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गोंडा। परिषदीय स्कूलों को हाईटेक बनाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू हो गया है। स्मार्ट स्कूल तैयार करने के साथ हर स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत दो शिक्षकों को टैबलेट मिलेगी। इससे बायोमीट्रिक हाजिरी होगी। 17 बीआरसी पर निगरानी के लिए तकनीकी सुविधा केंद्र स्थापित होंगे। केंद्र के लिए 40. 80 लाख का बजट तय किया गया है। प्रत्येक बीआरसी को इसके लिए दो लाख 40 हजार रुपये का बजट मिलेगा। इससे स्कूलों को जोड़ा जाएगा और हर स्थिति पर नजर रहेगी। राज्य स्तर पर विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित होगा, जिससे हर स्कूलों की निगरानी होगी। इस बार राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम विद्या समीक्षा केंद्र में प्रतिदिन शिक्षकों व विद्यार्थियों की हाजिरी दर्ज की जाएगी। हर तीन माह पर होने वाली परीक्षाओं का रिजल्ट भी यहां दर्ज होगा। स्कूल चलो अभियान, स्कूलों की मान्यता, शिक्षकों के शिक्षणेत्तर कामों को कम करने में मदद मिलेगी। प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को टैबलेट दिए जाने की योजना में विस्तार करते हुए प्रधानाध्यापक के अलावा स्कूल के एक और शिक्षक को टैबलेट दिया जाएगा। टैबलेट से बायोमीट्रिक हाजिरी लगाई जाएगी। इसे कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। बीआरसी और एआरपी आदि को भी टैबलेट दिया जाना है। जिले में करीब 5400 टैबलेट की जरूरत होगी। 2611 परिषदीय स्कूलों के साथ ही 85 एआरपी भी टैबलेट पाएंगे। परिषदीय स्कूलों का संचालन 16 जून से शुरू हो गया है। साथ ही पढ़ाई की कई तरह की पहल हो रही है। मानसून आने से स्कूलों में भी पौधरोपण अभियान चल रहा है। स्कूलों में नामांकन के साथ ही बच्चों को स्कूल बुलाने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि पहली अप्रैल से ही नवीन सत्र शुरू हो चुका है। अभी जो नामांकन अवशेष हैं वह हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। हर तीन माह पर परीक्षाएं होनी है, जिसकी तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
गोंडा। परिषदीय स्कूलों को हाईटेक बनाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू हो गया है। स्मार्ट स्कूल तैयार करने के साथ हर स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत दो शिक्षकों को टैबलेट मिलेगी। इससे बायोमीट्रिक हाजिरी होगी। सत्रह बीआरसी पर निगरानी के लिए तकनीकी सुविधा केंद्र स्थापित होंगे। केंद्र के लिए चालीस. अस्सी लाख का बजट तय किया गया है। प्रत्येक बीआरसी को इसके लिए दो लाख चालीस हजार रुपये का बजट मिलेगा। इससे स्कूलों को जोड़ा जाएगा और हर स्थिति पर नजर रहेगी। राज्य स्तर पर विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित होगा, जिससे हर स्कूलों की निगरानी होगी। इस बार राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम विद्या समीक्षा केंद्र में प्रतिदिन शिक्षकों व विद्यार्थियों की हाजिरी दर्ज की जाएगी। हर तीन माह पर होने वाली परीक्षाओं का रिजल्ट भी यहां दर्ज होगा। स्कूल चलो अभियान, स्कूलों की मान्यता, शिक्षकों के शिक्षणेत्तर कामों को कम करने में मदद मिलेगी। प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को टैबलेट दिए जाने की योजना में विस्तार करते हुए प्रधानाध्यापक के अलावा स्कूल के एक और शिक्षक को टैबलेट दिया जाएगा। टैबलेट से बायोमीट्रिक हाजिरी लगाई जाएगी। इसे कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। बीआरसी और एआरपी आदि को भी टैबलेट दिया जाना है। जिले में करीब पाँच हज़ार चार सौ टैबलेट की जरूरत होगी। दो हज़ार छः सौ ग्यारह परिषदीय स्कूलों के साथ ही पचासी एआरपी भी टैबलेट पाएंगे। परिषदीय स्कूलों का संचालन सोलह जून से शुरू हो गया है। साथ ही पढ़ाई की कई तरह की पहल हो रही है। मानसून आने से स्कूलों में भी पौधरोपण अभियान चल रहा है। स्कूलों में नामांकन के साथ ही बच्चों को स्कूल बुलाने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि पहली अप्रैल से ही नवीन सत्र शुरू हो चुका है। अभी जो नामांकन अवशेष हैं वह हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। हर तीन माह पर परीक्षाएं होनी है, जिसकी तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भाजपा की युवा नेता पामेला गोस्वामी को कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार को बड़ी राहत दी। उन्हें 2021 के ड्रग्स केस में अदालत ने बरी कर दिया। पामेला के खिलाफ विधानसभा चुनाव के दौरान कोकीन तस्करी का मामला दर्ज किया गया था। कोलकाता पुलिस ने 21 फरवरी 2021 को पामेला को गिरफ्तार किया था। पुलिस को 76 ग्राम कोकीन उनकी गाड़ी से मिली थी। जिसकी कीमत 10 लाख रुपए आंकी गई थी। पुलिस ने जांच की तो बड़ा राजफाश हुआ। जांच में सामने आया की पामेला को फंसाने के लिए ये सारी साजिश एक अन्य भाजपा नेता राकेश सिंह द्वारा रची गई थी। राकेश सिंह ने ही एक महिला और दो अन्य पैडलर्स के जरिए से कोकीन खरीदी थी और अमृत राज सिंह की मदद से गोस्वामी की गाड़ी में रखवा दी थी। इसके पीछे की वजह पामेला द्वारा राकेश का एक अश्लील प्रस्ताव ठुकराया जाना था। कोर्ट से बरी होने के बाद पामेला गोस्वामी ने कहा कि यह पूरी साजिश चुनाव के दौरान मेरी और पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए रची गई थी। यह मेरे जीवन का बेहद ज्ञानवर्धक सफर रहा है। इस दौरान मैंने मनुष्य के व्यवहार के बारे में बहुत कुछ सीखा। इस स्थिति ने मुझे मजबूत बना दिया है और मेरे सबसे अच्छा वर्जन सामने लाने में मदद की। उन्होंने कहा कि यह मामला सौ फीसदी न्यायिक प्रणाली और पुलिस विभाग के लिए एक आंख खोलने वाला है, जिसमें कहीं न कहीं खामियां हैं। जिससे निर्दोष लोग साजिश में फंसते हैं। किसी भी व्यक्ति या आम नागरिक की ऐसी कठिनाई भरी स्थिति का अकेले सामना करने के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकती हूं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि इन झूठे आरोपों के खिलाफ यह लड़ाई मैंने अकेले नहीं लड़ी बल्कि मेरे साथ कार्यकर्ताओं का साथ, शीर्ष नेतृत्व का विश्वास और जनता का भरपूर सपोर्ट मिला। बिना इनके सपोर्ट के मेरी ये लड़ाई काफी मुश्किल हो जाती। इस मुश्किल वक्त में सभी का मेरे साथ बने रहने के लिए मैं तहे दिल से आभारी हूं। पामेला गोस्वामी ने कहा कि दो साल तक चले इस मामले में पूरे समय मैं काफी तनाव में रही। यह निश्चित रूप से मेरे लिए एक दर्दनाक स्थिति थी क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी ड्रग्स लेने की साजिश का शिकार हो सकती हूं। अब जब कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है तो मुझे मानसिक रूप से काफी राहत मिली हैं और न्याय प्रणाली पर विश्वास और बढ़ गया है।
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भाजपा की युवा नेता पामेला गोस्वामी को कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार को बड़ी राहत दी। उन्हें दो हज़ार इक्कीस के ड्रग्स केस में अदालत ने बरी कर दिया। पामेला के खिलाफ विधानसभा चुनाव के दौरान कोकीन तस्करी का मामला दर्ज किया गया था। कोलकाता पुलिस ने इक्कीस फरवरी दो हज़ार इक्कीस को पामेला को गिरफ्तार किया था। पुलिस को छिहत्तर ग्राम कोकीन उनकी गाड़ी से मिली थी। जिसकी कीमत दस लाख रुपए आंकी गई थी। पुलिस ने जांच की तो बड़ा राजफाश हुआ। जांच में सामने आया की पामेला को फंसाने के लिए ये सारी साजिश एक अन्य भाजपा नेता राकेश सिंह द्वारा रची गई थी। राकेश सिंह ने ही एक महिला और दो अन्य पैडलर्स के जरिए से कोकीन खरीदी थी और अमृत राज सिंह की मदद से गोस्वामी की गाड़ी में रखवा दी थी। इसके पीछे की वजह पामेला द्वारा राकेश का एक अश्लील प्रस्ताव ठुकराया जाना था। कोर्ट से बरी होने के बाद पामेला गोस्वामी ने कहा कि यह पूरी साजिश चुनाव के दौरान मेरी और पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए रची गई थी। यह मेरे जीवन का बेहद ज्ञानवर्धक सफर रहा है। इस दौरान मैंने मनुष्य के व्यवहार के बारे में बहुत कुछ सीखा। इस स्थिति ने मुझे मजबूत बना दिया है और मेरे सबसे अच्छा वर्जन सामने लाने में मदद की। उन्होंने कहा कि यह मामला सौ फीसदी न्यायिक प्रणाली और पुलिस विभाग के लिए एक आंख खोलने वाला है, जिसमें कहीं न कहीं खामियां हैं। जिससे निर्दोष लोग साजिश में फंसते हैं। किसी भी व्यक्ति या आम नागरिक की ऐसी कठिनाई भरी स्थिति का अकेले सामना करने के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकती हूं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि इन झूठे आरोपों के खिलाफ यह लड़ाई मैंने अकेले नहीं लड़ी बल्कि मेरे साथ कार्यकर्ताओं का साथ, शीर्ष नेतृत्व का विश्वास और जनता का भरपूर सपोर्ट मिला। बिना इनके सपोर्ट के मेरी ये लड़ाई काफी मुश्किल हो जाती। इस मुश्किल वक्त में सभी का मेरे साथ बने रहने के लिए मैं तहे दिल से आभारी हूं। पामेला गोस्वामी ने कहा कि दो साल तक चले इस मामले में पूरे समय मैं काफी तनाव में रही। यह निश्चित रूप से मेरे लिए एक दर्दनाक स्थिति थी क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी ड्रग्स लेने की साजिश का शिकार हो सकती हूं। अब जब कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है तो मुझे मानसिक रूप से काफी राहत मिली हैं और न्याय प्रणाली पर विश्वास और बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के कलेक्टर रणबीर शर्मा को एक युवक के साथ अमानवीय व्यवहार करने के मामले में उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टर रणबीर शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं. छत्तीसगढ़ सीएम के कार्यालय ने बताया कि IAS गौरव कुमार सिंह को सूरजपुर का नया जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य प्रशासन ने IAS अधिकारी शर्मा का तबादला संयुक्त सचिव (प्रतीक्षारत) के रूप में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (सचिवालय) में कर दिया है. क्या था मामला? सूरजपुर के कलेक्टर रणवीर शर्मा अपने पूरे लाव लश्कर के साथ कोविड के चलते राज्य में लगे लॉकडाउन का मुआयना करने निकले थे. एक युवक को पुलिस ने रोका तो वह कलेक्टर के पास एक कागज़ और मोबाइल फोन पर कुछ दिखाने की कोशिश में पहुंचा. अचानक से कलेक्टर भड़क गए और उन्होंने उसका पहले फोन जमीन पर पटका और फिर उसे थप्पड़ मारा. कलेक्टर ने इसके बाद अपने साथ चल रहे पुलिस बल से कहा कि वो युवक रिकॉर्डिंग कर रहा था. इसके बाद कलेक्टर ने युवक को मारने का आदेश दे दिया. इस घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और ये सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. सोशल मीडिया पर रणवीर शर्मा को हटाने की मांग की गई और उसके बाद सीएम बघेल ने उनके ऊपर कार्रवाई करने का निर्णय लिया.
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के कलेक्टर रणबीर शर्मा को एक युवक के साथ अमानवीय व्यवहार करने के मामले में उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टर रणबीर शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं. छत्तीसगढ़ सीएम के कार्यालय ने बताया कि IAS गौरव कुमार सिंह को सूरजपुर का नया जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य प्रशासन ने IAS अधिकारी शर्मा का तबादला संयुक्त सचिव के रूप में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में कर दिया है. क्या था मामला? सूरजपुर के कलेक्टर रणवीर शर्मा अपने पूरे लाव लश्कर के साथ कोविड के चलते राज्य में लगे लॉकडाउन का मुआयना करने निकले थे. एक युवक को पुलिस ने रोका तो वह कलेक्टर के पास एक कागज़ और मोबाइल फोन पर कुछ दिखाने की कोशिश में पहुंचा. अचानक से कलेक्टर भड़क गए और उन्होंने उसका पहले फोन जमीन पर पटका और फिर उसे थप्पड़ मारा. कलेक्टर ने इसके बाद अपने साथ चल रहे पुलिस बल से कहा कि वो युवक रिकॉर्डिंग कर रहा था. इसके बाद कलेक्टर ने युवक को मारने का आदेश दे दिया. इस घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और ये सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. सोशल मीडिया पर रणवीर शर्मा को हटाने की मांग की गई और उसके बाद सीएम बघेल ने उनके ऊपर कार्रवाई करने का निर्णय लिया.
266 : अपश्चिम तीर्थंकर महावीर, भाग- द्वितीय 1 वीरागक, 2 वीरयश, 3 सजय, 4 एणेयक, 5 राजर्षि, 6 श्वेत, 7 शिव, 8 उदायन (वीतिभयनगर का राजा ) VI सन्निपल्ली यह गाँव पूर्व दिशा से सिन्धु देश की ओर जाते समय बीच मे पडता था इसके आस-पास का प्रदेश विकट मरूस्थल भूमि थी । जैन सूत्रो के उल्लेख से ज्ञात होता है कि सिनपल्ली के मार्ग निर्जल और छायारहित थे। एक सूत्रोल्लेख है कि सिनपल्ली के दीर्घ मार्ग मे केवल एक ही वृक्ष आता है। देवप्रभसूरि के पाण्डवचरित्र महाकाव्य मे उल्लेख है कि जरासन्ध के साथ यादवो ने सिनपल्ली के पास सरस्वती नदी के तटपर युद्ध किया था और युद्ध मे अपनी जीत होने पर वे आनन्दवश होकर नाचे थे, जिससे सिनपल्ली ही बाद मे आनन्दपुर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कुछ भी हो पर इससे यह तो निश्चित है कि सिनपल मरूभूमि म एक प्रसिद्ध नगर था जो बाद मे आनन्दपुर के रूप में परिवर्तित ह गया था। जैन सूत्रों के अनेक उल्लेखो से उक्त बात का समर्थन होता है हमारे विचारानुसार बीकानेर राज्य के उत्तरप्रदेश मे अवस्थित "आदनपुर नामक गॉव ही प्राचीन आनन्दपुर का प्रतीक हो तो आश्चर्य नही है । पुरातत्ववेता, कल्याणविजयर्ज
दो सौ छयासठ : अपश्चिम तीर्थंकर महावीर, भाग- द्वितीय एक वीरागक, दो वीरयश, तीन सजय, चार एणेयक, पाँच राजर्षि, छः श्वेत, सात शिव, आठ उदायन VI सन्निपल्ली यह गाँव पूर्व दिशा से सिन्धु देश की ओर जाते समय बीच मे पडता था इसके आस-पास का प्रदेश विकट मरूस्थल भूमि थी । जैन सूत्रो के उल्लेख से ज्ञात होता है कि सिनपल्ली के मार्ग निर्जल और छायारहित थे। एक सूत्रोल्लेख है कि सिनपल्ली के दीर्घ मार्ग मे केवल एक ही वृक्ष आता है। देवप्रभसूरि के पाण्डवचरित्र महाकाव्य मे उल्लेख है कि जरासन्ध के साथ यादवो ने सिनपल्ली के पास सरस्वती नदी के तटपर युद्ध किया था और युद्ध मे अपनी जीत होने पर वे आनन्दवश होकर नाचे थे, जिससे सिनपल्ली ही बाद मे आनन्दपुर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कुछ भी हो पर इससे यह तो निश्चित है कि सिनपल मरूभूमि म एक प्रसिद्ध नगर था जो बाद मे आनन्दपुर के रूप में परिवर्तित ह गया था। जैन सूत्रों के अनेक उल्लेखो से उक्त बात का समर्थन होता है हमारे विचारानुसार बीकानेर राज्य के उत्तरप्रदेश मे अवस्थित "आदनपुर नामक गॉव ही प्राचीन आनन्दपुर का प्रतीक हो तो आश्चर्य नही है । पुरातत्ववेता, कल्याणविजयर्ज
26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक भाषा से सम्बन्धित उपबन्धों का विवेचन किया गया है। अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी निर्धारित की गयी है। और साथ में इस धारा के उप विन्दु 2 में कहा गया है कि "किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पन्द्रह वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिये उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था" यह उपबंध इंडियन कान्स्युक्वेन्सियल प्रोविजन एक्ट 1949 के परिप्रेक्ष्य में था। इसका लिंक है https://www. legislation. gov. uk/ukpga/1949/92/pdfs/ukpga_19490092_en. pdf इसकों पढ़ने के बाद आप स्वतः समझ सकते है कि पन्द्रह वर्षों तक इसे क्यों रखा गया। आखिर क्यों अंग्रेजों के चले आ रहे भाषिक कानूनों को हू-ब-हू चलने दिया गया? आदि के उत्तर आपकों इस लिंक से मिल जायेंगे। बाकी के उत्तर आपकों इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट के कानून से लिंक से प्राप्त हो जायेगा जिसका लिंक https://www. legislation. gov. uk/ukpga/1947/30/pdfs/ukpga_19470030_en. pdf है। उसके बाद संविधान के अनुच्छेद 346 में राज्य की राजभाषा से सम्बन्धित और अनुच्छेद 346 में एक राज्य और दूसरे राज्य बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा को परिभाषित किया गया है। और अनुच्छेद 347 में किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में बताया गया है। 1955 में एक समिति बनाई गयी, उस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कह दिया कि देश में अंग्रेजी हटाने का अभी अनुकूल समय नहीं है। 1963 में संसद में हिंदी को लेकर बहस हुई कि अंग्रेजी हटाया जाये और हिंदी लाया जाये। एक बार एक वैज्ञानिक सम्मलेन हुआ। उसमें भारत के एक वैज्ञानिक वहां पहुंचे। जब भारतीय वैज्ञानिक ने अपने शोध पत्र को पढ़ना शुरू किया तो एक वैज्ञानिक ने कहा कि आपके देश की मातृभाषा तो हिन्दी है तो फिर आप अंग्रेजी में अपना शोध पत्र क्यों पढ़ रहे है। तो फिर इस भारतीय वैज्ञानिक ने कहा कि हिन्दी वैश्विक भाषा नहीं है और फिर हिन्दी में पढ़ने पर सबको समझ में भी तो नहीं आयेगा। तो फिर उस वैज्ञानिक ने कहा कि आप उसकी चिन्ता क्यो करते है। यहां बहुत से वैज्ञानिक है जिन्होंने अपने शोध पत्र को फ्रेंच, जापनीज, मंडारिन, पूर्तगीज़, हिब्रू, रशीयन आदि भाषा में पढ़ रहे हैं तो उनके भाषा को भी सभी लोग नहीं समझ पा रहे और जब उनके भाषा को सब नहीं समझ पा रहे तो आप क्यों चिंतित है। जरूरी भाषा नहीं वरन आपकी खोज और आपके शोध की है। आपका शोध यदि महत्वपूर्ण है तो वो चाहे जिस भाषा में हो वह अमूल्य है। और हमने ऐसी व्यवस्था भी कर रखी है कि आप चाहे विश्व के किसी भी भाषा में अपने शोध पत्र को पढ़ेंगे हम उसका अनुवाद करवा लेंगे। और उसे समझ लिया जायेगा। तब इस भारतीय वैज्ञानिक की स्थिति किंकर्तव्यविमुढ़ वाली हो गयी। और ये बेचारे चुप हो गये। कोई जरूरी नहीं की आप दूसरे के हिसाब से अपने भाषा का चयन करें। क्या अंग्रेज आपके लिये हिन्दी भाषा का चयन करते है कतई नहीं तो फिर आप अपने भाषा को क्यों बदलते है। और बदलते है तो फिर किस-किस भाषा में बदलेंगे। प्रश्न यह उठता है मौलिकता का गला हम कब तक घोटेंगे? क्या हम स्वयं के मौलिकता को जीवित रखने में असमर्थ है। जब उत्तर प्रदेश जितना बड़ा जापान अपने मौलिकता को जीवित रख पाने और विश्व के विकसित राष्ट्रों में स्थान बनाने के कृतसंकल्प और तथस्थ है तो फिर हम अरबों की जनसंख्या वाले भारत को विश्व मानस पटल पर मौलिकता के साथ अपने प्रस्तुत नहीं कर सकते क्या? प्रश्न उठता है कि आखिर अंग्रेजी ही क्यों तमिल, उर्दू, संस्कृत, भोजपुरी, मराठी क्यों नहीं तो इसका उत्तर है कि भारत के रसूखदार, जमिन्दार, राजे-रजवाड़े खानदान वाले जो घीस-घीसकर अंग्रेजी सीख लिये थे उसका क्या वे आचार डालते कतई नहीं। जैसे प्राचीन समय राजे-रजवाड़े अपने रसूख के लिये अन्ये वस्तुओं का प्रयोग करते थे ठीक वैसे ही अब उनके लिये अंग्रेजी एक हथियार बनकर जो उभरा था और वे इसे अच्छे से समझने भी लगे थे। तब उन्हें यह मन ही मन गुदगुदी करने वाला भी मुद्दा लगा और अंधे के हाथ बटेर मिलने वाली घटना प्रतीत हुई। जवाहर लाल नेहुरू ब्रिटेन से पढ़े लिखे थे सो उनके लिये अंग्रेजी की कोई दिक्कत नहंी थी और भारतीय नेताओं में अपवाद के साथ बहुतेरे अंग्रेजी का रट्टा मार ही रहे थे। सो उन्होंने भी मौन सहमति प्रदान की। राम मनोहर लोहिय जिन्दगी भर विरोध करते रहे अंग्रेजी का। इधर के नेताओं में शरद यादव ऐसे नेता है जो अक्सर लोकसभा में अंग्रेजी को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते रहते है। एक बार शरद यादव ने लोकसभा में कहा था "ट्रान्सलेशन से कोई भी आविष्कार नहीं होने वाला" एक उक्ति और याद आ रहा है "गमले में खेती करने से कुछ नहीं होने वाला और सही में 3 प्रतिशत जब अंग्रेजी जानने समझने वालों की जनसंख्या हो तो उसे गमलें बराबर ही कहा जायेगा। देश आजाद तो 1947 में हुआ और हिन्दी का विकास हमारे सरकारों ने ऐसा किया कि आज सभी इंजीनियरिंग, मेडिकल से लेकर सभी महत्वपूर्ण संस्थाओं की भाषा प्रायः अंग्रेजी ही है लेकिन निहायत शर्म की बात है कि इसमें पढ़ने वाले 97 फीसदी बच्चों की मातृभाषा हिन्दी अथवा आठवी अनुसूचि में विनिर्दिष्ट अन्य भाषायें है। आप स्वतः समझ सकते है कि कोई भी छात्र एक साथ दो भाषाओं का मौलिक प्रयोग कैसे कर पायेगा। लेकिन भारतीय नीति नियंताओं को इसमें फायदा है। क्योंकि वे खुद नहीं चाहते की भारत का सर्वहारा वर्ग तरक्की करें। लेकिन हमारे ढांचा गिरने के कागार पर पहुंच चुके है अतः कोई भी उस ढांचे को सही करने अथवा उसे बनाने के लिये आगे नहीं आना चाहता। बहुत प्राचीन घटना है "एक चर्च था जो इतना जर्जर हो चुका था कि कब गिर जाये उसका ठीक न था। आंधी चलती, बिजली कड़कती तो लोग घर से बाहर आकर चर्च को देखते कि गिरा की नहीं। चर्च के जो पादरी थे वे घर-घर जाकर चर्च में आने की प्रार्थना तो करते लेकिन स्वयं वे कभी भी चर्च में नहीं जाते थे। मीटिंग भी करते तो चर्च के बाहर। एक दिन मीटिंग में नया चर्च बनाने को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ। चार प्रस्ताव पारित किये गये जिसमें पहला था कि जो नया चर्च बनेगा वह पुराने चर्च के स्थान पर ही बनेगा, दूसरा ये कि जो नया चर्च बनेगा उसमें पुराने चर्च की लक़िडया और ईंटे प्रयोग में लायी जायेंगी और, तीसरा ये की जैसा पुराना चर्च था ठीक वैसा ही नया चर्च भी बनेगा और चैथा ये की जब तक नया चर्च बन नहीं जाता पुराना चर्च नहीं तोड़ना। " विचारणीय है कि जब तक पुराना तोड़ा नहीं जाता नया कहां से बन जायेगा? ठीक यही स्थिति भारत का भी है। जब तक भाषिक परतंत्रता को खतम नहीं किया जाता तब तक मौलिकता का समावेश होना मुमकिन नहीं। जब सम्पूर्ण धरा के सभी वैज्ञानिक, डाॅक्टर, इंजीनियर, लेखक से लेकर सभी बुद्धीजीवी सोंचने से लेकर शोध तक सिर्फ एक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं तो आखिर हम क्यों दो अथवा अनेकों भाषा के फेर में पड़े। दरअसल हमारें अनेकों भाषाओं के फेर के वजह से हम कोई भी अन्वेषण कर पाने में असफल हैं। क्योंकि भाषा की आत्मा से बेबूझ हम परेशान है। एक पुरानी कहावत है एक बार एक संन्यासी दीक्षा प्राप्त करने के लिये एक प्रख्यात गुरु के पास गया और शिक्षा ग्रहण ही कर रहा था कि एक दिन किसी दूसरे संन्यासी का आना हुआ। नये संन्यासी ने आते ही वेदों, पुराणों का उद्धरण दे-देकर अपने ज्ञान का प्रभाव जमा रहा था। शिक्षारत संन्यासी भी काफी प्रभावित हुआ। 2 घंटे लगातार बोलने के बाद जब संन्यासी ने गुरु से अपने ज्ञान के बारे में पुछा तब गुरु ने कहा बेटा ये दो घंटे तुमने जो बोला वह तुमने नहीं वेदों और पुराणों ने बोला तुमने क्या बोला? इसमें तुम्हारा कुछ भी नहीं था। जिस दिन तुम्हें लगने लगे की तुम स्वयं बोलने में समर्थ हो गये उस दिन मेरे पास आना। और वह नवागत संन्यासी वापस ज्ञानाभ्रमण के लिये चला गया। क्यों जबरदस्ती हमारे देश के होनहारों पर अंग्रेजी थोपी जा रही है। अभी कुछ समय पहले एक आई. ए. एस से मेरी हिन्दी अंग्रेजी को लेकर चर्चा हो रही थी। ये आइएएस महोदय अंग्रेजी के तारिफों के पुल बांधे जा रहे थे। फिर मैंने अंग्रेजी की एक कविता उन्हें दी और कहा इसका अर्थ बताइयें फिर क्या था, वह आइ. ए. एस. महोदय बगले झांकने लगे। भाषा जानना और उसकी आत्मा को समझना दो अलग पहलु है। हिन्दी हमारी आत्मा में बसती है। लेकिन अंग्रेजी को हम अनुवाद करके ही समझते है। हां अगर 1 अरब 25 करोण में एक से डेढ़ करोण लोग अच्छी अंग्रेजी वाले है भी तो उनकी वजह से 1 अरब 24 करोण लोगों पर अंग्रेजी थोपना प्रजातंत्र के सिद्धान्त के अनुसार क्या न्यायोचित माना जायेगा? जब देश के सबसे कठिन परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों का ये हाल है तो फिर आम जनता की स्थिति का आंकलन स्वतः किया जा सकता है। आज भी सरकारी कार्यालयों में इतने नियम है कि उन्हें समझने के लिए सालों लग जाते है। भाषा के चलते आ रहे समस्याओं के समाधान हेतु राजभाषा नियम 1976 बनाया गया था लेकिन इसका समुचित अनुपालन आज तक नहीं हो पा रहा। आज भी हमारी सरकार की सभी वेबसाइटे अंग्रेजी की शोभा बढ़ा रही है। आखिर आम जनता अंग्रेजी को क्यो पढ़े। भाषा की समस्या ही मुख्य समस्या है इस देश में। देश में क्या हो रहा है उसकी समझ आम जनता के परे है। सब रट्टा मार प्रतियोगिता करने में भागे जा रहे हैं। हमारे बगल में चाइना दिन-दूनी रात चैगूनी कर रहा है और वहां सभी कार्य उसके अपने भाषा में हो रहे है। जापान निरन्तर उन्नती कर रहा है और उसके यहां भी सभी कार्य उसके अपने भाषा में हो रहे है और भी अनेको देश है जो निज भाषा का प्रयोग कर उन्नती की अग्रसर है। लेकिन हमारी सरकार का अंग्रेजी मोह नहीं छुट रहा। हमारे देश के होनहार बच्चों को अंग्रेजी की चक्की में पीसा जा रहा है। संभ्रान्त, रसूखदार और ऊँचे तबके के लोग शुरू से ही अपने बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा की चक्की का आंटा खिला रहे है और हमारी सरकारे आज तक अन्य भारतीय भाषाओं की उन्नति की जगह अंग्रेजी भाषा की उन्नती करती जा रही है। और ऐसा सिर्फ सरकारी मांग की वजह से हो रहा है। क्योंकि हमारी सरकार और उनके द्वारा बुलायी गयी हजारों बहुराष्ट्रीय कंपनीय अंग्रेजी के जानकारों को खोज रही है। । भाषा की समस्या का खत्म करने के लिए हमें अपने देश को भाषा के हिसाब से बांटना होगा। और जिस राज्य की जो भाषा होगी उस राज्य में उसी में भाषा में हाईकोर्ट में जिरह और फैसले होने चाहिये। मतलब एक ही भाषा का प्रयोग सभी कार्यों के लिये। शिक्षा से लेकर शोध तक। सरकारी, प्राईवेट से लेकर हर जगह उसी भाषा का प्रयोग। इससे क्या होगा मौलिकता आयेगी। ट्रान्सलेशन से बचाव होगा। और कोई भी अहिन्दी भाषी हिन्दी और अन्य भाषाओं के लिए उर्जा नष्ट करने से बचेगा तथा हिन्दी भाषी अन्य दूसरी भाषा के प्रयोग से बचेंगे। अगर किसी को हिन्दी से कुछ ज्यादा प्रेम है तो वे भारत सरकार द्वारा घोषित हिन्दी भाषी क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार द्विप समूह आदि राज्यों में जाकर अपने हिन्दी ज्ञान का प्रयोग करें और अगर किसी को गुजराती से प्रेम हो तो वह गुजरात जाये। और अंग्रेजी से प्रेम हो तो नागालैण्ड। प्राविधान यह होना चाहिये कि जिस राज्य की जो भी भाषा है अगर उस राज्य में नौकरी करनी हो तो उसी राज्य की भाषा में सभी कार्य करने होंगे। जबतक हम देश को भाषा के हिसाब से नहीं बांटते और सिर्फ और सिर्फ एक भाषा का राग अलापेंगे तबतक अंग्रेजी ही विकल्प बनी रहेगी। केन्द्रीय स्तर पर भाषा के व्यवधान को भाषा के हिसाब से बेंच बनाकर इसका निराकरण कर सकते है। जैसे न्याय व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सभी राज्यों के उनके भाषाओं के अलग-अलग बेंच बनाकर। लोकसभा में पहले से ट्रांसलेशन की सुविधा हैं ही।
छब्बीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचास को भारत का संविधान लागू हुआ। संविधान के अनुच्छेद तीन सौ तैंतालीस से तीन सौ इक्यावन तक भाषा से सम्बन्धित उपबन्धों का विवेचन किया गया है। अनुच्छेद तीन सौ तैंतालीस के अनुसार भारत की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी निर्धारित की गयी है। और साथ में इस धारा के उप विन्दु दो में कहा गया है कि "किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पन्द्रह वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिये उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था" यह उपबंध इंडियन कान्स्युक्वेन्सियल प्रोविजन एक्ट एक हज़ार नौ सौ उनचास के परिप्रेक्ष्य में था। इसका लिंक है https://www. legislation. gov. uk/ukpga/एक हज़ार नौ सौ उनचास/बानवे/pdfs/ukpga_एक करोड़ चौरानवे लाख नब्बे हज़ार बानवे_en. pdf इसकों पढ़ने के बाद आप स्वतः समझ सकते है कि पन्द्रह वर्षों तक इसे क्यों रखा गया। आखिर क्यों अंग्रेजों के चले आ रहे भाषिक कानूनों को हू-ब-हू चलने दिया गया? आदि के उत्तर आपकों इस लिंक से मिल जायेंगे। बाकी के उत्तर आपकों इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट के कानून से लिंक से प्राप्त हो जायेगा जिसका लिंक https://www. legislation. gov. uk/ukpga/एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस/तीस/pdfs/ukpga_एक करोड़ चौरानवे लाख सत्तर हज़ार तीस_en. pdf है। उसके बाद संविधान के अनुच्छेद तीन सौ छियालीस में राज्य की राजभाषा से सम्बन्धित और अनुच्छेद तीन सौ छियालीस में एक राज्य और दूसरे राज्य बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा को परिभाषित किया गया है। और अनुच्छेद तीन सौ सैंतालीस में किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में बताया गया है। एक हज़ार नौ सौ पचपन में एक समिति बनाई गयी, उस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कह दिया कि देश में अंग्रेजी हटाने का अभी अनुकूल समय नहीं है। एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में संसद में हिंदी को लेकर बहस हुई कि अंग्रेजी हटाया जाये और हिंदी लाया जाये। एक बार एक वैज्ञानिक सम्मलेन हुआ। उसमें भारत के एक वैज्ञानिक वहां पहुंचे। जब भारतीय वैज्ञानिक ने अपने शोध पत्र को पढ़ना शुरू किया तो एक वैज्ञानिक ने कहा कि आपके देश की मातृभाषा तो हिन्दी है तो फिर आप अंग्रेजी में अपना शोध पत्र क्यों पढ़ रहे है। तो फिर इस भारतीय वैज्ञानिक ने कहा कि हिन्दी वैश्विक भाषा नहीं है और फिर हिन्दी में पढ़ने पर सबको समझ में भी तो नहीं आयेगा। तो फिर उस वैज्ञानिक ने कहा कि आप उसकी चिन्ता क्यो करते है। यहां बहुत से वैज्ञानिक है जिन्होंने अपने शोध पत्र को फ्रेंच, जापनीज, मंडारिन, पूर्तगीज़, हिब्रू, रशीयन आदि भाषा में पढ़ रहे हैं तो उनके भाषा को भी सभी लोग नहीं समझ पा रहे और जब उनके भाषा को सब नहीं समझ पा रहे तो आप क्यों चिंतित है। जरूरी भाषा नहीं वरन आपकी खोज और आपके शोध की है। आपका शोध यदि महत्वपूर्ण है तो वो चाहे जिस भाषा में हो वह अमूल्य है। और हमने ऐसी व्यवस्था भी कर रखी है कि आप चाहे विश्व के किसी भी भाषा में अपने शोध पत्र को पढ़ेंगे हम उसका अनुवाद करवा लेंगे। और उसे समझ लिया जायेगा। तब इस भारतीय वैज्ञानिक की स्थिति किंकर्तव्यविमुढ़ वाली हो गयी। और ये बेचारे चुप हो गये। कोई जरूरी नहीं की आप दूसरे के हिसाब से अपने भाषा का चयन करें। क्या अंग्रेज आपके लिये हिन्दी भाषा का चयन करते है कतई नहीं तो फिर आप अपने भाषा को क्यों बदलते है। और बदलते है तो फिर किस-किस भाषा में बदलेंगे। प्रश्न यह उठता है मौलिकता का गला हम कब तक घोटेंगे? क्या हम स्वयं के मौलिकता को जीवित रखने में असमर्थ है। जब उत्तर प्रदेश जितना बड़ा जापान अपने मौलिकता को जीवित रख पाने और विश्व के विकसित राष्ट्रों में स्थान बनाने के कृतसंकल्प और तथस्थ है तो फिर हम अरबों की जनसंख्या वाले भारत को विश्व मानस पटल पर मौलिकता के साथ अपने प्रस्तुत नहीं कर सकते क्या? प्रश्न उठता है कि आखिर अंग्रेजी ही क्यों तमिल, उर्दू, संस्कृत, भोजपुरी, मराठी क्यों नहीं तो इसका उत्तर है कि भारत के रसूखदार, जमिन्दार, राजे-रजवाड़े खानदान वाले जो घीस-घीसकर अंग्रेजी सीख लिये थे उसका क्या वे आचार डालते कतई नहीं। जैसे प्राचीन समय राजे-रजवाड़े अपने रसूख के लिये अन्ये वस्तुओं का प्रयोग करते थे ठीक वैसे ही अब उनके लिये अंग्रेजी एक हथियार बनकर जो उभरा था और वे इसे अच्छे से समझने भी लगे थे। तब उन्हें यह मन ही मन गुदगुदी करने वाला भी मुद्दा लगा और अंधे के हाथ बटेर मिलने वाली घटना प्रतीत हुई। जवाहर लाल नेहुरू ब्रिटेन से पढ़े लिखे थे सो उनके लिये अंग्रेजी की कोई दिक्कत नहंी थी और भारतीय नेताओं में अपवाद के साथ बहुतेरे अंग्रेजी का रट्टा मार ही रहे थे। सो उन्होंने भी मौन सहमति प्रदान की। राम मनोहर लोहिय जिन्दगी भर विरोध करते रहे अंग्रेजी का। इधर के नेताओं में शरद यादव ऐसे नेता है जो अक्सर लोकसभा में अंग्रेजी को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते रहते है। एक बार शरद यादव ने लोकसभा में कहा था "ट्रान्सलेशन से कोई भी आविष्कार नहीं होने वाला" एक उक्ति और याद आ रहा है "गमले में खेती करने से कुछ नहीं होने वाला और सही में तीन प्रतिशत जब अंग्रेजी जानने समझने वालों की जनसंख्या हो तो उसे गमलें बराबर ही कहा जायेगा। देश आजाद तो एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में हुआ और हिन्दी का विकास हमारे सरकारों ने ऐसा किया कि आज सभी इंजीनियरिंग, मेडिकल से लेकर सभी महत्वपूर्ण संस्थाओं की भाषा प्रायः अंग्रेजी ही है लेकिन निहायत शर्म की बात है कि इसमें पढ़ने वाले सत्तानवे फीसदी बच्चों की मातृभाषा हिन्दी अथवा आठवी अनुसूचि में विनिर्दिष्ट अन्य भाषायें है। आप स्वतः समझ सकते है कि कोई भी छात्र एक साथ दो भाषाओं का मौलिक प्रयोग कैसे कर पायेगा। लेकिन भारतीय नीति नियंताओं को इसमें फायदा है। क्योंकि वे खुद नहीं चाहते की भारत का सर्वहारा वर्ग तरक्की करें। लेकिन हमारे ढांचा गिरने के कागार पर पहुंच चुके है अतः कोई भी उस ढांचे को सही करने अथवा उसे बनाने के लिये आगे नहीं आना चाहता। बहुत प्राचीन घटना है "एक चर्च था जो इतना जर्जर हो चुका था कि कब गिर जाये उसका ठीक न था। आंधी चलती, बिजली कड़कती तो लोग घर से बाहर आकर चर्च को देखते कि गिरा की नहीं। चर्च के जो पादरी थे वे घर-घर जाकर चर्च में आने की प्रार्थना तो करते लेकिन स्वयं वे कभी भी चर्च में नहीं जाते थे। मीटिंग भी करते तो चर्च के बाहर। एक दिन मीटिंग में नया चर्च बनाने को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ। चार प्रस्ताव पारित किये गये जिसमें पहला था कि जो नया चर्च बनेगा वह पुराने चर्च के स्थान पर ही बनेगा, दूसरा ये कि जो नया चर्च बनेगा उसमें पुराने चर्च की लक़िडया और ईंटे प्रयोग में लायी जायेंगी और, तीसरा ये की जैसा पुराना चर्च था ठीक वैसा ही नया चर्च भी बनेगा और चैथा ये की जब तक नया चर्च बन नहीं जाता पुराना चर्च नहीं तोड़ना। " विचारणीय है कि जब तक पुराना तोड़ा नहीं जाता नया कहां से बन जायेगा? ठीक यही स्थिति भारत का भी है। जब तक भाषिक परतंत्रता को खतम नहीं किया जाता तब तक मौलिकता का समावेश होना मुमकिन नहीं। जब सम्पूर्ण धरा के सभी वैज्ञानिक, डाॅक्टर, इंजीनियर, लेखक से लेकर सभी बुद्धीजीवी सोंचने से लेकर शोध तक सिर्फ एक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं तो आखिर हम क्यों दो अथवा अनेकों भाषा के फेर में पड़े। दरअसल हमारें अनेकों भाषाओं के फेर के वजह से हम कोई भी अन्वेषण कर पाने में असफल हैं। क्योंकि भाषा की आत्मा से बेबूझ हम परेशान है। एक पुरानी कहावत है एक बार एक संन्यासी दीक्षा प्राप्त करने के लिये एक प्रख्यात गुरु के पास गया और शिक्षा ग्रहण ही कर रहा था कि एक दिन किसी दूसरे संन्यासी का आना हुआ। नये संन्यासी ने आते ही वेदों, पुराणों का उद्धरण दे-देकर अपने ज्ञान का प्रभाव जमा रहा था। शिक्षारत संन्यासी भी काफी प्रभावित हुआ। दो घंटाटे लगातार बोलने के बाद जब संन्यासी ने गुरु से अपने ज्ञान के बारे में पुछा तब गुरु ने कहा बेटा ये दो घंटे तुमने जो बोला वह तुमने नहीं वेदों और पुराणों ने बोला तुमने क्या बोला? इसमें तुम्हारा कुछ भी नहीं था। जिस दिन तुम्हें लगने लगे की तुम स्वयं बोलने में समर्थ हो गये उस दिन मेरे पास आना। और वह नवागत संन्यासी वापस ज्ञानाभ्रमण के लिये चला गया। क्यों जबरदस्ती हमारे देश के होनहारों पर अंग्रेजी थोपी जा रही है। अभी कुछ समय पहले एक आई. ए. एस से मेरी हिन्दी अंग्रेजी को लेकर चर्चा हो रही थी। ये आइएएस महोदय अंग्रेजी के तारिफों के पुल बांधे जा रहे थे। फिर मैंने अंग्रेजी की एक कविता उन्हें दी और कहा इसका अर्थ बताइयें फिर क्या था, वह आइ. ए. एस. महोदय बगले झांकने लगे। भाषा जानना और उसकी आत्मा को समझना दो अलग पहलु है। हिन्दी हमारी आत्मा में बसती है। लेकिन अंग्रेजी को हम अनुवाद करके ही समझते है। हां अगर एक अरब पच्चीस करोण में एक से डेढ़ करोण लोग अच्छी अंग्रेजी वाले है भी तो उनकी वजह से एक अरब चौबीस करोण लोगों पर अंग्रेजी थोपना प्रजातंत्र के सिद्धान्त के अनुसार क्या न्यायोचित माना जायेगा? जब देश के सबसे कठिन परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों का ये हाल है तो फिर आम जनता की स्थिति का आंकलन स्वतः किया जा सकता है। आज भी सरकारी कार्यालयों में इतने नियम है कि उन्हें समझने के लिए सालों लग जाते है। भाषा के चलते आ रहे समस्याओं के समाधान हेतु राजभाषा नियम एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर बनाया गया था लेकिन इसका समुचित अनुपालन आज तक नहीं हो पा रहा। आज भी हमारी सरकार की सभी वेबसाइटे अंग्रेजी की शोभा बढ़ा रही है। आखिर आम जनता अंग्रेजी को क्यो पढ़े। भाषा की समस्या ही मुख्य समस्या है इस देश में। देश में क्या हो रहा है उसकी समझ आम जनता के परे है। सब रट्टा मार प्रतियोगिता करने में भागे जा रहे हैं। हमारे बगल में चाइना दिन-दूनी रात चैगूनी कर रहा है और वहां सभी कार्य उसके अपने भाषा में हो रहे है। जापान निरन्तर उन्नती कर रहा है और उसके यहां भी सभी कार्य उसके अपने भाषा में हो रहे है और भी अनेको देश है जो निज भाषा का प्रयोग कर उन्नती की अग्रसर है। लेकिन हमारी सरकार का अंग्रेजी मोह नहीं छुट रहा। हमारे देश के होनहार बच्चों को अंग्रेजी की चक्की में पीसा जा रहा है। संभ्रान्त, रसूखदार और ऊँचे तबके के लोग शुरू से ही अपने बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा की चक्की का आंटा खिला रहे है और हमारी सरकारे आज तक अन्य भारतीय भाषाओं की उन्नति की जगह अंग्रेजी भाषा की उन्नती करती जा रही है। और ऐसा सिर्फ सरकारी मांग की वजह से हो रहा है। क्योंकि हमारी सरकार और उनके द्वारा बुलायी गयी हजारों बहुराष्ट्रीय कंपनीय अंग्रेजी के जानकारों को खोज रही है। । भाषा की समस्या का खत्म करने के लिए हमें अपने देश को भाषा के हिसाब से बांटना होगा। और जिस राज्य की जो भाषा होगी उस राज्य में उसी में भाषा में हाईकोर्ट में जिरह और फैसले होने चाहिये। मतलब एक ही भाषा का प्रयोग सभी कार्यों के लिये। शिक्षा से लेकर शोध तक। सरकारी, प्राईवेट से लेकर हर जगह उसी भाषा का प्रयोग। इससे क्या होगा मौलिकता आयेगी। ट्रान्सलेशन से बचाव होगा। और कोई भी अहिन्दी भाषी हिन्दी और अन्य भाषाओं के लिए उर्जा नष्ट करने से बचेगा तथा हिन्दी भाषी अन्य दूसरी भाषा के प्रयोग से बचेंगे। अगर किसी को हिन्दी से कुछ ज्यादा प्रेम है तो वे भारत सरकार द्वारा घोषित हिन्दी भाषी क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार द्विप समूह आदि राज्यों में जाकर अपने हिन्दी ज्ञान का प्रयोग करें और अगर किसी को गुजराती से प्रेम हो तो वह गुजरात जाये। और अंग्रेजी से प्रेम हो तो नागालैण्ड। प्राविधान यह होना चाहिये कि जिस राज्य की जो भी भाषा है अगर उस राज्य में नौकरी करनी हो तो उसी राज्य की भाषा में सभी कार्य करने होंगे। जबतक हम देश को भाषा के हिसाब से नहीं बांटते और सिर्फ और सिर्फ एक भाषा का राग अलापेंगे तबतक अंग्रेजी ही विकल्प बनी रहेगी। केन्द्रीय स्तर पर भाषा के व्यवधान को भाषा के हिसाब से बेंच बनाकर इसका निराकरण कर सकते है। जैसे न्याय व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सभी राज्यों के उनके भाषाओं के अलग-अलग बेंच बनाकर। लोकसभा में पहले से ट्रांसलेशन की सुविधा हैं ही।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम (Australia Cricket Team) के कप्तान बनाए गए पैट कमिंस (Pat Cummins) ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जाने वाले सीरीज के दूसरे टेस्ट से बाहर होने को लेकर बयान दिया है। टीम से बाहर होने पर उन्होंने कहा की मुझे बड़ा दुःख है की में इस अहम मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं हूं। खेल। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम (Australia Cricket Team) के कप्तान बनाए गए पैट कमिंस (Pat Cummins) ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जाने वाले सीरीज के दूसरे टेस्ट से बाहर होने को लेकर बयान दिया है। टीम से बाहर होने पर उन्होंने कहा की मुझे बड़ा दुःख है की में इस अहम मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं हूं। लेकिन उन्होंने माइकल नेसर (Michael Neser) के टेस्ट डेब्यू को लेकर खुशी भी जताई है। ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम (Australia Cricket Team) के कप्तान पैट कमिंस (Pat Cummins) एडिलेड (Adelaide) डे-नाइट टेस्ट मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं होंगे। उनके बाहर होने से ऑस्ट्रेलिया टीम को उनकी कमी जरूर खलेगी है। अब कमिंस की जगह टीम की कप्तानी का पद भार स्टीव स्मिथ संभालेंगे। बता दें कि, पैट कमिंस की जगह ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग इलेवन में माइकल नेसर को खेलने का मौका दिया गया है। वह इस अहम मुकाबले में अपना टेस्ट डेब्यू भी करेंगे। पैट कमिंस ने ट्वीट करके लिखा "इस टेस्ट को मिस करने के लिए बड़ा दुःख है लेकिन नेसर को टीम में खेलने का मौका मिलते देखने के लिए वास्तव में उत्साहित हैं। उन्होंने कठिन यार्ड्स किए हैं और गंभीर रूप से कुशल खिलाड़ी हैं। बहुत निराशाजनक लेकिन COVID ने पिछले कुछ वर्षों में हम सभी को कुछ घुमावदार गेंदें फेंकी हैं। साथ-साथ जयकारे लगाते रहेंगे। " बता दें कि, पैट कमिंस बीती रात एडिलेड में रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे और वह एक कोरोना पॉजिटिव शख्स के संपर्क में आए थे और इसी वजह उनको क्वारंटाइन किया गया है। वह सीरीज के दूसरे मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं होंगे। स्टीव स्मिथ 3 साल बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी करते फिर से नजर आएंगे। बॉल टैंपरिंग के मामले के बाद स्मिथ को कप्तानी से हटा दिया था और उनके ऊपर बैन लगा दिया गया।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम के कप्तान बनाए गए पैट कमिंस ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जाने वाले सीरीज के दूसरे टेस्ट से बाहर होने को लेकर बयान दिया है। टीम से बाहर होने पर उन्होंने कहा की मुझे बड़ा दुःख है की में इस अहम मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं हूं। खेल। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम के कप्तान बनाए गए पैट कमिंस ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जाने वाले सीरीज के दूसरे टेस्ट से बाहर होने को लेकर बयान दिया है। टीम से बाहर होने पर उन्होंने कहा की मुझे बड़ा दुःख है की में इस अहम मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं हूं। लेकिन उन्होंने माइकल नेसर के टेस्ट डेब्यू को लेकर खुशी भी जताई है। ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम के कप्तान पैट कमिंस एडिलेड डे-नाइट टेस्ट मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं होंगे। उनके बाहर होने से ऑस्ट्रेलिया टीम को उनकी कमी जरूर खलेगी है। अब कमिंस की जगह टीम की कप्तानी का पद भार स्टीव स्मिथ संभालेंगे। बता दें कि, पैट कमिंस की जगह ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग इलेवन में माइकल नेसर को खेलने का मौका दिया गया है। वह इस अहम मुकाबले में अपना टेस्ट डेब्यू भी करेंगे। पैट कमिंस ने ट्वीट करके लिखा "इस टेस्ट को मिस करने के लिए बड़ा दुःख है लेकिन नेसर को टीम में खेलने का मौका मिलते देखने के लिए वास्तव में उत्साहित हैं। उन्होंने कठिन यार्ड्स किए हैं और गंभीर रूप से कुशल खिलाड़ी हैं। बहुत निराशाजनक लेकिन COVID ने पिछले कुछ वर्षों में हम सभी को कुछ घुमावदार गेंदें फेंकी हैं। साथ-साथ जयकारे लगाते रहेंगे। " बता दें कि, पैट कमिंस बीती रात एडिलेड में रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे और वह एक कोरोना पॉजिटिव शख्स के संपर्क में आए थे और इसी वजह उनको क्वारंटाइन किया गया है। वह सीरीज के दूसरे मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं होंगे। स्टीव स्मिथ तीन साल बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी करते फिर से नजर आएंगे। बॉल टैंपरिंग के मामले के बाद स्मिथ को कप्तानी से हटा दिया था और उनके ऊपर बैन लगा दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नववर्ष की शुभकामनाएं दी। नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नववर्ष की शुभकामनाएं दी। पीएम मोदी ने व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत कर उन्हें शुभकामनाएं दी वहीं रूसी राष्ट्रपति ने भी भारत के लोगों की समृद्धि, प्रगति, शांति और खुशी की कामना की। उन्होंने बातचीत के दौरान याद किया कि रशियन फेडरेशन ने हाल में रूस की परंपरा के अनुसार क्रिसमस मनाया था। (वार्ता)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नववर्ष की शुभकामनाएं दी। नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नववर्ष की शुभकामनाएं दी। पीएम मोदी ने व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत कर उन्हें शुभकामनाएं दी वहीं रूसी राष्ट्रपति ने भी भारत के लोगों की समृद्धि, प्रगति, शांति और खुशी की कामना की। उन्होंने बातचीत के दौरान याद किया कि रशियन फेडरेशन ने हाल में रूस की परंपरा के अनुसार क्रिसमस मनाया था।
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. बॉलीवुड की सबसे हॉट एंड सेक्सी एंक्ट्रेस में से एक अमीषा पटेल आज भी उतनी ही बोल्ड और सेक्सी एक्ट्रेस है, जितनी एक दशक पहले हुआ करती थी. आज भी फैन्स उनकी अक झलक पाने के लिए बेताब रहते हैं. आज भी फैन्स उनको काफी अच्छी खासी तदात में पसंद और फॉलो करते हैं. वहीं अमीषा भी अपने फैन्स को निराश नहीं करती हैं. अक्सर ही वो अपने सोशल मीडिया पर अपनी हॉट एंड सेक्सी फोटो या वीडियो अपने फैन्स के साथ शेयर करके उनका दिल जीत लेती हैं. वहीं हाल ही में अमीषा पटेल की कुछ और हॉट एंड सेक्सी फोटो सोशल मीडिया पर सामने आई हैं. फोटो में अमीषा ब्लैक कलर की शॉर्ट ड्रेस में बेहद खूबसूरत और हॉट नजर आ रही हैं. इसके साथ ही वो अपने हॉट अंदाज के साथ बोल्ड पोज देती हुई नजर आ रही हैं. फोटो मे अमीषा के इस सेक्सी अंदाज को कोफी पसंद किाय जा रहा है. फोटो पर अत तक काफी सारे लाइक और कमेंट्स आ चुके हैं. इसके साथ ही फैन्स अमीषा की हुस्न की तारीफें करते थक नहीं रहे हैं. वहीं अमीषा ने खुद भी अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर अपनी एक बॉट फोटो शेयक की है. इतना ही नहीं अमीषा पटेल की सोशल मीडिया पर काफी अच्छी फैन फॉलोइंग हैं. उनके इंस्टाग्राम पर उनके 2 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स है, जो उनके हर एक्टिविटी पर अपनी नजरें बनाए रखते हैं और अमीषा पटेल भी अपने हुस्न का जलवा बिखेरती रहती हैं. इसके अलावा अमीषा पटेल को अक्सर कामुक बॉलीवुड एक्ट्रेस में से एक जाना जाता है. वहीं अमीषा पटेल के काम की बात की जाए तो, अमीषा पटेल ने कई बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकी हैं, लेकिन उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल नहीं दिखा पाई. इसके साथ ही उनकी कुछ ही ऐसी फिल्में हैं जो आज भी पसंद की जाती हैं. अमीषा पटेल की सुपरहिट फिल्मों में से एक गदर एक प्रेम कथा रही. ये फिल्म 2001 में रिलीज हुई थी और दर्शकों को काफी पसंद आई थी. वहीं अब खबर है कि अमीषा पटेल गदर के सिक्वल में नजर आने वाली हैं. इसके साथ ही बता दें कि अमीषा पटेल को आखिरी बार 2018 में रिलीज हुई फिल्म भैयाजी सुपरहिट में देखा गया था.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. बॉलीवुड की सबसे हॉट एंड सेक्सी एंक्ट्रेस में से एक अमीषा पटेल आज भी उतनी ही बोल्ड और सेक्सी एक्ट्रेस है, जितनी एक दशक पहले हुआ करती थी. आज भी फैन्स उनकी अक झलक पाने के लिए बेताब रहते हैं. आज भी फैन्स उनको काफी अच्छी खासी तदात में पसंद और फॉलो करते हैं. वहीं अमीषा भी अपने फैन्स को निराश नहीं करती हैं. अक्सर ही वो अपने सोशल मीडिया पर अपनी हॉट एंड सेक्सी फोटो या वीडियो अपने फैन्स के साथ शेयर करके उनका दिल जीत लेती हैं. वहीं हाल ही में अमीषा पटेल की कुछ और हॉट एंड सेक्सी फोटो सोशल मीडिया पर सामने आई हैं. फोटो में अमीषा ब्लैक कलर की शॉर्ट ड्रेस में बेहद खूबसूरत और हॉट नजर आ रही हैं. इसके साथ ही वो अपने हॉट अंदाज के साथ बोल्ड पोज देती हुई नजर आ रही हैं. फोटो मे अमीषा के इस सेक्सी अंदाज को कोफी पसंद किाय जा रहा है. फोटो पर अत तक काफी सारे लाइक और कमेंट्स आ चुके हैं. इसके साथ ही फैन्स अमीषा की हुस्न की तारीफें करते थक नहीं रहे हैं. वहीं अमीषा ने खुद भी अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर अपनी एक बॉट फोटो शेयक की है. इतना ही नहीं अमीषा पटेल की सोशल मीडिया पर काफी अच्छी फैन फॉलोइंग हैं. उनके इंस्टाग्राम पर उनके दो मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स है, जो उनके हर एक्टिविटी पर अपनी नजरें बनाए रखते हैं और अमीषा पटेल भी अपने हुस्न का जलवा बिखेरती रहती हैं. इसके अलावा अमीषा पटेल को अक्सर कामुक बॉलीवुड एक्ट्रेस में से एक जाना जाता है. वहीं अमीषा पटेल के काम की बात की जाए तो, अमीषा पटेल ने कई बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकी हैं, लेकिन उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल नहीं दिखा पाई. इसके साथ ही उनकी कुछ ही ऐसी फिल्में हैं जो आज भी पसंद की जाती हैं. अमीषा पटेल की सुपरहिट फिल्मों में से एक गदर एक प्रेम कथा रही. ये फिल्म दो हज़ार एक में रिलीज हुई थी और दर्शकों को काफी पसंद आई थी. वहीं अब खबर है कि अमीषा पटेल गदर के सिक्वल में नजर आने वाली हैं. इसके साथ ही बता दें कि अमीषा पटेल को आखिरी बार दो हज़ार अट्ठारह में रिलीज हुई फिल्म भैयाजी सुपरहिट में देखा गया था.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गोलीय खगोलशास्त्र (spherical astronomy) या स्थितीय खगोलशास्त्र (positional astronomy) खगोलशास्त्र की वह शाखा है जिसमें खगोलीय वस्तुओं का किसी विशेष समय, तिथि या पृथ्वी पर स्थित स्थान पर खगोलीय गोले में स्थान अनुमानित करा जाता है। यह अध्ययन की शाखा गोलीय ज्यामिति के सिद्धांतों व विधियों और खगोलमिति की मापन-कलाओं पर निर्भर है। ऐतिहासिक दृष्टि से गोलीय खगोलशास्त्र को पूरे खगोलशास्त्र की प्राचीनतम शाखा माना जा सकता है क्योंकि धार्मिक, ज्योतिष, समयानुमान और दिक्चालन (नैविगेशन) कार्यों के लिये मानव आकाश में तारों, तारामंडलों, ग्रहों, सूर्य व चंद्रमा की स्थिति को ग़ौर से जाँचता-समझता रहा है। अकाश में खगोलीय वस्तुओं के स्थानों को गणितीय रूप से समझने के विज्ञान को खगोलमिति (astronomy) कहते हैं। . दो आयाम (डिमॅनशनों) में ध्रुवीय निर्देशांक पद्धति में किसी भी बिंदु का स्थान उसके कोण और त्रिज्या (रेडियस) से पूर्णतः निर्धारित हो जाता है निर्देशांक पद्धति (अंग्रेजीः coordinate system) ज्यामिति में ऐसी प्रणाली को कहते हैं जिसमें एक या उस से अधिक अंकों के प्रयोग से किसी भी बिंदु का किसी दिक् (स्पेस) में स्थान पूर्ण रूप से बताया जा सके। यह दिक् मनुष्यों का जाना-पहचाना त्रिआयामी (तीन डिमॅनशनों वाला) हो सकता है या फिर ऐसा कोई उलझा हुआ बहुमोड़ (मैनीफ़ोल्ड) दिक् जिसकी गणित में कल्पना की जाती है। सरल एक, दो या तीन आयामों वाले दिक् में अक्सर कार्तीय निर्देशांक पद्धति का प्रयोग किया जाता है, हालांकि ध्रुवीय (पोलर) पद्धति जैसी अन्य प्रणालियाँ भी उपलब्ध हैं।, Edward J. Denecke, Jr., pp. गोलीय खगोलशास्त्र और निर्देशांक पद्धति आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। गोलीय खगोलशास्त्र 34 संबंध है और निर्देशांक पद्धति 7 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (34 + 7)। यह लेख गोलीय खगोलशास्त्र और निर्देशांक पद्धति के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गोलीय खगोलशास्त्र या स्थितीय खगोलशास्त्र खगोलशास्त्र की वह शाखा है जिसमें खगोलीय वस्तुओं का किसी विशेष समय, तिथि या पृथ्वी पर स्थित स्थान पर खगोलीय गोले में स्थान अनुमानित करा जाता है। यह अध्ययन की शाखा गोलीय ज्यामिति के सिद्धांतों व विधियों और खगोलमिति की मापन-कलाओं पर निर्भर है। ऐतिहासिक दृष्टि से गोलीय खगोलशास्त्र को पूरे खगोलशास्त्र की प्राचीनतम शाखा माना जा सकता है क्योंकि धार्मिक, ज्योतिष, समयानुमान और दिक्चालन कार्यों के लिये मानव आकाश में तारों, तारामंडलों, ग्रहों, सूर्य व चंद्रमा की स्थिति को ग़ौर से जाँचता-समझता रहा है। अकाश में खगोलीय वस्तुओं के स्थानों को गणितीय रूप से समझने के विज्ञान को खगोलमिति कहते हैं। . दो आयाम में ध्रुवीय निर्देशांक पद्धति में किसी भी बिंदु का स्थान उसके कोण और त्रिज्या से पूर्णतः निर्धारित हो जाता है निर्देशांक पद्धति ज्यामिति में ऐसी प्रणाली को कहते हैं जिसमें एक या उस से अधिक अंकों के प्रयोग से किसी भी बिंदु का किसी दिक् में स्थान पूर्ण रूप से बताया जा सके। यह दिक् मनुष्यों का जाना-पहचाना त्रिआयामी हो सकता है या फिर ऐसा कोई उलझा हुआ बहुमोड़ दिक् जिसकी गणित में कल्पना की जाती है। सरल एक, दो या तीन आयामों वाले दिक् में अक्सर कार्तीय निर्देशांक पद्धति का प्रयोग किया जाता है, हालांकि ध्रुवीय पद्धति जैसी अन्य प्रणालियाँ भी उपलब्ध हैं।, Edward J. Denecke, Jr., pp. गोलीय खगोलशास्त्र और निर्देशांक पद्धति आम में शून्य बातें हैं । गोलीय खगोलशास्त्र चौंतीस संबंध है और निर्देशांक पद्धति सात है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख गोलीय खगोलशास्त्र और निर्देशांक पद्धति के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
दिल्ली नगर निगम ने अब तक 69 आरडब्ल्यूए और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज को 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' घोषित किया है। ये कॉलोनियां निगम की सहभागिता योजना के तहत कर रियायतों की पात्र बन गई हैं। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने स्रोत पर ही 100 प्रतिशत कचरा अलग करने का काम करने और अपनी कॉलोनियों में जीरो वेस्ट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज (जीएचएस) को मान्यता देना शुरू कर दिया है। एमसीडी ने राजधानी दिल्ली को हरा-भरा और कचरा मुक्त बनाने के लिए एक अनूठा प्रोत्साहन-आधारित कार्यक्रम शुरू किया है। एमसीडी ने अब तक 69 आरडब्ल्यूए और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज को 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' घोषित किया है। ये कॉलोनियां निगम की सहभागिता योजना के तहत कर रियायतों की पात्र बन गई हैं। एमसीडी राष्ट्रीय राजधानी की सफाई, हरियाली और कचरा प्रबंधन में लोगों की भागीदारी की दिशा में काम कर रही है। मान्यता, टैक्स छूट और वित्तीय लाभ के मामले में एमसीडी द्वारा प्रोत्साहित इस तरह की योजनाएं कचरा प्रबंधन के मामले में कॉलोनियों को आत्मनिर्भर बना रही हैं। एमसीडी ने जीरो वेस्ट कॉलोनियों को सर्टिफिकेट देने की एक नई पहल शुरू की थी। इससे इसे प्राप्त करने के लिए आरडब्ल्यूए और जीएचएस के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी होगी। एमसीडी ने निम्नलिखित कॉलोनियों को जीरो वेस्ट कॉलोनी घोषित किया :- दक्षिण क्षेत्र में मेफेयर गार्डन हौज खास, बी-11, बी-4 वसंत कुंज, तारा अपार्टमेंट सीआर पार्क; मध्य क्षेत्र में निजामुद्दीन पूर्व, लाजपत नगर-3 आई और एफ ब्लॉक, पॉकेट जी सरिता विहार, नजफगढ़ जोन में सद्भावना अपार्टमेंट, सी-9 वसंत कुंज, वेदांत अपार्टमेंट सेक्टर-23 द्वारका; अरिहंत नगर, सूर्य किरण अपार्टमेंट, पश्चिम क्षेत्र में प्रिया अपार्टमेंट, करोल बाग जोन में जी ब्लॉक नरैना, डीएमएस कॉलोनी; रोहिणी जोन में अतम वल्लभ विहार अपार्टमेंट सेक्टर-13 रोहिणी, अंतरिक्ष अपार्टमेंट सेक्टर-14 रोहिणी; सिटी एसपी जोन में डीएमआरसी ऑफिसर फ्लैट्स, रोहतगी अपार्टमेंट, शाहदरा नॉर्थ जोन में सी ब्लॉक दिलशाद गार्डन; एसआरएम अपार्टमेंट, शाहदरा साउथ जोन में दिल्ली राजधानी अपार्टमेंट; नरेला जोन में भगवान अपार्टमेंट सेक्टर-28 रोहिणी, पॉकेट-11 सेक्टर-21 रोहिणी; सिविल लाइंस जोन में गुलाब वाटिका टैगोर पार्क, पटेल चेस्ट भाई परमानंद कॉलोनी; केशवपुरम जोन में बी-2, बी-3 केशव पुरम, एपी ब्लॉक पीतमपुरा कुछ नाम हैं। इस प्रकार, 41 और कॉलोनियां जीरो वेस्ट कॉलोनियां बन गई हैं, जबकि 32 और कॉलोनियां 'हरित मित्र' बन गई हैं, जिससे जीरो वेस्ट के लिए कुल संख्या 69 और हरित मित्र के लिए 60 हो गई है। 'सहभागिता कॉलोनी' प्रमाणन के तहत आने वाली जीरो वेस्ट कॉलोनियों को एमसीडी भुगतान किए गए संपत्ति कर के 5 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस प्रोत्साहन राशि का उपयोग उनकी कॉलोनी/सोसायटी में आरडब्ल्यूए/जीएचएस की सिफारिशों पर विकासात्मक कार्य करके किया जा सकता है। एमसीडी द्वारा शुरू की गई यह अनूठी पहल कचरे के प्रसंस्करण की समस्या का समाधान करेगी और लैंडफिल साइटों पर पुराने कचरे को कम करने में मदद करेगी। आरडब्ल्यूए की मदद से एमसीडी शहर को कचरा मुक्त कर सकेगी। एमसीडी का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले 100 जीरो-वेस्ट कॉलोनियां बनाने का है।
दिल्ली नगर निगम ने अब तक उनहत्तर आरडब्ल्यूए और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज को 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' घोषित किया है। ये कॉलोनियां निगम की सहभागिता योजना के तहत कर रियायतों की पात्र बन गई हैं। दिल्ली नगर निगम ने स्रोत पर ही एक सौ प्रतिशत कचरा अलग करने का काम करने और अपनी कॉलोनियों में जीरो वेस्ट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज को मान्यता देना शुरू कर दिया है। एमसीडी ने राजधानी दिल्ली को हरा-भरा और कचरा मुक्त बनाने के लिए एक अनूठा प्रोत्साहन-आधारित कार्यक्रम शुरू किया है। एमसीडी ने अब तक उनहत्तर आरडब्ल्यूए और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज को 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' घोषित किया है। ये कॉलोनियां निगम की सहभागिता योजना के तहत कर रियायतों की पात्र बन गई हैं। एमसीडी राष्ट्रीय राजधानी की सफाई, हरियाली और कचरा प्रबंधन में लोगों की भागीदारी की दिशा में काम कर रही है। मान्यता, टैक्स छूट और वित्तीय लाभ के मामले में एमसीडी द्वारा प्रोत्साहित इस तरह की योजनाएं कचरा प्रबंधन के मामले में कॉलोनियों को आत्मनिर्भर बना रही हैं। एमसीडी ने जीरो वेस्ट कॉलोनियों को सर्टिफिकेट देने की एक नई पहल शुरू की थी। इससे इसे प्राप्त करने के लिए आरडब्ल्यूए और जीएचएस के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी होगी। एमसीडी ने निम्नलिखित कॉलोनियों को जीरो वेस्ट कॉलोनी घोषित किया :- दक्षिण क्षेत्र में मेफेयर गार्डन हौज खास, बी-ग्यारह, बी-चार वसंत कुंज, तारा अपार्टमेंट सीआर पार्क; मध्य क्षेत्र में निजामुद्दीन पूर्व, लाजपत नगर-तीन आई और एफ ब्लॉक, पॉकेट जी सरिता विहार, नजफगढ़ जोन में सद्भावना अपार्टमेंट, सी-नौ वसंत कुंज, वेदांत अपार्टमेंट सेक्टर-तेईस द्वारका; अरिहंत नगर, सूर्य किरण अपार्टमेंट, पश्चिम क्षेत्र में प्रिया अपार्टमेंट, करोल बाग जोन में जी ब्लॉक नरैना, डीएमएस कॉलोनी; रोहिणी जोन में अतम वल्लभ विहार अपार्टमेंट सेक्टर-तेरह रोहिणी, अंतरिक्ष अपार्टमेंट सेक्टर-चौदह रोहिणी; सिटी एसपी जोन में डीएमआरसी ऑफिसर फ्लैट्स, रोहतगी अपार्टमेंट, शाहदरा नॉर्थ जोन में सी ब्लॉक दिलशाद गार्डन; एसआरएम अपार्टमेंट, शाहदरा साउथ जोन में दिल्ली राजधानी अपार्टमेंट; नरेला जोन में भगवान अपार्टमेंट सेक्टर-अट्ठाईस रोहिणी, पॉकेट-ग्यारह सेक्टर-इक्कीस रोहिणी; सिविल लाइंस जोन में गुलाब वाटिका टैगोर पार्क, पटेल चेस्ट भाई परमानंद कॉलोनी; केशवपुरम जोन में बी-दो, बी-तीन केशव पुरम, एपी ब्लॉक पीतमपुरा कुछ नाम हैं। इस प्रकार, इकतालीस और कॉलोनियां जीरो वेस्ट कॉलोनियां बन गई हैं, जबकि बत्तीस और कॉलोनियां 'हरित मित्र' बन गई हैं, जिससे जीरो वेस्ट के लिए कुल संख्या उनहत्तर और हरित मित्र के लिए साठ हो गई है। 'सहभागिता कॉलोनी' प्रमाणन के तहत आने वाली जीरो वेस्ट कॉलोनियों को एमसीडी भुगतान किए गए संपत्ति कर के पाँच प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस प्रोत्साहन राशि का उपयोग उनकी कॉलोनी/सोसायटी में आरडब्ल्यूए/जीएचएस की सिफारिशों पर विकासात्मक कार्य करके किया जा सकता है। एमसीडी द्वारा शुरू की गई यह अनूठी पहल कचरे के प्रसंस्करण की समस्या का समाधान करेगी और लैंडफिल साइटों पर पुराने कचरे को कम करने में मदद करेगी। आरडब्ल्यूए की मदद से एमसीडी शहर को कचरा मुक्त कर सकेगी। एमसीडी का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले एक सौ जीरो-वेस्ट कॉलोनियां बनाने का है।
लेन्द्रिय खादों की व्यावहारिक बातें १५४. (ख) अथवा दूसरा उदाहरण यह है कि एक ही लेत के जिसहिस्से मे से, हरे चारे की फसल उगाकर उठा ली गयी (साद के रूप में जोतकर खेत में पाटी नहीं गयी - मगर उठा ला गयो). उस हिस्से में लगातार तीन फसलें औसनन ५०% अधिक-अधिक उपजी, वनिस्वत उसी खेत के दूसरे हिस्से से कि जो हिस्सा सुधा रने के लिए चौमाल ( fallow ) रखा गया था (कमजार बने हुए खेतों से, एक मौसम भर फसलें न लेकर, उन्हें जीतकर आराम देने के लिए छोड रखने का जो रिवाज है, उसे किसान लोग "चौमान छोड़ना" कहते है ) । खेत के प्रथम हिस्से का सुधार इसलिए हुआ कि हरे चारे की फसल द्विदल वर्ग की थी और हिलने के पौधे, वायुमंडल के नत्रजन को भी जमीन में जनाते ६ आर अपनी सोरों को विशेष गहराई मे भेजकर, यहाँ के शेष तत्वों को भी विशेष मात्रा में विघटित करके, खेत की सब तरह से पुष्ट करते है । १५५. इसका अर्थ यह हुआ कि हमारे देश को फसलों में जल्द-से-जल्द और खूत्र चढा लेना हो, तो उनका आसान-मेंआसान और अच्छे से अच्छा तरीका भी हरएक का उपयोग पूरा-पूरा और लगातार लेते रहने मे है, चाहे उगाकर पार्ट और यदि ताक पर पानी के मिलने का योग न बँटा तो उसे सेन ने से उखाड़ भी लें । १५६ खेतों की इन सभी सेन्द्रियों को पचाने भी अपरम्पार है और फसल के नाम को बढ़ाने की उतारन भी उतनी ही अधिक है । मिश्रा का समान रूप से जा तह समूचे खेत मे पाटने से. उस खेत में फसल चार गुनी हो श्री; और डेढ इव का तह पाटने से, चाट नात गुनीबज्ञ थी । श्री अल्बर्ट महोदय का कहना है कि इन सा नात्रा दो के तह तक भो खुशी से बढ़ायी जा नरती है ।
लेन्द्रिय खादों की व्यावहारिक बातें एक सौ चौवन. अथवा दूसरा उदाहरण यह है कि एक ही लेत के जिसहिस्से मे से, हरे चारे की फसल उगाकर उठा ली गयी . उस हिस्से में लगातार तीन फसलें औसनन पचास% अधिक-अधिक उपजी, वनिस्वत उसी खेत के दूसरे हिस्से से कि जो हिस्सा सुधा रने के लिए चौमाल रखा गया था । खेत के प्रथम हिस्से का सुधार इसलिए हुआ कि हरे चारे की फसल द्विदल वर्ग की थी और हिलने के पौधे, वायुमंडल के नत्रजन को भी जमीन में जनाते छः आर अपनी सोरों को विशेष गहराई मे भेजकर, यहाँ के शेष तत्वों को भी विशेष मात्रा में विघटित करके, खेत की सब तरह से पुष्ट करते है । एक सौ पचपन. इसका अर्थ यह हुआ कि हमारे देश को फसलों में जल्द-से-जल्द और खूत्र चढा लेना हो, तो उनका आसान-मेंआसान और अच्छे से अच्छा तरीका भी हरएक का उपयोग पूरा-पूरा और लगातार लेते रहने मे है, चाहे उगाकर पार्ट और यदि ताक पर पानी के मिलने का योग न बँटा तो उसे सेन ने से उखाड़ भी लें । एक सौ छप्पन खेतों की इन सभी सेन्द्रियों को पचाने भी अपरम्पार है और फसल के नाम को बढ़ाने की उतारन भी उतनी ही अधिक है । मिश्रा का समान रूप से जा तह समूचे खेत मे पाटने से. उस खेत में फसल चार गुनी हो श्री; और डेढ इव का तह पाटने से, चाट नात गुनीबज्ञ थी । श्री अल्बर्ट महोदय का कहना है कि इन सा नात्रा दो के तह तक भो खुशी से बढ़ायी जा नरती है ।
362 : प्रेमचंद रचनावली-11 दीं। मौत की कटार सिर पर नजर आई। वह घबराकर उठ बैठी। हैदर को देखा, परिस्थिति समझ में आ गई । बोलीहैदर ! हैदर ने अपनी झेंप को गुस्से के पर्दे में छिपाकर कहा- हां, मैं हूं हैदर । नईमा सिर झुकाकर हसरत-भरे ढंग से बोली- तुम्हारे हाथों में यह चमकती तलवार देखकर मेरा कलेजा थरथरा रहा है। तुम्हीं ने मुझे नाजबरदारियों का आदी बना दिया है। जरा देर के लिए इस कटार को मेरी आंखों से छिपा लो। मैं जानती हूं कि तुम मेरे खून के प्यासे हो, लेकिन मुझे न मालूम था कि तुम इतने बेरहम और संगदिल हो । मैंने तुमसे दगा की है, तुम्हारी खतावार हूं लेकिन हैदर यकीन मानो, अगर मुझे चंद आखिरी बातें कहने का मौका न मिलता तो शायद मेरी रूह को दोजख में भी यही आरजू रहती। मौत की सजा से पहले अपने घर वालों से आखिरी मुलाकात की इजाजत होती है। क्या तुम मेरे लिए इतनी रियायत के भी रवादार न थे ? माना कि अब तुम मेरे कोई नहीं हो मगर किसी वक्त थे और तुम चाहे अपने दिल में समझते हो कि मैं सब कुछ भूल गई लेकिन मैं मुहब्बत को इतनी भूल जाने वाली नहीं हूं। अपने ही दिल से फैसला करो। तुम मेरी बेवफाइयां चाहे भूल जाओ लेकिन मेरी मुहब्बत की दिल तोड़ने वाली यादगारें नही मिटा सकते । मेरी आखिरी बातें सुन लो और इस नापाक जिंदगी का किस्सा पाक करो। मैं साफ-साफ कहती हूं, इस आखिरी वक्त मैं क्यों डरूं। मेरी जो कुछ दुर्गत हुई है उसके जिम्मेदार तुम हो । नाराज न हो। अगर तुम्हारा खयाल है कि मैं यहां फूलों की सेज पर सोती हूं तो वह गलत है। मैंने औरत की शर्म खोकर उसकी कद्र जानी है। मैं हसीन हूं, नाजुक हूं, दुनिया की नेमतें मेरे लिए हाजिर हैं, नासिर मेरी इच्छा का गुलाम है लेकिन मेरे दिल से यह खयाल कभी दूर नहीं होता कि वह सिर्फ मेरे हुस्न और अदा का बंदा है। मेरी इज्जत उसके दिल में कभी हो भी नहीं सकती। क्या तुम जानते हो कि यहां खवासों और दूसरी बीवियों के मतलब भरे इशारे मेरे खून और जिगर को नहीं जलाते । ओफ्, मैंने अस्मत खोकर अस्मत की कद्र जानी है लेकिन मैं कह चुकी हूं और फिर कहती हूं कि इसके तुम जिम्मेदार हो । हैदर ने पहलू बदलकर पूछा- क्योंकर नईमा ने उसी अंदाज से जवाब दिया- तुमने मुझे बीवी बनाकर नहीं, माशूक बनाकर रखा। तुमने मुझे नाजबरदारियों का आदी बनाया लेकिन फर्ज का सबक नहीं पढ़ाया। तुमने कभी न अपनी बातों से, न कामों से मुझे यह खयाल करने का मौका दिया कि इस मुहब्बत की बुनियाद फर्ज पर है। तुमने मुझे हमेशा हुस्न और मस्तियों के तिलिस्म में फंसा रखा और मुझे ख्वाहिशों का गुलाम बना दिया। किसी किश्ती पर अगर फर्ज का मल्लाह न हो तो फिर उसे दरिया में डूब जाने के सिवा और कोई चारा नहीं। लेकिन अब बातों से क्या हासिल, अब तो तुम्हारी गैरत की कटार मेरे खून की प्यासी है और यह लो मेरा सिर उसके सामने झुका हुआ है। हां, मेरी एक आखिरी तमन्ना है, अगर तुम्हारी इजाजत पाऊं तो कहूं ।
तीन सौ बासठ : प्रेमचंद रचनावली-ग्यारह दीं। मौत की कटार सिर पर नजर आई। वह घबराकर उठ बैठी। हैदर को देखा, परिस्थिति समझ में आ गई । बोलीहैदर ! हैदर ने अपनी झेंप को गुस्से के पर्दे में छिपाकर कहा- हां, मैं हूं हैदर । नईमा सिर झुकाकर हसरत-भरे ढंग से बोली- तुम्हारे हाथों में यह चमकती तलवार देखकर मेरा कलेजा थरथरा रहा है। तुम्हीं ने मुझे नाजबरदारियों का आदी बना दिया है। जरा देर के लिए इस कटार को मेरी आंखों से छिपा लो। मैं जानती हूं कि तुम मेरे खून के प्यासे हो, लेकिन मुझे न मालूम था कि तुम इतने बेरहम और संगदिल हो । मैंने तुमसे दगा की है, तुम्हारी खतावार हूं लेकिन हैदर यकीन मानो, अगर मुझे चंद आखिरी बातें कहने का मौका न मिलता तो शायद मेरी रूह को दोजख में भी यही आरजू रहती। मौत की सजा से पहले अपने घर वालों से आखिरी मुलाकात की इजाजत होती है। क्या तुम मेरे लिए इतनी रियायत के भी रवादार न थे ? माना कि अब तुम मेरे कोई नहीं हो मगर किसी वक्त थे और तुम चाहे अपने दिल में समझते हो कि मैं सब कुछ भूल गई लेकिन मैं मुहब्बत को इतनी भूल जाने वाली नहीं हूं। अपने ही दिल से फैसला करो। तुम मेरी बेवफाइयां चाहे भूल जाओ लेकिन मेरी मुहब्बत की दिल तोड़ने वाली यादगारें नही मिटा सकते । मेरी आखिरी बातें सुन लो और इस नापाक जिंदगी का किस्सा पाक करो। मैं साफ-साफ कहती हूं, इस आखिरी वक्त मैं क्यों डरूं। मेरी जो कुछ दुर्गत हुई है उसके जिम्मेदार तुम हो । नाराज न हो। अगर तुम्हारा खयाल है कि मैं यहां फूलों की सेज पर सोती हूं तो वह गलत है। मैंने औरत की शर्म खोकर उसकी कद्र जानी है। मैं हसीन हूं, नाजुक हूं, दुनिया की नेमतें मेरे लिए हाजिर हैं, नासिर मेरी इच्छा का गुलाम है लेकिन मेरे दिल से यह खयाल कभी दूर नहीं होता कि वह सिर्फ मेरे हुस्न और अदा का बंदा है। मेरी इज्जत उसके दिल में कभी हो भी नहीं सकती। क्या तुम जानते हो कि यहां खवासों और दूसरी बीवियों के मतलब भरे इशारे मेरे खून और जिगर को नहीं जलाते । ओफ्, मैंने अस्मत खोकर अस्मत की कद्र जानी है लेकिन मैं कह चुकी हूं और फिर कहती हूं कि इसके तुम जिम्मेदार हो । हैदर ने पहलू बदलकर पूछा- क्योंकर नईमा ने उसी अंदाज से जवाब दिया- तुमने मुझे बीवी बनाकर नहीं, माशूक बनाकर रखा। तुमने मुझे नाजबरदारियों का आदी बनाया लेकिन फर्ज का सबक नहीं पढ़ाया। तुमने कभी न अपनी बातों से, न कामों से मुझे यह खयाल करने का मौका दिया कि इस मुहब्बत की बुनियाद फर्ज पर है। तुमने मुझे हमेशा हुस्न और मस्तियों के तिलिस्म में फंसा रखा और मुझे ख्वाहिशों का गुलाम बना दिया। किसी किश्ती पर अगर फर्ज का मल्लाह न हो तो फिर उसे दरिया में डूब जाने के सिवा और कोई चारा नहीं। लेकिन अब बातों से क्या हासिल, अब तो तुम्हारी गैरत की कटार मेरे खून की प्यासी है और यह लो मेरा सिर उसके सामने झुका हुआ है। हां, मेरी एक आखिरी तमन्ना है, अगर तुम्हारी इजाजत पाऊं तो कहूं ।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने चुनाव आयोग (Election Commission) पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पहले की तरह आजाद नहीं है। यह बीजेपी की शाखा बन गया है। पहले हमारे चुनाव आयुक्तों को चुनाव कराने में विशेषज्ञ सलाह के लिए दूसरे देश आमंत्रित करते थे। - मह्बूबा मुफ्ती ने कहा कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र निकाय नहीं रहा। - पहले हमारे चुनाव आयोग से दूसरे देश सलाह लेते थे। - बीजेपी नियमों का उल्लंघन करती है, चुनाव आयोग चुप रहता है। B&B Political: Rajasthan में Congress पर जमकर बरसे PM Modi, कही ये बड़ी बात! Manipur में चिंगारी किसने भड़काई, पता चला ! Dhartiputra: Fazil Ahmad के लिए "मुसलमान को समस्या है", पर समस्या पूछ ली तो बातें बनाने लगे !
