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Ranji Trophy 2022 रणजी ट्राफी टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेलने उतरे यश ढुल ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ दिया। पहले ही मैच में ऐसी यादगार पारी खेलते हुए इस बल्लेबाज ने दिल्ली की टीम को शुरुआती झकटों से उबारा। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारत के अंडर 19 टीम के विश्व चैंपियन कप्तान ने गुरुवार 17 फरवरी को अपना फर्स्टक्लास डेब्यू किया। रणजी ट्राफी टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेलने उतरे यश ढुल ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ दिया। पहले ही मैच में ऐसी यादगार पारी खेलते हुए इस बल्लेबाज ने दिल्ली की टीम को शुरुआती झकटों से उबारा। दिल्ली ने दिन का खेल खत्म होने तक 7 विकेट पर 291 रन बनाए थे। ढुल ने 113 रन की पारी खेल टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दिल्ली इस सीजन के अपने पहले रणजी मुकाबले में तमिलनाडु के खिलाफ खेलने उतरी। कप्तान विजय शंकर ने टास जीता और पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी दिल्ली के लिए पारी की शुरुआत करने धुव शौरी के साथ डेब्यू कर रहे यश ढुल उतरे। टीम को जल्दी जल्दी दो झटके लगे। 1 रन बनाकर ध्रुव आउट हुए जबकि हिम्मत सिंह खाता भी नहीं खोल पाए। 7 रन पर दो विकेट गंवाने के बाद टीम को यश ने नितिश राणा के साथ संभाला। अपना पहला रणजी मैच खेलने उतरे अंडर 19 विश्व कप विजेता कप्तान यश ने दमदार बल्लेबाजी की। पहले ही मैच में किसी अनुभवी बल्लेबाज की तरफ पारी को संभाला भी जमकर शाट भी लगाए। 14 चौके की मदद से उन्होंने 57 गेंद खेलकर हाफ सेंचुरी पूरी कि। इस दौरान तीसरे विकेट के लिए 60 रन जोड़े। लंच पर जाने के वक्त दिल्ली का स्कोर 3 विकेट पर 144 रन था। यश 104 गेंद पर 84 रन बनाकर वापस लौटे थे। लंच के बाद भी इस युवा ने अपनी दमदार बल्लेबाजी जारी रखी। 16 चौके जमाते हुए यश ने अपने पहले ही रणजी मैच में धमाकेदार शतक बना डाला। 150 गेंद पर 18 चौके की मदद से 113 रन की पारी खेली । हाल ही में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को अंडर 19 विश्व कप फाइनल में हराकर खिताब अपने नाम किया है। इस टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम ने एक भी मैच नहीं गंवाया। भारत के लिए सेमीफाइनल में यश ढुल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतक जमाया। उनकी बेहतरीन कप्तान के दम पर ही टीम इंडिया ने यह खिताब जीता। यश भारत के लिए अंडर 19 विश्व कप जीतने वाले पांचवें कप्तान बने। मोहम्मद कैफ, विराट कोहली, उनमुक्त चंद, पृथ्वी शा ने भारत को यह खिताब दिलाया था।
Ranji Trophy दो हज़ार बाईस रणजी ट्राफी टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेलने उतरे यश ढुल ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ दिया। पहले ही मैच में ऐसी यादगार पारी खेलते हुए इस बल्लेबाज ने दिल्ली की टीम को शुरुआती झकटों से उबारा। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारत के अंडर उन्नीस टीम के विश्व चैंपियन कप्तान ने गुरुवार सत्रह फरवरी को अपना फर्स्टक्लास डेब्यू किया। रणजी ट्राफी टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेलने उतरे यश ढुल ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ दिया। पहले ही मैच में ऐसी यादगार पारी खेलते हुए इस बल्लेबाज ने दिल्ली की टीम को शुरुआती झकटों से उबारा। दिल्ली ने दिन का खेल खत्म होने तक सात विकेट पर दो सौ इक्यानवे रन बनाए थे। ढुल ने एक सौ तेरह रन की पारी खेल टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दिल्ली इस सीजन के अपने पहले रणजी मुकाबले में तमिलनाडु के खिलाफ खेलने उतरी। कप्तान विजय शंकर ने टास जीता और पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी दिल्ली के लिए पारी की शुरुआत करने धुव शौरी के साथ डेब्यू कर रहे यश ढुल उतरे। टीम को जल्दी जल्दी दो झटके लगे। एक रन बनाकर ध्रुव आउट हुए जबकि हिम्मत सिंह खाता भी नहीं खोल पाए। सात रन पर दो विकेट गंवाने के बाद टीम को यश ने नितिश राणा के साथ संभाला। अपना पहला रणजी मैच खेलने उतरे अंडर उन्नीस विश्व कप विजेता कप्तान यश ने दमदार बल्लेबाजी की। पहले ही मैच में किसी अनुभवी बल्लेबाज की तरफ पारी को संभाला भी जमकर शाट भी लगाए। चौदह चौके की मदद से उन्होंने सत्तावन गेंद खेलकर हाफ सेंचुरी पूरी कि। इस दौरान तीसरे विकेट के लिए साठ रन जोड़े। लंच पर जाने के वक्त दिल्ली का स्कोर तीन विकेट पर एक सौ चौंतालीस रन था। यश एक सौ चार गेंद पर चौरासी रन बनाकर वापस लौटे थे। लंच के बाद भी इस युवा ने अपनी दमदार बल्लेबाजी जारी रखी। सोलह चौके जमाते हुए यश ने अपने पहले ही रणजी मैच में धमाकेदार शतक बना डाला। एक सौ पचास गेंद पर अट्ठारह चौके की मदद से एक सौ तेरह रन की पारी खेली । हाल ही में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को अंडर उन्नीस विश्व कप फाइनल में हराकर खिताब अपने नाम किया है। इस टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम ने एक भी मैच नहीं गंवाया। भारत के लिए सेमीफाइनल में यश ढुल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतक जमाया। उनकी बेहतरीन कप्तान के दम पर ही टीम इंडिया ने यह खिताब जीता। यश भारत के लिए अंडर उन्नीस विश्व कप जीतने वाले पांचवें कप्तान बने। मोहम्मद कैफ, विराट कोहली, उनमुक्त चंद, पृथ्वी शा ने भारत को यह खिताब दिलाया था।
398 सहीह बुख़ारी 8 हकमत और कज़ा का बयान चादर लेकर बाहर निकले देखा तो वो सालिम मौला अबू हुज़ैफ़ह (रजि.) हैं। आपने फ़र्माया अल्लाह का शुक्र है कि उस ने मेरी उम्मत में ऐसा शख़्स बनाया। सालिम (रजि.) इमामत कर रहे थे जो आज़ादकर्दा गुलाम थे, उसी से गुलाम को हाकिम या क़ाज़ी बनाना ष़ाबित हुआ, बशर्ते कि वो अहलियत रखता हो । बाब 26 : लोगों के चौधरी या नक़ीब बनाना ख़ानदान के नुमाइन्दे बनाना हूदीषे ज़ैल से ज़ाहिर है। 7176, 7177. हमसे इस्माईल बिन अबी उवैस ने बयान किया, उन्होंने कहा हमसे इस्माईल बिन इब्राहीम ने बयान किया, उनसे उनके चचा मूसा बिन उम्बा ने बयान किया, उनसे इब्ने शिहाब ने बयान किया, उनसे उर्वा बिन ज़ुबैर ने बयान किया और उन्हें मरवान बिन हकम और मिस्वर बिन मख़रमा (रजि.) ने ख़बर दी कि रसूले करीम ( ) ने जब मुसलमानों ने क़बीला हवाज़िन के कैदियों को इजाज़त दी तो फ़र्माया कि मुझे नहीं मा' लूम कि तुममें से किसने इजाज़त दी है और किसने नहीं दी है। पस वापस जाओ और तुम्हारा मामला हमारे पास तुम्हारे नक़ीब या चौधरी और तुम्हारे सरदार लाएँ । चुनाँचे लोग वापस चले गये और उनके ज़िम्मेदारों ने उनसे बात की और फिर आहज़रत () को आकर ख़बर दी कि लोगों ने दिली ख़ुशी से इजाज़त दे दी है । (राजेअः 2307, 2308) ٢٦- باب الغرفاء للناس 7178. हमसे अबू नुऐम फ़ज़्ल बिन दुकैन ने बयान किया, कहा हमसे आसिम बिन मुहम्मद बिन जैद बिन अब्दुल्लाह बिन उमर ने, और उनसे उनके वालिद ने, कि कुछ लोगों ने इब्ने उमर (रज़ि.) से कहा कि हम अपने हाकिमों के पास जाते हैं और उनके हक़ में वो बातें कहते हैं कि बाहर आने के बाद हम उसके ख़िलाफ़ कहते हैं । इब्ने उमर (रजि.) ने कहा कि हम उसे निफ़ाक़ कहते थे । ۷١٧٦، ۷۱۷۷- حدثنا إسماعيل بن أويس، حدثني إسماعيل بن إبراهيم، عن عمه موسى بن عقبة قال ابن شهاب: حدثني عروة بن الزبير أن مروان بن الحكم والمسور بن مخرمة أخبراه أن رسول الله قال حين أذن لهم المسلمون في عتق ستي هوازن فقال ((إني لا أدري من اذن منكم ممن لم يأذن، فارجعوا حتى يرفع إلينا عرفاؤكم أمركم)) فرجع الناس تكلمهم غرقاؤهم فرجعوا إلى رسول ال فأخبروه أن الناس قد طيبوا وأذنوا. बाब 27 : बादशाह के सामने मुँह दर मुँह खुशामद करना, पीठ पीछे उसको बुरा कहना मना है क्योंकि ये दग़ाबाज़ी और निफ़ाक़ है जिसके मा' नी यही हैं कि ज़ाहिर में कुछ हो और बातिन में कुछ यही निफ़ाक़ है। ۲۷- باب ما يكره من ثناء السلطان وإذا خرج قال : غير ذلك. ۷۱۷۸- حدثنا أبو نعيم، حدثنا عاصم بن محمد بن زيد بن عبد الله بن عمر، عن أبيه قال أناس لابن عمر: إنا ندخل على سلطانا فنقول لهم خلاف ما تتكلم إذا خرجنا من عندهم قال كنا نعدها بفاقا.
तीन सौ अट्ठानवे सहीह बुख़ारी आठ हकमत और कज़ा का बयान चादर लेकर बाहर निकले देखा तो वो सालिम मौला अबू हुज़ैफ़ह हैं। आपने फ़र्माया अल्लाह का शुक्र है कि उस ने मेरी उम्मत में ऐसा शख़्स बनाया। सालिम इमामत कर रहे थे जो आज़ादकर्दा गुलाम थे, उसी से गुलाम को हाकिम या क़ाज़ी बनाना ष़ाबित हुआ, बशर्ते कि वो अहलियत रखता हो । बाब छब्बीस : लोगों के चौधरी या नक़ीब बनाना ख़ानदान के नुमाइन्दे बनाना हूदीषे ज़ैल से ज़ाहिर है। सात हज़ार एक सौ छिहत्तर, सात हज़ार एक सौ सतहत्तर. हमसे इस्माईल बिन अबी उवैस ने बयान किया, उन्होंने कहा हमसे इस्माईल बिन इब्राहीम ने बयान किया, उनसे उनके चचा मूसा बिन उम्बा ने बयान किया, उनसे इब्ने शिहाब ने बयान किया, उनसे उर्वा बिन ज़ुबैर ने बयान किया और उन्हें मरवान बिन हकम और मिस्वर बिन मख़रमा ने ख़बर दी कि रसूले करीम ने जब मुसलमानों ने क़बीला हवाज़िन के कैदियों को इजाज़त दी तो फ़र्माया कि मुझे नहीं मा' लूम कि तुममें से किसने इजाज़त दी है और किसने नहीं दी है। पस वापस जाओ और तुम्हारा मामला हमारे पास तुम्हारे नक़ीब या चौधरी और तुम्हारे सरदार लाएँ । चुनाँचे लोग वापस चले गये और उनके ज़िम्मेदारों ने उनसे बात की और फिर आहज़रत को आकर ख़बर दी कि लोगों ने दिली ख़ुशी से इजाज़त दे दी है । छब्बीस- باب الغرفاء للناس सात हज़ार एक सौ अठहत्तर. हमसे अबू नुऐम फ़ज़्ल बिन दुकैन ने बयान किया, कहा हमसे आसिम बिन मुहम्मद बिन जैद बिन अब्दुल्लाह बिन उमर ने, और उनसे उनके वालिद ने, कि कुछ लोगों ने इब्ने उमर से कहा कि हम अपने हाकिमों के पास जाते हैं और उनके हक़ में वो बातें कहते हैं कि बाहर आने के बाद हम उसके ख़िलाफ़ कहते हैं । इब्ने उमर ने कहा कि हम उसे निफ़ाक़ कहते थे । सात हज़ार एक सौ छिहत्तर، सात हज़ार एक सौ सतहत्तर- حدثنا إسماعيل بن أويس، حدثني إسماعيل بن إبراهيم، عن عمه موسى بن عقبة قال ابن شهاب: حدثني عروة بن الزبير أن مروان بن الحكم والمسور بن مخرمة أخبراه أن رسول الله قال حين أذن لهم المسلمون في عتق ستي هوازن فقال ) فرجع الناس تكلمهم غرقاؤهم فرجعوا إلى رسول ال فأخبروه أن الناس قد طيبوا وأذنوا. बाब सत्ताईस : बादशाह के सामने मुँह दर मुँह खुशामद करना, पीठ पीछे उसको बुरा कहना मना है क्योंकि ये दग़ाबाज़ी और निफ़ाक़ है जिसके मा' नी यही हैं कि ज़ाहिर में कुछ हो और बातिन में कुछ यही निफ़ाक़ है। सत्ताईस- باب ما يكره من ثناء السلطان وإذا خرج قال : غير ذلك. सात हज़ार एक सौ अठहत्तर- حدثنا أبو نعيم، حدثنا عاصم بن محمد بن زيد بن عبد الله بن عمر، عن أبيه قال أناس لابن عمر: إنا ندخل على سلطانا فنقول لهم خلاف ما تتكلم إذا خرجنا من عندهم قال كنا نعدها بفاقا.
राज्य मंत्री और प्रमुख विपक्षी आईएनएलडी के एक विधायक के बीच हाथापाई की नौबत आने से बच गई। मार्शल, कुछ मंत्री और कुछ विधायक दीवार बनकर खड़े हो गए और तब जाकर हालात जैसे-तैसे संभाल गए। चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इतनी सियासी गर्मी बढ़ी कि एक राज्य मंत्री और प्रमुख विपक्षी आईएनएलडी के एक विधायक के बीच हाथापाई की नौबत आने से बच गई। सदन में जबरदस्त शोरगुल और हंगामे के बीच अचानक हुए घटनाक्रम को थामने के लिए मार्शल, कुछ मंत्री और कुछ विधायक दीवार बनकर खड़े हो गए और तब जाकर हालात जैसे-तैसे संभाल गए। यह वाकया राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और आईएनएलडी के विधायक केहर सिंह रावत के बीच व्यक्तिगत टिप्पणी के चलते कुछ ऐसा घटा कि हर कोई अवाक रह गया। सदन में विवाद की शुरुआत विपक्ष के नेता अभय चौटाला और राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के बीच शुरु हुई थी। उस वक्त किसानों का मुद्दा गूंज रहा था। अभय किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में लगे थे तो राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी समेत बीजेपी के अन्य विधायक जवाबी नोकझोंक करते नजर आए। इसी दौरान राज्य मंत्री बेदी ने अभय चौटाला की भाभी और डबवाली से विधायक नैना चौटाला व भतीजों दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला द्वारा पूर्व में की गई बयानबाजियों का उल्लेख कर टिप्पणी कर डाली। शोरगुल के बीच गुंडागर्दी जैसे शब्द भी सुनाई दिए। इससे सदन में शोर बढ़ गया और अभय चौटाला इस कदर बिफरे कि शिकायत करने के लिए पहले स्पीकर के आसन तक पहुंच गए। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु इस दौरान कुछ बोलने के लिए उठे थे कि अभय सीधे उनके पास गए। वहां कैप्टन का हाथ पकड़ कर वह उन्हें समझाते नजर आए। शोरगुल के कारण दोनों के बीच हुई बातचीत सुनी नहीं जा सकी। उधर, कैप्टन अभिमन्यु व अभय चौटाला आपस में बात कर रहे थे कि आईएनएलडी के अन्य विधायक भी सीटें छोड़कर सत्तापक्ष की सीटों की तरफ बढ़ गए। इसी दौरान बेदी और आईएनएलडी विधायक केहर सिंह रावत में तीखी कहासुनी शुरु हो गई। दोनों एक दूसरे को चुनौती पेश करते हुए और एक दूसरे की ओर हाथ लहराते देखे गए। इसी बीच केहर सिंह, मंत्री बेदी की सीट की तरफ बढ़े तो मौके की नजाकत देख कार्यवाही का संचालन कर रहे स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने तुरंत मार्शलों को सक्रिय कर दिया। मार्शलों और बेदी के पास बैठे राज्य मंत्री कर्ण देव कांबोज और मंत्री कविता जैन समेत अन्य बीजेपी के विधायक ढाल बनकर बेदी और रावत के बीच खड़े हो गए और दोनों को दूर करते और समझाते दिखाई दिए। हालात इतने गर्म थे कि एक मौके पर हाथापाई वाली नौबत आते-आते रह गई। उल्लेखनीय है कि पिछले मॉनसून सत्र के दौरान भी विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला और कांग्रेस के विधायक कर्ण सिंह दलाल के बीच एक शब्द को लेकर जूते निकालने और एक दूसरे से भिड़ने की घटना हुई थी। यह विवाद इतना आगे बढ़ गया था कि दलाल को एक साल के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया था।
राज्य मंत्री और प्रमुख विपक्षी आईएनएलडी के एक विधायक के बीच हाथापाई की नौबत आने से बच गई। मार्शल, कुछ मंत्री और कुछ विधायक दीवार बनकर खड़े हो गए और तब जाकर हालात जैसे-तैसे संभाल गए। चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इतनी सियासी गर्मी बढ़ी कि एक राज्य मंत्री और प्रमुख विपक्षी आईएनएलडी के एक विधायक के बीच हाथापाई की नौबत आने से बच गई। सदन में जबरदस्त शोरगुल और हंगामे के बीच अचानक हुए घटनाक्रम को थामने के लिए मार्शल, कुछ मंत्री और कुछ विधायक दीवार बनकर खड़े हो गए और तब जाकर हालात जैसे-तैसे संभाल गए। यह वाकया राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और आईएनएलडी के विधायक केहर सिंह रावत के बीच व्यक्तिगत टिप्पणी के चलते कुछ ऐसा घटा कि हर कोई अवाक रह गया। सदन में विवाद की शुरुआत विपक्ष के नेता अभय चौटाला और राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के बीच शुरु हुई थी। उस वक्त किसानों का मुद्दा गूंज रहा था। अभय किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में लगे थे तो राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी समेत बीजेपी के अन्य विधायक जवाबी नोकझोंक करते नजर आए। इसी दौरान राज्य मंत्री बेदी ने अभय चौटाला की भाभी और डबवाली से विधायक नैना चौटाला व भतीजों दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला द्वारा पूर्व में की गई बयानबाजियों का उल्लेख कर टिप्पणी कर डाली। शोरगुल के बीच गुंडागर्दी जैसे शब्द भी सुनाई दिए। इससे सदन में शोर बढ़ गया और अभय चौटाला इस कदर बिफरे कि शिकायत करने के लिए पहले स्पीकर के आसन तक पहुंच गए। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु इस दौरान कुछ बोलने के लिए उठे थे कि अभय सीधे उनके पास गए। वहां कैप्टन का हाथ पकड़ कर वह उन्हें समझाते नजर आए। शोरगुल के कारण दोनों के बीच हुई बातचीत सुनी नहीं जा सकी। उधर, कैप्टन अभिमन्यु व अभय चौटाला आपस में बात कर रहे थे कि आईएनएलडी के अन्य विधायक भी सीटें छोड़कर सत्तापक्ष की सीटों की तरफ बढ़ गए। इसी दौरान बेदी और आईएनएलडी विधायक केहर सिंह रावत में तीखी कहासुनी शुरु हो गई। दोनों एक दूसरे को चुनौती पेश करते हुए और एक दूसरे की ओर हाथ लहराते देखे गए। इसी बीच केहर सिंह, मंत्री बेदी की सीट की तरफ बढ़े तो मौके की नजाकत देख कार्यवाही का संचालन कर रहे स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने तुरंत मार्शलों को सक्रिय कर दिया। मार्शलों और बेदी के पास बैठे राज्य मंत्री कर्ण देव कांबोज और मंत्री कविता जैन समेत अन्य बीजेपी के विधायक ढाल बनकर बेदी और रावत के बीच खड़े हो गए और दोनों को दूर करते और समझाते दिखाई दिए। हालात इतने गर्म थे कि एक मौके पर हाथापाई वाली नौबत आते-आते रह गई। उल्लेखनीय है कि पिछले मॉनसून सत्र के दौरान भी विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला और कांग्रेस के विधायक कर्ण सिंह दलाल के बीच एक शब्द को लेकर जूते निकालने और एक दूसरे से भिड़ने की घटना हुई थी। यह विवाद इतना आगे बढ़ गया था कि दलाल को एक साल के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया था।
महेन्द भारती रेवाड़ी। शहर के माडल टाऊन स्थित बाल भवन में कृषि विभाग की ओर से किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में जिले के पगतिशील किसानों को केडिट कार्ड वितरित किए गए। किसानों को संबोधित करते हुए अतिरिक्प उपायुक्प डा. जे. गणेशन ने कहा कि जिले के किसान तरक्की व खुशहाली के लिए किसान पेडिट कार्ड अवश्य बनवाएं। उन्होंने कहा कि जिलेभर में किसान केडिट कार्ड बनवाने के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से 15 अक्पूबर तक इस कार्य को पूरा किया जाएगा, जिसके चलते किसान स्वयं किसान कार्ड बनवाएं और पड़ोसी किसानों को भी इसके लिए पेरित करें। उन्होंने विभाग द्वारा लगाई गई पदर्शनी का अवलोकन किया। अतिरिक्प उपायुक्प ने कहा कि किसान पेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साधन है, जिनकी पाप्ति के लिए योजनाओं का सरलीकरण कर दिया गया है, ताकि किसान इनका फायदा आसानी से ले सपें। उन्होंने कहा कि अब तक पंजाब नैशनल बैंक द्वारा 78 किसानों को 1 करोड 23 लाख, गुड़गांव ग्रामीण बैंक द्वारा 67 किसानों को एक करोड़ नौ लाख तथा अन्य दूसरे बैंकों सहित कुल 375 कार्ड जिसमें 4 करोड 13 लाख रुपए की लिमिट में किसान केडिट कार्ड बनवाने की पकिया पूरी कर ली गई है। किसानों को केडिट कार्ड उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से आज इस शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी और इस तरह के पैंपों का आयोजन करने के लिए पोत्साहित किया। उन्हेंने कहा कि किसान केडिट कार्डों से आपको अगले एक वर्ष के दौरान मांग के अनुसार ऋण व कृषि संबंधित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
महेन्द भारती रेवाड़ी। शहर के माडल टाऊन स्थित बाल भवन में कृषि विभाग की ओर से किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में जिले के पगतिशील किसानों को केडिट कार्ड वितरित किए गए। किसानों को संबोधित करते हुए अतिरिक्प उपायुक्प डा. जे. गणेशन ने कहा कि जिले के किसान तरक्की व खुशहाली के लिए किसान पेडिट कार्ड अवश्य बनवाएं। उन्होंने कहा कि जिलेभर में किसान केडिट कार्ड बनवाने के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से पंद्रह अक्पूबर तक इस कार्य को पूरा किया जाएगा, जिसके चलते किसान स्वयं किसान कार्ड बनवाएं और पड़ोसी किसानों को भी इसके लिए पेरित करें। उन्होंने विभाग द्वारा लगाई गई पदर्शनी का अवलोकन किया। अतिरिक्प उपायुक्प ने कहा कि किसान पेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साधन है, जिनकी पाप्ति के लिए योजनाओं का सरलीकरण कर दिया गया है, ताकि किसान इनका फायदा आसानी से ले सपें। उन्होंने कहा कि अब तक पंजाब नैशनल बैंक द्वारा अठहत्तर किसानों को एक करोड तेईस लाख, गुड़गांव ग्रामीण बैंक द्वारा सरसठ किसानों को एक करोड़ नौ लाख तथा अन्य दूसरे बैंकों सहित कुल तीन सौ पचहत्तर कार्ड जिसमें चार करोड तेरह लाख रुपए की लिमिट में किसान केडिट कार्ड बनवाने की पकिया पूरी कर ली गई है। किसानों को केडिट कार्ड उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से आज इस शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी और इस तरह के पैंपों का आयोजन करने के लिए पोत्साहित किया। उन्हेंने कहा कि किसान केडिट कार्डों से आपको अगले एक वर्ष के दौरान मांग के अनुसार ऋण व कृषि संबंधित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों की तीनों मांगें मान ली हैंं। हड़ताल के दौरान लगाया एस्मा हटाया जाएगा। आंदोलन के दौरान की अन्य कार्रवाई को वापस लेते हुए हड़ताल के दिनों को ड्यूटी में जोड़ा जाएगा। यूनियन ने परिवहन मंत्री के विस क्षेत्र इसराना में 22 सितंबर को किए जाने वाले सेमिनार टाल दिए हैं। परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार और रोडवेज की संयुक्त तालमेल कमेटी के बीच रेस्ट हाउस में करीब दो घंटे तक बातचीत चली। यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल में सर्व कर्मचारी संघ से इंद्र सिंह बधाना, महासचिव सरबत पूनिया, कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र धनखड़ और महासचिव पहल सिंह के अलावा हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दलबीर सिंह किरमारा मौजूद रहे। बैठक में पानीपत ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा भी मौजूद रहे। परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार ने बताया कि रोडवेज तालमेल कमेटी में चार यूनियनों के पदाधिकारी शामिल रहे। सभी मांगों को मान लिया गया है। रोडवेज यूनियनों ने 1 मार्च 2015 से लेकर 9 जनवरी 2019 तक छह बार हड़ताल की थी। सरकार ने एस्मा लगा दिया था। हड़ताल के दौरान गैरहाजिरी लगाने के साथ अन्य कार्रवाई की थी। परिवहन मंत्री ने बताया कि एस्मा खत्म करने के लिए मुख्य सचिव को लिखा जाएगा। इस अवधि को ड्यूटी में जोड़ा जाएगा। यूनियन ने किलोमीटर स्कीम में शामिल की जाने वाली 710 बसों के टेंडर को वापस लेने की मांग रखी। परिवहन मंत्री ने बताया कि बस ऑपरेटर और यूनियन कोर्ट में चले गए थे। कोर्ट ने पॉलिसी रद करने का फैसला दिया था। बस ऑपरेटर निजी सुनवाई के लिए फिर से कोर्ट में चले गए। कोर्ट के फैसले को सरकार लागू करेगी। यूनियन की तीसरी बड़ी मांग ड्राइवर, कंडक्टर और तकनीकी कर्मचारियों को मिलने वाली राजपत्रित छुट्टियां दूसरे राज्यों के बराबर करने की थी। नेताओं ने कहा कि 31 राजपत्रित छुट्टियों से ड्राइवर व कंडक्टर को तीन ही मिलती हैं। सरकार ने तकनीकी कर्मचारियों की छुट्टी घटाकर आठ कर दी। मंत्री ने बताया कि यह विधानसभा में प्रस्ताव मंजूर कराना है। तब तक ड्राइवरों को तीन और तकनीकी स्टाफ को 31 छुट्टियों की पुरानी पॉलिसी लागू रहेगी। कच्चे कर्मियों को पक्का करने की मांग पर परिवहन मंत्री ने बताया कि 1993 से अब तक लगे 8200 कर्मियों को पक्का कर दिया गया है। 1992 से 2004 के बीच के कर्मी अटके हैं। बैठक में सहमति बनी तो इन्हें पक्का किया जाएगा। जेएनएन, चंडीगढ़। नीतिगत मांगों पर सरकार और सर्व कर्मचारी संघ के बीच बैठक में कोई नतीजा निकल पाया है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और कर्मचारी नेताओं के बीच वीरवार को सिविल सचिवालय में दो घंटे चली बैठक में करीब आधा दर्जन मांगों पर सहमति बन गई, जबकि बड़ी मांगों पर कोई निर्णय नहीं हो सका। बैठक में सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलनों व हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ की गई उत्पीड़न एवं दमन की कार्रवाई को लटकाकर रखना चाहती है। इसका सर्व कर्मचारी संघ डटकर विरोध करेगा। उन्होंने बताया कि रोडवेज की हड़ताल के दौरान कर्मचारियों पर 1274 झूठे मुकदमे दर्ज कर उनकी सर्विस ब्रेक कर दी गई। मुकदमे वापस लेने और पिछले साल 8 व 9 जनवरी की हड़ताल को लीव आफ काइंड ड्यूटी करने से मना कर दिया गया है। लांबा ने कहा कि 20 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ हुई मीटिंग में करीब 24 बिंदुओं पर सहमति बनी थी, प्रोसिडिंग में केवल 12 का ही उल्लेख किया गया है। इसमें भी केवल दो के ही पत्र जारी हुए। पंजाब के समान वेतनमान व पेंशन तथा कच्चे कर्मियों को पक्का करने से भी सरकार ने मना कर दिया है। पुरानी पेंशन बहाली नहीं होगी।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों की तीनों मांगें मान ली हैंं। हड़ताल के दौरान लगाया एस्मा हटाया जाएगा। आंदोलन के दौरान की अन्य कार्रवाई को वापस लेते हुए हड़ताल के दिनों को ड्यूटी में जोड़ा जाएगा। यूनियन ने परिवहन मंत्री के विस क्षेत्र इसराना में बाईस सितंबर को किए जाने वाले सेमिनार टाल दिए हैं। परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार और रोडवेज की संयुक्त तालमेल कमेटी के बीच रेस्ट हाउस में करीब दो घंटे तक बातचीत चली। यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल में सर्व कर्मचारी संघ से इंद्र सिंह बधाना, महासचिव सरबत पूनिया, कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र धनखड़ और महासचिव पहल सिंह के अलावा हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दलबीर सिंह किरमारा मौजूद रहे। बैठक में पानीपत ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा भी मौजूद रहे। परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार ने बताया कि रोडवेज तालमेल कमेटी में चार यूनियनों के पदाधिकारी शामिल रहे। सभी मांगों को मान लिया गया है। रोडवेज यूनियनों ने एक मार्च दो हज़ार पंद्रह से लेकर नौ जनवरी दो हज़ार उन्नीस तक छह बार हड़ताल की थी। सरकार ने एस्मा लगा दिया था। हड़ताल के दौरान गैरहाजिरी लगाने के साथ अन्य कार्रवाई की थी। परिवहन मंत्री ने बताया कि एस्मा खत्म करने के लिए मुख्य सचिव को लिखा जाएगा। इस अवधि को ड्यूटी में जोड़ा जाएगा। यूनियन ने किलोमीटर स्कीम में शामिल की जाने वाली सात सौ दस बसों के टेंडर को वापस लेने की मांग रखी। परिवहन मंत्री ने बताया कि बस ऑपरेटर और यूनियन कोर्ट में चले गए थे। कोर्ट ने पॉलिसी रद करने का फैसला दिया था। बस ऑपरेटर निजी सुनवाई के लिए फिर से कोर्ट में चले गए। कोर्ट के फैसले को सरकार लागू करेगी। यूनियन की तीसरी बड़ी मांग ड्राइवर, कंडक्टर और तकनीकी कर्मचारियों को मिलने वाली राजपत्रित छुट्टियां दूसरे राज्यों के बराबर करने की थी। नेताओं ने कहा कि इकतीस राजपत्रित छुट्टियों से ड्राइवर व कंडक्टर को तीन ही मिलती हैं। सरकार ने तकनीकी कर्मचारियों की छुट्टी घटाकर आठ कर दी। मंत्री ने बताया कि यह विधानसभा में प्रस्ताव मंजूर कराना है। तब तक ड्राइवरों को तीन और तकनीकी स्टाफ को इकतीस छुट्टियों की पुरानी पॉलिसी लागू रहेगी। कच्चे कर्मियों को पक्का करने की मांग पर परिवहन मंत्री ने बताया कि एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से अब तक लगे आठ हज़ार दो सौ कर्मियों को पक्का कर दिया गया है। एक हज़ार नौ सौ बानवे से दो हज़ार चार के बीच के कर्मी अटके हैं। बैठक में सहमति बनी तो इन्हें पक्का किया जाएगा। जेएनएन, चंडीगढ़। नीतिगत मांगों पर सरकार और सर्व कर्मचारी संघ के बीच बैठक में कोई नतीजा निकल पाया है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और कर्मचारी नेताओं के बीच वीरवार को सिविल सचिवालय में दो घंटे चली बैठक में करीब आधा दर्जन मांगों पर सहमति बन गई, जबकि बड़ी मांगों पर कोई निर्णय नहीं हो सका। बैठक में सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलनों व हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ की गई उत्पीड़न एवं दमन की कार्रवाई को लटकाकर रखना चाहती है। इसका सर्व कर्मचारी संघ डटकर विरोध करेगा। उन्होंने बताया कि रोडवेज की हड़ताल के दौरान कर्मचारियों पर एक हज़ार दो सौ चौहत्तर झूठे मुकदमे दर्ज कर उनकी सर्विस ब्रेक कर दी गई। मुकदमे वापस लेने और पिछले साल आठ व नौ जनवरी की हड़ताल को लीव आफ काइंड ड्यूटी करने से मना कर दिया गया है। लांबा ने कहा कि बीस जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ हुई मीटिंग में करीब चौबीस बिंदुओं पर सहमति बनी थी, प्रोसिडिंग में केवल बारह का ही उल्लेख किया गया है। इसमें भी केवल दो के ही पत्र जारी हुए। पंजाब के समान वेतनमान व पेंशन तथा कच्चे कर्मियों को पक्का करने से भी सरकार ने मना कर दिया है। पुरानी पेंशन बहाली नहीं होगी।
शाम के नाश्ते के तौर पर आप कुछ बेहतरीन ट्राई करना चाहते होंगे तो आपके लिए अंडे और मकई मफिन से बहतर कुछ और हो नहीं सकता. ये कम समय में आसानी से बन जाता है और बेहद स्वादिष्ट होता है. अगर आप कॉन्टिनेंटल डिशेज पर नजर डालें तो एक चीज आपको अंडे और मफिन जरूर नजर आएगी. ये दोनों फेमस डिशेज का एक अभिन्न हिस्सा हैं और हकीकत में स्वादिष्ट और स्वस्थ भी है. मफिन के बारे में सोचें और आपको एक मीठे पकवान का आभास होगा, लेकिन ये मफिन रेसिपी अलग है और इसका स्वाद बेहतरीन है. पालक और मकई मफिन एक स्वादिष्ट और मुंह में पानी लाने वाला डिश है जिसे पालक, स्वीट कॉर्न, लाल बेल मिर्च, शकरकंद, रिज लौकी, सभी पर्पस फ्लोर, अंडे, चेडर चीज और वनस्पति तेल का इस्तेमाल करके पकाया जाता है. आप इस स्वादिष्ट कॉन्टिनेंटल रेसिपी को किटी पार्टी, बर्थडे पार्टी और पॉट लक जैसे मौकों पर बना सकते हैं, और ये सभी को पसंद आएगी. इस आसान रेसिपी को ट्राई करें और अपने प्रियजनों के साथ आनंद लें. पालक और कॉर्न मफिन्स को कैसे बनाएं? इस स्वादिष्ट नमकीन मफिन रेसिपी को तैयार करने के लिए, ओवन को 180 डिग्री सेल्सियस पर प्री-हीट करें और पेपर मफिन कप को वनस्पति तेल से ग्रीस करें. दूसरी ओर, मीडियम आंच पर एक प्रेशर कुकर डालें और उसमें शकरकंद डालकर आधे घंटे तक उबालें. जब ये हो जाए तो एक बड़े बाउल में शकरकंद को छीलकर मैश कर लें. इस बीच, जब शकरकंद पक रहे हों, सभी सब्जियों को बहते पानी में धो लें और फिर सभी सब्जियों को एक बड़े कटोरे में बारीक काट लें. वेजी बाउल में चेडर चीज को कद्दूकस कर लें और मैश किए हुए शकरकंद के साथ स्वीट कॉर्न डालें. पनीर के साथ सभी सब्जियों को हाथ से अच्छी तरह मिला लें. मिक्सचर में मसाले- नमक, काली मिर्च पाउडर और मिर्च के फ्लेक्स को कंबाइन करें. अब, अंडे को एक कटोरे में तोड़ लें और इलेक्ट्रिक बीटर का इस्तेमाल करके अच्छी तरह से फेंट लें. फिर, फेंटे हुए अंडे और मैदा को सब्जियों के कटोरे में डालें. एक स्पैटुला का इस्तेमाल करके सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं, और मफिन बैटर तैयार है. तैयार बैटर को घी लगे मफिन कप में डालें और बेकिंग ट्रे पर रख दें. इस ट्रे को पहले से गर्म किए हुए ओवन के अंदर रख दें. इन मफिन्स को तकरीबन 20-25 मिनट तक बेक करें और जब ये पक जाएं तो बेकिंग ट्रे को बाहर निकाल लें और इन स्वादिष्ट और लजीज पालक और कॉर्न मफिन को नाश्ते में या शाम को नाश्ते के रूप में गर्मा-गर्म परोसें. ये भी पढ़ें- Healthy Recipe : हेल्दी डाइट के तौर पर तैयार करें ओट्स से बने लड्डू, जानिए रेसिपी !
शाम के नाश्ते के तौर पर आप कुछ बेहतरीन ट्राई करना चाहते होंगे तो आपके लिए अंडे और मकई मफिन से बहतर कुछ और हो नहीं सकता. ये कम समय में आसानी से बन जाता है और बेहद स्वादिष्ट होता है. अगर आप कॉन्टिनेंटल डिशेज पर नजर डालें तो एक चीज आपको अंडे और मफिन जरूर नजर आएगी. ये दोनों फेमस डिशेज का एक अभिन्न हिस्सा हैं और हकीकत में स्वादिष्ट और स्वस्थ भी है. मफिन के बारे में सोचें और आपको एक मीठे पकवान का आभास होगा, लेकिन ये मफिन रेसिपी अलग है और इसका स्वाद बेहतरीन है. पालक और मकई मफिन एक स्वादिष्ट और मुंह में पानी लाने वाला डिश है जिसे पालक, स्वीट कॉर्न, लाल बेल मिर्च, शकरकंद, रिज लौकी, सभी पर्पस फ्लोर, अंडे, चेडर चीज और वनस्पति तेल का इस्तेमाल करके पकाया जाता है. आप इस स्वादिष्ट कॉन्टिनेंटल रेसिपी को किटी पार्टी, बर्थडे पार्टी और पॉट लक जैसे मौकों पर बना सकते हैं, और ये सभी को पसंद आएगी. इस आसान रेसिपी को ट्राई करें और अपने प्रियजनों के साथ आनंद लें. पालक और कॉर्न मफिन्स को कैसे बनाएं? इस स्वादिष्ट नमकीन मफिन रेसिपी को तैयार करने के लिए, ओवन को एक सौ अस्सी डिग्री सेल्सियस पर प्री-हीट करें और पेपर मफिन कप को वनस्पति तेल से ग्रीस करें. दूसरी ओर, मीडियम आंच पर एक प्रेशर कुकर डालें और उसमें शकरकंद डालकर आधे घंटे तक उबालें. जब ये हो जाए तो एक बड़े बाउल में शकरकंद को छीलकर मैश कर लें. इस बीच, जब शकरकंद पक रहे हों, सभी सब्जियों को बहते पानी में धो लें और फिर सभी सब्जियों को एक बड़े कटोरे में बारीक काट लें. वेजी बाउल में चेडर चीज को कद्दूकस कर लें और मैश किए हुए शकरकंद के साथ स्वीट कॉर्न डालें. पनीर के साथ सभी सब्जियों को हाथ से अच्छी तरह मिला लें. मिक्सचर में मसाले- नमक, काली मिर्च पाउडर और मिर्च के फ्लेक्स को कंबाइन करें. अब, अंडे को एक कटोरे में तोड़ लें और इलेक्ट्रिक बीटर का इस्तेमाल करके अच्छी तरह से फेंट लें. फिर, फेंटे हुए अंडे और मैदा को सब्जियों के कटोरे में डालें. एक स्पैटुला का इस्तेमाल करके सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं, और मफिन बैटर तैयार है. तैयार बैटर को घी लगे मफिन कप में डालें और बेकिंग ट्रे पर रख दें. इस ट्रे को पहले से गर्म किए हुए ओवन के अंदर रख दें. इन मफिन्स को तकरीबन बीस-पच्चीस मिनट तक बेक करें और जब ये पक जाएं तो बेकिंग ट्रे को बाहर निकाल लें और इन स्वादिष्ट और लजीज पालक और कॉर्न मफिन को नाश्ते में या शाम को नाश्ते के रूप में गर्मा-गर्म परोसें. ये भी पढ़ें- Healthy Recipe : हेल्दी डाइट के तौर पर तैयार करें ओट्स से बने लड्डू, जानिए रेसिपी !
बूंदी। 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक मनाए जा रहे नेत्रदान पखवाड़े के अंतर्गत बुधवार को कन्या महाविद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जीवन में नेत्रदान, देहदान व रक्तदान के महत्व पर डॉ. दिनेश शर्मा ने प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मधुसूदन गुप्ता, वैभव, ऋतुराज कोठीवाला, स्मृति संस्थान बूंदी, बी. एस. आकोदिया उपाचार्य, मुकेश खत्री, इंद्रपाल आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन छात्रसंघ अध्यक्ष पूजारानी धाभाई ने किया।
बूंदी। पच्चीस अगस्त से आठ सितम्बर तक मनाए जा रहे नेत्रदान पखवाड़े के अंतर्गत बुधवार को कन्या महाविद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जीवन में नेत्रदान, देहदान व रक्तदान के महत्व पर डॉ. दिनेश शर्मा ने प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मधुसूदन गुप्ता, वैभव, ऋतुराज कोठीवाला, स्मृति संस्थान बूंदी, बी. एस. आकोदिया उपाचार्य, मुकेश खत्री, इंद्रपाल आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन छात्रसंघ अध्यक्ष पूजारानी धाभाई ने किया।
NewDelhi : विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार पर कायम है. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, मई माह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआई) ने भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 43,838 करोड़ रुपये का निवेश किया. यह पिछले नौ माह में एफपीआई के निवेश का सबसे उच्च स्तर है. शेयरों के अलावा एफपीआई ने मई में ऋण या बॉन्ड बाजार में भी 3,276 करोड़ रुपये डाले हैं. इस तरह 2023 में अबतक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों में 35,748 करोड़ रुपये और बॉन्ड बाजार में 7,471 करोड़ रुपये डाल चुके हैं. इतना ही नहीं जून माह में शेयर बाजार में भी विदेशी निवेशकों ने लिवाली जारी रखी है. जून महीने के पहले दो कारोबारी सत्रों में शेयर बाजारों में 6,490 करोड़ रुपये डाले हैं. (पढ़ें, ओडिशा रेल हादसे पर रेलवे ने कहा, हम सभी एंगल से जांच कर रहे हैं, प्रथम दृष्टया यह सिग्नलिंग का मामला है...) डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने अगस्त 2022 में शेयरों में शुद्ध रूप से 51,204 करोड़ रुपये डाले थे. इससे पहले अप्रैल में विदेशी निवेशकों ने शेयरों में शुद्ध रूप से 11,630 करोड़ और मार्च में 7,936 करोड़ डाले थे. मार्च का निवेश मुख्य रूप से अमेरिका स्थित जीक्यूजी पार्टनर्स से आया था. जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी समूह की कंपनियों में पैसा लगाया था. जिसकी वजह से मार्च में एफपीआई का निवेश मार्च में सकारात्मक रहा था. इससे पहले एफपीआई ने 19 मार्च तक भारतीय इक्विटी में 11,500 करोड़ डाले थे. इसके अलावा इस साल के पहले दो माह यानी जनवरी-फरवरी में एफपीआई ने 34,000 करोड़ से अधिक की निकासी की थी. मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि एफपीआई का ताजा प्रवाह मजबूत वृहद परिदृश्य, शेयरों के उचित मूल्यांकन और बेहतर तिमाही नतीजों की वजह से है. जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि इस महीने भी एफपीआई का प्रवाह जारी रहेगा. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों के साथ अन्य संकेतक इस बात का इशारा कर रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था और मजबूत हो रही है.
NewDelhi : विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार पर कायम है. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, मई माह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से तैंतालीस,आठ सौ अड़तीस करोड़ रुपये का निवेश किया. यह पिछले नौ माह में एफपीआई के निवेश का सबसे उच्च स्तर है. शेयरों के अलावा एफपीआई ने मई में ऋण या बॉन्ड बाजार में भी तीन,दो सौ छिहत्तर करोड़ रुपये डाले हैं. इस तरह दो हज़ार तेईस में अबतक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों में पैंतीस,सात सौ अड़तालीस करोड़ रुपये और बॉन्ड बाजार में सात,चार सौ इकहत्तर करोड़ रुपये डाल चुके हैं. इतना ही नहीं जून माह में शेयर बाजार में भी विदेशी निवेशकों ने लिवाली जारी रखी है. जून महीने के पहले दो कारोबारी सत्रों में शेयर बाजारों में छः,चार सौ नब्बे करोड़ रुपये डाले हैं. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने अगस्त दो हज़ार बाईस में शेयरों में शुद्ध रूप से इक्यावन,दो सौ चार करोड़ रुपये डाले थे. इससे पहले अप्रैल में विदेशी निवेशकों ने शेयरों में शुद्ध रूप से ग्यारह,छः सौ तीस करोड़ और मार्च में सात,नौ सौ छत्तीस करोड़ डाले थे. मार्च का निवेश मुख्य रूप से अमेरिका स्थित जीक्यूजी पार्टनर्स से आया था. जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी समूह की कंपनियों में पैसा लगाया था. जिसकी वजह से मार्च में एफपीआई का निवेश मार्च में सकारात्मक रहा था. इससे पहले एफपीआई ने उन्नीस मार्च तक भारतीय इक्विटी में ग्यारह,पाँच सौ करोड़ डाले थे. इसके अलावा इस साल के पहले दो माह यानी जनवरी-फरवरी में एफपीआई ने चौंतीस,शून्य करोड़ से अधिक की निकासी की थी. मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि एफपीआई का ताजा प्रवाह मजबूत वृहद परिदृश्य, शेयरों के उचित मूल्यांकन और बेहतर तिमाही नतीजों की वजह से है. जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि इस महीने भी एफपीआई का प्रवाह जारी रहेगा. सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों के साथ अन्य संकेतक इस बात का इशारा कर रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था और मजबूत हो रही है.
Urfi Javed Eye Fillers Gets Wrong: उर्फी जावेद अपने अतरंगी ड्रेसिंग स्टाइल के कारण काफी चर्चा में रहती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस ने डार्क सर्कल हटाने के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया था, जिसका उनके चेहरे पर काफी बुरा असर पड़ा है। Urfi Javed Eye Fillers Treatment Goes Wrong: टीवी की मशहूर एक्ट्रेस उर्फी जावेद अपने लुक्स के लिए काफी चर्चा में रहती हैं। एक्ट्रेस अक्सर नई-नई ड्रेस पहनकर लोगों को हैरान करने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। अपने अतरंगी ड्रेसिंग सेंस के लिए उर्फी जावेद जमकर ट्रोल भी होती हैं। हालांकि इस बार उर्फी जावेद अपनी ड्रेस के लिए नहीं बल्कि ब्यूटी ट्रीटमेंट के लिए चर्चा में आ गई हैं। दरअसल, उर्फी जावेद ने आंखों के नीचे ट्रीटमेंट कराया था, जिसका उनके चेहरे पर बेहद बुरा असर पड़ा। उर्फी जावेद ने इंस्टाग्राम पर स्टोरी साझा कर अपना दर्द भी बयां किया। उर्फी जावेद की इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। उर्फी जावेद ने आंखों के आस-पास डार्क सर्कल दूर करने के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया था। लेकिन इस ट्रीटमेंट ने उर्फी जावेद के चेहरे पर ऐसा बुरा असर किया कि अब मेकअप से भी वह चीज ठीक नहीं हो रही है। उर्फी जावेद ने इस चीज को लेकर इंस्टाग्राम पर स्टोरी भी साझा की थी। हालांकि उन्होंने बाद में वह पोस्ट डिलीट कर दी। उर्फी जावेद ने इस बारे में बताया, "मैं डार्क सर्कल्स के कार काफी ट्रोल होती थी। ऐसे में मैंने आई फिलर ट्रीटमेंट कराया। लेकिन अब मेरा चेहरा और अजीब लग रहा है। आई फिलर ठीक नहीं हुए हैं और बहुद भद्दे लग रहे हैं। यहां तक कि मेकअप से भी मेरी आंखों के नीचे का हिस्सा ठीक नहीं हो रहा। ये मैंने खुद के साथ क्यों किया।" उर्फी जावेद ने अपनी पोस्ट में बताया था कि उन्हें बचपन से ही आंखों के पास डार्क सर्कल की प्रॉब्लम रही है। ऐसे में वह आई फिलर के जरिए इसे दूर करना चाहती थीं, लेकिन उस ट्रीटमेंट का उनके चेहरे पर गलत असर हुआ। उर्फी जावेद ने पोस्ट में चिंता जाहिर करते हुए लिखा, "मुझे बचपन से ही डार्क सर्कल की परेशानी थी। ऐसे में मैंने आई फिलर ट्रीटमेंट कराया, लेकिन अब मेरा चेहरा बहुत अजीब लग रहा है। उम्मीद करती हूं कि यह जल्दी ठक हो जाए। मेरा मन नहीं था बिना मेकअप के फोटो शेयर करने का।" बता दें कि उर्फी जावेद ने आंखों से पहले होठों की भी सर्जरी कराई थी, लेकिन वो ट्रीटमेंट भी सही नहीं हो पाया था। इसपर भी एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी साझा की थी और बताया था कि लिप फिलर्स से भी परेशान हो गई हूं। ये बहुत बुरी तरह सूज गए हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Urfi Javed Eye Fillers Gets Wrong: उर्फी जावेद अपने अतरंगी ड्रेसिंग स्टाइल के कारण काफी चर्चा में रहती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस ने डार्क सर्कल हटाने के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया था, जिसका उनके चेहरे पर काफी बुरा असर पड़ा है। Urfi Javed Eye Fillers Treatment Goes Wrong: टीवी की मशहूर एक्ट्रेस उर्फी जावेद अपने लुक्स के लिए काफी चर्चा में रहती हैं। एक्ट्रेस अक्सर नई-नई ड्रेस पहनकर लोगों को हैरान करने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। अपने अतरंगी ड्रेसिंग सेंस के लिए उर्फी जावेद जमकर ट्रोल भी होती हैं। हालांकि इस बार उर्फी जावेद अपनी ड्रेस के लिए नहीं बल्कि ब्यूटी ट्रीटमेंट के लिए चर्चा में आ गई हैं। दरअसल, उर्फी जावेद ने आंखों के नीचे ट्रीटमेंट कराया था, जिसका उनके चेहरे पर बेहद बुरा असर पड़ा। उर्फी जावेद ने इंस्टाग्राम पर स्टोरी साझा कर अपना दर्द भी बयां किया। उर्फी जावेद की इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। उर्फी जावेद ने आंखों के आस-पास डार्क सर्कल दूर करने के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया था। लेकिन इस ट्रीटमेंट ने उर्फी जावेद के चेहरे पर ऐसा बुरा असर किया कि अब मेकअप से भी वह चीज ठीक नहीं हो रही है। उर्फी जावेद ने इस चीज को लेकर इंस्टाग्राम पर स्टोरी भी साझा की थी। हालांकि उन्होंने बाद में वह पोस्ट डिलीट कर दी। उर्फी जावेद ने इस बारे में बताया, "मैं डार्क सर्कल्स के कार काफी ट्रोल होती थी। ऐसे में मैंने आई फिलर ट्रीटमेंट कराया। लेकिन अब मेरा चेहरा और अजीब लग रहा है। आई फिलर ठीक नहीं हुए हैं और बहुद भद्दे लग रहे हैं। यहां तक कि मेकअप से भी मेरी आंखों के नीचे का हिस्सा ठीक नहीं हो रहा। ये मैंने खुद के साथ क्यों किया।" उर्फी जावेद ने अपनी पोस्ट में बताया था कि उन्हें बचपन से ही आंखों के पास डार्क सर्कल की प्रॉब्लम रही है। ऐसे में वह आई फिलर के जरिए इसे दूर करना चाहती थीं, लेकिन उस ट्रीटमेंट का उनके चेहरे पर गलत असर हुआ। उर्फी जावेद ने पोस्ट में चिंता जाहिर करते हुए लिखा, "मुझे बचपन से ही डार्क सर्कल की परेशानी थी। ऐसे में मैंने आई फिलर ट्रीटमेंट कराया, लेकिन अब मेरा चेहरा बहुत अजीब लग रहा है। उम्मीद करती हूं कि यह जल्दी ठक हो जाए। मेरा मन नहीं था बिना मेकअप के फोटो शेयर करने का।" बता दें कि उर्फी जावेद ने आंखों से पहले होठों की भी सर्जरी कराई थी, लेकिन वो ट्रीटमेंट भी सही नहीं हो पाया था। इसपर भी एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी साझा की थी और बताया था कि लिप फिलर्स से भी परेशान हो गई हूं। ये बहुत बुरी तरह सूज गए हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
एप्पल ने पहली बार एक साथ 3 नए आईफोन लॉन्च किए. बीती रात अमेरिका के कैलिपोर्निया में आईफोन 8, आईफोन 8 प्लस और आईफोन 10 लॉन्च कर दिया. ये अबतक की सबसे महंगे और स्मार्ट फीचर वाले फोन हैं. आईफोन 8 और 8 प्लस के दो वेरिएंट 64 जीबी और 256 जीबी में उपलब्ध हैं.
एप्पल ने पहली बार एक साथ तीन नए आईफोन लॉन्च किए. बीती रात अमेरिका के कैलिपोर्निया में आईफोन आठ, आईफोन आठ प्लस और आईफोन दस लॉन्च कर दिया. ये अबतक की सबसे महंगे और स्मार्ट फीचर वाले फोन हैं. आईफोन आठ और आठ प्लस के दो वेरिएंट चौंसठ जीबी और दो सौ छप्पन जीबी में उपलब्ध हैं.
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 23 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 23 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल २,६३२ बार देखा गया है। पंचकोण एक बहुभुज होता है जिसमें पाँच सीधी भुजाएँ होती हैं। गणित की कक्षा में आपको मिलने वाले लगभग सभी सवाल रेगुलर पंचकोण को कवर करेंगे, जिनमें पाँच बराबर भुजाएँ होंगी। आपके पास कितनी जानकारी है, इसके आधार पर क्षेत्रफल को पता करने के दो कॉमन तरीके हैं। विधि 1 का 3: {"smallUrl":"https:\/\/www2पंचकोण को पाँच त्रिभुजों में बाँटेंः पंचकोण के केंद्र से पाँच रेखाएँ खींचें, जो प्रत्येक शीर्ष (कोने) तक जाती हों। अब आपके पास पाँच त्रिभुज हैं। {"smallUrl":"https:\/\/www4कुल क्षेत्रफल पता करने के लिए पाँच से गुणा करेंः हमने पंचकोण को पाँच बराबर त्रिभुजों में बाँटा है। कुल क्षेत्रफल पता करने के लिए, बस एक त्रिभुज के क्षेत्रफल को पाँच से गुणा करें। - हमारे उदाहरण में, A (कुल पंचकोण) = 5 x A (त्रिभुज) = 5 x 3 = 15 स्क्वायर यूनिट है। विधि 2 का 3: {"smallUrl":"https:\/\/www2पंचकोण को पाँच त्रिभुजों में बाँटेंः पंचकोण के केंद्र से किसी भी शीर्ष (vertex) तक एक रेखा खींचें। इसे हर शीर्ष के लिए दोहरायें। अब आपके पास पांच त्रिभुज हैं, जो सब बराबर साइज के हैं। {"smallUrl":"https:\/\/www4किसी एक छोटे त्रिभुज को लेबल करेंः हम पहले से ही एक भुजा और छोटे त्रिभुज के एक कोण को लेबल कर सकते हैंः - समकोण त्रिभुज में, कोण का tangent विपरीत पक्ष की लंबाई, बगल की भुजा की लंबाई से विभाजित लम्बाई के बराबर होता है। - 36o कोण के विपरीत वाली भुजा त्रिभुज का आधार (पंचकोण की भुजा का आधा) है। 36o कोण के बगल वाली भुजा त्रिभुज की ऊंचाई होती है। - हमारे उदाहरण में, tan(36o) = 36त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालेंः एक त्रिभुज का क्षेत्रफल 1⁄2 आधार x ऊँचाई के बराबर होता है। (A = 1⁄2bh7पंचकोण का क्षेत्रफल निकालने के लिए गुणा करेंः इन छोटे त्रिभुजों में से एक पेंटागन के क्षेत्रफल का 1/10 भाग कवर करता है। कुल क्षेत्रफल निकालने के लिए, छोटे त्रिभुज के क्षेत्रफल को 10 से गुणा करें। - हमारे उदाहरण में, पूरे पंचकोण का क्षेत्रफल = 81परिधि (perimeter) और अन्तःत्रिज्या (apothem) का उपयोग करेंः अन्तःत्रिज्या एक पंचकोण के केंद्र से एक रेखा है, जो एक भुजा को समकोण पर काटती है। यदि आपको इसकी लंबाई दी गई है, तो आप इस आसान फॉर्मूले का उपयोग कर सकते हैं। - अगर आप परिधि नहीं जानते हैं, तो उसे भुजा की लंबाईः p = 5s से कैलकुलेट करें, जहाँ s भुजा की लंबाई है। - रेगुलर पंचकोण का क्षेत्रफल = (5/2)r2sin(72o), जहाँ r त्रिज्या है। - फॉर्मूले ज्यामितीय तरीकों से प्राप्त हुए हैं, जो यहाँ बताए गए हैं। देखें कि क्या आप पता लगा सकते हैं कि उन्हें कैसे निकालना है। त्रिज्या से फॉर्मूले को हल करना दूसरों की तुलना ज्यादा कठिन है (हिंटः आपको डबल एंगल आइडेंटिटी की जरूरत होगी)। - यहाँ दिए उदाहरण में गणित को सरल करने के लिए राउंड वैल्यू का उपयोग किया है। अगर आप दी गयी भुजा की लंबाई वाले असली पंचकोण को नापते हैं, तो आपको दूसरी लंबाईयों और क्षेत्रफल के लिए थोडें अलग रिजल्ट मिलेंगे। - इररेगुलर पंचकोण, या असमान भुजाओं वाले पंचकोण पढ़ने में ज्यादा कठिन हैं। आमतौर पर पंचकोणों को त्रिभुजों में बाँटना, और हर त्रिभुज के क्षेत्रफल को जोड़ देना सबसे अच्छा तरीका है। आपको पंचकोण के चारों तरफ एक बड़ा आकार खींचने करने की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसका क्षेत्रफल निकालें, और एक्स्ट्रा जगह के क्षेत्रफल को घटा दें। - अगर संभव हो, तो दोनों ज्यामितिक तरीके और फॉर्मूला तरीके का उपयोग करें, और आपका उत्तर सही है तो कन्फर्म करने के लिए रिजल्ट की तुलना करें। आपको थोड़े अलग उत्तर मिल सकते हैं अगर आप फॉर्मूले को एक बार में लगा देते हैं (क्योंकि आप इस तरह राउंड नहीं करेंगे), लेकिन वे बहुत पास होने चाहिए। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो २,६३२ बार पढ़ा गया है।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, तेईस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, तेईस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल दो,छः सौ बत्तीस बार देखा गया है। पंचकोण एक बहुभुज होता है जिसमें पाँच सीधी भुजाएँ होती हैं। गणित की कक्षा में आपको मिलने वाले लगभग सभी सवाल रेगुलर पंचकोण को कवर करेंगे, जिनमें पाँच बराबर भुजाएँ होंगी। आपके पास कितनी जानकारी है, इसके आधार पर क्षेत्रफल को पता करने के दो कॉमन तरीके हैं। विधि एक का तीन: {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोपंचकोण को पाँच त्रिभुजों में बाँटेंः पंचकोण के केंद्र से पाँच रेखाएँ खींचें, जो प्रत्येक शीर्ष तक जाती हों। अब आपके पास पाँच त्रिभुज हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारकुल क्षेत्रफल पता करने के लिए पाँच से गुणा करेंः हमने पंचकोण को पाँच बराबर त्रिभुजों में बाँटा है। कुल क्षेत्रफल पता करने के लिए, बस एक त्रिभुज के क्षेत्रफल को पाँच से गुणा करें। - हमारे उदाहरण में, A = पाँच x A = पाँच x तीन = पंद्रह स्क्वायर यूनिट है। विधि दो का तीन: {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोपंचकोण को पाँच त्रिभुजों में बाँटेंः पंचकोण के केंद्र से किसी भी शीर्ष तक एक रेखा खींचें। इसे हर शीर्ष के लिए दोहरायें। अब आपके पास पांच त्रिभुज हैं, जो सब बराबर साइज के हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारकिसी एक छोटे त्रिभुज को लेबल करेंः हम पहले से ही एक भुजा और छोटे त्रिभुज के एक कोण को लेबल कर सकते हैंः - समकोण त्रिभुज में, कोण का tangent विपरीत पक्ष की लंबाई, बगल की भुजा की लंबाई से विभाजित लम्बाई के बराबर होता है। - छत्तीसo कोण के विपरीत वाली भुजा त्रिभुज का आधार है। छत्तीसo कोण के बगल वाली भुजा त्रिभुज की ऊंचाई होती है। - हमारे उदाहरण में, tan = छत्तीसत्रिभुज का क्षेत्रफल निकालेंः एक त्रिभुज का क्षेत्रफल एक⁄दो आधार x ऊँचाई के बराबर होता है। और अन्तःत्रिज्या का उपयोग करेंः अन्तःत्रिज्या एक पंचकोण के केंद्र से एक रेखा है, जो एक भुजा को समकोण पर काटती है। यदि आपको इसकी लंबाई दी गई है, तो आप इस आसान फॉर्मूले का उपयोग कर सकते हैं। - अगर आप परिधि नहीं जानते हैं, तो उसे भुजा की लंबाईः p = पाँच सेकंड से कैलकुलेट करें, जहाँ s भुजा की लंबाई है। - रेगुलर पंचकोण का क्षेत्रफल = rदोsin, जहाँ r त्रिज्या है। - फॉर्मूले ज्यामितीय तरीकों से प्राप्त हुए हैं, जो यहाँ बताए गए हैं। देखें कि क्या आप पता लगा सकते हैं कि उन्हें कैसे निकालना है। त्रिज्या से फॉर्मूले को हल करना दूसरों की तुलना ज्यादा कठिन है । - यहाँ दिए उदाहरण में गणित को सरल करने के लिए राउंड वैल्यू का उपयोग किया है। अगर आप दी गयी भुजा की लंबाई वाले असली पंचकोण को नापते हैं, तो आपको दूसरी लंबाईयों और क्षेत्रफल के लिए थोडें अलग रिजल्ट मिलेंगे। - इररेगुलर पंचकोण, या असमान भुजाओं वाले पंचकोण पढ़ने में ज्यादा कठिन हैं। आमतौर पर पंचकोणों को त्रिभुजों में बाँटना, और हर त्रिभुज के क्षेत्रफल को जोड़ देना सबसे अच्छा तरीका है। आपको पंचकोण के चारों तरफ एक बड़ा आकार खींचने करने की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसका क्षेत्रफल निकालें, और एक्स्ट्रा जगह के क्षेत्रफल को घटा दें। - अगर संभव हो, तो दोनों ज्यामितिक तरीके और फॉर्मूला तरीके का उपयोग करें, और आपका उत्तर सही है तो कन्फर्म करने के लिए रिजल्ट की तुलना करें। आपको थोड़े अलग उत्तर मिल सकते हैं अगर आप फॉर्मूले को एक बार में लगा देते हैं , लेकिन वे बहुत पास होने चाहिए। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो दो,छः सौ बत्तीस बार पढ़ा गया है।
उसने अपने मुँह पर भी फिराया और बोला - "प्राज प्रभात बेला में उठते समय अनेकों प्राणियों ने नये २ मन्सूबे बाँधे होंगे। मगर न जाने कितनों के पूरे हुये होंगे और कितनों के मिट्टी में मिल गये होंगे ? जिनके पूरे हुये होंगे उनमें से मैं भी एक भाग्यवान् प्राणी हूँ।" लावण्य शान्त रही। उसने अमित को उत्तर नहीं दिया । अमित ने पुनः कहा - "बन्या, तुम्हारा मौन मेरे हृदय पर आघात कर रहा है । " लावण्य ने नीची आखें करके उत्तर दिया--- "मीता, तुम्हारी बातें सुन कर मुझे भय लगता है ।" अमित बोला - "कैसा भय ?" लावण्य ने कहा - "तुम्हारी प्राकांक्षा पूर्ण करने में मैं कहां तक समर्थ हो सकूगी ? यही सोचकर हृदय कांप उठता है ।" अमित बोला - "विना विचारे ही तुम मुझे जितना देती रहती हो उसे पाकर ही में सन्तुष्ट रहता हूँ। वहीं तो तुम्हारे दान का महत्व है। यह बात शायद तुम नहीं जानतीं ?" लावण्य बोली- "यह जान कर मौसी जी ने अपनी सम्मति दे दी है, में सोचने लगी हूँ कि अब मैं तुम्हारी पकड़ से न बच सकूगी ।" श्रमित ने कहा - "एक न एक दिन पकड़ में तो आना ही था ! सोच कैसा ?" लावण्य बोली- "मीता ! तुम्हारी बुद्धि मुझसे बहुत आगे है। में तुम्हारा सहयोग दे सकूगी अथवा मार्ग ही में पिछड़ जाऊँगी ? जानती हूँ अगर पिछड़ गयी तो तुम बुलाओगे भी नहीं। मीता, मेरी बात मानो, मैं तुम्हारे योग्य नहीं । तुम मेरे साथ ब्याह करने की बात छोड़ दो। अब तक तुम्हारे संसर्ग में रह कर जो कुछ भी मैंने पाया है उसके सहारे ही मेरा शेष जीवन चैन से बीत जायेगा। मैं नहीं चाहती कि तुम मेरे कारण अपने हृदय की स्वतंत्रता छीन लो ।" अमित बोला - "तुम क्या कह रही हो ? यह सब श्राशंकायें क्यों ? मुझ पर विश्वास करो ।" लावण्य बोली - "मीता, तुमने ही तो मुझे सच कहना सिखाया है । अपने अन्तः करण की भावनायें में तुम्हारे सम्मुख शब्दों के रूप में प्रगट कर रही हूँ। तुम साहित्य क्षेत्र में विहार करने वाले स्वतन्त्र प्राणी हो । घर गृहस्थी के जाल में बंधकर रहना शायद तुम्हें पसन्द न आये । भनेकों बार तुम्हारे ही मुख से में विवाह का दूसरा नाम तुम्हारे ही शब्दों में 'वल्गर' भी सुन चुकी हूँ । हो सकता है कि इस समय भावावेश में तुम मेरे साथ विवाह करने को उतारू हो गये हो । भविष्य में तुम्हें उतनी रुचि न रह सके ।" अमित ने कहा - "बन्या, मुझे आश्चर्य है कि तुम कड़ी से कड़ी बात भी कितनी मृदुलता से कह सकती हो ।" लावण्य बोली - "मीता, अपनों से दुराव नहीं होता। इसी कारण यह सव तुम्हें बताना श्रावश्यक ही था। मैं हमेशा यही चाहती हूँ कि तुमको मेरे प्रति कभी गलतफ़हमी त हो। हम दोनों ने परस्पर एक दूसरे को जिस रूप में देखा है उसी रूप में सदा देखते रहें, उसी प्रकार रुचि लेते रहें । यही मेरी इच्छा है ।" अमित बोलः - " बन्या, तुम्हारी सफलता पर मैं तुम्हें बधाई देता हूँ । तुमने अपने ढंग से मेरी व्याख्या करके मुझे आश्चर्यचकित कर दिया है। फिर भी मैं इस बात को लेकर तुम से तर्क वितर्क नहीं करूंगा। तुमने केवल एक जगह गलती की है। तुम यह भूल गयी हो कि मनुष्य का चरित्र भी परिवर्तनशील है। घर की चाहरदीवारी में मनुष्य सीखे हुये पशु के समान ही प्राचरण करता है लेकिन जब वह घर से बाहर होता है तो वह वन की ओर भाग निकलता है । उसका स्वभाव पूर्णतया पल जाता है। उसकी....।" ने पूछा--"आज तुम उन दोनों में से किस अवस्था में हो ?" अमित बोला-"जो में कभी नहीं था वह श्राज हूँ। तुमसे पहले अनेकों लड़कियों से मेरा परिचय हुआ। कोई भी मेरी रुचि के अनुकूल न बैठी । अपनी २ रुचि ही तो है । बन्या, तुम्हारे संसर्ग में आते ही में क्या से क्या हो गया हूँ तुमसे छिपा नहीं है !' लावण्य उत्तर न दे सकी । अमित ने पुनः कहना प्रारम्भ किया - "बन्या, जिस प्रकार दो नक्षत्र
उसने अपने मुँह पर भी फिराया और बोला - "प्राज प्रभात बेला में उठते समय अनेकों प्राणियों ने नये दो मन्सूबे बाँधे होंगे। मगर न जाने कितनों के पूरे हुये होंगे और कितनों के मिट्टी में मिल गये होंगे ? जिनके पूरे हुये होंगे उनमें से मैं भी एक भाग्यवान् प्राणी हूँ।" लावण्य शान्त रही। उसने अमित को उत्तर नहीं दिया । अमित ने पुनः कहा - "बन्या, तुम्हारा मौन मेरे हृदय पर आघात कर रहा है । " लावण्य ने नीची आखें करके उत्तर दिया--- "मीता, तुम्हारी बातें सुन कर मुझे भय लगता है ।" अमित बोला - "कैसा भय ?" लावण्य ने कहा - "तुम्हारी प्राकांक्षा पूर्ण करने में मैं कहां तक समर्थ हो सकूगी ? यही सोचकर हृदय कांप उठता है ।" अमित बोला - "विना विचारे ही तुम मुझे जितना देती रहती हो उसे पाकर ही में सन्तुष्ट रहता हूँ। वहीं तो तुम्हारे दान का महत्व है। यह बात शायद तुम नहीं जानतीं ?" लावण्य बोली- "यह जान कर मौसी जी ने अपनी सम्मति दे दी है, में सोचने लगी हूँ कि अब मैं तुम्हारी पकड़ से न बच सकूगी ।" श्रमित ने कहा - "एक न एक दिन पकड़ में तो आना ही था ! सोच कैसा ?" लावण्य बोली- "मीता ! तुम्हारी बुद्धि मुझसे बहुत आगे है। में तुम्हारा सहयोग दे सकूगी अथवा मार्ग ही में पिछड़ जाऊँगी ? जानती हूँ अगर पिछड़ गयी तो तुम बुलाओगे भी नहीं। मीता, मेरी बात मानो, मैं तुम्हारे योग्य नहीं । तुम मेरे साथ ब्याह करने की बात छोड़ दो। अब तक तुम्हारे संसर्ग में रह कर जो कुछ भी मैंने पाया है उसके सहारे ही मेरा शेष जीवन चैन से बीत जायेगा। मैं नहीं चाहती कि तुम मेरे कारण अपने हृदय की स्वतंत्रता छीन लो ।" अमित बोला - "तुम क्या कह रही हो ? यह सब श्राशंकायें क्यों ? मुझ पर विश्वास करो ।" लावण्य बोली - "मीता, तुमने ही तो मुझे सच कहना सिखाया है । अपने अन्तः करण की भावनायें में तुम्हारे सम्मुख शब्दों के रूप में प्रगट कर रही हूँ। तुम साहित्य क्षेत्र में विहार करने वाले स्वतन्त्र प्राणी हो । घर गृहस्थी के जाल में बंधकर रहना शायद तुम्हें पसन्द न आये । भनेकों बार तुम्हारे ही मुख से में विवाह का दूसरा नाम तुम्हारे ही शब्दों में 'वल्गर' भी सुन चुकी हूँ । हो सकता है कि इस समय भावावेश में तुम मेरे साथ विवाह करने को उतारू हो गये हो । भविष्य में तुम्हें उतनी रुचि न रह सके ।" अमित ने कहा - "बन्या, मुझे आश्चर्य है कि तुम कड़ी से कड़ी बात भी कितनी मृदुलता से कह सकती हो ।" लावण्य बोली - "मीता, अपनों से दुराव नहीं होता। इसी कारण यह सव तुम्हें बताना श्रावश्यक ही था। मैं हमेशा यही चाहती हूँ कि तुमको मेरे प्रति कभी गलतफ़हमी त हो। हम दोनों ने परस्पर एक दूसरे को जिस रूप में देखा है उसी रूप में सदा देखते रहें, उसी प्रकार रुचि लेते रहें । यही मेरी इच्छा है ।" अमित बोलः - " बन्या, तुम्हारी सफलता पर मैं तुम्हें बधाई देता हूँ । तुमने अपने ढंग से मेरी व्याख्या करके मुझे आश्चर्यचकित कर दिया है। फिर भी मैं इस बात को लेकर तुम से तर्क वितर्क नहीं करूंगा। तुमने केवल एक जगह गलती की है। तुम यह भूल गयी हो कि मनुष्य का चरित्र भी परिवर्तनशील है। घर की चाहरदीवारी में मनुष्य सीखे हुये पशु के समान ही प्राचरण करता है लेकिन जब वह घर से बाहर होता है तो वह वन की ओर भाग निकलता है । उसका स्वभाव पूर्णतया पल जाता है। उसकी....।" ने पूछा--"आज तुम उन दोनों में से किस अवस्था में हो ?" अमित बोला-"जो में कभी नहीं था वह श्राज हूँ। तुमसे पहले अनेकों लड़कियों से मेरा परिचय हुआ। कोई भी मेरी रुचि के अनुकूल न बैठी । अपनी दो रुपयाचि ही तो है । बन्या, तुम्हारे संसर्ग में आते ही में क्या से क्या हो गया हूँ तुमसे छिपा नहीं है !' लावण्य उत्तर न दे सकी । अमित ने पुनः कहना प्रारम्भ किया - "बन्या, जिस प्रकार दो नक्षत्र
यमुनानगर। यमुनानगर में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को एक 13 साल की लड़की के साथ 5 युवकों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। आरोपी लड़की को उसके घर से पिता की एक्सीडेंट की बात कहकर ले गए। जहां पहले दो ने उसके साथ गैंगरेप किया, फिर तीन अन्य साथी वहां पहुंचे, जिन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। लड़की ने विरोध किया तो ब्लेड से हमला कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
यमुनानगर। यमुनानगर में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को एक तेरह साल की लड़की के साथ पाँच युवकों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। आरोपी लड़की को उसके घर से पिता की एक्सीडेंट की बात कहकर ले गए। जहां पहले दो ने उसके साथ गैंगरेप किया, फिर तीन अन्य साथी वहां पहुंचे, जिन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। लड़की ने विरोध किया तो ब्लेड से हमला कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जम्मू। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात डिवीजनल कमांडर अबु दुजाना तथा माजिद गनई को सुरक्षाबलों ने घेर रखा है तथा सुरक्षाबलों व आतंकियों के बीच मुठभेड जारी है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के हुसैनपौरा-आरवानी में बुधवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की गोपनीय सूचना मिली जिसके बाद पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया। घेराबंदी के दौरान आतंकी सुरक्षाबलों की नज़र में आ गए तथा दोनों ओर से मुठभेड शुरू हो गई जो आज भी जारी है। इसी बीच बीते कल आतंकियों के बचाव में क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया जिस पर बाद में सुरक्षाबलों ने काबू पा लिया। बताते चलें कि अबु दुजाना पर 12. 50 लाख रुपए का इनाम है। कश्मीर में मुठभेड़ में मारे गए लश्कर कमांडर अबु कासिम के बाद अबु दुजाना लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन का टॉप कमांडर बन गया था। इसी बीच कश्मीर में लश्कर के सभी ऑपरेशनों को अंजाम देने की बागडोर भी इस सेकेंड इन कमांड रहे दुजाना को मिल गई थी।
जम्मू। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात डिवीजनल कमांडर अबु दुजाना तथा माजिद गनई को सुरक्षाबलों ने घेर रखा है तथा सुरक्षाबलों व आतंकियों के बीच मुठभेड जारी है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के हुसैनपौरा-आरवानी में बुधवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की गोपनीय सूचना मिली जिसके बाद पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया। घेराबंदी के दौरान आतंकी सुरक्षाबलों की नज़र में आ गए तथा दोनों ओर से मुठभेड शुरू हो गई जो आज भी जारी है। इसी बीच बीते कल आतंकियों के बचाव में क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया जिस पर बाद में सुरक्षाबलों ने काबू पा लिया। बताते चलें कि अबु दुजाना पर बारह. पचास लाख रुपए का इनाम है। कश्मीर में मुठभेड़ में मारे गए लश्कर कमांडर अबु कासिम के बाद अबु दुजाना लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन का टॉप कमांडर बन गया था। इसी बीच कश्मीर में लश्कर के सभी ऑपरेशनों को अंजाम देने की बागडोर भी इस सेकेंड इन कमांड रहे दुजाना को मिल गई थी।
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा. एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने पब्लिक इवेंट्स पर शानदार लुक के मामले में महारथ हासिल कर ली है. वह जब भी रेड कार्पेट पर उतरती हैं सबको पीछे छोड़ देती हैं. अब कान फिल्म फेस्टिव के रेड कार्पेट पर भी प्रियंका ने यूं ही जलवा बिखेरा. गुरुवार(16 मई) के दिन वह दो अलग-अलग लुक में नजर आईं. पहले इवेंट के लिए उन्होंने पर्ल व्हाइट ड्रेस चुनी. लेकिन रेड कार्पेट के लिए स्टाइल जुदा था. इसके लिए उन्होंने एक ब्लैक शिमर ड्रेस चुनी थी. जिसकी हाईलाइट उसकी हाई स्लिट थी. प्रियंका वहां दो फिल्मों की स्क्रीनिंग में शामिल हुईं. 5B नाम से एक डॉक्युमेंट्री HIV/AIDS पर थी. वहीं दूसरी एक म्जूकिल फैंटेसी फिल्म थी. इसका नाम 'रॉकेटमैन' था. यह फिल्म म्यूजीशियन एल्टन जॉन के शुरुआती दिनों पर आधारित है. प्रियंका के दोनों लुक्स को सोशल मीडिया ही नहीं सेलेब्स से भी काफी तारीफ मिली. उनके पति निक जोनास ने उन्हें गॉर्जियस कहा. पैरिस हिल्टन ने भी यही बात दोहराई. ईशा गुप्ता, भूमि पेडनेकर को प्रियंका का लुक पसंद आया. वहीं अर्जुन कपूर और इशान खट्टर प्रियंका की तस्वीरों पर मजाकिया कमेंट करते दिखे. अर्जुन ने लिखा, 'सर्फ एक्सेल वाइब्स'. रेड कार्पेट से अलग अगर वर्क फ्रंट पर बात करें तो प्रियंका की आखिरी हॉलीवुड रिलीज 'Isn't It Romantic' थी. इसके अलावा उन्होंने शोनाली बोस की फिल्म 'The Sky Is Pink' की शूटिंग कर ली है. इस फिल्म में प्रियंका के साथ फरहान अख्तर और जायरा वसीम हैं. हॉलीवुड की बात करें तो वह जल्द मिंडी कलिंग के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम करने वाली हैं. यह फिल्म बिग फैट इंडियन वेडिंग पर आधारित है. फिल्मी करियर के अलावा प्रियंका सोशल मीडिया पर भी नई ऊंचाइयां छू रही हैं. इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स हर दिन बढ़ रहे हैं. ये नंबर अब 40 मिलियन हो गया है. वहीं दीपिका पादुकोण के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का नंबर अभी 35 मिलियन है. वह प्रियंका के करीब ही हैं. यह भी पढ़ेंः सुपरहिट हुआ हिना खान का Cannes लुक, रेड कार्पेट पर ऐसी दिखीं Bigg Boss स्टार! .
