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व्यापारके लिए बिलकुल अयोग्य और अनुपयुक्त है, जबतक कि मकान मालिक होई-ली ऐंड कम्पनीके साथ अपने पट्टे में किये हुए इकरारके अनुसार नया मकान नहीं बना देता । (६) कि, निकायका निर्णय और प्रस्ताव न्याय के सिद्धान्तों तथा कानून दोनोंकी दृष्टिसे भी अयोग्य और अन्यायपूर्ण है । मामले कागजात देखने से मालूम होता है कि यह चीनी एक ब्रिटिश प्रजाजन है । फिर भी उसकी जो गति हुई वही भारतीयोंकी भी होना असम्भव नहीं है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालयने अपील सुनने से इनकार कर दिया। इसका कारण ऊपर बताये हुए न्यूकैसिलके मामलेका फैसला ही था । गत नवम्बरमें करदाताओं के अनुरोधपर डंडीके स्थानिक निकायके अध्यक्ष एक सभा बुलाई थी । उसका उद्देश्य एशिवाइयोंको नगरमें व्यापार करने देनेके ओचित्यपर विचारविमर्श करना " था । इस समय डंडीमें लगभग दस भारतीय वस्तु भण्डार हैं। सभा की कार्रवाई के निम्नलिखित अंशोंसे मालूम होगा कि स्थानिक निकाय अगले वर्ष उनके साथ कैसा वरताय करना चाहता है : श्री सी० जी० विल्सन (स्थानिक निकाय के अध्यक्ष) ने अपने मंतव्य से बहुत अच्छा असर पैदा किया। उन्होंने सभी विषयोंमें निकायकी कार्रवाईका पोषण किया और कहा कि हमारा प्रयत्न, अगर सम्भव हो तो, नगरको एशियाई अभिशापसे मुक्त कर देनेका है । वे सिर्फ यहीं नहीं, बल्कि सारे नेटाल उपनिवेशके लिए एक अभिशाप हैं। उन्होंने सभाको आश्वासन दिया कि चीनी व्यापारीके सम्बन्धमें हमारी कार्रवाइयाँ स्वार्य रहित और पक्षपातहीन थीं और परवानेको रद करके हमने ईमानदारी के साथ वही किया है जिसे हम नगरके प्रति अपना कर्तव्य समझते थे। उन्होंने आशा व्यक्त को कि करदाता अपनी राय जोरोंसे व्यक्त करके बता देंगे कि उनका इरादा इस अभिशापको नामशेष कर देनेका है । श्री डब्ल्यू ० एल० ओल्डएकर ( निकाय के एक सदस्य) ने कहा कि उन्होंने और निकायके अन्य सदस्योंने जो कुछ ठीक समझा वही किया है। उन्होंने सभाको आश्वासन दिया कि उनकी कार्रवाइयोंमें पक्षपातका कोई भाव नहीं था और सभासद भरोता कर सकते है कि वे निकाय के सदस्यको हैसियत से अपने कर्तव्यका पालन अवश्य करेंगे। श्री एस० जोन्सने इसके बाद प्रस्ताव पेश किया कि, स्थानिक निकाय अवांछनीय लोगोंको परवाने देना रोकने के लिए जो कुछ भी उसकी शक्ति हो, सब करे; कि, परवाना अधिकारीको भी इस आशयका निर्देश दिया जाये; और यह कि, इनमें से जितने परवाने रद किये जा सकें उतनोंको रद करनेको कार्रवाई की जाये । यह प्रस्ताव सर्वसम्मतिसे, हर्ष - ध्वनिके साथ, मंजूर हो गया । श्री सी० जी० विल्सनने इस निर्णयपर सभाको यह कहकर धन्यवाद दिया कि इससे निकायके हाथ बहुत मजबूत हो गये है और वह सभाके निर्णयपर अमल करेगा। और भी कई सज्जनोंके भाषण हो जाने के बाद श्री हेस्टिग्जने प्रस्ताव किया कि टाउन क्लार्क और परवाना अधिकारी दो भिन्न व्यक्ति हों । श्री विल्सनने कहा कि अधिकारियोंको अभोकी तरह हो रहने देना बहुत बेहतर होगा। बादमें, अगर परवाना अधिकारीने इस प्रकारके मामलोंमें वैसी ही कार्रवाई न की
व्यापारके लिए बिलकुल अयोग्य और अनुपयुक्त है, जबतक कि मकान मालिक होई-ली ऐंड कम्पनीके साथ अपने पट्टे में किये हुए इकरारके अनुसार नया मकान नहीं बना देता । कि, निकायका निर्णय और प्रस्ताव न्याय के सिद्धान्तों तथा कानून दोनोंकी दृष्टिसे भी अयोग्य और अन्यायपूर्ण है । मामले कागजात देखने से मालूम होता है कि यह चीनी एक ब्रिटिश प्रजाजन है । फिर भी उसकी जो गति हुई वही भारतीयोंकी भी होना असम्भव नहीं है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालयने अपील सुनने से इनकार कर दिया। इसका कारण ऊपर बताये हुए न्यूकैसिलके मामलेका फैसला ही था । गत नवम्बरमें करदाताओं के अनुरोधपर डंडीके स्थानिक निकायके अध्यक्ष एक सभा बुलाई थी । उसका उद्देश्य एशिवाइयोंको नगरमें व्यापार करने देनेके ओचित्यपर विचारविमर्श करना " था । इस समय डंडीमें लगभग दस भारतीय वस्तु भण्डार हैं। सभा की कार्रवाई के निम्नलिखित अंशोंसे मालूम होगा कि स्थानिक निकाय अगले वर्ष उनके साथ कैसा वरताय करना चाहता है : श्री सीशून्य जीशून्य विल्सन ने अपने मंतव्य से बहुत अच्छा असर पैदा किया। उन्होंने सभी विषयोंमें निकायकी कार्रवाईका पोषण किया और कहा कि हमारा प्रयत्न, अगर सम्भव हो तो, नगरको एशियाई अभिशापसे मुक्त कर देनेका है । वे सिर्फ यहीं नहीं, बल्कि सारे नेटाल उपनिवेशके लिए एक अभिशाप हैं। उन्होंने सभाको आश्वासन दिया कि चीनी व्यापारीके सम्बन्धमें हमारी कार्रवाइयाँ स्वार्य रहित और पक्षपातहीन थीं और परवानेको रद करके हमने ईमानदारी के साथ वही किया है जिसे हम नगरके प्रति अपना कर्तव्य समझते थे। उन्होंने आशा व्यक्त को कि करदाता अपनी राय जोरोंसे व्यक्त करके बता देंगे कि उनका इरादा इस अभिशापको नामशेष कर देनेका है । श्री डब्ल्यू शून्य एलशून्य ओल्डएकर ने कहा कि उन्होंने और निकायके अन्य सदस्योंने जो कुछ ठीक समझा वही किया है। उन्होंने सभाको आश्वासन दिया कि उनकी कार्रवाइयोंमें पक्षपातका कोई भाव नहीं था और सभासद भरोता कर सकते है कि वे निकाय के सदस्यको हैसियत से अपने कर्तव्यका पालन अवश्य करेंगे। श्री एसशून्य जोन्सने इसके बाद प्रस्ताव पेश किया कि, स्थानिक निकाय अवांछनीय लोगोंको परवाने देना रोकने के लिए जो कुछ भी उसकी शक्ति हो, सब करे; कि, परवाना अधिकारीको भी इस आशयका निर्देश दिया जाये; और यह कि, इनमें से जितने परवाने रद किये जा सकें उतनोंको रद करनेको कार्रवाई की जाये । यह प्रस्ताव सर्वसम्मतिसे, हर्ष - ध्वनिके साथ, मंजूर हो गया । श्री सीशून्य जीशून्य विल्सनने इस निर्णयपर सभाको यह कहकर धन्यवाद दिया कि इससे निकायके हाथ बहुत मजबूत हो गये है और वह सभाके निर्णयपर अमल करेगा। और भी कई सज्जनोंके भाषण हो जाने के बाद श्री हेस्टिग्जने प्रस्ताव किया कि टाउन क्लार्क और परवाना अधिकारी दो भिन्न व्यक्ति हों । श्री विल्सनने कहा कि अधिकारियोंको अभोकी तरह हो रहने देना बहुत बेहतर होगा। बादमें, अगर परवाना अधिकारीने इस प्रकारके मामलोंमें वैसी ही कार्रवाई न की
नेशनल प्रोजेक्ट्स कंसट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (एनपीसीसी भर्ती 2018) ने 12 साइट इंजीनियर्स (सिविल) पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं।अगर आप यह एनपीसीसी भर्ती 2018 के इच्छुक हैं तो आवेदन कर सकते हैं।योग्यता,आवेदन शुल्क,वेतन/सैलरी,आयु सीमा,नोटिफिकेशन और अन्य जानकारी नीचे दी गई हैं। ।NPCC Recruitment 2018: ।Advertisement Number: ।Post name: ।साइट इंजीनियर्स (सिविल) ( npcc recruitment 2018) ।Number of posts: ।pay scale: ।educational qualification: ।Age Range: ।40 वर्ष (आयु की गणना 31.08.2018 के आधार पर की जाएगी) ।Age relaxation: ।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग,विकलांग (पीडब्ल्यूडी) और महिलाओं को सरकार के नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी. ।Job Location: ।इस जॉब/भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवारों को बेंगलुरु (कर्नाटक) में नियुक्त किया जाएगा। ।Selection Process: ।उम्मीदवारों का चयन साक्षात्कार पर आधारित होगा ( npcc website) आवेदन शुल्कः सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग उम्मीदवारों से 500/:रुपयेः बैंगलोर में देय एनपीसीसी लिमिटेड के पक्ष में तैयार डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से,अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,विकलांग (पीडब्ल्यूडी) उम्मीदवारों को शुल्क से छूट दी गई है। ।How to apply NPPC: ।इच्छुक उम्मीदवार प्रशंसापत्रों,नवीनतम पास पोर्ट आकार की तस्वीरों और डीडी / बैंकरों की जांच की गई फोटोकॉपी के साथ निर्धारित आवेदन पत्र में आवेदन जोनल मैनेजर,एनपीसीसी लिमिटेड,संख्या 13316,दूसरा क्रॉस,केएचबी कॉलोनी,मगदी रोड,बेंगलुरूः560079 20.09.2018 को भेजें। ।Last date for applying online: ।Detailed Advertisement and Application Link: ।Official website: ।Important instructions: ।आप यह जॉब्स अप्लाई करने से पहले इस NPPC वैकेंसी से जुड़ी अधिसूचना और Advertisement जरूर पढ़ लें। ।आप सभी से निवेदन है कि इस जॉब लिंक एनपीसीसी भर्ती 2018 को अपने दोस्तों को वाट्स एप ग्रुप एवं फेसबुक या अन्य सोशल नेटवर्क पर अधिक से अधिक शेयर करें और उनको भी रोजगार के अवसर 2018 पाने में उनकी मदद करें।
नेशनल प्रोजेक्ट्स कंसट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड ने बारह साइट इंजीनियर्स पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं।अगर आप यह एनपीसीसी भर्ती दो हज़ार अट्ठारह के इच्छुक हैं तो आवेदन कर सकते हैं।योग्यता,आवेदन शुल्क,वेतन/सैलरी,आयु सीमा,नोटिफिकेशन और अन्य जानकारी नीचे दी गई हैं। ।NPCC Recruitment दो हज़ार अट्ठारह: ।Advertisement Number: ।Post name: ।साइट इंजीनियर्स ।Number of posts: ।pay scale: ।educational qualification: ।Age Range: ।चालीस वर्ष ।Age relaxation: ।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग,विकलांग और महिलाओं को सरकार के नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी. ।Job Location: ।इस जॉब/भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवारों को बेंगलुरु में नियुक्त किया जाएगा। ।Selection Process: ।उम्मीदवारों का चयन साक्षात्कार पर आधारित होगा आवेदन शुल्कः सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग उम्मीदवारों से पाँच सौ/:रुपयेः बैंगलोर में देय एनपीसीसी लिमिटेड के पक्ष में तैयार डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से,अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,विकलांग उम्मीदवारों को शुल्क से छूट दी गई है। ।How to apply NPPC: ।इच्छुक उम्मीदवार प्रशंसापत्रों,नवीनतम पास पोर्ट आकार की तस्वीरों और डीडी / बैंकरों की जांच की गई फोटोकॉपी के साथ निर्धारित आवेदन पत्र में आवेदन जोनल मैनेजर,एनपीसीसी लिमिटेड,संख्या तेरह हज़ार तीन सौ सोलह,दूसरा क्रॉस,केएचबी कॉलोनी,मगदी रोड,बेंगलुरूःपाँच लाख साठ हज़ार उन्यासी बीस.नौ.दो हज़ार अट्ठारह को भेजें। ।Last date for applying online: ।Detailed Advertisement and Application Link: ।Official website: ।Important instructions: ।आप यह जॉब्स अप्लाई करने से पहले इस NPPC वैकेंसी से जुड़ी अधिसूचना और Advertisement जरूर पढ़ लें। ।आप सभी से निवेदन है कि इस जॉब लिंक एनपीसीसी भर्ती दो हज़ार अट्ठारह को अपने दोस्तों को वाट्स एप ग्रुप एवं फेसबुक या अन्य सोशल नेटवर्क पर अधिक से अधिक शेयर करें और उनको भी रोजगार के अवसर दो हज़ार अट्ठारह पाने में उनकी मदद करें।
200 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने एक्ट्रेस चाहत खन्ना पर गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, सुकेश चंद्रशेखर ने उन्हें लीगल नोटिस भी भेजा है। महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना को 100 करोड़ रुपये का लीगल नोटिस भेजा है। जेल में बंद ठग आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने चाहत पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। सुकेश के वकील ने दावा किया कि चाहत खन्ना ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुकेश चंद्रशेखर के बारे में गलत बयान दिया है। इतना ही नहीं, वकील ने ये तक कहा कि चाहत खन्ना के बयान की वजह से सुकेश की प्रतिष्ठा और उनकी छवि पर गहरा असर पड़ा है। सुकेश चंद्रशेखर के वकील का कहना है कि जिस मामले में सुकेश को आरोपी बनाया गया है, अभी वह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में जब तक कोई आरोपी दोषी साबित नहीं हो जाता है तब तक कोई भी व्यक्ति उस आरोपी के खिलाफ टिप्पणी नहीं कर सकता है। चाहत खन्ना ये सब फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने और मीडिया का अटेंशन पाने के लिए कर रही है। लीगल नोटिस भेजकर चाहत खन्ना को सात दिन का वक्त दिया गया है। सुकेश चंद्रशेखर के वकील ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि चाहत खन्ना को सात दिन के भीतर माफी मांगते हुए एक स्टेटमेंट जारी करना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें, 29 जनवरी को एक मीडिया संस्थान से बातचीत करते हुए चाहत खन्ना ने यह दावा किया था कि सुकेश ने उन्हें प्रोपोज किया था।
दो सौ करोड़ रुपये की ठगी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने एक्ट्रेस चाहत खन्ना पर गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, सुकेश चंद्रशेखर ने उन्हें लीगल नोटिस भी भेजा है। महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना को एक सौ करोड़ रुपये का लीगल नोटिस भेजा है। जेल में बंद ठग आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने चाहत पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। सुकेश के वकील ने दावा किया कि चाहत खन्ना ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुकेश चंद्रशेखर के बारे में गलत बयान दिया है। इतना ही नहीं, वकील ने ये तक कहा कि चाहत खन्ना के बयान की वजह से सुकेश की प्रतिष्ठा और उनकी छवि पर गहरा असर पड़ा है। सुकेश चंद्रशेखर के वकील का कहना है कि जिस मामले में सुकेश को आरोपी बनाया गया है, अभी वह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में जब तक कोई आरोपी दोषी साबित नहीं हो जाता है तब तक कोई भी व्यक्ति उस आरोपी के खिलाफ टिप्पणी नहीं कर सकता है। चाहत खन्ना ये सब फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने और मीडिया का अटेंशन पाने के लिए कर रही है। लीगल नोटिस भेजकर चाहत खन्ना को सात दिन का वक्त दिया गया है। सुकेश चंद्रशेखर के वकील ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि चाहत खन्ना को सात दिन के भीतर माफी मांगते हुए एक स्टेटमेंट जारी करना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें, उनतीस जनवरी को एक मीडिया संस्थान से बातचीत करते हुए चाहत खन्ना ने यह दावा किया था कि सुकेश ने उन्हें प्रोपोज किया था।
२९ सुवीरं रविमा भर जातवेदो विचर्षणे । जहि रक्षांसि सुक्रतो ।। १५४ ।। ३० त्वं नः पाह्यंहसो जातवेदो अघायतः । रक्षा णो ब्रह्मणस्कवे ॥ १५५ ॥ ३१ यो नो अग्ने दुरेव आ मर्तो वधाय दाशति । तस्मान्नः पाह्यंहसः ।। १५६ ॥ ३२ त्वं तं देव जिह्वया परि बाधस्व दुष्कृतम् । मर्तो यो नो जिघांसति ॥ १५७ ॥ ३३ भरद्वाजाय सप्रथः शर्म यच्छ सहन्त्य । अग्ने वरेण्यं वसु ॥ १५८ ॥ अत्री - ( अति इति ) - जो खाता है, दुष्ट राक्षस । १ तिग्मेन शोचिषा विश्वं अत्रिणं नियासत्अप्रणो अपने तीक्ष्ण तेजसे सब शत्रुको दूर करे । २ अभिः राय नः वनते - अग्रणी हमें धन देता है । मानव धर्म - अपने तेजसे शत्रु दूर हो जॉय इतना अपना तेज बढाओ । धन प्राप्त करो और उसका दान करो । { २९ ] ( १५४ ) हे ( जातवेदः विचर्षणे ) ज्ञानी और विशेष द्रष्टा ! ( सुवीरं रयिं ) उत्तम बीरोंसे युक्त धन हमारे जिये ( आ भर ) भर दो। और हे ( सुक्रतो ) अच्छे कर्म करनेवाले । ( रक्षांसि ) राक्षसोंका ( जहि ) नाश कर । १ सुवरं रयि आ भर - उत्तम वीर जिसके साथ रहते हैं ऐसा धन हमें भरपूर भर दो । वीरपुत्र पौत्रों से युक्त घन दो । २ रक्षांसि जहि- दुष्टशका नाश कर । ३ जातवेदाः विचर्षणिः सुक्रतुः - विद्या प्राप्त कर विशेष दृष्टि धारण कर और उत्तम कर्म कर । मानव धर्म - ज्ञानी बन, निरीक्षक बन और उत्तम कर्म कर । उत्तम वीरों के साथ रहनेवाला धन प्राप्त कर और दुष्टोंका दमन कर । [ ३० ] ( १५५ ) हे ( जातवेदः ) जिससे ज्ञान प्रकट हुआ है ऐसे देव ! ( त्वं नः अंहसः पाहि ) तू पापसे हमारी रक्षा कर । हे ( ब्रह्मणः-कवे ) ज्ञानके द्रष्टा ! ( अघायतः नः रक्ष ) पापी शत्रुओंसे हमारी रक्षा कर । १ जातवेदाः- जिसने ज्ञान प्राप्त किया है ऐसा ज्ञानी । जो बने हुए पदार्थोंकी विद्या जानता है । वेद जिससे प्रकट हुए। २ ब्रह्मणः कविः - ज्ञानका द्रष्टा, ज्ञान प्राप्त करके जो अतीन्द्रियार्थदशी ज्ञानी बना है। ३ अंहसः नः पाहि- पापसे हमारा बचाव कर । ४ अघायतः नः पाहि- पापियोंसे हमारी सुरक्षा कर मानव धर्म - ज्ञान प्राप्त कर, द्रष्टा बन, पापसे बचाओ और पापियोंसे बचाओ। [ ३१ ] ( १५६ ) हे (अग्ने ) अभि ! ( दुरेवः यः मर्तः ) दुष्ट अभिप्रायवाला जो मनुष्य है ( नः वधाय आ दाशति ) जो हमारे वध के लिये यत्न करता है । ( तस्मात् अंड्सः नः पाहि ) उस पापीसे हमें बचाओ । मानव धर्म - जो दुष्ट अभिप्राय अपने मनमें धारण करता है । जो हमारा वध करता है उस पापीसे अपना बचाव करो । [ ३२ ] ( १५७ ) हे ( देव ) तेजस्वी विबुध ! ( त्वं ) तू ( यः मर्तः नः ) जो मनुष्य हमको ( जिघांसति ) मारने की इच्छा करता है । ( तं दुष्कृतं जिह्वया परि बाधख ) उस दुष्ट नाश कर कर्म करनेवाले मनुष्यका अपनी तीक्ष्ण ज्वालासे सब प्रकार से मानव धर्म - जो मनुष्य अपना नाश करने की इच्छा करता है। उस पापीका नाश करना उचित है । [ ३३ ] ( १५८ ) हे (सहन्त्य अग्ने ) सामर्थ्यवाले अमि तेजस्खी देव ! ( भरद्वाजाय सप्रथः शर्म यच्छ ) भरद्वाजको सब प्रकारका यशस्वी गृह दे । तथा ( वरेण्यं वसु ) श्रेष्ठ धन दे । १ सहन्त्यः -- शत्रुका पराभव करने के सामर्थ्यसे युक्त होना चाहिये । २ भरद्वाजः- ( भरत - बाजः ) जो अन्नका दान करता है। ४ शर्म - संरक्षक घर, जिस घर में दुष्टोंका प्रवेश नहीं हो सकता ऐसा किले जैसा घर । मानव धर्म - मनुष्य यशस्वी घर प्राप्त करे और श्रेष्ठ धन प्राप्त करे ।
उनतीस सुवीरं रविमा भर जातवेदो विचर्षणे । जहि रक्षांसि सुक्रतो ।। एक सौ चौवन ।। तीस त्वं नः पाह्यंहसो जातवेदो अघायतः । रक्षा णो ब्रह्मणस्कवे ॥ एक सौ पचपन ॥ इकतीस यो नो अग्ने दुरेव आ मर्तो वधाय दाशति । तस्मान्नः पाह्यंहसः ।। एक सौ छप्पन ॥ बत्तीस त्वं तं देव जिह्वया परि बाधस्व दुष्कृतम् । मर्तो यो नो जिघांसति ॥ एक सौ सत्तावन ॥ तैंतीस भरद्वाजाय सप्रथः शर्म यच्छ सहन्त्य । अग्ने वरेण्यं वसु ॥ एक सौ अट्ठावन ॥ अत्री - - जो खाता है, दुष्ट राक्षस । एक तिग्मेन शोचिषा विश्वं अत्रिणं नियासत्अप्रणो अपने तीक्ष्ण तेजसे सब शत्रुको दूर करे । दो अभिः राय नः वनते - अग्रणी हमें धन देता है । मानव धर्म - अपने तेजसे शत्रु दूर हो जॉय इतना अपना तेज बढाओ । धन प्राप्त करो और उसका दान करो । { उनतीस ] हे ज्ञानी और विशेष द्रष्टा ! उत्तम बीरोंसे युक्त धन हमारे जिये भर दो। और हे अच्छे कर्म करनेवाले । राक्षसोंका नाश कर । एक सुवरं रयि आ भर - उत्तम वीर जिसके साथ रहते हैं ऐसा धन हमें भरपूर भर दो । वीरपुत्र पौत्रों से युक्त घन दो । दो रक्षांसि जहि- दुष्टशका नाश कर । तीन जातवेदाः विचर्षणिः सुक्रतुः - विद्या प्राप्त कर विशेष दृष्टि धारण कर और उत्तम कर्म कर । मानव धर्म - ज्ञानी बन, निरीक्षक बन और उत्तम कर्म कर । उत्तम वीरों के साथ रहनेवाला धन प्राप्त कर और दुष्टोंका दमन कर । [ तीस ] हे जिससे ज्ञान प्रकट हुआ है ऐसे देव ! तू पापसे हमारी रक्षा कर । हे ज्ञानके द्रष्टा ! पापी शत्रुओंसे हमारी रक्षा कर । एक जातवेदाः- जिसने ज्ञान प्राप्त किया है ऐसा ज्ञानी । जो बने हुए पदार्थोंकी विद्या जानता है । वेद जिससे प्रकट हुए। दो ब्रह्मणः कविः - ज्ञानका द्रष्टा, ज्ञान प्राप्त करके जो अतीन्द्रियार्थदशी ज्ञानी बना है। तीन अंहसः नः पाहि- पापसे हमारा बचाव कर । चार अघायतः नः पाहि- पापियोंसे हमारी सुरक्षा कर मानव धर्म - ज्ञान प्राप्त कर, द्रष्टा बन, पापसे बचाओ और पापियोंसे बचाओ। [ इकतीस ] हे अभि ! दुष्ट अभिप्रायवाला जो मनुष्य है जो हमारे वध के लिये यत्न करता है । उस पापीसे हमें बचाओ । मानव धर्म - जो दुष्ट अभिप्राय अपने मनमें धारण करता है । जो हमारा वध करता है उस पापीसे अपना बचाव करो । [ बत्तीस ] हे तेजस्वी विबुध ! तू जो मनुष्य हमको मारने की इच्छा करता है । उस दुष्ट नाश कर कर्म करनेवाले मनुष्यका अपनी तीक्ष्ण ज्वालासे सब प्रकार से मानव धर्म - जो मनुष्य अपना नाश करने की इच्छा करता है। उस पापीका नाश करना उचित है । [ तैंतीस ] हे सामर्थ्यवाले अमि तेजस्खी देव ! भरद्वाजको सब प्रकारका यशस्वी गृह दे । तथा श्रेष्ठ धन दे । एक सहन्त्यः -- शत्रुका पराभव करने के सामर्थ्यसे युक्त होना चाहिये । दो भरद्वाजः- जो अन्नका दान करता है। चार शर्म - संरक्षक घर, जिस घर में दुष्टोंका प्रवेश नहीं हो सकता ऐसा किले जैसा घर । मानव धर्म - मनुष्य यशस्वी घर प्राप्त करे और श्रेष्ठ धन प्राप्त करे ।
साहित्य का पुर्नावलोकन निःसंदेह, सामाजिक अनुसन्धान के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक शोध के प्रमुख सोपानों के अन्तर्गत "साहित्य का पुनरावलोकन" तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षाऐं कर ली जाय तो यह जान लेता है कि प्रस्तुत अनुसाधन कार्य अनुभविक रूप में सम्पादित किए जा चुके है, तथा कौन-कौन सी अध्ययन पद्धतियां व प्रविधियां उन में प्रयोग की गयीं, और किस अनुसंधान - अभिकल्प को अपनाया गया; साथ ही तथ्य सम्बन्धित प्रमुख निदान तथा समस्याऐं क्या-क्या रहीं है? यह निर्विवाद सत्य है कि प्रत्येक सामाजिक समस्या का देश एवं परिस्थियों से घनिष्ठ तथा प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है, अतः इस दृष्टि से भी पूर्व अध्ययनों से सम्बन्धित साहित्य की समीक्षा करना अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण ही नही होता; अपितु कि अनिवार्य आवश्यकता होती है। परिवर्ती परिवेश में अपने अनुसंधान कार्य में क्या-क्या समस्याऐं जनित हो सकती हैं ? किन पद्धतियों व प्रविधियों से अध्ययन करना उपयुक्त रहेगा? किन-किन पहलुओं, आयामों तथा कारकों का अध्ययन; पूर्व (अतीत) में हो चुका है ? और किन पहलुओं का नहीं; तथा किस दृष्टिकोण से अध्ययन करना अवशेष है? अध्ययन किस भाँति (कैसे) किया जाय; कि अनुसंधान कार्य सरलता, सहजता तथा सुगमता से वस्तुनिष्ठ तथा वैज्ञानिक रूप में पूर्ण हो जाय तथा शोधकर्ता को समय, धन तथा श्रम भी कम अपव्यय करना पड़े; इत्यादि यह सब कुछ एक अध्ययनकर्ता को साहित्य के पुनरावलोकन तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षा कर लेने से स्पष्ट हो जाता है। इस प्रसंग में प्रो. बेसिन का कथन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बेसिन एफ. एच. 1 ( 1962:42) के अनुसार, "प्रत्येक अनुसंधान कार्य में सम्बन्धित साहित्य एवं पूर्व अध्ययनों की समीक्षा " अनुसंधान योजना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सोपान हुआ करता है क्योंकि प्रत्येक अनुसंधान कार्य, आरम्भ में अस्पष्ट होने के कारण दुरूह एवं जटिल प्रतीत होता है। सम्बन्धित साहित्य के पुनरावलोकन से अनुसंधान की जटिलता एवं अस्पष्टता दोनों ही समस्याऐं लगभग समाप्त हो जाती है। इसका कारण यह है कि साहित्य के पुनरावलोकन से यह स्पष्ट हो जाता है कि शोध अध्ययन के लिए विश्वसनीय, तथा वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री किस भाँति तथा कैसे प्राप्त हो सकती है? साहित्य के पुनरावलोकन तथा समीक्षा करने के कुछ अन्य प्रमुख लाभ इस प्रकार हैअध्ययनकर्ता को शोध समस्या के सन्दर्भ में सामान्य ज्ञान विकसित हो जाता है । अनुसंधान कार्य हेतु अनुसंधान प्रारूप एवं उपयोगी तथा प्रविधियां अनुसंधित्सु को स्पष्ट हो जाती है कि अध्ययन कैसे सम्पादित करना है। साहित्य के पुनरावलोकन से अध्ययनकर्ता को अनुसंधान सम्बन्धी भ्रमात्मक तथा सन्देहात्मक स्थितियां सुस्पष्ट हो जाती है; सम्प्रति अनुसंधान कार्य के सम्बन्ध में अनुसंधानकर्ता का शोध स्पष्ट हो जाने की बजह से अध्ययन करने में सरलता हो जाती है। इस प्रकार साहित्य के पुनरावलोकन तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षा कर लेने से अध्ययनकर्ता को अनुसंधान हेतु शोध-प्रारूप, अध्ययन-पद्धतियां तथा प्रविधियों के ज्ञान के अतिरिक्त, दिशा बोध हो जाता है क्योंकि ऐसा करने से अनुसंधित्सु में अतिरिक्त अभिज्ञान तथा अन्तर्दृष्टि विकसित हो जाती है । प्रोफेसर बोर्ग जी.पी. (1963:48) के शब्दों में, "सम्बन्धित साहित्य का पुनरावलोकन किसी भी अनुसंधानकर्ता को इस योग्य बना देता है कि वह पूर्व में किए हुए अनुसंधान कार्यों का पता लगा सकें, और उनका अध्ययन करके तथ्य [122] सम्बन्धित समीक्षा कर सके ऐसा करने से अध्ययनकर्ता अपने अनुसंधान कार्य के लिए उपयुक्त उपकरणों तथा पद्धतियों इत्यादि का उचित चयन करके अतिरिक्त ज्ञानार्जन का आधार पर अनुसंधान हेतु स्पष्ट दिशा प्राप्त कर लेता है"। सर्वश्री पुरुषोत्तम (1991:110) के अनुसार "सामान्यतः मानव-ज्ञान के तीन पक्ष - (1) ज्ञान को एकत्रित करना (2) एक दूसरे तक पहुँचाना (3) अतिरिक्त ज्ञान में वृद्धि करना, होते हैं। ये तीनों ही मूलभूत तत्व अनुसंधानों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते है, जो कि वास्तविकता के समीप / निकट आने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहते हैं। अतिरिक्त ज्ञान के अर्जन तथा विस्तृत ज्ञान - भण्डार में इनका योगदान, प्रत्येक क्षेत्र में मानव द्वारा किए गए निरन्तर प्रयासों की सफलता को सम्भव बनाता है। उसी भाँति अनुसंधान प्रक्रिया में "साहित्य का पुनरावलोकन" अनुसंधान उपक्रम का एक ऐसा महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सोपान होता है; जो कि वर्तमान के गर्त में निहित होता है अर्थात् मनुष्य अपने अतीत में संचरित एवं आलेखित ज्ञान के आधार पर अनुसंधान कार्य के माध्यम से नवीन ज्ञान का सृजन करता है । सर्वश्री सिंह एस. पी. (1975:14) के अनुसार, किसी भी शोध- समस्या का चयन कर लेने के पश्चात, यह आवश्यक ही नहीं; अपितु शोध की अनिवार्य आवश्यकता होती है कि उस अनुसंधान विषय से सम्बन्धित उपलब्ध साहित्य का पुरावलोकन कर; तथ्यसम्बन्धित विषयगत समीक्षाएं कर ली जांय क्योंकि ऐसा करने से - शोधकर्ता के मन पटल में अध्ययन समस्या के सन्दर्भ में एक स्पष्ट अन्तर्दृष्टि तथा ज्ञान बोध विकसित हो जाता है। शोधकर्ता को अनुसंधान कार्य हेतु उपयुक्त पद्धतियों तथा प्रविधियों का आभास तथा समुचित ज्ञान हो जाता है। साहित्य की समीक्षा अध्ययनार्थ निर्मित परिकल्पनाओं / शोध - प्रश्नों के निर्माण में सहायक होती है। विभिन्न शोध-अध्येताओं द्वारा एक ही अनुसंधान कार्य को फिर से दोहराने की गलती नहीं हो पाती और अध्ययन - समस्या से सम्बन्धित उन आयामों (पहलुओं) पर, जिन पर अन्य शोध- अध्येताओं ने ध्यान नहीं दिया अथवा अछूते रह गए; या फिर अज्ञानतावश छूट गए; शोधकर्ता को उन समस्त अछूते आयामों का भी आभास हो जाता हैं। सर्वश्री स्टॉउफर सेम्युल रिब्यू (1962:73) का कहना है कि सम्बन्धित साहित्य के गहन अध्ययन एवं उसकी समीक्षा के अभाव के अभाव में कोई भी अन्वेषण कार्य करना, "अन्धे के तीर" के तुल्य होता है। साहित्य समीक्षा के अभाव में कोई भी अनुसंधान कार्य एक कदम भी प्रगति पथ पर अग्रसर नहीं हो सकता; जब तक कि अनुसंधानकर्ता को इस बात का ज्ञान तथा जानकारी नहीं है कि प्रस्तुत अनुसंधान के क्षेत्र में किन-किन पक्षों पर कितना कार्य हो चुका है ? कौन-कौन से स्रोत प्राप्त है? तब तक वह अध्ययनकर्ता न तो अध्ययन - समस्या का चयन कर सकता है, और न ही उसकी रूपरेखा तैयार कर, अनुसंधान कार्य को गति प्रदान कर सकता है। इसका मोलिक कारण यह है कि प्रत्येक अनुसंधान कार्य का प्रमुख उद्देश्य; किसी समस्या विशेष पर नवीन दृष्टिकोण से चिन्तन तथा विचार करके उसमें नवीनता लाना अथवा समस्या की नवीन ढंग से तार्किक व्याख्या प्रस्तुत करना होता है। उपरोक्त समस्त प्रतिनिधि बिन्दुओं को दृष्टिपथ में रखकर शोधकर्ता ने अपने अनुसंधान कार्य के सुचारू संचालन तथा सफलता हेतु अध्ययन करने से पूर्व सम्बन्धित साहित्य का पुनरावलोकन तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षा करने का प्रयास किया है ताकि प्रस्तुत अध्ययन को उचित दिशा एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्राप्त हो सके। भारत में युवकों में मादक द्रव्यों के सम्बन्ध में अनुसंधान कार्य अपेक्षाकृत अत्यन्त ही अल्प हुऐ है फिर भी तत्सम्बन्धित शोध अध्ययनों को निम्नानुसार प्रस्तुत किया गया है :कुछ अन्य अध्ययनों ( M.C. Jones, 1971; R.A. Woodruff et al.,1973;F.A. Seixas and R.Cadoret, 1974) के आधार पर स्थिर किया गया है कि अवसाद (Depression) और समाज विरोधी व्यक्तित्व वाले लोग मद्यपान करते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि कुसमायोजित (Meladjusted) व्यक्तियों के मद्यपान करने की सम्भावना अधिक होती है । लेकिन आवश्यक नहीं है कि कुसमायोजित व्यक्ति में मद्यपान की आदत पड़ ही जाय। मद्यपान करने वाले व्यक्तियों की व्यक्तित्व विशेषताऐं सामान्य व्यक्तियों की अपेक्षा भिन्न होती हैं । आदतजन्य मद्यपान करने वाले व्यक्ति में प्रतिबल (Stress) सहनशीलता कम, ऋणात्मक आत्म-प्रतिभा (Self Image), अनुपयुक्तता की भावनाएँ और अवसाद की भावनाएँ पायी जाती हैं । जब मद्यपान करने वाले व्यक्ति बहुत अधिक मद्यपान करते हैं और उसकी स्थिति अस्पताल में भर्ती या उपचार वाली हो जाती है तो उसके व्यक्तित्व में कुछ निम्न प्रमुख विशेषताएँ पायी जाती हैं- मनोरचनाओं का अतिरंजित प्रयोग करता है जिसमें युक्तिकरण और प्रक्षेपण का अधिक प्रयोग करता है । इस अवस्था में वह अपने आवेगों को नियंत्रित करने में कठिनाई का अनुभव करता है। उसमें उत्तरदायित्व का अभाव भी पाया जाता है । मनोवैज्ञानिक मेधता- जिन अध्ययनों में मद्यपान करने वाले और मद्यपान न करने वाले व्यक्तियों की व्यक्तित्व विशेषताओं की तुलना की गयी है, उन अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि मद्यपान करने वाले व्यक्ति संवेगात्मक रूप से अपरिपक्व होते हैं । मद्यपान करने वाले व्यक्ति चाहते हैं कि समाज के लोग उनकी प्रशंसा करें । मद्यपान करने वाले व्यक्तियों में यह भी देखा गया है कि इन व्यक्तियों में असफलता के कारण हीनता की भावनाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। इनमें कुण्ठा के प्रति सहनशीलता भी निम्न स्तर की होती है। वे अपने आपको अनुपयुक्त भी अनुभव करते हैं । कुछ अन्य अध्ययनकर्ताओं (D.G. McClelland, et.al.,1972,B.Pratt, 1972;G.Winokur.et.al., 1970) ने अपने अध्ययनों के आधार पर यह स्थिर किया कि व्यक्ति अपने पुरुषत्व और अपनी उपयुक्तता की भावना को स्थापित और स्थिर करने के लिए मद्यपान करता है। व्यक्तियों को अपने शराब पीने पर नियंत्रण नहीं होता है । अध्ययन D.W.Goodwin,et.al., 1973 ने यह देखा गया कि वे बच्चे जिनके पिता मद्यपान करने वाले थे, उन्हें उन परिवारों पाला गया जहाँ मद्यपान नहीं होता था । इस प्रयोगात्मक समूह की तुलना नियंत्रित समूह से की गयी । नियंत्रित समूह में वे बालक थे जिनके परिवार में कभी किसी के द्वारा मद्यपान नहीं किया गया था । इस अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला कि नियंत्रित समूह के बालकों की अपेक्षा प्रयोगात्मक समूह के बालकों से मद्यपान की समस्याएँ दो गुनी थीं। मस्तिष्क सर्जरी जर्मनी में एक अध्ययन (R.Fritz, et al; 1974) के अनुसार जिस प्रकार खाने और सैक्स की पूर्ति की इच्छा होती है, ठीक उसी प्रकार मद्यपान की इच्छा होती है । इन इच्छाओं को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क के कुछ विशिष्ट केन्द्रों का ऑपरेशन किया जाता है। इसके लिए के मस्तिष्क के इन विशिष्ट केन्द्रों का लगभग 50 क्यूबिक किलोलीटर के क्षेत्र को उदासीन कर दिया जाता है फिर रोगी को पीने की इच्छा नहीं उत्पन्न होती है । इनदिनेशस्मथ, अल्फ्रेड (1940): "द ड्रग ऐडिक्ट एज ए साइकोपेथ" अमेरिकन सोशियोलोजीकल रिव्यू, न्यूयार्क । मर्टन, रोवर्ट, के एण्ड निसवेट रोवर्ट, ए (1979) : कनटेम्परेरी सोसल प्रालम्स ने प्रतिमान उल्लंघन के विभिन्न प्रकारों का महत्व को समझने की दृष्टि से विपथगामी (Aberrant) और अ- अनुपालक मद्यसारिकों का तीन समूहों में वर्गीकरण किया जा सकता हैः स्थिर, आवर्ती, और पठार । स्थिर मद्यसारिक वह है जो निरन्तर मदिरा में सन्तृप्त रहता है । आवर्ती मद्यसारिक वह है जो लंबी समयावधियों तक नहीं पीता और फिर रंगरेलियां मनाता है। अधित्यका व पठार मद्यसारिक वह है जो उपरोक्त दोनों किस्मों में से प्रत्येक से अधिक जानबूझ कर पीता है और मदिरा से अधिकतम प्रभावों को चाहने की ओर प्रवृत्त होता है। उसे हर समय संतृप्ति का एक विशेष स्तर बनाये रखने की इच्छा होती है, परन्तु उसमें अपनी मदिरा को प्रभाव को लंबे समय की अवधि तक फैलाने की क्षमता होती है । " बेकर, हावर्ड, एस, (1963): "द आउट साइडर" फ्री प्रेस, न्यूयार्क : ने मादक द्रव्यों के सेवन सोशियो-साइकिलोजीकल कारण बताते हुए हाबर्ड बेकर (1963) और काइ एरिकसन (1964:21) ने सामाजिक मनोवैज्ञानिक 'लेबलिंग' सिद्धांत में बताया है कि एक व्यक्ति व्यसनी व शराबी के लेबल लगने के दबाव के कारण मादक द्रव्य सेवनकर्ता व शराबी बन जाता है । परन्तु यह सिद्ध समझाने में असफल रहा है कि व्यक्ति मादक द्रव्य-व्यवहार में पहले कैसे फंसते हैं जिसके कारण उन्हें सामाजिक दृष्टि से 'विचलित व्यसनी' कहा जाता है।" बासकिन रिचर्ड (ऐडी): "सोसल प्राबलम्स", मैकग्रो हिल एण्ड को. न्यूयार्क, 1964, ने विश्व में मादक द्रव्यों की खपत को मूल्यों में बताते हुए निष्कर्ष निकाला कि, "यदि हम विभिन्न देशों के बीस वर्ष की आयु से अधिक (वयस्कों) के मदिरा सेवन करने वालों की तुलना करें, तो सबसे अधिक संख्या फ्रांस में ( 5, 200 प्रति एक लाख जनसंख्या) में पाई जाती है; उसके पश्चात अमेरिका (4,760 प्रति लाख); स्वीडन (2,780 प्रति लाख), स्वटजरलैण्ड (2,685 प्रति लाख), डेनमार्क (2,260 प्रति लाख), नार्वे (2,220 प्रति लाख), कनाडा (2, 140 प्रति लाख), आस्ट्रेलिया (1,640 प्रति लाख), इंग्लैंड (1,530 प्रति लाख), और इटली (1,100 प्रति लाख) में पाई जाती है । " चेन, इशोडोर एट आल (1969): "साइकोलोजीकल फक्सन आफ ड्रग यूज" में मद्यपान प्रयोग कर्ताओं के लक्ष्यों को बताते हुए लिखते है कि, "निर्भर व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों को दूसरों से भावात्मक समर्थन व ध्यान चाहिए और इनके अभाव में वे उसे मादक द्रव्यों के सेवन से स्थानापन्न करते हैं । चेन ने न्यूयार्क में नारकोटिक्स के अध्ययन में पाया कि जिन व्यक्तित्व - लक्षणों वाले व्यक्ति मादक पदार्थो को सेवन करते हैं, वे लक्षण हैंः निष्क्रियता, निम्न आत्माभिमान, आत्म-निदेशन की सीमित क्षमता, अन्य व्यक्तियों में अविश्वास, कुण्ठाओं और तनावों का सामना करने में कठिनाई, पौरूषी पहचान की अपर्याप्तता तथा बचपन के संघर्षों के समाधान की असफलता ।" डेविड मेक क्लेलेण्ड (1972): ने द्रव्यव्यसन के कारण, व्यक्तित्व सिद्धांत को चुनौती देते हुए शक्ति सिद्धांत को प्रस्तुत किया है जिसके आधार पर उसने द्रव्य दुरूपयोग (शराब) को व्यक्ति की शक्ति आवश्यकता की अभिव्यक्ति के संदर्भ में समझाया है। हल्का और कभी-कभी शराब पीने वाले व्यक्ति को शराब पीने से बड़ी हुई सामाजिक शक्ति की अनुभूति मिलती है, जबकि भारी (Heavy) शराबी को बड़ी हुई व्यक्तित्व शक्ति की अनुभूति मिलती है। रिचर्ड ब्लूम (1973:508) : ने पीने के दो सन्दर्भों पर अपने अध्ययन निष्कर्षो में लिखा है कि, "(1) निर्धारित सामाजिक संरूप के संदर्भ में जहां पीना समाज की संस्कृति से जुड़ा हुआ है और वह प्रतिदिन की दिनचर्या का अंग समझा जाता है (उदाहरण के लिये, इटली, अमरीका) और व्यक्तियों को उसमें कोई मनोवैज्ञानिक विभव / सम्भावना प्रतीत नहीं होती; (2) मदिरा सेवन को संस्कृति और समाज के लिये विघटनकारी माने जाने और व्यक्तियों द्वारा उसमें आदी होने की संभावना देखने (जैसे भारत में) और पीने को विलास और पलायन (Escape) का साधन समझने के संदर्भ में । शराब पीने वालों का वर्गीकरण 'गैर-व्यसनी' (Non-addicts), 'व्यसनी' (Addicts), और 'चिरकालिक मद्यसारिक' (Chronicalcoholic) के रूप में किया गया है। गैर-व्यसनियों को प्रयोगकर्ताओं' (Experimenters) और नियमितों (Regulars) की श्रेणी में रखा जाता है ।" 'समाजशास्त्रीय' सिद्धांत की मान्यता है कि परिस्थितियाँ अथवा सामाजिक पर्यावरण व्यक्ति को मादक द्रव्यों का व्यसनी बनाते हैं । सदरलैण्ड के विभिन्न सम्पर्क सिद्धांत के आधार पर यदि द्रव्य - सेवन समझाया जाये, तो उसके अनुसार मादक द्रव्यों का लेना दूसरे व्यक्तियों से सीखा हुआ व्यवहार हैं, विशेष रूप से छोटे घनिष्ठ समूहों से । 'सामाजिक सीखने' का सिद्धात, जो कि विभिन्न सम्पर्क सिद्धांत और प्रबलीकरण सिद्धांत का विस्तृत रूप है । एकर्स और बर्जेस द्वारा प्रतिपादित किया गया था । 'प्रबलीकरण' सिद्धांत जब यह मानता है कि मादक द्रव्यों पर निर्भरता मात्र एक 'प्रतिबद्ध सीखना' (Conditioned learning) है, सामाजिक सीख का सिद्धांत सीखने की प्रक्रिया में कार्य करने वाले बलयुक्तकर्ता जोर देने वालों के सामाजिक स्रोतों का मूल्यांकन करता है। प्रबलीकरण उन व्यक्तियों के सम्पर्क से होता है जो मादक द्रव्य सेवन के पक्ष में होते है । 'तनाव' (Strain) सिद्धांत व्यक्तियों पर उस जोरदार दबाव पर बल देता है जो उन्हें आन्तरीकृत (Internalised) प्रतिमानों से विचलित होने के लिए बाध्य करते हैं । " मर्टन के अनुसार इस दबाव का स्रोत लक्ष्यों और साधनों के बीच विसंगति है। जो व्यक्ति अपने लक्ष्यों को वैध साधनों द्वारा प्राप्त नहीं कर पाते वे इतने हताश हो जाते हैं कि शराब और अन्य मादक द्रव्यों का सेवन करना आरम्भ कर देते हैं । स्टार्क रोडनी (1975): "अलकोलिज्म एण्ड ड्रिग ऐडिग्सन" इन सोसल प्रोबलम्स में मादक द्रव्यों के प्रयोग को मनोवैज्ञानिक कारण बताते हुए बताते हैं हैं कि, "मनौवैज्ञानिकों ने मादक द्रव्य - सेवन व द्रव्य-निर्भरता को मुख्यतः 'प्रबलीकरण' (Reinforcement) सिद्धांत, 'व्यक्तित्व' सिद्धांत, 'शक्ति' सिद्धांत, व 'क्षीण स्व' (weakened self) सिद्धांत के आधार पर समझाया है। 'प्रबलीकरण' सिद्धांत में अबराहम विलकर (Strak Rodney, 1975 : 102) ने बताया है कि मादक द्रव्यों की सुखद अनुभूतियां उनके उपयोग को बढ़ावा देती हैं। 'व्यक्तित्व' सिद्धांत ने मादक पदार्थो के सेवन को मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति अथवा कुछ मनोवैज्ञानिक दोषों/कमजोरियों के लिए क्षतिपूर्ण करने के आधार पर समझाया है । यह (सिद्धांत) मादक द्रव्य निर्भरता से जुड़े हुए कुछ विशिष्ट व्यक्तित्व सम्बन्धी लक्षणों की चर्चा करता है तथा द्रव्य - निर्भरता के कारण में 'निर्भर व्यक्तित्व' पर बल देता है ।" aad एवं शोस्टक (1977:111) : भारत में शराब की बिक्री 1988 और 1998 के बीच 20 गुना बढ़ गयी है। इस समय पूरे देश में मद्यसारिकों की संख्या 50 लाख आंकी गयी है। सन् 1948 में जब शराब की बिक्री से एक वर्ष में लगभग 50 करोड़ रूपये की आमदनी थी, 1998 में वह एक वर्ष में 15,000 करोड़ रूपये बतायी गयी थी । देशी शराब पीने वालों का खर्च एक वर्ष में 60,000 करोड़ रूपये आंका गया है। भारत में एक व्यक्ति की शराब की खपत सबसे अधिक केरल में एक व्यक्ति पर 8.3 लीटर और उसके बाद पंजाब में 7.9 लीटर, जबकि पूरे देश में औसत खपत 5.7 लीटर है।" जूलियन जोसेफ (1977): सोसल प्रोवलम्स, प्रेनटिस हाल, इगसीबुड किलिफ, न्यू जरसे ने मादक द्रव्यों का व्यसन के बारे में अपने विचार कुछ इस प्रकार व्यक्त किए है, "द्रव्य व्यसन का अनेक बार सेवन इतना खतरनाक समझा जाता है और कभी-कभी इतना अनैतिक व असामाजिक माना जाता है कि यह आम जनता में अनेक प्रकार से प्रतिकूल मनोभाव जागृत करता है । परन्तु कुछ द्रव्य सापेक्षित रूप से अघातक तथा व्यसनहित होते हैं और उनमें हानिकारक शारीरिक प्रभाव भी नहीं पाये जाते हैं। ऐसे द्रव्यों का उपयोग हेरोइन, कोकीन, व एल.एस. डी. जैसे अवैध द्रव्यों के प्रयोग से तथा शराब-तम्बाकू, वार्विटयुरेट तथा ऐम्फेटामाइन जैसे वैध द्रव्यों के सेवन से सुस्पष्ट विपरीत होता है, क्योंकि यह सभी अवैध और दुरूपयोग किए जाने वाले वैध द्रव्य इनके सेवन करने वाले व्यक्तियों पर स्पष्ट हानि कारक शारीरिक प्रभाव डालते है"। पीले, स्टेनसन एण्ड ब्रोडिसकी (1975): "लव एण्ड ऐडिक्सन, टेपलिंगर न्यूयार्क ने (Reinforcement) सिद्धांत अथवा भय 'क्षीणस्व' (Weakened self) Fear सिद्धांत में कहा है, "कि मादक द्रव्यों का व्यसन आधुनिक जीवन की परिस्थितियों के प्रति भय और असुरक्षा की अनुभूतियों के कारण है ।" स्टारक रोडनी (1975:102): 'अलकोहोलिज्म एण्ड ड्रग ऐडिक्सन', इन सोसल प्रावलम्स, रेनडोम हाऊस, टोरोन्टो, अपने प्रवलीकरण सिद्धांत में (Reinforcement) ने बताया कि मादक द्रव्यों की सुखद अनुभूतियां उनके उपयोग को बढावा देती हैं । व्यक्तित्व सिद्धांत ने मादक पदार्थो के सेवन को मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति अथवा कुछ मनोवैज्ञानिक दोषों/कमजोरियों के लिए क्षतिपूर्ति करने के आधार पर समझाया है । यह सिद्धांत मादक द्रव्य निर्भरता से जुड़े हुए कुछ विशिष्ट व्यक्तित्व सम्बन्धी लक्षणों की चर्चा करता है तथा द्रव्य निर्भरता के कारण में निर्भर व्यक्तित्व पर बल देता है ।" कल्याण मंत्रालय भारत सरकार (2005): "शोध परियोजना" हाल ही में कल्याण मंत्रालय ने आसानी से मादक पदार्थो की बुराईयों की चपेट में आ जाने वाले जनसंख्या के विभिन्न ग्रुपों तथा विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण के आधार पर नशीले पदार्थो के दुरूपयोग की समस्याओं के राष्ट्रव्यापी आकलन के लिए एक सामान्य प्रपत्र पर 31 शोध अध्ययन कराएँ । इस परियोजना (सर्वेक्षण) के प्रमुख निष्कर्ष थे - "1. सभी धर्मों और जातियों के ग्रुपों में नशे की लत पाई गई । ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कोई खास धर्म इससे ज्यादा प्रभावित है या उसके लोगों पर ही इसका ज्यादा असर पड़ने की आशंका होती है। जातीय ग्रुपों के बारे में भी यही बात सही है । 3. नशे की लत अपनाने के पीछे जिज्ञासा, प्रयोग करना, हमउम्र लोगों का दबाव तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण पाए गए।
साहित्य का पुर्नावलोकन निःसंदेह, सामाजिक अनुसन्धान के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक शोध के प्रमुख सोपानों के अन्तर्गत "साहित्य का पुनरावलोकन" तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षाऐं कर ली जाय तो यह जान लेता है कि प्रस्तुत अनुसाधन कार्य अनुभविक रूप में सम्पादित किए जा चुके है, तथा कौन-कौन सी अध्ययन पद्धतियां व प्रविधियां उन में प्रयोग की गयीं, और किस अनुसंधान - अभिकल्प को अपनाया गया; साथ ही तथ्य सम्बन्धित प्रमुख निदान तथा समस्याऐं क्या-क्या रहीं है? यह निर्विवाद सत्य है कि प्रत्येक सामाजिक समस्या का देश एवं परिस्थियों से घनिष्ठ तथा प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है, अतः इस दृष्टि से भी पूर्व अध्ययनों से सम्बन्धित साहित्य की समीक्षा करना अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण ही नही होता; अपितु कि अनिवार्य आवश्यकता होती है। परिवर्ती परिवेश में अपने अनुसंधान कार्य में क्या-क्या समस्याऐं जनित हो सकती हैं ? किन पद्धतियों व प्रविधियों से अध्ययन करना उपयुक्त रहेगा? किन-किन पहलुओं, आयामों तथा कारकों का अध्ययन; पूर्व में हो चुका है ? और किन पहलुओं का नहीं; तथा किस दृष्टिकोण से अध्ययन करना अवशेष है? अध्ययन किस भाँति किया जाय; कि अनुसंधान कार्य सरलता, सहजता तथा सुगमता से वस्तुनिष्ठ तथा वैज्ञानिक रूप में पूर्ण हो जाय तथा शोधकर्ता को समय, धन तथा श्रम भी कम अपव्यय करना पड़े; इत्यादि यह सब कुछ एक अध्ययनकर्ता को साहित्य के पुनरावलोकन तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षा कर लेने से स्पष्ट हो जाता है। इस प्रसंग में प्रो. बेसिन का कथन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बेसिन एफ. एच. एक के अनुसार, "प्रत्येक अनुसंधान कार्य में सम्बन्धित साहित्य एवं पूर्व अध्ययनों की समीक्षा " अनुसंधान योजना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सोपान हुआ करता है क्योंकि प्रत्येक अनुसंधान कार्य, आरम्भ में अस्पष्ट होने के कारण दुरूह एवं जटिल प्रतीत होता है। सम्बन्धित साहित्य के पुनरावलोकन से अनुसंधान की जटिलता एवं अस्पष्टता दोनों ही समस्याऐं लगभग समाप्त हो जाती है। इसका कारण यह है कि साहित्य के पुनरावलोकन से यह स्पष्ट हो जाता है कि शोध अध्ययन के लिए विश्वसनीय, तथा वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री किस भाँति तथा कैसे प्राप्त हो सकती है? साहित्य के पुनरावलोकन तथा समीक्षा करने के कुछ अन्य प्रमुख लाभ इस प्रकार हैअध्ययनकर्ता को शोध समस्या के सन्दर्भ में सामान्य ज्ञान विकसित हो जाता है । अनुसंधान कार्य हेतु अनुसंधान प्रारूप एवं उपयोगी तथा प्रविधियां अनुसंधित्सु को स्पष्ट हो जाती है कि अध्ययन कैसे सम्पादित करना है। साहित्य के पुनरावलोकन से अध्ययनकर्ता को अनुसंधान सम्बन्धी भ्रमात्मक तथा सन्देहात्मक स्थितियां सुस्पष्ट हो जाती है; सम्प्रति अनुसंधान कार्य के सम्बन्ध में अनुसंधानकर्ता का शोध स्पष्ट हो जाने की बजह से अध्ययन करने में सरलता हो जाती है। इस प्रकार साहित्य के पुनरावलोकन तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षा कर लेने से अध्ययनकर्ता को अनुसंधान हेतु शोध-प्रारूप, अध्ययन-पद्धतियां तथा प्रविधियों के ज्ञान के अतिरिक्त, दिशा बोध हो जाता है क्योंकि ऐसा करने से अनुसंधित्सु में अतिरिक्त अभिज्ञान तथा अन्तर्दृष्टि विकसित हो जाती है । प्रोफेसर बोर्ग जी.पी. के शब्दों में, "सम्बन्धित साहित्य का पुनरावलोकन किसी भी अनुसंधानकर्ता को इस योग्य बना देता है कि वह पूर्व में किए हुए अनुसंधान कार्यों का पता लगा सकें, और उनका अध्ययन करके तथ्य [एक सौ बाईस] सम्बन्धित समीक्षा कर सके ऐसा करने से अध्ययनकर्ता अपने अनुसंधान कार्य के लिए उपयुक्त उपकरणों तथा पद्धतियों इत्यादि का उचित चयन करके अतिरिक्त ज्ञानार्जन का आधार पर अनुसंधान हेतु स्पष्ट दिशा प्राप्त कर लेता है"। सर्वश्री पुरुषोत्तम के अनुसार "सामान्यतः मानव-ज्ञान के तीन पक्ष - ज्ञान को एकत्रित करना एक दूसरे तक पहुँचाना अतिरिक्त ज्ञान में वृद्धि करना, होते हैं। ये तीनों ही मूलभूत तत्व अनुसंधानों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते है, जो कि वास्तविकता के समीप / निकट आने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहते हैं। अतिरिक्त ज्ञान के अर्जन तथा विस्तृत ज्ञान - भण्डार में इनका योगदान, प्रत्येक क्षेत्र में मानव द्वारा किए गए निरन्तर प्रयासों की सफलता को सम्भव बनाता है। उसी भाँति अनुसंधान प्रक्रिया में "साहित्य का पुनरावलोकन" अनुसंधान उपक्रम का एक ऐसा महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सोपान होता है; जो कि वर्तमान के गर्त में निहित होता है अर्थात् मनुष्य अपने अतीत में संचरित एवं आलेखित ज्ञान के आधार पर अनुसंधान कार्य के माध्यम से नवीन ज्ञान का सृजन करता है । सर्वश्री सिंह एस. पी. के अनुसार, किसी भी शोध- समस्या का चयन कर लेने के पश्चात, यह आवश्यक ही नहीं; अपितु शोध की अनिवार्य आवश्यकता होती है कि उस अनुसंधान विषय से सम्बन्धित उपलब्ध साहित्य का पुरावलोकन कर; तथ्यसम्बन्धित विषयगत समीक्षाएं कर ली जांय क्योंकि ऐसा करने से - शोधकर्ता के मन पटल में अध्ययन समस्या के सन्दर्भ में एक स्पष्ट अन्तर्दृष्टि तथा ज्ञान बोध विकसित हो जाता है। शोधकर्ता को अनुसंधान कार्य हेतु उपयुक्त पद्धतियों तथा प्रविधियों का आभास तथा समुचित ज्ञान हो जाता है। साहित्य की समीक्षा अध्ययनार्थ निर्मित परिकल्पनाओं / शोध - प्रश्नों के निर्माण में सहायक होती है। विभिन्न शोध-अध्येताओं द्वारा एक ही अनुसंधान कार्य को फिर से दोहराने की गलती नहीं हो पाती और अध्ययन - समस्या से सम्बन्धित उन आयामों पर, जिन पर अन्य शोध- अध्येताओं ने ध्यान नहीं दिया अथवा अछूते रह गए; या फिर अज्ञानतावश छूट गए; शोधकर्ता को उन समस्त अछूते आयामों का भी आभास हो जाता हैं। सर्वश्री स्टॉउफर सेम्युल रिब्यू का कहना है कि सम्बन्धित साहित्य के गहन अध्ययन एवं उसकी समीक्षा के अभाव के अभाव में कोई भी अन्वेषण कार्य करना, "अन्धे के तीर" के तुल्य होता है। साहित्य समीक्षा के अभाव में कोई भी अनुसंधान कार्य एक कदम भी प्रगति पथ पर अग्रसर नहीं हो सकता; जब तक कि अनुसंधानकर्ता को इस बात का ज्ञान तथा जानकारी नहीं है कि प्रस्तुत अनुसंधान के क्षेत्र में किन-किन पक्षों पर कितना कार्य हो चुका है ? कौन-कौन से स्रोत प्राप्त है? तब तक वह अध्ययनकर्ता न तो अध्ययन - समस्या का चयन कर सकता है, और न ही उसकी रूपरेखा तैयार कर, अनुसंधान कार्य को गति प्रदान कर सकता है। इसका मोलिक कारण यह है कि प्रत्येक अनुसंधान कार्य का प्रमुख उद्देश्य; किसी समस्या विशेष पर नवीन दृष्टिकोण से चिन्तन तथा विचार करके उसमें नवीनता लाना अथवा समस्या की नवीन ढंग से तार्किक व्याख्या प्रस्तुत करना होता है। उपरोक्त समस्त प्रतिनिधि बिन्दुओं को दृष्टिपथ में रखकर शोधकर्ता ने अपने अनुसंधान कार्य के सुचारू संचालन तथा सफलता हेतु अध्ययन करने से पूर्व सम्बन्धित साहित्य का पुनरावलोकन तथा पूर्व अध्ययनों की समीक्षा करने का प्रयास किया है ताकि प्रस्तुत अध्ययन को उचित दिशा एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्राप्त हो सके। भारत में युवकों में मादक द्रव्यों के सम्बन्ध में अनुसंधान कार्य अपेक्षाकृत अत्यन्त ही अल्प हुऐ है फिर भी तत्सम्बन्धित शोध अध्ययनों को निम्नानुसार प्रस्तुत किया गया है :कुछ अन्य अध्ययनों के आधार पर स्थिर किया गया है कि अवसाद और समाज विरोधी व्यक्तित्व वाले लोग मद्यपान करते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि कुसमायोजित व्यक्तियों के मद्यपान करने की सम्भावना अधिक होती है । लेकिन आवश्यक नहीं है कि कुसमायोजित व्यक्ति में मद्यपान की आदत पड़ ही जाय। मद्यपान करने वाले व्यक्तियों की व्यक्तित्व विशेषताऐं सामान्य व्यक्तियों की अपेक्षा भिन्न होती हैं । आदतजन्य मद्यपान करने वाले व्यक्ति में प्रतिबल सहनशीलता कम, ऋणात्मक आत्म-प्रतिभा , अनुपयुक्तता की भावनाएँ और अवसाद की भावनाएँ पायी जाती हैं । जब मद्यपान करने वाले व्यक्ति बहुत अधिक मद्यपान करते हैं और उसकी स्थिति अस्पताल में भर्ती या उपचार वाली हो जाती है तो उसके व्यक्तित्व में कुछ निम्न प्रमुख विशेषताएँ पायी जाती हैं- मनोरचनाओं का अतिरंजित प्रयोग करता है जिसमें युक्तिकरण और प्रक्षेपण का अधिक प्रयोग करता है । इस अवस्था में वह अपने आवेगों को नियंत्रित करने में कठिनाई का अनुभव करता है। उसमें उत्तरदायित्व का अभाव भी पाया जाता है । मनोवैज्ञानिक मेधता- जिन अध्ययनों में मद्यपान करने वाले और मद्यपान न करने वाले व्यक्तियों की व्यक्तित्व विशेषताओं की तुलना की गयी है, उन अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि मद्यपान करने वाले व्यक्ति संवेगात्मक रूप से अपरिपक्व होते हैं । मद्यपान करने वाले व्यक्ति चाहते हैं कि समाज के लोग उनकी प्रशंसा करें । मद्यपान करने वाले व्यक्तियों में यह भी देखा गया है कि इन व्यक्तियों में असफलता के कारण हीनता की भावनाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। इनमें कुण्ठा के प्रति सहनशीलता भी निम्न स्तर की होती है। वे अपने आपको अनुपयुक्त भी अनुभव करते हैं । कुछ अन्य अध्ययनकर्ताओं ने अपने अध्ययनों के आधार पर यह स्थिर किया कि व्यक्ति अपने पुरुषत्व और अपनी उपयुक्तता की भावना को स्थापित और स्थिर करने के लिए मद्यपान करता है। व्यक्तियों को अपने शराब पीने पर नियंत्रण नहीं होता है । अध्ययन D.W.Goodwin,et.al., एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर ने यह देखा गया कि वे बच्चे जिनके पिता मद्यपान करने वाले थे, उन्हें उन परिवारों पाला गया जहाँ मद्यपान नहीं होता था । इस प्रयोगात्मक समूह की तुलना नियंत्रित समूह से की गयी । नियंत्रित समूह में वे बालक थे जिनके परिवार में कभी किसी के द्वारा मद्यपान नहीं किया गया था । इस अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला कि नियंत्रित समूह के बालकों की अपेक्षा प्रयोगात्मक समूह के बालकों से मद्यपान की समस्याएँ दो गुनी थीं। मस्तिष्क सर्जरी जर्मनी में एक अध्ययन के अनुसार जिस प्रकार खाने और सैक्स की पूर्ति की इच्छा होती है, ठीक उसी प्रकार मद्यपान की इच्छा होती है । इन इच्छाओं को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क के कुछ विशिष्ट केन्द्रों का ऑपरेशन किया जाता है। इसके लिए के मस्तिष्क के इन विशिष्ट केन्द्रों का लगभग पचास क्यूबिक किलोलीटर के क्षेत्र को उदासीन कर दिया जाता है फिर रोगी को पीने की इच्छा नहीं उत्पन्न होती है । इनदिनेशस्मथ, अल्फ्रेड : "द ड्रग ऐडिक्ट एज ए साइकोपेथ" अमेरिकन सोशियोलोजीकल रिव्यू, न्यूयार्क । मर्टन, रोवर्ट, के एण्ड निसवेट रोवर्ट, ए : कनटेम्परेरी सोसल प्रालम्स ने प्रतिमान उल्लंघन के विभिन्न प्रकारों का महत्व को समझने की दृष्टि से विपथगामी और अ- अनुपालक मद्यसारिकों का तीन समूहों में वर्गीकरण किया जा सकता हैः स्थिर, आवर्ती, और पठार । स्थिर मद्यसारिक वह है जो निरन्तर मदिरा में सन्तृप्त रहता है । आवर्ती मद्यसारिक वह है जो लंबी समयावधियों तक नहीं पीता और फिर रंगरेलियां मनाता है। अधित्यका व पठार मद्यसारिक वह है जो उपरोक्त दोनों किस्मों में से प्रत्येक से अधिक जानबूझ कर पीता है और मदिरा से अधिकतम प्रभावों को चाहने की ओर प्रवृत्त होता है। उसे हर समय संतृप्ति का एक विशेष स्तर बनाये रखने की इच्छा होती है, परन्तु उसमें अपनी मदिरा को प्रभाव को लंबे समय की अवधि तक फैलाने की क्षमता होती है । " बेकर, हावर्ड, एस, : "द आउट साइडर" फ्री प्रेस, न्यूयार्क : ने मादक द्रव्यों के सेवन सोशियो-साइकिलोजीकल कारण बताते हुए हाबर्ड बेकर और काइ एरिकसन ने सामाजिक मनोवैज्ञानिक 'लेबलिंग' सिद्धांत में बताया है कि एक व्यक्ति व्यसनी व शराबी के लेबल लगने के दबाव के कारण मादक द्रव्य सेवनकर्ता व शराबी बन जाता है । परन्तु यह सिद्ध समझाने में असफल रहा है कि व्यक्ति मादक द्रव्य-व्यवहार में पहले कैसे फंसते हैं जिसके कारण उन्हें सामाजिक दृष्टि से 'विचलित व्यसनी' कहा जाता है।" बासकिन रिचर्ड : "सोसल प्राबलम्स", मैकग्रो हिल एण्ड को. न्यूयार्क, एक हज़ार नौ सौ चौंसठ, ने विश्व में मादक द्रव्यों की खपत को मूल्यों में बताते हुए निष्कर्ष निकाला कि, "यदि हम विभिन्न देशों के बीस वर्ष की आयु से अधिक के मदिरा सेवन करने वालों की तुलना करें, तो सबसे अधिक संख्या फ्रांस में में पाई जाती है; उसके पश्चात अमेरिका ; स्वीडन , स्वटजरलैण्ड , डेनमार्क , नार्वे , कनाडा , आस्ट्रेलिया , इंग्लैंड , और इटली में पाई जाती है । " चेन, इशोडोर एट आल : "साइकोलोजीकल फक्सन आफ ड्रग यूज" में मद्यपान प्रयोग कर्ताओं के लक्ष्यों को बताते हुए लिखते है कि, "निर्भर व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों को दूसरों से भावात्मक समर्थन व ध्यान चाहिए और इनके अभाव में वे उसे मादक द्रव्यों के सेवन से स्थानापन्न करते हैं । चेन ने न्यूयार्क में नारकोटिक्स के अध्ययन में पाया कि जिन व्यक्तित्व - लक्षणों वाले व्यक्ति मादक पदार्थो को सेवन करते हैं, वे लक्षण हैंः निष्क्रियता, निम्न आत्माभिमान, आत्म-निदेशन की सीमित क्षमता, अन्य व्यक्तियों में अविश्वास, कुण्ठाओं और तनावों का सामना करने में कठिनाई, पौरूषी पहचान की अपर्याप्तता तथा बचपन के संघर्षों के समाधान की असफलता ।" डेविड मेक क्लेलेण्ड : ने द्रव्यव्यसन के कारण, व्यक्तित्व सिद्धांत को चुनौती देते हुए शक्ति सिद्धांत को प्रस्तुत किया है जिसके आधार पर उसने द्रव्य दुरूपयोग को व्यक्ति की शक्ति आवश्यकता की अभिव्यक्ति के संदर्भ में समझाया है। हल्का और कभी-कभी शराब पीने वाले व्यक्ति को शराब पीने से बड़ी हुई सामाजिक शक्ति की अनुभूति मिलती है, जबकि भारी शराबी को बड़ी हुई व्यक्तित्व शक्ति की अनुभूति मिलती है। रिचर्ड ब्लूम : ने पीने के दो सन्दर्भों पर अपने अध्ययन निष्कर्षो में लिखा है कि, " निर्धारित सामाजिक संरूप के संदर्भ में जहां पीना समाज की संस्कृति से जुड़ा हुआ है और वह प्रतिदिन की दिनचर्या का अंग समझा जाता है और व्यक्तियों को उसमें कोई मनोवैज्ञानिक विभव / सम्भावना प्रतीत नहीं होती; मदिरा सेवन को संस्कृति और समाज के लिये विघटनकारी माने जाने और व्यक्तियों द्वारा उसमें आदी होने की संभावना देखने और पीने को विलास और पलायन का साधन समझने के संदर्भ में । शराब पीने वालों का वर्गीकरण 'गैर-व्यसनी' , 'व्यसनी' , और 'चिरकालिक मद्यसारिक' के रूप में किया गया है। गैर-व्यसनियों को प्रयोगकर्ताओं' और नियमितों की श्रेणी में रखा जाता है ।" 'समाजशास्त्रीय' सिद्धांत की मान्यता है कि परिस्थितियाँ अथवा सामाजिक पर्यावरण व्यक्ति को मादक द्रव्यों का व्यसनी बनाते हैं । सदरलैण्ड के विभिन्न सम्पर्क सिद्धांत के आधार पर यदि द्रव्य - सेवन समझाया जाये, तो उसके अनुसार मादक द्रव्यों का लेना दूसरे व्यक्तियों से सीखा हुआ व्यवहार हैं, विशेष रूप से छोटे घनिष्ठ समूहों से । 'सामाजिक सीखने' का सिद्धात, जो कि विभिन्न सम्पर्क सिद्धांत और प्रबलीकरण सिद्धांत का विस्तृत रूप है । एकर्स और बर्जेस द्वारा प्रतिपादित किया गया था । 'प्रबलीकरण' सिद्धांत जब यह मानता है कि मादक द्रव्यों पर निर्भरता मात्र एक 'प्रतिबद्ध सीखना' है, सामाजिक सीख का सिद्धांत सीखने की प्रक्रिया में कार्य करने वाले बलयुक्तकर्ता जोर देने वालों के सामाजिक स्रोतों का मूल्यांकन करता है। प्रबलीकरण उन व्यक्तियों के सम्पर्क से होता है जो मादक द्रव्य सेवन के पक्ष में होते है । 'तनाव' सिद्धांत व्यक्तियों पर उस जोरदार दबाव पर बल देता है जो उन्हें आन्तरीकृत प्रतिमानों से विचलित होने के लिए बाध्य करते हैं । " मर्टन के अनुसार इस दबाव का स्रोत लक्ष्यों और साधनों के बीच विसंगति है। जो व्यक्ति अपने लक्ष्यों को वैध साधनों द्वारा प्राप्त नहीं कर पाते वे इतने हताश हो जाते हैं कि शराब और अन्य मादक द्रव्यों का सेवन करना आरम्भ कर देते हैं । स्टार्क रोडनी : "अलकोलिज्म एण्ड ड्रिग ऐडिग्सन" इन सोसल प्रोबलम्स में मादक द्रव्यों के प्रयोग को मनोवैज्ञानिक कारण बताते हुए बताते हैं हैं कि, "मनौवैज्ञानिकों ने मादक द्रव्य - सेवन व द्रव्य-निर्भरता को मुख्यतः 'प्रबलीकरण' सिद्धांत, 'व्यक्तित्व' सिद्धांत, 'शक्ति' सिद्धांत, व 'क्षीण स्व' सिद्धांत के आधार पर समझाया है। 'प्रबलीकरण' सिद्धांत में अबराहम विलकर ने बताया है कि मादक द्रव्यों की सुखद अनुभूतियां उनके उपयोग को बढ़ावा देती हैं। 'व्यक्तित्व' सिद्धांत ने मादक पदार्थो के सेवन को मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति अथवा कुछ मनोवैज्ञानिक दोषों/कमजोरियों के लिए क्षतिपूर्ण करने के आधार पर समझाया है । यह मादक द्रव्य निर्भरता से जुड़े हुए कुछ विशिष्ट व्यक्तित्व सम्बन्धी लक्षणों की चर्चा करता है तथा द्रव्य - निर्भरता के कारण में 'निर्भर व्यक्तित्व' पर बल देता है ।" aad एवं शोस्टक : भारत में शराब की बिक्री एक हज़ार नौ सौ अठासी और एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के बीच बीस गुना बढ़ गयी है। इस समय पूरे देश में मद्यसारिकों की संख्या पचास लाख आंकी गयी है। सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में जब शराब की बिक्री से एक वर्ष में लगभग पचास करोड़ रूपये की आमदनी थी, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में वह एक वर्ष में पंद्रह,शून्य करोड़ रूपये बतायी गयी थी । देशी शराब पीने वालों का खर्च एक वर्ष में साठ,शून्य करोड़ रूपये आंका गया है। भारत में एक व्यक्ति की शराब की खपत सबसे अधिक केरल में एक व्यक्ति पर आठ दशमलव तीन लीटरटर और उसके बाद पंजाब में सात दशमलव नौ लीटरटर, जबकि पूरे देश में औसत खपत पाँच दशमलव सात लीटरटर है।" जूलियन जोसेफ : सोसल प्रोवलम्स, प्रेनटिस हाल, इगसीबुड किलिफ, न्यू जरसे ने मादक द्रव्यों का व्यसन के बारे में अपने विचार कुछ इस प्रकार व्यक्त किए है, "द्रव्य व्यसन का अनेक बार सेवन इतना खतरनाक समझा जाता है और कभी-कभी इतना अनैतिक व असामाजिक माना जाता है कि यह आम जनता में अनेक प्रकार से प्रतिकूल मनोभाव जागृत करता है । परन्तु कुछ द्रव्य सापेक्षित रूप से अघातक तथा व्यसनहित होते हैं और उनमें हानिकारक शारीरिक प्रभाव भी नहीं पाये जाते हैं। ऐसे द्रव्यों का उपयोग हेरोइन, कोकीन, व एल.एस. डी. जैसे अवैध द्रव्यों के प्रयोग से तथा शराब-तम्बाकू, वार्विटयुरेट तथा ऐम्फेटामाइन जैसे वैध द्रव्यों के सेवन से सुस्पष्ट विपरीत होता है, क्योंकि यह सभी अवैध और दुरूपयोग किए जाने वाले वैध द्रव्य इनके सेवन करने वाले व्यक्तियों पर स्पष्ट हानि कारक शारीरिक प्रभाव डालते है"। पीले, स्टेनसन एण्ड ब्रोडिसकी : "लव एण्ड ऐडिक्सन, टेपलिंगर न्यूयार्क ने सिद्धांत अथवा भय 'क्षीणस्व' Fear सिद्धांत में कहा है, "कि मादक द्रव्यों का व्यसन आधुनिक जीवन की परिस्थितियों के प्रति भय और असुरक्षा की अनुभूतियों के कारण है ।" स्टारक रोडनी : 'अलकोहोलिज्म एण्ड ड्रग ऐडिक्सन', इन सोसल प्रावलम्स, रेनडोम हाऊस, टोरोन्टो, अपने प्रवलीकरण सिद्धांत में ने बताया कि मादक द्रव्यों की सुखद अनुभूतियां उनके उपयोग को बढावा देती हैं । व्यक्तित्व सिद्धांत ने मादक पदार्थो के सेवन को मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति अथवा कुछ मनोवैज्ञानिक दोषों/कमजोरियों के लिए क्षतिपूर्ति करने के आधार पर समझाया है । यह सिद्धांत मादक द्रव्य निर्भरता से जुड़े हुए कुछ विशिष्ट व्यक्तित्व सम्बन्धी लक्षणों की चर्चा करता है तथा द्रव्य निर्भरता के कारण में निर्भर व्यक्तित्व पर बल देता है ।" कल्याण मंत्रालय भारत सरकार : "शोध परियोजना" हाल ही में कल्याण मंत्रालय ने आसानी से मादक पदार्थो की बुराईयों की चपेट में आ जाने वाले जनसंख्या के विभिन्न ग्रुपों तथा विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण के आधार पर नशीले पदार्थो के दुरूपयोग की समस्याओं के राष्ट्रव्यापी आकलन के लिए एक सामान्य प्रपत्र पर इकतीस शोध अध्ययन कराएँ । इस परियोजना के प्रमुख निष्कर्ष थे - "एक. सभी धर्मों और जातियों के ग्रुपों में नशे की लत पाई गई । ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कोई खास धर्म इससे ज्यादा प्रभावित है या उसके लोगों पर ही इसका ज्यादा असर पड़ने की आशंका होती है। जातीय ग्रुपों के बारे में भी यही बात सही है । तीन. नशे की लत अपनाने के पीछे जिज्ञासा, प्रयोग करना, हमउम्र लोगों का दबाव तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण पाए गए।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
देहरादून, 22 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में सोमवार को बारिश से पहाड़ी राज्य में शीतलहर और ठंड का नया दौर शुरू हो गया है। राज्य में भारी बर्फबारी और बारिश की मौसम विभाग की चेतावनी के बाद अधिकांश निजी और सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं, धनौल्टी में बीती रात हुई बर्फबारी के बाद पर्यटक मंगलवार को पहुंच गए हैं। वे सोशल मीडिया पर धनौल्टी में हो रही बर्फबारी की तस्वीरें भी साझा कर रहे हैं। मसूरी के ला टिब्बा में भी सुबह बर्फबारी हुई। केदारनाथ, बदरीनाथ में भी सोमवार रात से भारी बर्फबारी हो रही है। रपट में कहा गया है कि चमोली जिले में गढ़वाल हिमालय के ऊपरी इलाकों में इस मौसम की सबसे भारी बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग ने कहा कि राज्य में अगले कुछ दिनों में तापमान में गिरावट आ सकती है। दुबई, 1 मार्च (आईएएनएस)। ग्रीस के युवा टेनिस खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास ने शुक्रवार को दुबई ड्यूटी फ्री चैम्पियनशिप के पुरुष एकल वर्ग के सेमीफाइनल में फ्रांस के गेल मोनफिल्स को कड़े मुकाबले में मात देकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। वर्ल्ड नंबर-11 सितसिपास ने वर्ल्ड नंबर-23 मोनफिल्स को कड़े मुकाबले में 4-6, 7-6 (7-4), 7-6 (7-4) से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। यह इन दोनों के बीच दूसरा मुकाबला था। इससे पहले दोनों सोफिया में एक-दूसरे के सामने हुए थे, जहां फ्रांस के खिलाड़ी ने सीधे सेटों में सितसिपास को हराया था। इस बार ग्रीस के खिलाड़ी ने दो घंटे 59 मिनट तक चले मुकाबले को जीत कर मोनफिल्स से हिसाब बराबर कर लिया। फाइनल में सितसिपास का सामना स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर और क्रोएशिया के बोर्ना कोरिक के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। सितसिपास ने साल के पहले ग्रैंड स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन में फेडरर को मात दी थी।
देहरादून, बाईस जनवरी । उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में सोमवार को बारिश से पहाड़ी राज्य में शीतलहर और ठंड का नया दौर शुरू हो गया है। राज्य में भारी बर्फबारी और बारिश की मौसम विभाग की चेतावनी के बाद अधिकांश निजी और सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं, धनौल्टी में बीती रात हुई बर्फबारी के बाद पर्यटक मंगलवार को पहुंच गए हैं। वे सोशल मीडिया पर धनौल्टी में हो रही बर्फबारी की तस्वीरें भी साझा कर रहे हैं। मसूरी के ला टिब्बा में भी सुबह बर्फबारी हुई। केदारनाथ, बदरीनाथ में भी सोमवार रात से भारी बर्फबारी हो रही है। रपट में कहा गया है कि चमोली जिले में गढ़वाल हिमालय के ऊपरी इलाकों में इस मौसम की सबसे भारी बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग ने कहा कि राज्य में अगले कुछ दिनों में तापमान में गिरावट आ सकती है। दुबई, एक मार्च । ग्रीस के युवा टेनिस खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास ने शुक्रवार को दुबई ड्यूटी फ्री चैम्पियनशिप के पुरुष एकल वर्ग के सेमीफाइनल में फ्रांस के गेल मोनफिल्स को कड़े मुकाबले में मात देकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। वर्ल्ड नंबर-ग्यारह सितसिपास ने वर्ल्ड नंबर-तेईस मोनफिल्स को कड़े मुकाबले में चार-छः, सात-छः , सात-छः से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। यह इन दोनों के बीच दूसरा मुकाबला था। इससे पहले दोनों सोफिया में एक-दूसरे के सामने हुए थे, जहां फ्रांस के खिलाड़ी ने सीधे सेटों में सितसिपास को हराया था। इस बार ग्रीस के खिलाड़ी ने दो घंटे उनसठ मिनट तक चले मुकाबले को जीत कर मोनफिल्स से हिसाब बराबर कर लिया। फाइनल में सितसिपास का सामना स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर और क्रोएशिया के बोर्ना कोरिक के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। सितसिपास ने साल के पहले ग्रैंड स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन में फेडरर को मात दी थी।
