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वीरागद्वेपादिकमका फल यहभी संसारकी जड़ है. वास्तव संसारकी जड मायोपहितबल है. इसहेतुसे उसको ऊर्ध्वं जड कहा. मनुप्यलोकमें कर्म इसकी जड है. मायोपहितबहाके अपेक्षामें मर्त्यलो-क नीचा है. इसवास्ते इसजगे कहा कि, इसकी नीचे अनुष्यलोकमें भी कर्मकांड जड है. ब्रह्मलोक वैकुंठादि, और मायोपहितब्रह्म, सूक्ष्मउपाधि करके उपाहत, हिरण्यगर्भ स्थूल उपाधिकरके उपहित, विराह और उसके अन्तर्गत ब्रह्मादिदेवता यह तो ऊपरको संसारकी शाखा फैल रही है. और मर्त्यलोकमें पशु, पक्षी, मनुष्यादि और यज्ञादि कर्म, यह नीचे संसारकी शाखा फैल रही है, जैसे जैसे स त्वादिगुणोंमें प्रीतिकरते हैं. तैसेतैसे ही शाखामेसे शाखा वढती चलीजाती है. इसीहेतुले नकुछ परलोकसावयषलोकोका पतालगता है, कि चौदहलोक हैं या वैकुंठादि कितने लोक हैं और एकएक देवताके उपासनामें अनेकअनेक भेद हैं और अक्तक अनेक भेद (शा खा/ निकलती चलीजाती हैं और नीचेमनुष्योंका जो व्यवहार है, इसका कुछ प्रमाण नहीं. न जातीका प्रमाण न कुलके व्यवहारोंका प्रमाण है. संसारवृक्ष में शब्दादिविषय कोमलसुन्दर पत्र लगरहे हैं देवतामनुष्यपश्वादि सब प्राणियोंने विपयोंका आश्रा ले रक्खा है कोई साक्षात् भोक्ते हैं, कोई उनकेलिये वेदोक्तकर्म कर रहे हैं संसारकी व्यवस्था इसजगे बहुत संक्षेपकरके लिखी गई है. वैराग्यवान पुरुषोंसे, और योगवासिष्ठादिग्रंथों से इसकी व्यवस्था श्रवण करना योग्य है, कि यह कैसे अनथका मूल है ॥ २ ॥ मू०नरूपमस्येहतथोपलभ्यतेनांतोनचादिर्नचसंप्रतिष्ठा ।। अश्वत्थमेनंसुविरूढमूल मसंगशस्त्रेणदृढेनछित्त्वा ॥ ३ ॥
इह १ अस्य २ रूपम् ३ तथा ४ न ५ उपलभ्यते ६ न ७ अ(४१४)
न्तम् ८ नच ९ आदिः १० च ११ न १२ संप्रतिष्ठा १३ सुवि रूढमूलम् १४ एनम् १५ अश्वत्थम् १६ हढेन १७ असंगशस्त्रेण १८ छित्वा १९ ॥ ३ ॥ अ० संसार में १ सि० जैसा * इससंसारका २ रूप ३ सि० वर्णनकरते हैं * तैसा ४ मि० बेसन्देह नहीं ५ प्रतीत होता है. ६ सि० इसकान ७ अन्त ८ और न आदि ९ । १० । ११न १२ स्थिति १३ सि० इसकी प्रतीत होती है कि, यह कैसा उत्पन्न हुवा, कैसा लीनहोगा, कैसा ठहर रहा है. क्षणभंगुर स्वप्नवत् या इन्द्रजालवत् इसकेपदार्थ प्रतीत होते हैं. अनथका मूल और दुःखोंका स्थान है जो पदार्थ नरकका कारण उसके विनानिर्वाहनहीं होता. जो उसका अशेषत्याग किया जावे तो यह असम्भव है. इस प्रकार * बन्धीहुई है भलेप्रकार जडजिसकी १४ इस १५ अश्वत्थको १६ दृढ ऐसे असंगशस्त्र से १७ १८ छेदन करके १९ सि० परमपदपरमानन्दस्वरूपआत्माको ढूंढना चाहिये. अगले मंत्र के साथ इसमंत्रका संबंध है. * तात्पर्य इस संसारकी व्यवस्था सवमतवाले जूदीजूदी कहते हैं. अपने मतको सब बडा कहते हैं, दुसरेको बुरा कहते हैं. कोई बेसन्देह समन्वय नहीं करता कि वास्तव संसारकी यह व्यवस्था है. और अमुक अमुक जो यह कहते हैं, उनका तात्पर्य यह है. सुमुक्षूका कैसा निश्च य हो की अमुकमत सच्चा है. जो निर्णय करो तो एकघटका निर्णय नहीं हो सक्ता एकघटके चर्चामें समस्त अवस्था समाप्त होजावे, परन्तु घटका निर्णय नहो. न्यायशास्त्रवाले चर्चाके वलसे कुछकाकुछ सिद्धकरदें. विद्याकि तो यह व्यवस्था है. एकमत नहीं कि जिसपर निश्चय बना रहे तात्पर्य यह है कि सब प्रकार संसार दुःखरूप है. इसका कभी निर्णय न करे इसके दूर होनेका यत्नकरे, कभी इसमें प्रीति न करे सदा संसारसे ग्लानि बनी रहे, तव परमानन्दस्वरूपआत्माकी प्राप्ति होती है ॥ ३ ॥ | वीरागद्वेपादिकमका फल यहभी संसारकी जड़ है. वास्तव संसारकी जड मायोपहितबल है. इसहेतुसे उसको ऊर्ध्वं जड कहा. मनुप्यलोकमें कर्म इसकी जड है. मायोपहितबहाके अपेक्षामें मर्त्यलो-क नीचा है. इसवास्ते इसजगे कहा कि, इसकी नीचे अनुष्यलोकमें भी कर्मकांड जड है. ब्रह्मलोक वैकुंठादि, और मायोपहितब्रह्म, सूक्ष्मउपाधि करके उपाहत, हिरण्यगर्भ स्थूल उपाधिकरके उपहित, विराह और उसके अन्तर्गत ब्रह्मादिदेवता यह तो ऊपरको संसारकी शाखा फैल रही है. और मर्त्यलोकमें पशु, पक्षी, मनुष्यादि और यज्ञादि कर्म, यह नीचे संसारकी शाखा फैल रही है, जैसे जैसे स त्वादिगुणोंमें प्रीतिकरते हैं. तैसेतैसे ही शाखामेसे शाखा वढती चलीजाती है. इसीहेतुले नकुछ परलोकसावयषलोकोका पतालगता है, कि चौदहलोक हैं या वैकुंठादि कितने लोक हैं और एकएक देवताके उपासनामें अनेकअनेक भेद हैं और अक्तक अनेक भेद न्तम् आठ नच नौ आदिः दस च ग्यारह न बारह संप्रतिष्ठा तेरह सुवि रूढमूलम् चौदह एनम् पंद्रह अश्वत्थम् सोलह हढेन सत्रह असंगशस्त्रेण अट्ठारह छित्वा उन्नीस ॥ तीन ॥ अशून्य संसार में एक सिशून्य जैसा * इससंसारका दो रूप तीन सिशून्य वर्णनकरते हैं * तैसा चार मिशून्य बेसन्देह नहीं पाँच प्रतीत होता है. छः सिशून्य इसकान सात अन्त आठ और न आदि नौ । दस । ग्यारहन बारह स्थिति तेरह सिशून्य इसकी प्रतीत होती है कि, यह कैसा उत्पन्न हुवा, कैसा लीनहोगा, कैसा ठहर रहा है. क्षणभंगुर स्वप्नवत् या इन्द्रजालवत् इसकेपदार्थ प्रतीत होते हैं. अनथका मूल और दुःखोंका स्थान है जो पदार्थ नरकका कारण उसके विनानिर्वाहनहीं होता. जो उसका अशेषत्याग किया जावे तो यह असम्भव है. इस प्रकार * बन्धीहुई है भलेप्रकार जडजिसकी चौदह इस पंद्रह अश्वत्थको सोलह दृढ ऐसे असंगशस्त्र से सत्रह अट्ठारह छेदन करके उन्नीस सिशून्य परमपदपरमानन्दस्वरूपआत्माको ढूंढना चाहिये. अगले मंत्र के साथ इसमंत्रका संबंध है. * तात्पर्य इस संसारकी व्यवस्था सवमतवाले जूदीजूदी कहते हैं. अपने मतको सब बडा कहते हैं, दुसरेको बुरा कहते हैं. कोई बेसन्देह समन्वय नहीं करता कि वास्तव संसारकी यह व्यवस्था है. और अमुक अमुक जो यह कहते हैं, उनका तात्पर्य यह है. सुमुक्षूका कैसा निश्च य हो की अमुकमत सच्चा है. जो निर्णय करो तो एकघटका निर्णय नहीं हो सक्ता एकघटके चर्चामें समस्त अवस्था समाप्त होजावे, परन्तु घटका निर्णय नहो. न्यायशास्त्रवाले चर्चाके वलसे कुछकाकुछ सिद्धकरदें. विद्याकि तो यह व्यवस्था है. एकमत नहीं कि जिसपर निश्चय बना रहे तात्पर्य यह है कि सब प्रकार संसार दुःखरूप है. इसका कभी निर्णय न करे इसके दूर होनेका यत्नकरे, कभी इसमें प्रीति न करे सदा संसारसे ग्लानि बनी रहे, तव परमानन्दस्वरूपआत्माकी प्राप्ति होती है ॥ तीन ॥ |
ककनमठ मंदिर के बारे में बताया जाता है बड़े-बड़े पत्थरों से बने इस मंदिर के निर्माण में किसी भी तरह के सीमेंट गाड़े का प्रयोग नहीं किया गया है। सभी पत्थर एक के ऊपर कतारबद्ध रखे हुए हैं। एक बार देखकर तो मन में यह सवाल उठता है कि कहीं यह गिर ना जाए लेकिन यह मंदिर वर्षों से अपने स्थान पर अडिग खड़ा है।
इस मंदिर को देखकर यह भी लगता है कि इसका निर्माण अचानक छोड़ दिया गया हो। स्थानीय लोग बताते हैं मंदिर बनते-बनते सुबह हो गई इसलिए मंदिर को अधूरा छोड़कर ही भूत-प्रेत चले गए।
किंवदंती है कि इस मंदिर के संग भूत-प्रेतों का शाप भी चल रहा है। इस मंदिर को काने लोगों से खतरा है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस दिन नाई जाति के नौ काने लड़के दूल्हा बनकर मंदिर के सामने से गुजरेंगे उस दिन यह मंदिर नष्ट हो जाएगा। संयोग की बात है कि अब तक ऐसी बात यहां नहीं हुई है।
ककनमठ मंदिर को लेकर एक कहानी यह भी बताई जाती है कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छवाहा वंश के राजा कीर्ति सिंह के शासनकाल में हुआ था। राजा कीर्ति सिंह और उनकी पत्नी रानी ककनावती भगवान भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। उन्होंने ही इस मंदिर का निर्माण कराया था इसलिए इसका नाम ककनमठ मंदिर पड़ा।
| ककनमठ मंदिर के बारे में बताया जाता है बड़े-बड़े पत्थरों से बने इस मंदिर के निर्माण में किसी भी तरह के सीमेंट गाड़े का प्रयोग नहीं किया गया है। सभी पत्थर एक के ऊपर कतारबद्ध रखे हुए हैं। एक बार देखकर तो मन में यह सवाल उठता है कि कहीं यह गिर ना जाए लेकिन यह मंदिर वर्षों से अपने स्थान पर अडिग खड़ा है। इस मंदिर को देखकर यह भी लगता है कि इसका निर्माण अचानक छोड़ दिया गया हो। स्थानीय लोग बताते हैं मंदिर बनते-बनते सुबह हो गई इसलिए मंदिर को अधूरा छोड़कर ही भूत-प्रेत चले गए। किंवदंती है कि इस मंदिर के संग भूत-प्रेतों का शाप भी चल रहा है। इस मंदिर को काने लोगों से खतरा है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस दिन नाई जाति के नौ काने लड़के दूल्हा बनकर मंदिर के सामने से गुजरेंगे उस दिन यह मंदिर नष्ट हो जाएगा। संयोग की बात है कि अब तक ऐसी बात यहां नहीं हुई है। ककनमठ मंदिर को लेकर एक कहानी यह भी बताई जाती है कि इस मंदिर का निर्माण ग्यारहवीं शताब्दी में कच्छवाहा वंश के राजा कीर्ति सिंह के शासनकाल में हुआ था। राजा कीर्ति सिंह और उनकी पत्नी रानी ककनावती भगवान भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। उन्होंने ही इस मंदिर का निर्माण कराया था इसलिए इसका नाम ककनमठ मंदिर पड़ा। |
इस पृष्ठ में केंचुआ खाद का प्रयोग एवं बनाने की विधि को विस्तृत रूप से बताया गया है।
इस पृष्ठ में जीवाणु एवं जैविक खाद की विस्तृत जानकारी दी गयी है।
इस पृष्ठ में झारखण्ड राज्य के विभिन्न गांवों में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की जानकारी दी गयी है।
इस भाग में नारियल की खेती क उत्कृष्ट प्रयास के बारे में जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ में झारखण्ड में वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) का गाँवों में उत्पादन कैसे करे, इसकी जानकारी दी गयी है।
इस पृष्ठ में केंचुआ की खाद बनाने की विधि दी गयी है ।
इस पृष्ठ में जैविक प्रबन्धन की विशेष जानकारी दी गयी है।
इस पृष्ठ में जीवाणु एवं जैविक खाद की तैयारी की जानकारी दी गयी है।
इस भाग में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की जानकारी दी गई है।
| इस पृष्ठ में केंचुआ खाद का प्रयोग एवं बनाने की विधि को विस्तृत रूप से बताया गया है। इस पृष्ठ में जीवाणु एवं जैविक खाद की विस्तृत जानकारी दी गयी है। इस पृष्ठ में झारखण्ड राज्य के विभिन्न गांवों में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की जानकारी दी गयी है। इस भाग में नारियल की खेती क उत्कृष्ट प्रयास के बारे में जानकारी दी गई है। इस पृष्ठ में झारखण्ड में वर्मी कम्पोस्ट का गाँवों में उत्पादन कैसे करे, इसकी जानकारी दी गयी है। इस पृष्ठ में केंचुआ की खाद बनाने की विधि दी गयी है । इस पृष्ठ में जैविक प्रबन्धन की विशेष जानकारी दी गयी है। इस पृष्ठ में जीवाणु एवं जैविक खाद की तैयारी की जानकारी दी गयी है। इस भाग में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की जानकारी दी गई है। |
भारत में हाल ही में दूतावास के ट्विटर अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाने से पाकिस्तान बौखला गया है और उसने शुक्रवार को इस्लामाबाद में भारत के शीर्ष राजनयिक को तलब कर लिया. इसके साथ ही पाकिस्तान ने भारत के सामने कड़ा विरोध जताया है. पाकिस्तान ने यहां तक कह दिया है कि अभिव्यक्ति की आजादी को रोकने की कोशिश की जा रही है.
बताते चलें कि भारत में पाकिस्तान के दूतावासों के ट्विटर अकाउंट को बंद कर दिया गया है. आरोप है कि इन ट्विटर हैंडल से भारत के खिलाफ झूठी खबरें और दुष्प्रचार किया जा रहा था. पाकिस्तान के तुर्की, संयुक्त राष्ट्र, ईरान और मिस्त्र स्थित दूतावासों के अकाउंट को ब्लॉक किया गया है. बताया जा रहा है कि अन्य ट्विटर अकाउंट पर भी इस तरह की कार्रवाई हो सकती है. पाकिस्तान ने ट्विटर से इन अकाउंट्स की बहाली की मांग की है.
इस घटनाक्रम से पाकिस्तान नाराज हो गया है और उसने भारत के खिलाफ गुस्सा निकाला है. शुक्रवार को पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय प्रभारी डी' अफेयर (Cd'A) सुरेश कुमार को तलब कर लिया और विरोध दर्ज कराया. पाकिस्तान ने एक बयान में कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय प्रभारी डी' अफेयर्स (Cd'A) को आज विदेश मंत्रालय में बुलाया गया था और भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के राजनयिक मिशन के अकाउंट समेत ट्विटर पर 80 खातों पर बैन लगाने का विरोध किया गया है.
पाकिस्तान ने कहा कि हमारे ईरान, तुर्की, मिस्र, संयुक्त राष्ट्र और रेडियो पाकिस्तान के अकाउंट पर सेंसरशिप लगाया गया है. पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया कि ये हमारी आवाज पर अंकुश लगाने की कोशिश है. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा- Cd'A को बताया गया कि ये भारतीय कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानकों, दायित्वों, मानदंडों और सूचना के प्रवाह के ढांचे के खिलाफ है और भारत में मौलिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास है.
भारत सरकार से पाकिस्तान के राजनयिक ट्विटर अकाउंट्स से तुरंत बैन हटवाने की अपील की गई है. भारत के इस कदम को 'अवैध' और 'सूचना तक पहुंच के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया है. पाकिस्तान ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मानकों का भी पालन करना चाहिए और मौलिक स्वतंत्रता और असहमति के सम्मान की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए.
बता दें कि हाल ही में भारतीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने के लिए पाकिस्तान स्थित 6 चैनलों समेत 16 YouTube समाचार चैनलों को ब्लॉक कर दिया है.
| भारत में हाल ही में दूतावास के ट्विटर अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाने से पाकिस्तान बौखला गया है और उसने शुक्रवार को इस्लामाबाद में भारत के शीर्ष राजनयिक को तलब कर लिया. इसके साथ ही पाकिस्तान ने भारत के सामने कड़ा विरोध जताया है. पाकिस्तान ने यहां तक कह दिया है कि अभिव्यक्ति की आजादी को रोकने की कोशिश की जा रही है. बताते चलें कि भारत में पाकिस्तान के दूतावासों के ट्विटर अकाउंट को बंद कर दिया गया है. आरोप है कि इन ट्विटर हैंडल से भारत के खिलाफ झूठी खबरें और दुष्प्रचार किया जा रहा था. पाकिस्तान के तुर्की, संयुक्त राष्ट्र, ईरान और मिस्त्र स्थित दूतावासों के अकाउंट को ब्लॉक किया गया है. बताया जा रहा है कि अन्य ट्विटर अकाउंट पर भी इस तरह की कार्रवाई हो सकती है. पाकिस्तान ने ट्विटर से इन अकाउंट्स की बहाली की मांग की है. इस घटनाक्रम से पाकिस्तान नाराज हो गया है और उसने भारत के खिलाफ गुस्सा निकाला है. शुक्रवार को पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय प्रभारी डी' अफेयर सुरेश कुमार को तलब कर लिया और विरोध दर्ज कराया. पाकिस्तान ने एक बयान में कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय प्रभारी डी' अफेयर्स को आज विदेश मंत्रालय में बुलाया गया था और भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के राजनयिक मिशन के अकाउंट समेत ट्विटर पर अस्सी खातों पर बैन लगाने का विरोध किया गया है. पाकिस्तान ने कहा कि हमारे ईरान, तुर्की, मिस्र, संयुक्त राष्ट्र और रेडियो पाकिस्तान के अकाउंट पर सेंसरशिप लगाया गया है. पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया कि ये हमारी आवाज पर अंकुश लगाने की कोशिश है. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा- Cd'A को बताया गया कि ये भारतीय कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानकों, दायित्वों, मानदंडों और सूचना के प्रवाह के ढांचे के खिलाफ है और भारत में मौलिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास है. भारत सरकार से पाकिस्तान के राजनयिक ट्विटर अकाउंट्स से तुरंत बैन हटवाने की अपील की गई है. भारत के इस कदम को 'अवैध' और 'सूचना तक पहुंच के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया है. पाकिस्तान ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मानकों का भी पालन करना चाहिए और मौलिक स्वतंत्रता और असहमति के सम्मान की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए. बता दें कि हाल ही में भारतीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने के लिए पाकिस्तान स्थित छः चैनलों समेत सोलह YouTube समाचार चैनलों को ब्लॉक कर दिया है. |
Ranchi: वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति ने रांची के जरुरतमंद लोगों के लिए सीता रसोई की शुरुआत की है. गाडीखाना, शनि मंदिर के सामने सीता रसोई केंद्र खोला गया है. समाज के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा इसकी शुरूआत की गई है. संस्था के सदस्य सीताराम पोद्दार और निरंजन सराफ में बताया कि इस रसोई में हर दिन दो समय शाकाहारी भोजन कराया जाएगा. यह भोजन सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक और शाम 6 बजे से 8 बजे तक कराई जाएगी. जिसमें ₹10 में 6 रोटी-सब्जी, अचार एवं 8 रुपये में पानी की बोतल मिलेगी.
संस्था के वरिष्ठ सदस्य कैलाश सिंघानिया ने बताया कि यह सुविधा जल्द ही शहर के पांच और स्थानों में उपलब्ध होगी. समिति ने रांची डीसी और सदर अस्पताल के अधीक्षक से अनुरोध किया है कि वे अपने परिसर में इस रसोई को चलाने के लिए जगह दें.
संस्था के सदस्यों ने सीता रसोई के लिए निशुल्क स्थान उपलब्ध कराने के लिए सूर्यभान सिंह का विशेष धन्यवाद दिया. इसके साथ ही कार्यक्रम में छात्र युवक संघ ने विशेष सहयोग दिया. इसके साथ ही इसी तरह समिति का सहयोग करने का आश्वासन दिया.
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रुप से सीताराम पोदार, निरंजन सर्राफ, बेनी प्रसाद अग्रवाल, कैलाश सिंघानिया, कौशल राजगढ़िया, उमेद मल जैन काला, वी के गढयान, सुरेश चौधरी, ललित कुमार पोद्दार, हरी परशुरामपुरिया, शैलेंद्र सिंह, संतोष सिंह, रमेश शर्मा, हेमेंद्र सिंह, हरि कृष्ण बजाज, भगवती प्रसाद भुवालका, छोटेलाल जैन, मानिक चंद जैन, प्रवीन जैन छाबड़ा (चेंबर अध्यक्ष), कृष्ण कुमार गाड़ोदिया, टीटू खेतान, विजय सिंह सहित 100 से अधिक लोगों ने एहम भूमिका निभाई.
| Ranchi: वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति ने रांची के जरुरतमंद लोगों के लिए सीता रसोई की शुरुआत की है. गाडीखाना, शनि मंदिर के सामने सीता रसोई केंद्र खोला गया है. समाज के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा इसकी शुरूआत की गई है. संस्था के सदस्य सीताराम पोद्दार और निरंजन सराफ में बताया कि इस रसोई में हर दिन दो समय शाकाहारी भोजन कराया जाएगा. यह भोजन सुबह ग्यारह बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक और शाम छः बजे से आठ बजे तक कराई जाएगी. जिसमें दस रुपया में छः रोटी-सब्जी, अचार एवं आठ रुपयापये में पानी की बोतल मिलेगी. संस्था के वरिष्ठ सदस्य कैलाश सिंघानिया ने बताया कि यह सुविधा जल्द ही शहर के पांच और स्थानों में उपलब्ध होगी. समिति ने रांची डीसी और सदर अस्पताल के अधीक्षक से अनुरोध किया है कि वे अपने परिसर में इस रसोई को चलाने के लिए जगह दें. संस्था के सदस्यों ने सीता रसोई के लिए निशुल्क स्थान उपलब्ध कराने के लिए सूर्यभान सिंह का विशेष धन्यवाद दिया. इसके साथ ही कार्यक्रम में छात्र युवक संघ ने विशेष सहयोग दिया. इसके साथ ही इसी तरह समिति का सहयोग करने का आश्वासन दिया. कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रुप से सीताराम पोदार, निरंजन सर्राफ, बेनी प्रसाद अग्रवाल, कैलाश सिंघानिया, कौशल राजगढ़िया, उमेद मल जैन काला, वी के गढयान, सुरेश चौधरी, ललित कुमार पोद्दार, हरी परशुरामपुरिया, शैलेंद्र सिंह, संतोष सिंह, रमेश शर्मा, हेमेंद्र सिंह, हरि कृष्ण बजाज, भगवती प्रसाद भुवालका, छोटेलाल जैन, मानिक चंद जैन, प्रवीन जैन छाबड़ा , कृष्ण कुमार गाड़ोदिया, टीटू खेतान, विजय सिंह सहित एक सौ से अधिक लोगों ने एहम भूमिका निभाई. |
कोरोना से निपटने के लिए हैंड सैनिटाइज़र का कोई विकल्प नहीं है! महामारी के दौरान कोरोना एक हाथ प्रक्षालक बन गया है! लेकिन यह हैंड सैनिटाइजर कितना सुरक्षित है? क्या सैनिटाइज़र आपके जीवन को खतरे में डाल सकता है? अगर यह खतरा लाता है! वह खतरा कैसे ला सकता है? सीजीएसआई के अनुसार, हैंड सैनिटाइज़र आपके जीवन में गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं! सीजीएसआई के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश सैनिटाइज़र में विषाक्त मेथनॉल होता है।
भले ही सैनिटाइज़र में मेथनॉल मिलाया जाता है, निर्माता बोतल के लेबल में मेथनॉल को शामिल करने का उल्लेख नहीं करते हैं। यह आरोप सीजीएसआई का है। यह सैनिटाइजर कोरोना में दवा दुकानों के अलावा अन्य दुकानों में बेचा जा रहा है। नतीजतन, शारीरिक नुकसान पहुंचाने के अलावा, यह सैनिटाइज़र मानव दृष्टि को भी नष्ट कर सकता है। इतना ही नहीं, कुछ हैंड सैनिटाइजर में हानिकारक अल्कोहल भी होता है। यह शराब लोगों को शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचा सकती है। अध्ययनों से पता चला है कि इथेनॉल का उपयोग कई हैंड सैनिटाइज़र में किया जाता है। इथेनॉल के बाजार मूल्य को कम करने के लिए सैनिटाइज़र मेथनॉल का उपयोग कर रहे हैं। CGSI ने सूचना दी। 31 अगस्त को जारी सीजीएसआई सर्वे में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ध्यान दें कि मेथनॉल के साथ मिश्रित सैनिटाइज़र के उपयोग से सिरदर्द, उल्टी, अंधापन, चेतना की हानि और यहां तक कि कोमा भी हो सकता है! यह किलर विषाक्त मेथनॉल बाजार में 122 नमूनों में से 5 में पाया गया था! ध्यान दें कि 45 सैनिटाइज़र बोतलों में निहित शब्द बोतल के अंदर सेनिटाइज़र से मेल नहीं खाते हैं! कंज्यूमर गाइडेंस सोसाइटी ऑफ इंडिया या CGSI की रिपोर्ट से काफी हलचल मची है।
लेकिन अगर सैनिटाइज़र इतना हानिकारक है तो क्या किया जा सकता है? आपको अपने हाथ साफ़ करने होंगे! इसलिए, सीजीएसआई के अनुसार, सैनिटाइज़र की तुलना में साबुन को अधिक महत्व दिया जाता है। यदि नहीं, तो 70% अल्कोहल युक्त एक हाथ प्रक्षालक का उपयोग किया जा सकता है। कोई बात नहीं है।
एक वैश्विक महामारी के खिलाफ एहतियात के तौर पर, 100 प्रतिशत मास्क पहनना, हाथों को साफ रखना और लंबी दूरी बनाए रखना उचित है। इसके अलावा, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए, आपको अपने खाने की आदतों में कुछ बदलाव करने होंगे।
| कोरोना से निपटने के लिए हैंड सैनिटाइज़र का कोई विकल्प नहीं है! महामारी के दौरान कोरोना एक हाथ प्रक्षालक बन गया है! लेकिन यह हैंड सैनिटाइजर कितना सुरक्षित है? क्या सैनिटाइज़र आपके जीवन को खतरे में डाल सकता है? अगर यह खतरा लाता है! वह खतरा कैसे ला सकता है? सीजीएसआई के अनुसार, हैंड सैनिटाइज़र आपके जीवन में गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं! सीजीएसआई के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश सैनिटाइज़र में विषाक्त मेथनॉल होता है। भले ही सैनिटाइज़र में मेथनॉल मिलाया जाता है, निर्माता बोतल के लेबल में मेथनॉल को शामिल करने का उल्लेख नहीं करते हैं। यह आरोप सीजीएसआई का है। यह सैनिटाइजर कोरोना में दवा दुकानों के अलावा अन्य दुकानों में बेचा जा रहा है। नतीजतन, शारीरिक नुकसान पहुंचाने के अलावा, यह सैनिटाइज़र मानव दृष्टि को भी नष्ट कर सकता है। इतना ही नहीं, कुछ हैंड सैनिटाइजर में हानिकारक अल्कोहल भी होता है। यह शराब लोगों को शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचा सकती है। अध्ययनों से पता चला है कि इथेनॉल का उपयोग कई हैंड सैनिटाइज़र में किया जाता है। इथेनॉल के बाजार मूल्य को कम करने के लिए सैनिटाइज़र मेथनॉल का उपयोग कर रहे हैं। CGSI ने सूचना दी। इकतीस अगस्त को जारी सीजीएसआई सर्वे में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ध्यान दें कि मेथनॉल के साथ मिश्रित सैनिटाइज़र के उपयोग से सिरदर्द, उल्टी, अंधापन, चेतना की हानि और यहां तक कि कोमा भी हो सकता है! यह किलर विषाक्त मेथनॉल बाजार में एक सौ बाईस नमूनों में से पाँच में पाया गया था! ध्यान दें कि पैंतालीस सैनिटाइज़र बोतलों में निहित शब्द बोतल के अंदर सेनिटाइज़र से मेल नहीं खाते हैं! कंज्यूमर गाइडेंस सोसाइटी ऑफ इंडिया या CGSI की रिपोर्ट से काफी हलचल मची है। लेकिन अगर सैनिटाइज़र इतना हानिकारक है तो क्या किया जा सकता है? आपको अपने हाथ साफ़ करने होंगे! इसलिए, सीजीएसआई के अनुसार, सैनिटाइज़र की तुलना में साबुन को अधिक महत्व दिया जाता है। यदि नहीं, तो सत्तर% अल्कोहल युक्त एक हाथ प्रक्षालक का उपयोग किया जा सकता है। कोई बात नहीं है। एक वैश्विक महामारी के खिलाफ एहतियात के तौर पर, एक सौ प्रतिशत मास्क पहनना, हाथों को साफ रखना और लंबी दूरी बनाए रखना उचित है। इसके अलावा, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए, आपको अपने खाने की आदतों में कुछ बदलाव करने होंगे। |
ग्वालियरः ग्वालियर के जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने बीते दिनों ही सुप्रीम काेर्ट में न्यायाधीश के पद की शपथ ग्रहण की है। आपको बता दें कि चीफ जस्टिस द्वारा जितेंद्र माहेश्वरी काे शपथ दिलाई गई। आप सभी को हम यह भी जानकारी दे दें कि लगभग 12 साल बाद सुप्रीम काेर्ट में मध्यप्रदेश काे प्रतिनिधित्व मिला है। ऐसे में अब सीजेआइ आरसी लाहाैटी और अरुण मिश्रा के बाद श्री माहेश्वरी ग्वालियर से तीसरे सुप्रीम काेर्ट न्यायाधीश बनाए गए हैं। सुप्रीम काेर्ट न्यायाधीश बनने के बाद जैसे ही जितेंद्र माहेश्वरी अपने गृह नगर जौरा पहुंचने, यहाँ परिजनों के साथ समस्त गांव वालो ने उनका आत्मीय स्वागत किया और अब उस दौरान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जो आप यहाँ देख सकते हैं।
आप सभी को बता दें कि जितेंद्र माहेश्वरी ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के जौरा में जन्म लिया है और वह ग्वालियर में कानून की पढ़ाई व वकालात की प्रैक्टिस कर अब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश पद पर बैठ गए है। आप सभी को बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने हाल ही में श्री माहेश्वरी सहित नौ जजों के नामों को सिफारिश सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के लिए की थी।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने 6 जनवरी 2021 को उन्हें सिक्किम का मुख्य न्यायाधीश नामांकित किया था। जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने इससे पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मप्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में वे 25 नवंबर 2005 से 6 अक्टूबर 2019 तक करीब 14 साल न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे।
| ग्वालियरः ग्वालियर के जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने बीते दिनों ही सुप्रीम काेर्ट में न्यायाधीश के पद की शपथ ग्रहण की है। आपको बता दें कि चीफ जस्टिस द्वारा जितेंद्र माहेश्वरी काे शपथ दिलाई गई। आप सभी को हम यह भी जानकारी दे दें कि लगभग बारह साल बाद सुप्रीम काेर्ट में मध्यप्रदेश काे प्रतिनिधित्व मिला है। ऐसे में अब सीजेआइ आरसी लाहाैटी और अरुण मिश्रा के बाद श्री माहेश्वरी ग्वालियर से तीसरे सुप्रीम काेर्ट न्यायाधीश बनाए गए हैं। सुप्रीम काेर्ट न्यायाधीश बनने के बाद जैसे ही जितेंद्र माहेश्वरी अपने गृह नगर जौरा पहुंचने, यहाँ परिजनों के साथ समस्त गांव वालो ने उनका आत्मीय स्वागत किया और अब उस दौरान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जो आप यहाँ देख सकते हैं। आप सभी को बता दें कि जितेंद्र माहेश्वरी ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के जौरा में जन्म लिया है और वह ग्वालियर में कानून की पढ़ाई व वकालात की प्रैक्टिस कर अब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश पद पर बैठ गए है। आप सभी को बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने हाल ही में श्री माहेश्वरी सहित नौ जजों के नामों को सिफारिश सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के लिए की थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने छः जनवरी दो हज़ार इक्कीस को उन्हें सिक्किम का मुख्य न्यायाधीश नामांकित किया था। जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने इससे पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मप्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में वे पच्चीस नवंबर दो हज़ार पाँच से छः अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस तक करीब चौदह साल न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे। |
Ranchi : झारखंड कैडर के दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए विरमित कर दिया गया है. इनमें निदेशक, माध्यमिक शिक्षा झारखंड रांची के पद पर पदस्थापित हर्ष मंगला हैं. इन्हें पदभार त्याग करने की तिथि से निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के पद पर योगदान देने के लिए विरमित किया गया है. वहीं निदेशक, हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प झारखंड रांची के पद पर पदस्थापित दिव्यांशु झा को पदभार त्याग करने की तिथि से अवर सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के पद पर योगदान के लिए विरमित किया गया है.
दोनों अधिकारियों को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग भारत सरकार ने 6 जनवरी को पत्र लिख कर सेवा सौंपने का निर्देश दिया था. इस संबंध में शनिवार को कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है.
| Ranchi : झारखंड कैडर के दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए विरमित कर दिया गया है. इनमें निदेशक, माध्यमिक शिक्षा झारखंड रांची के पद पर पदस्थापित हर्ष मंगला हैं. इन्हें पदभार त्याग करने की तिथि से निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के पद पर योगदान देने के लिए विरमित किया गया है. वहीं निदेशक, हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प झारखंड रांची के पद पर पदस्थापित दिव्यांशु झा को पदभार त्याग करने की तिथि से अवर सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के पद पर योगदान के लिए विरमित किया गया है. दोनों अधिकारियों को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग भारत सरकार ने छः जनवरी को पत्र लिख कर सेवा सौंपने का निर्देश दिया था. इस संबंध में शनिवार को कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है. |
Jamia Millia Islamia Violence: दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट में 15 दिसंबर, 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के संबंध में स्वतंत्र जांच और एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग वाली संशोधित अर्जी का विरोध किया है।
हाई कोर्ट में दाखिल दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में कहा कि एक जनहित याचिका किसी तीसरे पक्ष की एजेंसी द्वारा न्यायिक जांच या जांच की मांग नहीं कर सकती है। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में पुलिस से उसका जवाब मांगा था। अब मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी, 2023 को होगी।
इससे पहले इस मामले में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने पहले कहा था कि इस मामले में कई प्रार्थनाएं निरर्थक हो गई हैं और याचिकाकर्ता मौद्रिक मुआवजे, एसआईटी के गठन आदि की संशोधित याचिका के माध्यम से केवल कुछ प्रार्थनाओं के लिए दबाव बना रहा है।
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 15 दिसंबर, 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) विश्वविद्यालय में हुई हिंसा से संबंधित याचिकाओं के एक बैच को दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दिया था। पीठ ने यह देखते हुए संबंधित मामलों को स्थानांतरित कर दिया कि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली पीठ पहले से ही उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की जांच कर रही है।
इस मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस पेश हुए और केंद्र सरकार (दिल्ली पुलिस) की ओर से अधिवक्ता रजत नायर पेश हुए। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह प्रस्तुत करने के बाद कि मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष वर्षों से लंबित है, दिल्ली उच्च न्यायालय से याचिका पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया था।
| Jamia Millia Islamia Violence: दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट में पंद्रह दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के संबंध में स्वतंत्र जांच और एक विशेष जांच दल के गठन की मांग वाली संशोधित अर्जी का विरोध किया है। हाई कोर्ट में दाखिल दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में कहा कि एक जनहित याचिका किसी तीसरे पक्ष की एजेंसी द्वारा न्यायिक जांच या जांच की मांग नहीं कर सकती है। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में पुलिस से उसका जवाब मांगा था। अब मामले की अगली सुनवाई बारह जनवरी, दो हज़ार तेईस को होगी। इससे पहले इस मामले में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने पहले कहा था कि इस मामले में कई प्रार्थनाएं निरर्थक हो गई हैं और याचिकाकर्ता मौद्रिक मुआवजे, एसआईटी के गठन आदि की संशोधित याचिका के माध्यम से केवल कुछ प्रार्थनाओं के लिए दबाव बना रहा है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पंद्रह दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई हिंसा से संबंधित याचिकाओं के एक बैच को दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दिया था। पीठ ने यह देखते हुए संबंधित मामलों को स्थानांतरित कर दिया कि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली पीठ पहले से ही उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की जांच कर रही है। इस मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस पेश हुए और केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रजत नायर पेश हुए। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह प्रस्तुत करने के बाद कि मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष वर्षों से लंबित है, दिल्ली उच्च न्यायालय से याचिका पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया था। |
अगर हमें कुछ शब्दों में नाग टिब्बा ट्रेक का वर्णन करना हो तो हम आपको बताना चाहेंगे कि यह छोटा, सुंदर और मजेदार है। यदि आपके पास एक या दो दिन का समय है और आप बर्फीले ट्रेक की तलाश में हैं या हिमालय में ट्रेक करना चाहते हैं, तो नाग टिब्बा आपके लिए एक अच्छा विकल्प है।
नाग टिब्बा ट्रेक उत्तराखंड में स्थित में एक आसान से मध्यम स्तर का ट्रेक (अनफिट लोगों के लिए कठिन हो सकता है) है। नाग टिब्बा के टॉप तक की एकतरफा दूरी 10 किमी है। यह ट्रेक राज्य की राजधानी देहरादून से 100 किमी दूर पंटवारी नामक गांव से शुरू होता है।
यह यात्रा मार्गदर्शिका आपको नाग टिब्बा ट्रेक के बारे में सभी आवश्यक बातें बताएगीः अपनी यात्रा की योजना कैसे बनाएं, कहां ठहरें, दूरी, और बहुत कुछ।
- नाग टिब्बा कैसे पहुंचे?
सूचनाः इस पोस्ट में कुछ लिंक हो सकते हैं। जब आप उनके माध्यम से कुछ खरीदते हैं या कोई बुकिंग करते हैं तो हमें वित्तीय सहायता मिलती हैं। वे किसी भी तरह से हमारी राय या यहां प्रस्तुत जानकारी को प्रभावित नहीं करते हैं।
यदि आप नाग टिब्बा ट्रेक करने की योजना बना रहे हैं तो यहां कुछ आवश्यक चीजें हैं जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिएः
- आप जिस महीने में जा रहे हैं, उसके आधार पर आवश्यक कपड़े पैक करें। ठंड को नजरंदाज ना करें क्योंकि आप एक गर्म क्षेत्र से आ रहे हैं।
- रास्ते के लिए कुछ एनर्जी बूस्टर खरीदें - चॉकलेट, ग्लूकोज पाउडर, या एनर्जी ड्रिंक।
- एक बोतल से अधिक पानी रखें। प्रारंभिक बिंदु और बेस कैंप के बीच पानी का केवल एक स्रोत है। हालाँकि, गर्मी के मौसम में आपको नींबू पानी बेचने वाली एक या दो दुकानें रास्ते में मिल जाएंगी।
- यदि आप एक अनुभवी ट्रेकर नहीं हैं या पहली बार आ रहे हैं, तो ट्रेक गाइड या ट्रैवल एजेंट के माध्यम से जाना अच्छा है। हमारा एक भरोसेमंद संपर्क है। यदि आप इसमें मदद चाहते हैं, तो कृपया मिसफिट वांडरर्स से संपर्क करें।
- सुनिश्चित करें कि आपके पास ट्रेकिंग के लिए कोई सपोर्ट है। या तो ट्रेकिंग पोल खरीदें या पंटवारी गांव से लकड़ी की एक स्टिक लें। आपका ट्रेक गाइड आपको बाद में इससे सम्बंधित मदद करेगा।
- इसके अलावा, यदि बर्फ है, तो कृपया गंभीर दुर्घटनाओं से बचने के लिए स्नो ट्रेकिंग शूज़ या स्नो बूट्स खरीदें। वैकल्पिक रूप से, आप उन्हें देहरादून और मसूरी से किराए पर प्राप्त कर सकते हैं।
- नाग टिब्बा ट्रेक को आसानी से कवर करने और आनंद लेने के लिए आपको कम से कम दो दिनों की आवश्यकता होगी।
शुरुआती बिंदु से पंटवारी गांव है, जहां से नाग टिब्बा ट्रेक के बेस कैंप तक की दूरी 5 किमी है। यह दूरी बाकी ट्रेक की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। आप उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हैं, इतनी खड़ी नहीं बल्कि छोटी चट्टानों, कंकड़ और अन्य जंगली वस्तुओं के साथ।
हालाँकि, आप इस पगडंडी के साथ जो परिदृश्य देखते हैं, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है। आप ग्रामीणों को नींबू पानी बेचते हुए या ऊपर से भारी सामान ढोते हुए देख सकते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि इस 5 किमी के ज्यादातर रास्ते में बैठने के लिए कोई शेड नहीं है। इसलिए यदि आप इस ट्रेक को कर रहे हैं तो अधिक गर्म होने पर पसीने से लथपथ होने के लिए तैयार रहें।
बेस कैंप तक पहुंचने के बाद, जो टॉप से 5 किमी पहले है, आपको आमतौर पर एक रात के लिए आराम करना होता हैं। और फिर अगले दिन, सुबह-सुबह, लगभग 3:30 बजे, आप उठते हैं और टॉप पर जाने के लिए ट्रेक शुरू करते हैं। यदि आप सूर्योदय नहीं देखना चाहते हैं, तो आप उसके अनुसार समय को सेट कर सकते हैं। यहां का सूर्योदय देखने का अलग ही मजा है, पर इसके लिए आपको भोर में जल्दी ट्रेक शुरू करना पड़ेगा।
टॉप से 1 किमी पहले आपको नाग देवता मंदिर दिखाई देगा। यह सांपों के देवता हैं और स्थानीय लोग अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए उनसे प्रार्थना करते हैं। इस लैंडमार्क की यात्रा करना न भूलें!
इसके अलावा, एक ऑन-डिमांड टैक्सी सेवा है जिसके बारे में अपने गाइड से संपर्क करें। आप बेस कैंप से 2 किमी दूर पंटवारी जाने और आने के लिए टैक्सी ले सकते हैं।
नाग टिब्बा ट्रेक पंटवारी गांव से शुरू होता है। तो, देहरादून से नाग टिब्बा की दूरी 100 किमी, मसूरी से 55 किमी और दिल्ली से 380 किमी है।
ऐसे जाएं नाग टिब्बा ट्रेकः
- सबसे पहले पहुंचे देहरादून पहुंचें।
- फिर पंटवारी गाँव के लिए संचालित सरकारी बस या टैक्सी की मदद लें। (आपका टूर ऑपरेटर भी इसकी व्यवस्था कर सकता है)।
- शाम तक बेस कैंप तक पहुंचने के लिए दोपहर 1 बजे या उससे पहले ट्रेक शुरू करें।
नाग टिब्बा ट्रेक की यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है। हालाँकि, यदि आप बर्फ और नाग टिब्बा को सफेद चादर में ढका हुआ देखना चाहते हैं, तो जनवरी से मार्च के बीच किसी भी महीने में जाएँ।
हम मार्च में गए थे जब दिन में बहुत गर्मी हो रही थी। लेकिन जैसे ही हम बेस कैंप से टॉप की ओर बढ़े, तापमान गिरना शुरू हो गया, और सर्द हवा हमारे गालों को छू रही थी।
यदि आकाश साफ है और चांद नहीं है, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि आप गैलेक्सी के बैंड को नग्न आंखों से देख सकते हैं। हमने इसे अपने ट्रेक के दौरान टॉप पर देखा। यह बहुत बढ़िया और बेहतरीन अनुभव था!
यदि आप एक अंतरिक्ष प्रेमी हैं या खगोलीय पिंड में रूचि रखते हैं, तो नाग टिब्बा ट्रेक के यात्रा की योजना बनाएं।
नाग टिब्बा कैसे पहुंचे?
नाग टिब्बा पहुंचने के लिए आपको उत्तराखंडी गांव पंटवारी पहुंचना होगा। इस गांव में जाने के लिए आपको देहरादून से निजी या सार्वजनिक वाहन लेना होगा। इसके अलावा, आप निम्नलिखित तरीकों का उपयोग करके देहरादून पहुंच सकते हैंः
देहरादून रेलवे स्टेशन, दिल्ली और लखनऊ सहित भारत के महत्वपूर्ण स्टेशनों से जुड़ा है। यहाँ के लिए आसानी से ट्रेन मिल जाएगी।
देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा भारत के कई हवाई अड्डों से जुड़ा है। आप देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से देहरादून के लिए कई सस्ती उड़ानें आसानी से पा सकते हैं।
उत्तराखंड परिवहन विभाग आसपास के राज्यों से और नियमित बसों का संचालन करता है। उदाहरण के लिए, आप राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से लगातार बसें पा सकते हैं। बसों का समय जानने के लिए संबंधित परिवहन विभाग के कस्टमर केयर पर कॉल करना न भूलें।
यदि आपने किसी ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से अपना ट्रेक बुक किया है, तो उनके पास पहले से ही आवास की व्यवस्था होगी। अगर आप बिना किसी ट्रैवल एजेंसी के जा रहे हैं तो आपको पंटवारी गांव और बेस कैंप में रहने की जगह मिल जाएगी।
हालांकि, किसी भी मुसीबत से बचने के लिए पहले से बुकिंग करना और ऑफ-सीजन में यात्रा करना अच्छा है। फिर से, हमारे पास भरोसेमंद संपर्क हैं, इसलिए यदि आप नाग टिब्बा ट्रेक करना चाहते हैं तो कृपया मिसफिट वांडरर्स से संपर्क करें।
तो, यह यात्रा मार्गदर्शिका आपको अपने नाग टिब्बा ट्रेक की कुशलतापूर्वक योजना बनाने में मदद करेगी। अब आप जानते हैं कि आप नाग टिब्बा तक कैसे पहुंचेंगे और आपको किन महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा, आप जानते हैं कि कौन से गैजेट और एक्सेसरीज़ आपकी मदद करेंगे।
नाग टिब्बा निचले हिमालय क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटी है और भारत में सबसे अच्छे बर्फीले ट्रेक्स में से एक है। यह न केवल प्राकृतिक नजारों की पेशकश करता है जो आपको आकर्षित करेगा, बल्कि यह भारत में सबसे आसान ट्रेक में से एक है।
हम आपके शानदार नाग टिब्बा अभियान की कामना करते हैं।
एक अपीलः कृपया कूड़े को इधर-उधर न फेंके। डस्टबिन का उपयोग करें और यदि आपको डस्टबिन नहीं मिल रहा है, तो कचरे को अपने साथ ले जाएं और जहां कूड़ेदान दिखाई दे, वहां फेंक दें। आपकी छोटी सी पहल भारत और दुनिया को स्वच्छ और हरा-भरा बना सकता है।
| अगर हमें कुछ शब्दों में नाग टिब्बा ट्रेक का वर्णन करना हो तो हम आपको बताना चाहेंगे कि यह छोटा, सुंदर और मजेदार है। यदि आपके पास एक या दो दिन का समय है और आप बर्फीले ट्रेक की तलाश में हैं या हिमालय में ट्रेक करना चाहते हैं, तो नाग टिब्बा आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। नाग टिब्बा ट्रेक उत्तराखंड में स्थित में एक आसान से मध्यम स्तर का ट्रेक है। नाग टिब्बा के टॉप तक की एकतरफा दूरी दस किमी है। यह ट्रेक राज्य की राजधानी देहरादून से एक सौ किमी दूर पंटवारी नामक गांव से शुरू होता है। यह यात्रा मार्गदर्शिका आपको नाग टिब्बा ट्रेक के बारे में सभी आवश्यक बातें बताएगीः अपनी यात्रा की योजना कैसे बनाएं, कहां ठहरें, दूरी, और बहुत कुछ। - नाग टिब्बा कैसे पहुंचे? सूचनाः इस पोस्ट में कुछ लिंक हो सकते हैं। जब आप उनके माध्यम से कुछ खरीदते हैं या कोई बुकिंग करते हैं तो हमें वित्तीय सहायता मिलती हैं। वे किसी भी तरह से हमारी राय या यहां प्रस्तुत जानकारी को प्रभावित नहीं करते हैं। यदि आप नाग टिब्बा ट्रेक करने की योजना बना रहे हैं तो यहां कुछ आवश्यक चीजें हैं जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिएः - आप जिस महीने में जा रहे हैं, उसके आधार पर आवश्यक कपड़े पैक करें। ठंड को नजरंदाज ना करें क्योंकि आप एक गर्म क्षेत्र से आ रहे हैं। - रास्ते के लिए कुछ एनर्जी बूस्टर खरीदें - चॉकलेट, ग्लूकोज पाउडर, या एनर्जी ड्रिंक। - एक बोतल से अधिक पानी रखें। प्रारंभिक बिंदु और बेस कैंप के बीच पानी का केवल एक स्रोत है। हालाँकि, गर्मी के मौसम में आपको नींबू पानी बेचने वाली एक या दो दुकानें रास्ते में मिल जाएंगी। - यदि आप एक अनुभवी ट्रेकर नहीं हैं या पहली बार आ रहे हैं, तो ट्रेक गाइड या ट्रैवल एजेंट के माध्यम से जाना अच्छा है। हमारा एक भरोसेमंद संपर्क है। यदि आप इसमें मदद चाहते हैं, तो कृपया मिसफिट वांडरर्स से संपर्क करें। - सुनिश्चित करें कि आपके पास ट्रेकिंग के लिए कोई सपोर्ट है। या तो ट्रेकिंग पोल खरीदें या पंटवारी गांव से लकड़ी की एक स्टिक लें। आपका ट्रेक गाइड आपको बाद में इससे सम्बंधित मदद करेगा। - इसके अलावा, यदि बर्फ है, तो कृपया गंभीर दुर्घटनाओं से बचने के लिए स्नो ट्रेकिंग शूज़ या स्नो बूट्स खरीदें। वैकल्पिक रूप से, आप उन्हें देहरादून और मसूरी से किराए पर प्राप्त कर सकते हैं। - नाग टिब्बा ट्रेक को आसानी से कवर करने और आनंद लेने के लिए आपको कम से कम दो दिनों की आवश्यकता होगी। शुरुआती बिंदु से पंटवारी गांव है, जहां से नाग टिब्बा ट्रेक के बेस कैंप तक की दूरी पाँच किमी है। यह दूरी बाकी ट्रेक की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। आप उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हैं, इतनी खड़ी नहीं बल्कि छोटी चट्टानों, कंकड़ और अन्य जंगली वस्तुओं के साथ। हालाँकि, आप इस पगडंडी के साथ जो परिदृश्य देखते हैं, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है। आप ग्रामीणों को नींबू पानी बेचते हुए या ऊपर से भारी सामान ढोते हुए देख सकते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि इस पाँच किमी के ज्यादातर रास्ते में बैठने के लिए कोई शेड नहीं है। इसलिए यदि आप इस ट्रेक को कर रहे हैं तो अधिक गर्म होने पर पसीने से लथपथ होने के लिए तैयार रहें। बेस कैंप तक पहुंचने के बाद, जो टॉप से पाँच किमी पहले है, आपको आमतौर पर एक रात के लिए आराम करना होता हैं। और फिर अगले दिन, सुबह-सुबह, लगभग तीन:तीस बजे, आप उठते हैं और टॉप पर जाने के लिए ट्रेक शुरू करते हैं। यदि आप सूर्योदय नहीं देखना चाहते हैं, तो आप उसके अनुसार समय को सेट कर सकते हैं। यहां का सूर्योदय देखने का अलग ही मजा है, पर इसके लिए आपको भोर में जल्दी ट्रेक शुरू करना पड़ेगा। टॉप से एक किमी पहले आपको नाग देवता मंदिर दिखाई देगा। यह सांपों के देवता हैं और स्थानीय लोग अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए उनसे प्रार्थना करते हैं। इस लैंडमार्क की यात्रा करना न भूलें! इसके अलावा, एक ऑन-डिमांड टैक्सी सेवा है जिसके बारे में अपने गाइड से संपर्क करें। आप बेस कैंप से दो किमी दूर पंटवारी जाने और आने के लिए टैक्सी ले सकते हैं। नाग टिब्बा ट्रेक पंटवारी गांव से शुरू होता है। तो, देहरादून से नाग टिब्बा की दूरी एक सौ किमी, मसूरी से पचपन किमी और दिल्ली से तीन सौ अस्सी किमी है। ऐसे जाएं नाग टिब्बा ट्रेकः - सबसे पहले पहुंचे देहरादून पहुंचें। - फिर पंटवारी गाँव के लिए संचालित सरकारी बस या टैक्सी की मदद लें। । - शाम तक बेस कैंप तक पहुंचने के लिए दोपहर एक बजे या उससे पहले ट्रेक शुरू करें। नाग टिब्बा ट्रेक की यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है। हालाँकि, यदि आप बर्फ और नाग टिब्बा को सफेद चादर में ढका हुआ देखना चाहते हैं, तो जनवरी से मार्च के बीच किसी भी महीने में जाएँ। हम मार्च में गए थे जब दिन में बहुत गर्मी हो रही थी। लेकिन जैसे ही हम बेस कैंप से टॉप की ओर बढ़े, तापमान गिरना शुरू हो गया, और सर्द हवा हमारे गालों को छू रही थी। यदि आकाश साफ है और चांद नहीं है, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि आप गैलेक्सी के बैंड को नग्न आंखों से देख सकते हैं। हमने इसे अपने ट्रेक के दौरान टॉप पर देखा। यह बहुत बढ़िया और बेहतरीन अनुभव था! यदि आप एक अंतरिक्ष प्रेमी हैं या खगोलीय पिंड में रूचि रखते हैं, तो नाग टिब्बा ट्रेक के यात्रा की योजना बनाएं। नाग टिब्बा कैसे पहुंचे? नाग टिब्बा पहुंचने के लिए आपको उत्तराखंडी गांव पंटवारी पहुंचना होगा। इस गांव में जाने के लिए आपको देहरादून से निजी या सार्वजनिक वाहन लेना होगा। इसके अलावा, आप निम्नलिखित तरीकों का उपयोग करके देहरादून पहुंच सकते हैंः देहरादून रेलवे स्टेशन, दिल्ली और लखनऊ सहित भारत के महत्वपूर्ण स्टेशनों से जुड़ा है। यहाँ के लिए आसानी से ट्रेन मिल जाएगी। देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा भारत के कई हवाई अड्डों से जुड़ा है। आप देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से देहरादून के लिए कई सस्ती उड़ानें आसानी से पा सकते हैं। उत्तराखंड परिवहन विभाग आसपास के राज्यों से और नियमित बसों का संचालन करता है। उदाहरण के लिए, आप राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से लगातार बसें पा सकते हैं। बसों का समय जानने के लिए संबंधित परिवहन विभाग के कस्टमर केयर पर कॉल करना न भूलें। यदि आपने किसी ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से अपना ट्रेक बुक किया है, तो उनके पास पहले से ही आवास की व्यवस्था होगी। अगर आप बिना किसी ट्रैवल एजेंसी के जा रहे हैं तो आपको पंटवारी गांव और बेस कैंप में रहने की जगह मिल जाएगी। हालांकि, किसी भी मुसीबत से बचने के लिए पहले से बुकिंग करना और ऑफ-सीजन में यात्रा करना अच्छा है। फिर से, हमारे पास भरोसेमंद संपर्क हैं, इसलिए यदि आप नाग टिब्बा ट्रेक करना चाहते हैं तो कृपया मिसफिट वांडरर्स से संपर्क करें। तो, यह यात्रा मार्गदर्शिका आपको अपने नाग टिब्बा ट्रेक की कुशलतापूर्वक योजना बनाने में मदद करेगी। अब आप जानते हैं कि आप नाग टिब्बा तक कैसे पहुंचेंगे और आपको किन महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा, आप जानते हैं कि कौन से गैजेट और एक्सेसरीज़ आपकी मदद करेंगे। नाग टिब्बा निचले हिमालय क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटी है और भारत में सबसे अच्छे बर्फीले ट्रेक्स में से एक है। यह न केवल प्राकृतिक नजारों की पेशकश करता है जो आपको आकर्षित करेगा, बल्कि यह भारत में सबसे आसान ट्रेक में से एक है। हम आपके शानदार नाग टिब्बा अभियान की कामना करते हैं। एक अपीलः कृपया कूड़े को इधर-उधर न फेंके। डस्टबिन का उपयोग करें और यदि आपको डस्टबिन नहीं मिल रहा है, तो कचरे को अपने साथ ले जाएं और जहां कूड़ेदान दिखाई दे, वहां फेंक दें। आपकी छोटी सी पहल भारत और दुनिया को स्वच्छ और हरा-भरा बना सकता है। |
ऐसे में रिश्ता की डोर कहीं कमजोर पड़ने लगती है। पति भी पत्नी के साथ इस तरह का बर्ताव करने लगते हैं, जहां वह तारीफ और सम्मान के लिए तरस जाती हैं। ऐसे लोगों को पंजाबी संगीतकार बी प्राक से इंस्पिरेशन लेनी चाहिए, जिन्होंने अपनी पत्नी के लिए इतने प्यारे शब्द कहे हैं, जो हर पति नहीं बोल पाता। इन दिनों सिंगर की पत्नी मीरा बच्चन दूसरी बार अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को इंजॉए कर रही हैं, जिसकी जानकारी रिसेन्टली खुद बी प्राक ने दी। जिस दौरान उन्होंने एक दिल जीत लेने वाला पोस्ट भी किया। फोटोज साभार - इंडिया टाइम्स)
दरअसल, हाल ही में बी-प्राक ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी थर्ड वेडिंग एनिवर्सरी पर अपनी पत्नी की दूसरी प्रेग्नेंसी की खबर दी थी। जिसे लेकर उन्होंने कुछ प्यारी तस्वीरों के साथ पत्नी के लिए बहुत ही खूबसूरत लाइन्स लिखी थीं। बी प्राक ने अपनी लेडीलव के लिए लिखा था, 'तू रूह है तो मैं काया बनूं ता उम्र मैं तेरा साया बनूं। हम दोनों को हैप्पी एनिवर्सरी। तुम इस दुनिया में मेरी फेवरेट इंसान हो। बेस्ट फ्रेंड और सब कुछ। बीवी मैं तुमसे प्यार की तुलना में भी बहुत प्यार करता हूं। '
बी-प्राक ने अपनी पत्नी के लिए जो बातें लिखी हैं, वह बताता है कि अगर आप अपने साथी से बिना किसी शर्त के प्यार करते हैं, तो रिश्ते की नींव हमेशा बहुत मजबूत रहती है। एक रिलेशनशिप में पति की तारीफ तो अक्सर पत्नियां करती नजर आती हैं, लेकिन खुद उन्हें प्रशंसा में बेहद कम शब्द नसीब होते हैं। ऐसे में एक महिला के तौर पर वाइफ को भी तारीफ जरूर मिलनी चाहिए, जो आपके प्रति उनके प्यार को कम नहीं होने देती है।
इस बात में कोई दोराय नहीं है कि शादी के बाद महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है। उन्हें कई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, हालांकि इस सबके बीच कई बार उन्हें ससुरालवालों से लेकर पति के ताने भी सुनने पड़ते हैं। आप वर्किंग हो या हाउसवाइफ, एक महिला से हमेशा उम्मीद की जाती है कि आप घर का पूरा काम देख लेंगी। इसी दौरान पत्नी को तारीफ तो नहीं, लेकिन ताने जरूर सुनने पड़ते हैं। अपनी हर एक रिस्पॉन्सिबिलिटी को पूरा करने के बाद भी उन्हें सुनना पड़ जाता है कि वे करती ही क्या हैं।
महान और सहनशील जैसे शब्दों को ढाल बनाकर आज भी कई लोग महिलाओं को तारीफ के काबिल नहीं समझते हैं। जबकि घर चलाने से लेकर उसे संभालने में हमेशा ही एक महिला सबसे आगे रही है। वह घर और बाहर के काम को बैलेंस कर खुद को इस तरह से ढाल लेती हैं, जिसमें दोनों को मैनेज कर सकें।
ऐसे में आपका खुलकर उनकी तारीफ करना बनता ही है। दुनिया के सामने उनकी प्रशंसा करने से आप उन्हें एहसास कराते हैं कि वह आपके लिए कितनी खास हैं। जो आपके रिश्ते को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
पत्नी की छोटी-छोटी जरूरतों को नजरअंदाज न करें, बल्कि उसे पूरा करने का प्रयास करें। आपको यह समझना होगा कि कई बार पत्नियां सोचती हैं कि उनका पार्टनर खुद से उनके मन की बातों को समझें और उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। जब आप पत्नी की बातों पर ध्यान नहीं देते और उन्हें इग्नोर करने लगते हैं तो उन्हें बुरी तरह से तकलीफ पहुंचती है।
वहीं जब आप अपनी वाइफ के लिए फिक्र दिखाते हैं और उन्हें बताते हैं कि आप कितने भी बिजी क्यों न हो, लेकिन वह आपकी पहली प्राथमिकता हैं, तो उन्हें आप पर प्यार लुटाने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसे रिश्ते हमेशा ही बहुत मजेदार बने रहते हैं।
एक रिश्ते में पति-पत्नी दोनों सम्मान के बराबरी से हकदार होते हैं। आप उन्हें अपनी मीठी बातों और अपने एक्शन्स के जरिए सम्मान दे सकते हैं। उनके विचारों को भी सुने और उनकी राय को वेल्यू करें। एक पत्नी यही चाहती है कि उसका पति उसे समझे और उसे भी रिलेशनशिप में बराबर की रिस्पेक्ट दे।
गुस्से में आकर आप कुछ ऐसा न बोल जाएं कि पत्नी का दिल बुरी तरह से दुखा दे। उन्हें नीचा दिखाने वाली बातें सिर्फ उन्हें ही हर्ट नहीं करती बल्कि रिश्ते को कमजोर भी बना देती हैं। अपनी रिलेशनशिप को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो अपनी पत्नी को कभी फॉर-ग्रांटेड न लें।
