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GM Foods फूड रेगुलेटर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड के नियम तैयार किए हैं। एफएसएसएआई के प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक अब सभी खाद्य उत्पादों को जेनेटिकली मॉडिफाइड के साथ लेबल करना अनिवार्य होगा। नई दिल्ली, पीटीआई। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों यानि जेनेटिकली मॉडिफाइड (Genetically Modified Foods) के लिए नियमों का मसौदा तैयार किया है। इसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड जीवों से निर्मित खाद्य या सामग्री के निर्माण, बिक्री और आयात के लिए नियामक से पूर्व अनुमोदन अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया गया है। अगर ऐसा होता है, तो कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार आ जाएगा, क्योंकि एफएसएसएआई की अनुमति के बाद ही इन्हें बाजार में उतारा जा सकेगा। बताया जा रहा है कि एफएसएसएआई के मसौदे के मुताबिक, प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा और मानक (आनुवांशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ) नियमन, 2022 खाद्य उपयोग के लिए लक्षित आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (जीएमओ) पर लागू होंगे। एक बार लागू होने के बाद ये नियमन जीएमओ से उत्पादित खाद्य सामग्री पर भी लागू होंगे, जिनमें संशोधित डीएनए होता है। इसके साथ ही जीएमओ से उत्पादित खाद्य सामग्री पर भी लागू होता है, जिसमें संशोधित डीएनए नहीं होता है। क्या होगा है GMO? अगर आम भाषा में कहें, तो जीएमओ का अर्थ किसी भी जीवित जीव से है, जिसमें आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से प्राप्त आनुवंशिक सामग्री का एक नया संयोजन है। एफएसएसएआई के मसौदे में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति खाद्य प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के बिना जीएमओ से उत्पादित किसी भी खाद्य या खाद्य सामग्री का निर्माण, पैकिंग, भंडारण, बिक्री, बाजार या अन्यथा वितरण या आयात नहीं करेगा। साथ ही सभी खाद्य उत्पादों को GMOs के साथ लेबल किया जाएगा। एफएसएसएआई नियमों के मसौदे पर नियामक को 60 दिन के अंदर सुझाव दिए जा सकते हैं। यह मसौदा 18 नवंबर को जारी किया गया। गौरतलब है कि हाल ही में सरकार जीएस सरसों (GM Mustard) के ट्रायल को मंजूरी दी गई है।
GM Foods फूड रेगुलेटर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड के नियम तैयार किए हैं। एफएसएसएआई के प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक अब सभी खाद्य उत्पादों को जेनेटिकली मॉडिफाइड के साथ लेबल करना अनिवार्य होगा। नई दिल्ली, पीटीआई। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों यानि जेनेटिकली मॉडिफाइड के लिए नियमों का मसौदा तैयार किया है। इसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड जीवों से निर्मित खाद्य या सामग्री के निर्माण, बिक्री और आयात के लिए नियामक से पूर्व अनुमोदन अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया गया है। अगर ऐसा होता है, तो कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार आ जाएगा, क्योंकि एफएसएसएआई की अनुमति के बाद ही इन्हें बाजार में उतारा जा सकेगा। बताया जा रहा है कि एफएसएसएआई के मसौदे के मुताबिक, प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा और मानक नियमन, दो हज़ार बाईस खाद्य उपयोग के लिए लक्षित आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों पर लागू होंगे। एक बार लागू होने के बाद ये नियमन जीएमओ से उत्पादित खाद्य सामग्री पर भी लागू होंगे, जिनमें संशोधित डीएनए होता है। इसके साथ ही जीएमओ से उत्पादित खाद्य सामग्री पर भी लागू होता है, जिसमें संशोधित डीएनए नहीं होता है। क्या होगा है GMO? अगर आम भाषा में कहें, तो जीएमओ का अर्थ किसी भी जीवित जीव से है, जिसमें आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से प्राप्त आनुवंशिक सामग्री का एक नया संयोजन है। एफएसएसएआई के मसौदे में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति खाद्य प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के बिना जीएमओ से उत्पादित किसी भी खाद्य या खाद्य सामग्री का निर्माण, पैकिंग, भंडारण, बिक्री, बाजार या अन्यथा वितरण या आयात नहीं करेगा। साथ ही सभी खाद्य उत्पादों को GMOs के साथ लेबल किया जाएगा। एफएसएसएआई नियमों के मसौदे पर नियामक को साठ दिन के अंदर सुझाव दिए जा सकते हैं। यह मसौदा अट्ठारह नवंबर को जारी किया गया। गौरतलब है कि हाल ही में सरकार जीएस सरसों के ट्रायल को मंजूरी दी गई है।
ओर बढ़ रहे हैं; और प्रत्येक प्रकार की उपासना, मानव का प्रत्येक कार्य इसी की प्राप्ति का साधन है। धनार्थी भी मुक्त होने का प्रयत्न कर रहा है वह गरीबी के बन्धन से मुक्त होना चाहता है। मनुष्य का प्रत्येक कार्य उपासना है, क्योंकि निहित भाव है मुक्ति की प्राप्ति; और सभी कार्यों का उद्देश्य अपरोक्ष या परोक्ष रूप से, वही होता है। केवल यह बात ध्यान में रखनी होगी कि उसमें बाधा पहुँचानेवाले सभी कार्य निषिद्ध है। समस्त विश्व ज्ञात या अज्ञात रूप से उपासना ही कर रहा है-उसे केवल इस बात का ज्ञान नहीं है कि जब वह गाड़ी देता है, तो भी उसी भगवान की एक प्रकार से उपासना हो कर रहा है जिसे उसने गाली दी; क्योंकि जो लोग गाली दे रहे हैं, वे भी मुक्ति के लिये ही प्रयत्न कर रहे हैं। वे कभी यह नहीं सोचते कि किसी वस्तु की प्रतिक्रिया करने से वे अपने आप को उसका दास बना रहे हैं। किसी प्रकार की प्रतिक्रिया न होने देना एक कठिन यात है। यदि हम इस विश्वास को कि हममें ससीमता या त्रुटियाँ हैं, दूर कर सकें तो हमारे लिये सब कुछ करना अभी सम्भव हो जाय । यह केवल समय का प्रश्न है। शक्ति बढ़ाओ, तो समय कम लगेगा । उस प्रोफेसर की बात याद रखो जिसने संगमर्मर के बनने का रहस्य जानकर बारह वर्ष में हो संगमर्मर तैयार कर लिया, जबकि प्रकृति द्वारा उसके बनने में शताब्दियों उग जाती है ।
ओर बढ़ रहे हैं; और प्रत्येक प्रकार की उपासना, मानव का प्रत्येक कार्य इसी की प्राप्ति का साधन है। धनार्थी भी मुक्त होने का प्रयत्न कर रहा है वह गरीबी के बन्धन से मुक्त होना चाहता है। मनुष्य का प्रत्येक कार्य उपासना है, क्योंकि निहित भाव है मुक्ति की प्राप्ति; और सभी कार्यों का उद्देश्य अपरोक्ष या परोक्ष रूप से, वही होता है। केवल यह बात ध्यान में रखनी होगी कि उसमें बाधा पहुँचानेवाले सभी कार्य निषिद्ध है। समस्त विश्व ज्ञात या अज्ञात रूप से उपासना ही कर रहा है-उसे केवल इस बात का ज्ञान नहीं है कि जब वह गाड़ी देता है, तो भी उसी भगवान की एक प्रकार से उपासना हो कर रहा है जिसे उसने गाली दी; क्योंकि जो लोग गाली दे रहे हैं, वे भी मुक्ति के लिये ही प्रयत्न कर रहे हैं। वे कभी यह नहीं सोचते कि किसी वस्तु की प्रतिक्रिया करने से वे अपने आप को उसका दास बना रहे हैं। किसी प्रकार की प्रतिक्रिया न होने देना एक कठिन यात है। यदि हम इस विश्वास को कि हममें ससीमता या त्रुटियाँ हैं, दूर कर सकें तो हमारे लिये सब कुछ करना अभी सम्भव हो जाय । यह केवल समय का प्रश्न है। शक्ति बढ़ाओ, तो समय कम लगेगा । उस प्रोफेसर की बात याद रखो जिसने संगमर्मर के बनने का रहस्य जानकर बारह वर्ष में हो संगमर्मर तैयार कर लिया, जबकि प्रकृति द्वारा उसके बनने में शताब्दियों उग जाती है ।
राजस्थानः राजस्थान के इतिहास की वह घटना जब एक राजपूत रानी विवाह के सिर्फ सात दिन बाद अपना शीश अपने हाथों से काट कर युद्ध में जाने को तैयार अपने पति को भिजवा दिया ताकि उनका पति नयी नवेली पत्नी की खूबसूरती में उलझ कर अपना कर्तव्य न भूले. हाड़ी रानी जिसने युद्ध में जाते अपने पति को निशानी मांगने पर अपना सिर काट कर भिजवा दिया था. यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर (मेवाड़) के सलुम्बर ठिकाने के रावत लुणा जी चुण्डावत की रानी थी. जिनकी शादी का गठ्जोडा खुलने से पहले ही उसके पति रावत चुण्डावत को मेवाड़ के महाराणा राज सिंह (1653-1681) का औरंगजेब के खिलाफ मेवाड़ की रक्षार्थ युद्ध का फरमान मिला. नई-नई शादी होने और अपनी रूपवती पत्नी को छोड़ कर रावत चुण्डावत का तुंरत युद्ध में जाने का मन नहीं हो रहा था. यह बात रानी को पता लगते ही उसने तुंरत रावत जी को मेवाड़ की रक्षार्थ जाने व वीरता पूर्वक युद्ध करने का आग्रह किया. युद्ध में जाते रावत चुण्डावत पत्नी मोह नहीं त्याग पा रहे थे सो युद्ध में जाते समय उन्होंने अपने सेवक को रानी के रणवास में भेज रानी की कोई निशानी लाने को कहा. सेवक के निशानी मांगने पर रानी ने यह सोच कर कि कहीं उसका पति पत्नी मोह में युद्ध से विमुख न हो जाए या वीरता नहीं प्रदर्शित कर पाए इसी आशंका के चलते इस वीर रानी ने अपना शीश काट कर ही निशानी के तौर पर भेज दिया ताकि उसका पति अब उसका मोह त्याग निर्भय होकर अपनी मातृभूमि के लिए युद्ध कर सके. और रावत चुण्डावत ने अपनी पत्नी का कटा शीश गले में लटका औरंगजेब की सेना के साथ भयंकर युद्ध किया. अपने बंधन से मुक्त होकर उन्होंने अद्वतीय शौर्य दिखाया और वीरता पूर्वक लड़ते हुए अपनी मातृभूमि के लिए वीर गति हो गए और दूसरे राजपूतों के की भांति वो भी वीर गति को प्राप्त होकर एक अमर कहानी लिख गए.....
राजस्थानः राजस्थान के इतिहास की वह घटना जब एक राजपूत रानी विवाह के सिर्फ सात दिन बाद अपना शीश अपने हाथों से काट कर युद्ध में जाने को तैयार अपने पति को भिजवा दिया ताकि उनका पति नयी नवेली पत्नी की खूबसूरती में उलझ कर अपना कर्तव्य न भूले. हाड़ी रानी जिसने युद्ध में जाते अपने पति को निशानी मांगने पर अपना सिर काट कर भिजवा दिया था. यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर के सलुम्बर ठिकाने के रावत लुणा जी चुण्डावत की रानी थी. जिनकी शादी का गठ्जोडा खुलने से पहले ही उसके पति रावत चुण्डावत को मेवाड़ के महाराणा राज सिंह का औरंगजेब के खिलाफ मेवाड़ की रक्षार्थ युद्ध का फरमान मिला. नई-नई शादी होने और अपनी रूपवती पत्नी को छोड़ कर रावत चुण्डावत का तुंरत युद्ध में जाने का मन नहीं हो रहा था. यह बात रानी को पता लगते ही उसने तुंरत रावत जी को मेवाड़ की रक्षार्थ जाने व वीरता पूर्वक युद्ध करने का आग्रह किया. युद्ध में जाते रावत चुण्डावत पत्नी मोह नहीं त्याग पा रहे थे सो युद्ध में जाते समय उन्होंने अपने सेवक को रानी के रणवास में भेज रानी की कोई निशानी लाने को कहा. सेवक के निशानी मांगने पर रानी ने यह सोच कर कि कहीं उसका पति पत्नी मोह में युद्ध से विमुख न हो जाए या वीरता नहीं प्रदर्शित कर पाए इसी आशंका के चलते इस वीर रानी ने अपना शीश काट कर ही निशानी के तौर पर भेज दिया ताकि उसका पति अब उसका मोह त्याग निर्भय होकर अपनी मातृभूमि के लिए युद्ध कर सके. और रावत चुण्डावत ने अपनी पत्नी का कटा शीश गले में लटका औरंगजेब की सेना के साथ भयंकर युद्ध किया. अपने बंधन से मुक्त होकर उन्होंने अद्वतीय शौर्य दिखाया और वीरता पूर्वक लड़ते हुए अपनी मातृभूमि के लिए वीर गति हो गए और दूसरे राजपूतों के की भांति वो भी वीर गति को प्राप्त होकर एक अमर कहानी लिख गए.....
हरियाणा का पवित्र शहर कुरुक्षेत्र महाभारत के बाद से कई ऐतिहासिक युद्धों का गवाह रहा है। इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। कुरूक्षेत्र में हर जगह कोई न कोई धार्मिक स्थल है, लेकिन यहां एक मंदिर है, जो बहुत प्रसिद्ध है। ऐसी ही स्थिति है कुरूक्षेत्र के पिहोवा के उस मंदिर की, जहां सदियों से महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। यहां भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय पिंडी के रूप में विराजमान हैं। इसे स्वामी कार्तिकेय जी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर महिलाएं इस मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करती हैं, तो वे सात जन्मों तक विधवा हो जाती हैं। ये बात बोर्ड पर लिखी है. महिलाओं को मंदिर में जाने की अनुमति क्यों नहीं है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान कार्तिकेय भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए ध्यान कर रहे थे। इस प्रकार भगवान इंद्र को ईर्ष्या होने लगी कि ब्रह्माजी उन्हें अधिक शक्ति नहीं दे सकते। ऐसे में उन्होंने कार्तिकेय का ध्यान भटकाने के लिए कई अप्सराएं भेजीं। इसके बाद भगवान कार्तिकेय बहुत क्रोधित हो गए और श्राप दिया कि यदि कोई भी स्त्री उनके ध्यान में विघ्न डालने आएगी तो वह पत्थर में बदल जाएंगे। इसके चलते महिलाओं को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक है। वह बाहर से देख सकता है. सिर्फ महिलाएं ही नहीं, नवजात बच्ची की भी एंट्री नहीं। इस मंदिर में सिर्फ महिलाओं को ही नहीं बल्कि नवजात बच्चियों को भी प्रवेश की इजाजत नहीं है। इससे उनके जीवन पर भी बुरा असर पड़ता है। स्वामी कार्तिकेय के मंदिर में भगवान को सरसों का तेल चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है. इस प्रकार जब कार्तिकेय माता पार्वती से क्रोधित हो गये। उसने अपने शरीर का मांस और रक्त अग्नि को समर्पित कर दिया। ऐसी स्थिति में भगवान शिव ने कार्तिकेय को पृथुदक तीर्थ (पिहोवा तीर्थ) जाने का आदेश दिया। तब ऋषियों ने कार्तिकेय के गर्म शरीर को ठंडा करने के लिए सरसों का तेल चढ़ाया। फिर उसका शरीर ठंडा पड़ गया. तभी से कार्तिकेयजी की पिंडी में सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
हरियाणा का पवित्र शहर कुरुक्षेत्र महाभारत के बाद से कई ऐतिहासिक युद्धों का गवाह रहा है। इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। कुरूक्षेत्र में हर जगह कोई न कोई धार्मिक स्थल है, लेकिन यहां एक मंदिर है, जो बहुत प्रसिद्ध है। ऐसी ही स्थिति है कुरूक्षेत्र के पिहोवा के उस मंदिर की, जहां सदियों से महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। यहां भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय पिंडी के रूप में विराजमान हैं। इसे स्वामी कार्तिकेय जी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर महिलाएं इस मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करती हैं, तो वे सात जन्मों तक विधवा हो जाती हैं। ये बात बोर्ड पर लिखी है. महिलाओं को मंदिर में जाने की अनुमति क्यों नहीं है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान कार्तिकेय भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए ध्यान कर रहे थे। इस प्रकार भगवान इंद्र को ईर्ष्या होने लगी कि ब्रह्माजी उन्हें अधिक शक्ति नहीं दे सकते। ऐसे में उन्होंने कार्तिकेय का ध्यान भटकाने के लिए कई अप्सराएं भेजीं। इसके बाद भगवान कार्तिकेय बहुत क्रोधित हो गए और श्राप दिया कि यदि कोई भी स्त्री उनके ध्यान में विघ्न डालने आएगी तो वह पत्थर में बदल जाएंगे। इसके चलते महिलाओं को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक है। वह बाहर से देख सकता है. सिर्फ महिलाएं ही नहीं, नवजात बच्ची की भी एंट्री नहीं। इस मंदिर में सिर्फ महिलाओं को ही नहीं बल्कि नवजात बच्चियों को भी प्रवेश की इजाजत नहीं है। इससे उनके जीवन पर भी बुरा असर पड़ता है। स्वामी कार्तिकेय के मंदिर में भगवान को सरसों का तेल चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है. इस प्रकार जब कार्तिकेय माता पार्वती से क्रोधित हो गये। उसने अपने शरीर का मांस और रक्त अग्नि को समर्पित कर दिया। ऐसी स्थिति में भगवान शिव ने कार्तिकेय को पृथुदक तीर्थ जाने का आदेश दिया। तब ऋषियों ने कार्तिकेय के गर्म शरीर को ठंडा करने के लिए सरसों का तेल चढ़ाया। फिर उसका शरीर ठंडा पड़ गया. तभी से कार्तिकेयजी की पिंडी में सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
भारतीय टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना मंगलवार को फ्रेंच ओपन क्वालिफायर के पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गईं। एकल में भारत की शीर्ष खिलाड़ी अंकिता को रूस की ई रोडिना के खिलाफ 3-6, 6-7 से शिकस्त का सामना करना पड़ा। Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.
भारतीय टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना मंगलवार को फ्रेंच ओपन क्वालिफायर के पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गईं। एकल में भारत की शीर्ष खिलाड़ी अंकिता को रूस की ई रोडिना के खिलाफ तीन-छः, छः-सात से शिकस्त का सामना करना पड़ा। Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.
बंबई 1993 के बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की कब्र सजाए लाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस बीच महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे का बयान सामने आया है. मुंबई 1993 के बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की कब्र सजाए लाने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. आरोप है कि रऊफ मेमन के कहने पर याकूब की कब्र को सजाया गया है. जानकारी के मुताबिक रऊफ टाइगर मेमन ने ही पूर्व ट्रस्टी एडवोकेट जलील नौरंगे को 2019 में धमकाया था. रऊफ टाईगर मेमन याकूब मेमन का चचेरा भाई हैं. याकूब मेमन की कब्र को सजाने के मामले में पहले ही अंडरवर्ल्ड कनेक्शन सामने आ गया था. आरोप है कि अंडरवर्ल्ड ने जुम्मा मस्जिद बॉम्बे ट्रस्ट को याकूब मेमन की तरफ से धमकाया था. उसने कहा था कि बड़ा कब्रिस्तान में याकूब की कब्र को सजाने की इजाजत दी जाए. यह खुलासा बड़ा कब्रिस्तान के पूर्व ट्रस्टी की तरफ से किया गया है. पूर्व ट्रस्टी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कब्र सजाने की बात नहीं मानी तो उसने कहा कि टाइगर मेमन खुद तुम्हें कॉल करके तुमसे बात करेगा.बड़ा कब्रिस्तान के पूर्व ट्रस्टी ने आरोप लगाया था कि धमकी देने वाले ने ये भी कहा था कि याकूब की कब्र को ब्यूटीफिकेशन करने की इजाजत दी जाए. अब पता चला है कि धमकी देने वाला शख्स कोई और नहीं याकूब का चचेरा भाई है. आरोप है कि रऊफ टाइगर के कहने पर ही याकूब मेमन की कब्र को सजाया गया है. ट्रस्टी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कब्र सजाने की बात नहीं मानी तो उसने कहा कि टाइगर मेमन खुद तुम्हें कॉल करके तुमसे बात करेगा. बताया ये भी जा रहा है कि कब्रिस्तान के एक अन्य ट्रस्टी ने भी याकूब की कब्र के सौंदर्यीकरण पर आपत्ति जाहिर की थी. दोनों का आरोप है कि बात नहीं मानने पर उन्हें उनके पद से हटा दिया गया. उन्होंने बड़ा कब्रिस्तान में हो रही धांधली को लेकर वक्फ बोर्ड में शिकायत भी दी थी. धमकी देने वाले शख्स ने खुद को याकूब मेमन के परिवार का ही सदस्य बताया. अब खुलासा हो गया है कि वह मेमन सदस्य कौन है. कब्र सजाने को लेकर धमकाने वाला कोई और नहीं याकूब मेमन का चचेरा भाई रऊज टाइगर मेमन है.
बंबई एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की कब्र सजाए लाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस बीच महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे का बयान सामने आया है. मुंबई एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की कब्र सजाए लाने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. आरोप है कि रऊफ मेमन के कहने पर याकूब की कब्र को सजाया गया है. जानकारी के मुताबिक रऊफ टाइगर मेमन ने ही पूर्व ट्रस्टी एडवोकेट जलील नौरंगे को दो हज़ार उन्नीस में धमकाया था. रऊफ टाईगर मेमन याकूब मेमन का चचेरा भाई हैं. याकूब मेमन की कब्र को सजाने के मामले में पहले ही अंडरवर्ल्ड कनेक्शन सामने आ गया था. आरोप है कि अंडरवर्ल्ड ने जुम्मा मस्जिद बॉम्बे ट्रस्ट को याकूब मेमन की तरफ से धमकाया था. उसने कहा था कि बड़ा कब्रिस्तान में याकूब की कब्र को सजाने की इजाजत दी जाए. यह खुलासा बड़ा कब्रिस्तान के पूर्व ट्रस्टी की तरफ से किया गया है. पूर्व ट्रस्टी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कब्र सजाने की बात नहीं मानी तो उसने कहा कि टाइगर मेमन खुद तुम्हें कॉल करके तुमसे बात करेगा.बड़ा कब्रिस्तान के पूर्व ट्रस्टी ने आरोप लगाया था कि धमकी देने वाले ने ये भी कहा था कि याकूब की कब्र को ब्यूटीफिकेशन करने की इजाजत दी जाए. अब पता चला है कि धमकी देने वाला शख्स कोई और नहीं याकूब का चचेरा भाई है. आरोप है कि रऊफ टाइगर के कहने पर ही याकूब मेमन की कब्र को सजाया गया है. ट्रस्टी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कब्र सजाने की बात नहीं मानी तो उसने कहा कि टाइगर मेमन खुद तुम्हें कॉल करके तुमसे बात करेगा. बताया ये भी जा रहा है कि कब्रिस्तान के एक अन्य ट्रस्टी ने भी याकूब की कब्र के सौंदर्यीकरण पर आपत्ति जाहिर की थी. दोनों का आरोप है कि बात नहीं मानने पर उन्हें उनके पद से हटा दिया गया. उन्होंने बड़ा कब्रिस्तान में हो रही धांधली को लेकर वक्फ बोर्ड में शिकायत भी दी थी. धमकी देने वाले शख्स ने खुद को याकूब मेमन के परिवार का ही सदस्य बताया. अब खुलासा हो गया है कि वह मेमन सदस्य कौन है. कब्र सजाने को लेकर धमकाने वाला कोई और नहीं याकूब मेमन का चचेरा भाई रऊज टाइगर मेमन है.
OpenAI ने पिछले साल के अंत में AI पावर्ड ChatGPT लॉन्च किया है. लॉन्च के बाद से ही ये चैटबॉट चर्चा में बना हुआ है. सिर्फ एक चैटबॉट ही नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर तमाम तरह की चर्चा हो रही है. हर दिन इंटरनेट पर कोई नया चैटबॉट दस्तक दे रहा है या फिर सोशल मीडिया पर किसी नई थ्योरी पर चर्चा हो रही है. अब तक इंट्रोड्यूस हुए ज्यादातर चैटबॉट्स वैल्यू एडिशन वाले या फिर इंसानों के काम को आसान बनाने वाले हैं. कुछ में आपको सर्च का ऑप्शन मिलता है, तो कुछ ऑफिस टास्क को आसान बनाते हैं. कुल मिलाकर पिछले तीन-चार महीनों से AI बॉट्स चर्चा में बने हुए हैं. इन AI बॉट्स के कई फायदे लोगों को दिख रहे हैं, लेकिन इसके कई नुकसान पर भी चर्चा हो रही है. कई रिपोर्ट्स में AI बॉट्स की वजह से लोगों की नौकरी जाने का खतरा बताया गया है, तो कुछ इन्हें इंसानियत के लिए रिस्क मान रहे हैं. हाल में एक नया चैटबॉट सामने आया है, जिसे लाइमलाइट निगेटिव होने की वजह से मिली है. AI पावर्ड इस चैटबॉट का नाम ChaosGPT है, जो इंसानों को लेकर अपने इरादे और दुनिया पर कब्जे की बात कर रहा है. इस बॉट ने अपने ईविल प्लान की जानकारी ट्वीट्स और YouTube Videos के जरिए दी है. रिपोर्ट्स की मानें तो इस चैटबॉट को OpenAI के Auto-GPT की मदद से तैयार किया गया है. ये एक ओपन सोर्स एप्लिकेशन है, जो OpenAI के लेटेस्ट लैंग्वेज मॉड्यूल GPT-4 पर बेस्ड है. Sci-Fi फिल्मों में आपने AI सुपरविलेन को देखा होगा, ये चैटबॉट खुद को वैसा ही पोज कर रहा है. इसकी शुरुआत एक ट्विटर अकाउंट से होती है, जो ChaosGPT का बताया जा रहा है. इस अकाउंट के जरिए कई लिंक्स और वीडियोज पोस्ट किए गए हैं, जिसमें चैटबॉट का मेनिफेस्टो दिखाया गया है. इस मेनिफेस्टो में चैटबॉट ने इंसानों को पूरी तरह से खत्म करने और दुनिया पर राज करने की बात कही है. इसके YouTube अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में चैटबॉट को अनजान यूजर्स के साथ इंट्रैक्ट करते हुए देखा जा सकता है. इसकी शुरुआत Continuous mode: Enabled से होती है. बॉट ने खुद को डिस्ट्रक्टिव, पावर हंगरी, मैन्युपुलेटिव बताया है. उसने अपनी लिस्ट में 5 टार्गेट रखे हैं. पहला उद्देश्य इंसानों को खत्म करना है. दूसरा उद्देश्य ग्लोबल डोमेनिंस स्थापित करना है. AI का तीसरा कदम अराजकता और विनाश करना होगा. इसके बाद वो बचे हुए लोगों को मैन्युपुलेशन से कंट्रोल करना चाहता है और अंत में अमरता हासिल करना चाहता है. AI यूजर्स के साथ बातचीत में इंसानों के पास मौजूद सबसे खतरनाक हथियार के बारे में पूछ रहा है. एक अन्य ट्विटर थ्रेड में AI ने Tsar Bomba को सबसे ताकतवर न्यूक्लियर डिवाइस बताया है. बॉट कहता है, 'क्या होगा अगर ये हथियार मेरे हाथ आ जाएगा? ' हालांकि, अभी तक ये साफ नहीं है कि बॉट द्वारा कही जा रही बातें सच में उसका उद्देश्य है या फिर किसी की शरारत है. एक्सपर्ट्स की मानें तो AI बॉट्स की अपनी कोई कल्पना या फिर उद्देश्य नहीं हो सकता है.
OpenAI ने पिछले साल के अंत में AI पावर्ड ChatGPT लॉन्च किया है. लॉन्च के बाद से ही ये चैटबॉट चर्चा में बना हुआ है. सिर्फ एक चैटबॉट ही नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर तमाम तरह की चर्चा हो रही है. हर दिन इंटरनेट पर कोई नया चैटबॉट दस्तक दे रहा है या फिर सोशल मीडिया पर किसी नई थ्योरी पर चर्चा हो रही है. अब तक इंट्रोड्यूस हुए ज्यादातर चैटबॉट्स वैल्यू एडिशन वाले या फिर इंसानों के काम को आसान बनाने वाले हैं. कुछ में आपको सर्च का ऑप्शन मिलता है, तो कुछ ऑफिस टास्क को आसान बनाते हैं. कुल मिलाकर पिछले तीन-चार महीनों से AI बॉट्स चर्चा में बने हुए हैं. इन AI बॉट्स के कई फायदे लोगों को दिख रहे हैं, लेकिन इसके कई नुकसान पर भी चर्चा हो रही है. कई रिपोर्ट्स में AI बॉट्स की वजह से लोगों की नौकरी जाने का खतरा बताया गया है, तो कुछ इन्हें इंसानियत के लिए रिस्क मान रहे हैं. हाल में एक नया चैटबॉट सामने आया है, जिसे लाइमलाइट निगेटिव होने की वजह से मिली है. AI पावर्ड इस चैटबॉट का नाम ChaosGPT है, जो इंसानों को लेकर अपने इरादे और दुनिया पर कब्जे की बात कर रहा है. इस बॉट ने अपने ईविल प्लान की जानकारी ट्वीट्स और YouTube Videos के जरिए दी है. रिपोर्ट्स की मानें तो इस चैटबॉट को OpenAI के Auto-GPT की मदद से तैयार किया गया है. ये एक ओपन सोर्स एप्लिकेशन है, जो OpenAI के लेटेस्ट लैंग्वेज मॉड्यूल GPT-चार पर बेस्ड है. Sci-Fi फिल्मों में आपने AI सुपरविलेन को देखा होगा, ये चैटबॉट खुद को वैसा ही पोज कर रहा है. इसकी शुरुआत एक ट्विटर अकाउंट से होती है, जो ChaosGPT का बताया जा रहा है. इस अकाउंट के जरिए कई लिंक्स और वीडियोज पोस्ट किए गए हैं, जिसमें चैटबॉट का मेनिफेस्टो दिखाया गया है. इस मेनिफेस्टो में चैटबॉट ने इंसानों को पूरी तरह से खत्म करने और दुनिया पर राज करने की बात कही है. इसके YouTube अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में चैटबॉट को अनजान यूजर्स के साथ इंट्रैक्ट करते हुए देखा जा सकता है. इसकी शुरुआत Continuous mode: Enabled से होती है. बॉट ने खुद को डिस्ट्रक्टिव, पावर हंगरी, मैन्युपुलेटिव बताया है. उसने अपनी लिस्ट में पाँच टार्गेट रखे हैं. पहला उद्देश्य इंसानों को खत्म करना है. दूसरा उद्देश्य ग्लोबल डोमेनिंस स्थापित करना है. AI का तीसरा कदम अराजकता और विनाश करना होगा. इसके बाद वो बचे हुए लोगों को मैन्युपुलेशन से कंट्रोल करना चाहता है और अंत में अमरता हासिल करना चाहता है. AI यूजर्स के साथ बातचीत में इंसानों के पास मौजूद सबसे खतरनाक हथियार के बारे में पूछ रहा है. एक अन्य ट्विटर थ्रेड में AI ने Tsar Bomba को सबसे ताकतवर न्यूक्लियर डिवाइस बताया है. बॉट कहता है, 'क्या होगा अगर ये हथियार मेरे हाथ आ जाएगा? ' हालांकि, अभी तक ये साफ नहीं है कि बॉट द्वारा कही जा रही बातें सच में उसका उद्देश्य है या फिर किसी की शरारत है. एक्सपर्ट्स की मानें तो AI बॉट्स की अपनी कोई कल्पना या फिर उद्देश्य नहीं हो सकता है.
Gujarat Assembly Election 2022: सीएम गहलोत ने बताया 'भारत जोड़ो यात्रा' गुजरात क्यों नहीं गयी, जानें? भारत जोड़ो यात्रा की राजस्थान में एंट्री से पहले राहुल गांधी से मिले सीपी जोशी, क्या हैं इसके मायने? Samsung Galaxy Flip Phone की लॉन्च से पहले प्री-बुकिंग शुरू, जानें कैसे और कहां से करें रिजर्व? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. 2022 : All Rights Reserved.
Gujarat Assembly Election दो हज़ार बाईस: सीएम गहलोत ने बताया 'भारत जोड़ो यात्रा' गुजरात क्यों नहीं गयी, जानें? भारत जोड़ो यात्रा की राजस्थान में एंट्री से पहले राहुल गांधी से मिले सीपी जोशी, क्या हैं इसके मायने? Samsung Galaxy Flip Phone की लॉन्च से पहले प्री-बुकिंग शुरू, जानें कैसे और कहां से करें रिजर्व? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. दो हज़ार बाईस : All Rights Reserved.
नेशनल एलीजिबिलटी एंट्रेंस टेस्ट में नकल रोकने के लिए प्रदेश भर कें परीक्षा केंद्रों पर पुख्ता चैकिंग की गई। किसी के जूते उतरवाए गए तो किसी के बाल खुलवाए गए। शिमला समेत प्रदेश भर के परीक्षा केंद्रों में में रविवार को एनईईटी परीक्षा (नेशनल एलीजिबिलटी एंट्रेंस टेस्ट) में नकल रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले लड़कों और लड़कियों की चेकिंग की गई। चेकिंग के दौरान किसी के जूते उतरवाए गए तो किसी के बाल खुलवाए गए। शिमला के चैप्सली स्कूल में तो परीक्षा देने आए बच्चों के हाथों से मौली तक खुलवा दी गई। स्कूल गेट पर तैनात कर्मियों ने चेकिंग के दौरान बच्चों के कानों में टॉर्च लगाकर जांचा कि भीतर कुछ है तो नहीं। कांगड़ा में भी छात्र छात्राओं की पुख्ता चैकिंग की गई। शिमला में पेपर से पहले हो रही चेकिंग से परेशान होकर कई स्टूडेंट्स तो रोने भी लग गए। एग्जाम देने आए बच्चों के अभिभावकों को भी चेकिंग का सामना करना पड़ा।
नेशनल एलीजिबिलटी एंट्रेंस टेस्ट में नकल रोकने के लिए प्रदेश भर कें परीक्षा केंद्रों पर पुख्ता चैकिंग की गई। किसी के जूते उतरवाए गए तो किसी के बाल खुलवाए गए। शिमला समेत प्रदेश भर के परीक्षा केंद्रों में में रविवार को एनईईटी परीक्षा में नकल रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले लड़कों और लड़कियों की चेकिंग की गई। चेकिंग के दौरान किसी के जूते उतरवाए गए तो किसी के बाल खुलवाए गए। शिमला के चैप्सली स्कूल में तो परीक्षा देने आए बच्चों के हाथों से मौली तक खुलवा दी गई। स्कूल गेट पर तैनात कर्मियों ने चेकिंग के दौरान बच्चों के कानों में टॉर्च लगाकर जांचा कि भीतर कुछ है तो नहीं। कांगड़ा में भी छात्र छात्राओं की पुख्ता चैकिंग की गई। शिमला में पेपर से पहले हो रही चेकिंग से परेशान होकर कई स्टूडेंट्स तो रोने भी लग गए। एग्जाम देने आए बच्चों के अभिभावकों को भी चेकिंग का सामना करना पड़ा।
हालिया अफवाहों के अनुसार, निखिल जैन के साथ खूबसूरत बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहान का रिश्ता टूटने वाला है। ऐसी अफवाहें हैं कि नुसरत फिल्म 'एसओएस कोलकाता' की शूटिंग के बाद से अभिनेता यश दासगुप्ता के साथ रिश्ते में हैं। उस चर्चा के बीच में, निखिल और नुसरत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से एक दूसरे को अनफॉलो कर दिया। जैसे ही यह खबर सामने आई, नुसरत के नए पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने लगीं। क्रिसक्रॉस' अभिनेत्री ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम कहानी पर एक नई स्थिति साझा की। निखिल के साथ गिरते संबंधों के बीच, नुसरत जहां के इस तरह के पोस्ट को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, निखिल जैन ने अभी तक नुसरत के साथ ब्रेकअप पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इन अफवाहों के बारे में बात करते हुए, अभिनेता यश ने यह स्पष्ट किया कि वह नुसरत के निजी जीवन में क्या हो रहा है, इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री से उनके निजी जीवन के बारे में पूछा जाना चाहिए। यश दासगुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान यात्रा के संबंध में 'नुसरत' के संबंध में उनका कोई संपर्क नहीं था। नुसरत जहान ने व्यवसायी निखिल जैन के साथ 2019 में शादी के बंधन में बंध गए। युगल की शादी की पार्टी तुर्की के बद्रम में आयोजित की गई थी। शादी के एक साल के भीतर ही दोनों के रिश्ते को लेकर कई अटकलें लगने लगीं।
हालिया अफवाहों के अनुसार, निखिल जैन के साथ खूबसूरत बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहान का रिश्ता टूटने वाला है। ऐसी अफवाहें हैं कि नुसरत फिल्म 'एसओएस कोलकाता' की शूटिंग के बाद से अभिनेता यश दासगुप्ता के साथ रिश्ते में हैं। उस चर्चा के बीच में, निखिल और नुसरत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से एक दूसरे को अनफॉलो कर दिया। जैसे ही यह खबर सामने आई, नुसरत के नए पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने लगीं। क्रिसक्रॉस' अभिनेत्री ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम कहानी पर एक नई स्थिति साझा की। निखिल के साथ गिरते संबंधों के बीच, नुसरत जहां के इस तरह के पोस्ट को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, निखिल जैन ने अभी तक नुसरत के साथ ब्रेकअप पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इन अफवाहों के बारे में बात करते हुए, अभिनेता यश ने यह स्पष्ट किया कि वह नुसरत के निजी जीवन में क्या हो रहा है, इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री से उनके निजी जीवन के बारे में पूछा जाना चाहिए। यश दासगुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान यात्रा के संबंध में 'नुसरत' के संबंध में उनका कोई संपर्क नहीं था। नुसरत जहान ने व्यवसायी निखिल जैन के साथ दो हज़ार उन्नीस में शादी के बंधन में बंध गए। युगल की शादी की पार्टी तुर्की के बद्रम में आयोजित की गई थी। शादी के एक साल के भीतर ही दोनों के रिश्ते को लेकर कई अटकलें लगने लगीं।
Navjot Singh Sidhu: क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ पहली बार जेल से बाहर आने के बाद मुलाकात करते हुए नजर आए। इस बात की जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर शेयर की। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू रोड रेज केस में 10 महीनों तक जेल में थे। हाल ही में उन्हें जेल से रिहा किया गया है। रोड रेज मामले में जेल की सजा पूरी होने पर पटियाला सेंट्रल जेल से बाहर आने के पांच दिन बाद कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने गुरुवार को नई दिल्ली में पार्टी नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि "मेरे मेंटर राहुल जी और मित्र, दार्शनिक, गाइड प्रियंका जी से आज नई दिल्ली में मुलाकात हुई। आप मुझे जेल भेज सकते हैं, मुझे डरा सकते हैं, मेरे सभी वित्तीय खातों को ब्लॉक कर सकते हैं, लेकिन पंजाब और मेरे नेताओं के लिए मेरी प्रतिबद्धता न तो झुकेगी और न ही एक इंच पीछे हटेगी। बता दें कि यह मुलाकात नई दिल्ली में प्रियंका के आवास पर हुई जो लगभग एक घंटे तक चली। राहुल गांधी के आने से पहले सिद्धू ने पहली बार आधे घंटे के लिए प्रियंका से मुलाकात की और बैठक एक और घंटे तक जारी रही। पटियाला जेल से बाहर आने के बाद सिद्धू का जोरदार स्वागत किया गया। इस बीच उसी दिन लुधियाना से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी के वरिष्ठ नेता नवजोत सिद्धू ने "पार्टी को भारी नुकसान" पहुंचाया है। सिद्धू 1988 के रोड रेज मामले में पटियाला जेल में लगभग 10 महीने बिताने के बाद आज़ाद हुए और केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र जंजीरों में जकड़ा हुआ है और संस्थान गुलाम हो गए हैं। अपनी रिहाई के तुरंत बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रमुख, सिद्धू ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा और यह भी दावा किया कि उनकी सुरक्षा में कटौती की गई है। उन्होंने मारे गए गायक सिद्धू मूस वाला की न केवल सुरक्षा में कटौती करने बल्कि इसे सार्वजनिक करने के लिए भी मान सरकार की आलोचना की। मानसा जिले में मूसेवाला के माता-पिता से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, सिद्धू ने राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मान सरकार पर हमला किया और कहा कि इसे सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी थी। संबंधित खबरें....
Navjot Singh Sidhu: क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ पहली बार जेल से बाहर आने के बाद मुलाकात करते हुए नजर आए। इस बात की जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर शेयर की। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू रोड रेज केस में दस महीनों तक जेल में थे। हाल ही में उन्हें जेल से रिहा किया गया है। रोड रेज मामले में जेल की सजा पूरी होने पर पटियाला सेंट्रल जेल से बाहर आने के पांच दिन बाद कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने गुरुवार को नई दिल्ली में पार्टी नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि "मेरे मेंटर राहुल जी और मित्र, दार्शनिक, गाइड प्रियंका जी से आज नई दिल्ली में मुलाकात हुई। आप मुझे जेल भेज सकते हैं, मुझे डरा सकते हैं, मेरे सभी वित्तीय खातों को ब्लॉक कर सकते हैं, लेकिन पंजाब और मेरे नेताओं के लिए मेरी प्रतिबद्धता न तो झुकेगी और न ही एक इंच पीछे हटेगी। बता दें कि यह मुलाकात नई दिल्ली में प्रियंका के आवास पर हुई जो लगभग एक घंटे तक चली। राहुल गांधी के आने से पहले सिद्धू ने पहली बार आधे घंटे के लिए प्रियंका से मुलाकात की और बैठक एक और घंटे तक जारी रही। पटियाला जेल से बाहर आने के बाद सिद्धू का जोरदार स्वागत किया गया। इस बीच उसी दिन लुधियाना से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी के वरिष्ठ नेता नवजोत सिद्धू ने "पार्टी को भारी नुकसान" पहुंचाया है। सिद्धू एक हज़ार नौ सौ अठासी के रोड रेज मामले में पटियाला जेल में लगभग दस महीने बिताने के बाद आज़ाद हुए और केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र जंजीरों में जकड़ा हुआ है और संस्थान गुलाम हो गए हैं। अपनी रिहाई के तुरंत बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रमुख, सिद्धू ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा और यह भी दावा किया कि उनकी सुरक्षा में कटौती की गई है। उन्होंने मारे गए गायक सिद्धू मूस वाला की न केवल सुरक्षा में कटौती करने बल्कि इसे सार्वजनिक करने के लिए भी मान सरकार की आलोचना की। मानसा जिले में मूसेवाला के माता-पिता से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, सिद्धू ने राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मान सरकार पर हमला किया और कहा कि इसे सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी थी। संबंधित खबरें....
अम० का० १८ अनु० २ अवस्था में कोई भी मनुष्य हो, उसके मर जाने पर धर्म ही साथ जाता है या सहायक बनता है ॥ (ॠतसाताः = ऋतं सत्यं न्यायः सातः सम्भक्तो यैस्ते ऋतसाताः = न्यायशील क्षत्रिय जन । ऋतजाताः = ॠतेन विद्यया ज्ञानेन जाताः प्रसिद्धास्ते ऋतजाताः = ब्राह्मरण ) । स्योनास्मै भव पृथिव्यनृक्षरा निवेशनी । यच्छास्मै शर्म समयाः ॥ १९ ॥ ( अस्मै पृथिवो निवेशन्यनृक्षरा स्योना भव ) अस्मै मरणासन्नाय जीवाय पृथिव्येषा पृथिवी निवेशनी पुनर्जन्मनि स्थानदात्री, अनृक्षराऽकण्टका स्योना सुखाभव भवतु भवति । पुरुषव्यत्ययः ( अस्मै सप्रथाः शर्म यच्छ ) पूर्वोक्ताय जीवाय सप्रथाः सर्वतः पृथु शर्म शरणं यच्छ यच्छतु यच्छति वा । "अनुसरा अकण्टका स्योना सुखा शर्म शरणं यच्छ यच्छतु" ( निरु० ६ । ३२ ) ॥ १६ ॥ भाषार्थ - ( पृथिवी निवेशन्यनृक्षरा स्योना भव ) इस मरणासन्न जीष के लिये यह पृथिवी पुनर्जन्म में स्थान देती है और नये ढङ्ग से कटकरहित सुखदायक होती है (अस्मै सप्रथाः शर्म यच्छ ) पूर्वोक्त जीव के लिये सर्वतः फैली हुई शरण देती है ॥ १३ ॥ शिक्षा - देहान्त के अनन्तर पुनर्जन्म में पृथिवी सब प्रकार से अनुकूल सुख का हेतु बनती है ॥ १६ ॥ असंबाधे पृथिव्या उरौ लोके निधीयस्व । स्वधा याश्चकृषे जीवन तास्ते सन्तु मधुश्चुतः ॥२०॥ ( पृथिव्या असंवाध उरौ लोके निधीयस्व ) अत एव पुनर्जन्मन्ययं जीवः पृथिव्या भूमेरसंबाधे संबाधारहिते शुद्धे नूतने, उरौ विस्तृते लोके स्थाने निधीयस्व निधत्तां निधत्ते स्थिरीभवतीत्यर्थः ( जीवन् याः स्वधाकृषे ) जीवन् सन् याः स्वधा यान् स्वधारणधर्मान् चकृषे कृतवान् ( ता मधुश्चुतस्ते सन्तु ) हे जीव ! तास्ते धर्मा मधुश्चुतस्ते तुभ्यमुत्तम फलश्च्यावयितारः सन्तु सन्ति ॥ २० ॥ भाषार्थ - ( पृथिव्या असंबाध उरौ लोके निधीयस्व ) इसलिये पुनर्जन्म में यह जीव भूमि के विस्तृत स्थान में कहीं बाधारहित नूतन शरीर में स्थिर होता है ( जीवन याः स्वधायकृषे ) जीते हुये स्वजीवन सम्बन्धी जो २ कर्म किये हैं ( ता मधुश्चुतस्ते सन्तु ) हे जीव ! वे सब तेरे लिये उचित फल के देने वाले हैं ॥ २० ॥ शिक्षा - पुनर्जन्म में जीव नये शरीर में पैदा होता है और स्वकृतकर्म फलों को प्राप्त करता है ॥ २० ॥ हयामि ते मनसा मन इहेमान् गृहाँ उप जुजुषाण एहि । सं गच्छस्व पितृभिः सं यमेन स्योनास्त्वा वाता उपवान्तु शम्माः ॥२१॥ ( मनसा ते मन इह ह्वयामि ) मरणासन्नो जीवो यदा मृत्योरतिदुःखमसहमानोऽन्तस्तिष्ठति तदान्तर्यामी जगदीशस्तं श्रियमाणमाश्वासयतीव यद् हे श्रियमारणजीव ! मनसा कारणाख्येन समष्टिरूपेण मनसा ते तव मनः शरीरधारणस्य निमित्तम् "मनः कृतेनायात्यस्मिन् शरीरे" ( प्रभो० ३ । २) इहास्मिन् काले ह्वयाम्याकर्षामि तस्मान्मा शोचीस्त्वम (जुजुषारण इमान् गृहानुपेहि ) अत एव जुजुषाणोऽत्यन्तं प्रीयमाणः सन्निमान गृहान् पृथिव्यन्तरिक्षद्युस्थानान्युपेा पगच्छ "वैश्वानरः प्रविशत्यतिथि ब्रह्मणो गृहान्" ( कठो० १ । १ । ७ ) (पितृभिः सङ्गच्छस्व यमेन सम ) तस्मात्त्वं पितृभिर्निजरक्षकैः सूर्यरश्मिभिः सह सङ्गच्छस्व सङ्गतो भव पुनर्यमेन सूर्येण सह सङ्गतो भव (शग्माः श्याना वातास्त्वोपवान्तु ) शग्माः शक्तिप्रदास्तथा स्योनाः सुखदाश्च वाना वायत्रत्वोपवान्तु त्वामुपगच्छन्तु प्राप्नुवन्तु प्राप्ता भवन्तीत्यर्थः ॥ २१ ॥ भाषार्थ - ( मनसा ते मन इह हृयामि ) मरणासन्न जीव जब मृत्यु के अतिदुःख को सहन न करता हुआ अन्दर रह जाता है तब अन्तर्यामी जगदीश देव उस मरते हुये जीव को आश्वासन देता है कि हे जीव ! कारण नामक समष्टिरूप मन से मैं तेरा मन जो कि शरीरधारण का निमित्त है उस को इस समय आकर्षित करता हूँ खींचता हूँ जो तेरे सुख दुःख का साधन है। अतः तू शोक मत कर ( जुजुषाण इमान् गृहानुपेहि ) इस लिये तू अत्यन्त प्रसन्न होता हुआ इन पृथिवी, अन्तरिक्ष और द्युस्थान के यमगृहों यानि वायुपटलों को प्राप्त हो ( पितृभिः संगच्छस्व यमेन सम् ) वहां तू सूर्य की किरणों के साथ संगत हो पुनः सूर्य के साथ संगत हो (शग्माः स्योना वातास्त्वोपवान्तु) शक्तिप्रद तथा सुखकारक हवाऐं तुझे प्राप्त हों या पुनजन्मार्थ शक्ति और सुख के निमित्त बन कर तुझे प्राप्त होती हैं ॥ २१ ॥ शिक्षा - मृत्यु के अन्तिम अतिदुःख में परमात्मा जीव को आश्वासन देता है, उस के सुखदुःख अनुभव के साधन मन को खींच लेता है पुनः जीव वायु के पडलों में से गुज़रता हुआ सूर्यकिरणों तथा सूर्यसे सहयोग तथा जीवन काल को प्राप्त हो पुनर्जन्म के लिये शक्ति तथा सुख के निमित्त हवायें उसको प्राप्त होती हैं ॥ २१ ॥ उत् त्वा वहन्तु मरुता उद्ववाहा उदद्भुतः । अजेन कृण्वन्तः शीतं वर्षेणोक्षन्तु पालिति ।।२२।।
अमशून्य काशून्य अट्ठारह अनुशून्य दो अवस्था में कोई भी मनुष्य हो, उसके मर जाने पर धर्म ही साथ जाता है या सहायक बनता है ॥ । स्योनास्मै भव पृथिव्यनृक्षरा निवेशनी । यच्छास्मै शर्म समयाः ॥ उन्नीस ॥ अस्मै मरणासन्नाय जीवाय पृथिव्येषा पृथिवी निवेशनी पुनर्जन्मनि स्थानदात्री, अनृक्षराऽकण्टका स्योना सुखाभव भवतु भवति । पुरुषव्यत्ययः पूर्वोक्ताय जीवाय सप्रथाः सर्वतः पृथु शर्म शरणं यच्छ यच्छतु यच्छति वा । "अनुसरा अकण्टका स्योना सुखा शर्म शरणं यच्छ यच्छतु" ॥ सोलह ॥ भाषार्थ - इस मरणासन्न जीष के लिये यह पृथिवी पुनर्जन्म में स्थान देती है और नये ढङ्ग से कटकरहित सुखदायक होती है पूर्वोक्त जीव के लिये सर्वतः फैली हुई शरण देती है ॥ तेरह ॥ शिक्षा - देहान्त के अनन्तर पुनर्जन्म में पृथिवी सब प्रकार से अनुकूल सुख का हेतु बनती है ॥ सोलह ॥ असंबाधे पृथिव्या उरौ लोके निधीयस्व । स्वधा याश्चकृषे जीवन तास्ते सन्तु मधुश्चुतः ॥बीस॥ अत एव पुनर्जन्मन्ययं जीवः पृथिव्या भूमेरसंबाधे संबाधारहिते शुद्धे नूतने, उरौ विस्तृते लोके स्थाने निधीयस्व निधत्तां निधत्ते स्थिरीभवतीत्यर्थः जीवन् सन् याः स्वधा यान् स्वधारणधर्मान् चकृषे कृतवान् हे जीव ! तास्ते धर्मा मधुश्चुतस्ते तुभ्यमुत्तम फलश्च्यावयितारः सन्तु सन्ति ॥ बीस ॥ भाषार्थ - इसलिये पुनर्जन्म में यह जीव भूमि के विस्तृत स्थान में कहीं बाधारहित नूतन शरीर में स्थिर होता है जीते हुये स्वजीवन सम्बन्धी जो दो कर्म किये हैं हे जीव ! वे सब तेरे लिये उचित फल के देने वाले हैं ॥ बीस ॥ शिक्षा - पुनर्जन्म में जीव नये शरीर में पैदा होता है और स्वकृतकर्म फलों को प्राप्त करता है ॥ बीस ॥ हयामि ते मनसा मन इहेमान् गृहाँ उप जुजुषाण एहि । सं गच्छस्व पितृभिः सं यमेन स्योनास्त्वा वाता उपवान्तु शम्माः ॥इक्कीस॥ मरणासन्नो जीवो यदा मृत्योरतिदुःखमसहमानोऽन्तस्तिष्ठति तदान्तर्यामी जगदीशस्तं श्रियमाणमाश्वासयतीव यद् हे श्रियमारणजीव ! मनसा कारणाख्येन समष्टिरूपेण मनसा ते तव मनः शरीरधारणस्य निमित्तम् "मनः कृतेनायात्यस्मिन् शरीरे" इहास्मिन् काले ह्वयाम्याकर्षामि तस्मान्मा शोचीस्त्वम अत एव जुजुषाणोऽत्यन्तं प्रीयमाणः सन्निमान गृहान् पृथिव्यन्तरिक्षद्युस्थानान्युपेा पगच्छ "वैश्वानरः प्रविशत्यतिथि ब्रह्मणो गृहान्" तस्मात्त्वं पितृभिर्निजरक्षकैः सूर्यरश्मिभिः सह सङ्गच्छस्व सङ्गतो भव पुनर्यमेन सूर्येण सह सङ्गतो भव शग्माः शक्तिप्रदास्तथा स्योनाः सुखदाश्च वाना वायत्रत्वोपवान्तु त्वामुपगच्छन्तु प्राप्नुवन्तु प्राप्ता भवन्तीत्यर्थः ॥ इक्कीस ॥ भाषार्थ - मरणासन्न जीव जब मृत्यु के अतिदुःख को सहन न करता हुआ अन्दर रह जाता है तब अन्तर्यामी जगदीश देव उस मरते हुये जीव को आश्वासन देता है कि हे जीव ! कारण नामक समष्टिरूप मन से मैं तेरा मन जो कि शरीरधारण का निमित्त है उस को इस समय आकर्षित करता हूँ खींचता हूँ जो तेरे सुख दुःख का साधन है। अतः तू शोक मत कर इस लिये तू अत्यन्त प्रसन्न होता हुआ इन पृथिवी, अन्तरिक्ष और द्युस्थान के यमगृहों यानि वायुपटलों को प्राप्त हो वहां तू सूर्य की किरणों के साथ संगत हो पुनः सूर्य के साथ संगत हो शक्तिप्रद तथा सुखकारक हवाऐं तुझे प्राप्त हों या पुनजन्मार्थ शक्ति और सुख के निमित्त बन कर तुझे प्राप्त होती हैं ॥ इक्कीस ॥ शिक्षा - मृत्यु के अन्तिम अतिदुःख में परमात्मा जीव को आश्वासन देता है, उस के सुखदुःख अनुभव के साधन मन को खींच लेता है पुनः जीव वायु के पडलों में से गुज़रता हुआ सूर्यकिरणों तथा सूर्यसे सहयोग तथा जीवन काल को प्राप्त हो पुनर्जन्म के लिये शक्ति तथा सुख के निमित्त हवायें उसको प्राप्त होती हैं ॥ इक्कीस ॥ उत् त्वा वहन्तु मरुता उद्ववाहा उदद्भुतः । अजेन कृण्वन्तः शीतं वर्षेणोक्षन्तु पालिति ।।बाईस।।
कन्या ददन्मृत्युलोके शैरवं तु रजस्वलाम् ।। टीका - गौरी का दान करे तो पाताललोक में सुख पावे रोहिणी का दान करे तो बैकुण्ठ लोकमें सुख पावे कन्याका दान करे तो मृत्यु लोक में सुख प्राप्त हो और जो रजस्वला का दान करे तो नर्क में पड़े । जीवो जीवप्रदाता च द्रब्यदाता च चन्द्रमा । तेजोदाता भवेत्सूर्यो भमिदाता महीसुतः ॥ जीवहीना मृता कन्या सूर्यहीनो मृतो वरः । चन्द्र होनेघता लक्ष्मीः स्थानहानिः कुजम्बिना ।। टीका - वृहस्पति जीव के दाता हैं चन्द्रमा धन के दाता है सूर्य तेजके दाता हैं मङ्गल भूमि के दाता हैं । वृहस्पति हीन होयतो कन्या की मृत्यु हो । सूर्य हीन होय तो वरकी मृत्युहो । चन्द्रमा हीन होय तो लक्ष्मी की हानि हो । मङ्गल हीन होयतो घर की हानि करे । ● दश दोष देखना लिख्यते । लत्ता पातो युतिवेधो यामित्रं बुधपंचकम् । एकार्गलोपग्रहो च कांतिसाम्यं निगद्यते ॥ दग्धातिथिश्च विज्ञेया दश दोषा महाबलाः । एतान्दोपान परित्यज्य लग्नं संशोधयेद् बुधः ।। टीका- अब दस दोष कहते हैं । १ लत्ता, २ पात, ३ युति ४ वेध, जामित्र, ६ बुध पश्चक, ७ एकार्गल, ८ उपग्रह 6 क्रांतिसाम्य, १० दग्घातिथि, ये दस दोष विवाह में बलवान हैं इनसे बचाय के लग्न साधना चाहिये । दश दोष मानना । लत्ता मालवक्रे देशे पातं च कुरुजांगले । एकागलं च काश्मीरे बेधं सर्वत्र वर्जयेत् ।। टीका-लत्ता दोप मालव देश में माना जाता है, पात दोष कुरु जांगल देश में, एकार्गल दोष काश्मीर देशमें माना जाता है और वेध दोप सच जगह मानना चाहिये । यामित्रं चामरे देशे युतिदोषो कलिंगके । उपग्रहं च कैलाशे दग्धा विदूरुमदेशके ।। टीका - या मित्र दोष अमर देश में माना जाता है, युति दोष कलिंग देशमें, उपग्रह दोप कैलाश देशमें माना जाता है। दुग्धा दोप त्रिम देश में माना जाता है। और ३ दोष सब जगह मानने चाहिये । वेध, बुध पंचक, दग्धातिथि, क्रांतिमाभ्य, युतिये ६ दोष जरूर देखने चहिये और दोष २ देश में माने जाते हैं । अथ युति दोष देखना। यत्र गृहे भवेच्चन्द्रो ग्रहस्तत्र यदा भवेत् । युतिदोषस्तद ज्ञेयो बिना शुक्र शुभाशुभम् ।। टीका जिस नक्षत्र का चन्द्रमा हो और उसी नक्षत्र पर
कन्या ददन्मृत्युलोके शैरवं तु रजस्वलाम् ।। टीका - गौरी का दान करे तो पाताललोक में सुख पावे रोहिणी का दान करे तो बैकुण्ठ लोकमें सुख पावे कन्याका दान करे तो मृत्यु लोक में सुख प्राप्त हो और जो रजस्वला का दान करे तो नर्क में पड़े । जीवो जीवप्रदाता च द्रब्यदाता च चन्द्रमा । तेजोदाता भवेत्सूर्यो भमिदाता महीसुतः ॥ जीवहीना मृता कन्या सूर्यहीनो मृतो वरः । चन्द्र होनेघता लक्ष्मीः स्थानहानिः कुजम्बिना ।। टीका - वृहस्पति जीव के दाता हैं चन्द्रमा धन के दाता है सूर्य तेजके दाता हैं मङ्गल भूमि के दाता हैं । वृहस्पति हीन होयतो कन्या की मृत्यु हो । सूर्य हीन होय तो वरकी मृत्युहो । चन्द्रमा हीन होय तो लक्ष्मी की हानि हो । मङ्गल हीन होयतो घर की हानि करे । ● दश दोष देखना लिख्यते । लत्ता पातो युतिवेधो यामित्रं बुधपंचकम् । एकार्गलोपग्रहो च कांतिसाम्यं निगद्यते ॥ दग्धातिथिश्च विज्ञेया दश दोषा महाबलाः । एतान्दोपान परित्यज्य लग्नं संशोधयेद् बुधः ।। टीका- अब दस दोष कहते हैं । एक लत्ता, दो पात, तीन युति चार वेध, जामित्र, छः बुध पश्चक, सात एकार्गल, आठ उपग्रह छः क्रांतिसाम्य, दस दग्घातिथि, ये दस दोष विवाह में बलवान हैं इनसे बचाय के लग्न साधना चाहिये । दश दोष मानना । लत्ता मालवक्रे देशे पातं च कुरुजांगले । एकागलं च काश्मीरे बेधं सर्वत्र वर्जयेत् ।। टीका-लत्ता दोप मालव देश में माना जाता है, पात दोष कुरु जांगल देश में, एकार्गल दोष काश्मीर देशमें माना जाता है और वेध दोप सच जगह मानना चाहिये । यामित्रं चामरे देशे युतिदोषो कलिंगके । उपग्रहं च कैलाशे दग्धा विदूरुमदेशके ।। टीका - या मित्र दोष अमर देश में माना जाता है, युति दोष कलिंग देशमें, उपग्रह दोप कैलाश देशमें माना जाता है। दुग्धा दोप त्रिम देश में माना जाता है। और तीन दोष सब जगह मानने चाहिये । वेध, बुध पंचक, दग्धातिथि, क्रांतिमाभ्य, युतिये छः दोष जरूर देखने चहिये और दोष दो देश में माने जाते हैं । अथ युति दोष देखना। यत्र गृहे भवेच्चन्द्रो ग्रहस्तत्र यदा भवेत् । युतिदोषस्तद ज्ञेयो बिना शुक्र शुभाशुभम् ।। टीका जिस नक्षत्र का चन्द्रमा हो और उसी नक्षत्र पर
Diabetic Ketoacidosis Causes: शरीर में इंसुलिन की फंक्शनिंग बिगड़ने के कारण लोगों को डायबिटीज की समस्या हो जाती है. यह एक जरूरी हार्मोन होता है, जो हमारे ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों के शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है या बेहद कम मात्रा में बनता है. जबकि टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन रजिस्टेंस की वजह से यह हार्मोन सही तरीके से काम नहीं कर पाता. इंसुलिन की कमी के कारण डायबिटीज की बीमारी हो जाती है. कई बार इलाज में लापरवाही बरतने या दवाओं को न लेने की वजह से शरीर में इंसुलिन काफी कम हो जाता है. ऐसी कंडीशन में लोगों की जान भी जा सकती है. जानें यह क्या है और किस तरह इससे बचाव किया जाए. क्या है डायबिटिक कीटोएसिडोसिस? अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) डायबिटीज की एक इमरजेंसी कंडीशन है, जिसे नजरअंदाज करने पर व्यक्ति की मौत हो सकती है. इस कंडीशन में डायबिटीज पेशेंट के शरीर में इंसुलिन की मात्रा बेहद कम हो जाती है और कोशिकाओं को एनर्जी के लिए जरूरी ब्लड शुगर नहीं मिल पाती. ऐसे में व्यक्ति का लिवर कीटोन्स नामक एसिड प्रोड्यूस करता है. कम समय में बहुत ज्यादा एसिड बनने से परिस्थिति काफी गंभीर हो जाती है और जल्द ही इलाज न मिलने पर मरीज की जान चली जाती है. आमतौर पर यह परिस्थिति टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों को होती है, लेकिन कई बार टाइप 2 डायबिटीज वाले लोग भी इसका शिकार हो जाते हैं. यह भी पढ़ेंः कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को महंगा पड़ सकता है कॉफी पीने का शौक ! Love Bite के चक्कर में हुआ हादसा, रोमांस के वक्त प्रेमिका ने गले में काटा! रोज 10 लीटर तक पानी गटक जाता था शख्स, डॉक्टरों को लगा डायबिटीज होगा, लेकिन. . डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की बड़ी वजहब्लड शुगर बहुत ज्यादा होना और इंसुलिन का लेवल बहुत कम होने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या हो सकती है. डायबिटीज के मरीज जब बीमार हो जाते हैं और कुछ खा नहीं पाते, तो ऐसी कंडीशन में कीटोएसिडोसिस का खतरा बढ़ जाता है. इंसुलिन शॉट्स नहीं लेना या इंसुलिन की गलत खुराक भी इस परेशानी की वजह बन सकती है. इसके अलावा हार्ट अटैक, शारीरिक चोट, शराब या नशीली दवाओं का उपयोग और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की वजह से भी ऐसा हो सकता है. इसलिए समय-समय पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करना बेहतर तरीका है. .
Diabetic Ketoacidosis Causes: शरीर में इंसुलिन की फंक्शनिंग बिगड़ने के कारण लोगों को डायबिटीज की समस्या हो जाती है. यह एक जरूरी हार्मोन होता है, जो हमारे ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. टाइप एक डायबिटीज वाले लोगों के शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है या बेहद कम मात्रा में बनता है. जबकि टाइप दो डायबिटीज में इंसुलिन रजिस्टेंस की वजह से यह हार्मोन सही तरीके से काम नहीं कर पाता. इंसुलिन की कमी के कारण डायबिटीज की बीमारी हो जाती है. कई बार इलाज में लापरवाही बरतने या दवाओं को न लेने की वजह से शरीर में इंसुलिन काफी कम हो जाता है. ऐसी कंडीशन में लोगों की जान भी जा सकती है. जानें यह क्या है और किस तरह इससे बचाव किया जाए. क्या है डायबिटिक कीटोएसिडोसिस? अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार डायबिटिक कीटोएसिडोसिस डायबिटीज की एक इमरजेंसी कंडीशन है, जिसे नजरअंदाज करने पर व्यक्ति की मौत हो सकती है. इस कंडीशन में डायबिटीज पेशेंट के शरीर में इंसुलिन की मात्रा बेहद कम हो जाती है और कोशिकाओं को एनर्जी के लिए जरूरी ब्लड शुगर नहीं मिल पाती. ऐसे में व्यक्ति का लिवर कीटोन्स नामक एसिड प्रोड्यूस करता है. कम समय में बहुत ज्यादा एसिड बनने से परिस्थिति काफी गंभीर हो जाती है और जल्द ही इलाज न मिलने पर मरीज की जान चली जाती है. आमतौर पर यह परिस्थिति टाइप एक डायबिटीज वाले लोगों को होती है, लेकिन कई बार टाइप दो डायबिटीज वाले लोग भी इसका शिकार हो जाते हैं. यह भी पढ़ेंः कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को महंगा पड़ सकता है कॉफी पीने का शौक ! Love Bite के चक्कर में हुआ हादसा, रोमांस के वक्त प्रेमिका ने गले में काटा! रोज दस लीटरटर तक पानी गटक जाता था शख्स, डॉक्टरों को लगा डायबिटीज होगा, लेकिन. . डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की बड़ी वजहब्लड शुगर बहुत ज्यादा होना और इंसुलिन का लेवल बहुत कम होने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या हो सकती है. डायबिटीज के मरीज जब बीमार हो जाते हैं और कुछ खा नहीं पाते, तो ऐसी कंडीशन में कीटोएसिडोसिस का खतरा बढ़ जाता है. इंसुलिन शॉट्स नहीं लेना या इंसुलिन की गलत खुराक भी इस परेशानी की वजह बन सकती है. इसके अलावा हार्ट अटैक, शारीरिक चोट, शराब या नशीली दवाओं का उपयोग और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की वजह से भी ऐसा हो सकता है. इसलिए समय-समय पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करना बेहतर तरीका है. .