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा. एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने पब्लिक इवेंट्स पर शानदार लुक के मामले में महारथ हासिल कर ली है. वह जब भी रेड कार्पेट पर उतरती हैं सबको पीछे छोड़ देती हैं. अब कान फिल्म फेस्टिव के रेड कार्पेट पर भी प्रियंका ने यूं ही जलवा बिखेरा. गुरुवार के दिन वह दो अलग-अलग लुक में नजर आईं. पहले इवेंट के लिए उन्होंने पर्ल व्हाइट ड्रेस चुनी. लेकिन रेड कार्पेट के लिए स्टाइल जुदा था. इसके लिए उन्होंने एक ब्लैक शिमर ड्रेस चुनी थी. जिसकी हाईलाइट उसकी हाई स्लिट थी. प्रियंका वहां दो फिल्मों की स्क्रीनिंग में शामिल हुईं. पाँचB नाम से एक डॉक्युमेंट्री HIV/AIDS पर थी. वहीं दूसरी एक म्जूकिल फैंटेसी फिल्म थी. इसका नाम 'रॉकेटमैन' था. यह फिल्म म्यूजीशियन एल्टन जॉन के शुरुआती दिनों पर आधारित है. प्रियंका के दोनों लुक्स को सोशल मीडिया ही नहीं सेलेब्स से भी काफी तारीफ मिली. उनके पति निक जोनास ने उन्हें गॉर्जियस कहा. पैरिस हिल्टन ने भी यही बात दोहराई. ईशा गुप्ता, भूमि पेडनेकर को प्रियंका का लुक पसंद आया. वहीं अर्जुन कपूर और इशान खट्टर प्रियंका की तस्वीरों पर मजाकिया कमेंट करते दिखे. अर्जुन ने लिखा, 'सर्फ एक्सेल वाइब्स'. रेड कार्पेट से अलग अगर वर्क फ्रंट पर बात करें तो प्रियंका की आखिरी हॉलीवुड रिलीज 'Isn't It Romantic' थी. इसके अलावा उन्होंने शोनाली बोस की फिल्म 'The Sky Is Pink' की शूटिंग कर ली है. इस फिल्म में प्रियंका के साथ फरहान अख्तर और जायरा वसीम हैं. हॉलीवुड की बात करें तो वह जल्द मिंडी कलिंग के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम करने वाली हैं. यह फिल्म बिग फैट इंडियन वेडिंग पर आधारित है. फिल्मी करियर के अलावा प्रियंका सोशल मीडिया पर भी नई ऊंचाइयां छू रही हैं. इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स हर दिन बढ़ रहे हैं. ये नंबर अब चालीस मिलियन हो गया है. वहीं दीपिका पादुकोण के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का नंबर अभी पैंतीस मिलियन है. वह प्रियंका के करीब ही हैं. यह भी पढ़ेंः सुपरहिट हुआ हिना खान का Cannes लुक, रेड कार्पेट पर ऐसी दिखीं Bigg Boss स्टार! .
स्पेन में FEINDEF 2023 रक्षा प्रदर्शनी में, फ्रांसीसी रक्षा कंपनी CNIM ने अपने नवीनतम ROCUS नवाचार का अनावरण किया। यह मानव रहित रूट क्लीयरेंस सिस्टम एक ट्रैक पर आधारित है रोबोट MILREM THEMIS, वापस लेने योग्य उपकरण और खदान के खतरों और IEDs को साफ करने के लिए विशेष उपकरणों से लैस है। जैसा कि CNIM में बताया गया है, ROCUS मुख्य रूप से सशस्त्र बलों के लिए बनाया गया था; यूक्रेन को डिलीवरी के लिए सात इकाइयां पहले से ही निर्धारित हैं। ROCUS प्रणाली अपने सार्वभौमिक जोड़तोड़ पर आधारित है, जिस पर विशेष उपकरणों का एक सेट स्थापित है। उनमें से एक अंतिम प्रभावक है, जो वस्तुओं को पकड़ने और उठाने के लिए एक सरल पंजा हो सकता है, या तारों को काटने या घटकों को खोलने जैसे कार्यों के लिए अधिक उन्नत उपकरण हो सकता है। THEMIS (ट्रैक्ड हाइब्रिड मॉड्यूलर इन्फैंट्री सिस्टम) एस्टोनियाई कंपनी मिल्रेम रोबोटिक्स द्वारा विकसित एक मानव रहित ग्राउंड व्हीकल (UGV) है। THeMIS को एक मॉड्यूलर डिज़ाइन की विशेषता है जो इसे हाथ में लिए गए कार्यों के अनुसार विभिन्न पेलोड से लैस करने की अनुमति देता है। इसमें 100 किमी तक की सीमा है और डीजल ईंधन के एक पूर्ण टैंक के साथ 10 घंटे तक काम कर सकता है। डिवाइस को दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया जा सकता है या स्वायत्त रूप से पूर्व निर्धारित मार्गों का पालन करने के लिए कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
स्पेन में FEINDEF दो हज़ार तेईस रक्षा प्रदर्शनी में, फ्रांसीसी रक्षा कंपनी CNIM ने अपने नवीनतम ROCUS नवाचार का अनावरण किया। यह मानव रहित रूट क्लीयरेंस सिस्टम एक ट्रैक पर आधारित है रोबोट MILREM THEMIS, वापस लेने योग्य उपकरण और खदान के खतरों और IEDs को साफ करने के लिए विशेष उपकरणों से लैस है। जैसा कि CNIM में बताया गया है, ROCUS मुख्य रूप से सशस्त्र बलों के लिए बनाया गया था; यूक्रेन को डिलीवरी के लिए सात इकाइयां पहले से ही निर्धारित हैं। ROCUS प्रणाली अपने सार्वभौमिक जोड़तोड़ पर आधारित है, जिस पर विशेष उपकरणों का एक सेट स्थापित है। उनमें से एक अंतिम प्रभावक है, जो वस्तुओं को पकड़ने और उठाने के लिए एक सरल पंजा हो सकता है, या तारों को काटने या घटकों को खोलने जैसे कार्यों के लिए अधिक उन्नत उपकरण हो सकता है। THEMIS एस्टोनियाई कंपनी मिल्रेम रोबोटिक्स द्वारा विकसित एक मानव रहित ग्राउंड व्हीकल है। THeMIS को एक मॉड्यूलर डिज़ाइन की विशेषता है जो इसे हाथ में लिए गए कार्यों के अनुसार विभिन्न पेलोड से लैस करने की अनुमति देता है। इसमें एक सौ किमी तक की सीमा है और डीजल ईंधन के एक पूर्ण टैंक के साथ दस घंटाटे तक काम कर सकता है। डिवाइस को दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया जा सकता है या स्वायत्त रूप से पूर्व निर्धारित मार्गों का पालन करने के लिए कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
चर्चा में क्यों? 2 नवंबर, 2021 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कोविड-19 उपचार एवं प्रबंधन योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। - इस योजना में स्वास्थ्य अधो-संरचना उन्नयन, मानव संसाधन प्रबंधन, दवा एवं अन्य उपकरण क्रय, कोविड मरीज़ों का निःशुल्क उपचार, टेस्टिंग एवं सेम्पलिंग व्यवस्थाएँ, कोविड अनुकूल व्यवहार-जागरूकता एवं प्रचार, कोविड केयर सेंटर संचालन, अस्पतालों का कचरा प्रबंधन, होम आइसोलेशन निगरानी एवं मेडिकल किट वितरण आदि कार्य को शामिल किया गया है। - योजना के क्रियान्वयन के लिये कुल 480 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है, जिसमें से वर्तमान में 75 करोड़ रुपए पुनर्विनियोजन से उपलब्ध हैं।
चर्चा में क्यों? दो नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कोविड-उन्नीस उपचार एवं प्रबंधन योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। - इस योजना में स्वास्थ्य अधो-संरचना उन्नयन, मानव संसाधन प्रबंधन, दवा एवं अन्य उपकरण क्रय, कोविड मरीज़ों का निःशुल्क उपचार, टेस्टिंग एवं सेम्पलिंग व्यवस्थाएँ, कोविड अनुकूल व्यवहार-जागरूकता एवं प्रचार, कोविड केयर सेंटर संचालन, अस्पतालों का कचरा प्रबंधन, होम आइसोलेशन निगरानी एवं मेडिकल किट वितरण आदि कार्य को शामिल किया गया है। - योजना के क्रियान्वयन के लिये कुल चार सौ अस्सी करोड़ रुपए का प्रस्ताव है, जिसमें से वर्तमान में पचहत्तर करोड़ रुपए पुनर्विनियोजन से उपलब्ध हैं।
Early sign and symptoms of blood cancer or leukemia in kids : इस तरह के संकेत और लक्षण दिखने पर आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और सही इलाज कराना चाहिए. ब्लड कैंसर (Blood cancer) को ल्यूकेमिया (Leukemia) के नाम से भी जाना जाता है जो बच्चों को भी हो सकता है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह कैंसर का सबसे आम प्रकार है। लगभग 4 में से 3 बच्चे और किशोर जो ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं। यह 5 से कम उम्र के बच्चों में सबसे आम है अधिकतर मामले में 2 और 4 के बीच देखने को मिलते हैं। यह लड़कों की तुलना में लड़कियों में कम है। ब्लड कैंसर में रक्त कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। ब्लड कैंसर होने पर अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में सफेद रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं। यह ब्लड फ्लो के जरिए पूरे शरीर में फैलने लगत्ती हैं और हेल्दी ब्लड सेल्स के उत्पादन को दबा देते हैं। ब्लड कैंसर के संकेत और लक्षण वैसे तो सभी लोगों में सामान होते हैं लेकिन बच्चों में कुछ लक्षण अलग हो सकते हैं। ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना थोड़ा मुश्किल है और सभी बच्चों में अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे में बार-बार एनीमिया के लक्षण दिखते हैं, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। एनीमिया तब होता है जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है। लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने के लिए जिम्मेदार होती हैं, और यदि कोई पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रहा है, तो बच्चे में थकान, दुर्बलता, चक्कर आना, सांस फूलना, सिर दर्द, पीली त्वचा, असामान्य रूप से ठंड लगना जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। यदि किसी बच्चे को आसानी से चोट लग जाती है और नाक या मसूड़ों से खून आता है, तो यह ल्यूकेमिया की ओर इशारा कर सकता है। इस प्रकार के कैंसर वाले बच्चे में प्लेटलेट्स की कमी होगी जो रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है। ब्लड कैंसर वाले बच्चों में सफेद रक्त कोशिका ज्यादा होती हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कोशिकाएं सही ढंग से काम नहीं कर रही हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि असामान्य कोशिकाएं स्वस्थ सफेद रक्त कोशिकाओं की जगह ले रही होती हैं। श्वेत रक्त कोशिकाएं शरीर की रक्षा करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार हो रहा है, तो होशियार हो जाएं। यदि कोई बच्चा लगातार यह शिकायत करता है कि उसकी हड्डियों या जोड़ों में दर्द हो रहा है, तो यह चाइल्डहुड ल्यूकेमिया का संकेत दे सकता है। जब ल्यूकेमिया विकसित होता है, तो असामान्य कोशिकाएं जोड़ों के अंदर या हड्डियों की सतह के करीब इकट्ठा हो सकती हैं। ब्लड कैंसर के संकेत में शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन होना भी शामिल है जिसमें मुख्यतः पेट, चेहरा और हाथ, लिम्फ नोड्स, अंडरआर्म्स में या कॉलरबोन पर शामिल हैं। अगर इन हिस्सों में को छोटी गांठ बन रही है, तो डॉक्टर के पास जाएं। अचानक भूख में कमी, हमेशा पेट दर्द रहना, वजन कम होना, खांसी, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, उल्टी, सुन्नता, धुंधला दिखना, बैलेंस बनाने में परेशानी, त्वचा पर दाग-धब्बे, बहुत ज्यादा थकान रहना, हमेशा बीमार रहना आदि भी इसके लक्षणों में हैं।
Early sign and symptoms of blood cancer or leukemia in kids : इस तरह के संकेत और लक्षण दिखने पर आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और सही इलाज कराना चाहिए. ब्लड कैंसर को ल्यूकेमिया के नाम से भी जाना जाता है जो बच्चों को भी हो सकता है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, पंद्रह वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह कैंसर का सबसे आम प्रकार है। लगभग चार में से तीन बच्चे और किशोर जो ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं। यह पाँच से कम उम्र के बच्चों में सबसे आम है अधिकतर मामले में दो और चार के बीच देखने को मिलते हैं। यह लड़कों की तुलना में लड़कियों में कम है। ब्लड कैंसर में रक्त कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। ब्लड कैंसर होने पर अस्थि मज्जा में सफेद रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं। यह ब्लड फ्लो के जरिए पूरे शरीर में फैलने लगत्ती हैं और हेल्दी ब्लड सेल्स के उत्पादन को दबा देते हैं। ब्लड कैंसर के संकेत और लक्षण वैसे तो सभी लोगों में सामान होते हैं लेकिन बच्चों में कुछ लक्षण अलग हो सकते हैं। ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना थोड़ा मुश्किल है और सभी बच्चों में अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे में बार-बार एनीमिया के लक्षण दिखते हैं, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। एनीमिया तब होता है जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है। लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने के लिए जिम्मेदार होती हैं, और यदि कोई पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रहा है, तो बच्चे में थकान, दुर्बलता, चक्कर आना, सांस फूलना, सिर दर्द, पीली त्वचा, असामान्य रूप से ठंड लगना जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। यदि किसी बच्चे को आसानी से चोट लग जाती है और नाक या मसूड़ों से खून आता है, तो यह ल्यूकेमिया की ओर इशारा कर सकता है। इस प्रकार के कैंसर वाले बच्चे में प्लेटलेट्स की कमी होगी जो रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है। ब्लड कैंसर वाले बच्चों में सफेद रक्त कोशिका ज्यादा होती हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कोशिकाएं सही ढंग से काम नहीं कर रही हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि असामान्य कोशिकाएं स्वस्थ सफेद रक्त कोशिकाओं की जगह ले रही होती हैं। श्वेत रक्त कोशिकाएं शरीर की रक्षा करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार हो रहा है, तो होशियार हो जाएं। यदि कोई बच्चा लगातार यह शिकायत करता है कि उसकी हड्डियों या जोड़ों में दर्द हो रहा है, तो यह चाइल्डहुड ल्यूकेमिया का संकेत दे सकता है। जब ल्यूकेमिया विकसित होता है, तो असामान्य कोशिकाएं जोड़ों के अंदर या हड्डियों की सतह के करीब इकट्ठा हो सकती हैं। ब्लड कैंसर के संकेत में शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन होना भी शामिल है जिसमें मुख्यतः पेट, चेहरा और हाथ, लिम्फ नोड्स, अंडरआर्म्स में या कॉलरबोन पर शामिल हैं। अगर इन हिस्सों में को छोटी गांठ बन रही है, तो डॉक्टर के पास जाएं। अचानक भूख में कमी, हमेशा पेट दर्द रहना, वजन कम होना, खांसी, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, उल्टी, सुन्नता, धुंधला दिखना, बैलेंस बनाने में परेशानी, त्वचा पर दाग-धब्बे, बहुत ज्यादा थकान रहना, हमेशा बीमार रहना आदि भी इसके लक्षणों में हैं।
Holi Photo Effects: इस बार होली का रंग आपको वाकई सराबोर कर देगा। इस त्यौहार के हर रंग आप के चेहरे पर खिले-खिले नजर आएगें। और हर कोई आपकी फोटो को देखकर यही कहेगा कि 'वाह! इसे कहते हैं होली वाली फोटो'। इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी है। बस गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए 'होली फोटो इफेक्ट्स' नाम का ये ऐप। इसके जरिए आप अपनी फोटो में ढेर सारे होली इफेक्ट्स दे सकते हैं। - अपनी तस्वीर को आप इस ऐप के जरिए और भी खूबसूरत बना सकते हैं। - अलग-अलग तरह के रंग भी आप अपनी तस्वीर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। - ये ऐप एक तरह का एडिटर बूथ है जहां पर फोटो को मनपसंद तरीके से कलरफुल करने के लिए कई ऑपशन दिए हैं। - इसकी खासियत है कि ये ऐप आपकी तस्वीर को बनावटी नहीं बल्कि ओरेजनल लुक देगा। - अपनी फोटो के साथ आप इस ऐप में दिए गए ऑब्जेक्ट्स भी यूज कर सकते हैं। जैसे - पिचकारी, रंग की पोटली ,टोपी आदि। - ऑब्जेक्ट को आप फोटो के हिसाब से बड़ा-छोटा भी कर सकते हैं। - एडिट हुई फोटो को आप अपने दोस्तों को साथ सांझा भी कर पाएगें। - साथ ही आप एडिट फोटो को डायरेक्ट ही सोशल मीडिया अकाउंट की प्रोफाइल पिक्चर भी बना सकते हैं। - यही नहीं इस फोटो को आप अपने डिवाइस का वॉलपेपर भी बना सकते हैं। तो फिर देर किस बात की है, उठाइए अपना स्मार्टफोन और डाउनलोड करें ये होली स्पेशल ऐप। यकीन मनाइए इस ऐप के जरिए आप की फोटो बनेगी होली वाली फोटो। जिसे सोशल मीडिया पर शेयर करते ही आपको मिलेंगे ढेरो लाइक।
Holi Photo Effects: इस बार होली का रंग आपको वाकई सराबोर कर देगा। इस त्यौहार के हर रंग आप के चेहरे पर खिले-खिले नजर आएगें। और हर कोई आपकी फोटो को देखकर यही कहेगा कि 'वाह! इसे कहते हैं होली वाली फोटो'। इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी है। बस गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए 'होली फोटो इफेक्ट्स' नाम का ये ऐप। इसके जरिए आप अपनी फोटो में ढेर सारे होली इफेक्ट्स दे सकते हैं। - अपनी तस्वीर को आप इस ऐप के जरिए और भी खूबसूरत बना सकते हैं। - अलग-अलग तरह के रंग भी आप अपनी तस्वीर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। - ये ऐप एक तरह का एडिटर बूथ है जहां पर फोटो को मनपसंद तरीके से कलरफुल करने के लिए कई ऑपशन दिए हैं। - इसकी खासियत है कि ये ऐप आपकी तस्वीर को बनावटी नहीं बल्कि ओरेजनल लुक देगा। - अपनी फोटो के साथ आप इस ऐप में दिए गए ऑब्जेक्ट्स भी यूज कर सकते हैं। जैसे - पिचकारी, रंग की पोटली ,टोपी आदि। - ऑब्जेक्ट को आप फोटो के हिसाब से बड़ा-छोटा भी कर सकते हैं। - एडिट हुई फोटो को आप अपने दोस्तों को साथ सांझा भी कर पाएगें। - साथ ही आप एडिट फोटो को डायरेक्ट ही सोशल मीडिया अकाउंट की प्रोफाइल पिक्चर भी बना सकते हैं। - यही नहीं इस फोटो को आप अपने डिवाइस का वॉलपेपर भी बना सकते हैं। तो फिर देर किस बात की है, उठाइए अपना स्मार्टफोन और डाउनलोड करें ये होली स्पेशल ऐप। यकीन मनाइए इस ऐप के जरिए आप की फोटो बनेगी होली वाली फोटो। जिसे सोशल मीडिया पर शेयर करते ही आपको मिलेंगे ढेरो लाइक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सोमवार 19 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। एक ओर सत्र से पहले जहां सर्वदीलय बैठक होने वाली है तो वहीं लंबे समय से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सत्र के दौरान अपने विरोध को लेकर दिल्ली पुलिस के साथ बैठक की है। बताया जा रहा है कि किसानों ने जंतर-मंतर पर किसान संसद लगाने की मांग की है। दिल्ली पुलिस ने मानसून सत्र के दौरान किसानों के संसद घेराव के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो के 7 मेट्रो स्टेशन (जनपथ, लोक कल्याण मार्ग, पटेल चौक, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, उद्योग भवन) पर अतिरिक्त निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बंद करने के लिए पत्र लिखा। तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर मानसून सत्र के दौरान संसद के पास नियोजित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सिंघू सीमा के पास किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैतो का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा अपना जाने वाले मार्गों पर चर्चा की जानी चाहिए। इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया था कि आज दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक है, बैठक में 22 जुलाई के कार्यक्रम की चर्चा होगी। 22 जुलाई को हमारे 200 लोग संसद जाएंगे। हमने विपक्ष के लोगों से भी कहा है कि वो अपनी बात सदन में उठाएं। वहीं बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि किसानों की मांगों के संबंध में संसद में केंद्र पर हर तरह का दबाव बनाना जरूरी है। केंद्र सरकार की गलत आर्थिक और अन्य नीतियों की वजह से देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच महंगाई के आसमान छूने से लोगों के सामने काफी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इसके साथ ही मायावति ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है कि पंजाब के कांग्रेसी सीएम द्वारा किसानों के आन्दोलन को लेकर विभिन्न आशंकाएं व्यक्त करते हुए पीएम को लिखा गया। पत्र नए कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दे रहे किसानों के आन्दोलन को बदनाम करने की साजिश व उसकी आड़ में चुनावी राजनीति करना घोर अनुचित।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सोमवार उन्नीस जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। एक ओर सत्र से पहले जहां सर्वदीलय बैठक होने वाली है तो वहीं लंबे समय से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सत्र के दौरान अपने विरोध को लेकर दिल्ली पुलिस के साथ बैठक की है। बताया जा रहा है कि किसानों ने जंतर-मंतर पर किसान संसद लगाने की मांग की है। दिल्ली पुलिस ने मानसून सत्र के दौरान किसानों के संसद घेराव के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो के सात मेट्रो स्टेशन पर अतिरिक्त निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बंद करने के लिए पत्र लिखा। तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर मानसून सत्र के दौरान संसद के पास नियोजित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सिंघू सीमा के पास किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैतो का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा अपना जाने वाले मार्गों पर चर्चा की जानी चाहिए। इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया था कि आज दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक है, बैठक में बाईस जुलाई के कार्यक्रम की चर्चा होगी। बाईस जुलाई को हमारे दो सौ लोग संसद जाएंगे। हमने विपक्ष के लोगों से भी कहा है कि वो अपनी बात सदन में उठाएं। वहीं बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि किसानों की मांगों के संबंध में संसद में केंद्र पर हर तरह का दबाव बनाना जरूरी है। केंद्र सरकार की गलत आर्थिक और अन्य नीतियों की वजह से देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच महंगाई के आसमान छूने से लोगों के सामने काफी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इसके साथ ही मायावति ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है कि पंजाब के कांग्रेसी सीएम द्वारा किसानों के आन्दोलन को लेकर विभिन्न आशंकाएं व्यक्त करते हुए पीएम को लिखा गया। पत्र नए कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दे रहे किसानों के आन्दोलन को बदनाम करने की साजिश व उसकी आड़ में चुनावी राजनीति करना घोर अनुचित।
'जग के उर्वर आँगन में बरसो ज्योतिर्मय जीवन, बरसो लघु लघु तृण तरु पर हे चिर व्यय चिर नूतन ।' - गीत इसी सविशेष कल्पना के सहारे हम कह सकते है कि कवि ने अपने जीवन के प्रति एक नवीन ग्राशा- समन्वित ह एकोण को लेकर ईश्वर, जीव, प्रकृति, मुक्ति आदि समस्याओं पर विचार किया। इसी समय उन पर प्राच्य तथा पाश्चात्य दर्शन तथा अन्य ललित कलाओं का विशेष प्रभाव पडा । परन्तु यह उनका बाह्य प्रभाव है जिसने उनकी हार्दिकता को धक्का नहीं दिया। उन्हें भोतिक जगत के आदर्शों के प्रति विश्वास न रह गया, इसीलिये उन्होंने भारतीय आस्तिकता का चल दृढता के साथ पकड़ा । यथा'ईश्वर पर चिर विश्वास मुझे ।' अंत जी के जीवन सम्बन्धी म एवं उनके विचारों को समझने के लिये 'ज्योत्स्ना' का अध्ययन अनिवार्य है। उन्होंने 'गु जन' मे जो पद्यमय विचार प्रकट किये है, वे गद्यरूप मे 'ज्योत्स्ना' मे बिखरे हुए हैं। उन पर पश्चिम के मार्क्सवाद का अक्षरशः प्रभाव पडा है, परन्तु वे कठोर भौतिक युग का प्रतिकार करते है, जिसका विचार निम्नलिखित शब्दों मे 'ज्योत्स्ना' के द्वारा प्रकट किया गया है । यथा - वह कहती है - 'मनुष्य को यथार्थ प्रकाश की वकता है। इस दि नन्त जीवन पर अनन्त दृष्टिकोण से प्रकाश डाला जा सकता है । ज्ञान-विज्ञान से मनुष्य की अभिवृद्धि हो सकती है, विश्वास नहीं हो सकता । सरल मुन्दर र उच्च आदर्शों पर विश्वास रग्वकर मनुष्य जाति सुख-शान्ति का उपयोग कर सकती है, पशु से देवता बन सकती है ।' - इसी ईश्वरत्व पर विश्वास रखकर ही नव-जीवन का निर्माण हो सकता है तथा 'गु जन' मे कवि ने यो लिखा है'मुन्दर विश्वासो से ही बता रे सुखमय जीवन, ज्यो सहज-सहज सांसो से चलता उर का मृदु स्पन्दन ।' कवि को ईश्वर पर विश्वास तो है ही, परन्तु उसने प्रकृति एवं जीव की सत्ता को भी चिरन्तन माना है। वह इन वस्तुओं को नश्वर नहीं कहना चाहता, क्योकि इनकी नश्वरता मे ही संसार है और मानव शीघ्र ही विरक्त होने के लिए प्रचेष्टाशील होने लगेगा । इसीलिए ईश्वर की महत्ता के महश प्रकृति और जीव की भी महत्ता है। इनका कम महत्त्व नहीं है - 'मानव दिव्य स्फुलिंग चिरंतन' गु जन : - रक परिचय मे ही अमरता का सन्देश है। जिस प्रकार मानव-जीवन-धारा चिर-व्यावी, चिरन्तन एच शाश्वत है, उसी प्रकार प्रकृति भी। इसका निर्देश कवि ने 'नौकाविहार' शीर्षक कविता की अन्तिम पंकियों में किया है। देखिए - 'शाश्वत लघु लहरों का विलास । हे जग-जीवन के कर्णधार ! चिर जन्म-मरण के आर पार, शाश्वत जीवन नौका-विहार । मै भूल गया अस्तित्व ज्ञान, जीवन का यह शाश्वत प्रमाण, करता मुझको अमरत्व दान ।' -- गीत, ४३ ज वन के अमरत्व के साथ-साथ पुनर्जन्म में विश्वास है, क्योंकि मुक्ति एक प्रकार का बन्धन है'तेरी मधुर मुक्ति ही बधन ।' गीत, २ वे इस प्रकार की मुक्ति से पलायन करते हैं, क्योंकि मानव के जन्म-मरण को शाश्वत मानते है। जिस प्रकार जीव की सत्ता चिरन्तन है, उसी प्रकार प्रकृति की सत्ता मी शाश्वत है। विश्व की सृष्टि सत्य, शिव एव सुन्दर है । मसार प्रकृतिमय है और वह कवि के हृदय में दमयी भावनाओं को जन्म देती है। इसके अतिरिक्त कवि का मन सकुचित व्यक्तिगत सुखों की तृणा कारण चचल रहता है । अस्तु, प्रकृति चिरव्यापी एवं सौन्दर्यमय है - "प्रिय मुझे विश्व यह सचराचर, तृण, तरु, पशु, पक्षी, नर, सुरवर, सुन्दर अनादि शुभ सृष्टि श्रमर; निज सुख से चिर चंचल मन, मै हू प्रतिपल उन्मन, उन्मन ।' जब जगत् के जीव, प्रकृति सुन्दर है, तब मानव जीवन का सुन्दर होना अनिवार्य है, इसलिए पन्त का कवि कहता है'जग-जीवन में उल्लास मुझे, नव आशा नव अभिलाप मुझे ।' - गीत १०
'जग के उर्वर आँगन में बरसो ज्योतिर्मय जीवन, बरसो लघु लघु तृण तरु पर हे चिर व्यय चिर नूतन ।' - गीत इसी सविशेष कल्पना के सहारे हम कह सकते है कि कवि ने अपने जीवन के प्रति एक नवीन ग्राशा- समन्वित ह एकोण को लेकर ईश्वर, जीव, प्रकृति, मुक्ति आदि समस्याओं पर विचार किया। इसी समय उन पर प्राच्य तथा पाश्चात्य दर्शन तथा अन्य ललित कलाओं का विशेष प्रभाव पडा । परन्तु यह उनका बाह्य प्रभाव है जिसने उनकी हार्दिकता को धक्का नहीं दिया। उन्हें भोतिक जगत के आदर्शों के प्रति विश्वास न रह गया, इसीलिये उन्होंने भारतीय आस्तिकता का चल दृढता के साथ पकड़ा । यथा'ईश्वर पर चिर विश्वास मुझे ।' अंत जी के जीवन सम्बन्धी म एवं उनके विचारों को समझने के लिये 'ज्योत्स्ना' का अध्ययन अनिवार्य है। उन्होंने 'गु जन' मे जो पद्यमय विचार प्रकट किये है, वे गद्यरूप मे 'ज्योत्स्ना' मे बिखरे हुए हैं। उन पर पश्चिम के मार्क्सवाद का अक्षरशः प्रभाव पडा है, परन्तु वे कठोर भौतिक युग का प्रतिकार करते है, जिसका विचार निम्नलिखित शब्दों मे 'ज्योत्स्ना' के द्वारा प्रकट किया गया है । यथा - वह कहती है - 'मनुष्य को यथार्थ प्रकाश की वकता है। इस दि नन्त जीवन पर अनन्त दृष्टिकोण से प्रकाश डाला जा सकता है । ज्ञान-विज्ञान से मनुष्य की अभिवृद्धि हो सकती है, विश्वास नहीं हो सकता । सरल मुन्दर र उच्च आदर्शों पर विश्वास रग्वकर मनुष्य जाति सुख-शान्ति का उपयोग कर सकती है, पशु से देवता बन सकती है ।' - इसी ईश्वरत्व पर विश्वास रखकर ही नव-जीवन का निर्माण हो सकता है तथा 'गु जन' मे कवि ने यो लिखा है'मुन्दर विश्वासो से ही बता रे सुखमय जीवन, ज्यो सहज-सहज सांसो से चलता उर का मृदु स्पन्दन ।' कवि को ईश्वर पर विश्वास तो है ही, परन्तु उसने प्रकृति एवं जीव की सत्ता को भी चिरन्तन माना है। वह इन वस्तुओं को नश्वर नहीं कहना चाहता, क्योकि इनकी नश्वरता मे ही संसार है और मानव शीघ्र ही विरक्त होने के लिए प्रचेष्टाशील होने लगेगा । इसीलिए ईश्वर की महत्ता के महश प्रकृति और जीव की भी महत्ता है। इनका कम महत्त्व नहीं है - 'मानव दिव्य स्फुलिंग चिरंतन' गु जन : - रक परिचय मे ही अमरता का सन्देश है। जिस प्रकार मानव-जीवन-धारा चिर-व्यावी, चिरन्तन एच शाश्वत है, उसी प्रकार प्रकृति भी। इसका निर्देश कवि ने 'नौकाविहार' शीर्षक कविता की अन्तिम पंकियों में किया है। देखिए - 'शाश्वत लघु लहरों का विलास । हे जग-जीवन के कर्णधार ! चिर जन्म-मरण के आर पार, शाश्वत जीवन नौका-विहार । मै भूल गया अस्तित्व ज्ञान, जीवन का यह शाश्वत प्रमाण, करता मुझको अमरत्व दान ।' -- गीत, तैंतालीस ज वन के अमरत्व के साथ-साथ पुनर्जन्म में विश्वास है, क्योंकि मुक्ति एक प्रकार का बन्धन है'तेरी मधुर मुक्ति ही बधन ।' गीत, दो वे इस प्रकार की मुक्ति से पलायन करते हैं, क्योंकि मानव के जन्म-मरण को शाश्वत मानते है। जिस प्रकार जीव की सत्ता चिरन्तन है, उसी प्रकार प्रकृति की सत्ता मी शाश्वत है। विश्व की सृष्टि सत्य, शिव एव सुन्दर है । मसार प्रकृतिमय है और वह कवि के हृदय में दमयी भावनाओं को जन्म देती है। इसके अतिरिक्त कवि का मन सकुचित व्यक्तिगत सुखों की तृणा कारण चचल रहता है । अस्तु, प्रकृति चिरव्यापी एवं सौन्दर्यमय है - "प्रिय मुझे विश्व यह सचराचर, तृण, तरु, पशु, पक्षी, नर, सुरवर, सुन्दर अनादि शुभ सृष्टि श्रमर; निज सुख से चिर चंचल मन, मै हू प्रतिपल उन्मन, उन्मन ।' जब जगत् के जीव, प्रकृति सुन्दर है, तब मानव जीवन का सुन्दर होना अनिवार्य है, इसलिए पन्त का कवि कहता है'जग-जीवन में उल्लास मुझे, नव आशा नव अभिलाप मुझे ।' - गीत दस
रायपुर। नवा रायपुर में अब राहगीरों के लिए ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था की जा रही है। अब हर यहां हर चौक चौराहों पर सिग्नल दिखाई देगा। सिग्नल के साथ इन खम्भों पर कैमरे और छोटे लाऊडस्पीकर भी स्थापित किये गए। फिलहाल अभी सिग्नल की टेस्टिंग की जा रही है।
रायपुर। नवा रायपुर में अब राहगीरों के लिए ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था की जा रही है। अब हर यहां हर चौक चौराहों पर सिग्नल दिखाई देगा। सिग्नल के साथ इन खम्भों पर कैमरे और छोटे लाऊडस्पीकर भी स्थापित किये गए। फिलहाल अभी सिग्नल की टेस्टिंग की जा रही है।
इसी दुनिया में हैं ये पांच अजब-गज़ब महिलाएं, जिनके बारे में जानकर हैरान हो जायेंगे! ! इस दुनिया में हर तरह तरह के लोग देखने को मिलते हैं लेकिन कुछ ऐसे बह होते हैं जो हर किसी को अपनी और आकर्षित किया करते हैं उनका शरीर ही कुछ ऐसा होता हैं कोई उन्हें देखे बजे रह ही नहीं पता । हमारी ही दुनिया में अलग-अलग देशों में कुछ ऐसी औरतें रहतीं हैं जिनके बारे में जानकर लोग हैरान हो जायेंगे। आईये पढ़ते हैं दुनिया की पांच अजब-गज़ब महिलाओं के बारे में.... बता दे की कैथी अमेरिका की रहने वाली हैं और वह अपनी पतली कमर के लिए जानी जाती हैं । जब कैथी से इस बारे में पूछा गया तब उन्होंने बताया था की उन्होंने 12 साल तक कॉरसेट को अपने शरीर से अलग नहीं किया। 12 साल बाद उनकी कमर की साइज़ लगभग 15 इंच हो गयी और अब कैथी को दुनिया की सबसे पतली कमर वाली महिला के तोर पर जाना जाता यहाँ तक के उन्हें क्वीन ऑफ़ हर्ट्स भी कहा जाता हैं । एरिका एर्विन को पेशेवर रूप से अमेज़ॅन ईव के रूप में जाना जाता है। ऐमजन ईव दुनिया की सबसे लंबी ट्रांसजेंडर अमेरिकी मॉडल, फिटनेस ट्रेनर और अभिनेत्री हैं। उन्होंने अमेरिकी हॉरर स्टोरीः फ़्रीक शो पर एक आवर्ती चरित्र की भूमिका निभाई है। वे फिटनेस कॉन्शस ईव साइज जीरो की वजह से मरने की अवस्था में आ गयीं थी। लेकिन अब इस घटना से प्रेरणा लेकर एरिका पर्सनल ट्रेनिंग देती हैं। बॉडी इमेज दुरुस्त करने के लिए लोगों की मदद करती हैं। अपने लम्बे बालो को लेकर दुनिया भरमे अपनी पहचान बनाने वाली आशा मंडेला कैंसर की मरीज थी और इस वजह से उन्होंने कीमोथैरपी के बावजूद अपने बालो का काफी ध्यान रखा और अब आशा के बाल करीब 19 फिट लम्बे हैं । आशा दुनिया की सबसे लंबे बालों वाली महिला का रिकॉर्ड भी कायम किया है। जूलिया ग्नूसे 35 साल की उम्र में पॉरफीरिया नामक भयानक बीमारी से पीड़ित हो गयी थी। इस बीमारी की वजह से उनके शरीर पर छाले पड़ गये और उम्र भर के लिए इन छालों के निशान इनके शरीर पर बने रहे। इसके बाद जूलिया ने हिम्मत ना हारते हुए अपने एक दोस्त के कहने पर अपने शरीर पर टैटू बनवा लिए। और इस प्रकार उनकी 95 प्रतिशत बॉडी टैटू से कवर हो गयी। इसके चलते उन्होनें सबसे अधिक टैटू वाले शरीर का गिनीज रिकार्ड भी अपने नाम कर लिया। एनेटा फ्लोरचेक दुनिया की सबसे मजबूत महिलाओ में गिनी जाती हैं बता दे की एनेटा एक आम आदमी को अपने सर के बल उठा सकती हैं यहाँ तक के इन्होने वर्ल्डस स्ट्रॉन्गेस्ट वुमन का ख़िताब भी अपने नाम कर रखा हैं ।
इसी दुनिया में हैं ये पांच अजब-गज़ब महिलाएं, जिनके बारे में जानकर हैरान हो जायेंगे! ! इस दुनिया में हर तरह तरह के लोग देखने को मिलते हैं लेकिन कुछ ऐसे बह होते हैं जो हर किसी को अपनी और आकर्षित किया करते हैं उनका शरीर ही कुछ ऐसा होता हैं कोई उन्हें देखे बजे रह ही नहीं पता । हमारी ही दुनिया में अलग-अलग देशों में कुछ ऐसी औरतें रहतीं हैं जिनके बारे में जानकर लोग हैरान हो जायेंगे। आईये पढ़ते हैं दुनिया की पांच अजब-गज़ब महिलाओं के बारे में.... बता दे की कैथी अमेरिका की रहने वाली हैं और वह अपनी पतली कमर के लिए जानी जाती हैं । जब कैथी से इस बारे में पूछा गया तब उन्होंने बताया था की उन्होंने बारह साल तक कॉरसेट को अपने शरीर से अलग नहीं किया। बारह साल बाद उनकी कमर की साइज़ लगभग पंद्रह इंच हो गयी और अब कैथी को दुनिया की सबसे पतली कमर वाली महिला के तोर पर जाना जाता यहाँ तक के उन्हें क्वीन ऑफ़ हर्ट्स भी कहा जाता हैं । एरिका एर्विन को पेशेवर रूप से अमेज़ॅन ईव के रूप में जाना जाता है। ऐमजन ईव दुनिया की सबसे लंबी ट्रांसजेंडर अमेरिकी मॉडल, फिटनेस ट्रेनर और अभिनेत्री हैं। उन्होंने अमेरिकी हॉरर स्टोरीः फ़्रीक शो पर एक आवर्ती चरित्र की भूमिका निभाई है। वे फिटनेस कॉन्शस ईव साइज जीरो की वजह से मरने की अवस्था में आ गयीं थी। लेकिन अब इस घटना से प्रेरणा लेकर एरिका पर्सनल ट्रेनिंग देती हैं। बॉडी इमेज दुरुस्त करने के लिए लोगों की मदद करती हैं। अपने लम्बे बालो को लेकर दुनिया भरमे अपनी पहचान बनाने वाली आशा मंडेला कैंसर की मरीज थी और इस वजह से उन्होंने कीमोथैरपी के बावजूद अपने बालो का काफी ध्यान रखा और अब आशा के बाल करीब उन्नीस फिट लम्बे हैं । आशा दुनिया की सबसे लंबे बालों वाली महिला का रिकॉर्ड भी कायम किया है। जूलिया ग्नूसे पैंतीस साल की उम्र में पॉरफीरिया नामक भयानक बीमारी से पीड़ित हो गयी थी। इस बीमारी की वजह से उनके शरीर पर छाले पड़ गये और उम्र भर के लिए इन छालों के निशान इनके शरीर पर बने रहे। इसके बाद जूलिया ने हिम्मत ना हारते हुए अपने एक दोस्त के कहने पर अपने शरीर पर टैटू बनवा लिए। और इस प्रकार उनकी पचानवे प्रतिशत बॉडी टैटू से कवर हो गयी। इसके चलते उन्होनें सबसे अधिक टैटू वाले शरीर का गिनीज रिकार्ड भी अपने नाम कर लिया। एनेटा फ्लोरचेक दुनिया की सबसे मजबूत महिलाओ में गिनी जाती हैं बता दे की एनेटा एक आम आदमी को अपने सर के बल उठा सकती हैं यहाँ तक के इन्होने वर्ल्डस स्ट्रॉन्गेस्ट वुमन का ख़िताब भी अपने नाम कर रखा हैं ।
Tesla फिलहाल पूरी तरह से इंपोर्ट किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर कटौती के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है और इस मुद्दे के हल होने से पहले कारों को भारत लाने की संभावना नहीं है. अमेरिकी इलेक्ट्रिक व्हीकल मेकर कंपनी टेस्ला (Tesla) फिलहाल भारतीय कार बाजार (India Car Market) में शुरुआत करने की तैयारी कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि कंपनी भारत में अपना ऑपरेशन अपने दो सबसे किफायती मॉडल - मॉडल 3 (Tesla Model 3) या मॉडल वाई (Tesla Model Y) के साथ शुरू करेगी. हाल ही में टेस्ला मॉडल वाई को भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा गया था. अब, यह पहली बार नहीं है कि मॉडल Y को हमारे देश में देखा गया है, लेकिन इस बार इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट एसयूवी को अधिक करीब से कैप्चर किया गया है. तस्वीर टेस्ला क्लब इंडिया के सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की गई थी और नितेश बोराने ने इसे कैप्चर किया. उन्होंने पुणे, महाराष्ट्र में मॉडल वाई को देखा था. मॉडल वाई के अलावा, पहले हमने भारत में टेस्ला मॉडल 3 इलेक्ट्रिक सेडान (electric sedan) की कई लीक तस्वीरें भी देखी हैं. जहां तक मॉडल Y की बात है, यह मॉडल 3 के जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है और ग्लोबल लेवल पर टेस्ला एसयूवी को 5- और 7-सीटर कॉन्फिगरेशन दोनों में पेश करती है. टेस्ला मॉडल वाई मॉडल 3 के साथ अपनी बहुत सी विजुअल स्कीम को शेयर करता है, इसमें फ्रंट सेक्शन और एलईडी टेललाइट्स शामिल हैं. आगे की ओर, स्वेप्टबैक हेडलैंप, बिना ग्रिल और एक सेंटर एयरडैम के साथ एक तराशा हुआ डिजाइन मिलता है. प्रोफाइल सिल्वर अलॉय व्हील्स को दिखाती है, जबकि पीछे की तरफ इसमें शार्प-लुकिंग बूट लिड और क्लैडेड रियर बंपर मिलता है. ग्लोबल लेवल पर, टेस्ला मॉडल वाई को दो ऑप्शन लॉन्ग रेंज एडब्ल्यूडी और परफॉर्मेंस में पेश किया गया है. दोनों मॉडल डुअल इलेक्ट्रिक मोटर के साथ आते हैं, हर एक एक्सल के लिए एक, इलेक्ट्रिक ऑल-व्हील ड्राइव (एडब्ल्यूडी) फंक्शन की पेशकश करता है. पुराना लॉन्ग रेंज ऑप्शन 505 किमी तक की रेंज ऑफर करता है और 4.8 सेकंड से भी कम समय में 0-97 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकता है. अधिक पावरफुल परफॉर्मेंस वेरिएंट लगभग 3.5 सेकंड में 480 किमी की इलेक्ट्रिक रेंज ऑफर करता है. फिलहाल, टेस्ला पूरी तरह से इंपोर्ट किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर कटौती के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है और इस मुद्दे के हल होने से पहले कारों को भारत लाने की संभावना नहीं है. ऐसा लगता है कि भारत को टेस्ला कारों के ऑफीशियल तौर पर हमारे बाजार तक पहुंचने के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा.
Tesla फिलहाल पूरी तरह से इंपोर्ट किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर कटौती के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है और इस मुद्दे के हल होने से पहले कारों को भारत लाने की संभावना नहीं है. अमेरिकी इलेक्ट्रिक व्हीकल मेकर कंपनी टेस्ला फिलहाल भारतीय कार बाजार में शुरुआत करने की तैयारी कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि कंपनी भारत में अपना ऑपरेशन अपने दो सबसे किफायती मॉडल - मॉडल तीन या मॉडल वाई के साथ शुरू करेगी. हाल ही में टेस्ला मॉडल वाई को भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा गया था. अब, यह पहली बार नहीं है कि मॉडल Y को हमारे देश में देखा गया है, लेकिन इस बार इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट एसयूवी को अधिक करीब से कैप्चर किया गया है. तस्वीर टेस्ला क्लब इंडिया के सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की गई थी और नितेश बोराने ने इसे कैप्चर किया. उन्होंने पुणे, महाराष्ट्र में मॉडल वाई को देखा था. मॉडल वाई के अलावा, पहले हमने भारत में टेस्ला मॉडल तीन इलेक्ट्रिक सेडान की कई लीक तस्वीरें भी देखी हैं. जहां तक मॉडल Y की बात है, यह मॉडल तीन के जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है और ग्लोबल लेवल पर टेस्ला एसयूवी को पाँच- और सात-सीटर कॉन्फिगरेशन दोनों में पेश करती है. टेस्ला मॉडल वाई मॉडल तीन के साथ अपनी बहुत सी विजुअल स्कीम को शेयर करता है, इसमें फ्रंट सेक्शन और एलईडी टेललाइट्स शामिल हैं. आगे की ओर, स्वेप्टबैक हेडलैंप, बिना ग्रिल और एक सेंटर एयरडैम के साथ एक तराशा हुआ डिजाइन मिलता है. प्रोफाइल सिल्वर अलॉय व्हील्स को दिखाती है, जबकि पीछे की तरफ इसमें शार्प-लुकिंग बूट लिड और क्लैडेड रियर बंपर मिलता है. ग्लोबल लेवल पर, टेस्ला मॉडल वाई को दो ऑप्शन लॉन्ग रेंज एडब्ल्यूडी और परफॉर्मेंस में पेश किया गया है. दोनों मॉडल डुअल इलेक्ट्रिक मोटर के साथ आते हैं, हर एक एक्सल के लिए एक, इलेक्ट्रिक ऑल-व्हील ड्राइव फंक्शन की पेशकश करता है. पुराना लॉन्ग रेंज ऑप्शन पाँच सौ पाँच किमी तक की रेंज ऑफर करता है और चार दशमलव आठ सेकंड से भी कम समय में शून्य-सत्तानवे किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकता है. अधिक पावरफुल परफॉर्मेंस वेरिएंट लगभग तीन दशमलव पाँच सेकंड में चार सौ अस्सी किमी की इलेक्ट्रिक रेंज ऑफर करता है. फिलहाल, टेस्ला पूरी तरह से इंपोर्ट किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर कटौती के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है और इस मुद्दे के हल होने से पहले कारों को भारत लाने की संभावना नहीं है. ऐसा लगता है कि भारत को टेस्ला कारों के ऑफीशियल तौर पर हमारे बाजार तक पहुंचने के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा.
यूक्रेन। यूक्रेन (Ukrain) के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की का कहना है कि देश के दक्षिणी खेरसॉन इलाके में उन्होंने तीन गांवों को रूसी कब्जे से मुक्त करा कर फिर से यूक्रेन (Ukrain) में मिला लिया है। उन्होंने कहा, नोवोवोस्क्रेसेन्सके , नोवग्रेगोरिव्का और पेट्रोपेवलिवका वो तीन गांव है जिन्हें रूसी कब्जे से करवा लिया गया है। ज़ेलेंस्की ने बताया कि इन तीनों गांवों को यूक्रेन की सेना ने पिछले 24 घंटों में मुक्त करा लिया है। यूक्रेन (Ukrain) के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूक्रेन का जवाबी हमला अभी भी जारी है। बता दें कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जनमत संग्रह कर यूक्रेन के चार प्रांतों का अपने देश में विलय करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए थे। रूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन के दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जोपोरिज्जिया इलाकों पर कब्जा कर लिया है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत मंगलवार को यूक्रेन (Ukrain) के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से टेलीफोन पर बातचीत की और कहा कि यूक्रेन संकट का कोई "सैन्य समाधान" नहीं हो सकता। उन्होंने ये भी कहा कि परमाणु प्रतिष्ठानों को खतरे में डालने के दूरगामी और विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस यूक्रेन (Ukrain) में युद्ध पर बातचीत की और एक बार फिर दोहराया कि वार्ता और कूटनीति के जरिए ही इसका युद्ध का समाधान निकाला जा सकता है।
यूक्रेन। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की का कहना है कि देश के दक्षिणी खेरसॉन इलाके में उन्होंने तीन गांवों को रूसी कब्जे से मुक्त करा कर फिर से यूक्रेन में मिला लिया है। उन्होंने कहा, नोवोवोस्क्रेसेन्सके , नोवग्रेगोरिव्का और पेट्रोपेवलिवका वो तीन गांव है जिन्हें रूसी कब्जे से करवा लिया गया है। ज़ेलेंस्की ने बताया कि इन तीनों गांवों को यूक्रेन की सेना ने पिछले चौबीस घंटाटों में मुक्त करा लिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूक्रेन का जवाबी हमला अभी भी जारी है। बता दें कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जनमत संग्रह कर यूक्रेन के चार प्रांतों का अपने देश में विलय करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए थे। रूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन के दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जोपोरिज्जिया इलाकों पर कब्जा कर लिया है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत मंगलवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से टेलीफोन पर बातचीत की और कहा कि यूक्रेन संकट का कोई "सैन्य समाधान" नहीं हो सकता। उन्होंने ये भी कहा कि परमाणु प्रतिष्ठानों को खतरे में डालने के दूरगामी और विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस यूक्रेन में युद्ध पर बातचीत की और एक बार फिर दोहराया कि वार्ता और कूटनीति के जरिए ही इसका युद्ध का समाधान निकाला जा सकता है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Ramayan: रामानंद सागर की रामायण के हर पात्र ने दर्शकों का दिल छुआ। इस शो का एक एक कलाकार बहुत लोकप्रिय हुआ। उनमें से एक थे 'विभीषण'। विभीषण 'रामायण' करने के साथ साथ एक बैंक में नौकरी भी किया करते थे। शो के लिए कई बार वह नौकरी से छुट्टी ले लिया करते थे। बैंक वालों को ये बात रास नहीं आ रही थी। ऐसे में उनके नाम एक नोटिस तक जारी कर दिया गया था। रामानंद सागर की रामायण में विभीषण का किरदार एक्टर मुकेश रावल ने निभाया था। मुकेश रावल एक गुजराती एक्टर थे। हिंदी सिनेमा के अलावा उन्होंने गुजराती इंडस्ट्री में भी काम किया था। लेकिन जब रामायण की शूटिंग हो रही थी उस वक्त वह मुंबई के एक बैंक में काम करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक की नौकरी करते करते ही रावल रामायण कर रहे थे। वह कई बार छुट्टी मार लिया करते थे। ऐसे में कंपनी ने उनके नाम एख नोटिस जारी कर दिया था। धीरे धीरे शो की लोकप्रियता बढ़ी तो विभीषण के किरदार में मुकेश रावल को भी जनता ने खूब पसंद किया। देखते ही देखे वह लोगों के बीच पॉपुलर हो गए। ऐसे में ऑफिस वाले भी उनसे इंप्रेस हो गए और उन्हें कंपनी की तरफ से स्पेशल छुट्टियां दी जाने लगीं। सासल 2001 में वह रिटायर हुए थे। रामायण के अलावा एक्टर न और भी कई फिल्मों में काम किया जैसे लहू के दो रंग, सत्ता, ये मझदार, जिद्द, औजार आदि। मुकेश रावल को लेकर ऐसी खबरें साल 2016 में आई थीं कि उस साल 15 नवंबर को उनकी मौत हो गई थी। मुंबई, कांदिवली रेलवे स्टेशन से कुछ दूर ट्रैक पर उनका शव मिला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रेन से कट कर उनकी मौत हो गई थी। खबरें थीं कि एक्टर डिप्रेशन में थे। बेटी की अचानक मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की शादी की औऱ खुद मौत को गले लगा लिया।
Ramayan: रामानंद सागर की रामायण के हर पात्र ने दर्शकों का दिल छुआ। इस शो का एक एक कलाकार बहुत लोकप्रिय हुआ। उनमें से एक थे 'विभीषण'। विभीषण 'रामायण' करने के साथ साथ एक बैंक में नौकरी भी किया करते थे। शो के लिए कई बार वह नौकरी से छुट्टी ले लिया करते थे। बैंक वालों को ये बात रास नहीं आ रही थी। ऐसे में उनके नाम एक नोटिस तक जारी कर दिया गया था। रामानंद सागर की रामायण में विभीषण का किरदार एक्टर मुकेश रावल ने निभाया था। मुकेश रावल एक गुजराती एक्टर थे। हिंदी सिनेमा के अलावा उन्होंने गुजराती इंडस्ट्री में भी काम किया था। लेकिन जब रामायण की शूटिंग हो रही थी उस वक्त वह मुंबई के एक बैंक में काम करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक की नौकरी करते करते ही रावल रामायण कर रहे थे। वह कई बार छुट्टी मार लिया करते थे। ऐसे में कंपनी ने उनके नाम एख नोटिस जारी कर दिया था। धीरे धीरे शो की लोकप्रियता बढ़ी तो विभीषण के किरदार में मुकेश रावल को भी जनता ने खूब पसंद किया। देखते ही देखे वह लोगों के बीच पॉपुलर हो गए। ऐसे में ऑफिस वाले भी उनसे इंप्रेस हो गए और उन्हें कंपनी की तरफ से स्पेशल छुट्टियां दी जाने लगीं। सासल दो हज़ार एक में वह रिटायर हुए थे। रामायण के अलावा एक्टर न और भी कई फिल्मों में काम किया जैसे लहू के दो रंग, सत्ता, ये मझदार, जिद्द, औजार आदि। मुकेश रावल को लेकर ऐसी खबरें साल दो हज़ार सोलह में आई थीं कि उस साल पंद्रह नवंबर को उनकी मौत हो गई थी। मुंबई, कांदिवली रेलवे स्टेशन से कुछ दूर ट्रैक पर उनका शव मिला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रेन से कट कर उनकी मौत हो गई थी। खबरें थीं कि एक्टर डिप्रेशन में थे। बेटी की अचानक मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की शादी की औऱ खुद मौत को गले लगा लिया।
नई दिल्ली : देश दुनिया में कोरोना से कोहराम मचा हुआ हर दिन कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा और मरने वालों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है वहीं इस बीच ओडिशा से एक खबर आई है जिसको पढ़कर आपकी रूह कांप जाएगी एक महिला को बैंक की असंवेदनशीलता के कारण अपनी 100 साल की मां को चारपाई पर घसीटकर बैंक ले जाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक कहा जा रहा है बैंक वालों ने उस बुजुर्ग महिला के घर से गई महिला को पेंशन की रकम देने से मना कर दिया कहा आप उस बुजुर्ग महिला को लाएं तभी आपको रकम दी जाएगी इसके बाद महिला अपनी 100 साल की बूढ़ी मां को चारपाई से घसीटकर बैंक तक ले गई जिसके बाद आस पास के मौजूद लोगों ने इस घटना की तस्वीरें अपने फोन के कैमरे में कैद कर ली और यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी इस तस्वीर को देख लोगों में बैंक वालों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। यह घटना ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से 433 किलोमीटर दूर स्थित नुआपाड़ा जिले की है जानकारी के अनुसार महिला के घर में उस वक्त पैसे नहीं थे और वह घर के खर्च के लिए बूढ़ी माँ के खाते से पैसे निकालने गई थी जिसके बाद से यह घटना हुई। यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग तस्वीरें देख महिला के लिए मदद की अपील कर रहें है।
नई दिल्ली : देश दुनिया में कोरोना से कोहराम मचा हुआ हर दिन कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा और मरने वालों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है वहीं इस बीच ओडिशा से एक खबर आई है जिसको पढ़कर आपकी रूह कांप जाएगी एक महिला को बैंक की असंवेदनशीलता के कारण अपनी एक सौ साल की मां को चारपाई पर घसीटकर बैंक ले जाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक कहा जा रहा है बैंक वालों ने उस बुजुर्ग महिला के घर से गई महिला को पेंशन की रकम देने से मना कर दिया कहा आप उस बुजुर्ग महिला को लाएं तभी आपको रकम दी जाएगी इसके बाद महिला अपनी एक सौ साल की बूढ़ी मां को चारपाई से घसीटकर बैंक तक ले गई जिसके बाद आस पास के मौजूद लोगों ने इस घटना की तस्वीरें अपने फोन के कैमरे में कैद कर ली और यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी इस तस्वीर को देख लोगों में बैंक वालों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। यह घटना ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से चार सौ तैंतीस किलोग्राममीटर दूर स्थित नुआपाड़ा जिले की है जानकारी के अनुसार महिला के घर में उस वक्त पैसे नहीं थे और वह घर के खर्च के लिए बूढ़ी माँ के खाते से पैसे निकालने गई थी जिसके बाद से यह घटना हुई। यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग तस्वीरें देख महिला के लिए मदद की अपील कर रहें है।
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। युवाओं से लेकर वृद्धजनों में कोरोना टीकाकरण के लिए उत्साह देखा गया। टीकाकरण के लिए शुक्रवार को जिलेभर में 75 केंद्र बनाए गए थे जहां 34 सौ से ज्यादा हितग्राहियों को टीका लगाया गया। लाभांवित हितग्राहियों ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को अनिवार्य रूप से कोरोना का टीका लगवाना चाहिए। इस महामारी से निपटने के लिए टीकाकरण आवश्यक है। शहपुरा, मझौली, पनागर, कुंडम, पाटन, सिहोरा, बरगी-बरेला, जबलपुर ब्लाक में बनाए गए केंद्रों में सुबह से शाम तक हितग्राहियों को टीका लगाते हुए मौके पर ही पंजीयन किया गया। शुक्रवार से शुरू हुआ टीकाकरण आगामी 75 दिनों (अवकाश के दिनों को छोड़कर) तक जारी रहेगा। जिला टीकाकरण अधिकारी डा. एसएस दाहिया ने बताया कि इस दौरान 18 वर्ष से ज्यादा आयु के हितग्राहियों को कोरोना टीके की तीसरी डोज निश्शुल्क लगाई जाएगी। -वर्ष 2020 से शुरू हुई कोरोना महामारी के कारण तमाम गतिविधियां ठप हो गई थीं। टीकाकरण के बाद महामारी से काफी हद तक राहत मिली। प्रत्येक पात्र नागरिक को अनिवार्य रूप से कोरोना का टीका लगवाना चाहिए। -कोरोना टीकाकरण ने सुरक्षा कवच तैयार किया है। यही वजह है कि तीसरी लहर में कोरोना का भयावह रूप सामने नहीं आया। कोरोना संक्रमण को हराने के लिए नागरिकों को शत प्रतिशत टीकाकरण में सहभागिता करनी होगी। -कोरोना का टीका शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जिससे कोरोना के वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। टीका न लगवाने वालों को कोरोना के संक्रमण के दौरान ज्यादा जोखिम उठाना पड़ा। -कोरोना का टीका लगवाने वालों को अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाना पड़ा। सरकार ने नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन देकर कोरोना को हराने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज अनिवार्य रूप से लगवानी चाहिए। -15 जुलाई को 7 हजार 500 हितग्राहियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। -75 केंद्रों में 3 हजार 443 हितग्राहियों को टीका लगाया गया। -12 से 14 वर्ष के 55 हितग्राहियों को टीका लगाया गया। -15 से 18 वर्ष के 44 हितग्राही टीकाकरण से लाभांवित हुए। -18 से 45 वर्ष के 71 हितग्राही टीका लगवाने केंद्रों में पहुंचे। -45 वर्ष से ज्यादा आयु के 28 हितग्राहियों को टीका लगाया गया। पहला डोज-96 प्रतिशत हितग्राही लाभांवित। दूसरा डोज-99 प्रतिशत हितग्राही लाभांवित। तीसरा डोज-मात्र पांच प्रतिशत हितग्राही लाभांवित। कुल टीकाकरण-जिले में 16 जनवरी 2021 को कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। अब तक 45 लाख 44 हजार 380 डोज लगाए जा चुके हैं। जिसमें 4 हजार 711 डोज निजी अस्पतालों में सशुल्क लगाई जा रही स्पुतनिक वैक्सीन के शामिल हैं। स्पुतनिक वैक्सीन की तीसरी डोज का आंकड़ा शून्य है।
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। युवाओं से लेकर वृद्धजनों में कोरोना टीकाकरण के लिए उत्साह देखा गया। टीकाकरण के लिए शुक्रवार को जिलेभर में पचहत्तर केंद्र बनाए गए थे जहां चौंतीस सौ से ज्यादा हितग्राहियों को टीका लगाया गया। लाभांवित हितग्राहियों ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को अनिवार्य रूप से कोरोना का टीका लगवाना चाहिए। इस महामारी से निपटने के लिए टीकाकरण आवश्यक है। शहपुरा, मझौली, पनागर, कुंडम, पाटन, सिहोरा, बरगी-बरेला, जबलपुर ब्लाक में बनाए गए केंद्रों में सुबह से शाम तक हितग्राहियों को टीका लगाते हुए मौके पर ही पंजीयन किया गया। शुक्रवार से शुरू हुआ टीकाकरण आगामी पचहत्तर दिनों तक जारी रहेगा। जिला टीकाकरण अधिकारी डा. एसएस दाहिया ने बताया कि इस दौरान अट्ठारह वर्ष से ज्यादा आयु के हितग्राहियों को कोरोना टीके की तीसरी डोज निश्शुल्क लगाई जाएगी। -वर्ष दो हज़ार बीस से शुरू हुई कोरोना महामारी के कारण तमाम गतिविधियां ठप हो गई थीं। टीकाकरण के बाद महामारी से काफी हद तक राहत मिली। प्रत्येक पात्र नागरिक को अनिवार्य रूप से कोरोना का टीका लगवाना चाहिए। -कोरोना टीकाकरण ने सुरक्षा कवच तैयार किया है। यही वजह है कि तीसरी लहर में कोरोना का भयावह रूप सामने नहीं आया। कोरोना संक्रमण को हराने के लिए नागरिकों को शत प्रतिशत टीकाकरण में सहभागिता करनी होगी। -कोरोना का टीका शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जिससे कोरोना के वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। टीका न लगवाने वालों को कोरोना के संक्रमण के दौरान ज्यादा जोखिम उठाना पड़ा। -कोरोना का टीका लगवाने वालों को अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाना पड़ा। सरकार ने नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन देकर कोरोना को हराने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज अनिवार्य रूप से लगवानी चाहिए। -पंद्रह जुलाई को सात हजार पाँच सौ हितग्राहियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। -पचहत्तर केंद्रों में तीन हजार चार सौ तैंतालीस हितग्राहियों को टीका लगाया गया। -बारह से चौदह वर्ष के पचपन हितग्राहियों को टीका लगाया गया। -पंद्रह से अट्ठारह वर्ष के चौंतालीस हितग्राही टीकाकरण से लाभांवित हुए। -अट्ठारह से पैंतालीस वर्ष के इकहत्तर हितग्राही टीका लगवाने केंद्रों में पहुंचे। -पैंतालीस वर्ष से ज्यादा आयु के अट्ठाईस हितग्राहियों को टीका लगाया गया। पहला डोज-छियानवे प्रतिशत हितग्राही लाभांवित। दूसरा डोज-निन्यानवे प्रतिशत हितग्राही लाभांवित। तीसरा डोज-मात्र पांच प्रतिशत हितग्राही लाभांवित। कुल टीकाकरण-जिले में सोलह जनवरी दो हज़ार इक्कीस को कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। अब तक पैंतालीस लाख चौंतालीस हजार तीन सौ अस्सी डोज लगाए जा चुके हैं। जिसमें चार हजार सात सौ ग्यारह डोज निजी अस्पतालों में सशुल्क लगाई जा रही स्पुतनिक वैक्सीन के शामिल हैं। स्पुतनिक वैक्सीन की तीसरी डोज का आंकड़ा शून्य है।
बेटी बनकर घर आंगन महकाया। घर में ख़ुशियाँ को फैलाया। माँ की हमदर्द, पिता की हमराज बनकर।। घर की रौनक को बढ़ाया। ये तो बेटी है जो सबका जीवन महकाती है। बहन बनकर भाई का हरदम साथ निभाती। रक्षा का वचन तो भाई ने लिया। पर बहन ने भी कभी पीछे हाथ नहीं किया। जितना भाई देता है उससे दुगना लौटाती है। ये तो बहन है जो भाई पर जान भी लुटाती है। आती जब बहू बनकर मकान को घर बनाती है। अपना घर छोड़कर पराये घर को भी अपनाती है। ससुराल के हर रिश्ते को दिल से निभाती है। सब सहकर भी, दोनो घरों की लाज निभाती है। बचाती है । पत्नी रूप में पति का हर दम साथ निभाती, दुख ,सुख में कदम से कदम मिलाकर चलती, भूल जाती, लड़ जाती है । माँ बनकर नवजीवन निर्माण करती । और अपना सर्वस्व समर्पण करती । बच्चों के लिये मन्नत उपवास करती। खुद से पहले अपने बच्चों का सोचना। वो एक माँ ही कर पाती है । कर जाती है ।
बेटी बनकर घर आंगन महकाया। घर में ख़ुशियाँ को फैलाया। माँ की हमदर्द, पिता की हमराज बनकर।। घर की रौनक को बढ़ाया। ये तो बेटी है जो सबका जीवन महकाती है। बहन बनकर भाई का हरदम साथ निभाती। रक्षा का वचन तो भाई ने लिया। पर बहन ने भी कभी पीछे हाथ नहीं किया। जितना भाई देता है उससे दुगना लौटाती है। ये तो बहन है जो भाई पर जान भी लुटाती है। आती जब बहू बनकर मकान को घर बनाती है। अपना घर छोड़कर पराये घर को भी अपनाती है। ससुराल के हर रिश्ते को दिल से निभाती है। सब सहकर भी, दोनो घरों की लाज निभाती है। बचाती है । पत्नी रूप में पति का हर दम साथ निभाती, दुख ,सुख में कदम से कदम मिलाकर चलती, भूल जाती, लड़ जाती है । माँ बनकर नवजीवन निर्माण करती । और अपना सर्वस्व समर्पण करती । बच्चों के लिये मन्नत उपवास करती। खुद से पहले अपने बच्चों का सोचना। वो एक माँ ही कर पाती है । कर जाती है ।