परिष्कृत मेट्रोसेक्सुअल पुरुषों के स्थान पर,एक सुंदर मैनीक्योर, जो हर लड़की ईर्ष्या करती है, बालों वाली दाढ़ी आती है, साहस और असभ्य दिखती है। फैशन में एक नया चलन धीरे-धीरे पूरी दुनिया को कवर कर रहा है, और अब, कैटवॉक पर, कपड़े लाड़ सुंदरियों द्वारा नहीं दिखाए जाते हैं, लेकिन मजबूत सेक्स के क्रूर प्रतिनिधि, आक्रामक रूप से सेक्सी दिखते हैं। शहरी "अमेरिकन लंबरजैक" समाज में पुरुष शोधन के थोपे गए मानकों के थक जाने के बाद दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत अच्छी तरह से खुद की देखभाल करने के लिए मेट्रो ने कुछ समय पहले अपने पदों को आत्मसमर्पण कर दिया है, और सभी एक शैली के उद्भव के लिए धन्यवाद करते हैं जिसका नाम अंग्रेजी से उधार लिया गया है। बोझिल - यह कौन है? शब्द लम्बरजैक का अनुवाद "लंबरजैक" के रूप में किया जाता है, औरउत्तरी अमेरिकी वुडकटर्स की उपस्थिति, जो ताजी हवा में बहुत समय बिताते हैं, ने आधुनिक शैली का आधार बनाया जो लोकप्रियता हासिल कर रहा है। लैम्बर्ससेक्सुअल की मुख्य विशेषताएं हैं, निश्चित रूप से, चेहरे के बाल और कई टैटू (तथाकथित आस्तीन - कलाई से गर्दन तक), व्यक्तित्व पर जोर देना। दाढ़ी - एक असली आदमी के गहने, जिसके लिएयह ध्यान रखना आवश्यक है, क्योंकि खुद से यह खूबसूरती से नहीं बढ़ेगा। इसलिए, स्वच्छ उपस्थिति बनाए रखने के लिए पेशेवरों की ओर मुड़ना अक्सर आवश्यक होता है, क्योंकि लापरवाही स्वागत योग्य नहीं है। रूस में, एक ठोस दाढ़ी एक बार एक राष्ट्रीय विशेषता थी, और पीटर I के आदेश के बाद, कई पुरुषों ने उसके साथ भाग लिया, आत्महत्या कर ली। ऐसा लगता है कि हम अब अपने मूल में लौट रहे हैं। "कनाडाई लंबरैक" नामक फैशन प्रवृत्तिहाल ही में हिपस्टर्स के हाल के प्रवाह के साथ जुड़ा हुआ है जो कला-घर की संस्कृति, मूल संगीत, लेखक सिनेमा और प्रचारक आंतरिक स्वतंत्रता के शौकीन हैं। बेशक, किसी को यह स्वीकार करना चाहिए कि लैंबर्ससेक्सुअल, मेंअसली लकड़हारे के विपरीत, उन्होंने कभी अपने हाथों में कुल्हाड़ी नहीं रखी। एक विशिष्ट शहरवासी, जो जानबूझकर असभ्य प्रतीत होता है, को आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में काम करने का एक अच्छा वेतन मिलता है। वह मानसिक कार्य में लगा हुआ है, एक लैपटॉप के लिए कार्यालय में बैठता है और नवीनतम iPhone मॉडल को जाने नहीं देता है। वैसे, ऐप्पल से सबसे आधुनिक गैजेट्स, साथ ही साथ महंगे धूम्रपान पाइप, एक क्रूर आदमी की दुकान में मिलना सुनिश्चित हैं। फैशन ट्रेंड का हर प्रतिनिधि नहीं हैवह पुरुषों के सौंदर्य प्रसाधनों पर बहुत पैसा खर्च करता है, लेकिन वह अपने बालों और दाढ़ी पर नज़र रखने की कोशिश करता है, जो कनाडाई लकड़हारा निश्चित रूप से नहीं करता है। बहुत से लोग फिट रहते हैं और काम के बाद पब या ट्रेंडी क्लब में नहीं बल्कि जिम जाते हैं। मुझे कहना होगा कि जो महिलाएं अपने पास शारीरिक और नैतिक रूप से असहाय पुरुषों से थक चुकी हैं, वे नई प्रवृत्ति से अविश्वसनीय रूप से खुश हैं। निष्पक्ष छवि क्रूर छवियों से प्रसन्न होती है, क्योंकि एक आकर्षक और अच्छी तरह से तैयार दाढ़ी वाला आदमी, और यहां तक कि काम में सफल होना - क्या यह एक सपना नहीं है? लिरेक्सुअल प्रकृति से प्यार करता है और अपने साथी के साथ लोकप्रिय रिसॉर्ट्स में नहीं, बल्कि एक पहाड़ी या जंगली इलाके में रहता है, जो सामाजिक नेटवर्क के लिए एक अनिवार्य फोटो रिपोर्ट के साथ अपनी यात्राओं की पुष्टि करता है। ऐसा लगता है कि पुरुष वास्तव में परेशान नहीं करते हैंशैलीः वे साधारण टी-शर्ट, बुना हुआ स्वेटर, फर टोपी, फीका जीन्स, भारी जूते और निश्चित रूप से, व्यापक शर्ट (कैनेडियन लम्बरजैक के राष्ट्रीय कपड़े - फलालैन "टैटन") पहनते हैं। क्रूर दाढ़ी वाले पुरुषों को जैकेट में और पाया जा सकता हैबिजनेस सूट जो उनके लिए अविश्वसनीय हैं। यह स्पष्ट है कि आधिकारिक कार्यक्रम में वे अवसर के अनुसार कपड़े पहनते हैं, लेकिन एक ही समय में रहते हैं। जैसा कि स्टाइलिस्ट मजाक करते हैं, लैम्बर्ससेक्सुअल एक सुंदर छंटनी वाली दाढ़ी वाला आदमी है जो माना जाता है कि जंगल से बाहर आया था, लेकिन उसके हाथ में एक कुल्हाड़ी के बजाय एक फैशनेबल गैजेट। क्या पहनना है? आधुनिक के बाद अशिष्ट आदमीदिशा, साहसी लकड़हारे के समान, और "कैनेडियन लकड़हारा" नामक शैली के पूरक के रूप में, बिना किसी तामझाम के, बिना किसी तामझाम के ढीली टी-शर्ट, ढीली टी-शर्ट पहनने में मदद करेगा। ऊन, मोटे-मोटे स्वेटर और चमड़े की जैकेट से बने पैंट करेंगे। अक्सर लैम्बर्सएक्सुअल कपड़े में लेयरिंग का उपयोग करते हैंः वे हल्के रंग की टी-शर्ट के ऊपर ढीली शर्ट पहनते हैं। तो, शैली में कैनेडियन लम्बरजैक एक सख्त पुरुष छवि है। मजबूत सेक्स के प्रतिनिधि बताते हैं कि वे खुद फैशन बनाते हैं, और इसके रुझानों का पालन नहीं करते हैं। लापरवाह शैली न केवल बाहरी में प्रकट होती हैउपस्थिति, लेकिन जीवन और विचारों के तरीके में भी। एक आदमी स्पष्ट रूप से जानता है कि वह क्या चाहता है, और किसी भी तरह से यह हासिल करता है। एक व्यापारी जो हमेशा अच्छे आकार में होना चाहिए, आधुनिक फैशन को समझता है और समय के साथ बना रहता है।
परिष्कृत मेट्रोसेक्सुअल पुरुषों के स्थान पर,एक सुंदर मैनीक्योर, जो हर लड़की ईर्ष्या करती है, बालों वाली दाढ़ी आती है, साहस और असभ्य दिखती है। फैशन में एक नया चलन धीरे-धीरे पूरी दुनिया को कवर कर रहा है, और अब, कैटवॉक पर, कपड़े लाड़ सुंदरियों द्वारा नहीं दिखाए जाते हैं, लेकिन मजबूत सेक्स के क्रूर प्रतिनिधि, आक्रामक रूप से सेक्सी दिखते हैं। शहरी "अमेरिकन लंबरजैक" समाज में पुरुष शोधन के थोपे गए मानकों के थक जाने के बाद दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत अच्छी तरह से खुद की देखभाल करने के लिए मेट्रो ने कुछ समय पहले अपने पदों को आत्मसमर्पण कर दिया है, और सभी एक शैली के उद्भव के लिए धन्यवाद करते हैं जिसका नाम अंग्रेजी से उधार लिया गया है। बोझिल - यह कौन है? शब्द लम्बरजैक का अनुवाद "लंबरजैक" के रूप में किया जाता है, औरउत्तरी अमेरिकी वुडकटर्स की उपस्थिति, जो ताजी हवा में बहुत समय बिताते हैं, ने आधुनिक शैली का आधार बनाया जो लोकप्रियता हासिल कर रहा है। लैम्बर्ससेक्सुअल की मुख्य विशेषताएं हैं, निश्चित रूप से, चेहरे के बाल और कई टैटू , व्यक्तित्व पर जोर देना। दाढ़ी - एक असली आदमी के गहने, जिसके लिएयह ध्यान रखना आवश्यक है, क्योंकि खुद से यह खूबसूरती से नहीं बढ़ेगा। इसलिए, स्वच्छ उपस्थिति बनाए रखने के लिए पेशेवरों की ओर मुड़ना अक्सर आवश्यक होता है, क्योंकि लापरवाही स्वागत योग्य नहीं है। रूस में, एक ठोस दाढ़ी एक बार एक राष्ट्रीय विशेषता थी, और पीटर I के आदेश के बाद, कई पुरुषों ने उसके साथ भाग लिया, आत्महत्या कर ली। ऐसा लगता है कि हम अब अपने मूल में लौट रहे हैं। "कनाडाई लंबरैक" नामक फैशन प्रवृत्तिहाल ही में हिपस्टर्स के हाल के प्रवाह के साथ जुड़ा हुआ है जो कला-घर की संस्कृति, मूल संगीत, लेखक सिनेमा और प्रचारक आंतरिक स्वतंत्रता के शौकीन हैं। बेशक, किसी को यह स्वीकार करना चाहिए कि लैंबर्ससेक्सुअल, मेंअसली लकड़हारे के विपरीत, उन्होंने कभी अपने हाथों में कुल्हाड़ी नहीं रखी। एक विशिष्ट शहरवासी, जो जानबूझकर असभ्य प्रतीत होता है, को आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में काम करने का एक अच्छा वेतन मिलता है। वह मानसिक कार्य में लगा हुआ है, एक लैपटॉप के लिए कार्यालय में बैठता है और नवीनतम iPhone मॉडल को जाने नहीं देता है। वैसे, ऐप्पल से सबसे आधुनिक गैजेट्स, साथ ही साथ महंगे धूम्रपान पाइप, एक क्रूर आदमी की दुकान में मिलना सुनिश्चित हैं। फैशन ट्रेंड का हर प्रतिनिधि नहीं हैवह पुरुषों के सौंदर्य प्रसाधनों पर बहुत पैसा खर्च करता है, लेकिन वह अपने बालों और दाढ़ी पर नज़र रखने की कोशिश करता है, जो कनाडाई लकड़हारा निश्चित रूप से नहीं करता है। बहुत से लोग फिट रहते हैं और काम के बाद पब या ट्रेंडी क्लब में नहीं बल्कि जिम जाते हैं। मुझे कहना होगा कि जो महिलाएं अपने पास शारीरिक और नैतिक रूप से असहाय पुरुषों से थक चुकी हैं, वे नई प्रवृत्ति से अविश्वसनीय रूप से खुश हैं। निष्पक्ष छवि क्रूर छवियों से प्रसन्न होती है, क्योंकि एक आकर्षक और अच्छी तरह से तैयार दाढ़ी वाला आदमी, और यहां तक कि काम में सफल होना - क्या यह एक सपना नहीं है? लिरेक्सुअल प्रकृति से प्यार करता है और अपने साथी के साथ लोकप्रिय रिसॉर्ट्स में नहीं, बल्कि एक पहाड़ी या जंगली इलाके में रहता है, जो सामाजिक नेटवर्क के लिए एक अनिवार्य फोटो रिपोर्ट के साथ अपनी यात्राओं की पुष्टि करता है। ऐसा लगता है कि पुरुष वास्तव में परेशान नहीं करते हैंशैलीः वे साधारण टी-शर्ट, बुना हुआ स्वेटर, फर टोपी, फीका जीन्स, भारी जूते और निश्चित रूप से, व्यापक शर्ट पहनते हैं। क्रूर दाढ़ी वाले पुरुषों को जैकेट में और पाया जा सकता हैबिजनेस सूट जो उनके लिए अविश्वसनीय हैं। यह स्पष्ट है कि आधिकारिक कार्यक्रम में वे अवसर के अनुसार कपड़े पहनते हैं, लेकिन एक ही समय में रहते हैं। जैसा कि स्टाइलिस्ट मजाक करते हैं, लैम्बर्ससेक्सुअल एक सुंदर छंटनी वाली दाढ़ी वाला आदमी है जो माना जाता है कि जंगल से बाहर आया था, लेकिन उसके हाथ में एक कुल्हाड़ी के बजाय एक फैशनेबल गैजेट। क्या पहनना है? आधुनिक के बाद अशिष्ट आदमीदिशा, साहसी लकड़हारे के समान, और "कैनेडियन लकड़हारा" नामक शैली के पूरक के रूप में, बिना किसी तामझाम के, बिना किसी तामझाम के ढीली टी-शर्ट, ढीली टी-शर्ट पहनने में मदद करेगा। ऊन, मोटे-मोटे स्वेटर और चमड़े की जैकेट से बने पैंट करेंगे। अक्सर लैम्बर्सएक्सुअल कपड़े में लेयरिंग का उपयोग करते हैंः वे हल्के रंग की टी-शर्ट के ऊपर ढीली शर्ट पहनते हैं। तो, शैली में कैनेडियन लम्बरजैक एक सख्त पुरुष छवि है। मजबूत सेक्स के प्रतिनिधि बताते हैं कि वे खुद फैशन बनाते हैं, और इसके रुझानों का पालन नहीं करते हैं। लापरवाह शैली न केवल बाहरी में प्रकट होती हैउपस्थिति, लेकिन जीवन और विचारों के तरीके में भी। एक आदमी स्पष्ट रूप से जानता है कि वह क्या चाहता है, और किसी भी तरह से यह हासिल करता है। एक व्यापारी जो हमेशा अच्छे आकार में होना चाहिए, आधुनिक फैशन को समझता है और समय के साथ बना रहता है।
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में जेल हिरासत में रह रहे पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की तबीयत बिगड़ गयी है. उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए शनिवार दोपहर को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल लाया गया. पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपी पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें शनिवार दोपहर को प्रेसिडेंसी जेल से एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया. उनकी विभिन्न तरह की शारीरिक परीक्षा की गई. उसके बाद फिर उन्हें प्रेसिडेंसी जेल वापस ले जाया गया. एसएसकेएम अस्पताल में जांच के लिए लाये गये पार्थ चटर्जी से जब मीडिया ने पूछा कि उनकी तबीयत कैसी है, पार्थ चटर्जी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अच्छा नहीं है. बता दें कि शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में गिरफ्तार किये गये पार्थ चटर्जी फिलहाल 31 अगस्त तक जेल हिरासत में हैं और पिछले कुछ दिनों में पैर में सूजन और दर्द की शिकायत कर रहे हैं. पूर्व शिक्षा मंत्री को शिक्षकों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार के मामले में प्रेसीडेंसी जेल के वार्ड के सेल नंबर 2 में रखा गया है. जेल जाने के बाद जेल के डॉक्टरों ने पार्थ के पैर में सूजन देखी. डॉक्टरों ने उस समय कहा था कि कम चलने के कारण पूर्व मंत्री के पैरों में सूजन देखी जा सकती है. एसएसकेएम डॉक्टरों की एक टीम ने हाल ही में प्रेसीडेंसी सुधार सुविधा में पर्थ का दौरा किया था और उनके स्वास्थ्य की जांच करने के बाद रिपोर्ट सौंपी थी. बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 22 जुलाई को नाकतला में पार्थ के घर पर छापा मारा था. दिन भर पूछताछ करते रहे थे. उस समय उनके बीमार होने की भी खबर आई थी. ईडी की पूछताछ के दौरान एसएसकेएम के डॉक्टरों को पार्थ के घर जाते देखा गया था. बाद में उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती किये जाने को लेकर ईडी ने कोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट के आदेश पर पार्थ को भुवनेश्वर एमसी ले जाया गया था और वहां उनकी शारीरिक जांच हुई थी. वहां ने डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें अपनी बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है. उसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया था और ईडी की हिरासत में रखा गया था. ईडी की हिरासत में रहते हुए हर 48 घंटे में ईएसआई अस्पताल पार्थ की शारीरिक जांच होती थी. कोर्ट ने उनकी शारीरिक स्थिति पर निगरानी का निर्देश दिया था. बता दें कि शारीरिक जांच के दौरान खुलासा हुआ था कि पार्थ चटर्जी को डॉयबेटिज, किडनी संबंधित बीमारी सहित कई क्रोनिक बीमारियां हैं. जेल में परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी सभी चिकित्सा जेल में संभव नहीं है.
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में जेल हिरासत में रह रहे पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की तबीयत बिगड़ गयी है. उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए शनिवार दोपहर को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल लाया गया. पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपी पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें शनिवार दोपहर को प्रेसिडेंसी जेल से एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया. उनकी विभिन्न तरह की शारीरिक परीक्षा की गई. उसके बाद फिर उन्हें प्रेसिडेंसी जेल वापस ले जाया गया. एसएसकेएम अस्पताल में जांच के लिए लाये गये पार्थ चटर्जी से जब मीडिया ने पूछा कि उनकी तबीयत कैसी है, पार्थ चटर्जी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अच्छा नहीं है. बता दें कि शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में गिरफ्तार किये गये पार्थ चटर्जी फिलहाल इकतीस अगस्त तक जेल हिरासत में हैं और पिछले कुछ दिनों में पैर में सूजन और दर्द की शिकायत कर रहे हैं. पूर्व शिक्षा मंत्री को शिक्षकों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार के मामले में प्रेसीडेंसी जेल के वार्ड के सेल नंबर दो में रखा गया है. जेल जाने के बाद जेल के डॉक्टरों ने पार्थ के पैर में सूजन देखी. डॉक्टरों ने उस समय कहा था कि कम चलने के कारण पूर्व मंत्री के पैरों में सूजन देखी जा सकती है. एसएसकेएम डॉक्टरों की एक टीम ने हाल ही में प्रेसीडेंसी सुधार सुविधा में पर्थ का दौरा किया था और उनके स्वास्थ्य की जांच करने के बाद रिपोर्ट सौंपी थी. बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने बाईस जुलाई को नाकतला में पार्थ के घर पर छापा मारा था. दिन भर पूछताछ करते रहे थे. उस समय उनके बीमार होने की भी खबर आई थी. ईडी की पूछताछ के दौरान एसएसकेएम के डॉक्टरों को पार्थ के घर जाते देखा गया था. बाद में उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती किये जाने को लेकर ईडी ने कोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट के आदेश पर पार्थ को भुवनेश्वर एमसी ले जाया गया था और वहां उनकी शारीरिक जांच हुई थी. वहां ने डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें अपनी बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है. उसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया था और ईडी की हिरासत में रखा गया था. ईडी की हिरासत में रहते हुए हर अड़तालीस घंटाटे में ईएसआई अस्पताल पार्थ की शारीरिक जांच होती थी. कोर्ट ने उनकी शारीरिक स्थिति पर निगरानी का निर्देश दिया था. बता दें कि शारीरिक जांच के दौरान खुलासा हुआ था कि पार्थ चटर्जी को डॉयबेटिज, किडनी संबंधित बीमारी सहित कई क्रोनिक बीमारियां हैं. जेल में परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी सभी चिकित्सा जेल में संभव नहीं है.
रोनहाट - जिला सिरमौर के पुलिस थाना शिलाई के अधीन पनोग-अजरोली सड़क मार्ग पर एक आल्टो कार के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि अन्य तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा रविवार सुबह उस समय का है जब यह गाड़ी अजरोली से पनोग की तरफ जा रही थी। यह गाड़ी अजरोली गांव के साथ लगते हाई स्कूल अजरोली के समीप करीब 150 मीटर गहरी खाई में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आल्टो गाड़ी नंबर (एचपी 85-9881) अजरोली से पनोग की तरफ आ रही थी तो अजरोली गांव के साथ लगते हाई स्कूल अजरोली के समीप गाड़ी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस आल्टो कार में चार लोग सवार थे। इस दुर्घटना में गाड़ी में सवार सिंघा राम निवासी अजरोली 45 वर्षीय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुखराम निवासी अजरोली 30 वर्षीय, विनोद निवासी पनोग 24 वर्षीय व प्रवीन निवासी पनोग 22 वर्षीय गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत इलाज के लिए रीजनल अस्पताल सोलन ले जाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। उधर, मामले की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी शिलाई अशोक नेगी ने बताया कि इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि अन्य तीन लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
रोनहाट - जिला सिरमौर के पुलिस थाना शिलाई के अधीन पनोग-अजरोली सड़क मार्ग पर एक आल्टो कार के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि अन्य तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा रविवार सुबह उस समय का है जब यह गाड़ी अजरोली से पनोग की तरफ जा रही थी। यह गाड़ी अजरोली गांव के साथ लगते हाई स्कूल अजरोली के समीप करीब एक सौ पचास मीटर गहरी खाई में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आल्टो गाड़ी नंबर अजरोली से पनोग की तरफ आ रही थी तो अजरोली गांव के साथ लगते हाई स्कूल अजरोली के समीप गाड़ी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस आल्टो कार में चार लोग सवार थे। इस दुर्घटना में गाड़ी में सवार सिंघा राम निवासी अजरोली पैंतालीस वर्षीय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुखराम निवासी अजरोली तीस वर्षीय, विनोद निवासी पनोग चौबीस वर्षीय व प्रवीन निवासी पनोग बाईस वर्षीय गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत इलाज के लिए रीजनल अस्पताल सोलन ले जाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। उधर, मामले की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी शिलाई अशोक नेगी ने बताया कि इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि अन्य तीन लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
नीदरलैंड बेस्ड ऑटोमेकर Lightyear ने अपने पहले प्रोडक्ट '0' को लॉन्च कर दिया है। ये कंपनी की पहली प्रोडक्शन रेडी सोलर पावर्ड इलेक्ट्रिक कार है । इसकी कीमत €250,000 (लगभग 2. 06 करोड़ रुपये) रखी गई है। इस Lightyear 0 इलेक्ट्रिक कार को कंपनी ने 6 साल में बनाया है। इस फोर-व्हीलर में रूफ में 5 स्क्वायर मीटर सोलर सेल दिया गया है। ये नीदरलैंड बेस्ड स्टार्टअप कंपनी अपनी सोलर इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए इस साल के अंत से प्री-बुकिंग एक्सेप्ट करना शुरू करेगी। Lightyear 0 का सेडान प्रोटोटाइप सबसे पहले साल 2019 में पेश किया गया था। वहीं, कंपनी ने फाइनल डिजाइन और कार के यूनिक स्पेसिफिकेशन्स को ऑनलाइन प्रीमियर के जरिए 9 जून को शेयर किया। इस व्हीकल में 60kWh बैटरी पैक और चार इलेक्ट्रिक मोटर्स दिए गए हैं। ये 174hp का पवार देंगे। इस व्हीकल की रेंज 625km की है। Lightyear 0 में पैटेंटेड फाइव स्क्वायर मीटर डबल-कर्व्ड सोलर ऐरे दिया गया है। इससे रोज एडिशनल 70 किलोमीटर की रेंज मिल सकेगी। सालाना 11,000 किलोमीटर की रेंज मिलेगी। सोलर पावर के साथ टोटल रेंज 695Km हो जाएगी। Lightyear के मुताबिक ये कार 100Kmph की स्पीड महज 10 सेकेंड में पकड़ सकती है। वहीं, इसकी टॉप स्पीड 160kmph की है। कंपनी ने दावा किया है कि अगर आप रोज करीब 35 किलोमीटर चलते हैं। तो आप क्लाउडी कंडीशन में कार को बिना चार्ज किए करीब 2 महीने तक चला सकते हैं तो वहीं, सनी कंडीशन में कार को बिना चार्ज किए 7 महीने तक चलाया जा सकेगा। खास बात ये है कि कार के इंटीरियर को केवल वीगल मटेरियल से बनाया गया है। साथ ही इसमें गूगल ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ 10. 1-इंच सेंटर टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। कंपनी के मुताबिक इस कार के केवल 946 यूनिट्स बनाए जाएंगे।
नीदरलैंड बेस्ड ऑटोमेकर Lightyear ने अपने पहले प्रोडक्ट 'शून्य' को लॉन्च कर दिया है। ये कंपनी की पहली प्रोडक्शन रेडी सोलर पावर्ड इलेक्ट्रिक कार है । इसकी कीमत दो सौ पचास यूरो,शून्य रखी गई है। इस Lightyear शून्य इलेक्ट्रिक कार को कंपनी ने छः साल में बनाया है। इस फोर-व्हीलर में रूफ में पाँच स्क्वायर मीटर सोलर सेल दिया गया है। ये नीदरलैंड बेस्ड स्टार्टअप कंपनी अपनी सोलर इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए इस साल के अंत से प्री-बुकिंग एक्सेप्ट करना शुरू करेगी। Lightyear शून्य का सेडान प्रोटोटाइप सबसे पहले साल दो हज़ार उन्नीस में पेश किया गया था। वहीं, कंपनी ने फाइनल डिजाइन और कार के यूनिक स्पेसिफिकेशन्स को ऑनलाइन प्रीमियर के जरिए नौ जून को शेयर किया। इस व्हीकल में साठ किलोवाट-घंटा बैटरी पैक और चार इलेक्ट्रिक मोटर्स दिए गए हैं। ये एक सौ चौहत्तरhp का पवार देंगे। इस व्हीकल की रेंज छः सौ पच्चीस किलोमीटर की है। Lightyear शून्य में पैटेंटेड फाइव स्क्वायर मीटर डबल-कर्व्ड सोलर ऐरे दिया गया है। इससे रोज एडिशनल सत्तर किलोग्राममीटर की रेंज मिल सकेगी। सालाना ग्यारह,शून्य किलोग्राममीटर की रेंज मिलेगी। सोलर पावर के साथ टोटल रेंज छः सौ पचानवेKm हो जाएगी। Lightyear के मुताबिक ये कार एक सौKmph की स्पीड महज दस सेकेंड में पकड़ सकती है। वहीं, इसकी टॉप स्पीड एक सौ साठkmph की है। कंपनी ने दावा किया है कि अगर आप रोज करीब पैंतीस किलोग्राममीटर चलते हैं। तो आप क्लाउडी कंडीशन में कार को बिना चार्ज किए करीब दो महीने तक चला सकते हैं तो वहीं, सनी कंडीशन में कार को बिना चार्ज किए सात महीने तक चलाया जा सकेगा। खास बात ये है कि कार के इंटीरियर को केवल वीगल मटेरियल से बनाया गया है। साथ ही इसमें गूगल ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ दस. एक-इंच सेंटर टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। कंपनी के मुताबिक इस कार के केवल नौ सौ छियालीस यूनिट्स बनाए जाएंगे।
राजस्थान ब्राम्हण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सरदारशहर विधायक और पूर्व नहर मंत्री स्व. पंडित भंवर लाल शर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए शोक सभा का आयोजन किया गया। राजस्थान ब्राह्मण महासभा एवं विप्र फाउंडेशन की ओर से गुरुवार देर शाम स्थानीय गौड़ ब्राह्मण भवन में आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता ब्राह्मण महासभा के तहसील अध्यक्ष सुभाष जोशी ने की। शोक सभा में उपस्थित बंधुओं ने स्वर्गीय पंडित भंवरलाल द्वारा समग्र विप्र समाज के प्रति की गई सेवाओं, समाज की सभी जातियों और उपजातीयों में एकता के लिए किए गए कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वक्ताओं ने उनके साथ बिताए पलों और उनसे हुई मुलाकातों के संस्करणों को साझा किया। इस अवसर पर एस आर स्कूल के चेयरमैन ओमप्रकाश जोशी,पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश जोशी,विप्र कल्याण बोर्ड सदस्य पवन बूंटोलिया, पालिका में नेता प्रतिपक्ष एडवोकेट ललित पुरोहित,शहर भाजपा अध्यक्ष मधुसूदन दायमा, राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक छगनलाल शास्त्री, कुंजबिहारी जोशी, समाज कल्याण अधिकारी यादव शास्त्री, बिनोद शर्मा, शिक्षाविद जगदीश महर्षि, गो सेवक संजय जोशी,कमल पुजारी, एडवोकेट रविन्द्र शर्मा, राजकुमार जोशी, बालकृष्ण जोशी, पूर्व पार्षद अशोक पुजारी, धनराज सिखवाल, ललित मिश्रा, जयशंकर जोशी, जयशंकर पुजारी, सहित बड़ी संख्या में समाज बंधु उपस्थित थे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन प्रदीप दाधीच ने किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान ब्राम्हण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सरदारशहर विधायक और पूर्व नहर मंत्री स्व. पंडित भंवर लाल शर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए शोक सभा का आयोजन किया गया। राजस्थान ब्राह्मण महासभा एवं विप्र फाउंडेशन की ओर से गुरुवार देर शाम स्थानीय गौड़ ब्राह्मण भवन में आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता ब्राह्मण महासभा के तहसील अध्यक्ष सुभाष जोशी ने की। शोक सभा में उपस्थित बंधुओं ने स्वर्गीय पंडित भंवरलाल द्वारा समग्र विप्र समाज के प्रति की गई सेवाओं, समाज की सभी जातियों और उपजातीयों में एकता के लिए किए गए कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वक्ताओं ने उनके साथ बिताए पलों और उनसे हुई मुलाकातों के संस्करणों को साझा किया। इस अवसर पर एस आर स्कूल के चेयरमैन ओमप्रकाश जोशी,पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश जोशी,विप्र कल्याण बोर्ड सदस्य पवन बूंटोलिया, पालिका में नेता प्रतिपक्ष एडवोकेट ललित पुरोहित,शहर भाजपा अध्यक्ष मधुसूदन दायमा, राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक छगनलाल शास्त्री, कुंजबिहारी जोशी, समाज कल्याण अधिकारी यादव शास्त्री, बिनोद शर्मा, शिक्षाविद जगदीश महर्षि, गो सेवक संजय जोशी,कमल पुजारी, एडवोकेट रविन्द्र शर्मा, राजकुमार जोशी, बालकृष्ण जोशी, पूर्व पार्षद अशोक पुजारी, धनराज सिखवाल, ललित मिश्रा, जयशंकर जोशी, जयशंकर पुजारी, सहित बड़ी संख्या में समाज बंधु उपस्थित थे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन प्रदीप दाधीच ने किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
You Searched For "e-shram card benefits" E-Shram Card New List 2023: समाज के हर वर्ग की स्थिति में सुधार लाने केंद्र और राज्य सरकार तरह-तरह की योजनाएं संचालित करती हैं. E-Shram Card Payment Status 2023: ई-श्रम पोर्टल (e-Shram Portal) में आपने रजिस्ट्रेशन कराया है तो आपके लिए ये बेहद अच्छी खबर है. e shram Card Benefits: ई-श्रम कार्ड को लेकर बड़ा ऐलान, अब छात्र भी उठा सकेंगे लाभ, ऐसे करे आवेदन? E Shram Card वालो के लिए खुशखबरी, सरकार ने अकाउंट में डालें इतने पैसे, जानिए!
You Searched For "e-shram card benefits" E-Shram Card New List दो हज़ार तेईस: समाज के हर वर्ग की स्थिति में सुधार लाने केंद्र और राज्य सरकार तरह-तरह की योजनाएं संचालित करती हैं. E-Shram Card Payment Status दो हज़ार तेईस: ई-श्रम पोर्टल में आपने रजिस्ट्रेशन कराया है तो आपके लिए ये बेहद अच्छी खबर है. e shram Card Benefits: ई-श्रम कार्ड को लेकर बड़ा ऐलान, अब छात्र भी उठा सकेंगे लाभ, ऐसे करे आवेदन? E Shram Card वालो के लिए खुशखबरी, सरकार ने अकाउंट में डालें इतने पैसे, जानिए!
स्टडी से पता चलता है कि जिन मरीजों की मौत हुई उन्हें बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ थी. स्टडी का डाटा, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिपोर्ट, मरीजों के डेली प्रोग्रेस चार्ट के जरिए इकट्ठा किया गया. एम्स की एक स्टडी (AIIMS Study) में दावा किया है कि कोरोनावायरस (Corona Virus) के चलते 50 साल से कम उम्र के लोगों की 65 साल और अन्य एज ग्रुप के लोगों की तुलना में ज्यादा मौतें हुई हैं. इस स्टडी में एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria), एम्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख डाक्टर राकेश मल्होत्रा और कई अन्य लोग शामिल रहे हैं. इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाशित इस स्टडी के एनालिसिस में पिछले साल 4 अप्रैल से 24 जुलाई के बीच का डाटा इस्तेमाल किया गया. कोविड -19 मौतों पर एम्स की स्टडी भारत में कोविड -19 सेंटर्स में भर्ती मरीजों के डेथ रेट के कारणों का पता लगाने के लिए की गई थी. जिस दौरान स्टडी की गई, उस वक्त करीब 654 मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराया गया था, इसमें से 247 मरीजों की मौत हुई और मृत्यु दर करीब 37.7 फीसदी दर्ज की गई. स्टडी को आसान बनाने के लिए इन मरीजों को कई एज ग्रुप्स में बांटा गया. जिसमें 18 से 50, 51 से 65 और 65 से ऊपर के मरीजों के ग्रुप बने. स्टडी से पता चलता है कि 42.1% मौतें 18-50 आयुवर्ग के मरीजों की हुईं. वहीं 51 से 65 के बीच 34.8 फीसदी मरीजों की कोरोना से जान गई थी. वहीं 65 से ज्यादा उम्र के मरीजों की मौतों का प्रतिशत 23.1 फीसदी दर्ज किया गया. इनमें से अधिकांश कोविड -19 मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और क्रोनिक किडनी की बीमारियां शामिल हैं. जिनकी मौत हुई वो मरीज बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ झेल रहे थे. सभी मृत मरीजों का डाटा उनकी इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिपोर्ट, मरीजों के डेली प्रोग्रेस चार्ट के साथ ही ICU में नर्सिंग नोट्स के साथ इकट्ठा किया गया. कई स्टडी में कोविड-19 रोगियों की आईसीयू में मृत्यु दर 8.0% से 66.7% के बीच अलग-अलग होती है. अन्य देशों जैसे अमेरिका, स्पेन, इटली ने भी इसी तरह के डेथ रेट को रिपोर्ट किया है. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि वैक्सीनेशन ही कोरोनावायरस महामारी से बाहर निकलने का इकलौता रास्ता है. उन्होंने कोविड के खिलाफ बच्चों के लिए वैक्सीन की समय के भीतर उपलब्धता की बात कही है. गुलेरिया ने कहा कि बच्चों के लिए कोविड -19 वैक्सीन उपलब्ध कराना कोरोना की इस जंग में मील का पत्थर साबित होगा. इससे स्कूलों और अन्य बच्चों से संबंधित चीजों को दोबारा खोलने में मदद मिलेगी.
स्टडी से पता चलता है कि जिन मरीजों की मौत हुई उन्हें बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ थी. स्टडी का डाटा, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिपोर्ट, मरीजों के डेली प्रोग्रेस चार्ट के जरिए इकट्ठा किया गया. एम्स की एक स्टडी में दावा किया है कि कोरोनावायरस के चलते पचास साल से कम उम्र के लोगों की पैंसठ साल और अन्य एज ग्रुप के लोगों की तुलना में ज्यादा मौतें हुई हैं. इस स्टडी में एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया , एम्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख डाक्टर राकेश मल्होत्रा और कई अन्य लोग शामिल रहे हैं. इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाशित इस स्टडी के एनालिसिस में पिछले साल चार अप्रैल से चौबीस जुलाई के बीच का डाटा इस्तेमाल किया गया. कोविड -उन्नीस मौतों पर एम्स की स्टडी भारत में कोविड -उन्नीस सेंटर्स में भर्ती मरीजों के डेथ रेट के कारणों का पता लगाने के लिए की गई थी. जिस दौरान स्टडी की गई, उस वक्त करीब छः सौ चौवन मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराया गया था, इसमें से दो सौ सैंतालीस मरीजों की मौत हुई और मृत्यु दर करीब सैंतीस.सात फीसदी दर्ज की गई. स्टडी को आसान बनाने के लिए इन मरीजों को कई एज ग्रुप्स में बांटा गया. जिसमें अट्ठारह से पचास, इक्यावन से पैंसठ और पैंसठ से ऊपर के मरीजों के ग्रुप बने. स्टडी से पता चलता है कि बयालीस.एक% मौतें अट्ठारह-पचास आयुवर्ग के मरीजों की हुईं. वहीं इक्यावन से पैंसठ के बीच चौंतीस.आठ फीसदी मरीजों की कोरोना से जान गई थी. वहीं पैंसठ से ज्यादा उम्र के मरीजों की मौतों का प्रतिशत तेईस.एक फीसदी दर्ज किया गया. इनमें से अधिकांश कोविड -उन्नीस मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और क्रोनिक किडनी की बीमारियां शामिल हैं. जिनकी मौत हुई वो मरीज बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ झेल रहे थे. सभी मृत मरीजों का डाटा उनकी इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिपोर्ट, मरीजों के डेली प्रोग्रेस चार्ट के साथ ही ICU में नर्सिंग नोट्स के साथ इकट्ठा किया गया. कई स्टडी में कोविड-उन्नीस रोगियों की आईसीयू में मृत्यु दर आठ.शून्य% से छयासठ.सात% के बीच अलग-अलग होती है. अन्य देशों जैसे अमेरिका, स्पेन, इटली ने भी इसी तरह के डेथ रेट को रिपोर्ट किया है. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि वैक्सीनेशन ही कोरोनावायरस महामारी से बाहर निकलने का इकलौता रास्ता है. उन्होंने कोविड के खिलाफ बच्चों के लिए वैक्सीन की समय के भीतर उपलब्धता की बात कही है. गुलेरिया ने कहा कि बच्चों के लिए कोविड -उन्नीस वैक्सीन उपलब्ध कराना कोरोना की इस जंग में मील का पत्थर साबित होगा. इससे स्कूलों और अन्य बच्चों से संबंधित चीजों को दोबारा खोलने में मदद मिलेगी.
रायपुर। राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) के मध्य संयुक्त शोध परियोजनाएं अब पांच वर्ष और जारी रहेंगी। इस संबंध में दोनों संस्थानों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। नई परियोजनाओं में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) और नैनोटेक्नोलाजी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों संस्थानों के मध्य पांच वर्ष पूर्व एमओयू किया गया था, जिसकी अवधि पूर्ण होने के बाद अब पुनः पांच वर्ष के लिए निदेशक प्रो. (डा. ) नितिन एम नागरकर और एनआइटी केे निदेशक प्रो. एएम रावाणी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रो. नागरकर ने कहा कि दोनों संस्थान मिलकर चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाओं पर काम करेंगे। एनआइटी एम्स को बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, भीड़, प्रबंधन, वेस्ट मैनेजमेंट आदि क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता का लाभ प्रदान कर सकता है। इसके साथ ही एआइ और नैनोटेक्नोलाजी के क्षेत्र में भी दोनों संस्थानों के मध्य सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। एम्स के चिकित्सक अपनी जरूरतों को एनआइटी के विशेषज्ञों को बता सकते हैं, जिनका तकनीकी समाधान एनआइटी कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही दोनों संस्थानों के शिक्षकों के मध्य वार्ता होगी और लगभग 20 चुनौतीपूर्ण विषयों को चिन्हित कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा। प्रो. रावाणी ने तकनीक की कंवर्जेंस की चर्चा करते हुए कहा कि अब समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए संयुक्त रूप से अकादमिक कार्यक्रम और कान्फ्रेंस आयोजित की जा सकती हैं। अगले पांच वर्ष की सहभागिता में समाज को पेटेंट और कॉपीराइट के माध्यम से उनकी समस्याओं के समाधान देने का लक्ष्य होगा। कार्यक्रम में एम्स के डीन (अकादमिक) प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल, एनआइटी के डीन (रिसर्च) डा. प्रभात दीवान, उप-निदेशक (प्रशासन) अंशुमान गुप्ता, कुलसचिव डा. नितिन गायकवाड़, डा. बीके सिंह, विभागाध्यक्ष, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, एनआइटी और सहायक कुलसचिव पवन कटारिया भी उपस्थित थे। दोनों संस्थानों ने पूर्व की पांच वर्ष की सहभागिता में स्तन कैंसर, मनोविज्ञान और फेफड़ों की बीमारी के संबंध में शोध किए हैं। इसके साथ ही पांच छात्रों को दोनों संस्थानों के शिक्षकों ने मिलकर पीएचडी शोध भी संपन्न् कराया है। नए एमओयू के बाद दोनों संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त शोध परियोजनाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे। अनुसंधान और विकास के साथ ही कंसलटेंसी भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही शोध की सुविधाओं का भी दोनों संस्थान के शोधार्थी प्रयोग कर सकेंगे।
रायपुर। राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के मध्य संयुक्त शोध परियोजनाएं अब पांच वर्ष और जारी रहेंगी। इस संबंध में दोनों संस्थानों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। नई परियोजनाओं में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और नैनोटेक्नोलाजी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों संस्थानों के मध्य पांच वर्ष पूर्व एमओयू किया गया था, जिसकी अवधि पूर्ण होने के बाद अब पुनः पांच वर्ष के लिए निदेशक प्रो. नितिन एम नागरकर और एनआइटी केे निदेशक प्रो. एएम रावाणी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रो. नागरकर ने कहा कि दोनों संस्थान मिलकर चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाओं पर काम करेंगे। एनआइटी एम्स को बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, भीड़, प्रबंधन, वेस्ट मैनेजमेंट आदि क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता का लाभ प्रदान कर सकता है। इसके साथ ही एआइ और नैनोटेक्नोलाजी के क्षेत्र में भी दोनों संस्थानों के मध्य सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। एम्स के चिकित्सक अपनी जरूरतों को एनआइटी के विशेषज्ञों को बता सकते हैं, जिनका तकनीकी समाधान एनआइटी कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही दोनों संस्थानों के शिक्षकों के मध्य वार्ता होगी और लगभग बीस चुनौतीपूर्ण विषयों को चिन्हित कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा। प्रो. रावाणी ने तकनीक की कंवर्जेंस की चर्चा करते हुए कहा कि अब समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए संयुक्त रूप से अकादमिक कार्यक्रम और कान्फ्रेंस आयोजित की जा सकती हैं। अगले पांच वर्ष की सहभागिता में समाज को पेटेंट और कॉपीराइट के माध्यम से उनकी समस्याओं के समाधान देने का लक्ष्य होगा। कार्यक्रम में एम्स के डीन प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल, एनआइटी के डीन डा. प्रभात दीवान, उप-निदेशक अंशुमान गुप्ता, कुलसचिव डा. नितिन गायकवाड़, डा. बीके सिंह, विभागाध्यक्ष, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, एनआइटी और सहायक कुलसचिव पवन कटारिया भी उपस्थित थे। दोनों संस्थानों ने पूर्व की पांच वर्ष की सहभागिता में स्तन कैंसर, मनोविज्ञान और फेफड़ों की बीमारी के संबंध में शोध किए हैं। इसके साथ ही पांच छात्रों को दोनों संस्थानों के शिक्षकों ने मिलकर पीएचडी शोध भी संपन्न् कराया है। नए एमओयू के बाद दोनों संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त शोध परियोजनाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे। अनुसंधान और विकास के साथ ही कंसलटेंसी भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही शोध की सुविधाओं का भी दोनों संस्थान के शोधार्थी प्रयोग कर सकेंगे।
अपमानकारक वचनोंमें राव अजितसे कहा कि "वीलहठा राणाको लौटा देना होगा और यदि ऐसा न करोगे तो मैं एक सिन्धी सेनाको भेजकर आपको बंदी करूँगा । मंत्रीने अजितसे यह भी कहा कि मैंने राणाकी आज्ञानुसार तुमसे समस्त समाचार कहा है, राव अजितने मेवाडके मंत्री के उन अपमानकारक वचनोंको सुनकर उसके इस व्यवहार से मनही मनमें समस्त रात्रि में घोर क्रोध संचय किया था। दूसरे दिन उक्त मृगयाका कार्य समाप्त होते ही राणाने अजितको बिदा किया कि इसी अवसरमें अचानक अजितके मनमें राणाके मंत्रीका वह अपमान याद आया, यद्यपि वह राणासे विदा होकर कुछ दूरतक चले गये थे, परन्तु हमैं राणा बंदी करेंगे यह विचार कर वह फिर राणाके सम्मुख गये । अजितको फिर आया हुआ देखकर राणा किसी प्रकार भी स्थिर न रह सके उन्होंने हँसते हुए फिर अजितको बिदा कर दिया। दोनोंने फिर परस्परमें साक्षात् किया। अजित उस समय भी क्या करें इसका कुछ भी स्थिर न करके राणाके दयालु व्यवहारसे मोहित हो फिर राणाके सम्मुखसे चले आये, परन्तु अजित. के फिर कुछ दूर आते ही उनके हृदय में प्रतिहिंसाकी अग्नि भयंकररूपसे प्रज्वलित हो गई अजितने उसी समय तीक्ष्ण भालेको हाथ में लेकर बडे वेगसे बलपूर्वक राणाके ऊपर भाला चलाया। उस भालने राणाकी देहको भेदकर उनके घोडेको भी जा भेदा; दारुणरूप से घायल हुए राणा जिस अजितको अपना परमप्यारा मित्र जानते थे उसको प्राणघाती देखकर केवल इतना ही कहकर प्राण त्याग किये, "ओह हाडा ! क्या किया ?" घायल हुए राणाके घोडेपरसे गिरते ही इन्द्रगढके सामन्त तलवारके आघातसे राणाका जीवन एकबार ही समाप्त कर दिया। हाडाराज अजित इस कार्यसे अपना महान् गौरव जानकर मेवाडके महाराजकी "छत्रझांगी " अर्थात् गोलाकार मोरकी पूँछके चक्रमें सुवर्णके सूर्यादित राजचिह्नोंको लेकर अपनी राजधानी वृंदीमें चले आये । वह मेवाडके राजचिह्न बूँदीके महल में रक्खे गये । उमेदसिंहने जो देवसिंहके प्राण नाश करनेके लिये राजस्वको छोड़कर संन्यासीक समान अनेक देशों में भ्रमण कर अपने पापोंका नाश किया था उन्होंने जब यह समाचर सुना कि हमारे पुत्र अजितने मेवाडके महाराजके प्राण नाश किये हैं तब उनके हृदय में प्रबल आवेग उछलने लगा। उन्होंने अपने वंशमें फिर महापाप संचय होता हुआ देखकर अत्यन्त दुःख प्रकाश किया, उन्होंने उसी समय यह प्रतिज्ञा की कि अब जन्मभर पुत्रका मुख नहीं देखूंगा । बूँदीके जातीय इतिहास में लिखा जा चुका है कि कृष्णगढ़ के राजाओंकी दो कन्याओंके साथ राणा और वृंदीराज अजितका विवाह हुआ था, इसीसे दोनों दृढ सांसारिक सम्बन्धबन्धन में बंध रहे थे, वृंदीराज अजितसे उनका कुछ अमंगळ होगा राणाके हृदय में यह विचार भूलसे भी उदय नही हुआ । परन्तु राणाकी स्त्रीने अपने स्वामको यह कहकर पहिलेस ही सावधान कर दिया कि जिससे वह किसी प्रकार से भी अजितके ऊपर विश्वास न करें । कई पीढी पहिले मेवाड और बूंदी दोनों राज्यके राजा जो परस्पर में आक्रमण करके इस मृगयाक्षेत्र में मारे गये थे, उस वृत्तान्तको
अपमानकारक वचनोंमें राव अजितसे कहा कि "वीलहठा राणाको लौटा देना होगा और यदि ऐसा न करोगे तो मैं एक सिन्धी सेनाको भेजकर आपको बंदी करूँगा । मंत्रीने अजितसे यह भी कहा कि मैंने राणाकी आज्ञानुसार तुमसे समस्त समाचार कहा है, राव अजितने मेवाडके मंत्री के उन अपमानकारक वचनोंको सुनकर उसके इस व्यवहार से मनही मनमें समस्त रात्रि में घोर क्रोध संचय किया था। दूसरे दिन उक्त मृगयाका कार्य समाप्त होते ही राणाने अजितको बिदा किया कि इसी अवसरमें अचानक अजितके मनमें राणाके मंत्रीका वह अपमान याद आया, यद्यपि वह राणासे विदा होकर कुछ दूरतक चले गये थे, परन्तु हमैं राणा बंदी करेंगे यह विचार कर वह फिर राणाके सम्मुख गये । अजितको फिर आया हुआ देखकर राणा किसी प्रकार भी स्थिर न रह सके उन्होंने हँसते हुए फिर अजितको बिदा कर दिया। दोनोंने फिर परस्परमें साक्षात् किया। अजित उस समय भी क्या करें इसका कुछ भी स्थिर न करके राणाके दयालु व्यवहारसे मोहित हो फिर राणाके सम्मुखसे चले आये, परन्तु अजित. के फिर कुछ दूर आते ही उनके हृदय में प्रतिहिंसाकी अग्नि भयंकररूपसे प्रज्वलित हो गई अजितने उसी समय तीक्ष्ण भालेको हाथ में लेकर बडे वेगसे बलपूर्वक राणाके ऊपर भाला चलाया। उस भालने राणाकी देहको भेदकर उनके घोडेको भी जा भेदा; दारुणरूप से घायल हुए राणा जिस अजितको अपना परमप्यारा मित्र जानते थे उसको प्राणघाती देखकर केवल इतना ही कहकर प्राण त्याग किये, "ओह हाडा ! क्या किया ?" घायल हुए राणाके घोडेपरसे गिरते ही इन्द्रगढके सामन्त तलवारके आघातसे राणाका जीवन एकबार ही समाप्त कर दिया। हाडाराज अजित इस कार्यसे अपना महान् गौरव जानकर मेवाडके महाराजकी "छत्रझांगी " अर्थात् गोलाकार मोरकी पूँछके चक्रमें सुवर्णके सूर्यादित राजचिह्नोंको लेकर अपनी राजधानी वृंदीमें चले आये । वह मेवाडके राजचिह्न बूँदीके महल में रक्खे गये । उमेदसिंहने जो देवसिंहके प्राण नाश करनेके लिये राजस्वको छोड़कर संन्यासीक समान अनेक देशों में भ्रमण कर अपने पापोंका नाश किया था उन्होंने जब यह समाचर सुना कि हमारे पुत्र अजितने मेवाडके महाराजके प्राण नाश किये हैं तब उनके हृदय में प्रबल आवेग उछलने लगा। उन्होंने अपने वंशमें फिर महापाप संचय होता हुआ देखकर अत्यन्त दुःख प्रकाश किया, उन्होंने उसी समय यह प्रतिज्ञा की कि अब जन्मभर पुत्रका मुख नहीं देखूंगा । बूँदीके जातीय इतिहास में लिखा जा चुका है कि कृष्णगढ़ के राजाओंकी दो कन्याओंके साथ राणा और वृंदीराज अजितका विवाह हुआ था, इसीसे दोनों दृढ सांसारिक सम्बन्धबन्धन में बंध रहे थे, वृंदीराज अजितसे उनका कुछ अमंगळ होगा राणाके हृदय में यह विचार भूलसे भी उदय नही हुआ । परन्तु राणाकी स्त्रीने अपने स्वामको यह कहकर पहिलेस ही सावधान कर दिया कि जिससे वह किसी प्रकार से भी अजितके ऊपर विश्वास न करें । कई पीढी पहिले मेवाड और बूंदी दोनों राज्यके राजा जो परस्पर में आक्रमण करके इस मृगयाक्षेत्र में मारे गये थे, उस वृत्तान्तको
बालाघाट, सुनील कोरे। वन्यप्राणी बाघ के मूंछ के बाल के साथ तांत्रिक क्रिया कर धनवर्षा करने के चक्कर में पड़े 65 साल के रिटायर्ड पुलिसकर्मी हरिलाल पिता जनकलाल उइके को वन विभाग की टीम ने पकड़ा है, बताया जा रहा है कि आरोपी जबलपुर से मूंछ के बाल लेकर तीन साल पहले आया था। जो शुक्रवार को बाघ के मूंछ के बाल को लेकर वाहन से तांत्रिक क्रिया करने अपने दो साथियों के साथ जा रहा था। जिसकी मुखबिर से मिली सूचना के बाद वारासिवनी वन परिक्षेत्र की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। बताया जाता है कि रिटायर्ड पुलिस कर्मी की पत्नी एक शिक्षिका थी, जो वर्तमान में एक राजनीतिक दल से जुड़ी है। आरोपी पुलिसकर्मी के साथ उसके दो साथी लालबर्रा थाना अंतर्गत ग्राम नगपुरा निवासी 35 वर्षीय सचेन्द्र पिता लंकेशसिंह नागेश्वर और बूढ़ी वार्ड क्रमांक 1 निवासी 37 वर्षीय भूपेन्द्र पिता इंदरचंद मर्सकोले को गिरफ्तार किया है। जबकि एक आरोपी फरार हो गया। जिनके पास से वनविभाग की टीम ने 28 नग बाघ के मूंछ के बाल, एक ऑल्टो कार बरामद की है। वारासिवनी वन परिक्षेत्र की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी। इस मामले में वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध क्रमांक 12769/02 एवं वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 31,32,33,36,09,39 (बी) (डी),49(ए)/49(बी) (सी) के तहत मामला कायम किया। जिसके बाद गिरफ्तार किये गये सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज भिजवा दिया है।
बालाघाट, सुनील कोरे। वन्यप्राणी बाघ के मूंछ के बाल के साथ तांत्रिक क्रिया कर धनवर्षा करने के चक्कर में पड़े पैंसठ साल के रिटायर्ड पुलिसकर्मी हरिलाल पिता जनकलाल उइके को वन विभाग की टीम ने पकड़ा है, बताया जा रहा है कि आरोपी जबलपुर से मूंछ के बाल लेकर तीन साल पहले आया था। जो शुक्रवार को बाघ के मूंछ के बाल को लेकर वाहन से तांत्रिक क्रिया करने अपने दो साथियों के साथ जा रहा था। जिसकी मुखबिर से मिली सूचना के बाद वारासिवनी वन परिक्षेत्र की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। बताया जाता है कि रिटायर्ड पुलिस कर्मी की पत्नी एक शिक्षिका थी, जो वर्तमान में एक राजनीतिक दल से जुड़ी है। आरोपी पुलिसकर्मी के साथ उसके दो साथी लालबर्रा थाना अंतर्गत ग्राम नगपुरा निवासी पैंतीस वर्षीय सचेन्द्र पिता लंकेशसिंह नागेश्वर और बूढ़ी वार्ड क्रमांक एक निवासी सैंतीस वर्षीय भूपेन्द्र पिता इंदरचंद मर्सकोले को गिरफ्तार किया है। जबकि एक आरोपी फरार हो गया। जिनके पास से वनविभाग की टीम ने अट्ठाईस नग बाघ के मूंछ के बाल, एक ऑल्टो कार बरामद की है। वारासिवनी वन परिक्षेत्र की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी। इस मामले में वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध क्रमांक बारह हज़ार सात सौ उनहत्तर/दो एवं वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बहत्तर की धारा इकतीस,बत्तीस,तैंतीस,छत्तीस,नौ,उनतालीस ,उनचास/उनचास के तहत मामला कायम किया। जिसके बाद गिरफ्तार किये गये सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज भिजवा दिया है।
Mi True Wireless Earphones 2 Basic ट्रू वायरलेस स्टीरियो ईयरबड्स को भारत में जल्द लॉन्च किया जा सकता है। बता दें, इन ईयरबड्स को इस साल जुलाई में ग्लोबली लॉन्च किया गया था और अब माना जा रहा है कि यह जल्द ही भारत में दस्तक दे सकते हैं। हालांकि, Xiaomi ने फिलहाल Mi True Wireless Earphones 2 Basic के भारत लॉन्च की सटिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, कंपनी ने ट्विटर पेज पर एक टीज़र वीडियो साझा किया है जिसके जरिए नए ऑडियो प्रोडक्ट लॉन्च के संकेत प्राप्त हुए हैं। इस छोटे टीज़र वीडियो को देखें, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि लॉन्च होने वाला प्रोडक्ट मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन 2 बेसिक हो सकते हैं। हाल ही में Redmi ने भी अपने ऑडियो रेंज में विस्तार करते हुए Redmi SonicBass Wireless Earphones और Redmi Earbuds 2 को लॉन्च किया है। किए जाएंगे। यूरोपियन कीमत EUR 39. 99 (लगभग 3,400 रुपये) के आसपास ही हो सकती है। स्पेसिफिकेशन की बात करें, तो मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन 2 बेसिक में 14. 2 एमएम के डायनमिक ड्राइवर्स और SBC/ AAC ऑडियो कोडेक्स सपोर्ट शामिल किया गया है। इसके अलावा ईयरबड्स में ऑटो-पेयर और ऑटो-कनेक्ट फीचर भी मौजूद है, जो Mi True Wireless Earphones 2 में भी पहले से उपलब्ध है। साथ आपको चार्जिंग केस के साथ यूएसबी टाइप-सी पोर्ट भी मिलेगा। मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन 2 बेसिक दो नॉयज़ कैंसिलेशन माइक्रोफोन के साथ आता है। वहीं, इसमें एक इन-ईयर डिटेक्शन सेंसर भी दिया गया है, जिसका मतलब है कि दोनों में से किसी भी एक ईयरबड्स निकलने के बाद ऑडियो अपने आप ही पॉज़ हो जाएगी। यही नहीं, इसमें टच कंट्रोल फंक्शन भी मौजूद है। शाओमी का दावा है कि मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन 2 बेसिक ईयरबड्स सिंगल चार्ज पर 5 घंटे बिना रुके काम करता है। हालांकि, केस के साथ इसकी बैटरी लाइफ को 20 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। कंपनी के पोर्टफोलियो में मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन 2 बेसिक Mi True Wireless Earphones 2 और Redmi Earbuds S के साथ स्थित है। नया ईयरफोन एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ही डिवाइस पर काम करने में सक्षम है।
Mi True Wireless Earphones दो Basic ट्रू वायरलेस स्टीरियो ईयरबड्स को भारत में जल्द लॉन्च किया जा सकता है। बता दें, इन ईयरबड्स को इस साल जुलाई में ग्लोबली लॉन्च किया गया था और अब माना जा रहा है कि यह जल्द ही भारत में दस्तक दे सकते हैं। हालांकि, Xiaomi ने फिलहाल Mi True Wireless Earphones दो Basic के भारत लॉन्च की सटिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, कंपनी ने ट्विटर पेज पर एक टीज़र वीडियो साझा किया है जिसके जरिए नए ऑडियो प्रोडक्ट लॉन्च के संकेत प्राप्त हुए हैं। इस छोटे टीज़र वीडियो को देखें, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि लॉन्च होने वाला प्रोडक्ट मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन दो बेसिक हो सकते हैं। हाल ही में Redmi ने भी अपने ऑडियो रेंज में विस्तार करते हुए Redmi SonicBass Wireless Earphones और Redmi Earbuds दो को लॉन्च किया है। किए जाएंगे। यूरोपियन कीमत उनतालीस यूरो. निन्यानवे के आसपास ही हो सकती है। स्पेसिफिकेशन की बात करें, तो मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन दो बेसिक में चौदह. दो एमएम के डायनमिक ड्राइवर्स और SBC/ AAC ऑडियो कोडेक्स सपोर्ट शामिल किया गया है। इसके अलावा ईयरबड्स में ऑटो-पेयर और ऑटो-कनेक्ट फीचर भी मौजूद है, जो Mi True Wireless Earphones दो में भी पहले से उपलब्ध है। साथ आपको चार्जिंग केस के साथ यूएसबी टाइप-सी पोर्ट भी मिलेगा। मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन दो बेसिक दो नॉयज़ कैंसिलेशन माइक्रोफोन के साथ आता है। वहीं, इसमें एक इन-ईयर डिटेक्शन सेंसर भी दिया गया है, जिसका मतलब है कि दोनों में से किसी भी एक ईयरबड्स निकलने के बाद ऑडियो अपने आप ही पॉज़ हो जाएगी। यही नहीं, इसमें टच कंट्रोल फंक्शन भी मौजूद है। शाओमी का दावा है कि मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन दो बेसिक ईयरबड्स सिंगल चार्ज पर पाँच घंटाटे बिना रुके काम करता है। हालांकि, केस के साथ इसकी बैटरी लाइफ को बीस घंटाटे तक बढ़ाया जा सकता है। कंपनी के पोर्टफोलियो में मी ट्रू वायरलेस ईयरफोन दो बेसिक Mi True Wireless Earphones दो और Redmi Earbuds S के साथ स्थित है। नया ईयरफोन एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ही डिवाइस पर काम करने में सक्षम है।
कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल्स से एक इन्फ़ोग्राफ़िक शेयर करते हुए दावा किया गया कि UPA सरकार ने वैक्सीन द्वारा रोके जा सकने वाले 12 रोगों की मुफ़्त वैक्सीन मुहैया करवाई थी. और इस ग्राफ़िक के मुताबिक भाजपा सरकार एक कोविड-19 वैक्सीन डोज़ के ग़ैर-सरकारी अस्पताल में 250 रुपये वसूल रही है. ये इन्फ़ोग्राफ़िक शेयर करने वाले हैंडल्स में INC आंध्र प्रदेश, गोवा प्रदेश कांग्रेस सेवादल, पश्चिम बंगाल महिला कांग्रेस, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सेवादल (हिंदी पोस्ट), महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस शामिल थे. This slideshow requires JavaScript. कांग्रेस नेता अकोइज़ाम मीराबाई, विवेक बंसल और एसएस किम ने भी इसे शेयर किया. कांग्रेस ने जिस 12 बीमारियों को रोकने वाली वैक्सीन मुफ़्त में दिए जाने की बात की, वो सरकारी अस्पतालों में दी गयी थी जबकि इसकी तुलना उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों में दिए जाने वाली कोविड-19 वैक्सीन से की. इसी वजह से लोगों को लगा कि भाजपा कोविड-19 वैक्सीन समेत कोई भी वैक्सीन मुफ़्त में उपलब्ध नहीं करवा रही. इस ग्राफ़िक में 12 रोगों को रोकने वाली वैक्सीन के बारे में जो लिखा है, वो यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम (UIP) के आंकड़ों से लिया गया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मुताबिक UIP देश का सबसे बड़ा स्वास्थ्य अभियान है जिसमें हर साल करीब 2. 67 करोड़ नवजात शिशुओं और 2. 9 करोड़ गर्भवती महिलाओं तक सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य होता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मुताबिक, "UIP के तहत वैक्सीन द्वारा रोके जा सकने वाले 12 रोगों की मुफ़्त वैक्सीन मुहैया करवाई जाती है. इनमें से 9 वैक्सीन राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान की जाती हैं- डिफ़्थीरिया, कुकुरखांसी (काली खांसी), टेटेनस, पोलियो, खसरा, रूबेला (जर्मन खसरा), बचपन में होने वाली जानलेवा टीबी, हेपेटाइटिस बी और मैनिंजाइटिस और हीमोफ़िलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी से होने वाला निमोनिया शामिल है. इन तीन बीमारियों के लिए राज्य स्तर पर वैक्सीन दी जाती है - रोटावायरस डायरिया, न्यूमोकॉकल निमोनिया और जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस. " ये कांग्रेस सरकार के समय भी दी जाती थी और आज भी. भारत में सौ फ़ीसदी टीकाकरण पंहुचने में प्राइवेट अस्पताल अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, ये वैक्सीन मुफ़्त में उपलब्ध नहीं करवाते हैं. हमने भारत के सबसे बड़े प्राइवेट अस्पतालों में शामिल एक अस्पताल के प्रवक्ता से बात की. उन्होंने बताया, "प्राइवेट अस्पताल फ़्री वैक्सीन मुहैया नहीं करवाते हैं. उन्होंने ऐसा पहले भी नहीं किया है. लेकिन सरकारी अस्पतालों में फ़्री वैक्सीन लगाई जाती है. " कांग्रेस का ये दावा कि उनके कार्यकाल में 12 बीमारियों की वैक्सीन पूरी तरह मुफ़्त में उपलब्ध करवाई गयी, ग़लत है. क्योंकि UPA के समय भी प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के लिए पैसे दिए जाते थे. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दस्तावेज़, 'FAQs on Immunization 2017' के मुताबिक, नीचे दी गयी वैक्सीन मुफ़्त में उपलब्ध करवाई जाती हैं (पेज 12). ये वो 12 वैक्सीन हैं जो 18 बिमारियों से बचाने के लिए लगाए जाते हैं. ऑल्ट न्यूज़ को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट पर 'FAQs on Immunization 2013' (PDG देखें) भी मिला. उस समय UIP के तहत 8 तरह की वैक्सीन 9 बीमारियों से बचाव के लिए लगाई जाती थीं. हालांकि, ये जानना भी ज़रूरी है कि चीन, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, ब्राज़ील जैसे देश ने नागरिकों को मुफ़्त में वैक्सीन मुहैया करने के ऐलान किया है. वहीं भारत इकलौता देश है जिसने नागरिकों को मुफ़्त वैक्सीन उपलब्ध कराने की कोई बात नहीं कही है. एक बार फिर दोहराया जा रहा है कि कांग्रेस ने UIP के तहत दी जाने वाली वैक्सीन की तुलना भाजपा सरकार में प्राइवेट अस्पतालों में दी जा रही कोविड-19 वैक्सीन से की है. UIP के तहत आने वाली वैक्सीन सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर अभी भी मुफ़्त में दी जाती है. सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल्स से एक इन्फ़ोग्राफ़िक शेयर करते हुए दावा किया गया कि UPA सरकार ने वैक्सीन द्वारा रोके जा सकने वाले बारह रोगों की मुफ़्त वैक्सीन मुहैया करवाई थी. और इस ग्राफ़िक के मुताबिक भाजपा सरकार एक कोविड-उन्नीस वैक्सीन डोज़ के ग़ैर-सरकारी अस्पताल में दो सौ पचास रुपयापये वसूल रही है. ये इन्फ़ोग्राफ़िक शेयर करने वाले हैंडल्स में INC आंध्र प्रदेश, गोवा प्रदेश कांग्रेस सेवादल, पश्चिम बंगाल महिला कांग्रेस, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सेवादल , महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस शामिल थे. This slideshow requires JavaScript. कांग्रेस नेता अकोइज़ाम मीराबाई, विवेक बंसल और एसएस किम ने भी इसे शेयर किया. कांग्रेस ने जिस बारह बीमारियों को रोकने वाली वैक्सीन मुफ़्त में दिए जाने की बात की, वो सरकारी अस्पतालों में दी गयी थी जबकि इसकी तुलना उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों में दिए जाने वाली कोविड-उन्नीस वैक्सीन से की. इसी वजह से लोगों को लगा कि भाजपा कोविड-उन्नीस वैक्सीन समेत कोई भी वैक्सीन मुफ़्त में उपलब्ध नहीं करवा रही. इस ग्राफ़िक में बारह रोगों को रोकने वाली वैक्सीन के बारे में जो लिखा है, वो यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम के आंकड़ों से लिया गया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मुताबिक UIP देश का सबसे बड़ा स्वास्थ्य अभियान है जिसमें हर साल करीब दो. सरसठ करोड़ नवजात शिशुओं और दो. नौ करोड़ गर्भवती महिलाओं तक सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य होता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मुताबिक, "UIP के तहत वैक्सीन द्वारा रोके जा सकने वाले बारह रोगों की मुफ़्त वैक्सीन मुहैया करवाई जाती है. इनमें से नौ वैक्सीन राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान की जाती हैं- डिफ़्थीरिया, कुकुरखांसी , टेटेनस, पोलियो, खसरा, रूबेला , बचपन में होने वाली जानलेवा टीबी, हेपेटाइटिस बी और मैनिंजाइटिस और हीमोफ़िलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी से होने वाला निमोनिया शामिल है. इन तीन बीमारियों के लिए राज्य स्तर पर वैक्सीन दी जाती है - रोटावायरस डायरिया, न्यूमोकॉकल निमोनिया और जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस. " ये कांग्रेस सरकार के समय भी दी जाती थी और आज भी. भारत में सौ फ़ीसदी टीकाकरण पंहुचने में प्राइवेट अस्पताल अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, ये वैक्सीन मुफ़्त में उपलब्ध नहीं करवाते हैं. हमने भारत के सबसे बड़े प्राइवेट अस्पतालों में शामिल एक अस्पताल के प्रवक्ता से बात की. उन्होंने बताया, "प्राइवेट अस्पताल फ़्री वैक्सीन मुहैया नहीं करवाते हैं. उन्होंने ऐसा पहले भी नहीं किया है. लेकिन सरकारी अस्पतालों में फ़्री वैक्सीन लगाई जाती है. " कांग्रेस का ये दावा कि उनके कार्यकाल में बारह बीमारियों की वैक्सीन पूरी तरह मुफ़्त में उपलब्ध करवाई गयी, ग़लत है. क्योंकि UPA के समय भी प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के लिए पैसे दिए जाते थे. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दस्तावेज़, 'FAQs on Immunization दो हज़ार सत्रह' के मुताबिक, नीचे दी गयी वैक्सीन मुफ़्त में उपलब्ध करवाई जाती हैं . ये वो बारह वैक्सीन हैं जो अट्ठारह बिमारियों से बचाने के लिए लगाए जाते हैं. ऑल्ट न्यूज़ को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट पर 'FAQs on Immunization दो हज़ार तेरह' भी मिला. उस समय UIP के तहत आठ तरह की वैक्सीन नौ बीमारियों से बचाव के लिए लगाई जाती थीं. हालांकि, ये जानना भी ज़रूरी है कि चीन, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, ब्राज़ील जैसे देश ने नागरिकों को मुफ़्त में वैक्सीन मुहैया करने के ऐलान किया है. वहीं भारत इकलौता देश है जिसने नागरिकों को मुफ़्त वैक्सीन उपलब्ध कराने की कोई बात नहीं कही है. एक बार फिर दोहराया जा रहा है कि कांग्रेस ने UIP के तहत दी जाने वाली वैक्सीन की तुलना भाजपा सरकार में प्राइवेट अस्पतालों में दी जा रही कोविड-उन्नीस वैक्सीन से की है. UIP के तहत आने वाली वैक्सीन सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर अभी भी मुफ़्त में दी जाती है. सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
आधुनिक डिजाइनर अक्सर सबसे असामान्य अभिव्यक्तियों में उनका उपयोग करते हुए सजावट तत्वों के साथ प्रयोग करते हैं। तो, शास्त्रीय छत baguette, जो आमतौर पर वॉलपेपर के किनारों को सजाने के लिए, अब दीवार सजावट के लिए प्रयोग किया जाता है। प्रोफाइल फ्रेम के रूप में या दो प्रकार के वॉलपेपर को चित्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है। वे बहुत ही मूल और समझदार इंटीरियर में भी बहुत मूल दिखते हैं और ताजा नोट लाते हैं। सभी सजावटी दीवार फ्रेम कई प्रकारों में विभाजित किया जा सकता हैः - लकड़ी; - प्लास्टिक; - एल्यूमीनियम। काम में सबसे सुविधाजनक एक लकड़ी की प्रोफाइल है। यह उपवास करते समय क्रैक नहीं करता है, अपार्टमेंट के डिजाइन को ennobles, मालिकों के कुलीन स्वाद पर जोर देते हैं। दीवार के लिए प्लास्टिक बैगूट्स को बजट विकल्प माना जाता है, लेकिन इससे उन्हें मांग में कम नहीं होता है। वे आमतौर पर रंगों का एक विस्तृत पैलेट है, और राहत अधिक जटिल और multifaceted है। एल्यूमीनियम baguettes के लिए, वे आधुनिक अंदरूनी के लिए आदर्श हैं। फ्रेम के धातु चमक पूरी तरह से क्रोम तत्वों और प्लाज्मा टीवी की ठंडी चमक के साथ संयुक्त है। तो, इस मामले में कौन से मामले प्रासंगिक होंगे? कई सार्वभौमिक विकल्प हैंः - दीवार पर एक निश्चित क्षेत्र का चयन। यह एक ऐसा स्थान हो सकता है जहां सख्त सीमाओं के भीतर घंटों या कई तस्वीरें लटका हों। Baguette केंद्रीय भाग में क्या है और कमरे के डिजाइन को हल्का करने पर ध्यान आकर्षित करेगा। - निकेश यदि आप दीवार में एक जगह पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, तो इसके किनारों को एक विपरीत बैगूट के साथ ट्रिम करें। आप इस बैकलाइट को जोड़कर इंटीरियर को भी ट्रिम कर सकते हैं। यह रोमांटिक और थोड़ा रहस्यमय दिखता है। - वॉलपेपर का संयोजन। जोड़ों पर दो प्रकार के वॉलपेपर के बीच सीमा को सुगम बनाने के लिए, आप फ्रेम पेस्ट कर सकते हैं। इसके कारण, संक्रमण कम ध्यान देने योग्य होगा, और डिजाइन स्वयं अधिक सामंजस्यपूर्ण होगा। - दर्पण फ़्रेमिंग। एक फ्रेम के बिना सबसे साधारण दर्पण एक छत baguette के साथ उज्ज्वल और आकर्षक हो जाएगा। इसे उत्पाद के चारों ओर परिधि के चारों ओर चिपकाएं और आपका इंटीरियर तुरंत बदल जाएगा। दीवार पर चलने वाले बैगूटे का उपयोग करते समय, इसकी बनावट और रंग पर ध्यान देना अनुशंसा की जाती है। यदि आप एक तस्वीर, एक दीपक या दर्पण फ्रेम करते हैं, तो बिना मोड़ और नक्काशीदार विवरण के क्लासिक पैनलों का उपयोग करना बेहतर होता है। वॉलपेपर को सजाने के लिए, अनुकरण स्टुको या संतृप्त रंग के साथ अधिक सुरुचिपूर्ण मॉडल करेंगे।
आधुनिक डिजाइनर अक्सर सबसे असामान्य अभिव्यक्तियों में उनका उपयोग करते हुए सजावट तत्वों के साथ प्रयोग करते हैं। तो, शास्त्रीय छत baguette, जो आमतौर पर वॉलपेपर के किनारों को सजाने के लिए, अब दीवार सजावट के लिए प्रयोग किया जाता है। प्रोफाइल फ्रेम के रूप में या दो प्रकार के वॉलपेपर को चित्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है। वे बहुत ही मूल और समझदार इंटीरियर में भी बहुत मूल दिखते हैं और ताजा नोट लाते हैं। सभी सजावटी दीवार फ्रेम कई प्रकारों में विभाजित किया जा सकता हैः - लकड़ी; - प्लास्टिक; - एल्यूमीनियम। काम में सबसे सुविधाजनक एक लकड़ी की प्रोफाइल है। यह उपवास करते समय क्रैक नहीं करता है, अपार्टमेंट के डिजाइन को ennobles, मालिकों के कुलीन स्वाद पर जोर देते हैं। दीवार के लिए प्लास्टिक बैगूट्स को बजट विकल्प माना जाता है, लेकिन इससे उन्हें मांग में कम नहीं होता है। वे आमतौर पर रंगों का एक विस्तृत पैलेट है, और राहत अधिक जटिल और multifaceted है। एल्यूमीनियम baguettes के लिए, वे आधुनिक अंदरूनी के लिए आदर्श हैं। फ्रेम के धातु चमक पूरी तरह से क्रोम तत्वों और प्लाज्मा टीवी की ठंडी चमक के साथ संयुक्त है। तो, इस मामले में कौन से मामले प्रासंगिक होंगे? कई सार्वभौमिक विकल्प हैंः - दीवार पर एक निश्चित क्षेत्र का चयन। यह एक ऐसा स्थान हो सकता है जहां सख्त सीमाओं के भीतर घंटों या कई तस्वीरें लटका हों। Baguette केंद्रीय भाग में क्या है और कमरे के डिजाइन को हल्का करने पर ध्यान आकर्षित करेगा। - निकेश यदि आप दीवार में एक जगह पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, तो इसके किनारों को एक विपरीत बैगूट के साथ ट्रिम करें। आप इस बैकलाइट को जोड़कर इंटीरियर को भी ट्रिम कर सकते हैं। यह रोमांटिक और थोड़ा रहस्यमय दिखता है। - वॉलपेपर का संयोजन। जोड़ों पर दो प्रकार के वॉलपेपर के बीच सीमा को सुगम बनाने के लिए, आप फ्रेम पेस्ट कर सकते हैं। इसके कारण, संक्रमण कम ध्यान देने योग्य होगा, और डिजाइन स्वयं अधिक सामंजस्यपूर्ण होगा। - दर्पण फ़्रेमिंग। एक फ्रेम के बिना सबसे साधारण दर्पण एक छत baguette के साथ उज्ज्वल और आकर्षक हो जाएगा। इसे उत्पाद के चारों ओर परिधि के चारों ओर चिपकाएं और आपका इंटीरियर तुरंत बदल जाएगा। दीवार पर चलने वाले बैगूटे का उपयोग करते समय, इसकी बनावट और रंग पर ध्यान देना अनुशंसा की जाती है। यदि आप एक तस्वीर, एक दीपक या दर्पण फ्रेम करते हैं, तो बिना मोड़ और नक्काशीदार विवरण के क्लासिक पैनलों का उपयोग करना बेहतर होता है। वॉलपेपर को सजाने के लिए, अनुकरण स्टुको या संतृप्त रंग के साथ अधिक सुरुचिपूर्ण मॉडल करेंगे।
FD Interest Rates: रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाने के बाद देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. Fixed Deposit Interest Rate: अगर आप निवेश करते हैं और सबसे ज्यादा ब्याज के साथ अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो आप इस बैंक की एफडी में निवेश करें. इसमें आपका निवेश सुरक्षित रहेगा और कोई परेशानी भी नहीं होगी. रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने के बाद देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)पर लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. अब ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले इंटरेस्ट रेट (Interest Rate)में बढ़ोतरी की है. ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक ने दो करोड़ रुपये से कम कीफिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं.बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नई दरें 15 दिसंबर 2022 से प्रभावी हो गई हैं. नए रेजिडेंट टर्म डिपॉजिट और मौजूदा रेजिडेंट टर्म डिपॉजिट केरिन्यूअल दोनों पर ही नई ब्याज दरें प्रभावी होंगी. फिक्स्ड डिपॉजिट कीब्याज दरों में हुए बदलाव के बाद बैंक 7 दिनों से 10 वर्षों की अवधि में मैच्योर होने वाली FD पर आम पब्लिक के लिए 4.00 फीसदी से 5.25 फीसदी तक ब्याज ऑफर कर रहा है. वहीं, वरिष्ठ नागरिकों को FD पर 4.50 फीसदी से 5.75 फीसदी तक ब्याज मिलेगा. इसके अलावा 999 दिनों में मैच्योर होने वाली FD पर ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) वरिष्ठ नागरिकों कोअधिकतम 8.50% और गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.00 फीसदी की अधिकतम ब्याज दर ऑफर कर रहा है. 183 दिनों से एक वर्ष में मैच्योर होने वाली डिपॉजिट पर 5.50 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. एक वर्ष एक दिन से दो वर्ष से कम की अवधि में मैच्योर होने वाली FD पर 7.25 फीसदी की दर से बैंक ब्याज ऑफर कर रहा है. दो वर्ष से 998 दिनों में परिपक्व होने वाली जमा पर बैंक 7.50 फीसदी की ब्याज दर पेश कर रहा है. इसके अलावा 999 दिनों (2 वर्ष 8 महीने और 25 दिन) में मैचेयोर होने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) 8.00 फीसदी की अधिकतमब्याज दर ऑफर कर रहा है.1000 दिनों से लेकर 3 साल से कम में मैच्योर होने वाली FD पर 7.50 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. अगर आप इस बैंक में निवेश करते हैं तो तीन साल से पांच साल से कम और पांच साल से 10 साल तक की अवधि में मैच्योर होने वाली FD पर क्रमशः 5.75 फीसदी और 5.25 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. ये ब्याज दरें रेजिडेंट रेकरिंग डिपॉजिट पर भी लागू होंगी. भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट (Repo Rate) में इजाफा किया है. रेपो रेट में 0.35 फीसदी की हुई बढ़ोतरी हुई है. English News Headline : ESAF Small Finance Bank SFB hikes Interest Rate on Fixed Deposit.