| ऐसे में रिश्ता की डोर कहीं कमजोर पड़ने लगती है। पति भी पत्नी के साथ इस तरह का बर्ताव करने लगते हैं, जहां वह तारीफ और सम्मान के लिए तरस जाती हैं। ऐसे लोगों को पंजाबी संगीतकार बी प्राक से इंस्पिरेशन लेनी चाहिए, जिन्होंने अपनी पत्नी के लिए इतने प्यारे शब्द कहे हैं, जो हर पति नहीं बोल पाता। इन दिनों सिंगर की पत्नी मीरा बच्चन दूसरी बार अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को इंजॉए कर रही हैं, जिसकी जानकारी रिसेन्टली खुद बी प्राक ने दी। जिस दौरान उन्होंने एक दिल जीत लेने वाला पोस्ट भी किया। फोटोज साभार - इंडिया टाइम्स) दरअसल, हाल ही में बी-प्राक ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी थर्ड वेडिंग एनिवर्सरी पर अपनी पत्नी की दूसरी प्रेग्नेंसी की खबर दी थी। जिसे लेकर उन्होंने कुछ प्यारी तस्वीरों के साथ पत्नी के लिए बहुत ही खूबसूरत लाइन्स लिखी थीं। बी प्राक ने अपनी लेडीलव के लिए लिखा था, 'तू रूह है तो मैं काया बनूं ता उम्र मैं तेरा साया बनूं। हम दोनों को हैप्पी एनिवर्सरी। तुम इस दुनिया में मेरी फेवरेट इंसान हो। बेस्ट फ्रेंड और सब कुछ। बीवी मैं तुमसे प्यार की तुलना में भी बहुत प्यार करता हूं। ' बी-प्राक ने अपनी पत्नी के लिए जो बातें लिखी हैं, वह बताता है कि अगर आप अपने साथी से बिना किसी शर्त के प्यार करते हैं, तो रिश्ते की नींव हमेशा बहुत मजबूत रहती है। एक रिलेशनशिप में पति की तारीफ तो अक्सर पत्नियां करती नजर आती हैं, लेकिन खुद उन्हें प्रशंसा में बेहद कम शब्द नसीब होते हैं। ऐसे में एक महिला के तौर पर वाइफ को भी तारीफ जरूर मिलनी चाहिए, जो आपके प्रति उनके प्यार को कम नहीं होने देती है। इस बात में कोई दोराय नहीं है कि शादी के बाद महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है। उन्हें कई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, हालांकि इस सबके बीच कई बार उन्हें ससुरालवालों से लेकर पति के ताने भी सुनने पड़ते हैं। आप वर्किंग हो या हाउसवाइफ, एक महिला से हमेशा उम्मीद की जाती है कि आप घर का पूरा काम देख लेंगी। इसी दौरान पत्नी को तारीफ तो नहीं, लेकिन ताने जरूर सुनने पड़ते हैं। अपनी हर एक रिस्पॉन्सिबिलिटी को पूरा करने के बाद भी उन्हें सुनना पड़ जाता है कि वे करती ही क्या हैं। महान और सहनशील जैसे शब्दों को ढाल बनाकर आज भी कई लोग महिलाओं को तारीफ के काबिल नहीं समझते हैं। जबकि घर चलाने से लेकर उसे संभालने में हमेशा ही एक महिला सबसे आगे रही है। वह घर और बाहर के काम को बैलेंस कर खुद को इस तरह से ढाल लेती हैं, जिसमें दोनों को मैनेज कर सकें। ऐसे में आपका खुलकर उनकी तारीफ करना बनता ही है। दुनिया के सामने उनकी प्रशंसा करने से आप उन्हें एहसास कराते हैं कि वह आपके लिए कितनी खास हैं। जो आपके रिश्ते को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। पत्नी की छोटी-छोटी जरूरतों को नजरअंदाज न करें, बल्कि उसे पूरा करने का प्रयास करें। आपको यह समझना होगा कि कई बार पत्नियां सोचती हैं कि उनका पार्टनर खुद से उनके मन की बातों को समझें और उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। जब आप पत्नी की बातों पर ध्यान नहीं देते और उन्हें इग्नोर करने लगते हैं तो उन्हें बुरी तरह से तकलीफ पहुंचती है। वहीं जब आप अपनी वाइफ के लिए फिक्र दिखाते हैं और उन्हें बताते हैं कि आप कितने भी बिजी क्यों न हो, लेकिन वह आपकी पहली प्राथमिकता हैं, तो उन्हें आप पर प्यार लुटाने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसे रिश्ते हमेशा ही बहुत मजेदार बने रहते हैं। एक रिश्ते में पति-पत्नी दोनों सम्मान के बराबरी से हकदार होते हैं। आप उन्हें अपनी मीठी बातों और अपने एक्शन्स के जरिए सम्मान दे सकते हैं। उनके विचारों को भी सुने और उनकी राय को वेल्यू करें। एक पत्नी यही चाहती है कि उसका पति उसे समझे और उसे भी रिलेशनशिप में बराबर की रिस्पेक्ट दे। गुस्से में आकर आप कुछ ऐसा न बोल जाएं कि पत्नी का दिल बुरी तरह से दुखा दे। उन्हें नीचा दिखाने वाली बातें सिर्फ उन्हें ही हर्ट नहीं करती बल्कि रिश्ते को कमजोर भी बना देती हैं। अपनी रिलेशनशिप को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो अपनी पत्नी को कभी फॉर-ग्रांटेड न लें। |
सोशल मीडिया एनालिटिक्स और मॉनिटरिंग टूल टाकवाकर की रिपोर्ट के अनुसार, इमाम हुसैन (अ) के चेहलुम (अरबईन) के अवसर पर इराक़ के पवित्र शहर कर्बला में अज़ादारी करने इकट्ठा हुए लाखों लोगों की ख़बर को जहां वर्ल्ड मीडिया ने नज़र अंदाज़ किया, वहीं अरबईन का टाइटल #HussainForUnity - #हुसैन हमें एकजुट करते हैं, ट्वीटर पर दूसरे नम्बर पर ट्रैंड करता रहा।
टाकवाकर का कहना है कि ट्वीटर पर #हुसैन हमें एकजुट करते हैं, 14 लाख बार ट्वीट किया गया, जिसके कारण विश्व भर में वह दूसरे नम्बर पर ट्रैंड करने लगा।
हालांकि #हुसैन हमें एकजुट करते हैं, मोहर्रम के मीहने से ही ट्वीटर पर ट्रैंड करने लगा था, लेकिन अरबईन के मौक़े पर पिछले एक हफ़्ते से 29 करोड़ एकाउंट्स पर इसे देखा गया।
इसके अलावा, एक हफ़्ते के दौरान 17 लाख लोगों ने इस हैशटैग पर अपनी प्रतिक्रिया दी। वहीं अरबईन के दिन पांच घंटे के लिए यह हैशटैग ट्वीटर पर पहले नम्बर पर ट्रैंड करता रहा।
| सोशल मीडिया एनालिटिक्स और मॉनिटरिंग टूल टाकवाकर की रिपोर्ट के अनुसार, इमाम हुसैन के चेहलुम के अवसर पर इराक़ के पवित्र शहर कर्बला में अज़ादारी करने इकट्ठा हुए लाखों लोगों की ख़बर को जहां वर्ल्ड मीडिया ने नज़र अंदाज़ किया, वहीं अरबईन का टाइटल #HussainForUnity - #हुसैन हमें एकजुट करते हैं, ट्वीटर पर दूसरे नम्बर पर ट्रैंड करता रहा। टाकवाकर का कहना है कि ट्वीटर पर #हुसैन हमें एकजुट करते हैं, चौदह लाख बार ट्वीट किया गया, जिसके कारण विश्व भर में वह दूसरे नम्बर पर ट्रैंड करने लगा। हालांकि #हुसैन हमें एकजुट करते हैं, मोहर्रम के मीहने से ही ट्वीटर पर ट्रैंड करने लगा था, लेकिन अरबईन के मौक़े पर पिछले एक हफ़्ते से उनतीस करोड़ एकाउंट्स पर इसे देखा गया। इसके अलावा, एक हफ़्ते के दौरान सत्रह लाख लोगों ने इस हैशटैग पर अपनी प्रतिक्रिया दी। वहीं अरबईन के दिन पांच घंटे के लिए यह हैशटैग ट्वीटर पर पहले नम्बर पर ट्रैंड करता रहा। |
"वंडरफुल वर्क मिस्टर रावत।" पीछे से आती हुई एक आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी और खींचा और अचानक ही में अतीत में चला गया। "वंडरफुल" कई बार कुछ शब्द कुछ लोगों से इतने जुड़े होते है की उनको सुनकर उन लोगों का स्मरण हो जाता है।
सरस्वती शांतिनिकेतन इंजीनियरिंग कॉलेज, देहरादून जहाँ से मैंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी। आज से कुछ ५-६ साल पहले की बात रही होगी। हम नए-नए ही कॉलेज में आये थे। हॉस्टल में सेटल हुए कुछ ही वक़्त हुआ था। रोज़ का रूटीन तय था। सुबह उतना तैयार होना कॉलेज जाना, लौट कर आना असाइनमेंट्स करना और सो जाना। दिन के ६ लेक्टर्स होते थे। इतने नीरस से जीवन में भी छोटी-छोटी बातें ही बड़ी दिलचस्प लगती थी। यूँ तो किसी प्रोफेसर से कोई ज्यातती दुश्मनी तो थी नहीं पर हर प्रोफेसर एक न एक कारण तो दे ही देता था उनसे गुस्सा होने का। कोई ज़रा-ज़रा सी बातों पर बिदक जाता तो कोई इतना काम दे देता करने के लिए की उनसे नफरत होना आम बात थी। ऐसे ही एक प्रोफेसर थे मार्कण्डेय पांडेय सर। वो प्रथम और द्वितीय वर्ष में भौतिकी पढ़ाया करते थे। उनसे पहली बार सामना ही बड़े अजीब तरीके से हुआ था। हम नए नए आये थे तो क्लास ढूंढना मुश्किल हो गया था और पहुंचते पहुंचते २० मिनट लेट हो चुके थे। इंजीनियरिंग में क्लासेज अटेंड करने से ज्यादा ज़रुरी अटेंडेंस होती है। कुछ प्रोफेसर्स पहले क्लास करते थे बाद में अटेंडेंस लेते थे कुछ उल्टा ही करते थे। जब हम पहुंचे तो वो रंग बिरंगी चॉक लेकर कुछ कुछ समझा रहे थे। में और मेरा दोस्त राज। हमने अंदर जाने की आज्ञा मांगी तब जाकर उनका ध्यान बोर्ड से हटकर हमारी और हुआ। देखने में औसत लम्बाई के थे गोरे से, अधेड़ उम्र के। उम्र ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था , आगे के बाल जा चुके थे सर पर एक गोलाकार जगह छोड़कर। हमारी आवाज़ सुनकर पढ़ना छोड़कर हमारी तरफ देखा और एक ऊँगली से अपना बड़ा सा आयताकार चस्मा उठा कर माथे पर चढ़ा लिया और नज़रें ऊँची करके हमे देख कर बस दो उँगलियों से क्लास में अंदर जाने का इशारा कर दिया। हम चुप-चाप चले गए। और उन्होंने अपना चस्मा ठीक करके फिर पढ़ना शुरू कर दिया। पढ़ाना हमे नहीं खुदको। इतनी धीमी आवाज़ में बोल रहे थे की प्रथम पंथी में बैठे लोग भी ना सुन पाए। बस हर थोड़ी देर में अपनी चाक कर कलर चेंज करके बोर्ड पे कुछ बनाने लगते। वो चालीस मिनट पहाड़ की तरह गुज़रे। अगर क्लास में कोई बात भी करता तो वो पलटते चिल्लाते और वापस बोर्ड की और मुड़ जाते। मैंने उतने समय में क्लास की बेंचे , कितने लोग बैठे है ये सब गिनने के बाद खिड़की के सरिये गिनना शुरू कर दिया था। फिर एक दम से वो रुके अपने हाथ में बंधी पुरानी घड़ी को देखा और मुड़कर चॉको को शालीनता से बक्से में रखने लगे। और अपनी किताबें उठाकर जाने लगे। मैं फिर उन्हें टोका और कहा "सर, अटेंडेंस ।"
वो रुके पलटे और फिर अपना चस्मा उठा कर बोले "अगली बार समय पर आना तब मिलेगी ।" और चले गए। क्या यार पूरा लेक्चर बैठे और अटेंडेंस भी न मिली। खैर कर भी क्या सकते थे। वैसे बात सिर्फ इतनी सी भी नहीं थी। मैं और राज तो थे ही आदतन आलसी। उसके बाद भी कई बार कई क्लासेस में लेट हुए थे। कई बार तो कुछ प्रोफेसर्स मान भी जाते थे पर पांडेय सर कभी नहीं। गाड़ी फिर भी चलती रही।
ऐसे ही करते करते एक महीना बीत गया। मिड-सेमेस्टर टेस्ट शुरू होकर ख़तम भी हो गए थे और रिजल्ट्स आना शुरू हो गया था। गणित में बस पार ही थे और इलेक्ट्रिकल का पेपर तो गया ही गोबर था तो उसमे उम्मीद न थी। मन तो पूरा मरियना ट्रेंच में डूब गया था। फिर आये पांडेय सर आते ही बोल पड़े "यह अब तक का मेरा सबसे ख़राब रिजल्ट रहा है। क्या कोई भी पढ़ कर गया था टेस्ट में या नहीं। " मैं फिर और ज्यादा उदास। एक एक करके नंबर बताने लगे और आंसर शीट देने लगे। जैसे ही मेरा नंबर बुलाया गया में डरते डरते उनकी टेबल की और बढ़ा। जैसे ही पास पंहुचा उन्होंने कॉपी में देखा और फिर चस्मा उठा कर मेरी और देखा और फिर कॉपी में देखने लगे। टेस्ट यूँ तो ठीक ही गया था पर जिस तरह से वो देख रहे थे मुझे लगा शहीदी दिवस तो आज ही मन जाना है। पर तभी वो ख़ुशी से बोल पड़े "वंडरफुल परफॉरमेंस। क्लास में सबसे ज्यादा नंबर तुम्हारे ही है १० में से ८। " उन्होंने ऐसे बोलै जैसे लगा किसी ने आकर बहादुरी के दो मैडल लगा दिए हो सीने पर। जिन लोगों से उम्मीद नहीं होती उन् लोगों से तारीफें पाने में जो मज़ा है वो शायद किसी और चीज़ में नहीं। शायद इश्क़ में भी नहीं। अचानक से खुद को कीमती समझने लगते है हम। खुद का होना ज़रूरी हो जाता है। उसके बाद का पूरा दिन ऐसा गुज़रा जैसे किसी ने मुँह में हेंगर लगा दिया हो। मुस्कुराहट रूक ही नहीं रही थी। उस वाक़ये के बाद दो तीन बार और ही उनके मुँह से "वंडरफुल" सुन पाया था।
खैर उस दिन के बाद वो इतने बुरे भी नहीं लगे। धीरे धीरे उनकी क्लास में ध्यान भी लगने लगा था। कारण जो भी रहा हो। धीरे धीरे सेमेस्टर भी ख़तम होने को था। एक दिन की बात है। उनकी आखिरी क्लास थी दिन की। वो फिर अपने आप को पढ़ने में लगे हुए थे और औरों के विपरीत में तो ध्यान से सुनने की कोशिश कर रहा था। तभी अचानक सर के एक सहकर्मी दौड़ते हुए आये और पांडेय सर को क्लास के बाहर बुलाया। ज्यादा कुछ पता तो नहीं चला था पर जब वो वापस क्लास के भीतर आये बड़े अलग तरीके से व्यवहार करने लगे। आमतौर पर धीरे बोलने वाले सर को पहली बार तेज़ बोलते सुना था। ऐसा लग रहा था जैसे गाला भर आया हो उनका। एक कम्पन था उनकी आवाज़ में। लिखते समय भी हाथ कपकपा रहे थे। पहली बार में उन्हें शायद इतने ज्यादा गौर से देखा होगा। हम सब सकते में थे ना जाने ऐसी क्या बात हुई थी। जो भी हो उनके लिए काफी बुरा भी लग रहा था। जैसे ही कक्षा का समय हुआ। वो धीरे से मुड़े अपना सामान बंधा और धीरे धीरे चले गए। वो पूरा दिन बस इसी सोच में गुज़रा।
उसके बाद कई दिनों तक वो नहीं दिखे फिर सेमेस्टर की परीक्षाएं भी हो गयी और छुट्टियाँ भी लग गयी। अगले सेमेस्टर जब हम कॉलेज पहुंचे तब कुछ लोगों से पूछने पर पता चला की उस दिन उनकी पत्नी का लम्बी बीमारी के बाद देहांत हो गया था। जिसके बाद वो खुद में ही होकर रह गए थे ।
उसके बाद उनका सब्जेक्ट तो आया नहीं तो फिर मुलाक़ात भी नहीं हुई। कई बार ऐसे ही क्लास के पास या हॉल में चलते हुए दिख जाते पर बातें करने की कोई वजह नहीं थी बस गुड मॉर्निंग और गुड आफ्टरनून में ही आगे बढ़ जाते।
एक दो बार वार्षिकोत्सव वगैरह में हस्ते हुए देखा होगा उसके अलावा तो नहीं।
उनसे जुडी आखरी याद बस यही थी जब अगले साल हमने स्वतंत्रता दिवस पर कॉलेज के सामने हिंदी भाषा पर नुक्कड़ किया था तब अचानक से पास में आये और "wonderful young man !" बोल कर आगे बढ़ गए। उसके बाद पढ़ाई , नौकरी की चिंता और ना जाने क्या क्या में फँस गए और फिर मुड़कर भी नहीं देखा।
आज अचानक "वंडरफुल " सुनकर उनकी याद सी आ गयी। मैं मुड़ा और हलके से मुस्कुरा दिया।
| "वंडरफुल वर्क मिस्टर रावत।" पीछे से आती हुई एक आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी और खींचा और अचानक ही में अतीत में चला गया। "वंडरफुल" कई बार कुछ शब्द कुछ लोगों से इतने जुड़े होते है की उनको सुनकर उन लोगों का स्मरण हो जाता है। सरस्वती शांतिनिकेतन इंजीनियरिंग कॉलेज, देहरादून जहाँ से मैंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी। आज से कुछ पाँच-छः साल पहले की बात रही होगी। हम नए-नए ही कॉलेज में आये थे। हॉस्टल में सेटल हुए कुछ ही वक़्त हुआ था। रोज़ का रूटीन तय था। सुबह उतना तैयार होना कॉलेज जाना, लौट कर आना असाइनमेंट्स करना और सो जाना। दिन के छः लेक्टर्स होते थे। इतने नीरस से जीवन में भी छोटी-छोटी बातें ही बड़ी दिलचस्प लगती थी। यूँ तो किसी प्रोफेसर से कोई ज्यातती दुश्मनी तो थी नहीं पर हर प्रोफेसर एक न एक कारण तो दे ही देता था उनसे गुस्सा होने का। कोई ज़रा-ज़रा सी बातों पर बिदक जाता तो कोई इतना काम दे देता करने के लिए की उनसे नफरत होना आम बात थी। ऐसे ही एक प्रोफेसर थे मार्कण्डेय पांडेय सर। वो प्रथम और द्वितीय वर्ष में भौतिकी पढ़ाया करते थे। उनसे पहली बार सामना ही बड़े अजीब तरीके से हुआ था। हम नए नए आये थे तो क्लास ढूंढना मुश्किल हो गया था और पहुंचते पहुंचते बीस मिनट लेट हो चुके थे। इंजीनियरिंग में क्लासेज अटेंड करने से ज्यादा ज़रुरी अटेंडेंस होती है। कुछ प्रोफेसर्स पहले क्लास करते थे बाद में अटेंडेंस लेते थे कुछ उल्टा ही करते थे। जब हम पहुंचे तो वो रंग बिरंगी चॉक लेकर कुछ कुछ समझा रहे थे। में और मेरा दोस्त राज। हमने अंदर जाने की आज्ञा मांगी तब जाकर उनका ध्यान बोर्ड से हटकर हमारी और हुआ। देखने में औसत लम्बाई के थे गोरे से, अधेड़ उम्र के। उम्र ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था , आगे के बाल जा चुके थे सर पर एक गोलाकार जगह छोड़कर। हमारी आवाज़ सुनकर पढ़ना छोड़कर हमारी तरफ देखा और एक ऊँगली से अपना बड़ा सा आयताकार चस्मा उठा कर माथे पर चढ़ा लिया और नज़रें ऊँची करके हमे देख कर बस दो उँगलियों से क्लास में अंदर जाने का इशारा कर दिया। हम चुप-चाप चले गए। और उन्होंने अपना चस्मा ठीक करके फिर पढ़ना शुरू कर दिया। पढ़ाना हमे नहीं खुदको। इतनी धीमी आवाज़ में बोल रहे थे की प्रथम पंथी में बैठे लोग भी ना सुन पाए। बस हर थोड़ी देर में अपनी चाक कर कलर चेंज करके बोर्ड पे कुछ बनाने लगते। वो चालीस मिनट पहाड़ की तरह गुज़रे। अगर क्लास में कोई बात भी करता तो वो पलटते चिल्लाते और वापस बोर्ड की और मुड़ जाते। मैंने उतने समय में क्लास की बेंचे , कितने लोग बैठे है ये सब गिनने के बाद खिड़की के सरिये गिनना शुरू कर दिया था। फिर एक दम से वो रुके अपने हाथ में बंधी पुरानी घड़ी को देखा और मुड़कर चॉको को शालीनता से बक्से में रखने लगे। और अपनी किताबें उठाकर जाने लगे। मैं फिर उन्हें टोका और कहा "सर, अटेंडेंस ।" वो रुके पलटे और फिर अपना चस्मा उठा कर बोले "अगली बार समय पर आना तब मिलेगी ।" और चले गए। क्या यार पूरा लेक्चर बैठे और अटेंडेंस भी न मिली। खैर कर भी क्या सकते थे। वैसे बात सिर्फ इतनी सी भी नहीं थी। मैं और राज तो थे ही आदतन आलसी। उसके बाद भी कई बार कई क्लासेस में लेट हुए थे। कई बार तो कुछ प्रोफेसर्स मान भी जाते थे पर पांडेय सर कभी नहीं। गाड़ी फिर भी चलती रही। ऐसे ही करते करते एक महीना बीत गया। मिड-सेमेस्टर टेस्ट शुरू होकर ख़तम भी हो गए थे और रिजल्ट्स आना शुरू हो गया था। गणित में बस पार ही थे और इलेक्ट्रिकल का पेपर तो गया ही गोबर था तो उसमे उम्मीद न थी। मन तो पूरा मरियना ट्रेंच में डूब गया था। फिर आये पांडेय सर आते ही बोल पड़े "यह अब तक का मेरा सबसे ख़राब रिजल्ट रहा है। क्या कोई भी पढ़ कर गया था टेस्ट में या नहीं। " मैं फिर और ज्यादा उदास। एक एक करके नंबर बताने लगे और आंसर शीट देने लगे। जैसे ही मेरा नंबर बुलाया गया में डरते डरते उनकी टेबल की और बढ़ा। जैसे ही पास पंहुचा उन्होंने कॉपी में देखा और फिर चस्मा उठा कर मेरी और देखा और फिर कॉपी में देखने लगे। टेस्ट यूँ तो ठीक ही गया था पर जिस तरह से वो देख रहे थे मुझे लगा शहीदी दिवस तो आज ही मन जाना है। पर तभी वो ख़ुशी से बोल पड़े "वंडरफुल परफॉरमेंस। क्लास में सबसे ज्यादा नंबर तुम्हारे ही है दस में से आठ। " उन्होंने ऐसे बोलै जैसे लगा किसी ने आकर बहादुरी के दो मैडल लगा दिए हो सीने पर। जिन लोगों से उम्मीद नहीं होती उन् लोगों से तारीफें पाने में जो मज़ा है वो शायद किसी और चीज़ में नहीं। शायद इश्क़ में भी नहीं। अचानक से खुद को कीमती समझने लगते है हम। खुद का होना ज़रूरी हो जाता है। उसके बाद का पूरा दिन ऐसा गुज़रा जैसे किसी ने मुँह में हेंगर लगा दिया हो। मुस्कुराहट रूक ही नहीं रही थी। उस वाक़ये के बाद दो तीन बार और ही उनके मुँह से "वंडरफुल" सुन पाया था। खैर उस दिन के बाद वो इतने बुरे भी नहीं लगे। धीरे धीरे उनकी क्लास में ध्यान भी लगने लगा था। कारण जो भी रहा हो। धीरे धीरे सेमेस्टर भी ख़तम होने को था। एक दिन की बात है। उनकी आखिरी क्लास थी दिन की। वो फिर अपने आप को पढ़ने में लगे हुए थे और औरों के विपरीत में तो ध्यान से सुनने की कोशिश कर रहा था। तभी अचानक सर के एक सहकर्मी दौड़ते हुए आये और पांडेय सर को क्लास के बाहर बुलाया। ज्यादा कुछ पता तो नहीं चला था पर जब वो वापस क्लास के भीतर आये बड़े अलग तरीके से व्यवहार करने लगे। आमतौर पर धीरे बोलने वाले सर को पहली बार तेज़ बोलते सुना था। ऐसा लग रहा था जैसे गाला भर आया हो उनका। एक कम्पन था उनकी आवाज़ में। लिखते समय भी हाथ कपकपा रहे थे। पहली बार में उन्हें शायद इतने ज्यादा गौर से देखा होगा। हम सब सकते में थे ना जाने ऐसी क्या बात हुई थी। जो भी हो उनके लिए काफी बुरा भी लग रहा था। जैसे ही कक्षा का समय हुआ। वो धीरे से मुड़े अपना सामान बंधा और धीरे धीरे चले गए। वो पूरा दिन बस इसी सोच में गुज़रा। उसके बाद कई दिनों तक वो नहीं दिखे फिर सेमेस्टर की परीक्षाएं भी हो गयी और छुट्टियाँ भी लग गयी। अगले सेमेस्टर जब हम कॉलेज पहुंचे तब कुछ लोगों से पूछने पर पता चला की उस दिन उनकी पत्नी का लम्बी बीमारी के बाद देहांत हो गया था। जिसके बाद वो खुद में ही होकर रह गए थे । उसके बाद उनका सब्जेक्ट तो आया नहीं तो फिर मुलाक़ात भी नहीं हुई। कई बार ऐसे ही क्लास के पास या हॉल में चलते हुए दिख जाते पर बातें करने की कोई वजह नहीं थी बस गुड मॉर्निंग और गुड आफ्टरनून में ही आगे बढ़ जाते। एक दो बार वार्षिकोत्सव वगैरह में हस्ते हुए देखा होगा उसके अलावा तो नहीं। उनसे जुडी आखरी याद बस यही थी जब अगले साल हमने स्वतंत्रता दिवस पर कॉलेज के सामने हिंदी भाषा पर नुक्कड़ किया था तब अचानक से पास में आये और "wonderful young man !" बोल कर आगे बढ़ गए। उसके बाद पढ़ाई , नौकरी की चिंता और ना जाने क्या क्या में फँस गए और फिर मुड़कर भी नहीं देखा। आज अचानक "वंडरफुल " सुनकर उनकी याद सी आ गयी। मैं मुड़ा और हलके से मुस्कुरा दिया। |
बॉलीवुड और पॉलीवुड की जानी मानी सिंगर नेहा कक्कड़ अकसर अपने गानों से लोगों का दिल जीत लेती है। उनकी अवाज फैंस को उनका दीवाना बना देती है। हाल ही में नेहा ने अपना एक गाना रिलीज किया है। यह गाना गजेंद्र वर्मा का हिट गाना 'तेरा घाटा' है। इस गाने को नेहा ने अपनी आवाज दी है। इस बात की जानकारी खूद नेहा ने अपने इंस्टा पर तस्वीर शेयर कर दी है। नेहा ने तस्वीर शेयर करते वक्त लिखा है- TeraGhata - My Version ☺️♥️ Go check it out on My Channel on Youtube ? NehaKakkar। गाने की वीडियो में नेहा लाइट कलर की साड़ी पहने नजर आ रही है। इस दौरान वह बेहद खूबसूरत लग रही है। फैस को उनका क्यूट और सेक्सी अंदाज बेहद पसंद है।
फिलहाल नेहा के नया गाना सुनने के बाद तो ऐसा लग रहा है कि इसे गाने को उन्होंने अपने एक्स बॉयफ्रेंड हिमांश कोहली के लिए गाया है। दरअसल, कुछ समय पहलेनेहा को लेकर खबरें आईं थी कि नेहा और हिमांश का ब्रेकअप हो गया है। यह बात नेहा के हिमांश के साथ सोशल मीडिया पर फोटो डिलीट करने पर ही कंफर्म हो गई थी। नेहा हिमांश कोहली के साथ ब्रेकअप के बाद डिप्रेशन में आ गई थी यह बात भी खुद नेहा ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर लिखा कर बताई थी 'हां, मैं डिप्रेशन में हूं। नेहा ने एक इमोशनल पोस्ट भी लिखी था जिसमें लिखा- "मुझे नहीं पता था इस दुनिया में इतने बुरे लोग भी होते हैं।
| बॉलीवुड और पॉलीवुड की जानी मानी सिंगर नेहा कक्कड़ अकसर अपने गानों से लोगों का दिल जीत लेती है। उनकी अवाज फैंस को उनका दीवाना बना देती है। हाल ही में नेहा ने अपना एक गाना रिलीज किया है। यह गाना गजेंद्र वर्मा का हिट गाना 'तेरा घाटा' है। इस गाने को नेहा ने अपनी आवाज दी है। इस बात की जानकारी खूद नेहा ने अपने इंस्टा पर तस्वीर शेयर कर दी है। नेहा ने तस्वीर शेयर करते वक्त लिखा है- TeraGhata - My Version ☺️♥️ Go check it out on My Channel on Youtube ? NehaKakkar। गाने की वीडियो में नेहा लाइट कलर की साड़ी पहने नजर आ रही है। इस दौरान वह बेहद खूबसूरत लग रही है। फैस को उनका क्यूट और सेक्सी अंदाज बेहद पसंद है। फिलहाल नेहा के नया गाना सुनने के बाद तो ऐसा लग रहा है कि इसे गाने को उन्होंने अपने एक्स बॉयफ्रेंड हिमांश कोहली के लिए गाया है। दरअसल, कुछ समय पहलेनेहा को लेकर खबरें आईं थी कि नेहा और हिमांश का ब्रेकअप हो गया है। यह बात नेहा के हिमांश के साथ सोशल मीडिया पर फोटो डिलीट करने पर ही कंफर्म हो गई थी। नेहा हिमांश कोहली के साथ ब्रेकअप के बाद डिप्रेशन में आ गई थी यह बात भी खुद नेहा ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर लिखा कर बताई थी 'हां, मैं डिप्रेशन में हूं। नेहा ने एक इमोशनल पोस्ट भी लिखी था जिसमें लिखा- "मुझे नहीं पता था इस दुनिया में इतने बुरे लोग भी होते हैं। |
Things every husband hide from his wife: नंबर 4 - सेक्स के दौरान हो रही है बोरियत महसूस।
अगर आपको ऐसा लगता है कि लड़कियों का स्वभाव समझना मुश्किल है और उनके सीक्रेट्स को कोई नहीं जान सकता तो बता दें कि रहस्य रखने में लड़के भी कुछ कम नहीं हैं। विभिन्न शोध के बाद यह बात सामने आई है कि पति अपनी पत्नी से कई बातें छिपाते हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी पत्नी उनके इन रहस्यों के बारे में जाने। तो आइए जानते हैं कौन सी हैं वे 7 बातें, जो पति अपनी पत्नी से सारी जिन्दगी छिपाते फिरते हैं।
लड़कियां अपने फिगर को लेकर चिंता में रहती हैं ये तो सब जानते हैं लेकिन लड़कों को भी अपनी बॉडी को लेकर तरह-तरह की चिताएं होती हैं, इस हकीकत से बहुत कम लड़कियां वाकिफ हैं। उनकी बॉडी उन्हें कांफिडेंस देती है और अगर ये सही ना हो तो उनका आत्मविश्वास कम होने लगता है।
शादी से पहले अगर वो पोर्न देखते थे, इस बात से लड़कियों को शायद दिक्कत ना हो लेकिन शादी के बाद पति का पोर्न देखना पत्नी को बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए पति छुप-छुप कर पोर्न देखते हैं।
कभी-कभी मास्टरबेट यानी हस्तमैथुन करने जैसी बात को पति कभी भी अपनी पत्नी को नहीं बताना चाहते हैं। इससे कहीं पत्नी को यह महसूस ना हो कि दोनों का सेक्शुअल रिश्ता फीका पड़ रहा है। इसलिए पति इस बात को छिपाकर रखते हैं।
एक समय के बाद जब बिस्तर पर अपनी पत्नी के साथ कुछ नया करने को ना मिले तो ज्यादातर पति बोरियत महसूस करने लगते हैं। लेकिन उनकी पत्नी ये जानकार गुस्से से आग बबूला ना हो जाए या उसे दुःख ना हो, इसलिए वे जाहिर नहीं करते हैं।
अब घर से बाहर ऑफिस में उनकी कोई दोस्त है जिसके साथ वे कम्फ़र्टेबल हैं और उससे फ़्लर्ट भी कर लेते हैं, ये बात बीवी को नहीं बता सकते ना। इसलिए इस बात को भी पति हमेशा छिपाते हैं।
पति को किसी बात की चिंता है, इसे वे पत्नी के सामने जाहिर नहीं होने देते हैं। खुद ही समय एक साथ परेशानी का हल निकाल लेते हैं। लेकिन अगर पत्नी को पति चिंता में दिखे तो उसे खुद ही पूछ लेना चाहिए और उसकी मदद करनी चाहिए। इस तरह दोनों में केवल पति-पत्नी नहीं, दोस्ती का रिश्ता भी बनता है।
शादी से पहले किसके साथ रिलेशनशिप में थे, ये बात पति फिर भी बता देते हैं। लेकिन उस रिश्ते में कितनी नजदीकियां थीं, इस बात को जाहिर नहीं करते हैं।
| Things every husband hide from his wife: नंबर चार - सेक्स के दौरान हो रही है बोरियत महसूस। अगर आपको ऐसा लगता है कि लड़कियों का स्वभाव समझना मुश्किल है और उनके सीक्रेट्स को कोई नहीं जान सकता तो बता दें कि रहस्य रखने में लड़के भी कुछ कम नहीं हैं। विभिन्न शोध के बाद यह बात सामने आई है कि पति अपनी पत्नी से कई बातें छिपाते हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी पत्नी उनके इन रहस्यों के बारे में जाने। तो आइए जानते हैं कौन सी हैं वे सात बातें, जो पति अपनी पत्नी से सारी जिन्दगी छिपाते फिरते हैं। लड़कियां अपने फिगर को लेकर चिंता में रहती हैं ये तो सब जानते हैं लेकिन लड़कों को भी अपनी बॉडी को लेकर तरह-तरह की चिताएं होती हैं, इस हकीकत से बहुत कम लड़कियां वाकिफ हैं। उनकी बॉडी उन्हें कांफिडेंस देती है और अगर ये सही ना हो तो उनका आत्मविश्वास कम होने लगता है। शादी से पहले अगर वो पोर्न देखते थे, इस बात से लड़कियों को शायद दिक्कत ना हो लेकिन शादी के बाद पति का पोर्न देखना पत्नी को बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए पति छुप-छुप कर पोर्न देखते हैं। कभी-कभी मास्टरबेट यानी हस्तमैथुन करने जैसी बात को पति कभी भी अपनी पत्नी को नहीं बताना चाहते हैं। इससे कहीं पत्नी को यह महसूस ना हो कि दोनों का सेक्शुअल रिश्ता फीका पड़ रहा है। इसलिए पति इस बात को छिपाकर रखते हैं। एक समय के बाद जब बिस्तर पर अपनी पत्नी के साथ कुछ नया करने को ना मिले तो ज्यादातर पति बोरियत महसूस करने लगते हैं। लेकिन उनकी पत्नी ये जानकार गुस्से से आग बबूला ना हो जाए या उसे दुःख ना हो, इसलिए वे जाहिर नहीं करते हैं। अब घर से बाहर ऑफिस में उनकी कोई दोस्त है जिसके साथ वे कम्फ़र्टेबल हैं और उससे फ़्लर्ट भी कर लेते हैं, ये बात बीवी को नहीं बता सकते ना। इसलिए इस बात को भी पति हमेशा छिपाते हैं। पति को किसी बात की चिंता है, इसे वे पत्नी के सामने जाहिर नहीं होने देते हैं। खुद ही समय एक साथ परेशानी का हल निकाल लेते हैं। लेकिन अगर पत्नी को पति चिंता में दिखे तो उसे खुद ही पूछ लेना चाहिए और उसकी मदद करनी चाहिए। इस तरह दोनों में केवल पति-पत्नी नहीं, दोस्ती का रिश्ता भी बनता है। शादी से पहले किसके साथ रिलेशनशिप में थे, ये बात पति फिर भी बता देते हैं। लेकिन उस रिश्ते में कितनी नजदीकियां थीं, इस बात को जाहिर नहीं करते हैं। |
मादक क्षण में ही जब अपनत्व और अधिकार जताने की भूखी बाँहों ने उन शरीरों को आलिंगनबद्ध कर लिया जिनकी आकृतियाँ वे भूल गए थे, तो वे लम्बे बिछोह ख़त्म हो गए जिनके बारे में लोगों का खयाल था कि वे कभी ख़त्म नहीं होंगे। रेम्बर्त को इतना वक्त ही नहीं मिला कि वह अपनी बीवी को देख सके जो उसकी तरफ़ दौड़ती भ्रा रही थी । वह आकर सीधी उसके सीने से लिपट गई थी । रेम्बर्त ने उसे अपनी बाँहों में ले लिया था और उसके सर को अपने कन्धों पर दबा रहा था । उसे सिर्फ़ अपनी प्रेयसी के परिचित केश ही दिखाई दे रहे थे, उसने अपने आँसुको मुक्त भाव से बहने दिया । वह नहीं जानता था कि ये खुशी के आँसू थे या बहुत दिनों के दबे हुए दुख के आँसू । उसे सिर्फ यही एहसास था कि आँसुओं की वजह से वह अपने को यह तसल्ली नहीं दे सकेगा कि उसके कन्धे से चिपका चेहरा सचमुच वही चेहरा था जिसके बारे में उसने बहुत बार तमन्ना की थी या वह किसी अजनबी का चेहरा था । उस क्षण तो वह अपने आसपास के लोगों की तरह ही व्यवहार करना चाहता था जिनका खयाल था कि प्लेग इन्सानों के दिलों के भीतर कोई चीज़ बदले बगैर भी आकर चली जा सकती है - अगर वे ऐसा नहीं सोचते थे तो इसका अभिनय ज़रूर कर रहे थे ।
एक-दूसरे से सटे हुए वे अपने घरों में गये, बाहर की दुनिया से आँखें मूंदकर । और ऐसा लगता था कि वे महसूस कर रहे थे कि उन्होंने प्लेग को हरा दिया है । वे हर उदासी को भूल गए थे और उन लोगों की दुर्दशा को भी भूल गए थे, जो उसी ट्रेन से आये थे, लेकिन प्लेटफॉर्म पर उनकी प्रतीक्षा करने वाला कोई नहीं था। वे घर जाकर उस भय की पुष्टि के लिए अपने को तैयार कर रहे थे जो लम्बी खामोशी ने पहले से ही उनके दिलों में पैदा कर दिया था। इन लोगों के लिए, जिनका साथी केवल सद्यजात शोक था, जो इस क्षण अपने को किसी प्रियजन की मृत्यु के शोक की आजीवन स्मृति के लिए समर्पित कर रहे थे - इन दुखी लोगों की दशा बिलकुल अलग थी। इनके विरह की कसक अपनी चरम सीमा तक जा पहुँची थी। उन माताओं, पतियों और पत्नियों के लिए, जो अपनी सारी खुशी | मादक क्षण में ही जब अपनत्व और अधिकार जताने की भूखी बाँहों ने उन शरीरों को आलिंगनबद्ध कर लिया जिनकी आकृतियाँ वे भूल गए थे, तो वे लम्बे बिछोह ख़त्म हो गए जिनके बारे में लोगों का खयाल था कि वे कभी ख़त्म नहीं होंगे। रेम्बर्त को इतना वक्त ही नहीं मिला कि वह अपनी बीवी को देख सके जो उसकी तरफ़ दौड़ती भ्रा रही थी । वह आकर सीधी उसके सीने से लिपट गई थी । रेम्बर्त ने उसे अपनी बाँहों में ले लिया था और उसके सर को अपने कन्धों पर दबा रहा था । उसे सिर्फ़ अपनी प्रेयसी के परिचित केश ही दिखाई दे रहे थे, उसने अपने आँसुको मुक्त भाव से बहने दिया । वह नहीं जानता था कि ये खुशी के आँसू थे या बहुत दिनों के दबे हुए दुख के आँसू । उसे सिर्फ यही एहसास था कि आँसुओं की वजह से वह अपने को यह तसल्ली नहीं दे सकेगा कि उसके कन्धे से चिपका चेहरा सचमुच वही चेहरा था जिसके बारे में उसने बहुत बार तमन्ना की थी या वह किसी अजनबी का चेहरा था । उस क्षण तो वह अपने आसपास के लोगों की तरह ही व्यवहार करना चाहता था जिनका खयाल था कि प्लेग इन्सानों के दिलों के भीतर कोई चीज़ बदले बगैर भी आकर चली जा सकती है - अगर वे ऐसा नहीं सोचते थे तो इसका अभिनय ज़रूर कर रहे थे । एक-दूसरे से सटे हुए वे अपने घरों में गये, बाहर की दुनिया से आँखें मूंदकर । और ऐसा लगता था कि वे महसूस कर रहे थे कि उन्होंने प्लेग को हरा दिया है । वे हर उदासी को भूल गए थे और उन लोगों की दुर्दशा को भी भूल गए थे, जो उसी ट्रेन से आये थे, लेकिन प्लेटफॉर्म पर उनकी प्रतीक्षा करने वाला कोई नहीं था। वे घर जाकर उस भय की पुष्टि के लिए अपने को तैयार कर रहे थे जो लम्बी खामोशी ने पहले से ही उनके दिलों में पैदा कर दिया था। इन लोगों के लिए, जिनका साथी केवल सद्यजात शोक था, जो इस क्षण अपने को किसी प्रियजन की मृत्यु के शोक की आजीवन स्मृति के लिए समर्पित कर रहे थे - इन दुखी लोगों की दशा बिलकुल अलग थी। इनके विरह की कसक अपनी चरम सीमा तक जा पहुँची थी। उन माताओं, पतियों और पत्नियों के लिए, जो अपनी सारी खुशी |
भैया, मुझे इनकम टैक्स सर्टिफिकेट बनवाना है।
चपरासी - अमर बाबू से मिल लीजिए।
अपने प्रेमी को फोन कर लड़की बोली - मेले बाबू,
सोना, मुझे नहीं पता है, तो इनकम टैक्स ऑफिसर है।
मेरे लिए इनकम टैक्स सर्टिफिकेट बना दो।
लड़का बेहोश!
मोनूः इंस्पेक्टर साहब, मेरी मदद कीजिए!
कोई मुझे धमकी भरे कॉल कर रहा है. . !
पुलिसवालाः कौन है वह?
फिर क्या था...हो गई जेल...!
उसने मुझसे पूछा- चाहोगे मुझे कब तक?
मैंने भी कह दिया- मेरी बीबी को पता ना चले...तब तक...!
बीबी में वो शक्ति है,
जिसके घूरने मात्र से ही...!
लौकी की सब्जी में पनीर का स्वाद आने लगता है...!
लड़की ये तो कुछ भी नहीं,
प्रेमी : ओह माय गॉड, ये तो एकदम हीरोइन है?
इससे सेंटिग करा देते, भगवान!
लड़का-क्या यूज करती है ?
| भैया, मुझे इनकम टैक्स सर्टिफिकेट बनवाना है। चपरासी - अमर बाबू से मिल लीजिए। अपने प्रेमी को फोन कर लड़की बोली - मेले बाबू, सोना, मुझे नहीं पता है, तो इनकम टैक्स ऑफिसर है। मेरे लिए इनकम टैक्स सर्टिफिकेट बना दो। लड़का बेहोश! मोनूः इंस्पेक्टर साहब, मेरी मदद कीजिए! कोई मुझे धमकी भरे कॉल कर रहा है. . ! पुलिसवालाः कौन है वह? फिर क्या था...हो गई जेल...! उसने मुझसे पूछा- चाहोगे मुझे कब तक? मैंने भी कह दिया- मेरी बीबी को पता ना चले...तब तक...! बीबी में वो शक्ति है, जिसके घूरने मात्र से ही...! लौकी की सब्जी में पनीर का स्वाद आने लगता है...! लड़की ये तो कुछ भी नहीं, प्रेमी : ओह माय गॉड, ये तो एकदम हीरोइन है? इससे सेंटिग करा देते, भगवान! लड़का-क्या यूज करती है ? |
ब्रजनिधि ग्रंथावली.
हमारी वृंदाबन रजधानी ।
निधि बन महाराज ब्रजराज लाडिलो श्रीराधा पटरानी ।। निधि बन सेवा कुंज पुलिन बंसीबट सुख-धानी । व्रजनिधि ब्रजरस सै। मन निधि पाई मनमानी ॥ ८ ॥
प्यारौ व्रज ही को सिंगार ।
मोर-पखा वा लकुट बाँसुरी गर गुंजन को हार । बन बन गोधन संग डोलिबो गोपन सौं कर यारी । सुनि सुनिकै सुख मानत मोहन ब्रजबासिन की गारी ॥ बिधि सिव सेस सनक नारद से जाको पार न पावैं ताकौ घर-बाहर ब्रज-सुंदरि नाना नाच नचावें ।। ऐसौ परम छबीला ठाकुर कहा काहि नहिं भावें । बजनिधि सोई जानिहै यह रस जाहि स्याम अपनावें ।।१०।।
आजक बानिक नई बनाई ।
छूटि रही अल कपोल पर नैन- कंज सोहत अरुनाई ।। अलसाने जाने पलक अधखुनी अति छबि छाई । बिन गुन माल बाल पहराई ब्रजनिधि कैसे छिपत छिपाई ॥ ११ ॥
उपासक नेही जग मैं थोर ।
जिनके दरस करत ही हिय में आवें साँवल-गोरे ।। यह रस अति दुर्लभ सबही तै जानि स नहिं कोरे ॥ बजनिधि कृपा पाय दंपति की जुगल रंग मैं वोरे ।।१२।।
कुतूहल होत अवधपुर ओर ।
सुर सौ बजत सरस सहनाई सुर दुंदुभि की घोर ॥ रघु-कुल- तिलक राय दसरथ के प्रगट भए रघुराई । 'कौसल्या की कूँखि सिरानी मनमानी निधि पाई ॥ कोसल देस बढ़नौ अति आनँद गावत नारि बधाए । नजनिधि खरभर परी लंक में संतन मन हुलसाए ।।१३।। जमुना तट बंसीबट-छैयाँ ठाढ़ो बेन बजावै हो हो । कोउ इक नटनागर रस-सागर गुन-आगर गुन गावै हो हो । गलबहियाँ देकै प्यारी कौ राग सुनाय रिझाव हो हो । रसिक-सिरोमनि स्यामसुंदरबर ब्रज निधि हियो सिरावै हो हो ॥ १४॥ कह्यौ कछु जाय ।
रंगमहल मैं
राधा-मोहन रहे रंग बरसाय ।।
ललिता बीन बजावत प्यारी गावत राग जमाय । नजनिधि रीझि लई वंसी तहाँ बजई सुरनि मिलाय ॥१५॥
राग सारंग ख्याल ( इकताल )
जमुना तट दोंऊ गरबहियाँ गान रंग बरसावै हो । चोपन चढ़ि चढ़ि बिपिनराज की सोभा की दुलरावै हो । बढ़ि बढ़ि मुदित प्रसंसित छवि का आनंद उर न समावै हो । व्रजनिधि सौ कछु कहि नहिं आवत देखै ही बनि आहे ॥१६॥
राग सारंग ( सुर फाख्ता चर्चरी ) मन मैं राधा-कृष्न रचाव ।
विषय- बासना अनल-ज्वाल है तास करो बचाव । सुख संपति दंपति बृदाबन वाही बुद्धि मचाव ।
धन दारा रु मित्र बंधव सो तृष्ना को जु लचाव ॥ दै कौड़ी मनि गाँठ बाँधि ले यामैं नाहि कचाव । गौर स्याम सुंदर बर सागर ता मधि तनहि जँचाव ॥ बुरी भली क्यों सहै जगत की अब जिन सीस थिचाव । ब्रजनिधि के चरना में चित दे वाही खेम पचाव ॥ १७ ॥
मन तू सुमिरि हरि को नाम ।
अर्क सुत की त्रास माहीं कृष्न रामहि काम ॥ चित्त धरि ले सुभग लीला गौर स्यामा स्याम । चरन छाया रहै निरभै हरी सीतल झाम ॥ क्लेस भव के दे अबै तू भजन की दृढ़ खाम । विषय-सुख-आसा न कर तू त्याग दुख की घाम ।। दाम एक न लगे तेरा मिले तोहि तमाम कहें ब्रजनिधि दास ले तू अटल पदवी पाम ॥ १८ ॥ राग सारंग ख्याल ( ताल होरी )
हम तो चाकर नंदकिसोर के 1
रहें सदा सनमुख रुख लीए गौरी गरब गरूर के । व्रजनिधि के संगी कहायकै अब नहि हैं और के ॥ १६ ॥
राग सारंग ख्याल ( इकताला)
प्यारी पिय महल उसीर दोऊ बिल नाना सुख के पुंजें । हिलियाँ मिलियाँ सब रंगरलियाँ कुंजन-गलियाँ अलियॉ गुंजे ।। लखिकै रसकेलि अलबेलि नवेल उभै रति-मैन भयै लुंजें । ब्रजनिधि कल कौतिकर को बरने जैसे बिहरै कुंजें कुंजें ।।२०।।
१ ) चर्क-सुत = यमराज । ( २ ) कलकौतिक = सु दर कौतुक (लीला) ।
राग सारंग ( तिताला )
ऐसी निठुराई न चहिए नवरंगी टेव परी ये कौन 1 तिहारी हँसी अरु और को मरन है सुख बरखो जू सुखभौन ॥ जानि परत चितवृत्ति कहुँ बिथुरी हमहिं गने तुम गौन । बजनिधि न उपावन तुमसों अब करिह्रै मुख मौन ।।२१।।
राग सारंग ( जल्द तिताला )
हमने नेह स्याम सो कीनो ।
जबही ते वह दुख सगरो ही सब सौतिन को दीनो ॥ अष्ट सिद्धि नव निद्धि मिली री सफल भयो अब जीनो । कोटि काम वारों ब्रजनिधि पर नैन रूप-रस पीनो ।।२२।। कृष्न कीने लालची अतिही ।
भैई बंक कमलदल लोचन खंजन मीन रहे ये कितही ॥ ब्रजनिधि नेक कृपा करि झकत अष्टसिद्धि है जितही ।।२३।।
राग सारंग ( ख्याल ताल )
राग सारंग ( बधाई ख्याल ताल )
भयो री आज मेरे मन को भायो । बड़ी बैस में महरि जसोदा सुंदर घोटा जायो ।। गोपी छबि ओपी मिलि गावत आनँद को कर लायो । धन्य भाग नँदराय महर के ब्रजनिधि गोद खिलायो ।॥२४॥
ललन को जसुमति माइ भुलावे ।
सुंदर स्याम पालने झूले गीत गाइ दुलरावे ॥ किलकि किलकि मैया तन हेरें तब हँसि कंठ लगावे । ब्रजनिधि चूमि बदन मोहन को आनँद उर न समावें ॥२५॥
राग सारंग
रस भरनो रसिया मोहन छैल ।
फागुन भागम के मिस सों री करत अनोखे फैल ।। रंग रँगीले सखन संग ले है। निकसों तब रोकत गैल । बचिए कहो कहाँ लगि सजनी व्रजनिधि करत रंग की रैल ॥२६॥
। हिय की बेदनि कहीं कौन सों जिय मेरा अकुलाइ । जाके लगी सोई पहचाने और सके नहि पाइ ॥ एक दिना है। अपने मारग चली जाति ही सहज सुभाइ । कोऊ छली छलाही मूरति छलछाया सी गयो दिखाइ ।। वा बिरियाँ की या बिरियाँ लॉ ललक लोइन ते नहिं जाइ । अधरनि धारि बाँसुरी में कछु दोना सो मोहि दियो सुनाइ ।। हितू जानि मैं तोहि सुनाई फिरि पूछे तू आगे हाइ । व्रजनिधि की सौ साँच कहति है। तब तें तन-मन गयो बिकाइ ।।२७।
बिहारनि करि राखे हरि हाथ ।
बीरी देत लिए कर में कर हँसि रहत नित साथ ।। ह्यौं तो टहल करत निज महलों हैं त्रिभुवन के नाथ । प्यारी देत रीझि ब्रजनिधि को लेत कबहुँ भरि बाथ ।।२८।।
डफ लिए गारी गा ।
दे तारी जु कहें हो हो री मोहन सनमुख धावें ॥ अंजन ऑजि गाल गुलचा दे मुख गुलाल लपटावें । ब्रजनिधि रीझि-भीजि राधे पर यह औौसर नित पावें ॥२६॥
स्बरसाने सों बनि बनि बनिता नंदगाँव को आई हो । चंग बजावत गारी गावत भारी धूम मचाई हो ॥ यह सुनि सखा संग ले निकसे सुंदर स्याम कन्हाई हो । हो हो कहि पिचकारिन-धारन रंग की झरी लगाई हो ॥ रपटि परसपर झपटि के रपटत अबिर-गुलाल उड़ाई हो । कहि भरत निसंक लाल को मुख रोरी लपटाई हो ॥ गालन के बाच्यो दे प्रीति-रीति सरसाई हो ।
मुरली लई छिनाय स्याम की कुंज-धाम गहि ल्याई हो ॥ फलवा दियो मोद करि अतिही तापहि मदन मिटाई हो । मन सो रतन दियो तब छूटे ब्रजनिधि है बलि जाई हो ।।३०।।
आली आह आहा रे होरी आई रे ।
फागुन मास सुहावनो सजनी करिहैं मन चित भाई रे ॥ हिलि मिलि चोप चौगुने चित सो रतिपति-ताप मिटाई रे । रूप सलोनो छैल सॉवरों हित की झरी लगाई रे ॥ गावत गारि कुढंगी मोहन लागत परम सुहाई रे । हैंौसन भरे द्यौस या रितु के प्रति मति रस सरसाई रे ॥ श्री ब्रजनिधि वृषभान- किसोरी जोरी यह छबि छाई रे ॥३१॥
नि हे हि को ख माहि डारी ।
गुलाल ढीठ लँगर यह नंदकुँवर ने बरजोरी कर कर ॥ सनमुख होकर मटकत है लटकावत कटि कौ । नैन नचावत मह उचकावत मुसकावत है धावत इत
फर पिचकारी ले केसरि | ब्रजनिधि ग्रंथावली. हमारी वृंदाबन रजधानी । निधि बन महाराज ब्रजराज लाडिलो श्रीराधा पटरानी ।। निधि बन सेवा कुंज पुलिन बंसीबट सुख-धानी । व्रजनिधि ब्रजरस सै। मन निधि पाई मनमानी ॥ आठ ॥ प्यारौ व्रज ही को सिंगार । मोर-पखा वा लकुट बाँसुरी गर गुंजन को हार । बन बन गोधन संग डोलिबो गोपन सौं कर यारी । सुनि सुनिकै सुख मानत मोहन ब्रजबासिन की गारी ॥ बिधि सिव सेस सनक नारद से जाको पार न पावैं ताकौ घर-बाहर ब्रज-सुंदरि नाना नाच नचावें ।। ऐसौ परम छबीला ठाकुर कहा काहि नहिं भावें । बजनिधि सोई जानिहै यह रस जाहि स्याम अपनावें ।।दस।। आजक बानिक नई बनाई । छूटि रही अल कपोल पर नैन- कंज सोहत अरुनाई ।। अलसाने जाने पलक अधखुनी अति छबि छाई । बिन गुन माल बाल पहराई ब्रजनिधि कैसे छिपत छिपाई ॥ ग्यारह ॥ उपासक नेही जग मैं थोर । जिनके दरस करत ही हिय में आवें साँवल-गोरे ।। यह रस अति दुर्लभ सबही तै जानि स नहिं कोरे ॥ बजनिधि कृपा पाय दंपति की जुगल रंग मैं वोरे ।।बारह।। कुतूहल होत अवधपुर ओर । सुर सौ बजत सरस सहनाई सुर दुंदुभि की घोर ॥ रघु-कुल- तिलक राय दसरथ के प्रगट भए रघुराई । 'कौसल्या की कूँखि सिरानी मनमानी निधि पाई ॥ कोसल देस बढ़नौ अति आनँद गावत नारि बधाए । नजनिधि खरभर परी लंक में संतन मन हुलसाए ।।तेरह।। जमुना तट बंसीबट-छैयाँ ठाढ़ो बेन बजावै हो हो । कोउ इक नटनागर रस-सागर गुन-आगर गुन गावै हो हो । गलबहियाँ देकै प्यारी कौ राग सुनाय रिझाव हो हो । रसिक-सिरोमनि स्यामसुंदरबर ब्रज निधि हियो सिरावै हो हो ॥ चौदह॥ कह्यौ कछु जाय । रंगमहल मैं राधा-मोहन रहे रंग बरसाय ।। ललिता बीन बजावत प्यारी गावत राग जमाय । नजनिधि रीझि लई वंसी तहाँ बजई सुरनि मिलाय ॥पंद्रह॥ राग सारंग ख्याल जमुना तट दोंऊ गरबहियाँ गान रंग बरसावै हो । चोपन चढ़ि चढ़ि बिपिनराज की सोभा की दुलरावै हो । बढ़ि बढ़ि मुदित प्रसंसित छवि का आनंद उर न समावै हो । व्रजनिधि सौ कछु कहि नहिं आवत देखै ही बनि आहे ॥सोलह॥ राग सारंग मन मैं राधा-कृष्न रचाव । विषय- बासना अनल-ज्वाल है तास करो बचाव । सुख संपति दंपति बृदाबन वाही बुद्धि मचाव । धन दारा रु मित्र बंधव सो तृष्ना को जु लचाव ॥ दै कौड़ी मनि गाँठ बाँधि ले यामैं नाहि कचाव । गौर स्याम सुंदर बर सागर ता मधि तनहि जँचाव ॥ बुरी भली क्यों सहै जगत की अब जिन सीस थिचाव । ब्रजनिधि के चरना में चित दे वाही खेम पचाव ॥ सत्रह ॥ मन तू सुमिरि हरि को नाम । अर्क सुत की त्रास माहीं कृष्न रामहि काम ॥ चित्त धरि ले सुभग लीला गौर स्यामा स्याम । चरन छाया रहै निरभै हरी सीतल झाम ॥ क्लेस भव के दे अबै तू भजन की दृढ़ खाम । विषय-सुख-आसा न कर तू त्याग दुख की घाम ।। दाम एक न लगे तेरा मिले तोहि तमाम कहें ब्रजनिधि दास ले तू अटल पदवी पाम ॥ अट्ठारह ॥ राग सारंग ख्याल हम तो चाकर नंदकिसोर के एक रहें सदा सनमुख रुख लीए गौरी गरब गरूर के । व्रजनिधि के संगी कहायकै अब नहि हैं और के ॥ सोलह ॥ राग सारंग ख्याल प्यारी पिय महल उसीर दोऊ बिल नाना सुख के पुंजें । हिलियाँ मिलियाँ सब रंगरलियाँ कुंजन-गलियाँ अलियॉ गुंजे ।। लखिकै रसकेलि अलबेलि नवेल उभै रति-मैन भयै लुंजें । ब्रजनिधि कल कौतिकर को बरने जैसे बिहरै कुंजें कुंजें ।।बीस।। एक ) चर्क-सुत = यमराज । कलकौतिक = सु दर कौतुक । राग सारंग ऐसी निठुराई न चहिए नवरंगी टेव परी ये कौन एक तिहारी हँसी अरु और को मरन है सुख बरखो जू सुखभौन ॥ जानि परत चितवृत्ति कहुँ बिथुरी हमहिं गने तुम गौन । बजनिधि न उपावन तुमसों अब करिह्रै मुख मौन ।।इक्कीस।। राग सारंग हमने नेह स्याम सो कीनो । जबही ते वह दुख सगरो ही सब सौतिन को दीनो ॥ अष्ट सिद्धि नव निद्धि मिली री सफल भयो अब जीनो । कोटि काम वारों ब्रजनिधि पर नैन रूप-रस पीनो ।।बाईस।। कृष्न कीने लालची अतिही । भैई बंक कमलदल लोचन खंजन मीन रहे ये कितही ॥ ब्रजनिधि नेक कृपा करि झकत अष्टसिद्धि है जितही ।।तेईस।। राग सारंग राग सारंग भयो री आज मेरे मन को भायो । बड़ी बैस में महरि जसोदा सुंदर घोटा जायो ।। गोपी छबि ओपी मिलि गावत आनँद को कर लायो । धन्य भाग नँदराय महर के ब्रजनिधि गोद खिलायो ।॥चौबीस॥ ललन को जसुमति माइ भुलावे । सुंदर स्याम पालने झूले गीत गाइ दुलरावे ॥ किलकि किलकि मैया तन हेरें तब हँसि कंठ लगावे । ब्रजनिधि चूमि बदन मोहन को आनँद उर न समावें ॥पच्चीस॥ राग सारंग रस भरनो रसिया मोहन छैल । फागुन भागम के मिस सों री करत अनोखे फैल ।। रंग रँगीले सखन संग ले है। निकसों तब रोकत गैल । बचिए कहो कहाँ लगि सजनी व्रजनिधि करत रंग की रैल ॥छब्बीस॥ । हिय की बेदनि कहीं कौन सों जिय मेरा अकुलाइ । जाके लगी सोई पहचाने और सके नहि पाइ ॥ एक दिना है। अपने मारग चली जाति ही सहज सुभाइ । कोऊ छली छलाही मूरति छलछाया सी गयो दिखाइ ।। वा बिरियाँ की या बिरियाँ लॉ ललक लोइन ते नहिं जाइ । अधरनि धारि बाँसुरी में कछु दोना सो मोहि दियो सुनाइ ।। हितू जानि मैं तोहि सुनाई फिरि पूछे तू आगे हाइ । व्रजनिधि की सौ साँच कहति है। तब तें तन-मन गयो बिकाइ ।।सत्ताईस। बिहारनि करि राखे हरि हाथ । बीरी देत लिए कर में कर हँसि रहत नित साथ ।। ह्यौं तो टहल करत निज महलों हैं त्रिभुवन के नाथ । प्यारी देत रीझि ब्रजनिधि को लेत कबहुँ भरि बाथ ।।अट्ठाईस।। डफ लिए गारी गा । दे तारी जु कहें हो हो री मोहन सनमुख धावें ॥ अंजन ऑजि गाल गुलचा दे मुख गुलाल लपटावें । ब्रजनिधि रीझि-भीजि राधे पर यह औौसर नित पावें ॥छब्बीस॥ स्बरसाने सों बनि बनि बनिता नंदगाँव को आई हो । चंग बजावत गारी गावत भारी धूम मचाई हो ॥ यह सुनि सखा संग ले निकसे सुंदर स्याम कन्हाई हो । हो हो कहि पिचकारिन-धारन रंग की झरी लगाई हो ॥ रपटि परसपर झपटि के रपटत अबिर-गुलाल उड़ाई हो । कहि भरत निसंक लाल को मुख रोरी लपटाई हो ॥ गालन के बाच्यो दे प्रीति-रीति सरसाई हो । मुरली लई छिनाय स्याम की कुंज-धाम गहि ल्याई हो ॥ फलवा दियो मोद करि अतिही तापहि मदन मिटाई हो । मन सो रतन दियो तब छूटे ब्रजनिधि है बलि जाई हो ।।तीस।। आली आह आहा रे होरी आई रे । फागुन मास सुहावनो सजनी करिहैं मन चित भाई रे ॥ हिलि मिलि चोप चौगुने चित सो रतिपति-ताप मिटाई रे । रूप सलोनो छैल सॉवरों हित की झरी लगाई रे ॥ गावत गारि कुढंगी मोहन लागत परम सुहाई रे । हैंौसन भरे द्यौस या रितु के प्रति मति रस सरसाई रे ॥ श्री ब्रजनिधि वृषभान- किसोरी जोरी यह छबि छाई रे ॥इकतीस॥ नि हे हि को ख माहि डारी । गुलाल ढीठ लँगर यह नंदकुँवर ने बरजोरी कर कर ॥ सनमुख होकर मटकत है लटकावत कटि कौ । नैन नचावत मह उचकावत मुसकावत है धावत इत फर पिचकारी ले केसरि |
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সনি परम पूज्य, प्रातः स्मरणीय, तपोनिधि, सन्मार्ग दिवाकर, चारित्र चक्रवर्ती १०८ आचार्यशत्री विमल सागरजी महाराज वर्तमान युग के प्रमुख आचार्य हैं। आचार्य परमेष्ठी पद पर विराजमान, छत्तीस मुलगुणों के धारक, रत्नत्रय के साधक, बाल-ब्रम्हचारी, परम तपस्वी, परम विद्रान, पूज्य आचार्यश्री दशक वर्षो से प्रतिष्ठित आचार्य है। चतुर्विध संघ से सुशोभित पूज्य आचार्यशी के अनेकों शिष्य पूरे भारत में आचार्य, उपाध्याय, मुनि एवं आर्थिका जैसे पावन पदों पर प्रतिष्ठित हैं तथा धर्म के प्रचार-प्रसार में अविस्मरणीय योगदान कर रहे हैं। दीक्षा और संयम की दृष्टि से आप वरिष्ठतम हैं। सत्य, अहिंसा, दया, शान्ति, संयम, अपरिग्रह एवं ब्रम्हचर्य के आप प्रतीक हैं। सूर्य सा तेज, चन्द्रमा सी शीतलता, सागर जैसी गम्भीरता, पर्वत जैसी निर्भकता आचार्यश्री का व्यक्तित्व है। वे त्याग और वैराग्य की, धर्म और अध्यात्म की, ट । की साक्षात् मूर्ति हैं। सतत साधना एवं तपश्चर्या ही आपका जीवन है। ह বিরাট 7 যলাঘিহি हैं। पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से রা बैकिंटे। आपकी प्रेरणा से कोने-कोने में अनगिनत जिन মামা निर्माण एवं जीर्णद्धार हुआ है। जिनबिम्बों পাতি পয দল্দ देने से जिनप्रतिमायें जीवित हो उठती पूज्य आचार्यश्री जैन धर्म ओर र क्च दक्षिण पूरे भारत में आचार्यश्री ने अनेकों बा मन्दिरों, पाठशालाओं, पुस्तकालयों, औषधाल की प्रतिष्ठा कराने में आचार्यश्री का परम ये নি ই। घर-घर में मन्दिर हो, सदाचार हे, शी हि রী भावना रहती है। वात्सल्यमूर्ति, करूणा सागर, लोक शर्ैथीणकारी, जगत् हितैषी, कैः सिद्ध, अत्यन्त उदार आचार्यत्री अत्यन्त लोकप्रिय हैं। आपकी आत्मा जन-जन के कद््याण मेंडसंलका॥है। आुगैका वात्सल्यभाव मानव कल्याण में हर समय अग्रसर रहता है। आप आत्म दर्शन वे হী कर्कर लोक यात्रा में संसार के अनन्त प्राणियों की अपार सहायता करते है। आत्मा ग कल्याण आपके जीवन का प्रमुख लक्ष है। आप सर्वं हितकारी है। निमित्त ज्ञानी आचार्यश्री अन्तर्दृष्टा है। आपकी अहर्निश तपस्या के प्रताप से अनगिनत लोग कृतज्ञ हो चुके है। आपकी आत्मसाधना तथा तपश्चर्या मानव कल्याण के लिए अप्रतिम वरदान है। आप मानव को सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाकर अणुब्रत धारण करने के लिए प्रेरित करते हैं। आचार्यश्री के दशन से सिद्ध तीर्थो के दर्शन का अनुभव एवं पुण्य होता है। आचार्यश्री चलते फिरते जैन तीर्थो मे सम्मेद शिखर है!
| लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश সনি परम पूज्य, प्रातः स्मरणीय, तपोनिधि, सन्मार्ग दिवाकर, चारित्र चक्रवर्ती एक सौ आठ आचार्यशत्री विमल सागरजी महाराज वर्तमान युग के प्रमुख आचार्य हैं। आचार्य परमेष्ठी पद पर विराजमान, छत्तीस मुलगुणों के धारक, रत्नत्रय के साधक, बाल-ब्रम्हचारी, परम तपस्वी, परम विद्रान, पूज्य आचार्यश्री दशक वर्षो से प्रतिष्ठित आचार्य है। चतुर्विध संघ से सुशोभित पूज्य आचार्यशी के अनेकों शिष्य पूरे भारत में आचार्य, उपाध्याय, मुनि एवं आर्थिका जैसे पावन पदों पर प्रतिष्ठित हैं तथा धर्म के प्रचार-प्रसार में अविस्मरणीय योगदान कर रहे हैं। दीक्षा और संयम की दृष्टि से आप वरिष्ठतम हैं। सत्य, अहिंसा, दया, शान्ति, संयम, अपरिग्रह एवं ब्रम्हचर्य के आप प्रतीक हैं। सूर्य सा तेज, चन्द्रमा सी शीतलता, सागर जैसी गम्भीरता, पर्वत जैसी निर्भकता आचार्यश्री का व्यक्तित्व है। वे त्याग और वैराग्य की, धर्म और अध्यात्म की, ट । की साक्षात् मूर्ति हैं। सतत साधना एवं तपश्चर्या ही आपका जीवन है। ह বিরাট सात যলাঘিহি हैं। पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से রা बैकिंटे। आपकी प्रेरणा से कोने-कोने में अनगिनत जिन মামা निर्माण एवं जीर्णद्धार हुआ है। जिनबिम्बों পাতি পয দল্দ देने से जिनप्रतिमायें जीवित हो उठती पूज्य आचार्यश्री जैन धर्म ओर र क्च दक्षिण पूरे भारत में आचार्यश्री ने अनेकों बा मन्दिरों, पाठशालाओं, पुस्तकालयों, औषधाल की प्रतिष्ठा कराने में आचार्यश्री का परम ये নি ই। घर-घर में मन्दिर हो, सदाचार हे, शी हि রী भावना रहती है। वात्सल्यमूर्ति, करूणा सागर, लोक शर्ैथीणकारी, जगत् हितैषी, कैः सिद्ध, अत्यन्त उदार आचार्यत्री अत्यन्त लोकप्रिय हैं। आपकी आत्मा जन-जन के कद््याण मेंडसंलका॥है। आुगैका वात्सल्यभाव मानव कल्याण में हर समय अग्रसर रहता है। आप आत्म दर्शन वे হী कर्कर लोक यात्रा में संसार के अनन्त प्राणियों की अपार सहायता करते है। आत्मा ग कल्याण आपके जीवन का प्रमुख लक्ष है। आप सर्वं हितकारी है। निमित्त ज्ञानी आचार्यश्री अन्तर्दृष्टा है। आपकी अहर्निश तपस्या के प्रताप से अनगिनत लोग कृतज्ञ हो चुके है। आपकी आत्मसाधना तथा तपश्चर्या मानव कल्याण के लिए अप्रतिम वरदान है। आप मानव को सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाकर अणुब्रत धारण करने के लिए प्रेरित करते हैं। आचार्यश्री के दशन से सिद्ध तीर्थो के दर्शन का अनुभव एवं पुण्य होता है। आचार्यश्री चलते फिरते जैन तीर्थो मे सम्मेद शिखर है! |
राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन कल यानि शनिवार 29 अक्टूंबर को होने जा रहा है। इस दिन से 9 दिनों तक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानिएं वहां की विशेषताएं।
राजस्थान से एक चौकाने वाला मामला सामने आयाह है। जहां नाबालिग लड़कियों को या तो दलालों द्वारा या खुद के माता् पिता के द्वारा अवैध धंधें में धकेल दिया जाता है। हाल ही केंद्र सरकार से लैटर जारी होने के बाद मचा हड़कंप।
राजस्थान के जयपुर में नौकर ने घर में काम करने वाली नौकरानी को त्यौहार मनाने के लिए घर भेज दिया था। पीछे से वह घर में अकेला था। घर में रखे 25 लाख के गहने और 20 लाख रुपये कैश लेकर फरार हो गया।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रस्ताव के बाद आज भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बयान जारी कर कहा कि लोग दिवाली पर अपनों को तोहफा देते हैं लेकिन यह राजस्थान सरकार है जो दाम बढ़ाती है ।
राजस्थान में जारी सियासी सरगर्मियों के बीच लगातार कुछ अंतराल में सरकारी अफसरों के तबादले की लिस्ट जारी हो रही है। शुक्रवार के दिन जारी हुई लिस्ट में 4 कलक्टर सहित 30 आईएएस अफसरों के हुए ट्रांसफर। वहीं जयपुर में नेहरा के नए संभागीय आयुक्त बनने से हुई हैरानी।
राजस्थान के आदिवासी इलाके बांसवाड़ा से रिश्ते को शर्मिंदा करने वाला मामला गुरुवार की रात हुआ। पत्नी से विवाद के चलते शराबी पति ने उसका खुद के साथ 2 भाईयों कराया गैंगरेप, फिर इतने में भी दिल नहीं भरा तो उसके सिर के काट दिए पूरे बाल। पीड़िता ने की शिकायत।
राजस्थान के सीकर जिले में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां विवाहिता का विवाद सुलझाने गए हैडकांस्टेबल को आरोपियों ने उसे पीटकर कमरे में किया कैद। सूचना पर पहुंचे कोतवाल ने छुड़वाया। मामले में तीन गिरफ्तार कर लिए गए है।
राजस्थान पुलिस को नया डीजीपी मिल गया है। डीजी इंटेलीजेंस उमेश मिश्रा को प्रदेश का नया पुलिस मुखिया बनाया गया है। अगले सप्ताह वे डीजीपी पद पर कार्यभार ग्रहण करेंगे।
उदयपुर में मूक-बधिर युवती के साथ रेप की वारदात सामने आई है। गिरने के बाद इलाज के लिए हॉस्पिटल जाने पर पता चला कि 5 महीने की गर्भवती युवती। पूछताछ में इशारों में बताई आपबीती। पुलिस भी एक बार को उसका बयान सुनकर मायूस हो गई। एक आरोपी हुआ अरेस्ट।
राजस्थान के अजमेर शहर में 19 साल की युवती से गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां पीड़िता के परिचित ने ही कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया। फिर तीन लोगों मिलकर बनाया हवस का शिकार, महिला के मंगेतर को वीडियो भेज दी धमकी।
| राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन कल यानि शनिवार उनतीस अक्टूंबर को होने जा रहा है। इस दिन से नौ दिनों तक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानिएं वहां की विशेषताएं। राजस्थान से एक चौकाने वाला मामला सामने आयाह है। जहां नाबालिग लड़कियों को या तो दलालों द्वारा या खुद के माता् पिता के द्वारा अवैध धंधें में धकेल दिया जाता है। हाल ही केंद्र सरकार से लैटर जारी होने के बाद मचा हड़कंप। राजस्थान के जयपुर में नौकर ने घर में काम करने वाली नौकरानी को त्यौहार मनाने के लिए घर भेज दिया था। पीछे से वह घर में अकेला था। घर में रखे पच्चीस लाख के गहने और बीस लाख रुपये कैश लेकर फरार हो गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रस्ताव के बाद आज भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बयान जारी कर कहा कि लोग दिवाली पर अपनों को तोहफा देते हैं लेकिन यह राजस्थान सरकार है जो दाम बढ़ाती है । राजस्थान में जारी सियासी सरगर्मियों के बीच लगातार कुछ अंतराल में सरकारी अफसरों के तबादले की लिस्ट जारी हो रही है। शुक्रवार के दिन जारी हुई लिस्ट में चार कलक्टर सहित तीस आईएएस अफसरों के हुए ट्रांसफर। वहीं जयपुर में नेहरा के नए संभागीय आयुक्त बनने से हुई हैरानी। राजस्थान के आदिवासी इलाके बांसवाड़ा से रिश्ते को शर्मिंदा करने वाला मामला गुरुवार की रात हुआ। पत्नी से विवाद के चलते शराबी पति ने उसका खुद के साथ दो भाईयों कराया गैंगरेप, फिर इतने में भी दिल नहीं भरा तो उसके सिर के काट दिए पूरे बाल। पीड़िता ने की शिकायत। राजस्थान के सीकर जिले में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां विवाहिता का विवाद सुलझाने गए हैडकांस्टेबल को आरोपियों ने उसे पीटकर कमरे में किया कैद। सूचना पर पहुंचे कोतवाल ने छुड़वाया। मामले में तीन गिरफ्तार कर लिए गए है। राजस्थान पुलिस को नया डीजीपी मिल गया है। डीजी इंटेलीजेंस उमेश मिश्रा को प्रदेश का नया पुलिस मुखिया बनाया गया है। अगले सप्ताह वे डीजीपी पद पर कार्यभार ग्रहण करेंगे। उदयपुर में मूक-बधिर युवती के साथ रेप की वारदात सामने आई है। गिरने के बाद इलाज के लिए हॉस्पिटल जाने पर पता चला कि पाँच महीने की गर्भवती युवती। पूछताछ में इशारों में बताई आपबीती। पुलिस भी एक बार को उसका बयान सुनकर मायूस हो गई। एक आरोपी हुआ अरेस्ट। राजस्थान के अजमेर शहर में उन्नीस साल की युवती से गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां पीड़िता के परिचित ने ही कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया। फिर तीन लोगों मिलकर बनाया हवस का शिकार, महिला के मंगेतर को वीडियो भेज दी धमकी। |
दूँगा । यह बढ़ोतरी क्यों ? किस लिए?" दूसरी ओर शिवकालीपुर का खेतिहर से जमींदार बना श्रीहरि घोष भी तैयार हो गया । वह पक्का मामलेबाज गुमाश्ता है - सदर के दीवानी कानून के बड़े वकील और प्यादा- लठैतों से लैस होकर उसने ऐलान किया, "मेरे पक्ष में कानून का सप्तसिन्धु लहराता हुआ प्रतीक्षा कर रहा है; रुपयों के जोर से समुद्र के पानी को खरीद लाकर मैं इस तुच्छ शिवकालीपुर को डुबा दूँगा । लगान-वृद्धि के मामले में मैं हाईकोर्ट तक लहँगा।" आसपास के जमींदार भी आपस में सहानुभूतिशील हो उठे। उन लोगों ने श्रीहरि को भरोसा दिया।
रथयात्रा के दूसरे दिन ।
जोरों की बारिश से वैहार पानी से भर गया । खेती का काम शुरू हुआ । रात रहते ही किसान खेतों में जा जुटे। चारों तरफ के गाँवों के बीचोंबीच खेतों में काम करते-करते ही आन्दोलन की चर्चा चल रही थी ।
पानी-भरे खेत की मेड़ काटते काटते थककर शिबू एक बार तम्बाकू पीने के लिए आ बैठा । चकमकी ठोंककर सोले की आग सुलगा चिलम भरते ही आस-पास के कई लोग आ गये। कुसुमपुर के रहम शेख ने ही पहले शुरू किया।
"चाचा, सुना तुम लोगों ने जिहाद बोल दिया ?"