बार-बार मूर्छित होकर गिर पड़ते थे । रत्नगर्भको कुछ भी होश नहीं था, वे वेसुध होकर इलोकका पाठ करते और बीच-बीचमें जोरोंसे रुदन भी करने लगते । जैसे-तैसे गदाधर पण्डितने पकड़कर रत्नगर्भको इलोक पढ़नेसे शान्त किया । तब कहीं जाकर प्रभुको कुछ-कुछ बाह्य ज्ञान हुआ। कुछ होश होनेपर सभी मिलकर गंगा स्नान करने गये और फिर सभी प्रेममें छके हुए-से अपने-अपने घरोंको चले गये । इस प्रकार प्रभुकी सर्वप्रथम कृपा-किरणके अधिकारी रत्नगर्भाचार्य ही हुए। उन्हें ही सर्वप्रथम प्रभुकी असीम अनुकम्पाका आदि-अधिकारी समझना चाहिये । तृणादपि सुनोचेन तरोरपि सहिष्णुना । अमानिना मानदेन कीर्तनीयः सदा हरिः ॥ ( श्रीकृष्णचैतन्यशिक्षाष्टक ) भक्त-गण दास्य, सख्य, वात्सल्य, शान्त और मधुर इन पाँचों भावोंके द्वारा अपने प्रियतम की उपासना करते हैं। उपासनामें ये ही पाँच भाव मुख्य समझे गये हैं, किन्तु इन पाँचोंमें भी दास्य-भाव ही सर्वश्रेष्ट और सर्वप्रधान है। या यों कह लीजिये कि दास्यभाव ही इन पाँचों भावोंका मुख्य प्राण है । दास्यभावके बिना न तो सख्य ही हो सकता है और न वात्सल्य, शान्त तथा मधुर ही । कोई भी भाव क्यों न हो, दास्यभाव उसमें अव्यक्तरूपसे जरूर छिपा रहेगा । दास्यके बिना प्रेम हो ही छ अपने आपको तृणसे भी नीचा समझना चाहिये तथा तरुले भी अधिक सहनशील बनना चाहिये । स्वयं तो सदा अमानी ही बने रहना चाहिये, किन्तु दूसरोंको सदा सम्मान प्रदान करते रहना चाहिये । अपनेको ऐसा बना लेनेपर ही श्रीकृष्ण-कीर्तनके अधिकारी वन सकते हैं। क्योंकि श्रीकृष्ण-कीर्तन प्राणियोंके लिये सर्वदा कीर्तनीय वस्तु है । नहीं सकता । जो स्त्रयं दास बनना नहीं जानता वह खामी कभी वन ही नहीं सकेगा, जिसने स्वयं किसीकी उपासना तथा वन्दना नहीं की है, वह उपास्य तथा वन्दनीय हो हो नहीं सकता। तभी तो अखिल ब्रह्माण्डकोटिनायक श्रीहरि स्वयं अपने श्रीमुखसे कहते हैं 'ऋीतोऽहं तेन चार्जुन' हे अर्जुन ! भक्तोंने मुझे खरीद लिया है, मैं उनका क्रीतदास हूँ। क्योंकि वे स्वयं चराचर प्राणियोंके स्वामी हैं इसलिये स्त्रामीपनेके भावको प्रदर्शित करनेके निमित्त वे भक्त तथा ब्राह्मणोंके स्वयं दास होना स्वीकार करते हैं और उनकी पदरजको अपने मस्तकपर चढ़ानेके निमित्त सदा उनके पीछे-पीछे घूमा करते हैं । महाप्रभु अव भावावेशमें आकर भक्तोंके भावोंको प्रकट करने लगे । भक्तोंको सम्पूर्ण लोगोंके प्रति और भगवत्-भक्तोंके प्रति किस प्रकारके आचरण करने चाहिये, उनमें भागवत पुरुषोंके प्रति कितनी दीनता, कैसी नम्रता होनी चाहिये, इसकी शिक्षा देनेके निमित्त वे स्वयं आचरण करके लोगोंको दिखाने लगे। क्योंकि वे तो भक्ति-भावके प्रदर्शक भक्तशिरोमणि ही ठहरे । उनके सभी कार्य लोकमर्यादा-स्थापनके निमित्त होते थे । उन्होंने मर्यादाका उल्लंघन कहीं भी नहीं किया, यही तो प्रभुके जीवन में एक भारी विशेषता है। अध्यापकीका अन्त हो गया, बाह्यशास्त्र पढ़ना तथा पढ़ाना दोनों ही छूट गये, अब न वह पहिला-सा चाञ्चल्य है और न शास्त्रार्य तथा वाद-विवादकी उन्मादकारी धुन, अब तो इनपर दूसरी ही धुन सवार हुई है, जिस धुनमें ये सभी संसारी कामोंको ही नहीं भूल गये हैं, किन्तु अपने आपको भी विस्मृत कर बैठे हैं । इनके भाव अलौकिक हैं, इनकी बातें गूढ़ हैं, इनके चरित्र रहस्यमय हैं, भला सर्वदा स्वार्थमें ही सने रहनेवाले संसारी मनुष्य इनके भावोंको समझ ही कैसे सकते हैं । अत्र ये नित्यप्रति प्रातःकाल गङ्गा-स्नानके निमित्त जाने लगे। रास्तेमें जो भी ब्राह्मण, वैष्णव तथा वयोवृद्ध पुरुष मिलता उसे ही नम्रतापूर्वक प्रणाम करते और उसका आशीर्वाद ग्रहण करते । गङ्गाजीपर पहुँचकर ये प्रत्येक वैष्णवकी पदधूलिको अपने मस्तकपर चढ़ाते । उनकी वन्दना करते और भावावेशमें आकर कभी-कभी प्रदक्षिणा भी करने लगते । भक्तगण इन्हें भाँति-भाँतिके आशीर्वाद देते । कोई कहता - 'भगवान् करे आपको भगवान्की अनन्य भक्तिकी प्राप्ति हो ।" कोई कहता - 'आप प्रमुके परम प्रिय बनें ।' कोई कहता - 'श्रीकृष्ण तुम्हारी सभी मनोकामनाओंको पूर्ण करें ।' सबके आशीर्वादोंको सुनकर प्रभु उनके चरणोंमें लोट जाते और फूट-फूटकर रोने लगते । रोतेरोते कहते --- 'आप सभी वैष्णवोंके आशीर्वादका ही सहारा है, मुझ दीन-हीन कङ्गालपर आप सभी लोग कृपा कीजिये । भागवत पुरुष बड़े ही कोमल स्वभावके होते हैं, उनका हृदय करुणासे सदा भरा हुआ होता है, वे पर-पीड़ाको देखकर सदा दुखी हुआ करते हैं। मुझ दुखियाके दुखको भी दूर करो । मुझे श्रीकृष्णसे मिला दो, मेरी मनोकामना पूर्ण कर दो, मेरे सत्संकल्पको सफल बना दो । यही मेरी आप सभी वैष्णवों के चरणोंमें विनीत प्रार्थना है घाटपर बैठे हुए वैष्णवोंकी, प्रभु जो भी मिल जाती वही, सेवा कर देते । किसीका चन्दन ही घिस देते, किसीकी गीली धोतीको ही धो देते । किसीके जलके घड़ेको भरकर उनके घरतक पहुँचा आते। किसीके सिरमें आँवला तथा तैल ही मलने लगते । भक्तोंकी सेवा-शुश्रूपा करनेमें ये सबसे अधिक सुखका अनुभव करते । वृद्ध वैष्णव इन्हें भाँति-भाँतिके उपदेश करते । कोई कहता 'निरन्तर श्रीकृष्ण कीर्तन करते रहना ही एकमात्र सार है। तुम्हें श्रीकृष्ण ही कहना चाहिये, कृष्णके मनोहर नामका ही स्मरण करते रहना चाहिये । श्रीकृष्ण-कथाओं के अतिरिक्त अन्य कोई भी संसारी बातें न सुननी चाहिये । सम्पूर्ण जीवन श्रीकृष्णमय ही हो जाना चाहिये । खाते कृष्ण, पीते कृष्ण, चलते कृष्ण, उठते कृष्ण, बैठते कृष्ण, हँसते कृष्ण, रोते कृष्ण, इस प्रकार सदा कृष्णकृष्ण ही कहते रहना चाहिये । श्रीकृष्णनामामृतके अतिरिक्त इन्द्रियोंको किसी प्रकारके दूसरे आहारकी आवश्यकता ही नहीं है । इसीका पान करते-करते वे सदा अतृप्त ही बनी रहेंगी ।' वृद्ध वैष्णवोंके सदुपदेशोंको ये श्रद्धा के साथ श्रवण करते, उनकी वन्दना करते और उनकी पद-धूलिको मस्तकपर चढ़ाते तथा अञ्जन बनाकर आँखोंमें आँजने लगते । इनकी ऐसी भक्ति देखकर वैष्णव कहने लगते - 'कौन कहता है, निमाई पण्डित पागल हो गया है, ये तो श्रीकृष्ण प्रेममें मतवाले बने हुए हैं । इन्हें तो प्रेमोन्माद है । अहा ! धन्य है इनकी जननीको जिनकी कोखसे ऐसा सुपुत्र उत्पन्न हुआ । वैष्णवगण इस प्रकार इनकी परस्परमें प्रशंसा करने लगते ।' इधर महाप्रभुकी ऐसी विचित्र दशा देखकर शचीमाता मन-ही-मन बड़ी दुखी होतीं। वह दीन होकर भगवान से प्रार्थना करती - 'प्रभो ! इस विधवाके एकमात्र आश्रयको अपनी कृपाका अधिकारी बनाओ । नाथ ! इस सदसठ वर्षकी अनाथिनी दुखियाकी दीन-हीन दशापर ध्यान दो । पति परलोकवासी बन चुके, ज्येष्ठ पुत्र बिलखती छोड़कर न जाने कहाँ चला गया । अब आगे-पीछे यही मेरा एकमात्र सहारा है। इस अन्धी वृद्धाका यह निमाई ही एकमात्र लकुटी है । इस लकुटीके ही सहारे यह संसारमें चल-फिर सकती है । हे अशरण-शरण ! इसे रोगमुक्त कीजिये, इसे सुन्दर स्वास्थ्य प्रदान कीजिये ।। भोलीभाली माता सभीके सामने अपना दुखड़ा रोतीं । रोते रोते कहने लगतीं - 'न जाने निमाईको क्या हो गया है, वह कभी तो रोता है, कभी हँसता है, कभी गाता है, कभी नाचता है, कभी रोते-रोते मूर्छित होकर गिर पड़ता है, कभी जोरोंसे दौड़ने लगता है और कभी किसी पेड़पर चढ़ जाता है।' स्त्रियाँ भाँति-भाँतिकी बातें कहतीं । कोई कहती - 'अम्माजी ! तुम भी चड़ी भोली हो, इसमें पूछना ही क्या है, वही पुराना वायुरोग है । समय पाकर उभर आया है। किसी अच्छे वैद्यसे इसका इलाज कराइये ।' कोई कहती - 'वायु रोग बड़ा भयकर होता है, तुम निमाईके दोनों पैरोंको बाँधकर उसे कोठरीमें बन्द करके रखा करो, खानेके लिये हरे नारियलका जल दिया करो । इससे धीरेधीरे वायुरोग दूर हो जायगा ।' कोई-कोई सलाह देतीं'शिवातैलका सिरमें मर्दन कराओ, सत्र ठीक हो जायगा । भगवान् सब भला ही करेंगे । वे ही हम सब लोगोंकी एकमात्र शरण हैं ।' बेचारी शचीमाता सबकी बातें सुनतीं और सुनकर उदासभावसे चुप हो जातीं । इकलौते पुत्रके पैर बाँधकर उसे कोठरीमें बन्द कर देनेकी उसकी हिम्मत न पड़ती। बेचारी एक तो पुत्रके दुःखसे दुखी थी, दूसरा उसे विष्णुप्रियाका दुख था । पतिकी ऐसी दशा देखकर विष्णुप्रिया सदा चिन्तित ही बनी रहतीं । उन्हें अन्न-जल कुछ भी अच्छा नहीं लगता। उदासीन-भावसे सदा पतिके ही सम्बन्धमें सोचती रहतीं। शचीमाताके बहुत अधिक आग्रह करनेपर पतिके उच्छिष्ट अन्नमेंसे दो-चार ग्रास खा लेतीं, नहीं तो सदा वैसे ही बैठी रहतीं। इससे शचीमाताका दुख दुगुना हो गया था। उनकी अवस्था सदसठ वर्षकी थी । वृद्धावस्थाके कारण इतना दुःख उनके लिये असह्य था । किन्तु नीलाम्बर चक्रवर्तीकी पुत्रीको जगन्नाथ मिश्र - जैसे पण्डितकी धर्मपत्नीको तथा विश्वरूप और विश्वम्भर-जैसे महापुरुपोंकी माताके लिये ये सभी दुःख स्वाभाविक ही थे, वे ही इन दुःखोंका सहन करने - में भी समर्थ हो सकती थीं, साधारण स्त्रियोंका काम नहीं था, कि वे इतने भारी-भारी दुःखोंको सहन कर सकें । • महाप्रभुकी नूतनावस्थाकी नवद्वीपभरमें चर्चा होने लगी । जितने मुख थे उतने ही प्रकारको वातें भी होती थीं। जिसके मनमें जो आता वह उसी प्रकारकी बातें कहता । बहुत से तो कहते ---- 'ऐसा पागलपन तो हमने कभी नहीं देखा ।' बहुत-से कहते'सचमुचमें भाव तो विचित्र है कुछ समझमें नहीं आता, असली बात क्या है । चेष्टा तो पागलोंकी-सी जान नहीं पड़ती। चेहरेकी कान्ति अधिकाधिक दिव्य होती जाती है। उनके दर्शनमात्रसे ही हृदयमें हिलोरें-सी मारने लगती हैं, अन्तःकरण उमड़ने लगता है । न जाने उनकी आकृतिमें क्या जादू भरा पड़ा है । पागलोंकी भी कहीं ऐसी दशा होती है ?? कोई-कोई इन बातोंका खण्डन करते हुए कहने लगते - 'कुछ भी क्यों न हो, है तो यह मस्तिष्कका ही विकार । किसी प्रकारकी हो, यह वातव्याधिके सिवाय और कुछ नहीं है ।' हम पहिले ही बता चुके हैं, कि श्रीवास पण्डित प्रभुके पूज्य पिताजीके परम स्नेही और सखा थे, उनकी पत्नी मालती देवीसे शचीमाताका सखीभाव था, वे दोनों ही प्रभुको पुत्रकी भाँति प्रेम करते थे । श्रीवास पण्डितको इस बातका हार्दिक दुःख बना रहता था, कि निमाई पण्डित-जैसे समझदार और विद्वान् पुरुष भगवत्-भक्तिसे उदासीन ही बने हुए हैं, उनके मनमें सदा यही बात बनी रहती कि निमाई पण्डित कहीं वैष्णव बन जाय तो चैष्णव-धर्मका बेड़ा पार ही हो जाय। फिर वैष्णवोंकी आजकी भाँति दुर्गति कभी न हो । प्रभुके सम्बन्धमें लोगोंके मुखोंसे भाँति-भाँतिकी बातें सुनकर श्रीवास पण्डितके मनमें परम कुतूहल. हुआ, वे आनन्द और दुःखके बीचमें पड़कर भाँति-भाँतिकी वार्ते सोचने लगे । कभी तो सोचते - 'सम्भव है, वायुरोग ही उभट्ट आया हो, इस शरीरका पता ही क्या है ? शास्त्रों में इसे अनित्य और आगमापायी बताया है, रोगोंका तो यह घर ही है ।' फिर सोचते - 'लोगोंके मुखोंसे जो मैं लक्षण सुन रहा हूँ, वैसे तो भगवत् - भक्तों में ही होते हैं, मेरा हृदय भी भीतर ही भीतर किसी अज्ञात सुखका-सा अनुभव कर रहा है, कुछ भी हो, चलकर उनकी दशा देखनी चाहिये ।' यह सोचकर वे प्रभुकी दशा देखनेके निमित्त अपने घरसे चल दिये । महाप्रभु उस समय श्रीतुलसीजीमें जल देकर उनकी प्रदक्षिणा कर रहे थे। पिताके समान पूजनीय श्रीवास पण्डितको देखकर प्रभु उनकी ओर दौड़े और प्रेमके साथ उनके गलेसे लिपट गये । श्रीवासने प्रभुके अंगोंका स्पर्श किया । प्रभुके अंगों के स्पर्शमात्रसे उनके शरीरमें बिजली-सी दौड़ गयी । उनके सम्पूर्ण शरीरमें रोमाञ्च हो गया । वे प्रेममें विभोर होकर एकटक प्रभुके मनोहर मुखकी ही ओर देखते रहे। प्रभुने उन्हें आदरसे ले जाकर भीतर बिठाया और उनकी गोदी में अपना सिर रखकर वे फूट-फूटकर रोने लगे । शचीमाता भी श्रीवास पण्डितको देखकर वहाँ आ गयीं और रो-रोकर प्रभुकी व्याधिकी बातें सुनाने लगीं । पुत्रस्नेहके कारण उनका गला भरा हुआ था, वे ठीक-ठीक बातें नहीं कह सकती थीं। जैसे-तैसे श्रीवास पण्डितको माताने सभी बातें सुनायी। सब बातें सुनकर भावावेशमें श्रीवास पण्डितने कहा - 'जो इसे वायुरोग बताते हैं, वे स्वयं वायुरोगसे पीड़ित हैं। उन्हें क्या पता कि यह ऐसा रोग है जिसके लिये शिव-सनकादि बड़े-बड़े योगीजन तरसते रहते हैं । शचीदेवी ! तुम बड़भागिनी हो, जो तुम्हारे ऐसा भगवत्-भक्त पुत्र उत्पन्न हुआ। ये सब तो पूर्ण भक्तिके चिह्न हैं।' श्रीवास पण्डितकी ऐसी बातें सुनकर माताको कुछ-कुछ सन्तोष हुआ । अधीर - भावसे प्रभुने श्रीवास पण्डितसे कहा'आज आपके दर्शनसे मुझे परम शान्ति हुई । सभी लोग मुझे वायुरोग ही बताते थे । मैं भी इसे वायुरोग ही समझता था और मेरे कारण विष्णुप्रिया तथा माताको जो दुःख होता था, उसके कारण मेरा हृदय फटा-सा जाता था । यदि आज आप यहाँ आकर मुझे इसप्रकार आश्वासन न देते तो मैं सचमुच ही श्री श्रीचैतन्य चरितावलो २ गंगाजीनें डूत्रकर अपने प्राणोंका परित्याग कर देता । लोग मेरे सम्बन्ध में भाँति-भाँतिकी बातें करते हैं ।। श्रीवास पण्डितने कहा - 'मेरा हृदय बार-बार कह रहा है, आपके द्वारा संसारका बड़ा भारी उद्धार होगा। आप ही भक्तोंके एकमात्र आश्रय और आराध्य बनेंगे। आपकी इस अद्वितीय और अलौकिक मादकताको देखकर तो मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है, कि अखिल-कोटि-ब्रह्माण्डनायक अनादि पुरुष श्रीहरि ही अवनितल पर अवतीर्ण होकर अविद्या और अविचारका विनाश करते हुए भगवन्नामका प्रचार करेंगे। मुझे प्रतीत हो रहा है, कि सम्भवतया प्रभु इसी शरीरद्वारा उस शुभकार्यको करावें ।" प्रभुने अधीरता के साथ कहा- 'मैं तो आपके पुत्रके समान । वैष्णवों के चरणों में मेरी अनुरक्ति हो, ऐसा आशीर्वाद दीजिये । श्रीकृष्ण कीर्तन के अतिरिक्त कोई भी कार्य मुझे अच्छा ही न लगे यही मेरी अभिलाषा है, सदा प्रभु-प्रेममें विकल होकर मैं रोया ही करूँ, यही मेरी हार्दिक इच्छा है ।" श्रीवास पण्डितने कहा - 'आप ही ऐसा आशीर्वाद दें, जिससे इस प्रकारका थोड़ा-बहुत पागलपन हमें भी प्राप्त हो सके । हम भी आपकी भाँति प्रेममें पागल हुए लोक बाह्य बनकर उन्मत्तोंकी भाँति नृत्य करने लगें । इस प्रकार बहुत देरतक इन दोनों ही महापुरुषों में विशुद्ध अन्तःकरणकी बातें होती रहीं । अन्तमें प्रभुकी अनुमति लेकर श्रीवास पण्डित अपने घरको चले आये । चार्य और उनका सन्देह अर्चयित्वा तु गोविन्दं तदीयान्नार्चयेत्तु यः । न स भागवतो ज्ञेयः केवलं दाम्मिकः स्मृतः ॥ ( तस्मात्सर्वप्रयत्न न वैष्णवान्पूजयेत्सदा ) * ( विष्णुपुराण) भगवान् तो प्राणीमात्रके हृदय में विराजमान हैं । समानरूपसे संसारके अणु परमाणु में व्यास हैं, किन्तु पात्रभेदके कारण उनकी उपलब्धि भिन्न-भिन्न प्रकारसे होती है । भगवान् निशानाथकी किरणें समानरूपसे सभी वस्तुओंपर एक-सी ही पड़ती हैं। पत्थर, मिट्टी, घड़ा, वस्त्रपर भी वे ही किरणें पड़ती हैं और शीशा तथा चन्द्रकान्तमणिपर भी उन्हीं किरणोंका प्रभाव पड़ता है। मिट्टी तथा पत्थरमें निशानाथका प्रभाव प्रकट नहीं होता है, वहाँ घोर तमोगुणके कारण अव्यक्त रूपसे ही बना रहता है, किन्तु स्वच्छ और निर्मल चन्द्रकान्तमणिपर $ जो भगवान्की पूजा तो करता है, किन्तु भगवत्-भक्त वैष्णवकी पूजा नहीं करता, वह यथार्थ में भक्त नहीं है, उसे तो दाम्भिक ही समझना चाहिये । भगवान् तो भक्तकी ही पूजासे अत्यन्त सन्तुष्ट होते हैं, इसलिये सर्व प्रयत्वसे वैष्णवोंकी ही पूजा करनी चाहिये । उनकी कृपाकी तनिक-सी किरण पड़ते ही उसकी विचित्र दशा हो जाती है । उन लोकसुखकारी भगवान् निशानाथकी कृपाकोर पाते ही उसका हृदय पिघलने लगता है और वह द्रवीभूत होकर बहने लगता है। इस कारण चन्द्रदेव उसके प्रति अधिकाधिक स्नेह करने लगते हैं । इसी कारण उसका नाम ही चन्द्रकान्तमणि पड़ गया । उसका चन्द्रमाके साथ नित्यका शाश्वत सम्बन्ध हो गया। वह निशानाथसे भिन्न नहीं है । निशानाथके गुणोंका उसमें समावेश हो जाता है । इसी प्रकार भक्तोंके हृदयमें भगवान्की कृपा - किरण पड़ते ही वह पिघलने लगता है । चन्द्रकान्तमणि तो चाहे, चन्द्रमाकी किरणोंसे बनी भी रहे, किन्तु भक्तोंके हृदयका फिर अस्तित्व नहीं रहता, वह कृपा-किरण के पड़ते ही पिघल-पिघलकर प्रभुके प्रेम-पीयूषार्णवमें जाकर तदाकार हो जाता है । यही भक्तोंकी विशेषता है । तभी तो गोस्वामी तुलसीदासजीने यहाँतक कह डाला है - मोरे मन प्रभु अस विश्वासा। राम तें अधिक राम कर दासा ॥ भगवत्-भक्तोंकी महिमा ही ऐसी है, भक्तोंके समझनेके लिये भी प्रभुकी कृपाकी ही आवश्यकता है । जिसपर भगवान्की कृपा नहीं, वह भक्तोंकी महिमाको भला समझ ही क्या सकता है । जिसके हृदयमें उस रसराजके रस - सुधामयी एक बिन्दुका भी प्रवेश नहीं हुआ, जिसमें उसके ग्रहण करनेकी किश्चिन्मात्र भी शक्ति नहीं हुई, वह रसिकताके मर्मको समझ ही कैसे सकता है ? इसीलिये रसिक-शिरोमणि भगवतरसिकजी कहते हैं'भगवत- रसिक' रसिककी बातें रसिक बिना कोउ समुझि सके ना । महाप्रभुके नवानुरागकी चर्चा नदियाके सभी स्थानों में भाँति-भाँतिसे हो रही थी, उस समय सभी वैष्णव श्री अद्वैताचार्य - जीके यहाँ एकत्रित हुआ करते थे । अद्वैताचार्यके स्थानको चैष्णवोंका अखाड़ा ही कहना ठीक है। वहाँपर सभी नामीनामी वैष्णवरूपी पहलवान एकत्रित होकर भक्तितत्त्वरूपी युद्धका अभ्यास किया करते थे। प्रभुकी प्राप्तिके लिये भाँति-भाँतिके दाव-पेचोंकी उस अखाड़े में आलोचना तथा प्रत्यालोचना हुआ करती थी और सदा इस बातपर विचार होता कि कदाचाररूपी अवल शत्रु किसके द्वारा पछाड़ा जा सकता है ? वैष्णव अपने बलका विचार करते और अपनी ऐसी दुर्दशापर आँसू भी बहाते । महाप्रभुके नूतन भावकी बातोंपर यहाँ भी वाद-विवाद होने लगे । अधिकांश वैष्णव इसी पक्षमें थे कि निमाई पण्डितको भक्तिका ही आवेश है, उनके हृदयमें प्रेमका पूर्णरूपसे प्रकाश हो रहा है। उनकी सभी चेष्टाएँ अलौकिक हैं, उनके मुखके तेजको देखकर मालूम पड़ता है कि वे प्रेमके ही उन्माद - में उन्मादी बने हुए हैं, दूसरा कोई भी कारण नहीं है, किन्तु कुछ भक्त इसके विपक्ष में थे। उनका कथन था, कि निमाई पण्डितकी भला, एक साथ ऐसी दशा किस प्रकार हो सकती है ? कलतक तो वे देवी देवता और भक्त वैष्णवोंकी खिल्लियाँ उड़ाते थे, सहसा उनमें इस प्रकारके परिवर्तनका होना असम्भव ही है । जरूर उन्हें वही पुराना वायुरोग फिरसे हो गया है । उनकी सभी चेष्टाएँ पागलोंकी-सी ही हैं । उन सबकी बातें सुनकर श्रीमान् अद्वैताचार्यजीने सत्रको सम्बोधित करते हुए गम्भीरताके साथ कहा - 'भाई ! आप लोग जिन निमाई पण्डितके सम्बन्ध में बातें कर रहे हो, उन्हीं के सम्बन्ध में मेरा भी एक निजी अनुभव सुन लो । तुम सत्र लोगोंको यह बात तो विदित ही है कि मैं भगवान्को प्रकट करने के निमित्त नित्य गंगा-जलसे और तुलसीसे श्रीकृष्णका पूजन किया करता हूँ । गौतमीय तन्त्रके इस वाक्यपर मुझे पूर्ण विश्वास है - तुलसीदलमात्रेण जलस्य चुलुकेन वा । विक्रोणीते स्वमात्मानं भक्तभ्यो भक्तवत्सलः ॥ अर्थात् भगवान् ऐसे दयालु हैं कि वे भक्तिसे दिये हुए एक चुल्लू जल तथा एक तुलसीपत्रके द्वारा ही अपनी आत्माको भक्तोंके लिये दे देते हैं । इसी वाक्यपर विश्वास करके मैं तुम लोगोंको बार-बार आश्वासन दिया करता था । कल श्रीमद्भगवद्गीताके एक श्लोकका अर्थ मेरी समझमें ही नहीं आया । इसी चिन्तामें रात्रि में बिना भोजन किये ही सो गया था। स्वप्नमें क्या देखता हूँ, कि एक गौर वर्णके तेजस्वी महापुरुष मेरे समीप आये और मुझसे कहने लगे - 'अद्वैत । जल्दीसे उठ, जिस श्लोकमें तुझे शङ्का थी, उसका अर्थ इस प्रकार है । अब तेरी मनोकामना पूर्ण हुई । जिस इच्छासे तू निरन्तर गंगा जल और तुलसीसे मेरा पूजन करता था, तेरी वह इच्छा अब सफल हो गयी । हम अब शीघ्र ही प्रकाशित हो जायेंगे । अब तुम्हें भक्तोंको अधिक दिन आश्वासन न देना होगा । अब हम थोड़े ही दिनोंमें नाम संकीर्तन आरम्भ कर देंगे। जिसकी घनघोर तुमुल ध्वनिसे दिशा - विदिशाएँ प्रतिध्वनित हो उठेंगी ।" इतना कहनेपर उन महापुरुषने अपना असली स्वरूप दिखाया। वे और कोई नहीं थे, शचीनन्दन विश्वम्भर ही ये बातें मुझसे कह रहे थे । जब इनके अग्रज विश्वरूप मेरी पाठशाला में पढ़ा करते थे, तब ये उन्हें बुलानेके निमित्त मेरे यहाँ कभी-कभी आया करते थे, इन्हें देखते ही मेरा मन हठात् इनकी ओर आकर्षित होता था, तभी मैं समझता था, कि मेरी मनोकामना इन्हींके द्वारा पूर्ण होगी। आज स्वप्नमें उन्हें देखकर तो यह बात स्पष्ट ही हो गयी । इतना कहते-कहते वृद्ध आचार्यका गला भर आया । वे फूट-फूटकर बालकोंकी भाँति रुदन करने लगे । भगवान्की भक्त-वत्सलताका स्मरण करके वे हिचकियाँ भर-भरकर रो रहे थे, इनकी ऐसी दशा देखकर अन्य वैष्णवोंकी आँखोंमेंसे भी आँसू निकलने लगे । सभीका हृदय प्रेमसे भर आया । सभी वैष्णवोंके इस भावी उत्कर्षका स्मरण करके आनन्द-सागरमें गोता लगाने लगे । इस प्रकार बहुत सी बातें होनेके अनन्तर सभी वैष्णव अपने-अपने घरोंको चले गये । इधर महाप्रभुकी दशा अब और भी अधिक विचित्र होने लगी। उन्हें अब श्रीकृष्ण-कथा और वैष्णवोंके सत्सङ्गके अतिरिक्त दूसरा विषय रुचिकर ही प्रतीत नहीं होता था, वे सदा गदाधर या अन्य किसी भक्तके साथ भगवत्- चर्चा ही करते रहते थे । एक दिन प्रभुने गदाधर पण्डितसे कहा - 'गदाधर । आचार्य ! अद्वैत परम भागवत वैष्णव हैं, वे ही नवद्वीपके भक्त वैष्णवोंके शिरोमणि और आश्रयदाता हैं, आज उनके यहाँ चलकर उनकी पद-रजसे अपनेको पावन बनाना चाहिये ।' प्रभुकी ऐसी इच्छा जानकर गदाधर उन्हें साथ लेकर अद्वैताचार्यके घरपर पहुँचे । उस समय सत्तर वर्षकी अवस्थावाले वृद्ध आचार्य बड़ी श्रद्धाभक्तिके साथ तुलसी पूजन कर रहे थे । आचार्य के सिरके सभी बाल श्वेत हो गये थे। उनके तेजोमय मुखमण्डलपर एक प्रकारकी अपूर्व आभा विराजमान थी, वे अपने सिकुड़े हुए मुखसे शुद्धता के साथ गम्भीर खरमें स्तोत्रपाठ कर रहे थे। मुखसे भगवान्की स्तुतिके मधुर श्लोक निकल रहे थे और आँखोंसे अश्रुओंकी धारा बह रही थी । उन परमभागवत. वृद्ध वैष्णवके ऐसे अपूर्व भक्तिभावको देखकर प्रभु प्रेममें गद्गद हो गये । उन्हें आवावेशमें शरीरकी कुछ भी सुध-बुध न रही। वे मूर्छा खाकर पृथ्वीपर वेहोश होकर गिर पड़े। अद्वैताचार्यने जब अपने सामने अपने इष्टदेवको मूर्छित-दशामें पड़े हुए देखा, तब तो उनके आनन्दकी सीमा न रही। सामने रखी हुई पूजनकी थालीको उठाकर उन्होंने प्रभुके कोमल पादपनोंकी अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य और पत्रपुप्पोंसे विधिवत् पूजा की। उन इतने भारी ज्ञानी वृद्ध महापुरुषको एक बालकके पैरोंकी पूजा करते देख आश्चर्यमें चकित होकर गदाधरने उनसे कहा-'आचार्य ! आप यह क्या अनर्थ कर रहे हैं ? इतने भारी ज्ञानी, मानी और चयोवृद्ध पण्डित होकर आप एक बच्चेके पैरोंकी पूजा करके उसके ऊपर पाप चढ़ा रहे हैं।' गदाधरकी ऐसी बात सुनकर हँसते हुए आचार्य अद्वैतने उत्तर दिया - 'गदाधर ! तुम थोड़े दिनोंके बाद इस वालकका महत्व समझने लगोगे । सभी वैष्णव इनके चरणोंकी पूजा करके अपनेको कृतकृत्य समझा करेंगे। अभी तुम मेरे इस कार्यको देखकर आश्चर्य करते हो । कालान्तर में तुम्हारा यह भ्रम स्वतः ही दूर हो जायगा ।' इसी बीच प्रभुको कुछ कुछ बाह्यज्ञान हुआ । चैतन्यता प्राप्त होते ही उन्होंने आचार्यके चरण पकड़ लिये और वे रोतेरोते कहने लगे - 'प्रभो ! अब हमारा उद्धार करो। हमने अपना बहुत सा समय व्यर्थकी बकवादमें ही बरबाद किया । अब तो हमें अपने चरणोंकी शरण प्रदान कीजिये । अब तो हमें प्रेमका थोड़ा-बहुत तत्त्व समझाइये । हम आपकी शरणमें आये हैं, आप ही हमारी रक्षा कर सकते हैं । प्रभुकी इस प्रकारकी दैन्ययुक्त प्रार्थनाको सुनकर आचार्य मौचक्के-से रह गये और कहने लगे--'प्रभो ! अब मेरे सामने अपनेको बहुत न छिपाइये । इतने दिनतक तो छिपे-छिपे रहे, अब और कबतक छिपे ही रहनेकी इच्छा है ? अब तो आपके प्रकाशमें आनेका समय आ गया है ।' प्रभुने दीनताके साथ कहा- 'आप ही हमारे माता-पिता तथा गुरु हैं। आपका जब अनुग्रह होगा, तभी हम श्रीकृष्णप्रेम प्राप्त कर सकेंगे । आप ऐसा आशीर्वाद दीजिये, कि हम वैष्णवोंके सच्चे सेवक वन सकें ।' इस प्रकार बहुत देरतक परस्परमें दोनों ओरसे दैन्यतायुक्त बातें होती रहीं । अन्तमें प्रभु गदाधरके साथ अपने घरको चले गये । इधर अद्वैताचार्यने सोचा - 'ये मुझे छलना चाहते हैं, यदि सचमुचमें मेरा स्वप्न सत्य होगा और ये वे ही रात्रिवाले महापुरुष होंगे तो संकीर्तनके समय मुझे खतः ही अपने पास बुला लेंगे । अब मेरा नवद्वीपमें रहना ठीक नहीं।' यह सोचकर वे नवद्वीपको छोड़कर शान्तिपुरके अपने घरमें जाकर रहने लगे। चेतोदर्पणमार्जनं भवमहादावाग्नि निर्वापणं श्रेयः कैरवचन्द्रिका वितरणं विद्यावधूजीवनम् । आनन्दाम्बुधिवर्द्धनं प्रतिपदं पूर्णामृतास्वादनं सर्वात्मस्त्रपनं परं विजयते श्रीकृष्ण सङ्कीर्तनम् ॥ ( पद्यावळी अं० १० 19 ) सम्पूर्ण संसार एक अज्ञात आकर्षणके अधीन होकर ही सब व्यवहार कर रहा है । अग्नि सभीको गरम प्रतीत होती है । जल सभीको शीतल ही जान पड़ता है। सर्दी-गरमी पड़नेपर उसके सुख-दुःखका अनुभव जीवमात्रको होता है। यह बात अवश्य है, कि स्थिति-भेदसे उसके अनुभवमें न्यूनाधिक्य-भाव हो जाय । किसी-न-किसी रूपमें अनुभव तो सब करते ही हैं। ● जो श्रीकृष्ण सङ्कीर्तन चित्तरूपी दर्पणका मार्जन करनेवाला है, भवरूपी महादावाग्निका शमन करनेवाला है, जीवोंके मङ्गलरूपी कैरवचन्द्रिकाका वितरण करनेवाला है, विद्यारूपी वधूका जीवन है, आनन्दरूपी सागरका वर्द्धन करनेवाला है। प्रत्येक पदंपर पूर्णामृतको आस्वादन करानेवाला है और जो सर्व प्रकारसे शीतलस्वरूप है उसकी विशेषरूपसे जय हो । इस जीवका आदिउत्पत्ति स्थान आनन्द ही है । आनन्दका पुत्र होनेके कारण यह सदा आनन्दकी ही खोज करता रहा है। 'मैं सदा आनन्दमें ही बना रहूँ' यह इसकी स्वाभाविक इच्छा होती है, होनी भी चाहिये । कारण, कि जनकके गुण जन्यमें जरूर ही आते हैं । इसलिये आनन्दसे ही उत्पन्न होनेके कारण यह आनन्दमें ही रहना भी चाहता है और अन्तमें आनन्दमें ही मिल भी जाता है । जलका एक बिन्दु समुद्रसे पृथक् होता है, पृथक् होकर चाहे वह अनेकों स्थानमें भ्रमण कर आवे, किन्तु अन्तमें सर्वत्र घूमकर उसे समुद्रमें ही आना पड़ेगा। समुद्रके अतिरिक्त उसकी दूसरी गति ही नहीं। भाप बनके वह बादलोंमें जायगा । बादलोंसे वर्षा बनकर पृथ्वीपर बरसेगा । पृथ्वी से वह कर तालाबमें जायगा। तालाबसे छोटी नदीमें पहुँचेगा, उसमें से फिर बड़ी नदीमें, इसी प्रकार महानदके प्रवाहके साथ मिलकर वह समुद्र में ही पहुँच जायगा । कभी-कभी क्षुद्र तालाबके संसर्गसे उसमें दुर्गन्धि-सी भी प्रतीत होने लगेगी, किन्तु चौमासेकी महा बाढ़ में वह सब दुर्गन्धि साफ हो जायगी और वह भारी वेगके साथ अपने निर्दिष्ट स्थानपर पहुँच जायगा । मनन करनेवाले प्राणियोंका मन एक-सा ही होता है । सर्वत्र उसकी गति एक ही भाँतिसे सञ्चालन करती है । सम्पूर्ण शरीरमें चित्तकी वृत्तियाँ किसी एक निर्धारित नियमके ही साथ कार्य करती हैं । जीवका मुख्य लक्ष्य है, अपने प्रियतमके साथ
बार-बार मूर्छित होकर गिर पड़ते थे । रत्नगर्भको कुछ भी होश नहीं था, वे वेसुध होकर इलोकका पाठ करते और बीच-बीचमें जोरोंसे रुदन भी करने लगते । जैसे-तैसे गदाधर पण्डितने पकड़कर रत्नगर्भको इलोक पढ़नेसे शान्त किया । तब कहीं जाकर प्रभुको कुछ-कुछ बाह्य ज्ञान हुआ। कुछ होश होनेपर सभी मिलकर गंगा स्नान करने गये और फिर सभी प्रेममें छके हुए-से अपने-अपने घरोंको चले गये । इस प्रकार प्रभुकी सर्वप्रथम कृपा-किरणके अधिकारी रत्नगर्भाचार्य ही हुए। उन्हें ही सर्वप्रथम प्रभुकी असीम अनुकम्पाका आदि-अधिकारी समझना चाहिये । तृणादपि सुनोचेन तरोरपि सहिष्णुना । अमानिना मानदेन कीर्तनीयः सदा हरिः ॥ भक्त-गण दास्य, सख्य, वात्सल्य, शान्त और मधुर इन पाँचों भावोंके द्वारा अपने प्रियतम की उपासना करते हैं। उपासनामें ये ही पाँच भाव मुख्य समझे गये हैं, किन्तु इन पाँचोंमें भी दास्य-भाव ही सर्वश्रेष्ट और सर्वप्रधान है। या यों कह लीजिये कि दास्यभाव ही इन पाँचों भावोंका मुख्य प्राण है । दास्यभावके बिना न तो सख्य ही हो सकता है और न वात्सल्य, शान्त तथा मधुर ही । कोई भी भाव क्यों न हो, दास्यभाव उसमें अव्यक्तरूपसे जरूर छिपा रहेगा । दास्यके बिना प्रेम हो ही छ अपने आपको तृणसे भी नीचा समझना चाहिये तथा तरुले भी अधिक सहनशील बनना चाहिये । स्वयं तो सदा अमानी ही बने रहना चाहिये, किन्तु दूसरोंको सदा सम्मान प्रदान करते रहना चाहिये । अपनेको ऐसा बना लेनेपर ही श्रीकृष्ण-कीर्तनके अधिकारी वन सकते हैं। क्योंकि श्रीकृष्ण-कीर्तन प्राणियोंके लिये सर्वदा कीर्तनीय वस्तु है । नहीं सकता । जो स्त्रयं दास बनना नहीं जानता वह खामी कभी वन ही नहीं सकेगा, जिसने स्वयं किसीकी उपासना तथा वन्दना नहीं की है, वह उपास्य तथा वन्दनीय हो हो नहीं सकता। तभी तो अखिल ब्रह्माण्डकोटिनायक श्रीहरि स्वयं अपने श्रीमुखसे कहते हैं 'ऋीतोऽहं तेन चार्जुन' हे अर्जुन ! भक्तोंने मुझे खरीद लिया है, मैं उनका क्रीतदास हूँ। क्योंकि वे स्वयं चराचर प्राणियोंके स्वामी हैं इसलिये स्त्रामीपनेके भावको प्रदर्शित करनेके निमित्त वे भक्त तथा ब्राह्मणोंके स्वयं दास होना स्वीकार करते हैं और उनकी पदरजको अपने मस्तकपर चढ़ानेके निमित्त सदा उनके पीछे-पीछे घूमा करते हैं । महाप्रभु अव भावावेशमें आकर भक्तोंके भावोंको प्रकट करने लगे । भक्तोंको सम्पूर्ण लोगोंके प्रति और भगवत्-भक्तोंके प्रति किस प्रकारके आचरण करने चाहिये, उनमें भागवत पुरुषोंके प्रति कितनी दीनता, कैसी नम्रता होनी चाहिये, इसकी शिक्षा देनेके निमित्त वे स्वयं आचरण करके लोगोंको दिखाने लगे। क्योंकि वे तो भक्ति-भावके प्रदर्शक भक्तशिरोमणि ही ठहरे । उनके सभी कार्य लोकमर्यादा-स्थापनके निमित्त होते थे । उन्होंने मर्यादाका उल्लंघन कहीं भी नहीं किया, यही तो प्रभुके जीवन में एक भारी विशेषता है। अध्यापकीका अन्त हो गया, बाह्यशास्त्र पढ़ना तथा पढ़ाना दोनों ही छूट गये, अब न वह पहिला-सा चाञ्चल्य है और न शास्त्रार्य तथा वाद-विवादकी उन्मादकारी धुन, अब तो इनपर दूसरी ही धुन सवार हुई है, जिस धुनमें ये सभी संसारी कामोंको ही नहीं भूल गये हैं, किन्तु अपने आपको भी विस्मृत कर बैठे हैं । इनके भाव अलौकिक हैं, इनकी बातें गूढ़ हैं, इनके चरित्र रहस्यमय हैं, भला सर्वदा स्वार्थमें ही सने रहनेवाले संसारी मनुष्य इनके भावोंको समझ ही कैसे सकते हैं । अत्र ये नित्यप्रति प्रातःकाल गङ्गा-स्नानके निमित्त जाने लगे। रास्तेमें जो भी ब्राह्मण, वैष्णव तथा वयोवृद्ध पुरुष मिलता उसे ही नम्रतापूर्वक प्रणाम करते और उसका आशीर्वाद ग्रहण करते । गङ्गाजीपर पहुँचकर ये प्रत्येक वैष्णवकी पदधूलिको अपने मस्तकपर चढ़ाते । उनकी वन्दना करते और भावावेशमें आकर कभी-कभी प्रदक्षिणा भी करने लगते । भक्तगण इन्हें भाँति-भाँतिके आशीर्वाद देते । कोई कहता - 'भगवान् करे आपको भगवान्की अनन्य भक्तिकी प्राप्ति हो ।" कोई कहता - 'आप प्रमुके परम प्रिय बनें ।' कोई कहता - 'श्रीकृष्ण तुम्हारी सभी मनोकामनाओंको पूर्ण करें ।' सबके आशीर्वादोंको सुनकर प्रभु उनके चरणोंमें लोट जाते और फूट-फूटकर रोने लगते । रोतेरोते कहते --- 'आप सभी वैष्णवोंके आशीर्वादका ही सहारा है, मुझ दीन-हीन कङ्गालपर आप सभी लोग कृपा कीजिये । भागवत पुरुष बड़े ही कोमल स्वभावके होते हैं, उनका हृदय करुणासे सदा भरा हुआ होता है, वे पर-पीड़ाको देखकर सदा दुखी हुआ करते हैं। मुझ दुखियाके दुखको भी दूर करो । मुझे श्रीकृष्णसे मिला दो, मेरी मनोकामना पूर्ण कर दो, मेरे सत्संकल्पको सफल बना दो । यही मेरी आप सभी वैष्णवों के चरणोंमें विनीत प्रार्थना है घाटपर बैठे हुए वैष्णवोंकी, प्रभु जो भी मिल जाती वही, सेवा कर देते । किसीका चन्दन ही घिस देते, किसीकी गीली धोतीको ही धो देते । किसीके जलके घड़ेको भरकर उनके घरतक पहुँचा आते। किसीके सिरमें आँवला तथा तैल ही मलने लगते । भक्तोंकी सेवा-शुश्रूपा करनेमें ये सबसे अधिक सुखका अनुभव करते । वृद्ध वैष्णव इन्हें भाँति-भाँतिके उपदेश करते । कोई कहता 'निरन्तर श्रीकृष्ण कीर्तन करते रहना ही एकमात्र सार है। तुम्हें श्रीकृष्ण ही कहना चाहिये, कृष्णके मनोहर नामका ही स्मरण करते रहना चाहिये । श्रीकृष्ण-कथाओं के अतिरिक्त अन्य कोई भी संसारी बातें न सुननी चाहिये । सम्पूर्ण जीवन श्रीकृष्णमय ही हो जाना चाहिये । खाते कृष्ण, पीते कृष्ण, चलते कृष्ण, उठते कृष्ण, बैठते कृष्ण, हँसते कृष्ण, रोते कृष्ण, इस प्रकार सदा कृष्णकृष्ण ही कहते रहना चाहिये । श्रीकृष्णनामामृतके अतिरिक्त इन्द्रियोंको किसी प्रकारके दूसरे आहारकी आवश्यकता ही नहीं है । इसीका पान करते-करते वे सदा अतृप्त ही बनी रहेंगी ।' वृद्ध वैष्णवोंके सदुपदेशोंको ये श्रद्धा के साथ श्रवण करते, उनकी वन्दना करते और उनकी पद-धूलिको मस्तकपर चढ़ाते तथा अञ्जन बनाकर आँखोंमें आँजने लगते । इनकी ऐसी भक्ति देखकर वैष्णव कहने लगते - 'कौन कहता है, निमाई पण्डित पागल हो गया है, ये तो श्रीकृष्ण प्रेममें मतवाले बने हुए हैं । इन्हें तो प्रेमोन्माद है । अहा ! धन्य है इनकी जननीको जिनकी कोखसे ऐसा सुपुत्र उत्पन्न हुआ । वैष्णवगण इस प्रकार इनकी परस्परमें प्रशंसा करने लगते ।' इधर महाप्रभुकी ऐसी विचित्र दशा देखकर शचीमाता मन-ही-मन बड़ी दुखी होतीं। वह दीन होकर भगवान से प्रार्थना करती - 'प्रभो ! इस विधवाके एकमात्र आश्रयको अपनी कृपाका अधिकारी बनाओ । नाथ ! इस सदसठ वर्षकी अनाथिनी दुखियाकी दीन-हीन दशापर ध्यान दो । पति परलोकवासी बन चुके, ज्येष्ठ पुत्र बिलखती छोड़कर न जाने कहाँ चला गया । अब आगे-पीछे यही मेरा एकमात्र सहारा है। इस अन्धी वृद्धाका यह निमाई ही एकमात्र लकुटी है । इस लकुटीके ही सहारे यह संसारमें चल-फिर सकती है । हे अशरण-शरण ! इसे रोगमुक्त कीजिये, इसे सुन्दर स्वास्थ्य प्रदान कीजिये ।। भोलीभाली माता सभीके सामने अपना दुखड़ा रोतीं । रोते रोते कहने लगतीं - 'न जाने निमाईको क्या हो गया है, वह कभी तो रोता है, कभी हँसता है, कभी गाता है, कभी नाचता है, कभी रोते-रोते मूर्छित होकर गिर पड़ता है, कभी जोरोंसे दौड़ने लगता है और कभी किसी पेड़पर चढ़ जाता है।' स्त्रियाँ भाँति-भाँतिकी बातें कहतीं । कोई कहती - 'अम्माजी ! तुम भी चड़ी भोली हो, इसमें पूछना ही क्या है, वही पुराना वायुरोग है । समय पाकर उभर आया है। किसी अच्छे वैद्यसे इसका इलाज कराइये ।' कोई कहती - 'वायु रोग बड़ा भयकर होता है, तुम निमाईके दोनों पैरोंको बाँधकर उसे कोठरीमें बन्द करके रखा करो, खानेके लिये हरे नारियलका जल दिया करो । इससे धीरेधीरे वायुरोग दूर हो जायगा ।' कोई-कोई सलाह देतीं'शिवातैलका सिरमें मर्दन कराओ, सत्र ठीक हो जायगा । भगवान् सब भला ही करेंगे । वे ही हम सब लोगोंकी एकमात्र शरण हैं ।' बेचारी शचीमाता सबकी बातें सुनतीं और सुनकर उदासभावसे चुप हो जातीं । इकलौते पुत्रके पैर बाँधकर उसे कोठरीमें बन्द कर देनेकी उसकी हिम्मत न पड़ती। बेचारी एक तो पुत्रके दुःखसे दुखी थी, दूसरा उसे विष्णुप्रियाका दुख था । पतिकी ऐसी दशा देखकर विष्णुप्रिया सदा चिन्तित ही बनी रहतीं । उन्हें अन्न-जल कुछ भी अच्छा नहीं लगता। उदासीन-भावसे सदा पतिके ही सम्बन्धमें सोचती रहतीं। शचीमाताके बहुत अधिक आग्रह करनेपर पतिके उच्छिष्ट अन्नमेंसे दो-चार ग्रास खा लेतीं, नहीं तो सदा वैसे ही बैठी रहतीं। इससे शचीमाताका दुख दुगुना हो गया था। उनकी अवस्था सदसठ वर्षकी थी । वृद्धावस्थाके कारण इतना दुःख उनके लिये असह्य था । किन्तु नीलाम्बर चक्रवर्तीकी पुत्रीको जगन्नाथ मिश्र - जैसे पण्डितकी धर्मपत्नीको तथा विश्वरूप और विश्वम्भर-जैसे महापुरुपोंकी माताके लिये ये सभी दुःख स्वाभाविक ही थे, वे ही इन दुःखोंका सहन करने - में भी समर्थ हो सकती थीं, साधारण स्त्रियोंका काम नहीं था, कि वे इतने भारी-भारी दुःखोंको सहन कर सकें । • महाप्रभुकी नूतनावस्थाकी नवद्वीपभरमें चर्चा होने लगी । जितने मुख थे उतने ही प्रकारको वातें भी होती थीं। जिसके मनमें जो आता वह उसी प्रकारकी बातें कहता । बहुत से तो कहते ---- 'ऐसा पागलपन तो हमने कभी नहीं देखा ।' बहुत-से कहते'सचमुचमें भाव तो विचित्र है कुछ समझमें नहीं आता, असली बात क्या है । चेष्टा तो पागलोंकी-सी जान नहीं पड़ती। चेहरेकी कान्ति अधिकाधिक दिव्य होती जाती है। उनके दर्शनमात्रसे ही हृदयमें हिलोरें-सी मारने लगती हैं, अन्तःकरण उमड़ने लगता है । न जाने उनकी आकृतिमें क्या जादू भरा पड़ा है । पागलोंकी भी कहीं ऐसी दशा होती है ?? कोई-कोई इन बातोंका खण्डन करते हुए कहने लगते - 'कुछ भी क्यों न हो, है तो यह मस्तिष्कका ही विकार । किसी प्रकारकी हो, यह वातव्याधिके सिवाय और कुछ नहीं है ।' हम पहिले ही बता चुके हैं, कि श्रीवास पण्डित प्रभुके पूज्य पिताजीके परम स्नेही और सखा थे, उनकी पत्नी मालती देवीसे शचीमाताका सखीभाव था, वे दोनों ही प्रभुको पुत्रकी भाँति प्रेम करते थे । श्रीवास पण्डितको इस बातका हार्दिक दुःख बना रहता था, कि निमाई पण्डित-जैसे समझदार और विद्वान् पुरुष भगवत्-भक्तिसे उदासीन ही बने हुए हैं, उनके मनमें सदा यही बात बनी रहती कि निमाई पण्डित कहीं वैष्णव बन जाय तो चैष्णव-धर्मका बेड़ा पार ही हो जाय। फिर वैष्णवोंकी आजकी भाँति दुर्गति कभी न हो । प्रभुके सम्बन्धमें लोगोंके मुखोंसे भाँति-भाँतिकी बातें सुनकर श्रीवास पण्डितके मनमें परम कुतूहल. हुआ, वे आनन्द और दुःखके बीचमें पड़कर भाँति-भाँतिकी वार्ते सोचने लगे । कभी तो सोचते - 'सम्भव है, वायुरोग ही उभट्ट आया हो, इस शरीरका पता ही क्या है ? शास्त्रों में इसे अनित्य और आगमापायी बताया है, रोगोंका तो यह घर ही है ।' फिर सोचते - 'लोगोंके मुखोंसे जो मैं लक्षण सुन रहा हूँ, वैसे तो भगवत् - भक्तों में ही होते हैं, मेरा हृदय भी भीतर ही भीतर किसी अज्ञात सुखका-सा अनुभव कर रहा है, कुछ भी हो, चलकर उनकी दशा देखनी चाहिये ।' यह सोचकर वे प्रभुकी दशा देखनेके निमित्त अपने घरसे चल दिये । महाप्रभु उस समय श्रीतुलसीजीमें जल देकर उनकी प्रदक्षिणा कर रहे थे। पिताके समान पूजनीय श्रीवास पण्डितको देखकर प्रभु उनकी ओर दौड़े और प्रेमके साथ उनके गलेसे लिपट गये । श्रीवासने प्रभुके अंगोंका स्पर्श किया । प्रभुके अंगों के स्पर्शमात्रसे उनके शरीरमें बिजली-सी दौड़ गयी । उनके सम्पूर्ण शरीरमें रोमाञ्च हो गया । वे प्रेममें विभोर होकर एकटक प्रभुके मनोहर मुखकी ही ओर देखते रहे। प्रभुने उन्हें आदरसे ले जाकर भीतर बिठाया और उनकी गोदी में अपना सिर रखकर वे फूट-फूटकर रोने लगे । शचीमाता भी श्रीवास पण्डितको देखकर वहाँ आ गयीं और रो-रोकर प्रभुकी व्याधिकी बातें सुनाने लगीं । पुत्रस्नेहके कारण उनका गला भरा हुआ था, वे ठीक-ठीक बातें नहीं कह सकती थीं। जैसे-तैसे श्रीवास पण्डितको माताने सभी बातें सुनायी। सब बातें सुनकर भावावेशमें श्रीवास पण्डितने कहा - 'जो इसे वायुरोग बताते हैं, वे स्वयं वायुरोगसे पीड़ित हैं। उन्हें क्या पता कि यह ऐसा रोग है जिसके लिये शिव-सनकादि बड़े-बड़े योगीजन तरसते रहते हैं । शचीदेवी ! तुम बड़भागिनी हो, जो तुम्हारे ऐसा भगवत्-भक्त पुत्र उत्पन्न हुआ। ये सब तो पूर्ण भक्तिके चिह्न हैं।' श्रीवास पण्डितकी ऐसी बातें सुनकर माताको कुछ-कुछ सन्तोष हुआ । अधीर - भावसे प्रभुने श्रीवास पण्डितसे कहा'आज आपके दर्शनसे मुझे परम शान्ति हुई । सभी लोग मुझे वायुरोग ही बताते थे । मैं भी इसे वायुरोग ही समझता था और मेरे कारण विष्णुप्रिया तथा माताको जो दुःख होता था, उसके कारण मेरा हृदय फटा-सा जाता था । यदि आज आप यहाँ आकर मुझे इसप्रकार आश्वासन न देते तो मैं सचमुच ही श्री श्रीचैतन्य चरितावलो दो गंगाजीनें डूत्रकर अपने प्राणोंका परित्याग कर देता । लोग मेरे सम्बन्ध में भाँति-भाँतिकी बातें करते हैं ।। श्रीवास पण्डितने कहा - 'मेरा हृदय बार-बार कह रहा है, आपके द्वारा संसारका बड़ा भारी उद्धार होगा। आप ही भक्तोंके एकमात्र आश्रय और आराध्य बनेंगे। आपकी इस अद्वितीय और अलौकिक मादकताको देखकर तो मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है, कि अखिल-कोटि-ब्रह्माण्डनायक अनादि पुरुष श्रीहरि ही अवनितल पर अवतीर्ण होकर अविद्या और अविचारका विनाश करते हुए भगवन्नामका प्रचार करेंगे। मुझे प्रतीत हो रहा है, कि सम्भवतया प्रभु इसी शरीरद्वारा उस शुभकार्यको करावें ।" प्रभुने अधीरता के साथ कहा- 'मैं तो आपके पुत्रके समान । वैष्णवों के चरणों में मेरी अनुरक्ति हो, ऐसा आशीर्वाद दीजिये । श्रीकृष्ण कीर्तन के अतिरिक्त कोई भी कार्य मुझे अच्छा ही न लगे यही मेरी अभिलाषा है, सदा प्रभु-प्रेममें विकल होकर मैं रोया ही करूँ, यही मेरी हार्दिक इच्छा है ।" श्रीवास पण्डितने कहा - 'आप ही ऐसा आशीर्वाद दें, जिससे इस प्रकारका थोड़ा-बहुत पागलपन हमें भी प्राप्त हो सके । हम भी आपकी भाँति प्रेममें पागल हुए लोक बाह्य बनकर उन्मत्तोंकी भाँति नृत्य करने लगें । इस प्रकार बहुत देरतक इन दोनों ही महापुरुषों में विशुद्ध अन्तःकरणकी बातें होती रहीं । अन्तमें प्रभुकी अनुमति लेकर श्रीवास पण्डित अपने घरको चले आये । चार्य और उनका सन्देह अर्चयित्वा तु गोविन्दं तदीयान्नार्चयेत्तु यः । न स भागवतो ज्ञेयः केवलं दाम्मिकः स्मृतः ॥ * भगवान् तो प्राणीमात्रके हृदय में विराजमान हैं । समानरूपसे संसारके अणु परमाणु में व्यास हैं, किन्तु पात्रभेदके कारण उनकी उपलब्धि भिन्न-भिन्न प्रकारसे होती है । भगवान् निशानाथकी किरणें समानरूपसे सभी वस्तुओंपर एक-सी ही पड़ती हैं। पत्थर, मिट्टी, घड़ा, वस्त्रपर भी वे ही किरणें पड़ती हैं और शीशा तथा चन्द्रकान्तमणिपर भी उन्हीं किरणोंका प्रभाव पड़ता है। मिट्टी तथा पत्थरमें निशानाथका प्रभाव प्रकट नहीं होता है, वहाँ घोर तमोगुणके कारण अव्यक्त रूपसे ही बना रहता है, किन्तु स्वच्छ और निर्मल चन्द्रकान्तमणिपर $ जो भगवान्की पूजा तो करता है, किन्तु भगवत्-भक्त वैष्णवकी पूजा नहीं करता, वह यथार्थ में भक्त नहीं है, उसे तो दाम्भिक ही समझना चाहिये । भगवान् तो भक्तकी ही पूजासे अत्यन्त सन्तुष्ट होते हैं, इसलिये सर्व प्रयत्वसे वैष्णवोंकी ही पूजा करनी चाहिये । उनकी कृपाकी तनिक-सी किरण पड़ते ही उसकी विचित्र दशा हो जाती है । उन लोकसुखकारी भगवान् निशानाथकी कृपाकोर पाते ही उसका हृदय पिघलने लगता है और वह द्रवीभूत होकर बहने लगता है। इस कारण चन्द्रदेव उसके प्रति अधिकाधिक स्नेह करने लगते हैं । इसी कारण उसका नाम ही चन्द्रकान्तमणि पड़ गया । उसका चन्द्रमाके साथ नित्यका शाश्वत सम्बन्ध हो गया। वह निशानाथसे भिन्न नहीं है । निशानाथके गुणोंका उसमें समावेश हो जाता है । इसी प्रकार भक्तोंके हृदयमें भगवान्की कृपा - किरण पड़ते ही वह पिघलने लगता है । चन्द्रकान्तमणि तो चाहे, चन्द्रमाकी किरणोंसे बनी भी रहे, किन्तु भक्तोंके हृदयका फिर अस्तित्व नहीं रहता, वह कृपा-किरण के पड़ते ही पिघल-पिघलकर प्रभुके प्रेम-पीयूषार्णवमें जाकर तदाकार हो जाता है । यही भक्तोंकी विशेषता है । तभी तो गोस्वामी तुलसीदासजीने यहाँतक कह डाला है - मोरे मन प्रभु अस विश्वासा। राम तें अधिक राम कर दासा ॥ भगवत्-भक्तोंकी महिमा ही ऐसी है, भक्तोंके समझनेके लिये भी प्रभुकी कृपाकी ही आवश्यकता है । जिसपर भगवान्की कृपा नहीं, वह भक्तोंकी महिमाको भला समझ ही क्या सकता है । जिसके हृदयमें उस रसराजके रस - सुधामयी एक बिन्दुका भी प्रवेश नहीं हुआ, जिसमें उसके ग्रहण करनेकी किश्चिन्मात्र भी शक्ति नहीं हुई, वह रसिकताके मर्मको समझ ही कैसे सकता है ? इसीलिये रसिक-शिरोमणि भगवतरसिकजी कहते हैं'भगवत- रसिक' रसिककी बातें रसिक बिना कोउ समुझि सके ना । महाप्रभुके नवानुरागकी चर्चा नदियाके सभी स्थानों में भाँति-भाँतिसे हो रही थी, उस समय सभी वैष्णव श्री अद्वैताचार्य - जीके यहाँ एकत्रित हुआ करते थे । अद्वैताचार्यके स्थानको चैष्णवोंका अखाड़ा ही कहना ठीक है। वहाँपर सभी नामीनामी वैष्णवरूपी पहलवान एकत्रित होकर भक्तितत्त्वरूपी युद्धका अभ्यास किया करते थे। प्रभुकी प्राप्तिके लिये भाँति-भाँतिके दाव-पेचोंकी उस अखाड़े में आलोचना तथा प्रत्यालोचना हुआ करती थी और सदा इस बातपर विचार होता कि कदाचाररूपी अवल शत्रु किसके द्वारा पछाड़ा जा सकता है ? वैष्णव अपने बलका विचार करते और अपनी ऐसी दुर्दशापर आँसू भी बहाते । महाप्रभुके नूतन भावकी बातोंपर यहाँ भी वाद-विवाद होने लगे । अधिकांश वैष्णव इसी पक्षमें थे कि निमाई पण्डितको भक्तिका ही आवेश है, उनके हृदयमें प्रेमका पूर्णरूपसे प्रकाश हो रहा है। उनकी सभी चेष्टाएँ अलौकिक हैं, उनके मुखके तेजको देखकर मालूम पड़ता है कि वे प्रेमके ही उन्माद - में उन्मादी बने हुए हैं, दूसरा कोई भी कारण नहीं है, किन्तु कुछ भक्त इसके विपक्ष में थे। उनका कथन था, कि निमाई पण्डितकी भला, एक साथ ऐसी दशा किस प्रकार हो सकती है ? कलतक तो वे देवी देवता और भक्त वैष्णवोंकी खिल्लियाँ उड़ाते थे, सहसा उनमें इस प्रकारके परिवर्तनका होना असम्भव ही है । जरूर उन्हें वही पुराना वायुरोग फिरसे हो गया है । उनकी सभी चेष्टाएँ पागलोंकी-सी ही हैं । उन सबकी बातें सुनकर श्रीमान् अद्वैताचार्यजीने सत्रको सम्बोधित करते हुए गम्भीरताके साथ कहा - 'भाई ! आप लोग जिन निमाई पण्डितके सम्बन्ध में बातें कर रहे हो, उन्हीं के सम्बन्ध में मेरा भी एक निजी अनुभव सुन लो । तुम सत्र लोगोंको यह बात तो विदित ही है कि मैं भगवान्को प्रकट करने के निमित्त नित्य गंगा-जलसे और तुलसीसे श्रीकृष्णका पूजन किया करता हूँ । गौतमीय तन्त्रके इस वाक्यपर मुझे पूर्ण विश्वास है - तुलसीदलमात्रेण जलस्य चुलुकेन वा । विक्रोणीते स्वमात्मानं भक्तभ्यो भक्तवत्सलः ॥ अर्थात् भगवान् ऐसे दयालु हैं कि वे भक्तिसे दिये हुए एक चुल्लू जल तथा एक तुलसीपत्रके द्वारा ही अपनी आत्माको भक्तोंके लिये दे देते हैं । इसी वाक्यपर विश्वास करके मैं तुम लोगोंको बार-बार आश्वासन दिया करता था । कल श्रीमद्भगवद्गीताके एक श्लोकका अर्थ मेरी समझमें ही नहीं आया । इसी चिन्तामें रात्रि में बिना भोजन किये ही सो गया था। स्वप्नमें क्या देखता हूँ, कि एक गौर वर्णके तेजस्वी महापुरुष मेरे समीप आये और मुझसे कहने लगे - 'अद्वैत । जल्दीसे उठ, जिस श्लोकमें तुझे शङ्का थी, उसका अर्थ इस प्रकार है । अब तेरी मनोकामना पूर्ण हुई । जिस इच्छासे तू निरन्तर गंगा जल और तुलसीसे मेरा पूजन करता था, तेरी वह इच्छा अब सफल हो गयी । हम अब शीघ्र ही प्रकाशित हो जायेंगे । अब तुम्हें भक्तोंको अधिक दिन आश्वासन न देना होगा । अब हम थोड़े ही दिनोंमें नाम संकीर्तन आरम्भ कर देंगे। जिसकी घनघोर तुमुल ध्वनिसे दिशा - विदिशाएँ प्रतिध्वनित हो उठेंगी ।" इतना कहनेपर उन महापुरुषने अपना असली स्वरूप दिखाया। वे और कोई नहीं थे, शचीनन्दन विश्वम्भर ही ये बातें मुझसे कह रहे थे । जब इनके अग्रज विश्वरूप मेरी पाठशाला में पढ़ा करते थे, तब ये उन्हें बुलानेके निमित्त मेरे यहाँ कभी-कभी आया करते थे, इन्हें देखते ही मेरा मन हठात् इनकी ओर आकर्षित होता था, तभी मैं समझता था, कि मेरी मनोकामना इन्हींके द्वारा पूर्ण होगी। आज स्वप्नमें उन्हें देखकर तो यह बात स्पष्ट ही हो गयी । इतना कहते-कहते वृद्ध आचार्यका गला भर आया । वे फूट-फूटकर बालकोंकी भाँति रुदन करने लगे । भगवान्की भक्त-वत्सलताका स्मरण करके वे हिचकियाँ भर-भरकर रो रहे थे, इनकी ऐसी दशा देखकर अन्य वैष्णवोंकी आँखोंमेंसे भी आँसू निकलने लगे । सभीका हृदय प्रेमसे भर आया । सभी वैष्णवोंके इस भावी उत्कर्षका स्मरण करके आनन्द-सागरमें गोता लगाने लगे । इस प्रकार बहुत सी बातें होनेके अनन्तर सभी वैष्णव अपने-अपने घरोंको चले गये । इधर महाप्रभुकी दशा अब और भी अधिक विचित्र होने लगी। उन्हें अब श्रीकृष्ण-कथा और वैष्णवोंके सत्सङ्गके अतिरिक्त दूसरा विषय रुचिकर ही प्रतीत नहीं होता था, वे सदा गदाधर या अन्य किसी भक्तके साथ भगवत्- चर्चा ही करते रहते थे । एक दिन प्रभुने गदाधर पण्डितसे कहा - 'गदाधर । आचार्य ! अद्वैत परम भागवत वैष्णव हैं, वे ही नवद्वीपके भक्त वैष्णवोंके शिरोमणि और आश्रयदाता हैं, आज उनके यहाँ चलकर उनकी पद-रजसे अपनेको पावन बनाना चाहिये ।' प्रभुकी ऐसी इच्छा जानकर गदाधर उन्हें साथ लेकर अद्वैताचार्यके घरपर पहुँचे । उस समय सत्तर वर्षकी अवस्थावाले वृद्ध आचार्य बड़ी श्रद्धाभक्तिके साथ तुलसी पूजन कर रहे थे । आचार्य के सिरके सभी बाल श्वेत हो गये थे। उनके तेजोमय मुखमण्डलपर एक प्रकारकी अपूर्व आभा विराजमान थी, वे अपने सिकुड़े हुए मुखसे शुद्धता के साथ गम्भीर खरमें स्तोत्रपाठ कर रहे थे। मुखसे भगवान्की स्तुतिके मधुर श्लोक निकल रहे थे और आँखोंसे अश्रुओंकी धारा बह रही थी । उन परमभागवत. वृद्ध वैष्णवके ऐसे अपूर्व भक्तिभावको देखकर प्रभु प्रेममें गद्गद हो गये । उन्हें आवावेशमें शरीरकी कुछ भी सुध-बुध न रही। वे मूर्छा खाकर पृथ्वीपर वेहोश होकर गिर पड़े। अद्वैताचार्यने जब अपने सामने अपने इष्टदेवको मूर्छित-दशामें पड़े हुए देखा, तब तो उनके आनन्दकी सीमा न रही। सामने रखी हुई पूजनकी थालीको उठाकर उन्होंने प्रभुके कोमल पादपनोंकी अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य और पत्रपुप्पोंसे विधिवत् पूजा की। उन इतने भारी ज्ञानी वृद्ध महापुरुषको एक बालकके पैरोंकी पूजा करते देख आश्चर्यमें चकित होकर गदाधरने उनसे कहा-'आचार्य ! आप यह क्या अनर्थ कर रहे हैं ? इतने भारी ज्ञानी, मानी और चयोवृद्ध पण्डित होकर आप एक बच्चेके पैरोंकी पूजा करके उसके ऊपर पाप चढ़ा रहे हैं।' गदाधरकी ऐसी बात सुनकर हँसते हुए आचार्य अद्वैतने उत्तर दिया - 'गदाधर ! तुम थोड़े दिनोंके बाद इस वालकका महत्व समझने लगोगे । सभी वैष्णव इनके चरणोंकी पूजा करके अपनेको कृतकृत्य समझा करेंगे। अभी तुम मेरे इस कार्यको देखकर आश्चर्य करते हो । कालान्तर में तुम्हारा यह भ्रम स्वतः ही दूर हो जायगा ।' इसी बीच प्रभुको कुछ कुछ बाह्यज्ञान हुआ । चैतन्यता प्राप्त होते ही उन्होंने आचार्यके चरण पकड़ लिये और वे रोतेरोते कहने लगे - 'प्रभो ! अब हमारा उद्धार करो। हमने अपना बहुत सा समय व्यर्थकी बकवादमें ही बरबाद किया । अब तो हमें अपने चरणोंकी शरण प्रदान कीजिये । अब तो हमें प्रेमका थोड़ा-बहुत तत्त्व समझाइये । हम आपकी शरणमें आये हैं, आप ही हमारी रक्षा कर सकते हैं । प्रभुकी इस प्रकारकी दैन्ययुक्त प्रार्थनाको सुनकर आचार्य मौचक्के-से रह गये और कहने लगे--'प्रभो ! अब मेरे सामने अपनेको बहुत न छिपाइये । इतने दिनतक तो छिपे-छिपे रहे, अब और कबतक छिपे ही रहनेकी इच्छा है ? अब तो आपके प्रकाशमें आनेका समय आ गया है ।' प्रभुने दीनताके साथ कहा- 'आप ही हमारे माता-पिता तथा गुरु हैं। आपका जब अनुग्रह होगा, तभी हम श्रीकृष्णप्रेम प्राप्त कर सकेंगे । आप ऐसा आशीर्वाद दीजिये, कि हम वैष्णवोंके सच्चे सेवक वन सकें ।' इस प्रकार बहुत देरतक परस्परमें दोनों ओरसे दैन्यतायुक्त बातें होती रहीं । अन्तमें प्रभु गदाधरके साथ अपने घरको चले गये । इधर अद्वैताचार्यने सोचा - 'ये मुझे छलना चाहते हैं, यदि सचमुचमें मेरा स्वप्न सत्य होगा और ये वे ही रात्रिवाले महापुरुष होंगे तो संकीर्तनके समय मुझे खतः ही अपने पास बुला लेंगे । अब मेरा नवद्वीपमें रहना ठीक नहीं।' यह सोचकर वे नवद्वीपको छोड़कर शान्तिपुरके अपने घरमें जाकर रहने लगे। चेतोदर्पणमार्जनं भवमहादावाग्नि निर्वापणं श्रेयः कैरवचन्द्रिका वितरणं विद्यावधूजीवनम् । आनन्दाम्बुधिवर्द्धनं प्रतिपदं पूर्णामृतास्वादनं सर्वात्मस्त्रपनं परं विजयते श्रीकृष्ण सङ्कीर्तनम् ॥ सम्पूर्ण संसार एक अज्ञात आकर्षणके अधीन होकर ही सब व्यवहार कर रहा है । अग्नि सभीको गरम प्रतीत होती है । जल सभीको शीतल ही जान पड़ता है। सर्दी-गरमी पड़नेपर उसके सुख-दुःखका अनुभव जीवमात्रको होता है। यह बात अवश्य है, कि स्थिति-भेदसे उसके अनुभवमें न्यूनाधिक्य-भाव हो जाय । किसी-न-किसी रूपमें अनुभव तो सब करते ही हैं। ● जो श्रीकृष्ण सङ्कीर्तन चित्तरूपी दर्पणका मार्जन करनेवाला है, भवरूपी महादावाग्निका शमन करनेवाला है, जीवोंके मङ्गलरूपी कैरवचन्द्रिकाका वितरण करनेवाला है, विद्यारूपी वधूका जीवन है, आनन्दरूपी सागरका वर्द्धन करनेवाला है। प्रत्येक पदंपर पूर्णामृतको आस्वादन करानेवाला है और जो सर्व प्रकारसे शीतलस्वरूप है उसकी विशेषरूपसे जय हो । इस जीवका आदिउत्पत्ति स्थान आनन्द ही है । आनन्दका पुत्र होनेके कारण यह सदा आनन्दकी ही खोज करता रहा है। 'मैं सदा आनन्दमें ही बना रहूँ' यह इसकी स्वाभाविक इच्छा होती है, होनी भी चाहिये । कारण, कि जनकके गुण जन्यमें जरूर ही आते हैं । इसलिये आनन्दसे ही उत्पन्न होनेके कारण यह आनन्दमें ही रहना भी चाहता है और अन्तमें आनन्दमें ही मिल भी जाता है । जलका एक बिन्दु समुद्रसे पृथक् होता है, पृथक् होकर चाहे वह अनेकों स्थानमें भ्रमण कर आवे, किन्तु अन्तमें सर्वत्र घूमकर उसे समुद्रमें ही आना पड़ेगा। समुद्रके अतिरिक्त उसकी दूसरी गति ही नहीं। भाप बनके वह बादलोंमें जायगा । बादलोंसे वर्षा बनकर पृथ्वीपर बरसेगा । पृथ्वी से वह कर तालाबमें जायगा। तालाबसे छोटी नदीमें पहुँचेगा, उसमें से फिर बड़ी नदीमें, इसी प्रकार महानदके प्रवाहके साथ मिलकर वह समुद्र में ही पहुँच जायगा । कभी-कभी क्षुद्र तालाबके संसर्गसे उसमें दुर्गन्धि-सी भी प्रतीत होने लगेगी, किन्तु चौमासेकी महा बाढ़ में वह सब दुर्गन्धि साफ हो जायगी और वह भारी वेगके साथ अपने निर्दिष्ट स्थानपर पहुँच जायगा । मनन करनेवाले प्राणियोंका मन एक-सा ही होता है । सर्वत्र उसकी गति एक ही भाँतिसे सञ्चालन करती है । सम्पूर्ण शरीरमें चित्तकी वृत्तियाँ किसी एक निर्धारित नियमके ही साथ कार्य करती हैं । जीवका मुख्य लक्ष्य है, अपने प्रियतमके साथ
2019 लोकसभा चुनाव से करीब एक साल पहले भाजपा राष्ट्र रक्षा महायज्ञ करने जा रही है। यह महायज्ञ लाल किला परिसर में होगा। इससे पहले बुधवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इंडिया गेट से जल-मिट्टी रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद महेश गिरी इस राष्ट्र रक्षा महायज्ञ के अगुवा हैं। महेश गिरी कहते हैं यज्ञ हमारे शत्रु के विनाश के लिए है। चाहे वह भीतरी शत्रु हो या बाहरी शत्रु, जो भी देश का बुरा चाह रहा है, उसका इस यज्ञ से विनाश होगा। देश भर की जनता इस यज्ञ में हिस्सा लेगी। महेश गिरी ने बताया कि इस महायज्ञ के लिए यह रथ कश्मीर, लद्दाख, डोकलाम की सरहद के साथ देश के हर प्रांत से जहां हमारे शहीदों का खून बहा वहां से मिट्टी लाएगा। महेश गिरी ने कहा कि इस बारे में ITBP से भी मदद ली जा रही है। मिट्टी के साथ ही प्रमुख तीर्थ स्थलों और चारों धाम से जल भी लाया जाएगा। पूरे देश से देशी घी भी एकत्र होगा।
दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव से करीब एक साल पहले भाजपा राष्ट्र रक्षा महायज्ञ करने जा रही है। यह महायज्ञ लाल किला परिसर में होगा। इससे पहले बुधवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इंडिया गेट से जल-मिट्टी रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद महेश गिरी इस राष्ट्र रक्षा महायज्ञ के अगुवा हैं। महेश गिरी कहते हैं यज्ञ हमारे शत्रु के विनाश के लिए है। चाहे वह भीतरी शत्रु हो या बाहरी शत्रु, जो भी देश का बुरा चाह रहा है, उसका इस यज्ञ से विनाश होगा। देश भर की जनता इस यज्ञ में हिस्सा लेगी। महेश गिरी ने बताया कि इस महायज्ञ के लिए यह रथ कश्मीर, लद्दाख, डोकलाम की सरहद के साथ देश के हर प्रांत से जहां हमारे शहीदों का खून बहा वहां से मिट्टी लाएगा। महेश गिरी ने कहा कि इस बारे में ITBP से भी मदद ली जा रही है। मिट्टी के साथ ही प्रमुख तीर्थ स्थलों और चारों धाम से जल भी लाया जाएगा। पूरे देश से देशी घी भी एकत्र होगा।
तीनों देशों ने पांच साल के बाद अपना पहला पनडुब्बी रोधी अभ्यास शुरू किया है। दक्षिण कोरियाई नौसेना के अनुसार यह एक दिवसीय त्रिपक्षीय प्रशिक्षण पनडुब्बियों से मिसाइल दागने की अपनी क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर कोरियाई खतरे के देखते हुए किया जा रहा है। सियोल, एपी। नॉर्थ कोरिया द्वारा हाल ही में पांच बैलिस्टिक मिसाइल लांच करने के जवाब में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने युद्धपोतों के साथ पांच साल के बाद अपना पहला पनडुब्बी रोधी अभ्यास शुरू किया है। दक्षिण कोरियाई नौसेना के अनुसार यह एक दिवसीय त्रिपक्षीय प्रशिक्षण पनडुब्बियों से मिसाइल दागने की अपनी क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर कोरियाई खतरे के देखते हुए किया जा रहा है। उत्तर कोरिया ने हाल ही में पांच मिसाइलें लांच की है, जिसमें से एक इसी महीने में की गई है। यह मिसाइल लांचिंग अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के दक्षिण कोरिया दौरे से पहले और बाद में किया गया था। कमला हैरिस ने इस यात्रा के दौरान दक्षिण कोरिया की रक्षा की प्रतिबद्धता जताई थी। बता दें कि अपने रक्षा उपकर्णों में इजाफा करते हुए उत्तर कोरिया कई बड़ी पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इन पनडुब्बियों के जरिए कई परीक्षण भी किए गए हैं, जिसमें परमाणु अत्याधुनिक मिसाइलों का परीक्षण भी शामिल है। यह इसलिए भी दुश्मनों के लिए खतरनाक है क्योंकि इसकी पानी के भीतर कई किलोमीटर की मानक क्षमता है और इसका पता लगाना भी शामिल है। दक्षिण कोरिया नौसेना के अनुसार शुक्रवार के अभ्यास में परमाणु शक्ति से चलने वाले विमानवाहक पोत यूएसएस रोनाल्ड रीगन के साथ-साथ अमेरिका, दक्षिण कोरियाई और जापान के विध्वंसक जहाज भी शामिल रहे।
तीनों देशों ने पांच साल के बाद अपना पहला पनडुब्बी रोधी अभ्यास शुरू किया है। दक्षिण कोरियाई नौसेना के अनुसार यह एक दिवसीय त्रिपक्षीय प्रशिक्षण पनडुब्बियों से मिसाइल दागने की अपनी क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर कोरियाई खतरे के देखते हुए किया जा रहा है। सियोल, एपी। नॉर्थ कोरिया द्वारा हाल ही में पांच बैलिस्टिक मिसाइल लांच करने के जवाब में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने युद्धपोतों के साथ पांच साल के बाद अपना पहला पनडुब्बी रोधी अभ्यास शुरू किया है। दक्षिण कोरियाई नौसेना के अनुसार यह एक दिवसीय त्रिपक्षीय प्रशिक्षण पनडुब्बियों से मिसाइल दागने की अपनी क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर कोरियाई खतरे के देखते हुए किया जा रहा है। उत्तर कोरिया ने हाल ही में पांच मिसाइलें लांच की है, जिसमें से एक इसी महीने में की गई है। यह मिसाइल लांचिंग अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के दक्षिण कोरिया दौरे से पहले और बाद में किया गया था। कमला हैरिस ने इस यात्रा के दौरान दक्षिण कोरिया की रक्षा की प्रतिबद्धता जताई थी। बता दें कि अपने रक्षा उपकर्णों में इजाफा करते हुए उत्तर कोरिया कई बड़ी पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इन पनडुब्बियों के जरिए कई परीक्षण भी किए गए हैं, जिसमें परमाणु अत्याधुनिक मिसाइलों का परीक्षण भी शामिल है। यह इसलिए भी दुश्मनों के लिए खतरनाक है क्योंकि इसकी पानी के भीतर कई किलोमीटर की मानक क्षमता है और इसका पता लगाना भी शामिल है। दक्षिण कोरिया नौसेना के अनुसार शुक्रवार के अभ्यास में परमाणु शक्ति से चलने वाले विमानवाहक पोत यूएसएस रोनाल्ड रीगन के साथ-साथ अमेरिका, दक्षिण कोरियाई और जापान के विध्वंसक जहाज भी शामिल रहे।
गुम या चोरी हुए फोन को सभी मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक करने, चोर का पता लगाने और मोबाइल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है. कम्युनिकेशन मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने मुंबई में एक वेब पोर्टल की शुरुआत की है, जिससे चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाया जा सकेगा. इसके लिए दूरसंचार विभाग ने CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) प्रोजेक्ट शुरू किया है. गुम या चोरी हुए फोन को सभी मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक करने, चोर का पता लगाने और मोबाइल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है. बता दें कि आइडेन्टिटी के लिए हर मोबाइल का एक यूनीक IMEI नंबर होता है. ये नंबर रिप्रोग्रामेबल होता है, यानी कि इसे बदला जा सकता है. फोन चुराने वाले ठग इसे रिप्रोग्राम कर देते हैं. चोर IMEI की क्लोनिंग कर देते हैं, जिसके कारण एक ही IMEI नंबर पर कई फोन इस्तेमाल किए जाते हैं. टेलिकम्युनिकेशन्स डिपार्टमेंट के मुताबिक IMEI हैंडसेट क्लोनिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं. अगर IMEI नंबर को ब्लॉक कर दिए जाए तो जिनका मोबाइल फोन चोरी हुआ है उन्हें परेशानी होती है. इस मुसीबत से बचाने के लिए CEIR प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है. - मोबाइल फोन को चोरी को कम करने के लिए गम हुए फोन को सभी मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक करना. - गम या चोरी हुए फोन का पता लगाना. - मोबाइल नेटवर्क में IMEI क्लोनिंग (डुप्लीकेट) को रोकना. - चोरी हुए मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाना. - सर्विस क्वॉलिटी को बेहतर बनाना. - कॉल ड्रॉप कम करना. अगर आपका मोबाइल फोन मिसिंग है, तो सबसे पहले पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाएं. इसके बाद हेल्पलाइन नंबर 14422 पर कॉल करें और टेलिकम्युनिकेशन्स डिपार्टमेंट को फोन की गुमशुदगी की जानकारी दें. वेरिफिकेशन किए जाने के बाद फोन को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. इसके बाद कोई भी आपके फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. वहीं अगर आपके फोन में दूसरे सिमकार्ड का इस्तेमाल किया गया तो सर्विस प्रोवाइडर नए यूजर को पहचान लेगा और इसकी जानकरी पुलिस को देगा.