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पहले की तरह आजाद नहीं है। यह बीजेपी की शाखा बन गया है। पहले हमारे चुनाव आयुक्तों को चुनाव कराने में विशेषज्ञ सलाह के लिए दूसरे देश आमंत्रित करते थे। - मह्बूबा मुफ्ती ने कहा कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र निकाय नहीं रहा। - पहले हमारे चुनाव आयोग से दूसरे देश सलाह लेते थे। - बीजेपी नियमों का उल्लंघन करती है, चुनाव आयोग चुप रहता है। B&B Political: Rajasthan में Congress पर जमकर बरसे PM Modi, कही ये बड़ी बात! Manipur में चिंगारी किसने भड़काई, पता चला ! Dhartiputra: Fazil Ahmad के लिए "मुसलमान को समस्या है", पर समस्या पूछ ली तो बातें बनाने लगे !
इंडियन रेलवे की आईआरसीटीसी की वेबसाइट सुबह 10 बजे अचानक बंद हो गई। जिसकी वजह से ऑनलाइन टिकट बुकिंग ठप हो गई। तत्काल टिकट बुकिंग भी पूरी तरह से बाधित हो गई। लखनऊ ही नहीं आसपास के शहरों के भी टिकट नहीं बन पाए। लगभग 48 मिनट तक बेवसाइट ठप रही। 11 बजे तक किसी तरह से बेवसाइट चली भी, लेकिन टिकट बुकिंग नहीं हो पाई। इंडियन रेलवे की आइआरसीटीसी की वेबसाइट सुबह 10 बजे से लेकर 10:48 तक ठप रही। जिसकी वजह से तत्काल बुकिंग ठप हो गई। लोग टिकट बुकिंग के लिए लोग परेशान रहे। बेवसाइट नहीं खुलने की वजह से सैंकड़ों लोग टिकट नहीं बनवा पाए। सुबह तत्काल टिकट बनने के समय ही वेबसाइट खुल नहीं पाई। अब तक शूरू नहीं हो सकी। लंबी वेटिंग के कारण तत्काल टिकट बनाने वालों को झटका लगा। लखनऊ ही नहीं कई शहरों के टिकट भी नही बन पाए। 10:48 बजे तक किसी तरह गड़बड़ी ठीक हुई, लेकिन बहुत ज्यादा लोड होने की वजह से टिकट बुकिंग शुरू नहीं हो पाई।
इंडियन रेलवे की आईआरसीटीसी की वेबसाइट सुबह दस बजे अचानक बंद हो गई। जिसकी वजह से ऑनलाइन टिकट बुकिंग ठप हो गई। तत्काल टिकट बुकिंग भी पूरी तरह से बाधित हो गई। लखनऊ ही नहीं आसपास के शहरों के भी टिकट नहीं बन पाए। लगभग अड़तालीस मिनट तक बेवसाइट ठप रही। ग्यारह बजे तक किसी तरह से बेवसाइट चली भी, लेकिन टिकट बुकिंग नहीं हो पाई। इंडियन रेलवे की आइआरसीटीसी की वेबसाइट सुबह दस बजे से लेकर दस:अड़तालीस तक ठप रही। जिसकी वजह से तत्काल बुकिंग ठप हो गई। लोग टिकट बुकिंग के लिए लोग परेशान रहे। बेवसाइट नहीं खुलने की वजह से सैंकड़ों लोग टिकट नहीं बनवा पाए। सुबह तत्काल टिकट बनने के समय ही वेबसाइट खुल नहीं पाई। अब तक शूरू नहीं हो सकी। लंबी वेटिंग के कारण तत्काल टिकट बनाने वालों को झटका लगा। लखनऊ ही नहीं कई शहरों के टिकट भी नही बन पाए। दस:अड़तालीस बजे तक किसी तरह गड़बड़ी ठीक हुई, लेकिन बहुत ज्यादा लोड होने की वजह से टिकट बुकिंग शुरू नहीं हो पाई।
वर्धाः लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक बार फिर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि उसने शांतिप्रिय हिंदुओं पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगाने और धर्म मार्ग पर चलने वालों को अपमानित करने का काम किया है। महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए वर्धा में एक जनसभा में मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 'हिंदू आतंकवाद' शब्द ईजाद किया। मोदी ने पुलवामा आतंकवादी हमले और बालाकोट हवाई हमले को लेकर कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर सैनिकों के साहस पर सवाल उठाने और उनका अपमान करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो पाकिस्तान में प्रयोग के लिए एकदम उचित थी। मोदी ने पहले चुनाव लड़ने और फिर लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने के राकांपा प्रमुख शरद पवार के फैसले को लेकर उन पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पवार ने प्रतिकूल स्थिति को भांप लिया है। (भाषा)
वर्धाः लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक बार फिर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि उसने शांतिप्रिय हिंदुओं पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगाने और धर्म मार्ग पर चलने वालों को अपमानित करने का काम किया है। महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए वर्धा में एक जनसभा में मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 'हिंदू आतंकवाद' शब्द ईजाद किया। मोदी ने पुलवामा आतंकवादी हमले और बालाकोट हवाई हमले को लेकर कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर सैनिकों के साहस पर सवाल उठाने और उनका अपमान करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो पाकिस्तान में प्रयोग के लिए एकदम उचित थी। मोदी ने पहले चुनाव लड़ने और फिर लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने के राकांपा प्रमुख शरद पवार के फैसले को लेकर उन पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पवार ने प्रतिकूल स्थिति को भांप लिया है।
डिजिटल मीडिया स्टार्टअप 'ट्राईसिटी टुडे' (Tricity Today) ने 'रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया' (RNI) की एक पॉलिसी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पत्रकार अंकित शर्मा ने 'टीवी9' (TV9) डिजिटल को अलविदा कह दिया है। वह यहां सोशल मीडिया मैनेजर के पद पर एक वर्ष से अधिक समय से कार्यरत थे। 'हिंदुस्तान टाइम्स' ग्रुप से पहले विश्व गौरव नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 'एबीपी नेटवर्क' (ABP Network) का मराठी न्यूज चैनल 'एबीपी माझा' (ABP Majha) एक नया टीवी शो लॉन्च करने की तैयारी में है। WCRC द्वारा लंदन के वेस्टमिंस्टर में आयोजित एक भव्य समारोह में 'इंडिया टीवी' को धूम रही। बचपन से ही मुझे पढ़ने का शौक रहा है। राम चरित मानस से लेकर महाभारत और रामचंद्र गुहा से लेकर मस्तराम कपूर तक की किताबें। बता दें कि अनुपम खेर इससे पहले 'द अनुपम खेर शो-कुछ भी हो सकता है' को होस्ट कर चुके हैं। ये सभी पद दिल्ली के लिए हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए इच्छुक व योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आर्टिकल हिंदी अथवा अंग्रेजी दोनों में से से किसी भी भाषा में भेज सकते हैं। इसके लिए शब्द सीमा एक हजार से दो हजार शब्दों के बीच रखी गई है। 'इंडिया टुडे' ग्रुप ने 'बिजनेस टुडे टेलीविजन' चैनल के स्टूडियो को नए अवतार के साथ लॉन्च किया है। पत्रकार नीतू झा ने 'एबीपी न्यूज' (ABP News) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया टीवी' (India TV) ने दीपावली पर अपने एंप्लॉयीज को 'तोहफा' दिया है। कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के समक्ष दायर की गई वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। 'सहारा इंडिया मीडिया', 'तहलका मैगजीन', 'स्टार न्यूज' एवं 'सीएनबीसी-आवाज' को अपनी सेवाओं से ऊंचाई देने वाले वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय खुद का न्यूज वेंचर शुरू कर रहे हैं। श्रीराम श्रीनिवासन जनवरी, 2016 से 'द हिंदू' के स्ट्रैजटी एंड डिजिटल एडिटर के पद पर बने हुए हैं।
डिजिटल मीडिया स्टार्टअप 'ट्राईसिटी टुडे' ने 'रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया' की एक पॉलिसी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पत्रकार अंकित शर्मा ने 'टीवीनौ' डिजिटल को अलविदा कह दिया है। वह यहां सोशल मीडिया मैनेजर के पद पर एक वर्ष से अधिक समय से कार्यरत थे। 'हिंदुस्तान टाइम्स' ग्रुप से पहले विश्व गौरव नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 'एबीपी नेटवर्क' का मराठी न्यूज चैनल 'एबीपी माझा' एक नया टीवी शो लॉन्च करने की तैयारी में है। WCRC द्वारा लंदन के वेस्टमिंस्टर में आयोजित एक भव्य समारोह में 'इंडिया टीवी' को धूम रही। बचपन से ही मुझे पढ़ने का शौक रहा है। राम चरित मानस से लेकर महाभारत और रामचंद्र गुहा से लेकर मस्तराम कपूर तक की किताबें। बता दें कि अनुपम खेर इससे पहले 'द अनुपम खेर शो-कुछ भी हो सकता है' को होस्ट कर चुके हैं। ये सभी पद दिल्ली के लिए हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए इच्छुक व योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आर्टिकल हिंदी अथवा अंग्रेजी दोनों में से से किसी भी भाषा में भेज सकते हैं। इसके लिए शब्द सीमा एक हजार से दो हजार शब्दों के बीच रखी गई है। 'इंडिया टुडे' ग्रुप ने 'बिजनेस टुडे टेलीविजन' चैनल के स्टूडियो को नए अवतार के साथ लॉन्च किया है। पत्रकार नीतू झा ने 'एबीपी न्यूज' में अपनी पारी को विराम दे दिया है। हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया टीवी' ने दीपावली पर अपने एंप्लॉयीज को 'तोहफा' दिया है। कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के समक्ष दायर की गई वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। 'सहारा इंडिया मीडिया', 'तहलका मैगजीन', 'स्टार न्यूज' एवं 'सीएनबीसी-आवाज' को अपनी सेवाओं से ऊंचाई देने वाले वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय खुद का न्यूज वेंचर शुरू कर रहे हैं। श्रीराम श्रीनिवासन जनवरी, दो हज़ार सोलह से 'द हिंदू' के स्ट्रैजटी एंड डिजिटल एडिटर के पद पर बने हुए हैं।
कलियुग के प्रमाण को चार से गुणा किया तो १७२८००० वर्ष हुए । यही कृतयुग का प्रमाण है। फिर कलिप्रमाण को तीन से गुणा किया तो १२९६००० वर्ष हुए, यही त्रेतायुग का प्रमाण हुआ। फिर कलिप्रमाण को दो से गुणा किया तो ८६४००० वर्ष हुए, यही द्वापर का प्रमाण जानिये ॥ २ ॥ संवत्सर में वर्षादि के विस्वा का आनयन । शाकस्त्रि३ निघ्नो नग७भाजितश्च शेषं द्वि२निघ्नं शर५संयुतं च । वर्षा च धान्यं तृण-शीत-तेजो वायुश्च वृद्धिक्षयविग्रहौ च ॥ १ ॥ शाकं वेद ४ गुणं कृत्वा सप्तभि ७ र्भागमाहरेत् । शेषं द्विघ्नं त्रिभि३र्युक्तं भुक्तविश्वाख्यसंज्ञकम् ॥ २ ॥ क्षुधा तृषा च निद्रा च आलस्योद्यममेव च । शान्तिः क्रोधस्तथा दम्भो लोभमैथुनयोः क्रमात् ॥ ३ ॥ ततश्च रसनिष्पत्तिः फलनिष्पत्तिरेव च । उत्साहः सर्वलोकानां फलान्येतानि चिन्तयेत् ॥ ४ ॥ शकं च वसु ८ भिर्निघ्नं नव ६ मिर्मागमाहरेत् । शेषं द्विघ्नं रूप १ युक्तं प्रोक्तं विश्वाख्यसंज्ञकम् ॥ ५ ॥ उग्रत्वपापपुण्यानि व्याधिश्च व्याधिनाशनम् । आचारश्चाप्यनाचारो मृत्युर्जन्म यथाक्रमम् ॥ ६ ॥ देशोपद्रवस्वास्थ्यं च चौरभीश्चौरनाशनम् । वहिभीर्वदिशान्तिश्च ज्ञातव्यानि यथाक्रमात् ॥ ७ ॥ शकः चतुःस्थश्शर ५ सप्त ७ नन्द रुद्र ११ र्हतः सप्त ७ हतावशेषम् । द्वि २ घ्नं त्रिभिः ३ संयुतमत्र मानमुद्भिज्जजारण्डजस्वेदजानाम् ॥ ८ ॥ सप्त७घ्नशाकं नवभिहर्भाजिताशेषकं तथा । लोचनश्घ्नं युतं रामै३र्जीवीयाश्च यथाक्रमम् ॥ ६ ॥ शलभाश्च शुकाश्चैव मूषकाः स्वर्णताम्रको । स्वचक्रं परचक्रं च वृष्टिर्वष्टिविनाशनम् ॥ १० ॥ दिवारे संक्रान्त कर्कस्याब्दविशोषकाः । दिशो १० नखा २० गजाः = सूर्या १२ भृत्यो १८ ऽष्टादश १८ सायकाः ५ ॥ ११ ॥ शक को तीन से गुणा करके सात का भाग देना, लब्ध को अलग रखना और शेष को दूना करके पाँच जोड़ देना जो अङ्क हों वह वर्षा के बिस्वा निकलेंगे। फिर लब्ध को तीन से गुणा करके सात का भाग देना, लब्ध को अलग रखना, शेष को दूना करके पाँच जोड़ देना, जो अङ्क प्राप्त हों उनको धान्य के बिस्वा जानिये । फिर लब्धाङ्क को इसी रीति से गणित करके तृण के बिस्वा बन जायँगे । फिर लब्धाङ्क से इसी प्रकार वारंवार यही क्रिया करने से शीत, तेज, वायु, वृद्धि, क्षय और विग्रह इन सब के बिस्वा अलग अलग निकलेंगे । संवत् १९४८ शक १८१३ इस शक को तीन से गुणा किया तो ५४३९ हुए। इसमें सात का भाग दिया तो लब्ध मिले ७७७
कलियुग के प्रमाण को चार से गुणा किया तो सत्रह लाख अट्ठाईस हज़ार वर्ष हुए । यही कृतयुग का प्रमाण है। फिर कलिप्रमाण को तीन से गुणा किया तो बारह लाख छियानवे हज़ार वर्ष हुए, यही त्रेतायुग का प्रमाण हुआ। फिर कलिप्रमाण को दो से गुणा किया तो आठ लाख चौंसठ हज़ार वर्ष हुए, यही द्वापर का प्रमाण जानिये ॥ दो ॥ संवत्सर में वर्षादि के विस्वा का आनयन । शाकस्त्रितीन निघ्नो नगसातभाजितश्च शेषं द्विदोनिघ्नं शरपाँचसंयुतं च । वर्षा च धान्यं तृण-शीत-तेजो वायुश्च वृद्धिक्षयविग्रहौ च ॥ एक ॥ शाकं वेद चार गुणं कृत्वा सप्तभि सात र्भागमाहरेत् । शेषं द्विघ्नं त्रिभितीनर्युक्तं भुक्तविश्वाख्यसंज्ञकम् ॥ दो ॥ क्षुधा तृषा च निद्रा च आलस्योद्यममेव च । शान्तिः क्रोधस्तथा दम्भो लोभमैथुनयोः क्रमात् ॥ तीन ॥ ततश्च रसनिष्पत्तिः फलनिष्पत्तिरेव च । उत्साहः सर्वलोकानां फलान्येतानि चिन्तयेत् ॥ चार ॥ शकं च वसु आठ भिर्निघ्नं नव छः मिर्मागमाहरेत् । शेषं द्विघ्नं रूप एक युक्तं प्रोक्तं विश्वाख्यसंज्ञकम् ॥ पाँच ॥ उग्रत्वपापपुण्यानि व्याधिश्च व्याधिनाशनम् । आचारश्चाप्यनाचारो मृत्युर्जन्म यथाक्रमम् ॥ छः ॥ देशोपद्रवस्वास्थ्यं च चौरभीश्चौरनाशनम् । वहिभीर्वदिशान्तिश्च ज्ञातव्यानि यथाक्रमात् ॥ सात ॥ शकः चतुःस्थश्शर पाँच सप्त सात नन्द रुद्र ग्यारह र्हतः सप्त सात हतावशेषम् । द्वि दो घ्नं त्रिभिः तीन संयुतमत्र मानमुद्भिज्जजारण्डजस्वेदजानाम् ॥ आठ ॥ सप्तसातघ्नशाकं नवभिहर्भाजिताशेषकं तथा । लोचनश्घ्नं युतं रामैतीनर्जीवीयाश्च यथाक्रमम् ॥ छः ॥ शलभाश्च शुकाश्चैव मूषकाः स्वर्णताम्रको । स्वचक्रं परचक्रं च वृष्टिर्वष्टिविनाशनम् ॥ दस ॥ दिवारे संक्रान्त कर्कस्याब्दविशोषकाः । दिशो दस नखा बीस गजाः = सूर्या बारह भृत्यो अट्ठारह ऽष्टादश अट्ठारह सायकाः पाँच ॥ ग्यारह ॥ शक को तीन से गुणा करके सात का भाग देना, लब्ध को अलग रखना और शेष को दूना करके पाँच जोड़ देना जो अङ्क हों वह वर्षा के बिस्वा निकलेंगे। फिर लब्ध को तीन से गुणा करके सात का भाग देना, लब्ध को अलग रखना, शेष को दूना करके पाँच जोड़ देना, जो अङ्क प्राप्त हों उनको धान्य के बिस्वा जानिये । फिर लब्धाङ्क को इसी रीति से गणित करके तृण के बिस्वा बन जायँगे । फिर लब्धाङ्क से इसी प्रकार वारंवार यही क्रिया करने से शीत, तेज, वायु, वृद्धि, क्षय और विग्रह इन सब के बिस्वा अलग अलग निकलेंगे । संवत् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस शक एक हज़ार आठ सौ तेरह इस शक को तीन से गुणा किया तो पाँच हज़ार चार सौ उनतालीस हुए। इसमें सात का भाग दिया तो लब्ध मिले सात सौ सतहत्तर
औरंगाबाद : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज बिहार दौरे पर रहेंगे. 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर अमित शाह बिहार में अपनी पहली चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान उनके साथ बिहार भाजपा इकाई के अध्यक्ष नित्यानंद राय और प्रभारी भूपेंद्र यादव भी उपस्थित रहेंगे. अमित शाह एक विशेष विमान से गया हवाई अड्डे पहुंचेंगे. इसके बाद वे यहां से हेलीकॉप्टर द्वारा औरंगाबाद जाएंगे. अमित शाह औरंगाबाद के गांधी मैदान में भाजपा उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह के पक्ष में दोपहर तीन बजे चुनाव जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान वे भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करेंगे. एनडीए नेताओं के द्वारा कार्यक्रम की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है. इस लोकसभा सीट पर भाजपा और हम के प्रत्याशी के मध्य सीधी टक्कर है. उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. यह भाजपा की पहली जीत थी. इससे पहले भाजपा कभी भी इस सीट से नहीं जीती थी. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी 2014 के परिणाम 2019 में दोहरा पाती है या नहीं. अमित शाह के दौरे को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है. भाजपा के कार्यकर्ताओं में बेहद उत्साह है. इस सभा में बिहार के कई विधायक और मंत्री भी हिस्सा ले सकते हैं. आपको बता दें कि औरंगाबाद, गया, नावादा और जमुई के लिए पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होगा.
औरंगाबाद : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज बिहार दौरे पर रहेंगे. दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव को लेकर अमित शाह बिहार में अपनी पहली चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान उनके साथ बिहार भाजपा इकाई के अध्यक्ष नित्यानंद राय और प्रभारी भूपेंद्र यादव भी उपस्थित रहेंगे. अमित शाह एक विशेष विमान से गया हवाई अड्डे पहुंचेंगे. इसके बाद वे यहां से हेलीकॉप्टर द्वारा औरंगाबाद जाएंगे. अमित शाह औरंगाबाद के गांधी मैदान में भाजपा उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह के पक्ष में दोपहर तीन बजे चुनाव जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान वे भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करेंगे. एनडीए नेताओं के द्वारा कार्यक्रम की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है. इस लोकसभा सीट पर भाजपा और हम के प्रत्याशी के मध्य सीधी टक्कर है. उल्लेखनीय है कि दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. यह भाजपा की पहली जीत थी. इससे पहले भाजपा कभी भी इस सीट से नहीं जीती थी. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी दो हज़ार चौदह के परिणाम दो हज़ार उन्नीस में दोहरा पाती है या नहीं. अमित शाह के दौरे को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है. भाजपा के कार्यकर्ताओं में बेहद उत्साह है. इस सभा में बिहार के कई विधायक और मंत्री भी हिस्सा ले सकते हैं. आपको बता दें कि औरंगाबाद, गया, नावादा और जमुई के लिए पहले चरण में ग्यारह अप्रैल को मतदान होगा.
राजधानी शिमला में शुक्रवार को दिन भर टै्रफिक व्यवस्था प्रभावित रही। शहर की सड़कों पर दोपहर एक बजे के बाद यातायात पूरी तरह सुचारू हुआ। शहर में सुबह से ही पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर को श्रद्धाजंलि देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा। इस बीच सड़कों पर लोग अपने वाहन लेकर पहुंचे, लेकिन शिमला में टै्रफिक व्यवस्था को देखते हुए वन-वे व्यवस्था की गई थी। इस वजह से शिमला में सुबह से ही सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारंे नजर आईं। जाहिर सी बात है कि टै्रफिक जाम होने से कामकाजी लोगों को जरूर दिक्कतें पेश आई। शिमला के माल रोड से लेकर कांग्रेस कार्यालय तक लोगों की भीड़ देखी गई। पूरे शहर में सुरक्षा के पुख्ता इतंजाम किए गए थे। दोपहर तक कोर्ट रोड में वाहनों की आवाजाही सीमित रही, जिससे कामकाजी लोगों को जरूर दिक्कतें पेंश आईं। कोर्ट रोड में बसों के इतंजार के लिए घंटों लोग खड़ें रहें, लेकिन उन्हें बसें नहीं मिली। बताते चलें कि शिमला में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ओर भाजपा से जेपी नड्डा वीरभद्र सिंह को अंतिम दर्शन करने और श्रद्धाजंलि देने पहुंचे थे। ऐसे में शिमला शहर की सड़कों में टै्रफिक न हो यह सुनिश्चित किया गया था। इसी वजह से सड़कों में यातायात सुविधा दोपहर तक धीमी गति से चली। हॉली लॉज जाखू जाने वाले वाहनों को शिल्ली चौक और फाइव बैंच से एंट्री दी गई। और टका बैंच डायमंड होते हुए लक्कड़ बाजार की ओर एग्जिट प्वाइंट बनाया गया था। इस पूरे रूट पर हर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मोड़ पर पुलिस कर्मियों की तैनाती की है। वहीं, जाखू को केंद्र में रखकर आसपास के इलाके को चार सेक्टरों में बांटा गया था। छह पुलिस अधिकारी और करीब 250 पुलिस कर्मी सुबह सात बजे से देर शाम तक यहां तैनात रहे। शिल्ली चौक पर डीएसपी डीएस नेगी, हॉली लॉज में डीएसपी कमल वर्मा, टका बैंच पर डीएसपी रतनचंद नेगी की तैनाती रहे। एसपी मोहित चावला ने बताया कि आईजीएमसी से हाली लॉज और शिल्ली चौक से हॉली लॉज के बीच पुलिस कर्मियों की तैनाती की है। चार सेक्टर बना कर पुलिस अधिकारियों को सेक्टर इंचार्ज लगाया गया था। जो पूरे शहर की टै्रफिक व्यवस्था पर अपनी निगाहें टिकाएं हुए थे। हालांकि इस वन-वे व्यवस्था से साफ तौर पर आम लोगों को जरूर दिक्कतें पेंश आई। सुबह के समय कामकाजी लोगों को कार्यालय पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा। पयर्टन सीजन के चलते शिमला में बाहरी राज्यों से काफी संख्या में सैलानी पहुंच रहे है, लेकिन शिमला में शुक्रवार को वन-वे व्यवस्था के चलते सैलानियों को भी सड़कों पर घंटों इतंजार करना पड़ा। दोपहर बाद टै्रफिक व्यवस्था पुरी तरह से बहाल हुई उसके बाद लोगों को भी आने-जाने में दिक्कतें नहीं पेंश आई। शिमला में टै्रफिक व्यवस्था सुचारू रहे, इसको ध्यान में रखते हुए शिमला से रामपुर तक रूटों को छह सेक्टरों में बांटा गया था। सुबह नौ से 11:30 बजे तक लोग रिज मैदान पर पार्थिव शरीर को श्रद्धाजंलि दी गई। वहीं, इस दौरान शहर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को शहर के एंट्री प्वाइंट पर रोका गया। लोअर हिमाचल और सोलन व अपर शिमला से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं दिया। यहां लोग दूसरी बसों में बैठकर शहर में पहुंचे। इसके बाद 11:40 से दोपहर एक बजे तक लोग कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में श्रद्धांजली देने पहुुंचे। इस दौरान शिमला की सड़कों में वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। सड़कों पर वाहनों के आने जाने में दोपहर तक रोक रही। जिस वजह से आम लोगों को जरूर दिक्कतें पेंश आई। इस दौरान लोग सुबह के समय पैदल सफर कर रिज मैदान पहुंचे।
राजधानी शिमला में शुक्रवार को दिन भर टै्रफिक व्यवस्था प्रभावित रही। शहर की सड़कों पर दोपहर एक बजे के बाद यातायात पूरी तरह सुचारू हुआ। शहर में सुबह से ही पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर को श्रद्धाजंलि देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा। इस बीच सड़कों पर लोग अपने वाहन लेकर पहुंचे, लेकिन शिमला में टै्रफिक व्यवस्था को देखते हुए वन-वे व्यवस्था की गई थी। इस वजह से शिमला में सुबह से ही सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारंे नजर आईं। जाहिर सी बात है कि टै्रफिक जाम होने से कामकाजी लोगों को जरूर दिक्कतें पेश आई। शिमला के माल रोड से लेकर कांग्रेस कार्यालय तक लोगों की भीड़ देखी गई। पूरे शहर में सुरक्षा के पुख्ता इतंजाम किए गए थे। दोपहर तक कोर्ट रोड में वाहनों की आवाजाही सीमित रही, जिससे कामकाजी लोगों को जरूर दिक्कतें पेंश आईं। कोर्ट रोड में बसों के इतंजार के लिए घंटों लोग खड़ें रहें, लेकिन उन्हें बसें नहीं मिली। बताते चलें कि शिमला में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ओर भाजपा से जेपी नड्डा वीरभद्र सिंह को अंतिम दर्शन करने और श्रद्धाजंलि देने पहुंचे थे। ऐसे में शिमला शहर की सड़कों में टै्रफिक न हो यह सुनिश्चित किया गया था। इसी वजह से सड़कों में यातायात सुविधा दोपहर तक धीमी गति से चली। हॉली लॉज जाखू जाने वाले वाहनों को शिल्ली चौक और फाइव बैंच से एंट्री दी गई। और टका बैंच डायमंड होते हुए लक्कड़ बाजार की ओर एग्जिट प्वाइंट बनाया गया था। इस पूरे रूट पर हर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मोड़ पर पुलिस कर्मियों की तैनाती की है। वहीं, जाखू को केंद्र में रखकर आसपास के इलाके को चार सेक्टरों में बांटा गया था। छह पुलिस अधिकारी और करीब दो सौ पचास पुलिस कर्मी सुबह सात बजे से देर शाम तक यहां तैनात रहे। शिल्ली चौक पर डीएसपी डीएस नेगी, हॉली लॉज में डीएसपी कमल वर्मा, टका बैंच पर डीएसपी रतनचंद नेगी की तैनाती रहे। एसपी मोहित चावला ने बताया कि आईजीएमसी से हाली लॉज और शिल्ली चौक से हॉली लॉज के बीच पुलिस कर्मियों की तैनाती की है। चार सेक्टर बना कर पुलिस अधिकारियों को सेक्टर इंचार्ज लगाया गया था। जो पूरे शहर की टै्रफिक व्यवस्था पर अपनी निगाहें टिकाएं हुए थे। हालांकि इस वन-वे व्यवस्था से साफ तौर पर आम लोगों को जरूर दिक्कतें पेंश आई। सुबह के समय कामकाजी लोगों को कार्यालय पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा। पयर्टन सीजन के चलते शिमला में बाहरी राज्यों से काफी संख्या में सैलानी पहुंच रहे है, लेकिन शिमला में शुक्रवार को वन-वे व्यवस्था के चलते सैलानियों को भी सड़कों पर घंटों इतंजार करना पड़ा। दोपहर बाद टै्रफिक व्यवस्था पुरी तरह से बहाल हुई उसके बाद लोगों को भी आने-जाने में दिक्कतें नहीं पेंश आई। शिमला में टै्रफिक व्यवस्था सुचारू रहे, इसको ध्यान में रखते हुए शिमला से रामपुर तक रूटों को छह सेक्टरों में बांटा गया था। सुबह नौ से ग्यारह:तीस बजे तक लोग रिज मैदान पर पार्थिव शरीर को श्रद्धाजंलि दी गई। वहीं, इस दौरान शहर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को शहर के एंट्री प्वाइंट पर रोका गया। लोअर हिमाचल और सोलन व अपर शिमला से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं दिया। यहां लोग दूसरी बसों में बैठकर शहर में पहुंचे। इसके बाद ग्यारह:चालीस से दोपहर एक बजे तक लोग कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में श्रद्धांजली देने पहुुंचे। इस दौरान शिमला की सड़कों में वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। सड़कों पर वाहनों के आने जाने में दोपहर तक रोक रही। जिस वजह से आम लोगों को जरूर दिक्कतें पेंश आई। इस दौरान लोग सुबह के समय पैदल सफर कर रिज मैदान पहुंचे।
हरियाणा के सूरजकुंड में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का 3 दिवसीय अधिवेशन शुरू हो रहा है. अधिवेशन के मद्देनजर यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. हालांकि अधिवेशन शुरू होने से एक दिन पहले अज्ञात लोगों ने अधिवेशन स्थल के करीब ही वरिष्ठ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी, मुख्तार अब्बास नकवी और गोपीनाथ मुंडे के पोस्टर फाड़ डाले. इस सिलसिले में बीजेपी नेताओं ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की है. पार्टी के अधिवेशन के लिये वरिष्ठ नेताओं के आने का सिलसिला मंगलवार से ही शुरू हो चुका है. इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के लगातार दूसरे कार्यकाल पर मुहर लगाई जाएगी जिसके लिए पार्टी के संविधान में संशोधन को मंजूरी दी जानी है. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने मुंबई में पिछले दिनों हुए अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित कर अध्यक्ष को लगातार दूसरा कार्यकाल देने के लिए बीजेपी के संविधान में संशोधन को मंजूरी दी थी. पार्टी अध्यक्ष के तौर पर गडकरी का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है जिसके बाद वह दूसरे कार्यकाल के लिए इस पद पर बरकरार रह सकते हैं. तब उनका कार्यकाल दिसंबर 2015 तक के लिए बढ़ जाएगा. बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद यहां औपचारिक रूप से प्रस्ताव पारित कर गडकरी के दूसरे कार्यकाल के लिए रास्ता साफ करेगी. राष्ट्रीय परिषद में 1200 सदस्य हैं. बीजेपी के मौजूदा संविधान के अनुसार पार्टी अध्यक्ष केवल एक बार तीन साल के कार्यकाल के लिए चुना जा सकता है और दूसरे कार्यकाल के लिए मनोनयन का प्रावधान फिलहाल नहीं है. सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गडकरी को दूसरा कार्यकाल देने तथा 2014 का लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ने के पक्ष में है. बीजेपी का सदस्यता अभियान चल रहा है और इसके सांगठनिक चुनाव जल्दी होंगे.
हरियाणा के सूरजकुंड में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का तीन दिवसीय अधिवेशन शुरू हो रहा है. अधिवेशन के मद्देनजर यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. हालांकि अधिवेशन शुरू होने से एक दिन पहले अज्ञात लोगों ने अधिवेशन स्थल के करीब ही वरिष्ठ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी, मुख्तार अब्बास नकवी और गोपीनाथ मुंडे के पोस्टर फाड़ डाले. इस सिलसिले में बीजेपी नेताओं ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की है. पार्टी के अधिवेशन के लिये वरिष्ठ नेताओं के आने का सिलसिला मंगलवार से ही शुरू हो चुका है. इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के लगातार दूसरे कार्यकाल पर मुहर लगाई जाएगी जिसके लिए पार्टी के संविधान में संशोधन को मंजूरी दी जानी है. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने मुंबई में पिछले दिनों हुए अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित कर अध्यक्ष को लगातार दूसरा कार्यकाल देने के लिए बीजेपी के संविधान में संशोधन को मंजूरी दी थी. पार्टी अध्यक्ष के तौर पर गडकरी का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है जिसके बाद वह दूसरे कार्यकाल के लिए इस पद पर बरकरार रह सकते हैं. तब उनका कार्यकाल दिसंबर दो हज़ार पंद्रह तक के लिए बढ़ जाएगा. बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद यहां औपचारिक रूप से प्रस्ताव पारित कर गडकरी के दूसरे कार्यकाल के लिए रास्ता साफ करेगी. राष्ट्रीय परिषद में एक हज़ार दो सौ सदस्य हैं. बीजेपी के मौजूदा संविधान के अनुसार पार्टी अध्यक्ष केवल एक बार तीन साल के कार्यकाल के लिए चुना जा सकता है और दूसरे कार्यकाल के लिए मनोनयन का प्रावधान फिलहाल नहीं है. सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गडकरी को दूसरा कार्यकाल देने तथा दो हज़ार चौदह का लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ने के पक्ष में है. बीजेपी का सदस्यता अभियान चल रहा है और इसके सांगठनिक चुनाव जल्दी होंगे.
न्यूयॉर्क। शोधकर्ताओं ने एक नई दवा की खोज की है जो याददाश्त जाने, तंत्रिका क्षति और अल्जाइमर (Alzheimer) रोग के अन्य लक्षणों से बचा सकती है। दवा-बीपीएन14770-अमलॉइड बीटा के प्रभावों को रोकती है। अमलॉइड बीटा, होता है। टेट्रा थेरेप्यूटिक्स के विकास के तहत बीपीएन14770 उन प्रक्रियाओं को सक्रिय करने में मदद कर सकती है जो तंत्रिका के स्वास्थ्य में सहयोग करती हैं और डिमेंशिया को रोकती है। बुफालो यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर शोधकर्ता यिंग जू ने कहा, "इस तरह के अवलोकन का मतलब है कि अल्जाइमर पैथोलॉजी को कुछ हद तक मस्तिष्क द्वारा कुछ हद तक बर्दाश्त किया जा सकता है, ऐसा प्रतिपूरक प्रक्रिया के कोशिकीय व सिनेप्टिक स्तर पर चलने की वजह से है। " जू ने कहा, "हमारे नए शोध के अनुसार, बीपीएन14770 मल्टीपल बॉयोलॉजिकल प्रक्रियाओं को सक्रिय करने में सक्षम हो सकती है, यह प्रक्रियाएं दिमाग को याददाश्त की कमी, तंत्रिका संबंधी क्षति व बॉयोकेमिकल हानि से रोकती हैं। " (आईएएनएस)
न्यूयॉर्क। शोधकर्ताओं ने एक नई दवा की खोज की है जो याददाश्त जाने, तंत्रिका क्षति और अल्जाइमर रोग के अन्य लक्षणों से बचा सकती है। दवा-बीपीएनचौदह हज़ार सात सौ सत्तर-अमलॉइड बीटा के प्रभावों को रोकती है। अमलॉइड बीटा, होता है। टेट्रा थेरेप्यूटिक्स के विकास के तहत बीपीएनचौदह हज़ार सात सौ सत्तर उन प्रक्रियाओं को सक्रिय करने में मदद कर सकती है जो तंत्रिका के स्वास्थ्य में सहयोग करती हैं और डिमेंशिया को रोकती है। बुफालो यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर शोधकर्ता यिंग जू ने कहा, "इस तरह के अवलोकन का मतलब है कि अल्जाइमर पैथोलॉजी को कुछ हद तक मस्तिष्क द्वारा कुछ हद तक बर्दाश्त किया जा सकता है, ऐसा प्रतिपूरक प्रक्रिया के कोशिकीय व सिनेप्टिक स्तर पर चलने की वजह से है। " जू ने कहा, "हमारे नए शोध के अनुसार, बीपीएनचौदह हज़ार सात सौ सत्तर मल्टीपल बॉयोलॉजिकल प्रक्रियाओं को सक्रिय करने में सक्षम हो सकती है, यह प्रक्रियाएं दिमाग को याददाश्त की कमी, तंत्रिका संबंधी क्षति व बॉयोकेमिकल हानि से रोकती हैं। "
कमरे में फर्श पर बैठे थे । सामने छोटा सा डेस्क था । आपकी पोशाक से आप कुछ अच्छी हैसियत के किमान या ग्रामीण जचते थे । श्री रामवृक्ष बेनीपुरी ने पीछे मेरे साहित्यकार्य के सम्बन्ध में अपने बहुत भावपूर्ण विचार 'योगा' में प्रगट किये । दुबे जी की ग्रन्थ-निर्माण योजना - मन् १६३६ में मुझे बड़े अर्थ संकट का अनुभव हुआ । आखिर समस्या हल करने का एक मार्ग दिखायी दिया । श्री दयाशंकर दुबे बहुत समय से कह रहे थे कि में उनके पास रहकर शास्त्र पर एक बड़ा सिद्धान्त का ग्रन्थ लिखूं । यह कार्य टलता जा रहा था। अब मई में में प्रयाग जाकर उनमें विचारविनिमय करते हुए पहले 'वन की उत्पत्ति' लिखने लगा । इसमें चार माह लगे । यह पुस्तक लाला रामनारायणलाल के यहाँ प्रकाशित हुई । दुवे जी चाहते थे कि मैं उनके साथ ( संयुक्त लेखक के रूप में ) धन की उत्पत्ति' की तरह अर्थशास्त्र के अन्य भागों के सम्बन्ध में भी इसी तरह सिद्धान्त की पुस्तकें लिखूँ । पीछे उन पुस्तकों को मिला कर एक बड़ा ग्रन्थ वन जाए जो बी० ए० के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में स्थान पाए । इस काम के लिए समय काफी चाहिए था, मैं बहुत ग्रां में दिन घर से बाहर नहीं रह सकता था। एक बात भी थी, वह गौण थी । दुबे जी चाहते थे कि बड़े ग्रन्थ पर केवल उनका ही नाम रहे। बात यह थी कि व इस ग्रन्थ को मंगलाप्रसाद पुरस्कार के लिए विचारार्थ भेजना चाहते थे, और उसके लिए किसी ग्रन्थ का एक ही लेग्नक की कृति होना टोक माना जाता था । अस्तु, में इस बड़े ग्रन्थ का काम हाथ में न ले सका । दुवे जो को मेरा 'असहयोग' खटका, तथापि उनके व्यवहार में अन्तर नहीं आया। उन्होंने पीछे 'अर्थशास्त्र की रूप-रेखा' ग्रन्थ कहानियों के रूप में छुपाया । उस पर उन्हें मंगलाप्रसाद पुरस्कार नहीं मिला तो उन्हें इसका इतना दुख हुआ कि मैं आश्चर्य में रह गया । मैं उनसे ऐसी आशा नहीं करता था । सोचता हूँ कि पूजा-पाठ करने से यह लाभ तो होना ही चाहिए कि हर्ष और शांक, हानि और लाभ के समय मन चलायमान न हो । पुस्तक न होने पर भी पाठ्यक्रम में नाम छपा - एक दिन लाला रामनारायणलाल के यहाँ मध्यप्रान्त का पाठ्यक्रम देखकर मुझे एक विचित्र बात मालूम हुई । उसमें मेरो 'भारतीय राज्य शासन' नाम की पुस्तक दसवीं-ग्यारहीं श्रेणी के लिए प्रारम्भिक इतिहास की पाठ्य पुस्तक दर्ज है, जबकि वास्तव में मेरो इस नाम की कोई पुस्तक थी ही नहीं। पुस्तक मिलने का पता माहेश्वरी कार्यालय, अलीगढ़, लपा था । सोचने पर मालूम हुआ कि कई वर्ष पहले मध्यप्रान्त में मेरी 'भार - तीय शासन' मेट्रिक क्लाम के लिए पाठ्य पुस्तक रही थी। उसके बाद यह विषय मिडल क्लासों में आ जाने से मेरी पुस्तक पाठ्य पुस्तक नहीं रही थी । फिर यह विषय मैट्रिक में ले लिये जाने से मेरी पुस्तक निर्धारित कर दी गयी है, और भूल से उसका नाम 'भारतीय राज्य शासन' हो गया । पाठ्य पुस्तकों की रचना - इस पर लाला रामनारायण् लाल के अनुराध से 'भारतीय राज्य शासन' नाम की एक नयी पुस्तक तैयार की गयी, जा पाठ्यक्रम के अनुसार थी । यह पुस्तक लिखे जाने के साथ ही छातो गयी । पाठ्य पुस्तकों के प्रति प्रकाशकों का कैसा आकर्षण होता है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव हुआ । इसी समय मध्यप्रान्त की नवीं, दसवीं और ग्यारहवीं श्रेणियों के लिए मेरी 'सीविक्स' की पुस्तक ( नागरिक ज्ञान ) भी लिखी जाकर प्रकाशित हो गयी। पीछे मैंने मध्यप्रान्त की छटो-मातवी कलासों के लिए मरल नागरिक ज्ञान ( दो भाग ) और संयुक्तवान्त को मैट्रिक के लिए एलिमेंटरी मीविकम लिखी । कुछ समय बाद ( सन् १९३६ ) दुबे जी के साथ इंटर क्लामां के लिए 'सरल अर्थशास्त्र' लिखा गया । ये सब पुस्तकें लाला रामनारायण लाल के कहने से तैयार की गयी थीं, और उनके द्वारा ही प्रकाशित हुई । पिछली दो पुस्तकों का उर्दू संस्करण भी छपाया गया इंटर की 'सीविक्म' के लिए मेरी पुस्तक 'मरल नागरिक शास्त्र' हिन्दी माहित्य सम्मेजन से प्रकाशित हुई । इसके सम्बन्ध में आगे लिखा जाएगा । रायल्टी की बात - नाला रामनारायणलाल ने मुझे पुस्तकों की रायल्टा देना म्वाकार किंवा । 'रायल्टी' का सिद्धान्त अच्छा है, इससे लेखक का भविष्य में आय का साधन रहता है, नकदी तो एक बार ही मिल कर रह जाती है, यार प्रायः उसका परिमाण भी अपेक्षाकृत कम रहता है। परन्तु अधिकांश लेखकों के सामने दूसरी बात विचारणीय होती है। उन्हें तत्काल रुपये की आवश्यकता होता है, उन्हें उसी समय एकमाथ जो कुछ मिल सके उसे ही लेकर संतोष करना होता है। मेरे सामने भी यही बात थी, पर दुबे जी ने मेरी रायल्टी के आधार पर मुझे रुपया देकर मेरी समस्या हल कर दी । ऊपर कहा गया है कि लेखकों के लिए पारिश्रमिक को रकम एकसाथ लेने के बजाय प्रायः रायल्टी के रूप में लेना लाभकारी है । पर रायल्टी के हिसाब में भी गड़बड़ हो सकती है । यदि काई प्रकाशक अधिक प्रतियों छपा कर लेखक को थाड़ी ही प्रतियाँ छुपाने की बात कहे और इस प्रकार उसे पूरी रायल्टो देने से बचता रहे ता साधारण लेखक का कुछ वश नहीं चल सकता, वह कुछ रुपयों के लिए झगड़ा मोल लेना र प्रकाशक से बिगाड़ना न चाहेगा । यो प्रकाशकों में सभी तरह के होते हैं और कुछ का व्यवहारा मो रहता है। लाला रामनारायणलाल की गिनती इनमें ही रही है । हाँ, इनकी एक बात मुझे ठीक नहीं मालूम हुई । युद्ध काल में इन्होंने पुस्तकों का मूल्य बढ़ाया, परन्तु रायल्टी दी पूर्व निर्धारित कम मूल्य के हिसाब से हो । इसके विषय में उन्होंने अपनी सफाई दी, पर उससे यथेष्ट संतोष न हुम्रा । सम्मेलन कार्य के लिए यात्रा - सन् १९३७ में जब कई प्रान्तों में कांग्रेस सरकारें काम कर रही थीं, हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से मुछे उसकी परीक्षाओं को मान्यता दिलाने का प्रयत्न करने के लिए कहा गया । इस पर सितम्बर में मैं पहले लखनऊ गया, वहाँ उस समय कौंसिल की मीटिंग हो रही थी, इससे कई मजनों से- खासकर सर्वश्री आचार्य जुगलकिशोर ( पार्लिमेंटरी सेक्रेटरी ), प्यारेलाल ( शिक्षा मंत्री ) और पुरुषोत्तमदास टंडन ( स्पीकर, व्यवस्थापक सभा ) से वहाँ ही मिलना हो गया। सबसे प्रसंगानुसार विचार विनिमय हुआ । लखनऊ में मैं पटना गया । यहाँ श्री लविनाथ पांडे पूर्व परिचित थे। आपने तथा श्री रामधारीप्रसाद ( भूतपूर्व मंत्री, विहार हिन्दी • साहित्य सम्मेलन ) ने मुझे विविध अधिकारियों से मिलाया और सम्म लन के सम्बन्ध में उनकी नीति जानने का अवसर दिया । इसी समय ( ता० १८ सितम्बर) आरा में हरिांध जी उपाध्याय की अभिनन्दनग्रन्थ समर्पित किया जाने वाला था, उत्सव के सभापति थे श्री राजेन्द्र बाबू खासकर आपसे मिलने के लिए मैं श्रारा गया। उत्सव में उपस्थिति बहुत ही कम थी । पर मुझे तो अपने काम में मतलब था । श्री राजेन्द्र बाबू तथा कई अन्य सजना से बातचीत करने का अवसर मिल गया । बिहार से लौटने पर में सम्मेलन कार्य के लिए ही मध्यप्रान्त तथा इन्दौर और गवालियर राज्यों के शिक्षाधिकारियों एवं सार्वजनिक कार्यकतांत्रों से मिलने गया । गवालियर में हिन्दी साहित्य सभा की ओर से एक डेप्यूटेशन ने मेरे साथ मान्यवर श्री मेहता जी की सेवा में उपस्थित होकर सम्मेलन के सम्बन्ध में आवश्यक निवेदन किया । श्री दुर्गाशंकर नागर - इस यात्रा में मेरा उज्जैन भी जाना हुआ । यहाँ डाक्टर दुगाशंकर जी नागर से भेंट हुई। बड़े प्रेम से खासकर ग्राभ्यात्मिक और मानसिक चिकित्सा करते थे तथा 'कल्पवृक्ष के सम्पादक थे । प्रातःकाल से लेकर रात को सोने के समय तक विविध रोगियों को सान्त्वना देने तथा उनका आवश्यक उपचार करने में लगे रहते थे । शान्तिदायक विचारों के प्रचार में आप खूब
कमरे में फर्श पर बैठे थे । सामने छोटा सा डेस्क था । आपकी पोशाक से आप कुछ अच्छी हैसियत के किमान या ग्रामीण जचते थे । श्री रामवृक्ष बेनीपुरी ने पीछे मेरे साहित्यकार्य के सम्बन्ध में अपने बहुत भावपूर्ण विचार 'योगा' में प्रगट किये । दुबे जी की ग्रन्थ-निर्माण योजना - मन् एक हज़ार छः सौ छत्तीस में मुझे बड़े अर्थ संकट का अनुभव हुआ । आखिर समस्या हल करने का एक मार्ग दिखायी दिया । श्री दयाशंकर दुबे बहुत समय से कह रहे थे कि में उनके पास रहकर शास्त्र पर एक बड़ा सिद्धान्त का ग्रन्थ लिखूं । यह कार्य टलता जा रहा था। अब मई में में प्रयाग जाकर उनमें विचारविनिमय करते हुए पहले 'वन की उत्पत्ति' लिखने लगा । इसमें चार माह लगे । यह पुस्तक लाला रामनारायणलाल के यहाँ प्रकाशित हुई । दुवे जी चाहते थे कि मैं उनके साथ धन की उत्पत्ति' की तरह अर्थशास्त्र के अन्य भागों के सम्बन्ध में भी इसी तरह सिद्धान्त की पुस्तकें लिखूँ । पीछे उन पुस्तकों को मिला कर एक बड़ा ग्रन्थ वन जाए जो बीशून्य एशून्य के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में स्थान पाए । इस काम के लिए समय काफी चाहिए था, मैं बहुत ग्रां में दिन घर से बाहर नहीं रह सकता था। एक बात भी थी, वह गौण थी । दुबे जी चाहते थे कि बड़े ग्रन्थ पर केवल उनका ही नाम रहे। बात यह थी कि व इस ग्रन्थ को मंगलाप्रसाद पुरस्कार के लिए विचारार्थ भेजना चाहते थे, और उसके लिए किसी ग्रन्थ का एक ही लेग्नक की कृति होना टोक माना जाता था । अस्तु, में इस बड़े ग्रन्थ का काम हाथ में न ले सका । दुवे जो को मेरा 'असहयोग' खटका, तथापि उनके व्यवहार में अन्तर नहीं आया। उन्होंने पीछे 'अर्थशास्त्र की रूप-रेखा' ग्रन्थ कहानियों के रूप में छुपाया । उस पर उन्हें मंगलाप्रसाद पुरस्कार नहीं मिला तो उन्हें इसका इतना दुख हुआ कि मैं आश्चर्य में रह गया । मैं उनसे ऐसी आशा नहीं करता था । सोचता हूँ कि पूजा-पाठ करने से यह लाभ तो होना ही चाहिए कि हर्ष और शांक, हानि और लाभ के समय मन चलायमान न हो । पुस्तक न होने पर भी पाठ्यक्रम में नाम छपा - एक दिन लाला रामनारायणलाल के यहाँ मध्यप्रान्त का पाठ्यक्रम देखकर मुझे एक विचित्र बात मालूम हुई । उसमें मेरो 'भारतीय राज्य शासन' नाम की पुस्तक दसवीं-ग्यारहीं श्रेणी के लिए प्रारम्भिक इतिहास की पाठ्य पुस्तक दर्ज है, जबकि वास्तव में मेरो इस नाम की कोई पुस्तक थी ही नहीं। पुस्तक मिलने का पता माहेश्वरी कार्यालय, अलीगढ़, लपा था । सोचने पर मालूम हुआ कि कई वर्ष पहले मध्यप्रान्त में मेरी 'भार - तीय शासन' मेट्रिक क्लाम के लिए पाठ्य पुस्तक रही थी। उसके बाद यह विषय मिडल क्लासों में आ जाने से मेरी पुस्तक पाठ्य पुस्तक नहीं रही थी । फिर यह विषय मैट्रिक में ले लिये जाने से मेरी पुस्तक निर्धारित कर दी गयी है, और भूल से उसका नाम 'भारतीय राज्य शासन' हो गया । पाठ्य पुस्तकों की रचना - इस पर लाला रामनारायण् लाल के अनुराध से 'भारतीय राज्य शासन' नाम की एक नयी पुस्तक तैयार की गयी, जा पाठ्यक्रम के अनुसार थी । यह पुस्तक लिखे जाने के साथ ही छातो गयी । पाठ्य पुस्तकों के प्रति प्रकाशकों का कैसा आकर्षण होता है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव हुआ । इसी समय मध्यप्रान्त की नवीं, दसवीं और ग्यारहवीं श्रेणियों के लिए मेरी 'सीविक्स' की पुस्तक भी लिखी जाकर प्रकाशित हो गयी। पीछे मैंने मध्यप्रान्त की छटो-मातवी कलासों के लिए मरल नागरिक ज्ञान और संयुक्तवान्त को मैट्रिक के लिए एलिमेंटरी मीविकम लिखी । कुछ समय बाद दुबे जी के साथ इंटर क्लामां के लिए 'सरल अर्थशास्त्र' लिखा गया । ये सब पुस्तकें लाला रामनारायण लाल के कहने से तैयार की गयी थीं, और उनके द्वारा ही प्रकाशित हुई । पिछली दो पुस्तकों का उर्दू संस्करण भी छपाया गया इंटर की 'सीविक्म' के लिए मेरी पुस्तक 'मरल नागरिक शास्त्र' हिन्दी माहित्य सम्मेजन से प्रकाशित हुई । इसके सम्बन्ध में आगे लिखा जाएगा । रायल्टी की बात - नाला रामनारायणलाल ने मुझे पुस्तकों की रायल्टा देना म्वाकार किंवा । 'रायल्टी' का सिद्धान्त अच्छा है, इससे लेखक का भविष्य में आय का साधन रहता है, नकदी तो एक बार ही मिल कर रह जाती है, यार प्रायः उसका परिमाण भी अपेक्षाकृत कम रहता है। परन्तु अधिकांश लेखकों के सामने दूसरी बात विचारणीय होती है। उन्हें तत्काल रुपये की आवश्यकता होता है, उन्हें उसी समय एकमाथ जो कुछ मिल सके उसे ही लेकर संतोष करना होता है। मेरे सामने भी यही बात थी, पर दुबे जी ने मेरी रायल्टी के आधार पर मुझे रुपया देकर मेरी समस्या हल कर दी । ऊपर कहा गया है कि लेखकों के लिए पारिश्रमिक को रकम एकसाथ लेने के बजाय प्रायः रायल्टी के रूप में लेना लाभकारी है । पर रायल्टी के हिसाब में भी गड़बड़ हो सकती है । यदि काई प्रकाशक अधिक प्रतियों छपा कर लेखक को थाड़ी ही प्रतियाँ छुपाने की बात कहे और इस प्रकार उसे पूरी रायल्टो देने से बचता रहे ता साधारण लेखक का कुछ वश नहीं चल सकता, वह कुछ रुपयों के लिए झगड़ा मोल लेना र प्रकाशक से बिगाड़ना न चाहेगा । यो प्रकाशकों में सभी तरह के होते हैं और कुछ का व्यवहारा मो रहता है। लाला रामनारायणलाल की गिनती इनमें ही रही है । हाँ, इनकी एक बात मुझे ठीक नहीं मालूम हुई । युद्ध काल में इन्होंने पुस्तकों का मूल्य बढ़ाया, परन्तु रायल्टी दी पूर्व निर्धारित कम मूल्य के हिसाब से हो । इसके विषय में उन्होंने अपनी सफाई दी, पर उससे यथेष्ट संतोष न हुम्रा । सम्मेलन कार्य के लिए यात्रा - सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में जब कई प्रान्तों में कांग्रेस सरकारें काम कर रही थीं, हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से मुछे उसकी परीक्षाओं को मान्यता दिलाने का प्रयत्न करने के लिए कहा गया । इस पर सितम्बर में मैं पहले लखनऊ गया, वहाँ उस समय कौंसिल की मीटिंग हो रही थी, इससे कई मजनों से- खासकर सर्वश्री आचार्य जुगलकिशोर , प्यारेलाल और पुरुषोत्तमदास टंडन से वहाँ ही मिलना हो गया। सबसे प्रसंगानुसार विचार विनिमय हुआ । लखनऊ में मैं पटना गया । यहाँ श्री लविनाथ पांडे पूर्व परिचित थे। आपने तथा श्री रामधारीप्रसाद ने मुझे विविध अधिकारियों से मिलाया और सम्म लन के सम्बन्ध में उनकी नीति जानने का अवसर दिया । इसी समय आरा में हरिांध जी उपाध्याय की अभिनन्दनग्रन्थ समर्पित किया जाने वाला था, उत्सव के सभापति थे श्री राजेन्द्र बाबू खासकर आपसे मिलने के लिए मैं श्रारा गया। उत्सव में उपस्थिति बहुत ही कम थी । पर मुझे तो अपने काम में मतलब था । श्री राजेन्द्र बाबू तथा कई अन्य सजना से बातचीत करने का अवसर मिल गया । बिहार से लौटने पर में सम्मेलन कार्य के लिए ही मध्यप्रान्त तथा इन्दौर और गवालियर राज्यों के शिक्षाधिकारियों एवं सार्वजनिक कार्यकतांत्रों से मिलने गया । गवालियर में हिन्दी साहित्य सभा की ओर से एक डेप्यूटेशन ने मेरे साथ मान्यवर श्री मेहता जी की सेवा में उपस्थित होकर सम्मेलन के सम्बन्ध में आवश्यक निवेदन किया । श्री दुर्गाशंकर नागर - इस यात्रा में मेरा उज्जैन भी जाना हुआ । यहाँ डाक्टर दुगाशंकर जी नागर से भेंट हुई। बड़े प्रेम से खासकर ग्राभ्यात्मिक और मानसिक चिकित्सा करते थे तथा 'कल्पवृक्ष के सम्पादक थे । प्रातःकाल से लेकर रात को सोने के समय तक विविध रोगियों को सान्त्वना देने तथा उनका आवश्यक उपचार करने में लगे रहते थे । शान्तिदायक विचारों के प्रचार में आप खूब
जाकर बसनेवालोके सिरकी आकृति में एक या दो पीढी बाद रहस्यमय परिवर्तन हो जाता है। दूसरी बात यह है कि मनुष्यकी सहानभूति सीमित होती है और मनुष्यके विकासकी वर्तमान स्थिति में राष्ट्रीय जन्मभूमि ही वह उपयुक्त भौगालिक इकाई है जिसमे मनुष्यकी पारमार्थिक भावनाए और प्रेरणाए सक्रिय और सफल बनाई जा सकती है। एक समय था जब यह भावनाए अपने गाव या अपने कबीले तक ही सीमित यो पर सभी प्रगतिशील देशाम इन सकीण निष्ठाओका स्थान राष्ट्रीय निष्ठा ने ले लिया है। भारतक एक निवासी के लिए अपने एक पडोसी व्यक्तिकी भावनाओं की स्पष्ट कल्पना कर सकना आसान है, पर लेब्राडार या ग्रीनलैण्ड मे रहनेवाले व्यक्तिकी भावनाओकी कल्पना उसके लिए उतनी आसान नही है। साधारणतया 'एक विश्व नागरिक की सहानुभूति या निष्ठा बहुत गहरी नही होती। वह बहुत छिछली होती है। राष्ट्रीयनाके एक महत्त्वपूर्ण तत्वके रूपमे प्रकृति द्वारा भली-भाति अलग किये गये एक प्रदशके महत्व पर जार देनेका तीसरा कारण यह है कि पशओकी भानि मनुष्योमे भो अपन निवास स्थान के प्रति प्रेम होता है। हर मानवके हृदय में अपनी जन्मभूमिक प्रति अगाध प्रेम होता है। देशसे निकाले जाने पर दशका प्रेम और भी गहरा हो जाता है। प्राचीन इजराईल वासिय ने किया विदेशम अपने बन्दो जीवनम अपनी इस भावनाका इस प्रकार प्रकट किया है "आ" जैरूपलम यदि मै तुझे भूल जाऊँ तो मेरा दाहना हाथ अपने कशिलका भूल जाय । यदि मैं तेरा स्मरण न करूँ तो मेरी जीभ तालूम चिपक जाय, मैं जैरूसलम को अपने सवप्रधान मुखसे भी उच्चतर समझू "" । आधुनिक राष्ट्रीयतावादके आध्यात्मिक जन्मदाता मंजिनी ने लिखा है "हमारा देश हमारा घर है, वह घर जो परमात्मा ने हम दिया है, जिसमे उसने अनेक परिवार रखे है, जो परिवार हमे प्यार करते है और जिन परिवारोको हम प्यार करत है। एक ऐसा परिवार जिसके साथ दूसरोकी अपेक्षा हम अधिक तत्परतासे सहानुभूति रखते है और जिसे हम दूपराको अपेक्षा अधिक आसानी से समझ पाते है, और जो परिवार एक निश्चित प्रदेश मे इकट्ठा रहनेने कारण और अपने तत्वों की सजातीय प्रगति के कारण एक विशेष प्रकारकी किनाशील ताके लिए उपयुक्त है"। "हमारा देश हमारी कार्यशाला (workshop ) है जहासे हमारे श्रमका उत्पादन पूरे ससारके लाभ के लिए बाहर भेजा जाता है, और जहा वे सभी उपकरण औज़ार इकट्ठे किये गये है जिनका हम बहुत अधिक सफलता के साथ उपयोग कर सकते है ( ५९ खण्ड ४, पृष्ठ २७६) ।' यद्यपि ऊपर के विचारोसे एक राष्ट्रीय जन्मभूमिका महत्व सिद्ध होता है फिर १ स्तोत्र १३७, पद्य ५ और ६ । मानते हैं। दूसरी ओर मैजिनी का कहना है कि राष्ट्रीयता के लिए जाति आवश्यक नही है। श्री रेनन का कहना है कि "जाति एक ऐसी चीज है जा स्वय ही वनतीबिगडनी रहती है और राजनीतिमे इसका कोई प्रयोजन नहीं है। श्री जे० एच० रोज का कहना है कि राष्ट्रीयता बहुत अविकगित रूपमे ही जाति पर निर्भर रहती है। थी हेज कहते है "शुद्धता यदि कही है तो आजकल असभ्य कबायली लोगामे ही है।" श्री पिल्जबरी लिखते हैं, "माधारणतया राष्ट्रीयताके निर्माण मे जानिका अब काई महत्व नही है। किसी भी राष्ट्रमे कोई भी शुद्ध जाति नहीं है। मनुष्य सब कही वर्ण सकर है।" मुसोलिनी तक ने एक बार कहा था, "जानि एक भावना है, वास्तविकता नही । काई भी बात मुझे विश्वास नहीं दिना सक्ती कि जीवशास्त्रकी दृप्टिसे आज शुद्ध जातियाका अस्तिस्य है।" इस प्रकार शास्त्रीय सम्मनिका पल्ला उन लोगोंके पक्ष मे भारी है जो जातिका अपेक्षाकृत निम्न स्थान देते है। स्विटजरलैण्ड और केनाडा ऐसे उदाहरण है जहा विभिन्न जातिक लाग एक साथ रहत है और एक सुदृढ़ राष्ट्रीयताका निर्माण कर चुके है। कई पीढ़िया तक सयुक्त राष्ट्र अमेरिका "जातियोका सगम रहा है। जहा तक हमारा सम्बन्ध है हम विश्वास करते है कि जातीय एकता से राष्ट्रीयता सुदृढ़ हाती है पर वह अनिवाय नही है। राष्ट्रीयताकी प्रारम्भिक अवस्थामे जानीय एकता अधिक महत्त्वपूर्ण है, बादकी अवस्थामे कम संयुक्त राष्ट्र अमेरिकामे जातीय वर्गीकी बहुत अधिक विभिन्नता है, पर साथ ही गाथ वहा एक प्रभावशाली प्रधान जातीय यथ भी है जिसमें पुराने प्रवासियोके वशज है और वे देशके राष्ट्रीय जीवनको एक निश्चित रूप देने में समर्थ हैं। साधारणतया यह कहा जा सकता है कि जातीय एकम्पताकी एक निश्चित मात्रा राष्ट्रीयता के लिए सहायक होती है। जब तक जातीय भेदोकी अनेकरूपता से साधारण विभेद ही उत्पन्न होते हैं तब तक काई बडी कठिनाई नही पडती । वर यह समझने में कठिनाई हानी है कि आग्ल-सैक्सनी, चीनी और नीग्रो लोग अपने बीच वर्तमान सामाजिक विभेवोंके कायम रहते हुए किस प्रकार एक राष्ट्रीयताका निर्माण कर सकते हैं। कोई भी राष्ट्रीयता अधिक समय तक नहीं टिक सकती यदि उसके जातीय वर्गीमें तीव्र विभेद हो । समारके इतिहास पर दृष्टिपान करिए तो यह स्पष्ट हो जायगा कि किसी जमानेमे भी ऐसा नहीं हुआ कि एक पूरी जानि ने एक ही राष्ट्रीयता कबूलकी हो । फिन (Finns) लोगोको एक जाति माना जा सकता है पर वह विभिन्न राष्ट्रीयताओमे बढे हुए हैं। जाति और राष्ट्रीयता कही भी एकरूप नही है। जोजेफ का कहना है, "राष्ट्रीयता वास्तव मे जातियाक आरपार निकल जाती है।" कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि राष्ट्रीयता ही जातिकी सृष्टि करती है, जाति राष्ट्रीयताकी सृष्टि नहीं करती। हमारे देश में जातीय अनेकरूपता बहुत स्पष्ट है, पर यह नहीं कहा जा सकता है कि भारतके विभिन्न सम्प्रदाय पूरी
जाकर बसनेवालोके सिरकी आकृति में एक या दो पीढी बाद रहस्यमय परिवर्तन हो जाता है। दूसरी बात यह है कि मनुष्यकी सहानभूति सीमित होती है और मनुष्यके विकासकी वर्तमान स्थिति में राष्ट्रीय जन्मभूमि ही वह उपयुक्त भौगालिक इकाई है जिसमे मनुष्यकी पारमार्थिक भावनाए और प्रेरणाए सक्रिय और सफल बनाई जा सकती है। एक समय था जब यह भावनाए अपने गाव या अपने कबीले तक ही सीमित यो पर सभी प्रगतिशील देशाम इन सकीण निष्ठाओका स्थान राष्ट्रीय निष्ठा ने ले लिया है। भारतक एक निवासी के लिए अपने एक पडोसी व्यक्तिकी भावनाओं की स्पष्ट कल्पना कर सकना आसान है, पर लेब्राडार या ग्रीनलैण्ड मे रहनेवाले व्यक्तिकी भावनाओकी कल्पना उसके लिए उतनी आसान नही है। साधारणतया 'एक विश्व नागरिक की सहानुभूति या निष्ठा बहुत गहरी नही होती। वह बहुत छिछली होती है। राष्ट्रीयनाके एक महत्त्वपूर्ण तत्वके रूपमे प्रकृति द्वारा भली-भाति अलग किये गये एक प्रदशके महत्व पर जार देनेका तीसरा कारण यह है कि पशओकी भानि मनुष्योमे भो अपन निवास स्थान के प्रति प्रेम होता है। हर मानवके हृदय में अपनी जन्मभूमिक प्रति अगाध प्रेम होता है। देशसे निकाले जाने पर दशका प्रेम और भी गहरा हो जाता है। प्राचीन इजराईल वासिय ने किया विदेशम अपने बन्दो जीवनम अपनी इस भावनाका इस प्रकार प्रकट किया है "आ" जैरूपलम यदि मै तुझे भूल जाऊँ तो मेरा दाहना हाथ अपने कशिलका भूल जाय । यदि मैं तेरा स्मरण न करूँ तो मेरी जीभ तालूम चिपक जाय, मैं जैरूसलम को अपने सवप्रधान मुखसे भी उच्चतर समझू "" । आधुनिक राष्ट्रीयतावादके आध्यात्मिक जन्मदाता मंजिनी ने लिखा है "हमारा देश हमारा घर है, वह घर जो परमात्मा ने हम दिया है, जिसमे उसने अनेक परिवार रखे है, जो परिवार हमे प्यार करते है और जिन परिवारोको हम प्यार करत है। एक ऐसा परिवार जिसके साथ दूसरोकी अपेक्षा हम अधिक तत्परतासे सहानुभूति रखते है और जिसे हम दूपराको अपेक्षा अधिक आसानी से समझ पाते है, और जो परिवार एक निश्चित प्रदेश मे इकट्ठा रहनेने कारण और अपने तत्वों की सजातीय प्रगति के कारण एक विशेष प्रकारकी किनाशील ताके लिए उपयुक्त है"। "हमारा देश हमारी कार्यशाला है जहासे हमारे श्रमका उत्पादन पूरे ससारके लाभ के लिए बाहर भेजा जाता है, और जहा वे सभी उपकरण औज़ार इकट्ठे किये गये है जिनका हम बहुत अधिक सफलता के साथ उपयोग कर सकते है ।' यद्यपि ऊपर के विचारोसे एक राष्ट्रीय जन्मभूमिका महत्व सिद्ध होता है फिर एक स्तोत्र एक सौ सैंतीस, पद्य पाँच और छः । मानते हैं। दूसरी ओर मैजिनी का कहना है कि राष्ट्रीयता के लिए जाति आवश्यक नही है। श्री रेनन का कहना है कि "जाति एक ऐसी चीज है जा स्वय ही वनतीबिगडनी रहती है और राजनीतिमे इसका कोई प्रयोजन नहीं है। श्री जेशून्य एचशून्य रोज का कहना है कि राष्ट्रीयता बहुत अविकगित रूपमे ही जाति पर निर्भर रहती है। थी हेज कहते है "शुद्धता यदि कही है तो आजकल असभ्य कबायली लोगामे ही है।" श्री पिल्जबरी लिखते हैं, "माधारणतया राष्ट्रीयताके निर्माण मे जानिका अब काई महत्व नही है। किसी भी राष्ट्रमे कोई भी शुद्ध जाति नहीं है। मनुष्य सब कही वर्ण सकर है।" मुसोलिनी तक ने एक बार कहा था, "जानि एक भावना है, वास्तविकता नही । काई भी बात मुझे विश्वास नहीं दिना सक्ती कि जीवशास्त्रकी दृप्टिसे आज शुद्ध जातियाका अस्तिस्य है।" इस प्रकार शास्त्रीय सम्मनिका पल्ला उन लोगोंके पक्ष मे भारी है जो जातिका अपेक्षाकृत निम्न स्थान देते है। स्विटजरलैण्ड और केनाडा ऐसे उदाहरण है जहा विभिन्न जातिक लाग एक साथ रहत है और एक सुदृढ़ राष्ट्रीयताका निर्माण कर चुके है। कई पीढ़िया तक सयुक्त राष्ट्र अमेरिका "जातियोका सगम रहा है। जहा तक हमारा सम्बन्ध है हम विश्वास करते है कि जातीय एकता से राष्ट्रीयता सुदृढ़ हाती है पर वह अनिवाय नही है। राष्ट्रीयताकी प्रारम्भिक अवस्थामे जानीय एकता अधिक महत्त्वपूर्ण है, बादकी अवस्थामे कम संयुक्त राष्ट्र अमेरिकामे जातीय वर्गीकी बहुत अधिक विभिन्नता है, पर साथ ही गाथ वहा एक प्रभावशाली प्रधान जातीय यथ भी है जिसमें पुराने प्रवासियोके वशज है और वे देशके राष्ट्रीय जीवनको एक निश्चित रूप देने में समर्थ हैं। साधारणतया यह कहा जा सकता है कि जातीय एकम्पताकी एक निश्चित मात्रा राष्ट्रीयता के लिए सहायक होती है। जब तक जातीय भेदोकी अनेकरूपता से साधारण विभेद ही उत्पन्न होते हैं तब तक काई बडी कठिनाई नही पडती । वर यह समझने में कठिनाई हानी है कि आग्ल-सैक्सनी, चीनी और नीग्रो लोग अपने बीच वर्तमान सामाजिक विभेवोंके कायम रहते हुए किस प्रकार एक राष्ट्रीयताका निर्माण कर सकते हैं। कोई भी राष्ट्रीयता अधिक समय तक नहीं टिक सकती यदि उसके जातीय वर्गीमें तीव्र विभेद हो । समारके इतिहास पर दृष्टिपान करिए तो यह स्पष्ट हो जायगा कि किसी जमानेमे भी ऐसा नहीं हुआ कि एक पूरी जानि ने एक ही राष्ट्रीयता कबूलकी हो । फिन लोगोको एक जाति माना जा सकता है पर वह विभिन्न राष्ट्रीयताओमे बढे हुए हैं। जाति और राष्ट्रीयता कही भी एकरूप नही है। जोजेफ का कहना है, "राष्ट्रीयता वास्तव मे जातियाक आरपार निकल जाती है।" कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि राष्ट्रीयता ही जातिकी सृष्टि करती है, जाति राष्ट्रीयताकी सृष्टि नहीं करती। हमारे देश में जातीय अनेकरूपता बहुत स्पष्ट है, पर यह नहीं कहा जा सकता है कि भारतके विभिन्न सम्प्रदाय पूरी
जीवनीय, पुष्टिकारक, रोगनाशक, बुद्धिवर्धक तथा समस्त रोगों का यह घृत अपहारक है। इसके सेवन से वन्ध्या नारी भी शीघ्र ही गर्भाधान में समर्थ हो जाती है। इसके साथ ही यह रक्तविकार तथा अनेक प्रकार के योनि-संबंधी रोगों से छुटकारा दिलाता है। अतः मूत्राघात आदि जैसे दुष्कर रोगों में यह घृत सदैव ही ग्रहणीय होता है। अश्मरी रोग का उपचार वात, पित्त, कफ और शुक्र - इन चार प्रकार के विकारों से पथरी रोग की उत्पत्ति होती है। इन चारों में वातादि तीन दोषों से युक्त अश्मरी कफाश्रित रहती हैं। अतः सभी दृष्टियों से पथरी के ये चारों प्रकार अत्यन्त कष्टकारक होते हैं। सोंठ, गोखरू तथा वरुण की छाल का काढ़ा जवाखार और गुड़ मिलाकर पका लें। इस क्वाथ-पान से दीर्घकालिक वातज पथरी का निवारण होता है। कुम्हड़े के रस में जवाखार और गुड़ मिलाकर पीना मूत्रावरोध, शर्कराप्रमेह तथा अश्मरीनाशक होता है। अथवा सहिजन की जड़ का काढ़ा बनाकर गुनगुना पीने से पथरी रोग का उन्मूलन होता है। खस, अरनी काष्ठ, ईश्वरमल्लिका, अडूसा, गोखरू, दीर्घलोहित-यष्टि, पीली कटसरैया, नीली कटसरैया, कास, अम्लबेल, नल नामक तृण, डाभ, वृन्ततृण, एरका, सोनापाठा, मूर्वा ( मरोड़फली), कुरंटक, उत्तम और सूर्यबेल - ये सब वीरतरादिगण कहे जाते हैं। इनसे वातज रोग, पथरी, शर्कराप्रमेह, मूत्रकृच्छ्र तथा मूत्राघात - जैसे रोगों का निर्मूलन होता है । शतावरी, गोखरू, कटेरी, कंटकारी, ब्राह्मी, नागबला (गंगेरन), सोनापाठा, खस, कटक फल, अमरबेल, वरुना, शाकफल, यव, कुलथी, कोल और अनार के फल। इनके क्वाथ में उषकादिगण के पदार्थों का प्रतिवाप देकर घृत को पका लें। इस घृतपाक के द्वारा वातोत्पन्न पथरी का शीघ्र ही नाश होता है। खारी मिट्टी, नीलाथोथा ( तूतिया), हींग, दोनों प्रकार के कासीस, सेंधा नमक और शिलाजीत उषकादिगण कहे गये हैं। ये सभी मूत्रकृच्छ्र, अश्मरी, मेदोरोग तथा कफजन्य रोगों के उन्मूलक होते हैं। चौलाई शाक की जड़, गोखरू, सोनापाठा, पाटला, पतंग, कुरंटा, पुनर्नवा (विषखपरा, कुश, कास, रामशर, गुण्ठ, इत्कट, मरोड़फली, डाभ, बिदारीकंद, वाराहीकंद, गदहपूरना) और शिरीष ।
जीवनीय, पुष्टिकारक, रोगनाशक, बुद्धिवर्धक तथा समस्त रोगों का यह घृत अपहारक है। इसके सेवन से वन्ध्या नारी भी शीघ्र ही गर्भाधान में समर्थ हो जाती है। इसके साथ ही यह रक्तविकार तथा अनेक प्रकार के योनि-संबंधी रोगों से छुटकारा दिलाता है। अतः मूत्राघात आदि जैसे दुष्कर रोगों में यह घृत सदैव ही ग्रहणीय होता है। अश्मरी रोग का उपचार वात, पित्त, कफ और शुक्र - इन चार प्रकार के विकारों से पथरी रोग की उत्पत्ति होती है। इन चारों में वातादि तीन दोषों से युक्त अश्मरी कफाश्रित रहती हैं। अतः सभी दृष्टियों से पथरी के ये चारों प्रकार अत्यन्त कष्टकारक होते हैं। सोंठ, गोखरू तथा वरुण की छाल का काढ़ा जवाखार और गुड़ मिलाकर पका लें। इस क्वाथ-पान से दीर्घकालिक वातज पथरी का निवारण होता है। कुम्हड़े के रस में जवाखार और गुड़ मिलाकर पीना मूत्रावरोध, शर्कराप्रमेह तथा अश्मरीनाशक होता है। अथवा सहिजन की जड़ का काढ़ा बनाकर गुनगुना पीने से पथरी रोग का उन्मूलन होता है। खस, अरनी काष्ठ, ईश्वरमल्लिका, अडूसा, गोखरू, दीर्घलोहित-यष्टि, पीली कटसरैया, नीली कटसरैया, कास, अम्लबेल, नल नामक तृण, डाभ, वृन्ततृण, एरका, सोनापाठा, मूर्वा , कुरंटक, उत्तम और सूर्यबेल - ये सब वीरतरादिगण कहे जाते हैं। इनसे वातज रोग, पथरी, शर्कराप्रमेह, मूत्रकृच्छ्र तथा मूत्राघात - जैसे रोगों का निर्मूलन होता है । शतावरी, गोखरू, कटेरी, कंटकारी, ब्राह्मी, नागबला , सोनापाठा, खस, कटक फल, अमरबेल, वरुना, शाकफल, यव, कुलथी, कोल और अनार के फल। इनके क्वाथ में उषकादिगण के पदार्थों का प्रतिवाप देकर घृत को पका लें। इस घृतपाक के द्वारा वातोत्पन्न पथरी का शीघ्र ही नाश होता है। खारी मिट्टी, नीलाथोथा , हींग, दोनों प्रकार के कासीस, सेंधा नमक और शिलाजीत उषकादिगण कहे गये हैं। ये सभी मूत्रकृच्छ्र, अश्मरी, मेदोरोग तथा कफजन्य रोगों के उन्मूलक होते हैं। चौलाई शाक की जड़, गोखरू, सोनापाठा, पाटला, पतंग, कुरंटा, पुनर्नवा और शिरीष ।
रायपुर. सप्ताह में सिर्फ पांच दिन काम करने सीएम की घोषणा के बाद अधिकारियों-कर्मचारियों ने सोचा कि सबकी बल्ले-बल्ले हो गई. अधिकारियों-कर्मचारियों ने सोचा अब हर सप्ताह शनि-रविवार फैमली के साथ घुमने जाने का प्लान बनाया जा सकता है. कुछ घरेलू काम निपटाया जा सकता है. रिश्तेदारों के घर जाया जा सकता है. 5 डे वर्किंग की घोषणा कर्मचारियों के लिए चांदी काटने जैसा था. अब कुछ कर्मचारी चांदी काटने के बाद सोना काटने की भी सोच रहे हैं. हर दफ्तरों में कुछ कर्मचारी जानबूझकर लेट से ऑफिस पहुँच रहे हैं. कुछ कर्मचारियों के लिए आधा घंटा जल्दी पहुंचना गले की फ़ांस बन गई है. 5 डे वर्किंग की घोषणा के बाद अब कर्मचारियों को 10 बजे ऑफिस पहुँचने की बाध्यता है. कर्मचारियों में लंबे समय से 10:30-11:00 बजे ऑफिस पहुँचने का बायोलॉजिकल क्लॉक सेट हो चुका है. इस बायोलॉजिकल क्लॉक सेट को तोड़ने में या एडजेस्ट करने में शायद टाइम लगेगा. आज कई जिलों में आकस्मिक निरीक्षण किया गया. दफ्तरों में कर्मचारी लेट पहुँच रहे थे. जांजगीर में दफ्तर लेट पहुँचने के कारण 68 कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है. जांजगीर कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. कवर्धा में 8 कर्मचारियों के नाम नोटिस जारी हुआ है. जांजगीर चांपा में अधिकारियों ने जिले के विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कार्यालय से अनुपस्थित मिले 68 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. कवर्धा में अपर कलेक्टर बीएस उइके ने बताया कि प्रशासनिक कसावट की दृष्टिकोण से आज 8 फरवरी को सुबह 10 बजे से 10. 30 बजे तक अलग-अलग कार्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक हरीश सक्सेना, सहायक ग्रेड-03 आलोक सिंह, महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी आनंद तिवारी, पर्यवेक्षक सरोज शर्मा, डाटा एंन्ट्री ऑपरेटर कु. अंकिता चंद्रवंशी और परिवहन विभाग के जिला अधिकारी सहित कुल 8 कर्मचारी अनुपस्थित मिले. सभी अनुपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है.