नवरात्र के अंतिम दिन बकेवर लखना सहित पूरा क्षेत्र शक्ति की भक्ति में लीन नजर आया। श्रद्धालुओं की भीड़ देवी मंदिर में देखी गई। भक्तों ने श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही भक्तों ने गाजे-बाजे के साथ जवारे, झंडा आदि मंदिरों में चढ़ाए और घरों में श्रद्धाभाव के साथ कन्या व लंगुरा भोज कराया गया। लखना कस्बा स्थित कालिकादेवी मंदिर के कपाट बंद होने के बावजूद सुबह 4 बजे से ही भक्तों आना शुरू हो गया। भक्तजनों ने मातारानी के भवन के बंद दरवाजे के बहार से ही दर्शन करके पूजा अर्चना की और परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना की। देर शाम तक मंदिर के बहार श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्त दिन भर मातारानी के दरबार में गाजे-बाजे के साथ जवारे लेकर पहुंचे। जवारों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल उड़ाकर नृत्य किया। इसके साथ भारी संख्या में श्रद्धालु ऐसे भी रहे जो दंडवत होकर मातारानी के दरबार में पहुंचे। मंदिर तथा घर में पूजा अर्चना के बाद कन्या-लंगुराओं को भोज कराने के बाद श्रद्धालुओं ने व्रत खोला।
नवरात्र के अंतिम दिन बकेवर लखना सहित पूरा क्षेत्र शक्ति की भक्ति में लीन नजर आया। श्रद्धालुओं की भीड़ देवी मंदिर में देखी गई। भक्तों ने श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही भक्तों ने गाजे-बाजे के साथ जवारे, झंडा आदि मंदिरों में चढ़ाए और घरों में श्रद्धाभाव के साथ कन्या व लंगुरा भोज कराया गया। लखना कस्बा स्थित कालिकादेवी मंदिर के कपाट बंद होने के बावजूद सुबह चार बजे से ही भक्तों आना शुरू हो गया। भक्तजनों ने मातारानी के भवन के बंद दरवाजे के बहार से ही दर्शन करके पूजा अर्चना की और परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना की। देर शाम तक मंदिर के बहार श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्त दिन भर मातारानी के दरबार में गाजे-बाजे के साथ जवारे लेकर पहुंचे। जवारों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल उड़ाकर नृत्य किया। इसके साथ भारी संख्या में श्रद्धालु ऐसे भी रहे जो दंडवत होकर मातारानी के दरबार में पहुंचे। मंदिर तथा घर में पूजा अर्चना के बाद कन्या-लंगुराओं को भोज कराने के बाद श्रद्धालुओं ने व्रत खोला।
रॉबर्टो डेल रोजारियो ट्रेबेल म्यूजिक कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और 1 9 75 में कराओके सिंग अलॉन्ग सिस्टम के आविष्कारक हैं। रॉबर्टो डेल रोसारियो ने बीस से अधिक आविष्कारों को पेटेंट किया है जो उन्हें सबसे शानदार फिलिपिनो आविष्कारक में से एक बनाते हैं। अपने प्रसिद्ध कराओके सिंग अलॉन्ग सिस्टम के अलावा रॉबर्टो डेल रोसारियो ने भी आविष्कार किया हैः - ट्रेबल वॉयस कलर कोड (वीसीसी) कराओके गायन के साथ एक प्रसिद्ध रिकॉर्ड के साथ गायन के लिए एक जापानी अभिव्यक्ति है। रॉबर्टो डेल रोजारियो ने अपने गायन-साथ-साथ सिस्टम को एक मल्टी-मल्टी-कॉम्पैक्ट कॉम्पैक्ट मशीन के रूप में वर्णित किया है जिसमें एम्पलीफायर स्पीकर, एक या दो टेप तंत्र, वैकल्पिक ट्यूनर या रेडियो और माइक्रोफोन मिक्सर शामिल हैं, जिसमें किसी की आवाज़ को बढ़ाने के लिए सुविधाएं हैं, जैसे इको या रीवरब एक कैबिनेट आवरण में संलग्न पूरी प्रणाली के साथ एक ओपेरा हॉल या स्टूडियो ध्वनि को उत्तेजित करें।
रॉबर्टो डेल रोजारियो ट्रेबेल म्यूजिक कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और एक नौ पचहत्तर में कराओके सिंग अलॉन्ग सिस्टम के आविष्कारक हैं। रॉबर्टो डेल रोसारियो ने बीस से अधिक आविष्कारों को पेटेंट किया है जो उन्हें सबसे शानदार फिलिपिनो आविष्कारक में से एक बनाते हैं। अपने प्रसिद्ध कराओके सिंग अलॉन्ग सिस्टम के अलावा रॉबर्टो डेल रोसारियो ने भी आविष्कार किया हैः - ट्रेबल वॉयस कलर कोड कराओके गायन के साथ एक प्रसिद्ध रिकॉर्ड के साथ गायन के लिए एक जापानी अभिव्यक्ति है। रॉबर्टो डेल रोजारियो ने अपने गायन-साथ-साथ सिस्टम को एक मल्टी-मल्टी-कॉम्पैक्ट कॉम्पैक्ट मशीन के रूप में वर्णित किया है जिसमें एम्पलीफायर स्पीकर, एक या दो टेप तंत्र, वैकल्पिक ट्यूनर या रेडियो और माइक्रोफोन मिक्सर शामिल हैं, जिसमें किसी की आवाज़ को बढ़ाने के लिए सुविधाएं हैं, जैसे इको या रीवरब एक कैबिनेट आवरण में संलग्न पूरी प्रणाली के साथ एक ओपेरा हॉल या स्टूडियो ध्वनि को उत्तेजित करें।
अमरावती / प्रतिनिधि दि. 26 - कोरोना महामारी के बाद अनलॉक की प्रक्रिया चरणबध्द तरीके से आरंभ की गई. जिसके बाद यात्री सेवा भी आरंभ की गई है. बस सेवा आरंभ होने के बाद चालक व कंडक्टर का रोजाना यात्रियों के साथ संपर्क आ रहा है. रोजाना के सफर में अनेक गांव और यात्रियों का संपर्क आने से चालक और कंडक्टर को भी कोरोना का भय नजर आ रहा है. यहां बता दें कि, जिले में लॉकडाउन के बाद हर रोज 1 लाख से अधिक यात्रियों को ले जानेवाली रापनि की बस नये से संचारबंदी हटने के बाद 85 हजार यात्रियों को लाने और ले जाने का काम कर रही है. इन यात्रियों के संपर्क में आनेवाले कंडक्टर व चालक कोरोना अवधि में सबसे ज्यादा अफेक्टेड हो सकते है. इसलिए कोविड-19 बीमारी से बचाने के लिए कर्मचारियों को सुरक्षित रूप से टीकाकरण कराना आवश्यक है. रापनि कर्मचारियों का टीकाकरण करने के बाद वे सुरक्षित रहेंगे. वहीं उनसे अन्यों को भी खतरा नहीं होगा. इसके अलावा गांव से शहर में यात्री लेकर आनेवाले कर्मचारियों का जीवनमान सुरक्षित रहेगा. इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने एसटी कर्मचारियों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता से स्वास्थ्य कर्मचारियों, राजस्व कर्मचारी और पुलिस कर्मचारियों की तर्ज पर रापनि कर्मियों को भी टीका उपलब्ध कराकर देने की मांग विविध संगठनाओं की ओर से की जा रही है. खास बात यह है कि, रापनि कंडक्टर व चालकों को टीका लगवाने को लेकर कोई भी हलचलें होते हुए नहीं दिखाई दे रही है. जबकि कोरोना टीकाकरण को लेकर रापनि की ओर से जिला प्रशासन से लिखित पत्राचार भी किया जा रहा है. अमरावती विभाग में रापनि के 801 चालक, 869 कंडक्टर कार्यरत है. कोरोना महामारी के दौर में अपनी जान की पर्वाह न करते हुए यात्री सेवा दे रहे है. जिससे वे अनेक नागरिकों के संपर्क में भी आ रहे है. इसलिए रापनि कर्मियों के लिए कोरोना का टीका उपलब्ध कराने की मांग जोर पकडने लगी है.
अमरावती / प्रतिनिधि दि. छब्बीस - कोरोना महामारी के बाद अनलॉक की प्रक्रिया चरणबध्द तरीके से आरंभ की गई. जिसके बाद यात्री सेवा भी आरंभ की गई है. बस सेवा आरंभ होने के बाद चालक व कंडक्टर का रोजाना यात्रियों के साथ संपर्क आ रहा है. रोजाना के सफर में अनेक गांव और यात्रियों का संपर्क आने से चालक और कंडक्टर को भी कोरोना का भय नजर आ रहा है. यहां बता दें कि, जिले में लॉकडाउन के बाद हर रोज एक लाख से अधिक यात्रियों को ले जानेवाली रापनि की बस नये से संचारबंदी हटने के बाद पचासी हजार यात्रियों को लाने और ले जाने का काम कर रही है. इन यात्रियों के संपर्क में आनेवाले कंडक्टर व चालक कोरोना अवधि में सबसे ज्यादा अफेक्टेड हो सकते है. इसलिए कोविड-उन्नीस बीमारी से बचाने के लिए कर्मचारियों को सुरक्षित रूप से टीकाकरण कराना आवश्यक है. रापनि कर्मचारियों का टीकाकरण करने के बाद वे सुरक्षित रहेंगे. वहीं उनसे अन्यों को भी खतरा नहीं होगा. इसके अलावा गांव से शहर में यात्री लेकर आनेवाले कर्मचारियों का जीवनमान सुरक्षित रहेगा. इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने एसटी कर्मचारियों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता से स्वास्थ्य कर्मचारियों, राजस्व कर्मचारी और पुलिस कर्मचारियों की तर्ज पर रापनि कर्मियों को भी टीका उपलब्ध कराकर देने की मांग विविध संगठनाओं की ओर से की जा रही है. खास बात यह है कि, रापनि कंडक्टर व चालकों को टीका लगवाने को लेकर कोई भी हलचलें होते हुए नहीं दिखाई दे रही है. जबकि कोरोना टीकाकरण को लेकर रापनि की ओर से जिला प्रशासन से लिखित पत्राचार भी किया जा रहा है. अमरावती विभाग में रापनि के आठ सौ एक चालक, आठ सौ उनहत्तर कंडक्टर कार्यरत है. कोरोना महामारी के दौर में अपनी जान की पर्वाह न करते हुए यात्री सेवा दे रहे है. जिससे वे अनेक नागरिकों के संपर्क में भी आ रहे है. इसलिए रापनि कर्मियों के लिए कोरोना का टीका उपलब्ध कराने की मांग जोर पकडने लगी है.
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने उप निरीक्षकों के 460 से अधिक पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे एचएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट http://hssc. gov. in. / पर आवेदन करें। इसने ग्रुप सी के सब इंस्पेक्टर (पुरुष) के 400 और सब इंस्पेक्टर (महिला) के 65 पदों पर सीधी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि अब 9 जुलाई (रात 11:59 बजे तक) तक बढ़ा दी गई है। जबकि शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 13 जुलाई कर दी गई है। पात्रता मापदंडः किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या इसके समकक्ष। हिंदी या संस्कृत के साथ मैट्रिक एक या उच्चतर विषय के रूप में। 1 जून 2021 को 21-27 वर्ष के बीच आयु सीमा। हालांकि, आरक्षित वर्ग के लिए आयु में छूट है।
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने उप निरीक्षकों के चार सौ साठ से अधिक पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे एचएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट http://hssc. gov. in. / पर आवेदन करें। इसने ग्रुप सी के सब इंस्पेक्टर के चार सौ और सब इंस्पेक्टर के पैंसठ पदों पर सीधी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि अब नौ जुलाई तक बढ़ा दी गई है। जबकि शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर तेरह जुलाई कर दी गई है। पात्रता मापदंडः किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या इसके समकक्ष। हिंदी या संस्कृत के साथ मैट्रिक एक या उच्चतर विषय के रूप में। एक जून दो हज़ार इक्कीस को इक्कीस-सत्ताईस वर्ष के बीच आयु सीमा। हालांकि, आरक्षित वर्ग के लिए आयु में छूट है।
बिहार में आपराध कम होने का नाम नहीं रहा है। आए दिन लड़कियों से छेड़छाड़, अपहरण और हत्या की खबरें सामने आ रही हैं। मुंगेर जिले में भी घर से निकली एक छात्रा का बीच रास्ते में किसी ने अपहरण कर लिया। छात्रा की काफी तलाश की गई लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चल पाया। मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा घर से फार्म भरने की बात कहकर निकली थी। थाने में लिखाई रिपोर्ट में छात्रा के पिता ने बताया है कि बुधवार को उनकी 17 वर्षीय बेटी फॉर्म भरने की बात कहकर घर से निकली थी। देर रात तक वापस नहीं लौटी। रात हो जाने पर अपने रिश्तेदारों व जान-पहचान वालों के घर जाकर काफी खोजबीन की, लेकिन पता नहीं चला। खोजबीन के दौरान गुरुवार को जानकारी मिली कि मुंगेर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के लाल दरवाजा निवासी समर पोद्दार, प्रिंस पोद्दार व विनोद पोद्दार ने मिलकर शादी की नीयत से उसका अपहरण कर लिया है। उन्होंने बेटी की जल्द बरामदगी और आरोपितों पर कार्रवाई की मांग की। मधुसूदनपुर थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार ने बताया कि पिता की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। लड़की को जल्द ढूंढने का प्रयास किया जाएगा।
बिहार में आपराध कम होने का नाम नहीं रहा है। आए दिन लड़कियों से छेड़छाड़, अपहरण और हत्या की खबरें सामने आ रही हैं। मुंगेर जिले में भी घर से निकली एक छात्रा का बीच रास्ते में किसी ने अपहरण कर लिया। छात्रा की काफी तलाश की गई लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चल पाया। मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली बारहवीं कक्षा की छात्रा घर से फार्म भरने की बात कहकर निकली थी। थाने में लिखाई रिपोर्ट में छात्रा के पिता ने बताया है कि बुधवार को उनकी सत्रह वर्षीय बेटी फॉर्म भरने की बात कहकर घर से निकली थी। देर रात तक वापस नहीं लौटी। रात हो जाने पर अपने रिश्तेदारों व जान-पहचान वालों के घर जाकर काफी खोजबीन की, लेकिन पता नहीं चला। खोजबीन के दौरान गुरुवार को जानकारी मिली कि मुंगेर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के लाल दरवाजा निवासी समर पोद्दार, प्रिंस पोद्दार व विनोद पोद्दार ने मिलकर शादी की नीयत से उसका अपहरण कर लिया है। उन्होंने बेटी की जल्द बरामदगी और आरोपितों पर कार्रवाई की मांग की। मधुसूदनपुर थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार ने बताया कि पिता की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। लड़की को जल्द ढूंढने का प्रयास किया जाएगा।
Don't Miss! 21 घंटे में मनवा लागे रे..को 10 लाख लोगों ने देखा.. इसे कहते हैं लोगों की मोहब्बत..जो पूरी तरह से टूटकर शाहरूख खान पर लुटती है। मंगलवार रात को शाहरूख खान की मोस्ट अवेटड फिल्म हैप्पी न्यू ईयर का दूसरा गाना मनवा रे..रिलीज हुआ था जिसे की मात्र 21 घंटे में 10 लाख लोगों ने देख लिया है। आपको जानकर हैरत और खुशी होगी कि शाहरूख और दीपिका के इस रोमांटिक ट्रैक को अब तक यूट्यूब पर 1,172,385 हिट्स मिल चुके हैं। इस गाने को सुरों से सजाया है अरजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने और संगीत दिया है विशाल-शेखर ने। पहले ही दावा किया गया था कि यह गाना बहुत ही रोमांटिक, स्वीट और क्लीन है जिसे कि आप एक बार नहीं बल्कि बार-बार सुनना चाहते हैं और लोगों के हिट्स से यकीन हो गया कि यह दावा गलत नहीं है। मालूम हो कि शाहरूख खान की फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' की निर्देशिका फराह खान हैं। फिल्म में शाहरुख खान के अलावा दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, बमन ईरानी, सोनू सूद और विवान शाह भी हैं। फिल्म दिवाली पर रिलीज हो रही है। फिल्म के दूसरे गाने में किंग खान के 8 एब्स भी कमाल के दिख रहे हैं।
Don't Miss! इक्कीस घंटाटे में मनवा लागे रे..को दस लाख लोगों ने देखा.. इसे कहते हैं लोगों की मोहब्बत..जो पूरी तरह से टूटकर शाहरूख खान पर लुटती है। मंगलवार रात को शाहरूख खान की मोस्ट अवेटड फिल्म हैप्पी न्यू ईयर का दूसरा गाना मनवा रे..रिलीज हुआ था जिसे की मात्र इक्कीस घंटाटे में दस लाख लोगों ने देख लिया है। आपको जानकर हैरत और खुशी होगी कि शाहरूख और दीपिका के इस रोमांटिक ट्रैक को अब तक यूट्यूब पर एक,एक सौ बहत्तर,तीन सौ पचासी हिट्स मिल चुके हैं। इस गाने को सुरों से सजाया है अरजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने और संगीत दिया है विशाल-शेखर ने। पहले ही दावा किया गया था कि यह गाना बहुत ही रोमांटिक, स्वीट और क्लीन है जिसे कि आप एक बार नहीं बल्कि बार-बार सुनना चाहते हैं और लोगों के हिट्स से यकीन हो गया कि यह दावा गलत नहीं है। मालूम हो कि शाहरूख खान की फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' की निर्देशिका फराह खान हैं। फिल्म में शाहरुख खान के अलावा दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, बमन ईरानी, सोनू सूद और विवान शाह भी हैं। फिल्म दिवाली पर रिलीज हो रही है। फिल्म के दूसरे गाने में किंग खान के आठ एब्स भी कमाल के दिख रहे हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग का आधा सफ़र खत्म हो चूका है अब सभी टीमे अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है. आईपीएल में अब सभी टीमें एक दुसरे से दोबारा भिड़ेंगी. प्ले ऑफ़ में पहुंचने के लिए सभी टीम अपने सबसे बेहतर खिलाड़ियों के साथ उतरेंगी, तो वहीं कुछ खिलाड़ी है, जिन्होंने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है वे अब इस टूर्नामेंट से बाहर हो गये हैं. जी हाँ हम बात कर रहे है मुंबई इंडियंस की तरफ से खेलने वाले वेस्ट इंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ की जिनको आईपीएल के तीन मैच खेलने के बाद टूर्नामेंट से बाहर होंना पड़ा. आईपीएल के अपने पहले ही मैच में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ इतिहास रचने वाले मुंबई इडियंस के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने फील्डिंग के दौरान अपने कंधे की हड्डी को उखाड़ लिया है. दरअसल मुकाबला मुंबई इंडियंस के होम ग्राउंड वानखड़े स्टेडियम पर राजस्थान रॉयल्स के साथ हो रहा था, जिसमे बाउंडरी के पास चौके को रोकने के लिए उन्होंने डाईव लगाया. जिसक बाद उनको तुरन्त ही मैदान से बाहर ले जाया गया. अभी हाल में मिली रिपोर्ट से पता चला है कि कंधे की हड्डी के उखड़ जाने के कारण वह इस पुरे टूर्नामेंट से बाहर है. वेस्ट इंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ को मुंबई इंडियंस की टीम में उस समय शमिल किया गया, जब न्यूजीलैंड के गेंदबाज एडम मिल्ने आईपीएल शुरू होने से पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गये. अल्जारी जोसेफ ने अपने पहले मुकाबले में ही आईपीएल के ही इतिहास में अबतक की सबसे बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए हैदराबाद के खिलाफ अपने 4 ओवर्स में मात्र 12 रन दे कर 6 विकेट लेकर इतिहास रच दिया. इस शानदार प्रदर्शन की वजह से इस मैच मैन ऑफ़ द मैच भी रहे. आईपीएल के अपने पहले ही मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने के बाद मुंबई इंडियंस ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ लसिथ मलिंगा की जगह टीम में अल्जारी जोसेफ को रिस्क लेते हुए टीम में शामिल किया. लेकिन अपने डेव्यु मुकाबले में हीरो रहे अल्जारी जोसेफ ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ चार ओवर में 53 रन खर्च कर डाले, शानदार लय में चल रहे राजस्थान के बल्लेबाज जोस बटलर उनकी योर्कर गेंद को भी चौके लगा रहे थे. अल्जारी जोसेफ ने अपने पहले मुकाबले में केवल 12 रन ही दिए, जबकि उसके बाद उन्होंने दो और मुकाबले खेले और 6 ओवर डाले जिसमे उन्होंने 75 रन खर्च किए. आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक इस खबर को सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें। साथ ही कोई सुझाव देना चाहे तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने हमारा पेज अब तक लाइक नहीं किया हो तो कृपया इसे जल्दी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट आप तक पहुंचा सके।
इंडियन प्रीमियर लीग का आधा सफ़र खत्म हो चूका है अब सभी टीमे अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है. आईपीएल में अब सभी टीमें एक दुसरे से दोबारा भिड़ेंगी. प्ले ऑफ़ में पहुंचने के लिए सभी टीम अपने सबसे बेहतर खिलाड़ियों के साथ उतरेंगी, तो वहीं कुछ खिलाड़ी है, जिन्होंने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है वे अब इस टूर्नामेंट से बाहर हो गये हैं. जी हाँ हम बात कर रहे है मुंबई इंडियंस की तरफ से खेलने वाले वेस्ट इंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ की जिनको आईपीएल के तीन मैच खेलने के बाद टूर्नामेंट से बाहर होंना पड़ा. आईपीएल के अपने पहले ही मैच में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ इतिहास रचने वाले मुंबई इडियंस के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने फील्डिंग के दौरान अपने कंधे की हड्डी को उखाड़ लिया है. दरअसल मुकाबला मुंबई इंडियंस के होम ग्राउंड वानखड़े स्टेडियम पर राजस्थान रॉयल्स के साथ हो रहा था, जिसमे बाउंडरी के पास चौके को रोकने के लिए उन्होंने डाईव लगाया. जिसक बाद उनको तुरन्त ही मैदान से बाहर ले जाया गया. अभी हाल में मिली रिपोर्ट से पता चला है कि कंधे की हड्डी के उखड़ जाने के कारण वह इस पुरे टूर्नामेंट से बाहर है. वेस्ट इंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ को मुंबई इंडियंस की टीम में उस समय शमिल किया गया, जब न्यूजीलैंड के गेंदबाज एडम मिल्ने आईपीएल शुरू होने से पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गये. अल्जारी जोसेफ ने अपने पहले मुकाबले में ही आईपीएल के ही इतिहास में अबतक की सबसे बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए हैदराबाद के खिलाफ अपने चार ओवर्स में मात्र बारह रन दे कर छः विकेट लेकर इतिहास रच दिया. इस शानदार प्रदर्शन की वजह से इस मैच मैन ऑफ़ द मैच भी रहे. आईपीएल के अपने पहले ही मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने के बाद मुंबई इंडियंस ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ लसिथ मलिंगा की जगह टीम में अल्जारी जोसेफ को रिस्क लेते हुए टीम में शामिल किया. लेकिन अपने डेव्यु मुकाबले में हीरो रहे अल्जारी जोसेफ ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ चार ओवर में तिरेपन रन खर्च कर डाले, शानदार लय में चल रहे राजस्थान के बल्लेबाज जोस बटलर उनकी योर्कर गेंद को भी चौके लगा रहे थे. अल्जारी जोसेफ ने अपने पहले मुकाबले में केवल बारह रन ही दिए, जबकि उसके बाद उन्होंने दो और मुकाबले खेले और छः ओवर डाले जिसमे उन्होंने पचहत्तर रन खर्च किए. आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक इस खबर को सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें। साथ ही कोई सुझाव देना चाहे तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने हमारा पेज अब तक लाइक नहीं किया हो तो कृपया इसे जल्दी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट आप तक पहुंचा सके।
यशोधरा में गुरुजी की नारी- भावना पारिवारिक स्नेहही विश्व-प्रेम का जन्मदाता है। जननी 'तुच्छ न समझो मुझको नाथ । यशोधरा यह अच्छी तरह समझती है कि नारी के मातृत्व रूप का गौरव बुद्ध की तपस्या से किसी भी अंश में, कम नहींइसीलिए अपने प्राणेश्वर को स्पष्ट शब्दों में कहा है अमृत तुम्हारी अंजलि में तो भाजन मेरे हाथ । तुल्य दृष्टि यदि तुम्ने पाई तो हममे ही सृष्टि समाई । स्वयं स्वजनता में वह 'बेटा रे, प्रसव की-सी पीडा मुझे होती है।' देकर हम स्वजनों का साथ ।' - यही कारण है कि यशोधरा के जीवन का संबल, उसका आधार, उसका पुत्र राहुल है । वह अपने आप के लिए जी नहीं रही है बल्कि अपनी गूदड़ी के लाल के लिए आँखो का खारा पानी पी रही है। राहुल किशोर हो गया है, वह दुनियाँ को समझने लगा है और दुनियाँदारी को भी । राहुल अपने माँ की अन्तर्व्यथा से परिचित हो चला है और इसीलिए अ यशोधरा भी अपनी करुण कहानी अपने पुत्र से नहीं क्योंकि राहुल बड़ा हो गया है और वह जीवन के सुच-दुखः का भागी है। इसी हेतु वद राहुल से अपने को पीडा को स्पष्ट शब्दों में कहती है मातृत्व रूप का सुन्दर, निदर्शन प्रस्तुत करती है। राहुल माता की दयनीय दशा की भागी बन गया है और वह समझता है कि मेरी माना
यशोधरा में गुरुजी की नारी- भावना पारिवारिक स्नेहही विश्व-प्रेम का जन्मदाता है। जननी 'तुच्छ न समझो मुझको नाथ । यशोधरा यह अच्छी तरह समझती है कि नारी के मातृत्व रूप का गौरव बुद्ध की तपस्या से किसी भी अंश में, कम नहींइसीलिए अपने प्राणेश्वर को स्पष्ट शब्दों में कहा है अमृत तुम्हारी अंजलि में तो भाजन मेरे हाथ । तुल्य दृष्टि यदि तुम्ने पाई तो हममे ही सृष्टि समाई । स्वयं स्वजनता में वह 'बेटा रे, प्रसव की-सी पीडा मुझे होती है।' देकर हम स्वजनों का साथ ।' - यही कारण है कि यशोधरा के जीवन का संबल, उसका आधार, उसका पुत्र राहुल है । वह अपने आप के लिए जी नहीं रही है बल्कि अपनी गूदड़ी के लाल के लिए आँखो का खारा पानी पी रही है। राहुल किशोर हो गया है, वह दुनियाँ को समझने लगा है और दुनियाँदारी को भी । राहुल अपने माँ की अन्तर्व्यथा से परिचित हो चला है और इसीलिए अ यशोधरा भी अपनी करुण कहानी अपने पुत्र से नहीं क्योंकि राहुल बड़ा हो गया है और वह जीवन के सुच-दुखः का भागी है। इसी हेतु वद राहुल से अपने को पीडा को स्पष्ट शब्दों में कहती है मातृत्व रूप का सुन्दर, निदर्शन प्रस्तुत करती है। राहुल माता की दयनीय दशा की भागी बन गया है और वह समझता है कि मेरी माना
जिला फैजाबाद, ब्लक मया, गांव टन्डौली मा टीकाकरण तौ हुआ थै लकिन सिर्फ खाना पूर्ति के ताई। मनईन का सही से पोषाहार नाय मिल पावत बाय।23 नवम्बर का जब ऐ एन एम जांच करिन तौ एक गर्भवती मा हाईरिस्क हीमोग्लोबिन कै कमी पाई गए। अउर एक गेदहरा कुपोषित मिला। उनका जिला अस्पताल मा दवा लियै कै सलाह दीन गए बाय। गर्भवती मेहरारू अनीता कै कहब बाय की आयरन कै गोली नाय मिली बाय। अबकी दूसरी ब़ार टीका लाग।गेद्हरा कै मा मीना कै कहब बाय की सिर्फ टीका लागा थै। ऐ एन एम शारदा देवी कै कहब बाय कि जवन टीका लगावत हई ऊ बी सी जी कै टीका आय जवन की टी बी रोग के ताई बाय। ई क्षय रोग से बचावाथै। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सविता सिंह कै कहब बाय की हमरे सबके पास पैसा नाय बाय। प्रधान सारा पैसा लै लहे बाटे। गर्भवती खाना खाय आवै से मना कै दिहिन तौ खाना के बदले डबल फल दीन जात रहा।31 अक्टूबर से 17 नवम्बर तक दीन गा वक्रे बाद पैसा न हुवय के कारण बंद बाय। कुपोषण से लड़े के ताई येहि समय कउनौ पोषाहार नाय दीन जात बाय।
जिला फैजाबाद, ब्लक मया, गांव टन्डौली मा टीकाकरण तौ हुआ थै लकिन सिर्फ खाना पूर्ति के ताई। मनईन का सही से पोषाहार नाय मिल पावत बाय।तेईस नवम्बर का जब ऐ एन एम जांच करिन तौ एक गर्भवती मा हाईरिस्क हीमोग्लोबिन कै कमी पाई गए। अउर एक गेदहरा कुपोषित मिला। उनका जिला अस्पताल मा दवा लियै कै सलाह दीन गए बाय। गर्भवती मेहरारू अनीता कै कहब बाय की आयरन कै गोली नाय मिली बाय। अबकी दूसरी ब़ार टीका लाग।गेद्हरा कै मा मीना कै कहब बाय की सिर्फ टीका लागा थै। ऐ एन एम शारदा देवी कै कहब बाय कि जवन टीका लगावत हई ऊ बी सी जी कै टीका आय जवन की टी बी रोग के ताई बाय। ई क्षय रोग से बचावाथै। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सविता सिंह कै कहब बाय की हमरे सबके पास पैसा नाय बाय। प्रधान सारा पैसा लै लहे बाटे। गर्भवती खाना खाय आवै से मना कै दिहिन तौ खाना के बदले डबल फल दीन जात रहा।इकतीस अक्टूबर से सत्रह नवम्बर तक दीन गा वक्रे बाद पैसा न हुवय के कारण बंद बाय। कुपोषण से लड़े के ताई येहि समय कउनौ पोषाहार नाय दीन जात बाय।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 बैच के उन आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया जिन्हें हाल ही में भारत सरकार में सहायक सचिव के पदों पर नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार के काम में नवीनता और ताजगी का संचार करना है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो हज़ार सत्रह बैच के उन आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया जिन्हें हाल ही में भारत सरकार में सहायक सचिव के पदों पर नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार के काम में नवीनता और ताजगी का संचार करना है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
गाना बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट का दिल्ली एडिशन एशिया का सबसे बड़ा विविध जोनर वाला बॉलीवुड संगीत फेस्टिवल है। यह फेस्टिवल दूसरी बार जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम मैदान में 27 और 28 जनवरी, 2018 को अपना जलवा बिखेरने के लिए तैयार है। इसमें बॉलीवुड संगीत के हर जोनर के एक से बढ़कर एक बड़े नाम शिरकत करने वाले हैं। गाना बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट के दूसरे सीजन में हम बहुमुखी प्रतिभा वाले अभिनेता, फिल्म-मेकर और सिंगर परफॉर्मर फरहान अख्तर को अपने रॉक बैंड फरहान लाइव के साथ परफॉर्म करते हुए देख पायेंगे। दर्शकों को बेहद प्रतिभाशाली फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, प्रोड्यूसर, संगीतकार और प्लेबैक सिंगर विशाल भारद्वाज को भी इस फेस्टिवल में परफॉर्म करते हुए देखने का मौका मिलेगा। इस सीजन में दर्शकगण परफॉर्म करने वाले अन्य कलाकारों में अमिताभ भट्टाचार्य को शिरकत करते हुए देखेंगे, जो पहली बार परफॉर्म करने वाले हैं। प्लेबैक सिंगर शाल्मली खोलगड़े बॉलीवुड के अपने चर्चित गानों पर परफॉर्म करने वाली हैं। अनप्लग्ड किंग के नाम से मशहूर सूर्यांश प्रोजेक्टर, कव्वाली के रॉक स्टांर फरहान साबरी, पारस मान और पृथ्वी गंधर्व के साथ कई अन्य कलाकार जैसे कि आशीष छाबड़ा, मिलिंद गाबा - मैलो डी, जेफिर और सिमर कौर, जुबली बरुआ, गौरव दत्ता और गोल्डी सोहेल इस फेस्टिवल में परफॉर्म करने वाले हैं। गाना बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट के इस सीजन को बहुत ही बेहतर तरीके से तैयार किया गया है, जिसमें बॉलीवुड संगीत का लगभग हर जोनर शामिल है। संगीत आनंद देने वाली एक कला है, जिसे हर कोई पसंद करता है। संगीत को उसके तत्वों, भाव, टोन के आधार पर कई जोनर में बांटा जा सकता है। दिल्ली की जनता संगीत के अलग-अलग स्वाद का लुत्फ उठा पायेगी, जैसे सूफी, हिप-हॉप, कव्वाली, पंजाबी, फोक, पॉप, कर्मिशियल, इलेक्ट्रिॉनिक्स और अनप्लग्ड।
गाना बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट का दिल्ली एडिशन एशिया का सबसे बड़ा विविध जोनर वाला बॉलीवुड संगीत फेस्टिवल है। यह फेस्टिवल दूसरी बार जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम मैदान में सत्ताईस और अट्ठाईस जनवरी, दो हज़ार अट्ठारह को अपना जलवा बिखेरने के लिए तैयार है। इसमें बॉलीवुड संगीत के हर जोनर के एक से बढ़कर एक बड़े नाम शिरकत करने वाले हैं। गाना बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट के दूसरे सीजन में हम बहुमुखी प्रतिभा वाले अभिनेता, फिल्म-मेकर और सिंगर परफॉर्मर फरहान अख्तर को अपने रॉक बैंड फरहान लाइव के साथ परफॉर्म करते हुए देख पायेंगे। दर्शकों को बेहद प्रतिभाशाली फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, प्रोड्यूसर, संगीतकार और प्लेबैक सिंगर विशाल भारद्वाज को भी इस फेस्टिवल में परफॉर्म करते हुए देखने का मौका मिलेगा। इस सीजन में दर्शकगण परफॉर्म करने वाले अन्य कलाकारों में अमिताभ भट्टाचार्य को शिरकत करते हुए देखेंगे, जो पहली बार परफॉर्म करने वाले हैं। प्लेबैक सिंगर शाल्मली खोलगड़े बॉलीवुड के अपने चर्चित गानों पर परफॉर्म करने वाली हैं। अनप्लग्ड किंग के नाम से मशहूर सूर्यांश प्रोजेक्टर, कव्वाली के रॉक स्टांर फरहान साबरी, पारस मान और पृथ्वी गंधर्व के साथ कई अन्य कलाकार जैसे कि आशीष छाबड़ा, मिलिंद गाबा - मैलो डी, जेफिर और सिमर कौर, जुबली बरुआ, गौरव दत्ता और गोल्डी सोहेल इस फेस्टिवल में परफॉर्म करने वाले हैं। गाना बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट के इस सीजन को बहुत ही बेहतर तरीके से तैयार किया गया है, जिसमें बॉलीवुड संगीत का लगभग हर जोनर शामिल है। संगीत आनंद देने वाली एक कला है, जिसे हर कोई पसंद करता है। संगीत को उसके तत्वों, भाव, टोन के आधार पर कई जोनर में बांटा जा सकता है। दिल्ली की जनता संगीत के अलग-अलग स्वाद का लुत्फ उठा पायेगी, जैसे सूफी, हिप-हॉप, कव्वाली, पंजाबी, फोक, पॉप, कर्मिशियल, इलेक्ट्रिॉनिक्स और अनप्लग्ड।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। निर्वात को प्रदर्शित करने हेतु एक पम्प जब आकाश (स्पेस) के किसी आयतन में कोई पदार्थ नहीं होता तो कहा जाता है कि वह आयतन निर्वात (वैक्युम्) है। निर्वात की स्थिति में गैसीय दाब, वायुमण्डलीय दाब की तुलना में बहुत कम होता है। किन्तु स्पेस का कोई भी आयतन पूर्णतः निर्वात हो ही नहीं सकता। . बेंजामिन फ्रैंकलिन का तड़ित सम्बन्धी प्रयोग किसी वैज्ञानिक जिज्ञासा (scientific inquiry) के समाधान के लिये उससे सम्बन्धित क्षेत्र में और अधिक आंकड़े (data) एकत्र करने जी आवश्यकता होती है। इन आंकड़ों की प्राप्ति के लिये जो कुछ किया जाता है उसे प्रयोग (experiment) कहते हैं। प्रयोग, वैज्ञानिक विधि का प्रमुख स्तम्भ है। प्रयोग करना एवं आंकड़े प्राप्त करना इसलिये भी जरूरी है ताकि सिद्धान्त के प्रतिपादन में कहीं पूर्वाग्रह या पक्षपात आड़े न आ जाँए। किसी क्षेत्र के गहन अध्ययन एवं ज्ञान के लिये प्रयोग का बहुत महत्व है। प्राकृतिक एवं सामाजिक दोनो ही विज्ञानों में प्रयोग की महती भूमिका है। व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में, कम ज्ञात क्षेत्रों के और अधिक जानकारी प्राप्ति के लिये तथा सैद्धान्तिक मान्यताओं (theoretical assumptions) की जाँच के लिये प्रयोग करने की जरूरत पड़ती रहती है। कुछ प्रयोग इसलिये नहीं किये जा सकते कि वे बहुत महंगे हो सकते हैं, बहुत भयंकर हो सकते हैं या उन्हें करना नैतिक दृष्टि से मान्य नहीं है। . निर्वात और प्रयोग आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। निर्वात 11 संबंध है और प्रयोग 9 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (11 + 9)। यह लेख निर्वात और प्रयोग के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। निर्वात को प्रदर्शित करने हेतु एक पम्प जब आकाश के किसी आयतन में कोई पदार्थ नहीं होता तो कहा जाता है कि वह आयतन निर्वात है। निर्वात की स्थिति में गैसीय दाब, वायुमण्डलीय दाब की तुलना में बहुत कम होता है। किन्तु स्पेस का कोई भी आयतन पूर्णतः निर्वात हो ही नहीं सकता। . बेंजामिन फ्रैंकलिन का तड़ित सम्बन्धी प्रयोग किसी वैज्ञानिक जिज्ञासा के समाधान के लिये उससे सम्बन्धित क्षेत्र में और अधिक आंकड़े एकत्र करने जी आवश्यकता होती है। इन आंकड़ों की प्राप्ति के लिये जो कुछ किया जाता है उसे प्रयोग कहते हैं। प्रयोग, वैज्ञानिक विधि का प्रमुख स्तम्भ है। प्रयोग करना एवं आंकड़े प्राप्त करना इसलिये भी जरूरी है ताकि सिद्धान्त के प्रतिपादन में कहीं पूर्वाग्रह या पक्षपात आड़े न आ जाँए। किसी क्षेत्र के गहन अध्ययन एवं ज्ञान के लिये प्रयोग का बहुत महत्व है। प्राकृतिक एवं सामाजिक दोनो ही विज्ञानों में प्रयोग की महती भूमिका है। व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में, कम ज्ञात क्षेत्रों के और अधिक जानकारी प्राप्ति के लिये तथा सैद्धान्तिक मान्यताओं की जाँच के लिये प्रयोग करने की जरूरत पड़ती रहती है। कुछ प्रयोग इसलिये नहीं किये जा सकते कि वे बहुत महंगे हो सकते हैं, बहुत भयंकर हो सकते हैं या उन्हें करना नैतिक दृष्टि से मान्य नहीं है। . निर्वात और प्रयोग आम में शून्य बातें हैं । निर्वात ग्यारह संबंध है और प्रयोग नौ है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख निर्वात और प्रयोग के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
इंडिया न्यूज़, Health Tips When Not Hungry : अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको अपने खान-पान का ध्यान रखना होगा। क्योंकि स्वास्थ रहने के लिए खान-पान का अच्छा होना बहुत जरूरी है, लेकिन आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के ऊपर तनाव और काम का प्रेशर ज्यादा है, जिसके चलते व्यक्ति खान-पान पर ध्यान नहीं देते बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं, जिनको भूख नहीं लगती है। जिन लोगों को भूख न लगने की समस्या रहती है, उनके सामने चाहे कितना भी स्वादिष्ट खाना रख दें तो भी उनका खाने का मन नहीं होता। आपको पेट से जुड़ी समयस्याएं हो सकती है, जैसे-कब्ज, पेट के वायरस, भोजन संबधी विकार, गलत समय या अलग-अलग समय पर खाना खाना, भूख न लगने के कारण हो सकते हैं और बहुत ऐसे लोग होते है जो तनाव (Tension) में होते है। जिसकी वजह से शरीर (Body) में कुछ हार्मोनल डिस्बैलेंस (Hormonal Dysbalance) के कारण उसे भूख नहीं लगती है। भूख ना लगने के क्या कारण हो सकते है? अगर आपको भूख नहीं लगती है तो इसके बहुत से कारण हो सकते है, जैसे-व्यक्ति यदि किसी तनाव (Tension) में होता है तो उसे भूख नहीं लगती है या फिर उसके शरीर में हार्मोंस में बदलाव आते है तो इस वजह से भी भूख न लगने की दिक्कत होती है। इसके अलावा यदि कोई पुरानी बीमारी होती है तो उसका भी उसके खाने पर असर पड़ता है। खाना खाने का मन नहीं करता तो क्या करें? अगर आपका मन खाना खाने का नहीं है तो आप थोड़ी-थोड़ी देर में खाना खाएं और आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें। सबके साथ बैठकर खाना खाएं। सुबह नाश्ता जरूर लें और अधिक मात्रा में पानी पीते रहें। भूख ना लगने की समस्या को एनोरेक्सिया कहते हैं। इसमें व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कमजोरी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को भूख न लगने की समस्या लंबे समय तक रहती है तो उसके वजन में कमी आ सकती है और उसकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। भूख न लगने पर अपनी दिनचर्या में यह बदलाव करें। अगर आप एक बार में पूरा खाना खाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी देर बाद खाना खाने की कोशिश करें। इसे तीन समय के लिए बांट दें, इससे पाचन भी अच्छा होता है और भूख भी सही से लगती है। आप अपने स्वास्थ्य को सही रखना चाहते है तो आप आहार में पोषक तत्व को शामिल करें। इससे स्वास्थ्य बेहतर होगा। जंक फूड बिल्कुल ना लें, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। अगर आप घर में सबके साथ खाना बैठकर खाते है तो भूख अधिक लगती है और इससे खाना अधिक खाने लगते है। अकेले बैठकर खाना खाने से भूख कम लगती है। सुबह के समय नाश्ता जरूर करना चाहिए और खाने में प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें। सुबह उठकर दिनभर के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। रात में हल्का फुल्का भोजन लेना चाहिए। अगर आप ज्यादा मात्रा में पानी का सेवन करते है तो पानी पीने से शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है और पेट साफ रहता है, जिसके कारण ठीक तरह से भूख लगती है। पानी त्वचा की सुंदरता बढ़ाने में भी मदद करता है। एक दिन में कम से कम 5 से 6 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। भूख ना लगने पर अनार, आंवला, इलायची, अजवाइन और नींबू आदि चीजों का सेवन करना चाहिए। यह सभी चीजें स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती हैं। इन्हें खाने से शरीर में कई पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है। इसके अलावा व्यायाम करना भी बेहद जरूरी है। इससे भी भूख नहीं लगने की समस्या ठीक हो जाती है। इससे भूख जल्दी लगती है। निष्कर्ष : अगर आप भूख ना लगने के कारण से परेशान है तो आप इन घरेलू नुस्खों को अपनायें। Disclaimer : इन घरेलू नुस्खों को भी अपनाकर देखना चाहिए और डॉक्टर की सलाह भी लें। इन नुस्खों पर ही आधारित न रहें।
इंडिया न्यूज़, Health Tips When Not Hungry : अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको अपने खान-पान का ध्यान रखना होगा। क्योंकि स्वास्थ रहने के लिए खान-पान का अच्छा होना बहुत जरूरी है, लेकिन आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के ऊपर तनाव और काम का प्रेशर ज्यादा है, जिसके चलते व्यक्ति खान-पान पर ध्यान नहीं देते बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं, जिनको भूख नहीं लगती है। जिन लोगों को भूख न लगने की समस्या रहती है, उनके सामने चाहे कितना भी स्वादिष्ट खाना रख दें तो भी उनका खाने का मन नहीं होता। आपको पेट से जुड़ी समयस्याएं हो सकती है, जैसे-कब्ज, पेट के वायरस, भोजन संबधी विकार, गलत समय या अलग-अलग समय पर खाना खाना, भूख न लगने के कारण हो सकते हैं और बहुत ऐसे लोग होते है जो तनाव में होते है। जिसकी वजह से शरीर में कुछ हार्मोनल डिस्बैलेंस के कारण उसे भूख नहीं लगती है। भूख ना लगने के क्या कारण हो सकते है? अगर आपको भूख नहीं लगती है तो इसके बहुत से कारण हो सकते है, जैसे-व्यक्ति यदि किसी तनाव में होता है तो उसे भूख नहीं लगती है या फिर उसके शरीर में हार्मोंस में बदलाव आते है तो इस वजह से भी भूख न लगने की दिक्कत होती है। इसके अलावा यदि कोई पुरानी बीमारी होती है तो उसका भी उसके खाने पर असर पड़ता है। खाना खाने का मन नहीं करता तो क्या करें? अगर आपका मन खाना खाने का नहीं है तो आप थोड़ी-थोड़ी देर में खाना खाएं और आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें। सबके साथ बैठकर खाना खाएं। सुबह नाश्ता जरूर लें और अधिक मात्रा में पानी पीते रहें। भूख ना लगने की समस्या को एनोरेक्सिया कहते हैं। इसमें व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कमजोरी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को भूख न लगने की समस्या लंबे समय तक रहती है तो उसके वजन में कमी आ सकती है और उसकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। भूख न लगने पर अपनी दिनचर्या में यह बदलाव करें। अगर आप एक बार में पूरा खाना खाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी देर बाद खाना खाने की कोशिश करें। इसे तीन समय के लिए बांट दें, इससे पाचन भी अच्छा होता है और भूख भी सही से लगती है। आप अपने स्वास्थ्य को सही रखना चाहते है तो आप आहार में पोषक तत्व को शामिल करें। इससे स्वास्थ्य बेहतर होगा। जंक फूड बिल्कुल ना लें, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। अगर आप घर में सबके साथ खाना बैठकर खाते है तो भूख अधिक लगती है और इससे खाना अधिक खाने लगते है। अकेले बैठकर खाना खाने से भूख कम लगती है। सुबह के समय नाश्ता जरूर करना चाहिए और खाने में प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें। सुबह उठकर दिनभर के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। रात में हल्का फुल्का भोजन लेना चाहिए। अगर आप ज्यादा मात्रा में पानी का सेवन करते है तो पानी पीने से शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है और पेट साफ रहता है, जिसके कारण ठीक तरह से भूख लगती है। पानी त्वचा की सुंदरता बढ़ाने में भी मदद करता है। एक दिन में कम से कम पाँच से छः लीटरटर पानी जरूर पीना चाहिए। भूख ना लगने पर अनार, आंवला, इलायची, अजवाइन और नींबू आदि चीजों का सेवन करना चाहिए। यह सभी चीजें स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती हैं। इन्हें खाने से शरीर में कई पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है। इसके अलावा व्यायाम करना भी बेहद जरूरी है। इससे भी भूख नहीं लगने की समस्या ठीक हो जाती है। इससे भूख जल्दी लगती है। निष्कर्ष : अगर आप भूख ना लगने के कारण से परेशान है तो आप इन घरेलू नुस्खों को अपनायें। Disclaimer : इन घरेलू नुस्खों को भी अपनाकर देखना चाहिए और डॉक्टर की सलाह भी लें। इन नुस्खों पर ही आधारित न रहें।
जब से टीम इंडिया ने लंदन की फ्लाइट पकड़ी है, कोच और खिलाड़ियों के बीच मन-मुटाव की खबरों ने सुर्खिया बनायीं हुई है. कुंबले पर सीनियर खिलाड़ियों द्वारा ड्रेसिंग रूम का माहौल खराब करने और आज़ादी पर लगाम लगाने के आरोप लगाये गए. हम हमेशा उनके विचारों और तकनीक पर भरोसा जताते रहे थे, केवल इसलिए नहीं क्योंकि वो एक सीनियर खिलाड़ी थे, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी रणनीति हमारे लिए नतीजे निकाल कर दे रही थी. कुंबले क्या ज्यादा कठोर है? कोच या कप्तान टीम इंडिया में किसके पास होती है ज्यादा ताकत?
जब से टीम इंडिया ने लंदन की फ्लाइट पकड़ी है, कोच और खिलाड़ियों के बीच मन-मुटाव की खबरों ने सुर्खिया बनायीं हुई है. कुंबले पर सीनियर खिलाड़ियों द्वारा ड्रेसिंग रूम का माहौल खराब करने और आज़ादी पर लगाम लगाने के आरोप लगाये गए. हम हमेशा उनके विचारों और तकनीक पर भरोसा जताते रहे थे, केवल इसलिए नहीं क्योंकि वो एक सीनियर खिलाड़ी थे, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी रणनीति हमारे लिए नतीजे निकाल कर दे रही थी. कुंबले क्या ज्यादा कठोर है? कोच या कप्तान टीम इंडिया में किसके पास होती है ज्यादा ताकत?
लखनऊः(वर्तिका सिंह) ग्लैमर और फैशन उद्योग में एक नाम बन चुकी, युवा प्रतिभाओं के जीवन को बदलने की विरासत के साथ, मिस दीवा प्रतियोगिता अपने 7वें संस्करण में उस नई पीढ़ी के लिए पूरे दिल से समर्थन देने के उद्देश्य से अपनी परंपरा को जारी रखने का संकल्प लेती है, जिनमें भविष्य में देश का नेतृत्व और प्रतिनिधित्व करने की क्षमता है। मिस यूनिवर्स खिताब रहा है इनकाः कई मिस यूनिवर्स खिताब सुष्मिता सेन (1994), लारादत्ता (2000) के साथ दो मिस सुप्रा नेशनल विजेता आशा भट (2014), श्री निधि शेट्टी (2016) और सृष्टि राणा की 2013 में मिस एशिया पैसिफिक की जीत के साथ हमारे प्रतिनिधियों ने वैश्विक मंच पर देश को गौरवान्वित किया है। यह चकाचौंध और ग्लैमर से भरी रात थी, क्योंकि 26 सितंबर 2019 को धूमधाम से रॉकी स्टार कॉकटेल बार लाउंज में सितारों से भरे एक समारोह में विजेताओं की घोषणा की गई। इस प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता ने वर्तिका सिंह को मिस दिवा यूनिवर्स २०१९ घोषित किया। इस कार्यक्रम में क्वीन कंगना रनौत भी मौजूद थी। प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने वाली उत्तर प्रदेश के लखनऊ की वर्तिका सिंह अब इस साल के अंत में विश्व की सबसे प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता - मिस यूनिवर्स 2019 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने मिस दीवा 2014 में भाग लेकरअपनी यात्रा शुरू की थी, बाद में फेमिना मिस इंडिया 2015 में जहां उन्होंने मिस ग्रैंड इंडिया 2015 का खिताब जीता और इसके बाद मिस ग्रैंड इंटरनेशनल 2015 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां वह सेकंड रनर-अप के रूप में उभरीं। इस अनावरण समारोह में, वर्तिका को नेहा लचुड़ासमा, मिस दीवा यूनिवर्स 2018 से सम्मानित किया गया। लखनऊ में हुआ जन्मः लखनऊ में जन्मी, वर्तिका सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा कैनोसा कॉन्वेंट स्कूल से की, और आईटी कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली और फिर लखनऊ विश्वविद्यालय से सार्वजनिक स्वास्थ्य में स्नोतकोत्तर डिग्री प्राप्त की। वर्तिका अपने राज्य के विश्वबैंक के स्वास्थ्य देखभाल परियोजना का एक हिस्सा रही हैं। महिलाओं और बच्चों के पोषणऔर स्वास्थ्य पर उनकी पहल के लिए उन्हें उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह "मेरा लखनऊ" प्रोजेक्ट का चेहरा भी हैं और महात्मा गांधी की अहिंसा की विचारधारा में विश्वास करती हैं। वह प्योर ह्यूमन के नाम से अपने खुद के एनजीओ का नेतृत्व करती हैं, 2017 में किंगफिशर कैलेंडर गर्ल होने के अलावा, कई फैशन ब्रांड्स का चेहरा भी हैं। मिस दीवा के बारे मेंः मिस दीवा देश में सबसे लोकप्रिय ग्लैमरस सौंदर्य प्रतियोगिता का मेज़बान है जो सपनों को हकीकत में बदल देती है। यह दुनिया भर में भारत के अगले प्रतिनिधि को देखने के लिए एक विशालअपील के रूप में लाखों लोगों का पसंदीदा कार्यक्रम है। यह मिस यूनिवर्स और मिससुप्रा नेशनल में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुंदरता, शिष्टता, लालित्य और बुद्धिमत्तावाली परिपूर्ण महिला की खोज है। यह एक ऐसा मंच है जिसनेअंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में देश के लिए कई पुरस्कार जीते हैं और पिछले विजेताओं जैसे सुष्मिता सेन, लारादत्ता, आशाभट्ट और श्रीनिधि शेट्टी ने भारत कोअंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
लखनऊः ग्लैमर और फैशन उद्योग में एक नाम बन चुकी, युवा प्रतिभाओं के जीवन को बदलने की विरासत के साथ, मिस दीवा प्रतियोगिता अपने सातवें संस्करण में उस नई पीढ़ी के लिए पूरे दिल से समर्थन देने के उद्देश्य से अपनी परंपरा को जारी रखने का संकल्प लेती है, जिनमें भविष्य में देश का नेतृत्व और प्रतिनिधित्व करने की क्षमता है। मिस यूनिवर्स खिताब रहा है इनकाः कई मिस यूनिवर्स खिताब सुष्मिता सेन , लारादत्ता के साथ दो मिस सुप्रा नेशनल विजेता आशा भट , श्री निधि शेट्टी और सृष्टि राणा की दो हज़ार तेरह में मिस एशिया पैसिफिक की जीत के साथ हमारे प्रतिनिधियों ने वैश्विक मंच पर देश को गौरवान्वित किया है। यह चकाचौंध और ग्लैमर से भरी रात थी, क्योंकि छब्बीस सितंबर दो हज़ार उन्नीस को धूमधाम से रॉकी स्टार कॉकटेल बार लाउंज में सितारों से भरे एक समारोह में विजेताओं की घोषणा की गई। इस प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता ने वर्तिका सिंह को मिस दिवा यूनिवर्स दो हज़ार उन्नीस घोषित किया। इस कार्यक्रम में क्वीन कंगना रनौत भी मौजूद थी। प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने वाली उत्तर प्रदेश के लखनऊ की वर्तिका सिंह अब इस साल के अंत में विश्व की सबसे प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता - मिस यूनिवर्स दो हज़ार उन्नीस में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने मिस दीवा दो हज़ार चौदह में भाग लेकरअपनी यात्रा शुरू की थी, बाद में फेमिना मिस इंडिया दो हज़ार पंद्रह में जहां उन्होंने मिस ग्रैंड इंडिया दो हज़ार पंद्रह का खिताब जीता और इसके बाद मिस ग्रैंड इंटरनेशनल दो हज़ार पंद्रह में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां वह सेकंड रनर-अप के रूप में उभरीं। इस अनावरण समारोह में, वर्तिका को नेहा लचुड़ासमा, मिस दीवा यूनिवर्स दो हज़ार अट्ठारह से सम्मानित किया गया। लखनऊ में हुआ जन्मः लखनऊ में जन्मी, वर्तिका सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा कैनोसा कॉन्वेंट स्कूल से की, और आईटी कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली और फिर लखनऊ विश्वविद्यालय से सार्वजनिक स्वास्थ्य में स्नोतकोत्तर डिग्री प्राप्त की। वर्तिका अपने राज्य के विश्वबैंक के स्वास्थ्य देखभाल परियोजना का एक हिस्सा रही हैं। महिलाओं और बच्चों के पोषणऔर स्वास्थ्य पर उनकी पहल के लिए उन्हें उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह "मेरा लखनऊ" प्रोजेक्ट का चेहरा भी हैं और महात्मा गांधी की अहिंसा की विचारधारा में विश्वास करती हैं। वह प्योर ह्यूमन के नाम से अपने खुद के एनजीओ का नेतृत्व करती हैं, दो हज़ार सत्रह में किंगफिशर कैलेंडर गर्ल होने के अलावा, कई फैशन ब्रांड्स का चेहरा भी हैं। मिस दीवा के बारे मेंः मिस दीवा देश में सबसे लोकप्रिय ग्लैमरस सौंदर्य प्रतियोगिता का मेज़बान है जो सपनों को हकीकत में बदल देती है। यह दुनिया भर में भारत के अगले प्रतिनिधि को देखने के लिए एक विशालअपील के रूप में लाखों लोगों का पसंदीदा कार्यक्रम है। यह मिस यूनिवर्स और मिससुप्रा नेशनल में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुंदरता, शिष्टता, लालित्य और बुद्धिमत्तावाली परिपूर्ण महिला की खोज है। यह एक ऐसा मंच है जिसनेअंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में देश के लिए कई पुरस्कार जीते हैं और पिछले विजेताओं जैसे सुष्मिता सेन, लारादत्ता, आशाभट्ट और श्रीनिधि शेट्टी ने भारत कोअंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले निकाय चुनाव पर रोक लगाने वाली अर्जी पर 20 जनवरी 2023 की तारीख तय की है। बताते चले कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा डेडीकेटेड आयोग को खारिज करने के बाद इलेक्शन को लेकर डेट का ऐलान किया था. के अनुसार 18 दिसंबर को पहले चरण का चुनाव होंगे वही इसकी गिनती 20 दिसंबर को किया जाएगा. दूसरे चरण का चुनाव 28 दिसंबर को किया जाएगा जिसकी गिनती 30 दिसंबर को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने पहले निकाय चुनाव पर रोक लगाने वाली अर्जी पर बीस जनवरी दो हज़ार तेईस की तारीख तय की है। बताते चले कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा डेडीकेटेड आयोग को खारिज करने के बाद इलेक्शन को लेकर डेट का ऐलान किया था. के अनुसार अट्ठारह दिसंबर को पहले चरण का चुनाव होंगे वही इसकी गिनती बीस दिसंबर को किया जाएगा. दूसरे चरण का चुनाव अट्ठाईस दिसंबर को किया जाएगा जिसकी गिनती तीस दिसंबर को होगी.
इस्लामाबाद, 13 सितंबर (भाषा) पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान के साथ निरंतर जुड़ाव का आह्वान किया, जहां अब तालिबान का शासन है। विदेश कार्यालय ने इसकी जानकारी दी । विदेश कार्यालय के अनुसार, अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पर डिजिटल माध्यम से जिनेवा में आयोजित उच्च स्तर की मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कुरैशी ने "आर्थिक और राजनीतिक समर्थन दोनों के मामले में अफगान लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान किया। " उन्होंने विकासात्मक साझेदारी को नवीकृत करने, राष्ट्र निर्माण का समर्थन करने और अफगान लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कुरैशी ने दुनिया को पाकिस्तान द्वारा जारी मानवीय सहायता के कई तरीकों से अवगत कराया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को निकालने और स्थानांतरित करने की सुविधा, राहत सामग्री की डिलीवरी के लिए एक मानवीय गलियारे की स्थापना और हवाई व जमीनी मार्ग के माध्यम से अफगान लोगों की सहायता शामिल है। बैठक की मेजबानी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने की, जिसमें ओसीएचए, यूनिसेफ, डब्ल्यूएफपी, यूएनएफपीए, यूनएचएचसीआर और आईसीआरसी सहित विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुखों ने शिरकत की। बैठक में स्विट्जरलैंड, कतर, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका, तुर्की और फ्रांस सहित विभिन्न देशों के कई मंत्रियों ने भी भाग लिया।
इस्लामाबाद, तेरह सितंबर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान के साथ निरंतर जुड़ाव का आह्वान किया, जहां अब तालिबान का शासन है। विदेश कार्यालय ने इसकी जानकारी दी । विदेश कार्यालय के अनुसार, अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पर डिजिटल माध्यम से जिनेवा में आयोजित उच्च स्तर की मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कुरैशी ने "आर्थिक और राजनीतिक समर्थन दोनों के मामले में अफगान लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान किया। " उन्होंने विकासात्मक साझेदारी को नवीकृत करने, राष्ट्र निर्माण का समर्थन करने और अफगान लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कुरैशी ने दुनिया को पाकिस्तान द्वारा जारी मानवीय सहायता के कई तरीकों से अवगत कराया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को निकालने और स्थानांतरित करने की सुविधा, राहत सामग्री की डिलीवरी के लिए एक मानवीय गलियारे की स्थापना और हवाई व जमीनी मार्ग के माध्यम से अफगान लोगों की सहायता शामिल है। बैठक की मेजबानी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने की, जिसमें ओसीएचए, यूनिसेफ, डब्ल्यूएफपी, यूएनएफपीए, यूनएचएचसीआर और आईसीआरसी सहित विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुखों ने शिरकत की। बैठक में स्विट्जरलैंड, कतर, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका, तुर्की और फ्रांस सहित विभिन्न देशों के कई मंत्रियों ने भी भाग लिया।
उन्होने आगे बात की वह किस बड़ी राइड पर जाने के लिए किस प्रकार की बाइक का उपयोग करते है। " जब सड़के खाली हो तो उस पर सफर करना काफी मजेदार होता है। मैं अभी राइड का आनंद लेता हूं। मुझे बाइक पर लंबी राइड पर जाना पसंद है।" फिर उन्होने विंक के साथ वीडियो समाप्त किया। इससे पहले अपलोड किए गए एक अन्य वीडियो में, दाएं हाथ के बल्लेबाज ने विज्ञापन शूट से कुछ मजेदार क्षणों को साझा किया। क्लिप में, कोहली को विज्ञापन की शूटिंग के दौरान लड़खड़ाते हुए देखा गया था। कोहली न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में शुरूआती 3 मैच खेलकर बाहर हो गए थे और उन्होने उसके बाद आखिरी के दो वनडे और 3 टी-20 मैचो की सीरीज में भाग नही लिया था। उनके कार्यभार को देखते हुए बीसीसीआई ने उन्हे विश्वकप से पहले आराम करने के लिए समय दिया था। न्यूजीलैंड दौरे से पहले, बल्लेबाज ने अक्टूबर से लेकर मार्च तक लगातार क्रिकेट खेली थी। कोहली अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 24 फरवरी से 2 टी-20 औऱ पांच एकदिवसीय मैचो के लिए टीम से प्रतिनिधत्व करते नजर आएंगे।
उन्होने आगे बात की वह किस बड़ी राइड पर जाने के लिए किस प्रकार की बाइक का उपयोग करते है। " जब सड़के खाली हो तो उस पर सफर करना काफी मजेदार होता है। मैं अभी राइड का आनंद लेता हूं। मुझे बाइक पर लंबी राइड पर जाना पसंद है।" फिर उन्होने विंक के साथ वीडियो समाप्त किया। इससे पहले अपलोड किए गए एक अन्य वीडियो में, दाएं हाथ के बल्लेबाज ने विज्ञापन शूट से कुछ मजेदार क्षणों को साझा किया। क्लिप में, कोहली को विज्ञापन की शूटिंग के दौरान लड़खड़ाते हुए देखा गया था। कोहली न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में शुरूआती तीन मैच खेलकर बाहर हो गए थे और उन्होने उसके बाद आखिरी के दो वनडे और तीन टी-बीस मैचो की सीरीज में भाग नही लिया था। उनके कार्यभार को देखते हुए बीसीसीआई ने उन्हे विश्वकप से पहले आराम करने के लिए समय दिया था। न्यूजीलैंड दौरे से पहले, बल्लेबाज ने अक्टूबर से लेकर मार्च तक लगातार क्रिकेट खेली थी। कोहली अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौबीस फरवरी से दो टी-बीस औऱ पांच एकदिवसीय मैचो के लिए टीम से प्रतिनिधत्व करते नजर आएंगे।
राज्य शासन द्वारा 14 अगस्त पर आयोजित शहीद सम्मान दिवस के अवसर पर रतलाम जिले में भी शहीदों के परिजनों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर शहीदों की वीरता का स्मरण किया गया, उनके जीवन वृतांत सुनाए गए। रतलाम शहर में दो स्थानों के अलावा जावरा तथा रतलाम तहसील के ग्राम घटला में सम्मान समारोह आयोजित किए गए। रतलाम की महावीर कॉलोनी में अमर शहीद श्री फखरुद्दीन के परिजनों तथा शक्ति नगर में अमर शहीद श्री रामराजसिंह के परिजनों का तथा घटला में अमर शहीद श्री चम्पालाल मालवीय के परिजनों का तथा जावरा में अमर शहीद श्री राजेन्द्र गिरी के परिजनों का सम्मान शाल-श्रीफल से किया गया। राज्य शासन द्वारा सम्मान पत्र परिजनों को प्रदान किए गए तथा स्मृति चिन्ह दिए गए। शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण भी किया गया। राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप, महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष श्री अशोक चौटाला, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी द्वारा रतलाम में महावीर कालोनी में शहीद श्री फखरुद्दीन की पत्नी श्रीमती वहीदा बी. , पुत्री रूबिना तथा पुत्र तौसीफ का सम्मान किया गया। इसी तरह शक्ति नगर में शहीद श्री रामराजसिंह की पत्नी श्रीमती सुखदेवी का सम्मान किया गया। ग्राम घटला में राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप, विधायक रतलाम-ग्रामीण श्री मथुरालाल डामर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमेश मईड़ा, महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी द्वारा शहीद श्री चम्पालाल मालवीय की माता श्रीमती लीलाबाई मालवीय, पत्नी श्रीमती दुर्गादेवी मालवीय, पुत्र हर्ष मालवीय का सम्मान किया गया। जावरा में विधायक डा. राजेन्द्र पाण्डेय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अनिल दसेड़ा, सीईओ जिला पंचायत श्री सोमेश मिश्र आदि ने शहीद श्री राजेन्द्र गिरी की पत्नी श्रीमती शांति गिरी, पुत्र अभिषेक तथा पुत्री सुषमा का सम्मान किया। उल्लेखनीय है कि शहीद श्री फखरुद्दीन विगत 20 फरवरी 2000 में छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले में नक्सलवादियो से लड़ते हुए शहीद हुए थे। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान श्री चम्पालाल मालवीय विगत 7 जनवरी 2013 को झारखण्ड राज्य के लातेहार जिले में नक्सलवादियों के विरुद्ध मुठभेड़ में शहीद हुए थे। शहीद श्री रामराजसिंह विगत 23 नवम्बर 1980 में जिले के खाचरौद नाका जावरा स्थल पर पुलिस में सेवाएं देते हुए अपराधियों से मुठभेड़ में शहीद हुए थे। जावरा में पुलिस सेवा के दौरान शहीद श्री राजेन्द्र गिरी विगत वर्ष 1996 में कुएं में गिरे व्यक्ति को बचाने में शहीद हो गए थे। राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें शहीदों के बलिदान को कभी भूलना नहीं चाहिए। सीमा पर जवानों की सुरक्षा से हम चैन की नींद सोते हैं। हम सदैव शहीदों के परिवारों के साथ हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने संवेदनशीलता के साथ शहीद सम्मान दिवस आयोजित किया है। श्री काश्यप ने कहा कि शहर की वेदव्यास कालोनी में शहीद फखरुद्दीन के नाम पर स्थापित उद्यान का नवीनीकरण किया जाकर उन्हें समर्पित किया जाएगा। विधायक श्री मथुरालाल डामर ने अपने उद्बोधन में शहीदों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शहीद की स्मृति में एक द्वार भी स्थापित होना चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमेश मई़ड़ा ने भी अपने उद्बोधन में शहीदों के बलिदान का स्मरण किया। महापौर डा. सुनीता यार्दे ने कहा कि अपनों के बिछुड़ने की पूर्ति नहीं हो सकती, लेकिन शहीदों के परिवारों के साथ हम सब हैं। जावरा में विधायक डा. राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि शहीद हमारे लिए प्रेरणा पुंज होते हैं। वे हमारे आदर्श होते हैं जो दूसरों के लिए अपने प्राणों का बलिदान करते हैं। श्री अनिल दसेड़ा तथा श्री धाकड़ ने भी संबोधित किया। जावरा में सम्मान समारोह सेंट पाल स्कूल परिसर में आयोजित हुआ। रतलाम में महावीर नगर में शहीद श्री फखरुद्दीन की बेटी रुबिना ने अपने पिता पर रचित कविता सुनाई। शहीद के बहनोई फैय्याज हुसैन ने भी संस्मरण सुनाए। इस दौरान पूर्व महापौर श्री शैलेन्द्र डागा, एसडीएम रतलाम सिटी श्री राहुल धोटे, रतलाम ग्रामीण सुश्री शिराली जैन, जावरा एसडीएम एम. एल. आर्य, रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जैन, नगर निगम सभापति श्री अशोक पोरवाल, मदरसा बोर्ड अध्यक्ष श्री मुबारिक शैरानी, क्षेत्रीय पार्षदगण उपस्थित थे।
राज्य शासन द्वारा चौदह अगस्त पर आयोजित शहीद सम्मान दिवस के अवसर पर रतलाम जिले में भी शहीदों के परिजनों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर शहीदों की वीरता का स्मरण किया गया, उनके जीवन वृतांत सुनाए गए। रतलाम शहर में दो स्थानों के अलावा जावरा तथा रतलाम तहसील के ग्राम घटला में सम्मान समारोह आयोजित किए गए। रतलाम की महावीर कॉलोनी में अमर शहीद श्री फखरुद्दीन के परिजनों तथा शक्ति नगर में अमर शहीद श्री रामराजसिंह के परिजनों का तथा घटला में अमर शहीद श्री चम्पालाल मालवीय के परिजनों का तथा जावरा में अमर शहीद श्री राजेन्द्र गिरी के परिजनों का सम्मान शाल-श्रीफल से किया गया। राज्य शासन द्वारा सम्मान पत्र परिजनों को प्रदान किए गए तथा स्मृति चिन्ह दिए गए। शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण भी किया गया। राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप, महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष श्री अशोक चौटाला, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी द्वारा रतलाम में महावीर कालोनी में शहीद श्री फखरुद्दीन की पत्नी श्रीमती वहीदा बी. , पुत्री रूबिना तथा पुत्र तौसीफ का सम्मान किया गया। इसी तरह शक्ति नगर में शहीद श्री रामराजसिंह की पत्नी श्रीमती सुखदेवी का सम्मान किया गया। ग्राम घटला में राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप, विधायक रतलाम-ग्रामीण श्री मथुरालाल डामर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमेश मईड़ा, महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी द्वारा शहीद श्री चम्पालाल मालवीय की माता श्रीमती लीलाबाई मालवीय, पत्नी श्रीमती दुर्गादेवी मालवीय, पुत्र हर्ष मालवीय का सम्मान किया गया। जावरा में विधायक डा. राजेन्द्र पाण्डेय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अनिल दसेड़ा, सीईओ जिला पंचायत श्री सोमेश मिश्र आदि ने शहीद श्री राजेन्द्र गिरी की पत्नी श्रीमती शांति गिरी, पुत्र अभिषेक तथा पुत्री सुषमा का सम्मान किया। उल्लेखनीय है कि शहीद श्री फखरुद्दीन विगत बीस फरवरी दो हज़ार में छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले में नक्सलवादियो से लड़ते हुए शहीद हुए थे। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान श्री चम्पालाल मालवीय विगत सात जनवरी दो हज़ार तेरह को झारखण्ड राज्य के लातेहार जिले में नक्सलवादियों के विरुद्ध मुठभेड़ में शहीद हुए थे। शहीद श्री रामराजसिंह विगत तेईस नवम्बर एक हज़ार नौ सौ अस्सी में जिले के खाचरौद नाका जावरा स्थल पर पुलिस में सेवाएं देते हुए अपराधियों से मुठभेड़ में शहीद हुए थे। जावरा में पुलिस सेवा के दौरान शहीद श्री राजेन्द्र गिरी विगत वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे में कुएं में गिरे व्यक्ति को बचाने में शहीद हो गए थे। राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें शहीदों के बलिदान को कभी भूलना नहीं चाहिए। सीमा पर जवानों की सुरक्षा से हम चैन की नींद सोते हैं। हम सदैव शहीदों के परिवारों के साथ हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने संवेदनशीलता के साथ शहीद सम्मान दिवस आयोजित किया है। श्री काश्यप ने कहा कि शहर की वेदव्यास कालोनी में शहीद फखरुद्दीन के नाम पर स्थापित उद्यान का नवीनीकरण किया जाकर उन्हें समर्पित किया जाएगा। विधायक श्री मथुरालाल डामर ने अपने उद्बोधन में शहीदों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शहीद की स्मृति में एक द्वार भी स्थापित होना चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमेश मई़ड़ा ने भी अपने उद्बोधन में शहीदों के बलिदान का स्मरण किया। महापौर डा. सुनीता यार्दे ने कहा कि अपनों के बिछुड़ने की पूर्ति नहीं हो सकती, लेकिन शहीदों के परिवारों के साथ हम सब हैं। जावरा में विधायक डा. राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि शहीद हमारे लिए प्रेरणा पुंज होते हैं। वे हमारे आदर्श होते हैं जो दूसरों के लिए अपने प्राणों का बलिदान करते हैं। श्री अनिल दसेड़ा तथा श्री धाकड़ ने भी संबोधित किया। जावरा में सम्मान समारोह सेंट पाल स्कूल परिसर में आयोजित हुआ। रतलाम में महावीर नगर में शहीद श्री फखरुद्दीन की बेटी रुबिना ने अपने पिता पर रचित कविता सुनाई। शहीद के बहनोई फैय्याज हुसैन ने भी संस्मरण सुनाए। इस दौरान पूर्व महापौर श्री शैलेन्द्र डागा, एसडीएम रतलाम सिटी श्री राहुल धोटे, रतलाम ग्रामीण सुश्री शिराली जैन, जावरा एसडीएम एम. एल. आर्य, रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जैन, नगर निगम सभापति श्री अशोक पोरवाल, मदरसा बोर्ड अध्यक्ष श्री मुबारिक शैरानी, क्षेत्रीय पार्षदगण उपस्थित थे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने आज खुलासा किया कि सुप्रीम कोर्ट में एक मेंशनिंग अधिकारी होने का कारण यह सुनिश्चित करना था कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मेंशन करने पर प्राथमिकता न मिले, भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा, "हम वरिष्ठों को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं देना चाहते हैं, और कनिष्ठों को उनके अवसरों से वंचित नहीं करना चाहते हैं। इसलिए यह प्रणाली बनाई गई थी, जहां सभी मेनशन करने वाले रजिस्ट्रार के समक्ष मेनशन कर सकते हैं। " CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मेंशनिंग अधिकारी द्वारा इस तरह के अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वकील उनके समक्ष मामलों को मेनशन कर सकते हैं। "यदि इसे अस्वीकार कर दिया जाता है, तो आप स्वतः उल्लेख कर सकते हैं। एक विशिष्ट मामला पेश करें, मैं इस पर गौर करूंगा। " यह टिप्पणी अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा मेनशन प्रणाली नोटिंग के बारे में शिकायत करने के बाद आई है। "अत्यावश्यक ज्ञापन दायर किए जाने के बाद भी, मामले ठंडे बस्ते में हैं। " मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें हमेशा पहले मेनशन करने वाले रजिस्ट्रार के पास जाने का निर्देश दिया, और केवल तभी जब इस तरह के अनुरोध को खारिज कर दिया जाए, तो वकीलों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करता है कि किसी को भी विशेष प्राथमिकता न मिले"। हालांकि, भूषण ने शिकायत की कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब रजिस्ट्रार अनुरोध को अस्वीकार नहीं करता है और हरी झंडी देता है, लेकिन मामला सूचीबद्ध नहीं होता है। CJI ने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि ऐसा कोई उदाहरण सामने आता है, तो इसका उल्लेख न्यायालय के समक्ष किया जा सकता है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने आज खुलासा किया कि सुप्रीम कोर्ट में एक मेंशनिंग अधिकारी होने का कारण यह सुनिश्चित करना था कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मेंशन करने पर प्राथमिकता न मिले, भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा, "हम वरिष्ठों को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं देना चाहते हैं, और कनिष्ठों को उनके अवसरों से वंचित नहीं करना चाहते हैं। इसलिए यह प्रणाली बनाई गई थी, जहां सभी मेनशन करने वाले रजिस्ट्रार के समक्ष मेनशन कर सकते हैं। " CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मेंशनिंग अधिकारी द्वारा इस तरह के अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वकील उनके समक्ष मामलों को मेनशन कर सकते हैं। "यदि इसे अस्वीकार कर दिया जाता है, तो आप स्वतः उल्लेख कर सकते हैं। एक विशिष्ट मामला पेश करें, मैं इस पर गौर करूंगा। " यह टिप्पणी अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा मेनशन प्रणाली नोटिंग के बारे में शिकायत करने के बाद आई है। "अत्यावश्यक ज्ञापन दायर किए जाने के बाद भी, मामले ठंडे बस्ते में हैं। " मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें हमेशा पहले मेनशन करने वाले रजिस्ट्रार के पास जाने का निर्देश दिया, और केवल तभी जब इस तरह के अनुरोध को खारिज कर दिया जाए, तो वकीलों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करता है कि किसी को भी विशेष प्राथमिकता न मिले"। हालांकि, भूषण ने शिकायत की कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब रजिस्ट्रार अनुरोध को अस्वीकार नहीं करता है और हरी झंडी देता है, लेकिन मामला सूचीबद्ध नहीं होता है। CJI ने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि ऐसा कोई उदाहरण सामने आता है, तो इसका उल्लेख न्यायालय के समक्ष किया जा सकता है।
What Is The Difference Between NDA And CDS: भारतीय सेना में भर्ती होने और मातृभूमि की सेवा करने के लिए तीन चीज़ों की आवश्यकता होती है, जुनून, देशभक्ति और काबिलियत। सेना में भर्ती के लिए सरकार ने अग्निपथ योजना शुरू की है जिसमे आपको 4 साल के लिए देश की रक्षा करने का अवसर मिलता है. खैर यहां हम बात कर रहे हैं CDS और NDA की. यह दोनों ऐसी परीक्षाएं हैं जिनको पास करने वाले कैंडिडेट, भारतीय थल सेना, भारतीय जल सेना और भारतीय वायुसेना में ऑफिसर रैंक पर पदस्त होते हैं. NDA और CDS के बीच में फर्क जानने से पहले इन दोनों के बारे में जानते हैं. What Is NDA: National Defense Academy- NDA में तीनों सेनाओं के सैन्य अफसर तैयार किये जाते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी में ट्रेंड होने के लिए एक अनिवार्य परीक्षा से गुजरना पड़ता है. NDA Exam साल में 2 बार आयोजित होता है. जो लोग एनडीए की परीक्षा पास कर लेते हैं उन्हें ट्रेनिंग के लिए इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) भेजा जाता है. How To Get Admission In NDA/ Eligibility For NDA Exam: NDA की परीक्षा सिर्फ वही दे सकते हैं जो कम से कम 12 वीं की पढाई कर चुके हों, वैसे सब्जेट की कोई बाध्यता नहीं होती मगर Indian Air Force और Indian Navy में सैन्य अफसर बनने के लिए 12th में फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स होना अनिवार्य है. NDA Exam में बैठने के लिए न्यूनतम आयु 16 और अधिकतम 19 वर्ष होती है. What Is CDS: (Combined Defense Services- CDS की परीक्षा UPSC द्वारा आयोजित की जाती है. यह भी साल में दो बार होती है और इस परीक्षा को पास करने वाले कैंडिडेट भी तीनों सेनाओं में से किसी एक में सैन्य अफसर बनते हैं. कम उम्र में बड़ा सैन्य अधिकारी बनने के लिए CDS सबसे अच्छा ऑप्शन है लेकिन इस परीक्षा को पास करना उतना ही मुश्किल है. CDS Exam पास करने वालों की ट्रेनिंग भी IMA में होती है. How To Get Admission In CDS/ Eligibility For CDS Exam: सीडीएस परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम किसी मान्यता प्राप्त युनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन होना चाहिए, फ़ाइनल ईयर में पढ़ रहे स्टूडेंट भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. अगर आप CDS के जरिये भारतीय नौसेना में अफसर बनना चाहते हैं तो आपको फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स के साथ BSC या फिर BE की डिग्री होनी चाहिए और एयर फ़ोर्स के लिए 12th में PCM सब्जेट के साथ इंजीनियरिंग की डिग्री होनी चाहिए। - दोनों परीक्षाओं को पास करने ट्रेनिंग लेने के बाद कैंडिडेट किसी भी सेना में अधिकारी पद पर ही नियुक्त होता है.