गुम या चोरी हुए फोन को सभी मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक करने, चोर का पता लगाने और मोबाइल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है. कम्युनिकेशन मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने मुंबई में एक वेब पोर्टल की शुरुआत की है, जिससे चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाया जा सकेगा. इसके लिए दूरसंचार विभाग ने CEIR प्रोजेक्ट शुरू किया है. गुम या चोरी हुए फोन को सभी मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक करने, चोर का पता लगाने और मोबाइल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है. बता दें कि आइडेन्टिटी के लिए हर मोबाइल का एक यूनीक IMEI नंबर होता है. ये नंबर रिप्रोग्रामेबल होता है, यानी कि इसे बदला जा सकता है. फोन चुराने वाले ठग इसे रिप्रोग्राम कर देते हैं. चोर IMEI की क्लोनिंग कर देते हैं, जिसके कारण एक ही IMEI नंबर पर कई फोन इस्तेमाल किए जाते हैं. टेलिकम्युनिकेशन्स डिपार्टमेंट के मुताबिक IMEI हैंडसेट क्लोनिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं. अगर IMEI नंबर को ब्लॉक कर दिए जाए तो जिनका मोबाइल फोन चोरी हुआ है उन्हें परेशानी होती है. इस मुसीबत से बचाने के लिए CEIR प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है. - मोबाइल फोन को चोरी को कम करने के लिए गम हुए फोन को सभी मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक करना. - गम या चोरी हुए फोन का पता लगाना. - मोबाइल नेटवर्क में IMEI क्लोनिंग को रोकना. - चोरी हुए मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाना. - सर्विस क्वॉलिटी को बेहतर बनाना. - कॉल ड्रॉप कम करना. अगर आपका मोबाइल फोन मिसिंग है, तो सबसे पहले पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाएं. इसके बाद हेल्पलाइन नंबर चौदह हज़ार चार सौ बाईस पर कॉल करें और टेलिकम्युनिकेशन्स डिपार्टमेंट को फोन की गुमशुदगी की जानकारी दें. वेरिफिकेशन किए जाने के बाद फोन को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. इसके बाद कोई भी आपके फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. वहीं अगर आपके फोन में दूसरे सिमकार्ड का इस्तेमाल किया गया तो सर्विस प्रोवाइडर नए यूजर को पहचान लेगा और इसकी जानकरी पुलिस को देगा.
हत्या में शामिल चाचा भतीजा वह मृतक का बेटा अब पुलिस की गिरफ्त में है। सहारनपुर। किसको पता था कि बेटा ही निकलेगा अपने पिता का कातिल। पुलिस को भले ही इस मर्डर मिस्ट्री का खुलासा 3 महीने करने में लग गए हों, लेकिन हत्या में शामिल चाचा भतीजा वह मृतक का बेटा अब पुलिस की गिरफ्त में है। आपको बता दें कि जनपद सहारनपुर के थाना गागालेहड़ी थाने में मृतक के बेटे इनाम द्वारा एक तहरीर दी गई थी, जिसमें बताया गया था कि उसके पिता महमूद की किसी ने हत्या कर दी है। इसके बाद से ही पुलिस इस पूरे मामले की जांच में लग गई थी। 3 महीने बाद पुलिस को अब इस मामले में सफलता हासिल हुई है। पुलिस के मुताबिक मृतक महमूद के ही बेटे इनाम ने अपने चाचा नसीर व मृतक के भतीजे फैजान के साथ मिलकर संपत्ति व जमीन के लालच में इस घटना को अंजाम दिया था। फिलहाल तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इनके पास से आला कत्ल (बसौली) व एक अदद तमंचा 135 बोर भी बरामद कर लिया है। पूछताछ में मृतक के बेटे ने बताया कि मुझे मेरे पिता ने जायदाद से बेदखल कर रखा था। उसने बताया कि इसके बाद दो - तीन बार मैंने अपने पिता की हत्या प्लान बनाया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। मैंने अपने सभी रिश्तेदारों को फोन करके यह बता दिया कि मेरा फोन कहीं खो गया है। मैं शहर से बाहर हूं ताकि हत्या के बाद पुलिस को मोबाइल फोन की लोकेशन न मिल सके। फिर चौथी बार प्लान कर मैंने अपने चाचा ओर चचेरे भाई की मदद से इस हत्या को अंजाम दे दिया।
हत्या में शामिल चाचा भतीजा वह मृतक का बेटा अब पुलिस की गिरफ्त में है। सहारनपुर। किसको पता था कि बेटा ही निकलेगा अपने पिता का कातिल। पुलिस को भले ही इस मर्डर मिस्ट्री का खुलासा तीन महीने करने में लग गए हों, लेकिन हत्या में शामिल चाचा भतीजा वह मृतक का बेटा अब पुलिस की गिरफ्त में है। आपको बता दें कि जनपद सहारनपुर के थाना गागालेहड़ी थाने में मृतक के बेटे इनाम द्वारा एक तहरीर दी गई थी, जिसमें बताया गया था कि उसके पिता महमूद की किसी ने हत्या कर दी है। इसके बाद से ही पुलिस इस पूरे मामले की जांच में लग गई थी। तीन महीने बाद पुलिस को अब इस मामले में सफलता हासिल हुई है। पुलिस के मुताबिक मृतक महमूद के ही बेटे इनाम ने अपने चाचा नसीर व मृतक के भतीजे फैजान के साथ मिलकर संपत्ति व जमीन के लालच में इस घटना को अंजाम दिया था। फिलहाल तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इनके पास से आला कत्ल व एक अदद तमंचा एक सौ पैंतीस बोर भी बरामद कर लिया है। पूछताछ में मृतक के बेटे ने बताया कि मुझे मेरे पिता ने जायदाद से बेदखल कर रखा था। उसने बताया कि इसके बाद दो - तीन बार मैंने अपने पिता की हत्या प्लान बनाया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। मैंने अपने सभी रिश्तेदारों को फोन करके यह बता दिया कि मेरा फोन कहीं खो गया है। मैं शहर से बाहर हूं ताकि हत्या के बाद पुलिस को मोबाइल फोन की लोकेशन न मिल सके। फिर चौथी बार प्लान कर मैंने अपने चाचा ओर चचेरे भाई की मदद से इस हत्या को अंजाम दे दिया।
भजन संग्रह और भजन माला । Bhajan Sangrah Aur Bhajan Mala के बारे में अधिक जानकारी : हम संसारबद्ध जीवोंको इतना अवकाश कहाँ, जो संत-महात्माओंकी । समग्र सरस बानियोंका पवित्र पारायण कर सकें? इसलिये इस भजन-संग्रहमें । थोड़े-से चुने हुए पदोंका संकलन किया गया है। अच्छा हो कि इनका रस लेकर हमारी लोभ-प्रवृत्ति जागे और हम सम्पूर्ण बानियोंका आनन्द लेनेको प्रेम-विह्वल हो जायें। इस संग्रह के प्रारम्भमें गोसाईं तुलसीदास, महात्मा सूरदास और संतबर । कबीरदासके पदोंका संकलन है। भक्ति-साहित्यमें इन तीनों ही महात्माओंकी दिव्य बानियाँ अनुपम हैं, तदनन्तर अष्टछापके अनन्य भक्तों तथा हितहरिवंश, स्वामी हरिदास, गदाधर भट्ट, हरिराम व्यास आदि व्रज-रस-मधुकरोंकी सुललित गुंजार और नानक, दादूदयाल, रैदास, मलूकदास आदि संतोंके पदोंका संक्षिप्त संग्रह है। ग्रन्थके मध्यमें कुछ हरिभक्त देवियोंके पदोंका संग्रह है।
भजन संग्रह और भजन माला । Bhajan Sangrah Aur Bhajan Mala के बारे में अधिक जानकारी : हम संसारबद्ध जीवोंको इतना अवकाश कहाँ, जो संत-महात्माओंकी । समग्र सरस बानियोंका पवित्र पारायण कर सकें? इसलिये इस भजन-संग्रहमें । थोड़े-से चुने हुए पदोंका संकलन किया गया है। अच्छा हो कि इनका रस लेकर हमारी लोभ-प्रवृत्ति जागे और हम सम्पूर्ण बानियोंका आनन्द लेनेको प्रेम-विह्वल हो जायें। इस संग्रह के प्रारम्भमें गोसाईं तुलसीदास, महात्मा सूरदास और संतबर । कबीरदासके पदोंका संकलन है। भक्ति-साहित्यमें इन तीनों ही महात्माओंकी दिव्य बानियाँ अनुपम हैं, तदनन्तर अष्टछापके अनन्य भक्तों तथा हितहरिवंश, स्वामी हरिदास, गदाधर भट्ट, हरिराम व्यास आदि व्रज-रस-मधुकरोंकी सुललित गुंजार और नानक, दादूदयाल, रैदास, मलूकदास आदि संतोंके पदोंका संक्षिप्त संग्रह है। ग्रन्थके मध्यमें कुछ हरिभक्त देवियोंके पदोंका संग्रह है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मतिथि के अवसर पर एक दिन में 2.5 करोड़ से अधिक डोज लगाकर भारत ने कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण का अपना ही विश्व रिकार्ड तोड़ दिया। इसके पहले 31 अगस्त को 1.41 करोड़ डोज लगाने का रिकार्ड बना था। शुक्रवार के कोरोना रोधी टीकाकरण के बाद भारत सभी यूरोपीय देशों को मिलाकर लगाए गए डोज से अधिक टीके लगाने वाला देश बन गया है। भारत की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने स्वास्थ्य कर्मियों को बधाई दी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मतिथि के अवसर पर एक दिन में दो.पाँच करोड़ से अधिक डोज लगाकर भारत ने कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण का अपना ही विश्व रिकार्ड तोड़ दिया। इसके पहले इकतीस अगस्त को एक.इकतालीस करोड़ डोज लगाने का रिकार्ड बना था। शुक्रवार के कोरोना रोधी टीकाकरण के बाद भारत सभी यूरोपीय देशों को मिलाकर लगाए गए डोज से अधिक टीके लगाने वाला देश बन गया है। भारत की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने स्वास्थ्य कर्मियों को बधाई दी।
।देवमानोहारी (Devamanohari) मीन राशि का स्वामी ग्रह गुरु होता है। भगवान विष्णु (सत्यनारायण भगवन) को मीन राशि का आराध्य देव माना जाता है। देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ कमज़ोर इम्यून सिस्टम और पेट की समस्याओं से ग्रस्त रह सकते हैं। इन देवमानोहारी नाम की लड़कियों को शराब से दूर रहना चाहिए। इस राशि के देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ पांव की उंगलियों के रोगों, गठिया, बलगम और ट्यूमर आदि से पीड़ित हो सकते हैं। मीन राशि के देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ भावुक प्रवृत्ति के होते हैं ये दूसरों के लिए अधिक भावुक होते हैं। देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ दयालु प्रवृत्ति के होते हैं, देखभाल करने में भी कम नहीं होते। अगर आप अपने बच्चे का नाम देवमानोहारी रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि देवमानोहारी का मतलब एक राग का नाम होता है। एक राग का नाम मतलब होने के कारण देवमानोहारी नाम बहुत सुंदर बन जाता है। आपको बता दें कि अपने शिशु को देवमानोहारी नाम देकर आप उसके जीवन में सकारात्मक संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। देवमानोहारी नाम का अर्थ जानने के बाद आप भी अपने बच्चे को देवमानोहारी नाम आराम से दे सकते हैं। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार देवमानोहारी नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि देवमानोहारी नाम का अर्थ एक राग का नाम है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। देवमानोहारी नाम की राशि, देवमानोहारी नाम का लकी नंबर व देवमानोहारी नाम के लोगों के व्यक्तित्व अथवा इस नाम के मतलब जो कि एक राग का नाम है, आदि के बारे में आगे बताया गया है। देवमानोहारी नाम का स्वामी बृहस्पति होता है एवं आपका शुभ अंक 3 है। देवमानोहारी नाम की लड़कियां आकर्षक होती हैं। अगर ये मेहनत करें तो खूब लोकप्रियता हासिल कर सकती हैं। देवमानोहारी नाम की लड़कियां अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से निभाती हैं। देवमानोहारी नाम की युवतियों को अनुशासन से जीवन व्यतीत करना और सिद्धांतों व नियमों का पालन करना पसंद होता है। देवमानोहारी नाम की 3 अंक वाली लड़कियों का स्वभाव हठीला और जिद्दी होता है तथा इनके दुश्मनों की संख्या दोस्तों से अधिक रहती है। देवमानोहारी नाम की लड़कियों की सेहत अच्छी रहती है लेकिन इन्हें डायबिटीज का खतरा रहता है। देवमानोहारी नाम की लड़कियों की राशि मीन है। अध्यात्म में रुचि होती है देवमानोहारी नाम की लड़कियों की। मीन राशि की महिलाएं जिनका नाम देवमानोहारी है, वे आत्मिक शांति के लिए प्रयासरत रहती हैं। देवमानोहारी नाम की महिलाएं मुश्किलों में भी शांत रहना पसंद करती हैं, क्योंकि ये स्वभाव से शांतिप्रिय होती हैं। जिन महिलाओं का नाम देवमानोहारी है, उन्हें लड़ाई-झगड़ा बिलकुल पसंद नहीं होता है। दूसरे लोगों को इनके विचारों का सम्मान करना चाहिए, ऐसा देवमानोहारी नाम की लड़कियां सोचती हैं।
।देवमानोहारी मीन राशि का स्वामी ग्रह गुरु होता है। भगवान विष्णु को मीन राशि का आराध्य देव माना जाता है। देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ कमज़ोर इम्यून सिस्टम और पेट की समस्याओं से ग्रस्त रह सकते हैं। इन देवमानोहारी नाम की लड़कियों को शराब से दूर रहना चाहिए। इस राशि के देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ पांव की उंगलियों के रोगों, गठिया, बलगम और ट्यूमर आदि से पीड़ित हो सकते हैं। मीन राशि के देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ भावुक प्रवृत्ति के होते हैं ये दूसरों के लिए अधिक भावुक होते हैं। देवमानोहारी नाम की लड़कियाँ दयालु प्रवृत्ति के होते हैं, देखभाल करने में भी कम नहीं होते। अगर आप अपने बच्चे का नाम देवमानोहारी रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि देवमानोहारी का मतलब एक राग का नाम होता है। एक राग का नाम मतलब होने के कारण देवमानोहारी नाम बहुत सुंदर बन जाता है। आपको बता दें कि अपने शिशु को देवमानोहारी नाम देकर आप उसके जीवन में सकारात्मक संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। देवमानोहारी नाम का अर्थ जानने के बाद आप भी अपने बच्चे को देवमानोहारी नाम आराम से दे सकते हैं। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार देवमानोहारी नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि देवमानोहारी नाम का अर्थ एक राग का नाम है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। देवमानोहारी नाम की राशि, देवमानोहारी नाम का लकी नंबर व देवमानोहारी नाम के लोगों के व्यक्तित्व अथवा इस नाम के मतलब जो कि एक राग का नाम है, आदि के बारे में आगे बताया गया है। देवमानोहारी नाम का स्वामी बृहस्पति होता है एवं आपका शुभ अंक तीन है। देवमानोहारी नाम की लड़कियां आकर्षक होती हैं। अगर ये मेहनत करें तो खूब लोकप्रियता हासिल कर सकती हैं। देवमानोहारी नाम की लड़कियां अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से निभाती हैं। देवमानोहारी नाम की युवतियों को अनुशासन से जीवन व्यतीत करना और सिद्धांतों व नियमों का पालन करना पसंद होता है। देवमानोहारी नाम की तीन अंक वाली लड़कियों का स्वभाव हठीला और जिद्दी होता है तथा इनके दुश्मनों की संख्या दोस्तों से अधिक रहती है। देवमानोहारी नाम की लड़कियों की सेहत अच्छी रहती है लेकिन इन्हें डायबिटीज का खतरा रहता है। देवमानोहारी नाम की लड़कियों की राशि मीन है। अध्यात्म में रुचि होती है देवमानोहारी नाम की लड़कियों की। मीन राशि की महिलाएं जिनका नाम देवमानोहारी है, वे आत्मिक शांति के लिए प्रयासरत रहती हैं। देवमानोहारी नाम की महिलाएं मुश्किलों में भी शांत रहना पसंद करती हैं, क्योंकि ये स्वभाव से शांतिप्रिय होती हैं। जिन महिलाओं का नाम देवमानोहारी है, उन्हें लड़ाई-झगड़ा बिलकुल पसंद नहीं होता है। दूसरे लोगों को इनके विचारों का सम्मान करना चाहिए, ऐसा देवमानोहारी नाम की लड़कियां सोचती हैं।
Don't Miss! आईफा 2019 के ग्रीन कार्पेट पर बॉलीवुड हसीनाएं परियां बनकर उतर आईं लेकिन ग्रीन कार्पेट पर पहुंचते ही स्वरा भास्कर ने हाथ में सैंडल उतार कर ले लिया और ये तस्वीरें सबसे तेज़ी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में स्वरा भास्कर का रिएक्शन भी शानदार है। अब आपको याद ही होगा कि हाल ही में स्वरा भास्कर ने गणपति पंडाल दर्शन के दौरान, लाल बाग के राजा के पंडाल में अपने सैंडल खो दिए थे। इसके बाद स्वरा को नंगे पांव घर आना पड़ा था। शायद उसका डर स्वरा को आज तक सता रहा है। तभी तो वो आईफा की ग्रीन कार्पेट पर भी सैंडल हाथ में लेकर ही चलने लगीं। खैर मज़ाक को एक तरफ रखा जाए तो स्वरा हमेशा की तरह अपने स्टाईल स्टेटमेंट से लोगों का दिल जीतती नज़र आईं। जल्दी ही वो परदे पर अर्थ रीमेक में शबाना आज़मी के किरदार में जान फूंकती नज़र आएंगी।
Don't Miss! आईफा दो हज़ार उन्नीस के ग्रीन कार्पेट पर बॉलीवुड हसीनाएं परियां बनकर उतर आईं लेकिन ग्रीन कार्पेट पर पहुंचते ही स्वरा भास्कर ने हाथ में सैंडल उतार कर ले लिया और ये तस्वीरें सबसे तेज़ी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में स्वरा भास्कर का रिएक्शन भी शानदार है। अब आपको याद ही होगा कि हाल ही में स्वरा भास्कर ने गणपति पंडाल दर्शन के दौरान, लाल बाग के राजा के पंडाल में अपने सैंडल खो दिए थे। इसके बाद स्वरा को नंगे पांव घर आना पड़ा था। शायद उसका डर स्वरा को आज तक सता रहा है। तभी तो वो आईफा की ग्रीन कार्पेट पर भी सैंडल हाथ में लेकर ही चलने लगीं। खैर मज़ाक को एक तरफ रखा जाए तो स्वरा हमेशा की तरह अपने स्टाईल स्टेटमेंट से लोगों का दिल जीतती नज़र आईं। जल्दी ही वो परदे पर अर्थ रीमेक में शबाना आज़मी के किरदार में जान फूंकती नज़र आएंगी।
पाकिस्तान में लगातार चल रही सियासी हलचल के बाद आखिरकार इमरान खान की सरकार गिर गई। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 174 सदस्यों ने मतदान किया। लेकिन इमरान की सरकार गिरने के तुरंत बाद ही उनके करीबियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। देर रात इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सफलता के बाद उनके प्रवक्ता डॉ. अर्सलान खालिद के घर पर छापेमारी की गई और उनके परिवार के सभी सदस्यों के फोन भी छीन लिए गए। पीटीआई ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से खुद ट्वीट कर अर्सलान खालिद के घर पर छापेमारी की जानकारी दी है। ट्वीट में लिखा गया कि बेहद परेशान करने वाली खबर, डॉ. अर्सलान खालिद मो के घर पर छापा मारा गया है और उन्होंने उसके परिवार से सभी फोन ले लिए हैं। Extremely Disturbing News: Ex Focal person on PM @ImranKhanPTI on Digital, Dr. @arslankhalid_m's home has been raided & they have taken all phones from his family! हालांकि, इमरान खान के प्रवक्ता डॉ. अर्सलान खालिद के घर पर छापेमारी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद उनके, फवाद चौधरी और शाह महमूद के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिका दायर कर तीनों का नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ECL) लिस्ट में डालने की मांग की गई है। हाईकोर्ट में 11 अप्रैल को दायर याचिका पर सुनवाई होगी। इमरान खान के देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।
पाकिस्तान में लगातार चल रही सियासी हलचल के बाद आखिरकार इमरान खान की सरकार गिर गई। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में एक सौ चौहत्तर सदस्यों ने मतदान किया। लेकिन इमरान की सरकार गिरने के तुरंत बाद ही उनके करीबियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। देर रात इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सफलता के बाद उनके प्रवक्ता डॉ. अर्सलान खालिद के घर पर छापेमारी की गई और उनके परिवार के सभी सदस्यों के फोन भी छीन लिए गए। पीटीआई ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से खुद ट्वीट कर अर्सलान खालिद के घर पर छापेमारी की जानकारी दी है। ट्वीट में लिखा गया कि बेहद परेशान करने वाली खबर, डॉ. अर्सलान खालिद मो के घर पर छापा मारा गया है और उन्होंने उसके परिवार से सभी फोन ले लिए हैं। Extremely Disturbing News: Ex Focal person on PM @ImranKhanPTI on Digital, Dr. @arslankhalid_m's home has been raided & they have taken all phones from his family! हालांकि, इमरान खान के प्रवक्ता डॉ. अर्सलान खालिद के घर पर छापेमारी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद उनके, फवाद चौधरी और शाह महमूद के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिका दायर कर तीनों का नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट लिस्ट में डालने की मांग की गई है। हाईकोर्ट में ग्यारह अप्रैल को दायर याचिका पर सुनवाई होगी। इमरान खान के देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।
स्वच्छ भारत मिशन ने पतंजलि योग समिति जौनपुर के सहयोग से पू. वि. वि. में स्वच्छता एवं पौधारोपण का कार्य किया ! विश्व विद्यालय जौनपुर आवासीय परिसर स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में साफ़ सफाई एवं वृक्षारोपण (पीपल,बरगद, पाकड़, चितवन, धिठोरी आदि) का कार्यक्रम "स्वच्छ भारत अभियान" मिशन के सौजन्य से संपन्न हुआ! इस कार्यक्रम का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. विक्रमदेव ( सरक्षक, पतंजलि योग समिति जौनपुर एवं राज्य प्रभारी सोशल मीडिया, पतंजलि योग परिवार) के विशेष सहयोग ( पौधों, खाद इत्यादि) , प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित हुआ !
स्वच्छ भारत मिशन ने पतंजलि योग समिति जौनपुर के सहयोग से पू. वि. वि. में स्वच्छता एवं पौधारोपण का कार्य किया ! विश्व विद्यालय जौनपुर आवासीय परिसर स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में साफ़ सफाई एवं वृक्षारोपण का कार्यक्रम "स्वच्छ भारत अभियान" मिशन के सौजन्य से संपन्न हुआ! इस कार्यक्रम का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. विक्रमदेव के विशेष सहयोग , प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित हुआ !
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान में फंसी हैदराबाद की रहने वाली भारतीय महिला को लेकर भारतीय उच्यायोग को निर्देश दिए हैं। विदेश मंत्री ने भारतीय महिला के पासपोर्ट का नवीनीकरण और उसकी देश वापसी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सुषमा ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। बता दें कि सुषमा स्वराज से 44 वर्षीय महिला के पिता ने उसकी स्वदेश वापसी में मदद मांगी थी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान में फंसी हैदराबाद की रहने वाली भारतीय महिला को लेकर भारतीय उच्यायोग को निर्देश दिए हैं। विदेश मंत्री ने भारतीय महिला के पासपोर्ट का नवीनीकरण और उसकी देश वापसी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सुषमा ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। बता दें कि सुषमा स्वराज से चौंतालीस वर्षीय महिला के पिता ने उसकी स्वदेश वापसी में मदद मांगी थी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
भोपाल। राजधानी में 13 व 15 जनवरी को क्रमशः लोहड़ी, पोंगल व मकर संक्रांति पर्व मनाए जाने के कारण तीनों दिन धार्मिक अनुष्ठान व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। इन आयोजनों में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे, जिससे इनमें सामाजिक समरसता की झलक दिखाई देगी। पंजाबी समाज के संरक्षक ओपी कपूर ने बताया कि पंजाबी समाज में 13 जनवरी को घर-घर में लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। इस मौके पर पंजाबी संस्कृति से जुड़े गीत-संगीत के कार्यक्रम होंगे। कई स्थानों पर अग्नि प्रज्ज्वलित कर उसमें अनाज अर्पित कर परिक्रमा करते हुए परंपरागत गीत गाए जाएंगे। तो वहीं रविवार 15 जनवरी को भोपाल पंजाबी समाज द्वारा होशंगाबाद रोड स्थित नर्मदा क्लब भवन में लोहड़ी मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें रंगारंग पंजाबी लोकगीत व संगीत के आयोजन होंगे। दूसरी ओर 14 जनवरी को शहर में दक्षिण भारतीय परिवारों में पोंगल और मलयाली समाज के लोगों द्वारा मकरविलक्कू पर्व मनाया जाएगा। तो वहीं इसी दिन यानी 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनेगा। इस दिन मंदिरों में भीड़ रहने के साथ ही पतंग उत्सव व खिचड़ी वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे। लोहड़ी मेला 15 को पंजाबी समाज द्वारा शाम 7 बजे सांची दुग्ध संघ के पास नर्मदा क्लब हबीबगंज रोड पर आयोजित किया गया है। समाज के अध्यक्ष संजीव सचदेवा ने बताया कि इस अवसर पर पंजाबी लोकगीत व संगीत के अलावा अन्य कई मनोरंजक कार्यक्रम होंगे। बच्चों के लिए झूले रहेंगे। नेशनल सिख समाज संगठन व कई अन्य संस्थाओं द्वारा गिद्दा व भांगड़ा नृत्य के आयोजन किए जाएंगे। गुलमोहर कॉम्प्लेक्स, पंजाबी बाग व ईदगाह हिल्स में भी लोहड़ी पर्व पर गीत-संगीत के आयोजन होंगे। मलयाली व तमिल समाज के लोग 14 जनवरी को मकरविलक्कू और पोंगल पर्व मनाएंगे। अय्यप्पा सेवा संगम समिति द्वारा बरखेड़ा स्थित अय्यप्पा मंदिर में सुबह पूजा व अभिषेक होगा। शाम साढ़े छह बजे विशेष आरती, पारायण व दीप आराधना होगी। गुलमोहर स्थित श्वेता मंदिर से अय्यप्पा दर्शन पूजा होगी। तमिल समाज के पिपलानी स्थित राम मंदिर में पोंगल के अवसर पर भगवान नटराज की पूजा और भजन होंगे। दक्षिण भारतीय समाज के घरों में नई फसल सजाकर लोग उसकी पूजा करेंगे। घरों में पुष्पों से सजावट भी की जाएगी। समाज के कई लोगों के घरों में आंगन में चावल के पानी से रंगोली बनाकर उस पर गन्ने रखने के साथ ही गुड़ व चावल का पोंगल पकाया जाएगा। पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि मकर संक्रांति पर 15 जनवरी को लोग पवित्र नदियों में स्नान के साथ ही तिल, गुड़, खिचड़ी व वस्त्र आदि का दान करेंगे। देव दर्शन के लिए मंदिरों में भीड़ रहेगी।
भोपाल। राजधानी में तेरह व पंद्रह जनवरी को क्रमशः लोहड़ी, पोंगल व मकर संक्रांति पर्व मनाए जाने के कारण तीनों दिन धार्मिक अनुष्ठान व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। इन आयोजनों में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे, जिससे इनमें सामाजिक समरसता की झलक दिखाई देगी। पंजाबी समाज के संरक्षक ओपी कपूर ने बताया कि पंजाबी समाज में तेरह जनवरी को घर-घर में लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। इस मौके पर पंजाबी संस्कृति से जुड़े गीत-संगीत के कार्यक्रम होंगे। कई स्थानों पर अग्नि प्रज्ज्वलित कर उसमें अनाज अर्पित कर परिक्रमा करते हुए परंपरागत गीत गाए जाएंगे। तो वहीं रविवार पंद्रह जनवरी को भोपाल पंजाबी समाज द्वारा होशंगाबाद रोड स्थित नर्मदा क्लब भवन में लोहड़ी मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें रंगारंग पंजाबी लोकगीत व संगीत के आयोजन होंगे। दूसरी ओर चौदह जनवरी को शहर में दक्षिण भारतीय परिवारों में पोंगल और मलयाली समाज के लोगों द्वारा मकरविलक्कू पर्व मनाया जाएगा। तो वहीं इसी दिन यानी पंद्रह जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनेगा। इस दिन मंदिरों में भीड़ रहने के साथ ही पतंग उत्सव व खिचड़ी वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे। लोहड़ी मेला पंद्रह को पंजाबी समाज द्वारा शाम सात बजे सांची दुग्ध संघ के पास नर्मदा क्लब हबीबगंज रोड पर आयोजित किया गया है। समाज के अध्यक्ष संजीव सचदेवा ने बताया कि इस अवसर पर पंजाबी लोकगीत व संगीत के अलावा अन्य कई मनोरंजक कार्यक्रम होंगे। बच्चों के लिए झूले रहेंगे। नेशनल सिख समाज संगठन व कई अन्य संस्थाओं द्वारा गिद्दा व भांगड़ा नृत्य के आयोजन किए जाएंगे। गुलमोहर कॉम्प्लेक्स, पंजाबी बाग व ईदगाह हिल्स में भी लोहड़ी पर्व पर गीत-संगीत के आयोजन होंगे। मलयाली व तमिल समाज के लोग चौदह जनवरी को मकरविलक्कू और पोंगल पर्व मनाएंगे। अय्यप्पा सेवा संगम समिति द्वारा बरखेड़ा स्थित अय्यप्पा मंदिर में सुबह पूजा व अभिषेक होगा। शाम साढ़े छह बजे विशेष आरती, पारायण व दीप आराधना होगी। गुलमोहर स्थित श्वेता मंदिर से अय्यप्पा दर्शन पूजा होगी। तमिल समाज के पिपलानी स्थित राम मंदिर में पोंगल के अवसर पर भगवान नटराज की पूजा और भजन होंगे। दक्षिण भारतीय समाज के घरों में नई फसल सजाकर लोग उसकी पूजा करेंगे। घरों में पुष्पों से सजावट भी की जाएगी। समाज के कई लोगों के घरों में आंगन में चावल के पानी से रंगोली बनाकर उस पर गन्ने रखने के साथ ही गुड़ व चावल का पोंगल पकाया जाएगा। पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि मकर संक्रांति पर पंद्रह जनवरी को लोग पवित्र नदियों में स्नान के साथ ही तिल, गुड़, खिचड़ी व वस्त्र आदि का दान करेंगे। देव दर्शन के लिए मंदिरों में भीड़ रहेगी।
लंदन - विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे एक जासूसी कानून तोडऩे सहित 18 आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन्हें संयुक्त राज्य अमरीका में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करने की अनुमति मिल गई है। अब वह फैसले को चुनौती देने के लिए ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में जा सकेंगे। लंदन उच्च न्यायालय, जिसने दिसंबर में निचली अदालत के फैसले को पलट दिया था कि उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण आत्महत्या का खतरा होगा। साल 2021 में निचली अदालत के एक न्यायाधीश ने विकीलीक्स द्वारा एक दशक पहले गुप्त सैन्य दस्तावेजों का प्रकाशन किए जाने के मामले में जासूसी के आरोपों का सामना कर रहे असांजे को अमरीका प्रत्यर्पित करने के अमरीकी अनुरोध को खारिज कर दिया था।
लंदन - विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे एक जासूसी कानून तोडऩे सहित अट्ठारह आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन्हें संयुक्त राज्य अमरीका में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करने की अनुमति मिल गई है। अब वह फैसले को चुनौती देने के लिए ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में जा सकेंगे। लंदन उच्च न्यायालय, जिसने दिसंबर में निचली अदालत के फैसले को पलट दिया था कि उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण आत्महत्या का खतरा होगा। साल दो हज़ार इक्कीस में निचली अदालत के एक न्यायाधीश ने विकीलीक्स द्वारा एक दशक पहले गुप्त सैन्य दस्तावेजों का प्रकाशन किए जाने के मामले में जासूसी के आरोपों का सामना कर रहे असांजे को अमरीका प्रत्यर्पित करने के अमरीकी अनुरोध को खारिज कर दिया था।
सोलनः सोलन जिले के अर्की में शातिरों ने एक व्यक्ति के खाते से साढ़े सात लाख रूपए उड़ा दिए। ठगी का शिकार हुए व्यक्ति ने इसकी शिकायत पुलिस थाना में दर्ज करवाई है। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगामी जांच की जा रही है। पुलिस को दी गई शिकायत में विजय कुमार गुप्ता पुत्र स्व. गोपाल चंद गुप्ता वार्ड-5 अर्की ने बताया कि 20 अप्रैल को इसे फोन आया कि इसकी सिम 24 घंटे में ब्लॉक हो जाएगी। शातिर ने उसे अपने झांसे में लेकर उसे तुरंत नेट बैंकिंग से 10 रुपये का रिचार्ज करने को कहा। जैसे ही नेट बैंकिंग से रिचार्ज किया तो व्यक्ति के स्टेट बैंक आफ इंडिया अर्की के खाते से शातिरों ने सात लाख 63 हजार 162 रुपये उड़ा दिए। खबर की पुष्टि करते हुए एसपी सोलन अभिषेक यादव ने बताया कि व्यक्ति की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगामी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। ये भी पढ़े : सूरत के व्यापारी ने अपनी 2 माह की बेटी के लिए चांद पर खरीदी जमीन! 10 रुपये का रिचार्ज करवाना पड़ा महंगा, शातिरों ने खाते से उड़ाए साढ़े सात लाख रूपए Reviewed by News Himachali on April 29, 2021 Rating:
सोलनः सोलन जिले के अर्की में शातिरों ने एक व्यक्ति के खाते से साढ़े सात लाख रूपए उड़ा दिए। ठगी का शिकार हुए व्यक्ति ने इसकी शिकायत पुलिस थाना में दर्ज करवाई है। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगामी जांच की जा रही है। पुलिस को दी गई शिकायत में विजय कुमार गुप्ता पुत्र स्व. गोपाल चंद गुप्ता वार्ड-पाँच अर्की ने बताया कि बीस अप्रैल को इसे फोन आया कि इसकी सिम चौबीस घंटाटे में ब्लॉक हो जाएगी। शातिर ने उसे अपने झांसे में लेकर उसे तुरंत नेट बैंकिंग से दस रुपयापये का रिचार्ज करने को कहा। जैसे ही नेट बैंकिंग से रिचार्ज किया तो व्यक्ति के स्टेट बैंक आफ इंडिया अर्की के खाते से शातिरों ने सात लाख तिरेसठ हजार एक सौ बासठ रुपयापये उड़ा दिए। खबर की पुष्टि करते हुए एसपी सोलन अभिषेक यादव ने बताया कि व्यक्ति की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगामी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। ये भी पढ़े : सूरत के व्यापारी ने अपनी दो माह की बेटी के लिए चांद पर खरीदी जमीन! दस रुपयापये का रिचार्ज करवाना पड़ा महंगा, शातिरों ने खाते से उड़ाए साढ़े सात लाख रूपए Reviewed by News Himachali on April उनतीस, दो हज़ार इक्कीस Rating:
हम भारतीय लोग खाने के काफी शौकीन होते हैं और हर दिन कुछ नया और स्वादिष्ट खाना पसंद करते हैं। लोग अपने-अपने घरों में चीजें तो बनाते ही हैं, लेकिन आज के समय में लोग बाहर का खाने का स्वाद लेना काफी पसंद करते हैं। बात चाहे स्ट्रीट फूड की करें या फिर किसी होटल या रेस्टोरेंट की करें। यहां आपको लोग काफी संख्या में स्वाद लेते हुए आसानी से नजर आ जाएंगे। हालांकि, कुछ लोगों को तीखा या खट्टा खाना पसंद होता है तो किसी को काफी मिर्ची वाला खाना काफी पसंद होता है। लेकिन एक चीज है जो हर कोई खाना खाने के बाद जरूर खाना पसंद करता है, और वो है मीठा। अगर आप भी मीठा खाने का शौक रखते हैं, तो आप आलू के हलवे का स्वाद ले सकते हैं और वो भी आसान रेसिपी से। तो चलिए आपको आलू के हलवे की बेहद आसान रेसिपी के बारे में बताते हैं। -हरी इलायची (पीसी हुई)। -आपको सबसे पहले आलू को उबाल लेना है और फिर इन्हें छीलकर हाथों से मैश कर ले। -दूसरी तरफ एक बर्तन लेना है और उसमें घी डालकर उसे गर्म करें। -इसके बाद इस गर्म घी में मैश किए हुए आलू डाल लें और फिर इन्हें 2-4 मिनट तक पकाएं। आलू को चलाते रहें, ताकि ये तले पर न चिपके। जब आलू पक जाएं, तो इसमें चीनी और दूध डाल लें और सभी को एक साथ मिला लें और लगभग 5-7 मिनट तक पका लें। -अब ऊपर से सूखे मेवे और इलायची पाउडर डालकर मिला लें। इसके बाद आपका हलवा परोसने के लिए पूरी तरह तैयार है।
हम भारतीय लोग खाने के काफी शौकीन होते हैं और हर दिन कुछ नया और स्वादिष्ट खाना पसंद करते हैं। लोग अपने-अपने घरों में चीजें तो बनाते ही हैं, लेकिन आज के समय में लोग बाहर का खाने का स्वाद लेना काफी पसंद करते हैं। बात चाहे स्ट्रीट फूड की करें या फिर किसी होटल या रेस्टोरेंट की करें। यहां आपको लोग काफी संख्या में स्वाद लेते हुए आसानी से नजर आ जाएंगे। हालांकि, कुछ लोगों को तीखा या खट्टा खाना पसंद होता है तो किसी को काफी मिर्ची वाला खाना काफी पसंद होता है। लेकिन एक चीज है जो हर कोई खाना खाने के बाद जरूर खाना पसंद करता है, और वो है मीठा। अगर आप भी मीठा खाने का शौक रखते हैं, तो आप आलू के हलवे का स्वाद ले सकते हैं और वो भी आसान रेसिपी से। तो चलिए आपको आलू के हलवे की बेहद आसान रेसिपी के बारे में बताते हैं। -हरी इलायची । -आपको सबसे पहले आलू को उबाल लेना है और फिर इन्हें छीलकर हाथों से मैश कर ले। -दूसरी तरफ एक बर्तन लेना है और उसमें घी डालकर उसे गर्म करें। -इसके बाद इस गर्म घी में मैश किए हुए आलू डाल लें और फिर इन्हें दो-चार मिनट तक पकाएं। आलू को चलाते रहें, ताकि ये तले पर न चिपके। जब आलू पक जाएं, तो इसमें चीनी और दूध डाल लें और सभी को एक साथ मिला लें और लगभग पाँच-सात मिनट तक पका लें। -अब ऊपर से सूखे मेवे और इलायची पाउडर डालकर मिला लें। इसके बाद आपका हलवा परोसने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इंडिया न्यूज़, Gadget News: Acer Aspire कंपनी के लेपटॉप शुरू से ही अपने बेहतर फीचर और कलमाल की परफॉरमेंस के लिए जाने जाते है। अब एक बार फिर Acer Aspire कंपनी ने Acer Aspire 7 लेपटॉप लॉन्च किया है जिसके आते ही यूजर में इसके बारे में जानने की बहुत जिज्ञासा है क्योंकि पहले भी Acer Aspire कंपनी के लेपटॉप्स ने धमाल मचा रखी है। जो हेवी काम के लिए हलकी मशीन का प्रयोग करना चाहते है। इस लेपटॉप में कंपनी 15. 6 इंच कि फुल HD IPS स्क्रीन मिलती है। कनेक्टिविटी के लिए Bluetooth 5. 2 का स्पोर्ट भी मिलता है। 81. 67% स्क्रीन तो बॉडी रेशो मिलता है कंपनी का कहना है कि यह बेहतरीन विसुअल देता है क्योंकि इसमें Acer ExaColor लाइट शील्ड और Acer ब्लू शील्ड तकनीक दी गई है। साथ ही Wi -Fi6 और 6E की सुविधा भी मिलती है। इस लेपटॉप को कंपनी ने 62,990 रुपये में लॉन्च किया है। इसे यूजर फ्लिपकार्ट से और Acer Online Store से भी खरीद सकता है कंपनी का कहना है की यह मॉडल पुराने मॉडल का ही रिफ्रेश वैरियंट है । इसमें कंपनी 135W का चार्जिंग स्पोर्ट और 50WH की बटेरी देती है। ये भी पढ़े : आखिर सोशल मीडिया पर "ब्लू टिक" पाने के लिए लोग क्यों लगा रहे दौड़? हमें Google News पर फॉलो करे- क्लिक करे !
इंडिया न्यूज़, Gadget News: Acer Aspire कंपनी के लेपटॉप शुरू से ही अपने बेहतर फीचर और कलमाल की परफॉरमेंस के लिए जाने जाते है। अब एक बार फिर Acer Aspire कंपनी ने Acer Aspire सात लेपटॉप लॉन्च किया है जिसके आते ही यूजर में इसके बारे में जानने की बहुत जिज्ञासा है क्योंकि पहले भी Acer Aspire कंपनी के लेपटॉप्स ने धमाल मचा रखी है। जो हेवी काम के लिए हलकी मशीन का प्रयोग करना चाहते है। इस लेपटॉप में कंपनी पंद्रह. छः इंच कि फुल HD IPS स्क्रीन मिलती है। कनेक्टिविटी के लिए Bluetooth पाँच. दो का स्पोर्ट भी मिलता है। इक्यासी. सरसठ% स्क्रीन तो बॉडी रेशो मिलता है कंपनी का कहना है कि यह बेहतरीन विसुअल देता है क्योंकि इसमें Acer ExaColor लाइट शील्ड और Acer ब्लू शील्ड तकनीक दी गई है। साथ ही Wi -Fiछः और छःE की सुविधा भी मिलती है। इस लेपटॉप को कंपनी ने बासठ,नौ सौ नब्बे रुपयापये में लॉन्च किया है। इसे यूजर फ्लिपकार्ट से और Acer Online Store से भी खरीद सकता है कंपनी का कहना है की यह मॉडल पुराने मॉडल का ही रिफ्रेश वैरियंट है । इसमें कंपनी एक सौ पैंतीस वाट का चार्जिंग स्पोर्ट और पचासWH की बटेरी देती है। ये भी पढ़े : आखिर सोशल मीडिया पर "ब्लू टिक" पाने के लिए लोग क्यों लगा रहे दौड़? हमें Google News पर फॉलो करे- क्लिक करे !
देशभर में श्रद्धालु मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मना रहे हैं. जगह-जगह घाट पर लोग स्नान करते देखे जा सकते हैं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा-भरा नजर आ रहा है. अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महासचिव आचार्य कृष्णदत्त शर्मा के अनुसार भारत में समय-समय पर हर पर्व को श्रद्धा, आस्था, हर्षोल्लास एवं उमंग के साथ मनाया जाता है. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना 'मकर संक्रांति' कहलाता है.
देशभर में श्रद्धालु मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मना रहे हैं. जगह-जगह घाट पर लोग स्नान करते देखे जा सकते हैं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा-भरा नजर आ रहा है. अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महासचिव आचार्य कृष्णदत्त शर्मा के अनुसार भारत में समय-समय पर हर पर्व को श्रद्धा, आस्था, हर्षोल्लास एवं उमंग के साथ मनाया जाता है. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना 'मकर संक्रांति' कहलाता है.
मंडी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मुंदड़ू बल्ह ने अपनी कामयाबियों की लिस्ट में आज एक और बड़ी सफ लता हासिल की। मुंदड़ू स्कूल को राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2016 के सम्मान से नवाजा गया है। मंगलवार को शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम में यह पुरस्कार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथों स्कूल की पूर्व प्रधानाचार्य हेमलता उपाध्याय एवं वर्तमान प्रधानाचार्य मीना ठाकुर ने प्राप्त किया। इस अवसर पर सर्व शिक्षा अभियान एवं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के निदेशक घनश्याम व शिक्षा निदेशक बीएल वींटा भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि वह हमेशा शिक्षा के लिए समर्पित रहे हैं और इसलिए उनके कार्यकाल में शिक्षा विभाग हमेशा उनके पास ही रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्कूलों ने बेहतर प्रदर्शन कर अन्य के लिए भी एक मिसाल पेश की है। वहीं राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2016 के बारे में बताते हुए पूर्व प्रधानाचार्य हेमलता ने बताया कि मुंदड़ू स्कूल में उन्होंने अपने कार्यकाल में जुलाई 2014 से जुलाई 2017 तक स्वच्छता की हर बारीकी को स्कूल प्रांगन में स्थापित किया और स्वच्छता के हर मापदंड को लागू किया गया। स्कूल व आसपास क्षेत्र में न सिर्फ सफाई की गई, बल्कि सफाई को लेकर विद्यार्थियों और लोगों की सोच भी बदली गई। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए जुलाई 2016 में स्कूल का नामांकन भरा था, जिसके बाद केंद्रीय, राज्य व जिला स्तरीय विभागीय टीमों ने कड़े निरीक्षण के बाद मुंदड़ू स्कूल का नाम इस पुरस्कार के लिए चयनित हुआ था। उन्होंने कहा कि इस अवार्ड के स्कूल की पूरी टीम और छात्र-छात्राएं बधाई की पात्र हैं।
मंडी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मुंदड़ू बल्ह ने अपनी कामयाबियों की लिस्ट में आज एक और बड़ी सफ लता हासिल की। मुंदड़ू स्कूल को राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार दो हज़ार सोलह के सम्मान से नवाजा गया है। मंगलवार को शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम में यह पुरस्कार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथों स्कूल की पूर्व प्रधानाचार्य हेमलता उपाध्याय एवं वर्तमान प्रधानाचार्य मीना ठाकुर ने प्राप्त किया। इस अवसर पर सर्व शिक्षा अभियान एवं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के निदेशक घनश्याम व शिक्षा निदेशक बीएल वींटा भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि वह हमेशा शिक्षा के लिए समर्पित रहे हैं और इसलिए उनके कार्यकाल में शिक्षा विभाग हमेशा उनके पास ही रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्कूलों ने बेहतर प्रदर्शन कर अन्य के लिए भी एक मिसाल पेश की है। वहीं राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार दो हज़ार सोलह के बारे में बताते हुए पूर्व प्रधानाचार्य हेमलता ने बताया कि मुंदड़ू स्कूल में उन्होंने अपने कार्यकाल में जुलाई दो हज़ार चौदह से जुलाई दो हज़ार सत्रह तक स्वच्छता की हर बारीकी को स्कूल प्रांगन में स्थापित किया और स्वच्छता के हर मापदंड को लागू किया गया। स्कूल व आसपास क्षेत्र में न सिर्फ सफाई की गई, बल्कि सफाई को लेकर विद्यार्थियों और लोगों की सोच भी बदली गई। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए जुलाई दो हज़ार सोलह में स्कूल का नामांकन भरा था, जिसके बाद केंद्रीय, राज्य व जिला स्तरीय विभागीय टीमों ने कड़े निरीक्षण के बाद मुंदड़ू स्कूल का नाम इस पुरस्कार के लिए चयनित हुआ था। उन्होंने कहा कि इस अवार्ड के स्कूल की पूरी टीम और छात्र-छात्राएं बधाई की पात्र हैं।
नई दिल्लीः कोरोना काल के बाद में लोगों को कमाई करना जुनुन सवार हो गया है। जिससे लोग कमाई करने के लिए हर समय कोई ना कोई खास जरिया को सर्च करते रहते हैं। आप को बता दें कि सीजन के हिसाब से ऐसे कई बिजनेस होते हैं जो कमाई करने का अच्छा ऑप्सन देते है। यहां पर हम आपको ऐसे ही दो बिजनेस के बारे में बताने वाले हैं, जिनको एक विशेष सीजन में किया जाए लाखों रुपये भी कमाए जा सकते हैं। दरअसल आप को बता दें कि देश में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, जिससे इस सर्दियों के सीजन के 3-4 महीने में कमाई का तगड़ा मौका मिल सकता है। इन महीनों में कुछ चीजें ऐसी होती है, जिनका इस्तेमाल लगभग हर लोगों के जरिए किया जाता है। आज के समयमें हर कोई अपनी हेल्थ को लेकर जागरुक हो गया है, जिससे मार्केट में कमाई करने के साधन बढ़ गए हैं। वही सर्दियों के मौसम में लोग गर्म चीजें खाना भी ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हीं में सूप भी शामिल है। लोगों की सूप पीने की आदत ही कमाई का जरिया वना दे रही है। ऐसे में आप को ये काम एक अवसर के तौर पर देखना चाहिए। सूप का बिजनेस ऐसी जगह शुरू किया जाना चाहिए, जहां मार्केट हो और लोगों की भीड़ भी हो। ऐसी जगह में सूप का बिजनेस ज्यादा ग्रोथ कर सकता है। आप को बता दें कि ये बिजनेस शुरु करने से पहले आप मार्केट में रिसर्च जरुर कर लें। जिससे काम अच्छा चले और कमाई भी खास हो। आप को बता दे कि आज के समय में हर कोई फैशनेवल कपड़ें पहनना चाहता है। जिससे लोगों के कमाई के द्धार खुल जाते हैं। ऐसे में सर्दियों के मौसम में फैशन के लिहाज से बढ़िया गर्म कपड़ों का बिजनेस शुरू किया जा सकता है। साथ ही कपड़ों के बिजनेस में जितनी ज्यादा वैरायटी होगी, लोगों के कपड़ा खरीदने के चांस भी उतने ही ज्यादा बढ़ेंगे। ऐसे में गर्म कपड़ों के बिजनेस से सर्दियों के मौसम में लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। आप को बता दें कि आप अपने बजट के हिसाब से बिजनेस को शुरु कर सकते हैं।
नई दिल्लीः कोरोना काल के बाद में लोगों को कमाई करना जुनुन सवार हो गया है। जिससे लोग कमाई करने के लिए हर समय कोई ना कोई खास जरिया को सर्च करते रहते हैं। आप को बता दें कि सीजन के हिसाब से ऐसे कई बिजनेस होते हैं जो कमाई करने का अच्छा ऑप्सन देते है। यहां पर हम आपको ऐसे ही दो बिजनेस के बारे में बताने वाले हैं, जिनको एक विशेष सीजन में किया जाए लाखों रुपये भी कमाए जा सकते हैं। दरअसल आप को बता दें कि देश में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, जिससे इस सर्दियों के सीजन के तीन-चार महीने में कमाई का तगड़ा मौका मिल सकता है। इन महीनों में कुछ चीजें ऐसी होती है, जिनका इस्तेमाल लगभग हर लोगों के जरिए किया जाता है। आज के समयमें हर कोई अपनी हेल्थ को लेकर जागरुक हो गया है, जिससे मार्केट में कमाई करने के साधन बढ़ गए हैं। वही सर्दियों के मौसम में लोग गर्म चीजें खाना भी ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हीं में सूप भी शामिल है। लोगों की सूप पीने की आदत ही कमाई का जरिया वना दे रही है। ऐसे में आप को ये काम एक अवसर के तौर पर देखना चाहिए। सूप का बिजनेस ऐसी जगह शुरू किया जाना चाहिए, जहां मार्केट हो और लोगों की भीड़ भी हो। ऐसी जगह में सूप का बिजनेस ज्यादा ग्रोथ कर सकता है। आप को बता दें कि ये बिजनेस शुरु करने से पहले आप मार्केट में रिसर्च जरुर कर लें। जिससे काम अच्छा चले और कमाई भी खास हो। आप को बता दे कि आज के समय में हर कोई फैशनेवल कपड़ें पहनना चाहता है। जिससे लोगों के कमाई के द्धार खुल जाते हैं। ऐसे में सर्दियों के मौसम में फैशन के लिहाज से बढ़िया गर्म कपड़ों का बिजनेस शुरू किया जा सकता है। साथ ही कपड़ों के बिजनेस में जितनी ज्यादा वैरायटी होगी, लोगों के कपड़ा खरीदने के चांस भी उतने ही ज्यादा बढ़ेंगे। ऐसे में गर्म कपड़ों के बिजनेस से सर्दियों के मौसम में लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। आप को बता दें कि आप अपने बजट के हिसाब से बिजनेस को शुरु कर सकते हैं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन भी आए दिन फैंस की सुर्खियों का कारण बनी रहती हैं। एक्ट्रेस ने अपनी दमदार एक्टिंग के साथ फैंस के दिलों में एक खास जगह बना ली है। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं और आए दिन सभी के साथ अपनी लाइफ से जुड़े किस्से शेयर करती रहती हैं। हाल ही में कृति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर फैंस के साथ (#AskMeAnything) ऑस्क मी एनीथिंग सेशन रखा था जिसमें उन्होंने अपनी लाइफ से जुड़े कई सीक्रेट शेयर किए। वहीं इस दौरान एक्ट्रेस ने अपने ब्वॉयफ्रेंड का नाम भी बताया है। कृति के ऑस्क में सेशन में फैंस ने उन्हें कई सारे सवाल किए जिसके जवाब कृति ने भी दिलचस्पी दिखाते हुए दिए। एक्ट्रेस की ब्यूटी टिप्स से लेकर एक्ट्रेस के अपकमिंग प्रोजेक्ट फैंस ने उन्हें कई सारे सवाल पूछे लेकिन सबसे ज्यादा लाइमलाइट में रहा उनकी पर्सनल लाइफ पर पूछा गया सवाल । कई सारे लोगों ने कृति के ब्वॉयफ्रेंड का नाम जानने के लिए दिलचस्पी दिखाई। फैंस कृति के रिलेशनशिप स्टेटस को लेकर काफी एक्साइटेड नजर आए। ऐसे में फैंस ने कृति को उनके रिलेशनशिप को लेकर भी सवाल किया। फैंस ने पूछा आपके ब्वॉयफ्रेंड का क्या नाम है? इस सवाल का जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने एक वीडियो शेयर किया और कहा कि- 'ये एक सीक्रेट है यहां तक कि मेरे लिए भी। जवाब देने के बाद कृति खुद भी जोर-जोर से हंसने लगी। ' आपको बता दें कि कृति सेनन और साउथ सुपरस्टार प्रभास की डेटिंग की खबरों को फिल्म 'भेड़िया' के दौरान हवा मिली थी। क्योंकि फिल्म की प्रमोशन के दौरान मजाक में वरुण धवन ने कृति और प्रभास का नाम आपस में जोड़ दिया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस दोनों का नाम साथ जोड़ने लगे थे। हालांकि बाद में कृति ने इस पर बात करते हुए इसको एक सिर्फ मजाक ही बताया था। वहीं अगर बात कृति के वर्कफ्रंट की करें तो एक्ट्रेस जल्द ही फिल्म 'आदिपुरुष' में प्रभास के साथ नजर आएंगी। इसके अलावा कृति की हाल ही में फिल्म 'शहजादा' भी रिलीज हुई थी। 'शहजादा' में कृति के अलावा कार्तिक आर्यन लीड रोल में नजर आए थे। लेकिन कृति की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस में कुछ खास नहीं चल पाई थी।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन भी आए दिन फैंस की सुर्खियों का कारण बनी रहती हैं। एक्ट्रेस ने अपनी दमदार एक्टिंग के साथ फैंस के दिलों में एक खास जगह बना ली है। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं और आए दिन सभी के साथ अपनी लाइफ से जुड़े किस्से शेयर करती रहती हैं। हाल ही में कृति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर फैंस के साथ ऑस्क मी एनीथिंग सेशन रखा था जिसमें उन्होंने अपनी लाइफ से जुड़े कई सीक्रेट शेयर किए। वहीं इस दौरान एक्ट्रेस ने अपने ब्वॉयफ्रेंड का नाम भी बताया है। कृति के ऑस्क में सेशन में फैंस ने उन्हें कई सारे सवाल किए जिसके जवाब कृति ने भी दिलचस्पी दिखाते हुए दिए। एक्ट्रेस की ब्यूटी टिप्स से लेकर एक्ट्रेस के अपकमिंग प्रोजेक्ट फैंस ने उन्हें कई सारे सवाल पूछे लेकिन सबसे ज्यादा लाइमलाइट में रहा उनकी पर्सनल लाइफ पर पूछा गया सवाल । कई सारे लोगों ने कृति के ब्वॉयफ्रेंड का नाम जानने के लिए दिलचस्पी दिखाई। फैंस कृति के रिलेशनशिप स्टेटस को लेकर काफी एक्साइटेड नजर आए। ऐसे में फैंस ने कृति को उनके रिलेशनशिप को लेकर भी सवाल किया। फैंस ने पूछा आपके ब्वॉयफ्रेंड का क्या नाम है? इस सवाल का जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने एक वीडियो शेयर किया और कहा कि- 'ये एक सीक्रेट है यहां तक कि मेरे लिए भी। जवाब देने के बाद कृति खुद भी जोर-जोर से हंसने लगी। ' आपको बता दें कि कृति सेनन और साउथ सुपरस्टार प्रभास की डेटिंग की खबरों को फिल्म 'भेड़िया' के दौरान हवा मिली थी। क्योंकि फिल्म की प्रमोशन के दौरान मजाक में वरुण धवन ने कृति और प्रभास का नाम आपस में जोड़ दिया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस दोनों का नाम साथ जोड़ने लगे थे। हालांकि बाद में कृति ने इस पर बात करते हुए इसको एक सिर्फ मजाक ही बताया था। वहीं अगर बात कृति के वर्कफ्रंट की करें तो एक्ट्रेस जल्द ही फिल्म 'आदिपुरुष' में प्रभास के साथ नजर आएंगी। इसके अलावा कृति की हाल ही में फिल्म 'शहजादा' भी रिलीज हुई थी। 'शहजादा' में कृति के अलावा कार्तिक आर्यन लीड रोल में नजर आए थे। लेकिन कृति की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस में कुछ खास नहीं चल पाई थी।
Sunny Deol Rejected Movies. सनी देओल की गदर एक प्रेमकथा दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इसी बीच आपको सनी की उन फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उन्होंने रिजेक्ट की थी और उनका यह फैसला सही साबित हुआ। उनकी रिजेक्ट फिल्में फ्लॉप रहीं। Bade Acche Lagte Hai सीजन 3 में प्रिया का किरदार निभा रही दिशा परमार प्रेग्नेंट है और इन दिनों प्रेग्नेंसी पीरियड एन्जॉय कर रही हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें होने वाले मम्मी-पापा का एक्साइटमेंट देखने लायक है। Prabhas Next Film With Allu Arjun Film Director. मीडिया में चल रही रिपोर्ट्स की मानें तो प्रभास ने अल्लू अर्जुन की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म के डायरेक्टर के साथ हाथ मिलाया है। कहा जा रहा है कि प्रभास, पुष्पा स्टार को झटका देने की तैयारी कर रह हैं। Salman Khan Hugged Vicky Kaushal After Controversy. हाल ही में सलमान खान का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उनके बॉडीगार्ड विक्की कौशल को साइड करते दिखे थे। इस विवाद के बाद एक और वीडियो सामने आया, जिसमें सलमान, विक्की को गले लगाते नजर आ रहे हैं। Brazilian Actor Jefferson Machado Found Dead Inside Wooden Box. सामने आ रही एक चौंका देने वाली खबर की मानें तो ब्राजीलियन एक्टर जेफरसन मचाडो, जो 4 महीने से लापता थे, वह लकड़ी के एक बॉक्स में मृत पाए गए। Salman Khan Rejects Marriage Proposal. आईफा 2023 में मीडिया से इंटरएक्शन करते वक्त सलमान खान को मैरिज प्रपोजल मिला। उन्होंने क्या जवाब दिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुना जा सकता है। Prabhas Salaar Teaser Attached With Adipurush. सामने आ रही एक रिपोर्ट की मानें तो साउथ एक्टर प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म सालार का टीजर फिल्म आदिपुरुष के साथ दिखाया जाएगा। सालार ने मेकर्स ने मूवी को हिट कराने नया पैंतरा आजमाया है। Anushka Sharma Cannes Debut. अनुष्का शर्मा आखिरकार कान्स फिल्म फेस्विटव 2023 के रेड कारपेट पर नजर आईं। कान्स से उनका लुक वायरल हो रहा है, जिसकी काफी तारीफ भी हो रही है। Gadar Ek Prem Katha. सनी देओल की फिल्म गदर एक प्रेमकथा 22 साल बाद दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म में सनी दुश्मनों से जमकर पंगा लेते नजर आएंगे। वैसे, आपको बता दें कि रियल लाइफ में भी उनके कम दुश्मन नहीं हैं।
Sunny Deol Rejected Movies. सनी देओल की गदर एक प्रेमकथा दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इसी बीच आपको सनी की उन फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उन्होंने रिजेक्ट की थी और उनका यह फैसला सही साबित हुआ। उनकी रिजेक्ट फिल्में फ्लॉप रहीं। Bade Acche Lagte Hai सीजन तीन में प्रिया का किरदार निभा रही दिशा परमार प्रेग्नेंट है और इन दिनों प्रेग्नेंसी पीरियड एन्जॉय कर रही हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें होने वाले मम्मी-पापा का एक्साइटमेंट देखने लायक है। Prabhas Next Film With Allu Arjun Film Director. मीडिया में चल रही रिपोर्ट्स की मानें तो प्रभास ने अल्लू अर्जुन की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म के डायरेक्टर के साथ हाथ मिलाया है। कहा जा रहा है कि प्रभास, पुष्पा स्टार को झटका देने की तैयारी कर रह हैं। Salman Khan Hugged Vicky Kaushal After Controversy. हाल ही में सलमान खान का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उनके बॉडीगार्ड विक्की कौशल को साइड करते दिखे थे। इस विवाद के बाद एक और वीडियो सामने आया, जिसमें सलमान, विक्की को गले लगाते नजर आ रहे हैं। Brazilian Actor Jefferson Machado Found Dead Inside Wooden Box. सामने आ रही एक चौंका देने वाली खबर की मानें तो ब्राजीलियन एक्टर जेफरसन मचाडो, जो चार महीने से लापता थे, वह लकड़ी के एक बॉक्स में मृत पाए गए। Salman Khan Rejects Marriage Proposal. आईफा दो हज़ार तेईस में मीडिया से इंटरएक्शन करते वक्त सलमान खान को मैरिज प्रपोजल मिला। उन्होंने क्या जवाब दिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुना जा सकता है। Prabhas Salaar Teaser Attached With Adipurush. सामने आ रही एक रिपोर्ट की मानें तो साउथ एक्टर प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म सालार का टीजर फिल्म आदिपुरुष के साथ दिखाया जाएगा। सालार ने मेकर्स ने मूवी को हिट कराने नया पैंतरा आजमाया है। Anushka Sharma Cannes Debut. अनुष्का शर्मा आखिरकार कान्स फिल्म फेस्विटव दो हज़ार तेईस के रेड कारपेट पर नजर आईं। कान्स से उनका लुक वायरल हो रहा है, जिसकी काफी तारीफ भी हो रही है। Gadar Ek Prem Katha. सनी देओल की फिल्म गदर एक प्रेमकथा बाईस साल बाद दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म में सनी दुश्मनों से जमकर पंगा लेते नजर आएंगे। वैसे, आपको बता दें कि रियल लाइफ में भी उनके कम दुश्मन नहीं हैं।
एक सार्वजनिक संस्थान के रूप में, इसकी ट्यूशन फीस स्वायत्त प्रशासन द्वारा निर्धारित की जाती है, जो पूरे राज्य में सबसे कम है। यूएससी सैंटियागो डी कॉम्पोस्टेला और लुगो में स्थित दो ऐतिहासिक परिसरों में स्थापित है, दोनों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, और जीवन की उच्च गुणवत्ता के साथ, उनकी कीमतों, गतिशीलता की संभावनाओं या सांस्कृतिक और खेल सेवाओं की पेशकश के आधार पर। सैंटियागो एक अंतरराष्ट्रीय शहर है जो दुनिया भर के छात्रों को अध्ययन, शोध या भाषा सीखने के लिए आकर्षित करता है। यह एक छोटा, बहुत ही सुरक्षित शहर है जहाँ जीवन की अच्छी गुणवत्ता है और सांस्कृतिक और अवकाश गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला है। अंतर्राष्ट्रीयकरण नीति का उद्देश्य यूएससी को वैश्विक स्तर पर शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एजेंट के रूप में स्थापित करना है। यूएससी के पास एक गतिशीलता कार्यक्रम में भाग लेने में रुचि रखने वाले अपने स्वयं के छात्रों या अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सैंटियागो में उनके आगमन पर सलाह देने के लिए (नौकरशाही और शैक्षणिक रूप से) सूचना के अनुरोधों का जवाब देने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्वागत केंद्र (Centro de Bienvenida Internacional) है। यूएससी की कार्रवाइयाँ, विशेष रूप से, निम्नलिखित मार्गदर्शक पंक्तियों का जवाब देती हैंः - निर्णय लेने वाले स्थानों, मंचों और उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों में यूएससी की संस्थागत उपस्थिति को तेज करना और रणनीतिक गठजोड़ की औपचारिकता में इसकी भागीदारी। - अनुसंधान नेटवर्क में यूएससी की भागीदारी को बढ़ावा देना और यूरोपीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपने नेतृत्व को मजबूत करना, अनुसंधान और सहयोग परियोजनाओं के परिणामों को महत्व देना और उनका अधिक प्रसार करना। - अंतर्राष्ट्रीय छात्र गतिशीलता कार्यक्रमों, PDI और PAS की शक्ति बढ़ाएँ। - अन्य विश्वविद्यालयों की भागीदारी के साथ बहुभाषी अध्ययन कार्यक्रम विकसित करके शिक्षण प्रस्ताव को समृद्ध करें। - अंतर्राष्ट्रीय विज़िटिंग छात्रों और संकाय के लिए देखभाल प्रोटोकॉल का अनुकूलन करें। - प्रतिभा भर्ती और प्रतिधारण कार्यक्रमों के दायरे में सुधार करें। - यूएससी के अंतर्राष्ट्रीयकरण और वैश्विक प्रक्षेपण की पहल में विविधता लाने के लिए संसाधनों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषण पर कब्जा करना।
एक सार्वजनिक संस्थान के रूप में, इसकी ट्यूशन फीस स्वायत्त प्रशासन द्वारा निर्धारित की जाती है, जो पूरे राज्य में सबसे कम है। यूएससी सैंटियागो डी कॉम्पोस्टेला और लुगो में स्थित दो ऐतिहासिक परिसरों में स्थापित है, दोनों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, और जीवन की उच्च गुणवत्ता के साथ, उनकी कीमतों, गतिशीलता की संभावनाओं या सांस्कृतिक और खेल सेवाओं की पेशकश के आधार पर। सैंटियागो एक अंतरराष्ट्रीय शहर है जो दुनिया भर के छात्रों को अध्ययन, शोध या भाषा सीखने के लिए आकर्षित करता है। यह एक छोटा, बहुत ही सुरक्षित शहर है जहाँ जीवन की अच्छी गुणवत्ता है और सांस्कृतिक और अवकाश गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला है। अंतर्राष्ट्रीयकरण नीति का उद्देश्य यूएससी को वैश्विक स्तर पर शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एजेंट के रूप में स्थापित करना है। यूएससी के पास एक गतिशीलता कार्यक्रम में भाग लेने में रुचि रखने वाले अपने स्वयं के छात्रों या अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सैंटियागो में उनके आगमन पर सलाह देने के लिए सूचना के अनुरोधों का जवाब देने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्वागत केंद्र है। यूएससी की कार्रवाइयाँ, विशेष रूप से, निम्नलिखित मार्गदर्शक पंक्तियों का जवाब देती हैंः - निर्णय लेने वाले स्थानों, मंचों और उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों में यूएससी की संस्थागत उपस्थिति को तेज करना और रणनीतिक गठजोड़ की औपचारिकता में इसकी भागीदारी। - अनुसंधान नेटवर्क में यूएससी की भागीदारी को बढ़ावा देना और यूरोपीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपने नेतृत्व को मजबूत करना, अनुसंधान और सहयोग परियोजनाओं के परिणामों को महत्व देना और उनका अधिक प्रसार करना। - अंतर्राष्ट्रीय छात्र गतिशीलता कार्यक्रमों, PDI और PAS की शक्ति बढ़ाएँ। - अन्य विश्वविद्यालयों की भागीदारी के साथ बहुभाषी अध्ययन कार्यक्रम विकसित करके शिक्षण प्रस्ताव को समृद्ध करें। - अंतर्राष्ट्रीय विज़िटिंग छात्रों और संकाय के लिए देखभाल प्रोटोकॉल का अनुकूलन करें। - प्रतिभा भर्ती और प्रतिधारण कार्यक्रमों के दायरे में सुधार करें। - यूएससी के अंतर्राष्ट्रीयकरण और वैश्विक प्रक्षेपण की पहल में विविधता लाने के लिए संसाधनों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषण पर कब्जा करना।
राज एक्सप्रेस। नौ बार के चैम्पियन राफेल नडाल ने अमेरिका के रेली ओपेल्का को 6-4, 6-4 से हराकर शनिवार को 12वीं बार इटालियन ओपन के फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में उनका मुकाबला सर्बिया के नोवाक जोकोविच से होगा, जो उनका 52 वां मास्टर्स फाइनल भी होगा। अपना 500वां क्ले-कोर्ट मैच खेलते हुए, नडाल ने पहले सेट के चौथे गेम में ब्रेक पॉइंट हासिल किए और 1 घंटे 32 मिनट में जीत हासिल करने के लिए पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोंटे कार्लो और मैड्रिड में जल्दी बाहर हुए नडाल ने कहा, फाइनल में वापस आना मेरे आत्मविश्वास के लिए महत्वपूर्ण है। मैंने वही किया जो मुझे आज करना था, यह खेलना आसान या सुंदर मैच नहीं था। नडाल रविवार को जोकोविच के 36 एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब के रिकॉर्ड की बराबरी करना चाहते हैं। वह रोलैंड गैरोस (13), बार्सिलोना (12) और मोंटे कार्लो (11) के बाद चौथी बार एक ही इवेंट में 10 या अधिक खिताब जीतने का प्रयास कर रहा है। वहीं दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने बारिश के कारण स्थगित किए गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में शनिवार को स्टेफानोस सितसिपास को हराया। अंतिम दोनों सेटों में अपनी सर्विस गंवाकर वापसी करने वाले जोकोविच ने 4-6, 7-5, 7-5 की जीत के साथ लगातार आठवीं बार इटालियन ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई। गत चैंपियन जोकोविच यहां पांच बार खिताब जीत चुके हैं। जोकोविच को आराम का अधिक समय नहीं मिला और फाइनल में जगह बनाने के लिए वह शनिवार को ही स्थानीय दावेदार लॉरेंजो सोनेगो से भिड़ना पड़ा। इस सेमीफाइनल में जीत हासिल कर जोकोविच ने फाइनल में जगह पक्की कर ली है। फाइनल में नोवाक जोकोविच का मुकाबला राफेल नडाल से आज रविवार को होगा। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
राज एक्सप्रेस। नौ बार के चैम्पियन राफेल नडाल ने अमेरिका के रेली ओपेल्का को छः-चार, छः-चार से हराकर शनिवार को बारहवीं बार इटालियन ओपन के फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में उनका मुकाबला सर्बिया के नोवाक जोकोविच से होगा, जो उनका बावन वां मास्टर्स फाइनल भी होगा। अपना पाँच सौवां क्ले-कोर्ट मैच खेलते हुए, नडाल ने पहले सेट के चौथे गेम में ब्रेक पॉइंट हासिल किए और एक घंटाटे बत्तीस मिनट में जीत हासिल करने के लिए पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोंटे कार्लो और मैड्रिड में जल्दी बाहर हुए नडाल ने कहा, फाइनल में वापस आना मेरे आत्मविश्वास के लिए महत्वपूर्ण है। मैंने वही किया जो मुझे आज करना था, यह खेलना आसान या सुंदर मैच नहीं था। नडाल रविवार को जोकोविच के छत्तीस एटीपी मास्टर्स एक हज़ार खिताब के रिकॉर्ड की बराबरी करना चाहते हैं। वह रोलैंड गैरोस , बार्सिलोना और मोंटे कार्लो के बाद चौथी बार एक ही इवेंट में दस या अधिक खिताब जीतने का प्रयास कर रहा है। वहीं दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने बारिश के कारण स्थगित किए गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में शनिवार को स्टेफानोस सितसिपास को हराया। अंतिम दोनों सेटों में अपनी सर्विस गंवाकर वापसी करने वाले जोकोविच ने चार-छः, सात-पाँच, सात-पाँच की जीत के साथ लगातार आठवीं बार इटालियन ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई। गत चैंपियन जोकोविच यहां पांच बार खिताब जीत चुके हैं। जोकोविच को आराम का अधिक समय नहीं मिला और फाइनल में जगह बनाने के लिए वह शनिवार को ही स्थानीय दावेदार लॉरेंजो सोनेगो से भिड़ना पड़ा। इस सेमीफाइनल में जीत हासिल कर जोकोविच ने फाइनल में जगह पक्की कर ली है। फाइनल में नोवाक जोकोविच का मुकाबला राफेल नडाल से आज रविवार को होगा। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
1 थम यीशु मसीह के कारण उत्साहित हो, अर जो उसका प्यार थारे खात्तर सै, वो थमनै शान्ति देवै सै, क्यूँके पवित्र आत्मा कै गैल थारी संगति सै, अर मसीह की करुणा अर दया थारे पै सै। 2 तो मेरा यो आनन्द पूरा करो के एक मन रहों, अर एके प्यार, एके चित्त, अर एके मनसा राक्खों। 3 मतलबीपण या झूठ्ठी बड़ाई कै खात्तर कुछ ना करो, पर दीनता तै एक-दुसरे नै अपणे तै घणा आदर मान द्यो। 4 हरेक अपणे ए हित की न्ही, बल्के दुसरयां कै हित की भी चिंता करै। 5 जिसा मसीह यीशु का सुभाव था उसाए तेरा भी सुभाव हो। 6 यीशु, परमेसवर कै समान होकै भी होकै भी परमेसवर कै बराबर होण नै अपणे बस म्ह राक्खण की चीज ना समझा। 7 बल्के अपणा सारा सुर्गीय हक छोड़ दिया, अर दास का रूप धारण करते होए माणस की समानता म्ह होग्या। 8 अर माणस कै रूप म्ह जाहिर होकै अपणे-आपनै दीन करया, अर परमेसवर का आज्ञाकारी रहया अर याड़ै तक के अपराधियाँ की तरियां मौत, हाँ क्रूस की मौत भी सह ली। 9 इस कारण परमेसवर नै उस ताहीं ऊँच्ची उपाधि दी, अर उसनै वो नाम दिया जो सारे नाम्मां म्ह ऊँच्चा सै, 10 के जो सुर्ग म्ह अर धरती पै धरती कै नीच्चै सै, वे सारी यीशु कै नाम की बड़ाई करै, 11 अर परमेसवर पिता की महिमा के खात्तर हरेक इन्सान मान ले के यीशु मसीह ए प्रभु सै। 12 इस करकै हे मेरै प्यारे बिश्वासी भाईयो, जिस ढाळ थम सदा तै हुकम मानते आये सों, उसाए इब भी ना सिर्फ मेरै गैल रहंदे होए, पर खास करकै इब मेरै दूर रहण पै, भी परमेसवर तै डरदे अर कापते होए अपणे उद्धार के काम नै पूरा करो। 13 क्यूँके परमेसवर थारे म्ह काम करण लागरया सै, अर वोए थमनै अपणी इच्छा अर सामर्थ देवै सै, वो काम करो जो उसनै पसन्द सै। 14 सारे काम बिना कुड़कड़ाए अर बिना विवाद कै करया करो, 15 ताके थम परमेसवर की ऊलाद की तरियां इस दुनिया के बुरे अर मतलबी माणसां के बीच म्ह पवित्र अर बेदाग जीवन जी सकों। दुनिया के माणसां के बीच म्ह थम जीवन का वचन लिये होए, आसमान के तारां के समान चमकों। 16 जिब मसीह बोहड़ै तो मन्नै गर्व करण का कारण हो, ताके मेरी कोशिश अर मेरी मेहनत करणा बेकार ना होवै। 17 जिब मन्नै थारे ताहीं वचन सुणाया, तो थमनै यीशु मसीह पै बिश्वास करया, अर अपणा जीवन भी सेवा खात्तर प्रभु ताहीं बलिदान दिया। इस करकै मै प्रभु खात्तर मर भी जाऊँ, तोभी थारे साथ खुश अर आनन्दित सूं। 18 उस्से तरियां थम भी आनन्दित होओ, अर मेरै गैल आनन्द करो। 19 मन्नै प्रभु यीशु मसीह म्ह आस सै, के मै तीमुथियुस नै थारे धोरै तावळा-ए भेजूगाँ, ताके थारे हाल नै जाणकै, मै उत्साहित होऊँ। 20 क्यूँके मेरै धोरै तीमुथियुस के जिसा सुभाव आळा माणस और कोए न्ही सै जो शुद्ध मन तै थारी चिंता करै। 21 क्यूँके सारे अपणे स्वार्थ की खोज म्ह रहवै सै, परमेसवर के काम्मां खात्तर न्ही। 22 पर थम जाणो सों, के तीमुथियुस तो बिश्वास लायक अर आच्छे सुभाव का सै, जिसा बेट्टा पिता कै गेल्या रहवै सै, उसाए उसनै सुसमाचार कै फैलाण म्ह मेरै गैल मेहनत करी। 23 इस करकै मन्नै आस सै, कै ज्यो ही मन्नै बेरा लाग्गैगा के मेरा के हाल होगा, त्यों ही मै उसनै तावळी सी भेज देऊँगाँ। 24 अर मन्नै प्रभु म्ह भरोस्सा सै, के मै आप भी तावळा आऊँगा। 25 मन्नै इपफ्रुदीतुस नै थारे धोरै भेजणा जरूरी समझा, जो मेरा भाई अर सहकर्मी साथी योध्दा, अर जरूरतां म्ह मेरी मदद करण आळा थारी ओड़ तै भेज्जा गया दूत सै। 26 क्यूँके उसका मन थारे सारया म्ह लाग्या रह्या था, अर वो बेचैन रहवै था क्यूँके थमनै उसकी बीमारी का हाल सुण्या था। 27 पक्का वो बीमार तो होग्या था, उरै ताहीं वो मरण पै था, पर परमेसवर नै उस ताहीं मरण न्ही दिया, अर सिर्फ उस्से पै न्ही पर मेरै पै भी दया करी, ताके मन्नै दुख पै दुख ना हो। 28 इस करकै मन्नै उस ताहीं भेजण का और भी जत्न करया, के तू उसतै फेर मिलकै आनन्दित हो जा, अर मेरी भी चिन्ता घट जावै। 29 इस करकै तू प्रभु म्ह उसतै घणे आनन्द कै गैल मिलये, अर इसा का आदर करया करिये। 30 क्यूँके वो मसीह कै काम खात्तर अपणी जान जोखिम म्ह गेर कै मौत कै धोरै आ ग्या था। ताके वो मेरी मदद कर सकै जिस काम नै थम कर न्ही पाये, क्यूँके थम दूर थे।