रायपुर. सप्ताह में सिर्फ पांच दिन काम करने सीएम की घोषणा के बाद अधिकारियों-कर्मचारियों ने सोचा कि सबकी बल्ले-बल्ले हो गई. अधिकारियों-कर्मचारियों ने सोचा अब हर सप्ताह शनि-रविवार फैमली के साथ घुमने जाने का प्लान बनाया जा सकता है. कुछ घरेलू काम निपटाया जा सकता है. रिश्तेदारों के घर जाया जा सकता है. पाँच डे वर्किंग की घोषणा कर्मचारियों के लिए चांदी काटने जैसा था. अब कुछ कर्मचारी चांदी काटने के बाद सोना काटने की भी सोच रहे हैं. हर दफ्तरों में कुछ कर्मचारी जानबूझकर लेट से ऑफिस पहुँच रहे हैं. कुछ कर्मचारियों के लिए आधा घंटा जल्दी पहुंचना गले की फ़ांस बन गई है. पाँच डे वर्किंग की घोषणा के बाद अब कर्मचारियों को दस बजे ऑफिस पहुँचने की बाध्यता है. कर्मचारियों में लंबे समय से दस:तीस-ग्यारह:शून्य बजे ऑफिस पहुँचने का बायोलॉजिकल क्लॉक सेट हो चुका है. इस बायोलॉजिकल क्लॉक सेट को तोड़ने में या एडजेस्ट करने में शायद टाइम लगेगा. आज कई जिलों में आकस्मिक निरीक्षण किया गया. दफ्तरों में कर्मचारी लेट पहुँच रहे थे. जांजगीर में दफ्तर लेट पहुँचने के कारण अड़सठ कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है. जांजगीर कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. कवर्धा में आठ कर्मचारियों के नाम नोटिस जारी हुआ है. जांजगीर चांपा में अधिकारियों ने जिले के विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कार्यालय से अनुपस्थित मिले अड़सठ कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. कवर्धा में अपर कलेक्टर बीएस उइके ने बताया कि प्रशासनिक कसावट की दृष्टिकोण से आज आठ फरवरी को सुबह दस बजे से दस. तीस बजे तक अलग-अलग कार्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक हरीश सक्सेना, सहायक ग्रेड-तीन आलोक सिंह, महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी आनंद तिवारी, पर्यवेक्षक सरोज शर्मा, डाटा एंन्ट्री ऑपरेटर कु. अंकिता चंद्रवंशी और परिवहन विभाग के जिला अधिकारी सहित कुल आठ कर्मचारी अनुपस्थित मिले. सभी अनुपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है.
साल 2019 में लोकसभा चुनावों के वक्त राहुल गांधी ने दक्षिण में जोर शोर से प्रचार प्रसार किया था. इस दौरान उन्होंने कर्नाटक में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था कि आखिर ये केसे हो रहा है कि सभी चोरों के उपनाम मोदी हैं. सूरतः मोदी समाज को लेकर दिए बयान पर सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई है. एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरनेम को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया गया. इस मामले में आज यानि गुरुवार को सूरत सेशन कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को दोषी करार दिया है और दो साल की सजा का ऐलान किया है. फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी खुद भी कोर्ट में मौजूद थे. हालांकि सजा के ऐलान के बाद राहुल गांधी को जमानत भी मिल गई. राहुल के वकील ने बताया कि राहुल गांधी जैसे ही कोर्ट में गए वैसे ही दो मिनट बाद कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई. जब उनसे पूछा गया कि सजा के बारे में आपका क्या कहना है तो राहुल गांधी ने जवाब दिया कि उन्होंने जो कुछ भी कहा वो विपक्ष के नेता के तौर पर भ्रष्टाचार को उजागर करने के इरादे से कहा गया है. सजा के ऐलान के बाद राहुल गांधी को बेल दे दी गई. कोर्ट ने इसी के साथ उन्हें 30 दिन का समय दिया है, जिसमें वो इस फैसले को लेकर आगे हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं. पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर ने बताया कि इस मौके पर खुद राहुल गांधी भी कोर्ट में मौजूद थे. उन्होंने बताया कि इस मौके पर पार्टी विधायक दल के नेता अमित चावड़ा के अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के गुजरात प्रभारी रघु शर्मा और कई अन्य विधायक व पार्टी कार्यकर्ता भी सुनवाई के वक्त सूरत कोर्ट में मौजूद रहे. बता दें कि साल 2019 में लोकसभा चुनावों के वक्त राहुल गांधी ने दक्षिण में जोर शोर से प्रचार प्रसार किया था. इस दौरान उन्होंने कर्नाटक में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था कि आखिर ये कैसे हो रहा है कि सभी चोरों के उपनाम मोदी हैं. उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुए गुजरात बीजेपी के नेता और विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने इस बयान के जरिए किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि समूचे मोदी समुदाय के लोगों की भावनाओं को आहत किया है. उनके इस बयान से समाज में मोदी समुदाय के लोगों का मान गिरा है. उनके इस आरोप और पेश किए गए तथ्यों के आधार पर सूरत कोर्ट में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत में बीते शुक्रवार को सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए आज की तिथि नीयत की है.उनके वकील किरीट पानवाला के मुताबिक इस मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए राहुल गांधी खुद तीन बार अदालत में पेश हो चुके हैं. इससे पहले अक्तूबर 2021 में वह बयान दर्ज कराने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था.
साल दो हज़ार उन्नीस में लोकसभा चुनावों के वक्त राहुल गांधी ने दक्षिण में जोर शोर से प्रचार प्रसार किया था. इस दौरान उन्होंने कर्नाटक में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था कि आखिर ये केसे हो रहा है कि सभी चोरों के उपनाम मोदी हैं. सूरतः मोदी समाज को लेकर दिए बयान पर सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई है. एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरनेम को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया गया. इस मामले में आज यानि गुरुवार को सूरत सेशन कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को दोषी करार दिया है और दो साल की सजा का ऐलान किया है. फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी खुद भी कोर्ट में मौजूद थे. हालांकि सजा के ऐलान के बाद राहुल गांधी को जमानत भी मिल गई. राहुल के वकील ने बताया कि राहुल गांधी जैसे ही कोर्ट में गए वैसे ही दो मिनट बाद कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई. जब उनसे पूछा गया कि सजा के बारे में आपका क्या कहना है तो राहुल गांधी ने जवाब दिया कि उन्होंने जो कुछ भी कहा वो विपक्ष के नेता के तौर पर भ्रष्टाचार को उजागर करने के इरादे से कहा गया है. सजा के ऐलान के बाद राहुल गांधी को बेल दे दी गई. कोर्ट ने इसी के साथ उन्हें तीस दिन का समय दिया है, जिसमें वो इस फैसले को लेकर आगे हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं. पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर ने बताया कि इस मौके पर खुद राहुल गांधी भी कोर्ट में मौजूद थे. उन्होंने बताया कि इस मौके पर पार्टी विधायक दल के नेता अमित चावड़ा के अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के गुजरात प्रभारी रघु शर्मा और कई अन्य विधायक व पार्टी कार्यकर्ता भी सुनवाई के वक्त सूरत कोर्ट में मौजूद रहे. बता दें कि साल दो हज़ार उन्नीस में लोकसभा चुनावों के वक्त राहुल गांधी ने दक्षिण में जोर शोर से प्रचार प्रसार किया था. इस दौरान उन्होंने कर्नाटक में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था कि आखिर ये कैसे हो रहा है कि सभी चोरों के उपनाम मोदी हैं. उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुए गुजरात बीजेपी के नेता और विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने इस बयान के जरिए किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि समूचे मोदी समुदाय के लोगों की भावनाओं को आहत किया है. उनके इस बयान से समाज में मोदी समुदाय के लोगों का मान गिरा है. उनके इस आरोप और पेश किए गए तथ्यों के आधार पर सूरत कोर्ट में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत में बीते शुक्रवार को सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए आज की तिथि नीयत की है.उनके वकील किरीट पानवाला के मुताबिक इस मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए राहुल गांधी खुद तीन बार अदालत में पेश हो चुके हैं. इससे पहले अक्तूबर दो हज़ार इक्कीस में वह बयान दर्ज कराने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था.
धर्मशाला। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के कयासों के बीच देश के सबसे संक्रमित जिलों में शुमार हो चुके कांगड़ा जिला में इससे पहले ही दो हजार से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। कोरोना महामारी ने जब से अपने पैर पसारे हैं, तब से लेकर अब तक जिला में दो हजार से अधिक बच्चों को कोरोना अपनी गिरफ्त में ले चुका है। हालांकि आंकड़ा हैरत में डालने वाला है, लेकिन सुखद बात यह है कि इनमें से अधिकतर बच्चे कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। ऐसे में अब तीसरी लहर में कोरोना संक्रमण किस तरह से छोटे बच्चों को प्रभावित करेगा, इस बात को लेकर अभिभावकों की चिंताएं बढऩा स्वाभाविक है। कोरोना महामारी से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक बनाने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है। कोरोना की तीसरी लहर के संकट को देखते हुए हालांकि प्रशासन ने भी अस्पतालों में बच्चों के लिए आईसीयू बेड सहित तमाम अन्य इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं, जिससे यदि भविष्य में कोरोना बच्चों पर संक्रमण का हमला करता है, तो उनका इलाज आसानी से किया जा सकता है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित हिमाचल के लोगों को अब तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने का डर सताने लगा है। दूसरी लहर में हिमाचल के हजारों बच्चे संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
धर्मशाला। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के कयासों के बीच देश के सबसे संक्रमित जिलों में शुमार हो चुके कांगड़ा जिला में इससे पहले ही दो हजार से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। कोरोना महामारी ने जब से अपने पैर पसारे हैं, तब से लेकर अब तक जिला में दो हजार से अधिक बच्चों को कोरोना अपनी गिरफ्त में ले चुका है। हालांकि आंकड़ा हैरत में डालने वाला है, लेकिन सुखद बात यह है कि इनमें से अधिकतर बच्चे कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। ऐसे में अब तीसरी लहर में कोरोना संक्रमण किस तरह से छोटे बच्चों को प्रभावित करेगा, इस बात को लेकर अभिभावकों की चिंताएं बढऩा स्वाभाविक है। कोरोना महामारी से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक बनाने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है। कोरोना की तीसरी लहर के संकट को देखते हुए हालांकि प्रशासन ने भी अस्पतालों में बच्चों के लिए आईसीयू बेड सहित तमाम अन्य इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं, जिससे यदि भविष्य में कोरोना बच्चों पर संक्रमण का हमला करता है, तो उनका इलाज आसानी से किया जा सकता है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित हिमाचल के लोगों को अब तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने का डर सताने लगा है। दूसरी लहर में हिमाचल के हजारों बच्चे संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
ट्रिप एडवाइजर द्वारा किये हाल ही सर्वेक्षण में दुनिया में शीर्ष पांच पर्यटकों के आकर्षण में ताजमहल भी है। चोइस लैंडमार्क एवार्ड की विश्व सूची में ताजमहल 5 वें स्थान पर है। इन पांच टूरिस्ट स्थलों का चयन 12 महीने की अवधि में एकत्र किये आकड़ों अनुसार किया गया है। पेरू का माचू पिचू और आबूधाबी का शेख जायद मस्जिद केंद्र शीर्ष स्थानों पर रहे। जयपुर में आमेर के किले को भी एशिया की यात्री 'च्वाइस स्थलों की सूची में 8 वीं पोजीशन दी गई है।
ट्रिप एडवाइजर द्वारा किये हाल ही सर्वेक्षण में दुनिया में शीर्ष पांच पर्यटकों के आकर्षण में ताजमहल भी है। चोइस लैंडमार्क एवार्ड की विश्व सूची में ताजमहल पाँच वें स्थान पर है। इन पांच टूरिस्ट स्थलों का चयन बारह महीने की अवधि में एकत्र किये आकड़ों अनुसार किया गया है। पेरू का माचू पिचू और आबूधाबी का शेख जायद मस्जिद केंद्र शीर्ष स्थानों पर रहे। जयपुर में आमेर के किले को भी एशिया की यात्री 'च्वाइस स्थलों की सूची में आठ वीं पोजीशन दी गई है।
चलहु कुंअर लै चलहि सवेरा, मगु कोइ आइ मढ़ी संह हेरा । एहि न पाउ और तुरै जो पावा, जानक कुंअर जन्तु कोउ खावा ।। जन पुरजन माता पिता, जह लहु हित सुनि पाउ । सरिहहि छाती फाटि सव, तब कछु हाथ न आउ ॥7॥h शब्दार्थ - देवतन्ह - देवताओं को । चितिति = चित्रावली । अमर== अमरत्व । सगरी = समस्त । पुरजन =नगर के लोग । - देवताओ अर्थात् देव एवं उसके मित्र को 'चित्रावली' को वर्षगांठ का उत्सव अत्यधिक अच्छा लगा। चिनिनि अर्थात् 'चित्रावली का दर्शन कर उनकी काया अमर हो गई । भोर होने और सूर्योदय से पूर्व ही सभा समाप्त हो गई है और नृत्यादि बन्द हो गये । 'चित्रावली' को निद्रा आा मई और उसे उसकी सखियों ने पलंग पर सुला दिया । 'चित्रावली' की सखियां, जो सारी रात्रि सुख में जागी थी, जहां-तहां सोने लगी । देवताओं ने सोचा कि विलम्ब हो रहा है कहीं ऐसा न हो कि कोई चिनसारी को खोलकर कुंवर को देख लें । अतः अच्छा यही है कि हम कुवर को प्रातःकाल से पूर्व ही यहां से ले चलें । सम्भव है कि कोई उसे मढी पर खोजने के लिए आए । मढ़ी पर न तो उन्हें कुवर ही मिलेगा और न ही उसका घोड़ा । इससे लोगों को यह अनुमान होगा कि कुवर को किसी जन्तु ने खा लिया है । इससे देश के सभी निवासियों, कुवर के माता-पिता और जहा तक इसके हितैषी है सभी को यह जानकर अत्यधिक दुःख होगा। उनकी छाती इस दुःख से फठ जायेगी और वह मर जायेंगे । इस अवस्था में इसका सारा अपयश हमारे ऊपर आयेगा । विशेष - चित्रिनि से तात्पर्य 'चित्रावली' से है । उत्तर भारत के हिन्दी सूफी प्रेमाख्यानो मे चित्रावली ही ऐसी नायिका है जिसे चित्रणी बताया गया है। सूफी प्रेमाख्यानो की अन्य नायिकाएं पद्मिनी कोटि की है । पुनि वोज एक संग चित्रसारी, आइ उधारेन्हि पौरि के वारी । सोवत कुमर आन तहं पाया, लीन्ह उठाई वार नहि लाया । निमिष मांह ले नठी उतारा, गए छांड़ि सोयत बुःख मारा । सूरज फिरन जब कुंअरही लागी, फरवट लेत उठा तब जागो । देखे कहा चहूं विसि हेरी, भई आनि रचना विधि फेरी । ना वह (क) मन्दिर नाहि कबिलासू, ना यह चित्र न वह सुख वासू ।। सपन जान चित उठा मरोहू, और करेज पानि भा लोहू । पुनि जो निहारे आपु तन, चिन्ह आह सो संग । बस्तर औ कर पर वही, लिखत लाग जो रंग ॥8॥ शब्दार्थ - पौरि = दरवाजा । लाहू = खून । करेज = कलेजा । बस्तर वस्त्र । मरोहू = मरोड । व्याख्या - अतः दोनों ( देव एव उसका मित्र) एक साथ चित्रसारी पर गये और उन्होने चित्रसारी के दरवाजे खोल लिये । उन्हें वहां कुंवर सोता हुआ दृष्टिगोचर हुआ इसलिए कुवर को उठाने में उन्हें एक क्षण भी नहीं लगा । एक क्षण के ही अन्तर्गत उन्होंने कुंवर को मढी में लाकर उतार दिया और दुखी कुवर को होता हुआ छोड़कर चले गये । कुवर को जब सूर्य की गरम किरणों का ताप लगा तब करवट लेकर वह जाग उठा । वह चारों दिशाओं में देख रहा है कि विधाता की यह कैसी रचना है । न तो यहा वह मन्दिर है और न ही वह कैलाश, न वह चित्र है और न ही वह सुख का निवास है । इस घटना को स्वप्नवत् समझकर उसके हृदय में मरोड उठने लगी है तथा उसके हृदय का रक्त पानी में परिवर्तित हो गया। उसने पुनः अपने शारीर एवं वस्त्रो पर लगे हुए रंगो के निशानों को साक्षात् देखा । षन एक कुंअर अचफ मन रहा, कौतुक सपना जाइ न कहीं । पुनि जो बिरह लहरि तन आई, थांमिन (ख) सकेउ गिरेउ मुरझाई ।। दोउ नैनन जनु समुन्य आपारा, उमंड़ि चले राखे को पारा । फार झंगा औ लोटे परा, बंधुन फोऊ हाथ को धरा ।। भरि गे सेह सोस औ देहा, लेयक नाहि जो झारै सेहा । संग न कोउ हित पियारा, को उठाइ बैठाइ संभारा ।। पिन चेतं पिन होइ बेसं बारा, घरी धुरी सिर भुई वह मारा । बिरह वहनि कोउ किमि कहै, रसना कहि जारि जाइ । सोइ हिय मांहि संभार, जेहि तन लागे आई ॥9॥ शब्दार्थ - अचक - आश्चर्यचकित । झंगा= पहिनने का वस्त्र । खेह= - = मिट्टी । हितू = हितैषी । दहिन = जलन । रसना = जिहा । व्याख्या - एक क्षण तक कुंवर अवाक् रहा तथा उससे स्वप्न का कौतुक वर्णित नही हो पा रहा था। इसके पश्चात् उसके शरीर में विरह की लहर ने संचरण किया, जिसे संभालने में वह असमर्थ रहा । अतः वह मुरझाकर गिर पड़ा । उसके दोनो नेत्रों से आंसू समुद्र की भांति उमड़ रहे थे । वह कपडे फाडता था और पृथ्वी पर लेटा हुआ था। इस समय उसका कोई साथी नही था । उसके सिर और शरीर में मिट्टी भर गई थी। वहां कोई सेवक भी नही था जो उसके शरीर से मिट्टी हटा दे । उसके साथ कोई हितैपी भी नहीं था जो उसे संभालकर बैठा दे । उसे एक क्षण मे चेतना और एक ही क्षण में अचेतना आ जाती है । वह घड़ी-घड़ी अपने सिर को पृथ्वी में देकर मारता था । विरहाग्नि को कोई कैसे वर्णित कर सकता है और जिह्वा द्वारा उसका वर्णन होना भी असम्भव है । इस विरहाग्नि को वही संभाल सकता है, जिसके हृदय में इसकी पौर उत्पन्न हुई हो ।. विशेष- सूफी प्रेमाख्यानो में सौन्दर्य ही विरह का मूल कारण बनता है । सौन्दर्य का प्रथम साक्षात्कार साधक के हृदय मे संकल्प एवं विकल्प, आस्था एवं अनास्था का प्रतीक बनता है । सूफी कवि उसे कभी मूर्छा और कभी चेतनता कहते है । प्रथम साक्षात्कार के समय समस्त सूफी प्रेमाख्यानों में सौन्दर्य दृष्टाओ को मूर्च्छित दिखाया गया है । कटक जो आई नगर नियराना, देखिन्ह संग न कुंअर सुजाना । वह और कहं वह ओ कहं पूंछा, फटक जानु वितु जिउ तन हूंछा ।। सब मिलि कहा कुअर जो नाहीं, राज पास काह लै जाही । पूछत उतर वेव हम फाहा, छूछ लगाइ रहब मुंह चाहा । जेंहि बिनु तब जाइहि मुंह गोवा, कसन अर्वाह जो खोजिअ खोवा । सोवत जानु सकेँ सुनि जागे, आपु आप कहं ढूंढ़न लागे ॥ जल-जल थल-थल मेरु पहारा, एक-एक तर सौ सौ बारा । स्याम रंन विनु पंथ पुनि, अगुवा संग न कोइ । दूरि दूरि सब धावह, नियर जाहि नहि कोई ॥ 1011 शब्दार्थ - काह = किसको। गोवा=वादालता । व्याख्या - उधर कटक जैसे ही नगर के नजदीक पहुंचा तो लोगों ने देखा कि हमारे साथ राजकु वर 'सुजान' नही है । वह परस्पर एक-दूसरे से कुंवर के सम्बन्ध में पूछने लगे । कुवर के बिना यह कटक उसी प्रकार है जैसे कि प्राणो के विना शरीर । सबने मिलकर सोचा कि यदि हमारे साथ कुंवस नही है तब हम राजा के पास किसको लेकर जायेंगे । अगर राजा हमसे, पूछेगा तो हम उसको क्या उत्तर देंगे ? अगर हम उसे हूढ लायेंगे तभी हम मुह दिखाने योग्य होगे । जिसके बिना समस्त वाचालता समाप्त हो जाती है । हम उसे पहले ही क्यो न ढूंढ लें । वह सब उसी प्रकार सचेत हो गये जैसे कि कोई सोते से जाग जाता हो तथा सभी कुचर को अलग-अलग ढूढने लगे । उन्होने जल, थल, पहाड तथा वृक्षो की एक-एक डाली पर कुवर क खोजा । काली रात्रि, अत्यन्त विकट पथ तथा किसी अगुआ का अभाव अनेक कष्टप्रद प्रतीत हो रहा था । कुवर को खोजने के लिए सब दूर-दूर तक गये. लेकिन किसी ने भी कुंवर को नजदीक के स्थानो पर नही खोजा । खोजत खोजि क्टक सब हारा, बोती रैनि भयो भिनुसारा । सूरज उदै पंथ तब सूझा, भयो दिवस पर आापन बूझा ॥ वाजी चरन खोज पुनि पाए, खोजत खोज मढी मंह आए । देखिह फुंअर परा बिकरारा, हाथ पांव सिर कछु न संभारा ।। अभ उसास लेइ ओ रोवा, देखत सैन प्रान जुन खोवा । खेह भारि ले बैसे कोरा, रोवै कतक देखि मुख ओरा ।। पूछे बातन उतर न देई, पिन पिन ऊभ सांस पैलेई । अरुन बदन पिराइगा, रुहिर सूख गा गात । रहा झांपि लोयन दोक, कहै न पूछे बात ॥11॥ शब्दार्थ - भिनुसारा = प्रातःकाल । अरुण = = लान । पिराइ = पीला रुहिर == रुधिर । व्याख्या - सारा कटक कुवर को खोज-खोजकर हार गया । सारी रात्रि व्यतीत हो गई और प्रातः काल हो गया । सूर्य के उदित होने से पथ दृष्टिगोचर होने लगा तथा दिन मे सभी कुछ दिखाई देने लगा । कुछ लोग कुवर को खोजते-खोजते मढी पर आ पहुचे । वहा वह क्या देखते हैं कि कुवर बेचैन होकर पड़ा हुआ है । उसे अपने हाथ, पाव और सिर की भी चेतना
चलहु कुंअर लै चलहि सवेरा, मगु कोइ आइ मढ़ी संह हेरा । एहि न पाउ और तुरै जो पावा, जानक कुंअर जन्तु कोउ खावा ।। जन पुरजन माता पिता, जह लहु हित सुनि पाउ । सरिहहि छाती फाटि सव, तब कछु हाथ न आउ ॥सात॥h शब्दार्थ - देवतन्ह - देवताओं को । चितिति = चित्रावली । अमर== अमरत्व । सगरी = समस्त । पुरजन =नगर के लोग । - देवताओ अर्थात् देव एवं उसके मित्र को 'चित्रावली' को वर्षगांठ का उत्सव अत्यधिक अच्छा लगा। चिनिनि अर्थात् 'चित्रावली का दर्शन कर उनकी काया अमर हो गई । भोर होने और सूर्योदय से पूर्व ही सभा समाप्त हो गई है और नृत्यादि बन्द हो गये । 'चित्रावली' को निद्रा आा मई और उसे उसकी सखियों ने पलंग पर सुला दिया । 'चित्रावली' की सखियां, जो सारी रात्रि सुख में जागी थी, जहां-तहां सोने लगी । देवताओं ने सोचा कि विलम्ब हो रहा है कहीं ऐसा न हो कि कोई चिनसारी को खोलकर कुंवर को देख लें । अतः अच्छा यही है कि हम कुवर को प्रातःकाल से पूर्व ही यहां से ले चलें । सम्भव है कि कोई उसे मढी पर खोजने के लिए आए । मढ़ी पर न तो उन्हें कुवर ही मिलेगा और न ही उसका घोड़ा । इससे लोगों को यह अनुमान होगा कि कुवर को किसी जन्तु ने खा लिया है । इससे देश के सभी निवासियों, कुवर के माता-पिता और जहा तक इसके हितैषी है सभी को यह जानकर अत्यधिक दुःख होगा। उनकी छाती इस दुःख से फठ जायेगी और वह मर जायेंगे । इस अवस्था में इसका सारा अपयश हमारे ऊपर आयेगा । विशेष - चित्रिनि से तात्पर्य 'चित्रावली' से है । उत्तर भारत के हिन्दी सूफी प्रेमाख्यानो मे चित्रावली ही ऐसी नायिका है जिसे चित्रणी बताया गया है। सूफी प्रेमाख्यानो की अन्य नायिकाएं पद्मिनी कोटि की है । पुनि वोज एक संग चित्रसारी, आइ उधारेन्हि पौरि के वारी । सोवत कुमर आन तहं पाया, लीन्ह उठाई वार नहि लाया । निमिष मांह ले नठी उतारा, गए छांड़ि सोयत बुःख मारा । सूरज फिरन जब कुंअरही लागी, फरवट लेत उठा तब जागो । देखे कहा चहूं विसि हेरी, भई आनि रचना विधि फेरी । ना वह मन्दिर नाहि कबिलासू, ना यह चित्र न वह सुख वासू ।। सपन जान चित उठा मरोहू, और करेज पानि भा लोहू । पुनि जो निहारे आपु तन, चिन्ह आह सो संग । बस्तर औ कर पर वही, लिखत लाग जो रंग ॥आठ॥ शब्दार्थ - पौरि = दरवाजा । लाहू = खून । करेज = कलेजा । बस्तर वस्त्र । मरोहू = मरोड । व्याख्या - अतः दोनों एक साथ चित्रसारी पर गये और उन्होने चित्रसारी के दरवाजे खोल लिये । उन्हें वहां कुंवर सोता हुआ दृष्टिगोचर हुआ इसलिए कुवर को उठाने में उन्हें एक क्षण भी नहीं लगा । एक क्षण के ही अन्तर्गत उन्होंने कुंवर को मढी में लाकर उतार दिया और दुखी कुवर को होता हुआ छोड़कर चले गये । कुवर को जब सूर्य की गरम किरणों का ताप लगा तब करवट लेकर वह जाग उठा । वह चारों दिशाओं में देख रहा है कि विधाता की यह कैसी रचना है । न तो यहा वह मन्दिर है और न ही वह कैलाश, न वह चित्र है और न ही वह सुख का निवास है । इस घटना को स्वप्नवत् समझकर उसके हृदय में मरोड उठने लगी है तथा उसके हृदय का रक्त पानी में परिवर्तित हो गया। उसने पुनः अपने शारीर एवं वस्त्रो पर लगे हुए रंगो के निशानों को साक्षात् देखा । षन एक कुंअर अचफ मन रहा, कौतुक सपना जाइ न कहीं । पुनि जो बिरह लहरि तन आई, थांमिन सकेउ गिरेउ मुरझाई ।। दोउ नैनन जनु समुन्य आपारा, उमंड़ि चले राखे को पारा । फार झंगा औ लोटे परा, बंधुन फोऊ हाथ को धरा ।। भरि गे सेह सोस औ देहा, लेयक नाहि जो झारै सेहा । संग न कोउ हित पियारा, को उठाइ बैठाइ संभारा ।। पिन चेतं पिन होइ बेसं बारा, घरी धुरी सिर भुई वह मारा । बिरह वहनि कोउ किमि कहै, रसना कहि जारि जाइ । सोइ हिय मांहि संभार, जेहि तन लागे आई ॥नौ॥ शब्दार्थ - अचक - आश्चर्यचकित । झंगा= पहिनने का वस्त्र । खेह= - = मिट्टी । हितू = हितैषी । दहिन = जलन । रसना = जिहा । व्याख्या - एक क्षण तक कुंवर अवाक् रहा तथा उससे स्वप्न का कौतुक वर्णित नही हो पा रहा था। इसके पश्चात् उसके शरीर में विरह की लहर ने संचरण किया, जिसे संभालने में वह असमर्थ रहा । अतः वह मुरझाकर गिर पड़ा । उसके दोनो नेत्रों से आंसू समुद्र की भांति उमड़ रहे थे । वह कपडे फाडता था और पृथ्वी पर लेटा हुआ था। इस समय उसका कोई साथी नही था । उसके सिर और शरीर में मिट्टी भर गई थी। वहां कोई सेवक भी नही था जो उसके शरीर से मिट्टी हटा दे । उसके साथ कोई हितैपी भी नहीं था जो उसे संभालकर बैठा दे । उसे एक क्षण मे चेतना और एक ही क्षण में अचेतना आ जाती है । वह घड़ी-घड़ी अपने सिर को पृथ्वी में देकर मारता था । विरहाग्नि को कोई कैसे वर्णित कर सकता है और जिह्वा द्वारा उसका वर्णन होना भी असम्भव है । इस विरहाग्नि को वही संभाल सकता है, जिसके हृदय में इसकी पौर उत्पन्न हुई हो ।. विशेष- सूफी प्रेमाख्यानो में सौन्दर्य ही विरह का मूल कारण बनता है । सौन्दर्य का प्रथम साक्षात्कार साधक के हृदय मे संकल्प एवं विकल्प, आस्था एवं अनास्था का प्रतीक बनता है । सूफी कवि उसे कभी मूर्छा और कभी चेतनता कहते है । प्रथम साक्षात्कार के समय समस्त सूफी प्रेमाख्यानों में सौन्दर्य दृष्टाओ को मूर्च्छित दिखाया गया है । कटक जो आई नगर नियराना, देखिन्ह संग न कुंअर सुजाना । वह और कहं वह ओ कहं पूंछा, फटक जानु वितु जिउ तन हूंछा ।। सब मिलि कहा कुअर जो नाहीं, राज पास काह लै जाही । पूछत उतर वेव हम फाहा, छूछ लगाइ रहब मुंह चाहा । जेंहि बिनु तब जाइहि मुंह गोवा, कसन अर्वाह जो खोजिअ खोवा । सोवत जानु सकेँ सुनि जागे, आपु आप कहं ढूंढ़न लागे ॥ जल-जल थल-थल मेरु पहारा, एक-एक तर सौ सौ बारा । स्याम रंन विनु पंथ पुनि, अगुवा संग न कोइ । दूरि दूरि सब धावह, नियर जाहि नहि कोई ॥ एक हज़ार ग्यारह शब्दार्थ - काह = किसको। गोवा=वादालता । व्याख्या - उधर कटक जैसे ही नगर के नजदीक पहुंचा तो लोगों ने देखा कि हमारे साथ राजकु वर 'सुजान' नही है । वह परस्पर एक-दूसरे से कुंवर के सम्बन्ध में पूछने लगे । कुवर के बिना यह कटक उसी प्रकार है जैसे कि प्राणो के विना शरीर । सबने मिलकर सोचा कि यदि हमारे साथ कुंवस नही है तब हम राजा के पास किसको लेकर जायेंगे । अगर राजा हमसे, पूछेगा तो हम उसको क्या उत्तर देंगे ? अगर हम उसे हूढ लायेंगे तभी हम मुह दिखाने योग्य होगे । जिसके बिना समस्त वाचालता समाप्त हो जाती है । हम उसे पहले ही क्यो न ढूंढ लें । वह सब उसी प्रकार सचेत हो गये जैसे कि कोई सोते से जाग जाता हो तथा सभी कुचर को अलग-अलग ढूढने लगे । उन्होने जल, थल, पहाड तथा वृक्षो की एक-एक डाली पर कुवर क खोजा । काली रात्रि, अत्यन्त विकट पथ तथा किसी अगुआ का अभाव अनेक कष्टप्रद प्रतीत हो रहा था । कुवर को खोजने के लिए सब दूर-दूर तक गये. लेकिन किसी ने भी कुंवर को नजदीक के स्थानो पर नही खोजा । खोजत खोजि क्टक सब हारा, बोती रैनि भयो भिनुसारा । सूरज उदै पंथ तब सूझा, भयो दिवस पर आापन बूझा ॥ वाजी चरन खोज पुनि पाए, खोजत खोज मढी मंह आए । देखिह फुंअर परा बिकरारा, हाथ पांव सिर कछु न संभारा ।। अभ उसास लेइ ओ रोवा, देखत सैन प्रान जुन खोवा । खेह भारि ले बैसे कोरा, रोवै कतक देखि मुख ओरा ।। पूछे बातन उतर न देई, पिन पिन ऊभ सांस पैलेई । अरुन बदन पिराइगा, रुहिर सूख गा गात । रहा झांपि लोयन दोक, कहै न पूछे बात ॥ग्यारह॥ शब्दार्थ - भिनुसारा = प्रातःकाल । अरुण = = लान । पिराइ = पीला रुहिर == रुधिर । व्याख्या - सारा कटक कुवर को खोज-खोजकर हार गया । सारी रात्रि व्यतीत हो गई और प्रातः काल हो गया । सूर्य के उदित होने से पथ दृष्टिगोचर होने लगा तथा दिन मे सभी कुछ दिखाई देने लगा । कुछ लोग कुवर को खोजते-खोजते मढी पर आ पहुचे । वहा वह क्या देखते हैं कि कुवर बेचैन होकर पड़ा हुआ है । उसे अपने हाथ, पाव और सिर की भी चेतना
नयी दिल्ली। संसद की एक समिति ने बुधवार को वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को कोविड-19 की सस्ती और देश में निर्मित आसानी से उपलब्ध दवाइयों को बढ़ावा देने को कहा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समिति ने औषधि कंपनियों द्वारा पेश की जा रही महंगी दवाइयों का उपयोग करने की सलाह को रोकने और उनकी कीमतों को भी नियंत्रित करने को कहा। सूत्रों ने बताया कि गृह मामलों की स्थायी समिति की एक बैठक में समिति के सदस्यों ने कोविड-19 की दवाइयों की अधिकतम कीम सीमा भी तय किये जाने की मांग की। गृह मामलों पर स्थायी समिति की बैठक में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल और अन्य अधिकारी उपस्थिति थे। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने की। समिति के सूत्रों ने बताया कि दलीय भावना से ऊपर उठते हुए समिति के सदस्यों ने सवाल किया कि कोविड-19 के उपचार के लिये अक्सर महंगी दवाइयों की सलाह क्यों दी जा रही है? समिति के सदस्यों ने दवाइयों की कालाबाजारी पर चिंता प्रकट की। समिति के सदस्यों ने तीन सस्ती और आसानी से उपलब्ध दवाइयों का नाम लेते हुए सवाल किया कि इन दवाइयों के समान रूप से कारगर होने के बावजूद भी इन्हें बढ़ावा क्यों नहीं दिया जा रहा है?
नयी दिल्ली। संसद की एक समिति ने बुधवार को वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को कोविड-उन्नीस की सस्ती और देश में निर्मित आसानी से उपलब्ध दवाइयों को बढ़ावा देने को कहा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समिति ने औषधि कंपनियों द्वारा पेश की जा रही महंगी दवाइयों का उपयोग करने की सलाह को रोकने और उनकी कीमतों को भी नियंत्रित करने को कहा। सूत्रों ने बताया कि गृह मामलों की स्थायी समिति की एक बैठक में समिति के सदस्यों ने कोविड-उन्नीस की दवाइयों की अधिकतम कीम सीमा भी तय किये जाने की मांग की। गृह मामलों पर स्थायी समिति की बैठक में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल और अन्य अधिकारी उपस्थिति थे। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने की। समिति के सूत्रों ने बताया कि दलीय भावना से ऊपर उठते हुए समिति के सदस्यों ने सवाल किया कि कोविड-उन्नीस के उपचार के लिये अक्सर महंगी दवाइयों की सलाह क्यों दी जा रही है? समिति के सदस्यों ने दवाइयों की कालाबाजारी पर चिंता प्रकट की। समिति के सदस्यों ने तीन सस्ती और आसानी से उपलब्ध दवाइयों का नाम लेते हुए सवाल किया कि इन दवाइयों के समान रूप से कारगर होने के बावजूद भी इन्हें बढ़ावा क्यों नहीं दिया जा रहा है?
UPSC Success Story: दोस्तों अगर आपके अन्दर प्रतिभा है न तो आप कहीं भी किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते है प्रतिभा जात-पात अमीर-गरीब नहीं देखती है. दोस्तोनाज के इस खबर में हम जिस शख्स के बारे में बात कर रहे है उनका नाम मुक्तेंद्र कुमार(Muktendra Kumar IRS) है. दोस्तों इनका जन्म बेहद साधारण और दलित परिवार में हुआ था. UPSC Success Story Muktendra Kumar: आज भी हमारे देश में लोग जाती देखते है लेकिन अब धीरे-धीरे ये परचलन खत्म होती जा रही है और लोग टैलेंट देख रहे है. जाती नहीं. दोस्तों मुक्तेंद्र कुमार(Muktendra Kumar IRS) के बारे में बताया जाता अहि की ये बचपन से ही पढने में काफी तेज-तरार छात्र थे. इनका जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर में हुआ था. दोस्तों वैसे तो यूपीएससी की परीक्षा आसान नहीं है यह परीक्षा देश की सबसे सर्वश्रेष्ठ परीक्षा में गिनती की जाती है. और यह परीक्षा और मुश्किल हो जाती है. जब आपके पास उचित संसाधन नहीं हो. पढने के लिय अच्छे कोचिंग संसथान में एडमिशन के लिए पैसे नहीं हो. UPSC Success Story: दोस्तों कुछ ऐसा ही हुआ था मुक्तेंद्र कुमार(Muktendra Kumar IRS) के साथ इनका बचपन आर्थिक तंगी से होकर गुजरा है इनके पिता एक दलित और तिहारी मजदूर थे. लेकिन अपने घर की स्थिति को देखते हुए मुक्तेंद्र कुमार ने पूरी जान झोंक दी यूपीएससी की तैयारी करने में और 23 मई का दिन मुक्तेंद्र कुमार(Muktendra Kumar IRS) के जीवन के सबसे ख़ुशी का दिन था क्यूंकि उसी तारीख को उन्हें यूपीएससी में सफलता मिली थी. दोस्तों जैसे ही मुक्तेंद्र कुमार(Muktendra Kumar IRS) को यूपीएससी की परीक्षा में सफलता मिली उनसे अधिक ख़ुशी उनके मजदूर पिता को मिला उनके लिए एक नई सहारा बने. अब मुक्तेंद्र कुमार(Muktendra Kumar IRS) अपने खराब घर को ठीक करवा सकेंगे अपनी छोटी बहन की शादी अच्छे घर में कर सकेंगे. उनके पिता ईट धोते थे धुप में अब उन्हें ये काम नहीं करना पड़ेगा.
UPSC Success Story: दोस्तों अगर आपके अन्दर प्रतिभा है न तो आप कहीं भी किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते है प्रतिभा जात-पात अमीर-गरीब नहीं देखती है. दोस्तोनाज के इस खबर में हम जिस शख्स के बारे में बात कर रहे है उनका नाम मुक्तेंद्र कुमार है. दोस्तों इनका जन्म बेहद साधारण और दलित परिवार में हुआ था. UPSC Success Story Muktendra Kumar: आज भी हमारे देश में लोग जाती देखते है लेकिन अब धीरे-धीरे ये परचलन खत्म होती जा रही है और लोग टैलेंट देख रहे है. जाती नहीं. दोस्तों मुक्तेंद्र कुमार के बारे में बताया जाता अहि की ये बचपन से ही पढने में काफी तेज-तरार छात्र थे. इनका जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर में हुआ था. दोस्तों वैसे तो यूपीएससी की परीक्षा आसान नहीं है यह परीक्षा देश की सबसे सर्वश्रेष्ठ परीक्षा में गिनती की जाती है. और यह परीक्षा और मुश्किल हो जाती है. जब आपके पास उचित संसाधन नहीं हो. पढने के लिय अच्छे कोचिंग संसथान में एडमिशन के लिए पैसे नहीं हो. UPSC Success Story: दोस्तों कुछ ऐसा ही हुआ था मुक्तेंद्र कुमार के साथ इनका बचपन आर्थिक तंगी से होकर गुजरा है इनके पिता एक दलित और तिहारी मजदूर थे. लेकिन अपने घर की स्थिति को देखते हुए मुक्तेंद्र कुमार ने पूरी जान झोंक दी यूपीएससी की तैयारी करने में और तेईस मई का दिन मुक्तेंद्र कुमार के जीवन के सबसे ख़ुशी का दिन था क्यूंकि उसी तारीख को उन्हें यूपीएससी में सफलता मिली थी. दोस्तों जैसे ही मुक्तेंद्र कुमार को यूपीएससी की परीक्षा में सफलता मिली उनसे अधिक ख़ुशी उनके मजदूर पिता को मिला उनके लिए एक नई सहारा बने. अब मुक्तेंद्र कुमार अपने खराब घर को ठीक करवा सकेंगे अपनी छोटी बहन की शादी अच्छे घर में कर सकेंगे. उनके पिता ईट धोते थे धुप में अब उन्हें ये काम नहीं करना पड़ेगा.
नई दिल्ली. ब्रिटेन से संचालित और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे एक सिख आतंकी संगठन 'बब्बर खालसा' का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने शनिवार को इससे जुड़े सात कथित आतंकियों को लुधियाना से गिरफ्तार किया. पकड़े गये आतंकियों से तीन पिस्तौल और गोला-बारूद बरामद किये गये हैं. लुधियाना पुलिस आयुक्त आरएन ढोके ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में से तीन अमृतसर से हैं. सभी 7 लोगों को लुधियाना से गिरफ्तार किया गया हैं. उनके कब्जे से तीन पिस्तौल और 33 कारतूस बरामद किए गए हैं. जबकि इस संगठन का सरगना बिट्रेन से अपने लोगों को वित्तीय सहायता तथा हथियार मुहैया करा रहा है. पकड़े गये लोगों की पहचान ओंकार सिंह, जागरण सिंह, अमृतपाल सिंह, कुलदीप सिंह, जसबीर सिंह, अमनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह के रूप में हुई है. आतंकवादी गुट का सरगना सुरिन्दर सिंह बब्बर बिट्रेन में रहता है और वहीं से सोशल मीडिया के जरीये लोगों की भर्ती आदि करता है.
नई दिल्ली. ब्रिटेन से संचालित और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे एक सिख आतंकी संगठन 'बब्बर खालसा' का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने शनिवार को इससे जुड़े सात कथित आतंकियों को लुधियाना से गिरफ्तार किया. पकड़े गये आतंकियों से तीन पिस्तौल और गोला-बारूद बरामद किये गये हैं. लुधियाना पुलिस आयुक्त आरएन ढोके ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में से तीन अमृतसर से हैं. सभी सात लोगों को लुधियाना से गिरफ्तार किया गया हैं. उनके कब्जे से तीन पिस्तौल और तैंतीस कारतूस बरामद किए गए हैं. जबकि इस संगठन का सरगना बिट्रेन से अपने लोगों को वित्तीय सहायता तथा हथियार मुहैया करा रहा है. पकड़े गये लोगों की पहचान ओंकार सिंह, जागरण सिंह, अमृतपाल सिंह, कुलदीप सिंह, जसबीर सिंह, अमनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह के रूप में हुई है. आतंकवादी गुट का सरगना सुरिन्दर सिंह बब्बर बिट्रेन में रहता है और वहीं से सोशल मीडिया के जरीये लोगों की भर्ती आदि करता है.