FD Interest Rates: रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने के बाद देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. Fixed Deposit Interest Rate: अगर आप निवेश करते हैं और सबसे ज्यादा ब्याज के साथ अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो आप इस बैंक की एफडी में निवेश करें. इसमें आपका निवेश सुरक्षित रहेगा और कोई परेशानी भी नहीं होगी. रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने के बाद देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं. अब ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की है. ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक ने दो करोड़ रुपये से कम कीफिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं.बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नई दरें पंद्रह दिसंबर दो हज़ार बाईस से प्रभावी हो गई हैं. नए रेजिडेंट टर्म डिपॉजिट और मौजूदा रेजिडेंट टर्म डिपॉजिट केरिन्यूअल दोनों पर ही नई ब्याज दरें प्रभावी होंगी. फिक्स्ड डिपॉजिट कीब्याज दरों में हुए बदलाव के बाद बैंक सात दिनों से दस वर्षों की अवधि में मैच्योर होने वाली FD पर आम पब्लिक के लिए चार.शून्य फीसदी से पाँच.पच्चीस फीसदी तक ब्याज ऑफर कर रहा है. वहीं, वरिष्ठ नागरिकों को FD पर चार.पचास फीसदी से पाँच.पचहत्तर फीसदी तक ब्याज मिलेगा. इसके अलावा नौ सौ निन्यानवे दिनों में मैच्योर होने वाली FD पर ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों कोअधिकतम आठ.पचास% और गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए आठ.शून्य फीसदी की अधिकतम ब्याज दर ऑफर कर रहा है. एक सौ तिरासी दिनों से एक वर्ष में मैच्योर होने वाली डिपॉजिट पर पाँच.पचास फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. एक वर्ष एक दिन से दो वर्ष से कम की अवधि में मैच्योर होने वाली FD पर सात.पच्चीस फीसदी की दर से बैंक ब्याज ऑफर कर रहा है. दो वर्ष से नौ सौ अट्ठानवे दिनों में परिपक्व होने वाली जमा पर बैंक सात.पचास फीसदी की ब्याज दर पेश कर रहा है. इसके अलावा नौ सौ निन्यानवे दिनों में मैचेयोर होने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर स्मॉल फाइनेंस बैंक आठ.शून्य फीसदी की अधिकतमब्याज दर ऑफर कर रहा है.एक हज़ार दिनों से लेकर तीन साल से कम में मैच्योर होने वाली FD पर सात.पचास फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. अगर आप इस बैंक में निवेश करते हैं तो तीन साल से पांच साल से कम और पांच साल से दस साल तक की अवधि में मैच्योर होने वाली FD पर क्रमशः पाँच.पचहत्तर फीसदी और पाँच.पच्चीस फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. ये ब्याज दरें रेजिडेंट रेकरिंग डिपॉजिट पर भी लागू होंगी. भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट में इजाफा किया है. रेपो रेट में शून्य.पैंतीस फीसदी की हुई बढ़ोतरी हुई है. English News Headline : ESAF Small Finance Bank SFB hikes Interest Rate on Fixed Deposit.
सब्जीपुर के युवराज ' आलू चंद ' की विवाह योग्य उम्र होते ही राज्य के सभी मंत्री , दरबारी उनके लिए सुयोग्य नायिका की खोज में लग गए । सब्जी पुर की कई यौवनाएँ मन ही मन आलूचन्द के सपने देखती थीं । लेकिन अपनी छोटी सी हैसियत देखकर उन्हें अपना मन मसोस कर रह जाना पड़ता था । दरबारी पंडित लौकी चंद ने अपने दूर के रिश्तेदार की बेटी कद्दू से आलूचन्द के रिश्ते की बात चलाई । दोनों पक्षों की आपसी सहमति में यह तय हुआ कि एक नजर भावी वर व वधू एक दूसरे को देख परख लें , और यदि दोनों की सहमति मिलती है तो आगे धूमधाम से दोनों का शुभविवाह कर दिया जाएगा । वर वधू को मिलवाने की तैयारी पूरी हो गयी । दोनों पक्षों की तरफ से मान्यवरों की उपस्थिति में वधू ' कद्दू कुमारी ' को बुलवाया गया । ' गाजर , मुली , और सुकुमार लचकती हुई धनिया के संग शर्म से लाल होती जा रही चुकंदर भी सखियों के रूप में ' कद्दू कुमारी ' के संग ही सधे कदमों से उस तरफ बढ़ रही थी जहां ' आलूचन्द ' टमाटर , परवल , बैंगनलाल सहित सभी रिश्तेदारों व हितैषियों के साथ बैठा हुआ था । उनकी मार्गदर्शक राजमाता ' गोभिदेवी ' भी इस सुअवसर पर आलूचन्द का उत्साहवर्धन करने के लिए उपस्थित थीं । कहकर लौकी चंद कन्यापक्ष के मेहमानों की भीड़ में भिंडी कुमारी की तरफ बढ़ गया । इतने में कद्दू कुमारी का अपनी सहेलियों के साथ उस विशेष कक्ष में आगमन हो गया । लेकिन आलूचन्द का पूरा ध्यान तो भिंडी कुमारी की तरफ लगा हुआ था । अचानक उसे उठकर अपनी तरफ बढ़ते देखकर आलूचन्द की धड़कनें खुशी के मारे सामान्य से तेज हो गईं । उसे लगा पंडित लौकिचन्द की बात मानकर वह उसके पास अपनी सहमति जताने आ रही है । लेकिन यह क्या ? अगले ही पल गुस्से में तमतमाई भिंडी कुमारी अपनी पतली कमर पर एक हाथ रखे बड़े तैश में सबके सामने आलूचन्द को डपट रही थी " बड़े आये मुझसे शादी करनेवाले । कभी अपनी शक्ल भी देखी है ? ये गोल मटोल और बीच बीच में दागदार चेहरा और जिस्म देखो तो कई जगह कूबड़ सा निकला हुआ है और सपने देख रहे हैं मुझ जैसी हसीन खूबसूरत कमसिन सब्जी का । अरे तुझे तो कद्दू कुमारी पसंद कर ले तो भी तेरा नशीब अच्छा है यही समझना । बड़े आये हैं ......" बड़बड़ाती भिंडी कुमारी भीड़ में से रास्ता बनाती बड़ी अदा से वहां से चली गयी । उसका संक्षिप्त सा भाषण सुनकर आलूचन्द स्तब्ध रह गया । लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए वह भी तैश में उठा और अपने साथियों के साथ उठकर अपने वाहन में सवार होकर वहां से चले आया । खुशी का माहौल अचानक अफरातफरी के माहौल में बदल गया । पूरे वाकये से अनजान कद्दुकुमारी और उसकी सहेलियों व परिजनों को आलूचन्द का यूं चले जाना अपनी घोर बेइज्जती महसूस हुई । लौकिचन्द के स्पष्टीकरण के बाद तो उनका गुस्सा लौकिचन्द पर ही फुट पड़ा और वादाखिलाफी के आरोप में उन लोगों ने लौकिचन्द को अपने ही खेमे में बंधक बना लिया । कहते हैं इस वाकये के बाद से ही सब्जियों के दो समूह बन गए । आज भी आलू चंद अपने साथियों टमाटर लाल , राजमाता गोभी देवी , परवल कुमार , बैंगनलाल , मटरु चंद जैसी सब्जियों के समर्थन से बहुमत के आधार पर सब्जी पुर की सत्ता का राजा के रूप में उपभोग कर रहा है जबकि कद्दू कुमारी के परिजन आज भी लौकिचन्द व भिंडी कुमारी को सारे फसाद की जड़ मानते हुए इन्हें अपने आस पास फटकने भी नहीं देते । सभी परिजनों में भी अविश्वास इस कदर बढ़ गया है कि ये आपस में भी मिलना जुलना बंद कर चुके हैं । शायद तभी से आलूचन्द अपने परिजनों के साथ मिलकर लाजवाब सब्जी का स्वाद उत्पन्न कर देता है और सब्जियों का राजा कहलाने का गौरव पाता है जबकि दूसरी तरफ कद्दुकुमारी , भिंडी कुमारी , लौकिचन्द , चुकंदर , जैसी सब्जियां आपस की दुश्मनी की वजह से आज भी अकेले अकेले ही पकाई जाती हैं और सिर्फ अपने ही गुणों से पहचानी जाती हैं । यह विडंबना ही है कि अधिक से अधिक लोगों की पसंद कद्दुकुमारी के परिजन व उसके खेमे की सब्जियां करेला , नेनुआ , व तुरीया जैसी दर्जनों सब्जियों का नैतिक समर्थन हासिल करने के बावजूद सिर्फ आपसी फूट के चलते विपक्ष में रहने को अभिशप्त हैं जबकि आलूचन्द अपने चंद साथियों के दम पर ही अपने मिलनसार व विनम्र स्वभाव के चलते तेल व मसालों का भी भरपूर समर्थन पाकर सब्जीपुर पर लगातार शासन कर रहा है ।
सब्जीपुर के युवराज ' आलू चंद ' की विवाह योग्य उम्र होते ही राज्य के सभी मंत्री , दरबारी उनके लिए सुयोग्य नायिका की खोज में लग गए । सब्जी पुर की कई यौवनाएँ मन ही मन आलूचन्द के सपने देखती थीं । लेकिन अपनी छोटी सी हैसियत देखकर उन्हें अपना मन मसोस कर रह जाना पड़ता था । दरबारी पंडित लौकी चंद ने अपने दूर के रिश्तेदार की बेटी कद्दू से आलूचन्द के रिश्ते की बात चलाई । दोनों पक्षों की आपसी सहमति में यह तय हुआ कि एक नजर भावी वर व वधू एक दूसरे को देख परख लें , और यदि दोनों की सहमति मिलती है तो आगे धूमधाम से दोनों का शुभविवाह कर दिया जाएगा । वर वधू को मिलवाने की तैयारी पूरी हो गयी । दोनों पक्षों की तरफ से मान्यवरों की उपस्थिति में वधू ' कद्दू कुमारी ' को बुलवाया गया । ' गाजर , मुली , और सुकुमार लचकती हुई धनिया के संग शर्म से लाल होती जा रही चुकंदर भी सखियों के रूप में ' कद्दू कुमारी ' के संग ही सधे कदमों से उस तरफ बढ़ रही थी जहां ' आलूचन्द ' टमाटर , परवल , बैंगनलाल सहित सभी रिश्तेदारों व हितैषियों के साथ बैठा हुआ था । उनकी मार्गदर्शक राजमाता ' गोभिदेवी ' भी इस सुअवसर पर आलूचन्द का उत्साहवर्धन करने के लिए उपस्थित थीं । कहकर लौकी चंद कन्यापक्ष के मेहमानों की भीड़ में भिंडी कुमारी की तरफ बढ़ गया । इतने में कद्दू कुमारी का अपनी सहेलियों के साथ उस विशेष कक्ष में आगमन हो गया । लेकिन आलूचन्द का पूरा ध्यान तो भिंडी कुमारी की तरफ लगा हुआ था । अचानक उसे उठकर अपनी तरफ बढ़ते देखकर आलूचन्द की धड़कनें खुशी के मारे सामान्य से तेज हो गईं । उसे लगा पंडित लौकिचन्द की बात मानकर वह उसके पास अपनी सहमति जताने आ रही है । लेकिन यह क्या ? अगले ही पल गुस्से में तमतमाई भिंडी कुमारी अपनी पतली कमर पर एक हाथ रखे बड़े तैश में सबके सामने आलूचन्द को डपट रही थी " बड़े आये मुझसे शादी करनेवाले । कभी अपनी शक्ल भी देखी है ? ये गोल मटोल और बीच बीच में दागदार चेहरा और जिस्म देखो तो कई जगह कूबड़ सा निकला हुआ है और सपने देख रहे हैं मुझ जैसी हसीन खूबसूरत कमसिन सब्जी का । अरे तुझे तो कद्दू कुमारी पसंद कर ले तो भी तेरा नशीब अच्छा है यही समझना । बड़े आये हैं ......" बड़बड़ाती भिंडी कुमारी भीड़ में से रास्ता बनाती बड़ी अदा से वहां से चली गयी । उसका संक्षिप्त सा भाषण सुनकर आलूचन्द स्तब्ध रह गया । लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए वह भी तैश में उठा और अपने साथियों के साथ उठकर अपने वाहन में सवार होकर वहां से चले आया । खुशी का माहौल अचानक अफरातफरी के माहौल में बदल गया । पूरे वाकये से अनजान कद्दुकुमारी और उसकी सहेलियों व परिजनों को आलूचन्द का यूं चले जाना अपनी घोर बेइज्जती महसूस हुई । लौकिचन्द के स्पष्टीकरण के बाद तो उनका गुस्सा लौकिचन्द पर ही फुट पड़ा और वादाखिलाफी के आरोप में उन लोगों ने लौकिचन्द को अपने ही खेमे में बंधक बना लिया । कहते हैं इस वाकये के बाद से ही सब्जियों के दो समूह बन गए । आज भी आलू चंद अपने साथियों टमाटर लाल , राजमाता गोभी देवी , परवल कुमार , बैंगनलाल , मटरु चंद जैसी सब्जियों के समर्थन से बहुमत के आधार पर सब्जी पुर की सत्ता का राजा के रूप में उपभोग कर रहा है जबकि कद्दू कुमारी के परिजन आज भी लौकिचन्द व भिंडी कुमारी को सारे फसाद की जड़ मानते हुए इन्हें अपने आस पास फटकने भी नहीं देते । सभी परिजनों में भी अविश्वास इस कदर बढ़ गया है कि ये आपस में भी मिलना जुलना बंद कर चुके हैं । शायद तभी से आलूचन्द अपने परिजनों के साथ मिलकर लाजवाब सब्जी का स्वाद उत्पन्न कर देता है और सब्जियों का राजा कहलाने का गौरव पाता है जबकि दूसरी तरफ कद्दुकुमारी , भिंडी कुमारी , लौकिचन्द , चुकंदर , जैसी सब्जियां आपस की दुश्मनी की वजह से आज भी अकेले अकेले ही पकाई जाती हैं और सिर्फ अपने ही गुणों से पहचानी जाती हैं । यह विडंबना ही है कि अधिक से अधिक लोगों की पसंद कद्दुकुमारी के परिजन व उसके खेमे की सब्जियां करेला , नेनुआ , व तुरीया जैसी दर्जनों सब्जियों का नैतिक समर्थन हासिल करने के बावजूद सिर्फ आपसी फूट के चलते विपक्ष में रहने को अभिशप्त हैं जबकि आलूचन्द अपने चंद साथियों के दम पर ही अपने मिलनसार व विनम्र स्वभाव के चलते तेल व मसालों का भी भरपूर समर्थन पाकर सब्जीपुर पर लगातार शासन कर रहा है ।
एक ठंडे स्टील पहने हुए महत्वपूर्ण है! Crimea में रूसी नागरिकता कैसे प्राप्त करें? Crimea में रूसी नागरिकता प्राप्त करने के लिए आपको क्या चाहिए? रूस के कितने साल? रूस कितने सालों से अस्तित्व में है? क्या उपहार को चुनौती देना संभव है? किसी अपार्टमेंट के लिए उपहार को कैसे चुनौती देना है? कार्यालय का काम और कार्यप्रवाह क्या है?
एक ठंडे स्टील पहने हुए महत्वपूर्ण है! Crimea में रूसी नागरिकता कैसे प्राप्त करें? Crimea में रूसी नागरिकता प्राप्त करने के लिए आपको क्या चाहिए? रूस के कितने साल? रूस कितने सालों से अस्तित्व में है? क्या उपहार को चुनौती देना संभव है? किसी अपार्टमेंट के लिए उपहार को कैसे चुनौती देना है? कार्यालय का काम और कार्यप्रवाह क्या है?
कैसी विडंबना है कि विश्व की भुखमरी सूची में भारत का स्थान 107 वां है याने दुनिया के 106 देशों से भी ज्यादा भुखमरी भारत में है और दूसरी तरफ हमें गर्व करने की यह खबर आई है कि विश्व की चिकित्सा पद्धतियों में भारत के आयुर्वेद को पहली बार अग्रणी सम्मान मिला है। यह सम्मान दिया है, अमेरिका की स्टेनफोर्ड युनिवर्सिटी और यूरोपीय पब्लिशर्स एल्सेवियर ने! यह सम्मान मिला है, पंतजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण को! विश्व के प्रतिष्ठित शोधकर्त्ता वैज्ञानिकों की श्रेणी में अब उनकी गणना हो गई है। यह अकेले आचार्य बालकृष्ण का ही सम्मान नहीं है। यह भारत की प्राचीन और परिणाम सिद्ध चिकित्सा-प्रणाली को मिली वैश्विक मान्यता है। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने देश के करोड़ों लोगों के लिए उत्तम और सुलभ औषधियों का बड़े पैमाने पर निर्माण ही नहीं किया है बल्कि उन्होंने ऐसे बुनियादी अनुसंधान भी किए हैं, जो आयुर्वेद को एलोपेथी से भी अधिक प्रभावशाली और उपयोगी बना देते हैं। ऐसे कुछ शोध-ग्रंथों का विमोचन कुछ वर्ष पहले मैंने और श्री नितीन गडकरी ने हरिद्वार के एक बड़े समारोह में किया था। अपने भाषण में उस समय मैंने कहा था कि शंहशाहों द्वारा बनाए गए महल और किले तो 5-7 सौ साल में ढेर हो जाएंगे लेकिन बालकृष्णजी के ये ग्रंथ चरक, सुश्रुत, वाग्भट आदि के ग्रंथों की तरह हजारों साल तक मानवता की सेवा करते रहेंगे। यदि भारत पर विदेशी आक्रमण नहीं होते तो हमारा आयुर्वेद आज दुनिया का सर्वश्रेष्ठ उपचार तंत्र बन जाता। सौ साल पहले तक ऐलोपेथी के डाक्टरों को यह पता ही नहीं था कि आपरेशन के पहले मरीजों को बेहोश कैसे किया जाए? हमारे यहां हजारों साल पहले से चरक-संहिता में इसका विस्तृत विधान है। ऐलोपेथी कुछ वर्षों तक सिर्फ शरीर का इलाज करती थी लेकिन आयुर्वेद का वैद्य जब दवाई देता है तो वह मरीज़ के शरीर, मन, मस्तिष्क और आत्मा का भी ख्याल करता है। अब ऐलोपेथी भी धीरे-धीरे इस रास्ते पर आ रही है। आयुर्वेद का नाड़ी-विज्ञान आज भी इतना गजब का है कि दिल्ली के स्व. बृहस्पतिदेव त्रिगुणा जैसे वैद्य मरीज़ की सिर्फ नाड़ी देखकर ऐसा विलक्षण रोग-विश्लेषण कर देते थे कि जैसा ऐलोपेथी के आठ यंत्र भी एक साथ नहीं कर सकते हैं। आज सारी दुनिया में ऐलोपेथी लोगों का जितना भला कर रही है, उससे ज्यादा वह उनकी ठगी कर रही है। भारत के करोड़ों गरीब लोगों को उसकी सुविधा नसीब ही नहीं है। भारत में आयुर्वेद, यूनानी, तिब्बती और होम्योपेथी (घरेलू इलाज) का अनुसंधान बढ़ जाए और आधुनिकीकरण हो जाए तो देश के निर्धन और वंचित लोगों का सबसे अधिक लाभ होगा। हमारे पड़ौसी देशों के लोग भी भारत दौड़े चले आएंगे। भारत के पड़ौसी देशों के लेागों को भारत से जोड़ने का यह सर्वोत्तम साधन है। भारत के वैद्य जिसकी जान बचा देंगे, वह भारत का भक्त हुए बिना नहीं रहेगा।
कैसी विडंबना है कि विश्व की भुखमरी सूची में भारत का स्थान एक सौ सात वां है याने दुनिया के एक सौ छः देशों से भी ज्यादा भुखमरी भारत में है और दूसरी तरफ हमें गर्व करने की यह खबर आई है कि विश्व की चिकित्सा पद्धतियों में भारत के आयुर्वेद को पहली बार अग्रणी सम्मान मिला है। यह सम्मान दिया है, अमेरिका की स्टेनफोर्ड युनिवर्सिटी और यूरोपीय पब्लिशर्स एल्सेवियर ने! यह सम्मान मिला है, पंतजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण को! विश्व के प्रतिष्ठित शोधकर्त्ता वैज्ञानिकों की श्रेणी में अब उनकी गणना हो गई है। यह अकेले आचार्य बालकृष्ण का ही सम्मान नहीं है। यह भारत की प्राचीन और परिणाम सिद्ध चिकित्सा-प्रणाली को मिली वैश्विक मान्यता है। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने देश के करोड़ों लोगों के लिए उत्तम और सुलभ औषधियों का बड़े पैमाने पर निर्माण ही नहीं किया है बल्कि उन्होंने ऐसे बुनियादी अनुसंधान भी किए हैं, जो आयुर्वेद को एलोपेथी से भी अधिक प्रभावशाली और उपयोगी बना देते हैं। ऐसे कुछ शोध-ग्रंथों का विमोचन कुछ वर्ष पहले मैंने और श्री नितीन गडकरी ने हरिद्वार के एक बड़े समारोह में किया था। अपने भाषण में उस समय मैंने कहा था कि शंहशाहों द्वारा बनाए गए महल और किले तो पाँच-सात सौ साल में ढेर हो जाएंगे लेकिन बालकृष्णजी के ये ग्रंथ चरक, सुश्रुत, वाग्भट आदि के ग्रंथों की तरह हजारों साल तक मानवता की सेवा करते रहेंगे। यदि भारत पर विदेशी आक्रमण नहीं होते तो हमारा आयुर्वेद आज दुनिया का सर्वश्रेष्ठ उपचार तंत्र बन जाता। सौ साल पहले तक ऐलोपेथी के डाक्टरों को यह पता ही नहीं था कि आपरेशन के पहले मरीजों को बेहोश कैसे किया जाए? हमारे यहां हजारों साल पहले से चरक-संहिता में इसका विस्तृत विधान है। ऐलोपेथी कुछ वर्षों तक सिर्फ शरीर का इलाज करती थी लेकिन आयुर्वेद का वैद्य जब दवाई देता है तो वह मरीज़ के शरीर, मन, मस्तिष्क और आत्मा का भी ख्याल करता है। अब ऐलोपेथी भी धीरे-धीरे इस रास्ते पर आ रही है। आयुर्वेद का नाड़ी-विज्ञान आज भी इतना गजब का है कि दिल्ली के स्व. बृहस्पतिदेव त्रिगुणा जैसे वैद्य मरीज़ की सिर्फ नाड़ी देखकर ऐसा विलक्षण रोग-विश्लेषण कर देते थे कि जैसा ऐलोपेथी के आठ यंत्र भी एक साथ नहीं कर सकते हैं। आज सारी दुनिया में ऐलोपेथी लोगों का जितना भला कर रही है, उससे ज्यादा वह उनकी ठगी कर रही है। भारत के करोड़ों गरीब लोगों को उसकी सुविधा नसीब ही नहीं है। भारत में आयुर्वेद, यूनानी, तिब्बती और होम्योपेथी का अनुसंधान बढ़ जाए और आधुनिकीकरण हो जाए तो देश के निर्धन और वंचित लोगों का सबसे अधिक लाभ होगा। हमारे पड़ौसी देशों के लोग भी भारत दौड़े चले आएंगे। भारत के पड़ौसी देशों के लेागों को भारत से जोड़ने का यह सर्वोत्तम साधन है। भारत के वैद्य जिसकी जान बचा देंगे, वह भारत का भक्त हुए बिना नहीं रहेगा।
गौरतलब है कि परीक्षा का आयोजन 20 अगस्त 2022 को 53 केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा में कुल 11531 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे। उम्मीदवार बीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc. bih. nic. in पर जाकर परीक्षा का परिणाम देख सकते हैं। पटनाः बीपीएससी (BPSC) असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर पीटी का रिजल्ट जारी कर दिया गया है जिसमें कुल 1696 उम्मीदवार सफल हुए हैं। गौरतलब है कि परीक्षा का आयोजन 20 अगस्त 2022 को 53 केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा में कुल 11531 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे। उम्मीदवार बीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc. bih. nic. in पर जाकर परीक्षा का परिणाम देख सकते हैं। जो उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं, उनके आयोग मुख्य लिखित परीक्षा के लिए जल्द ही नोटिस जारी करेगा। मुख्य लिखित परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को फिर से आवेदन करना होगा। कैसे देखें रिजल्ट (How To Check BPSC Assistant Audit Officer PT Result) अभ्यर्थियों को अपना रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद होम पेज पर दिख रहे रिजल्ट ऑफ असिस्टेंट ऑडिटर कॉम्पिटेटिव एक्जाम के लिंक पर क्लिक करें। एक पीडीएफ फाइल ओपन होगा, जिसमें रोल नंबर सर्च कर अपने रिजल्ट को देख सकते हैं। बीपीएससी ने असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के कुल 138 पदों पर पीटी परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में आवेदन करने के लिए आवेदन भी मांगे हैं। आवेदन ऑनलाइन मोड में भरा जाएगा और इसके लिए आयोग के आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अभ्यर्थी आवेदन भर सकते हैं। आवेदन करने के लिए सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 750 रुपए का आवेदन शुल्क देना होगा जबकि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति सभी जाति वर्ग की महिला उम्मीदवारों और दिव्यांग उम्मीदवारों को 200 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की शुरुआत आज मंगलवार 18 अक्टूबर से हो रही है और ऑनलाइन आवेदन भरने की आखिरी तिथि 28 अक्टूबर 2022 है। ऑनलाइन आवेदन में आरक्षण कोटि और वैकल्पिक विषय में अगर कोई अभ्यर्थी चेंज करना चाहते हैं तो उसे एडिट करने के लिए 24 अक्टूबर से 28 अक्टूबर के बीच का समय है।
गौरतलब है कि परीक्षा का आयोजन बीस अगस्त दो हज़ार बाईस को तिरेपन केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा में कुल ग्यारह हज़ार पाँच सौ इकतीस उम्मीदवार उपस्थित हुए थे। उम्मीदवार बीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc. bih. nic. in पर जाकर परीक्षा का परिणाम देख सकते हैं। पटनाः बीपीएससी असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर पीटी का रिजल्ट जारी कर दिया गया है जिसमें कुल एक हज़ार छः सौ छियानवे उम्मीदवार सफल हुए हैं। गौरतलब है कि परीक्षा का आयोजन बीस अगस्त दो हज़ार बाईस को तिरेपन केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा में कुल ग्यारह हज़ार पाँच सौ इकतीस उम्मीदवार उपस्थित हुए थे। उम्मीदवार बीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc. bih. nic. in पर जाकर परीक्षा का परिणाम देख सकते हैं। जो उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं, उनके आयोग मुख्य लिखित परीक्षा के लिए जल्द ही नोटिस जारी करेगा। मुख्य लिखित परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को फिर से आवेदन करना होगा। कैसे देखें रिजल्ट अभ्यर्थियों को अपना रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद होम पेज पर दिख रहे रिजल्ट ऑफ असिस्टेंट ऑडिटर कॉम्पिटेटिव एक्जाम के लिंक पर क्लिक करें। एक पीडीएफ फाइल ओपन होगा, जिसमें रोल नंबर सर्च कर अपने रिजल्ट को देख सकते हैं। बीपीएससी ने असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के कुल एक सौ अड़तीस पदों पर पीटी परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में आवेदन करने के लिए आवेदन भी मांगे हैं। आवेदन ऑनलाइन मोड में भरा जाएगा और इसके लिए आयोग के आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अभ्यर्थी आवेदन भर सकते हैं। आवेदन करने के लिए सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए सात सौ पचास रुपयापए का आवेदन शुल्क देना होगा जबकि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति सभी जाति वर्ग की महिला उम्मीदवारों और दिव्यांग उम्मीदवारों को दो सौ रुपयापए आवेदन शुल्क देना होगा। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की शुरुआत आज मंगलवार अट्ठारह अक्टूबर से हो रही है और ऑनलाइन आवेदन भरने की आखिरी तिथि अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार बाईस है। ऑनलाइन आवेदन में आरक्षण कोटि और वैकल्पिक विषय में अगर कोई अभ्यर्थी चेंज करना चाहते हैं तो उसे एडिट करने के लिए चौबीस अक्टूबर से अट्ठाईस अक्टूबर के बीच का समय है।
अजीबोगरीब तरीके से चोरी की यह वारदात गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित शालीमार गार्डन की है। चोरों ने इतनी सफाई से घटना को अंजाम दिया कि गाड़ी में लगा आर्लम तक नहीं बजा और चोरी हो गई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने जयनगर में रैली की। उन्होंने कहा कि पहले चरण में बंगाल में हुए शांतिपूर्ण और रिकॉर्ड मतदान में लोगों ने भाजपा को भारी समर्थन दिया है। कुछ हफ्ते पहले तक बंगाल के लोग कह रहे थे कि भाजपा इस बार 200 सीटें पार कर जाएगी। लेकिन पहले चरण जिस तरह की दमदार शुरुआत भाजपा ने की है, उससे ये साफ है कि जनता की आवाज को ईश्वर का भी आशीर्वाद मिल गया है। सिंधिया ने गरुवार को सबह नई दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में जाकर कोरोना की वैक्सीन का पहला डोज लिया। इस बीच उन्होंने वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों से अपील की। वीडियो डेस्क। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो महाराष्ट्र का है जहां सबसे ज्यादा कोविड के केस बढ़ रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग हैं जो मुर्गा वॉक करते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल ये उन लोगों को सजा दी गई है जो बिना मास्क के शहर में घूम रहे हैं। मास्क ना पहनने पर पुलिस ने युवकों को ये सजा दी है। लखनऊ ( Uttar Pradesh) । यूपी में जहरीली शराब पीने से मौत की लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रतापगढ़ में अब तक आठ और अयोध्या में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, जांच में यह बात सामने आ रही है कि शराब पिलाने वाले पंचायत चुनाव में लड़ रहे दो प्रत्याशी हैं, जो रात में मछली और शराब की दावत दिए थे। जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं। कानपुर देहात ( Uttar Pradesh) । शिव-पार्वती का रोल करने वाले रीयल में भी शिव-पार्वती की वेषभूषा धारण कर शादी किए। इतना ही नहीं, दोनों की बकायदा शिव बारात निकाली गई। फिर, शिवली स्थित शिव मंदिर में रचाई। मंगलवार को हुई इस की तस्वीर भी वायरल हो रही है। जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं। हैरान कर देनी वाली यह वारदात दिल्ली के रोहिणी इलाके गुरुवार सुबह घटी। जहां मृतकों की पहचान धीरज यादव, पत्नी आरती, बच्चे हितेन (6), आर्थव (3) के रूप में हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर ताला तोड़ा और शव बरामद कर लिए। इससे पहले ATS ने भी NIA को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में सचिन वझे के एक ऑडी कार के इस्तेमाल की बात बताई थी। NIA को अब भी एक स्कोडा कार की तलाश है। यह मामला प्रतापगढ़ जनपद के उदयपुर थाना क्षेत्र के कटरिया गांव का है। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जिसके बाद जिला प्रशसान और एडीजी प्रेम प्रकाश दौरे पर पहुंचे।
अजीबोगरीब तरीके से चोरी की यह वारदात गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित शालीमार गार्डन की है। चोरों ने इतनी सफाई से घटना को अंजाम दिया कि गाड़ी में लगा आर्लम तक नहीं बजा और चोरी हो गई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने जयनगर में रैली की। उन्होंने कहा कि पहले चरण में बंगाल में हुए शांतिपूर्ण और रिकॉर्ड मतदान में लोगों ने भाजपा को भारी समर्थन दिया है। कुछ हफ्ते पहले तक बंगाल के लोग कह रहे थे कि भाजपा इस बार दो सौ सीटें पार कर जाएगी। लेकिन पहले चरण जिस तरह की दमदार शुरुआत भाजपा ने की है, उससे ये साफ है कि जनता की आवाज को ईश्वर का भी आशीर्वाद मिल गया है। सिंधिया ने गरुवार को सबह नई दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में जाकर कोरोना की वैक्सीन का पहला डोज लिया। इस बीच उन्होंने वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों से अपील की। वीडियो डेस्क। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो महाराष्ट्र का है जहां सबसे ज्यादा कोविड के केस बढ़ रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग हैं जो मुर्गा वॉक करते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल ये उन लोगों को सजा दी गई है जो बिना मास्क के शहर में घूम रहे हैं। मास्क ना पहनने पर पुलिस ने युवकों को ये सजा दी है। लखनऊ । यूपी में जहरीली शराब पीने से मौत की लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रतापगढ़ में अब तक आठ और अयोध्या में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, जांच में यह बात सामने आ रही है कि शराब पिलाने वाले पंचायत चुनाव में लड़ रहे दो प्रत्याशी हैं, जो रात में मछली और शराब की दावत दिए थे। जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं। कानपुर देहात । शिव-पार्वती का रोल करने वाले रीयल में भी शिव-पार्वती की वेषभूषा धारण कर शादी किए। इतना ही नहीं, दोनों की बकायदा शिव बारात निकाली गई। फिर, शिवली स्थित शिव मंदिर में रचाई। मंगलवार को हुई इस की तस्वीर भी वायरल हो रही है। जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं। हैरान कर देनी वाली यह वारदात दिल्ली के रोहिणी इलाके गुरुवार सुबह घटी। जहां मृतकों की पहचान धीरज यादव, पत्नी आरती, बच्चे हितेन , आर्थव के रूप में हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर ताला तोड़ा और शव बरामद कर लिए। इससे पहले ATS ने भी NIA को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में सचिन वझे के एक ऑडी कार के इस्तेमाल की बात बताई थी। NIA को अब भी एक स्कोडा कार की तलाश है। यह मामला प्रतापगढ़ जनपद के उदयपुर थाना क्षेत्र के कटरिया गांव का है। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जिसके बाद जिला प्रशसान और एडीजी प्रेम प्रकाश दौरे पर पहुंचे।
पोलासपुरे नयरे श्रमुत्तेण जाव^ त णिगच्छसि णिग्गच्छित्ता जेणेव मम प्रतिय तेणेव हव्वमागया । से नूण देवई ! अट्ठे समट्ठे ?" "हता प्रत्थि ।" 28- एव खलु देवाणु प्पिए । तेण कालेण तेण समएण भद्दिलपुरे नयरे नागे नाम गाहावई परिवसइ - प्रड्ढे । तस्स ण नागस्स गाहावइस्स सुलसा नामं भारिया होत्या । तए ण सा सुलसा बालत्तणे चेव हरिणेगमेसीभत्तया यायि होत्या । नैमित्तिएण वागरिया-एस ण वारिया णिदू भविस्सइ । तए ण सा सुलसा वालप्प भइ चेव हरिणेगमेसिस्स पडिम करेइ करेत्ता कल्लाकल्लि व्हाया जाव पायच्छित्ता उल्लपडसाडया महरिह पुष्फच्चण करेड, करेत्ता जण्णुपायपडिया पणाम करेइ, फरेत्ता तो पच्छा श्राहारे या नीहारेझ वा वरइ था। 29- तए ण तोसे सुलसाए गाहायइणोए भत्तिबहमाणगुस्साए हरिणेगमेसी देवे धाराहिए यायि होत्या । तए ण से हरिणेगमेसो देवे तृतीय यग--78 प्रध्ययन निवलकर शोघ्रता के साथ मेरे पास भाई हो, क्या यह कथन सत्य है " भगवान ने इस वथन को दवको देवी स्पष्ट करने लगी । "भगवन् । प्रापन जो कुछ कहा है यह सवथा सत्य है, मैं उमी उद्देश्य को लेकर आपकी सेवा में उपस्थित हुई हूँ भगवान अरिष्टनमि-ह दवानुप्रिय 1 "उम वाल उस समय मे भदिलपुर नामव नगर मे ऋद्धि यादि म सम्पन्न नाग नामव गायापति निवास करता था। उस नाग नामक गायापति थे सुलसा नामा भार्याधर्मपत्नी थी । उम मुलसा नामक गाथापली सेवाल्यवाल में ही एक नैतिक ज्योतिषी ने कहा था- यह लो निंदू हागो प्रर्थात् मा बच्चो का जन्म देगी। इस बात मा सुन र गुलसा न तभी से हरियोगमेपि देववी भाराघना प्रारम्भ करदी। उसने हरिणगमपि देव की एक प्रतिमा जनवाई, बनवाकर नित्य प्रति स्नान एव अनिष्ट परिहाराय प्रायश्चित रखे पट्ट-गोली मार्ग के साथ पूजाहचयनित फूलों से नित्य प्रति पूजा करती थी। तदनन्तर दोना (जाउ घुटनाको भूमि पर टक्कर प्रणाम करती। यह सब बुध करन में बाद ही आहार परतो. शिहार वरती तथा अन्य ग्रामों में प्रवृत्त हानो यो । तदन्तर गुनगा की भक्ति तथा सेवा मे हरियागमेपि देव प्रागपिन हा गया, प्रसन्न हो गया। नवप्र हुए हमे देन सुलमा नाम गठानी को मिस उस पर दया भाव मार, मुलगा गाया पत्नी अतगडदसाम्रो सारो गए सुलसाए गाहावइणीए अणुकपणट्टयाए सुलस गाहावणि तुम च दो वि समउउयाओ करेइ । तए ण तुम्भे दो वि सममेव गढ़भे गिण्हह, सममेव गब्भे परिवहह, सममेव दारए पयायह। तए ण सा सुलसा गाहावइणी विणिहायमावण्णे दारए पयायइ । तए ण से हरिणेगमेसी देवे सुलसाए अणुकपणट्टयाए विणिहायमावण्णे व रए करयलसपुडेण गेण्हड, गेण्हित्ता तव प्रतिय साहरइ । त समय च ण तुम पि नवण्ह मासाण सुकुमाल दारएपसवसि । जे विय ण देवाणुप्पिए । तब पुत्ता ते वि य तव प्रतियात्रो करयलसपुडेण गेण्हइ, गेण्हित्ता सुलसाए गाहावइणीए प्रतिए साहरइ । त तव चेवण देवई ! एए पुत्ता, णो चेव सुलसाए गाहावइणोए । 30- तए ण सा देवई देवो रहश्रो अरिमिस्स प्रतिए एयमट्ठ सोच्चा निसम्म हट्टतुट्ठ जाव^ हियया श्ररह अरिम वदइ नमसइ वदित्ता नमसित्ता जेणेव ते छ प्रणगारा तेणेव उवागच्छद्र, उवागच्छिता ते छप्पि तृतीय वग - 7-8 अध्ययन और तुम्हे (देवी) एक साथ रजस्वला होने की व्यवस्था कर दी । अर्थात् देव माया से तुम और सुलसा एक साथ सन्तान उत्पन्न करने लगी । तुम दोनो ने ही लगभग एक ही समय मे गर्भ धारण किया, उसका परिवहन किया और प्राय एक ही समय में बच्चो को जन्म भी दिया । सुलसा पर अनुकम्पा करके देव ने उसके मृत बच्चो को हाथो से गृहरण कर तुम्हारे पास लाकर ( स्थापित ) रख दिया और उस समय तुमने भी नवमास में कुछ अधिक दिन व्यतीत होने पर सुकुमार वालको को जन्म दिया । हे देवानुप्रिय । जो तुम्हारे बालक थे उनको देव ने दोनो हाथो से उठाकर सेठानी सुलसा के पास पहुँचा दिया । पुत्र दर्शन से देवकी का हर्षातिरेक अत हे देवकी । वे पुत्र तुम्हारे ही है सुलसा के नही । तदनन्तर देवकी देवी प्रहन्त अरिष्टनेमि भगवान से इस तथ्य को श्रवणकर हृष्ट हुई सन्तुष्ट हुई और हृस्ट-तुष्ट हृदय से ग्रहन्त अरिष्टनेमि भगवान को वादन-नमस्कार करती है, वदन नमस्कार करके जहा ने छ अनगार थे, वहा पर प्राती है। भावर छहो हो भनगारो का वन्दन-नमस्कार करती है । अनगडदमामा - मारणे-गए अणगारे बदइ नमसइ वदिता नमसित्ता श्रागण्या पप्पुयलोयणा फचुयपरिविखत्तया दरियवलय-वाहाधाराय-फलव-पुष्फग विव समूससियरोमकूवा ते छप्पि श्रणगारे श्रणिमिसाए दिट्ठीए पेह्माणी-पेहमाणी सुचिर निरिक्षक निरिवियत्ता वदइ नमसइ यदित्ता नमसित्ता जेणेव रहारिणेमो तेणेव उवागच्छद, उवागच्छिता रह अरिवर्णमि तिवसुत्तो प्रायाहिण पयाहिण करेझ करेत्ता वदइ नमसइ, वदित्ता नमसत्ता तमेव धम्मिय जाणप्पवर दुरुहइ दुरुहिता जेणव बारवई नयरी तेणेव उवागच्छड, उयागच्छिता बारवह नयर अणुष्पविसड, अणुप्प विसित्ता जेणेव सए गिहे, जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला तेणेव उवागया, धम्मियाम्रो जाणव्यवराम्रो पच्चोह पच्चीरहित्ता जेणेव सए यासधरे जेणेव सए सर्याणिज्जे तेणेव उवागया सयसि सर्वाणिज्जति निसोयड । देवकी द्वारा 31- तए ण तोसे देवईए बेयोए भय प्रज्झत्यिए चिंतिए पत्यिए जाय नलकूबर- समाणे सत्त पुत्ते पयामा नो चेवण भए एगस्स वि बालत्तणए तृतीय यग-78 मध्ययन दन नमस्कार करने के पश्चात भागत प्रस्तुता प्रत्यधिक पुत्र स्नेहम उसके स्तनों में दुग्ध आ गया, उसने नेश मानन्दाधु मे आदहा गये । हम भार रामाची अधिरता से शरीर फूल जान के वारण वपण तग होकर मेघधारा से ग्राहन हुए बदम्बन फून ये श्राम मे उसकी रामराजि विकसित हा गई । छटो अनगारो पो निर्निमैप एष्टि से स्थिर काल तक देगती है। देसार वन्दननमस्कार करके जहाँ पर महन्त परिष्टनमि भगवान थे, उधर माती है, मार महत्त अरिष्टनेमि भगवान की तीन बार प्रदक्षिणा प्रदक्षिणा करती है, करके, वन्दन-नमस्कार करती है, वन्दा नमस्कार र धार्मिक पार्यों में उपयोग लाये जान वाले श्रेष्ठ यान- रथ पर भारोहण करती है। भाराहा करके, जिधर द्वारिका नगरी थी, उधर माती है, भाव द्वारा नगरी में प्रवेश कर जहां अपना महल था और जहां बाहर की उपस्थापन शाला-बैठने की जगह थी, यहाँ प्राती है, पर धार्मिक यान (श्रष्ठ रथ ) से नीचे उतरती है, उतरकर, जहाँ पर अपना वागग्रह था, वहीं मार अपनी शय्या पर घट जाती है । मदातर देवीदे मन म प्रकार के विचार होते हैं नि श्रमण के पुत्रों में समानता जन्म दिया कि मैं भी नहीं किया। यह समणुब्भूए । एस वि य ण कण्हे वासुदेवे छण्ह छण्ह मासाण मम श्रुतिय पायवदए हव्वमागच्छइ । त धण्णाओ ण ताओ अम्मयाओ, पुण्णाओ ण ताओ अम्मयाओ कयपुण्णाओ ण ताम्रो श्रम्मयाम्रो, कयलक्खणाश्रो ण ताओ अम्मयाम्रो जासि मण्णे णियगकुच्छि सभूयाइ, थणदुद्ध-लुद्धयाइ महुरसमुल्लावाया इ मम्मण-पजपियाइ थण-मूला कक्खदेसभाग अभिसरमाणाइ मुद्धयाइ पुणो य कोमलकमोलवमेहि हत्येहि गिव्हिऊण उच्छगे णिवेसियाइ देंति समुल्लावए सुमहुरे पुणो पुणो मजुलप्पभणए । ग्रह ण श्रधण्णा अण्णा पुण्णा ( प्रकलखणा ) एत्तो एक्कतरमवि ण पत्ता यह जाव^ क्रियायइ । 32- इम च ण कण्हे वासुदेवे व्हाए जाव^ विभूसिए देवइए देवीए पायग्गहण करेइ करित्ता देवइ देवि एव वयासीदुख की अभिव्यक्ति - श्री कृष्ण के समक्ष श्रणयाण श्रम्मो ! तुमे यम पासित्ता हट्टतुट्ठा जाव" भवह, किण्ण श्रम्मो ! प्रज्ज तुब्भे श्रोहयमणसकप्पा जाव कियायह ? तृतीय वर्ग - 78 मध्ययन कृष्ण वासुदेव भी छ छ मास के अनन्तर चरण-वन्दन के लिये मेरे पास आते हैं। मैं मानती हूँ कि वे माताएँ धन्य हैं, जिनकी सतति निज कुक्षि से उत्पन्न होती है, स्तन के दुग्ध मे लुब्ध होती है, मधुर तथा अव्यक्त मुनमुन, तुतलाती वाणी मे बोलते है, स्तन मूलक कक्ष भाग मे रहती हैं, जिसको माता कमल के समान कोमल हाथो से उठातो, अपनी गोदी मे विठाती हैं तथा उन बालको के आलाप को - शब्दादि बाल सबधी प्रक्रियाओ का सुमधुर और मजुल उत्तर देती है। मैं अधन्य हूँ, अकृतपुण्या हूँ। क्योकि मुझे उपर्युक्त पुत्र जनित प्रनिया में से एक का भी कर्त्तव्य, कम रूप से अनुभव नही हुआ । इस प्रकार उदासीन माता देवकी प्रातंध्यान करने लगती है । इधर कृष्ण वासुदेव स्नान से निवृत्त हो, सभी अलकारा से विभूषित होकर, देवकी देवो को चरण वादन करने के लिये शीघ्र आते हैं । तब कृष्ण-वसुदेव देवकी देवी को देखते हैं, देखकर देवकी देवी के चररण-वदन करते हैं, करके देवकी देवी को इस प्रकार कहते हैं - है माता । श्रय दिनो मे, जब मैं तुम्हारे पास प्राता हूँ तो आप मुझे समीप देखकर हषित और खुशी होती है। परन्तु हे माता । आज भाप विस कारण मे योगिनी की तरह विचार निमग्न हो ? अतगडदसाम्रो बार 33- तए ण सा देवई देवी कण्ह वासुदेव एव वयासो- एव खलु ग्रह पुत्ता । सरिसए जाव नलकूबरसमाणे सत्त पुत्ते पयाया, नो चेव ण भए एगस्स वि वालत्तणे अणुभए। तुम पियण पुत्ता ! छण्ह - घण्ह मासाण मम अतिय पाययवए हव्वमागच्छसि । त घण्णाश्रो णं ताओ अम्मयात्री जाव झियामि । 34- तए ण से कण्हे वासुदेवे देवह देवि एव वयासी-मा ण तुम्ने धम्मो ! श्रोहयमण सफप्पा जाय क्रियायह अहण्ण तहा जतिस्सामि जहा ण मम सहोदरे कणीयसे भाउए भविस्सति त्ति कट्टु देवइ देवि ताहि इट्ठाहि वग्गृह समासासेइतप्रोपडिणिक्खमई पडिणिक्खमित्ता जेणेव पोसहसाला तेणेव उवागच्छद उवागच्छत्ता जहा धभयो । नवर हरिणेगमेसिस्स मट्टमभत्त पगेण्हड जाय अजलि कट्ट एव वयासोकृष्ण द्वारा देव आराधन इच्छामि ण देवाणुपिया । सहोदर कणोयस भाग्य विदिष्ण । तए ण से हरिणेगमेसी देव कह वासुदेवं एव वयासी-होहिड तृतीय यग - 7-8 मध्ययन तब देवको देवी कृष्ण वासुदेव को इस प्रवार बोली- हे पुत्र । निश्चय ही मैन एन समान सात पुत्रा को जम दिया, विन्तु एवं भी पुत्र के बालत्व आादि यत्तव्यमा अनुभव नहीं किया । और न तुम भी हू पुत्र । छ छ महीने मे मेरे पास चरण चन्दन क निये शीघ्र आते हो । अत में सोती हूँ कि वे माताएं धन्य हैं जो अपने पुत्रो के बाल से कत्तव्य-कम का अनुभव करती हैं। कित्तु हे पुत्र में उसके अभाव में पारण । आत्तध्यान करती हूँ । तदनत्तर कृष्ण-यासुदेव दयी देवी वा इस प्रकार महने लगे तुम उदामीन मत हाँ, यावन् मात्तध्यान मत करो। मैं उस प्रभार का प्रयत्न वरु गा, जिसमे मेरे एवं सहादर भ्राता मोर होगा। एसा वह पर देवी देवी या इष्टवाग्भि-इष्ट वचनो द्वारा प्राश्वासन देते हैं। पाश्वासन देउर वहाँ मे चलते हैं, चलकर जिधर पावधशाला थी, उपर आते हैं मोर जिस प्रकार मगमकुमार ने तेला दिया, ये सेता करते हैं । अन्तर येवलाना ही है कि वृण-यामुदव न हरिणगमेषी देव की माराधना गरा मे मिए तेले या पाराया दिया था. हरिगांगमेषी देय में प्रस्ट हा जाने पर विधिवत् पोषध पूर्ण करणे पृथ्ण वासुदेव ने महा-हे दवाप्रिय ! मेरी इच्छा है मे एक यहादराम हो माता से उत्पन्न, एम भाई और हो । तदनन्तर हरियुगमणी दान वासुदेव को इस प्रकार बद्दा है दवाइप्रिय । अतगडदसाम्रो-सारखे गए ण देवाणुप्पिया तव देवलोयचुए सहोदरे कणोयसे भाउए । सेण उम्मुक्क जावन मणुप्पत्ते श्ररहश्रो अरिनेमिस्स प्रतिय मुण्डे जाव पव्वइस्सइ । कण्ह वासुदेव दोच्च पि तच्च पि वदइ वदित्ता जामेव दिस पाउन्भूए तामेव दिस पडिगए । कृष्ण द्वारा देवकी को आश्वासन 35- तए ण मे कण्हे वासुदेवे पोसहसालाओ पडिणिवत्तइ पडिणिवत्तित्ता जेणेव देवइ देवि तेणेव उवागच्छड उवागच्छित्ता देवईए देवीए पायग्गहण करेइ करेत्ता एव वयासीहोहिइ ण अम्मो ! मम सहोदरे कणीयसे भाउए त्ति कट्टु देवइ देवि ताहि इट्ठाहि जाव प्रासासेइ श्रासासित्ता जामेव दिस पाउब्भूए तामेव दिस पडिगए । 36- तए ण सा देवई देवी प्रणया कयाइ तसि तारिसगसि जाव^ सोह सुविणे पासित्ता पडिबुद्धा जाव पाढया' हट्ठहियया त गव्भ सुहसुहेण परिवहइ । देवलोक से च्युत होकर एक देव तुम्हारे भाई के रूप में जरूर उत्पन्न होगा किन्तु वह बाल भाव को छोडकर, जब युवावस्था मे प्रवेश करेगा, उसी समय अर्हन्त अरिष्टनेमि भगवान के पास मुण्डित यावत् दीक्षित हो जायगा । देव कृष्ण- वासुदेव को दो बार तीन बार इस प्रकार कहता है, कहकर जिस दिशा में आया था, उसी दिशा मे पुन चला गया । ततीय वग - 78 अध्ययन गजसुकुमाल का जन्म और विकास तब कृष्ण वासुदेव पोषधशाला से निकलते हैं, निकलकर देवकी देवी के पास चरण वन्दन करते हुए इस प्रकार बोले - हे माता ! मेरे सहोदर लघु भ्राता अवश्य होगा । इस प्रकार देवकी देवी को इप्ट वचनो से आश्वस्त करते हैं, आश्वस्त करके जिस दिशा से आये उसी दिशा मे चले जाते है । तदनन्तर देवकी देवी अय किसो समय मे कोमल एवं सुसद शय्या पर शयन वर रही थी । उस समय सिंह स्वप्न को देखकर जाग्रत हो उठी । उसने स्वप्न वा सारा वृत्तान्त अपने पति वसुदेव को सुनाया । महाराज वसुदेव ने स्वप्न पाठवा को बुलावर
पोलासपुरे नयरे श्रमुत्तेण जाव^ त णिगच्छसि णिग्गच्छित्ता जेणेव मम प्रतिय तेणेव हव्वमागया । से नूण देवई ! अट्ठे समट्ठे ?" "हता प्रत्थि ।" अट्ठाईस- एव खलु देवाणु प्पिए । तेण कालेण तेण समएण भद्दिलपुरे नयरे नागे नाम गाहावई परिवसइ - प्रड्ढे । तस्स ण नागस्स गाहावइस्स सुलसा नामं भारिया होत्या । तए ण सा सुलसा बालत्तणे चेव हरिणेगमेसीभत्तया यायि होत्या । नैमित्तिएण वागरिया-एस ण वारिया णिदू भविस्सइ । तए ण सा सुलसा वालप्प भइ चेव हरिणेगमेसिस्स पडिम करेइ करेत्ता कल्लाकल्लि व्हाया जाव पायच्छित्ता उल्लपडसाडया महरिह पुष्फच्चण करेड, करेत्ता जण्णुपायपडिया पणाम करेइ, फरेत्ता तो पच्छा श्राहारे या नीहारेझ वा वरइ था। उनतीस- तए ण तोसे सुलसाए गाहायइणोए भत्तिबहमाणगुस्साए हरिणेगमेसी देवे धाराहिए यायि होत्या । तए ण से हरिणेगमेसो देवे तृतीय यग--अठहत्तर प्रध्ययन निवलकर शोघ्रता के साथ मेरे पास भाई हो, क्या यह कथन सत्य है " भगवान ने इस वथन को दवको देवी स्पष्ट करने लगी । "भगवन् । प्रापन जो कुछ कहा है यह सवथा सत्य है, मैं उमी उद्देश्य को लेकर आपकी सेवा में उपस्थित हुई हूँ भगवान अरिष्टनमि-ह दवानुप्रिय एक "उम वाल उस समय मे भदिलपुर नामव नगर मे ऋद्धि यादि म सम्पन्न नाग नामव गायापति निवास करता था। उस नाग नामक गायापति थे सुलसा नामा भार्याधर्मपत्नी थी । उम मुलसा नामक गाथापली सेवाल्यवाल में ही एक नैतिक ज्योतिषी ने कहा था- यह लो निंदू हागो प्रर्थात् मा बच्चो का जन्म देगी। इस बात मा सुन र गुलसा न तभी से हरियोगमेपि देववी भाराघना प्रारम्भ करदी। उसने हरिणगमपि देव की एक प्रतिमा जनवाई, बनवाकर नित्य प्रति स्नान एव अनिष्ट परिहाराय प्रायश्चित रखे पट्ट-गोली मार्ग के साथ पूजाहचयनित फूलों से नित्य प्रति पूजा करती थी। तदनन्तर दोना एक साथ रजस्वला होने की व्यवस्था कर दी । अर्थात् देव माया से तुम और सुलसा एक साथ सन्तान उत्पन्न करने लगी । तुम दोनो ने ही लगभग एक ही समय मे गर्भ धारण किया, उसका परिवहन किया और प्राय एक ही समय में बच्चो को जन्म भी दिया । सुलसा पर अनुकम्पा करके देव ने उसके मृत बच्चो को हाथो से गृहरण कर तुम्हारे पास लाकर रख दिया और उस समय तुमने भी नवमास में कुछ अधिक दिन व्यतीत होने पर सुकुमार वालको को जन्म दिया । हे देवानुप्रिय । जो तुम्हारे बालक थे उनको देव ने दोनो हाथो से उठाकर सेठानी सुलसा के पास पहुँचा दिया । पुत्र दर्शन से देवकी का हर्षातिरेक अत हे देवकी । वे पुत्र तुम्हारे ही है सुलसा के नही । तदनन्तर देवकी देवी प्रहन्त अरिष्टनेमि भगवान से इस तथ्य को श्रवणकर हृष्ट हुई सन्तुष्ट हुई और हृस्ट-तुष्ट हृदय से ग्रहन्त अरिष्टनेमि भगवान को वादन-नमस्कार करती है, वदन नमस्कार करके जहा ने छ अनगार थे, वहा पर प्राती है। भावर छहो हो भनगारो का वन्दन-नमस्कार करती है । अनगडदमामा - मारणे-गए अणगारे बदइ नमसइ वदिता नमसित्ता श्रागण्या पप्पुयलोयणा फचुयपरिविखत्तया दरियवलय-वाहाधाराय-फलव-पुष्फग विव समूससियरोमकूवा ते छप्पि श्रणगारे श्रणिमिसाए दिट्ठीए पेह्माणी-पेहमाणी सुचिर निरिक्षक निरिवियत्ता वदइ नमसइ यदित्ता नमसित्ता जेणेव रहारिणेमो तेणेव उवागच्छद, उवागच्छिता रह अरिवर्णमि तिवसुत्तो प्रायाहिण पयाहिण करेझ करेत्ता वदइ नमसइ, वदित्ता नमसत्ता तमेव धम्मिय जाणप्पवर दुरुहइ दुरुहिता जेणव बारवई नयरी तेणेव उवागच्छड, उयागच्छिता बारवह नयर अणुष्पविसड, अणुप्प विसित्ता जेणेव सए गिहे, जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला तेणेव उवागया, धम्मियाम्रो जाणव्यवराम्रो पच्चोह पच्चीरहित्ता जेणेव सए यासधरे जेणेव सए सर्याणिज्जे तेणेव उवागया सयसि सर्वाणिज्जति निसोयड । देवकी द्वारा इकतीस- तए ण तोसे देवईए बेयोए भय प्रज्झत्यिए चिंतिए पत्यिए जाय नलकूबर- समाणे सत्त पुत्ते पयामा नो चेवण भए एगस्स वि बालत्तणए तृतीय यग-अठहत्तर मध्ययन दन नमस्कार करने के पश्चात भागत प्रस्तुता प्रत्यधिक पुत्र स्नेहम उसके स्तनों में दुग्ध आ गया, उसने नेश मानन्दाधु मे आदहा गये । हम भार रामाची अधिरता से शरीर फूल जान के वारण वपण तग होकर मेघधारा से ग्राहन हुए बदम्बन फून ये श्राम मे उसकी रामराजि विकसित हा गई । छटो अनगारो पो निर्निमैप एष्टि से स्थिर काल तक देगती है। देसार वन्दननमस्कार करके जहाँ पर महन्त परिष्टनमि भगवान थे, उधर माती है, मार महत्त अरिष्टनेमि भगवान की तीन बार प्रदक्षिणा प्रदक्षिणा करती है, करके, वन्दन-नमस्कार करती है, वन्दा नमस्कार र धार्मिक पार्यों में उपयोग लाये जान वाले श्रेष्ठ यान- रथ पर भारोहण करती है। भाराहा करके, जिधर द्वारिका नगरी थी, उधर माती है, भाव द्वारा नगरी में प्रवेश कर जहां अपना महल था और जहां बाहर की उपस्थापन शाला-बैठने की जगह थी, यहाँ प्राती है, पर धार्मिक यान से नीचे उतरती है, उतरकर, जहाँ पर अपना वागग्रह था, वहीं मार अपनी शय्या पर घट जाती है । मदातर देवीदे मन म प्रकार के विचार होते हैं नि श्रमण के पुत्रों में समानता जन्म दिया कि मैं भी नहीं किया। यह समणुब्भूए । एस वि य ण कण्हे वासुदेवे छण्ह छण्ह मासाण मम श्रुतिय पायवदए हव्वमागच्छइ । त धण्णाओ ण ताओ अम्मयाओ, पुण्णाओ ण ताओ अम्मयाओ कयपुण्णाओ ण ताम्रो श्रम्मयाम्रो, कयलक्खणाश्रो ण ताओ अम्मयाम्रो जासि मण्णे णियगकुच्छि सभूयाइ, थणदुद्ध-लुद्धयाइ महुरसमुल्लावाया इ मम्मण-पजपियाइ थण-मूला कक्खदेसभाग अभिसरमाणाइ मुद्धयाइ पुणो य कोमलकमोलवमेहि हत्येहि गिव्हिऊण उच्छगे णिवेसियाइ देंति समुल्लावए सुमहुरे पुणो पुणो मजुलप्पभणए । ग्रह ण श्रधण्णा अण्णा पुण्णा एत्तो एक्कतरमवि ण पत्ता यह जाव^ क्रियायइ । बत्तीस- इम च ण कण्हे वासुदेवे व्हाए जाव^ विभूसिए देवइए देवीए पायग्गहण करेइ करित्ता देवइ देवि एव वयासीदुख की अभिव्यक्ति - श्री कृष्ण के समक्ष श्रणयाण श्रम्मो ! तुमे यम पासित्ता हट्टतुट्ठा जाव" भवह, किण्ण श्रम्मो ! प्रज्ज तुब्भे श्रोहयमणसकप्पा जाव कियायह ? तृतीय वर्ग - अठहत्तर मध्ययन कृष्ण वासुदेव भी छ छ मास के अनन्तर चरण-वन्दन के लिये मेरे पास आते हैं। मैं मानती हूँ कि वे माताएँ धन्य हैं, जिनकी सतति निज कुक्षि से उत्पन्न होती है, स्तन के दुग्ध मे लुब्ध होती है, मधुर तथा अव्यक्त मुनमुन, तुतलाती वाणी मे बोलते है, स्तन मूलक कक्ष भाग मे रहती हैं, जिसको माता कमल के समान कोमल हाथो से उठातो, अपनी गोदी मे विठाती हैं तथा उन बालको के आलाप को - शब्दादि बाल सबधी प्रक्रियाओ का सुमधुर और मजुल उत्तर देती है। मैं अधन्य हूँ, अकृतपुण्या हूँ। क्योकि मुझे उपर्युक्त पुत्र जनित प्रनिया में से एक का भी कर्त्तव्य, कम रूप से अनुभव नही हुआ । इस प्रकार उदासीन माता देवकी प्रातंध्यान करने लगती है । इधर कृष्ण वासुदेव स्नान से निवृत्त हो, सभी अलकारा से विभूषित होकर, देवकी देवो को चरण वादन करने के लिये शीघ्र आते हैं । तब कृष्ण-वसुदेव देवकी देवी को देखते हैं, देखकर देवकी देवी के चररण-वदन करते हैं, करके देवकी देवी को इस प्रकार कहते हैं - है माता । श्रय दिनो मे, जब मैं तुम्हारे पास प्राता हूँ तो आप मुझे समीप देखकर हषित और खुशी होती है। परन्तु हे माता । आज भाप विस कारण मे योगिनी की तरह विचार निमग्न हो ? अतगडदसाम्रो बार तैंतीस- तए ण सा देवई देवी कण्ह वासुदेव एव वयासो- एव खलु ग्रह पुत्ता । सरिसए जाव नलकूबरसमाणे सत्त पुत्ते पयाया, नो चेव ण भए एगस्स वि वालत्तणे अणुभए। तुम पियण पुत्ता ! छण्ह - घण्ह मासाण मम अतिय पाययवए हव्वमागच्छसि । त घण्णाश्रो णं ताओ अम्मयात्री जाव झियामि । चौंतीस- तए ण से कण्हे वासुदेवे देवह देवि एव वयासी-मा ण तुम्ने धम्मो ! श्रोहयमण सफप्पा जाय क्रियायह अहण्ण तहा जतिस्सामि जहा ण मम सहोदरे कणीयसे भाउए भविस्सति त्ति कट्टु देवइ देवि ताहि इट्ठाहि वग्गृह समासासेइतप्रोपडिणिक्खमई पडिणिक्खमित्ता जेणेव पोसहसाला तेणेव उवागच्छद उवागच्छत्ता जहा धभयो । नवर हरिणेगमेसिस्स मट्टमभत्त पगेण्हड जाय अजलि कट्ट एव वयासोकृष्ण द्वारा देव आराधन इच्छामि ण देवाणुपिया । सहोदर कणोयस भाग्य विदिष्ण । तए ण से हरिणेगमेसी देव कह वासुदेवं एव वयासी-होहिड तृतीय यग - सात-आठ मध्ययन तब देवको देवी कृष्ण वासुदेव को इस प्रवार बोली- हे पुत्र । निश्चय ही मैन एन समान सात पुत्रा को जम दिया, विन्तु एवं भी पुत्र के बालत्व आादि यत्तव्यमा अनुभव नहीं किया । और न तुम भी हू पुत्र । छ छ महीने मे मेरे पास चरण चन्दन क निये शीघ्र आते हो । अत में सोती हूँ कि वे माताएं धन्य हैं जो अपने पुत्रो के बाल से कत्तव्य-कम का अनुभव करती हैं। कित्तु हे पुत्र में उसके अभाव में पारण । आत्तध्यान करती हूँ । तदनत्तर कृष्ण-यासुदेव दयी देवी वा इस प्रकार महने लगे तुम उदामीन मत हाँ, यावन् मात्तध्यान मत करो। मैं उस प्रभार का प्रयत्न वरु गा, जिसमे मेरे एवं सहादर भ्राता मोर होगा। एसा वह पर देवी देवी या इष्टवाग्भि-इष्ट वचनो द्वारा प्राश्वासन देते हैं। पाश्वासन देउर वहाँ मे चलते हैं, चलकर जिधर पावधशाला थी, उपर आते हैं मोर जिस प्रकार मगमकुमार ने तेला दिया, ये सेता करते हैं । अन्तर येवलाना ही है कि वृण-यामुदव न हरिणगमेषी देव की माराधना गरा मे मिए तेले या पाराया दिया था. हरिगांगमेषी देय में प्रस्ट हा जाने पर विधिवत् पोषध पूर्ण करणे पृथ्ण वासुदेव ने महा-हे दवाप्रिय ! मेरी इच्छा है मे एक यहादराम हो माता से उत्पन्न, एम भाई और हो । तदनन्तर हरियुगमणी दान वासुदेव को इस प्रकार बद्दा है दवाइप्रिय । अतगडदसाम्रो-सारखे गए ण देवाणुप्पिया तव देवलोयचुए सहोदरे कणोयसे भाउए । सेण उम्मुक्क जावन मणुप्पत्ते श्ररहश्रो अरिनेमिस्स प्रतिय मुण्डे जाव पव्वइस्सइ । कण्ह वासुदेव दोच्च पि तच्च पि वदइ वदित्ता जामेव दिस पाउन्भूए तामेव दिस पडिगए । कृष्ण द्वारा देवकी को आश्वासन पैंतीस- तए ण मे कण्हे वासुदेवे पोसहसालाओ पडिणिवत्तइ पडिणिवत्तित्ता जेणेव देवइ देवि तेणेव उवागच्छड उवागच्छित्ता देवईए देवीए पायग्गहण करेइ करेत्ता एव वयासीहोहिइ ण अम्मो ! मम सहोदरे कणीयसे भाउए त्ति कट्टु देवइ देवि ताहि इट्ठाहि जाव प्रासासेइ श्रासासित्ता जामेव दिस पाउब्भूए तामेव दिस पडिगए । छत्तीस- तए ण सा देवई देवी प्रणया कयाइ तसि तारिसगसि जाव^ सोह सुविणे पासित्ता पडिबुद्धा जाव पाढया' हट्ठहियया त गव्भ सुहसुहेण परिवहइ । देवलोक से च्युत होकर एक देव तुम्हारे भाई के रूप में जरूर उत्पन्न होगा किन्तु वह बाल भाव को छोडकर, जब युवावस्था मे प्रवेश करेगा, उसी समय अर्हन्त अरिष्टनेमि भगवान के पास मुण्डित यावत् दीक्षित हो जायगा । देव कृष्ण- वासुदेव को दो बार तीन बार इस प्रकार कहता है, कहकर जिस दिशा में आया था, उसी दिशा मे पुन चला गया । ततीय वग - अठहत्तर अध्ययन गजसुकुमाल का जन्म और विकास तब कृष्ण वासुदेव पोषधशाला से निकलते हैं, निकलकर देवकी देवी के पास चरण वन्दन करते हुए इस प्रकार बोले - हे माता ! मेरे सहोदर लघु भ्राता अवश्य होगा । इस प्रकार देवकी देवी को इप्ट वचनो से आश्वस्त करते हैं, आश्वस्त करके जिस दिशा से आये उसी दिशा मे चले जाते है । तदनन्तर देवकी देवी अय किसो समय मे कोमल एवं सुसद शय्या पर शयन वर रही थी । उस समय सिंह स्वप्न को देखकर जाग्रत हो उठी । उसने स्वप्न वा सारा वृत्तान्त अपने पति वसुदेव को सुनाया । महाराज वसुदेव ने स्वप्न पाठवा को बुलावर
एक सौ रुपए छूट नहीं देने पर अलबर्ट एक्का चौक के समीप जलजोगा रेस्टोरेंट के संचालक से ट्रैफिक पुलिसकर्मी उलझ गया। पुलिसकर्मी ने संचालक को न सिर्फ दुकान बंद करवाने की, बल्कि पॉलीबैग रखने, मिठाई की क्वालिटी की जांच करवाने की भी धमकी दे डाली। जब पुलिसकर्मी ज्यादा दबंगई दिखाने लगा तब संचालक समीर घोष ने उसे एसएसपी से बातचीत करने की बात कही। इसके बाद पुलिसकर्मी वहां से रफूचक्कर हो गया। संचालक के अनुसार सोमवार की सुबह करीब 8. 30 बजे पुलिसकर्मी मिठाई खरीदने पहुंचा। मिठाई खरीदने के बाद वह काउंटर पर बिल जमा करने पहुंचा। इस दौरान उसने 100 रुपये का डिस्काउंट देने को कहा। कैश काउंटर पर बैठे कर्मी ने मालिक के नहीं रहने की बात कही, तो उनसे उलझ गया। बात बढ़ने पर वह रेस्टोरेंट के कर्मी से धक्का-मुक्की करने लगा। डीएसपी पहुंचे जांच करने : पुलिसकर्मी की इस दबंगई की सूचना रेस्टोरेंट संचालक ने एसएसपी अनीश गुप्ता, ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह और कोतवाली थानेदार को सूचना दी। इस पर संज्ञान लेते हुए ट्रैफिक एसपी ने ट्रैफिक डीएसपी वन रंजीत कुमार लकड़ा को जांच के लिए भेजा। डीएसपी ने रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को लेकर जांच कर कार्रवाई की बात कही।
एक सौ रुपए छूट नहीं देने पर अलबर्ट एक्का चौक के समीप जलजोगा रेस्टोरेंट के संचालक से ट्रैफिक पुलिसकर्मी उलझ गया। पुलिसकर्मी ने संचालक को न सिर्फ दुकान बंद करवाने की, बल्कि पॉलीबैग रखने, मिठाई की क्वालिटी की जांच करवाने की भी धमकी दे डाली। जब पुलिसकर्मी ज्यादा दबंगई दिखाने लगा तब संचालक समीर घोष ने उसे एसएसपी से बातचीत करने की बात कही। इसके बाद पुलिसकर्मी वहां से रफूचक्कर हो गया। संचालक के अनुसार सोमवार की सुबह करीब आठ. तीस बजे पुलिसकर्मी मिठाई खरीदने पहुंचा। मिठाई खरीदने के बाद वह काउंटर पर बिल जमा करने पहुंचा। इस दौरान उसने एक सौ रुपयापये का डिस्काउंट देने को कहा। कैश काउंटर पर बैठे कर्मी ने मालिक के नहीं रहने की बात कही, तो उनसे उलझ गया। बात बढ़ने पर वह रेस्टोरेंट के कर्मी से धक्का-मुक्की करने लगा। डीएसपी पहुंचे जांच करने : पुलिसकर्मी की इस दबंगई की सूचना रेस्टोरेंट संचालक ने एसएसपी अनीश गुप्ता, ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह और कोतवाली थानेदार को सूचना दी। इस पर संज्ञान लेते हुए ट्रैफिक एसपी ने ट्रैफिक डीएसपी वन रंजीत कुमार लकड़ा को जांच के लिए भेजा। डीएसपी ने रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को लेकर जांच कर कार्रवाई की बात कही।
नीतीश कुमार ने आज दिल्ली से सटे गुड़गांव स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे लालू यादव के समधी और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। मुलाकात के समय जदयू महासचिव केसी त्यागी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मौजूद थे। दिल्लीः साल 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकता को धार देने के लिए दिल्ली में डेरा जमाए हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज दिल्ली से सटे गुड़गांव स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे समाजवादी पार्टी के संरक्षक और वयोवृद्ध नेता मुलायम सिंह से मुलाकात की। नीतीश कुमार ने जब मुलायम सिंह यादव से अस्पताल में जाकर मुलाकात की तो उस समय उनके साथ जदयू के महासचिव केसी त्यागी भी मौजूद थे। सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अस्पताल में मुलायम सिंह के स्वास्थ्य के बारे में नीतीश कुमार को जानकारी दी। अस्पताल में नीतीश कुमार ने मुलायम सिंह के साथ काफी लंबा समय बिताया। समाचार वेबसाइट एनडीटीवी के मुताबिक मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच साल 2024 के चुनाव के संबंध में चर्चा हुई और मुलायम सिंह यादव ने भी अपने समधी लालू प्रसाद यादव की तरह विपक्षी एकता के लिए नीतीश कुमार को सपा की ओर से पूरे सहयोग का वादा किया। मुलायम सिंह से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार का अगला पड़ाव इंडियन नेशनल लोक दल के वयोवृद्ध नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के घर का रहा। जहां नीतीश कुमार ने चौटाला का साथ चाय के प्याले के साथ देश की सियासत पर लंबी चर्चा की। नीतीश कुमार ने चौटाला से 2024 के आम चुनाव के लिए विपक्षी मंच पर साथ आने का आग्रह किया। जिसे चौटाला ने स्वीकार करते हुए उनके साथ आने की बात पर हामी भरी। दिल्ली में विपक्षी ताकत में जान फूंकने के लिए लगातार दो दिनों से अनवरत प्रयास करने वाले नीतीश कुमार पार्टी नेता केसी त्यागी के साथ उस नेता की दहलीज पर गये, जिन्हें नीतीश कुमार की अदावत के कारण जदयू छोड़ना पड़ा था। जी हां, कभी नीतीश कुमार के साथ रहे जदयू के अध्यक्ष रहे शरद यादव ने नीतीश के साथ हुई मुलाकात में कहा कि मौजूदा हालात में विपक्ष एक होकर केंद्र की सत्ता के साथ चुनावी मुकाबले के लिए उतरे तो केंद्र की सत्ता को परास्त किया जा सकता है। नीतीश कुमार ने आज विपक्ष के वयोवृद्ध नेताओं के मथने का काम किया, जब केंद्र में सत्ताधारी भाजपा ने विशिष्ट लोकसभा सीटों पर चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। मालूम हो कि नीतीश कुमार ने दिल्ली में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी के साथ भी मुलाकात की। वहीं कल उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और दिल्ली सरकार के मुखिया और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की थी। दिल्ली आने से पहले नीतीश कुमार ने पिछले हफ्ते पटना में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के साथ मुलाकात की थी। देश के महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि वो केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्हें अब दिल्ली की सत्ता का मोह नहीं है और न ही वो पीएम पद के दावेदार हैं।