एक थम यीशु मसीह के कारण उत्साहित हो, अर जो उसका प्यार थारे खात्तर सै, वो थमनै शान्ति देवै सै, क्यूँके पवित्र आत्मा कै गैल थारी संगति सै, अर मसीह की करुणा अर दया थारे पै सै। दो तो मेरा यो आनन्द पूरा करो के एक मन रहों, अर एके प्यार, एके चित्त, अर एके मनसा राक्खों। तीन मतलबीपण या झूठ्ठी बड़ाई कै खात्तर कुछ ना करो, पर दीनता तै एक-दुसरे नै अपणे तै घणा आदर मान द्यो। चार हरेक अपणे ए हित की न्ही, बल्के दुसरयां कै हित की भी चिंता करै। पाँच जिसा मसीह यीशु का सुभाव था उसाए तेरा भी सुभाव हो। छः यीशु, परमेसवर कै समान होकै भी होकै भी परमेसवर कै बराबर होण नै अपणे बस म्ह राक्खण की चीज ना समझा। सात बल्के अपणा सारा सुर्गीय हक छोड़ दिया, अर दास का रूप धारण करते होए माणस की समानता म्ह होग्या। आठ अर माणस कै रूप म्ह जाहिर होकै अपणे-आपनै दीन करया, अर परमेसवर का आज्ञाकारी रहया अर याड़ै तक के अपराधियाँ की तरियां मौत, हाँ क्रूस की मौत भी सह ली। नौ इस कारण परमेसवर नै उस ताहीं ऊँच्ची उपाधि दी, अर उसनै वो नाम दिया जो सारे नाम्मां म्ह ऊँच्चा सै, दस के जो सुर्ग म्ह अर धरती पै धरती कै नीच्चै सै, वे सारी यीशु कै नाम की बड़ाई करै, ग्यारह अर परमेसवर पिता की महिमा के खात्तर हरेक इन्सान मान ले के यीशु मसीह ए प्रभु सै। बारह इस करकै हे मेरै प्यारे बिश्वासी भाईयो, जिस ढाळ थम सदा तै हुकम मानते आये सों, उसाए इब भी ना सिर्फ मेरै गैल रहंदे होए, पर खास करकै इब मेरै दूर रहण पै, भी परमेसवर तै डरदे अर कापते होए अपणे उद्धार के काम नै पूरा करो। तेरह क्यूँके परमेसवर थारे म्ह काम करण लागरया सै, अर वोए थमनै अपणी इच्छा अर सामर्थ देवै सै, वो काम करो जो उसनै पसन्द सै। चौदह सारे काम बिना कुड़कड़ाए अर बिना विवाद कै करया करो, पंद्रह ताके थम परमेसवर की ऊलाद की तरियां इस दुनिया के बुरे अर मतलबी माणसां के बीच म्ह पवित्र अर बेदाग जीवन जी सकों। दुनिया के माणसां के बीच म्ह थम जीवन का वचन लिये होए, आसमान के तारां के समान चमकों। सोलह जिब मसीह बोहड़ै तो मन्नै गर्व करण का कारण हो, ताके मेरी कोशिश अर मेरी मेहनत करणा बेकार ना होवै। सत्रह जिब मन्नै थारे ताहीं वचन सुणाया, तो थमनै यीशु मसीह पै बिश्वास करया, अर अपणा जीवन भी सेवा खात्तर प्रभु ताहीं बलिदान दिया। इस करकै मै प्रभु खात्तर मर भी जाऊँ, तोभी थारे साथ खुश अर आनन्दित सूं। अट्ठारह उस्से तरियां थम भी आनन्दित होओ, अर मेरै गैल आनन्द करो। उन्नीस मन्नै प्रभु यीशु मसीह म्ह आस सै, के मै तीमुथियुस नै थारे धोरै तावळा-ए भेजूगाँ, ताके थारे हाल नै जाणकै, मै उत्साहित होऊँ। बीस क्यूँके मेरै धोरै तीमुथियुस के जिसा सुभाव आळा माणस और कोए न्ही सै जो शुद्ध मन तै थारी चिंता करै। इक्कीस क्यूँके सारे अपणे स्वार्थ की खोज म्ह रहवै सै, परमेसवर के काम्मां खात्तर न्ही। बाईस पर थम जाणो सों, के तीमुथियुस तो बिश्वास लायक अर आच्छे सुभाव का सै, जिसा बेट्टा पिता कै गेल्या रहवै सै, उसाए उसनै सुसमाचार कै फैलाण म्ह मेरै गैल मेहनत करी। तेईस इस करकै मन्नै आस सै, कै ज्यो ही मन्नै बेरा लाग्गैगा के मेरा के हाल होगा, त्यों ही मै उसनै तावळी सी भेज देऊँगाँ। चौबीस अर मन्नै प्रभु म्ह भरोस्सा सै, के मै आप भी तावळा आऊँगा। पच्चीस मन्नै इपफ्रुदीतुस नै थारे धोरै भेजणा जरूरी समझा, जो मेरा भाई अर सहकर्मी साथी योध्दा, अर जरूरतां म्ह मेरी मदद करण आळा थारी ओड़ तै भेज्जा गया दूत सै। छब्बीस क्यूँके उसका मन थारे सारया म्ह लाग्या रह्या था, अर वो बेचैन रहवै था क्यूँके थमनै उसकी बीमारी का हाल सुण्या था। सत्ताईस पक्का वो बीमार तो होग्या था, उरै ताहीं वो मरण पै था, पर परमेसवर नै उस ताहीं मरण न्ही दिया, अर सिर्फ उस्से पै न्ही पर मेरै पै भी दया करी, ताके मन्नै दुख पै दुख ना हो। अट्ठाईस इस करकै मन्नै उस ताहीं भेजण का और भी जत्न करया, के तू उसतै फेर मिलकै आनन्दित हो जा, अर मेरी भी चिन्ता घट जावै। उनतीस इस करकै तू प्रभु म्ह उसतै घणे आनन्द कै गैल मिलये, अर इसा का आदर करया करिये। तीस क्यूँके वो मसीह कै काम खात्तर अपणी जान जोखिम म्ह गेर कै मौत कै धोरै आ ग्या था। ताके वो मेरी मदद कर सकै जिस काम नै थम कर न्ही पाये, क्यूँके थम दूर थे।
जम्मू-कश्मीर के रामबन में सात न्यूज पोर्टल को बैन किया गया है। इन न्यूज पोर्टल पर आरोप है कि ये सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे थे। रामबन जिला प्रशासन ने फर्जी खबरें फैलाने और सरकार की छवि खराब करने के आरोप में इन समाचार पोर्टलों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया है। जिला प्रशासन ने जिन न्यूज पोर्टल के संचालन पर प्रतिबंध लगाया है उनमें संगलदान (यूनाईटेड उर्दू न्यूज), जुल्फिकार भट, लतीफ रेजा, चरणजीत बाली उखेरल (वीडी न्यूज), संगलधन (करंट न्यूज ऑफ इंडिया), मुबाशीर नजीर उखेरल (न्यूज वर्स इंडिया), सज्जाद रुनियाल और मालिगम शामिल हैं। इनके अलावा, पोगल (एनबीआई), राजगढ़ के परवेज भट और जीएचआरटी न्यूज का संचालन करने वाले एक शख्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बताया गया कि रामबन के उपायुक्त मस्सारतुल इस्लाम ने कहा कि यह पहले चरण की कार्रवाई की गई है और अगले चरण में जो अन्य पोर्टल सर्टिफिकेशन पेश करने में विफल रहते हैं तो उनका संचालन भी बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने जारी किए गए आदेशों को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उपायुक्त ने बताया कि विभिन्न नयूज पोर्टलों से जुड़े रामबन के पत्रकारों को जिला सूचना अधिकारी के पास अपना आईडी कार्ड पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इनमें से कई पोर्टलों से जुड़े 7 लोग रजिस्ट्रेशन सहित अपने अन्य दस्तावेज पेश करने में विफल रहे। इन सभी लोगों को अपने पोर्टलों का संचालन जारी रखने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिला प्रशासन की तरफ से जारी किए गए आदेश में कहा गया कि फेक न्यूज फैलाने और सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश करने वाले अवैध न्यूज पोर्टलों के संचालन पर रोक लगाकर रामबन में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। आदेश में यह भी कहा गया कि इस बात की आशंका है कि अगर फर्जी खबरें फैलाने वाले इन न्यूज पोर्टल का संचालन अनियंत्रित रहा तो, जिले का शांतिपूर्ण माहौल भंग हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के रामबन में सात न्यूज पोर्टल को बैन किया गया है। इन न्यूज पोर्टल पर आरोप है कि ये सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे थे। रामबन जिला प्रशासन ने फर्जी खबरें फैलाने और सरकार की छवि खराब करने के आरोप में इन समाचार पोर्टलों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया है। जिला प्रशासन ने जिन न्यूज पोर्टल के संचालन पर प्रतिबंध लगाया है उनमें संगलदान , जुल्फिकार भट, लतीफ रेजा, चरणजीत बाली उखेरल , संगलधन , मुबाशीर नजीर उखेरल , सज्जाद रुनियाल और मालिगम शामिल हैं। इनके अलावा, पोगल , राजगढ़ के परवेज भट और जीएचआरटी न्यूज का संचालन करने वाले एक शख्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बताया गया कि रामबन के उपायुक्त मस्सारतुल इस्लाम ने कहा कि यह पहले चरण की कार्रवाई की गई है और अगले चरण में जो अन्य पोर्टल सर्टिफिकेशन पेश करने में विफल रहते हैं तो उनका संचालन भी बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने जारी किए गए आदेशों को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उपायुक्त ने बताया कि विभिन्न नयूज पोर्टलों से जुड़े रामबन के पत्रकारों को जिला सूचना अधिकारी के पास अपना आईडी कार्ड पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इनमें से कई पोर्टलों से जुड़े सात लोग रजिस्ट्रेशन सहित अपने अन्य दस्तावेज पेश करने में विफल रहे। इन सभी लोगों को अपने पोर्टलों का संचालन जारी रखने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिला प्रशासन की तरफ से जारी किए गए आदेश में कहा गया कि फेक न्यूज फैलाने और सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश करने वाले अवैध न्यूज पोर्टलों के संचालन पर रोक लगाकर रामबन में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। आदेश में यह भी कहा गया कि इस बात की आशंका है कि अगर फर्जी खबरें फैलाने वाले इन न्यूज पोर्टल का संचालन अनियंत्रित रहा तो, जिले का शांतिपूर्ण माहौल भंग हो जाएगा।
Agriculture Reforms: तीस साल पहले हुए आर्थिक सुधारों में कृषि की अनदेखी हुई थी। मोदी सरकार ने नए कृषि कानूनों के जरिये उस भूल को सुधारने का काम किया है। editorialSat, 19 Dec 2020 11:59 AM (IST) जनपद पंचायत लखनादौन की ग्राम पंचायत घूरवारा में पंचायत के ग्रामीण किसान बिल की जानकारी के लिए लालायित थे, लेकिन ग्राम पंचायत के प्रभारी सचिव टीकाराम झारिया ने प्रधानमंत्री के संदेश को सुनाना उचित नहीं समझा। इसके कारण गां. . . madhya pradeshFri, 18 Dec 2020 06:45 PM (IST) अध्यक्ष रोहित गुप्ता ने कहा कि किसान पहले ही परेशान था, लेकिन सरकार नया बिल लागू करके उनके अधिकारों को छीनना चाहती है। madhya pradeshFri, 18 Dec 2020 12:50 PM (IST) मस्तूरी(नईदुनिया न्यूज)। भाजपा के एक दिवसीय प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की किसान बिल का समर्थन करते हुए प्रदेश सरकार की हर मोर्चे पर फेल बताया। डा. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा केंद्र सरकार की योजना से कृषकों को. . . chhattisgarhThu, 17 Dec 2020 12:17 AM (IST) केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए किसान बिल में संशोधन और स्थानीय मांगों को लेकर मंगलवार को किसानों ने छैगांवमाखन में हाइवे पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान चक्काजाम की स्थिति भी बनी। madhya pradeshTue, 15 Dec 2020 07:25 PM (IST) दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन में विपक्ष द्वारा किसानों को भड़काया जा रहा है। किसान बिल पूरी तरह से किसानों के पक्ष में है। किसान आंदोलन में बाहरी तत्वों का भी हाथ है, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है। यह बात गुना के सां. . . madhya pradeshTue, 15 Dec 2020 10:02 AM (IST) हमारी आपको सलाह है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करें। madhya pradeshMon, 14 Dec 2020 07:39 AM (IST) ये तीनों कानून यदि उचित रूप से लागू हुए तो इनमें भारतीय कृषि और किसानों की कायापलट करने की पूरी क्षमता है। editorialSun, 13 Dec 2020 01:09 PM (IST) बीना (नवदुनिया न्यूज)। किसान कृषि सुधार बिल के नफा-नुकसान से पूरी तरह अनजान हैं। अलग-अलग गांव के किसानों से बिल को लेकर चर्चा करने पर पता चला कि ज्यादातर किसान बिल से पूरी तरह अनजान हैं। कई किसानों को सुनी सुनाई बात बता. . . madhya pradeshWed, 09 Dec 2020 08:45 PM (IST) किसान बिल के विरोध में मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों द्वारा कराए गए भारत बंद का असर राजधानी में मिला जुला रहा। कुछ क्षेत्रों में स्वस्फूर्त ही दुकानें बंद रही तो जबरिया। chhattisgarhTue, 08 Dec 2020 07:36 PM (IST)
Agriculture Reforms: तीस साल पहले हुए आर्थिक सुधारों में कृषि की अनदेखी हुई थी। मोदी सरकार ने नए कृषि कानूनों के जरिये उस भूल को सुधारने का काम किया है। editorialSat, उन्नीस दिसंबर दो हज़ार बीस ग्यारह:उनसठ AM जनपद पंचायत लखनादौन की ग्राम पंचायत घूरवारा में पंचायत के ग्रामीण किसान बिल की जानकारी के लिए लालायित थे, लेकिन ग्राम पंचायत के प्रभारी सचिव टीकाराम झारिया ने प्रधानमंत्री के संदेश को सुनाना उचित नहीं समझा। इसके कारण गां. . . madhya pradeshFri, अट्ठारह दिसंबर दो हज़ार बीस छः:पैंतालीस PM अध्यक्ष रोहित गुप्ता ने कहा कि किसान पहले ही परेशान था, लेकिन सरकार नया बिल लागू करके उनके अधिकारों को छीनना चाहती है। madhya pradeshFri, अट्ठारह दिसंबर दो हज़ार बीस बारह:पचास PM मस्तूरी। भाजपा के एक दिवसीय प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की किसान बिल का समर्थन करते हुए प्रदेश सरकार की हर मोर्चे पर फेल बताया। डा. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा केंद्र सरकार की योजना से कृषकों को. . . chhattisgarhThu, सत्रह दिसंबर दो हज़ार बीस बारह:सत्रह AM केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए किसान बिल में संशोधन और स्थानीय मांगों को लेकर मंगलवार को किसानों ने छैगांवमाखन में हाइवे पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान चक्काजाम की स्थिति भी बनी। madhya pradeshTue, पंद्रह दिसंबर दो हज़ार बीस सात:पच्चीस PM दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन में विपक्ष द्वारा किसानों को भड़काया जा रहा है। किसान बिल पूरी तरह से किसानों के पक्ष में है। किसान आंदोलन में बाहरी तत्वों का भी हाथ है, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है। यह बात गुना के सां. . . madhya pradeshTue, पंद्रह दिसंबर दो हज़ार बीस दस:दो AM हमारी आपको सलाह है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करें। madhya pradeshMon, चौदह दिसंबर दो हज़ार बीस सात:उनतालीस AM ये तीनों कानून यदि उचित रूप से लागू हुए तो इनमें भारतीय कृषि और किसानों की कायापलट करने की पूरी क्षमता है। editorialSun, तेरह दिसंबर दो हज़ार बीस एक:नौ PM बीना । किसान कृषि सुधार बिल के नफा-नुकसान से पूरी तरह अनजान हैं। अलग-अलग गांव के किसानों से बिल को लेकर चर्चा करने पर पता चला कि ज्यादातर किसान बिल से पूरी तरह अनजान हैं। कई किसानों को सुनी सुनाई बात बता. . . madhya pradeshWed, नौ दिसंबर दो हज़ार बीस आठ:पैंतालीस PM किसान बिल के विरोध में मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों द्वारा कराए गए भारत बंद का असर राजधानी में मिला जुला रहा। कुछ क्षेत्रों में स्वस्फूर्त ही दुकानें बंद रही तो जबरिया। chhattisgarhTue, आठ दिसंबर दो हज़ार बीस सात:छत्तीस PM
Phone Sale : स्मार्टफोन कंपनी रियलमी (Realme) का स्मार्टफोन 7 प्रो (7 Pro) आज खरीदने का मौका है। इस फोन की सेल (Sale) ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ्लिपकार्ट (Flipkart) और कंपनी की वेबसाइट रियलमी. कॉम (Realme. com) पर दोपहर 12 बजे होगी।
Phone Sale : स्मार्टफोन कंपनी रियलमी का स्मार्टफोन सात प्रो आज खरीदने का मौका है। इस फोन की सेल ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ्लिपकार्ट और कंपनी की वेबसाइट रियलमी. कॉम पर दोपहर बारह बजे होगी।
16 वीं शताब्दी में, मास्को के बाहरी इलाके में एक छोटा सा व्यक्ति दिखाई दिया।गाँव के माली। नाम से देखते हुए, हम यह मान सकते हैं कि लोगों ने मुख्य आबादी का गठन किस पेशे में किया है। वहां रहने वाले लोगों ने शाही उद्यानों की देखभाल की और पार्क क्षेत्रों की सुंदरता और आराम के लिए सब कुछ किया। ऐतिहासिक अतीत में "माली" धीरे-धीरे गांव में बदलाव आयाआँखें। यहां उन्होंने फूल लगाए, विश्राम के लिए सुसज्जित स्थान और पेड़ पौधे लगाए। यह योजना बनाई गई थी कि कुलीन सज्जनों के लिए जगह होगी। लेकिन धीरे-धीरे इस जगह में पेड़ उगने लगे और फल आने लगे। XVIII सदी में, पार्क "गार्डनर्स" अधिक संख्या में था1000 विभिन्न फलों के पेड़। यह स्थान कैथरीन द ग्रेट, पीटर II, अन्ना इयोनोव्ना के लिए पसंदीदा बन गया। बागों के अलावा, मवेशियों को पालने के लिए पार्क "गार्डनर्स" का उपयोग किया जाता था। इसके अलावा, लोगों ने बगीचों को तोड़ दिया और सब्जियां लगाईं। आधुनिक पुरातात्विक के समय मेंपार्क में अनुसंधान ओक बैरल पाए गए। जैसा कि इतिहासकारों का कहना है, कई स्थानीय लोग पहले से ही सकरारूट में लगे हुए थे। जाम के रूप में सभी तैयारियां, सॉकर्राट शाही मेज पर आपूर्ति की गईं। बहुत बिक्री हुई। पार्क "गार्डनर्स", जैसे कि यह प्रतिनिधित्व करता हैआधुनिक लोग, 1989 में दिखाई दिए। इसके आधिकारिक उद्घाटन के बाद, पार्क स्थानीय आबादी के साथ बहुत लोकप्रिय हो गया है और कई पर्यटकों को आकर्षित करता है। मॉस्को का दक्षिणी प्रशासनिक जिला आधुनिक पार्क "गार्डनर्स" का क्षेत्र है। अब वह अद्वितीय कोलोमना रिजर्व का हिस्सा है। पार्क में दो हजार साल मेंघुमावदार रास्ते और रास्ते दिखाई दिए, एक पत्थर की फूल की दीवार जो रीगा की पुरानी सड़कों से मिलती जुलती है। यह तथाकथित रीगा पार्क है, जो 2014 के बाद से कुज़्मिंस्की फ़ॉरेस्ट पार्क के अंतर्गत आता है। बच्चों के साथ समय बिताना बहुत दिलचस्प है। बच्चों के लिए, उन्होंने आरामदायक और दिलचस्प खेल के मैदानों की व्यवस्था की, जहां हमेशा बहुत सारे बच्चे होते हैं। इसके अलावा, वयस्क केबल कार पर जाकर या खेल के मैदानों पर वॉलीबॉल खेलकर उपयोगी काम कर सकते हैं। लेकिन, जैसा कि अक्सर आधुनिक समय में होता है, पार्कइसके आसपास के निरंतर विकास के कारण क्षेत्र को कम करने की धमकी देता है। जनता "गार्डनर्स" की उपस्थिति को बनाए रखने और सुधारने की कोशिश कर रही है और इसकी भव्यता को नष्ट करने की अनुमति नहीं है। 2014 में, पार्क को "गार्डनर्स" को फिर से संगठित किया गया। और सितंबर में, मेयर एस। सोबिनिन की भागीदारी के साथ एक भव्य उद्घाटन किया गया था। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए जगह सुसज्जित थी।आगंतुकों। उदाहरण के लिए, पक्का मार्ग जहाँ लोग वास्तव में चलते हैं। अब घर के रास्तों पर न जाएं। सबसे लोकप्रिय मार्गों पर विचार किया और उन्हें समृद्ध किया। पार्क "माली" हमेशा से इसके लिए प्रसिद्ध रहा हैफूल उद्यान, लेकिन अब कई नए हैं, परिदृश्य डिजाइन के सभी नियमों से टूट गए हैं। एक अनुभवी डिजाइनर अन्ना एंड्रीवा ने फूलों से सुंदरता के निर्माण का नेतृत्व किया। आज पार्क "गार्डनर्स", जिसका एक फोटो नीचे प्रस्तुत किया गया है, को देखते हुए, आप सभी आधुनिक विचारों को लैंडस्केप डिजाइन में उपयोग कर सकते हैं। पूरे पार्क में आधुनिक एलईडी लाइटिंग स्थापित की गई है। अब, प्रकाश के सुंदर दृश्य और तेजस्वी नाटक के अलावा, आप बिजली की लागत को कम कर सकते हैं। बाहरी गतिविधियों और खेल के प्रेमियों के लिएकई अलग-अलग स्थानों के लिए व्यवसाय प्रदान किया गया। तो, पार्क में सभी आधुनिक मानकों और पिंग-पोंग प्लेटफ़ॉर्म पर एक छायादार अदालत है। बास्केटबॉल और वॉलीबॉल प्रशंसक भी ध्यान से वंचित नहीं हैं। उनके लिए विशेष सार्वभौमिक मंच हैं। यहां तक कि फुटबॉल खिलाड़ियों को अपने पसंदीदा खेल के लिए जगह मिलेगी। उन लोगों के लिए जो चुपचाप अधिक खर्च करना पसंद करते हैंसमय, शतरंज क्लब खोलें। कुत्ते प्रेमियों के बारे में भी मत भूलना। पार्क के बाहरी इलाके में कुत्ते के प्रजनकों से मिलने और उनके पालतू जानवरों के घूमने के लिए एक विशेष स्थान है। यह ध्यान में रखते हुए कि पार्क बच्चों के साथ घूमने का बहुत शौक है, उन्होंने तीन खेल के मैदान स्थापित किए। इसके अलावा, किसी भी उम्र के बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार कुछ मिलेगा। साइटें विभिन्न आयु के लिए डिज़ाइन की गई हैं। स्केट पार्क के उद्घाटन की युवाओं ने सराहना की। स्केटबोर्डिंग के प्रेमियों के लिए, यह एक बड़ी बात थी। इसके अलावा, स्केटरिस्ट निर्मित साइट को रूस में सर्वश्रेष्ठ कहते हैं। नए पार्क का मुख्य फोकस रीगा गार्डन का पुनर्निर्माण था। उन्होंने कई सजावटी तत्व स्थापित किए, जैसे मेहराब, छाया पर्दे, जिसके माध्यम से प्रकाश को धीरे से फैलाया जाता है। रास्तों के साथ धीरे-धीरे चलते हुए, आप रीगा सड़क के नाम देख सकते हैं। और यहाँ स्थापित बेंच और एलईडी लाइट्स किसी भी समय वॉक को और भी सुखद बना देंगी। - सार्वजनिक परिवहन। काशीर्स्काया स्टेशन पर पहुंचने के दौरान, आपको गुजरना होगादक्षिण की ओर, एंड्रोपोव एवेन्यू के साथ लगभग 150 मीटर। यदि आप उत्तर से आ रहे हैं, तो आपको कोलोमेन्सकोय संग्रहालय में उतरना चाहिए। यह कई मिनीबस और ट्रॉली को रोकता है। - कार जब आप पार्क "माली" के लिए अपनी कार चलाते हैं, तो नाविक पर पता निकटतम इमारत को निर्धारित करता हैः एंड्रोपोव एवेन्यू, 58 ए पार्क के पास कई पार्किंग स्थलों से सुसज्जित है।
सोलह वीं शताब्दी में, मास्को के बाहरी इलाके में एक छोटा सा व्यक्ति दिखाई दिया।गाँव के माली। नाम से देखते हुए, हम यह मान सकते हैं कि लोगों ने मुख्य आबादी का गठन किस पेशे में किया है। वहां रहने वाले लोगों ने शाही उद्यानों की देखभाल की और पार्क क्षेत्रों की सुंदरता और आराम के लिए सब कुछ किया। ऐतिहासिक अतीत में "माली" धीरे-धीरे गांव में बदलाव आयाआँखें। यहां उन्होंने फूल लगाए, विश्राम के लिए सुसज्जित स्थान और पेड़ पौधे लगाए। यह योजना बनाई गई थी कि कुलीन सज्जनों के लिए जगह होगी। लेकिन धीरे-धीरे इस जगह में पेड़ उगने लगे और फल आने लगे। XVIII सदी में, पार्क "गार्डनर्स" अधिक संख्या में थाएक हज़ार विभिन्न फलों के पेड़। यह स्थान कैथरीन द ग्रेट, पीटर II, अन्ना इयोनोव्ना के लिए पसंदीदा बन गया। बागों के अलावा, मवेशियों को पालने के लिए पार्क "गार्डनर्स" का उपयोग किया जाता था। इसके अलावा, लोगों ने बगीचों को तोड़ दिया और सब्जियां लगाईं। आधुनिक पुरातात्विक के समय मेंपार्क में अनुसंधान ओक बैरल पाए गए। जैसा कि इतिहासकारों का कहना है, कई स्थानीय लोग पहले से ही सकरारूट में लगे हुए थे। जाम के रूप में सभी तैयारियां, सॉकर्राट शाही मेज पर आपूर्ति की गईं। बहुत बिक्री हुई। पार्क "गार्डनर्स", जैसे कि यह प्रतिनिधित्व करता हैआधुनिक लोग, एक हज़ार नौ सौ नवासी में दिखाई दिए। इसके आधिकारिक उद्घाटन के बाद, पार्क स्थानीय आबादी के साथ बहुत लोकप्रिय हो गया है और कई पर्यटकों को आकर्षित करता है। मॉस्को का दक्षिणी प्रशासनिक जिला आधुनिक पार्क "गार्डनर्स" का क्षेत्र है। अब वह अद्वितीय कोलोमना रिजर्व का हिस्सा है। पार्क में दो हजार साल मेंघुमावदार रास्ते और रास्ते दिखाई दिए, एक पत्थर की फूल की दीवार जो रीगा की पुरानी सड़कों से मिलती जुलती है। यह तथाकथित रीगा पार्क है, जो दो हज़ार चौदह के बाद से कुज़्मिंस्की फ़ॉरेस्ट पार्क के अंतर्गत आता है। बच्चों के साथ समय बिताना बहुत दिलचस्प है। बच्चों के लिए, उन्होंने आरामदायक और दिलचस्प खेल के मैदानों की व्यवस्था की, जहां हमेशा बहुत सारे बच्चे होते हैं। इसके अलावा, वयस्क केबल कार पर जाकर या खेल के मैदानों पर वॉलीबॉल खेलकर उपयोगी काम कर सकते हैं। लेकिन, जैसा कि अक्सर आधुनिक समय में होता है, पार्कइसके आसपास के निरंतर विकास के कारण क्षेत्र को कम करने की धमकी देता है। जनता "गार्डनर्स" की उपस्थिति को बनाए रखने और सुधारने की कोशिश कर रही है और इसकी भव्यता को नष्ट करने की अनुमति नहीं है। दो हज़ार चौदह में, पार्क को "गार्डनर्स" को फिर से संगठित किया गया। और सितंबर में, मेयर एस। सोबिनिन की भागीदारी के साथ एक भव्य उद्घाटन किया गया था। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए जगह सुसज्जित थी।आगंतुकों। उदाहरण के लिए, पक्का मार्ग जहाँ लोग वास्तव में चलते हैं। अब घर के रास्तों पर न जाएं। सबसे लोकप्रिय मार्गों पर विचार किया और उन्हें समृद्ध किया। पार्क "माली" हमेशा से इसके लिए प्रसिद्ध रहा हैफूल उद्यान, लेकिन अब कई नए हैं, परिदृश्य डिजाइन के सभी नियमों से टूट गए हैं। एक अनुभवी डिजाइनर अन्ना एंड्रीवा ने फूलों से सुंदरता के निर्माण का नेतृत्व किया। आज पार्क "गार्डनर्स", जिसका एक फोटो नीचे प्रस्तुत किया गया है, को देखते हुए, आप सभी आधुनिक विचारों को लैंडस्केप डिजाइन में उपयोग कर सकते हैं। पूरे पार्क में आधुनिक एलईडी लाइटिंग स्थापित की गई है। अब, प्रकाश के सुंदर दृश्य और तेजस्वी नाटक के अलावा, आप बिजली की लागत को कम कर सकते हैं। बाहरी गतिविधियों और खेल के प्रेमियों के लिएकई अलग-अलग स्थानों के लिए व्यवसाय प्रदान किया गया। तो, पार्क में सभी आधुनिक मानकों और पिंग-पोंग प्लेटफ़ॉर्म पर एक छायादार अदालत है। बास्केटबॉल और वॉलीबॉल प्रशंसक भी ध्यान से वंचित नहीं हैं। उनके लिए विशेष सार्वभौमिक मंच हैं। यहां तक कि फुटबॉल खिलाड़ियों को अपने पसंदीदा खेल के लिए जगह मिलेगी। उन लोगों के लिए जो चुपचाप अधिक खर्च करना पसंद करते हैंसमय, शतरंज क्लब खोलें। कुत्ते प्रेमियों के बारे में भी मत भूलना। पार्क के बाहरी इलाके में कुत्ते के प्रजनकों से मिलने और उनके पालतू जानवरों के घूमने के लिए एक विशेष स्थान है। यह ध्यान में रखते हुए कि पार्क बच्चों के साथ घूमने का बहुत शौक है, उन्होंने तीन खेल के मैदान स्थापित किए। इसके अलावा, किसी भी उम्र के बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार कुछ मिलेगा। साइटें विभिन्न आयु के लिए डिज़ाइन की गई हैं। स्केट पार्क के उद्घाटन की युवाओं ने सराहना की। स्केटबोर्डिंग के प्रेमियों के लिए, यह एक बड़ी बात थी। इसके अलावा, स्केटरिस्ट निर्मित साइट को रूस में सर्वश्रेष्ठ कहते हैं। नए पार्क का मुख्य फोकस रीगा गार्डन का पुनर्निर्माण था। उन्होंने कई सजावटी तत्व स्थापित किए, जैसे मेहराब, छाया पर्दे, जिसके माध्यम से प्रकाश को धीरे से फैलाया जाता है। रास्तों के साथ धीरे-धीरे चलते हुए, आप रीगा सड़क के नाम देख सकते हैं। और यहाँ स्थापित बेंच और एलईडी लाइट्स किसी भी समय वॉक को और भी सुखद बना देंगी। - सार्वजनिक परिवहन। काशीर्स्काया स्टेशन पर पहुंचने के दौरान, आपको गुजरना होगादक्षिण की ओर, एंड्रोपोव एवेन्यू के साथ लगभग एक सौ पचास मीटर। यदि आप उत्तर से आ रहे हैं, तो आपको कोलोमेन्सकोय संग्रहालय में उतरना चाहिए। यह कई मिनीबस और ट्रॉली को रोकता है। - कार जब आप पार्क "माली" के लिए अपनी कार चलाते हैं, तो नाविक पर पता निकटतम इमारत को निर्धारित करता हैः एंड्रोपोव एवेन्यू, अट्ठावन ए पार्क के पास कई पार्किंग स्थलों से सुसज्जित है।
खूंटी प्रचार । गड्ढे में ऊपला भर वीच में सरवला (सकोरा) घर के ऊपर ऊपला घर के आंच दे बंगेश्वर भस्म हो सुस्तीवाले को देवै । मल कबजियत गर्मी बादी खेन स्वास दम की दवा सनाय के पान सुधे हुए तोले ८ आवले तोला १ इन दोनों को पानी डाल पीस के झारीबेर की बराबर गोली बनावै पीछे उसे खाय कास, स्वास, दम, खेन को आराम हो पूढी मजार । सनाय तोल ४ गुलाब के फूल मासा ६ सहत तोला ४ मिश्री तोले ३ रात्रि को सनाय भि. जोय दे पीछे मिश्री और सहत मिलाय पानी पानभर पीयें जुठाय लगे गर्मी छटे घाटीमिटे सटाई तेल न साय इसको चूरन में भी घर्तते है पथप न बिगडे पेट के सब रोग जांप आराम हो । कर्णमूल अटीठ और भगंदर की दवा कर्णमूल अदीद भगंदर यानासूर छोप तो छौगारी लाल के फूल तोले २ मिश्री तोला १ काली मिरन नग ११ घोट के तो ला राम हो छोगारी के पान फूल पीस और उस में तेंदू के घोजन का आटा और घोड़ोसी मि. सरी मिलाके फोडा के लगाये आराम होता
खूंटी प्रचार । गड्ढे में ऊपला भर वीच में सरवला घर के ऊपर ऊपला घर के आंच दे बंगेश्वर भस्म हो सुस्तीवाले को देवै । मल कबजियत गर्मी बादी खेन स्वास दम की दवा सनाय के पान सुधे हुए तोले आठ आवले तोला एक इन दोनों को पानी डाल पीस के झारीबेर की बराबर गोली बनावै पीछे उसे खाय कास, स्वास, दम, खेन को आराम हो पूढी मजार । सनाय तोल चार गुलाब के फूल मासा छः सहत तोला चार मिश्री तोले तीन रात्रि को सनाय भि. जोय दे पीछे मिश्री और सहत मिलाय पानी पानभर पीयें जुठाय लगे गर्मी छटे घाटीमिटे सटाई तेल न साय इसको चूरन में भी घर्तते है पथप न बिगडे पेट के सब रोग जांप आराम हो । कर्णमूल अटीठ और भगंदर की दवा कर्णमूल अदीद भगंदर यानासूर छोप तो छौगारी लाल के फूल तोले दो मिश्री तोला एक काली मिरन नग ग्यारह घोट के तो ला राम हो छोगारी के पान फूल पीस और उस में तेंदू के घोजन का आटा और घोड़ोसी मि. सरी मिलाके फोडा के लगाये आराम होता
रूपियो मिल्यां अठन्नी बाद ( ज्यादा मिलने पर थोडे को छोड़ देना) रूपियो ही मां, रूपियो ही बाप, रूपियै बिना बड़ो सन्ताप । ( पैसे की माया) रेशम है पोतड़िया मै पळ्योड्या । ( सम्पन्नता मे पले) रोग अर दुश्मन नै उठते ही दबा देवणो । (रोग का इलाज व शत्रुता का अन्त शीघ्र कर देना ही उचित है ) रोग रो मूल धांसी / खांसी लड़ाई से मूल हांसी । ( ज्यादा हसी मजाक अच्छी नहीं) रोटी खावै आपरी, बात करै पराई । (दूसरो की बातो मे रूचि रखना) रोटी देवै, खावण कोनी देवै । मांचो देवै, सोवण कोनी देवै । कूटै पण रोवण कोनी देवै ॥ ( दबाब में रखना) रोंवतो जावै - मूवां/मट्योड़ा रा समाचार लावै । (मन मे सशय रखकर शुरू करने वाला काम कभी सफल नहीं होता है) रोयां राज कोनी मिलै । ( दीनता दिखाने से लाभ नहीं है) : कैयोड़ी जचे मौके पर रोवो केनै हो ? -क- खसमां नै । खसम जीवता है नी? -क- जणै ही रोवां, मर जांवता तो जातो ही कर लेवता । ( पति से परेशान ) लड़ाई मै किसा लाडू बटै ? (लडाई मे लाभ नही होता) लड़तां लारै भाजतां आगे, बात्यां घणी बणावै । एसो सखी मेरो सायबो, क्षेम कुशल घर आवै । ( कायर सैनिक लडाई में पीछे रहता है व भागने में आगे, उसके जीवन की चिन्ता नहीं होती) लड़तां री मां दो हुवै । ( झगडे मे सगे भाई भी गरिमा खो देते है ) लंका कदै ही लूंटीजी (अब क्या बचा है) लंका मै तूं ई दाळदी रहयो । ( सबके लाभ उठाने के बावजूद कोई वचित रह जाये) लम्बा पीरा - भाई भजैयां रा । (भाई के अच्छा व्यवहार रखने पर पीहर का सुख रहता है) लाखां पर लेखो, करोड़ां पर कलम । ( बहुत अमीर घराना ) लाखां लोहां चम्मड़ां, पैली किसा बखाण । बहू बछेरा डीकरां, निवड़ियां परमाण ।। (लाख, लोहा, चमडा, बहू, गाय का बछड़ा और पुत्र कैसे निकलते हैं, बाद मे ही पता चलता है) लाग्यो तो तीर, नहीं तो तुक्को ई सही । (सफल हो गये तो ठीक अन्यथा नहीं ही सही) लाडू खावै हरकूड़ी, दाम चुकावै शिवनाथो । (कोई चुकाये व कोई मजा करे ) लाप्ठै रो डोको गाण्ड फाड़ देवै । ( बड़े आदमी की बेरूखी नुकसानप्रद होती है) लात्यां रा भूत बात्यां स्यूं कोनी मानै । ( कुछ व्यक्ति बिना प्रताडना नहीं मानते) लाम्बा तिलक मधरी बाणी, दगैबाज री आ ई निसाणी। (धोखेबाज सदाचारी होने का दिखावा करते हैं व मीठा बोलते हैं) लालच गळो कटावै । ( लालच मरवा देता है) लालच बुरी बलाय, खीर मै लूण मिलाय। (लोभ मे आदमी अन्धा हो जाता है) लाल बही छप्पन रै पानै, सेठजी रोवै छानै छाने । (खाते मे छप्पन पेज पर किसी का खाता लगाना शुभ नहीं माना जाता था) लाळ लाग्योड़ी छुटै कोनी । ( आदत नहीं छूटती ) लिखे खुदा - पढ़े मूसा । (खराब लिखावट) लिख्यो लिख्यो हुवै । (किस्मत मे लिखा ही होता है)
रूपियो मिल्यां अठन्नी बाद रूपियो ही मां, रूपियो ही बाप, रूपियै बिना बड़ो सन्ताप । रेशम है पोतड़िया मै पळ्योड्या । रोग अर दुश्मन नै उठते ही दबा देवणो । रोग रो मूल धांसी / खांसी लड़ाई से मूल हांसी । रोटी खावै आपरी, बात करै पराई । रोटी देवै, खावण कोनी देवै । मांचो देवै, सोवण कोनी देवै । कूटै पण रोवण कोनी देवै ॥ रोंवतो जावै - मूवां/मट्योड़ा रा समाचार लावै । रोयां राज कोनी मिलै । : कैयोड़ी जचे मौके पर रोवो केनै हो ? -क- खसमां नै । खसम जीवता है नी? -क- जणै ही रोवां, मर जांवता तो जातो ही कर लेवता । लड़ाई मै किसा लाडू बटै ? लड़तां लारै भाजतां आगे, बात्यां घणी बणावै । एसो सखी मेरो सायबो, क्षेम कुशल घर आवै । लड़तां री मां दो हुवै । लंका कदै ही लूंटीजी लंका मै तूं ई दाळदी रहयो । लम्बा पीरा - भाई भजैयां रा । लाखां पर लेखो, करोड़ां पर कलम । लाखां लोहां चम्मड़ां, पैली किसा बखाण । बहू बछेरा डीकरां, निवड़ियां परमाण ।। लाग्यो तो तीर, नहीं तो तुक्को ई सही । लाडू खावै हरकूड़ी, दाम चुकावै शिवनाथो । लाप्ठै रो डोको गाण्ड फाड़ देवै । लात्यां रा भूत बात्यां स्यूं कोनी मानै । लाम्बा तिलक मधरी बाणी, दगैबाज री आ ई निसाणी। लालच गळो कटावै । लालच बुरी बलाय, खीर मै लूण मिलाय। लाल बही छप्पन रै पानै, सेठजी रोवै छानै छाने । लाळ लाग्योड़ी छुटै कोनी । लिखे खुदा - पढ़े मूसा । लिख्यो लिख्यो हुवै ।
Don't Miss! मारूति सुजुकी ने अपनी नई कॉम्पेक्ट एसयूवी कार विटारा ब्रीजा को भारत में मंगलवार को लांच कर दिया। ब्रीजा की भारत में शुरुआती कीमत 6. 99 लाख (एक्स शोरूम दिल्ली) होगी। यह छह प्रकार में उपलब्ध होगी। इसकी टॉप एंड मॉडल की कीमत 9. 68 लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस कार को ऑटो एक्सपो 2016 के दौरान डिस्पले किया था। यह मारूति की वही कार है जिसे पहले वाईबीए और एक्सए अल्फा नाम से भी जाना जाता रहा है। Maruti Vitara Breeza कंपनी की स्टालिश कार है। क्योंकि कॉम्पेक्ट एसयूवी सेगमेंट में आने वाली अन्य गाडिय़ों की तरह भड़कीली भी है और कॉम्पैक्ट भी। इसमें लंबा फ्लैट बॉनेट गन मेटल फिनिश्ड ग्रिल तक दिय गया है। इस ग्रिल के दोनों तरफ खूबसूरत दिखने वाले प्रॉजेक्टर टाइप हेडलैम्प्स लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें ड्यूल टोन एक्सटीरियर दिया गाय है। इसमें दिए गए अलॉय व्हील्स और ओआरवीएम इसे एक दमदार कॉम्पैक्ट एसयूवी का लुक देते हैं। मारूति विटारा ब्रीजा को फिलहाल डीजल मॉडल में उतारा जा रहा है। इसमें फिएट सोर्स 1. 3 लीटर इंजन दिया गया है। इस इंजन से अधिकतम 90पीएस की ताकत और 200एनएम तक टॉर्क पैदा हो सकता है। सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इस कॉम्पैक्ट एसयूवी में एबीएस और ईबीडी एयरबैग्स मौजूद हैं। इसके अलावा इमें टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम लगाया गया है जो कि एस क्रॉस में भी दिय गया है। इसमें एपल कार प्ले फीचर भी दिया जा रहा है। इस कार की शुरुआती कीमत 6. 99 लाख रुपये रखी गई है। यह कीमत एक्स शोरूम दिल्ली में है।
Don't Miss! मारूति सुजुकी ने अपनी नई कॉम्पेक्ट एसयूवी कार विटारा ब्रीजा को भारत में मंगलवार को लांच कर दिया। ब्रीजा की भारत में शुरुआती कीमत छः. निन्यानवे लाख होगी। यह छह प्रकार में उपलब्ध होगी। इसकी टॉप एंड मॉडल की कीमत नौ. अड़सठ लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस कार को ऑटो एक्सपो दो हज़ार सोलह के दौरान डिस्पले किया था। यह मारूति की वही कार है जिसे पहले वाईबीए और एक्सए अल्फा नाम से भी जाना जाता रहा है। Maruti Vitara Breeza कंपनी की स्टालिश कार है। क्योंकि कॉम्पेक्ट एसयूवी सेगमेंट में आने वाली अन्य गाडिय़ों की तरह भड़कीली भी है और कॉम्पैक्ट भी। इसमें लंबा फ्लैट बॉनेट गन मेटल फिनिश्ड ग्रिल तक दिय गया है। इस ग्रिल के दोनों तरफ खूबसूरत दिखने वाले प्रॉजेक्टर टाइप हेडलैम्प्स लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें ड्यूल टोन एक्सटीरियर दिया गाय है। इसमें दिए गए अलॉय व्हील्स और ओआरवीएम इसे एक दमदार कॉम्पैक्ट एसयूवी का लुक देते हैं। मारूति विटारा ब्रीजा को फिलहाल डीजल मॉडल में उतारा जा रहा है। इसमें फिएट सोर्स एक. तीन लीटरटर इंजन दिया गया है। इस इंजन से अधिकतम नब्बेपीएस की ताकत और दो सौएनएम तक टॉर्क पैदा हो सकता है। सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इस कॉम्पैक्ट एसयूवी में एबीएस और ईबीडी एयरबैग्स मौजूद हैं। इसके अलावा इमें टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम लगाया गया है जो कि एस क्रॉस में भी दिय गया है। इसमें एपल कार प्ले फीचर भी दिया जा रहा है। इस कार की शुरुआती कीमत छः. निन्यानवे लाख रुपये रखी गई है। यह कीमत एक्स शोरूम दिल्ली में है।
( २ ) भारतमंत्री की आशा के बिना कोई कानून ऐसा पास नहीं हो सकता सो नियुक्त हाईकोर्ट से भिन्न किसी अन्य अदालत को युरोपनिवासी ब्रिटिश प्रजा को फांसी की सज़ा देने का अधिकार है। (३) धर्म, पथलिक रेवन्यू, सेना तथा देशी रियासतों के संबंध में गवरनर जनरल की स्वीकारता के बिना कोई बिल पेश नहीं किया जा सकता । (४) ऐसा कोई कानून पास नहीं हो सकता जो सन् १८६० ई० से याद के पास हुए किसी पार्लामेंट एकृ के विरुद्ध हो अथवा जो पार्लामेंट के अधिकारों के विषय में हो अथवा जो यूनाईटेड किंगडम (इंगलैंड, स्काटलैंड, थायरलैंड, वेल्स) की शासनप्रणाली अथवा वहां के उन कानूनों के विषय में हो जो लिखे हुए नहीं हैं। ( ५ ) भारत गवरमेंट के सन् १८३३, १८५३, १८५४ औ १८५६ ई० के पकों तथा सेना एक में कोई घटती बढ़ती नहीं हो सकती और न कोई एकृ उस एकृ के विरुद्ध पास हो सकता है जिसके अनुसार भारत मंत्री को यूनाईटेड किंगडम में रुपया जमा करने का अधिकार है। इन शर्तों के विरुद्ध ब्रिटिश इंडिया के समस्त मनुष्यों, न्यायालयों, वस्तुओं, स्थानों तथा देशी रियासतों में ब्रिटिश मजा तथा ब्रिटिश कर्मचारियों और सेना में देशी अफसरों और सिपाहियों तथा रायल इंडियन मेरीन के कर्मचारियों के
भारतमंत्री की आशा के बिना कोई कानून ऐसा पास नहीं हो सकता सो नियुक्त हाईकोर्ट से भिन्न किसी अन्य अदालत को युरोपनिवासी ब्रिटिश प्रजा को फांसी की सज़ा देने का अधिकार है। धर्म, पथलिक रेवन्यू, सेना तथा देशी रियासतों के संबंध में गवरनर जनरल की स्वीकारता के बिना कोई बिल पेश नहीं किया जा सकता । ऐसा कोई कानून पास नहीं हो सकता जो सन् एक हज़ार आठ सौ साठ ईशून्य से याद के पास हुए किसी पार्लामेंट एकृ के विरुद्ध हो अथवा जो पार्लामेंट के अधिकारों के विषय में हो अथवा जो यूनाईटेड किंगडम की शासनप्रणाली अथवा वहां के उन कानूनों के विषय में हो जो लिखे हुए नहीं हैं। भारत गवरमेंट के सन् एक हज़ार आठ सौ तैंतीस, एक हज़ार आठ सौ तिरेपन, एक हज़ार आठ सौ चौवन औ एक हज़ार आठ सौ छप्पन ईशून्य के पकों तथा सेना एक में कोई घटती बढ़ती नहीं हो सकती और न कोई एकृ उस एकृ के विरुद्ध पास हो सकता है जिसके अनुसार भारत मंत्री को यूनाईटेड किंगडम में रुपया जमा करने का अधिकार है। इन शर्तों के विरुद्ध ब्रिटिश इंडिया के समस्त मनुष्यों, न्यायालयों, वस्तुओं, स्थानों तथा देशी रियासतों में ब्रिटिश मजा तथा ब्रिटिश कर्मचारियों और सेना में देशी अफसरों और सिपाहियों तथा रायल इंडियन मेरीन के कर्मचारियों के
सौंफ (Fennel Seeds) का उपयोग एक माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है, जो सेहत को कई लाभ पहुंचाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं यदि आप सौंफ के पानी (Fennel Seeds Water) का सेवन करते हैं, तो यह सेहत को ज्यादा लाभ पहुंचाते हैं। जी हां क्योंकि सौंफ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। सौंफ के पानी का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। साथ ही कई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार साबित होता है। क्योंकि सौंफ में पोटेशियम, फोलेट, विटामिन सी, विटामिन बी-6, फाइबर, कैल्शियम, जिंक, मैंगनीज, विटामिन सी, आयरन, सेलेनियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से काफी लाभदायक साबित होते हैं। तो आइए जानते हैं सौंफ का पानी पीने के क्या-क्या फायदे होते हैं। अगर आप अपने बढ़ते वजन (Weight) से परेशान हैं और वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको सौंफ के पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि सौंफ के पानी में मौजूद फाइबर वजन को कम करने में मददगार साबित होता है। बढ़ता कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) हार्ट की बीमारियों का कारण बनता है। इसलिए इसको कंट्रोल करना जरूरी होता है। कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए सौंफ के पानी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सौंफ के पानी में फाइबर पाया जाता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मददगार साबित होता है। आंखों की रोशनी (Eyesight) कमजोर होने पर सौंफ के पानी का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सौंफ का पानी विटामिन ए से भरपूर होता है। जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मददगार साबित होता है। अगर आप पाचन (Digestion) से जुड़ी समस्या से परेशान हैं तो आपको सौंफ के पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि सौंफ के पानी में फाइबर पाया जाता है। जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। साथ ही सौंफ के पानी का सेवन कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्या को दूर करता है। शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने की वजह से आप कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। लेकिन अगर आप रोजाना सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स (Toxins) बाहर निकलते हैं। जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। सौंफ का पानी पोटैशियम से भरपूर होता है। इसलिए अगर आप सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो इससे ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) कंट्रोल होता है। साथ ही सौंफ के पानी का सेवन हार्ट संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है। सौंफ के पानी में विटामिन सी, जिंक, सेलेनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, इसलिए अगर आप सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो इससे इम्यूनिटी (Immunity) मजबूत होती है। जिससे आप बाहरी वायरस और बैक्टीरिया से सुरक्षित रह सकते हैं। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
सौंफ का उपयोग एक माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है, जो सेहत को कई लाभ पहुंचाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं यदि आप सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो यह सेहत को ज्यादा लाभ पहुंचाते हैं। जी हां क्योंकि सौंफ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। सौंफ के पानी का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। साथ ही कई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार साबित होता है। क्योंकि सौंफ में पोटेशियम, फोलेट, विटामिन सी, विटामिन बी-छः, फाइबर, कैल्शियम, जिंक, मैंगनीज, विटामिन सी, आयरन, सेलेनियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से काफी लाभदायक साबित होते हैं। तो आइए जानते हैं सौंफ का पानी पीने के क्या-क्या फायदे होते हैं। अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं और वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको सौंफ के पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि सौंफ के पानी में मौजूद फाइबर वजन को कम करने में मददगार साबित होता है। बढ़ता कोलेस्ट्रॉल हार्ट की बीमारियों का कारण बनता है। इसलिए इसको कंट्रोल करना जरूरी होता है। कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए सौंफ के पानी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सौंफ के पानी में फाइबर पाया जाता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मददगार साबित होता है। आंखों की रोशनी कमजोर होने पर सौंफ के पानी का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सौंफ का पानी विटामिन ए से भरपूर होता है। जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मददगार साबित होता है। अगर आप पाचन से जुड़ी समस्या से परेशान हैं तो आपको सौंफ के पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि सौंफ के पानी में फाइबर पाया जाता है। जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। साथ ही सौंफ के पानी का सेवन कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्या को दूर करता है। शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने की वजह से आप कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। लेकिन अगर आप रोजाना सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। सौंफ का पानी पोटैशियम से भरपूर होता है। इसलिए अगर आप सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है। साथ ही सौंफ के पानी का सेवन हार्ट संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है। सौंफ के पानी में विटामिन सी, जिंक, सेलेनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, इसलिए अगर आप सौंफ के पानी का सेवन करते हैं, तो इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है। जिससे आप बाहरी वायरस और बैक्टीरिया से सुरक्षित रह सकते हैं। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
Spicejet False Audit Story : प्राइवेट एयरलाइन 'स्पाइसजेट' (Spicejet) ने 5 दिसंबर को एक बड़ा दावा किया था। इस दावे के तहत Spicejet ने इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) में ऑडिट करने की बात कही थी। हालांकि, Spicejet का यह दावा करने वाली कहानी झूठी निकली है। जिसका खुलासा ICAO ने मंगलवार को किया। जी हां, ICAO द्वारा Spicejet द्वारा किए गए ऑडिट वाले दावे को गलत बताया है। ICAO ने किया Spicejet के झूठ का खुलासा : दरअसल, यूनाइटेड नेशंस की स्पेशलाइज्ड एजेंसी इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) ने एयरलाइन 'स्पाइसजेट' (Spicejet) के ऑडिट की कहानी को नकार दिया है। इस मामले में सच बताते हुए UN बॉडी ने बताया है कि Spicejet द्वारा हेड ऑफिस में केबल विजिट किया गया था और इस उनकी इस विजिट का मकसद ऑडिट या इंस्पेक्शन नहीं था। ' ICAO के अनुसार, एजेंसी ने आज तक दुनिया के किसी भी देश में किसी एयरपोर्ट या एयरलाइन का ऑडिट नहीं किया है। बता दें, ICAO सिविल एविएशन के लिए स्टैंडर्ड और रेगुलेशन तय करने का काम करती है। ICAO का कहना : इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) ने कई बातें स्पष्ट करते हुए बताया है कि, 'यूनिवर्सल सेफ्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम (USOAP) टीम ने इस साल 9 से 16 नवंबर तक ICAO कोऑर्डिनेटेड वैलिडेशन मिशन (ICVM) परफॉर्म किया था। ICVM के एक पार्ट के रूप में सिविल एविएशन अथॉरिटी की सेफ्टी ओवरसाइट की इफेक्टिवनेस को वेरिफाई करने के लिए ICAO की टीमें एयरलाइन इंडस्ट्रीज का दौरा करती हैं, जो एक सामान्य प्रैक्टिस है। ' 5 दिसंबर को जारी किया गया बयान : याद दिला दें, Spicejet ने 5 दिसंबर को एक बयान जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि, 'ICAO द्वारा यूनिवर्सल सेफ्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम (USOAP) के सतत निगरानी दृष्टिकोण के तहत किए गए ऑडिट में स्पाइसजेट एकमात्र शेड्यूल्ड इंडियन एयरलाइन थी। Spicejet सेफ्टी सिस्टम के ऑडिट ने भारत को ICAO ऑडिट में अब तक की हाईएस्ट सेफ्टी रैंकिंग हासिल करने में मदद की। ' हालांकि, ICAO ऑडिटिंग कमेटी ने 14 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर Spicejet के हेड ऑफिस का दौरा किया था। Spicejet का कहना : बताते चलें, ICAO ऑडिटिंग कमेटी के दौरे के बाद Spicejet एयरलाइन ने कहा था कि, 'UN बॉडी ने फ्लाइट के क्रिटिकल फंक्शंस और ऑपरेशनल एरियाज का ऑडिट और रिव्यू किया है। जिसमें फ्लाइट प्लानिंग, वेदर असेसमेंट, रूट प्लानिंग, एयरक्राफ्ट सर्विसएबिलिटी जैसे कई एरियाज शामिल हैं। वहीं, Spicejet के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह ने बताया था कि, 'ICAO के ऑडिट के बाद एयरलाइन के सेफ्टी कल्चर और ऑपरेशंस दुरुस्त पाए गए। ' Spicejet ने पैसेंजर्स को किया था मेल : सोमवार को Spicejet द्वारा एक पैसेंजर्स को एक मेल भेजा था। जिसमें कहा गया था, 'आप सुरक्षित हाथों में हैं। यह दावा हम नहीं कर रहे हैं। ICAO के ऑडिट में स्पाइसजेट के सेफ्टी स्टैंडर्ड की पुष्टि हुई है। ' जबकि, DGCA के सूत्रों का कहना है कि, 'एयरलाइन का ऑडिट करना स्टेट रेगुलेटर का काम है। रेगुलेटर ने इस मुद्दे पर कोई भी कमेंट करने से इंकार कर दिया है। जुलाई में स्पाइसजेट के कई विमानों में तकनीकी गड़बड़ी की कई शिकायतें सामने आई थीं। ' ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
Spicejet False Audit Story : प्राइवेट एयरलाइन 'स्पाइसजेट' ने पाँच दिसंबर को एक बड़ा दावा किया था। इस दावे के तहत Spicejet ने इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन में ऑडिट करने की बात कही थी। हालांकि, Spicejet का यह दावा करने वाली कहानी झूठी निकली है। जिसका खुलासा ICAO ने मंगलवार को किया। जी हां, ICAO द्वारा Spicejet द्वारा किए गए ऑडिट वाले दावे को गलत बताया है। ICAO ने किया Spicejet के झूठ का खुलासा : दरअसल, यूनाइटेड नेशंस की स्पेशलाइज्ड एजेंसी इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने एयरलाइन 'स्पाइसजेट' के ऑडिट की कहानी को नकार दिया है। इस मामले में सच बताते हुए UN बॉडी ने बताया है कि Spicejet द्वारा हेड ऑफिस में केबल विजिट किया गया था और इस उनकी इस विजिट का मकसद ऑडिट या इंस्पेक्शन नहीं था। ' ICAO के अनुसार, एजेंसी ने आज तक दुनिया के किसी भी देश में किसी एयरपोर्ट या एयरलाइन का ऑडिट नहीं किया है। बता दें, ICAO सिविल एविएशन के लिए स्टैंडर्ड और रेगुलेशन तय करने का काम करती है। ICAO का कहना : इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने कई बातें स्पष्ट करते हुए बताया है कि, 'यूनिवर्सल सेफ्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम टीम ने इस साल नौ से सोलह नवंबर तक ICAO कोऑर्डिनेटेड वैलिडेशन मिशन परफॉर्म किया था। ICVM के एक पार्ट के रूप में सिविल एविएशन अथॉरिटी की सेफ्टी ओवरसाइट की इफेक्टिवनेस को वेरिफाई करने के लिए ICAO की टीमें एयरलाइन इंडस्ट्रीज का दौरा करती हैं, जो एक सामान्य प्रैक्टिस है। ' पाँच दिसंबर को जारी किया गया बयान : याद दिला दें, Spicejet ने पाँच दिसंबर को एक बयान जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि, 'ICAO द्वारा यूनिवर्सल सेफ्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम के सतत निगरानी दृष्टिकोण के तहत किए गए ऑडिट में स्पाइसजेट एकमात्र शेड्यूल्ड इंडियन एयरलाइन थी। Spicejet सेफ्टी सिस्टम के ऑडिट ने भारत को ICAO ऑडिट में अब तक की हाईएस्ट सेफ्टी रैंकिंग हासिल करने में मदद की। ' हालांकि, ICAO ऑडिटिंग कमेटी ने चौदह नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर Spicejet के हेड ऑफिस का दौरा किया था। Spicejet का कहना : बताते चलें, ICAO ऑडिटिंग कमेटी के दौरे के बाद Spicejet एयरलाइन ने कहा था कि, 'UN बॉडी ने फ्लाइट के क्रिटिकल फंक्शंस और ऑपरेशनल एरियाज का ऑडिट और रिव्यू किया है। जिसमें फ्लाइट प्लानिंग, वेदर असेसमेंट, रूट प्लानिंग, एयरक्राफ्ट सर्विसएबिलिटी जैसे कई एरियाज शामिल हैं। वहीं, Spicejet के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह ने बताया था कि, 'ICAO के ऑडिट के बाद एयरलाइन के सेफ्टी कल्चर और ऑपरेशंस दुरुस्त पाए गए। ' Spicejet ने पैसेंजर्स को किया था मेल : सोमवार को Spicejet द्वारा एक पैसेंजर्स को एक मेल भेजा था। जिसमें कहा गया था, 'आप सुरक्षित हाथों में हैं। यह दावा हम नहीं कर रहे हैं। ICAO के ऑडिट में स्पाइसजेट के सेफ्टी स्टैंडर्ड की पुष्टि हुई है। ' जबकि, DGCA के सूत्रों का कहना है कि, 'एयरलाइन का ऑडिट करना स्टेट रेगुलेटर का काम है। रेगुलेटर ने इस मुद्दे पर कोई भी कमेंट करने से इंकार कर दिया है। जुलाई में स्पाइसजेट के कई विमानों में तकनीकी गड़बड़ी की कई शिकायतें सामने आई थीं। ' ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
मनचेरियल के एसीपी बी तिरुपति रेड्डी ने कहा, "पद्मा और उसका पति घर में रहते थे। दो दिन पहले मोनिका (भतीजी), उसके दो बच्चे और एक रिश्तेदार घर पर आए थे। आग लगने के वक्त घर में कुल छह लोग मौजूद थे। " हैदराबादः तेलंगाना के मनचेरियल जिले में शनिवार को आग लगने से दो बच्चों सहित छह लोगों की मौत हो गई। तेलंगाना पुलिस ने बताया कि घटना रामकृष्णपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गाँव वेंकटपुर में हुई है। एक पड़ोसी ने पुलिस को बताया कि पद्मा का परिवार कुछ दिनों से मेहमानों का आव-भगत में लगा था। पूरा परिवार आग का शिकार हुआ है। मनचेरियल के एसीपी बी तिरुपति रेड्डी ने कहा, "पद्मा और उसका पति घर में रहते थे। दो दिन पहले मोनिका (भतीजी), उसके दो बच्चे और एक रिश्तेदार घर पर आए थे। आग लगने के वक्त घर में कुल छह लोग मौजूद थे। " बकौल तिरुपति रेड्डी, लगभग 12-12. 30 बजे पड़ोसी ने आग की लपटों में घर को जलते देखा और पुलिस को सूचित किया। सूचना के बाद दमकल की एक टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। रेड्डी ने कहा, "आग में घर पूरी तरह से नष्ट हो गया। आग लगने के समय घर के अंदर छह लोग थे। " पुलिस ने कहा कि उन्होंने मामला दर्ज कर लिया है। आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
मनचेरियल के एसीपी बी तिरुपति रेड्डी ने कहा, "पद्मा और उसका पति घर में रहते थे। दो दिन पहले मोनिका , उसके दो बच्चे और एक रिश्तेदार घर पर आए थे। आग लगने के वक्त घर में कुल छह लोग मौजूद थे। " हैदराबादः तेलंगाना के मनचेरियल जिले में शनिवार को आग लगने से दो बच्चों सहित छह लोगों की मौत हो गई। तेलंगाना पुलिस ने बताया कि घटना रामकृष्णपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गाँव वेंकटपुर में हुई है। एक पड़ोसी ने पुलिस को बताया कि पद्मा का परिवार कुछ दिनों से मेहमानों का आव-भगत में लगा था। पूरा परिवार आग का शिकार हुआ है। मनचेरियल के एसीपी बी तिरुपति रेड्डी ने कहा, "पद्मा और उसका पति घर में रहते थे। दो दिन पहले मोनिका , उसके दो बच्चे और एक रिश्तेदार घर पर आए थे। आग लगने के वक्त घर में कुल छह लोग मौजूद थे। " बकौल तिरुपति रेड्डी, लगभग बारह-बारह. तीस बजे पड़ोसी ने आग की लपटों में घर को जलते देखा और पुलिस को सूचित किया। सूचना के बाद दमकल की एक टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। रेड्डी ने कहा, "आग में घर पूरी तरह से नष्ट हो गया। आग लगने के समय घर के अंदर छह लोग थे। " पुलिस ने कहा कि उन्होंने मामला दर्ज कर लिया है। आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
सरकार ने घरेलू उपयोग में आने वाली लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के दोहरा मूल्य निर्धारित करने के लिए एक कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत सभी विपणन कंपनियों को खास तरह के फाइबर ग्लास के सिलेंडर में बाजार मूल्य पर गैस बेचने की अनुमति दे दी है। तीनों सरकारी कंपनियां-इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन (एचपीसीएल) खास तरह के पारदर्शी सिलेंडरों को बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में बेचेगी। गौरतलब है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन शहरों का चुनाव किया गया है। खास बात यह कि पारदर्शी फाइबर सिलेंडर में बिकने वाली रसोई गैस पर सरकार की ओर से किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विपणन कंपनियों को यह अधिकार होगा कि वे वैश्विक बाजार के मुताबिक के गैस के दाम तय कर सकेंगी। फिलहाल देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी आईओसी को प्रति सिलेंडर 305 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। खुले बाजार में रसोई गैस के एक सिलेंडर की कीमत 600 रुपये है। यही नहीं, उपभोक्ता को अब प्रति फाइबर सिलेंडर 3000 रुपये जमानत राशि के रूप में जमा करानी पड़ेगी, जो सामान्य सिलेंडर के लिए दी जाने वाली जमानत राशि से करीब दोगुनी है। तेल विपणन करने वाली तीनों कंपनियों ने करीब 200,000 फाइबर ग्लास वाले सिलेंडर खरीदने की योजना बना रहे हैं। एचपीसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह के सिलेंडर निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदा जारी किए जाएंगे। मुंबई स्थित एचपीसीएल के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पारदर्शी सिलेंडर को लेकर हम अभी उपभोक्ताओं की पसंद का अध्ययन कर रहे हैं। खास बात यह कि इस पारदर्शी सिलेंडर में गैस भरने के लिए अलग से कोई प्लांट लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सामान्य प्लांट में ही थोड़ी-बहुत तब्दीली के जरिए उसमें गैस भरी जा सकेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह सिलेंडर पूरी तरह पारदर्शी होगा, ऐसे में कोई भी अनधिकृत बिक्रेता गैस में पानी मिलाकर नहीं बेच सकेगा। यही नहीं, फाइबर के ये सिलेंडर वजन में भी बहुत हल्के होंगे। आईओसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब कोई भी व्यक्ति 600-650 रुपये देकर यह रसोई गैस खरीद सकेगा, जबकि सब्सिडी के साथ अभी रसोई गैस इससे करीब आधी कीमत पर उपलब्ध है। दरअसल, योजना की व्यावहारिकता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बरकरार है, ऐसे में विपणन कंपनियां इस योजना को लागू करने के लिए कोई नियत तिथि तय नहीं कर पा रही है। बीपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी इस बारे में निश्चित रूप नहीं कहा जा सकता है कि खुले बाजार में ऊंची कीमत पर रसोई गैस खरीदने में उपभोक्ता कितनी रुचि दिखाते हैं।
सरकार ने घरेलू उपयोग में आने वाली लिक्विड पेट्रोलियम गैस के दोहरा मूल्य निर्धारित करने के लिए एक कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत सभी विपणन कंपनियों को खास तरह के फाइबर ग्लास के सिलेंडर में बाजार मूल्य पर गैस बेचने की अनुमति दे दी है। तीनों सरकारी कंपनियां-इंडियन ऑयल कारपोरेशन , भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन खास तरह के पारदर्शी सिलेंडरों को बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में बेचेगी। गौरतलब है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन शहरों का चुनाव किया गया है। खास बात यह कि पारदर्शी फाइबर सिलेंडर में बिकने वाली रसोई गैस पर सरकार की ओर से किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विपणन कंपनियों को यह अधिकार होगा कि वे वैश्विक बाजार के मुताबिक के गैस के दाम तय कर सकेंगी। फिलहाल देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी आईओसी को प्रति सिलेंडर तीन सौ पाँच रुपयापये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। खुले बाजार में रसोई गैस के एक सिलेंडर की कीमत छः सौ रुपयापये है। यही नहीं, उपभोक्ता को अब प्रति फाइबर सिलेंडर तीन हज़ार रुपयापये जमानत राशि के रूप में जमा करानी पड़ेगी, जो सामान्य सिलेंडर के लिए दी जाने वाली जमानत राशि से करीब दोगुनी है। तेल विपणन करने वाली तीनों कंपनियों ने करीब दो सौ,शून्य फाइबर ग्लास वाले सिलेंडर खरीदने की योजना बना रहे हैं। एचपीसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह के सिलेंडर निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदा जारी किए जाएंगे। मुंबई स्थित एचपीसीएल के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पारदर्शी सिलेंडर को लेकर हम अभी उपभोक्ताओं की पसंद का अध्ययन कर रहे हैं। खास बात यह कि इस पारदर्शी सिलेंडर में गैस भरने के लिए अलग से कोई प्लांट लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सामान्य प्लांट में ही थोड़ी-बहुत तब्दीली के जरिए उसमें गैस भरी जा सकेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह सिलेंडर पूरी तरह पारदर्शी होगा, ऐसे में कोई भी अनधिकृत बिक्रेता गैस में पानी मिलाकर नहीं बेच सकेगा। यही नहीं, फाइबर के ये सिलेंडर वजन में भी बहुत हल्के होंगे। आईओसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब कोई भी व्यक्ति छः सौ-छः सौ पचास रुपयापये देकर यह रसोई गैस खरीद सकेगा, जबकि सब्सिडी के साथ अभी रसोई गैस इससे करीब आधी कीमत पर उपलब्ध है। दरअसल, योजना की व्यावहारिकता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बरकरार है, ऐसे में विपणन कंपनियां इस योजना को लागू करने के लिए कोई नियत तिथि तय नहीं कर पा रही है। बीपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी इस बारे में निश्चित रूप नहीं कहा जा सकता है कि खुले बाजार में ऊंची कीमत पर रसोई गैस खरीदने में उपभोक्ता कितनी रुचि दिखाते हैं।
मनोरंजन की दुनिया में हर दिन नई जानकारियां सामने आती रहती हैं। फैंस भी अपने फेवरेट सितारों से जुड़े अपडेट्स के लिए काफी उत्सुक रहते हैं। ऐसे में फिल्मी रैप के जरिए हम आपको मनोरंजन जगत की दिन भर की 10 बड़ी खबरों से रूबरू कराते हैं। आइए जानते हैं की आज दिन भर में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में क्या कुछ नया हुआ। अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने कल अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए फैंस को जानकारी दी कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उनकी एंजियोप्लास्टी की गई और स्टेंट लगाया गया। अपनी चहेती एक्ट्रेस की सेहत से जुड़ी इस चौंका देने वाली खबर ने फैंस की चिंता बढ़ा दी है। वे एक्ट्रेस की सेहत का हाल जानना चाहते हैं। हालांकि, सुष्मिता ने सिर्फ इतना ही कहा कि उन्हें कुछ दिनों पहले हार्ट अटैक आया। हेल्थ इमरजेंसी से जुड़ी अन्य जानकारी एक्ट्रेस ने नहीं दी। फैंस जानना चाहते हैं कि आखिर एक्ट्रेस की तबीयत कब और कहां खराब हुई? अब इस बारे में कुछ जानकारी सामने आई है। बॉलीवुड की पंगा गर्ल अभिनेत्री कंगना रणौत अपने काम और फिल्मो से ज्यादा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहती हैं। आए दिन वह किसी न किसी पर निशाना साधती नजर आती हैं। एक बार फिर कंगना अपनी टिप्पणी को लेकर मीडिया की सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार उन्होंने किसी फिल्म स्टार या कथित बॉलीवुड माफियाओं पर निशाना नहीं साधा है, बल्कि इस बार उन्होंने जनरेशन जेड पर विवादित टिप्पणी की है। अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और उनकी पत्नी पूनम की प्रेम कहानी काफी हद तक फिल्मी है। इसके साथ ही जेसे हर प्रेम कहानी में एक समय के बाद परीक्षा की घड़ी आती है वैसे ही इन दोनों की कहानी में भी परीक्षा की घड़ी आई थी। जिसका जिक्र शत्रुघ्न सिन्हा ने अरबाज खान के शो द इन्विसिबल पर खुलासा किया कि कैसे उनके सिर पर स्टारडम चढ़ गया। फिल्मी दुनिया भी अब समय के साथ अब काफी अपडेट हो चुकी है। यहां कोई भी घटना होती है तो उसका पता बहुत जल्द आम लोगों को हो जाता है। चीजें अच्छी हों या फिर बुरी, सभी कुछ बहुत जल्दी सामने आ जाता है। इसी क्रम में जब साल 2018 में तनुश्री दत्ता ने मीटू आंदोलन की शुरुआत की तो वह बहुत जल्द उसकी पहुंच आम लोगों के बीच भी हो गई। जिसके बाद बहुत सी महिलाओं ने वर्कप्लेस पर हुए शोषण के बारे में खुलकर बात की। कई अभिनेत्रियों ने तो अपने को-स्टार समेत डायरेक्टर्स पर भी मीटू के आरोप लगाए। वहीं अब हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने भी इस बारे में अपना समर्थन रखा।
मनोरंजन की दुनिया में हर दिन नई जानकारियां सामने आती रहती हैं। फैंस भी अपने फेवरेट सितारों से जुड़े अपडेट्स के लिए काफी उत्सुक रहते हैं। ऐसे में फिल्मी रैप के जरिए हम आपको मनोरंजन जगत की दिन भर की दस बड़ी खबरों से रूबरू कराते हैं। आइए जानते हैं की आज दिन भर में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में क्या कुछ नया हुआ। अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने कल अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए फैंस को जानकारी दी कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उनकी एंजियोप्लास्टी की गई और स्टेंट लगाया गया। अपनी चहेती एक्ट्रेस की सेहत से जुड़ी इस चौंका देने वाली खबर ने फैंस की चिंता बढ़ा दी है। वे एक्ट्रेस की सेहत का हाल जानना चाहते हैं। हालांकि, सुष्मिता ने सिर्फ इतना ही कहा कि उन्हें कुछ दिनों पहले हार्ट अटैक आया। हेल्थ इमरजेंसी से जुड़ी अन्य जानकारी एक्ट्रेस ने नहीं दी। फैंस जानना चाहते हैं कि आखिर एक्ट्रेस की तबीयत कब और कहां खराब हुई? अब इस बारे में कुछ जानकारी सामने आई है। बॉलीवुड की पंगा गर्ल अभिनेत्री कंगना रणौत अपने काम और फिल्मो से ज्यादा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहती हैं। आए दिन वह किसी न किसी पर निशाना साधती नजर आती हैं। एक बार फिर कंगना अपनी टिप्पणी को लेकर मीडिया की सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार उन्होंने किसी फिल्म स्टार या कथित बॉलीवुड माफियाओं पर निशाना नहीं साधा है, बल्कि इस बार उन्होंने जनरेशन जेड पर विवादित टिप्पणी की है। अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और उनकी पत्नी पूनम की प्रेम कहानी काफी हद तक फिल्मी है। इसके साथ ही जेसे हर प्रेम कहानी में एक समय के बाद परीक्षा की घड़ी आती है वैसे ही इन दोनों की कहानी में भी परीक्षा की घड़ी आई थी। जिसका जिक्र शत्रुघ्न सिन्हा ने अरबाज खान के शो द इन्विसिबल पर खुलासा किया कि कैसे उनके सिर पर स्टारडम चढ़ गया। फिल्मी दुनिया भी अब समय के साथ अब काफी अपडेट हो चुकी है। यहां कोई भी घटना होती है तो उसका पता बहुत जल्द आम लोगों को हो जाता है। चीजें अच्छी हों या फिर बुरी, सभी कुछ बहुत जल्दी सामने आ जाता है। इसी क्रम में जब साल दो हज़ार अट्ठारह में तनुश्री दत्ता ने मीटू आंदोलन की शुरुआत की तो वह बहुत जल्द उसकी पहुंच आम लोगों के बीच भी हो गई। जिसके बाद बहुत सी महिलाओं ने वर्कप्लेस पर हुए शोषण के बारे में खुलकर बात की। कई अभिनेत्रियों ने तो अपने को-स्टार समेत डायरेक्टर्स पर भी मीटू के आरोप लगाए। वहीं अब हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने भी इस बारे में अपना समर्थन रखा।
बॉलीवुड तड़का टीम. सिंगर अरिजीत सिंह अपनी मधुर आवाज से हमेशा लोगों को अपना दीवाना बना लेते हैं। हाल ही में शानदार आवाज के मालिक अरिजीत के साथ एक इवेंट में बदतमीजी हुई। लाइव कॉन्सर्ट के दौरान एक शख्स ने अचानक सिंगर का हाथ तेजी से खींच दिया, जिससे उन्हें चोट आ गई। इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर ताबड़तोड़ वायरल हो रहा है और फैंस इस वीडियो पर अपनी खूब प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अरिजीत सिंह एक लाइव कॉन्सर्ट कर रहे थे। इसी दौरान एक शख्स ने उनका हाथ तेजी से खींच दिया, जिससे वो चोटिल हो गए। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि अरिजीत फैन से कहते हैं, 'तुम मुझे खींच रहे थे। प्लीज स्टेज पर आ जाओ। सुनो, मैं स्ट्रगल कर रहा हूं, ठीक है? तुम्हें ये समझना होगा। ' फैन के जवाब के बाद उन्होंने कहा, 'आप यहां मजे करने के लिए हैं, कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर मैं परफॉर्म नहीं कर पा रहा हूं, तो आप मजे नहीं कर पाएंगे, यह बहुत सिंपल सी बात है। तुम मुझे ऐसे खींच रहे हो, अब मेरे हाथ कांप रहे हैं। क्या मैं चला जाऊं? ' इस क्लिप को देखने के बाद फैंस अरिजीत को जमकर सपोर्ट कर रहे हैं। बता दें, सोशल मीडिया पर अरिजीत सिंह की तगड़ी फैन फॉलोइंग है। फैंस उनकी एक झलक पाने को काफी बेताब रहते हैं और जब वह किसी इवेंट में पहुंचते हैं तो सेल्फी लेने के लिए लोगों भी काफी भीड़ उमड़ आती है।
बॉलीवुड तड़का टीम. सिंगर अरिजीत सिंह अपनी मधुर आवाज से हमेशा लोगों को अपना दीवाना बना लेते हैं। हाल ही में शानदार आवाज के मालिक अरिजीत के साथ एक इवेंट में बदतमीजी हुई। लाइव कॉन्सर्ट के दौरान एक शख्स ने अचानक सिंगर का हाथ तेजी से खींच दिया, जिससे उन्हें चोट आ गई। इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर ताबड़तोड़ वायरल हो रहा है और फैंस इस वीडियो पर अपनी खूब प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अरिजीत सिंह एक लाइव कॉन्सर्ट कर रहे थे। इसी दौरान एक शख्स ने उनका हाथ तेजी से खींच दिया, जिससे वो चोटिल हो गए। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि अरिजीत फैन से कहते हैं, 'तुम मुझे खींच रहे थे। प्लीज स्टेज पर आ जाओ। सुनो, मैं स्ट्रगल कर रहा हूं, ठीक है? तुम्हें ये समझना होगा। ' फैन के जवाब के बाद उन्होंने कहा, 'आप यहां मजे करने के लिए हैं, कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर मैं परफॉर्म नहीं कर पा रहा हूं, तो आप मजे नहीं कर पाएंगे, यह बहुत सिंपल सी बात है। तुम मुझे ऐसे खींच रहे हो, अब मेरे हाथ कांप रहे हैं। क्या मैं चला जाऊं? ' इस क्लिप को देखने के बाद फैंस अरिजीत को जमकर सपोर्ट कर रहे हैं। बता दें, सोशल मीडिया पर अरिजीत सिंह की तगड़ी फैन फॉलोइंग है। फैंस उनकी एक झलक पाने को काफी बेताब रहते हैं और जब वह किसी इवेंट में पहुंचते हैं तो सेल्फी लेने के लिए लोगों भी काफी भीड़ उमड़ आती है।
आत्मरक्षा शिक्षक ने ही भंग करी रक्षा! जानिए पूरी खबर। 8 घंटे में 36 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन; बनारस में मोदी ने किस बात पर कह दिया 5 ट्रिलियन? चौंक गया संसार! बनारस में मां गंगा की गोद मे ये क्या? आप जानेंगे तो नहाना छोड़ देंगे!