शिबूदास विज्ञ की तरह जरा हँसा- "कल न्यायरत्न के यहाँ हड़ताल का ही निश्चय किया गया।"
देबू ने सब कुछ समझा दिया। उसने बार-बार बाधा - विपत्ति, दुःख कष्ट की बातें बतायीं, तो जरूर ही आएँगे । बीते सौ साल के अन्दर इसी पंचग्राम में जितनी हड़तालें हुईं, उनकी कहानियाँ कहकर बताया कि कितने किसान जमींदार के खिलाफ लड़ने में किस तरह बिलकुल तबाह हो गये । उसने साफ बताया, कानून जहाँ जमींदार के पक्ष में है, वहाँ लगान की बढ़ोतरी न देने को कहना गलत है, आईन के मुताबिक अन्याय है। रैयत और जमींदार के पैसों के जोर की बात तथा कानूनन अधिकार की याद दिलाते हुए प्रकारान्तर से उसने मना ही किया था ।
सभी हतोत्साह हो गये थे। लेकिन न्यायरन का पोता बिशू वहाँ मौजूद था। उसने हँसकर कहा, "कानून भी बदलता है, देबू भाई! पहले सरकार के मुताबिक जमीन के मालिक जमींदार थे, प्रजा को सिर्फ जोतने बोने का अधिकार था। जमीन बेचने के लिए जमींदार से खारिज - दाखिल कराकर हुक्म लेना पड़ता था। जमीन पर जो कीमती पेड़ होते थे, उनपर भी रैयत का हक नहीं होता था। लेकिन वह कानून बदल गया । लगान की बढ़ोतरी न देने की अपनी माँग को प्रजा अगर मजबूत और जोरदार बना सके, उसके लिए वाजिब दलील पेश कर सके, तो बढ़ोतरी कानून भी बदल जाएगा।"
292 : गणदेवता
इतना कहना था कि सबके मन में एक ही युक्ति फूलकर विन्ध्यपर्वत की नाईं शिखर उठाकर आकाश चूमती-सी हो उठी थी- "कहाँ से देंगे? देने से हमें बच क्या रहेगा? हम क्या खाकर जिएँगे? सरकार का ऐसा कानून न्यायसंगत कैसे हो सकता है?"
अन्धे और बूढ़े पण्डित केनाराम ने हँसकर कहा था, "लेकिन बिशू बाबू, भगवान की मार पड़े तो कौन बचा सकता है?"
बूढ़े के ऐसा कहने पर सारी सभा क्षोभ से भर गयी थी । जीव-जीवन की भौतिक प्रकृति के अनुसार एक व्यक्ति दूसरे को हटाकर शोषण करके अपने को ज्यादा ताकतवर बना लेता है । जो हारता है, शोषित होता है, वह हजारों दुःख-कष्ट झेलते हुए भी मरते दम तक छुटकारा पाने की कोशिश से बाज नहीं आता। वैसी स्थिति में वह क्षोभ या मान नहीं करता। लेकिन उसके प्रतिकार के लिए वह जिस पर निर्भर करता है, वह भी आकर यदि शोषण करनेवाले की ही मदद करे, जी-जान से छुटकारा पाने की कोशिश के लिए कलेजे पर अपनी शक्ति का दबाव डाल दे, तो शोषितों का आखिरी सहारा होता है आँसू की दो बूँदों से भीगा हुआ हृदय का क्षोभ केवल क्षोभ ही नहीं मान भी। लोगों में वही क्षोभ, वही अभिमान
जाग उठा ।
विशू ने उसपर कहा था, "भगवान अगर इन्साफ न करके मारना ही चाहे तो वैसे भगवान को बदलकर हम दूसरे भगवान की पूजा करेंगे।"
देवू सिहरकर बोल उठा था, "यह क्या कहते हो बिशू भाई! नहीं, तुम्हारे मुँह से ऐसी बात नहीं सोहाती ।"
देवू ही नहीं, सारी सभा सिहर उठी थी । लेकिन बिशू ने हँसकर कहा था, "मैं गोकुल या गोलोक के मुरलीधर या चक्रधारी भगवान की बात नहीं कर रहा हूँ देवू भाई, वे जैसे हैं, रहें माथे पर । मैं उनकी कह रहा हूँ जो कानून बनाते हैं। जो कानून बनाते हैं वे अगर हम लोगों के दुःख का खयाल न करें तो अगली बार हम उन्हें वोट नहीं देंगे । वोट तो अपने ही हाथ हैं !"
इसी वक्त न्यायरत्न आकर विश्वनाथ को बुला ले गये थे । वे बगल के ही कमरे में थे और सब सुन रहे थे । बोले, "भई, विश्वनाथ को अभी दुनिया का अनुभव नहीं है । तुम लोग उसके कहे पर कान न दो । पाँच जने मिलकर अपना भला-बुरा सोचकर जैसा समझो करो !"
विश्वनाथ के चले जाने के बावजूद घोर तर्क-कोलाहल में आखिर उन सबके हृदय की निश्चल अभिलाषा की ही जीत हुई - लगान की बढ़ोतरी नहीं देंगे । देबू ने कहा, "तो मुझे छुटकारा दो, मैं इसमें नहीं पड़ता ।" "क्यों?"
"मेरा खयाल है बढ़ोतरी नहीं देंगे यह कहना ठीक न होगा; जो वाजिब है,
गणदेवता : 293
उससे ज्यादा नहीं देंगे यही कहना ठीक है। इसके लिए हड़ताल करने की जरूरत पड़े तो मैं तैयार हूँ ।"
"लेकिन बिशू बाबू ने जो यह कहा है कि नहीं देने का आन्दोलन करने से कानून पलट जाएगा ?"
मुसकराकर देबू ने कहा, "न्यायरत्नजी ने कहा न कि बिशू को दुनिया का अनुभव नहीं है, मेरा भी वही खयाल है । बाल-बच्चेवाली घर - गिरस्ती है अपनी अगर हम शपथ खा बैठे कि बढ़ा हुआ लगान नहीं देंगे तो किसी की चुटकी भर भी जगह-जमीन नहीं रह पाएगी । हाँ, यह हो सकता है कि उसके बाद कानून बदल जाए।"
जगन ने खड़े होकर कहा, "तुम्हारी यह बात तो डरपोक - जैसी हुई। सभी जब हड़ताल करेंगे तो जमीन खरीदेगा कौन?"
"कौन खरीदेगा?" - हँसते हुए देबू ने कंकना तथा आस-पास के बाबू भैयों की याद दिला दी, जंक्शन के गद्दीवाले महाजनों की बात बता दी। इस पर जगन भी चुप होकर बैठ गया ।
आखिर सबने देबू की ही बात मानी । लेकिन साथ ही यह भी तय हुआ कि यह बात अन्दर की रही। पहले नहीं देने की ही कही जाएगी ।
शिबूदास को उस बाहर भीतर की बात का पता था, इसलिए वह विज्ञ की तरह जरा हँसा ।
"हमारी तो कल जुम्मे की नमाज है। मसजिद में ही तय होगा ।" शिबू ने पूछा, "और दौलत शेख ? शेखजी राजी हो गया ?"
दौलत शेख चमड़े का व्यापारी था, धनी आदमी। बीते दिनों के अनुभव से दौलत शेख के बारे में शिबू को सन्देह था । उसके अपने गाँव में भी ठीक वही बात हुई । भले लोग हड़ताल में शामिल होने को तैयार नहीं हुए। उनमें से ज्यादातर लोगों ने निजी तौर पर मामला- मुकदमा करने की सोच ली । किसी-किसी ने आपसी तौर पर बढ़ोतरी दे दी या देने का निश्चय कर लिया। भले लोग चूँकि अपने से खेती नहीं करते, इसलिए इन लोगों ने जमींदार की शरण ली । बढ़ोतरी पहले ही दे देने के नाते इनका भद्रता और अनुगतता का दावा भी है। ये सबके सब नौकरी-पेशा, गरीब तथा भले गृहस्थ हैं ।
रहम ने हँसकर कहा, "तेल और पानी कभी मिल सकते हैं, चाचा? शेख अलग से मुकदमा लड़ेगा । वह इन बातों में नहीं है।"
कुसुमपुर के पास ही है देखुड़िया! वहाँ का तिनकौड़ी बड़ा जाबिर आदमी है। अपने इसी जाबिरपने के कारण वह करीब-करीब तबाह हो चुका है। और अब दूसरे लोगों का खेत बटाईदारी में जोतता है। शिवकालीपुर में ही कंकना के एक बाबू का खेत जोतने आया था वह । बोला, "हमारे गाँव के साले लोग अभी भी गुजुर-गुजुर
294 : गणदेवता | दूँगा । यह बढ़ोतरी क्यों ? किस लिए?" दूसरी ओर शिवकालीपुर का खेतिहर से जमींदार बना श्रीहरि घोष भी तैयार हो गया । वह पक्का मामलेबाज गुमाश्ता है - सदर के दीवानी कानून के बड़े वकील और प्यादा- लठैतों से लैस होकर उसने ऐलान किया, "मेरे पक्ष में कानून का सप्तसिन्धु लहराता हुआ प्रतीक्षा कर रहा है; रुपयों के जोर से समुद्र के पानी को खरीद लाकर मैं इस तुच्छ शिवकालीपुर को डुबा दूँगा । लगान-वृद्धि के मामले में मैं हाईकोर्ट तक लहँगा।" आसपास के जमींदार भी आपस में सहानुभूतिशील हो उठे। उन लोगों ने श्रीहरि को भरोसा दिया। रथयात्रा के दूसरे दिन । जोरों की बारिश से वैहार पानी से भर गया । खेती का काम शुरू हुआ । रात रहते ही किसान खेतों में जा जुटे। चारों तरफ के गाँवों के बीचोंबीच खेतों में काम करते-करते ही आन्दोलन की चर्चा चल रही थी । पानी-भरे खेत की मेड़ काटते काटते थककर शिबू एक बार तम्बाकू पीने के लिए आ बैठा । चकमकी ठोंककर सोले की आग सुलगा चिलम भरते ही आस-पास के कई लोग आ गये। कुसुमपुर के रहम शेख ने ही पहले शुरू किया। "चाचा, सुना तुम लोगों ने जिहाद बोल दिया ?" शिबूदास विज्ञ की तरह जरा हँसा- "कल न्यायरत्न के यहाँ हड़ताल का ही निश्चय किया गया।" देबू ने सब कुछ समझा दिया। उसने बार-बार बाधा - विपत्ति, दुःख कष्ट की बातें बतायीं, तो जरूर ही आएँगे । बीते सौ साल के अन्दर इसी पंचग्राम में जितनी हड़तालें हुईं, उनकी कहानियाँ कहकर बताया कि कितने किसान जमींदार के खिलाफ लड़ने में किस तरह बिलकुल तबाह हो गये । उसने साफ बताया, कानून जहाँ जमींदार के पक्ष में है, वहाँ लगान की बढ़ोतरी न देने को कहना गलत है, आईन के मुताबिक अन्याय है। रैयत और जमींदार के पैसों के जोर की बात तथा कानूनन अधिकार की याद दिलाते हुए प्रकारान्तर से उसने मना ही किया था । सभी हतोत्साह हो गये थे। लेकिन न्यायरन का पोता बिशू वहाँ मौजूद था। उसने हँसकर कहा, "कानून भी बदलता है, देबू भाई! पहले सरकार के मुताबिक जमीन के मालिक जमींदार थे, प्रजा को सिर्फ जोतने बोने का अधिकार था। जमीन बेचने के लिए जमींदार से खारिज - दाखिल कराकर हुक्म लेना पड़ता था। जमीन पर जो कीमती पेड़ होते थे, उनपर भी रैयत का हक नहीं होता था। लेकिन वह कानून बदल गया । लगान की बढ़ोतरी न देने की अपनी माँग को प्रजा अगर मजबूत और जोरदार बना सके, उसके लिए वाजिब दलील पेश कर सके, तो बढ़ोतरी कानून भी बदल जाएगा।" दो सौ बानवे : गणदेवता इतना कहना था कि सबके मन में एक ही युक्ति फूलकर विन्ध्यपर्वत की नाईं शिखर उठाकर आकाश चूमती-सी हो उठी थी- "कहाँ से देंगे? देने से हमें बच क्या रहेगा? हम क्या खाकर जिएँगे? सरकार का ऐसा कानून न्यायसंगत कैसे हो सकता है?" अन्धे और बूढ़े पण्डित केनाराम ने हँसकर कहा था, "लेकिन बिशू बाबू, भगवान की मार पड़े तो कौन बचा सकता है?" बूढ़े के ऐसा कहने पर सारी सभा क्षोभ से भर गयी थी । जीव-जीवन की भौतिक प्रकृति के अनुसार एक व्यक्ति दूसरे को हटाकर शोषण करके अपने को ज्यादा ताकतवर बना लेता है । जो हारता है, शोषित होता है, वह हजारों दुःख-कष्ट झेलते हुए भी मरते दम तक छुटकारा पाने की कोशिश से बाज नहीं आता। वैसी स्थिति में वह क्षोभ या मान नहीं करता। लेकिन उसके प्रतिकार के लिए वह जिस पर निर्भर करता है, वह भी आकर यदि शोषण करनेवाले की ही मदद करे, जी-जान से छुटकारा पाने की कोशिश के लिए कलेजे पर अपनी शक्ति का दबाव डाल दे, तो शोषितों का आखिरी सहारा होता है आँसू की दो बूँदों से भीगा हुआ हृदय का क्षोभ केवल क्षोभ ही नहीं मान भी। लोगों में वही क्षोभ, वही अभिमान जाग उठा । विशू ने उसपर कहा था, "भगवान अगर इन्साफ न करके मारना ही चाहे तो वैसे भगवान को बदलकर हम दूसरे भगवान की पूजा करेंगे।" देवू सिहरकर बोल उठा था, "यह क्या कहते हो बिशू भाई! नहीं, तुम्हारे मुँह से ऐसी बात नहीं सोहाती ।" देवू ही नहीं, सारी सभा सिहर उठी थी । लेकिन बिशू ने हँसकर कहा था, "मैं गोकुल या गोलोक के मुरलीधर या चक्रधारी भगवान की बात नहीं कर रहा हूँ देवू भाई, वे जैसे हैं, रहें माथे पर । मैं उनकी कह रहा हूँ जो कानून बनाते हैं। जो कानून बनाते हैं वे अगर हम लोगों के दुःख का खयाल न करें तो अगली बार हम उन्हें वोट नहीं देंगे । वोट तो अपने ही हाथ हैं !" इसी वक्त न्यायरत्न आकर विश्वनाथ को बुला ले गये थे । वे बगल के ही कमरे में थे और सब सुन रहे थे । बोले, "भई, विश्वनाथ को अभी दुनिया का अनुभव नहीं है । तुम लोग उसके कहे पर कान न दो । पाँच जने मिलकर अपना भला-बुरा सोचकर जैसा समझो करो !" विश्वनाथ के चले जाने के बावजूद घोर तर्क-कोलाहल में आखिर उन सबके हृदय की निश्चल अभिलाषा की ही जीत हुई - लगान की बढ़ोतरी नहीं देंगे । देबू ने कहा, "तो मुझे छुटकारा दो, मैं इसमें नहीं पड़ता ।" "क्यों?" "मेरा खयाल है बढ़ोतरी नहीं देंगे यह कहना ठीक न होगा; जो वाजिब है, गणदेवता : दो सौ तिरानवे उससे ज्यादा नहीं देंगे यही कहना ठीक है। इसके लिए हड़ताल करने की जरूरत पड़े तो मैं तैयार हूँ ।" "लेकिन बिशू बाबू ने जो यह कहा है कि नहीं देने का आन्दोलन करने से कानून पलट जाएगा ?" मुसकराकर देबू ने कहा, "न्यायरत्नजी ने कहा न कि बिशू को दुनिया का अनुभव नहीं है, मेरा भी वही खयाल है । बाल-बच्चेवाली घर - गिरस्ती है अपनी अगर हम शपथ खा बैठे कि बढ़ा हुआ लगान नहीं देंगे तो किसी की चुटकी भर भी जगह-जमीन नहीं रह पाएगी । हाँ, यह हो सकता है कि उसके बाद कानून बदल जाए।" जगन ने खड़े होकर कहा, "तुम्हारी यह बात तो डरपोक - जैसी हुई। सभी जब हड़ताल करेंगे तो जमीन खरीदेगा कौन?" "कौन खरीदेगा?" - हँसते हुए देबू ने कंकना तथा आस-पास के बाबू भैयों की याद दिला दी, जंक्शन के गद्दीवाले महाजनों की बात बता दी। इस पर जगन भी चुप होकर बैठ गया । आखिर सबने देबू की ही बात मानी । लेकिन साथ ही यह भी तय हुआ कि यह बात अन्दर की रही। पहले नहीं देने की ही कही जाएगी । शिबूदास को उस बाहर भीतर की बात का पता था, इसलिए वह विज्ञ की तरह जरा हँसा । "हमारी तो कल जुम्मे की नमाज है। मसजिद में ही तय होगा ।" शिबू ने पूछा, "और दौलत शेख ? शेखजी राजी हो गया ?" दौलत शेख चमड़े का व्यापारी था, धनी आदमी। बीते दिनों के अनुभव से दौलत शेख के बारे में शिबू को सन्देह था । उसके अपने गाँव में भी ठीक वही बात हुई । भले लोग हड़ताल में शामिल होने को तैयार नहीं हुए। उनमें से ज्यादातर लोगों ने निजी तौर पर मामला- मुकदमा करने की सोच ली । किसी-किसी ने आपसी तौर पर बढ़ोतरी दे दी या देने का निश्चय कर लिया। भले लोग चूँकि अपने से खेती नहीं करते, इसलिए इन लोगों ने जमींदार की शरण ली । बढ़ोतरी पहले ही दे देने के नाते इनका भद्रता और अनुगतता का दावा भी है। ये सबके सब नौकरी-पेशा, गरीब तथा भले गृहस्थ हैं । रहम ने हँसकर कहा, "तेल और पानी कभी मिल सकते हैं, चाचा? शेख अलग से मुकदमा लड़ेगा । वह इन बातों में नहीं है।" कुसुमपुर के पास ही है देखुड़िया! वहाँ का तिनकौड़ी बड़ा जाबिर आदमी है। अपने इसी जाबिरपने के कारण वह करीब-करीब तबाह हो चुका है। और अब दूसरे लोगों का खेत बटाईदारी में जोतता है। शिवकालीपुर में ही कंकना के एक बाबू का खेत जोतने आया था वह । बोला, "हमारे गाँव के साले लोग अभी भी गुजुर-गुजुर दो सौ चौरानवे : गणदेवता |
टीवी9 भारतवर्ष के राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रियंका गांधी से जुड़े सवाल पर कपिल सिब्बल भड़क गए और बोले- एक बहन अपने भाई की मदद कर रही है, इसमें आपको दिक्कत क्या है? यहां तक तो सब ठीक रहा, लेकिन इसके आगे कपिल सिब्बल बिफर पड़े.
नई दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल टीवी9भारतवर्ष के राष्ट्रीय सम्मेलन में वंशवाद के सवाल भड़क गए. कपिल सिब्बल से सवाल पूछा गया था कि प्रियंका गांधी के आने से यूपी में कितना फायदा होगा.
इसी बीच ऑडियंस में बैठे सीनियर जर्नलिस्ट अशोक वानखेड़े ने वंशवाद पर कपिल सिब्बल से चुभता हुआ सवाल पूछा. अशोक वानखेड़े ने सवाल दागा, 'राहुल गांधी जब नए-नए राजनीति में आए तो कॉलेजों में भाषण दे रहे थे, तब वह बार-बार कह रहे थे कि कांग्रेस में वंशवाद खत्म हो गया. इसके बाद आप प्रियंका को लेकर आते हैं. जब कांग्रेस बनी तब गांधी परिवार की नहीं थी, इस देश में पूरा आंदोलन कांग्रेस के साथ था. क्या ये वंशवाद नहीं है?' इस सवाल पर कपिल सिब्बल भड़क गए.
इस बीच एक शख्स ऑडियंस में से बोला और अशोक वानखेड़े के सवाल पर आपत्ति जताई. इस पर अशोक वानखेड़े ने कहा कि क्या आजकल नेता बाउंसर लेकर आ रहे हैं क्या.
कपिल सिब्बल ने अशोक वानखेड़े के सवाल पर आगे कहा, 'मुझे लगता है ये प्लांटेड पीपुल (उनका इशारा अशोक वानखेड़े की तरफ था).' इस पर कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने कपिल सिब्बल को काउंटर किया. उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल जी अशोक वानखेड़े पत्रकार हैं. हमने राजनाथ जी से भी सवाल पूछे. इसी तरह तालियां बजी थीं.
कपिल सिब्बल और भड़क गए, उन्होंने कहा कि जब आप सवाल पूछते हो कि वहां से तालियां बजती हैं.
| टीवीनौ भारतवर्ष के राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रियंका गांधी से जुड़े सवाल पर कपिल सिब्बल भड़क गए और बोले- एक बहन अपने भाई की मदद कर रही है, इसमें आपको दिक्कत क्या है? यहां तक तो सब ठीक रहा, लेकिन इसके आगे कपिल सिब्बल बिफर पड़े. नई दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल टीवीनौभारतवर्ष के राष्ट्रीय सम्मेलन में वंशवाद के सवाल भड़क गए. कपिल सिब्बल से सवाल पूछा गया था कि प्रियंका गांधी के आने से यूपी में कितना फायदा होगा. इसी बीच ऑडियंस में बैठे सीनियर जर्नलिस्ट अशोक वानखेड़े ने वंशवाद पर कपिल सिब्बल से चुभता हुआ सवाल पूछा. अशोक वानखेड़े ने सवाल दागा, 'राहुल गांधी जब नए-नए राजनीति में आए तो कॉलेजों में भाषण दे रहे थे, तब वह बार-बार कह रहे थे कि कांग्रेस में वंशवाद खत्म हो गया. इसके बाद आप प्रियंका को लेकर आते हैं. जब कांग्रेस बनी तब गांधी परिवार की नहीं थी, इस देश में पूरा आंदोलन कांग्रेस के साथ था. क्या ये वंशवाद नहीं है?' इस सवाल पर कपिल सिब्बल भड़क गए. इस बीच एक शख्स ऑडियंस में से बोला और अशोक वानखेड़े के सवाल पर आपत्ति जताई. इस पर अशोक वानखेड़े ने कहा कि क्या आजकल नेता बाउंसर लेकर आ रहे हैं क्या. कपिल सिब्बल ने अशोक वानखेड़े के सवाल पर आगे कहा, 'मुझे लगता है ये प्लांटेड पीपुल .' इस पर कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने कपिल सिब्बल को काउंटर किया. उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल जी अशोक वानखेड़े पत्रकार हैं. हमने राजनाथ जी से भी सवाल पूछे. इसी तरह तालियां बजी थीं. कपिल सिब्बल और भड़क गए, उन्होंने कहा कि जब आप सवाल पूछते हो कि वहां से तालियां बजती हैं. |
'मीडिया अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उस सच को दिखा रही है जो दरअसल घटा ही नहीं। अकसर बात का बतंगड़ बना देता है मीडिया। आपने क्या कहा और मीडिया ने उसे क्या बता दिया, इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर होता है। ' हिंदी दैनिक अखबार हरिभूमि में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहा वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैंः
समाचार4मीडिया ब्यूरो : ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजिंग एजेंसी और एडवर्टाइजर्स द्वारा गठित टेलिविजन रेटिंग कंपनी BARC India और नीलसन व कंटार का संयुक्त उद्यम TAM India (Television Audience Measurement) ने गुरुवार को साथ मिलकर एक नई मीटर मैनेजमेंट कंपनी बनाने के घोषणा की है। यह कंपनी बार्क इंडिया को दर्शकों के रॉ डाटा (कच्चे आंकड़े)
| 'मीडिया अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उस सच को दिखा रही है जो दरअसल घटा ही नहीं। अकसर बात का बतंगड़ बना देता है मीडिया। आपने क्या कहा और मीडिया ने उसे क्या बता दिया, इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर होता है। ' हिंदी दैनिक अखबार हरिभूमि में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहा वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैंः समाचारचारमीडिया ब्यूरो : ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजिंग एजेंसी और एडवर्टाइजर्स द्वारा गठित टेलिविजन रेटिंग कंपनी BARC India और नीलसन व कंटार का संयुक्त उद्यम TAM India ने गुरुवार को साथ मिलकर एक नई मीटर मैनेजमेंट कंपनी बनाने के घोषणा की है। यह कंपनी बार्क इंडिया को दर्शकों के रॉ डाटा |
कहते हैं, युधिष्ठिर ने वैसाही किया और परिणाम में महाभारतका युद्ध होकर पाण्डवों की विजय हुई। उन्हें सारे संसार का राज्य मिला और निष्कण्टक होकर बहुत दिनों तक वे राज्य करते रहे ।
वैकुण्ठ चतुर्दशी
कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को वैकुण्ठ चतुर्दशी कहते हैं । इस दिन दिनभर उपवास करके प्रथम विष्णु का और फिर शिव का पूजन यथा विधि करना चाहिए । फिर प्रातःकाल कमल-पुष्पों के द्वारा शिव जी को प्रसन्न करना चाहिए ।
यह व्रत लोक में बहुत प्रसिद्ध नहीं है। जहाँ तहाँ यह व्रत होता है। इसे जानते भी बहुत कम लोग हैं ।
कहते हैं, एक बार शिवजी की पूजा करने की इच्छा से विष्णु भगवान काशी में आये । प्रातःकाल उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर गंगा स्नान किया और फिर एकहज़ार सुनहले कमल के फूल लेकर वे शिवकी पूजा करने. के लिए चले। पहले उन्होंने शिव और पार्वती को गंगाजल से स्नान कराया और फिर गिन-गिन कर फूलों को चढ़ाने लगे । जब सब फूल खतम हो गये, तो उन्हें मालूम पड़ा कि एक फूल कम हो गया है। वे बड़े चिन्तित हुए । हजार फूल चढ़ाने का वे संकल्प कर चुके थे । लाचार होकर उन्होंने फूल के बदले में अपनी एक आँख निकाल कर ७१
चढ़ायी । सोचा- मुझे भी तो लोग पुण्डरीकाक्ष कहते ही हैं। शिवजी ने जब विष्णु की यह भक्ति देखी तो बड़े प्रसन्न हुए। बोले- मैं आपकी भक्ति से प्रसन्न हूँ। आपकी परीक्षा लेने के लिये मैंने ही एक फूल छिपा लिया था । आप परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं अतः मैं आपको त्रिलोकी का राज्य देता हूँ। आप इसका योग्यता पूर्वक पालन करें, और जिसकी जरूरत हो वह भी मुझसे कहें। विष्णु ने कहा - त्रिलोकी का राज्य करते समय जो असुर उपद्रव करेंगे उनका शासन मैं कैसे करूँगा ?
शिव ने सुदर्शन चक्र दिया । बोले- इसका प्रताप बड़ा प्रबल है। इसकी चोट सहने की शक्ति त्रिभुवन में किसी में नहीं है। आप इसको धारण कीजिये । आज आपने मेरा पूजन करके मुझे प्रसन्न किया है, इसलिए इस तिथि का नाम वैकुण्ठ चतुर्दशी पड़ेगा और जो लोग श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करेंगे वे संसार में अवश्य ही सुख पावे गे और मृत्यु के उपरान्त वैकुण्ठ के अधिकारी होंगे
महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। अपने पापों का नाश करने और अक्षय मोक्षं प्राप्ति की कामना से यह शिवरात्रि व्रत करता हूँ" ऐसा संकल्प करके विधिपूर्वक शिवजी की पूजा करनी चाहिये । चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से पवित्र होकर दिनभर उपवास करना और फूल-पत्तों और वस्त्रों से सजाकर एक सुन्दर मण्डप तैयार करना चाहिये । मण्डप में सर्वतोभद्र की वेदी बनाकर उसपर एक घट स्थापित करना और घट पर शिव-पार्वती की स्वर्णमयी मूर्ति स्थापित करनी चाहिये। मूर्ति के पास ही चाँदी का नादिया भी बनाना चाहिये । मूर्ति को वस्त्रालंकारों से भली भाँति सजाकर बेलपत्नों से उनकी पूजा करनी चाहिये और चन्द्रमा आदि आठों गणों को भी पूजने का विधान है। रातभर वेद पुराण आदि सुनते या पढ़ते हुए जागरण करना चाहिये और प्रातःकाल उठकर स्नान-सन्ध्या करके "श्यंवर्क यजामहे" इस मंत्र से जौ, तिल और खीर की १०८ आहुतियों से हवन करना चाहिये । फिर बेलपत्रों से भी हवनं
करके और ब्राह्मणों को दान-दक्षिण देकर तथा भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिये ।
इस व्रत के संबन्ध में जो कथा प्रचलित है और जो लिंगपुराण में भी लिखी हुई है, यहाँ उद्ध त की जाती है. ।: यह कथा पार्वती के पूछने पर महादेव जी ने उन्हें सुनायी थी ।
पुराने समय में एक व्याध जंगलीः जीवों को मारकर अपनी जीविका चलाता था.! एक बार फाल्गुन कृष्ण. चतुर्दशी की इसी तिथि को वह न्याध जीविका की तलाश मेंः भूखा-प्यासा दिन भर जंगल में घूमता रह गया, किन्तु एक. भी. शिकार न. पा. सका । लाचार होकर, एक तालाव के पास रात बिताने का निश्चय करके वह बैठ गया । वहाँ एक शिवलिङ्ग स्थापित था और बेल का एक वृत्त भी था । व्याध ने बहुत सा बेलपत्र तोड़कर शिवलिङ्ग को ढक दिया और वहीं बैठकर चुपचाप शिकार की प्रतीक्षा करने लगाः ।.
---थोड़ी रात बीतने पर एक गर्भिणी हरिणी उस तालाब के किनारे पानी पीने आयी। उसे देखकर व्याध बहुत प्रसन्न हुआ और उसने धनुष पर वाण चढ़ा लिया । हरिणी ने उसे देख, गिड़गिड़ाकर कहा-व्याध ! तुम मुझे | कहते हैं, युधिष्ठिर ने वैसाही किया और परिणाम में महाभारतका युद्ध होकर पाण्डवों की विजय हुई। उन्हें सारे संसार का राज्य मिला और निष्कण्टक होकर बहुत दिनों तक वे राज्य करते रहे । वैकुण्ठ चतुर्दशी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को वैकुण्ठ चतुर्दशी कहते हैं । इस दिन दिनभर उपवास करके प्रथम विष्णु का और फिर शिव का पूजन यथा विधि करना चाहिए । फिर प्रातःकाल कमल-पुष्पों के द्वारा शिव जी को प्रसन्न करना चाहिए । यह व्रत लोक में बहुत प्रसिद्ध नहीं है। जहाँ तहाँ यह व्रत होता है। इसे जानते भी बहुत कम लोग हैं । कहते हैं, एक बार शिवजी की पूजा करने की इच्छा से विष्णु भगवान काशी में आये । प्रातःकाल उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर गंगा स्नान किया और फिर एकहज़ार सुनहले कमल के फूल लेकर वे शिवकी पूजा करने. के लिए चले। पहले उन्होंने शिव और पार्वती को गंगाजल से स्नान कराया और फिर गिन-गिन कर फूलों को चढ़ाने लगे । जब सब फूल खतम हो गये, तो उन्हें मालूम पड़ा कि एक फूल कम हो गया है। वे बड़े चिन्तित हुए । हजार फूल चढ़ाने का वे संकल्प कर चुके थे । लाचार होकर उन्होंने फूल के बदले में अपनी एक आँख निकाल कर इकहत्तर चढ़ायी । सोचा- मुझे भी तो लोग पुण्डरीकाक्ष कहते ही हैं। शिवजी ने जब विष्णु की यह भक्ति देखी तो बड़े प्रसन्न हुए। बोले- मैं आपकी भक्ति से प्रसन्न हूँ। आपकी परीक्षा लेने के लिये मैंने ही एक फूल छिपा लिया था । आप परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं अतः मैं आपको त्रिलोकी का राज्य देता हूँ। आप इसका योग्यता पूर्वक पालन करें, और जिसकी जरूरत हो वह भी मुझसे कहें। विष्णु ने कहा - त्रिलोकी का राज्य करते समय जो असुर उपद्रव करेंगे उनका शासन मैं कैसे करूँगा ? शिव ने सुदर्शन चक्र दिया । बोले- इसका प्रताप बड़ा प्रबल है। इसकी चोट सहने की शक्ति त्रिभुवन में किसी में नहीं है। आप इसको धारण कीजिये । आज आपने मेरा पूजन करके मुझे प्रसन्न किया है, इसलिए इस तिथि का नाम वैकुण्ठ चतुर्दशी पड़ेगा और जो लोग श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करेंगे वे संसार में अवश्य ही सुख पावे गे और मृत्यु के उपरान्त वैकुण्ठ के अधिकारी होंगे महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। अपने पापों का नाश करने और अक्षय मोक्षं प्राप्ति की कामना से यह शिवरात्रि व्रत करता हूँ" ऐसा संकल्प करके विधिपूर्वक शिवजी की पूजा करनी चाहिये । चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से पवित्र होकर दिनभर उपवास करना और फूल-पत्तों और वस्त्रों से सजाकर एक सुन्दर मण्डप तैयार करना चाहिये । मण्डप में सर्वतोभद्र की वेदी बनाकर उसपर एक घट स्थापित करना और घट पर शिव-पार्वती की स्वर्णमयी मूर्ति स्थापित करनी चाहिये। मूर्ति के पास ही चाँदी का नादिया भी बनाना चाहिये । मूर्ति को वस्त्रालंकारों से भली भाँति सजाकर बेलपत्नों से उनकी पूजा करनी चाहिये और चन्द्रमा आदि आठों गणों को भी पूजने का विधान है। रातभर वेद पुराण आदि सुनते या पढ़ते हुए जागरण करना चाहिये और प्रातःकाल उठकर स्नान-सन्ध्या करके "श्यंवर्क यजामहे" इस मंत्र से जौ, तिल और खीर की एक सौ आठ आहुतियों से हवन करना चाहिये । फिर बेलपत्रों से भी हवनं करके और ब्राह्मणों को दान-दक्षिण देकर तथा भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिये । इस व्रत के संबन्ध में जो कथा प्रचलित है और जो लिंगपुराण में भी लिखी हुई है, यहाँ उद्ध त की जाती है. ।: यह कथा पार्वती के पूछने पर महादेव जी ने उन्हें सुनायी थी । पुराने समय में एक व्याध जंगलीः जीवों को मारकर अपनी जीविका चलाता था.! एक बार फाल्गुन कृष्ण. चतुर्दशी की इसी तिथि को वह न्याध जीविका की तलाश मेंः भूखा-प्यासा दिन भर जंगल में घूमता रह गया, किन्तु एक. भी. शिकार न. पा. सका । लाचार होकर, एक तालाव के पास रात बिताने का निश्चय करके वह बैठ गया । वहाँ एक शिवलिङ्ग स्थापित था और बेल का एक वृत्त भी था । व्याध ने बहुत सा बेलपत्र तोड़कर शिवलिङ्ग को ढक दिया और वहीं बैठकर चुपचाप शिकार की प्रतीक्षा करने लगाः ।. ---थोड़ी रात बीतने पर एक गर्भिणी हरिणी उस तालाब के किनारे पानी पीने आयी। उसे देखकर व्याध बहुत प्रसन्न हुआ और उसने धनुष पर वाण चढ़ा लिया । हरिणी ने उसे देख, गिड़गिड़ाकर कहा-व्याध ! तुम मुझे |
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और 19 राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को हैदराबाद में भगवा पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का उद्घाटन किया। पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में नड्डा ने विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना की। पार्टी अध्यक्ष ने COVID-19 महामारी के प्रकोप, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी अभूतपूर्व परिस्थितियों में सरकार के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को स्वीकार किया।
इस अवसर पर, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से निपटने जैसे क्षेत्रों में भारत के सुधार पर प्रकाश डालते हुए, नड्डा ने लगातार सबूत मांगने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्ष के लोगों पर निशाना भी साधा। पार्टी अध्यक्ष ने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में हवाई हमले जैसी घटनाओं का हवाला दिया और पार्टियों पर प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया।
इस बीच हैदराबाद में जैसे ही बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही है, तेलंगाना में एक बार फिर पोस्टर वार शुरू हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के पोस्टर, होर्डिंग और बैनर हर नुक्कड़ पर पीएम नरेंद्र मोदी के पोस्टर से बदले जा रहे हैं।
शनिवार को बेगमपेट एयरपोर्ट पहुंचने पर सीएम केसीआर ने पीएम मोदी की अगवानी नहीं की। लगातार तीसरी बार प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए, केसीआर ने अपने प्रॉक्सी और कैबिनेट मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव को नियुक्त किया, जो पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी विकास और छायांकन के विभागों को रखते हैं।
हालांकि, केसीआर ने पीएम मोदी के उसी हवाई पट्टी पर उतरने से कुछ घंटे पहले हैदराबाद स्थित हवाई अड्डे पर विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का स्वागत किया। इतना ही नहीं, वह भाजपा के एक नेता सिन्हा के 'सम्मान' में दोपहर के भोजन की मेजबानी करने वाले हैं।
इसे भी पढ़ें- केसरकर ने की शिंदे के निष्कासन की निंदा; कहा- 'उद्धव ठाकरे ने हमारे ऊपर राकांपा और कांग्रेस को चुना'
| प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उन्नीस राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को हैदराबाद में भगवा पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का उद्घाटन किया। पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में नड्डा ने विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना की। पार्टी अध्यक्ष ने COVID-उन्नीस महामारी के प्रकोप, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी अभूतपूर्व परिस्थितियों में सरकार के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को स्वीकार किया। इस अवसर पर, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से निपटने जैसे क्षेत्रों में भारत के सुधार पर प्रकाश डालते हुए, नड्डा ने लगातार सबूत मांगने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्ष के लोगों पर निशाना भी साधा। पार्टी अध्यक्ष ने दो हज़ार सोलह में सर्जिकल स्ट्राइक और दो हज़ार उन्नीस में हवाई हमले जैसी घटनाओं का हवाला दिया और पार्टियों पर प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया। इस बीच हैदराबाद में जैसे ही बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही है, तेलंगाना में एक बार फिर पोस्टर वार शुरू हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के पोस्टर, होर्डिंग और बैनर हर नुक्कड़ पर पीएम नरेंद्र मोदी के पोस्टर से बदले जा रहे हैं। शनिवार को बेगमपेट एयरपोर्ट पहुंचने पर सीएम केसीआर ने पीएम मोदी की अगवानी नहीं की। लगातार तीसरी बार प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए, केसीआर ने अपने प्रॉक्सी और कैबिनेट मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव को नियुक्त किया, जो पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी विकास और छायांकन के विभागों को रखते हैं। हालांकि, केसीआर ने पीएम मोदी के उसी हवाई पट्टी पर उतरने से कुछ घंटे पहले हैदराबाद स्थित हवाई अड्डे पर विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का स्वागत किया। इतना ही नहीं, वह भाजपा के एक नेता सिन्हा के 'सम्मान' में दोपहर के भोजन की मेजबानी करने वाले हैं। इसे भी पढ़ें- केसरकर ने की शिंदे के निष्कासन की निंदा; कहा- 'उद्धव ठाकरे ने हमारे ऊपर राकांपा और कांग्रेस को चुना' |
तिरुपति, 24 नवंबर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को तिरुमला की पहाड़ियों में स्थित तिरूपति बालाजी मंदिर जा कर भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए।
भगवान वेंकटेश्वर के भक्त राष्ट्रपति के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे और मंदिर में उनका पारंपरिक तरीके से पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्वागत किया।
राष्ट्रपति ने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए और पूजा अर्चना की। अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि इस मौके पर पुजारी के अलावा मंदिर का प्रबंधन देखने के लिए गठित टीटीडी बोर्ड के अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी, कार्यकारी अधिकारी केएस जवाहर रेड्डी भी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद को रेशम से बने अंगवस्त्र, भगवान वेंकटेश्वर की तस्वीर और 'लड्डू प्रसाद' दिया गया।
राष्ट्रपति ने करीब आधे घंटे तक मंदिर में पूजा अर्चना की।
अधिकारी ने बताया कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में जाने से पहले राष्ट्रपति कोविंद ने श्री लक्ष्मी वाराह स्वामी मंदिर में भी दर्शन किए जो तिरुमला के पवित्र सरोवर के किनारे स्थित है।
मंदिर में दर्शन के दौरान आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन भी राष्ट्रपति के साथ थें।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| तिरुपति, चौबीस नवंबर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को तिरुमला की पहाड़ियों में स्थित तिरूपति बालाजी मंदिर जा कर भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। भगवान वेंकटेश्वर के भक्त राष्ट्रपति के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे और मंदिर में उनका पारंपरिक तरीके से पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए और पूजा अर्चना की। अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि इस मौके पर पुजारी के अलावा मंदिर का प्रबंधन देखने के लिए गठित टीटीडी बोर्ड के अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी, कार्यकारी अधिकारी केएस जवाहर रेड्डी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद को रेशम से बने अंगवस्त्र, भगवान वेंकटेश्वर की तस्वीर और 'लड्डू प्रसाद' दिया गया। राष्ट्रपति ने करीब आधे घंटे तक मंदिर में पूजा अर्चना की। अधिकारी ने बताया कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में जाने से पहले राष्ट्रपति कोविंद ने श्री लक्ष्मी वाराह स्वामी मंदिर में भी दर्शन किए जो तिरुमला के पवित्र सरोवर के किनारे स्थित है। मंदिर में दर्शन के दौरान आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन भी राष्ट्रपति के साथ थें। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
लोकपाल के अनुसार, अन्य राज्यों की सरकारें शायद ही कभी राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा कार्यक्रमों को निधि देती हैं।
इसके अलावा, जानसन ने कहा कि रूसी भाषी छात्र पहले से ही विशेषाधिकार प्राप्त स्थितियों में हैं, क्योंकि वे रूसी में नौवीं कक्षा में परीक्षा पास करते हैं, जबकि अन्य राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों को लात्विया में परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है।
"उदाहरण के लिए, रूसी बच्चे 9 कक्षा में रूसी में परीक्षा दे सकते हैं, और कानूनी दृष्टिकोण से, यह अनुचित है। यदि हम एक ही दृष्टिकोण के बारे में बात कर रहे हैं, तो हमें इसे हर किसी के लिए गारंटी देने की आवश्यकता है, उदाहरण के लिए, यूक्रेनी बच्चों को अपनी भाषा में परीक्षा देने का अवसर भी होना चाहिए, "आरआईए ने यानों को यह कहते हुए उद्धृत किया। "समाचार".
यह ध्यान देने योग्य है कि, नवीनतम जनगणना के अनुसार, रूसी भाषी नागरिकों के 557 हजार (26. 9%) लातविया में रहते हैं।
| लोकपाल के अनुसार, अन्य राज्यों की सरकारें शायद ही कभी राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा कार्यक्रमों को निधि देती हैं। इसके अलावा, जानसन ने कहा कि रूसी भाषी छात्र पहले से ही विशेषाधिकार प्राप्त स्थितियों में हैं, क्योंकि वे रूसी में नौवीं कक्षा में परीक्षा पास करते हैं, जबकि अन्य राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों को लात्विया में परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। "उदाहरण के लिए, रूसी बच्चे नौ कक्षा में रूसी में परीक्षा दे सकते हैं, और कानूनी दृष्टिकोण से, यह अनुचित है। यदि हम एक ही दृष्टिकोण के बारे में बात कर रहे हैं, तो हमें इसे हर किसी के लिए गारंटी देने की आवश्यकता है, उदाहरण के लिए, यूक्रेनी बच्चों को अपनी भाषा में परीक्षा देने का अवसर भी होना चाहिए, "आरआईए ने यानों को यह कहते हुए उद्धृत किया। "समाचार". यह ध्यान देने योग्य है कि, नवीनतम जनगणना के अनुसार, रूसी भाषी नागरिकों के पाँच सौ सत्तावन हजार लातविया में रहते हैं। |
भारत में अल्पसंख्यकों को दबाने के कदम का कड़ा विरोध करते हुए, सिखों सहित, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC), गुरुद्वारों को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था, ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा देश को "हिंदू राष्ट्र" बनाने के लिए किए गए कथित कदमों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।
इसने केंद्र सरकार से "आरएसएस द्वारा शुरू किए गए प्रयासों को लागू करने के लिए तैयार" होने के बजाय सभी धर्मों के अधिकारों और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए काम करने का भी आह्वान किया। उन सभी तत्वों को जो अल्पसंख्यकों को दबाने की कोशिश करते हैं, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए, प्रस्ताव मे मांगा गया है।
SGPC ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और जेलों में बंद किसानों और युवाओं की तत्काल रिहाई की मांग की। उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए, यह मांग की गई। इससे पहले, संकल्प ने ट्रैक्टर मार्च के दौरान घायल हुए लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की और हिंसा में सरकारी एजेंसियों की कथित भूमिका की जांच की भी मांग की गई।
| भारत में अल्पसंख्यकों को दबाने के कदम का कड़ा विरोध करते हुए, सिखों सहित, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति , गुरुद्वारों को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था, ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा देश को "हिंदू राष्ट्र" बनाने के लिए किए गए कथित कदमों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इसने केंद्र सरकार से "आरएसएस द्वारा शुरू किए गए प्रयासों को लागू करने के लिए तैयार" होने के बजाय सभी धर्मों के अधिकारों और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए काम करने का भी आह्वान किया। उन सभी तत्वों को जो अल्पसंख्यकों को दबाने की कोशिश करते हैं, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए, प्रस्ताव मे मांगा गया है। SGPC ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और जेलों में बंद किसानों और युवाओं की तत्काल रिहाई की मांग की। उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए, यह मांग की गई। इससे पहले, संकल्प ने ट्रैक्टर मार्च के दौरान घायल हुए लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की और हिंसा में सरकारी एजेंसियों की कथित भूमिका की जांच की भी मांग की गई। |
[8bhrl A. B. A, Ghani Khan Choudhuri]
sengers. That is why, one by one, in
all the zones I have instituted these Task Forces and I am sure that the Memiers will be able to know the results very soon.
With regard to the amendment, if every thing goes all right, we intend to bring it during the Budget Session. Thank you.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Rajnath Sonkar Shastri.
श्री राजनाथ सोनकर शास्त्री : आज से चार पांच मास पहले बजट सत्र जब प्रारंभ हुआ था उस समय भी इतफाक से इसी विषय पर एक कॉलिंग एटेशन आया था और उस पर भी मेरा नाम था । तब मने यह कहा था कि अब इस देश के किसी भी आदमी को यह भरोसा नहीं रह गया है कि रेल में वह सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकेगा कि नहीं ? गन्तव्य स्थान पर पहुंच जायेगा कि नहीं, बीच ही में तो उसके साथ बलात्कार, लूटपाट, हत्या नहीं होगो, किसी भी दुश्मनी का बदला रास्ते में ही तो उससे नहीं ले लिया जायेगा । क्योंकि यह आज कल सब रेलों में हो रहा है। उस समय डिप्टी मिनिस्टर, श्री मल्लिकार्जुन, जो शंकर भगवान के नामधारी हैं, बड़ी बहादुरी से उन्होंने उत्तर दिया था कि यह सब बिल्कुल उल्टी सोधी बात है । और हमारी सरकार इसे रोकने का पूरा प्रयास कर रही है : क्या हुआ मल्लिकार्जुन जो ?
incidents on Railway trains, etc. (CA) एक्सप्रेस में यात्रियों का चार लाब का सामान लूटा गया", "हवलदार की हत्या कर दो राइफलों की लूट", "झेलम एक्सप्रेस में डाका और गर्भवती महिला की हत्या", "मालगाड़ी से चुराये गये सेना के 35 पेट्रो कारतूस बरामद" । "रेलवे खजाने का बाई लाख रुपया और युवती को लेकर बजांची फरार ।" यह डिप्टी मिनिस्टर श्री मलिकार्जुन जी के भाषण के बाद की हुई घटनायें है । कहने का मतलब यह है कि आज भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है । हो सकता है कि कमी फिर मेरा काल अटेंशन इस विषय पर ग्रावे । एक मेम्बर ने पूछा था कि अक्तूबर, 1981 से ले कर अक्तूवर 1982 तक चोरी और लूट को कितनो घटनायें हुई ? मंत्री जी ने इसका जवाब नहीं दिया। लेकिन लेकिन इसका जवाब दे रहा हूं । इस बीच 19 हत्यायें हुई हैं, 36 डाके, 76 लूटपाट की घटनायें एक साल के अन्दर हुई । मान्यवर, समस्या काबू के बाहर हो गई है, अन्य माननीय सदस्यों का कहने का मतलब भी यही था कि समस्या काबू के बाहर हो गई है । मै मंत्री जी से पहला सवाल पूछना चाहता हूं : ( 1 ) आप बतायें कि क्या वाकई में यह समस्या जो इस समय रेल में चल रही है यह सरकार की पकड़ के बाहर है कि नहीं ? यदि सरकार की पकड़ से बाहर नहीं है, सरकार इस पर नियंत्रण कर सकती है तो श्रो मल्लिकार्जुन के उत्तर देने के बाद इतनी घटनायें क्यों हुई ? और जो घटनायें हुई उनमें कितने लोग पकड़ गये और कितनों को सजा मिली और उस पर क्या कार्यवाही हुई, इसका विवरण म चाहता हूं।
अब म आधा मिनट आजकल के पेपरों के कुछ हैडिग्स की तरफ आपका ध्यान दिलाऊंगा जो भंयकर स्थिति रेलों में है । "जाली रेलवे टिकटों का गोरख धंधा, 5 अभियुक्तों के विरूद्ध सी० मी भाई द्वारा अभियोग-पत्न दाखिल ।" "दिल्ली प्रा. रही तूफान एक्सप्रेस में ढाका", "हिमगिरि
कालिंग अटेंशन का पहला पोर्शन था तिनसुखिया मेल में दुर्घटना संसद सदस्यों के साथ जो हुई। इसको छोड़ दिया जाय, जैसा मने पढ़ा, एक संसद सदस्य की हैसियत से नहीं बोल रहा हूं, हमारे बी डी सिंह
357 Reported increase in ASVINA 20,1904 (SAKA)
और श्री केपी तिवारी यात्रा कर रह वे । तिनसुखिया मेल के चलने का समय 10 बजकर 5 मिनट है और उस दिन यह गाड़ी 10.36 मिनट पर चली थी ? क्यों ? श्राधा घंटा लेट, गार्ड गाड़ी को ले कर चला। वहां पर संसद सदस्य पहुंचे, आरक्षण चार्ट को देखा जा रहा था । वड़ी लापरवाही है कि आरक्षण चार्ट में किसी का नाम नहीं है । और जब इन दोनों सदस्यों ने जा कर रेलवे अधिकारियों से बात की, सदस्यों ने पूछा कि यात्रा की क्या व्यवस्था बनाई गई है किसी ने कहा कि जो यात्री जहां चाहें वहां बैठे । माननीय संसद सदस्य जहां चाहें वहां बैठ जायें । हमें यह बताया जाये कि यह बात ठीक है या नहीं ? हमको सत्ता पक्ष के द्वारा यह पता चला है कि उस दिन आरक्षण चार्ट वहां नहीं था । मैं यह जानना चाहता हूं जो व्यक्ति आरक्षण करा कर जाता है, वह जहां चा वहां बैठ जाये, इसका मतलव क्या है ? इसके मायने यह हैं कि इस दुर्घटना में संसद सदस्यों को जान से मार डालने की पक्की साजिश थी ।
यह ट्रेन चली और उसमें चोरी कैसे हुई, इज़ पर गौर करने की बात है । पिछले 3 डिब्बों में से जो उसके क्लोज दरवाजे होते हैं सैकिंड में से फर्स्ट में और फर्स्ट में से सेकिंड में आने का उनको खोन दिया गया और खुलने के बाद चोर सैकिंड क्लास में से फर्स्ट क्लास में घुसे। उसमें एक भी टेंडेंट नहीं था, कंडक्टर नहीं था और न सशस्त्र पुलिस ही थी ।
जब चोर उसमें प्राता है तो उपाध्यक्ष महोदय, आप भी अनुभव करते होंगे, हमारे नये मंत्री जी पता नहीं समझते हैं या नहीं, वह बड़े जोश में भाषण दे रहे थे, जिसकी में कद्र करता हूं और में ऐसा मानकर चलता हूं कि हो सकता है कि वह रेलवे की व्यवस्था को ठीक कर दें और अगर वह ऐसा कर दें
तो हम देश के लोग उनको बधाई देते हैं, लेकिन में इनका ध्यान इस बात की भोर दिलाना चाहता हूं कि एक संसद सदस्य पार्लियामेंट में बहुत सारी बातें बोलता है, बहुत ऐसे कार्य करता है जो बहुत कुछ प्रपराधी तत्वों के लिये, अराजक तत्वों के लिये पिच करता है, मने 64 पत्र भेजें हैं जिसमें लिखा है कि राजनाथ सोनकर शास्त्री की हत्या कर दी जायगी । जब हम उस गाड़ी में जा रहे हैं और अपने केबिन का दरवाजा बन्द कर लेते हैं, तो उस दरवाजे में एक सिटकनी लगी होती है । हम जानना चाहते हैं कि वह सिटकनी कैसे खुल गई ? इसका मतलब यह है कि वह सुरक्षित नहीं है और उसमें किसी संसद् सदस्य को यात्रा नहीं करनी चाहिये । जब भादमी केबिन का दरवाजा बन्द कर लेता है तो आराम से सोता है कि कुछ नहीं है । हम सुरक्षित है। लेकिन अगर वह सिटकनी खुल जाये तो उसमें क्या कुछ नहीं हो सकता है, कोई व्यक्ति किसी को पिस्टल मार दें ? इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिये ।
यह जो चोरी की घटना हुई हैं, इसमें चोर संसद् सदस्यों का सामान लेकर बाथ• रूम में घुस गये वहां उन्होंने उसे खोला और देखा। उसमें से उन्होंने एक भी कपड़ा नहीं निकाला, कोई कागज पत्र नहीं लिया । उन्होंने केवल रुपये पैसे की चोरी की । में चोरो की बारीकी की बात कर रहा
आज के पहले एक समाचार था जो इस हाउस में भी उठा था। लखनऊ मेल में चोरो हुई थी। एक माननीय सदस्य ने बयान किया था कि "एक यात्री जब स्नान घर से हाथ धोकर निकला तभी उस ने बंदमार्शों को देखा। बदमाशों ने उसको छड़ी छोन लो। यह आश्चर्य की बात
कि बदमाशों ने किसी यात्री का
श्री राजनाथ सोनकर शास्त्री] कपड़ा नहीं लिया। इस घटना में भी काड़ा नहीं लिया और उसमें भी कपड़ा नहीं लिया। वह एक बहुत बड़ा दुर्घटना थो । बरमाश कराव डेढ़ घंटे तक लूटपाट करते रहे। "जब एक आदमी ने इसका प्रतिरोध किया तो बदमाशों ने उसे घायल कर दिया ।" यहां तो किसी को घायल नहीं किया, लेकिन एक घंटे तक नहीं, बल्कि 3 घंटे तक बाथरूम में बह सामान खोलकर लूटते रहे । इतना मौका उनको मिला, यह भी गौर करने का चीज है ।
संसद सदस्य महावीर प्रसाद जो बालो दुर्घटना लखनऊ मेल में हुई, इसने एक संसद सदस्य को बुरी तरह से पीटा भी गया था ।
तिनसुखिया मेल में जो यह घटना हुई है, उसके बारे में में मंत्रों जो से जानना चाहता हूं कि इस प्रकार की जो 2-3 घटनाएं हुई है, इसके लिये क्या वह सो ईड० को या कोई और जांच बैठायेंगे ? क्योंकि यह बहुत गंमार मामला है, इसका उत्तर हम लोगों को जांच बैठाकर दें ।
इस घटना के बाद जब गाड़ी कानपुर पहुंचा और संसद् सदस्यों ने उतर कर स्टेशन मास्टर और दूसरे लोगों से शिकायत की, तो लाउड स्पीकर पर एनाउंस किया गया कि अगर जो० पोकाया र पो एफ कोई प्रादमो हो, तो आए । बारह-तेरह बार यह एउंस कराया गया, लेकिन कोई भो कर्मचारी वहां नहीं पहुंचा । एक प्रटेंडेंट को तो ससपेंड कर दिया गया है, लेकिन क्या और कर्मचारियों की भो कोई ड्यूटी थो या नहीं ? क्या कंड क्टर को कोई डयूटो यो 'या नहीं ?
हम जानना चाहते हैं कि डी प्रार० एन० ने इस बारे में कितनी दिलचस्पी ली ।
जब गाड़ी इलाहाबाद पहुंची, तो श्री केपी तिवारी और श्री वी डी० सिंह ने रिपोर्ट लिखाई। अखवार वालों ने दो-तीन घंटे बाद थानेदार से पूछा कि क्या आपके यहां कोई रिपोर्ट लिख ई गई है। उन्होंने कहा कि नहीं, हमारे यहां कोई रिपोर्ट नहीं लिखाई गई है। इलाहाबाद के एक अखबार में यह बात छपी है । उसको कटिंग मेरे पास नहीं है, में यहां दे देता । यह है रेलवे लापरव हो ।
मंत्री महोदय ने कहा है कि यह जी र पोका मामला है और राज्य सरकारों का भी मामला है और राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है। में मंत्री महोदय में पूछना चाहता हूं कि यदि राज्य सरकारों को जिम्मेदारी है, तो क्यों नहीं इस रेल विभाग को निकाल कर राज्य सरकारों को सौंप दिया जाता कि वे अपनी व्यवस्था करें। क्या जरूरत
केन्द्र में रेल मंत्री की और लाखों करोड़ों रूपए व्यय करने की ? जब राज्य सरकारी सुरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं, तो वे हो यह काम करें, ऐसा विधेयक
लाया जाए ।
SHRI A.B.A. GHANI KHAN CHAUDHURI: Kindly support the amendment.