नयी दिल्ली, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि वर्ष 2014 से 2023 तक देश की कानून-व्यवस्था की परिस्थिति और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चों पर आमूलचूल परिवर्तन आए हैं। अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के 76वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के लिए 2023 का वर्ष बेहद महत्वपूर्ण है। इस वर्ष होने वाले जी-20 सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था में भी दिल्ली पुलिस देश को यश दिलाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के मुख्यालय पर भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर 20 क्षेत्रों में सुधार की प्रक्रिया की शुरु की गयी थी, जिनमें से सोलह क्षेत्रों में बहुत अच्छी प्रगति हुई है। आने वाले दिनों में दिल्ली पुलिस के कार्यों में बहुत बड़े सुधार होंगे, जो दिल्ली की जनता के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण और लाभदायक होंगे। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के सभी सुरक्षा बलों को बधाई दी। अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में भी पहले उग्रवाद फैलाने वाले अनेक ग्रुप कार्यरत थे, लेकिन आज वहां शांति प्रस्थापित हुई है और 60 प्रतिशत उत्तर-पूर्व से आज 'अफस्पा' हटा लिया गया है। आज नॉर्थ-ईस्ट में 8000 से ज्यादा युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली, पंजाब, राजस्थान पुलिस और नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी ने मिलकर उत्तर भारत में अंतरराज्यीय गिरोहों पर नकेल कसना शुरू किया, जिसमें इन्हें बहुत बड़ी सफलता मिली। इसमें दिल्ली पुलिस की बड़ी भूमिका रही। अमित शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने नशे की तरफ जा चुके लोगों के प्रति सहानुभूति रखकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाकर समाज में पुनः प्रस्थापित करना और नशे का कारोबार करने वालों को कठोरतम दंड देकर जेल की सलाखों के पीछे डालने का काम बहुत अच्छे तरीके से किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिस और सभी सीएपीएफ कर्मियों के लिए हाउसिंग सेटिस्फैक्शन रेश्यो बढ़ाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार वर्ष 2024 से पहले देश की पुलिस, सभी सीएपीएफ और दिल्ली पुलिस के हाउसिंग सेटिस्फैक्शन रेश्यो को 60 प्रतिशत से ऊपर ले जाएगी। उन्होंने ने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस के सभी जवान अपने ध्येय वाक्य "शांति, सेवा और न्याय" के पथ पर आगे बढ़ते हुए देश की राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति को शानदार तरीके से संभालते रहेंगे।
नयी दिल्ली, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि वर्ष दो हज़ार चौदह से दो हज़ार तेईस तक देश की कानून-व्यवस्था की परिस्थिति और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चों पर आमूलचूल परिवर्तन आए हैं। अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के छिहत्तरवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के लिए दो हज़ार तेईस का वर्ष बेहद महत्वपूर्ण है। इस वर्ष होने वाले जी-बीस सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था में भी दिल्ली पुलिस देश को यश दिलाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के मुख्यालय पर भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बीस क्षेत्रों में सुधार की प्रक्रिया की शुरु की गयी थी, जिनमें से सोलह क्षेत्रों में बहुत अच्छी प्रगति हुई है। आने वाले दिनों में दिल्ली पुलिस के कार्यों में बहुत बड़े सुधार होंगे, जो दिल्ली की जनता के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण और लाभदायक होंगे। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के सभी सुरक्षा बलों को बधाई दी। अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में भी पहले उग्रवाद फैलाने वाले अनेक ग्रुप कार्यरत थे, लेकिन आज वहां शांति प्रस्थापित हुई है और साठ प्रतिशत उत्तर-पूर्व से आज 'अफस्पा' हटा लिया गया है। आज नॉर्थ-ईस्ट में आठ हज़ार से ज्यादा युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली, पंजाब, राजस्थान पुलिस और नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी ने मिलकर उत्तर भारत में अंतरराज्यीय गिरोहों पर नकेल कसना शुरू किया, जिसमें इन्हें बहुत बड़ी सफलता मिली। इसमें दिल्ली पुलिस की बड़ी भूमिका रही। अमित शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने नशे की तरफ जा चुके लोगों के प्रति सहानुभूति रखकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाकर समाज में पुनः प्रस्थापित करना और नशे का कारोबार करने वालों को कठोरतम दंड देकर जेल की सलाखों के पीछे डालने का काम बहुत अच्छे तरीके से किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिस और सभी सीएपीएफ कर्मियों के लिए हाउसिंग सेटिस्फैक्शन रेश्यो बढ़ाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार वर्ष दो हज़ार चौबीस से पहले देश की पुलिस, सभी सीएपीएफ और दिल्ली पुलिस के हाउसिंग सेटिस्फैक्शन रेश्यो को साठ प्रतिशत से ऊपर ले जाएगी। उन्होंने ने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस के सभी जवान अपने ध्येय वाक्य "शांति, सेवा और न्याय" के पथ पर आगे बढ़ते हुए देश की राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति को शानदार तरीके से संभालते रहेंगे।
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) नागेंद्र डी राव कंपनी सचिवों के शीर्ष संगठन भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के अध्यक्ष और देवेंद्र वी देशपांडे उपाध्यक्ष चुने गये हैं। संगठन ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी। बयान में कहा गया कि श्री राव और श्री देशपांडे को 2021 के लिये आईसीएसआई का क्रमशः अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुना गया है। दोनों का चयन 19 जनवरी 2021 से प्रभावी है। राव के पास कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्हें कंपनी व प्रतिभूति कानून, पूंजी बाजार के लेन-देन, विलय व अधिग्रहण, वित्तीय पुनर्गठन आदि में विशेषज्ञता प्राप्त है। देशपांडे 2004 से कंपनी सचिव के रूप में काम कर रहे हैं। उन्हें कंपनी कानून, विदेशी मुद्रा विनिमय संबंधी कानूनों की लेखा-परीक्षा आदि में विशेषज्ञता है।
नयी दिल्ली, उन्नीस जनवरी नागेंद्र डी राव कंपनी सचिवों के शीर्ष संगठन भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के अध्यक्ष और देवेंद्र वी देशपांडे उपाध्यक्ष चुने गये हैं। संगठन ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी। बयान में कहा गया कि श्री राव और श्री देशपांडे को दो हज़ार इक्कीस के लिये आईसीएसआई का क्रमशः अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुना गया है। दोनों का चयन उन्नीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस से प्रभावी है। राव के पास कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने का पंद्रह वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्हें कंपनी व प्रतिभूति कानून, पूंजी बाजार के लेन-देन, विलय व अधिग्रहण, वित्तीय पुनर्गठन आदि में विशेषज्ञता प्राप्त है। देशपांडे दो हज़ार चार से कंपनी सचिव के रूप में काम कर रहे हैं। उन्हें कंपनी कानून, विदेशी मुद्रा विनिमय संबंधी कानूनों की लेखा-परीक्षा आदि में विशेषज्ञता है।
मुकुंदगढ़ पुलिस ने जिला साइबर सेल की मदद से असली सोने के गहनों की आड़ में लोगों को झांसे में लेकर लाखों की ठगी कर नकली सोने के जेवरात पकड़ाकर फरार होने वाली टटलू गैंग का राजफाश करते हुए अन्तरराज्यीय टटलू गैंग के चार मुख्य सरगनाओं को शुक्रवार को बापर्दा गिरफ्तार किया है। एसपी श्यामसिंह ने बताया कि आरोपी गिरीराज उर्फ गोविन्द उर्फ मुकेश नायक (37) पुत्र स्व. हजारीलाल भोपा निवासी मीणा मोहल्ला ग्राम रेटी पुलिस थाना कठूमर जिला अलवर, दौलत सिंह उर्फ राजु नायक(42) पुत्र स्व. हजारीलाल भोपा नायक निवासी मीणा मोहल्ला ग्राम रेटी पुलिस थाना कठूमर, अतर सिंह उर्फ शिवकुमार (53) पुत्र सुआराम भोपा नायक निवासी ग्राम बगड़ राजपूत, पुलिस थाना बगड़ तिराहा तहसील रामगढ़, डालसिंह(44) पुत्र स्व. हजारीलाल भोपा ग्राम रेटी पुलिस थाना कठूमर अलवर को बपर्दा गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार रामचरण सोनी निवासी वार्ड नबर 19 मुकुन्दगढ ने मुकुंदगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि उसकी पूजा ज्वैलर्स दुकान पर विगत 4-5 माह से मुकेश नामक व्यक्ति जो स्वयं को सवाईमाधोपुर का रहने वाला बताया। इस दौरान प्याज के व्यापार में पैसे आवश्यकता बता 4-5 बार असली सोने जैसे जेवराती गहने गिरवी रख पैसे ले जाता और हर बार अलग-अलग आदमी, औरतें साथ में लाता था। चार मई 2023 को मुकेश और उसके साथ एक व्यक्ति राजू मेरी दुकान पर आकर 22 सोने की हार की पातरियां गिरवी रख 12 लाख रुपए 10 मई 2023 ब्याज सहित वापस देने की कहकर उधार ले गया और जाते समय आधार कार्ड की कॉपी देकर चला गया। मुकदमें की जांच मुकुंदगढ़ थानाधिकारी सरदारमल को दी गई। एसपी ने सरदारमल जाट नेतृत्व में जिला साईबर सेल के साथ एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने झुंझुनूं, दिल्ली, गुडगांव, मध्यप्रदेश, कोटा, सवाई माधोपुर गंगापुर सिटी, भरतपुर, अलवर आदि जगहों से मिली सूचना के आधार पर मामले का खुलासा किया। आरोपियों ने 12 लाख की मुकुंदगढ़ में, नवलगढ़ के बावडी गेट इलाके में पांच लाख, कारी में तीन लाख, गुढ़ा के रघुनाथपुरा में पांच लाख, कोटा में 12 लाख व सिंगोली एमपी में तीन लाख रुपए की ठगी की है। गिरोह ने छह वारदातें करना कबूल कर लिया है। टटलू गैंग ने 40 लाख रूपए की ठगी करना स्वीकार कर लिया। झुंझुनूं में एक ही दिन में चार वारदातों को अंजाम दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुकुंदगढ़ पुलिस ने जिला साइबर सेल की मदद से असली सोने के गहनों की आड़ में लोगों को झांसे में लेकर लाखों की ठगी कर नकली सोने के जेवरात पकड़ाकर फरार होने वाली टटलू गैंग का राजफाश करते हुए अन्तरराज्यीय टटलू गैंग के चार मुख्य सरगनाओं को शुक्रवार को बापर्दा गिरफ्तार किया है। एसपी श्यामसिंह ने बताया कि आरोपी गिरीराज उर्फ गोविन्द उर्फ मुकेश नायक पुत्र स्व. हजारीलाल भोपा निवासी मीणा मोहल्ला ग्राम रेटी पुलिस थाना कठूमर जिला अलवर, दौलत सिंह उर्फ राजु नायक पुत्र स्व. हजारीलाल भोपा नायक निवासी मीणा मोहल्ला ग्राम रेटी पुलिस थाना कठूमर, अतर सिंह उर्फ शिवकुमार पुत्र सुआराम भोपा नायक निवासी ग्राम बगड़ राजपूत, पुलिस थाना बगड़ तिराहा तहसील रामगढ़, डालसिंह पुत्र स्व. हजारीलाल भोपा ग्राम रेटी पुलिस थाना कठूमर अलवर को बपर्दा गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार रामचरण सोनी निवासी वार्ड नबर उन्नीस मुकुन्दगढ ने मुकुंदगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि उसकी पूजा ज्वैलर्स दुकान पर विगत चार-पाँच माह से मुकेश नामक व्यक्ति जो स्वयं को सवाईमाधोपुर का रहने वाला बताया। इस दौरान प्याज के व्यापार में पैसे आवश्यकता बता चार-पाँच बार असली सोने जैसे जेवराती गहने गिरवी रख पैसे ले जाता और हर बार अलग-अलग आदमी, औरतें साथ में लाता था। चार मई दो हज़ार तेईस को मुकेश और उसके साथ एक व्यक्ति राजू मेरी दुकान पर आकर बाईस सोने की हार की पातरियां गिरवी रख बारह लाख रुपए दस मई दो हज़ार तेईस ब्याज सहित वापस देने की कहकर उधार ले गया और जाते समय आधार कार्ड की कॉपी देकर चला गया। मुकदमें की जांच मुकुंदगढ़ थानाधिकारी सरदारमल को दी गई। एसपी ने सरदारमल जाट नेतृत्व में जिला साईबर सेल के साथ एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने झुंझुनूं, दिल्ली, गुडगांव, मध्यप्रदेश, कोटा, सवाई माधोपुर गंगापुर सिटी, भरतपुर, अलवर आदि जगहों से मिली सूचना के आधार पर मामले का खुलासा किया। आरोपियों ने बारह लाख की मुकुंदगढ़ में, नवलगढ़ के बावडी गेट इलाके में पांच लाख, कारी में तीन लाख, गुढ़ा के रघुनाथपुरा में पांच लाख, कोटा में बारह लाख व सिंगोली एमपी में तीन लाख रुपए की ठगी की है। गिरोह ने छह वारदातें करना कबूल कर लिया है। टटलू गैंग ने चालीस लाख रूपए की ठगी करना स्वीकार कर लिया। झुंझुनूं में एक ही दिन में चार वारदातों को अंजाम दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
स्मरण करो, मिग- 29K और Su-33 डेक सेनानियों पर नवंबर 14 और दिसंबर 4 पर IS सेनानियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान (ग्रुपिंग रूसी संघ में निषिद्ध है) लैंडिंग के दौरान एक केबल के कारण, एडमिरल कुजनेत्सोव विमान ले जाने वाले क्रूजर के डेक से लुढ़का। मिग-एक्सएनयूएमएक्सके के नुकसान के मामले में, एक महत्वपूर्ण कोण पर डेक पर विमान के उतरने के कारण केबल टूट गया। Su-29 की लैंडिंग सामान्य रूप से हुई और इस मामले में हम पहली बार कम गुणवत्ता वाली केबल की बात कर सकते हैं। लेकिन दोनों मामलों में, विमान के बारे में कोई शिकायत नहीं हो सकती है,एजेंसी को एक स्रोत कहा। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "दो लैंडिंग के दौरान केबल टूटने के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किनारे पर परिष्करण केबल का अध्ययन करने के बाद ही स्थापित किया जा सकता है"।
स्मरण करो, मिग- उनतीस केल्विन और Su-तैंतीस डेक सेनानियों पर नवंबर चौदह और दिसंबर चार पर IS सेनानियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान लैंडिंग के दौरान एक केबल के कारण, एडमिरल कुजनेत्सोव विमान ले जाने वाले क्रूजर के डेक से लुढ़का। मिग-एक्सएनयूएमएक्सके के नुकसान के मामले में, एक महत्वपूर्ण कोण पर डेक पर विमान के उतरने के कारण केबल टूट गया। Su-उनतीस की लैंडिंग सामान्य रूप से हुई और इस मामले में हम पहली बार कम गुणवत्ता वाली केबल की बात कर सकते हैं। लेकिन दोनों मामलों में, विमान के बारे में कोई शिकायत नहीं हो सकती है,एजेंसी को एक स्रोत कहा। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "दो लैंडिंग के दौरान केबल टूटने के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किनारे पर परिष्करण केबल का अध्ययन करने के बाद ही स्थापित किया जा सकता है"।
श्रुति को पसंद है गेटअप बदलना, और ये है उनका फेवरेट स्टाइल, जिसमें दिखता है सबकुछ , श्रुति हसन हमेशा अपने लुक को लेकर सावधान रहती है और जब ही कोई उनके गेटअप को लेकर आलोचना करता है तो वो उसका पलटकर जवाब देने में देर भी नहीं लगातीं। राजकुमार राव के साथ फिल्म बहन होगी तेरी को लेकर श्रुति हसन बहुत उत्साहित है।इस मौके पर श्रुति हसन ने यह भी कहा कि उनके लिए उनके परिवार का मत सबसे अहम रखता है। फिल्म बहन होगी तेरी को अजय के पन्नालाल ने डायरेक्ट किया है और ये फिल्म 9 जून को रिलीज़ हो रही है। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
श्रुति को पसंद है गेटअप बदलना, और ये है उनका फेवरेट स्टाइल, जिसमें दिखता है सबकुछ , श्रुति हसन हमेशा अपने लुक को लेकर सावधान रहती है और जब ही कोई उनके गेटअप को लेकर आलोचना करता है तो वो उसका पलटकर जवाब देने में देर भी नहीं लगातीं। राजकुमार राव के साथ फिल्म बहन होगी तेरी को लेकर श्रुति हसन बहुत उत्साहित है।इस मौके पर श्रुति हसन ने यह भी कहा कि उनके लिए उनके परिवार का मत सबसे अहम रखता है। फिल्म बहन होगी तेरी को अजय के पन्नालाल ने डायरेक्ट किया है और ये फिल्म नौ जून को रिलीज़ हो रही है। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
टीएमसी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए 291 उम्मीदवारों की घोषणा की। ज्यादातर 40 वर्ष से कम उम्र के कम से कम 12 हस्तियों ने सूची में स्थान पाया है। इन हस्तियों में फिल्मी कलाकार जून मालिया, सौयोनी घोष, सायंतिका बनर्जी और कंचन मुलिक; गायक अदिति मुंशी; निर्देशक राज चक्रवर्ती; और क्रिकेटर मनोज तिवारी शामिल हैं। उनमें से कुछ ने कुछ दिन पहले टीएमसी ज्वाइन की थी। टीएमसी ने दलित लेखक मनोरंजन व्यापारी और मोहन बागान के पूर्व कप्तान बिदेश बोस को भी टिकट दिया है। विधायक का चुनाव लड़ रहे प्रसिद्ध दलित लेखक मनोरंजन व्यापारी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लंबा संघर्ष किया है। उनके जीवन की कथा किसी फिल्म की तरह विविध अनुभवों से भरपूर है। 16 साल का एक किशोर घर से भाग जाता है। उसे काम की तलाश थी। साल 1967 था, वह भाग कर सिलीगुड़ी आता है। तब बंगाल में नक्सल आंदोलन अपने चरम पर था। खैर, थक-हार कर वह किशोर फिर घर पहुंच गया। लेकिन इस बीच उसने कई नई बातें सीखीं। इनमें से एक बात यह भी थी कि किस्से कैसे गढ़े जाएं। उसने एक किस्सा गढ़ा- अपने दोस्तों को बताया कि वह नक्सली आंदोलन के संचालक कानू सान्याल से मिलकर आया है। उसकी बातों से प्रभावित होकर एक दोस्त ने दक्षिण कोलकाता में सीपीआई (एम) के होर्डिंग पर 'एल' शब्द और जोड़ दिया। एल से मतलब लेनिनवादी से था। इसका पता जब सीपीआई (एम) के नेताओं को लगा तो उन्होंने उस किशोर को लैम्पपोस्ट (बिजली का खंभा) से बांध दिया और जमकर पिटाई की। संभव है यह एक लेखक के जन्म की शुरुआत थी, हालांकि उस किशोर के जीवन में अभी और भी बहुत कुछ घटना बाकी था। मनोरंजन व्यापारी बंगला साहित्य के जाने-माने रचनाकार हैं। उनका परिचय यह है कि वे दलित समाज से हैं, उन्होंने रिक्शा चलाया है, बतौर कुक काम किया है, जेल भी होकर आए हैं और इससे पहले एक गुंडा भी रह चुके हैं। व्यापारी साफ मन से जाहिर करते हैं, बंगाल में 1960 से 1970 के बीच ऐसे लोग सक्रिय थे, जिनका काम छोटे-मोटे अपराध करना था, मुझे भी इसका चाव चढ़ा था और मैं भी उनकी लाइन में आ गया। व्यापारी की 10 किताबें और 100 निबंध प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें विभिन्न पुरस्कार और अवॉर्ड हासिल हो चुके हैं, जिनमें से एक पश्चिम बंगाल बांग्ला अकादमी अवॉर्ड भी शामिल है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित एक पत्रिका के सेमिनार में वे हिस्सा ले चुके हैं। वे दक्षिण कोलकाता के मुकंदपुर में एक छोटे से मकान में रहते हैं। व्यापारी बताते हैं- 'मैं 22 साल का था और मुझे जेल हो गई थी, पढ़ना क्या होता है, इसकी समझ नहीं थी। जेल के बारे में कहते हैं कि उन्हें अपराधियों को सुधारने के लिए बनाया जाता है। हालांकि मैं जेल में गया तो जीवन ही बदल गया। जेल में एक कैदी ने मुझे अक्षर ज्ञान कराया। मैंने पढ़ने को क्यों इच्छुक हुआ, इसकी भी वजह है, वैसे यह वजह बेहद साधारण थी। मैंने सुना था कि जेल में उन लोगों को कुछ सम्मान मिलता है जोकि पढ़े-लिखे होते हैं। उन लोगों को काम भी अलग तरह के सौंपे जाते हैं, हालांकि जो पढ़े-लिखे नहीं होते, उन्हें आटा-चक्की पर या फिर दूसरे इसी तरह के काम दिए जाते। इस बात को ध्यान में रखकर मैंने अपने जीवन को सरल बनाने की कोशिश शुरू की। जेल में लिखने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं थी।' 'मैंने रेत पर लकड़ी के टुकड़े से लिखने की प्रैक्टिस शुरू की। हालांकि जिंदगी खुद एक पाठशाला है, मुझ पर केस गलत था और कोर्ट से मैं बरी हो गया। जेल से बाहर आकर मैंने रिक्शा चला कर अपनी गुजर करनी शुरू कर दी थी। इस बीच रिक्शा में बैठने वाली सवारियों की जिंदगी मुझे अपनी ओर खींचती। लोगों का आचरण, बोलने और उनके हाव-भाव को रेखांकित करने का हुनर मैंने वहीं सीखा। गौरतलब है कि व्यापारी की रचना 'अमानुषिक' जोकि धनंजय चटर्जी फांसी मामले पर आधारित है, में उनके इसी हुनर को बारीकी से समझा जा सकता है। दुष्कर्म केस में धनंजय को 2004 में फांसी दी गई थी।' व्यापारी कहते हैं- 'मैंने जिंदगी की कठोर हकीकतों को जिया है, मेरे अंदर इस कदर गुस्सा भरा हुआ था, जो बहकर कागजों पर फैल गया। जेल से बाहर आने के बाद एक दिन जो घटा उसने मेरे जीवन को एक दिशा दी जोकि संभव है मेरे जैसे हालात में किसी और को न मिले। हुआ यह था कि मैं अपनी रिक्शा पर एक महिला को लेकर उनकी मंजिल पर जा रहा था। मुझे लगा कि वह बेहद पढ़ी-लिखी महिला हैं तो मैंने उनसे एक शब्द का अर्थ पूछा। इस दौरान उन महिला ने मुझसे यह जानना चाहा कि आखिर मैंने उस शब्द को कहां पढ़ा है। मैंने एक किताब निकाली और उनके सामने पेश कर दी। जाते हुए उन महिला ने एक कागज पर अपना पता लिखा और मुझे देते हुए कहा कि मैं उनकी पत्रिका के लिए कुछ लिखकर दूं। और जब मैंने उस कागज को पूरा खोला तो उस पर एक नाम लिखा था- महाश्वेता देवी। बंगाली की सुविख्यात लेखिका से इस तरह परिचय होगा, यह मैंने कभी नहीं सोचा था।' 'मैं समझता हूं जैसे मुझे फिर से जन्म मिला। जब व्यापारी की लिखी स्टोरी महाश्वेता देवी की पत्रिका बर्तिका में छपी तो वे एक गंभीर लेखक बन चुके थे। इसके बाद तमाम अन्य कहानियों और निबंधों में उन्होंने अपने आक्रोश और अनुभवों को पिरोया। आपने महाश्वेता देवी से क्या पूछा था? व्यापारी बताते हैं- यह शब्द था, जिजीविषा। और महाश्वेता देवी ने मुझे इसका अर्थ समझाया था- जीने की चाह। (महाश्वेता देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं।)' व्यापारी के अनुसार, मैं बेशक लिख रहा था लेकिन मैंने अपने रोजगार रिक्शा चलाना को बंद नहीं किया था। लिखना आपका घर नहीं चला सकता। रोजी-रोटी के लिए कुछ और तो करना ही पड़ता है और रिक्शा चलाकर मैं अपनी इन्हीं जरूरतों को पूरा करता था। बाद में मैंने एक स्कूल में कुक का काम शुरू कर दिया। मेरी रचनाएं उस बंटे हुए समाज का दर्पण है, जिसमें हम रह रहे हैं। व्यापारी के अनुसार जेल जाने के बाद मुझ पर अपराधी का जो टैग लग चुका था, मैं उसे उतारना चाहता था, लोग मुझे गंभीरता से नहीं लेते थे। तब मेरे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था कि मैं सीखूं और आगे बढ़ूं। देश भर के समाचार पत्रों-पत्रिकाओं में दलितों के संबंध में जब-तब प्रकाशित होता रहता है, लेकिन मनोरंजन व्यापारी मानते हैं कि वह दलितों की असली जिंदगी को जाहिर नहीं करता। बकौल व्यापारी, मुझे नहीं लगता यह कोई दलित साहित्य है, जो लिख रहे हैं, उनके साथ कभी जब कुछ अप्रिय घटता है तो उससे प्रभावित होकर वे लिख देते हैं। व्यापारी कहते हैं, बहुत बार लोग एक शब्द बोलते हैं, चोरी-चमारी। चमार एक जाति है, तब आप कैसे इसे चोरी के साथ जोड़ सकते हो। मुझे इसका जवाब चाहिए। मैंने देखा है कि जब आप निम्न वर्ग से संबंधित होते हैं, तब अपने आप गरीब हो जाते हैं। बंगाल में दलित साहित्य कहीं नहीं है, हालांकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में काफी सक्रिय दलित लेखक हैं। मुझे इसका दुख होता है कि कैसे समाज को जाति में बांट दिया गया है और ऊंची जात के लोग किस तरह से हमारे संबंध में बात करते हैं। अपनी उपेक्षा मुझे परेशान करती है। व्यापारी कोलकाता के कालीघाट इलाके की एक घटना का वर्णन करते हैं, यहां रेड लाइट एरिया है, आवारागर्द लड़के नशाखोरी के लिए यहां जमा रहते हैं, पुलिस छापेमारी करती रहती है। एक बार रेड के दौरान एक पुलिस कर्मी ने एक लड़के को पकड़ लिया। मालूम हुआ कि वह लड़का पुलिस कर्मी की तरह ऊंची जाति से था। इस पर उस पुलिसकर्मी ने उसे सुधार गृह भिजवा दिया। व्यापारी के अनुसार महाश्वेता देवी जोकि ऊंची जाति से थीं, ने हमारे अधिकारों के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी। मनोरंजन व्यापारी की आत्मकथा 'इतिवृत्ते चांडाल जीवन' में कठिन जीवन संग्राम झकझोर देनेवाला है। 368 पृष्ठों की इस किताब में लेखक ने सिर्फ एक जीवन लिखा है। वह जीवन कभी आगे बढ़ता है कभी पीछे छूट जाता है। वह जीवन कभी हार जाता है तो कभी खो जाता है। खो जाने के बाद पुनः खोज लिया जाता है। वह आघात के ठोकर से क्षत-विक्षत होकर रक्ताक्त भी होता है। इस आत्मकथा में नव नाम का जो रिक्शा चालक है, लतखोर नाम का जो ट्रक खलासी है, जीवन नाम का जो क्रोधी चंडाल है, गुड़जोर नाम का जो शराबी है, बांगाल (उस पार से आए लोगों को बांगाल कहा जाता है) नाम का जो लेखक है, वे सभी मनोरंजन व्यापारी के खंडित रूप हैं। मनोरंजन व्यापारी का जन्म पूर्वी बंगाल के बरिशाल जिले के पिरिचपुर के निकट स्थित तुरुकखाली गांव के दलित मंडल परिवार में हुआ था। देश विभाजन के बाद उनका परिवार उस पार से विस्थापित होकर इस पार सुंदरवन पहुंचा था। मनोरंजन व्यापारी का बचपन शरणार्थी शिविरों में बीता जहां अन्न और वस्त्र के लाले पड़े रहते। स्कूल का मुंह देखने का सुयोग नहीं था। किशोरावस्था में ही उनकी जेल यात्रा हो गई और वहीं खुद की कोशिश से उन्होंने अक्षर ज्ञान अर्जित किया। जेल से लौटकर मनोरंजन ने रिक्शा चलाना शुरू किया। जीविका के लिए दूसरे कई काम भी किए। व्यापारी पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव में हुगली जिले के बालागढ़ निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव के लिए खड़े होंगे। उनके उम्मीदवार घोषित किए जाने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल में दलित साहित्य अकादमी के 70 वर्षीय अध्यक्ष व्यापारी के पहले चुनावी अभियान के पोस्टर में "रिक्शा ईबार बिधानसभा (रिक्शा अब विधानसभा की ओर)" का नारा दिया गया। जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके पास पहुंचीं, तो उन्होंने उम्मीदवारी के उनके प्रस्ताव को स्वीकार करने में संकोच नहीं किया। "मैंने पिछले एक दशक में मातुओं [एक अनुसूचित जाति समुदाय] के लिए और मेरे जैसे नामशूद्र लोगों के लिए उनका काम देखा है। जब उन्होंने मुझसे कहा, आपको जिम्मेदारी लेनी होगी', तो मेरे पास ना कहने का कोई कारण नहीं था," व्यापारी कहते हैं।
टीएमसी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए दो सौ इक्यानवे उम्मीदवारों की घोषणा की। ज्यादातर चालीस वर्ष से कम उम्र के कम से कम बारह हस्तियों ने सूची में स्थान पाया है। इन हस्तियों में फिल्मी कलाकार जून मालिया, सौयोनी घोष, सायंतिका बनर्जी और कंचन मुलिक; गायक अदिति मुंशी; निर्देशक राज चक्रवर्ती; और क्रिकेटर मनोज तिवारी शामिल हैं। उनमें से कुछ ने कुछ दिन पहले टीएमसी ज्वाइन की थी। टीएमसी ने दलित लेखक मनोरंजन व्यापारी और मोहन बागान के पूर्व कप्तान बिदेश बोस को भी टिकट दिया है। विधायक का चुनाव लड़ रहे प्रसिद्ध दलित लेखक मनोरंजन व्यापारी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लंबा संघर्ष किया है। उनके जीवन की कथा किसी फिल्म की तरह विविध अनुभवों से भरपूर है। सोलह साल का एक किशोर घर से भाग जाता है। उसे काम की तलाश थी। साल एक हज़ार नौ सौ सरसठ था, वह भाग कर सिलीगुड़ी आता है। तब बंगाल में नक्सल आंदोलन अपने चरम पर था। खैर, थक-हार कर वह किशोर फिर घर पहुंच गया। लेकिन इस बीच उसने कई नई बातें सीखीं। इनमें से एक बात यह भी थी कि किस्से कैसे गढ़े जाएं। उसने एक किस्सा गढ़ा- अपने दोस्तों को बताया कि वह नक्सली आंदोलन के संचालक कानू सान्याल से मिलकर आया है। उसकी बातों से प्रभावित होकर एक दोस्त ने दक्षिण कोलकाता में सीपीआई के होर्डिंग पर 'एल' शब्द और जोड़ दिया। एल से मतलब लेनिनवादी से था। इसका पता जब सीपीआई के नेताओं को लगा तो उन्होंने उस किशोर को लैम्पपोस्ट से बांध दिया और जमकर पिटाई की। संभव है यह एक लेखक के जन्म की शुरुआत थी, हालांकि उस किशोर के जीवन में अभी और भी बहुत कुछ घटना बाकी था। मनोरंजन व्यापारी बंगला साहित्य के जाने-माने रचनाकार हैं। उनका परिचय यह है कि वे दलित समाज से हैं, उन्होंने रिक्शा चलाया है, बतौर कुक काम किया है, जेल भी होकर आए हैं और इससे पहले एक गुंडा भी रह चुके हैं। व्यापारी साफ मन से जाहिर करते हैं, बंगाल में एक हज़ार नौ सौ साठ से एक हज़ार नौ सौ सत्तर के बीच ऐसे लोग सक्रिय थे, जिनका काम छोटे-मोटे अपराध करना था, मुझे भी इसका चाव चढ़ा था और मैं भी उनकी लाइन में आ गया। व्यापारी की दस किताबें और एक सौ निबंध प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें विभिन्न पुरस्कार और अवॉर्ड हासिल हो चुके हैं, जिनमें से एक पश्चिम बंगाल बांग्ला अकादमी अवॉर्ड भी शामिल है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित एक पत्रिका के सेमिनार में वे हिस्सा ले चुके हैं। वे दक्षिण कोलकाता के मुकंदपुर में एक छोटे से मकान में रहते हैं। व्यापारी बताते हैं- 'मैं बाईस साल का था और मुझे जेल हो गई थी, पढ़ना क्या होता है, इसकी समझ नहीं थी। जेल के बारे में कहते हैं कि उन्हें अपराधियों को सुधारने के लिए बनाया जाता है। हालांकि मैं जेल में गया तो जीवन ही बदल गया। जेल में एक कैदी ने मुझे अक्षर ज्ञान कराया। मैंने पढ़ने को क्यों इच्छुक हुआ, इसकी भी वजह है, वैसे यह वजह बेहद साधारण थी। मैंने सुना था कि जेल में उन लोगों को कुछ सम्मान मिलता है जोकि पढ़े-लिखे होते हैं। उन लोगों को काम भी अलग तरह के सौंपे जाते हैं, हालांकि जो पढ़े-लिखे नहीं होते, उन्हें आटा-चक्की पर या फिर दूसरे इसी तरह के काम दिए जाते। इस बात को ध्यान में रखकर मैंने अपने जीवन को सरल बनाने की कोशिश शुरू की। जेल में लिखने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं थी।' 'मैंने रेत पर लकड़ी के टुकड़े से लिखने की प्रैक्टिस शुरू की। हालांकि जिंदगी खुद एक पाठशाला है, मुझ पर केस गलत था और कोर्ट से मैं बरी हो गया। जेल से बाहर आकर मैंने रिक्शा चला कर अपनी गुजर करनी शुरू कर दी थी। इस बीच रिक्शा में बैठने वाली सवारियों की जिंदगी मुझे अपनी ओर खींचती। लोगों का आचरण, बोलने और उनके हाव-भाव को रेखांकित करने का हुनर मैंने वहीं सीखा। गौरतलब है कि व्यापारी की रचना 'अमानुषिक' जोकि धनंजय चटर्जी फांसी मामले पर आधारित है, में उनके इसी हुनर को बारीकी से समझा जा सकता है। दुष्कर्म केस में धनंजय को दो हज़ार चार में फांसी दी गई थी।' व्यापारी कहते हैं- 'मैंने जिंदगी की कठोर हकीकतों को जिया है, मेरे अंदर इस कदर गुस्सा भरा हुआ था, जो बहकर कागजों पर फैल गया। जेल से बाहर आने के बाद एक दिन जो घटा उसने मेरे जीवन को एक दिशा दी जोकि संभव है मेरे जैसे हालात में किसी और को न मिले। हुआ यह था कि मैं अपनी रिक्शा पर एक महिला को लेकर उनकी मंजिल पर जा रहा था। मुझे लगा कि वह बेहद पढ़ी-लिखी महिला हैं तो मैंने उनसे एक शब्द का अर्थ पूछा। इस दौरान उन महिला ने मुझसे यह जानना चाहा कि आखिर मैंने उस शब्द को कहां पढ़ा है। मैंने एक किताब निकाली और उनके सामने पेश कर दी। जाते हुए उन महिला ने एक कागज पर अपना पता लिखा और मुझे देते हुए कहा कि मैं उनकी पत्रिका के लिए कुछ लिखकर दूं। और जब मैंने उस कागज को पूरा खोला तो उस पर एक नाम लिखा था- महाश्वेता देवी। बंगाली की सुविख्यात लेखिका से इस तरह परिचय होगा, यह मैंने कभी नहीं सोचा था।' 'मैं समझता हूं जैसे मुझे फिर से जन्म मिला। जब व्यापारी की लिखी स्टोरी महाश्वेता देवी की पत्रिका बर्तिका में छपी तो वे एक गंभीर लेखक बन चुके थे। इसके बाद तमाम अन्य कहानियों और निबंधों में उन्होंने अपने आक्रोश और अनुभवों को पिरोया। आपने महाश्वेता देवी से क्या पूछा था? व्यापारी बताते हैं- यह शब्द था, जिजीविषा। और महाश्वेता देवी ने मुझे इसका अर्थ समझाया था- जीने की चाह। ' व्यापारी के अनुसार, मैं बेशक लिख रहा था लेकिन मैंने अपने रोजगार रिक्शा चलाना को बंद नहीं किया था। लिखना आपका घर नहीं चला सकता। रोजी-रोटी के लिए कुछ और तो करना ही पड़ता है और रिक्शा चलाकर मैं अपनी इन्हीं जरूरतों को पूरा करता था। बाद में मैंने एक स्कूल में कुक का काम शुरू कर दिया। मेरी रचनाएं उस बंटे हुए समाज का दर्पण है, जिसमें हम रह रहे हैं। व्यापारी के अनुसार जेल जाने के बाद मुझ पर अपराधी का जो टैग लग चुका था, मैं उसे उतारना चाहता था, लोग मुझे गंभीरता से नहीं लेते थे। तब मेरे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था कि मैं सीखूं और आगे बढ़ूं। देश भर के समाचार पत्रों-पत्रिकाओं में दलितों के संबंध में जब-तब प्रकाशित होता रहता है, लेकिन मनोरंजन व्यापारी मानते हैं कि वह दलितों की असली जिंदगी को जाहिर नहीं करता। बकौल व्यापारी, मुझे नहीं लगता यह कोई दलित साहित्य है, जो लिख रहे हैं, उनके साथ कभी जब कुछ अप्रिय घटता है तो उससे प्रभावित होकर वे लिख देते हैं। व्यापारी कहते हैं, बहुत बार लोग एक शब्द बोलते हैं, चोरी-चमारी। चमार एक जाति है, तब आप कैसे इसे चोरी के साथ जोड़ सकते हो। मुझे इसका जवाब चाहिए। मैंने देखा है कि जब आप निम्न वर्ग से संबंधित होते हैं, तब अपने आप गरीब हो जाते हैं। बंगाल में दलित साहित्य कहीं नहीं है, हालांकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में काफी सक्रिय दलित लेखक हैं। मुझे इसका दुख होता है कि कैसे समाज को जाति में बांट दिया गया है और ऊंची जात के लोग किस तरह से हमारे संबंध में बात करते हैं। अपनी उपेक्षा मुझे परेशान करती है। व्यापारी कोलकाता के कालीघाट इलाके की एक घटना का वर्णन करते हैं, यहां रेड लाइट एरिया है, आवारागर्द लड़के नशाखोरी के लिए यहां जमा रहते हैं, पुलिस छापेमारी करती रहती है। एक बार रेड के दौरान एक पुलिस कर्मी ने एक लड़के को पकड़ लिया। मालूम हुआ कि वह लड़का पुलिस कर्मी की तरह ऊंची जाति से था। इस पर उस पुलिसकर्मी ने उसे सुधार गृह भिजवा दिया। व्यापारी के अनुसार महाश्वेता देवी जोकि ऊंची जाति से थीं, ने हमारे अधिकारों के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी। मनोरंजन व्यापारी की आत्मकथा 'इतिवृत्ते चांडाल जीवन' में कठिन जीवन संग्राम झकझोर देनेवाला है। तीन सौ अड़सठ पृष्ठों की इस किताब में लेखक ने सिर्फ एक जीवन लिखा है। वह जीवन कभी आगे बढ़ता है कभी पीछे छूट जाता है। वह जीवन कभी हार जाता है तो कभी खो जाता है। खो जाने के बाद पुनः खोज लिया जाता है। वह आघात के ठोकर से क्षत-विक्षत होकर रक्ताक्त भी होता है। इस आत्मकथा में नव नाम का जो रिक्शा चालक है, लतखोर नाम का जो ट्रक खलासी है, जीवन नाम का जो क्रोधी चंडाल है, गुड़जोर नाम का जो शराबी है, बांगाल नाम का जो लेखक है, वे सभी मनोरंजन व्यापारी के खंडित रूप हैं। मनोरंजन व्यापारी का जन्म पूर्वी बंगाल के बरिशाल जिले के पिरिचपुर के निकट स्थित तुरुकखाली गांव के दलित मंडल परिवार में हुआ था। देश विभाजन के बाद उनका परिवार उस पार से विस्थापित होकर इस पार सुंदरवन पहुंचा था। मनोरंजन व्यापारी का बचपन शरणार्थी शिविरों में बीता जहां अन्न और वस्त्र के लाले पड़े रहते। स्कूल का मुंह देखने का सुयोग नहीं था। किशोरावस्था में ही उनकी जेल यात्रा हो गई और वहीं खुद की कोशिश से उन्होंने अक्षर ज्ञान अर्जित किया। जेल से लौटकर मनोरंजन ने रिक्शा चलाना शुरू किया। जीविका के लिए दूसरे कई काम भी किए। व्यापारी पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव में हुगली जिले के बालागढ़ निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव के लिए खड़े होंगे। उनके उम्मीदवार घोषित किए जाने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल में दलित साहित्य अकादमी के सत्तर वर्षीय अध्यक्ष व्यापारी के पहले चुनावी अभियान के पोस्टर में "रिक्शा ईबार बिधानसभा " का नारा दिया गया। जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके पास पहुंचीं, तो उन्होंने उम्मीदवारी के उनके प्रस्ताव को स्वीकार करने में संकोच नहीं किया। "मैंने पिछले एक दशक में मातुओं [एक अनुसूचित जाति समुदाय] के लिए और मेरे जैसे नामशूद्र लोगों के लिए उनका काम देखा है। जब उन्होंने मुझसे कहा, आपको जिम्मेदारी लेनी होगी', तो मेरे पास ना कहने का कोई कारण नहीं था," व्यापारी कहते हैं।
हल. इंग्लैंड में रहने वाली एक महिला की सालभर की बेटी ने अचानक उसके एक लेफ्ट ब्रेस्ट (स्तन) से दूध पीना बंद कर दिया। महिला को पहले तो ये नॉर्मल लगा, लेकिन जब उसने डॉक्टर को जाकर दिखाया तो उसके होश उड़ गए। जांच से पता चला कि महिला के स्तन में एक गांठ बन गई थी, जिसमें कैंसर हो गया था। लेकिन सही वक्त पर पता चल जाने की वजह से कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया और अब महिला कैंसर मुक्त हो चुकी है। वो कहती है कि मेरी बेटी ने ही मेरी जान बचाई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हल. इंग्लैंड में रहने वाली एक महिला की सालभर की बेटी ने अचानक उसके एक लेफ्ट ब्रेस्ट से दूध पीना बंद कर दिया। महिला को पहले तो ये नॉर्मल लगा, लेकिन जब उसने डॉक्टर को जाकर दिखाया तो उसके होश उड़ गए। जांच से पता चला कि महिला के स्तन में एक गांठ बन गई थी, जिसमें कैंसर हो गया था। लेकिन सही वक्त पर पता चल जाने की वजह से कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया और अब महिला कैंसर मुक्त हो चुकी है। वो कहती है कि मेरी बेटी ने ही मेरी जान बचाई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आज रेसिपी ऑफ द डे में हम आपको स्वाद और सेहत से भरपूर सेब के मुरब्बे की रेसिपी बताने जा रहे हैं। एन एप्पल ए डे कीप्स द डॉक्टर अवे, यह कहावत तो हर किसी ने सुनी है और ज्यादातर लोग इस पर पर अमल भी करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सेब विटामिन्स, मिनरल्स और बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसलिए हर कोई रोजाना एक सेब खाने की कोशिश करता है। लेकिन अगर आप सेब खाकर बोर हो गए हैं या आपके बच्चे सेब खाने से बचते हैं तो आज हम रेसिपी ऑफ द डे में आपके लिए स्वाद और सेहत से भरपूर सेब का मुरब्बा की रेसिपी लेकर आए हैं जिसे घर पर बनाना बेहद सरल होता है। जी हां अगर आपको स्वाद के साथ-साथ अपनी और परिवार वालों की सेहत का पूरा ख्याल है तो घर में बने इस सेब के मुरब्बे को अपने डाइट रूटीन में जरूर शामिल करें। आइए घर में सेब का मुरब्बा बनाने का तरीका जानते हैं। - Step 1 : सेब का मुरब्बा बनाने के लिए सबसे पहले सेब को अच्छे तरह से धोकर साफ कर लें और इसका छिलका उतार लें। - Step 2 : इसके बाद एक बड़े बर्तन में पानी लेकर गैस पर रखें और एक उबाल आने तक गर्म करें। पानी में उबाल आने पर इसमें छीले हुए सेब डालें और हल्का नरम होने तक पकाएं। - Step 3 : जब सेब नरम हो जाए तो इन्हें गर्म पानी से बाहर निकाल लें। फिर सेब के गर्म पानी में चीनी डालकर गाढ़ी चाशनी बनने तक पकाएं। चाशनी बनने पर उसमें नींबू का रस और इलायची पाउडर डालकर मिक्स करें। - Step 4 : अब चाशनी में पके हुए सेब डालकर 2 दिनों तक अलग रख दें, लेकिन बीच-बीच में मुरब्बे को चलाते रहें। 2 दिन बाद आपका सेब का मुरब्बा बनकर तैयार हो जाएगा। - Step 5 : घर पर बने इस सेब के मुरब्बे को फ्रिज में रखकर 2 महीनों तक खाया जा सकता है। इसे लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए आप चाशनी में एसिटीक एसिड की 1 छोटी चम्मच डालकर अच्छी तरह मिला लें। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
आज रेसिपी ऑफ द डे में हम आपको स्वाद और सेहत से भरपूर सेब के मुरब्बे की रेसिपी बताने जा रहे हैं। एन एप्पल ए डे कीप्स द डॉक्टर अवे, यह कहावत तो हर किसी ने सुनी है और ज्यादातर लोग इस पर पर अमल भी करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सेब विटामिन्स, मिनरल्स और बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसलिए हर कोई रोजाना एक सेब खाने की कोशिश करता है। लेकिन अगर आप सेब खाकर बोर हो गए हैं या आपके बच्चे सेब खाने से बचते हैं तो आज हम रेसिपी ऑफ द डे में आपके लिए स्वाद और सेहत से भरपूर सेब का मुरब्बा की रेसिपी लेकर आए हैं जिसे घर पर बनाना बेहद सरल होता है। जी हां अगर आपको स्वाद के साथ-साथ अपनी और परिवार वालों की सेहत का पूरा ख्याल है तो घर में बने इस सेब के मुरब्बे को अपने डाइट रूटीन में जरूर शामिल करें। आइए घर में सेब का मुरब्बा बनाने का तरीका जानते हैं। - Step एक : सेब का मुरब्बा बनाने के लिए सबसे पहले सेब को अच्छे तरह से धोकर साफ कर लें और इसका छिलका उतार लें। - Step दो : इसके बाद एक बड़े बर्तन में पानी लेकर गैस पर रखें और एक उबाल आने तक गर्म करें। पानी में उबाल आने पर इसमें छीले हुए सेब डालें और हल्का नरम होने तक पकाएं। - Step तीन : जब सेब नरम हो जाए तो इन्हें गर्म पानी से बाहर निकाल लें। फिर सेब के गर्म पानी में चीनी डालकर गाढ़ी चाशनी बनने तक पकाएं। चाशनी बनने पर उसमें नींबू का रस और इलायची पाउडर डालकर मिक्स करें। - Step चार : अब चाशनी में पके हुए सेब डालकर दो दिनों तक अलग रख दें, लेकिन बीच-बीच में मुरब्बे को चलाते रहें। दो दिन बाद आपका सेब का मुरब्बा बनकर तैयार हो जाएगा। - Step पाँच : घर पर बने इस सेब के मुरब्बे को फ्रिज में रखकर दो महीनों तक खाया जा सकता है। इसे लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए आप चाशनी में एसिटीक एसिड की एक छोटी चम्मच डालकर अच्छी तरह मिला लें। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
लखनऊ, 16 फरवरीः बसपा अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को गुरु रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और नेताओं को उनके जन्मस्थान "सीर गोवर्धन" में स्वार्थ के लिए मत्था टेकने के प्रति आगाह किया। आपको बता दें कि बसपा कार्यालय की ओर से यहां जारी एक बयान में पार्टी सुप्रीमो ने देश-दुनिया में रह रहे रविदास के करोड़ों अनुयायियों को श्रद्धांजलि दी और संत के सम्मान में उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का जिक्र किया. मायावती ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने अपनी जातिवादी मानसिकता और राजनीतिक नफरत के कारण संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया, मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार ने भी नाम को बहाल नहीं किया। 'सीर गोवर्धन' में संत रविदास की जन्मस्थली पर श्रद्धांजलि देने आए नेताओं पर तंज कसते हुए मायावती ने दावा किया कि जो लोग संतों और उनकी शिक्षाओं की उपेक्षा करते हैं, वे अब वोट पाने के स्वार्थ के लिए सिर झुका रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है जो सिर्फ वोट की राजनीति करने में माहिर हैं।
लखनऊ, सोलह फरवरीः बसपा अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को गुरु रविदास की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और नेताओं को उनके जन्मस्थान "सीर गोवर्धन" में स्वार्थ के लिए मत्था टेकने के प्रति आगाह किया। आपको बता दें कि बसपा कार्यालय की ओर से यहां जारी एक बयान में पार्टी सुप्रीमो ने देश-दुनिया में रह रहे रविदास के करोड़ों अनुयायियों को श्रद्धांजलि दी और संत के सम्मान में उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का जिक्र किया. मायावती ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने अपनी जातिवादी मानसिकता और राजनीतिक नफरत के कारण संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया, मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार ने भी नाम को बहाल नहीं किया। 'सीर गोवर्धन' में संत रविदास की जन्मस्थली पर श्रद्धांजलि देने आए नेताओं पर तंज कसते हुए मायावती ने दावा किया कि जो लोग संतों और उनकी शिक्षाओं की उपेक्षा करते हैं, वे अब वोट पाने के स्वार्थ के लिए सिर झुका रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है जो सिर्फ वोट की राजनीति करने में माहिर हैं।
जम्मू-कश्मीर में तैनात अधिकारी और सुरक्षबलों की मानें तो परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हैं। धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही घाटी में बंद है। वहां मौजूद अधिकारियों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने के बजाय और भी ज्यादा बिगड़ सकती है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही मोदी सरकार लगातार यही दावा कर रही है कि घाटी में सब ठीक है, सब कुछ सामान्य है। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में तैनात अधिकारी और सुरक्षबलों की मानें तो परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हैं। धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही घाटी में बंद है, दो महीने बाद भी हालात जस के तस हैं। वहां मौजूद अधिकारियों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने के बजाय और भी ज्यादा बिगड़ सकती है। बाजार में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है। इनंटरनेट और सेलफोन सेवा अभी तक पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाई है। इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज बंद हैं। सैकड़ों लोग हिरासत में हैं। हालांकि, राज्यपाल कह रहे हैं कि हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं और इसी वजह से पर्यटकों को प्रतिबंधित करने वाले आदेश वापस लिए जा रह हैं। लेकिन इसका कोई असर होता दिख नहीं रहा है। इस स्थिति में कोई भी पर्यटक शायद ही वहां जाए। वहीं बीजेपी को छोड़कर 24 अक्टूबर को होने वाले ब्लॉक विकास परिषद (बीडीसी) का चुनाव लड़ने से सभी दलों ने इनकार कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर में तैनात अधिकारी और सुरक्षबलों की मानें तो परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हैं। धारा तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद से ही घाटी में बंद है। वहां मौजूद अधिकारियों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने के बजाय और भी ज्यादा बिगड़ सकती है। जम्मू-कश्मीर से धारा तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद से ही मोदी सरकार लगातार यही दावा कर रही है कि घाटी में सब ठीक है, सब कुछ सामान्य है। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में तैनात अधिकारी और सुरक्षबलों की मानें तो परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हैं। धारा तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद से ही घाटी में बंद है, दो महीने बाद भी हालात जस के तस हैं। वहां मौजूद अधिकारियों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने के बजाय और भी ज्यादा बिगड़ सकती है। बाजार में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है। इनंटरनेट और सेलफोन सेवा अभी तक पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाई है। इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज बंद हैं। सैकड़ों लोग हिरासत में हैं। हालांकि, राज्यपाल कह रहे हैं कि हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं और इसी वजह से पर्यटकों को प्रतिबंधित करने वाले आदेश वापस लिए जा रह हैं। लेकिन इसका कोई असर होता दिख नहीं रहा है। इस स्थिति में कोई भी पर्यटक शायद ही वहां जाए। वहीं बीजेपी को छोड़कर चौबीस अक्टूबर को होने वाले ब्लॉक विकास परिषद का चुनाव लड़ने से सभी दलों ने इनकार कर दिया है।
Rewa Lokayukta Trap News: रीवा लोकायुक्त टीम ने 10 हजार की रिश्वत लेते एसडीएम के रीडर को ट्रेप किया है। लोकायुक्त द्वारा यह कार्रवाई कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनगवां रीवा द्वारा की गई है। गुरूवार की सुबह कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त टीम ने रीडर कमलेश तिवारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं दंडाधिकारी तहसील मनगवां रीवा को रंगे हांथो पकड़ लिया है। क्यों मांगी रिश्वत? बताया गया है कि तहसील मनगवां के सेमरी कला निवासी विपुल मिश्रा ने जमीन पर स्िगन से फाइल हटाने के लिए एवं प्रकरण खारिज करने के लिए कार्यालय में आवेदन किया था। लेकिन कार्य करने के बदले रीडर द्वारा आवेदक से 20 हजार की मांग की थी। लेकिन अंत में 10 हजार में मामला तय हुआ। आवेदक विपुल द्वारा ने रीडर द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त में की। जिसके बाद लोकायुक्त द्वारा मामले की अपने स्तर पर जांच की गई। जांच के बाद शिकायत सही पाई गई। इसी कड़ी में गुरूवार को आवेदक ने जैसे ही विभाग के अंदर रीडर को पैसे दिए लोकायुक्त ने उसे पकड़ लिया। आरोपी को लोकायुक्त टीम पकड़ कर रेस्ट हाउस ले गई। जहां कार्रवाई जारी है। यह कार्रवाई डीएसपी राजेश पाठक द्वारा की गई। कार्रवाई के दौरान टीम में निरीक्षक जियाउल हक, उप निरीक्षक आकांक्षा पाण्डेय, सुरेश साकेत, मुकेश मिश्रा, पवन पाण्डेय, मनोज मिश्रा, प्रेम सिंह, लवलेश पाण्डेय सहित अन्य लोग शामिल रहे।
Rewa Lokayukta Trap News: रीवा लोकायुक्त टीम ने दस हजार की रिश्वत लेते एसडीएम के रीडर को ट्रेप किया है। लोकायुक्त द्वारा यह कार्रवाई कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनगवां रीवा द्वारा की गई है। गुरूवार की सुबह कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त टीम ने रीडर कमलेश तिवारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं दंडाधिकारी तहसील मनगवां रीवा को रंगे हांथो पकड़ लिया है। क्यों मांगी रिश्वत? बताया गया है कि तहसील मनगवां के सेमरी कला निवासी विपुल मिश्रा ने जमीन पर स्िगन से फाइल हटाने के लिए एवं प्रकरण खारिज करने के लिए कार्यालय में आवेदन किया था। लेकिन कार्य करने के बदले रीडर द्वारा आवेदक से बीस हजार की मांग की थी। लेकिन अंत में दस हजार में मामला तय हुआ। आवेदक विपुल द्वारा ने रीडर द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त में की। जिसके बाद लोकायुक्त द्वारा मामले की अपने स्तर पर जांच की गई। जांच के बाद शिकायत सही पाई गई। इसी कड़ी में गुरूवार को आवेदक ने जैसे ही विभाग के अंदर रीडर को पैसे दिए लोकायुक्त ने उसे पकड़ लिया। आरोपी को लोकायुक्त टीम पकड़ कर रेस्ट हाउस ले गई। जहां कार्रवाई जारी है। यह कार्रवाई डीएसपी राजेश पाठक द्वारा की गई। कार्रवाई के दौरान टीम में निरीक्षक जियाउल हक, उप निरीक्षक आकांक्षा पाण्डेय, सुरेश साकेत, मुकेश मिश्रा, पवन पाण्डेय, मनोज मिश्रा, प्रेम सिंह, लवलेश पाण्डेय सहित अन्य लोग शामिल रहे।
नेपाल की राजधानी काठमांडो में आज 7. 5 तीव्रता का जबरदस्त भूकंप आया जहां कुछ घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। भूकंप के कारण लोगों के हताहत होने के बारे में तत्काल कोई सूचना नहीं है। भूकंप दोपहर के आसपास आया और भारत के साथ ही पाकिस्तान में भी महसूस किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 3 बजे आपात बैठक बुलाई है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार और सिक्किम के मुख्यमंत्री से बात कर वहां की जानकारी मांगी। News has come in about an Earthquake in Nepal. Several parts of India also experienced tremors. पाकिस्तान में लाहौर निवासी मोहम्मद शहाब ने बताया कि वह अपने कार्यालय में बैठे हुए थे कि तभी पूरा शहर भूकंप से हिल गया। उन्होंने बताया कि भूकंप काफी देर तक महसूस किया गया लेकिन शहर में अब स्थिति सामान्य है। भारत की राजधानी दिल्ली समेत देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में भी भूकंप महसूस किया गया। अमेरिकी ज्योलोजिकल सर्वे ने कहा है कि भूकंप के चलते नेपाल में भारी नुकसान की आशंका है।
नेपाल की राजधानी काठमांडो में आज सात. पाँच तीव्रता का जबरदस्त भूकंप आया जहां कुछ घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। भूकंप के कारण लोगों के हताहत होने के बारे में तत्काल कोई सूचना नहीं है। भूकंप दोपहर के आसपास आया और भारत के साथ ही पाकिस्तान में भी महसूस किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तीन बजे आपात बैठक बुलाई है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार और सिक्किम के मुख्यमंत्री से बात कर वहां की जानकारी मांगी। News has come in about an Earthquake in Nepal. Several parts of India also experienced tremors. पाकिस्तान में लाहौर निवासी मोहम्मद शहाब ने बताया कि वह अपने कार्यालय में बैठे हुए थे कि तभी पूरा शहर भूकंप से हिल गया। उन्होंने बताया कि भूकंप काफी देर तक महसूस किया गया लेकिन शहर में अब स्थिति सामान्य है। भारत की राजधानी दिल्ली समेत देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में भी भूकंप महसूस किया गया। अमेरिकी ज्योलोजिकल सर्वे ने कहा है कि भूकंप के चलते नेपाल में भारी नुकसान की आशंका है।
स्टीमपंक युग की दिलचस्प कलाकृतियां हैं मोबाइल सेना सर्चलाइट्स जो स्टीम जनरेटर द्वारा संचालित होती हैं। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में, उन्हें हमारे सामान्य गैस जनरेटर - हल्के, अधिक कॉम्पैक्ट, शक्तिशाली और संचालित करने के लिए सरल द्वारा दबा दिया गया था। हालांकि, "स्टीम सर्चलाइट्स" का एक फायदा था, क्योंकि वे सार्वभौमिक रूप से उपलब्ध लकड़ी के ईंधन पर चल सकते थे। कर्नल मन्ज़िन की स्टीम सर्चलाइट वैगन एक दो-पहिया पहाड़ गाड़ी पर, 1885 वर्ष के लिए जर्नल साइंटिफिक अमेरिकन के मई अंक में वर्णित है। जनरेटर जिसने 12-inch फ्लडलाइट के लिए ऊर्जा प्रदान की थी, एक छोटे तीन-सिलेंडर स्टीम इंजन द्वारा संचालित था। दक्षिण-पूर्व, लेमनियर एंड कंपनी द्वारा 1881 में उत्पादित एक सर्चलाइट को बिजली देने के लिए फ्रांसीसी स्व-चालित भाप जनरेटर। स्पॉटलाइट के साथ अमेरिकी फायर ट्रक। इलेक्ट्रिक जनरेटर के अलावा, भाप इंजन ने पानी पंप की सेवा की। एक ट्रेवल्ड सर्चलाइट के साथ एक अंग्रेजी स्टीम ट्रैक्टर-जनरेटर का कॉम्बैट क्रू। 1910 में माल्टा में लिया गया फोटो। स्टीम जनरेटर फ्लोयड सॉटर और लेमियर एक द्विअक्षीय घोड़े की नाल वाली गाड़ी पर। एक्सएनयूएमएक्स स्पॉटलाइट के लिए जनरेटर एक डी डायोन-बुटन स्टीम इंजन द्वारा संचालित किया गया था, जो बाद में आंतरिक दहन इंजन और ऑटोमोबाइल के उत्पादन में बदल गया। बाईं ओर लकड़ी के पहियों के साथ एक गाड़ी पर Southter और Lemonier फ्लडलाइट का थोड़ा संशोधित संस्करण है। दाईं ओर कर्नल मंझिन की एक और फ्रांसीसी सेना की खोज है, जो एक बाहरी बिजली जनरेटर और एक मैनुअल ड्राइव के साथ अपने स्वयं के जनरेटर से काम कर सकता है। इस डायनेमो का घूमने वाला हैंडल बाएं पहिया के ऊपर दिखाई देता है। यह आधुनिक हाथ लालटेन का बड़ा और कठोर पूर्वज है - "हमर"।
स्टीमपंक युग की दिलचस्प कलाकृतियां हैं मोबाइल सेना सर्चलाइट्स जो स्टीम जनरेटर द्वारा संचालित होती हैं। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में, उन्हें हमारे सामान्य गैस जनरेटर - हल्के, अधिक कॉम्पैक्ट, शक्तिशाली और संचालित करने के लिए सरल द्वारा दबा दिया गया था। हालांकि, "स्टीम सर्चलाइट्स" का एक फायदा था, क्योंकि वे सार्वभौमिक रूप से उपलब्ध लकड़ी के ईंधन पर चल सकते थे। कर्नल मन्ज़िन की स्टीम सर्चलाइट वैगन एक दो-पहिया पहाड़ गाड़ी पर, एक हज़ार आठ सौ पचासी वर्ष के लिए जर्नल साइंटिफिक अमेरिकन के मई अंक में वर्णित है। जनरेटर जिसने बारह-inch फ्लडलाइट के लिए ऊर्जा प्रदान की थी, एक छोटे तीन-सिलेंडर स्टीम इंजन द्वारा संचालित था। दक्षिण-पूर्व, लेमनियर एंड कंपनी द्वारा एक हज़ार आठ सौ इक्यासी में उत्पादित एक सर्चलाइट को बिजली देने के लिए फ्रांसीसी स्व-चालित भाप जनरेटर। स्पॉटलाइट के साथ अमेरिकी फायर ट्रक। इलेक्ट्रिक जनरेटर के अलावा, भाप इंजन ने पानी पंप की सेवा की। एक ट्रेवल्ड सर्चलाइट के साथ एक अंग्रेजी स्टीम ट्रैक्टर-जनरेटर का कॉम्बैट क्रू। एक हज़ार नौ सौ दस में माल्टा में लिया गया फोटो। स्टीम जनरेटर फ्लोयड सॉटर और लेमियर एक द्विअक्षीय घोड़े की नाल वाली गाड़ी पर। एक्सएनयूएमएक्स स्पॉटलाइट के लिए जनरेटर एक डी डायोन-बुटन स्टीम इंजन द्वारा संचालित किया गया था, जो बाद में आंतरिक दहन इंजन और ऑटोमोबाइल के उत्पादन में बदल गया। बाईं ओर लकड़ी के पहियों के साथ एक गाड़ी पर Southter और Lemonier फ्लडलाइट का थोड़ा संशोधित संस्करण है। दाईं ओर कर्नल मंझिन की एक और फ्रांसीसी सेना की खोज है, जो एक बाहरी बिजली जनरेटर और एक मैनुअल ड्राइव के साथ अपने स्वयं के जनरेटर से काम कर सकता है। इस डायनेमो का घूमने वाला हैंडल बाएं पहिया के ऊपर दिखाई देता है। यह आधुनिक हाथ लालटेन का बड़ा और कठोर पूर्वज है - "हमर"।
नाहीं । जो चोरनिमें शिरोमणि अर जारनिमें शिरोमणि है सो कैसे आराधने योग्य होय । बहुरि सर्वज्ञवीतरागका उपदेश्या अर प्रत्यक्ष अनुमानादिकरि जामें सर्वथा बाधा नाहीं आवै अर समस्त छहकायके जीवनिकी हिंसारहित धर्मका उपदेशक आत्माका उद्धारक अनेकांतरूप वस्तुकू साक्षात् प्रगट करनेवाला ही गम है सो पढ़ने पढ़ावने श्रवणकरने श्रद्धानकरने वंदने योग्य है । अर जे रागी द्वेषीनिकरि प्ररूपणकिये अर विषयानुराग अर कषायके बधावनेवारे जिनमें हिंसा के करनेका उपदेश है ऐसे प्रत्यक्ष अनुमानकरि बाधित एकांतरूप शास्त्र श्रवण पढनेयोग्य नाहीं वन्दनायोग्य नाहीं हैं। बहुरि विषयनिकी वांछाका अर कषायका अरआरम्भपरिग्रहका जाकै अत्यन्त अभाव भया, केवल आत्माकी उज्ज्वलता करनेमें उद्यमी, ध्यान स्वाध्याय में अत्यन्त लोन, स्वाधीन कर्मवं धजनित दुःख सुखमें साम्यभावके धारक, जीवन मरण, लाभ श्रलाभ स्तवननिंदनेमें रागद्वेषरहित उपसर्गपरीषहनिके सहने में अकम्प धैर्यके धारक परमनिर्ग्रन्थ दिगम्बर गुरु ही वंदन स्तवन करनेयोग्य हैं अन्य आरम्भी कषायी विषयानुरागी कुगुरु कदाचित् स्तवन वन्दन करने योग्य नाहीं हैं। बहुरि जीवदया ही धर्म है हिंसा कदाचित् धर्म नाहीं जो कदाचित् सूर्यका उदय पश्चिम दिशा में होजाय अर अग्नि शीतल होजाय अर सर्पका मुखमें अमृत हो जाय र मेरु चलि जाय श्रर पृथ्वी उलटपलट होजाय तो हू हिंसामें तो धर्म कदाचित् नाहीं होय । ऐसा दृढश्रद्धान सम्यग्दृष्टिके होय है जाकै अपने आत्माके अनुभवन में अर सर्वज्ञ वीतरागरूप आपके स्वरूप में कर निग्रंथ विषयकषायरहित गुरुमें अर अने कांतस्वरूप आगममें अर दयारूप धर्ममें शंकाका अभाव सो निःशंकित अग है सम्यग्दृष्टि यामें कदाचित् शंका नाहीं करै है । बहुरि सम्यग्दृष्टि है सो धर्मसेवनकरि विषयनिकी वांछा नाहीं करै है जातैं सम्यग्दृष्टिकू इन्द्र अहमिन्द्रलोकके विषै हू महान वेदनारूप विनाशीक पापका बीज दोख़ है अर धर्मका फल अनन्त अविनाशी स्वाधीन सुखकरियुक्त मोक्ष दीखे है तातैं ज सें बहूमूल्य रत्न छांडि काचखण्डकू जोहरी नाहीं ग्रहण करें है तैसें जाकू सांचा आत्मीक अविनाशी बाधारहित सुख दीख्या सो झूठा बाधासहित विषयनिका सुखमें कैसैं वांछा करता सम्यग्दृष्टि वांछारहित ही होय है। श्रर जो अव्रती सम्यग्दृष्टिके वर्तमानकालमें आजीविका दिकनिमें तथा स्थानादिकपरिग्रह में वेदनाके अभाव जो वांछा होय है सो वर्तमानकालकी वेदना सहने की सामर्थ्य वेदनाका इलाजमात्र चाहै है। जैसे रोगी कति विरक्त होय है तो हू वेदनाका दःख नाहीं सह्या जाय तातैं कडवी औषधि वमन विरेचनादिकका कारण हू ग्रहण करै है, दुर्गंध तैलादिक हू लगावै है अन्तरङ्गमें औषधित अनुराग नहीं है तँसैं सम्यग्दृष्टि निर्वाछक है तो हू वर्तमानके दुःख मेटनेकू' योग्य न्यायके विषयनिकी वांछा करै है। जिनकै प्रत्याख्यान अप्रत्याख्यानावरणकषायका अभाव भया अपना सौ खंड होय तो हू विषयवांछा नाहीं करें हैं यात सम्यग्दृष्टिके निःकांक्षित गुरण होय ही है। बहुरि सम्यग्दृष्टि अशुभ कर्मके उदय प्राप्त भई अशुभ सामग्री तिसमें ग्लानि नाहीं करै, परिणाम नाहीं विगार्डे है पूष जैसा कर्म बांध्या तैसा भोजन पान स्त्री पुत्र दरिद्र संपदा आपदाकू प्राप्त भया हूँ तथा अन्य किसीकू रोगी दरिद्री हीन नीच मलीन देखि परिणाम नाहीं विगाड़े है, पापकी सामग्री जानि कलुषता नाहीं करै है तथा मलमुत्र कर्दमादि द्रव्यकू' देखि अर भयङ्कर श्मसान वनादि क्षेत्रकू देखि, भयरूप दुःखदायी कालकू देखि, दुष्टपना कडवापना इत्यादिक वस्तुका स्वभावकू देखि अपना निर्विचिकित्सित अंग सम्यग्दृष्टिके होय ही है । बहुरि खोटे शास्त्रनित तथा व्यन्तरादिक देवनिकृत विक्रिया तथा मरिण मन्त्र औषदिनिके प्रभाव अनेक वस्तुनिके , विपरीत स्वभाव देखि सत्यार्थ धर्म चलायमान नाहीं होना सो सम्यग्दर्शनका अमूढदृष्टि गुण है सो सम्यग्दृष्टिके होय ही है । बहुरि सम्यग्दृष्टि अन्य जीवनिके ज्ञान लगे हुए दोष देखि आच्छादन करै है जो संसारीजीव ज्ञानावरण दर्शनावरण मोहनीय कमके वशि होय अपना स्वभाव भूल रहे हैं कर्मके आधीन असत्य परधनहरण कुशीलादि पापनि में प्रवृत्ति करें हैं जे पापति दूर बतें हैं ते धन्य हैं । बहुरि कोऊ धर्मात्मा पुरुष (नामी पुरुष) पापके उदय चूकि जाय ताकू देखि ऐसा विचारै जो यो दोष प्रगट होसी तो अन्य धर्मात्मा भर जिन धर्मकी बड़ी निन्दा होसी या जानि दोष आच्छादन करै अर अपना गुण होय ताकी प्रशंसा का इच्छुक नाहीं होय है सो यो उपगूहनगुण सम्यक्त्वको है इन गुणनितैं पवित्र उज्ज्वल दर्शन विशुद्धता नाम भावना होय है । बहुरि जो धर्मसहित पुरुषका परिणाम कदाचित् रोगकी ३६१ ) वेदनाकरि धर्म चलि जाय तथा दारिद्रकरि चलि जाय तथा उपसर्ग परीसहनिकरि चलिजाय तथा असहायताकरि तथा आहारपानका निरोधकरि परिणाम धर्मर्ते शिथिल हो जाय ताकू उपदेशकरि धर्म में स्थम्भन करै । भो ज्ञानी भो धर्मके धारक ! तुम सचेत होहू कैसे कायरता धारणकरि धर्ममें सिथिल भए हो जो रोगकी वेदना धर्म चिगो हो, ज्ञानी होय कैसैं भूलो हो यो असतावेदनकर्म अपना अवसर पाय उदय में आ गया है अब जो कायर होय दीनताकरि रुदनविलापादि करते भोगोगे तो कर्म नाहीं छोड़ेगा कर्मके दया नाहीं होय है और धीर तो कर्म नाहीं छोड़ेगा कोऊ देवदानव मन्त्रतन्त्र औषधादिक तथा स्त्री, पुत्र, मित्र, बांधव सेवक सुभटादिक उदयमें आया कर्म हरनेकू' समर्थ है नाहीं यो तुम अच्छी तरह समझो हो अब इस वेदनामें कायर होय अपना धर्म अर यश अर परलोक इनकू कैसें विगाडौ हो अर इनकू' विगाड़ि स्वच्छंद चेष्टा विलापादि करनेतैं वेदना नाहीं घटै है ज्यों ज्यों कायर होवोगे त्यों त्यों वेदना दुःख बढैगा । तातैं अब साहस धारण करि परमधर्मका शरण ग्रहण करो । संसारमें नरकके तथा तिर्यंचनिके क्षुधा तृषा रोग सन्ताप ताडन मारण शीत उष्णादिक घोर दुःख असंख्यातकाल पर्यन्त अनेक वार अनन्तभव धारण करि भोगे ये तुम्हारै कहा दुःख है अल्पकाल में निर्जरैगा अर रोग वेदना देहकू मारैगा तुम्हारा चेतनस्वरूप आत्माकू नाहीं मारैगा श्रर देहका मारना अवश्य होयगा जो देह धारण किया ताकै अवश्यंभावी मरण है सो अब सचेत होहू यो कर्मका जीतवाको अवसर है अब भगवान पंच परमेष्ठीका शरण महणकर अपना अमर अखंड ज्ञाता दृष्टा स्वरूपका ग्रहण करो ऐसा अवसर फेरि मिलना दुर्लभ है इत्यादिक धर्मका उपदेश देय धर्ममें दृढ़ करना अर अनित्य रादिभावनाका ग्रहण शीघ्र करावना, त्याग व्रतादिक छांडि दिये होंय तो फिर ग्रहण करावना तथा शरीरका मर्दनादिक करि दुःख दूरि करना अर कोऊ टहल करनेवाला नाहीं होय तो आप टहल करना अन्य साधर्मीनका मेल मिला देना आहार पान औषधादिकर स्थितिकरण करना तथा मलमूत्र कफादिक होय तो धोवना पूछना इत्यादिक करि स्थिर करना तथा दारिद्रकरि चलायमान होय तिनका भोजनपानादिककरि आजीविकादिक लगाय देने करि, उपसर्ग परीषहादिक दूर करनेकरि सत्यार्थधर्म में स्थापन करना सो स्थितिकरण अंग सम्यग्दृष्टिके होय है । बहुरि वात्सल्य नामगुण सम्यग्दृष्टिके होय है संसारी जीवनिकी प्रीति तो अपने स्त्रीपुत्रदिकनिमें तथा इन्द्रियनिके विषयभोगनिमें धनके उपार्जनमें बहुत रहै है जाकै स्त्री पुत्र धन परिग्रह विषयादिकनिकू संसारपरिभ्रमरण के कारण जानि रंग विरागता धारण करि जाकी धर्मात्मा में रत्नत्रयके धारक मुनि अर्जिका श्रावक श्राविका वा धर्मके आयतननिमें अत्यन्त प्रीति होय ताकै सम्यग्दर्शनका वात्सल्य होय है । बहुरि जो अपने मनकरि वचनकरि कायकरि धनकरि दानकरि व्रतकरि तपकर भक्तिकरि रत्नत्रयका भाव प्रगट करै सो मार्ग प्रभावना अंग है। याका विशेष प्रभावना अगकी भावनामें वर्णन करियेगा । ऐसें सम्यग्दर्शन के अष्ट धारण करने इन गुणनिका प्रतिपक्षी शंकाकांक्षादिक दोषनिका अभावकरि दर्शना( ३६३ ) विशुद्धता होय है। बहुरि लोकमूढता देवमूढता गुरुमूढताका परिणामनिकू छांडि श्रद्धानकू उज्वल करना । अब लोकमूढताका स्वरूप ऐसा है जो मृतकनिका हाड नखादिक गंगामें पहुँचाने में मुक्ति भई मानै हैं तथा गंगाजलकू उत्तम मानना तथा गंगास्नानमें अन्य नदीके स्नानमें नदीकी लहर लेने में धर्म मानना तथा मृतक भर्ता के साथ जीवती स्त्री तथा दासी अग्निमें दग्ध होजाय ताकू सतीमानि पूजना मरयाकू पितर मानि पूजना पितरनिकू पातडी में स्थापन करि पहरना तथा सूर्यचन्द्र मंगलादिक ग्रहनिकू सुवर्णरूपाका बनाय गले में पहरना तथा ग्रहनिका दोष दूरि करनेकू दान देना संक्रांति व्यतिपात सोमोती अमावसी मानि दान करना सूर्यचन्द्रमाका ग्रहणका निमित्तितें स्नान करना, डाभकू शुद्ध मानना, हस्तीके दंतनिकू शुद्ध मानना कूवा पूजना सूर्यचंद्रमाकू अर्घ देना देहली पूजना मूशलकू' पूजना छककू पूजना, विनायक नामकरि गणेश पूजना, तथा दीपकको जोतिकू' पूजना तथा देवताकी बोलारी बोलना जडूला चोटी रखना देवताकी भेटके करार अपना सन्तानादिककू जीवित मानना सन्तानकू देवताका दिया मानना तथा अपने लाभ वास्ते तथा कार्यसिद्धि वास्तै ऐसी वीनती करै जो मेरे एता लाभ होजाय तथा सन्तानका रोग मिटि जाय तथा सन्तान होजाय वा वैरी का नाश होजाय तो मैं आपके छत्र चढ़ाऊ इतना धन भेट करू ऐसा करार करै है देवताकू सौंक (रिसवत) देय कार्य की सिद्धि के वास्ते वां है। तथा रात जगा करना कुलदेवकू पूजना शीतलाकू' पूजना, लक्ष्मीकू पूजना, सोना रूपाकू' पूजना पशुनिकू पूजना अन्नकू' जलकू' पूजना, शस्त्रकू' वृक्षकू' पूजना, अग्नि देव मानि पूजना सो लोकमढता मिथ्यादर्शनका प्रभावर्ते श्रद्धानके विपरीतपना है सो त्यागने योग्य है । बहुरि देवकुदेवका विचाररहित होय कामी क्रोधी शस्त्रधारीहूमें ईश्वरपना की बुद्धि करना जो यह भगवान् परमेश्वर हैं समस्त रचना याकी है ये ही कर्त्ता हैं हर्त्ता हैं जो कुछ होय है सो ईश्वरको कियो होय है, समस्त छी बुरी लोकनिसू. ईश्वर करावे है ईश्वरका किया बिना कळू ही नाहीं होय है, सब ईश्वर की इच्छाके आधीन है शुभकर्म ईश्वरकी प्रेरणा बिना नाहीं होय है इत्यादिक परिणाम मिथ्यादर्शनके उदयकरि होय सो देवमूढ़ता है। बहुरि पाखण्डी हीन-चार धारक तथा परिग्रही, लोभी विषयनिका लोलुपीनिकू करामाती मानना, वाका वचन सिद्ध मानना तथा ये प्रसन्न हो जाय तो हमारा वांछित सिद्ध हो जाय ये तपस्वी हैं, पूज्य हैं, महापुरुष हैं, पुराण हैं इत्यादिक विपरीत श्रद्धान करै सो गुरुमूढता है तातैं जिनके परिणामनितैं इन तीनमूढताका लेशमात्र हू नाहीं होय ताकै दर्शनकी विशुद्धता होय है । बहुरि छह अनायतनका त्याग करि दर्शनविशुद्धता होय है कुदेव कुगुरु कुशास्त्र अर इनके सेवन करने वाले ये धर्मके आयतन कहिये स्थान नाहीं तातैं ये अनयतन हैं । भावार्थ - जो रागी द्वेषी कामी क्रोधी लोभी शस्त्रादिक सहित मिथ्यात्वकार सहित हैं तिनमें सम्यक् धर्म नाहीं पाईये तातैं कुदेव हैं ते अनायतन हैं । बहुरि पंचइन्द्रियनिके विषय निके लोलुपी परिग्रहके धारी आरंभ करनेवाले ऐसे भेषधारी ते गुरु नाहीं, धर्महीन हैं तातैं अनायतन हैं । बहुरि हिंसाके आरंभकी प्रेरणा करने( ३६५ ) वाला रागद्वेषकामादिक दोषनिका बधावनेवाला सर्वथा एकान्तका प्ररूपक शास्त्र हैं ते कुशास्त्र धर्मरहित हैं ता अनायत है बहुरि देवी दिहाडी क्षेत्रपालादिक देवकू वंदने वाले अनायतन बहुरि कुगुरुनिके सेवक हैं भक्ति धर्म रहित हैं ते अनाया है बहुरि मिथ्याशास्त्रके पढ़नेवाले अर इनकी सेवाभक्ति करनेवाले एकांती धर्मका स्थान नाहीं तारौँ अनायतन हैं ऐसे कुदेव कुगुरु कुशास्त्र अर इनकी सेवा भक्ति करनेवाले इन छहूनिमें सम्यकधर्म नाहीं है ऐसा दृढ़श्रद्धानकरि दर्शनविशुद्धता होय है । बहुरि जातिमद कुलमद ऐश्वर्यमद रूपमद शासनका मद तपकामद बलकामद विज्ञानमढ़ इन अष्ट मदनिका जाकै अत्यन्त प्रभाव होय है ताकै दर्शनविशुद्धता होय है सम्यग्दृष्टि के सांचा विचार ऐसा है हे आत्मन् ! या उच्च जाति है सो तुम्हारा स्वभाव नाहीं यह तो कर्मकी परिणमनि है, परकृत है विनाशीक है, कर्मनिके अधीन है। संसार अनेकवार अनेक जाति पाई हैं माताकी पक्षकू जाति कहिये है जीव अनेक बार चांडालोके तथा भीलनीके तथा म्लेक्षणीके चमारी के धोबन के नायणिके डूमणिके नटनीके वेश्याके दासीके कलालीके धीवरी इत्यादि मनुष्यनिके गर्भमें उपज्या है तथा सूकरी कूकरी गई भी स्यालणी कागली इत्यादिक तिर्यचनिके गर्भ में अनंतबार उपजि उपजि मरथा है अनन्तबार नीचजाति पावै तब एकबार उच्चजाति पावै फिर अनंतबार नीचजाति पावै तब एकबार उच्चजाति पावै ऐसे उच्च जाति भी अनंतबार पाई तो हू संसारपरिभ्रमण ही किया अर ऐसें ही पिताकी पक्षका कुल हू ऊंचा नीचा अनंतबार प्राप्त भया संसारमें जातिका, कुलका मद कैसें करिये है स्वर्गका महर्द्धिकदेव मरिकरि एकेन्द्रिय उपजै है तथा श्वानादिक निद्य तिर्यचनिमें उपजै है तथा उत्तम कुलका धारक होय सो चांडाल में जाय उपजै तातैं जातिकुल अहंकार करना मिथ्यादर्शन है । हे आत्मन् तुम्हारा जातिकुल तो सिद्धनिके समान है तुम आपाभूलि माताका रुविर पिताका वीर्यतै उपजे जाति कुल में मिथ्या घरि फेरनन्तकाल निगोदवास मति करो । वीतरागका उपदेश ग्रहण किया है तो इस देहकी जातिकू हू संयम शील दया सत्यवचनादिकरि सफल करो जो में उत्तम जातिकुल पाय नीचकर्मीनिकेसे हिंसा असत्य परधनहरण कुशीलसेवन अभक्ष्य भक्षणादि योग्य आचरण कैसे करू नाही करू ऐसा अहंकार करना योग्य है सम्यग्दृष्टिके कर्मकृत पुद्गलपर्याय में कदाचित आत्मबुद्धि नाहीं होय है । बहुरि ऐश्वर्य पाय ताका मद कैसे करिये यो ऐश्वर्य तो आग भुलाय बहु आरंभ रागद्वेषादिकमें प्रवृत्ति कराय चतुर्गति में परिभ्रमणका कारण है और निर्मंथपना तीनलो कमें ध्यावने योग्य है पूज्य है अर यो ऐश्वर्य क्षणभंगुर है बड़े । २ इंद्र निका पतनसहित है बलभद्र नारायणनिका ऐश्वर्य चरणमात्रमें नष्ट हो गया अन्य जीवनिका ऐश्वर्य केताक है ऐसें जानि ऐश्वर्य दोय दिन पाया है तो दुःखित जीवनिका उपकार करो विनयवान होय दान देहु परमात्मस्वरूप अपना ऐश्वर्य जानि इस कर्मकृत ऐश्वर्य में विरक्त होना योग्य है । बहुरि रूपका मद मति करो यो विनाशीक पुद्गलको रूपमा स्वरूप नाहीं विनाशीक है क्षणक्षरण में नष्ट होय है इस रूपकू रोग वियोग दरिद्र जरा महाकुरूप करैगा ऐसा हाडचामका रूपमें रागी होय मद करना बडा अथ है। इस माका रूप तो केवलज्ञान है जिसमें लोक लोक सर्व प्रतिबिंबित होय हैं तातैं चामडाका रूपमें आपा छांडि अविनाशी ज्ञानस्वरूप में आपाधारहू । बहुरि श्रुतका गर्वकू छांडहू आत्मज्ञानरहितका श्रुत निष्फल है, जातै एकादश अंगका ज्ञान सहित होय करके हूं अभव्य संसारहीमें परिभ्रमरण करै है सम्यग्दर्शन विना अनेक व्याकरण छंद अलंकार काव्य कोषादिक पढना विपरीत धर्ममें अभिमान लोभमें प्रवर्तन कराय संसाररूप अंध डुवोबनेके । और इस इंद्रियजनित ज्ञानका कहा गर्व है एकक्षण में वातपित्तकफादिकके घटनेबधने ज्ञान चलायमान हो जाय है अर इंद्रियजनित ज्ञान तो इनका विनाशकी साथ हो विनशैगा अर मिथ्याज्ञान तो ज्यों बंधैगा त्यों खोटे काव्य, खोटी टीकादिकनिकी रचनामें प्रवर्तन कराय अनेक जीवनिकू दुराचार में प्रवर्तन कराय डबोय देगा तारौँ श्रुतका मद छांडहू, ज्ञान पाय आत्मविशुद्धता करहू, ज्ञान पाय अज्ञानी कैसे आचरणकरि संसार में भ्रमण करना योग्य नाहीं । बहुरि सम्यक्त्व विना मिथ्यादृष्ट्रिका तप निष्फल है तपको मद करो हो जो मैं बडा तपस्वी हूं सो मदके प्रभाव बुद्धि नष्टकरिकेँ यो तप दुर्गति में परिभ्रमण करावेगा तातैं तपका गर्व करना महा अनर्थ जानि भव्यनिकू तपका गर्व करना योग्य नाहीं है । बहुरि जिस बलकरि कर्मरूप वैरीकू जीतिये कथा काम क्रोध लोभकू जीतिये सो बल तो प्रशंसायोग्य है और देहका बल यौवनका बल ऐश्वर्यका बल पाय अन्य निर्बल अनाथ जीवनिकू मारिलेना, धनखोसिलेना जमी जीविका खोसिलेना, कुशील सेवनकरना, दुराचार में प्रवर्तन