नीतीश कुमार ने आज दिल्ली से सटे गुड़गांव स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे लालू यादव के समधी और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। मुलाकात के समय जदयू महासचिव केसी त्यागी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मौजूद थे। दिल्लीः साल दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकता को धार देने के लिए दिल्ली में डेरा जमाए हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज दिल्ली से सटे गुड़गांव स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे समाजवादी पार्टी के संरक्षक और वयोवृद्ध नेता मुलायम सिंह से मुलाकात की। नीतीश कुमार ने जब मुलायम सिंह यादव से अस्पताल में जाकर मुलाकात की तो उस समय उनके साथ जदयू के महासचिव केसी त्यागी भी मौजूद थे। सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अस्पताल में मुलायम सिंह के स्वास्थ्य के बारे में नीतीश कुमार को जानकारी दी। अस्पताल में नीतीश कुमार ने मुलायम सिंह के साथ काफी लंबा समय बिताया। समाचार वेबसाइट एनडीटीवी के मुताबिक मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच साल दो हज़ार चौबीस के चुनाव के संबंध में चर्चा हुई और मुलायम सिंह यादव ने भी अपने समधी लालू प्रसाद यादव की तरह विपक्षी एकता के लिए नीतीश कुमार को सपा की ओर से पूरे सहयोग का वादा किया। मुलायम सिंह से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार का अगला पड़ाव इंडियन नेशनल लोक दल के वयोवृद्ध नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के घर का रहा। जहां नीतीश कुमार ने चौटाला का साथ चाय के प्याले के साथ देश की सियासत पर लंबी चर्चा की। नीतीश कुमार ने चौटाला से दो हज़ार चौबीस के आम चुनाव के लिए विपक्षी मंच पर साथ आने का आग्रह किया। जिसे चौटाला ने स्वीकार करते हुए उनके साथ आने की बात पर हामी भरी। दिल्ली में विपक्षी ताकत में जान फूंकने के लिए लगातार दो दिनों से अनवरत प्रयास करने वाले नीतीश कुमार पार्टी नेता केसी त्यागी के साथ उस नेता की दहलीज पर गये, जिन्हें नीतीश कुमार की अदावत के कारण जदयू छोड़ना पड़ा था। जी हां, कभी नीतीश कुमार के साथ रहे जदयू के अध्यक्ष रहे शरद यादव ने नीतीश के साथ हुई मुलाकात में कहा कि मौजूदा हालात में विपक्ष एक होकर केंद्र की सत्ता के साथ चुनावी मुकाबले के लिए उतरे तो केंद्र की सत्ता को परास्त किया जा सकता है। नीतीश कुमार ने आज विपक्ष के वयोवृद्ध नेताओं के मथने का काम किया, जब केंद्र में सत्ताधारी भाजपा ने विशिष्ट लोकसभा सीटों पर चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। मालूम हो कि नीतीश कुमार ने दिल्ली में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी के साथ भी मुलाकात की। वहीं कल उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और दिल्ली सरकार के मुखिया और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की थी। दिल्ली आने से पहले नीतीश कुमार ने पिछले हफ्ते पटना में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के साथ मुलाकात की थी। देश के महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि वो केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्हें अब दिल्ली की सत्ता का मोह नहीं है और न ही वो पीएम पद के दावेदार हैं।
Highlightsएडिलेड में मिली हार के बाद सीरीज में बने रहने के लिए भारत को दूसरा टेस्ट मैच हर हाल में जीतना होगा। ऋषभ पंत ने प्रैक्टिस मैच में शतक लगाया था। उनका फॉर्म टीम के काम आ सकता है। एडीलेड टेस्ट में मिली शर्मनाक हार के बाद भारतीय टीम दूसरे टेस्ट मैच में प्लेइंग इलेवन में बदलाव कर सकती है। टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर मुरली कार्तिक ने टीम मैनजमेंट को ऋषभ पंत पर भरोसा जताने को कहा है। मुरली कार्तिक ने उम्मीद जताई है कि ऋषभ पंत भारत के लिए एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं। मुरली कार्तिक के मुताबिक टीम इंडिया अपने दोनों ही विकेटकीपरों को मेलबर्न टेस्ट के लिए प्लेइंग इलेवन में मौका दे सकती है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क से बात करते हुए कार्तिक ने कहा कि भारत साहा और पंत दोनों को ही प्लेइंग में शामिल कर सकता है। वहीं अनुभवी रोहित शर्मा तीसरे टेस्ट से पहले टीम से नहीं जुड़ सकेंगे ऐसे में अभ्यास मैचों में शानदार बल्लेबाजी करने वाले शुभमन गिल को सलामी बल्लेबाज के तौर पर मौका मिल सकता है। पहले टेस्ट की दोनों पारियों में नाकाम रहने वाले साहा टीम प्रबंधन का विश्वास जीतने में नाकाम रहे है ऐसे में पंत को मौका मिलना तय है। पंत ने अभ्यास मैच में शतक लगाया था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पिछले दौरे (2018) पर भी एक शतकीय पारी खेली थी। पितृत्व अककाश पर गये कप्तान विराट कोहली की जगह लोकेश राहुल को जगह मिलना तय है जबकि चोट के कारण श्रृंखला से बाहर हुए मोहम्मद शमी की जगह मोहम्मद सिराज का दावा मजबूत है। करियर के आखिरी पड़ाव पर चल रहे 36 साल के साहा की जगह टीम प्रबंधन अगले तीनों मैचों में पंत को आजमा सकता है । पंत का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया में अगर अच्छा रहा तो उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट श्रृंखला में भी मौका मिलना तय है।
Highlightsएडिलेड में मिली हार के बाद सीरीज में बने रहने के लिए भारत को दूसरा टेस्ट मैच हर हाल में जीतना होगा। ऋषभ पंत ने प्रैक्टिस मैच में शतक लगाया था। उनका फॉर्म टीम के काम आ सकता है। एडीलेड टेस्ट में मिली शर्मनाक हार के बाद भारतीय टीम दूसरे टेस्ट मैच में प्लेइंग इलेवन में बदलाव कर सकती है। टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर मुरली कार्तिक ने टीम मैनजमेंट को ऋषभ पंत पर भरोसा जताने को कहा है। मुरली कार्तिक ने उम्मीद जताई है कि ऋषभ पंत भारत के लिए एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं। मुरली कार्तिक के मुताबिक टीम इंडिया अपने दोनों ही विकेटकीपरों को मेलबर्न टेस्ट के लिए प्लेइंग इलेवन में मौका दे सकती है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क से बात करते हुए कार्तिक ने कहा कि भारत साहा और पंत दोनों को ही प्लेइंग में शामिल कर सकता है। वहीं अनुभवी रोहित शर्मा तीसरे टेस्ट से पहले टीम से नहीं जुड़ सकेंगे ऐसे में अभ्यास मैचों में शानदार बल्लेबाजी करने वाले शुभमन गिल को सलामी बल्लेबाज के तौर पर मौका मिल सकता है। पहले टेस्ट की दोनों पारियों में नाकाम रहने वाले साहा टीम प्रबंधन का विश्वास जीतने में नाकाम रहे है ऐसे में पंत को मौका मिलना तय है। पंत ने अभ्यास मैच में शतक लगाया था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पिछले दौरे पर भी एक शतकीय पारी खेली थी। पितृत्व अककाश पर गये कप्तान विराट कोहली की जगह लोकेश राहुल को जगह मिलना तय है जबकि चोट के कारण श्रृंखला से बाहर हुए मोहम्मद शमी की जगह मोहम्मद सिराज का दावा मजबूत है। करियर के आखिरी पड़ाव पर चल रहे छत्तीस साल के साहा की जगह टीम प्रबंधन अगले तीनों मैचों में पंत को आजमा सकता है । पंत का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया में अगर अच्छा रहा तो उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट श्रृंखला में भी मौका मिलना तय है।
जयपुर : देश की गुलाबी नगरी कहे जाने वाले जयपुर के हथरोई में हथरोई वाले बालाजी मंदिर में पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन किया गया. जम्मूः जम्मू डिवीजन में पाकिस्तानी गोलीबारी का सामना करने वाले सीमाई बाशिंदों के लिए नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास 14,000 से ज्यादा सामुदायिक और निजी बंकर बनाए जाएंगे. बैतूल : हालात इंसान से कुछ भी करवा सकते है. मज़बूरी और गरीबी में जीवन यापन करने वाले लोगो को घर का चूल्हा जलाने के लिए भी जान तक जोखिम में डालनी पड़ती है. पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को समीक्षा यात्रा के दौरान बेगूसराय पहुंचे जहां उनकी सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया. यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर मोदी सरकार के रुख पर सवाल उठाया है. इन दिनों एमपी के कुछ हिस्सों में नगरपालिका चुनाव का दौर चल रहा है . इसमें धार जिले की धामनोद नगर परिषद भी शामिल है. यहाँ भी चुनाव प्रचार हो रहा है. नई दिल्लीः WWE और विवादों का लम्बा नाता रहा है, आये दिन कोई ना कोई विवाद की वजह से या तो कंपनी मुसीबत में पड़ जाती है या इसमें नजर आने वाले रेस्लर्स। जापान की राजधानी टोक्यो में एक रेस्त्रां इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, जापान में एक रेस्त्रां है जिसका नाम कायाबुकिया है. बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता महेश भट्ट इन दिनों अपने बयान को लेकर चर्चा में है. उनका कहना है कि, अभिनेता संजय दत्त के लिए हीरोइन की लत से ऊबरना बेहद मुश्किल था. बॉलीवुड के सुपस्टार सलमान खान ने इन दिनों नागपुर के ईश्वर देशमुख कॉलेज कैंपस में शिरकत की. यहां पर पहुंचकर जब उन्होंने कहा "टाइगर से बेहतर शिकार कोई नहीं करता" तो जैसे फैन्स के जोश का तूफान थमने का नाम ही नहीं लिया.
जयपुर : देश की गुलाबी नगरी कहे जाने वाले जयपुर के हथरोई में हथरोई वाले बालाजी मंदिर में पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन किया गया. जम्मूः जम्मू डिवीजन में पाकिस्तानी गोलीबारी का सामना करने वाले सीमाई बाशिंदों के लिए नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास चौदह,शून्य से ज्यादा सामुदायिक और निजी बंकर बनाए जाएंगे. बैतूल : हालात इंसान से कुछ भी करवा सकते है. मज़बूरी और गरीबी में जीवन यापन करने वाले लोगो को घर का चूल्हा जलाने के लिए भी जान तक जोखिम में डालनी पड़ती है. पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को समीक्षा यात्रा के दौरान बेगूसराय पहुंचे जहां उनकी सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया. यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर मोदी सरकार के रुख पर सवाल उठाया है. इन दिनों एमपी के कुछ हिस्सों में नगरपालिका चुनाव का दौर चल रहा है . इसमें धार जिले की धामनोद नगर परिषद भी शामिल है. यहाँ भी चुनाव प्रचार हो रहा है. नई दिल्लीः WWE और विवादों का लम्बा नाता रहा है, आये दिन कोई ना कोई विवाद की वजह से या तो कंपनी मुसीबत में पड़ जाती है या इसमें नजर आने वाले रेस्लर्स। जापान की राजधानी टोक्यो में एक रेस्त्रां इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, जापान में एक रेस्त्रां है जिसका नाम कायाबुकिया है. बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता महेश भट्ट इन दिनों अपने बयान को लेकर चर्चा में है. उनका कहना है कि, अभिनेता संजय दत्त के लिए हीरोइन की लत से ऊबरना बेहद मुश्किल था. बॉलीवुड के सुपस्टार सलमान खान ने इन दिनों नागपुर के ईश्वर देशमुख कॉलेज कैंपस में शिरकत की. यहां पर पहुंचकर जब उन्होंने कहा "टाइगर से बेहतर शिकार कोई नहीं करता" तो जैसे फैन्स के जोश का तूफान थमने का नाम ही नहीं लिया.
प्रयागराज ब्यूरो । डिविजनल नान पेमेंट की मीटिंग एनसीआरएमयू के साथ गुरुवार को हुई। मिटिंग में एनसीआरएमयू की तरफ से कर्मचारियों के नान पेमेंट से संबंधित कुल 59 मुद्दे उठाए गए। अध्यक्षता सहायक कार्मिक अधिकारी चंद्रशेखर कुमार ने किया। सहायक मंडल वित्त प्रबंधक पीके मिश्रा तथा सभी हित निरीक्षक मौजूद थे। मिटिंग में कर्मचारियों के बहुत दिनों से लंबित भत्तों टीए, एनडीए, कंटिजेंट, एनएच, लीव एनकैशमेंट, चिल्ड्रन एजुकेशन एलाउंस आदि का समाधान कराया गया। आश्वासन मिला कि इसी माह में और कुछ अगले माह के वेतन के साथ लगा दिए जाएंगे। इसी के साथ नान पेमेंट से संबंधित अन्य मुद्दों का एजेंडा भी दिया गया जिसका निस्तारण करा कर अगले माह की होने वाली नान पेमेंट की मीटिंग में बताया जाएगा। आज की मिटिंग बड़े सौहार्द वातावरण में लेकिन गरमा गरम हुई और कर्मचारियों के नॉनपेमेंट से संबंधित विभिन्न प्रकार के मुद्दों को काफी जोरदार ढंग से उठाया गया। अंत में संगठन को आश्वासन दिया गया कि जिसका भी भत्तों का भुगतान मार्च 2023 में फंड की कमी की वजह से नहीं हो पाया था, वे सभी इस माह के वेतन के साथ लगा दिया जाएगा। नागेंद्र बहादुर सिंह, आशीष कुमार, विक्रम सिंह, एके सिंह, बिपिन बिहारी सिंह, रामसेवक, सत्यजीत यादव, महेंद्र सिंह, बीरेंद्र सिंह, अमित, अजवानी आदि मौजूद रहे। प्रयागराज ब्यूरो । डिविजनल नान पेमेंट की मीटिंग एनसीआरएमयू के साथ गुरुवार को हुई। मिटिंग में एनसीआरएमयू की तरफ से कर्मचारियों के नान पेमेंट से संबंधित कुल 59 मुद्दे उठाए गए। अध्यक्षता सहायक कार्मिक अधिकारी चंद्रशेखर कुमार ने किया। सहायक मंडल वित्त प्रबंधक पीके मिश्रा तथा सभी हित निरीक्षक मौजूद थे।
प्रयागराज ब्यूरो । डिविजनल नान पेमेंट की मीटिंग एनसीआरएमयू के साथ गुरुवार को हुई। मिटिंग में एनसीआरएमयू की तरफ से कर्मचारियों के नान पेमेंट से संबंधित कुल उनसठ मुद्दे उठाए गए। अध्यक्षता सहायक कार्मिक अधिकारी चंद्रशेखर कुमार ने किया। सहायक मंडल वित्त प्रबंधक पीके मिश्रा तथा सभी हित निरीक्षक मौजूद थे। मिटिंग में कर्मचारियों के बहुत दिनों से लंबित भत्तों टीए, एनडीए, कंटिजेंट, एनएच, लीव एनकैशमेंट, चिल्ड्रन एजुकेशन एलाउंस आदि का समाधान कराया गया। आश्वासन मिला कि इसी माह में और कुछ अगले माह के वेतन के साथ लगा दिए जाएंगे। इसी के साथ नान पेमेंट से संबंधित अन्य मुद्दों का एजेंडा भी दिया गया जिसका निस्तारण करा कर अगले माह की होने वाली नान पेमेंट की मीटिंग में बताया जाएगा। आज की मिटिंग बड़े सौहार्द वातावरण में लेकिन गरमा गरम हुई और कर्मचारियों के नॉनपेमेंट से संबंधित विभिन्न प्रकार के मुद्दों को काफी जोरदार ढंग से उठाया गया। अंत में संगठन को आश्वासन दिया गया कि जिसका भी भत्तों का भुगतान मार्च दो हज़ार तेईस में फंड की कमी की वजह से नहीं हो पाया था, वे सभी इस माह के वेतन के साथ लगा दिया जाएगा। नागेंद्र बहादुर सिंह, आशीष कुमार, विक्रम सिंह, एके सिंह, बिपिन बिहारी सिंह, रामसेवक, सत्यजीत यादव, महेंद्र सिंह, बीरेंद्र सिंह, अमित, अजवानी आदि मौजूद रहे। प्रयागराज ब्यूरो । डिविजनल नान पेमेंट की मीटिंग एनसीआरएमयू के साथ गुरुवार को हुई। मिटिंग में एनसीआरएमयू की तरफ से कर्मचारियों के नान पेमेंट से संबंधित कुल उनसठ मुद्दे उठाए गए। अध्यक्षता सहायक कार्मिक अधिकारी चंद्रशेखर कुमार ने किया। सहायक मंडल वित्त प्रबंधक पीके मिश्रा तथा सभी हित निरीक्षक मौजूद थे।
फोटोः आशुतोष मास्कः बिहारशरीफ के बबुरबन्ना में लोगों को मास्क देकर लगाने को प्रेरित करते समाजसेवी डॉ. आशुतोष कुमार मानव व अन्य। कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए कुछ समाजसेवियों ने बिहारशरीफ, हरनौत, हिलसा समेत अन्य शहरों में अभियान चला रहे हैं। शनिवार को बिहारशरीफ के बबुरबन्ना समेत आसपास के मोहल्लों में छात्रों व कारोबारियों को मास्क बांटे। साथ ही उसे लगाने की अपील की। समाजसेवी डॉ. आशुतोष कुमार मानव ने कहा कि सुरक्षा ही बचाव है। मास्क लगाने के साथ ही दो गज की दूरी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह धैर्य के साथ खुद पर सख्ती करने का समय है। हमें किसी तरह के भ्रम में नहीं रहना चाहिए। बल्कि, सतर्क व सावधान रहकर ही हम अपने समाज व परिवार की रक्षा कर सकते हैं। समाजसेवी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि यदि दोबारा जिले व राज्य में लॉकडाउन लगता है। तो, भयंकर तरीके से अर्थ-व्यवस्था प्रभावित हो जाएगा। यदि हम सभी मास्क लगाएंगे। एक-दूसरे के बीच पर्याप्त दूरी रखेंगे। अन्य गाइड लाइन का पालन करेंगे। तो, कोरोना संक्रमण नहीं फैलेगा। यही एकमात्र उपाय है। उन्होंने लोगों से कोरोना वैक्सीन लगवाने की भी अपील की। इस अभियान में समाजसेवी शैलेश सिंह, विजय प्रसाद, शुभम कुमार व अन्य ने सहयोग किया। अभियान के दौरान लोगों ने हाथ जोड़कर मास्क पहनने की गुजारिश की।
फोटोः आशुतोष मास्कः बिहारशरीफ के बबुरबन्ना में लोगों को मास्क देकर लगाने को प्रेरित करते समाजसेवी डॉ. आशुतोष कुमार मानव व अन्य। कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए कुछ समाजसेवियों ने बिहारशरीफ, हरनौत, हिलसा समेत अन्य शहरों में अभियान चला रहे हैं। शनिवार को बिहारशरीफ के बबुरबन्ना समेत आसपास के मोहल्लों में छात्रों व कारोबारियों को मास्क बांटे। साथ ही उसे लगाने की अपील की। समाजसेवी डॉ. आशुतोष कुमार मानव ने कहा कि सुरक्षा ही बचाव है। मास्क लगाने के साथ ही दो गज की दूरी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह धैर्य के साथ खुद पर सख्ती करने का समय है। हमें किसी तरह के भ्रम में नहीं रहना चाहिए। बल्कि, सतर्क व सावधान रहकर ही हम अपने समाज व परिवार की रक्षा कर सकते हैं। समाजसेवी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि यदि दोबारा जिले व राज्य में लॉकडाउन लगता है। तो, भयंकर तरीके से अर्थ-व्यवस्था प्रभावित हो जाएगा। यदि हम सभी मास्क लगाएंगे। एक-दूसरे के बीच पर्याप्त दूरी रखेंगे। अन्य गाइड लाइन का पालन करेंगे। तो, कोरोना संक्रमण नहीं फैलेगा। यही एकमात्र उपाय है। उन्होंने लोगों से कोरोना वैक्सीन लगवाने की भी अपील की। इस अभियान में समाजसेवी शैलेश सिंह, विजय प्रसाद, शुभम कुमार व अन्य ने सहयोग किया। अभियान के दौरान लोगों ने हाथ जोड़कर मास्क पहनने की गुजारिश की।
IPL 2023, SRH vs RCB, Sachin Tendulkar on Heinrich Klaasen century: आईपीएल 2023 में आज एक और शानदार शतक देखने को मिल गया। इस बार एक ऐसे खिलाड़ी ने धमाल मचाया है जिसके बारे में सीजन शुरू होते समय शायद ही किसी ने इतना सोचा होगा। ये हैं सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिच क्लासेन, जिनकी पारी के सचिन तेंदुलकर भी मुरीद हो गए हैं। पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार ! Opinion India Ka: Election 2024 से पहले राहुल का कॉन्फिडेंस बढ़ा, मोदी जैसे बन पाएंगे ? News Ki Pathshala । Sushant Sinha। विपक्ष का एक नेता और मोदी विरोध का एजेंडा फेल ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । भारत का वो नया सैटेलाइट. . . जो रखेगा दुश्मनों पर नज़र!
IPL दो हज़ार तेईस, SRH vs RCB, Sachin Tendulkar on Heinrich Klaasen century: आईपीएल दो हज़ार तेईस में आज एक और शानदार शतक देखने को मिल गया। इस बार एक ऐसे खिलाड़ी ने धमाल मचाया है जिसके बारे में सीजन शुरू होते समय शायद ही किसी ने इतना सोचा होगा। ये हैं सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिच क्लासेन, जिनकी पारी के सचिन तेंदुलकर भी मुरीद हो गए हैं। पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार ! Opinion India Ka: Election दो हज़ार चौबीस से पहले राहुल का कॉन्फिडेंस बढ़ा, मोदी जैसे बन पाएंगे ? News Ki Pathshala । Sushant Sinha। विपक्ष का एक नेता और मोदी विरोध का एजेंडा फेल ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । भारत का वो नया सैटेलाइट. . . जो रखेगा दुश्मनों पर नज़र!
पंजाब के कपूरथला कोर्ट कॉम्प्लेक्स में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट राजदीप सिंह को होशियारपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के मामले में जिला बार एसोसिएशन कपूरथला ने विरोध स्वरूप आज से 2 दिन का नो वर्क डे की घोषणा की है। कचहरी के सभी वकीलों ने राजदीप सिंह की गिरफ्तारी को गैर-कानूनी करार देते हुए आज अदालत में पेश न होने के चलते हड़ताल रखी है। बता दें कि होशियारपुर पुलिस ने कपूरथला के वकील राजदीप सिंह को खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की मदद तथा उसकी पोस्टें सोशल मीडिया पर डालने के आरोप में कुछ दिन पहले काबू किया था। जिला बार एसोसिएशन कपूरथला के प्रधान एडवोकेट सुरेश कालिया ने कहा कि उनके साथी वकील राजदीप को गैर क़ानूनी ढंग से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि जिला बार एसोसिएशन कपूरथला का एक पैनल इस मामले की गंभीरता से देखरेख कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजदीप सिंह को पुलिस ने माननीय अदालत में पेश कर फिर से रिमांड ले लिया है, जबकि कोई रिकवरी भी नहीं हुई है। बार एसोसिएशन के महासचिव एडवोकेट अजय कुमार ने बताया कि बार एसोसिएशन द्वारा घोषित किए गए नो वर्क डे का उल्लंघन करने वाले वकीलों पर 5000 जुर्माना भी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर NIA तथा पुलिस उनके वकील साथी पर अत्याचार करेगी तो पूरे देश के वकील सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब के कपूरथला कोर्ट कॉम्प्लेक्स में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट राजदीप सिंह को होशियारपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के मामले में जिला बार एसोसिएशन कपूरथला ने विरोध स्वरूप आज से दो दिन का नो वर्क डे की घोषणा की है। कचहरी के सभी वकीलों ने राजदीप सिंह की गिरफ्तारी को गैर-कानूनी करार देते हुए आज अदालत में पेश न होने के चलते हड़ताल रखी है। बता दें कि होशियारपुर पुलिस ने कपूरथला के वकील राजदीप सिंह को खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की मदद तथा उसकी पोस्टें सोशल मीडिया पर डालने के आरोप में कुछ दिन पहले काबू किया था। जिला बार एसोसिएशन कपूरथला के प्रधान एडवोकेट सुरेश कालिया ने कहा कि उनके साथी वकील राजदीप को गैर क़ानूनी ढंग से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि जिला बार एसोसिएशन कपूरथला का एक पैनल इस मामले की गंभीरता से देखरेख कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजदीप सिंह को पुलिस ने माननीय अदालत में पेश कर फिर से रिमांड ले लिया है, जबकि कोई रिकवरी भी नहीं हुई है। बार एसोसिएशन के महासचिव एडवोकेट अजय कुमार ने बताया कि बार एसोसिएशन द्वारा घोषित किए गए नो वर्क डे का उल्लंघन करने वाले वकीलों पर पाँच हज़ार जुर्माना भी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर NIA तथा पुलिस उनके वकील साथी पर अत्याचार करेगी तो पूरे देश के वकील सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Aaj ka Panchang 18 March 2023: आज चैत्र कृष्ण पक्ष की उदया तिथि एकादशी और शनिवार का दिन है। एकादशी तिथि आज दोपहर पहले 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। आज रात 11 बजकर 54 तक शिव योग रहेगा। साथ ही आज रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर कल सुबह 8 बजकर 7 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। इसके आलावा आज रात 12 बजकर 29 मिनट तक श्रवण नक्षत्र रहेगा। आज पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शनिवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय। (आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7. 30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं। )
Aaj ka Panchang अट्ठारह मार्चch दो हज़ार तेईस: आज चैत्र कृष्ण पक्ष की उदया तिथि एकादशी और शनिवार का दिन है। एकादशी तिथि आज दोपहर पहले ग्यारह बजकर तेरह मिनट तक रहेगी। उसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। आज रात ग्यारह बजकर चौवन तक शिव योग रहेगा। साथ ही आज रात बारह बजकर उनतीस मिनट से शुरू होकर कल सुबह आठ बजकर सात मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। इसके आलावा आज रात बारह बजकर उनतीस मिनट तक श्रवण नक्षत्र रहेगा। आज पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शनिवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
PRAYAGRAJ: पुराने शहर में व्हीकल पार्किंग की समस्या को खत्म करने के लिए मोती पार्क में मल्टीलेवल पार्किंग प्रस्तावित है, वहीं वेंडिंग जोन अभी तक डेवलप नहीं हो सका है। इस तरह के कई अन्य डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पहले से सेंशन तो हैं, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। ऐसे डेवलपमेंट वर्क को जल्द से जल्द शुरू कराए जाने की जरूरत है। जिस पर अधिकारी काम करें और जल्द से जल्द पेंडिंग प्रोजेक्ट शुरू कराएं। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं शहर दक्षिणी विधायक नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने सोमवार को सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ मीटिंग कर ये निर्देश दिए। इस दौरान नगर आयुक्त रवि रंजन, पीडीए वीसी अंकित अग्रवाल व अन्य विभागों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सुलाकी चौराहे के पास स्थित मोती पार्क अंडर ग्राउंड मल्टीलेवल पाìकग के निर्माण एवं पार्क के पुनर्विकास को आगे बढ़ाया जाए। - पटरी दुकानदारों को यहां-वहां भगाने के बजाय उनके लिए जल्द से जल्द वेंडिंग जोन की व्यवस्था की जाए, ताकि सड़क व पटरी से अतिक्रमण हट जाए। - शहर में कई जगह पानी की पाइप लाइन ध्वस्त हो चुकी है, जिसकी मरम्मत कराने के साथ ही पाइप लाइन को बदलवाया जाए। - करेलाबाग, सदियापुर झुग्गी बस्तियों के आस-पास सीवर लाइन डालने का काम शुरू कराया जाए। - एडीए कॉलोनी नैनी के पार्को का ब्यूटीफिकेशन करने के साथ ही ओपन एयर जिम की व्यवस्था की जाए। - नैनी में सीवर लाइन डालने का काम जल्द से जल्द शुरू कराया जाए।
PRAYAGRAJ: पुराने शहर में व्हीकल पार्किंग की समस्या को खत्म करने के लिए मोती पार्क में मल्टीलेवल पार्किंग प्रस्तावित है, वहीं वेंडिंग जोन अभी तक डेवलप नहीं हो सका है। इस तरह के कई अन्य डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पहले से सेंशन तो हैं, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। ऐसे डेवलपमेंट वर्क को जल्द से जल्द शुरू कराए जाने की जरूरत है। जिस पर अधिकारी काम करें और जल्द से जल्द पेंडिंग प्रोजेक्ट शुरू कराएं। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं शहर दक्षिणी विधायक नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने सोमवार को सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ मीटिंग कर ये निर्देश दिए। इस दौरान नगर आयुक्त रवि रंजन, पीडीए वीसी अंकित अग्रवाल व अन्य विभागों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सुलाकी चौराहे के पास स्थित मोती पार्क अंडर ग्राउंड मल्टीलेवल पाìकग के निर्माण एवं पार्क के पुनर्विकास को आगे बढ़ाया जाए। - पटरी दुकानदारों को यहां-वहां भगाने के बजाय उनके लिए जल्द से जल्द वेंडिंग जोन की व्यवस्था की जाए, ताकि सड़क व पटरी से अतिक्रमण हट जाए। - शहर में कई जगह पानी की पाइप लाइन ध्वस्त हो चुकी है, जिसकी मरम्मत कराने के साथ ही पाइप लाइन को बदलवाया जाए। - करेलाबाग, सदियापुर झुग्गी बस्तियों के आस-पास सीवर लाइन डालने का काम शुरू कराया जाए। - एडीए कॉलोनी नैनी के पार्को का ब्यूटीफिकेशन करने के साथ ही ओपन एयर जिम की व्यवस्था की जाए। - नैनी में सीवर लाइन डालने का काम जल्द से जल्द शुरू कराया जाए।
राफेल डील की जांच एक फ्रांस जज (French judge) को सौंपी गई है। इस मामले में फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच ने कहा है कि इस डील को लेकर जो भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे है, उनकी जांच की जाएगी। नई दिल्ली. राफेल डील की न्याययिक जांच फ्रांस सरकार ने एक जज (French judge) को नियुक्त किया है। इस मामले में फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच का कहना है कि इस डील को लेकर जो भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे है, उनकी जांच की जाएगी। बता दें कि साल 2016 में राफेल फाइटर जेट की डील करीब 7. 8 बिलियन यूरो यानी 9. 3 बिलियन डॉलर की डील हुई थी। जिसमें 36 राफेल विमानो का दाम तय किए गए थे। तब से लेकर आज तक इस डील को लेकर विवाद जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को फ्रेंच पब्लिकेशन मीडियापार्ट ने बताया कि 14 जून को एक मजिस्ट्रेट ने इस मामले की आपराधिक जांच शुरू की थी, इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद, वर्तमान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से उनके काम काज को लेकर सवाल किए जाएंगे । यही नहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियान से भी पूछताछ की जा सकती है। जिस समय राफेल डील को साइन किया गया था उस समय राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद राष्ट्रपति के पद पर थे। वहीं वर्तमान में जो फ्रांस के राष्ट्रपति हैं, वह उस समय वित्तमंत्री के पद पर थे। फिलहाल, इस मामले में डसॉल्ट एविएशन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे पहले कंपनी कंपनी की तरफ से इस बात को लेकर इनकार किया गया था कि इंडो-फ्रेंच डील में कोई धांधली हुई है। कंपनी का कहना था कि आधिकारिक संगठनों द्वारा कई नियंत्रण किए जाते हैं. कोई भारत के साथ 36 राफेल को लेकर हुई डील में किसी भी प्रकार की धांधली नहीं हुई थी।
राफेल डील की जांच एक फ्रांस जज को सौंपी गई है। इस मामले में फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच ने कहा है कि इस डील को लेकर जो भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे है, उनकी जांच की जाएगी। नई दिल्ली. राफेल डील की न्याययिक जांच फ्रांस सरकार ने एक जज को नियुक्त किया है। इस मामले में फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच का कहना है कि इस डील को लेकर जो भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे है, उनकी जांच की जाएगी। बता दें कि साल दो हज़ार सोलह में राफेल फाइटर जेट की डील करीब सात. आठ बिलियन यूरो यानी नौ. तीन बिलियन डॉलर की डील हुई थी। जिसमें छत्तीस राफेल विमानो का दाम तय किए गए थे। तब से लेकर आज तक इस डील को लेकर विवाद जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को फ्रेंच पब्लिकेशन मीडियापार्ट ने बताया कि चौदह जून को एक मजिस्ट्रेट ने इस मामले की आपराधिक जांच शुरू की थी, इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद, वर्तमान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से उनके काम काज को लेकर सवाल किए जाएंगे । यही नहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियान से भी पूछताछ की जा सकती है। जिस समय राफेल डील को साइन किया गया था उस समय राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद राष्ट्रपति के पद पर थे। वहीं वर्तमान में जो फ्रांस के राष्ट्रपति हैं, वह उस समय वित्तमंत्री के पद पर थे। फिलहाल, इस मामले में डसॉल्ट एविएशन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे पहले कंपनी कंपनी की तरफ से इस बात को लेकर इनकार किया गया था कि इंडो-फ्रेंच डील में कोई धांधली हुई है। कंपनी का कहना था कि आधिकारिक संगठनों द्वारा कई नियंत्रण किए जाते हैं. कोई भारत के साथ छत्तीस राफेल को लेकर हुई डील में किसी भी प्रकार की धांधली नहीं हुई थी।
योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ वाट्सएप ग्रुप पर अश्लील पोस्ट डालने के आरोपी युवक को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। युवक सांडी थाना क्षेत्र का निवासी है। उसके खिलाफ बजरंगदल के जिला संयोजक की तहरीर पर पुलिस ने आईटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की थी। हरदोई के थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी मोहम्मद फुरकान ने अपने नंबर से माई ग्रुप नाम से वाट्सएप ग्रुप बना रखा है। बुधवार को आरोपी ने ग्रुप पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का आपत्तिजनक फोटो डाला। फोटो के नीचे उनसे संबंधित अश्लील पोस्ट डाली थी। कथित पोस्ट बजरंगदल के जिला संयोजक अभिषेक द्विवेदी ने देखी। उन्होंने बुधवार रात आपत्तिजनक पोस्ट डालने की तहरीर शहर कोतवाली में दी थी। पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मोहम्मद फु करान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और सांडी पुलिस से संपर्क कर मामले से अवगत कराया था। एसओ सांडी रणजीत सिंह ने बुधवार देर रात फुरकान को गिरफ्तार कर शहर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। कोतवाल कमलेश नारायण पांडेय ने बताया कि मामले में कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। ग्रुप से जुडे़ सदस्यों के बारे में भी पड़ताल की जा रही है। बताया कि जांच पूरी होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ वाट्सएप ग्रुप पर अश्लील पोस्ट डालने के आरोपी युवक को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। युवक सांडी थाना क्षेत्र का निवासी है। उसके खिलाफ बजरंगदल के जिला संयोजक की तहरीर पर पुलिस ने आईटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की थी। हरदोई के थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी मोहम्मद फुरकान ने अपने नंबर से माई ग्रुप नाम से वाट्सएप ग्रुप बना रखा है। बुधवार को आरोपी ने ग्रुप पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का आपत्तिजनक फोटो डाला। फोटो के नीचे उनसे संबंधित अश्लील पोस्ट डाली थी। कथित पोस्ट बजरंगदल के जिला संयोजक अभिषेक द्विवेदी ने देखी। उन्होंने बुधवार रात आपत्तिजनक पोस्ट डालने की तहरीर शहर कोतवाली में दी थी। पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मोहम्मद फु करान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और सांडी पुलिस से संपर्क कर मामले से अवगत कराया था। एसओ सांडी रणजीत सिंह ने बुधवार देर रात फुरकान को गिरफ्तार कर शहर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। कोतवाल कमलेश नारायण पांडेय ने बताया कि मामले में कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। ग्रुप से जुडे़ सदस्यों के बारे में भी पड़ताल की जा रही है। बताया कि जांच पूरी होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
शिमला - हर त्योहार और पर्व की रौनक में राजधानी शिमला के बाजार भी रंग जाते हैं। इस बार भी शिमला के बाजार लोहड़ी के त्योहार के लिए सज चुके हैं। वर्ष का यह पहला पर्व होता है, जिसको धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष पर्व को खास बनाने के लिए राजधानी शिमला का बाजार भी पूरी तरह से सज चुका है। शिमला के बाजारों की दुकानों पर रेवड़ी, गजक और मूंगफली के स्टाल सजाए गए हैं। इस त्योहार को राजधानी शिमला सहित प्रदेश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। त्योहार की खास बात यह है कि इसकी रौनक ही तिल, गुड़, गजक और रेवड़ी की मिठास से खास बनती है। ऐसे में बाजारों में भी इस पर्व पर रेवड़ी, गजक और तिलपट्टी के अलग-अलग स्टाल लगाए गए हैं। दुकानों पर इन सब चीजों की खरीददारी लोगों द्वारा की जा रही है। दुकानों पर गजक, मूंगफली व तिलपट्टी के अलग-अलग पैकिंग भी इस बार बाजार में खास रूप से लोहड़ी के लिए लाई गई है। लोहड़ी पर इन्हें घर के साथ-साथ तोहफों के रूप में देने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बाजारों में लोहड़ी की खरीददारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पर्व की खुशियां अपनों के साथ बांटने के लिए खरीददारी करने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। लोहड़ी पर राजधानी शिमला में जगह-जगह लोहड़ी जलाने के साथ ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर डांस किया जाता है। बाजारों में इस दिन पर सभी एक साथ मिलकर पर्व की खुशियां साझा करते हैं। पहले जहां बच्चों द्वारा लोहड़ी पर घर-घर जाकर लोहड़ी गाकर लोहड़ी मांगने का भी चलन था, जो अब खत्म होता जा रहा है, लेकिन अभी भी बाजारों में व्यापारी वर्ग एक साथ मिलकर इस पर्व की खुशियां साझा करते हैं। लोहड़ी जलाने के बाद मूंगफली, रेवड़ी और गजक का प्रसाद भी एक दूसरे को बांटा जाता है। लोहड़ी पर जिला शिमला के तत्तापानी में पवित्र स्नान किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग इस स्थान पर पवित्र स्नान करने के साथ ही दान पुण्य भी करते हैं। इस दिन पर अन्न का दान करने के साथ ही खिचड़ी भी बनाई जाती है।
शिमला - हर त्योहार और पर्व की रौनक में राजधानी शिमला के बाजार भी रंग जाते हैं। इस बार भी शिमला के बाजार लोहड़ी के त्योहार के लिए सज चुके हैं। वर्ष का यह पहला पर्व होता है, जिसको धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष पर्व को खास बनाने के लिए राजधानी शिमला का बाजार भी पूरी तरह से सज चुका है। शिमला के बाजारों की दुकानों पर रेवड़ी, गजक और मूंगफली के स्टाल सजाए गए हैं। इस त्योहार को राजधानी शिमला सहित प्रदेश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। त्योहार की खास बात यह है कि इसकी रौनक ही तिल, गुड़, गजक और रेवड़ी की मिठास से खास बनती है। ऐसे में बाजारों में भी इस पर्व पर रेवड़ी, गजक और तिलपट्टी के अलग-अलग स्टाल लगाए गए हैं। दुकानों पर इन सब चीजों की खरीददारी लोगों द्वारा की जा रही है। दुकानों पर गजक, मूंगफली व तिलपट्टी के अलग-अलग पैकिंग भी इस बार बाजार में खास रूप से लोहड़ी के लिए लाई गई है। लोहड़ी पर इन्हें घर के साथ-साथ तोहफों के रूप में देने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बाजारों में लोहड़ी की खरीददारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पर्व की खुशियां अपनों के साथ बांटने के लिए खरीददारी करने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। लोहड़ी पर राजधानी शिमला में जगह-जगह लोहड़ी जलाने के साथ ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर डांस किया जाता है। बाजारों में इस दिन पर सभी एक साथ मिलकर पर्व की खुशियां साझा करते हैं। पहले जहां बच्चों द्वारा लोहड़ी पर घर-घर जाकर लोहड़ी गाकर लोहड़ी मांगने का भी चलन था, जो अब खत्म होता जा रहा है, लेकिन अभी भी बाजारों में व्यापारी वर्ग एक साथ मिलकर इस पर्व की खुशियां साझा करते हैं। लोहड़ी जलाने के बाद मूंगफली, रेवड़ी और गजक का प्रसाद भी एक दूसरे को बांटा जाता है। लोहड़ी पर जिला शिमला के तत्तापानी में पवित्र स्नान किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग इस स्थान पर पवित्र स्नान करने के साथ ही दान पुण्य भी करते हैं। इस दिन पर अन्न का दान करने के साथ ही खिचड़ी भी बनाई जाती है।
इंग्लैंड के एक फ़ार्म में एक पांच पैर वाले मेमने का जन्म हुआ है. ये प्यारी सी भेड़ अभी स्वस्थ्य है और फार्म के लोग उस पर नज़र बनाए हुए हैं. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
इंग्लैंड के एक फ़ार्म में एक पांच पैर वाले मेमने का जन्म हुआ है. ये प्यारी सी भेड़ अभी स्वस्थ्य है और फार्म के लोग उस पर नज़र बनाए हुए हैं.
कागान से तिर्मिज तक की रेलवे लाइन को बर्बाद करने में सफेद रूसी इञ्जीनियरो रेज साम्राज्यवादियों ने नेतृत्व किया था - एक और स्वयंसेवक ने कहा । - छा - पार्टी सुहृदों के सरदार जौवाद ने कहा - पुल से पार होना - - ने ठीक नही, तो पानी गे पार होना ठीक होगा । लम्बी चोडी बातों में समय बिताना ठीक नहीं। हमने इसी तरह समय बिता दिया, तो फिर दिन हो जायेगा और बासमची हमारी कम संख्या को जान जायेंगे, उस वक्त भारी श्राफत आयेगी । हम कैसे कम है - एक पार्टी सुहृद ने कहा - हम ढाई सौ हैं । - चार हजार के मुकाबिले ढाई सौ बहुत कम है - जोवाद - ने कहा । - ढाई सौ है, किन्तु हमने पार्टी के अधीन शिक्षा पायी है। हमें ग्रागपानी और सारी दुनिया की दुश्मनी और मरने का भय न करके आगे बढना चाहिये -- दूसरे पार्टी मुहृद ने कहा । अवश्य मरने से डरने की जरूरत नहीं - एक स्वयंसेवक ने कहा - लेकिन बेफायदा मग्ने की भी जरूरत नहीं । जो बेफायदा मरने की इच्छा रखता है, वह घर मे बैठे छाती पर तमचा रखकर भी मर सकता है। हमें ऐसी मौत की जरूरत है, जिमन बुखारा जन प्रजातन्त्र को शक्ति मिले । - जन प्रजातन्त्र न मरणासन्न है, न मरेगा - जौवाद ने टोककर कहाजब तक बुखारा के जाँगर चलानेवाले सजग हैं, जब तक दुनिया मे कमकरवर्ग जिन्दा है, जब तक रूस और तुकिस्तान में सोवियत सरकार जिन्दा है तब तक बुखारा-जन-पनायती प्रजातन्त्र न मरा है, न मरेगा, बल्कि वह बुखारा सोवियत समाजवादी प्रजातन्त्र बनकर सोवियत संघ का अंग बनकर रहेगा। इस विषय मे संदेह करना नितान्त भूल है । --- इस समय बुखारा जन प्रजातंत्र के कितने ही अगों में जो बुराइयाँ देखी जाती हैं, उन्होंने हरएक आदमी के दिल मे संदेह पैदा कर दिया है - उक्त स्वयंसेवक ने कहा । - नाजिर हरबी फोके दुश्मनों की ओर भाग जाने और केन्द्रीय कार्य समिति के अध्यक्ष उसमान खोजा के विश्वासघात ने प्रजातन्त्र को निर्बल नहीं किया, बल्कि सबल करने का रास्ता खोल दिया - जौवाद ने कहा- उनके विश्वासघात से हमारी आँखें खुल गयीं। हम पार्टी संगठन, सरकारी विभाग
कागान से तिर्मिज तक की रेलवे लाइन को बर्बाद करने में सफेद रूसी इञ्जीनियरो रेज साम्राज्यवादियों ने नेतृत्व किया था - एक और स्वयंसेवक ने कहा । - छा - पार्टी सुहृदों के सरदार जौवाद ने कहा - पुल से पार होना - - ने ठीक नही, तो पानी गे पार होना ठीक होगा । लम्बी चोडी बातों में समय बिताना ठीक नहीं। हमने इसी तरह समय बिता दिया, तो फिर दिन हो जायेगा और बासमची हमारी कम संख्या को जान जायेंगे, उस वक्त भारी श्राफत आयेगी । हम कैसे कम है - एक पार्टी सुहृद ने कहा - हम ढाई सौ हैं । - चार हजार के मुकाबिले ढाई सौ बहुत कम है - जोवाद - ने कहा । - ढाई सौ है, किन्तु हमने पार्टी के अधीन शिक्षा पायी है। हमें ग्रागपानी और सारी दुनिया की दुश्मनी और मरने का भय न करके आगे बढना चाहिये -- दूसरे पार्टी मुहृद ने कहा । अवश्य मरने से डरने की जरूरत नहीं - एक स्वयंसेवक ने कहा - लेकिन बेफायदा मग्ने की भी जरूरत नहीं । जो बेफायदा मरने की इच्छा रखता है, वह घर मे बैठे छाती पर तमचा रखकर भी मर सकता है। हमें ऐसी मौत की जरूरत है, जिमन बुखारा जन प्रजातन्त्र को शक्ति मिले । - जन प्रजातन्त्र न मरणासन्न है, न मरेगा - जौवाद ने टोककर कहाजब तक बुखारा के जाँगर चलानेवाले सजग हैं, जब तक दुनिया मे कमकरवर्ग जिन्दा है, जब तक रूस और तुकिस्तान में सोवियत सरकार जिन्दा है तब तक बुखारा-जन-पनायती प्रजातन्त्र न मरा है, न मरेगा, बल्कि वह बुखारा सोवियत समाजवादी प्रजातन्त्र बनकर सोवियत संघ का अंग बनकर रहेगा। इस विषय मे संदेह करना नितान्त भूल है । --- इस समय बुखारा जन प्रजातंत्र के कितने ही अगों में जो बुराइयाँ देखी जाती हैं, उन्होंने हरएक आदमी के दिल मे संदेह पैदा कर दिया है - उक्त स्वयंसेवक ने कहा । - नाजिर हरबी फोके दुश्मनों की ओर भाग जाने और केन्द्रीय कार्य समिति के अध्यक्ष उसमान खोजा के विश्वासघात ने प्रजातन्त्र को निर्बल नहीं किया, बल्कि सबल करने का रास्ता खोल दिया - जौवाद ने कहा- उनके विश्वासघात से हमारी आँखें खुल गयीं। हम पार्टी संगठन, सरकारी विभाग
धर्म के ' समूलं च विनश्यति' होने का समय आ गया था। परन्तु वौद्ध धर्म के हास के बाद वेदान्त के साथ ही गीता के भागवतधर्म का जो पुनरुज्जीवन होने लगा था, उसके कारण हमारे यहाँ यह टुप्परिणाम नहीं हो सका । जय कि दौलताबाद का हिन्दू राज्य मुसलमानों से नष्ट भ्रष्ट नहीं किया गया था, उसके कुछ वर्ष पूर्व ही श्रीज्ञानेश्वर महाराज ने हमारे सौभाग्य से भगवद्गीता को मराठी भाषा में अलंकृत कर ब्रह्मविद्या को महाराष्ट्र प्रान्त में प्रति सुगम कर दिया था; और हिन्दुस्थान के अन्य प्रान्तों में भी इसी समय अनेक साधुसन्तों ने गीता के भक्ति मार्ग का उपदेश जारी कर रखा था । यवनाला-चांडाल इत्यादिकों को एक समान और ज्ञानमूलक गीताधर्म का जाज्वल्य उपदेश (चाहे वह वैराग्ययुक्त भक्ति के रूप में ही क्यों न हो) एक ही समय चारों और लगातार जारी था, इसलिये हिन्दू धर्म का पूरा न्हास होने का कोई भय नहीं रहा। इतना ही नहीं; बल्कि उसका कुछ कुछ प्रभुत्व मुसलमानी धर्म पर भी जमने लगा, कबीर जैसे भक्त इस देश की सन्त-मराढली में मान्य होगये और औरंगज़ेब के बड़े भाई शाहजादा द्वारा ने इसी समय अपनी देखरेख में उपनिषदों का फ़ारसी में भाषान्तर कराया । यदि वैदिक भक्ति-धर्म अध्यात्मज्ञान को छोड़ केवल तांन्निक श्रद्धा के आधार पर स्थापित हुना होता, तो इस बात का संदेह है कि उसमें यह विलक्षण सामर्थ्य रह सकता या नहीं। परंतु भागवतधर्म का यह आधुनिक पुनरुज्जीवन मुसलमानों के ही ज़माने में हुआ है, अतएव वह भी अनेकांशों में केवल भक्तिविषयक अर्थात् एक-देशीय हो गया है और मूल भागवत धर्म के कर्मयोग का जो स्वतंत्र महत्त्व एक वार घट गया था वह उसे फिर प्राप्त नहीं हुआ । फलतः इल समय के भागवतधर्मीय संतजन, पंडित और आचार्य लोग भी यह कहने लगे कि कर्मयोग भक्तिमार्ग का अंग या साधन है, जैला पहले संन्यासमार्गीय लोग कहा करते थे कि कर्मयोग संन्यासमार्ग का अंग या साधन है। उस समय में प्रचलित इस सर्वसाधारण मत या समझ के विरुद्ध केवल श्रीसमर्थ रामदासस्वामी ने अपने 'दासबोध' ग्रंथ में विवेचन किया है। कर्ममार्ग के सच्चे और वास्तविक महत्त्व का वर्णन, शुद्ध तथा प्रासादिक मराठी भाषा में जिले देखना हो उसे समर्थकृत इस ग्रंथ को विशेषतः उत्तरार्ध को अवश्य पढ़ लेना चाहिये। शिवाजी महाराज को श्रीसमर्थ रामदालस्वामी का ही उपदेश मिला था; और, मरहठों के ज़माने में जय कर्मयोग के तत्वों को समझाने तथा उनके प्रचार करने की आवश्यकता मालूम होने लगी, तब शांडिल्यसूत्रों तथा ब्रह्मसूत्रभाप्यों के बदले महाभारत का गद्यात्मक भाषान्तर होने लगा एवं ' बखर' नामक ऐतिहासिक लेखों के रूप में ' दासबोध ' नामक मराठी ग्रंथ के उपदेशामृत से वंचित नहीं रह सकते, क्योंकि उसका शुद्ध, सरल तथा हृदयग्राही अनुवाद हिन्दी में भी हो चुका है। यह हिन्दी ग्रन्थ चित्रशाला प्रेस, पूना से मिल सकता है। उसका अभ्यास शुरू हो गया। ये भाषान्तर तंजौर के पुस्तकालय में आज तक रखे हुए हैं। यदि यही कार्यक्रम बहुत समय तक अबाधित रीति से चलता रहता, तो गीता की सब एक पक्षीय और संकुचित टीकाओं का महत्व घट जाता और काल-मान के अनुसार एक बार फिर भी यह बात सब लोगों के ध्यान में आ जाती, कि महाभारत की सारी नीति का सार गीता-प्रतिपादित कर्मयोग में कह दिया गया है। परन्तु हमारे दुर्भाग्य से कर्मयोग का यह पुनरुज्जीवन बहुत दिनों तक नहीं ठहर सका। हिन्दुस्थान के धार्मिक इतिहास का विवेचन करने का यह स्थान नहीं है । ऊपर के संक्षिप्त विवेचन से पाठकों को मालूम हो गया होगा, कि गीताधर्म में जो एक प्रकार का ज़िन्दापन, तेज या सामर्थ्य है वह संन्यास धर्म के उस दबदबे से भी बिलकुल नट नहीं होने पाया, कि जो मध्यकाल में दैववशाल हो गया है । तीसरे प्रकरण में हम बतला चुके हैं, कि धर्म शब्द का धात्वर्थ " धारणाद्धर्मः " ई और सामान्यतः उसके ये दो भेद होते हैं - एक "पारलौकिक " और दूसरा "व्यावहारिक, " अथवा "मोक्षधर्म" और "नीतिधर्म " । चाहे वैदिकधर्म को लीजिये, बौद्धधर्म को लीजिये अथवा ईसाई धर्म को लीजियेः सब का मुख्य हेतु यही है कि जगत् का धारण-पोषण हो और मनुष्य को अंत में सद्गति मिले; इसीलिये तथा प्रत्येक धर्म में मोक्षधर्म के साथ ही साथ व्यावहा रिक धर्म-अधर्म का भी विवेचन थोड़ा बहुत किया गया है । यही नहींघहिक यहाँ तक कहा जा सकता है, कि प्राचीन काल में यह भेद ही नहीं किया जाता था कि ' मोदधर्म और व्यावहारिक धर्म भिन्न भिन्न हैं; ' क्योंकि उस समय लय लोगों की यही धारणा थी कि परलोक में सद्गति मिलने के लिये इस जोक में भी हमारा आचरण शुद्ध ही होना चाहिये । वे लोग गीता के कथनानुसार यह भी मानते थे कि पारलौकिक तथा सांसारिक कल्याण की जड़ भी एक ही हैं । परन्तु पाधिमौतिक ज्ञान का प्रसार होने पर आजकल पश्चिमी देशों में यह धारणा स्थिर न रह सकी और इस बात का विचार होने लगा कि मोक्षधर्मरहित नीति की, अर्थात् जिन नियमों से जगत् का धारण-पोषण हुआ करता है उन नियमों की, उपपत्ति बतलाई जा सकती है या नहीं; और, फलतः केवल माधिभौतिक अर्थात् दृश्य या व्यक्त आधार पर ही समाजधारणाशास्त्र की रचना होने लगी है। इस पर प्रश्न होता है, कि केवल व्यक्त से ही मनुष्य का निर्वाह कैसे हो सकेगा ? पेड़, मनुष्य इत्यादि जातिवाचक शब्दों से भी तो अध्यक्त अर्थ ही प्रगट होता है न । याम का पेड़ या गुलाब का पेड़ एक विशिष्ट दृश्य वस्तु है को नहीं सही; परन्तु ' पेढ़ सामान्य शब्द किसी भी दृश्य छअथवा व्यक्त वस्तु दिखला सकता । इसी तरह हमारा सब व्यवहार हो रहा है। इससे यही सिद्ध होता है, कि मन में अव्यक्त-सम्वन्धी कल्पना की जागृति के लिये पहले कुछ न कुछ व्यक्त वस्तु भाँखों के सामने अवश्य होनी चाहिये; परन्तु इसे भी
धर्म के ' समूलं च विनश्यति' होने का समय आ गया था। परन्तु वौद्ध धर्म के हास के बाद वेदान्त के साथ ही गीता के भागवतधर्म का जो पुनरुज्जीवन होने लगा था, उसके कारण हमारे यहाँ यह टुप्परिणाम नहीं हो सका । जय कि दौलताबाद का हिन्दू राज्य मुसलमानों से नष्ट भ्रष्ट नहीं किया गया था, उसके कुछ वर्ष पूर्व ही श्रीज्ञानेश्वर महाराज ने हमारे सौभाग्य से भगवद्गीता को मराठी भाषा में अलंकृत कर ब्रह्मविद्या को महाराष्ट्र प्रान्त में प्रति सुगम कर दिया था; और हिन्दुस्थान के अन्य प्रान्तों में भी इसी समय अनेक साधुसन्तों ने गीता के भक्ति मार्ग का उपदेश जारी कर रखा था । यवनाला-चांडाल इत्यादिकों को एक समान और ज्ञानमूलक गीताधर्म का जाज्वल्य उपदेश एक ही समय चारों और लगातार जारी था, इसलिये हिन्दू धर्म का पूरा न्हास होने का कोई भय नहीं रहा। इतना ही नहीं; बल्कि उसका कुछ कुछ प्रभुत्व मुसलमानी धर्म पर भी जमने लगा, कबीर जैसे भक्त इस देश की सन्त-मराढली में मान्य होगये और औरंगज़ेब के बड़े भाई शाहजादा द्वारा ने इसी समय अपनी देखरेख में उपनिषदों का फ़ारसी में भाषान्तर कराया । यदि वैदिक भक्ति-धर्म अध्यात्मज्ञान को छोड़ केवल तांन्निक श्रद्धा के आधार पर स्थापित हुना होता, तो इस बात का संदेह है कि उसमें यह विलक्षण सामर्थ्य रह सकता या नहीं। परंतु भागवतधर्म का यह आधुनिक पुनरुज्जीवन मुसलमानों के ही ज़माने में हुआ है, अतएव वह भी अनेकांशों में केवल भक्तिविषयक अर्थात् एक-देशीय हो गया है और मूल भागवत धर्म के कर्मयोग का जो स्वतंत्र महत्त्व एक वार घट गया था वह उसे फिर प्राप्त नहीं हुआ । फलतः इल समय के भागवतधर्मीय संतजन, पंडित और आचार्य लोग भी यह कहने लगे कि कर्मयोग भक्तिमार्ग का अंग या साधन है, जैला पहले संन्यासमार्गीय लोग कहा करते थे कि कर्मयोग संन्यासमार्ग का अंग या साधन है। उस समय में प्रचलित इस सर्वसाधारण मत या समझ के विरुद्ध केवल श्रीसमर्थ रामदासस्वामी ने अपने 'दासबोध' ग्रंथ में विवेचन किया है। कर्ममार्ग के सच्चे और वास्तविक महत्त्व का वर्णन, शुद्ध तथा प्रासादिक मराठी भाषा में जिले देखना हो उसे समर्थकृत इस ग्रंथ को विशेषतः उत्तरार्ध को अवश्य पढ़ लेना चाहिये। शिवाजी महाराज को श्रीसमर्थ रामदालस्वामी का ही उपदेश मिला था; और, मरहठों के ज़माने में जय कर्मयोग के तत्वों को समझाने तथा उनके प्रचार करने की आवश्यकता मालूम होने लगी, तब शांडिल्यसूत्रों तथा ब्रह्मसूत्रभाप्यों के बदले महाभारत का गद्यात्मक भाषान्तर होने लगा एवं ' बखर' नामक ऐतिहासिक लेखों के रूप में ' दासबोध ' नामक मराठी ग्रंथ के उपदेशामृत से वंचित नहीं रह सकते, क्योंकि उसका शुद्ध, सरल तथा हृदयग्राही अनुवाद हिन्दी में भी हो चुका है। यह हिन्दी ग्रन्थ चित्रशाला प्रेस, पूना से मिल सकता है। उसका अभ्यास शुरू हो गया। ये भाषान्तर तंजौर के पुस्तकालय में आज तक रखे हुए हैं। यदि यही कार्यक्रम बहुत समय तक अबाधित रीति से चलता रहता, तो गीता की सब एक पक्षीय और संकुचित टीकाओं का महत्व घट जाता और काल-मान के अनुसार एक बार फिर भी यह बात सब लोगों के ध्यान में आ जाती, कि महाभारत की सारी नीति का सार गीता-प्रतिपादित कर्मयोग में कह दिया गया है। परन्तु हमारे दुर्भाग्य से कर्मयोग का यह पुनरुज्जीवन बहुत दिनों तक नहीं ठहर सका। हिन्दुस्थान के धार्मिक इतिहास का विवेचन करने का यह स्थान नहीं है । ऊपर के संक्षिप्त विवेचन से पाठकों को मालूम हो गया होगा, कि गीताधर्म में जो एक प्रकार का ज़िन्दापन, तेज या सामर्थ्य है वह संन्यास धर्म के उस दबदबे से भी बिलकुल नट नहीं होने पाया, कि जो मध्यकाल में दैववशाल हो गया है । तीसरे प्रकरण में हम बतला चुके हैं, कि धर्म शब्द का धात्वर्थ " धारणाद्धर्मः " ई और सामान्यतः उसके ये दो भेद होते हैं - एक "पारलौकिक " और दूसरा "व्यावहारिक, " अथवा "मोक्षधर्म" और "नीतिधर्म " । चाहे वैदिकधर्म को लीजिये, बौद्धधर्म को लीजिये अथवा ईसाई धर्म को लीजियेः सब का मुख्य हेतु यही है कि जगत् का धारण-पोषण हो और मनुष्य को अंत में सद्गति मिले; इसीलिये तथा प्रत्येक धर्म में मोक्षधर्म के साथ ही साथ व्यावहा रिक धर्म-अधर्म का भी विवेचन थोड़ा बहुत किया गया है । यही नहींघहिक यहाँ तक कहा जा सकता है, कि प्राचीन काल में यह भेद ही नहीं किया जाता था कि ' मोदधर्म और व्यावहारिक धर्म भिन्न भिन्न हैं; ' क्योंकि उस समय लय लोगों की यही धारणा थी कि परलोक में सद्गति मिलने के लिये इस जोक में भी हमारा आचरण शुद्ध ही होना चाहिये । वे लोग गीता के कथनानुसार यह भी मानते थे कि पारलौकिक तथा सांसारिक कल्याण की जड़ भी एक ही हैं । परन्तु पाधिमौतिक ज्ञान का प्रसार होने पर आजकल पश्चिमी देशों में यह धारणा स्थिर न रह सकी और इस बात का विचार होने लगा कि मोक्षधर्मरहित नीति की, अर्थात् जिन नियमों से जगत् का धारण-पोषण हुआ करता है उन नियमों की, उपपत्ति बतलाई जा सकती है या नहीं; और, फलतः केवल माधिभौतिक अर्थात् दृश्य या व्यक्त आधार पर ही समाजधारणाशास्त्र की रचना होने लगी है। इस पर प्रश्न होता है, कि केवल व्यक्त से ही मनुष्य का निर्वाह कैसे हो सकेगा ? पेड़, मनुष्य इत्यादि जातिवाचक शब्दों से भी तो अध्यक्त अर्थ ही प्रगट होता है न । याम का पेड़ या गुलाब का पेड़ एक विशिष्ट दृश्य वस्तु है को नहीं सही; परन्तु ' पेढ़ सामान्य शब्द किसी भी दृश्य छअथवा व्यक्त वस्तु दिखला सकता । इसी तरह हमारा सब व्यवहार हो रहा है। इससे यही सिद्ध होता है, कि मन में अव्यक्त-सम्वन्धी कल्पना की जागृति के लिये पहले कुछ न कुछ व्यक्त वस्तु भाँखों के सामने अवश्य होनी चाहिये; परन्तु इसे भी
हेल्थ कार्नर :- आजकल के समय में किसी न किसी को तो अक्सर किसी बीमारी का सामना करना पड़ता है। आजकल के दौर में काफी लोग कील और मुंहासे से बहुत ज्यादा परेशान हैं। यह समस्या धीरे धीरे काफी बढ़ जाती है और कील और मुंहासों से आपका चेहरा भर जाता है। इससे आपके चेहरे पर गहरा असर पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कैसे बनतीं है वो दवाई जिससे आप कील और मुंहासों से छुटकारा पा सकते हैं। 1 चम्मच ग्रीन टी , आधा चम्मच अंगूर का तेल, 1 विटामिन ईं कैप्यूल, 4 से 5 बूंदे टी ट्री आयल, 2 बूंदे नींबू का रस, 3 बूंदे अखरोट का तेल, आधा चम्मच ऐलोवेरा जेल आदि। सबसे पहले एक बड़ा बड़ा कटोरा लें और इसमें सभी समान को डाल दे। जो हमने ऊपर बताया है। अब सभी सामग्री को एक चम्मच से मिलाएं। अब इस मिक्सचर को एक एयरटाइट कांच की बोतल में डालकर रख दें। इस बोतल को सुर्य की रोशनी से दूर रखें। सबसे पहले आप अपने चेहरे को गर्म पानी से अच्छी तरह से धौ लें। फिर चेहरे को साफ कपड़े से साफ करें। चेहरा सूखने के बाद अपनी हथेलियों से इस दवाई को अपने चेहरे पर उंगलियों की मदद से लगाएं। इसे हर रोज लगाने से आपके चेहरे से सभी कील और मुंहासे हट जायेंगे।
हेल्थ कार्नर :- आजकल के समय में किसी न किसी को तो अक्सर किसी बीमारी का सामना करना पड़ता है। आजकल के दौर में काफी लोग कील और मुंहासे से बहुत ज्यादा परेशान हैं। यह समस्या धीरे धीरे काफी बढ़ जाती है और कील और मुंहासों से आपका चेहरा भर जाता है। इससे आपके चेहरे पर गहरा असर पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कैसे बनतीं है वो दवाई जिससे आप कील और मुंहासों से छुटकारा पा सकते हैं। एक चम्मच ग्रीन टी , आधा चम्मच अंगूर का तेल, एक विटामिन ईं कैप्यूल, चार से पाँच बूंदे टी ट्री आयल, दो बूंदे नींबू का रस, तीन बूंदे अखरोट का तेल, आधा चम्मच ऐलोवेरा जेल आदि। सबसे पहले एक बड़ा बड़ा कटोरा लें और इसमें सभी समान को डाल दे। जो हमने ऊपर बताया है। अब सभी सामग्री को एक चम्मच से मिलाएं। अब इस मिक्सचर को एक एयरटाइट कांच की बोतल में डालकर रख दें। इस बोतल को सुर्य की रोशनी से दूर रखें। सबसे पहले आप अपने चेहरे को गर्म पानी से अच्छी तरह से धौ लें। फिर चेहरे को साफ कपड़े से साफ करें। चेहरा सूखने के बाद अपनी हथेलियों से इस दवाई को अपने चेहरे पर उंगलियों की मदद से लगाएं। इसे हर रोज लगाने से आपके चेहरे से सभी कील और मुंहासे हट जायेंगे।
रामनवमी पर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन (Khargone Violence) में हुई हिंसा पर किए गए ट्वीट मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के खिलाफ होशंगाबाद में FIR दर्ज की गई है. रामनवमी पर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन (Khargone Violence) में हुई हिंसा पर किए गए ट्वीट मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के खिलाफ होशंगाबाद में FIR दर्ज की गई है. एफआईआर दर्ज होने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझपर 1 नहीं एक लाख FIR दर्ज करें,मुझे डर नहीं है.दिग्विजय सिंह ने कहा कि साम्प्रदायिक उन्माद के खिलाफ़ बोलने पर कितने ही मामले दर्ज हो जाएं,मुझे फर्क नहीं पड़ता. दिग्विजय सिंह ने कहा कि, ट्वीट में मैंने सवाल पूछा है,क्या ये ठीक नहीं? ट्वीट से फ़ोटो डिलीट करने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वो खरगोन की नहीं थी इसलिए मैंने डिलीट कर दिया. सिंह ने कहा कि, पूरे देश मे BJP का एजेंडा चल रहा है. मेरे खिलाफ भी चले तो भी मुझे फर्क नहीं पड़ता. पुलिस ने इस मामले में उनके खिलाफ मंगलवार को केस दर्ज किया . खरगौन में रामनवमी जुलूस में हुई हिंसा के मामले में गलत फोटो ट्वीट करने को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस ने आईपीसी की धारा 58/22 , u/s 153A(1), 295A,465 505(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है. कांग्रेस नेता पर धार्मिक भावनाओं को आहत कर उन्माद फैलाने के आरोप लगाए गए थे. दरअसल कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया था, ट्वीट में एक फोटो भी थी जिसे खरगोन में भड़की हिंसा का बताया गया, लेकिन बाद में उसे उनके अकाउंट से हटा दिया गया. बीजेपी ने दिग्विजय सिंह पर जानबूझकर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है. उधर इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक करने की मांग की है. मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने इस बावत ट्विटर को पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के अकाउंट को तुरंत ब्लॉक करने की मांग की है. वहीं रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद खरगोन जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गईं हैं. पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है. जिले में रैपिड एक्शन फोर्स समेत 4 आईपीएस, 15 डीएसपी तैनात कर दिए गए हैं. दिग्विजय सिंह ने धार्मिक स्थल की फोटो ट्वीट कर उसे खरगौन का बताया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि तलवार, लाठी लिए लोगों का क्या धार्मिक स्थल पर झंडा लगाना सही है. गलत फोटो के साथ उन्होंने सवाल किया था कि क्या खरगौन प्रशासन ने हथियारों के साथ जुलूस निकालने की परमिशन दी थी. इस फोटो के साथ दिग्विजय सिंह ने शिवराज सरकार पर भी हमला बोला था.