श्री राजनाथ सोनकर शास्त्री : मैं जानना चाहता हूं कि पिछले एकदो साल में जितनी घटनाएं हुई हैं, उनके सम्बन्ध में कुल कितने रेलवे अधिकारी और रेलवे कर्मचारी मुप्रत्तिल किए गये हैं या सजा पाए हैं। कर्मचारी वैसा ही होगा, जैसा उसका अधिकारी होगा इसमें सारा की सारी जिम्मेदारी अधिकारियों की है। माननीय मंत्री श्री महिल
| [आठbhrl A. B. A, Ghani Khan Choudhuri] sengers. That is why, one by one, in all the zones I have instituted these Task Forces and I am sure that the Memiers will be able to know the results very soon. With regard to the amendment, if every thing goes all right, we intend to bring it during the Budget Session. Thank you. MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Rajnath Sonkar Shastri. श्री राजनाथ सोनकर शास्त्री : आज से चार पांच मास पहले बजट सत्र जब प्रारंभ हुआ था उस समय भी इतफाक से इसी विषय पर एक कॉलिंग एटेशन आया था और उस पर भी मेरा नाम था । तब मने यह कहा था कि अब इस देश के किसी भी आदमी को यह भरोसा नहीं रह गया है कि रेल में वह सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकेगा कि नहीं ? गन्तव्य स्थान पर पहुंच जायेगा कि नहीं, बीच ही में तो उसके साथ बलात्कार, लूटपाट, हत्या नहीं होगो, किसी भी दुश्मनी का बदला रास्ते में ही तो उससे नहीं ले लिया जायेगा । क्योंकि यह आज कल सब रेलों में हो रहा है। उस समय डिप्टी मिनिस्टर, श्री मल्लिकार्जुन, जो शंकर भगवान के नामधारी हैं, बड़ी बहादुरी से उन्होंने उत्तर दिया था कि यह सब बिल्कुल उल्टी सोधी बात है । और हमारी सरकार इसे रोकने का पूरा प्रयास कर रही है : क्या हुआ मल्लिकार्जुन जो ? incidents on Railway trains, etc. एक्सप्रेस में यात्रियों का चार लाब का सामान लूटा गया", "हवलदार की हत्या कर दो राइफलों की लूट", "झेलम एक्सप्रेस में डाका और गर्भवती महिला की हत्या", "मालगाड़ी से चुराये गये सेना के पैंतीस पेट्रो कारतूस बरामद" । "रेलवे खजाने का बाई लाख रुपया और युवती को लेकर बजांची फरार ।" यह डिप्टी मिनिस्टर श्री मलिकार्जुन जी के भाषण के बाद की हुई घटनायें है । कहने का मतलब यह है कि आज भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है । हो सकता है कि कमी फिर मेरा काल अटेंशन इस विषय पर ग्रावे । एक मेम्बर ने पूछा था कि अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी से ले कर अक्तूवर एक हज़ार नौ सौ बयासी तक चोरी और लूट को कितनो घटनायें हुई ? मंत्री जी ने इसका जवाब नहीं दिया। लेकिन लेकिन इसका जवाब दे रहा हूं । इस बीच उन्नीस हत्यायें हुई हैं, छत्तीस डाके, छिहत्तर लूटपाट की घटनायें एक साल के अन्दर हुई । मान्यवर, समस्या काबू के बाहर हो गई है, अन्य माननीय सदस्यों का कहने का मतलब भी यही था कि समस्या काबू के बाहर हो गई है । मै मंत्री जी से पहला सवाल पूछना चाहता हूं : आप बतायें कि क्या वाकई में यह समस्या जो इस समय रेल में चल रही है यह सरकार की पकड़ के बाहर है कि नहीं ? यदि सरकार की पकड़ से बाहर नहीं है, सरकार इस पर नियंत्रण कर सकती है तो श्रो मल्लिकार्जुन के उत्तर देने के बाद इतनी घटनायें क्यों हुई ? और जो घटनायें हुई उनमें कितने लोग पकड़ गये और कितनों को सजा मिली और उस पर क्या कार्यवाही हुई, इसका विवरण म चाहता हूं। अब म आधा मिनट आजकल के पेपरों के कुछ हैडिग्स की तरफ आपका ध्यान दिलाऊंगा जो भंयकर स्थिति रेलों में है । "जाली रेलवे टिकटों का गोरख धंधा, पाँच अभियुक्तों के विरूद्ध सीशून्य मी भाई द्वारा अभियोग-पत्न दाखिल ।" "दिल्ली प्रा. रही तूफान एक्सप्रेस में ढाका", "हिमगिरि कालिंग अटेंशन का पहला पोर्शन था तिनसुखिया मेल में दुर्घटना संसद सदस्यों के साथ जो हुई। इसको छोड़ दिया जाय, जैसा मने पढ़ा, एक संसद सदस्य की हैसियत से नहीं बोल रहा हूं, हमारे बी डी सिंह तीन सौ सत्तावन Reported increase in ASVINA बीस,एक हज़ार नौ सौ चार और श्री केपी तिवारी यात्रा कर रह वे । तिनसुखिया मेल के चलने का समय दस बजकर पाँच मिनट है और उस दिन यह गाड़ी दस दशमलव छत्तीस मिनट पर चली थी ? क्यों ? श्राधा घंटा लेट, गार्ड गाड़ी को ले कर चला। वहां पर संसद सदस्य पहुंचे, आरक्षण चार्ट को देखा जा रहा था । वड़ी लापरवाही है कि आरक्षण चार्ट में किसी का नाम नहीं है । और जब इन दोनों सदस्यों ने जा कर रेलवे अधिकारियों से बात की, सदस्यों ने पूछा कि यात्रा की क्या व्यवस्था बनाई गई है किसी ने कहा कि जो यात्री जहां चाहें वहां बैठे । माननीय संसद सदस्य जहां चाहें वहां बैठ जायें । हमें यह बताया जाये कि यह बात ठीक है या नहीं ? हमको सत्ता पक्ष के द्वारा यह पता चला है कि उस दिन आरक्षण चार्ट वहां नहीं था । मैं यह जानना चाहता हूं जो व्यक्ति आरक्षण करा कर जाता है, वह जहां चा वहां बैठ जाये, इसका मतलव क्या है ? इसके मायने यह हैं कि इस दुर्घटना में संसद सदस्यों को जान से मार डालने की पक्की साजिश थी । यह ट्रेन चली और उसमें चोरी कैसे हुई, इज़ पर गौर करने की बात है । पिछले तीन डिब्बों में से जो उसके क्लोज दरवाजे होते हैं सैकिंड में से फर्स्ट में और फर्स्ट में से सेकिंड में आने का उनको खोन दिया गया और खुलने के बाद चोर सैकिंड क्लास में से फर्स्ट क्लास में घुसे। उसमें एक भी टेंडेंट नहीं था, कंडक्टर नहीं था और न सशस्त्र पुलिस ही थी । जब चोर उसमें प्राता है तो उपाध्यक्ष महोदय, आप भी अनुभव करते होंगे, हमारे नये मंत्री जी पता नहीं समझते हैं या नहीं, वह बड़े जोश में भाषण दे रहे थे, जिसकी में कद्र करता हूं और में ऐसा मानकर चलता हूं कि हो सकता है कि वह रेलवे की व्यवस्था को ठीक कर दें और अगर वह ऐसा कर दें तो हम देश के लोग उनको बधाई देते हैं, लेकिन में इनका ध्यान इस बात की भोर दिलाना चाहता हूं कि एक संसद सदस्य पार्लियामेंट में बहुत सारी बातें बोलता है, बहुत ऐसे कार्य करता है जो बहुत कुछ प्रपराधी तत्वों के लिये, अराजक तत्वों के लिये पिच करता है, मने चौंसठ पत्र भेजें हैं जिसमें लिखा है कि राजनाथ सोनकर शास्त्री की हत्या कर दी जायगी । जब हम उस गाड़ी में जा रहे हैं और अपने केबिन का दरवाजा बन्द कर लेते हैं, तो उस दरवाजे में एक सिटकनी लगी होती है । हम जानना चाहते हैं कि वह सिटकनी कैसे खुल गई ? इसका मतलब यह है कि वह सुरक्षित नहीं है और उसमें किसी संसद् सदस्य को यात्रा नहीं करनी चाहिये । जब भादमी केबिन का दरवाजा बन्द कर लेता है तो आराम से सोता है कि कुछ नहीं है । हम सुरक्षित है। लेकिन अगर वह सिटकनी खुल जाये तो उसमें क्या कुछ नहीं हो सकता है, कोई व्यक्ति किसी को पिस्टल मार दें ? इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिये । यह जो चोरी की घटना हुई हैं, इसमें चोर संसद् सदस्यों का सामान लेकर बाथ• रूम में घुस गये वहां उन्होंने उसे खोला और देखा। उसमें से उन्होंने एक भी कपड़ा नहीं निकाला, कोई कागज पत्र नहीं लिया । उन्होंने केवल रुपये पैसे की चोरी की । में चोरो की बारीकी की बात कर रहा आज के पहले एक समाचार था जो इस हाउस में भी उठा था। लखनऊ मेल में चोरो हुई थी। एक माननीय सदस्य ने बयान किया था कि "एक यात्री जब स्नान घर से हाथ धोकर निकला तभी उस ने बंदमार्शों को देखा। बदमाशों ने उसको छड़ी छोन लो। यह आश्चर्य की बात कि बदमाशों ने किसी यात्री का श्री राजनाथ सोनकर शास्त्री] कपड़ा नहीं लिया। इस घटना में भी काड़ा नहीं लिया और उसमें भी कपड़ा नहीं लिया। वह एक बहुत बड़ा दुर्घटना थो । बरमाश कराव डेढ़ घंटे तक लूटपाट करते रहे। "जब एक आदमी ने इसका प्रतिरोध किया तो बदमाशों ने उसे घायल कर दिया ।" यहां तो किसी को घायल नहीं किया, लेकिन एक घंटे तक नहीं, बल्कि तीन घंटाटे तक बाथरूम में बह सामान खोलकर लूटते रहे । इतना मौका उनको मिला, यह भी गौर करने का चीज है । संसद सदस्य महावीर प्रसाद जो बालो दुर्घटना लखनऊ मेल में हुई, इसने एक संसद सदस्य को बुरी तरह से पीटा भी गया था । तिनसुखिया मेल में जो यह घटना हुई है, उसके बारे में में मंत्रों जो से जानना चाहता हूं कि इस प्रकार की जो दो-तीन घटनाएं हुई है, इसके लिये क्या वह सो ईडशून्य को या कोई और जांच बैठायेंगे ? क्योंकि यह बहुत गंमार मामला है, इसका उत्तर हम लोगों को जांच बैठाकर दें । इस घटना के बाद जब गाड़ी कानपुर पहुंचा और संसद् सदस्यों ने उतर कर स्टेशन मास्टर और दूसरे लोगों से शिकायत की, तो लाउड स्पीकर पर एनाउंस किया गया कि अगर जोशून्य पोकाया र पो एफ कोई प्रादमो हो, तो आए । बारह-तेरह बार यह एउंस कराया गया, लेकिन कोई भो कर्मचारी वहां नहीं पहुंचा । एक प्रटेंडेंट को तो ससपेंड कर दिया गया है, लेकिन क्या और कर्मचारियों की भो कोई ड्यूटी थो या नहीं ? क्या कंड क्टर को कोई डयूटो यो 'या नहीं ? हम जानना चाहते हैं कि डी प्रारशून्य एनशून्य ने इस बारे में कितनी दिलचस्पी ली । जब गाड़ी इलाहाबाद पहुंची, तो श्री केपी तिवारी और श्री वी डीशून्य सिंह ने रिपोर्ट लिखाई। अखवार वालों ने दो-तीन घंटे बाद थानेदार से पूछा कि क्या आपके यहां कोई रिपोर्ट लिख ई गई है। उन्होंने कहा कि नहीं, हमारे यहां कोई रिपोर्ट नहीं लिखाई गई है। इलाहाबाद के एक अखबार में यह बात छपी है । उसको कटिंग मेरे पास नहीं है, में यहां दे देता । यह है रेलवे लापरव हो । मंत्री महोदय ने कहा है कि यह जी र पोका मामला है और राज्य सरकारों का भी मामला है और राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है। में मंत्री महोदय में पूछना चाहता हूं कि यदि राज्य सरकारों को जिम्मेदारी है, तो क्यों नहीं इस रेल विभाग को निकाल कर राज्य सरकारों को सौंप दिया जाता कि वे अपनी व्यवस्था करें। क्या जरूरत केन्द्र में रेल मंत्री की और लाखों करोड़ों रूपए व्यय करने की ? जब राज्य सरकारी सुरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं, तो वे हो यह काम करें, ऐसा विधेयक लाया जाए । SHRI A.B.A. GHANI KHAN CHAUDHURI: Kindly support the amendment. श्री राजनाथ सोनकर शास्त्री : मैं जानना चाहता हूं कि पिछले एकदो साल में जितनी घटनाएं हुई हैं, उनके सम्बन्ध में कुल कितने रेलवे अधिकारी और रेलवे कर्मचारी मुप्रत्तिल किए गये हैं या सजा पाए हैं। कर्मचारी वैसा ही होगा, जैसा उसका अधिकारी होगा इसमें सारा की सारी जिम्मेदारी अधिकारियों की है। माननीय मंत्री श्री महिल |
ये बेस्ट Toothpaste For Sensitivity दांतों को सेंसिटिविटी के दर्द से बचा सकते हैं। इन्हें बेस्ट रेटिंग मिली है।
आजकल लोगों में दांतों की सेंसिटिविटी की प्रॉब्लम काफी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में आप जब भी कुछ ठंडा या गर्म खाते हैं तो दांतों में एक अजीब सी सिहरन पैदा होती है और झनझनाहट भी होती है, जिससे आपको दर्द होता है। अगर आप भी सेंसिटिविटी की समस्या से परेशान हैं तो इन Toothpaste For Sensitive Teeth को ट्राय कर सकते हैं।
इन्हें लोगों के द्वारा आजमाया गया है और अच्छी रेटिंग भी मिली हुई है। इन टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से पहले आप चाहे तो एक बार डेंटिस्ट की सलाह भी ले सकते हैं। इनके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
| ये बेस्ट Toothpaste For Sensitivity दांतों को सेंसिटिविटी के दर्द से बचा सकते हैं। इन्हें बेस्ट रेटिंग मिली है। आजकल लोगों में दांतों की सेंसिटिविटी की प्रॉब्लम काफी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में आप जब भी कुछ ठंडा या गर्म खाते हैं तो दांतों में एक अजीब सी सिहरन पैदा होती है और झनझनाहट भी होती है, जिससे आपको दर्द होता है। अगर आप भी सेंसिटिविटी की समस्या से परेशान हैं तो इन Toothpaste For Sensitive Teeth को ट्राय कर सकते हैं। इन्हें लोगों के द्वारा आजमाया गया है और अच्छी रेटिंग भी मिली हुई है। इन टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से पहले आप चाहे तो एक बार डेंटिस्ट की सलाह भी ले सकते हैं। इनके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। |
UP Politics: यूपी में सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल (UP SP President Naresh Uttam Patel) ने महागठबंधन को लेकर विपक्ष के कई दलों के बीच असहमति को लेकर कहा है कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (SP chief Akhilesh Yadav) पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में जो भी हमारे गठबंधन में है उन्हें छोड़कर और किसी दूसरे से गठबंधन नहीं करेंगे। बाकी वो आगे जो भी राष्ट्रीय राजनीति पर फैसला लेंगे उसे पार्टी मानेगी। वहीं गैस के दाम बढ़ने पर नरेश पटेल ने कहा है कि बीजेपी ने कहा था हम 90 दिन में महंगाई खत्म कर देंगे लेकिन महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है।
खबर में खासः
सपा अध्यक्ष पटेल ने आगे कहा कि गरीब आदमी परेशान है। आज रसोई गैस का दाम बढ़ा। कल बिजली का दाम बढ़ने वाला है। दवाओं का दाम बढ़ रहा। रोडवेज बसों का किराया बढ़ा है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि महंगाई पर बीजेपी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। बल्कि बीजेपी पूंजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा रही है और गरीब की जेब से पैसा निकालकर अमीर की जेब में डाल रही है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अभी हाल ही में सपा को अपराधियों की नर्सरी वाला बयान दिया था।
इस पर सपा अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी की कथनी करनी में बहुत अंतर है। यह दोहरे चरित्र वाली पार्टी है। वह जो कहती है वह करती नहीं है। इसलिए बीजेपी की साख पूरे देश प्रदेश में गिरती जा रही। प्रदेश में प्रतिदिन हत्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में डकैती, छिनैती, महिलाओं से रेप और बच्चियों से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं।
Also Read: UP Politics: क्या अपना फैसला बदल लेंगे सपा मुखिया अखिलेश यादव? मान गए प्रियंका गांधी का संदेश!
| UP Politics: यूपी में सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने महागठबंधन को लेकर विपक्ष के कई दलों के बीच असहमति को लेकर कहा है कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में जो भी हमारे गठबंधन में है उन्हें छोड़कर और किसी दूसरे से गठबंधन नहीं करेंगे। बाकी वो आगे जो भी राष्ट्रीय राजनीति पर फैसला लेंगे उसे पार्टी मानेगी। वहीं गैस के दाम बढ़ने पर नरेश पटेल ने कहा है कि बीजेपी ने कहा था हम नब्बे दिन में महंगाई खत्म कर देंगे लेकिन महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। खबर में खासः सपा अध्यक्ष पटेल ने आगे कहा कि गरीब आदमी परेशान है। आज रसोई गैस का दाम बढ़ा। कल बिजली का दाम बढ़ने वाला है। दवाओं का दाम बढ़ रहा। रोडवेज बसों का किराया बढ़ा है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि महंगाई पर बीजेपी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। बल्कि बीजेपी पूंजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा रही है और गरीब की जेब से पैसा निकालकर अमीर की जेब में डाल रही है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अभी हाल ही में सपा को अपराधियों की नर्सरी वाला बयान दिया था। इस पर सपा अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी की कथनी करनी में बहुत अंतर है। यह दोहरे चरित्र वाली पार्टी है। वह जो कहती है वह करती नहीं है। इसलिए बीजेपी की साख पूरे देश प्रदेश में गिरती जा रही। प्रदेश में प्रतिदिन हत्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में डकैती, छिनैती, महिलाओं से रेप और बच्चियों से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। Also Read: UP Politics: क्या अपना फैसला बदल लेंगे सपा मुखिया अखिलेश यादव? मान गए प्रियंका गांधी का संदेश! |
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। राजधानी भोपाल में एक पूरा परिवार कस्तूरबा नगर में स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गया, परिवार में पति पत्नी और बच्चे है, बताया जा रहा है कि पति पत्नी अपने छोटे छोटे बच्चो को लेकर पानी की इस ऊंची टंकी पर चढ़े है, मौके पर भारी भीड़ और पुलिस मौजूद है और लगातार उन्हें नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा है, फिलहाल बताया जा रहा है कि टंकी पर चढ़े इस परिवार की जमीन पर दबंगो ने कब्जा कर लिया था। फिलहाल पुलिस और आमजन इन्हें नीचे उतरने की अपील कर रहे है। खबर लिखने तक परिवार टंकी पर ही चढ़ा है।
| भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। राजधानी भोपाल में एक पूरा परिवार कस्तूरबा नगर में स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गया, परिवार में पति पत्नी और बच्चे है, बताया जा रहा है कि पति पत्नी अपने छोटे छोटे बच्चो को लेकर पानी की इस ऊंची टंकी पर चढ़े है, मौके पर भारी भीड़ और पुलिस मौजूद है और लगातार उन्हें नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा है, फिलहाल बताया जा रहा है कि टंकी पर चढ़े इस परिवार की जमीन पर दबंगो ने कब्जा कर लिया था। फिलहाल पुलिस और आमजन इन्हें नीचे उतरने की अपील कर रहे है। खबर लिखने तक परिवार टंकी पर ही चढ़ा है। |
हिज्बुल चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने रावलपिंडी में आतंकी के जनाजे की अगुवाई की. (फोटो- Twitter)
नई दिल्ली. टॉप टेरेरिस्ट और हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है. पाकिस्तान में उसे खुलेआम हिज्बुल के एक आतंकवादी के जनाजे की अगुवाई करते देखा गया. इस मौके पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अफसर भी मौजूद थे. मारा गया आतंकी इम्तियाज आलम भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक था, जिसे पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी. सूत्रों ने बताया कि रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर पॉइंट ब्लैंक रेंज से हिज्बुल कमांडर को गोली मारी गई थी.
इम्तियाज कश्मीर के कुपवाड़ा का रहने वाला था और बीते 15 साल से वह पाकिस्तान में था. भारत ने आतंकी गतिविधियों में उसकी भूमिका के लिए मारे गए हिजबुल कमांडर को 4 अक्टूबर, 2022 को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक आतंकवादी नामित किया था. शीर्ष खुफिया सूत्रों ने News18 को बताया कि सैयद सलाउद्दीन को जनाजे में शामिल होने की अनुमति ISI द्वारा दी गई थी. उन्होंने कहा कि रावलपिंडी में उसकी मौजूदगी बताती है कि पाकिस्तानी सेना इन समूहों की मदद कर रही है. हालांकि पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की जांच के दायरे में है और हाल ही में पेरिस स्थित निगरानी संस्था द्वारा ग्रे सूची से हटा दिया गया था.
हालांकि, रावलपिंडी में मोस्ट वांटेड आतंकवादी की मौजूदगी से पता चलता है कि एफएटीएफ को अनुपालन के बारे में गलत जानकारी दी गई थी. सूत्रों ने कहा कि भारत, जो एफएटीएफ के साथ मिलकर काम कर रहा है, इस मुद्दे को कई मंचों पर उठाएगा. पिछले महीने प्रकाशित संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एफएटीएफ के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिससे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं. रावलपिंडी में इम्तियाज की हत्या, हिज्बुल मुजाहिदीन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है. यह सैयद सलाहुद्दीन और पाकिस्तान में स्थित अन्य हिज्बुल कमांडरों के लिए एक संदेश हो सकता है.
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| हिज्बुल चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने रावलपिंडी में आतंकी के जनाजे की अगुवाई की. नई दिल्ली. टॉप टेरेरिस्ट और हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है. पाकिस्तान में उसे खुलेआम हिज्बुल के एक आतंकवादी के जनाजे की अगुवाई करते देखा गया. इस मौके पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अफसर भी मौजूद थे. मारा गया आतंकी इम्तियाज आलम भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक था, जिसे पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी. सूत्रों ने बताया कि रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर पॉइंट ब्लैंक रेंज से हिज्बुल कमांडर को गोली मारी गई थी. इम्तियाज कश्मीर के कुपवाड़ा का रहने वाला था और बीते पंद्रह साल से वह पाकिस्तान में था. भारत ने आतंकी गतिविधियों में उसकी भूमिका के लिए मारे गए हिजबुल कमांडर को चार अक्टूबर, दो हज़ार बाईस को गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत एक आतंकवादी नामित किया था. शीर्ष खुफिया सूत्रों ने Newsअट्ठारह को बताया कि सैयद सलाउद्दीन को जनाजे में शामिल होने की अनुमति ISI द्वारा दी गई थी. उन्होंने कहा कि रावलपिंडी में उसकी मौजूदगी बताती है कि पाकिस्तानी सेना इन समूहों की मदद कर रही है. हालांकि पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की जांच के दायरे में है और हाल ही में पेरिस स्थित निगरानी संस्था द्वारा ग्रे सूची से हटा दिया गया था. हालांकि, रावलपिंडी में मोस्ट वांटेड आतंकवादी की मौजूदगी से पता चलता है कि एफएटीएफ को अनुपालन के बारे में गलत जानकारी दी गई थी. सूत्रों ने कहा कि भारत, जो एफएटीएफ के साथ मिलकर काम कर रहा है, इस मुद्दे को कई मंचों पर उठाएगा. पिछले महीने प्रकाशित संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एफएटीएफ के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिससे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं. रावलपिंडी में इम्तियाज की हत्या, हिज्बुल मुजाहिदीन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है. यह सैयद सलाहुद्दीन और पाकिस्तान में स्थित अन्य हिज्बुल कमांडरों के लिए एक संदेश हो सकता है. . |
नई दिल्लीः कहते है न शौक बहुत बड़ी चीज होती है, इंसान इसके चलते कुछ भी कर गुजरने को तैयार होता है। कुछ शौक तो ऐसे होते है जो बेहद हैरान कर देते है। जी हां ऐसे ही एक शौक के चलते एक शख्स ने अपने घर के पीछे कई सारी साइकिल का पहाड़ (Mountain Of Bikes) बना लिया है, इसकी वजह से वहां ढेर सारे चुहे आते है और पुरे मोहल्ले को तबाह कर देते है, बता दें कि यह शख्स बीते आठ साल से वो घर के पीछे साइकिल जमा कर रहा है। अब इस साइकिल के पहाड़ के वजह से चूहों ने तबाही मचा राखी है।
आपको बता दें कि इस खबर को कॉलोनी में रहने वाली 53 साल की कोलीन बटलर (Colleen Butler) ने लोगों के साथ शेयर की. उसने बताया कि ये शख्स उसकी कॉलोनी में आठ साल पहले आया था। इसके बाद इसने घर के पीछे साइकिल जमा करना शुरू किया। आज की तारीख में उसके घर के पीछे करीब पांच सौ से ज्यादा साइकिल हैं। लेकिन इसकी वजह से वहां कई चूहे हो गए हैं। ये चूहे अब साइकिल के ढेर से निकल कर सबके घरों में जाकर आतंक मचा रहे हैं।
इस बारे में अपनी समस्या बताते हुए कोलीन ने बताया कि कॉलोनी में चूहों के आतंक के कारण वो काफी परेशान है। इतना ही नहीं बल्कि उसके खुद के घर में बहुत सारे चूहे हो गए हैं। उसने काफी बार चूहों के लिए घर में पेस्ट कंट्रोल करवाया लेकिन चूहों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब भी बहुत सारे चूहे उनके घर में मौजूद है। इसका विपरीत नतीजा ये है कि वो मेंटल हेल्थ से जूझ रही है। कोलीन ने बताया कि उसने कई बार अपने पड़ोसी से इन चूहों को लेकर बातचीत की है लेकिन हमेशा वो चला जाता है। वह इस विषय पर बात करने के लिए तैयार ही नहीं रहता।
इस बारे में कोलीन ने आगे बताया कि हर बार पेस्ट कंट्रोल के पैसे उसे ही देने पड़ते हैं। जब इस महिला ने इसकी शिकायत पुलिस में की तो उनका कहना है कि चूहे साइकिल में घर नहीं बनाते। चूंकि पड़ोसी ने जहां साइकिल जमा किया है, वो उसके घर के ठीक सामने है इस वजह से मोहल्ले के कई लोगों को लगता है कि चूहों की जिम्मेदार कोलीन ही है। कोलीन के पड़ोसी के साइकिल का पहाड़ इतना बड़ा हो चुका है कि अब इसे गूगल अर्थ के जरिये भी देखा जा सकता है। इस साईकिल के पहाड़ों के चलते कोलीन बहुत परेशान है।
| नई दिल्लीः कहते है न शौक बहुत बड़ी चीज होती है, इंसान इसके चलते कुछ भी कर गुजरने को तैयार होता है। कुछ शौक तो ऐसे होते है जो बेहद हैरान कर देते है। जी हां ऐसे ही एक शौक के चलते एक शख्स ने अपने घर के पीछे कई सारी साइकिल का पहाड़ बना लिया है, इसकी वजह से वहां ढेर सारे चुहे आते है और पुरे मोहल्ले को तबाह कर देते है, बता दें कि यह शख्स बीते आठ साल से वो घर के पीछे साइकिल जमा कर रहा है। अब इस साइकिल के पहाड़ के वजह से चूहों ने तबाही मचा राखी है। आपको बता दें कि इस खबर को कॉलोनी में रहने वाली तिरेपन साल की कोलीन बटलर ने लोगों के साथ शेयर की. उसने बताया कि ये शख्स उसकी कॉलोनी में आठ साल पहले आया था। इसके बाद इसने घर के पीछे साइकिल जमा करना शुरू किया। आज की तारीख में उसके घर के पीछे करीब पांच सौ से ज्यादा साइकिल हैं। लेकिन इसकी वजह से वहां कई चूहे हो गए हैं। ये चूहे अब साइकिल के ढेर से निकल कर सबके घरों में जाकर आतंक मचा रहे हैं। इस बारे में अपनी समस्या बताते हुए कोलीन ने बताया कि कॉलोनी में चूहों के आतंक के कारण वो काफी परेशान है। इतना ही नहीं बल्कि उसके खुद के घर में बहुत सारे चूहे हो गए हैं। उसने काफी बार चूहों के लिए घर में पेस्ट कंट्रोल करवाया लेकिन चूहों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब भी बहुत सारे चूहे उनके घर में मौजूद है। इसका विपरीत नतीजा ये है कि वो मेंटल हेल्थ से जूझ रही है। कोलीन ने बताया कि उसने कई बार अपने पड़ोसी से इन चूहों को लेकर बातचीत की है लेकिन हमेशा वो चला जाता है। वह इस विषय पर बात करने के लिए तैयार ही नहीं रहता। इस बारे में कोलीन ने आगे बताया कि हर बार पेस्ट कंट्रोल के पैसे उसे ही देने पड़ते हैं। जब इस महिला ने इसकी शिकायत पुलिस में की तो उनका कहना है कि चूहे साइकिल में घर नहीं बनाते। चूंकि पड़ोसी ने जहां साइकिल जमा किया है, वो उसके घर के ठीक सामने है इस वजह से मोहल्ले के कई लोगों को लगता है कि चूहों की जिम्मेदार कोलीन ही है। कोलीन के पड़ोसी के साइकिल का पहाड़ इतना बड़ा हो चुका है कि अब इसे गूगल अर्थ के जरिये भी देखा जा सकता है। इस साईकिल के पहाड़ों के चलते कोलीन बहुत परेशान है। |
लुधियाना : कैप्टन अमरिंदर सिंह की आलोचना करने पर अकालियों पर तीखा हमला करते हुये पंजाब कांग्रेस के प्रधान और गुरदासपुर लोक सभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता की मांग करना ख़ैरात नहीं बल्कि पंजाब के लिए अपना बनता हक लेना है।
आज यहां वर्करों से लगातार मीटिंगों के दौरान पंजाब कांग्रेस के प्रधान ने बादलों की खराब नीतियों और मुख्यमंत्री की अनावश्यक आलोचना करने के लिए बादलों को निशाना बनात हुये कहा कि गत् अकाली-भाजपा सरकार द्वारा सरकारी खजाने को पूरी तरह चाट लिए जाने के बावजूद कैप्टन सरकार ने सिफऱ् छह महीनों में ही सूबे के लोगों के लिए कल्याण प्रोग्राम आरंभ किये हैं।
कांग्रेसी उम्मीदवार को क्षेत्र की महिलाओं सहित लोगों से बड़ा समर्थन मिल रहा है। श्री जाखड़ ने स्वर्ण सलारिया और उसकी पार्टी की तरफ से उन पर किये निजी हमलों की भी सख्त आलोचना की। श्री जाखड़ ने उन को बाहरी बताने वाले विरोधियों पर चुटकी लेते हुये कहा कि क्षेत्र के लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि वह लोक सभा में हमारी आवाज़ बुलंद करेंगे और लोग उनको 'हमारा जाखड़ ' कहने लग पड़े हैं और उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बना ली है।
बादलों पर निशाना लगाते हुये श्री जाखड़ ने कहा कि सुखबीर को तो लोग गंभीर नेता समझते ही नहीं जबकि प्रकाश सिंह बादल ने नासमझी वाली बयानबाज़ी से अपनी विश्वशनीयता पूरी तरह गवां दी है। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल द्वारा मुख्यमंत्री की इस बातों की आलोचना का जि़क्र किया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों के कजऱ्े को माफ करने का वायदा नहीं पूरा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर प्रकाश सिंह बादल द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की बेतुकी आलोचना को रद्द करते हुये पंजाब के किसानों का कजाऱ् माफ करने का ऐतिहासिक फ़ैसला लिया जिसके बाद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित अन्य सूबों ने भी पंजाब से दिशा लेेते हुये किसानों का कजऱ् माफ किया।
बादल द्वारा मुख्यमंत्री होते हुये 10 वर्षो के शासनकाल के अंतिम छह महीनों में पैंशन बढ़ाने की बात करने संबंधी श्री जाखड़ ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी सरकार के पहले 6 महीनों में ही पैंशन राशि में बढ़ौतरी की है। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह की इस बात के लिए भी सराहना की कि वह राजनैतिक बदलाखोरी से बिना लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को कांग्रेस सरकार द्वारा गुरदासपुर लोक सभा क्षेत्र में पड़ते दीनानगर और अन्य हिस्सों में आरंभ किये कई विकास प्रोजेक्टों संबंधी याद करवाया जिनको पूरा करने के लिए फंड रुकावट नहीं बनेंगे।
सुखबीर बादल और सलारिया द्वारा पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह विरूद्ध दर्ज बलात्कार केस पर अभी तक चुप्पी न तोडऩे संबंधी श्री जाखड़ ने दोनों नेताओं को किसी भी मुद्दे पर उनसे बहस करने की चुनौती दी। पंजाब कांग्रेस के प्रधान ने मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों की आलोचना करते कहा कि इस के साथ ही नोटबंदी और जी. एस. टी. के प्रभाव और ज़रूरी वस्तुओं की बढ़ी कीमतों का बोझ लोगों को सहना पड़ रहा है। उन्होंने पूछा, "मोदी के वायदों वाले 'अच्छे दिन ' कहां हैं। " उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के बुरे फ़ैसलों से पैदा हुई वित्तीय मुश्किल और बढ़ी कीमत कारण लोग इस बार दिवाली मनाने लायक भी नहीं रहे।
| लुधियाना : कैप्टन अमरिंदर सिंह की आलोचना करने पर अकालियों पर तीखा हमला करते हुये पंजाब कांग्रेस के प्रधान और गुरदासपुर लोक सभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता की मांग करना ख़ैरात नहीं बल्कि पंजाब के लिए अपना बनता हक लेना है। आज यहां वर्करों से लगातार मीटिंगों के दौरान पंजाब कांग्रेस के प्रधान ने बादलों की खराब नीतियों और मुख्यमंत्री की अनावश्यक आलोचना करने के लिए बादलों को निशाना बनात हुये कहा कि गत् अकाली-भाजपा सरकार द्वारा सरकारी खजाने को पूरी तरह चाट लिए जाने के बावजूद कैप्टन सरकार ने सिफऱ् छह महीनों में ही सूबे के लोगों के लिए कल्याण प्रोग्राम आरंभ किये हैं। कांग्रेसी उम्मीदवार को क्षेत्र की महिलाओं सहित लोगों से बड़ा समर्थन मिल रहा है। श्री जाखड़ ने स्वर्ण सलारिया और उसकी पार्टी की तरफ से उन पर किये निजी हमलों की भी सख्त आलोचना की। श्री जाखड़ ने उन को बाहरी बताने वाले विरोधियों पर चुटकी लेते हुये कहा कि क्षेत्र के लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि वह लोक सभा में हमारी आवाज़ बुलंद करेंगे और लोग उनको 'हमारा जाखड़ ' कहने लग पड़े हैं और उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बना ली है। बादलों पर निशाना लगाते हुये श्री जाखड़ ने कहा कि सुखबीर को तो लोग गंभीर नेता समझते ही नहीं जबकि प्रकाश सिंह बादल ने नासमझी वाली बयानबाज़ी से अपनी विश्वशनीयता पूरी तरह गवां दी है। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल द्वारा मुख्यमंत्री की इस बातों की आलोचना का जि़क्र किया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों के कजऱ्े को माफ करने का वायदा नहीं पूरा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर प्रकाश सिंह बादल द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की बेतुकी आलोचना को रद्द करते हुये पंजाब के किसानों का कजाऱ् माफ करने का ऐतिहासिक फ़ैसला लिया जिसके बाद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित अन्य सूबों ने भी पंजाब से दिशा लेेते हुये किसानों का कजऱ् माफ किया। बादल द्वारा मुख्यमंत्री होते हुये दस वर्षो के शासनकाल के अंतिम छह महीनों में पैंशन बढ़ाने की बात करने संबंधी श्री जाखड़ ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी सरकार के पहले छः महीनों में ही पैंशन राशि में बढ़ौतरी की है। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह की इस बात के लिए भी सराहना की कि वह राजनैतिक बदलाखोरी से बिना लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को कांग्रेस सरकार द्वारा गुरदासपुर लोक सभा क्षेत्र में पड़ते दीनानगर और अन्य हिस्सों में आरंभ किये कई विकास प्रोजेक्टों संबंधी याद करवाया जिनको पूरा करने के लिए फंड रुकावट नहीं बनेंगे। सुखबीर बादल और सलारिया द्वारा पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह विरूद्ध दर्ज बलात्कार केस पर अभी तक चुप्पी न तोडऩे संबंधी श्री जाखड़ ने दोनों नेताओं को किसी भी मुद्दे पर उनसे बहस करने की चुनौती दी। पंजाब कांग्रेस के प्रधान ने मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों की आलोचना करते कहा कि इस के साथ ही नोटबंदी और जी. एस. टी. के प्रभाव और ज़रूरी वस्तुओं की बढ़ी कीमतों का बोझ लोगों को सहना पड़ रहा है। उन्होंने पूछा, "मोदी के वायदों वाले 'अच्छे दिन ' कहां हैं। " उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के बुरे फ़ैसलों से पैदा हुई वित्तीय मुश्किल और बढ़ी कीमत कारण लोग इस बार दिवाली मनाने लायक भी नहीं रहे। |
मुंबई. करीना कपूर और शाहिद कपूरएक वक्त फैंस का सबसे पसंदीदा कपल था। दोनों ने 36 चाइना टाउन, फिदा, मिलेंगे-मिलेंगे और जब वी मेट जैसी कई फिल्मों में काम किया था। साल 2007 में दोनों का ब्रेकअप हो गया था। हालांकि, साल 2016 में करीना कपूर और शाहिद कपूर ने फिल्म उड़ता पंजाब में काम किया था लेकिन, दोनों ने स्क्रीन शेयर नहीं किया था। फिल्म के प्रमोशन के दौरान करीना से पूछा गया था कि दोनों ने स्क्रीन शेयर क्यों नहीं किया? इस पर बेबो ने तुरंत जवाब दिया- 'जब वी मेट की डीवीडी अभी भी उपलब्ध है। ' वहीं, शाहिद ने कहा, 'हमें एक ही वक्त अलग- अलग काम करने में बड़ा मजा आया था। मतलब जो हुआ नहीं इसके बारे में हम खुश थे या दुखी थे? जो हो गया, उसके बारे में कमेंट कर सकते हैं। ' आपको बता दें कि करीना कपूर ने साल 2012 में सैफ अली खान से शादी की। वहीं, साल 2015 में शाहिद कपूर ने मीरा राजपूत से शादी की थी।
| मुंबई. करीना कपूर और शाहिद कपूरएक वक्त फैंस का सबसे पसंदीदा कपल था। दोनों ने छत्तीस चाइना टाउन, फिदा, मिलेंगे-मिलेंगे और जब वी मेट जैसी कई फिल्मों में काम किया था। साल दो हज़ार सात में दोनों का ब्रेकअप हो गया था। हालांकि, साल दो हज़ार सोलह में करीना कपूर और शाहिद कपूर ने फिल्म उड़ता पंजाब में काम किया था लेकिन, दोनों ने स्क्रीन शेयर नहीं किया था। फिल्म के प्रमोशन के दौरान करीना से पूछा गया था कि दोनों ने स्क्रीन शेयर क्यों नहीं किया? इस पर बेबो ने तुरंत जवाब दिया- 'जब वी मेट की डीवीडी अभी भी उपलब्ध है। ' वहीं, शाहिद ने कहा, 'हमें एक ही वक्त अलग- अलग काम करने में बड़ा मजा आया था। मतलब जो हुआ नहीं इसके बारे में हम खुश थे या दुखी थे? जो हो गया, उसके बारे में कमेंट कर सकते हैं। ' आपको बता दें कि करीना कपूर ने साल दो हज़ार बारह में सैफ अली खान से शादी की। वहीं, साल दो हज़ार पंद्रह में शाहिद कपूर ने मीरा राजपूत से शादी की थी। |
भारत और कई अन्य देशों ने बुधवार को काबुल में ट्रूली इन्क्लूसिव सरकार बनाने और अफगानिस्तान की सरजमीं से आतंकवाद खत्म करने का आह्वान किया. उन्होंने अफगानिस्तान की स्थिति पर मॉस्को प्रारूप के तहत विचार विमर्श के दौरान यह टिप्पणी की. रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को प्रारूप के बातचीत के तहत हुई चौथी बैठक में रूस, भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बैठक में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने अमेरिका की तरफ से अफगानिस्तान की संपत्ति की कुर्की को पूरी तरह से हटाने की मांग की. रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधि भी अतिथि के तौर पर बैठक में शामिल हुए.
रूस ने अमेरिका और अन्य उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) देशों से दृढ़ता से आग्रह किया किया, जो अफगानिस्तान में 20 साल की लंबी सैन्य उपस्थिति का हिस्सा थे, इस अवधि के दौरान हुए नुकसान के लिए अफगानों को मुआवजा दें. रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि बैठक में काबुल को सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ और अधिक स्पष्ट कदम उठाने, दृढ़ता से लड़ने और उन्हें समाप्त करने के लिए कहा गया.
एक बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान में वास्तव में इन्क्लूसिव सरकार बनाने के महत्व पर जोर दिया जाए, जो प्रमुख जातीय-राजनीतिक समूहों के हितों और उस देश से उत्पन्न होने वाले आतंकवादी, नशीली दवाओं और अन्य खतरों को हटाने की आवश्यकता को मजबूती दे. प्रतिभागियों ने फसल रिप्लेसमेंट कार्यक्रम विकसित करने और नशीले पदार्थों के उत्पादन और तस्करी पर नकेल कसने में अफगान अधिकारियों को समर्थन देने को कहा.
| भारत और कई अन्य देशों ने बुधवार को काबुल में ट्रूली इन्क्लूसिव सरकार बनाने और अफगानिस्तान की सरजमीं से आतंकवाद खत्म करने का आह्वान किया. उन्होंने अफगानिस्तान की स्थिति पर मॉस्को प्रारूप के तहत विचार विमर्श के दौरान यह टिप्पणी की. रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को प्रारूप के बातचीत के तहत हुई चौथी बैठक में रूस, भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बैठक में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने अमेरिका की तरफ से अफगानिस्तान की संपत्ति की कुर्की को पूरी तरह से हटाने की मांग की. रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधि भी अतिथि के तौर पर बैठक में शामिल हुए. रूस ने अमेरिका और अन्य उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन देशों से दृढ़ता से आग्रह किया किया, जो अफगानिस्तान में बीस साल की लंबी सैन्य उपस्थिति का हिस्सा थे, इस अवधि के दौरान हुए नुकसान के लिए अफगानों को मुआवजा दें. रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि बैठक में काबुल को सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ और अधिक स्पष्ट कदम उठाने, दृढ़ता से लड़ने और उन्हें समाप्त करने के लिए कहा गया. एक बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान में वास्तव में इन्क्लूसिव सरकार बनाने के महत्व पर जोर दिया जाए, जो प्रमुख जातीय-राजनीतिक समूहों के हितों और उस देश से उत्पन्न होने वाले आतंकवादी, नशीली दवाओं और अन्य खतरों को हटाने की आवश्यकता को मजबूती दे. प्रतिभागियों ने फसल रिप्लेसमेंट कार्यक्रम विकसित करने और नशीले पदार्थों के उत्पादन और तस्करी पर नकेल कसने में अफगान अधिकारियों को समर्थन देने को कहा. |
श्रीनगर, 11 जून (वार्ता)। जम्मू- कश्मीर (Jammu and Kashmir) के सोपोर (sopore) में शनिवार सुबह सुरक्षा बलों को एक संदिग्ध वस्तु (suspicious object) मिली, जिसका शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण (IED) होने का संदेह है। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों को श्रीनगर-बारामूला राजमार्ग से लगे ह्यगाम इलाके में नियमित सड़क खोलने के अभ्यास के दौरान संदिग्ध वस्तु मिली है। इसके बाद इलाके की तुरंत घेराबंदी कर दी गयी और व्यस्त राजमार्ग पर यातायात को बंद कर दिया गया।
| श्रीनगर, ग्यारह जून । जम्मू- कश्मीर के सोपोर में शनिवार सुबह सुरक्षा बलों को एक संदिग्ध वस्तु मिली, जिसका शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण होने का संदेह है। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों को श्रीनगर-बारामूला राजमार्ग से लगे ह्यगाम इलाके में नियमित सड़क खोलने के अभ्यास के दौरान संदिग्ध वस्तु मिली है। इसके बाद इलाके की तुरंत घेराबंदी कर दी गयी और व्यस्त राजमार्ग पर यातायात को बंद कर दिया गया। |
Prabhas to play Lord Vishnu in Project K : साउथ सुपरस्टार प्रभास की अपकमिंग फिल्म प्रोजेक्ट के को लेकर एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म में सुपरस्टार प्रभास भगवान विष्णु का किरदार निभाने वाले हैं।
Prabhas to play Lord Vishnu in Project K : इंडियन सुपरस्टार प्रभास की अपकमिंग फिल्म 'प्रोजेक्ट के' को लेकर इन दिनों खासा बज है। फिल्म को महानती फेम निर्देशक नाग अश्विन बना रहे हैं। ये एक साई-फाई फिल्म है। जिसके बारे में अभी तक मेकर्स ने कोई खास जानकारी नहीं दी है। फिल्म के लीड स्टार्स के पोस्टर्स भले ही जारी कर दिए गए हैं। मगर किसी में भी अभी तक मेकर्स ने फिल्म के लुक्स का खुलासा नहीं किया है। फिल्म को निर्माता अश्विनी दत्त के बैनर वैजयंती मूवीज मेकर्स के तले बनाया जा रहा है। अब सामने आई ताजा जानकारी की मानें को फिल्ममेकर अश्विनी दत्त ने खुद पहली दफा इस फिल्म की कहानी को लेकर बात कही है।
अश्विनी दत्त ने बताया कि उनकी ये अपकमिंग फिल्म 'प्रोजेक्ट के' में साइंस फिक्शन फैंटेसी और इमोशन्स से भरी हुई फिल्म होगी। फिल्म की कहानी भगवान विष्णु के मॉर्डन अवतार की होगी। साथ ही, फिल्म की कहानी इमोशन्स से भरी हुई है। अश्विनी दत्त ने बताया कि फिल्म की शूटिंग 70 फीसदी पूरी हो चुकी है। इसके बाद फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन में जुटेगी। जिसमें काफी हैवी वीएफएक्स वर्क होना बाकी है। बता दें कि इस फिल्म में सुपरस्टार प्रभास के साथ ही अदाकारा दीपिका पादुकोण लीड रोल में नजर आने वाली हैं। साथ ही सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी लीड रोल में नजर आएंगे। जिसकी शूटिंग दोनों सितारे करीब-करीब पूरी कर चुके हैं।
इतना ही नहीं, मेकर्स ने बताया कि फिल्म प्रोजेक्ट के में कई सारे दिलचस्प कैमियो होने वाले हैं। फिल्म में चार इंटरनेशनल कोरियोग्राफर्स हैं। यही वजह है कि फिल्म में टॉप लेवल के एक्शन सीक्वेंस होने वाले हैं। फिल्म में दिशा पाटनी भी एक क्रूशियल रोल में नजर आएंगी। ये फिल्म अगले साल 12 जनवरी 2024 तक सिल्वर स्क्रीन पहुंचने की कोशिश में हैं।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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| Prabhas to play Lord Vishnu in Project K : साउथ सुपरस्टार प्रभास की अपकमिंग फिल्म प्रोजेक्ट के को लेकर एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म में सुपरस्टार प्रभास भगवान विष्णु का किरदार निभाने वाले हैं। Prabhas to play Lord Vishnu in Project K : इंडियन सुपरस्टार प्रभास की अपकमिंग फिल्म 'प्रोजेक्ट के' को लेकर इन दिनों खासा बज है। फिल्म को महानती फेम निर्देशक नाग अश्विन बना रहे हैं। ये एक साई-फाई फिल्म है। जिसके बारे में अभी तक मेकर्स ने कोई खास जानकारी नहीं दी है। फिल्म के लीड स्टार्स के पोस्टर्स भले ही जारी कर दिए गए हैं। मगर किसी में भी अभी तक मेकर्स ने फिल्म के लुक्स का खुलासा नहीं किया है। फिल्म को निर्माता अश्विनी दत्त के बैनर वैजयंती मूवीज मेकर्स के तले बनाया जा रहा है। अब सामने आई ताजा जानकारी की मानें को फिल्ममेकर अश्विनी दत्त ने खुद पहली दफा इस फिल्म की कहानी को लेकर बात कही है। अश्विनी दत्त ने बताया कि उनकी ये अपकमिंग फिल्म 'प्रोजेक्ट के' में साइंस फिक्शन फैंटेसी और इमोशन्स से भरी हुई फिल्म होगी। फिल्म की कहानी भगवान विष्णु के मॉर्डन अवतार की होगी। साथ ही, फिल्म की कहानी इमोशन्स से भरी हुई है। अश्विनी दत्त ने बताया कि फिल्म की शूटिंग सत्तर फीसदी पूरी हो चुकी है। इसके बाद फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन में जुटेगी। जिसमें काफी हैवी वीएफएक्स वर्क होना बाकी है। बता दें कि इस फिल्म में सुपरस्टार प्रभास के साथ ही अदाकारा दीपिका पादुकोण लीड रोल में नजर आने वाली हैं। साथ ही सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी लीड रोल में नजर आएंगे। जिसकी शूटिंग दोनों सितारे करीब-करीब पूरी कर चुके हैं। इतना ही नहीं, मेकर्स ने बताया कि फिल्म प्रोजेक्ट के में कई सारे दिलचस्प कैमियो होने वाले हैं। फिल्म में चार इंटरनेशनल कोरियोग्राफर्स हैं। यही वजह है कि फिल्म में टॉप लेवल के एक्शन सीक्वेंस होने वाले हैं। फिल्म में दिशा पाटनी भी एक क्रूशियल रोल में नजर आएंगी। ये फिल्म अगले साल बारह जनवरी दो हज़ार चौबीस तक सिल्वर स्क्रीन पहुंचने की कोशिश में हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
ईरान ने आज इराक में स्थित अमेरिका के 2 सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए। ये हमले मेजर जनरल कासिम सुलेमानी कीं मौत का बदला लेने के लिए किए गए है। बुधवार अल सुबह इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 22 मिसाइल दागे।
ईरान ने दावा किया है कि उसकी 17 मिसाइलों ने अमेरिका के अइन अल-असद एयरबेस को निशाना बनाया है। ईरान का दावा किया है कि इस हमले में 80 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। अमेरिकी बेस पर हमले को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने अमेरिका के मुंह पर तमाचा करार दिया।
सर्वोच्च नेता खामनेई ने इस घटना को ईरान की क्रांति बताई और कहा कि यह सफर जारी रहेगा। खामनेई ने कहा, 'हमारे बारे में विश्व में कुछ लोग झूठ फैला रहे हैं। हम हार नहीं माननेवाले हैं और यहां रुकने भी नहीं वाले। हम लगातार अपना संघर्ष जारी रखेंगे और अपने दुश्मनों को मटियामेट कर देंगे। ' खामनेई के ऐसा कहने के बाद मौजूद लोगों ने ईरानी भाषा में 'अमेरिका की मौत' का नारा भी लगाया। खामनेई ने कहा कि अमेरिकी बेस पर हमला कर आज हमने उनके घमंड पर तमाचा जड़ा है।
ईरानी टीवी चैनल प्रेस टीवी ने ट्वीट कर कहा, 'ईराक में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमलों में 80 मारे गए। ' ईरान सरकार की ओर से जारी बयान में गया है कि उसकी दो मिसाइलें हेइतान में गिरीं लेकिन उनमें विस्फोट नहीं हुआ। इसके अलावा 5 मिसाइलों ने इरबिल में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया है। इस हमले में इराक की सेना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
| ईरान ने आज इराक में स्थित अमेरिका के दो सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए। ये हमले मेजर जनरल कासिम सुलेमानी कीं मौत का बदला लेने के लिए किए गए है। बुधवार अल सुबह इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बाईस मिसाइल दागे। ईरान ने दावा किया है कि उसकी सत्रह मिसाइलों ने अमेरिका के अइन अल-असद एयरबेस को निशाना बनाया है। ईरान का दावा किया है कि इस हमले में अस्सी अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। अमेरिकी बेस पर हमले को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने अमेरिका के मुंह पर तमाचा करार दिया। सर्वोच्च नेता खामनेई ने इस घटना को ईरान की क्रांति बताई और कहा कि यह सफर जारी रहेगा। खामनेई ने कहा, 'हमारे बारे में विश्व में कुछ लोग झूठ फैला रहे हैं। हम हार नहीं माननेवाले हैं और यहां रुकने भी नहीं वाले। हम लगातार अपना संघर्ष जारी रखेंगे और अपने दुश्मनों को मटियामेट कर देंगे। ' खामनेई के ऐसा कहने के बाद मौजूद लोगों ने ईरानी भाषा में 'अमेरिका की मौत' का नारा भी लगाया। खामनेई ने कहा कि अमेरिकी बेस पर हमला कर आज हमने उनके घमंड पर तमाचा जड़ा है। ईरानी टीवी चैनल प्रेस टीवी ने ट्वीट कर कहा, 'ईराक में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमलों में अस्सी मारे गए। ' ईरान सरकार की ओर से जारी बयान में गया है कि उसकी दो मिसाइलें हेइतान में गिरीं लेकिन उनमें विस्फोट नहीं हुआ। इसके अलावा पाँच मिसाइलों ने इरबिल में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया है। इस हमले में इराक की सेना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। |
इनपुट (input) बदल जाएगा; इसलिए टाइम विरीइंग सिगनल (time varying signal) के प्रतयेक पॉइन्ट( point) का लिए, आपको नूमिरिक्ल (numerical) या ग्रेफ़िक्ल (graphical) गणना को दोबारा करना होगा, और यह बहुत मुश्किल है। कम से कम इन्साइट ( insight) प्राप्त करने के लिए सर्किट (circuit) में और हैंड अनेलिसिस (hand analysis) के लिए, हम इनसे बचना चाहते हैं। तो देखते हैं कि हम क्या कर सकते हैं। मैं उस ग्रेफ़िक्ली (graphically)सलूशन (solution) को दोहरा दूंगा जो हमें मिला था। अनिवार्य रूप से, हम इस समीकरण के लिए हल कर रहे हैं, रजिस्टर ( resistor) में करंट (current) डायोड (diode) में करंट (current) के बराबर है। रजिस्टर ( resistor) में करंट (current) वीएस (V) माइन वीडी (V,)) बाइ (by ) आर (R) ((Vs V,)/R )है और यह डायोड (diode) में करंट (current) के बराबर है, जो 1g(exp(\) - 1)है। इसलिए, हम क्या करते हैं हम एक ग्राफ (graph) खींचते हैं राइट साइड
(right side) और लेफ्ट साइड (left side) के लिए और देखें कि वे कहां मिलते हैं। तो, यह राइट हैंड साइड (right hand side) का प्लाट (plot) है, यह लेफ्ट हैंड साइड (left hand side) का प्लाट (plot) है, और वे यहां मिलती हैं, जो सलूशन (solution) है। अब, जैसे वीएस (V) परिवर्तित होता है, हमें इसे दोहराना होगा। इसलिए, वीएस (V) के बड़े वैल्यू (value ) के लिए, इस विशेष मामले में राइट हैंड साइड (right hand side) नहीं बदलता है, लेकिन लेफ्ट हैंड साइड (left hand side) बदलता है, और हमारे पास एक नया सलूशन (solution) है, नॉन लिन्डुअर कर्व (nonlinear curve) के साथ नया पॉइन्ट आफ़ इन्टर्सिक्शन (point of intersection) । सरलीकरण जो हम करेंगे, वह निम्नलिखित है। आप देखते हैं कि अरिजॅनॅल सलूशन (original solution) यहां है, और यह एक नया सलूशन (solution) है। हम मानेंगे कि वीएस (V) परिवर्तित होता है, यह नॉन लिन्इअर (nonlinear) कर्व (curve) पर एक नए पॉइन्ट आफ़ इन्टर्सिक्शन (point of intersection) है, लेकिन यह बहुत दूर नहीं चलेगा, यह पॉइन्ट (point) इस पॉइन्ट (point) के करीब है। अब, हम बाद में देखेंगे क्या मतलब है, पॉइन्ट (point) यह है कि यदि आप नॉन लिन्ड्अर (nonlinear) कर्व (curve) पर बहुत दूर नहीं जाते हैं, तो इस पॉइन्ट (point) के आसपास, यदि आप नॉन लिन्इअर (nonlinear) कर्व (curve) पर बहुत दूर नहीं जाते हैं, तो हम नॉन लिन्डुअर कर्व (nonlinear curve) को अप्रॉक्समेट (approximate) कर सकते हैं स्ट्रेट लाइन (straight line) से, आप किसी कर्व (curve) को लेते हैं, आप इसके बहुत छोटे भाग में ज़ूम (zoom ) करते हैं, यह एक स्ट्रेट लाइन (straight line) की तरह दिखाई देगा, इसलिए वह सिद्धांत है जिसका हम उपयोग करते हैं। तो यहां आइडीअ ( idea ) यह है कि यदि हम बहुत दूर नहीं जाते हैं, तो मुझे इसे अरिनॅनॅल सलूशन (original solution) कहने दें, यह वास्तव में केवल प्रथम सलूशन (solution) जो आप गणना करते हैं। और इसे नॉन लिन्इअर (nonlinear) नूमिरिक्ली (numerically) या ग्रेफ़िक्ली (graphically) सलूशन (solution) से प्राप्त किया
जाना है, इसके लिए कोई शॉर्टकट (shortcu) नहीं है। हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं कम से कम कुछ परेशानी से बचाने के लिए, जब वीएस (V) बदलता हैं तो बाद के पॉइन्टस (points) के सलूशन (solution) की गणना करते हैं। तो, वीएस (V) के एक वैल्यू (value ) के लिए, हमने सटीक गणना की और अन्य वैल्यू (value ) को हम एक स्ट्रेट लाइन (straight line) से इस नॉन लिन्इअररिटी (nonlinearity) का अप्रॉक्समेट (approximate) लगाते हुए मानते हैं कि हम नॉन लिन्डुअर कर्व (nonlinear curve) पर बहुत दूर नहीं जाते हैं। अब, स्ट्रेट लाइन (straight line) क्या है जिसका हम उपयोग कर सकते हैं, इसलिए यह अरिनॅनॅल पॉइन्ट (original point) पर इस कर्व (curve) का टैन्जॅन्ट (tangent) है, और अरिजॅनॅल सलूशन (original solution) को सर्किट(circuit) के ऑपरेटिंग पॉइंट (operating point ) के रूप में जाना जाता है। इसलिए, मैं इसे पहले ग्राफिकली (graphically) दिखाता हूं, क्योंकि इसे समझना बहुत आसान है, इसे समीकरणों से औपचारिक रूप से साबित किया जा सकता है। तो, हम इस कर्व (curve) का अप्रॉक्समेशन (approximation) लगा रहे हैं, जो ब्लू कर्व (blue curve) है - नॉन लिन्इअर (nonlinear) इसके टैन्जॅन्ट (tangent) द्वारा जो निश्चित रूप से ऑपरेटिंग पॉइंट (operating poin) पर यह स्ट्रेट लाइन (straight line) है। और अब के लिए ऑपरेटिंग पॉइंट (operating point) आप इसे गणना करने वाले पहले मान के रूप में मान सकते हैं। वीएस (V) के कुछ वैल्यू (value ) के लिए, आपने सटीक सलूशन ( solution ) की गणना की है जो ऑपरेटिंग पॉइंट ( operating point) है। तो, अब, यह कैसे मदद करता है, क्योंकि आप जानते हैं कि यह स्ट्रेट लाइन (straight line) है। अन्य सभी पॉइंट ( point) के लिए, हम दो स्ट्रेट लाइन (straight line) के इन्टर्सिक्शन (intersection) की गणना कर रहे हैं और यह बहुत आसान है। असल में, हमें स्पष्ट रूप से इन्टर्सिक्शन (intersection) की गणना भी नहीं करना है, मैं उस विधि को दिखाऊंगा जिसके द्वारा हम ऐसा करेंगे, क्योंकि जब वीएस (V) बदलता है इस रेड कर्व (curve) से वास्तविक सलूशन ( solution ) वह होता है, लेकिन यदि आप इस अप्रॉक्समेट स्ट्रेट लाइन (approximate straight line) का इन्टर्सिक्शन (intersection) लते हैं अप्रॉक्समेशन सलूशन (approximation solution) वहा है, और वे एक-दूसरे के करीब हैं। और यदि आप एक पॉइंट ( point) लते हैं जो अरिजॅनॅल ऑपरेटिंग पॉइंट (original operating point) के करीब है, तो वे एक-दूसरे के करीब भी होंगे। तो अब के लिए हम मानदंडों को अस्पष्ट रूप से बताएंगे; यदि परिवर्तन छोटा है तो इसके टैन्जॅन्ट (tangent) द्वारा नॉन लिन्इअर कर्व (nonlinear curve) अप्रॉक्समेशन (approximation) करना पर्याप्त सलूशन (solution) देता है। तो यही वह है जो हम करेंगे। अब यह अप्रॉक्समेट (approximate) है, लेकिन यह पता चला है कि यह अप्रॉक्समेशन (approximation) काफी अच्छा और व्यावहारिक संदर्भ है, इसलिए हम इसका व्यापक रूप से उपयोग करेंगे। लेकिन निश्चित रूप से, आपको इस अप्रॉक्समेशन (approximation) की सीमाओं को समझना चाहिए; आपको ऑपरेटिंग पॉइंट (operating point) से बहुत
दूर नहीं जाना चाहिए। और आप जिस संदर्भ में काम कर रहे हैं उस पर बहुत दूर तक निर्भर करता है। और यह भी इस बात पर निर्भर करता है कि आप फ़र्स्ट प्लेस (first place) कितनी ऐक्युरॅसि ( accuracy) चाहते हैं। यदि आप सलूशन (solution) को बहुत ऐक्यरट (accurate) बनाना चाहते हैं तो आप ऑपरेटिंग पॉइंट (operating point) से बहुत दूर नहीं जा सकते हैं, लेकिन अगर कुछ
मामलों में क्रूड सलूशन (crude solution) ठीक हैं; कई मामलों में आप अनुमान लगाना चाहते हैं, इसलिए उन मामलों में, आप ऑपरेटिंग पॉइंट (operating point) से आगे जा सकते हैं।
| इनपुट बदल जाएगा; इसलिए टाइम विरीइंग सिगनल के प्रतयेक पॉइन्ट का लिए, आपको नूमिरिक्ल या ग्रेफ़िक्ल गणना को दोबारा करना होगा, और यह बहुत मुश्किल है। कम से कम इन्साइट प्राप्त करने के लिए सर्किट में और हैंड अनेलिसिस के लिए, हम इनसे बचना चाहते हैं। तो देखते हैं कि हम क्या कर सकते हैं। मैं उस ग्रेफ़िक्ली सलूशन को दोहरा दूंगा जो हमें मिला था। अनिवार्य रूप से, हम इस समीकरण के लिए हल कर रहे हैं, रजिस्टर में करंट डायोड में करंट के बराबर है। रजिस्टर में करंट वीएस माइन वीडी ) बाइ आर /R )है और यह डायोड में करंट के बराबर है, जो एक ग्राम - एक)है। इसलिए, हम क्या करते हैं हम एक ग्राफ खींचते हैं राइट साइड और लेफ्ट साइड के लिए और देखें कि वे कहां मिलते हैं। तो, यह राइट हैंड साइड का प्लाट है, यह लेफ्ट हैंड साइड का प्लाट है, और वे यहां मिलती हैं, जो सलूशन है। अब, जैसे वीएस परिवर्तित होता है, हमें इसे दोहराना होगा। इसलिए, वीएस के बड़े वैल्यू के लिए, इस विशेष मामले में राइट हैंड साइड नहीं बदलता है, लेकिन लेफ्ट हैंड साइड बदलता है, और हमारे पास एक नया सलूशन है, नॉन लिन्डुअर कर्व के साथ नया पॉइन्ट आफ़ इन्टर्सिक्शन । सरलीकरण जो हम करेंगे, वह निम्नलिखित है। आप देखते हैं कि अरिजॅनॅल सलूशन यहां है, और यह एक नया सलूशन है। हम मानेंगे कि वीएस परिवर्तित होता है, यह नॉन लिन्इअर कर्व पर एक नए पॉइन्ट आफ़ इन्टर्सिक्शन है, लेकिन यह बहुत दूर नहीं चलेगा, यह पॉइन्ट इस पॉइन्ट के करीब है। अब, हम बाद में देखेंगे क्या मतलब है, पॉइन्ट यह है कि यदि आप नॉन लिन्ड्अर कर्व पर बहुत दूर नहीं जाते हैं, तो इस पॉइन्ट के आसपास, यदि आप नॉन लिन्इअर कर्व पर बहुत दूर नहीं जाते हैं, तो हम नॉन लिन्डुअर कर्व को अप्रॉक्समेट कर सकते हैं स्ट्रेट लाइन से, आप किसी कर्व को लेते हैं, आप इसके बहुत छोटे भाग में ज़ूम करते हैं, यह एक स्ट्रेट लाइन की तरह दिखाई देगा, इसलिए वह सिद्धांत है जिसका हम उपयोग करते हैं। तो यहां आइडीअ यह है कि यदि हम बहुत दूर नहीं जाते हैं, तो मुझे इसे अरिनॅनॅल सलूशन कहने दें, यह वास्तव में केवल प्रथम सलूशन जो आप गणना करते हैं। और इसे नॉन लिन्इअर नूमिरिक्ली या ग्रेफ़िक्ली सलूशन से प्राप्त किया जाना है, इसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं है। हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं कम से कम कुछ परेशानी से बचाने के लिए, जब वीएस बदलता हैं तो बाद के पॉइन्टस के सलूशन की गणना करते हैं। तो, वीएस के एक वैल्यू के लिए, हमने सटीक गणना की और अन्य वैल्यू को हम एक स्ट्रेट लाइन से इस नॉन लिन्इअररिटी का अप्रॉक्समेट लगाते हुए मानते हैं कि हम नॉन लिन्डुअर कर्व पर बहुत दूर नहीं जाते हैं। अब, स्ट्रेट लाइन क्या है जिसका हम उपयोग कर सकते हैं, इसलिए यह अरिनॅनॅल पॉइन्ट पर इस कर्व का टैन्जॅन्ट है, और अरिजॅनॅल सलूशन को सर्किट के ऑपरेटिंग पॉइंट के रूप में जाना जाता है। इसलिए, मैं इसे पहले ग्राफिकली दिखाता हूं, क्योंकि इसे समझना बहुत आसान है, इसे समीकरणों से औपचारिक रूप से साबित किया जा सकता है। तो, हम इस कर्व का अप्रॉक्समेशन लगा रहे हैं, जो ब्लू कर्व है - नॉन लिन्इअर इसके टैन्जॅन्ट द्वारा जो निश्चित रूप से ऑपरेटिंग पॉइंट पर यह स्ट्रेट लाइन है। और अब के लिए ऑपरेटिंग पॉइंट आप इसे गणना करने वाले पहले मान के रूप में मान सकते हैं। वीएस के कुछ वैल्यू के लिए, आपने सटीक सलूशन की गणना की है जो ऑपरेटिंग पॉइंट है। तो, अब, यह कैसे मदद करता है, क्योंकि आप जानते हैं कि यह स्ट्रेट लाइन है। अन्य सभी पॉइंट के लिए, हम दो स्ट्रेट लाइन के इन्टर्सिक्शन की गणना कर रहे हैं और यह बहुत आसान है। असल में, हमें स्पष्ट रूप से इन्टर्सिक्शन की गणना भी नहीं करना है, मैं उस विधि को दिखाऊंगा जिसके द्वारा हम ऐसा करेंगे, क्योंकि जब वीएस बदलता है इस रेड कर्व से वास्तविक सलूशन वह होता है, लेकिन यदि आप इस अप्रॉक्समेट स्ट्रेट लाइन का इन्टर्सिक्शन लते हैं अप्रॉक्समेशन सलूशन वहा है, और वे एक-दूसरे के करीब हैं। और यदि आप एक पॉइंट लते हैं जो अरिजॅनॅल ऑपरेटिंग पॉइंट के करीब है, तो वे एक-दूसरे के करीब भी होंगे। तो अब के लिए हम मानदंडों को अस्पष्ट रूप से बताएंगे; यदि परिवर्तन छोटा है तो इसके टैन्जॅन्ट द्वारा नॉन लिन्इअर कर्व अप्रॉक्समेशन करना पर्याप्त सलूशन देता है। तो यही वह है जो हम करेंगे। अब यह अप्रॉक्समेट है, लेकिन यह पता चला है कि यह अप्रॉक्समेशन काफी अच्छा और व्यावहारिक संदर्भ है, इसलिए हम इसका व्यापक रूप से उपयोग करेंगे। लेकिन निश्चित रूप से, आपको इस अप्रॉक्समेशन की सीमाओं को समझना चाहिए; आपको ऑपरेटिंग पॉइंट से बहुत दूर नहीं जाना चाहिए। और आप जिस संदर्भ में काम कर रहे हैं उस पर बहुत दूर तक निर्भर करता है। और यह भी इस बात पर निर्भर करता है कि आप फ़र्स्ट प्लेस कितनी ऐक्युरॅसि चाहते हैं। यदि आप सलूशन को बहुत ऐक्यरट बनाना चाहते हैं तो आप ऑपरेटिंग पॉइंट से बहुत दूर नहीं जा सकते हैं, लेकिन अगर कुछ मामलों में क्रूड सलूशन ठीक हैं; कई मामलों में आप अनुमान लगाना चाहते हैं, इसलिए उन मामलों में, आप ऑपरेटिंग पॉइंट से आगे जा सकते हैं। |
- बड़े यूएसडीटी होल्डिंग्स वाले पते अपनी संपत्ति को एक्सचेंजों से स्थानांतरित कर रहे हैं।
- सर्किल में टीथर का मार्केट कैप हावी था, लेकिन पहले हाई सेंटीमेंट कम हुआ है।
सप्ताहांत में, स्थिर सिक्के पांचवें स्थान की क्रिप्टोक्यूरेंसी के रूप में "अस्थिर" हो गए सर्किल यूएसडीसी बाजार मूल्य में अपना डॉलर पेग खो दिया। घटना के बाद, बहुत सारे निवेशकों ने पाला बदल लिया और अपने अस्तबल को होल्ड कर लिया बांधने की रस्सी [USDT]. इससे यूएसडीसी के बाजार पूंजीकरण में गिरावट आई और टीथर के लिए प्रभुत्व बढ़ गया।
जबकि कई लोगों का मानना हो सकता है कि यूएसडीटी एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में कार्य कर सकता है, बहुत से लोग उन्हें एक्सचेंजों पर रखने पर भरोसा नहीं करते। वास्तव में, इस समूह में व्हेल प्रमुख प्रकाश थीं।
सेंटिमेंट के अनुसार, लगभग 1 बिलियन यूएसडीटी ने एक्सचेंज छोड़ दिया और पिछले दस दिनों में कई बार स्व-हिरासत में ले जाया गया। यह एक असामान्य घटना थी क्योंकि अब से पिछले 365 दिनों में यह कृत्य केवल आठ बार हुआ था।
जिस समय सर्किल ने अपने प्रदर्शन का खुलासा किया, उस समय टीथर के सीईओ पाओलो अर्दोइनो ने समुदाय को आश्वासन दिया था कि इसका सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) के साथ कोई संबंध नहीं है। परवाह किए बिना, यूएसडीसी के पास है अपना रास्ता खोज लिया वापस $1 पर, हालांकि प्रेस समय में कीमत अपेक्षित मूल्य से थोड़ी कम थी।
इस बीच, 18 फरवरी के आसपास यूएसडीटी के गैर-शून्य पते कम हो गए। लेकिन, ग्लासनोड के अनुसार, की संख्या अद्वितीय पते स्थिर मुद्रा की सकारात्मक मात्रा को बढ़ाकर 4.15 मिलियन कर दिया गया था। इसने USDT की श्रेष्ठता की बहाली की पुष्टि की यूएसडीसी की स्थिति इस पहलू में केवल 1.59 मिलियन अद्वितीय पते थे।
मोरेसो, यूएसडीटी नेटवर्क का एक हिस्सा जिसने ध्यान खींचा वह था वेग. इस मीट्रिक की एक व्याख्या यह है कि यह मापता है कि एक नेटवर्क में एक सिक्के की कितनी इकाइयाँ परिचालित हो रही हैं। यह बाजार पूंजीकरण द्वारा ऑन-चेन ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को विभाजित करके निकाला जाता है।
प्रेस समय में, USDT ने पिछले दस महीनों के उच्च स्तर को पार कर लिया, क्योंकि यह 0.366 पर चरम पर था। इस मान का अर्थ है कि तरल आपूर्ति में तेजी से वृद्धि हुई है। इसलिए, यूएसडीटी का उपयोग करके व्यापक बाजार तेजी से लेनदेन कर रहा था। लेकिन जिन लोगों के पास बड़ी आपूर्ति थी, उनके लिए एक्सचेंजों को बंद रखना ही सही रास्ता था।
इसके अतिरिक्त, USDC की परेशानियों ने USDT के प्रति धारणा को सुधारने में मदद की। ऐसा सेंटिमेंट के डेटा के कारण था दिखाया है कि बाद की स्थिर मुद्रा 12 मार्च को 6.628 पर पहुंच गई। भारित भाव किसी संपत्ति के बारे में जनता की राय को संकलित करता है।
कितना हैं आज के लायक 1,10,100 USDT?