नाहीं । जो चोरनिमें शिरोमणि अर जारनिमें शिरोमणि है सो कैसे आराधने योग्य होय । बहुरि सर्वज्ञवीतरागका उपदेश्या अर प्रत्यक्ष अनुमानादिकरि जामें सर्वथा बाधा नाहीं आवै अर समस्त छहकायके जीवनिकी हिंसारहित धर्मका उपदेशक आत्माका उद्धारक अनेकांतरूप वस्तुकू साक्षात् प्रगट करनेवाला ही गम है सो पढ़ने पढ़ावने श्रवणकरने श्रद्धानकरने वंदने योग्य है । अर जे रागी द्वेषीनिकरि प्ररूपणकिये अर विषयानुराग अर कषायके बधावनेवारे जिनमें हिंसा के करनेका उपदेश है ऐसे प्रत्यक्ष अनुमानकरि बाधित एकांतरूप शास्त्र श्रवण पढनेयोग्य नाहीं वन्दनायोग्य नाहीं हैं। बहुरि विषयनिकी वांछाका अर कषायका अरआरम्भपरिग्रहका जाकै अत्यन्त अभाव भया, केवल आत्माकी उज्ज्वलता करनेमें उद्यमी, ध्यान स्वाध्याय में अत्यन्त लोन, स्वाधीन कर्मवं धजनित दुःख सुखमें साम्यभावके धारक, जीवन मरण, लाभ श्रलाभ स्तवननिंदनेमें रागद्वेषरहित उपसर्गपरीषहनिके सहने में अकम्प धैर्यके धारक परमनिर्ग्रन्थ दिगम्बर गुरु ही वंदन स्तवन करनेयोग्य हैं अन्य आरम्भी कषायी विषयानुरागी कुगुरु कदाचित् स्तवन वन्दन करने योग्य नाहीं हैं। बहुरि जीवदया ही धर्म है हिंसा कदाचित् धर्म नाहीं जो कदाचित् सूर्यका उदय पश्चिम दिशा में होजाय अर अग्नि शीतल होजाय अर सर्पका मुखमें अमृत हो जाय र मेरु चलि जाय श्रर पृथ्वी उलटपलट होजाय तो हू हिंसामें तो धर्म कदाचित् नाहीं होय । ऐसा दृढश्रद्धान सम्यग्दृष्टिके होय है जाकै अपने आत्माके अनुभवन में अर सर्वज्ञ वीतरागरूप आपके स्वरूप में कर निग्रंथ विषयकषायरहित गुरुमें अर अने कांतस्वरूप आगममें अर दयारूप धर्ममें शंकाका अभाव सो निःशंकित अग है सम्यग्दृष्टि यामें कदाचित् शंका नाहीं करै है । बहुरि सम्यग्दृष्टि है सो धर्मसेवनकरि विषयनिकी वांछा नाहीं करै है जातैं सम्यग्दृष्टिकू इन्द्र अहमिन्द्रलोकके विषै हू महान वेदनारूप विनाशीक पापका बीज दोख़ है अर धर्मका फल अनन्त अविनाशी स्वाधीन सुखकरियुक्त मोक्ष दीखे है तातैं ज सें बहूमूल्य रत्न छांडि काचखण्डकू जोहरी नाहीं ग्रहण करें है तैसें जाकू सांचा आत्मीक अविनाशी बाधारहित सुख दीख्या सो झूठा बाधासहित विषयनिका सुखमें कैसैं वांछा करता सम्यग्दृष्टि वांछारहित ही होय है। श्रर जो अव्रती सम्यग्दृष्टिके वर्तमानकालमें आजीविका दिकनिमें तथा स्थानादिकपरिग्रह में वेदनाके अभाव जो वांछा होय है सो वर्तमानकालकी वेदना सहने की सामर्थ्य वेदनाका इलाजमात्र चाहै है। जैसे रोगी कति विरक्त होय है तो हू वेदनाका दःख नाहीं सह्या जाय तातैं कडवी औषधि वमन विरेचनादिकका कारण हू ग्रहण करै है, दुर्गंध तैलादिक हू लगावै है अन्तरङ्गमें औषधित अनुराग नहीं है तँसैं सम्यग्दृष्टि निर्वाछक है तो हू वर्तमानके दुःख मेटनेकू' योग्य न्यायके विषयनिकी वांछा करै है। जिनकै प्रत्याख्यान अप्रत्याख्यानावरणकषायका अभाव भया अपना सौ खंड होय तो हू विषयवांछा नाहीं करें हैं यात सम्यग्दृष्टिके निःकांक्षित गुरण होय ही है। बहुरि सम्यग्दृष्टि अशुभ कर्मके उदय प्राप्त भई अशुभ सामग्री तिसमें ग्लानि नाहीं करै, परिणाम नाहीं विगार्डे है पूष जैसा कर्म बांध्या तैसा भोजन पान स्त्री पुत्र दरिद्र संपदा आपदाकू प्राप्त भया हूँ तथा अन्य किसीकू रोगी दरिद्री हीन नीच मलीन देखि परिणाम नाहीं विगाड़े है, पापकी सामग्री जानि कलुषता नाहीं करै है तथा मलमुत्र कर्दमादि द्रव्यकू' देखि अर भयङ्कर श्मसान वनादि क्षेत्रकू देखि, भयरूप दुःखदायी कालकू देखि, दुष्टपना कडवापना इत्यादिक वस्तुका स्वभावकू देखि अपना निर्विचिकित्सित अंग सम्यग्दृष्टिके होय ही है । बहुरि खोटे शास्त्रनित तथा व्यन्तरादिक देवनिकृत विक्रिया तथा मरिण मन्त्र औषदिनिके प्रभाव अनेक वस्तुनिके , विपरीत स्वभाव देखि सत्यार्थ धर्म चलायमान नाहीं होना सो सम्यग्दर्शनका अमूढदृष्टि गुण है सो सम्यग्दृष्टिके होय ही है । बहुरि सम्यग्दृष्टि अन्य जीवनिके ज्ञान लगे हुए दोष देखि आच्छादन करै है जो संसारीजीव ज्ञानावरण दर्शनावरण मोहनीय कमके वशि होय अपना स्वभाव भूल रहे हैं कर्मके आधीन असत्य परधनहरण कुशीलादि पापनि में प्रवृत्ति करें हैं जे पापति दूर बतें हैं ते धन्य हैं । बहुरि कोऊ धर्मात्मा पुरुष पापके उदय चूकि जाय ताकू देखि ऐसा विचारै जो यो दोष प्रगट होसी तो अन्य धर्मात्मा भर जिन धर्मकी बड़ी निन्दा होसी या जानि दोष आच्छादन करै अर अपना गुण होय ताकी प्रशंसा का इच्छुक नाहीं होय है सो यो उपगूहनगुण सम्यक्त्वको है इन गुणनितैं पवित्र उज्ज्वल दर्शन विशुद्धता नाम भावना होय है । बहुरि जो धर्मसहित पुरुषका परिणाम कदाचित् रोगकी तीन सौ इकसठ ) वेदनाकरि धर्म चलि जाय तथा दारिद्रकरि चलि जाय तथा उपसर्ग परीसहनिकरि चलिजाय तथा असहायताकरि तथा आहारपानका निरोधकरि परिणाम धर्मर्ते शिथिल हो जाय ताकू उपदेशकरि धर्म में स्थम्भन करै । भो ज्ञानी भो धर्मके धारक ! तुम सचेत होहू कैसे कायरता धारणकरि धर्ममें सिथिल भए हो जो रोगकी वेदना धर्म चिगो हो, ज्ञानी होय कैसैं भूलो हो यो असतावेदनकर्म अपना अवसर पाय उदय में आ गया है अब जो कायर होय दीनताकरि रुदनविलापादि करते भोगोगे तो कर्म नाहीं छोड़ेगा कर्मके दया नाहीं होय है और धीर तो कर्म नाहीं छोड़ेगा कोऊ देवदानव मन्त्रतन्त्र औषधादिक तथा स्त्री, पुत्र, मित्र, बांधव सेवक सुभटादिक उदयमें आया कर्म हरनेकू' समर्थ है नाहीं यो तुम अच्छी तरह समझो हो अब इस वेदनामें कायर होय अपना धर्म अर यश अर परलोक इनकू कैसें विगाडौ हो अर इनकू' विगाड़ि स्वच्छंद चेष्टा विलापादि करनेतैं वेदना नाहीं घटै है ज्यों ज्यों कायर होवोगे त्यों त्यों वेदना दुःख बढैगा । तातैं अब साहस धारण करि परमधर्मका शरण ग्रहण करो । संसारमें नरकके तथा तिर्यंचनिके क्षुधा तृषा रोग सन्ताप ताडन मारण शीत उष्णादिक घोर दुःख असंख्यातकाल पर्यन्त अनेक वार अनन्तभव धारण करि भोगे ये तुम्हारै कहा दुःख है अल्पकाल में निर्जरैगा अर रोग वेदना देहकू मारैगा तुम्हारा चेतनस्वरूप आत्माकू नाहीं मारैगा श्रर देहका मारना अवश्य होयगा जो देह धारण किया ताकै अवश्यंभावी मरण है सो अब सचेत होहू यो कर्मका जीतवाको अवसर है अब भगवान पंच परमेष्ठीका शरण महणकर अपना अमर अखंड ज्ञाता दृष्टा स्वरूपका ग्रहण करो ऐसा अवसर फेरि मिलना दुर्लभ है इत्यादिक धर्मका उपदेश देय धर्ममें दृढ़ करना अर अनित्य रादिभावनाका ग्रहण शीघ्र करावना, त्याग व्रतादिक छांडि दिये होंय तो फिर ग्रहण करावना तथा शरीरका मर्दनादिक करि दुःख दूरि करना अर कोऊ टहल करनेवाला नाहीं होय तो आप टहल करना अन्य साधर्मीनका मेल मिला देना आहार पान औषधादिकर स्थितिकरण करना तथा मलमूत्र कफादिक होय तो धोवना पूछना इत्यादिक करि स्थिर करना तथा दारिद्रकरि चलायमान होय तिनका भोजनपानादिककरि आजीविकादिक लगाय देने करि, उपसर्ग परीषहादिक दूर करनेकरि सत्यार्थधर्म में स्थापन करना सो स्थितिकरण अंग सम्यग्दृष्टिके होय है । बहुरि वात्सल्य नामगुण सम्यग्दृष्टिके होय है संसारी जीवनिकी प्रीति तो अपने स्त्रीपुत्रदिकनिमें तथा इन्द्रियनिके विषयभोगनिमें धनके उपार्जनमें बहुत रहै है जाकै स्त्री पुत्र धन परिग्रह विषयादिकनिकू संसारपरिभ्रमरण के कारण जानि रंग विरागता धारण करि जाकी धर्मात्मा में रत्नत्रयके धारक मुनि अर्जिका श्रावक श्राविका वा धर्मके आयतननिमें अत्यन्त प्रीति होय ताकै सम्यग्दर्शनका वात्सल्य होय है । बहुरि जो अपने मनकरि वचनकरि कायकरि धनकरि दानकरि व्रतकरि तपकर भक्तिकरि रत्नत्रयका भाव प्रगट करै सो मार्ग प्रभावना अंग है। याका विशेष प्रभावना अगकी भावनामें वर्णन करियेगा । ऐसें सम्यग्दर्शन के अष्ट धारण करने इन गुणनिका प्रतिपक्षी शंकाकांक्षादिक दोषनिका अभावकरि दर्शना विशुद्धता होय है। बहुरि लोकमूढता देवमूढता गुरुमूढताका परिणामनिकू छांडि श्रद्धानकू उज्वल करना । अब लोकमूढताका स्वरूप ऐसा है जो मृतकनिका हाड नखादिक गंगामें पहुँचाने में मुक्ति भई मानै हैं तथा गंगाजलकू उत्तम मानना तथा गंगास्नानमें अन्य नदीके स्नानमें नदीकी लहर लेने में धर्म मानना तथा मृतक भर्ता के साथ जीवती स्त्री तथा दासी अग्निमें दग्ध होजाय ताकू सतीमानि पूजना मरयाकू पितर मानि पूजना पितरनिकू पातडी में स्थापन करि पहरना तथा सूर्यचन्द्र मंगलादिक ग्रहनिकू सुवर्णरूपाका बनाय गले में पहरना तथा ग्रहनिका दोष दूरि करनेकू दान देना संक्रांति व्यतिपात सोमोती अमावसी मानि दान करना सूर्यचन्द्रमाका ग्रहणका निमित्तितें स्नान करना, डाभकू शुद्ध मानना, हस्तीके दंतनिकू शुद्ध मानना कूवा पूजना सूर्यचंद्रमाकू अर्घ देना देहली पूजना मूशलकू' पूजना छककू पूजना, विनायक नामकरि गणेश पूजना, तथा दीपकको जोतिकू' पूजना तथा देवताकी बोलारी बोलना जडूला चोटी रखना देवताकी भेटके करार अपना सन्तानादिककू जीवित मानना सन्तानकू देवताका दिया मानना तथा अपने लाभ वास्ते तथा कार्यसिद्धि वास्तै ऐसी वीनती करै जो मेरे एता लाभ होजाय तथा सन्तानका रोग मिटि जाय तथा सन्तान होजाय वा वैरी का नाश होजाय तो मैं आपके छत्र चढ़ाऊ इतना धन भेट करू ऐसा करार करै है देवताकू सौंक देय कार्य की सिद्धि के वास्ते वां है। तथा रात जगा करना कुलदेवकू पूजना शीतलाकू' पूजना, लक्ष्मीकू पूजना, सोना रूपाकू' पूजना पशुनिकू पूजना अन्नकू' जलकू' पूजना, शस्त्रकू' वृक्षकू' पूजना, अग्नि देव मानि पूजना सो लोकमढता मिथ्यादर्शनका प्रभावर्ते श्रद्धानके विपरीतपना है सो त्यागने योग्य है । बहुरि देवकुदेवका विचाररहित होय कामी क्रोधी शस्त्रधारीहूमें ईश्वरपना की बुद्धि करना जो यह भगवान् परमेश्वर हैं समस्त रचना याकी है ये ही कर्त्ता हैं हर्त्ता हैं जो कुछ होय है सो ईश्वरको कियो होय है, समस्त छी बुरी लोकनिसू. ईश्वर करावे है ईश्वरका किया बिना कळू ही नाहीं होय है, सब ईश्वर की इच्छाके आधीन है शुभकर्म ईश्वरकी प्रेरणा बिना नाहीं होय है इत्यादिक परिणाम मिथ्यादर्शनके उदयकरि होय सो देवमूढ़ता है। बहुरि पाखण्डी हीन-चार धारक तथा परिग्रही, लोभी विषयनिका लोलुपीनिकू करामाती मानना, वाका वचन सिद्ध मानना तथा ये प्रसन्न हो जाय तो हमारा वांछित सिद्ध हो जाय ये तपस्वी हैं, पूज्य हैं, महापुरुष हैं, पुराण हैं इत्यादिक विपरीत श्रद्धान करै सो गुरुमूढता है तातैं जिनके परिणामनितैं इन तीनमूढताका लेशमात्र हू नाहीं होय ताकै दर्शनकी विशुद्धता होय है । बहुरि छह अनायतनका त्याग करि दर्शनविशुद्धता होय है कुदेव कुगुरु कुशास्त्र अर इनके सेवन करने वाले ये धर्मके आयतन कहिये स्थान नाहीं तातैं ये अनयतन हैं । भावार्थ - जो रागी द्वेषी कामी क्रोधी लोभी शस्त्रादिक सहित मिथ्यात्वकार सहित हैं तिनमें सम्यक् धर्म नाहीं पाईये तातैं कुदेव हैं ते अनायतन हैं । बहुरि पंचइन्द्रियनिके विषय निके लोलुपी परिग्रहके धारी आरंभ करनेवाले ऐसे भेषधारी ते गुरु नाहीं, धर्महीन हैं तातैं अनायतन हैं । बहुरि हिंसाके आरंभकी प्रेरणा करने वाला रागद्वेषकामादिक दोषनिका बधावनेवाला सर्वथा एकान्तका प्ररूपक शास्त्र हैं ते कुशास्त्र धर्मरहित हैं ता अनायत है बहुरि देवी दिहाडी क्षेत्रपालादिक देवकू वंदने वाले अनायतन बहुरि कुगुरुनिके सेवक हैं भक्ति धर्म रहित हैं ते अनाया है बहुरि मिथ्याशास्त्रके पढ़नेवाले अर इनकी सेवाभक्ति करनेवाले एकांती धर्मका स्थान नाहीं तारौँ अनायतन हैं ऐसे कुदेव कुगुरु कुशास्त्र अर इनकी सेवा भक्ति करनेवाले इन छहूनिमें सम्यकधर्म नाहीं है ऐसा दृढ़श्रद्धानकरि दर्शनविशुद्धता होय है । बहुरि जातिमद कुलमद ऐश्वर्यमद रूपमद शासनका मद तपकामद बलकामद विज्ञानमढ़ इन अष्ट मदनिका जाकै अत्यन्त प्रभाव होय है ताकै दर्शनविशुद्धता होय है सम्यग्दृष्टि के सांचा विचार ऐसा है हे आत्मन् ! या उच्च जाति है सो तुम्हारा स्वभाव नाहीं यह तो कर्मकी परिणमनि है, परकृत है विनाशीक है, कर्मनिके अधीन है। संसार अनेकवार अनेक जाति पाई हैं माताकी पक्षकू जाति कहिये है जीव अनेक बार चांडालोके तथा भीलनीके तथा म्लेक्षणीके चमारी के धोबन के नायणिके डूमणिके नटनीके वेश्याके दासीके कलालीके धीवरी इत्यादि मनुष्यनिके गर्भमें उपज्या है तथा सूकरी कूकरी गई भी स्यालणी कागली इत्यादिक तिर्यचनिके गर्भ में अनंतबार उपजि उपजि मरथा है अनन्तबार नीचजाति पावै तब एकबार उच्चजाति पावै फिर अनंतबार नीचजाति पावै तब एकबार उच्चजाति पावै ऐसे उच्च जाति भी अनंतबार पाई तो हू संसारपरिभ्रमण ही किया अर ऐसें ही पिताकी पक्षका कुल हू ऊंचा नीचा अनंतबार प्राप्त भया संसारमें जातिका, कुलका मद कैसें करिये है स्वर्गका महर्द्धिकदेव मरिकरि एकेन्द्रिय उपजै है तथा श्वानादिक निद्य तिर्यचनिमें उपजै है तथा उत्तम कुलका धारक होय सो चांडाल में जाय उपजै तातैं जातिकुल अहंकार करना मिथ्यादर्शन है । हे आत्मन् तुम्हारा जातिकुल तो सिद्धनिके समान है तुम आपाभूलि माताका रुविर पिताका वीर्यतै उपजे जाति कुल में मिथ्या घरि फेरनन्तकाल निगोदवास मति करो । वीतरागका उपदेश ग्रहण किया है तो इस देहकी जातिकू हू संयम शील दया सत्यवचनादिकरि सफल करो जो में उत्तम जातिकुल पाय नीचकर्मीनिकेसे हिंसा असत्य परधनहरण कुशीलसेवन अभक्ष्य भक्षणादि योग्य आचरण कैसे करू नाही करू ऐसा अहंकार करना योग्य है सम्यग्दृष्टिके कर्मकृत पुद्गलपर्याय में कदाचित आत्मबुद्धि नाहीं होय है । बहुरि ऐश्वर्य पाय ताका मद कैसे करिये यो ऐश्वर्य तो आग भुलाय बहु आरंभ रागद्वेषादिकमें प्रवृत्ति कराय चतुर्गति में परिभ्रमणका कारण है और निर्मंथपना तीनलो कमें ध्यावने योग्य है पूज्य है अर यो ऐश्वर्य क्षणभंगुर है बड़े । दो इंद्र निका पतनसहित है बलभद्र नारायणनिका ऐश्वर्य चरणमात्रमें नष्ट हो गया अन्य जीवनिका ऐश्वर्य केताक है ऐसें जानि ऐश्वर्य दोय दिन पाया है तो दुःखित जीवनिका उपकार करो विनयवान होय दान देहु परमात्मस्वरूप अपना ऐश्वर्य जानि इस कर्मकृत ऐश्वर्य में विरक्त होना योग्य है । बहुरि रूपका मद मति करो यो विनाशीक पुद्गलको रूपमा स्वरूप नाहीं विनाशीक है क्षणक्षरण में नष्ट होय है इस रूपकू रोग वियोग दरिद्र जरा महाकुरूप करैगा ऐसा हाडचामका रूपमें रागी होय मद करना बडा अथ है। इस माका रूप तो केवलज्ञान है जिसमें लोक लोक सर्व प्रतिबिंबित होय हैं तातैं चामडाका रूपमें आपा छांडि अविनाशी ज्ञानस्वरूप में आपाधारहू । बहुरि श्रुतका गर्वकू छांडहू आत्मज्ञानरहितका श्रुत निष्फल है, जातै एकादश अंगका ज्ञान सहित होय करके हूं अभव्य संसारहीमें परिभ्रमरण करै है सम्यग्दर्शन विना अनेक व्याकरण छंद अलंकार काव्य कोषादिक पढना विपरीत धर्ममें अभिमान लोभमें प्रवर्तन कराय संसाररूप अंध डुवोबनेके । और इस इंद्रियजनित ज्ञानका कहा गर्व है एकक्षण में वातपित्तकफादिकके घटनेबधने ज्ञान चलायमान हो जाय है अर इंद्रियजनित ज्ञान तो इनका विनाशकी साथ हो विनशैगा अर मिथ्याज्ञान तो ज्यों बंधैगा त्यों खोटे काव्य, खोटी टीकादिकनिकी रचनामें प्रवर्तन कराय अनेक जीवनिकू दुराचार में प्रवर्तन कराय डबोय देगा तारौँ श्रुतका मद छांडहू, ज्ञान पाय आत्मविशुद्धता करहू, ज्ञान पाय अज्ञानी कैसे आचरणकरि संसार में भ्रमण करना योग्य नाहीं । बहुरि सम्यक्त्व विना मिथ्यादृष्ट्रिका तप निष्फल है तपको मद करो हो जो मैं बडा तपस्वी हूं सो मदके प्रभाव बुद्धि नष्टकरिकेँ यो तप दुर्गति में परिभ्रमण करावेगा तातैं तपका गर्व करना महा अनर्थ जानि भव्यनिकू तपका गर्व करना योग्य नाहीं है । बहुरि जिस बलकरि कर्मरूप वैरीकू जीतिये कथा काम क्रोध लोभकू जीतिये सो बल तो प्रशंसायोग्य है और देहका बल यौवनका बल ऐश्वर्यका बल पाय अन्य निर्बल अनाथ जीवनिकू मारिलेना, धनखोसिलेना जमी जीविका खोसिलेना, कुशील सेवनकरना, दुराचार में प्रवर्तन
Quick links: सुशांत सिंह मामले में चल रहे ईडी की जांच से यह साबित हो चुका है कि सुशांत सिंह राजपूत के खाते से 15 करोड़ रुपए निकाल गए थे। अब ईडी इस बात की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है कि यह रकम किसके खाते में जमा हुई । प्रवर्तन निर्दशालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार जांच के लिए मुंबई पुलिस से डिजिटल एविडेंस की मांग की है। जिसे पुलिस ने सुशांत के घर से इकट्ठा किया था। जानकारी के अनुसार सुशांत के कई खातों से नेट बैंकिग और डेबट कार्ड से हुए ट्रांजेक्शन की जांच जारी है। इस निकासी से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पैसा कहां गया और इसके पीछे मकसद क्या था। ईडी की जांच से यह भी पता चहा है कि सुशांत ने 2.7 करोड़ रुपए का टैक्स भरा था। इसमें जिएसटी भी शामिल था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि वह अकस्र जरूरतमंद करीबियों का भुकतान करने के लिए तैयार रहते थे। इसके साथ ईडी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि सुशांत रिया और उनके भाई शोविक के सात बिजनेस में कैसे जुड़े। वहीं गुरुवार को सेलिब्रिटी टैलेंट मैनेजर जयंती साहा से करीब 11 घंटे पूछताछ की गई, जिन्होंने 2019 से अपनी एजेंसी और सुशांत के बीच का लेनदेन संभाला था। बता दें सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे के एक बैंक खाते में 17 करोड़ रुपए थे, जिसमें से 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई। उन्होंने रिया चक्रवर्ती, उनके पिता इंद्रजीत, मां संध्या, भाई शोविक और दो मैनेजर सैमुअल मिरांडा और श्रुति मोदी का नाम एफआईआर में दर्ज कराया था।
Quick links: सुशांत सिंह मामले में चल रहे ईडी की जांच से यह साबित हो चुका है कि सुशांत सिंह राजपूत के खाते से पंद्रह करोड़ रुपए निकाल गए थे। अब ईडी इस बात की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है कि यह रकम किसके खाते में जमा हुई । प्रवर्तन निर्दशालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार जांच के लिए मुंबई पुलिस से डिजिटल एविडेंस की मांग की है। जिसे पुलिस ने सुशांत के घर से इकट्ठा किया था। जानकारी के अनुसार सुशांत के कई खातों से नेट बैंकिग और डेबट कार्ड से हुए ट्रांजेक्शन की जांच जारी है। इस निकासी से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पैसा कहां गया और इसके पीछे मकसद क्या था। ईडी की जांच से यह भी पता चहा है कि सुशांत ने दो.सात करोड़ रुपए का टैक्स भरा था। इसमें जिएसटी भी शामिल था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि वह अकस्र जरूरतमंद करीबियों का भुकतान करने के लिए तैयार रहते थे। इसके साथ ईडी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि सुशांत रिया और उनके भाई शोविक के सात बिजनेस में कैसे जुड़े। वहीं गुरुवार को सेलिब्रिटी टैलेंट मैनेजर जयंती साहा से करीब ग्यारह घंटाटे पूछताछ की गई, जिन्होंने दो हज़ार उन्नीस से अपनी एजेंसी और सुशांत के बीच का लेनदेन संभाला था। बता दें सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे के एक बैंक खाते में सत्रह करोड़ रुपए थे, जिसमें से पंद्रह करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई। उन्होंने रिया चक्रवर्ती, उनके पिता इंद्रजीत, मां संध्या, भाई शोविक और दो मैनेजर सैमुअल मिरांडा और श्रुति मोदी का नाम एफआईआर में दर्ज कराया था।
लखनऊ। कौशांबी जिले के जिला मजिस्ट्रेट के अधीन एक सहायक भू-वैज्ञानिक सहित आठ अन्य के खिलाफ सीबीआई ने 2015 और 2016 में जिले में अवैध खनन करने के आरोप में रविवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीबीआई ने पिछले साल जुलाई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की दिशा-निर्देश के बाद अवैध खनन की जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच शुरू करने के बाद यह सभी लोग सीबीआई की जांच में दोषी पाएं गए। अमर सिंह नाम के एक शख्स ने अप्रैल 2016 में हाईकोर्ट के सामने पीआईएल दायर की थी , बगैर खनन-पट्टे के सैकड़ों ट्रकों को कौशांबी से रेत कटान कर करोड़ों रुपए का सरकारी कोष को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। साथ ही कुछ ठेकेदार रेत के खुदाई के लिए जेसीबी मशीनों का भी उपयोग कर रहे थे। गंगा और यमुना दोनों इलाहाबाद के आगे कई जिलों से होकर बहती है, इसका ही फायदा उठाकर खनन माफिया अवैध खनन करते हैं। जबकि उच्च न्यायालय ने तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट को आरोपों की जांच के लिए निर्देश दिया था। अदालत ने केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को मामले की जांच का जिम्मा दिया था। आरोपों की जांच करते हुए सीबीआई ने पाया कि, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के तहत सहायक भू-वैज्ञानिक के रूप में तैनात अरविंद कुमार कुछ लोगों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र में शामिल हैं, जो अवैध खनन से मिलने वाले रुपए में हिस्सेदार हैं। अरविंद के अलावा अवैध खनन प्रक्रिया के साथ जुड़े अमित यादव, जेपी पांडेय, अनिल यादव, राशिद अजीज ऊर्फ राणा, मोहम्मद रिजवान, नरिंदर पाल सिंह, बलजीत सिंह, हरबीर सिंह उर्फ काका और अन्य अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई कौशांबी के अलावा शामली, फतेहपुर, हमीरपुर, सिद्धार्थनगर और देवरिया जिलों में अवैध खनन के आरोपों की जांच कर रही है। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिएयहांक्लिक करें।
लखनऊ। कौशांबी जिले के जिला मजिस्ट्रेट के अधीन एक सहायक भू-वैज्ञानिक सहित आठ अन्य के खिलाफ सीबीआई ने दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सोलह में जिले में अवैध खनन करने के आरोप में रविवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीबीआई ने पिछले साल जुलाई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की दिशा-निर्देश के बाद अवैध खनन की जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच शुरू करने के बाद यह सभी लोग सीबीआई की जांच में दोषी पाएं गए। अमर सिंह नाम के एक शख्स ने अप्रैल दो हज़ार सोलह में हाईकोर्ट के सामने पीआईएल दायर की थी , बगैर खनन-पट्टे के सैकड़ों ट्रकों को कौशांबी से रेत कटान कर करोड़ों रुपए का सरकारी कोष को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। साथ ही कुछ ठेकेदार रेत के खुदाई के लिए जेसीबी मशीनों का भी उपयोग कर रहे थे। गंगा और यमुना दोनों इलाहाबाद के आगे कई जिलों से होकर बहती है, इसका ही फायदा उठाकर खनन माफिया अवैध खनन करते हैं। जबकि उच्च न्यायालय ने तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट को आरोपों की जांच के लिए निर्देश दिया था। अदालत ने केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को मामले की जांच का जिम्मा दिया था। आरोपों की जांच करते हुए सीबीआई ने पाया कि, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के तहत सहायक भू-वैज्ञानिक के रूप में तैनात अरविंद कुमार कुछ लोगों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र में शामिल हैं, जो अवैध खनन से मिलने वाले रुपए में हिस्सेदार हैं। अरविंद के अलावा अवैध खनन प्रक्रिया के साथ जुड़े अमित यादव, जेपी पांडेय, अनिल यादव, राशिद अजीज ऊर्फ राणा, मोहम्मद रिजवान, नरिंदर पाल सिंह, बलजीत सिंह, हरबीर सिंह उर्फ काका और अन्य अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई कौशांबी के अलावा शामली, फतेहपुर, हमीरपुर, सिद्धार्थनगर और देवरिया जिलों में अवैध खनन के आरोपों की जांच कर रही है। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिएयहांक्लिक करें।
लोकसभा में NIA संशोधन बिल पर वोटिंग हो रही है. अमित शाह ने कहा कि इस विषय पर सदन में डिविजन होना चाहिए ताकि देश को पता चल कि कौन आतंकवाद के पक्ष में है और कौन इसके खिलाफ है. कर्नाटक में जारी सियासी रस्साकशी के बीच विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने अब आगे के लिए कमर कस ली है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार को नोटिस देकर मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की है। जिला पुलिस और डीआरजी को सोमवार को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सर्चिंग पर निकले जवानों ने ताड़मेटला घाट से एक नक्सली को गिरफ्तार किया है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सोमवार दोपहर बड़ा सड़क हादसा हो गया। जिसमें 12 लोग घायल और 4 गंभीर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुनकुरी से अम्बिकापुर जा रही यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हिमाचल प्रदेश में सोलन के कुमारहट्टी में बचाव अभियान चल रहा है। जहां रविवार शाम एक इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 23 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार तड़के होने वाले चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को तकनीकी खामी की वजह से टाल दिया. काउंटडाउन खत्म होने से 56 मिनट 24 सेंकेड पहले ही इसमें कोई तकनीकी खामी नजर आई, जिसके बाद ये निर्णय लिया गया. विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष ने विधायक भीमा मंडावी की हत्या को लेकर स्थगन प्रस्ताव रखा। जिसके बाद आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव चर्चा के लिए ग्राह्य किया। उन्होंने कहा कि सदन के सारे काम रोककर भीमा मंडावी की हत्या पर चर्चा की जाएगी।
लोकसभा में NIA संशोधन बिल पर वोटिंग हो रही है. अमित शाह ने कहा कि इस विषय पर सदन में डिविजन होना चाहिए ताकि देश को पता चल कि कौन आतंकवाद के पक्ष में है और कौन इसके खिलाफ है. कर्नाटक में जारी सियासी रस्साकशी के बीच विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने अब आगे के लिए कमर कस ली है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार को नोटिस देकर मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की है। जिला पुलिस और डीआरजी को सोमवार को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सर्चिंग पर निकले जवानों ने ताड़मेटला घाट से एक नक्सली को गिरफ्तार किया है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सोमवार दोपहर बड़ा सड़क हादसा हो गया। जिसमें बारह लोग घायल और चार गंभीर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुनकुरी से अम्बिकापुर जा रही यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हिमाचल प्रदेश में सोलन के कुमारहट्टी में बचाव अभियान चल रहा है। जहां रविवार शाम एक इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में अब तक दस लोगों की मौत हो चुकी है और तेईस अन्य घायल बताए जा रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोमवार तड़के होने वाले चंद्रयान-दो के प्रक्षेपण को तकनीकी खामी की वजह से टाल दिया. काउंटडाउन खत्म होने से छप्पन मिनट चौबीस सेंकेड पहले ही इसमें कोई तकनीकी खामी नजर आई, जिसके बाद ये निर्णय लिया गया. विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष ने विधायक भीमा मंडावी की हत्या को लेकर स्थगन प्रस्ताव रखा। जिसके बाद आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव चर्चा के लिए ग्राह्य किया। उन्होंने कहा कि सदन के सारे काम रोककर भीमा मंडावी की हत्या पर चर्चा की जाएगी।
इंडिया ए टीम एक सप्ताह बाद न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। इस दौरे से पहले इंडिया ए टीम को युवा ओपनर पृथ्वी शॉ के रूप में तगड़ा झटका का लग सकता है जो रणजी ट्रॉफी 2019-20 ग्रुप बी मुकाबले में शुक्रवार को कर्नाटक के खिलाफ अपना कंधा चोटिल करा बैठे. मुंबई की ओर से खेल रहे पृथ्वी को ये चोट फील्डिंग के दौरान लगी. बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मुकाबले के तीसरे सेशन में रन रोकने के प्रयास में पृथ्वी ने डाइव लगाई जिससे उनका दायां कंधा चोटिल हो गया. इसके तुरंत बाद उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया. इंडिया ए टीम 10 जनवरी, 2020 को न्यूजीलैंड के लिए रवाना होगी. उन्हें टीम इंडिया में लिमिटेड और चार दिवसीय मैचों की सीरीज के लिए चुना गया है. मुंबई टीम के सूत्र ने बताया कि एहतियातन उनका एमआरआई स्कैन कराया गया है. डोप टेस्ट में फेल होने के कारण 8 महीने का बैन झेल चुके 20 वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज पृथ्वी ने हाल मेें वापसी की थी. पिछले साल (2019) 22 फरवरी को इंदौर में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान पृथ्वी शॉ के यूरिन का सैंपल लिया गया था जिसमें प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया था। ये टेस्ट बीसीसीआइ ने अपने एंटी डोपिंग प्रोग्राम के तहत कराया था. गौरतलब है कि पहली पारी में पृथ्वी ने 57 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली जिसमें 6 चौके शामिल थे. मुंबई की टीम पहली पारी में 194 रन पर ढेर हो गई. जवाब में कर्नाटक ने 79 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे.
इंडिया ए टीम एक सप्ताह बाद न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। इस दौरे से पहले इंडिया ए टीम को युवा ओपनर पृथ्वी शॉ के रूप में तगड़ा झटका का लग सकता है जो रणजी ट्रॉफी दो हज़ार उन्नीस-बीस ग्रुप बी मुकाबले में शुक्रवार को कर्नाटक के खिलाफ अपना कंधा चोटिल करा बैठे. मुंबई की ओर से खेल रहे पृथ्वी को ये चोट फील्डिंग के दौरान लगी. बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मुकाबले के तीसरे सेशन में रन रोकने के प्रयास में पृथ्वी ने डाइव लगाई जिससे उनका दायां कंधा चोटिल हो गया. इसके तुरंत बाद उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया. इंडिया ए टीम दस जनवरी, दो हज़ार बीस को न्यूजीलैंड के लिए रवाना होगी. उन्हें टीम इंडिया में लिमिटेड और चार दिवसीय मैचों की सीरीज के लिए चुना गया है. मुंबई टीम के सूत्र ने बताया कि एहतियातन उनका एमआरआई स्कैन कराया गया है. डोप टेस्ट में फेल होने के कारण आठ महीने का बैन झेल चुके बीस वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज पृथ्वी ने हाल मेें वापसी की थी. पिछले साल बाईस फरवरी को इंदौर में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान पृथ्वी शॉ के यूरिन का सैंपल लिया गया था जिसमें प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया था। ये टेस्ट बीसीसीआइ ने अपने एंटी डोपिंग प्रोग्राम के तहत कराया था. गौरतलब है कि पहली पारी में पृथ्वी ने सत्तावन गेंदों पर उनतीस रन की पारी खेली जिसमें छः चौके शामिल थे. मुंबई की टीम पहली पारी में एक सौ चौरानवे रन पर ढेर हो गई. जवाब में कर्नाटक ने उन्यासी रन पर तीन विकेट गंवा दिए थे.
कृष्णवर्ण और ताम्म्रवर्ण जाति । छ वर्ष पहले में जिस रास्तेसे हैम्पटनके विद्यालयमे विद्यार्थीके . नाते भरती होनेके लिए गया था, इस बार स्पचि देनेके लिए भी मै उसी रास्तेसे गया, पर इस बार मै रेलगाडीम सवार था। मेरी पहली सफरमें और इस सफरमें कितना अन्तर है । पाँच वर्षकी अनधिमें शायद ही किसी मनुष्यकी अवस्था में इतना परिवर्तन हुआ होगा। हैम्पटनमें शिक्षक और विद्यार्थी, दोनोंने ही शुद्ध अन्त करणसे मेरा स्वागत किया । वहाँ मैने देखा कि विद्यालयने पहलेसे कहीं अधिक उन्नति की है और नीयो लोगोंकी हालत सुधारने और जरूरतोंको रफा करनेमें उसकी उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ रही है, शिक्षाप्रणालीमें भी बहुत कुछ सुधार हो रहा है । हैम्पटन-विद्यालय किसी नमूनेकी नक्ल नहीं था, बल्कि उसमें नीग्रो लोगोंकी अवस्था सुधारने और उनकी आवश्यकताओंकी पूर्ति करनेके विचारसे ही जनरल आर्मस्ट्रागके उदार नेतृत्वमें सुधारका प्रत्येक कार्य हुआ करता था। अपढ लोगोंमें शिक्षामचार तथा अन्य परोपकारके कार्य करते समय शिक्षित लोग प्राय पुरानी लकीर ही पीटते जाते है । वे इस बातको मूल जाते है कि हमे किन लोगोंमें काम करना है, उनकी क्या क्या आवश्यकतायें है, और उनकी शिक्षाका ध्येय क्या होना चाहिए । इन बातोंको भूल कर वे एक ही शिक्षाप्रणालीके साँचमें नये पुराने विद्यार्थियोंको ढालते जाते है, परन्तु हैम्पटनमें यह बात न थी । उपाधिदानसमारभके समय मैने जो व्याख्यान दिया उससे लोग बहुत प्रसन्न हुए और बहुतोंने अपनी प्रसन्नता प्रकट करके मुझे खूब ही उत्साहित किया। मै शीघ्र ही वेस्ट वर्जीनियामे अपने गॉवको वापिस चला आया, और फिर पाठशालामें पढानेका विचार करने लगा। इसी वीच अर्थात् १८७९ में एकाएक मुझे जनरल आर्मट्रागका पन फिर मिला। उन्होंने इस पनमें शिक्षकका काम करने और रही सही पढ़ाई पूरी आत्मोद्धारकरनेके लिए चले आनेको लिखा था । वेस्ट वर्जीनियाम शिक्षकका काम करते समय मैने अपने दो भाइयोंके अतिरिक्त और चार युवकों को हेम्पटन-विद्यालय में भरती कराने के लिए बडी तैयारी की थी। इसका फूल यह हुआ कि जब ये विद्यार्थी हेम्पटन पहुॅचे तो उनकी योग्यता देखकर शिक्षक इतने प्रसन्न हुए कि उनको उन्होंने एक्दम ऊपरके दर्जमें भरती कर लिया। मे समझता हूँ कि यही देखकर हैम्पटन के विद्यालयमे मुझे शिक्षकका काम करनेके लिए बुलाया था। मैंने जिन विद्यार्थियोंको हैम्पटन भेजा उनमेंसे एकका नाम हे डाक्टर सेमुएल ई कने । ये इस समय बोस्टन शहरके बड़े डाक्टरों में गिने जाते है और वहाँके स्कूल-चोर्टके मैचर भी है। इस समय जनरल आर्मस्ट्रागने इंडियन लोगोंको पहले पहल शिक्षा देनेका प्रयोग करना आरंभ किया था। उस समय बहुत कम लोगोंको यह आशा थी कि इडियन लोग भी लिख पढ़कर कुछ काम लायक हो जायेंगे स्ट्रगके मनमें यह समाई कि यह प्रयोग विशाल परिमाण पर और ढंगके साथ करना चाहिए । पश्चिम प्रान्तके जगलोंमेंसे वे जगली और बिल्कुल अपढ ऐसे एक सौसे भी ज्यादा इडियन ले आये, उनमे बहुतेरे युवा भी थे । जनरल आर्मस्ट्रा चाहते थे कि मै उन सब इडियनोंका पितृवत् पालक बनूँअर्थात् एक ही मकानमें उनके साथ रहकर उनकी शिक्षा, चालढाल और रहनसहनकी देखभाल किया करूँ । इस कार्य मोहकता अवश्य थी, पर वेस्ट वर्जीनियाके कार्यमे मैं इतना मगन हो गया था कि उसे छोड देना मेरे लिए बड़े भारी कष्टका कारण था, पर मैंने दिलको मजबूत करके उस कामको छोड ही दिया, क्याकि जनरल आर्मस्ट्रागकी आज्ञाको म टाल नहीं सकता था । कृष्णवर्ण ओर ताम्रवर्ण जाति । हेम्पटन जाने पर में ७५ इटियन विद्यार्थियोंके साथ एक मकानमें रहने लगा । मै ही अकेला एक ऐसा आदमी था जो उनकी जातिके चाहर था। शुरू-शुरूमें मुझे बडा सन्देह था कि इस कार्यमें मै कैसे कामयाब हो सकूँगा । मै भली भाँति जानता था कि इडियनोंके दिमाग हम लोगोंसे बहुत ऊँचे है । वे अपनेको गोरोंसे भी बड़े मानते थे इसीसे अन्दाज किया जा सकता है कि गुलामीको महत्पाप समझनेवाले इंडियन गुलामीमें पले हुए नीग्रो लोगांको क्या समझते होंगे । गुलामीके दिनोंमें इडियन लोगोंके भी बहुतसे गुलाम थे। इन सब बातोंके सिवाय सब लोगों को यह विश्वास हो गया था कि इडियन लोगों को पढ़ाने और सुधारनेकी चेष्टा कभी फलवती नही हो सकती । यह सब होते हुए भी मैने यह प्रण कर लिया कि में दिल लगाकर, सावधानीके साथ काम करूंगा और सफलता प्राप्त किये बिना न रहूँगा । कुछ ही दिनोंम इन इंडियनोंको मेरा विश्वास हो गया - चे मुझसे प्रेम करने लगे ओर मुझे आदरकी दृष्टि से देखने लगे । इडियनोंके विषयमे और लोग चाहे जो कहूँ, परन्तु मेरा अनुभव तो यह है कि और मनुष्योंके समान वे भी मनुष्य है, उनके साथ अच्छा बर्ताव करनेसे वे प्रसन्न रहते हैं और बुरा बर्ताव करनेसे नाराज होते है । जब उन्हें मेरा परिचय हो गया तब, वे मुझे सुसी करनेका प्रयत्न भी करने लगे। पर उन्हें अपने लबे बालोंसे, कनल ओढनेसे और पीनेसे इतनी प्रीति थी कि वे इन बातोंको छोडना पसन्द नहीं तबाकू करते थे, और ऐसे ही कारणोंसे गोरे लोग उन्हें असभ्य और जगली समझते थे । अँगरेजी भाषा सीसनेमें इंडियन बहुत पिछड़ जाते थे सही, पर और और विषयोंमं तथा कलाकौशल सीखने में काले नीमो और लाल इडियन विद्यार्थियोंमें कोई बडा भारी अन्तर न था 1 में इस बातसे
कृष्णवर्ण और ताम्म्रवर्ण जाति । छ वर्ष पहले में जिस रास्तेसे हैम्पटनके विद्यालयमे विद्यार्थीके . नाते भरती होनेके लिए गया था, इस बार स्पचि देनेके लिए भी मै उसी रास्तेसे गया, पर इस बार मै रेलगाडीम सवार था। मेरी पहली सफरमें और इस सफरमें कितना अन्तर है । पाँच वर्षकी अनधिमें शायद ही किसी मनुष्यकी अवस्था में इतना परिवर्तन हुआ होगा। हैम्पटनमें शिक्षक और विद्यार्थी, दोनोंने ही शुद्ध अन्त करणसे मेरा स्वागत किया । वहाँ मैने देखा कि विद्यालयने पहलेसे कहीं अधिक उन्नति की है और नीयो लोगोंकी हालत सुधारने और जरूरतोंको रफा करनेमें उसकी उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ रही है, शिक्षाप्रणालीमें भी बहुत कुछ सुधार हो रहा है । हैम्पटन-विद्यालय किसी नमूनेकी नक्ल नहीं था, बल्कि उसमें नीग्रो लोगोंकी अवस्था सुधारने और उनकी आवश्यकताओंकी पूर्ति करनेके विचारसे ही जनरल आर्मस्ट्रागके उदार नेतृत्वमें सुधारका प्रत्येक कार्य हुआ करता था। अपढ लोगोंमें शिक्षामचार तथा अन्य परोपकारके कार्य करते समय शिक्षित लोग प्राय पुरानी लकीर ही पीटते जाते है । वे इस बातको मूल जाते है कि हमे किन लोगोंमें काम करना है, उनकी क्या क्या आवश्यकतायें है, और उनकी शिक्षाका ध्येय क्या होना चाहिए । इन बातोंको भूल कर वे एक ही शिक्षाप्रणालीके साँचमें नये पुराने विद्यार्थियोंको ढालते जाते है, परन्तु हैम्पटनमें यह बात न थी । उपाधिदानसमारभके समय मैने जो व्याख्यान दिया उससे लोग बहुत प्रसन्न हुए और बहुतोंने अपनी प्रसन्नता प्रकट करके मुझे खूब ही उत्साहित किया। मै शीघ्र ही वेस्ट वर्जीनियामे अपने गॉवको वापिस चला आया, और फिर पाठशालामें पढानेका विचार करने लगा। इसी वीच अर्थात् एक हज़ार आठ सौ उन्यासी में एकाएक मुझे जनरल आर्मट्रागका पन फिर मिला। उन्होंने इस पनमें शिक्षकका काम करने और रही सही पढ़ाई पूरी आत्मोद्धारकरनेके लिए चले आनेको लिखा था । वेस्ट वर्जीनियाम शिक्षकका काम करते समय मैने अपने दो भाइयोंके अतिरिक्त और चार युवकों को हेम्पटन-विद्यालय में भरती कराने के लिए बडी तैयारी की थी। इसका फूल यह हुआ कि जब ये विद्यार्थी हेम्पटन पहुॅचे तो उनकी योग्यता देखकर शिक्षक इतने प्रसन्न हुए कि उनको उन्होंने एक्दम ऊपरके दर्जमें भरती कर लिया। मे समझता हूँ कि यही देखकर हैम्पटन के विद्यालयमे मुझे शिक्षकका काम करनेके लिए बुलाया था। मैंने जिन विद्यार्थियोंको हैम्पटन भेजा उनमेंसे एकका नाम हे डाक्टर सेमुएल ई कने । ये इस समय बोस्टन शहरके बड़े डाक्टरों में गिने जाते है और वहाँके स्कूल-चोर्टके मैचर भी है। इस समय जनरल आर्मस्ट्रागने इंडियन लोगोंको पहले पहल शिक्षा देनेका प्रयोग करना आरंभ किया था। उस समय बहुत कम लोगोंको यह आशा थी कि इडियन लोग भी लिख पढ़कर कुछ काम लायक हो जायेंगे स्ट्रगके मनमें यह समाई कि यह प्रयोग विशाल परिमाण पर और ढंगके साथ करना चाहिए । पश्चिम प्रान्तके जगलोंमेंसे वे जगली और बिल्कुल अपढ ऐसे एक सौसे भी ज्यादा इडियन ले आये, उनमे बहुतेरे युवा भी थे । जनरल आर्मस्ट्रा चाहते थे कि मै उन सब इडियनोंका पितृवत् पालक बनूँअर्थात् एक ही मकानमें उनके साथ रहकर उनकी शिक्षा, चालढाल और रहनसहनकी देखभाल किया करूँ । इस कार्य मोहकता अवश्य थी, पर वेस्ट वर्जीनियाके कार्यमे मैं इतना मगन हो गया था कि उसे छोड देना मेरे लिए बड़े भारी कष्टका कारण था, पर मैंने दिलको मजबूत करके उस कामको छोड ही दिया, क्याकि जनरल आर्मस्ट्रागकी आज्ञाको म टाल नहीं सकता था । कृष्णवर्ण ओर ताम्रवर्ण जाति । हेम्पटन जाने पर में पचहत्तर इटियन विद्यार्थियोंके साथ एक मकानमें रहने लगा । मै ही अकेला एक ऐसा आदमी था जो उनकी जातिके चाहर था। शुरू-शुरूमें मुझे बडा सन्देह था कि इस कार्यमें मै कैसे कामयाब हो सकूँगा । मै भली भाँति जानता था कि इडियनोंके दिमाग हम लोगोंसे बहुत ऊँचे है । वे अपनेको गोरोंसे भी बड़े मानते थे इसीसे अन्दाज किया जा सकता है कि गुलामीको महत्पाप समझनेवाले इंडियन गुलामीमें पले हुए नीग्रो लोगांको क्या समझते होंगे । गुलामीके दिनोंमें इडियन लोगोंके भी बहुतसे गुलाम थे। इन सब बातोंके सिवाय सब लोगों को यह विश्वास हो गया था कि इडियन लोगों को पढ़ाने और सुधारनेकी चेष्टा कभी फलवती नही हो सकती । यह सब होते हुए भी मैने यह प्रण कर लिया कि में दिल लगाकर, सावधानीके साथ काम करूंगा और सफलता प्राप्त किये बिना न रहूँगा । कुछ ही दिनोंम इन इंडियनोंको मेरा विश्वास हो गया - चे मुझसे प्रेम करने लगे ओर मुझे आदरकी दृष्टि से देखने लगे । इडियनोंके विषयमे और लोग चाहे जो कहूँ, परन्तु मेरा अनुभव तो यह है कि और मनुष्योंके समान वे भी मनुष्य है, उनके साथ अच्छा बर्ताव करनेसे वे प्रसन्न रहते हैं और बुरा बर्ताव करनेसे नाराज होते है । जब उन्हें मेरा परिचय हो गया तब, वे मुझे सुसी करनेका प्रयत्न भी करने लगे। पर उन्हें अपने लबे बालोंसे, कनल ओढनेसे और पीनेसे इतनी प्रीति थी कि वे इन बातोंको छोडना पसन्द नहीं तबाकू करते थे, और ऐसे ही कारणोंसे गोरे लोग उन्हें असभ्य और जगली समझते थे । अँगरेजी भाषा सीसनेमें इंडियन बहुत पिछड़ जाते थे सही, पर और और विषयोंमं तथा कलाकौशल सीखने में काले नीमो और लाल इडियन विद्यार्थियोंमें कोई बडा भारी अन्तर न था एक में इस बातसे
Posted On: केंद्रीय रसायन और उर्वरक एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्री भगवंत खुबा ने इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली स्थित हैबिटेट वर्ल्ड में डीसीपीसी के तहत 'इंडस्ट्री कनेक्ट विद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉन्क्लेव' का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग (डीसीपीसी) के तहत सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) द्वारा आयोजित किया गया था। केंद्रीय राज्यमंत्री ने माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत मिशन को पूरा करने के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करने में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। अनुसंधानों को प्रदर्शित करने, उपयुक्त उद्योग भागीदार की पहचान करने और उद्योग के भविष्य की आवश्यकताओं को समझने के लिए डीसीपीसी और सीआईपीईटी के प्रयासों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सीओई ऊर्जा सक्षम उपकरणों, पर्यावरण के अनुकूल बहुलक उत्पादों, कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण, स्मार्ट पॉलिमर यानी बहुलक, स्वास्थ्य देखभाल में बहुलक आदि के क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और उसके जरिए प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ स्टार्टअप को प्रोत्साहन दे रही है। भविष्य में इन परियोजनाओं के शोध परिणाम भारत को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का केंद्र बना देंगे। उन्होंने कहा कि जैव चिकित्सा उपकरणों और खिलौनों पर आधारित परियोजनाएं आयात पर भारत की निर्भरता घटाएंगी और इस तरह हमारे लिए विदेशी मुद्रा की बचत करेंगी। हितधारकों के बीच सहयोग के महत्व को प्रदर्शित करते हुए, श्री भगवंत खुबा ने कहा कि "यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि उद्योग और शिक्षाविदों को न सिर्फ एक साथ काम करना चाहिए बल्कि एक साथ विकास करना चाहिए। ज्ञान सृजन और उसका व्यावसायीकरण एक नदी के दो छोरों की तरह है जिसे सभी हितधारकों के बीच इस तरह की नियमित बातचीत के माध्यम से एक साथ जोड़ा जाना चाहिए।" उन्होंने सभी हितधारकों से काइजेन की जापानी अवधारणा को लागू करने और देश में अनुसंधान एवं नवाचार का एक समग्र इकोसिस्टम बनाने के लिए साइलो में काम करना छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसंधान और नवाचार प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए देशभर में सीआईपीईटी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र बनाया है। उन्होंने मंच पर मौजूद वैज्ञानिकों से जटिल औद्योगिक समस्याओं के स्थायी और वैकल्पिक समाधान तलाशने की दृष्टि से अनुसंधान करने और प्रौद्योगिकी एवं नीति अनुसंधान में सहयोगी अनुसंधान एवं विकास के प्रयासों के माध्यम से उनका समर्थन करने का अनुरोध किया। अब समय आ गया है कि इस शोध का व्यावसायीकरण करने के लिए उद्योग को आगे आने में सक्षम बनाया जा सके। इस संबंध में उद्योग की जरूरतों को जानने में इस तरह के सम्मेलन और बातचीत लाभप्रद होती है। सुश्री आरती आहूजा, सचिव (रसायन एवं पेट्रोरसायन) ने प्रतिभागियों को मंत्रालय द्वारा की गई पहलों की जानकारी दी। रसायन और पेट्रोरसायन विभाग अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के अपने प्रयास में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए योजना लागू कर रहा है और विभिन्न प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में पहले ही 13 सीओई स्थापित कर चुका है। सरकार द्वारा वित्त पोषित उत्कृष्टता केंद्र के अलावा, सरकार उद्योग की जरूरत के लिए देश में अन्य प्रयोगशालाओं और संस्थानों की क्षमता का दोहन करने की भी उम्मीद कर रही है। श्री भगवंत खुबा ने आज इस कार्यक्रम में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) और उद्योग को जोड़ने के लिए पोर्टल के साथ-साथ सीआईपीईटी का एक ई-न्यूजलेटर भी लॉन्च किया। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद, निम्नलिखित विषयों पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किए गएः बायो-इंजीनियर्ड पॉलीमेरिक सिस्टम, पॉलिमर आधारित बायो-मेडिकल डिवाइसेस, पॉलिमर-आधारित खिलौने और उन्नत पॉलिमर और कंपोजिट। विभिन्न सीओई के वैज्ञानिकों ने उद्योगपतियों को अपने अनुसंधानों पर एक प्रस्तुति दी। सीआईपीईटी के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) शिशिर सिन्हा ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। संगोष्ठी में प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों, शोध-छात्रों, सीआईपीईटी के स्टाफ और छात्रों, पूर्व छात्रों, उद्योगों और संघों ने उपस्थित होकर और वर्चुअल माध्यम दोनों तरह से हिस्सा लिया।
Posted On: केंद्रीय रसायन और उर्वरक एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्री भगवंत खुबा ने इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली स्थित हैबिटेट वर्ल्ड में डीसीपीसी के तहत 'इंडस्ट्री कनेक्ट विद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉन्क्लेव' का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग के तहत सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित किया गया था। केंद्रीय राज्यमंत्री ने माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत मिशन को पूरा करने के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करने में उत्कृष्टता केंद्र द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। अनुसंधानों को प्रदर्शित करने, उपयुक्त उद्योग भागीदार की पहचान करने और उद्योग के भविष्य की आवश्यकताओं को समझने के लिए डीसीपीसी और सीआईपीईटी के प्रयासों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सीओई ऊर्जा सक्षम उपकरणों, पर्यावरण के अनुकूल बहुलक उत्पादों, कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण, स्मार्ट पॉलिमर यानी बहुलक, स्वास्थ्य देखभाल में बहुलक आदि के क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और उसके जरिए प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ स्टार्टअप को प्रोत्साहन दे रही है। भविष्य में इन परियोजनाओं के शोध परिणाम भारत को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का केंद्र बना देंगे। उन्होंने कहा कि जैव चिकित्सा उपकरणों और खिलौनों पर आधारित परियोजनाएं आयात पर भारत की निर्भरता घटाएंगी और इस तरह हमारे लिए विदेशी मुद्रा की बचत करेंगी। हितधारकों के बीच सहयोग के महत्व को प्रदर्शित करते हुए, श्री भगवंत खुबा ने कहा कि "यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि उद्योग और शिक्षाविदों को न सिर्फ एक साथ काम करना चाहिए बल्कि एक साथ विकास करना चाहिए। ज्ञान सृजन और उसका व्यावसायीकरण एक नदी के दो छोरों की तरह है जिसे सभी हितधारकों के बीच इस तरह की नियमित बातचीत के माध्यम से एक साथ जोड़ा जाना चाहिए।" उन्होंने सभी हितधारकों से काइजेन की जापानी अवधारणा को लागू करने और देश में अनुसंधान एवं नवाचार का एक समग्र इकोसिस्टम बनाने के लिए साइलो में काम करना छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसंधान और नवाचार प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए देशभर में सीआईपीईटी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र बनाया है। उन्होंने मंच पर मौजूद वैज्ञानिकों से जटिल औद्योगिक समस्याओं के स्थायी और वैकल्पिक समाधान तलाशने की दृष्टि से अनुसंधान करने और प्रौद्योगिकी एवं नीति अनुसंधान में सहयोगी अनुसंधान एवं विकास के प्रयासों के माध्यम से उनका समर्थन करने का अनुरोध किया। अब समय आ गया है कि इस शोध का व्यावसायीकरण करने के लिए उद्योग को आगे आने में सक्षम बनाया जा सके। इस संबंध में उद्योग की जरूरतों को जानने में इस तरह के सम्मेलन और बातचीत लाभप्रद होती है। सुश्री आरती आहूजा, सचिव ने प्रतिभागियों को मंत्रालय द्वारा की गई पहलों की जानकारी दी। रसायन और पेट्रोरसायन विभाग अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के अपने प्रयास में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए योजना लागू कर रहा है और विभिन्न प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में पहले ही तेरह सीओई स्थापित कर चुका है। सरकार द्वारा वित्त पोषित उत्कृष्टता केंद्र के अलावा, सरकार उद्योग की जरूरत के लिए देश में अन्य प्रयोगशालाओं और संस्थानों की क्षमता का दोहन करने की भी उम्मीद कर रही है। श्री भगवंत खुबा ने आज इस कार्यक्रम में उत्कृष्टता केंद्र और उद्योग को जोड़ने के लिए पोर्टल के साथ-साथ सीआईपीईटी का एक ई-न्यूजलेटर भी लॉन्च किया। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद, निम्नलिखित विषयों पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किए गएः बायो-इंजीनियर्ड पॉलीमेरिक सिस्टम, पॉलिमर आधारित बायो-मेडिकल डिवाइसेस, पॉलिमर-आधारित खिलौने और उन्नत पॉलिमर और कंपोजिट। विभिन्न सीओई के वैज्ञानिकों ने उद्योगपतियों को अपने अनुसंधानों पर एक प्रस्तुति दी। सीआईपीईटी के महानिदेशक प्रो. शिशिर सिन्हा ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। संगोष्ठी में प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों, शोध-छात्रों, सीआईपीईटी के स्टाफ और छात्रों, पूर्व छात्रों, उद्योगों और संघों ने उपस्थित होकर और वर्चुअल माध्यम दोनों तरह से हिस्सा लिया।
मेषः लोहा, लोहा मशीनरी, लोहा के कलपुर्जों, हार्डवेयर, स्टील शटरिंग, स्टील फर्नीचर का काम करने वालों को अपने काम-धंधे में अच्छा लाभ मिलेगा। वृषः राजकीय कामों में कदम बढ़त की तरफ, बड़े लोगों के समक्ष आपकी पैठ, लिहाजदारी बढ़ेगी, दुश्मन भी कमजोर, तेजहीन रहेंगे। मिथुनः आमतौर पर मजबूत सितारा आपको हर फ्रंट पर हावी, प्रभावी, विजयी रखेगा, यत्न करने पर आपकी योजनाबंदी में कोई पेचीदगी हटेगी। कर्क : सितारा सेहत के लिए ढीला, इसलिए बेतुके खान-पान से बचना चाहिए, सफर भी न करें, मगर आम हालात पहले जैसे बने रहेंगे। सिंह : व्यापारिक तथा कामकाज की दशा अच्छी, कोशिशों, इरादों, मनोरथों में कामयाबी मिलेगी, फैमिली फ्रंट पर आपकी पैठ बढ़ी रहेगी। कन्याः विरोधियों को कमजोर समझने की भूल न करें, क्योंकि वे आपकी टांग खींचने से बाज न आएंगे, मगर आम हालात पहले जैसे बने रहेंगे। तुलाः संतान के सुपोर्टिव रुख पर भरोसा किया जा सकता है और वह आपकी किसी प्रॉब्लम की सैटलमैंट में मददगार हो सकती है। वृश्चिकः यत्न करने पर कोर्ट-कचहरी के किसी काम में कोई पेचीदगी हट सकती है, विरोधियों पर आपकी पकड़ मजबूत होगी। धनुः किसी बड़े व्यक्ति से मदद सहयोग लेने के लिए यदि आप उसे अपरोच करेंगे तो वह आपकी बात धीरज तथा ध्यान से सुनेगा। मकरः वाहनों की सेल परचेज या उन्हें डैकोरेट करने का काम करने वालों की अर्थदशा कंफर्टेबल रहेगी, कामकाजी दशा भी बेहतर रहेगी। कुम्भः अर्थ तथा कारोबारी दशा अच्छी, जिस काम के लिए यत्न करेंगे उसमें कामयाबी मिलेगी, मगर स्वभाव में क्रोध रह सकता है। मीनः उलझनों तथा पंगों से अपने आपको बचाकर रखें क्योंकि कमजोर ग्रह के कारण कोई न कोई समस्या या पंगा आपको परेशान करता रह सकता है।
मेषः लोहा, लोहा मशीनरी, लोहा के कलपुर्जों, हार्डवेयर, स्टील शटरिंग, स्टील फर्नीचर का काम करने वालों को अपने काम-धंधे में अच्छा लाभ मिलेगा। वृषः राजकीय कामों में कदम बढ़त की तरफ, बड़े लोगों के समक्ष आपकी पैठ, लिहाजदारी बढ़ेगी, दुश्मन भी कमजोर, तेजहीन रहेंगे। मिथुनः आमतौर पर मजबूत सितारा आपको हर फ्रंट पर हावी, प्रभावी, विजयी रखेगा, यत्न करने पर आपकी योजनाबंदी में कोई पेचीदगी हटेगी। कर्क : सितारा सेहत के लिए ढीला, इसलिए बेतुके खान-पान से बचना चाहिए, सफर भी न करें, मगर आम हालात पहले जैसे बने रहेंगे। सिंह : व्यापारिक तथा कामकाज की दशा अच्छी, कोशिशों, इरादों, मनोरथों में कामयाबी मिलेगी, फैमिली फ्रंट पर आपकी पैठ बढ़ी रहेगी। कन्याः विरोधियों को कमजोर समझने की भूल न करें, क्योंकि वे आपकी टांग खींचने से बाज न आएंगे, मगर आम हालात पहले जैसे बने रहेंगे। तुलाः संतान के सुपोर्टिव रुख पर भरोसा किया जा सकता है और वह आपकी किसी प्रॉब्लम की सैटलमैंट में मददगार हो सकती है। वृश्चिकः यत्न करने पर कोर्ट-कचहरी के किसी काम में कोई पेचीदगी हट सकती है, विरोधियों पर आपकी पकड़ मजबूत होगी। धनुः किसी बड़े व्यक्ति से मदद सहयोग लेने के लिए यदि आप उसे अपरोच करेंगे तो वह आपकी बात धीरज तथा ध्यान से सुनेगा। मकरः वाहनों की सेल परचेज या उन्हें डैकोरेट करने का काम करने वालों की अर्थदशा कंफर्टेबल रहेगी, कामकाजी दशा भी बेहतर रहेगी। कुम्भः अर्थ तथा कारोबारी दशा अच्छी, जिस काम के लिए यत्न करेंगे उसमें कामयाबी मिलेगी, मगर स्वभाव में क्रोध रह सकता है। मीनः उलझनों तथा पंगों से अपने आपको बचाकर रखें क्योंकि कमजोर ग्रह के कारण कोई न कोई समस्या या पंगा आपको परेशान करता रह सकता है।
Comet will be seen in February: यह 12 फरवरी को धरती से करीब 4.20 करोड़ किलोमीटर दूर से निकलेगा. इसे किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद के बिना नंगी आंखों स देखा जा सकेगा. बस आपके इलाके का आसमान उस वक्त साफ होना चाहिए. Space Science: 2023 की शुरुआत में ही अंतरिक्ष में एक नजारा दिखने वाला है जो हजारों सालों में एक बार ही दिखता है यह C/2022 E3 (ZTF) नाम का एक धूमकेतू है जो अगले महीने अंतरिक्ष में दिखाई देगा. इससे पहले यह 50 हजार साल पहले हिमयुग के दौरान ऐसा नजारा दिखा था. यह 12 फरवरी को धरती से करीब 4.20 करोड़ किलोमीटर दूर से निकलेगा. इसे किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद के बिना नंगी आंखों स देखा जा सकेगा. बस आपके इलाके का आसमान उस वक्त साफ होना चाहिए. इस धूमकेतू को पिछले साल कैलिफोर्निया की ज्विकी ट्रांसजिएंट फैसिलिटी के वैज्ञानिकों ने खोजा था और तब से वह इसकी ट्रेकिंग कर रहे हैं. वैसे धूमकेतुओं को लेकर भविष्यवाणी करना आमतौर पर काफी मुश्किल काम है क्योंकि ये कई बार अपनी दिशा बदल लेते हैं. 50 हजार साल पहले अपर पैलियोलिथिक काल (Upper Paleolithic Period) में आया यह धूमकेतू आया था तब धरती पर हिमयुग था और इंसानों की आधुनिक प्रजाति होमो सेपियंस भी नहीं थे. यह धूमकेतू जब पिछली बार नजर आया था तो धरती पर कोई प्रदूषण नहीं था, आसमान बिल्कुल साफ था. तब धरती पर निएंडरथल मानव और मैमथ घूमते थे. उत्तरी गोलार्ध में तो इसे देखा जा सकेगा. आसामना साफ रहा तो नंगी आखों से नहीं तो दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से. इसे देखने का सही समय सुबह होने से ठीक पहले का होगा. लेकिन दक्षिण गोलार्ध में यह सिर्फ फरवरी के शुरुआती दिनों में ही देखा जा सकेगा. 21 जनवरी को भी इसे देखने का एक मौका होगा, उन दिन नया चांद होगा.
Comet will be seen in February: यह बारह फरवरी को धरती से करीब चार.बीस करोड़ किलोमीटर दूर से निकलेगा. इसे किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद के बिना नंगी आंखों स देखा जा सकेगा. बस आपके इलाके का आसमान उस वक्त साफ होना चाहिए. Space Science: दो हज़ार तेईस की शुरुआत में ही अंतरिक्ष में एक नजारा दिखने वाला है जो हजारों सालों में एक बार ही दिखता है यह C/दो हज़ार बाईस Eतीन नाम का एक धूमकेतू है जो अगले महीने अंतरिक्ष में दिखाई देगा. इससे पहले यह पचास हजार साल पहले हिमयुग के दौरान ऐसा नजारा दिखा था. यह बारह फरवरी को धरती से करीब चार.बीस करोड़ किलोमीटर दूर से निकलेगा. इसे किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद के बिना नंगी आंखों स देखा जा सकेगा. बस आपके इलाके का आसमान उस वक्त साफ होना चाहिए. इस धूमकेतू को पिछले साल कैलिफोर्निया की ज्विकी ट्रांसजिएंट फैसिलिटी के वैज्ञानिकों ने खोजा था और तब से वह इसकी ट्रेकिंग कर रहे हैं. वैसे धूमकेतुओं को लेकर भविष्यवाणी करना आमतौर पर काफी मुश्किल काम है क्योंकि ये कई बार अपनी दिशा बदल लेते हैं. पचास हजार साल पहले अपर पैलियोलिथिक काल में आया यह धूमकेतू आया था तब धरती पर हिमयुग था और इंसानों की आधुनिक प्रजाति होमो सेपियंस भी नहीं थे. यह धूमकेतू जब पिछली बार नजर आया था तो धरती पर कोई प्रदूषण नहीं था, आसमान बिल्कुल साफ था. तब धरती पर निएंडरथल मानव और मैमथ घूमते थे. उत्तरी गोलार्ध में तो इसे देखा जा सकेगा. आसामना साफ रहा तो नंगी आखों से नहीं तो दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से. इसे देखने का सही समय सुबह होने से ठीक पहले का होगा. लेकिन दक्षिण गोलार्ध में यह सिर्फ फरवरी के शुरुआती दिनों में ही देखा जा सकेगा. इक्कीस जनवरी को भी इसे देखने का एक मौका होगा, उन दिन नया चांद होगा.
ट्रेजेडी क्वीन कहीं जाने वालीं मीना कुमारी को उनके पिता पैदा होते ही अनाथ आश्रम छोड़ आए थे। मीना कुमारी के पिता अली बख्श ने पैसे की कमी और पहले से ही दो बेटियों के बोझ से घबराकर उन्हें एक मुस्लिम अनाथालय में छोड़ दिया था। आज ही के दिन साल 1972 में फिल्म इंडस्ट्री की सबसे शानदार अदाकार मीना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। तमाम सफलताओं के बाद भी मीना अंत समय तक सुकून और प्यार के लिए तरसती रहीं। भले ही मीना कुमारी ने फिल्म इंडस्ट्री में कितना ही बड़ा नाम क्यों न कमाया हो लेकिन वो फिल्मों में काम नहीं करना चाहती थीं। मीना ने चार साल की छोटी उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। मीना हमेशा अपने माता-पिता से विनती करती थी कि वह भी अन्य बच्चों की तरह पढ़ना चाहती हैं लेकिन किसी ने नहीं सुना। 14 फरवरी 1952 को महज 18 साल की मीना कुमारी की शादी कमाल अमरोही से हुई थी। साल 1964 में मीना कुमारी और कमाल अमरोही का रिश्ता टूट गया, दोनों ने तलाक नहीं लिया बल्कि अलग रहने लगे।
ट्रेजेडी क्वीन कहीं जाने वालीं मीना कुमारी को उनके पिता पैदा होते ही अनाथ आश्रम छोड़ आए थे। मीना कुमारी के पिता अली बख्श ने पैसे की कमी और पहले से ही दो बेटियों के बोझ से घबराकर उन्हें एक मुस्लिम अनाथालय में छोड़ दिया था। आज ही के दिन साल एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में फिल्म इंडस्ट्री की सबसे शानदार अदाकार मीना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। तमाम सफलताओं के बाद भी मीना अंत समय तक सुकून और प्यार के लिए तरसती रहीं। भले ही मीना कुमारी ने फिल्म इंडस्ट्री में कितना ही बड़ा नाम क्यों न कमाया हो लेकिन वो फिल्मों में काम नहीं करना चाहती थीं। मीना ने चार साल की छोटी उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। मीना हमेशा अपने माता-पिता से विनती करती थी कि वह भी अन्य बच्चों की तरह पढ़ना चाहती हैं लेकिन किसी ने नहीं सुना। चौदह फरवरी एक हज़ार नौ सौ बावन को महज अट्ठारह साल की मीना कुमारी की शादी कमाल अमरोही से हुई थी। साल एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में मीना कुमारी और कमाल अमरोही का रिश्ता टूट गया, दोनों ने तलाक नहीं लिया बल्कि अलग रहने लगे।
Weather Warning: उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई हिस्सों में कड़ाके की सर्दी और शीतलहर (Cold Wave) के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है. हाड कंपा देने वाली ठंड के कारण लोग घरों में रहने के लिए मजबूर है. इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अभी कुछ दिन ऐसे ही ठंड रहने की उम्मीद जताई है. जबकि उत्तर भारत (North India) के कई राज्यों के लिए अलर्ट भी जारी किया है. आईएमडी ने जानकारी दी है कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सोमवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम दर्ज किया गया. वहीं मंगलवार को बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्से शीतलहर की चपेट में रहेंगे. जबकि राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग हिस्सों में घना कोहरा छाया रहेगा. बीते कुछ दिनों से कम दृश्यता और घने कोहरे के कारण पूरे उत्तर भारत के लिए कई विमान देर से उड़ान भर रही हैं. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक सोमवार तक समूचे उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण 300 हवाई उड़ान प्रभावित हुई है, जबकि सुबह 6 से दिन के 12 बजे तक करीब 260 उड़ानें रद्द हुई हैं. इनके अलावा अन्य 50 विमान, जो दिन के 12 बजे से शाम 6 बजे तक अपने गंतव्य के लिए रवाना होने वाली थी, वह भी कम दृश्यता के कारण देरी से उड़ान भर रही हैं.
Weather Warning: उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई हिस्सों में कड़ाके की सर्दी और शीतलहर के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है. हाड कंपा देने वाली ठंड के कारण लोग घरों में रहने के लिए मजबूर है. इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने अभी कुछ दिन ऐसे ही ठंड रहने की उम्मीद जताई है. जबकि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए अलर्ट भी जारी किया है. आईएमडी ने जानकारी दी है कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सोमवार को अधिकतम तापमान सामान्य से दस डिग्री सेल्सियस तक कम दर्ज किया गया. वहीं मंगलवार को बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्से शीतलहर की चपेट में रहेंगे. जबकि राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग हिस्सों में घना कोहरा छाया रहेगा. बीते कुछ दिनों से कम दृश्यता और घने कोहरे के कारण पूरे उत्तर भारत के लिए कई विमान देर से उड़ान भर रही हैं. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक सोमवार तक समूचे उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण तीन सौ हवाई उड़ान प्रभावित हुई है, जबकि सुबह छः से दिन के बारह बजे तक करीब दो सौ साठ उड़ानें रद्द हुई हैं. इनके अलावा अन्य पचास विमान, जो दिन के बारह बजे से शाम छः बजे तक अपने गंतव्य के लिए रवाना होने वाली थी, वह भी कम दृश्यता के कारण देरी से उड़ान भर रही हैं.
रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्वामी सदानंद प्रणामी चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वामी सदानंद ने मुलाकात की. चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री को स्वामी सदानंद ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए ग्यारह लाख रुपये का चेक सौंपा. मुख्यमंत्री ने ट्रस्ट की ओर से कोरोना संक्रमण के दौर में किये गए इस कार्य के लिए आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर भीम सिंह, डोंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजू अग्रवाल और मनोज चौधरी उपस्थित थे.
रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्वामी सदानंद प्रणामी चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वामी सदानंद ने मुलाकात की. चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री को स्वामी सदानंद ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए ग्यारह लाख रुपये का चेक सौंपा. मुख्यमंत्री ने ट्रस्ट की ओर से कोरोना संक्रमण के दौर में किये गए इस कार्य के लिए आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर भीम सिंह, डोंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजू अग्रवाल और मनोज चौधरी उपस्थित थे.
भारत नेे वनडे सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लिया है. टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंग्लैंड की पूरी टीम 45. 5 ओवरों में 259 रनों पर सिमट गई है. इंग्लैंड की ओर से जोस बटलर ने सबसे ज्यादा 60 रन बनाए. वहीं जेसन रॉय ने 41 और मोईन अली ने 24 रनों की पारी खेली. इसके अलावा क्रेग ओवरटन ने 32 और लियाम लिविंगस्टोन ने 27 रनों का योगदान दिया. भारत की ओर से हार्दिक पंड्या ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट चटकाए. वहीं युजवेंद्र चहल ने तीन और सिराज ने दो-दो विकेट हासिल किए. टीम इंडिया ने इंग्लैंड को तीसरे वनडे मैच में पांच विकेट से हरा दिया है. ऋषभ पंत ने अपने वनडे करियर का पहला शतक जड़ दिया है. पंत ने अपनी शतकीय पारी में 10 चौके और दो छक्के लगाए. भारत का स्कोर अब पांच विकेट पर 244 रन है. ऋषभ पंत 108 और रवींद्र जडेजा सात रन बनाकर क्रीज पर हैं. हार्दिक पंड्या आउट होकर पवेलियन लौट गए हैं. हार्दिक को ब्रायडन कार्स ने बेन स्टोक्स के हाथों कैच आउट कराया. हार्दिक ने 55 गेंदों पर ताबड़तोड़ 71 रन बनाए, जिसमें 10 चौके शामिल रहे. 36 ओवर के बाद भारत का स्कोर पांच विकेट पर 206 रन है. ऋषभ पंत ने भी अपना पचासा पूरा कर लिया है. पंत ने 71 बॉल का सामना करते हुए पांच चौकों की मदद से यह मुकाम हासिल किया. भारत का स्कोर 31 ओवर्स की समाप्ति के बाद चार विकेट पर 159 रन है. हार्दिक पंड्या 52 और ऋषभ पंत 50 रन बनाकर खेल रहे हैं. हार्दिक पंड्या ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया है. इस दौरान हार्दिक ने सात चौके उड़ाए हैं. 30. 3 ओवर के बाद भारत का स्कोर चार विकेट पर 153 रन है. हार्दिक पंड्या 51 और ऋषभ पंत 45 रन बनाकर खेल रहे हैं. अब भारत को मैच जीतने के लिए 107 रनों की जरूरत है. भारतीय टीम का स्कोर 26. 3 ओवर्स में चार विकेट पर 135 रन है. हार्दिक पंड्या 44 और ऋषभ पंत 35 रन बनाकर खेल रहे हैं. दोनों खिलाड़ियों के बीच अबतक 63 रनों की साझेदारी हुई है. भारतीय टीम को चौथा झटका लग चुका है. सूर्यकुमार यादव 16 रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं. सूर्या को क्रेग ओवरटन ने जोस बटलर के हाथों कैच आउट कराया. 16. 2 ओवर्स के बाद भारत का स्कोर चार विकेट पर 72 रन है. ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या क्रीज पर हैं. विराट कोहली 17 रन बनाकर आउट हो गए हैं. कोहली को रीस टॉप्ली ने विकेटकीपर जोस बटलर के हाथों कैच आउट कराया. भारत का स्कोर 8. 3 ओवर्स में तीन विकेट पर 38 रन है. सूर्यकुामर यादव और ऋषभ पंत क्रीज पर मौजूद हैं. भारतीय टीम का दूसरा विकेट गिर गया है. कप्तान रोहित शर्मा 17 रन बनाकर आउट हो गए हैं. रोहित शर्मा को रीस टॉप्ली ने जो रूट के हाथों कैच आउट कराया. भारत का स्कोर 5. 3 ओवर्स में दो विकेट पर 29 रन है. विराट कोहली 10 और ऋषभ पंत 0 रन बनाकर खेल रहे हैं. भारतीय टीम को पहला झटका लग चुका है. शिखर धवन महज एक रन बनाकर आउट हो गए हैं. धवन को रीस टॉप्ली ने जेसन रॉय के हाथों कैच आउट कराया. 3 ओवरों की समाप्ति के बाद भारत का स्कोर एक विकेट पर 13 रन है. रोहित शर्मा 12 और विराट कोहली 0 रन बनाकर खेल रहे हैं. टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंग्लैंड की पूरी टीम 45. 5 ओवरों में 259 रनों पर सिमट गई है. इंग्लैंड की ओर से जोस बटलर ने सबसे ज्यादा 60 रन बनाए. वहीं जेसन रॉय ने 41 और मोईन अली ने 24 रनों की पारी खेली. इसके अलावा क्रेग ओवरटन ने 32 और लियाम लिविंगस्टोन ने 27 रनों का योगदान दिया. भारत की ओर से हार्दिक पंड्या ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट चटकाए. वहीं युजवेंद्र चहल ने तीन और सिराज ने दो-दो विकेट हासिल किए. England are all out for 259 in 45. 5 overs. Hardik Pandya was pick of the bowlers with figures of 4/24 in 7 overs. इंग्लैंड का नौवां विकेट गिर गया है. क्रेग ओवरटन 32 रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं. ओवरटन को चहल ने विराट कोहली के हाथों कैच आउट कराया. 45. 4 ओवर्स में इंग्लैंड का स्कोर नौ विकेट पर 258 रन है. इंग्लैंड को आठवां झटका लगा है. डेविड विली युजवेंद्र चहल की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के चक्कर में सूर्यकुमार यादव को कैच थमा बैठे. विली ने 18 रनों की पारी खेली. 44 ओवर्स के बाद इंग्लैंड का स्कोर आठ विकेट 249 रन है. हार्दिक पंड्या ने भारत को एक और एक सफलता दिलाई है. हार्दिक ने जोस बटलर को जडेजा के हाथों कैच आउट करा दिया है. बटलर ने 60 रनों की पारी खेली. इंग्लैंड का स्कोर 37. 1 ओवर्स मे ंसात विकेट पर 200 रन है. डेविड विली और क्रेग ओवरटन क्रीज पर हैं. इंग्लैंड का छठा विकेट गिर चुका है. लियाम लिविंगस्टोन को हार्दिक पंड्या ने रवींद्र जडेजा के हाथों कैच आउट कराया. लिविंगस्टोन ने 27 रनों की पारी खेली. 36. 4 ओवर्स में इंग्लैंड का स्कोर 6 विकेट पर 198 रन है. जोस बटलर 60 और डेविड विली 0 रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड का स्कोर फिलहाल 29. 4 ओवर्स में पांच विकेट पर 160 रन है. जोस बटलर 43 और लियाम लिविंगस्टोन 7 रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड का पांचवां विकेट मोईन अली के रूप में गिरा, जो 34 रन बनाकर आउट हुए. मोईन को रवींद्र जडेजा ने ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट कराया. 24 ओवर्स की समाप्ति के बाद इंग्लैंड का स्कोर चार विकेट पर 128 रन है. जोस बटलर 31 और मोईन अली 23 रन बनाकर खेल रहे हैं. दोनों के बीच अबतक 54 रनों की साझेदारी हो चुकी है. इंग्लैंड को चौथा झटका लग चुका है. बेन स्टोक्स 27 रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं. स्टोक्स को हार्दिक पंड्या ने कॉट एंड बोल्ड आउट कर दिया. 13. 2 ओवर्स में इंग्लैंड का स्कोर चार विकेट पर 74 रन है. जोस बटलर चार और मोईन अली 0 रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड को तीसरा झटका लग चुका है. जेसन रॉय 41 रन बनाकर पवेलियन लौट गए है. रॉय को हार्दिक पंड्या ने विकेटकीपर ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट कराया. 10 ओवर्स के बाद इंग्लैंड का स्कोर तीन विकेट पर 66 रन है. बेन स्टोक्स 24 और जोस बटलर 0 रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड को मैच के दूसरे ही ओवर में डबल झटका लगा है. मोहम्मद सिराज ने पहले जॉनी बेयरस्टो और फिर जो रूट को चलता कर दिया, बेयरस्टो का कैच श्रेयस अय्यर और रूट का कैच रोहित शर्मा ने लपका. दोनों खिलाड़ी अपना खाता तक नहीं खोल पाए. इंग्लैंड का स्कोर 2 ओवर्स में दो विकेट पर 12 रन है. जेसन रॉय 12 और बेन स्टोक्स खाता खोले बगैर क्रीज पर हैं. टीम इंडिया की प्लेइंग-11: रोहित शर्मा (कप्तान), शिखर धवन, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और युजवेंद्र चहल. इंग्लिश की प्लेइंग-11: जेसन रॉय, जॉनी बेयरस्टो, जो रूट, बेन स्टोक्स, जोस बटलर (कप्तान और विकेटकीपर), लियाम लिविंगस्टोन, मोईन अली, डेविड विली, क्रेग ओवर्टन, रीस टॉपले और ब्रायडन कार्स. टीम इंडिया की प्लेइंग-11 में एक बदलाव किया गया है. इस निर्णायक मैच से स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है. उन्हें थोड़ी हेल्थ समस्या थी. बुमराह की जगह मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया. टीम इंडिया और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच शुरू हो गया है. यह मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफर्ड में खेला जा रहा है. भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बॉलिंग का फैसला किया. इंडिया की फुल स्क्वॉडः रोहित शर्मा (कप्तान), विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह, शिखर धवन, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, शार्दूल ठाकुर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह. इंग्लैंड की फुल स्क्वॉडः जोस बटलर (कप्तान), मोईन अली, जॉनी बेयरस्टो, हैरी ब्रूक, ब्रायडन कार्स, सैम कुरेन, लियाम लिविंगस्टोन, क्रेग ओवरटन, एम. पार्किंसन, जो रूट, जेसन रॉय, फिल सॉल्ट, बेन स्टोक्स,रीस टॉपली, डेविड विली. टीम इंडिया और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच थोड़ी देर में खेला जाएगा. यह मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफर्ड में होगा. फिलहाल, दोनों टीमों के बीच सीरीज 1-1 की बराबरी पर है.