आत्मरक्षा शिक्षक ने ही भंग करी रक्षा! जानिए पूरी खबर। आठ घंटाटे में छत्तीस हजार श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन; बनारस में मोदी ने किस बात पर कह दिया पाँच ट्रिलियन? चौंक गया संसार! बनारस में मां गंगा की गोद मे ये क्या? आप जानेंगे तो नहाना छोड़ देंगे!
Quick links: India New Record: भारतीय अर्थव्यवस्था ने दुनियाभर में नया रिकॉर्ड बनाया है। खालसा वॉक्स (Khalsa Vox) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 के वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी में 6.1 प्रतिशत की बढोत्तरी दर्ज की गई है। जान लें कि USD 3.3 ट्रिलियन के कुल आकार के साथ इस बेहतरीन उपलब्धि ने भारत की जीडीपी के सालाना ग्रोथ रेट को भी 7.2 प्रतिशत बढ़ा दिया है। इसी के साथ भारत एशिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हो चुका है। बुधवार को जारी की गई सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-मार्च में जीडीपी में 6.1 की वृद्धि हुई है, जबकि पिछली रिपोर्ट तक जीडीपी में 4.5 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई थी। कृषि क्षेत्र में 5.5 प्रतिशत और मैन्यूफैक्चरिंग में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन, सर्विसेज और माइनिंग भी कुछ ऐसे अन्य क्षेत्र रहे, जिसमें बढोत्तरी देखी गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि भारत ने अप्रैल-जून में 13.1 प्रतिशत के बेहतरीन ग्रोथ रेट को हासिल करने में सफलता पाई है। वहीं, अगर 2022-23 के वित्तीय वर्ष में पूरे साल की बात करें तो अप्रैल 2022 से लेकर मार्च 2023 तक भारत की जीडीपी का ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रहा। यह भी पढ़ेंः अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी में घमासान! ट्रंप के साथ रेस में फ्लोरिडा के गवर्नर, कौन मारेगा बाजी? भारत ने अपने बेहतरीन ग्रोथ रेट के साथ दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपना स्टेट बरकरार रखा है। इस दौरान भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। जान लें कि चीनी अर्थव्यवस्था ने 2023 की पहली तिमाही में केवल 4.5 प्रतिशत की बढोत्तरी दिखाई है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन (V. Anantha Nageswaran) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि अगले साल भारत और अच्छा परफॉर्म करेगा। यह भी पढ़ेंः चीन में मस्जिद तोड़ने पर बरपा है हंगामा, इस्लाम का झंडा उठाने वाले तुर्किए-पाकिस्तान क्यों हैं खामोश?
Quick links: India New Record: भारतीय अर्थव्यवस्था ने दुनियाभर में नया रिकॉर्ड बनाया है। खालसा वॉक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो हज़ार बाईस-तेईस के वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी में छः.एक प्रतिशत की बढोत्तरी दर्ज की गई है। जान लें कि तीन दशमलव तीन डॉलर ट्रिलियन के कुल आकार के साथ इस बेहतरीन उपलब्धि ने भारत की जीडीपी के सालाना ग्रोथ रेट को भी सात.दो प्रतिशत बढ़ा दिया है। इसी के साथ भारत एशिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हो चुका है। बुधवार को जारी की गई सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-मार्च में जीडीपी में छः.एक की वृद्धि हुई है, जबकि पिछली रिपोर्ट तक जीडीपी में चार.पाँच प्रतिशत की बढोत्तरी हुई थी। कृषि क्षेत्र में पाँच.पाँच प्रतिशत और मैन्यूफैक्चरिंग में चार.पाँच प्रतिशत की वृद्धि को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन, सर्विसेज और माइनिंग भी कुछ ऐसे अन्य क्षेत्र रहे, जिसमें बढोत्तरी देखी गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि भारत ने अप्रैल-जून में तेरह.एक प्रतिशत के बेहतरीन ग्रोथ रेट को हासिल करने में सफलता पाई है। वहीं, अगर दो हज़ार बाईस-तेईस के वित्तीय वर्ष में पूरे साल की बात करें तो अप्रैल दो हज़ार बाईस से लेकर मार्च दो हज़ार तेईस तक भारत की जीडीपी का ग्रोथ रेट सात.दो प्रतिशत रहा। यह भी पढ़ेंः अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी में घमासान! ट्रंप के साथ रेस में फ्लोरिडा के गवर्नर, कौन मारेगा बाजी? भारत ने अपने बेहतरीन ग्रोथ रेट के साथ दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपना स्टेट बरकरार रखा है। इस दौरान भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। जान लें कि चीनी अर्थव्यवस्था ने दो हज़ार तेईस की पहली तिमाही में केवल चार.पाँच प्रतिशत की बढोत्तरी दिखाई है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि अगले साल भारत और अच्छा परफॉर्म करेगा। यह भी पढ़ेंः चीन में मस्जिद तोड़ने पर बरपा है हंगामा, इस्लाम का झंडा उठाने वाले तुर्किए-पाकिस्तान क्यों हैं खामोश?
RANCHI : दैनिक जागरण आईनेक्स्ट में आशियाने के नाम पर जालसाजी का खुलासे किए जाने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन और रांची पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाली वेलफेयर बिल्डिंग एंड स्टेट प्राइवेट लिमिटेट कंपनी के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। पुलिस ने शनिवार की देर शाम मुरी ओपी में कांड संख्या 13/ 2020 दर्ज कर लिया है। सिल्ली सीओ की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई। कंपनी के सिल्ली ब्रांच मैनेजर सचिन कुमार महतो को हिरासत में ले लिया गया है और पूछताछ चल रही है। प्राथमिकी में लिखा गया है कि वेलफेयर बिल्डिंग एंड स्टेट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ग्राहकों से रुपए दोगुना करने और ज्यादा ब्याज देने के नाम पर रुपए की उगाही कर रही है। जांच के दौरान स्थानीय ब्रांच मैनेजर सचिन कुमार महतो से कागजातों की मांग की गई, लेकिन उन्होंने कागजात प्रस्तुत नहीं किए। इससे साफ है कि कंपनी गैरकानूनी तरीके से लोगों की गाढ़ी कमाई ठग रही है। साक्ष्य के तौर पर सीओ ने राहुल सोनार, सोमवारी देवी, शशि शंकर, जितेन्द्र महतो, सुधीर चन्द्र महतो, रमेश महतो आदि के दस्तावेजों को संलग्न कर दिया है। इनमें कई लोग 2010 से कंपनी की जालसाजी के शिकार बने हुए हैं। लोगों के 5 लाख से लेकर लाखों रुपयों तक के निवेश के कागजात कंपनी से गायब भी कर दिए गए हैं। कांड के जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गई है उससे यह साफ है कि कंपनी से जुड़े बड़े लोगों जैसे जोनल इंचार्ज, स्टेट आफिसर जैसे लोगों को बचाने का काम किया जा रहा है। केस दर्ज कर ब्रांच मैनेजर को दोषी बनाया जा रहा है ताकि वह जेल चला जाए और ऊपर बैठे जो लोग रुपए उगाही कर चुके हैं, वे लोग साफ बच निकलें। इससे पहले भी कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर यही किया गया है। लोगों की गाढ़ी कमाई जिन खातों में जमा की जाती है उसको ऑपरेट करने का काम केवल तीन ही लोग कर सकते हैं। कंपनी के एमडी विजय प्रसाद मल्ला, डायरेक्टर आला वीआरकेएस श्रीनिवास राव और दूसरी निदेशक विन्जुमूली संध्या वल्ली ये तीन नाम ही हैं जो वेलफेयर बिल्डिंग एंड इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों को ऑपरेट करते हैं। इसका मतलब है कि देशभर में कहीं से भी इस कंपनी के बैंक खातों में जमा रुपए की निकासी और इस्तेमाल इन्हीं तीन लोगों द्वारा की जाती है, लेकिन इनके खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया। कंपनी के अधिकारियों जैसे काउंसिल मेंबर, एरिया इंचार्ज, जोनल इंचार्ज के तौर पर कई लोग काम कर रहे हैं। पुलिस जांच में जब इन मोबाइल फोन को खंगाला जाएगा तो कंपनी और लोकल पुलिस से लेकर प्रशासन तक के कई राज खुल कर सामने आ जाएंगे। सूत्रों की मानें तो कुछ लोकल पुलिस अधिकारियों का कंपनी के अधिकारियों के साथ मधुर संबंध रहा है, जिसकी भरपायी की जा रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच के दौरान चाहे कितना भी हाईप्रोफाइल व्यक्ति हो, उसपर शिकंजा कसा जाएगा। पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
RANCHI : दैनिक जागरण आईनेक्स्ट में आशियाने के नाम पर जालसाजी का खुलासे किए जाने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन और रांची पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाली वेलफेयर बिल्डिंग एंड स्टेट प्राइवेट लिमिटेट कंपनी के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। पुलिस ने शनिवार की देर शाम मुरी ओपी में कांड संख्या तेरह/ दो हज़ार बीस दर्ज कर लिया है। सिल्ली सीओ की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई। कंपनी के सिल्ली ब्रांच मैनेजर सचिन कुमार महतो को हिरासत में ले लिया गया है और पूछताछ चल रही है। प्राथमिकी में लिखा गया है कि वेलफेयर बिल्डिंग एंड स्टेट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ग्राहकों से रुपए दोगुना करने और ज्यादा ब्याज देने के नाम पर रुपए की उगाही कर रही है। जांच के दौरान स्थानीय ब्रांच मैनेजर सचिन कुमार महतो से कागजातों की मांग की गई, लेकिन उन्होंने कागजात प्रस्तुत नहीं किए। इससे साफ है कि कंपनी गैरकानूनी तरीके से लोगों की गाढ़ी कमाई ठग रही है। साक्ष्य के तौर पर सीओ ने राहुल सोनार, सोमवारी देवी, शशि शंकर, जितेन्द्र महतो, सुधीर चन्द्र महतो, रमेश महतो आदि के दस्तावेजों को संलग्न कर दिया है। इनमें कई लोग दो हज़ार दस से कंपनी की जालसाजी के शिकार बने हुए हैं। लोगों के पाँच लाख से लेकर लाखों रुपयों तक के निवेश के कागजात कंपनी से गायब भी कर दिए गए हैं। कांड के जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गई है उससे यह साफ है कि कंपनी से जुड़े बड़े लोगों जैसे जोनल इंचार्ज, स्टेट आफिसर जैसे लोगों को बचाने का काम किया जा रहा है। केस दर्ज कर ब्रांच मैनेजर को दोषी बनाया जा रहा है ताकि वह जेल चला जाए और ऊपर बैठे जो लोग रुपए उगाही कर चुके हैं, वे लोग साफ बच निकलें। इससे पहले भी कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर यही किया गया है। लोगों की गाढ़ी कमाई जिन खातों में जमा की जाती है उसको ऑपरेट करने का काम केवल तीन ही लोग कर सकते हैं। कंपनी के एमडी विजय प्रसाद मल्ला, डायरेक्टर आला वीआरकेएस श्रीनिवास राव और दूसरी निदेशक विन्जुमूली संध्या वल्ली ये तीन नाम ही हैं जो वेलफेयर बिल्डिंग एंड इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों को ऑपरेट करते हैं। इसका मतलब है कि देशभर में कहीं से भी इस कंपनी के बैंक खातों में जमा रुपए की निकासी और इस्तेमाल इन्हीं तीन लोगों द्वारा की जाती है, लेकिन इनके खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया। कंपनी के अधिकारियों जैसे काउंसिल मेंबर, एरिया इंचार्ज, जोनल इंचार्ज के तौर पर कई लोग काम कर रहे हैं। पुलिस जांच में जब इन मोबाइल फोन को खंगाला जाएगा तो कंपनी और लोकल पुलिस से लेकर प्रशासन तक के कई राज खुल कर सामने आ जाएंगे। सूत्रों की मानें तो कुछ लोकल पुलिस अधिकारियों का कंपनी के अधिकारियों के साथ मधुर संबंध रहा है, जिसकी भरपायी की जा रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच के दौरान चाहे कितना भी हाईप्रोफाइल व्यक्ति हो, उसपर शिकंजा कसा जाएगा। पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पति (मरते समय अपनी बीवी से)- अलमारी से तेरे सोने के गहने मैंने ही चोरी किए थे। बीवी रोते हुए- कोई बात नहीं जी। पति- तेरे भाई ने तुझे जो एक लाख रुपए दिए थे वह भी मैंने ही गायब किए थे। पत्नी- कोई बात नहीं मैंने आपको माफ किया। पति- तेरे कीमती साड़ियां भी मैंने चोरी कर अपनी प्रेमिका को दे दिए थे। पत्नी- कोई बात नहीं जी, आपको जहर भी तो मैंने ही दिया था हो गई बात बराबर। बच्चा- पापा आपने मम्मी में ऐसा क्या देखा जो शादी कर ली? बच्चा- कमाल है ! ! ! इतनी सी छोटी चीज के लिए इतनी बड़ी मुसीबत मोल ले ली। लड़की (लड़के से)- मैं तुम्हारे लिए राखी लेकर आई थी, तुमने क्यों नहीं बंधवाई? लड़का- अगर मैं तेरे लिये मंगलसूत्र लाऊं तो तू बंधवा लेगी क्या? संता- यार बता, शादीशुदा लड़की और शादीशुदा लड़के में क्या अंतर है? जज- हत्या की रात तुम्हारे पति के अंतिम शब्द क्या थे? पत्नी- मेरा चश्मा कहां है संगीता? जज- तो इसमें मारने वाली क्या बात थी? पत्नी- मेरा नाम रंजना है. . पूरा कोर्ट खामोश. .
पति - अलमारी से तेरे सोने के गहने मैंने ही चोरी किए थे। बीवी रोते हुए- कोई बात नहीं जी। पति- तेरे भाई ने तुझे जो एक लाख रुपए दिए थे वह भी मैंने ही गायब किए थे। पत्नी- कोई बात नहीं मैंने आपको माफ किया। पति- तेरे कीमती साड़ियां भी मैंने चोरी कर अपनी प्रेमिका को दे दिए थे। पत्नी- कोई बात नहीं जी, आपको जहर भी तो मैंने ही दिया था हो गई बात बराबर। बच्चा- पापा आपने मम्मी में ऐसा क्या देखा जो शादी कर ली? बच्चा- कमाल है ! ! ! इतनी सी छोटी चीज के लिए इतनी बड़ी मुसीबत मोल ले ली। लड़की - मैं तुम्हारे लिए राखी लेकर आई थी, तुमने क्यों नहीं बंधवाई? लड़का- अगर मैं तेरे लिये मंगलसूत्र लाऊं तो तू बंधवा लेगी क्या? संता- यार बता, शादीशुदा लड़की और शादीशुदा लड़के में क्या अंतर है? जज- हत्या की रात तुम्हारे पति के अंतिम शब्द क्या थे? पत्नी- मेरा चश्मा कहां है संगीता? जज- तो इसमें मारने वाली क्या बात थी? पत्नी- मेरा नाम रंजना है. . पूरा कोर्ट खामोश. .
कर्फ्यू के दिन शनिवार को पूरे शहर की सफाई कराने के बाद सेनेटाइजेशन किया गया। नगर पालिका के कर्मचारियों ने युद्ध स्तर पर सफाई कराते हुए प्रेशर टैंकर की मदद से सड़कों के साथ प्रमुख बाजारों को सेनेटाइज किया। एसडीएम सदर मोहनलाल गुप्ता व नगर पालिका के ईओ मुदित सिंह के नेतृत्व में शनिवार सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक कचहरी रोड, चौक, सदर बाजार, स्टेशन रोड, भंगवा चुंगी से जोगापुर, ट्रेजरी तिराहा, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, डीएम आवास रोड, न्यायालय परिसर के आसपास नगर पालिका के कर्मचारियों ने नाली व सड़कों की सफाई कर दवाओं का छिड़काव किया। प्रेशर टैंकर की मदद से सड़कों व बंद दुकानों के आसपास सेनेटाइज किया गया। शहर की गलियों में कर्मचारियों ने छोटी मशीनों की मदद से सेनेटाइज किया।
कर्फ्यू के दिन शनिवार को पूरे शहर की सफाई कराने के बाद सेनेटाइजेशन किया गया। नगर पालिका के कर्मचारियों ने युद्ध स्तर पर सफाई कराते हुए प्रेशर टैंकर की मदद से सड़कों के साथ प्रमुख बाजारों को सेनेटाइज किया। एसडीएम सदर मोहनलाल गुप्ता व नगर पालिका के ईओ मुदित सिंह के नेतृत्व में शनिवार सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक कचहरी रोड, चौक, सदर बाजार, स्टेशन रोड, भंगवा चुंगी से जोगापुर, ट्रेजरी तिराहा, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, डीएम आवास रोड, न्यायालय परिसर के आसपास नगर पालिका के कर्मचारियों ने नाली व सड़कों की सफाई कर दवाओं का छिड़काव किया। प्रेशर टैंकर की मदद से सड़कों व बंद दुकानों के आसपास सेनेटाइज किया गया। शहर की गलियों में कर्मचारियों ने छोटी मशीनों की मदद से सेनेटाइज किया।
रात करीब 1. 52 बजे उनका कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक सरोज खान का अंतिम संस्कार मुंबई स्थित मलाड के मालवाणी में किया जाएगा. सरोज खान ने दो हजार से ज्यादा गानों की कोरियाग्राफी की थी. लेकिन क्या आप जानते हैं फिल्मों में आने से पहले वह बैकग्राउंड डांसर थीं. उन्होंने 1950 के दशक के मशहूर कोरियाग्राफर बी. सोहनलाल के साथ ट्रेनिंग ली थी और बाद में इन्हीं के साथ शादी कर ली. बी. सोहन लाल से सरोज से 30 साल बड़े थे. शादी के दौरान सरोज खान 13 साल की थी. सरोज खान ने पहली बार साल 1974 में रिलीज हुई फिल्म 'गीता मेरा नाम' के गानों को कोरियाोग्राफ किया. इसके बाद उन्होंने कई मुकाम हासिल किए. उन्हें भारत में मदर्स ऑफ डांस/कोरियाग्राफी की मां कहा जाने लगा. उन्होंने साल 1986 में आई फिल्म 'नगीना', 1987 में आई 'मि. इंडिया', साल 1988 में आई 'तेजाब', साल 1989 में आई 'चांदनी' सहित कई बेहतरीन फिल्मों के सॉन्ग की कोरियोग्राफी के लिए अवार्ड और सम्मान मिला. सरोज खान को साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म 'देवदास' के सॉन्ग डोला रे डोल के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. इसके अलावा साल 2006 में आई फिल्म 'श्रीनगरम' के सभी गानों और साल 2008 में आई 'जब वी मेट' के लिए यह इश्क हाए के लिए भी नेशनल अवार्ड मिला.
रात करीब एक. बावन बजे उनका कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक सरोज खान का अंतिम संस्कार मुंबई स्थित मलाड के मालवाणी में किया जाएगा. सरोज खान ने दो हजार से ज्यादा गानों की कोरियाग्राफी की थी. लेकिन क्या आप जानते हैं फिल्मों में आने से पहले वह बैकग्राउंड डांसर थीं. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ पचास के दशक के मशहूर कोरियाग्राफर बी. सोहनलाल के साथ ट्रेनिंग ली थी और बाद में इन्हीं के साथ शादी कर ली. बी. सोहन लाल से सरोज से तीस साल बड़े थे. शादी के दौरान सरोज खान तेरह साल की थी. सरोज खान ने पहली बार साल एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में रिलीज हुई फिल्म 'गीता मेरा नाम' के गानों को कोरियाोग्राफ किया. इसके बाद उन्होंने कई मुकाम हासिल किए. उन्हें भारत में मदर्स ऑफ डांस/कोरियाग्राफी की मां कहा जाने लगा. उन्होंने साल एक हज़ार नौ सौ छियासी में आई फिल्म 'नगीना', एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में आई 'मि. इंडिया', साल एक हज़ार नौ सौ अठासी में आई 'तेजाब', साल एक हज़ार नौ सौ नवासी में आई 'चांदनी' सहित कई बेहतरीन फिल्मों के सॉन्ग की कोरियोग्राफी के लिए अवार्ड और सम्मान मिला. सरोज खान को साल दो हज़ार तीन में रिलीज हुई फिल्म 'देवदास' के सॉन्ग डोला रे डोल के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. इसके अलावा साल दो हज़ार छः में आई फिल्म 'श्रीनगरम' के सभी गानों और साल दो हज़ार आठ में आई 'जब वी मेट' के लिए यह इश्क हाए के लिए भी नेशनल अवार्ड मिला.
चंडीगढ़ - भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ को प्रदेशाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। इसके साथ इस पर पद नियुक्ति को लेकर गत कई माह से चल रही चर्चाओं और अटकलों का पटाक्षेप हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नगत प्रकाश नड्डा ने प्रदेशाध्यक्ष पद के लिये श्री धनकड़ के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है जो श्री सुभाष बराला का स्थान लेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कार्यालय प्रभारी अरूण सिंह ने श्री धनकड़ की नियुक्ति को लेकर आज पत्र जारी किया। श्री बराला के बाद श्री धनकड़ दूसरे जाट नेता हैं जिन पर पार्टी ने भरोसा जताया है। प्रदेश में जाट राजनीति का बोलबाला होने के चलते पार्टी हाईकमान को प्रदेशाध्यक्ष पद के लिये ऐसे जाट नेता दरकार थी जो जाटों समेत 36 बिरादरियों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो। श्री धनकड़ राज्य की पिछली भाजपा सरकार में कृषि मंत्री थे और स्वयं भी एक किसान होने के चलते उनकी जनता के बीच सतही स्तर पर गहरी पैठ है। सेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भूमिकाओं में रहने के अलावा वर्ष 2011 से 2015 तक दो बार भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निकटता की वजह से उनके ड्रीम प्रोजेक्ट 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के लिये श्री धनकड़ को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था। श्री धनकड़ का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के धाकला गांव में हुआ है। वर्ष 1978 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से एक स्वयंसेवक के तौर पर जुड़े। 1980 से 1996 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए काम किया। बाद में वह स्वदेशी जागरण मंच से भी जुड़े रहे। वर्ष 1996 में वह भाजपा से जुड़े तथा उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद उन्हें पार्टी के हिमाचल प्रदेश मामलों का प्रभारी बनाया गया जहां कमल खिलाने में उनकी भूमिका रही। वर्ष 2014 में रोहतक सांसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन यहां पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा से चुनाव हार गये। लेकिन इसी वर्ष बादली विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे और यहां कैबिनेट मंत्री बने। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में बादली सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
चंडीगढ़ - भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ को प्रदेशाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। इसके साथ इस पर पद नियुक्ति को लेकर गत कई माह से चल रही चर्चाओं और अटकलों का पटाक्षेप हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नगत प्रकाश नड्डा ने प्रदेशाध्यक्ष पद के लिये श्री धनकड़ के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है जो श्री सुभाष बराला का स्थान लेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कार्यालय प्रभारी अरूण सिंह ने श्री धनकड़ की नियुक्ति को लेकर आज पत्र जारी किया। श्री बराला के बाद श्री धनकड़ दूसरे जाट नेता हैं जिन पर पार्टी ने भरोसा जताया है। प्रदेश में जाट राजनीति का बोलबाला होने के चलते पार्टी हाईकमान को प्रदेशाध्यक्ष पद के लिये ऐसे जाट नेता दरकार थी जो जाटों समेत छत्तीस बिरादरियों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो। श्री धनकड़ राज्य की पिछली भाजपा सरकार में कृषि मंत्री थे और स्वयं भी एक किसान होने के चलते उनकी जनता के बीच सतही स्तर पर गहरी पैठ है। सेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भूमिकाओं में रहने के अलावा वर्ष दो हज़ार ग्यारह से दो हज़ार पंद्रह तक दो बार भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निकटता की वजह से उनके ड्रीम प्रोजेक्ट 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के लिये श्री धनकड़ को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था। श्री धनकड़ का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के धाकला गांव में हुआ है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से एक स्वयंसेवक के तौर पर जुड़े। एक हज़ार नौ सौ अस्सी से एक हज़ार नौ सौ छियानवे तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए काम किया। बाद में वह स्वदेशी जागरण मंच से भी जुड़े रहे। वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे में वह भाजपा से जुड़े तथा उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद उन्हें पार्टी के हिमाचल प्रदेश मामलों का प्रभारी बनाया गया जहां कमल खिलाने में उनकी भूमिका रही। वर्ष दो हज़ार चौदह में रोहतक सांसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन यहां पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा से चुनाव हार गये। लेकिन इसी वर्ष बादली विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे और यहां कैबिनेट मंत्री बने। वर्ष दो हज़ार उन्नीस के विधानसभा चुनाव में बादली सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
मैंने अपनी नींद से उठते हुए किताब निकाली, और मैं इसमें पढ़ाः "और भी बुरे समय थे, लेकिन कोई मतलब नहीं था। " और मैं इसमें पढ़ाः "और भी बुरे समय थे, लेकिन कोई मतलब नहीं था। " हां, फिल्म "ज़ोया" से ठंडा होने का समय नहीं है, जिसके बाद यह वास्तव में हिल रहा था, इसलिए अगली गंदी चाल का अगला प्रीमियर ध्वस्त हो गया। फिल्म "नाकाबंदी डायरी" का निर्देशन एंड्रे ज़ैतसेव ने किया है। मेडुज़ा और रोसिस्काया गज़ेटा की तरह प्रेस से टकराया और दूसरी तरफ से तीखी आलोचना की, उदाहरण के लिए, राडा मिखाइलोवना ग्रानोव्स्काया, मनोविज्ञान के डॉक्टर, घेराबंदी करने वाली महिला, निकोलाई पुचकोव और बैर इरिनचेव, एंड्रे सिदोरचिक और कई अन्य उदासीन नहीं हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात, लोग। फिल्म ने 42 वें अंतर्राष्ट्रीय मॉस्को फिल्म महोत्सव "गोल्डन सेंट जॉर्ज" का ग्रैंड प्रिक्स जीता। वह स्वाभाविक रूप से उन लोगों की प्रशंसा करता है, जिन्हें उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। लेकिन जो लोग आलोचना करते हैं वे भी उनकी राय के हकदार हैं, खासकर अगर वे वास्तव में भागीदार थे। पहले ही ट्रेलर ने लोगों को नाराज कर दिया है। हां, एक ट्रेलर एक प्रचारक उत्पाद है जिसे लोगों को थिएटर में आकर्षित करना चाहिए। "जब मैंने लेनिनग्राद की घेराबंदी के बारे में इस फिल्म का वीडियो देखा, तो मेरा दिल दुख और आक्रोश से भर उठा। वीडियो में जिस तरह से लेनिनग्राद के निवासियों को दिखाया गया है वह गंदा चाल और झूठ है। वीडियो में उन वीर लोगों को दर्शाया गया है जिन्होंने अपने शहर का बचाव किया था, "ग्रानोव्स्काया ने क्रास्नाया वेस्ना के साथ एक साक्षात्कार में कहा। "यह मेरे लिए स्पष्ट हो गया कि फिल्म के लेखक नाकाबंदी लोगों को नहीं मानते हैं। अगर हम ऐसे लोग होते, जैसा कि फिल्म निर्माताओं ने दिखाया, तो हमने लेनिनग्राद का बचाव नहीं किया होता। और आपको उन लोगों से नफरत करने की ज़रूरत कैसे है जो इस तरह की फिल्म बनाने के लिए नाकाबंदी से बच गए थे! " शायद राडा मिखाइलोवना अत्यधिक भावुक थे? तुम्हें पता है, मैं भी अपने आप को "अतिरिक्त भावुकता" की अनुमति दूंगा। युद्ध से पहले लेनिनग्राद में दो सौ से अधिक रिश्तेदार रहते थे। एक नाकाबंदी से बच गया। अलेक्जेंड्रा स्ट्रेलनिकोवा, दूसरी निकासी अस्पताल की नर्स। बाकी - बोगोसलोव्स्की, ओबुखोव्स्की और पिस्करेवस्की पर। लेकिन यह व्यक्तिगत के बारे में नहीं है, यह राष्ट्रीय स्तर पर एक त्रासदी थी। और पूरे देश ने लेनिनग्राद के लिए लड़ाई लड़ी। बड़ी कठिनाई के साथ, निर्यात किए गए बच्चों को पूरे सोवियत संघ में, पूरे गणराज्य में स्वीकार किया गया था। यह थोड़ा सम्मानजनक कर्तव्य माना जाता था। और यह वही है जो फिल्मों के बारे में बनाया जाना चाहिए - वीरता के बारे में, लोगों के आध्यात्मिक पराक्रम के बारे में, और न केवल जीवित रहना, बल्कि ऐसी परिस्थितियों में काम करना और लड़ना। लेकिन कोई नहीं। योग्य नहीं। और अगर वे अयोग्य हैं, तो इसे ज़ोंबी सर्वनाश के विषय पर न लें। पटकथा लेखक स्क्रिप्ट में प्रवेश नहीं कर सकता है, निर्देशक निर्देशन नहीं कर सकता है, संपादक संपादित नहीं कर सकता है, लेकिन आप, दर्शक, आपको इस भुगतान के कारण देखेंगे। अरे हाँ . . . क्या यह किसी को परेशान करता है कि निर्देशक, पटकथा लेखक, संपादक, निर्माता एक व्यक्ति हैं? एंड्री ज़ैतसेव, एक बहु-स्थानीय स्टक्खनोवित? जिनकी पीठ के पीछे सब कुछ वैसा ही है जैसा कि फिल्म "ज़ोया" में आरवीआईओ, मेडिंस्की और संस्कृति मंत्रालय की भूमिका है। और फिर मैं घोषणा करना चाहता हूंः "कोविद की जय! " यदि संगरोध उपायों के लिए नहीं, तो हम एक बार फिर कीचड़ से सराबोर हो जाते। जीत की 75 वीं वर्षगांठ के लिए नहीं (ओह, हम कैसे चाहेंगे! ), लेकिन नाकाबंदी के उठाने की अगली सालगिरह पर। यह हमारे लिए पर्याप्त नहीं है, खलनायक क्रोसोव्स्की के "हॉलिडे", हम वहां, जनता के सम्मान के लिए, चले गए ताकि कोई भी स्क्रीन पर इस को प्रदर्शित करने की हिम्मत न करे। हमने तय किया कि इंटरनेट पर्याप्त होगा। लेकिन जब आरवीआईओ हस्तक्षेप से मेडिंस्की के घोंसले का हिस्सा होता है, तो यह तुरंत स्पष्ट हो जाता हैः एक बजट होगा, जिसका अर्थ है कि सिनेमाघरों के स्क्रीन पर भी किराये होंगे। दुर्भाग्य से। तो वे हमें क्या दिखाएंगे? आंद्रेई ज़ेटसेव से क्या उम्मीद करें, वैसे, इस समय कुछ खास नहीं है जिसे मास्टरपीस बनाने के संदर्भ में नोट नहीं किया गया है? ज़ोंबी सर्वनाश। द वाकिंग डेड। हर एक चीज़। यह सब कुछ निर्देशक के दिमाग और कल्पना के लिए पर्याप्त था। आमतौर पर एक ट्रेलर "फेटेस्ट" फ़्रेम का एक कट होता है जिसे दर्शक पसंद कर सकते हैं। कभी-कभी ट्रेलर से सभी दिलचस्प फुटेज फिल्म में सबसे मूल्यवान चीज होती है। लेकिन श्री ज़ैतसेव ने हमें लाश के बारे में वास्तव में एक फिल्म दिखाने का फैसला किया, जिसने सब कुछ मानव को खो दिया है। ब्लैक एंड व्हाइट "फिल्म", कुछ वास्तव में पोस्ट-एपोकैलिक शहर, इमारतों के साथ, छत से जमीन तक किसी कारण से कुछ अजीब ड्रिप, ठंढ के साथ . . . धीरे-धीरे चलती आंकड़े . . . एक, जैसे फिल्म "ज़ोया"। एक स्लेज को खींचते हुए ऑडियो ट्रैक को भरते हुए। लाइन के ठीक बगल में स्लेड्स पलट जाते हैं और ब्रेड की रोटियां बर्फ पर गिरती हैं। लाइन में खड़े लोगों के सिर धीरे-धीरे मुड़ते हैं और बार-बार होने वाली आवाज़ से लगता हैः "ब्रेड . . . ब्रेड . . . ब्रेड . . . ब्रेड . . . ब्रेड . . . "। घातक और शोकाकुल गुनगुनाना। उच्चतम स्तर की विकटता। फिर से अपने टिकटों के साथ हॉलीवुड। भगवान, हमें यह सब क्यों चाहिए? हमें इतनी देर तक सजा क्यों भुगतनी पड़ती है, यह सब बकवास है, इन औसत दर्जे के निर्देशकों और पटकथा लेखकों को पैसा क्यों दिया जाता है? क्या इसके लिए वोट देना जरूरी था? यह संविधान इसलिए रक्षा करता है ऐतिहासिक सच्चाई? नहीं, ऐसा नहीं था। हाँ, इतिहास के शास्त्री वास्तव में ज़ोम्बीलैंड को दिखाना चाहते हैं, जो उन प्राणियों से आबाद हैं जो अपना मानवीय स्वरूप खो चुके हैं। कुछ वृत्ति के एक सेट का प्रदर्शन। बच्चों से रोटी न चुराएँ और न खाएँ यह एक वीरता और उपलब्धि है? क्या यह सब गर्व और बिना शर्त लेनिनग्राद करने में सक्षम था? नहीं। पर्याप्त दस्तावेज, संस्मरण, संस्मरण, किताबें हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद कोई भी केवल एक निष्कर्ष निकाल सकता हैः लेनिनग्राद मौत का एक राज्य नहीं था, लाश का निवास था जो अपनी मानवीय उपस्थिति खो चुके हैं। यह एक कठिन मोर्चा था, जीवन और मृत्यु के युद्ध का मोर्चा। लाशों ने कारखानों में काम नहीं किया, मरम्मत और विमोचन किया टैंक और स्व-चालित बंदूकें। लाश नहीं जर्मन छापे विमानन और तोपखाने गोलाबारी का विरोध किया। वे लोग थे। और न केवल लोग, बल्कि उच्चतम भावना और दृढ़ता के लोग। एक दूसरे की मदद करना। आखिरी मिनट तक लड़े। जिन्होंने संघर्ष किया, काम किया, सिखाया और अध्ययन किया। हां, हवाई छापे और गोलाबारी के तहत मरना, भूख और ठंड से मरना। लेकिन बेवकूफ लाश के रूप में नहीं, बल्कि उन लोगों के रूप में जो युद्ध में थे, वे कत्ल जानवरों के रूप में नहीं थे, बल्कि बहुत ही मातृभूमि के कुछ हिस्सों के रूप में, जो अंततः वे थे। ज़ैतसेव यह नहीं समझता है। वह शिक्षा नहीं, वह शिक्षा नहीं। इसलिए उसकी लाश है। और जिन्हें ठीक से शिक्षित और शिक्षित किया गया उनकी स्मृति में पूरी तरह से अलग लोग हैं। जिन्होंने बच्चों को आखिरी तड़प दिया ताकि वे इस भयानक समय से बच सकें। हाँ, वहाँ शैतान थे। चोर, दारोगा, डाकू। महान शहर की आबादी की उज्ज्वल छवि पर छाया, जो पागल कुत्तों की तरह पकड़े गए और नष्ट हो गए। पाठ में मैं उपयोगी स्रोतों के लिए कई लिंक दूंगा, लेकिन मैं हर किसी को बहुत दिलचस्प काम, अलेक्जेंडर किकनडज़ की पुस्तक "द लॉन्ग टाइम" पढ़ने की सलाह देता हूं। पुस्तक लेनिनग्राद डायनमो के टीएचएटी फुटबॉल मैच के लिए समर्पित है, लेकिन इसमें कई दिलचस्प तथ्य शामिल हैं कि खिलाड़ियों ने युद्ध के दौरान क्या किया। अत्यधिक सिफारिश किया जाता है। और अगर कम से कम कुछ लेनिनग्रादर्स उन राक्षसों में बदल गए थे जो कि ज़ेतसेव ने अपने परिवाद में हटा दिया, तो शहर निश्चित रूप से गिर जाएगा। और आश्चर्य के रूप में यह लग सकता है, किसी कारण के लिए जैतसेव शुरू होता है . . . झूठ बोलना! Rossiyskaya Gazeta के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहाः "यह एक वृत्तचित्र वास्तविकता है। मैंने स्टार्स ऑफ द डे पर आधारित पटकथा लिखी, बुक ऑफ सीज से मिले सबूत और डेनियल ग्रैनिन के संस्मरण। और मैं खुद को नाकाबंदी के बारे में कुछ कल्पना करने की अनुमति नहीं देता। यह एक पवित्र विषय है, और फिल्म में जो कुछ भी है वह नाकाबंदी के बचे लोगों की यादें हैं। 1941 की सर्दियों में ग्रैनिन, बर्गोल्ट्स और नाकाबंदी की डायरियों में शहर का विस्तृत वर्णन है - भयंकर, जब बहुत सारे लोग ठंढ और भूख से मर गए थे। तब हमने किसी तरह अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सीखा था, वहाँ भोजन अधिक था, और बाद में सड़कों पर फिल्म बनाना इतना घातक नहीं लगता है। और पहला साल सबसे खराब होता है। दिसंबर में, बिजली काट दी गई, कैमरामैन ने अपने कैमरे सौंप दिए, और यह क्रूर सर्दी लगभग फोटो में या समाचारपत्रों में नहीं है। " ज़ैतसेव ने सब कुछ कैसे पढ़ा, इसके बारे में बैर इरिंचेव ने बहुत अच्छी तरह से कहा, और मुझे उसके बाद दोहराने का कोई कारण नहीं दिखता है, यह पुचुकोव के भाषण में उसे दिखाने के लिए पर्याप्त है। ईमानदार काम। बगल के लेनिनग्राद के दस्तावेजी फिल्मांकन, 1941-1942 की सर्दियों की तस्वीरें खींची गईं। सोवियत वर्षों में, ये सभी फोटोग्राफिक सामग्री उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन अब उनके साथ परिचित होना काफी संभव है। यह तथ्य कि ज़ैतसेव को पता नहीं है कि ऑपरेटरों को बिजली की आवश्यकता नहीं थी, आश्चर्य की बात है। काश, किसी ने कहीं भी अपने कैमरे नहीं सौंपे। वे उस भयानक सर्दी सहित फिल्माए गए, जैसा कि आप ऊपर की तस्वीरों से देख सकते हैं। कैमरामैन बोरिस डेमेंटयेव, बोरिस सोकोलोव, मिखाइल पॉसेल्स्की और रोमन कारमेन, मई 1945, जर्मनी, बर्लिन। यहाँ मेरे ऑल-टाइम आइडल रोमन कारमेन और उनके "आयमो 71-क्यू" हैं, जो बेल एंड हॉवेल का एक अमेरिकी कैमरा है। हालांकि हमारे KS-4 और KS-5 भी मौजूद थे। और फिर, मुख्य सवालः ज़ैतसेव हमें क्या दिखाना चाहता है? नाकेबंदी का खौफ? माफ कीजिए, एक संग्रहालय में रखी सरोगेट ब्रेड के 125 ग्राम राशन से ज्यादा बुरा क्या हो सकता है? तान्या सविचवा की डायरी के पन्नों से ज्यादा क्या झटका दे सकता है? रोड ऑफ लाइफ ट्रैफिक कंट्रोलर्स के काले ठंढे हाथ और पैर जो रात में बर्फीले पानी में खड़े थे ताकि शहर के निवासियों के लिए जीवन के साथ कारें चल सकें? जीतसेव ने लेनिनग्राद के नायकों के खिलाफ उन लोगों को नायक के रूप में नहीं दिखाने का प्रयास किया, जिन्होंने एक व्यक्ति के लिए सबसे कीमती चीज का बलिदान किया, जो जीवन के लिए - विजय की वेदी तक, लेकिन पीड़ितों के रूप में। जिन्हें कुछ अतुलनीय लक्ष्यों और आदर्शों के लिए बलिदान किया गया था। यह बहुत ही पुनर्लेखन है जिसके खिलाफ, सिद्धांत रूप में, पुतिन संविधान को काम करना चाहिए था। लेकिन यह किसी कारण से काम नहीं करता है। और यह एक और बातचीत का विषय है। और अब मैं एक अन्य वीडियो सामग्री का प्रस्ताव करता हूं, जो पूरी तरह से और ईमानदारी से आंद्रेई जैतसेव के बारे में बताता है। मैं उद्धृत नहीं करना चाहता, गैलिना शेचर्बा इस फिल्म के कलात्मक मूल्य को पूरी तरह से समझती हैं। बैर इरिनचेव और दिमित्री पुचकोव की तुलना में कोई कम पूरी तरह से ऐतिहासिक मूल्य का विश्लेषण नहीं करता है। आंद्रेई जैतसेव द्वारा निर्देशित फिल्म की समीक्षा। चित्र और अर्थ। मुझे क्या समझ आया। और मुझे निम्नलिखित का एहसास हुआः रूसी सिनेमा में आज जो कुछ भी हो रहा है, मैं नहीं जानता कि किसकी इच्छा से, लेकिन इसका उद्देश्य इतिहास के सबसे उलट पुनर्लेखन में है। ऐतिहासिक मूल्यों को प्रतिस्थापित करने के लिए। ग्रेट देशभक्ति युद्ध में SOVIET लोगों के पराक्रम को समर्पित करने के लिए। नाकाबंदी की नकली सेटिंग एक उपलब्धि नहीं थी, लेकिन एक आपदा थी। युद्ध की व्यर्थता, मूल्यह्रास। "दुः ख और पश्चाताप" के साथ "याद रखें और गर्व करें"। सभी आगामी परिणामों के साथ। आपका संविधान, श्री पुतिन कहाँ है? हमारे ऐतिहासिक मूल्यों की सुरक्षा कहाँ है? और क्या यह गंभीरता से सोचने का समय नहीं है कि रूसी सिनेमा के साथ क्या हो रहा है और जहां दस वर्षों में RVIO का Vlasov क्लीक हमें अग्रणी बना रहा है? क्या हमें ऐसी कहानी की जरूरत है? आज "ज़ोया" पर, जो भयानक है, हुक या बदमाश द्वारा वे दर्शकों, विशेष रूप से युवाओं को ड्राइव करने की कोशिश कर रहे हैं। शायद यह बुरे सपने की धारा को रोकने का समय है कि आरवीआईओ और मेडिंस्की हमें स्क्रीन से बहाने की कोशिश कर रहे हैं? विशेष रूप से एक सैन्य विषय की एक निश्चित अवधारणा और सामान्य रूप से हमारे इतिहास का एक कलात्मक चित्रण विकसित करें? ठीक है, तुम सब कुछ अब हो रहा है जिस तरह से नहीं कर सकते! सोचिए, प्रिय पाठकों, अंतिम दिग्गज और पीछे के अंतिम कार्यकर्ता, जिसमें आसपास के निवासी लेनिनग्राद शामिल हैं, छोड़ रहे हैं। और बदमाश, "जीवन की सच्चाई" के आधार पर, ऐतिहासिक सिनेमा को छोड़ देते हैं। और कौन बचा है? एक निश्चित देश के नागरिकों के प्रति उदासीन और विश्वास नहीं रह गया है, जो अक्सर अतीत को देखते हुए घृणा करते हैं। एकदम सही झुंड। प्रबंधन में आसान। क्या यह हम बहुत करीने से नेतृत्व कर रहे हैं? वीर, मादक और अपराधी अलेक्जेंडर मैट्रोजोव, सिज़ोफ्रेनिक ज़ोया कोस्मोडेमेन्स्काया, बच्चों-सबोटर्स "बस्टर्ड" के बजाय घिरे लेनिनग्राद के शिकार। अगला कौन है? और फिर, जैसा कि मैं इसे समझता हूं, क्या यह व्लासोव, क्रास्नोव, अख्मेट-गिरी, डेनिकिन, युडिकिच है? हां, ऐसे महान अतीत वाला देश एक "महान" भविष्य नहीं हो सकता है। और यह, स्पष्ट रूप से, मारता है। - लेखकः
मैंने अपनी नींद से उठते हुए किताब निकाली, और मैं इसमें पढ़ाः "और भी बुरे समय थे, लेकिन कोई मतलब नहीं था। " और मैं इसमें पढ़ाः "और भी बुरे समय थे, लेकिन कोई मतलब नहीं था। " हां, फिल्म "ज़ोया" से ठंडा होने का समय नहीं है, जिसके बाद यह वास्तव में हिल रहा था, इसलिए अगली गंदी चाल का अगला प्रीमियर ध्वस्त हो गया। फिल्म "नाकाबंदी डायरी" का निर्देशन एंड्रे ज़ैतसेव ने किया है। मेडुज़ा और रोसिस्काया गज़ेटा की तरह प्रेस से टकराया और दूसरी तरफ से तीखी आलोचना की, उदाहरण के लिए, राडा मिखाइलोवना ग्रानोव्स्काया, मनोविज्ञान के डॉक्टर, घेराबंदी करने वाली महिला, निकोलाई पुचकोव और बैर इरिनचेव, एंड्रे सिदोरचिक और कई अन्य उदासीन नहीं हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात, लोग। फिल्म ने बयालीस वें अंतर्राष्ट्रीय मॉस्को फिल्म महोत्सव "गोल्डन सेंट जॉर्ज" का ग्रैंड प्रिक्स जीता। वह स्वाभाविक रूप से उन लोगों की प्रशंसा करता है, जिन्हें उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। लेकिन जो लोग आलोचना करते हैं वे भी उनकी राय के हकदार हैं, खासकर अगर वे वास्तव में भागीदार थे। पहले ही ट्रेलर ने लोगों को नाराज कर दिया है। हां, एक ट्रेलर एक प्रचारक उत्पाद है जिसे लोगों को थिएटर में आकर्षित करना चाहिए। "जब मैंने लेनिनग्राद की घेराबंदी के बारे में इस फिल्म का वीडियो देखा, तो मेरा दिल दुख और आक्रोश से भर उठा। वीडियो में जिस तरह से लेनिनग्राद के निवासियों को दिखाया गया है वह गंदा चाल और झूठ है। वीडियो में उन वीर लोगों को दर्शाया गया है जिन्होंने अपने शहर का बचाव किया था, "ग्रानोव्स्काया ने क्रास्नाया वेस्ना के साथ एक साक्षात्कार में कहा। "यह मेरे लिए स्पष्ट हो गया कि फिल्म के लेखक नाकाबंदी लोगों को नहीं मानते हैं। अगर हम ऐसे लोग होते, जैसा कि फिल्म निर्माताओं ने दिखाया, तो हमने लेनिनग्राद का बचाव नहीं किया होता। और आपको उन लोगों से नफरत करने की ज़रूरत कैसे है जो इस तरह की फिल्म बनाने के लिए नाकाबंदी से बच गए थे! " शायद राडा मिखाइलोवना अत्यधिक भावुक थे? तुम्हें पता है, मैं भी अपने आप को "अतिरिक्त भावुकता" की अनुमति दूंगा। युद्ध से पहले लेनिनग्राद में दो सौ से अधिक रिश्तेदार रहते थे। एक नाकाबंदी से बच गया। अलेक्जेंड्रा स्ट्रेलनिकोवा, दूसरी निकासी अस्पताल की नर्स। बाकी - बोगोसलोव्स्की, ओबुखोव्स्की और पिस्करेवस्की पर। लेकिन यह व्यक्तिगत के बारे में नहीं है, यह राष्ट्रीय स्तर पर एक त्रासदी थी। और पूरे देश ने लेनिनग्राद के लिए लड़ाई लड़ी। बड़ी कठिनाई के साथ, निर्यात किए गए बच्चों को पूरे सोवियत संघ में, पूरे गणराज्य में स्वीकार किया गया था। यह थोड़ा सम्मानजनक कर्तव्य माना जाता था। और यह वही है जो फिल्मों के बारे में बनाया जाना चाहिए - वीरता के बारे में, लोगों के आध्यात्मिक पराक्रम के बारे में, और न केवल जीवित रहना, बल्कि ऐसी परिस्थितियों में काम करना और लड़ना। लेकिन कोई नहीं। योग्य नहीं। और अगर वे अयोग्य हैं, तो इसे ज़ोंबी सर्वनाश के विषय पर न लें। पटकथा लेखक स्क्रिप्ट में प्रवेश नहीं कर सकता है, निर्देशक निर्देशन नहीं कर सकता है, संपादक संपादित नहीं कर सकता है, लेकिन आप, दर्शक, आपको इस भुगतान के कारण देखेंगे। अरे हाँ . . . क्या यह किसी को परेशान करता है कि निर्देशक, पटकथा लेखक, संपादक, निर्माता एक व्यक्ति हैं? एंड्री ज़ैतसेव, एक बहु-स्थानीय स्टक्खनोवित? जिनकी पीठ के पीछे सब कुछ वैसा ही है जैसा कि फिल्म "ज़ोया" में आरवीआईओ, मेडिंस्की और संस्कृति मंत्रालय की भूमिका है। और फिर मैं घोषणा करना चाहता हूंः "कोविद की जय! " यदि संगरोध उपायों के लिए नहीं, तो हम एक बार फिर कीचड़ से सराबोर हो जाते। जीत की पचहत्तर वीं वर्षगांठ के लिए नहीं , लेकिन नाकाबंदी के उठाने की अगली सालगिरह पर। यह हमारे लिए पर्याप्त नहीं है, खलनायक क्रोसोव्स्की के "हॉलिडे", हम वहां, जनता के सम्मान के लिए, चले गए ताकि कोई भी स्क्रीन पर इस को प्रदर्शित करने की हिम्मत न करे। हमने तय किया कि इंटरनेट पर्याप्त होगा। लेकिन जब आरवीआईओ हस्तक्षेप से मेडिंस्की के घोंसले का हिस्सा होता है, तो यह तुरंत स्पष्ट हो जाता हैः एक बजट होगा, जिसका अर्थ है कि सिनेमाघरों के स्क्रीन पर भी किराये होंगे। दुर्भाग्य से। तो वे हमें क्या दिखाएंगे? आंद्रेई ज़ेटसेव से क्या उम्मीद करें, वैसे, इस समय कुछ खास नहीं है जिसे मास्टरपीस बनाने के संदर्भ में नोट नहीं किया गया है? ज़ोंबी सर्वनाश। द वाकिंग डेड। हर एक चीज़। यह सब कुछ निर्देशक के दिमाग और कल्पना के लिए पर्याप्त था। आमतौर पर एक ट्रेलर "फेटेस्ट" फ़्रेम का एक कट होता है जिसे दर्शक पसंद कर सकते हैं। कभी-कभी ट्रेलर से सभी दिलचस्प फुटेज फिल्म में सबसे मूल्यवान चीज होती है। लेकिन श्री ज़ैतसेव ने हमें लाश के बारे में वास्तव में एक फिल्म दिखाने का फैसला किया, जिसने सब कुछ मानव को खो दिया है। ब्लैक एंड व्हाइट "फिल्म", कुछ वास्तव में पोस्ट-एपोकैलिक शहर, इमारतों के साथ, छत से जमीन तक किसी कारण से कुछ अजीब ड्रिप, ठंढ के साथ . . . धीरे-धीरे चलती आंकड़े . . . एक, जैसे फिल्म "ज़ोया"। एक स्लेज को खींचते हुए ऑडियो ट्रैक को भरते हुए। लाइन के ठीक बगल में स्लेड्स पलट जाते हैं और ब्रेड की रोटियां बर्फ पर गिरती हैं। लाइन में खड़े लोगों के सिर धीरे-धीरे मुड़ते हैं और बार-बार होने वाली आवाज़ से लगता हैः "ब्रेड . . . ब्रेड . . . ब्रेड . . . ब्रेड . . . ब्रेड . . . "। घातक और शोकाकुल गुनगुनाना। उच्चतम स्तर की विकटता। फिर से अपने टिकटों के साथ हॉलीवुड। भगवान, हमें यह सब क्यों चाहिए? हमें इतनी देर तक सजा क्यों भुगतनी पड़ती है, यह सब बकवास है, इन औसत दर्जे के निर्देशकों और पटकथा लेखकों को पैसा क्यों दिया जाता है? क्या इसके लिए वोट देना जरूरी था? यह संविधान इसलिए रक्षा करता है ऐतिहासिक सच्चाई? नहीं, ऐसा नहीं था। हाँ, इतिहास के शास्त्री वास्तव में ज़ोम्बीलैंड को दिखाना चाहते हैं, जो उन प्राणियों से आबाद हैं जो अपना मानवीय स्वरूप खो चुके हैं। कुछ वृत्ति के एक सेट का प्रदर्शन। बच्चों से रोटी न चुराएँ और न खाएँ यह एक वीरता और उपलब्धि है? क्या यह सब गर्व और बिना शर्त लेनिनग्राद करने में सक्षम था? नहीं। पर्याप्त दस्तावेज, संस्मरण, संस्मरण, किताबें हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद कोई भी केवल एक निष्कर्ष निकाल सकता हैः लेनिनग्राद मौत का एक राज्य नहीं था, लाश का निवास था जो अपनी मानवीय उपस्थिति खो चुके हैं। यह एक कठिन मोर्चा था, जीवन और मृत्यु के युद्ध का मोर्चा। लाशों ने कारखानों में काम नहीं किया, मरम्मत और विमोचन किया टैंक और स्व-चालित बंदूकें। लाश नहीं जर्मन छापे विमानन और तोपखाने गोलाबारी का विरोध किया। वे लोग थे। और न केवल लोग, बल्कि उच्चतम भावना और दृढ़ता के लोग। एक दूसरे की मदद करना। आखिरी मिनट तक लड़े। जिन्होंने संघर्ष किया, काम किया, सिखाया और अध्ययन किया। हां, हवाई छापे और गोलाबारी के तहत मरना, भूख और ठंड से मरना। लेकिन बेवकूफ लाश के रूप में नहीं, बल्कि उन लोगों के रूप में जो युद्ध में थे, वे कत्ल जानवरों के रूप में नहीं थे, बल्कि बहुत ही मातृभूमि के कुछ हिस्सों के रूप में, जो अंततः वे थे। ज़ैतसेव यह नहीं समझता है। वह शिक्षा नहीं, वह शिक्षा नहीं। इसलिए उसकी लाश है। और जिन्हें ठीक से शिक्षित और शिक्षित किया गया उनकी स्मृति में पूरी तरह से अलग लोग हैं। जिन्होंने बच्चों को आखिरी तड़प दिया ताकि वे इस भयानक समय से बच सकें। हाँ, वहाँ शैतान थे। चोर, दारोगा, डाकू। महान शहर की आबादी की उज्ज्वल छवि पर छाया, जो पागल कुत्तों की तरह पकड़े गए और नष्ट हो गए। पाठ में मैं उपयोगी स्रोतों के लिए कई लिंक दूंगा, लेकिन मैं हर किसी को बहुत दिलचस्प काम, अलेक्जेंडर किकनडज़ की पुस्तक "द लॉन्ग टाइम" पढ़ने की सलाह देता हूं। पुस्तक लेनिनग्राद डायनमो के टीएचएटी फुटबॉल मैच के लिए समर्पित है, लेकिन इसमें कई दिलचस्प तथ्य शामिल हैं कि खिलाड़ियों ने युद्ध के दौरान क्या किया। अत्यधिक सिफारिश किया जाता है। और अगर कम से कम कुछ लेनिनग्रादर्स उन राक्षसों में बदल गए थे जो कि ज़ेतसेव ने अपने परिवाद में हटा दिया, तो शहर निश्चित रूप से गिर जाएगा। और आश्चर्य के रूप में यह लग सकता है, किसी कारण के लिए जैतसेव शुरू होता है . . . झूठ बोलना! Rossiyskaya Gazeta के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहाः "यह एक वृत्तचित्र वास्तविकता है। मैंने स्टार्स ऑफ द डे पर आधारित पटकथा लिखी, बुक ऑफ सीज से मिले सबूत और डेनियल ग्रैनिन के संस्मरण। और मैं खुद को नाकाबंदी के बारे में कुछ कल्पना करने की अनुमति नहीं देता। यह एक पवित्र विषय है, और फिल्म में जो कुछ भी है वह नाकाबंदी के बचे लोगों की यादें हैं। एक हज़ार नौ सौ इकतालीस की सर्दियों में ग्रैनिन, बर्गोल्ट्स और नाकाबंदी की डायरियों में शहर का विस्तृत वर्णन है - भयंकर, जब बहुत सारे लोग ठंढ और भूख से मर गए थे। तब हमने किसी तरह अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सीखा था, वहाँ भोजन अधिक था, और बाद में सड़कों पर फिल्म बनाना इतना घातक नहीं लगता है। और पहला साल सबसे खराब होता है। दिसंबर में, बिजली काट दी गई, कैमरामैन ने अपने कैमरे सौंप दिए, और यह क्रूर सर्दी लगभग फोटो में या समाचारपत्रों में नहीं है। " ज़ैतसेव ने सब कुछ कैसे पढ़ा, इसके बारे में बैर इरिंचेव ने बहुत अच्छी तरह से कहा, और मुझे उसके बाद दोहराने का कोई कारण नहीं दिखता है, यह पुचुकोव के भाषण में उसे दिखाने के लिए पर्याप्त है। ईमानदार काम। बगल के लेनिनग्राद के दस्तावेजी फिल्मांकन, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस-एक हज़ार नौ सौ बयालीस की सर्दियों की तस्वीरें खींची गईं। सोवियत वर्षों में, ये सभी फोटोग्राफिक सामग्री उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन अब उनके साथ परिचित होना काफी संभव है। यह तथ्य कि ज़ैतसेव को पता नहीं है कि ऑपरेटरों को बिजली की आवश्यकता नहीं थी, आश्चर्य की बात है। काश, किसी ने कहीं भी अपने कैमरे नहीं सौंपे। वे उस भयानक सर्दी सहित फिल्माए गए, जैसा कि आप ऊपर की तस्वीरों से देख सकते हैं। कैमरामैन बोरिस डेमेंटयेव, बोरिस सोकोलोव, मिखाइल पॉसेल्स्की और रोमन कारमेन, मई एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस, जर्मनी, बर्लिन। यहाँ मेरे ऑल-टाइम आइडल रोमन कारमेन और उनके "आयमो इकहत्तर-क्यू" हैं, जो बेल एंड हॉवेल का एक अमेरिकी कैमरा है। हालांकि हमारे KS-चार और KS-पाँच भी मौजूद थे। और फिर, मुख्य सवालः ज़ैतसेव हमें क्या दिखाना चाहता है? नाकेबंदी का खौफ? माफ कीजिए, एक संग्रहालय में रखी सरोगेट ब्रेड के एक सौ पच्चीस ग्राम राशन से ज्यादा बुरा क्या हो सकता है? तान्या सविचवा की डायरी के पन्नों से ज्यादा क्या झटका दे सकता है? रोड ऑफ लाइफ ट्रैफिक कंट्रोलर्स के काले ठंढे हाथ और पैर जो रात में बर्फीले पानी में खड़े थे ताकि शहर के निवासियों के लिए जीवन के साथ कारें चल सकें? जीतसेव ने लेनिनग्राद के नायकों के खिलाफ उन लोगों को नायक के रूप में नहीं दिखाने का प्रयास किया, जिन्होंने एक व्यक्ति के लिए सबसे कीमती चीज का बलिदान किया, जो जीवन के लिए - विजय की वेदी तक, लेकिन पीड़ितों के रूप में। जिन्हें कुछ अतुलनीय लक्ष्यों और आदर्शों के लिए बलिदान किया गया था। यह बहुत ही पुनर्लेखन है जिसके खिलाफ, सिद्धांत रूप में, पुतिन संविधान को काम करना चाहिए था। लेकिन यह किसी कारण से काम नहीं करता है। और यह एक और बातचीत का विषय है। और अब मैं एक अन्य वीडियो सामग्री का प्रस्ताव करता हूं, जो पूरी तरह से और ईमानदारी से आंद्रेई जैतसेव के बारे में बताता है। मैं उद्धृत नहीं करना चाहता, गैलिना शेचर्बा इस फिल्म के कलात्मक मूल्य को पूरी तरह से समझती हैं। बैर इरिनचेव और दिमित्री पुचकोव की तुलना में कोई कम पूरी तरह से ऐतिहासिक मूल्य का विश्लेषण नहीं करता है। आंद्रेई जैतसेव द्वारा निर्देशित फिल्म की समीक्षा। चित्र और अर्थ। मुझे क्या समझ आया। और मुझे निम्नलिखित का एहसास हुआः रूसी सिनेमा में आज जो कुछ भी हो रहा है, मैं नहीं जानता कि किसकी इच्छा से, लेकिन इसका उद्देश्य इतिहास के सबसे उलट पुनर्लेखन में है। ऐतिहासिक मूल्यों को प्रतिस्थापित करने के लिए। ग्रेट देशभक्ति युद्ध में SOVIET लोगों के पराक्रम को समर्पित करने के लिए। नाकाबंदी की नकली सेटिंग एक उपलब्धि नहीं थी, लेकिन एक आपदा थी। युद्ध की व्यर्थता, मूल्यह्रास। "दुः ख और पश्चाताप" के साथ "याद रखें और गर्व करें"। सभी आगामी परिणामों के साथ। आपका संविधान, श्री पुतिन कहाँ है? हमारे ऐतिहासिक मूल्यों की सुरक्षा कहाँ है? और क्या यह गंभीरता से सोचने का समय नहीं है कि रूसी सिनेमा के साथ क्या हो रहा है और जहां दस वर्षों में RVIO का Vlasov क्लीक हमें अग्रणी बना रहा है? क्या हमें ऐसी कहानी की जरूरत है? आज "ज़ोया" पर, जो भयानक है, हुक या बदमाश द्वारा वे दर्शकों, विशेष रूप से युवाओं को ड्राइव करने की कोशिश कर रहे हैं। शायद यह बुरे सपने की धारा को रोकने का समय है कि आरवीआईओ और मेडिंस्की हमें स्क्रीन से बहाने की कोशिश कर रहे हैं? विशेष रूप से एक सैन्य विषय की एक निश्चित अवधारणा और सामान्य रूप से हमारे इतिहास का एक कलात्मक चित्रण विकसित करें? ठीक है, तुम सब कुछ अब हो रहा है जिस तरह से नहीं कर सकते! सोचिए, प्रिय पाठकों, अंतिम दिग्गज और पीछे के अंतिम कार्यकर्ता, जिसमें आसपास के निवासी लेनिनग्राद शामिल हैं, छोड़ रहे हैं। और बदमाश, "जीवन की सच्चाई" के आधार पर, ऐतिहासिक सिनेमा को छोड़ देते हैं। और कौन बचा है? एक निश्चित देश के नागरिकों के प्रति उदासीन और विश्वास नहीं रह गया है, जो अक्सर अतीत को देखते हुए घृणा करते हैं। एकदम सही झुंड। प्रबंधन में आसान। क्या यह हम बहुत करीने से नेतृत्व कर रहे हैं? वीर, मादक और अपराधी अलेक्जेंडर मैट्रोजोव, सिज़ोफ्रेनिक ज़ोया कोस्मोडेमेन्स्काया, बच्चों-सबोटर्स "बस्टर्ड" के बजाय घिरे लेनिनग्राद के शिकार। अगला कौन है? और फिर, जैसा कि मैं इसे समझता हूं, क्या यह व्लासोव, क्रास्नोव, अख्मेट-गिरी, डेनिकिन, युडिकिच है? हां, ऐसे महान अतीत वाला देश एक "महान" भविष्य नहीं हो सकता है। और यह, स्पष्ट रूप से, मारता है। - लेखकः
ALLAHABAD: एसटीएफ ने असलहों के दो सौदागरों विजय बहादुर पटेल व रवि कुमार पटेल को थरवई के सेमरी गेट के पास बुधवार रात नकली नोटों के साथ दबोच लिया। दोनों के पास 500-500 रुपए के 100 नोट बरामद हुए हैं। दोनों को नकली नोट प्रतापगढ़ लालगंज के बच्चा चौरसिया ने मुहैया कराए थे। बच्चा दोनों को नोट थमाने के बाद गायब हो गया। एसटीएफ उसकी तलाश कर रही है। एसटीएफ इस गिरोह के नक्सली कनेक्शन की भी जांच में जुटी है। रवि जौनपुर के मछली शहर व विजय रामपुर भभरा का रहने वाला है। एसटीएफ के मुताबिक दोनों लंबे समय से पश्चिम बंगाल व बिहार से पिस्टल, तमंचा लाकर इलाहाबाद में सप्लाई करते थे। असलहों की तस्करी के दौरान दोनों की पहचान बच्चा से हुई थी। बच्चा वह शख्स है जो कि सीधे मालदा व बिहार के रास्ते नकली नोट इलाहाबाद और आसपास के जिलों तक लाता है। उसके पास विजय व रवि जैसे कई लोग हैं जो कैरियर का काम करते हैं। बच्चा को एक लाख के जाली नोट 40 हजार रुपए तक में मिलते है। बंगाल से लाए एक लाख के नकली नोट वह इलाहाबाद में 60 हजार रुपए तक में बेचता है। 20 हजार रुपए वह होम डिलीवरी का एक्सट्रा चार्ज लेता है। अगर कोई मालदा खुद जाए तो उसे एक लाख रुपए के जाली नोट 40 हजार रुपए तक में मिल सकते हैं। सीओ एसटीएफ प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि सूचना मिली थी कि नकली नोटों की एक खेप पहुंचने वाली है। एसटीएफ के एसआई श्रीनिवास राय ने जाल फैलाया और दो को धर दबोचा। बच्चा एसटीएफ के हाथ नहीं आ सका है। उसके बारे में इन्फार्मेशन जुटाई जा रही है। एसटीएफ को पता चला है कि बच्चा इलाहाबाद से लेकर वेस्ट यूपी, एमपी व छत्तीसगढ़ तक फेक करेंसी की सप्लाई करता है। सारा काम वह खुद करता है। दोनों ने कुबूल किया है कि वह साल भर में पांच साल से अधिक के नकली नोट खपा चुके हैं। नकली नोटों के धंधे से जुड़ने के बाद दोनों ने असलहों की तस्करी का काम कम कर दिया था।
ALLAHABAD: एसटीएफ ने असलहों के दो सौदागरों विजय बहादुर पटेल व रवि कुमार पटेल को थरवई के सेमरी गेट के पास बुधवार रात नकली नोटों के साथ दबोच लिया। दोनों के पास पाँच सौ-पाँच सौ रुपयापए के एक सौ नोट बरामद हुए हैं। दोनों को नकली नोट प्रतापगढ़ लालगंज के बच्चा चौरसिया ने मुहैया कराए थे। बच्चा दोनों को नोट थमाने के बाद गायब हो गया। एसटीएफ उसकी तलाश कर रही है। एसटीएफ इस गिरोह के नक्सली कनेक्शन की भी जांच में जुटी है। रवि जौनपुर के मछली शहर व विजय रामपुर भभरा का रहने वाला है। एसटीएफ के मुताबिक दोनों लंबे समय से पश्चिम बंगाल व बिहार से पिस्टल, तमंचा लाकर इलाहाबाद में सप्लाई करते थे। असलहों की तस्करी के दौरान दोनों की पहचान बच्चा से हुई थी। बच्चा वह शख्स है जो कि सीधे मालदा व बिहार के रास्ते नकली नोट इलाहाबाद और आसपास के जिलों तक लाता है। उसके पास विजय व रवि जैसे कई लोग हैं जो कैरियर का काम करते हैं। बच्चा को एक लाख के जाली नोट चालीस हजार रुपए तक में मिलते है। बंगाल से लाए एक लाख के नकली नोट वह इलाहाबाद में साठ हजार रुपए तक में बेचता है। बीस हजार रुपए वह होम डिलीवरी का एक्सट्रा चार्ज लेता है। अगर कोई मालदा खुद जाए तो उसे एक लाख रुपए के जाली नोट चालीस हजार रुपए तक में मिल सकते हैं। सीओ एसटीएफ प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि सूचना मिली थी कि नकली नोटों की एक खेप पहुंचने वाली है। एसटीएफ के एसआई श्रीनिवास राय ने जाल फैलाया और दो को धर दबोचा। बच्चा एसटीएफ के हाथ नहीं आ सका है। उसके बारे में इन्फार्मेशन जुटाई जा रही है। एसटीएफ को पता चला है कि बच्चा इलाहाबाद से लेकर वेस्ट यूपी, एमपी व छत्तीसगढ़ तक फेक करेंसी की सप्लाई करता है। सारा काम वह खुद करता है। दोनों ने कुबूल किया है कि वह साल भर में पांच साल से अधिक के नकली नोट खपा चुके हैं। नकली नोटों के धंधे से जुड़ने के बाद दोनों ने असलहों की तस्करी का काम कम कर दिया था।
इक्कीसवा अध्याय । लगा । किन्तु उस को चिरकाल तक चिन्ता में नहीं रहना पड़ा । महाराज ने 'बिक्रम सिंह यहां मामो ' कहा और एक वृद्ध सरदार उन के सामने आकर खड़ा हुआ और बोला 'क्या माशा है ? महाराज ने कहा- देखो, यह वीरमल चौहान की कन्या मृगाङ्कले खा है। मे ने इसे धर्मपूर्णक रक्षित रखने की प्रतिज्ञा की है। तुम्हारे पुत्र वलराम का इसपर अत्यन्त प्रेम है। इसको तुम अपने घरमे लेजाकर पुत्री की तरह रक्खो-देखो मेरी प्रतिज्ञा का पोलन तुम्हारे ही हाथ है। बीरमल ने इसका विवाह बलराम से करने का निश्चय कर लिया है। जब तक विवाह का प्रबन्ध तथा वीरमल की स्वीकारता न होजाय तबतक यह सुकुमार ललना तुम्हारीही रक्षा में रहे । महाराज की यह आज्ञ। सुनकर सब वाह वाह करने लगे । सृगाङ्क लेखा को साथ लेकर वीर विक्रम सिंह अपने स्थान को वि द हुए । महाराज का यह वर्ताव सुनकर वीरमल वहुत प्रसन्न हुआ और कई राजपूतों ने वीच मे पड़कर महाराज का और उसका एका कर दिया। मृगाइलेखा का बलराम से विवाह होगया। और राज घराने की रमादेवो जिसको रामसिंह और भीमसिंह ने मन्दिर में गाते हुए देखा था लौटकर राजधानी में आई और बलराम के भाई अर्जुनसिह से उसका पाणिग्रहण हुआ। जो वीरमल महाराज का परम शत्रु होरहा था वह परम शुभचिंतक होगया । राजा के लिये दया का वर्तावभी एक बड़ी भारो शक्ति होता है।
इक्कीसवा अध्याय । लगा । किन्तु उस को चिरकाल तक चिन्ता में नहीं रहना पड़ा । महाराज ने 'बिक्रम सिंह यहां मामो ' कहा और एक वृद्ध सरदार उन के सामने आकर खड़ा हुआ और बोला 'क्या माशा है ? महाराज ने कहा- देखो, यह वीरमल चौहान की कन्या मृगाङ्कले खा है। मे ने इसे धर्मपूर्णक रक्षित रखने की प्रतिज्ञा की है। तुम्हारे पुत्र वलराम का इसपर अत्यन्त प्रेम है। इसको तुम अपने घरमे लेजाकर पुत्री की तरह रक्खो-देखो मेरी प्रतिज्ञा का पोलन तुम्हारे ही हाथ है। बीरमल ने इसका विवाह बलराम से करने का निश्चय कर लिया है। जब तक विवाह का प्रबन्ध तथा वीरमल की स्वीकारता न होजाय तबतक यह सुकुमार ललना तुम्हारीही रक्षा में रहे । महाराज की यह आज्ञ। सुनकर सब वाह वाह करने लगे । सृगाङ्क लेखा को साथ लेकर वीर विक्रम सिंह अपने स्थान को वि द हुए । महाराज का यह वर्ताव सुनकर वीरमल वहुत प्रसन्न हुआ और कई राजपूतों ने वीच मे पड़कर महाराज का और उसका एका कर दिया। मृगाइलेखा का बलराम से विवाह होगया। और राज घराने की रमादेवो जिसको रामसिंह और भीमसिंह ने मन्दिर में गाते हुए देखा था लौटकर राजधानी में आई और बलराम के भाई अर्जुनसिह से उसका पाणिग्रहण हुआ। जो वीरमल महाराज का परम शत्रु होरहा था वह परम शुभचिंतक होगया । राजा के लिये दया का वर्तावभी एक बड़ी भारो शक्ति होता है।
सीएसके की जीत के बाद दीपक चाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सीएसके की जीत के बाद दीपक चाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। टीम इंडिया के प्लेयर्स का अब आईपीएल खत्म हो गया है। लेकिन जल्द ही सभी खिलाड़ी फिर से मैदान में उतरकर खेलते हुए नजर आएंगे। Asia Cup 2022 : एशिया कप को लेकर नया पंगा फंस गया है। इस बीच पाकिस्तान अब अलग थलग पड़ गया है। IND vs AUS: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल 7 जून से इंग्लैंड के ओवल मैदान पर खेला जाएगा। कुश्ती संघ के चीफ और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना दे रहे पहलवानों ने अब नया मोर्चा खोला है। IPL 2023 का फाइनल जीतकर एमएस धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपरकिग्स ने पांचवीं बार खिताब पर कब्जा किया है। IPL 2023 का खिताब चेन्नई सुपर किंग्स की टीम ने गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराकर अपने नाम किया है। Ravindra Jadeja: सीएसके के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। अब इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। CSK vs GT : आईपीएल के इतिहास में इससे पहले 15 फाइनल खेले जा चुके थे, लेकिन जो इस बार हुआ वो इससे पहले केवल एक ही बार हुआ था। IPL 2023 में शिवम दुबे ने सीएसके की टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन सिर्फ एक छक्का कम होने की वजह से वह आईपीएल में दो बड़े रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए। IPL 2023 का खिताब जीतकर भी महेंद्र सिंह धोनी मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा से पीछे रह गए हैं। धोनी ने अभी तक आईपीएल में 5 खिताब जीते हैं। MS Dhoni CSK: महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सीएसके की टीम ने आईपीएल में 5वां खिताब जीत लिया। मैच के बाद धोनी ने अपने संन्यास पर बड़ी बात कही है।