इसलिए, वृद्धि का अर्थ है कि सामाजिक मात्रा अधिक थी और यूएसडीटी के प्रति भावना काफी हद तक सकारात्मक थी। हालाँकि, ऑन-चेन एनालिटिक प्लेटफ़ॉर्म के प्रेस टाइम डेटा से पता चला कि मीट्रिक को थोड़ा दबा दिया गया था।
शीर्ष पतों द्वारा आयोजित आपूर्ति प्रतिशत भी नीचे की ओर प्रवृत्त हुआ। प्रेस समय में, इन भारी-भरकम निवेशकों का हिस्सा घटकर 29.53 हो गया था।
| - बड़े यूएसडीटी होल्डिंग्स वाले पते अपनी संपत्ति को एक्सचेंजों से स्थानांतरित कर रहे हैं। - सर्किल में टीथर का मार्केट कैप हावी था, लेकिन पहले हाई सेंटीमेंट कम हुआ है। सप्ताहांत में, स्थिर सिक्के पांचवें स्थान की क्रिप्टोक्यूरेंसी के रूप में "अस्थिर" हो गए सर्किल यूएसडीसी बाजार मूल्य में अपना डॉलर पेग खो दिया। घटना के बाद, बहुत सारे निवेशकों ने पाला बदल लिया और अपने अस्तबल को होल्ड कर लिया बांधने की रस्सी [USDT]. इससे यूएसडीसी के बाजार पूंजीकरण में गिरावट आई और टीथर के लिए प्रभुत्व बढ़ गया। जबकि कई लोगों का मानना हो सकता है कि यूएसडीटी एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में कार्य कर सकता है, बहुत से लोग उन्हें एक्सचेंजों पर रखने पर भरोसा नहीं करते। वास्तव में, इस समूह में व्हेल प्रमुख प्रकाश थीं। सेंटिमेंट के अनुसार, लगभग एक बिलियन यूएसडीटी ने एक्सचेंज छोड़ दिया और पिछले दस दिनों में कई बार स्व-हिरासत में ले जाया गया। यह एक असामान्य घटना थी क्योंकि अब से पिछले तीन सौ पैंसठ दिनों में यह कृत्य केवल आठ बार हुआ था। जिस समय सर्किल ने अपने प्रदर्शन का खुलासा किया, उस समय टीथर के सीईओ पाओलो अर्दोइनो ने समुदाय को आश्वासन दिया था कि इसका सिलिकॉन वैली बैंक के साथ कोई संबंध नहीं है। परवाह किए बिना, यूएसडीसी के पास है अपना रास्ता खोज लिया वापस एक डॉलर पर, हालांकि प्रेस समय में कीमत अपेक्षित मूल्य से थोड़ी कम थी। इस बीच, अट्ठारह फरवरी के आसपास यूएसडीटी के गैर-शून्य पते कम हो गए। लेकिन, ग्लासनोड के अनुसार, की संख्या अद्वितीय पते स्थिर मुद्रा की सकारात्मक मात्रा को बढ़ाकर चार.पंद्रह मिलियन कर दिया गया था। इसने USDT की श्रेष्ठता की बहाली की पुष्टि की यूएसडीसी की स्थिति इस पहलू में केवल एक.उनसठ मिलियन अद्वितीय पते थे। मोरेसो, यूएसडीटी नेटवर्क का एक हिस्सा जिसने ध्यान खींचा वह था वेग. इस मीट्रिक की एक व्याख्या यह है कि यह मापता है कि एक नेटवर्क में एक सिक्के की कितनी इकाइयाँ परिचालित हो रही हैं। यह बाजार पूंजीकरण द्वारा ऑन-चेन ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को विभाजित करके निकाला जाता है। प्रेस समय में, USDT ने पिछले दस महीनों के उच्च स्तर को पार कर लिया, क्योंकि यह शून्य.तीन सौ छयासठ पर चरम पर था। इस मान का अर्थ है कि तरल आपूर्ति में तेजी से वृद्धि हुई है। इसलिए, यूएसडीटी का उपयोग करके व्यापक बाजार तेजी से लेनदेन कर रहा था। लेकिन जिन लोगों के पास बड़ी आपूर्ति थी, उनके लिए एक्सचेंजों को बंद रखना ही सही रास्ता था। इसके अतिरिक्त, USDC की परेशानियों ने USDT के प्रति धारणा को सुधारने में मदद की। ऐसा सेंटिमेंट के डेटा के कारण था दिखाया है कि बाद की स्थिर मुद्रा बारह मार्च को छः.छः सौ अट्ठाईस पर पहुंच गई। भारित भाव किसी संपत्ति के बारे में जनता की राय को संकलित करता है। कितना हैं आज के लायक एक,दस,एक सौ डॉलरT? इसलिए, वृद्धि का अर्थ है कि सामाजिक मात्रा अधिक थी और यूएसडीटी के प्रति भावना काफी हद तक सकारात्मक थी। हालाँकि, ऑन-चेन एनालिटिक प्लेटफ़ॉर्म के प्रेस टाइम डेटा से पता चला कि मीट्रिक को थोड़ा दबा दिया गया था। शीर्ष पतों द्वारा आयोजित आपूर्ति प्रतिशत भी नीचे की ओर प्रवृत्त हुआ। प्रेस समय में, इन भारी-भरकम निवेशकों का हिस्सा घटकर उनतीस.तिरेपन हो गया था। |
डूबकर जीवन में।
कोई त्रिभुज घेरे हुए भविष्य का वैभव,
समुद्र यात्राओं के अनाम विवरण,
जिसमें छिपाकर रखे गए हैं आयु और स्वास्थ्य के रहस्य,
इसे देखता हूँ एक अधूरे सपने की तरह-समय के आखिरी छोर से।
अभी बाकि हो प्रेम का कोई अछूता स्पर्श।
अभी दबाई जानी थी बंदूक की लिबलिबि,
अभी देना था ह्रदय का उष्म संदेश।
मेरा प्रिय, कितना अपरिचित।
| डूबकर जीवन में। कोई त्रिभुज घेरे हुए भविष्य का वैभव, समुद्र यात्राओं के अनाम विवरण, जिसमें छिपाकर रखे गए हैं आयु और स्वास्थ्य के रहस्य, इसे देखता हूँ एक अधूरे सपने की तरह-समय के आखिरी छोर से। अभी बाकि हो प्रेम का कोई अछूता स्पर्श। अभी दबाई जानी थी बंदूक की लिबलिबि, अभी देना था ह्रदय का उष्म संदेश। मेरा प्रिय, कितना अपरिचित। |
रामलला के दर्शन मार्ग में श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर बिछाई गई कारपेट। विराजमान रामलला के परिसर से रंगमहल बैरियर तक बिछाई गई कारपेट। तेज धूप में श्रद्धालुओं के पैर जलने की वजह से ट्रस्ट ने लिया फैसला। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द और भी कार्य किए जाएंगे दर्शन मार्ग पर। दर्शनार्थियों के मूलभूत सुविधा को पूरा करने के लिए ट्रस्ट कर रहा है प्रयास। श्रद्धालुओं को निशुल्क सामान जमा करने पीने के लिए साफ पानी और बैठने के लिए बेंच की सुविधा भी मिलेगी जल्द।
| रामलला के दर्शन मार्ग में श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर बिछाई गई कारपेट। विराजमान रामलला के परिसर से रंगमहल बैरियर तक बिछाई गई कारपेट। तेज धूप में श्रद्धालुओं के पैर जलने की वजह से ट्रस्ट ने लिया फैसला। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द और भी कार्य किए जाएंगे दर्शन मार्ग पर। दर्शनार्थियों के मूलभूत सुविधा को पूरा करने के लिए ट्रस्ट कर रहा है प्रयास। श्रद्धालुओं को निशुल्क सामान जमा करने पीने के लिए साफ पानी और बैठने के लिए बेंच की सुविधा भी मिलेगी जल्द। |
द्वाविंश अध्याय चौद्ध धर्म
बुद्ध शब्द का अर्थ होता है - ज्ञान प्राप्त । अमरसिंह इन्हें १८ नामों से सकेत करता है। बुद्ध दो प्रकार के होते हैं - प्रत्येक बुद्ध जो ज्ञान प्राप्त करने के बाद दूसरों को उपदेश नहीं देते तथा सम्मासम्बुद्ध जो सर्व देशों एव निव्वाण मार्ग के पथप्रदर्शक होते हैं। बुद्ध ने सन्यासी, ४८ बार राजा, ४३ बार वृक्षदेव, २६ चार उरदेशक, २४ बार प्रवक्का, २० घार इन्द्र, १८ बार बानर, १३ पार चखि १२ बार श्रेष्ठो, १२ वार , १० बार मृग, १० बार सिंह, ८ बार हस, ६ बार अश्व, ४ बार वृक्ष, ३ बार कु भकार, ३ बार चाण्डाल, २ बार मत्स्य दो बार गायन्ना, दो बार चूहा तथा एक एक बार बढ़ई लोहार, दुर और शशक कुन में जन्म लिया ।
बुद्ध का जन्म
शाक्य प्रदेश म करिवस्तु नामक नगर में सूर्यवंशी राजा शुद्धोदन रहते थे। उत्तरागढ़ नक्षत्र में आपदपूर्णिमा को इनकी माता मायादेवी ने प्रथम गर्भधारण किया। प्रथम प्रसव के समय अधिक दुख और लज्जा से बचने के लिए माया देवी ने अपने पति की आज्ञा से अपने मोहर को कुछ दाम दासियों सहित प्रशन देवदह नगर को प्रस्थान किया। कपिनवस्तु और देवदह के बीच ही मार के कारण माया को प्रसर होने लगी। लोग कनात घेरकर अलग हो गये और दोनों नगरों के बीच आम्रत के लुम्बिनोन म गम के दसवें माउ म घेशात्री पूर्णिमा को युद्ध का जन्म हुआ। लोग बालक को लेकर कपिनवस्तु ही लोग आये । पुत्र की पष्ठी ( छट्ठी ) समाप्त होने के याद यथाशीघ्र ही सानवें दिन मायादेवी इस संसार से चल बर्सी किन्तु राजा ने लालन पालन में कुत्र उठा न रखा ।
राजा शुद्धोदन ने पारंगन देवकों को पुनवाकर नामकरण संस्कार करवाया । भाउ माइयो ने गणना कर भविष्यवाणी की-ऐसे लक्षणोंवाला यदि गृहस्थ रहे तो राजा होना है और यदि प्रयजित हो, तो बुद्ध उनमें सबसे कम अवस्थावाने मात्रा काँसिन्य ने कहाइसके घर में रहने की संभावना नहीं है। यह विश्व का युद्ध होगा ये सा ग्राहय धाउ पूर्ण होने पर परलोक द्विारे कानों मादायों के पुत्रों से जब महापुरुष प्रमजिन दो गये, जाकर कहा - पुमार सिद्धार्थ व्यजित हो गये। यह नि स देह युद्ध होंगे। यदि तुम्हारे हिना जीव होते तो ये भी होते यदि तुम चाहो तो मेरे ग्राम ग्रामो दम र प्राजिय
१. विषौराकोट ( मेराठ को सराई )
२ दम्मिनदेई मौतनया स्टेशन से चार पश्चिम मेरालको तराई में
३. अदिपूरे निदान जायन चनूदिव ) भाग १, २०७०
far an
हो आय। फेवल सौन संन्यासी न हुए। शेष चार कौण्डिन्य प्राझण को मुलिया बनाकर संन्यस्त हुए। आगे यहीं पाँचों माझा पशवर्गीय स्थविर के नाम से स्यात हुए।
राजा ने देवशों से पूछा- क्या देखकर मेरा पुत्र संन्यस्त होगा
उत्तर - चार पूर्व लक्षण - वृद्ध, रोगी, मृत और मनजित ।
राजा ने बालक के लिए उत्तम रूपवाली और सप दोषों से रहित धाइयाँ नियुक्त की मालक अनन्त परिवार तथा महती शोभा और थी के साथ बढ़ने लगा। एक दिन राजा के यहाँ सेत बोने का उत्सव था। इस उत्सव पर लोग सारे नगर को देवताओं के विमान की भाँति घेर लिया करते थे राजा को एक सहस इलों की खेती होती थी। राजा दल-बल के साथ पुत्र को भी लेकर यहाँ पहुँचा। खेत के पास ही एक सघन जामुनवच के नीचे कुमार को तम्बू में सुता दिया गया। धाइयों भी तमाशा देखने के लिए बाहर चली गई। बालक अकेला होने के कारण मुछित सा हो गया। राजा ने आकर इस बालक को एकान्त में पाया और धाइयों को
बहुत फटकारा ।
कमशः सिद्धार्थ सोलह वर्ष के हुए। राजा ने राजकुमार के लिए तीनों ऋतुओं से युक्त तीन प्रासाद घनवा दिये। इनमें एक नौतला, दूसरा सात तला और तीसरा पाँच तला था । राजा ने ४० नाटक करनेवाली स्त्रियों को भी नियुक्त किया । सिद्धार्थ अलंकृत नटियों से परिवृत्त, गीतवाओं से सेवित और महासम्पत्ति का उपयोग करते हुए ऋतुओं के क्रम से प्रासादों में विहरते थे। इनकी महिपी गोपा थी। इसे कंचना, यशोधरा, विम्बा और विम्बसुन्दरी भी कहते हैं । यह घटाशब्द या किंकिणीस्वर के सुप्रबुद्ध राजा की कन्या थी ।
जिस समय विद्धार्थ महासम्पत्ति का उपयोग कर रहे थे, उसी समय जाति-विरादरी में अपवाद निकल पड़ा सिद्धार्थ कीड़ा में ही रत रहता है। किसी कला को नहीं सीखता युद्ध आने पर क्या करेगा ? राजा ने कुमार को बुलाकर कहा 'तात ! तेरे सगे-सम्बन्धी कहते हैं कि सिद्धार्थ किसी कला को न सीखकर फेवल खेलों में ही लिप्त रहता है। तुम इस विषय में क्या उचित समझते हो ?" कुमार ने कहा- 'महाराज ! मेरा शिल्प देखने के लिए नगर में ढोल पिटवा दें कि आज से सातवें दिन में अपनी कला प्रदर्शित करूँगा ।" राजा ने वैसा ही किया कुमार सिद्धार्थ ने अक्षणबेध, केशवेध इत्यादि बारह प्रकार के विभिन्न कलाओं को दिखलाया। राजा ने भी प्रसन्न होकर कुमार को केषक प्रदेश का समाहर्ता बनाकर भेज दिया।
एक दिन राजकुमार ने उपवन देखने की इच्छा से सारथी को बुलाकर रथ जोतने को कहा। सारथी सिन्धु देशीय चार घोड़ों को जोनकर रथ सहित उपस्थित हुआ । कुमार बाहर निकले। मार्ग में उन्हें एक जरा जर्जरित, टूटे दांत, पलित केश, धनुषाकार शरीवाला, थरथर कांपता हुआ दोय में डँडा लिये एक वृद्ध दीख पड़ा। कुमार ने सारथी से पूछा- 'सौम्य । यह कौन | द्वाविंश अध्याय चौद्ध धर्म बुद्ध शब्द का अर्थ होता है - ज्ञान प्राप्त । अमरसिंह इन्हें अट्ठारह नामों से सकेत करता है। बुद्ध दो प्रकार के होते हैं - प्रत्येक बुद्ध जो ज्ञान प्राप्त करने के बाद दूसरों को उपदेश नहीं देते तथा सम्मासम्बुद्ध जो सर्व देशों एव निव्वाण मार्ग के पथप्रदर्शक होते हैं। बुद्ध ने सन्यासी, अड़तालीस बार राजा, तैंतालीस बार वृक्षदेव, छब्बीस चार उरदेशक, चौबीस बार प्रवक्का, बीस घार इन्द्र, अट्ठारह बार बानर, तेरह पार चखि बारह बार श्रेष्ठो, बारह वार , दस बार मृग, दस बार सिंह, आठ बार हस, छः बार अश्व, चार बार वृक्ष, तीन बार कु भकार, तीन बार चाण्डाल, दो बार मत्स्य दो बार गायन्ना, दो बार चूहा तथा एक एक बार बढ़ई लोहार, दुर और शशक कुन में जन्म लिया । बुद्ध का जन्म शाक्य प्रदेश म करिवस्तु नामक नगर में सूर्यवंशी राजा शुद्धोदन रहते थे। उत्तरागढ़ नक्षत्र में आपदपूर्णिमा को इनकी माता मायादेवी ने प्रथम गर्भधारण किया। प्रथम प्रसव के समय अधिक दुख और लज्जा से बचने के लिए माया देवी ने अपने पति की आज्ञा से अपने मोहर को कुछ दाम दासियों सहित प्रशन देवदह नगर को प्रस्थान किया। कपिनवस्तु और देवदह के बीच ही मार के कारण माया को प्रसर होने लगी। लोग कनात घेरकर अलग हो गये और दोनों नगरों के बीच आम्रत के लुम्बिनोन म गम के दसवें माउ म घेशात्री पूर्णिमा को युद्ध का जन्म हुआ। लोग बालक को लेकर कपिनवस्तु ही लोग आये । पुत्र की पष्ठी समाप्त होने के याद यथाशीघ्र ही सानवें दिन मायादेवी इस संसार से चल बर्सी किन्तु राजा ने लालन पालन में कुत्र उठा न रखा । राजा शुद्धोदन ने पारंगन देवकों को पुनवाकर नामकरण संस्कार करवाया । भाउ माइयो ने गणना कर भविष्यवाणी की-ऐसे लक्षणोंवाला यदि गृहस्थ रहे तो राजा होना है और यदि प्रयजित हो, तो बुद्ध उनमें सबसे कम अवस्थावाने मात्रा काँसिन्य ने कहाइसके घर में रहने की संभावना नहीं है। यह विश्व का युद्ध होगा ये सा ग्राहय धाउ पूर्ण होने पर परलोक द्विारे कानों मादायों के पुत्रों से जब महापुरुष प्रमजिन दो गये, जाकर कहा - पुमार सिद्धार्थ व्यजित हो गये। यह नि स देह युद्ध होंगे। यदि तुम्हारे हिना जीव होते तो ये भी होते यदि तुम चाहो तो मेरे ग्राम ग्रामो दम र प्राजिय एक. विषौराकोट दो दम्मिनदेई मौतनया स्टेशन से चार पश्चिम मेरालको तराई में तीन. अदिपूरे निदान जायन चनूदिव ) भाग एक, दो हज़ार सत्तर far an हो आय। फेवल सौन संन्यासी न हुए। शेष चार कौण्डिन्य प्राझण को मुलिया बनाकर संन्यस्त हुए। आगे यहीं पाँचों माझा पशवर्गीय स्थविर के नाम से स्यात हुए। राजा ने देवशों से पूछा- क्या देखकर मेरा पुत्र संन्यस्त होगा उत्तर - चार पूर्व लक्षण - वृद्ध, रोगी, मृत और मनजित । राजा ने बालक के लिए उत्तम रूपवाली और सप दोषों से रहित धाइयाँ नियुक्त की मालक अनन्त परिवार तथा महती शोभा और थी के साथ बढ़ने लगा। एक दिन राजा के यहाँ सेत बोने का उत्सव था। इस उत्सव पर लोग सारे नगर को देवताओं के विमान की भाँति घेर लिया करते थे राजा को एक सहस इलों की खेती होती थी। राजा दल-बल के साथ पुत्र को भी लेकर यहाँ पहुँचा। खेत के पास ही एक सघन जामुनवच के नीचे कुमार को तम्बू में सुता दिया गया। धाइयों भी तमाशा देखने के लिए बाहर चली गई। बालक अकेला होने के कारण मुछित सा हो गया। राजा ने आकर इस बालक को एकान्त में पाया और धाइयों को बहुत फटकारा । कमशः सिद्धार्थ सोलह वर्ष के हुए। राजा ने राजकुमार के लिए तीनों ऋतुओं से युक्त तीन प्रासाद घनवा दिये। इनमें एक नौतला, दूसरा सात तला और तीसरा पाँच तला था । राजा ने चालीस नाटक करनेवाली स्त्रियों को भी नियुक्त किया । सिद्धार्थ अलंकृत नटियों से परिवृत्त, गीतवाओं से सेवित और महासम्पत्ति का उपयोग करते हुए ऋतुओं के क्रम से प्रासादों में विहरते थे। इनकी महिपी गोपा थी। इसे कंचना, यशोधरा, विम्बा और विम्बसुन्दरी भी कहते हैं । यह घटाशब्द या किंकिणीस्वर के सुप्रबुद्ध राजा की कन्या थी । जिस समय विद्धार्थ महासम्पत्ति का उपयोग कर रहे थे, उसी समय जाति-विरादरी में अपवाद निकल पड़ा सिद्धार्थ कीड़ा में ही रत रहता है। किसी कला को नहीं सीखता युद्ध आने पर क्या करेगा ? राजा ने कुमार को बुलाकर कहा 'तात ! तेरे सगे-सम्बन्धी कहते हैं कि सिद्धार्थ किसी कला को न सीखकर फेवल खेलों में ही लिप्त रहता है। तुम इस विषय में क्या उचित समझते हो ?" कुमार ने कहा- 'महाराज ! मेरा शिल्प देखने के लिए नगर में ढोल पिटवा दें कि आज से सातवें दिन में अपनी कला प्रदर्शित करूँगा ।" राजा ने वैसा ही किया कुमार सिद्धार्थ ने अक्षणबेध, केशवेध इत्यादि बारह प्रकार के विभिन्न कलाओं को दिखलाया। राजा ने भी प्रसन्न होकर कुमार को केषक प्रदेश का समाहर्ता बनाकर भेज दिया। एक दिन राजकुमार ने उपवन देखने की इच्छा से सारथी को बुलाकर रथ जोतने को कहा। सारथी सिन्धु देशीय चार घोड़ों को जोनकर रथ सहित उपस्थित हुआ । कुमार बाहर निकले। मार्ग में उन्हें एक जरा जर्जरित, टूटे दांत, पलित केश, धनुषाकार शरीवाला, थरथर कांपता हुआ दोय में डँडा लिये एक वृद्ध दीख पड़ा। कुमार ने सारथी से पूछा- 'सौम्य । यह कौन |
मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2020 का 32वां मुकाबला खेला गया। अबु धाबी के शेख जायेद क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में केकेआर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 149 रनों का लक्ष्य दिया। जिसका मुंबई इंडियंस ने सफलतापूर्वक हासिल कर 8 विकेट से जीत दर्ज की।
मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मुकाबले में टॉस केकेआर ने जीता और बल्लेबाजी का फैसला किया। अबु धाबी के मैदान पर कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम की कमान दिनेश कार्तिक नहीं बल्कि इयोन मोर्गन को सौंपी गई है और क्रिस ग्रीन को आईपीएल डेब्यू का मौका दिया गया।
मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने टीम में तेज गेंदबाज जेम्स पैटिंसन की जगह नाथन कूल्टर नाइल को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है।
इयोन मोर्गन की कप्तानी में मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम की एक बार फिर शुरुआत निराशाजनक हुई। ओपनिंग के लिए मैदान पर उतरे राहुल त्रिपाठी मात्र 7 रन बनाकर ही आउट हो गए। इसके बाद नितीश राणा भी 5 रन बनाकर आउट हो गए।
इस तरह केकेआर ने पावर प्ले में ही अपने 2 बल्लेबाज खो दिए। फिर शुभमन गिल इस बार भी बड़ी पारी नहीं खेल सके और 23 गेंदों पर 21 रन बनाकर आउट हो गए। केकेआर का कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर अधिक देर तक नहीं टिक सका।
कार्तिक त्यागी 4, आंद्रे रसेल 12 रन बनाकर पवेलियन लौटे। वहीं कप्तान इयोन मोर्गन नाबाद 39 व पैट कमिंस ने नाबाद 53 रन की अहम पारी खेली और 5 विकेट के नुकसान पर 148 तक पहुंचाया।
अबु धाबी के मैदान पर 149 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की टीम ने शानदार शुरुआत की। सलामी जोड़ी क्विंटन डी कॉक और रोहित शर्मा ने टीम को एक मजबूत शुरुआत दी। जहां, रोहित शर्मा 36 गेंदों पर 35 रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद सूर्यकुमार यादव भी 10 गेंदों पर 10 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।
मगर क्विंटन डी कॉक शुरु से लेकर अंत तक क्रीज पर टिके रहे और 44 गेंदों पर 78 रन बनाए। वहीं हार्दिक पांड्या ने नाबाद 21 रन बनाए और टीम को 8 विकेट से जीत दिलाई। इस जीत के साथ मुंबई इंडियंस प्वॉइंट्स टेबल में नंबर-1 पर पहुंच गई है।
इस मैच में कप्तान इयोन मोर्गन ने अबु धाबी के मैदान के अनुसार सही प्लेइंग इलेवन का चुनाव नहीं किया। इसलिए मुंबई की धाकड़ गेंदबाजी के सामने केकेआर की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। इसके बाद गेंदबाज भी कुछ खास नहीं कर सके और मुंबई इंडियंस ने शानदार जीत दर्ज की।
| मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार बीस का बत्तीसवां मुकाबला खेला गया। अबु धाबी के शेख जायेद क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में केकेआर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए एक सौ उनचास रनों का लक्ष्य दिया। जिसका मुंबई इंडियंस ने सफलतापूर्वक हासिल कर आठ विकेट से जीत दर्ज की। मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मुकाबले में टॉस केकेआर ने जीता और बल्लेबाजी का फैसला किया। अबु धाबी के मैदान पर कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम की कमान दिनेश कार्तिक नहीं बल्कि इयोन मोर्गन को सौंपी गई है और क्रिस ग्रीन को आईपीएल डेब्यू का मौका दिया गया। मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने टीम में तेज गेंदबाज जेम्स पैटिंसन की जगह नाथन कूल्टर नाइल को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। इयोन मोर्गन की कप्तानी में मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम की एक बार फिर शुरुआत निराशाजनक हुई। ओपनिंग के लिए मैदान पर उतरे राहुल त्रिपाठी मात्र सात रन बनाकर ही आउट हो गए। इसके बाद नितीश राणा भी पाँच रन बनाकर आउट हो गए। इस तरह केकेआर ने पावर प्ले में ही अपने दो बल्लेबाज खो दिए। फिर शुभमन गिल इस बार भी बड़ी पारी नहीं खेल सके और तेईस गेंदों पर इक्कीस रन बनाकर आउट हो गए। केकेआर का कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर अधिक देर तक नहीं टिक सका। कार्तिक त्यागी चार, आंद्रे रसेल बारह रन बनाकर पवेलियन लौटे। वहीं कप्तान इयोन मोर्गन नाबाद उनतालीस व पैट कमिंस ने नाबाद तिरेपन रन की अहम पारी खेली और पाँच विकेट के नुकसान पर एक सौ अड़तालीस तक पहुंचाया। अबु धाबी के मैदान पर एक सौ उनचास रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की टीम ने शानदार शुरुआत की। सलामी जोड़ी क्विंटन डी कॉक और रोहित शर्मा ने टीम को एक मजबूत शुरुआत दी। जहां, रोहित शर्मा छत्तीस गेंदों पर पैंतीस रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद सूर्यकुमार यादव भी दस गेंदों पर दस रन बनाकर पवेलियन लौट गए। मगर क्विंटन डी कॉक शुरु से लेकर अंत तक क्रीज पर टिके रहे और चौंतालीस गेंदों पर अठहत्तर रन बनाए। वहीं हार्दिक पांड्या ने नाबाद इक्कीस रन बनाए और टीम को आठ विकेट से जीत दिलाई। इस जीत के साथ मुंबई इंडियंस प्वॉइंट्स टेबल में नंबर-एक पर पहुंच गई है। इस मैच में कप्तान इयोन मोर्गन ने अबु धाबी के मैदान के अनुसार सही प्लेइंग इलेवन का चुनाव नहीं किया। इसलिए मुंबई की धाकड़ गेंदबाजी के सामने केकेआर की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। इसके बाद गेंदबाज भी कुछ खास नहीं कर सके और मुंबई इंडियंस ने शानदार जीत दर्ज की। |
CG Police Transfer 2023: राज्य के पुलिस विभाग में थोकबंद तबादलें किए गए है। भाटापारा उप पुलिस महानिरिक्षक के द्वारा जारी की गई लिस्ट में तकरीबन 39 पुलिस कर्मियों की नवीन पदस्थापना की गई है। पुलिस अधिकारियों के द्वारा किए गए तबादले से पुलिस कर्मियों में खलबली है तो वही थाना और चौकी इंचार्ज बनाए गए पुलिस अधिकारियों में प्रस्न्नता व्याप्त है।
उपपुलिस महानिरिक्षक एवं पुलिस अधीक्षक बलौदा बाजार भाटापार के द्वारा पुलिस व्यवस्था के तहत अपने क्षेत्र अंतर्गत 39 पुलिस कर्मचारियों का तबादला किया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि वे नवीन पदस्थापना वाले स्थान पर पहुच कर अपना प्रभार ग्रहण कर लें।
ज्ञात हो कि राज्य में लगातार तबादलें पुलिस विभाग सहित अन्य अधिकारियों के किए जा रहे है। उसके पीछे का एक कारण चुनावी वर्ष को भी माना जा रहा है। जिससे पदस्थ होने वाले अधिकारी अपने क्षेत्र के अपराध एवं पुलिस व्यवस्था में सेट हो सकें।
| CG Police Transfer दो हज़ार तेईस: राज्य के पुलिस विभाग में थोकबंद तबादलें किए गए है। भाटापारा उप पुलिस महानिरिक्षक के द्वारा जारी की गई लिस्ट में तकरीबन उनतालीस पुलिस कर्मियों की नवीन पदस्थापना की गई है। पुलिस अधिकारियों के द्वारा किए गए तबादले से पुलिस कर्मियों में खलबली है तो वही थाना और चौकी इंचार्ज बनाए गए पुलिस अधिकारियों में प्रस्न्नता व्याप्त है। उपपुलिस महानिरिक्षक एवं पुलिस अधीक्षक बलौदा बाजार भाटापार के द्वारा पुलिस व्यवस्था के तहत अपने क्षेत्र अंतर्गत उनतालीस पुलिस कर्मचारियों का तबादला किया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि वे नवीन पदस्थापना वाले स्थान पर पहुच कर अपना प्रभार ग्रहण कर लें। ज्ञात हो कि राज्य में लगातार तबादलें पुलिस विभाग सहित अन्य अधिकारियों के किए जा रहे है। उसके पीछे का एक कारण चुनावी वर्ष को भी माना जा रहा है। जिससे पदस्थ होने वाले अधिकारी अपने क्षेत्र के अपराध एवं पुलिस व्यवस्था में सेट हो सकें। |
लखनऊ - यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि CM योगी ने टीम-11 के साथ बैठक की है। जहां उन्होंने कहा कि जो भी श्रमिक या कामगार हैं उनकी प्रदेश वापसी के लिए व्यवस्थित रूप से स्क्रीन करके उनको घर तक होम क्वारंटाइन में भेजने का काम मजबूती से किया जा रहा है, कहीं भी किसी श्रमिक या कामगार पैदल ना चले, इससे बीमारी फैलने का खतरा है। जहां उन्होंने कहा ट्रेन-बस के द्वारा अब तक 7 लाख से ज्यादा लोगों को लाया जा चुका है।
अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में अब तक 69 ट्रेनें आ चुकी हैं वहीं लखनऊ-गोरखपुर में 11 ट्रेनें आ चुकी हैं साथ ही कहा कि अगले 2 दिन में 76 ट्रेनें यूपी आ जाएंगी। परिवहन विभाग की 10 बसें लोगों को ला रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने पूल टेस्टिंग बढ़ाने का आदेश दिया है। और 14 दिन तक होम क्वारंटीन में रहने की सलाह दी है। यूपी के स्वास्थ्य सचिव अमित मोहन ने कहा कि UP में कोरोना के 3145 कुल केस है। जहां कोरोना 1821 एक्टिव केस हैं और 1261 मरीज ठीक हो चुके हैं। वहीं बताया कि यूपी में अब तक कोरोना से 63 लोगों की मौत हो गई है।
साथ ही अवनीश कुमार अवस्थी कहा कि हरियाणा से अब 30000 से ज्यादा लोग जो एग्रीकल्चर लेबर हैं उनको आज या कल तक लाने की व्यवस्था कर रहे हैं, अब तक 69 ट्रेन हमारे प्रदेश में आ चुकी हैं। वहीं हरियाणा से 11500 से अधिक श्रमिक लाए गए हैं, कोटा से 12000 से अधिक छात्र लाए गए हैं, प्रयागराज से 15000 से ज्यादा छात्र अपने घर जा चुके हैं, मध्य प्रदेश और राजस्थान से 15000 लोगों को लाया गया है, गुजरात से महाराष्ट्र से भी कुछ और लोग अन्य वाहन से आ चुके हैं।
| लखनऊ - यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि CM योगी ने टीम-ग्यारह के साथ बैठक की है। जहां उन्होंने कहा कि जो भी श्रमिक या कामगार हैं उनकी प्रदेश वापसी के लिए व्यवस्थित रूप से स्क्रीन करके उनको घर तक होम क्वारंटाइन में भेजने का काम मजबूती से किया जा रहा है, कहीं भी किसी श्रमिक या कामगार पैदल ना चले, इससे बीमारी फैलने का खतरा है। जहां उन्होंने कहा ट्रेन-बस के द्वारा अब तक सात लाख से ज्यादा लोगों को लाया जा चुका है। अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में अब तक उनहत्तर ट्रेनें आ चुकी हैं वहीं लखनऊ-गोरखपुर में ग्यारह ट्रेनें आ चुकी हैं साथ ही कहा कि अगले दो दिन में छिहत्तर ट्रेनें यूपी आ जाएंगी। परिवहन विभाग की दस बसें लोगों को ला रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने पूल टेस्टिंग बढ़ाने का आदेश दिया है। और चौदह दिन तक होम क्वारंटीन में रहने की सलाह दी है। यूपी के स्वास्थ्य सचिव अमित मोहन ने कहा कि UP में कोरोना के तीन हज़ार एक सौ पैंतालीस कुल केस है। जहां कोरोना एक हज़ार आठ सौ इक्कीस एक्टिव केस हैं और एक हज़ार दो सौ इकसठ मरीज ठीक हो चुके हैं। वहीं बताया कि यूपी में अब तक कोरोना से तिरेसठ लोगों की मौत हो गई है। साथ ही अवनीश कुमार अवस्थी कहा कि हरियाणा से अब तीस हज़ार से ज्यादा लोग जो एग्रीकल्चर लेबर हैं उनको आज या कल तक लाने की व्यवस्था कर रहे हैं, अब तक उनहत्तर ट्रेन हमारे प्रदेश में आ चुकी हैं। वहीं हरियाणा से ग्यारह हज़ार पाँच सौ से अधिक श्रमिक लाए गए हैं, कोटा से बारह हज़ार से अधिक छात्र लाए गए हैं, प्रयागराज से पंद्रह हज़ार से ज्यादा छात्र अपने घर जा चुके हैं, मध्य प्रदेश और राजस्थान से पंद्रह हज़ार लोगों को लाया गया है, गुजरात से महाराष्ट्र से भी कुछ और लोग अन्य वाहन से आ चुके हैं। |
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Vegetable Research), वाराणसी, उत्तर प्रदेश में बैंगन और टमाटर (ब्रिमेटो) की दोहरी ग्राफ्टिंग को दिखाया है।
Karan Kundrra जो कि, Bigg Boss 15 में दिखाई दे रहे हैं। आजकल वो सोशल मीडिया सेंसेशन बन गए हैं। हर कोई उन्हीं की बात करता नजर आता है। लेकिन उनको लेकर कौन सी बात करता नजर आता है इसके बारे में आज हम आपको बताएंगे।
Maa जितना सुनने में अच्छा लगता है लेने में भी उतना ही सुकून मिलता है। ये एक ऐसा शब्द है जिसके अनेको मतलब होते हैं, लेकिन प्यार का एक ही स्वरूप होता है वो है ममता। कितना भी बच्चा अपनी मां से नाराज हो जाए वो कभी भी उसे अकेला नहीं छोड़ती। आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताएंगे जिससे आपका और आपकी मां का बनेगा स्ट्रांग बॉन्ड।
नई दिल्ली। त्योहार के लिए हर किसी के अलग-अलग मायनों में खास होता है। लेकिन अगर आप शादीशुदा हैं तो इसके मायने आपके लिए और ज्यादा बढ़ जाते हैं क्योंकि आपको पार्टनर का साथ मिलता है, उसका प्यार मिलता है। जिससे आपका रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है। सबसे ज्यादा त्योहारों पर क्योंकि उसपर आपको खास मौका मिलता है अपने पार्टनर को खुश करने का। आज हम आपको बताते हैं कैसे आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं।
वीडियो डेस्क। कन्नड़ फिल्म एक्टर पुनीत राजकुमार का हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे 46 साल के थे। पुनीत जिम में वर्कआउट कर रहे थे तभी उन्हें दिल का दौड़ा पड़ा। जिसके बाद उन्हें बेंगलुरु के विक्रम अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके निधन से पूरे कर्नाटक में शोक की लहर है।
Health tips: हल्दी (Turmeric) एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों का भंडार है, इससे बनने वाली चाय डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होती है।
Covid 19: यूनाइटेड किंगडम, चीन और रूस में COVID-19, AY. 4. 2 के डेल्टा वैरिएंट के एक उप-वंश का पता चला है और अब इसने भारत में अपना रास्ता बना लिया है।
| भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान , वाराणसी, उत्तर प्रदेश में बैंगन और टमाटर की दोहरी ग्राफ्टिंग को दिखाया है। Karan Kundrra जो कि, Bigg Boss पंद्रह में दिखाई दे रहे हैं। आजकल वो सोशल मीडिया सेंसेशन बन गए हैं। हर कोई उन्हीं की बात करता नजर आता है। लेकिन उनको लेकर कौन सी बात करता नजर आता है इसके बारे में आज हम आपको बताएंगे। Maa जितना सुनने में अच्छा लगता है लेने में भी उतना ही सुकून मिलता है। ये एक ऐसा शब्द है जिसके अनेको मतलब होते हैं, लेकिन प्यार का एक ही स्वरूप होता है वो है ममता। कितना भी बच्चा अपनी मां से नाराज हो जाए वो कभी भी उसे अकेला नहीं छोड़ती। आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताएंगे जिससे आपका और आपकी मां का बनेगा स्ट्रांग बॉन्ड। नई दिल्ली। त्योहार के लिए हर किसी के अलग-अलग मायनों में खास होता है। लेकिन अगर आप शादीशुदा हैं तो इसके मायने आपके लिए और ज्यादा बढ़ जाते हैं क्योंकि आपको पार्टनर का साथ मिलता है, उसका प्यार मिलता है। जिससे आपका रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है। सबसे ज्यादा त्योहारों पर क्योंकि उसपर आपको खास मौका मिलता है अपने पार्टनर को खुश करने का। आज हम आपको बताते हैं कैसे आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। वीडियो डेस्क। कन्नड़ फिल्म एक्टर पुनीत राजकुमार का हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे छियालीस साल के थे। पुनीत जिम में वर्कआउट कर रहे थे तभी उन्हें दिल का दौड़ा पड़ा। जिसके बाद उन्हें बेंगलुरु के विक्रम अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके निधन से पूरे कर्नाटक में शोक की लहर है। Health tips: हल्दी एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों का भंडार है, इससे बनने वाली चाय डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होती है। Covid उन्नीस: यूनाइटेड किंगडम, चीन और रूस में COVID-उन्नीस, AY. चार. दो के डेल्टा वैरिएंट के एक उप-वंश का पता चला है और अब इसने भारत में अपना रास्ता बना लिया है। |
निष्कर्षतः सात गीत वर्ष की कविताएँ माँसलता से ऊपर उठ गयी हैं । कवि ने विभिन्न पहलुओं पर कविताएँ लिखी है । इस संकलन में कहीं व्यंग्य है तो कहीं 'वृहन्नला' के माध्यम से आज के क्लीवी शोर्य का पोस्टमार्टम है । कही जीवन की रिक्तता है तो कहीं घुटन का धुआँ भी है । किन्तु इन सबके ऊपर यादों की मीनार खड़ी है, फूलों की गधभरा ऑगन है और हैं-- प्रकृति के ताजे ताजे अनाघ्रात और अचुम्बित चित्र जिन्हें देखकर लगता है कि कवि नये स्वरों को साधते हुए भी अपने प्रारम्भिक मनोभावों को पूरी तरह भुला नहीं पाया है ।" लेकिन कविताओं के विषय व भाव- - भूमि बदली हुई है । 'सात गीत वर्ष' तक आते-आते भारती की काव्य चेतना संभवतः अपनी वास्तविक राह खोज लेती है और उसे आत्मज्ञान की यह प्रौढ़ता प्राप्त हो जाती है कि मुग्ध सौन्दर्य, उद्दाम आकर्षण, मॉसलता और रूपोपासना इन सबके पीछे आवश्यक है आत्म संस्कार 112 इसलिए यहाँ कवि आत्म संस्कारों को ग्रहण करते हुए चिन्तनशील बन गया है। इस संकलन में प्रणय संवेदना है अवश्य लेकिन मांसल भूख न होकर तन मन से एक होने की चाह है । यहाँ संघर्ष, आस्था और विश्वास कवि शक्ति बन कर आये हैं । 'कवि की वाणी गैरिक वसना' होकर गोरे अंगो को फूलों में कसना भूल जाती है । निराशा, पराजय एवं अनास्था का कुहासा ' अंजुरी भर धूप' से दूर हो जाता है । अतः इस संकलन में प्रणय राग के अतिरिक्त संक्रान्ति वेला में गाये गये 'पराजित पीढ़ी के गीत' के दर्द को भी कवि ने उभारा है और धूल भरी आंधी का भी साक्षात्कार किया है । कवि के मन की प्यास मुर्दा होकर पिघले फूलों की आग बन कर एक नया प्रश्न चिहुन लगाती है । युगीन परिस्थितियों का दंश और अभिशाप फूट पड़ता है और कवि यथार्थ के धरातल पर उतर कर सांस्कृतिक एवं राजनैतिक विसंगतियों के प्रति कटुता एवं व्यंग्य से भर उठता है ।
वस्तुतः यहाँ कवि की वाणी में नयी चाह है, नया सन्देश है, वह आशान्वित है और उसने अपने अन्तर को प्रकट करके भावों के साथ शिल्प संधान में भी अपनी सामर्थ्य का परिचय दिया है ।
हरिचरण शर्मा, 'नयी कविता नये धरातल' पृष्ठ
श्री निवास शर्मा, हिन्दी के आधुनिक प्रतिनिधि कवि, पृष्ठ 226
श्री निवास शर्मा, हिन्दी के आधुनिक प्रतिनिधि कवि, पृष्ठ | निष्कर्षतः सात गीत वर्ष की कविताएँ माँसलता से ऊपर उठ गयी हैं । कवि ने विभिन्न पहलुओं पर कविताएँ लिखी है । इस संकलन में कहीं व्यंग्य है तो कहीं 'वृहन्नला' के माध्यम से आज के क्लीवी शोर्य का पोस्टमार्टम है । कही जीवन की रिक्तता है तो कहीं घुटन का धुआँ भी है । किन्तु इन सबके ऊपर यादों की मीनार खड़ी है, फूलों की गधभरा ऑगन है और हैं-- प्रकृति के ताजे ताजे अनाघ्रात और अचुम्बित चित्र जिन्हें देखकर लगता है कि कवि नये स्वरों को साधते हुए भी अपने प्रारम्भिक मनोभावों को पूरी तरह भुला नहीं पाया है ।" लेकिन कविताओं के विषय व भाव- - भूमि बदली हुई है । 'सात गीत वर्ष' तक आते-आते भारती की काव्य चेतना संभवतः अपनी वास्तविक राह खोज लेती है और उसे आत्मज्ञान की यह प्रौढ़ता प्राप्त हो जाती है कि मुग्ध सौन्दर्य, उद्दाम आकर्षण, मॉसलता और रूपोपासना इन सबके पीछे आवश्यक है आत्म संस्कार एक सौ बारह इसलिए यहाँ कवि आत्म संस्कारों को ग्रहण करते हुए चिन्तनशील बन गया है। इस संकलन में प्रणय संवेदना है अवश्य लेकिन मांसल भूख न होकर तन मन से एक होने की चाह है । यहाँ संघर्ष, आस्था और विश्वास कवि शक्ति बन कर आये हैं । 'कवि की वाणी गैरिक वसना' होकर गोरे अंगो को फूलों में कसना भूल जाती है । निराशा, पराजय एवं अनास्था का कुहासा ' अंजुरी भर धूप' से दूर हो जाता है । अतः इस संकलन में प्रणय राग के अतिरिक्त संक्रान्ति वेला में गाये गये 'पराजित पीढ़ी के गीत' के दर्द को भी कवि ने उभारा है और धूल भरी आंधी का भी साक्षात्कार किया है । कवि के मन की प्यास मुर्दा होकर पिघले फूलों की आग बन कर एक नया प्रश्न चिहुन लगाती है । युगीन परिस्थितियों का दंश और अभिशाप फूट पड़ता है और कवि यथार्थ के धरातल पर उतर कर सांस्कृतिक एवं राजनैतिक विसंगतियों के प्रति कटुता एवं व्यंग्य से भर उठता है । वस्तुतः यहाँ कवि की वाणी में नयी चाह है, नया सन्देश है, वह आशान्वित है और उसने अपने अन्तर को प्रकट करके भावों के साथ शिल्प संधान में भी अपनी सामर्थ्य का परिचय दिया है । हरिचरण शर्मा, 'नयी कविता नये धरातल' पृष्ठ श्री निवास शर्मा, हिन्दी के आधुनिक प्रतिनिधि कवि, पृष्ठ दो सौ छब्बीस श्री निवास शर्मा, हिन्दी के आधुनिक प्रतिनिधि कवि, पृष्ठ |
आप सभी जानते ही हैं कि करवा चौथ आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. जी हाँ, इस साल 27 अक्टूबर को करवा चौथ है जिसे देशभर की सुहागिन महिलाएं धूमधाम से मनाएंगी. ऐसे में इस साल कई बॉलीवुड हसीनाओं का भी पहला करवाचौथ है लेकिन इसी के साथ कई टीवी एक्ट्रेस भी इस साल शादी के बंधन में बंधी हैं और उनका भी पहला ही करवाचौथ है. तो आइए बताते हैं कौन सी टीवी एक्ट्रेस इस साल अपना पहला करवाचौथ सेलिब्रेट करेंगी.
रुबीना दिलायक - इन्होने इस साल 21 जून को शिमला में अपने प्रेमी अभिनव शुक्ला से शादी की. आपको बता दें कि दोनों ने 3 साल तक एक-दूसरे को डेट किया. इस साल दोनों अपना करवाचौथ सेलिब्रेट करेंगे.
दीपिका कक्कड़ - टीवी की मशहूर अदाकारा दीपिका कक्कड़ ने इसी साल 22 फरवरी को शोएब अब्राहिम के साथ भोपाल में एक प्राइवेट सेरेमनी में निकाह किया, आपको पता हो इन दोनों ने ससुराल सिमर का में साथ काम किया था.
गौरव चोपड़ा - 20 फरवरी को टीवी के मशहूर एक्टर गौरव चोपड़ा ने एक प्राइवेट सेरेमनी में हिशिता के साथ शादी कर ली. अब इस बार इनका भी पहला करवाचौथ है.
पंखुड़ी अवस्थी - टीवी शो 'सरस्वतीचंद्र' से सुर्खियों बटोरने वाले अभिनेता गौतम रोडे लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड पंखुड़ी अवस्थी से इसी साल 5 जनवरी को राजस्थान में शादी की अब इनका भी पहला करवाचौथ है.
नेहा सक्सेना - टीवी की दुनिया का हाटबीट बढ़ाने वाला कपल शक्ति अरोड़ा और नेहा सक्सेना ने 16 अप्रैल को शादी कर ली है अब इनका भी पहला करवाचौथ है.
विविधा कृति - इश्कबाज फेम एक्ट्रेस विविधा कृति ने अपने बचपन के दोस्त वरूण से 15 मार्च को शादी रचाई. अब इनका भी पहला करवाचौथ है.
कुणाल जयसिंह - इश्कबाज एक्टर कुणाल जयसिंह ने 18 मार्च को गर्लफ्रेंड भारती के साथ अंगेज हो गए. अब इनका भी पहला करवाचौथ है.
रिद्धिमा तिवारी - टीवी की यह एक्ट्रेस भी अपनी पहली करवा चौथ मनाने के लिए तैयार है. इन्होने जसकरण सिंह से शादी की है.
| आप सभी जानते ही हैं कि करवा चौथ आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. जी हाँ, इस साल सत्ताईस अक्टूबर को करवा चौथ है जिसे देशभर की सुहागिन महिलाएं धूमधाम से मनाएंगी. ऐसे में इस साल कई बॉलीवुड हसीनाओं का भी पहला करवाचौथ है लेकिन इसी के साथ कई टीवी एक्ट्रेस भी इस साल शादी के बंधन में बंधी हैं और उनका भी पहला ही करवाचौथ है. तो आइए बताते हैं कौन सी टीवी एक्ट्रेस इस साल अपना पहला करवाचौथ सेलिब्रेट करेंगी. रुबीना दिलायक - इन्होने इस साल इक्कीस जून को शिमला में अपने प्रेमी अभिनव शुक्ला से शादी की. आपको बता दें कि दोनों ने तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया. इस साल दोनों अपना करवाचौथ सेलिब्रेट करेंगे. दीपिका कक्कड़ - टीवी की मशहूर अदाकारा दीपिका कक्कड़ ने इसी साल बाईस फरवरी को शोएब अब्राहिम के साथ भोपाल में एक प्राइवेट सेरेमनी में निकाह किया, आपको पता हो इन दोनों ने ससुराल सिमर का में साथ काम किया था. गौरव चोपड़ा - बीस फरवरी को टीवी के मशहूर एक्टर गौरव चोपड़ा ने एक प्राइवेट सेरेमनी में हिशिता के साथ शादी कर ली. अब इस बार इनका भी पहला करवाचौथ है. पंखुड़ी अवस्थी - टीवी शो 'सरस्वतीचंद्र' से सुर्खियों बटोरने वाले अभिनेता गौतम रोडे लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड पंखुड़ी अवस्थी से इसी साल पाँच जनवरी को राजस्थान में शादी की अब इनका भी पहला करवाचौथ है. नेहा सक्सेना - टीवी की दुनिया का हाटबीट बढ़ाने वाला कपल शक्ति अरोड़ा और नेहा सक्सेना ने सोलह अप्रैल को शादी कर ली है अब इनका भी पहला करवाचौथ है. विविधा कृति - इश्कबाज फेम एक्ट्रेस विविधा कृति ने अपने बचपन के दोस्त वरूण से पंद्रह मार्च को शादी रचाई. अब इनका भी पहला करवाचौथ है. कुणाल जयसिंह - इश्कबाज एक्टर कुणाल जयसिंह ने अट्ठारह मार्च को गर्लफ्रेंड भारती के साथ अंगेज हो गए. अब इनका भी पहला करवाचौथ है. रिद्धिमा तिवारी - टीवी की यह एक्ट्रेस भी अपनी पहली करवा चौथ मनाने के लिए तैयार है. इन्होने जसकरण सिंह से शादी की है. |
मैदानी जिलों में दो सैनिक स्कूल चिह्नित करने के बाद अब सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में भी दो स्कूलों के प्रस्ताव तैयार कर रही है। नौ सितंबर की कैबिनेट बैठक में इस बाबत निर्णय किया जा चुका है।
मैदानी जिलों में दो सैनिक स्कूल चिह्नित करने के बाद अब सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में भी दो स्कूलों के प्रस्ताव तैयार कर रही है। नौ सितंबर की कैबिनेट बैठक में इस बाबत निर्णय किया जा चुका है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने सैनिक स्कूलों के लिए भूमि और भवन चिह्नित करना शुरू किया है।
इसमें एक स्कूल गढ़वाल मंडल तो दूसरा कुमाऊं मंडल में प्रस्तावित है। मालूम हो कि केंद्र सरकार की देश भर में सौ नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना के तहत उत्तराखंड ने भी दो स्कूल चिह्नित किए हैं। इनमें गढ़वाल मंडल में देहरादून का राजीव नवोदय विद्यालय है। जबकि कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर का एएन झा इंटर कालेज को चुना गया है।
इनका प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। दोनों स्कूल मैदानी जिलों में बनाने के प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे थे। सरकार ने भूमि की उपलब्धता के आधार पर पहाड़ी जिलों में भी सैनिक स्कूल खोलने का निर्णय किया है। जखोली में मंजूर हुए सैनिक स्कूल का भविष्य संकट में है।
| मैदानी जिलों में दो सैनिक स्कूल चिह्नित करने के बाद अब सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में भी दो स्कूलों के प्रस्ताव तैयार कर रही है। नौ सितंबर की कैबिनेट बैठक में इस बाबत निर्णय किया जा चुका है। मैदानी जिलों में दो सैनिक स्कूल चिह्नित करने के बाद अब सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में भी दो स्कूलों के प्रस्ताव तैयार कर रही है। नौ सितंबर की कैबिनेट बैठक में इस बाबत निर्णय किया जा चुका है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने सैनिक स्कूलों के लिए भूमि और भवन चिह्नित करना शुरू किया है। इसमें एक स्कूल गढ़वाल मंडल तो दूसरा कुमाऊं मंडल में प्रस्तावित है। मालूम हो कि केंद्र सरकार की देश भर में सौ नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना के तहत उत्तराखंड ने भी दो स्कूल चिह्नित किए हैं। इनमें गढ़वाल मंडल में देहरादून का राजीव नवोदय विद्यालय है। जबकि कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर का एएन झा इंटर कालेज को चुना गया है। इनका प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। दोनों स्कूल मैदानी जिलों में बनाने के प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे थे। सरकार ने भूमि की उपलब्धता के आधार पर पहाड़ी जिलों में भी सैनिक स्कूल खोलने का निर्णय किया है। जखोली में मंजूर हुए सैनिक स्कूल का भविष्य संकट में है। |
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए महाराष्ट्र के संगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार तक चलने वाली 100वीं किसान रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इस रेल गाड़ी में कई तरह के फल एवं सब्जियों को लादकर भेजा जा रहा है। इसमें फूलगोभी, बंद गोभी, शिमला मिर्च, मिर्च और प्याज के अलावा अंगूर, संतरा, केला, अनार और अन्य फल लादे गये हैं। बयान के मुताबिक रेलगाड़ी जिन स्टेशनों पर रुकेगी, वहां सभी तरह की कृषि उपज को चढ़ाने-उतारने की सुविधा होगी और इसके जरिए सामान भेजने के लिए मात्रा की कोई शर्त नहीं है।
पहली किसान रेल की शुरुआत सात अगस्त को महाराष्ट्र के देवलाली से बिहार के दानापुर तक की गई थी, जिसे बाद में मुजफ्फरपुर तक बढ़ाया गया। किसानों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसके फेरों की संख्या सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर सप्ताह में तीन दिन कर दी गई। बयान के मुताबिक, "किसान रेल ने देश भर में कृषि उपज का तेजी से परिवहन सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसने कृषि उपज के लिए निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला मुहैया कराई है।
पहली किसान रेल और दूसरी कृषि उड़ान।
| नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए महाराष्ट्र के संगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार तक चलने वाली एक सौवीं किसान रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इस रेल गाड़ी में कई तरह के फल एवं सब्जियों को लादकर भेजा जा रहा है। इसमें फूलगोभी, बंद गोभी, शिमला मिर्च, मिर्च और प्याज के अलावा अंगूर, संतरा, केला, अनार और अन्य फल लादे गये हैं। बयान के मुताबिक रेलगाड़ी जिन स्टेशनों पर रुकेगी, वहां सभी तरह की कृषि उपज को चढ़ाने-उतारने की सुविधा होगी और इसके जरिए सामान भेजने के लिए मात्रा की कोई शर्त नहीं है। पहली किसान रेल की शुरुआत सात अगस्त को महाराष्ट्र के देवलाली से बिहार के दानापुर तक की गई थी, जिसे बाद में मुजफ्फरपुर तक बढ़ाया गया। किसानों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसके फेरों की संख्या सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर सप्ताह में तीन दिन कर दी गई। बयान के मुताबिक, "किसान रेल ने देश भर में कृषि उपज का तेजी से परिवहन सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसने कृषि उपज के लिए निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला मुहैया कराई है। पहली किसान रेल और दूसरी कृषि उड़ान। |
सिरमौर पुलिस ने 840 किलो भुक्की मामले में माजरा थाने में हुए मामला दर्ज के मुख्य आरोपी को सोमवार को बहराल नाके के पास पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार मुख्य आरोपी काफी समय से माजरा पुलिस को चकमा देकर फरार था। गौरतलब है कि माजरा पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बेहडेवाला के पास नाका लगाकर एक ट्रक से 840 किलो भुक्की बरामद की थी, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। वहीं इस केस के मुख्य आरोपी को जिला सिरमौर की गुप्त शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा तथा उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी वह इतने दिनों से कहां पर छुपा हुआ था तथा उसने पुलिस को चकमा देने के लिए कहां-कहां पर और किस-किस का सहारा लिया। इस मामले में डीएसपी वीर बहादुर पिछले कई दिनों से इसकी तलाश में थे। डीएसपी वीर बहादुर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को अदालत में पेश करके रिमांड लिया जाएगा।
| सिरमौर पुलिस ने आठ सौ चालीस किलो भुक्की मामले में माजरा थाने में हुए मामला दर्ज के मुख्य आरोपी को सोमवार को बहराल नाके के पास पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार मुख्य आरोपी काफी समय से माजरा पुलिस को चकमा देकर फरार था। गौरतलब है कि माजरा पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बेहडेवाला के पास नाका लगाकर एक ट्रक से आठ सौ चालीस किलो भुक्की बरामद की थी, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। वहीं इस केस के मुख्य आरोपी को जिला सिरमौर की गुप्त शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा तथा उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी वह इतने दिनों से कहां पर छुपा हुआ था तथा उसने पुलिस को चकमा देने के लिए कहां-कहां पर और किस-किस का सहारा लिया। इस मामले में डीएसपी वीर बहादुर पिछले कई दिनों से इसकी तलाश में थे। डीएसपी वीर बहादुर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को अदालत में पेश करके रिमांड लिया जाएगा। |
भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आजकल बीमार चल रहे हैं और इलाज के लिये उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ वाजपेयी का हाल-चाल जानने के लिये थोड़ी देर में दिल्ली पहुंच रहे हैं।
गाज़ियाबादः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हाल-चाल जानने के लिये थोड़ी देर बाद दिल्ली के एम्स पहुंचेंगे।
सीएम योगी दोपहर साढ़े तीन बजे हिंडन एयर बेस पहुचेंगे जहां से वह एलिवेटेड रोड से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। योगी दिल्ली एम्स में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात करेंगे और उनका हाल-चाल जानेंगे।
वाजपेयी से मुलाकात के बाद सीएम योगी शाम साढ़े 6 बजे लखनऊ के लिए रवाना होंगे।
| भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आजकल बीमार चल रहे हैं और इलाज के लिये उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ वाजपेयी का हाल-चाल जानने के लिये थोड़ी देर में दिल्ली पहुंच रहे हैं। गाज़ियाबादः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हाल-चाल जानने के लिये थोड़ी देर बाद दिल्ली के एम्स पहुंचेंगे। सीएम योगी दोपहर साढ़े तीन बजे हिंडन एयर बेस पहुचेंगे जहां से वह एलिवेटेड रोड से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। योगी दिल्ली एम्स में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात करेंगे और उनका हाल-चाल जानेंगे। वाजपेयी से मुलाकात के बाद सीएम योगी शाम साढ़े छः बजे लखनऊ के लिए रवाना होंगे। |
- 8 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
- 8 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . "
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अमिताभ बच्चन एक के बाद एक फिल्मों में लगातार धमाल कर रहें हैं और अब उनकी फिल्म बदला को लेकर उनका पहला लुक सामने आया है। इस लुक को निर्देशक सुजॉय घोष ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है और लिखा है 8 मार्च। गौरतलब है कि फिल्म 8 मार्च को बड़े पर्दे पर दस्तक देने आ रही है। इस लुक में अमिताभ बच्चन सूट बूट में हाथ में एक बैग लिए नजर आ रहें हैं। हालांकि उनकी शक्ल इसमें नजर नहीं आ रही हैं।
इतना तो पक्का है कि हर फिल्म की तरह अमिताभ बच्चन इस फिल्म में भी काफी अलग तरह के लुक में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में उनके साथ तापसी पन्नू भी लीड रोल में नजर आने वाली हैं और इसके पहले भी दोनो साथ काम कर चुके हैं।
हम बात कर रहें हैं फिल्म पिंक की जिसमें दोनो के दमदार अभिनय ने लोगों दीवाना बना दिया था। तापसी पन्नू इस फिल्म में काम करने को लेकर शुरु से ही काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं।
जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
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Gujarat हार्दिक पटेल व अल्पेश कथीरिया ने कहा कि गुजरात सरकार आगामी 23 मार्च तक पाटीदार युवकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमे वापस नहीं लेती है तो पाटीदार फिर आंदोलन पर मजबूर होंगे। हार्दिक ने कहा कि अल्पेश कथीरिया आगामी आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन पार्ट-दो की अगुुवाई सूरत के पाटीदार नेता अल्पेश कथीरिया करेंगे। कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने कहा कि वे हर मोर्चे पर अल्पेश का साथ देंगे। पाटीदार आरक्षण आंदोलन की शर्तों पर अमल कराने को सरकार पर दबाव बनाने के लिए पाटीदार आंदोलन समिति लगातार प्रयास कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गले की फांस बनी पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के जिला व तहसील पदाधिकारियों की बैठक रविवार को बुलाई गई। इस बैठक में पाटीदार युवकों पर आंदोलन के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मुकदमें वापस लेने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दिनेश बामणिया, अल्पेश कथीरिया समेत आधा दर्जन युवकों पर राजद्रोह का मुकदमा हैं, जबकि अन्य सैकड़ों युवकों के खिलाफ 390 आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। गुजरात के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने पाटीदार नेताओं को आपराधिक मुकदमे वापस लेने का वादा किया था, लेकिन पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति अब सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है।
रविवार को बैठक के बाद हार्दिक पटेल और अल्पेश कथीरिया ने पत्रकारों को बताया कि सरकार आगामी 23 मार्च तक पाटीदार युवकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमे वापस नहीं लेती है तो पाटीदार फिर आंदोलन पर मजबूर होंगे। हार्दिक पटेल ने कहा कि अल्पेश कथीरिया आगामी आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। बतौर कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष वे अल्पेश कथीरिया का हर मोर्चे पर साथ देंगे। गौरतलब है कि गुजरात में आरक्षण आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल करीब नौ माह तक जेल में रहे थे तथा उसके बाद अल्पेश कथीरिया को भी राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया। आंदोलन के दौरान अल्पेश कथीरिया को दो बार जेल जाना पड़ा था। बीते साल ही करीब तीन माह जेल में रहने के बाद वे जुलाई, 2021 में रिहा हुए थे।
| Gujarat हार्दिक पटेल व अल्पेश कथीरिया ने कहा कि गुजरात सरकार आगामी तेईस मार्च तक पाटीदार युवकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमे वापस नहीं लेती है तो पाटीदार फिर आंदोलन पर मजबूर होंगे। हार्दिक ने कहा कि अल्पेश कथीरिया आगामी आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन पार्ट-दो की अगुुवाई सूरत के पाटीदार नेता अल्पेश कथीरिया करेंगे। कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने कहा कि वे हर मोर्चे पर अल्पेश का साथ देंगे। पाटीदार आरक्षण आंदोलन की शर्तों पर अमल कराने को सरकार पर दबाव बनाने के लिए पाटीदार आंदोलन समिति लगातार प्रयास कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी की गले की फांस बनी पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के जिला व तहसील पदाधिकारियों की बैठक रविवार को बुलाई गई। इस बैठक में पाटीदार युवकों पर आंदोलन के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मुकदमें वापस लेने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दिनेश बामणिया, अल्पेश कथीरिया समेत आधा दर्जन युवकों पर राजद्रोह का मुकदमा हैं, जबकि अन्य सैकड़ों युवकों के खिलाफ तीन सौ नब्बे आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। गुजरात के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने पाटीदार नेताओं को आपराधिक मुकदमे वापस लेने का वादा किया था, लेकिन पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति अब सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है। रविवार को बैठक के बाद हार्दिक पटेल और अल्पेश कथीरिया ने पत्रकारों को बताया कि सरकार आगामी तेईस मार्च तक पाटीदार युवकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमे वापस नहीं लेती है तो पाटीदार फिर आंदोलन पर मजबूर होंगे। हार्दिक पटेल ने कहा कि अल्पेश कथीरिया आगामी आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। बतौर कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष वे अल्पेश कथीरिया का हर मोर्चे पर साथ देंगे। गौरतलब है कि गुजरात में आरक्षण आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल करीब नौ माह तक जेल में रहे थे तथा उसके बाद अल्पेश कथीरिया को भी राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया। आंदोलन के दौरान अल्पेश कथीरिया को दो बार जेल जाना पड़ा था। बीते साल ही करीब तीन माह जेल में रहने के बाद वे जुलाई, दो हज़ार इक्कीस में रिहा हुए थे। |
इस बारे में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया है।
इस पद पर उनकी नियुक्ति दो साल (2022 से 2024) के लिए की गई है। वह 'ZEE5 Global' (जी5 ग्लोबल) के हेड अमित गोयनका की जगह यह पदभार संभालेंगे।
अमर उजाला को अपने हिंदी न्यूज पोर्टल और अख़बार दोनों के लिए एंटरटेनमेंट बीट के लिए पत्रकार की तलाश है।
e4m-DNPA डायलॉग्स में 'मिंडेरू फाउंडेशन' की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड और 'दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट' के डायरेक्टर पीटर लुईस के बीच काफी ज्ञानपरक व रोचक चर्चा हुई।
e4m-DNPA वर्चुअल राउंडटेबल में ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन (ACCC) के पूर्व अध्यक्ष रोडनी सिम्स ने न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड के बारे में विस्तार से बातचीत की।
e4m और DNPA, डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए इंटरनेशनल स्पीकर्स के साथ वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं।
जम्मू से खबर है कि यहां शनिवार रात अमर उजाला के पत्रकार से कार सवार बदमाशों ने न केवल मारपीट कर लूटपाट की, बल्कि अपहरण करने का भी प्रयास किया।
इसके साथ ही रजत शर्मा वाइस प्रेजिडेंट (न्यूज और करेंट अफेयर्स), राहुल जोशी वाइस प्रेजिडेंट (गवर्नमेंट एंड रेगुलेटरी अफेयर्स) और पुनीत मिश्रा एक बार फिर कोषाध्यक्ष के पद पर चुने गए हैं।
पत्रकार गौरव त्रिपाठी ने 'दैनिक जागरण' (Dainik Jagran) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह इस अखबार की हिसार यूनिट में करीब चार साल से कार्यरत थे।
टाइम्स नेटवर्क के प्रेजिडेंट व COO रोहित चड्ढा ने कहा कि डिजिटल न्यूज में व्युअर्स की पहुंच जिस तरह से बढ़ रही है, वह टाइम्स नाउ में व्युअर्स के भरोसे को दर्शाता है।
लिखित परीक्षा ओएमआर शीट के माध्यम से ली जा रही है। दूसरे चरण में 20 नवंबर को 27 शहरों के 29 सेंटरों पर यह परीक्षा होगी।
इससे पहले वह यहां डिप्टी इंटरनेट एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।
डिजिटल मीडिया स्टार्टअप 'ट्राईसिटी टुडे' (Tricity Today) ने 'रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया' (RNI) की एक पॉलिसी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पत्रकार अंकित शर्मा ने 'टीवी9' (TV9) डिजिटल को अलविदा कह दिया है। वह यहां सोशल मीडिया मैनेजर के पद पर एक वर्ष से अधिक समय से कार्यरत थे।
'हिंदुस्तान टाइम्स' ग्रुप से पहले विश्व गौरव नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
मूल रूप से आगरा के रहने वाले विनोद भारद्वाज को मीडिया में काम करने का करीब साढ़े चार दशक का अनुभव है। वह 'ताज प्रेस क्लब' आगरा के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं।
| इस बारे में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया है। इस पद पर उनकी नियुक्ति दो साल के लिए की गई है। वह 'ZEEपाँच Global' के हेड अमित गोयनका की जगह यह पदभार संभालेंगे। अमर उजाला को अपने हिंदी न्यूज पोर्टल और अख़बार दोनों के लिए एंटरटेनमेंट बीट के लिए पत्रकार की तलाश है। eचार मीटर-DNPA डायलॉग्स में 'मिंडेरू फाउंडेशन' की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड और 'दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट' के डायरेक्टर पीटर लुईस के बीच काफी ज्ञानपरक व रोचक चर्चा हुई। eचार मीटर-DNPA वर्चुअल राउंडटेबल में ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन के पूर्व अध्यक्ष रोडनी सिम्स ने न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड के बारे में विस्तार से बातचीत की। eचार मीटर और DNPA, डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए इंटरनेशनल स्पीकर्स के साथ वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं। जम्मू से खबर है कि यहां शनिवार रात अमर उजाला के पत्रकार से कार सवार बदमाशों ने न केवल मारपीट कर लूटपाट की, बल्कि अपहरण करने का भी प्रयास किया। इसके साथ ही रजत शर्मा वाइस प्रेजिडेंट , राहुल जोशी वाइस प्रेजिडेंट और पुनीत मिश्रा एक बार फिर कोषाध्यक्ष के पद पर चुने गए हैं। पत्रकार गौरव त्रिपाठी ने 'दैनिक जागरण' में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह इस अखबार की हिसार यूनिट में करीब चार साल से कार्यरत थे। टाइम्स नेटवर्क के प्रेजिडेंट व COO रोहित चड्ढा ने कहा कि डिजिटल न्यूज में व्युअर्स की पहुंच जिस तरह से बढ़ रही है, वह टाइम्स नाउ में व्युअर्स के भरोसे को दर्शाता है। लिखित परीक्षा ओएमआर शीट के माध्यम से ली जा रही है। दूसरे चरण में बीस नवंबर को सत्ताईस शहरों के उनतीस सेंटरों पर यह परीक्षा होगी। इससे पहले वह यहां डिप्टी इंटरनेट एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। डिजिटल मीडिया स्टार्टअप 'ट्राईसिटी टुडे' ने 'रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया' की एक पॉलिसी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पत्रकार अंकित शर्मा ने 'टीवीनौ' डिजिटल को अलविदा कह दिया है। वह यहां सोशल मीडिया मैनेजर के पद पर एक वर्ष से अधिक समय से कार्यरत थे। 'हिंदुस्तान टाइम्स' ग्रुप से पहले विश्व गौरव नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। मूल रूप से आगरा के रहने वाले विनोद भारद्वाज को मीडिया में काम करने का करीब साढ़े चार दशक का अनुभव है। वह 'ताज प्रेस क्लब' आगरा के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं। |
जी हां आपको बता दे कि, फिल्म 'पार्टीशन 1947' का पहला गाना लॉन्च हुआ है. फिल्म का पहला गाना 'दो दिलों की तैयारी' है. इससे फिल्म पार्टीशन 1947 का ट्रेलर लॉन्च हो चुका है. यह फिल्म भारत पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित है.