भारत नेे वनडे सीरीज पर दो-एक से कब्जा कर लिया है. टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंग्लैंड की पूरी टीम पैंतालीस. पाँच ओवरों में दो सौ उनसठ रनों पर सिमट गई है. इंग्लैंड की ओर से जोस बटलर ने सबसे ज्यादा साठ रन बनाए. वहीं जेसन रॉय ने इकतालीस और मोईन अली ने चौबीस रनों की पारी खेली. इसके अलावा क्रेग ओवरटन ने बत्तीस और लियाम लिविंगस्टोन ने सत्ताईस रनों का योगदान दिया. भारत की ओर से हार्दिक पंड्या ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट चटकाए. वहीं युजवेंद्र चहल ने तीन और सिराज ने दो-दो विकेट हासिल किए. टीम इंडिया ने इंग्लैंड को तीसरे वनडे मैच में पांच विकेट से हरा दिया है. ऋषभ पंत ने अपने वनडे करियर का पहला शतक जड़ दिया है. पंत ने अपनी शतकीय पारी में दस चौके और दो छक्के लगाए. भारत का स्कोर अब पांच विकेट पर दो सौ चौंतालीस रन है. ऋषभ पंत एक सौ आठ और रवींद्र जडेजा सात रन बनाकर क्रीज पर हैं. हार्दिक पंड्या आउट होकर पवेलियन लौट गए हैं. हार्दिक को ब्रायडन कार्स ने बेन स्टोक्स के हाथों कैच आउट कराया. हार्दिक ने पचपन गेंदों पर ताबड़तोड़ इकहत्तर रन बनाए, जिसमें दस चौके शामिल रहे. छत्तीस ओवर के बाद भारत का स्कोर पांच विकेट पर दो सौ छः रन है. ऋषभ पंत ने भी अपना पचासा पूरा कर लिया है. पंत ने इकहत्तर बॉल का सामना करते हुए पांच चौकों की मदद से यह मुकाम हासिल किया. भारत का स्कोर इकतीस ओवर्स की समाप्ति के बाद चार विकेट पर एक सौ उनसठ रन है. हार्दिक पंड्या बावन और ऋषभ पंत पचास रन बनाकर खेल रहे हैं. हार्दिक पंड्या ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया है. इस दौरान हार्दिक ने सात चौके उड़ाए हैं. तीस. तीन ओवर के बाद भारत का स्कोर चार विकेट पर एक सौ तिरेपन रन है. हार्दिक पंड्या इक्यावन और ऋषभ पंत पैंतालीस रन बनाकर खेल रहे हैं. अब भारत को मैच जीतने के लिए एक सौ सात रनों की जरूरत है. भारतीय टीम का स्कोर छब्बीस. तीन ओवर्स में चार विकेट पर एक सौ पैंतीस रन है. हार्दिक पंड्या चौंतालीस और ऋषभ पंत पैंतीस रन बनाकर खेल रहे हैं. दोनों खिलाड़ियों के बीच अबतक तिरेसठ रनों की साझेदारी हुई है. भारतीय टीम को चौथा झटका लग चुका है. सूर्यकुमार यादव सोलह रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं. सूर्या को क्रेग ओवरटन ने जोस बटलर के हाथों कैच आउट कराया. सोलह. दो ओवर्स के बाद भारत का स्कोर चार विकेट पर बहत्तर रन है. ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या क्रीज पर हैं. विराट कोहली सत्रह रन बनाकर आउट हो गए हैं. कोहली को रीस टॉप्ली ने विकेटकीपर जोस बटलर के हाथों कैच आउट कराया. भारत का स्कोर आठ. तीन ओवर्स में तीन विकेट पर अड़तीस रन है. सूर्यकुामर यादव और ऋषभ पंत क्रीज पर मौजूद हैं. भारतीय टीम का दूसरा विकेट गिर गया है. कप्तान रोहित शर्मा सत्रह रन बनाकर आउट हो गए हैं. रोहित शर्मा को रीस टॉप्ली ने जो रूट के हाथों कैच आउट कराया. भारत का स्कोर पाँच. तीन ओवर्स में दो विकेट पर उनतीस रन है. विराट कोहली दस और ऋषभ पंत शून्य रन बनाकर खेल रहे हैं. भारतीय टीम को पहला झटका लग चुका है. शिखर धवन महज एक रन बनाकर आउट हो गए हैं. धवन को रीस टॉप्ली ने जेसन रॉय के हाथों कैच आउट कराया. तीन ओवरों की समाप्ति के बाद भारत का स्कोर एक विकेट पर तेरह रन है. रोहित शर्मा बारह और विराट कोहली शून्य रन बनाकर खेल रहे हैं. टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंग्लैंड की पूरी टीम पैंतालीस. पाँच ओवरों में दो सौ उनसठ रनों पर सिमट गई है. इंग्लैंड की ओर से जोस बटलर ने सबसे ज्यादा साठ रन बनाए. वहीं जेसन रॉय ने इकतालीस और मोईन अली ने चौबीस रनों की पारी खेली. इसके अलावा क्रेग ओवरटन ने बत्तीस और लियाम लिविंगस्टोन ने सत्ताईस रनों का योगदान दिया. भारत की ओर से हार्दिक पंड्या ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट चटकाए. वहीं युजवेंद्र चहल ने तीन और सिराज ने दो-दो विकेट हासिल किए. England are all out for दो सौ उनसठ in पैंतालीस. पाँच overs. Hardik Pandya was pick of the bowlers with figures of चार/चौबीस in सात overs. इंग्लैंड का नौवां विकेट गिर गया है. क्रेग ओवरटन बत्तीस रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं. ओवरटन को चहल ने विराट कोहली के हाथों कैच आउट कराया. पैंतालीस. चार ओवर्स में इंग्लैंड का स्कोर नौ विकेट पर दो सौ अट्ठावन रन है. इंग्लैंड को आठवां झटका लगा है. डेविड विली युजवेंद्र चहल की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के चक्कर में सूर्यकुमार यादव को कैच थमा बैठे. विली ने अट्ठारह रनों की पारी खेली. चौंतालीस ओवर्स के बाद इंग्लैंड का स्कोर आठ विकेट दो सौ उनचास रन है. हार्दिक पंड्या ने भारत को एक और एक सफलता दिलाई है. हार्दिक ने जोस बटलर को जडेजा के हाथों कैच आउट करा दिया है. बटलर ने साठ रनों की पारी खेली. इंग्लैंड का स्कोर सैंतीस. एक ओवर्स मे ंसात विकेट पर दो सौ रन है. डेविड विली और क्रेग ओवरटन क्रीज पर हैं. इंग्लैंड का छठा विकेट गिर चुका है. लियाम लिविंगस्टोन को हार्दिक पंड्या ने रवींद्र जडेजा के हाथों कैच आउट कराया. लिविंगस्टोन ने सत्ताईस रनों की पारी खेली. छत्तीस. चार ओवर्स में इंग्लैंड का स्कोर छः विकेट पर एक सौ अट्ठानवे रन है. जोस बटलर साठ और डेविड विली शून्य रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड का स्कोर फिलहाल उनतीस. चार ओवर्स में पांच विकेट पर एक सौ साठ रन है. जोस बटलर तैंतालीस और लियाम लिविंगस्टोन सात रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड का पांचवां विकेट मोईन अली के रूप में गिरा, जो चौंतीस रन बनाकर आउट हुए. मोईन को रवींद्र जडेजा ने ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट कराया. चौबीस ओवर्स की समाप्ति के बाद इंग्लैंड का स्कोर चार विकेट पर एक सौ अट्ठाईस रन है. जोस बटलर इकतीस और मोईन अली तेईस रन बनाकर खेल रहे हैं. दोनों के बीच अबतक चौवन रनों की साझेदारी हो चुकी है. इंग्लैंड को चौथा झटका लग चुका है. बेन स्टोक्स सत्ताईस रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं. स्टोक्स को हार्दिक पंड्या ने कॉट एंड बोल्ड आउट कर दिया. तेरह. दो ओवर्स में इंग्लैंड का स्कोर चार विकेट पर चौहत्तर रन है. जोस बटलर चार और मोईन अली शून्य रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड को तीसरा झटका लग चुका है. जेसन रॉय इकतालीस रन बनाकर पवेलियन लौट गए है. रॉय को हार्दिक पंड्या ने विकेटकीपर ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट कराया. दस ओवर्स के बाद इंग्लैंड का स्कोर तीन विकेट पर छयासठ रन है. बेन स्टोक्स चौबीस और जोस बटलर शून्य रन बनाकर खेल रहे हैं. इंग्लैंड को मैच के दूसरे ही ओवर में डबल झटका लगा है. मोहम्मद सिराज ने पहले जॉनी बेयरस्टो और फिर जो रूट को चलता कर दिया, बेयरस्टो का कैच श्रेयस अय्यर और रूट का कैच रोहित शर्मा ने लपका. दोनों खिलाड़ी अपना खाता तक नहीं खोल पाए. इंग्लैंड का स्कोर दो ओवर्स में दो विकेट पर बारह रन है. जेसन रॉय बारह और बेन स्टोक्स खाता खोले बगैर क्रीज पर हैं. टीम इंडिया की प्लेइंग-ग्यारह: रोहित शर्मा , शिखर धवन, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत , हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और युजवेंद्र चहल. इंग्लिश की प्लेइंग-ग्यारह: जेसन रॉय, जॉनी बेयरस्टो, जो रूट, बेन स्टोक्स, जोस बटलर , लियाम लिविंगस्टोन, मोईन अली, डेविड विली, क्रेग ओवर्टन, रीस टॉपले और ब्रायडन कार्स. टीम इंडिया की प्लेइंग-ग्यारह में एक बदलाव किया गया है. इस निर्णायक मैच से स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है. उन्हें थोड़ी हेल्थ समस्या थी. बुमराह की जगह मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया. टीम इंडिया और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच शुरू हो गया है. यह मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफर्ड में खेला जा रहा है. भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बॉलिंग का फैसला किया. इंडिया की फुल स्क्वॉडः रोहित शर्मा , विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह, शिखर धवन, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, शार्दूल ठाकुर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह. इंग्लैंड की फुल स्क्वॉडः जोस बटलर , मोईन अली, जॉनी बेयरस्टो, हैरी ब्रूक, ब्रायडन कार्स, सैम कुरेन, लियाम लिविंगस्टोन, क्रेग ओवरटन, एम. पार्किंसन, जो रूट, जेसन रॉय, फिल सॉल्ट, बेन स्टोक्स,रीस टॉपली, डेविड विली. टीम इंडिया और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच थोड़ी देर में खेला जाएगा. यह मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफर्ड में होगा. फिलहाल, दोनों टीमों के बीच सीरीज एक-एक की बराबरी पर है.
ये चयन करना मुश्किल हो जाता है। नारियल का तेल (Coconut oil) और जैतून का तेल (Olive oil) सभी के स्वस्थ्यप्रद तेल होने के चार्ट में सबसे ऊपर है। लेकिन अगर आपको दोनों में से किसी एक को चुनना है, तो आपकी पसंद क्या होनी चाहिए? अमेरिकियों के लिए 2015-2020 आहार दिशा-निर्देश (Dietary Guidelines) हेल्दी बॉडी वेट और हृदय रोग (heart disease) के जोखिम को कम करने में मदद करने के लिए आहार में स्वस्थ तेलों को जोड़ने की सलाह देते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि असंतृप्त वसा, जिसमें मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट शामिल हैं, वे हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकते हैं। ऐसे में जो लोग सैचुरेटेड और ट्रांस फैट के मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड से समृद्ध कुकिंग ऑइल का सेवन करते हैं वे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बचते हैं। पोषण मूल्य (Nutrition value): - एक चम्मच वर्जिन नारियल तेल में शामिल हैंः एक चम्मच एक्स्ट्रा-वर्जिन जैतून के तेल में शामिल हैंः नारियल तेल के लाभ (Coconut oil health benefits) संतृप्त वसा (Saturated fat): नारियल के तेल में ज्यादातर संतृप्त वसा अणुओं के रूप में होता है जिसे मध्यम-श्रृंखला-ट्राइग्लिसराइड्स (एमसीटी) कहा जाता है। सैचुरेटेड फैट दिल की बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक से जोड़ा गया है। हालांकि, 2018 में हुए शोध से पता चलता है कि नारियल के तेल के जरिए जिस संतृप्त वसा को प्राप्त करते हैं वो आपके अच्छे (एचडीएल) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। स्मोकिंग प्वाइंटः जैतून के तेल की तुलना में नारियल के तेल का स्मोकिंग प्वाइंट यानी गर्म होने पर तेज धुआं अपेक्षाकृत अधिक होता है। आप नारियल के तेल को 350 डिग्री फ़ारेनहाइट तक गर्म कर सकते हैं, जो इसे मध्यम उच्च तापमान पर पकाने के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनाता है। एंटीऑक्सीडेंटः नारियल के तेल में कुछ एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, लेकिन यह जैतून के तेल में मौजूद लोगों की तुलना में उतना प्रभावी नहीं होता है। जैतून तेल के स्वास्थ्य लाभ (Olive oil health benefits) मोनोसैचुरेटेड फैटः जैतून के तेल में मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट होते हैं, जिन्हें दिल के लिए अनुकूल यानी अच्छे वसा के रूप में पहचाना जाता है। जैतून के तेल में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट आपके एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद कर सकता है। स्मोकिंग प्वाइंटः जैतून के तेल का स्मोकिंग प्वाइंट 280 डिग्री फारेनहाइट है और इसे उच्च तापमान पर गर्म नहीं किया जाना चाहिए। एंटीऑक्सीडेंटः जैतून का तेल एंटीऑक्सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है। यह जैव उपलब्ध फेनोलिक यौगिकों से भरा हुआ है, जो डीएनए को ऑक्सीडेटिव क्षति को कम करता है, इसके अलावा ये हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है। कौन सा स्वस्थ है? (Which one is healthier) वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि नारियल के तेल की तुलना में जैतून का तेल स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके कई कारण हैं। ऑलिव ऑइल Mediterranean diet का हिस्सा है, जिसे दुनियाभर में स्वास्थ्यप्रद आहार के रूप में जाना जाता है। Mediterranean diet को हृदय रोग, तमाम तरह के कैंसर, डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए अच्छी मानी जाती है। इतना ही नहीं, ये डाइट वजन घटाने (Weight Loss) में भी मददगार है। दूसरे, वर्जिन नारियल तेल की तुलना में जैतून के तेल में ज्यादा अच्छा वसा यानी फैट होता है, इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होता है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दिल के रोगों के लिए अच्छा है। वहीं, नारियल के तेल में संतृप्त वसा होता है, जिसे खराब वसा कहा जाता है और इसे कम मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है। आप जिस प्रकार का भोजन तैयार कर रहे हैं, उसके आधार पर आप दोनों का उपयोग कर सकते हैं। आप जैतून के तेल का उपयोग सलाद और अपने भोजन में मसाला बनाने के लिए कर सकते हैं, जबकि नारियल के तेल का उपयोग उच्च तापमान जैसे डीप फ्राई करने के लिए किया जा सकता है।
ये चयन करना मुश्किल हो जाता है। नारियल का तेल और जैतून का तेल सभी के स्वस्थ्यप्रद तेल होने के चार्ट में सबसे ऊपर है। लेकिन अगर आपको दोनों में से किसी एक को चुनना है, तो आपकी पसंद क्या होनी चाहिए? अमेरिकियों के लिए दो हज़ार पंद्रह-दो हज़ार बीस आहार दिशा-निर्देश हेल्दी बॉडी वेट और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद करने के लिए आहार में स्वस्थ तेलों को जोड़ने की सलाह देते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि असंतृप्त वसा, जिसमें मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट शामिल हैं, वे हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकते हैं। ऐसे में जो लोग सैचुरेटेड और ट्रांस फैट के मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड से समृद्ध कुकिंग ऑइल का सेवन करते हैं वे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बचते हैं। पोषण मूल्य : - एक चम्मच वर्जिन नारियल तेल में शामिल हैंः एक चम्मच एक्स्ट्रा-वर्जिन जैतून के तेल में शामिल हैंः नारियल तेल के लाभ संतृप्त वसा : नारियल के तेल में ज्यादातर संतृप्त वसा अणुओं के रूप में होता है जिसे मध्यम-श्रृंखला-ट्राइग्लिसराइड्स कहा जाता है। सैचुरेटेड फैट दिल की बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक से जोड़ा गया है। हालांकि, दो हज़ार अट्ठारह में हुए शोध से पता चलता है कि नारियल के तेल के जरिए जिस संतृप्त वसा को प्राप्त करते हैं वो आपके अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। स्मोकिंग प्वाइंटः जैतून के तेल की तुलना में नारियल के तेल का स्मोकिंग प्वाइंट यानी गर्म होने पर तेज धुआं अपेक्षाकृत अधिक होता है। आप नारियल के तेल को तीन सौ पचास डिग्री फ़ारेनहाइट तक गर्म कर सकते हैं, जो इसे मध्यम उच्च तापमान पर पकाने के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनाता है। एंटीऑक्सीडेंटः नारियल के तेल में कुछ एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, लेकिन यह जैतून के तेल में मौजूद लोगों की तुलना में उतना प्रभावी नहीं होता है। जैतून तेल के स्वास्थ्य लाभ मोनोसैचुरेटेड फैटः जैतून के तेल में मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट होते हैं, जिन्हें दिल के लिए अनुकूल यानी अच्छे वसा के रूप में पहचाना जाता है। जैतून के तेल में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट आपके एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद कर सकता है। स्मोकिंग प्वाइंटः जैतून के तेल का स्मोकिंग प्वाइंट दो सौ अस्सी डिग्री फारेनहाइट है और इसे उच्च तापमान पर गर्म नहीं किया जाना चाहिए। एंटीऑक्सीडेंटः जैतून का तेल एंटीऑक्सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है। यह जैव उपलब्ध फेनोलिक यौगिकों से भरा हुआ है, जो डीएनए को ऑक्सीडेटिव क्षति को कम करता है, इसके अलावा ये हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है। कौन सा स्वस्थ है? वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि नारियल के तेल की तुलना में जैतून का तेल स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके कई कारण हैं। ऑलिव ऑइल Mediterranean diet का हिस्सा है, जिसे दुनियाभर में स्वास्थ्यप्रद आहार के रूप में जाना जाता है। Mediterranean diet को हृदय रोग, तमाम तरह के कैंसर, डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए अच्छी मानी जाती है। इतना ही नहीं, ये डाइट वजन घटाने में भी मददगार है। दूसरे, वर्जिन नारियल तेल की तुलना में जैतून के तेल में ज्यादा अच्छा वसा यानी फैट होता है, इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होता है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दिल के रोगों के लिए अच्छा है। वहीं, नारियल के तेल में संतृप्त वसा होता है, जिसे खराब वसा कहा जाता है और इसे कम मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है। आप जिस प्रकार का भोजन तैयार कर रहे हैं, उसके आधार पर आप दोनों का उपयोग कर सकते हैं। आप जैतून के तेल का उपयोग सलाद और अपने भोजन में मसाला बनाने के लिए कर सकते हैं, जबकि नारियल के तेल का उपयोग उच्च तापमान जैसे डीप फ्राई करने के लिए किया जा सकता है।
दिल्ली के शाहदरा से एक सनीखेज घटना सामने आई है। यहां ज्योति कॉलोनी में दिल्ली मेट्रो के मेंटेनेंस सुपरवाइजर ने पहले अपनी पत्नी और 6 साल की बेटी की हत्या कर दी फिर सुसाइड कर लिया। उसने अपने 13 साल के बेटे की भी जान लेने की कोशिश की मगर वह बच गया। फिलहाल उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस कई एंगल से मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं वह आर्थिक तंगी से तो नहीं जूझ रहा था। मामले का खुलासा तब हुआ जब सुपरवाइजर के एक दोस्त ने उसे फोन करके ऑफिस ना आने का कारण पूछा। फिलहाल इस बात की जानकारी नहीं है कि उसने इस वारदात को अंजाम क्यों दिया? इस मामले में शाहदरा के डीसीपी रोहित मीणा का कहना है कि दोपहर 12 बजे के करीब पुलिस कंट्रोल रूम ने उन्हें सूचना दी कि 43 साल के सुशील के एक दोस्त ने हत्या के बारे में फोन किया था। डीसीपी का कहना है कि सुशील के एक सहकर्मी ने उसे यह पूछने के लिए फोन किया कि वह अब तक ऑफिस क्यों नहीं आया है? इस पर सुशील ने उससे कहा कि मैंने घऱ में सबको मार डाला है। इसके बाद पुलिस सुशील के घर पहुंची। पुलिस को सुशील, उसकी पत्नी अनुराधा औऱ बेटी का शव अलग-अलग कमरों से मिला। सुशील के किसी रिश्तेदार को इस घटना के बारे में जानकारी नहीं थी। पुलिस ने उन्हें सूचना दी। इस मामले में सुशील की भतीजी मोनिका का कहना है कि सबुह 11 बजे के आस-पास मैं ग्राउंड फ्लोर की सफाई कर रही थी। पुलिस आई और मुझे पीसीआर कॉल और घटना के बारे में जानकारी दी। पहले मुझे लगा कि पुलिस को हत्या के बारे में गलत सूचना मिली है। उन्होंने ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर की तलाशी शुरू की लेकिन कुछ भी नहीं मिला। बाद में जब उन्होंने दूसरी मंजिल की जांच की तो पाया कि सीढ़ी का गेट बंद था। उन्होंने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि दोनों बच्चे बिस्तर पर पड़े हैं। उनका गला कटा हुआ था। उसी कमरे में सुशील का शव पंखे के फंदे से लटक रहा था। वहीं अनुराधा का शव दूसरे कमरे में फर्श पर पड़ा था। उसका भी गला कटा हुआ था। पुलिस को दो हथियार बरामद हुए हैं। डीसीपी ने आगे कहा कि घटना की जांच कई एंगल से की जा रही है। यह पोस्टमार्टम के बाद ही साफ हो पाएगा कि कहीं उन्हें मारने से पहले जहर तो नहीं दिया गया था। फिलहाल पुलिस घटना की जांच में जुट गई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
दिल्ली के शाहदरा से एक सनीखेज घटना सामने आई है। यहां ज्योति कॉलोनी में दिल्ली मेट्रो के मेंटेनेंस सुपरवाइजर ने पहले अपनी पत्नी और छः साल की बेटी की हत्या कर दी फिर सुसाइड कर लिया। उसने अपने तेरह साल के बेटे की भी जान लेने की कोशिश की मगर वह बच गया। फिलहाल उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस कई एंगल से मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं वह आर्थिक तंगी से तो नहीं जूझ रहा था। मामले का खुलासा तब हुआ जब सुपरवाइजर के एक दोस्त ने उसे फोन करके ऑफिस ना आने का कारण पूछा। फिलहाल इस बात की जानकारी नहीं है कि उसने इस वारदात को अंजाम क्यों दिया? इस मामले में शाहदरा के डीसीपी रोहित मीणा का कहना है कि दोपहर बारह बजे के करीब पुलिस कंट्रोल रूम ने उन्हें सूचना दी कि तैंतालीस साल के सुशील के एक दोस्त ने हत्या के बारे में फोन किया था। डीसीपी का कहना है कि सुशील के एक सहकर्मी ने उसे यह पूछने के लिए फोन किया कि वह अब तक ऑफिस क्यों नहीं आया है? इस पर सुशील ने उससे कहा कि मैंने घऱ में सबको मार डाला है। इसके बाद पुलिस सुशील के घर पहुंची। पुलिस को सुशील, उसकी पत्नी अनुराधा औऱ बेटी का शव अलग-अलग कमरों से मिला। सुशील के किसी रिश्तेदार को इस घटना के बारे में जानकारी नहीं थी। पुलिस ने उन्हें सूचना दी। इस मामले में सुशील की भतीजी मोनिका का कहना है कि सबुह ग्यारह बजे के आस-पास मैं ग्राउंड फ्लोर की सफाई कर रही थी। पुलिस आई और मुझे पीसीआर कॉल और घटना के बारे में जानकारी दी। पहले मुझे लगा कि पुलिस को हत्या के बारे में गलत सूचना मिली है। उन्होंने ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर की तलाशी शुरू की लेकिन कुछ भी नहीं मिला। बाद में जब उन्होंने दूसरी मंजिल की जांच की तो पाया कि सीढ़ी का गेट बंद था। उन्होंने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि दोनों बच्चे बिस्तर पर पड़े हैं। उनका गला कटा हुआ था। उसी कमरे में सुशील का शव पंखे के फंदे से लटक रहा था। वहीं अनुराधा का शव दूसरे कमरे में फर्श पर पड़ा था। उसका भी गला कटा हुआ था। पुलिस को दो हथियार बरामद हुए हैं। डीसीपी ने आगे कहा कि घटना की जांच कई एंगल से की जा रही है। यह पोस्टमार्टम के बाद ही साफ हो पाएगा कि कहीं उन्हें मारने से पहले जहर तो नहीं दिया गया था। फिलहाल पुलिस घटना की जांच में जुट गई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एमएम तीसरे चरण के दूसरे बैच में 92 शहरो में 266 निजी एफएम स्टेशनो की ई-नीलामी के लिए नोटिस जारी किया है। इस चरण में 69 नए शहरो में 227 चैनल और वर्तमान 23 शहरों में 39 चैनल सम्मिलित हैं। दूसरे बैच के 69 नए शहरों में 3 से 10 लाख की जनसंख्या वाले 20 शहरो में 80 चैनल, 1 से 3 लाख की जनसंख्या वाले 38 शहरों में 114 चैनल के लिए ई-नीलामी का आयोजन किया जाएगा। इसमें जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के 1-1 लाख की जनसंख्या वाले शहरों में 33 चैनल भी सम्मिलित हैं। मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया, चैनलों का आरक्षित मूल्य, चयन के लिए उपलब्ध फ्रीक्वन्सी,नीलामी के नियम आदि का विवरण दिया गया है और इसका उद्देश्य आगामी नीलामी में भाग लेने वाली इच्छुक कंपनियों से आवेदन प्राप्त करना है। आवेदन एक अगस्त,2016 को शाम 5 बजे तक दाखिल किए जा सकते हैं। प्राप्त हुए आवेदनो के आधार पर सरकार नीलामी में भाग लेने के लिए पात्रता मानदंड पूर्ण करने वाले आवेदको को योग्य घोषित करेगी। नीलामी के लिए कुल 266 स्टेशनों में से जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के 14 शहरों में 36 चैनलों के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। यह सरकार के पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के सम्मिलित विकास के प्रति प्रेरणा को प्रदर्शित करता है। इससे पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और उपद्वीप क्षेत्र के शहरों में एफएम रेडियो प्रसारण सेवाओं को अति आवश्यक सहयोग भी प्राप्त होगा। इसके लिए पहले तीन वर्षों में चैनल के वार्षिक शुल्क को आधा करना और प्रसार भारती के आधारभूत ढ़ांचे के पट्टा किराए को आधा करना भी सम्मिलित है। एमएम फेज 3 के दूसरे बैच में ई-नीलामी के लिए शहरों की सूची और निजी एफएम स्टेशनों की सूची के लिए कृपया अंग्रेजी की विज्ञप्ति देखें।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एमएम तीसरे चरण के दूसरे बैच में बानवे शहरो में दो सौ छयासठ निजी एफएम स्टेशनो की ई-नीलामी के लिए नोटिस जारी किया है। इस चरण में उनहत्तर नए शहरो में दो सौ सत्ताईस चैनल और वर्तमान तेईस शहरों में उनतालीस चैनल सम्मिलित हैं। दूसरे बैच के उनहत्तर नए शहरों में तीन से दस लाख की जनसंख्या वाले बीस शहरो में अस्सी चैनल, एक से तीन लाख की जनसंख्या वाले अड़तीस शहरों में एक सौ चौदह चैनल के लिए ई-नीलामी का आयोजन किया जाएगा। इसमें जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के एक-एक लाख की जनसंख्या वाले शहरों में तैंतीस चैनल भी सम्मिलित हैं। मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया, चैनलों का आरक्षित मूल्य, चयन के लिए उपलब्ध फ्रीक्वन्सी,नीलामी के नियम आदि का विवरण दिया गया है और इसका उद्देश्य आगामी नीलामी में भाग लेने वाली इच्छुक कंपनियों से आवेदन प्राप्त करना है। आवेदन एक अगस्त,दो हज़ार सोलह को शाम पाँच बजे तक दाखिल किए जा सकते हैं। प्राप्त हुए आवेदनो के आधार पर सरकार नीलामी में भाग लेने के लिए पात्रता मानदंड पूर्ण करने वाले आवेदको को योग्य घोषित करेगी। नीलामी के लिए कुल दो सौ छयासठ स्टेशनों में से जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के चौदह शहरों में छत्तीस चैनलों के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। यह सरकार के पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के सम्मिलित विकास के प्रति प्रेरणा को प्रदर्शित करता है। इससे पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और उपद्वीप क्षेत्र के शहरों में एफएम रेडियो प्रसारण सेवाओं को अति आवश्यक सहयोग भी प्राप्त होगा। इसके लिए पहले तीन वर्षों में चैनल के वार्षिक शुल्क को आधा करना और प्रसार भारती के आधारभूत ढ़ांचे के पट्टा किराए को आधा करना भी सम्मिलित है। एमएम फेज तीन के दूसरे बैच में ई-नीलामी के लिए शहरों की सूची और निजी एफएम स्टेशनों की सूची के लिए कृपया अंग्रेजी की विज्ञप्ति देखें।
प्रियंका चोपड़ा ने बताया अपना लाइफ प्लान! नया संसद भवन तो बन गया, अब पुराने का क्या होगा? खुद-ब-खुद जुड़ जाएगा वोटर लिस्ट में नाम, समझें सरकार का प्लान! क्या है 'सेंगोल' जिसे नई संसद में रखा जाएगा? पीएम मोदी उत्तराखंड की पहली वंदे भारत ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी! खेती की नई तकनीकें सीखने विदेश जाएंगे इस राज्य के किसान!
प्रियंका चोपड़ा ने बताया अपना लाइफ प्लान! नया संसद भवन तो बन गया, अब पुराने का क्या होगा? खुद-ब-खुद जुड़ जाएगा वोटर लिस्ट में नाम, समझें सरकार का प्लान! क्या है 'सेंगोल' जिसे नई संसद में रखा जाएगा? पीएम मोदी उत्तराखंड की पहली वंदे भारत ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी! खेती की नई तकनीकें सीखने विदेश जाएंगे इस राज्य के किसान!
IPL 2023: इंडियन प्रीमियर लीग 2023 में रविवार यानी आज का पहला मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जाएगा। आज यानी 23 अप्रैल को खेले जाने वाले इस मैच में आरसीबी के लिए कुछ बड़ा हो सकता है, क्योंकि इस तारीख से आरसीबी का कुछ अलग जुड़ाव है। आरसीबी की टीम जब आखिरी बार इस तारीख को खेली थी तो 68 रनों पर ही ऑलआउट हो गई थी। वहीं, आरसीबी ने आईपीएल का सबसे छोटा स्कोर इसी तारीख को बनाया था। हालाँकि, आरसीबी की टीम ने आईपीएल का उच्चतम स्कोर भी इसी तारीख को बनाया था। 2013 से आईपीएल इतिहास में 23 अप्रैल को आरसीबी का प्रर्दशनः 2013 - 263/5 बनाम पीडब्ल्यूआई (पुणे वारियर्स इंडिया)
IPL दो हज़ार तेईस: इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस में रविवार यानी आज का पहला मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जाएगा। आज यानी तेईस अप्रैल को खेले जाने वाले इस मैच में आरसीबी के लिए कुछ बड़ा हो सकता है, क्योंकि इस तारीख से आरसीबी का कुछ अलग जुड़ाव है। आरसीबी की टीम जब आखिरी बार इस तारीख को खेली थी तो अड़सठ रनों पर ही ऑलआउट हो गई थी। वहीं, आरसीबी ने आईपीएल का सबसे छोटा स्कोर इसी तारीख को बनाया था। हालाँकि, आरसीबी की टीम ने आईपीएल का उच्चतम स्कोर भी इसी तारीख को बनाया था। दो हज़ार तेरह से आईपीएल इतिहास में तेईस अप्रैल को आरसीबी का प्रर्दशनः दो हज़ार तेरह - दो सौ तिरेसठ/पाँच बनाम पीडब्ल्यूआई
जैन पलस्तर वाली दीवार परस्तर गिरा कर कर दो जाती है. इसी तरह अनशन प्रादि सद्वारा शरीर की कृश कर देना चाहिए और अहिंसाधर्म का पालन करना चाहिए । सर्वश ने यही धर्म कहा है । जैसे पक्षिणी अपने शरीर में लगी धूल को गरीर झाड़ कर गिरा देती है, इसी तरह प्रनशनादि तप करने वाला रापस्वी भव्य अपने कर्मों का नाश कर देता है ।
जैन पलस्तर वाली दीवार परस्तर गिरा कर कर दो जाती है. इसी तरह अनशन प्रादि सद्वारा शरीर की कृश कर देना चाहिए और अहिंसाधर्म का पालन करना चाहिए । सर्वश ने यही धर्म कहा है । जैसे पक्षिणी अपने शरीर में लगी धूल को गरीर झाड़ कर गिरा देती है, इसी तरह प्रनशनादि तप करने वाला रापस्वी भव्य अपने कर्मों का नाश कर देता है ।
नुपुर अलंकार की मां बीमार हैं और उन्हें जल्द से जल्द हॉस्पिटल में एडमिट कराने की सख्त जरुरत है। नुपुर अलंकार की मां बीमार हैं और उन्हें जल्द से जल्द हॉस्पिटल में एडमिट कराने की सख्त जरुरत है। आसिम और हिमांशी पॉपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस 13 में नज़र आए थे, जहां दोनों ने एक-दूसरे से अपने दिल की बात कही थी। रियलिटी शो रोडीज के जज, अवधेश के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बनने की सकारात्मक भावना से सुपर प्रभावित हुए। हिना खान ने टीवी में अपने करियर की शुरुआत सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' से की थी। हिना खान इसके बाद खतरों के खिलाड़ी और बिग बॉस जैसे रियलिटी शो में नजर आईं। आइए आपको बताते हैं कि आज आपके फेवरेट सेलिब्रिटी ने इंस्टाग्राम पर क्या शेयर किया है। आरती सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके बताया है कि उन्हें शादी के लिए किस तरह का लड़का चाहिए। फैन्स ने कमेंट करके कहा सिद्धार्थ शुक्ला से शादी कर लो। सौम्या टंडन 'भाभीजी घर पर हैं' में अनीता भाभी का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुई हैं। रोहित बोस रॉय ने 4 महीने बाद बाइड राइड का मजा लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बाइक के साथ तस्वीर शेयर की। बिग बॉस विनर सिद्धार्थ शुक्ला ने सोशल मीडिया पर अपने नए लुक की फोटो शेयर की है। जिसे देखकर शहनाज गिल कमेंट करने से खुद को रोक नहीं पाईं। लॉकडाउन के कारण, पारस और माहिरा अपने-अपने घरों में वीडियो शूट करेंगे। टीवी की दुनिया में एकता कपूर का बोलबाला रहा है। उन्होंने कॉमेडी, लव स्टोरी से लेकर फैंटेसी सीरियल्स तक को छोटे पर्दे पर बखूबी उकेरा है। एकता कपूर ने हम पांच, कुसुम, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर घर की, कसौटी जिंदगी की, पवित्र रिश्ता, कसम से, बड़े अच्छे लगते हैं, नागिन, ये हैं मोहब्बतें सहित कई हिट सीरियल्स का निर्माण किया। एकता कपूर को सोशल मीडिया पर जान से मारने और रेप की धमकियां मिल रही हैं। प्रोड्यूसर एकता कपूर के सपोर्ट में देशभर की महिलाएं आगे आई हैं। भाबी जी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस शुभांगी आत्रे को बिग बॉस 14 के लिए अप्रोच किया गया है। कार्टून शो छोटा भीम पिछले कुछ दिनों से सुर्खियां बटोर रहा है। खबरों के मुताबिक छोटा भीम की चुटकी की जगह राजकुमारी इंदुमती से शादी हो गई है। अब मेकर्स ने इस पर सफाई दी है।
नुपुर अलंकार की मां बीमार हैं और उन्हें जल्द से जल्द हॉस्पिटल में एडमिट कराने की सख्त जरुरत है। नुपुर अलंकार की मां बीमार हैं और उन्हें जल्द से जल्द हॉस्पिटल में एडमिट कराने की सख्त जरुरत है। आसिम और हिमांशी पॉपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस तेरह में नज़र आए थे, जहां दोनों ने एक-दूसरे से अपने दिल की बात कही थी। रियलिटी शो रोडीज के जज, अवधेश के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बनने की सकारात्मक भावना से सुपर प्रभावित हुए। हिना खान ने टीवी में अपने करियर की शुरुआत सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' से की थी। हिना खान इसके बाद खतरों के खिलाड़ी और बिग बॉस जैसे रियलिटी शो में नजर आईं। आइए आपको बताते हैं कि आज आपके फेवरेट सेलिब्रिटी ने इंस्टाग्राम पर क्या शेयर किया है। आरती सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके बताया है कि उन्हें शादी के लिए किस तरह का लड़का चाहिए। फैन्स ने कमेंट करके कहा सिद्धार्थ शुक्ला से शादी कर लो। सौम्या टंडन 'भाभीजी घर पर हैं' में अनीता भाभी का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुई हैं। रोहित बोस रॉय ने चार महीने बाद बाइड राइड का मजा लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बाइक के साथ तस्वीर शेयर की। बिग बॉस विनर सिद्धार्थ शुक्ला ने सोशल मीडिया पर अपने नए लुक की फोटो शेयर की है। जिसे देखकर शहनाज गिल कमेंट करने से खुद को रोक नहीं पाईं। लॉकडाउन के कारण, पारस और माहिरा अपने-अपने घरों में वीडियो शूट करेंगे। टीवी की दुनिया में एकता कपूर का बोलबाला रहा है। उन्होंने कॉमेडी, लव स्टोरी से लेकर फैंटेसी सीरियल्स तक को छोटे पर्दे पर बखूबी उकेरा है। एकता कपूर ने हम पांच, कुसुम, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर घर की, कसौटी जिंदगी की, पवित्र रिश्ता, कसम से, बड़े अच्छे लगते हैं, नागिन, ये हैं मोहब्बतें सहित कई हिट सीरियल्स का निर्माण किया। एकता कपूर को सोशल मीडिया पर जान से मारने और रेप की धमकियां मिल रही हैं। प्रोड्यूसर एकता कपूर के सपोर्ट में देशभर की महिलाएं आगे आई हैं। भाबी जी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस शुभांगी आत्रे को बिग बॉस चौदह के लिए अप्रोच किया गया है। कार्टून शो छोटा भीम पिछले कुछ दिनों से सुर्खियां बटोर रहा है। खबरों के मुताबिक छोटा भीम की चुटकी की जगह राजकुमारी इंदुमती से शादी हो गई है। अब मेकर्स ने इस पर सफाई दी है।
दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन पार्ट-2 स्थित एक रेस्तरां में बुधवार को आग लग गई। दमकल की आठ गाड़ियों मौके पर पहुंच गई है। Delhi Fire News: राजधानी दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन पार्ट-2 स्थित एक रेस्तरां में बुधवार को आग लग गई। इसकी जानकारी अधिकारियों ने दी है। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब पौने एक बजे उन्हें घटना की सूचना मिली और उन्होंने दमकल की आठ गाड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि रेस्तरां एक पेट्रोल पंप के पास स्थित है। घटना में किसी के हताहत होने की अभी कोई खबर नहीं है। फिलहाल आगे की जानकारी का इंतजार है।
दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन पार्ट-दो स्थित एक रेस्तरां में बुधवार को आग लग गई। दमकल की आठ गाड़ियों मौके पर पहुंच गई है। Delhi Fire News: राजधानी दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन पार्ट-दो स्थित एक रेस्तरां में बुधवार को आग लग गई। इसकी जानकारी अधिकारियों ने दी है। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब पौने एक बजे उन्हें घटना की सूचना मिली और उन्होंने दमकल की आठ गाड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि रेस्तरां एक पेट्रोल पंप के पास स्थित है। घटना में किसी के हताहत होने की अभी कोई खबर नहीं है। फिलहाल आगे की जानकारी का इंतजार है।
Sandeep REVEALED the connection between Animal and Kabir Singh: डायरेक्ट संदीप रेड्डी वंगा ने कहा है कि फिल्म एनिमल में दर्शकों कबीर सिंह की तरह ही मारधाड़ देखने को मिलेगी। Sandeep REVEALED the connection between Animal and Kabir Singh: साउथ सिनेमा के जाने-माने डायरेक्टर संदीप रेड्डी वंगा (Sandeep Reddy) ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'एनिमल' (Animal) के लिए बॉलीवुड कलाकार रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) के साथ हाथ मिलाया है। फिल्म 'एनिमल' में रणबीर कपूर के साथ-साथ अनिल कपूर और बॉबी देओल जैसे धांसू अभिनेता भी दिखाई देंगे। संदीप रेड्डी वंगा ने फिल्म का टीजर वीडियो कुछ वक्त पहले फैंस के साथ शेयर किया था, जिससे यह साफ हो गया था कि इसमें दर्शकों को जबरदस्त कहानी और एक्शन देखने को मिलेगा, जिस कारण दर्शक अभी से 'एनिमल' का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म 'एनिमल' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वंगा ने हाल में 'ट्रिपल आर' के डायरेक्टर एस.एस. राजामौली से खास मुलाकात की, जिसके दौरान उन्होंने फिल्म 'एनिमल' के बारे में बड़ी जानकारी दी है। एस.एस. राजामौली ने संदीप से पूछा कि 'एनिमल' की कहानी फिल्म 'कबीर सिंह' से कितनी मेल खाती है? जिसका जवाब देते हुए संदीप रेड्डी वंगा ने कहा कि दोनों की कहानी एकदम अलग है लेकिन 'एनिमल' में भी 'कबीर सिंह' की तरह मार-धाड़ देखने को मिलेगी। बताते चलें कि फिल्म 'कबीर सिंह' रिलीज होने के बाद डायरेक्ट संदीप रेड्डी वंगा की काफी आलोचना हुई थी क्योंकि कुछ दर्शकों को फिल्म के सीन्स से शिकायत थी। ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा कि फिल्म 'एनिमल' के बाद ये दर्शक संदीप रेड्डी वंगा से नाराज होंगे या फिर फिल्म पर प्यार बरसाएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Sandeep REVEALED the connection between Animal and Kabir Singh: डायरेक्ट संदीप रेड्डी वंगा ने कहा है कि फिल्म एनिमल में दर्शकों कबीर सिंह की तरह ही मारधाड़ देखने को मिलेगी। Sandeep REVEALED the connection between Animal and Kabir Singh: साउथ सिनेमा के जाने-माने डायरेक्टर संदीप रेड्डी वंगा ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'एनिमल' के लिए बॉलीवुड कलाकार रणबीर कपूर के साथ हाथ मिलाया है। फिल्म 'एनिमल' में रणबीर कपूर के साथ-साथ अनिल कपूर और बॉबी देओल जैसे धांसू अभिनेता भी दिखाई देंगे। संदीप रेड्डी वंगा ने फिल्म का टीजर वीडियो कुछ वक्त पहले फैंस के साथ शेयर किया था, जिससे यह साफ हो गया था कि इसमें दर्शकों को जबरदस्त कहानी और एक्शन देखने को मिलेगा, जिस कारण दर्शक अभी से 'एनिमल' का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म 'एनिमल' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वंगा ने हाल में 'ट्रिपल आर' के डायरेक्टर एस.एस. राजामौली से खास मुलाकात की, जिसके दौरान उन्होंने फिल्म 'एनिमल' के बारे में बड़ी जानकारी दी है। एस.एस. राजामौली ने संदीप से पूछा कि 'एनिमल' की कहानी फिल्म 'कबीर सिंह' से कितनी मेल खाती है? जिसका जवाब देते हुए संदीप रेड्डी वंगा ने कहा कि दोनों की कहानी एकदम अलग है लेकिन 'एनिमल' में भी 'कबीर सिंह' की तरह मार-धाड़ देखने को मिलेगी। बताते चलें कि फिल्म 'कबीर सिंह' रिलीज होने के बाद डायरेक्ट संदीप रेड्डी वंगा की काफी आलोचना हुई थी क्योंकि कुछ दर्शकों को फिल्म के सीन्स से शिकायत थी। ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा कि फिल्म 'एनिमल' के बाद ये दर्शक संदीप रेड्डी वंगा से नाराज होंगे या फिर फिल्म पर प्यार बरसाएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
राजस्थान में यहां भूतों को दी जाती है थर्ड डिग्री! एफिल टॉवर और कुतुबमीनार से भी ऊंचा होगा ये पुल! नवरात्र में शारीरिक संबंध बनाना खतरनाक है या सिर्फ एक टैबू ? Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 पर आया है इतना खर्च. . जानें चंद्रयान-2 से क्यों सस्ता है ये मिशन?
राजस्थान में यहां भूतों को दी जाती है थर्ड डिग्री! एफिल टॉवर और कुतुबमीनार से भी ऊंचा होगा ये पुल! नवरात्र में शारीरिक संबंध बनाना खतरनाक है या सिर्फ एक टैबू ? Chandrayaan-तीन: चंद्रयान-तीन पर आया है इतना खर्च. . जानें चंद्रयान-दो से क्यों सस्ता है ये मिशन?
थानान्तर्गत एक गांव निवासी महिला द्वारा 14 वर्षीया नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर घर से भगा ले जाने व शादी करने का मामला दर्ज कराया है। तुलसीवरन कोरिया बांका निवासी दामाद के भाई विकास दास, पिता- मोहन दास के विरूद्ध कांड संख्या- 77/2023 दर्ज कराया गया है। बताया गया कि उसका पति गोवा में काम करता है। उसकी अनुपस्थिति में 20 जून दोपहर बेटी अचानक घर से गायब हो गई। खोजबीन करने पर पता चला कि उसके दामाद का भाई भगा ले गया है। अभियुक्त के मोबाइल पर फोन करने पर बेटी के घर पहुंच जाने का भरोसा दिया। बताया कि बाद में उसकी बेटी फोन कर बता रही है कि उसने शादी कर ली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
थानान्तर्गत एक गांव निवासी महिला द्वारा चौदह वर्षीया नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर घर से भगा ले जाने व शादी करने का मामला दर्ज कराया है। तुलसीवरन कोरिया बांका निवासी दामाद के भाई विकास दास, पिता- मोहन दास के विरूद्ध कांड संख्या- सतहत्तर/दो हज़ार तेईस दर्ज कराया गया है। बताया गया कि उसका पति गोवा में काम करता है। उसकी अनुपस्थिति में बीस जून दोपहर बेटी अचानक घर से गायब हो गई। खोजबीन करने पर पता चला कि उसके दामाद का भाई भगा ले गया है। अभियुक्त के मोबाइल पर फोन करने पर बेटी के घर पहुंच जाने का भरोसा दिया। बताया कि बाद में उसकी बेटी फोन कर बता रही है कि उसने शादी कर ली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
नयी दिल्ली, दो नवंबर आतिथ्य क्षेत्र के संगठन एफएचआरएआई ने सरकार से होटल एवं रेस्तरां क्षेत्र को रियायती ऋण उपलब्ध कराने का सोमवार को आग्रह किया। कोविड-19 संकट के चलते इस क्षेत्र को खुद का अस्तित्व बचाए रखने में दिक्कत पेश आ रही है। एफएचआरएआई ने कहा कि देशभर में आतिथ्य क्षेत्र कोविड-19 से पूर्व की स्थिति के 20 से 30 प्रतिशत के स्तर पर ही पहुंचा है। ऐसे में उनके लिए एक-एक दिन मुश्किल होता जा रहा है। एफएचआरएआई के मानद कोषाध्यक्ष डी. वी. एस. सोमा राजू ने कहा कि सरकार कम ब्याज दर पर ऋण देकर उद्योग की मदद कर सकती है। वह यह ऋण तब तक के लिए दे सकती है जब तक कारोबार कोविड-19 से पूर्व की स्थिति तक नहीं पहुंच जाता है।
नयी दिल्ली, दो नवंबर आतिथ्य क्षेत्र के संगठन एफएचआरएआई ने सरकार से होटल एवं रेस्तरां क्षेत्र को रियायती ऋण उपलब्ध कराने का सोमवार को आग्रह किया। कोविड-उन्नीस संकट के चलते इस क्षेत्र को खुद का अस्तित्व बचाए रखने में दिक्कत पेश आ रही है। एफएचआरएआई ने कहा कि देशभर में आतिथ्य क्षेत्र कोविड-उन्नीस से पूर्व की स्थिति के बीस से तीस प्रतिशत के स्तर पर ही पहुंचा है। ऐसे में उनके लिए एक-एक दिन मुश्किल होता जा रहा है। एफएचआरएआई के मानद कोषाध्यक्ष डी. वी. एस. सोमा राजू ने कहा कि सरकार कम ब्याज दर पर ऋण देकर उद्योग की मदद कर सकती है। वह यह ऋण तब तक के लिए दे सकती है जब तक कारोबार कोविड-उन्नीस से पूर्व की स्थिति तक नहीं पहुंच जाता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच कल क्रिकेट मैच खेला जाना है. (PIC: AFP) नई दिल्ली. महिला एशिया कप 2022 में शुक्रवार यानी 7 अक्टूबर को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला होना है. मैच से एक दिन पहले पाकिस्तान की महिला क्रिकेट टीम को थाईलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा है. एशिया कप में थाईलैंड की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया दिया है. उन्होंने ऐतिहासिक क्षण बनाने के लिए पाकिस्तान महिला टीम को चार विकेट से हराया. पाकिस्तान ने 116/5 का स्कोर बनाया और थाईलैंड ने एक गेंद शेष रहते लक्ष्य को हासिल कर लिया. लक्ष्य का पीछा करते हुए अर्धशतक बनाने वाली नत्थाकन चैंथम स्टार खिलाड़ी रहीं. इस मैच में थाईलैंड की महिला टीम ने शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन किया. टारगेट का पीछा करते हुए थाईलैंड टीम को अंतिम ओवर में 10 रन की जरूरत थी. उन्हें प्रभावशाली जीत दर्ज करने के लिए सिर्फ पांच गेंदों की जरूरत थी. पाकिस्तान के कप्तान बिस्माह मारुफ ने अपनी हार के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदार ठहराया. भारत की महिला महिला एशिया कप 2022 अंक तालिका में शीर्ष पर बनी हुई है. भारत ने अब तक खेले तीनों मैच जीते हैं. 2 मैचों में दो जीत के साथ पाकिस्तान वर्तमान में नंबर पर दो पर है. इसके बाद श्रीलंका और बांग्लादेश हैं. इस बीच यूएई ने मलेशिया महिला टीम को 7 विकेट से हराकर एशिया कप 2022 की पहली जीत दर्ज की है. मलेशिया अब अंक तालिका में सातवें नंबर पर है, क्योंकि उसने टूर्नामेंट में खेले गए सभी 3 मैच गंवाए हैं. महिला एशिया कप 2022 में सात टीमें भाग ले रही हैं - भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया और यूएई. यह कॉन्टिनेंटल शोपीस का आठवां संस्करण है और 2018 के बाद पहला है. बता दें कि थाईलैंड ने सिलहट में अपने महिला एशिया कप मैच में पाकिस्तान को चार विकेट से हराकर अपने क्रिकेट इतिहास में सबसे बड़ी जीत में से एक को हासिल किया है. कम स्कोर वाले खेल में जीत की स्टार नत्थकन चैंथम ने 51 गेंदों में 61 रनों के की पारी खेली. सोरनारिन टिप्पोच ने थाईलैंड के मजबूत गेंदबाजी प्रदर्शन में 20 विकेट पर 2 विकेट लिए. इससे पहले थाईलैंड की सबसे बड़ी जीत 2018 टी20 एशिया कप में हुई थी, जब उन्होंने कुआलालंपुर में श्रीलंका को चार विकेट से हराया था. पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने सिडनी में टी20 विश्व कप 2020 मैच में 3 विकेट पर 150 रन बनाए थे, लेकिन यह मैच बारिश से धुल गया था. .
भारत और पाकिस्तान के बीच कल क्रिकेट मैच खेला जाना है. नई दिल्ली. महिला एशिया कप दो हज़ार बाईस में शुक्रवार यानी सात अक्टूबर को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला होना है. मैच से एक दिन पहले पाकिस्तान की महिला क्रिकेट टीम को थाईलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा है. एशिया कप में थाईलैंड की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया दिया है. उन्होंने ऐतिहासिक क्षण बनाने के लिए पाकिस्तान महिला टीम को चार विकेट से हराया. पाकिस्तान ने एक सौ सोलह/पाँच का स्कोर बनाया और थाईलैंड ने एक गेंद शेष रहते लक्ष्य को हासिल कर लिया. लक्ष्य का पीछा करते हुए अर्धशतक बनाने वाली नत्थाकन चैंथम स्टार खिलाड़ी रहीं. इस मैच में थाईलैंड की महिला टीम ने शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन किया. टारगेट का पीछा करते हुए थाईलैंड टीम को अंतिम ओवर में दस रन की जरूरत थी. उन्हें प्रभावशाली जीत दर्ज करने के लिए सिर्फ पांच गेंदों की जरूरत थी. पाकिस्तान के कप्तान बिस्माह मारुफ ने अपनी हार के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदार ठहराया. भारत की महिला महिला एशिया कप दो हज़ार बाईस अंक तालिका में शीर्ष पर बनी हुई है. भारत ने अब तक खेले तीनों मैच जीते हैं. दो मैचों में दो जीत के साथ पाकिस्तान वर्तमान में नंबर पर दो पर है. इसके बाद श्रीलंका और बांग्लादेश हैं. इस बीच यूएई ने मलेशिया महिला टीम को सात विकेट से हराकर एशिया कप दो हज़ार बाईस की पहली जीत दर्ज की है. मलेशिया अब अंक तालिका में सातवें नंबर पर है, क्योंकि उसने टूर्नामेंट में खेले गए सभी तीन मैच गंवाए हैं. महिला एशिया कप दो हज़ार बाईस में सात टीमें भाग ले रही हैं - भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया और यूएई. यह कॉन्टिनेंटल शोपीस का आठवां संस्करण है और दो हज़ार अट्ठारह के बाद पहला है. बता दें कि थाईलैंड ने सिलहट में अपने महिला एशिया कप मैच में पाकिस्तान को चार विकेट से हराकर अपने क्रिकेट इतिहास में सबसे बड़ी जीत में से एक को हासिल किया है. कम स्कोर वाले खेल में जीत की स्टार नत्थकन चैंथम ने इक्यावन गेंदों में इकसठ रनों के की पारी खेली. सोरनारिन टिप्पोच ने थाईलैंड के मजबूत गेंदबाजी प्रदर्शन में बीस विकेट पर दो विकेट लिए. इससे पहले थाईलैंड की सबसे बड़ी जीत दो हज़ार अट्ठारह टीबीस एशिया कप में हुई थी, जब उन्होंने कुआलालंपुर में श्रीलंका को चार विकेट से हराया था. पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने सिडनी में टीबीस विश्व कप दो हज़ार बीस मैच में तीन विकेट पर एक सौ पचास रन बनाए थे, लेकिन यह मैच बारिश से धुल गया था. .
काठमांडू, २० सेप्टेम्बर । छह दिवसीय औपचारिक चीन भ्रमण के क्रम में उपराष्ट्रपति नंदबहादुर पुन बुधबार चीन के सिचुआन प्रांत की राजधानी छेंदू पहुँचे हैं । छेंदु अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर उपराष्ट्रपति पुन का स्वागत सिचुआन प्रांत जनसरकार के उपसचिव यान वि पिंग ने किया था । चीन प्रस्थान के समय त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर उनकी विदाई गृहमंत्री रामबहादुर थापा ने की थी । उनके सम्मान में नेपाली सेना की एक टुकड़ी ने सम्मानगारत अर्पण किया था । उपराष्ट्रपति पुन आश्विन ८ गते को नेपाल लौटेंगे । इसितरह, चीन दौरे पर रहे नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी नेकपा के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचंड ने चीनी उपराष्ट्रपति वांग क्वी सान के साथ मुलाकात की । मुलाकात के दौरान अध्यक्ष प्रचंड ने उपराष्ट्रपति सान को बताया कि नेपाल में द्वंद्व समाप्त होकर देश समृद्धि की राह पर है ।
काठमांडू, बीस सेप्टेम्बर । छह दिवसीय औपचारिक चीन भ्रमण के क्रम में उपराष्ट्रपति नंदबहादुर पुन बुधबार चीन के सिचुआन प्रांत की राजधानी छेंदू पहुँचे हैं । छेंदु अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर उपराष्ट्रपति पुन का स्वागत सिचुआन प्रांत जनसरकार के उपसचिव यान वि पिंग ने किया था । चीन प्रस्थान के समय त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर उनकी विदाई गृहमंत्री रामबहादुर थापा ने की थी । उनके सम्मान में नेपाली सेना की एक टुकड़ी ने सम्मानगारत अर्पण किया था । उपराष्ट्रपति पुन आश्विन आठ गते को नेपाल लौटेंगे । इसितरह, चीन दौरे पर रहे नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी नेकपा के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचंड ने चीनी उपराष्ट्रपति वांग क्वी सान के साथ मुलाकात की । मुलाकात के दौरान अध्यक्ष प्रचंड ने उपराष्ट्रपति सान को बताया कि नेपाल में द्वंद्व समाप्त होकर देश समृद्धि की राह पर है ।
यह एक तीसरा भी उदाहरण देखिये - जोइसदेवीणाऊ सग सगदेवाणमद्धयं होदि । सव्वणिगिट्ठसुराणं बत्तीसा होति देवीओ ॥ ४४९, इसका निम्न इलोकसे मिलान कीजिये --- आयुर्ज्योतिष्कदेवीनां स्व-स्वदेवायुरर्धकम् । सर्वेभ्यश्च निकृष्टानां देव्यो द्वात्रिंशदेव च ॥६-२३५. इस प्रकारसे अन्य ( ४ - २२ त्रि. ३५७, ६-१२८ त्रि. ३९५, ९, ७-८ त्रि. २९७ तथा ९ ९ त्रि. २९९ आदि) भी कितने ही उदाहरण दिये जा सकते हैं। त्रिलोकसारके अन्तमें (गा. ९७८-१०१४) अकृत्रिम जिनभवनोंका वर्णन किया गया है । उसका अनुसरण करके प्रस्तुत लो. वि. में भी सुमेरुके वर्णनमें उन जिनभवनों प्रायः उसी रूपसे वर्णन किया गया है । इसमें लो. वि. के १,२९५-३११ श्लोकोंका त्रि. सा. की ९८४-१०१ गाथाओंसे मिलान किया जा सकता है। प्रस्तुत ग्रन्थके टवें विभागमें श्लोक ४६-४७ द्वारा सातवीं पृथिवीके ४ श्रेणीवद्ध और १ इन्द्रक इन ५ नारक विलोंके विन्यासको वतलाकर आगे ' उक्तं च' कहते हुए ' मनुष्यक्षेत्रमानः स्यात् ' आदि एक श्लोक दिया गया है, जो पूर्वोक्त विषयसे विषयान्तरको प्राप्त होकर गणितसूत्रके रूपमें ४९ इन्द्रक त्रिलोंके विस्तारका सूचक है। यह श्लोक किस ग्रन्थका है, यह ज्ञात नहीं होता। परन्तु वह त्रिलोकसारकी निम्न गाथाके छायानुवादके समान हैमाणुसखेत्तपमाणं पढमं चरिमं तु जंबुदीवसमं । उभयविसेसे रुऊणदयभजिदम्हि हाणि चयं ॥ १६९. आश्चर्य नहीं जो ' उक्तं ' च कहकर इसी गाथा को वहां देना चाहते हों और अनुवाद कर दिया हो संस्कृतमें । उसका उत्तरार्ध भी शुद्ध उपलब्ध नहीं है । जैन सं. सं. संघ । सोलापूर बालचन्द्र शास्त्री
यह एक तीसरा भी उदाहरण देखिये - जोइसदेवीणाऊ सग सगदेवाणमद्धयं होदि । सव्वणिगिट्ठसुराणं बत्तीसा होति देवीओ ॥ चार सौ उनचास, इसका निम्न इलोकसे मिलान कीजिये --- आयुर्ज्योतिष्कदेवीनां स्व-स्वदेवायुरर्धकम् । सर्वेभ्यश्च निकृष्टानां देव्यो द्वात्रिंशदेव च ॥छः-दो सौ पैंतीस. इस प्रकारसे अन्य भी कितने ही उदाहरण दिये जा सकते हैं। त्रिलोकसारके अन्तमें अकृत्रिम जिनभवनोंका वर्णन किया गया है । उसका अनुसरण करके प्रस्तुत लो. वि. में भी सुमेरुके वर्णनमें उन जिनभवनों प्रायः उसी रूपसे वर्णन किया गया है । इसमें लो. वि. के एक,दो सौ पचानवे-तीन सौ ग्यारह श्लोकोंका त्रि. सा. की नौ सौ चौरासी-एक सौ एक गाथाओंसे मिलान किया जा सकता है। प्रस्तुत ग्रन्थके टवें विभागमें श्लोक छियालीस-सैंतालीस द्वारा सातवीं पृथिवीके चार श्रेणीवद्ध और एक इन्द्रक इन पाँच नारक विलोंके विन्यासको वतलाकर आगे ' उक्तं च' कहते हुए ' मनुष्यक्षेत्रमानः स्यात् ' आदि एक श्लोक दिया गया है, जो पूर्वोक्त विषयसे विषयान्तरको प्राप्त होकर गणितसूत्रके रूपमें उनचास इन्द्रक त्रिलोंके विस्तारका सूचक है। यह श्लोक किस ग्रन्थका है, यह ज्ञात नहीं होता। परन्तु वह त्रिलोकसारकी निम्न गाथाके छायानुवादके समान हैमाणुसखेत्तपमाणं पढमं चरिमं तु जंबुदीवसमं । उभयविसेसे रुऊणदयभजिदम्हि हाणि चयं ॥ एक सौ उनहत्तर. आश्चर्य नहीं जो ' उक्तं ' च कहकर इसी गाथा को वहां देना चाहते हों और अनुवाद कर दिया हो संस्कृतमें । उसका उत्तरार्ध भी शुद्ध उपलब्ध नहीं है । जैन सं. सं. संघ । सोलापूर बालचन्द्र शास्त्री
कोलंबो (एजेंसी/वार्ता): श्रीलंका की सांसद डायना गोमेज को ब्रिटिश नागरिक घोषित कर दिया गया है। समाचार पत्र'डेली मिरर' ने मंगलवार को यह जानकारी दी। समाचार पत्र के अनुसार, इमिग्रेशन एंड इमिग्रेशन कंट्रोलर (ईईएमसी) ने रक्षा मंत्रालय के सचिव को बताया कि सुश्री गोमेज को ब्रिटेन नागरिकता प्राप्त है और इसलिए उन्हें श्रीलंकाई पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता है। विपक्षी सदस्य मुजीबुर रहमान द्वारा संसद में पेश किए गए पत्र में कहा गया कि सांसद वर्ष 2004 से ब्रिटेन की नागरिक हैं और उसके पास ब्रिटेन का पासपोर्ट है। ईईएमसी ने अपने एक पत्र में बताया कि उन्होंने 24 जनवरी 2014 में एक श्रीलंकाई पासपोर्ट बनवाया, जिसके बाद पांच नवंबर 2018 को एक राजनयिक पासपोर्ट भी बनवाने में सफल रही। एक नया राजनयिक पासपोर्ट जारी करना संभव नहीं है क्योंकि वह यह साबित करने में विफल रही कि उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता छोड़ दी है।
कोलंबो : श्रीलंका की सांसद डायना गोमेज को ब्रिटिश नागरिक घोषित कर दिया गया है। समाचार पत्र'डेली मिरर' ने मंगलवार को यह जानकारी दी। समाचार पत्र के अनुसार, इमिग्रेशन एंड इमिग्रेशन कंट्रोलर ने रक्षा मंत्रालय के सचिव को बताया कि सुश्री गोमेज को ब्रिटेन नागरिकता प्राप्त है और इसलिए उन्हें श्रीलंकाई पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता है। विपक्षी सदस्य मुजीबुर रहमान द्वारा संसद में पेश किए गए पत्र में कहा गया कि सांसद वर्ष दो हज़ार चार से ब्रिटेन की नागरिक हैं और उसके पास ब्रिटेन का पासपोर्ट है। ईईएमसी ने अपने एक पत्र में बताया कि उन्होंने चौबीस जनवरी दो हज़ार चौदह में एक श्रीलंकाई पासपोर्ट बनवाया, जिसके बाद पांच नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को एक राजनयिक पासपोर्ट भी बनवाने में सफल रही। एक नया राजनयिक पासपोर्ट जारी करना संभव नहीं है क्योंकि वह यह साबित करने में विफल रही कि उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता छोड़ दी है।
आज कार्य क्षेत्र में कार्यरत लोगों को महत्वपूर्ण कार्य में सफलता एवं धन लाभ होगा. घर परिवार में कोई धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रम संपन्न होने के योग बनेंगे. आज कार्यक्षेत्र में नए सहयोगी बनेंगे. नौकरी में पदोन्नति होने के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी. राजनीति में आपको अपार जनसमर्थन एवं सहयोग मिलेगा. आज नौकरी में स्थानांतरण के योग हैं. आपको किसी जरूरी कार्य से घर से दूर जाना पड़ेगा. व्यापार में कुछ समस्या आ सकती है. किसी महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी नए व्यक्ति के हाथों में न दें. आज पूजा आराधना में अत्यधिक समय व्यतीत होगा. आज कुछ छोटी-छोटी समस्याएं उत्पन्न होती रहेगी. अपनी समस्याओं को अधिक न बढ़ने दें. आज कोर्ट कचहरी के मामले में निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है. खेलकूद प्रतियोगिता में उच्च सफलता एवं सम्मान मिलेगा. व्यापार में नए सहयोगी बनेंगे. आज आध्यात्मिक कार्यों में अभिरुचि रहेगी. किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलेगी. राजनीति में किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति से भेंट होगी. नौकरी में पदोन्नति के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी. आज व्यापार में नए सहयोगी बनेंगे. किसी महत्वपूर्ण कार्य में आई बाधा सरकारी सहयोग से दूर होगी. व्यापारिक यात्रा सुखद एवं सफल रहेगी. आज नौकरी के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति गुप्त शत्रुओं से सावधानि बरतें. नौकरी में आपको महत्वपूर्ण पद से हटाया जा सकता है. अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें. जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय न लें. आज कोई महत्वाकांक्षा पूर्ण होगी. किसी महत्वपूर्ण कार्य से आपको यात्रा पर जाना पड़ सकता है. किसी विशिष्ट व्यक्ति से मार्गदर्शन एवं सानिध्य प्राप्त होगा. आज कार्य क्षेत्र में किसी अधूरे कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी आपको मिलेगी. राजनीति में अत्यधिक बोल चाल से बचें. किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा. आज भूमि संबंधी कार्य में संलग्न लोगों को विशेष सफलता प्राप्त होगी. कार्यक्षेत्र में नए लोगों से सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा. किसी महत्वपूर्ण कार्य में कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिलेगी. आज संतान सुख में वृद्धि होगी. किसी अभिन्न मित्र से भेंट होगी. परीक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. कार्य क्षेत्र में नए सहयोगी बनेंगे. व्यापार में धैर्य एवं लगन के साथ कार्य करें. किसी के कहे सुने में न आएं.
आज कार्य क्षेत्र में कार्यरत लोगों को महत्वपूर्ण कार्य में सफलता एवं धन लाभ होगा. घर परिवार में कोई धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रम संपन्न होने के योग बनेंगे. आज कार्यक्षेत्र में नए सहयोगी बनेंगे. नौकरी में पदोन्नति होने के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी. राजनीति में आपको अपार जनसमर्थन एवं सहयोग मिलेगा. आज नौकरी में स्थानांतरण के योग हैं. आपको किसी जरूरी कार्य से घर से दूर जाना पड़ेगा. व्यापार में कुछ समस्या आ सकती है. किसी महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी नए व्यक्ति के हाथों में न दें. आज पूजा आराधना में अत्यधिक समय व्यतीत होगा. आज कुछ छोटी-छोटी समस्याएं उत्पन्न होती रहेगी. अपनी समस्याओं को अधिक न बढ़ने दें. आज कोर्ट कचहरी के मामले में निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है. खेलकूद प्रतियोगिता में उच्च सफलता एवं सम्मान मिलेगा. व्यापार में नए सहयोगी बनेंगे. आज आध्यात्मिक कार्यों में अभिरुचि रहेगी. किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलेगी. राजनीति में किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति से भेंट होगी. नौकरी में पदोन्नति के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी. आज व्यापार में नए सहयोगी बनेंगे. किसी महत्वपूर्ण कार्य में आई बाधा सरकारी सहयोग से दूर होगी. व्यापारिक यात्रा सुखद एवं सफल रहेगी. आज नौकरी के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति गुप्त शत्रुओं से सावधानि बरतें. नौकरी में आपको महत्वपूर्ण पद से हटाया जा सकता है. अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें. जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय न लें. आज कोई महत्वाकांक्षा पूर्ण होगी. किसी महत्वपूर्ण कार्य से आपको यात्रा पर जाना पड़ सकता है. किसी विशिष्ट व्यक्ति से मार्गदर्शन एवं सानिध्य प्राप्त होगा. आज कार्य क्षेत्र में किसी अधूरे कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी आपको मिलेगी. राजनीति में अत्यधिक बोल चाल से बचें. किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा. आज भूमि संबंधी कार्य में संलग्न लोगों को विशेष सफलता प्राप्त होगी. कार्यक्षेत्र में नए लोगों से सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा. किसी महत्वपूर्ण कार्य में कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिलेगी. आज संतान सुख में वृद्धि होगी. किसी अभिन्न मित्र से भेंट होगी. परीक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. कार्य क्षेत्र में नए सहयोगी बनेंगे. व्यापार में धैर्य एवं लगन के साथ कार्य करें. किसी के कहे सुने में न आएं.
नोएडाः उत्तर प्रदेश में कुत्ते के लिए पुरुष के किडनैपिंग की सनसनीखेज घटना सामने आई है. मामला ग्रेटर नोएडा के बीटा 2 थाना क्षेत्र का है. जहां दबंगो को जब एक कुत्ता पसंद आया तो उन्होंने पहले उसे प्यार से मांगा एवं जब कुत्ते के मालिक ने उसे देने से मना कर दिया तो दबंगों ने गुस्से में आकर शख्स का किडनैपिंग कर लिया. वही अपराधियों पर कुत्ते के मालिक से अभद्रता करने के पश्चात् उसका किडनैपिंग करके अलीगढ़ ले जाने का आरोप भी लगा है. अब सोशल मीडिया पर अपराधियों की ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है. बीटा दो कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर अल्फा 2 में अर्जेंटीनो नस्ल का कुत्ता नहीं देने पर पुरुष का किडनैपिंग कर लिया गया. इस कुत्ते का मूल्य 2 लाख रुपये है. आपको बता दे कि स्कार्पियो सवार दबंगों ने पीड़ित का किडनैपिंग करने के पश्चात् उसे ग्रेटर नोएडा से लेकर अलीगढ़ तक की सड़कों पर घुमाया. वहीं पूरे रास्ते में कुत्ते के मालिक के साथ गाली-गलौज और हाथापाई भी की गई. ग्रेटर नोएडा के रहने वाले राहुल ने बताया कि उसके भाई शुभम के पास एक डोगो अर्जेंटीनो कुत्ता है. बुधवार शाम को शुभम अपने कुत्ते को घुमा रहा था तभी अलीगढ़ के रहने वाले विशाल, ललित एवं मोंटी अपनी स्कॉर्पियो से आए एवं उसका कुत्ता पसंद आने की बात कही. तीनों ने धमकाया कि चाहे कुछ भी हो जाए उन्हें ये कुत्ता हर हाल में चाहिए तथा उसके पश्चात् उन्होंने शुभम को किडनैप कर लिया. तत्पश्चात, पुलिस को समाचार दी गई. जिसके बाद पीड़ित शख्स जैसे तैसे अपनी जान बचाकर अपराधियों के कब्जे से अपनी जान बचाकर वापस ग्रेटर नोएडा स्थित अपने घर पहुंचा. अब पुलिस ने मुद्दे में किडनैपिंग की धारा में रिपोर्ट दर्ज अपराधियों की तलाश आरम्भ कर दी है.