सीएसके की जीत के बाद दीपक चाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सीएसके की जीत के बाद दीपक चाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। टीम इंडिया के प्लेयर्स का अब आईपीएल खत्म हो गया है। लेकिन जल्द ही सभी खिलाड़ी फिर से मैदान में उतरकर खेलते हुए नजर आएंगे। Asia Cup दो हज़ार बाईस : एशिया कप को लेकर नया पंगा फंस गया है। इस बीच पाकिस्तान अब अलग थलग पड़ गया है। IND vs AUS: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल सात जून से इंग्लैंड के ओवल मैदान पर खेला जाएगा। कुश्ती संघ के चीफ और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना दे रहे पहलवानों ने अब नया मोर्चा खोला है। IPL दो हज़ार तेईस का फाइनल जीतकर एमएस धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपरकिग्स ने पांचवीं बार खिताब पर कब्जा किया है। IPL दो हज़ार तेईस का खिताब चेन्नई सुपर किंग्स की टीम ने गुजरात टाइटंस को पाँच विकेट से हराकर अपने नाम किया है। Ravindra Jadeja: सीएसके के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। अब इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। CSK vs GT : आईपीएल के इतिहास में इससे पहले पंद्रह फाइनल खेले जा चुके थे, लेकिन जो इस बार हुआ वो इससे पहले केवल एक ही बार हुआ था। IPL दो हज़ार तेईस में शिवम दुबे ने सीएसके की टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन सिर्फ एक छक्का कम होने की वजह से वह आईपीएल में दो बड़े रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए। IPL दो हज़ार तेईस का खिताब जीतकर भी महेंद्र सिंह धोनी मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा से पीछे रह गए हैं। धोनी ने अभी तक आईपीएल में पाँच खिताब जीते हैं। MS Dhoni CSK: महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सीएसके की टीम ने आईपीएल में पाँचवां खिताब जीत लिया। मैच के बाद धोनी ने अपने संन्यास पर बड़ी बात कही है।
भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) इन दिनों अलग अंदाज में नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली अक्षरा सिंह (Akshara Singh) आये दिन रोमांटिक गाने में वीडियोस और अपनी हॉट एंड ग्लैमरस तस्वीरें शेयर करती नजर आ जाती हैं। हाल ही में अक्षरा ने अपने फैंस के लिए मजेदार वीडियो और रोमांटिक गाने का मिक्सचर शेयर किया था। इस गाने में अक्षरा (Akshara Singh) जाने माने टीवी एक्टर करण खन्ना (Karan Khanna) की बाहों में नजर आ रही हैं। अक्षरा (Akshara Singh) और करण का यह वीडियो सामने आते ही लोग हैरान हो गए। हालांकि अब एक बार फिर अक्षरा (Akshara Singh) ने करण (Karan Khanna) के साथ रोमांटिक वीडियो शेयर किया हैं। शेयर किया वीडियो : बता दें, टीवी एक्टर करण खन्ना (Karan Khanna) के साथ अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने वीडियो शेयर किया हैं। इस वीडियो में दोनों अदनान सामी का गाया गाना 'ये जमी रुक जाए, आसमां झुक जा' में लुक देते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में दोनों की केमेस्ट्री खूब देखने को मिल रही हैं। वीडियो में अक्षरा (Akshara Singh) लाइट पिंक कलर के टॉप पहने और खुले बालों में नजर आ रही है। वही करण (Karan Khanna) ब्लू कलर की शर्ट और वाइट कलर की पैंट में दिख रहे हैं। रिलीज़ हुआ ये गाना : आपको बता दें, हाल ही में अक्षरा सिंह (Akshara Singh) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) का नया गाना 'सुनामी' रिलीज़ हुआ था। इस गाने में दोनों काफी खूबसूरत लग रहे हैं। इस गाने को अक्षरा सिंह (Akshara Singh) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) ने अपनी आवाज से सजाया था। इस गाने को दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं। बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः
भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इन दिनों अलग अंदाज में नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली अक्षरा सिंह आये दिन रोमांटिक गाने में वीडियोस और अपनी हॉट एंड ग्लैमरस तस्वीरें शेयर करती नजर आ जाती हैं। हाल ही में अक्षरा ने अपने फैंस के लिए मजेदार वीडियो और रोमांटिक गाने का मिक्सचर शेयर किया था। इस गाने में अक्षरा जाने माने टीवी एक्टर करण खन्ना की बाहों में नजर आ रही हैं। अक्षरा और करण का यह वीडियो सामने आते ही लोग हैरान हो गए। हालांकि अब एक बार फिर अक्षरा ने करण के साथ रोमांटिक वीडियो शेयर किया हैं। शेयर किया वीडियो : बता दें, टीवी एक्टर करण खन्ना के साथ अक्षरा सिंह ने वीडियो शेयर किया हैं। इस वीडियो में दोनों अदनान सामी का गाया गाना 'ये जमी रुक जाए, आसमां झुक जा' में लुक देते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में दोनों की केमेस्ट्री खूब देखने को मिल रही हैं। वीडियो में अक्षरा लाइट पिंक कलर के टॉप पहने और खुले बालों में नजर आ रही है। वही करण ब्लू कलर की शर्ट और वाइट कलर की पैंट में दिख रहे हैं। रिलीज़ हुआ ये गाना : आपको बता दें, हाल ही में अक्षरा सिंह और खेसारी लाल यादव का नया गाना 'सुनामी' रिलीज़ हुआ था। इस गाने में दोनों काफी खूबसूरत लग रहे हैं। इस गाने को अक्षरा सिंह और खेसारी लाल यादव ने अपनी आवाज से सजाया था। इस गाने को दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं। बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः
Quick links: Tomato Benefits: खट्टा-खट्टा टमाटर खाने में गजब का स्वाद लाने के लिए काफी होता है। अगर खाने में टमाटर ना डाला जाए तो खाना काफी बेस्वाद लगता है। टमाटर को आप सलाद में भी इस्तेमाल करते हैं। कई लोग तो टमाटर खाने के इतने शौकीन होते हैं कि वह टमाटर का चाट बनाकर खाते हैं। जिस तरह से टमाटर खाने में स्वादिष्ट होता है उसी तरह से टमाटर स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। टमाटर स्किन के लिए बेहद लाभकारी होता है। स्किन पर अगर आप टमाटर लगाते हैं तो आपकी स्किन पहले से ज्यादा ग्लोइंग और हेल्दी हो जाएगी। कई तरह के गुणकारी विटामिन्स से भरपूर टमाटर के स्किन के लिए कई फायदे हैं। ये स्किन पर हो रहे एक्ने, रेडनेस, ब्रेकआउट, डार्क स्पॉट्स जैसी कई स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा दिलाने में काफी मददगार साबित होता है। आइए जानते हैं कि टमाटर स्किन की किन समस्याओं से छुटकारा दिलाने का काम करता है। अगर आपके चेहरे पर उम्र से पहले एजिंग साइन दिखने लगे हैं तो आपको इसे दूर करने के लिए टमाटर का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आप टमाटर में एलोवेरा जेल मिलाकर पूरे चेहरे पर लगा लें, फिर इसे 20 मिनट तक रखने के बाद धो लें। आपके एजिंग साइन धीरे-धीरे कम होने लगेंगे। स्किन के ओपन पोर्स अगर काफी बड़े हो गए हैं तो आप इन्हें कम करने के लिए टमाटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसमें खीरे का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इससे आपके ओपन पोर्स का साइज काफी कम हो जाएगा, साथ ही इससे डार्क स्पॉट्स भी कम होने लगेंगे। जिद्दी टैनिंग की समस्या को दूर करने का बेहतरीन इलाज है टमाटर का रस। टमाटर में विटामिन सी और विटामिन ए होता है, जो त्वचा को आराम देने और टैनिंग हटाने में मदद करता है। टमाटर का पेस्ट लाइकोपीन से भरपूर होता है, जो सनबर्न से बचाता है। इसलिए टैनिंग को हटाने के लिए आप टमाटर के रस या पेस्ट से स्किन की मसाज कर सकते हैं। बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में 2-3 बार अप्लाई करें। टमाटर के एक टुकड़े को पूरे चेहरे पर रगड़ें और फिर इसे 30-40 मिनट तक सूखने दें। फिर पानी से चेहरे को अच्छी तरह से धो लें। ये स्किन में जमी हुई गंदगी को अच्छी तरह से रिमूव करेगा और ब्लैकहेड्स को भी कम करेगा। Disclaimer: REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
Quick links: Tomato Benefits: खट्टा-खट्टा टमाटर खाने में गजब का स्वाद लाने के लिए काफी होता है। अगर खाने में टमाटर ना डाला जाए तो खाना काफी बेस्वाद लगता है। टमाटर को आप सलाद में भी इस्तेमाल करते हैं। कई लोग तो टमाटर खाने के इतने शौकीन होते हैं कि वह टमाटर का चाट बनाकर खाते हैं। जिस तरह से टमाटर खाने में स्वादिष्ट होता है उसी तरह से टमाटर स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। टमाटर स्किन के लिए बेहद लाभकारी होता है। स्किन पर अगर आप टमाटर लगाते हैं तो आपकी स्किन पहले से ज्यादा ग्लोइंग और हेल्दी हो जाएगी। कई तरह के गुणकारी विटामिन्स से भरपूर टमाटर के स्किन के लिए कई फायदे हैं। ये स्किन पर हो रहे एक्ने, रेडनेस, ब्रेकआउट, डार्क स्पॉट्स जैसी कई स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा दिलाने में काफी मददगार साबित होता है। आइए जानते हैं कि टमाटर स्किन की किन समस्याओं से छुटकारा दिलाने का काम करता है। अगर आपके चेहरे पर उम्र से पहले एजिंग साइन दिखने लगे हैं तो आपको इसे दूर करने के लिए टमाटर का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आप टमाटर में एलोवेरा जेल मिलाकर पूरे चेहरे पर लगा लें, फिर इसे बीस मिनट तक रखने के बाद धो लें। आपके एजिंग साइन धीरे-धीरे कम होने लगेंगे। स्किन के ओपन पोर्स अगर काफी बड़े हो गए हैं तो आप इन्हें कम करने के लिए टमाटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसमें खीरे का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इससे आपके ओपन पोर्स का साइज काफी कम हो जाएगा, साथ ही इससे डार्क स्पॉट्स भी कम होने लगेंगे। जिद्दी टैनिंग की समस्या को दूर करने का बेहतरीन इलाज है टमाटर का रस। टमाटर में विटामिन सी और विटामिन ए होता है, जो त्वचा को आराम देने और टैनिंग हटाने में मदद करता है। टमाटर का पेस्ट लाइकोपीन से भरपूर होता है, जो सनबर्न से बचाता है। इसलिए टैनिंग को हटाने के लिए आप टमाटर के रस या पेस्ट से स्किन की मसाज कर सकते हैं। बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में दो-तीन बार अप्लाई करें। टमाटर के एक टुकड़े को पूरे चेहरे पर रगड़ें और फिर इसे तीस-चालीस मिनट तक सूखने दें। फिर पानी से चेहरे को अच्छी तरह से धो लें। ये स्किन में जमी हुई गंदगी को अच्छी तरह से रिमूव करेगा और ब्लैकहेड्स को भी कम करेगा। Disclaimer: REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
बगदाद, 27 अगस्त (आईएएनएस)। इराक के विदेश मंत्री ने शनिवार को बताया कि आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के कब्जे से इराक के ताल अफर शहर के 70 फीसदी हिस्से पर दोबारा नियंत्रण कर लिया गया है। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, मोसुल के पश्चिम में स्थित ताल अफर आईएस का उत्तरी इराक में आखिरी गढ़ था। विदेश मंत्री इब्राहिम अल-जाफरी ने फ्रांस के समकक्ष जीन-यवेस ली ड्रियन और फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की। इस समय ली ड्रियन और पार्ली इराक के दौरे पर हैं। फ्रांस के ये मंत्री इराक के राष्ट्रपति फौद मासूम और प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी से मुलाकात करेंगे। ली ड्रियन ने जोर देकर कहा कि उनका देश शांति और युद्ध की स्थिति में इराक का समर्थन करेगा।
बगदाद, सत्ताईस अगस्त । इराक के विदेश मंत्री ने शनिवार को बताया कि आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के कब्जे से इराक के ताल अफर शहर के सत्तर फीसदी हिस्से पर दोबारा नियंत्रण कर लिया गया है। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, मोसुल के पश्चिम में स्थित ताल अफर आईएस का उत्तरी इराक में आखिरी गढ़ था। विदेश मंत्री इब्राहिम अल-जाफरी ने फ्रांस के समकक्ष जीन-यवेस ली ड्रियन और फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की। इस समय ली ड्रियन और पार्ली इराक के दौरे पर हैं। फ्रांस के ये मंत्री इराक के राष्ट्रपति फौद मासूम और प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी से मुलाकात करेंगे। ली ड्रियन ने जोर देकर कहा कि उनका देश शांति और युद्ध की स्थिति में इराक का समर्थन करेगा।
काउंसिल ब्लफ्स (अमरीका) भारत के स्टार खिलाड़ी लक्ष्य सेन को यूएस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के पुरुष एकल के सेमीफाइनल में चीन के ऑल इंग्लैंड चैंपियन ली शी फेंग से संघर्षपूर्ण मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और यहां तीसरी वरीयता प्राप्त सेन दूसरी वरीयता प्राप्त फेंग के खिलाफ 17-21, 24-22, 17-21 से हार गए। बीडब्ल्यूएफ सुपर 300 टूर्नामेंट का यह मुकाबला एक घंटे 16 मिनट तक चला। विश्व में सातवें नंबर के खिलाड़ी फेंग और 12वीं रैंकिंग के सेन के बीच यह मुकाबला काफी करीबी रहा। शुरुआती गेम में दोनों खिलाड़ी 17 अंकों तक बराबरी पर थे, लेकिन के बाद चीन के खिलाड़ी ने आक्रामक रवैया दिखाया, जबकि भारतीय खिलाड़ी ने कुछ गलतियां की। विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता सेन ने हालांकि दूसरे गेम में अच्छी वापसी की। पहले गेम की तरह दूसरे गेम में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों खिलाडिय़ों ने लंबी रैलियां की और 22 अंक तक दोनों बराबरी पर थे। लक्ष्य सेन ने इसके बाद लगातार दो अंक बनाकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया। तीसरा और निर्णायक गेम पहले गेम की पुनरावृति था। फेंग ने शुरू में बढ़त बनाई और इंटरवल तक वह 11-8 से आगे थे। सेन ने हालांकि हार नहीं मानी और 17 अंकों तक स्वयं को मुकाबले में बनाए रखा। चीन के खिलाड़ी ने इसके बाद दबाव बनाया तथा मैच अपनी झोली में डाला।
काउंसिल ब्लफ्स भारत के स्टार खिलाड़ी लक्ष्य सेन को यूएस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के पुरुष एकल के सेमीफाइनल में चीन के ऑल इंग्लैंड चैंपियन ली शी फेंग से संघर्षपूर्ण मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और यहां तीसरी वरीयता प्राप्त सेन दूसरी वरीयता प्राप्त फेंग के खिलाफ सत्रह-इक्कीस, चौबीस-बाईस, सत्रह-इक्कीस से हार गए। बीडब्ल्यूएफ सुपर तीन सौ टूर्नामेंट का यह मुकाबला एक घंटे सोलह मिनट तक चला। विश्व में सातवें नंबर के खिलाड़ी फेंग और बारहवीं रैंकिंग के सेन के बीच यह मुकाबला काफी करीबी रहा। शुरुआती गेम में दोनों खिलाड़ी सत्रह अंकों तक बराबरी पर थे, लेकिन के बाद चीन के खिलाड़ी ने आक्रामक रवैया दिखाया, जबकि भारतीय खिलाड़ी ने कुछ गलतियां की। विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता सेन ने हालांकि दूसरे गेम में अच्छी वापसी की। पहले गेम की तरह दूसरे गेम में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों खिलाडिय़ों ने लंबी रैलियां की और बाईस अंक तक दोनों बराबरी पर थे। लक्ष्य सेन ने इसके बाद लगातार दो अंक बनाकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया। तीसरा और निर्णायक गेम पहले गेम की पुनरावृति था। फेंग ने शुरू में बढ़त बनाई और इंटरवल तक वह ग्यारह-आठ से आगे थे। सेन ने हालांकि हार नहीं मानी और सत्रह अंकों तक स्वयं को मुकाबले में बनाए रखा। चीन के खिलाड़ी ने इसके बाद दबाव बनाया तथा मैच अपनी झोली में डाला।
कई दिनों के बाद, जिसके दौरान इज़राइली वायु सेना ने गाजा पट्टी के क्षेत्र में हवाई हमले शुरू किए, आईडीएफ कमांड ने एक आदेश जारी किया टैंक. . . रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी गाजा को शेल करने के लिए मर्कवा टैंकों का इस्तेमाल किया था। आईडीएफ (इज़राइली सेना) की प्रेस सेवा का कहना है कि हमास समूह की स्थितियों को टैंक बंदूकों से निकाल दिया गया था। जैसा कि कहा गया है, यह कदम, इजरायली क्षेत्र में रॉकेट फायर करने के संबंध में इजरायली सैनिकों के पास गया। गोलाबारी शुक्रवार (21 अगस्त) शाम को हुई। इज़राइल में सार्डोट और इसकी कई सीमा बस्तियों में अलार्म सायरन बंद हो गया। गाजा में, यह बताया गया है कि इज़राइल ने राफा और खान यूनिस के निकट अवलोकन चौकियों पर आग लगाने के लिए टैंक और तोपखाने का इस्तेमाल किया। बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान हुआ। वहीं, फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इससे पहले, इज़राइल ने गाजा पर कई हवाई हमले किए, दावा किया कि यह "आग के आतंक" का जवाब था। आईडीएफ, गाजा के क्षेत्र से दहनशील पदार्थों के साथ गुब्बारों को लॉन्च करने को संदर्भित करता है, जो कि इजरायल तक पहुंचते हैं, अक्सर आग का कारण बनते हैं।
कई दिनों के बाद, जिसके दौरान इज़राइली वायु सेना ने गाजा पट्टी के क्षेत्र में हवाई हमले शुरू किए, आईडीएफ कमांड ने एक आदेश जारी किया टैंक. . . रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी गाजा को शेल करने के लिए मर्कवा टैंकों का इस्तेमाल किया था। आईडीएफ की प्रेस सेवा का कहना है कि हमास समूह की स्थितियों को टैंक बंदूकों से निकाल दिया गया था। जैसा कि कहा गया है, यह कदम, इजरायली क्षेत्र में रॉकेट फायर करने के संबंध में इजरायली सैनिकों के पास गया। गोलाबारी शुक्रवार शाम को हुई। इज़राइल में सार्डोट और इसकी कई सीमा बस्तियों में अलार्म सायरन बंद हो गया। गाजा में, यह बताया गया है कि इज़राइल ने राफा और खान यूनिस के निकट अवलोकन चौकियों पर आग लगाने के लिए टैंक और तोपखाने का इस्तेमाल किया। बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान हुआ। वहीं, फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इससे पहले, इज़राइल ने गाजा पर कई हवाई हमले किए, दावा किया कि यह "आग के आतंक" का जवाब था। आईडीएफ, गाजा के क्षेत्र से दहनशील पदार्थों के साथ गुब्बारों को लॉन्च करने को संदर्भित करता है, जो कि इजरायल तक पहुंचते हैं, अक्सर आग का कारण बनते हैं।
राजस्थान के अजमेर जिले के नारेली के नजदीक भीषण सड़क हादसा हो गया। इस दौरान ट्रेलर और बस की बीच भिड़ंत हो गई। घटना में 2 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर घायल रूप से घायल हो गए। हादसे में दुर्घटनाग्रस्त हुई प्राइवेट बस जयपुर से उदयपुर जा रही थी। घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। इसके बाद घायलों को जेएलएन अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं घटना के बाद बस चालक फरार है।
राजस्थान के अजमेर जिले के नारेली के नजदीक भीषण सड़क हादसा हो गया। इस दौरान ट्रेलर और बस की बीच भिड़ंत हो गई। घटना में दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर घायल रूप से घायल हो गए। हादसे में दुर्घटनाग्रस्त हुई प्राइवेट बस जयपुर से उदयपुर जा रही थी। घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। इसके बाद घायलों को जेएलएन अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं घटना के बाद बस चालक फरार है।
GORAKHPUR: चौरीचौरा एरिया में पुलिस पर हमले के आरोपित मामा-भांजा मुठभेड़ के दौरान गुलरिहा एरिया के नारायणपुर में पकड़े गए। शनिवार सुबह करीब नौ बजे बदमाशों के मेडिकल कॉलेज की तरफ जाने की सूचना पर क्राइम ब्रांच, गुलरिहा और शाहपुर पुलिस की टीम ने घेराबंदी की। बनगाई जंगल पार करके बालापार रोड की तरफ फरार होने के चक्कर में बदमाशों ने पुलिस पर गोली दाग दी। जवाबी कार्रवाई में घायल बदमाशों को पुलिस ने दबोच लिया। सीओ प्रवीण सिंह की अगुवाई में चले ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच में तैनात दो कांस्टेबल भी घायल हो गए। बदमाशों से पूछताछ करके पुलिस उनको शरण देने वालों की जानकारी जुटा रही है। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि बदमाशों के खिलाफ ईनाम बढ़ाकर एक-एक लाख रुपए कर दिया गया था। फरारी के दौरान दोनों की मदद करने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। बदमाशों के पास से दरोगा की सरकारी पिस्टल भी बरामद हुई है। 14 अक्टूबर को चौरीचौरा के रौतेनिया सरदार में पुलिस पर हमले में फरार मिथुन और उसके मामा धीरू के खिलाफ एक-एक लाख रुपए का ईनाम था। करीब सवा महीने से फरार चल रहे मामा-भांजे ने पांच दिन पूर्व गुलरिहा एरिया के फत्तेपुर में किराए पर कमरा लिया था। चार दिन पूर्व दोनों एक महिला और करीब दो साल की बच्ची संग किराए के कमरे में रहने पहुंचे। एक हफ्ते तक ठिकाना बनाने के लिए दोनों ने कमरा लिया था। इसकी भनक कहीं से पुलिस को लग गई। तभी से पुलिस उनकी रेकी कर रही थी। शनिवार सुबह क्राइम ब्रांच के सीओ प्रवीण सिंह को दोनों के मूवमेंट की जानकारी मिली। मुखबिर ने बताया कि काली बाइक पर सवार होकर मिथुन और धीरू गुलरिहा की तरफ से मेडिकल कॉलेज जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज रोड पर गुलरिहा के एसएचओ गिरजेश तिवारी ने बदमाशों का पीछा किया। सामने से शाहपुर पुलिस को देखकर फायरिंग करते हुए बदमाश बनगाई जंगल की तरफ भाग निकले। नारायणपुर के पास पहुंचकर पुलिस ने उनको घेर लिया। दोनों ओर से चली गोली में मिथुन और उसके मामा धीरू को गोली लगी। जबकि क्राइम ब्रांच में तैनात कांस्टेबल शशिकांत राय और मोहसिन खान घायल हो गए। तलाशी लेने पर मिथुन के पास से नाइन एमएम की पिस्टल, 32 बोर की एक पिस्टल, कारतूस और बाइक बरामद हुई। जांच में पता लगा कि नाइन एमएम की पिस्टल चौरीचौरा में तैनात दरोगा की है। 14 अक्टूबर की रात पुलिस पर हमले के दौरान पिस्टल लूटी गई थी। जांच में सामने आया कि बदमाशों ने पुलिस की पिस्टल से पुलिस पर हमला किया। घायल बदमाशों और पुलिस कर्मचारियों को लेकर सीओ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। मुठभेड़ की सूचना पर पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए। पूछताछ में सामने आया कि फरारी के दौरान दोनों कई रिश्तेदारों के घर छिपे। बरगदवां के शांति नगर में किराए पर कमरा लेकर सात दिनों तक छिपे रहे। गुलरिहा के फत्तेपुर में किराए पर कमरा लेकर किसी बड़ी लूट की योजना गढ़ने की कोशिश में थे। पुलिस का कहना है कि नकदी जुटने पर दोनों परिवार संग नेपाल भागने की तैयारी में थे। गुलरिहा में दीवान के बेटे के ग्राहक सेवा केंद्र में हुई लूटपाट में दोनों के शामिल होने की आशंका में पुलिस छानबीन में जुटी है। दोनों के खिलाफ पुलिस पर हमले, लूटपाट, जानलेवा हमला करने सहित दर्जन भर से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। शातिरों की गिरफ्तारी पर पुलिस ने राहत की सांस ली है। पुलिस पर हमले के आरोपित मिथुन पासवान और धीरू पासवान को मुठभेड़ में अरेस्ट किया गया। दोनों के खिलाफ एक-एक लाख रुपए का ईनाम था। बदमाशों के पास से चौरीचौरा में लूटी गई दरोगा की सरकारी पिस्टल भी बरामद हुई है। उसने पूछताछ करके मददगारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। शरण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
GORAKHPUR: चौरीचौरा एरिया में पुलिस पर हमले के आरोपित मामा-भांजा मुठभेड़ के दौरान गुलरिहा एरिया के नारायणपुर में पकड़े गए। शनिवार सुबह करीब नौ बजे बदमाशों के मेडिकल कॉलेज की तरफ जाने की सूचना पर क्राइम ब्रांच, गुलरिहा और शाहपुर पुलिस की टीम ने घेराबंदी की। बनगाई जंगल पार करके बालापार रोड की तरफ फरार होने के चक्कर में बदमाशों ने पुलिस पर गोली दाग दी। जवाबी कार्रवाई में घायल बदमाशों को पुलिस ने दबोच लिया। सीओ प्रवीण सिंह की अगुवाई में चले ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच में तैनात दो कांस्टेबल भी घायल हो गए। बदमाशों से पूछताछ करके पुलिस उनको शरण देने वालों की जानकारी जुटा रही है। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि बदमाशों के खिलाफ ईनाम बढ़ाकर एक-एक लाख रुपए कर दिया गया था। फरारी के दौरान दोनों की मदद करने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। बदमाशों के पास से दरोगा की सरकारी पिस्टल भी बरामद हुई है। चौदह अक्टूबर को चौरीचौरा के रौतेनिया सरदार में पुलिस पर हमले में फरार मिथुन और उसके मामा धीरू के खिलाफ एक-एक लाख रुपए का ईनाम था। करीब सवा महीने से फरार चल रहे मामा-भांजे ने पांच दिन पूर्व गुलरिहा एरिया के फत्तेपुर में किराए पर कमरा लिया था। चार दिन पूर्व दोनों एक महिला और करीब दो साल की बच्ची संग किराए के कमरे में रहने पहुंचे। एक हफ्ते तक ठिकाना बनाने के लिए दोनों ने कमरा लिया था। इसकी भनक कहीं से पुलिस को लग गई। तभी से पुलिस उनकी रेकी कर रही थी। शनिवार सुबह क्राइम ब्रांच के सीओ प्रवीण सिंह को दोनों के मूवमेंट की जानकारी मिली। मुखबिर ने बताया कि काली बाइक पर सवार होकर मिथुन और धीरू गुलरिहा की तरफ से मेडिकल कॉलेज जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज रोड पर गुलरिहा के एसएचओ गिरजेश तिवारी ने बदमाशों का पीछा किया। सामने से शाहपुर पुलिस को देखकर फायरिंग करते हुए बदमाश बनगाई जंगल की तरफ भाग निकले। नारायणपुर के पास पहुंचकर पुलिस ने उनको घेर लिया। दोनों ओर से चली गोली में मिथुन और उसके मामा धीरू को गोली लगी। जबकि क्राइम ब्रांच में तैनात कांस्टेबल शशिकांत राय और मोहसिन खान घायल हो गए। तलाशी लेने पर मिथुन के पास से नाइन एमएम की पिस्टल, बत्तीस बोर की एक पिस्टल, कारतूस और बाइक बरामद हुई। जांच में पता लगा कि नाइन एमएम की पिस्टल चौरीचौरा में तैनात दरोगा की है। चौदह अक्टूबर की रात पुलिस पर हमले के दौरान पिस्टल लूटी गई थी। जांच में सामने आया कि बदमाशों ने पुलिस की पिस्टल से पुलिस पर हमला किया। घायल बदमाशों और पुलिस कर्मचारियों को लेकर सीओ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। मुठभेड़ की सूचना पर पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए। पूछताछ में सामने आया कि फरारी के दौरान दोनों कई रिश्तेदारों के घर छिपे। बरगदवां के शांति नगर में किराए पर कमरा लेकर सात दिनों तक छिपे रहे। गुलरिहा के फत्तेपुर में किराए पर कमरा लेकर किसी बड़ी लूट की योजना गढ़ने की कोशिश में थे। पुलिस का कहना है कि नकदी जुटने पर दोनों परिवार संग नेपाल भागने की तैयारी में थे। गुलरिहा में दीवान के बेटे के ग्राहक सेवा केंद्र में हुई लूटपाट में दोनों के शामिल होने की आशंका में पुलिस छानबीन में जुटी है। दोनों के खिलाफ पुलिस पर हमले, लूटपाट, जानलेवा हमला करने सहित दर्जन भर से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। शातिरों की गिरफ्तारी पर पुलिस ने राहत की सांस ली है। पुलिस पर हमले के आरोपित मिथुन पासवान और धीरू पासवान को मुठभेड़ में अरेस्ट किया गया। दोनों के खिलाफ एक-एक लाख रुपए का ईनाम था। बदमाशों के पास से चौरीचौरा में लूटी गई दरोगा की सरकारी पिस्टल भी बरामद हुई है। उसने पूछताछ करके मददगारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। शरण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
दुनिया भर में फैशन की हजारों महिलाओं ने मैक्सी लंबाई की एक स्त्री स्कर्ट चुना है और सर्दियों में भी इसे देना नहीं चाहते हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि एक लड़की जो कपड़े और मैक्सी स्कर्ट पहनती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, कपड़े पहनने, एक भी पहनावा बनाने, अपने सभी आकर्षण पर जोर देता है, और दूसरों को शैली की उत्कृष्ट भावना के बारे में भी बताता है। इस लेख में आप सर्दियों में एक लंबी स्कर्ट पहनने के लिए पता लगा सकते हैं। इसमें मैक्सी स्कर्ट के जूते चुनने का सवाल भी शामिल होगा। सर्दी के लिए लंबे ऊनी स्कर्ट, वे क्या हैं? सभी उम्र की कई प्रसिद्ध महिलाओं द्वारा लंबी स्कर्ट पसंद की जाती है। लेकिन क्या यह ऐसी प्रवृत्ति के लिए उपयुक्त है जिसने सामान्य जीवन में हस्तियों के दिल पर विजय प्राप्त की है, जो धर्मनिरपेक्ष घटनाओं से बहुत दूर है? बेशक, यह उचित है! और आपकी उम्र और आकृति के पैरामीटर कोई फर्क नहीं पड़ता। मैक्सी लंबाई की एक स्कर्ट आपका कॉलिंग कार्ड बन सकती है। एक लंबी स्कर्ट सर्दी में आपको गर्म कर सकती है, लेकिन साथ ही यह विचार करने लायक है कि यहां मौसम अंतिम स्थान नहीं है। किसी भी मामले में स्लैश पर ऐसी स्कर्ट नहीं पहनती है, अन्यथा यह तुरंत विफल हो जाएगी। सर्दी के लिए लंबे गर्म स्कर्ट एक आभूषण, असामान्य कट और रंगों के संयोजन के साथ, एक लैकोनिक कट या इसके विपरीत चमकदार के साथ मोनोफोनिक हो सकते हैं। अगर हम सर्दी स्कर्ट के बारे में बात कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से, यह गर्म कपड़े से बना होना चाहिए। रेशम के साथ शिफॉन गर्मियों के लिए बेहतर छोड़ दिया जाता है। स्कर्ट के रंग को चुनने में साफ होना भी फायदेमंद है। वसंत और गर्मियों में ज्वलंत और चमकदार रंग। सर्दी सर्दियों के टन अधिक उपयुक्त होंगे, जो पूरे पैकेज में सही मूड बना सकते हैं। तो, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लंबे स्कर्ट बहुत विशाल शीर्ष के साथ पहना नहीं जाना चाहिए। कोई ruches, flounces और जो संगठन पोशाक को खुश कर सकते हैं नहीं होना चाहिए। ऊपर और नीचे के बीच सद्भाव होना चाहिए। मैक्सी-स्कर्टों को ओबेगायुस्की ब्लाउज और टॉप का चयन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, आप इसके विपरीत खेल सकते हैं। लंबे जैकेट लंबे स्कर्ट जैकेट या ब्लेज़र के साथ पहनने के लिए उपयुक्त होंगे। बाहरी वस्त्रों को छोटे जैकेट, कार्डिगन और यहां तक कि पार्कों का चयन करना चाहिए। सर्दी में एक लंबी स्कर्ट पहनने के लिए किस तरह के जूते? शीतकालीन समय में मैक्सी लंबाई की एक स्कर्ट टखने के जूते, ऊँची एड़ी के जूते और फ्लैट तलवों से पहनी जानी चाहिए। किसी भी मामले में, एक लंबी स्कर्ट ugg जूते, एक वर्ग एड़ी और सैन्य जूते के साथ जूते पहनें। उपर्युक्त सिफारिशों के अनुसार, आप सर्दियों में एक लंबी स्कर्ट के साथ एक आदर्श छवि सटीक रूप से बना सकते हैं।
दुनिया भर में फैशन की हजारों महिलाओं ने मैक्सी लंबाई की एक स्त्री स्कर्ट चुना है और सर्दियों में भी इसे देना नहीं चाहते हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि एक लड़की जो कपड़े और मैक्सी स्कर्ट पहनती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, कपड़े पहनने, एक भी पहनावा बनाने, अपने सभी आकर्षण पर जोर देता है, और दूसरों को शैली की उत्कृष्ट भावना के बारे में भी बताता है। इस लेख में आप सर्दियों में एक लंबी स्कर्ट पहनने के लिए पता लगा सकते हैं। इसमें मैक्सी स्कर्ट के जूते चुनने का सवाल भी शामिल होगा। सर्दी के लिए लंबे ऊनी स्कर्ट, वे क्या हैं? सभी उम्र की कई प्रसिद्ध महिलाओं द्वारा लंबी स्कर्ट पसंद की जाती है। लेकिन क्या यह ऐसी प्रवृत्ति के लिए उपयुक्त है जिसने सामान्य जीवन में हस्तियों के दिल पर विजय प्राप्त की है, जो धर्मनिरपेक्ष घटनाओं से बहुत दूर है? बेशक, यह उचित है! और आपकी उम्र और आकृति के पैरामीटर कोई फर्क नहीं पड़ता। मैक्सी लंबाई की एक स्कर्ट आपका कॉलिंग कार्ड बन सकती है। एक लंबी स्कर्ट सर्दी में आपको गर्म कर सकती है, लेकिन साथ ही यह विचार करने लायक है कि यहां मौसम अंतिम स्थान नहीं है। किसी भी मामले में स्लैश पर ऐसी स्कर्ट नहीं पहनती है, अन्यथा यह तुरंत विफल हो जाएगी। सर्दी के लिए लंबे गर्म स्कर्ट एक आभूषण, असामान्य कट और रंगों के संयोजन के साथ, एक लैकोनिक कट या इसके विपरीत चमकदार के साथ मोनोफोनिक हो सकते हैं। अगर हम सर्दी स्कर्ट के बारे में बात कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से, यह गर्म कपड़े से बना होना चाहिए। रेशम के साथ शिफॉन गर्मियों के लिए बेहतर छोड़ दिया जाता है। स्कर्ट के रंग को चुनने में साफ होना भी फायदेमंद है। वसंत और गर्मियों में ज्वलंत और चमकदार रंग। सर्दी सर्दियों के टन अधिक उपयुक्त होंगे, जो पूरे पैकेज में सही मूड बना सकते हैं। तो, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लंबे स्कर्ट बहुत विशाल शीर्ष के साथ पहना नहीं जाना चाहिए। कोई ruches, flounces और जो संगठन पोशाक को खुश कर सकते हैं नहीं होना चाहिए। ऊपर और नीचे के बीच सद्भाव होना चाहिए। मैक्सी-स्कर्टों को ओबेगायुस्की ब्लाउज और टॉप का चयन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, आप इसके विपरीत खेल सकते हैं। लंबे जैकेट लंबे स्कर्ट जैकेट या ब्लेज़र के साथ पहनने के लिए उपयुक्त होंगे। बाहरी वस्त्रों को छोटे जैकेट, कार्डिगन और यहां तक कि पार्कों का चयन करना चाहिए। सर्दी में एक लंबी स्कर्ट पहनने के लिए किस तरह के जूते? शीतकालीन समय में मैक्सी लंबाई की एक स्कर्ट टखने के जूते, ऊँची एड़ी के जूते और फ्लैट तलवों से पहनी जानी चाहिए। किसी भी मामले में, एक लंबी स्कर्ट ugg जूते, एक वर्ग एड़ी और सैन्य जूते के साथ जूते पहनें। उपर्युक्त सिफारिशों के अनुसार, आप सर्दियों में एक लंबी स्कर्ट के साथ एक आदर्श छवि सटीक रूप से बना सकते हैं।
धर्मशास्त्रसंग्रह( २६ ) नारदस्त - १२ विवादपद । कन्यायां दत्तशुल्कायां ज्यायांचेवर आव्रजेत् । धर्मार्थकामसंयुक्तं वाच्यं तत्रानृतं भवेत् ॥ ३० ॥ जो पुरुप द्रव्य देकर कन्या ग्रहण करता है उसका अर्थ, धर्म, काम और वचन व्यर्थ है ।। ३० ॥ वरका धर्म २. ( १ ) मनुस्मृति - २ अध्याय । श्रवान : शुभां विद्यामाददतावरादपि । अन्त्यादपि परं धर्म स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि ॥ २३८ ॥ श्रद्धावान् मनुष्यको उचित है कि नीच वर्णसे भी कल्याण दायिनी विद्या सीखे, अन्त्यज जातिसे भी परम धर्मकी शिक्षा लेवे और कलङ्कित कुलसे भी स्त्रीरत्न ग्रहण करे ।।२३८ ।। गुरुणानुमतः स्त्रात्वा समावृत्तो यथाविधि । उद्हेत द्विजो भायां सवर्णी लक्षणान्विताम् ॥ ४ ॥ असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः । सा प्रशस्ता द्विजातीनां दारकर्मणि मैथुने ॥ ५ ॥ महान्त्यपि समृद्धानि गोजाविधनवान्यतः । स्त्रीसम्बन्धे दशैतानि कुलानि परिवर्जयेत् ॥ ६ ॥ हीनक्रियं निष्पुरुषं निश्छन्दो रोमशार्शसम् । क्षय्यामयाव्यपस्मारिश्वित्रिकुष्ठिकुलानि च ॥ ७ ॥ नोइहेत्कपिलां कन्यां नाधिकाङ्क्षीं न रोगिणीम् । नालोमिकां नातिलोमां न वाचटां न पिङ्गलामुद नर्क्षवृक्षनदीनानी नान्त्यपर्वतनामिकाम् । न पक्ष्यहिप्रेष्यनाम्नीं न च भीपणनामिकाम् ॥ ९ ॥ अव्यङ्गाङ्गी सौम्यनाम्नी हंसवारणगामिनीम् । तनुलोमकेशदशनां मृदङ्गीमुहेत्स्वयम् ॥ १० ॥ द्विजको उचित है कि गुरु की आज्ञा से ब्रह्मचर्य व्रत समाप्तिका समावर्तन सान करके शुभलक्षणों से युक्त अपने वर्णकी स्त्रीसे विवाह करे ॥ ४ ॥ जो कन्या वरकी माताकी सपिण्डा और पिताकी सगोत्रा नहीं है वही द्विजातियों की भार्या होने योग्य है ।। ५ ।। नीचे लिखे हुए १० कुल यदि गौ, बकरी, मेड़, धन और धान्य से युक्त होंय तो भी उनकी कन्या से विवाह नहीं करना चाहिये ॥ ६ ॥ ( १ ) क्रियाहीन, ( २ :) केवल कन्या ही उत्पन्न होनेवाला, ( ३ ) वेदविद्या से रहित, ( ४ ) अधिक रोएंवाला, ( ५ ) बवासीर रोगवाला, ( ६ ) क्ष्यी रोगसे युक्त, ( ७ ) मन्दाग्नि रोग युक्त, ( ८ ) मिरगी रोग युक्त, ( ९ ) श्वेतकुष्ठसे युक्त और ( १० ) गलत्कुष्ठसे युक्त ॥ ७ ॥ भूरे केशवाली, अधिक अङ्गवाली, रोगिणी, रोमरहित, बहुत रोपंवाली, बहुत बोलनेवाली, पीले आंखवाली, तथा नक्षत्र, वृक्ष, नदी, म्लेच्छ, पहाड़, पक्षी, सर्प, दासी आदि सेवा सूचक अथवा भयानक नामवाली कन्यासे विवाह नहीं करना चाहिये ।। ८-९ ॥ शुद्ध अङ्गोंसे युक्त, प्रिय नामवाली, हंस और हाथी के समान गमन करनेवाली तथा सूक्ष्म लोम बारीक केश, छोटे दांत और कोमल अङ्गवाली कन्यासे विवाह करना चाहि © ।। १० ।। * याज्ञवल्क्यस्मृति - ३ अध्याय - २६१ श्लोक । जो मनुष्य ब्रह्मवाती आदि महापातकियोंके साथ एक वर्षतक रहतेहैं वे उन्हींके समान होजाते हैं, किन्तु उनकी कन्याओंको उपवास कराके और अपना वस्त्र आदि देकर विवाहलेवगा तो कुछ दोप नहीं होगा । ३. शातातपस्मृतिके ३४-३५ श्लोक मनुके ८-९ श्लोक के समान हैं । याज्ञवल्क्यस्मृति-१ अध्याय के ५२-५४ श्लोक । द्विजको चाहिये कि ब्रह्मचर्य व्रत समाप्त कर के लक्षणों से युक्त, विना विवाही हुई, असपिण्ड, अपनेसे छोटी अवस्थाकी, रोगरहिता, भ्रातावाली, अपने गोत्र और प्रवरसे बाहर की, मातासे ५ पीढ़ी और पितासे. ७ पीढ़ी अन्तरवाली और १० पीढियोंसे विख्यातनामा श्रोत्रियोंके महान् कुलकी कन्यासे अपना विवाह करे; कुष्ठ आदि सञ्चारी रोग तथा दोष युक्त बड़े कुलकी सी कन्याको नहीं विवाहे । व्यासस्मृति - २ अध्याय के १ - ४ श्लोक में भी ऐसा है और लिखा है कि जिस कन्याका पिता मूल्य नहीं चाहता होवे, जो अपनी जातिकी होवे, जो नीचे लटकने वाले ( लंहगा आदि ) वस्त्र पहनती होवे और सदाचारसे युक्त होवे उस कन्यासे शास्त्रकी विधिसे विवाह करे । गौतमस्मृति - ४ अध्यायके १-२ अङ्क और वसिष्टस्मृति - ८ अध्याय १-२ अंक । गृहस्थको उचित है कि अपने तुल्य, विना विवाही हुई, अपनेसे छोटी अवस्थावाली, अन्य प्रवरकी, पिताके बन्धुओंसे ७ पीढ़ी और माता असे ५ पीढीके अन्तर वाली कन्यासे अपना विवाह करे । शङ्खस्मृति - ४ अध्यायका १ लोक और नारदस्मृति -- १२ विवादपदका ७ श्लोक । असमान प्रवर और अन्य गोत्रकी अथवा मातासे ५ पीढ़ी और पितासे ७ पीढी अन्तरवाली कन्या से विधिपूर्वक विवाह करना चाहिये । शातातपस्मृति - ३२३लोक । अपने गोत्र और समान प्रवरकी कन्या से द्विज विवाह नहीं करे; कदाचित् ऐसी कन्या से विवाह होजाय तो अतिकृच्छ्र
धर्मशास्त्रसंग्रह नारदस्त - बारह विवादपद । कन्यायां दत्तशुल्कायां ज्यायांचेवर आव्रजेत् । धर्मार्थकामसंयुक्तं वाच्यं तत्रानृतं भवेत् ॥ तीस ॥ जो पुरुप द्रव्य देकर कन्या ग्रहण करता है उसका अर्थ, धर्म, काम और वचन व्यर्थ है ।। तीस ॥ वरका धर्म दो. मनुस्मृति - दो अध्याय । श्रवान : शुभां विद्यामाददतावरादपि । अन्त्यादपि परं धर्म स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि ॥ दो सौ अड़तीस ॥ श्रद्धावान् मनुष्यको उचित है कि नीच वर्णसे भी कल्याण दायिनी विद्या सीखे, अन्त्यज जातिसे भी परम धर्मकी शिक्षा लेवे और कलङ्कित कुलसे भी स्त्रीरत्न ग्रहण करे ।।दो सौ अड़तीस ।। गुरुणानुमतः स्त्रात्वा समावृत्तो यथाविधि । उद्हेत द्विजो भायां सवर्णी लक्षणान्विताम् ॥ चार ॥ असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः । सा प्रशस्ता द्विजातीनां दारकर्मणि मैथुने ॥ पाँच ॥ महान्त्यपि समृद्धानि गोजाविधनवान्यतः । स्त्रीसम्बन्धे दशैतानि कुलानि परिवर्जयेत् ॥ छः ॥ हीनक्रियं निष्पुरुषं निश्छन्दो रोमशार्शसम् । क्षय्यामयाव्यपस्मारिश्वित्रिकुष्ठिकुलानि च ॥ सात ॥ नोइहेत्कपिलां कन्यां नाधिकाङ्क्षीं न रोगिणीम् । नालोमिकां नातिलोमां न वाचटां न पिङ्गलामुद नर्क्षवृक्षनदीनानी नान्त्यपर्वतनामिकाम् । न पक्ष्यहिप्रेष्यनाम्नीं न च भीपणनामिकाम् ॥ नौ ॥ अव्यङ्गाङ्गी सौम्यनाम्नी हंसवारणगामिनीम् । तनुलोमकेशदशनां मृदङ्गीमुहेत्स्वयम् ॥ दस ॥ द्विजको उचित है कि गुरु की आज्ञा से ब्रह्मचर्य व्रत समाप्तिका समावर्तन सान करके शुभलक्षणों से युक्त अपने वर्णकी स्त्रीसे विवाह करे ॥ चार ॥ जो कन्या वरकी माताकी सपिण्डा और पिताकी सगोत्रा नहीं है वही द्विजातियों की भार्या होने योग्य है ।। पाँच ।। नीचे लिखे हुए दस कुल यदि गौ, बकरी, मेड़, धन और धान्य से युक्त होंय तो भी उनकी कन्या से विवाह नहीं करना चाहिये ॥ छः ॥ क्रियाहीन, केवल कन्या ही उत्पन्न होनेवाला, वेदविद्या से रहित, अधिक रोएंवाला, बवासीर रोगवाला, क्ष्यी रोगसे युक्त, मन्दाग्नि रोग युक्त, मिरगी रोग युक्त, श्वेतकुष्ठसे युक्त और गलत्कुष्ठसे युक्त ॥ सात ॥ भूरे केशवाली, अधिक अङ्गवाली, रोगिणी, रोमरहित, बहुत रोपंवाली, बहुत बोलनेवाली, पीले आंखवाली, तथा नक्षत्र, वृक्ष, नदी, म्लेच्छ, पहाड़, पक्षी, सर्प, दासी आदि सेवा सूचक अथवा भयानक नामवाली कन्यासे विवाह नहीं करना चाहिये ।। आठ-नौ ॥ शुद्ध अङ्गोंसे युक्त, प्रिय नामवाली, हंस और हाथी के समान गमन करनेवाली तथा सूक्ष्म लोम बारीक केश, छोटे दांत और कोमल अङ्गवाली कन्यासे विवाह करना चाहि © ।। दस ।। * याज्ञवल्क्यस्मृति - तीन अध्याय - दो सौ इकसठ श्लोक । जो मनुष्य ब्रह्मवाती आदि महापातकियोंके साथ एक वर्षतक रहतेहैं वे उन्हींके समान होजाते हैं, किन्तु उनकी कन्याओंको उपवास कराके और अपना वस्त्र आदि देकर विवाहलेवगा तो कुछ दोप नहीं होगा । तीन. शातातपस्मृतिके चौंतीस-पैंतीस श्लोक मनुके आठ-नौ श्लोक के समान हैं । याज्ञवल्क्यस्मृति-एक अध्याय के बावन-चौवन श्लोक । द्विजको चाहिये कि ब्रह्मचर्य व्रत समाप्त कर के लक्षणों से युक्त, विना विवाही हुई, असपिण्ड, अपनेसे छोटी अवस्थाकी, रोगरहिता, भ्रातावाली, अपने गोत्र और प्रवरसे बाहर की, मातासे पाँच पीढ़ी और पितासे. सात पीढ़ी अन्तरवाली और दस पीढियोंसे विख्यातनामा श्रोत्रियोंके महान् कुलकी कन्यासे अपना विवाह करे; कुष्ठ आदि सञ्चारी रोग तथा दोष युक्त बड़े कुलकी सी कन्याको नहीं विवाहे । व्यासस्मृति - दो अध्याय के एक - चार श्लोक में भी ऐसा है और लिखा है कि जिस कन्याका पिता मूल्य नहीं चाहता होवे, जो अपनी जातिकी होवे, जो नीचे लटकने वाले वस्त्र पहनती होवे और सदाचारसे युक्त होवे उस कन्यासे शास्त्रकी विधिसे विवाह करे । गौतमस्मृति - चार अध्यायके एक-दो अङ्क और वसिष्टस्मृति - आठ अध्याय एक-दो अंक । गृहस्थको उचित है कि अपने तुल्य, विना विवाही हुई, अपनेसे छोटी अवस्थावाली, अन्य प्रवरकी, पिताके बन्धुओंसे सात पीढ़ी और माता असे पाँच पीढीके अन्तर वाली कन्यासे अपना विवाह करे । शङ्खस्मृति - चार अध्यायका एक लोक और नारदस्मृति -- बारह विवादपदका सात श्लोक । असमान प्रवर और अन्य गोत्रकी अथवा मातासे पाँच पीढ़ी और पितासे सात पीढी अन्तरवाली कन्या से विधिपूर्वक विवाह करना चाहिये । शातातपस्मृति - तीन सौ तेईसलोक । अपने गोत्र और समान प्रवरकी कन्या से द्विज विवाह नहीं करे; कदाचित् ऐसी कन्या से विवाह होजाय तो अतिकृच्छ्र
नगर के व्यायाम शालाओं में सामग्री खस्ताहाल है। जय हनुमान, हिंदुस्तानी, सिंपल लाइफ स्टाइल महिला जिम सहित छोटे-बड़े आधा दर्जन सरकारी व्यायाम शाला शहर में है। यहां सैकड़ों की संख्या में युवाजन पहुंचते हैं, लेकिन जर्जर सामानों. . . chhattisgarhMon, 11 Dec 2017 03:51 AM (IST) रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि रायपुर जिला तैराकी संघ की ओर से मारुति लाइफ स्टाइल में तैराकी को लेकर शुक्रवार को सेमीनार आयोजित किया गया। जिसमें भारतीय तैराकी संघ कि फिजियो डॉ. प्राची साह अरोरा ने सभी तैराकों को इंटरनल मशल्स. . . chhattisgarhSat, 11 Nov 2017 03:58 AM (IST) रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि तैयारी खेल को लेकर दो दिवसीय सेमीनार 10 नवंबर शुक्रवार को सुबह 9. 30 बजे से शुरू हो रहा। सेमीनार में मुंबई की फिजियोथेरिपिस्ट डॉ. प्राची शाह खिलाड़ियों को विशेष जानकारी देंगी। सेमीनार मारुती लाइफ. . . chhattisgarhFri, 10 Nov 2017 08:15 AM (IST) इंदौर। नई दुनिया प्रतिनिधि सीनियर सिटीजन की लाइफ स्टाइल में बदलाव लाना आवश्यक है। गरीबी रेखा सmadhya pradeshMon, 06 Nov 2017 03:59 AM (IST) 00 मेल में सबसे घातक माउथ कैंसर और फीमेल में ब्रेस्ट कैंसर फोटो रिपोर्टर फोल्डर में सुरेश के नाम से रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि संत गरीब दास आई हॉस्पिटल में चल रहे मेल हेल्थ कैंप के दूसरे दिन रविवार को 350 लोगों की जांच. . . chhattisgarhMon, 06 Nov 2017 03:54 AM (IST) डबरा। नईदुनिया न्यूज वर्तमान में आधुनिकता बढ़ने के साथ सुख साधन भी बढ़े हैं, जिससे हम लोगों की जीवन शैली में बदलाव आया है। बदली लाइफ स्टाइल के चलते मनुष्य मोटापा, शुगर जैसी कई बीमारियों की चपेट में आ रहा है। इन समस्याओं से. . . madhya pradeshWed, 01 Nov 2017 02:08 AM (IST) जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर कैंसर के संबंध में जो तथ्य और भ्रांतियां हैं उन्हें समझने और जानने की जरूरत है। कैंसर के मरीज को प्यार, सुरक्षा, हेल्थी लाइफ स्टाइल, पौष्टिक आहार देकर कैंसर से लड़ने में मदद की जा सकती है। तुलसी. . . madhya pradeshTue, 31 Oct 2017 01:27 AM (IST) नीमच। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में मंगलवार को लाइफ स्टाइल मैनेजमेंट डे मनाया गया। क्षेत्रीय कmadhya pradeshThu, 26 Oct 2017 03:59 AM (IST) फास्ट फूड कल्चर और मॉर्डन लाइफ स्टाइल की सबसे बड़ी कीमत मुझे ही तो चुकाना पड़ रही है। magazineMon, 23 Oct 2017 04:55 PM (IST) फोटो रिपोर्टर में डॉ. वर्षा रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ की ओर से मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने और अपने मन का आत्मनिरीक्षण करके अपने व्यक्तित्व विकारों एव. . . chhattisgarhTue, 10 Oct 2017 03:51 AM (IST)
नगर के व्यायाम शालाओं में सामग्री खस्ताहाल है। जय हनुमान, हिंदुस्तानी, सिंपल लाइफ स्टाइल महिला जिम सहित छोटे-बड़े आधा दर्जन सरकारी व्यायाम शाला शहर में है। यहां सैकड़ों की संख्या में युवाजन पहुंचते हैं, लेकिन जर्जर सामानों. . . chhattisgarhMon, ग्यारह दिसंबर दो हज़ार सत्रह तीन:इक्यावन AM रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि रायपुर जिला तैराकी संघ की ओर से मारुति लाइफ स्टाइल में तैराकी को लेकर शुक्रवार को सेमीनार आयोजित किया गया। जिसमें भारतीय तैराकी संघ कि फिजियो डॉ. प्राची साह अरोरा ने सभी तैराकों को इंटरनल मशल्स. . . chhattisgarhSat, ग्यारह नवंबर दो हज़ार सत्रह तीन:अट्ठावन AM रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि तैयारी खेल को लेकर दो दिवसीय सेमीनार दस नवंबर शुक्रवार को सुबह नौ. तीस बजे से शुरू हो रहा। सेमीनार में मुंबई की फिजियोथेरिपिस्ट डॉ. प्राची शाह खिलाड़ियों को विशेष जानकारी देंगी। सेमीनार मारुती लाइफ. . . chhattisgarhFri, दस नवंबर दो हज़ार सत्रह आठ:पंद्रह AM इंदौर। नई दुनिया प्रतिनिधि सीनियर सिटीजन की लाइफ स्टाइल में बदलाव लाना आवश्यक है। गरीबी रेखा सmadhya pradeshMon, छः नवंबर दो हज़ार सत्रह तीन:उनसठ AM शून्य मेल में सबसे घातक माउथ कैंसर और फीमेल में ब्रेस्ट कैंसर फोटो रिपोर्टर फोल्डर में सुरेश के नाम से रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि संत गरीब दास आई हॉस्पिटल में चल रहे मेल हेल्थ कैंप के दूसरे दिन रविवार को तीन सौ पचास लोगों की जांच. . . chhattisgarhMon, छः नवंबर दो हज़ार सत्रह तीन:चौवन AM डबरा। नईदुनिया न्यूज वर्तमान में आधुनिकता बढ़ने के साथ सुख साधन भी बढ़े हैं, जिससे हम लोगों की जीवन शैली में बदलाव आया है। बदली लाइफ स्टाइल के चलते मनुष्य मोटापा, शुगर जैसी कई बीमारियों की चपेट में आ रहा है। इन समस्याओं से. . . madhya pradeshWed, एक नवंबर दो हज़ार सत्रह दो:आठ AM जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर कैंसर के संबंध में जो तथ्य और भ्रांतियां हैं उन्हें समझने और जानने की जरूरत है। कैंसर के मरीज को प्यार, सुरक्षा, हेल्थी लाइफ स्टाइल, पौष्टिक आहार देकर कैंसर से लड़ने में मदद की जा सकती है। तुलसी. . . madhya pradeshTue, इकतीस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह एक:सत्ताईस AM नीमच। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में मंगलवार को लाइफ स्टाइल मैनेजमेंट डे मनाया गया। क्षेत्रीय कmadhya pradeshThu, छब्बीस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह तीन:उनसठ AM फास्ट फूड कल्चर और मॉर्डन लाइफ स्टाइल की सबसे बड़ी कीमत मुझे ही तो चुकाना पड़ रही है। magazineMon, तेईस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह चार:पचपन PM फोटो रिपोर्टर में डॉ. वर्षा रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ की ओर से मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने और अपने मन का आत्मनिरीक्षण करके अपने व्यक्तित्व विकारों एव. . . chhattisgarhTue, दस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह तीन:इक्यावन AM
महामहिम प्रधानमंत्री दातो श्री मोहम्मद नजीब बिन तुन अब्दुल रजाक और मीडिया के साथियों, हमें भारत में मलेशिया के महामहिम प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए अपार खुशी हो रही है। महामहिम नजीब, आपकी यात्रा मुझे और भारत के लोगों को नवंबर 2015 में मेरी मलेशिया की यात्रा के दौरान गर्मजोशी और शुभकामनाओं का लाभ उठाने का अवसर दिया है। आपकी यात्रा भी हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक समय पर हुई है। हम अपने द्वपक्षीय संबंधों की 60वीं सालगिरह मना रहे हैं। और महामहिम, आपके नेतृत्व और व्यक्तिगत तौर पर ध्यान देने की वजह से हमारे रिश्तों में स्थिरत, मजबूती और जीवंतता आई है। भारत के साथ एक विस्तृत सामरिक भागीदारी स्थापित करने में आपके योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मलेशिया के साथ हमारा संबंध सभ्यतागत और ऐतिहासिक है। हमारे रिश्ते समृद्ध और विविध हैं। हमारा समाज कई स्तरों पर जुड़ा हुआ है। धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों के चलते हमारे लोगों के बीच मजबूत संबंध स्थापित होते हैं। मलेशिया में भारतीय लोगों का योगदान हमारा विशेष मूल्य है। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और लोगों के संबंधों को मजूबत बनाने में महती भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री नजीब और मैंने संयुक्त रूप से कुआला लुम्पुर में तोरांग गेट का उद्घाटन किया था। तोरांग गेट का ढांचा सांची स्तूप की तरह है। यह हमारे रिश्तों का एक प्रतीक है। आज हमारी व्यापक बातचीत में, प्रधानमंत्री नजीब और मैंने अपनी सांस्कृतिक, आर्थिक और सामरिक भागीदारी की पूरी श्रृंखला का चर्चा किया। हम नवंबर 2015 में मलेशिया की अपनी यात्रा के दौरान उठाए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के कार्यान्वयन में लगातार प्रगति पर नजर रख रहे हैं और हम अपनी सामरिक भागीदारी को मजबूती प्रदान करने पर सहमत हुए हैं। एक दृष्टिकोण जो एक क्रिया उन्मुख दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है। इस प्रयास में, सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों को गहरा करना और नए क्षेत्रों में रिश्ते स्थापित करना हमारे मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं। भारत और मलेशिया ने एक संपन्न आर्थिक साझेदारी का निर्माण किया है। इस को मापने के हमारे प्रयासों में, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। और, इससे हमारे समाज में समृद्धि के नए स्थान तैयार हुए हैं। हम दो अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और पूंजी प्रवाह को विस्तार देने के लिए तैयार हैं। बुनियादी ढांचा हमारे बीच उपयोगी भागीदारी का एक क्षेत्र रहा है। लेकिन हम और बढिया कर सकते हैं। भारत के बुनियादी ढांचे की जरूरत और स्मार्ट शहरों के विकास की हमारी महत्वाकांक्षी दृष्टि मलेशियाई क्षमताओं के साथ अच्छी तरह से मिलता जुलती है। मलेशियाई कंपनियां भारत के विभिन्न राज्यों में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में काम कर रही हैं। भारतीय कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर मलेशिया की अर्थव्यवस्था में निवेश किया है। हमें खुशी है कि प्रधान मंत्री नजीब के साथ एक उच्च स्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी है। मुझे पूरा भरोसा है कि वे जो व्यावसयिक साझेदारियां स्थापित करेंगे वह हमारे व्यापारिक रिश्तों को गति प्रदान करेगा। हम खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य को हासिल करने के प्रयासों के साथ एकजुट हो रहे हैं जो हमारे किसानों की भलाई से जुड़ा हुआ है। मलेशिया में उर्वरक संयंत्र के प्रस्तावित विकास पर समझौता ज्ञापन और मलेशिया से भारत में अतिरिक्त यूरिया का आयात एक स्वागत योग्य विकास है। पहली बार मलेशिया में यू.टी.ए.आर. विश्वविद्यालय आयुर्वेद की डिग्री प्रदान करना शुरू किया है। इस विकास का स्वागत किया जाना चाहिए। और इसी विश्वविद्यालय में आयुर्वेद चेयर की स्थापना को लेकर कार्य प्रगति पर है। इससे हमारे रिश्तों में और मजबूती आएगी। शैक्षणिक आदान-प्रदान दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। शैक्षिक डिग्री देने को लेकर आज समझौता ज्ञापन पर हुआ हस्ताक्षर एक मिसाल कायम करेगा और इससे दोनों देशों के समाज व छात्रों को लाभ मिलेगा। हम ऐसे समय और ऐसे क्षेत्र में रह रहे हैं जहां परंपरागत और गैर-परंपरागत सुरक्षा खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नजीब और मैं इस बात पर सहमत हुए हैं कि इस क्षेत्र में इन चुनौनियों के चलते स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को खतरा पैदा हुआ है। हमें और इस क्षेत्र के दूसरे देशों को इस दिशा में साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। इस संदर्भ में, मलेशिया सरकार के साथ आतंकवाद विरोधी अभियान को लेकर अपने निरंतर सहयोग की सराहना करता हूं। महामहिम, कट्टरपंथ और आतंकवाद का मुकाबला करने में आपका अपना नेतृत्व पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है। हमारी व्यापक रक्षा भागीदारी ने पहले ही हमारे सशस्त्र बलों को लगभग करीब लाया है। - उपकरण और सैन्य हार्डवेयर का रखरखाव; प्रधानमंत्री नजीब और मैं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि, नेविगेशन की स्वतंत्रता और स्थिरता को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका और ज़िम्मेदारी के बारे में भी जागरूक हैं, खासकर अपने महासागरों में। अपने समाज और बेहतर क्षेत्रीय अच्छे के लिए, हम अपनी सामरिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं ताकि हमारी आम समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी प्रतिक्रिया आ सके। हम आपका भारत में एक बार और स्वागत करते हैं। मैं बेहतरीन चर्चाओं के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि आज लिया गया हमारा निर्णय अगले चरण में हमारी सामरिक भागीदारी को आगे बढ़ाएगा। मैं आपकी भारत यात्रा के सुखद और उपयोगी रहने की कामना करता हूं।
महामहिम प्रधानमंत्री दातो श्री मोहम्मद नजीब बिन तुन अब्दुल रजाक और मीडिया के साथियों, हमें भारत में मलेशिया के महामहिम प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए अपार खुशी हो रही है। महामहिम नजीब, आपकी यात्रा मुझे और भारत के लोगों को नवंबर दो हज़ार पंद्रह में मेरी मलेशिया की यात्रा के दौरान गर्मजोशी और शुभकामनाओं का लाभ उठाने का अवसर दिया है। आपकी यात्रा भी हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक समय पर हुई है। हम अपने द्वपक्षीय संबंधों की साठवीं सालगिरह मना रहे हैं। और महामहिम, आपके नेतृत्व और व्यक्तिगत तौर पर ध्यान देने की वजह से हमारे रिश्तों में स्थिरत, मजबूती और जीवंतता आई है। भारत के साथ एक विस्तृत सामरिक भागीदारी स्थापित करने में आपके योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मलेशिया के साथ हमारा संबंध सभ्यतागत और ऐतिहासिक है। हमारे रिश्ते समृद्ध और विविध हैं। हमारा समाज कई स्तरों पर जुड़ा हुआ है। धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों के चलते हमारे लोगों के बीच मजबूत संबंध स्थापित होते हैं। मलेशिया में भारतीय लोगों का योगदान हमारा विशेष मूल्य है। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और लोगों के संबंधों को मजूबत बनाने में महती भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री नजीब और मैंने संयुक्त रूप से कुआला लुम्पुर में तोरांग गेट का उद्घाटन किया था। तोरांग गेट का ढांचा सांची स्तूप की तरह है। यह हमारे रिश्तों का एक प्रतीक है। आज हमारी व्यापक बातचीत में, प्रधानमंत्री नजीब और मैंने अपनी सांस्कृतिक, आर्थिक और सामरिक भागीदारी की पूरी श्रृंखला का चर्चा किया। हम नवंबर दो हज़ार पंद्रह में मलेशिया की अपनी यात्रा के दौरान उठाए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के कार्यान्वयन में लगातार प्रगति पर नजर रख रहे हैं और हम अपनी सामरिक भागीदारी को मजबूती प्रदान करने पर सहमत हुए हैं। एक दृष्टिकोण जो एक क्रिया उन्मुख दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है। इस प्रयास में, सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों को गहरा करना और नए क्षेत्रों में रिश्ते स्थापित करना हमारे मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं। भारत और मलेशिया ने एक संपन्न आर्थिक साझेदारी का निर्माण किया है। इस को मापने के हमारे प्रयासों में, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। और, इससे हमारे समाज में समृद्धि के नए स्थान तैयार हुए हैं। हम दो अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और पूंजी प्रवाह को विस्तार देने के लिए तैयार हैं। बुनियादी ढांचा हमारे बीच उपयोगी भागीदारी का एक क्षेत्र रहा है। लेकिन हम और बढिया कर सकते हैं। भारत के बुनियादी ढांचे की जरूरत और स्मार्ट शहरों के विकास की हमारी महत्वाकांक्षी दृष्टि मलेशियाई क्षमताओं के साथ अच्छी तरह से मिलता जुलती है। मलेशियाई कंपनियां भारत के विभिन्न राज्यों में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में काम कर रही हैं। भारतीय कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर मलेशिया की अर्थव्यवस्था में निवेश किया है। हमें खुशी है कि प्रधान मंत्री नजीब के साथ एक उच्च स्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी है। मुझे पूरा भरोसा है कि वे जो व्यावसयिक साझेदारियां स्थापित करेंगे वह हमारे व्यापारिक रिश्तों को गति प्रदान करेगा। हम खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य को हासिल करने के प्रयासों के साथ एकजुट हो रहे हैं जो हमारे किसानों की भलाई से जुड़ा हुआ है। मलेशिया में उर्वरक संयंत्र के प्रस्तावित विकास पर समझौता ज्ञापन और मलेशिया से भारत में अतिरिक्त यूरिया का आयात एक स्वागत योग्य विकास है। पहली बार मलेशिया में यू.टी.ए.आर. विश्वविद्यालय आयुर्वेद की डिग्री प्रदान करना शुरू किया है। इस विकास का स्वागत किया जाना चाहिए। और इसी विश्वविद्यालय में आयुर्वेद चेयर की स्थापना को लेकर कार्य प्रगति पर है। इससे हमारे रिश्तों में और मजबूती आएगी। शैक्षणिक आदान-प्रदान दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। शैक्षिक डिग्री देने को लेकर आज समझौता ज्ञापन पर हुआ हस्ताक्षर एक मिसाल कायम करेगा और इससे दोनों देशों के समाज व छात्रों को लाभ मिलेगा। हम ऐसे समय और ऐसे क्षेत्र में रह रहे हैं जहां परंपरागत और गैर-परंपरागत सुरक्षा खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नजीब और मैं इस बात पर सहमत हुए हैं कि इस क्षेत्र में इन चुनौनियों के चलते स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को खतरा पैदा हुआ है। हमें और इस क्षेत्र के दूसरे देशों को इस दिशा में साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। इस संदर्भ में, मलेशिया सरकार के साथ आतंकवाद विरोधी अभियान को लेकर अपने निरंतर सहयोग की सराहना करता हूं। महामहिम, कट्टरपंथ और आतंकवाद का मुकाबला करने में आपका अपना नेतृत्व पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है। हमारी व्यापक रक्षा भागीदारी ने पहले ही हमारे सशस्त्र बलों को लगभग करीब लाया है। - उपकरण और सैन्य हार्डवेयर का रखरखाव; प्रधानमंत्री नजीब और मैं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि, नेविगेशन की स्वतंत्रता और स्थिरता को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका और ज़िम्मेदारी के बारे में भी जागरूक हैं, खासकर अपने महासागरों में। अपने समाज और बेहतर क्षेत्रीय अच्छे के लिए, हम अपनी सामरिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं ताकि हमारी आम समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी प्रतिक्रिया आ सके। हम आपका भारत में एक बार और स्वागत करते हैं। मैं बेहतरीन चर्चाओं के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि आज लिया गया हमारा निर्णय अगले चरण में हमारी सामरिक भागीदारी को आगे बढ़ाएगा। मैं आपकी भारत यात्रा के सुखद और उपयोगी रहने की कामना करता हूं।