रामनवमी पर मध्य प्रदेश के खरगोन में हुई हिंसा पर किए गए ट्वीट मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के खिलाफ होशंगाबाद में FIR दर्ज की गई है. रामनवमी पर मध्य प्रदेश के खरगोन में हुई हिंसा पर किए गए ट्वीट मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के खिलाफ होशंगाबाद में FIR दर्ज की गई है. एफआईआर दर्ज होने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझपर एक नहीं एक लाख FIR दर्ज करें,मुझे डर नहीं है.दिग्विजय सिंह ने कहा कि साम्प्रदायिक उन्माद के खिलाफ़ बोलने पर कितने ही मामले दर्ज हो जाएं,मुझे फर्क नहीं पड़ता. दिग्विजय सिंह ने कहा कि, ट्वीट में मैंने सवाल पूछा है,क्या ये ठीक नहीं? ट्वीट से फ़ोटो डिलीट करने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वो खरगोन की नहीं थी इसलिए मैंने डिलीट कर दिया. सिंह ने कहा कि, पूरे देश मे BJP का एजेंडा चल रहा है. मेरे खिलाफ भी चले तो भी मुझे फर्क नहीं पड़ता. पुलिस ने इस मामले में उनके खिलाफ मंगलवार को केस दर्ज किया . खरगौन में रामनवमी जुलूस में हुई हिंसा के मामले में गलत फोटो ट्वीट करने को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस ने आईपीसी की धारा अट्ठावन/बाईस , u/s एक सौ तिरेपन एम्पीयर, दो सौ पचानवे एम्पीयर,चार सौ पैंसठ पाँच सौ पाँच के तहत मुकदमा दर्ज किया है. कांग्रेस नेता पर धार्मिक भावनाओं को आहत कर उन्माद फैलाने के आरोप लगाए गए थे. दरअसल कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया था, ट्वीट में एक फोटो भी थी जिसे खरगोन में भड़की हिंसा का बताया गया, लेकिन बाद में उसे उनके अकाउंट से हटा दिया गया. बीजेपी ने दिग्विजय सिंह पर जानबूझकर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है. उधर इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक करने की मांग की है. मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने इस बावत ट्विटर को पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के अकाउंट को तुरंत ब्लॉक करने की मांग की है. वहीं रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद खरगोन जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गईं हैं. पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है. जिले में रैपिड एक्शन फोर्स समेत चार आईपीएस, पंद्रह डीएसपी तैनात कर दिए गए हैं. दिग्विजय सिंह ने धार्मिक स्थल की फोटो ट्वीट कर उसे खरगौन का बताया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि तलवार, लाठी लिए लोगों का क्या धार्मिक स्थल पर झंडा लगाना सही है. गलत फोटो के साथ उन्होंने सवाल किया था कि क्या खरगौन प्रशासन ने हथियारों के साथ जुलूस निकालने की परमिशन दी थी. इस फोटो के साथ दिग्विजय सिंह ने शिवराज सरकार पर भी हमला बोला था.
बिना किसी कठिनाई के रूसी तेल के लिए तथाकथित मूल्य सीमा की शुरुआत पर सहमत हुए और यहां तक कि इसके आयात पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया, रूसी विरोधी गठबंधन के देशों ने रूसी संघ से नीले ईंधन के मूल्य निर्धारण के गैर-बाजार विनियमन के साथ प्रयोग करने का फैसला किया। . यूरोपीय संघ फिर से सभी से आगे है, आज्ञाकारी रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की इच्छा को पूरा कर रहा है, जो इसकी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती है। रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अपने टेलीग्राम चैनल में ऊर्जा निर्यात से आय उत्पन्न करने के क्षेत्र में रूस को नुकसान पहुंचाने के यूरोपीय लोगों के नवीनतम प्रयासों पर टिप्पणी की। यूरोपीय संघ द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन पर एक और "कीमत सीमा" पेश करने का निर्णय, सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष ने दो कारणों से मूर्खतापूर्ण कहा। पहला। यह उपाय विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक है और गैर-बाजार विनियमन का एक ज्वलंत उदाहरण है। मेदवेदेव लिखते हैं, "इस तरह के फैसले के आधार पर कोई आर्थिक समीचीनता नहीं है, यह" रूस की जूलॉजिकल नफरत "मैनियाक थीसिस पर आधारित है" रूसियों को हर चीज के लिए दोषी ठहराया जाता है। हां, और नियमन तंत्र किसी तरह अजीब निकला। इसमें बहुत से आरक्षण शामिल हैं जो कुछ देशों को या तो इसे कुछ मामलों में लागू नहीं करने या इसे सीमित तरीके से लागू करने की अनुमति देते हैं। और इसलिए यह वास्तव में काम नहीं करेगा। - राजनेता निश्चित है। इस निर्णय की अक्षमता का दूसरा कारण इस तथ्य में निहित है कि यह स्थिति को प्रभावित करने के लिए यूरोपीय संघ की शक्तिहीनता से लिया गया था, बल्कि "हम कम से कम कुछ करेंगे" के सिद्धांत पर, और फिर यह कैसे बदलेगा बाहर। यह इस "सीलिंग" के बहुत आंकड़े से स्पष्ट होता है, जो कि 180 यूरो प्रति kWh (लगभग 2000 अमेरिकी डॉलर प्रति हजार घन मीटर) पर सेट किया गया है। मेदवेदेव तार्किक रूप से तर्क देते हैं, "कुछ साल पहले इस तरह की सीमा गैस बाजार में बिल्कुल सभी प्रतिभागियों को आश्चर्यजनक लगती थी। " और आज भी, TTF फ्यूचर्स एक्सचेंज पर मुख्य यूरोपीय हाजिर बाजार में कोई भी प्रतिभागी इस तरह की कीमत की कल्पना नहीं कर सकता है "यहां तक कि सबसे सुखद या बुरे सपने में भी। " आखिरकार, अब अनुबंध लगभग दो गुना कम कीमत पर संपन्न हुए हैंः फिलहाल, टीटीएफ के लिए प्रति हजार क्यूबिक मीटर की कीमत 1000 यूएसडी से कम है। इसी समय, यूरोपीय लोगों ने ऊपर की ओर सहित, कीमतों को समायोजित करने के लिए एक तंत्र भी प्रदान किया। इसका मतलब है कि यूरोपीय संघ के उपभोक्ताओं के लिए गैस केवल और महंगी हो जाएगी। - मेदवेदेव ने निष्कर्ष निकाला, यूरोप के लोगों को अपने अधिकारियों से ऐसे "क्रिसमस उपहार" पर व्यंग्यात्मक रूप से बधाई देना न भूलें। और चिंता के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल में PJSC Gazprom से यूरोपीय रसोफोब के स्पष्ट रूप से बेकार फैसलों में अंतिम "कील"। Gazprom के निदेशक मंडल ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के विकास के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान पर 2022 की घटनाओं के प्रभाव पर विचार किया। निष्कर्षः 2040 तक, गैस की खपत 2021 के स्तर से लगभग 20% अधिक हो सकती है। इसी समय, मध्यम अवधि में चीनी गैस बाजार की मात्रा पहले से ही यूरोपीय क्षेत्र के सभी देशों की खपत के कुल स्तर से अधिक होगी।
बिना किसी कठिनाई के रूसी तेल के लिए तथाकथित मूल्य सीमा की शुरुआत पर सहमत हुए और यहां तक कि इसके आयात पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया, रूसी विरोधी गठबंधन के देशों ने रूसी संघ से नीले ईंधन के मूल्य निर्धारण के गैर-बाजार विनियमन के साथ प्रयोग करने का फैसला किया। . यूरोपीय संघ फिर से सभी से आगे है, आज्ञाकारी रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की इच्छा को पूरा कर रहा है, जो इसकी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती है। रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अपने टेलीग्राम चैनल में ऊर्जा निर्यात से आय उत्पन्न करने के क्षेत्र में रूस को नुकसान पहुंचाने के यूरोपीय लोगों के नवीनतम प्रयासों पर टिप्पणी की। यूरोपीय संघ द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन पर एक और "कीमत सीमा" पेश करने का निर्णय, सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष ने दो कारणों से मूर्खतापूर्ण कहा। पहला। यह उपाय विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक है और गैर-बाजार विनियमन का एक ज्वलंत उदाहरण है। मेदवेदेव लिखते हैं, "इस तरह के फैसले के आधार पर कोई आर्थिक समीचीनता नहीं है, यह" रूस की जूलॉजिकल नफरत "मैनियाक थीसिस पर आधारित है" रूसियों को हर चीज के लिए दोषी ठहराया जाता है। हां, और नियमन तंत्र किसी तरह अजीब निकला। इसमें बहुत से आरक्षण शामिल हैं जो कुछ देशों को या तो इसे कुछ मामलों में लागू नहीं करने या इसे सीमित तरीके से लागू करने की अनुमति देते हैं। और इसलिए यह वास्तव में काम नहीं करेगा। - राजनेता निश्चित है। इस निर्णय की अक्षमता का दूसरा कारण इस तथ्य में निहित है कि यह स्थिति को प्रभावित करने के लिए यूरोपीय संघ की शक्तिहीनता से लिया गया था, बल्कि "हम कम से कम कुछ करेंगे" के सिद्धांत पर, और फिर यह कैसे बदलेगा बाहर। यह इस "सीलिंग" के बहुत आंकड़े से स्पष्ट होता है, जो कि एक सौ अस्सी यूरो प्रति kWh पर सेट किया गया है। मेदवेदेव तार्किक रूप से तर्क देते हैं, "कुछ साल पहले इस तरह की सीमा गैस बाजार में बिल्कुल सभी प्रतिभागियों को आश्चर्यजनक लगती थी। " और आज भी, TTF फ्यूचर्स एक्सचेंज पर मुख्य यूरोपीय हाजिर बाजार में कोई भी प्रतिभागी इस तरह की कीमत की कल्पना नहीं कर सकता है "यहां तक कि सबसे सुखद या बुरे सपने में भी। " आखिरकार, अब अनुबंध लगभग दो गुना कम कीमत पर संपन्न हुए हैंः फिलहाल, टीटीएफ के लिए प्रति हजार क्यूबिक मीटर की कीमत एक हज़ार यूएसडी से कम है। इसी समय, यूरोपीय लोगों ने ऊपर की ओर सहित, कीमतों को समायोजित करने के लिए एक तंत्र भी प्रदान किया। इसका मतलब है कि यूरोपीय संघ के उपभोक्ताओं के लिए गैस केवल और महंगी हो जाएगी। - मेदवेदेव ने निष्कर्ष निकाला, यूरोप के लोगों को अपने अधिकारियों से ऐसे "क्रिसमस उपहार" पर व्यंग्यात्मक रूप से बधाई देना न भूलें। और चिंता के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल में PJSC Gazprom से यूरोपीय रसोफोब के स्पष्ट रूप से बेकार फैसलों में अंतिम "कील"। Gazprom के निदेशक मंडल ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के विकास के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान पर दो हज़ार बाईस की घटनाओं के प्रभाव पर विचार किया। निष्कर्षः दो हज़ार चालीस तक, गैस की खपत दो हज़ार इक्कीस के स्तर से लगभग बीस% अधिक हो सकती है। इसी समय, मध्यम अवधि में चीनी गैस बाजार की मात्रा पहले से ही यूरोपीय क्षेत्र के सभी देशों की खपत के कुल स्तर से अधिक होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के लिए जारी मतणना में पीछे चल रहे डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को कोर्ट से भी झटका लगा है. वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Election) के बाद मतणना जारी है. ताजा नतीजों के अनुसार जो बाइडेन (Joe Biden) ने 264 इलेक्टोरल वोट हासिल कर ली है और बहुमत से सिर्फ 6 वोट दूर हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के खाते में 214 इलेक्टोरल वोट आए हैं. ट्रंप चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं. जॉर्जिया केस में सुपीरियर कोर्ट के न्यायाधीश जेम्स बैस ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जिन बैलट्स पर सवाए उठाए गए, वे अमान्य थे. वहीं मिशिगन मामले में न्यायाधीश सिंथिया स्टीफेंस ने कहा कि मुकदमे को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप अभियान की प्रवक्ता ने कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. ट्रंप के सहयोगियों ने यह भी आरोप लगाया कि नेवादा में मतदान में अनियमितताएं हुई हैं, जिसमें लॉस वेगास भी शामिल है. बता दें कि इन तीनों राज्यों में अभी भी वोटों की गिनती जारी है, जो राष्ट्रपति पद का फैसला कर सकते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के लिए जारी मतणना में पीछे चल रहे डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से भी झटका लगा है. वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद मतणना जारी है. ताजा नतीजों के अनुसार जो बाइडेन ने दो सौ चौंसठ इलेक्टोरल वोट हासिल कर ली है और बहुमत से सिर्फ छः वोट दूर हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप के खाते में दो सौ चौदह इलेक्टोरल वोट आए हैं. ट्रंप चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं. जॉर्जिया केस में सुपीरियर कोर्ट के न्यायाधीश जेम्स बैस ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जिन बैलट्स पर सवाए उठाए गए, वे अमान्य थे. वहीं मिशिगन मामले में न्यायाधीश सिंथिया स्टीफेंस ने कहा कि मुकदमे को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप अभियान की प्रवक्ता ने कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. ट्रंप के सहयोगियों ने यह भी आरोप लगाया कि नेवादा में मतदान में अनियमितताएं हुई हैं, जिसमें लॉस वेगास भी शामिल है. बता दें कि इन तीनों राज्यों में अभी भी वोटों की गिनती जारी है, जो राष्ट्रपति पद का फैसला कर सकते हैं.
दवा "Fezam" एक नॉट्रोपिक दवा है जो रक्त आपूर्ति में सुधार करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो मस्तिष्क को ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करती है। उत्पाद की संरचना में सक्रिय पदार्थ शामिल हैंCinnarizine और piracetam, जो इसी तरह की अन्य दवाओं में मौजूद हैं। ये घटक मस्तिष्क रक्त वाहिकाओं की बाहरी झिल्ली की छूट में शामिल है, रक्त प्रवाह और बहिर्वाह बढ़ जाती है। Piracetam ग्लूकोज विषाक्त घटकों से मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करने, पाचनशक्ति को बेहतर बनाता है, चयापचय को तेज करता है। Cinnarizine तंत्रिका तंत्र के बुनियादी कार्यों पर एक शामक प्रभाव पड़ता है, यह स्वर और समग्र sosotoyanie रोगी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। टूल का उद्देश्य आपको प्राप्त करने की अनुमति देता हैसेरेब्रल संवहनी तंत्र और वेस्टिबुलर तंत्र के विभिन्न रोगों के उपचार में सकारात्मक परिणाम। दवा का उपयोग दिल के दौरे, स्ट्रोक, एथेरोस्क्लेरोसिस, क्रैनियल और सेरेब्रल आघात के साथ, स्मृति और विचार प्रक्रियाओं के साथ करने के लिए किया जाता है। एक व्यक्ति के साथ एक दवा का प्रयोग न करेंदवा के घटकों के असहिष्णुता, पार्किंसंस रोग से पीड़ित लोग। यकृत और गुर्दे की गंभीर पैथोलॉजी के मामले में, तैयारी "Fezam" भी नहीं लिया जाना चाहिए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं में दवा का उपयोग contraindicated है। मादक नशा में दवा का प्रयोग न करें, हालांकि उसे डाक मादक सिंड्रोम को हटाने के लिए नियुक्त किया गया है। कुछ मामलों में, दवा का उपयोग करते समयकुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। शायद माइग्रेन के उद्भव, भावनात्मक लचीलापन, प्रकाश संवेदनशीलता, मांसपेशी हाइपरटोनिया, डिस्प्लेप्टिक विकार, अंगों का कांपना बढ़ गया। आम तौर पर, ये लक्षण हल्के होते हैं और Fezam को वापस लेने का कारण नहीं बनते हैं। दवा के विवरण में विधियां शामिल हैंआवेदन और खुराक। वयस्क रोगियों को दो कैप्सूल निर्धारित किए जाते हैं, जिन्हें दिन में तीन बार लेना चाहिए। उपचार का सामान्य कोर्स 2-3 महीने है। उपचार के 1-3 महीने के बच्चों के उपचार के लिए, एक कैप्सूल दिन में दो बार से अधिक नहीं। के उपचार में इस उपाय का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता हैबाल रोगियों और बाल चिकित्सा में। हालाँकि, यह निओट्रोपिक दवा सभी के लिए उपयुक्त है। कुछ बच्चे ओवरज़म के साथ फ़ाज़म (माता-पिता से प्रतिक्रिया इसकी पुष्टि करते हैं) पर प्रतिक्रिया करते हैं, दूसरों को अपच हो जाता है, और तीसरे के लिए वे सुधार नहीं करते हैं। लेकिन, नकारात्मक के अलावा, सकारात्मक हैंदवा "फ़ेज़ाम" के बारे में कथन। कुछ माता-पिता की समीक्षाओं का कहना है कि दवा लेने के परिणामस्वरूप उनके बच्चों में मस्तिष्क की संवहनी प्रणाली की सामान्य स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ था, खोपड़ी के अंदर दबाव कम हो गया (उपचार के बाद परीक्षा के परिणामों के अनुसार), संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का अनुकूलन देखा गया था। वयस्क रोगियों की राय भी काफी हद तक हैविरोधाभासी। कुछ ने व्यक्त किया है कि वे अपनी स्थिति में किसी भी परिवर्तन का अवलोकन नहीं कर रहे हैं। कभी-कभी दुष्प्रभाव होते हैं, वजन बढ़ता है, उनींदापन बढ़ता है, और अवसादग्रस्तता बढ़ जाती है। हालांकि, अन्य निर्णय हैं जिनके अनुसार फ़ेज़म दवा के साथ चिकित्सा के बाद रोगियों में संज्ञानात्मक कार्यों और स्मृति में सुधार हुआ है।
दवा "Fezam" एक नॉट्रोपिक दवा है जो रक्त आपूर्ति में सुधार करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो मस्तिष्क को ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करती है। उत्पाद की संरचना में सक्रिय पदार्थ शामिल हैंCinnarizine और piracetam, जो इसी तरह की अन्य दवाओं में मौजूद हैं। ये घटक मस्तिष्क रक्त वाहिकाओं की बाहरी झिल्ली की छूट में शामिल है, रक्त प्रवाह और बहिर्वाह बढ़ जाती है। Piracetam ग्लूकोज विषाक्त घटकों से मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करने, पाचनशक्ति को बेहतर बनाता है, चयापचय को तेज करता है। Cinnarizine तंत्रिका तंत्र के बुनियादी कार्यों पर एक शामक प्रभाव पड़ता है, यह स्वर और समग्र sosotoyanie रोगी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। टूल का उद्देश्य आपको प्राप्त करने की अनुमति देता हैसेरेब्रल संवहनी तंत्र और वेस्टिबुलर तंत्र के विभिन्न रोगों के उपचार में सकारात्मक परिणाम। दवा का उपयोग दिल के दौरे, स्ट्रोक, एथेरोस्क्लेरोसिस, क्रैनियल और सेरेब्रल आघात के साथ, स्मृति और विचार प्रक्रियाओं के साथ करने के लिए किया जाता है। एक व्यक्ति के साथ एक दवा का प्रयोग न करेंदवा के घटकों के असहिष्णुता, पार्किंसंस रोग से पीड़ित लोग। यकृत और गुर्दे की गंभीर पैथोलॉजी के मामले में, तैयारी "Fezam" भी नहीं लिया जाना चाहिए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं में दवा का उपयोग contraindicated है। मादक नशा में दवा का प्रयोग न करें, हालांकि उसे डाक मादक सिंड्रोम को हटाने के लिए नियुक्त किया गया है। कुछ मामलों में, दवा का उपयोग करते समयकुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। शायद माइग्रेन के उद्भव, भावनात्मक लचीलापन, प्रकाश संवेदनशीलता, मांसपेशी हाइपरटोनिया, डिस्प्लेप्टिक विकार, अंगों का कांपना बढ़ गया। आम तौर पर, ये लक्षण हल्के होते हैं और Fezam को वापस लेने का कारण नहीं बनते हैं। दवा के विवरण में विधियां शामिल हैंआवेदन और खुराक। वयस्क रोगियों को दो कैप्सूल निर्धारित किए जाते हैं, जिन्हें दिन में तीन बार लेना चाहिए। उपचार का सामान्य कोर्स दो-तीन महीने है। उपचार के एक-तीन महीने के बच्चों के उपचार के लिए, एक कैप्सूल दिन में दो बार से अधिक नहीं। के उपचार में इस उपाय का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता हैबाल रोगियों और बाल चिकित्सा में। हालाँकि, यह निओट्रोपिक दवा सभी के लिए उपयुक्त है। कुछ बच्चे ओवरज़म के साथ फ़ाज़म पर प्रतिक्रिया करते हैं, दूसरों को अपच हो जाता है, और तीसरे के लिए वे सुधार नहीं करते हैं। लेकिन, नकारात्मक के अलावा, सकारात्मक हैंदवा "फ़ेज़ाम" के बारे में कथन। कुछ माता-पिता की समीक्षाओं का कहना है कि दवा लेने के परिणामस्वरूप उनके बच्चों में मस्तिष्क की संवहनी प्रणाली की सामान्य स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ था, खोपड़ी के अंदर दबाव कम हो गया , संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का अनुकूलन देखा गया था। वयस्क रोगियों की राय भी काफी हद तक हैविरोधाभासी। कुछ ने व्यक्त किया है कि वे अपनी स्थिति में किसी भी परिवर्तन का अवलोकन नहीं कर रहे हैं। कभी-कभी दुष्प्रभाव होते हैं, वजन बढ़ता है, उनींदापन बढ़ता है, और अवसादग्रस्तता बढ़ जाती है। हालांकि, अन्य निर्णय हैं जिनके अनुसार फ़ेज़म दवा के साथ चिकित्सा के बाद रोगियों में संज्ञानात्मक कार्यों और स्मृति में सुधार हुआ है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) 'भविष्य में साथ आएंगे। ' पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह और राकांपा अध्यक्ष शरद पवार एक ही पेड़ के नीचे (कांग्रेस में ही) बड़े हुए हैं, हालांकि पवार खुलेआम इस पर बात नहीं करते हैँ। उन्होंने बिना विस्तार दिए हुए कहा, " भले ही कांग्रेस और राकांपा दो अलग-अलग पार्टियां हैं लेकिन आज मैं आपको यह कहना चाहूंगा कि भविष्य में हम एक-दूसरे के करीब आएंगे क्योंकि अब वे भी थक गए हैं और हम भी थक गए हैं। " शिंदे पश्चिमी महाराष्ट्र में अपने गृह जिले सोलापुर में एक सार्वजनिक सभा में बोल रहे थे। शिंदे ने खुद के और पवार के बारे में कहा कि वह राकांपा नेता से सिर्फ साढ़े आठ महीने छोटे हैं और एक ही पेड़ के नीचे बड़े हुए हैं और इंदिरा गांधी और यशवंतराव चव्हाण के नेतृत्व में आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा, " इसलिए हमारे दिल और उनके दिल में भी अफसोस है, एक ही भावना है. . . बस इतना फर्क है कि वह (पवार) इसके बारे में बोलते नहीं हैं, लेकिन समय आएगा जब वह इस बारे में बात करेंगे। " पवार ने मई 1999 में कांग्रेस छोड़ दी थी और राकांपा की स्थापना की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 'भविष्य में साथ आएंगे। ' पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह और राकांपा अध्यक्ष शरद पवार एक ही पेड़ के नीचे बड़े हुए हैं, हालांकि पवार खुलेआम इस पर बात नहीं करते हैँ। उन्होंने बिना विस्तार दिए हुए कहा, " भले ही कांग्रेस और राकांपा दो अलग-अलग पार्टियां हैं लेकिन आज मैं आपको यह कहना चाहूंगा कि भविष्य में हम एक-दूसरे के करीब आएंगे क्योंकि अब वे भी थक गए हैं और हम भी थक गए हैं। " शिंदे पश्चिमी महाराष्ट्र में अपने गृह जिले सोलापुर में एक सार्वजनिक सभा में बोल रहे थे। शिंदे ने खुद के और पवार के बारे में कहा कि वह राकांपा नेता से सिर्फ साढ़े आठ महीने छोटे हैं और एक ही पेड़ के नीचे बड़े हुए हैं और इंदिरा गांधी और यशवंतराव चव्हाण के नेतृत्व में आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा, " इसलिए हमारे दिल और उनके दिल में भी अफसोस है, एक ही भावना है. . . बस इतना फर्क है कि वह इसके बारे में बोलते नहीं हैं, लेकिन समय आएगा जब वह इस बारे में बात करेंगे। " पवार ने मई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में कांग्रेस छोड़ दी थी और राकांपा की स्थापना की।
इंदौर। आनंद बाजार स्थित उत्कर्ष विहार कॉलोनी में शनिवार को प्रशासनिक अमला अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा। टीम ने नाले की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को तोड़ा। इसके अलावा कॉलोनाइजर की बाउंड्रीवॉल भी तोड़ी गई, लेकिन सोमवार तक का समय मांगने पर उसकी बांउड्रीवॉल को आधा ही तोड़ा गया। इस दौरान विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन कार्रवाई जारी रही। अमला सोमवार को फिर कार्रवाई के लिए जाएगा। बीतो दिनों उत्कर्ष विहार के हुए सीमांकन में कॉलोनइजर विमल चौरड़िया के बंगले के पीछे का कुछ हिस्सा सरकारी नाले में बना पाया था। कॉलोनाइजर ने कॉलोनी का गेट और चौकरीदार का मकान भी सीलिंग की जमीन पर बना दिया था। साथ ही एक अन्य मकान भी सीलिंग की जमीन पर बन रहा है। कुल मिलाकर करीब 45000 वर्गफीट जमीन पर अलग-अलग अतिक्रमण पाए गए हैं। इसी को हटाने की कार्रवाई शनिवार को की गई। कार्रवाई में सरकारी जमीन पर बनी बाउंड्रीवॉल,चौकीदार का घर और सीलिंग की जमीन पर बन रहा मकान तोड़ा गया। कॉलोनाइजर विमल चौरड़िया के द्वारा सोमवार तक का समय मांगने पर उसके घर की बाउंड्रीवॉल को आधा ही तोड़ा गया। तहसीलदार राजकुमार हलदर ने बताया कि उत्कर्ष विहार का करीब 70 प्रतिशत अतिक्रमण हटा दिया है। अंधेरा होने के कारण कार्रवाई रोकना पड़ी। सोमवार को फिर से कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर। आनंद बाजार स्थित उत्कर्ष विहार कॉलोनी में शनिवार को प्रशासनिक अमला अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा। टीम ने नाले की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को तोड़ा। इसके अलावा कॉलोनाइजर की बाउंड्रीवॉल भी तोड़ी गई, लेकिन सोमवार तक का समय मांगने पर उसकी बांउड्रीवॉल को आधा ही तोड़ा गया। इस दौरान विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन कार्रवाई जारी रही। अमला सोमवार को फिर कार्रवाई के लिए जाएगा। बीतो दिनों उत्कर्ष विहार के हुए सीमांकन में कॉलोनइजर विमल चौरड़िया के बंगले के पीछे का कुछ हिस्सा सरकारी नाले में बना पाया था। कॉलोनाइजर ने कॉलोनी का गेट और चौकरीदार का मकान भी सीलिंग की जमीन पर बना दिया था। साथ ही एक अन्य मकान भी सीलिंग की जमीन पर बन रहा है। कुल मिलाकर करीब पैंतालीस हज़ार वर्गफीट जमीन पर अलग-अलग अतिक्रमण पाए गए हैं। इसी को हटाने की कार्रवाई शनिवार को की गई। कार्रवाई में सरकारी जमीन पर बनी बाउंड्रीवॉल,चौकीदार का घर और सीलिंग की जमीन पर बन रहा मकान तोड़ा गया। कॉलोनाइजर विमल चौरड़िया के द्वारा सोमवार तक का समय मांगने पर उसके घर की बाउंड्रीवॉल को आधा ही तोड़ा गया। तहसीलदार राजकुमार हलदर ने बताया कि उत्कर्ष विहार का करीब सत्तर प्रतिशत अतिक्रमण हटा दिया है। अंधेरा होने के कारण कार्रवाई रोकना पड़ी। सोमवार को फिर से कार्रवाई की जाएगी।
मधेपुरा में चला अतिक्रमणकारियों पर जिला प्रशासन का बुल्डोजर, शहर में जगह जगह अवैध रूप से सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को लेकर आज डीएम विजय प्रकाश मीणा के निर्देशन में नगर परिषद क्षेत्र के कर्पूरी चौक और अन्य जगहों पर हटाया जा रहा है अतिक्रमण. बता दें कि मुख्य शहर में भीषण जाम की समस्या हमेशा बनी रहती थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए डीएम विजय प्रकाश मीणा ने नगर परिषद के कार्यपालक अभियंता को सख्त निर्देश दिए, जिसके बाद हरकत में आए नगर परिषद प्रशासन ने सड़क किनारे अवैध रूप से कब्जा जमाए दुकानदारों को दिया नोटिस और नोटिस के बावजूद जब दुकानदारों ने नहीं किया खाली तो मजबूरन आज नगर परिषद के अधिकारी समेत पुलिस वालों ने सख्ती के साथ सड़क किनारे वर्षों से जमे दुकानदारों को खाली करवाया गया. वहीं कई जगहों पर किए जा रहे अतिक्रमण मुक्त को लेकर प्रशासन को आक्रोश का भी भारी सामना करना पड़ा, बावजूद अधिकारियों ने बुल्डोजर के माध्यम से अतिक्रमण मुक्त करवाया. अब शहर के आम लोगों समेत राहगीरों को जाम की समस्याओं से मिलेगी मुक्ति. वहीं कुछ दुकानदारों ने अपने निजी जगहों पर भी बुल्डोजर चलवाने को लेकर जिला प्रशासन पर लगाया मनमौजी का आरोप. हालांकि जिला प्रशासन के अधिकारी किसी भी दुकानदारों की एक नहीं सुनी और मुहिम के तहत अतिक्रमण हटाया गया. वहीं इस मामले को लेकर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमित कुमार ने बताया कि मुख्य शहर में अतिक्रमण को लेकर हमेशा जाम की समस्या बनी रहती थी. लोग जाम के कारण परेशान रहते थे. जिसके बाद जिला पदाधिकारी के निर्देशन में अतिक्रमण हटाओ मुहिम के तहत आज शहर में सड़क किनारे वर्षों से अवैध रूप से कब्जा जमाए दुकानों पर बुल्डोजर चला कर अतिक्रमण से मुक्ति दिलाई जा रही है. अब शहर में जाम की समस्याओं से आम अवाम को मुक्ति मिलेगी.
मधेपुरा में चला अतिक्रमणकारियों पर जिला प्रशासन का बुल्डोजर, शहर में जगह जगह अवैध रूप से सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को लेकर आज डीएम विजय प्रकाश मीणा के निर्देशन में नगर परिषद क्षेत्र के कर्पूरी चौक और अन्य जगहों पर हटाया जा रहा है अतिक्रमण. बता दें कि मुख्य शहर में भीषण जाम की समस्या हमेशा बनी रहती थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए डीएम विजय प्रकाश मीणा ने नगर परिषद के कार्यपालक अभियंता को सख्त निर्देश दिए, जिसके बाद हरकत में आए नगर परिषद प्रशासन ने सड़क किनारे अवैध रूप से कब्जा जमाए दुकानदारों को दिया नोटिस और नोटिस के बावजूद जब दुकानदारों ने नहीं किया खाली तो मजबूरन आज नगर परिषद के अधिकारी समेत पुलिस वालों ने सख्ती के साथ सड़क किनारे वर्षों से जमे दुकानदारों को खाली करवाया गया. वहीं कई जगहों पर किए जा रहे अतिक्रमण मुक्त को लेकर प्रशासन को आक्रोश का भी भारी सामना करना पड़ा, बावजूद अधिकारियों ने बुल्डोजर के माध्यम से अतिक्रमण मुक्त करवाया. अब शहर के आम लोगों समेत राहगीरों को जाम की समस्याओं से मिलेगी मुक्ति. वहीं कुछ दुकानदारों ने अपने निजी जगहों पर भी बुल्डोजर चलवाने को लेकर जिला प्रशासन पर लगाया मनमौजी का आरोप. हालांकि जिला प्रशासन के अधिकारी किसी भी दुकानदारों की एक नहीं सुनी और मुहिम के तहत अतिक्रमण हटाया गया. वहीं इस मामले को लेकर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमित कुमार ने बताया कि मुख्य शहर में अतिक्रमण को लेकर हमेशा जाम की समस्या बनी रहती थी. लोग जाम के कारण परेशान रहते थे. जिसके बाद जिला पदाधिकारी के निर्देशन में अतिक्रमण हटाओ मुहिम के तहत आज शहर में सड़क किनारे वर्षों से अवैध रूप से कब्जा जमाए दुकानों पर बुल्डोजर चला कर अतिक्रमण से मुक्ति दिलाई जा रही है. अब शहर में जाम की समस्याओं से आम अवाम को मुक्ति मिलेगी.
चंडीगढ़ । पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतदान के शुरुआती चार घंटों में 23 प्रतिशत से अधिक वोट डाले गए। राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ, जो शाम पांच बजे तक चलेगा। मतदान शुरू होते ही अधिकांश मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जो दोपहर 12 बजे तक देखी गईं। फतेहगढ़ साहिब जिले में दोपहर तक सर्वाधिक 36 प्रतिशत से अधिक वोट डाले गए। वहीं, फाजिल्का में 35 प्रतिशत, मोगा में 30 प्रतिशत, मुक्तसर में 28 प्रतिशत और मनसा में 27 प्रतिशत वोट पड़ चुके हैं। चुनाव में 1. 98 करोड़ से अधिक मतदाता 1,145 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे, जिनमें 81 महिलाएं और एक किन्नर उम्मीदवार हैं। चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच है। राज्य में मतदान को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सीमा क्षेत्रों को सील कर दिया गया है। राज्य में 22,614 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना 11 मार्च को होगी। वर्ष 2012 के विधासभा चुनाव में पंजाब के 78. 57 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
चंडीगढ़ । पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतदान के शुरुआती चार घंटों में तेईस प्रतिशत से अधिक वोट डाले गए। राज्य की सभी एक सौ सत्रह विधानसभा सीटों पर मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ, जो शाम पांच बजे तक चलेगा। मतदान शुरू होते ही अधिकांश मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जो दोपहर बारह बजे तक देखी गईं। फतेहगढ़ साहिब जिले में दोपहर तक सर्वाधिक छत्तीस प्रतिशत से अधिक वोट डाले गए। वहीं, फाजिल्का में पैंतीस प्रतिशत, मोगा में तीस प्रतिशत, मुक्तसर में अट्ठाईस प्रतिशत और मनसा में सत्ताईस प्रतिशत वोट पड़ चुके हैं। चुनाव में एक. अट्ठानवे करोड़ से अधिक मतदाता एक,एक सौ पैंतालीस उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे, जिनमें इक्यासी महिलाएं और एक किन्नर उम्मीदवार हैं। चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच है। राज्य में मतदान को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सीमा क्षेत्रों को सील कर दिया गया है। राज्य में बाईस,छः सौ चौदह मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना ग्यारह मार्च को होगी। वर्ष दो हज़ार बारह के विधासभा चुनाव में पंजाब के अठहत्तर. सत्तावन मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
आगरा के रुनकता से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कस्बे के मोहल्ला कचहरा थोक में एक बंदर महिला नेहा से उसके 12 दिन के बेटे आरुष उर्फ सनी को छीनकर ले गया और उसकी जान ले ली। महिला उस समय बच्चे को दूध पिला रही थी। बंदर ने बच्चे की गर्दन पर दांत गड़ा दिए। बच्चे की तुरंत मौत हो गई। इसके बाद बंदर शव को लेकर भाग गया। लोगों के पीछा करने पर खून से लथपथ शव एक मकान की छत पर छोड़कर भाग गया। घटना सोमवार रात करीब नौ बजे हुई। ऑटो चालक योगेश की पत्नी नेहा बच्चे को कमरे में दूध पिला रही थी। मेन गेट खुला था। कमरे का दरवाजा भी बंद नहीं था। तभी अचानक बंदर आया। नेहा कुछ समझ पाती, इससे पहले ही बंदर ने बच्चे पर झपट्टा मारा। नेहा ने जिगर के टुकड़े को बचाने की कोशिश की लेकिन बंदर घुड़की देते हुए आगे बढ़ा और बच्चा छीन ले गया। नेहा ने फिर से लाल को बचाने की कोशिश की लेकिन उसके सामने ही बंदर ने दांतों से बच्चे की गर्दन पर काटा और फूल से नाजुक बदन पर नुकीले नाखून गड़ा दिए। इसके बाद बंदर बच्चे को मुंह में दबाकर भाग गया। रुनकता कस्बे में मासूम बच्चे को बंदरों ने निशाने पर ले लिया है। लोगों का कहना है कि चार दिन पहले भी बंदर ने वाल्मीकि बस्ती में एक माह की बच्ची को काटा था। वह लहुलुहान हो गई थी। तब बंदर ने छोड़ा था। बच्ची निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है।
आगरा के रुनकता से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कस्बे के मोहल्ला कचहरा थोक में एक बंदर महिला नेहा से उसके बारह दिन के बेटे आरुष उर्फ सनी को छीनकर ले गया और उसकी जान ले ली। महिला उस समय बच्चे को दूध पिला रही थी। बंदर ने बच्चे की गर्दन पर दांत गड़ा दिए। बच्चे की तुरंत मौत हो गई। इसके बाद बंदर शव को लेकर भाग गया। लोगों के पीछा करने पर खून से लथपथ शव एक मकान की छत पर छोड़कर भाग गया। घटना सोमवार रात करीब नौ बजे हुई। ऑटो चालक योगेश की पत्नी नेहा बच्चे को कमरे में दूध पिला रही थी। मेन गेट खुला था। कमरे का दरवाजा भी बंद नहीं था। तभी अचानक बंदर आया। नेहा कुछ समझ पाती, इससे पहले ही बंदर ने बच्चे पर झपट्टा मारा। नेहा ने जिगर के टुकड़े को बचाने की कोशिश की लेकिन बंदर घुड़की देते हुए आगे बढ़ा और बच्चा छीन ले गया। नेहा ने फिर से लाल को बचाने की कोशिश की लेकिन उसके सामने ही बंदर ने दांतों से बच्चे की गर्दन पर काटा और फूल से नाजुक बदन पर नुकीले नाखून गड़ा दिए। इसके बाद बंदर बच्चे को मुंह में दबाकर भाग गया। रुनकता कस्बे में मासूम बच्चे को बंदरों ने निशाने पर ले लिया है। लोगों का कहना है कि चार दिन पहले भी बंदर ने वाल्मीकि बस्ती में एक माह की बच्ची को काटा था। वह लहुलुहान हो गई थी। तब बंदर ने छोड़ा था। बच्ची निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है।
मामला राजनगर प्रखंड के कसियोना उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है। बताया जा रहा है कि शनिवार होने के कारण बच्चों को खिचड़ी बना कर खाने के लिए दी गई। इसी बीच एक बच्चे को खिचड़ी में छिपकली नजर आ गई और बच्चे ने इसकी शिकायत एचएम से की। मधुबनीः बिहार के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड डे मील की क्वालिटी पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। मामला मधुबनी जिले से सामने आया है, जहां पर एक सरकारी स्कूल में खराब मिड डे मील खाने से करीब 50 से ज्यादा बच्चे बीमार हो गए। जानकरी के मुताबिक,मामला राजनगर प्रखंड के कसियोना उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है। बताया जा रहा है कि शनिवार होने के कारण बच्चों को खिचड़ी बना कर खाने के लिए दी गई। इसी बीच एक बच्चे को खिचड़ी में छिपकली नजर आ गई और बच्चे ने इसकी शिकायत एचएम से की। इसके बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। सभी बच्चों को राजनगर पीएचसी लाया गया, फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। वहीं सूचना पाकर बिहार सरकार के पूर्व पीएचईडी मंत्री रामप्रीत पासवान पीएचसी पहुंचे। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से मुलाकात की। वहीं स्कूल के एचएम को भी लापरवाही के लिए फटकार लगाई। इस लापरवाही के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
मामला राजनगर प्रखंड के कसियोना उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है। बताया जा रहा है कि शनिवार होने के कारण बच्चों को खिचड़ी बना कर खाने के लिए दी गई। इसी बीच एक बच्चे को खिचड़ी में छिपकली नजर आ गई और बच्चे ने इसकी शिकायत एचएम से की। मधुबनीः बिहार के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड डे मील की क्वालिटी पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। मामला मधुबनी जिले से सामने आया है, जहां पर एक सरकारी स्कूल में खराब मिड डे मील खाने से करीब पचास से ज्यादा बच्चे बीमार हो गए। जानकरी के मुताबिक,मामला राजनगर प्रखंड के कसियोना उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है। बताया जा रहा है कि शनिवार होने के कारण बच्चों को खिचड़ी बना कर खाने के लिए दी गई। इसी बीच एक बच्चे को खिचड़ी में छिपकली नजर आ गई और बच्चे ने इसकी शिकायत एचएम से की। इसके बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। सभी बच्चों को राजनगर पीएचसी लाया गया, फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। वहीं सूचना पाकर बिहार सरकार के पूर्व पीएचईडी मंत्री रामप्रीत पासवान पीएचसी पहुंचे। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से मुलाकात की। वहीं स्कूल के एचएम को भी लापरवाही के लिए फटकार लगाई। इस लापरवाही के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
परिवहन, पत्रिका "हमारे दाख की बारी हकदार लेख प्रवर्धन के साथ इस्तांबुल में नए हवाई अड्डे" Raillif के जुलाई अंक में समुद्री मामलों और संचार मंत्री अहमत अर्सलन प्रकाशित हुआ था। जैसा कि सभी जानते हैं; हमारी दुनिया में एक नया आदेश स्थापित हो रहा है। राजनीतिक और आर्थिक प्रणाली के साथ, व्यापार मार्ग फिर से व्यवस्थित हो रहे हैं। यहाँ इस प्रक्रिया में तुर्की की भूमिका है कि यह परिवर्तन हवा को हर गुजरते दिन के साथ दृढ़ता से बढ़ाना शुरू कर देता है। इस नए क्रम में एक मजबूत जगह लेने के लिए इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट के निर्माण का बहुत महत्व है। जैसा कि आप जानते हैं, इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट में हमारी प्रगति 90 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 21 जून की शाम को, हमारे राष्ट्रपति को ले जाने वाले "टीसी-एएनके" विमान ने तीसरे हवाई अड्डे के पहले रनवे पर पहली लैंडिंग की, जो 3 हजार 750 मीटर लंबी और 60 मीटर चौड़ी थी और सभी प्रक्रियाएं पूरी हुईं। हमें अब से सिर्फ 3 महीने पहले 29 अक्टूबर, 2018 को इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट को सेवा में लाने पर गर्व होगा। इस हवाई अड्डे के उद्घाटन के साथ, जो 5 महाद्वीपों के यात्री और माल परिवहन का काम करेगा, अफ्रीका, सुदूर पूर्व और मध्य एशिया इस्तांबुल का उपयोग करके यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका से मिलेंगे। हालांकि, तुर्की रोजगार और अर्थव्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। इसी तरह, सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड फॉरेन पॉलिसी रिसर्च की "इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट इकोनॉमिक इम्पैक्ट एनालिसिस" रिपोर्ट के अनुसार, यह भविष्यवाणी की गई है कि एयरपोर्ट द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बनाए जाने वाले रोजगार 2025 के लिए 195 हजार से 225 हजार लोगों के बीच होंगे। अतिरिक्त घरेलू आय लगभग $ 4 बिलियन होगी। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में तुर्की का योगदान राष्ट्रीय आय के 4,2-4,9 प्रतिशत के बीच होगा। यह हमारे आस-पास के भूगोल में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। 29 Ekim'den sonra İstanbul Yeni Havalimanı'nın dünyayı Türkiye'ye, Türkiye'yi de dünyaya bağlayacak perçinleri kuvvetlendirmesi, Türkiye'nin hem bir köprü ve hem de bir merkez niteliği kazanmasına olumlu etki edeceği kaçınılmazdır. Son tahlilde İstanbul Yeni Havalimanı, Türkiye'nin önümüzdeki 50 yıllık büyüme sürecinin itici güçlerinden biri olacaktır.
परिवहन, पत्रिका "हमारे दाख की बारी हकदार लेख प्रवर्धन के साथ इस्तांबुल में नए हवाई अड्डे" Raillif के जुलाई अंक में समुद्री मामलों और संचार मंत्री अहमत अर्सलन प्रकाशित हुआ था। जैसा कि सभी जानते हैं; हमारी दुनिया में एक नया आदेश स्थापित हो रहा है। राजनीतिक और आर्थिक प्रणाली के साथ, व्यापार मार्ग फिर से व्यवस्थित हो रहे हैं। यहाँ इस प्रक्रिया में तुर्की की भूमिका है कि यह परिवर्तन हवा को हर गुजरते दिन के साथ दृढ़ता से बढ़ाना शुरू कर देता है। इस नए क्रम में एक मजबूत जगह लेने के लिए इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट के निर्माण का बहुत महत्व है। जैसा कि आप जानते हैं, इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट में हमारी प्रगति नब्बे प्रतिशत से अधिक हो गई है। इक्कीस जून की शाम को, हमारे राष्ट्रपति को ले जाने वाले "टीसी-एएनके" विमान ने तीसरे हवाई अड्डे के पहले रनवे पर पहली लैंडिंग की, जो तीन हजार सात सौ पचास मीटर लंबी और साठ मीटर चौड़ी थी और सभी प्रक्रियाएं पूरी हुईं। हमें अब से सिर्फ तीन महीने पहले उनतीस अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट को सेवा में लाने पर गर्व होगा। इस हवाई अड्डे के उद्घाटन के साथ, जो पाँच महाद्वीपों के यात्री और माल परिवहन का काम करेगा, अफ्रीका, सुदूर पूर्व और मध्य एशिया इस्तांबुल का उपयोग करके यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका से मिलेंगे। हालांकि, तुर्की रोजगार और अर्थव्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। इसी तरह, सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड फॉरेन पॉलिसी रिसर्च की "इस्तांबुल न्यू एयरपोर्ट इकोनॉमिक इम्पैक्ट एनालिसिस" रिपोर्ट के अनुसार, यह भविष्यवाणी की गई है कि एयरपोर्ट द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बनाए जाने वाले रोजगार दो हज़ार पच्चीस के लिए एक सौ पचानवे हजार से दो सौ पच्चीस हजार लोगों के बीच होंगे। अतिरिक्त घरेलू आय लगभग चार डॉलर बिलियन होगी। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में तुर्की का योगदान राष्ट्रीय आय के चार,दो-चार,नौ प्रतिशत के बीच होगा। यह हमारे आस-पास के भूगोल में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। उनतीस Ekim'den sonra İstanbul Yeni Havalimanı'nın dünyayı Türkiye'ye, Türkiye'yi de dünyaya bağlayacak perçinleri kuvvetlendirmesi, Türkiye'nin hem bir köprü ve hem de bir merkez niteliği kazanmasına olumlu etki edeceği kaçınılmazdır. Son tahlilde İstanbul Yeni Havalimanı, Türkiye'nin önümüzdeki पचास yıllık büyüme sürecinin itici güçlerinden biri olacaktır.