नोएडाः उत्तर प्रदेश में कुत्ते के लिए पुरुष के किडनैपिंग की सनसनीखेज घटना सामने आई है. मामला ग्रेटर नोएडा के बीटा दो थाना क्षेत्र का है. जहां दबंगो को जब एक कुत्ता पसंद आया तो उन्होंने पहले उसे प्यार से मांगा एवं जब कुत्ते के मालिक ने उसे देने से मना कर दिया तो दबंगों ने गुस्से में आकर शख्स का किडनैपिंग कर लिया. वही अपराधियों पर कुत्ते के मालिक से अभद्रता करने के पश्चात् उसका किडनैपिंग करके अलीगढ़ ले जाने का आरोप भी लगा है. अब सोशल मीडिया पर अपराधियों की ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है. बीटा दो कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर अल्फा दो में अर्जेंटीनो नस्ल का कुत्ता नहीं देने पर पुरुष का किडनैपिंग कर लिया गया. इस कुत्ते का मूल्य दो लाख रुपये है. आपको बता दे कि स्कार्पियो सवार दबंगों ने पीड़ित का किडनैपिंग करने के पश्चात् उसे ग्रेटर नोएडा से लेकर अलीगढ़ तक की सड़कों पर घुमाया. वहीं पूरे रास्ते में कुत्ते के मालिक के साथ गाली-गलौज और हाथापाई भी की गई. ग्रेटर नोएडा के रहने वाले राहुल ने बताया कि उसके भाई शुभम के पास एक डोगो अर्जेंटीनो कुत्ता है. बुधवार शाम को शुभम अपने कुत्ते को घुमा रहा था तभी अलीगढ़ के रहने वाले विशाल, ललित एवं मोंटी अपनी स्कॉर्पियो से आए एवं उसका कुत्ता पसंद आने की बात कही. तीनों ने धमकाया कि चाहे कुछ भी हो जाए उन्हें ये कुत्ता हर हाल में चाहिए तथा उसके पश्चात् उन्होंने शुभम को किडनैप कर लिया. तत्पश्चात, पुलिस को समाचार दी गई. जिसके बाद पीड़ित शख्स जैसे तैसे अपनी जान बचाकर अपराधियों के कब्जे से अपनी जान बचाकर वापस ग्रेटर नोएडा स्थित अपने घर पहुंचा. अब पुलिस ने मुद्दे में किडनैपिंग की धारा में रिपोर्ट दर्ज अपराधियों की तलाश आरम्भ कर दी है.
हाल ही में सामने आए एक अपराध के मामले ने सभी को हैरानी में डाल दिया है. जी हाँ, इस मामले को सुनने के बाद सभी लोगों के होश उड़ गए हैं. आप सभी को बता दें कि यह मामला हरियाणा के सोनीपत का है जहां 23 साल की आरती की शादी सोनीपत के इंजीनियर लड़के के साथ की गई थी. इस मामले में बताया गया है कि उस लड़की की शादी कुछ महीनों पहले ही हुई थी. वहीं जब एक दिन आरती नहा रही थी तब उसके पति ने वहां से गीजर ऑफ कर दिया और फिर अपनी माँ के साथ मिलकर एक ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया जिसे सुनकर आप सभी के होश उड़ सकते हैं. हाल ही में पुलिस से बात करते हुए इस मामले में आरती ने बताया कि, "उसका पति पेशे से एक इंजीनियर और दिल्ली में काम करता है वहीं पिछले कई महीनों से वह और उसके माँ-बाप उसे दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित कर रहे थे और वह सभी उससे दहेज के रूप में ₹1000000 मांग रहे थे. घटना वाले दिन इसी बात को लेकर जब वह बाथरूम में नहाने गई तो उसके पति ने बाहर से गीजर ऑफ कर दिया और बाथरूम में उससे काफी मारपीट की. इस दौरान उसके शरीर पर कई निशान भी बन गए. " इस मामले में पुलिस को बताते हुए पीड़िता ने बताया कि इस दौरान उसका पति और उसकी मां शामिल रहे और उसके बाद एक अन्य महिला के साथ मिलकर तीनो ने उसपर पेट्रोल डालकर उसे जलाने की भी कोशिश की लेकिन वह बच गई. अंत में आरती वहां से भागने में कामयाब रही और अपने मायके पानीपत पहुंच गई जहाँ उसके घरवालों ने उसे अस्पताल में एडमिट करवाया. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. तीन महीने की गर्भवती गाय को पेड़ से बांधकर किया रेप, हालत गंभीर. .
हाल ही में सामने आए एक अपराध के मामले ने सभी को हैरानी में डाल दिया है. जी हाँ, इस मामले को सुनने के बाद सभी लोगों के होश उड़ गए हैं. आप सभी को बता दें कि यह मामला हरियाणा के सोनीपत का है जहां तेईस साल की आरती की शादी सोनीपत के इंजीनियर लड़के के साथ की गई थी. इस मामले में बताया गया है कि उस लड़की की शादी कुछ महीनों पहले ही हुई थी. वहीं जब एक दिन आरती नहा रही थी तब उसके पति ने वहां से गीजर ऑफ कर दिया और फिर अपनी माँ के साथ मिलकर एक ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया जिसे सुनकर आप सभी के होश उड़ सकते हैं. हाल ही में पुलिस से बात करते हुए इस मामले में आरती ने बताया कि, "उसका पति पेशे से एक इंजीनियर और दिल्ली में काम करता है वहीं पिछले कई महीनों से वह और उसके माँ-बाप उसे दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित कर रहे थे और वह सभी उससे दहेज के रूप में दस लाख रुपया मांग रहे थे. घटना वाले दिन इसी बात को लेकर जब वह बाथरूम में नहाने गई तो उसके पति ने बाहर से गीजर ऑफ कर दिया और बाथरूम में उससे काफी मारपीट की. इस दौरान उसके शरीर पर कई निशान भी बन गए. " इस मामले में पुलिस को बताते हुए पीड़िता ने बताया कि इस दौरान उसका पति और उसकी मां शामिल रहे और उसके बाद एक अन्य महिला के साथ मिलकर तीनो ने उसपर पेट्रोल डालकर उसे जलाने की भी कोशिश की लेकिन वह बच गई. अंत में आरती वहां से भागने में कामयाब रही और अपने मायके पानीपत पहुंच गई जहाँ उसके घरवालों ने उसे अस्पताल में एडमिट करवाया. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. तीन महीने की गर्भवती गाय को पेड़ से बांधकर किया रेप, हालत गंभीर. .
चिंतित करते हैं और हमें आहत भी करते हैं। भारत की संसद ऐसी घटनाओं को लेकर हमेशा चिंतित रही है। सरकार ने भी इस विषय पर सभी राज्यों, देश के किसी भी हिस्से में घटी ऐसी घटना पर कठोर कार्रवाई हो, ऐसा सदन को अवगत कराया है। किसी भी माँ-बेटी के साथ इस प्रकार के अपराध की हम सब एक स्वर से निंदा करते हैं। सरकार ने कहा है कि इस विषय पर अगर कहीं चर्चा करने की आवश्यकता होगी तो सारा सदन सहमत है। इस विषय पर बी.ए.सी. के अंदर जब कभी बात होगी तो निश्चित रूप से चर्चा की जाएगी । देश के किसी भी राज्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो, इसके लिए सदन चिंतित है। हम सब कोशिश करेंगे, इसके लिए कठोर से कठोर कानून बनाए गए हैं। अगर उस कानून में परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी तो जैसा सदन सहमत होगा, हम निश्चित रूप से इस पर विचार करेंगे । मैं इस घटना पर सदन की तरफ से दुख व्यक्त करता हूं। ऐसी घटना की पुनरावृति न हो, ऐसी अपेक्षा मैं देश से करता हूं।
चिंतित करते हैं और हमें आहत भी करते हैं। भारत की संसद ऐसी घटनाओं को लेकर हमेशा चिंतित रही है। सरकार ने भी इस विषय पर सभी राज्यों, देश के किसी भी हिस्से में घटी ऐसी घटना पर कठोर कार्रवाई हो, ऐसा सदन को अवगत कराया है। किसी भी माँ-बेटी के साथ इस प्रकार के अपराध की हम सब एक स्वर से निंदा करते हैं। सरकार ने कहा है कि इस विषय पर अगर कहीं चर्चा करने की आवश्यकता होगी तो सारा सदन सहमत है। इस विषय पर बी.ए.सी. के अंदर जब कभी बात होगी तो निश्चित रूप से चर्चा की जाएगी । देश के किसी भी राज्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो, इसके लिए सदन चिंतित है। हम सब कोशिश करेंगे, इसके लिए कठोर से कठोर कानून बनाए गए हैं। अगर उस कानून में परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी तो जैसा सदन सहमत होगा, हम निश्चित रूप से इस पर विचार करेंगे । मैं इस घटना पर सदन की तरफ से दुख व्यक्त करता हूं। ऐसी घटना की पुनरावृति न हो, ऐसी अपेक्षा मैं देश से करता हूं।
जबलपुर, यशभारत। नगर निगम की अनदेखी के चलते शहर के चौराहे बद्सूरत हो गए हैं। शहर का सबसे बड़ा चौराहा कहे जाने वाला छोटीलाइन फाटक (अब आदि शंकराचार्य) चौराहा भी इससे अछूता नहीं रहा। चौराहा के आस-पास सहित ग्वारीघाट, गोरखपुर, महानद्दा की तरफ खोले गए लेफ्ट टर्न पर सब्जी, पान, चाय, चाट, फुल्की वालों ने अतिक्रमण कर लिया है। जिसके कारण यातायात तो बाधित हो ही रहा है चैराहें की सुंदरता भी खराब हो रही है। जबकि चैराहे के सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी तकरीबन एक करोड़ 74 लाख रुपये खर्च कर चुका है। दावा किया गया था कि शहर के सबसे बड़े आदि शंकराचार्य चैक को शहर का सबसे आकर्षक चौराहा बनाया जाएगा। हैरानी की बात है कि चौराहा पर ही नगर निगम का संभागीय कार्यालय है फिर भी चैराहा अतिक्रमण की चपेट में हैं। हाल ये है कि चैराहे और डिवाइडर के पास खड़े किए गए ठेले, टपरों के कारण शास्त्री ब्रिज से गोरखपुर मार्केट की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को इनसे जूझ कर आगे बढ़ना पड़ रहा है। इसी तरह गोरखपुर से ग्वारीघाट नर्मदा रोड की तरफ जाने के लिए खोले गए लेफ्ट टर्न पर अतिक्रमणों की बाढ़ आ गई है। पूरे लेफ्ट टर्न पर सब्जी के ठेले खड़े किए जा रहे, दुकानें लगाई जा रही हैं। जिसके कारण कारण वाहन चालक मुख्य सड़क से आ-जा रहे हैं। जिसे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। मुख्य मार्ग होने के कारण शाम को यहां यातायात का दबाव इस कदर बढ़ जाता है कि जाम के हालात बन जाते हैं। जबकि नगर निगम का कहना था कि चैराहे को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि 20 वर्षों इसमें सुधार की गुजाइंश नहीं नही रहेगी। यातायात पानी की तरह बहेगा। एक साथ चार वाहन निकल सकेंगे, लेकिन हकीकत में चैराहा अतिक्रमणों से घिरा हुआ है। नगर निगम ने छोटी लाइन फाटक का नाम 20 अप्रैल 2018 में बदलकर आदि शंकराचार्य चैराहा तो कर दिया। लेकिन नाम के अनुरूप चैराहा नजर नहीं आ रहा। लाखों रुपये खर्च कर रोटरी में जबलपुर की पहचान मदनमहल स्थित ऐतिहासिक बैलेंसिंग राक की कृति बनवाकर स्थापित की थी। विरोध के बाद इसे हटा दिया गया। ये मांग भी उठी कि चैराहे को आदि शंकराचार्य के नाम के अनुरूप विकसित किया जाए, लेकिन वक्त के साथ ये मांग दब कर रह गई। फिलहाल ये चैराहा सब्जी मार्केट नजर आ रहा है।
जबलपुर, यशभारत। नगर निगम की अनदेखी के चलते शहर के चौराहे बद्सूरत हो गए हैं। शहर का सबसे बड़ा चौराहा कहे जाने वाला छोटीलाइन फाटक चौराहा भी इससे अछूता नहीं रहा। चौराहा के आस-पास सहित ग्वारीघाट, गोरखपुर, महानद्दा की तरफ खोले गए लेफ्ट टर्न पर सब्जी, पान, चाय, चाट, फुल्की वालों ने अतिक्रमण कर लिया है। जिसके कारण यातायात तो बाधित हो ही रहा है चैराहें की सुंदरता भी खराब हो रही है। जबकि चैराहे के सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी तकरीबन एक करोड़ चौहत्तर लाख रुपये खर्च कर चुका है। दावा किया गया था कि शहर के सबसे बड़े आदि शंकराचार्य चैक को शहर का सबसे आकर्षक चौराहा बनाया जाएगा। हैरानी की बात है कि चौराहा पर ही नगर निगम का संभागीय कार्यालय है फिर भी चैराहा अतिक्रमण की चपेट में हैं। हाल ये है कि चैराहे और डिवाइडर के पास खड़े किए गए ठेले, टपरों के कारण शास्त्री ब्रिज से गोरखपुर मार्केट की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को इनसे जूझ कर आगे बढ़ना पड़ रहा है। इसी तरह गोरखपुर से ग्वारीघाट नर्मदा रोड की तरफ जाने के लिए खोले गए लेफ्ट टर्न पर अतिक्रमणों की बाढ़ आ गई है। पूरे लेफ्ट टर्न पर सब्जी के ठेले खड़े किए जा रहे, दुकानें लगाई जा रही हैं। जिसके कारण कारण वाहन चालक मुख्य सड़क से आ-जा रहे हैं। जिसे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। मुख्य मार्ग होने के कारण शाम को यहां यातायात का दबाव इस कदर बढ़ जाता है कि जाम के हालात बन जाते हैं। जबकि नगर निगम का कहना था कि चैराहे को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि बीस वर्षों इसमें सुधार की गुजाइंश नहीं नही रहेगी। यातायात पानी की तरह बहेगा। एक साथ चार वाहन निकल सकेंगे, लेकिन हकीकत में चैराहा अतिक्रमणों से घिरा हुआ है। नगर निगम ने छोटी लाइन फाटक का नाम बीस अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह में बदलकर आदि शंकराचार्य चैराहा तो कर दिया। लेकिन नाम के अनुरूप चैराहा नजर नहीं आ रहा। लाखों रुपये खर्च कर रोटरी में जबलपुर की पहचान मदनमहल स्थित ऐतिहासिक बैलेंसिंग राक की कृति बनवाकर स्थापित की थी। विरोध के बाद इसे हटा दिया गया। ये मांग भी उठी कि चैराहे को आदि शंकराचार्य के नाम के अनुरूप विकसित किया जाए, लेकिन वक्त के साथ ये मांग दब कर रह गई। फिलहाल ये चैराहा सब्जी मार्केट नजर आ रहा है।
Bilaspur Politics News: बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने एक बार फिर से आपातकाल लगाने की साजिश रची है। सांप्रदायिक तुष्टीकरण की राजनीति के तहत प्रदेश में मतांतरण को बढ़ावा देने के लिए रासुका लगा दिया है। अत्यधिक असामान्य परिस्थितियों में उठाये जाने वाले इस कदम ने कांग्रेस के विभाजनकारी राजनीति की पोल खोल दी है। भाजपा द्वारा पूर्व में क़ानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के बारे में लगातार मामला उठाया जाता रहा है, तब कांग्रेस यह डींगें हांकती थी कि प्रदेश में सब कुछ समान्य है और कानून-व्यवस्था बेहतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब आखिर क्या ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गयी यह गंभीर कदम उठाना पड़ा। क्या कांग्रेस सरकार खुद भी अब यह मानती है कि प्रदेश की क़ानून-व्यस्था उसके नियंत्रण से बाहर चला गया है और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के अपने मूल दायित्व को निभाने में सरकार विफल हुई है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल,प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी व बेलतरा के विधायक रजनीश सिंह जिला भाजपा कार्यालय में संयुक्त रूप से पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को आड़े हाथाें लेते हुए कहा कि कांग्रेस स्पष्ट तौर पर छत्तीसगढ़ में तुष्टीकरण और मतांतरण के एजेंडे पर काम कर रही है। किसी सरकार का काम धर्म और संस्कृति को कुचलना तथा मतांतरण को बढ़ावा देना नहीं होता लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मतांतरण के पक्ष में अपने अधिकार का सीधे दुरुपयोग कर रही है। वह मिशनरियों के हाथ में खेल रही है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अघोषित आपातकाल लागू करने की शुरुआत लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने के लिए क़ानून बना कर काफी पहले कर दी थी लेकिन इससे जनता के सभी वर्गों का आक्रोश दोगुना हो गया। इससे घबराकर उन्होंने रासुका के बहाने आपातकाल जैसी अलोकतांत्रिक स्थिति का निर्माण कर दिया है। जब राज्य सरकार मान रही है कि उससे राज्य की कानून व्यवस्था नहीं संभल रही है तो उसे अपनी विफलता स्वीकार करते हुए कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। भाजपा नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने वास्तव में चर्च के सामने समर्पण कर दिया है। प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मुख्यमंत्री बघेल दिल्ली जाकर ईसाई धर्म के नेताओं के सामने सफाई दे आये हैं कि वे उनके साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री का यह कृत्य साबित कर रहा है कि वे चर्च के प्रभाव में हैं। सोनिया गांधी के दबाव में या फिर सोनिया गांधी को प्रसन्न् करने के लिए यह पक्षपात किया जा रहा है। मुख्यमंत्री अपना सिंहासन बचाने के लिए चर्च की शरण में हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रासुका के जरिये आदिवासी संस्कृति को कुचलने का घृणित षड्यंत्र रचा है। वे चाहते हैं कि आदिवासी संस्कृति समाप्त हो जाये। आदिवासी समाज ईसाई समुदाय में मतांतरित हो जाये और चर्च के प्रभाव में आ जाए। ऐसा लगता है कि सुनियोजित षड्यंत्र के तहत ही आदिवासी समाज में मतांतरण के जरिये विखंडन और वर्ग संघर्ष का खाका तैयार किया गया है। आदिवासी संस्कृति के विरुद्ध मुख्यमंत्री के इरादों को यह रासुका व्यक्त कर रहा है। अपनी संस्कृति को बचाने में लगे आदिवासियों के संघर्ष को कुचलने के लिए उन्हें बेवजह जेल में डालने का इंतजाम किया गया है। ताकि आदिवासी समाज को मतांतरण का विरोध करने से रोका जा सके।
Bilaspur Politics News: बिलासपुर। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने एक बार फिर से आपातकाल लगाने की साजिश रची है। सांप्रदायिक तुष्टीकरण की राजनीति के तहत प्रदेश में मतांतरण को बढ़ावा देने के लिए रासुका लगा दिया है। अत्यधिक असामान्य परिस्थितियों में उठाये जाने वाले इस कदम ने कांग्रेस के विभाजनकारी राजनीति की पोल खोल दी है। भाजपा द्वारा पूर्व में क़ानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के बारे में लगातार मामला उठाया जाता रहा है, तब कांग्रेस यह डींगें हांकती थी कि प्रदेश में सब कुछ समान्य है और कानून-व्यवस्था बेहतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब आखिर क्या ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गयी यह गंभीर कदम उठाना पड़ा। क्या कांग्रेस सरकार खुद भी अब यह मानती है कि प्रदेश की क़ानून-व्यस्था उसके नियंत्रण से बाहर चला गया है और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के अपने मूल दायित्व को निभाने में सरकार विफल हुई है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल,प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी व बेलतरा के विधायक रजनीश सिंह जिला भाजपा कार्यालय में संयुक्त रूप से पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को आड़े हाथाें लेते हुए कहा कि कांग्रेस स्पष्ट तौर पर छत्तीसगढ़ में तुष्टीकरण और मतांतरण के एजेंडे पर काम कर रही है। किसी सरकार का काम धर्म और संस्कृति को कुचलना तथा मतांतरण को बढ़ावा देना नहीं होता लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मतांतरण के पक्ष में अपने अधिकार का सीधे दुरुपयोग कर रही है। वह मिशनरियों के हाथ में खेल रही है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अघोषित आपातकाल लागू करने की शुरुआत लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने के लिए क़ानून बना कर काफी पहले कर दी थी लेकिन इससे जनता के सभी वर्गों का आक्रोश दोगुना हो गया। इससे घबराकर उन्होंने रासुका के बहाने आपातकाल जैसी अलोकतांत्रिक स्थिति का निर्माण कर दिया है। जब राज्य सरकार मान रही है कि उससे राज्य की कानून व्यवस्था नहीं संभल रही है तो उसे अपनी विफलता स्वीकार करते हुए कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। भाजपा नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने वास्तव में चर्च के सामने समर्पण कर दिया है। प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मुख्यमंत्री बघेल दिल्ली जाकर ईसाई धर्म के नेताओं के सामने सफाई दे आये हैं कि वे उनके साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री का यह कृत्य साबित कर रहा है कि वे चर्च के प्रभाव में हैं। सोनिया गांधी के दबाव में या फिर सोनिया गांधी को प्रसन्न् करने के लिए यह पक्षपात किया जा रहा है। मुख्यमंत्री अपना सिंहासन बचाने के लिए चर्च की शरण में हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रासुका के जरिये आदिवासी संस्कृति को कुचलने का घृणित षड्यंत्र रचा है। वे चाहते हैं कि आदिवासी संस्कृति समाप्त हो जाये। आदिवासी समाज ईसाई समुदाय में मतांतरित हो जाये और चर्च के प्रभाव में आ जाए। ऐसा लगता है कि सुनियोजित षड्यंत्र के तहत ही आदिवासी समाज में मतांतरण के जरिये विखंडन और वर्ग संघर्ष का खाका तैयार किया गया है। आदिवासी संस्कृति के विरुद्ध मुख्यमंत्री के इरादों को यह रासुका व्यक्त कर रहा है। अपनी संस्कृति को बचाने में लगे आदिवासियों के संघर्ष को कुचलने के लिए उन्हें बेवजह जेल में डालने का इंतजाम किया गया है। ताकि आदिवासी समाज को मतांतरण का विरोध करने से रोका जा सके।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नाम के साथ प्रयोग हुआ दूसरा शब्द जो नाम कि जाति या किसी विशेषता को व्यक्त करता है उपनाम (Surname / सरनेम) कहलाता है। जैसे महात्मा गाँधी, सचिन तेंदुलकर, भगत सिंह आदि में दूसरा शब्द गाँधी, तेंदुलकर, सिंह उपनाम हैं। . भारतीय गणतंत्र में हिन्दू धर्म के बाद इस्लाम दूसरा सर्वाधिक प्रचलित धर्म है, जो देश की जनसंख्या का 14.2% है (2011 की जनगणना के अनुसार 17.2 करोड़)। भारत में इस्लाम का आगमन करीब 7वीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों के आने से हुआ था (629 ईसवी सन्) और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उदय और सांस्कृतिक प्रभुत्व में मुसलमानों ने महती भूमिका निभाई है। हालांकि कुछ इतिहासकार ये दावा करते हैं कि मुसलमानों के शासनकाल में हिंदुओं पर क्रूरता किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। जबरन धर्मपरिवर्तन करा कर मुसलमान बनाया गया। ऐसा भी कहा जाता है कि एक मुसलमान शासक टीपू शुल्तान खुद ये दावा करता था कि उसने चार लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रकाशितः 11 दिसम्बर 1992 विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकार हज यात्रा के लिए विमान के किराया में सब्सिडी देती थी और २००७ के अनुसार प्रति यात्री 47454 खर्च करती थी। हालांकि 2018 से रियायत हटा ली गयी है। . उपनाम और भारत में इस्लाम आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): राजपूत। राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल माना जाता है।जो कि राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजस्थान को ब्रिटिशकाल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यवस्था थी। राजपूत काल में प्राचीन वर्ण व्यवस्था समाप्त हो गयी थी तथा वर्ण के स्थान पर कई जातियाँ व उप जातियाँ बन गईं थीं। कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजघरानों का बहुत विस्तार हुआ। . उपनाम 91 संबंध है और भारत में इस्लाम 201 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 0.34% है = 1 / (91 + 201)। यह लेख उपनाम और भारत में इस्लाम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नाम के साथ प्रयोग हुआ दूसरा शब्द जो नाम कि जाति या किसी विशेषता को व्यक्त करता है उपनाम कहलाता है। जैसे महात्मा गाँधी, सचिन तेंदुलकर, भगत सिंह आदि में दूसरा शब्द गाँधी, तेंदुलकर, सिंह उपनाम हैं। . भारतीय गणतंत्र में हिन्दू धर्म के बाद इस्लाम दूसरा सर्वाधिक प्रचलित धर्म है, जो देश की जनसंख्या का चौदह.दो% है । भारत में इस्लाम का आगमन करीब सातवीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों के आने से हुआ था और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उदय और सांस्कृतिक प्रभुत्व में मुसलमानों ने महती भूमिका निभाई है। हालांकि कुछ इतिहासकार ये दावा करते हैं कि मुसलमानों के शासनकाल में हिंदुओं पर क्रूरता किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। जबरन धर्मपरिवर्तन करा कर मुसलमान बनाया गया। ऐसा भी कहा जाता है कि एक मुसलमान शासक टीपू शुल्तान खुद ये दावा करता था कि उसने चार लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रकाशितः ग्यारह दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बानवे विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकार हज यात्रा के लिए विमान के किराया में सब्सिडी देती थी और दो हज़ार सात के अनुसार प्रति यात्री सैंतालीस हज़ार चार सौ चौवन खर्च करती थी। हालांकि दो हज़ार अट्ठारह से रियायत हटा ली गयी है। . उपनाम और भारत में इस्लाम आम में एक बात है : राजपूत। राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल माना जाता है।जो कि राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजस्थान को ब्रिटिशकाल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यवस्था थी। राजपूत काल में प्राचीन वर्ण व्यवस्था समाप्त हो गयी थी तथा वर्ण के स्थान पर कई जातियाँ व उप जातियाँ बन गईं थीं। कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की छत्तीस जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजघरानों का बहुत विस्तार हुआ। . उपनाम इक्यानवे संबंध है और भारत में इस्लाम दो सौ एक है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक शून्य.चौंतीस% है = एक / । यह लेख उपनाम और भारत में इस्लाम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
पंजाब में भगवंत मान की सीएम के तौर पर आज ताजपोशी होगी. भगवंत मान दोपहर साढ़े बारह बजे शहीद भगत सिंह के गांव खटकड़कलां में शपथ लेंगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के बड़े नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. मुख्यमंच पर राज्यपाल और भगवंत मान होंगे, शपथग्रहण भी इसी मंच पर होगा. भगवंत मान के शपथ ग्रहण को भव्य बनाने की पूरी तैयारी आम आदमी पार्टी ने की है. 125 एकड़ में पंडाल, पार्किंग समेत खास इंतजाम किए गए हैं. करीब 3 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. मान ने लोगों से बड़ी संख्या में समारोह में शामिल होने की अपील करते हुए पुरुषों से उस दिन विशेष रूप से 'बसंती' (पीली) पगड़ी और महिलाओं को पीला 'दुपट्टा' (शॉल) पहन कर आने का भी आग्रह किया. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर निचले सदन की सदस्यता से इस्तीफे का पत्र सौंपा. आम आदमी पार्टी (आप) ने ट्वीट कर यह जानकारी दी.
पंजाब में भगवंत मान की सीएम के तौर पर आज ताजपोशी होगी. भगवंत मान दोपहर साढ़े बारह बजे शहीद भगत सिंह के गांव खटकड़कलां में शपथ लेंगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के बड़े नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. मुख्यमंच पर राज्यपाल और भगवंत मान होंगे, शपथग्रहण भी इसी मंच पर होगा. भगवंत मान के शपथ ग्रहण को भव्य बनाने की पूरी तैयारी आम आदमी पार्टी ने की है. एक सौ पच्चीस एकड़ में पंडाल, पार्किंग समेत खास इंतजाम किए गए हैं. करीब तीन लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. मान ने लोगों से बड़ी संख्या में समारोह में शामिल होने की अपील करते हुए पुरुषों से उस दिन विशेष रूप से 'बसंती' पगड़ी और महिलाओं को पीला 'दुपट्टा' पहन कर आने का भी आग्रह किया. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर निचले सदन की सदस्यता से इस्तीफे का पत्र सौंपा. आम आदमी पार्टी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी.
वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता पी. एल. पुनिया ने कहा कि सुषमा को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। पुनिया ने यहां संवाददाताओं से कहा, "सुषमा ने इस मामले में जिस तरह से ललित मोदी की सहायता की है, वह राष्ट्रहित में नहीं है। उनकी सफाई बिल्कुल बनावटी है और यह तथ्यों पर खरी नहीं उतरती। पुर्तगाल के कानून के अनुसार किसी भी सर्जरी के लिए पति के हस्ताक्षर लेना जरूरी नहीं है। " कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पुनिया ने आरोप लगाया कि यह मदद सुषमा और मोदी के बीच 'एक दूसरे को लाभ पहुंचाने' का मामला है। ललित मोदी 2010 से लंदन में रह रहे हैं।
वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता पी. एल. पुनिया ने कहा कि सुषमा को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। पुनिया ने यहां संवाददाताओं से कहा, "सुषमा ने इस मामले में जिस तरह से ललित मोदी की सहायता की है, वह राष्ट्रहित में नहीं है। उनकी सफाई बिल्कुल बनावटी है और यह तथ्यों पर खरी नहीं उतरती। पुर्तगाल के कानून के अनुसार किसी भी सर्जरी के लिए पति के हस्ताक्षर लेना जरूरी नहीं है। " कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पुनिया ने आरोप लगाया कि यह मदद सुषमा और मोदी के बीच 'एक दूसरे को लाभ पहुंचाने' का मामला है। ललित मोदी दो हज़ार दस से लंदन में रह रहे हैं।
Poonch Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पूंछ में सेना की गाड़ी पर आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय सेना ने ड्रोन से आतंकियों के कई संदिग्ध इलाकों को तबाह कर दिया है। Poonch Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना की गाड़ी पर आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय सेना ने ड्रोन के जरिए कई संदिग्ध इलाकों को तबाह कर दिया है। ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सर्च ऑपरेशन शुरु किया गया है। भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुंछ में हुए आतंकी हमले में अब तक पुलिस 6 लोगों को हिरासत में ले चुकी है। पूछताछ जारी है। एनआईए ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर सबूत जमा किए हैं। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अटैक करने के बाद सभी आतंकी एक गाड़ी में सवार होकर मौके से फरार हो गए। जांच जारी है। पुंछ में हुए हमले में सात आतंकियों के शामिल होनी का जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसमें 3 आतंकी विदेशी और दो पाकिस्तानी थे। सेना ने करारा जवाब देते हुए संदिग्ध इलाकों को नस्ते नाबूत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सेना ने कहा कि पाकिस्तान को इसकी भरपाई करनी होगी। पूंछ हमले के बाद भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस का बड़ा एक्शन जारी है। अधिकारियों ने कई संदिग्ध इलाकों को सील कर दिया है और जांच अभियान चलाया जा रहा है। गाड़ियों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। जिस जगह पर कल सेना के वाहन को निशाना बनाकर हमला किया था, उसके आसपास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली गई है। घटना की जांच के लिए शुक्रवार को NIA की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है। भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों को राजौरी-पुंछ सेक्टर में उसी इलाके के पास दो समूहों के 6 से 7 सक्रिय आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली है। एनआईए की टीम लगातार जांच में जुटी है। तलाश में सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियों सहित सुरक्षा बल अभियान चला रहे हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूंछ में हुए आतंकी हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए हैं। पहले से घात लगाकर बैठे आतंकियों ने गुरुवार को सेना के जवानों से भरे वाहन पर गोलियों से हमला कर दिया था, जवानों ने तुरंत वाहन को रोक दिया, लेकिन इतनी ही देर में आतंकियों ने ग्रेनेड से वाहन पर हमला दिया। इससे ट्रक का फ्यूल टैंक चपेट में आ गया और तुरंत वाहन ने आग पकड़ ली। इस हमले के बाद ट्रक धूं धूं कर जलने लगा। अचानक हुए इस हमले को जब तक जवान समझ पाते तब तक कई जवान आग की चपेट में आ चुके थे। इनमें से पहले चार और फिर एक जवान ने दम तोड़ दिया।
Poonch Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पूंछ में सेना की गाड़ी पर आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय सेना ने ड्रोन से आतंकियों के कई संदिग्ध इलाकों को तबाह कर दिया है। Poonch Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना की गाड़ी पर आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय सेना ने ड्रोन के जरिए कई संदिग्ध इलाकों को तबाह कर दिया है। ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सर्च ऑपरेशन शुरु किया गया है। भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुंछ में हुए आतंकी हमले में अब तक पुलिस छः लोगों को हिरासत में ले चुकी है। पूछताछ जारी है। एनआईए ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर सबूत जमा किए हैं। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अटैक करने के बाद सभी आतंकी एक गाड़ी में सवार होकर मौके से फरार हो गए। जांच जारी है। पुंछ में हुए हमले में सात आतंकियों के शामिल होनी का जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसमें तीन आतंकी विदेशी और दो पाकिस्तानी थे। सेना ने करारा जवाब देते हुए संदिग्ध इलाकों को नस्ते नाबूत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सेना ने कहा कि पाकिस्तान को इसकी भरपाई करनी होगी। पूंछ हमले के बाद भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस का बड़ा एक्शन जारी है। अधिकारियों ने कई संदिग्ध इलाकों को सील कर दिया है और जांच अभियान चलाया जा रहा है। गाड़ियों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। जिस जगह पर कल सेना के वाहन को निशाना बनाकर हमला किया था, उसके आसपास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली गई है। घटना की जांच के लिए शुक्रवार को NIA की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है। भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों को राजौरी-पुंछ सेक्टर में उसी इलाके के पास दो समूहों के छः से सात सक्रिय आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली है। एनआईए की टीम लगातार जांच में जुटी है। तलाश में सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियों सहित सुरक्षा बल अभियान चला रहे हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूंछ में हुए आतंकी हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए हैं। पहले से घात लगाकर बैठे आतंकियों ने गुरुवार को सेना के जवानों से भरे वाहन पर गोलियों से हमला कर दिया था, जवानों ने तुरंत वाहन को रोक दिया, लेकिन इतनी ही देर में आतंकियों ने ग्रेनेड से वाहन पर हमला दिया। इससे ट्रक का फ्यूल टैंक चपेट में आ गया और तुरंत वाहन ने आग पकड़ ली। इस हमले के बाद ट्रक धूं धूं कर जलने लगा। अचानक हुए इस हमले को जब तक जवान समझ पाते तब तक कई जवान आग की चपेट में आ चुके थे। इनमें से पहले चार और फिर एक जवान ने दम तोड़ दिया।
है क्योंकि वहाँ के उसके कार्य से हमारा साम्पत्तिक कोष बढ़ता नहीं। उसी प्रकार प्राचीन ब्रह्मचारी या आधुनिक विद्यार्थी विद्याध्ययन के सिवा स्वयं कोई उत्पादक श्रम नहीं करता जिससे कोई साम्पत्तिक उत्पत्ति हो । वह साधनों की प्राप्ति में व्यस्त है जिसके द्वारा शायद आगे चलकर वह कोई उत्पादक कार्य कर सके । इसलिए यदि उत्पत्ति और उपयुक्त वातावरण का कोई सम्बन्ध है तो उत्पादक श्रम के लिए गृहस्थाश्रम को उपादेय मानना ही पड़ेगा। वैयक्तिक रूप से गृहस्थाश्रम का श्रीगणेश उसी समय होता है जब मनुष्य दाम्पत्य जीवन द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रत्यक्ष भार अपने ऊपर ले लेता है। परन्तु गृहस्थाश्रम की परिधि बड़ी व्यापक है। पति और पत्नी, पिता और पुत्र, भाई-बहन, माँबेटे, उसी गृहस्थाश्रम की छाया में, एक दूसरे से बँधे हुए, सब सम्मिलित श्रम द्वारा उत्पादन कार्य में व्यस्त हैं। हमारे प्राचीन गार्हस्थ्य की बेल इसी विधान से हरी-भरी रहती थी जिसे वर्तमान यंत्र-युग ने नष्ट-भ्रष्ट कर दिया है। यही कारण है कि चारों ओर समाजवाद, साम्यवाद, समूहवाद, राष्ट्रवाद अथवा जिन्नावाद के प्रतिकूल 'भोजनागार में भूख' के उत्पीड़क रोग से लोग मृत प्राय हो उठे हैं । वास्तव में, समाज की सुख-सम्पदा की कोई भी व्यवस्था, वाद या विधान हो, जब तक वह सुन्दर और सुसंघटित गार्हस्थ्य को घटक बनाकर भवन निर्माण नहीं करता, लोगों के स्थायी कल्याण का विधान हो ही नहीं सकता । हमने अब तक यह समझने की चेष्टा की है कि, यंत्र-युग के प्रभाव के पूर्व तक, गृहस्थाश्रम और साम्पत्तिक उत्पत्ति का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध रहा है, परन्तु अब मशीनों ने हमारे उत्पादन आधार को उलट-पलट दिया है । परिणामतः कार्य में मानव बल का प्राथमिक महत्व क्षीण हो गया है। बिजली, भाप, तेल और गैस द्वारा मशीनें मनुष्य से स्वतंत्र, कार्य कर लेती हैं। एक स्थान पर खड़े या बैठे-बैठे बटन दबाने या हैण्डिल घुमाने मात्र से हजारों मन गल्ले, लाखों गज कपड़े आदि की उपज हो सकती है, सैकड़ों मील बिजली का प्रकाश और रेल गाड़ियों से करोड़ों मन माल ढुलवाया जा सकता है। स्त्री पुरुष के प्राकृतिक भेद को भी महत्व हीन बनाया जा रहा है। जो कार्य पुरुष करता है स्त्रियाँ उसी को उतनी ही सुविधा और सरलता से कर लेना चाहती हैं। गर्भाधान और
है क्योंकि वहाँ के उसके कार्य से हमारा साम्पत्तिक कोष बढ़ता नहीं। उसी प्रकार प्राचीन ब्रह्मचारी या आधुनिक विद्यार्थी विद्याध्ययन के सिवा स्वयं कोई उत्पादक श्रम नहीं करता जिससे कोई साम्पत्तिक उत्पत्ति हो । वह साधनों की प्राप्ति में व्यस्त है जिसके द्वारा शायद आगे चलकर वह कोई उत्पादक कार्य कर सके । इसलिए यदि उत्पत्ति और उपयुक्त वातावरण का कोई सम्बन्ध है तो उत्पादक श्रम के लिए गृहस्थाश्रम को उपादेय मानना ही पड़ेगा। वैयक्तिक रूप से गृहस्थाश्रम का श्रीगणेश उसी समय होता है जब मनुष्य दाम्पत्य जीवन द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रत्यक्ष भार अपने ऊपर ले लेता है। परन्तु गृहस्थाश्रम की परिधि बड़ी व्यापक है। पति और पत्नी, पिता और पुत्र, भाई-बहन, माँबेटे, उसी गृहस्थाश्रम की छाया में, एक दूसरे से बँधे हुए, सब सम्मिलित श्रम द्वारा उत्पादन कार्य में व्यस्त हैं। हमारे प्राचीन गार्हस्थ्य की बेल इसी विधान से हरी-भरी रहती थी जिसे वर्तमान यंत्र-युग ने नष्ट-भ्रष्ट कर दिया है। यही कारण है कि चारों ओर समाजवाद, साम्यवाद, समूहवाद, राष्ट्रवाद अथवा जिन्नावाद के प्रतिकूल 'भोजनागार में भूख' के उत्पीड़क रोग से लोग मृत प्राय हो उठे हैं । वास्तव में, समाज की सुख-सम्पदा की कोई भी व्यवस्था, वाद या विधान हो, जब तक वह सुन्दर और सुसंघटित गार्हस्थ्य को घटक बनाकर भवन निर्माण नहीं करता, लोगों के स्थायी कल्याण का विधान हो ही नहीं सकता । हमने अब तक यह समझने की चेष्टा की है कि, यंत्र-युग के प्रभाव के पूर्व तक, गृहस्थाश्रम और साम्पत्तिक उत्पत्ति का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध रहा है, परन्तु अब मशीनों ने हमारे उत्पादन आधार को उलट-पलट दिया है । परिणामतः कार्य में मानव बल का प्राथमिक महत्व क्षीण हो गया है। बिजली, भाप, तेल और गैस द्वारा मशीनें मनुष्य से स्वतंत्र, कार्य कर लेती हैं। एक स्थान पर खड़े या बैठे-बैठे बटन दबाने या हैण्डिल घुमाने मात्र से हजारों मन गल्ले, लाखों गज कपड़े आदि की उपज हो सकती है, सैकड़ों मील बिजली का प्रकाश और रेल गाड़ियों से करोड़ों मन माल ढुलवाया जा सकता है। स्त्री पुरुष के प्राकृतिक भेद को भी महत्व हीन बनाया जा रहा है। जो कार्य पुरुष करता है स्त्रियाँ उसी को उतनी ही सुविधा और सरलता से कर लेना चाहती हैं। गर्भाधान और
KARTIKA, 25, क्यों कर दिया ? उस के बिना मेरा सवाल कैसे पूरा होगा ? अध्यक्ष महोदय : मैं इस बारे में झगड़ा नहीं कर सकता हूं । अगर माननीय सदस्य बवाल करना चाहते हैं, तो करें । श्री मधु लिमये : श्राप मेरा पायंट ग्राफ़ आर्डर सुनिए । एक्सपंज करने के सम्बन्ध में 320 है । अध्यक्ष महोदय : भाप उस को छोड़ बीजिए । श्री मषु लिमयेः मैं उस को कैसे छोड़ सकता हूं ? मैं नियमों का पाबन्द हूं। मैं नियमों के अनुसार चलता हूं । नियम आप और मुझ दोनों पर लागू होते हैं । मैं नियम के अधीन रह कर आप से प्रेमपूर्वक प्रार्थना करता हूं, विनय के साथ हाथ जोड़ता हूं, कि आप मेरा पायंट आफ़ आर्डर सुनिए । अध्यक्ष महोदयः मैं प्राप से विनय करता हूं कि आप सवाल कीजिए जो इस पर मुनासिब श्री मधु लिमये : सवाल कर रहा हूं । लेकिन आपने मेरे इस वाक्य को कार्यवाही से क्यों काट दिया ? प्रध्यक्ष महोदय अब श्राप सवाल कीजिए । श्री मष लिमये : मैं सवाल कर रहा हूं लेकिन मेरा प्वाइंट भ्राफ थ्रार्डर सुन लीजिए । या तो आप यह निदेश दीजिए कि यह कार्यवाही में रहेगा ( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : श्राप सवाल कीजिए । श्रो मषु लिमये : कार्यवाही में रहेगा, इस आधार पर में सवाल कर रहा हूं । अध्यक्ष महोदय, तो मेरा यह सवाल है कि 7 नवम्बर, की घटनाओं के पीछे बड़ा रहस्य और राज March in Delhi 338 (C.A.) है । इसलिए उस का प्राधार लेकर छात्रों के राष्ट्रीय मोर्चे पर पाबन्दी लगाना ठीक नहीं है । अब मेरा प्रश्न यह है कि इधर एक भर से से छात्रों के अन्दर घोर असंतोष फैला है । उन की कई मांगें हैं। उनके पेटीशन तो हम यहां जरूर रखेंगे लेकिन साथ साथ इन को यह जरूर अधिकार होना चाहिए था शांतिपूर्ण यहां पर एक मोर्चा ले कर आने का । अब यह मध्य प्रदेश की खबर है. प्रध्यक्ष महोदय : अब मैं फिर बन्द करता हूं मिस्टर मधु लिमये श्री मध लिमये : मैं सवाल ही कर रहा अध्यक्ष महोदयः फिर मैं इजाजत नहीं दूंगा । Shri Madhu Limaye: ."Nearly 20 colleges in Madhya Pradesh closed since the middle of September...." प्रध्यक्ष महोदय : मैं पहले भी कह चुका और फिर कह रहा हूं कि श्राप सवाल करिए । भषु लिमये : सवाल ही कर रहा हूं । 20 कालेजेज इसलिए बन्द हैं...... Shri Prashar: He is defying the chair.... Shri Madhu Limaye: I am not. Let him please shut up. प्रध्यक्ष महोदय : अगर अाप सवाल नहीं करते तो मुझे बन्द करना पड़ेगा । श्री मधु लिमये : अध्यक्ष महोदय, मध्य प्रदेश में 20 कालेज इसलिए बन्द हैं ( व्यवधान ) क्या सरकार को इस बात का पता है कि मध्य प्रदेश में दशहरा और दोवाली की छुट्टी के बाद भी 20 कालेज इसलिए नहीं खुल सके क्योंकि कालेज के छात्रों से मध्य प्रदेश की सरकार ने इस तरह की मांग की कि वह अच्छा सलूक और व्यवहार करेंगे, इस की गारन्टी लिख कर दें..... .NOVEMBER 16, 1966 March in Delhi (C.A.) 3386 प्रध्यक्ष महोदयः मैंने श्राप को इतनी दफा कहा, आपने नहीं माना । मैंने उसी वक्त बन्द कर दिया । श्री दाजी : नहीं नहीं । माफी नामा लिख कर दे, उन के गाजियन्स भी लिख कर दें, विद्यार्थी भी लिख कर दें और गाजियन्स भी नहीं लिखेंगे और विद्यार्थी भी नहीं लिखेंगे, गलत पालिसी है यह.. ( व्यवधान) श्री मधु लिमये तो प्रध्यक्ष महोदय, : क्या सरकार को इस बात का पता है ? कहा कि शिक्षा संस्थाओं की आटोनामी. अध्यक्ष महोदय : मिस्टर बी० पी० मौर्य । (ध्यवधान) I ask him to stop. श्री मष लिमये नहीं प्रध्यक्ष महोदय, मेरा यह सवाल है. अध्यक्ष महोदय नहीं, मैंने आप से कहा कि आप अब स्टाप कर दीजिए । श्री बी० पी० मोयं । 'श्री मधु लिमये : मेरा सवाल खत्म हो रहा था......... अध्यक्ष महोदय : नहीं, मैंने खत्म कर दिया । अब श्राप नहीं कर सकते । श्री मधु लिमये : मेरा सवाल खत्म हो गया, श्राप उस का जवाब दिलवाइये । प्रध्यक्ष महोदय : अब आप बैठ जाइए । श्री मध लिमये : अब अध्यक्ष महोदय, इस तरह कार्यवाही कैसे चल सकती है ? मेरे प्रश्न का जवाब दिलवाइये न । मैं बैठ जाऊंगा । श्रध्यक्ष महोदय : श्री बी० पी० मौर्य । श्री मधु लिमये : अध्यक्ष महोदय, मैं बैठ जाता हूं, आप जवाब दिलवाइए । प्रध्यक्ष महोदय : मिस्टर बी० पी० मौर्य, आप सवाल करेंगे या नहीं ? श्री मधु लिमये तरह नहीं चलेगा। गया था लेकिन मैं प्रश्न का जवाब चाहता हूं। अध्यक्ष महोदय, इस ( व्यवधान) मैं बैठ श्री मधु लिमये : अध्यक्ष महोदय, मैं बैठ गया था, अभी भी बैठ जाता हूं। मेरे प्रश्न का जवाब दिलवा दीजिए । प्रध्यक्ष महोदय : नहीं अब यही नहीं हो सकता । श्री बागड़ी : प्रध्यक्ष महोदय, प्राप नाराज न हों, गुस्सा न करे । ठंडे दिल से काम चलायें । सरकार को बचाने की बात न करें.. ( व्यवधान) ठीक है जब तक बोलते रहे, तब तक तो श्राप कहते रहे कि लम्बा मत करो । लेकिन जब सवाल हो गया तो आ गया तो उस का जवाब न आये यह बड़ी गलत परम्परा डाल रहे हैं आप । प्रध्यक्ष महोदय : अब आप बैठ जाइए । श्री बागड़ी : मैं बैठ जाता हूं, लेकिन शक्ति का उपयोग न्याय से करिए । कर सकते हो प्राप प्रध्यक्ष महोदय मिस्टर बी० पी० मौर्य । श्री मधु लिमयेः मैं बैठ गया हूं । बैठ जाता हूं लेकिन मेरे प्रश्न का जवाब तो आना चाहिए । अध्यक्ष महोदय कोई प्रश्न आपने नहीं किया है । श्री मधु लिमये : किया है अध्यक्ष महोदय । यह ग्राप कैसे कह रहे हैं ? Shrimati Renu Chakravartty: He has asked a question. The Minister should answer it. Shri Dinen Bhattacharya: He has asked the question, Mr. Speaker: Is there that can be given ? any answer KARTIKA 25, Shri Y. B. Chavan: The only point the hon. Member wanted to convey was that the students have got certain grievances. I have referred to that in my own Statement. We can certainly discuss with them. I have taken that position. If that is all that the hon. Member wants to say, there is no difficulty. But my only point is that for that a 'national march' is not necessary. मधु लिमये प्रश्न का जवाब आना चाहिए .... ( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : मिस्टर मधु लिमये, आप बाहर चले जांयें । श्री मधु लिमयेंः क्यों बाहर चला जाऊं ? अध्यक्ष महोदय : क्योंकि प्राप रुकावट डाल रहे हैं । श्री मधु लिमये मैं नहीं रुकावट डाल रहा हूं । मंत्री महोदय रुकावट डाल रहे हैं । मैंने एक ठोस और निश्चित सवाल पूछा उसका जवाब दिलवाइए । प्रध्यक्ष महोदयः आप बाहर चले जाइए । श्री मधु लिमये मैं बाहर जाने के लिए तैयार हूं । प्राप जवाब दिलवाइए । अध्यक्ष महोदयः अब आप बाहर चले जाइए ।... ( व्यवधान) ( श्री मधु लिमये सदन से बाहर चले गए) श्री मौर्य : अध्यक्ष महोदय, देश के विद्यार्थियों में बड़ती हुई अशांति, उन के मन में बढ़ता हुआ रोष, इन दो कारणों से वह यहां शांतिपूर्वक कोई अपना प्रदर्शन करना चाहते थे । उस पर रोक लगा दी गई । विद्यार्थियों को कुछ समस्यायें हैं और उन समस्याओं के संबंध में देश के वाइनचांसलर को जी बैठक हुई थी, और जो शिक्षा के 1888 ( SAKA) March in Delhi 3388 (C.A.) विशेष हैं उन की बैठक हुई थी, क्योंकि मैं एक विद्यार्थी भी हूं और व्यापक भी हूं, इस नाते इस प्रोर मैं भी थोड़ी बहुत अपनी दिनत्रस्पी रखता है, उन्होंने कुछ सिफारिशें की थीं कि विद्यार्थियों में बढ़ना हुई प्रशांति और रोष केवल राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप के कारण ही नहीं है, जिस में कि कांग्रेस भी शामिल है क्योंकि कांग्रेस यथ लीग ने सब से पहले पहले जन्म लिया था और यह श्रेय अगर जाता है किसी को तो कांग्रेस को जाता है कि विद्यार्थी र अध्यापकवर्ग को राजनीति में घसोटा है, तो उनमें बेरारी है विद्यार्थियों में, शिक्षा मंहगी है, पढ़ने लिखने के बाद नौ करो नहीं मिलती है, शिक्षा का पढ़ाने का जो माध्यम है वह गोरों की भाषा में है, इन तमाम समस्याओं को लेकर जो विद्यार्थीवर्ग में प्रस्ताव है, और जो इस्तान के तरीके हैं वह गलत है, इत तमाम समस्याओं को लेकर विद्यार्थी प्राज अपना मोर्चा लाने वाले थे, ता उन समस्याओं की ओर भी सरकार का ध्यान जा रहा है क्या क्योंकि जब तक उन की समस्याओं का हुन नहीं होता विद्यार्थीवर्ग में शांति नहीं हो सकती ? Shri Y. B. Chavan: Yes. We are very keen about tackling the problems that the students have. As I said in my own statement there are certainly some justifiable grievances that the student community has got and they need to be looked into. For that, not only are we willing to discuss with them, but we are prepared to seek opportunities for such discussion. Shri S. Kandappan (Tiruchengode): Is there any machinery set up for the purpose? Shri S. M. Banerjee: The Education Minister has been made External Affairs Minister. This is how they go about it. Shrimati Renu Chakravartty: Let him answer it. This is a very serious situation agitating the whole country. A large number of institutions closed. Let him tell us what is it that they are thinking of. Are they going NOVEMBER 16, 1966 March in Delhi (C.A.) 3390 [Shri Y B. Chavan ] to deal with it by imposing these restrictions or are they going to deal with it by positive measures. (Interruptions). Let them be specific. श्री हुकम चन्द कछवायः माननीय गृह मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में बताया, 7 तारीख की घटना का उल्लेख किया तो मैं जानना चाहता हूं कि क्या माननीय मंत्री जी को इस बात का ध्यान है कि गोवध विरोधी प्रदर्शन के संयोजक जैन मुनि, सुशील कुमार जी ने यह बात कही है कि प्रमुख किसी भी जनसंवी को पदाधिकारी नहीं बनाया गया था बल्कि कांग्रेस के कुछ प्रमुख लोगों को कुछ प्रमुख पद दिए गए थे, ऐसा उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा जो इस के संयोजक थे, तो जनसंघ पर यह सारा कलंक थोपा गया है, मेरी पार्टी को बदनाम करने के लिए और यह जो दो सौ कार्यकर्ता पकड़े गए क्या इसी उद्देश्य से पकड़े गये हैं कि भाने वाले 18 तारीख को जो विद्यार्थियों का प्रदर्शन था, उनमें भय पैदा हो जाये और वह नहीं श्रायें और दूसरी बात मैं यह पूछना चाहता हूं कि आज के "हिन्दुस्तान में छात्रों को रास्ते में ही पकड़ा जायेगा, यह खबर निकली है और वहां जज नियुक्त कर दिए गए हैं उन्हें रास्ते में रोका जायेगा, तो मैं जानना चाहता हूं कि क्या इसकी सूचना गृह मंत्री को पहले से थी छात्रों को जो पकड़ा जायगा और रास्ते में सजा दी जायगी और उन को ऐसा भय है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या विद्यार्थियों की ओर से ग्राप को इस बात का आश्वासन नहीं दिया गया कि हमारा जो प्रर्शन होगा बह शांतिपूर्वक होगा और आप के पास ऐसी कौन सी एजेंसी है जिससे आपको इस बात का पता घना और आप को भय लगता है कि विद्यार्थी यहां श्रा कर उत्पात करेंगे, तोड़फोड़ करेंगे, किस एजेंसी से यह बात आप को मालूम हुई है ? Shri Y. B. Chavan: I do not think there anything which I can reply to this particular question. Naturally Government has its sources of getting information and making an assessment of the situation. Shri Joachim Alva: I want only one minute. (Interruptions) श्री बागड़ी : मेरा भी काल एटेन्शन नोटिस था, उस पर मेरे भी दस्खत हैं । अध्यक्ष महोदय बागड़ी जी, श्रापके दस्तखत नहीं हैं । श्री बागड़ी : मैंने श्राज काल एटेन्शन नोटिस दिया है । श्री हुकम चन्द कछवाय प्रध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न पूछा था, उसका उत्तर नहीं आया, मैंने पूछा था कि 7 नवम्बर की घटनाओं के सम्बन्ध में जो जिम्मेदारी हमारे ऊपर थोपी गई है, उस के सम्बन्ध में मुनि सुशील कुमार जी ने कहा है कि इस में जनसंघ का हाथ नहीं था, उन्होंने.. Mr. Speaker : The Home Minister might reply to that part of the question as well which had been put by Mr. Kachhavaiya. क्या यह इल्जाम जो लगाया गया था कि जनसंध ने यह सब कुछ करवाया है, इस के सम्बन्ध में मुनिजी ने कहा है कि ऐसा नहीं था । क्या यह कार्यवाही उस सारी चीज़ को छिपाने के लिये की जा रही है और स्टूडेन्ट्स के यहां आने पर पाबन्दी लगाने के लिये की जा रही है ? Shri Y. B. Chavan: I would certainly like to have notice of this question, because I will have to look into the previous statements on this particular matter. I thought this question did not arise out of this particular statement, that is why I did not reply to it. श्री हुकम चन्द कछवायः मध्यक्ष महोदय, प्रश्न का उत्तर नहीं प्राया अध्यक्ष महोदय : भब भाप बैठ जाइये ।
KARTIKA, पच्चीस, क्यों कर दिया ? उस के बिना मेरा सवाल कैसे पूरा होगा ? अध्यक्ष महोदय : मैं इस बारे में झगड़ा नहीं कर सकता हूं । अगर माननीय सदस्य बवाल करना चाहते हैं, तो करें । श्री मधु लिमये : श्राप मेरा पायंट ग्राफ़ आर्डर सुनिए । एक्सपंज करने के सम्बन्ध में तीन सौ बीस है । अध्यक्ष महोदय : भाप उस को छोड़ बीजिए । श्री मषु लिमयेः मैं उस को कैसे छोड़ सकता हूं ? मैं नियमों का पाबन्द हूं। मैं नियमों के अनुसार चलता हूं । नियम आप और मुझ दोनों पर लागू होते हैं । मैं नियम के अधीन रह कर आप से प्रेमपूर्वक प्रार्थना करता हूं, विनय के साथ हाथ जोड़ता हूं, कि आप मेरा पायंट आफ़ आर्डर सुनिए । अध्यक्ष महोदयः मैं प्राप से विनय करता हूं कि आप सवाल कीजिए जो इस पर मुनासिब श्री मधु लिमये : सवाल कर रहा हूं । लेकिन आपने मेरे इस वाक्य को कार्यवाही से क्यों काट दिया ? प्रध्यक्ष महोदय अब श्राप सवाल कीजिए । श्री मष लिमये : मैं सवाल कर रहा हूं लेकिन मेरा प्वाइंट भ्राफ थ्रार्डर सुन लीजिए । या तो आप यह निदेश दीजिए कि यह कार्यवाही में रहेगा अध्यक्ष महोदय : श्राप सवाल कीजिए । श्रो मषु लिमये : कार्यवाही में रहेगा, इस आधार पर में सवाल कर रहा हूं । अध्यक्ष महोदय, तो मेरा यह सवाल है कि सात नवम्बर, की घटनाओं के पीछे बड़ा रहस्य और राज March in Delhi तीन सौ अड़तीस है । इसलिए उस का प्राधार लेकर छात्रों के राष्ट्रीय मोर्चे पर पाबन्दी लगाना ठीक नहीं है । अब मेरा प्रश्न यह है कि इधर एक भर से से छात्रों के अन्दर घोर असंतोष फैला है । उन की कई मांगें हैं। उनके पेटीशन तो हम यहां जरूर रखेंगे लेकिन साथ साथ इन को यह जरूर अधिकार होना चाहिए था शांतिपूर्ण यहां पर एक मोर्चा ले कर आने का । अब यह मध्य प्रदेश की खबर है. प्रध्यक्ष महोदय : अब मैं फिर बन्द करता हूं मिस्टर मधु लिमये श्री मध लिमये : मैं सवाल ही कर रहा अध्यक्ष महोदयः फिर मैं इजाजत नहीं दूंगा । Shri Madhu Limaye: ."Nearly बीस colleges in Madhya Pradesh closed since the middle of September...." प्रध्यक्ष महोदय : मैं पहले भी कह चुका और फिर कह रहा हूं कि श्राप सवाल करिए । भषु लिमये : सवाल ही कर रहा हूं । बीस कालेजेज इसलिए बन्द हैं...... Shri Prashar: He is defying the chair.... Shri Madhu Limaye: I am not. Let him please shut up. प्रध्यक्ष महोदय : अगर अाप सवाल नहीं करते तो मुझे बन्द करना पड़ेगा । श्री मधु लिमये : अध्यक्ष महोदय, मध्य प्रदेश में बीस कालेज इसलिए बन्द हैं क्या सरकार को इस बात का पता है कि मध्य प्रदेश में दशहरा और दोवाली की छुट्टी के बाद भी बीस कालेज इसलिए नहीं खुल सके क्योंकि कालेज के छात्रों से मध्य प्रदेश की सरकार ने इस तरह की मांग की कि वह अच्छा सलूक और व्यवहार करेंगे, इस की गारन्टी लिख कर दें..... .NOVEMBER सोलह, उन्नीसछयासठ मार्चch in Delhi तीन हज़ार तीन सौ छियासी प्रध्यक्ष महोदयः मैंने श्राप को इतनी दफा कहा, आपने नहीं माना । मैंने उसी वक्त बन्द कर दिया । श्री दाजी : नहीं नहीं । माफी नामा लिख कर दे, उन के गाजियन्स भी लिख कर दें, विद्यार्थी भी लिख कर दें और गाजियन्स भी नहीं लिखेंगे और विद्यार्थी भी नहीं लिखेंगे, गलत पालिसी है यह.. श्री मधु लिमये तो प्रध्यक्ष महोदय, : क्या सरकार को इस बात का पता है ? कहा कि शिक्षा संस्थाओं की आटोनामी. अध्यक्ष महोदय : मिस्टर बीशून्य पीशून्य मौर्य । I ask him to stop. श्री मष लिमये नहीं प्रध्यक्ष महोदय, मेरा यह सवाल है. अध्यक्ष महोदय नहीं, मैंने आप से कहा कि आप अब स्टाप कर दीजिए । श्री बीशून्य पीशून्य मोयं । 'श्री मधु लिमये : मेरा सवाल खत्म हो रहा था......... अध्यक्ष महोदय : नहीं, मैंने खत्म कर दिया । अब श्राप नहीं कर सकते । श्री मधु लिमये : मेरा सवाल खत्म हो गया, श्राप उस का जवाब दिलवाइये । प्रध्यक्ष महोदय : अब आप बैठ जाइए । श्री मध लिमये : अब अध्यक्ष महोदय, इस तरह कार्यवाही कैसे चल सकती है ? मेरे प्रश्न का जवाब दिलवाइये न । मैं बैठ जाऊंगा । श्रध्यक्ष महोदय : श्री बीशून्य पीशून्य मौर्य । श्री मधु लिमये : अध्यक्ष महोदय, मैं बैठ जाता हूं, आप जवाब दिलवाइए । प्रध्यक्ष महोदय : मिस्टर बीशून्य पीशून्य मौर्य, आप सवाल करेंगे या नहीं ? श्री मधु लिमये तरह नहीं चलेगा। गया था लेकिन मैं प्रश्न का जवाब चाहता हूं। अध्यक्ष महोदय, इस मैं बैठ श्री मधु लिमये : अध्यक्ष महोदय, मैं बैठ गया था, अभी भी बैठ जाता हूं। मेरे प्रश्न का जवाब दिलवा दीजिए । प्रध्यक्ष महोदय : नहीं अब यही नहीं हो सकता । श्री बागड़ी : प्रध्यक्ष महोदय, प्राप नाराज न हों, गुस्सा न करे । ठंडे दिल से काम चलायें । सरकार को बचाने की बात न करें.. ठीक है जब तक बोलते रहे, तब तक तो श्राप कहते रहे कि लम्बा मत करो । लेकिन जब सवाल हो गया तो आ गया तो उस का जवाब न आये यह बड़ी गलत परम्परा डाल रहे हैं आप । प्रध्यक्ष महोदय : अब आप बैठ जाइए । श्री बागड़ी : मैं बैठ जाता हूं, लेकिन शक्ति का उपयोग न्याय से करिए । कर सकते हो प्राप प्रध्यक्ष महोदय मिस्टर बीशून्य पीशून्य मौर्य । श्री मधु लिमयेः मैं बैठ गया हूं । बैठ जाता हूं लेकिन मेरे प्रश्न का जवाब तो आना चाहिए । अध्यक्ष महोदय कोई प्रश्न आपने नहीं किया है । श्री मधु लिमये : किया है अध्यक्ष महोदय । यह ग्राप कैसे कह रहे हैं ? Shrimati Renu Chakravartty: He has asked a question. The Minister should answer it. Shri Dinen Bhattacharya: He has asked the question, Mr. Speaker: Is there that can be given ? any answer KARTIKA पच्चीस, Shri Y. B. Chavan: The only point the hon. Member wanted to convey was that the students have got certain grievances. I have referred to that in my own Statement. We can certainly discuss with them. I have taken that position. If that is all that the hon. Member wants to say, there is no difficulty. But my only point is that for that a 'national march' is not necessary. मधु लिमये प्रश्न का जवाब आना चाहिए .... अध्यक्ष महोदय : मिस्टर मधु लिमये, आप बाहर चले जांयें । श्री मधु लिमयेंः क्यों बाहर चला जाऊं ? अध्यक्ष महोदय : क्योंकि प्राप रुकावट डाल रहे हैं । श्री मधु लिमये मैं नहीं रुकावट डाल रहा हूं । मंत्री महोदय रुकावट डाल रहे हैं । मैंने एक ठोस और निश्चित सवाल पूछा उसका जवाब दिलवाइए । प्रध्यक्ष महोदयः आप बाहर चले जाइए । श्री मधु लिमये मैं बाहर जाने के लिए तैयार हूं । प्राप जवाब दिलवाइए । अध्यक्ष महोदयः अब आप बाहर चले जाइए ।... श्री मौर्य : अध्यक्ष महोदय, देश के विद्यार्थियों में बड़ती हुई अशांति, उन के मन में बढ़ता हुआ रोष, इन दो कारणों से वह यहां शांतिपूर्वक कोई अपना प्रदर्शन करना चाहते थे । उस पर रोक लगा दी गई । विद्यार्थियों को कुछ समस्यायें हैं और उन समस्याओं के संबंध में देश के वाइनचांसलर को जी बैठक हुई थी, और जो शिक्षा के एक हज़ार आठ सौ अठासी March in Delhi तीन हज़ार तीन सौ अठासी विशेष हैं उन की बैठक हुई थी, क्योंकि मैं एक विद्यार्थी भी हूं और व्यापक भी हूं, इस नाते इस प्रोर मैं भी थोड़ी बहुत अपनी दिनत्रस्पी रखता है, उन्होंने कुछ सिफारिशें की थीं कि विद्यार्थियों में बढ़ना हुई प्रशांति और रोष केवल राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप के कारण ही नहीं है, जिस में कि कांग्रेस भी शामिल है क्योंकि कांग्रेस यथ लीग ने सब से पहले पहले जन्म लिया था और यह श्रेय अगर जाता है किसी को तो कांग्रेस को जाता है कि विद्यार्थी र अध्यापकवर्ग को राजनीति में घसोटा है, तो उनमें बेरारी है विद्यार्थियों में, शिक्षा मंहगी है, पढ़ने लिखने के बाद नौ करो नहीं मिलती है, शिक्षा का पढ़ाने का जो माध्यम है वह गोरों की भाषा में है, इन तमाम समस्याओं को लेकर जो विद्यार्थीवर्ग में प्रस्ताव है, और जो इस्तान के तरीके हैं वह गलत है, इत तमाम समस्याओं को लेकर विद्यार्थी प्राज अपना मोर्चा लाने वाले थे, ता उन समस्याओं की ओर भी सरकार का ध्यान जा रहा है क्या क्योंकि जब तक उन की समस्याओं का हुन नहीं होता विद्यार्थीवर्ग में शांति नहीं हो सकती ? Shri Y. B. Chavan: Yes. We are very keen about tackling the problems that the students have. As I said in my own statement there are certainly some justifiable grievances that the student community has got and they need to be looked into. For that, not only are we willing to discuss with them, but we are prepared to seek opportunities for such discussion. Shri S. Kandappan : Is there any machinery set up for the purpose? Shri S. M. Banerjee: The Education Minister has been made External Affairs Minister. This is how they go about it. Shrimati Renu Chakravartty: Let him answer it. This is a very serious situation agitating the whole country. A large number of institutions closed. Let him tell us what is it that they are thinking of. Are they going NOVEMBER सोलह, उन्नीसछयासठ मार्चch in Delhi तीन हज़ार तीन सौ नब्बे [Shri Y B. Chavan ] to deal with it by imposing these restrictions or are they going to deal with it by positive measures. . Let them be specific. श्री हुकम चन्द कछवायः माननीय गृह मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में बताया, सात तारीख की घटना का उल्लेख किया तो मैं जानना चाहता हूं कि क्या माननीय मंत्री जी को इस बात का ध्यान है कि गोवध विरोधी प्रदर्शन के संयोजक जैन मुनि, सुशील कुमार जी ने यह बात कही है कि प्रमुख किसी भी जनसंवी को पदाधिकारी नहीं बनाया गया था बल्कि कांग्रेस के कुछ प्रमुख लोगों को कुछ प्रमुख पद दिए गए थे, ऐसा उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा जो इस के संयोजक थे, तो जनसंघ पर यह सारा कलंक थोपा गया है, मेरी पार्टी को बदनाम करने के लिए और यह जो दो सौ कार्यकर्ता पकड़े गए क्या इसी उद्देश्य से पकड़े गये हैं कि भाने वाले अट्ठारह तारीख को जो विद्यार्थियों का प्रदर्शन था, उनमें भय पैदा हो जाये और वह नहीं श्रायें और दूसरी बात मैं यह पूछना चाहता हूं कि आज के "हिन्दुस्तान में छात्रों को रास्ते में ही पकड़ा जायेगा, यह खबर निकली है और वहां जज नियुक्त कर दिए गए हैं उन्हें रास्ते में रोका जायेगा, तो मैं जानना चाहता हूं कि क्या इसकी सूचना गृह मंत्री को पहले से थी छात्रों को जो पकड़ा जायगा और रास्ते में सजा दी जायगी और उन को ऐसा भय है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या विद्यार्थियों की ओर से ग्राप को इस बात का आश्वासन नहीं दिया गया कि हमारा जो प्रर्शन होगा बह शांतिपूर्वक होगा और आप के पास ऐसी कौन सी एजेंसी है जिससे आपको इस बात का पता घना और आप को भय लगता है कि विद्यार्थी यहां श्रा कर उत्पात करेंगे, तोड़फोड़ करेंगे, किस एजेंसी से यह बात आप को मालूम हुई है ? Shri Y. B. Chavan: I do not think there anything which I can reply to this particular question. Naturally Government has its sources of getting information and making an assessment of the situation. Shri Joachim Alva: I want only one minute. श्री बागड़ी : मेरा भी काल एटेन्शन नोटिस था, उस पर मेरे भी दस्खत हैं । अध्यक्ष महोदय बागड़ी जी, श्रापके दस्तखत नहीं हैं । श्री बागड़ी : मैंने श्राज काल एटेन्शन नोटिस दिया है । श्री हुकम चन्द कछवाय प्रध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न पूछा था, उसका उत्तर नहीं आया, मैंने पूछा था कि सात नवम्बर की घटनाओं के सम्बन्ध में जो जिम्मेदारी हमारे ऊपर थोपी गई है, उस के सम्बन्ध में मुनि सुशील कुमार जी ने कहा है कि इस में जनसंघ का हाथ नहीं था, उन्होंने.. Mr. Speaker : The Home Minister might reply to that part of the question as well which had been put by Mr. Kachhavaiya. क्या यह इल्जाम जो लगाया गया था कि जनसंध ने यह सब कुछ करवाया है, इस के सम्बन्ध में मुनिजी ने कहा है कि ऐसा नहीं था । क्या यह कार्यवाही उस सारी चीज़ को छिपाने के लिये की जा रही है और स्टूडेन्ट्स के यहां आने पर पाबन्दी लगाने के लिये की जा रही है ? Shri Y. B. Chavan: I would certainly like to have notice of this question, because I will have to look into the previous statements on this particular matter. I thought this question did not arise out of this particular statement, that is why I did not reply to it. श्री हुकम चन्द कछवायः मध्यक्ष महोदय, प्रश्न का उत्तर नहीं प्राया अध्यक्ष महोदय : भब भाप बैठ जाइये ।
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- सात hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - आठ hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - News विदेश मंत्री बनने के बाद कितनी बढ़ी एस जयशंकर और उनकी पत्नी की संपत्ति? - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले ने बॉलीवुड में ड्रग्स के फैशन को बेपरदा कर दिया है। इस मामले में रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती, सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुएल मिरांडा और कुक दीपेश सावंत पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। और अब धीरे धीरे बॉलीवुड के बाकी लोगों पर भी शिकंजा कस रहा है। गौरतलब है कि अब रिपब्लिक टीवी और टाईम्स नाऊ के पास कुछ एक्सक्लूसिव वॉट्सएप चैट हैं जिनमें बॉलीवुड की टॉप पाँच हीरोइनों ड्रग्स के बारे में चर्चा करती दिख रही हैं। इन चैट्स में जो हीरोइनें हैं उनके नाम, S, D, K, J और N अक्षरों से शुरू होते हैं और सभी बॉलीवुड में सक्रिय हैं। हालांकि इनके नाम फिलहाल गोपनीय रखे जा रहे हैं। हीरोइन, है। छोड़ोगी। पर। है। नहीं।
जैविक सत्ता के चारों ओर परिवेश की संज्ञा पर्यावरण है। विश्व के सब ओर परिव्याप्त महाकाश के अभिन्न अंग वायु, प्रकाश, ध्वनि, जल तथा शून्य का समन्वय ही पर्यावरण है। ब्रम्हांड के जीव-जंतुओं की पारस्परिक सापेक्षता, निर्भरता तथा ताल-मेल ही पृथ्वी के विभिन्न तत्वों के समायोजन व् संतुलन का कारण है। पञ्च तत्वों का भिन्न-भिन्न अनुपातों में सम्मिश्रण ही पर्यावरण को जीवोत्पत्ति तथा विकास के अनुकूल बनाता है। भारत की शाश्वत-सनातन संस्कृति युगों से प्राकृतिक सौंदर्य व पर्यावरणीय वैविध्य के प्रति सजग-सचेष्ट ही नहीं आग्रही भी रही है। यजुर्वेद के अर्न्तगत सम्पूर्ण वैश्विक सत्ता की शान्ति का आव्हान इसी पर्यावरणगत सतर्कता का द्योतक है। मन्त्र दृष्टा ऋषियों ने पृथ्वी तथा अन्तरिक्ष की शान्ति की प्रार्थना करते समय "वनस्पतयः शान्ति' का उद्घोष कर अंत में 'शान्तिरेव शान्ति' की अपेक्षा की थी। समय-साक्षी ऋषियों ने मानवता के इतिहास में सर्व प्रथम वृक्षों, पौधों, लताओं, जडी-बूटियों, घास-पत्तियों, फल-फूलों तथा बीजों में देवी शक्तियों की उपस्थति की अनुभूति तथा दर्शन कर प्रकृति और मानव के मध्य माँ-बेटे के सम्बन्ध की स्थापना कर समन्वय व सामंजस्य की सृष्टि की किंतु भोगवादी पाश्चात्य चिंतन ने प्रकृति को भोग्या मानकर उसका दोहन ही नहीं शोषण भी मानव का अधिकार मान लिया और प्राकृतिक तत्वों को असंतुलित कर विनाश के दरवाजे पर दस्तक दे दी है। वैज्ञानिक, औद्योगिक, यांत्रिक तथा वाणिज्यिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय विकृतियाँ दिन-ब -दिन बढाती ही जा रही हैं। अगणित कारखानों, संयंत्रों, वाहनों, संक्रामक कचरों, कंडीशनरों आदि से उत्सर्जित प्राणघाती गैसों से क्षरित ओजोन पार्ट, परमाण्विक विखंडन के फलस्वरूप महाकाश में ध्वनि एवं प्रकाश की किरणों का टकराव, धरती पर वायु एंव जल का घातक प्रदूषण मानव ही नहीं सकल जीव जगत के लिए महाकाल बन रहा है। आज कलकल निनादिनी मातृ स्वरूपा सलिलायें सूख अथवा दूषित होकर जीवनदायिनी नहीं मरणदायिनी हो गयी हैं, इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह मनुष्य मात्र की है। चौडे से चौडे राजपथों के निर्माण के नाम पर लाखों जीवनदायी वृक्षों का कत्ले-आम कर सुन्दरता के नाम पर चाँद झाडियाँ लगाकर खुद को छलने का अंजाम यह है कि शीतल बयार के लिए भी तरसना पद रहा है और हवा भी विषैली हो गयी है जिससे बचने के लिए मुखौटे लगाना पड़ते हैं। कारखानों की गगनचुम्बी चिमनियों से लगातार निकलता जहरीला धुँआ जीवनदायी ओषजन का नाश कर प्राणघाती गैसों से पछुआ और पुरवैया को प्रदूषित कर हर प्राणि के प्राण-हरण पर उतारू है। विश्व में निरंतर होते युद्धों के बम विस्फोटों, बारूदी प्रयोगों, कर्कश ध्वनियों और प्लास्टिक कचरे ढेरों ने मनुष्य को भविष्य के बारे में सोचने पर विवश कर दिया है। समस्याओं से उद्वेलित मानव-मन की शांति का एक मात्र समाधान पृथ्वी को उसका वानस्पतिक वैभव लौटाना है। धरती माता को धनी चुनरिया उढाकर ही उसके ममतामय आँचल में सुख की नींद ली जा सकती है, आँचल को तार-तार करने पर तो बद्दुआ ही मिल सकती है। विश्व विख्यात वैज्ञानिक सर जगदीश चन्द्र बसु ने वर्षों पूर्व पौधों में जीवन तथा चेतना कि उपस्थिति अपने वैज्ञानिक प्रयोगों से सिद्ध कर दिखाई है। मानव के समान ही वनस्पतियों में भी सोने- जागने, भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख, आनंद-भय, वंशोत्पत्ति आदि प्राकृत इच्छाएँ पलती हैं। वैदिक ऋषियों ने कंकर में शंकर और कण-कण में भगवन कहकर इसी सत्य को इंगित किया है। बौद्ध तथा जैन दर्शन में हिंसा-निषेध के अर्न्तगत सिर्फ मानव नहीं, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की हिंसा का भी निषेध है। प्रकृति-पर्यावरण और मानव के अंतर्संबंध को अपनत्व, अभिन्नता व आत्मीयता के सूत्र में पिरोकर अनेक जातक कथाओं की रचना की जाने के पीछे उद्देश्य यही था कि सामान्य जन भी प्रकृति से तादात्म्य स्थापित कर सके। आयुर्वेद ने नीम की रोगाणुहरण तथा ओषजन उत्सर्जन क्षमता को पहचानकर उसमें देवी शक्ति का वास होने का लोकाचार प्रचारित किया। पीपल में ब्रम्ह, बेल में शिव, तुलसी में विष्णु, आंवले में धन्वन्तरी, कदम्ब में कृष्ण आदि देवताओं को मानकर इनकी रक्षा व पूजा के पीछे वैज्ञानिक दृष्टि रही है। अशोक, मौलश्री, पारिजात, सदा सुहागन, अगरु, अंकोल, अर्जुन, आरग्वध, आमलकी, कुटज, कचनार, गंभारी, गुग्गुल, देवदारु, वरुण, विभीतक, थिगारू, कदलीफल (केला), श्रीफल (नारियल), जासौंन, पान अदि को घरों में लगाने की वास्तु-शास्त्रीय परंपरा पूर्णतः वैज्ञानिक है। आधुनिक नगरीय जीवन पद्धति में कम क्षेत्र में सघन बसाहट को देखते हुए सघन पौधारोपण कर पेड़ बनाने और बचाने को प्राथमिकता देना अपरिहार्य हो गया है। सतत बढ़ रहे अवसाद, मानसिक तनाव तथा अकेलेपन का एक इलाज मनुष्य और वनस्पति के मध्य सनातन सम्बन्ध को पुनर्जीवित करना ही है। - डी १०५ शैलेन्द्र नगर रायपुर, छत्तीसगढ़।
जैविक सत्ता के चारों ओर परिवेश की संज्ञा पर्यावरण है। विश्व के सब ओर परिव्याप्त महाकाश के अभिन्न अंग वायु, प्रकाश, ध्वनि, जल तथा शून्य का समन्वय ही पर्यावरण है। ब्रम्हांड के जीव-जंतुओं की पारस्परिक सापेक्षता, निर्भरता तथा ताल-मेल ही पृथ्वी के विभिन्न तत्वों के समायोजन व् संतुलन का कारण है। पञ्च तत्वों का भिन्न-भिन्न अनुपातों में सम्मिश्रण ही पर्यावरण को जीवोत्पत्ति तथा विकास के अनुकूल बनाता है। भारत की शाश्वत-सनातन संस्कृति युगों से प्राकृतिक सौंदर्य व पर्यावरणीय वैविध्य के प्रति सजग-सचेष्ट ही नहीं आग्रही भी रही है। यजुर्वेद के अर्न्तगत सम्पूर्ण वैश्विक सत्ता की शान्ति का आव्हान इसी पर्यावरणगत सतर्कता का द्योतक है। मन्त्र दृष्टा ऋषियों ने पृथ्वी तथा अन्तरिक्ष की शान्ति की प्रार्थना करते समय "वनस्पतयः शान्ति' का उद्घोष कर अंत में 'शान्तिरेव शान्ति' की अपेक्षा की थी। समय-साक्षी ऋषियों ने मानवता के इतिहास में सर्व प्रथम वृक्षों, पौधों, लताओं, जडी-बूटियों, घास-पत्तियों, फल-फूलों तथा बीजों में देवी शक्तियों की उपस्थति की अनुभूति तथा दर्शन कर प्रकृति और मानव के मध्य माँ-बेटे के सम्बन्ध की स्थापना कर समन्वय व सामंजस्य की सृष्टि की किंतु भोगवादी पाश्चात्य चिंतन ने प्रकृति को भोग्या मानकर उसका दोहन ही नहीं शोषण भी मानव का अधिकार मान लिया और प्राकृतिक तत्वों को असंतुलित कर विनाश के दरवाजे पर दस्तक दे दी है। वैज्ञानिक, औद्योगिक, यांत्रिक तथा वाणिज्यिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय विकृतियाँ दिन-ब -दिन बढाती ही जा रही हैं। अगणित कारखानों, संयंत्रों, वाहनों, संक्रामक कचरों, कंडीशनरों आदि से उत्सर्जित प्राणघाती गैसों से क्षरित ओजोन पार्ट, परमाण्विक विखंडन के फलस्वरूप महाकाश में ध्वनि एवं प्रकाश की किरणों का टकराव, धरती पर वायु एंव जल का घातक प्रदूषण मानव ही नहीं सकल जीव जगत के लिए महाकाल बन रहा है। आज कलकल निनादिनी मातृ स्वरूपा सलिलायें सूख अथवा दूषित होकर जीवनदायिनी नहीं मरणदायिनी हो गयी हैं, इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह मनुष्य मात्र की है। चौडे से चौडे राजपथों के निर्माण के नाम पर लाखों जीवनदायी वृक्षों का कत्ले-आम कर सुन्दरता के नाम पर चाँद झाडियाँ लगाकर खुद को छलने का अंजाम यह है कि शीतल बयार के लिए भी तरसना पद रहा है और हवा भी विषैली हो गयी है जिससे बचने के लिए मुखौटे लगाना पड़ते हैं। कारखानों की गगनचुम्बी चिमनियों से लगातार निकलता जहरीला धुँआ जीवनदायी ओषजन का नाश कर प्राणघाती गैसों से पछुआ और पुरवैया को प्रदूषित कर हर प्राणि के प्राण-हरण पर उतारू है। विश्व में निरंतर होते युद्धों के बम विस्फोटों, बारूदी प्रयोगों, कर्कश ध्वनियों और प्लास्टिक कचरे ढेरों ने मनुष्य को भविष्य के बारे में सोचने पर विवश कर दिया है। समस्याओं से उद्वेलित मानव-मन की शांति का एक मात्र समाधान पृथ्वी को उसका वानस्पतिक वैभव लौटाना है। धरती माता को धनी चुनरिया उढाकर ही उसके ममतामय आँचल में सुख की नींद ली जा सकती है, आँचल को तार-तार करने पर तो बद्दुआ ही मिल सकती है। विश्व विख्यात वैज्ञानिक सर जगदीश चन्द्र बसु ने वर्षों पूर्व पौधों में जीवन तथा चेतना कि उपस्थिति अपने वैज्ञानिक प्रयोगों से सिद्ध कर दिखाई है। मानव के समान ही वनस्पतियों में भी सोने- जागने, भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख, आनंद-भय, वंशोत्पत्ति आदि प्राकृत इच्छाएँ पलती हैं। वैदिक ऋषियों ने कंकर में शंकर और कण-कण में भगवन कहकर इसी सत्य को इंगित किया है। बौद्ध तथा जैन दर्शन में हिंसा-निषेध के अर्न्तगत सिर्फ मानव नहीं, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की हिंसा का भी निषेध है। प्रकृति-पर्यावरण और मानव के अंतर्संबंध को अपनत्व, अभिन्नता व आत्मीयता के सूत्र में पिरोकर अनेक जातक कथाओं की रचना की जाने के पीछे उद्देश्य यही था कि सामान्य जन भी प्रकृति से तादात्म्य स्थापित कर सके। आयुर्वेद ने नीम की रोगाणुहरण तथा ओषजन उत्सर्जन क्षमता को पहचानकर उसमें देवी शक्ति का वास होने का लोकाचार प्रचारित किया। पीपल में ब्रम्ह, बेल में शिव, तुलसी में विष्णु, आंवले में धन्वन्तरी, कदम्ब में कृष्ण आदि देवताओं को मानकर इनकी रक्षा व पूजा के पीछे वैज्ञानिक दृष्टि रही है। अशोक, मौलश्री, पारिजात, सदा सुहागन, अगरु, अंकोल, अर्जुन, आरग्वध, आमलकी, कुटज, कचनार, गंभारी, गुग्गुल, देवदारु, वरुण, विभीतक, थिगारू, कदलीफल , श्रीफल , जासौंन, पान अदि को घरों में लगाने की वास्तु-शास्त्रीय परंपरा पूर्णतः वैज्ञानिक है। आधुनिक नगरीय जीवन पद्धति में कम क्षेत्र में सघन बसाहट को देखते हुए सघन पौधारोपण कर पेड़ बनाने और बचाने को प्राथमिकता देना अपरिहार्य हो गया है। सतत बढ़ रहे अवसाद, मानसिक तनाव तथा अकेलेपन का एक इलाज मनुष्य और वनस्पति के मध्य सनातन सम्बन्ध को पुनर्जीवित करना ही है। - डी एक सौ पाँच शैलेन्द्र नगर रायपुर, छत्तीसगढ़।
मुंबईः अंकिता जैन (Ankita Lokhande) ने विक्की जैन (Vicky Jain) से पिछले साल धूमधाम से शादी की थी। उन्होंने स्मार्ट जोड़ी के साथ टेलीविज़न डेब्यू भी किया है। बहुतों को पता नहीं होगा लेकिन वे पिछले कुछ समय से लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हैं। 'पवित्र रिश्ता' अभिनेत्री ने इस पर खुलासा करते हुए अपने दर्द बयान किया है। जैसा कि सभी जानते हैं, अंकिता पहले दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के साथ रिश्ते में थी। यह रिश्ता उसी साल टूट गया जिस साल यह कपल शादी के बंधन में बंधने की योजना बना रहा था।
मुंबईः अंकिता जैन ने विक्की जैन से पिछले साल धूमधाम से शादी की थी। उन्होंने स्मार्ट जोड़ी के साथ टेलीविज़न डेब्यू भी किया है। बहुतों को पता नहीं होगा लेकिन वे पिछले कुछ समय से लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हैं। 'पवित्र रिश्ता' अभिनेत्री ने इस पर खुलासा करते हुए अपने दर्द बयान किया है। जैसा कि सभी जानते हैं, अंकिता पहले दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ रिश्ते में थी। यह रिश्ता उसी साल टूट गया जिस साल यह कपल शादी के बंधन में बंधने की योजना बना रहा था।
Posted On: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 एवं उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों से अंतर्गत चिकित्सा यंत्रों की 15 अधिसूचित श्रेणियों को विनियमित करता है। तथापि, चिकित्सा उपस्कर को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 3(ख) (iv) के अंतर्गत चिकित्सा यंत्र के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता है। औषधि तकनीकी परामर्श बोर्ड (डीटीएबी) की 12 फरवरी, 2018 को आयोजित 78वीं बैठक में बोर्ड अल्ट्रासाउंड उपस्करों तथा समतुल्य इमेजिंग उपस्करों को इनके आयात, विनिर्माण, वितरण एवं विक्रय को विनियमित करने के उद्देश्य से चिकित्सा यंत्र के रूप में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 3(ख) (iv) की सीमा में लाने के लिए सहमत हो गया है। चिकित्सा यंत्र नियमावली, 2017 के अनुसार केंद्र सरकार चिकित्सा यंत्रों की जांच एवं मूल्यांकन करने की सुविधा वाली किसी भी प्रयोगशाला को केंद्रीय चिकित्सा यंत्र परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में नामित कर सकती है। इस संबंध में सीडीएससीओ ने राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशाकंन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) प्रत्यायित प्रयोगशालाओं जिनकी इन विट्रो नैदानिक सहित चिकित्सा यत्रों के परीक्षण एवं मूल्यांकन की क्षमता तथा सामर्थ्य है, से सीडीएससीओ में पंजीकरण कराने और अपने कार्यों के विवरण की सूचना देने के लिए 1.3.2018 को अनुरोध किया है। यह उल्लेखनीय है कि चिकित्सा उपस्कर/सामान्य वैज्ञानिक सुविधाओं आदि के लिए परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने हेतु पहले की निर्यात अवसंरचना विकास योजना के लिए राज्यों को सहायता एवं वर्तमान निर्यात व्यापार अवसंरचना योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2015-16 से निधि अनुमोदित/संवितरित की गई हैं।
Posted On: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चालीस एवं उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों से अंतर्गत चिकित्सा यंत्रों की पंद्रह अधिसूचित श्रेणियों को विनियमित करता है। तथापि, चिकित्सा उपस्कर को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चालीस की धारा तीन के अंतर्गत चिकित्सा यंत्र के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता है। औषधि तकनीकी परामर्श बोर्ड की बारह फरवरी, दो हज़ार अट्ठारह को आयोजित अठहत्तरवीं बैठक में बोर्ड अल्ट्रासाउंड उपस्करों तथा समतुल्य इमेजिंग उपस्करों को इनके आयात, विनिर्माण, वितरण एवं विक्रय को विनियमित करने के उद्देश्य से चिकित्सा यंत्र के रूप में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चालीस की धारा तीन की सीमा में लाने के लिए सहमत हो गया है। चिकित्सा यंत्र नियमावली, दो हज़ार सत्रह के अनुसार केंद्र सरकार चिकित्सा यंत्रों की जांच एवं मूल्यांकन करने की सुविधा वाली किसी भी प्रयोगशाला को केंद्रीय चिकित्सा यंत्र परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में नामित कर सकती है। इस संबंध में सीडीएससीओ ने राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशाकंन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड प्रत्यायित प्रयोगशालाओं जिनकी इन विट्रो नैदानिक सहित चिकित्सा यत्रों के परीक्षण एवं मूल्यांकन की क्षमता तथा सामर्थ्य है, से सीडीएससीओ में पंजीकरण कराने और अपने कार्यों के विवरण की सूचना देने के लिए एक.तीन.दो हज़ार अट्ठारह को अनुरोध किया है। यह उल्लेखनीय है कि चिकित्सा उपस्कर/सामान्य वैज्ञानिक सुविधाओं आदि के लिए परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने हेतु पहले की निर्यात अवसंरचना विकास योजना के लिए राज्यों को सहायता एवं वर्तमान निर्यात व्यापार अवसंरचना योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह से निधि अनुमोदित/संवितरित की गई हैं।
RIE अजमेर भर्ती 2019 उर्फ रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन,अजमेर 17 लोअर डिवीजन क्लर्क के पदों पर आवेदन आमंत्रित हैं। आप इस RIE अजमेर भर्ती के इच्छुक हैं तो आप आवेदन करने की अंतिम तिथि से पहले आवेदन कर सकते हैं। Lower divisional clerk: 265 कुल पद। Academic ability: लोअर डिवीजन क्लर्क की इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदार को 12वीं होना अनिवार्य है।
RIE अजमेर भर्ती दो हज़ार उन्नीस उर्फ रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन,अजमेर सत्रह लोअर डिवीजन क्लर्क के पदों पर आवेदन आमंत्रित हैं। आप इस RIE अजमेर भर्ती के इच्छुक हैं तो आप आवेदन करने की अंतिम तिथि से पहले आवेदन कर सकते हैं। Lower divisional clerk: दो सौ पैंसठ कुल पद। Academic ability: लोअर डिवीजन क्लर्क की इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदार को बारहवीं होना अनिवार्य है।
युधिष्ठिपने उपस्वरमेंद्रोणाचार्य के सन्मुख कहा, कि अश्वत्थामा हतो नरो वा. कुरो था। जिस समय नरो वाकुंजरो वा पर युधिष्ठिर कह रहे थे, उस समय पाण्डव दलने एक साथ वाघा नाद मारम्भ कर दिया । द्रोणाचा युधिष्ठिरके मुग्यसे इतनाही- सुन सके कि अश्वत्थामा मारा गया। उसीक्षण पुत्र शोकसे वह व्याकुल हो उठे। उनके हाथ शिथिल हो गये और धनुष मीचे गिर गया। यह पद्मासन लगाकर वहीं बैठ गये औौर ईश्वरका ध्यान करने लगे। अवसर देस धूट ने उनका शिर काट डाला । अमिमानो कर्णकी अब तक मनकी मनमेंहो रही थी। होणा थाके भाव दुर्योधनने उसे भी सेनापति घना कर अपना रण-कौशलः दिवानेका अवसर दिया। कर्णने मकरव्यूहकी रचना कर-ओषण युद्ध-मारम्भ किया। नकुलको यड़ी दुर्दशा हुई । एक वार कर्णने अपना धनुष उनके गले में डालकर खींच लिया और चाहते तो इन्हें मार भी घालते परन्तु छ्या था मानेसे छोड़ दिया ! कर्णकेशराघातसे पीड़ित हो धर्मराज मी मैदान छोड़ भागे । अर्जुनको मार डालनेकी फर्णको : बड़ी उत्कण्ठा थी; परन्तुः उमसे यश न. चलते देख, वह भीमसे युद्ध करने लगा। -अर्जुनः यह समाचार पाकर कि युधिष्ठिर शिविरमैं चले गये हैं, वहीं उनके पास पहुंचे और कुशल समाचार पूछा । युधिष्ठिर यह देखकर कि अर्जुन कर्णको थिना. मारेही रण क्षेत्र से चला बाया है, उन्हें भला बुरा कहने लगे। उस समय वह व्याकुल हो रहे थे। कर्ण पर उन्हें बड़ा क्रोध आ रहा था 1 उचित अनुचितका विचार न कर उन्होंने कहा-अर्जुन ! कर्णको विना मारे ही तू चला आया, यह देख मुझे आश्चर्य होता है ! यदि तू कर्णको नहीं मार सकता तो यह गाएडीवों धारण करता है ?. इसे फेंक दे या किसीको दे दे। व्यर्यहो धनुर्धरोंमें तृ अपनी गणना करता है ।" धर्मराजके यह शब्द सुनकर अर्जुन असन्तुष्ट हो गये। उन्हें उनकी बातोंमें अपना अपमान दिखायी देने लगा। गायडोव धनुष पर उन्हें बड़ा प्रेम था अतः उसकी भी निन्दा उन्हें अच्छी न लगी। उनके नेत्र अरुण हो गये. और घर भी कुछ कह चेंडे पासही श्रीकृष्ण खड़े थे। उन्होंने अनर्थको आशङ्कासे अजुनका हाथ पकड़ लिया और उन्हें चलाफ नामक व्याघा और कौशिक ब्राह्मणका इतिहास सुनाकर शान्त : किया। उन्होंने समझाया, कि धर्मराजका हृदय संतप्त था, थतः उनके सुखसे वैसे शब्द निकल गये। वह घड़े भाई हैं, अतः तुम्हें सच कुछ कह सकते हैं, परन्तु तुमने उन्हें उत्तर दिया, यह.वेजा किया 1.. वास्तवमें तुम्हीं अपराधी हुए। श्रीकृष्णको यह बात सुन अर्जुनका क्रोध जाता रहा और उन्हें अपने कर्त्तव्यका ज्ञान हुआ । तुरन्तही युधिष्ठिरसे, उन्होंने क्षमा प्रार्थना की और कर्णको मारनेका प्रण किया । युधिष्ठिरने प्रसन्न हो उन्हें माशिर्वाद दिया और वह युद्धार्थ, चले गये। श्रीकृष्ण उपस्थित न होते तो क्षणिक क्रोधके.