What Is The Difference Between NDA And CDS: भारतीय सेना में भर्ती होने और मातृभूमि की सेवा करने के लिए तीन चीज़ों की आवश्यकता होती है, जुनून, देशभक्ति और काबिलियत। सेना में भर्ती के लिए सरकार ने अग्निपथ योजना शुरू की है जिसमे आपको चार साल के लिए देश की रक्षा करने का अवसर मिलता है. खैर यहां हम बात कर रहे हैं CDS और NDA की. यह दोनों ऐसी परीक्षाएं हैं जिनको पास करने वाले कैंडिडेट, भारतीय थल सेना, भारतीय जल सेना और भारतीय वायुसेना में ऑफिसर रैंक पर पदस्त होते हैं. NDA और CDS के बीच में फर्क जानने से पहले इन दोनों के बारे में जानते हैं. What Is NDA: National Defense Academy- NDA में तीनों सेनाओं के सैन्य अफसर तैयार किये जाते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी में ट्रेंड होने के लिए एक अनिवार्य परीक्षा से गुजरना पड़ता है. NDA Exam साल में दो बार आयोजित होता है. जो लोग एनडीए की परीक्षा पास कर लेते हैं उन्हें ट्रेनिंग के लिए इंडियन मिलिट्री एकेडमी भेजा जाता है. How To Get Admission In NDA/ Eligibility For NDA Exam: NDA की परीक्षा सिर्फ वही दे सकते हैं जो कम से कम बारह वीं की पढाई कर चुके हों, वैसे सब्जेट की कोई बाध्यता नहीं होती मगर Indian Air Force और Indian Navy में सैन्य अफसर बनने के लिए बारहth में फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स होना अनिवार्य है. NDA Exam में बैठने के लिए न्यूनतम आयु सोलह और अधिकतम उन्नीस वर्ष होती है. What Is CDS: (Combined Defense Services- CDS की परीक्षा UPSC द्वारा आयोजित की जाती है. यह भी साल में दो बार होती है और इस परीक्षा को पास करने वाले कैंडिडेट भी तीनों सेनाओं में से किसी एक में सैन्य अफसर बनते हैं. कम उम्र में बड़ा सैन्य अधिकारी बनने के लिए CDS सबसे अच्छा ऑप्शन है लेकिन इस परीक्षा को पास करना उतना ही मुश्किल है. CDS Exam पास करने वालों की ट्रेनिंग भी IMA में होती है. How To Get Admission In CDS/ Eligibility For CDS Exam: सीडीएस परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम किसी मान्यता प्राप्त युनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन होना चाहिए, फ़ाइनल ईयर में पढ़ रहे स्टूडेंट भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. अगर आप CDS के जरिये भारतीय नौसेना में अफसर बनना चाहते हैं तो आपको फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स के साथ BSC या फिर BE की डिग्री होनी चाहिए और एयर फ़ोर्स के लिए बारहth में PCM सब्जेट के साथ इंजीनियरिंग की डिग्री होनी चाहिए। - दोनों परीक्षाओं को पास करने ट्रेनिंग लेने के बाद कैंडिडेट किसी भी सेना में अधिकारी पद पर ही नियुक्त होता है.
मंदिर समिति ने इसकी जानकारी मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के भोपाल स्थित कार्यालय को दी। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भूगर्भ से निकले एक हजार साल पुराने शिव मंदिर को फिर से आकार दिया जाएगा। मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग ने पुरा अवशेषों की नंबरिंग का काम पूरा कर लिया है। मंदिर की ड्राइंग डिजाइन का काम भी पूरा हो गया है। जल्द ही महाकाल दर्शन करने आने वाले भक्त यह देख सकेंगे कि एक हजार साल पहले शिव मंदिर कैसा था। महाकाल मंदिर में निर्माण कार्य के लिए की जा रही खोदाई के दौरान सन 2021 में एक हजार साल पुराने शिव मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए थे। मंदिर समिति ने इसकी जानकारी मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के भोपाल स्थित कार्यालय को दी। इसके बाद शोध अधिकारी डा. ध्रुवेंद्र जोधा के निर्देशन में आगे की खोदाई हुई। विभाग को महाकाल मंदिर का गौरवशाली इतिहास जानने में शीघ्र सफलता मिली और भूगर्भ से शिव मंदिर का आधार भाग, प्राचीन शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा आदि मूर्तियां प्राप्त हुईं। इसके साथ ही दो हजार साल पुराने शुंग, कुषाण, मौर्य व परमार काल के मिट्टी के बर्तन भी मिले थे। विभाग ने इन अवशेषों को एक स्थान पर एकत्रित किया। प्रबुद्धजन की मांग पर मंदिर समिति ने पुरातत्व विभाग के सहयोग से शैव दर्शन के शोध केंद्र के रूप में मंदिर का पुर्ननिर्माण कराने का निर्णय लिया है। जल्द ही इसकी शुरुआत होगी। बताया जाता है पुरातत्व विभाग पुरा अवशेषों की नंबरिंग कर मंदिर की ड्राइंग डिजाइन तैयार करने में व्यस्त हो गया। इधर निर्माण कार्य के चलते भारी वाहनों की आवाजाही से जमीन से निकले पुराअवशेष फिर से टूटने लगे हैं। मंदिर परिसर में जल स्तंभ के समीप जहां पुरा अवशेषों को संरक्षित किया गया है, उसी के पास शिवलिंग की जलाधारी खंडित अवस्था में पड़ी है। जानकारी मिलने के बाद विभाग के शोध अधिकारी रविवार को स्थल का निरीक्षण करेंगे। प्राचीन द्वार की गुफा में संरक्षित की पुरासंपदा। स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा महाराजवाड़ा के समीप स्थित प्राचीन महाकाल द्वारा का संरक्षण कर जीर्णोद्धार किया है। इस दौरान प्राप्त हुई पुरा संपदा को कंपनी ने एहतियात से सहेजा है। द्वारा के भीतर दो छोटी प्राचीन गुफा है, इन्हीं में पुरा अवशेषों को सुरक्षित करते हुए आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया है।
मंदिर समिति ने इसकी जानकारी मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के भोपाल स्थित कार्यालय को दी। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भूगर्भ से निकले एक हजार साल पुराने शिव मंदिर को फिर से आकार दिया जाएगा। मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग ने पुरा अवशेषों की नंबरिंग का काम पूरा कर लिया है। मंदिर की ड्राइंग डिजाइन का काम भी पूरा हो गया है। जल्द ही महाकाल दर्शन करने आने वाले भक्त यह देख सकेंगे कि एक हजार साल पहले शिव मंदिर कैसा था। महाकाल मंदिर में निर्माण कार्य के लिए की जा रही खोदाई के दौरान सन दो हज़ार इक्कीस में एक हजार साल पुराने शिव मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए थे। मंदिर समिति ने इसकी जानकारी मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के भोपाल स्थित कार्यालय को दी। इसके बाद शोध अधिकारी डा. ध्रुवेंद्र जोधा के निर्देशन में आगे की खोदाई हुई। विभाग को महाकाल मंदिर का गौरवशाली इतिहास जानने में शीघ्र सफलता मिली और भूगर्भ से शिव मंदिर का आधार भाग, प्राचीन शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा आदि मूर्तियां प्राप्त हुईं। इसके साथ ही दो हजार साल पुराने शुंग, कुषाण, मौर्य व परमार काल के मिट्टी के बर्तन भी मिले थे। विभाग ने इन अवशेषों को एक स्थान पर एकत्रित किया। प्रबुद्धजन की मांग पर मंदिर समिति ने पुरातत्व विभाग के सहयोग से शैव दर्शन के शोध केंद्र के रूप में मंदिर का पुर्ननिर्माण कराने का निर्णय लिया है। जल्द ही इसकी शुरुआत होगी। बताया जाता है पुरातत्व विभाग पुरा अवशेषों की नंबरिंग कर मंदिर की ड्राइंग डिजाइन तैयार करने में व्यस्त हो गया। इधर निर्माण कार्य के चलते भारी वाहनों की आवाजाही से जमीन से निकले पुराअवशेष फिर से टूटने लगे हैं। मंदिर परिसर में जल स्तंभ के समीप जहां पुरा अवशेषों को संरक्षित किया गया है, उसी के पास शिवलिंग की जलाधारी खंडित अवस्था में पड़ी है। जानकारी मिलने के बाद विभाग के शोध अधिकारी रविवार को स्थल का निरीक्षण करेंगे। प्राचीन द्वार की गुफा में संरक्षित की पुरासंपदा। स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा महाराजवाड़ा के समीप स्थित प्राचीन महाकाल द्वारा का संरक्षण कर जीर्णोद्धार किया है। इस दौरान प्राप्त हुई पुरा संपदा को कंपनी ने एहतियात से सहेजा है। द्वारा के भीतर दो छोटी प्राचीन गुफा है, इन्हीं में पुरा अवशेषों को सुरक्षित करते हुए आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया है।
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की आज मुंबई में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात हो रही हैं। इस बैठक ने मिशन 2024 या अगले आम चुनावों को लेकर सियासी सुगबुगाहट को बढ़ा दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का चेहरा कौन होगा इस पर चर्चा हो सकती है। आधिकारिक रूप से यह बंगाल और तमिलनाडु चुनाव से जुड़ी एक धन्यवाद वार्ता है। प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर हर उस नेता से मुलाकात करेंगे, जिन्होंने ममता बनर्जी और एमके स्टालिन का चुनाव में समर्थन किया था। हाल में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं ने बड़ी जीत दर्ज की है। हालांकि, प्रबल कयास लगाए जा रहे हैं कि चर्चाओं का 2024 के आम चुनाव से संबंधित एक बड़ा संदर्भ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए एक संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार पर बात हो सकती है।
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की आज मुंबई में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात हो रही हैं। इस बैठक ने मिशन दो हज़ार चौबीस या अगले आम चुनावों को लेकर सियासी सुगबुगाहट को बढ़ा दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में दो हज़ार चौबीस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का चेहरा कौन होगा इस पर चर्चा हो सकती है। आधिकारिक रूप से यह बंगाल और तमिलनाडु चुनाव से जुड़ी एक धन्यवाद वार्ता है। प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर हर उस नेता से मुलाकात करेंगे, जिन्होंने ममता बनर्जी और एमके स्टालिन का चुनाव में समर्थन किया था। हाल में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं ने बड़ी जीत दर्ज की है। हालांकि, प्रबल कयास लगाए जा रहे हैं कि चर्चाओं का दो हज़ार चौबीस के आम चुनाव से संबंधित एक बड़ा संदर्भ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए एक संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार पर बात हो सकती है।
ग्रेटर नोएडा। थाना क्षेत्र के गांव जवां में बिजली का तार टूट कर गिरने से घर में आग लग गई । जिसमे हजारों का नुकसान हुआ है। तार टूटने के दौरान कई लोग बाल बाल बच गए। रविवार को 4-5 बजे करीब आग लग गयी क्षेत्र के गांव जवां मोहल्ला जाटवान निवासी बाबू पुत्र लिख्खी सिंह के घर में बिजली का तार आ रहा था तभी अचानक टूट कर गिरने से भगदड़ मच गई और कई लोग तार की चपेट में आने से बाल बच गए। देखते ही देखते बाबू के घर में आग लग गई।ग्रामीण लोगो ने पानी की बाल्टी आदि लेकर दौड़े और आग को बुझाने लगे।मौके पर पहोंची फायर बिग्रेड ने आग पर काबू पाया मामले की जानकारी बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी गई जिस पर बिजली कटवाई गई। बाबू ने बताया कि आग से उसका घरेलू सामन जल गया है जैसे चार चारपाई,साइकिल विस्तर,कपड़े,दो छप्पड़,दस कुंटल गेहू आदि समान जला है वही मछला देवी पत्नी बाबू व दो महिला आग की चपेट में आ गई।बताया जा रहा है हजारो रुपये का नुकसान हुआ है। जिससे बाबू ने जिलाप्रशासन से अग्निपीड़ित परिवार को राहत पाने की मांग की है वही आज रामु पुत्र डीधा की खेत पर रखी बोगी बिटोरो में अचानक से आग लग गयी फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया हजारो रुपये का नुकसान स्थानीय लोगो ने आग बुझाने में सहयोग दिया।
ग्रेटर नोएडा। थाना क्षेत्र के गांव जवां में बिजली का तार टूट कर गिरने से घर में आग लग गई । जिसमे हजारों का नुकसान हुआ है। तार टूटने के दौरान कई लोग बाल बाल बच गए। रविवार को चार-पाँच बजे करीब आग लग गयी क्षेत्र के गांव जवां मोहल्ला जाटवान निवासी बाबू पुत्र लिख्खी सिंह के घर में बिजली का तार आ रहा था तभी अचानक टूट कर गिरने से भगदड़ मच गई और कई लोग तार की चपेट में आने से बाल बच गए। देखते ही देखते बाबू के घर में आग लग गई।ग्रामीण लोगो ने पानी की बाल्टी आदि लेकर दौड़े और आग को बुझाने लगे।मौके पर पहोंची फायर बिग्रेड ने आग पर काबू पाया मामले की जानकारी बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी गई जिस पर बिजली कटवाई गई। बाबू ने बताया कि आग से उसका घरेलू सामन जल गया है जैसे चार चारपाई,साइकिल विस्तर,कपड़े,दो छप्पड़,दस कुंटल गेहू आदि समान जला है वही मछला देवी पत्नी बाबू व दो महिला आग की चपेट में आ गई।बताया जा रहा है हजारो रुपये का नुकसान हुआ है। जिससे बाबू ने जिलाप्रशासन से अग्निपीड़ित परिवार को राहत पाने की मांग की है वही आज रामु पुत्र डीधा की खेत पर रखी बोगी बिटोरो में अचानक से आग लग गयी फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया हजारो रुपये का नुकसान स्थानीय लोगो ने आग बुझाने में सहयोग दिया।
President's Rauta 3n U.P. (Res) [Shri Dinesh Singh) their constituencies and start working for that. Therefore, while supporting the Government in its imposition of the President's rule, I would request the Home Minister to clarify the position as much as he can SHRI RANABAHADUR SINGH (Sindhi) There have been no rains in Rihand Dam Catchment area, so it is not full even today श्री शिव कुमार शास्त्री (अलीगढ़) उपाध्यक्ष जी, उत्तर प्रदेश मे राष्ट्रपति शासन की स्थापना के लिये जो युक्तिया बी गयी है उन मे परस्पर बडी प्रसगतिया है । केवल एक बात को छोड़ कर कि प्रदेश मे सूखे का प्रकोप था इसलिये शासन चलाने मे कठिभाई थी, यह बात तो कुछ समझ मे प्राती है । इस के अतिरिक्त जो तीन युक्तिया दी गयी है वह शासक दल की अयोग्यता के अतिरिक्त और किसी चीज को प्रमाणित नही करती । यदि पी०ए०सी में प्रसतोष हुआ तो क्यो ? और उस का पता न प्रदेश को चल पाया और न केन्द्र को । जब इतना बडा विस्फोट हो गया तब यह बात कही गयी । मैं यह समझता हू कि जब काग्रेस के पास सब से बड़ा प्रमाण-पत्र यह था कि बार बार वह कहते थे कि यही एव दल है जो स्थायी सरकार दे सकता है, गवर्नमेट दे सकता है, हम से यह देखा कि उन का बहुमत होते भी जिस तरह से पतझड मे पत्ते झर झर कर गिरते हैं उसी तरह से यह बहुमत मे होते हुए भी सारी की सारी सरकारी का पतन हुआ, और उस मे उत्तर प्रदेश का भी हुआ । इसलिये अपनी भयोग्यता स्वीकार कर लेनी चाहिये कि हम शासन नही चला सकते थे इसलिये बहुमत होते हुए भी हम ने उस को समाप्त किया और राष्ट्रपति शासन की स्थापना की । President's Rule 356 in U.P, (Res.) इस के साथ साथ जो अगली चीजें है वह भी एक विशेष विचारणीय हैं। राष्ट्रपति शासन से पहले ही कुछ इस प्रकार की घोषणाये वहां की लोकप्रिय सरकार ने की थी, जैसा कि श्री माननीय वाजपेयी जी ने कहा कि किसी भाषा को सरक्षण दिया जाय, उस को पढाने की व्यवस्था की जाय, इस मे किसी को कोई मतभेद नही हो सकता। लेकिन पिछले 25 वर्ष से जो आप की नीति चली ग्रा रही थी उस मे एक साथ आप ने इस प्रकार का सशोधन किया जिस से दूसरे की दृष्टि उस भोर जाती है और वह प्रापत्तिजनक प्रतीत होता है कि वहा के स्कूलो मे चार हजार उर्दू के अध्यापक एक साथ नियुक्त कर दिये जाये । इस साथ साथ वहा पढने वा या नही है इस बात का कोई ध्यान न रखा जाय । और युक्ति यह दी गयी कि जब तक और छात न हो तब तक यह उर्दू के अध्यापक और विषयो ने पढ़ाये । तो क्या और विपयो के अध्यापक तब तक नहीं थ जिन के लिये यह प्रतीक्षा की जा रही थी कि यह प्रायेगे और तभी पढाना प्रारम्भ होगा । ये इस प्रकार की चीजे हैं जो इस ओर ध्यान करानी है कि वास्तव मे यह लक्ष्य किसी भाषा मरक्षण का नही है अपितु राजनीतिक दृष्टि स लाभ प्राप्त करने का है। इस के साथ उत्तर प्रदेश मे जहा श्रावश्यक गणना की दृष्टि से इस प्रकार के लोग बसते थे कि जिस में उर्दू में प्रार्थना पत्र देने की कचहरियो मे छूट होनी चाहिये उसलिये 9 जिनो म पहले से ये सुविधाये प्राप्त थी । नेकिन यह सारे के सारे प्रार्थना पत्र फारसी लिपि में उत्तर प्रदेश मे दिये जाये, इस प्रकार की जो बात कही जा रही है वह इस बात को सोचने के लिये विवश करती है कि यह सब राजनीतिक दृष्टिकाण से किया जा रहा है, किसी भाषा के संरक्षण की दृष्टि से नहीं किया जा रहा है । इसके साथ साथ एक तरफ यह कहा जात है कि इस प्रकार के अनेक उदाहरण हैं कि President's Rule SRAVANA 17, in U.P. (Res.) जहां बिल्डिंग्ज मौजूद है वहां पर पाठशालाओं में प्रइमरी अध्यापक पढ़ाने के लिए नहीं हैं और जब यह मांग की जाती है शासन से कि वहा पर अध्यापक होने चाहिये तो पैसे के प्रभाव की बात कह कर इसको टाल दिया जाता है और दूसरी तरफ चार हजार अध्यापक रख दिए जाएं और भारीभरकम बोझ इस प्रकार का प्रदेश के ऊपर लाद दिया जाए यह बीज समझ में नहीं आती है । इस वास्ते राष्ट्रपति शासन के लागू होने के साथ साथ जो इस प्रकार की चीजे चल रही हैं वे बहुत ही प्रापत्तिजनक हैं और इन की और केन्द्रीय सरकार का ध्यान जाना चाहिये और इसके कारण जो असतोष उभर रहा है, उसको ध्यान में रखना चाहिये । या तो वहा पर लोकप्रिय शासन की स्थापना की जाए और यदि ऐसा नही होता है तो मैं चाहूंगा कि विधान सभा भग करके नए चुनाव कराए जाए । श्री रुद्र प्रताप सिंह (बाराबकी) उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की उदघोषणा के सम्बन्ध में हमारे गृह मंत्री श्री उमा शकर - दीक्षित जी ने जो अनुमोदन का सकल्प प्रस्तत किया है उसका समर्थन करन के लिए मै खडा हुआ हूँ। मुझ से पूर्व विरोधी दलो के वक्ताओ ने यहा पर जो विचार व्यक्त किए है वे न केवल अतिशयोक्तिपूर्ण है बल्कि तथ्यो मे परे है, निराधार है और उनका कोई औचित्य नहीं है । वास्तविकता यह है कि लोक सभा के जब मध्यावधि चुनाव हुए थे और उन मे जनता ने हमे जो आदेश दिये थे देश के अन्दर सामाजिक और आर्थिक विषमताथो को समाप्त करने के, देश से गरीबी, बेकारी, भुखमरी, बेरोजगारी भौर महगाई को दूर करने के, देश में फैले हुए असन्तुलन को दूर करने के उत्तर प्रदेश मे हमारे दल की सरकार उन तमाम वादों तथा जनता द्वारा दिए गए मादेशों का पालन करने के लिए कृतसंकल्प थी और बढ़तापूर्वक उन President's Rule in U.P. (Res.) कार्यों में रत थी । इस बात के कुछ उदाहरण मैं इस सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं । विधान सभा में हमारी सरकार ने वहा पर भूमि सुधारो को कार्यान्वित करने की दिशा में सीलिग का विधेयक प्रस्तुत किया था और उसको स्वीकृत कराया था। उसके द्वारा इस बात की व्यवस्था की गई थी कि अधिक से अधिक भूमि प्राप्त करके भूमिहीनों को, हरिजनों को और पिछड़े वर्गों को बी जाए । इसके साथ साथ इस बात की भी व्यवस्था की गई कि अखिल भारतीय काग्रेस कमेटी के निर्णय के अनुसार गल्ले के व्यापार का अधिग्रहण किया जाए और उत्तर प्रदेश की सरकार मे इस कार्यक्रम को तेजी के साथ कार्यान्वित किया और इस बात की व्यवस्था की कि जिस तरह से हो सके जनता के सहयोग के द्वारा सुचारू रूप से गल्ले की वसूली की जाए ताकि जो हमारे भूखे लोग हैं उनको हम भोजन दे सके । हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में एक बहुत बडी व्यवस्था यह की कि उन्होंने एक कैबिनेट डिसिशन लिया जिस के अनुसार इस बात की व्यवस्था की गई थी कि उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तक की शिक्षा का प्रान्तीयकरण किया जाएगा जिससे शिक्षा दलगत राजनीति से ऊपर उठ सके और विद्यार्थियों का सतुलित विकास हो सके, उनके व्यक्तित्त का विकास हो और शिक्षा का वातावरण शुद्ध हो सके तथा स्तर उन्नत हो सके । इन सब कामों को वह कर रही थी कि एक पी०ए०सी० की घटना घटी और न चाहते हुए भी सशस्त्र सेना का उम में सहयोग लेना पड़ा। वह गम्भीर स्थिति थी । उस पर गम्भीरता से विचार करने की आवश्यकता भी थी। यह सोचने की प्रावश्यकता थी कि यह जो कार्य हुआ है इसके पीछे तोड़फोड मे विश्वास करने वाले राजनीतिक दलों का हाथ है 359 President's Rule in U.P. (Res) [श्री या प्रताप सिंह] या इसके पीछे अनुशासनहीनता फैलाने वाले दलो का हाथ है या इसके पीछे साम्प्रदायिकता फैलाने वाले दलो का हाथ है या इसके पीछे लोकतन के विरोधी वडे अफसरो का, नौकर शाही का हाथ है या पूजिपतियो का हाथ है या इसके पीछे कोई विदेशी षडयन है। उत्तर प्रदेश जो कि एक सीमा प्रदेश है, जोकि सुरक्षा की बष्टि से महत्वपूर्ण प्रदेश है वहा हमें इस बात के लिए विवश होना पडा कि पी० ए० सी० की जो अभूतपूर्व घटना उत्तर प्रदेश ने घटी है देश की स्वतंत्रता के पश्चात यह एक अपने प्रकार की ऐसी घटना थी जिसकी ईश्वर न करे दुवारा भारत की भूमि पर कभी बोहराया जाए । इस प्रकार की घटना घटने के बाद भी हमारे विरोधी दलों के नेता पूछते हैं कि कौन सी बात थी कि माप विवश हो गए राष्ट्रपति शामन लागू करने के लिए। में अपने विरोधी दलो के नेताओ से यह पूछना चाहता हूँ कि भौर कौन इससे बडी घटना वे चाहते थे कि घंटे औौर राष्ट्रपति शासन लागू हो और कौन सी बड़ी घटना घटते हुए वे सुनना चाहते थे, पी० ए० सी० जो हमारा एक धग है, जिस के द्वारा हम प्रशासन को चलना चाहते हैं वह अग अगर हमारा साथ नहीं देता है और मनुशासनहीनता करता है तो इससे बड़ा कारण राष्ट्रपति शासन लागू करने के अलावा और कौन सा हो सकता था ? हर कोई जानता है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा में हमारा 421 मे से 271 का बहुतमत था। इतना भारी बहुमत होते हुए भी परिस्थितियों के कारणवश हमे मजबूर होना पड़ा और हमारे दल की सरकार को त्यागपत्र देना पड़ा। हम समझते थे और हम चाहते थे और माता भी करते थे कि हमारे विरोधी दलों के नेता इस के लिए हमारी प्रशसा कर गे, हमारे दल की सराहना करेंगे कि हमारे दल ने इस रजत जयन्ती वर्ष में इस बात को चौहरा दिया है, सिद्ध कर दिया President's Rule H.P. (Res) है कि इस कुर्सियों से चिपके रहना नहीं चाहते, हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, हम जनता की मदालत में जाना पसन्द करेगे बजाय इसके कि कुर्सियों से चिपके रहे । हमारे बनर्जी साहब ने औौर वाजपेयी जी ने विधान सभा के चुनाबो की मांग की है । मैं उसका स्वागत करता हूं । यथासमय फरवरी मे जब चुनाव होने चाहिये, हम भाशा करते हैं कि चुनाव अवश्य होगे। हम विरोधी दलो के मिथ्या प्रचार से भयभीत होने वाले नहीं है। हम भगले चुनाव में यह सिद्ध कर देगे कि लोक सभा के 1971 के मध्यावधि चुनाव में जनता ने जो फैसला किया था और 1972 के विधान सभाओ के चुनाव मे देश भर मे जो परिणाम हमने दिखाए थे, फरवरी 1974 में उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए जो चुनाव होगे उन मे उसमे भी अधिक बहुमत ले कर हम विधान सभा मे भाएगे और सरकार बनाएगे । आप भय क्यो दिखाते है । हम चुनाव का स्वागत करते हैं, हमारे कनकर्ता स्वागत करते हैं सारे विधायक स्वागत हैं, जो प्रत्याशी होगे वे भी स्वागत करते हैं । यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन मे विधान सभा को निलम्बित क्यो किया गया है, उसको भग क्यो नही कर दिया गया ? बडी अजीब बात है। अगर हमने भग कर दिया होता तो हमारे अटल जी कहते कि लोकतन की हत्या हो गई और जब हम निलम्बित करते हैं तो उन्हें सन्देह होता है और कहते हैं कि भंग क्यो नहीं कर दिया गया । हमारे विरोधी दलो की तो यह स्थिति है मैं यह साफ कह दू जो है फर्क मुझ से तुझ मे तेरा वर्ष वर्षे सनहा मेरा गम गमे बनाना । इन शब्दों के साथ मैं अपना भाषण समाप्त करता हूं और जो संकल्प रखा गया है इसका समर्पत करता हू 4 President's Rule SRAVANA 17, 1895 ( SAKA) President's Rule in .P. (Res.) in U.P. (Res.) श्री चन्द्रिका प्रसाद (बलिया) : उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। इसलिए हमारे विरोधी भाइयों को कोई प्राधार चाहिये । इस वास्ते उनको हमारी पार्टी में और हमारी सरकार में खराबियां ही खराबिया दिखाई पड़ती है। वे हमारे प्रधान मंत्री और हमारे नेताओं की जो कीमत है उसको गिराना चाहते हैं। प्रधान मनी का यह प्रदेश है। प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की वेव में हमारे सब विरोधी बह गए थे। वे डरते है कि कही फिर ऐसा न हो जाए। इस वास्ते वे अभी से तैयारी कर रहे है। वे समझते है कि अगर उनके इमेज को नहीं गिरायेंगे तो उनका फिर वही हाल होगा जो पहले हुआ था मापने देख ही लिया है कि किस तरह से हाउस में चार चार घंटे काम का हरजा किया जा रहा है। यह एक प्रकार से डैमोक्रेस के साथ बलात्कार करना है । ऐसा करके मदन की जो मर्यादा है उसको गिराया जा रहा है। मैं कहूंगा कि जनता इनकी फिर वही हालत करेगी जा पहले 1971 में की थी । 1971 के चुनाव में जनता ने हमें मैंडेट दिया। जिन सूबों में इनकी मरकारे थी वहां भी ये हार गए । बंगाल मे श्री ज्योति बसु की सरकार बनी । बंगाल में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलो के लोग तीन पुश्तो से रहते आ रहे हैं। हम जानते हैं कि वहां सिनेमा का एक एक लाइसेम देने के लिए पचास पचास हजार रुपये लिये गये थे और मामूली मामूली कामों को करने के लिए दम दस हजार रुपये खुले श्राम लिये जाते थे । श्री ज्योतिर्मय बसु हमारे ऊपर चार्जिज लगाते हैं। मैं चाहता हूं कि पहले वे अपने दामन को देखें, उसको पाक साफ करें। भोजपुरी में एक कहावत है, सूप हंसे तो हंसं छलनी भी हंसे जिस में 72 छेद होते हैं। अपर मुझे मौका मिले, तो मैं हर बात का सबूत दे सकता हूं। यह कहना संतसर गलत है कि हमारे नेता पार्टी के लिए चंदा भांगते हैं । हमारी पार्टी के 32 करोड़ सदस्य हैं। अगर वे एक एक रुपया भी दें, तो हम 32 करोड़ रुपये इकट्टा कर सकते हैं। मेरे जंसा व्यक्ति भी 1967 में केवल पांच छः हजार रुपये खर्च कर के जीता, जब कि उस समय कांग्रेस मेरे निर्वाचन क्षेत्र के अन्तर्गत करीब करीब सभी सीटें हार गई थी। 1971 में मैं केवल 16 से 20 हजार रुपये खर्च कर के जीत कर आया हूं। हम को रुपये की क्या जरूरत है। देश की जनता ने हमारा साथ दिया है और हम को अपनी पार्टी के वर्कर्ज पर पूरा भरोसा है। इस लिए हम पर इस प्रकार का चार्ज लगाना अन्यायपूर्ण है और पब्लिक लाइफ़ में इस तरह कीचड़ उछालना ग़लत बात है । श्री वाजपेयी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागूक रना ग़लत है लेकिन खुद श्री बनर्जी ने कहा है कि सोशालिस्ट पार्टी और अन्य विरोधी पार्टियों के लोगों ने पी० ए०सी० वालों और विद्यार्थियों को भड़काया हमारे प्रदेश मे सूखा पड़ा हुआ था। पच्चीस बरस के इतिहास में यह पहला मौका था, जब कि पी० एस० सी० और पुलिस का आपस मे संघर्ष हुआ, जिन के द्वारा ला एड भार्डर मेनटेन किया जाता है, और प्रशासन ठप्प हो गया था। उस समय हमारे मुख्य मन्त्री और उनके साथियों ने जनता के कष्ट देखकर खुशी से त्याग किया और यह साबित किया कि हम कुर्सी से चिपके नहीं रहना चाहते हैं। इस प्रकार उन्होंने वह आदर्श उपस्थित किया, जो हमारे अन्य नेता बराबर उपस्थित करते रहे हैं। . श्री बाजपेयी ने कहा है कि एसेम्बली को डिजाल्ब न करके केवल ससपेंड किया गया है मूछित किया गया है। गवर्नर ने साफ कहा है कि यह एक टेम्पोरेरी व्यवस्था है और जब प्रदेश की स्थिति में सुधार हो जायगा, 363 President's Rule in U.P. (Res ) [श्री चन्द्रिका प्रसाद] तो ऐसम्बली जिन्दा हो जायेगी और लोकप्रिय सरकार बन जायेगी। मै भी चाहता हू कि हमारे प्रदेश मे जरूर चुनाव होने चाहिए, लेकिन उससे पहले वहा लोकप्रिय सरकार बननी चाहिए। 1967 के चुनाव के बाद हमारे प्रदेश मे चार पाच साल तक सविद सरकारे रह । उन्होने सारी सरकारी मशीनरी को करप्ट कर दिया था, चारो तरफ अनुशासनहीनता फैल गई थी और भूखमरी व्याप्त थी । श्री कमलापति त्रिपाठी ने बो वर्ष मे वह काम कर दिखाया जो बीस वर्ष मे भी नही हो सकता था। श्री त्रिपाठी उन नेताओ मे से है, जो जीवन भर समाजसेवा और राजनैतिक कार्यों में लगे रहे है । उन्होने जनतन और देश की जो सेवा की हे और तीस बरस तक जो कुर्बानिया की है, वे देश के महान् नेताओ की तुलना मे किसी से कम नही हैं । यह बात नहीं है कि उन के घर मे कोई आर्थिक सकट था। वह पहले भी अच्छे घर से थे और आज भी अच्छी स्थिति मे है । इस लिए हम उन पर और उन वे परिवार पर इस प्रकार के लाछन लगाना समझते हैं । श्री वाजपेयी और श्री ज्योतिर्मय वसु दोनो ने कहा है कि भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के प्रति हमेशा उपेक्षा की नीति अपनाई है । आज न केवल देश मे, लिल विश्व भर मे, उस की प्रति व्यक्ति प्राय सब से कम है। उत्तर प्रदेश पहले सूखे और बाढ से तगह होता रहा है और आज भी तबाह हो रहा है । हमारे यहा जितनी इडस्ट्रीज होनी चाहिए वे नही हैं । हम चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश मे राष्ट्रपति शामन तब तक रहे, जब तक कि हम अन्य प्रदेशो के समकक्ष न प्रा जाये, हमारी आर्थिक समस्याये हल न हो जाये और हमारी मार्थिक प्रगति न हो जाये । उत्तर प्रदेश में बच्चो से तीन चार महीने की फ़ीस मामी जा President's Rule in U.P. (Rea.) है और किसानों से लगान की वसूली की जा रही है हम चाहते हैं कि बच्चो की फ्रीस माफ़ की जाये और लगान की वसुली बन्द. की जाये । बनारस कमिशनरी मे खरीफ अभियान के बारे में जो मंडलोय स्तर पर सम्मलन हुभा था, मैं ने वहा भा कहा था, और प्रधान मंत्री से उत्तर प्रदेश के समद सदस्यों की जो बैठव बुलाई थी उस मे भी कहा था कि बलिया पास्टाट्युएन्सी मे नानपेमेट भ्राफ ड्यूज के कारण तान साँ ट्यूबवैल्ज के कनेक्शन कटे हुए हैं। इस वक्त लागा के पास पैसा नहीं है । अगर बिजली के बनेक्शन वटे रहेगे तो बिजली न मिलने से फल का उत्पादन नहीं हो पायेगा और मुखमरा जारी रहेगी । पब्लिम वर्कस और सरकारी अधिकारियों के काम करने का तरीका अलग अलग होता है। सरकारी अधिगरियो में यह बानही प्रती निवेद। गहान के लिए बिजली का वनेक्शन दे दे, ता षि उत्पादन में वृद्धि होग प्र वीस्थति खत्म हो जायेगी तब लागा के पास पैसे हागे आर वे पेमेट वर देगे । इन शब्द, वे ग्ाथ में उत्तर प्रदेश मे राष्ट्रपन शामर्थन रंगहू । मरत सरकार का यह नाति है वि गरोबा योर वीवर मैगन्ज की मदद की जाये । उत्तर प्रदेश में राष्ट्र शाग्न उग नीति का कार्यान्वित करे हमारे यहा एक शूगर फैक्टरी बनी है । उस म जिन डायरेक्टर्ज का नाम(नेशन हुआ है, उन में हरिजन मुसलमान भार प्रन्य अनख्यकों के प्रतिनिधि नही है । इन वर्गों को भी उस से प्रतिनिधित्व दिया जान चाहिए, ताकि उन वर्गों के हितों की रक्षा President's Rule SRAVANA 17, 1895 (SAKA) President's Rule in U.P. (Res.) ग़रीबी को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश में सिंचाई की प्राजेक्टस की तरफ़ पूरा ध्यान दिया जाये । हमारे यहां गंगा और घाघरा में बाढ़ माई हुई है। घाघरा से चकीचाददेरा के चौदह घर कट गये हैं। अगर यह पूरा गाव कट गया, तो नदी अपना रास्ता बदल लेगी और इससे जिले का दो तिहाई भाग कट जायेगा । श्रम सम्बन्ध में समय पर उचित कार्यबाड़ी न की गई, तो वह क्षेत्र बर्बाद हो जायेगा। दोहरी महायक परियोजना स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन ग्राज तक उसका काम शुरु नहीं गया है और उग का रुपया लैप्स हो रहा है। उस परियोजना के कार्य को तुरन्त हाथ में लेना चाहिए । फ़ैक्टरी चुकी है और उसका मैनेजिंग बोर्ड बन गया है । रभ काम का तेजी से किया जाये, ताकि लोगों की क्रय शक्ति बढ़े । इसी तरह मिनी स्टील पलाट भी स्त्री हो चुका है । उस को भी शाघ्र लगाया जाये । इम प्रकार हमारे क्षेत्र का प्रौद्योगिकरण करने से हमारे यहा का ग़रीबी मिट गयेगी । वहा के लागो का गहा देने के लिए टेस्ट वर्म भी शुरु किये जाये । श्री कृष्ण चन्द्र पांडे (खनालाबाद ) उपाध्यक्ष महादय, आज हम उत्तर प्रदेश के और देश के ऐसे मसले पर विचार कर रहे है, जो बहुत हो गम्भीर मसला है। उत्तर प्रदेश मे श्राज राष्ट्रपति का शासन है । यह विधि की बिडमना ही कही जा सकती है कि जिस प्रदेश में बहुमत की सरकार रही हो, उसमे राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। परन्तु भगर गम्भारता से विचार किया जाये, तो ज्ञात होगा कि जिन परिस्थितियों में राष्ट्र3, पति शासन लागू किया गया, वे बड़ी दुर्भाग्य पूर्ण थीं। आप जानते है कि उत्तर प्रदेश में सात बरस तक ऐसी स्थिति रही कि सरकार भाई औौर गई। इस बीच मे प्रशासन इतना कमजोर और भ्रष्ट हो गया कि उस को सुधारने के लिए एक सुदृढ़ शासन की आवश्यकता थी । पंडित कमलापनि विपाटी के नेतृत्व मे छब्बीस महीनों में जो कार्य हुआ, उस का अपना एक इतिहास है। इसी बीच विरोधी दलों का जा षड़यत्र चल रहा था, वह सामने भाया । वह षडयंत था लखनऊ विश्वविद्यालय वा । विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार महोदय ने, जिन पर चालीस लाख रुपये के ग़बन के आरोप थे वहा के विद्याथियों को गुमराह कर के एक षडयत्र किया । मैं गुह मत्री महोदय से यह जानना चाहता हूँ कि क्या कारण है कि लखनऊ विश्वविद्यालय की अन्य फ़ॉल्टउज मे आग नही लगाई गई, वाइस-चाम्लर का चेम्बर नही पूरा गया, लेकिन केवल रजिस्ट्रार का आफ़िस फूना गया और उनकी उन फ़ाइलों को फूका गया, जिनमे गबन सम्बन्धी वागजात थे । में जानना चाहता हूनि क्याने आज तक उस तरफ ध्यान दिया है श्री दि मही दिया है, तो उस का क्या कारण है । जहा तक मेरी जानकारी हे, उत्तर प्रदेश में पी० ए० सी० का जो भयकर विद्राह हुआ, उस को राजनैतिक सफलता नही बल्कि प्रशासनिक असफलता हा जी 1 । मुख्य मन्त्री गये, उन की कंबिनेट गई और विधायक भी अपने अपने घर गये । लोकन पी० एस० सी० की बागडोर जिन उच्चाधिकारियों के हाथ में थी, वे जिन पदो पर बैठे थे, आज भी वे उन्ही पदो पर बड़े हुए है । भाज भी उन पदो का दुरुपयोग किया जा रहा है। है । यह ठीक है कि पी० ए० सी० को नया रूप दिया जा रहा है, लेकिन पी० ए० सी० के विद्रोह के समय जिन अधिकारियों के हाथों
President's Rauta तीनn U.P. [Shri Dinesh Singh) their constituencies and start working for that. Therefore, while supporting the Government in its imposition of the President's rule, I would request the Home Minister to clarify the position as much as he can SHRI RANABAHADUR SINGH There have been no rains in Rihand Dam Catchment area, so it is not full even today श्री शिव कुमार शास्त्री उपाध्यक्ष जी, उत्तर प्रदेश मे राष्ट्रपति शासन की स्थापना के लिये जो युक्तिया बी गयी है उन मे परस्पर बडी प्रसगतिया है । केवल एक बात को छोड़ कर कि प्रदेश मे सूखे का प्रकोप था इसलिये शासन चलाने मे कठिभाई थी, यह बात तो कुछ समझ मे प्राती है । इस के अतिरिक्त जो तीन युक्तिया दी गयी है वह शासक दल की अयोग्यता के अतिरिक्त और किसी चीज को प्रमाणित नही करती । यदि पीशून्यएशून्यसी में प्रसतोष हुआ तो क्यो ? और उस का पता न प्रदेश को चल पाया और न केन्द्र को । जब इतना बडा विस्फोट हो गया तब यह बात कही गयी । मैं यह समझता हू कि जब काग्रेस के पास सब से बड़ा प्रमाण-पत्र यह था कि बार बार वह कहते थे कि यही एव दल है जो स्थायी सरकार दे सकता है, गवर्नमेट दे सकता है, हम से यह देखा कि उन का बहुमत होते भी जिस तरह से पतझड मे पत्ते झर झर कर गिरते हैं उसी तरह से यह बहुमत मे होते हुए भी सारी की सारी सरकारी का पतन हुआ, और उस मे उत्तर प्रदेश का भी हुआ । इसलिये अपनी भयोग्यता स्वीकार कर लेनी चाहिये कि हम शासन नही चला सकते थे इसलिये बहुमत होते हुए भी हम ने उस को समाप्त किया और राष्ट्रपति शासन की स्थापना की । President's Rule तीन सौ छप्पन in U.P, इस के साथ साथ जो अगली चीजें है वह भी एक विशेष विचारणीय हैं। राष्ट्रपति शासन से पहले ही कुछ इस प्रकार की घोषणाये वहां की लोकप्रिय सरकार ने की थी, जैसा कि श्री माननीय वाजपेयी जी ने कहा कि किसी भाषा को सरक्षण दिया जाय, उस को पढाने की व्यवस्था की जाय, इस मे किसी को कोई मतभेद नही हो सकता। लेकिन पिछले पच्चीस वर्ष से जो आप की नीति चली ग्रा रही थी उस मे एक साथ आप ने इस प्रकार का सशोधन किया जिस से दूसरे की दृष्टि उस भोर जाती है और वह प्रापत्तिजनक प्रतीत होता है कि वहा के स्कूलो मे चार हजार उर्दू के अध्यापक एक साथ नियुक्त कर दिये जाये । इस साथ साथ वहा पढने वा या नही है इस बात का कोई ध्यान न रखा जाय । और युक्ति यह दी गयी कि जब तक और छात न हो तब तक यह उर्दू के अध्यापक और विषयो ने पढ़ाये । तो क्या और विपयो के अध्यापक तब तक नहीं थ जिन के लिये यह प्रतीक्षा की जा रही थी कि यह प्रायेगे और तभी पढाना प्रारम्भ होगा । ये इस प्रकार की चीजे हैं जो इस ओर ध्यान करानी है कि वास्तव मे यह लक्ष्य किसी भाषा मरक्षण का नही है अपितु राजनीतिक दृष्टि स लाभ प्राप्त करने का है। इस के साथ उत्तर प्रदेश मे जहा श्रावश्यक गणना की दृष्टि से इस प्रकार के लोग बसते थे कि जिस में उर्दू में प्रार्थना पत्र देने की कचहरियो मे छूट होनी चाहिये उसलिये नौ जिनो म पहले से ये सुविधाये प्राप्त थी । नेकिन यह सारे के सारे प्रार्थना पत्र फारसी लिपि में उत्तर प्रदेश मे दिये जाये, इस प्रकार की जो बात कही जा रही है वह इस बात को सोचने के लिये विवश करती है कि यह सब राजनीतिक दृष्टिकाण से किया जा रहा है, किसी भाषा के संरक्षण की दृष्टि से नहीं किया जा रहा है । इसके साथ साथ एक तरफ यह कहा जात है कि इस प्रकार के अनेक उदाहरण हैं कि President's Rule SRAVANA सत्रह, in U.P. जहां बिल्डिंग्ज मौजूद है वहां पर पाठशालाओं में प्रइमरी अध्यापक पढ़ाने के लिए नहीं हैं और जब यह मांग की जाती है शासन से कि वहा पर अध्यापक होने चाहिये तो पैसे के प्रभाव की बात कह कर इसको टाल दिया जाता है और दूसरी तरफ चार हजार अध्यापक रख दिए जाएं और भारीभरकम बोझ इस प्रकार का प्रदेश के ऊपर लाद दिया जाए यह बीज समझ में नहीं आती है । इस वास्ते राष्ट्रपति शासन के लागू होने के साथ साथ जो इस प्रकार की चीजे चल रही हैं वे बहुत ही प्रापत्तिजनक हैं और इन की और केन्द्रीय सरकार का ध्यान जाना चाहिये और इसके कारण जो असतोष उभर रहा है, उसको ध्यान में रखना चाहिये । या तो वहा पर लोकप्रिय शासन की स्थापना की जाए और यदि ऐसा नही होता है तो मैं चाहूंगा कि विधान सभा भग करके नए चुनाव कराए जाए । श्री रुद्र प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की उदघोषणा के सम्बन्ध में हमारे गृह मंत्री श्री उमा शकर - दीक्षित जी ने जो अनुमोदन का सकल्प प्रस्तत किया है उसका समर्थन करन के लिए मै खडा हुआ हूँ। मुझ से पूर्व विरोधी दलो के वक्ताओ ने यहा पर जो विचार व्यक्त किए है वे न केवल अतिशयोक्तिपूर्ण है बल्कि तथ्यो मे परे है, निराधार है और उनका कोई औचित्य नहीं है । वास्तविकता यह है कि लोक सभा के जब मध्यावधि चुनाव हुए थे और उन मे जनता ने हमे जो आदेश दिये थे देश के अन्दर सामाजिक और आर्थिक विषमताथो को समाप्त करने के, देश से गरीबी, बेकारी, भुखमरी, बेरोजगारी भौर महगाई को दूर करने के, देश में फैले हुए असन्तुलन को दूर करने के उत्तर प्रदेश मे हमारे दल की सरकार उन तमाम वादों तथा जनता द्वारा दिए गए मादेशों का पालन करने के लिए कृतसंकल्प थी और बढ़तापूर्वक उन President's Rule in U.P. कार्यों में रत थी । इस बात के कुछ उदाहरण मैं इस सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं । विधान सभा में हमारी सरकार ने वहा पर भूमि सुधारो को कार्यान्वित करने की दिशा में सीलिग का विधेयक प्रस्तुत किया था और उसको स्वीकृत कराया था। उसके द्वारा इस बात की व्यवस्था की गई थी कि अधिक से अधिक भूमि प्राप्त करके भूमिहीनों को, हरिजनों को और पिछड़े वर्गों को बी जाए । इसके साथ साथ इस बात की भी व्यवस्था की गई कि अखिल भारतीय काग्रेस कमेटी के निर्णय के अनुसार गल्ले के व्यापार का अधिग्रहण किया जाए और उत्तर प्रदेश की सरकार मे इस कार्यक्रम को तेजी के साथ कार्यान्वित किया और इस बात की व्यवस्था की कि जिस तरह से हो सके जनता के सहयोग के द्वारा सुचारू रूप से गल्ले की वसूली की जाए ताकि जो हमारे भूखे लोग हैं उनको हम भोजन दे सके । हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में एक बहुत बडी व्यवस्था यह की कि उन्होंने एक कैबिनेट डिसिशन लिया जिस के अनुसार इस बात की व्यवस्था की गई थी कि उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तक की शिक्षा का प्रान्तीयकरण किया जाएगा जिससे शिक्षा दलगत राजनीति से ऊपर उठ सके और विद्यार्थियों का सतुलित विकास हो सके, उनके व्यक्तित्त का विकास हो और शिक्षा का वातावरण शुद्ध हो सके तथा स्तर उन्नत हो सके । इन सब कामों को वह कर रही थी कि एक पीशून्यएशून्यसीशून्य की घटना घटी और न चाहते हुए भी सशस्त्र सेना का उम में सहयोग लेना पड़ा। वह गम्भीर स्थिति थी । उस पर गम्भीरता से विचार करने की आवश्यकता भी थी। यह सोचने की प्रावश्यकता थी कि यह जो कार्य हुआ है इसके पीछे तोड़फोड मे विश्वास करने वाले राजनीतिक दलों का हाथ है तीन सौ उनसठ President's Rule in U.P. [श्री या प्रताप सिंह] या इसके पीछे अनुशासनहीनता फैलाने वाले दलो का हाथ है या इसके पीछे साम्प्रदायिकता फैलाने वाले दलो का हाथ है या इसके पीछे लोकतन के विरोधी वडे अफसरो का, नौकर शाही का हाथ है या पूजिपतियो का हाथ है या इसके पीछे कोई विदेशी षडयन है। उत्तर प्रदेश जो कि एक सीमा प्रदेश है, जोकि सुरक्षा की बष्टि से महत्वपूर्ण प्रदेश है वहा हमें इस बात के लिए विवश होना पडा कि पीशून्य एशून्य सीशून्य की जो अभूतपूर्व घटना उत्तर प्रदेश ने घटी है देश की स्वतंत्रता के पश्चात यह एक अपने प्रकार की ऐसी घटना थी जिसकी ईश्वर न करे दुवारा भारत की भूमि पर कभी बोहराया जाए । इस प्रकार की घटना घटने के बाद भी हमारे विरोधी दलों के नेता पूछते हैं कि कौन सी बात थी कि माप विवश हो गए राष्ट्रपति शामन लागू करने के लिए। में अपने विरोधी दलो के नेताओ से यह पूछना चाहता हूँ कि भौर कौन इससे बडी घटना वे चाहते थे कि घंटे औौर राष्ट्रपति शासन लागू हो और कौन सी बड़ी घटना घटते हुए वे सुनना चाहते थे, पीशून्य एशून्य सीशून्य जो हमारा एक धग है, जिस के द्वारा हम प्रशासन को चलना चाहते हैं वह अग अगर हमारा साथ नहीं देता है और मनुशासनहीनता करता है तो इससे बड़ा कारण राष्ट्रपति शासन लागू करने के अलावा और कौन सा हो सकता था ? हर कोई जानता है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा में हमारा चार सौ इक्कीस मे से दो सौ इकहत्तर का बहुतमत था। इतना भारी बहुमत होते हुए भी परिस्थितियों के कारणवश हमे मजबूर होना पड़ा और हमारे दल की सरकार को त्यागपत्र देना पड़ा। हम समझते थे और हम चाहते थे और माता भी करते थे कि हमारे विरोधी दलों के नेता इस के लिए हमारी प्रशसा कर गे, हमारे दल की सराहना करेंगे कि हमारे दल ने इस रजत जयन्ती वर्ष में इस बात को चौहरा दिया है, सिद्ध कर दिया President's Rule H.P. है कि इस कुर्सियों से चिपके रहना नहीं चाहते, हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, हम जनता की मदालत में जाना पसन्द करेगे बजाय इसके कि कुर्सियों से चिपके रहे । हमारे बनर्जी साहब ने औौर वाजपेयी जी ने विधान सभा के चुनाबो की मांग की है । मैं उसका स्वागत करता हूं । यथासमय फरवरी मे जब चुनाव होने चाहिये, हम भाशा करते हैं कि चुनाव अवश्य होगे। हम विरोधी दलो के मिथ्या प्रचार से भयभीत होने वाले नहीं है। हम भगले चुनाव में यह सिद्ध कर देगे कि लोक सभा के एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के मध्यावधि चुनाव में जनता ने जो फैसला किया था और एक हज़ार नौ सौ बहत्तर के विधान सभाओ के चुनाव मे देश भर मे जो परिणाम हमने दिखाए थे, फरवरी एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए जो चुनाव होगे उन मे उसमे भी अधिक बहुमत ले कर हम विधान सभा मे भाएगे और सरकार बनाएगे । आप भय क्यो दिखाते है । हम चुनाव का स्वागत करते हैं, हमारे कनकर्ता स्वागत करते हैं सारे विधायक स्वागत हैं, जो प्रत्याशी होगे वे भी स्वागत करते हैं । यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन मे विधान सभा को निलम्बित क्यो किया गया है, उसको भग क्यो नही कर दिया गया ? बडी अजीब बात है। अगर हमने भग कर दिया होता तो हमारे अटल जी कहते कि लोकतन की हत्या हो गई और जब हम निलम्बित करते हैं तो उन्हें सन्देह होता है और कहते हैं कि भंग क्यो नहीं कर दिया गया । हमारे विरोधी दलो की तो यह स्थिति है मैं यह साफ कह दू जो है फर्क मुझ से तुझ मे तेरा वर्ष वर्षे सनहा मेरा गम गमे बनाना । इन शब्दों के साथ मैं अपना भाषण समाप्त करता हूं और जो संकल्प रखा गया है इसका समर्पत करता हू चार President's Rule SRAVANA सत्रह, एक हज़ार आठ सौ पचानवे President's Rule in .P. in U.P. श्री चन्द्रिका प्रसाद : उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। इसलिए हमारे विरोधी भाइयों को कोई प्राधार चाहिये । इस वास्ते उनको हमारी पार्टी में और हमारी सरकार में खराबियां ही खराबिया दिखाई पड़ती है। वे हमारे प्रधान मंत्री और हमारे नेताओं की जो कीमत है उसको गिराना चाहते हैं। प्रधान मनी का यह प्रदेश है। प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की वेव में हमारे सब विरोधी बह गए थे। वे डरते है कि कही फिर ऐसा न हो जाए। इस वास्ते वे अभी से तैयारी कर रहे है। वे समझते है कि अगर उनके इमेज को नहीं गिरायेंगे तो उनका फिर वही हाल होगा जो पहले हुआ था मापने देख ही लिया है कि किस तरह से हाउस में चार चार घंटे काम का हरजा किया जा रहा है। यह एक प्रकार से डैमोक्रेस के साथ बलात्कार करना है । ऐसा करके मदन की जो मर्यादा है उसको गिराया जा रहा है। मैं कहूंगा कि जनता इनकी फिर वही हालत करेगी जा पहले एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में की थी । एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के चुनाव में जनता ने हमें मैंडेट दिया। जिन सूबों में इनकी मरकारे थी वहां भी ये हार गए । बंगाल मे श्री ज्योति बसु की सरकार बनी । बंगाल में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलो के लोग तीन पुश्तो से रहते आ रहे हैं। हम जानते हैं कि वहां सिनेमा का एक एक लाइसेम देने के लिए पचास पचास हजार रुपये लिये गये थे और मामूली मामूली कामों को करने के लिए दम दस हजार रुपये खुले श्राम लिये जाते थे । श्री ज्योतिर्मय बसु हमारे ऊपर चार्जिज लगाते हैं। मैं चाहता हूं कि पहले वे अपने दामन को देखें, उसको पाक साफ करें। भोजपुरी में एक कहावत है, सूप हंसे तो हंसं छलनी भी हंसे जिस में बहत्तर छेद होते हैं। अपर मुझे मौका मिले, तो मैं हर बात का सबूत दे सकता हूं। यह कहना संतसर गलत है कि हमारे नेता पार्टी के लिए चंदा भांगते हैं । हमारी पार्टी के बत्तीस करोड़ सदस्य हैं। अगर वे एक एक रुपया भी दें, तो हम बत्तीस करोड़ रुपये इकट्टा कर सकते हैं। मेरे जंसा व्यक्ति भी एक हज़ार नौ सौ सरसठ में केवल पांच छः हजार रुपये खर्च कर के जीता, जब कि उस समय कांग्रेस मेरे निर्वाचन क्षेत्र के अन्तर्गत करीब करीब सभी सीटें हार गई थी। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में मैं केवल सोलह से बीस हजार रुपये खर्च कर के जीत कर आया हूं। हम को रुपये की क्या जरूरत है। देश की जनता ने हमारा साथ दिया है और हम को अपनी पार्टी के वर्कर्ज पर पूरा भरोसा है। इस लिए हम पर इस प्रकार का चार्ज लगाना अन्यायपूर्ण है और पब्लिक लाइफ़ में इस तरह कीचड़ उछालना ग़लत बात है । श्री वाजपेयी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागूक रना ग़लत है लेकिन खुद श्री बनर्जी ने कहा है कि सोशालिस्ट पार्टी और अन्य विरोधी पार्टियों के लोगों ने पीशून्य एशून्यसीशून्य वालों और विद्यार्थियों को भड़काया हमारे प्रदेश मे सूखा पड़ा हुआ था। पच्चीस बरस के इतिहास में यह पहला मौका था, जब कि पीशून्य एसशून्य सीशून्य और पुलिस का आपस मे संघर्ष हुआ, जिन के द्वारा ला एड भार्डर मेनटेन किया जाता है, और प्रशासन ठप्प हो गया था। उस समय हमारे मुख्य मन्त्री और उनके साथियों ने जनता के कष्ट देखकर खुशी से त्याग किया और यह साबित किया कि हम कुर्सी से चिपके नहीं रहना चाहते हैं। इस प्रकार उन्होंने वह आदर्श उपस्थित किया, जो हमारे अन्य नेता बराबर उपस्थित करते रहे हैं। . श्री बाजपेयी ने कहा है कि एसेम्बली को डिजाल्ब न करके केवल ससपेंड किया गया है मूछित किया गया है। गवर्नर ने साफ कहा है कि यह एक टेम्पोरेरी व्यवस्था है और जब प्रदेश की स्थिति में सुधार हो जायगा, तीन सौ तिरेसठ President's Rule in U.P. [श्री चन्द्रिका प्रसाद] तो ऐसम्बली जिन्दा हो जायेगी और लोकप्रिय सरकार बन जायेगी। मै भी चाहता हू कि हमारे प्रदेश मे जरूर चुनाव होने चाहिए, लेकिन उससे पहले वहा लोकप्रिय सरकार बननी चाहिए। एक हज़ार नौ सौ सरसठ के चुनाव के बाद हमारे प्रदेश मे चार पाच साल तक सविद सरकारे रह । उन्होने सारी सरकारी मशीनरी को करप्ट कर दिया था, चारो तरफ अनुशासनहीनता फैल गई थी और भूखमरी व्याप्त थी । श्री कमलापति त्रिपाठी ने बो वर्ष मे वह काम कर दिखाया जो बीस वर्ष मे भी नही हो सकता था। श्री त्रिपाठी उन नेताओ मे से है, जो जीवन भर समाजसेवा और राजनैतिक कार्यों में लगे रहे है । उन्होने जनतन और देश की जो सेवा की हे और तीस बरस तक जो कुर्बानिया की है, वे देश के महान् नेताओ की तुलना मे किसी से कम नही हैं । यह बात नहीं है कि उन के घर मे कोई आर्थिक सकट था। वह पहले भी अच्छे घर से थे और आज भी अच्छी स्थिति मे है । इस लिए हम उन पर और उन वे परिवार पर इस प्रकार के लाछन लगाना समझते हैं । श्री वाजपेयी और श्री ज्योतिर्मय वसु दोनो ने कहा है कि भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के प्रति हमेशा उपेक्षा की नीति अपनाई है । आज न केवल देश मे, लिल विश्व भर मे, उस की प्रति व्यक्ति प्राय सब से कम है। उत्तर प्रदेश पहले सूखे और बाढ से तगह होता रहा है और आज भी तबाह हो रहा है । हमारे यहा जितनी इडस्ट्रीज होनी चाहिए वे नही हैं । हम चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश मे राष्ट्रपति शामन तब तक रहे, जब तक कि हम अन्य प्रदेशो के समकक्ष न प्रा जाये, हमारी आर्थिक समस्याये हल न हो जाये और हमारी मार्थिक प्रगति न हो जाये । उत्तर प्रदेश में बच्चो से तीन चार महीने की फ़ीस मामी जा President's Rule in U.P. है और किसानों से लगान की वसूली की जा रही है हम चाहते हैं कि बच्चो की फ्रीस माफ़ की जाये और लगान की वसुली बन्द. की जाये । बनारस कमिशनरी मे खरीफ अभियान के बारे में जो मंडलोय स्तर पर सम्मलन हुभा था, मैं ने वहा भा कहा था, और प्रधान मंत्री से उत्तर प्रदेश के समद सदस्यों की जो बैठव बुलाई थी उस मे भी कहा था कि बलिया पास्टाट्युएन्सी मे नानपेमेट भ्राफ ड्यूज के कारण तान साँ ट्यूबवैल्ज के कनेक्शन कटे हुए हैं। इस वक्त लागा के पास पैसा नहीं है । अगर बिजली के बनेक्शन वटे रहेगे तो बिजली न मिलने से फल का उत्पादन नहीं हो पायेगा और मुखमरा जारी रहेगी । पब्लिम वर्कस और सरकारी अधिकारियों के काम करने का तरीका अलग अलग होता है। सरकारी अधिगरियो में यह बानही प्रती निवेद। गहान के लिए बिजली का वनेक्शन दे दे, ता षि उत्पादन में वृद्धि होग प्र वीस्थति खत्म हो जायेगी तब लागा के पास पैसे हागे आर वे पेमेट वर देगे । इन शब्द, वे ग्ाथ में उत्तर प्रदेश मे राष्ट्रपन शामर्थन रंगहू । मरत सरकार का यह नाति है वि गरोबा योर वीवर मैगन्ज की मदद की जाये । उत्तर प्रदेश में राष्ट्र शाग्न उग नीति का कार्यान्वित करे हमारे यहा एक शूगर फैक्टरी बनी है । उस म जिन डायरेक्टर्ज का नाम President's Rule in U.P. ग़रीबी को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश में सिंचाई की प्राजेक्टस की तरफ़ पूरा ध्यान दिया जाये । हमारे यहां गंगा और घाघरा में बाढ़ माई हुई है। घाघरा से चकीचाददेरा के चौदह घर कट गये हैं। अगर यह पूरा गाव कट गया, तो नदी अपना रास्ता बदल लेगी और इससे जिले का दो तिहाई भाग कट जायेगा । श्रम सम्बन्ध में समय पर उचित कार्यबाड़ी न की गई, तो वह क्षेत्र बर्बाद हो जायेगा। दोहरी महायक परियोजना स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन ग्राज तक उसका काम शुरु नहीं गया है और उग का रुपया लैप्स हो रहा है। उस परियोजना के कार्य को तुरन्त हाथ में लेना चाहिए । फ़ैक्टरी चुकी है और उसका मैनेजिंग बोर्ड बन गया है । रभ काम का तेजी से किया जाये, ताकि लोगों की क्रय शक्ति बढ़े । इसी तरह मिनी स्टील पलाट भी स्त्री हो चुका है । उस को भी शाघ्र लगाया जाये । इम प्रकार हमारे क्षेत्र का प्रौद्योगिकरण करने से हमारे यहा का ग़रीबी मिट गयेगी । वहा के लागो का गहा देने के लिए टेस्ट वर्म भी शुरु किये जाये । श्री कृष्ण चन्द्र पांडे उपाध्यक्ष महादय, आज हम उत्तर प्रदेश के और देश के ऐसे मसले पर विचार कर रहे है, जो बहुत हो गम्भीर मसला है। उत्तर प्रदेश मे श्राज राष्ट्रपति का शासन है । यह विधि की बिडमना ही कही जा सकती है कि जिस प्रदेश में बहुमत की सरकार रही हो, उसमे राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। परन्तु भगर गम्भारता से विचार किया जाये, तो ज्ञात होगा कि जिन परिस्थितियों में राष्ट्रतीन, पति शासन लागू किया गया, वे बड़ी दुर्भाग्य पूर्ण थीं। आप जानते है कि उत्तर प्रदेश में सात बरस तक ऐसी स्थिति रही कि सरकार भाई औौर गई। इस बीच मे प्रशासन इतना कमजोर और भ्रष्ट हो गया कि उस को सुधारने के लिए एक सुदृढ़ शासन की आवश्यकता थी । पंडित कमलापनि विपाटी के नेतृत्व मे छब्बीस महीनों में जो कार्य हुआ, उस का अपना एक इतिहास है। इसी बीच विरोधी दलों का जा षड़यत्र चल रहा था, वह सामने भाया । वह षडयंत था लखनऊ विश्वविद्यालय वा । विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार महोदय ने, जिन पर चालीस लाख रुपये के ग़बन के आरोप थे वहा के विद्याथियों को गुमराह कर के एक षडयत्र किया । मैं गुह मत्री महोदय से यह जानना चाहता हूँ कि क्या कारण है कि लखनऊ विश्वविद्यालय की अन्य फ़ॉल्टउज मे आग नही लगाई गई, वाइस-चाम्लर का चेम्बर नही पूरा गया, लेकिन केवल रजिस्ट्रार का आफ़िस फूना गया और उनकी उन फ़ाइलों को फूका गया, जिनमे गबन सम्बन्धी वागजात थे । में जानना चाहता हूनि क्याने आज तक उस तरफ ध्यान दिया है श्री दि मही दिया है, तो उस का क्या कारण है । जहा तक मेरी जानकारी हे, उत्तर प्रदेश में पीशून्य एशून्य सीशून्य का जो भयकर विद्राह हुआ, उस को राजनैतिक सफलता नही बल्कि प्रशासनिक असफलता हा जी एक । मुख्य मन्त्री गये, उन की कंबिनेट गई और विधायक भी अपने अपने घर गये । लोकन पीशून्य एसशून्य सीशून्य की बागडोर जिन उच्चाधिकारियों के हाथ में थी, वे जिन पदो पर बैठे थे, आज भी वे उन्ही पदो पर बड़े हुए है । भाज भी उन पदो का दुरुपयोग किया जा रहा है। है । यह ठीक है कि पीशून्य एशून्य सीशून्य को नया रूप दिया जा रहा है, लेकिन पीशून्य एशून्य सीशून्य के विद्रोह के समय जिन अधिकारियों के हाथों
इसके दो भेद होते हैं - समस्त वस्तु-विषय और एकदेशविवति । १ समस्त वस्तु विषय वह है जिसमें सभी प्रारोप्यमाणों - उपमानों और सभी आरोप के विषय - उपमेयो का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन किया जाय । मेरी आशा नवल लतिका थी बड़ी हो मनोज्ञा नोले पत्ते सकल उसके नीलमों के बने थे । हीरे के थे कुसुम, फल थे लाल गोमेदकों के पन्नो द्वारा रचित उसकी सुन्दरी डंटियाँ थीं । - हरिश्रौध इसमें आशा उपमेय को नवललतिका उपमान में एकरूपता मानकर श्रारोप्यमार्गो - नीलम, हीरा, गोमेद, पन्ना का और आरोप के विषयों - पत्ता, फूल, फल, ईंटी का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है । आनन अमल चन्द्र चन्द्रिका पटीर पंक दसन अमद कुन्द कलिका सुढंग की। खंजन नयन पदपाँति मृदु कंजनि के मंजुल मराल चाल चलत उमग की। कवि 'जयदेव' नभ नखत समेत सोई ओढ़े चार चूनरि नवीन नील रंग की । लाज भरि आज ब्रजराज के रिझाइबे को सुन्दरी सरद सिधाई सुचि अंग को । इसमें शरद् की सारी सामग्री- वन्द्र, चन्द्रिका आदि में नायिका के अंगोंमुख, नयन, दर्शन आदि का आरोप है। इस प्रकार शरद् ऋतु में सुन्दरी नायिका का रूपक है । (२) एक देशविवर्ति रूपक वह है जिसमें कुछ आरोग्यमाण वा आरोप के विषय तो शब्दतः स्पष्ट कहे जायँ और कुछ अर्थ के बल सेक्षित होते हों । जीवन की चंचल सरिता में फेंकी मैने मन की जाली, फँस गयी मनोहर भावों को मछलियाँ सुघर भोलीभाली 1-- पंत इसमें मछलियाँ फँसाने के सभी साधन हैं। सावयव उपमेय और उपमानों को शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है, पर 'मैंने' उपमान उक्त नहीं है । पर मछली फँसाने का काम होने से 'मैंने' के स्थान पर धीवर उपमान का सहज ही आक्षेप हो जाता है। तरल मोती से नयन भरे मानस से ले उठे स्नेह-घन, कसक विद्यु- पलकों के हिमकण, सुधि-स्वाति की छह पलक की सीपी में उतरे । - महादेवी उपमेय का शब्द से कथन नहीं है, पर अन्य आरोपों के द्वारा उपमेय आँसु स्वतः श्राप्ति हो जाता है। इसके अन्य अवयव - स्नेह - धन, कसक-विद्यु, सुधि-स्वाति, पलक- सौपौ का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है। इससे यह भी एकादेशविवति रूपक है ।