दंतेवाड़ा,(ब्यूरो छत्तीसगढ़)। नक्सल हिंसा शामिल रहे व्यक्पि के एल. एम . जी. हथियार सहित आत्मसमर्पण पर राज्य सरकार द्वारा तीन लाख रूपये की अनुग्रह राशि स्वीकृत की जायेगी। इसके साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने उन्हें पुर्नवास के लिए आवास और रोजगार संबंधी विभिन्न योजनाओं में पात्रता अनुसार पाथकिता देते हुए अन्य सहायता भी पदान की जायेगी। आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और पुर्नवासों के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कार्य योजना के तहत कार्यवाही तेजी से जारी हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हथियार के साथ समर्पण करने पर समर्पित हथियार के बदले मुआवजे के रूप में अनुग्रह राशि भी स्वीकृत की जा रही हैं। ए. के. 47 रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने पर दो लाख रूपये, एस. एल. आर. रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने पर एक लाख रूपये अनुग्रह राशि स्वीकृत की जाती हैं। राज्य शासन ने थ्री नाट थ्री रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को पचास हजार रूपये और बारह बोर बन्दूक के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को बीस हजार रूपये अनुग्रह राशि पदान करने का पावधान पुर्नवास नीति में किया हैं। राज्य शासन द्वारा जारी पुर्नवास नीति के अनुसार जीविकापार्जन साधन विहीन नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सली संबंधी जिले में किसी भी स्थान पर कृषि योग्य भूमि आंबटन के लिए भी आवेदन कर सपेंगे। ऐसे व्यक्पि एवं परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वरीयता कम कृषि योग्य भूमि आंबटित की जायेगी। नक्सल पीड़ित व्यक्ति की सुरक्षा की दुष्टि से उसकी स्वयं के भूमि के बदले में अन्य स्थान पर सममूल्य भूमि उपलब्धता अनुसार आंबटित करने का पावधान भी पुर्नवास नीति में किया गया हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वरोजगार संबंधी विभिन्न योजनाओं के लिए आवश्यकतानुसार ऋण एवं अनुदान कराने में संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा पाथमिकता देने का भी पावधान पुर्नवास नीति में किया गया हैं। सुरक्षा कारणों के कारण शहरी क्षेत्रों में पुर्नवास आवश्यक होने पर ऐसे पभावित व्यक्तियों को शहरी योजनाओं के तहत लाभ दिलाने के लिए आवास और स्वरोजगार की पचलित योजनाओं में नजूल भूमि आंबटन में भी पाथमिकता मिलेगी।
दंतेवाड़ा,। नक्सल हिंसा शामिल रहे व्यक्पि के एल. एम . जी. हथियार सहित आत्मसमर्पण पर राज्य सरकार द्वारा तीन लाख रूपये की अनुग्रह राशि स्वीकृत की जायेगी। इसके साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने उन्हें पुर्नवास के लिए आवास और रोजगार संबंधी विभिन्न योजनाओं में पात्रता अनुसार पाथकिता देते हुए अन्य सहायता भी पदान की जायेगी। आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और पुर्नवासों के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कार्य योजना के तहत कार्यवाही तेजी से जारी हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हथियार के साथ समर्पण करने पर समर्पित हथियार के बदले मुआवजे के रूप में अनुग्रह राशि भी स्वीकृत की जा रही हैं। ए. के. सैंतालीस रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने पर दो लाख रूपये, एस. एल. आर. रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने पर एक लाख रूपये अनुग्रह राशि स्वीकृत की जाती हैं। राज्य शासन ने थ्री नाट थ्री रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को पचास हजार रूपये और बारह बोर बन्दूक के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को बीस हजार रूपये अनुग्रह राशि पदान करने का पावधान पुर्नवास नीति में किया हैं। राज्य शासन द्वारा जारी पुर्नवास नीति के अनुसार जीविकापार्जन साधन विहीन नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सली संबंधी जिले में किसी भी स्थान पर कृषि योग्य भूमि आंबटन के लिए भी आवेदन कर सपेंगे। ऐसे व्यक्पि एवं परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वरीयता कम कृषि योग्य भूमि आंबटित की जायेगी। नक्सल पीड़ित व्यक्ति की सुरक्षा की दुष्टि से उसकी स्वयं के भूमि के बदले में अन्य स्थान पर सममूल्य भूमि उपलब्धता अनुसार आंबटित करने का पावधान भी पुर्नवास नीति में किया गया हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वरोजगार संबंधी विभिन्न योजनाओं के लिए आवश्यकतानुसार ऋण एवं अनुदान कराने में संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा पाथमिकता देने का भी पावधान पुर्नवास नीति में किया गया हैं। सुरक्षा कारणों के कारण शहरी क्षेत्रों में पुर्नवास आवश्यक होने पर ऐसे पभावित व्यक्तियों को शहरी योजनाओं के तहत लाभ दिलाने के लिए आवास और स्वरोजगार की पचलित योजनाओं में नजूल भूमि आंबटन में भी पाथमिकता मिलेगी।
बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. उनके तस्वीरें और वीडियो आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं. वह आज मुंबई के बांद्रा में स्पॉट हुईं। दिशा पाटनी की कई तस्वीरें सामने आई हैं. इन तस्वीरो में वह काफी फिट दिखाई दे रही हैं। बात करें वर्कफ्रंट की तो दिशा की इस साल राधे रिलीज हुई थी, जिसमें वह सलमान खाने क अपॉजिट दिखाई दीं. उनके पास एक विलेन रिटर्न और टीना जैसी फिल्में पाइपलाइन में हैं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. उनके तस्वीरें और वीडियो आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं. वह आज मुंबई के बांद्रा में स्पॉट हुईं। दिशा पाटनी की कई तस्वीरें सामने आई हैं. इन तस्वीरो में वह काफी फिट दिखाई दे रही हैं। बात करें वर्कफ्रंट की तो दिशा की इस साल राधे रिलीज हुई थी, जिसमें वह सलमान खाने क अपॉजिट दिखाई दीं. उनके पास एक विलेन रिटर्न और टीना जैसी फिल्में पाइपलाइन में हैं।
१ अहिंसा-व्रत जैसे नदी के प्रवाह को मर्यादित रखने के लिये दो किनारों की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन के प्रवाह को शुद्ध और सरल बनाने के लिये व्रतों की आवश्यकता है। नदी अगर यह कहे कि 'मुझे दो किनारों का बंधन नहीं चाहिये, मैं तो स्वतंत्र होकर बहूँगी तो उसका पानी इतस्ततः छिन्न-भिन्न हो जायगा । यही हाल मानव जीवन का भी है। मनुष्य पर व्रतों का बंधन नहीं रहेगा, तो उसकी जीवन-शक्ति भी तितर-वितर होकर क्षीण हो जायगी । अतः जीवन-शक्ति को केन्द्रित कर योग्य दिशा में उसका उपयोग करने के लिये व्रतों को अनिवार्य आवश्यकता है। भगवान् महावीर ने वारह व्रत बताये हैं। उसमें सबसे पहला व्रत अहिंसा का है । दशवकालिक सूत्र में कहा है किसव्वे जीवा वि इच्छन्ति जोविउं न मरिज्जिउं । तम्हा पाणीवह घोरं निग्गंथा वज्जयंति रगं ।। अर्थात्- सभी प्राणियों को जीवन प्रिय होता है और मरण अप्रिय । अतः साधक पुरुषों द्वारा प्राणी वध नहीं किया जाना चाहिये, क्योंकि यह भयंकर पाप है । हिंसा की व्याख्या करते हुए प्राचार्य उमास्वाति कहते हैं कि- 'प्रमत्तयोगात् प्राण-व्यपरोपणं हिंसा' प्रर्थात् प्रमत्तयोग से प्राणों का नाश करना हिंसा है। प्रमत्तयोग अर्थात् राग-द्वेष से की गई प्रवृत्ति हिंसा होती है । सब प्राणियों को अपने कर्मानुसार रक्षा करने के लिये नाखून, खाने के लिये दाँत और डाढ़, देखने के लिये नेत्र, सुनने के लिये कान, सूंघने के लिये नाक, चखने के लिये जीभ श्रादि मिले हुए हैं । इन अंगोपांग को छीन लेने का अधिकार मनुष्य को नहीं है । जो मनुष्य एक नाचीज मक्खी की पांख भी नहीं बना सकता है, उसे उसको मारने का क्या अधिकार है ? परन्तु स्वार्थांध बना हुआ मनुष्य कुछ विचार नहीं कर सकता है। मांसाहार करने वाले कई बार यह दलील करते हैं कि 'ये सभी पशु-पक्षी किसके लिये उत्पन्न किये गये हैं ? ईश्वर ने इन्हें मनुष्यों के लिये ही उत्पन्न किया है ।' ऐसा कहने वालों से अगर सिंह यह कहे कि 'ईश्वर ने मनुष्यों का सृजन मेरी खुराक के लिये ही किया है' तो कहिये लोग इसका क्या जवाब दे सकेंगे ? इस दलील में और कोई तथ्य नहीं है। उसमें केवल स्वार्थ और स्वादलोलुपता ही है । जैसा जीव मनुष्य में है, वैसा ही जीव पशु पक्षियों में भी है । जैसे मनुष्य यह नहीं चाहता कि सिंह या वाघ उसको अपना आहार बना ले, वैसे ही मनुष्य को भी चाहिये कि वह अपने खाने के लिये पशु-पक्षियों का उपयोग न करें । हां, यह सच है कि मनुष्य में एक विशिष्ट प्रकार की बुद्धि है, जो कि पशु-पक्षियों में नहीं है । परन्तु इसका अर्थ यह नहीं, कि वह इसका उपयोग पशु-पक्षियों को पकड़ने में, मारने में और खाने में करें । ऐसा करना तो बुद्धि का दुरुपयोग ही कहा जायेगा । अतः उसे अपनी बुद्धि का सदुपयोग सब की रक्षा करने में ही करना चाहिये । जैसे मानव को अपना जीवन- प्रिय है, वैसे पशु-पक्षियों और छोटे-छोटे जीवों को भी अपना जीवन प्रिय होता है । अतः जीव हिंसा से दूर रहना चाहिये । अहिंसा आध्यात्मिक जीवन की है- नींव है । इसीलिये बारह व्रतों में उसे सर्व प्रथम स्थान दिया गया है । भगवान् महावीर के शब्दों में कहें, तो श्रहिंसा भगवती है । विना भगवती की शरण में प्राये साधक. पुरुष अपना विकास नहीं कर सकता है । सब व्रतों में हिंसा व्रत जितना महत्त्वपूर्ण है उतना ही उसका पालन दुष्कर है । महात्माजी के शब्दों में कहें तो 'अहिंसा का मार्ग जितना सीधा है, उतना ही वह सकडा भी है। यह मार्ग खांडे की धार पर चलने जैसा है । नट, जिस रस्सी पर एक नजर रख चलते हैं, उससे भी सत्य-अहिंसा की यह रस्सी पतली है । थोड़ी भी सावधानी रही कि धड़ाम से नीचे जा गिरे । उसके दर्शन तो प्रतिक्षण उसकी साधना करने से ही हो सकते हैं ।' किसी को भी नहीं मारना - इसका समावेश तो होता ही है, परन्तु कुविचारों को नहीं छोड़ना भी किसी का बुरा चाहना, जो वस्तु दूसरों को चाहिये अपना अधिकार जमाये रखना भी हिंसा है । हमें हिंसा है । उस पर अहिंसा के पालन से ही सच्ची शान्ति प्राप्त की जा सकती है । हिंसा से कभी शान्ति नहीं मिल सकती । अंग्रेज लेखक ल्युथर ने कहा है कि - Nothing good ever comes of violence अर्थात् - हिंसा में से कभी अच्छा परिणाम निकलने वाला नहीं है। एक दूसरे अनुभवी ने लिखा है कि - The violence done to us by others is often less painful than that which we do to others. अर्थात् हम दूसरों को कष्ट देते हैं, उसके बदले अगर वे हमें कष्ट दें, तो यह उतना दुःखदायी नहीं होता है, जितना कि हम दूसरों को देते हैं । हम दूसरों को अधिक कष्ट देते हैं, जब कि दूसरों की तरफ से हमें बहुत कम कष्ट दिया जाता है । इस वक्रोक्ति में रहस्य यह है कि अपनी तरफ से किसी को दुःख न पहुँचे, इसकी हमें सावधानी रखनी चाहिये । दूसरे शब्दों में कहें, तो खुद सहन करना और दूसरों को न सताना, यही सबका ध्येय होना चाहिये । इसी का नाम हिंसा है । दया, करुणा, अनुकम्पा, सेवा, प्रेम, मैत्री आदि सभी अहिंसा के ही स्वरूप हैं । दयालु-हृदय नन्दनवन की तरह होता है । जैसा कि कहा भी है - Paradise is open to all kind hearts. दयालु-हृदय के लिये स्वर्ग के द्वार खुले ही होते हैं । निष्ठुर-हृदय के बादशाह से एक दयालु हृदय का कंगाल वड़ा-चढ़ा होता है । यही बात टेनीसन ने भी कही है कि- Kind hearts are more than coronets. एक दूसरे विद्वान् ने भी कहा है कि Kindness is the golden chain by which society is bound together. ufq çar aîì zavi जंजीर समाज को संगठित रखने के लिये है। वायरन के शब्दों में कहें तो - The drying up a single tear has more of honest fame than shedding ceas of gore. अर्थात[ ७ युद्ध में खून को नदियाँ बहा देने वाले विजेता से वह साधारण मनुष्य, जो दुखी मानव का ग्रांसू पोंछता है, अधिक प्रशंसा का पात्र है । अतः अहिंसा के साथ-साथ दया और मैत्री की भी आराधना करनी चाहिये । दया से जीवन उन्नत बनाया जा सकता है । एक समय की बात है, एक जंगल में आग लग गई। सभी पशु-पक्षी उससे बचने के लिये इधर-उधर दौड़ रहे थे । उस जंगल में एक हाथीभी अपने झुण्ड के साथ रहता था । आग से बचने के लिये उसने अपने झुण्ड के साथ मिल कर एक योजन अर्थात् चार कोस का मैदान साफ कर डाला । जहाँ एक सूखी घास का तिनका भी न रहा, वहाँ अब आग लगने का डर नहीं था । अतः भागे हुए पशु वहाँ आकर इकठ्ठे होने लगे । हाथी ने तो अपने समुदाय की रक्षा के लिये ही यह मैदान साफ किया था, परन्तु फिर भी उदार भाव से उसने अन्य प्राणियों को भी वहाँ आश्रय दिया । मैदान पशुओं से सारा भर गया था । कहीं पांव रखने की भी जगह न रही । इतने में एक खरगोश वहाँ ग्रा पहुँचा । पर जगह कहाँ ? इतने ही में नायक हाथी ने अपना एक पाँव शरीर खुजलाने के लिये ऊपर उठाया । खरगोश ने पाँव के नीचे की जगह खाली देखी, तो तुरन्त वहाँ आकर बैठ गया । हाथी ने पाँव नीचा किया, तो उसे मालूम हुआ कि यहाँ भी कोई प्राणी आकर बैठ गया है । अतः उसने अपना पाँव पुनः ऊपर उठा लिया और तीन पैर से ही खड़ा रहा । जंगल की दावाग्नि तीन दिनों बाद शान्त हुई । उस दिन तक हाथी ने अपना पाँव ऊपर ही उठाये रखा । अग्नि के शान्त हो जाने पर वहाँ के सभी प्राणी धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे । उस खरगोश के चले जाने पर हाथी ने भी अपना पाँव जमीन पर रखने के लिये नीचा किया। परन्तु लगातार तीन रोज तक इस तरह खड़े रहने से उसकी नसें तन गई थीं अतः धड़ाम से नीचे गिर पड़ा और तत्काल ही मृत्यु को प्राप्त हो गया । यही हाथी का जीव मगध राजा श्रेणिक के यहाँ मेघकुमार के नाम से उत्पन्न हुआ। अनुकम्पा, करुणा, दया या ग्रहिंसा का ही प्रताप है, 'कि एक हाथी का जीव मर कर राजकुमार बना । हाथी जैसा प्राणी भी अपने जीवन की परवाह न कर इतनी दया पाल सकता है, तो संस्कारी मानव से विशेष प्राशा रखना अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता । हाथी का यह प्रदर्श दृष्टान्त ग्राज के श्रीमन्तों को याद रखने जैसा है । हाथी जैसे पशु के पास अन्य कोई ऐसा वाह्य साधन नहीं होता है कि जिससे वह दूसरों की मदद कर सके । फिर भी उसने अपने शरीर बल का उपयोग कर चार कोस की जमीन पशु-पक्षियों के रक्षण के लिये साफ कर दी - उपद्रव रहित बना दी । तब कहिये, ग्राज के श्रीमन्त जिनके पास सूट द्रव्य और आय के भी अनेकों साधन हैं, वे चाहें तो अपने तन, मन, धन और द्रव्य - साधन सामग्रियों का कितना सदुपयोग कर सकते हैं ? हाथी जितना करुणाभाव भी आज के श्रीमन्तों में श्रा जाय, तो संसार की विषमता दूर होने में देर न लगे । विषमता दूर होने पर सव मनुष्य अपना जीवन सुख से व्यतीत कर सकते । फिर किसी को भी अपने जीवन निर्वाह के लिये श्रनीति का सहारा न लेना पड़े, न असत्य बोलना पड़े, और न किसी का शोषण ही करना पड़े। ऐसा करने से ही दोनों को अर्थात् श्रीमतों और गरीबों का श्रेय निहित है। विशेष भोग देने की बात तो दूर रही, श्रीमन्त अपने मकान की छाया का उपयोग ही गरीबों को करने दें, तो इससे उन्हें काफी राहत मिल सकती है। बचा हुआ अन्न, फटे हुए वस्त्र और काम में न आने वाली अन्य वस्तुएँ गरीबों को दे दी जाय, तो यही उनके लिये रेगिस्तान में पानी की नहर सिद्ध होगी । श्रीमन्तों के लिये तो यह बढ़े हुए नखों और बालों को काट डालने जैसी सामान्य वात ही कही जायगी। किसी-किसी स्थान पर तो बिल्कुल विपरीत स्थिति दिखाई पड़ती है। अपने कुए में से कोई गरीब पानी भरने प्राता है, तो उसे चौकीदार द्वारा धमकाया जाता है । कुए के पानी का भी यह हाल है, तो नल के पानी की तो बात ही कहाँ रही ? ऐसी संकुचित मनोवृत्ति वालों के लिये मेघकुमार के हाथी के भव की अनुकम्पा उदारता और स्वार्थ त्याग की भावना शिक्षाप्रद है । हमारे पूज्य गुरुदेव इन सब व्रतों की बड़ी व्यापक और सुन्दर व्याख्या करते हैं । वे कहते हैं कि 'मन, वचन और काया की कोई भी प्रवृत्ति करने से पूर्व उसके भावी परिणाम का विवेकमय विचार करना अहिंसा है। अहिंसा का उपासक व्यापार करने से पूर्व यह विचार कर लेता है कि मेरा व्यापार शोषक है या पोषक ? जिस व्यापार से दूसरे की आजीविका छिन जाती हो, हिंसा का आधार लेना पड़ता हो, तो ऐसे व्यापार से हिंसक व्यक्ति अलग ही रहता है । वह अपने जीवन की हर एक प्रवृत्ति को इसी कसौटी पर कस कर देखता है । इसका प्राचार, विचार. और उच्चार अहिंसामय ही होता है।' जैन लोग जलाने के लिये लकड़ी या कंडों का उपयोग भी देन कर करते हैं । चूल्हा, सिगड़ी, चक्की आदि को भी साफ कर उपयोग में लाते हैं । शाक-भाजी को भी बारीकी से देखकर पकाते हैं। इस प्रकार लट, कीड़ी ग्रादि जीवों की रक्षा करने के लिये इतनी सावधानी रखते हैं। वनस्पति के जीवों की रक्षा करने के लिये वे अमुक हरी शाक-भाजी का भी त्याग कर देते हैं । एक लट को मारने के लिये यदि कोई उसे पाँच लाख रुपया भी दे, तो वह उन्हें लेकर लट को मारने के लिये तैयार नहीं होगा । इस प्रकार अहिंसा के पालन में जैन लोग इतनी अधिक सावधानी रखते हैं, फिर भी प्रश्न यह है कि उनकी अहिंसा में तेजस्विता क्यों नहीं है ? इसका उत्तर स्पष्ट है कि वे हिंसा का व्यापक अर्थ समझे नहीं हैं। हिंसा के दो प्रकार हैं - एक विषेधात्मक अहिंसा और दूसरी विधेयात्मक अहिंसा । किसी भी जीव को कष्ट नहीं देना, निषेधात्मक अहिंसा है और पीड़ितों का दुःख दूर करना, यह विधेयात्मक ग्रहा है। जैसे किसी को कष्ट देना हिंसा है, वैसे ही शक्ति होने पर पीड़ितों का दुख दूर न करना भी हिंसा है । एक मनुष्य भूख से तड़फड़ा रहाहो, और आपके पास बचा हुआ भोजन पड़ा हो, फिर भी आप उसकी भूख शान्त न करें, तो अहिंसा का पालन कैसे किया जा सकता है ? एक मनुष्य कपड़े के विना ठंड से थरथर काँप रहा है, आपके पास वस्त्रों की पेटियाँ भरी पड़ी हैं, आप चाहें तो उसे वस्त्र देकर उसका कष्ट निवारण कर सकते हैं, फिर भी आप उसके प्रति उपेक्षा रखें, तो ऐसी हालत में श्राप हिंसक कैसे कहे जा सकते हैं ? एक बीमार मनुष्य की सेवा करने के लिये आपके पास समय और सामर्थ्य भी है, फिर भी आप उसकी सेवा न करें तो समझ लेना चाहिये, कि अभी आपके जीवन में अहिंसा पूर्ण रूप से प्रकट नहीं हुई है । ज्ञान होने पर दूसरों का दूर नहीं करते हैं, तो समझ लेना चाहिये कि अभी हम अहिंसा का विधेयात्मक रूप समझे ही नहीं । बिजली के भी दो तार होते हैं - नेगेटिव और पोजेटिव । ये दोनों जब शामिल होते हैं, तभी बिजली प्रकाश देती है । इसी प्रकार जीवन में भी जब अहिंसा के दोनों प्रकाशों का निषेधात्मक और विधेयात्मक रूपों का संगम होता है, तभी वह अहिंसा सजीव होकर तेजस्वी बन सकती है । मैत्री, अहिंसा का विधेयात्मक स्वरूप है। मंत्री सुखप्रद है और द्वेष दुःखप्रद । मनुष्यों के परस्पर व्यवहार में मंत्री का प्रभाव होता है, तो दुनिया में दुख बढ़ जाता है । चोर को अपना घर छोड़ कर दूसरा घर प्रिय नहीं होता । इसीसे वह अपने लाभ के खातिर दूसरे के घर से चोरी करने के लिये प्रेरित होता है एक खूनी अपने शरीर को ही चाहता है, दूसरे के शरीर को नहीं । इसीसे वह दूसरे का खून करने के लिये तत्पर हो जाता है। एक श्रीमन्त अपने कुटुम्ब को ही चाहता है, दूसरों के कुटुम्ब को नहीं । इसीसे वह अपने कुटुम्ब की भलाई के लिये दूसरों के कुटुम्बों का शोषण करता है । राजा अपने देश के सिवाय अन्य देशों को नहीं चाहता है । इसीलिये वह दूसरे देशों पर चढ़ाई करता है । अपने घर की तरह ही दूसरों का घर भी समझ लिया जाय, तो फिर कोई किसी के यहाँ चोरी कर सकता है ? सभी अपने शरीर की तरह ही दूसरों का शरीर भी कीमती समझने लग जाय, तो फिर कोई किसी का खून कर सकता है ? सभी अपने कुटुम्ब की तरह ही ग्रन्थ कुटुम्बों को भी चाहने लग जाय, तो कौन किसका शोषण कर सकता है ? सभी अपने देश की तरह अन्य देशों को भी चाहने लग जाएं, तो कौन किस पर चढ़ाई कर सकता है ? इस प्रकार अगर गहरा विचार किया जाय, तो प्रतीत होगा कि दुनिया के सभी दुःखों की एक दिव्य औषधिमैत्री ही है । अहिंसक पुरुप सेवाभावी होता है, उसमें सेवावृत्ति ठूंसठूस कर भरी होती है। अहिंसा के आराधक को अपने घर से सेवा की शुरुआत करनी चाहिये और धीरे धीरे उसे सारी दुनियाँ तक फैला देनी चाहिए । परन्तु उसकी सेवा में स्वार्थ की गंध नहीं चाहिए । सेवा निष्काम भाव से करनी चाहिये । अन्यथा वह सेवा, सेवा नहीं, कुसेवा हो जायगी । सेवा के क्षेत्र में ऊंचनीच का भेदभाव, गरीब-श्रीमन्त का भेदभाव या स्वजन-परजन का भेदभाव नहीं हो सकता है । ऐसी निःस्वार्थ अहिंसा का प्रभाव हर एक पर पड़ता है । जितने परिमाण में सेवा का विकास हुआ होता है, उतने ही परिमाण में उसका प्रभाव भी पड़ता है। अहिंसक के सामने क्रूर प्राणी भी अपनो हिसक स्वभाव भूल कर नम्र वन जाता है। जैसा कि कहा भी है कि - 'हिंसा प्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैर-त्यागः' अहिंसा के निकट सव प्राणी अपना वैर छोड़ देते हैं । किसी भी क्रूर, दुष्ट या हिंसक मनुष्य को सुधारना होगा, तो आप उसे हिंसा या क्रोध से नहीं सुधार सकेंगे, परन्तु अहिंसा, प्रेम और मैत्री से ही उसका सुधार किया जा सकेगा। अपने नौकर को भी दवाव से, हुक्म से या से नहीं सुधार सकेंगे। आप अपने प्रेमपूर्ण वर्ताव से हो उसे सुधार सकेंगे । कई लोग कहते हैं कि दया का बदला कई बार उल्टा मिलता है, दया बताने जाते हैं, तो नौकर भी सिर पर सवार हो जाता है। ऐसा कहना ठीक नहीं है । जो नौकर प्रेमपूर्ण व्यवहार के प्रति भी सावधानी प्रदर्शित करता है, उसके लिये अगर आप कठोर बनेंगे, तो उसका व्यवहार और अधिक कटु हो जायगा । उदार सेठ के प्रति भी जो नौकर असावधानी बर्तता है, वह नौकर अनुदार सेठ को इससे भी अधिक नुकसान पहुंचाता है। कठोर बरताव से उसमें सुधार होने की संभावना बहुत कम रहती है, जब कि बिगड़ने की प्रेमहीन बनने की अधिक निकर्ष यही है कि चाहे जैसी परिस्थति क्यों न हो, मैत्री और प्रेमपूर्ण बर्ताव का परिणाम ही अच्छा निकलता है । कोई मनुष्य चाहे जितना बुरा क्यों न हो, पर चंडकौशिक सर्प जितना तो भयंकर नहीं होगा न ? चंडकौशिक सर्प का विष मीलों तक हवा में मिलकर असर पहुँचाता था और कोई भी प्राणी उसके पास नहीं जा सकता था। ऐसे जहरीले सर्प को भी भगवान महावीर ने अपनी मैत्री से सुधारा था । भगवान् महावीर ने अपने आदर्श व्यवहार से जो मार्ग दूसरों को सुधारने का बताया, वही राजमार्ग है। उसी पर चल कर दुनिया का कल्याण हो सकता है । गालियाँ देकर किसी का दिल दुखाना, अपमान करना, निन्दा करना, मन से किसी का बुरा सोचना, किसी को लड़नेझगड़ने की सलाह देना आदि सभी हिंसा के भिन्न-भिन्न प्रकार हैं, जो कि अहिंसा के उपासक के लिये त्याज्य हैं । हिंसा और अहिंसा का माप निकालना कठिन नहीं है । जितने अंशों में समभाव हो, उतने ही अंशों में हिंसा और जितने में विषमभाव हो, उतने ही अंशों में हिंसा समझ - लेनी चाहिये । समभावी पुरुष पत्थर का जवाव भी फूल से देता है । विषय-कषाय पर विजय पाना ही है और यही तप भी है । अहंभाव के त्याग का नाम ही अहिंसा है । ऐसी हिंसा का पालन वीर पुरुष ही कर सकता है । कायर का इसमें काम नहीं । ग्रहिंसा के पालन के लिये हमारे गुरुदेव फरमाया करते हैं कि वरसते हुए पानी का प्रहार जैसे किसान अपनी खेती के लिये हर्षित होकर झेलता रहता है, वैसे ही हिंसक को भी अपनी हंस रूपी खेती की प्रगति के लिये सभी तरह के कष्टों और पत्तियों को सहर्प झेलते रहना चाहिये । चार - अहिंसा व्रत के पांच प्रतिचार कहे गये हैं । ये अतिचार साधक को जानने योग्य हैं, आचरण के योग्य नहीं । ये पांच अतिचार इस प्रकार हैं बन्धवधच्छविच्छेदातिभारारोपणान्नपाननिरोधाः ।' वन्व, वध, छविच्छेद, अतिभार, और अपाननिरोध । बंध-किसी भी प्राणी को गाढ़ बन्धन से बांधना, या उसे अपने इष्ट स्थान पर जाने से रोकना बंध कहलाता है । कई लोग बंध का अर्थ बड़ा मर्यादित कर देते हैं और उसका अर्थ पशु तक ही समझते हैं । मानव को अनेक तरह से वांध लेने में वे व्रतभंग नहीं समझते। उनका यह अर्थ ठीक नहीं है । बंध का अर्थ मानव के व्यवहारों में भी लागू होता है। नौकरों को अधिक समय स्थानों पर जाने देने में अन्तराय तक रोक रखना, उन्हें अपने इष्ट डालना, निर्दिष्ट समय के उपरान्त उनसे इच्छा विरुद्ध काम लेना, इन सबका भी बंध के अतिचार में समावेश होता है । एक मनुष्य गरीबी की वजह से नौकरी करता है, परन्तु उसकी गरीबो का अनुचित लाभ उठा कर उससे अधिक काम लेना ठीक नहीं है । यह अधर्म है। ऐसा करने से बंध का अतिचार लगता है, औौर व्रत में दूषण लगता है । वध - किसी भी त्रस जीव को मारना वध है । स्पष्टतः आज कोई किसी को मारना चाहेगा नहीं, परन्तु आज व्यवहार इस तरह का हो गया है कि उसमें इस प्रतिचार से बचना कठिन-सा हो गया है । बैलों के प्रार लगाना और घोड़ों के चाबुक लगाना वध है। दयाधर्मो अपने हाथों से चाबुक लगाने में हिचकिचा जायेंगे। यह सही वात है, परन्तु जब वे कभी घोड़ागाड़ी या बैलगाड़ी से मुसाफिरी कर रहे हों, उस समय हाँकने वाला बैलों पर आर लगावे या घोड़ों पर चाबुक जमावे तो क्या वे उस समय मना करेंगे या जल्दी पहुंचने की इच्छा से उसके कार्य में अपनी मूक सम्मति प्रकट करेंगे ? बैल या घोड़े को चाबुक लगाने का निमित्त बैठने वाला ही बनता है । अतः वह भी अपनी मूक सम्मति द्वारा चाबुक मारने वाले की तरह ही वध अतिचार का भागी बनता है । चमड़े की अधिकांश वस्तुएँ पशुओं की हिंसा करके ही बनाई जाती हैं । सुकोमल चमड़ों की वस्तुओं के लिये नवजात पशु की या गर्भस्थ पशु की हत्या की जाती है और उसके चमड़े से ये चमकीली और कोमल वस्तुएँ तैयार की जाती हैं। ऐसी वस्तुओं का उपयोग करने वाला भी परोक्षतः वध में भागीदार बनता है। इसी तरह चरवी वाले और रेशमी वस्त्र पहिनने वाले या मोती के गहने धारण करने वाले भी त्रस और पंचेन्द्रिय जीव के वध के भागीदार बनते हैं। वृत्तिच्छेद का पाप भी बन्ध की तरह ही है। शास्त्रों में कहा गया है कि वृत्तिच्छेद करने वालों को भी वध का ही पाप लगता है । वध में स्पष्ट रूप से प्राणियों का वध होता है, जब कि वृत्तिच्छेद में अस्पष्ट रूप से । अतः वध के अतिचार का विचार करते समय इसका भी विचार करना चाहिये कि कहीं हमारी `क्रिया वृत्तिच्छेद करने वाली तो नहीं है ? गृहोद्योग को नष्ट करने वाले जो व्यवसाय-धन्धे हैं, उनसे कई गरीबों और विधवाओं की ग्राजीविका नष्ट हो जाती है । जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कारखानों, मिलों या यंत्रोद्योग को उत्तेजना देते हैं, पोषण करते हैं, वे इस वृत्तिच्छेद के भागीदार बनते हैं । पहले की गरीब विधवाएं चक्की पीस कर अपना भरणपोषण करती थीं, वालकों को वड़ा करती थीं और पढ़ाती थीं । परन्तु जब से अनाज पीसने की चक्की आई, तब से गरीब विधवाओं का यह धन्धा छिन गया है। उनकी आजीविका नष्ट हो गई है। इसमें सूक्ष्म रूप से वध का पाप रहा हुआ है। कपड़े की मिलों से चरखा चलाने वालों का तथा बुनकरों का धन्धा नष्ट हो गया है। इस वृत्तिच्छेद के भागीदार सभी मिल मालिक और शेयर होल्डर ही गिने जायेंगे। इस प्रकार गृहोद्योग बन्द करने वाले जितने भी यंत्रोद्योग हैं, उनमें बनी हुई वस्तुओं का उपयोग करने से भी वृत्तिच्छेद और वध का भागीदार वनना पड़ता है । कई लोग यह तर्क करते हैं कि 'हम तो मिलों के तैयार कपड़े पहनते हैं, इसमें क्या पाप करते हैं ? हम उन्हें बनवाते थोड़े ही हैं ? इसका पाप तो मिल चलाने वालों को लग सकता है, हमको क्यों ! इस पर जरा गहरा विचार करेंगे, तो आपको प्रतीत
एक अहिंसा-व्रत जैसे नदी के प्रवाह को मर्यादित रखने के लिये दो किनारों की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन के प्रवाह को शुद्ध और सरल बनाने के लिये व्रतों की आवश्यकता है। नदी अगर यह कहे कि 'मुझे दो किनारों का बंधन नहीं चाहिये, मैं तो स्वतंत्र होकर बहूँगी तो उसका पानी इतस्ततः छिन्न-भिन्न हो जायगा । यही हाल मानव जीवन का भी है। मनुष्य पर व्रतों का बंधन नहीं रहेगा, तो उसकी जीवन-शक्ति भी तितर-वितर होकर क्षीण हो जायगी । अतः जीवन-शक्ति को केन्द्रित कर योग्य दिशा में उसका उपयोग करने के लिये व्रतों को अनिवार्य आवश्यकता है। भगवान् महावीर ने वारह व्रत बताये हैं। उसमें सबसे पहला व्रत अहिंसा का है । दशवकालिक सूत्र में कहा है किसव्वे जीवा वि इच्छन्ति जोविउं न मरिज्जिउं । तम्हा पाणीवह घोरं निग्गंथा वज्जयंति रगं ।। अर्थात्- सभी प्राणियों को जीवन प्रिय होता है और मरण अप्रिय । अतः साधक पुरुषों द्वारा प्राणी वध नहीं किया जाना चाहिये, क्योंकि यह भयंकर पाप है । हिंसा की व्याख्या करते हुए प्राचार्य उमास्वाति कहते हैं कि- 'प्रमत्तयोगात् प्राण-व्यपरोपणं हिंसा' प्रर्थात् प्रमत्तयोग से प्राणों का नाश करना हिंसा है। प्रमत्तयोग अर्थात् राग-द्वेष से की गई प्रवृत्ति हिंसा होती है । सब प्राणियों को अपने कर्मानुसार रक्षा करने के लिये नाखून, खाने के लिये दाँत और डाढ़, देखने के लिये नेत्र, सुनने के लिये कान, सूंघने के लिये नाक, चखने के लिये जीभ श्रादि मिले हुए हैं । इन अंगोपांग को छीन लेने का अधिकार मनुष्य को नहीं है । जो मनुष्य एक नाचीज मक्खी की पांख भी नहीं बना सकता है, उसे उसको मारने का क्या अधिकार है ? परन्तु स्वार्थांध बना हुआ मनुष्य कुछ विचार नहीं कर सकता है। मांसाहार करने वाले कई बार यह दलील करते हैं कि 'ये सभी पशु-पक्षी किसके लिये उत्पन्न किये गये हैं ? ईश्वर ने इन्हें मनुष्यों के लिये ही उत्पन्न किया है ।' ऐसा कहने वालों से अगर सिंह यह कहे कि 'ईश्वर ने मनुष्यों का सृजन मेरी खुराक के लिये ही किया है' तो कहिये लोग इसका क्या जवाब दे सकेंगे ? इस दलील में और कोई तथ्य नहीं है। उसमें केवल स्वार्थ और स्वादलोलुपता ही है । जैसा जीव मनुष्य में है, वैसा ही जीव पशु पक्षियों में भी है । जैसे मनुष्य यह नहीं चाहता कि सिंह या वाघ उसको अपना आहार बना ले, वैसे ही मनुष्य को भी चाहिये कि वह अपने खाने के लिये पशु-पक्षियों का उपयोग न करें । हां, यह सच है कि मनुष्य में एक विशिष्ट प्रकार की बुद्धि है, जो कि पशु-पक्षियों में नहीं है । परन्तु इसका अर्थ यह नहीं, कि वह इसका उपयोग पशु-पक्षियों को पकड़ने में, मारने में और खाने में करें । ऐसा करना तो बुद्धि का दुरुपयोग ही कहा जायेगा । अतः उसे अपनी बुद्धि का सदुपयोग सब की रक्षा करने में ही करना चाहिये । जैसे मानव को अपना जीवन- प्रिय है, वैसे पशु-पक्षियों और छोटे-छोटे जीवों को भी अपना जीवन प्रिय होता है । अतः जीव हिंसा से दूर रहना चाहिये । अहिंसा आध्यात्मिक जीवन की है- नींव है । इसीलिये बारह व्रतों में उसे सर्व प्रथम स्थान दिया गया है । भगवान् महावीर के शब्दों में कहें, तो श्रहिंसा भगवती है । विना भगवती की शरण में प्राये साधक. पुरुष अपना विकास नहीं कर सकता है । सब व्रतों में हिंसा व्रत जितना महत्त्वपूर्ण है उतना ही उसका पालन दुष्कर है । महात्माजी के शब्दों में कहें तो 'अहिंसा का मार्ग जितना सीधा है, उतना ही वह सकडा भी है। यह मार्ग खांडे की धार पर चलने जैसा है । नट, जिस रस्सी पर एक नजर रख चलते हैं, उससे भी सत्य-अहिंसा की यह रस्सी पतली है । थोड़ी भी सावधानी रही कि धड़ाम से नीचे जा गिरे । उसके दर्शन तो प्रतिक्षण उसकी साधना करने से ही हो सकते हैं ।' किसी को भी नहीं मारना - इसका समावेश तो होता ही है, परन्तु कुविचारों को नहीं छोड़ना भी किसी का बुरा चाहना, जो वस्तु दूसरों को चाहिये अपना अधिकार जमाये रखना भी हिंसा है । हमें हिंसा है । उस पर अहिंसा के पालन से ही सच्ची शान्ति प्राप्त की जा सकती है । हिंसा से कभी शान्ति नहीं मिल सकती । अंग्रेज लेखक ल्युथर ने कहा है कि - Nothing good ever comes of violence अर्थात् - हिंसा में से कभी अच्छा परिणाम निकलने वाला नहीं है। एक दूसरे अनुभवी ने लिखा है कि - The violence done to us by others is often less painful than that which we do to others. अर्थात् हम दूसरों को कष्ट देते हैं, उसके बदले अगर वे हमें कष्ट दें, तो यह उतना दुःखदायी नहीं होता है, जितना कि हम दूसरों को देते हैं । हम दूसरों को अधिक कष्ट देते हैं, जब कि दूसरों की तरफ से हमें बहुत कम कष्ट दिया जाता है । इस वक्रोक्ति में रहस्य यह है कि अपनी तरफ से किसी को दुःख न पहुँचे, इसकी हमें सावधानी रखनी चाहिये । दूसरे शब्दों में कहें, तो खुद सहन करना और दूसरों को न सताना, यही सबका ध्येय होना चाहिये । इसी का नाम हिंसा है । दया, करुणा, अनुकम्पा, सेवा, प्रेम, मैत्री आदि सभी अहिंसा के ही स्वरूप हैं । दयालु-हृदय नन्दनवन की तरह होता है । जैसा कि कहा भी है - Paradise is open to all kind hearts. दयालु-हृदय के लिये स्वर्ग के द्वार खुले ही होते हैं । निष्ठुर-हृदय के बादशाह से एक दयालु हृदय का कंगाल वड़ा-चढ़ा होता है । यही बात टेनीसन ने भी कही है कि- Kind hearts are more than coronets. एक दूसरे विद्वान् ने भी कहा है कि Kindness is the golden chain by which society is bound together. ufq çar aîì zavi जंजीर समाज को संगठित रखने के लिये है। वायरन के शब्दों में कहें तो - The drying up a single tear has more of honest fame than shedding ceas of gore. अर्थात[ सात युद्ध में खून को नदियाँ बहा देने वाले विजेता से वह साधारण मनुष्य, जो दुखी मानव का ग्रांसू पोंछता है, अधिक प्रशंसा का पात्र है । अतः अहिंसा के साथ-साथ दया और मैत्री की भी आराधना करनी चाहिये । दया से जीवन उन्नत बनाया जा सकता है । एक समय की बात है, एक जंगल में आग लग गई। सभी पशु-पक्षी उससे बचने के लिये इधर-उधर दौड़ रहे थे । उस जंगल में एक हाथीभी अपने झुण्ड के साथ रहता था । आग से बचने के लिये उसने अपने झुण्ड के साथ मिल कर एक योजन अर्थात् चार कोस का मैदान साफ कर डाला । जहाँ एक सूखी घास का तिनका भी न रहा, वहाँ अब आग लगने का डर नहीं था । अतः भागे हुए पशु वहाँ आकर इकठ्ठे होने लगे । हाथी ने तो अपने समुदाय की रक्षा के लिये ही यह मैदान साफ किया था, परन्तु फिर भी उदार भाव से उसने अन्य प्राणियों को भी वहाँ आश्रय दिया । मैदान पशुओं से सारा भर गया था । कहीं पांव रखने की भी जगह न रही । इतने में एक खरगोश वहाँ ग्रा पहुँचा । पर जगह कहाँ ? इतने ही में नायक हाथी ने अपना एक पाँव शरीर खुजलाने के लिये ऊपर उठाया । खरगोश ने पाँव के नीचे की जगह खाली देखी, तो तुरन्त वहाँ आकर बैठ गया । हाथी ने पाँव नीचा किया, तो उसे मालूम हुआ कि यहाँ भी कोई प्राणी आकर बैठ गया है । अतः उसने अपना पाँव पुनः ऊपर उठा लिया और तीन पैर से ही खड़ा रहा । जंगल की दावाग्नि तीन दिनों बाद शान्त हुई । उस दिन तक हाथी ने अपना पाँव ऊपर ही उठाये रखा । अग्नि के शान्त हो जाने पर वहाँ के सभी प्राणी धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे । उस खरगोश के चले जाने पर हाथी ने भी अपना पाँव जमीन पर रखने के लिये नीचा किया। परन्तु लगातार तीन रोज तक इस तरह खड़े रहने से उसकी नसें तन गई थीं अतः धड़ाम से नीचे गिर पड़ा और तत्काल ही मृत्यु को प्राप्त हो गया । यही हाथी का जीव मगध राजा श्रेणिक के यहाँ मेघकुमार के नाम से उत्पन्न हुआ। अनुकम्पा, करुणा, दया या ग्रहिंसा का ही प्रताप है, 'कि एक हाथी का जीव मर कर राजकुमार बना । हाथी जैसा प्राणी भी अपने जीवन की परवाह न कर इतनी दया पाल सकता है, तो संस्कारी मानव से विशेष प्राशा रखना अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता । हाथी का यह प्रदर्श दृष्टान्त ग्राज के श्रीमन्तों को याद रखने जैसा है । हाथी जैसे पशु के पास अन्य कोई ऐसा वाह्य साधन नहीं होता है कि जिससे वह दूसरों की मदद कर सके । फिर भी उसने अपने शरीर बल का उपयोग कर चार कोस की जमीन पशु-पक्षियों के रक्षण के लिये साफ कर दी - उपद्रव रहित बना दी । तब कहिये, ग्राज के श्रीमन्त जिनके पास सूट द्रव्य और आय के भी अनेकों साधन हैं, वे चाहें तो अपने तन, मन, धन और द्रव्य - साधन सामग्रियों का कितना सदुपयोग कर सकते हैं ? हाथी जितना करुणाभाव भी आज के श्रीमन्तों में श्रा जाय, तो संसार की विषमता दूर होने में देर न लगे । विषमता दूर होने पर सव मनुष्य अपना जीवन सुख से व्यतीत कर सकते । फिर किसी को भी अपने जीवन निर्वाह के लिये श्रनीति का सहारा न लेना पड़े, न असत्य बोलना पड़े, और न किसी का शोषण ही करना पड़े। ऐसा करने से ही दोनों को अर्थात् श्रीमतों और गरीबों का श्रेय निहित है। विशेष भोग देने की बात तो दूर रही, श्रीमन्त अपने मकान की छाया का उपयोग ही गरीबों को करने दें, तो इससे उन्हें काफी राहत मिल सकती है। बचा हुआ अन्न, फटे हुए वस्त्र और काम में न आने वाली अन्य वस्तुएँ गरीबों को दे दी जाय, तो यही उनके लिये रेगिस्तान में पानी की नहर सिद्ध होगी । श्रीमन्तों के लिये तो यह बढ़े हुए नखों और बालों को काट डालने जैसी सामान्य वात ही कही जायगी। किसी-किसी स्थान पर तो बिल्कुल विपरीत स्थिति दिखाई पड़ती है। अपने कुए में से कोई गरीब पानी भरने प्राता है, तो उसे चौकीदार द्वारा धमकाया जाता है । कुए के पानी का भी यह हाल है, तो नल के पानी की तो बात ही कहाँ रही ? ऐसी संकुचित मनोवृत्ति वालों के लिये मेघकुमार के हाथी के भव की अनुकम्पा उदारता और स्वार्थ त्याग की भावना शिक्षाप्रद है । हमारे पूज्य गुरुदेव इन सब व्रतों की बड़ी व्यापक और सुन्दर व्याख्या करते हैं । वे कहते हैं कि 'मन, वचन और काया की कोई भी प्रवृत्ति करने से पूर्व उसके भावी परिणाम का विवेकमय विचार करना अहिंसा है। अहिंसा का उपासक व्यापार करने से पूर्व यह विचार कर लेता है कि मेरा व्यापार शोषक है या पोषक ? जिस व्यापार से दूसरे की आजीविका छिन जाती हो, हिंसा का आधार लेना पड़ता हो, तो ऐसे व्यापार से हिंसक व्यक्ति अलग ही रहता है । वह अपने जीवन की हर एक प्रवृत्ति को इसी कसौटी पर कस कर देखता है । इसका प्राचार, विचार. और उच्चार अहिंसामय ही होता है।' जैन लोग जलाने के लिये लकड़ी या कंडों का उपयोग भी देन कर करते हैं । चूल्हा, सिगड़ी, चक्की आदि को भी साफ कर उपयोग में लाते हैं । शाक-भाजी को भी बारीकी से देखकर पकाते हैं। इस प्रकार लट, कीड़ी ग्रादि जीवों की रक्षा करने के लिये इतनी सावधानी रखते हैं। वनस्पति के जीवों की रक्षा करने के लिये वे अमुक हरी शाक-भाजी का भी त्याग कर देते हैं । एक लट को मारने के लिये यदि कोई उसे पाँच लाख रुपया भी दे, तो वह उन्हें लेकर लट को मारने के लिये तैयार नहीं होगा । इस प्रकार अहिंसा के पालन में जैन लोग इतनी अधिक सावधानी रखते हैं, फिर भी प्रश्न यह है कि उनकी अहिंसा में तेजस्विता क्यों नहीं है ? इसका उत्तर स्पष्ट है कि वे हिंसा का व्यापक अर्थ समझे नहीं हैं। हिंसा के दो प्रकार हैं - एक विषेधात्मक अहिंसा और दूसरी विधेयात्मक अहिंसा । किसी भी जीव को कष्ट नहीं देना, निषेधात्मक अहिंसा है और पीड़ितों का दुःख दूर करना, यह विधेयात्मक ग्रहा है। जैसे किसी को कष्ट देना हिंसा है, वैसे ही शक्ति होने पर पीड़ितों का दुख दूर न करना भी हिंसा है । एक मनुष्य भूख से तड़फड़ा रहाहो, और आपके पास बचा हुआ भोजन पड़ा हो, फिर भी आप उसकी भूख शान्त न करें, तो अहिंसा का पालन कैसे किया जा सकता है ? एक मनुष्य कपड़े के विना ठंड से थरथर काँप रहा है, आपके पास वस्त्रों की पेटियाँ भरी पड़ी हैं, आप चाहें तो उसे वस्त्र देकर उसका कष्ट निवारण कर सकते हैं, फिर भी आप उसके प्रति उपेक्षा रखें, तो ऐसी हालत में श्राप हिंसक कैसे कहे जा सकते हैं ? एक बीमार मनुष्य की सेवा करने के लिये आपके पास समय और सामर्थ्य भी है, फिर भी आप उसकी सेवा न करें तो समझ लेना चाहिये, कि अभी आपके जीवन में अहिंसा पूर्ण रूप से प्रकट नहीं हुई है । ज्ञान होने पर दूसरों का दूर नहीं करते हैं, तो समझ लेना चाहिये कि अभी हम अहिंसा का विधेयात्मक रूप समझे ही नहीं । बिजली के भी दो तार होते हैं - नेगेटिव और पोजेटिव । ये दोनों जब शामिल होते हैं, तभी बिजली प्रकाश देती है । इसी प्रकार जीवन में भी जब अहिंसा के दोनों प्रकाशों का निषेधात्मक और विधेयात्मक रूपों का संगम होता है, तभी वह अहिंसा सजीव होकर तेजस्वी बन सकती है । मैत्री, अहिंसा का विधेयात्मक स्वरूप है। मंत्री सुखप्रद है और द्वेष दुःखप्रद । मनुष्यों के परस्पर व्यवहार में मंत्री का प्रभाव होता है, तो दुनिया में दुख बढ़ जाता है । चोर को अपना घर छोड़ कर दूसरा घर प्रिय नहीं होता । इसीसे वह अपने लाभ के खातिर दूसरे के घर से चोरी करने के लिये प्रेरित होता है एक खूनी अपने शरीर को ही चाहता है, दूसरे के शरीर को नहीं । इसीसे वह दूसरे का खून करने के लिये तत्पर हो जाता है। एक श्रीमन्त अपने कुटुम्ब को ही चाहता है, दूसरों के कुटुम्ब को नहीं । इसीसे वह अपने कुटुम्ब की भलाई के लिये दूसरों के कुटुम्बों का शोषण करता है । राजा अपने देश के सिवाय अन्य देशों को नहीं चाहता है । इसीलिये वह दूसरे देशों पर चढ़ाई करता है । अपने घर की तरह ही दूसरों का घर भी समझ लिया जाय, तो फिर कोई किसी के यहाँ चोरी कर सकता है ? सभी अपने शरीर की तरह ही दूसरों का शरीर भी कीमती समझने लग जाय, तो फिर कोई किसी का खून कर सकता है ? सभी अपने कुटुम्ब की तरह ही ग्रन्थ कुटुम्बों को भी चाहने लग जाय, तो कौन किसका शोषण कर सकता है ? सभी अपने देश की तरह अन्य देशों को भी चाहने लग जाएं, तो कौन किस पर चढ़ाई कर सकता है ? इस प्रकार अगर गहरा विचार किया जाय, तो प्रतीत होगा कि दुनिया के सभी दुःखों की एक दिव्य औषधिमैत्री ही है । अहिंसक पुरुप सेवाभावी होता है, उसमें सेवावृत्ति ठूंसठूस कर भरी होती है। अहिंसा के आराधक को अपने घर से सेवा की शुरुआत करनी चाहिये और धीरे धीरे उसे सारी दुनियाँ तक फैला देनी चाहिए । परन्तु उसकी सेवा में स्वार्थ की गंध नहीं चाहिए । सेवा निष्काम भाव से करनी चाहिये । अन्यथा वह सेवा, सेवा नहीं, कुसेवा हो जायगी । सेवा के क्षेत्र में ऊंचनीच का भेदभाव, गरीब-श्रीमन्त का भेदभाव या स्वजन-परजन का भेदभाव नहीं हो सकता है । ऐसी निःस्वार्थ अहिंसा का प्रभाव हर एक पर पड़ता है । जितने परिमाण में सेवा का विकास हुआ होता है, उतने ही परिमाण में उसका प्रभाव भी पड़ता है। अहिंसक के सामने क्रूर प्राणी भी अपनो हिसक स्वभाव भूल कर नम्र वन जाता है। जैसा कि कहा भी है कि - 'हिंसा प्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैर-त्यागः' अहिंसा के निकट सव प्राणी अपना वैर छोड़ देते हैं । किसी भी क्रूर, दुष्ट या हिंसक मनुष्य को सुधारना होगा, तो आप उसे हिंसा या क्रोध से नहीं सुधार सकेंगे, परन्तु अहिंसा, प्रेम और मैत्री से ही उसका सुधार किया जा सकेगा। अपने नौकर को भी दवाव से, हुक्म से या से नहीं सुधार सकेंगे। आप अपने प्रेमपूर्ण वर्ताव से हो उसे सुधार सकेंगे । कई लोग कहते हैं कि दया का बदला कई बार उल्टा मिलता है, दया बताने जाते हैं, तो नौकर भी सिर पर सवार हो जाता है। ऐसा कहना ठीक नहीं है । जो नौकर प्रेमपूर्ण व्यवहार के प्रति भी सावधानी प्रदर्शित करता है, उसके लिये अगर आप कठोर बनेंगे, तो उसका व्यवहार और अधिक कटु हो जायगा । उदार सेठ के प्रति भी जो नौकर असावधानी बर्तता है, वह नौकर अनुदार सेठ को इससे भी अधिक नुकसान पहुंचाता है। कठोर बरताव से उसमें सुधार होने की संभावना बहुत कम रहती है, जब कि बिगड़ने की प्रेमहीन बनने की अधिक निकर्ष यही है कि चाहे जैसी परिस्थति क्यों न हो, मैत्री और प्रेमपूर्ण बर्ताव का परिणाम ही अच्छा निकलता है । कोई मनुष्य चाहे जितना बुरा क्यों न हो, पर चंडकौशिक सर्प जितना तो भयंकर नहीं होगा न ? चंडकौशिक सर्प का विष मीलों तक हवा में मिलकर असर पहुँचाता था और कोई भी प्राणी उसके पास नहीं जा सकता था। ऐसे जहरीले सर्प को भी भगवान महावीर ने अपनी मैत्री से सुधारा था । भगवान् महावीर ने अपने आदर्श व्यवहार से जो मार्ग दूसरों को सुधारने का बताया, वही राजमार्ग है। उसी पर चल कर दुनिया का कल्याण हो सकता है । गालियाँ देकर किसी का दिल दुखाना, अपमान करना, निन्दा करना, मन से किसी का बुरा सोचना, किसी को लड़नेझगड़ने की सलाह देना आदि सभी हिंसा के भिन्न-भिन्न प्रकार हैं, जो कि अहिंसा के उपासक के लिये त्याज्य हैं । हिंसा और अहिंसा का माप निकालना कठिन नहीं है । जितने अंशों में समभाव हो, उतने ही अंशों में हिंसा और जितने में विषमभाव हो, उतने ही अंशों में हिंसा समझ - लेनी चाहिये । समभावी पुरुष पत्थर का जवाव भी फूल से देता है । विषय-कषाय पर विजय पाना ही है और यही तप भी है । अहंभाव के त्याग का नाम ही अहिंसा है । ऐसी हिंसा का पालन वीर पुरुष ही कर सकता है । कायर का इसमें काम नहीं । ग्रहिंसा के पालन के लिये हमारे गुरुदेव फरमाया करते हैं कि वरसते हुए पानी का प्रहार जैसे किसान अपनी खेती के लिये हर्षित होकर झेलता रहता है, वैसे ही हिंसक को भी अपनी हंस रूपी खेती की प्रगति के लिये सभी तरह के कष्टों और पत्तियों को सहर्प झेलते रहना चाहिये । चार - अहिंसा व्रत के पांच प्रतिचार कहे गये हैं । ये अतिचार साधक को जानने योग्य हैं, आचरण के योग्य नहीं । ये पांच अतिचार इस प्रकार हैं बन्धवधच्छविच्छेदातिभारारोपणान्नपाननिरोधाः ।' वन्व, वध, छविच्छेद, अतिभार, और अपाननिरोध । बंध-किसी भी प्राणी को गाढ़ बन्धन से बांधना, या उसे अपने इष्ट स्थान पर जाने से रोकना बंध कहलाता है । कई लोग बंध का अर्थ बड़ा मर्यादित कर देते हैं और उसका अर्थ पशु तक ही समझते हैं । मानव को अनेक तरह से वांध लेने में वे व्रतभंग नहीं समझते। उनका यह अर्थ ठीक नहीं है । बंध का अर्थ मानव के व्यवहारों में भी लागू होता है। नौकरों को अधिक समय स्थानों पर जाने देने में अन्तराय तक रोक रखना, उन्हें अपने इष्ट डालना, निर्दिष्ट समय के उपरान्त उनसे इच्छा विरुद्ध काम लेना, इन सबका भी बंध के अतिचार में समावेश होता है । एक मनुष्य गरीबी की वजह से नौकरी करता है, परन्तु उसकी गरीबो का अनुचित लाभ उठा कर उससे अधिक काम लेना ठीक नहीं है । यह अधर्म है। ऐसा करने से बंध का अतिचार लगता है, औौर व्रत में दूषण लगता है । वध - किसी भी त्रस जीव को मारना वध है । स्पष्टतः आज कोई किसी को मारना चाहेगा नहीं, परन्तु आज व्यवहार इस तरह का हो गया है कि उसमें इस प्रतिचार से बचना कठिन-सा हो गया है । बैलों के प्रार लगाना और घोड़ों के चाबुक लगाना वध है। दयाधर्मो अपने हाथों से चाबुक लगाने में हिचकिचा जायेंगे। यह सही वात है, परन्तु जब वे कभी घोड़ागाड़ी या बैलगाड़ी से मुसाफिरी कर रहे हों, उस समय हाँकने वाला बैलों पर आर लगावे या घोड़ों पर चाबुक जमावे तो क्या वे उस समय मना करेंगे या जल्दी पहुंचने की इच्छा से उसके कार्य में अपनी मूक सम्मति प्रकट करेंगे ? बैल या घोड़े को चाबुक लगाने का निमित्त बैठने वाला ही बनता है । अतः वह भी अपनी मूक सम्मति द्वारा चाबुक मारने वाले की तरह ही वध अतिचार का भागी बनता है । चमड़े की अधिकांश वस्तुएँ पशुओं की हिंसा करके ही बनाई जाती हैं । सुकोमल चमड़ों की वस्तुओं के लिये नवजात पशु की या गर्भस्थ पशु की हत्या की जाती है और उसके चमड़े से ये चमकीली और कोमल वस्तुएँ तैयार की जाती हैं। ऐसी वस्तुओं का उपयोग करने वाला भी परोक्षतः वध में भागीदार बनता है। इसी तरह चरवी वाले और रेशमी वस्त्र पहिनने वाले या मोती के गहने धारण करने वाले भी त्रस और पंचेन्द्रिय जीव के वध के भागीदार बनते हैं। वृत्तिच्छेद का पाप भी बन्ध की तरह ही है। शास्त्रों में कहा गया है कि वृत्तिच्छेद करने वालों को भी वध का ही पाप लगता है । वध में स्पष्ट रूप से प्राणियों का वध होता है, जब कि वृत्तिच्छेद में अस्पष्ट रूप से । अतः वध के अतिचार का विचार करते समय इसका भी विचार करना चाहिये कि कहीं हमारी `क्रिया वृत्तिच्छेद करने वाली तो नहीं है ? गृहोद्योग को नष्ट करने वाले जो व्यवसाय-धन्धे हैं, उनसे कई गरीबों और विधवाओं की ग्राजीविका नष्ट हो जाती है । जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कारखानों, मिलों या यंत्रोद्योग को उत्तेजना देते हैं, पोषण करते हैं, वे इस वृत्तिच्छेद के भागीदार बनते हैं । पहले की गरीब विधवाएं चक्की पीस कर अपना भरणपोषण करती थीं, वालकों को वड़ा करती थीं और पढ़ाती थीं । परन्तु जब से अनाज पीसने की चक्की आई, तब से गरीब विधवाओं का यह धन्धा छिन गया है। उनकी आजीविका नष्ट हो गई है। इसमें सूक्ष्म रूप से वध का पाप रहा हुआ है। कपड़े की मिलों से चरखा चलाने वालों का तथा बुनकरों का धन्धा नष्ट हो गया है। इस वृत्तिच्छेद के भागीदार सभी मिल मालिक और शेयर होल्डर ही गिने जायेंगे। इस प्रकार गृहोद्योग बन्द करने वाले जितने भी यंत्रोद्योग हैं, उनमें बनी हुई वस्तुओं का उपयोग करने से भी वृत्तिच्छेद और वध का भागीदार वनना पड़ता है । कई लोग यह तर्क करते हैं कि 'हम तो मिलों के तैयार कपड़े पहनते हैं, इसमें क्या पाप करते हैं ? हम उन्हें बनवाते थोड़े ही हैं ? इसका पाप तो मिल चलाने वालों को लग सकता है, हमको क्यों ! इस पर जरा गहरा विचार करेंगे, तो आपको प्रतीत
चर्चा में क्यों? 29 मई, 2022 को मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त बंसत प्रताप सिंह ने कलेक्टर एवं ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन, 2022 के लिये मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने, मतदान की अपील तथा आयोग द्वारा किये गए नवाचारों की जानकारी देने के लिये 'मतदाता जागरूकता अभियान' प्रारंभ करने का निर्देश दिया। - उन्होंने अधिकारियों को 'मतदाता जागरूकता अभियान' के तहत मतदाताओं को प्रेरित/जागरूक करने के लिये स्थानीय महाविद्यालयों/ विश्वविद्यालयों से कुछ विद्यार्थियों को, जो कि नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं, को कैंपस एंबेसडर (Campus Ambassador) नियुक्त करने का निर्देश भी दिया। - कैंपस एंबेसडर का चयन ज़िला निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनकी निष्पक्ष, स्वच्छ एवं गैर-राजनीतिक छवि को चिह्नित कर महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों के प्राचार्य, उप-कुलपति द्वारा प्रदान की गई सूची के आधार पर किया जाएगा। - ज़िला निर्वाचन अधिकारी अपने स्तर पर एन.सी.सी./एन.एस.एस. के सहयोग से भी नियुक्ति कर सकते हैं। (Co-Education) महाविद्यालयों में 2 कैंपस एंबेसडर (एक छात्र एवं एक छात्रा) का चयन किया जाएगा। - कैंपस एंबेसडर की संबद्धता किसी भी राजनीतिक दल या उनकी संलग्नता किसी राजनीतिक गतिविधि में नहीं होनी चाहिये। कैंपस एंबेसडर के परिवार का संबंध किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक गतिविधि से नहीं होना चाहिये। - कैंपस एंबेसडर के विरुद्ध आचरण एवं व्यवहार संबंधी किसी भी तरह की शिकायत प्राप्त होने की स्थिति में संस्था प्रमुख तत्काल जाँच कर उपयुक्त कार्यवाही करेंगे। प्रत्येक कैंपस एंबेसडर का पुलिस सत्यापन ज़िला प्रशासन द्वारा किया जाना अनिवार्य होगा। - कैंपस एंबेसडर मतदाताओं को मतदान की प्रक्रिया तिथियों तथा आयोग द्वारा किये गए विभिन्न नवाचारों आदि की जानकारी देंगे। स्कॉउट-गाइड, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) एवं अशासकीय संगठनों (NGO) के साथ समन्वय कर मतदाता जागरूकता में उनका सहयोग प्राप्त करेंगे। - मतदाता जागरूकता अभियान (SENSE) की गतिविधियों के संचालन के लिये सक्रिय सदस्यों का एक दल बनाकर मतदाताओं को जागरूक करेंगे। - ज़िला निर्वाचन अधिकारी कैंपस एंबेसडर की नियुक्ति के पश्चात् उन्हें उनकी भूमिका, दायित्वों, उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यों, गतिविधियों, लक्ष्यों, संभावित उपलब्धियों तथा कार्ययोजनाओं से अवगत कराएंगे तथा उन्हें संक्षिप्त प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। ज़िला निर्वाचन अधिकारी कैंपस एंबेसडर को मतदाता जागरूकता अभियान कार्य के लिये यथायोग्य सामग्री, मार्गदर्शन एवं सहयोग देंगे। - ज़िला निर्वाचन अधिकारी समय-समय पर संपन्न की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों का आकलन करेंगे एवं प्रतिवेदन प्राप्त करेंगे। SENSE की गतिविधियों के लिये नियुक्त किये गए नोडल अधिकारी समय-समय पर प्रतिवेदन (फोटोग्राफ्स सहित) आयोग को भेजेंगे। - ज़िला स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले कैंपस एंबेसडर को चिह्नित कर उनके नाम की अनुशंसा की जाएगी तथा राष्ट्रीय पर्व पर आयोजित समारोह में प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार बाईस को मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त बंसत प्रताप सिंह ने कलेक्टर एवं ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन, दो हज़ार बाईस के लिये मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने, मतदान की अपील तथा आयोग द्वारा किये गए नवाचारों की जानकारी देने के लिये 'मतदाता जागरूकता अभियान' प्रारंभ करने का निर्देश दिया। - उन्होंने अधिकारियों को 'मतदाता जागरूकता अभियान' के तहत मतदाताओं को प्रेरित/जागरूक करने के लिये स्थानीय महाविद्यालयों/ विश्वविद्यालयों से कुछ विद्यार्थियों को, जो कि नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं, को कैंपस एंबेसडर नियुक्त करने का निर्देश भी दिया। - कैंपस एंबेसडर का चयन ज़िला निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनकी निष्पक्ष, स्वच्छ एवं गैर-राजनीतिक छवि को चिह्नित कर महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों के प्राचार्य, उप-कुलपति द्वारा प्रदान की गई सूची के आधार पर किया जाएगा। - ज़िला निर्वाचन अधिकारी अपने स्तर पर एन.सी.सी./एन.एस.एस. के सहयोग से भी नियुक्ति कर सकते हैं। महाविद्यालयों में दो कैंपस एंबेसडर का चयन किया जाएगा। - कैंपस एंबेसडर की संबद्धता किसी भी राजनीतिक दल या उनकी संलग्नता किसी राजनीतिक गतिविधि में नहीं होनी चाहिये। कैंपस एंबेसडर के परिवार का संबंध किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक गतिविधि से नहीं होना चाहिये। - कैंपस एंबेसडर के विरुद्ध आचरण एवं व्यवहार संबंधी किसी भी तरह की शिकायत प्राप्त होने की स्थिति में संस्था प्रमुख तत्काल जाँच कर उपयुक्त कार्यवाही करेंगे। प्रत्येक कैंपस एंबेसडर का पुलिस सत्यापन ज़िला प्रशासन द्वारा किया जाना अनिवार्य होगा। - कैंपस एंबेसडर मतदाताओं को मतदान की प्रक्रिया तिथियों तथा आयोग द्वारा किये गए विभिन्न नवाचारों आदि की जानकारी देंगे। स्कॉउट-गाइड, राष्ट्रीय सेवा योजना , राष्ट्रीय कैडेट कोर एवं अशासकीय संगठनों के साथ समन्वय कर मतदाता जागरूकता में उनका सहयोग प्राप्त करेंगे। - मतदाता जागरूकता अभियान की गतिविधियों के संचालन के लिये सक्रिय सदस्यों का एक दल बनाकर मतदाताओं को जागरूक करेंगे। - ज़िला निर्वाचन अधिकारी कैंपस एंबेसडर की नियुक्ति के पश्चात् उन्हें उनकी भूमिका, दायित्वों, उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यों, गतिविधियों, लक्ष्यों, संभावित उपलब्धियों तथा कार्ययोजनाओं से अवगत कराएंगे तथा उन्हें संक्षिप्त प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। ज़िला निर्वाचन अधिकारी कैंपस एंबेसडर को मतदाता जागरूकता अभियान कार्य के लिये यथायोग्य सामग्री, मार्गदर्शन एवं सहयोग देंगे। - ज़िला निर्वाचन अधिकारी समय-समय पर संपन्न की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों का आकलन करेंगे एवं प्रतिवेदन प्राप्त करेंगे। SENSE की गतिविधियों के लिये नियुक्त किये गए नोडल अधिकारी समय-समय पर प्रतिवेदन आयोग को भेजेंगे। - ज़िला स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले कैंपस एंबेसडर को चिह्नित कर उनके नाम की अनुशंसा की जाएगी तथा राष्ट्रीय पर्व पर आयोजित समारोह में प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
रायपुर। ठंड के दिनों में होने वाले चुनाव ने प्रदेश के सियासी पारे को अभी से गर्मा दिया है. जैसे-जैसे मतदान के दिन नजदीक आते जा रहे हैं, छत्तीसगढ़ में चुनावी हलचल तेज होते जा रही है. आने वाले दिनों में प्रदेश में और भी ज्यादा गहमा-गहमी देखने को मिल सकती है. हम आपको हर रोज दिनभर की ताजातरीन और बड़ी घटनाओं से रूबरू कराने जा रहे हैं. प्रदेश के सबसे विश्वसनीय और सबसे तेज वेब न्यूज पोर्टल लल्लूराम डॉट कॉम में. जिसके तहत हर रोज रात में आपको प्रदेश की सारी प्रमुख राजनीतिक गतिविधियां और घटनाएं आपके मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर देखने को मिल जाएगी. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बहुजन समाज पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया महागठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी चार दिनों तक बस्तर प्रवास पर रहेंगे. रविवार से शुरू हो रहे प्रवास के दौरान वे 8 विधानसभा में सभा करेंगे. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश प्रवक्ता सुब्रत डे ने कहा कि अजीत जोगी अपने चार दिवसीय प्रवार के दौरान 6 विधानसभा - चित्रकोट, जगदलपुर, नारायणपुर, भानुप्रतापपुर, बीजापुर और बस्तर से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रत्याशियो का और 2 विधानसभा - दंतेवाड़ा एवं कोंटा में सीपीआई के प्रत्याशियो के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. कांग्रेस के दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा दंतेवाड़ा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ रही अपनी मां और वर्तमान विधायक देवती कर्मा को चुनौती देंगे. समाजवादी पार्टी ने रविवार को विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की. समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशियों में प्रथम चरण के चुनाव के लिए दंतेवाड़ा से छविंद्र कर्मा, बीजापुर से संतोष पुनेम, जगदलपुर से विमलेश दुबे और दूसरे चरण में होने वाले चुनाव के लिए रायपुर पश्चिम से नवीन गुप्ता, बसना से यागेन्द्र भोई, अलकतरा से जीवन सिंह यादव, पामगढ़ से मुकेश लहरे, कोरबा से अमरनाथ अग्रवाल, वैशाली नगर से सूबेदार सिंह शामिल हैं. गोंगपा ने भी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. गोंगपा प्रदेश में 60 सीटों में चुनाव लड़ने जा रही है. गोंगपा की ओर से जारी सूची में पाली तानाखार से हीरा सिंह मरकाम, बैकुंठपुर से संजय सिंह कमरो, भरतपुर-सोनहत से श्याम सिंह मरकाम, मरवाही से ऋतु पन्द्राम, सक्ति से कलेश्वर मरावी, पत्थलगांव से लालेश्वर जगत, कुनकुरी से श्यामसुंदर मरावी और रामानुजगंज सुखराज पोया को शामिल किया गया है. टिकट बंटवारे को लेकर ब्रिन्द्रानवागढ़ में गम का माहौल बना हुआ है. दरअसल टिकट बंटवारे में भाजपा ने बिन्द्रानवागढ़ सिटिंग एमएलए संसदीय सचिव गोवर्धन माँझी की टिकट काट कर पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी पर भरोसा जताया है. अंतिम समय तक टिकट मिलने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त गोवर्धन मांझी समेत अन्य दावेदार भारी आहत नजर आ रहे हैं. गोवर्धन मांझी डमरुधर पुजारी पर आरोपो की झड़ी लगा दी. उन्होंने कहा कि पिछली चुनाव में पुजारी विरोधी गुट के प्रत्याशी का प्रचार कर रहे थे. इसकी प्रमाणिक रिपोर्ट संगठन को किया गया था. इतना ही नहीं पार्टी से निष्कासित सोहन पोटाई के साथ सरकार विरोधी आंदोलन का नेतृत्व भी किया. इस रैली में मुख्यमंत्री मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए थे. धुरुवागुड़ी में चक्का जाम भी किया गया. बीते पांच सालों में संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों में पूरी तरह निष्क्रिय रहे. इन सभी बातों की जानकारी संगठन के पास भी थी, बावजूद उसके ऐसे व्यक्ति पर भरोसा किया गया. इससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा.
रायपुर। ठंड के दिनों में होने वाले चुनाव ने प्रदेश के सियासी पारे को अभी से गर्मा दिया है. जैसे-जैसे मतदान के दिन नजदीक आते जा रहे हैं, छत्तीसगढ़ में चुनावी हलचल तेज होते जा रही है. आने वाले दिनों में प्रदेश में और भी ज्यादा गहमा-गहमी देखने को मिल सकती है. हम आपको हर रोज दिनभर की ताजातरीन और बड़ी घटनाओं से रूबरू कराने जा रहे हैं. प्रदेश के सबसे विश्वसनीय और सबसे तेज वेब न्यूज पोर्टल लल्लूराम डॉट कॉम में. जिसके तहत हर रोज रात में आपको प्रदेश की सारी प्रमुख राजनीतिक गतिविधियां और घटनाएं आपके मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर देखने को मिल जाएगी. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ बहुजन समाज पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया महागठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी चार दिनों तक बस्तर प्रवास पर रहेंगे. रविवार से शुरू हो रहे प्रवास के दौरान वे आठ विधानसभा में सभा करेंगे. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता सुब्रत डे ने कहा कि अजीत जोगी अपने चार दिवसीय प्रवार के दौरान छः विधानसभा - चित्रकोट, जगदलपुर, नारायणपुर, भानुप्रतापपुर, बीजापुर और बस्तर से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रत्याशियो का और दो विधानसभा - दंतेवाड़ा एवं कोंटा में सीपीआई के प्रत्याशियो के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. कांग्रेस के दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा दंतेवाड़ा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ रही अपनी मां और वर्तमान विधायक देवती कर्मा को चुनौती देंगे. समाजवादी पार्टी ने रविवार को विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की. समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशियों में प्रथम चरण के चुनाव के लिए दंतेवाड़ा से छविंद्र कर्मा, बीजापुर से संतोष पुनेम, जगदलपुर से विमलेश दुबे और दूसरे चरण में होने वाले चुनाव के लिए रायपुर पश्चिम से नवीन गुप्ता, बसना से यागेन्द्र भोई, अलकतरा से जीवन सिंह यादव, पामगढ़ से मुकेश लहरे, कोरबा से अमरनाथ अग्रवाल, वैशाली नगर से सूबेदार सिंह शामिल हैं. गोंगपा ने भी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. गोंगपा प्रदेश में साठ सीटों में चुनाव लड़ने जा रही है. गोंगपा की ओर से जारी सूची में पाली तानाखार से हीरा सिंह मरकाम, बैकुंठपुर से संजय सिंह कमरो, भरतपुर-सोनहत से श्याम सिंह मरकाम, मरवाही से ऋतु पन्द्राम, सक्ति से कलेश्वर मरावी, पत्थलगांव से लालेश्वर जगत, कुनकुरी से श्यामसुंदर मरावी और रामानुजगंज सुखराज पोया को शामिल किया गया है. टिकट बंटवारे को लेकर ब्रिन्द्रानवागढ़ में गम का माहौल बना हुआ है. दरअसल टिकट बंटवारे में भाजपा ने बिन्द्रानवागढ़ सिटिंग एमएलए संसदीय सचिव गोवर्धन माँझी की टिकट काट कर पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी पर भरोसा जताया है. अंतिम समय तक टिकट मिलने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त गोवर्धन मांझी समेत अन्य दावेदार भारी आहत नजर आ रहे हैं. गोवर्धन मांझी डमरुधर पुजारी पर आरोपो की झड़ी लगा दी. उन्होंने कहा कि पिछली चुनाव में पुजारी विरोधी गुट के प्रत्याशी का प्रचार कर रहे थे. इसकी प्रमाणिक रिपोर्ट संगठन को किया गया था. इतना ही नहीं पार्टी से निष्कासित सोहन पोटाई के साथ सरकार विरोधी आंदोलन का नेतृत्व भी किया. इस रैली में मुख्यमंत्री मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए थे. धुरुवागुड़ी में चक्का जाम भी किया गया. बीते पांच सालों में संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों में पूरी तरह निष्क्रिय रहे. इन सभी बातों की जानकारी संगठन के पास भी थी, बावजूद उसके ऐसे व्यक्ति पर भरोसा किया गया. इससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा.
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के ये आरक्षित लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की उन सीटों में शामिल है, जिन्हें समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (BJP) से छीनना चाहता ही. इस सीट पर 2014 से पहले 15 सालों तक बारी-बारी से एसपी और बीएसपी ने राज किया. लेकिन 2014 आम चुनावों की मोदी लहर में बीजेपी ने यहां वापसी कर ली. बीजेपी पहले लगातार दो बार 1996 और 1998 में यहां कब्जा जमा चुकी हैं. लेकिन 1998 के बाद बीजेपी को यहां जीत नसीब नहीं हुई थी. पर अब जब बीजेपी ने 2014 में यहां दोबारा वापसी कर ली तो वह फिर से चुनाव जीतने के फिराक में रहेगी. जबकि सपा और बसपा किसी हाल में अपनी खोई साख वापस पाने की जंग लड़ेंगे. मछलीशहर में बीजेपी ने इस बार पिछले साल के बसपा प्रत्याशी को ही अपना टिकट दिया है. उन्होंने कुछ समय पहले ही बीजेपी ज्वाइन की थी. 2019 के आम चुनाव में वीपी सरोज दूसरे नंबर रहे थे. ऐसे में बीजेपी विरोधी खेमे के नेता को ही अपना बनाकर गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गठबंधन ने इस बार टी राम को अपना उम्मीदवार बनाया है. जबकि यहां जन अधिकार पार्टी भी मैदान में है. इसके अउम्मीदवार अमरनाथ पासवान दोनों ही पार्टियों के वोट काटने की क्षमता रखते हैं. यहां लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण में अगामी 12 मई को वोट डाले जाएंगे. बीजेपी ने अपने उम्मीदवार को एक रणनीति के तहत हटाया है. क्योंकि विरोधी खेमे के नेता को अपनी पाली में लाने की यही कीमत चुकानी पड़ी हो, ऐसा हो सकता है. लेकिन पिछले आम चुनाव के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो बीजेपी के राम चरित्र निषाद 438210, दूसरे नंबर पर बसपा के वीपी सरोज 266055 वोट, सपा के तूफानी को 191387 वोट और कांग्रेस को तूफानी निषाद को 36275 वोट मिले थे. ऐसे में अगर पहले और दूसरे नंबर के बीच अंतर को देखें तो यह दो लाख से ज्यादा का था. साल 2011 में जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें मछलीशहर तहसील की कुल जनसंख्या 7,36,209 थी. इनमें 3,75,252 महिलाएं और 7,36,209 पुरुष थे. हालांकि मछलीशहर संसदीय क्षेत्र की कुल आबादी का 22. 7% यानी 166,766 लोग अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं. हालांकि बात हिन्दी व मुस्लिम आबादी में फर्क ढूंढ़ें तो 90. 61 हिंदू और 8. 9% मुस्लिम आबादी है. मछलीशहर लोकसभा सीट के अंतरगत पांच विधानसभा क्षेत्र मछलीशहर, मरियाहू, जाफराबाद, केराकत और पिंडरा आते हैं. .
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के ये आरक्षित लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की उन सीटों में शामिल है, जिन्हें समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी से छीनना चाहता ही. इस सीट पर दो हज़ार चौदह से पहले पंद्रह सालों तक बारी-बारी से एसपी और बीएसपी ने राज किया. लेकिन दो हज़ार चौदह आम चुनावों की मोदी लहर में बीजेपी ने यहां वापसी कर ली. बीजेपी पहले लगातार दो बार एक हज़ार नौ सौ छियानवे और एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में यहां कब्जा जमा चुकी हैं. लेकिन एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के बाद बीजेपी को यहां जीत नसीब नहीं हुई थी. पर अब जब बीजेपी ने दो हज़ार चौदह में यहां दोबारा वापसी कर ली तो वह फिर से चुनाव जीतने के फिराक में रहेगी. जबकि सपा और बसपा किसी हाल में अपनी खोई साख वापस पाने की जंग लड़ेंगे. मछलीशहर में बीजेपी ने इस बार पिछले साल के बसपा प्रत्याशी को ही अपना टिकट दिया है. उन्होंने कुछ समय पहले ही बीजेपी ज्वाइन की थी. दो हज़ार उन्नीस के आम चुनाव में वीपी सरोज दूसरे नंबर रहे थे. ऐसे में बीजेपी विरोधी खेमे के नेता को ही अपना बनाकर गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गठबंधन ने इस बार टी राम को अपना उम्मीदवार बनाया है. जबकि यहां जन अधिकार पार्टी भी मैदान में है. इसके अउम्मीदवार अमरनाथ पासवान दोनों ही पार्टियों के वोट काटने की क्षमता रखते हैं. यहां लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के छठे चरण में अगामी बारह मई को वोट डाले जाएंगे. बीजेपी ने अपने उम्मीदवार को एक रणनीति के तहत हटाया है. क्योंकि विरोधी खेमे के नेता को अपनी पाली में लाने की यही कीमत चुकानी पड़ी हो, ऐसा हो सकता है. लेकिन पिछले आम चुनाव के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो बीजेपी के राम चरित्र निषाद चार लाख अड़तीस हज़ार दो सौ दस, दूसरे नंबर पर बसपा के वीपी सरोज दो लाख छयासठ हज़ार पचपन वोट, सपा के तूफानी को एक लाख इक्यानवे हज़ार तीन सौ सत्तासी वोट और कांग्रेस को तूफानी निषाद को छत्तीस हज़ार दो सौ पचहत्तर वोट मिले थे. ऐसे में अगर पहले और दूसरे नंबर के बीच अंतर को देखें तो यह दो लाख से ज्यादा का था. साल दो हज़ार ग्यारह में जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें मछलीशहर तहसील की कुल जनसंख्या सात,छत्तीस,दो सौ नौ थी. इनमें तीन,पचहत्तर,दो सौ बावन महिलाएं और सात,छत्तीस,दो सौ नौ पुरुष थे. हालांकि मछलीशहर संसदीय क्षेत्र की कुल आबादी का बाईस. सात% यानी एक सौ छयासठ,सात सौ छयासठ लोग अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं. हालांकि बात हिन्दी व मुस्लिम आबादी में फर्क ढूंढ़ें तो नब्बे. इकसठ हिंदू और आठ. नौ% मुस्लिम आबादी है. मछलीशहर लोकसभा सीट के अंतरगत पांच विधानसभा क्षेत्र मछलीशहर, मरियाहू, जाफराबाद, केराकत और पिंडरा आते हैं. .
हॉलीवुड अभिनेता मैथ्यू मैकॉन्गे की पत्नी और ब्राजीलियाई मॉडल कामिला एल्विस को अमेरिका की नागरिकता मिल गई है। ब्राजील के इटांबाचुरी में जन्मी कामिला को अमेरिका में 18 सालों के प्रवास के बाद अमेरिकी नागरिकता मिली। वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके' के अनुसार, कामिला जब 15 साल की थीं, तब वह अपनी आंटी से मिलने के लिए अमेरिका आया करती थीं और इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में बसने का फैसला किया था। कामिला को अमेरिकी नागरिकता दिए जाने के दौरान मैकॉन्गे अपने तीन बच्चों लेवी, वीडा और लिविंग्स्टन के साथ उनकी हौसलाअफजाई के लिए मौजूद थे। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
हॉलीवुड अभिनेता मैथ्यू मैकॉन्गे की पत्नी और ब्राजीलियाई मॉडल कामिला एल्विस को अमेरिका की नागरिकता मिल गई है। ब्राजील के इटांबाचुरी में जन्मी कामिला को अमेरिका में अट्ठारह सालों के प्रवास के बाद अमेरिकी नागरिकता मिली। वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके' के अनुसार, कामिला जब पंद्रह साल की थीं, तब वह अपनी आंटी से मिलने के लिए अमेरिका आया करती थीं और इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में बसने का फैसला किया था। कामिला को अमेरिकी नागरिकता दिए जाने के दौरान मैकॉन्गे अपने तीन बच्चों लेवी, वीडा और लिविंग्स्टन के साथ उनकी हौसलाअफजाई के लिए मौजूद थे। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
शाहजहांपुर - बेग हॉस्पिटल ने वो कर दिखाया जो कोई ना कर पाया। बेग हॉस्पिटल के सर्जन डाक्टर मोo इशहाक़ बेग ने बताया कि जलालाबाद के रहने बाले साजिद जो कि एक ऐसे मरीज हैं जो कि लगभग दस हजार लोगों में एक मरीज पाया जाता है। क्यूंकि ज्यादातर सभी लोगों में दिल बाईं तरफ होता है लेकिन उनके यहां भर्ती मरीज साजिद का दिल,फेफड़ा,लीवर और तिल्ली दाईं तरफ है। इसके बाबजूद मरीज साजिद की पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी। डाक्टर बेग ने बताया कि ऐसी विषम परिस्थिती में इस मरीज के आपरेशन को लगभग सभी डाक्टरों ने मना कर दिया था लेकिन बेग हॉस्पिटल के सर्जन डाक्टर मोo इशहाक बेग ने मरीज साजिद की पित्त की थैली का दुरवीन विधि द्वारा सफल आप्रेशन किया और ऊपर बाले के रहमो करम से मरीज साजिद आज स्वस्थ्य हैं। सफल आप्रेशन के बाद मरीज साजिद ने बेग हॉस्पिटल को शुक्रिया कहा।
शाहजहांपुर - बेग हॉस्पिटल ने वो कर दिखाया जो कोई ना कर पाया। बेग हॉस्पिटल के सर्जन डाक्टर मोo इशहाक़ बेग ने बताया कि जलालाबाद के रहने बाले साजिद जो कि एक ऐसे मरीज हैं जो कि लगभग दस हजार लोगों में एक मरीज पाया जाता है। क्यूंकि ज्यादातर सभी लोगों में दिल बाईं तरफ होता है लेकिन उनके यहां भर्ती मरीज साजिद का दिल,फेफड़ा,लीवर और तिल्ली दाईं तरफ है। इसके बाबजूद मरीज साजिद की पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी। डाक्टर बेग ने बताया कि ऐसी विषम परिस्थिती में इस मरीज के आपरेशन को लगभग सभी डाक्टरों ने मना कर दिया था लेकिन बेग हॉस्पिटल के सर्जन डाक्टर मोo इशहाक बेग ने मरीज साजिद की पित्त की थैली का दुरवीन विधि द्वारा सफल आप्रेशन किया और ऊपर बाले के रहमो करम से मरीज साजिद आज स्वस्थ्य हैं। सफल आप्रेशन के बाद मरीज साजिद ने बेग हॉस्पिटल को शुक्रिया कहा।
नागपुर- कोरोना के अलावा गलवान घाटी की घटनाओं से देशवासियों में चीन के खिलाफ रोष बढ गया है. आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विविध स्तर पर तैयार किए जा रहे है. इसी बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुडे विविध संगठनाओं ने भी कदम बढाना शुरु किया है. देशअंतर्गत उद्योगों को बढावा देने के लिए स्वदेशी को लेकर संघ परिवार जोर दे रही है. स्वदेशी के प्रसार के लिए डिजिटल जागरुकता पर भी जोर दिया जारहा है. स्वदेशी स्वालंबन अभियान के माध्यम से समाज के विविध स्तर पर जनजागृती की जा रही है. छोटे उद्योग व स्टार्टअप को समाज ने ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन देना चाहिए यह भूमिका संघ परिवार ने रखी है. बता दे कि, स्वदेशी को बढावा देने के लिए संघ परिवार की ओर से हमेशा अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है. लेकिन वैश्वीकरण के प्रभाव ने संघ परिवार पर अर्थव्यवस्था पर चीन की ओर से किए गए आक्रमण को तोडने में कामयाबी नहीं मिल पाएगी. सस्ते दरों में बिक्री के नाम पर चीन से आयत होने वाले अनेक वस्तुओं ने भारतीय बाजार को घेर लिया. डोकलाम में चीन की खुराफातों के बाद वर्ष २०१७ में संघ की ओर से चीन डे्रगन के खिलाफ देशभर में मुहित छेडी गई थी. सीमा पार खतरनाक साबित होने वाले चीन को आर्थिक रुप से झटका देने के लिए बीते मई माह से स्वदेशी स्वलंबन अभियान को गति दी गई. आने वाले दिनो में विविध त्यौहारों की चहल-पहल शुरु होने वाली है. इस दौरान विदेशी व विशेष तौर पर चीनी वस्तुओं की भरमार बाजार में दिखायी देती है. लेकिन इन त्योहांरो के दौर में विदेशी सामानो को टालने के संदर्भ में संघ परिवार की ओर से जनजागृति की जा रही है. स्वदेशी जागरण मंच सहित संघ परिवार की विविध संगठनाओं का इसमें समावेश किया गया है. कोरोना की वजह से प्रत्यक्ष घर-घर जाना टालते हुए डिजिटल प्लेटफार्म पर विशेष जोर दिया जा रहा है. स्वदेशी स्वालंबन अभियान के माध्यम से नागरिकों को स्वदेशी का उपयोग करने का आहवान किया जा रहा है. समाज के विविध मान्यवर व्यक्तियों के अलावा संगठन भी इसमें शामिल हुई है. यह जानकारी स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख अजय पतकी ने दी है.