फिल्म के पहले गाने को श्रेया घेषाल और हरिहरन ने अपनी आवाज दी है. गाने का म्यूजिक ए आर रहमान ने दिया है. गाने में हुमा मुरेशी और मनीष दयाल के अलावा ओम पुरी की झलक दिखी है. पहला गाना बहुत धीमा है. इसमें बंटवारे के समय दो दिलों के बिछड़ने का दर्द छलका है.
फिल्म पार्टीशन 1947 के ट्रेलर लॉन्च से कुछ घंटो पहले इसका पोस्टर सामने आया था. पोस्टर को हुमा कुरैशी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था.
| जी हां आपको बता दे कि, फिल्म 'पार्टीशन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस' का पहला गाना लॉन्च हुआ है. फिल्म का पहला गाना 'दो दिलों की तैयारी' है. इससे फिल्म पार्टीशन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस का ट्रेलर लॉन्च हो चुका है. यह फिल्म भारत पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित है. फिल्म के पहले गाने को श्रेया घेषाल और हरिहरन ने अपनी आवाज दी है. गाने का म्यूजिक ए आर रहमान ने दिया है. गाने में हुमा मुरेशी और मनीष दयाल के अलावा ओम पुरी की झलक दिखी है. पहला गाना बहुत धीमा है. इसमें बंटवारे के समय दो दिलों के बिछड़ने का दर्द छलका है. फिल्म पार्टीशन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के ट्रेलर लॉन्च से कुछ घंटो पहले इसका पोस्टर सामने आया था. पोस्टर को हुमा कुरैशी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था. |
ज्ञानवापी (Gyanvapi Case) मामले को अदालत के बाहर सुलझाने के लिए विश्व वैदिक सनातन संघ ने कदम उठाया है। इसके लिए संघ के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन ने मुस्लिम पक्ष को आमंत्रित भी किया है। हालांकि इसको लेकर हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए वकील विष्णु शंकर जैन (Advocate Vishnu Shankar Jain) ने गुरुवार को कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सीपीसी के तहत अदालत के बाहर समझौता कानूनी रूप से संभव नहीं है।
वकील विष्णु शंकर जैन का कहना है, 'सीपीसी के आदेश 23 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक सभी पक्ष सहमत नहीं हो जाते, तब तक कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सीपीसी के तहत अदालत से बाहर समाधान की यह पहल संभव नहीं है, क्योंकि यह कानूनी रूप से संभव नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारी कोई भी पार्टी या क्लाइंट समझौते के लिए तैयार नहीं है।'
एएनआई से बात करते हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वे समझौता करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें अपने कुछ अधिकार छोड़ने होंगे। वे एक इंच भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा, 'मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि समझौता कैसे होगा' समझौता तभी होता है, जब आप अपने कुछ अधिकार छोड़ देते हैं और दूसरा व्यक्ति अपने कुछ अधिकार छोड़ देता है। यहां हम तारबंदी के अंदर की एक इंच जमीन भी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हम चाहते हैं कि पूरा क्षेत्र बैरिकेड के अंदर हो।'
विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 'जिस तरह से आपने (मुस्लिम पक्ष) एक मंदिर को मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया है, मुस्लिम पक्ष को मंदिर परिसर को गलत तरीके से इस्तेमाल करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। इसलिए समझौते का कोई सवाल ही नहीं है।'
यह भी पढ़ेंः ज्ञानवापी पर कथा वाचक मोरारी बापू का बड़ा बयान, कहा- 'शिव सबके हैं, सर्वे का विरोध नहीं होना चाहिए'
| ज्ञानवापी मामले को अदालत के बाहर सुलझाने के लिए विश्व वैदिक सनातन संघ ने कदम उठाया है। इसके लिए संघ के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन ने मुस्लिम पक्ष को आमंत्रित भी किया है। हालांकि इसको लेकर हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने गुरुवार को कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सीपीसी के तहत अदालत के बाहर समझौता कानूनी रूप से संभव नहीं है। वकील विष्णु शंकर जैन का कहना है, 'सीपीसी के आदेश तेईस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक सभी पक्ष सहमत नहीं हो जाते, तब तक कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सीपीसी के तहत अदालत से बाहर समाधान की यह पहल संभव नहीं है, क्योंकि यह कानूनी रूप से संभव नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारी कोई भी पार्टी या क्लाइंट समझौते के लिए तैयार नहीं है।' एएनआई से बात करते हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वे समझौता करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें अपने कुछ अधिकार छोड़ने होंगे। वे एक इंच भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि समझौता कैसे होगा' समझौता तभी होता है, जब आप अपने कुछ अधिकार छोड़ देते हैं और दूसरा व्यक्ति अपने कुछ अधिकार छोड़ देता है। यहां हम तारबंदी के अंदर की एक इंच जमीन भी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हम चाहते हैं कि पूरा क्षेत्र बैरिकेड के अंदर हो।' विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 'जिस तरह से आपने एक मंदिर को मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया है, मुस्लिम पक्ष को मंदिर परिसर को गलत तरीके से इस्तेमाल करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। इसलिए समझौते का कोई सवाल ही नहीं है।' यह भी पढ़ेंः ज्ञानवापी पर कथा वाचक मोरारी बापू का बड़ा बयान, कहा- 'शिव सबके हैं, सर्वे का विरोध नहीं होना चाहिए' |
पदों का विवरण : केंद्रीय जल आयोग में सहायक, पीआरओ, यूडीसी, एलडीसी, निजी सचिव, आशुलिपिक, अभियंता आदि के 53 पदों पर भर्ती को लेकर आवेदन मांगे हैं।
योग्यता : आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार 12वीं, स्नातक, डिप्लोमा आदि निर्धारित किया गया हैं।
चयन प्रक्रिया : आपको बता दें की योग्य उम्मीदवारों का चयन परीक्षा/साक्षात्कार आयोजित करके किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए नोटिश देखिये।
आवेदन की तिथि : इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 22 जून 2022 तक चलेगी। इसलिए आप जल्द से जल्द आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।
आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार केंद्रीय जल आयोग के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें।
| पदों का विवरण : केंद्रीय जल आयोग में सहायक, पीआरओ, यूडीसी, एलडीसी, निजी सचिव, आशुलिपिक, अभियंता आदि के तिरेपन पदों पर भर्ती को लेकर आवेदन मांगे हैं। योग्यता : आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार बारहवीं, स्नातक, डिप्लोमा आदि निर्धारित किया गया हैं। चयन प्रक्रिया : आपको बता दें की योग्य उम्मीदवारों का चयन परीक्षा/साक्षात्कार आयोजित करके किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए नोटिश देखिये। आवेदन की तिथि : इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया बाईस जून दो हज़ार बाईस तक चलेगी। इसलिए आप जल्द से जल्द आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें। आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार केंद्रीय जल आयोग के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। |
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः कार दुर्घटना में घायल हुए क्रिकेटर ऋषभ पंत का इलाज़ देहरादून के मैक्स हॉस्पिटल में चल रहा है। हालांकि अस्पताल में उन्हें आराम पूर्ण रूप से आराम करने का वक्त नहीं मिल रहा है। क्योंकि विधायक, मंत्री, अधिकारी फिल्म अभिनेता उन्हें देखने के लिए आते रहते हैं। इस पर उनके परिवार ने चिंता जाहिर की है। मुलाकात के लिए निर्धारित किए गए घंटों के बाद भी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं। पंत को 30 दिसंबर को मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
| स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः कार दुर्घटना में घायल हुए क्रिकेटर ऋषभ पंत का इलाज़ देहरादून के मैक्स हॉस्पिटल में चल रहा है। हालांकि अस्पताल में उन्हें आराम पूर्ण रूप से आराम करने का वक्त नहीं मिल रहा है। क्योंकि विधायक, मंत्री, अधिकारी फिल्म अभिनेता उन्हें देखने के लिए आते रहते हैं। इस पर उनके परिवार ने चिंता जाहिर की है। मुलाकात के लिए निर्धारित किए गए घंटों के बाद भी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं। पंत को तीस दिसंबर को मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। |
राजस्थान में अपनी ही सरकार के खिलाफ सचिन पायलट का अनशन. आप को मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा. कर्नाटक चुनाव के लिए बीजेपी जारी करेगी उम्मीदवारों की लिस्ट. अग्निपथ स्कीम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर. यहां देखिए आज की बड़ी सुर्खियां.
| राजस्थान में अपनी ही सरकार के खिलाफ सचिन पायलट का अनशन. आप को मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा. कर्नाटक चुनाव के लिए बीजेपी जारी करेगी उम्मीदवारों की लिस्ट. अग्निपथ स्कीम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर. यहां देखिए आज की बड़ी सुर्खियां. |
अपने प्रमेयकमलमार्तंड में बहुत अच्छी तरह स्त्रीमुक्ति केवली कवलाहार इत्यादि का निषेध किया है । धर्मसंग्रह श्रावकाचार में श्री जिनचन्द्राचार्य ने पृष्ठ ३७ पर लिखा है।
क्योकर आहार के बिना रह सकेगी ?
परन्तु यह उनकी कल्पना बिल्कुल असङ्गत है । यह बात हम भी मानते हैं कि संसारी जीवों की शरीर की स्थिति आहारादि के बिना रहना मुश्किल ही नहीं किन्तु नितांत असम्भव है, रहे ? परन्तु क्या इस कथन से श्वेताम्बरी लोग यह भी स्वीकार करेंगे कि केवली भगवान् भी ससारी लोगों के समान हैं यदि वे इसे स्वीकार करें तो फिर उनका केवली को प्रभु मानना निरर्थक है। यदि वे इसे नहीं मानेंने तो उन्हें और कितने केवली भगवान के अतिशय मानना पड़ते हैं। उसी के अनुसार आहारादिक की निवृत्तिरूप भी एक और अतिशय मानना पड़ेगा ।
दूसरे जिन भगवान को जब अनन्त चतुष्टय का अधिपति कहते हैं, फिर उनसे हमारा इतना ही पूछना है कि केवली भगवान को क्षुधादिकों की प्रवृत्ति मानने से अनन्तशक्तिपने का उनमें निर्बाध निर्वाह हो जायगा या नहीं ? खेद तो इस बात का कि अनन्त चतुष्टय भी बतानो और आहारादिक की कल्पना भी करना, यह कैसे बन सकता है मेरी समझ में तो ये, माता को बन्ध्या कहने के समान है। इसे कौन बुद्धिमान मानेगा।
और भी यह बात है कि जब हमलोग भोजनादि करते हैं उसी के साथ मे हमारे पीछे शौचादि की भी वाघाका अन्वयव्यतिरेक सम्बन्ध है। केवलो भगवान् को भी यह बाधा स्वीकार करना पड़ेगी। कदाचित् यह कहो कि यह तो उनका अतिशय है जो भोजन के करने पर भी उन्हें ये बोधायें बाधित नहीं करतीं तो फिर उसी तरह आहारादिकों का अभाव स्वरूप ही एक और अतिशय क्यो न मान लिया जाय जिससे इतनी विडम्बना का पहले से ही सूत्रपात न हो ।
क्षुधादिदोषनिर्मुक्तः सर्वातिशयभासुरः । प्राप्तानन्त चतुष्कोसौ कोट्यादित्यसदृक्प्रभः ॥६५॥ प्रातिहार्याष्टभूतीश स्त्रिसन्ध्यं क्षणदांतरे। प्रभुःषण्णाडिका यावत्सूत्रार्थं ध्वनिता वदेत् ।।१६।।
अर्थात - क्षुधा, पिपासा, जरा, आतङ्क, जन्म, मरण, शोक, भय, चिन्ता, प्रस्वेदादि अठारह प्रकार के दोषो से रहित तथा दश जन्म के, दश केवलज्ञान के, और चौदह देवताओं के इस तरह चौंतीस अतिशयो से विराजमान, जिन्हें अनन्त दर्शन, अनंन्तज्ञान, अनन्त सुख और अनन्त वीर्य ये अनन्त चतुष्टय प्राप्त हो गये हैं, अष्टप्रातिहार्यों से शोभित, 'और जिनकी शरीर को कांति कोटि सूर्य से भी अधिक है ऐसे, त्रिभुवन स्वामी श्री जिनदेव अपनी मेघ समान दिव्य ध्वनि से प्रातःकाल, मध्याह्नकाल, सायंकाल, और आधी रात्रि में तत्व का उपदेश नियम पूर्वक करते रहते हैं। रात्रि के समय जो दिव्यध्वनि होती है वह छह नाड़िका तक होती है। एक नाड़ी एक घड़ी (२४ मिनट) की होती है।
इन श्लोको में सर्वज्ञ देव का स्वरूप वर्णन किया गया है। सर्वज्ञ के पहले विशेषण में उन्हें क्षुधादि अठारह प्रकार के दोपों से रहित बनाया है।
परन्तु हमारे प्रोफेमर जी जैसे व्यक्ति तथा श्वेताम्बर सम्प्रदाय वाले उसे ठीक नहीं बताते हैं । वे कहते हैं - जब यह बात हम अपनी दृष्टि से देख रहे हैं कि आहारादि के बिना शरीरिक स्थिति नहीं र६ सकती फिर केवली भगवान के शरीर की स्थिति
अच्छा यह तो कहो कि जब केवली भगवान
परते हैं, वह समवशरण में ही करते हैं या कहीं अन्यत्र ? और समवशरण में भी गन्धकुटी से कोई दूसरा स्थान है अथवा गन्धकुटी के ऊपर ही । मैं नहीं कह सकता इन लोगों की कैसी असङ्गत कल्पनायें हैं, जिनके देखने से दांतों के नीचे अंगुली दवाना पड़ती है। हा, इसी सम्बन्ध में हमें एक बात चौर स्मरण हो आई है। वह यह है - हम यह पूछना चाहते हैं कि ये लोग जिस तरह गृहस्थों तथा मुनियों के आहार के समय अन्तरायों की कल्पना करते है । उसी तरह केवली भगवान के अन्तरायों की कल्पना करते हैं या नहीं ? यदि स्वीकार करेंगे, तब जो दिगम्बरी लोगों का केवली को आहारादिका नहीं मानना है वही सुतरां सिद्ध हो जायगा । क्योकि फेयली भगवान त्रैलोक्य के जानने वाले और देखने वाले है । इसमें न तो श्वेताम्चरियों का कुछ विवाद है और न दिगम्बरी लोगो को। इससे यह सिद्ध होगा कि संसार में जितना अच्छा वा बुरा कृत्य उस समय में होता होगा, वह चराचर केवलो भगवान को मालूम पड़ता ही होगा। कहीं पर जीवो की दृष्ट लोग हिमा करते है, कहीं कोई किस तरह का दुष्कृत्य पर रहा है इत्यादि कर्मों को प्रत्यक्ष देखते ट्र्ये ५.रुणासागर फेवली भगवान आहारादि कभी नहीं पर सक्ते । इतने पर भी यही दुरामह बना रहे तो हम फिर कभी उनमें जिन की कल्पना ही नहीं कर सकते। यदि कढाचित अन्तराय स्वीकार नरें तो भाचिन बुरी बात है जिस खोटे काम
देखने से गृहग्य जोगनक आहार का परित्याग पर देते हैं उसोन बैलोय के नाम की घृतान अजितने साहचर्य की बात है।
इन लोगों की केवल यही कल्पना नहीं है किन्तु ऐसो सैंकड़ो असङ्गत कल्पनायें हैं यदि मौका मिला तो 'श्वेताम्बर पराजय' नामक स्वतन्त्र प्रन्थ में खूत्र खुलासा वर्णन करेंगे। सच बात तो यह है कि जिन लोगो की कल्पनायें आधुनिक होती हैं वे कहां तक ठीक कही जा सकेंगी ? यह वात विचारणीय है । गट्टपमाए पढमा सएगा एहि तत्थ कारणभावा । मेसाकम्मत्वित्तेणुवयारेणत्थि । हि कज्जे ।।१३६॥
टीका - नष्टप्रमादे श्रप्रमत्तसंयताद्यपरितनगुणस्थानेषु प्रथमासंज्ञा आहारसंज्ञा न भवति । कुतः कारणात तत्राप्रमत्तादौ आहारसंज्ञा कारणस्य असत्तावेदनीयोदीरणाख्यस्याभावात् । सातासातावेदनीयमनुष्यायुष्याणां त्रिप्रकृतीनां प्रमत्तविरते एव उदीरणा भवतीति परमागमे प्रसिद्धत्वात् । शेषा भयमैथुनपरिग्रहसंज्ञा अप्रमत्तसंयतादि-गुणस्थानेषु तत्तत्कारण भयवेदलोभकर्मोंदीरणानां तत्तदुदय-व्युच्छित्तिचरमसमयपर्यंतमस्तित्वेन निमित्तेनोपचारेण सन्ति स्व स्व कार्ये पलायनरतिक्रीड़ा परीग्रह स्वीकाररूपे प्रवृत्यभावात् । मन्दमन्दत र मन्दतमातिसूक्ष्मानुभागोदयसहितसंयमविशेषसमाहितध्यानोपयुक्तांनां महामुनीनां भयादिसंज्ञा मुख्यवृत्त्या न सन्त्येव, अन्यथा कदाचिदपि शुक्लध्यान धातिकर्मक्षयो वा न घटते .............. ततो मोक्षमिच्छनां स्याद्वादिनां दपक श्रेण्यामाहारादि चतुः संज्ञानामभाव एत्र सम्भावनीय इति केवलिनां कुनः कबलाहारसुतिगद्दारसज्ञानिषेधात् ।
मनोथिकाय मयचन्द्रः । इति - या मृल में श्रप्रमत्तादि गुणस्थानों में प्रथम आहारता वा निषेध और उसके कारण का भाव फा गया है । अष्ट तीन संज्ञाम्रो का वहां पर उपसर में महान पड़ा है, अचार का कर उन
उन कर्मों की उदीरणा का अस्तित्व और कार्यरूप से वहां संज्ञायें नहीं होतीं। टीका में तो प्राधान्यरूप से होने का कारण भी कह दिया गया है । तात्पर्य में यह है कि अप्रमत्त आदि गुणस्थानों में उपचार से ये संज्ञायें हैं परमार्थिक में वे नहीं हैं। ऐसी प्रवृत्ति अर्थात् प्रथा केवली भगवान के 'क्षुधादि परीषहों के सम्बन्ध में है। केवली के वेदनीयकर्म के उदय का 'अस्तित्व है, कार्यरूप से या प्रमुखपन से अथवा स्पष्ट रूप से नहीं है । वक्तव्य कहीं उपचार से या शक्ति की अपेक्षा से होता है, और कहीं पर प्राधान्यरूप या सामध्ये को अपेक्षा से होता है। केवली में क्षुधादिका सद्भाव उपचार से या सामर्थ्य की अपेक्षा से कहा गया है। इसलिये कहा जाता है कि 'तत्वार्थमहाशास्त्र में भी और प्रस्तुत आगम में भी ग्यारह परीषह केवली भगवान में उपचार से हैं। वास्तविक उनका अभाव हो है। ऐसा उद्धरण शास्त्रों में विद्यमान होते हुए भी आजकल के प्रोफेसर जी के समान मनुष्य स्वीकार नहीं करते हैं यह बड़ी दुःख की बात है।
जिस तरह सम्पूर्ण मोहनीय कर्म नष्ट होने पर और वेदनीय का सद्भाव होने से केवली भगवान को ग्यारह परीषद् उपचार से मानी जाती हैं न कि पारमार्थिक न्याय से । इसी तरह ज्ञानावरण के नष्ट हो जाने पर युगग्त सम्पूर्ण पदार्थों का प्रकाशन करने वाले केवल ज्ञान रूप अतिशय के होते हुये भगवान के चिन्तानिरोध का अभाव है। उसके होते हुये भी उसका फल कर्मोदय की निर्जरारूप फल की अपेक्षा से ध्यान का उपचार किया जाता है। उसी प्रकार वास्तव में क्षुधादिको का अभाव है किन्तु वेदनीयकर्म का सद्भाव होने से 'एकादश जिने' यही संज्ञा उपचार से कही है।
मथितार्थ यह है कि ध्यान भी जिस तरह उनमें उपचार से है, उसी तरह परीषह भी उपचार से हैं, वास्तविक मे ग्यारह परीषह उनमें नहीं है। अतएव क्षुधादि वेदना का भगवान में अभाव है। यथा- - ननु मोहनीय - सहायाभावात् क्षुध दिवेदनाभावे परीषहव्यपदेशो न युक्तः, सत्यमेवमेदत, वेदनाभावेऽपि द्रव्यकर्ममद्भावापेक्षया परीषहोपचारः कियते । निरवशेषनिरस्ताज्ञानावर युगपत्सकल- - पदार्थावभासिकेवलज्ञानातिशये चिन्तानिरोधाभावेऽपि तत्फल 'कर्मनिर्हरणापेक्षया ध्यानोपचारवत् । अथवा एकादश "जिने न सन्तीति वाक्य शेषः कल्पनीयः सोपस्कारस्वात् सूत्राणां । 'मोहोदयसहायोकृतक्षुधादिवेंदनाभावात् ।" इति ।
यहां टोका में ग्यारह परीषदों का सद्भाव और अभाव कह दिया गया है, द्रव्य कर्म के सद्भाव की अपेक्षा से उपचार से सद्भाव और मोहनीय के उदय की सहायता न होने से कार्य रूप से उनका यही बात अकलंकदेवने राजवार्तिकमे और आचार्य विद्यानन्द ने श्लोकवार्तिक में एकादश जिने' सूत्र मे कही है आदि पुराण पृष्ठ २५ देखिये -
न भुक्तिः क्षीणमोहस्य तवानन्तसुखोदयात । 'क्षुत्क्लेशवाधितो जन्तुः कवलाहारभुग्भवेत् ।।१।। असद्वेद्योदयाद्भुति खयि यो योजयेदधीः । मोहानिलप्रतीकारे तस्यान्वे व्यं जरघृतं ।।२।। असनेद्यविष घातिविध्वंस ध्वस्तशक्तिकं । खय्य किंचित्कर मन्त्रशक्त्येवाप्रवल विषं ॥६॥ असद्वेद्योदयो घातिसहकारिव्यपायतः । वय्यकिचित्करी नाथ सामग्रन्या हि फलोदयः ४
आचार्य देवसेन कवलाहार का निषेध मार्मिक ता से व विस्तार के साथ करते हैं, वे कहते हैं कि
अन्य विषयों का भी भोगोपभोग करता है। किन्तु विषयों का भोग करने वाला वीतरागी कैसे हो सकता है ? इसलिये केवलीके कवलाहार प्रमाणविरुद्ध है। प्रमेयकमल मार्तंड में प्रभाचन्दाचार्य ने लिखा हैश्वेताम्बर लोग केवली में कवलाहार कहते हैं सी भगवान में वह नहीं है, क्योंकि उस परमभट्टारक अर्हन्त भगवान के मन नष्ट हो गया है । इन्द्रियों के व्यापार से जिनका चित्त रहित हो गया है और जिन के भावेन्द्रिय की प्रधानता है, उनके निश्चल ध्यान होता है। उस ध्यान से उस आत्मा के आत्मा और मन का एकीभाव होता है, और फिर एकी भाव से संवित्ति होती है। उस सवित्ति से तृष्णा, निद्रा और क्षुधा, नष्ट हो जाते हैं तब वह ध्यानी पुरुष क्षपकश्रेणि मे आरूढ़ होता है वह निद्रादि के कारण, मोहकर्म का सम्पूर्ण क्षय करता है। उसके क्षय हो जाने से केवलज्ञान प्रगट होता है, वह केवलज्ञान समस्त अठारह दोष प्रलय हो जाने से होता है। वे अठारह दोष क्षुधादिक है, वे केवली भगवान के नहीं होते हैं ।
नोकमोहार, कर्माहार, कवलाहार, लेपाहार, ओजार और मनाहार इस प्रकार छह प्रकार का हर होता है। इनमें से नोकर्माहार और कर्माहार ये दो तो समस्त चतुगेति वाले जोवो के होते हैं, कवलाहार मनुष्यों और पशुओं के होता है, वृक्षों के लेपाहार होता है। अण्डों में रहने वाले पक्षियों के ओजाहार होता है । और देवों के मानसिकाहार होता है। इन छहो आहार में से कवलाहार, लेपाहार, 'ओजाहार, और मानसिकाहार ये चार प्रकार के आहार केवली के नहीं होते। जो नोकर्माद्दार और कर्माद्दार केवली के होते हैं । वे भी जिनागम में उपचार से कहे गये है। निश्चय से तो वे भी नहीं हैं। क्योंकि- केवली भगवान उत्कृष्ट वीतराग -
परमेष्ठी हैं ।
जो भोजन करता है वह सोता है, सोता हुआ
'ये श्वेतपटाः प्रतिपादयन्ति आत्मनो जीवन्मुक्तौ कवलाहारं प्रेच्छन्ति तेषां - अनन्त चतुष्टयस्वभावा - भावोऽनन्तसुखविरहात् । तद्विरहश्चबुभुक्षापीड़ाक्रान्त - त्वात् । तत्पीड़ाप्रतिकारार्थो हि निखिलजन्तूनां कवलाहारग्रहणप्रेसङ्गः ।'
अर्थ - जो श्वेताम्बर लोग कहते हैं कि आत्मा के जीवन्मुक्तावस्था में अर्थात् केवली भगवान के अनन्त चतुष्टय व वीतराग दशामें कवलाहार होता है, उन लोगो के प्रति अनेकांतमय, स्याद्वादसप्तभंगीगर्भित स्यात्पदालकृतपरमागम के प्रमाण, नय, निक्षेप, तर्क और युक्तियों के द्वारा निषेध किय जाता है।
केवली को कवलाहार मानने से उनके अनन्त - चतुष्टय स्वभाव का अभाव हो जाने पर उन भगवान. के 'घातिकर्म चतुष्टय के अभाव से पैदा होने वाले के नैसगिक अनन्तसुखादिकों का सुतरां विनाश होता है । और उसका अभाव होने से उन परमात्मा में भी क्षुधादि अठारह दोषो का सद्भाव हो जाने से वे भगवान् रागी, द्वेषी, मोही होने से उनमें वीतराग व सर्वज्ञत्व न रहेगा यह बड़ा भारी दोष उपस्थित हो जायगा और उस भूख के प्रतिकार करने के लिये सांसारिक जांवो को कवलाद्दार ग्रहण करना पड़ता है। क्या केवली भी ऐसे ही हैं ?
श्रत भगवान में अनन्त चतुष्टय के सद्भाव और अठारह दोषों के अभाव होने से वीतरागता सर्वज्ञता | अपने प्रमेयकमलमार्तंड में बहुत अच्छी तरह स्त्रीमुक्ति केवली कवलाहार इत्यादि का निषेध किया है । धर्मसंग्रह श्रावकाचार में श्री जिनचन्द्राचार्य ने पृष्ठ सैंतीस पर लिखा है। क्योकर आहार के बिना रह सकेगी ? परन्तु यह उनकी कल्पना बिल्कुल असङ्गत है । यह बात हम भी मानते हैं कि संसारी जीवों की शरीर की स्थिति आहारादि के बिना रहना मुश्किल ही नहीं किन्तु नितांत असम्भव है, रहे ? परन्तु क्या इस कथन से श्वेताम्बरी लोग यह भी स्वीकार करेंगे कि केवली भगवान् भी ससारी लोगों के समान हैं यदि वे इसे स्वीकार करें तो फिर उनका केवली को प्रभु मानना निरर्थक है। यदि वे इसे नहीं मानेंने तो उन्हें और कितने केवली भगवान के अतिशय मानना पड़ते हैं। उसी के अनुसार आहारादिक की निवृत्तिरूप भी एक और अतिशय मानना पड़ेगा । दूसरे जिन भगवान को जब अनन्त चतुष्टय का अधिपति कहते हैं, फिर उनसे हमारा इतना ही पूछना है कि केवली भगवान को क्षुधादिकों की प्रवृत्ति मानने से अनन्तशक्तिपने का उनमें निर्बाध निर्वाह हो जायगा या नहीं ? खेद तो इस बात का कि अनन्त चतुष्टय भी बतानो और आहारादिक की कल्पना भी करना, यह कैसे बन सकता है मेरी समझ में तो ये, माता को बन्ध्या कहने के समान है। इसे कौन बुद्धिमान मानेगा। और भी यह बात है कि जब हमलोग भोजनादि करते हैं उसी के साथ मे हमारे पीछे शौचादि की भी वाघाका अन्वयव्यतिरेक सम्बन्ध है। केवलो भगवान् को भी यह बाधा स्वीकार करना पड़ेगी। कदाचित् यह कहो कि यह तो उनका अतिशय है जो भोजन के करने पर भी उन्हें ये बोधायें बाधित नहीं करतीं तो फिर उसी तरह आहारादिकों का अभाव स्वरूप ही एक और अतिशय क्यो न मान लिया जाय जिससे इतनी विडम्बना का पहले से ही सूत्रपात न हो । क्षुधादिदोषनिर्मुक्तः सर्वातिशयभासुरः । प्राप्तानन्त चतुष्कोसौ कोट्यादित्यसदृक्प्रभः ॥पैंसठ॥ प्रातिहार्याष्टभूतीश स्त्रिसन्ध्यं क्षणदांतरे। प्रभुःषण्णाडिका यावत्सूत्रार्थं ध्वनिता वदेत् ।।सोलह।। अर्थात - क्षुधा, पिपासा, जरा, आतङ्क, जन्म, मरण, शोक, भय, चिन्ता, प्रस्वेदादि अठारह प्रकार के दोषो से रहित तथा दश जन्म के, दश केवलज्ञान के, और चौदह देवताओं के इस तरह चौंतीस अतिशयो से विराजमान, जिन्हें अनन्त दर्शन, अनंन्तज्ञान, अनन्त सुख और अनन्त वीर्य ये अनन्त चतुष्टय प्राप्त हो गये हैं, अष्टप्रातिहार्यों से शोभित, 'और जिनकी शरीर को कांति कोटि सूर्य से भी अधिक है ऐसे, त्रिभुवन स्वामी श्री जिनदेव अपनी मेघ समान दिव्य ध्वनि से प्रातःकाल, मध्याह्नकाल, सायंकाल, और आधी रात्रि में तत्व का उपदेश नियम पूर्वक करते रहते हैं। रात्रि के समय जो दिव्यध्वनि होती है वह छह नाड़िका तक होती है। एक नाड़ी एक घड़ी की होती है। इन श्लोको में सर्वज्ञ देव का स्वरूप वर्णन किया गया है। सर्वज्ञ के पहले विशेषण में उन्हें क्षुधादि अठारह प्रकार के दोपों से रहित बनाया है। परन्तु हमारे प्रोफेमर जी जैसे व्यक्ति तथा श्वेताम्बर सम्प्रदाय वाले उसे ठीक नहीं बताते हैं । वे कहते हैं - जब यह बात हम अपनी दृष्टि से देख रहे हैं कि आहारादि के बिना शरीरिक स्थिति नहीं रछः सकती फिर केवली भगवान के शरीर की स्थिति अच्छा यह तो कहो कि जब केवली भगवान परते हैं, वह समवशरण में ही करते हैं या कहीं अन्यत्र ? और समवशरण में भी गन्धकुटी से कोई दूसरा स्थान है अथवा गन्धकुटी के ऊपर ही । मैं नहीं कह सकता इन लोगों की कैसी असङ्गत कल्पनायें हैं, जिनके देखने से दांतों के नीचे अंगुली दवाना पड़ती है। हा, इसी सम्बन्ध में हमें एक बात चौर स्मरण हो आई है। वह यह है - हम यह पूछना चाहते हैं कि ये लोग जिस तरह गृहस्थों तथा मुनियों के आहार के समय अन्तरायों की कल्पना करते है । उसी तरह केवली भगवान के अन्तरायों की कल्पना करते हैं या नहीं ? यदि स्वीकार करेंगे, तब जो दिगम्बरी लोगों का केवली को आहारादिका नहीं मानना है वही सुतरां सिद्ध हो जायगा । क्योकि फेयली भगवान त्रैलोक्य के जानने वाले और देखने वाले है । इसमें न तो श्वेताम्चरियों का कुछ विवाद है और न दिगम्बरी लोगो को। इससे यह सिद्ध होगा कि संसार में जितना अच्छा वा बुरा कृत्य उस समय में होता होगा, वह चराचर केवलो भगवान को मालूम पड़ता ही होगा। कहीं पर जीवो की दृष्ट लोग हिमा करते है, कहीं कोई किस तरह का दुष्कृत्य पर रहा है इत्यादि कर्मों को प्रत्यक्ष देखते ट्र्ये पाँच.रुणासागर फेवली भगवान आहारादि कभी नहीं पर सक्ते । इतने पर भी यही दुरामह बना रहे तो हम फिर कभी उनमें जिन की कल्पना ही नहीं कर सकते। यदि कढाचित अन्तराय स्वीकार नरें तो भाचिन बुरी बात है जिस खोटे काम देखने से गृहग्य जोगनक आहार का परित्याग पर देते हैं उसोन बैलोय के नाम की घृतान अजितने साहचर्य की बात है। इन लोगों की केवल यही कल्पना नहीं है किन्तु ऐसो सैंकड़ो असङ्गत कल्पनायें हैं यदि मौका मिला तो 'श्वेताम्बर पराजय' नामक स्वतन्त्र प्रन्थ में खूत्र खुलासा वर्णन करेंगे। सच बात तो यह है कि जिन लोगो की कल्पनायें आधुनिक होती हैं वे कहां तक ठीक कही जा सकेंगी ? यह वात विचारणीय है । गट्टपमाए पढमा सएगा एहि तत्थ कारणभावा । मेसाकम्मत्वित्तेणुवयारेणत्थि । हि कज्जे ।।एक सौ छत्तीस॥ टीका - नष्टप्रमादे श्रप्रमत्तसंयताद्यपरितनगुणस्थानेषु प्रथमासंज्ञा आहारसंज्ञा न भवति । कुतः कारणात तत्राप्रमत्तादौ आहारसंज्ञा कारणस्य असत्तावेदनीयोदीरणाख्यस्याभावात् । सातासातावेदनीयमनुष्यायुष्याणां त्रिप्रकृतीनां प्रमत्तविरते एव उदीरणा भवतीति परमागमे प्रसिद्धत्वात् । शेषा भयमैथुनपरिग्रहसंज्ञा अप्रमत्तसंयतादि-गुणस्थानेषु तत्तत्कारण भयवेदलोभकर्मोंदीरणानां तत्तदुदय-व्युच्छित्तिचरमसमयपर्यंतमस्तित्वेन निमित्तेनोपचारेण सन्ति स्व स्व कार्ये पलायनरतिक्रीड़ा परीग्रह स्वीकाररूपे प्रवृत्यभावात् । मन्दमन्दत र मन्दतमातिसूक्ष्मानुभागोदयसहितसंयमविशेषसमाहितध्यानोपयुक्तांनां महामुनीनां भयादिसंज्ञा मुख्यवृत्त्या न सन्त्येव, अन्यथा कदाचिदपि शुक्लध्यान धातिकर्मक्षयो वा न घटते .............. ततो मोक्षमिच्छनां स्याद्वादिनां दपक श्रेण्यामाहारादि चतुः संज्ञानामभाव एत्र सम्भावनीय इति केवलिनां कुनः कबलाहारसुतिगद्दारसज्ञानिषेधात् । मनोथिकाय मयचन्द्रः । इति - या मृल में श्रप्रमत्तादि गुणस्थानों में प्रथम आहारता वा निषेध और उसके कारण का भाव फा गया है । अष्ट तीन संज्ञाम्रो का वहां पर उपसर में महान पड़ा है, अचार का कर उन उन कर्मों की उदीरणा का अस्तित्व और कार्यरूप से वहां संज्ञायें नहीं होतीं। टीका में तो प्राधान्यरूप से होने का कारण भी कह दिया गया है । तात्पर्य में यह है कि अप्रमत्त आदि गुणस्थानों में उपचार से ये संज्ञायें हैं परमार्थिक में वे नहीं हैं। ऐसी प्रवृत्ति अर्थात् प्रथा केवली भगवान के 'क्षुधादि परीषहों के सम्बन्ध में है। केवली के वेदनीयकर्म के उदय का 'अस्तित्व है, कार्यरूप से या प्रमुखपन से अथवा स्पष्ट रूप से नहीं है । वक्तव्य कहीं उपचार से या शक्ति की अपेक्षा से होता है, और कहीं पर प्राधान्यरूप या सामध्ये को अपेक्षा से होता है। केवली में क्षुधादिका सद्भाव उपचार से या सामर्थ्य की अपेक्षा से कहा गया है। इसलिये कहा जाता है कि 'तत्वार्थमहाशास्त्र में भी और प्रस्तुत आगम में भी ग्यारह परीषह केवली भगवान में उपचार से हैं। वास्तविक उनका अभाव हो है। ऐसा उद्धरण शास्त्रों में विद्यमान होते हुए भी आजकल के प्रोफेसर जी के समान मनुष्य स्वीकार नहीं करते हैं यह बड़ी दुःख की बात है। जिस तरह सम्पूर्ण मोहनीय कर्म नष्ट होने पर और वेदनीय का सद्भाव होने से केवली भगवान को ग्यारह परीषद् उपचार से मानी जाती हैं न कि पारमार्थिक न्याय से । इसी तरह ज्ञानावरण के नष्ट हो जाने पर युगग्त सम्पूर्ण पदार्थों का प्रकाशन करने वाले केवल ज्ञान रूप अतिशय के होते हुये भगवान के चिन्तानिरोध का अभाव है। उसके होते हुये भी उसका फल कर्मोदय की निर्जरारूप फल की अपेक्षा से ध्यान का उपचार किया जाता है। उसी प्रकार वास्तव में क्षुधादिको का अभाव है किन्तु वेदनीयकर्म का सद्भाव होने से 'एकादश जिने' यही संज्ञा उपचार से कही है। मथितार्थ यह है कि ध्यान भी जिस तरह उनमें उपचार से है, उसी तरह परीषह भी उपचार से हैं, वास्तविक मे ग्यारह परीषह उनमें नहीं है। अतएव क्षुधादि वेदना का भगवान में अभाव है। यथा- - ननु मोहनीय - सहायाभावात् क्षुध दिवेदनाभावे परीषहव्यपदेशो न युक्तः, सत्यमेवमेदत, वेदनाभावेऽपि द्रव्यकर्ममद्भावापेक्षया परीषहोपचारः कियते । निरवशेषनिरस्ताज्ञानावर युगपत्सकल- - पदार्थावभासिकेवलज्ञानातिशये चिन्तानिरोधाभावेऽपि तत्फल 'कर्मनिर्हरणापेक्षया ध्यानोपचारवत् । अथवा एकादश "जिने न सन्तीति वाक्य शेषः कल्पनीयः सोपस्कारस्वात् सूत्राणां । 'मोहोदयसहायोकृतक्षुधादिवेंदनाभावात् ।" इति । यहां टोका में ग्यारह परीषदों का सद्भाव और अभाव कह दिया गया है, द्रव्य कर्म के सद्भाव की अपेक्षा से उपचार से सद्भाव और मोहनीय के उदय की सहायता न होने से कार्य रूप से उनका यही बात अकलंकदेवने राजवार्तिकमे और आचार्य विद्यानन्द ने श्लोकवार्तिक में एकादश जिने' सूत्र मे कही है आदि पुराण पृष्ठ पच्चीस देखिये - न भुक्तिः क्षीणमोहस्य तवानन्तसुखोदयात । 'क्षुत्क्लेशवाधितो जन्तुः कवलाहारभुग्भवेत् ।।एक।। असद्वेद्योदयाद्भुति खयि यो योजयेदधीः । मोहानिलप्रतीकारे तस्यान्वे व्यं जरघृतं ।।दो।। असनेद्यविष घातिविध्वंस ध्वस्तशक्तिकं । खय्य किंचित्कर मन्त्रशक्त्येवाप्रवल विषं ॥छः॥ असद्वेद्योदयो घातिसहकारिव्यपायतः । वय्यकिचित्करी नाथ सामग्रन्या हि फलोदयः चार आचार्य देवसेन कवलाहार का निषेध मार्मिक ता से व विस्तार के साथ करते हैं, वे कहते हैं कि अन्य विषयों का भी भोगोपभोग करता है। किन्तु विषयों का भोग करने वाला वीतरागी कैसे हो सकता है ? इसलिये केवलीके कवलाहार प्रमाणविरुद्ध है। प्रमेयकमल मार्तंड में प्रभाचन्दाचार्य ने लिखा हैश्वेताम्बर लोग केवली में कवलाहार कहते हैं सी भगवान में वह नहीं है, क्योंकि उस परमभट्टारक अर्हन्त भगवान के मन नष्ट हो गया है । इन्द्रियों के व्यापार से जिनका चित्त रहित हो गया है और जिन के भावेन्द्रिय की प्रधानता है, उनके निश्चल ध्यान होता है। उस ध्यान से उस आत्मा के आत्मा और मन का एकीभाव होता है, और फिर एकी भाव से संवित्ति होती है। उस सवित्ति से तृष्णा, निद्रा और क्षुधा, नष्ट हो जाते हैं तब वह ध्यानी पुरुष क्षपकश्रेणि मे आरूढ़ होता है वह निद्रादि के कारण, मोहकर्म का सम्पूर्ण क्षय करता है। उसके क्षय हो जाने से केवलज्ञान प्रगट होता है, वह केवलज्ञान समस्त अठारह दोष प्रलय हो जाने से होता है। वे अठारह दोष क्षुधादिक है, वे केवली भगवान के नहीं होते हैं । नोकमोहार, कर्माहार, कवलाहार, लेपाहार, ओजार और मनाहार इस प्रकार छह प्रकार का हर होता है। इनमें से नोकर्माहार और कर्माहार ये दो तो समस्त चतुगेति वाले जोवो के होते हैं, कवलाहार मनुष्यों और पशुओं के होता है, वृक्षों के लेपाहार होता है। अण्डों में रहने वाले पक्षियों के ओजाहार होता है । और देवों के मानसिकाहार होता है। इन छहो आहार में से कवलाहार, लेपाहार, 'ओजाहार, और मानसिकाहार ये चार प्रकार के आहार केवली के नहीं होते। जो नोकर्माद्दार और कर्माद्दार केवली के होते हैं । वे भी जिनागम में उपचार से कहे गये है। निश्चय से तो वे भी नहीं हैं। क्योंकि- केवली भगवान उत्कृष्ट वीतराग - परमेष्ठी हैं । जो भोजन करता है वह सोता है, सोता हुआ 'ये श्वेतपटाः प्रतिपादयन्ति आत्मनो जीवन्मुक्तौ कवलाहारं प्रेच्छन्ति तेषां - अनन्त चतुष्टयस्वभावा - भावोऽनन्तसुखविरहात् । तद्विरहश्चबुभुक्षापीड़ाक्रान्त - त्वात् । तत्पीड़ाप्रतिकारार्थो हि निखिलजन्तूनां कवलाहारग्रहणप्रेसङ्गः ।' अर्थ - जो श्वेताम्बर लोग कहते हैं कि आत्मा के जीवन्मुक्तावस्था में अर्थात् केवली भगवान के अनन्त चतुष्टय व वीतराग दशामें कवलाहार होता है, उन लोगो के प्रति अनेकांतमय, स्याद्वादसप्तभंगीगर्भित स्यात्पदालकृतपरमागम के प्रमाण, नय, निक्षेप, तर्क और युक्तियों के द्वारा निषेध किय जाता है। केवली को कवलाहार मानने से उनके अनन्त - चतुष्टय स्वभाव का अभाव हो जाने पर उन भगवान. के 'घातिकर्म चतुष्टय के अभाव से पैदा होने वाले के नैसगिक अनन्तसुखादिकों का सुतरां विनाश होता है । और उसका अभाव होने से उन परमात्मा में भी क्षुधादि अठारह दोषो का सद्भाव हो जाने से वे भगवान् रागी, द्वेषी, मोही होने से उनमें वीतराग व सर्वज्ञत्व न रहेगा यह बड़ा भारी दोष उपस्थित हो जायगा और उस भूख के प्रतिकार करने के लिये सांसारिक जांवो को कवलाद्दार ग्रहण करना पड़ता है। क्या केवली भी ऐसे ही हैं ? श्रत भगवान में अनन्त चतुष्टय के सद्भाव और अठारह दोषों के अभाव होने से वीतरागता सर्वज्ञता |
ईटानगर। Arunachal Pradesh Heavy Rains अरुणाचल प्रदेश में बुधवार को मूसलाधार बारिश से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई और भूस्खलन हुआ। इससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले 24 घंटे में भूस्खलनों में दो और लोगों की मौत हो गयी जबकि लापाता दो अन्य लोगों के लिए तलाश अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार को होल्लोंगी में भीषण भूस्खलन में जल शोधन संयंत्र में काम कर रहा एक मजदूर दब गया। रात में उसका शव बरामद किया गया। पश्चिमी सियांग जिले में दारला गांव के समीप भूस्खलन में ट्रांस अरुणाचल हाईवे परियोजना में काम कर रहे एक निर्माण मजदूर की दबकर मौत हो गयी। मृतक की पहचान असम के लखीमपुर जिले के लालुक निवासी टीलू कलांदी के तौर पर की गयी है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नीमा ताशी ने बताया कि पापुम पारे के हुतो गांव मेंदो में लापता लोगों की तलाश जारी है। अभियान में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के कर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में इस साल अभी तक बाढ़ और भूस्खलन में 17 लोगों की मौत हो चुकी है। सियांग जिले में 1448 ब्रिज कंसट्रक्शन कंपनी (बीसीसी) के साथ काम कर रहे छह मजदूरों को बाढ़ से बचाया गया। सियांग नदी के उफान पर होने के कारण बोलेंग में उनका शिविर बह गया था। बारिश और भूस्खलनों से राज्य के कई इलाकों से संपर्क टूट गया, जिनमें से ज्यादा दूरवर्ती इलाके हैं।
अधिकारियों के अनुसार, पापुम पारे में भूस्खलनों के कारण चिम्पू-होल्लोंगी रोड़ अवरुद्ध है, सियांग में पैनगिन-बोलेंग रोड अवरुद्ध है, पश्चिमी सियांग में बोलेंग-रुमगोंग रोड अवरुद्ध है और पश्चिमी कामेंग में बालेमु-बोमडिला रोड अवरुद्ध है। पापुम पारे जिले के तलहटी वाले क्षेत्रों में स्थित कई गांवों और शहरों का संपर्क टूट गया है। पूर्वी सियांग जिलों में सिबो कोरोंग नदी में बाढ़ आने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं। पागला नदी के पानी से भी कुछ इलाकों में बाढ़ आ गयी है। राजधानी ईटानगर में कई संपर्क सड़कें भी अवरुद्ध हैं।
बारिश से पेयजल और बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जिलों में कृषि योग्य भूमि पर भी असर पड़ा है। ईटानगर में बारिश के कारण सभी स्कूल और कॉलेजों को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। शहर में चार अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं जबकि संवदेनशील इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।
| ईटानगर। Arunachal Pradesh Heavy Rains अरुणाचल प्रदेश में बुधवार को मूसलाधार बारिश से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई और भूस्खलन हुआ। इससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले चौबीस घंटाटे में भूस्खलनों में दो और लोगों की मौत हो गयी जबकि लापाता दो अन्य लोगों के लिए तलाश अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार को होल्लोंगी में भीषण भूस्खलन में जल शोधन संयंत्र में काम कर रहा एक मजदूर दब गया। रात में उसका शव बरामद किया गया। पश्चिमी सियांग जिले में दारला गांव के समीप भूस्खलन में ट्रांस अरुणाचल हाईवे परियोजना में काम कर रहे एक निर्माण मजदूर की दबकर मौत हो गयी। मृतक की पहचान असम के लखीमपुर जिले के लालुक निवासी टीलू कलांदी के तौर पर की गयी है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नीमा ताशी ने बताया कि पापुम पारे के हुतो गांव मेंदो में लापता लोगों की तलाश जारी है। अभियान में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के कर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में इस साल अभी तक बाढ़ और भूस्खलन में सत्रह लोगों की मौत हो चुकी है। सियांग जिले में एक हज़ार चार सौ अड़तालीस ब्रिज कंसट्रक्शन कंपनी के साथ काम कर रहे छह मजदूरों को बाढ़ से बचाया गया। सियांग नदी के उफान पर होने के कारण बोलेंग में उनका शिविर बह गया था। बारिश और भूस्खलनों से राज्य के कई इलाकों से संपर्क टूट गया, जिनमें से ज्यादा दूरवर्ती इलाके हैं। अधिकारियों के अनुसार, पापुम पारे में भूस्खलनों के कारण चिम्पू-होल्लोंगी रोड़ अवरुद्ध है, सियांग में पैनगिन-बोलेंग रोड अवरुद्ध है, पश्चिमी सियांग में बोलेंग-रुमगोंग रोड अवरुद्ध है और पश्चिमी कामेंग में बालेमु-बोमडिला रोड अवरुद्ध है। पापुम पारे जिले के तलहटी वाले क्षेत्रों में स्थित कई गांवों और शहरों का संपर्क टूट गया है। पूर्वी सियांग जिलों में सिबो कोरोंग नदी में बाढ़ आने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं। पागला नदी के पानी से भी कुछ इलाकों में बाढ़ आ गयी है। राजधानी ईटानगर में कई संपर्क सड़कें भी अवरुद्ध हैं। बारिश से पेयजल और बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जिलों में कृषि योग्य भूमि पर भी असर पड़ा है। ईटानगर में बारिश के कारण सभी स्कूल और कॉलेजों को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। शहर में चार अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं जबकि संवदेनशील इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। |
बेहतर काम करने वाले पलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया गया। बैठक में आयुक्त ने सभी 15 जिलों में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं व उस मामले में शामिल बदमाशों व आरोपितों की धर पकड़ के लिए की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। जय सिंह रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय में शनिवार को दिल्ली की कानून व्यवस्था और पुलि¨सग के अन्य पहलुओं पर चर्चा करने के लिए पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने दिल्ली पुलिस के समस्त आला अधिकारियों के साथ अपराध समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद बेहतर काम करने वाले पलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया गया। बैठक में आयुक्त ने सभी 15 जिलों में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं व उस मामले में शामिल बदमाशों व आरोपितों की धर पकड़ के लिए की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने इस दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जमकर क्लास ली और भविष्य में उन्हें बेहतर करने के लिए चेतावनी भी दी। बैठक में आयुक्त ने लूटपाट व झपटमारी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह देखा जा रहा है कि अधिकतर घटनाओं में अपराधी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 10 माह पहले भी उन्होंने सभी थानाध्यक्षों की बैठक लेकर अपराध में हथियारों के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने की बात की थी, लेकिन इस पर रोक नहीं लग पाई, बल्कि अपराध काफी बढ़ ही गया है।
कुख्यात गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी की रोहिणी कोर्ट में हत्या के बाद गैंगस्टरों में गैंगवार की घटनाएं भी काफी बढ़ गई हैं। गैंगस्टरों के बीच खूनी संघर्ष तेज होता जा रहा है। यह स्थिति तब है जब स्पेशल सेल व क्राइम ब्रांच के अलावा जिले की पुलिस गैंगस्टरों के 100 से अधिक बदमाशों को दबोच चुकी है। उन्होंने इसको लेकर काफी नाराजगी जताई। दिल्ली में आए दिन यातायात जाम की समस्या को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। जाम से निपटने के लिए दिशानिर्देश दिए गए।
बैठक के बाद पुलिस आयुक्त ने दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ डिवीजन अधिकारियों, बीट अधिकारियों और यातायात पुलिस के चुने हुए उन कर्मियों को पुरस्कृत किया, जिन्होंने हाल ही में उत्कृष्ट कर्तव्यों का पालन किया। एसआइ अभिषेक दिवाकर (थाना हर्ष विहार) और एसआइ रवि बेनीवाल (थाना गोविंदपुरी) को सर्वश्रेष्ठ डिवीजन अधिकारी चुना गया, जबकि सिपाही रमेश कुमार (थाना सिविल लाइंस), हवलदार सुनील (थाना मुंडका) और सिपाही नरसी कुमार मीणा (थाना हरि नगर) को बेस्ट बीट आफिसर और हवलदार पूरन चंद (सीआर पार्क ट्रैफिक सर्कल) को बेस्ट ट्रैफिक आफिसर चुना गया।
चयनित कर्मियों को प्रशस्ति पत्र के साथ नकद पुरस्कार और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर विशेष आयुक्त संजय सिंह व दीपेंद्र पाठक समेत सभी विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, जिले व यूनिटों के डीसीपी मौजूद थे।
| बेहतर काम करने वाले पलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया गया। बैठक में आयुक्त ने सभी पंद्रह जिलों में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं व उस मामले में शामिल बदमाशों व आरोपितों की धर पकड़ के लिए की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। जय सिंह रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय में शनिवार को दिल्ली की कानून व्यवस्था और पुलि¨सग के अन्य पहलुओं पर चर्चा करने के लिए पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने दिल्ली पुलिस के समस्त आला अधिकारियों के साथ अपराध समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद बेहतर काम करने वाले पलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया गया। बैठक में आयुक्त ने सभी पंद्रह जिलों में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं व उस मामले में शामिल बदमाशों व आरोपितों की धर पकड़ के लिए की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने इस दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जमकर क्लास ली और भविष्य में उन्हें बेहतर करने के लिए चेतावनी भी दी। बैठक में आयुक्त ने लूटपाट व झपटमारी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह देखा जा रहा है कि अधिकतर घटनाओं में अपराधी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दस माह पहले भी उन्होंने सभी थानाध्यक्षों की बैठक लेकर अपराध में हथियारों के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने की बात की थी, लेकिन इस पर रोक नहीं लग पाई, बल्कि अपराध काफी बढ़ ही गया है। कुख्यात गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी की रोहिणी कोर्ट में हत्या के बाद गैंगस्टरों में गैंगवार की घटनाएं भी काफी बढ़ गई हैं। गैंगस्टरों के बीच खूनी संघर्ष तेज होता जा रहा है। यह स्थिति तब है जब स्पेशल सेल व क्राइम ब्रांच के अलावा जिले की पुलिस गैंगस्टरों के एक सौ से अधिक बदमाशों को दबोच चुकी है। उन्होंने इसको लेकर काफी नाराजगी जताई। दिल्ली में आए दिन यातायात जाम की समस्या को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। जाम से निपटने के लिए दिशानिर्देश दिए गए। बैठक के बाद पुलिस आयुक्त ने दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ डिवीजन अधिकारियों, बीट अधिकारियों और यातायात पुलिस के चुने हुए उन कर्मियों को पुरस्कृत किया, जिन्होंने हाल ही में उत्कृष्ट कर्तव्यों का पालन किया। एसआइ अभिषेक दिवाकर और एसआइ रवि बेनीवाल को सर्वश्रेष्ठ डिवीजन अधिकारी चुना गया, जबकि सिपाही रमेश कुमार , हवलदार सुनील और सिपाही नरसी कुमार मीणा को बेस्ट बीट आफिसर और हवलदार पूरन चंद को बेस्ट ट्रैफिक आफिसर चुना गया। चयनित कर्मियों को प्रशस्ति पत्र के साथ नकद पुरस्कार और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर विशेष आयुक्त संजय सिंह व दीपेंद्र पाठक समेत सभी विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, जिले व यूनिटों के डीसीपी मौजूद थे। |
तलवाड़ा। धरवाल हास्पिटल, तलवाड़ा के सौजन्य से यूथ डिवेलपमेंट सेंटर द्वारा नेहरू युवा केंद्र के निर्देशन में उपमडल देहरा में सामुदायिक स्वास्थ्य जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी शृंखला में जसवा घाटी के पिछड़े गांव बाड़ी में निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के राष्ट्रीय निर्देशक कर्ण भूषण ने किया। इसी दोरान डा. वरुण धरवाल द्वारा 37 रोगियों के स्वास्थ्य का निरीक्षण किया गया एवं निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। डा. वरुण धरवाल ने कहा कि प्रसव हास्पिटल में ही करवाना चाहिए नहीं तो माता एवं शिशु की जान का खतरा हो सकता है। इस अवसर पर पंचायत उपप्रधान विवेक जसवाल, कृषि सेवा सहकारी सभा की सचिव रजनी कुमारी, स्टेट प्रोग्राम कोओर्डिनेटर पीएस राणा, युवा समाजसेवी नितीश राणा, सरु, राष्ट्रपति स्काउट अवार्ड विजेता नितीश कुमार, कृपाल सिंह, माया देवी, बलबीर सिंह, जागरूप सिंह, रोशन लाल, कर्म चंद आदि मौजूद रहे।
| तलवाड़ा। धरवाल हास्पिटल, तलवाड़ा के सौजन्य से यूथ डिवेलपमेंट सेंटर द्वारा नेहरू युवा केंद्र के निर्देशन में उपमडल देहरा में सामुदायिक स्वास्थ्य जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी शृंखला में जसवा घाटी के पिछड़े गांव बाड़ी में निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के राष्ट्रीय निर्देशक कर्ण भूषण ने किया। इसी दोरान डा. वरुण धरवाल द्वारा सैंतीस रोगियों के स्वास्थ्य का निरीक्षण किया गया एवं निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। डा. वरुण धरवाल ने कहा कि प्रसव हास्पिटल में ही करवाना चाहिए नहीं तो माता एवं शिशु की जान का खतरा हो सकता है। इस अवसर पर पंचायत उपप्रधान विवेक जसवाल, कृषि सेवा सहकारी सभा की सचिव रजनी कुमारी, स्टेट प्रोग्राम कोओर्डिनेटर पीएस राणा, युवा समाजसेवी नितीश राणा, सरु, राष्ट्रपति स्काउट अवार्ड विजेता नितीश कुमार, कृपाल सिंह, माया देवी, बलबीर सिंह, जागरूप सिंह, रोशन लाल, कर्म चंद आदि मौजूद रहे। |
उर्फी जावेद अक्सर सोशल मीडिया पर अजीबो-गरीब ड्रेस पहनकर तस्वीरें साझा करती रहती हैं। इस बार उन्होंने ड्रेस भी नहीं पहनी है। लोग उनकी तस्वीरों पर तरह-तरह के कमेंट कर उनके मजे ले रहे हैं।
49 साल की एक्ट्रेस ने 'दिया और बाती हम' के अलावा शक्तिमान, घर की लक्ष्मी बेटीयां और तंत्र जैसे 157 टीवी शोज और राजा जी, सांवरिया और सोनाली केबल जैसी फिल्मों में काम किया है।
केबीसी-14 में हर दिन अमिताभ बच्चन कंटेस्टेंट से सिंपल से सिंपल सवाल पूछ रहे हैं। कई कंटेस्टेंट इनमें से कुछ सवालों का जवाब आसानी से दे रहे हैं, जबकि कई इन्हीं सवालों में उलझ जा रहे हैं। इस सीजन अब तक शो को सिर्फ एक ही करोड़पति मिल सका है।
| उर्फी जावेद अक्सर सोशल मीडिया पर अजीबो-गरीब ड्रेस पहनकर तस्वीरें साझा करती रहती हैं। इस बार उन्होंने ड्रेस भी नहीं पहनी है। लोग उनकी तस्वीरों पर तरह-तरह के कमेंट कर उनके मजे ले रहे हैं। उनचास साल की एक्ट्रेस ने 'दिया और बाती हम' के अलावा शक्तिमान, घर की लक्ष्मी बेटीयां और तंत्र जैसे एक सौ सत्तावन टीवी शोज और राजा जी, सांवरिया और सोनाली केबल जैसी फिल्मों में काम किया है। केबीसी-चौदह में हर दिन अमिताभ बच्चन कंटेस्टेंट से सिंपल से सिंपल सवाल पूछ रहे हैं। कई कंटेस्टेंट इनमें से कुछ सवालों का जवाब आसानी से दे रहे हैं, जबकि कई इन्हीं सवालों में उलझ जा रहे हैं। इस सीजन अब तक शो को सिर्फ एक ही करोड़पति मिल सका है। |
Bhopal Sports News: भोपाल। रोहतक में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी ड्रॉप रोबॉल प्रतियोगिता में एलएनसीटी विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 अंकों के साथ पुरुष वर्ग में दूसरा स्थान पाया। वहीं महिला वर्ग में 10 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रही। आल इंडिया ड्राप रोबॉल प्रतियोगिता में 48 महिला एवं पुरुष टीमों ने भाग लिया था।
सिंगल्स पुरुष वर्ग में बीपीईएस के विजय सिसोदिया ने कांस्य पदक, पुरुष डबल्स मुकाबले में कृष्णकांत, सिद्धांत, नरेंद्र ने कांस्य पदक, पुरुष ट्रिपल मुकाबले में ध्रुव खन्ना, मुकेश, भरत, जटाशंकर, लक्ष्य, मयूरेस व्यास ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया। मिक्स डबल्स मुकाबले में गुंजन मिश्रा, हिमांशी एवं दीपक ने रजत पदक प्राप्त किया, बही महिला वर्ग के ट्रिपल मुकाबले में रुकमणी, लता, सोनाली, प्रियंका, इशिका ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
पुरुष वर्ग में एमडीयू प्रथम, आईआईएमटी मेरठ ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं महिला वर्ग में एमडीयू प्रथम, कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल दूसरे स्थान पर रहा। विश्वविद्यालय के शानदार उपलब्धि पर सभी खिलाड़ियों को एलएनसीटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जय नारायण चौकसे, प्रो चांसलर डॉ. अनुपम चौकसे, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ धर्मेंद्र गुप्ता, डा एनके थापक, वाइस चांसलर, डॉ. अजीत सोनी रजिस्ट्रार, डा. अशोक राय डीन एडमिनिस्ट्रेशन, पंकज जैन स्पोर्ट्स डायरेक्टर, आकाश दुबे आईटी हेड, डा. रमेश शुक्ला असिस्टेंट रजिस्ट्रार, डा. वीएस पवार प्रिंसिपल फिजिकल एजुकेशन, वीरेश पाटकर, तनवंत सिंह, महेश सोधिया ने शुभकामनाएं दी।
धार में आयोजित हुई। इसमें भोपाल के अकुल सिंह ने जोरदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता। अवधपुरी के रहने वाले अकुल सिंह चौहान ने -46 किग्रा भार वर्ग में भाग लिया था। इस प्रतियोगिता में पूरे प्रदेशभर के खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया।
| Bhopal Sports News: भोपाल। रोहतक में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी ड्रॉप रोबॉल प्रतियोगिता में एलएनसीटी विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सोलह अंकों के साथ पुरुष वर्ग में दूसरा स्थान पाया। वहीं महिला वर्ग में दस अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रही। आल इंडिया ड्राप रोबॉल प्रतियोगिता में अड़तालीस महिला एवं पुरुष टीमों ने भाग लिया था। सिंगल्स पुरुष वर्ग में बीपीईएस के विजय सिसोदिया ने कांस्य पदक, पुरुष डबल्स मुकाबले में कृष्णकांत, सिद्धांत, नरेंद्र ने कांस्य पदक, पुरुष ट्रिपल मुकाबले में ध्रुव खन्ना, मुकेश, भरत, जटाशंकर, लक्ष्य, मयूरेस व्यास ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया। मिक्स डबल्स मुकाबले में गुंजन मिश्रा, हिमांशी एवं दीपक ने रजत पदक प्राप्त किया, बही महिला वर्ग के ट्रिपल मुकाबले में रुकमणी, लता, सोनाली, प्रियंका, इशिका ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया। पुरुष वर्ग में एमडीयू प्रथम, आईआईएमटी मेरठ ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं महिला वर्ग में एमडीयू प्रथम, कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल दूसरे स्थान पर रहा। विश्वविद्यालय के शानदार उपलब्धि पर सभी खिलाड़ियों को एलएनसीटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जय नारायण चौकसे, प्रो चांसलर डॉ. अनुपम चौकसे, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ धर्मेंद्र गुप्ता, डा एनके थापक, वाइस चांसलर, डॉ. अजीत सोनी रजिस्ट्रार, डा. अशोक राय डीन एडमिनिस्ट्रेशन, पंकज जैन स्पोर्ट्स डायरेक्टर, आकाश दुबे आईटी हेड, डा. रमेश शुक्ला असिस्टेंट रजिस्ट्रार, डा. वीएस पवार प्रिंसिपल फिजिकल एजुकेशन, वीरेश पाटकर, तनवंत सिंह, महेश सोधिया ने शुभकामनाएं दी। धार में आयोजित हुई। इसमें भोपाल के अकुल सिंह ने जोरदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता। अवधपुरी के रहने वाले अकुल सिंह चौहान ने -छियालीस किग्रा भार वर्ग में भाग लिया था। इस प्रतियोगिता में पूरे प्रदेशभर के खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया। |
कोल्हापुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर जारी टकराव पर बड़ा बयान दिया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पार्टी कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन पर 'मुख्यमंत्री बनने के लिए (एनसीपी चीफ) शरद पवार के चरणों में आत्मसमर्पण' करने का आरोप लगाया।
उद्धव ठाकरे ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया था और उसपर शिवसेना के साथ सीएम का पद साझा करने के अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया था। इसके बाद ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) गवर्नमेंट का नेतृत्व किया। पिछले वर्ष जून में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद तत्कालीन एमवीए गवर्नमेंट गिर गई थी।
उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, 'हिंदू दिल सम्राट बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना का शरद पवार के चरणों में सरेंडर कर दिया गया। ' शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना मानने और उसे तीर-धनुष का चुनाव चिह्न देने के चुनाव आयोग के शुक्रवार के निर्णय की सराहना करते हुए शाह ने बोला कि वे (ठाकरे गुट) अब सबक सीखेंगे।
| कोल्हापुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर जारी टकराव पर बड़ा बयान दिया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पार्टी कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन पर 'मुख्यमंत्री बनने के लिए शरद पवार के चरणों में आत्मसमर्पण' करने का आरोप लगाया। उद्धव ठाकरे ने साल दो हज़ार उन्नीस के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया था और उसपर शिवसेना के साथ सीएम का पद साझा करने के अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया था। इसके बाद ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर महाविकास आघाड़ी गवर्नमेंट का नेतृत्व किया। पिछले वर्ष जून में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद तत्कालीन एमवीए गवर्नमेंट गिर गई थी। उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, 'हिंदू दिल सम्राट बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना का शरद पवार के चरणों में सरेंडर कर दिया गया। ' शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना मानने और उसे तीर-धनुष का चुनाव चिह्न देने के चुनाव आयोग के शुक्रवार के निर्णय की सराहना करते हुए शाह ने बोला कि वे अब सबक सीखेंगे। |
शेर थोड़ी देर तक शीशे पर पंजे मारता रहा। दरअसल, यह एक चिड़ियाघर का शेर था। जूकीपर ने बताया कि शेर अक्सर छोटे बच्चों को देखकर इसी तरह एक्साइटेड हो जाता है और उनके संग खेलना चाहता है। वह बच्चे पर हमला करने की नीयत से नहीं, बल्कि उसके साथ खेलने के लिए ही उसके पास आया था।
| शेर थोड़ी देर तक शीशे पर पंजे मारता रहा। दरअसल, यह एक चिड़ियाघर का शेर था। जूकीपर ने बताया कि शेर अक्सर छोटे बच्चों को देखकर इसी तरह एक्साइटेड हो जाता है और उनके संग खेलना चाहता है। वह बच्चे पर हमला करने की नीयत से नहीं, बल्कि उसके साथ खेलने के लिए ही उसके पास आया था। |
बॉलीवुड में फिल्मों से ज़्यादा शादियों का माहौल है। इस वर्ष की सबसे बड़ी शादियों में से एक हैं निक्यंका की शादी यानी देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा और विदेशी पॉप स्टार निक जोनास।
दोनों करीब एक वर्ष से रिलेशनशिप में थे और उन्होंने डेटिंग के बाद अगस्त महीने में सगाई कर ली। मुंबई में हुए रोका सेरेमनी के बाद दोनों ने अपने रिश्ते की ऑफिशियल अनाउंसमेंट की और अब फैंस उनकी शादी का इंतज़ार बेसब्री से कर रहे हैं।
प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास जल्द ही 2 दिसंबर को जोधपुर में शादी कर रहे हैं। दोनों शादी की तैयारियों में लगे हैं। इस डेस्टिनेशन वेडिंग का कारण है निक का भारत प्रेम।
निक को भारतीय रीति-रिवाज़ और सभी चीज़ों से बहुत प्यार है इसलिए उनकी रोका सेरेमनी से लेकर उनकी शादी के डेस्टिनेशन तक, सभी कुछ भारतीय है। अपनी ग्रांड शादी के पहले दोनों ने अपनी बैचलर लाइफ जमकर एंजॉय की।
प्रियंका अपनी बहनों और दोस्तों के साथ पहले ग्रांड ब्राइडल शॉवर में शामिल हुईं, जो कि न्यूयॉर्क में हुआ। इसके बाद उन्होंने दोस्तों के साथ अपनी बैचलरेट एम्स्टर्डम में मनाई। वहां से फ्री होकर वे दिवाली के लिए मुंबई लौटी और फिलहाल वे दिल्ली शॉपिंग के लिए गई हुई हैं।
प्रियंका के बाद अब निक भी अपनी बैचलरेट मना रहे हैं। भाई और दोस्तों के साथ निक भी खूब मस्ती कर रहे हैं जिसकी तस्वीरें फैंस को सोशल मीडिया पर मिल रही हैं।
खास बात यह है कि निक्यंका की शादी के फोटोग्राफ्स का जिम्मा एक इंटरनेशनल मैग्ज़ीन ने लिया है। हालांकि अब तक यह तय नहीं हुआ है कि आखिर यह कौनसी मैग्ज़ीन होगी। खबर है कि 2. 5 मिलियन डॉलर (18 करोड़ रुपये) में फोटो का सौदा हुआ है। आखिर शादी भी तो ग्रांड है। यह तीन दिनों की शादी है, जिसकी शुरुआत 30 नवंबर से हो जाएगी।
शादी में करीब 1500-2000 मेहमान होंगे। साथ ही बॉलीवुड के भी कुछ खास मेहमान इसमें शामिल होंगे। परिवार के अलावा शादी में सलमान खान, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ, फरहान अख्तर और सिद्धार्थ रॉय कपूर जैसे कई कलाकार मौजूद होंगे।
खास बात यह होगी कि शादी हिन्दू रीति-रिवाज के साथ व्हाइट वेडिंग भी होगी। इसलिए पॉप सिंगर निक के भी कुछ खास मेहमान इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों ही इस बेहतरीन शादी के लिए बहुत उत्सुक है।
तीन दिनों के कार्यक्रमों की तैयारी शुरू हो चुकी है। संगीत की रात भी होगी जिसकी तैयारी प्रियंका और निक कर रहे हैं। शादी में मेन्यू से लेकर ड्रेसेस तक, सब पर नजर रहेगी और फैंस भी इसके लिए उत्साहित हैं।
सिंगिंग के लिए बेस्ट निक अपनी होने वाली बेटर हाफ प्रियंका के लिए संगीत की रात गाना भी गाएंगे। दोनों का प्यार जगजाहिर हैं। इनकी क्यूट पिक्चर्स सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो जाती हैं। इंतज़ार है 'निक्यंका' की इस ग्रेट वेडिंग का।
| बॉलीवुड में फिल्मों से ज़्यादा शादियों का माहौल है। इस वर्ष की सबसे बड़ी शादियों में से एक हैं निक्यंका की शादी यानी देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा और विदेशी पॉप स्टार निक जोनास। दोनों करीब एक वर्ष से रिलेशनशिप में थे और उन्होंने डेटिंग के बाद अगस्त महीने में सगाई कर ली। मुंबई में हुए रोका सेरेमनी के बाद दोनों ने अपने रिश्ते की ऑफिशियल अनाउंसमेंट की और अब फैंस उनकी शादी का इंतज़ार बेसब्री से कर रहे हैं। प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास जल्द ही दो दिसंबर को जोधपुर में शादी कर रहे हैं। दोनों शादी की तैयारियों में लगे हैं। इस डेस्टिनेशन वेडिंग का कारण है निक का भारत प्रेम। निक को भारतीय रीति-रिवाज़ और सभी चीज़ों से बहुत प्यार है इसलिए उनकी रोका सेरेमनी से लेकर उनकी शादी के डेस्टिनेशन तक, सभी कुछ भारतीय है। अपनी ग्रांड शादी के पहले दोनों ने अपनी बैचलर लाइफ जमकर एंजॉय की। प्रियंका अपनी बहनों और दोस्तों के साथ पहले ग्रांड ब्राइडल शॉवर में शामिल हुईं, जो कि न्यूयॉर्क में हुआ। इसके बाद उन्होंने दोस्तों के साथ अपनी बैचलरेट एम्स्टर्डम में मनाई। वहां से फ्री होकर वे दिवाली के लिए मुंबई लौटी और फिलहाल वे दिल्ली शॉपिंग के लिए गई हुई हैं। प्रियंका के बाद अब निक भी अपनी बैचलरेट मना रहे हैं। भाई और दोस्तों के साथ निक भी खूब मस्ती कर रहे हैं जिसकी तस्वीरें फैंस को सोशल मीडिया पर मिल रही हैं। खास बात यह है कि निक्यंका की शादी के फोटोग्राफ्स का जिम्मा एक इंटरनेशनल मैग्ज़ीन ने लिया है। हालांकि अब तक यह तय नहीं हुआ है कि आखिर यह कौनसी मैग्ज़ीन होगी। खबर है कि दो. पाँच मिलियन डॉलर में फोटो का सौदा हुआ है। आखिर शादी भी तो ग्रांड है। यह तीन दिनों की शादी है, जिसकी शुरुआत तीस नवंबर से हो जाएगी। शादी में करीब एक हज़ार पाँच सौ-दो हज़ार मेहमान होंगे। साथ ही बॉलीवुड के भी कुछ खास मेहमान इसमें शामिल होंगे। परिवार के अलावा शादी में सलमान खान, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ, फरहान अख्तर और सिद्धार्थ रॉय कपूर जैसे कई कलाकार मौजूद होंगे। खास बात यह होगी कि शादी हिन्दू रीति-रिवाज के साथ व्हाइट वेडिंग भी होगी। इसलिए पॉप सिंगर निक के भी कुछ खास मेहमान इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों ही इस बेहतरीन शादी के लिए बहुत उत्सुक है। तीन दिनों के कार्यक्रमों की तैयारी शुरू हो चुकी है। संगीत की रात भी होगी जिसकी तैयारी प्रियंका और निक कर रहे हैं। शादी में मेन्यू से लेकर ड्रेसेस तक, सब पर नजर रहेगी और फैंस भी इसके लिए उत्साहित हैं। सिंगिंग के लिए बेस्ट निक अपनी होने वाली बेटर हाफ प्रियंका के लिए संगीत की रात गाना भी गाएंगे। दोनों का प्यार जगजाहिर हैं। इनकी क्यूट पिक्चर्स सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो जाती हैं। इंतज़ार है 'निक्यंका' की इस ग्रेट वेडिंग का। |
- ई-श्रम कार्ड बनवाने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें किसी भी कामगार को किसी भी तरह का कोई प्रीमियम देने की जरूरत नहीं होती है।
- इस योजना के तहत प्रत्येक कार्डधारक को प्रति माह 500 रुपये देने की व्यवस्था है।
- इस योजना के अंतर्गत कार्डधारकों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवर भी दिया जाता है।
- इसमें किसी कार्डधारक की मौत होने पर 2 लाख रुपये और विकलांगता होने पर 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
- श्रम विभाग की सभी योजनाओं जैसे- बच्चों को छात्रवृत्ति, मुफ्त साइकिल, मुफ्त सिलाई मशीन, आपके काम के लिए मुफ्त उपकरण आदि दिए जाते हैं।
- अगर आप असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगार हैं, और आपकी पात्रता ई-श्रम कार्ड बनाने के लिए सही है। तो ऐसी स्थिति में आप खुद इसकी आधिकारिक वेबसाइट eshram. gov. in पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।
| - ई-श्रम कार्ड बनवाने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें किसी भी कामगार को किसी भी तरह का कोई प्रीमियम देने की जरूरत नहीं होती है। - इस योजना के तहत प्रत्येक कार्डधारक को प्रति माह पाँच सौ रुपयापये देने की व्यवस्था है। - इस योजना के अंतर्गत कार्डधारकों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवर भी दिया जाता है। - इसमें किसी कार्डधारक की मौत होने पर दो लाख रुपये और विकलांगता होने पर एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। - श्रम विभाग की सभी योजनाओं जैसे- बच्चों को छात्रवृत्ति, मुफ्त साइकिल, मुफ्त सिलाई मशीन, आपके काम के लिए मुफ्त उपकरण आदि दिए जाते हैं। - अगर आप असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगार हैं, और आपकी पात्रता ई-श्रम कार्ड बनाने के लिए सही है। तो ऐसी स्थिति में आप खुद इसकी आधिकारिक वेबसाइट eshram. gov. in पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। |
रांची (झारखंड) (एएनआई): झारखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य भर में समयबद्ध अग्नि सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया। अदालत ने धनबाद आग की घटना में स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें 14 लोगों की जान चली गई थी, साथ ही राज्य से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दर्ज करने को कहा।
झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने आज यहां संवाददाताओं से कहा, "हम पूरे राज्य की समयबद्ध अग्नि सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट जमा करेंगे। "
"उपायुक्त धनबाद ने दो समितियों का गठन किया है। एक तो आग लगने के कारणों का पता लगाना है और यह भी जांच करना है कि अग्नि सुरक्षा से संबंधित सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों को पूरा किया गया या नहीं। दूसरी समिति भवन को हुए संरचनात्मक नुकसान का पता लगाएगी। हम इन रिपोर्टों को अदालत में जमा करेंगे, "महाधिवक्ता झारखंड, राजीव रंजन ने कहा।
उन्होंने कहा, "राज्य सरकार राज्य में अग्नि सुरक्षा मानदंडों, भवन उपनियमों में प्रदान किए गए मानचित्रों के अनुपालन और शहरी नगर निकायों द्वारा अग्नि सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन के बारे में हलफनामों के माध्यम से अदालत को सूचित करेगी। "
झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को धनबाद अग्निकांड का स्वतः संज्ञान लिया जिसमें 14 लोगों की जलकर मौत हो गई थी।
अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
मंगलवार शाम को धनबाद के एक आवासीय अपार्टमेंट में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 10 महिलाओं, तीन पुरुषों और एक बच्चे सहित 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विनाशकारी आग में जानमाल के नुकसान पर शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
पीएम मोदी ने यह भी घोषणा की कि घटना में घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की राशि भी मंजूर की गई है.