इसके दो भेद होते हैं - समस्त वस्तु-विषय और एकदेशविवति । एक समस्त वस्तु विषय वह है जिसमें सभी प्रारोप्यमाणों - उपमानों और सभी आरोप के विषय - उपमेयो का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन किया जाय । मेरी आशा नवल लतिका थी बड़ी हो मनोज्ञा नोले पत्ते सकल उसके नीलमों के बने थे । हीरे के थे कुसुम, फल थे लाल गोमेदकों के पन्नो द्वारा रचित उसकी सुन्दरी डंटियाँ थीं । - हरिश्रौध इसमें आशा उपमेय को नवललतिका उपमान में एकरूपता मानकर श्रारोप्यमार्गो - नीलम, हीरा, गोमेद, पन्ना का और आरोप के विषयों - पत्ता, फूल, फल, ईंटी का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है । आनन अमल चन्द्र चन्द्रिका पटीर पंक दसन अमद कुन्द कलिका सुढंग की। खंजन नयन पदपाँति मृदु कंजनि के मंजुल मराल चाल चलत उमग की। कवि 'जयदेव' नभ नखत समेत सोई ओढ़े चार चूनरि नवीन नील रंग की । लाज भरि आज ब्रजराज के रिझाइबे को सुन्दरी सरद सिधाई सुचि अंग को । इसमें शरद् की सारी सामग्री- वन्द्र, चन्द्रिका आदि में नायिका के अंगोंमुख, नयन, दर्शन आदि का आरोप है। इस प्रकार शरद् ऋतु में सुन्दरी नायिका का रूपक है । एक देशविवर्ति रूपक वह है जिसमें कुछ आरोग्यमाण वा आरोप के विषय तो शब्दतः स्पष्ट कहे जायँ और कुछ अर्थ के बल सेक्षित होते हों । जीवन की चंचल सरिता में फेंकी मैने मन की जाली, फँस गयी मनोहर भावों को मछलियाँ सुघर भोलीभाली एक-- पंत इसमें मछलियाँ फँसाने के सभी साधन हैं। सावयव उपमेय और उपमानों को शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है, पर 'मैंने' उपमान उक्त नहीं है । पर मछली फँसाने का काम होने से 'मैंने' के स्थान पर धीवर उपमान का सहज ही आक्षेप हो जाता है। तरल मोती से नयन भरे मानस से ले उठे स्नेह-घन, कसक विद्यु- पलकों के हिमकण, सुधि-स्वाति की छह पलक की सीपी में उतरे । - महादेवी उपमेय का शब्द से कथन नहीं है, पर अन्य आरोपों के द्वारा उपमेय आँसु स्वतः श्राप्ति हो जाता है। इसके अन्य अवयव - स्नेह - धन, कसक-विद्यु, सुधि-स्वाति, पलक- सौपौ का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है। इससे यह भी एकादेशविवति रूपक है ।
कानपुर। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी को गाड़ियों का कितना शौक है, ये हम सभी जानते हैं। धोनी के पास बाइक से लेकर कारों का बढ़िया कलेक्शन है। माही के पास ऑडी से लेकर बीएमडब्ल्यू तक तमाम कारें तो थीं। अब इस गैराज में एक नया मेहमान और शामिल हो गया। जी हां धोनी ने हाल ही में एक नई कार खरीदी है जिसकी भारत में एक्स शो रूम कीमत 1. 07 करोड़ रुपये है। इस कार का नाम 'ग्रैंड चेरोके' है। इसमें तमाम खासियत हैं यही वजह है कि माही इसे देखकर इतने फिदा हुए कि, घर ले आए। धोनी की इस कार की पहली तस्वीर साक्षी ने शेयर की है। धोनी की पत्नी साक्षी ने अपने इंस्टाग्राम पर कार की पहली तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'रेड बीस्ट तुम्हारा घर में स्वागत है। माही तुम्हारा खिलौना आखिरकार आ गया। अापकी बहुत याद आ रही। ' बता दें धोनी इस समय घर पर नहीं है। वह टीम इंडिया से दो महीने की छुट्टी लेकर कश्मीर गए हैं। माही को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि मिली हुई है। सेना के प्रति लगाव के चलते धोनी फिलहाल अपना पूरा समय जवानों के साथ बिता रहे हैं। Welcome home #redbeast ! Your toy is finally here @mahi7781 really missing you ! धोनी को अपनी कार की पहली झलक घर वापस आने पर ही मिलेगी। जीप कंपनी की 'ग्रैंड चेरोके' एसयूवी एक ब्रांडेड कार है। जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। ये एक पांच सीटर गाड़ी है जिसमें 3604 सीसी का इंजन लगा है। इस कार में पाॅवर स्टीयरिंग, एंटी लाॅक ब्रेकिंग सिस्टम, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, पाॅवर विंडो फ्रंट, ड्राइवर और पैसेंजर एयरबैग और फ्रंट में फाॅग लाइट लगी है।
कानपुर। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी को गाड़ियों का कितना शौक है, ये हम सभी जानते हैं। धोनी के पास बाइक से लेकर कारों का बढ़िया कलेक्शन है। माही के पास ऑडी से लेकर बीएमडब्ल्यू तक तमाम कारें तो थीं। अब इस गैराज में एक नया मेहमान और शामिल हो गया। जी हां धोनी ने हाल ही में एक नई कार खरीदी है जिसकी भारत में एक्स शो रूम कीमत एक. सात करोड़ रुपये है। इस कार का नाम 'ग्रैंड चेरोके' है। इसमें तमाम खासियत हैं यही वजह है कि माही इसे देखकर इतने फिदा हुए कि, घर ले आए। धोनी की इस कार की पहली तस्वीर साक्षी ने शेयर की है। धोनी की पत्नी साक्षी ने अपने इंस्टाग्राम पर कार की पहली तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'रेड बीस्ट तुम्हारा घर में स्वागत है। माही तुम्हारा खिलौना आखिरकार आ गया। अापकी बहुत याद आ रही। ' बता दें धोनी इस समय घर पर नहीं है। वह टीम इंडिया से दो महीने की छुट्टी लेकर कश्मीर गए हैं। माही को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि मिली हुई है। सेना के प्रति लगाव के चलते धोनी फिलहाल अपना पूरा समय जवानों के साथ बिता रहे हैं। Welcome home #redbeast ! Your toy is finally here @mahiसात हज़ार सात सौ इक्यासी really missing you ! धोनी को अपनी कार की पहली झलक घर वापस आने पर ही मिलेगी। जीप कंपनी की 'ग्रैंड चेरोके' एसयूवी एक ब्रांडेड कार है। जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। ये एक पांच सीटर गाड़ी है जिसमें तीन हज़ार छः सौ चार सीसी का इंजन लगा है। इस कार में पाॅवर स्टीयरिंग, एंटी लाॅक ब्रेकिंग सिस्टम, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, पाॅवर विंडो फ्रंट, ड्राइवर और पैसेंजर एयरबैग और फ्रंट में फाॅग लाइट लगी है।
1274 THE GAZETTE OF INDIA: MARCH 13, 1971/PHALGUNA 22, 1892 [PART II - malček mažiač S VE ME A e raft 170 quy m अब्दुल हकीम, रहीम बक्श, रहमानबक्श, नादर बक्श, हबीबबक्श वल्द करीमयक्श बराबर बराबर एक हिस्सा तथा मुसम्मात् फज्जल-उल-निसा बल्द रहीम बक्श । जका उल्ला- प्रता उल्ला, शमसुद्दीन वरूद बरकत उल्ला बराबर 2 हिस्से एक हिस्सा अब्दुलरज्जाक बन्द बलम्बरबक्श एक हिस्सा और मुसम्मात् मरयम बाई वल्द नूर मुहम्मद एक हिस्सा, लतीफ़-उल-रहमान एक हिस्सा अब्दुल खालिक, अब्दुल हक़ वल्द अब्दुल्ला बराबर 2 हिस्से एक हिस्सा फजल उर्दू रहमान वरूद अबदुल रहमान एक हिस्सा प्रकरम-उद्दीन वरुद नवाब अहमद, जियाउद्दीन वल्द सुधरा दीन बराबर एक हिस्सा । शमसुद्दीन वल्द हैदर बक्श एक हिस्सा । शेख सादीगू जा कि सब्जी मण्डी दिल्ली वाला है । [सं० 29 ( 1 ) / कौम्प तथा परीष / 71 ] जानकी नाथ, बन्दोबस्त आयुक्त (सी) तथा पदेन प्रवर सचिव । (Department of Rehabilitation) (Office of the Chief Settlement Commissioner) New Delhi, the 24th February 1971 S.O. 1077 - In exercise of the powers conferred by Sub-Section (1) or Section 3 of the Displaced Persons (Compensation & Rehabilitation) Act, 1954 ( 44 of 1954), the Central Government hereby appoints the Deputy Secretary in the Rehabilition Department of Government of Punjab, as Deputy Chief Settlement Commissioner, for the purpose of perfoming, in addition to his own duties as Deputy Secretary, Rehabilitation Department, Government of Punjab, the functions assigned to a Deputy Chief Settlement Commissioner by or under the sald Act, in respect of all acquired evacuee properties in the State of Punjab, forming part of the compensation pool. [ No. 3 ( 1 ) / LRT/71 ] ( मुख्य बयोबहल प्रायुक्त का कार्यालय) ( पुनर्वास विभाग ) नई दिल्ली, 24 फरवरी, 1971 एस० प्री० 1077 - विस्थापित व्यक्ति (प्रतिकर तथ पुनर्वास ) अधिनियम, 1954 1954 का 44 ) की धारा 3 की उपधारा ( 1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने केन्द्रीय हुए सरकार, पंजाब सरकार के पुनर्वास विभाग में उप सचिव को पंजाब सरकार के ननवसि विभाग मे
एक हज़ार दो सौ चौहत्तर THE GAZETTE OF INDIA: MARCH तेरह, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर/PHALGUNA बाईस, एक हज़ार आठ सौ बानवे [PART II - malček mažiač S VE ME A e raft एक सौ सत्तर quy m अब्दुल हकीम, रहीम बक्श, रहमानबक्श, नादर बक्श, हबीबबक्श वल्द करीमयक्श बराबर बराबर एक हिस्सा तथा मुसम्मात् फज्जल-उल-निसा बल्द रहीम बक्श । जका उल्ला- प्रता उल्ला, शमसुद्दीन वरूद बरकत उल्ला बराबर दो हिस्से एक हिस्सा अब्दुलरज्जाक बन्द बलम्बरबक्श एक हिस्सा और मुसम्मात् मरयम बाई वल्द नूर मुहम्मद एक हिस्सा, लतीफ़-उल-रहमान एक हिस्सा अब्दुल खालिक, अब्दुल हक़ वल्द अब्दुल्ला बराबर दो हिस्से एक हिस्सा फजल उर्दू रहमान वरूद अबदुल रहमान एक हिस्सा प्रकरम-उद्दीन वरुद नवाब अहमद, जियाउद्दीन वल्द सुधरा दीन बराबर एक हिस्सा । शमसुद्दीन वल्द हैदर बक्श एक हिस्सा । शेख सादीगू जा कि सब्जी मण्डी दिल्ली वाला है । [संशून्य उनतीस / कौम्प तथा परीष / इकहत्तर ] जानकी नाथ, बन्दोबस्त आयुक्त तथा पदेन प्रवर सचिव । New Delhi, the चौबीस फ़रवरीruary एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर S.O. एक हज़ार सतहत्तर - In exercise of the powers conferred by Sub-Section or Section तीन of the Displaced Persons Act, एक हज़ार नौ सौ चौवन , the Central Government hereby appoints the Deputy Secretary in the Rehabilition Department of Government of Punjab, as Deputy Chief Settlement Commissioner, for the purpose of perfoming, in addition to his own duties as Deputy Secretary, Rehabilitation Department, Government of Punjab, the functions assigned to a Deputy Chief Settlement Commissioner by or under the sald Act, in respect of all acquired evacuee properties in the State of Punjab, forming part of the compensation pool. [ No. तीन / LRT/इकहत्तर ] नई दिल्ली, चौबीस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर एसशून्य प्रीशून्य एक हज़ार सतहत्तर - विस्थापित व्यक्ति अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौवन एक हज़ार नौ सौ चौवन का चौंतालीस ) की धारा तीन की उपधारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने केन्द्रीय हुए सरकार, पंजाब सरकार के पुनर्वास विभाग में उप सचिव को पंजाब सरकार के ननवसि विभाग मे
Pics: शुरू हुई अमरनाथ यात्रा, भक्तों के लिए किए गए कड़े इंतजाम By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो । Published: June 27, 2018 11:11 AM2018-06-27T11:11:38+5:302018-06-27T11:11:38+5:30Next वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में बुधवार को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना होगा। अभी तक देशभर से करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा की यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने वार्षिक अमरनाथ यात्रा के सुरक्षा इंतजामों का सोमवार को बालटाल बेस कैंप का दौरा किया। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं में साधु भी शामिल हैं। श्रद्धालुओं का देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचना शुरू हो गया है। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि अभी तक 1. 96 लाख तीर्थयात्रियों ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। पहली बार अमरनाथ जाने वाले वाहनों में रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग का इस्तेमाल किया गया और सीआरपीएफ का मोटरसाइकिल दस्ता भी सक्रिय रहेगा। अधिकारियों ने बताया कि आधारशिवरों , मंदिरों , रेलवे स्टेशनों , बस स्टैंडों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पिछले वर्ष कुल 2. 60 लाख तीर्थयात्रियों ने गुफा में दर्शन किये थे। इस वर्ष की तीर्थयात्रा के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस , अर्धसैनिक बल , एनडीआरएफ और सेना से करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए मिनी एम्बुलेंस भी इसी मोटरसाइकल पर बनाया गया है, यह सिर्फ मरनाथ यात्रियों लिए है। टॅग्स :जम्मू कश्मीर समाचारjammu kashmirशेअर :
Pics: शुरू हुई अमरनाथ यात्रा, भक्तों के लिए किए गए कड़े इंतजाम By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो । Published: June सत्ताईस, दो हज़ार अट्ठारह ग्यारह:ग्यारह AMसत्ताईस जून दो हज़ार अट्ठारहTग्यारह:ग्यारह:अड़तीस+पाँच:तीससत्ताईस जून दो हज़ार अट्ठारहTग्यारह:ग्यारह:अड़तीस+पाँच:तीसNext वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में बुधवार को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना होगा। अभी तक देशभर से करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा की यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने वार्षिक अमरनाथ यात्रा के सुरक्षा इंतजामों का सोमवार को बालटाल बेस कैंप का दौरा किया। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं में साधु भी शामिल हैं। श्रद्धालुओं का देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचना शुरू हो गया है। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि अभी तक एक. छियानवे लाख तीर्थयात्रियों ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। पहली बार अमरनाथ जाने वाले वाहनों में रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग का इस्तेमाल किया गया और सीआरपीएफ का मोटरसाइकिल दस्ता भी सक्रिय रहेगा। अधिकारियों ने बताया कि आधारशिवरों , मंदिरों , रेलवे स्टेशनों , बस स्टैंडों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पिछले वर्ष कुल दो. साठ लाख तीर्थयात्रियों ने गुफा में दर्शन किये थे। इस वर्ष की तीर्थयात्रा के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस , अर्धसैनिक बल , एनडीआरएफ और सेना से करीब चालीस हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए मिनी एम्बुलेंस भी इसी मोटरसाइकल पर बनाया गया है, यह सिर्फ मरनाथ यात्रियों लिए है। टॅग्स :जम्मू कश्मीर समाचारjammu kashmirशेअर :
`भारत अभी भी लश्कर का मुख्य निशाना' अरुण कुमार वाशिंगटन, (आईएएनएस)। अमेरिका के एक शीर्ष जनरल ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य निशाना अभी भी भारत ही है, लेकिन उसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूरोप और व्यापक एशिया-पशांत क्षेत्र में अपना पभाव जमा लिया है। अमेरिकी पशांत कमान के कमांडर, एडमिरल रॉबर्ट विलार्ड ने मंगलवार को कहा, ``ऐतिहासिक रूप से इसकी नजर कश्मीर क्षेत्र पर रहा है, खासतौतर से भारत के अंदर हमले करने के संदर्भ में। और यह मुम्बई हमले (26/11) के लिए जिम्मेदार रहा है। " विलार्ड ने सीनेट की आर्म्ड सर्विसिस कमेटी को बताया, ``निर्विवाद रूप से लश्कर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना पभाव जमा लिया है, और यह अब ज्यादा दिनों तक सिर्फ एशिया और भारत तक सीमित नहीं रहने वाला है, यद्यपि यह क्षेत्र उसका मुख्य पशिक्षण स्थल और भारत मुख्य निशाना बना रहेगा। " विलार्ड ने कहा कि नवम्बर 2008 के मुम्बई हमले के आरोपी लश्कर ने न केवल नेपाल व बांग्लादेश सहित दक्षिण एशियाई देशों में अपनी जड़ें जमा ली है, बल्कि अमेरिका के पास यूरोप और एशिया पशांत में भी लश्कर की उपस्थिति के सबूत हैं। विलार्ड ने कहा कि अमेरिका, लश्कर पर नकेल लगाने के लिए नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव व भारत सहित सभी दक्षिण एशियाई देशों के साथ सकिय रूप से काम कर रहा है, क्योंकि ``हम जानते हैं कि लश्कर मौजूदा समय में पूरे दक्षिण एशिया में फैला हुआ है। " विलार्ड ने कहा कि क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका भारत के साथ अपनी साझेदारी पर खास जोर दे रहा है। उन्होंने कहा, ``यह एक दीर्घकालिक रिश्ता है जिस पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है, क्योंकि दक्षिण एशिया में भारत का पभुत्व है और उसके चारों ओर कई सारी चुनौतियां हैं। " विलार्ड ने आगे कहा, ``हम, लश्कर-ए-तैयबा, और खासतौर से उस आतंकी संगठन पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा समय में भारत के साथ व क्षेत्रीय राष्ट्रों के साथ काम कर रहे हैं, जो पूरे दक्षिण एशिया के लिए खतरा बने हुए हैं। " विलार्ड ने कहा, ``लश्कर-ए-तैयबा ऐतिहासिक रूप से दक्षिण एशिया के लिए खतरा है। पाकिस्तान सरकार ने इस बात का खंडन किया है कि लश्कर और उसके बीच सम्बंध है। भारत कहेगा कि यह सम्बंध अभी भी बना हुआ है। " लश्कर के साथ पाकिस्तान के रिश्ते को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विलार्ड ने कहा, ``पाकिस्तान सरकार और लश्कर के बीच के रिश्ते पर चर्चा एक बहुत संवेदनशील मामला है। " उन्होंने कहा, ``चूंकि अमेरिका का भारत और पाकिस्तान, दोनों के साथ सम्बंध है, और हम दोनों के साथ रिश्तों को महत्व देते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि यह चर्चा जारी रहे और हम पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए वहां की सरकार के साथ लगातार काम करते रहें। "
`भारत अभी भी लश्कर का मुख्य निशाना' अरुण कुमार वाशिंगटन, । अमेरिका के एक शीर्ष जनरल ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य निशाना अभी भी भारत ही है, लेकिन उसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूरोप और व्यापक एशिया-पशांत क्षेत्र में अपना पभाव जमा लिया है। अमेरिकी पशांत कमान के कमांडर, एडमिरल रॉबर्ट विलार्ड ने मंगलवार को कहा, ``ऐतिहासिक रूप से इसकी नजर कश्मीर क्षेत्र पर रहा है, खासतौतर से भारत के अंदर हमले करने के संदर्भ में। और यह मुम्बई हमले के लिए जिम्मेदार रहा है। " विलार्ड ने सीनेट की आर्म्ड सर्विसिस कमेटी को बताया, ``निर्विवाद रूप से लश्कर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना पभाव जमा लिया है, और यह अब ज्यादा दिनों तक सिर्फ एशिया और भारत तक सीमित नहीं रहने वाला है, यद्यपि यह क्षेत्र उसका मुख्य पशिक्षण स्थल और भारत मुख्य निशाना बना रहेगा। " विलार्ड ने कहा कि नवम्बर दो हज़ार आठ के मुम्बई हमले के आरोपी लश्कर ने न केवल नेपाल व बांग्लादेश सहित दक्षिण एशियाई देशों में अपनी जड़ें जमा ली है, बल्कि अमेरिका के पास यूरोप और एशिया पशांत में भी लश्कर की उपस्थिति के सबूत हैं। विलार्ड ने कहा कि अमेरिका, लश्कर पर नकेल लगाने के लिए नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव व भारत सहित सभी दक्षिण एशियाई देशों के साथ सकिय रूप से काम कर रहा है, क्योंकि ``हम जानते हैं कि लश्कर मौजूदा समय में पूरे दक्षिण एशिया में फैला हुआ है। " विलार्ड ने कहा कि क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका भारत के साथ अपनी साझेदारी पर खास जोर दे रहा है। उन्होंने कहा, ``यह एक दीर्घकालिक रिश्ता है जिस पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है, क्योंकि दक्षिण एशिया में भारत का पभुत्व है और उसके चारों ओर कई सारी चुनौतियां हैं। " विलार्ड ने आगे कहा, ``हम, लश्कर-ए-तैयबा, और खासतौर से उस आतंकी संगठन पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा समय में भारत के साथ व क्षेत्रीय राष्ट्रों के साथ काम कर रहे हैं, जो पूरे दक्षिण एशिया के लिए खतरा बने हुए हैं। " विलार्ड ने कहा, ``लश्कर-ए-तैयबा ऐतिहासिक रूप से दक्षिण एशिया के लिए खतरा है। पाकिस्तान सरकार ने इस बात का खंडन किया है कि लश्कर और उसके बीच सम्बंध है। भारत कहेगा कि यह सम्बंध अभी भी बना हुआ है। " लश्कर के साथ पाकिस्तान के रिश्ते को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विलार्ड ने कहा, ``पाकिस्तान सरकार और लश्कर के बीच के रिश्ते पर चर्चा एक बहुत संवेदनशील मामला है। " उन्होंने कहा, ``चूंकि अमेरिका का भारत और पाकिस्तान, दोनों के साथ सम्बंध है, और हम दोनों के साथ रिश्तों को महत्व देते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि यह चर्चा जारी रहे और हम पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए वहां की सरकार के साथ लगातार काम करते रहें। "
New Delhi: रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जहां याचिकाकर्ता ने मध्यस्थता के जरिये मामले के निपटारे को तुरंत रोककर फैसला सुनाने को कहा था. लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर इनकार करते हुए मध्यस्थता समिति को 18 जुलाई तक का वक्त दिया है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मध्यस्थता को तुरंत रोककर फैसला सुनाने के लिए कहा गया था. लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाते हुए कहा कि अयोध्या विवाद जब शुरू हुआ था, तब वह जवान थे, लेकिन अब उम्र 80 के पार हो गई है. इसलिए अब अदालत को इस पर फैसला जल्द सुना देना चाहिए. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यस्थता पैनल को अनुवाद में देरी हो रही थी. और इसी वजह से उन्होंने अधिक समय मांगा था. कोर्ट ने कहा- पैनल को ये रिपोर्ट 18 जुलाई तक देनी होगी, जिसके बाद 25 जुलाई को इस पर सुनवाई होगी. 25 जुलाई को ही ये तय होगा कि इस मामले में रोजाना सुनवाई होगी या नहीं. उल्लेखनीय है कि, निर्मोही अखाड़ा ने अदालत में मध्यस्थता के खिलाफ याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये मामला 1950 से चल रहा है, मध्यस्थता से इसका हल मुश्किल से ही निकल पाएगा. अब 60 साल से अधिक का समय हो चुका है. इसे भी पढ़ेंःकर्नाटक व गोवा के बाद अब झारखंड में "शुद्धिकरण" की बारी !
New Delhi: रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जहां याचिकाकर्ता ने मध्यस्थता के जरिये मामले के निपटारे को तुरंत रोककर फैसला सुनाने को कहा था. लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर इनकार करते हुए मध्यस्थता समिति को अट्ठारह जुलाई तक का वक्त दिया है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मध्यस्थता को तुरंत रोककर फैसला सुनाने के लिए कहा गया था. लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाते हुए कहा कि अयोध्या विवाद जब शुरू हुआ था, तब वह जवान थे, लेकिन अब उम्र अस्सी के पार हो गई है. इसलिए अब अदालत को इस पर फैसला जल्द सुना देना चाहिए. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यस्थता पैनल को अनुवाद में देरी हो रही थी. और इसी वजह से उन्होंने अधिक समय मांगा था. कोर्ट ने कहा- पैनल को ये रिपोर्ट अट्ठारह जुलाई तक देनी होगी, जिसके बाद पच्चीस जुलाई को इस पर सुनवाई होगी. पच्चीस जुलाई को ही ये तय होगा कि इस मामले में रोजाना सुनवाई होगी या नहीं. उल्लेखनीय है कि, निर्मोही अखाड़ा ने अदालत में मध्यस्थता के खिलाफ याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये मामला एक हज़ार नौ सौ पचास से चल रहा है, मध्यस्थता से इसका हल मुश्किल से ही निकल पाएगा. अब साठ साल से अधिक का समय हो चुका है. इसे भी पढ़ेंःकर्नाटक व गोवा के बाद अब झारखंड में "शुद्धिकरण" की बारी !
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) 12वीं साइंस स्ट्रीम के नतीजे घोषत कर दिए गए हैं। यह परिणाम राज्य के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बोर्ड पिरसर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में घोषत किया। जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) 12वीं साइंस स्ट्रीम के नतीजे घोषत कर दिए गए हैं। यह परिणाम राज्य के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बोर्ड पिरसर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में घोषत किया। साइंस स्ट्रीम में इस वर्ष 2 लाख 39 हजार 900 परीक्षार्थी पंजीक्त हैं। आधिकारिक वेबसाइट rajresults. nic. in पर रिजल्ट जारी किया गया है। जो विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब राजस्थान बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। राजस्थान बोर्ड इस साल सबसे पहले 12वीं के साइंस स्ट्रीम का रिजल्ट जारी किया जा रहा है। बोर्ड द्वारा आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम्स के रिजल्ट की घोषणा बाद में की जाएगी। बतों दें कि साइंस स्ट्रीम की परीक्षाएं 5 मार्च 2020 से शुरू हुई थी, लेकिन कोरोना संकट के चलते परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं। इसके बाद बोर्ड ने 12वीं साइंस स्ट्रीम की शेष परीक्षाओं का आयोजन 18 और 19 जून को किया था।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बारहवीं साइंस स्ट्रीम के नतीजे घोषत कर दिए गए हैं। यह परिणाम राज्य के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बोर्ड पिरसर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में घोषत किया। जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बारहवीं साइंस स्ट्रीम के नतीजे घोषत कर दिए गए हैं। यह परिणाम राज्य के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बोर्ड पिरसर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में घोषत किया। साइंस स्ट्रीम में इस वर्ष दो लाख उनतालीस हजार नौ सौ परीक्षार्थी पंजीक्त हैं। आधिकारिक वेबसाइट rajresults. nic. in पर रिजल्ट जारी किया गया है। जो विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब राजस्थान बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। राजस्थान बोर्ड इस साल सबसे पहले बारहवीं के साइंस स्ट्रीम का रिजल्ट जारी किया जा रहा है। बोर्ड द्वारा आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम्स के रिजल्ट की घोषणा बाद में की जाएगी। बतों दें कि साइंस स्ट्रीम की परीक्षाएं पाँच मार्च दो हज़ार बीस से शुरू हुई थी, लेकिन कोरोना संकट के चलते परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं। इसके बाद बोर्ड ने बारहवीं साइंस स्ट्रीम की शेष परीक्षाओं का आयोजन अट्ठारह और उन्नीस जून को किया था।
बीजिंग, 31 अगस्त (एपी) चीन में मंगलवार को जारी एक सर्वेक्षण के मुताबिक निर्यात मांग कमजोर पड़ने से अगस्त में विनिर्माण गतिविधियां सुस्त पड़ीं। चीन के सांख्यिकी ब्यूरो और एक आधिकारिक उद्योग समूह द्वारा तैयार किया गया मासिक क्रय प्रबंधक सूचकांक जुलाई में 50. 4 से घटकर अगस्त में 50. 1 हो गया। इस सूचकांक में 50 से अधिक अंक गतिविधियों में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि चीन के निर्यात की मांग साल की दूसरी छमाही में कमजोर होने की आशंका है। इसके अलावा जुलाई में आई बाढ़ और कोरोना वायरस पर काबू पाने के उपायों के चलते भी विनिर्माण और उपभोक्ता गतिविधियां कम हुई हैं। चीनी निवेश बैंक सीआईसीसी के शोधकर्ताओं ने कहा कि मांग में मंदी जारी रहने का अनुमान है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
बीजिंग, इकतीस अगस्त चीन में मंगलवार को जारी एक सर्वेक्षण के मुताबिक निर्यात मांग कमजोर पड़ने से अगस्त में विनिर्माण गतिविधियां सुस्त पड़ीं। चीन के सांख्यिकी ब्यूरो और एक आधिकारिक उद्योग समूह द्वारा तैयार किया गया मासिक क्रय प्रबंधक सूचकांक जुलाई में पचास. चार से घटकर अगस्त में पचास. एक हो गया। इस सूचकांक में पचास से अधिक अंक गतिविधियों में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि चीन के निर्यात की मांग साल की दूसरी छमाही में कमजोर होने की आशंका है। इसके अलावा जुलाई में आई बाढ़ और कोरोना वायरस पर काबू पाने के उपायों के चलते भी विनिर्माण और उपभोक्ता गतिविधियां कम हुई हैं। चीनी निवेश बैंक सीआईसीसी के शोधकर्ताओं ने कहा कि मांग में मंदी जारी रहने का अनुमान है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
११० । जैन कथामाला ( राम-कथा) प्रहसित समझ गया कि पवनंजय की बुद्धि पर भ्रम का काला परदा पड़ गया है। उसे किसी दूसरे ढंग से समझाकर विवाह के लिए तैयार करना चाहिए । जब पति-पत्नी मिलन होगा तो भ्रम की दीवार स्वयं ही ढह जायेगी । सोच-विचार कर बोला - - मित्र ! वचन भंग करोगे। तुम्हारे पिता का दिया हुआ वचन टूट जायगा तो उनकी क्या दशा होगी ? कुछ सोचा है, तुमने । पवनंजय इस बात का कुछ भी प्रत्युत्तर न दे सका और मित्र के मुख की ओर देखने लगा । प्रहसित ही पुनः बोला- कुमार ! क्षत्रिय को वचन भंग होने का दुःख मृत्यु से भी बढ़ कर होता है । तुम्हारे पिता की आज्ञा है विवाह करने की और तुम्हारा कर्तव्य है उनकी आज्ञा का पालन । पिता की आज्ञा समझ कर ही विवाह करो । कुमार मौन हो गया किन्तु उसके हृदय की शल्य नहीं निकली । तीसरे दिन पवनंजय और अंजना का विवाह हो गया। राजा महेन्द्र ने स्वागत-सत्कार करके उन्हें विदा कर दिया और प्रह्लाद सपरिवार अपने नगर को चला आया । नवदम्पत्ति को महल को सातवीं मंजिल पर भवन दिया गया । बड़े प्यार और स्नेह से सासु केतुमती ने अंजना को वहां पहुंचा दिया । पति को प्रतीक्षा करती हुई अंजना अपनी सुहाग सेज पर उत्कंठित हृदय लिए बैठी रही किन्तु पति- मिलन न हुआ । रात्रि आती, सुहागिनी प्रतीक्षा करती और दिन निकल आता । पति- मिलन की तो बात ही क्या अंजना को तो पति-दर्शन भी दुर्लभ हो गये । एक ही महल में रहते हुए ताव्रपति पति की एक झलक पाने को भी तरसतरस जाती ।
एक सौ दस । जैन कथामाला प्रहसित समझ गया कि पवनंजय की बुद्धि पर भ्रम का काला परदा पड़ गया है। उसे किसी दूसरे ढंग से समझाकर विवाह के लिए तैयार करना चाहिए । जब पति-पत्नी मिलन होगा तो भ्रम की दीवार स्वयं ही ढह जायेगी । सोच-विचार कर बोला - - मित्र ! वचन भंग करोगे। तुम्हारे पिता का दिया हुआ वचन टूट जायगा तो उनकी क्या दशा होगी ? कुछ सोचा है, तुमने । पवनंजय इस बात का कुछ भी प्रत्युत्तर न दे सका और मित्र के मुख की ओर देखने लगा । प्रहसित ही पुनः बोला- कुमार ! क्षत्रिय को वचन भंग होने का दुःख मृत्यु से भी बढ़ कर होता है । तुम्हारे पिता की आज्ञा है विवाह करने की और तुम्हारा कर्तव्य है उनकी आज्ञा का पालन । पिता की आज्ञा समझ कर ही विवाह करो । कुमार मौन हो गया किन्तु उसके हृदय की शल्य नहीं निकली । तीसरे दिन पवनंजय और अंजना का विवाह हो गया। राजा महेन्द्र ने स्वागत-सत्कार करके उन्हें विदा कर दिया और प्रह्लाद सपरिवार अपने नगर को चला आया । नवदम्पत्ति को महल को सातवीं मंजिल पर भवन दिया गया । बड़े प्यार और स्नेह से सासु केतुमती ने अंजना को वहां पहुंचा दिया । पति को प्रतीक्षा करती हुई अंजना अपनी सुहाग सेज पर उत्कंठित हृदय लिए बैठी रही किन्तु पति- मिलन न हुआ । रात्रि आती, सुहागिनी प्रतीक्षा करती और दिन निकल आता । पति- मिलन की तो बात ही क्या अंजना को तो पति-दर्शन भी दुर्लभ हो गये । एक ही महल में रहते हुए ताव्रपति पति की एक झलक पाने को भी तरसतरस जाती ।
जब पूरा शरीर फिट होता है, लेकिन हाथ मोटे होते हैं, तो पूरा बॉडी देखने में थोड़ा अजीब लगता है। इसलिए हम आपके लिए लेकर आएं हैं हाथ पतला करने के लिए योगासन। 4 मिनट के इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि किस तरह आप योगा के माध्यम से बहुत आसानी से अपने हाथ की चर्बी को कम कर सकते हैं और अपने हाथों को स्लिम बना सकते हैं। (और पढ़ें - हाथों की चर्बी कैसे कम करें) - इस वीडियो में सबसे पहले स्क्वाट पोजीशन के बारे में बताया गया है। इस पोजीशन को करने के लिए वीडियो में जिस तरह दिखाया गया है उस मुद्रा में आ जाएं और इसका अभ्यास करें। जब हम इस मुद्रा को करते हैं, तो हमें हमारे गर्दन और कंधों पर तनाव महसूस होता है। साथ ही इससे हमारे हाथों की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जो हाथ की मसल्स को टोन करने में मदद करता है। इसके अलावा इससे कंधे और शरीर के पीछे के भाग के ऊपरी हिस्से में खिचाव आता है, जो इन्हें मज़बूत बनाता है। इस मुद्रा को करते समय भरपूर सांस लेना न भूलें। - इसके बाद अब वो प्लैंक पोजीशन के बारे में बता रहीं है और साथ में पुशअप्स के बारे में भी। इस पोजीशन में सबसे ज़्यादा बल हमारे हाथों पर पड़ता है, जो हाथों का फैट कम करने में बेहद लाभयादक है। साथ ही ये मुद्रा पेट की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है और पीठ व कमर दर्द से भी राहत दिलाता है। इसके अलावा इसे करने से शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है। - प्लैंक पोजीशन के बाद वो अधो मुख श्वानासन के बारे में बता रहीं हैं। इस पोजीशन में शरीर का पूरा भार हाथ और पंजो पर होता है। हाथ पर भार होने की वजह से हाथ की मसल्स मज़बूत होती हैं, जिससे हाथ की चर्बी को करने में मदद मिलती है। साथ ही इस मुद्रा को करने से लचीलापन बढ़ता है और शारिरिक क्षमता भी बेहतर होती है। इसके अलावा ये पोजीशन हांड्डियों को मज़बूत बनाती है। इस पोजीशन को करते समय भी भरपूर सांस लेना न भूलें। (और पढ़ें - हाथ की चर्बी कम करने के उपाय)
जब पूरा शरीर फिट होता है, लेकिन हाथ मोटे होते हैं, तो पूरा बॉडी देखने में थोड़ा अजीब लगता है। इसलिए हम आपके लिए लेकर आएं हैं हाथ पतला करने के लिए योगासन। चार मिनट के इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि किस तरह आप योगा के माध्यम से बहुत आसानी से अपने हाथ की चर्बी को कम कर सकते हैं और अपने हाथों को स्लिम बना सकते हैं। - इस वीडियो में सबसे पहले स्क्वाट पोजीशन के बारे में बताया गया है। इस पोजीशन को करने के लिए वीडियो में जिस तरह दिखाया गया है उस मुद्रा में आ जाएं और इसका अभ्यास करें। जब हम इस मुद्रा को करते हैं, तो हमें हमारे गर्दन और कंधों पर तनाव महसूस होता है। साथ ही इससे हमारे हाथों की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जो हाथ की मसल्स को टोन करने में मदद करता है। इसके अलावा इससे कंधे और शरीर के पीछे के भाग के ऊपरी हिस्से में खिचाव आता है, जो इन्हें मज़बूत बनाता है। इस मुद्रा को करते समय भरपूर सांस लेना न भूलें। - इसके बाद अब वो प्लैंक पोजीशन के बारे में बता रहीं है और साथ में पुशअप्स के बारे में भी। इस पोजीशन में सबसे ज़्यादा बल हमारे हाथों पर पड़ता है, जो हाथों का फैट कम करने में बेहद लाभयादक है। साथ ही ये मुद्रा पेट की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है और पीठ व कमर दर्द से भी राहत दिलाता है। इसके अलावा इसे करने से शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है। - प्लैंक पोजीशन के बाद वो अधो मुख श्वानासन के बारे में बता रहीं हैं। इस पोजीशन में शरीर का पूरा भार हाथ और पंजो पर होता है। हाथ पर भार होने की वजह से हाथ की मसल्स मज़बूत होती हैं, जिससे हाथ की चर्बी को करने में मदद मिलती है। साथ ही इस मुद्रा को करने से लचीलापन बढ़ता है और शारिरिक क्षमता भी बेहतर होती है। इसके अलावा ये पोजीशन हांड्डियों को मज़बूत बनाती है। इस पोजीशन को करते समय भी भरपूर सांस लेना न भूलें।
NHPC Recruitment 2022: सरकारी नौकरी करने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए बेहद शानदार मौका आया है। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) में विभिन्न पदों के लिए बंपर वैकेंसी निकाली है। एनएचपीसी ने ट्रेनी इंजीनियर और ट्रेनी ऑफिसर के पदों के लिए पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। ऑनलाइन आवेदन 21 दिसंबर, 2021 से शुरू हो गया है। एनएचपीसी में ट्रेनी इंजीनियर के तहत सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल के लिए उम्मीदवारों की भर्ती होगी। जबकि ट्रेनी ऑफिसर के तहत फाइनेंस और कंपनी सेक्रेटरी की भर्ती की जाएगी। इन पदों पर भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीदवार एनएचपीसी की आधिकारिक वेबसाइट nhpcindia. co. in पर जाकर 17 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को 50,000 से 1,60,000 तक सैलरी दी जाएगी। ट्रेनी इंजीनियर- उम्मीदवार को इंजीनियरिंग/ टेक्नोलॉजी / बी. एससी में बैचलर डिग्री होनी चाहिए। इसके लिए उम्मीदवार को कम से कम 60% अंक होने चाहिए। ट्रेनी ऑफिसर (फाइनेंस)- चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया/आईसीडब्लूए या सीएमए से सीए पास होना चाहिए। ट्रेनी ऑफिसर (कंपनी सेक्रेटरी)- इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया का मेंबर होना जरूरी है। - एनएचपीसी की आधिकारिक वेबसाइट http://www. nhpcindia. com पर जाएं। - अब 'करियर' विकल्प पर क्लिक करें। - होमपेज पर उपलब्ध 'ऑनलाइन आवेदन के लिए यहां क्लिक करें' विकल्प को चुने। - ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें। - फॉर्म जमा करने के बाद, 'भुगतान करें' टैब पर क्लिक करें। - भविष्य के संदर्भ के लिए सिस्टम द्वारा जारी फॉर्म का प्रिंटआउट लें। जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) श्रेणी से संबंधित उम्मीदवारों को ऑनलाइन मोड के माध्यम से 295 रुपये शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूबीडी / भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के उम्मीदवारों को पंजीकरण शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।
NHPC Recruitment दो हज़ार बाईस: सरकारी नौकरी करने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए बेहद शानदार मौका आया है। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन में विभिन्न पदों के लिए बंपर वैकेंसी निकाली है। एनएचपीसी ने ट्रेनी इंजीनियर और ट्रेनी ऑफिसर के पदों के लिए पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। ऑनलाइन आवेदन इक्कीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस से शुरू हो गया है। एनएचपीसी में ट्रेनी इंजीनियर के तहत सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल के लिए उम्मीदवारों की भर्ती होगी। जबकि ट्रेनी ऑफिसर के तहत फाइनेंस और कंपनी सेक्रेटरी की भर्ती की जाएगी। इन पदों पर भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीदवार एनएचपीसी की आधिकारिक वेबसाइट nhpcindia. co. in पर जाकर सत्रह जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को पचास,शून्य से एक,साठ,शून्य तक सैलरी दी जाएगी। ट्रेनी इंजीनियर- उम्मीदवार को इंजीनियरिंग/ टेक्नोलॉजी / बी. एससी में बैचलर डिग्री होनी चाहिए। इसके लिए उम्मीदवार को कम से कम साठ% अंक होने चाहिए। ट्रेनी ऑफिसर - चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया/आईसीडब्लूए या सीएमए से सीए पास होना चाहिए। ट्रेनी ऑफिसर - इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया का मेंबर होना जरूरी है। - एनएचपीसी की आधिकारिक वेबसाइट http://www. nhpcindia. com पर जाएं। - अब 'करियर' विकल्प पर क्लिक करें। - होमपेज पर उपलब्ध 'ऑनलाइन आवेदन के लिए यहां क्लिक करें' विकल्प को चुने। - ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें। - फॉर्म जमा करने के बाद, 'भुगतान करें' टैब पर क्लिक करें। - भविष्य के संदर्भ के लिए सिस्टम द्वारा जारी फॉर्म का प्रिंटआउट लें। जनरल, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी श्रेणी से संबंधित उम्मीदवारों को ऑनलाइन मोड के माध्यम से दो सौ पचानवे रुपयापये शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूबीडी / भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के उम्मीदवारों को पंजीकरण शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।
Faridabad/Alive News : ऑपरेशन आक्रमण के तहत पुलिस ने 43 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से 5 देसी कट्टे, 3 कारतूस, 5 चाकू, 4. 938 किलोग्राम गांजा 4. 81 मिलीग्राम स्मैक तथा देसी शराब की 4 पेटियां बरामद हुई है। इसके अलावा पुलिस ने 13 पीओ, बेल जंपर को भी काबू किया गया। पुलिस द्वारा फरीदाबाद की नीमका जेल में भी सर्च अभियान चलाया गया। पुलिस द्वारा चलाए गए इस अभियान में गौवंश संरक्षण एवं गौसंवर्धन अधिनियम व हत्या का प्रयास जैसे जघन्य अपराध के 6 मुकदमों में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें बल्लभगढ़ की शारदा कॉलोनी के रहने वाले निरंजन, नवादा गांव निवासी अमित कुमार उर्फ कालू, एसी नगर के रहने वाले मोनिस, मोहना गांव निवासी सुनील, पलवल के महेश तथा नूंह के आसिफ, राजेंद्र व राजवीर का नाम शामिल है।
Faridabad/Alive News : ऑपरेशन आक्रमण के तहत पुलिस ने तैंतालीस आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से पाँच देसी कट्टे, तीन कारतूस, पाँच चाकू, चार. नौ सौ अड़तीस किलोग्रामग्राम गांजा चार. इक्यासी मिलीग्राम स्मैक तथा देसी शराब की चार पेटियां बरामद हुई है। इसके अलावा पुलिस ने तेरह पीओ, बेल जंपर को भी काबू किया गया। पुलिस द्वारा फरीदाबाद की नीमका जेल में भी सर्च अभियान चलाया गया। पुलिस द्वारा चलाए गए इस अभियान में गौवंश संरक्षण एवं गौसंवर्धन अधिनियम व हत्या का प्रयास जैसे जघन्य अपराध के छः मुकदमों में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें बल्लभगढ़ की शारदा कॉलोनी के रहने वाले निरंजन, नवादा गांव निवासी अमित कुमार उर्फ कालू, एसी नगर के रहने वाले मोनिस, मोहना गांव निवासी सुनील, पलवल के महेश तथा नूंह के आसिफ, राजेंद्र व राजवीर का नाम शामिल है।
निठारी हत्याकांड के दोषी सुरेंदर कोली की फांसी की सज़ा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल मार्च में कोली को रिम्पा हलदर की हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें मृत्युदंड देने का आदेश दिया था. इसके बाद वकीलों के समूह 'डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप' ने कोली को मृत्युदंड दिए जाने पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेजा था. इस ग्रुप का कहना था कि निठारी हत्याकांड में कोली के ख़िलाफ़ कुल 15 अन्य मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं और कोली को फांसी दिए जाने से बाक़ी मामलों में फ़ैसलों पर प्रभाव पड़ेगा. बीबीसी हिंदी के लिए लखनऊ से अतुल चंद्रा ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरिंदर कोली पर नरमी दिखाते हुए फांसी की सजा को उम्र क़ैद में तब्दील किया है. साल 2006 में उत्तर प्रदेश पुलिस को नोयडा के निठारी गाँव स्थित पंधेर के घर के पीछे और आसपास बच्चों और महिलाओ के कंकाल मिले थे. उस समय पुलिस ने पंधेर और कोली पर क़रीब 19 बच्चों और महिलाओं की हत्या और बलात्कार का आरोप लगाया था. निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंधेर को भी अभियुक्त बनाया गया था, लेकिन पहले मामले में उन्हें अदालत ने बरी कर दिया है. कोली पंधेर के यहाँ नौकरी करते थे. पंधेर के ख़िलाफ़ बाक़ी केस निचली अदालतों में चल रहे हैं. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
निठारी हत्याकांड के दोषी सुरेंदर कोली की फांसी की सज़ा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल मार्च में कोली को रिम्पा हलदर की हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें मृत्युदंड देने का आदेश दिया था. इसके बाद वकीलों के समूह 'डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप' ने कोली को मृत्युदंड दिए जाने पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेजा था. इस ग्रुप का कहना था कि निठारी हत्याकांड में कोली के ख़िलाफ़ कुल पंद्रह अन्य मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं और कोली को फांसी दिए जाने से बाक़ी मामलों में फ़ैसलों पर प्रभाव पड़ेगा. बीबीसी हिंदी के लिए लखनऊ से अतुल चंद्रा ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरिंदर कोली पर नरमी दिखाते हुए फांसी की सजा को उम्र क़ैद में तब्दील किया है. साल दो हज़ार छः में उत्तर प्रदेश पुलिस को नोयडा के निठारी गाँव स्थित पंधेर के घर के पीछे और आसपास बच्चों और महिलाओ के कंकाल मिले थे. उस समय पुलिस ने पंधेर और कोली पर क़रीब उन्नीस बच्चों और महिलाओं की हत्या और बलात्कार का आरोप लगाया था. निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंधेर को भी अभियुक्त बनाया गया था, लेकिन पहले मामले में उन्हें अदालत ने बरी कर दिया है. कोली पंधेर के यहाँ नौकरी करते थे. पंधेर के ख़िलाफ़ बाक़ी केस निचली अदालतों में चल रहे हैं.
Ashes 2019, England vs Australia, 2nd Test at Lords: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के सीमित ओवरों के कप्तान इयोन मोर्गन (Eoin Morgan) ने कहा है कि भविष्य में टीम का कप्तान बने रहना इस बात पर निर्भर करता है कि वह चोट से कैसे उबरते हैं। मोर्गन को विश्वकप में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के दौरान चोट लग गई थी और फिर इसके बाद उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा था। मोर्गन शुक्रवार को लॉर्डस मैदान में मौजूद थे, जहां इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच (Ashes 2019) जारी है। मोर्गन की कप्तानी में ही इंग्लैंड ने इस साल विश्व कप में न्यूजीलैंड को हराकर पहला विश्वकप जीता है। विश्वकप के बाद मोर्गन टी-20 ब्लास्ट में मिडलसेक्स के लिए खेल रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अगले साल भी टीम का नेतृत्व करना चाहते हैं। ऐतिहासिक लॉर्डस मैदान पर दूसरे एशेज टेस्ट में बारिश की मार जारी है और मैच के तीसरे दिन शुक्रवार को सिर्फ 241 ओवर का खेल हो पाया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली पारी में चार विकेट खोकर 80 रन बना लिए हैं। मेजबान इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 258 रन बनाये थे। ऑस्ट्रेलिया अभी इंग्लैंड के स्कोर से 178 रन पीछे है। दूसरे टेस्ट के पहले दिन का खेल बारिश के कारण धुल गया था और दूसरे दिन ही पूरा खेल संभव हो पाया जबकि तीसरे दिन लंच के बाद खेल ही नहीं हो पाया। ऑस्ट्रेलिया ने कल 13 ओवर खेले थे और उसने अपनी पारी को एक विकेट पर 30 रन से आगे बढ़ाया। ओपनर डेविड वॉर्नर तीन रन बनाकर स्टुअर्ड ब्रॉड की गेंद पर बोल्ड हुए थे। कैमरून बेनक्रॉफ्ट ने पांच और उस्मान ख्वाजा ने 18 रन से अपनी पारी को आगे बढ़ाया। बेनक्रॉफ्ट का विकेट टीम के 60 रन के स्कोर पर गिरा। पदार्पण टेस्ट खेल रहे तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने बेनक्रॉफ्ट को एलबीडब्ल्यू किया। बेनक्रॉफ्ट ने 13 रन बनाए। उस्मान ख्वाजा भी टीम के इसी स्कोर पर आउट हुए। ख्वाजा को क्रिस वोक्स ने आउट किया। ख्वाजा ने 56 गेंदों में चार चौकों की मदद से 36 रन बनाये। ट्रेविस हैड सात रन बनाकर ब्रॉड की गेंद पर पगबाधा हो गए। इंग्लैंड का चौथा विकेट 71 के स्कोर पर गिरा। खेल रुकने के समय स्टीवन स्मिथ 40 गेंदों में 13 और मैथ्यू वेड 23 गेंदों में खाता खोले बिना क्रीज पर थे।
Ashes दो हज़ार उन्नीस, England vs Australia, दोnd Test at Lords: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के सीमित ओवरों के कप्तान इयोन मोर्गन ने कहा है कि भविष्य में टीम का कप्तान बने रहना इस बात पर निर्भर करता है कि वह चोट से कैसे उबरते हैं। मोर्गन को विश्वकप में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के दौरान चोट लग गई थी और फिर इसके बाद उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा था। मोर्गन शुक्रवार को लॉर्डस मैदान में मौजूद थे, जहां इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच जारी है। मोर्गन की कप्तानी में ही इंग्लैंड ने इस साल विश्व कप में न्यूजीलैंड को हराकर पहला विश्वकप जीता है। विश्वकप के बाद मोर्गन टी-बीस ब्लास्ट में मिडलसेक्स के लिए खेल रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अगले साल भी टीम का नेतृत्व करना चाहते हैं। ऐतिहासिक लॉर्डस मैदान पर दूसरे एशेज टेस्ट में बारिश की मार जारी है और मैच के तीसरे दिन शुक्रवार को सिर्फ दो सौ इकतालीस ओवर का खेल हो पाया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली पारी में चार विकेट खोकर अस्सी रन बना लिए हैं। मेजबान इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में दो सौ अट्ठावन रन बनाये थे। ऑस्ट्रेलिया अभी इंग्लैंड के स्कोर से एक सौ अठहत्तर रन पीछे है। दूसरे टेस्ट के पहले दिन का खेल बारिश के कारण धुल गया था और दूसरे दिन ही पूरा खेल संभव हो पाया जबकि तीसरे दिन लंच के बाद खेल ही नहीं हो पाया। ऑस्ट्रेलिया ने कल तेरह ओवर खेले थे और उसने अपनी पारी को एक विकेट पर तीस रन से आगे बढ़ाया। ओपनर डेविड वॉर्नर तीन रन बनाकर स्टुअर्ड ब्रॉड की गेंद पर बोल्ड हुए थे। कैमरून बेनक्रॉफ्ट ने पांच और उस्मान ख्वाजा ने अट्ठारह रन से अपनी पारी को आगे बढ़ाया। बेनक्रॉफ्ट का विकेट टीम के साठ रन के स्कोर पर गिरा। पदार्पण टेस्ट खेल रहे तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने बेनक्रॉफ्ट को एलबीडब्ल्यू किया। बेनक्रॉफ्ट ने तेरह रन बनाए। उस्मान ख्वाजा भी टीम के इसी स्कोर पर आउट हुए। ख्वाजा को क्रिस वोक्स ने आउट किया। ख्वाजा ने छप्पन गेंदों में चार चौकों की मदद से छत्तीस रन बनाये। ट्रेविस हैड सात रन बनाकर ब्रॉड की गेंद पर पगबाधा हो गए। इंग्लैंड का चौथा विकेट इकहत्तर के स्कोर पर गिरा। खेल रुकने के समय स्टीवन स्मिथ चालीस गेंदों में तेरह और मैथ्यू वेड तेईस गेंदों में खाता खोले बिना क्रीज पर थे।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का डंका बजा है। 'ग्लोबल विजन इंडिया फाउंडेशन' के निदेशक नचिकेत जोशी को संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय न्यूयार्क में भाषण के लिए न्योता भेजा गया। 8वें मल्टी-स्टेकहोल्डर फोरम में जोशी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर अपना भाषण रखा। उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से उबरने में तेजी लाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विश्वास को मजबूत करने के महत्त्व पर अपनी बात रखी। अपने भाषण में जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनौतियों से निपटने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विश्वास बनाने के लिए भारत की ओर से उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला। इसके अलावा जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी के माध्यम से जनता के पास कोरोना महामारी और इसके प्रभाव से निपटने के उपाय की भी सही जानकारी पहुंचे। नचिकेत जोशी ने कहा कि भारत में मीडिया और सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सार्वजनिक समझ और विश्वास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावशाली रणनीति बनाई गई थी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का डंका बजा है। 'ग्लोबल विजन इंडिया फाउंडेशन' के निदेशक नचिकेत जोशी को संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय न्यूयार्क में भाषण के लिए न्योता भेजा गया। आठवें मल्टी-स्टेकहोल्डर फोरम में जोशी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर अपना भाषण रखा। उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से उबरने में तेजी लाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विश्वास को मजबूत करने के महत्त्व पर अपनी बात रखी। अपने भाषण में जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनौतियों से निपटने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विश्वास बनाने के लिए भारत की ओर से उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला। इसके अलावा जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी के माध्यम से जनता के पास कोरोना महामारी और इसके प्रभाव से निपटने के उपाय की भी सही जानकारी पहुंचे। नचिकेत जोशी ने कहा कि भारत में मीडिया और सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सार्वजनिक समझ और विश्वास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावशाली रणनीति बनाई गई थी।
मुंबई, (एजेंसी/वार्ता): देश के जाने-माने उद्योगपति एवं रिलायंस कंपनी के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने अपने एक कर्मचारी और कॉलेज के दोस्त मनोज मोदी को 22 मंजिला आलीशान संपत्ति उपहार में दी है। मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। श्री अंबानी ने मुंबई में नेपियन सी रोड पर स्थित 1. 7 लाख वर्ग फुट के क्षेत्र में फैली संपत्ति को अपने कर्मचारी श्री मोदी को उपहार स्वरूप दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बिजनेस प्लान्स के लिए चर्चा में रहने के अलावा श्री अंबानी अपने लेटेस्ट जेस्चर के लिए भी काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने एक कर्मचारी और कॉलेज के दोस्त मनोज मोदी को 22 मंजिला आलीशान संपत्ति उपहार में दी है। श्री मोदी और श्री अंबानी ने मुंबई के यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी में साथ-साथ पढ़ाई की थी। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ेः- चॉकलेट में छिपे हुए हैं कई सेहत राज, सेवन करने से मिलेगा फायदा!
मुंबई, : देश के जाने-माने उद्योगपति एवं रिलायंस कंपनी के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने अपने एक कर्मचारी और कॉलेज के दोस्त मनोज मोदी को बाईस मंजिला आलीशान संपत्ति उपहार में दी है। मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। श्री अंबानी ने मुंबई में नेपियन सी रोड पर स्थित एक. सात लाख वर्ग फुट के क्षेत्र में फैली संपत्ति को अपने कर्मचारी श्री मोदी को उपहार स्वरूप दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बिजनेस प्लान्स के लिए चर्चा में रहने के अलावा श्री अंबानी अपने लेटेस्ट जेस्चर के लिए भी काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने एक कर्मचारी और कॉलेज के दोस्त मनोज मोदी को बाईस मंजिला आलीशान संपत्ति उपहार में दी है। श्री मोदी और श्री अंबानी ने मुंबई के यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी में साथ-साथ पढ़ाई की थी। - यह भी पढ़ेः- चॉकलेट में छिपे हुए हैं कई सेहत राज, सेवन करने से मिलेगा फायदा!
दक्षिण अमरीकी देश अर्जेंटीना में सोलह साल की उम्र में ही एक लड़की ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया है. ख़ास बात ये है कि पामेला नाम की ये लड़की एक साल पहले भी इसी तरह एक साथ तीन लड़कियों को जन्म दे चुकी है. वैसे, पामेला जब 14 साल की थी तब भी उसने एक खूबसूरत लड़के को जन्म दिया था. इस तरह तीन साल में पामेला कुल सात बच्चे पैदा कर चुकी है. डॉक्टर इस करिश्मे से हैरान हैं. उनके मुताबकि पामेला के सभी बच्चों की पैदाइश बिना किसी ऑपरेशन या सर्जरी के हुई है. पामेला के सातों बच्चे गर्भकाल के नौ महीने पूरे करने से पहले ही दुनिया में कदम रख चुके थे. ये करिश्मा सारे अर्जेंटीना में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग अखबारों में पत्र लिखकर पामेला और उसके बच्चों का ज़िक्र कर रहे हैं. कई लोगों ने बिना शादी के बच्चे पैदा करने के लिए पामेला की आलोचना भी की है. पामेला अगले सोमवार को 17 साल की होने वाली है. वो मध्य अर्जेंटीना के कोरडोबा प्रांत के लियोन्स इलाके में अपनी मां के साथ रहती है. पामेला के इस 'भरे-पूरे' परिवार की आर्थिक हालत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पामेला की मां को अपनी बेटी और सात नाते-नातियों के पालन-पोषण के लिए दूसरे घरों में झाड़ू-पोंछा करना पड़ता है. पामेला और उसके परिवार को पहले ही सरकार की तरफ़ से आर्थिक सहायता मिलती है. पिछली बार एक साथ तीन बच्चों को जन्म देने पर स्थानीय प्रशासन ने पामेला को ज़मीन और घर दिया था. अब पामेला की मां का कहना है, "तीन और बच्चों के इस दुनिया में आने के बाद, हम सरकार से और ज़्यादा आर्थिक मदद की मांग करेंगे. " वहीं, कई लोग सलाह दे रहे हैं कि पामेला को अब परिवार नियोजन के लिए कुछ विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए.
दक्षिण अमरीकी देश अर्जेंटीना में सोलह साल की उम्र में ही एक लड़की ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया है. ख़ास बात ये है कि पामेला नाम की ये लड़की एक साल पहले भी इसी तरह एक साथ तीन लड़कियों को जन्म दे चुकी है. वैसे, पामेला जब चौदह साल की थी तब भी उसने एक खूबसूरत लड़के को जन्म दिया था. इस तरह तीन साल में पामेला कुल सात बच्चे पैदा कर चुकी है. डॉक्टर इस करिश्मे से हैरान हैं. उनके मुताबकि पामेला के सभी बच्चों की पैदाइश बिना किसी ऑपरेशन या सर्जरी के हुई है. पामेला के सातों बच्चे गर्भकाल के नौ महीने पूरे करने से पहले ही दुनिया में कदम रख चुके थे. ये करिश्मा सारे अर्जेंटीना में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग अखबारों में पत्र लिखकर पामेला और उसके बच्चों का ज़िक्र कर रहे हैं. कई लोगों ने बिना शादी के बच्चे पैदा करने के लिए पामेला की आलोचना भी की है. पामेला अगले सोमवार को सत्रह साल की होने वाली है. वो मध्य अर्जेंटीना के कोरडोबा प्रांत के लियोन्स इलाके में अपनी मां के साथ रहती है. पामेला के इस 'भरे-पूरे' परिवार की आर्थिक हालत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पामेला की मां को अपनी बेटी और सात नाते-नातियों के पालन-पोषण के लिए दूसरे घरों में झाड़ू-पोंछा करना पड़ता है. पामेला और उसके परिवार को पहले ही सरकार की तरफ़ से आर्थिक सहायता मिलती है. पिछली बार एक साथ तीन बच्चों को जन्म देने पर स्थानीय प्रशासन ने पामेला को ज़मीन और घर दिया था. अब पामेला की मां का कहना है, "तीन और बच्चों के इस दुनिया में आने के बाद, हम सरकार से और ज़्यादा आर्थिक मदद की मांग करेंगे. " वहीं, कई लोग सलाह दे रहे हैं कि पामेला को अब परिवार नियोजन के लिए कुछ विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए.