नागपुर- कोरोना के अलावा गलवान घाटी की घटनाओं से देशवासियों में चीन के खिलाफ रोष बढ गया है. आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विविध स्तर पर तैयार किए जा रहे है. इसी बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुडे विविध संगठनाओं ने भी कदम बढाना शुरु किया है. देशअंतर्गत उद्योगों को बढावा देने के लिए स्वदेशी को लेकर संघ परिवार जोर दे रही है. स्वदेशी के प्रसार के लिए डिजिटल जागरुकता पर भी जोर दिया जारहा है. स्वदेशी स्वालंबन अभियान के माध्यम से समाज के विविध स्तर पर जनजागृती की जा रही है. छोटे उद्योग व स्टार्टअप को समाज ने ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन देना चाहिए यह भूमिका संघ परिवार ने रखी है. बता दे कि, स्वदेशी को बढावा देने के लिए संघ परिवार की ओर से हमेशा अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है. लेकिन वैश्वीकरण के प्रभाव ने संघ परिवार पर अर्थव्यवस्था पर चीन की ओर से किए गए आक्रमण को तोडने में कामयाबी नहीं मिल पाएगी. सस्ते दरों में बिक्री के नाम पर चीन से आयत होने वाले अनेक वस्तुओं ने भारतीय बाजार को घेर लिया. डोकलाम में चीन की खुराफातों के बाद वर्ष दो हज़ार सत्रह में संघ की ओर से चीन डे्रगन के खिलाफ देशभर में मुहित छेडी गई थी. सीमा पार खतरनाक साबित होने वाले चीन को आर्थिक रुप से झटका देने के लिए बीते मई माह से स्वदेशी स्वलंबन अभियान को गति दी गई. आने वाले दिनो में विविध त्यौहारों की चहल-पहल शुरु होने वाली है. इस दौरान विदेशी व विशेष तौर पर चीनी वस्तुओं की भरमार बाजार में दिखायी देती है. लेकिन इन त्योहांरो के दौर में विदेशी सामानो को टालने के संदर्भ में संघ परिवार की ओर से जनजागृति की जा रही है. स्वदेशी जागरण मंच सहित संघ परिवार की विविध संगठनाओं का इसमें समावेश किया गया है. कोरोना की वजह से प्रत्यक्ष घर-घर जाना टालते हुए डिजिटल प्लेटफार्म पर विशेष जोर दिया जा रहा है. स्वदेशी स्वालंबन अभियान के माध्यम से नागरिकों को स्वदेशी का उपयोग करने का आहवान किया जा रहा है. समाज के विविध मान्यवर व्यक्तियों के अलावा संगठन भी इसमें शामिल हुई है. यह जानकारी स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख अजय पतकी ने दी है.
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः सिनेमा जगत से एक दुखद खबर सामने आ रही है। पॉपुलर क्लासिकल डांसर और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित कनक रेले का 85 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ है। उनके निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री गमगीन है।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः सिनेमा जगत से एक दुखद खबर सामने आ रही है। पॉपुलर क्लासिकल डांसर और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित कनक रेले का पचासी साल की उम्र में निधन हो गया है। उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ है। उनके निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री गमगीन है।
नई दिल्लीः तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा को रोकने के मकसद से लाया गया मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक, 2018 गुरुवार को लोकसभा में पास हो गया. 5 घंटे चली चर्चा के बाद विधेयक के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े, जबकि वोटिंग के दौरान कांग्रेस, एआईएडीएमके, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने वॉक आउट कर दिया. लोकसभा में तीन तलाक विधेयक के पारित होने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर चला. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस को बिल का समर्थन नहीं करने के लिए माफी मांगनी चाहिए. वहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति करने का आरोप लगाया. कांग्रेस समेत विपक्षी दल विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग कर रहे थे. लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित होने को मुस्लिम महिलाओं की समानता और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम करार देते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मांग की है कि कांग्रेस दशकों तक अन्याय के लिये माफी मांगे. शाह ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को लोकसभा में सफलतापूर्वक तीन तलाक विधेयक पारित होने के लिये बधाई दी और कहा कि यह "मुस्लिम महिलाओं की समानता और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है. " उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ दशकों तक अन्याय के लिये कांग्रेस और अन्य दलों को निश्चित रूप से माफी मांगनी चाहिए. विधेयक को संविधान और मौलिक अधकारों के खिलाफ करार देते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने 2019 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए हड़बड़ी में इसे लोकसभा में पारित कराया. लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि आने वाले चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद से बीजेपी लोकसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिये बेकरार थी.
नई दिल्लीः तीन तलाक की प्रथा को रोकने के मकसद से लाया गया मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक, दो हज़ार अट्ठारह गुरुवार को लोकसभा में पास हो गया. पाँच घंटाटे चली चर्चा के बाद विधेयक के पक्ष में दो सौ पैंतालीस और विरोध में ग्यारह वोट पड़े, जबकि वोटिंग के दौरान कांग्रेस, एआईएडीएमके, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने वॉक आउट कर दिया. लोकसभा में तीन तलाक विधेयक के पारित होने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर चला. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस को बिल का समर्थन नहीं करने के लिए माफी मांगनी चाहिए. वहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति करने का आरोप लगाया. कांग्रेस समेत विपक्षी दल विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग कर रहे थे. लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित होने को मुस्लिम महिलाओं की समानता और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम करार देते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मांग की है कि कांग्रेस दशकों तक अन्याय के लिये माफी मांगे. शाह ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को लोकसभा में सफलतापूर्वक तीन तलाक विधेयक पारित होने के लिये बधाई दी और कहा कि यह "मुस्लिम महिलाओं की समानता और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है. " उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ दशकों तक अन्याय के लिये कांग्रेस और अन्य दलों को निश्चित रूप से माफी मांगनी चाहिए. विधेयक को संविधान और मौलिक अधकारों के खिलाफ करार देते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने दो हज़ार उन्नीस के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए हड़बड़ी में इसे लोकसभा में पारित कराया. लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि आने वाले चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद से बीजेपी लोकसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिये बेकरार थी.
Gopal Das Neeraj Birth Anniversary : कवि होना क्या ईश्वर प्रदत्त है या प्राकृतिक रूप से उत्पन्न किसी प्रतिभा विशेष का कोई अभ्यास? कविता और कला के संदर्भ में आपने इस विषय पर पहले कुछ सुना-पढ़ा जरूर होगा. कुछ पश्चिम विचारकों की राय यह है कि कविता में 10 फीसदी प्रकृति प्रदत्त प्रतिभा का योगदान होता है जबकि 90 फीसदी परिश्रम अथवा अभ्यास का. अब यहां विचारणीय यह है कि 10 फीसदी का पता कैसे चले और प्रश्न यह है कि पता चल भी जाए तो 90 फीसदी परिश्रम अथवा अभ्यास कौन करता है, इसका पता कैसे चले? ऐसा नहीं है कि इन सवालों के उत्तर नहीं हैं. इसके लिए आप पश्चिमी काव्य सिद्धांतों का अनुशीलन कर सकते हैं और उलझते-सुलझते हुए किसी संतोषजनक बिंदु तक पहुंच भी सकते हैं. मैं यहां भाषा विज्ञान व भाषा दर्शन के हवाले से कुछ पहलुओं को उकेरना चाहता हूं. गोपालदास नीरज स्वयं शृंगार के कवि के रूप में एक सुदीर्घ यात्रा कर गए इसलिए स्वाभाविक है कि पहले चरण में वह आत्मा के सौंदर्य का उल्लेख कर रहे हैं. सौंदर्य की परिकल्पना कालिदास से होते हुए अंग्रेजी साहित्य के रोमांसिज़्म दौर तक पहुंचती है, जहां वर्ड्सवर्थ और शैली जैसे कवियों के नाम मिलते हैं और फिर हिन्दी साहित्य के मध्यकाल से होती हुई छायावादी काव्य तक पहुंचती है. इस परिदृश्य से इतर, मैं सौंदर्य शब्द को सतत परिष्कार रूप में ग्रहण करना चाहता हूं. आत्मा के परिष्कार की अवधारणा ग्रहण करने से बात अपनी पूरी प्राचीनता के साथ उत्तर आधुनिक समय के संदर्भों से भी जुड़ जाती है. अब दोहे की दूसरी पंक्ति पर विचार करें. भाग्य की अवधारणा से स्पष्ट हो जाता है कि नीरज जी किसी ईश्वरीय शक्ति की कृपा को स्वीकार कर रहे हैं. 'कवि होना...' होना- यह शब्द संकेत है कि कवि होता है, बनता नहीं है. जैसे आप मानव होते हैं, मानव रूप में जन्मते हैं, आप मानव बनते नहीं हैं. यह और बात है कि किसी प्रकरण में मानवीय गुणों का लोप होना पाया जाए. अंततः बात भाग्य और सौभाग्य की. नीरज जी मंच के कवि जरूर रहे हैं लेकिन उनकी गंभीरता किसी शक के दायरे में नहीं रही. उन्होंने ऐसा कहा है तो यह कोई हवा-हवाई गल्प तो नहीं होगा. वह किस रहस्य तक पहुंचे हैं? कौन-सा सत्य उनके सामने खुल गया है, जिसके कारण वह कवि होने को सौभाग्य निरूपित करने को विवश हुए हैं? पुस्तक समीक्षाः कहानियों के 'सुल्तान' हैं कथाकार सुदर्शन! यश, धन, कीर्ति एवं स्वीकार्यता, यह सब नीरज जी को कविता के माध्यम से प्राप्त है. तो क्या इसलिए वह ऐसा कह रहे हैं? यदि हां तो यह सब कुछ तो किसी और को कविता के अलावा व्यापार, मनोरंजन, विज्ञान या अन्य माध्यमों से भी प्राप्त हो सकता है. ऐसे में, इसके पीछे कोई रहस्य अवश्य है जिसे खोजना चाहिए. विचार की धारा में बहते-उतरते हुए एक सत्य का मोती हाथ लग गया है. इस सत्य का उद्घाटन भाषा स्वयं कर रही है. प्रतिभा या ज्ञान के अनेक क्षेत्रों पर दृष्टि डालें - संगीत, शिल्प, गणित, विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा, लेखन आदि. ज्ञान के इन क्षेत्रों के लिए भाषा में उपर्युक्त शब्दों में कर्म प्रधान शब्द ही मौलिक हैं. इन मौलिक शब्दों से कर्ता शब्द बनते हैं जैसे संगीतज्ञ, शिल्पी, गणितज्ञ, वैज्ञानिक, दार्शनिक, चिकित्सक, लेखक आदि. अर्थात मूल में ये ज्ञान है जो इन्हें प्राप्त कर रहा है, समझ रहा है या इनका अनुशीलन कर रहा है, वह उस क्षेत्र का अनुयायी या कर्ता कहला रहा है. केवल एक शब्द है - 'कवि'. कवि शब्द से कविता या काव्य शब्द बन रहा है. कविता से कवितज्ञ या काव्य से काव्यज्ञ शब्द नहीं बन रहे हैं. थोड़ी उर्दू और थोड़ी अंग्रेजी जानता हूं और आश्चर्यचकित रह गया हूं कि यह रहस्य इन दोनों भाषाओं में भी छुपा हुआ है. POET से POETRY बन रहा है और शायर से शायरी. PHILOSOPHY, SCIENCE, ART आदि शब्दों से PHILLOSPHER, SCIENTIST और ARTIST जैसे कर्ता शब्द बनते हैं. उर्दू में भी फ़न से फ़नकार, फ़ल्सफ़ा से फ़ल्सफ़ी और अरूज़ से अरूज़ी जैसे शब्द बनते हैं. अर्थात कविता के संदर्भ में, कर्म नहीं कर्ता मौलिक है, प्रधान है. कवि जो सृजित कर रहा है, वह कविता है. अन्य में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि गणितज्ञ जो सिद्धांत दे रहा है, वह गणित है या दार्शनिक जो उद्घाटन कर रहा है वह दर्शन है. यहां स्थिति भिन्न है. गणित, दर्शन व अन्य ज्ञान प्रकृति में रहस्य रूप में ही सही, पहले ही विद्यमान हैं. जो इस ज्ञान तक पहुंच रहा है वह ज्ञानी है. मात्र कवि ही एक ऐसी प्रतिभा है जो पहले से विद्यमान किसी ज्ञान का रहस्योद्घाटन नहीं कर रहा है. वह रच रहा है, सृजन कर रहा है. वस्तुतः इसी कारण शास्त्रों में शब्द को ब्रह्म लिखा गया है क्योंकि शब्द में रचने का, सृजन कर पाने का गुण है. अस्तु, कवि होना सौभाग्य है क्योंकि कवि एक मौलिक सर्जक है. मानव होना भाग्य है क्योंकि मानव भी प्रजनन के माध्यम से रचना करता है, जो अन्य जीव भी करते हैं लेकिन इस सृजन के अतिरिक्त एक और सृजन कवि करता है. इस भूमिका के बाद स्वतः स्पष्ट है कि कवि वह है जो इस विराट् बोध को प्राप्त कर चुका है. कवि वह है, जो रच पा रहा है, सृजन कर पा रहा है. यदि पूर्व में हो चुकी रचना को ही किसी और प्रकार से अभिव्यक्त किया जा रहा है, तो वह कविता नहीं है. रचने का ढोंग संभव भी नहीं है. रचना एक वास्तविक क्रिया है. अर्थात कविता वह है, जो एक वास्तविक रचना है. यह रचना पाठक अथवा श्रेाता तक पहुंचकर उसके भीतर भी कुछ नया जोड़ती है. जो किसी और के अंतस में कुछ योग नहीं करती है, वह कविता नहीं है. पुनःश्च कवि होना सौभाग्य है परंतु, सौभाग्य का दंभ श्रेयस्कर नहीं है, कर्तव्य बोध एवं निर्वहन श्रेयस्कर है. .
Gopal Das Neeraj Birth Anniversary : कवि होना क्या ईश्वर प्रदत्त है या प्राकृतिक रूप से उत्पन्न किसी प्रतिभा विशेष का कोई अभ्यास? कविता और कला के संदर्भ में आपने इस विषय पर पहले कुछ सुना-पढ़ा जरूर होगा. कुछ पश्चिम विचारकों की राय यह है कि कविता में दस फीसदी प्रकृति प्रदत्त प्रतिभा का योगदान होता है जबकि नब्बे फीसदी परिश्रम अथवा अभ्यास का. अब यहां विचारणीय यह है कि दस फीसदी का पता कैसे चले और प्रश्न यह है कि पता चल भी जाए तो नब्बे फीसदी परिश्रम अथवा अभ्यास कौन करता है, इसका पता कैसे चले? ऐसा नहीं है कि इन सवालों के उत्तर नहीं हैं. इसके लिए आप पश्चिमी काव्य सिद्धांतों का अनुशीलन कर सकते हैं और उलझते-सुलझते हुए किसी संतोषजनक बिंदु तक पहुंच भी सकते हैं. मैं यहां भाषा विज्ञान व भाषा दर्शन के हवाले से कुछ पहलुओं को उकेरना चाहता हूं. गोपालदास नीरज स्वयं शृंगार के कवि के रूप में एक सुदीर्घ यात्रा कर गए इसलिए स्वाभाविक है कि पहले चरण में वह आत्मा के सौंदर्य का उल्लेख कर रहे हैं. सौंदर्य की परिकल्पना कालिदास से होते हुए अंग्रेजी साहित्य के रोमांसिज़्म दौर तक पहुंचती है, जहां वर्ड्सवर्थ और शैली जैसे कवियों के नाम मिलते हैं और फिर हिन्दी साहित्य के मध्यकाल से होती हुई छायावादी काव्य तक पहुंचती है. इस परिदृश्य से इतर, मैं सौंदर्य शब्द को सतत परिष्कार रूप में ग्रहण करना चाहता हूं. आत्मा के परिष्कार की अवधारणा ग्रहण करने से बात अपनी पूरी प्राचीनता के साथ उत्तर आधुनिक समय के संदर्भों से भी जुड़ जाती है. अब दोहे की दूसरी पंक्ति पर विचार करें. भाग्य की अवधारणा से स्पष्ट हो जाता है कि नीरज जी किसी ईश्वरीय शक्ति की कृपा को स्वीकार कर रहे हैं. 'कवि होना...' होना- यह शब्द संकेत है कि कवि होता है, बनता नहीं है. जैसे आप मानव होते हैं, मानव रूप में जन्मते हैं, आप मानव बनते नहीं हैं. यह और बात है कि किसी प्रकरण में मानवीय गुणों का लोप होना पाया जाए. अंततः बात भाग्य और सौभाग्य की. नीरज जी मंच के कवि जरूर रहे हैं लेकिन उनकी गंभीरता किसी शक के दायरे में नहीं रही. उन्होंने ऐसा कहा है तो यह कोई हवा-हवाई गल्प तो नहीं होगा. वह किस रहस्य तक पहुंचे हैं? कौन-सा सत्य उनके सामने खुल गया है, जिसके कारण वह कवि होने को सौभाग्य निरूपित करने को विवश हुए हैं? पुस्तक समीक्षाः कहानियों के 'सुल्तान' हैं कथाकार सुदर्शन! यश, धन, कीर्ति एवं स्वीकार्यता, यह सब नीरज जी को कविता के माध्यम से प्राप्त है. तो क्या इसलिए वह ऐसा कह रहे हैं? यदि हां तो यह सब कुछ तो किसी और को कविता के अलावा व्यापार, मनोरंजन, विज्ञान या अन्य माध्यमों से भी प्राप्त हो सकता है. ऐसे में, इसके पीछे कोई रहस्य अवश्य है जिसे खोजना चाहिए. विचार की धारा में बहते-उतरते हुए एक सत्य का मोती हाथ लग गया है. इस सत्य का उद्घाटन भाषा स्वयं कर रही है. प्रतिभा या ज्ञान के अनेक क्षेत्रों पर दृष्टि डालें - संगीत, शिल्प, गणित, विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा, लेखन आदि. ज्ञान के इन क्षेत्रों के लिए भाषा में उपर्युक्त शब्दों में कर्म प्रधान शब्द ही मौलिक हैं. इन मौलिक शब्दों से कर्ता शब्द बनते हैं जैसे संगीतज्ञ, शिल्पी, गणितज्ञ, वैज्ञानिक, दार्शनिक, चिकित्सक, लेखक आदि. अर्थात मूल में ये ज्ञान है जो इन्हें प्राप्त कर रहा है, समझ रहा है या इनका अनुशीलन कर रहा है, वह उस क्षेत्र का अनुयायी या कर्ता कहला रहा है. केवल एक शब्द है - 'कवि'. कवि शब्द से कविता या काव्य शब्द बन रहा है. कविता से कवितज्ञ या काव्य से काव्यज्ञ शब्द नहीं बन रहे हैं. थोड़ी उर्दू और थोड़ी अंग्रेजी जानता हूं और आश्चर्यचकित रह गया हूं कि यह रहस्य इन दोनों भाषाओं में भी छुपा हुआ है. POET से POETRY बन रहा है और शायर से शायरी. PHILOSOPHY, SCIENCE, ART आदि शब्दों से PHILLOSPHER, SCIENTIST और ARTIST जैसे कर्ता शब्द बनते हैं. उर्दू में भी फ़न से फ़नकार, फ़ल्सफ़ा से फ़ल्सफ़ी और अरूज़ से अरूज़ी जैसे शब्द बनते हैं. अर्थात कविता के संदर्भ में, कर्म नहीं कर्ता मौलिक है, प्रधान है. कवि जो सृजित कर रहा है, वह कविता है. अन्य में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि गणितज्ञ जो सिद्धांत दे रहा है, वह गणित है या दार्शनिक जो उद्घाटन कर रहा है वह दर्शन है. यहां स्थिति भिन्न है. गणित, दर्शन व अन्य ज्ञान प्रकृति में रहस्य रूप में ही सही, पहले ही विद्यमान हैं. जो इस ज्ञान तक पहुंच रहा है वह ज्ञानी है. मात्र कवि ही एक ऐसी प्रतिभा है जो पहले से विद्यमान किसी ज्ञान का रहस्योद्घाटन नहीं कर रहा है. वह रच रहा है, सृजन कर रहा है. वस्तुतः इसी कारण शास्त्रों में शब्द को ब्रह्म लिखा गया है क्योंकि शब्द में रचने का, सृजन कर पाने का गुण है. अस्तु, कवि होना सौभाग्य है क्योंकि कवि एक मौलिक सर्जक है. मानव होना भाग्य है क्योंकि मानव भी प्रजनन के माध्यम से रचना करता है, जो अन्य जीव भी करते हैं लेकिन इस सृजन के अतिरिक्त एक और सृजन कवि करता है. इस भूमिका के बाद स्वतः स्पष्ट है कि कवि वह है जो इस विराट् बोध को प्राप्त कर चुका है. कवि वह है, जो रच पा रहा है, सृजन कर पा रहा है. यदि पूर्व में हो चुकी रचना को ही किसी और प्रकार से अभिव्यक्त किया जा रहा है, तो वह कविता नहीं है. रचने का ढोंग संभव भी नहीं है. रचना एक वास्तविक क्रिया है. अर्थात कविता वह है, जो एक वास्तविक रचना है. यह रचना पाठक अथवा श्रेाता तक पहुंचकर उसके भीतर भी कुछ नया जोड़ती है. जो किसी और के अंतस में कुछ योग नहीं करती है, वह कविता नहीं है. पुनःश्च कवि होना सौभाग्य है परंतु, सौभाग्य का दंभ श्रेयस्कर नहीं है, कर्तव्य बोध एवं निर्वहन श्रेयस्कर है. .
मंडीः हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के बस अड्डे में एक 24 वर्षीय युवक को पुलिस ने चिट्टे की खेप समेत गिरफ्तार करने में सफलता हांसिल की है। पुलिस को यह सफलता उस समय मिल जब पुलिस की एक टीम बस अड्डे में गश्त पर थी। उसी दौराना पधर निवासी 24 वर्षीय युवक अनिल कुमार पुलिस को देखकर संदिग्ध हरकतें करने लगा पुलिस ने शक के अधार पर जब युवक की तलाशी ली तो उसके पास 21. 06 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। उधर एसपी मंडी शालिनी अगिनहोत्री ने बताया कि पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ छेडे अभियान में आज पुनिल टीम को एक और सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने बस अड्डे में एक युवक के कब्जे से उक्त चिट्टे के खेप बरामद की है। बताया जा रहा है कि युवक एक कालेज स्टूडेंट है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिमाचल पुलिस द्वारा नेश के खिलाफ छेडे अभियान में लगातार सफलता मिल रही है। जिला मंडी में भी पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान छेडा हुआ है। पिछले एक माह से पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है। इस कड़ी में आज एक युवक को चिट्टे की भारी मात्रा खेप में रंगे हाथों दबोचा गया है। फिलहाल पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। युवक जिला मंडी के पधर क्षेत्र का बताया जा रहा है। और मंडी में कॉलेज में पढ़ाई करता है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि युवक बस अड्डे में चिट्टे की खेप से सप्लाई करने आया हुआ था।
मंडीः हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के बस अड्डे में एक चौबीस वर्षीय युवक को पुलिस ने चिट्टे की खेप समेत गिरफ्तार करने में सफलता हांसिल की है। पुलिस को यह सफलता उस समय मिल जब पुलिस की एक टीम बस अड्डे में गश्त पर थी। उसी दौराना पधर निवासी चौबीस वर्षीय युवक अनिल कुमार पुलिस को देखकर संदिग्ध हरकतें करने लगा पुलिस ने शक के अधार पर जब युवक की तलाशी ली तो उसके पास इक्कीस. छः ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। उधर एसपी मंडी शालिनी अगिनहोत्री ने बताया कि पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ छेडे अभियान में आज पुनिल टीम को एक और सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने बस अड्डे में एक युवक के कब्जे से उक्त चिट्टे के खेप बरामद की है। बताया जा रहा है कि युवक एक कालेज स्टूडेंट है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिमाचल पुलिस द्वारा नेश के खिलाफ छेडे अभियान में लगातार सफलता मिल रही है। जिला मंडी में भी पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान छेडा हुआ है। पिछले एक माह से पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है। इस कड़ी में आज एक युवक को चिट्टे की भारी मात्रा खेप में रंगे हाथों दबोचा गया है। फिलहाल पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। युवक जिला मंडी के पधर क्षेत्र का बताया जा रहा है। और मंडी में कॉलेज में पढ़ाई करता है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि युवक बस अड्डे में चिट्टे की खेप से सप्लाई करने आया हुआ था।
नई दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट का दिल्ली के अस्पतालों में कोविड-19 के इलाज के लिए सिर्फ दिल्लीवासियों के फैसले को उप-राज्यपाल ने पलट दिया है. अब दिल्ली के अस्पतालों में बाहर से आए लोगों का इलाज हो सकेगा. रविवार को दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राज्य में कोविड-19 के बढ़ते मामले को देखते हुए फैसला लिया था कि दिल्ली के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही कोरोना का इलाज किया जाएगा. दिल्ली सरकार के इस फैसले की काफी आलोचना भी हो रही थी. उपराज्यपाल ने अधिकारियों से कहा है,' दिल्ली के निवासी नहीं होने के आधार पर किसी भी रोगी का इलाज से इनकार नहीं किया जाएगा यह सुनिश्चित किया जाए. ' बता दें कि दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल डीडीएमए के भी अध्यक्ष हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 सामुदायिक स्तर पर फैला है या नहीं इसकी समीक्षा करने के लिए मंगलवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की बैठक होगी. सिसोदिया ने ऑनलाइन माध्यम से मीडिया को बताया कि यदि दिल्ली में सामुदायिक स्तर पर विषाणु का प्रसार हो रहा है तो आम आदमी पार्टी सरकार को स्थिति से निपटने के लिए उसी के अनुसार रणनीति में बदलाव करना होगा. डीडीएमए के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सिसोदिया को अपने प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल होने को कहा है. इस बीच सोमवार सुबह खबर आई कि अरविंद केजरीवाल गले में खराश और हल्के बुखार के बाद खुद आइसोलेशन में चले गए हैं कल उनका कोरोना टेस्ट होना है. दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में सिर्फ शहर के निवासियों का इलाज होना चाहिए, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस हालिया घोषणा को लेकर उनकी आलोचना करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को कहा कि केजरीवाल को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए. मौर्य ने दावा किया कि आज से पहले या किसी राज्य सरकार ने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया होगा. गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को घोषणा की थी कि कोरोना संक्रमण महामारी के दौरान दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पताल केवल दिल्ली के लोगों का इलाज करेंगे. केजरीवाल ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के लिए इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होगा और यदि दूसरे राज्यों के लोग कुछ विशिष्ट ऑपरेशनों के लिए दिल्ली आते हैं तो उन्हें निजी अस्पतालों में उपचार कराना होगा. मुख्यमंत्री की इस घोषणा से एक दिन पहले आप सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति ने सिफारिश की थी कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर शहर के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल केवल दिल्लीवालों के उपचार के लिए होना चाहिए.
नई दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट का दिल्ली के अस्पतालों में कोविड-उन्नीस के इलाज के लिए सिर्फ दिल्लीवासियों के फैसले को उप-राज्यपाल ने पलट दिया है. अब दिल्ली के अस्पतालों में बाहर से आए लोगों का इलाज हो सकेगा. रविवार को दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राज्य में कोविड-उन्नीस के बढ़ते मामले को देखते हुए फैसला लिया था कि दिल्ली के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही कोरोना का इलाज किया जाएगा. दिल्ली सरकार के इस फैसले की काफी आलोचना भी हो रही थी. उपराज्यपाल ने अधिकारियों से कहा है,' दिल्ली के निवासी नहीं होने के आधार पर किसी भी रोगी का इलाज से इनकार नहीं किया जाएगा यह सुनिश्चित किया जाए. ' बता दें कि दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल डीडीएमए के भी अध्यक्ष हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-उन्नीस सामुदायिक स्तर पर फैला है या नहीं इसकी समीक्षा करने के लिए मंगलवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक होगी. सिसोदिया ने ऑनलाइन माध्यम से मीडिया को बताया कि यदि दिल्ली में सामुदायिक स्तर पर विषाणु का प्रसार हो रहा है तो आम आदमी पार्टी सरकार को स्थिति से निपटने के लिए उसी के अनुसार रणनीति में बदलाव करना होगा. डीडीएमए के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सिसोदिया को अपने प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल होने को कहा है. इस बीच सोमवार सुबह खबर आई कि अरविंद केजरीवाल गले में खराश और हल्के बुखार के बाद खुद आइसोलेशन में चले गए हैं कल उनका कोरोना टेस्ट होना है. दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में सिर्फ शहर के निवासियों का इलाज होना चाहिए, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस हालिया घोषणा को लेकर उनकी आलोचना करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को कहा कि केजरीवाल को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए. मौर्य ने दावा किया कि आज से पहले या किसी राज्य सरकार ने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया होगा. गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को घोषणा की थी कि कोरोना संक्रमण महामारी के दौरान दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पताल केवल दिल्ली के लोगों का इलाज करेंगे. केजरीवाल ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के लिए इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होगा और यदि दूसरे राज्यों के लोग कुछ विशिष्ट ऑपरेशनों के लिए दिल्ली आते हैं तो उन्हें निजी अस्पतालों में उपचार कराना होगा. मुख्यमंत्री की इस घोषणा से एक दिन पहले आप सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति ने सिफारिश की थी कि कोविड-उन्नीस संकट के मद्देनजर शहर के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल केवल दिल्लीवालों के उपचार के लिए होना चाहिए.
विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद पार्टी नेतृत्व ने समीक्षा कराई। करीब दो माह तक इसकी समीक्षा कर सप्ताह भर पहले रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपी गई। इसमें कहा गया कि विधानसभा चुनाव में घोषित कई प्रत्याशियों के साथ पार्टी के कई पदाधिकारी पूरे मनोयोग से नहीं लगे। प्रयागराज, जागरण संवाददाता। समाजवादी पार्टी के 17 प्रकोष्ठों को ऐसे ही पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने भंग नहीं किया है। इसके पीछे बड़ी वजह है। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय की समीक्षा शुरू हुई और जब इसकी रिपोर्ट पार्टी मुखिया को सौंपी गई तो इसमें तमाम खामियों का जिक्र किया गया था। इन्हीं खामियों को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी प्रकोष्ठों को शनिवार सुबह भंग का दिया। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद पार्टी नेतृत्व ने इसकी समीक्षा कराई। करीब दो माह तक इसकी समीक्षा की गई और सप्ताह भर पहले इसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपी गई। इसमें कहा गया था कि विधानसभा चुनाव में घोषित कई प्रत्याशियों के साथ पार्टी के कई पदाधिकारी पूरे मनोयोग से नहीं लगे। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में कोई कार्य नहीं किया। सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। मतदाता सूची की खामियों को दूर कराने में भी उस स्तर पर रुचि नहीं ली गई, जिसकी अपेक्षा थी। महिला संगठन की बैठक भी औपचारिकता तक ही सीमित रही। इसके अलावा और भी कई खामियां बताई गईं। यही वजह रही कि कई जगह कम अंतर से पार्टी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 की अपेक्षा 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा की सीटें तो बढ़ीं, लेकिन नगर में खाता नहीं खुल पाया। वर्ष 2017 में सपा को मात्र एक सीट करछना मिली थी, लेकिन इस बार चार सीट मेजा, प्रतापपुर, हंडिया और सोरांव मिली। हालांकि, करछना की सीट बचाने में पार्टी विफल साबित हुई थी। नगर की दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी पर हार का सामना करना पड़ा था। इन तीनों सीट पर प्रत्याशियों की हार काफी अंतर से हुई थी, जबकि ग्रामीण इलाकों की सीट पर हार-जीत का अंतर कम था। 17 प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के नाम की घोषणा कब होगी, यह अभी तय नहीं है, लेकिन 15 जुलाई के भीतर ही इसकी घोषणा की बात सामने आ रही है। इसमें पुराने चेहरे तो नजर आएंगे, जबकि अधिकांश प्रकोष्ठों पर नए चेहरे पर दांव लगाया जाएगा। युवाओं के साथ ही उन कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया जाएगा, जो अभी तक किसी पद पर नहीं थे। इसके लिए कई नाम भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गए हैं। पार्टी के कद्दावर नेता रेवती रमण सिंह को राज्यसभा के लिए मैदान में न उतारने से पार्टी के काफी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। इसे लेकर नगर उपाध्यक्ष विजय वैश्य समेत कई ने इस्तीफा तक दे दिया था। वहीं भीतर ही भीतर रेवती रमण सिंह में भी नाराजगी देखने को मिली।
विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद पार्टी नेतृत्व ने समीक्षा कराई। करीब दो माह तक इसकी समीक्षा कर सप्ताह भर पहले रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपी गई। इसमें कहा गया कि विधानसभा चुनाव में घोषित कई प्रत्याशियों के साथ पार्टी के कई पदाधिकारी पूरे मनोयोग से नहीं लगे। प्रयागराज, जागरण संवाददाता। समाजवादी पार्टी के सत्रह प्रकोष्ठों को ऐसे ही पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने भंग नहीं किया है। इसके पीछे बड़ी वजह है। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय की समीक्षा शुरू हुई और जब इसकी रिपोर्ट पार्टी मुखिया को सौंपी गई तो इसमें तमाम खामियों का जिक्र किया गया था। इन्हीं खामियों को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी प्रकोष्ठों को शनिवार सुबह भंग का दिया। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद पार्टी नेतृत्व ने इसकी समीक्षा कराई। करीब दो माह तक इसकी समीक्षा की गई और सप्ताह भर पहले इसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपी गई। इसमें कहा गया था कि विधानसभा चुनाव में घोषित कई प्रत्याशियों के साथ पार्टी के कई पदाधिकारी पूरे मनोयोग से नहीं लगे। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में कोई कार्य नहीं किया। सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। मतदाता सूची की खामियों को दूर कराने में भी उस स्तर पर रुचि नहीं ली गई, जिसकी अपेक्षा थी। महिला संगठन की बैठक भी औपचारिकता तक ही सीमित रही। इसके अलावा और भी कई खामियां बताई गईं। यही वजह रही कि कई जगह कम अंतर से पार्टी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष दो हज़ार सत्रह की अपेक्षा दो हज़ार बाईस में हुए विधानसभा चुनाव में सपा की सीटें तो बढ़ीं, लेकिन नगर में खाता नहीं खुल पाया। वर्ष दो हज़ार सत्रह में सपा को मात्र एक सीट करछना मिली थी, लेकिन इस बार चार सीट मेजा, प्रतापपुर, हंडिया और सोरांव मिली। हालांकि, करछना की सीट बचाने में पार्टी विफल साबित हुई थी। नगर की दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी पर हार का सामना करना पड़ा था। इन तीनों सीट पर प्रत्याशियों की हार काफी अंतर से हुई थी, जबकि ग्रामीण इलाकों की सीट पर हार-जीत का अंतर कम था। सत्रह प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के नाम की घोषणा कब होगी, यह अभी तय नहीं है, लेकिन पंद्रह जुलाई के भीतर ही इसकी घोषणा की बात सामने आ रही है। इसमें पुराने चेहरे तो नजर आएंगे, जबकि अधिकांश प्रकोष्ठों पर नए चेहरे पर दांव लगाया जाएगा। युवाओं के साथ ही उन कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया जाएगा, जो अभी तक किसी पद पर नहीं थे। इसके लिए कई नाम भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गए हैं। पार्टी के कद्दावर नेता रेवती रमण सिंह को राज्यसभा के लिए मैदान में न उतारने से पार्टी के काफी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। इसे लेकर नगर उपाध्यक्ष विजय वैश्य समेत कई ने इस्तीफा तक दे दिया था। वहीं भीतर ही भीतर रेवती रमण सिंह में भी नाराजगी देखने को मिली।
इंदर, एक साल की दोस्ती में आपको उसके एटिट्यूड से कुछ अंदाजा लग गया होगा. अगर आपको उसका एटिट्यूड पॉजिटिव लगता है तो प्रपोज करने में प्रॉब्लम नहीं है. मेरी नई शादी हुई है और मैं अपनी वाइफ से बहुत प्यार करता हूं लेकिन प्यार को एक्सप्रेस नहीं कर पाता हूं. वह मुझे अनरोमांटिक समझती है. इस बात को लेकर कई बार मिसअंडरस्टैंडिंग क्रिएट हो जाती है. प्लीज कुछ रोमांटिक आइडियाज सजेस्ट करिए. ? दीपक, वाइफ को कभी-कभी एक रोमांटिक सा एसएमएस भेज दीजिए. छुट्टी के दिन डिनर तैयार करने में उसकी हेल्प कर सकते हैं. उसे फ्लावर्स या चॉकलेट दे सकते हैं. हां, एक बात और अपनी फीलिग्ंस को एक्सप्रेस करने से हिचकिचाइए नहीं. अभय, आप डाइवोर्सी हैं, ये बड़ा इश्यू नहीं है. लेकिन वह आपसे एज में बहुत छोटी है और अभी पढ़ रही है. कई बार गल्र्स बड़ी उम्र के गाएज की ओर अट्रैक्ट हो जाती हैं. ये उसका आपके लिए क्रश भी हो सकता है. आप पहले भी रिलेशनशिप में प्रॉब्लम फेस कर चुके हैं. दूसरी बार रिलेशनशिप में जाने से पहले बहुत सोच-समझकर डिसीजन लें. आप ट्रिकी सिचुएशन में फंस गए हैं. आप जिससे प्यार करते हैं, वह आपसे प्यार नहीं करती और जिसे आप प्यार नहीं करते हैं, वह आपसे प्यार करती है. खैर भावनाओं में बहने से काम नहीं चलेगा. आप उसे मना कर दीजिए. जो आपसे प्यार नहीं करता है उसके बारे में सोचना छोड़ दीजिए. राजीव, आपका उसके पास्ट से कोई मतलब नहीं होना चाहिए. जहां तक नहीं बताने की बात है तो हो सकता है कि किसी वजह से उसने शेयर नहीं किया हो. इस बात को लेकर ब्रेकअप करने का डिसीजन अच्छा नहीं है. इस बारे में आप दोनों बात कर सकते हैं.
इंदर, एक साल की दोस्ती में आपको उसके एटिट्यूड से कुछ अंदाजा लग गया होगा. अगर आपको उसका एटिट्यूड पॉजिटिव लगता है तो प्रपोज करने में प्रॉब्लम नहीं है. मेरी नई शादी हुई है और मैं अपनी वाइफ से बहुत प्यार करता हूं लेकिन प्यार को एक्सप्रेस नहीं कर पाता हूं. वह मुझे अनरोमांटिक समझती है. इस बात को लेकर कई बार मिसअंडरस्टैंडिंग क्रिएट हो जाती है. प्लीज कुछ रोमांटिक आइडियाज सजेस्ट करिए. ? दीपक, वाइफ को कभी-कभी एक रोमांटिक सा एसएमएस भेज दीजिए. छुट्टी के दिन डिनर तैयार करने में उसकी हेल्प कर सकते हैं. उसे फ्लावर्स या चॉकलेट दे सकते हैं. हां, एक बात और अपनी फीलिग्ंस को एक्सप्रेस करने से हिचकिचाइए नहीं. अभय, आप डाइवोर्सी हैं, ये बड़ा इश्यू नहीं है. लेकिन वह आपसे एज में बहुत छोटी है और अभी पढ़ रही है. कई बार गल्र्स बड़ी उम्र के गाएज की ओर अट्रैक्ट हो जाती हैं. ये उसका आपके लिए क्रश भी हो सकता है. आप पहले भी रिलेशनशिप में प्रॉब्लम फेस कर चुके हैं. दूसरी बार रिलेशनशिप में जाने से पहले बहुत सोच-समझकर डिसीजन लें. आप ट्रिकी सिचुएशन में फंस गए हैं. आप जिससे प्यार करते हैं, वह आपसे प्यार नहीं करती और जिसे आप प्यार नहीं करते हैं, वह आपसे प्यार करती है. खैर भावनाओं में बहने से काम नहीं चलेगा. आप उसे मना कर दीजिए. जो आपसे प्यार नहीं करता है उसके बारे में सोचना छोड़ दीजिए. राजीव, आपका उसके पास्ट से कोई मतलब नहीं होना चाहिए. जहां तक नहीं बताने की बात है तो हो सकता है कि किसी वजह से उसने शेयर नहीं किया हो. इस बात को लेकर ब्रेकअप करने का डिसीजन अच्छा नहीं है. इस बारे में आप दोनों बात कर सकते हैं.
अजमेर। राजस्थान में अजमेर शहर कांग्रेस समिति ने कांग्रेस प्रत्याशी रिजु झुनझुनवाला की ओर से चुनाव के लिए शुक्रवार को 'वचन पत्र' जारी किया। शहर अध्यक्ष विजय जैन और पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने आज यहां पत्रकारों को बताया कि चुनाव जीतने के बाद रिजु झुनझुनवाला पूरी निष्ठा और ईमानदारी से चुनाव के दौरान जिले में किए जा रहे वायदे पूरा करेंगे। झुनझुनवाला ने अपने वचन पत्र में अजमेर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान, मनरेगा में अब 150 दिन रोजगार की गारंटी के साथ साथ जिले में रोजगार और उद्यमशीलता, औद्योगिक विकास, सिचांई और जल प्रबंधन, कौशल विकास, अजमेर की आंतरिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुधारने का वचन दिया है। पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने कहा कि रिजु झुनझुनवाला की ओर से जारी इस वचन पत्र की पालना शहर कांग्रेस समिति कराएगी जिसके जरिए जिले की दशा बदल दी जाएगी। जैन ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि अजमेर शहर स्मार्ट सिटी योजना एक धोखा है। साथ ही कौशल विकास के नाम पर जिले में कुछ भी नहीं हुआ।
अजमेर। राजस्थान में अजमेर शहर कांग्रेस समिति ने कांग्रेस प्रत्याशी रिजु झुनझुनवाला की ओर से चुनाव के लिए शुक्रवार को 'वचन पत्र' जारी किया। शहर अध्यक्ष विजय जैन और पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने आज यहां पत्रकारों को बताया कि चुनाव जीतने के बाद रिजु झुनझुनवाला पूरी निष्ठा और ईमानदारी से चुनाव के दौरान जिले में किए जा रहे वायदे पूरा करेंगे। झुनझुनवाला ने अपने वचन पत्र में अजमेर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान, मनरेगा में अब एक सौ पचास दिन रोजगार की गारंटी के साथ साथ जिले में रोजगार और उद्यमशीलता, औद्योगिक विकास, सिचांई और जल प्रबंधन, कौशल विकास, अजमेर की आंतरिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुधारने का वचन दिया है। पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने कहा कि रिजु झुनझुनवाला की ओर से जारी इस वचन पत्र की पालना शहर कांग्रेस समिति कराएगी जिसके जरिए जिले की दशा बदल दी जाएगी। जैन ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि अजमेर शहर स्मार्ट सिटी योजना एक धोखा है। साथ ही कौशल विकास के नाम पर जिले में कुछ भी नहीं हुआ।
उड़ती-उड़ती खबरों के मुताबिक ज्वेलरी ब्रांड अग्नि को रा. वन के अनरिलीज्ड सांग, 'छम्मक छल्लो. . . ' को इल्लीगली यूज करने के लिए लीगल नोटिस भेजा जा चुका है. दरअसल अग्नि ने हाल ही में हुए इंडिया इंटरनेशनल ज्वेलरी वीक (IIJW) 2011 में इस गाने को चलाया था. यह गाना जो एकॉन ने गाया है फिल्म की लीडिंग लेडी करीना कपूर पर पिक्चराइज किया गया है. कुछ महीनों पहले यह गाना ऑनलाइन भी लीक हुआ था. पिछले हफ्ते मुम्बई में हुए इस इवेंट के दौरान ज्वेलरी ब्रांड अग्नि ने यह गाना अपने क्रिएशन के चौथे दिन पर प्ले किया था जिसमें एक्ट्रेस अमृता राव के साथ कुछ और मॉडल्स रैम्प पर चलती नजर आई थीं. टी-सीरीज, जिसके पास फिल्म की म्यूजिक राइट की रिस्पांसिबिलिटी है, ने ब्रांड को लीगल नोटिस भेजा है और कुल 2 करोड़ रुपए की रकम कम्पनसेशन के रूप में मांगी है.
उड़ती-उड़ती खबरों के मुताबिक ज्वेलरी ब्रांड अग्नि को रा. वन के अनरिलीज्ड सांग, 'छम्मक छल्लो. . . ' को इल्लीगली यूज करने के लिए लीगल नोटिस भेजा जा चुका है. दरअसल अग्नि ने हाल ही में हुए इंडिया इंटरनेशनल ज्वेलरी वीक दो हज़ार ग्यारह में इस गाने को चलाया था. यह गाना जो एकॉन ने गाया है फिल्म की लीडिंग लेडी करीना कपूर पर पिक्चराइज किया गया है. कुछ महीनों पहले यह गाना ऑनलाइन भी लीक हुआ था. पिछले हफ्ते मुम्बई में हुए इस इवेंट के दौरान ज्वेलरी ब्रांड अग्नि ने यह गाना अपने क्रिएशन के चौथे दिन पर प्ले किया था जिसमें एक्ट्रेस अमृता राव के साथ कुछ और मॉडल्स रैम्प पर चलती नजर आई थीं. टी-सीरीज, जिसके पास फिल्म की म्यूजिक राइट की रिस्पांसिबिलिटी है, ने ब्रांड को लीगल नोटिस भेजा है और कुल दो करोड़ रुपए की रकम कम्पनसेशन के रूप में मांगी है.
जानकारी के अनुसार कोलारस में स्टेशन रोड कोलारस संत फार्म कॉलोनी में निवास करने वाले अलेक्सिस तिर्की पटवारी उम्र 48 साल रोज की तरह रविवार को सोने गए थे। बताया जा रहा है कि रविवार की सुबह 4 बजे पटवारी तिर्की को अटैक आया,जब बिस्तर पर हलचल हुई तो पटवारी का बेटा प्रियांशु जाग गया और अपने पिता को तत्काल कोलारस के सरकारी अस्पताल में लेकर गए तो डॉक्टरों पटवारी अलेक्सुअस तिर्की को मृत घोषित कर दिया। पटवारी तिर्की पिछोर तहसील में पदस्थ थे और जसपुर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी है। कोलासर में संत फार्म कॉलोनी में स्वयं का मकान बनाकर रह रहे थे। बताया जा रहा है कि पटवारी अलेक्सुअस तिर्की की पत्नी प्रिस्का तिर्की उम्र 45 की मौत भी हार्ट अटैक से हुई थी। प्रिस्का तिर्की एकीकृत विद्यालय पचावली में शिक्षिका के रूप में पदस्थ थी। अचानक से पति -पत्नी की मौत से इस घर में दो बच्चे बडा लड़का प्रियांशु उम्र 22 साल जो कॉलेज में पढाई कर रहा है छोटी बेटी रोजमरी उम्र 12 साल जो 8वीं क्लास की स्टूडेंट ही रहे गए हैं।
जानकारी के अनुसार कोलारस में स्टेशन रोड कोलारस संत फार्म कॉलोनी में निवास करने वाले अलेक्सिस तिर्की पटवारी उम्र अड़तालीस साल रोज की तरह रविवार को सोने गए थे। बताया जा रहा है कि रविवार की सुबह चार बजे पटवारी तिर्की को अटैक आया,जब बिस्तर पर हलचल हुई तो पटवारी का बेटा प्रियांशु जाग गया और अपने पिता को तत्काल कोलारस के सरकारी अस्पताल में लेकर गए तो डॉक्टरों पटवारी अलेक्सुअस तिर्की को मृत घोषित कर दिया। पटवारी तिर्की पिछोर तहसील में पदस्थ थे और जसपुर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी है। कोलासर में संत फार्म कॉलोनी में स्वयं का मकान बनाकर रह रहे थे। बताया जा रहा है कि पटवारी अलेक्सुअस तिर्की की पत्नी प्रिस्का तिर्की उम्र पैंतालीस की मौत भी हार्ट अटैक से हुई थी। प्रिस्का तिर्की एकीकृत विद्यालय पचावली में शिक्षिका के रूप में पदस्थ थी। अचानक से पति -पत्नी की मौत से इस घर में दो बच्चे बडा लड़का प्रियांशु उम्र बाईस साल जो कॉलेज में पढाई कर रहा है छोटी बेटी रोजमरी उम्र बारह साल जो आठवीं क्लास की स्टूडेंट ही रहे गए हैं।
शाकल्यस्य संहितामनुप्रावर्षत । शाकल्येन सुकृतां संहितामनुनिशम्य देवः प्रावर्षत् ॥ (अर्थ) शाकल्य से भले प्रकार की गई संहिता की समाप्ति पर वर्षा हुई। ऐसी संहिता में आया हुआ इति पद उन के मत के अनुसार अवैदिक कैसे होगा? हमारी समझ में जो समाधान प्राता है उस के अनुसार अन्य बहुस्थलवत् यहां भी आर्ष का अर्थ ऋषि = अनूचान प्रोक्त ही है । प्रतीत होता है कि शाकल्यादि ऋषियों के समय में साधारण जन सम्बोधन में आये वैदिक पदों के आगे इति शब्द प्रयोग में लाकर उन्हें प्रगृह्य माना करते थे । शाकल्य ने उन की बात स्वीकार कर ली और अपनी संहिता में उन्हीं का प्रकार जता दिया । और क्योंकि अन्य सब पदकार शाकल्य के समय के पश्चात् हुए हैं, अतः उन सब ने यह प्रकार स्वीकार कर लिया । यहां कोई कह सकता है कि शाकस्य संहिता आर्ष नहीं अथवा कोई उच्च स्थान नहीं रखती क्योंकि पतञ्जलि मुनि स्वयं उस की संहिता के साथ "सुकृतां" का प्रयोग करके उसे साधारण ग्रन्थवत् "तेन अधिकृत्य कृते ग्रन्थे " के अनुसार बतलाते हैं । और ब्राह्मण तो प्रोक्ताधिकार में हैं तो उस का उत्तर यह है कि उन के मतानुसार तो प्रोक्ताधिकार में होता हुआ भी कल, आर्ष नहीं अर्थात् वेद नहीं । वेद संहिता में किसी प्रगृह्ण की सन्धि नहीं हुई । 'उ' पंद
शाकल्यस्य संहितामनुप्रावर्षत । शाकल्येन सुकृतां संहितामनुनिशम्य देवः प्रावर्षत् ॥ शाकल्य से भले प्रकार की गई संहिता की समाप्ति पर वर्षा हुई। ऐसी संहिता में आया हुआ इति पद उन के मत के अनुसार अवैदिक कैसे होगा? हमारी समझ में जो समाधान प्राता है उस के अनुसार अन्य बहुस्थलवत् यहां भी आर्ष का अर्थ ऋषि = अनूचान प्रोक्त ही है । प्रतीत होता है कि शाकल्यादि ऋषियों के समय में साधारण जन सम्बोधन में आये वैदिक पदों के आगे इति शब्द प्रयोग में लाकर उन्हें प्रगृह्य माना करते थे । शाकल्य ने उन की बात स्वीकार कर ली और अपनी संहिता में उन्हीं का प्रकार जता दिया । और क्योंकि अन्य सब पदकार शाकल्य के समय के पश्चात् हुए हैं, अतः उन सब ने यह प्रकार स्वीकार कर लिया । यहां कोई कह सकता है कि शाकस्य संहिता आर्ष नहीं अथवा कोई उच्च स्थान नहीं रखती क्योंकि पतञ्जलि मुनि स्वयं उस की संहिता के साथ "सुकृतां" का प्रयोग करके उसे साधारण ग्रन्थवत् "तेन अधिकृत्य कृते ग्रन्थे " के अनुसार बतलाते हैं । और ब्राह्मण तो प्रोक्ताधिकार में हैं तो उस का उत्तर यह है कि उन के मतानुसार तो प्रोक्ताधिकार में होता हुआ भी कल, आर्ष नहीं अर्थात् वेद नहीं । वेद संहिता में किसी प्रगृह्ण की सन्धि नहीं हुई । 'उ' पंद
GORAKHPUR: जिले में 10 साल में एक्टिव रहे चोर, लुटेरों, उचक्कों सहित अन्य बदमाशों की लिस्ट भी न तैयार करने पाने वाली पुलिस को 3 दिनों में यह लिस्ट अपडेट कर देनी है। नई लिस्ट तैयार कराकर पुलिस की टीमों को मोहल्लावार जाकर वेरीफिकेशन करना है। इसमें कोताही बरतने वालों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। शहर के नए कप्तान का यह फरमान आने के बाद थानेदारों की हालत खराब हो गई है। बरसों से धूल फांक रही फाइलों को जहां खंगाला जाने लगा है, वहीं सोर्सेज को दौड़ाकर लिस्ट अपडेट करने की कोशिशें भी होने लगी हैं। जिले में अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर लेकर एसएसपी ने फरमान जारी किया है कि टॉप 10 के बदमाशों के घर दबिश पड़ती रहनी चाहिए, जब तक कि उनकी गिरफ्तारी नहीं हो जाती है। थाना के टॉप 10 बदमाशों के घर सीओ की मौजूदगी में एसएचओ, एसओ की टीम दबिश देने पहुंचेगी। इसका जिक्र बाकायदा जीडी में होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी तरह की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर जाकर निरीक्षण करना है। इसमें कोई लापरवाही मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने सभी थानों में पुराने मुकदमों की विवेचना जल्द से जल्द पूरी करने के भी निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि पीडि़तों को जल्द से जल्द न्याय मिले, इसलिए पुलिस उसी हिसाब से काम करना शुरू कर दे। हाल के दिनों में थानों के इंस्पेक्शन के दौरान क्रिमिनल्स से संबंधित रिकॉर्ड्स दुरुस्त न होने पर एसएसपी ने बुधवार की रात लंबा-चौड़ा जारी किया। ऑनसेट आकर एसएसपी ने कहा है कि इसमें किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। - लॉक डाउन के दौरान दर्ज आईपीसी 188 के मुकदमों का तीन दिनों के भीतर 100 प्रतिशत निस्तारण किया जाए। - पुलिस कर्मचारियों के अवकाश के संबंध में आदेश का पालन किया जाए। किसी के अबसेंट होने पर एसओ तत्काल उससे बात करें। - ड्यूटी पर न आने की वजह को जीडी में दर्ज किया जाए। साथ ही इसकी सूचना तीन दिन के भीतर हेड क्लर्क को मुहैया कराएं। - अबसेंट पुलिस कर्मचारियों को नियमानुसार सवाल-जवाब करते हुए परमिशन देकर कार्य स्थल पर भेजें। - सभी थानों पर आफिस और कैंपस के रख-रखाव के लिए प्रदान किए गए बजट से किए गए कार्य के संबंध में संस्तुति के लिए सीनियर आफिरी को पत्र भेजें। - इंस्पेक्टर में सभी थानों के सक्रिय अपराधियों की लिस्ट नियमानुसार नहीं मिली। इसलिए 10 साल के भीतर हुई लूट, छिनैती, चोरी, डकैती सहित अन्य अपराधों में शामिल बदमाशों की लिस्ट तीन दिन में तैयार करके उसका वेरीफिकेशन कराएं। थानों के निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पाई गई हैं। उनको दूर करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। 10 साल से एक्टिव बदमाशों की अपडेटेड लिस्ट बनाने को कहा गया है। इसके आधार पर उनका वेरीफिकेशन कराया जाएगा। अनुशासनहीनता के मामलों में विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित है।
GORAKHPUR: जिले में दस साल में एक्टिव रहे चोर, लुटेरों, उचक्कों सहित अन्य बदमाशों की लिस्ट भी न तैयार करने पाने वाली पुलिस को तीन दिनों में यह लिस्ट अपडेट कर देनी है। नई लिस्ट तैयार कराकर पुलिस की टीमों को मोहल्लावार जाकर वेरीफिकेशन करना है। इसमें कोताही बरतने वालों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। शहर के नए कप्तान का यह फरमान आने के बाद थानेदारों की हालत खराब हो गई है। बरसों से धूल फांक रही फाइलों को जहां खंगाला जाने लगा है, वहीं सोर्सेज को दौड़ाकर लिस्ट अपडेट करने की कोशिशें भी होने लगी हैं। जिले में अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर लेकर एसएसपी ने फरमान जारी किया है कि टॉप दस के बदमाशों के घर दबिश पड़ती रहनी चाहिए, जब तक कि उनकी गिरफ्तारी नहीं हो जाती है। थाना के टॉप दस बदमाशों के घर सीओ की मौजूदगी में एसएचओ, एसओ की टीम दबिश देने पहुंचेगी। इसका जिक्र बाकायदा जीडी में होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी तरह की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर जाकर निरीक्षण करना है। इसमें कोई लापरवाही मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने सभी थानों में पुराने मुकदमों की विवेचना जल्द से जल्द पूरी करने के भी निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि पीडि़तों को जल्द से जल्द न्याय मिले, इसलिए पुलिस उसी हिसाब से काम करना शुरू कर दे। हाल के दिनों में थानों के इंस्पेक्शन के दौरान क्रिमिनल्स से संबंधित रिकॉर्ड्स दुरुस्त न होने पर एसएसपी ने बुधवार की रात लंबा-चौड़ा जारी किया। ऑनसेट आकर एसएसपी ने कहा है कि इसमें किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। - लॉक डाउन के दौरान दर्ज आईपीसी एक सौ अठासी के मुकदमों का तीन दिनों के भीतर एक सौ प्रतिशत निस्तारण किया जाए। - पुलिस कर्मचारियों के अवकाश के संबंध में आदेश का पालन किया जाए। किसी के अबसेंट होने पर एसओ तत्काल उससे बात करें। - ड्यूटी पर न आने की वजह को जीडी में दर्ज किया जाए। साथ ही इसकी सूचना तीन दिन के भीतर हेड क्लर्क को मुहैया कराएं। - अबसेंट पुलिस कर्मचारियों को नियमानुसार सवाल-जवाब करते हुए परमिशन देकर कार्य स्थल पर भेजें। - सभी थानों पर आफिस और कैंपस के रख-रखाव के लिए प्रदान किए गए बजट से किए गए कार्य के संबंध में संस्तुति के लिए सीनियर आफिरी को पत्र भेजें। - इंस्पेक्टर में सभी थानों के सक्रिय अपराधियों की लिस्ट नियमानुसार नहीं मिली। इसलिए दस साल के भीतर हुई लूट, छिनैती, चोरी, डकैती सहित अन्य अपराधों में शामिल बदमाशों की लिस्ट तीन दिन में तैयार करके उसका वेरीफिकेशन कराएं। थानों के निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पाई गई हैं। उनको दूर करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। दस साल से एक्टिव बदमाशों की अपडेटेड लिस्ट बनाने को कहा गया है। इसके आधार पर उनका वेरीफिकेशन कराया जाएगा। अनुशासनहीनता के मामलों में विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित है।
नई दिल्ली Vridha Pension Scheme: केंद्र सरकार और राज्य सराकर के द्वारा लोगों के लिए काफी सारी सरकारी स्कीम्स को संचालित किया जा रहा है। जिनके द्वारा लोगों को काफी मालामाल किया जा रहा है। आपको बता दें यूपी सरकार के द्वारा लोगों को मालामाल करने के लिए यूपी वृद्धा पेंशन योजना नाम से शुरु किया गया है। इस यूपी वृद्धा पेंशन स्कीम के द्वारा सरकार राज्य के 60 साल या फिर उससे अधिक उम्र के सभी सहायक या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनके जीवन यापन के लिए मासिक पेंशन के रूप में हर महीने कुछ रकम की मदद की जाती है। इसे भी पढ़ें- EPFO UPDATE: 6 करोड़ पीएफ कर्मचारियों की चमकी किस्मत, इस तारीख को अकाउंट में आएंगे ब्याज की राशि! यूपी सरकार के द्वारा काफी सारी पेंशन स्कीम पेश की जाती हैं। कुछ ऐसी स्कीम हैं जो कि केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जाती हैं और कुछ स्कीम्स राज्य सरकार के द्वारा संचालित की जाती हैं। सरकार 60 साल से अधिक आयु के लोगों को बुजुर्ग पेंशन का लाभ दे रही है। इसके लिए आपको पेसा लगाने की जरुरत नहीं है। इसका लाभ आपको हर महीने मिलेगा। यूपी वृद्धा पेंशन योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को बैंक खाता आधार से लिंक करना होगा। इस स्कीम का लाभ सिर्फ यूपी के स्थायी निवासी की उठा सकते हैं। इसके अलावा इस पेंशन का लाभ उठाने के लिए आवेदक को गरीबी रेखा से जीवन यापन करना चाहिए। सरकार का अनुदान और 500 रुपये केंद्र सरकार का अनुदान है। स्कीम के तहत लोगों को पेंशन ट्रांसफर की जाती है। इसे भी पढ़ें- Yamini Singh ने अपनी लाल टीशर्ट उतार Khesari Lal Yadav के साथ किया ऐसा काम की उड़ गई एक्टर की नींद फिर हुआ.. वहीं यूपी वृद्धा पेंशन स्कीम को उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण विभाग के द्वारा शुरु की गई है। इस स्कीम के द्वारा राज्य के सभी लोग जो कि 60 साल से अधिक आयु के हैं और उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हैं और उनके पास में इनकम पाने का कोई स्त्रोत नहीं है तो ऐसे लोगों को हर महीने 1000 रुपये की राशि दी जाती है। इस योजना में तकरीबन 50 लाख लोग शामिल हैं। ये पेंशन बुजुर्ग लोगों को मिलेगी।
नई दिल्ली Vridha Pension Scheme: केंद्र सरकार और राज्य सराकर के द्वारा लोगों के लिए काफी सारी सरकारी स्कीम्स को संचालित किया जा रहा है। जिनके द्वारा लोगों को काफी मालामाल किया जा रहा है। आपको बता दें यूपी सरकार के द्वारा लोगों को मालामाल करने के लिए यूपी वृद्धा पेंशन योजना नाम से शुरु किया गया है। इस यूपी वृद्धा पेंशन स्कीम के द्वारा सरकार राज्य के साठ साल या फिर उससे अधिक उम्र के सभी सहायक या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनके जीवन यापन के लिए मासिक पेंशन के रूप में हर महीने कुछ रकम की मदद की जाती है। इसे भी पढ़ें- EPFO UPDATE: छः करोड़ पीएफ कर्मचारियों की चमकी किस्मत, इस तारीख को अकाउंट में आएंगे ब्याज की राशि! यूपी सरकार के द्वारा काफी सारी पेंशन स्कीम पेश की जाती हैं। कुछ ऐसी स्कीम हैं जो कि केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जाती हैं और कुछ स्कीम्स राज्य सरकार के द्वारा संचालित की जाती हैं। सरकार साठ साल से अधिक आयु के लोगों को बुजुर्ग पेंशन का लाभ दे रही है। इसके लिए आपको पेसा लगाने की जरुरत नहीं है। इसका लाभ आपको हर महीने मिलेगा। यूपी वृद्धा पेंशन योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को बैंक खाता आधार से लिंक करना होगा। इस स्कीम का लाभ सिर्फ यूपी के स्थायी निवासी की उठा सकते हैं। इसके अलावा इस पेंशन का लाभ उठाने के लिए आवेदक को गरीबी रेखा से जीवन यापन करना चाहिए। सरकार का अनुदान और पाँच सौ रुपयापये केंद्र सरकार का अनुदान है। स्कीम के तहत लोगों को पेंशन ट्रांसफर की जाती है। इसे भी पढ़ें- Yamini Singh ने अपनी लाल टीशर्ट उतार Khesari Lal Yadav के साथ किया ऐसा काम की उड़ गई एक्टर की नींद फिर हुआ.. वहीं यूपी वृद्धा पेंशन स्कीम को उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण विभाग के द्वारा शुरु की गई है। इस स्कीम के द्वारा राज्य के सभी लोग जो कि साठ साल से अधिक आयु के हैं और उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हैं और उनके पास में इनकम पाने का कोई स्त्रोत नहीं है तो ऐसे लोगों को हर महीने एक हज़ार रुपयापये की राशि दी जाती है। इस योजना में तकरीबन पचास लाख लोग शामिल हैं। ये पेंशन बुजुर्ग लोगों को मिलेगी।
वाट्सन की ओर आकृष्ट थी, यह तो वाट्सन भी जानता था, पर शैला इस मार्ग पर इतनी दूर निकल आई होगी, इसकी उसे आशा नहीं थी। नौका-विहार करते समय वाट्सन से अत्यंत साधारण वार्तालाप के बीच शैला के मुख से निकले एक वाक्यॉश ने शैला को एकदम निरावरण करके वाट्सन के सामने नग्नरूप में ला खड़ा किया : "वाट्सन ने हसी से कहा - "शैला ! तुम तो गंगा स्नान करने सवेरे नही आती। फिर कैसी हिन्दू ?" शैला ने हंसकर कहा - "तुम भी प्रति रविवार गिरजे में नहीं जाते, फिर कैसे ईसाई ?" "तब तो न तुम हिन्दू और न मै ईसाई ! " "बस केवल स्त्री पुरुष, " सहसा शैला के मुख से अजाने में निकल गया । वाट्सन ने चौक कर उसकी ओर देखा । शैला झेंप-सी गई ।" १२७ इस प्रकार इस स्थल पर पाठक भी चकित हुए बिना नहीं रहता। वह कभी भी यह नहीं सोच सकता था कि शैला पर से रामनाथ की शिक्षा का रग इतनी जल्दी उतर जाएगा । भावाभिव्यक्ति में व्यंजकता कोई व्यक्ति अपने कथोपकथन में सदा ही पूर्णरूपेण खुल जाता हो, यह बात नही । कई बार उसके अन्दर तो बहुत कुछ भरा होता है और वाहर उबल पड़ना भी चाहता है, पर अनौचित्य के भय से, हानि-लाभ के किसी अन्य भाव से, वह अपने आंतरिक भावों को बाहर आने से बलपूर्वक रोकता है । इस प्रकार उसके कथोपकथन में उसकी तत्कालीन मनोदशा का उतना अंश ही प्रकट हो पाता है जो उसके रोके से न रुका हो । ऐसे स्थलों पर उपन्यासकार बड़े संकट में पड़ जाता है । यदि वह श्रौचित्य का ध्यान रखे बिना अपने पात्रों के आंतरिक भावो को उनके अपने मुख से व्यक्त कराता है, तो अस्वाभाविकता का दोष आने की संभावना रहती है और यदि वह उसे पूरी तरह से खुलने नही देता तो चरित्र दुरूह बन जाता है । प्रसाद ने ऐसे स्थलों पर बड़ी कुशलता से ऐसे कथोपकथन कराए है, जिनसे उनके प्रातरिक भाव व्यंजित तो हो उठते हैं, पर पूरी तरह खुलते नही । 'तितली' में इन्द्रदेव और शैला के विरुद्ध षड्यन्त्र रचने के लिए अनवरी और माधुरी के बीच जिस संवाद में सधि हुई थी, इस दृष्टि से वह उल्लेखनीय है : "माधुरी ने भीतर के कमरे की ओर देखते हुए उसके मुंह पर हाथ रख दिया और कहने लगी- "प्यारी अनवरी ! क्या इस चुडैल से छुटकारा पाने का कोई उपाय नही ?"
वाट्सन की ओर आकृष्ट थी, यह तो वाट्सन भी जानता था, पर शैला इस मार्ग पर इतनी दूर निकल आई होगी, इसकी उसे आशा नहीं थी। नौका-विहार करते समय वाट्सन से अत्यंत साधारण वार्तालाप के बीच शैला के मुख से निकले एक वाक्यॉश ने शैला को एकदम निरावरण करके वाट्सन के सामने नग्नरूप में ला खड़ा किया : "वाट्सन ने हसी से कहा - "शैला ! तुम तो गंगा स्नान करने सवेरे नही आती। फिर कैसी हिन्दू ?" शैला ने हंसकर कहा - "तुम भी प्रति रविवार गिरजे में नहीं जाते, फिर कैसे ईसाई ?" "तब तो न तुम हिन्दू और न मै ईसाई ! " "बस केवल स्त्री पुरुष, " सहसा शैला के मुख से अजाने में निकल गया । वाट्सन ने चौक कर उसकी ओर देखा । शैला झेंप-सी गई ।" एक सौ सत्ताईस इस प्रकार इस स्थल पर पाठक भी चकित हुए बिना नहीं रहता। वह कभी भी यह नहीं सोच सकता था कि शैला पर से रामनाथ की शिक्षा का रग इतनी जल्दी उतर जाएगा । भावाभिव्यक्ति में व्यंजकता कोई व्यक्ति अपने कथोपकथन में सदा ही पूर्णरूपेण खुल जाता हो, यह बात नही । कई बार उसके अन्दर तो बहुत कुछ भरा होता है और वाहर उबल पड़ना भी चाहता है, पर अनौचित्य के भय से, हानि-लाभ के किसी अन्य भाव से, वह अपने आंतरिक भावों को बाहर आने से बलपूर्वक रोकता है । इस प्रकार उसके कथोपकथन में उसकी तत्कालीन मनोदशा का उतना अंश ही प्रकट हो पाता है जो उसके रोके से न रुका हो । ऐसे स्थलों पर उपन्यासकार बड़े संकट में पड़ जाता है । यदि वह श्रौचित्य का ध्यान रखे बिना अपने पात्रों के आंतरिक भावो को उनके अपने मुख से व्यक्त कराता है, तो अस्वाभाविकता का दोष आने की संभावना रहती है और यदि वह उसे पूरी तरह से खुलने नही देता तो चरित्र दुरूह बन जाता है । प्रसाद ने ऐसे स्थलों पर बड़ी कुशलता से ऐसे कथोपकथन कराए है, जिनसे उनके प्रातरिक भाव व्यंजित तो हो उठते हैं, पर पूरी तरह खुलते नही । 'तितली' में इन्द्रदेव और शैला के विरुद्ध षड्यन्त्र रचने के लिए अनवरी और माधुरी के बीच जिस संवाद में सधि हुई थी, इस दृष्टि से वह उल्लेखनीय है : "माधुरी ने भीतर के कमरे की ओर देखते हुए उसके मुंह पर हाथ रख दिया और कहने लगी- "प्यारी अनवरी ! क्या इस चुडैल से छुटकारा पाने का कोई उपाय नही ?"