युधिष्ठिपने उपस्वरमेंद्रोणाचार्य के सन्मुख कहा, कि अश्वत्थामा हतो नरो वा. कुरो था। जिस समय नरो वाकुंजरो वा पर युधिष्ठिर कह रहे थे, उस समय पाण्डव दलने एक साथ वाघा नाद मारम्भ कर दिया । द्रोणाचा युधिष्ठिरके मुग्यसे इतनाही- सुन सके कि अश्वत्थामा मारा गया। उसीक्षण पुत्र शोकसे वह व्याकुल हो उठे। उनके हाथ शिथिल हो गये और धनुष मीचे गिर गया। यह पद्मासन लगाकर वहीं बैठ गये औौर ईश्वरका ध्यान करने लगे। अवसर देस धूट ने उनका शिर काट डाला । अमिमानो कर्णकी अब तक मनकी मनमेंहो रही थी। होणा थाके भाव दुर्योधनने उसे भी सेनापति घना कर अपना रण-कौशलः दिवानेका अवसर दिया। कर्णने मकरव्यूहकी रचना कर-ओषण युद्ध-मारम्भ किया। नकुलको यड़ी दुर्दशा हुई । एक वार कर्णने अपना धनुष उनके गले में डालकर खींच लिया और चाहते तो इन्हें मार भी घालते परन्तु छ्या था मानेसे छोड़ दिया ! कर्णकेशराघातसे पीड़ित हो धर्मराज मी मैदान छोड़ भागे । अर्जुनको मार डालनेकी फर्णको : बड़ी उत्कण्ठा थी; परन्तुः उमसे यश न. चलते देख, वह भीमसे युद्ध करने लगा। -अर्जुनः यह समाचार पाकर कि युधिष्ठिर शिविरमैं चले गये हैं, वहीं उनके पास पहुंचे और कुशल समाचार पूछा । युधिष्ठिर यह देखकर कि अर्जुन कर्णको थिना. मारेही रण क्षेत्र से चला बाया है, उन्हें भला बुरा कहने लगे। उस समय वह व्याकुल हो रहे थे। कर्ण पर उन्हें बड़ा क्रोध आ रहा था एक उचित अनुचितका विचार न कर उन्होंने कहा-अर्जुन ! कर्णको विना मारे ही तू चला आया, यह देख मुझे आश्चर्य होता है ! यदि तू कर्णको नहीं मार सकता तो यह गाएडीवों धारण करता है ?. इसे फेंक दे या किसीको दे दे। व्यर्यहो धनुर्धरोंमें तृ अपनी गणना करता है ।" धर्मराजके यह शब्द सुनकर अर्जुन असन्तुष्ट हो गये। उन्हें उनकी बातोंमें अपना अपमान दिखायी देने लगा। गायडोव धनुष पर उन्हें बड़ा प्रेम था अतः उसकी भी निन्दा उन्हें अच्छी न लगी। उनके नेत्र अरुण हो गये. और घर भी कुछ कह चेंडे पासही श्रीकृष्ण खड़े थे। उन्होंने अनर्थको आशङ्कासे अजुनका हाथ पकड़ लिया और उन्हें चलाफ नामक व्याघा और कौशिक ब्राह्मणका इतिहास सुनाकर शान्त : किया। उन्होंने समझाया, कि धर्मराजका हृदय संतप्त था, थतः उनके सुखसे वैसे शब्द निकल गये। वह घड़े भाई हैं, अतः तुम्हें सच कुछ कह सकते हैं, परन्तु तुमने उन्हें उत्तर दिया, यह.वेजा किया एक.. वास्तवमें तुम्हीं अपराधी हुए। श्रीकृष्णको यह बात सुन अर्जुनका क्रोध जाता रहा और उन्हें अपने कर्त्तव्यका ज्ञान हुआ । तुरन्तही युधिष्ठिरसे, उन्होंने क्षमा प्रार्थना की और कर्णको मारनेका प्रण किया । युधिष्ठिरने प्रसन्न हो उन्हें माशिर्वाद दिया और वह युद्धार्थ, चले गये। श्रीकृष्ण उपस्थित न होते तो क्षणिक क्रोधके.
प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो ओलंपिक में शामिल हुए खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनके साथ नाश्ता भी किया। इस दौरान वह खिलाड़ियों के साथ बात करते भी नज़र आए। नीरज चोपड़ा समेत बाकी खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री मोदी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा एक किस्सा सुनाने लगे। उन्होंने कहा अटल जी जब पहले पार्टी का काम करते थे तो उनका आना जाना रहता था। किसी परिवार में वह भोजन करने गए थे। पीएम मोदी ने यह किस्सा तब सुनाया जब नीरज चोपड़ा से वह चूरमा के बारे में बात कर रहे थे। चोपड़ा ने कहा था कि उन्हें चूरमा बहुत पसंद है। पीएम मोदी ने दहिया से कहा, तुम्हारा हाथ काट लिया गया तब भी तुम जीतने की कोशिश करते रहे, क्या बाद में उन लोगों पर कुछ ऐक्शन लिया जाता है? दहिया ने कहा, हां उनपर कार्रवाई होती है। इसके बाद प्रधानमंत्री कहने लगे, हरियाणा के लोग हर चीज में खुशी ढूंढता है। पीएम कहने लगे रवि से मेरी शिकायत है, कि तुम पोडियम पर भी हंसते नहीं थे। दहिया ने जवाब दिया, उस समय थोड़ा प्रेशर होता है। वहीं नीरज चोपड़ा से बात करते हुए पीएम ने कहा, तुम्हारी खासियत है कि विजय तुम्हारे सिर पर नहीं चढ़ती और हार मन में नहीं बैठती। इसपर नीरज कहने लगे, हमारा खेल ही ऐसा है कि वहां केवल अपना बेस्ट देना होता है, केवल खुद पर फोकस करना होता है। ऐसे में दूसरे की तरफ ध्यान न देकर खुद पर फोकस करने की कोशिश करनी होती है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि चतुर्मास में वह केवल एक समय भोजन करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो ओलंपिक में शामिल हुए खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनके साथ नाश्ता भी किया। इस दौरान वह खिलाड़ियों के साथ बात करते भी नज़र आए। नीरज चोपड़ा समेत बाकी खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री मोदी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा एक किस्सा सुनाने लगे। उन्होंने कहा अटल जी जब पहले पार्टी का काम करते थे तो उनका आना जाना रहता था। किसी परिवार में वह भोजन करने गए थे। पीएम मोदी ने यह किस्सा तब सुनाया जब नीरज चोपड़ा से वह चूरमा के बारे में बात कर रहे थे। चोपड़ा ने कहा था कि उन्हें चूरमा बहुत पसंद है। पीएम मोदी ने दहिया से कहा, तुम्हारा हाथ काट लिया गया तब भी तुम जीतने की कोशिश करते रहे, क्या बाद में उन लोगों पर कुछ ऐक्शन लिया जाता है? दहिया ने कहा, हां उनपर कार्रवाई होती है। इसके बाद प्रधानमंत्री कहने लगे, हरियाणा के लोग हर चीज में खुशी ढूंढता है। पीएम कहने लगे रवि से मेरी शिकायत है, कि तुम पोडियम पर भी हंसते नहीं थे। दहिया ने जवाब दिया, उस समय थोड़ा प्रेशर होता है। वहीं नीरज चोपड़ा से बात करते हुए पीएम ने कहा, तुम्हारी खासियत है कि विजय तुम्हारे सिर पर नहीं चढ़ती और हार मन में नहीं बैठती। इसपर नीरज कहने लगे, हमारा खेल ही ऐसा है कि वहां केवल अपना बेस्ट देना होता है, केवल खुद पर फोकस करना होता है। ऐसे में दूसरे की तरफ ध्यान न देकर खुद पर फोकस करने की कोशिश करनी होती है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि चतुर्मास में वह केवल एक समय भोजन करते हैं।
मैक्रो एक रचनात्मक तत्व है जो ग्रीक भाषा से आता है और कुछ इस ओर इशारा करता है कि "बड़ा" है । इसलिए, यह सूक्ष्म ( "छोटा" ) के विपरीत है। मैक्रो उपसर्ग आपको विभिन्न अवधारणाओं को बनाने की अनुमति देता है, जैसे कि मैक्रो फ़ोटोग्राफ़ी ( चित्र के विकसित होने पर जो तकनीक विकसित होती है उसका आकार इलेक्ट्रॉनिक सेंसर के आयामों के बराबर या उससे कम होता है), मैक्रोबायोटिक (पोषण का एक रूप जो भलाई बढ़ाने का लक्ष्य रखता है व्यक्ति ) या मैक्रोइकॉनॉमिक्स (सैद्धांतिक शाखा जो अर्थव्यवस्था के वैश्विक व्यवहार का अध्ययन करती है, उत्पादित वस्तुओं की समग्रता का विश्लेषण, रोजगार की स्थिति, आय, आदि)। यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि उपरोक्त मैक्रो फोटोग्राफी के मामले में, उपयोग तथाकथित मैक्रो लेंस से बना है, जो कि बहुत कम दूरी पर सबसे सटीक तरीके से ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है और जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आकार में वृद्धि होती है। और यह सब भूल गए बिना कि सुपरमैक्रो उद्देश्य भी हैं जो सूक्ष्मदर्शी के समान एक उपस्थिति या पहचान के लक्षण हैं और जिनके पास फोकस रिंग नहीं है। इसी तरह, तथाकथित झूठे मैक्रोज़ भी हैं जो डिजिटल कैमरों की भीड़ में दिखाई देते हैं और जिन्हें लगभग 50% की वृद्धि प्राप्त करने के लिए तत्वों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जब वास्तव में वे ऐसा नहीं करते हैं। कंप्यूटर विज्ञान में, मैक्रो शब्द का उपयोग मैक्रो इंस्ट्रक्शन को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जो किसी ऑर्डर के संगठित निष्पादन को सक्षम करने के लिए संग्रहीत निर्देशों का अनुक्रम है । इसका मतलब यह है कि एक मैक्रो निर्देश एकल कमांड को कई निर्देशों के अनुक्रम को ट्रिगर करने की अनुमति देता है। एक मैक्रो को एक जटिलता निर्देश के रूप में समझा जा सकता है जो कई सरल निर्देशों से बना है। सॉफ्टवेयर में एक मैक्रो को स्टोर करना संभव है जिसमें इसे निष्पादित किया जाता है, या तो एक बटन के माध्यम से या चाबियों का एक निश्चित संयोजन। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सॉफ्टवेयर भी निर्देशों के एक सेट से बना है। हालांकि, यह मैक्रोइन्स्ट्रक्शंस से अलग है कि मैक्रोज़ के निष्पादन को क्रमिक रूप से विकसित किया गया है और यह द्विभाजन स्थापित करने की कोई संभावना नहीं है। मैक्रो की अनुक्रमिक ट्रैकिंग आपको कार्यों को सरल बनाने और चरणों को बचाने की अनुमति देती है। उदाहरण के लिएः एक डेटाबेस से रिकॉर्ड को हटाने के निर्देश के साथ एक मैक्रो को दूसरे निर्देश से "कॉल" किया जा सकता है, जो प्रोग्रामर और उपयोगकर्ता के लिए समय बचाएगा। एक प्रोग्राम जो सबसे अधिक बार मैक्रोज़ के बारे में बात करता है, वह माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में है, जो कि एक सॉफ्टवेयर है जिसे मूल रूप से स्प्रेडशीट विकसित करने और काम करने में सक्षम होने के लिए व्यापार स्तर पर उपयोग किया जाता है। इस एप्लिकेशन में मैक्रोस एक्सेल शब्द का उपयोग प्रोग्रामिंग कोड को संदर्भित करने के लिए किया जाता है जो प्रोग्रामिंग भाषा वीबीए (एप्लिकेशन के लिए विजुअल बेसिक) का उपयोग करके बनाया गया है। इन मैक्रोज़ के लिए धन्यवाद आप कार्यक्रम के विभिन्न कार्यों को स्वचालित करने के लिए नए कार्य बना सकते हैं ताकि उन्हें केवल एक साधारण क्लिक द्वारा किया जा सके। और यह सब भूल गए बिना, उसी तरह, वे नए एप्लिकेशन बनाने और उन समाधानों का विस्तार करने की अनुमति देते हैं जो एक्सेल नए समाधान या टूल के माध्यम से प्रस्तुत करता है। प्रोग्रामर अपने कार्यक्रमों के कुछ अंशों को संक्षिप्त करने के लिए मैक्रोप्रोसेसरों का उपयोग करते हैं और इन संक्षिप्तीकरणों का उपयोग करने में सक्षम होते हैं जितनी बार उनके कार्य की आवश्यकता होती है।
मैक्रो एक रचनात्मक तत्व है जो ग्रीक भाषा से आता है और कुछ इस ओर इशारा करता है कि "बड़ा" है । इसलिए, यह सूक्ष्म के विपरीत है। मैक्रो उपसर्ग आपको विभिन्न अवधारणाओं को बनाने की अनुमति देता है, जैसे कि मैक्रो फ़ोटोग्राफ़ी , मैक्रोबायोटिक या मैक्रोइकॉनॉमिक्स । यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि उपरोक्त मैक्रो फोटोग्राफी के मामले में, उपयोग तथाकथित मैक्रो लेंस से बना है, जो कि बहुत कम दूरी पर सबसे सटीक तरीके से ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है और जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आकार में वृद्धि होती है। और यह सब भूल गए बिना कि सुपरमैक्रो उद्देश्य भी हैं जो सूक्ष्मदर्शी के समान एक उपस्थिति या पहचान के लक्षण हैं और जिनके पास फोकस रिंग नहीं है। इसी तरह, तथाकथित झूठे मैक्रोज़ भी हैं जो डिजिटल कैमरों की भीड़ में दिखाई देते हैं और जिन्हें लगभग पचास% की वृद्धि प्राप्त करने के लिए तत्वों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जब वास्तव में वे ऐसा नहीं करते हैं। कंप्यूटर विज्ञान में, मैक्रो शब्द का उपयोग मैक्रो इंस्ट्रक्शन को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जो किसी ऑर्डर के संगठित निष्पादन को सक्षम करने के लिए संग्रहीत निर्देशों का अनुक्रम है । इसका मतलब यह है कि एक मैक्रो निर्देश एकल कमांड को कई निर्देशों के अनुक्रम को ट्रिगर करने की अनुमति देता है। एक मैक्रो को एक जटिलता निर्देश के रूप में समझा जा सकता है जो कई सरल निर्देशों से बना है। सॉफ्टवेयर में एक मैक्रो को स्टोर करना संभव है जिसमें इसे निष्पादित किया जाता है, या तो एक बटन के माध्यम से या चाबियों का एक निश्चित संयोजन। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सॉफ्टवेयर भी निर्देशों के एक सेट से बना है। हालांकि, यह मैक्रोइन्स्ट्रक्शंस से अलग है कि मैक्रोज़ के निष्पादन को क्रमिक रूप से विकसित किया गया है और यह द्विभाजन स्थापित करने की कोई संभावना नहीं है। मैक्रो की अनुक्रमिक ट्रैकिंग आपको कार्यों को सरल बनाने और चरणों को बचाने की अनुमति देती है। उदाहरण के लिएः एक डेटाबेस से रिकॉर्ड को हटाने के निर्देश के साथ एक मैक्रो को दूसरे निर्देश से "कॉल" किया जा सकता है, जो प्रोग्रामर और उपयोगकर्ता के लिए समय बचाएगा। एक प्रोग्राम जो सबसे अधिक बार मैक्रोज़ के बारे में बात करता है, वह माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में है, जो कि एक सॉफ्टवेयर है जिसे मूल रूप से स्प्रेडशीट विकसित करने और काम करने में सक्षम होने के लिए व्यापार स्तर पर उपयोग किया जाता है। इस एप्लिकेशन में मैक्रोस एक्सेल शब्द का उपयोग प्रोग्रामिंग कोड को संदर्भित करने के लिए किया जाता है जो प्रोग्रामिंग भाषा वीबीए का उपयोग करके बनाया गया है। इन मैक्रोज़ के लिए धन्यवाद आप कार्यक्रम के विभिन्न कार्यों को स्वचालित करने के लिए नए कार्य बना सकते हैं ताकि उन्हें केवल एक साधारण क्लिक द्वारा किया जा सके। और यह सब भूल गए बिना, उसी तरह, वे नए एप्लिकेशन बनाने और उन समाधानों का विस्तार करने की अनुमति देते हैं जो एक्सेल नए समाधान या टूल के माध्यम से प्रस्तुत करता है। प्रोग्रामर अपने कार्यक्रमों के कुछ अंशों को संक्षिप्त करने के लिए मैक्रोप्रोसेसरों का उपयोग करते हैं और इन संक्षिप्तीकरणों का उपयोग करने में सक्षम होते हैं जितनी बार उनके कार्य की आवश्यकता होती है।
दुर्ग। Durg News: निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में जिला प्रशासन द्वारा चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई में फिर तेजी लाई जा रही है। इस कड़ी में प्रशासन ने आठ चिटफंड कंपनियों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए जिला दण्डाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होने कहा है। सुनवाई की तिथि 18 मई निर्धारित है। जिले में छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 10 के अंतर्गत आरोपी कंपनी की संपत्ति को कुर्क किए जाने के लिए कार्रवाई कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी न्यायालय द्वारा की जा रही है। जिसकी सुनवाई तिथि 18 मई को नियत की गई है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने आरोपित कंपनी संस्कार धानी इंफ्रा हाउसिंग लिमिटेड भिलाई, आरोग्य धनवर्षा डेवलपर्स अलाईड लिमिटेड रजिस्टर्ड आफिस 14/2 विक्रम मार्ग अपोजिट एसएस हास्पिटल फ्रीगंज उज्जैन मध्यप्रदेश, सनराईस क्रेडिट को आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड कसारीडीह दुर्ग, अर्थतत्व क्रेडिट को आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड रायपुर, आस्था डेव्लपर्स एण्ड कालोनाईजर्स रूंगटा कालेज कुरूद भिलाई,एचबीएन डेयरीस एण्ड एलाईड लिमिटेड नई दिल्ली और साई प्रसाद प्रापर्टीज डेव्हलपमेंट लिमिटेड पणजी गोवा के डायरेक्टर को उक्त तिथि को अपरान्ह 1. 30 बजे न्यायालय कलेक्टर दुर्ग में समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने कोो कहा है। नियत समयावधि में उपस्थित नहीं होने पर बाद में कोई विचार नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा सालभर पहले चिटफंड कंपनी के निवेशकों से आवेदन मंगाया गया था। आवेदन तहसील कार्यालय और ब्लाक मुख्यालयों में लिया गया था। विभिन्न चिटफंड कंपनियों में राशि निवेश करने वाले जिले भर के करीब एक लाख 65 हजार आवेदकों ने आवेदन जमा किया था। शासन प्रशासन द्वारा निवेशकों को उनकी जमा रकम की वापसी के लिए संबंधित चिटफंड कंपनियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन कुछ चिटफंड कंपनियों के संबंध में प्रशासन अब तक जानकारी नहीं जुटा पाई है। हालाकि इस अवधि में प्रशासन द्वारा शुष्क इंडिया कंपनी के निवेशकों को करीब ढाई करोड़ रुपये लौटाया गया है।
दुर्ग। Durg News: निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में जिला प्रशासन द्वारा चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई में फिर तेजी लाई जा रही है। इस कड़ी में प्रशासन ने आठ चिटफंड कंपनियों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए जिला दण्डाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होने कहा है। सुनवाई की तिथि अट्ठारह मई निर्धारित है। जिले में छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम दो हज़ार पाँच की धारा दस के अंतर्गत आरोपी कंपनी की संपत्ति को कुर्क किए जाने के लिए कार्रवाई कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी न्यायालय द्वारा की जा रही है। जिसकी सुनवाई तिथि अट्ठारह मई को नियत की गई है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने आरोपित कंपनी संस्कार धानी इंफ्रा हाउसिंग लिमिटेड भिलाई, आरोग्य धनवर्षा डेवलपर्स अलाईड लिमिटेड रजिस्टर्ड आफिस चौदह/दो विक्रम मार्ग अपोजिट एसएस हास्पिटल फ्रीगंज उज्जैन मध्यप्रदेश, सनराईस क्रेडिट को आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड कसारीडीह दुर्ग, अर्थतत्व क्रेडिट को आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड रायपुर, आस्था डेव्लपर्स एण्ड कालोनाईजर्स रूंगटा कालेज कुरूद भिलाई,एचबीएन डेयरीस एण्ड एलाईड लिमिटेड नई दिल्ली और साई प्रसाद प्रापर्टीज डेव्हलपमेंट लिमिटेड पणजी गोवा के डायरेक्टर को उक्त तिथि को अपरान्ह एक. तीस बजे न्यायालय कलेक्टर दुर्ग में समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने कोो कहा है। नियत समयावधि में उपस्थित नहीं होने पर बाद में कोई विचार नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा सालभर पहले चिटफंड कंपनी के निवेशकों से आवेदन मंगाया गया था। आवेदन तहसील कार्यालय और ब्लाक मुख्यालयों में लिया गया था। विभिन्न चिटफंड कंपनियों में राशि निवेश करने वाले जिले भर के करीब एक लाख पैंसठ हजार आवेदकों ने आवेदन जमा किया था। शासन प्रशासन द्वारा निवेशकों को उनकी जमा रकम की वापसी के लिए संबंधित चिटफंड कंपनियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन कुछ चिटफंड कंपनियों के संबंध में प्रशासन अब तक जानकारी नहीं जुटा पाई है। हालाकि इस अवधि में प्रशासन द्वारा शुष्क इंडिया कंपनी के निवेशकों को करीब ढाई करोड़ रुपये लौटाया गया है।
शासन-प्ररणाली केवल काग़जों पर शासन बिधान बनाने से सफल नहीं हो सकती । जब तक भारत के प्रत्येक व्यक्ति में किसी वस्तु या व्यक्ति के विषय में स्वतंत्रसम्मति या स्वतंत्र निर्णय देने की शक्ति उत्पन्न नहीं होती तब तक हमारे देश में हर तरह के चुनाव झूठे प्रलोभनों, मिथ्या आकर्षण, भयंकर आतंकों, अवास्तविक प्रचारों से लड़े जायेंगे और तब तक सभी प्रकार के चुनावों में वे ही व्यक्ति रुफल होंगे जो उपयुक्त साधनों में सबसे अधिक सम्पन्न एवं समर्थ होंगे। किन्तु यह स्मरण रखना चाहिए कि ऐसे अधिकारी व्यक्ति शामन सम्बन्धी किसी प्रकार की सत्ता या शक्ति प्राप्त करने पर उसका दुरुपयोग करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं करेगे । जनता में जब तक समीक्षा शक्ति नहीं जगती तब तक उसमें किसी वस्तु को देखने, समझने, सोचने, अनुभव करने की स्वतंत्र शक्ति उत्पन्न नहीं हो सकती और तब तक उसका मत-दान, स्वतंत्र निर्णय - शक्ति के अभाव में अधिकारी व्यक्ति को नहीं मिल सकता, वन्नु वह अधिकारी व्यक्ति द्वारा मिथ्या प्रलोभनों, आतङ्को तथा प्रचारों के बल पर खरीदा जायगा । समीक्षा शक्ति के में विश्व के सभी देशों के अधिकांश राजनीतिज्ञों का विश्वास मानव जीवन की उदात्त वृत्तियों से उठ गया है। । उनकी पार्थिव क्षुधा, भौतिक एषणा एवं महमिका की भूख व्याकुल होकर आध्यात्मिक क्षुधा की उपेक्षा कर रही है। वे अपने लेखों, व्याख्यानों, संस्थाओं, संघटनों, परिषदों आदि में मानवता के महान आदर्शों - साम्य, स्वातंत्र्य, भ्रातृत्व, विश्व शान्ति, विश्वसुख, मानव संस्कृति, मानव धर्म आदि की डींग हाँकते हुए दिखाई पड़ते हैं, किन्तु वह सब अपने बड़प्पन के प्रदर्शन के लिए अथवा अपने ऊँचे आदर्शों के शाब्दिक इन्द्रजाल से दूसरे राष्ट्रों को विभ्रम में डालने के लिए। उन्हें यह स्मरण रखना चाहिए कि वे अपने खोखले आदर्शों के शाब्दिक इन्द्रजाल को बिछा कर अपने राष्ट्र को थोड़ी देर तक भले ही ठग लें तथा विश्व के अन्य राष्ट्रों के समक्ष महान बनने का मिथ्या दम्भ कुछ काल तक भले ही भर लें किन्तु यदि उनमें समीक्षा शक्ति पूर्ण रूपेरण सामान्य जीवन में समीक्षाशक्ति की आवश्यकता तथा महत्व नहीं जगी तथा तदनुकूल आचरण करने की शक्ति नहीं आई तो वे अपने को तथा अपने राष्ट्र को कुछ काल पश्चात् पतन की ऐसी गहरी खाई में गिरा देंगे जहाँ से उस राष्ट्र को कई शताब्दियों तक उठना असम्भव नहीं तो दुष्कर अवश्य हो जायगा । आज राजनीति ने जीवन के सभी क्षेत्रों - शिक्षा, साहित्य, व्यापार, धर्म, कर लिया है। समीक्षा शक्ति के प्रभाव में राजनीति का वातावरण दूषित हो गया है, उसका कुप्रभाव जीवन के उपर्युक्त सभी क्षेत्रों पर दिखाई पड़ रहा है। विश्व अधिकांश राजनीतिज्ञ अनुदात्त भावनाओं से प्रेरित होकर उस क्षेत्र में पहुँचे हैं; अतः अहं-संतृप्ति में संलग्न होना उनके लिए स्वाभाविक है; यदि वे विश्व-जीवन को असत् धागे में भूलता हुआ मान बैठे हैं तो कोई आश्चर्य करने की बात नहीं; यदि वे अपनी संकुचित राष्ट्रीय वैयक्तिक वासना की संतृप्ति में रत हैं तो विस्मय करने की कोई आवश्यकता नहीं; यदि वे स्वतंत्रता और एकता का अर्थ अपने लक्ष्यों की पूर्ति लेते हैं तो कोई आशातीत वस्तु नहीं; यदि के शान्ति का अर्थ अपने मन की अभीप्सित बातों की पूर्ति लेते हैं तो कोई दुःख करने की चीज़ नहीं; यदि वे मानवता या मानवहित बातें जिह्वा तक ही रखते हैं तो कोई अस गति पूर्ण बात नहीं; क्योंकि जनता ने उन्हें अपनी समीक्षा शक्ति के बल पर नहीं चुना और जो चुने गये वे उस क्षेत्र के लिए उपयुक्त समीक्षा-शक्ति रखने के कारण नहीं वरन् किसी अन्य सुविधा, अवसरवाना पूर्ति की इच्छा के कारण । इस दिअनन्त जीवन पर विज्ञान, धर्म, नीति, आचार-व्यवहार, भौतिक, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रकाश डाला जा रहा है; सर्वत्र उहापोह तर्क-वितर्क, आविष्कार, अनुसन्धान द्वारा एक नवीन युग के निर्माण का नारा लगाया जा रहा है, किन्तु सम्यक समीक्षा-शक्ति के अभाव में जीवन के प्रश्नों, समस्याओं, कठिनाइयों के ऊपर एकाङ्गी दृष्टि से प्रकाश डालने के कारण अनेक अतिवादा का जन्म हो रहा है और वे अतिवाद, समीक्षा शक्ति के प्रभाव में जीवन-सिद्धान्त या दर्शन बनकर मानवता के ऊपर नाना प्रकार के आवरण डाल रहे हैं। समीक्षा के अभाव में सत्य, तर्क-करों का छुई मुई बन रहा है, वह बुद्धि के क्रीड़ा पञ्जर का शृङ्खलाबद्ध शुकबन गया है । अधिकांश मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री, धर्म सुधारक अपने किसी पूर्वग्रह से गृहीत हो अपने पूर्वनिश्चित या पूर्व गृहीत सिद्धान्तों या मतों के प्रतिपादन तथा पुष्टि में अपनी बुद्धि का जादू नाना प्रकार से दिखला रहे हैं । वैज्ञानिक, समीक्षा शक्ति के अभाव में भौतिक ऐश्वर्य पर मुग्ध हो ऐन्द्रिक सुखों को सर्व समझ कर, भौतिक शक्तियों को ही हस्तगत करने में सलग्न हैं। वे दूरदर्शिता के अभाव में भूतशक्तियों को ही मानव कष्टों तथा असफलताओं का कारण समझ कर उनकी विजय में अपना सारा बुद्धि- वैभव दिखा रहे हैं। जीवन की आत्मिक शक्ति एवं आन्तरिक महत्ता को समझने का प्रयत्न किये बिना ही, उससे उदासीन होकर मानव जीवन के वाह्य अंगों, भौतिक क्षेत्रों एवं पार्थिव विभागों को ही सौंगठित करते हुए मानव के लिए एक नवीन कारा निर्मित कर रहे हैं । समीक्षा शक्ति के अभाव में हमारी शिक्षणसंस्थायें उपाधियों एवं डिग्रियों की हाट बन रही हैं; शिक्षाधिकारी समीक्षा के अभाव में शिक्षा के किसी एक ध्येय - नागरिक दक्षता या सामाजिक निपुणता, जीविकोपार्जनक्षमता को शिक्षा का सर्व सत्य समझ रहे हैं । इसी के भाव में पिता बालक को केवल अपनी वैयक्तिक सम्पत्ति समझ उसके व्यक्तित्व के विकास की उपेक्षा कर उसे अपनी जीविकार्जन का एक मशीन बना रहा है; अध्यापक विद्यार्थियों में क्रियाशुन्य ज्ञान की पम्पिङ्ग कर रहा है, शिक्षा के यांत्रिक साँचे में उसे ढालने का भगीरथ प्रयत्न कर रहा है, परीक्षा की फैक्टरी से मास प्रोडक्शन करना अपना ध्येय समझ रहा है । बालक समीक्षा-शक्ति के विकास के अभाव में शिक्षा का उद्देश्य - - अपनी विविध शक्तियों - शारीरिक, मानसिक, नैतिक, प्राध्यात्मिक आदि का विकास न समझ कर तोते की रामधुन बना रहा है। राष्ट्रीय सरकारें भी इस शक्ति के अभाव में
शासन-प्ररणाली केवल काग़जों पर शासन बिधान बनाने से सफल नहीं हो सकती । जब तक भारत के प्रत्येक व्यक्ति में किसी वस्तु या व्यक्ति के विषय में स्वतंत्रसम्मति या स्वतंत्र निर्णय देने की शक्ति उत्पन्न नहीं होती तब तक हमारे देश में हर तरह के चुनाव झूठे प्रलोभनों, मिथ्या आकर्षण, भयंकर आतंकों, अवास्तविक प्रचारों से लड़े जायेंगे और तब तक सभी प्रकार के चुनावों में वे ही व्यक्ति रुफल होंगे जो उपयुक्त साधनों में सबसे अधिक सम्पन्न एवं समर्थ होंगे। किन्तु यह स्मरण रखना चाहिए कि ऐसे अधिकारी व्यक्ति शामन सम्बन्धी किसी प्रकार की सत्ता या शक्ति प्राप्त करने पर उसका दुरुपयोग करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं करेगे । जनता में जब तक समीक्षा शक्ति नहीं जगती तब तक उसमें किसी वस्तु को देखने, समझने, सोचने, अनुभव करने की स्वतंत्र शक्ति उत्पन्न नहीं हो सकती और तब तक उसका मत-दान, स्वतंत्र निर्णय - शक्ति के अभाव में अधिकारी व्यक्ति को नहीं मिल सकता, वन्नु वह अधिकारी व्यक्ति द्वारा मिथ्या प्रलोभनों, आतङ्को तथा प्रचारों के बल पर खरीदा जायगा । समीक्षा शक्ति के में विश्व के सभी देशों के अधिकांश राजनीतिज्ञों का विश्वास मानव जीवन की उदात्त वृत्तियों से उठ गया है। । उनकी पार्थिव क्षुधा, भौतिक एषणा एवं महमिका की भूख व्याकुल होकर आध्यात्मिक क्षुधा की उपेक्षा कर रही है। वे अपने लेखों, व्याख्यानों, संस्थाओं, संघटनों, परिषदों आदि में मानवता के महान आदर्शों - साम्य, स्वातंत्र्य, भ्रातृत्व, विश्व शान्ति, विश्वसुख, मानव संस्कृति, मानव धर्म आदि की डींग हाँकते हुए दिखाई पड़ते हैं, किन्तु वह सब अपने बड़प्पन के प्रदर्शन के लिए अथवा अपने ऊँचे आदर्शों के शाब्दिक इन्द्रजाल से दूसरे राष्ट्रों को विभ्रम में डालने के लिए। उन्हें यह स्मरण रखना चाहिए कि वे अपने खोखले आदर्शों के शाब्दिक इन्द्रजाल को बिछा कर अपने राष्ट्र को थोड़ी देर तक भले ही ठग लें तथा विश्व के अन्य राष्ट्रों के समक्ष महान बनने का मिथ्या दम्भ कुछ काल तक भले ही भर लें किन्तु यदि उनमें समीक्षा शक्ति पूर्ण रूपेरण सामान्य जीवन में समीक्षाशक्ति की आवश्यकता तथा महत्व नहीं जगी तथा तदनुकूल आचरण करने की शक्ति नहीं आई तो वे अपने को तथा अपने राष्ट्र को कुछ काल पश्चात् पतन की ऐसी गहरी खाई में गिरा देंगे जहाँ से उस राष्ट्र को कई शताब्दियों तक उठना असम्भव नहीं तो दुष्कर अवश्य हो जायगा । आज राजनीति ने जीवन के सभी क्षेत्रों - शिक्षा, साहित्य, व्यापार, धर्म, कर लिया है। समीक्षा शक्ति के प्रभाव में राजनीति का वातावरण दूषित हो गया है, उसका कुप्रभाव जीवन के उपर्युक्त सभी क्षेत्रों पर दिखाई पड़ रहा है। विश्व अधिकांश राजनीतिज्ञ अनुदात्त भावनाओं से प्रेरित होकर उस क्षेत्र में पहुँचे हैं; अतः अहं-संतृप्ति में संलग्न होना उनके लिए स्वाभाविक है; यदि वे विश्व-जीवन को असत् धागे में भूलता हुआ मान बैठे हैं तो कोई आश्चर्य करने की बात नहीं; यदि वे अपनी संकुचित राष्ट्रीय वैयक्तिक वासना की संतृप्ति में रत हैं तो विस्मय करने की कोई आवश्यकता नहीं; यदि वे स्वतंत्रता और एकता का अर्थ अपने लक्ष्यों की पूर्ति लेते हैं तो कोई आशातीत वस्तु नहीं; यदि के शान्ति का अर्थ अपने मन की अभीप्सित बातों की पूर्ति लेते हैं तो कोई दुःख करने की चीज़ नहीं; यदि वे मानवता या मानवहित बातें जिह्वा तक ही रखते हैं तो कोई अस गति पूर्ण बात नहीं; क्योंकि जनता ने उन्हें अपनी समीक्षा शक्ति के बल पर नहीं चुना और जो चुने गये वे उस क्षेत्र के लिए उपयुक्त समीक्षा-शक्ति रखने के कारण नहीं वरन् किसी अन्य सुविधा, अवसरवाना पूर्ति की इच्छा के कारण । इस दिअनन्त जीवन पर विज्ञान, धर्म, नीति, आचार-व्यवहार, भौतिक, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रकाश डाला जा रहा है; सर्वत्र उहापोह तर्क-वितर्क, आविष्कार, अनुसन्धान द्वारा एक नवीन युग के निर्माण का नारा लगाया जा रहा है, किन्तु सम्यक समीक्षा-शक्ति के अभाव में जीवन के प्रश्नों, समस्याओं, कठिनाइयों के ऊपर एकाङ्गी दृष्टि से प्रकाश डालने के कारण अनेक अतिवादा का जन्म हो रहा है और वे अतिवाद, समीक्षा शक्ति के प्रभाव में जीवन-सिद्धान्त या दर्शन बनकर मानवता के ऊपर नाना प्रकार के आवरण डाल रहे हैं। समीक्षा के अभाव में सत्य, तर्क-करों का छुई मुई बन रहा है, वह बुद्धि के क्रीड़ा पञ्जर का शृङ्खलाबद्ध शुकबन गया है । अधिकांश मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री, धर्म सुधारक अपने किसी पूर्वग्रह से गृहीत हो अपने पूर्वनिश्चित या पूर्व गृहीत सिद्धान्तों या मतों के प्रतिपादन तथा पुष्टि में अपनी बुद्धि का जादू नाना प्रकार से दिखला रहे हैं । वैज्ञानिक, समीक्षा शक्ति के अभाव में भौतिक ऐश्वर्य पर मुग्ध हो ऐन्द्रिक सुखों को सर्व समझ कर, भौतिक शक्तियों को ही हस्तगत करने में सलग्न हैं। वे दूरदर्शिता के अभाव में भूतशक्तियों को ही मानव कष्टों तथा असफलताओं का कारण समझ कर उनकी विजय में अपना सारा बुद्धि- वैभव दिखा रहे हैं। जीवन की आत्मिक शक्ति एवं आन्तरिक महत्ता को समझने का प्रयत्न किये बिना ही, उससे उदासीन होकर मानव जीवन के वाह्य अंगों, भौतिक क्षेत्रों एवं पार्थिव विभागों को ही सौंगठित करते हुए मानव के लिए एक नवीन कारा निर्मित कर रहे हैं । समीक्षा शक्ति के अभाव में हमारी शिक्षणसंस्थायें उपाधियों एवं डिग्रियों की हाट बन रही हैं; शिक्षाधिकारी समीक्षा के अभाव में शिक्षा के किसी एक ध्येय - नागरिक दक्षता या सामाजिक निपुणता, जीविकोपार्जनक्षमता को शिक्षा का सर्व सत्य समझ रहे हैं । इसी के भाव में पिता बालक को केवल अपनी वैयक्तिक सम्पत्ति समझ उसके व्यक्तित्व के विकास की उपेक्षा कर उसे अपनी जीविकार्जन का एक मशीन बना रहा है; अध्यापक विद्यार्थियों में क्रियाशुन्य ज्ञान की पम्पिङ्ग कर रहा है, शिक्षा के यांत्रिक साँचे में उसे ढालने का भगीरथ प्रयत्न कर रहा है, परीक्षा की फैक्टरी से मास प्रोडक्शन करना अपना ध्येय समझ रहा है । बालक समीक्षा-शक्ति के विकास के अभाव में शिक्षा का उद्देश्य - - अपनी विविध शक्तियों - शारीरिक, मानसिक, नैतिक, प्राध्यात्मिक आदि का विकास न समझ कर तोते की रामधुन बना रहा है। राष्ट्रीय सरकारें भी इस शक्ति के अभाव में
इंडिया न्यूज़ (दिल्ली) : देश में मौसम लगातार खराब होता जा रहा है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की वजह से रेलवे ने शुक्रवार को 315 ट्रेनें रद्द कर दी हैं। इनमे से 268 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है, जबकि 47 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। खराब मौसम को देखते हुए 13 ट्रेनों को रिशिड्यूल किया गया है। साथ ही भारतीय रेलवे ने 19 ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित कर उन्हें नए रेल मार्ग से चलाने का आदेश जारी किया है। रेलवे के आदेशानुसार, रद्द होने वाली इन ट्रेनों में पैसेंजर, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। इस आदेश की वजह से जम्मू, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और प. बंगाल का रेल यातायात अधिक प्रभावित होगा। नई दिल्ली आने-जाने वाली लंबी दूरी की कई रेलगाड़ियों को शुक्रवार को रद्द किया गया है। आपको बता दें, आज जो प्रमुख ट्रेनें कैंसिल हुई हैं उनमें एक्सप्रेस जींद दिल्ली जंक्शन, सुपरफास्ट चंडीगढ़, सुपरफास्ट अमृतसर जंक्शन- चंडीगढ़, नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस कामाख्या- आनंद विहार टर्मिनल, डबल डैकर एसी लखनऊ- आनंद विहार टर्मिनल, डबल डेकर एसी आनंद विहार, लिच्छवी एक्सप्रेस सीतामढ़ी, ऊंचाहार एक्सप्रेस प्रयागराज संगम-चंडीगढ़, एक्सप्रेस स्पेशल पठानकोट, विक्रमशिला एक्सप्रेस आनंद विहार टर्मिनल- भागलपुर और अमृतसर जंक्शन और अजमेर के बीच चलने वाली कई रेल गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा कोहरे की वजह से कई ट्रेनें 10 घंटे की देरी से चल रही हैं। देर से चलने वाली इन ट्रेनों में राजधानी समेत कई एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। ट्रेन का सफर करने वाले यात्री एक तरफ तो कोहरा और सर्दी तो दूसरी तरफ ट्रेन के लेट होने से काफी परेशान हैं।
इंडिया न्यूज़ : देश में मौसम लगातार खराब होता जा रहा है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की वजह से रेलवे ने शुक्रवार को तीन सौ पंद्रह ट्रेनें रद्द कर दी हैं। इनमे से दो सौ अड़सठ ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है, जबकि सैंतालीस ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। खराब मौसम को देखते हुए तेरह ट्रेनों को रिशिड्यूल किया गया है। साथ ही भारतीय रेलवे ने उन्नीस ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित कर उन्हें नए रेल मार्ग से चलाने का आदेश जारी किया है। रेलवे के आदेशानुसार, रद्द होने वाली इन ट्रेनों में पैसेंजर, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। इस आदेश की वजह से जम्मू, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और प. बंगाल का रेल यातायात अधिक प्रभावित होगा। नई दिल्ली आने-जाने वाली लंबी दूरी की कई रेलगाड़ियों को शुक्रवार को रद्द किया गया है। आपको बता दें, आज जो प्रमुख ट्रेनें कैंसिल हुई हैं उनमें एक्सप्रेस जींद दिल्ली जंक्शन, सुपरफास्ट चंडीगढ़, सुपरफास्ट अमृतसर जंक्शन- चंडीगढ़, नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस कामाख्या- आनंद विहार टर्मिनल, डबल डैकर एसी लखनऊ- आनंद विहार टर्मिनल, डबल डेकर एसी आनंद विहार, लिच्छवी एक्सप्रेस सीतामढ़ी, ऊंचाहार एक्सप्रेस प्रयागराज संगम-चंडीगढ़, एक्सप्रेस स्पेशल पठानकोट, विक्रमशिला एक्सप्रेस आनंद विहार टर्मिनल- भागलपुर और अमृतसर जंक्शन और अजमेर के बीच चलने वाली कई रेल गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा कोहरे की वजह से कई ट्रेनें दस घंटाटे की देरी से चल रही हैं। देर से चलने वाली इन ट्रेनों में राजधानी समेत कई एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। ट्रेन का सफर करने वाले यात्री एक तरफ तो कोहरा और सर्दी तो दूसरी तरफ ट्रेन के लेट होने से काफी परेशान हैं।
इस दुनिया में जहां गरीबी बेइंतहा है वहीं अमीरों की भी कमी नहीं है। बहुत सारे अमीर लोग बेहद शौक़ीन भी होते हैं। किसी को महंगी गाड़ियां खरीदने का शौक होता है तो किसी को प्रॉपर्टी बनाने का । आज हम आपको एक ऐसे देश के प्रधानमंत्री के बारे में बताएंगे जिनके पास इतनी दौलत है कि वो छोटे-मोटे देश बड़ी आसानी से खरीद सकते हैं। ये प्रधानमंत्री दुनिया भर की महंगी गाड़ियों के भी शौक़ीन हैं। यही वजह है कि इनके पास गाड़ियों का जो कलेक्शन है उसकी चर्चा दुनिया भर में होती रही है। इनके पास एक, दो, तीन नहीं बल्कि 2000 कारों का कलेक्शन है। जी हां हम बात कर रहे हैं ब्रुनेई के वर्तमान प्रधानमंत्री और सुल्तान हस्सनल बोल्किअह की। उनके पास बेहिसाब दौलत होने के साथ ही दुनिया भर की बेहतरीन कारों का कलेक्शन भी है। बता दें कि हस्सनल बोल्किअह मशहूर फुटबॉलर फैक बोल्किअह के रिश्तेदार हैं। फैक की गिनती भी विश्व के सबसे अमीर फुटबॉलरों में होती है। ब्रुनेई के प्रधानमंत्री हस्सनल बोल्किअह के पास मौजूद कारों की कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी कारों को बेचकर दुनिया के कई गरीब देशों को खरीदा जा सकता है। हस्सनल के पास चार खरब से अधिक कीमत की दो हजार कारों का कलेक्शन हैं। ये कोई साधारण गाड़ियां नहीं है। गैराज में खड़ी एक गाड़ी को भी खरीदने के लिए आम इंसान को सौ बार सोचना पड़ेगा। बताया जाता है कि हस्सनल बोल्किअह के पास 600 रॉल्स रॉयस, 570 मर्सिडीज बेंज, 450 फेरारी और करीब 380 बेंटलेस जैसी कारें हैं। इसके साथ ही और भी कई अन्य कारें भी हैं। अगर हम बात करें हस्सनल बोल्किअह के कुल संपत्ति की तो इनके पास 13 बिलियन यूरो यानी 13 खरब 12 अरब 13 करोड़ 97 लाख 5 हजार 5 सौ के करीब रुपए हैं। ब्रुनेई के प्रधानमंत्री फुटबॉलर फैक के रिश्ते में अंकल लगते हैं। फैक ने अपनी पढ़ाई इंग्लैंड से की है और अभी वो ब्रुनेई के अंडर 19 और अंडर 23 फुटबॉल टीम में हैं।
इस दुनिया में जहां गरीबी बेइंतहा है वहीं अमीरों की भी कमी नहीं है। बहुत सारे अमीर लोग बेहद शौक़ीन भी होते हैं। किसी को महंगी गाड़ियां खरीदने का शौक होता है तो किसी को प्रॉपर्टी बनाने का । आज हम आपको एक ऐसे देश के प्रधानमंत्री के बारे में बताएंगे जिनके पास इतनी दौलत है कि वो छोटे-मोटे देश बड़ी आसानी से खरीद सकते हैं। ये प्रधानमंत्री दुनिया भर की महंगी गाड़ियों के भी शौक़ीन हैं। यही वजह है कि इनके पास गाड़ियों का जो कलेक्शन है उसकी चर्चा दुनिया भर में होती रही है। इनके पास एक, दो, तीन नहीं बल्कि दो हज़ार कारों का कलेक्शन है। जी हां हम बात कर रहे हैं ब्रुनेई के वर्तमान प्रधानमंत्री और सुल्तान हस्सनल बोल्किअह की। उनके पास बेहिसाब दौलत होने के साथ ही दुनिया भर की बेहतरीन कारों का कलेक्शन भी है। बता दें कि हस्सनल बोल्किअह मशहूर फुटबॉलर फैक बोल्किअह के रिश्तेदार हैं। फैक की गिनती भी विश्व के सबसे अमीर फुटबॉलरों में होती है। ब्रुनेई के प्रधानमंत्री हस्सनल बोल्किअह के पास मौजूद कारों की कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी कारों को बेचकर दुनिया के कई गरीब देशों को खरीदा जा सकता है। हस्सनल के पास चार खरब से अधिक कीमत की दो हजार कारों का कलेक्शन हैं। ये कोई साधारण गाड़ियां नहीं है। गैराज में खड़ी एक गाड़ी को भी खरीदने के लिए आम इंसान को सौ बार सोचना पड़ेगा। बताया जाता है कि हस्सनल बोल्किअह के पास छः सौ रॉल्स रॉयस, पाँच सौ सत्तर मर्सिडीज बेंज, चार सौ पचास फेरारी और करीब तीन सौ अस्सी बेंटलेस जैसी कारें हैं। इसके साथ ही और भी कई अन्य कारें भी हैं। अगर हम बात करें हस्सनल बोल्किअह के कुल संपत्ति की तो इनके पास तेरह बिलियन यूरो यानी तेरह खरब बारह अरब तेरह करोड़ सत्तानवे लाख पाँच हजार पाँच सौ के करीब रुपए हैं। ब्रुनेई के प्रधानमंत्री फुटबॉलर फैक के रिश्ते में अंकल लगते हैं। फैक ने अपनी पढ़ाई इंग्लैंड से की है और अभी वो ब्रुनेई के अंडर उन्नीस और अंडर तेईस फुटबॉल टीम में हैं।
India News (इंडिया न्यूज़), UP Nikay Chunav Result 2023 उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव 2023 (UP Nikay Chunav Result 2023) के लिए मतगणना चल रही है। इसी बीच यूपी के कौशाम्बी के नगर पंचायत सरायअकिल के एक वार्ड से आम आदमी पार्टी के लिए खुशी की खबर सामने आई है। यहां से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी रोशन लाल को जीत मिली है। वही आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने नगर पंचायत के वार्ड नंबर 6 से जीत हासिल की है। रोशन ने कुल 420 वोट पाकर जीत अपने नाम की है। यूपी नगर पंचायत सरायअकिल के वार्ड नंबर 6 से बीजेपी के प्रत्याशी राम नरेश दूसरे नंबर पर रहे। राम नरेश को कुल 192 वोट मिले. इस तरह से आम आदमी पार्टी के रोशनल लाल ने 228 वोटों के बड़े आंकड़े से जीत दर्ज की है। यहां बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच टक्कर थी, लेकिन अंत में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज कर ली। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में यह AAP की पहली जीत है। आम आदमी पार्टी ने यूपी के निकाय चुनाव में पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कुल 14,684 नगर निकाय के पदों पर दो चरण में चुनाव हुए, जिसकी मतगणना अभी चल रहा है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने यहां अपनी पहली जीत दर्ज की है। आज नगर निकाय के पदों में कुल 17 महापौर, 200 नगर पालिका अध्यक्ष, 545 नगर पंचायत अध्यक्ष और 1420 पार्षदों की किस्मत खुलेगी। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव की वोटिंग दो चरणों में हुई थी। 4 मई को पहले चरण की वोटिंग हुई थी, जिसमें 37 ज़िलों के 10 नगर निगम, 104 नगर पालिका और 276 नगर पंचायतों मतदान हुआ था। इसके बाद 11 मई, गुरुवार को दूसरे चरण की वोटिंग बीती हुई थी, जिसमें कुल 38 ज़िलों 7 नगर निगम, 95 नगर पालिका और 267 नगर पंचायत में वोट डाले गए थे। आज सभी के परिणाम की घोसणा हो रही है। इसी बीच कौशाम्बी के नगर पंचायत सरायअकिल के एक वार्ड में आम आदमी पार्टी का खाता खुल गया है।
India News , UP Nikay Chunav Result दो हज़ार तेईस उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव दो हज़ार तेईस के लिए मतगणना चल रही है। इसी बीच यूपी के कौशाम्बी के नगर पंचायत सरायअकिल के एक वार्ड से आम आदमी पार्टी के लिए खुशी की खबर सामने आई है। यहां से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी रोशन लाल को जीत मिली है। वही आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने नगर पंचायत के वार्ड नंबर छः से जीत हासिल की है। रोशन ने कुल चार सौ बीस वोट पाकर जीत अपने नाम की है। यूपी नगर पंचायत सरायअकिल के वार्ड नंबर छः से बीजेपी के प्रत्याशी राम नरेश दूसरे नंबर पर रहे। राम नरेश को कुल एक सौ बानवे वोट मिले. इस तरह से आम आदमी पार्टी के रोशनल लाल ने दो सौ अट्ठाईस वोटों के बड़े आंकड़े से जीत दर्ज की है। यहां बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच टक्कर थी, लेकिन अंत में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज कर ली। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में यह AAP की पहली जीत है। आम आदमी पार्टी ने यूपी के निकाय चुनाव में पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कुल चौदह,छः सौ चौरासी नगर निकाय के पदों पर दो चरण में चुनाव हुए, जिसकी मतगणना अभी चल रहा है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने यहां अपनी पहली जीत दर्ज की है। आज नगर निकाय के पदों में कुल सत्रह महापौर, दो सौ नगर पालिका अध्यक्ष, पाँच सौ पैंतालीस नगर पंचायत अध्यक्ष और एक हज़ार चार सौ बीस पार्षदों की किस्मत खुलेगी। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव की वोटिंग दो चरणों में हुई थी। चार मई को पहले चरण की वोटिंग हुई थी, जिसमें सैंतीस ज़िलों के दस नगर निगम, एक सौ चार नगर पालिका और दो सौ छिहत्तर नगर पंचायतों मतदान हुआ था। इसके बाद ग्यारह मई, गुरुवार को दूसरे चरण की वोटिंग बीती हुई थी, जिसमें कुल अड़तीस ज़िलों सात नगर निगम, पचानवे नगर पालिका और दो सौ सरसठ नगर पंचायत में वोट डाले गए थे। आज सभी के परिणाम की घोसणा हो रही है। इसी बीच कौशाम्बी के नगर पंचायत सरायअकिल के एक वार्ड में आम आदमी पार्टी का खाता खुल गया है।
श्रीलंका की इस जीत में सभी श्रीलंकाई बल्लेबाजो ने अहम भूमिका निभाई मगर अंत के ओवेर्स में असेला गुनेरतने की 21 गेंदों में 34 रन की विस्फोटक पारी ने श्रीलंकाई टीम का काम आसान कर दिया. और श्रीलंका को आसानी से लक्ष्य तक पहुँचा दिया था. असेला गुनेरतने ने जीत के बाद अपनी बल्लेबाजी का श्रेय किसी और को नहीं बल्कि भारत में खेले जाने वाले आईपीएल को दिया. असेला गुनेरतने पिछले 1 साल से श्रीलंका टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे है. जनवरी में ऑस्टेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज जीतने में श्रीलंका के लिए असेला गुनेरतने ने ही शानदार प्रदर्शन किया था. वो इस टी20 सीरीज में 'मैन ऑफ द सीरीज' भी रहे थे. इसी सीरीज की बदोलत असेला गुनेरतने आईपीएल में मुंबई इंडियन की तरफ से चुने गए.
श्रीलंका की इस जीत में सभी श्रीलंकाई बल्लेबाजो ने अहम भूमिका निभाई मगर अंत के ओवेर्स में असेला गुनेरतने की इक्कीस गेंदों में चौंतीस रन की विस्फोटक पारी ने श्रीलंकाई टीम का काम आसान कर दिया. और श्रीलंका को आसानी से लक्ष्य तक पहुँचा दिया था. असेला गुनेरतने ने जीत के बाद अपनी बल्लेबाजी का श्रेय किसी और को नहीं बल्कि भारत में खेले जाने वाले आईपीएल को दिया. असेला गुनेरतने पिछले एक साल से श्रीलंका टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे है. जनवरी में ऑस्टेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में टीबीस सीरीज जीतने में श्रीलंका के लिए असेला गुनेरतने ने ही शानदार प्रदर्शन किया था. वो इस टीबीस सीरीज में 'मैन ऑफ द सीरीज' भी रहे थे. इसी सीरीज की बदोलत असेला गुनेरतने आईपीएल में मुंबई इंडियन की तरफ से चुने गए.