देहरादून के कोटदा संतौर गांव में सोमवार दोपहर आग में सिलेंडर फटने से दो मासूम भाई जिंदा जल गए। हादसे के बाद चारों ओर दिल दहलाने वाला मंजर फैल गया। दोनों मासूम बलिया (यूपी) के रहने वाले हैं, जो अपने माता-पिता के साथ नाना के यहां घूमने आए थे। तस्वीरों में पूरा मंजर। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के कोटडा संतौर गांव में नदी किनारे इशरफी अपने दो बेटों मुन्ना और नौशाद के साथ झोपड़ियां बनाकर परिवार के साथ रहता है। सोमवार दोपहर 12 बजे के करीब इशरफी अपनी पत्नी शकीना बेटे मुन्ना के साथ बलिया से आई बेटी नूर निशां, दामाद नाजिर हुसैन और दो साल की नाती के साथ खरीदारी करने चले गए। झोपड़ी में मुन्ना के छोटे भाई की पत्नी सोनी के अलावा नूर निशां के चार और मुन्ना के दो बच्चे रह गए। दोपहर दो बजे के करीब अचानक एक झोपड़ी में आग लग गई। पड़ोस में रहने वाले शेर सिंह की पत्नी प्रमिता मुन्ना की चार साल की बेटी चुन्नू को बचाकर ले आई, लेकिन नूर निशां के दोनों बेटे अफसर और असलम अंदर ही रह गए। (तस्वीर में बाईं तरफ है प्रतिमा) इसी बीच झोपड़ी में रखा गैस सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। जिसके टुकड़े दूर तक जाकर गिरे। आसपास के लोग भागकर भी आए, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था। आग में अफसर (7) और असलम (4) जिंदा जल गए। दमकल कर्मचारियों ने आग को बुझाया, तब जाकर बच्चों के जले शवों को बाहर निकाला जा सका। इस अनहोनी से परिवार में कोहराम मचा है। नूरनिशां का तो रोते-रोते बुरा हाल था। एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।
देहरादून के कोटदा संतौर गांव में सोमवार दोपहर आग में सिलेंडर फटने से दो मासूम भाई जिंदा जल गए। हादसे के बाद चारों ओर दिल दहलाने वाला मंजर फैल गया। दोनों मासूम बलिया के रहने वाले हैं, जो अपने माता-पिता के साथ नाना के यहां घूमने आए थे। तस्वीरों में पूरा मंजर। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के कोटडा संतौर गांव में नदी किनारे इशरफी अपने दो बेटों मुन्ना और नौशाद के साथ झोपड़ियां बनाकर परिवार के साथ रहता है। सोमवार दोपहर बारह बजे के करीब इशरफी अपनी पत्नी शकीना बेटे मुन्ना के साथ बलिया से आई बेटी नूर निशां, दामाद नाजिर हुसैन और दो साल की नाती के साथ खरीदारी करने चले गए। झोपड़ी में मुन्ना के छोटे भाई की पत्नी सोनी के अलावा नूर निशां के चार और मुन्ना के दो बच्चे रह गए। दोपहर दो बजे के करीब अचानक एक झोपड़ी में आग लग गई। पड़ोस में रहने वाले शेर सिंह की पत्नी प्रमिता मुन्ना की चार साल की बेटी चुन्नू को बचाकर ले आई, लेकिन नूर निशां के दोनों बेटे अफसर और असलम अंदर ही रह गए। इसी बीच झोपड़ी में रखा गैस सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। जिसके टुकड़े दूर तक जाकर गिरे। आसपास के लोग भागकर भी आए, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था। आग में अफसर और असलम जिंदा जल गए। दमकल कर्मचारियों ने आग को बुझाया, तब जाकर बच्चों के जले शवों को बाहर निकाला जा सका। इस अनहोनी से परिवार में कोहराम मचा है। नूरनिशां का तो रोते-रोते बुरा हाल था। एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।
नई दिल्लीः Twitter की कमान अपने हाथ में लेने के बाद Elon Musk कई बदलाव कर रहे हैं। एलन मस्क ने हाल ही में Twitter Blue सब्सक्रिप्शन फीचर जारी किया है। इसके अलावा टिक को भी 3 अलग-अलग रंगों में दिया जा रहा है। पहले सिर्फ ब्लू टिक ही दिया जाता था। इस बदलाव का असर भी दिखने लगा है। क्योंकि, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल से ब्लू टिक हटा दिया गया है। हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि उनका हैंडल वेरिफाइड नहीं है। अब पीएम मोदी के नाम के आगे अब ग्रे कलर का टिक दिखने लगा है। अकाउंट हैंडल के नीचे India government official का भी टैग ग्रे कलर में नजर आ रहा है। ये संशोधन नए वेरिफिकेशन सिस्टम के तहत किया जा रहा है। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के अतिरिक्त केन्दीय गृहमंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल के अकाउंट के आगे से भी ब्लू टिक हटा दिया गया है। अब उनके नाम के आगे आपको ग्रे कलर का टिक दिखाई देगा। कंपनी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था ग्रे टिक सिर्फ सरकार से जुड़े लोगों को ही दिया जाएगा। हालांकि, अभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ग्रे टिक नहीं दिया जा रहा है। ये भी स्पष्ट नहीं है कि भारत में विपक्ष के नेताओं के हैंडल पर ग्रे टिक लगेगा या नहीं। कंपनी ने अपनी पॉलिसी में पिछले सप्ताह बदलाव किया था। इससे बिजनेस अकाउंट गोल्ड टिक दिया जा रहा है। जबकि सरकार के अकाउंट्स को ग्रे और आम यूजर्स को ब्लू टिक सब्सक्रिप्शन लेने पर प्रदान किया जाएगा। इस फीचर को कंपनी धीरे-धीरे रोलआउट कर रही है। यानी आने वाले वक़्त में दूसरे अकाउंट्स में ग्रे टिक नज़र आने लगेगा।
नई दिल्लीः Twitter की कमान अपने हाथ में लेने के बाद Elon Musk कई बदलाव कर रहे हैं। एलन मस्क ने हाल ही में Twitter Blue सब्सक्रिप्शन फीचर जारी किया है। इसके अलावा टिक को भी तीन अलग-अलग रंगों में दिया जा रहा है। पहले सिर्फ ब्लू टिक ही दिया जाता था। इस बदलाव का असर भी दिखने लगा है। क्योंकि, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल से ब्लू टिक हटा दिया गया है। हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि उनका हैंडल वेरिफाइड नहीं है। अब पीएम मोदी के नाम के आगे अब ग्रे कलर का टिक दिखने लगा है। अकाउंट हैंडल के नीचे India government official का भी टैग ग्रे कलर में नजर आ रहा है। ये संशोधन नए वेरिफिकेशन सिस्टम के तहत किया जा रहा है। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के अतिरिक्त केन्दीय गृहमंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल के अकाउंट के आगे से भी ब्लू टिक हटा दिया गया है। अब उनके नाम के आगे आपको ग्रे कलर का टिक दिखाई देगा। कंपनी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था ग्रे टिक सिर्फ सरकार से जुड़े लोगों को ही दिया जाएगा। हालांकि, अभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ग्रे टिक नहीं दिया जा रहा है। ये भी स्पष्ट नहीं है कि भारत में विपक्ष के नेताओं के हैंडल पर ग्रे टिक लगेगा या नहीं। कंपनी ने अपनी पॉलिसी में पिछले सप्ताह बदलाव किया था। इससे बिजनेस अकाउंट गोल्ड टिक दिया जा रहा है। जबकि सरकार के अकाउंट्स को ग्रे और आम यूजर्स को ब्लू टिक सब्सक्रिप्शन लेने पर प्रदान किया जाएगा। इस फीचर को कंपनी धीरे-धीरे रोलआउट कर रही है। यानी आने वाले वक़्त में दूसरे अकाउंट्स में ग्रे टिक नज़र आने लगेगा।
इस निर्वाचन क्षेत्र में 27 फरवरी को मतदान हुआ, जिसमें 73 प्रतिशत से अधिक मत पड़े. यह निर्वाचन क्षेत्र अपने बीड़ी उद्योग के लिए जाना जाता है और यहां प्रवासी श्रमिकों की भी अच्छी खासी संख्या है. मुर्शिदाबादः पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में सागरदिघी विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बायरन बिस्वास ने बाजी मार ली है. कांग्रेस के उम्मीदवार ने तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी को 22,980 मतों से हरा दिया.इसके साथ ही वह मौजूदा विधानसभा के लिए निर्वाचित होने वाले कांग्रेस के पहले विधायक बन गए हैं.निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार मतगणना के 16 दौर पूरे होने के बाद वाम समर्थित विश्वास को 87,667 वोट मिले. जबकि टीएमसी के उम्मीदवार देवाशीष बनर्जी को 64,681 और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी दिलीप साहा को 25,815 वोट मिले. वर्तमान विधानसभा में वह पार्टी के पहले विधायक हैं. गुरुवार को हुई मतगणना में कांग्रेस उम्मीदवार बायरन विश्वास अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे. बिस्वास को वाम दलों का समर्थन मिला. वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार देबाशीष बनर्जी से लगातार आगे चल रहे थे. आखिरकार कांग्रेस उम्मीदवार बायरन ने जीत दर्ज की. वहीं, मतगणना के नतीजे आने से पहले ही बिस्वास ने कहा था कि मुझे अपनी जीत का भरोसा है. यहां के लोग भ्रष्टाचार और तृणमूल के कुशासन से तंग आ चुके हैं. आपको बता दें कि तृणमूल के तीन बार के विधायक एवं राज्य के मंत्री सुब्रत साहा के पिछले साल दिसंबर में निधन के बाद सागरदिघी विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया. इस निर्वाचन क्षेत्र में 27 फरवरी को मतदान हुआ, जिसमें 73 प्रतिशत से अधिक मत पड़े. यह निर्वाचन क्षेत्र अपने बीड़ी उद्योग के लिए जाना जाता है और यहां प्रवासी श्रमिकों की भी अच्छी खासी संख्या है. यहां 60 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक आबादी के अलावा ग्रामीण सीट में करीब 18.5 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 6.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी है. सीट पर करीब 2.3 लाख मतदाता हैं. (भाषा इनपुट के साथ)
इस निर्वाचन क्षेत्र में सत्ताईस फरवरी को मतदान हुआ, जिसमें तिहत्तर प्रतिशत से अधिक मत पड़े. यह निर्वाचन क्षेत्र अपने बीड़ी उद्योग के लिए जाना जाता है और यहां प्रवासी श्रमिकों की भी अच्छी खासी संख्या है. मुर्शिदाबादः पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में सागरदिघी विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बायरन बिस्वास ने बाजी मार ली है. कांग्रेस के उम्मीदवार ने तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी को बाईस,नौ सौ अस्सी मतों से हरा दिया.इसके साथ ही वह मौजूदा विधानसभा के लिए निर्वाचित होने वाले कांग्रेस के पहले विधायक बन गए हैं.निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार मतगणना के सोलह दौर पूरे होने के बाद वाम समर्थित विश्वास को सत्तासी,छः सौ सरसठ वोट मिले. जबकि टीएमसी के उम्मीदवार देवाशीष बनर्जी को चौंसठ,छः सौ इक्यासी और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी दिलीप साहा को पच्चीस,आठ सौ पंद्रह वोट मिले. वर्तमान विधानसभा में वह पार्टी के पहले विधायक हैं. गुरुवार को हुई मतगणना में कांग्रेस उम्मीदवार बायरन विश्वास अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे. बिस्वास को वाम दलों का समर्थन मिला. वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार देबाशीष बनर्जी से लगातार आगे चल रहे थे. आखिरकार कांग्रेस उम्मीदवार बायरन ने जीत दर्ज की. वहीं, मतगणना के नतीजे आने से पहले ही बिस्वास ने कहा था कि मुझे अपनी जीत का भरोसा है. यहां के लोग भ्रष्टाचार और तृणमूल के कुशासन से तंग आ चुके हैं. आपको बता दें कि तृणमूल के तीन बार के विधायक एवं राज्य के मंत्री सुब्रत साहा के पिछले साल दिसंबर में निधन के बाद सागरदिघी विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया. इस निर्वाचन क्षेत्र में सत्ताईस फरवरी को मतदान हुआ, जिसमें तिहत्तर प्रतिशत से अधिक मत पड़े. यह निर्वाचन क्षेत्र अपने बीड़ी उद्योग के लिए जाना जाता है और यहां प्रवासी श्रमिकों की भी अच्छी खासी संख्या है. यहां साठ प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक आबादी के अलावा ग्रामीण सीट में करीब अट्ठारह.पाँच प्रतिशत अनुसूचित जाति और छः.पाँच प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी है. सीट पर करीब दो.तीन लाख मतदाता हैं.
(शनिचर, 21 फरवरी के खबर) - अतवार के साँझ जदयू नेता नीतीश कुमार चउथा बेर बिहार के मुख्यमंत्री पद के किरिया खइहें. अपने बनावल मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी के उखाड़ के नीतीश फेरू कुरसी हथियवले बाड़न. आ अबकि उनका चारा घोटाला आ जंगल राज खातिर जानल जाए वाला लालूओ प्रसाद के समर्थन बा. ढेर दिन बाद कांग्रेसो के बिहार सरकार में कवनो मंत्रालय मिल सकेला. देखे के बा कि रमई राम का करत बाड़न काहे कि उनकर कहना बा कि बनीहें त उपमुख्यमंत्री ना त कुछ ना. नीतीश के किरिया धराई का मौका पर ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, आ तरुण गोगोईओ के शामिल रहे के खबर बा. - भाजपा नीतीश के चुनौती दिहले बिया कि अगर सचहूँ उनका लगे विधायकन के बहुमत बा त गुप्त मतदान करवा के आपन बहुमत देखा देसु. भाजपा कहले बिया नीतीश एक बेर ना पाँचो बेर माफी मंगीहें तबो जनता माफ नइखे करे वाला. काहे कि उनुका गलती के सजा बिहार के जनता भोगत बिया. - सपा मुखिया मुलायम सिंह के पोता का तिलक में पीएम मोदी शामिल भइलन. मुलायम सिंह यादव के बड़ भाई के पोता आ सांसद तेज प्रताप यादव के शादी राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव के बेटी राजलक्ष्मी से होखे वाला बा. एह मौका पर मुलायम आ लालू का बीच में बइठल मोदी के सीन में कवनो राजनीति ना देखल जा सके. - जम्मू-कश्मीर में भाजपा आ पीडीपी के गठबन्हन वाली सरकार बने के एलान अब जल्दिए हो सकेला. दुनू गोल गँवे गँवे अधिकतर मुद्दा पर एगो राय बना चुकल बाड़े बाकिर अबहियों कुछ मुद्दा पर बात साफ कइल बाकी बा जवना पर बातचीत जारी बा. खास क के संविधान के धारा 370 आ सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम पर दुनू गोल के राय जुदा बा. बाकिर एही बीच दुनू गोल राज्यसभा आ विधानपरिषद के चुनाव में सहमति बना के लड़ल बा. - भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ शुरू अन्दोलन में अन्ना हजारे शामिल हो गइल बाड़न. आन्दोलनकारियन के जुलूस दिल्ली खातिर निकल चुकल बा. एह बीच केन्द्र सरकार आन्दोलनकारियन से ओह लोग के माँग पूछले बिया आ इशारा कइले बिया कि अध्यादेश में कुछ संशोधन कइल जा सकेला. सरकार चाहत बिया कि किसानो के नुकसान ना होखे आ विकास खातिर जमीनो मिल जाव. - संसद के बजट सत्र शुरु होखे से पहिले अतवार के साँझ सगरी राजनीतिक गोल के बइठक बोलावल गइल बा जवना में संसद के सुचारू रुप से चलावे पर विचार होखी. एह सत्र में सरकार के आपन अध्यादेशो के विधेयक बनवा के पास करावे के बा. सोमार से चले वाला बजट सत्र के पहिलका दौर 20 मार्च ले चली. दुसरका दौर के बइठक 20 अप्रैल से 08 मई ले चली. 26 फरवरी के रेल बजट आ 28 फरवरी के आम बजट पेश कइल जाई. - पेट्रोलियम मंत्रालय के दस्तावेज चोरावे का मामिला में बड़-बड़ औद्योगिक घरानन के पांच गो अधिकारियन के पुलिस गिरफ्तार कर लिहले बिया. एह लोग के तीन दिन ला पुलिस हिरासत में भेज दिहल गइल बा जहाँ एह लोग से पूछताछ क के मामिला के तह ले चहुँपे के कोशिश होखी. कांग्रेसी राज में अइसनका चोरियन पर नजर राखे के कोशिश ना कइल रहे ना त एहनी के अतना मन ना बढ़ल रहीत. - जम्मू कश्मीर के बारामूला जिला के सोपोर का एगो गांव में सुरक्षा बल मुठभेड़ क के लश्करे तैयबा के दू गो कमांडरन के मार गिरवलसि. इ दुनू विदेशी नागरिक रहले. एहनी का लगे से दू गो ए-के 47 राइफल आ बहुते असलहा आ गोली बारूद बरामद भइल बा. - देश में स्वाइन फ्लू से मरे वालन के सिलसिला चालू बा. करीब 13 हजार लोग एह बीमारी का चपेट में आ चुकल बा. बाकिर सरकार के कहना बा कि दवाईयन के कवनो कमी नइखे. - तीन दिन के बांग्लादेश यात्रा पर गइल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ढाका में प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात कइली. भरोसा दिहली कि तीस्ता समस्या के समाधान जल्दिए खोज लिहल जाई. चार साल पहिले ममते का चलते तीस्ता समझौता ना हो पावल रहे. - लीबिया के पूर्वी शहर कुब्बाह में इस्लामिक स्टेट के फिदायिन हमला में नाहियो त 45 जने के जान चल गइल बा आ बहुते लोग घवाहिल भइल बा. - क्राइस्ट चर्च में भइल विश्व कप क्रिकेट मैच में वेस्टइंडीज 150 रन से पाकिस्तान के हरा दिहलसि. पाकिस्तान के ई लगातार दुसरका हार भइल बा आ वेस्टइंडीज के पहिला जीत. अतवार का दिने भारत के मुकाबला दक्खिन अफ्रीका से होखे वाला बा. - वित्तमंत्री अरूण जेटली बैंक कर्मचारियन से गोहार लगवले बाड़न कि ऊ लोग हड़ताल पर मत जाव. कहलन कि एह हड़ताल से देश के आर्थिक नुकसान होखी. बैंक कर्मचारी 25 तारीख से चार दिन के हड़ताल पर जाए के एलान कइले बाड़न. - जौनपुर जिला के बैजारामपुर घाट पर गोमती नदी पर पुल बनावे के काम जल्दिए शुरु होखे वाला बा. ई जानकारी जौनपुर जिलाधिकारी मीडिया के दिहलन. - केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह शनिचर का दिने मोतिहारी टीसन के निरीक्षण कइले आ टीसन के विकास ला बीस लाख रुपिया के मदद दिहले, कहलन कि टीसन पर शौचालय आ यात्री सुविधा बढ़वला के जरूरत बा. - भोजपुर जिला में अलग-अलग थाना के मुकदमन में शामिल तीन गो आरोपियन के गिरफ्तार क के जेल भेज दिहल गइल बा. - सिवान पुलिस डकैती के सात गो आरोपियन के गिरफ्तार कइले बिया. ई सातो लोग छपरा जिला के हवे.
- अतवार के साँझ जदयू नेता नीतीश कुमार चउथा बेर बिहार के मुख्यमंत्री पद के किरिया खइहें. अपने बनावल मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी के उखाड़ के नीतीश फेरू कुरसी हथियवले बाड़न. आ अबकि उनका चारा घोटाला आ जंगल राज खातिर जानल जाए वाला लालूओ प्रसाद के समर्थन बा. ढेर दिन बाद कांग्रेसो के बिहार सरकार में कवनो मंत्रालय मिल सकेला. देखे के बा कि रमई राम का करत बाड़न काहे कि उनकर कहना बा कि बनीहें त उपमुख्यमंत्री ना त कुछ ना. नीतीश के किरिया धराई का मौका पर ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, आ तरुण गोगोईओ के शामिल रहे के खबर बा. - भाजपा नीतीश के चुनौती दिहले बिया कि अगर सचहूँ उनका लगे विधायकन के बहुमत बा त गुप्त मतदान करवा के आपन बहुमत देखा देसु. भाजपा कहले बिया नीतीश एक बेर ना पाँचो बेर माफी मंगीहें तबो जनता माफ नइखे करे वाला. काहे कि उनुका गलती के सजा बिहार के जनता भोगत बिया. - सपा मुखिया मुलायम सिंह के पोता का तिलक में पीएम मोदी शामिल भइलन. मुलायम सिंह यादव के बड़ भाई के पोता आ सांसद तेज प्रताप यादव के शादी राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव के बेटी राजलक्ष्मी से होखे वाला बा. एह मौका पर मुलायम आ लालू का बीच में बइठल मोदी के सीन में कवनो राजनीति ना देखल जा सके. - जम्मू-कश्मीर में भाजपा आ पीडीपी के गठबन्हन वाली सरकार बने के एलान अब जल्दिए हो सकेला. दुनू गोल गँवे गँवे अधिकतर मुद्दा पर एगो राय बना चुकल बाड़े बाकिर अबहियों कुछ मुद्दा पर बात साफ कइल बाकी बा जवना पर बातचीत जारी बा. खास क के संविधान के धारा तीन सौ सत्तर आ सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम पर दुनू गोल के राय जुदा बा. बाकिर एही बीच दुनू गोल राज्यसभा आ विधानपरिषद के चुनाव में सहमति बना के लड़ल बा. - भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ शुरू अन्दोलन में अन्ना हजारे शामिल हो गइल बाड़न. आन्दोलनकारियन के जुलूस दिल्ली खातिर निकल चुकल बा. एह बीच केन्द्र सरकार आन्दोलनकारियन से ओह लोग के माँग पूछले बिया आ इशारा कइले बिया कि अध्यादेश में कुछ संशोधन कइल जा सकेला. सरकार चाहत बिया कि किसानो के नुकसान ना होखे आ विकास खातिर जमीनो मिल जाव. - संसद के बजट सत्र शुरु होखे से पहिले अतवार के साँझ सगरी राजनीतिक गोल के बइठक बोलावल गइल बा जवना में संसद के सुचारू रुप से चलावे पर विचार होखी. एह सत्र में सरकार के आपन अध्यादेशो के विधेयक बनवा के पास करावे के बा. सोमार से चले वाला बजट सत्र के पहिलका दौर बीस मार्च ले चली. दुसरका दौर के बइठक बीस अप्रैल से आठ मई ले चली. छब्बीस फरवरी के रेल बजट आ अट्ठाईस फरवरी के आम बजट पेश कइल जाई. - पेट्रोलियम मंत्रालय के दस्तावेज चोरावे का मामिला में बड़-बड़ औद्योगिक घरानन के पांच गो अधिकारियन के पुलिस गिरफ्तार कर लिहले बिया. एह लोग के तीन दिन ला पुलिस हिरासत में भेज दिहल गइल बा जहाँ एह लोग से पूछताछ क के मामिला के तह ले चहुँपे के कोशिश होखी. कांग्रेसी राज में अइसनका चोरियन पर नजर राखे के कोशिश ना कइल रहे ना त एहनी के अतना मन ना बढ़ल रहीत. - जम्मू कश्मीर के बारामूला जिला के सोपोर का एगो गांव में सुरक्षा बल मुठभेड़ क के लश्करे तैयबा के दू गो कमांडरन के मार गिरवलसि. इ दुनू विदेशी नागरिक रहले. एहनी का लगे से दू गो ए-के सैंतालीस राइफल आ बहुते असलहा आ गोली बारूद बरामद भइल बा. - देश में स्वाइन फ्लू से मरे वालन के सिलसिला चालू बा. करीब तेरह हजार लोग एह बीमारी का चपेट में आ चुकल बा. बाकिर सरकार के कहना बा कि दवाईयन के कवनो कमी नइखे. - तीन दिन के बांग्लादेश यात्रा पर गइल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ढाका में प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात कइली. भरोसा दिहली कि तीस्ता समस्या के समाधान जल्दिए खोज लिहल जाई. चार साल पहिले ममते का चलते तीस्ता समझौता ना हो पावल रहे. - लीबिया के पूर्वी शहर कुब्बाह में इस्लामिक स्टेट के फिदायिन हमला में नाहियो त पैंतालीस जने के जान चल गइल बा आ बहुते लोग घवाहिल भइल बा. - क्राइस्ट चर्च में भइल विश्व कप क्रिकेट मैच में वेस्टइंडीज एक सौ पचास रन से पाकिस्तान के हरा दिहलसि. पाकिस्तान के ई लगातार दुसरका हार भइल बा आ वेस्टइंडीज के पहिला जीत. अतवार का दिने भारत के मुकाबला दक्खिन अफ्रीका से होखे वाला बा. - वित्तमंत्री अरूण जेटली बैंक कर्मचारियन से गोहार लगवले बाड़न कि ऊ लोग हड़ताल पर मत जाव. कहलन कि एह हड़ताल से देश के आर्थिक नुकसान होखी. बैंक कर्मचारी पच्चीस तारीख से चार दिन के हड़ताल पर जाए के एलान कइले बाड़न. - जौनपुर जिला के बैजारामपुर घाट पर गोमती नदी पर पुल बनावे के काम जल्दिए शुरु होखे वाला बा. ई जानकारी जौनपुर जिलाधिकारी मीडिया के दिहलन. - केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह शनिचर का दिने मोतिहारी टीसन के निरीक्षण कइले आ टीसन के विकास ला बीस लाख रुपिया के मदद दिहले, कहलन कि टीसन पर शौचालय आ यात्री सुविधा बढ़वला के जरूरत बा. - भोजपुर जिला में अलग-अलग थाना के मुकदमन में शामिल तीन गो आरोपियन के गिरफ्तार क के जेल भेज दिहल गइल बा. - सिवान पुलिस डकैती के सात गो आरोपियन के गिरफ्तार कइले बिया. ई सातो लोग छपरा जिला के हवे.
सामग्रीः लहसुन- 5-6 कलियां (कटी हुई) प्याज- 1 (कटा हुआ) टमाटर- 1 (कटा हुआ) अदरक- 1 चम्मच (कटा हुआ) विधिः 1. सबसे पहले बथुआ की पत्तियों को काट कर धोएं। 2. अब कुकर में बथुआ, पानी, 1/4 चम्मच नमक मिलाकर 2-3 सीटी बजाएं। 3. इसका एक्सट्रा पानी निकालकर मिक्सी में स्मूद पेस्ट बनाएं। 4. एक पैन में तेल गर्म करके उसमें तेज पत्ता, अजवाइन, जीरा, सौंफ, मेथी, धनिया पाउडर, राई, लाल मिर्च पाउडर, तेज पत्ता, हींग डालकर फ्राई करें। 5. अब प्याज लहसुन, अदरक व टमाटर डालकर 1 मिनट तक पकाएं। 6. इसमें बथुआ का पेस्ट और जरुरतानुसार पानी डालकर धीमी आंच पर 2-3 मिनट तक पकाएं। 7. इसे सर्विंग डिश में निकाल कर बटर से सजाएं। 8. लीजिए आपका बथुआ बन कर तैयार है।
सामग्रीः लहसुन- पाँच-छः कलियां प्याज- एक टमाटर- एक अदरक- एक चम्मच विधिः एक. सबसे पहले बथुआ की पत्तियों को काट कर धोएं। दो. अब कुकर में बथुआ, पानी, एक/चार चम्मच नमक मिलाकर दो-तीन सीटी बजाएं। तीन. इसका एक्सट्रा पानी निकालकर मिक्सी में स्मूद पेस्ट बनाएं। चार. एक पैन में तेल गर्म करके उसमें तेज पत्ता, अजवाइन, जीरा, सौंफ, मेथी, धनिया पाउडर, राई, लाल मिर्च पाउडर, तेज पत्ता, हींग डालकर फ्राई करें। पाँच. अब प्याज लहसुन, अदरक व टमाटर डालकर एक मिनट तक पकाएं। छः. इसमें बथुआ का पेस्ट और जरुरतानुसार पानी डालकर धीमी आंच पर दो-तीन मिनट तक पकाएं। सात. इसे सर्विंग डिश में निकाल कर बटर से सजाएं। आठ. लीटरजिए आपका बथुआ बन कर तैयार है।
India News(इंडिया न्यूज़),Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुक्रवार 12 मई को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक होगी। नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद ये पहली बैठक है। सरकार ने निकाय चुनाव के दोनों चरण के मतदान सही रूप में संपन्न होने के बाद यह बैठक बुलाई है। इसमें कहा जा रहा है कि 20 से अधिक प्रस्ताव पास किए जाएंगे या फिर उस पर अहम चर्चा हो सकती है। बैठक में औद्योगिक विकास एवं रोजगार प्रोत्सान नीति-2022 में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में मंजूर हो सकता है। प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक हैं जिन्होंने निवेश नीति लागू होने से पहले ही अपनी इकाई के लिए जमीन खरीद ली है। सरकार ने निवेशकों को राहत देने के लिए नीति में संशोधन का एक प्रस्ताव भी तैयार किया है। कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के बाद पहले से ही जमीन खरीदने वाले निवेशकों को स्टांप ड्यूटी की 100 फीसदी पूर्ति की जाएगी। अल्फा, मेगा परियोजनाओं को केस टू केस के आधार पर रियायत मिलेगी। इस बैठक में कैबिनेट से केरला स्टोरी फिल्म को टैक्स फ्री करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
India News,Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुक्रवार बारह मई को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक होगी। नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद ये पहली बैठक है। सरकार ने निकाय चुनाव के दोनों चरण के मतदान सही रूप में संपन्न होने के बाद यह बैठक बुलाई है। इसमें कहा जा रहा है कि बीस से अधिक प्रस्ताव पास किए जाएंगे या फिर उस पर अहम चर्चा हो सकती है। बैठक में औद्योगिक विकास एवं रोजगार प्रोत्सान नीति-दो हज़ार बाईस में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में मंजूर हो सकता है। प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक हैं जिन्होंने निवेश नीति लागू होने से पहले ही अपनी इकाई के लिए जमीन खरीद ली है। सरकार ने निवेशकों को राहत देने के लिए नीति में संशोधन का एक प्रस्ताव भी तैयार किया है। कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के बाद पहले से ही जमीन खरीदने वाले निवेशकों को स्टांप ड्यूटी की एक सौ फीसदी पूर्ति की जाएगी। अल्फा, मेगा परियोजनाओं को केस टू केस के आधार पर रियायत मिलेगी। इस बैठक में कैबिनेट से केरला स्टोरी फिल्म को टैक्स फ्री करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
Brain conditions: आजकल नई-नई बीमारियों के दौर में एक और बीमारी ने पूरी दुनिया में डर का माहौल बना रखा है। हमारे शरीर में बीमारियां दो प्रकार की होती हैं मानसिक और शारीरिक बीमारियां। हमारे देश में अब तक भी ज्यादातर लोग ज्यादा शारीरिक बीमारियों को ही सीरियस लेते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि मानसिक बीमारियां शारीरिक बीमारियों से भी ज्यादा गंभीर होते हैं और उसके बाद आती हैं कुछ ऐसी बीमारियां जो आपकी मानसिक और शारीरिक दोनों क्षमताओं को प्रभावित कर देती हैं। आजकल ऐसी ही एक दिमागी बीमारी है, जिसका खतरा लगातार महिलाओं में बढ़ता देखा जा रहा है। यह आर्टिकल खासतौर पर महिलाओं में बढ़ते इस बीमारी के खतरे के बारे में बताता है, जिसे पढ़कर आप यह जान पाएंगे कि आखिर यह कौन सी बीमारी है और इस से होने वाले शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं। साथ ही साथ इस बीमारी की रोकथाम करने के तरीकों के बारे में भी कुछ जानकारी दी गई है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तेजी से बढ़ इस बीमारी का नाम अल्जाइमर डिजीज है। यह लगातार बढ़ने वाली एक बीमारी है, जो दिमाग धीरे-धीरे दिमाग की याददाश्त को मिटा देती है और साथ ही दिमाग के अन्य कई कार्यों को करने की क्षमता को प्रभावित कर देती है। इस रोग में पहले कोशिकाओं के आपस के जोड़ और फिर खुद कोशिकाएं की नष्ट होने लगती हैं, जिससे धीरे-धीरे दिमागी कार्य प्रभावित होने लगते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हार्वर्ड एजुकेशन पर पब्लिश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली पुरुषों से ज्यादा मजबूत होती है और इस कारण से उनके शरीर में पुरुषों की तुलना में ज्यादा एमिलोइड प्लाक पाया जाता है। इस थ्योरी से पता चलता है कि महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा अल्जाइमर बीमारी होने का खतरा होता है। इसके साथ-साथ महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी भी अल्जाइमर डिजीज होने का कारण बन सकती है। हालांकि, इसके अलावा मरीज के शरीर के अनुसार कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं। इसलिए अगर आपको दिमाग से जुड़े किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। Total Wellness is now just a click away.
Brain conditions: आजकल नई-नई बीमारियों के दौर में एक और बीमारी ने पूरी दुनिया में डर का माहौल बना रखा है। हमारे शरीर में बीमारियां दो प्रकार की होती हैं मानसिक और शारीरिक बीमारियां। हमारे देश में अब तक भी ज्यादातर लोग ज्यादा शारीरिक बीमारियों को ही सीरियस लेते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि मानसिक बीमारियां शारीरिक बीमारियों से भी ज्यादा गंभीर होते हैं और उसके बाद आती हैं कुछ ऐसी बीमारियां जो आपकी मानसिक और शारीरिक दोनों क्षमताओं को प्रभावित कर देती हैं। आजकल ऐसी ही एक दिमागी बीमारी है, जिसका खतरा लगातार महिलाओं में बढ़ता देखा जा रहा है। यह आर्टिकल खासतौर पर महिलाओं में बढ़ते इस बीमारी के खतरे के बारे में बताता है, जिसे पढ़कर आप यह जान पाएंगे कि आखिर यह कौन सी बीमारी है और इस से होने वाले शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं। साथ ही साथ इस बीमारी की रोकथाम करने के तरीकों के बारे में भी कुछ जानकारी दी गई है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तेजी से बढ़ इस बीमारी का नाम अल्जाइमर डिजीज है। यह लगातार बढ़ने वाली एक बीमारी है, जो दिमाग धीरे-धीरे दिमाग की याददाश्त को मिटा देती है और साथ ही दिमाग के अन्य कई कार्यों को करने की क्षमता को प्रभावित कर देती है। इस रोग में पहले कोशिकाओं के आपस के जोड़ और फिर खुद कोशिकाएं की नष्ट होने लगती हैं, जिससे धीरे-धीरे दिमागी कार्य प्रभावित होने लगते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हार्वर्ड एजुकेशन पर पब्लिश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली पुरुषों से ज्यादा मजबूत होती है और इस कारण से उनके शरीर में पुरुषों की तुलना में ज्यादा एमिलोइड प्लाक पाया जाता है। इस थ्योरी से पता चलता है कि महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा अल्जाइमर बीमारी होने का खतरा होता है। इसके साथ-साथ महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी भी अल्जाइमर डिजीज होने का कारण बन सकती है। हालांकि, इसके अलावा मरीज के शरीर के अनुसार कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं। इसलिए अगर आपको दिमाग से जुड़े किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। Total Wellness is now just a click away.
की टीका लिखी भी होगी और फिर उनके पदों से यह भी नहीं झलकता कि उन्होंने गीतगोविन्द का अनुशीलन भी किया था या नहीं। यद्यपि महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा के अनुसार मीरा ने रागगोविन्द नाम से एक कविता मन्थ रचा था और आचार्य शुरु जी जैसे विचारकों ने भी इस कृति का उल्लेख किया है परन्तु श्री परशुराम चतुर्वेदी ने इसके अस्तित्व के विषय में संदेह ही व्यक्त किया है। राम सोरठ को मिश्रबंधुओं ने एक स्वतंत्र मन्थ माना है और उसकी दो प्रतियों के प्राप्त होने का उल्लेख नागरी प्रचारिणी सभा की सन् १९०२ की खोज रिपोर्ट में भी किया गया है तथा उसमें इस ग्रन्थ का नाम राग सोरठ का पद है लेकिन उसमें मीरा के अतिरिक्त नामदेव और कबीर के पद भी संगृहीत है। मीरा के नाम पर मीराबाई का मलार नामक एक ग्रन्थ और भी कहा जाता है तथा उसके विषय में ओझा जी का मत है कि यह "राग अब तक प्रचलित है और बहुत प्रसिद्ध है" परन्तु कुछ विचारक इसे स्वतंत्र ग्रन्थ नहीं मानते । इसी प्रकार श्री के० एम० झावेरी ने भी गुजरात में प्रचलित बहुत से गर्वा गीतों को जो कि रास क्रीड़ा के गीतों की भाँति गाए जाते हैं मीरा रचित माना है । परन्तु साहित्यिक दृष्टि से तो मीरा द्वारा रचित फुटकर पदों का ही विशेष महत्त्व है तथा मीरा की कृतियों के रूप में सर्वाधिक निश्चित जानकारी भी इन्हीं पदों के विषय में प्राप्त होती है। यहाँ यह भी स्मरण रहना चाहिए कि केवल एन० बी० दिवेटिया की Gujarati Langu age and Literature नामक कृति के अतिरिक्त प्रायः जितने भी गुजराती साहित्य के इतिहास दृष्टिगोचर होते हैं उनमें मीरा को गुजराती भाषा की कवयित्री ही माना जाता है चाहे उनके पदों की लिपिमात्र ही गुजराती की हो और उनकी भाषा मिश्रित राजस्थानी या ब्रज ही क्यों न हो लेकिन डा० जगदीश गुम ने तो तर्कों सहित सिद्ध कर १. मीराँबाई को पदावली - श्री परशुराम चतुर्वेदी (भू. पृ. १४ ) विशेष अध्ययन के लिए देखिए - १. Gujarat and Its Literature- श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ( पू. १२५-१९१ ) २. Classical Poets of Gujarat- श्री गोवनराम त्रिपाठी (पृ.११.२१) ३. Milestones in Gujarati Literature- की के. एम. झावेरी ( भ. १, पू. २५.५१)
की टीका लिखी भी होगी और फिर उनके पदों से यह भी नहीं झलकता कि उन्होंने गीतगोविन्द का अनुशीलन भी किया था या नहीं। यद्यपि महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा के अनुसार मीरा ने रागगोविन्द नाम से एक कविता मन्थ रचा था और आचार्य शुरु जी जैसे विचारकों ने भी इस कृति का उल्लेख किया है परन्तु श्री परशुराम चतुर्वेदी ने इसके अस्तित्व के विषय में संदेह ही व्यक्त किया है। राम सोरठ को मिश्रबंधुओं ने एक स्वतंत्र मन्थ माना है और उसकी दो प्रतियों के प्राप्त होने का उल्लेख नागरी प्रचारिणी सभा की सन् एक हज़ार नौ सौ दो की खोज रिपोर्ट में भी किया गया है तथा उसमें इस ग्रन्थ का नाम राग सोरठ का पद है लेकिन उसमें मीरा के अतिरिक्त नामदेव और कबीर के पद भी संगृहीत है। मीरा के नाम पर मीराबाई का मलार नामक एक ग्रन्थ और भी कहा जाता है तथा उसके विषय में ओझा जी का मत है कि यह "राग अब तक प्रचलित है और बहुत प्रसिद्ध है" परन्तु कुछ विचारक इसे स्वतंत्र ग्रन्थ नहीं मानते । इसी प्रकार श्री केशून्य एमशून्य झावेरी ने भी गुजरात में प्रचलित बहुत से गर्वा गीतों को जो कि रास क्रीड़ा के गीतों की भाँति गाए जाते हैं मीरा रचित माना है । परन्तु साहित्यिक दृष्टि से तो मीरा द्वारा रचित फुटकर पदों का ही विशेष महत्त्व है तथा मीरा की कृतियों के रूप में सर्वाधिक निश्चित जानकारी भी इन्हीं पदों के विषय में प्राप्त होती है। यहाँ यह भी स्मरण रहना चाहिए कि केवल एनशून्य बीशून्य दिवेटिया की Gujarati Langu age and Literature नामक कृति के अतिरिक्त प्रायः जितने भी गुजराती साहित्य के इतिहास दृष्टिगोचर होते हैं उनमें मीरा को गुजराती भाषा की कवयित्री ही माना जाता है चाहे उनके पदों की लिपिमात्र ही गुजराती की हो और उनकी भाषा मिश्रित राजस्थानी या ब्रज ही क्यों न हो लेकिन डाशून्य जगदीश गुम ने तो तर्कों सहित सिद्ध कर एक. मीराँबाई को पदावली - श्री परशुराम चतुर्वेदी विशेष अध्ययन के लिए देखिए - एक. Gujarat and Its Literature- श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी दो. Classical Poets of Gujarat- श्री गोवनराम त्रिपाठी तीन. Milestones in Gujarati Literature- की के. एम. झावेरी
इस्लामाबादः दुनिया के तमाम देशों की ही तरफ कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप झेल रहे पाकिस्तान के लिए उसकी खस्ता हाल अर्थव्यवस्था ने संकट को और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद ही संकेतों में कहा है कि उनके देश के सामने एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है। इमरान ने ट्विटर पर अपने एक ट्वीट में इस संकट का उल्लेख किया है कि कुल आबादी का 25 फीसदी हिस्सा गरीबी रेखा से भी नीचे है और इनकी रोजी रोटी के लिए देशव्यापी संपूर्ण लॉकडाउन किस हद तक समस्याएं लेकर आ सकता है, साथ ही अगर लॉकडाउन से बचा जाए या इसे खत्म किया जाए तो यह कोरोना महामारी मौत बनकर समाज पर टूट सकती है। इमरान ने निर्माण क्षेत्र में गतिविधियां शुरू करने के अपने सरकार के फैसले के हवाले से अपने ट्वीट में कहा, (भारतीय) उपमहाद्वीप में गरीबी बहुत ज्यादा है। हमारे सामने एक बेहद कठिन चुनौती इसमें संतुलन बनाने की है कि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन किया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि हमारे लोग भूख से न मरें और अर्थवय्वस्था तहस-नहस न हो। इमरान ने ट्वीट में कहा, हमने शिक्षण संस्थाओं, माल, रेस्टोरेंट, शादीघरों व अन्य जगहों पर लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाते हुए लॉकडाउन कर दिया लेकिन लॉकडाउन से होने वाली तबाही को रोकने के लिए कृषि क्षेत्र को इससे अलग रखा और अब हम अपने निर्माण क्षेत्र (कंस्ट्रक्शन सेक्टर) को खोल रहे हैं। इससे पहले भी इमरान यह कह चुके हैं कि अगल लोग भूखे मर रहे हों तो वो उनसे घरों में रहने के लिए कैसे कह सकते हैं।
इस्लामाबादः दुनिया के तमाम देशों की ही तरफ कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप झेल रहे पाकिस्तान के लिए उसकी खस्ता हाल अर्थव्यवस्था ने संकट को और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद ही संकेतों में कहा है कि उनके देश के सामने एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है। इमरान ने ट्विटर पर अपने एक ट्वीट में इस संकट का उल्लेख किया है कि कुल आबादी का पच्चीस फीसदी हिस्सा गरीबी रेखा से भी नीचे है और इनकी रोजी रोटी के लिए देशव्यापी संपूर्ण लॉकडाउन किस हद तक समस्याएं लेकर आ सकता है, साथ ही अगर लॉकडाउन से बचा जाए या इसे खत्म किया जाए तो यह कोरोना महामारी मौत बनकर समाज पर टूट सकती है। इमरान ने निर्माण क्षेत्र में गतिविधियां शुरू करने के अपने सरकार के फैसले के हवाले से अपने ट्वीट में कहा, उपमहाद्वीप में गरीबी बहुत ज्यादा है। हमारे सामने एक बेहद कठिन चुनौती इसमें संतुलन बनाने की है कि कोविड-उन्नीस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन किया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि हमारे लोग भूख से न मरें और अर्थवय्वस्था तहस-नहस न हो। इमरान ने ट्वीट में कहा, हमने शिक्षण संस्थाओं, माल, रेस्टोरेंट, शादीघरों व अन्य जगहों पर लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाते हुए लॉकडाउन कर दिया लेकिन लॉकडाउन से होने वाली तबाही को रोकने के लिए कृषि क्षेत्र को इससे अलग रखा और अब हम अपने निर्माण क्षेत्र को खोल रहे हैं। इससे पहले भी इमरान यह कह चुके हैं कि अगल लोग भूखे मर रहे हों तो वो उनसे घरों में रहने के लिए कैसे कह सकते हैं।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि दुकान की खिड़की में महंगा गहने की तरह वीडियो की उच्च गुणवत्ताः जैसा कि आप देख सकते हैं - आप को छूने नहीं कर सकते। दरअसल, इंटरनेट पा सकते हैं और आप की तरह कुछ भी देखते हैं, लेकिन डाउनलोड करने में समस्याएं अक्सर उत्पन्न होती हैं। क्या ऑनलाइन वीडियो डाउनलोड करने के लिए सबसे अच्छा सॉफ्टवेयर होना चाहिए? बुनियादी आवश्यकताओंः "इस कार्यक्रम नहीं है! " - कुछ उपयोगकर्ताओं को कहते हैं और सही नहीं होगा। ये और कई अन्य समस्याओं को हल कर रहे हैं कार्यक्रम 'VideoMANIYa "है, जो अब हम पर विचार करें। यह साइट है, जो अनुभवी और नौसिखिया उपयोगकर्ताओं के रूप में मान्यता मिल गया से वीडियो डाउनलोड करने के लिए एक उपयोगी उपकरण है। यही कारण है कि लेकिन स्टार्टअप "VideoMANII" में आनन्दित नहीं कर सकते हैं, तो यह ऑनलाइन स्रोतों की एक प्रभावशाली सूची है जिसमें से यह किसी भी वीडियो डाउनलोड करने के लिए संभव है। उपयोगकर्ताओं और खोज ही वीडियो पर निराश मत करोः वीडियो / फिल्म आप मैन्युअल रूप से खोज बॉक्स में ड्राइव कर सकते हैं का नाम है, और अपने ब्राउज़र से लिंक की नकल की है करने के लिए डाला जा सकता है - बस मामले में, यदि आप जानते हैं जो विशिष्ट वीडियो आप चाहते हैं। खोज दोनों सभी उपलब्ध स्रोतों पर है, साथ ही आवश्यक संसाधन के भीतर संभव है। अगर वांछित, आप वीडियो फ़ीड की गुणवत्ता का चयन कर सकते हैं, हालांकि, उच्च यह है, अब यह वादा किया फ़ाइल के लिए इंतजार कर रहे होंगे। लेकिन उज्ज्वल छवियों और हाई रिजोल्यूशन आप इंतजार कर सकते हैं के लिए, है ना? इस लेख की शुरुआत में, हम तथ्य यह है कि ऑनलाइन वीडियो डाउनलोड करने के लिए कार्यक्रम का पूर्ण लाभ एकाधिक प्रारूपों के लिए समर्थन है के बारे में बात की थी। "VideoMANIYa" iPhone और iPad के लिए AVI और एमपीईजी के सभी बड़े और छोटे विस्तार का समर्थन करता है। हाँ, आप सही सुना, कार्यक्रम वास्तव में आप प्रारूपों कि मोबाइल उपकरणों की एक किस्म है, जो 250 से अधिक प्रीसेट है के लिए अनुकूलित कर रहे हैं के साथ काम करने की अनुमति देता है। और क्या करता है, तो वीडियो डाउनलोड किया गया था, लेकिन यह कारण अपने पीसी पर सॉफ्टवेयर की कमी के नहीं खुलेगा? ऐसे प्रयोजनों के लिए, वहाँ एक आसान समारोह किसी ऐसे स्वरूप की जरूरत है में डाउनलोड की गई फ़ाइलों कन्वर्ट करने के लिए है। आप कल्पना कर सकते सच्चे प्रशंसकों में कितना आनन्द समारोह तुरंत बैच डाउनलोड वीडियो और उनके बाद के रूपांतरण सेट कॉल करेंगे। अपने कंप्यूटर, मोबाइल डिवाइस, मीडिया प्लेयर और यहां तक कि टीवी पर - इस प्रकार, आप वीडियो बाद में कहीं भी देख सकते हैं। एक उत्कृष्ट अवसर डीवीडी रिकॉर्डर के बारे में भूल करने के लिए। इसके अलावा, इस अद्भुत कार्यक्रम भी कर सकते हैं DVD- वीडियो, वे कहते हैं और, के रूप में, "मौके पर ही" - डिस्क हाल ही में डाउनलोड करने के लिए लिखा जा सकता है और परिवर्तित फ़ाइलों। मेनू डिजाइन भी कार्यक्रम में पंजीकरण का अधिकार के लिए उपलब्ध है। सब कुछ करने के लिए इसके अलावा, "VideoMANIYa" एक और बहुत ही उत्सुक सुविधा है। एक विशेष टैप जिसमें आंत सभी डाउनलोड की गई फ़ाइलें, बाधित है या आपके द्वारा की योजना बनाई के बारे में जानकारी संग्रहीत करता है - यह तथाकथित "डाउनलोड इतिहास" है। खोज का उपयोग करना बहुत आसान है, वांछित वीडियो खोजने के लिए अपनी स्थिति को और इसके अलावा की तारीख की जाँच, साथ ही साइट या डाउनलोड की तारीख में डाउनलोड की पूरी सूची सॉर्ट करने के लिए अनुमति देता है। कार्यक्रम के कई सकारात्मक पहलुओं के अलावा, इसके इंटरफेस का उल्लेख नहीं। अपने आप से, यह काफी अच्छा है, सादे दृष्टि में सभी कार्यों, और अधिक - जानने के लिए भी एक पेशेवर किया जा रहा बिना काम के सिद्धांत को अपने स्वयं के, पर यथार्थवादी है।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि दुकान की खिड़की में महंगा गहने की तरह वीडियो की उच्च गुणवत्ताः जैसा कि आप देख सकते हैं - आप को छूने नहीं कर सकते। दरअसल, इंटरनेट पा सकते हैं और आप की तरह कुछ भी देखते हैं, लेकिन डाउनलोड करने में समस्याएं अक्सर उत्पन्न होती हैं। क्या ऑनलाइन वीडियो डाउनलोड करने के लिए सबसे अच्छा सॉफ्टवेयर होना चाहिए? बुनियादी आवश्यकताओंः "इस कार्यक्रम नहीं है! " - कुछ उपयोगकर्ताओं को कहते हैं और सही नहीं होगा। ये और कई अन्य समस्याओं को हल कर रहे हैं कार्यक्रम 'VideoMANIYa "है, जो अब हम पर विचार करें। यह साइट है, जो अनुभवी और नौसिखिया उपयोगकर्ताओं के रूप में मान्यता मिल गया से वीडियो डाउनलोड करने के लिए एक उपयोगी उपकरण है। यही कारण है कि लेकिन स्टार्टअप "VideoMANII" में आनन्दित नहीं कर सकते हैं, तो यह ऑनलाइन स्रोतों की एक प्रभावशाली सूची है जिसमें से यह किसी भी वीडियो डाउनलोड करने के लिए संभव है। उपयोगकर्ताओं और खोज ही वीडियो पर निराश मत करोः वीडियो / फिल्म आप मैन्युअल रूप से खोज बॉक्स में ड्राइव कर सकते हैं का नाम है, और अपने ब्राउज़र से लिंक की नकल की है करने के लिए डाला जा सकता है - बस मामले में, यदि आप जानते हैं जो विशिष्ट वीडियो आप चाहते हैं। खोज दोनों सभी उपलब्ध स्रोतों पर है, साथ ही आवश्यक संसाधन के भीतर संभव है। अगर वांछित, आप वीडियो फ़ीड की गुणवत्ता का चयन कर सकते हैं, हालांकि, उच्च यह है, अब यह वादा किया फ़ाइल के लिए इंतजार कर रहे होंगे। लेकिन उज्ज्वल छवियों और हाई रिजोल्यूशन आप इंतजार कर सकते हैं के लिए, है ना? इस लेख की शुरुआत में, हम तथ्य यह है कि ऑनलाइन वीडियो डाउनलोड करने के लिए कार्यक्रम का पूर्ण लाभ एकाधिक प्रारूपों के लिए समर्थन है के बारे में बात की थी। "VideoMANIYa" iPhone और iPad के लिए AVI और एमपीईजी के सभी बड़े और छोटे विस्तार का समर्थन करता है। हाँ, आप सही सुना, कार्यक्रम वास्तव में आप प्रारूपों कि मोबाइल उपकरणों की एक किस्म है, जो दो सौ पचास से अधिक प्रीसेट है के लिए अनुकूलित कर रहे हैं के साथ काम करने की अनुमति देता है। और क्या करता है, तो वीडियो डाउनलोड किया गया था, लेकिन यह कारण अपने पीसी पर सॉफ्टवेयर की कमी के नहीं खुलेगा? ऐसे प्रयोजनों के लिए, वहाँ एक आसान समारोह किसी ऐसे स्वरूप की जरूरत है में डाउनलोड की गई फ़ाइलों कन्वर्ट करने के लिए है। आप कल्पना कर सकते सच्चे प्रशंसकों में कितना आनन्द समारोह तुरंत बैच डाउनलोड वीडियो और उनके बाद के रूपांतरण सेट कॉल करेंगे। अपने कंप्यूटर, मोबाइल डिवाइस, मीडिया प्लेयर और यहां तक कि टीवी पर - इस प्रकार, आप वीडियो बाद में कहीं भी देख सकते हैं। एक उत्कृष्ट अवसर डीवीडी रिकॉर्डर के बारे में भूल करने के लिए। इसके अलावा, इस अद्भुत कार्यक्रम भी कर सकते हैं DVD- वीडियो, वे कहते हैं और, के रूप में, "मौके पर ही" - डिस्क हाल ही में डाउनलोड करने के लिए लिखा जा सकता है और परिवर्तित फ़ाइलों। मेनू डिजाइन भी कार्यक्रम में पंजीकरण का अधिकार के लिए उपलब्ध है। सब कुछ करने के लिए इसके अलावा, "VideoMANIYa" एक और बहुत ही उत्सुक सुविधा है। एक विशेष टैप जिसमें आंत सभी डाउनलोड की गई फ़ाइलें, बाधित है या आपके द्वारा की योजना बनाई के बारे में जानकारी संग्रहीत करता है - यह तथाकथित "डाउनलोड इतिहास" है। खोज का उपयोग करना बहुत आसान है, वांछित वीडियो खोजने के लिए अपनी स्थिति को और इसके अलावा की तारीख की जाँच, साथ ही साइट या डाउनलोड की तारीख में डाउनलोड की पूरी सूची सॉर्ट करने के लिए अनुमति देता है। कार्यक्रम के कई सकारात्मक पहलुओं के अलावा, इसके इंटरफेस का उल्लेख नहीं। अपने आप से, यह काफी अच्छा है, सादे दृष्टि में सभी कार्यों, और अधिक - जानने के लिए भी एक पेशेवर किया जा रहा बिना काम के सिद्धांत को अपने स्वयं के, पर यथार्थवादी है।
गगरेट। कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर से पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे रैपिड एंटीजन टेस्ट ने उपमंडल गगरेट में एक बार फिर से खतरे की घंटी बजा दी है। मंगलवार को किए गए रैपिड एंटीजन टेस्ट में एक साथ आठ मामले कोरोना पॉजिटिव के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। ऊना। जिला ऊना में पहली सितंबर बुधवार को 28 केंद्रों पर कोविड-19 वैक्सीनेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह जानकारी सीएमओ ऊना डा. रमन कुमार शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि जीपीएस बसदेहड़ा, पीएचसी चलोला, एचएससी देहलां, एचएससी टक्का, एचएससी चढ़तगढ़, राधा स्वामी सत्संग भवन ऊना, राधा स्वामी सत्संग घर गगरेट, डिग्री कालेज दौलतपुर, पीएचसी मरवाड़ी, विधायक राजेश ठाकुर बोले, सरकारी नौकरी भी देगी जयराम सरकार स्टाफ रिपोर्टर-गगरेट टोक्यो पैरालंपिक में हिमाचली जनून का जादू बिखेर चुके पैरा एथलीट निषाद कुमार की इस उपलब्धि ने न सिर्फ रातों-रात उसे हीरो बना दिया है बल्कि उसके मां-बाप को भी अब पता चल रहा है कि बेटे ने क्या कमाल कर दिखाया है।
गगरेट। कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर से पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे रैपिड एंटीजन टेस्ट ने उपमंडल गगरेट में एक बार फिर से खतरे की घंटी बजा दी है। मंगलवार को किए गए रैपिड एंटीजन टेस्ट में एक साथ आठ मामले कोरोना पॉजिटिव के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। ऊना। जिला ऊना में पहली सितंबर बुधवार को अट्ठाईस केंद्रों पर कोविड-उन्नीस वैक्सीनेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह जानकारी सीएमओ ऊना डा. रमन कुमार शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि जीपीएस बसदेहड़ा, पीएचसी चलोला, एचएससी देहलां, एचएससी टक्का, एचएससी चढ़तगढ़, राधा स्वामी सत्संग भवन ऊना, राधा स्वामी सत्संग घर गगरेट, डिग्री कालेज दौलतपुर, पीएचसी मरवाड़ी, विधायक राजेश ठाकुर बोले, सरकारी नौकरी भी देगी जयराम सरकार स्टाफ रिपोर्टर-गगरेट टोक्यो पैरालंपिक में हिमाचली जनून का जादू बिखेर चुके पैरा एथलीट निषाद कुमार की इस उपलब्धि ने न सिर्फ रातों-रात उसे हीरो बना दिया है बल्कि उसके मां-बाप को भी अब पता चल रहा है कि बेटे ने क्या कमाल कर दिखाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जम्मू कश्मीर में आयुष्मान योजना की शुरुआत की और साथ ही प्रदेश में हुए सफल पंचायत चुनाव के लिए अपनी सरकार की प्रशंसा की. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्ष पर सीधा हमला किया. पीएम ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों की कथनी और करनी में बहुत फर्क है. देखें, और क्या कहा मोदी ने. Prime Minister Modi launched the Ayushman Yojna in Jammu Kashmir today and he also praised his government for carrying out the Panchayat election in the state successfully. During his address, he attacked the opposition directly. Watch, what else he said.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जम्मू कश्मीर में आयुष्मान योजना की शुरुआत की और साथ ही प्रदेश में हुए सफल पंचायत चुनाव के लिए अपनी सरकार की प्रशंसा की. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्ष पर सीधा हमला किया. पीएम ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों की कथनी और करनी में बहुत फर्क है. देखें, और क्या कहा मोदी ने. Prime Minister Modi launched the Ayushman Yojna in Jammu Kashmir today and he also praised his government for carrying out the Panchayat election in the state successfully. During his address, he attacked the opposition directly. Watch, what else he said.
ज्यादातर लोग खाने वाली चीजों को खराब होने से बचाने के लिए फ्रिज में रख देते हैं, ताकि वे ठीक रहें। मगर हर चीज को फ्रिज में रखना सही नहीं है, क्योंकि कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं, जिन्हें अगर फ्रिज में रखा जाए तो वो खराब हो जाती हैं। वहीं, कुछ चीजें सड़ जाती है और फ्रिज में रखी बाकी चीजों का स्वाद बिगाड़ देती हैं। तो आइए जानें कि फ्रिज में किन चीजों को नहीं रखना चाहिए। आजकल कई लोग ऑलिव ऑयल या जैतून के तेल का काफी इस्तेमाल करते हैं। अगर आप खाना बनाने के शौकीन हैं तो शत-प्रतिशत आपको इस तेल के फायदों के बारे में जरूर पता होगा। ऑलिव ऑयल न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर है। मगर जैतून के तेल को भूलकर भी फ्रिज में रखना सही नहीं है, क्योंकि फ्रिज में रखने से यह जम जाता है और इसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। प्याज खाने के स्वाद के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अगर आप प्याज को फ्रिज में रखा जाएं तो यह न सिर्फ नर्म और बेकार होने लगेगा बल्कि इसकी महक फ्रिज में रखे दूध दही जैसी चीजों को भी खराब कर देगी। इतना ही नहीं अगर प्याज और आलू दोनों को साथ में फ्रिज में रख दिया तो जल्द ही दोनों सब्जियां सड़ने लगती हैं। शहद लाजवाब स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल एक गुणकारी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सदियों से किया जा रहा है। मगर शहद को फ्रिज में रखने से इसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों खराब हो सकते हैं, इसलिए अच्छा होगा कि आप शहद को किसी एयर टाइट कंटेनर में बंद करके सामान्य तापमान वाले कमरें में रखें। शहद को ऐसे रखने से कई महीनों तक उसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों ही बने रहेंगे।
ज्यादातर लोग खाने वाली चीजों को खराब होने से बचाने के लिए फ्रिज में रख देते हैं, ताकि वे ठीक रहें। मगर हर चीज को फ्रिज में रखना सही नहीं है, क्योंकि कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं, जिन्हें अगर फ्रिज में रखा जाए तो वो खराब हो जाती हैं। वहीं, कुछ चीजें सड़ जाती है और फ्रिज में रखी बाकी चीजों का स्वाद बिगाड़ देती हैं। तो आइए जानें कि फ्रिज में किन चीजों को नहीं रखना चाहिए। आजकल कई लोग ऑलिव ऑयल या जैतून के तेल का काफी इस्तेमाल करते हैं। अगर आप खाना बनाने के शौकीन हैं तो शत-प्रतिशत आपको इस तेल के फायदों के बारे में जरूर पता होगा। ऑलिव ऑयल न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर है। मगर जैतून के तेल को भूलकर भी फ्रिज में रखना सही नहीं है, क्योंकि फ्रिज में रखने से यह जम जाता है और इसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। प्याज खाने के स्वाद के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अगर आप प्याज को फ्रिज में रखा जाएं तो यह न सिर्फ नर्म और बेकार होने लगेगा बल्कि इसकी महक फ्रिज में रखे दूध दही जैसी चीजों को भी खराब कर देगी। इतना ही नहीं अगर प्याज और आलू दोनों को साथ में फ्रिज में रख दिया तो जल्द ही दोनों सब्जियां सड़ने लगती हैं। शहद लाजवाब स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल एक गुणकारी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सदियों से किया जा रहा है। मगर शहद को फ्रिज में रखने से इसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों खराब हो सकते हैं, इसलिए अच्छा होगा कि आप शहद को किसी एयर टाइट कंटेनर में बंद करके सामान्य तापमान वाले कमरें में रखें। शहद को ऐसे रखने से कई महीनों तक उसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों ही बने रहेंगे।
जालंधर - सेंट सोल्जर कालेज बस्ती दानिशमंदा में एक दिवसीय एनएसएस कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप में कालेज की सीनियर प्रो. डा. ममता रानी के निर्देशन में लगभग 80 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कालेज डायरेक्टर डा. अनूप सिंह मुल्तानी ने विद्यार्थियों को एनएसएस का महत्त्व बताते हुए इस कैंप का आरंभ किया। इस अवसर पर कालेज प्रिंसीपल डा. नीरज भी विशेष रूप से उपस्थित थे, जिन्होंने सभी का स्वागत करते हुए एनएसएस में भाग लेने वाले छात्रों को उत्साहित किया। एनएसएस के छात्रों ने अपने आसपास को साफ रखने का संदेश देते हुए सारे कैंपस को साफ किया और इस अवसर पर पौधारोपण भी किया गया। मुल्तानी ने एनएसएस वॉलिंटियर्स को राष्ट्र की उन्नति में एनएसएस के योगदान पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जैसे कि कहा जाता है कि सफाई में ही भगवान का वास होता है, वैसे हमारे अपने आसपास की सफाई रखनी बहुत जरूरी है और एनएसएस के वालंटियर्स हैं वे कालेज स्तर पर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
जालंधर - सेंट सोल्जर कालेज बस्ती दानिशमंदा में एक दिवसीय एनएसएस कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप में कालेज की सीनियर प्रो. डा. ममता रानी के निर्देशन में लगभग अस्सी विद्यार्थियों ने भाग लिया। कालेज डायरेक्टर डा. अनूप सिंह मुल्तानी ने विद्यार्थियों को एनएसएस का महत्त्व बताते हुए इस कैंप का आरंभ किया। इस अवसर पर कालेज प्रिंसीपल डा. नीरज भी विशेष रूप से उपस्थित थे, जिन्होंने सभी का स्वागत करते हुए एनएसएस में भाग लेने वाले छात्रों को उत्साहित किया। एनएसएस के छात्रों ने अपने आसपास को साफ रखने का संदेश देते हुए सारे कैंपस को साफ किया और इस अवसर पर पौधारोपण भी किया गया। मुल्तानी ने एनएसएस वॉलिंटियर्स को राष्ट्र की उन्नति में एनएसएस के योगदान पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जैसे कि कहा जाता है कि सफाई में ही भगवान का वास होता है, वैसे हमारे अपने आसपास की सफाई रखनी बहुत जरूरी है और एनएसएस के वालंटियर्स हैं वे कालेज स्तर पर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
इस 'कीमती पत्थर' को पाने के लिए बेताब है अमेरिका-चीन, छोटा-सा टुकड़ा भी बदल देगा आपकी किस्मत! ब्लूटूथ चप्पल, मक्खी डिवाइस और वॉकी टॉकी... ये बिहार के हाईटेक 'नकलची' निज्जर हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस, जानिए अब तक क्या मिला? पटना में लालू-नीतीश की मुलाकात, जानिए क्या हुई बात?
इस 'कीमती पत्थर' को पाने के लिए बेताब है अमेरिका-चीन, छोटा-सा टुकड़ा भी बदल देगा आपकी किस्मत! ब्लूटूथ चप्पल, मक्खी डिवाइस और वॉकी टॉकी... ये बिहार के हाईटेक 'नकलची' निज्जर हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस, जानिए अब तक क्या मिला? पटना में लालू-नीतीश की मुलाकात, जानिए क्या हुई बात?
भारत के पड़ोसी राज्य म्यानमार में बार-बार नजरबंद और रिहाई जैसी कठोर प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी शांति का परचम लहराने वाली आंग सान सू की के राजनीतिक दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के एक अधिकारी की राखिन राज्य में हत्या कर दी गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी को 11 दिसंबर को अगवा किया गया था. इसी दिन सू की ने 'द हेग' में म्यांमार के खिलाफ नरसंहार के आरोपों पर देश का बचाव करना शुरू किया और उक्त अधिकारी सू की के समर्थन में प्रदर्शन की योजना बना रहा था. एनएलडी के ये थिन को रखाइन राज्य में और अधिक स्वायत्ता पाने के लिए संघर्ष कर रहे उग्रवादियों के संगठन अराकान सेना ने बंधक बनाया था. उग्रवादियों ने कहा कि बुथिदाउंग कस्बे में एनएलडी इकाई के प्रमुख थिन की मौत क्रिसमस के दिन हुए सेना के हमलों में हुई. अपने बयान में एनएलडी के प्रवक्ता म्यो न्यूंट ने कहा कि अधिकारी की मौत का जिम्मेदार उग्रवादी समूह है. न्यूंट ने कहा, 'इस क्षति का एनएलडी के हम सभी सदस्यों को बहुत दुख है. सू की के समर्थन में सभा करने में कुछ गलत नहीं था और यह कोई अपराध नहीं था. ' अराकान सेना ने राखिन राज्य में सेना और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ अपहरण, बमबारी और छापेमारी की घटनाओं को अंजाम दिया है.
भारत के पड़ोसी राज्य म्यानमार में बार-बार नजरबंद और रिहाई जैसी कठोर प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी शांति का परचम लहराने वाली आंग सान सू की के राजनीतिक दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के एक अधिकारी की राखिन राज्य में हत्या कर दी गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी को ग्यारह दिसंबर को अगवा किया गया था. इसी दिन सू की ने 'द हेग' में म्यांमार के खिलाफ नरसंहार के आरोपों पर देश का बचाव करना शुरू किया और उक्त अधिकारी सू की के समर्थन में प्रदर्शन की योजना बना रहा था. एनएलडी के ये थिन को रखाइन राज्य में और अधिक स्वायत्ता पाने के लिए संघर्ष कर रहे उग्रवादियों के संगठन अराकान सेना ने बंधक बनाया था. उग्रवादियों ने कहा कि बुथिदाउंग कस्बे में एनएलडी इकाई के प्रमुख थिन की मौत क्रिसमस के दिन हुए सेना के हमलों में हुई. अपने बयान में एनएलडी के प्रवक्ता म्यो न्यूंट ने कहा कि अधिकारी की मौत का जिम्मेदार उग्रवादी समूह है. न्यूंट ने कहा, 'इस क्षति का एनएलडी के हम सभी सदस्यों को बहुत दुख है. सू की के समर्थन में सभा करने में कुछ गलत नहीं था और यह कोई अपराध नहीं था. ' अराकान सेना ने राखिन राज्य में सेना और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ अपहरण, बमबारी और छापेमारी की घटनाओं को अंजाम दिया है.