एसएसपी धनबाद संजीव कुमार ने कहा कि आग लगने के समय कई लोग एक शादी समारोह के लिए अपार्टमेंट में इकट्ठा हुए थे। (एएनआई)
| रांची : झारखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य भर में समयबद्ध अग्नि सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया। अदालत ने धनबाद आग की घटना में स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें चौदह लोगों की जान चली गई थी, साथ ही राज्य से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दर्ज करने को कहा। झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने आज यहां संवाददाताओं से कहा, "हम पूरे राज्य की समयबद्ध अग्नि सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट जमा करेंगे। " "उपायुक्त धनबाद ने दो समितियों का गठन किया है। एक तो आग लगने के कारणों का पता लगाना है और यह भी जांच करना है कि अग्नि सुरक्षा से संबंधित सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों को पूरा किया गया या नहीं। दूसरी समिति भवन को हुए संरचनात्मक नुकसान का पता लगाएगी। हम इन रिपोर्टों को अदालत में जमा करेंगे, "महाधिवक्ता झारखंड, राजीव रंजन ने कहा। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार राज्य में अग्नि सुरक्षा मानदंडों, भवन उपनियमों में प्रदान किए गए मानचित्रों के अनुपालन और शहरी नगर निकायों द्वारा अग्नि सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन के बारे में हलफनामों के माध्यम से अदालत को सूचित करेगी। " झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को धनबाद अग्निकांड का स्वतः संज्ञान लिया जिसमें चौदह लोगों की जलकर मौत हो गई थी। अगली सुनवाई सत्रह फरवरी को होगी। मंगलवार शाम को धनबाद के एक आवासीय अपार्टमेंट में भीषण आग लग गई थी, जिसमें दस महिलाओं, तीन पुरुषों और एक बच्चे सहित चौदह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विनाशकारी आग में जानमाल के नुकसान पर शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। पीएम मोदी ने यह भी घोषणा की कि घटना में घायलों के लिए पचास-पचास हजार रुपये की राशि भी मंजूर की गई है. एसएसपी धनबाद संजीव कुमार ने कहा कि आग लगने के समय कई लोग एक शादी समारोह के लिए अपार्टमेंट में इकट्ठा हुए थे। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
पांवटा साहिब - पांवटा साहिब के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या आदर्श विद्यालय पांवटा साहिब की जमा दो की छात्रा रीतु देवी ने 94. 6 फीसदी अंक लेकर स्कूल में पहला स्थान हासिल किया है। रीतु ने विज्ञान संकाय में 500 में से 473 अंक लिए हैं जो संभवतः पांवटा क्षेत्र में सर्वाधिक है। स्कूल के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल का जमा दो का परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान संकाय में रीतु ने पहला स्थान लिया है। शाहीन ने 83. 4 प्रतिशत अंक लेकर दूसरा और मोमिना ने 82. 4 प्रतिशत अंक लेकर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। विज्ञान संकाय में 80 फीसदी से उपर पांच छात्राएं आई हैं। इसी प्रकार कॉमर्स संकाय में आंचल गुप्ता ने 91. 47 प्रतिशत अंक लेकर पहला, सिमरन ने 89. 50 फीसदी अंक लेकर दूसरा और अंजलि ने 88. 5 प्रतिशत अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। कॉमर्स में 85 फीसदी से अधिक अंक लेने वाली पांच छात्राएं हैं, जबकि 11 छात्राओं ने 80 फीसदी से अधिक अंक लिए हैं। इसके साथ ही आर्ट्स वर्ग में जसवीर कौर ने 87. 80, मनीषा चौधरी ने 96. 20 तथा जसप्रीत कौर ने 86 प्रतिशत अंक लेकर क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान अर्जित किया है। आर्ट्स में 85 प्रतिशत अंक लेने वाली छात्राओं की संख्या चार है, जबकि 10 छात्राओं ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। स्कूल प्रधानाचार्य ने छात्राओं और उनके अभिभावकों को बेहतरीन परीक्षा परिणाम पर बधाई दी है।
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| पांवटा साहिब - पांवटा साहिब के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या आदर्श विद्यालय पांवटा साहिब की जमा दो की छात्रा रीतु देवी ने चौरानवे. छः फीसदी अंक लेकर स्कूल में पहला स्थान हासिल किया है। रीतु ने विज्ञान संकाय में पाँच सौ में से चार सौ तिहत्तर अंक लिए हैं जो संभवतः पांवटा क्षेत्र में सर्वाधिक है। स्कूल के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल का जमा दो का परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान संकाय में रीतु ने पहला स्थान लिया है। शाहीन ने तिरासी. चार प्रतिशत अंक लेकर दूसरा और मोमिना ने बयासी. चार प्रतिशत अंक लेकर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। विज्ञान संकाय में अस्सी फीसदी से उपर पांच छात्राएं आई हैं। इसी प्रकार कॉमर्स संकाय में आंचल गुप्ता ने इक्यानवे. सैंतालीस प्रतिशत अंक लेकर पहला, सिमरन ने नवासी. पचास फीसदी अंक लेकर दूसरा और अंजलि ने अठासी. पाँच प्रतिशत अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। कॉमर्स में पचासी फीसदी से अधिक अंक लेने वाली पांच छात्राएं हैं, जबकि ग्यारह छात्राओं ने अस्सी फीसदी से अधिक अंक लिए हैं। इसके साथ ही आर्ट्स वर्ग में जसवीर कौर ने सत्तासी. अस्सी, मनीषा चौधरी ने छियानवे. बीस तथा जसप्रीत कौर ने छियासी प्रतिशत अंक लेकर क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान अर्जित किया है। आर्ट्स में पचासी प्रतिशत अंक लेने वाली छात्राओं की संख्या चार है, जबकि दस छात्राओं ने अस्सी प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। स्कूल प्रधानाचार्य ने छात्राओं और उनके अभिभावकों को बेहतरीन परीक्षा परिणाम पर बधाई दी है। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन! |
करियर डेस्क. बेंगलुरु की एक स्टार्ट-अप (Bangalore-based start-up ) ने एक पॉइंट-ऑफ-केयर इलेक्ट्रोकेमिकल एलिसा टेस्ट (Electrochemical ELISA test ) डेवलप किया है। क्लीनिकल सैंपल (clinical samples) में कोविड-19 और एंटीबॉडी (antibody) का सही तरीके से अंदाजा लगाया जा सकेगा। शनिवार को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इसकी जानकारी दी। जानें कैसे करती है काम, क्या है इसकी विशेषता।
मंत्रालय के अनुसार, इस नई तकनीक और प्रोडेक्ट को सेंटर फॉर ऑगमेंटिंग वॉर विद कोविड-19 हेल्थ क्राइसिस (CAWACH) की पहल के तहत भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित किया गया था। इस प्रयास को IIT बॉम्बे और IKP नॉलेज पार्क, हैदराबाद में SINE के माध्यम से संचालित किया गया था। पथशोध हेल्थकेयर, सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (एसआईडी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) में सहायता प्राप्त स्टार्ट-अप ने कोविड-19 आईजीएम और आईजीजी एंटीबॉडी के लिए अपनी तरह का पहला, सेमी-क्वानटेटिव इलेक्ट्रोकेमिकल एलिसा जांच विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
इस तकनीक से कोरोना वायरस के खिलाफ आइजीएम और आइजीजी एंटीबाडी की जांच की जाती है। आइजीएम एंटीबाडी किसी वायरस या रोगाणु के शरीर में प्रवेश करने पर तुरंत सक्रिय होती है। यह एंटीबाडी शरीर में व्यापक मात्रा में होती है और सबसे पहले वायरस के खिलाफ यही लड़ती है। आइजीजी एंटीबाडी के बनने में कुछ समय लगता है और यह लंबे समय तक शरीर में बनी रहती है।
कोरोना वायरस संक्रमण की क्या स्थिति है इसका पता लगाया जाता है। परीक्षण किट दो भागों में आती है। एक हैंडहेल्ड एनालाइजर है जो खून के नमूने को जांच करता है और एक विस्तृत रिपोर्ट देता है। दूसरी एक टेस्ट स्ट्रिप है, जिस पर किसी उंगलियों से खून की एक बूंद डिवाइस में डाली जाती है। हैंडहेल्ड डिवाइस पांच मिनट के भीतर जांच की रिपोर्ट देता है। इसकी रिपोर्ट को आप अपने फोन में भी डाउनलोड कर सकते हैं।
प्रोफेसर नवकांत भट, डीन, डिवीजन ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी साइंसेज और प्रोफेसर, पथशोध हेल्थकेयर के को-फाउंडर ने कहा कि कोविड -19 की स्थिति को का पता करने के साथ एंटीबॉडी के अस्थायी क्षय का आकलन करने में बहुत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि ये तकनीक कोविड-19 टीकों के लिए एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को स्पष्ट करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी और इस तरह भविष्य में टीकाकरण कार्यक्रमों को चलाने में इससे मदद मिलेगी।
प्रो आशुतोष शर्मा, सचिव, डीएसटी ने कहा परीक्षण न केवल पिछले संक्रमण को स्थापित करने के लिए एक नियमित सीरो-सर्वेक्षण उपकरण के रूप में उपयोगी है। बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एंटीबॉडी के क्वांटिफायर के रूप में ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को के लिए भी उपयोगी है जिससे एंटीबॉडी के लुप्त होने की डर, जैविक प्रतिक्रियाओं की समझने में भी मदद मिलेगी।
| करियर डेस्क. बेंगलुरु की एक स्टार्ट-अप ने एक पॉइंट-ऑफ-केयर इलेक्ट्रोकेमिकल एलिसा टेस्ट डेवलप किया है। क्लीनिकल सैंपल में कोविड-उन्नीस और एंटीबॉडी का सही तरीके से अंदाजा लगाया जा सकेगा। शनिवार को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इसकी जानकारी दी। जानें कैसे करती है काम, क्या है इसकी विशेषता। मंत्रालय के अनुसार, इस नई तकनीक और प्रोडेक्ट को सेंटर फॉर ऑगमेंटिंग वॉर विद कोविड-उन्नीस हेल्थ क्राइसिस की पहल के तहत भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित किया गया था। इस प्रयास को IIT बॉम्बे और IKP नॉलेज पार्क, हैदराबाद में SINE के माध्यम से संचालित किया गया था। पथशोध हेल्थकेयर, सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड डेवलपमेंट , इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में सहायता प्राप्त स्टार्ट-अप ने कोविड-उन्नीस आईजीएम और आईजीजी एंटीबॉडी के लिए अपनी तरह का पहला, सेमी-क्वानटेटिव इलेक्ट्रोकेमिकल एलिसा जांच विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस तकनीक से कोरोना वायरस के खिलाफ आइजीएम और आइजीजी एंटीबाडी की जांच की जाती है। आइजीएम एंटीबाडी किसी वायरस या रोगाणु के शरीर में प्रवेश करने पर तुरंत सक्रिय होती है। यह एंटीबाडी शरीर में व्यापक मात्रा में होती है और सबसे पहले वायरस के खिलाफ यही लड़ती है। आइजीजी एंटीबाडी के बनने में कुछ समय लगता है और यह लंबे समय तक शरीर में बनी रहती है। कोरोना वायरस संक्रमण की क्या स्थिति है इसका पता लगाया जाता है। परीक्षण किट दो भागों में आती है। एक हैंडहेल्ड एनालाइजर है जो खून के नमूने को जांच करता है और एक विस्तृत रिपोर्ट देता है। दूसरी एक टेस्ट स्ट्रिप है, जिस पर किसी उंगलियों से खून की एक बूंद डिवाइस में डाली जाती है। हैंडहेल्ड डिवाइस पांच मिनट के भीतर जांच की रिपोर्ट देता है। इसकी रिपोर्ट को आप अपने फोन में भी डाउनलोड कर सकते हैं। प्रोफेसर नवकांत भट, डीन, डिवीजन ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी साइंसेज और प्रोफेसर, पथशोध हेल्थकेयर के को-फाउंडर ने कहा कि कोविड -उन्नीस की स्थिति को का पता करने के साथ एंटीबॉडी के अस्थायी क्षय का आकलन करने में बहुत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि ये तकनीक कोविड-उन्नीस टीकों के लिए एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को स्पष्ट करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी और इस तरह भविष्य में टीकाकरण कार्यक्रमों को चलाने में इससे मदद मिलेगी। प्रो आशुतोष शर्मा, सचिव, डीएसटी ने कहा परीक्षण न केवल पिछले संक्रमण को स्थापित करने के लिए एक नियमित सीरो-सर्वेक्षण उपकरण के रूप में उपयोगी है। बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एंटीबॉडी के क्वांटिफायर के रूप में ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को के लिए भी उपयोगी है जिससे एंटीबॉडी के लुप्त होने की डर, जैविक प्रतिक्रियाओं की समझने में भी मदद मिलेगी। |
'सांसद आपके द्वार' कार्यक्रम के तहत एमपी किरण खेर ने विकलांगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। देखिए तस्वीरें।
सेक्टर 27 के कम्यूनिटी सेंटर में सांसद खेर ने यह जनता दरबार लगाया। काफी संख्या में सेक्टर के लोग भी उनसे मिलने के लिए पहुंचे।
लोगों की समस्याएं सुनने के बाद सांसद खेर ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करके समस्याएं सुलझाएंगी। सेक्टर-27 और 28 के व्यापारियों ने खेर से मार्केट में कॉरीडोर बनाने की मांग की। निगम के दिहाड़ीदार कर्मियों ने सांसद से नियमित करने की मांग की।
सेक्टर-28 के टाइप-13 मकानों में रहने वाले लोगों ने कहा कि मकानों की हालत काफी खराब है। बिजली के तार भी पुराने हो गए हैं। इन्हें बदलने की जरूरत है। मकानों की हालत खराब होने से कभी भी हादसा हो सकता है।
सेक्टर-27 के लोगों ने खेर को बताया कि उनके सेक्टर में बना ई-संपर्क सेंटर छोटा है। इसका विस्तार कर सेवाएं बढ़ाने की जरूरत है। ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके।
| 'सांसद आपके द्वार' कार्यक्रम के तहत एमपी किरण खेर ने विकलांगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। देखिए तस्वीरें। सेक्टर सत्ताईस के कम्यूनिटी सेंटर में सांसद खेर ने यह जनता दरबार लगाया। काफी संख्या में सेक्टर के लोग भी उनसे मिलने के लिए पहुंचे। लोगों की समस्याएं सुनने के बाद सांसद खेर ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करके समस्याएं सुलझाएंगी। सेक्टर-सत्ताईस और अट्ठाईस के व्यापारियों ने खेर से मार्केट में कॉरीडोर बनाने की मांग की। निगम के दिहाड़ीदार कर्मियों ने सांसद से नियमित करने की मांग की। सेक्टर-अट्ठाईस के टाइप-तेरह मकानों में रहने वाले लोगों ने कहा कि मकानों की हालत काफी खराब है। बिजली के तार भी पुराने हो गए हैं। इन्हें बदलने की जरूरत है। मकानों की हालत खराब होने से कभी भी हादसा हो सकता है। सेक्टर-सत्ताईस के लोगों ने खेर को बताया कि उनके सेक्टर में बना ई-संपर्क सेंटर छोटा है। इसका विस्तार कर सेवाएं बढ़ाने की जरूरत है। ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। |
गुजरात को पीछे छोड़ कर्नाटक देश का चौथा सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित राज्य बन गया है और राज्य में 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना के मामले अब पचास हज़ार पहुंचने को है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु ने सबकुछ भगवान भरोसे छोड़ते हुए कहा कि अब भगवान ही हमें बचा सकते हैं और हमें खुद भी सावधानियां बरतनी होगी।
ये ना अमीर-गरीब में फर्क करता है ना किसी एक समुदाय या किसी एक क्षेत्र को देखता है. ऐसे में सरकार क्या करेगी ?
स्वास्थ्य मंत्री के ऐसे बयान पर कांग्रेस ने अब पलटवार किया है। देश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने ट्वीट कर सवाल पूछा है।
उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि कर्नाटक को भगवान बचा सकता है, ये कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार की लापरवाही की निशानी है।
आगे उन्होंने लिखा कि अगर महामारी का मुकाबला नहीं हो सकता, तो हमें फिर सरकार की क्या जरूरत है।
ज्ञात हो, बेंगलुरू में 14 जुलाई रात आठ बजे से 22 जुलाई सुबह पांच बजे तक एक सप्ताह का पूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया गया है।
| गुजरात को पीछे छोड़ कर्नाटक देश का चौथा सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित राज्य बन गया है और राज्य में नौ सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना के मामले अब पचास हज़ार पहुंचने को है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु ने सबकुछ भगवान भरोसे छोड़ते हुए कहा कि अब भगवान ही हमें बचा सकते हैं और हमें खुद भी सावधानियां बरतनी होगी। ये ना अमीर-गरीब में फर्क करता है ना किसी एक समुदाय या किसी एक क्षेत्र को देखता है. ऐसे में सरकार क्या करेगी ? स्वास्थ्य मंत्री के ऐसे बयान पर कांग्रेस ने अब पलटवार किया है। देश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने ट्वीट कर सवाल पूछा है। उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि कर्नाटक को भगवान बचा सकता है, ये कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार की लापरवाही की निशानी है। आगे उन्होंने लिखा कि अगर महामारी का मुकाबला नहीं हो सकता, तो हमें फिर सरकार की क्या जरूरत है। ज्ञात हो, बेंगलुरू में चौदह जुलाई रात आठ बजे से बाईस जुलाई सुबह पांच बजे तक एक सप्ताह का पूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। |
मुंबई, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश की फिल्म 'दूबः नो बेड ऑफ रोजेज' को विदेशी भाषा की फिल्म श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया है। इस फिल्म के निर्देशक मोस्तोफा सरवर फारूकी का कहना है कि भारतीय अभिनेता इरफान के बिना यह फिल्म बनना संभव नहीं होता। 2017 की इस द्विभाषी फिल्म में इरफान ने प्रमुख भूमिका निभाई है, साथ ही वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।
इरफान फिलहाल लंदन अपने न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का इलाज करा रहे हैं। वे इस फिल्म को ऑस्कर के लिए चुने जाने पर काफी खुश हैं।
अभिनेता के प्रवक्ता ने इरफान के तरफ से एक बयान में कहा, जूरी द्वारा मान्यता मिलना एक सम्मान है और लंबे समय बाद फिल्म को वह पहचान मिल रही है, जो इसे मिलनी चाहिए थी।
फारूकी ने कहा, मैं खुश हूं कि 'दूब : नो बेड ऑफ रोजेज' ऑस्कर में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर रही है। मुझे उम्मीद है कि फिल्म को अकादमी के वोटर्स का कुछ प्यार मिलेगा। जहां तक इरफान के साथ मेरी भागीदारी का सवाल है, इस फिल्म में अभिनेता और सह-निर्माता के रूप में उनकी भागीदारी के बिना इस फिल्म का निर्माण संभव नहीं होता।
इस फिल्म में इरफान ने एक सफल फिल्म निर्माता की भूमिका निभाई है, जो जीवन के उस दौर में है, जब वह अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए बेटी की सहेली से रिश्ता बना लेता है, जिससे पूरे देश में हंगामा मच जाता है।
इस फिल्म को शुरू में बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि इसकी कहानी लेखक और फिल्मकार अहमद के जीवन से मिलती-जुलती थी, जिन्होंने शादी के 27 सालों बाद अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था और खुद से 33 साथ छोटी अभिनेत्री के साथ रिश्ता जोड़ लिया था।
बाद में 2017 के अक्टूबर में प्रतिबंध हटा लिया गया और यह फिल्म बांग्लादेश, फ्रांस, भारत और ऑस्ट्रेलिया में रिलीज की गई।
| मुंबई, पच्चीस सितंबर । बांग्लादेश की फिल्म 'दूबः नो बेड ऑफ रोजेज' को विदेशी भाषा की फिल्म श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया है। इस फिल्म के निर्देशक मोस्तोफा सरवर फारूकी का कहना है कि भारतीय अभिनेता इरफान के बिना यह फिल्म बनना संभव नहीं होता। दो हज़ार सत्रह की इस द्विभाषी फिल्म में इरफान ने प्रमुख भूमिका निभाई है, साथ ही वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं। इरफान फिलहाल लंदन अपने न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का इलाज करा रहे हैं। वे इस फिल्म को ऑस्कर के लिए चुने जाने पर काफी खुश हैं। अभिनेता के प्रवक्ता ने इरफान के तरफ से एक बयान में कहा, जूरी द्वारा मान्यता मिलना एक सम्मान है और लंबे समय बाद फिल्म को वह पहचान मिल रही है, जो इसे मिलनी चाहिए थी। फारूकी ने कहा, मैं खुश हूं कि 'दूब : नो बेड ऑफ रोजेज' ऑस्कर में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर रही है। मुझे उम्मीद है कि फिल्म को अकादमी के वोटर्स का कुछ प्यार मिलेगा। जहां तक इरफान के साथ मेरी भागीदारी का सवाल है, इस फिल्म में अभिनेता और सह-निर्माता के रूप में उनकी भागीदारी के बिना इस फिल्म का निर्माण संभव नहीं होता। इस फिल्म में इरफान ने एक सफल फिल्म निर्माता की भूमिका निभाई है, जो जीवन के उस दौर में है, जब वह अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए बेटी की सहेली से रिश्ता बना लेता है, जिससे पूरे देश में हंगामा मच जाता है। इस फिल्म को शुरू में बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि इसकी कहानी लेखक और फिल्मकार अहमद के जीवन से मिलती-जुलती थी, जिन्होंने शादी के सत्ताईस सालों बाद अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था और खुद से तैंतीस साथ छोटी अभिनेत्री के साथ रिश्ता जोड़ लिया था। बाद में दो हज़ार सत्रह के अक्टूबर में प्रतिबंध हटा लिया गया और यह फिल्म बांग्लादेश, फ्रांस, भारत और ऑस्ट्रेलिया में रिलीज की गई। |
अक्सर अपने बेबाक बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले पाकिस्तान के पूर्व ऑलराउंडर अब्दुल रज्जाक एक बार फिर से फैंस के निशाने पर हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें रज्जाक पाकिस्तान की महिला क्रिकेटर निदा दार पर सेक्सिस्ट कमेंट करते हुए नजर आ रहे हैं।
दरअसल, ये वायरल वीडियो इसी साल जून महीने का है जिसमें अब्दुल रज्जाक और निदा दार एक टॉक शो में साथ बैठे हुए नजर आ रहे हैं। इस शो के दौरान जब रज्जाक से महिलाओं के बारे में एक सवाल पूछा जाता है, तो वो दार के पहनावे को देखकर सेक्सिस्ट कमेंट करते हैं, जो फैंस को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया।
रज्जाक के इस कमेंट पर निदा ने बहुत ही प्यारा जवाब देते हुए कहा, "हमारा पेशा ऐसा है कि हमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी और हर वह काम करना पड़ता है जो खेल की आवश्यकता होती है। इसमें फिटनेस की आवश्यकता होती है और इसलिए आपका शरीर कठोर हो जाता है। अगर मैं क्रिकेटर नहीं होती, तो मैं निश्चित रूप से एक स्पोर्ट्सपर्सन होती।"
| अक्सर अपने बेबाक बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले पाकिस्तान के पूर्व ऑलराउंडर अब्दुल रज्जाक एक बार फिर से फैंस के निशाने पर हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें रज्जाक पाकिस्तान की महिला क्रिकेटर निदा दार पर सेक्सिस्ट कमेंट करते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, ये वायरल वीडियो इसी साल जून महीने का है जिसमें अब्दुल रज्जाक और निदा दार एक टॉक शो में साथ बैठे हुए नजर आ रहे हैं। इस शो के दौरान जब रज्जाक से महिलाओं के बारे में एक सवाल पूछा जाता है, तो वो दार के पहनावे को देखकर सेक्सिस्ट कमेंट करते हैं, जो फैंस को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। रज्जाक के इस कमेंट पर निदा ने बहुत ही प्यारा जवाब देते हुए कहा, "हमारा पेशा ऐसा है कि हमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी और हर वह काम करना पड़ता है जो खेल की आवश्यकता होती है। इसमें फिटनेस की आवश्यकता होती है और इसलिए आपका शरीर कठोर हो जाता है। अगर मैं क्रिकेटर नहीं होती, तो मैं निश्चित रूप से एक स्पोर्ट्सपर्सन होती।" |
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दिल्ली पुलिस (Delhi police) की पहल पर रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Delhi) नई दिल्ली में 'प्लाज्मा दान अभियान' (Plasma donation campaign) शुरू किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन मुख्य अतिथि थे, जबकि पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि थे। दिल्ली पुलिस के एडिशनल पीआरओ अनिल मित्तल ने कहा, "अभियान का उद्देश्य लोगों को कोविड-19 रोगियों के इलाज (Covid-19 patient treatment) के लिए प्लाज्मा दान (Plasma donation) करने के लिए प्रोत्साहित करना है। "
एक महिला कांस्टेबल सहित 26 पुलिसकर्मियों ने अपने प्लाज्मा का दान कर अभियान को शुरू किया। अधिकारी ने कहा, "दिल्ली पुलिस के 650 से अधिक कर्मियों द्वारा सप्ताह भर के अभियान के दौरान प्लाज्मा दान (Plasma donation campaign) करने की संभावना है। " एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दिल्ली पुलिस की पहल की सराहना की और डोनर पुलिस कर्मियों को 'सुपर कोरोना वॉरियर्स' कहा, क्योंकि वे पहले घातक वायरस से प्रभावित थे और बाद में उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए स्वेच्छा से अपना प्लाज्मा दान किया। उन्होंने लोगों से आगे आने और प्लाज्मा दान करने की अपील की, क्योंकि इससे गंभीर रोगियों के इलाज में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर श्रीवास्तव ने कहा, " कोरोनावायरस से निपटना एक अनोखा अनुभव रहा है, क्योंकि हममें से कोई भी नहीं जानता था कि क्या किया जाए। पुलिस की दो प्रमुख जिम्मेदारियां हैं, कानून -व्यवस्था बनाए रखना और लॉकडाउन को लागू कराना। साथ ही हमारे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और पुलिस फोर्स को प्रेरित करते रहने की भी चुनौती थी। सरकार का 'विजिबिल आर्म्स' होने के नाते, पुलिस को सरकार के निर्देशों को लागू करना सुनिश्चित करना ही होता है। "
फ्रंटलाइन वॉरियर्स होने के नाते पुलिस कर्मियों के वायरस के संपर्क में आने की सबसे अधिक आशंका रहती है। परिणामस्वरूप 2,500 से अधिक कर्मी संक्रमित हो गए और एक दर्जन जान गंवा बैठे। हालांकि, ठीक होने की दर 84 प्रतिशत से अधिक है। 2,100 से अधिक पुलिसकर्मी ठीक हो चुके हैं।
प्लाज्मा बैंक बनाने की पहल करने के लिए दिल्ली पुलिस के प्रयासों की सराहना करते हुए हर्षवर्धन ने इस आयोजन को पवित्र, महान और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस के जवानों ने खुद की तकलीफों को नजरअंदाज करते हुए दूसरों की जान बचाने के लिए स्वेच्छा से प्लाज्मा दान करके एक मिसाल कायम की है। यह अन्य कोरोना योद्धाओं को अपने प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित करेगा। " मुख्य अतिथि ने अमर कालोनी पुलिस स्टेशन के सीटी ओम प्रकाश की सराहना की, जिन्होंने अपना प्लाज्मा तीन बार दान किया। उन्होंने प्लाज्मा दाताओं को 'प्लाज्मा वारियर्स' कहा।
| Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! दिल्ली पुलिस की पहल पर रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में 'प्लाज्मा दान अभियान' शुरू किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन मुख्य अतिथि थे, जबकि पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि थे। दिल्ली पुलिस के एडिशनल पीआरओ अनिल मित्तल ने कहा, "अभियान का उद्देश्य लोगों को कोविड-उन्नीस रोगियों के इलाज के लिए प्लाज्मा दान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। " एक महिला कांस्टेबल सहित छब्बीस पुलिसकर्मियों ने अपने प्लाज्मा का दान कर अभियान को शुरू किया। अधिकारी ने कहा, "दिल्ली पुलिस के छः सौ पचास से अधिक कर्मियों द्वारा सप्ताह भर के अभियान के दौरान प्लाज्मा दान करने की संभावना है। " एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दिल्ली पुलिस की पहल की सराहना की और डोनर पुलिस कर्मियों को 'सुपर कोरोना वॉरियर्स' कहा, क्योंकि वे पहले घातक वायरस से प्रभावित थे और बाद में उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए स्वेच्छा से अपना प्लाज्मा दान किया। उन्होंने लोगों से आगे आने और प्लाज्मा दान करने की अपील की, क्योंकि इससे गंभीर रोगियों के इलाज में मदद मिलेगी। इस अवसर पर श्रीवास्तव ने कहा, " कोरोनावायरस से निपटना एक अनोखा अनुभव रहा है, क्योंकि हममें से कोई भी नहीं जानता था कि क्या किया जाए। पुलिस की दो प्रमुख जिम्मेदारियां हैं, कानून -व्यवस्था बनाए रखना और लॉकडाउन को लागू कराना। साथ ही हमारे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और पुलिस फोर्स को प्रेरित करते रहने की भी चुनौती थी। सरकार का 'विजिबिल आर्म्स' होने के नाते, पुलिस को सरकार के निर्देशों को लागू करना सुनिश्चित करना ही होता है। " फ्रंटलाइन वॉरियर्स होने के नाते पुलिस कर्मियों के वायरस के संपर्क में आने की सबसे अधिक आशंका रहती है। परिणामस्वरूप दो,पाँच सौ से अधिक कर्मी संक्रमित हो गए और एक दर्जन जान गंवा बैठे। हालांकि, ठीक होने की दर चौरासी प्रतिशत से अधिक है। दो,एक सौ से अधिक पुलिसकर्मी ठीक हो चुके हैं। प्लाज्मा बैंक बनाने की पहल करने के लिए दिल्ली पुलिस के प्रयासों की सराहना करते हुए हर्षवर्धन ने इस आयोजन को पवित्र, महान और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस के जवानों ने खुद की तकलीफों को नजरअंदाज करते हुए दूसरों की जान बचाने के लिए स्वेच्छा से प्लाज्मा दान करके एक मिसाल कायम की है। यह अन्य कोरोना योद्धाओं को अपने प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित करेगा। " मुख्य अतिथि ने अमर कालोनी पुलिस स्टेशन के सीटी ओम प्रकाश की सराहना की, जिन्होंने अपना प्लाज्मा तीन बार दान किया। उन्होंने प्लाज्मा दाताओं को 'प्लाज्मा वारियर्स' कहा। |
14 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर चंद्रयान-3 को लॉन्च किया जाना है। श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में इसे लेकर तैयारी पूरी हो चुकी हैं। सिर्फ इसरो ही नहीं अन्य स्पेस एजेंसियों की भी इस पर नजर बनी हुई है। इस मिशन के जरिए इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की कोशिश करेगा। 2019 में इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन के तहत चांद की सतह पर उतरने की कोशिश की थी लेकिन तकनीकी खामियों के कारण विक्रम लैंडर की चांद की सतह पर क्रैश लैंडिंग हुई। इसरो पुरानी गलतियों को सुधार कर एक बार फिर सफल लैंडिंग करना चाहता है। चंद्रयान-3 की सफलता काफी हद तक इसे लेकर जाने वाले बाहुबली रॉकेट लॉन्चर एलवीएम-3 पर टिकी है।
क्यों कहा जाता है बाहुबली रॉकेट लॉन्चर?
लॉन्च व्हीकल मार्क-III को बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है। पिछले साल अक्टूबर में एलवीएम-3 ने 36 सैटेलाइट को लेकर उड़ान भरी थी। इसके बाद से ही इस रॉकेट लॉन्चर को बाहुबली रॉकेट लॉन्चर कहा जाने लगा। इसरो को इसे बनाने में 15 साल का समय लगा था। यह इसरो द्वारा बनाया गया सबसे ताकतवर रॉकेट है। इस रॉकेट का इस्तेमाल हैवी लिफ्ट लॉन्च में किया जाता है।
यह रॉकेट तीन चरण में काम करता है। इसमें पहली स्टेज के तहत थ्रस्ट के लिए दो सॉलिड फ्यूल बूस्टर लगाए गए है। वहीं कोर थ्रस्ट के लिए एक लिक्विड बूस्टर लगाया गया है। एलवीएम-3 रॉकेट 640 टन से अधिक वजन उठा सकता है। वहीं इसकी पेलोड क्षमता 4,000 किलो से अधिक है। इसकी लंबाई 43. 5 मीटर है। इस रॉकेट का पुराना नाम जीएसएलवी-एमके-3 था जिसे पिछले साल बदल कर एलवीएम-3 रख दिया गया।
इस रॉकेट ने अभी तक के सभी मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। चंद्रयान-2 को भी इसी रॉकेट से लॉन्च किया गया था। चंद्रयान-3 इसका चौथा मिशन है। एलवीएम-3 का पहला मिशन G-SAT-19 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को पृथ्वी के ऑर्बिट में पहुंचाना था। इसने अपने दूसरे मिशन एस्ट्रोसैट एस्ट्रोनॉमी सैटेलाइट को पृथ्वी के ऑर्बिट में सफलता से पहुंचाया था। इसरो के सबसे बड़े मिशन में से एक गगनयान को भी एलवीएम-3 रॉकेट लेकर जाएगा। बता दें कि इसे बनाने में कुल 3,000 करोड़ रुपये का खर्च आया था।
| चौदह जुलाई को दोपहर दो बजकर पैंतीस मिनट पर चंद्रयान-तीन को लॉन्च किया जाना है। श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में इसे लेकर तैयारी पूरी हो चुकी हैं। सिर्फ इसरो ही नहीं अन्य स्पेस एजेंसियों की भी इस पर नजर बनी हुई है। इस मिशन के जरिए इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की कोशिश करेगा। दो हज़ार उन्नीस में इसरो ने चंद्रयान-दो मिशन के तहत चांद की सतह पर उतरने की कोशिश की थी लेकिन तकनीकी खामियों के कारण विक्रम लैंडर की चांद की सतह पर क्रैश लैंडिंग हुई। इसरो पुरानी गलतियों को सुधार कर एक बार फिर सफल लैंडिंग करना चाहता है। चंद्रयान-तीन की सफलता काफी हद तक इसे लेकर जाने वाले बाहुबली रॉकेट लॉन्चर एलवीएम-तीन पर टिकी है। क्यों कहा जाता है बाहुबली रॉकेट लॉन्चर? लॉन्च व्हीकल मार्क-III को बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है। पिछले साल अक्टूबर में एलवीएम-तीन ने छत्तीस सैटेलाइट को लेकर उड़ान भरी थी। इसके बाद से ही इस रॉकेट लॉन्चर को बाहुबली रॉकेट लॉन्चर कहा जाने लगा। इसरो को इसे बनाने में पंद्रह साल का समय लगा था। यह इसरो द्वारा बनाया गया सबसे ताकतवर रॉकेट है। इस रॉकेट का इस्तेमाल हैवी लिफ्ट लॉन्च में किया जाता है। यह रॉकेट तीन चरण में काम करता है। इसमें पहली स्टेज के तहत थ्रस्ट के लिए दो सॉलिड फ्यूल बूस्टर लगाए गए है। वहीं कोर थ्रस्ट के लिए एक लिक्विड बूस्टर लगाया गया है। एलवीएम-तीन रॉकेट छः सौ चालीस टन से अधिक वजन उठा सकता है। वहीं इसकी पेलोड क्षमता चार,शून्य किलो से अधिक है। इसकी लंबाई तैंतालीस. पाँच मीटर है। इस रॉकेट का पुराना नाम जीएसएलवी-एमके-तीन था जिसे पिछले साल बदल कर एलवीएम-तीन रख दिया गया। इस रॉकेट ने अभी तक के सभी मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। चंद्रयान-दो को भी इसी रॉकेट से लॉन्च किया गया था। चंद्रयान-तीन इसका चौथा मिशन है। एलवीएम-तीन का पहला मिशन G-SAT-उन्नीस कम्युनिकेशन सैटेलाइट को पृथ्वी के ऑर्बिट में पहुंचाना था। इसने अपने दूसरे मिशन एस्ट्रोसैट एस्ट्रोनॉमी सैटेलाइट को पृथ्वी के ऑर्बिट में सफलता से पहुंचाया था। इसरो के सबसे बड़े मिशन में से एक गगनयान को भी एलवीएम-तीन रॉकेट लेकर जाएगा। बता दें कि इसे बनाने में कुल तीन,शून्य करोड़ रुपये का खर्च आया था। |
हाल ही में एजबेस्टन टेस्ट मैच के दौरान दर्शकों पर नस्लवादी व्यवहार का आरोप लगाया गया था। IND vs ENG टेस्ट मैच के चौथे दिन भारतीय फैंस के साथ इंग्लिश फैंस ने दुर्व्यवहार किया था। भारतीय पर नस्लवादी (रेसिस्ट) वाली टिप्पणियां कीं। जिसके बाद एजबेस्टन के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा था कि इसको लेकर जांच की जाएगी। इसी बीच अब खबर आ रही है कि वारविकशायर ने नस्लीय दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कुछ निर्णय लिए हैं।
वारविकशायर ने जारी किए हुए बयान में कहा कि वें नस्लीय दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एजबेस्टन में दोनों टीमों के बीच दूसरे टी20 के दौरान अंडरकवर स्पॉटर्स (दर्शकों के साथ घुलने मिलने वाले कर्मचारी) को तैनात किया जाएगा। क्लब ने बयान में कहा,
अन्य कदमों में किसी भी घटना से निपटने के लिए पुलिस की उपस्थिति बढ़ाना, एजबेस्टन मोबाइल ऐप के माध्यम से नस्लवाद के बारे में जागरूकता पैदा करना, एरिक हॉलिस स्टैंड पर हर सीट पर 'क्यूआर' कोड स्टिकर लगाना, लोगों को ऐप से जुड़ने में मदद करना शामिल है। कर्मचारियों की जैकेट पर जीरो टॉलरेंस का संदेश शामिल है। इसके अलावा फैंस को शून्य-सहनशीलता रिस्टबैंड पहनकर एरिक हॉलिस स्टैंड पर आने के लिए प्रेरित करना शामिल है।
रीना नामक एक फैंस ने भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच के चौथे दिन हुए नस्लवाद व्यवहार की शिकायत दर्ज करते हुए कहा था कि दोनों टीमों के कुछ शानदार फैन्स के साथ तीन दिनों तक मैच का मजा लिया, लेकिन आज इस पूरे अनुभव पर पारी फिर गया। इस मैच का काफी समय से इंतजार कर रहे थे। इसका दुखद अंत हुआ।
| हाल ही में एजबेस्टन टेस्ट मैच के दौरान दर्शकों पर नस्लवादी व्यवहार का आरोप लगाया गया था। IND vs ENG टेस्ट मैच के चौथे दिन भारतीय फैंस के साथ इंग्लिश फैंस ने दुर्व्यवहार किया था। भारतीय पर नस्लवादी वाली टिप्पणियां कीं। जिसके बाद एजबेस्टन के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा था कि इसको लेकर जांच की जाएगी। इसी बीच अब खबर आ रही है कि वारविकशायर ने नस्लीय दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कुछ निर्णय लिए हैं। वारविकशायर ने जारी किए हुए बयान में कहा कि वें नस्लीय दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एजबेस्टन में दोनों टीमों के बीच दूसरे टीबीस के दौरान अंडरकवर स्पॉटर्स को तैनात किया जाएगा। क्लब ने बयान में कहा, अन्य कदमों में किसी भी घटना से निपटने के लिए पुलिस की उपस्थिति बढ़ाना, एजबेस्टन मोबाइल ऐप के माध्यम से नस्लवाद के बारे में जागरूकता पैदा करना, एरिक हॉलिस स्टैंड पर हर सीट पर 'क्यूआर' कोड स्टिकर लगाना, लोगों को ऐप से जुड़ने में मदद करना शामिल है। कर्मचारियों की जैकेट पर जीरो टॉलरेंस का संदेश शामिल है। इसके अलावा फैंस को शून्य-सहनशीलता रिस्टबैंड पहनकर एरिक हॉलिस स्टैंड पर आने के लिए प्रेरित करना शामिल है। रीना नामक एक फैंस ने भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच के चौथे दिन हुए नस्लवाद व्यवहार की शिकायत दर्ज करते हुए कहा था कि दोनों टीमों के कुछ शानदार फैन्स के साथ तीन दिनों तक मैच का मजा लिया, लेकिन आज इस पूरे अनुभव पर पारी फिर गया। इस मैच का काफी समय से इंतजार कर रहे थे। इसका दुखद अंत हुआ। |
ठंड का मौसम आते ही गीजर की मांग बढ़ जाती है। अगर आप इस बार नया गीजर खरीदने की सोच रहे हैं। तो हम यहां आपको बिना बिजली वाले ऑप्शन्स के बारे में बताने जा रहे हैं।
भारत में अब ठंड की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले दिनों में ठंड और भी बढ़ने वाली है। ऐसे में ठंडे पानी से नहाना काफी मुश्किल होता है। इसलिए घरों में गीजर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, गीजर इस्तेमाल करने से बिजली का बिल काफी ज्यादा आता है। साथ ही बिजली चली जाने पर पानी गर्म करना भी मुश्किल होता है। ऐसे में हम यहां आपको बिना बिजली से चलने वाले गीजर की लिस्ट बताने जा हे हैं। इसे चलाने में पंखे जितना ही खर्च आता है।
ये गीजर गैस से चलता है और इसे 2,800 रुपये में Indiamart से खरीदा जा सकता है। इसकी एनर्जी रेटिंग 5 स्टार है और इसकी कैपेसिटी 10 लीटर है। यानी 10 लीटर पानी को ये गर्म कर सकता है। चूंकि, ये गैस से चलता है इसलिए इसमें बिजली की खपत नहीं होती है। ये साइज में भी काफी छोटा होता है। ऐसे में इसे कहीं भी फिट किया जा सकता है।
Racold वाटर हीटर और गीजर बनाने वाली एक फेमस कंपनी है। कंपनी के पोर्टफोलियो में एक LPG-PNG Gas Water Heater भी है। ये काफी पॉपुलर भी है। इसे कंपनी की वेबसाइट से 8,744 रुपये में खरीदा जा सकता है। ये थोड़ा महंगा है। लेकिन, इसमें ब्रैंड का ट्रस्ट आपको मिलेगा। इसे दीवार में आसानी से फिट भी किया जा सकता है।
इस गैस वाटर हीटर को अमेजन से 4,499 रुपये में खरीदा जा सकता है। ये 6 लीटर कैपेसिटी के साथ आता है। इसके अलावा इसमें 20 मिन इन-बिल्ट टाइमर, एंटी-ड्राई बर्निंग प्रोटेक्शन, चाइल्ड लॉक सेफ्टी डिवाइस और 1kg कॉपर हीट एक्सचेंजर मिलता है।
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| ठंड का मौसम आते ही गीजर की मांग बढ़ जाती है। अगर आप इस बार नया गीजर खरीदने की सोच रहे हैं। तो हम यहां आपको बिना बिजली वाले ऑप्शन्स के बारे में बताने जा रहे हैं। भारत में अब ठंड की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले दिनों में ठंड और भी बढ़ने वाली है। ऐसे में ठंडे पानी से नहाना काफी मुश्किल होता है। इसलिए घरों में गीजर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, गीजर इस्तेमाल करने से बिजली का बिल काफी ज्यादा आता है। साथ ही बिजली चली जाने पर पानी गर्म करना भी मुश्किल होता है। ऐसे में हम यहां आपको बिना बिजली से चलने वाले गीजर की लिस्ट बताने जा हे हैं। इसे चलाने में पंखे जितना ही खर्च आता है। ये गीजर गैस से चलता है और इसे दो,आठ सौ रुपयापये में Indiamart से खरीदा जा सकता है। इसकी एनर्जी रेटिंग पाँच स्टार है और इसकी कैपेसिटी दस लीटरटर है। यानी दस लीटरटर पानी को ये गर्म कर सकता है। चूंकि, ये गैस से चलता है इसलिए इसमें बिजली की खपत नहीं होती है। ये साइज में भी काफी छोटा होता है। ऐसे में इसे कहीं भी फिट किया जा सकता है। Racold वाटर हीटर और गीजर बनाने वाली एक फेमस कंपनी है। कंपनी के पोर्टफोलियो में एक LPG-PNG Gas Water Heater भी है। ये काफी पॉपुलर भी है। इसे कंपनी की वेबसाइट से आठ,सात सौ चौंतालीस रुपयापये में खरीदा जा सकता है। ये थोड़ा महंगा है। लेकिन, इसमें ब्रैंड का ट्रस्ट आपको मिलेगा। इसे दीवार में आसानी से फिट भी किया जा सकता है। इस गैस वाटर हीटर को अमेजन से चार,चार सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीदा जा सकता है। ये छः लीटरटर कैपेसिटी के साथ आता है। इसके अलावा इसमें बीस मिन इन-बिल्ट टाइमर, एंटी-ड्राई बर्निंग प्रोटेक्शन, चाइल्ड लॉक सेफ्टी डिवाइस और एक किलोग्राम कॉपर हीट एक्सचेंजर मिलता है। ट्रेंडिंगः |
JDU Candidate List : बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के लिए जनता दल (यूनाइटेड) ने बुधवार को अपने सभी 115 सीटों पर लड़ने वाले प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है।
Bihar Election 2020 : बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के लिए एनडीए की ओर से सीटों के बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के साथ गठबंधन की जानकारी दी।
Bihar Assembly Election: महागठबंधन(Mahagathbandhan) में सबसे अधिक सीटें RJD के हिस्से में आई हैं। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस हैं। बता दें कि इस बार कांग्रेस(Congress) को 70 सीटें चुनाव लड़ने के लिए मिली हैं।
| JDU Candidate List : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जनता दल ने बुधवार को अपने सभी एक सौ पंद्रह सीटों पर लड़ने वाले प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। Bihar Election दो हज़ार बीस : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए की ओर से सीटों के बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के साथ गठबंधन की जानकारी दी। Bihar Assembly Election: महागठबंधन में सबसे अधिक सीटें RJD के हिस्से में आई हैं। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस हैं। बता दें कि इस बार कांग्रेस को सत्तर सीटें चुनाव लड़ने के लिए मिली हैं। |
Amazon Prime Video ने 80 करोड़ में खरीदी John Abraham की Mumbai Saga!!