बच्चे भविष्य हैं। भविष्य उज्ज्वल हो, परिवार, समाज, देश, दुनिया प्रगति करे, इसके लिए बच्चों का स्वस्थ रहना बहुत महत्त्व रखता है। बच्चों को स्वस्थ रखने में टीकाकरण की भूमिका अहम पायी गयी है। बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरक्षण के वास्ते टीके लगाये जाते हैं, जिससे बच्चों के शरीर की रोग से लडऩे की शक्ति बढ़ती है। टीकाकरण से बच्चों में कई संक्रामक बीमारियों की रोकथाम होती है तथा समुदाय के स्वास्थ्य के स्तर में सुधार होता है। अध्ययन यह भी बताते हैं कि स्वस्थ बच्चा पढ़ाई में भी अच्छा करता है व बीमार बच्चों की तुलना में वह रोज़गार में भी बेहतर प्रदर्शन करता है। टीकाकरण के महत्त्व के मद्देनज़र बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन' 2023 में टीकाकरण पर फोकस किया है। 'द स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन 2023 : फॉर एवरी चाइल्ड, वैक्सीनेशन' में बाल टीकाकरण पर रोशनी डाली है। यह रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019-2021 के दरमियान दुनिया भर में 6 करोड़ 70 लाख बच्चे टीका लगवाने से चूक गये। अध्ययन किये गये देशों में से एक-तिहाई में टीकाकरण के प्रति भरोसे में कमी पायी गयी। लेकिन भारत, चीन और मैक्सिको ऐसे देश हैं, जहाँ टीके के प्रति भरोसे बना रहा व इसमें सुधार हुआ। यह रिपोर्ट आगाह करती है कि विश्व बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक चेतावनी का सामना कर रहा है। कोरोना महामारी के दौरान टीकाकरण की कवरेज में तेज़ी से गिरावट आयी, कई लाखों बच्चों को असुरक्षित स्थिति में छोड़ दिया। कोरोना महामारी के मद्देनज़र वैश्विक स्तर पर बाल टीकाकरण की प्रगति को धक्का लगा। ग़ौरतलब है कि जो बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं, वे अक्सर ग़रीब परिवारों, निम्न आय वाले देशों व दूर-दराज़ इलाक़ों और हाशिये के समुदायों से ताल्लुक़ रखते हैं। और कोरोना महामारी ने उन्हें और भी पीछे धकेल दिया। दुनिया भर में हर पाँचवाँ बच्चा ऐसा है, जिसे टीका नहीं लगा है। यानी ज़ीरो डोज या उसका पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है। यानी उसकी आयु के अनुसार उसे जो-जो टीके लगने चाहिए थे, वे सभी उसे नहीं लगे हैं। हर पाँच में से एक बच्चा खसरे के प्रति असुरक्षित है, खसरा बच्चों के लिए जानलेवा है। क़रीब 8 में से 7 लड़कियों को एचपीवी नहीं लगा है, यह टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाव करता है। टीके हर साल 44 लाख ज़िन्दगियाँ बचाते हैं, यह आँकड़ा वर्ष 2030 तक 58 लाख तक जा सकता है, यदि टीकाकरण एंजेडा 2030 को हासिल कर लिया जाएगा। सतत विकास लक्ष्यों की सूची में यह भी शामिल है। पर इसके साथ ही यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बीते कुछ दशकों में टीकाकरण के प्रति बढ़ते प्रयासों के बावजूद ज़ीरो डोज वाले बच्चों की संख्या कम करने में बहुत कम प्रगति हुई है। प्रत्येक बच्चे तक पहुँचना एक चुनौती बनी हुई है। डॉक्टरों की राय में जब हम बच्चों को टीका नहीं लगवाते हैं, तो हम उनके जीवन और स्वास्थ्य को जोखिम में डालते हैं; साथ ही समाज की वृद्धि और विकास को भी। टीकाकरण बच्चों को बीमारियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा प्रदान करता है, वह बच्चों की स्कूल में ग़ैर-हाज़िरी को कम करता है, जिससे उसके सीखने के नतीजे भी सुधरते हैं। यही नहीं, जब बच्चे रोगों के ख़िलाफ़ सुरक्षित रहते हैं तो उनके अभिभावकों व देखभाल करने वालों को अपना अधिक वक़्त उनकी देखभाल में नहीं व्यतीत करना पड़ता। इससे उन्हें अपने काम से बार-बार अवकाश नहीं लेना पड़ता। ख़ासकर माँओं को। परिवारों को कम भावात्मक पीड़ा का सामना करने की संभावना रहती है और कई बार बीमार बच्चे की देखभाल की भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है। बहुत-से बच्चे जो ज़ीरो डोज वाले और जिनका पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है, वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रहते हैं। जैसे कि दुर्गम स्थनों पर, शहरी बस्तियों में जहाँ निर्माण कार्य चल रहा होता है, ग्रामीण इलाक़े ऐसे इलाक़े जो सघर्ष व संकटग्रस्त की श्रेणी में आते हो। विश्व में पाँच में से दो बच्चे, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है; वे संघर्ष प्रभावित या कमज़ोर हालात वाले स्थानों में रहते हैं। ये हालात टीकों को लेकर उपलब्धता, पहुँच व वहनीय क्षमता वाली चुनौतियाँ पैदा करते हैं। चुनौतियाँ निम्न व मध्य आय वाले देशों में अधिक हैं, जहाँ शहरी इलाक़ों में प्रत्येक 10 में से एक बच्चा ज़ीरो डोज वाले वर्ग में आता है, ग्रामीण इलाक़ों में यह आँकड़ा प्रति छः बच्चों में एक है। उच्च-मध्यम आय वाले देशों में, शहरों व ग्रामीणों बच्चों में कोई अन्तर नहीं है। सबसे ग़रीब घरों में पाँच बच्चों में से एक बच्चा ज़ीरो डोज वाली श्रेणी में आता है, जबकि अमीर देशों में यह आँकड़ा 20 बच्चों में से एक का है। इस पर भी ग़ौर फ़रमाया गया कि उन बच्चों की माँएँ, जो बिलकुल पढ़ी-लिखी नहीं या कम शिक्षित हैं; उनके टीकाकृत होने की संभावना बहुत कम होती है। यही नहीं, बहुत-से बच्चे टीकाकरण से इसलिए भी छूट जाते हैं, क्योंकि वे उन स्थानों पर रहते हैं, जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की सेवाएँ बहुत सीमित हैं या नहीं हैं। जहाँ तक भारत का सवाल है, यह रिपोर्ट कहती है कि महामारी के दौरान ज़ीरो डोज वाले बच्चों की संख्या 30 लाख होने के बावजूद भारत ने 2020 ओर 2021 के बीच इस दिशा में अच्छा काम किया और ऐसे बच्चों की संख्या 30 लाख से घटकर 27 लाख रह गयी। यह अटूट राजनीतिक प्रतिबद्धता और सरकार द्वारा शुरू किये गये साक्ष्य आधारित निरंतर कैच-अप अभियानों के कारण सम्भव हो सका है। द स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन 2023 रिपोर्ट इस बात को भी रेखांकित करती है कि भारत में हर पाँचवाँ बच्चा टीकाकरण से चूका हुआ है, उस तक पहुँचने के लिए भारत को प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख में निवेश को प्राथमिकता देनी होगी। यह रिपोर्ट स्वीकार करती है कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जहाँ टीकों के प्रति सबसे अधिक विश्वास है। यह भारत के टीकों के महत्त्व को बताने व संदेह को संबोधित करने वाले प्रयासों की प्रभावशीलता को प्रदर्षित करता है। देश के टीकाकरण पर नज़र डालें, तो पता चलता है कि टीकाकरण पर विस्तारित कार्यक्रम सन् 1978 में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य शैश्वावस्था में कम-से-कम 80 प्रतिशत कवरेज था। टीकाकरण की सुविधा प्रमुख अस्पतालों में दी जाती थी और यह सुविधा बड़े पैमाने पर शहरी इलाक़ों तक ही सीमित थी। सन् 1985 में इसका नाम बदलकर सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम कर दिया गया और इसका दायरा शहरों से बढ़ाकर गाँवों तक कर दिया गया। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर साल देश में 2. 67 करोड़ नवजात शिशुओं व तीन करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीके लगाये जाते हैं। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर इन बीमारियों के ख़िलाफ़ टीके लगाये जाते हैं- डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, खसरा-रूबेला, बचपन में तपेदिक के गम्भीर रूप से बचाव के लिए हेपेटाइटिस-बी और मेनिनजाइटिस और निमोनिया हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी, रोटावायरस। पोलियो से बचाव के लिए ड्रॉप्स दिये जाते हैं। इसके अलावा जापानी इन्सेफेलाइटिस वैक्सीन भी दी जाती है; लेकिन यह उन्हीं इलाक़ों में दी जाती है, जहाँ जापानी बुख़ार बच्चों को अपना निशाना बनाता है। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के दो प्रमुख उपलब्धियाँ 2014 में देश से पोलियो का उन्मूलन और 2015 में मातृ और नवजात टिटनेस उन्मूलन है। भारत के लिए पोलियो मुक्त होना एक बहुत बड़ी चुनौती थी; लेकिन राजनीतिक प्रतिबद्धता के कारण भारत ने यह सम्भव कर दिखाया और दूसरे देश यह देख हैरान रह गये। भारत ने बाल टीकाकरण की दर को बढ़ाने के लिए दिसंबर, 2014 में मिशन इंद्रधनुश अभियान शुरू किया और इसका उद्देश्य बच्चों की पूर्ण टीकाकरण कवरेज को 90 $फीसदी तक बढ़ाना है। इस अभियान के तहत कम टीकाकरण कवरेज वाले क्षेत्रों और दुर्गम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहाँ ग़ैर-टीकाकृत और आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों का अनुपात सबसे अधिक है। भारत ने बाल टीकाकरण को मज़बूत करने के लिए कोल्ड चेन की क्षमता को भी सुदृढ़ किया। कोल्ड चैन उपकरणों की मरम्मत और रख-रखाव में कोल्ड चैन तकनीशियनों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए नेशनल कोल्ड चेन ट्रेनिंग सेंटर पुणे और नेशनल कोल्ड चेन एंड वैक्सीन मैनेजमेंट रिसोर्स सेंटर नई दिल्ली में स्थापित किया गया है। इसके अलावा भारत सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि देश के हर सेंटर में टीके बराबर उपलब्ध रहे। भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क प्रणाली शुरू की है, जो संपूर्ण वैक्सीन स्टॉक प्रबंधन, उनके लॉजिस्टिक्स और तापमान ट्रेकिंग सरीखे वैक्सीन भंडारण के सभी स्तरों पर राष्ट्रीय से लेकर उप ज़िला तक डिजिटाइज करती है। देश भर में 27,000 से अधिक कोल्ड चैन हैं। टीकाकरण में भरोसा तो बना हुआ है; लेकिन इसे बनाये रखना और इस भरोसे के स्तर में वृद्धि करने के लिए प्रयासों में निरंतरता बनाये रखना ज़रूरी है।
बच्चे भविष्य हैं। भविष्य उज्ज्वल हो, परिवार, समाज, देश, दुनिया प्रगति करे, इसके लिए बच्चों का स्वस्थ रहना बहुत महत्त्व रखता है। बच्चों को स्वस्थ रखने में टीकाकरण की भूमिका अहम पायी गयी है। बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरक्षण के वास्ते टीके लगाये जाते हैं, जिससे बच्चों के शरीर की रोग से लडऩे की शक्ति बढ़ती है। टीकाकरण से बच्चों में कई संक्रामक बीमारियों की रोकथाम होती है तथा समुदाय के स्वास्थ्य के स्तर में सुधार होता है। अध्ययन यह भी बताते हैं कि स्वस्थ बच्चा पढ़ाई में भी अच्छा करता है व बीमार बच्चों की तुलना में वह रोज़गार में भी बेहतर प्रदर्शन करता है। टीकाकरण के महत्त्व के मद्देनज़र बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन' दो हज़ार तेईस में टीकाकरण पर फोकस किया है। 'द स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन दो हज़ार तेईस : फॉर एवरी चाइल्ड, वैक्सीनेशन' में बाल टीकाकरण पर रोशनी डाली है। यह रिपोर्ट बताती है कि वर्ष दो हज़ार उन्नीस-दो हज़ार इक्कीस के दरमियान दुनिया भर में छः करोड़ सत्तर लाख बच्चे टीका लगवाने से चूक गये। अध्ययन किये गये देशों में से एक-तिहाई में टीकाकरण के प्रति भरोसे में कमी पायी गयी। लेकिन भारत, चीन और मैक्सिको ऐसे देश हैं, जहाँ टीके के प्रति भरोसे बना रहा व इसमें सुधार हुआ। यह रिपोर्ट आगाह करती है कि विश्व बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक चेतावनी का सामना कर रहा है। कोरोना महामारी के दौरान टीकाकरण की कवरेज में तेज़ी से गिरावट आयी, कई लाखों बच्चों को असुरक्षित स्थिति में छोड़ दिया। कोरोना महामारी के मद्देनज़र वैश्विक स्तर पर बाल टीकाकरण की प्रगति को धक्का लगा। ग़ौरतलब है कि जो बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं, वे अक्सर ग़रीब परिवारों, निम्न आय वाले देशों व दूर-दराज़ इलाक़ों और हाशिये के समुदायों से ताल्लुक़ रखते हैं। और कोरोना महामारी ने उन्हें और भी पीछे धकेल दिया। दुनिया भर में हर पाँचवाँ बच्चा ऐसा है, जिसे टीका नहीं लगा है। यानी ज़ीरो डोज या उसका पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है। यानी उसकी आयु के अनुसार उसे जो-जो टीके लगने चाहिए थे, वे सभी उसे नहीं लगे हैं। हर पाँच में से एक बच्चा खसरे के प्रति असुरक्षित है, खसरा बच्चों के लिए जानलेवा है। क़रीब आठ में से सात लड़कियों को एचपीवी नहीं लगा है, यह टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाव करता है। टीके हर साल चौंतालीस लाख ज़िन्दगियाँ बचाते हैं, यह आँकड़ा वर्ष दो हज़ार तीस तक अट्ठावन लाख तक जा सकता है, यदि टीकाकरण एंजेडा दो हज़ार तीस को हासिल कर लिया जाएगा। सतत विकास लक्ष्यों की सूची में यह भी शामिल है। पर इसके साथ ही यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बीते कुछ दशकों में टीकाकरण के प्रति बढ़ते प्रयासों के बावजूद ज़ीरो डोज वाले बच्चों की संख्या कम करने में बहुत कम प्रगति हुई है। प्रत्येक बच्चे तक पहुँचना एक चुनौती बनी हुई है। डॉक्टरों की राय में जब हम बच्चों को टीका नहीं लगवाते हैं, तो हम उनके जीवन और स्वास्थ्य को जोखिम में डालते हैं; साथ ही समाज की वृद्धि और विकास को भी। टीकाकरण बच्चों को बीमारियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा प्रदान करता है, वह बच्चों की स्कूल में ग़ैर-हाज़िरी को कम करता है, जिससे उसके सीखने के नतीजे भी सुधरते हैं। यही नहीं, जब बच्चे रोगों के ख़िलाफ़ सुरक्षित रहते हैं तो उनके अभिभावकों व देखभाल करने वालों को अपना अधिक वक़्त उनकी देखभाल में नहीं व्यतीत करना पड़ता। इससे उन्हें अपने काम से बार-बार अवकाश नहीं लेना पड़ता। ख़ासकर माँओं को। परिवारों को कम भावात्मक पीड़ा का सामना करने की संभावना रहती है और कई बार बीमार बच्चे की देखभाल की भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है। बहुत-से बच्चे जो ज़ीरो डोज वाले और जिनका पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है, वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रहते हैं। जैसे कि दुर्गम स्थनों पर, शहरी बस्तियों में जहाँ निर्माण कार्य चल रहा होता है, ग्रामीण इलाक़े ऐसे इलाक़े जो सघर्ष व संकटग्रस्त की श्रेणी में आते हो। विश्व में पाँच में से दो बच्चे, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है; वे संघर्ष प्रभावित या कमज़ोर हालात वाले स्थानों में रहते हैं। ये हालात टीकों को लेकर उपलब्धता, पहुँच व वहनीय क्षमता वाली चुनौतियाँ पैदा करते हैं। चुनौतियाँ निम्न व मध्य आय वाले देशों में अधिक हैं, जहाँ शहरी इलाक़ों में प्रत्येक दस में से एक बच्चा ज़ीरो डोज वाले वर्ग में आता है, ग्रामीण इलाक़ों में यह आँकड़ा प्रति छः बच्चों में एक है। उच्च-मध्यम आय वाले देशों में, शहरों व ग्रामीणों बच्चों में कोई अन्तर नहीं है। सबसे ग़रीब घरों में पाँच बच्चों में से एक बच्चा ज़ीरो डोज वाली श्रेणी में आता है, जबकि अमीर देशों में यह आँकड़ा बीस बच्चों में से एक का है। इस पर भी ग़ौर फ़रमाया गया कि उन बच्चों की माँएँ, जो बिलकुल पढ़ी-लिखी नहीं या कम शिक्षित हैं; उनके टीकाकृत होने की संभावना बहुत कम होती है। यही नहीं, बहुत-से बच्चे टीकाकरण से इसलिए भी छूट जाते हैं, क्योंकि वे उन स्थानों पर रहते हैं, जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की सेवाएँ बहुत सीमित हैं या नहीं हैं। जहाँ तक भारत का सवाल है, यह रिपोर्ट कहती है कि महामारी के दौरान ज़ीरो डोज वाले बच्चों की संख्या तीस लाख होने के बावजूद भारत ने दो हज़ार बीस ओर दो हज़ार इक्कीस के बीच इस दिशा में अच्छा काम किया और ऐसे बच्चों की संख्या तीस लाख से घटकर सत्ताईस लाख रह गयी। यह अटूट राजनीतिक प्रतिबद्धता और सरकार द्वारा शुरू किये गये साक्ष्य आधारित निरंतर कैच-अप अभियानों के कारण सम्भव हो सका है। द स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन दो हज़ार तेईस रिपोर्ट इस बात को भी रेखांकित करती है कि भारत में हर पाँचवाँ बच्चा टीकाकरण से चूका हुआ है, उस तक पहुँचने के लिए भारत को प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख में निवेश को प्राथमिकता देनी होगी। यह रिपोर्ट स्वीकार करती है कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जहाँ टीकों के प्रति सबसे अधिक विश्वास है। यह भारत के टीकों के महत्त्व को बताने व संदेह को संबोधित करने वाले प्रयासों की प्रभावशीलता को प्रदर्षित करता है। देश के टीकाकरण पर नज़र डालें, तो पता चलता है कि टीकाकरण पर विस्तारित कार्यक्रम सन् एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य शैश्वावस्था में कम-से-कम अस्सी प्रतिशत कवरेज था। टीकाकरण की सुविधा प्रमुख अस्पतालों में दी जाती थी और यह सुविधा बड़े पैमाने पर शहरी इलाक़ों तक ही सीमित थी। सन् एक हज़ार नौ सौ पचासी में इसका नाम बदलकर सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम कर दिया गया और इसका दायरा शहरों से बढ़ाकर गाँवों तक कर दिया गया। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर साल देश में दो. सरसठ करोड़ नवजात शिशुओं व तीन करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीके लगाये जाते हैं। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर इन बीमारियों के ख़िलाफ़ टीके लगाये जाते हैं- डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, खसरा-रूबेला, बचपन में तपेदिक के गम्भीर रूप से बचाव के लिए हेपेटाइटिस-बी और मेनिनजाइटिस और निमोनिया हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी, रोटावायरस। पोलियो से बचाव के लिए ड्रॉप्स दिये जाते हैं। इसके अलावा जापानी इन्सेफेलाइटिस वैक्सीन भी दी जाती है; लेकिन यह उन्हीं इलाक़ों में दी जाती है, जहाँ जापानी बुख़ार बच्चों को अपना निशाना बनाता है। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के दो प्रमुख उपलब्धियाँ दो हज़ार चौदह में देश से पोलियो का उन्मूलन और दो हज़ार पंद्रह में मातृ और नवजात टिटनेस उन्मूलन है। भारत के लिए पोलियो मुक्त होना एक बहुत बड़ी चुनौती थी; लेकिन राजनीतिक प्रतिबद्धता के कारण भारत ने यह सम्भव कर दिखाया और दूसरे देश यह देख हैरान रह गये। भारत ने बाल टीकाकरण की दर को बढ़ाने के लिए दिसंबर, दो हज़ार चौदह में मिशन इंद्रधनुश अभियान शुरू किया और इसका उद्देश्य बच्चों की पूर्ण टीकाकरण कवरेज को नब्बे डॉलरफीसदी तक बढ़ाना है। इस अभियान के तहत कम टीकाकरण कवरेज वाले क्षेत्रों और दुर्गम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहाँ ग़ैर-टीकाकृत और आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों का अनुपात सबसे अधिक है। भारत ने बाल टीकाकरण को मज़बूत करने के लिए कोल्ड चेन की क्षमता को भी सुदृढ़ किया। कोल्ड चैन उपकरणों की मरम्मत और रख-रखाव में कोल्ड चैन तकनीशियनों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए नेशनल कोल्ड चेन ट्रेनिंग सेंटर पुणे और नेशनल कोल्ड चेन एंड वैक्सीन मैनेजमेंट रिसोर्स सेंटर नई दिल्ली में स्थापित किया गया है। इसके अलावा भारत सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि देश के हर सेंटर में टीके बराबर उपलब्ध रहे। भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क प्रणाली शुरू की है, जो संपूर्ण वैक्सीन स्टॉक प्रबंधन, उनके लॉजिस्टिक्स और तापमान ट्रेकिंग सरीखे वैक्सीन भंडारण के सभी स्तरों पर राष्ट्रीय से लेकर उप ज़िला तक डिजिटाइज करती है। देश भर में सत्ताईस,शून्य से अधिक कोल्ड चैन हैं। टीकाकरण में भरोसा तो बना हुआ है; लेकिन इसे बनाये रखना और इस भरोसे के स्तर में वृद्धि करने के लिए प्रयासों में निरंतरता बनाये रखना ज़रूरी है।
फिल्म 'देवदास' में माधुरी दीक्षित ने एक सांग "नंद का लाल मोहे छेड़" में लाल रंग का लहंगा पहना है जिसका वजन करीब 30 किलो बताया गया था। फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ही थे जो फिल्म 'पद्मावती' के भी निर्देशक हैं। पद्मावती में भी दीपिका पादुकोण ने भारी कॉस्ट्यूम पहने हैं ताकि वो 11-12वीं सदी की राजपूत रानी के करेक्टर और लुक के साथ इंसाफ कर सकें। हालाकि कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स ने पूरी कोशिश की है कि कपड़ों का वजन कम रखा जा सके। इसके लिए उन्होंने मूल, चंदेरी और कोटा जैसे हल्के फेब्रिक का इस्तेमाल किया है। क्योंकि उस दौर में सारी कढ़ाई हाथ से ही होती थी इसीलिए कढ़ाई से समझौता नहीं किया जा सका है। यही वजह है कि कपड़ों का वजन बढ़ गया है। इसके अलावा ज्वेलरी भी काफी भारी है। बताया जा रहा है कि जेवरों का वजन 20 किलो तक हो जाता है। वैसे ये पहला मौका नहीं है जब दीपिका इतने भारी गेटअप में शूटिंग कर रही हैं। लगता है भंसाली को अपनी हिरोइन खास कर दीपिका हैवी कॉस्ट्यूम में ही पसंद आती हैं। यही वजह कि उनकी पिछली दो फिल्मों 'रामलीला' और 'बाजीरॉव मस्तानी' में काम कर चुकी दीपिका ने दोनों बार भारी भरकम ड्रैसेज पहनी हैं। फिल्म गोलियों की 'रास लीला राम लीला' में उन्होंने जहां 30 किलो का लंहगा पहना तो वहीं बाजीरॉव मस्तानी में 20 किलो का आर्मर सूट पहन कर शूटिंग की थी। फिल्म 'पद्मावती' में दीपिका का लुक उसके पोस्टर रिलीज के साथ ही चर्चा में आ गया था जब उनका यूनिब्रो स्टाइल देखा गया था।
फिल्म 'देवदास' में माधुरी दीक्षित ने एक सांग "नंद का लाल मोहे छेड़" में लाल रंग का लहंगा पहना है जिसका वजन करीब तीस किलो बताया गया था। फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ही थे जो फिल्म 'पद्मावती' के भी निर्देशक हैं। पद्मावती में भी दीपिका पादुकोण ने भारी कॉस्ट्यूम पहने हैं ताकि वो ग्यारह-बारहवीं सदी की राजपूत रानी के करेक्टर और लुक के साथ इंसाफ कर सकें। हालाकि कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स ने पूरी कोशिश की है कि कपड़ों का वजन कम रखा जा सके। इसके लिए उन्होंने मूल, चंदेरी और कोटा जैसे हल्के फेब्रिक का इस्तेमाल किया है। क्योंकि उस दौर में सारी कढ़ाई हाथ से ही होती थी इसीलिए कढ़ाई से समझौता नहीं किया जा सका है। यही वजह है कि कपड़ों का वजन बढ़ गया है। इसके अलावा ज्वेलरी भी काफी भारी है। बताया जा रहा है कि जेवरों का वजन बीस किलो तक हो जाता है। वैसे ये पहला मौका नहीं है जब दीपिका इतने भारी गेटअप में शूटिंग कर रही हैं। लगता है भंसाली को अपनी हिरोइन खास कर दीपिका हैवी कॉस्ट्यूम में ही पसंद आती हैं। यही वजह कि उनकी पिछली दो फिल्मों 'रामलीला' और 'बाजीरॉव मस्तानी' में काम कर चुकी दीपिका ने दोनों बार भारी भरकम ड्रैसेज पहनी हैं। फिल्म गोलियों की 'रास लीला राम लीला' में उन्होंने जहां तीस किलो का लंहगा पहना तो वहीं बाजीरॉव मस्तानी में बीस किलो का आर्मर सूट पहन कर शूटिंग की थी। फिल्म 'पद्मावती' में दीपिका का लुक उसके पोस्टर रिलीज के साथ ही चर्चा में आ गया था जब उनका यूनिब्रो स्टाइल देखा गया था।
सीअर्स, गैप, एबरक्रॉम्बी और फिच स्टोर बंद इतिहास, आर्थिक रुझानचूंकि अमेरिका के खुदरा उद्योग में कुल मिलाकर 60% से अधिक यूएस सकल घरेलू उत्पाद शामिल हैं, खुदरा स्टोर को बंद या समाप्त करना आम तौर पर अमेरिकी आर्थिक स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतक माना जाता है। लेकिन उपभोक्ता व्यवहार में कट्टरपंथी बदलाव की वजह से, हालिया इतिहास ने यह साबित नहीं किया है कि ईंट-मोर्टार स्टोर क्लोजिंग का नकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ता है और इसके विपरीत। उदाहरण के लिए, 2011 अमेरिकी खुदरा उद्योग के विस्तार का एक वर्ष था, भले ही यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए अस्थिरता का एक वर्ष था। स्टोर ओपनिंग और क्लोजिंग द्वारा मापा गया, यह उम्मीद की गई थी कि 2012 में खुदरा उद्योग का विस्तार जारी रहेगा। लेकिन जब सीयर , ब्लॉकबस्टर, द गैप और एबरक्रॉम्बी और फिच जैसे प्रमुख अमेरिकी रिटेल चेन 2012 के लिए ट्रिपल-डिजिट स्टोर क्लोजिंग प्लान की घोषणा करते थे, तो ऐसा लगता था खुदरा बिक्री और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक पिछड़ा कदम के लिए परेशानी का संकेत देने के लिए। वास्तव में, यह मामला नहीं था, और उस वर्ष बिजनेस बिक्री की बड़ी संख्या में जाने के बावजूद यूएस सकल घरेलू उत्पाद में 2. 2% की वृद्धि हुई। हिंडसाइट के लाभ के साथ, यह स्पष्ट है कि सीअर्स, ब्लॉकबस्टर, द गैप, और एबरक्रॉम्बी और फिच रिटेल चेन में 2012 की खुदरा स्टोर क्लोजिंग की बड़ी संख्या उपभोक्ता किस्मत को स्थानांतरित करने और बदलावों के साथ और अधिक करने के लिए कम नहीं थी प्राथमिकताओं और विशाल खुदरा कंपनियों का उपभोग करने में जो गति नहीं रख सके। जब महान मंदी के दौरान छूट मूल्य निर्धारण रणनीतियों को अपनाने से इनकार कर दिया गया, एबरक्रॉम्बी और फिच ने अपने ग्राहक आधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अलग कर दिया । सीअर्स और द गैप ने 2012 से पहले वर्षों के लिए मर्चेंडाइज मिश्रण और मूल्य निर्धारण के साथ संघर्ष किया और प्रक्रिया में अपने मजबूत ग्राहक आधार भी खो दिए। ब्लॉकबस्टर के बंद होने से फिल्मों, टीवी शो और रिकॉर्ड की गई वीडियो सामग्री के ऑनलाइन और डिजिटल देखने की तरफ स्थानांतरण प्राथमिकताओं का एक अनिवार्य परिणाम था। नेटफ्लिक्स और रेडबॉक्स ने ब्लॉकबस्टर ग्राहकों को सुविधा और बेहद कम कीमतों के साथ भी चुरा लिया है। 2012 कैलेंडर वर्ष में होने वाली स्टोर क्लोजिंग की कुल संख्या पिछले आर्थिक मंदी और वसूली के वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत महत्वहीन प्रतीत होती है, लेकिन वे पूरे साल जारी रहे, और वे महत्वहीन नहीं थे। इंटरनेट और मोबाइल शॉपिंग में बदलाव 2012 से पहले भी चल रहा था, जिससे 2012 से पहले के वर्षों में ईंट और मोर्टार स्टोर खरीदारी की मांग कम हो गई थी। उपभोक्ता वरीयताओं से मेल खाने के अलावा सबसे बड़ी अमेरिकी खुदरा श्रृंखलाओं में थोड़ी सी पसंद थी, और वे जारी 2016 में डाउनसाइज करने के लिए पट्टे की अवधि समाप्त हो जाती है और कम लाभदायक स्थानों की पहचान की जाती है और बंद हो जाती है। 2012 से प्राप्त - बाएं कॉलम में संख्या 2012 में अमेरिकी खुदरा उद्योग में डाउनसाइजिंग, परिसमापन या व्यावसायिक प्रयासों से बाहर होने वाले स्टोरों की कुल संख्या है। इस 2012 स्टोर क्लोजिंग सूची के लिए जानकारी समाचार रिपोर्ट, कॉर्पोरेट दस्तावेज, और कंपनी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से आम जनता को उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट से प्राप्त की गई थी। स्टोर स्टोरिंग की संख्या के अनुसार यह स्टोर क्लोजिंग सूची संख्यात्मक रूप से व्यवस्थित की जाती है। सबसे हालिया जोड़ बोल्ड लेटरिंग में इंगित किए गए हैं। यह सूची अंतिम बार 9-18-12 को अपडेट की गई थी। वर्णमाला के अनुसार व्यवस्थित एक ही सूची देखने के लिए नीचे स्क्रॉल करें। 600 फैशन बग (2013 की शुरुआत के माध्यम से) 180 एबरक्रॉम्बी और फिच ("अगले कुछ वर्षों में") 2013 तक 123 सामूहिक ब्रांड (बेकार, स्ट्राइड अनुष्ठान) 103 क्रिस्टोफर एंड बैंक (क्यू 4 2011 में शुरू) 55 एसीना रिटेल (ड्रेसबर्न, मरीज़, जस्टिस) मैक्स (यूएस, कनाडा, और यूरोप) 40 कैथरीन (आकर्षक दुकानों) 25 लेन ब्रायंट (आकर्षक दुकानों) 24 रूबी मंगलवार (मार्लिन एंड रे, वोक हे, ट्रफल्स ग्रिल, लाइम फ्रेश) 60 सुपरवालू (अल्बर्टसन / एसीएमई / सेव-ए-लोट) 180 एबरक्रॉम्बी और फिच ("अगले कुछ वर्षों में") 55 एसीना रिटेल (ड्रेसबर्न, मरीज़, जस्टिस) 40 कैथरीन (आकर्षक दुकानों) 103 क्रिस्टोफर एंड बैंक (क्यू 4 2011 में शुरू) 2013 तक 123 सामूहिक ब्रांड (बेकार, स्ट्राइड अनुष्ठान) 600 फैशन बग (2013 की शुरुआत के माध्यम से) 25 लेन ब्रायंट (आकर्षक दुकानों) 24 रूबी मंगलवार (मार्लिन एंड रे, वोक हे, ट्रफल्स ग्रिल, लाइम फ्रेश) 60 सुपरवालू (अल्बर्टसन / एसीएमई / सेव-ए-लोट) 50 टीजे मैक्सक्स (यूएस, कनाडा और यूरोप)
सीअर्स, गैप, एबरक्रॉम्बी और फिच स्टोर बंद इतिहास, आर्थिक रुझानचूंकि अमेरिका के खुदरा उद्योग में कुल मिलाकर साठ% से अधिक यूएस सकल घरेलू उत्पाद शामिल हैं, खुदरा स्टोर को बंद या समाप्त करना आम तौर पर अमेरिकी आर्थिक स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतक माना जाता है। लेकिन उपभोक्ता व्यवहार में कट्टरपंथी बदलाव की वजह से, हालिया इतिहास ने यह साबित नहीं किया है कि ईंट-मोर्टार स्टोर क्लोजिंग का नकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ता है और इसके विपरीत। उदाहरण के लिए, दो हज़ार ग्यारह अमेरिकी खुदरा उद्योग के विस्तार का एक वर्ष था, भले ही यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए अस्थिरता का एक वर्ष था। स्टोर ओपनिंग और क्लोजिंग द्वारा मापा गया, यह उम्मीद की गई थी कि दो हज़ार बारह में खुदरा उद्योग का विस्तार जारी रहेगा। लेकिन जब सीयर , ब्लॉकबस्टर, द गैप और एबरक्रॉम्बी और फिच जैसे प्रमुख अमेरिकी रिटेल चेन दो हज़ार बारह के लिए ट्रिपल-डिजिट स्टोर क्लोजिंग प्लान की घोषणा करते थे, तो ऐसा लगता था खुदरा बिक्री और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक पिछड़ा कदम के लिए परेशानी का संकेत देने के लिए। वास्तव में, यह मामला नहीं था, और उस वर्ष बिजनेस बिक्री की बड़ी संख्या में जाने के बावजूद यूएस सकल घरेलू उत्पाद में दो. दो% की वृद्धि हुई। हिंडसाइट के लाभ के साथ, यह स्पष्ट है कि सीअर्स, ब्लॉकबस्टर, द गैप, और एबरक्रॉम्बी और फिच रिटेल चेन में दो हज़ार बारह की खुदरा स्टोर क्लोजिंग की बड़ी संख्या उपभोक्ता किस्मत को स्थानांतरित करने और बदलावों के साथ और अधिक करने के लिए कम नहीं थी प्राथमिकताओं और विशाल खुदरा कंपनियों का उपभोग करने में जो गति नहीं रख सके। जब महान मंदी के दौरान छूट मूल्य निर्धारण रणनीतियों को अपनाने से इनकार कर दिया गया, एबरक्रॉम्बी और फिच ने अपने ग्राहक आधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अलग कर दिया । सीअर्स और द गैप ने दो हज़ार बारह से पहले वर्षों के लिए मर्चेंडाइज मिश्रण और मूल्य निर्धारण के साथ संघर्ष किया और प्रक्रिया में अपने मजबूत ग्राहक आधार भी खो दिए। ब्लॉकबस्टर के बंद होने से फिल्मों, टीवी शो और रिकॉर्ड की गई वीडियो सामग्री के ऑनलाइन और डिजिटल देखने की तरफ स्थानांतरण प्राथमिकताओं का एक अनिवार्य परिणाम था। नेटफ्लिक्स और रेडबॉक्स ने ब्लॉकबस्टर ग्राहकों को सुविधा और बेहद कम कीमतों के साथ भी चुरा लिया है। दो हज़ार बारह कैलेंडर वर्ष में होने वाली स्टोर क्लोजिंग की कुल संख्या पिछले आर्थिक मंदी और वसूली के वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत महत्वहीन प्रतीत होती है, लेकिन वे पूरे साल जारी रहे, और वे महत्वहीन नहीं थे। इंटरनेट और मोबाइल शॉपिंग में बदलाव दो हज़ार बारह से पहले भी चल रहा था, जिससे दो हज़ार बारह से पहले के वर्षों में ईंट और मोर्टार स्टोर खरीदारी की मांग कम हो गई थी। उपभोक्ता वरीयताओं से मेल खाने के अलावा सबसे बड़ी अमेरिकी खुदरा श्रृंखलाओं में थोड़ी सी पसंद थी, और वे जारी दो हज़ार सोलह में डाउनसाइज करने के लिए पट्टे की अवधि समाप्त हो जाती है और कम लाभदायक स्थानों की पहचान की जाती है और बंद हो जाती है। दो हज़ार बारह से प्राप्त - बाएं कॉलम में संख्या दो हज़ार बारह में अमेरिकी खुदरा उद्योग में डाउनसाइजिंग, परिसमापन या व्यावसायिक प्रयासों से बाहर होने वाले स्टोरों की कुल संख्या है। इस दो हज़ार बारह स्टोर क्लोजिंग सूची के लिए जानकारी समाचार रिपोर्ट, कॉर्पोरेट दस्तावेज, और कंपनी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से आम जनता को उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट से प्राप्त की गई थी। स्टोर स्टोरिंग की संख्या के अनुसार यह स्टोर क्लोजिंग सूची संख्यात्मक रूप से व्यवस्थित की जाती है। सबसे हालिया जोड़ बोल्ड लेटरिंग में इंगित किए गए हैं। यह सूची अंतिम बार नौ अट्ठारह बारह को अपडेट की गई थी। वर्णमाला के अनुसार व्यवस्थित एक ही सूची देखने के लिए नीचे स्क्रॉल करें। छः सौ फैशन बग एक सौ अस्सी एबरक्रॉम्बी और फिच दो हज़ार तेरह तक एक सौ तेईस सामूहिक ब्रांड एक सौ तीन क्रिस्टोफर एंड बैंक पचपन एसीना रिटेल मैक्स चालीस कैथरीन पच्चीस लेन ब्रायंट चौबीस रूबी मंगलवार साठ सुपरवालू एक सौ अस्सी एबरक्रॉम्बी और फिच पचपन एसीना रिटेल चालीस कैथरीन एक सौ तीन क्रिस्टोफर एंड बैंक दो हज़ार तेरह तक एक सौ तेईस सामूहिक ब्रांड छः सौ फैशन बग पच्चीस लेन ब्रायंट चौबीस रूबी मंगलवार साठ सुपरवालू पचास टीजे मैक्सक्स
देहरादून। उत्तराखण्ड का स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर संजीवनी बूटी की खोज को लेकर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। स्वास्थ्य महकमे ने संजीवनी बूटी की खोज के लिए एक कमेटी का गठन किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने विधान सभा में संजीवनी की खोज को लेकर एक अहम बैठक की, जिसमें आयुर्वेद विभाग के कई अधिकारी भी मौजूद रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों के साथ संजीवनी बूटी की खोज को लेकर कई मसलों पर चर्चा की। खासतौर से हिमालय पर्वत के दुर्गम क्षेत्रों में संजीवनी के मसले पर चर्चा हुई। दरअसल आयुर्वेद विभाग अब संजीवनी बूटी की खोज के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि संजीवनी के बारे में पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, साथ ही रामायण और दूसरे ग्रंथो के लेखों की मदद भी ली जा रही है। नेगी का कहना है कि अब तक संजीवनी बूटी की खोज के लिए कई लेखकों ने अपनी किताबें लिखी हैं। संजीवनी की खोज आयुर्वेद विभाग के लिए एक ऐतिहासिक खोज सिद्ध होगी। क्योंकि आने वाले सालों में आयुर्वेद चिकित्सा का ग्राफ बढ़ेगा और इंसान आयुर्वेदिक चिकित्सा की तरफ फिर लौट रहा है। इस नजारिए से संजीवनी की खोज आयुर्वेद विभाग के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है। संजीवनी आम लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि जिस तरह से शास्त्रों में संजीवनी को लेकर कई महत्वपूर्ण लेखों का वर्णन किया गया है इससे साफ है संजीवनी समाज के लिए काफी अहम होगी। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि सितम्बर से संजीवनी की खोज के लिए कमेटी के सदस्य पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे और संजीवनी की तलाश करेंगे। नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद राज्य सरकार से अपील की है कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनहित याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एक्ट में यह प्रावधान है कि जिन अधिवक्ताओ की वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। कई राज्यों ने अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर फंड की व्यवस्था की है जिनमें केरल और पुडुचेरी मुख्य हैं।
देहरादून। उत्तराखण्ड का स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर संजीवनी बूटी की खोज को लेकर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। स्वास्थ्य महकमे ने संजीवनी बूटी की खोज के लिए एक कमेटी का गठन किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने विधान सभा में संजीवनी की खोज को लेकर एक अहम बैठक की, जिसमें आयुर्वेद विभाग के कई अधिकारी भी मौजूद रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों के साथ संजीवनी बूटी की खोज को लेकर कई मसलों पर चर्चा की। खासतौर से हिमालय पर्वत के दुर्गम क्षेत्रों में संजीवनी के मसले पर चर्चा हुई। दरअसल आयुर्वेद विभाग अब संजीवनी बूटी की खोज के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि संजीवनी के बारे में पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, साथ ही रामायण और दूसरे ग्रंथो के लेखों की मदद भी ली जा रही है। नेगी का कहना है कि अब तक संजीवनी बूटी की खोज के लिए कई लेखकों ने अपनी किताबें लिखी हैं। संजीवनी की खोज आयुर्वेद विभाग के लिए एक ऐतिहासिक खोज सिद्ध होगी। क्योंकि आने वाले सालों में आयुर्वेद चिकित्सा का ग्राफ बढ़ेगा और इंसान आयुर्वेदिक चिकित्सा की तरफ फिर लौट रहा है। इस नजारिए से संजीवनी की खोज आयुर्वेद विभाग के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है। संजीवनी आम लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि जिस तरह से शास्त्रों में संजीवनी को लेकर कई महत्वपूर्ण लेखों का वर्णन किया गया है इससे साफ है संजीवनी समाज के लिए काफी अहम होगी। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि सितम्बर से संजीवनी की खोज के लिए कमेटी के सदस्य पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे और संजीवनी की तलाश करेंगे। नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद राज्य सरकार से अपील की है कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनहित याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एक्ट में यह प्रावधान है कि जिन अधिवक्ताओ की वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। कई राज्यों ने अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर फंड की व्यवस्था की है जिनमें केरल और पुडुचेरी मुख्य हैं।
ग्वालियर। ट्रेन को ट्रांसपोर्टेशन के बहुत सुविधाजनक ऑप्शन के रूप में देखा जाता है। आप सुकून से बैठकर घंटों का सफर तय कर सकते है, लेकिन क्या हो अगर आपका बर्थ कंफर्म न हो तो? ऐसे में आपको कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसको लेकर यात्रियों ने अब रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन काउंटरों की लंबी- लंबी लाइनों में लगकर टिकट लेने की बजाय घर बैठे ऑनलाइन ऑप्शन को ज्यादा चुन लिया है।
ग्वालियर। ट्रेन को ट्रांसपोर्टेशन के बहुत सुविधाजनक ऑप्शन के रूप में देखा जाता है। आप सुकून से बैठकर घंटों का सफर तय कर सकते है, लेकिन क्या हो अगर आपका बर्थ कंफर्म न हो तो? ऐसे में आपको कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसको लेकर यात्रियों ने अब रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन काउंटरों की लंबी- लंबी लाइनों में लगकर टिकट लेने की बजाय घर बैठे ऑनलाइन ऑप्शन को ज्यादा चुन लिया है।
डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) ने 1990 के दशक के कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार-हत्या और उनके पलायन को देश का ज्वलंत मुद्दा बना दिया है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबर्दस्त बहस छिड़ गई है। हालांकि ज्यादातर लोगों की कश्मीरी पंडितों को लेकर सहानुभूति है, लेकिन कुछ विवादास्पद कमेंट़्स भी सामने आ रहे हैं। #TheKashmirFiles सोशल मीडिया पर ट्रेंड में है। मिथक था कि इस बंगले में रहने वाला कोई भी विधायक दोबारा विधानसभा नहीं पहुंच पाता है। लेकिन नंदी ने यह मिथक पूरी तरह से तोड़ दिया है। पूर्व में कहा जाता था कि जो भी इस बंगले में रहा उसका राजनीतिक ग्राफ गिरता ही चला गया। इसको लेकर कई उदाहरण भी दिए जाते थे। बलपुर गांव में प्रसिद्ध भगोरिया उत्सव का मेला लगा हुआ था। जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हए थे। इसी मेले में पीड़िता और आरोपी भी पहुंचे हुए थे। जब लड़की सड़क पर किसी के इंतजार के लिए खड़ी हुई तो पीछे से कुछ लड़के आए और उसके साथ छेड़खानी करना शुरू कर दिया। प्रदेश कार्यालय पहुंचे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कुछ देर तक सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बातचीत की। चुनाव परिणाम में अलग- अलग जिलों के बारे में भी जानकारी ली। इसके बाद पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात की। सपा संरक्षक के पार्टी कार्यालय पहुंचने की जानकारी पार्टी के ट्वीटर हैंडल से भी दी गई है। यूपी चुनाव के बाद वाराणसी में पुलिस ने सरगना के गोदाम को बुलडोजर से ढहा दिया। ज्ञात हो कि गाजीपुर के जखनिया ब्लाक थाना अंतर्गत इब्राहिमपुर निवासी ट्रेलर चालक रामदरस चौहान सात मार्च 2022 को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के चाइबासा से 40 लाख रुपए की कीमत की 32 टन सरिया लादकर निकले थे। यूपी चुनाव परिणाम बाद एडीआर रिपोर्ट के अनुसार 158 विजेता उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में 402 में से 107 विधायकों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किये थे। इसके साथ ही पांच विधायकों के खिलाफ हत्या के मुकदमे चल रहे हैं और 29 विधायकों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। वहीं भाजपा से जीतने वाले एक विधायक पर दुष्कर्म का आरोप और छह विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मामला दर्ज है। ज्ञानपुर में सपा के बाद पोस्टल बैलेट से सबसे अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवारों में दूसरा नाम बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का है। विजय मिश्रा को 200 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों ने पसंद किया है। वहीं कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्हें कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आया। इस घटना के बाद से ही ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि एडसमेटा गोली कांड के मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ और घायलों को 50-50 लाख रुपए का सरकार मुआवजा दे। ग्रामीणों की इसी मांग पर लगातार सियासत हो रही है। भगवंत मान इस वक्त दिल्ली में हैं। 16 मार्च को उनका शपथ ग्रहण समारोह है। भगवंत मान शहीद भगत सिंह के गांव में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बार के पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Chunav 2022) में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीट पर जीत हासिल की है।
डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' ने एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक के कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार-हत्या और उनके पलायन को देश का ज्वलंत मुद्दा बना दिया है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबर्दस्त बहस छिड़ गई है। हालांकि ज्यादातर लोगों की कश्मीरी पंडितों को लेकर सहानुभूति है, लेकिन कुछ विवादास्पद कमेंट़्स भी सामने आ रहे हैं। #TheKashmirFiles सोशल मीडिया पर ट्रेंड में है। मिथक था कि इस बंगले में रहने वाला कोई भी विधायक दोबारा विधानसभा नहीं पहुंच पाता है। लेकिन नंदी ने यह मिथक पूरी तरह से तोड़ दिया है। पूर्व में कहा जाता था कि जो भी इस बंगले में रहा उसका राजनीतिक ग्राफ गिरता ही चला गया। इसको लेकर कई उदाहरण भी दिए जाते थे। बलपुर गांव में प्रसिद्ध भगोरिया उत्सव का मेला लगा हुआ था। जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हए थे। इसी मेले में पीड़िता और आरोपी भी पहुंचे हुए थे। जब लड़की सड़क पर किसी के इंतजार के लिए खड़ी हुई तो पीछे से कुछ लड़के आए और उसके साथ छेड़खानी करना शुरू कर दिया। प्रदेश कार्यालय पहुंचे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कुछ देर तक सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बातचीत की। चुनाव परिणाम में अलग- अलग जिलों के बारे में भी जानकारी ली। इसके बाद पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात की। सपा संरक्षक के पार्टी कार्यालय पहुंचने की जानकारी पार्टी के ट्वीटर हैंडल से भी दी गई है। यूपी चुनाव के बाद वाराणसी में पुलिस ने सरगना के गोदाम को बुलडोजर से ढहा दिया। ज्ञात हो कि गाजीपुर के जखनिया ब्लाक थाना अंतर्गत इब्राहिमपुर निवासी ट्रेलर चालक रामदरस चौहान सात मार्च दो हज़ार बाईस को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के चाइबासा से चालीस लाख रुपए की कीमत की बत्तीस टन सरिया लादकर निकले थे। यूपी चुनाव परिणाम बाद एडीआर रिपोर्ट के अनुसार एक सौ अट्ठावन विजेता उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव दो हज़ार सत्रह में चार सौ दो में से एक सौ सात विधायकों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किये थे। इसके साथ ही पांच विधायकों के खिलाफ हत्या के मुकदमे चल रहे हैं और उनतीस विधायकों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। वहीं भाजपा से जीतने वाले एक विधायक पर दुष्कर्म का आरोप और छह विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मामला दर्ज है। ज्ञानपुर में सपा के बाद पोस्टल बैलेट से सबसे अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवारों में दूसरा नाम बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का है। विजय मिश्रा को दो सौ से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों ने पसंद किया है। वहीं कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्हें कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आया। इस घटना के बाद से ही ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि एडसमेटा गोली कांड के मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ और घायलों को पचास-पचास लाख रुपए का सरकार मुआवजा दे। ग्रामीणों की इसी मांग पर लगातार सियासत हो रही है। भगवंत मान इस वक्त दिल्ली में हैं। सोलह मार्च को उनका शपथ ग्रहण समारोह है। भगवंत मान शहीद भगत सिंह के गांव में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बार के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक सौ सत्रह में से बानवे सीट पर जीत हासिल की है।
आवरण को चीर कर अलौकिक जगत् में गम्भीरता से प्रवेश करके लोकातीत रहस्य को आलोकित करता है । अतएव भारतीय दर्शन पद्धति में वेदान्त का स्थान सर्वोपरि है, इसमें किचिन्मात्र सन्देह नहीं । 'वेदान्तौ नाम उपनिषत्प्रमाणम्' अर्थात् उपनिषदों को प्रमाणस्वरूप मानकर चलने वाला शास्त्र वेदान्त है। उपनिषद् शब्द से ज्ञानकाण्ड के उस विशाल दार्शनिक साहित्य का बोध होता है जो वैदिक कर्मकाण्ड की प्रतिक्रिया से उत्पन्न हुआ था, पर इस शब्द के मूल अर्थ के विषय में कुछ मतभेद है। यह उप और नि उपसर्गपूर्वक सद् धातु से विवप् प्रत्यय करने से बना है। सद् धातु के विक्षरण ( नष्ट होना) गति (जाना या प्राप्त होगा) तथा अवसादन (शिथिल करना) आदि तीन अर्थ हैं । (षद्लृ विक्षरणगत्यवसादनेसु) शंकराचार्य ने इन तीनों अर्थों का सुन्दर समन्वय अपने कठोपनिषद्भाष्य में किया है। इसके अनुशीलन से मुमुक्षु जनों की संसार बीजरूपी अविद्या नष्ट हो जाती है (विक्षरण) । वह ब्रह्म की प्राप्ति करा देती है । (गति उपनिषद्यते ब्रह्मसमीपम् ) तथा मनुष्य के गर्भवास, जन्म, जरा, मृत्यु आदि दुःख सर्वथा शिथिल हो जाते हैं ( अवसादन ) । शंकराचार्य ने यह भी कहा है कि उपनिषद् का मुख्य अर्थ है ब्रह्म विद्या तथा गौण अर्थ है ब्रह्म विद्या प्रतिकारक ग्रन्थविशेष । 'तस्माद् विद्याया मुख्यया वृत्या उपनिषच्छब्दो वर्तते ग्रन्थे तु भक्तत्या।" अर्थ बैठना तु भी अग्नि के समीप तपस्या तथा ध्यान से प्राप्त रहस्थात्मक 'ज्ञान' किया है। नारायण ने अपनी मनुस्मृति की टीका माना है । वस्तुतः उपनिषद् शब्द का मूल और प्राचीनतम भाव था 'किसी गुप्त ज्ञान की प्राप्ति के लिए शिष्य का गुरु के समीप बैठना' । विकास की दूसरी दशा में इसका अर्थ हुआ वह गोपनीय ज्ञान या सिद्धान्त जो ऐसी गुप्त स्थिति में प्रदान किया जाए, सामान्यतः उपनिषदों के लिए 'रहस्यम्' पर्यायवाची प्रयुक्त किया जाता है जिसका अर्थ 'रहति भवम्' या एकान्त में बताया जा सकने वाला है। स्वय उपनिषदों में ही 'इतिरहस्यम्' 'इत्युपनिषद्' आदि शब्द गुप्त सिद्धान्तों के अर्थ में प्रयुक्त हुए हैं। सर्व प्राचीन उपनिषद् वे हैं जो ब्राह्मण ग्रन्थों के अन्त में जुड़े हुए होते हैं। ऐसे उपनिषद् संख्या में छः हैं, दो-दो की संख्या में वेदत्रयों में विभक्त हैं । ( क ) ऐतरेय (ऐतरेय ब्राह्मण, ऋग्वेद), कौषीतकि (कौषीतकि ब्राह्मण, ऋग्वेद), (ख) तैत्तिरीय (तैत्तिरीयसंहिता, कृष्णायजुर्वेद), बृहदारण्यक (शतपथ ब्राह्मण, शुक्ल यजुर्वेद), छान्दोग्य (छान्दोग्य ब्रह्मणं सामवेद ) की ताण्ड्य शाखा, केन (तलवकार या जैमिनीय ब्राह्मण सामवेद) ये सभी उपनिषद् गद्य में हैं, केवल केनोपनिषद् का आधा भाग पद्यमय है, और वह इस श्रेणी में सबसे परवर्ती है। ये छः उपनिषद् भारतीय दर्शन के विकास की प्रारम्भिक अवस्था को सूचित करते हैं और इनमें वेदान्त दर्शन अपने • शुद्ध तथा मूल रूप में सुरक्षित है । उपनिषदों का यही 'वेदान्त' कहा जाता है जो कई अर्थों में उपयुक्त है।
आवरण को चीर कर अलौकिक जगत् में गम्भीरता से प्रवेश करके लोकातीत रहस्य को आलोकित करता है । अतएव भारतीय दर्शन पद्धति में वेदान्त का स्थान सर्वोपरि है, इसमें किचिन्मात्र सन्देह नहीं । 'वेदान्तौ नाम उपनिषत्प्रमाणम्' अर्थात् उपनिषदों को प्रमाणस्वरूप मानकर चलने वाला शास्त्र वेदान्त है। उपनिषद् शब्द से ज्ञानकाण्ड के उस विशाल दार्शनिक साहित्य का बोध होता है जो वैदिक कर्मकाण्ड की प्रतिक्रिया से उत्पन्न हुआ था, पर इस शब्द के मूल अर्थ के विषय में कुछ मतभेद है। यह उप और नि उपसर्गपूर्वक सद् धातु से विवप् प्रत्यय करने से बना है। सद् धातु के विक्षरण गति तथा अवसादन आदि तीन अर्थ हैं । शंकराचार्य ने इन तीनों अर्थों का सुन्दर समन्वय अपने कठोपनिषद्भाष्य में किया है। इसके अनुशीलन से मुमुक्षु जनों की संसार बीजरूपी अविद्या नष्ट हो जाती है । वह ब्रह्म की प्राप्ति करा देती है । तथा मनुष्य के गर्भवास, जन्म, जरा, मृत्यु आदि दुःख सर्वथा शिथिल हो जाते हैं । शंकराचार्य ने यह भी कहा है कि उपनिषद् का मुख्य अर्थ है ब्रह्म विद्या तथा गौण अर्थ है ब्रह्म विद्या प्रतिकारक ग्रन्थविशेष । 'तस्माद् विद्याया मुख्यया वृत्या उपनिषच्छब्दो वर्तते ग्रन्थे तु भक्तत्या।" अर्थ बैठना तु भी अग्नि के समीप तपस्या तथा ध्यान से प्राप्त रहस्थात्मक 'ज्ञान' किया है। नारायण ने अपनी मनुस्मृति की टीका माना है । वस्तुतः उपनिषद् शब्द का मूल और प्राचीनतम भाव था 'किसी गुप्त ज्ञान की प्राप्ति के लिए शिष्य का गुरु के समीप बैठना' । विकास की दूसरी दशा में इसका अर्थ हुआ वह गोपनीय ज्ञान या सिद्धान्त जो ऐसी गुप्त स्थिति में प्रदान किया जाए, सामान्यतः उपनिषदों के लिए 'रहस्यम्' पर्यायवाची प्रयुक्त किया जाता है जिसका अर्थ 'रहति भवम्' या एकान्त में बताया जा सकने वाला है। स्वय उपनिषदों में ही 'इतिरहस्यम्' 'इत्युपनिषद्' आदि शब्द गुप्त सिद्धान्तों के अर्थ में प्रयुक्त हुए हैं। सर्व प्राचीन उपनिषद् वे हैं जो ब्राह्मण ग्रन्थों के अन्त में जुड़े हुए होते हैं। ऐसे उपनिषद् संख्या में छः हैं, दो-दो की संख्या में वेदत्रयों में विभक्त हैं । ऐतरेय , कौषीतकि , तैत्तिरीय , बृहदारण्यक , छान्दोग्य की ताण्ड्य शाखा, केन ये सभी उपनिषद् गद्य में हैं, केवल केनोपनिषद् का आधा भाग पद्यमय है, और वह इस श्रेणी में सबसे परवर्ती है। ये छः उपनिषद् भारतीय दर्शन के विकास की प्रारम्भिक अवस्था को सूचित करते हैं और इनमें वेदान्त दर्शन अपने • शुद्ध तथा मूल रूप में सुरक्षित है । उपनिषदों का यही 'वेदान्त' कहा जाता है जो कई अर्थों में उपयुक्त है।
विश्व प्रख्यात मुक्केबाज माइक टायसन एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जहां माइक अपने साथी पैसेंजर को मुक्का मारते हुए दिख रहे हैं। हालांकि इस विडियो और उससे संबंधित घटना की जांच की जा रही है। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि माइक टायसन (Mike Tyson Biography) कौन हैं और कैसी है उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी। कौन हैं माइक टायसन? (Who Is Mike Tyson? ) 30 जून 1966 को न्यूयॉर्क शहर के फोर्ट ग्रीन में जन्मे माइक टायसन को उनकी बेहद डराने वाली बॉक्सिंग शैली के लिए जाना जाता है। टायसन के बायोलॉजिकल पिता परसेल टायसन हैं लेकिन जिस व्यक्ति को वह अपने पिता के नाम से जानते थे, वह जिमी किर्कपैट्रिक हैं। टायसन का बचपन बेहद गरीबी में बीता। जब वह 10 साल के थे तब उनकी मां की मृत्यु हो गई और टायसन को बॉक्सिंग मैनेजर और ट्रेनर कूस डी'मैटो के भरोसे छोड़ दिया गया। गरीबी और आपराधिक इलाके में रहने के कारण टायसन बार-बार छोटे-मोटे अपराध करते हुए पकड़े जाते थे। 13 साल की उम्र तक टायसन को 38 बार गिरफ्तार किया गया था। उनकी मुक्केबाजी क्षमताओं की खोज बॉबी स्टीवर्ट ने की थी जो एक डिटेंशन सेंटर के काउंसलर और पूर्व मुक्केबाज थे। टायसन ने हाई स्कूल बीच में ही छोड़ दिया और 1989 में सेंट्रल स्टेट यूनिवर्सिटी से मानवीय पत्रों में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। करियर (Mike Tyson Career) माइक टायसन ने 1985 से 2005 तक प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उन्होंने अपने मुक्केबाजी कौशल के लिए 'आयरन माइक', 'किड डायनामाइट' और 'द बैडेस्ट मैन ऑन द प्लैनेट' जैसे खिताब भी प्राप्त किए। उन्हें अब तक के सबसे महान हैवीवेट मुक्केबाजों में से एक माना जाता है। माइक ने 20 साल की उम्र में अपना पहला बेल्ट जीता था और साथ ही वे हैवीवेट खिताब जीतने वाले सबसे कम उम्र के मुक्केबाज हैं। 1987 से 1990 तक, टायसन ने विश्व हैवीवेट चैंपियन के रूप में शासन किया। 1992 में, टायसन को बलात्कार का दोषी ठहराया गया था और उसे छह साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि उन्हें तीन साल सलाखों के पीछे रहने के बाद पैरोल पर रिहा कर दिया गया था। 1995 में जेल से पैरोल पर छूटने के बाद, टायसन वापसी के कई मुकाबलों में लगे रहे। उन्होंने 1996 में WBA और WBC खिताब हासिल किया। इसके साथ, वह फ़्लॉइड पैटरसन, मुहम्मद अली, टिम विदरस्पून, इवांडर होलीफील्ड और जॉर्ज फोरमैन के साथ बॉक्सिंग इतिहास में एकमात्र पुरुष के रूप में शामिल हो गए, जिन्होंने इसे हारने के बाद हैवीवेट चैंपियनशिप हासिल की। अवॉर्ड्स (Mike Tyson Awards) पर्सनल लाइफ (Mike Tyson Personal Life) माइक की प्रोफेशनल लाइफ जितनी प्रख्यात है उतनी ही कुख्यात है उनकी पर्सनल लाइफ। माइक की तीन बार शादी हो चुकी है। उन्होंने पहली बार अभिनेत्री रॉबिन गिवेंस से शादी की थी और उनकी शादीशुदा जिंदगी उतनी अच्छी नहीं रही। उनकी पत्नी ने टायसन पर हिंसा, पति-पत्नी के दुर्व्यवहार और मानसिक अस्थिरता का आरोप लगाया और 1989 में शादी खत्म कर ली। टायसन की दूसरी पत्नी मोनिका टर्नर थीं, जो वाशिंगटन में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में बाल चिकित्सक के रूप में काम करती थीं। उन्होंने जनवरी 2002 में तलाक के लिए अर्जी दी और दावा किया कि टायसन ने अपनी शादी के पांच साल के दौरान एडल्ट्री को अपनाया।
विश्व प्रख्यात मुक्केबाज माइक टायसन एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जहां माइक अपने साथी पैसेंजर को मुक्का मारते हुए दिख रहे हैं। हालांकि इस विडियो और उससे संबंधित घटना की जांच की जा रही है। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि माइक टायसन कौन हैं और कैसी है उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी। कौन हैं माइक टायसन? तीस जून एक हज़ार नौ सौ छयासठ को न्यूयॉर्क शहर के फोर्ट ग्रीन में जन्मे माइक टायसन को उनकी बेहद डराने वाली बॉक्सिंग शैली के लिए जाना जाता है। टायसन के बायोलॉजिकल पिता परसेल टायसन हैं लेकिन जिस व्यक्ति को वह अपने पिता के नाम से जानते थे, वह जिमी किर्कपैट्रिक हैं। टायसन का बचपन बेहद गरीबी में बीता। जब वह दस साल के थे तब उनकी मां की मृत्यु हो गई और टायसन को बॉक्सिंग मैनेजर और ट्रेनर कूस डी'मैटो के भरोसे छोड़ दिया गया। गरीबी और आपराधिक इलाके में रहने के कारण टायसन बार-बार छोटे-मोटे अपराध करते हुए पकड़े जाते थे। तेरह साल की उम्र तक टायसन को अड़तीस बार गिरफ्तार किया गया था। उनकी मुक्केबाजी क्षमताओं की खोज बॉबी स्टीवर्ट ने की थी जो एक डिटेंशन सेंटर के काउंसलर और पूर्व मुक्केबाज थे। टायसन ने हाई स्कूल बीच में ही छोड़ दिया और एक हज़ार नौ सौ नवासी में सेंट्रल स्टेट यूनिवर्सिटी से मानवीय पत्रों में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। करियर माइक टायसन ने एक हज़ार नौ सौ पचासी से दो हज़ार पाँच तक प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उन्होंने अपने मुक्केबाजी कौशल के लिए 'आयरन माइक', 'किड डायनामाइट' और 'द बैडेस्ट मैन ऑन द प्लैनेट' जैसे खिताब भी प्राप्त किए। उन्हें अब तक के सबसे महान हैवीवेट मुक्केबाजों में से एक माना जाता है। माइक ने बीस साल की उम्र में अपना पहला बेल्ट जीता था और साथ ही वे हैवीवेट खिताब जीतने वाले सबसे कम उम्र के मुक्केबाज हैं। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी से एक हज़ार नौ सौ नब्बे तक, टायसन ने विश्व हैवीवेट चैंपियन के रूप में शासन किया। एक हज़ार नौ सौ बानवे में, टायसन को बलात्कार का दोषी ठहराया गया था और उसे छह साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि उन्हें तीन साल सलाखों के पीछे रहने के बाद पैरोल पर रिहा कर दिया गया था। एक हज़ार नौ सौ पचानवे में जेल से पैरोल पर छूटने के बाद, टायसन वापसी के कई मुकाबलों में लगे रहे। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियानवे में WBA और WBC खिताब हासिल किया। इसके साथ, वह फ़्लॉइड पैटरसन, मुहम्मद अली, टिम विदरस्पून, इवांडर होलीफील्ड और जॉर्ज फोरमैन के साथ बॉक्सिंग इतिहास में एकमात्र पुरुष के रूप में शामिल हो गए, जिन्होंने इसे हारने के बाद हैवीवेट चैंपियनशिप हासिल की। अवॉर्ड्स पर्सनल लाइफ माइक की प्रोफेशनल लाइफ जितनी प्रख्यात है उतनी ही कुख्यात है उनकी पर्सनल लाइफ। माइक की तीन बार शादी हो चुकी है। उन्होंने पहली बार अभिनेत्री रॉबिन गिवेंस से शादी की थी और उनकी शादीशुदा जिंदगी उतनी अच्छी नहीं रही। उनकी पत्नी ने टायसन पर हिंसा, पति-पत्नी के दुर्व्यवहार और मानसिक अस्थिरता का आरोप लगाया और एक हज़ार नौ सौ नवासी में शादी खत्म कर ली। टायसन की दूसरी पत्नी मोनिका टर्नर थीं, जो वाशिंगटन में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में बाल चिकित्सक के रूप में काम करती थीं। उन्होंने जनवरी दो हज़ार दो में तलाक के लिए अर्जी दी और दावा किया कि टायसन ने अपनी शादी के पांच साल के दौरान एडल्ट्री को अपनाया।
फारबिसगंज कांवरिया सेवा समिति का टंकेश्वर में दो माह तक लगने वाले शिविर का उद्घाटन स्थानीय सांसद प्रदीप कुमार सिंह, नप की मुख्य पार्षद वीणा देवी, उप मुख्य पार्षद नूतन भारती, पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण मेहता, समाजसेवी समर सिंह, पार्षद मनोज सिंह, बुलबुल यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं फीता काटकर किया। इस मौके पर सांसद प्रदीप सिंह ने सेवा समिति के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस बार दो माह तक सेवा शिविर लगेगा। कहा कि शिव भक्तों की सेवा करने का कार्य बड़े ही सौभाग्य से लोगों को मिलता है। उन्होंने सच्चे मन से भक्तों की सेवा करने की बात कही। वहीं मुख्य पार्षद वीणा देवी ने कहा कि फारबिसगंज के लोग हमेशा से ही समाजसेवा से जुड़े रहते हैं। सावन माह के दौरान हज़ारों, लाखों शिव भक्तों की सेवा में फारबिसगंज वासी लीन रहते है। कावड़ियों को निःशुल्क सेवा प्रदान करने के लिए उन्होंने सेवा समिति के सदस्यों को हर संभव सहयोग देने की बात कहीं। इससे पूर्व समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश केशरी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष विनोद धनावत, मुरली प्रसाद साह, सचिव अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संजय रांका, डोमन भगत, डा. उमेश वर्मा, महावीर बैद, हेमंत सिखवाल, परमेश्वर भगत, सुशील अग्रवाल, सुरेश केशरी, मांगीलाल वायंवाला, विनोद पटेल, श्रीप्रकाश जी, लालू यादव, आकाश राज, अमन राज, टंकेश्वर के मुखिया नारायण यादव, शंभू यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। इधर सेवा समिति के प्रवक्ता पूनम पांडिया ने बताया कि दो माह तक लगने वाले सेवा शिविर में शिव भक्तों के लिए निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, मेडिकल सेवा, डाक बम के लिए विशेष फल - पानी आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। साथ ही रात्रि विश्राम में गर्म - ठंडा पानी और कलाकारों द्वारा मधुर भजनों की प्रस्तुति, शौचालय, स्नानागर आदि की भी व्यवस्था है।
फारबिसगंज कांवरिया सेवा समिति का टंकेश्वर में दो माह तक लगने वाले शिविर का उद्घाटन स्थानीय सांसद प्रदीप कुमार सिंह, नप की मुख्य पार्षद वीणा देवी, उप मुख्य पार्षद नूतन भारती, पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण मेहता, समाजसेवी समर सिंह, पार्षद मनोज सिंह, बुलबुल यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं फीता काटकर किया। इस मौके पर सांसद प्रदीप सिंह ने सेवा समिति के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस बार दो माह तक सेवा शिविर लगेगा। कहा कि शिव भक्तों की सेवा करने का कार्य बड़े ही सौभाग्य से लोगों को मिलता है। उन्होंने सच्चे मन से भक्तों की सेवा करने की बात कही। वहीं मुख्य पार्षद वीणा देवी ने कहा कि फारबिसगंज के लोग हमेशा से ही समाजसेवा से जुड़े रहते हैं। सावन माह के दौरान हज़ारों, लाखों शिव भक्तों की सेवा में फारबिसगंज वासी लीन रहते है। कावड़ियों को निःशुल्क सेवा प्रदान करने के लिए उन्होंने सेवा समिति के सदस्यों को हर संभव सहयोग देने की बात कहीं। इससे पूर्व समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश केशरी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष विनोद धनावत, मुरली प्रसाद साह, सचिव अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संजय रांका, डोमन भगत, डा. उमेश वर्मा, महावीर बैद, हेमंत सिखवाल, परमेश्वर भगत, सुशील अग्रवाल, सुरेश केशरी, मांगीलाल वायंवाला, विनोद पटेल, श्रीप्रकाश जी, लालू यादव, आकाश राज, अमन राज, टंकेश्वर के मुखिया नारायण यादव, शंभू यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। इधर सेवा समिति के प्रवक्ता पूनम पांडिया ने बताया कि दो माह तक लगने वाले सेवा शिविर में शिव भक्तों के लिए निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, मेडिकल सेवा, डाक बम के लिए विशेष फल - पानी आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। साथ ही रात्रि विश्राम में गर्म - ठंडा पानी और कलाकारों द्वारा मधुर भजनों की प्रस्तुति, शौचालय, स्नानागर आदि की भी व्यवस्था है।