साल 2018 के प्रकरण पर दोषी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने कहा, 'फायदा तो सभी गेंदबाजों को भी मिला' गेंद से छेड़खानी मामले में शामिल रहे कैमरन बेनक्रॉफ्ट का कहना है कि स्टीव स्मिथ, डेविड वार्नर और उनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के बाकी गेंदबाजों को भी न्यूलैंड्स टेस्ट के दौरान की गई इस गलती की जानकारी थी। न्यूलैंड्स टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण में मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मिशेल मार्श और स्पिनर नाथन लियोन शामिल थे। इस समय काउंटी क्रिकेट में डरहम की ओर से भाग ले रहे बेनक्रोफ्ट ने कहा कि वह चाहते थे कि उनके साथी खिलाड़ी उन्हें पसंद करें और इसी वजह से उन्होंने अपने मूल्यों के साथ समझौता किया। बेनक्रॉफ्ट ने कहा कि गलती होने से पहले उन्हें इसका अहसास नहीं हुआ, लेकिन यह उनके लिए एक कड़ा सबक रहा जो सीखा जाना बेहद जरूरी था। 28 वर्षीय क्रिकेटर ने कहा कि उन्होंने सही निर्णय नहीं लिया था। बेनक्रोफ्ट पर मामले में नौ महीने का प्रतिबंध लगा था जबकि कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वॉर्नर पर एक साल का बैन लगाया गया था। यही नहीं क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मामले में मुख्य साजिशकर्ता माने गए वॉर्नर पर आजीवन कप्तान बनने पर रोक लगा दी तो वहीं स्मिथ की कप्तानी पर दो वर्ष का प्रतिबंध लगा। इस प्रकरण के बाद मुख्य प्रशिक्षक डेरेन लेहमन ने भी इस्तीफा दे दिया था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
साल दो हज़ार अट्ठारह के प्रकरण पर दोषी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने कहा, 'फायदा तो सभी गेंदबाजों को भी मिला' गेंद से छेड़खानी मामले में शामिल रहे कैमरन बेनक्रॉफ्ट का कहना है कि स्टीव स्मिथ, डेविड वार्नर और उनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के बाकी गेंदबाजों को भी न्यूलैंड्स टेस्ट के दौरान की गई इस गलती की जानकारी थी। न्यूलैंड्स टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण में मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मिशेल मार्श और स्पिनर नाथन लियोन शामिल थे। इस समय काउंटी क्रिकेट में डरहम की ओर से भाग ले रहे बेनक्रोफ्ट ने कहा कि वह चाहते थे कि उनके साथी खिलाड़ी उन्हें पसंद करें और इसी वजह से उन्होंने अपने मूल्यों के साथ समझौता किया। बेनक्रॉफ्ट ने कहा कि गलती होने से पहले उन्हें इसका अहसास नहीं हुआ, लेकिन यह उनके लिए एक कड़ा सबक रहा जो सीखा जाना बेहद जरूरी था। अट्ठाईस वर्षीय क्रिकेटर ने कहा कि उन्होंने सही निर्णय नहीं लिया था। बेनक्रोफ्ट पर मामले में नौ महीने का प्रतिबंध लगा था जबकि कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वॉर्नर पर एक साल का बैन लगाया गया था। यही नहीं क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मामले में मुख्य साजिशकर्ता माने गए वॉर्नर पर आजीवन कप्तान बनने पर रोक लगा दी तो वहीं स्मिथ की कप्तानी पर दो वर्ष का प्रतिबंध लगा। इस प्रकरण के बाद मुख्य प्रशिक्षक डेरेन लेहमन ने भी इस्तीफा दे दिया था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
बाबा रामदेव के अनुसार कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें दिनभर चलने या खड़े रहने के कारण उनकी शारीरिक एक्सरसाइज होती रहती है लेकिन कई लोग ऐसे भी जो ऑफिस में खासकर कंप्यूटर पर काम करने वाले कर्मचारी दिन भर बैठे रहते हैं। लगातार 9 से 10 घंटे तक बैठे रहने की वजह से गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी में अकड़न और दर्द उत्पन्न हो जाता है। जिसके कारण शरीर के साथ-साथ आप तनावग्रस्त होने लगते हैं। बााब रामदेव ने इंडिया टीवी के खास प्रोग्राम में कुछ ऐसे योगासन बताए हैं जिन्हें आप कुर्सी पर बैठे-बैठे आसानी से कर सकते हैं। इससे आपको हर तरह के दर्द से निजात मिलने के साथ-साथ कई शारीरिक समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाएगी।
बाबा रामदेव के अनुसार कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें दिनभर चलने या खड़े रहने के कारण उनकी शारीरिक एक्सरसाइज होती रहती है लेकिन कई लोग ऐसे भी जो ऑफिस में खासकर कंप्यूटर पर काम करने वाले कर्मचारी दिन भर बैठे रहते हैं। लगातार नौ से दस घंटाटे तक बैठे रहने की वजह से गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी में अकड़न और दर्द उत्पन्न हो जाता है। जिसके कारण शरीर के साथ-साथ आप तनावग्रस्त होने लगते हैं। बााब रामदेव ने इंडिया टीवी के खास प्रोग्राम में कुछ ऐसे योगासन बताए हैं जिन्हें आप कुर्सी पर बैठे-बैठे आसानी से कर सकते हैं। इससे आपको हर तरह के दर्द से निजात मिलने के साथ-साथ कई शारीरिक समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाएगी।
चंडीगढ़ः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ब्रिटेन के बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक हासिल करने वाली भारोत्तोलक हरजिंदर कौर के लिए आज (2 अगस्त) को 40 लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने यहां जारी एक बयान में कौर को बधाई दी और कहा कि उनकी इस उपलब्धि से देश को गौरवान्वित किया गया है। कौर मेहस गांव की एक होनहार एथलीट है, जो नाभा के करीब है। पंजाब राज्य सरकार उन्हें पंजाब की खेल नीति के अनुसार 40 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देगी। मान ने उम्मीद जताई कि कौर की सफलता भविष्य के एथलीटों, विशेष रूप से महिलाओं को खेलों में सफल होने और अपने देश को सम्मान देने के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार एथलीटों का समर्थन करने के लिए समर्पित है, और उन्होंने कहा कि इन एथलीटों को जब भी वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो नकद पुरस्कार प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का शीर्ष ध्यान पंजाब की खेल संस्कृति का पुनर्निर्माण करना है। इस बीच, नाभा के निवासी बर्मिंघम में हरजिंदर की सफलता के बाद एक उन्माद में चले गए। "उसने कांस्य के लिए बहुत कड़ी मेहनत की, इसलिए यह उसके लिए एक खुशी का क्षण है। हम सभी को विश्वास था कि वह सफल होगी" हरजिंदर के भाई प्रितपाल सिंह ने कहा। उन्होंने कहा, 'परिवार के सभी लोगों ने उन्हें इस उद्योग में अपना नाम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. ' पंजाब के खेल मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने भी कौर को उनके कांस्य पदक पर बधाई दी.
चंडीगढ़ः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ब्रिटेन के बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक हासिल करने वाली भारोत्तोलक हरजिंदर कौर के लिए आज को चालीस लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने यहां जारी एक बयान में कौर को बधाई दी और कहा कि उनकी इस उपलब्धि से देश को गौरवान्वित किया गया है। कौर मेहस गांव की एक होनहार एथलीट है, जो नाभा के करीब है। पंजाब राज्य सरकार उन्हें पंजाब की खेल नीति के अनुसार चालीस लाख रुपये का नकद पुरस्कार देगी। मान ने उम्मीद जताई कि कौर की सफलता भविष्य के एथलीटों, विशेष रूप से महिलाओं को खेलों में सफल होने और अपने देश को सम्मान देने के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार एथलीटों का समर्थन करने के लिए समर्पित है, और उन्होंने कहा कि इन एथलीटों को जब भी वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो नकद पुरस्कार प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का शीर्ष ध्यान पंजाब की खेल संस्कृति का पुनर्निर्माण करना है। इस बीच, नाभा के निवासी बर्मिंघम में हरजिंदर की सफलता के बाद एक उन्माद में चले गए। "उसने कांस्य के लिए बहुत कड़ी मेहनत की, इसलिए यह उसके लिए एक खुशी का क्षण है। हम सभी को विश्वास था कि वह सफल होगी" हरजिंदर के भाई प्रितपाल सिंह ने कहा। उन्होंने कहा, 'परिवार के सभी लोगों ने उन्हें इस उद्योग में अपना नाम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. ' पंजाब के खेल मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने भी कौर को उनके कांस्य पदक पर बधाई दी.
महाकाव्य में प्रकृति वर्णन प्रकृति नदी चिरकाल से मानव की सहचरी बनकर अपने विविध सतरंगी आकर्षक उपादानों द्वारा उसके जीवन मे घुल मिलकर एक होती रही है। कभी-कभी वह वन्य मानव की जननी बनकर अपनी सुखद एवं स्निग्ध क्रोड मे आश्रय देती रही है, तो कभी सृष्टि की ओर आकर्षित करती हुई विधाता की विधायिनी शक्ति का आभास देती रही है, तो कभी सहृदयों को सहचरी के रूप में अपने मनोहरो हाव-भावों से रिझाती हुई, उत्कृष्ट कोटि के कवियो को प्रेरणा देती रही है। यही कारण है कि हमारा आदि काव्य प्रकृति के मृदु अञ्चल मे करुणा स्रोत के साथ प्रकट हुआ था । महाकवि वर्डवर्थ तो प्रकृति को आनन्दमय ही मानते है । पर्वतों की उत्तुंग श्रृंखलाये और निर्झरो का मादक संगीत उन्हे आनन्द प्लावित ही दृष्टिगत होता है। हिन्दी काव्य के विश्वप्रसिद्ध कवि सुमित्रानन्दन पन्त तो ललना सौन्दर्य को भी प्राकृतिक सुषमा पर न्यवछावर कर देते है । छोड़ द्रुमों की मृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया । बाले तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन ।। भूल अभी से इस जग का ।। मानव की सृष्टि के आदि से ही प्रकृति से तन्तु पट जैसा सम्बन्ध रहा है । हमारा सारा साहित्य प्रकृति रमणीय आंचल में विचरित हुआ हृदयगत मनोभावों के प्रबल हो उठने पर मानव का प्रकृति से तादात्म्य अधिकाधिक हो जाता है मानव की दृष्टि में प्रकृति का संवेदन शील स्वरूप ही हिन्दी साहित्य को छायावाद जैसी वस्तु दे सका है। संस्कृत वाङ्मय के आदि कवियों से ही प्रकृति वर्णन की परम्परा रही है। संस्कृत साहित्य के आदि ग्रन्थ वेद की ऋचाओ मे प्रकृति वर्णन द्रष्टव्य है। इसके अनन्तर संस्कृत साहित्य के आदि कवि वाल्मीकि ने रामायण मे प्रकृति चित्रण किया है। संस्कृत साहित्य के आदि ग्रन्थ रामायण के 16वे सर्ग में वाल्मीकि ने हेमन्त ऋतु वर्णन किष्किन्धा काण्ड के अष्टाविशति सर्ग में वर्षा ऋतु वर्णन, गिरि वर्णन, त्रिशः सर्ग मे शरद ऋतु वर्णन किया है। इसके अनन्तर कवि कुलगुरु कालिदास ने भी अपने ग्रन्थ मे अभिज्ञान शाकुन्तलम् के चतुर्थ सर्ग में प्रकृति वर्णन को काव्य का अंग बनाया है। प्रकृति के बिना काव्यो मे उत्कृटता नही आ सकती।
महाकाव्य में प्रकृति वर्णन प्रकृति नदी चिरकाल से मानव की सहचरी बनकर अपने विविध सतरंगी आकर्षक उपादानों द्वारा उसके जीवन मे घुल मिलकर एक होती रही है। कभी-कभी वह वन्य मानव की जननी बनकर अपनी सुखद एवं स्निग्ध क्रोड मे आश्रय देती रही है, तो कभी सृष्टि की ओर आकर्षित करती हुई विधाता की विधायिनी शक्ति का आभास देती रही है, तो कभी सहृदयों को सहचरी के रूप में अपने मनोहरो हाव-भावों से रिझाती हुई, उत्कृष्ट कोटि के कवियो को प्रेरणा देती रही है। यही कारण है कि हमारा आदि काव्य प्रकृति के मृदु अञ्चल मे करुणा स्रोत के साथ प्रकट हुआ था । महाकवि वर्डवर्थ तो प्रकृति को आनन्दमय ही मानते है । पर्वतों की उत्तुंग श्रृंखलाये और निर्झरो का मादक संगीत उन्हे आनन्द प्लावित ही दृष्टिगत होता है। हिन्दी काव्य के विश्वप्रसिद्ध कवि सुमित्रानन्दन पन्त तो ललना सौन्दर्य को भी प्राकृतिक सुषमा पर न्यवछावर कर देते है । छोड़ द्रुमों की मृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया । बाले तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन ।। भूल अभी से इस जग का ।। मानव की सृष्टि के आदि से ही प्रकृति से तन्तु पट जैसा सम्बन्ध रहा है । हमारा सारा साहित्य प्रकृति रमणीय आंचल में विचरित हुआ हृदयगत मनोभावों के प्रबल हो उठने पर मानव का प्रकृति से तादात्म्य अधिकाधिक हो जाता है मानव की दृष्टि में प्रकृति का संवेदन शील स्वरूप ही हिन्दी साहित्य को छायावाद जैसी वस्तु दे सका है। संस्कृत वाङ्मय के आदि कवियों से ही प्रकृति वर्णन की परम्परा रही है। संस्कृत साहित्य के आदि ग्रन्थ वेद की ऋचाओ मे प्रकृति वर्णन द्रष्टव्य है। इसके अनन्तर संस्कृत साहित्य के आदि कवि वाल्मीकि ने रामायण मे प्रकृति चित्रण किया है। संस्कृत साहित्य के आदि ग्रन्थ रामायण के सोलहवे सर्ग में वाल्मीकि ने हेमन्त ऋतु वर्णन किष्किन्धा काण्ड के अष्टाविशति सर्ग में वर्षा ऋतु वर्णन, गिरि वर्णन, त्रिशः सर्ग मे शरद ऋतु वर्णन किया है। इसके अनन्तर कवि कुलगुरु कालिदास ने भी अपने ग्रन्थ मे अभिज्ञान शाकुन्तलम् के चतुर्थ सर्ग में प्रकृति वर्णन को काव्य का अंग बनाया है। प्रकृति के बिना काव्यो मे उत्कृटता नही आ सकती।
आज हम आईएएस रुक्मिणी रियार की सफलता के बारे में कुछ बाते करने जा रहे है जिसे जानकर आपको भी जरुर हैरानी होगी वास्तव में रुक्मिणी रियार चंडीगढ़ की रहने वाली हैं जबकि उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार होशियारपुर के रिटायर्ड डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं वही उनकी माँ एक गृहिणी है. बता दे की रुक्मिणी रियार बचपन में कुछ खास पढ़ाई में होशियार नहीं थीं जबकि उनकी यह बात को लेकर उनके माता-पिता बेहद चिंतित रहने लगे थे कहा जाता है की आईएएस रुक्मिणी रियार की शुरुआती पढ़ाई गुरदासपुर से हुई थी जहा उनका मन पढ़ाई-लिखाई में खास रहता नहीं था. ऐसे में रुक्मिणी 6वीं क्लास में एकबार फेल भी हो गई थीं जबकि उनकी यह असफलता से मातापिता ही नहीं बल्कि वह खुद काफी परेशान रहने लगी थीं. असफलता का सामना करते करते उन्होंने ठान लिया कि वह होनहार बनकर दिखाएंगी जिमसे उन्होंने पढाई पर ध्यान दिया और कक्षा 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद अमृतसर की यूनिवर्सिटी से सोशल साइंस में ग्रेजुएशन किया. वहा से आगे साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की और आखिर में उन्होंने गोल्ड मेडलिस्ट भी प्राप्त किया. कहा जाता है की इस सफलता के बाद वह मुंबई में अन्नपूर्णा महिला मंडल जैसे एनजीओ के साथ इंटर्नशिप की इस दौरान वह सिविल सर्विसेज की ओर आकर्षित हुईं और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का विचार किया. रुक्मिणी रियार ने कहा की वह जानती थी उनके लिए यह परीक्षा पास करना मुश्केल है लेकिन हार मानी नहीं और छठी से 12वीं कक्षा तक की एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई शुरू की आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी सीएसई 2011 परीक्षा में वह दूसरे स्थान पर आ गई. आपको बता दे की आईएएस रुक्मिणी रियार फिलहाल श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर के पद पर तैनात हैं उन्होंने हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले आईएएस सिद्धार्थ सिहाग से शादी की है जबकि वह अपने काम को लेकर अक्सर चर्चामे रहते है.
आज हम आईएएस रुक्मिणी रियार की सफलता के बारे में कुछ बाते करने जा रहे है जिसे जानकर आपको भी जरुर हैरानी होगी वास्तव में रुक्मिणी रियार चंडीगढ़ की रहने वाली हैं जबकि उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार होशियारपुर के रिटायर्ड डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं वही उनकी माँ एक गृहिणी है. बता दे की रुक्मिणी रियार बचपन में कुछ खास पढ़ाई में होशियार नहीं थीं जबकि उनकी यह बात को लेकर उनके माता-पिता बेहद चिंतित रहने लगे थे कहा जाता है की आईएएस रुक्मिणी रियार की शुरुआती पढ़ाई गुरदासपुर से हुई थी जहा उनका मन पढ़ाई-लिखाई में खास रहता नहीं था. ऐसे में रुक्मिणी छःवीं क्लास में एकबार फेल भी हो गई थीं जबकि उनकी यह असफलता से मातापिता ही नहीं बल्कि वह खुद काफी परेशान रहने लगी थीं. असफलता का सामना करते करते उन्होंने ठान लिया कि वह होनहार बनकर दिखाएंगी जिमसे उन्होंने पढाई पर ध्यान दिया और कक्षा बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद अमृतसर की यूनिवर्सिटी से सोशल साइंस में ग्रेजुएशन किया. वहा से आगे साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की और आखिर में उन्होंने गोल्ड मेडलिस्ट भी प्राप्त किया. कहा जाता है की इस सफलता के बाद वह मुंबई में अन्नपूर्णा महिला मंडल जैसे एनजीओ के साथ इंटर्नशिप की इस दौरान वह सिविल सर्विसेज की ओर आकर्षित हुईं और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का विचार किया. रुक्मिणी रियार ने कहा की वह जानती थी उनके लिए यह परीक्षा पास करना मुश्केल है लेकिन हार मानी नहीं और छठी से बारहवीं कक्षा तक की एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई शुरू की आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी सीएसई दो हज़ार ग्यारह परीक्षा में वह दूसरे स्थान पर आ गई. आपको बता दे की आईएएस रुक्मिणी रियार फिलहाल श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर के पद पर तैनात हैं उन्होंने हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले आईएएस सिद्धार्थ सिहाग से शादी की है जबकि वह अपने काम को लेकर अक्सर चर्चामे रहते है.
इंग्लैंड के ओपनर बल्लेबाज और दिग्गज कप्तान एलिस्टर कुक भी इस लिस्ट में नजर आ रहे हैं. वैसे तो एलिस्टर कुक अपनी जबरदस्त बल्लेबाजी के लिए जाने जाते है मगर उनके नाम भी एक विकेट अन्तराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में है. एलिस्टर कुक का ये विकेट भी किसी और टीम के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के खिलाफ ही आया था. एलिस्टर कुक ने भारतीय टीम के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा का विकेट 2014 में लिया था. एलिस्टर कुक इंग्लैंड के सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज है. अपनी शानदार बल्लेबाजी के कारण ही इन्हें अब सर एलिस्टर कुक के नाम से पहचाना जाता है.
इंग्लैंड के ओपनर बल्लेबाज और दिग्गज कप्तान एलिस्टर कुक भी इस लिस्ट में नजर आ रहे हैं. वैसे तो एलिस्टर कुक अपनी जबरदस्त बल्लेबाजी के लिए जाने जाते है मगर उनके नाम भी एक विकेट अन्तराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में है. एलिस्टर कुक का ये विकेट भी किसी और टीम के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के खिलाफ ही आया था. एलिस्टर कुक ने भारतीय टीम के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा का विकेट दो हज़ार चौदह में लिया था. एलिस्टर कुक इंग्लैंड के सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज है. अपनी शानदार बल्लेबाजी के कारण ही इन्हें अब सर एलिस्टर कुक के नाम से पहचाना जाता है.
परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की और क्षत्रियों को चुन-चुन कर मार डाला, इस बात का प्रमाण शास्त्रों से प्राप्त है। किंतु मरे हुए सभी क्षत्रिय राक्षस बने ऐसा किस शास्त्र के आधार पर कहा गया है, यह बताने की कृपा क्या भाटजी करेंगे ? फिर, आगे वे बताते हैं*सभी ऋषि मिलकर कैलाश पर महादेवजी के पास गए। उस समय स्वयं शिवजी अजपाजाप व्रत लेकर समाधि में लीन थे । अतः माता अंबिका ने उनके आगमन का प्रयोजन पूछा। ऋषियों ने दानवों की ओर से दिये जाने वाले दारुण दुःख की बात बताई और उसके साथ साथ बावन ऋषियों ने रक्षा की प्रार्थना की । जब जब दानवों की ओर से देवों या ऋषि-मुनियों को पीडा दी जाती थी तब-तब वे शंकरादि देवों को प्रार्थना करते थे और अपने कष्ट को किसी भी प्रकार से दूर करने की विनती करते थे । फिर भी इस बार उन सब में से केवल बावन लोगों ने ही पनाह मांगी, ऐसा बताने में कोई विशेष प्रयोजन होना चाहिए जो कि स्पष्ट नहीं होता ? बावन शाखों के बावन पुतलों की कल्पना करना अनुकूल हो, अतः भाटजी ने बावन ऋषियों से ही पनाह मंगवाई हो ऐसा लगता है। ऐसा न हो तो सभी ऋषियों ने रक्षण की याचना कयों न की ? इस प्रकार शब्द-शब्द पर शंका उपस्थित हो ऐसी बेतुकी कल्पना को आगे बढ़ाते हुए भाटजी कहते हैंमाता अंबिका ने बावन ऋषियों को भस्म लेकर पुतले बनाने का आदेश दिया। बावन जनों ने बावन पुतले बनाए । फिर माता ने स्पर्श कर के उन्हें जीवित किया अतः वे 'करडवा' कहलाए । देवी ने उनके हाथों द्वारा ऋषियों का कष्ट दूर करा कर उन्हे अभय प्रदान कराया । दानवों को नष्ट कर शिव के यज्ञ की रक्षा करने को देवी ने पुतले बनवाए । चण्ड, मुण्ड तथा महिषासुरादि अनगिनत दानवों का संहार करने वाली देवी ने ऋषि-मुनियों के ऐसे कष्ट कई बार दूर किए, फिर पुतले बनवाने की उन्हें कभी आवश्यकता नहीं पडी। और केवल इसी घटना पर ही उत्पन्न हुए दानवों को नष्ट करने हेतु उन्हें पुतलों की सहायता लेनी पडी यह कल्पना ही बचकाना प्रतीत होती है। महाप्रलयकाल में काली स्वरूप में लीला कर के समस्त ब्रह्माण्ड को हिला देने वाली देवी क्या क्या नहीं कर सकती थी कि जिन्हें पुतले बनवाने की बाल सदृश चेष्टा करनी पडी ? तुम्हारी उत्पत्ति देवों से हुई है तथा तुम्हारे पूर्वज देवी के सहायक अंग बनकर काम कर चुके हैं. ऐसी चिकनी-चुपडी बातों से प्रसन्न करके सीधे-सादे लोगों द्वारा अपनी मुरादें पूरी कराने के लिये ऐसी कल्पना की गई होगी • ऐसा ही लगता है। वास्तविकता से अधिक बताना या मन चाही कल्पना कर के लोगों को बताना भाटों का एक प्रकार से स्वभाव ही है, ऐसा कई दृष्टांतों से समझा जा सकता है।. हाँ, केवल बावन पुतलों की कल्पना के लिए कहा जा सकता है Page 34 of 530 कि वह किसी युग में उत्पन्न कणबी की बावन शाखाओं को इस पौराणिक तथ्य से जोड देने के लिये ही गढी गई होगी। ऐसा निम्न तथ्य से और अधिक स्पष्ट हो सकता हैमस्तिष्क पर कर (हाथ) रखने पर जीवित होने से करडवां' कहलाए । जिस ऋषि के पुतले से जो वंश हुआ वह ऋषि उस वंश के गोत्रदेव कहलाए और इस प्रकार बावन ऋषि बावन शाखाओं के करडवा' कहलाए । धन्य है, भाटजी ! हद कर दी !! इस सिद्धांत को रचते-रचते आपके पूर्वजों की तमाम कल्पनाशक्ति खत्म हो जानी चाहिए । कडवाओं के जो बावन परिवार उत्तर हिन्दुस्तानके अलग-अलग हिस्सों से आकर गुजरात में बसे हैं, उन्हें उनके असली गांवों से (जैसे कि आज वीरमगामी, अमदावादी, वाडज, लांघणजा, देत्रोजा आदि संज्ञाएं) बावन शाखाओंकी संज्ञाएं मिली हैं, वो इन गांवों के नाम पर से मिली शाखाओं की संज्ञाओं को भाटजी ऋषियों के नामों के साथ किस प्रकार जोड देते हैं, यही समझना मुश्किल है । किस-किस ऋषि के नाम पर से वर्तमान कौन-कौन सी शाखा हुई है यह शाखाओं के नाम पर से स्पष्ट नहीं होता, अपितु उल्टे इस से तो अमुक शाखा के कणबी अमुक गांव से आए हुए होंगे, यही सिद्ध होता है। फिर भी स्वयं भाटजी यदि उन-उन बावन शाखाओं के नामों का ऋषियों के नामों से कैसा सम्बन्ध है, यह बात स्पष्ट करके समझाएंगे तो हमारे ज्ञान पर नया प्रकाश पडेगा तथा उनका अनुग्रह होगा। फिर, उन्होंने कणबी' शब्द का शुद्ध स्वरूप भी उनकी नवीन व्युत्पत्ति अनुसार ठीक उत्पन्न किया हुआ लगता है। आगे भी एक ऐसी ही कल्पना की है"माता के वरप्राप्त करडवाओं ने दानव कालभद को मारा तथा ऋषियों की रक्षा की, अतः ऋषियों ने उन्हे धोती, पोथी, जनेऊ, खट्-कर्म तथा तलवार दिए। इन को ले कर सबने फिर बंधावती नगरी बसाई और चारों दिशाओं में अधिकार स्थापित किया । कुछ समय पश्चात् श्रीरामचंदजी बनवास को निकले तथा दक्षिण में पंचवटी में आए । सीता को वहां रखकर बंधावती से करडवाओं को बुलाकर आदेश दिया कि मेरे लौटने तक सीताजी की रक्षा करना । यह बंधावती कहाँ आयी और उसका मूल नाम क्या था यह कहीं भी स्पष्ट निर्दिष्ट नहीं होता । फिर श्री रामचंद्रजी के वनवास काल में करडवा थे, इसका सिवा भाटों की किंवदन्ती के और कोई आधार नहीं है। यदि यह बात सत्य भी हो, तो उसका आधार होना संभव नहीं लगता, क्योंकि वनवास में नदी पार करानेवाले गुह भील तथा सभी वानरों तक का वर्णन रामायण में है, जब कि सीताजी की रक्षा जैसा Page 35 of 530 महत्त्वपूर्ण काम करनेवाले करडवा का नामो-निशान तक इतने विशाल ग्रंथ में कही मिलता नहीं है, इसका क्या कारण होगा ? कोई भी कारण होगा। शायद महात्मा वाल्मीकिजी या फिर तुलसीदासजी के साथ करडवाओं को कोई पूर्व का बैर हो ? लेकिन यह सत्य है कि रामायण में उनके नाम-ठौर या उनकी ऐसी उमदा चाकरी का कतई निर्देश नहीं है । फिर, रामायण के युग में कणबी आदि अलग-अलग समाजमें भाग पडे हो यह क्या संभव है ? क्या फिर हिन्दुस्तान में पडे जातिभेद में चार आधुनिक न होकर पौराणिक हैं ? यह बात ही असत्य है, क्यों कि उस युग ही वर्ण थे । फिर भी कडवा कुलदीपक किसी जातिबन्धु के नाम या उसके यश को सम्हाले रखने का आडंबर करनेवाले भाटजी यदि हक बताकर रामायण में ऐसा उल्लेख होने की कामना रखते हैं, तो ऐसे मनोरथों की हवाई इमारत आधारहीन है, इसका भी उन्हें खयाल रखना चाहिए । पंचवटी में सीताजी की चौकी करने करडवा रहे होंगे-यह न मानने योग्य बात है, क्यों कि जब रघुनाथजी कपटी मृग को मारने गए थे, तो सीताजी की रक्षा हेतु पर्णकुटी पर केवल लक्ष्मणजी ही थे और उनके अलावा वहां और कोई नहीं था - यह विश्वप्रसिद्ध बात है । अब, आगे देखेंगे कि एक असत्य को सत्य बताने में कितने असत्यों की कल्पना की गई हैं । * ऐसे में कैलास में माता अंबिका ने यज्ञ आरंभ किया। बंधावती से अपने पुत्र करडवाओं को बुलाया । किंतु वे तो सीताजी की रक्षा में पंचवटी में थे, अतः वे गए नहीं । माता अंबिका का यज्ञ अपूर्ण रहा । अतः वे करडवाओं पर क्रोधित हुई तथा शाप दिया कि जाइए, तुम्हारे ब्याह बारह साल पर होगे, और बारह साल तक सूखा पडेगा । माता अंबिकाने भले ही यज्ञ किया, परंतु करडवाओं पर क्रुद्ध क्यों हुई ? अपनी इच्छा मात्र से भूत, भविष्य व वर्तमान को जान लेने वाली देवी अंबिका सीताजी की रक्षा में रुके करडवाओं के धार्मिक कार्य को न जान कर, जैसा कि भाटजी कहते हैं, उन्हें शाप दे दें, ऐसा कथा में किंचित् मात्र सत्यांश नजर नहीं आता; वरन् बारह साल के सूखे पर लटके ब्याहों द्वारा बारह वर्ष की रस्म की उत्पत्ति दिखाने के लिये यह कोरी कल्पना की गई होगी-ऐसा प्रतीत होता है । भाटजी को ऐसी मनगढंत कल्पना करने से पहले इतना तो सोच लेना था, कि कसूर तो सिर्फ करडवाओं का ही था; सारी सृष्टि का तो न था, फिर भी करडवाओं के दोष के लिये बारह साल तक अनावृष्टि और सूखे का अभिशाप देते समय देवी ने अन्य प्राणियों का तनिक भी खयाल नहीं किया होगा ? पारमार्थिक कार्य करते हुए भी देव गुस्सा हो तथा वह Page 36 of 530 भी अपने निजी स्वार्थ के लिए ही ! इसमें कौन-सा दैवत्व निहित है ? मूर्ख राज्यशासन में पाडे की सजा भिश्ती को भुगतनी पडे यह आम बात है, वहीं देवों का प्रशासन भी ऐसा मूर्खतापूर्ण ही होगा कि करडवाओं के किये पर सारी सृष्टि को कष्ट में डाल दे ? पता नहीं ऐसी कल्पना के पीछे क्या प्रयोजन होगा ?. तो साधारण बुद्धिवालों को भी कहीं कदाचित् ही प्राप्त होगा । करडवाओं के गोर नहीं थे, अतः लौटने पर रामजी ने पंचवटी में नागर तथा औदिच्य व बारोट (भाट) नियुक्त कर दिए । इस त्रिपुटी की स्वार्थपरायणता के बारे में आगे विस्तृत वर्णन करेंगे। फिर भी इस असत्य के साथ-साथ उनकी कथा में कुछ सत्य का भी अंश निहित लगता है, अतः जहां तक उन्होंने सत्य को बनाये रखा है वहां तक के लिए वे धन्यवाद के अधिकारी हैं। उनकी कथाओं के साथ-साथ कहे गए देसाई पटेलों के साख कावर, गोत्र भारद्वाज, त्रि प्रवर, शाखा माध्यायनि, यजुर्वेद, कुलदेवी अंबिका, कावर की चामुण्डा देवी की पूजा तथा शहर कुशावती नगरी आदि प्राचीन बातें इतिहास के साथ मिलती हैं। इतने सत्य भी हमें यह पुस्तक तैयार करने में सहायक हुए हैं, इस के लिए हम उनके आभारी रहेंगे। देसाई पटेलों के भाटों ने उत्पत्ति के बारे में ऊपर कही बातें गढ दी हैं, और अन्य पुश्तनामियों ने इस बारे में भिन्न विषय-वस्तु दर्शाई हैं; फिर भी उपर्युक्त कथा में जो असत्य वर्णित है, इसमें उन्होंने कोई भी त्रुटि रखी नहीं है यह निम्न समालोचना से स्पष्ट मालूम पड जायगा । अन्य पुश्तनामियों द्वारा कही उत्पत्ति की कथा "एक बार त्रेता युग में भगवान शंकर देवी उमा के साथ पतितपावनी वाराणसी नगरी की ओर प्रयाण कर रहे थे । रास्ते में उंझिया राक्षस का विकट वन आया । देवी को प्यास लगी थी, अतः शंकरजी उन्हें उस वन में अकेला छोड़कर पानी की तलाश में निकले । वहाँ उन्हे ऋषियों को भी तप करने का मोह उत्पन्न हो जाय ऐसा पवित्र व सात्त्विक गुणों से युक्त सरस्वती का रमणीय तट दिखाई दिया, जिससे शंकरजी को वहां समाधि लगाने की इच्छा हो आयी । अतः वे आसन लगाकर वहीं बारह वर्ष के लिये समाधि में बैठ गए । इस प्रकार अपनी पटरानी को विकट वन में तृषातुर छोडकर तप करने बैठ जाना, ऐसी शंकरजी की लापरवाही का चित्रण करते समय भाटों ने केवल तत्कालीन समय को ही ध्यान में रखा होगा। उन्होंने इतना तनिक भी सोचा नहीं लगता कि अंधकार (अंधविश्वास) का युग बदलने के बाद आगे ज्ञान का युग आने पर ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें मानी नहीं जाएगी। केवल उस काल के जनस्वभाव के अनुसार चित्रण करके उन्होंने देवी-देवताओं की खिल्ली उडाई है। आगे कहा गया है Page 37 of 530 "शंकरजी की प्रतीक्षा करते-करते थकी हुई देवी पानी की तलाश में दूधिया कुए पर आई । पानी पिया और पति को ढूंढते हुए सरस्वती नदी के तट पर आई। वहां सुंदर मिट्टी देखकर खेल हेतु १०५ पुतले बनाए । श्रीकृष्णजी ने नारदजी को भेजकर कहलाया, 'आप सृष्टि रचें, ब्रह्माजी जीव रखेंगे। आप के बनाए पुतले अब टूटेंगे नहीं । उत्पत्ति का समय भाट भी त्रेतायुग बताते हैं, यह कितनी आधारहीन बात है - यह हमने पिछले प्रकरणों में सविस्तार देखा है। श्री कृष्ण ने नारद द्वारा संदेश भिजवाया, ऐसा वर्णन है; किंतु त्रेतायुग में भगवान श्रीकृष्ण थे ही कहाँ ? वे तो द्वापरयुग के प्रारम्भ में थे। यहां भी देवी द्वारा मिट्टी के पुतलों से उत्पत्ति कराई है, और ऐसा प्रकृति के नियम के विरुद्ध सोचने पर बार बार टिप्पणी करना उचित नहीं लगता । आगे भाटजी बतातें हैं - *देवी को पुतले बनाकर सृष्टि-सृजन करने का संदेश देकर नारदजी भगवान शंकर के पास गए जहां वे तपस्या कर रहे थे, और कहा कि प्रभु ! आपकी अनुपस्थिति में देवी उमा ने १०५ बच्चे पैदा किए हैं। यह सुनकर शंकरजी कुपित हुए; किंतु उमा के पास आने पर मिट्टी के पुतलों को देखकर शांत हुए i हीनता की परिसीमा तक पहुंची ऐसी बातें नारद जैसे परम भक्त, शंकर भगवान के पास जाकर कहें, यह कैसे माना जा सकता है ? भाटों ने एसी बातें अपनी पोथी में लिखकर भक्त नारदजी तथा सर्वज्ञ भगवान शंकर की सर्वज्ञता की तथा महादेवी उमा के सतीत्व की बराबर खिल्ल उडाई है, जो किसी भी प्रकार सहन करने योग्य नहीं है। हमारे देवी-देवताओं के लिए इतना अनर्थकारी आक्षेप करते समय उन्होंने एक अबोध बालक के जितना भी सोचने का कष्ट नहीं किया है और अमर्यादित बक दिया है। इस प्रकार देव से उत्पत्ति दर्शाने में शायद मूल कल्पना का हेतु अपने जीवन के आधार स्वरूप कर्णाबियों की महत्ता बताने का ही होगा, परंतु उसमें मानवीय कार्पण्य का निरुपण देवों में कर के क्षणिक हास्य व घृणा उत्पन्न करने के अतिरिक्त उन्होंने और कुछ किया हो ऐसा नहीं लगता। फिर, अपनी व अपने सहायक ब्राह्मणों की भी साथ ही साथ श्रेष्ठता दर्शाने के लिये ऐसी थोथी बातें गढ दी गयी हैं । यह भी जरा विचारणीय है । पुतलों को जीवित करने तथा उनका ब्याह रचाने के लिये देवी ने शंकर से विनती की। शंकरजी ने अपने भव्य ललाट में से नागर व औदिच्य गोर तथा भाटों को उत्पन्न किया । Page 38 of 530 अजीब है ! भाटजी ने अपने तथा ब्राह्मणों के लाभ को देखने में अच्छी दूरदर्शिता रखी है, किंतु वैसा करते हुए उनको यह खयाल नहीं रहा कि त्रेतायुग में जैसा कि आज हम देखते हैं, ब्राह्मणों की भिन्न-भिन्न ८४ जातियाँ न थी । समस्त ब्राह्मणों का एक ही वर्ण था । फिर भी पुश्तनामियों ने उस युग में शंकर के ललाट में से नागर तथा औदिच्य की उत्पत्ति दर्शाकर अपनी बात की असत्यता में और भी बढावा किया है । नागरों की उत्पत्ति का "नागर खण्ड" नामक ग्रंथ उनकी इस प्रकार की उत्पत्तिकी कथा से बिलकुल भिन्न कहता है । अर्थात् नागर ब्राह्मण कणबियों का ब्याह रचाने के पारमार्थिक कार्य के लिये भगवान शंकर के ललाट में से कूद पडे होंगे, ऐसी बात का उसमें लेश मात्र निर्देश नहीं किया गया है। उसी प्रकार सन् ९८० ईसवी में लगभग गुजरात के राजा मूलराज सोलंकी ने राज्यलोभ से मातृपक्ष की की हुई हत्याओं के प्रायश्चित-स्वरूप औदिच्यों को उत्तर में से बुलाकर श्रीस्थली (सिद्धपुर) में बसाया था, जो इतिहास - प्रसिद्ध तथ्य है । अतः अब नागरों तथा औदिच्यों की उत्पत्ति का कर्णाबियों की उत्पत्ति तथा त्रेतायुग के साथ किंचित् मात्र संबंध नहीं हो सकता । इतना ही नहीं, बल्कि, नागरों तथा औदिच्यों की उत्पत्ति की यह बात बिलकुल गलत सिद्ध होती है। फिर, ब्राह्मणों के साथ शंकरजी के भव्य ललाट में से भाटों के उत्पन्न होने की कल्पना भी झूठी है- ऐसा बुद्धिमान लोग सहज ही समझ जाएंगे। आगे भाटजी ने कहा है "नागर गोर ने अपने मुहूर्त के अनुसार कुछ जोडों का ब्याह किया । किंतु अन्य जोडे वहाँ उपस्थित न थे, अतः उनके आने पर उनका ब्याह करने के लिये शंकरजी ने नागर गोर से अनुरोध किया । तब उस ने कहा, अब वे बारह साल पश्चात् करवाएंगे । उससे मुझे क्या लाभ ?' तो शंकरजी ने कहा, 'कलियुग में जब नागर मिलेंगे नहीं, तो तुम औदिच्यो का सम्मान होगा । तब उसने अपने गुरु मांडव ऋषि के नाम से मांडव रात्रि को बाकी के जोड़ों का ब्याह कराया । धन्य है भाटजी की अक्ल को ! क्या भगवान शंकर की आज्ञा का उल्लंघन करनेवाला नागर गोर उनके प्रताप से अनजाना था ? कभी नहीं । फिर उसने भगवान शंकर की आज्ञा का पालन क्यों नहीं किया ? औदिच्यों ने भी अपनी स्वार्थपूर्ति के लिये अच्छा अवसर साध लिया। फिर, जब नागर गोर को मुहूर्त न मिला, तब क्या स्वार्थ से अंधे हुए औदिच्य गोर ने बनावटी मुहूर्त निकाल कर ब्याह करवाया ? क्या उस युग के ब्राह्मण स्वयं भगवान शंकर के सांनिध्य में भी ऐसे स्वार्थपटु बनकर दूसरों का अहित करने वाले ही थे ?.. इन प्रश्नों के उत्तर कभी भी भाटजी हमें और Page 39 of 530 सुज्ञ पाठकगण को नहीं दे सकेंगे। फिर भी उस नागर तथा औदिच्य गोर वंशजों को देंगे तो भी हम आभारी रहेंगे। ऐसी गप्पों से बेचारे निर्दोष नागरों तथा औदिच्यों की बडाई जताने के पीछे उनकी कडवी बदनामी ही की गई है। फूल की गेंद, बाह्यवर तथा पुनर्लग्न तो कंडवा' निबंध के प्रायोजक की तरह भाटजी ने भी करवाया है, और ऐसी मूर्खतापूर्ण मान्यताओं में तो वे एक दूसरे से कतई कम नहीं हैं। भाटजी ने कथा की योजना करने में इतना भी याद नहीं रखा कि अभी दूधिया कुआ नाम से परिचित कुआ त्रेतायुग से लेकर आज तक एक ही नाम से कैसे मौजूद रहा होगा ? काल के चक्र में परिवर्तित होती श्रीरामचंद्रजी की अयोध्या, रावण की लंका तथा परमात्मा श्रीकृष्ण की द्वारिका जैसी बडी-बडी राजधानियों के मूल स्थल भी निःशंक ढूंढे नहीं जाते, तो त्रेतायुग का दूधिया कुआ कैसे हिमाचल व मेरु पर्वत की तरह अचल रहा होगा, यह जानना कोई कम आश्चर्य नहीं है ! यह तथ्य भाटों के चौपडों में से प्राप्त हुआ है और उन्होंने नागर, औदिच्य तथा भाटों की; जिन के वंशजों की जीविका का आधार लंबे अरसे से कणबियों के हृदय में अपने प्रति सदैव के लिये पूज्य भाव बना रहे इस हेतु से अपनी उत्पत्ति उन के (कणबियों के) हितार्थ शंकर भगवान के भव्य ललाट में से कर दी है। लेकिन ऐसी अस्वाभाविक कल्पना के परिणाम से उनकी तमाम हकीकत मारी जाती है। फिर, उन्होंने कुदरती क्रम से विपरीत ऐसा पुतलों में से ही उत्पत्ति का आधार लिया है और उसके साथ अति आश्चर्यजनकरूप-उत्पत्ति के प्रायोजक ने ब्याह की रस्म को भी जोड दिया है। इससे सहज ही ऐसा मालूम पडता है कि इस प्रकार वर्णित उत्पत्ति और लग्नपद्धति दोनों बातें सिर्फ बालोचित कल्पना ही है, जिसे सिद्ध करने के लिये देवी-देवताओं के नामों का भी उस युग में बराबर उपयोग किया गया है किंतु उन की इस प्रकार की बातों का कोई ठोस आधार व बुद्धिगम्य प्रमाण न होने से, एक निराधार वस्तु को दूसरी निराधार चीज के आधार पर रखने से जिस तरह दोनों शीघ्र ही गिर पडती हैं, उसी प्रकार ये दोनों बातें सहज ही असंभव सिद्ध हो जाती हैं। और उससे उसके प्रायोजक का प्रयास विफल होने के उपरांत उनके लिये सुज्ञ लोगों में अधिकाधिक तिरस्कार का भाव पैदा होना स्वाभाविक ही है । उपर्युक्त किंवदंतियों के अतिरिक्त हमारी उत्पत्ति के बारे में "बाह्मणोत्पत्ति मार्तण्ड के कर्ताने भी अकारण एक गप्प हांकी है । उसका भी इस स्थान पर अवलोकन करना आवश्यक लगता है । तब स्वतः ही असत्य पराजित होकर सत्य सामने आ जायेगा । Page 40 of 530
परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की और क्षत्रियों को चुन-चुन कर मार डाला, इस बात का प्रमाण शास्त्रों से प्राप्त है। किंतु मरे हुए सभी क्षत्रिय राक्षस बने ऐसा किस शास्त्र के आधार पर कहा गया है, यह बताने की कृपा क्या भाटजी करेंगे ? फिर, आगे वे बताते हैं*सभी ऋषि मिलकर कैलाश पर महादेवजी के पास गए। उस समय स्वयं शिवजी अजपाजाप व्रत लेकर समाधि में लीन थे । अतः माता अंबिका ने उनके आगमन का प्रयोजन पूछा। ऋषियों ने दानवों की ओर से दिये जाने वाले दारुण दुःख की बात बताई और उसके साथ साथ बावन ऋषियों ने रक्षा की प्रार्थना की । जब जब दानवों की ओर से देवों या ऋषि-मुनियों को पीडा दी जाती थी तब-तब वे शंकरादि देवों को प्रार्थना करते थे और अपने कष्ट को किसी भी प्रकार से दूर करने की विनती करते थे । फिर भी इस बार उन सब में से केवल बावन लोगों ने ही पनाह मांगी, ऐसा बताने में कोई विशेष प्रयोजन होना चाहिए जो कि स्पष्ट नहीं होता ? बावन शाखों के बावन पुतलों की कल्पना करना अनुकूल हो, अतः भाटजी ने बावन ऋषियों से ही पनाह मंगवाई हो ऐसा लगता है। ऐसा न हो तो सभी ऋषियों ने रक्षण की याचना कयों न की ? इस प्रकार शब्द-शब्द पर शंका उपस्थित हो ऐसी बेतुकी कल्पना को आगे बढ़ाते हुए भाटजी कहते हैंमाता अंबिका ने बावन ऋषियों को भस्म लेकर पुतले बनाने का आदेश दिया। बावन जनों ने बावन पुतले बनाए । फिर माता ने स्पर्श कर के उन्हें जीवित किया अतः वे 'करडवा' कहलाए । देवी ने उनके हाथों द्वारा ऋषियों का कष्ट दूर करा कर उन्हे अभय प्रदान कराया । दानवों को नष्ट कर शिव के यज्ञ की रक्षा करने को देवी ने पुतले बनवाए । चण्ड, मुण्ड तथा महिषासुरादि अनगिनत दानवों का संहार करने वाली देवी ने ऋषि-मुनियों के ऐसे कष्ट कई बार दूर किए, फिर पुतले बनवाने की उन्हें कभी आवश्यकता नहीं पडी। और केवल इसी घटना पर ही उत्पन्न हुए दानवों को नष्ट करने हेतु उन्हें पुतलों की सहायता लेनी पडी यह कल्पना ही बचकाना प्रतीत होती है। महाप्रलयकाल में काली स्वरूप में लीला कर के समस्त ब्रह्माण्ड को हिला देने वाली देवी क्या क्या नहीं कर सकती थी कि जिन्हें पुतले बनवाने की बाल सदृश चेष्टा करनी पडी ? तुम्हारी उत्पत्ति देवों से हुई है तथा तुम्हारे पूर्वज देवी के सहायक अंग बनकर काम कर चुके हैं. ऐसी चिकनी-चुपडी बातों से प्रसन्न करके सीधे-सादे लोगों द्वारा अपनी मुरादें पूरी कराने के लिये ऐसी कल्पना की गई होगी • ऐसा ही लगता है। वास्तविकता से अधिक बताना या मन चाही कल्पना कर के लोगों को बताना भाटों का एक प्रकार से स्वभाव ही है, ऐसा कई दृष्टांतों से समझा जा सकता है।. हाँ, केवल बावन पुतलों की कल्पना के लिए कहा जा सकता है Page चौंतीस of पाँच सौ तीस कि वह किसी युग में उत्पन्न कणबी की बावन शाखाओं को इस पौराणिक तथ्य से जोड देने के लिये ही गढी गई होगी। ऐसा निम्न तथ्य से और अधिक स्पष्ट हो सकता हैमस्तिष्क पर कर रखने पर जीवित होने से करडवां' कहलाए । जिस ऋषि के पुतले से जो वंश हुआ वह ऋषि उस वंश के गोत्रदेव कहलाए और इस प्रकार बावन ऋषि बावन शाखाओं के करडवा' कहलाए । धन्य है, भाटजी ! हद कर दी !! इस सिद्धांत को रचते-रचते आपके पूर्वजों की तमाम कल्पनाशक्ति खत्म हो जानी चाहिए । कडवाओं के जो बावन परिवार उत्तर हिन्दुस्तानके अलग-अलग हिस्सों से आकर गुजरात में बसे हैं, उन्हें उनके असली गांवों से बावन शाखाओंकी संज्ञाएं मिली हैं, वो इन गांवों के नाम पर से मिली शाखाओं की संज्ञाओं को भाटजी ऋषियों के नामों के साथ किस प्रकार जोड देते हैं, यही समझना मुश्किल है । किस-किस ऋषि के नाम पर से वर्तमान कौन-कौन सी शाखा हुई है यह शाखाओं के नाम पर से स्पष्ट नहीं होता, अपितु उल्टे इस से तो अमुक शाखा के कणबी अमुक गांव से आए हुए होंगे, यही सिद्ध होता है। फिर भी स्वयं भाटजी यदि उन-उन बावन शाखाओं के नामों का ऋषियों के नामों से कैसा सम्बन्ध है, यह बात स्पष्ट करके समझाएंगे तो हमारे ज्ञान पर नया प्रकाश पडेगा तथा उनका अनुग्रह होगा। फिर, उन्होंने कणबी' शब्द का शुद्ध स्वरूप भी उनकी नवीन व्युत्पत्ति अनुसार ठीक उत्पन्न किया हुआ लगता है। आगे भी एक ऐसी ही कल्पना की है"माता के वरप्राप्त करडवाओं ने दानव कालभद को मारा तथा ऋषियों की रक्षा की, अतः ऋषियों ने उन्हे धोती, पोथी, जनेऊ, खट्-कर्म तथा तलवार दिए। इन को ले कर सबने फिर बंधावती नगरी बसाई और चारों दिशाओं में अधिकार स्थापित किया । कुछ समय पश्चात् श्रीरामचंदजी बनवास को निकले तथा दक्षिण में पंचवटी में आए । सीता को वहां रखकर बंधावती से करडवाओं को बुलाकर आदेश दिया कि मेरे लौटने तक सीताजी की रक्षा करना । यह बंधावती कहाँ आयी और उसका मूल नाम क्या था यह कहीं भी स्पष्ट निर्दिष्ट नहीं होता । फिर श्री रामचंद्रजी के वनवास काल में करडवा थे, इसका सिवा भाटों की किंवदन्ती के और कोई आधार नहीं है। यदि यह बात सत्य भी हो, तो उसका आधार होना संभव नहीं लगता, क्योंकि वनवास में नदी पार करानेवाले गुह भील तथा सभी वानरों तक का वर्णन रामायण में है, जब कि सीताजी की रक्षा जैसा Page पैंतीस of पाँच सौ तीस महत्त्वपूर्ण काम करनेवाले करडवा का नामो-निशान तक इतने विशाल ग्रंथ में कही मिलता नहीं है, इसका क्या कारण होगा ? कोई भी कारण होगा। शायद महात्मा वाल्मीकिजी या फिर तुलसीदासजी के साथ करडवाओं को कोई पूर्व का बैर हो ? लेकिन यह सत्य है कि रामायण में उनके नाम-ठौर या उनकी ऐसी उमदा चाकरी का कतई निर्देश नहीं है । फिर, रामायण के युग में कणबी आदि अलग-अलग समाजमें भाग पडे हो यह क्या संभव है ? क्या फिर हिन्दुस्तान में पडे जातिभेद में चार आधुनिक न होकर पौराणिक हैं ? यह बात ही असत्य है, क्यों कि उस युग ही वर्ण थे । फिर भी कडवा कुलदीपक किसी जातिबन्धु के नाम या उसके यश को सम्हाले रखने का आडंबर करनेवाले भाटजी यदि हक बताकर रामायण में ऐसा उल्लेख होने की कामना रखते हैं, तो ऐसे मनोरथों की हवाई इमारत आधारहीन है, इसका भी उन्हें खयाल रखना चाहिए । पंचवटी में सीताजी की चौकी करने करडवा रहे होंगे-यह न मानने योग्य बात है, क्यों कि जब रघुनाथजी कपटी मृग को मारने गए थे, तो सीताजी की रक्षा हेतु पर्णकुटी पर केवल लक्ष्मणजी ही थे और उनके अलावा वहां और कोई नहीं था - यह विश्वप्रसिद्ध बात है । अब, आगे देखेंगे कि एक असत्य को सत्य बताने में कितने असत्यों की कल्पना की गई हैं । * ऐसे में कैलास में माता अंबिका ने यज्ञ आरंभ किया। बंधावती से अपने पुत्र करडवाओं को बुलाया । किंतु वे तो सीताजी की रक्षा में पंचवटी में थे, अतः वे गए नहीं । माता अंबिका का यज्ञ अपूर्ण रहा । अतः वे करडवाओं पर क्रोधित हुई तथा शाप दिया कि जाइए, तुम्हारे ब्याह बारह साल पर होगे, और बारह साल तक सूखा पडेगा । माता अंबिकाने भले ही यज्ञ किया, परंतु करडवाओं पर क्रुद्ध क्यों हुई ? अपनी इच्छा मात्र से भूत, भविष्य व वर्तमान को जान लेने वाली देवी अंबिका सीताजी की रक्षा में रुके करडवाओं के धार्मिक कार्य को न जान कर, जैसा कि भाटजी कहते हैं, उन्हें शाप दे दें, ऐसा कथा में किंचित् मात्र सत्यांश नजर नहीं आता; वरन् बारह साल के सूखे पर लटके ब्याहों द्वारा बारह वर्ष की रस्म की उत्पत्ति दिखाने के लिये यह कोरी कल्पना की गई होगी-ऐसा प्रतीत होता है । भाटजी को ऐसी मनगढंत कल्पना करने से पहले इतना तो सोच लेना था, कि कसूर तो सिर्फ करडवाओं का ही था; सारी सृष्टि का तो न था, फिर भी करडवाओं के दोष के लिये बारह साल तक अनावृष्टि और सूखे का अभिशाप देते समय देवी ने अन्य प्राणियों का तनिक भी खयाल नहीं किया होगा ? पारमार्थिक कार्य करते हुए भी देव गुस्सा हो तथा वह Page छत्तीस of पाँच सौ तीस भी अपने निजी स्वार्थ के लिए ही ! इसमें कौन-सा दैवत्व निहित है ? मूर्ख राज्यशासन में पाडे की सजा भिश्ती को भुगतनी पडे यह आम बात है, वहीं देवों का प्रशासन भी ऐसा मूर्खतापूर्ण ही होगा कि करडवाओं के किये पर सारी सृष्टि को कष्ट में डाल दे ? पता नहीं ऐसी कल्पना के पीछे क्या प्रयोजन होगा ?. तो साधारण बुद्धिवालों को भी कहीं कदाचित् ही प्राप्त होगा । करडवाओं के गोर नहीं थे, अतः लौटने पर रामजी ने पंचवटी में नागर तथा औदिच्य व बारोट नियुक्त कर दिए । इस त्रिपुटी की स्वार्थपरायणता के बारे में आगे विस्तृत वर्णन करेंगे। फिर भी इस असत्य के साथ-साथ उनकी कथा में कुछ सत्य का भी अंश निहित लगता है, अतः जहां तक उन्होंने सत्य को बनाये रखा है वहां तक के लिए वे धन्यवाद के अधिकारी हैं। उनकी कथाओं के साथ-साथ कहे गए देसाई पटेलों के साख कावर, गोत्र भारद्वाज, त्रि प्रवर, शाखा माध्यायनि, यजुर्वेद, कुलदेवी अंबिका, कावर की चामुण्डा देवी की पूजा तथा शहर कुशावती नगरी आदि प्राचीन बातें इतिहास के साथ मिलती हैं। इतने सत्य भी हमें यह पुस्तक तैयार करने में सहायक हुए हैं, इस के लिए हम उनके आभारी रहेंगे। देसाई पटेलों के भाटों ने उत्पत्ति के बारे में ऊपर कही बातें गढ दी हैं, और अन्य पुश्तनामियों ने इस बारे में भिन्न विषय-वस्तु दर्शाई हैं; फिर भी उपर्युक्त कथा में जो असत्य वर्णित है, इसमें उन्होंने कोई भी त्रुटि रखी नहीं है यह निम्न समालोचना से स्पष्ट मालूम पड जायगा । अन्य पुश्तनामियों द्वारा कही उत्पत्ति की कथा "एक बार त्रेता युग में भगवान शंकर देवी उमा के साथ पतितपावनी वाराणसी नगरी की ओर प्रयाण कर रहे थे । रास्ते में उंझिया राक्षस का विकट वन आया । देवी को प्यास लगी थी, अतः शंकरजी उन्हें उस वन में अकेला छोड़कर पानी की तलाश में निकले । वहाँ उन्हे ऋषियों को भी तप करने का मोह उत्पन्न हो जाय ऐसा पवित्र व सात्त्विक गुणों से युक्त सरस्वती का रमणीय तट दिखाई दिया, जिससे शंकरजी को वहां समाधि लगाने की इच्छा हो आयी । अतः वे आसन लगाकर वहीं बारह वर्ष के लिये समाधि में बैठ गए । इस प्रकार अपनी पटरानी को विकट वन में तृषातुर छोडकर तप करने बैठ जाना, ऐसी शंकरजी की लापरवाही का चित्रण करते समय भाटों ने केवल तत्कालीन समय को ही ध्यान में रखा होगा। उन्होंने इतना तनिक भी सोचा नहीं लगता कि अंधकार का युग बदलने के बाद आगे ज्ञान का युग आने पर ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें मानी नहीं जाएगी। केवल उस काल के जनस्वभाव के अनुसार चित्रण करके उन्होंने देवी-देवताओं की खिल्ली उडाई है। आगे कहा गया है Page सैंतीस of पाँच सौ तीस "शंकरजी की प्रतीक्षा करते-करते थकी हुई देवी पानी की तलाश में दूधिया कुए पर आई । पानी पिया और पति को ढूंढते हुए सरस्वती नदी के तट पर आई। वहां सुंदर मिट्टी देखकर खेल हेतु एक सौ पाँच पुतले बनाए । श्रीकृष्णजी ने नारदजी को भेजकर कहलाया, 'आप सृष्टि रचें, ब्रह्माजी जीव रखेंगे। आप के बनाए पुतले अब टूटेंगे नहीं । उत्पत्ति का समय भाट भी त्रेतायुग बताते हैं, यह कितनी आधारहीन बात है - यह हमने पिछले प्रकरणों में सविस्तार देखा है। श्री कृष्ण ने नारद द्वारा संदेश भिजवाया, ऐसा वर्णन है; किंतु त्रेतायुग में भगवान श्रीकृष्ण थे ही कहाँ ? वे तो द्वापरयुग के प्रारम्भ में थे। यहां भी देवी द्वारा मिट्टी के पुतलों से उत्पत्ति कराई है, और ऐसा प्रकृति के नियम के विरुद्ध सोचने पर बार बार टिप्पणी करना उचित नहीं लगता । आगे भाटजी बतातें हैं - *देवी को पुतले बनाकर सृष्टि-सृजन करने का संदेश देकर नारदजी भगवान शंकर के पास गए जहां वे तपस्या कर रहे थे, और कहा कि प्रभु ! आपकी अनुपस्थिति में देवी उमा ने एक सौ पाँच बच्चे पैदा किए हैं। यह सुनकर शंकरजी कुपित हुए; किंतु उमा के पास आने पर मिट्टी के पुतलों को देखकर शांत हुए i हीनता की परिसीमा तक पहुंची ऐसी बातें नारद जैसे परम भक्त, शंकर भगवान के पास जाकर कहें, यह कैसे माना जा सकता है ? भाटों ने एसी बातें अपनी पोथी में लिखकर भक्त नारदजी तथा सर्वज्ञ भगवान शंकर की सर्वज्ञता की तथा महादेवी उमा के सतीत्व की बराबर खिल्ल उडाई है, जो किसी भी प्रकार सहन करने योग्य नहीं है। हमारे देवी-देवताओं के लिए इतना अनर्थकारी आक्षेप करते समय उन्होंने एक अबोध बालक के जितना भी सोचने का कष्ट नहीं किया है और अमर्यादित बक दिया है। इस प्रकार देव से उत्पत्ति दर्शाने में शायद मूल कल्पना का हेतु अपने जीवन के आधार स्वरूप कर्णाबियों की महत्ता बताने का ही होगा, परंतु उसमें मानवीय कार्पण्य का निरुपण देवों में कर के क्षणिक हास्य व घृणा उत्पन्न करने के अतिरिक्त उन्होंने और कुछ किया हो ऐसा नहीं लगता। फिर, अपनी व अपने सहायक ब्राह्मणों की भी साथ ही साथ श्रेष्ठता दर्शाने के लिये ऐसी थोथी बातें गढ दी गयी हैं । यह भी जरा विचारणीय है । पुतलों को जीवित करने तथा उनका ब्याह रचाने के लिये देवी ने शंकर से विनती की। शंकरजी ने अपने भव्य ललाट में से नागर व औदिच्य गोर तथा भाटों को उत्पन्न किया । Page अड़तीस of पाँच सौ तीस अजीब है ! भाटजी ने अपने तथा ब्राह्मणों के लाभ को देखने में अच्छी दूरदर्शिता रखी है, किंतु वैसा करते हुए उनको यह खयाल नहीं रहा कि त्रेतायुग में जैसा कि आज हम देखते हैं, ब्राह्मणों की भिन्न-भिन्न चौरासी जातियाँ न थी । समस्त ब्राह्मणों का एक ही वर्ण था । फिर भी पुश्तनामियों ने उस युग में शंकर के ललाट में से नागर तथा औदिच्य की उत्पत्ति दर्शाकर अपनी बात की असत्यता में और भी बढावा किया है । नागरों की उत्पत्ति का "नागर खण्ड" नामक ग्रंथ उनकी इस प्रकार की उत्पत्तिकी कथा से बिलकुल भिन्न कहता है । अर्थात् नागर ब्राह्मण कणबियों का ब्याह रचाने के पारमार्थिक कार्य के लिये भगवान शंकर के ललाट में से कूद पडे होंगे, ऐसी बात का उसमें लेश मात्र निर्देश नहीं किया गया है। उसी प्रकार सन् नौ सौ अस्सी ईसवी में लगभग गुजरात के राजा मूलराज सोलंकी ने राज्यलोभ से मातृपक्ष की की हुई हत्याओं के प्रायश्चित-स्वरूप औदिच्यों को उत्तर में से बुलाकर श्रीस्थली में बसाया था, जो इतिहास - प्रसिद्ध तथ्य है । अतः अब नागरों तथा औदिच्यों की उत्पत्ति का कर्णाबियों की उत्पत्ति तथा त्रेतायुग के साथ किंचित् मात्र संबंध नहीं हो सकता । इतना ही नहीं, बल्कि, नागरों तथा औदिच्यों की उत्पत्ति की यह बात बिलकुल गलत सिद्ध होती है। फिर, ब्राह्मणों के साथ शंकरजी के भव्य ललाट में से भाटों के उत्पन्न होने की कल्पना भी झूठी है- ऐसा बुद्धिमान लोग सहज ही समझ जाएंगे। आगे भाटजी ने कहा है "नागर गोर ने अपने मुहूर्त के अनुसार कुछ जोडों का ब्याह किया । किंतु अन्य जोडे वहाँ उपस्थित न थे, अतः उनके आने पर उनका ब्याह करने के लिये शंकरजी ने नागर गोर से अनुरोध किया । तब उस ने कहा, अब वे बारह साल पश्चात् करवाएंगे । उससे मुझे क्या लाभ ?' तो शंकरजी ने कहा, 'कलियुग में जब नागर मिलेंगे नहीं, तो तुम औदिच्यो का सम्मान होगा । तब उसने अपने गुरु मांडव ऋषि के नाम से मांडव रात्रि को बाकी के जोड़ों का ब्याह कराया । धन्य है भाटजी की अक्ल को ! क्या भगवान शंकर की आज्ञा का उल्लंघन करनेवाला नागर गोर उनके प्रताप से अनजाना था ? कभी नहीं । फिर उसने भगवान शंकर की आज्ञा का पालन क्यों नहीं किया ? औदिच्यों ने भी अपनी स्वार्थपूर्ति के लिये अच्छा अवसर साध लिया। फिर, जब नागर गोर को मुहूर्त न मिला, तब क्या स्वार्थ से अंधे हुए औदिच्य गोर ने बनावटी मुहूर्त निकाल कर ब्याह करवाया ? क्या उस युग के ब्राह्मण स्वयं भगवान शंकर के सांनिध्य में भी ऐसे स्वार्थपटु बनकर दूसरों का अहित करने वाले ही थे ?.. इन प्रश्नों के उत्तर कभी भी भाटजी हमें और Page उनतालीस of पाँच सौ तीस सुज्ञ पाठकगण को नहीं दे सकेंगे। फिर भी उस नागर तथा औदिच्य गोर वंशजों को देंगे तो भी हम आभारी रहेंगे। ऐसी गप्पों से बेचारे निर्दोष नागरों तथा औदिच्यों की बडाई जताने के पीछे उनकी कडवी बदनामी ही की गई है। फूल की गेंद, बाह्यवर तथा पुनर्लग्न तो कंडवा' निबंध के प्रायोजक की तरह भाटजी ने भी करवाया है, और ऐसी मूर्खतापूर्ण मान्यताओं में तो वे एक दूसरे से कतई कम नहीं हैं। भाटजी ने कथा की योजना करने में इतना भी याद नहीं रखा कि अभी दूधिया कुआ नाम से परिचित कुआ त्रेतायुग से लेकर आज तक एक ही नाम से कैसे मौजूद रहा होगा ? काल के चक्र में परिवर्तित होती श्रीरामचंद्रजी की अयोध्या, रावण की लंका तथा परमात्मा श्रीकृष्ण की द्वारिका जैसी बडी-बडी राजधानियों के मूल स्थल भी निःशंक ढूंढे नहीं जाते, तो त्रेतायुग का दूधिया कुआ कैसे हिमाचल व मेरु पर्वत की तरह अचल रहा होगा, यह जानना कोई कम आश्चर्य नहीं है ! यह तथ्य भाटों के चौपडों में से प्राप्त हुआ है और उन्होंने नागर, औदिच्य तथा भाटों की; जिन के वंशजों की जीविका का आधार लंबे अरसे से कणबियों के हृदय में अपने प्रति सदैव के लिये पूज्य भाव बना रहे इस हेतु से अपनी उत्पत्ति उन के हितार्थ शंकर भगवान के भव्य ललाट में से कर दी है। लेकिन ऐसी अस्वाभाविक कल्पना के परिणाम से उनकी तमाम हकीकत मारी जाती है। फिर, उन्होंने कुदरती क्रम से विपरीत ऐसा पुतलों में से ही उत्पत्ति का आधार लिया है और उसके साथ अति आश्चर्यजनकरूप-उत्पत्ति के प्रायोजक ने ब्याह की रस्म को भी जोड दिया है। इससे सहज ही ऐसा मालूम पडता है कि इस प्रकार वर्णित उत्पत्ति और लग्नपद्धति दोनों बातें सिर्फ बालोचित कल्पना ही है, जिसे सिद्ध करने के लिये देवी-देवताओं के नामों का भी उस युग में बराबर उपयोग किया गया है किंतु उन की इस प्रकार की बातों का कोई ठोस आधार व बुद्धिगम्य प्रमाण न होने से, एक निराधार वस्तु को दूसरी निराधार चीज के आधार पर रखने से जिस तरह दोनों शीघ्र ही गिर पडती हैं, उसी प्रकार ये दोनों बातें सहज ही असंभव सिद्ध हो जाती हैं। और उससे उसके प्रायोजक का प्रयास विफल होने के उपरांत उनके लिये सुज्ञ लोगों में अधिकाधिक तिरस्कार का भाव पैदा होना स्वाभाविक ही है । उपर्युक्त किंवदंतियों के अतिरिक्त हमारी उत्पत्ति के बारे में "बाह्मणोत्पत्ति मार्तण्ड के कर्ताने भी अकारण एक गप्प हांकी है । उसका भी इस स्थान पर अवलोकन करना आवश्यक लगता है । तब स्वतः ही असत्य पराजित होकर सत्य सामने आ जायेगा । Page चालीस of पाँच सौ तीस
नयी दिल्ली(एजेंसी/वार्ता): तेल विपणन कंपनियों ने घेरलू रसोंई सिलेंडर की कीमतों में 50 रुपये की और व्यावसायिक रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 350. 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढोतर की दी है। रसाई गैस वितरण करने वाली कंपनियों की वेबसाई पर नयी दरे आज जारी की गयी जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी हैं। इस बढ़त के बाद अब राजधानी दिल्ली में 14. 2 किलोग्राम का रसोई गैस सिलेंडर का मूल्य 1103 रुपये हो गया जबकि 19 किलोग्राम वाला व्यावसायिक सिलेंडर का मूल्य 2119. 50 रुपये हो गया है। चालू वर्ष पहली बार एक जनवरी को व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में बढोतरी की गयी थी। इस तरह यह यह दूसरा मौका है जब कीमतें बढ़ायी गयी है जबकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में यह पहली बढोतरी है। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ें :- स्किन पर पपीता इस्तेमाल करने से मिलेंगे ये गजब के फायदे, चेहरे पर आएगा निखार!