Mumbai Saga Sold to Amazon Prime Video: ताजा मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मुंबई सागा के मेकर्स ने अमेजन प्राइम वीडियो के साथ डील कर ली है और दर्शकों को जल्द ही जॉन अब्राहम की फिल्म देखने को मिलेगी।
Mumbai Saga Sold to Amazon Prime Video: कोरोना वायरस महामारी की वजह से कई फिल्म निर्माता अपनी अपकमिंग फिल्मों को सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर रहे हैं। अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की लक्ष्मी (Laxmii) और वरुण धवन (Varun Dhawan) की कुली नं 1 (Coolie No 1) जैसी बड़ी फिल्में तक ओटीटी पर रिलीज की गईं ताकि फिल्म निर्माताओं को बड़े नुकसान से बचाया जा सके। ट्रेड एक्सपर्स्ट की मानें तो आने वाले समय में यह सिलसिला जारी रहेगा और मध्यम ही नहीं बल्कि बड़े फिल्म निर्माता भी अपनी फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म के पास लेकर जा सकते हैं।
अगर साल 2021 की शुरूआत में ही सामने आई रिपोर्ट की मानें तो बताया जा रहा है कि फिल्म 'मुंबई सागा' के मेकर्स ने अपनी फिल्म को सीधे ओटीटी पर रिलीज करने का मन बनाया है और इसके चलते उन्होंने अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) के साथ हाथ मिलाया है। पीपिंगमून नाम की वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है कि मुंबई सागा (Mumbai Saga) के मेकर्स ने लगभग 80 करोड़ रुपये अमेजन प्राइम वीडियो के साथ डील की है। अमेजन प्राइम वीडियो वाले'मुंबई सागा' को साल 2021 के फर्स्ट क्वार्टर में रिलीज करने की सोच रहे हैं।
'मुंबई सागा' का निर्देशन संजय गुप्ता (Sanjay Gupta) ने किया है और इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर, समीर सोनी, अमोल गुप्ते, प्रतीक बब्बर, काजल अग्रवाल, जॉन अब्राहम, इमरान हाशमी और जैकी श्रॉफ जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह साल 2021 में रिलीज होने वाली सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म है, जिसे टी-सीरीज ने व्हाइट फेदर प्रोडक्शन के साथ मिलकर बनाया है।
फिल्म 'मुंबई सागा' की कहानी की बात करें तो यह सालों पहले मुंबई में फैले गैंगस्टर वर्ल्ड के आसपास घूमती दिखाई देगी, जिसमें जॉन अब्राहम बड़े माफिया का किरदार निभाते दिखेंगे और इमरान हाशमी एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर के रूप में दिखेंगे, जो सभी गैंगस्टर्स का सफाया करने में जुटा हुआ है। वैसे आप 'मुंबई सागा' देखने के लिए कितने उत्साहित हैं, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
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| Amazon Prime Video ने अस्सी करोड़ में खरीदी John Abraham की Mumbai Saga!! Mumbai Saga Sold to Amazon Prime Video: ताजा मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मुंबई सागा के मेकर्स ने अमेजन प्राइम वीडियो के साथ डील कर ली है और दर्शकों को जल्द ही जॉन अब्राहम की फिल्म देखने को मिलेगी। Mumbai Saga Sold to Amazon Prime Video: कोरोना वायरस महामारी की वजह से कई फिल्म निर्माता अपनी अपकमिंग फिल्मों को सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर रहे हैं। अक्षय कुमार की लक्ष्मी और वरुण धवन की कुली नं एक जैसी बड़ी फिल्में तक ओटीटी पर रिलीज की गईं ताकि फिल्म निर्माताओं को बड़े नुकसान से बचाया जा सके। ट्रेड एक्सपर्स्ट की मानें तो आने वाले समय में यह सिलसिला जारी रहेगा और मध्यम ही नहीं बल्कि बड़े फिल्म निर्माता भी अपनी फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म के पास लेकर जा सकते हैं। अगर साल दो हज़ार इक्कीस की शुरूआत में ही सामने आई रिपोर्ट की मानें तो बताया जा रहा है कि फिल्म 'मुंबई सागा' के मेकर्स ने अपनी फिल्म को सीधे ओटीटी पर रिलीज करने का मन बनाया है और इसके चलते उन्होंने अमेजन प्राइम वीडियो के साथ हाथ मिलाया है। पीपिंगमून नाम की वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है कि मुंबई सागा के मेकर्स ने लगभग अस्सी करोड़ रुपये अमेजन प्राइम वीडियो के साथ डील की है। अमेजन प्राइम वीडियो वाले'मुंबई सागा' को साल दो हज़ार इक्कीस के फर्स्ट क्वार्टर में रिलीज करने की सोच रहे हैं। 'मुंबई सागा' का निर्देशन संजय गुप्ता ने किया है और इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर, समीर सोनी, अमोल गुप्ते, प्रतीक बब्बर, काजल अग्रवाल, जॉन अब्राहम, इमरान हाशमी और जैकी श्रॉफ जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह साल दो हज़ार इक्कीस में रिलीज होने वाली सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म है, जिसे टी-सीरीज ने व्हाइट फेदर प्रोडक्शन के साथ मिलकर बनाया है। फिल्म 'मुंबई सागा' की कहानी की बात करें तो यह सालों पहले मुंबई में फैले गैंगस्टर वर्ल्ड के आसपास घूमती दिखाई देगी, जिसमें जॉन अब्राहम बड़े माफिया का किरदार निभाते दिखेंगे और इमरान हाशमी एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर के रूप में दिखेंगे, जो सभी गैंगस्टर्स का सफाया करने में जुटा हुआ है। वैसे आप 'मुंबई सागा' देखने के लिए कितने उत्साहित हैं, हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा कि आदरणीय इंदिरा हृदयेश बहिन जी, आज मैं अति दुखी हूं। महिला हमारे लिए अति सम्मानित व पूज्या हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आधी रात के बाद 12:38 बजे ट्वीट कर प्रदेश की वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश क्षमा मांगी है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता बंशीधर भगत ने प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश अमर्यादित टिप्पणी की थी। इसे लेकर सूबे की सियासत में बड़ा बवाल मच गया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा कि आदरणीय इंदिरा हृदयेश बहिन जी, आज मैं अति दुखी हूं। महिला हमारे लिए अति सम्मानित व पूज्या हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से आपसे व उन सभी से क्षमा चाहता हं जो मेरी तरह दुखी हैं। मैं कल आपसे व्यक्तिगत बात करूंगा व पुनः क्षमा याचना करूंगा। '
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नैनीताल जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता बंशीधर भगत ने कहा था कि हमारी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश कह रही हैं कि बीजेपी के बहुत से विधायक मेरे संपर्क में हैं। अरे बुढ़िया, तुझसे क्यों संपर्क करेंगे, तुझसे संपर्क करेंगे? क्या डूबते जहाज से संपर्क करेंगे? यह अमर्यादित टिप्पणी बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओंको खूब भा गई और वह जोर-जोर से इस पर ठहाके लगाने लगे। बंशीधर भगत के बयान पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर माफी मांगी।
बता दें कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने इस तरह के बयान को नारी शक्ति का अपमान बताया था। इंदिरा हृदयेश पर की गई टिप्पणी से कांग्रेसियों का पारा सातवें आसमान पर है। जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल के मुताबिक, आज नैनीताल के सभी ब्लॉक और महानगर कमेटियां अपने-अपने क्षेत्र में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के पुतले फूंकने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजेंगे।
| उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा कि आदरणीय इंदिरा हृदयेश बहिन जी, आज मैं अति दुखी हूं। महिला हमारे लिए अति सम्मानित व पूज्या हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आधी रात के बाद बारह:अड़तीस बजे ट्वीट कर प्रदेश की वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश क्षमा मांगी है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता बंशीधर भगत ने प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश अमर्यादित टिप्पणी की थी। इसे लेकर सूबे की सियासत में बड़ा बवाल मच गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा कि आदरणीय इंदिरा हृदयेश बहिन जी, आज मैं अति दुखी हूं। महिला हमारे लिए अति सम्मानित व पूज्या हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से आपसे व उन सभी से क्षमा चाहता हं जो मेरी तरह दुखी हैं। मैं कल आपसे व्यक्तिगत बात करूंगा व पुनः क्षमा याचना करूंगा। ' मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नैनीताल जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता बंशीधर भगत ने कहा था कि हमारी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश कह रही हैं कि बीजेपी के बहुत से विधायक मेरे संपर्क में हैं। अरे बुढ़िया, तुझसे क्यों संपर्क करेंगे, तुझसे संपर्क करेंगे? क्या डूबते जहाज से संपर्क करेंगे? यह अमर्यादित टिप्पणी बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओंको खूब भा गई और वह जोर-जोर से इस पर ठहाके लगाने लगे। बंशीधर भगत के बयान पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर माफी मांगी। बता दें कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने इस तरह के बयान को नारी शक्ति का अपमान बताया था। इंदिरा हृदयेश पर की गई टिप्पणी से कांग्रेसियों का पारा सातवें आसमान पर है। जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल के मुताबिक, आज नैनीताल के सभी ब्लॉक और महानगर कमेटियां अपने-अपने क्षेत्र में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के पुतले फूंकने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजेंगे। |
राजधानी के खंड मशोबरा के अंतर्गत बल्देयां से बीते साल लापता मेदराम के शव का कंकाल तारापुर के जंगल से मिलने की खबर मिली है। CID और पुलिस को किसी ने सूचित किया कि तारापुर के जंगल में किसी का नर कंकाल पड़ा है। ढली पुलिस ने जब मौके से एक आईडी कार्ड और एक मोबाइल बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में यह नर कंकाल बल्देयां से लापता मेदराम का लग रहा है। पुलिस ने अवेशष इकट्ठा कर जांच के लिए भेज दिए हैं।
गौरतलब है कि शिमला बल्देयां पंचायत के मोहनपुर निवासी मेद राम (61) रहस्यमय परिस्थितियों में एक अप्रैल 2016 से लापता है। मेदराम एक गरीब दलित परिवार से संबंध रखते थे। पिछले कुछ वर्षों से प्रॉपर्टी डीलर का काम करते थे। शिमला पुलिस के सुस्त रवैये की वजह से जब मेदराम का कुछ अता-पता नहीं चल पाया। परिजनों ने काफी समय तक मेदराम की तलाश में भटकते रहे, ऐसे में किसान सभा ने इसको लेकर आवाज़ बुलंद की।
हिमाचल किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा की किसान सभा 20 मई 2016 से ही इस मामले को लगातार उठाती रही। लेकिन, पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते लापता मेदराम के मामले को और अधिक उलझा दिया था। मामले में उल्टा मेदराम के बेटे को डरा धमका कर पुलिस जंगलों में अपने पिता को खोजने भेजती रही।
डॉ. तंवर ने बताया कि 24 अप्रैल 2017 को किसान सभा ने पुलिस महानिदेशक और प्रधान सचिव गृह से मिलकर इस केस की जांच CID को सौंपने की मांग की थी। इसके बाद 23 जून को यह केस CID को सौंपने के निर्देश दिए गए। अब मामले की जांच सीआईडी कर रही है, लेकिन मामले में कोई सुराग नहीं मिल पाया है और अभी तक CID के हाथ खाली हैं।
| राजधानी के खंड मशोबरा के अंतर्गत बल्देयां से बीते साल लापता मेदराम के शव का कंकाल तारापुर के जंगल से मिलने की खबर मिली है। CID और पुलिस को किसी ने सूचित किया कि तारापुर के जंगल में किसी का नर कंकाल पड़ा है। ढली पुलिस ने जब मौके से एक आईडी कार्ड और एक मोबाइल बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में यह नर कंकाल बल्देयां से लापता मेदराम का लग रहा है। पुलिस ने अवेशष इकट्ठा कर जांच के लिए भेज दिए हैं। गौरतलब है कि शिमला बल्देयां पंचायत के मोहनपुर निवासी मेद राम रहस्यमय परिस्थितियों में एक अप्रैल दो हज़ार सोलह से लापता है। मेदराम एक गरीब दलित परिवार से संबंध रखते थे। पिछले कुछ वर्षों से प्रॉपर्टी डीलर का काम करते थे। शिमला पुलिस के सुस्त रवैये की वजह से जब मेदराम का कुछ अता-पता नहीं चल पाया। परिजनों ने काफी समय तक मेदराम की तलाश में भटकते रहे, ऐसे में किसान सभा ने इसको लेकर आवाज़ बुलंद की। हिमाचल किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा की किसान सभा बीस मई दो हज़ार सोलह से ही इस मामले को लगातार उठाती रही। लेकिन, पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते लापता मेदराम के मामले को और अधिक उलझा दिया था। मामले में उल्टा मेदराम के बेटे को डरा धमका कर पुलिस जंगलों में अपने पिता को खोजने भेजती रही। डॉ. तंवर ने बताया कि चौबीस अप्रैल दो हज़ार सत्रह को किसान सभा ने पुलिस महानिदेशक और प्रधान सचिव गृह से मिलकर इस केस की जांच CID को सौंपने की मांग की थी। इसके बाद तेईस जून को यह केस CID को सौंपने के निर्देश दिए गए। अब मामले की जांच सीआईडी कर रही है, लेकिन मामले में कोई सुराग नहीं मिल पाया है और अभी तक CID के हाथ खाली हैं। |
Relocation: Relocation of flood victims in Tierra Prometida, Ica
आखरी पहलू स्थानांतरण है, टिएरा प्रोमेटिडा, ईक्का में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में स्थानांतरण । तो, यहाँ, चर्च शामिल था, मिशनरी भी स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल थे, इसलिए, उन्होंने शुरू में अस्थायी आश्रयों और संक्रमण आश्रयों का समर्थन किया।
(Refer Slide Time: 28:40)
Present situation
Community problems are solved by the parish priest rather than by the people's efforts, to the extent that they insist on and receive payment for the work they do for their own benefit. The population does participate in this settlement, but they are paid for it. This paternalism reveals a mistaken concept of charity, which has created an absolute dependence on donations, affecting the population's dignity and self-esteem. People have become accustomed to begging.
Figure 13.5 THousing module] [enternion the back
और फिर बाद में, चर्च बातचीत करने और अपने घरों को बनाने के लिए कुछ मदद प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन, यदि आप इसे देखते हैं, तो समुदाय ने इसे हल नहीं किया है, वह पुजारी या चर्च है जिन्होंने काम के लिए भुगतान प्राप्त करके अपनी समस्याओं को हल किया है, वे अपने लाभ के लिए इसे करते हैं। तो, जिसका अर्थ है कि आबादी निपटान में भाग लेती है, लेकिन उन्हें इसके लिए भुगतान किया जाता है।
| Relocation: Relocation of flood victims in Tierra Prometida, Ica आखरी पहलू स्थानांतरण है, टिएरा प्रोमेटिडा, ईक्का में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में स्थानांतरण । तो, यहाँ, चर्च शामिल था, मिशनरी भी स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल थे, इसलिए, उन्होंने शुरू में अस्थायी आश्रयों और संक्रमण आश्रयों का समर्थन किया। Present situation Community problems are solved by the parish priest rather than by the people's efforts, to the extent that they insist on and receive payment for the work they do for their own benefit. The population does participate in this settlement, but they are paid for it. This paternalism reveals a mistaken concept of charity, which has created an absolute dependence on donations, affecting the population's dignity and self-esteem. People have become accustomed to begging. Figure तेरह.पाँच THousing module] [enternion the back और फिर बाद में, चर्च बातचीत करने और अपने घरों को बनाने के लिए कुछ मदद प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन, यदि आप इसे देखते हैं, तो समुदाय ने इसे हल नहीं किया है, वह पुजारी या चर्च है जिन्होंने काम के लिए भुगतान प्राप्त करके अपनी समस्याओं को हल किया है, वे अपने लाभ के लिए इसे करते हैं। तो, जिसका अर्थ है कि आबादी निपटान में भाग लेती है, लेकिन उन्हें इसके लिए भुगतान किया जाता है। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
पक्षाघात या लकवा मारना (Paralysis) एक या एकाधिक मांसपेशी समूह की मांसपेशियों के कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ होने की स्थिति को कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावी क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि दुर्बलता आंशिक है तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं। . पशुओं में पागलपन या हलकजाने का रोग (रेबीज़) को पैदा करने वाले विषाणु हलकाये कुत्ते, बिल्ली, बन्दर, गीदड़, लोमड़ी या नेवले के काटने से स्वस्थ पशु के शरीर में प्रवेश करते हैं तथा नाड़ियों के द्वारा मष्तिस्क में पहुंच कर उसमें बीमारी के लक्षण पैदा करते हैं। रोग ग्रस्त पशु की लार में यह विषाणु बहुतायत में होता है तथा रोगी पशु द्वारा दूसरे पशु को काट लेने से अथवा शरीर में पहले से मौजूद किसी घाव के ऊपर रोगी की लार लग जाने से यह बीमारी फैल सकती है। यह बीमारी रोग ग्रस्त पशुओं से मनुष्यों में भी आ सकती है अतः इस बीमारी का जन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्व है। एक बार पशु अथवा मनुष्य में इस बीमारी के लक्षण पैदा होने के बाद उसका फिर कोई इलाज नहीं है तथा उसकी मृत्यु निश्चित है। विषाणु के शरीर में घाव आदि के माध्य्म से प्रवेश करने के बाद 10 दिन से 210 दिनों तक की अवधि में यह बीमारी हो सकती है। मस्तिष्क के जितना अधिक नजदीक घाव होता है उतनी ही जल्दी बीमारी के लक्षण पशु में पैदा हो जाते हैं जैसे कि सिर अथवा चेहरे पर काटे गए पशु में एक हफ्ते के बाद यह रोग पैदा हो सकता है। .
पक्षाघात और पशुओं में पागलपन आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
पक्षाघात 14 संबंध है और पशुओं में पागलपन 4 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (14 + 4)।
यह लेख पक्षाघात और पशुओं में पागलपन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। पक्षाघात या लकवा मारना एक या एकाधिक मांसपेशी समूह की मांसपेशियों के कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ होने की स्थिति को कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावी क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि दुर्बलता आंशिक है तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं। . पशुओं में पागलपन या हलकजाने का रोग को पैदा करने वाले विषाणु हलकाये कुत्ते, बिल्ली, बन्दर, गीदड़, लोमड़ी या नेवले के काटने से स्वस्थ पशु के शरीर में प्रवेश करते हैं तथा नाड़ियों के द्वारा मष्तिस्क में पहुंच कर उसमें बीमारी के लक्षण पैदा करते हैं। रोग ग्रस्त पशु की लार में यह विषाणु बहुतायत में होता है तथा रोगी पशु द्वारा दूसरे पशु को काट लेने से अथवा शरीर में पहले से मौजूद किसी घाव के ऊपर रोगी की लार लग जाने से यह बीमारी फैल सकती है। यह बीमारी रोग ग्रस्त पशुओं से मनुष्यों में भी आ सकती है अतः इस बीमारी का जन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्व है। एक बार पशु अथवा मनुष्य में इस बीमारी के लक्षण पैदा होने के बाद उसका फिर कोई इलाज नहीं है तथा उसकी मृत्यु निश्चित है। विषाणु के शरीर में घाव आदि के माध्य्म से प्रवेश करने के बाद दस दिन से दो सौ दस दिनों तक की अवधि में यह बीमारी हो सकती है। मस्तिष्क के जितना अधिक नजदीक घाव होता है उतनी ही जल्दी बीमारी के लक्षण पशु में पैदा हो जाते हैं जैसे कि सिर अथवा चेहरे पर काटे गए पशु में एक हफ्ते के बाद यह रोग पैदा हो सकता है। . पक्षाघात और पशुओं में पागलपन आम में शून्य बातें हैं । पक्षाघात चौदह संबंध है और पशुओं में पागलपन चार है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख पक्षाघात और पशुओं में पागलपन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी () पर कांग्रेस पार्टी नेता अजय राय की टिप्पणी से टकराव बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजय राय ने अमेठी में स्मृति ईरानी के सहयोग को दरकिनार करने की प्रयास की थी और बोला था कि वह सिर्फ 'लटके- झटके' के लिए निर्वाचन क्षेत्र में आती हैं और फिर गायब हो जाती हैं। इस पर बीजेपी ने भी करारा उत्तर देते हुए इसे 'प्रथम परिवार द्वारा प्रायोजित प्रयोग' बताया है।
अजय राय की यह टिप्पणी बीजेपी को ठीक नहीं लगी और प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर इसकी आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि 'राहुल गांधी के वफादार अजय राय ने स्मृति ईरानी जी पर 'लटके झटके' टिप्पणी की है, इससे स्तब्ध हूं। यह संयोग नहीं है- यह सियासी बदला लेने के लिए प्रथम परिवार द्वारा प्रायोजित प्रयोग है क्योंकि स्मृति जी ने राजवंश को हराया। पहली स्त्री आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान भी कांग्रेस पार्टी ने किया।
| उत्तर प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर कांग्रेस पार्टी नेता अजय राय की टिप्पणी से टकराव बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजय राय ने अमेठी में स्मृति ईरानी के सहयोग को दरकिनार करने की प्रयास की थी और बोला था कि वह सिर्फ 'लटके- झटके' के लिए निर्वाचन क्षेत्र में आती हैं और फिर गायब हो जाती हैं। इस पर बीजेपी ने भी करारा उत्तर देते हुए इसे 'प्रथम परिवार द्वारा प्रायोजित प्रयोग' बताया है। अजय राय की यह टिप्पणी बीजेपी को ठीक नहीं लगी और प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर इसकी आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि 'राहुल गांधी के वफादार अजय राय ने स्मृति ईरानी जी पर 'लटके झटके' टिप्पणी की है, इससे स्तब्ध हूं। यह संयोग नहीं है- यह सियासी बदला लेने के लिए प्रथम परिवार द्वारा प्रायोजित प्रयोग है क्योंकि स्मृति जी ने राजवंश को हराया। पहली स्त्री आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान भी कांग्रेस पार्टी ने किया। |
"ऐसा नहीं होगा. घरपरिवार की चिंता पुरुष को भी होती है," कह कर उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया. उन के बांहों की जकड़ किसी सुरक्षा के घेरे से कम नहीं थी. मुझे राहत मिली. ऐसे ही प्यार, मुहब्बत और टकराव के बीच जिंदगी के 30 साल कैसे गुजर गए, पता ही न चला. बेटाबहू बनारस में बस गए. उन्हीें से मिलने मैं कभीकभार आ जाती हूं.
मैं अतीत से लौटी. आगे बढ़ कर उस महिला के पास आई. बदल तो वह काफी गई थी. फिर भी इतमीनान कर लेने में क्या जाता है."आप कहां की रहने वाली हैं?" मेैं ने पूछा. बिना जवाब दिए उस ने नजरें दूसरी तरफ फेर लीं."मम्मी, कहां आप फिजूल के चक्कर में पड गई हैं?" यह देख कर मेरे बेटे को कोफ्त हुई. मेरे बेटे का स्वर उस महिला के कानों पर पड़ा. उस से रहा न गया.
"बेटा, जिंदगी में कुछ भी हो सकता है. एक औरत के साथ तो कुछ ज्यादा ही, क्योंकि वह पुरुषों के समाज में जीती है," इतनी सारगर्भित बात सुन कर मैं सकते में आ गई. निश्चय ही यह महिला किसी भले परिवार की होगी. मेरा विश्वास प्रबल हो गया कि यही शालिनी भाभी होगी?
"आप शिवपाल चाचा की बहू शालिनी तो नहीं?" उस ने कोई जवाब नहीं दिया.मैं उस के चेहरे पर बनतेबिगड़ते भावों को पढ़ने की कोशिश करने लगी. उस ने नजरें नीची कर लीं.आसपास खड़े लोगों के लिए मैं जिज्ञासा का विषय बन गई. मेरे बेटेबहू को यह हरकत नागवार लग रही थी. मगर मैं ने शालिनी भाभी को करीब से जाना था. इसलिए मुझे उन का मोह था. नए जमाने के बेटेबहू को इस से क्या लेनादेना. वैसे भी आजकल के बच्चे प्रेक्टिकल हो गए हैं. वे भावनाओं में नहीं बहते. एक हमीं थे, जो अब भी भावनाओं के भंवर में फंसे हुए थे. खयाल जो पुराने थे. उस की चुप्पी से साफ जाहिर हो रहा था कि उस के मन में कुछ चल रहा था. यही कि अपनी पहचान जाहिर करे या चुप्पी साध ले. पहचान जाहिर करने का मतलब पुराने जख्मों को फिर से हरा करना. जो पीड़ादायक होगा.
| "ऐसा नहीं होगा. घरपरिवार की चिंता पुरुष को भी होती है," कह कर उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया. उन के बांहों की जकड़ किसी सुरक्षा के घेरे से कम नहीं थी. मुझे राहत मिली. ऐसे ही प्यार, मुहब्बत और टकराव के बीच जिंदगी के तीस साल कैसे गुजर गए, पता ही न चला. बेटाबहू बनारस में बस गए. उन्हीें से मिलने मैं कभीकभार आ जाती हूं. मैं अतीत से लौटी. आगे बढ़ कर उस महिला के पास आई. बदल तो वह काफी गई थी. फिर भी इतमीनान कर लेने में क्या जाता है."आप कहां की रहने वाली हैं?" मेैं ने पूछा. बिना जवाब दिए उस ने नजरें दूसरी तरफ फेर लीं."मम्मी, कहां आप फिजूल के चक्कर में पड गई हैं?" यह देख कर मेरे बेटे को कोफ्त हुई. मेरे बेटे का स्वर उस महिला के कानों पर पड़ा. उस से रहा न गया. "बेटा, जिंदगी में कुछ भी हो सकता है. एक औरत के साथ तो कुछ ज्यादा ही, क्योंकि वह पुरुषों के समाज में जीती है," इतनी सारगर्भित बात सुन कर मैं सकते में आ गई. निश्चय ही यह महिला किसी भले परिवार की होगी. मेरा विश्वास प्रबल हो गया कि यही शालिनी भाभी होगी? "आप शिवपाल चाचा की बहू शालिनी तो नहीं?" उस ने कोई जवाब नहीं दिया.मैं उस के चेहरे पर बनतेबिगड़ते भावों को पढ़ने की कोशिश करने लगी. उस ने नजरें नीची कर लीं.आसपास खड़े लोगों के लिए मैं जिज्ञासा का विषय बन गई. मेरे बेटेबहू को यह हरकत नागवार लग रही थी. मगर मैं ने शालिनी भाभी को करीब से जाना था. इसलिए मुझे उन का मोह था. नए जमाने के बेटेबहू को इस से क्या लेनादेना. वैसे भी आजकल के बच्चे प्रेक्टिकल हो गए हैं. वे भावनाओं में नहीं बहते. एक हमीं थे, जो अब भी भावनाओं के भंवर में फंसे हुए थे. खयाल जो पुराने थे. उस की चुप्पी से साफ जाहिर हो रहा था कि उस के मन में कुछ चल रहा था. यही कि अपनी पहचान जाहिर करे या चुप्पी साध ले. पहचान जाहिर करने का मतलब पुराने जख्मों को फिर से हरा करना. जो पीड़ादायक होगा. |
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मुगलों से सहानुभूति रखने वाले नसीरुद्दीन शाह को बाबर और औरंगजेब का इतिहास जान लेना चाहिए!
नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि हमें मुगलों का महिमामंडन नहीं करना चाहिए लेकिन उन्हें बदनाम करने की भी जरूरत नहीं है. मुगल तैमूर और नादिर शाह की तरह आक्रमणकारी नहीं थे. मुगल भारत को अपना घर बनाने आए थे. यदि मुगल इतने ही गलत हैं तो उनके बनाए ताजमहल, लाल किला और कुतुब मीनार को लोगों ने गिरा नहीं दिया होता.
हाथों में गुलाब पकड़े प्रेम चतुर्दशी का प्रेममयी पदार्पण हो चुका है!
14 फरवरी नज़दीक आने को है और गुलाब अपनी ख़ुशबू से सबों को राग-द्वेश त्यागकर प्रेमराग फैलाने का संदेश दे रहा है. चाहे शाहजहां हो या दशरथ मांझी, प्रेम के इस पवित्र सप्ताह में फूहड़पन को त्यागकर आइए प्यार की इन प्रतिमूर्ति को याद करें और समूचे संसार के समक्ष एक ऐसा उदाहरण पेश करें जो आने वाली नस्लो के लिए एक मिसाल बनकर सामने आए.
ताजमहल में बंद कमरे खुलवाने के लिए PhD जरूरी, लेकिन पद्मनाभ मंदिर पर केवल PIL!
ताजमहल (Taj Mahal) के 22 बंद कमरे खुलवाने को लेकर दायर पीआईएल पर हाईकोर्ट (High Court) के जजों ने तल्ख टिप्पणियां की. याचिककर्ता को मामले की रिसर्च करने और पीएचडी (Phd) करने की बात कही. लेकिन, सोशल मीडिया पर इसे लेकर पद्मनाभस्वामी मंदिर (Padmanabhaswamy Temple) का उदाहरण दिया जाने लगा.
ये भी ताजमहल. . . कर्नाटक के श्रीनिवास गुप्ता ने बनवाई स्वर्गीय पत्नी का मोम प्रतिमा!
अपने घर की हाउस वार्मिंग सेरेमनी (House Warming Ceremony) में अपनी स्वर्गवासी पत्नी (Wife) को याद करते हुए जो कुछ कर्नाटक (Karnataka) के उद्योगपति श्रीनिवास गुप्ता (Shrinivas Gupta) ने कियावो ज़माने भर के लिए मिसाल है. गुप्ता ने अपने घर में पत्नी (Wife) की मूर्ति (Statue) लगवाई है और सोशल मीडिया पर लोगों ने तारीफों के पुल बांध दिए हैं.
सुलतानों-बादशाहों को पूर्वज बताने से 'अपमानित' वल्दियत कैसे बदलेगी?
दिल्ली में सात सौ साल की सुलतानों-बादशाहों की हुकूमत के दौरान नामालूम किस जलालत में उनके किस पुरखे ने, औरत ने अपना नाम और धर्म बदला होगा और उसी जलालत में वे नामालूम कहां की कब्र में दफना दिए गए होंगे.
पंछी पेठे वालों से पूछिए आगरा को अग्रवन बनाने से क्या नुकसान होगा!
योगी आदित्यनाथ Agra का नाम बदलकर उसे Agravan तो कर रहे हैं मगर उन्हें पंछी पेठा को भी नहीं भूलना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर, आगरा का नाम अग्रवन हुआ तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी को होगा तो वो पंछी पेठा ही होगा.
सही तो कहा सुप्रीम कोर्ट ने, भला ताज महल भी कोई नमाज पढ़ने की जगह है!
ताज में नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है मगर देखा जाए तो कोर्ट का ये फैसला वीरान पड़ी मस्जिदों के लिए फायदेमंद है.
अयोध्या केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और हिंदू संगठनों के नेता 2019 से पहले मंदिर निर्माण का दावा भी कर रहे हैं. खास बात ये है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी एक अयोध्या प्लान है जो सिर्फ अयोध्या तक ही सीमित नहीं है.
सबको तो गले लगा लेते हैं, लेकिन कनाडा के पीएम से मिलने भी क्यों नहीं गए मोदी?
हर देश के राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंच जाने और मिलते ही उन्हें गले लगा लेने वाले पीएम मोदी कनाडा के पीएम से 4 दिन बाद भी नहीं मिले हैं. पीएम तो पीएम, यूपी के सीएम ने भी ताजमहल घूमने गए ट्रूडो से हाथ मिलाना मुनासिब नहीं समझा.
| You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. मुगलों से सहानुभूति रखने वाले नसीरुद्दीन शाह को बाबर और औरंगजेब का इतिहास जान लेना चाहिए! नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि हमें मुगलों का महिमामंडन नहीं करना चाहिए लेकिन उन्हें बदनाम करने की भी जरूरत नहीं है. मुगल तैमूर और नादिर शाह की तरह आक्रमणकारी नहीं थे. मुगल भारत को अपना घर बनाने आए थे. यदि मुगल इतने ही गलत हैं तो उनके बनाए ताजमहल, लाल किला और कुतुब मीनार को लोगों ने गिरा नहीं दिया होता. हाथों में गुलाब पकड़े प्रेम चतुर्दशी का प्रेममयी पदार्पण हो चुका है! चौदह फरवरी नज़दीक आने को है और गुलाब अपनी ख़ुशबू से सबों को राग-द्वेश त्यागकर प्रेमराग फैलाने का संदेश दे रहा है. चाहे शाहजहां हो या दशरथ मांझी, प्रेम के इस पवित्र सप्ताह में फूहड़पन को त्यागकर आइए प्यार की इन प्रतिमूर्ति को याद करें और समूचे संसार के समक्ष एक ऐसा उदाहरण पेश करें जो आने वाली नस्लो के लिए एक मिसाल बनकर सामने आए. ताजमहल में बंद कमरे खुलवाने के लिए PhD जरूरी, लेकिन पद्मनाभ मंदिर पर केवल PIL! ताजमहल के बाईस बंद कमरे खुलवाने को लेकर दायर पीआईएल पर हाईकोर्ट के जजों ने तल्ख टिप्पणियां की. याचिककर्ता को मामले की रिसर्च करने और पीएचडी करने की बात कही. लेकिन, सोशल मीडिया पर इसे लेकर पद्मनाभस्वामी मंदिर का उदाहरण दिया जाने लगा. ये भी ताजमहल. . . कर्नाटक के श्रीनिवास गुप्ता ने बनवाई स्वर्गीय पत्नी का मोम प्रतिमा! अपने घर की हाउस वार्मिंग सेरेमनी में अपनी स्वर्गवासी पत्नी को याद करते हुए जो कुछ कर्नाटक के उद्योगपति श्रीनिवास गुप्ता ने कियावो ज़माने भर के लिए मिसाल है. गुप्ता ने अपने घर में पत्नी की मूर्ति लगवाई है और सोशल मीडिया पर लोगों ने तारीफों के पुल बांध दिए हैं. सुलतानों-बादशाहों को पूर्वज बताने से 'अपमानित' वल्दियत कैसे बदलेगी? दिल्ली में सात सौ साल की सुलतानों-बादशाहों की हुकूमत के दौरान नामालूम किस जलालत में उनके किस पुरखे ने, औरत ने अपना नाम और धर्म बदला होगा और उसी जलालत में वे नामालूम कहां की कब्र में दफना दिए गए होंगे. पंछी पेठे वालों से पूछिए आगरा को अग्रवन बनाने से क्या नुकसान होगा! योगी आदित्यनाथ Agra का नाम बदलकर उसे Agravan तो कर रहे हैं मगर उन्हें पंछी पेठा को भी नहीं भूलना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर, आगरा का नाम अग्रवन हुआ तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी को होगा तो वो पंछी पेठा ही होगा. सही तो कहा सुप्रीम कोर्ट ने, भला ताज महल भी कोई नमाज पढ़ने की जगह है! ताज में नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है मगर देखा जाए तो कोर्ट का ये फैसला वीरान पड़ी मस्जिदों के लिए फायदेमंद है. अयोध्या केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और हिंदू संगठनों के नेता दो हज़ार उन्नीस से पहले मंदिर निर्माण का दावा भी कर रहे हैं. खास बात ये है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी एक अयोध्या प्लान है जो सिर्फ अयोध्या तक ही सीमित नहीं है. सबको तो गले लगा लेते हैं, लेकिन कनाडा के पीएम से मिलने भी क्यों नहीं गए मोदी? हर देश के राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंच जाने और मिलते ही उन्हें गले लगा लेने वाले पीएम मोदी कनाडा के पीएम से चार दिन बाद भी नहीं मिले हैं. पीएम तो पीएम, यूपी के सीएम ने भी ताजमहल घूमने गए ट्रूडो से हाथ मिलाना मुनासिब नहीं समझा. |
को छोड़ना चाहता था, किन्तु कृष्ण उसे कैसे छोड़ते । "ये तो पकडकर छोडना जानते ही नहीं। भूल से भी जो इन्हें पकड़ लेता है। उसके ये गले में लिपट जाते हैं, कसकर पकड़ लेते हैं । जाड़े के दिनों में गङ्गाजी में जीवित रीछ वहा जाता था, किसी साधु ने भ्रमवश कम्बल समझकर दौड़कर उसे पकड़ लिया। उसने भी साधु को अपने पंजो से पकड़ लिया। अब साधु बाबा कम्बल को तो भूल गये, प्राण बचाने का प्रयत्न करने लगे । किसी ने कहा - "कम्बल को छोड दो। "वे बोले - ' मैं तो बहुत छोडना चाहता हूँ, कम्वल हो मुझे नहीं छोड़ता।" यही दशा तृणावत की हुई । वह श्याम को छोड़ना चाहता था, श्याम उसके कण्ठ को कसकर पकड़े हुए थे । वह बड़े असमजस में पड़ा, कि यह विचित्र बालक है । उसने पूरी शक्ति लगायो, किन्तु शक्तिमान् के सम्मुख उसकी शक्ति क्या काम कर सकती थी। उसका गला घुटने लगा । हुच्च-हुच्च करके हिचकियाँ लेने लगा । आँखें निकल आयी और स्वाँस बन्द होने से वह निश्चेष्ट हो गया । उसकी चाणी बन्द हो गयी। प्राणहीन होने से वह विचित्र बालक को लिये हुए, धडाम से एक बड़ी भारी शिला पर गिर गया । गिरते ही उसका चकनाचूर हो गया। लालजी उसे लिये हुए चही गिरे जहाँ गोपियाँ विलाप कर रही थी, रोते-रोते मैया को सान्त्वना दे रही थी । जैसे आकाश में उड़ता हुआ कोई पहाड़ गिरा हो, अथवा शिवजी के वाणो से विद्ध होकर त्रिपुर का काई पुर गिरा हो, अथवा कोई बडा विमान श्राहार चुक जाने से गिर गया हो अथवा इन्द्र का वच्च भूल से गिर पड़ा हो, उसी प्रकार वह प्रसुर लालजी को लिये हुए पत्थर की पटिया पर गिरा । उस पर गिरते ही उसके समस्त अङ्ग खण्ड-खण्ड हो गये । गोपियों ने अत्यन्त विस्मय के साथ देखा लालजी उसके | को छोड़ना चाहता था, किन्तु कृष्ण उसे कैसे छोड़ते । "ये तो पकडकर छोडना जानते ही नहीं। भूल से भी जो इन्हें पकड़ लेता है। उसके ये गले में लिपट जाते हैं, कसकर पकड़ लेते हैं । जाड़े के दिनों में गङ्गाजी में जीवित रीछ वहा जाता था, किसी साधु ने भ्रमवश कम्बल समझकर दौड़कर उसे पकड़ लिया। उसने भी साधु को अपने पंजो से पकड़ लिया। अब साधु बाबा कम्बल को तो भूल गये, प्राण बचाने का प्रयत्न करने लगे । किसी ने कहा - "कम्बल को छोड दो। "वे बोले - ' मैं तो बहुत छोडना चाहता हूँ, कम्वल हो मुझे नहीं छोड़ता।" यही दशा तृणावत की हुई । वह श्याम को छोड़ना चाहता था, श्याम उसके कण्ठ को कसकर पकड़े हुए थे । वह बड़े असमजस में पड़ा, कि यह विचित्र बालक है । उसने पूरी शक्ति लगायो, किन्तु शक्तिमान् के सम्मुख उसकी शक्ति क्या काम कर सकती थी। उसका गला घुटने लगा । हुच्च-हुच्च करके हिचकियाँ लेने लगा । आँखें निकल आयी और स्वाँस बन्द होने से वह निश्चेष्ट हो गया । उसकी चाणी बन्द हो गयी। प्राणहीन होने से वह विचित्र बालक को लिये हुए, धडाम से एक बड़ी भारी शिला पर गिर गया । गिरते ही उसका चकनाचूर हो गया। लालजी उसे लिये हुए चही गिरे जहाँ गोपियाँ विलाप कर रही थी, रोते-रोते मैया को सान्त्वना दे रही थी । जैसे आकाश में उड़ता हुआ कोई पहाड़ गिरा हो, अथवा शिवजी के वाणो से विद्ध होकर त्रिपुर का काई पुर गिरा हो, अथवा कोई बडा विमान श्राहार चुक जाने से गिर गया हो अथवा इन्द्र का वच्च भूल से गिर पड़ा हो, उसी प्रकार वह प्रसुर लालजी को लिये हुए पत्थर की पटिया पर गिरा । उस पर गिरते ही उसके समस्त अङ्ग खण्ड-खण्ड हो गये । गोपियों ने अत्यन्त विस्मय के साथ देखा लालजी उसके |
सिगरेट पीते हुए जवाहरलाल नेहरू और साथ ही भारत में तत्कालीन ब्रिटिश उच्चायुक्त की पत्नी सुश्री सिमोन की मदद करते हुए एक तस्वीर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री की एक अलग ही छवि दर्शाती है। यह तस्वीर भारत की पहली तथा लंबे समय तक भारत की एकमात्र महिला फोटो पत्रकार द्वारा हो गई।
अपनी तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने परिवर्तशील राष्ट्र के सामाजिक तथा राजनैतिक जीवन को दर्शाया। इनमें नेहरू से माउन्टवेटन व दलाई लामा का भारत में प्रवेश, उनकी ली गई तस्वीरे विशेष निशान छोड़ गए- वे स्वतंत्र भारत से पूर्व तथा इसके पश्चात की कहानी बताते हैं। जहां नेताओं ने देश के बंटवारे के लिए वोट किया उसकी बैठक समेत प्रमुख अवसरों परे ली गए उनकी तस्वीरे भारतीय इतिहास पर पड़े निर्णायक प्रभाव की झलक दर्शाती है।
उन्होंने 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर पहली बार फहराये गये झंडे, भारत से लॉर्ड माऊन्टबेन्टन के प्रस्थान , महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री की अंतिम यात्रा के भी छायाचित्र लिए। उनके कार्य में चार दशकों का फैलाव जिसमें स्वतंत्रता की ललक के साथ-साथ नए राष्ट्र में नहीं निभाये गए वायदों के प्रति हताशा भी दिखाई देती है। व्यारवाला का जन्म 13 दिसंबर, 1913 को नवसारी गुजरात में मध्य वर्ग पारसी परिवार में होमई हाथीराम के रूप में हुआ। उनके पिता पारसी उर्दू थियेटर में अभिनेता थे। उनका पालन पोषण मुंबई में हुआ तथा उन्होंने पहले-पहल फोटोग्राफी अपने मित्र मानेकशां व्यारवाला से तथा बाद में जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से सीखी।
उनकी पहली तस्वीर बोम्बे क्रोनिकल में प्रकाशित हुई जिसमें उन्हें प्रत्येक छायाचित्र के लिए एक रूपया प्राप्त हुआ। वह अपने पति के साथ दिल्ली आ गई और ब्रिटिश सूचना सेवाओं के कर्मचारी के रूप में स्वतंत्रता के दौरान के फोटो लिए।
दिूतीय विश्व युद्ध के हमले के बाद, उन्होंने इलेस्ट्रेटिड वीकली ऑफ इंडिया मैगजीन के लिए कार्य करना शुरू किया जो 1970 तक चला। इसमें इनकी श्वेत-श्याम छायाचित्र हुए। उनके कई फोटोग्राफ टाईम, लाईफ, दि ब्लेक स्टार तथा कई अन्य अन्तरराष्ट्रीय प्रकाशनों में फोटो-कहानियों के रूप में प्रकाशित हुए।
व्यारवाला के कार्य एवं जीवन के बारे में सबीना गडिहोक ने अपनी पुस्तक इन्डिया इन फोकस -केमरा क्रोनिकल ऑफ होमेएव्यारवाला में बेहतर ढंग से उल्लेख किया है। फोटोग्राफरों से किए गए साक्षात्कारों के आधार पर उनकी फोटो-आत्मकथा तैयार की गई है।
व्यारवाला का पसन्दीदा विषय जवाहर लाल नेहरू थे। वे फोटो ग्राफर के लिए उन्हें उपयुक्त छवि मानती थीं। वह ब्लेक एण्ड वाईट माध्यम को वरियता देती थी।
फोटोग्राफी में वह फोटो-पत्रकारों के बीच उपयोग करती थी। दिन की रौशनी के दौरान, लो-एंगल शॉट तथा छवियों के विस्तार के लिए बैक लाईट का उपयोग करती थी, जिससे विषय-वस्तु की गहराई तथा ऊचाई को दिर्शाया जा सके। उनके कई फोटोग्राफ "डालडा 13" के अंतर्गत प्रकाशित किए गए थे। इस नाम के पीछे जो उन्होंने कारण बतायें उनमें 1913 में उनका जन्म होना, 13वें में उनका विवाह होना तथा उनकी कार की नम्बर प्लेट डी एल डी 13 होना गिनाया ।
1970 में, अपने पति के निधन के बाद उन्होंने फोटोग्राफी छोड़ने का निश्चय कर लिया।
पिछले 40 वर्षों में एक भी फोटोग्राफ न लेने के बावजूद होमई व्याखाला सदैव एक महान विभूति बनी रही तथा उनके द्वारा ली गई तस्वीरें नेशनल गैलरी ऑफ माडर्न आर्ट ने पिछले वर्ष मार्च में प्रदर्शित की। उन्हें पदम विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया। उनके जीवन से ऊंची इच्छा रखने वालों को प्रेरणा मिलती रहेगी।
| सिगरेट पीते हुए जवाहरलाल नेहरू और साथ ही भारत में तत्कालीन ब्रिटिश उच्चायुक्त की पत्नी सुश्री सिमोन की मदद करते हुए एक तस्वीर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री की एक अलग ही छवि दर्शाती है। यह तस्वीर भारत की पहली तथा लंबे समय तक भारत की एकमात्र महिला फोटो पत्रकार द्वारा हो गई। अपनी तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने परिवर्तशील राष्ट्र के सामाजिक तथा राजनैतिक जीवन को दर्शाया। इनमें नेहरू से माउन्टवेटन व दलाई लामा का भारत में प्रवेश, उनकी ली गई तस्वीरे विशेष निशान छोड़ गए- वे स्वतंत्र भारत से पूर्व तथा इसके पश्चात की कहानी बताते हैं। जहां नेताओं ने देश के बंटवारे के लिए वोट किया उसकी बैठक समेत प्रमुख अवसरों परे ली गए उनकी तस्वीरे भारतीय इतिहास पर पड़े निर्णायक प्रभाव की झलक दर्शाती है। उन्होंने सोलह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को लाल किले पर पहली बार फहराये गये झंडे, भारत से लॉर्ड माऊन्टबेन्टन के प्रस्थान , महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री की अंतिम यात्रा के भी छायाचित्र लिए। उनके कार्य में चार दशकों का फैलाव जिसमें स्वतंत्रता की ललक के साथ-साथ नए राष्ट्र में नहीं निभाये गए वायदों के प्रति हताशा भी दिखाई देती है। व्यारवाला का जन्म तेरह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ तेरह को नवसारी गुजरात में मध्य वर्ग पारसी परिवार में होमई हाथीराम के रूप में हुआ। उनके पिता पारसी उर्दू थियेटर में अभिनेता थे। उनका पालन पोषण मुंबई में हुआ तथा उन्होंने पहले-पहल फोटोग्राफी अपने मित्र मानेकशां व्यारवाला से तथा बाद में जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से सीखी। उनकी पहली तस्वीर बोम्बे क्रोनिकल में प्रकाशित हुई जिसमें उन्हें प्रत्येक छायाचित्र के लिए एक रूपया प्राप्त हुआ। वह अपने पति के साथ दिल्ली आ गई और ब्रिटिश सूचना सेवाओं के कर्मचारी के रूप में स्वतंत्रता के दौरान के फोटो लिए। दिूतीय विश्व युद्ध के हमले के बाद, उन्होंने इलेस्ट्रेटिड वीकली ऑफ इंडिया मैगजीन के लिए कार्य करना शुरू किया जो एक हज़ार नौ सौ सत्तर तक चला। इसमें इनकी श्वेत-श्याम छायाचित्र हुए। उनके कई फोटोग्राफ टाईम, लाईफ, दि ब्लेक स्टार तथा कई अन्य अन्तरराष्ट्रीय प्रकाशनों में फोटो-कहानियों के रूप में प्रकाशित हुए। व्यारवाला के कार्य एवं जीवन के बारे में सबीना गडिहोक ने अपनी पुस्तक इन्डिया इन फोकस -केमरा क्रोनिकल ऑफ होमेएव्यारवाला में बेहतर ढंग से उल्लेख किया है। फोटोग्राफरों से किए गए साक्षात्कारों के आधार पर उनकी फोटो-आत्मकथा तैयार की गई है। व्यारवाला का पसन्दीदा विषय जवाहर लाल नेहरू थे। वे फोटो ग्राफर के लिए उन्हें उपयुक्त छवि मानती थीं। वह ब्लेक एण्ड वाईट माध्यम को वरियता देती थी। फोटोग्राफी में वह फोटो-पत्रकारों के बीच उपयोग करती थी। दिन की रौशनी के दौरान, लो-एंगल शॉट तथा छवियों के विस्तार के लिए बैक लाईट का उपयोग करती थी, जिससे विषय-वस्तु की गहराई तथा ऊचाई को दिर्शाया जा सके। उनके कई फोटोग्राफ "डालडा तेरह" के अंतर्गत प्रकाशित किए गए थे। इस नाम के पीछे जो उन्होंने कारण बतायें उनमें एक हज़ार नौ सौ तेरह में उनका जन्म होना, तेरहवें में उनका विवाह होना तथा उनकी कार की नम्बर प्लेट डी एल डी तेरह होना गिनाया । एक हज़ार नौ सौ सत्तर में, अपने पति के निधन के बाद उन्होंने फोटोग्राफी छोड़ने का निश्चय कर लिया। पिछले चालीस वर्षों में एक भी फोटोग्राफ न लेने के बावजूद होमई व्याखाला सदैव एक महान विभूति बनी रही तथा उनके द्वारा ली गई तस्वीरें नेशनल गैलरी ऑफ माडर्न आर्ट ने पिछले वर्ष मार्च में प्रदर्शित की। उन्हें पदम विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया। उनके जीवन से ऊंची इच्छा रखने वालों को प्रेरणा मिलती रहेगी। |
कृष्ण चरित्र
त्यौं ही 'हरिचंद' सुधि भूलत न क्यौं हूँ तेरो लाँबो केस रैन- दिन छहरि
गड़ि गड़ि उठत कटीले कुच-कोर तेरी सारी सो लहरदार लहरि सालि सालि जात आधे आधे नैन-बान तेरे
घूँघट की फहरानि फहरि फहरि उठै ॥३१॥ सवैया
हमैं नीति सों काज नहीं कछु है अपुनो धन आपु जुगाए रहो। हमरी कुल- कानि गई तो कहा तुम आपनी को तो छिपाये रहो ॥ हमसों सब दूरि रहो 'हरिचंद' न संग मैं मोहिं लगाए रहो । हम तो बिरहा मैं सदा ही दहें तुम आपुनो अंग बचाए रहो ॥ ३२॥
जयति जन्हु-तनया सकल लोक की पावनी । सकल अघ-ओघ हर-नाम उच्चार मैं
पतित-जन - उद्धरनि
कलि-काल कठिन गज गर्व्व
छहरि उठे ।
लहरि उठै ।
दुक्ख-विद्रावनी ।
सिंहिनी गिरि गुहागत
खवित करन
बिधि-कमंडलु बिमल रमनि मन-भावनी ।। चित्रगुप्तादि के पत्रगत कर्म्म बिधि
नाद - श्रावनी ।
उलटि निज भक्त आनंद सरसावनी । 'हरिचंद' भागीरथी त्रिपथगा
जयति गंगे कृष्ण-चरन गुन-गावनी ॥ ३३॥
श्री गंगे पतित जानि मोहिं तारौ ।
जो जस अब लौं मिल्यौ तुम्हें नहिं सो जग में बिस्तारौ ॥ | कृष्ण चरित्र त्यौं ही 'हरिचंद' सुधि भूलत न क्यौं हूँ तेरो लाँबो केस रैन- दिन छहरि गड़ि गड़ि उठत कटीले कुच-कोर तेरी सारी सो लहरदार लहरि सालि सालि जात आधे आधे नैन-बान तेरे घूँघट की फहरानि फहरि फहरि उठै ॥इकतीस॥ सवैया हमैं नीति सों काज नहीं कछु है अपुनो धन आपु जुगाए रहो। हमरी कुल- कानि गई तो कहा तुम आपनी को तो छिपाये रहो ॥ हमसों सब दूरि रहो 'हरिचंद' न संग मैं मोहिं लगाए रहो । हम तो बिरहा मैं सदा ही दहें तुम आपुनो अंग बचाए रहो ॥ बत्तीस॥ जयति जन्हु-तनया सकल लोक की पावनी । सकल अघ-ओघ हर-नाम उच्चार मैं पतित-जन - उद्धरनि कलि-काल कठिन गज गर्व्व छहरि उठे । लहरि उठै । दुक्ख-विद्रावनी । सिंहिनी गिरि गुहागत खवित करन बिधि-कमंडलु बिमल रमनि मन-भावनी ।। चित्रगुप्तादि के पत्रगत कर्म्म बिधि नाद - श्रावनी । उलटि निज भक्त आनंद सरसावनी । 'हरिचंद' भागीरथी त्रिपथगा जयति गंगे कृष्ण-चरन गुन-गावनी ॥ तैंतीस॥ श्री गंगे पतित जानि मोहिं तारौ । जो जस अब लौं मिल्यौ तुम्हें नहिं सो जग में बिस्तारौ ॥ |
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग को डर है कि खराब फॉर्म से जूझ रहे डेविड वार्नर पर एशेज सीरीज से बाहर होने का खतरा है.
दिल्लीः इंदौर टेस्ट ने दिलचस्प मोड़ ले लिया है. उतार-चढ़ाव का खेल यहां जारी है. कभी भारत का पलड़ा भारी तो कभी ऑस्ट्रेलिया हावी. लेकिन इस बीच रिकी पॉन्टिंग परेशान हैं. उन्हें एक बड़ा डर सता रहा है.ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग को डर है कि खराब फॉर्म से जूझ रहे डेविड वार्नर पर एशेज सीरीज से बाहर होने का खतरा है. उन्हें डर है कि लंबे समय से बल्ले से नाकाम रहने के बाद उनके टेस्ट करियर का दुखद अंत हो सकता है.
पॉन्टिंग को लगता है कि वार्नर इंग्लैंड के दौरे पर जाने वाली एशेज टीम में जगह पाने के लिए संघर्ष करेंगे और उनका टेस्ट करियर शायद उनकी शर्तों पर खत्म नहीं होगा.
वार्नर का भारत दौरे पर प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा, जहां उन्होंने कोहनी में फ्रेक्चर के कारण स्वदेश लौटने से पहले तीन पारियों में एक, 10 और 15 रन बनाए. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 2019 में पिछले इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ 9.5 के औसत से रन बनाए थे.
पॉन्टिंग ने आरएसएन क्रिकेट से कहा अब यह डेविड वॉर्नर पर निर्भर करेगा. एक बल्लेबाज के रूप में आप सिर्फ रन ही बना सकते हैं और अगर आप रन नहीं बनाते तो मुश्किल स्थिति में फंस जाते हैं. पॉन्टिंगने कहा, यह हम सभी के साथ हुआ है, यह मेरे साथ हुआ है. जब आप एक निश्चित उम्र तक पहुंच जाते हैं और ऐसा लगता है कि आपका फॉर्म थोड़ा सा गिर रहा है, तो आलोचक हावी हो जाते हैं और फिर ज्यादा समय नहीं लगता.
पॉन्टिंग को लगता है कि वार्नर को पिछली गर्मियों में मेलबर्न में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट में दोहरा शतक बनाने के बाद टेस्ट क्रिकेट छोड़ देना चाहिए था जो उनका 100वां मैच भी था या फिर सिडनी में अपने घरेलू मैदान पर अगले मैच के बाद उन्हें ऐसा करना चाहिए था.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने कहा, वह जिस तरह चाहता था उस तरह खत्म करने के लिए मेरे हिसाब से शायद सिडनी टेस्ट के बाद उसे ऐसा करना चाहिए था. उसने मेलबर्न में 200 रन बनाए, अपना 100वां टेस्ट खेला, अपना 101वां टेस्ट सिडनी में खेला जो उसके घरेलू मैदान पर था और शायद वहीं खत्म कर देता.
| ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग को डर है कि खराब फॉर्म से जूझ रहे डेविड वार्नर पर एशेज सीरीज से बाहर होने का खतरा है. दिल्लीः इंदौर टेस्ट ने दिलचस्प मोड़ ले लिया है. उतार-चढ़ाव का खेल यहां जारी है. कभी भारत का पलड़ा भारी तो कभी ऑस्ट्रेलिया हावी. लेकिन इस बीच रिकी पॉन्टिंग परेशान हैं. उन्हें एक बड़ा डर सता रहा है.ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग को डर है कि खराब फॉर्म से जूझ रहे डेविड वार्नर पर एशेज सीरीज से बाहर होने का खतरा है. उन्हें डर है कि लंबे समय से बल्ले से नाकाम रहने के बाद उनके टेस्ट करियर का दुखद अंत हो सकता है. पॉन्टिंग को लगता है कि वार्नर इंग्लैंड के दौरे पर जाने वाली एशेज टीम में जगह पाने के लिए संघर्ष करेंगे और उनका टेस्ट करियर शायद उनकी शर्तों पर खत्म नहीं होगा. वार्नर का भारत दौरे पर प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा, जहां उन्होंने कोहनी में फ्रेक्चर के कारण स्वदेश लौटने से पहले तीन पारियों में एक, दस और पंद्रह रन बनाए. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने दो हज़ार उन्नीस में पिछले इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ नौ.पाँच के औसत से रन बनाए थे. पॉन्टिंग ने आरएसएन क्रिकेट से कहा अब यह डेविड वॉर्नर पर निर्भर करेगा. एक बल्लेबाज के रूप में आप सिर्फ रन ही बना सकते हैं और अगर आप रन नहीं बनाते तो मुश्किल स्थिति में फंस जाते हैं. पॉन्टिंगने कहा, यह हम सभी के साथ हुआ है, यह मेरे साथ हुआ है. जब आप एक निश्चित उम्र तक पहुंच जाते हैं और ऐसा लगता है कि आपका फॉर्म थोड़ा सा गिर रहा है, तो आलोचक हावी हो जाते हैं और फिर ज्यादा समय नहीं लगता. पॉन्टिंग को लगता है कि वार्नर को पिछली गर्मियों में मेलबर्न में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट में दोहरा शतक बनाने के बाद टेस्ट क्रिकेट छोड़ देना चाहिए था जो उनका एक सौवां मैच भी था या फिर सिडनी में अपने घरेलू मैदान पर अगले मैच के बाद उन्हें ऐसा करना चाहिए था. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने कहा, वह जिस तरह चाहता था उस तरह खत्म करने के लिए मेरे हिसाब से शायद सिडनी टेस्ट के बाद उसे ऐसा करना चाहिए था. उसने मेलबर्न में दो सौ रन बनाए, अपना एक सौवां टेस्ट खेला, अपना एक सौ एकवां टेस्ट सिडनी में खेला जो उसके घरेलू मैदान पर था और शायद वहीं खत्म कर देता. |
- आंवला का मुरब्बा प्रतिदिन खायें।
- 250 एमएल पानी में 6 ग्राम सूखा आँवला रात को भिगो दें। प्रातः इस पानी को छानकर आँखें धोयें। इससे आँखों के सब रोग दूर होते हैं और आँखों की रोशनी बढ़ती है।
- नेत्र-ज्योतिवर्धक, एक काँच का गिलास पानी से भरकर प्रतिदिन रात को उसमें एक चम्मच पिसा हुआ आंवला डाल दें। सुबह बिना हिलाये आधा पानी छानकर उससे आँखों को धोयें। बचा हुआ आधा पानी आँवले सहित पियें। इस तरह लगातार चार माह करने से नेत्र ज्योति बढ़ जायेगी, चश्मा भी हट सकता है।
- त्रिफला, हर्र, बहेड़ा और आंवला, रात को पानी में मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह इस पानी से आँखे धोने से आँखों की आम बीमारियाँ दूर होती है।
- आँखों के आगे अँधेरा छाना, सिर में जलन, बार-बार पेशाब आता हो, तो आंवलो का रस तीन चम्मच, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम चार दिन तक पीने से लाभ होता है।
- गर्मियों में चक्कर आते हों, जी घबराता हो तो आंवला का शर्बत पियें। दिल धडक़ता हो तो आंवला का मुरब्बा खायें।
- दिल की बेचैनी उच्च रक्तचाप, आंवला में सोडियम को कम करने की क्षमता होती है। इसलिए रक्तचाप के रोगी के लिए आंवला का उपयोग लाभदायक है।
- आंवला रक्त बढ़ाने और साफ करने में सहायक है तथा इससे शरीर को आवश्यक रेशा मिलता है।
- आधा भोजन करने के बाद हरे आंवले का रस 35 ग्राम पानी में मिलाकर पी लें, फिर बाकि बचा आधा भोजन करें। इस प्रकार 21 दिन सेवन करने से हृदय तथा मस्तिष्क सम्बन्धी दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है और स्मरण-शक्ति बढ़ती है।
- एक चम्मच आंवला का पाउडर प्रतिदिन लेने से हृदय रोग होने से बचाव होता है।
- कच्चे हरे आंवला का रस चौथाई कप, आधा कप पानी, स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीते रहने से कोलेस्ट्रॉल कम होकर सामान्य हो जाता है, जिससे हृदय रोग से बचाव होता है।
- हृदयरोग, दो चम्मच पिसा हुआ ऑवला दूध के साथ लेने से हृदय के आम रोग दूर हो जाते हैं।
- उच्च रक्तचाप, रक्त की गर्मी, ऑवले का मुरब्बा प्रतिदिन प्रातः खाने से उच्च रक्तचाप ठीक हो जाता है।
- आंवला खाने वालों में संक्रमण का प्रभाव कम होता है। यह कब्ज़ को दूर करता है।
- कब्ज़ हो तो रात को एक चम्मच पिसा हुआ ऑवला पानी या दूध से लेने से कब्ज़ नहीं रहती। आंते तथा पेट साफ होता है।
- यकृत में सूजन, पीलिया, आंवला का रस चौथाई कप एक गिलास गन्ने के रस में मिलाकर पियें। इस प्रकार प्रतिदिन तीन बार पीते रहने से पीलिया ठीक हो जाता है।
- 50 ग्राम आँवला , 50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम इलायची सबको मिलाकर पीसकर एक-एक चम्मच तीन बार गाय के दूध के साथ लेने से पेट साफ रहता है।
- दस्त में सूखा आँवला पिसा हुआ और काला नमक समान मात्रा में मिलाकर पानी के साथ आधा चम्मच की फंकी लेने से दस्त बन्द हो जाते हैं।
- ताजा आंवलो का रस चार चम्मच पानी में मिलाकर पिलाने से भी लाभ होता है। सूखा आँवला भिगोकर इसका पानी भी पिला सकते हैं।
- पिसा हुआ आंवला, 10 ग्राम़ पिसी हुई छोटी हरड़ 5 ग्राम, मिला लें। इसकी चौथाई चम्मच प्रतिदिन दो बार पानी के साथ लें। हर प्रकार के दस्तों में लाभ होगा। पाचनशक्ति बढ़ेगी।
- पेचिश, दस्तों में रक्त आता हो तो एक बढ़ा चम्मच पिसा हुआ आंवला एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन तीन बार दस दिन तक सेवन करें।
- प्रतिदिन खाली पेट 2 नग ऑवले का मुरब्बा खाने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर हो जाती है। स्मरण-शक्ति बढ़ाने के लिए प्रतिदिन प्रातः खाली पेट आँवले का मुरब्बा खायें।
- बच्चों को पढ़ाया हुआ याद नहीं रहता, वृध्दावस्था में जिनकी स्मरण-शक्ति कमजोर हो गयी हो, उनके लिए आंवला के मुरब्बे का सेवन लाभकारी है।
वृध्दावस्था में आन्तरिक शक्ति बढ़ाने वाली औषधियों में इस्तमाल किया जाने वाला मुख्य अंश आँवला ही होता है। क्योंकि आंवला में एक रसायन सकसीनिक अम्ल होता है जो बुढ़ापे में होने वाली अनेक शारीरिक समस्याओ को कम करने में सहायक है।
| - आंवला का मुरब्बा प्रतिदिन खायें। - दो सौ पचास एमएल पानी में छः ग्राम सूखा आँवला रात को भिगो दें। प्रातः इस पानी को छानकर आँखें धोयें। इससे आँखों के सब रोग दूर होते हैं और आँखों की रोशनी बढ़ती है। - नेत्र-ज्योतिवर्धक, एक काँच का गिलास पानी से भरकर प्रतिदिन रात को उसमें एक चम्मच पिसा हुआ आंवला डाल दें। सुबह बिना हिलाये आधा पानी छानकर उससे आँखों को धोयें। बचा हुआ आधा पानी आँवले सहित पियें। इस तरह लगातार चार माह करने से नेत्र ज्योति बढ़ जायेगी, चश्मा भी हट सकता है। - त्रिफला, हर्र, बहेड़ा और आंवला, रात को पानी में मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह इस पानी से आँखे धोने से आँखों की आम बीमारियाँ दूर होती है। - आँखों के आगे अँधेरा छाना, सिर में जलन, बार-बार पेशाब आता हो, तो आंवलो का रस तीन चम्मच, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम चार दिन तक पीने से लाभ होता है। - गर्मियों में चक्कर आते हों, जी घबराता हो तो आंवला का शर्बत पियें। दिल धडक़ता हो तो आंवला का मुरब्बा खायें। - दिल की बेचैनी उच्च रक्तचाप, आंवला में सोडियम को कम करने की क्षमता होती है। इसलिए रक्तचाप के रोगी के लिए आंवला का उपयोग लाभदायक है। - आंवला रक्त बढ़ाने और साफ करने में सहायक है तथा इससे शरीर को आवश्यक रेशा मिलता है। - आधा भोजन करने के बाद हरे आंवले का रस पैंतीस ग्राम पानी में मिलाकर पी लें, फिर बाकि बचा आधा भोजन करें। इस प्रकार इक्कीस दिन सेवन करने से हृदय तथा मस्तिष्क सम्बन्धी दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है और स्मरण-शक्ति बढ़ती है। - एक चम्मच आंवला का पाउडर प्रतिदिन लेने से हृदय रोग होने से बचाव होता है। - कच्चे हरे आंवला का रस चौथाई कप, आधा कप पानी, स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीते रहने से कोलेस्ट्रॉल कम होकर सामान्य हो जाता है, जिससे हृदय रोग से बचाव होता है। - हृदयरोग, दो चम्मच पिसा हुआ ऑवला दूध के साथ लेने से हृदय के आम रोग दूर हो जाते हैं। - उच्च रक्तचाप, रक्त की गर्मी, ऑवले का मुरब्बा प्रतिदिन प्रातः खाने से उच्च रक्तचाप ठीक हो जाता है। - आंवला खाने वालों में संक्रमण का प्रभाव कम होता है। यह कब्ज़ को दूर करता है। - कब्ज़ हो तो रात को एक चम्मच पिसा हुआ ऑवला पानी या दूध से लेने से कब्ज़ नहीं रहती। आंते तथा पेट साफ होता है। - यकृत में सूजन, पीलिया, आंवला का रस चौथाई कप एक गिलास गन्ने के रस में मिलाकर पियें। इस प्रकार प्रतिदिन तीन बार पीते रहने से पीलिया ठीक हो जाता है। - पचास ग्राम आँवला , पचास ग्राम जीरा, पच्चीस ग्राम इलायची सबको मिलाकर पीसकर एक-एक चम्मच तीन बार गाय के दूध के साथ लेने से पेट साफ रहता है। - दस्त में सूखा आँवला पिसा हुआ और काला नमक समान मात्रा में मिलाकर पानी के साथ आधा चम्मच की फंकी लेने से दस्त बन्द हो जाते हैं। - ताजा आंवलो का रस चार चम्मच पानी में मिलाकर पिलाने से भी लाभ होता है। सूखा आँवला भिगोकर इसका पानी भी पिला सकते हैं। - पिसा हुआ आंवला, दस ग्राम़ पिसी हुई छोटी हरड़ पाँच ग्राम, मिला लें। इसकी चौथाई चम्मच प्रतिदिन दो बार पानी के साथ लें। हर प्रकार के दस्तों में लाभ होगा। पाचनशक्ति बढ़ेगी। - पेचिश, दस्तों में रक्त आता हो तो एक बढ़ा चम्मच पिसा हुआ आंवला एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन तीन बार दस दिन तक सेवन करें। - प्रतिदिन खाली पेट दो नग ऑवले का मुरब्बा खाने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर हो जाती है। स्मरण-शक्ति बढ़ाने के लिए प्रतिदिन प्रातः खाली पेट आँवले का मुरब्बा खायें। - बच्चों को पढ़ाया हुआ याद नहीं रहता, वृध्दावस्था में जिनकी स्मरण-शक्ति कमजोर हो गयी हो, उनके लिए आंवला के मुरब्बे का सेवन लाभकारी है। वृध्दावस्था में आन्तरिक शक्ति बढ़ाने वाली औषधियों में इस्तमाल किया जाने वाला मुख्य अंश आँवला ही होता है। क्योंकि आंवला में एक रसायन सकसीनिक अम्ल होता है जो बुढ़ापे में होने वाली अनेक शारीरिक समस्याओ को कम करने में सहायक है। |
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