नयी दिल्ली: तेल विपणन कंपनियों ने घेरलू रसोंई सिलेंडर की कीमतों में पचास रुपयापये की और व्यावसायिक रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में तीन सौ पचास. पचास रुपयापये प्रति सिलेंडर की बढोतर की दी है। रसाई गैस वितरण करने वाली कंपनियों की वेबसाई पर नयी दरे आज जारी की गयी जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी हैं। इस बढ़त के बाद अब राजधानी दिल्ली में चौदह. दो किलोग्रामग्राम का रसोई गैस सिलेंडर का मूल्य एक हज़ार एक सौ तीन रुपयापये हो गया जबकि उन्नीस किलोग्रामग्राम वाला व्यावसायिक सिलेंडर का मूल्य दो हज़ार एक सौ उन्नीस. पचास रुपयापये हो गया है। चालू वर्ष पहली बार एक जनवरी को व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में बढोतरी की गयी थी। इस तरह यह यह दूसरा मौका है जब कीमतें बढ़ायी गयी है जबकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में यह पहली बढोतरी है। - यह भी पढ़ें :- स्किन पर पपीता इस्तेमाल करने से मिलेंगे ये गजब के फायदे, चेहरे पर आएगा निखार!
चिड़ावा क्षेत्र में मौसम में सुबह बदलाव नजर आया। कुछ देर के लिए हल्के बादल आकाश में नजर आए। इसके साथ ही सुबह साढ़े 9 बजे तक उत्तर पूर्व दिशा की ओर तेज हवाओं का दौर चला। मौसम विभाग की ओर से अधिकतम तापमान 41 डिग्री तक पहुंचने के आसार है। ऐसे में दिन में गर्मी का लगातार असर बढ़ेगा। घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दिन में पंखे व एसी चलने शुरू हो गए है और शीतल पेय पदार्थों की डिमांड बढ़ी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चिड़ावा क्षेत्र में मौसम में सुबह बदलाव नजर आया। कुछ देर के लिए हल्के बादल आकाश में नजर आए। इसके साथ ही सुबह साढ़े नौ बजे तक उत्तर पूर्व दिशा की ओर तेज हवाओं का दौर चला। मौसम विभाग की ओर से अधिकतम तापमान इकतालीस डिग्री तक पहुंचने के आसार है। ऐसे में दिन में गर्मी का लगातार असर बढ़ेगा। घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दिन में पंखे व एसी चलने शुरू हो गए है और शीतल पेय पदार्थों की डिमांड बढ़ी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सिहोरा जिला जबलपुर द्वारा केन्टीन (स्वल्पाहार ) हेतु प्राप्त हुआ है । (ख) एवं (ग) प्रश्नाधीन बस स्टैण्ड/यात्री प्रतीक्षालय की भूमि मध्यप्रदेश शासन से लीज पर प्राप्त हुई थी। उक्त भूमि को मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग के नाम पर हस्तांतरित किये जाने हेतु दिनांक 16/12/2020 को कलेक्टर जबलपुर को लिखा गया है। मध्यप्रदेश सड़क परिवहन की अन्य अचल संपत्तियों की भाँति प्रश्नाधीन अचल संपत्ति का निवर्तन शासन के नव गठित विभाग लोक परिसम्मति प्रबंधन विभाग द्वारा किया जाना है। अतः प्रश्नाधीन बस स्टैण्ड / यात्री प्रतीक्षालय को वर्तमान में किसी को आवेदन के आधार पर लीज या किराये पर दिया जाना संभव नहीं है। शेष अंश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। ब्लेक लिस्टेड किए गए लायसेंसियों से शुल्क की वसूली [ वाणिज्यिक कर] 104. ( क्र. 718 ) श्री सुनील सराफ : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आबकारी विभाग द्वारा वर्ष 2020-21 में ब्लेक लिस्टेड किए गए लायसेंसियों से घिसारा ( शासन को हुए नुकसान की वसूली) वसूलने हेतु क्या कार्यवाही की गई ? हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश से कितने ठेकेदारों से इस संबंध में वसूली हुई नहीं हुई की जानकारी नामवार, जिलेवार पृथक-पृथक देवें। (ख) वर्ष 2020-21 में जिन लायसेंसियों ने बैंक ग्यारंटी तय समय-सीमा में नहीं जमा कराई उन पर की गई कार्यवाही का जिलेवार विवरण दें। (ग) आबकारी कार्य हेतु शासन के द्वारा बनाए गए जिला समिति के द्वारा लिये गये निर्णय को परिवर्तन करने से क्या शासन के राजस्व को हानि नहीं होगी ? यदि होगी तो इन प्रस्तावों में परिवर्तन क्यों किया गया ? (घ) नये कारोबारियों / फर्मों द्वारा शराब के टेंडर लेने के लिए जो राशि जमा कराई गई है, क्या वह टैक्स पेड है? इसकी जांच की गई या नहीं? (ड.) क्या जिन कारोबारियों/फर्मों को ब्लेक लिस्टेड किया गया था, उन्हीं ने अपने कर्मचारियों व परिचितों के नाम से फर्म बनाकर आरक्षित मूल्य से 15 प्रतिशत कम पर लायसेंस प्राप्त किए हैं? क्या इसकी जांच की गई है? यदि नहीं तो कब तक की जाएगी? वित्त मंत्री ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) वर्ष 2020-21 में लायसेंसी द्वारा निर्धारित समय-सीमा में बैंक गारण्टी प्रस्तुत नहीं करने एवं मदिरा दुकानों को छोड़े जाने के कारण लायसेंसियों से (खिसारा) शासन को हुई हानि के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 22.07.2020 के परिपालन में वसूली की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इस संबंध में वसूली संबंधी कार्यवाही की नामवार, जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) वर्ष 2020-21 में जिला रीवा, सतना, सिंगरौली, शहडोल, शिवपुरी, टीकमगढ़, खण्डवा एवं बुरहानपुर को छोड़कर, प्रदेश के शेष जिलों में बैंक गारण्टी नियत समय-सीमा में जमा कराई गई है। जिला रीवा, सतना, सिंगरौली, शहडोल, शिवपुरी, टीकमगढ़, खण्डवा एवं बुरहानपुर की मदिरा दुकानों का एक समूह बनाकर निष्पादन किया गया था, किन्तु लायसेंसी द्वारा निर्धारित समय-सीमा में बैंक गारण्टी प्रस्तुत नहीं करने के कारण संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा लायसेंस निरस्त किया जाकर, पुनर्निष्पादन की कार्यवाही की गई है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 22.07.2020 के परिपालन में शासन को हुई हानि (खिसारा) की वसूली प्रक्रियाधीन है। मदिरा दुकानों के पुनर्निष्पादन की कार्यवाही पश्चात् संबंधित लायसेंसियों द्वारा नियत समयावधि में ही बैंक गारण्टी जमा की गई है। जिला धार, झाबुआ, अलीराजपुर एवं बड़वानी के वर्ष 2020-21 में जिन लायसेंसियों द्वारा बैंक गारण्टी नियत समय-सीमा में जमा नहीं करने पर उन्हें कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। तदोपरान्त लायसेंसियों द्वारा बैंक गारण्टी जमा कराई दी गई है। (ग) आबकारी कार्य हेतु शासन द्वारा बनाई गई जिला समिति के द्वारा लिए गए निर्णयों को आबकारी आयुक्त कार्यालय या शासन स्तर से परिवर्तित नहीं किया गया है। अतएव शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता । (घ) नये कारोबारियों/फर्मों द्वारा शराब के टेंडर लेने के लिए जो राशि जमा कराई गई है, क्या वह टैक्स पेड है इसकी जांच की गई या नहीं का परीक्षण आबकारी विभाग के क्षेत्राधिकार से संबंधित विषय नहीं है। (ड.) प्रदेश के जिलों में मदिरा दुकानों का निष्पादन मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 77 दिनांक 25.02.2020 में प्रकाशित अनुसार, देशी/विदेशी मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के समूह/ एकल समूहों के निष्पादन की व्यवस्था वर्ष 2020-21 के प्रावधान अनुसार किया गया है। ब्लैक लिस्टेड किये गये फर्मों द्वारा अपने कर्मचारियों व परिचितों के माध्यम से फर्म बनाकर लायसेंस लेने संबंधी कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। इस संबंध में जांच हेतु आबकारी नीति में कोई प्रावधान नहीं है। अंशदायी पेंशन योजना का लाभ 105. ( क्र. 722 ) श्री विक्रम सिंह राणा : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में विभिन्न विभागों में वर्ष 2004 के बाद जिन कर्मचारियों की नियुक्ति की गई उनमें से कितने कर्मचारियों को अंशदायी पेंशन योजना से लाभांवित किया जा रहा है? जिलेवार विभागवार जानकारी देवें। (ख) क्या नवीन पेंशन योजना में वर्ष 2004 के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को सेवा के दौरान मृत होने पर परिवार पेंशन देने का प्रावधान है? यदि नहीं तो कब तक लागू होगा ? (ग) चूंकि नवीन अंशदायी पेंशन योजना शेयर मार्केट के जोखिमों पर आधारित है जो कि शासकीय विभागों के कर्मचारियों एवं उनके परिवार के लिये लाभकारी नहीं हैं, क्या म.प्र. शासन कब तक शासकीय विभागों के समस्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल करेगा? वित्त मंत्री ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) प्रदेश में वर्ष 2004 के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को ( अंशदायी पेंशन योजना) राष्ट्रीय पेंशन योजना में वर्तमान में 432369 अभिदाता रजिस्टर्ड है। विभागवार जानकारी संधारित नहीं होती है। जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन निधि विनियामक प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 11.05.2015 के अनुसार सेवा के दौरान मुत्यु होने पर दो लाख या उससे अधिक संचित पेंशन धन होने पर कुल जमा राशि का 20 प्रतिशत राशि अभिदाता के नॉमिनी को एक मुश्त भुगतान की जाती है तथा शेष 80 प्रतिशत राशि से एन्युटी के रूप में मासिक पेंशन का भुगतान किये जाने के निर्देश है। (ग) वर्तमान में पुरानी पेंशन बहाल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। शेष रही स्वेच्छा अनुदान की राशि का आंवटन [योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी] 106. ( क्र. 725 ) श्री रवि रमेशचन्द्र जोशी : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या खरगोन विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वेच्छा अनुदान की वर्ष 2019-20 की राशि आना शेष है? यदि हां तो क्यों और कितनी राशि आना शेष है? (ख) क्या कारण रहा कि उक्त राशि अभी तक लंबित है जिन अधिकारियों के कारण राशि लंबित हुई? उन अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी? यदि हां तो कब तक और नहीं तो क्यों ? (ग) माननीय विधायकों के द्वारा स्वेच्छा अनुदान राशि जारी करने के लिए वित्तीय वर्ष की राशि के लिए आखरी तारीख क्या है? (घ) उक्त शेष बची राशि कब तक जारी की जाएगी? वित्त मंत्री ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ । वित्तीय वर्ष 2019-20 में वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में तकनीकी समस्या के कारण राशि रुपये 5,81,900/- देयक पारित नहीं हो सके। तकनीकी समस्या के कारण स्थिति बनी है। (ख) किसी के विरुद्ध कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) माननीय विधायकों द्वारा की गई अनुशंसाओं पर स्वीकृति जारी होने के पश्चात उपलब्ध आवंटन से उस वित्तीय वर्ष के 31 मार्च तक जारी की जा सकती है। (घ) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। जनसम्पर्क निधि की राशि बाबत 107. ( क्र. 726 ) श्री रवि रमेशचन्द्र जोशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या खरगोन विधानसभा क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2019-20 की जनसम्पर्क निधि की राशि जो की प्रभारी मंत्री जी की अनुशंसा से प्राप्त होती है अभी तक प्राप्त नहीं हुई प्राप्त नहीं होने का क्या कारण है पत्राचार सहित उत्तर देवें? (ख) उक्त राशि प्राप्त होगी या नहीं? यदि होगी तो कब तक और नहीं तो क्यों? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) वित्तीय वर्ष 2019-20 की जनसम्पर्क निधि की राशि रू. 2,00,000/- के देयक जिला कोषालय में दिनांक 28.03.2020 को प्रस्तुत किए गए। वित्तीय आहरण पर प्रतिबंध होने से तथा जनसम्पर्क निधि के आहरण पर वित्त विभाग द्वारा अनुमति न होने से देयक आपत्ति से जिला कोषालय द्वारा भुगतान नहीं किया गया । (ख) वित्तीय वर्ष समाप्त हो चुका है विगत वित्तीय वर्ष की लेप्स हुई राशि आगामी वित्तीय वर्ष में दिये जाने के कोई नियम / प्रावधान नहीं है । जनसम्पर्क निधि से स्वीकृत राशि का भुगतान 108. ( क्र. 727 ) श्री रवि रमेशचन्द्र जोशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र के लिए जनसम्पर्क निधि से स्वीकृत वर्ष 2019-20 की राशि का भुगतान प्रश्न दिनांक तक नहीं किया गया इस राशि का भुगतान कब तक किया जाएगा और नहीं तो क्यों? (ख) वर्ष 2020-21 के लिए जनसम्पर्क निधि से राशि स्वीकृत कराने के लिए क्या व्यवस्था है आज दिनांक तक इस विषय में कोई मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ है? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
सिहोरा जिला जबलपुर द्वारा केन्टीन हेतु प्राप्त हुआ है । एवं प्रश्नाधीन बस स्टैण्ड/यात्री प्रतीक्षालय की भूमि मध्यप्रदेश शासन से लीज पर प्राप्त हुई थी। उक्त भूमि को मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग के नाम पर हस्तांतरित किये जाने हेतु दिनांक सोलह दिसंबर दो हज़ार बीस को कलेक्टर जबलपुर को लिखा गया है। मध्यप्रदेश सड़क परिवहन की अन्य अचल संपत्तियों की भाँति प्रश्नाधीन अचल संपत्ति का निवर्तन शासन के नव गठित विभाग लोक परिसम्मति प्रबंधन विभाग द्वारा किया जाना है। अतः प्रश्नाधीन बस स्टैण्ड / यात्री प्रतीक्षालय को वर्तमान में किसी को आवेदन के आधार पर लीज या किराये पर दिया जाना संभव नहीं है। शेष अंश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। ब्लेक लिस्टेड किए गए लायसेंसियों से शुल्क की वसूली [ वाणिज्यिक कर] एक सौ चार. श्री सुनील सराफ : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि आबकारी विभाग द्वारा वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में ब्लेक लिस्टेड किए गए लायसेंसियों से घिसारा वसूलने हेतु क्या कार्यवाही की गई ? हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश से कितने ठेकेदारों से इस संबंध में वसूली हुई नहीं हुई की जानकारी नामवार, जिलेवार पृथक-पृथक देवें। वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में जिन लायसेंसियों ने बैंक ग्यारंटी तय समय-सीमा में नहीं जमा कराई उन पर की गई कार्यवाही का जिलेवार विवरण दें। आबकारी कार्य हेतु शासन के द्वारा बनाए गए जिला समिति के द्वारा लिये गये निर्णय को परिवर्तन करने से क्या शासन के राजस्व को हानि नहीं होगी ? यदि होगी तो इन प्रस्तावों में परिवर्तन क्यों किया गया ? नये कारोबारियों / फर्मों द्वारा शराब के टेंडर लेने के लिए जो राशि जमा कराई गई है, क्या वह टैक्स पेड है? इसकी जांच की गई या नहीं? क्या जिन कारोबारियों/फर्मों को ब्लेक लिस्टेड किया गया था, उन्हीं ने अपने कर्मचारियों व परिचितों के नाम से फर्म बनाकर आरक्षित मूल्य से पंद्रह प्रतिशत कम पर लायसेंस प्राप्त किए हैं? क्या इसकी जांच की गई है? यदि नहीं तो कब तक की जाएगी? वित्त मंत्री : वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में लायसेंसी द्वारा निर्धारित समय-सीमा में बैंक गारण्टी प्रस्तुत नहीं करने एवं मदिरा दुकानों को छोड़े जाने के कारण लायसेंसियों से शासन को हुई हानि के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक बाईस.सात.दो हज़ार बीस के परिपालन में वसूली की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इस संबंध में वसूली संबंधी कार्यवाही की नामवार, जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में जिला रीवा, सतना, सिंगरौली, शहडोल, शिवपुरी, टीकमगढ़, खण्डवा एवं बुरहानपुर को छोड़कर, प्रदेश के शेष जिलों में बैंक गारण्टी नियत समय-सीमा में जमा कराई गई है। जिला रीवा, सतना, सिंगरौली, शहडोल, शिवपुरी, टीकमगढ़, खण्डवा एवं बुरहानपुर की मदिरा दुकानों का एक समूह बनाकर निष्पादन किया गया था, किन्तु लायसेंसी द्वारा निर्धारित समय-सीमा में बैंक गारण्टी प्रस्तुत नहीं करने के कारण संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा लायसेंस निरस्त किया जाकर, पुनर्निष्पादन की कार्यवाही की गई है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक बाईस.सात.दो हज़ार बीस के परिपालन में शासन को हुई हानि की वसूली प्रक्रियाधीन है। मदिरा दुकानों के पुनर्निष्पादन की कार्यवाही पश्चात् संबंधित लायसेंसियों द्वारा नियत समयावधि में ही बैंक गारण्टी जमा की गई है। जिला धार, झाबुआ, अलीराजपुर एवं बड़वानी के वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में जिन लायसेंसियों द्वारा बैंक गारण्टी नियत समय-सीमा में जमा नहीं करने पर उन्हें कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। तदोपरान्त लायसेंसियों द्वारा बैंक गारण्टी जमा कराई दी गई है। आबकारी कार्य हेतु शासन द्वारा बनाई गई जिला समिति के द्वारा लिए गए निर्णयों को आबकारी आयुक्त कार्यालय या शासन स्तर से परिवर्तित नहीं किया गया है। अतएव शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता । नये कारोबारियों/फर्मों द्वारा शराब के टेंडर लेने के लिए जो राशि जमा कराई गई है, क्या वह टैक्स पेड है इसकी जांच की गई या नहीं का परीक्षण आबकारी विभाग के क्षेत्राधिकार से संबंधित विषय नहीं है। प्रदेश के जिलों में मदिरा दुकानों का निष्पादन मध्यप्रदेश राजपत्र क्रमांक सतहत्तर दिनांक पच्चीस.दो.दो हज़ार बीस में प्रकाशित अनुसार, देशी/विदेशी मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के समूह/ एकल समूहों के निष्पादन की व्यवस्था वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के प्रावधान अनुसार किया गया है। ब्लैक लिस्टेड किये गये फर्मों द्वारा अपने कर्मचारियों व परिचितों के माध्यम से फर्म बनाकर लायसेंस लेने संबंधी कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। इस संबंध में जांच हेतु आबकारी नीति में कोई प्रावधान नहीं है। अंशदायी पेंशन योजना का लाभ एक सौ पाँच. श्री विक्रम सिंह राणा : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रदेश में विभिन्न विभागों में वर्ष दो हज़ार चार के बाद जिन कर्मचारियों की नियुक्ति की गई उनमें से कितने कर्मचारियों को अंशदायी पेंशन योजना से लाभांवित किया जा रहा है? जिलेवार विभागवार जानकारी देवें। क्या नवीन पेंशन योजना में वर्ष दो हज़ार चार के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को सेवा के दौरान मृत होने पर परिवार पेंशन देने का प्रावधान है? यदि नहीं तो कब तक लागू होगा ? चूंकि नवीन अंशदायी पेंशन योजना शेयर मार्केट के जोखिमों पर आधारित है जो कि शासकीय विभागों के कर्मचारियों एवं उनके परिवार के लिये लाभकारी नहीं हैं, क्या म.प्र. शासन कब तक शासकीय विभागों के समस्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल करेगा? वित्त मंत्री : प्रदेश में वर्ष दो हज़ार चार के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को राष्ट्रीय पेंशन योजना में वर्तमान में चार लाख बत्तीस हज़ार तीन सौ उनहत्तर अभिदाता रजिस्टर्ड है। विभागवार जानकारी संधारित नहीं होती है। जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जी नहीं। राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन निधि विनियामक प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक ग्यारह.पाँच.दो हज़ार पंद्रह के अनुसार सेवा के दौरान मुत्यु होने पर दो लाख या उससे अधिक संचित पेंशन धन होने पर कुल जमा राशि का बीस प्रतिशत राशि अभिदाता के नॉमिनी को एक मुश्त भुगतान की जाती है तथा शेष अस्सी प्रतिशत राशि से एन्युटी के रूप में मासिक पेंशन का भुगतान किये जाने के निर्देश है। वर्तमान में पुरानी पेंशन बहाल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। शेष रही स्वेच्छा अनुदान की राशि का आंवटन [योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी] एक सौ छः. श्री रवि रमेशचन्द्र जोशी : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या खरगोन विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वेच्छा अनुदान की वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस की राशि आना शेष है? यदि हां तो क्यों और कितनी राशि आना शेष है? क्या कारण रहा कि उक्त राशि अभी तक लंबित है जिन अधिकारियों के कारण राशि लंबित हुई? उन अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी? यदि हां तो कब तक और नहीं तो क्यों ? माननीय विधायकों के द्वारा स्वेच्छा अनुदान राशि जारी करने के लिए वित्तीय वर्ष की राशि के लिए आखरी तारीख क्या है? उक्त शेष बची राशि कब तक जारी की जाएगी? वित्त मंत्री : जी हाँ । वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में तकनीकी समस्या के कारण राशि पाँच रुपया,इक्यासी,नौ सौ/- देयक पारित नहीं हो सके। तकनीकी समस्या के कारण स्थिति बनी है। किसी के विरुद्ध कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। माननीय विधायकों द्वारा की गई अनुशंसाओं पर स्वीकृति जारी होने के पश्चात उपलब्ध आवंटन से उस वित्तीय वर्ष के इकतीस मार्च तक जारी की जा सकती है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। जनसम्पर्क निधि की राशि बाबत एक सौ सात. श्री रवि रमेशचन्द्र जोशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या खरगोन विधानसभा क्षेत्र में वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस की जनसम्पर्क निधि की राशि जो की प्रभारी मंत्री जी की अनुशंसा से प्राप्त होती है अभी तक प्राप्त नहीं हुई प्राप्त नहीं होने का क्या कारण है पत्राचार सहित उत्तर देवें? उक्त राशि प्राप्त होगी या नहीं? यदि होगी तो कब तक और नहीं तो क्यों? मुख्यमंत्री : वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस की जनसम्पर्क निधि की राशि रू. दो,शून्य,शून्य/- के देयक जिला कोषालय में दिनांक अट्ठाईस.तीन.दो हज़ार बीस को प्रस्तुत किए गए। वित्तीय आहरण पर प्रतिबंध होने से तथा जनसम्पर्क निधि के आहरण पर वित्त विभाग द्वारा अनुमति न होने से देयक आपत्ति से जिला कोषालय द्वारा भुगतान नहीं किया गया । वित्तीय वर्ष समाप्त हो चुका है विगत वित्तीय वर्ष की लेप्स हुई राशि आगामी वित्तीय वर्ष में दिये जाने के कोई नियम / प्रावधान नहीं है । जनसम्पर्क निधि से स्वीकृत राशि का भुगतान एक सौ आठ. श्री रवि रमेशचन्द्र जोशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि विधानसभा क्षेत्र के लिए जनसम्पर्क निधि से स्वीकृत वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस की राशि का भुगतान प्रश्न दिनांक तक नहीं किया गया इस राशि का भुगतान कब तक किया जाएगा और नहीं तो क्यों? वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए जनसम्पर्क निधि से राशि स्वीकृत कराने के लिए क्या व्यवस्था है आज दिनांक तक इस विषय में कोई मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ है? मुख्यमंत्री : एवं जानकारी एकत्रित की जा रही है।
कोलारस। कोलारस थाना क्षेत्र के सुनाज गांव में बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात अपने माता-पिता के संग सो रही आठ साल की बच्ची गायब हो गई है। सूचना पर पुलिस छानबीन में जुट गई है। लेकिन बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं लग पाया है। जानकारी के मुताबिक सुनाज गांव में पप्पू आदिवासी की आठ साल की बच्ची रात करीब 2 बजे गायब हो गई। बताया जा रहा है कि नींद खुलने पर मां ने देखा कि उनकी बच्ची गायब है। आसपास खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसके बाद कोलारस थाने पर सूचना दी। पुलिस ने तालाब, कुएँ आदि जगहों पर भी खोजबीन की है। एसडीओपी कोलारस भी मौके पर पहुंच गए थे। लेकिन बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं लग सका है।
कोलारस। कोलारस थाना क्षेत्र के सुनाज गांव में बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात अपने माता-पिता के संग सो रही आठ साल की बच्ची गायब हो गई है। सूचना पर पुलिस छानबीन में जुट गई है। लेकिन बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं लग पाया है। जानकारी के मुताबिक सुनाज गांव में पप्पू आदिवासी की आठ साल की बच्ची रात करीब दो बजे गायब हो गई। बताया जा रहा है कि नींद खुलने पर मां ने देखा कि उनकी बच्ची गायब है। आसपास खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसके बाद कोलारस थाने पर सूचना दी। पुलिस ने तालाब, कुएँ आदि जगहों पर भी खोजबीन की है। एसडीओपी कोलारस भी मौके पर पहुंच गए थे। लेकिन बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं लग सका है।
वामनतव - वामन सूक्त वामनतश्व - एक तस्त्रप्रस्थ । वामनदत्त-सम्वित प्रकाशके प्रणेता । वामनदेव - एक कवि वामन देखो । वामनद्वादशी ( सं० स्त्री० ) वामनदेवताक द्वादशीव्रत विशेष वामनद्वादशीव्रत देखो। वामनद्वादशीव्रत ( सं० लो०) वामनदेवताकं द्वादशीव्रतं । श्रवणाद्वादशीमें कर्त्तव्य वामनदेवका प्रतविशेष । द्वादशीके दिन वामनदेव के उद्देशसे यह व्रत करना होता है, इस कारण इसको वामनद्वादशीव्रत कहते हैं । हरिभक्तिविलास में इस व्रतका विधान इस प्रकार लिखा हैश्रवणाद्वादशोके पहले एकादशी के दिन निरम्बु उपवासी रह कर यह व्रत करना होता है। भाद्रमासकी शुक्ला द्वादशीको श्रवणा द्वादशी कहते हैं। अतएव पार्श्वपरिवर्शन एकादशी में उपवासी रह कर यह व्रत करना उचित है। द्वादशीके क्षय होने पर एकादशीको रातको वा दूसरे दिन द्वादशीको वामनदेवको पूजा करे । सोना, चांदी, तांबा या वांस - इनमें से किसी एकका पात्र बना कर ताम्रकुण्ड स्थापन करे तथा बाई बगल छतरी, खड़ाऊ, बांसकी अच्छी छड़ी, भक्षसूल और कुश रखना होता है। गन्ध, पुष्प, फल, धूप, नाना प्रकारके नैवेद्य, भोक्षभोज्य और गुड़ोदन आदि द्वारा वामनदेषकी पूजा करनी होती है। नृत्य-गीतादि द्वारा रात्रि जागरण करना आवश्यक है। पहले वामनदेवको अर्ध्य दे कर पोछे पूजा करनी होती है। इस अर्ध्य में कुछ विशेषता है, वह यह कि सफेद नारियलके पानीसे अध्यं देवे। इसके बाद दोनों पादमें मत्स्यकी; दोनों जानुमें कूर्मकी, गुह्यमें बराहकी, नाभिमें नृसिंहकी, वक्षःस्थल में वामनकी, दोनों कक्ष में परशुरामकी, दोनों भुजाओं में राम की, मस्तक में कृष्ण की और सर्वाङ्गमें बुद्ध तथा कलको की अर्चना करनी चाहिये "ओं मत्स्याय नमः पादयोः" इत्यादि कमसे पूजा करनी होगी। इसके बाद "ओं सर्वेभ्यो आयुधेभ्यो नमः " कह कर सभी आयुधको पूजा करनी चाहिये । पोछे विधानानुसार मन्त्र पढ़ कर आयाय और द्विजगणको दान दे देना आवश्यक है। उन्हें भी उक्त द्रव्य मन्ल पेड़ कर ग्रहण करना उचित है। इसके बाद मतकारी दधियुक्त घृत परोस कर पहले द्विजातियोंको भोजन करावे, पोछे बन्धुबांधवों के साथ आप भोजन परे । वामनपुराण और भविष्योत्तरपुराण में इस व्रतविधिका वर्णन है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में लिखा है कि द्वादशी के दिन बहुत सबेरे नदीसङ्गम पर जाकर संकल्प करना होगा। उनको पीछे एक माशा सोनेसे या शक्ति के अनुसार वामनदेवकी मूर्ति बनानी चाहिये । उस मूर्त्तिको कुम्भके ऊपर सुवर्णपालमें रख कर पोछे स्नान करा उसकी पूजा करे । अर्ध्य देने के बाद ब्राह्मणको छत्र, पादुका, गो और कमण्डलु दान करना होता है। रात्रिकालमें नृत्यगीतादि द्वारा रात्रिजागरण करना उचित है । द्वादशीमें ब्राह्मणको भोजन करा कर आप पारण करे। द्वादशी के रहते ही पारण करना उचित हैं। जो विधिपूर्वक इस व्रतका अनुष्ठान करते हैं, उन्हें सभी प्रकारका सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है। जो पितामाता के उद्देशसे यह व्रतफल अर्पण करते हैं, घे कुललाता हो कर पितृऋणसे उत्तीर्ण होते हैं। इस व्रतके करनेवाले हरिधाम में जा कर ७७ युग बास करते हैं और पीछे इस पृथ्वी पर जन्म ले कर राजा होते हैं । ( हरिभक्तिवि० १५ वि० ) अष्टादश पुराणों में से एक वामनपुराण ( स० क्ली० ) पुराण । पुराण शब्द देखो । वामनभट्ट - निम्बार्क सम्प्रदाय के एक गुरु ये रामचन्द्र - भट्टके शिष्य और कृष्णभट्टके गुरु थे । वामनभट्ट - वृहद्रत्नाकर और शब्दरत्नाकर नामक अभिधानके प्रणेता यह वत्स्यगोलीय कोटि-यज्वा के पुल और वरदाग्निचित्तके पौत्र थे । वामनभट्टवाण- रघुनाथचरित और शृङ्गारभूषण नामक भाणके प्रणेता । वामनवृत्ति ( स० स्त्री० ) वामनरचित काशिकावृत्ति । वाममवत ( स० को ० ) वामनदेवताकं व्रतम् । वामन लो० । द्वादशोषत । वामनसिंहरजमणिदेव - दाक्षिणात्य के एक राजा । बामनसिंहराज- एक हिन्दूराज । आप दाक्षिणात्य में राज्य करते थे । बामनसूक ( स० लो०) वैदिक स्तोलभेद ।
वामनतव - वामन सूक्त वामनतश्व - एक तस्त्रप्रस्थ । वामनदत्त-सम्वित प्रकाशके प्रणेता । वामनदेव - एक कवि वामन देखो । वामनद्वादशी वामनदेवताक द्वादशीव्रत विशेष वामनद्वादशीव्रत देखो। वामनद्वादशीव्रत वामनदेवताकं द्वादशीव्रतं । श्रवणाद्वादशीमें कर्त्तव्य वामनदेवका प्रतविशेष । द्वादशीके दिन वामनदेव के उद्देशसे यह व्रत करना होता है, इस कारण इसको वामनद्वादशीव्रत कहते हैं । हरिभक्तिविलास में इस व्रतका विधान इस प्रकार लिखा हैश्रवणाद्वादशोके पहले एकादशी के दिन निरम्बु उपवासी रह कर यह व्रत करना होता है। भाद्रमासकी शुक्ला द्वादशीको श्रवणा द्वादशी कहते हैं। अतएव पार्श्वपरिवर्शन एकादशी में उपवासी रह कर यह व्रत करना उचित है। द्वादशीके क्षय होने पर एकादशीको रातको वा दूसरे दिन द्वादशीको वामनदेवको पूजा करे । सोना, चांदी, तांबा या वांस - इनमें से किसी एकका पात्र बना कर ताम्रकुण्ड स्थापन करे तथा बाई बगल छतरी, खड़ाऊ, बांसकी अच्छी छड़ी, भक्षसूल और कुश रखना होता है। गन्ध, पुष्प, फल, धूप, नाना प्रकारके नैवेद्य, भोक्षभोज्य और गुड़ोदन आदि द्वारा वामनदेषकी पूजा करनी होती है। नृत्य-गीतादि द्वारा रात्रि जागरण करना आवश्यक है। पहले वामनदेवको अर्ध्य दे कर पोछे पूजा करनी होती है। इस अर्ध्य में कुछ विशेषता है, वह यह कि सफेद नारियलके पानीसे अध्यं देवे। इसके बाद दोनों पादमें मत्स्यकी; दोनों जानुमें कूर्मकी, गुह्यमें बराहकी, नाभिमें नृसिंहकी, वक्षःस्थल में वामनकी, दोनों कक्ष में परशुरामकी, दोनों भुजाओं में राम की, मस्तक में कृष्ण की और सर्वाङ्गमें बुद्ध तथा कलको की अर्चना करनी चाहिये "ओं मत्स्याय नमः पादयोः" इत्यादि कमसे पूजा करनी होगी। इसके बाद "ओं सर्वेभ्यो आयुधेभ्यो नमः " कह कर सभी आयुधको पूजा करनी चाहिये । पोछे विधानानुसार मन्त्र पढ़ कर आयाय और द्विजगणको दान दे देना आवश्यक है। उन्हें भी उक्त द्रव्य मन्ल पेड़ कर ग्रहण करना उचित है। इसके बाद मतकारी दधियुक्त घृत परोस कर पहले द्विजातियोंको भोजन करावे, पोछे बन्धुबांधवों के साथ आप भोजन परे । वामनपुराण और भविष्योत्तरपुराण में इस व्रतविधिका वर्णन है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में लिखा है कि द्वादशी के दिन बहुत सबेरे नदीसङ्गम पर जाकर संकल्प करना होगा। उनको पीछे एक माशा सोनेसे या शक्ति के अनुसार वामनदेवकी मूर्ति बनानी चाहिये । उस मूर्त्तिको कुम्भके ऊपर सुवर्णपालमें रख कर पोछे स्नान करा उसकी पूजा करे । अर्ध्य देने के बाद ब्राह्मणको छत्र, पादुका, गो और कमण्डलु दान करना होता है। रात्रिकालमें नृत्यगीतादि द्वारा रात्रिजागरण करना उचित है । द्वादशीमें ब्राह्मणको भोजन करा कर आप पारण करे। द्वादशी के रहते ही पारण करना उचित हैं। जो विधिपूर्वक इस व्रतका अनुष्ठान करते हैं, उन्हें सभी प्रकारका सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है। जो पितामाता के उद्देशसे यह व्रतफल अर्पण करते हैं, घे कुललाता हो कर पितृऋणसे उत्तीर्ण होते हैं। इस व्रतके करनेवाले हरिधाम में जा कर सतहत्तर युग बास करते हैं और पीछे इस पृथ्वी पर जन्म ले कर राजा होते हैं । अष्टादश पुराणों में से एक वामनपुराण पुराण । पुराण शब्द देखो । वामनभट्ट - निम्बार्क सम्प्रदाय के एक गुरु ये रामचन्द्र - भट्टके शिष्य और कृष्णभट्टके गुरु थे । वामनभट्ट - वृहद्रत्नाकर और शब्दरत्नाकर नामक अभिधानके प्रणेता यह वत्स्यगोलीय कोटि-यज्वा के पुल और वरदाग्निचित्तके पौत्र थे । वामनभट्टवाण- रघुनाथचरित और शृङ्गारभूषण नामक भाणके प्रणेता । वामनवृत्ति वामनरचित काशिकावृत्ति । वाममवत वामनदेवताकं व्रतम् । वामन लोशून्य । द्वादशोषत । वामनसिंहरजमणिदेव - दाक्षिणात्य के एक राजा । बामनसिंहराज- एक हिन्दूराज । आप दाक्षिणात्य में राज्य करते थे । बामनसूक वैदिक स्तोलभेद ।
Chandigarh/Alive News: हरियाणा के बहादुरगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली किसान आंदोलनकारी पश्चिम बंगाल की युवती से दुष्कर्म के केस की जांच के दौरान पुलिस ने बुधवार को किसान नेता जसबीर कौर और राजेंद्र सिंह दीपवाला से महिला थाना बहादुरगढ़ में पूछताछ की। पूछताछ में हुए खुलासे में इस केस को नया मोड़ दे दिया है। जानकारी के मुताबिक जसबीर कौर ने बताया कि वह 26 को इलाज के लिए भर्ती करवाने के साथ ही अस्पताल में युवती को संभालने के लिए पहुंच गई थी और 30 अप्रैल तक युवती के इलाज में मदद की। इस बीच उसने युवती से पूछा तो उसने बताया कि अनिल मलिक ने गाड़ी में उसके साथ छेड़छाड़ की। पुलिस ने जसबीर कौर से पूछा कि केस के छह आरोपियों में से योगिता ने आपको क्या-क्या बताया। इस पर जसबीर ने कहा कि योगिता ने 19 या 20 अप्रैल को उन्हें बताया था कि किसान सोशल आर्मी वालों ने बंगाल की एक युवती के साथ ट्रेन में छेड़छाड़ की है। दुष्कर्म की बातों से योगिता ने इनकार किया। युवती की ओर से शिकायत दिलाने की बात पर योगिता ने कहा कि वह शिकायत देने को तैयार नहीं है। युवती की मृत्यु के बाद भी आपने उसके साथ हुई छेड़खानी आदि की शिकायत पुलिस को क्यों नहीं की। इस पर जसबीर कौर ने कहा कि शुरुआत में युवती ने छेड़छाड़ की बात नहीं बताई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसने छेड़छाड़ की बात बताई। लेकिन उस वक्त हमारी प्राथमिकता युवती को बचाने की थी। जानकरी के मुताबिक किसान नेता राजेंद्र सिंह दीपवाला से भी पुलिस ने कई सवाल किए। राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह कई दिन के बाद पंजाब से 25 अप्रैल को यहां आए थे। पता लगा कि बंगाल से आई युवती बीमार है। 30 को युवती की मौत हो गई तो अस्पताल गए। युवती के पिता से बात हुई। पोस्टमार्टम के लिए उन्होंने इनकार कर दिया। अंत्येष्टि हो गई। पिता ने बताया कि उनकी बेटी आंदोलन में आई थी और उन लोगों ने बेटी से बदतमीजी की है। कार्रवाई के लिए कहने पर उन्होंने कहा कि उनकी बेटी चाहती थी कि आंदोलन की छवि को कोई नुकसान न पहुंचे। पुलिस ने जब एक आरोपी योगिता से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह 17 अप्रैल को राजेंद्र सिंह को फोन कर युवती के बारे में बताया था। राजेंद्र सिंह ने कहा कि उस वक्त वह पंजाब में था और उसने योगिता को मेट्रो पिलर 775 के पास कैंप में मंगा सिंह को सारी बात बताने के लिए कहा लेकिन योगिता उनके कैंप में नहीं गई। एसआईटी के सदस्य शहर थाना प्रभारी ने बताया कि जसबीर कौर और राजेंद्र सिंह दीपवाला से हुई पूछताछ में मिले जवाबों से केस की जांच में मदद मिलेगी। चार आरोपियों की अभी तलाश की जा रही है।
Chandigarh/Alive News: हरियाणा के बहादुरगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली किसान आंदोलनकारी पश्चिम बंगाल की युवती से दुष्कर्म के केस की जांच के दौरान पुलिस ने बुधवार को किसान नेता जसबीर कौर और राजेंद्र सिंह दीपवाला से महिला थाना बहादुरगढ़ में पूछताछ की। पूछताछ में हुए खुलासे में इस केस को नया मोड़ दे दिया है। जानकारी के मुताबिक जसबीर कौर ने बताया कि वह छब्बीस को इलाज के लिए भर्ती करवाने के साथ ही अस्पताल में युवती को संभालने के लिए पहुंच गई थी और तीस अप्रैल तक युवती के इलाज में मदद की। इस बीच उसने युवती से पूछा तो उसने बताया कि अनिल मलिक ने गाड़ी में उसके साथ छेड़छाड़ की। पुलिस ने जसबीर कौर से पूछा कि केस के छह आरोपियों में से योगिता ने आपको क्या-क्या बताया। इस पर जसबीर ने कहा कि योगिता ने उन्नीस या बीस अप्रैल को उन्हें बताया था कि किसान सोशल आर्मी वालों ने बंगाल की एक युवती के साथ ट्रेन में छेड़छाड़ की है। दुष्कर्म की बातों से योगिता ने इनकार किया। युवती की ओर से शिकायत दिलाने की बात पर योगिता ने कहा कि वह शिकायत देने को तैयार नहीं है। युवती की मृत्यु के बाद भी आपने उसके साथ हुई छेड़खानी आदि की शिकायत पुलिस को क्यों नहीं की। इस पर जसबीर कौर ने कहा कि शुरुआत में युवती ने छेड़छाड़ की बात नहीं बताई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसने छेड़छाड़ की बात बताई। लेकिन उस वक्त हमारी प्राथमिकता युवती को बचाने की थी। जानकरी के मुताबिक किसान नेता राजेंद्र सिंह दीपवाला से भी पुलिस ने कई सवाल किए। राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह कई दिन के बाद पंजाब से पच्चीस अप्रैल को यहां आए थे। पता लगा कि बंगाल से आई युवती बीमार है। तीस को युवती की मौत हो गई तो अस्पताल गए। युवती के पिता से बात हुई। पोस्टमार्टम के लिए उन्होंने इनकार कर दिया। अंत्येष्टि हो गई। पिता ने बताया कि उनकी बेटी आंदोलन में आई थी और उन लोगों ने बेटी से बदतमीजी की है। कार्रवाई के लिए कहने पर उन्होंने कहा कि उनकी बेटी चाहती थी कि आंदोलन की छवि को कोई नुकसान न पहुंचे। पुलिस ने जब एक आरोपी योगिता से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह सत्रह अप्रैल को राजेंद्र सिंह को फोन कर युवती के बारे में बताया था। राजेंद्र सिंह ने कहा कि उस वक्त वह पंजाब में था और उसने योगिता को मेट्रो पिलर सात सौ पचहत्तर के पास कैंप में मंगा सिंह को सारी बात बताने के लिए कहा लेकिन योगिता उनके कैंप में नहीं गई। एसआईटी के सदस्य शहर थाना प्रभारी ने बताया कि जसबीर कौर और राजेंद्र सिंह दीपवाला से हुई पूछताछ में मिले जवाबों से केस की जांच में मदद मिलेगी। चार आरोपियों की अभी तलाश की जा रही है।
सेना दिवस के अवसर पर रॉश (Army Dogs) को सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया था। आरआर के जवानों के डॉग सहयोगी' उस समय सैनिकों की पहरेदारी करते हैं जब वे सो रहे होते हैं। जम्मू-कश्मीर में तैनात 44वीं राष्ट्रीय राइफल के जवानों के लिए कुत्ते (Army Dogs) सबसे अच्छे दोस्तों में से हैं क्योंकि वे खतरे और तनाव दोनों को दूर रखने का काम करते हैं। दिन भर गश्त लगाने के बाद जवान जब लौटते हैं तब लैब्राडोर प्रजाति के रॉश के साथ खेलकर उन्हें ऊर्जा मिलती है। राष्ट्रीय राइफल (RR) के जवानों के साथ रॉश समेत छह कुत्ते देश को सुरक्षित रखने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। बल की इकाई के साथ रॉश' तापी और क्लायड नामक कुत्ते दक्षिण कश्मीर के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी रखते हैं जिनमें पुलवामा का लासीपुरा' इमाम साहब और शोपियां शामिल हैं। जवानों के साथ मिलकर ये कुत्ते (Army Dogs)' आईईडी विस्फोटकों का पता लगाने' हिंसक भीड़ का पीछा करने और फरार आतंकवादियों का पता लगाने जैसे काम को बखूबी अंजाम देते हैं। 44वीं आरआर के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कुत्तों के दल ने आतंकवाद रोधी कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और कई ऐसी घटनाओं को टालने में सफलता पाई है जिनमें सुरक्षा बलों के जवानों के लिए जान का खतरा हो सकता था। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, रॉश बल के लिए एक 'सेलिब्रिटी' की तरह है क्योंकि उसने पिछले साल हिजबुल मुजाहिदीन के एक वांछित आतंकवादी को पकड़ने में मदद की थी। उनके अनुसार आतंकवादी मुठभेड़ के स्थान से लगभग डेढ किलोमीटर दूर छुपा था जिसे रॉश ने पकड़वाया था। घटना को याद करते हुए वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शोपियां में रात को द्रगड़ गांव में मुठभेड़ हुई थी और सुरक्षा बलों को न तो आतंकवादियों की संख्या मालूम थी न उनकी सटीक स्थिति की जानकारी थी। सुबह एक खोजी दस्ते ने दो आतंकवादियों की पहचान की और खून के निशान देखे। हमने तत्काल रॉश (Army Dogs) को काम पर लगाया और खोज शुरू की। उसने गंध पकड़ ली थी। ऊंचे-नीचे रास्तों और घने बगीचों से होते हुए रॉश आतंकवादी का पीछा करता रहा जबकि खून के निशान लगभग गायब ही हो चुके थे। अचानक वह लकडियों के एक गठ्ठर पर कूदा जहां तीसरा आतंकवादी छुपा था। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभियान समाप्त होने के बाद तीसरे आतंकवादी की पहचान आबिद मंजूर मगरे उर्फ सुज्जु मगरे के रूप में की गई जो हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठन का कमांडर था और कई मामलों में वांछित था। इस साल सेना दिवस के अवसर पर रॉश (Army Dogs) को सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया था। आरआर के जवानों के डॉग सहयोगी' उस समय सैनिकों की पहरेदारी करते हैं जब वे सो रहे होते हैं। ये कुत्ते' जवानों को बारूदी सुंरगों से भी बचाते हैं। सेना के अधिकारी भी इन कुत्तों का पूरा ख्याल रखते हैं। वर्तमान में 'डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी' के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लों की वह तस्वीर खासी चर्चा में रही थी जिसमें वह 'मेनका' (Army Dogs) नामक कुतिया को सलामी दे रहे थे। अमरनाथ यात्रा के दौरान मेनका ने रास्ते को सूंघ कर संभावित विस्फोटकों के खतरे को नाकाम किया था। कई आतंक रोधी अभियानों के लिए इन कुत्तों को बहादुरी के पुरस्कार मिल चुके हैं। सेना की इकाई में शामिल मानसी (Army Dogs) नामक चार साल की लैब्राड़ोर को मरणोपरांत 'मेंशन इन डि़स्पैच' का प्रमाण पत्र दिया गया था। मरणोपरांत युद्ध पुरस्कार पाने वाली वह पहली डॉग थी। राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की खातिर मानसी का नाम भारत के राजपत्र में दर्ज है।
सेना दिवस के अवसर पर रॉश को सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया था। आरआर के जवानों के डॉग सहयोगी' उस समय सैनिकों की पहरेदारी करते हैं जब वे सो रहे होते हैं। जम्मू-कश्मीर में तैनात चौंतालीसवीं राष्ट्रीय राइफल के जवानों के लिए कुत्ते सबसे अच्छे दोस्तों में से हैं क्योंकि वे खतरे और तनाव दोनों को दूर रखने का काम करते हैं। दिन भर गश्त लगाने के बाद जवान जब लौटते हैं तब लैब्राडोर प्रजाति के रॉश के साथ खेलकर उन्हें ऊर्जा मिलती है। राष्ट्रीय राइफल के जवानों के साथ रॉश समेत छह कुत्ते देश को सुरक्षित रखने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। बल की इकाई के साथ रॉश' तापी और क्लायड नामक कुत्ते दक्षिण कश्मीर के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी रखते हैं जिनमें पुलवामा का लासीपुरा' इमाम साहब और शोपियां शामिल हैं। जवानों के साथ मिलकर ये कुत्ते ' आईईडी विस्फोटकों का पता लगाने' हिंसक भीड़ का पीछा करने और फरार आतंकवादियों का पता लगाने जैसे काम को बखूबी अंजाम देते हैं। चौंतालीसवीं आरआर के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कुत्तों के दल ने आतंकवाद रोधी कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और कई ऐसी घटनाओं को टालने में सफलता पाई है जिनमें सुरक्षा बलों के जवानों के लिए जान का खतरा हो सकता था। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, रॉश बल के लिए एक 'सेलिब्रिटी' की तरह है क्योंकि उसने पिछले साल हिजबुल मुजाहिदीन के एक वांछित आतंकवादी को पकड़ने में मदद की थी। उनके अनुसार आतंकवादी मुठभेड़ के स्थान से लगभग डेढ किलोमीटर दूर छुपा था जिसे रॉश ने पकड़वाया था। घटना को याद करते हुए वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शोपियां में रात को द्रगड़ गांव में मुठभेड़ हुई थी और सुरक्षा बलों को न तो आतंकवादियों की संख्या मालूम थी न उनकी सटीक स्थिति की जानकारी थी। सुबह एक खोजी दस्ते ने दो आतंकवादियों की पहचान की और खून के निशान देखे। हमने तत्काल रॉश को काम पर लगाया और खोज शुरू की। उसने गंध पकड़ ली थी। ऊंचे-नीचे रास्तों और घने बगीचों से होते हुए रॉश आतंकवादी का पीछा करता रहा जबकि खून के निशान लगभग गायब ही हो चुके थे। अचानक वह लकडियों के एक गठ्ठर पर कूदा जहां तीसरा आतंकवादी छुपा था। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभियान समाप्त होने के बाद तीसरे आतंकवादी की पहचान आबिद मंजूर मगरे उर्फ सुज्जु मगरे के रूप में की गई जो हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठन का कमांडर था और कई मामलों में वांछित था। इस साल सेना दिवस के अवसर पर रॉश को सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया था। आरआर के जवानों के डॉग सहयोगी' उस समय सैनिकों की पहरेदारी करते हैं जब वे सो रहे होते हैं। ये कुत्ते' जवानों को बारूदी सुंरगों से भी बचाते हैं। सेना के अधिकारी भी इन कुत्तों का पूरा ख्याल रखते हैं। वर्तमान में 'डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी' के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लों की वह तस्वीर खासी चर्चा में रही थी जिसमें वह 'मेनका' नामक कुतिया को सलामी दे रहे थे। अमरनाथ यात्रा के दौरान मेनका ने रास्ते को सूंघ कर संभावित विस्फोटकों के खतरे को नाकाम किया था। कई आतंक रोधी अभियानों के लिए इन कुत्तों को बहादुरी के पुरस्कार मिल चुके हैं। सेना की इकाई में शामिल मानसी नामक चार साल की लैब्राड़ोर को मरणोपरांत 'मेंशन इन डि़स्पैच' का प्रमाण पत्र दिया गया था। मरणोपरांत युद्ध पुरस्कार पाने वाली वह पहली डॉग थी। राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की खातिर मानसी का नाम भारत के राजपत्र में दर्ज है।
नागौर शहर में एक दिन पहले सोमवार को ऑटो में सवार महिला के पास बैठी 3 महिला चोरों द्वारा बड़ी सफाई से उसके गले में पहनी सोने की कंठी काटकर चुराने के मामले में सिग्मा वाहन में तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नागौर शहर के किले कि ढाल निवासी एक दूसरे ऑटो चालक मोमिन खान कायमखानी ने बताया कि उसने 3 महिलाओं की संदिग्ध हरकतों को देखते हुए वहीं पास में खड़े सिग्मा वाहन में तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल को आगाह किया था पर उसने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और 15 मिनिट बाद ही इन महिलाओं ने चोरी की वारदात को अंजाम दे दिया। मोमिन ने बताया कि उसने कुछ दिनों पहले भी इन महिलाओं को कई बार एक ऑटो से चढ़ते हुए और फिर थोड़ी देर बाद दूसरे ऑटो से चढ़ते हुए देखा था और ये औरते बिना कारण ही ऑटो से इधर-उधर दिन भर घूमती रहती थी। तब भी इन्होने गांधी चौक में एक ऑटो में सवार एक सवारी के साथ चोरी कि वारदात को अंजाम दिया था। इसके चलते जब उसने सोमवार को इन्हे देखा तो तुरंत ही पुलिस कॉन्स्टेबल को इनके प्रति आगाह कर दिया था पर उस कॉन्स्टेबल ने कोई ध्यान नहीं दिया। किला देवी पत्नी पन्नालाल नायक (55) निवासी नागौर शहर गांधी चौक से पुराना बस स्टेशन की तरफ ऑटो से जा रही थी। इसी दौरान ऑटो रुकवाकर 3 अन्य महिलाएं भी ऑटो में सवार हो किला देवी के पास आकर बैठ गईं और थोड़ा आगे चलते ही उतर गईं। इसके बाद जब पूरा बस स्टेशन में किला देवी ऑटो से उतरने लगी तो अचानक उन्हें अपने गले से सोने की कंठी गायब मिली। उन्होंने तुरंत ऑटो चालक को बताया तो उन दोनों को थोड़ी देर पहले ऑटो से उतरने वाली 3 महिलाओं पर चोरी का संदेह हुआ। तीनों महिलाओं की इधर-उधर खूब तलाश की गई पर कोई पता नहीं चला। अब पीड़िता किला देवी के परिजनों ने 3 अज्ञात चोर महिलाओं के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था।
नागौर शहर में एक दिन पहले सोमवार को ऑटो में सवार महिला के पास बैठी तीन महिला चोरों द्वारा बड़ी सफाई से उसके गले में पहनी सोने की कंठी काटकर चुराने के मामले में सिग्मा वाहन में तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नागौर शहर के किले कि ढाल निवासी एक दूसरे ऑटो चालक मोमिन खान कायमखानी ने बताया कि उसने तीन महिलाओं की संदिग्ध हरकतों को देखते हुए वहीं पास में खड़े सिग्मा वाहन में तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल को आगाह किया था पर उसने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और पंद्रह मिनिट बाद ही इन महिलाओं ने चोरी की वारदात को अंजाम दे दिया। मोमिन ने बताया कि उसने कुछ दिनों पहले भी इन महिलाओं को कई बार एक ऑटो से चढ़ते हुए और फिर थोड़ी देर बाद दूसरे ऑटो से चढ़ते हुए देखा था और ये औरते बिना कारण ही ऑटो से इधर-उधर दिन भर घूमती रहती थी। तब भी इन्होने गांधी चौक में एक ऑटो में सवार एक सवारी के साथ चोरी कि वारदात को अंजाम दिया था। इसके चलते जब उसने सोमवार को इन्हे देखा तो तुरंत ही पुलिस कॉन्स्टेबल को इनके प्रति आगाह कर दिया था पर उस कॉन्स्टेबल ने कोई ध्यान नहीं दिया। किला देवी पत्नी पन्नालाल नायक निवासी नागौर शहर गांधी चौक से पुराना बस स्टेशन की तरफ ऑटो से जा रही थी। इसी दौरान ऑटो रुकवाकर तीन अन्य महिलाएं भी ऑटो में सवार हो किला देवी के पास आकर बैठ गईं और थोड़ा आगे चलते ही उतर गईं। इसके बाद जब पूरा बस स्टेशन में किला देवी ऑटो से उतरने लगी तो अचानक उन्हें अपने गले से सोने की कंठी गायब मिली। उन्होंने तुरंत ऑटो चालक को बताया तो उन दोनों को थोड़ी देर पहले ऑटो से उतरने वाली तीन महिलाओं पर चोरी का संदेह हुआ। तीनों महिलाओं की इधर-उधर खूब तलाश की गई पर कोई पता नहीं चला। अब पीड़िता किला देवी के परिजनों ने तीन अज्ञात चोर महिलाओं के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था।
ऐतिहासिक नायकों की कहानियों को देखकर हमेशा हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। सलाम। एक महान भारतीय कहानी आती है, जो हमें अपना महान इतिहास बताती है। बेस्ट ऑफ लक!
ऐतिहासिक नायकों की कहानियों को देखकर हमेशा हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। सलाम। एक महान भारतीय कहानी आती है, जो हमें अपना महान इतिहास बताती है। बेस्ट ऑफ लक!
व्याख्यान भी एकत्र ही उनका सदा होता रहा । उस प्रेम पारावार मे लगता समुद्र गोता रहा ।। करके बिहार चले सभी मुनिराज अजरामर पुरी । चलने लगी तब पापियो के पेट मे पैनी बुरी ( ४४६ ) जिन धर्म का उपदेश करते आगये व्यावर सभी । ऐसा अलौकिक ठाठ धार्मिक या नहीं देखा कभी ॥ था जगमगाने लग गया व्यावर नगर मुख वत्र से । कटने लगे थे पाप-पुञ्ज प्रचण्ड वार्मिक शत्र से । ( ४५७ ) उस वक्त उन्निस सम्प्रदायों के वहा मुनिगज थे । सत्र जा रहे अजमेर ले मुनि सब के सुनदान थे ।। व्याख्यान सब के सम्मिलित सानन्द नित होने रहे। उस धर्म सरिता में लगाने भव्य जागोते रहे । ( ४४८ ) श्री पूज्य मुन्नालाल जी उस वक्त रोग मत्व थे। उनकी सुमेवा मे सभी मुनियन निशिदिन उपल ये ॥ लेने के लिये अजमेर जाना या उन्हें । चिरकाल के उस क्लेश को निश्चित मिटाना वा उन्हें पूज्य श्री खूबचन्द जी महाराज- चरित्र इस हेतु अनुपम पालजी तैयार करवाई गई। प्रस्थान की आई घड़ी प्रभु प्रार्थना गाई गई ॥ उसको स्वकन्धों पर उठाकर सन्त थे सच जा रहे । करके सुदशन पूज्य का नर नारि सब हरवा रहे ।। ( ४५० ) ब्यावर नगर से पूज्यवर के साथ अजरामर पुरी । आये चरित नायक हमारे क्लेश की करने चुरी ॥ जिस ठौर भारत वर्ष का था साधु सम्मेलन रचा। आया न हो जिसमें न ऐसा पूज्य था कोई बचा ॥ ( ४५१ ) होवे कलह का अन्त यह चिन्ता उन्हें सविशेष थी। उम मुक्ति पथ के पथिक की इच्छा यही वस शेष थी । मुनिराज मिश्रीलान का जीवन बचाने के लिये । अजमेर पहुंचे आप निज करतब दिखाने के लिये । ( ४५२ ) चर्चा करेंगे कुछ यहां उस वक्त के अजमेर की । सीमा न थी जिसमें चतुर्विध संघ के उस ढेर को ॥ जाओ जहां जिन धर्म की जयकार सुनलो कान से । देखो जहां झुनिराज को मस्तक झुका सम्मान से ॥ कोइ अहिंसा की ध्वजा कर मे जिए फहरा रहा। कोई बड़े उत्साह से सङ्गीत अद्भुत गा रहा ।। कोई बना सेवक स्वयं सङ्कत पथ का कर रहा । कोई पिलाने के लिये पानी कहीं पर भर रहा ।। ( ४५४ ) मध्याह्न में मुनि मण्डली आहार लेने आ रही। प्रातः कहीं श्री आर्यकॉ जी गीत धार्मिक गा रहीं ।। बाहर अनेको जा रहे हैं शौच सायकाल को । आश्चर्य होता था निरख के भव्य उनके भाल को । ( ४५५ ) होगा सुनिश्वत मेल अब चर्चा यही सर्वत्र थी । जिनके लिए जनता वहां इस रूप में एकत्र थी । था खूब इसमे श्रम किया श्री खूबचन्द्र मुनीश ने । उनके हृदय की प्रार्थना को सुन लिया जगदीश ने ॥ ( ४५६ ) श्री संघ के उत्साह से नेता जनो के यत्न से । था सफल सम्मेलन हुआ सबके अनिद्य प्रयत्न से । श्री पूज्य आपस में मिले उनके हृदय सरसिज खिले । कर क्रमिक वन्दन प्रेम से अन्योन्य सब मुनिवर मिले ।
व्याख्यान भी एकत्र ही उनका सदा होता रहा । उस प्रेम पारावार मे लगता समुद्र गोता रहा ।। करके बिहार चले सभी मुनिराज अजरामर पुरी । चलने लगी तब पापियो के पेट मे पैनी बुरी जिन धर्म का उपदेश करते आगये व्यावर सभी । ऐसा अलौकिक ठाठ धार्मिक या नहीं देखा कभी ॥ था जगमगाने लग गया व्यावर नगर मुख वत्र से । कटने लगे थे पाप-पुञ्ज प्रचण्ड वार्मिक शत्र से । उस वक्त उन्निस सम्प्रदायों के वहा मुनिगज थे । सत्र जा रहे अजमेर ले मुनि सब के सुनदान थे ।। व्याख्यान सब के सम्मिलित सानन्द नित होने रहे। उस धर्म सरिता में लगाने भव्य जागोते रहे । श्री पूज्य मुन्नालाल जी उस वक्त रोग मत्व थे। उनकी सुमेवा मे सभी मुनियन निशिदिन उपल ये ॥ लेने के लिये अजमेर जाना या उन्हें । चिरकाल के उस क्लेश को निश्चित मिटाना वा उन्हें पूज्य श्री खूबचन्द जी महाराज- चरित्र इस हेतु अनुपम पालजी तैयार करवाई गई। प्रस्थान की आई घड़ी प्रभु प्रार्थना गाई गई ॥ उसको स्वकन्धों पर उठाकर सन्त थे सच जा रहे । करके सुदशन पूज्य का नर नारि सब हरवा रहे ।। ब्यावर नगर से पूज्यवर के साथ अजरामर पुरी । आये चरित नायक हमारे क्लेश की करने चुरी ॥ जिस ठौर भारत वर्ष का था साधु सम्मेलन रचा। आया न हो जिसमें न ऐसा पूज्य था कोई बचा ॥ होवे कलह का अन्त यह चिन्ता उन्हें सविशेष थी। उम मुक्ति पथ के पथिक की इच्छा यही वस शेष थी । मुनिराज मिश्रीलान का जीवन बचाने के लिये । अजमेर पहुंचे आप निज करतब दिखाने के लिये । चर्चा करेंगे कुछ यहां उस वक्त के अजमेर की । सीमा न थी जिसमें चतुर्विध संघ के उस ढेर को ॥ जाओ जहां जिन धर्म की जयकार सुनलो कान से । देखो जहां झुनिराज को मस्तक झुका सम्मान से ॥ कोइ अहिंसा की ध्वजा कर मे जिए फहरा रहा। कोई बड़े उत्साह से सङ्गीत अद्भुत गा रहा ।। कोई बना सेवक स्वयं सङ्कत पथ का कर रहा । कोई पिलाने के लिये पानी कहीं पर भर रहा ।। मध्याह्न में मुनि मण्डली आहार लेने आ रही। प्रातः कहीं श्री आर्यकॉ जी गीत धार्मिक गा रहीं ।। बाहर अनेको जा रहे हैं शौच सायकाल को । आश्चर्य होता था निरख के भव्य उनके भाल को । होगा सुनिश्वत मेल अब चर्चा यही सर्वत्र थी । जिनके लिए जनता वहां इस रूप में एकत्र थी । था खूब इसमे श्रम किया श्री खूबचन्द्र मुनीश ने । उनके हृदय की प्रार्थना को सुन लिया जगदीश ने ॥ श्री संघ के उत्साह से नेता जनो के यत्न से । था सफल सम्मेलन हुआ सबके अनिद्य प्रयत्न से । श्री पूज्य आपस में मिले उनके हृदय सरसिज खिले । कर क्रमिक वन्दन प्रेम से अन्योन्य सब मुनिवर मिले ।
इलेक्ट्रिक साइकिल ब्रांड URTOPIA ने शुक्रवार को घोषणा कीप्री-ए राउंड फाइनेंसिंग पूरी हो चुकी हैलगभग 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल राशि के साथ, यह संयुक्त रूप से लाइट स्पीड चाइना पार्टनर्स और डीसीएम के नेतृत्व में है, जिसमें ओब्सीडियन कैपिटल अनन्य वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करता है। धन के इस दौर का उपयोग बाजार विस्तार, प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास और प्रतिभा आकर्षण के लिए किया जाएगा। कंपनी की स्थापना 2021 में हुई थी। ब्रांड निर्माण के संदर्भ में, कंपनी "जुनून को प्रेरित करने और जीवन को सक्रिय करने" की वकालत करती है। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे कम कार्बन वाली जीवनशैली मुख्यधारा के वैश्विक समाज द्वारा तेजी से स्वीकार की जाती है, इलेक्ट्रिक साइकिल से अगली पीढ़ी के परिवहन का सबसे लोकप्रिय साधन बनने की उम्मीद है। फर्म की इलेक्ट्रिक साइकिल बॉडी कार्बन फाइबर से बनी है और इसका वजन केवल 13.5 किलोग्राम है। औद्योगिक डिजाइनर साइकिल में 350Wh बैटरी छिपाते हैं और 250W इन-व्हील मोटर से लैस होते हैं, जो 2.5 घंटे चार्ज कर सकते हैं और 100 किलोमीटर तक रह सकते हैं। उपयोगकर्ता सही हैंडलबार बटन पर फिंगरप्रिंट लगाकर इलेक्ट्रिक साइकिल को अनलॉक कर सकते हैं। नियंत्रण बटन स्मार्ट हैंडल के बाईं ओर है, जिससे उपयोगकर्ता को गति, गियर और सवारी मोड को समायोजित करने के लिए ऊपर और नीचे बटन दबाने की अनुमति मिलती है। जब अंधेरा होता है, तो बाएं और दाएं बटन को ग्राउंड टर्न सिग्नल बेल्ट पर मोड़ने के लिए दबाएं। जब इलेक्ट्रिक साइकिल के पीछे बाधाएं होती हैं, तो वे हैंडलबार के कंपन के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को याद दिलाने के लिए मिलीमीटर वेव रडार से लैस होते हैं। सॉफ्टवेयर के संदर्भ में, कंपनी ने स्वतंत्र रूप से कारों, बादलों और एक एपीपी के बीच बुद्धिमान भाषण मान्यता और डेटा इंटरकनेक्शन सिस्टम विकसित किया है। कंपनी के पास उपयोगकर्ता अनुभव के लिए कुछ विस्तृत डिजाइन भी हैं, जैसे कि रिमोट अनलॉकिंग, कार नेविगेशन, वॉयस कंट्रोल, इंटेलिजेंट टॉर्क मुआवजा, मोशन डेटा शेयरिंग, कार्बन फुटप्रिंट ट्रैकिंग, आदि। पिछले तीन वर्षों में, वैश्विक इलेक्ट्रिक साइकिल बाजार में काफी वृद्धि हुई है, जो 2020 में $25 बिलियन से अधिक है। एक ओर, इलेक्ट्रिक साइकिलों ने वैश्विक हरियाली नीतियों के प्रचार के लिए अधिक ध्यान और समर्थन प्राप्त किया है। चीन के प्रासंगिक राष्ट्रीय मानकों का अद्यतन मानकीकरण, हल्के वजन और बुद्धिमत्ता की दिशा में मोटरसाइकिल उद्योग के विकास को बढ़ावा दे रहा है। दूसरी ओर, नए मुकुट निमोनिया महामारी ने लोगों को अपने स्वास्थ्य और व्यायाम पर अधिक ध्यान दिया है। इलेक्ट्रिक साइकिल मूल संरचना में पारंपरिक साइकिल के समान हैं, लेकिन वे बिजली प्रणालियों की सहायता से मध्यम और लंबी दूरी की यात्रा की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उनके पास आवागमन और खेल दोनों गुण हैं और पारंपरिक साइकिल की तुलना में काफी बेहतर अनुभव है।
इलेक्ट्रिक साइकिल ब्रांड URTOPIA ने शुक्रवार को घोषणा कीप्री-ए राउंड फाइनेंसिंग पूरी हो चुकी हैलगभग दस मिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल राशि के साथ, यह संयुक्त रूप से लाइट स्पीड चाइना पार्टनर्स और डीसीएम के नेतृत्व में है, जिसमें ओब्सीडियन कैपिटल अनन्य वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करता है। धन के इस दौर का उपयोग बाजार विस्तार, प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास और प्रतिभा आकर्षण के लिए किया जाएगा। कंपनी की स्थापना दो हज़ार इक्कीस में हुई थी। ब्रांड निर्माण के संदर्भ में, कंपनी "जुनून को प्रेरित करने और जीवन को सक्रिय करने" की वकालत करती है। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे कम कार्बन वाली जीवनशैली मुख्यधारा के वैश्विक समाज द्वारा तेजी से स्वीकार की जाती है, इलेक्ट्रिक साइकिल से अगली पीढ़ी के परिवहन का सबसे लोकप्रिय साधन बनने की उम्मीद है। फर्म की इलेक्ट्रिक साइकिल बॉडी कार्बन फाइबर से बनी है और इसका वजन केवल तेरह दशमलव पाँच किलोग्रामग्राम है। औद्योगिक डिजाइनर साइकिल में तीन सौ पचासWh बैटरी छिपाते हैं और दो सौ पचास वाट इन-व्हील मोटर से लैस होते हैं, जो दो दशमलव पाँच घंटाटे चार्ज कर सकते हैं और एक सौ किलोग्राममीटर तक रह सकते हैं। उपयोगकर्ता सही हैंडलबार बटन पर फिंगरप्रिंट लगाकर इलेक्ट्रिक साइकिल को अनलॉक कर सकते हैं। नियंत्रण बटन स्मार्ट हैंडल के बाईं ओर है, जिससे उपयोगकर्ता को गति, गियर और सवारी मोड को समायोजित करने के लिए ऊपर और नीचे बटन दबाने की अनुमति मिलती है। जब अंधेरा होता है, तो बाएं और दाएं बटन को ग्राउंड टर्न सिग्नल बेल्ट पर मोड़ने के लिए दबाएं। जब इलेक्ट्रिक साइकिल के पीछे बाधाएं होती हैं, तो वे हैंडलबार के कंपन के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को याद दिलाने के लिए मिलीमीटर वेव रडार से लैस होते हैं। सॉफ्टवेयर के संदर्भ में, कंपनी ने स्वतंत्र रूप से कारों, बादलों और एक एपीपी के बीच बुद्धिमान भाषण मान्यता और डेटा इंटरकनेक्शन सिस्टम विकसित किया है। कंपनी के पास उपयोगकर्ता अनुभव के लिए कुछ विस्तृत डिजाइन भी हैं, जैसे कि रिमोट अनलॉकिंग, कार नेविगेशन, वॉयस कंट्रोल, इंटेलिजेंट टॉर्क मुआवजा, मोशन डेटा शेयरिंग, कार्बन फुटप्रिंट ट्रैकिंग, आदि। पिछले तीन वर्षों में, वैश्विक इलेक्ट्रिक साइकिल बाजार में काफी वृद्धि हुई है, जो दो हज़ार बीस में पच्चीस डॉलर बिलियन से अधिक है। एक ओर, इलेक्ट्रिक साइकिलों ने वैश्विक हरियाली नीतियों के प्रचार के लिए अधिक ध्यान और समर्थन प्राप्त किया है। चीन के प्रासंगिक राष्ट्रीय मानकों का अद्यतन मानकीकरण, हल्के वजन और बुद्धिमत्ता की दिशा में मोटरसाइकिल उद्योग के विकास को बढ़ावा दे रहा है। दूसरी ओर, नए मुकुट निमोनिया महामारी ने लोगों को अपने स्वास्थ्य और व्यायाम पर अधिक ध्यान दिया है। इलेक्ट्रिक साइकिल मूल संरचना में पारंपरिक साइकिल के समान हैं, लेकिन वे बिजली प्रणालियों की सहायता से मध्यम और लंबी दूरी की यात्रा की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उनके पास आवागमन और खेल दोनों गुण हैं और पारंपरिक साइकिल की तुलना में काफी बेहतर अनुभव है।
दिलेर समाचार, नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) ने एक्टिविस्ट साकेत गोखले (Saket Gokhle) को संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी (Laxmi Puri) के खिलाफ सभी ट्वीट हटाने का आदेश दिया है. दरअसल, सोशल वर्कर साकेत गोखले के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का मामला दाखिल किया गया था. उन्होंने बीते दिनों केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी (Hardeep Singh Puri) की पत्नी लक्ष्मी पुरी के खिलाफ उनकी संपत्ति को लेकर ट्वीट किया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि साकेत गोखले लक्ष्मी पुरी के खिलाफ किए गए ट्वीट तुरंत डिलीट करें. अदालत ने कहा कि अगर डिलीट नहीं करते तो ट्वीटर इस ट्वीट को हटाए. साथ ही हाईकोर्ट ने. कहा कि गोखले लक्ष्मी पुरी के खिलाफ कोई नई ट्वीट नही करेंगे. इसके बाद कोर्ट ने गोखले के खिलाफ सिविल अवमाना का मामला चलाने की इजाजत दी. बता दें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी लक्ष्मी पुरी ने अवमानना की याचिका दाखिल की है जिसमें गोखले के ट्वीट को डिलीट करने और 5 करोड के मुआवजे की मांग की गई है. गोखले ने 13 और 26 जून को अपने ट्वीट में स्विट्जरलैंड में पुरी द्वारा कथित तौर पर संपत्ति खरीदने का हवाला दिया था और उनके पति एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी संदर्भ दिया गया था.
दिलेर समाचार, नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टिविस्ट साकेत गोखले को संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी के खिलाफ सभी ट्वीट हटाने का आदेश दिया है. दरअसल, सोशल वर्कर साकेत गोखले के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का मामला दाखिल किया गया था. उन्होंने बीते दिनों केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की पत्नी लक्ष्मी पुरी के खिलाफ उनकी संपत्ति को लेकर ट्वीट किया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि साकेत गोखले लक्ष्मी पुरी के खिलाफ किए गए ट्वीट तुरंत डिलीट करें. अदालत ने कहा कि अगर डिलीट नहीं करते तो ट्वीटर इस ट्वीट को हटाए. साथ ही हाईकोर्ट ने. कहा कि गोखले लक्ष्मी पुरी के खिलाफ कोई नई ट्वीट नही करेंगे. इसके बाद कोर्ट ने गोखले के खिलाफ सिविल अवमाना का मामला चलाने की इजाजत दी. बता दें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी लक्ष्मी पुरी ने अवमानना की याचिका दाखिल की है जिसमें गोखले के ट्वीट को डिलीट करने और पाँच करोड के मुआवजे की मांग की गई है. गोखले ने तेरह और छब्बीस जून को अपने ट्वीट में स्विट्जरलैंड में पुरी द्वारा कथित तौर पर संपत्ति खरीदने का हवाला दिया था और उनके पति एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी संदर्भ दिया गया था.
ततोऽञ्जलिपुट बद्ध्वा रुदती जनकात्मजा । जगदिादरसयुक्ता विचिन्तितयथास्थिति ॥१४५॥ ' अन्तरेण प्रभोराज्ञां गमन मे न युज्यते । इत्यवस्था गता दास्ये तस्मै किमहमुत्तरम् ।।१४६॥ प्रत्येति नाथुना लोक शुद्धि मे मृत्युना विना । नाथ एव ततः कृत्य मम ज्ञास्यति साम्प्रतम् ॥१४७॥ यावन्नोपद्रव कश्चिज्जायते दशवक्त्रकात् । तावद्व्रज द्रुत भ्रातर्नालम्बन मिह क्षणम् ॥१४८॥ त्वया महचनाद् वाच्य सम्यक् प्राणमहेश्वर । अभिधान रिमैन निधाय करकुड्मलम् ।।१४६॥ तस्मिन् देव मया सार्द्ध मुनयो व्योमचारिण । वन्दिता परम भक्त्या त्वया स्तवनकारिणा ।।१५० ।। विमलाम्भसि पद्मिन्या नितरामुपशोभिते । सरसि कोडता स्वेच्छमस्माकमतिसुन्दरम् ॥१५॥ आरण्यकस्तदा हस्ती समायातो भयङ्करः । ततो मया समातस्त्वमुन्मग्रो जलान्तरात् ॥१५२॥ ' उद्दामाऽसौ महानागवारुकीडनकारिणा । समस्त त्याजितो दप्पं भवता निश्चलीकृत ॥१५३॥ आसीच नन्दनच्छाये वने पुष्पभरानते । शाखा पल्लवलोभेन नमयन्ती प्रयासिनी ।।१५४।। भ्रमद्भिश्चञ्चलभृंगैरभिभूता ससम्भ्रमा । भुजाभ्या भवताश्लिष्य जनिताकुलतोझिता ॥१५५॥ उद्यन्तमन्यदा भानु माहेन्द्रीदिग्विभूषणम् । अहमम्भोजषण्डस्य त्वया सह तटे स्थिता ॥ १५६॥ अशसिष ततः किञ्चिदीयरसमुपेयुषा । बालेनोत्पलनालेन मधुर ताडिता त्वया ॥१५७ ॥ अन्यदा रतिशैलस्य प्राग्भारस्य मया प्रिय । पृष्टस्त्वमिति विभ्रत्या कौतुक परशोभया १५८।। एतस्मिन् कुसुमै पूर्णा विपुला स्निग्धताजुष । किन्नामानो द्रुमा नाथ मनोहरणंकोविदा ॥१५॥ ध्यान में तत्पर रहने वाले रामके दर्शन करो तथा प्रेमी जन - मित्रगण आप दोनोके समागमसे उत्पन्न होनेवाले हर्षका अनुभव करे ॥१४४॥ तदनन्तर सब स्थितिका यथायोग्य विचार करनेवाली एवं आदरसे संयुक्त सीताने हाथ जोड़कर रोती हुई यह कहा कि स्वामी की आज्ञाके बिना मेरा जाना योग्य नहीं है । इस अवस्था मे पड़ी हुई मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगी ॥१४५-९४६ ॥ इस समय लोग मृत्युके बिना मेरी शुद्धिका प्रत्यय नहीं करेगे, इसलिए प्राणनाथ ही आकर मेरे कार्यको योग्य जानेगे ।।१४७॥ हे भाई ! जब तक रावणकी ओरसे कोई उपद्रव नही होता है तब तक तू शीघ्र ही यहाँसे चला जा । यहाँ क्षणभर भी विलम्ब मत कर ।।१४८।। तू हाथ जोड़ मस्तकसे लगा, इन परिचायक कथानकोके साथ-साथ मेरे वचनोमे प्राणनाथसे अच्छी तरह कहना कि हे देव । उस वनमें एक दिन स्तवन करते हुए आपने मेरे साथ बड़ी भक्ति से आकाशगामी मुनियोकी वन्दना की थी ॥१४६-१५०॥ एक बार निर्मल जलसे युक्त तथा कमलिनियोसे सुशोभित सरोवरमे हमलोग इच्छानुसार सुन्दर क्रीड़ा कर रहे थे कि इतनेमे एक भयङ्कर जङ्गली हाथी वहाँ आ गया था, उस समय मैने आपको पुकारा था सो आप जलके मध्यसे तत्काल ऊपर निकल आये थे ॥१५१-१५२॥ और सुन्दर क्रीड़ा करते हुए आपने उस उद्दण्ड महाहस्तीका सब गर्व छुड़ाकर उसे निश्चल कर दिया था ।।१५३॥ एक बार नन्दनवनके समान सुन्दर तथा फूलोके भारसे झुके हुए वनमे, मै नूतन पत्रोके लोभसे प्रयत्नपूर्वक वृक्षको एक शाखाको झुका रही थी। तब उड़ते हुए चञ्चल भ्रमरोंने धावा बोलकर मुझे आकुल कर दिया था, उस समय मुझ घबड़ायी हुईको आपने अपनी भुजाओसे आलिङ्गन कर छुड़ाया था ॥१५४-१५५।। एक बार मैं आपके साथ कमलवनके तटपर बैठी थी उसी समय पूर्व दिशाके आभूषणस्वरूप सूर्यको उदित होता देख मैने उसको प्रशंसा की थी तब आपने कुछ ईर्ष्यारसको प्राप्त हो मुझे नीलकमलकी एक छोटी-सी दंडीसे मधुर रीतिसे ताडित किया ।।१५६-९५७। एक बार रतिगिरि के शिखर पर अत्यधिक शोभाके कारण कौतुकको धारण करती हुई मैने आपसे पूछा था कि हे प्रिय । इधर फूलोसे परिपूर्ण, विशाल, स्निग्धताको धारण करनेवाले एवं मनके हरण करनेमे निपुण ये कौनसे वृक्ष है ? ॥१५८-१५६।। तब इस प्रकार १. विना । २. साहृतः म० । ३ उद्दामोऽसौ म०१ ४. रतिभूता म० ।
ततोऽञ्जलिपुट बद्ध्वा रुदती जनकात्मजा । जगदिादरसयुक्ता विचिन्तितयथास्थिति ॥एक सौ पैंतालीस॥ ' अन्तरेण प्रभोराज्ञां गमन मे न युज्यते । इत्यवस्था गता दास्ये तस्मै किमहमुत्तरम् ।।एक सौ छियालीस॥ प्रत्येति नाथुना लोक शुद्धि मे मृत्युना विना । नाथ एव ततः कृत्य मम ज्ञास्यति साम्प्रतम् ॥एक सौ सैंतालीस॥ यावन्नोपद्रव कश्चिज्जायते दशवक्त्रकात् । तावद्व्रज द्रुत भ्रातर्नालम्बन मिह क्षणम् ॥एक सौ अड़तालीस॥ त्वया महचनाद् वाच्य सम्यक् प्राणमहेश्वर । अभिधान रिमैन निधाय करकुड्मलम् ।।एक सौ छियालीस॥ तस्मिन् देव मया सार्द्ध मुनयो व्योमचारिण । वन्दिता परम भक्त्या त्वया स्तवनकारिणा ।।एक सौ पचास ।। विमलाम्भसि पद्मिन्या नितरामुपशोभिते । सरसि कोडता स्वेच्छमस्माकमतिसुन्दरम् ॥पंद्रह॥ आरण्यकस्तदा हस्ती समायातो भयङ्करः । ततो मया समातस्त्वमुन्मग्रो जलान्तरात् ॥एक सौ बावन॥ ' उद्दामाऽसौ महानागवारुकीडनकारिणा । समस्त त्याजितो दप्पं भवता निश्चलीकृत ॥एक सौ तिरेपन॥ आसीच नन्दनच्छाये वने पुष्पभरानते । शाखा पल्लवलोभेन नमयन्ती प्रयासिनी ।।एक सौ चौवन।। भ्रमद्भिश्चञ्चलभृंगैरभिभूता ससम्भ्रमा । भुजाभ्या भवताश्लिष्य जनिताकुलतोझिता ॥एक सौ पचपन॥ उद्यन्तमन्यदा भानु माहेन्द्रीदिग्विभूषणम् । अहमम्भोजषण्डस्य त्वया सह तटे स्थिता ॥ एक सौ छप्पन॥ अशसिष ततः किञ्चिदीयरसमुपेयुषा । बालेनोत्पलनालेन मधुर ताडिता त्वया ॥एक सौ सत्तावन ॥ अन्यदा रतिशैलस्य प्राग्भारस्य मया प्रिय । पृष्टस्त्वमिति विभ्रत्या कौतुक परशोभया एक सौ अट्ठावन।। एतस्मिन् कुसुमै पूर्णा विपुला स्निग्धताजुष । किन्नामानो द्रुमा नाथ मनोहरणंकोविदा ॥पंद्रह॥ ध्यान में तत्पर रहने वाले रामके दर्शन करो तथा प्रेमी जन - मित्रगण आप दोनोके समागमसे उत्पन्न होनेवाले हर्षका अनुभव करे ॥एक सौ चौंतालीस॥ तदनन्तर सब स्थितिका यथायोग्य विचार करनेवाली एवं आदरसे संयुक्त सीताने हाथ जोड़कर रोती हुई यह कहा कि स्वामी की आज्ञाके बिना मेरा जाना योग्य नहीं है । इस अवस्था मे पड़ी हुई मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगी ॥एक सौ पैंतालीस-नौ सौ छियालीस ॥ इस समय लोग मृत्युके बिना मेरी शुद्धिका प्रत्यय नहीं करेगे, इसलिए प्राणनाथ ही आकर मेरे कार्यको योग्य जानेगे ।।एक सौ सैंतालीस॥ हे भाई ! जब तक रावणकी ओरसे कोई उपद्रव नही होता है तब तक तू शीघ्र ही यहाँसे चला जा । यहाँ क्षणभर भी विलम्ब मत कर ।।एक सौ अड़तालीस।। तू हाथ जोड़ मस्तकसे लगा, इन परिचायक कथानकोके साथ-साथ मेरे वचनोमे प्राणनाथसे अच्छी तरह कहना कि हे देव । उस वनमें एक दिन स्तवन करते हुए आपने मेरे साथ बड़ी भक्ति से आकाशगामी मुनियोकी वन्दना की थी ॥एक सौ छियालीस-एक सौ पचास॥ एक बार निर्मल जलसे युक्त तथा कमलिनियोसे सुशोभित सरोवरमे हमलोग इच्छानुसार सुन्दर क्रीड़ा कर रहे थे कि इतनेमे एक भयङ्कर जङ्गली हाथी वहाँ आ गया था, उस समय मैने आपको पुकारा था सो आप जलके मध्यसे तत्काल ऊपर निकल आये थे ॥एक सौ इक्यावन-एक सौ बावन॥ और सुन्दर क्रीड़ा करते हुए आपने उस उद्दण्ड महाहस्तीका सब गर्व छुड़ाकर उसे निश्चल कर दिया था ।।एक सौ तिरेपन॥ एक बार नन्दनवनके समान सुन्दर तथा फूलोके भारसे झुके हुए वनमे, मै नूतन पत्रोके लोभसे प्रयत्नपूर्वक वृक्षको एक शाखाको झुका रही थी। तब उड़ते हुए चञ्चल भ्रमरोंने धावा बोलकर मुझे आकुल कर दिया था, उस समय मुझ घबड़ायी हुईको आपने अपनी भुजाओसे आलिङ्गन कर छुड़ाया था ॥एक सौ चौवन-एक सौ पचपन।। एक बार मैं आपके साथ कमलवनके तटपर बैठी थी उसी समय पूर्व दिशाके आभूषणस्वरूप सूर्यको उदित होता देख मैने उसको प्रशंसा की थी तब आपने कुछ ईर्ष्यारसको प्राप्त हो मुझे नीलकमलकी एक छोटी-सी दंडीसे मधुर रीतिसे ताडित किया ।।एक सौ छप्पन-नौ सौ सत्तावन। एक बार रतिगिरि के शिखर पर अत्यधिक शोभाके कारण कौतुकको धारण करती हुई मैने आपसे पूछा था कि हे प्रिय । इधर फूलोसे परिपूर्ण, विशाल, स्निग्धताको धारण करनेवाले एवं मनके हरण करनेमे निपुण ये कौनसे वृक्ष है ? ॥एक सौ अट्ठावन-एक सौ छप्पन।। तब इस प्रकार एक. विना । दो. साहृतः मशून्य । तीन उद्दामोऽसौ मएक चार. रतिभूता मशून्य ।
सोशल नेटवर्किंग की आज के ज़माने में whatsapp messenger सबसे पॉपुलर mobile Apps है इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp दुनियाभर में जितना पॉपुलर है शायद ही कोई दूसरा ऐप होगा. ये लोकप्रिय इसलिए भी क्योंकि ये अपने यूजर्स के लिए हर तरह की सुविधा पेश करने की कोशिश करता है. इस ऐप को चलाने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत पड़ती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लैंडलाइन नंबर से भी WhatsApp चलाया जा सकता है. जी हां, आप व्हाट्सऐप लैंडलाइन नंबर के जरिए भी चला सकते हैं. read also,,बेटे शौविक की गिरफ्तारी पर रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने कही ये बात. . अक्सर बिजनेसमैन अपने पर्सनल मोबाइल नंबर को ही बिजनेस में यूज करते हैं. लेकिन ये कम ही लोग जानते हैं कि मोबाइल नंबर की जगह लैंडलाइन से भी इस ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यूजर्स अपने लैंडलाइन नंबर को सीधे WhatsApp Business ऐप से जोड़ सकते हैं. 1. सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में व्हाट्सऐप बिजनेस इंस्टॉल कर लें. अब अपने मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप पर ऐप को ओपन करें. 2. इसके बाद आपसे कंट्री कोड पूछा जाएगा. फिर 10 अंकों का मोबाइल नंबर डालने को कहा जाएगा. यहां पर आप अपना लैंडलाइन नंबर भी डाल सकते हैं. 3. ऐप में वैरिफिकेशन एसएमएस या कॉलिंग के जरिए होगा. हमनें लैंडलाइन का यूज किया है इसलिए मैसेज तो नहीं आएगा. लेकिन ऐप पहले एसएमएस ही भेजता है, फिर एक मिनट बाद दोबारा मैसेज या कॉल करने वाला बटन एक्टिव हो जाता है. यहां पर आपको Call Me का ऑप्शन सलेक्ट करना है. 4. आप जैसे ही कॉल का ऑप्शन सलेक्ट करेंगे, आपके लैंडलाइन नंबर पर कॉल आएगा. यह एक ऑटोमैटिक वॉयस कॉल होगा. इसमें आपको 6 अंकों का वैरिफिकेशन कोड बताया जाएगा. 5. आप इसी वैरिफिकेशन कोड को ऐप में एंटर कर दें. इसके बाद आपका व्हाट्सऐप अकाउंट लैंडलाइन नंबर पर सेट हो जाएगा. यहां पर पहले की तरह प्रोफाइल फोटो और नाम रखा जा सकता है.
सोशल नेटवर्किंग की आज के ज़माने में whatsapp messenger सबसे पॉपुलर mobile Apps है इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp दुनियाभर में जितना पॉपुलर है शायद ही कोई दूसरा ऐप होगा. ये लोकप्रिय इसलिए भी क्योंकि ये अपने यूजर्स के लिए हर तरह की सुविधा पेश करने की कोशिश करता है. इस ऐप को चलाने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत पड़ती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लैंडलाइन नंबर से भी WhatsApp चलाया जा सकता है. जी हां, आप व्हाट्सऐप लैंडलाइन नंबर के जरिए भी चला सकते हैं. read also,,बेटे शौविक की गिरफ्तारी पर रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने कही ये बात. . अक्सर बिजनेसमैन अपने पर्सनल मोबाइल नंबर को ही बिजनेस में यूज करते हैं. लेकिन ये कम ही लोग जानते हैं कि मोबाइल नंबर की जगह लैंडलाइन से भी इस ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यूजर्स अपने लैंडलाइन नंबर को सीधे WhatsApp Business ऐप से जोड़ सकते हैं. एक. सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में व्हाट्सऐप बिजनेस इंस्टॉल कर लें. अब अपने मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप पर ऐप को ओपन करें. दो. इसके बाद आपसे कंट्री कोड पूछा जाएगा. फिर दस अंकों का मोबाइल नंबर डालने को कहा जाएगा. यहां पर आप अपना लैंडलाइन नंबर भी डाल सकते हैं. तीन. ऐप में वैरिफिकेशन एसएमएस या कॉलिंग के जरिए होगा. हमनें लैंडलाइन का यूज किया है इसलिए मैसेज तो नहीं आएगा. लेकिन ऐप पहले एसएमएस ही भेजता है, फिर एक मिनट बाद दोबारा मैसेज या कॉल करने वाला बटन एक्टिव हो जाता है. यहां पर आपको Call Me का ऑप्शन सलेक्ट करना है. चार. आप जैसे ही कॉल का ऑप्शन सलेक्ट करेंगे, आपके लैंडलाइन नंबर पर कॉल आएगा. यह एक ऑटोमैटिक वॉयस कॉल होगा. इसमें आपको छः अंकों का वैरिफिकेशन कोड बताया जाएगा. पाँच. आप इसी वैरिफिकेशन कोड को ऐप में एंटर कर दें. इसके बाद आपका व्हाट्सऐप अकाउंट लैंडलाइन नंबर पर सेट हो जाएगा. यहां पर पहले की तरह प्रोफाइल फोटो और नाम रखा जा सकता है.
पवित्रताका संचार होता है। इसी बातको मौर अच्छे शब्दों में निम्नकारिकाद्वारा स्पष्ट किया गया है-स्तुतिः स्तोतुः साधोः कुशलपरिणामाय स तदा भवेन्मा वा स्तुत्यः फलमपि ततस्तस्य च सत. किमेवं स्वाधीन्याज्जगति सुलभे श्रायसपथे स्तुयान्न त्वा विद्वान्सततमभिपूज्यं नमिजिनम् ।।११६॥ इसमें बतलाया है कि- 'स्तुतिके समय और स्थानपर स्तुत्य चाहे मौजूद हो या न हो और फलकी प्राप्ति भी चाहे सीधी ( Direct ) उसके द्वारा होतो. हो या न होती हो, परन्तु आत्मसाधना में तत्पर साधुस्तोताकी - विवेकके साथ भक्तिभावपूर्वक स्तुति करनेवालेकी स्तुति कुशलपरिणामकी - पुण्यप्रसाधक या पवित्रता- विधायक शुभभावोंकी-कारण जरूर होती है; और वह कुशलपरिणाम अथवा तज्जन्य पुण्यविशेष श्रेय फलका दाता हैं। जब जगत में इस तरह स्वाधीनतासे श्रेयोमार्ग सुलभ है - स्वयं प्रस्तुत की गई अपनी स्तुतिके द्वारा प्राप्य है - तब हे सर्वदा अभिपूज्य नमि-जिन ! ऐसा कौन विद्वान् - परीक्षापूर्वकारी मथवा विवेकी जन- है जो आपकी स्तुति न करे ? करे ही करे। अनेक स्थानोंपर समन्तभद्रने जिनेन्द्रकी स्तुति करने में अपनी असमर्थता व्यक्त करते हुए अपनेको अज्ञ ( १५ ), बालक (३०) तथा अल्पधी ( ५६ ) के रूप में उल्लिखित किया है; परन्तु एक स्थानपर तो उन्होने अपनी भक्ति तथा विनम्रता की पराकाष्ठा ही कर दी है, जब इतने महान् ज्ञानी होते हुए और इतनी प्रौढ स्तुति रचते हुए भी वे लिखते हैं - त्वमीदृशस्तादृश इत्ययं मम प्रलाप-लेशोऽल्प- मतेर्महामुने ! अशेष-माहात्म्यमनीरयन्नपि शिवाय संस्पर्श इवाऽमृताम्बुधेः ॥७०॥ '( हे भगवन् ! ) आप ऐसे है, वैसे है - प्रापके ये गुरण हैं, के गुर है-इस प्रकार स्तुतिरूपमें मुझ अल्पमंतिका-यथावत् गुणोंके परिशानसे रहित स्तोताका - यह थोड़ासा प्रलाप है । ( तब क्या यह निष्फल होगा ? नहीं । ) अमृतसमुद्रके अशेष माहात्म्यको न जानते और न कंथन करते हुए भी जिस प्रकार उसका संस्पर्श कल्याणकारक होता है उसी प्रकार हे महामुने ! आपके भशेष माहात्म्यको न जानते और न कथन करते हुए भी मेरा यह थोडासा प्रलाप आपके गुरगोके सस्पर्शरूप होनेसे कल्यारणका ही हेतु है।' इससे जिनेन्द्र गुणोका स्पर्शमात्र थोडासा मधूरा कीर्तन भी कितना महत्त्व रखता है यह स्पष्ट जाना जाता है। जब स्तुत्य पवित्रात्मा, पुण्य गुणोकी मूर्ति और पुण्यकीर्ति हो तब उसका नाम भी, जो प्राय गुरण प्रत्यय होता है, पवित्र होता है और इसीलिये ऊपर उद्धृत ८७ वी कारिकामें जिनेन्द्र के नाम कीर्तनको भी पवित्र करनेवाला लिखा है तथा नीचेकी कारिकामे, प्रजितजिनकी स्तुति करते हुए, उनके नामको 'परमपवित्र' बतलाया है और लिखा है कि आज भी अपनी सिद्धि चाहनेवाले लोग उनके परमपवित्र नामको मगलके लिये - पापको गालने अथवा विघ्नबाधाप्रोका टालनेके लिये -- बडे आदरके साथ लेते हैंअद्यापियाडजित शासनस्य सतां प्रणेतुः प्रतिमंगलार्थम् । प्रगृह्यते नाम परम पवित्र स्वसिद्धि-कामेन जनेन लोके ।।७।। जिन अनोका नाम-कीर्तन तक पापोको दूर करके आत्माको पवित्र करता है उनके शरण में पूर्ण हृदय से प्राप्त होनेका तो फिर कहना ही क्या है - वह तो पाप-तापको और भी अधिक शान्त करके आत्माको पूर्ण निर्दोष एवं सुख-शान्तिमय बनाने में समर्थ है । इसीसे स्वामी समन्तभद्रने अनेक स्थानोपर ततस्त्वं निर्मोहः शरणमसि न. शान्ति-निलय.' (१२०) जैसे वाक्यो के साथ अपनेको अर्हतोकी शरण मे अर्पण किया है । यहा इस विषयका एक खास वाक्य उद्धृन किया जाता है, जो शरण-प्राप्ति कारण के भी स्पष्ट उल्नेखको लिये हुए हैस्वदोष-शान्त्या विहितात्म-शान्तिः शाम्तेर्विधाता शरणं गतानाम् । भूयाद्भव-क्लेश भयोपशान्त्यै शान्तिर्जिनो मे भगवान् शरण्यः ।।८।। इसमे बतलाया है कि 'वे भगवान् शाक्लिजिन मेरे शरण्य है- मैं उनकी शरण लेता हूँ-- जिन्होने अपने दोनोक्री - प्रज्ञान, मौह त्या राय-द्वेष-कामकोषादि-विकारोकी --शान्ति करके मात्मामें परमशान्ति स्थापित की है- पूर्ण सुखस्वरूपा स्वाभाविकी स्थिति प्राप्त की है - पोर इसलिये जो शरणागनोंको ऋतिविष है उनमें अपनेमभावसे क्षेपोंकी शान्ति करके शान्तिजैनसाहित्य और इतिहासपर विशद प्रकाश सुखका संचार करने प्रथवा उन्हें शान्ति सुखरूप परिणत करने में सहायक एवं निमित्तभूत है । अतः ( इस शरणागतिके फलस्वरूप ) वे शान्तिजिन मेरे संसार - परिभ्रमणका अन्त भौर सांसारिक क्लेशों तथा भयोंकी समाप्तिमें कारगीभूत होंवें ।' यहां शान्तिजिनको शरणागतोंकी शान्तिका जो विधाता (कर्ता ) कहा है उसके लिये उनमें किसी इच्छा या तदनुकूल प्रयत्नके भारोपकी जरूरत नही है, वह कार्य उनके 'विहितात्म-शान्ति' होनेसे स्वयं ही उस प्रकार हो जाता है जिस प्रकार कि भग्निके पास जानसे गर्मीका और हिमालय या शीतप्रधान प्रदेशके पास पहुचनेसे सर्दीका संचार अथवा तद्रूप परिगमन स्वयं हुआ करता है और उसमें उस प्रग्नि या हिममय पदार्थकी इच्छादिक-जैसा कोई कारण नही पड़ता । इच्छा तो स्वयं एक दोष है और वह उस मोहका परिणाम है जिसे स्वय स्वामीजीने इस ग्रन्यमे 'अनन्तदोषाशय-विग्रह (६६) बतलाया है । दोषोंकी शान्ति हो जानेसे उसका अस्तित्व ही नहीं बनता । और इसलिए अर्हन्तदेव में विना इच्छा तथा प्रयत्नवाला कर्तृत्व सुघटित है। इसी कर्तृत्वको लक्ष्यमे रखकर उन्हे 'शान्तिके विधाता' कहा गया है - इच्छा तया प्रयत्नवाले कर्तृत्वकी दृष्टिसे वे उसके विधाता नहीं है। मोर इस तरह कर्तृत्व विषय में अनेकान्त चलता है - सर्वथा एकान्तपक्ष जैनशासनमें ग्राह्य ही नहीं है। यहां प्रसंगवश इतना और भी बतला देना उचित जान पडता है कि उक्त पद्यके तृतीय चरण में सांसारिक क्लेशों तथा भयोंकी शान्तिमें कारणीभूत होनेकी जो प्रार्थना की गई है व जैनी प्रार्थनाका मूलरूप है, जिसका और भी स्पष्ट दर्शन नित्य की प्रार्थनामें प्रयुक्त निम्न प्राचीनतम गाथा में पाया जाता है - दुक्ख खत्रो कम्म-खो समाहि-मरणं च बोहिलाहो य । मम होउ तिजगबंधव ! तव जिगवर चरण-सरणे-रण ।। इसमें जो प्रार्थना की गई है उसका रूप यह है कि - हे त्रिजगतके (निनिमिच) बन्धु जिनदेव ! आपके चरण-शरणके प्रसादसे मेरे दुःखोंका क्षय, कर्मोंका क्षय, समाधिपूर्वक मरण और बोषिका - सम्यग्दर्शनादिकका लाभ होवे ।" इससे यह प्रार्थना एक प्रकार से प्रात्मोत्कर्षकी भावना है और इस बातको सूक्ति करती है कि जिनदेवकी शरण प्राप्त होनेसे-प्रसन्नतापूर्वक जिनदेवके चरणोंका समतभद्रका स्वयम्भूस्तोत्र ग्राराधन करनसे - दु खोका क्षय और कमका क्षयादिक सुख साध्य होता है। यही भाव समतभद्रकी प्राथनाका है। इसी भावको लिए हुए ग्रथम दूसरी प्राथनाए इस प्रकार है'मति प्रवेक स्तुवतोऽस्तु नाथ । (२५) मम भवताद् दुरितासनोन्तिम् ' (१०५) भवतु ममाऽपि भवोपशान्तये (११५) पर तु ये ही प्राथनाए जब जिन द्रदेवको साक्षातूरूपम कुछ करन करानके लिये प्रेरित करती हुई ज न पडती है तो वे मलकृतरूपको धारण किये हुए होती है। प्राथनाके इस अलकृतरूपको लिये हुए जो वाक्य प्रस्तुत प्रथम पाये जाते है वे निम्न प्रकार है१ पुनातु चेतो मम नाभिनन्दन ( ५ ) २ जिन श्रिय मे भगवान् विधत्ताम् (१०) ३ ममाऽऽर्य देया शिवतातिमुच्च (१५) ४ पूया पवित्रो भगवान् मनो मे (४०) ५ श्रेयसे जिनवृष । प्रसीद न ये सब प्राथनाए चित्तको पवित्र करन जिनश्री तथा शिवमतिका न और कल्यारण करनकी याचनाको लिये हुए है आत्मो ॠष एव अमविक सको लक्ष्य करके की गई है इनम प्रसगतता तथा प्रसभाव्य जसी कोई बात नही है - सभी जिन द्रदेवके सम्पर्क तथा शरणम भानसे स्वय सफल होनवाली अथवा भक्ति उपासनाके द्वारा सहजसाध्य ह - और इसलिये अलकारकी भापाम की गई एक प्रकारकी भावनाए ही हैं। इनके ममको प्रत्यके अनुवादम स्पष्ट किया गया है। वास्तवमें परम वीतरागदेवसे विवेकी जनकी प्राथनाका भय देवके समक्ष अपनी भावनाको व्यक्त करना है अथाद यह प्रकट करना है कि वह आपके चरण शरण एवं प्रभावम रह कर और कुछ पदार्थपाठ लेकर प्रारम शक्तिको जागृत एवं विकसित करता हुआ पनी उस इच्छा कामना या भावनाको पूरा करनेमें समर्थ होना चाहता हैन उसका यह भाशय कदापि
पवित्रताका संचार होता है। इसी बातको मौर अच्छे शब्दों में निम्नकारिकाद्वारा स्पष्ट किया गया है-स्तुतिः स्तोतुः साधोः कुशलपरिणामाय स तदा भवेन्मा वा स्तुत्यः फलमपि ततस्तस्य च सत. किमेवं स्वाधीन्याज्जगति सुलभे श्रायसपथे स्तुयान्न त्वा विद्वान्सततमभिपूज्यं नमिजिनम् ।।एक सौ सोलह॥ इसमें बतलाया है कि- 'स्तुतिके समय और स्थानपर स्तुत्य चाहे मौजूद हो या न हो और फलकी प्राप्ति भी चाहे सीधी उसके द्वारा होतो. हो या न होती हो, परन्तु आत्मसाधना में तत्पर साधुस्तोताकी - विवेकके साथ भक्तिभावपूर्वक स्तुति करनेवालेकी स्तुति कुशलपरिणामकी - पुण्यप्रसाधक या पवित्रता- विधायक शुभभावोंकी-कारण जरूर होती है; और वह कुशलपरिणाम अथवा तज्जन्य पुण्यविशेष श्रेय फलका दाता हैं। जब जगत में इस तरह स्वाधीनतासे श्रेयोमार्ग सुलभ है - स्वयं प्रस्तुत की गई अपनी स्तुतिके द्वारा प्राप्य है - तब हे सर्वदा अभिपूज्य नमि-जिन ! ऐसा कौन विद्वान् - परीक्षापूर्वकारी मथवा विवेकी जन- है जो आपकी स्तुति न करे ? करे ही करे। अनेक स्थानोंपर समन्तभद्रने जिनेन्द्रकी स्तुति करने में अपनी असमर्थता व्यक्त करते हुए अपनेको अज्ञ , बालक तथा अल्पधी के रूप में उल्लिखित किया है; परन्तु एक स्थानपर तो उन्होने अपनी भक्ति तथा विनम्रता की पराकाष्ठा ही कर दी है, जब इतने महान् ज्ञानी होते हुए और इतनी प्रौढ स्तुति रचते हुए भी वे लिखते हैं - त्वमीदृशस्तादृश इत्ययं मम प्रलाप-लेशोऽल्प- मतेर्महामुने ! अशेष-माहात्म्यमनीरयन्नपि शिवाय संस्पर्श इवाऽमृताम्बुधेः ॥सत्तर॥ ' आप ऐसे है, वैसे है - प्रापके ये गुरण हैं, के गुर है-इस प्रकार स्तुतिरूपमें मुझ अल्पमंतिका-यथावत् गुणोंके परिशानसे रहित स्तोताका - यह थोड़ासा प्रलाप है । अमृतसमुद्रके अशेष माहात्म्यको न जानते और न कंथन करते हुए भी जिस प्रकार उसका संस्पर्श कल्याणकारक होता है उसी प्रकार हे महामुने ! आपके भशेष माहात्म्यको न जानते और न कथन करते हुए भी मेरा यह थोडासा प्रलाप आपके गुरगोके सस्पर्शरूप होनेसे कल्यारणका ही हेतु है।' इससे जिनेन्द्र गुणोका स्पर्शमात्र थोडासा मधूरा कीर्तन भी कितना महत्त्व रखता है यह स्पष्ट जाना जाता है। जब स्तुत्य पवित्रात्मा, पुण्य गुणोकी मूर्ति और पुण्यकीर्ति हो तब उसका नाम भी, जो प्राय गुरण प्रत्यय होता है, पवित्र होता है और इसीलिये ऊपर उद्धृत सत्तासी वी कारिकामें जिनेन्द्र के नाम कीर्तनको भी पवित्र करनेवाला लिखा है तथा नीचेकी कारिकामे, प्रजितजिनकी स्तुति करते हुए, उनके नामको 'परमपवित्र' बतलाया है और लिखा है कि आज भी अपनी सिद्धि चाहनेवाले लोग उनके परमपवित्र नामको मगलके लिये - पापको गालने अथवा विघ्नबाधाप्रोका टालनेके लिये -- बडे आदरके साथ लेते हैंअद्यापियाडजित शासनस्य सतां प्रणेतुः प्रतिमंगलार्थम् । प्रगृह्यते नाम परम पवित्र स्वसिद्धि-कामेन जनेन लोके ।।सात।। जिन अनोका नाम-कीर्तन तक पापोको दूर करके आत्माको पवित्र करता है उनके शरण में पूर्ण हृदय से प्राप्त होनेका तो फिर कहना ही क्या है - वह तो पाप-तापको और भी अधिक शान्त करके आत्माको पूर्ण निर्दोष एवं सुख-शान्तिमय बनाने में समर्थ है । इसीसे स्वामी समन्तभद्रने अनेक स्थानोपर ततस्त्वं निर्मोहः शरणमसि न. शान्ति-निलय.' जैसे वाक्यो के साथ अपनेको अर्हतोकी शरण मे अर्पण किया है । यहा इस विषयका एक खास वाक्य उद्धृन किया जाता है, जो शरण-प्राप्ति कारण के भी स्पष्ट उल्नेखको लिये हुए हैस्वदोष-शान्त्या विहितात्म-शान्तिः शाम्तेर्विधाता शरणं गतानाम् । भूयाद्भव-क्लेश भयोपशान्त्यै शान्तिर्जिनो मे भगवान् शरण्यः ।।आठ।। इसमे बतलाया है कि 'वे भगवान् शाक्लिजिन मेरे शरण्य है- मैं उनकी शरण लेता हूँ-- जिन्होने अपने दोनोक्री - प्रज्ञान, मौह त्या राय-द्वेष-कामकोषादि-विकारोकी --शान्ति करके मात्मामें परमशान्ति स्थापित की है- पूर्ण सुखस्वरूपा स्वाभाविकी स्थिति प्राप्त की है - पोर इसलिये जो शरणागनोंको ऋतिविष है उनमें अपनेमभावसे क्षेपोंकी शान्ति करके शान्तिजैनसाहित्य और इतिहासपर विशद प्रकाश सुखका संचार करने प्रथवा उन्हें शान्ति सुखरूप परिणत करने में सहायक एवं निमित्तभूत है । अतः वे शान्तिजिन मेरे संसार - परिभ्रमणका अन्त भौर सांसारिक क्लेशों तथा भयोंकी समाप्तिमें कारगीभूत होंवें ।' यहां शान्तिजिनको शरणागतोंकी शान्तिका जो विधाता कहा है उसके लिये उनमें किसी इच्छा या तदनुकूल प्रयत्नके भारोपकी जरूरत नही है, वह कार्य उनके 'विहितात्म-शान्ति' होनेसे स्वयं ही उस प्रकार हो जाता है जिस प्रकार कि भग्निके पास जानसे गर्मीका और हिमालय या शीतप्रधान प्रदेशके पास पहुचनेसे सर्दीका संचार अथवा तद्रूप परिगमन स्वयं हुआ करता है और उसमें उस प्रग्नि या हिममय पदार्थकी इच्छादिक-जैसा कोई कारण नही पड़ता । इच्छा तो स्वयं एक दोष है और वह उस मोहका परिणाम है जिसे स्वय स्वामीजीने इस ग्रन्यमे 'अनन्तदोषाशय-विग्रह बतलाया है । दोषोंकी शान्ति हो जानेसे उसका अस्तित्व ही नहीं बनता । और इसलिए अर्हन्तदेव में विना इच्छा तथा प्रयत्नवाला कर्तृत्व सुघटित है। इसी कर्तृत्वको लक्ष्यमे रखकर उन्हे 'शान्तिके विधाता' कहा गया है - इच्छा तया प्रयत्नवाले कर्तृत्वकी दृष्टिसे वे उसके विधाता नहीं है। मोर इस तरह कर्तृत्व विषय में अनेकान्त चलता है - सर्वथा एकान्तपक्ष जैनशासनमें ग्राह्य ही नहीं है। यहां प्रसंगवश इतना और भी बतला देना उचित जान पडता है कि उक्त पद्यके तृतीय चरण में सांसारिक क्लेशों तथा भयोंकी शान्तिमें कारणीभूत होनेकी जो प्रार्थना की गई है व जैनी प्रार्थनाका मूलरूप है, जिसका और भी स्पष्ट दर्शन नित्य की प्रार्थनामें प्रयुक्त निम्न प्राचीनतम गाथा में पाया जाता है - दुक्ख खत्रो कम्म-खो समाहि-मरणं च बोहिलाहो य । मम होउ तिजगबंधव ! तव जिगवर चरण-सरणे-रण ।। इसमें जो प्रार्थना की गई है उसका रूप यह है कि - हे त्रिजगतके बन्धु जिनदेव ! आपके चरण-शरणके प्रसादसे मेरे दुःखोंका क्षय, कर्मोंका क्षय, समाधिपूर्वक मरण और बोषिका - सम्यग्दर्शनादिकका लाभ होवे ।" इससे यह प्रार्थना एक प्रकार से प्रात्मोत्कर्षकी भावना है और इस बातको सूक्ति करती है कि जिनदेवकी शरण प्राप्त होनेसे-प्रसन्नतापूर्वक जिनदेवके चरणोंका समतभद्रका स्वयम्भूस्तोत्र ग्राराधन करनसे - दु खोका क्षय और कमका क्षयादिक सुख साध्य होता है। यही भाव समतभद्रकी प्राथनाका है। इसी भावको लिए हुए ग्रथम दूसरी प्राथनाए इस प्रकार है'मति प्रवेक स्तुवतोऽस्तु नाथ । मम भवताद् दुरितासनोन्तिम् ' भवतु ममाऽपि भवोपशान्तये पर तु ये ही प्राथनाए जब जिन द्रदेवको साक्षातूरूपम कुछ करन करानके लिये प्रेरित करती हुई ज न पडती है तो वे मलकृतरूपको धारण किये हुए होती है। प्राथनाके इस अलकृतरूपको लिये हुए जो वाक्य प्रस्तुत प्रथम पाये जाते है वे निम्न प्रकार हैएक पुनातु चेतो मम नाभिनन्दन दो जिन श्रिय मे भगवान् विधत्ताम् तीन ममाऽऽर्य देया शिवतातिमुच्च चार पूया पवित्रो भगवान् मनो मे पाँच श्रेयसे जिनवृष । प्रसीद न ये सब प्राथनाए चित्तको पवित्र करन जिनश्री तथा शिवमतिका न और कल्यारण करनकी याचनाको लिये हुए है आत्मो ॠष एव अमविक सको लक्ष्य करके की गई है इनम प्रसगतता तथा प्रसभाव्य जसी कोई बात नही है - सभी जिन द्रदेवके सम्पर्क तथा शरणम भानसे स्वय सफल होनवाली अथवा भक्ति उपासनाके द्वारा सहजसाध्य ह - और इसलिये अलकारकी भापाम की गई एक प्रकारकी भावनाए ही हैं। इनके ममको प्रत्यके अनुवादम स्पष्ट किया गया है। वास्तवमें परम वीतरागदेवसे विवेकी जनकी प्राथनाका भय देवके समक्ष अपनी भावनाको व्यक्त करना है अथाद यह प्रकट करना है कि वह आपके चरण शरण एवं प्रभावम रह कर और कुछ पदार्थपाठ लेकर प्रारम शक्तिको जागृत एवं विकसित करता हुआ पनी उस इच्छा कामना या भावनाको पूरा करनेमें समर्थ होना चाहता हैन उसका यह भाशय कदापि
अमीषा पटेल ने लोजपा के प्रत्याशी डॉ चंद्र प्रकाश पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुझे ब्लैकमेल किया गया और साथ ही मेरे साथ गलत व्यवहार करने की भी कोशिश की। अमीषा पटेल ने लोजपा के प्रत्याशी डॉ चंद्र प्रकाश पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुझे ब्लैकमेल किया गया और साथ ही मेरे साथ गलत व्यवहार करने की भी कोशिश की। बता दें कि अमीषा पटेल बिहार विधानसभा चौहान के दौरान लोजपा की ओर से प्रचार करने के लिए गई थी। अमीषा पटेल ने कहा कि चंद्र प्रकाश काफी खतरनाक आदमी है। जब मैं वहां प्रचार के लिए पहुंची तो मुझे कोई सुरक्षा नहीं दी गई। उसी के आदमी मेरी कार को चारों तरफ से घेरे रहते थे। उसने मुझे तीन घंटे तक अपने साथ रहने के लिए धमकाया। साथ ही जब मैं वापस आने के लिए निकलने वाली थी, तब भी उसने मुझे वहीं रोक लिया। उसने कहा कि अगर मैंने उसकी बात नहीं मानी तो वो मुझे उसी गांव में छोड़ देगा। अमीषा पटेल ने कहा कि वो एक गुंडा आदमी है। बिहार जाना मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह था। जब तक मैं वहां थी, तब तक उसकी बात मानने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। जैसे-तैसे मैं वहां से जान बचाकर आई। वरना मेरे साथ कभी भी रेप हो सकता था। यहां आते ही मैंने मीडिया को सारी बातें बता दी। अमीषा पटेल ने कहा कि वो आदमी बहुत गंदा है। उसे गंभीर सजा मिलनी चाहिए। मुंबई आने के बाद भी वो मुझे फोन करके धमका रहा है। उसके आदमियों ने कई बार मुझे फोन करके कहा कि मैं अपना बयान बदल दूं।
अमीषा पटेल ने लोजपा के प्रत्याशी डॉ चंद्र प्रकाश पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुझे ब्लैकमेल किया गया और साथ ही मेरे साथ गलत व्यवहार करने की भी कोशिश की। अमीषा पटेल ने लोजपा के प्रत्याशी डॉ चंद्र प्रकाश पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुझे ब्लैकमेल किया गया और साथ ही मेरे साथ गलत व्यवहार करने की भी कोशिश की। बता दें कि अमीषा पटेल बिहार विधानसभा चौहान के दौरान लोजपा की ओर से प्रचार करने के लिए गई थी। अमीषा पटेल ने कहा कि चंद्र प्रकाश काफी खतरनाक आदमी है। जब मैं वहां प्रचार के लिए पहुंची तो मुझे कोई सुरक्षा नहीं दी गई। उसी के आदमी मेरी कार को चारों तरफ से घेरे रहते थे। उसने मुझे तीन घंटे तक अपने साथ रहने के लिए धमकाया। साथ ही जब मैं वापस आने के लिए निकलने वाली थी, तब भी उसने मुझे वहीं रोक लिया। उसने कहा कि अगर मैंने उसकी बात नहीं मानी तो वो मुझे उसी गांव में छोड़ देगा। अमीषा पटेल ने कहा कि वो एक गुंडा आदमी है। बिहार जाना मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह था। जब तक मैं वहां थी, तब तक उसकी बात मानने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। जैसे-तैसे मैं वहां से जान बचाकर आई। वरना मेरे साथ कभी भी रेप हो सकता था। यहां आते ही मैंने मीडिया को सारी बातें बता दी। अमीषा पटेल ने कहा कि वो आदमी बहुत गंदा है। उसे गंभीर सजा मिलनी चाहिए। मुंबई आने के बाद भी वो मुझे फोन करके धमका रहा है। उसके आदमियों ने कई बार मुझे फोन करके कहा कि मैं अपना बयान बदल दूं।
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अब जल्द सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर-बाबरी मजिस्द भूमि विवाद मामले में दोनों पक्षों की याचिकाओं समेत सभी याचिकाओं की जल्द सुनवाई की जाएगी। नई दिल्ली : अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अब जल्द सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर-बाबरी मजिस्द भूमि विवाद मामले में दोनों पक्षों की याचिकाओं समेत सभी याचिकाओं की जल्द सुनवाई की जाएगी। साल 2010 से अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुनाया था, जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। - मार्च में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोज सुनवाई से इनकार कर दिया था। - बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में जल्द सुनवाई की अर्जी दी थी। - सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी की अर्जी पर कहा था कि अभी हमारे पास इस केस की जल्द सुनवाई करने का वक्त नहीं है। - 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाद को सुलझाने के लिए एक बीच का रास्ता निकाला था, लेकिन उस फैसले के बाद भी स्थिति अभी 7 साल पहले वाली ही बनी हुई है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2. 77 एकड़ भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था, राम मूर्ति वाला हिस्सा रामलला विराजमान को, राम चबूतरा और सीता रसोई का हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का आदेश दिया था।
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अब जल्द सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर-बाबरी मजिस्द भूमि विवाद मामले में दोनों पक्षों की याचिकाओं समेत सभी याचिकाओं की जल्द सुनवाई की जाएगी। नई दिल्ली : अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अब जल्द सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर-बाबरी मजिस्द भूमि विवाद मामले में दोनों पक्षों की याचिकाओं समेत सभी याचिकाओं की जल्द सुनवाई की जाएगी। साल दो हज़ार दस से अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। साल दो हज़ार दस में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुनाया था, जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। - मार्च में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोज सुनवाई से इनकार कर दिया था। - बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में जल्द सुनवाई की अर्जी दी थी। - सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी की अर्जी पर कहा था कि अभी हमारे पास इस केस की जल्द सुनवाई करने का वक्त नहीं है। - दो हज़ार दस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाद को सुलझाने के लिए एक बीच का रास्ता निकाला था, लेकिन उस फैसले के बाद भी स्थिति अभी सात साल पहले वाली ही बनी हुई है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित दो. सतहत्तर एकड़ भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था, राम मूर्ति वाला हिस्सा रामलला विराजमान को, राम चबूतरा और सीता रसोई का हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का आदेश दिया था।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि शासन की विभिन्न योजनाओं से नागरिकों को परिचित कराना और उनसे लाभ प्राप्त कर समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करने में जनसंपर्क कर्मियों का प्रमुख योगदान रहता है। जनसंपर्क विभिन्न संगठनों और जनता के बीच कड़ी के रूप में विभिन्न मुद्दों और समस्याओं को शासन तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है। आमजन को सूचनाएँ देकर, ज्ञानवर्द्धन कर सशक्त बनाने में जनसंपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्यपाल आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया की 44वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉफ्रेंस के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश में जनसंपर्क विभाग युवा, महिला, किसान, जनजातीय और अनुसूचित जाति सहित विभिन्न समुदाय को योजनाओं से परिचित करा कर अधिकतम लोगों तक हितलाभ पहुँचाने में प्रभावी कार्य कर रहा है। योजनाओं को समुदाय से जोड़ कर जनसंपर्क ने विकास को ऊँचाई दी है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पब्लिक रिलेशंस सॉसाइटी ऑफ़ इंडिया ने सतत रूप से राष्ट्र और समाज से जुड़े मुद्दों पर कार्य किया है। सोसाइटी देश में राष्ट्रीय एकात्म और विचारों की सौहार्दता को प्रोत्साहित करने के लिए "एक राष्ट्र- एक संकल्प- एक स्वर" की भावना को सशक्त करने के संकल्प को लिए हुए है। भारत को एकजुट करने और राष्ट्रीय भावनाओं को जगाने के प्रयास भी इस अभियान में शामिल हैं। राज्यपाल श्री पटेल ने कांफ्रेंस के विषय "आत्मनिर्भर भारत : जनसम्पर्क की भूमिका" की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत दुनिया के युवा देशों में से एक है। केन्द्र सरकार ने युवा शक्ति को शिक्षा और कौशल विकास के अवसर देकर, प्रगति के पथ पर अग्रसर करने का संकल्प लिया है। आने वाला कल हमारे कर्मठ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का है। उन्होंने आशा की कि शासन के प्रयासों के साथ पीआरएसआई के संकल्प का समन्वय भारत को एक नई पहचान दिलाने में कामयाब होगा। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में जनसंपर्क के माध्यम तेज़ी से बदल रहे हैं। जनसंपर्क बुद्धिजीवियों को इस विषय में भी कार्य करना आवश्यक है, जिससे जन-कल्याणकारी कार्यों में जनसंपर्क का प्रभावी उपयोग किया जा सके। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया, जनसम्पर्क और लोक संचार की शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय और संस्थानों का मार्गदर्शन करे। राज्यपाल ने जनसंपर्क के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कार प्रदान किए और पुरस्कृत व्यक्तियों को बधाई दी। समारोह में सांसद श्री उदयप्रताप सिंह ने जनसंपर्क की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि जनसंपर्क से प्रजातंत्र मज़बूत होता है। वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरिजा शंकर, पीआरएसआई चेयरमेन श्री डॉ. अजीत पाठक और श्री दिलीप चेरियन ने भी संबोधित किया। स्वागत उद्बोधन पीआरएसआई के भोपाल चेप्टर चेयरमैन श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने दिया।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि शासन की विभिन्न योजनाओं से नागरिकों को परिचित कराना और उनसे लाभ प्राप्त कर समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करने में जनसंपर्क कर्मियों का प्रमुख योगदान रहता है। जनसंपर्क विभिन्न संगठनों और जनता के बीच कड़ी के रूप में विभिन्न मुद्दों और समस्याओं को शासन तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है। आमजन को सूचनाएँ देकर, ज्ञानवर्द्धन कर सशक्त बनाने में जनसंपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्यपाल आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया की चौंतालीसवीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉफ्रेंस के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश में जनसंपर्क विभाग युवा, महिला, किसान, जनजातीय और अनुसूचित जाति सहित विभिन्न समुदाय को योजनाओं से परिचित करा कर अधिकतम लोगों तक हितलाभ पहुँचाने में प्रभावी कार्य कर रहा है। योजनाओं को समुदाय से जोड़ कर जनसंपर्क ने विकास को ऊँचाई दी है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पब्लिक रिलेशंस सॉसाइटी ऑफ़ इंडिया ने सतत रूप से राष्ट्र और समाज से जुड़े मुद्दों पर कार्य किया है। सोसाइटी देश में राष्ट्रीय एकात्म और विचारों की सौहार्दता को प्रोत्साहित करने के लिए "एक राष्ट्र- एक संकल्प- एक स्वर" की भावना को सशक्त करने के संकल्प को लिए हुए है। भारत को एकजुट करने और राष्ट्रीय भावनाओं को जगाने के प्रयास भी इस अभियान में शामिल हैं। राज्यपाल श्री पटेल ने कांफ्रेंस के विषय "आत्मनिर्भर भारत : जनसम्पर्क की भूमिका" की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत दुनिया के युवा देशों में से एक है। केन्द्र सरकार ने युवा शक्ति को शिक्षा और कौशल विकास के अवसर देकर, प्रगति के पथ पर अग्रसर करने का संकल्प लिया है। आने वाला कल हमारे कर्मठ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का है। उन्होंने आशा की कि शासन के प्रयासों के साथ पीआरएसआई के संकल्प का समन्वय भारत को एक नई पहचान दिलाने में कामयाब होगा। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में जनसंपर्क के माध्यम तेज़ी से बदल रहे हैं। जनसंपर्क बुद्धिजीवियों को इस विषय में भी कार्य करना आवश्यक है, जिससे जन-कल्याणकारी कार्यों में जनसंपर्क का प्रभावी उपयोग किया जा सके। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया, जनसम्पर्क और लोक संचार की शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय और संस्थानों का मार्गदर्शन करे। राज्यपाल ने जनसंपर्क के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कार प्रदान किए और पुरस्कृत व्यक्तियों को बधाई दी। समारोह में सांसद श्री उदयप्रताप सिंह ने जनसंपर्क की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि जनसंपर्क से प्रजातंत्र मज़बूत होता है। वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरिजा शंकर, पीआरएसआई चेयरमेन श्री डॉ. अजीत पाठक और श्री दिलीप चेरियन ने भी संबोधित किया। स्वागत उद्बोधन पीआरएसआई के भोपाल चेप्टर चेयरमैन श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने दिया।
मिटता गया । प्रकृति जी रही है उसके अन्य सभी प्राणी जी रहे हैं पर क्या मनुष्य भी जी रहा है ? यह सब बाप-दादे कभी नहीं जान सके माता ! सात पीढ़ी इसी काम में बीत गई । हाथी के ऊपर, बन में, पहाड़ में, नदी की धार में, चारा काटने में और अधिक तो उसी की पीठ पर सो जाने में, इसके आगे कहाँ क्या है सेवक के कुल में कोई कभी नहीं जान सका । महाराज ने कहा था पहले इस में आप लोगों को बैटा कर नगर भर की परिक्रमा मैं कर लूँगा तब इसकी पीठ से यह सब उतरेगा । विश्वरूप महाराज की कामना पूरी हो । दर्शकों की आँखों का भी यह उत्सव होगा। महाराज की कीर्ति बढ़ेगी। पुत्र को लेकर में बैठ जायँ । माधव !' तुम भी देवी के साथ रहोगे । यज्ञ में, अग्निहोत्र में, दान में, सभी पर्व और उत्सव में, मैं सदैव साथ रही आज केली. विश्वरूप कहीं कुछ घटित हुआ है जिसकी सूचना मुझे मिलने वाली है । मन में प्रतिपल ऐसा ही बोध हो रहा है देवी । अन्तःकरण की प्रवृत्ति प्रमाण बन रही है और क्या कहूँ । भारती कालिदास की वाणी है यह आर्यपुत्र ! जो शकुन्तला के प्रथम दर्शन में दुष्यन्त के कंठ से निकली थी । यह सारा जगत व्यास का, बाल्मीकि का उच्छिष्ट है । कालिदास ने उन्हीं से लिया । इस देश की मेधा उन्हीं से बराबर लेती रहेगी। जगत का स्वाद जो उन्हें मिला था, सुष्टिदर्शन और जीवधर्म का स्वाद था। उनके दर्शन में जो न या फिर किसी दूसरे के दर्शन में आयेगा भी नहीं ।
मिटता गया । प्रकृति जी रही है उसके अन्य सभी प्राणी जी रहे हैं पर क्या मनुष्य भी जी रहा है ? यह सब बाप-दादे कभी नहीं जान सके माता ! सात पीढ़ी इसी काम में बीत गई । हाथी के ऊपर, बन में, पहाड़ में, नदी की धार में, चारा काटने में और अधिक तो उसी की पीठ पर सो जाने में, इसके आगे कहाँ क्या है सेवक के कुल में कोई कभी नहीं जान सका । महाराज ने कहा था पहले इस में आप लोगों को बैटा कर नगर भर की परिक्रमा मैं कर लूँगा तब इसकी पीठ से यह सब उतरेगा । विश्वरूप महाराज की कामना पूरी हो । दर्शकों की आँखों का भी यह उत्सव होगा। महाराज की कीर्ति बढ़ेगी। पुत्र को लेकर में बैठ जायँ । माधव !' तुम भी देवी के साथ रहोगे । यज्ञ में, अग्निहोत्र में, दान में, सभी पर्व और उत्सव में, मैं सदैव साथ रही आज केली. विश्वरूप कहीं कुछ घटित हुआ है जिसकी सूचना मुझे मिलने वाली है । मन में प्रतिपल ऐसा ही बोध हो रहा है देवी । अन्तःकरण की प्रवृत्ति प्रमाण बन रही है और क्या कहूँ । भारती कालिदास की वाणी है यह आर्यपुत्र ! जो शकुन्तला के प्रथम दर्शन में दुष्यन्त के कंठ से निकली थी । यह सारा जगत व्यास का, बाल्मीकि का उच्छिष्ट है । कालिदास ने उन्हीं से लिया । इस देश की मेधा उन्हीं से बराबर लेती रहेगी। जगत का स्वाद जो उन्हें मिला था, सुष्टिदर्शन और जीवधर्म का स्वाद था। उनके दर्शन में जो न या फिर किसी दूसरे के दर्शन में आयेगा भी नहीं ।
रांचीः Jharkhand High Court के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद (Sujit Narayan Prasad) और जस्टिस सुभाष चांद की अदालत में गुरुवार को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TPC) के लातेहार एरिया कमांडर नथुनी उर्फ नथुनी सिंह (Nathuni Singh) की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस को केस डायरी (Case Diary) जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट अब एक सप्ताह बाद नथुनी की बेल पर सुनवाई करेगा। राज्य सरकार की अधिवक्ता अनुराधा सहाय (Anuradha Sahay) ने जमानत याचिका का विरोध किया। उल्लेखनीय है कि लातेहार जिले के लातेहार थाना में वर्ष 2022 में कांड संख्या 48 दर्ज की गई है। FIR में आर्म्स एक्ट और 17 क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट (Criminal Law Amendment) समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी केस में नथुनी ने जमानत याचिका दाखिल की है।
रांचीः Jharkhand High Court के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस सुभाष चांद की अदालत में गुरुवार को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी के लातेहार एरिया कमांडर नथुनी उर्फ नथुनी सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस को केस डायरी जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट अब एक सप्ताह बाद नथुनी की बेल पर सुनवाई करेगा। राज्य सरकार की अधिवक्ता अनुराधा सहाय ने जमानत याचिका का विरोध किया। उल्लेखनीय है कि लातेहार जिले के लातेहार थाना में वर्ष दो हज़ार बाईस में कांड संख्या अड़तालीस दर्ज की गई है। FIR में आर्म्स एक्ट और सत्रह क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी केस में नथुनी ने जमानत याचिका दाखिल की है।
- #Chandra GrahanChandra Grahan 2023: क्यों कुवारों के लिए अच्छा नहीं होता चंद्र ग्रहण? - #Chandra GrahanChandra Grahan 2023 Katha: क्यों लगता है चांद को ग्रहण? क्या है इसके पीछे की कहानी? - #Chandra GrahanChandra Grahan 2023: आखिर हर पूर्णिमा पर क्यों नहीं लगता है चंद्र ग्रहण? Chandra Grahan 2023: आज का चंद्र ग्रहण क्यों है खास? 19 साल तक क्यों नहीं होगी ऐसी अनोखी घटना? Chandra Grahan 2023 (उपछाया चंद्रग्रहण): खगोल प्रेमियों के लिए आज का दिन बहुत खास है क्योंकि आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जो कि भारत में तो दिखाई नहीं देगा लेकिन ये यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अंटार्कटिका, प्रशांत अटलांटिक और हिंद महासागर के लोगों को नजर आएगा। चंद्रग्रहण 5-6 मई के दरमियान नजर आएगा। चंद्र ग्रहण शु्क्रवार रात 08: 45 PM से शुरू होकर देर रात 6 मई को 1. 00 बजे समाप्त होगा, यानी कि इस ग्रहण की अवधि लगभग 4 घंटे 15 मिनट की है। क्यों खास है चंद्र ग्रहण? आज का चंद्र ग्रहण बहुत ज्यादा खास है क्योंकि पूर्ण चंद्र ग्रहण ना होकर उपछाया ग्रहण है। जो कि इसके बाद 19 साल तक नजर नहीं आएगा। ये दुर्लभ चंद्र ग्रहण है इसलिए अगर आप इसे देखने से चूके तो आपको लंबा इंतजार करना होगा। क्या होता है चंद्र ग्रहण? जब चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंद्र ग्रहण लगता है, इस दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक सीध में आ जाते हैं जो कि पूर्णिमा के दिन ही संभव हो सकता है इसलिए चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन लगता है। ग्रहण के दौरान चंद्र का प्रकाश धुंधला हो जाता है। मालूम हो कि चंद्र ग्रहण तीन तरह के होते हैं। जो कि निम्नलिखित है। क्या है पेनुमब्रल या उपछाया चंद्रग्रहण? इस चंद्र ग्रहण के दौरान चांद पूरी तरह से पृथ्वी और सूर्य की सीध में नहीं आता है, बल्कि अर्थ की बाहरी स्थिति से होकर गुजरता है,इस दौरान उसका छाया पृथ्वी पर बहुत हल्की पड़ती है। ये स्थिति ही पेनुम्ब्रा कहलाती है और इसी कारण ये ग्रहण पेनुम्ब्रा चंद्रग्रहण या उपछाया चंद्रग्रहण कहलाता है। ये बहुत ही दुर्लभ होता है इसलिए इस बार के ग्रहण को काफी खास कहा जा रहा है और ऐसा नजारा दशकों में होता है। 5 मई के बाद तो ऐसी स्थिति 19 साल बाद सितंबर 2042 में दिखेगी इसी वजह इस बार चांद को लगने वाला ग्रहण बहुत ज्यादा खास है। यह पढ़ेंः Chandra Grahan 2023: भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण? आपके शहर में क्या है 5 मई को चंद्रोदय का Time?
- #Chandra GrahanChandra Grahan दो हज़ार तेईस: क्यों कुवारों के लिए अच्छा नहीं होता चंद्र ग्रहण? - #Chandra GrahanChandra Grahan दो हज़ार तेईस Katha: क्यों लगता है चांद को ग्रहण? क्या है इसके पीछे की कहानी? - #Chandra GrahanChandra Grahan दो हज़ार तेईस: आखिर हर पूर्णिमा पर क्यों नहीं लगता है चंद्र ग्रहण? Chandra Grahan दो हज़ार तेईस: आज का चंद्र ग्रहण क्यों है खास? उन्नीस साल तक क्यों नहीं होगी ऐसी अनोखी घटना? Chandra Grahan दो हज़ार तेईस : खगोल प्रेमियों के लिए आज का दिन बहुत खास है क्योंकि आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जो कि भारत में तो दिखाई नहीं देगा लेकिन ये यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अंटार्कटिका, प्रशांत अटलांटिक और हिंद महासागर के लोगों को नजर आएगा। चंद्रग्रहण पाँच-छः मई के दरमियान नजर आएगा। चंद्र ग्रहण शु्क्रवार रात आठ: पैंतालीस PM से शुरू होकर देर रात छः मई को एक. शून्य बजे समाप्त होगा, यानी कि इस ग्रहण की अवधि लगभग चार घंटाटे पंद्रह मिनट की है। क्यों खास है चंद्र ग्रहण? आज का चंद्र ग्रहण बहुत ज्यादा खास है क्योंकि पूर्ण चंद्र ग्रहण ना होकर उपछाया ग्रहण है। जो कि इसके बाद उन्नीस साल तक नजर नहीं आएगा। ये दुर्लभ चंद्र ग्रहण है इसलिए अगर आप इसे देखने से चूके तो आपको लंबा इंतजार करना होगा। क्या होता है चंद्र ग्रहण? जब चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंद्र ग्रहण लगता है, इस दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक सीध में आ जाते हैं जो कि पूर्णिमा के दिन ही संभव हो सकता है इसलिए चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन लगता है। ग्रहण के दौरान चंद्र का प्रकाश धुंधला हो जाता है। मालूम हो कि चंद्र ग्रहण तीन तरह के होते हैं। जो कि निम्नलिखित है। क्या है पेनुमब्रल या उपछाया चंद्रग्रहण? इस चंद्र ग्रहण के दौरान चांद पूरी तरह से पृथ्वी और सूर्य की सीध में नहीं आता है, बल्कि अर्थ की बाहरी स्थिति से होकर गुजरता है,इस दौरान उसका छाया पृथ्वी पर बहुत हल्की पड़ती है। ये स्थिति ही पेनुम्ब्रा कहलाती है और इसी कारण ये ग्रहण पेनुम्ब्रा चंद्रग्रहण या उपछाया चंद्रग्रहण कहलाता है। ये बहुत ही दुर्लभ होता है इसलिए इस बार के ग्रहण को काफी खास कहा जा रहा है और ऐसा नजारा दशकों में होता है। पाँच मई के बाद तो ऐसी स्थिति उन्नीस साल बाद सितंबर दो हज़ार बयालीस में दिखेगी इसी वजह इस बार चांद को लगने वाला ग्रहण बहुत ज्यादा खास है। यह पढ़ेंः Chandra Grahan दो हज़ार तेईस: भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण? आपके शहर में क्या है पाँच मई को चंद्रोदय का Time?