इन्द्रजित के साथ विषम युद्ध की राक्षसी माया में निपुण है, उसे साफ देख रहा है । यद्यपि रामायण के युद्धकाण्डान्तर्गत ४६वें सर्ग में कथा कुछ भिन्न है, तथापि इसमें सन्देह नहीं कि प्रस्तुत तक्षण उसीका प्रदर्शन है। प्राम्चनम् के इस तक्षण - खण्ड में सबसे परे बांई ओर हम देखते हैं कि विभीषण अपने बांये हाथ पर त्रिशूल लिए खड़ा है और दाहिने हाथ से आकाश की ओर इशारा कर रहा है जहाँ से, बादलों में छिप कर, इन्द्रजित राम पर बाणों की वर्षा कर रहा था । दाहिनी ओर राम धनुष से तीरों को छोड़ते हुए दर्शाये गये हैं; उनके पैर एक दूसरे पर टिके हुए हैं, और उनका लक्ष्य वह दिशा है जिसकी ओर विभीषण ने इशारा किया था । किन्तु इन्द्रजित् स्वयं चतुर या और चूँकि वह राम को देख रहा था और स्वयं उनसे अदृश्य था, इसलिए राम के वाण अन्तरिक्ष में पहुँच कर विफल हो जाते हैं। अनएव यह स्वाभाविक ही है कि राम के चेहरे पर उदासी और शोक की छाया दिखलाई गई है, क्योंकि उनके जीवन में यह पहला अवसर है जब उनके चाण लक्ष्य से भ्रष्ट हो रहे हैं । पाँचवां और छठा तक्षण-खण्ड इन्द्रजित से लक्ष्मण का युद्ध पाँधवें और छठे खण्ड में रावण के पुत्र इन्द्रजित के साथ लक्ष्मण का युद्ध दर्शाया गया है, जिसमें उस भयंकर शत्रु के छल-छमों के विरुद्ध चतुर विभीषण ने इन्हें परामर्श दिया था और उससे इनकी रक्षा की थी । वाल्मीकीय रामायण (युद्धकाण्ड) के अनुसार पहली बार इन्द्राजित् नागास्त्र से बन्धे हुए दोनों बन्धुओं को घायल करता है, और फिर उन्हें मरा हुआ समझ कर अपने पिता रावण के पास जाकर उसे यह समाचार सुनाता है। राक्षसों में बड़ा मोद-प्रमोद होता है। नागास्त्र के प्रभाव से अचेत होकर राम और लक्ष्मण रण-क्षेत्र में मरे हुए जैसे पड़े रहते हैं। शीघ्र ही साँपों का शत्रु पक्षिराज गरुड़ रण-क्षेत्र के ऊपर मंडराता हुआ उस स्थान पर पहुँचता है जहाँ दोनों भाई पड़े हुए हैं। इससे साँप उन्हें छोड़कर लुक-छिप जाते हैं। इस प्रकार जब राम लक्ष्मण बन्धन से छूट जाते हैं तो फिर लड़ाई होती है, जिसमें एक एक करके अनेकों सेनाध्यक्ष मारे जाते हैं । इसलिए रावण एक बार फिर इन्द्रजित को ही रण-क्षेत्र में भेजता है। इस बार भी वह उसी यज्ञ को करता है से उसके शत्रु उसको देख नहीं सकते । वानर सेना छिन्न भिन्न इन्द्राजित् आदि से राम लक्ष्मण का युद्ध होने लगती है और अन्त में वह राम-लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र छोड़ता है, जिसके प्रबल प्रभाव से उनको ऐसी मूर्च्छा आती है मानो मर गये हों । वानर सेना के नायक आपस में सलाह करके हनुमान् को सञ्जीवनी बूटी लाने को भेजते हैं, जो किसी खास पहाड़ पर उगती थी । हनुमान् जल्दी में उस बूटी को पहचान नहीं सकता, इसलिए भ्रम से बचने के लिए वह समूचे पहाड़ को ही उठा कर उस स्थान पर ले आता है, जहाँ राम-लक्ष्मण और दूसरे वीर अचेत पड़े हैं । पहाड़ की हवा लगते ही सत्र जीवित हो उठते हैं, और पहले ही जैसे स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट हो जाते हैं। तीसरी बार जब रावण का भाई कुम्भकर्ण और राक्षसी सेना के कुछ और दिग्गज सेनाध्यक्ष राम और लक्ष्मण के बाणों का शिकार बन कर सनातन पथ का अनुसरण करते हैं तो राक्षसराज को शोक की वह मूर्च्छा आती है जिसमें आश्वासन देना भी दुष्कर हो जाता है । इस संकट के अवसर पर फिर · इन्द्रजित् ही उसका ढाढ़स बंधाता है। अपने पिता को आश्वासन देकर वह एक बार फिर यज्ञ करने के लिए निकुम्भिला की गुफा में जाता है, जिससे वह अपने शरीर को अलक्ष्य और इसलिए अजय बना सके । यह जान कर कि इन्द्रजित कहीं बाहर ठहरा हुआ है विभीषण इस रहस्य को भाँप लेता है । वह लक्ष्मण को हनुमान् की पीठ पर चढ़ाता है, और सब मिलकर उस दुरात्मा को अलक्ष्य बनने से रोकने के लिए उसके पास पहुँचते हैं । वे उसको तत्परता से यज्ञ करते हुए देखते हैं और जब उसकी दृष्टि विभीषण पर पड़ती है तो वह क्रोध से आग-बबूला हो जाता है। चाचा भतीजे का आपस में वादविवाद होने लगता है; अन्त में लक्ष्मण उससे कहते हैं 'वीर का काम चोर की तरह छिप कर लड़ना नहीं है ।" छुटकारे का और कोई रास्ता न देख कर वह गधों से खोचे जाते हुए रथ पर चढ़ कर मैदान में कूद पड़ता है और फिर भयंकर युद्ध होने लगता है, जिसमें इन्द्रजित् गजब का हत्या काण्ड रच कर राम की सेना को छिन्न-भिन्न कर डालता है । अन्त में उसके साथ लक्ष्मण का द्वन्द्व युद्ध होता है, जिसमें प्रत्येक वीर अपनी निपुणता और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों को चलाने की सिद्धहस्तता दिखलाता है । दोनों एक दूसरे को पछाड़ने की चेष्टा करते हैं, यहाँ तक कि आखिर लक्ष्मण ऐन्द्र की सहायता का आवाहन करते हैं और उसके अधिष्ठातृ-देव की आराधना करके सौगंद साते हुए कहते हैं कि यदि राम धर्मात्मा और सदाचारी हैं तो इस पत्र से रावणि ( इन्द्रजित ) के मरने में कोई सन्देह नहीं । फिर उस यत्र के अन्दर मन्त्र फेंक कर वे उसे सीधे इन्द्रजित् के गले पर लक्ष्य करके फेंकते हैं, जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो जाता है और वह निर्जीव हो कर धड़ाम से रणक्षेत्र में गिर कर इन्द्राजित् से विषम युद्ध धराशायी हो जाता है। पाँचवें तक्षण में हमें बांई ओर सबसे पहले राम दिखाई देते हैं। उनके बाद निशाना दागने की हालत में खड़े हुए लक्ष्मण अपने विशाल धनुप को टँकारित कर रहे हैं। उनकी दाहिनी ओर एक हाथ में एक छोटी-चौड़ी तलवार लिये हुए बिभीषण खड़ा है । इस मण्डली के सामने एक बन्दर, सम्भवतः हनुमान् बैठा हुआ लड़ाई देख रहा है। उसका चेहरा और घुटनों तक शरीर के कुछ अंश विशीर्ण हो गये है । छठे खण्ड में सबसे परे बांई ओर एक बन्दर रण-क्षेत्र में कूदता दिखाई देता है । उसके नीचे कुछ दाहिनी ओर को एक राक्षस है, जिसके चांयें हाथ में एक छोटी सी और दाहिने हाथ में एक लम्बी तलवार है । इस लम्बी तलवार से वह अपने सामने खड़े हुए किसी शत्रु पर आक्रमण कर रहा है। उसके ऊपर कुछ और दाहिनी ओर हम इन्द्रजित को कमर तक बादलों में छिपा हुआ देखते हैं, जो स्वयं यदृश्य रह कर युद्ध का सञ्चालन कर रहा है । वह अपने दाहिने हाथ को उठाये तर्जनी दिखा रहा है । उसके नीचे घुमड़े हुए बादल सुन्दर स्वाभाविक ढंग से दर्शाये गये हैं । वादलों के नीचे एक भूत या राक्षस - जैसा दिखाई देता है, जिसकी बड़ी बड़ी आँखें हैं और जो मुँह वाये चिल्ला रहा है। बृहद्भारतीय चित्रकारी में रामायम सातवां तक्षण-खण्ड यह खण्ड अधूरा है और इसलिए यह बताना सम्भव नहीं कि उसमें रामायण का कौन सा दृश्य या घटना दर्शाई गई है। फिर भी हम इतना कह सकते हैं कि उसमें युद्ध-काएड की कोई घटना दर्शाई गई है, अपना वह इसी काण्ड के किसी बड़े पटल का परिशेष- मात्र है। सबसे परे बांई ओर किसी राजकुमार का केयूर और कंगन से सजा हुआ दाहिना हाथ दिखाई देता है । वह इस हाथ में धनुष लेकर उसे खींच रहा है, ताकि उससे तीर छोड़े । उसकी दाहिनी जंघा और टांग के भी कुछ अंश दिखाई देते हैं, जो आलीढ- मुद्रा की दशा में स्थित है अर्थात् बांये पैर से कुछ आगे हटकर भुके हुए हैं। उसकी दाहिनी ओर एक और व्यक्ति धनुष से तीर छोड़ने के लिए खड़ा है, किन्तु उसका दाहिना हाथ और धनुष दोनों ही लुप्त हो चले हैं। इन दो व्यक्तियों के बीच किसी दढ़ियल आदमी का सिर और चेहरा दिखाई देता है । उसके कानों और शरीर के अन्य अवयवों को देखने से मालूम होता है कि यह रावण के भाई मिण को छोड़ कर और कोई नहीं हो सकता । इसलिए उसकी बांई ओर का धनुर्धारी व्यक्ति लक्ष्मण और उसकी दाहिनी ओर का मुकुटधारी व्यक्ति जिसके पीछे परिवेष है --- सयं श्रीरामचन्द्र होंगे ।
इन्द्रजित के साथ विषम युद्ध की राक्षसी माया में निपुण है, उसे साफ देख रहा है । यद्यपि रामायण के युद्धकाण्डान्तर्गत छियालीसवें सर्ग में कथा कुछ भिन्न है, तथापि इसमें सन्देह नहीं कि प्रस्तुत तक्षण उसीका प्रदर्शन है। प्राम्चनम् के इस तक्षण - खण्ड में सबसे परे बांई ओर हम देखते हैं कि विभीषण अपने बांये हाथ पर त्रिशूल लिए खड़ा है और दाहिने हाथ से आकाश की ओर इशारा कर रहा है जहाँ से, बादलों में छिप कर, इन्द्रजित राम पर बाणों की वर्षा कर रहा था । दाहिनी ओर राम धनुष से तीरों को छोड़ते हुए दर्शाये गये हैं; उनके पैर एक दूसरे पर टिके हुए हैं, और उनका लक्ष्य वह दिशा है जिसकी ओर विभीषण ने इशारा किया था । किन्तु इन्द्रजित् स्वयं चतुर या और चूँकि वह राम को देख रहा था और स्वयं उनसे अदृश्य था, इसलिए राम के वाण अन्तरिक्ष में पहुँच कर विफल हो जाते हैं। अनएव यह स्वाभाविक ही है कि राम के चेहरे पर उदासी और शोक की छाया दिखलाई गई है, क्योंकि उनके जीवन में यह पहला अवसर है जब उनके चाण लक्ष्य से भ्रष्ट हो रहे हैं । पाँचवां और छठा तक्षण-खण्ड इन्द्रजित से लक्ष्मण का युद्ध पाँधवें और छठे खण्ड में रावण के पुत्र इन्द्रजित के साथ लक्ष्मण का युद्ध दर्शाया गया है, जिसमें उस भयंकर शत्रु के छल-छमों के विरुद्ध चतुर विभीषण ने इन्हें परामर्श दिया था और उससे इनकी रक्षा की थी । वाल्मीकीय रामायण के अनुसार पहली बार इन्द्राजित् नागास्त्र से बन्धे हुए दोनों बन्धुओं को घायल करता है, और फिर उन्हें मरा हुआ समझ कर अपने पिता रावण के पास जाकर उसे यह समाचार सुनाता है। राक्षसों में बड़ा मोद-प्रमोद होता है। नागास्त्र के प्रभाव से अचेत होकर राम और लक्ष्मण रण-क्षेत्र में मरे हुए जैसे पड़े रहते हैं। शीघ्र ही साँपों का शत्रु पक्षिराज गरुड़ रण-क्षेत्र के ऊपर मंडराता हुआ उस स्थान पर पहुँचता है जहाँ दोनों भाई पड़े हुए हैं। इससे साँप उन्हें छोड़कर लुक-छिप जाते हैं। इस प्रकार जब राम लक्ष्मण बन्धन से छूट जाते हैं तो फिर लड़ाई होती है, जिसमें एक एक करके अनेकों सेनाध्यक्ष मारे जाते हैं । इसलिए रावण एक बार फिर इन्द्रजित को ही रण-क्षेत्र में भेजता है। इस बार भी वह उसी यज्ञ को करता है से उसके शत्रु उसको देख नहीं सकते । वानर सेना छिन्न भिन्न इन्द्राजित् आदि से राम लक्ष्मण का युद्ध होने लगती है और अन्त में वह राम-लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र छोड़ता है, जिसके प्रबल प्रभाव से उनको ऐसी मूर्च्छा आती है मानो मर गये हों । वानर सेना के नायक आपस में सलाह करके हनुमान् को सञ्जीवनी बूटी लाने को भेजते हैं, जो किसी खास पहाड़ पर उगती थी । हनुमान् जल्दी में उस बूटी को पहचान नहीं सकता, इसलिए भ्रम से बचने के लिए वह समूचे पहाड़ को ही उठा कर उस स्थान पर ले आता है, जहाँ राम-लक्ष्मण और दूसरे वीर अचेत पड़े हैं । पहाड़ की हवा लगते ही सत्र जीवित हो उठते हैं, और पहले ही जैसे स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट हो जाते हैं। तीसरी बार जब रावण का भाई कुम्भकर्ण और राक्षसी सेना के कुछ और दिग्गज सेनाध्यक्ष राम और लक्ष्मण के बाणों का शिकार बन कर सनातन पथ का अनुसरण करते हैं तो राक्षसराज को शोक की वह मूर्च्छा आती है जिसमें आश्वासन देना भी दुष्कर हो जाता है । इस संकट के अवसर पर फिर · इन्द्रजित् ही उसका ढाढ़स बंधाता है। अपने पिता को आश्वासन देकर वह एक बार फिर यज्ञ करने के लिए निकुम्भिला की गुफा में जाता है, जिससे वह अपने शरीर को अलक्ष्य और इसलिए अजय बना सके । यह जान कर कि इन्द्रजित कहीं बाहर ठहरा हुआ है विभीषण इस रहस्य को भाँप लेता है । वह लक्ष्मण को हनुमान् की पीठ पर चढ़ाता है, और सब मिलकर उस दुरात्मा को अलक्ष्य बनने से रोकने के लिए उसके पास पहुँचते हैं । वे उसको तत्परता से यज्ञ करते हुए देखते हैं और जब उसकी दृष्टि विभीषण पर पड़ती है तो वह क्रोध से आग-बबूला हो जाता है। चाचा भतीजे का आपस में वादविवाद होने लगता है; अन्त में लक्ष्मण उससे कहते हैं 'वीर का काम चोर की तरह छिप कर लड़ना नहीं है ।" छुटकारे का और कोई रास्ता न देख कर वह गधों से खोचे जाते हुए रथ पर चढ़ कर मैदान में कूद पड़ता है और फिर भयंकर युद्ध होने लगता है, जिसमें इन्द्रजित् गजब का हत्या काण्ड रच कर राम की सेना को छिन्न-भिन्न कर डालता है । अन्त में उसके साथ लक्ष्मण का द्वन्द्व युद्ध होता है, जिसमें प्रत्येक वीर अपनी निपुणता और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों को चलाने की सिद्धहस्तता दिखलाता है । दोनों एक दूसरे को पछाड़ने की चेष्टा करते हैं, यहाँ तक कि आखिर लक्ष्मण ऐन्द्र की सहायता का आवाहन करते हैं और उसके अधिष्ठातृ-देव की आराधना करके सौगंद साते हुए कहते हैं कि यदि राम धर्मात्मा और सदाचारी हैं तो इस पत्र से रावणि के मरने में कोई सन्देह नहीं । फिर उस यत्र के अन्दर मन्त्र फेंक कर वे उसे सीधे इन्द्रजित् के गले पर लक्ष्य करके फेंकते हैं, जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो जाता है और वह निर्जीव हो कर धड़ाम से रणक्षेत्र में गिर कर इन्द्राजित् से विषम युद्ध धराशायी हो जाता है। पाँचवें तक्षण में हमें बांई ओर सबसे पहले राम दिखाई देते हैं। उनके बाद निशाना दागने की हालत में खड़े हुए लक्ष्मण अपने विशाल धनुप को टँकारित कर रहे हैं। उनकी दाहिनी ओर एक हाथ में एक छोटी-चौड़ी तलवार लिये हुए बिभीषण खड़ा है । इस मण्डली के सामने एक बन्दर, सम्भवतः हनुमान् बैठा हुआ लड़ाई देख रहा है। उसका चेहरा और घुटनों तक शरीर के कुछ अंश विशीर्ण हो गये है । छठे खण्ड में सबसे परे बांई ओर एक बन्दर रण-क्षेत्र में कूदता दिखाई देता है । उसके नीचे कुछ दाहिनी ओर को एक राक्षस है, जिसके चांयें हाथ में एक छोटी सी और दाहिने हाथ में एक लम्बी तलवार है । इस लम्बी तलवार से वह अपने सामने खड़े हुए किसी शत्रु पर आक्रमण कर रहा है। उसके ऊपर कुछ और दाहिनी ओर हम इन्द्रजित को कमर तक बादलों में छिपा हुआ देखते हैं, जो स्वयं यदृश्य रह कर युद्ध का सञ्चालन कर रहा है । वह अपने दाहिने हाथ को उठाये तर्जनी दिखा रहा है । उसके नीचे घुमड़े हुए बादल सुन्दर स्वाभाविक ढंग से दर्शाये गये हैं । वादलों के नीचे एक भूत या राक्षस - जैसा दिखाई देता है, जिसकी बड़ी बड़ी आँखें हैं और जो मुँह वाये चिल्ला रहा है। बृहद्भारतीय चित्रकारी में रामायम सातवां तक्षण-खण्ड यह खण्ड अधूरा है और इसलिए यह बताना सम्भव नहीं कि उसमें रामायण का कौन सा दृश्य या घटना दर्शाई गई है। फिर भी हम इतना कह सकते हैं कि उसमें युद्ध-काएड की कोई घटना दर्शाई गई है, अपना वह इसी काण्ड के किसी बड़े पटल का परिशेष- मात्र है। सबसे परे बांई ओर किसी राजकुमार का केयूर और कंगन से सजा हुआ दाहिना हाथ दिखाई देता है । वह इस हाथ में धनुष लेकर उसे खींच रहा है, ताकि उससे तीर छोड़े । उसकी दाहिनी जंघा और टांग के भी कुछ अंश दिखाई देते हैं, जो आलीढ- मुद्रा की दशा में स्थित है अर्थात् बांये पैर से कुछ आगे हटकर भुके हुए हैं। उसकी दाहिनी ओर एक और व्यक्ति धनुष से तीर छोड़ने के लिए खड़ा है, किन्तु उसका दाहिना हाथ और धनुष दोनों ही लुप्त हो चले हैं। इन दो व्यक्तियों के बीच किसी दढ़ियल आदमी का सिर और चेहरा दिखाई देता है । उसके कानों और शरीर के अन्य अवयवों को देखने से मालूम होता है कि यह रावण के भाई मिण को छोड़ कर और कोई नहीं हो सकता । इसलिए उसकी बांई ओर का धनुर्धारी व्यक्ति लक्ष्मण और उसकी दाहिनी ओर का मुकुटधारी व्यक्ति जिसके पीछे परिवेष है --- सयं श्रीरामचन्द्र होंगे ।
साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के करियर में फिल्म पुष्पा ने चार चांद लगा दिए हैं. पुष्पा की वजह से अल्लू अर्जुन पैन इंडिया स्टार बने हैं. एक्टर की फैन फॉलोइंग में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है. ट्विटर पर एक्टर के फॉलोअर्स की तादाद बढ़कर 6. 5 मिलियन हो गई है. उन्होंने साउथ के सुपरस्टार्स रजनीकांत और चिरंजीवी को पछाड़ दिया है. अल्लू अर्जुन के ट्विटर पर थलाइवा रजनीकांत और चिरंजीवी से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं. रजनीकांत के 6. 1 मिलियन फॉलोअर्स हैं और चिरंजीवी के 1. 2 मिलियन ट्विटर फॉलोअर्स हैं. ये सब पुष्पा की ही देन है. जिसने अल्लू अर्जुन को देश का पसंदीदा स्टार बना दिया है. इसमें सबसे खास बात ये है कि अल्लू अर्जुन ट्विटर पर खासे एक्टिव भी नहीं हैं. उनकी आखिरी पोस्ट 29 जनवरी की है. वे कम ही पोस्ट ट्वीट करते हैं. मूवी प्रमोशन हो या किसी को बर्थडे विश करना, उन मौकों पर ही अल्लू ट्विटर पर ज्यादा एक्टिव दिखे हैं. उससे भी मजेदार बात ये है कि अल्लू अर्जुन ट्विटर पर किसी को फॉलो नहीं करते. अरे हैरान मत होइए, ये सच है. पावर स्टार अल्लू अर्जुन ट्विटर पर सेलेब्स, फैमिली मेंबर्स किसी को फॉलो नहीं करते हैं. जबकि उन्हें फॉलो करने वालों में बड़े बड़े स्टार्स शामिल हैं. है नाम कमाल की बात. अपने चहेते स्टार के इस माइलस्टोन को देख उनके फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं होगा. इंस्टा पर एक्टर के 16. 2m फॉलोअर्स हैं. इस साल रिलीज हुई एक्टर की फिल्म पुष्पा ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं. कोरोना काल में रिलीज फिल्म ने जो शानदार बिजनेस किया हो वो काबिलेतारीफ है. मूवी को सिनेमाघरों में मिस करने वालों के लिए ये फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर मौजूद है.
साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के करियर में फिल्म पुष्पा ने चार चांद लगा दिए हैं. पुष्पा की वजह से अल्लू अर्जुन पैन इंडिया स्टार बने हैं. एक्टर की फैन फॉलोइंग में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है. ट्विटर पर एक्टर के फॉलोअर्स की तादाद बढ़कर छः. पाँच मिलियन हो गई है. उन्होंने साउथ के सुपरस्टार्स रजनीकांत और चिरंजीवी को पछाड़ दिया है. अल्लू अर्जुन के ट्विटर पर थलाइवा रजनीकांत और चिरंजीवी से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं. रजनीकांत के छः. एक मिलियन फॉलोअर्स हैं और चिरंजीवी के एक. दो मिलियन ट्विटर फॉलोअर्स हैं. ये सब पुष्पा की ही देन है. जिसने अल्लू अर्जुन को देश का पसंदीदा स्टार बना दिया है. इसमें सबसे खास बात ये है कि अल्लू अर्जुन ट्विटर पर खासे एक्टिव भी नहीं हैं. उनकी आखिरी पोस्ट उनतीस जनवरी की है. वे कम ही पोस्ट ट्वीट करते हैं. मूवी प्रमोशन हो या किसी को बर्थडे विश करना, उन मौकों पर ही अल्लू ट्विटर पर ज्यादा एक्टिव दिखे हैं. उससे भी मजेदार बात ये है कि अल्लू अर्जुन ट्विटर पर किसी को फॉलो नहीं करते. अरे हैरान मत होइए, ये सच है. पावर स्टार अल्लू अर्जुन ट्विटर पर सेलेब्स, फैमिली मेंबर्स किसी को फॉलो नहीं करते हैं. जबकि उन्हें फॉलो करने वालों में बड़े बड़े स्टार्स शामिल हैं. है नाम कमाल की बात. अपने चहेते स्टार के इस माइलस्टोन को देख उनके फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं होगा. इंस्टा पर एक्टर के सोलह. दो मीटर फॉलोअर्स हैं. इस साल रिलीज हुई एक्टर की फिल्म पुष्पा ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं. कोरोना काल में रिलीज फिल्म ने जो शानदार बिजनेस किया हो वो काबिलेतारीफ है. मूवी को सिनेमाघरों में मिस करने वालों के लिए ये फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर मौजूद है.
कागज का आविष्कार सर्व प्रथम चीन में हुआ । कागज के आविष्कार के बाद भी साहित्य का सर्वसाधारण में प्रचलित होना सम्भव नहीं था, क्योंकि किसी लेख की हाथों से हजारों प्रतियां नकल करके लोगों में प्रसारित करना कोई बहुत आसान काम नहीं था । यह तो तभी सम्भव हो पाया जब आज से केवल ५०० वर्ष पूर्व सन् १४५० में यूरोप में छापेखाने का आविष्कार हुआ, और छापेखाने में मूल हस्त लिखित लेख की अनेक प्रतियां छपकर लोगों में फैलने लगीं। वैसे यूरोप में छापेखाने के आविष्कार के बहुत पहिले प्राचीन चीन में भी ब्लोक प्रिंटिंग ( ब्लोक छपाई) का आविष्कार हो चुका था किन्तु वह ढंग अन्य देशों में प्रचलित नहीं हो पाया था । यूरोप में छापेखाने के आविष्कार के बाद भी, भिन्न भिन्न देशों में भिन्न भिन्न लिपियों के छापेखानों के प्रचलित होने की बात तो केवल पिछले २५०-३०० वर्षों की ही है । * इसके पूर्व तो समस्त प्राचीन साहित्य, ज्ञान विज्ञान एवं दर्शन यत्र यत्र अज्ञात स्थानों में हस्तलिखित पोथियों में ही बद्ध पड़ा था । कल्पना कीजिए - पृथ्वी के २ अरब वर्ष के इतिहास में वास्तविक मानव के ५० हजार वर्ष के इतिहास में, - मानो कल ही सर्वसाधारण के लिये प्रकाश का द्वार खुला हो । अभी तो सर्वसाधारण को प्रकाश का प्रभास मात्र मिलने लगा है। कितना ज्ञान अभी सर्व साधारण तक पहुँचाना शेष है। कितना अनन्त प्रकाश "मानव" के लिये श्रात्मसात करना अभी शेष है । अद्भुत इस सृष्टि की अद्भुत इस मानव की कहानी है । यह कहानी तो अभी प्रारम्भ ही हुई है । * सन् १६०० ई० में भीमजी पारिख नामक एक गुजराती व्यापारी ने सूरत की एक कम्पनी की सहायता से इंगलैंड से ८००० मासिक वेतन पर एक अंग्रेज बुलाया। उसने हिन्दी के सभी प्रक्षरों को ढ़ालकर हिन्दी प्रेस को जन्म दिया। ( १४ ) प्राचीन मेसोपोटेमिया ( सुमेर, बेबीलोन, प्रसोरिया, केल्डिया की सभ्यता ) खाड़ी के उत्तर में जो आधुनिक ईराक प्रदेश है, उसको इतिहासकारों ने मेसोपोटेमिया नाम दिया है- मेसोपोटेमिया का अर्थ है नदियों के बीच की भूमि । वास्तव में उत्तर पच्छिम से प्राती हुई दो नदियां यूटीज ( दजला ) और टाईग्रीस (फरात) फारस की खाड़ी में गिरती हैं और इन दो नदियों के बीच की भूमि को मेसोपोटेमिया कहा गया है। आजकल तो फारस की खाड़ी में जहाँ ये दोनों नदियां गिरती हैं, उनका मुहाना एक ही है, किन्तु प्राचीन काल में प्राज से लगभग ८-१० हजार वर्ष पूर्व ये दोनों नदियाँ पृथक पृथक गिरती थीं और इन दोनों नदियों के मुहाने के बीच में भी काफी लम्बी चौड़ी भूमि थी । यही मुहानों के बीच की भूमि प्राचीन काल में सुमेर कहलाती थी, जिसमें प्राचीन काल के प्रसिद्ध नगर निपुर, उर, इरीदू, तेलप्रेलओबीद इत्यादि बसे हुए थे । उस समय फारस की खाड़ी का पानी भी कि ऊपर तक फैला हुआ था । इन हजारों वर्षों में दोनों नदियां अपनी मिट्टी से समुद्र को पाटती रहीं और फारस की खाड़ी की सीमा भी बदल गई । सुमेर प्रदेश से भागे उत्तर में प्राचीन काल में प्रक्काद प्रदेश था जिसकी राजधानी बेबीलोन थी । उससे भी आगे बढ़कर असीरिया प्रदेश था जिसकी राजधानी असुर थी । सुमेर, अक्काद और सीरिया ये तीनों प्रदेश सम्मिलित रूप में मेसोपोटेमिया कहलाते हैं, और तीनों प्रदेशों की प्राचीन सभ्यतायें काल क्रम में सबसे १० पहिले सुमेर, सुमेर के बाद बेबीलोन, बेबीलोन के बाद प्रसीरिया और फिर केल्डिया जाति के लोगों का दूसरा बेबीलोन साम्राज्य, इस प्रकार भाती हैं। इन सब सभ्यताओं का प्रायः एक ही प्रवाह और तारतम्य था, और ये सब प्राचीन मेसोपोटेमिया की सभ्यता मानी जाती हैं । इस सभ्यता का विकास कब और कैसे हुआ और किन लोगों ने किया ? - पिछले अध्याय में हम देख आाये हैं कि आज से लगभग १० - १२ हजार वर्ष पूर्व स्पेन के पच्छिमी छोर से लेकर पूर्व में प्रशान्त महासागर तक, यथा फ्रांस, इटली, मिस्र, एशिया माइनर, भारत और चीन में नव-पाषाण युगीय स्तर की अर्द्ध-सभ्य अवस्था फैली हुई थी; जिसमें कृषि, पशुपालन, कृषि सम्बन्धी देव देवियों की पूजा और भेंट, मिट्टी के बर्तन बनाना इत्यादि बातें प्रमुख थीं। इसी अवस्था में से विकास पाकर सामाजिक दृष्टि से सुसंगठित, सुमेर प्रदेश की वह सभ्यता बनी जिसके अवशेष हमें ६-७ हजार वर्ष ई० पू० तक के मिलते हैं । सबसे पहिले मानव के इतिहास में हम इस पृथ्वी पर नगर बसते हुए पाते हैं एवं लोगों को एक सभ्य सुसंगठित समाज बना कर रहता हुआ पाते हैं । सुमेर, बेबीलोन, असीरिया की सभ्यतायें सर्वथा लुप्त प्राय हैं किन्तु उन लुप्त सभ्यताओं का चित्र एवं इतिहास जो आज हमने बनाया है, वह उन खुदाइयों के फलस्वरूप जो उक्त प्रांत में प्राज से कई दशक वर्ष पूर्व हुईं । इन खुदाइयों में उस प्राचीनकाल के अद्भुत नगर, महल, सड़कें, कुएं, मन्दिर, देवताओं की मूर्तियाँ, लेखनकला, अनेक लेख, मुद्रायें, मोहर, मिट्टी के बर्तन, चांदी सोने के आभूषण इत्यादि के अवशेष मिले हैं, जिनसे उन प्राचीन सभ्यताओं का चित्र हमारे सामने स्पष्ट हुआ है। अभी अभी पिछले कुछ वर्षों में पेनसिलवेनिया और शिकागो विश्वविद्यालयों के श्रमरीकी पुरातत्व गवेषकों को प्राचीन सुमेर के प्रसिद्ध नगर निपुर के कुछ शिलालेख प्राप्त हुए हैं। इनमें से अधिकतर शिलालेख उस समय के लोगों के निजी "लेखसंग्रहालयों" के हैं। इनमें से कुछ शिलालेख "शिक्ष ग्रंथों" और कुछ "निर्देश ग्रन्थों" के रूप में प्रयुक्त किये जाते थे। इन शिलालेखों में कुछ में गरिणत के प्रश्न हैं और कुछ में कानूनी समस्यायें । एक शिलालेख में जनता को विद्याध्ययन के लिए निमन्त्रित किया गया है, और इस प्रकार शिक्षा के लिये लोगों को प्रेरित करने वाला यह सबसे प्राचीन लेख है । इतना असन्दिग्ध रूप से कहा जा सकता है कि सुमेरियन जाति उस जमाने की दृष्टि से बहुत आगे बढ़ चुकी थी और वह धीरे धीरे समाज शासन व्यवस्था और वैयक्तिक उत्तरदायित्व के आदर्श की घोर अग्रसर हो रही थी । यह निश्चयपूर्वक कहना कठिन है कि सबसे प्राचीन सभ्यता कौनसी है ? - सबसे पहिले सभ्यता का विकास मिस्र में हुआ या सुमेर में, - या इन दोनों सभ्यताओं का विकास संसार में सबसे पहिले लगभग एक ही काल में पृथक पृथक स्वतन्त्र रूप से हुआ, या इन दोनों सभ्यताओं से भी पहिले अपने ही ढंग की (जैसा कि कुछ भारतीय पुरातत्ववेत्ता कहते हैं) भारतीय आर्य संस्कृति का एवं चीन में अपने ही ढंग की चीनी संस्कृति का विकास हुआ। जिस प्रकार आधुनिक काल में तरतीबवार समस्त संसार का इतिहास लिखा जाता है, यह बात उस पुराने जमाने में तो प्रायः थी ही नहीं, फिर भी उस जमाने के अवशिष्ट चिन्हों, मुद्राओं, धातुपत्र एवं शिलालेखों के आधार पर कुछ अनुमान इतिहासकारों ने लगाये ही एवं अब तक जो कुछ सामग्री अथवा जो कुछ भी तथ्य उस पुराने काल के मिले हैं उससे कई पाश्चात्य विद्वानों की अब तक तो यही धारणा बनती है कि सुमेर की ही सभ्यता सबसे प्राचीन है । ईसा से पाँच-छः हजार वर्ष पहिले के जो अवशेष सुमेर में मिले हैं उतने पूर्वकाल के अवशेष मिस्र में भी जिसकी सभ्यता प्रतिपुरातन मानी जाती है, नहीं मिलते। भारत एवं चीन के पुरातन इतिहास के विषय में तो हम कह सकते हैं कि पाश्चात्य विद्वानों का ज्ञान अभी अधूरा ही है । जो कुछ भी हो इतना तो हम देखते हैं कि थोड़े से ही पूर्वापर अन्तर से प्राचीन दुनिया में प्रायः एक ही साथ चार संस्कृतियों का विकास होता है यथा दजला भौर फरात की नदियों की घाटी में सुमेर और बेबीलोन सभ्यता का, नील नदी की घाटी में मिस्र की सभ्यता का, भारत में सिन्धु नदी की घाटी में सिन्धु सभ्यता का (आर्य सभ्यता नहीं ) एवं ठेठ पूर्वीय चीन में ह्वांगहो और यांगटीसिक्यांग नदी की घाटियों में चीनी सभ्यता का । इतना ही नहीं कि इन नदियों की उपत्यकाओं में भिन्न भिन्न सभ्यतायें विद्यमान थीं, किन्तु अपनी सुविकसित अवस्थानों में वे समकालीन भी थीं और परस्पर उनमें सांस्कृतिक एवं व्यापारिक विनिमय भी होता रहता था । यहाँ यह बात देखने की है कि नदी की घाटियों में ही प्राचीन सभ्यताओं का विकास होता है, अन्य जगहों पर नहीं । इसका भौगोलिक कारण है । भौगोलिक परिस्थितियों का मनुष्य के जीवन एवं उसके विकास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। प्राचीन काल में मनुष्य स्थिर होकर उसी जगह ठहर सकता था, जहाँ वर्ष में बारहों महीने खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके, पशुओं के लिए चारा मिल सके, औौर घर बनाने के लिए कुछ सामग्री उपलब्ध हो । ऐसी परिस्थितियाँ उपर्युक्त नदियों की घाटियों में विद्यमान थीं । मिस्र में नील नदी की घाटी में मिट्टी एवं ऐसा पत्थर जो आसानी से इमारतों के काम आ सके बहुतायत से मिलता था । मेसोपोटेमिया में यदि पत्थर आ नहीं था तो वहीं एक प्रकार की ऐसी मिट्टी थी जो सूर्य की गर्मी से पककर पक्की ईंट की तरह बन जाती थी। इन नदियों की घाटियों में खूब घास पैदा होती थी, एवं अन्न के उत्पादन के लिए बारहों महीने सिंचाई का साधन था । अतएव ऐसे स्थलों पर मनुष्यों का स्थायीरूप से घर, गांव, नगर बनाकर बस जाना स्वाभाविक ही था । इन उपत्यकाओं में बहुत से लोग स्थायी रूप से बस गए । शनैः शनैः उनकी जनसंख्या में वृद्धि हुई, एवं उन्होंने संगठित सभ्यताओं का विकास किया । मानव का सव प्रथम सगाठत सभ्यताय इस सृष्टि में इस पृथ्वी पर यह पहला ही अवसर था कि मानव स्थिर होकर एक जगह बसने लगा । उसमें सामाजिक चेतना और उत्तरदायित्व का विकास हुआ, और प्राकृतिक परिस्थितियों को अपने लिये सुखद बनाने का उसने सामूहिक रूप से प्रयास किया । इन नदियों की घाटियों के अतिरिक्त पृथ्वी पर दूसरी जगहों पर घुमक्कड़ लोग ( Nomadic People ) भोजन की तलाश में इधर उधर घूमा फिरा करते थे । इन लोगों की वजह से इतिहास का यह एक अपूर्वतम तथ्य बराबर बना रहा है कि शांत स्थिर बसे हुए लोगों में एवं इन घुमक्कड़ लोगों में बारबार संघर्ष चलता रहा है - नये घुमक्कड़ लोग आये हैं, पुराने बसे हुए लोगों को जीता है, या ये उन्हीं में घुल मिलकर वहीं बस गये हैं । एवं फिर नये घुमक्कड़ लोगों का प्रवाह आया हैऔर इस प्रकार सभ्यताओं का आरोहरण अवरोहरण, उत्थान पतन होता रहा है और इतिहास गतिमान रहा है । सुमेर की सभ्यता का विकास सुमेरियन लोगों ने किया जो आज सर्वथा लुप्त है । कौन ये सुमेरियन लोग थे, कहाँ इनका उद्गम था यह सभी निश्चितरूप से नहीं कहा जा सकता । ये लोग प्रार्य, सेमेटिक, मंगोल, निग्रो सभ्यताओं के लोगों से अन्य ही लोग थे । इन सभ्यताओं से इनका कोई सीधा सम्बन्ध नहीं बैठता । स्यात् ये वे ही भूरे या गहरे बादामी रंग (Brunet ) के लोग थे जो नव-पाषाण युग में पच्छिम में स्पेन से लेकर पूर्व में प्रशांत महासागर तक भूमध्यसागर तटीय प्रदेशों में फैले हुए थे । हाँ, कुछ विद्वानों की राय है कि सिंधु ( भारत ) से ही कुछ लोगों ने मेसोपोटेमिया जाकर भाज से ७-८ हजार वर्ष पूर्व सुमेरी सभ्यता को जन्म दिया था । मेसोपोटेमिया में पहिले से ही नव-पाषारण युगीन उपरोक्त भूरे रंग के लोग बसे हुए थे, उन्हीं में सिंधु लोगों के सम्पर्क से संगठित सभ्यता का विकास हुआ । तो ये सिन्धु लोग कौन थे ? ये वे ही लोग थे जिनमें उस प्राचीन सिंधु ( मोहेंजोदाड़ो हरप्पा) सभ्यता का विकास हुआ था जिस के विषय में कुछ विद्वानों द्वारा यह माना जाता है कि वह भारत की प्राचीन द्रविड़ जाति और जाति दोनों के मेल से बनी थी । इसमें संदेह नहीं कि सिंधु और सुमेर - बेबीलोन की सभ्यता बहुत मिलती जुलती है । सुमेर के प्राचीन लोगों ने पहिले ग्राम बसाये और फिर ये ही ग्राम विकसित होकर नगर बने । कई नगरों के अवशेष मिले हैं जिनमें निपुर, निनेवेह, उर, लागश, किश और बेबीलोन मुख्य हैं। इन नगरों में पकी हुई चमकदार ईटों के सुन्दर सुन्दर मकान बने हुए थे । मिट्टी के अनेक प्रकार के सुन्दर सुन्दर बर्तन एवं मूर्तियाँ उस प्राचीन काल की उपलब्ध हुई हैं । प्रारम्भ में प्रत्येक नगर का शासन अलग अलग था - वास्तव में ये छोटे छोटे नगर राज्य थे । इन नगरों के राजा होते थे । मंदिरों के पुरोहित, पुजारी एवं वैद्य, चिकित्सक, जादू-टोना करने वाले लोग ही राजा होते थे । प्रत्येक नगर का एक मुख्य देवता होता था - उस मुख्य देवता का नगर में एक मुख्य मन्दिर होता था, उस मन्दिर का पुरोहित (पुजारी) ही नगर का राजा होता था। धर्मगुरु एवं नगर का शासक एक ही व्यक्ति होता था । नदियों में से नहरें निकालकर ये अपने खेतों को सींचते थे । नहरों द्वारा खेतों को सींचने की कला अद्भुत रूप से विकसित थी । गेहूँ, जौ की खेती मुख्यतया होती थी। गाय, बैल, भेड़, बकरी, गदहे इन लोगों के पालतू जानवर थे । घोड़े से ये लोग परिचित नहीं थे, जहाज रानी उद्यम का भी ये लोग धीरे-धीरे विकास कर रहे थे । इनकी विचित्र एक लेखन कला थी; तत्कालीन मानव सभ्यता के लिये वह एक महान उपलब्धि थी । भावों को चित्रों से सूचित किया जाता था, जो भाव इस प्रकार सूचित नहीं किये जा सकते थे उनके लिये खण्ड शब्द थे, जो चित्र नहीं बल्कि ध्वनि सूचक चिन्ह होते थे । ये चिन्ह वस्तु या भाव विशेष की सूचना देते थे । इस प्रकार यह पूर्ण चित्र लिपि नहीं किन्तु खंड चित्रलिपि थी । मिट्टी की छोटी छोटी टाइलों अर्थात् पट्टियों पर लकड़ी की नोकदार कलम से, सुमेरियन लोग, ये चित्र या शब्द- खंड कुरेदते थे ( जिससे यह लिपि सूच्याकार या कीलाक्षर - Cunei form कहलाई); बाद में वे मिट्टी की टाइलें पकाली जाती थीं और इस प्रकार उनके लेख सुरक्षित रहते थे। यह भाषा और लिपि इतना विकास पा चुकी थी कि इसमें व्यापार, काव्य और धर्म के जटिल भावों को भी अभिव्यक्त किया जा सकता था । उक्त लिपि में सबसे पुराने लेख ३६०० ई० पू० तक के मिलते हैं; ३२०० ई० पू० से तो लिखित पट्टियों की एक श्रृंखला सी मिलने लगती है । २७०० ई० पू० तक सुमेरिया में विशाल पुस्तकालय स्थापित हो चुके थे जिनमें उक्त लिखित पट्टियाँ संगृहीत थीं । प्राप्त अवशेषों से पता लगा है कि इन पट्टियों में व्यापार, ज्योतिष, राज्यादेश, सम्राटों के जीवन सम्बन्धी बातें लिखी हुई थीं; धर्म सम्बन्धी विचार, यहाँ तक कि काव्यात्मक गीत और देव-प्रार्थनायें भी मिली हैं । इस तरह के बहुत से ऐसे लेख मिले हैं जिनसे उन लोगों के रहन-सहन और इतिहास का पता लगता है । भिन्न भिन्न नगर राज्यों में आपस में लड़ाइयाँ और झगड़े होते रहते थे । अन्त में इरेच नामक नगर राज्य के राजा पुरोहित ने समस्त सुमेर प्रदेश को मिलाकर एक साम्राज्य स्थापित किया जो फारस की खाड़ी से पच्छिम में भू-मध्यसागर तक फैला हुआ था । इस पृथ्वी पर स्यात् यह पहिला संगठित साम्राज्य था । सुमेर प्रदेश में उपरोक्त नगर राज्य जब स्थित थे, उसी समय अरब रेगिस्तान की सेमेटिक जातियां इधर उधर घुमक्कड़ लोगों की तरह घूमा करती थीं । इन्हीं जातियों की अक्काद जाति के एक सरदार ने जिसका नाम सार्गन था, सुमेर पर हमला किया और वहां अपना राज्य स्थापित किया। सार्गन जिसका ऐतिहासिक काल अनुमान से २७५० ई० पू० माना जाता है, इतिहास का प्रथम सैनिक शासक था । उसका राज्य विस्तार फारस की खाड़ी से भू-मध्यसागर तक फैला हुआ था। उसका साम्राज्य सुमेर अक्काद साम्राज्य कहलाता है । सुमेरीयन लोगों की ही सभ्यता, लिपि, भाषा, देवपूजा, इत्यादि इन नये विजेताओं ने अपनाली । इस वंश के राजा ज्योंही कमजोर हुए तो सेमेटिक लोगों की एक अन्य जाति ने इस प्रदेश पर हमला किया, बेबीलोन नामका एक सुन्दर नगर बसाया अतएव उनका साम्राज्य भी बेबीलोन साम्राज्य कहलाया । इस जाति का प्रसिद्ध राजा हमुरबी हुआ जिसका काल लगभग २१०० ई० पू० अनुमानित किया जाता है । इसके राज्य काल में व्यापार की बहुत उन्नति हुई, शासन के संगठित नियत एवं कानून इस सम्राट ने बनाये । इतिहास में स्यात् यही सर्व प्रथम राजा था जिसने शासन सम्बन्धी एवं व्यक्तियों के सामाजिक व्यवहार सम्बन्धी कानून बनाये । इसके शासनकाल में कई बड़े बड़े नगर बसे, जिनके अब तो अवशेष मात्र मिट्टी के नीचे दबे हुए मिलते हैं । किन्तु इन भग्नावशेषों में विद्वानों को राजा हमुरबी द्वारा लिखे गये ( जैसा ऊपर कहा गया है मिट्टी की पट्टियों पर खुदे हुए ) अनेक पत्र मिले हैं जो उसने राज्य के भिन्न भिन्न विभागों के अफसरों को लिखे थे और जिनमें उसने शासन संबंधी, तथा मंदिर, धर्म एवं काल गरगना संबंधी अनेक प्रदेश दिये थे । इन पत्रों के अतिरिक्त पत्थर का एक लम्बा टुकड़ा भी मिला है जिस पर हमुरबी के शासन कानून हैं। उन पत्रों में जो प्रदेश हैं - उदाहरण स्वरूप वे इस प्रकार हैं - यूफीटीज ( दजला ) नदी में व्यापारिक विकास एवं आवागमन में जितनी रूकावटें आती हैं उनको साफ कर देना चाहिये । कर समय पर एकत्र हो जाना चाहिये, एवं जो लोग कर अदा नहीं करते हैं उनको सजा मिलनी चाहिये । बेईमान न्यायाधीशों एवं राज कर्मचारियों को भी न्याय के सामने प्रस्तुत होना पड़ेगा, इत्यादि इत्यादि । उपरोक्त "प्राप्त पत्थर" में जो कानून खुदे हैं उनमें से कुछ इस से प्रकार हैंः( १ ) यदि कोई पुत्र अपने पिता को पीटे तो उसका हाथ काट दिया जाय । ( २ ) जो किसी की आँख फोड़े तो उसकी श्रींख फोड़ दी जाय । ( ३ ) किसी कारीगर की लापरवाही से यदि मकान गिर जाय तो मकान वाले का जो नुकसान हो वही नुकसान कारीगर का किया जाय । ( ४ ) नहरों को खराब करने वाले को कड़ी सजा दी जाय, इत्यादि । राजा के, उपरोक्त पत्रों में जो आदेश लिखित हैं, एवं पत्थर पर जो कानून खुदे हुए हैं, उनसे उस प्राचीन काल की समाज व्यवस्था के विषय में बहुत कुछ मालूम होता है । यह सामाजिक व्यवस्था काफी संगठित एवं विकसित थी । तीन श्रेणी के लोग समाज में थे१. उच्च वर्ग - जिसमें पुरोहित, पुजारी, शासनकर्त्ता, राज्य कर्मचारी लोग थे । २. मध्यम वर्ग - जिसमें विशेषतः व्यापारी थे । ३. गुलाम - जिसमें विशेषतः खेतीहर मजदूर, नौकर थे । ऐसा भी अनुमान होता है कि स्त्रियों की स्थिति बहुत ऊंची थी । स्त्रियां बहुधा व्यापार भी किया करती थीं । बहुपत्नीत्व की प्रथा का प्रचलन था किन्तु स्त्रियों को तलाक का अधिकार था । व्यापार, बैंकिंग ( लेन देन ), खेती, सिंचाई के लिये नहरें, एवं नगरों की स्वच्छता के लिये नालियां, इत्यादि बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता था । हमुरबी की मृत्यु के पश्चात साम्राज्य फिर तितर बितर हो गया । १७०० ई०पू० में इसका पतन होना प्रारम्भ हुआ, किन्तु, ८ वीं शती ई० पू० तक किसी प्रकार यह चलता रहा। नये सेमेटिक लोग इस प्रदेश में आगये, जिन्होंने सब व्यवस्था को नष्ट भ्रष्ट कर दिया। बेबीलोन की सभ्यता से वे कुछ भी लाभ नहीं उठा सके । बेबीलोन की प्राचीन भाषा भी समाप्त हो गई एवं उसकी जगह एक प्रकार की सेमेटिक भाषा का जो उस जमाने की यहूदी भाषा से कुछ कुछ मिलती जुलती थी, प्रचलन हो गया । बेबीलोन के लोगों ने सुमेरियों की ही लेखन कला को अपनाकर उसे अधिक उन्नत कर लिया था। मिट्टी की पट्टियों पर धातु की कलमों से लिखा जाता था । इस प्रकार पुस्तकें लिखी जाकर मन्दिरों में रक्खी जाती थीं । उस काल का एक महाकाव्य मिला है । जो "गिलगमिश" महाकाव्य के नाम से प्रसिद्ध है । अनेक दन्त-कथायें भी उन लोगों में प्रचलित थीं। उन लोगों में सृष्टि रचना और महाप्रलय की एक कहानी प्रचलित थी जो एक चट्टान पर लिखी हुई मिली है । लगभग २००० ई० १० में इन सबका अस्तित्व होना चाहिये । सृष्टि रचना और प्रलय की इसी कहानी को बाद में यहूदियों ने अपनी बाइबल में अपना लिया, और यहूदियों की बाइबल से मुसलमानों ने अपनी कुरान में । बेवीलोन में गरिणत, ज्योतिष, इतिहास, चिकित्सा शास्त्र, व्याकरण, दर्शन का भी ज्ञान था, जिससे कालांतर में जूडिया, फिलस्तीन, सीरिया, अरब और ग्रीस के लोग भी प्रभावित हुए। जब बेबीलोन साम्राज्य खत्म प्रायः हो रहा था तो टाईग्रीस, युफ्रीटीज इन दो नदियों की घाटी के उत्तर भाग में एक नये राष्ट्र का उदय हो रहा था । इस नये राष्ट्र का मुख्य नगर असुर था, जिससे इस राज्य का नाम ही प्रसीरिया हुआ । असुर पहले एक छोटासा नगर राज्य ही था । यहाँ के निवासियों ने बेबीलोन की सभ्यता से ही काल-गणना, लेखन कला, मूर्तिकला एवं सभ्यता की अन्य बातें सीखीं। प्रसीरियन लोगों ने सीरिया, इजराइल, जूडिया एवं मिस्र साम्राज्य के भी कई भागों पर कुछ काल के लिए विजय प्राप्त की एवं अपना एक महान असीरीयन साम्राज्य स्थापित किया । इस साम्राज्य का सर्व प्रथम प्रसिद्ध सम्राट सागंन द्वितीय था ७०५ ई० पू० माना जाता है । सार्गन के पुत्र सेनाकरीब (७०५मानव की सर्व प्रथम संगठित सभ्यतायें ६८१ ई० पू० ) ने प्रसिद्ध बेबीलोन नगर को तो विध्वंस कर दिया किन्तु उसने एक नया शानदार नगर बसाया जिसका नाम निनेवेह था; इसी नगर को सेनाकरीब ने असीरियन साम्राज्य की राजधानी बनाया । इसी नगर में सम्राट ने एक बहुत विशाल महल बनवाया । इस महल में अलबस्टर पत्थर पर चित्रित अनेक चित्र मिले हैं। इन चित्रों में सम्राट की विजयों का चित्रण है एवं सिंह और अन्य जंगली जानवरों के शिकार के भी चित्र हैं । ये सब चित्र कलापूर्ण ढंग के हैं। इस महल से लगे हुए अनेक सुन्दर सुन्दर उद्यान भी थे। सेनाकरीब सम्राट का पौत्र असुरबनीपाल बड़ा विद्या प्रेमी था । अपने राज्यकाल में उसने एक विशाल पुस्तकालय बनवाया और जितने भी मिट्टी की पट्टियों पर प्राचीन लिखित लेख अथवा पत्र (Documents) उसको मिले वे सब उसने अपने पुस्तकालय में संगृहीत किये । उपरोक्त सेनाकरीब द्वारा निर्मित महलों में लगभग ३ लाख मिट्टी की पट्टियों पर लिखित उस काल के धार्मिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक लेख मिले हैं । ये पट्टियौ अब ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में सुरक्षित हैं । उस काल की ऐतिहासिक बातें इन्हीं रिकार्डों से उद्घाटित हुई हैं। इस प्रकार असुरबनीपाल का राज्य 'ज्ञानोदय' का राज्य था । किन्तु सम्राट को अनेक जाति के लोगों को दबाकर अपने प्राधीन रखना पड़ता था, और यह काम सम्राट अपनी सैनिक शक्ति के बल पर कर सकता था । इस दृष्टि से असीरीयन राज्य एक सैनिक साम्राज्य ही था । सीरीयन राज्य के विरुद्ध विद्रोह चलते ही रहते थे । इसी प्रकार ६०६ ई० पू० में असीरीयन लोगों के साम्राज्य का दक्षिण की ओर से बढकर प्राती हुई सेमेटिक लोगों की केल्डिया (खाल्दी) नामक एक जाति द्वारा अन्त किया गया -निनेवीह नगर पर कब्जा कर लिया गया और मेसोपोटेमिया की भूमि पर केल्डियन साम्राज्य की स्थापना हुई । असीरीयन लोगों की इस हार पर उन प्रदेशों की कई छोटी छोटी जाति के लोगों को जैसे जूड़िया के यहूदी, फिल्सतीन के फिल्सतीन लोग एवं सीरीया के सीरीयन लोगों को बहुत ही खुशी हुई, ऐसा एक विवरण यहूदी लोगों की प्राचीन धर्म पुस्तक "प्राचीन बाइबिल " ( Old Testament) में आता है । केल्डिया ( खल्द ) इस साम्राज्य का सबसे महान् सम्राट नेबूकाडू जार (Nebucha - drazzar) था- जिसने असीरीयन साम्राज्यकाल में विध्वंस्त पुराने बेबीलोन नगर को फिर से बनवाया और उसे अपने साम्राज्य की राजधानी चुना । इस सम्राट का शासन काल ६०४ - ५६१ ई० पू० था । पड़ोस की सब छोटी छोटी जातियों को जीतकर इस सम्राट ने अपने आधीन किया। जूडिया के यहूदी लोगों को वहाँ से हटाकर वह अपनी राजधानी वेबीलोन में लेगया और वहीं उनको बसाया । सम्राट ने बेबीलोन नगर को बहुत सुन्दर एवं समृद्ध किया । नगर में एक बहुत विशाल और सुन्दर महल बनवाया- इतना सुन्दर कि जितना मेसोपोटेमिया में किसी सम्राट के राज्यकाल में नहीं बना था । अपनी स्त्री को प्रसन्न करने के लिये उसने संसार प्रसिद्ध भूलते बाग (Hanging Gardens ) भी बनवाये । झूलते बाग - प्राचीन बेबीलोन के लोग अनेक देवी देवताओं को पूजते थे । देवताओं के सुन्दर सुन्दर विशाल मन्दिर बनवाये जाया करते थे जिनमें बड़े बड़े पुजारी पुरोहित लोग रहते थे । बहुधा शासक या सम्राट ही प्रधान पुरोहित भी होता था । बेबीलोन के सम्राट नेबूका जार ने एक बहुत विशाल, स्तम्भशैली (Towerlike) का मन्दिर बनवाया । यह मन्दिर बहुत ऊंचा था और इसके अनेक खंड थे । प्रत्येक खंड के बारजों ( Balconies ) में सुन्दर सुन्दर पुष्पित पौधे, वृक्ष एवं उद्यान लगाये गये थे-मानों मुख्य भवन के भिन्न भिन्न खंडों के बाहर की ओर झरोखों में ये घने पुष्पित पौधे और उद्यान ऐसे लग रहे हों जैसे प्रकाश में लटक रहे हैं। आश्चर्यजनक इंजीनियरिंग ढंग से
कागज का आविष्कार सर्व प्रथम चीन में हुआ । कागज के आविष्कार के बाद भी साहित्य का सर्वसाधारण में प्रचलित होना सम्भव नहीं था, क्योंकि किसी लेख की हाथों से हजारों प्रतियां नकल करके लोगों में प्रसारित करना कोई बहुत आसान काम नहीं था । यह तो तभी सम्भव हो पाया जब आज से केवल पाँच सौ वर्ष पूर्व सन् एक हज़ार चार सौ पचास में यूरोप में छापेखाने का आविष्कार हुआ, और छापेखाने में मूल हस्त लिखित लेख की अनेक प्रतियां छपकर लोगों में फैलने लगीं। वैसे यूरोप में छापेखाने के आविष्कार के बहुत पहिले प्राचीन चीन में भी ब्लोक प्रिंटिंग का आविष्कार हो चुका था किन्तु वह ढंग अन्य देशों में प्रचलित नहीं हो पाया था । यूरोप में छापेखाने के आविष्कार के बाद भी, भिन्न भिन्न देशों में भिन्न भिन्न लिपियों के छापेखानों के प्रचलित होने की बात तो केवल पिछले दो सौ पचास-तीन सौ वर्षों की ही है । * इसके पूर्व तो समस्त प्राचीन साहित्य, ज्ञान विज्ञान एवं दर्शन यत्र यत्र अज्ञात स्थानों में हस्तलिखित पोथियों में ही बद्ध पड़ा था । कल्पना कीजिए - पृथ्वी के दो अरब वर्ष के इतिहास में वास्तविक मानव के पचास हजार वर्ष के इतिहास में, - मानो कल ही सर्वसाधारण के लिये प्रकाश का द्वार खुला हो । अभी तो सर्वसाधारण को प्रकाश का प्रभास मात्र मिलने लगा है। कितना ज्ञान अभी सर्व साधारण तक पहुँचाना शेष है। कितना अनन्त प्रकाश "मानव" के लिये श्रात्मसात करना अभी शेष है । अद्भुत इस सृष्टि की अद्भुत इस मानव की कहानी है । यह कहानी तो अभी प्रारम्भ ही हुई है । * सन् एक हज़ार छः सौ ईशून्य में भीमजी पारिख नामक एक गुजराती व्यापारी ने सूरत की एक कम्पनी की सहायता से इंगलैंड से आठ हज़ार मासिक वेतन पर एक अंग्रेज बुलाया। उसने हिन्दी के सभी प्रक्षरों को ढ़ालकर हिन्दी प्रेस को जन्म दिया। प्राचीन मेसोपोटेमिया खाड़ी के उत्तर में जो आधुनिक ईराक प्रदेश है, उसको इतिहासकारों ने मेसोपोटेमिया नाम दिया है- मेसोपोटेमिया का अर्थ है नदियों के बीच की भूमि । वास्तव में उत्तर पच्छिम से प्राती हुई दो नदियां यूटीज और टाईग्रीस फारस की खाड़ी में गिरती हैं और इन दो नदियों के बीच की भूमि को मेसोपोटेमिया कहा गया है। आजकल तो फारस की खाड़ी में जहाँ ये दोनों नदियां गिरती हैं, उनका मुहाना एक ही है, किन्तु प्राचीन काल में प्राज से लगभग आठ-दस हजार वर्ष पूर्व ये दोनों नदियाँ पृथक पृथक गिरती थीं और इन दोनों नदियों के मुहाने के बीच में भी काफी लम्बी चौड़ी भूमि थी । यही मुहानों के बीच की भूमि प्राचीन काल में सुमेर कहलाती थी, जिसमें प्राचीन काल के प्रसिद्ध नगर निपुर, उर, इरीदू, तेलप्रेलओबीद इत्यादि बसे हुए थे । उस समय फारस की खाड़ी का पानी भी कि ऊपर तक फैला हुआ था । इन हजारों वर्षों में दोनों नदियां अपनी मिट्टी से समुद्र को पाटती रहीं और फारस की खाड़ी की सीमा भी बदल गई । सुमेर प्रदेश से भागे उत्तर में प्राचीन काल में प्रक्काद प्रदेश था जिसकी राजधानी बेबीलोन थी । उससे भी आगे बढ़कर असीरिया प्रदेश था जिसकी राजधानी असुर थी । सुमेर, अक्काद और सीरिया ये तीनों प्रदेश सम्मिलित रूप में मेसोपोटेमिया कहलाते हैं, और तीनों प्रदेशों की प्राचीन सभ्यतायें काल क्रम में सबसे दस पहिले सुमेर, सुमेर के बाद बेबीलोन, बेबीलोन के बाद प्रसीरिया और फिर केल्डिया जाति के लोगों का दूसरा बेबीलोन साम्राज्य, इस प्रकार भाती हैं। इन सब सभ्यताओं का प्रायः एक ही प्रवाह और तारतम्य था, और ये सब प्राचीन मेसोपोटेमिया की सभ्यता मानी जाती हैं । इस सभ्यता का विकास कब और कैसे हुआ और किन लोगों ने किया ? - पिछले अध्याय में हम देख आाये हैं कि आज से लगभग दस - बारह हजार वर्ष पूर्व स्पेन के पच्छिमी छोर से लेकर पूर्व में प्रशान्त महासागर तक, यथा फ्रांस, इटली, मिस्र, एशिया माइनर, भारत और चीन में नव-पाषाण युगीय स्तर की अर्द्ध-सभ्य अवस्था फैली हुई थी; जिसमें कृषि, पशुपालन, कृषि सम्बन्धी देव देवियों की पूजा और भेंट, मिट्टी के बर्तन बनाना इत्यादि बातें प्रमुख थीं। इसी अवस्था में से विकास पाकर सामाजिक दृष्टि से सुसंगठित, सुमेर प्रदेश की वह सभ्यता बनी जिसके अवशेष हमें छः-सात हजार वर्ष ईशून्य पूशून्य तक के मिलते हैं । सबसे पहिले मानव के इतिहास में हम इस पृथ्वी पर नगर बसते हुए पाते हैं एवं लोगों को एक सभ्य सुसंगठित समाज बना कर रहता हुआ पाते हैं । सुमेर, बेबीलोन, असीरिया की सभ्यतायें सर्वथा लुप्त प्राय हैं किन्तु उन लुप्त सभ्यताओं का चित्र एवं इतिहास जो आज हमने बनाया है, वह उन खुदाइयों के फलस्वरूप जो उक्त प्रांत में प्राज से कई दशक वर्ष पूर्व हुईं । इन खुदाइयों में उस प्राचीनकाल के अद्भुत नगर, महल, सड़कें, कुएं, मन्दिर, देवताओं की मूर्तियाँ, लेखनकला, अनेक लेख, मुद्रायें, मोहर, मिट्टी के बर्तन, चांदी सोने के आभूषण इत्यादि के अवशेष मिले हैं, जिनसे उन प्राचीन सभ्यताओं का चित्र हमारे सामने स्पष्ट हुआ है। अभी अभी पिछले कुछ वर्षों में पेनसिलवेनिया और शिकागो विश्वविद्यालयों के श्रमरीकी पुरातत्व गवेषकों को प्राचीन सुमेर के प्रसिद्ध नगर निपुर के कुछ शिलालेख प्राप्त हुए हैं। इनमें से अधिकतर शिलालेख उस समय के लोगों के निजी "लेखसंग्रहालयों" के हैं। इनमें से कुछ शिलालेख "शिक्ष ग्रंथों" और कुछ "निर्देश ग्रन्थों" के रूप में प्रयुक्त किये जाते थे। इन शिलालेखों में कुछ में गरिणत के प्रश्न हैं और कुछ में कानूनी समस्यायें । एक शिलालेख में जनता को विद्याध्ययन के लिए निमन्त्रित किया गया है, और इस प्रकार शिक्षा के लिये लोगों को प्रेरित करने वाला यह सबसे प्राचीन लेख है । इतना असन्दिग्ध रूप से कहा जा सकता है कि सुमेरियन जाति उस जमाने की दृष्टि से बहुत आगे बढ़ चुकी थी और वह धीरे धीरे समाज शासन व्यवस्था और वैयक्तिक उत्तरदायित्व के आदर्श की घोर अग्रसर हो रही थी । यह निश्चयपूर्वक कहना कठिन है कि सबसे प्राचीन सभ्यता कौनसी है ? - सबसे पहिले सभ्यता का विकास मिस्र में हुआ या सुमेर में, - या इन दोनों सभ्यताओं का विकास संसार में सबसे पहिले लगभग एक ही काल में पृथक पृथक स्वतन्त्र रूप से हुआ, या इन दोनों सभ्यताओं से भी पहिले अपने ही ढंग की भारतीय आर्य संस्कृति का एवं चीन में अपने ही ढंग की चीनी संस्कृति का विकास हुआ। जिस प्रकार आधुनिक काल में तरतीबवार समस्त संसार का इतिहास लिखा जाता है, यह बात उस पुराने जमाने में तो प्रायः थी ही नहीं, फिर भी उस जमाने के अवशिष्ट चिन्हों, मुद्राओं, धातुपत्र एवं शिलालेखों के आधार पर कुछ अनुमान इतिहासकारों ने लगाये ही एवं अब तक जो कुछ सामग्री अथवा जो कुछ भी तथ्य उस पुराने काल के मिले हैं उससे कई पाश्चात्य विद्वानों की अब तक तो यही धारणा बनती है कि सुमेर की ही सभ्यता सबसे प्राचीन है । ईसा से पाँच-छः हजार वर्ष पहिले के जो अवशेष सुमेर में मिले हैं उतने पूर्वकाल के अवशेष मिस्र में भी जिसकी सभ्यता प्रतिपुरातन मानी जाती है, नहीं मिलते। भारत एवं चीन के पुरातन इतिहास के विषय में तो हम कह सकते हैं कि पाश्चात्य विद्वानों का ज्ञान अभी अधूरा ही है । जो कुछ भी हो इतना तो हम देखते हैं कि थोड़े से ही पूर्वापर अन्तर से प्राचीन दुनिया में प्रायः एक ही साथ चार संस्कृतियों का विकास होता है यथा दजला भौर फरात की नदियों की घाटी में सुमेर और बेबीलोन सभ्यता का, नील नदी की घाटी में मिस्र की सभ्यता का, भारत में सिन्धु नदी की घाटी में सिन्धु सभ्यता का एवं ठेठ पूर्वीय चीन में ह्वांगहो और यांगटीसिक्यांग नदी की घाटियों में चीनी सभ्यता का । इतना ही नहीं कि इन नदियों की उपत्यकाओं में भिन्न भिन्न सभ्यतायें विद्यमान थीं, किन्तु अपनी सुविकसित अवस्थानों में वे समकालीन भी थीं और परस्पर उनमें सांस्कृतिक एवं व्यापारिक विनिमय भी होता रहता था । यहाँ यह बात देखने की है कि नदी की घाटियों में ही प्राचीन सभ्यताओं का विकास होता है, अन्य जगहों पर नहीं । इसका भौगोलिक कारण है । भौगोलिक परिस्थितियों का मनुष्य के जीवन एवं उसके विकास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। प्राचीन काल में मनुष्य स्थिर होकर उसी जगह ठहर सकता था, जहाँ वर्ष में बारहों महीने खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके, पशुओं के लिए चारा मिल सके, औौर घर बनाने के लिए कुछ सामग्री उपलब्ध हो । ऐसी परिस्थितियाँ उपर्युक्त नदियों की घाटियों में विद्यमान थीं । मिस्र में नील नदी की घाटी में मिट्टी एवं ऐसा पत्थर जो आसानी से इमारतों के काम आ सके बहुतायत से मिलता था । मेसोपोटेमिया में यदि पत्थर आ नहीं था तो वहीं एक प्रकार की ऐसी मिट्टी थी जो सूर्य की गर्मी से पककर पक्की ईंट की तरह बन जाती थी। इन नदियों की घाटियों में खूब घास पैदा होती थी, एवं अन्न के उत्पादन के लिए बारहों महीने सिंचाई का साधन था । अतएव ऐसे स्थलों पर मनुष्यों का स्थायीरूप से घर, गांव, नगर बनाकर बस जाना स्वाभाविक ही था । इन उपत्यकाओं में बहुत से लोग स्थायी रूप से बस गए । शनैः शनैः उनकी जनसंख्या में वृद्धि हुई, एवं उन्होंने संगठित सभ्यताओं का विकास किया । मानव का सव प्रथम सगाठत सभ्यताय इस सृष्टि में इस पृथ्वी पर यह पहला ही अवसर था कि मानव स्थिर होकर एक जगह बसने लगा । उसमें सामाजिक चेतना और उत्तरदायित्व का विकास हुआ, और प्राकृतिक परिस्थितियों को अपने लिये सुखद बनाने का उसने सामूहिक रूप से प्रयास किया । इन नदियों की घाटियों के अतिरिक्त पृथ्वी पर दूसरी जगहों पर घुमक्कड़ लोग भोजन की तलाश में इधर उधर घूमा फिरा करते थे । इन लोगों की वजह से इतिहास का यह एक अपूर्वतम तथ्य बराबर बना रहा है कि शांत स्थिर बसे हुए लोगों में एवं इन घुमक्कड़ लोगों में बारबार संघर्ष चलता रहा है - नये घुमक्कड़ लोग आये हैं, पुराने बसे हुए लोगों को जीता है, या ये उन्हीं में घुल मिलकर वहीं बस गये हैं । एवं फिर नये घुमक्कड़ लोगों का प्रवाह आया हैऔर इस प्रकार सभ्यताओं का आरोहरण अवरोहरण, उत्थान पतन होता रहा है और इतिहास गतिमान रहा है । सुमेर की सभ्यता का विकास सुमेरियन लोगों ने किया जो आज सर्वथा लुप्त है । कौन ये सुमेरियन लोग थे, कहाँ इनका उद्गम था यह सभी निश्चितरूप से नहीं कहा जा सकता । ये लोग प्रार्य, सेमेटिक, मंगोल, निग्रो सभ्यताओं के लोगों से अन्य ही लोग थे । इन सभ्यताओं से इनका कोई सीधा सम्बन्ध नहीं बैठता । स्यात् ये वे ही भूरे या गहरे बादामी रंग के लोग थे जो नव-पाषाण युग में पच्छिम में स्पेन से लेकर पूर्व में प्रशांत महासागर तक भूमध्यसागर तटीय प्रदेशों में फैले हुए थे । हाँ, कुछ विद्वानों की राय है कि सिंधु से ही कुछ लोगों ने मेसोपोटेमिया जाकर भाज से सात-आठ हजार वर्ष पूर्व सुमेरी सभ्यता को जन्म दिया था । मेसोपोटेमिया में पहिले से ही नव-पाषारण युगीन उपरोक्त भूरे रंग के लोग बसे हुए थे, उन्हीं में सिंधु लोगों के सम्पर्क से संगठित सभ्यता का विकास हुआ । तो ये सिन्धु लोग कौन थे ? ये वे ही लोग थे जिनमें उस प्राचीन सिंधु सभ्यता का विकास हुआ था जिस के विषय में कुछ विद्वानों द्वारा यह माना जाता है कि वह भारत की प्राचीन द्रविड़ जाति और जाति दोनों के मेल से बनी थी । इसमें संदेह नहीं कि सिंधु और सुमेर - बेबीलोन की सभ्यता बहुत मिलती जुलती है । सुमेर के प्राचीन लोगों ने पहिले ग्राम बसाये और फिर ये ही ग्राम विकसित होकर नगर बने । कई नगरों के अवशेष मिले हैं जिनमें निपुर, निनेवेह, उर, लागश, किश और बेबीलोन मुख्य हैं। इन नगरों में पकी हुई चमकदार ईटों के सुन्दर सुन्दर मकान बने हुए थे । मिट्टी के अनेक प्रकार के सुन्दर सुन्दर बर्तन एवं मूर्तियाँ उस प्राचीन काल की उपलब्ध हुई हैं । प्रारम्भ में प्रत्येक नगर का शासन अलग अलग था - वास्तव में ये छोटे छोटे नगर राज्य थे । इन नगरों के राजा होते थे । मंदिरों के पुरोहित, पुजारी एवं वैद्य, चिकित्सक, जादू-टोना करने वाले लोग ही राजा होते थे । प्रत्येक नगर का एक मुख्य देवता होता था - उस मुख्य देवता का नगर में एक मुख्य मन्दिर होता था, उस मन्दिर का पुरोहित ही नगर का राजा होता था। धर्मगुरु एवं नगर का शासक एक ही व्यक्ति होता था । नदियों में से नहरें निकालकर ये अपने खेतों को सींचते थे । नहरों द्वारा खेतों को सींचने की कला अद्भुत रूप से विकसित थी । गेहूँ, जौ की खेती मुख्यतया होती थी। गाय, बैल, भेड़, बकरी, गदहे इन लोगों के पालतू जानवर थे । घोड़े से ये लोग परिचित नहीं थे, जहाज रानी उद्यम का भी ये लोग धीरे-धीरे विकास कर रहे थे । इनकी विचित्र एक लेखन कला थी; तत्कालीन मानव सभ्यता के लिये वह एक महान उपलब्धि थी । भावों को चित्रों से सूचित किया जाता था, जो भाव इस प्रकार सूचित नहीं किये जा सकते थे उनके लिये खण्ड शब्द थे, जो चित्र नहीं बल्कि ध्वनि सूचक चिन्ह होते थे । ये चिन्ह वस्तु या भाव विशेष की सूचना देते थे । इस प्रकार यह पूर्ण चित्र लिपि नहीं किन्तु खंड चित्रलिपि थी । मिट्टी की छोटी छोटी टाइलों अर्थात् पट्टियों पर लकड़ी की नोकदार कलम से, सुमेरियन लोग, ये चित्र या शब्द- खंड कुरेदते थे ; बाद में वे मिट्टी की टाइलें पकाली जाती थीं और इस प्रकार उनके लेख सुरक्षित रहते थे। यह भाषा और लिपि इतना विकास पा चुकी थी कि इसमें व्यापार, काव्य और धर्म के जटिल भावों को भी अभिव्यक्त किया जा सकता था । उक्त लिपि में सबसे पुराने लेख तीन हज़ार छः सौ ईशून्य पूशून्य तक के मिलते हैं; तीन हज़ार दो सौ ईशून्य पूशून्य से तो लिखित पट्टियों की एक श्रृंखला सी मिलने लगती है । दो हज़ार सात सौ ईशून्य पूशून्य तक सुमेरिया में विशाल पुस्तकालय स्थापित हो चुके थे जिनमें उक्त लिखित पट्टियाँ संगृहीत थीं । प्राप्त अवशेषों से पता लगा है कि इन पट्टियों में व्यापार, ज्योतिष, राज्यादेश, सम्राटों के जीवन सम्बन्धी बातें लिखी हुई थीं; धर्म सम्बन्धी विचार, यहाँ तक कि काव्यात्मक गीत और देव-प्रार्थनायें भी मिली हैं । इस तरह के बहुत से ऐसे लेख मिले हैं जिनसे उन लोगों के रहन-सहन और इतिहास का पता लगता है । भिन्न भिन्न नगर राज्यों में आपस में लड़ाइयाँ और झगड़े होते रहते थे । अन्त में इरेच नामक नगर राज्य के राजा पुरोहित ने समस्त सुमेर प्रदेश को मिलाकर एक साम्राज्य स्थापित किया जो फारस की खाड़ी से पच्छिम में भू-मध्यसागर तक फैला हुआ था । इस पृथ्वी पर स्यात् यह पहिला संगठित साम्राज्य था । सुमेर प्रदेश में उपरोक्त नगर राज्य जब स्थित थे, उसी समय अरब रेगिस्तान की सेमेटिक जातियां इधर उधर घुमक्कड़ लोगों की तरह घूमा करती थीं । इन्हीं जातियों की अक्काद जाति के एक सरदार ने जिसका नाम सार्गन था, सुमेर पर हमला किया और वहां अपना राज्य स्थापित किया। सार्गन जिसका ऐतिहासिक काल अनुमान से दो हज़ार सात सौ पचास ईशून्य पूशून्य माना जाता है, इतिहास का प्रथम सैनिक शासक था । उसका राज्य विस्तार फारस की खाड़ी से भू-मध्यसागर तक फैला हुआ था। उसका साम्राज्य सुमेर अक्काद साम्राज्य कहलाता है । सुमेरीयन लोगों की ही सभ्यता, लिपि, भाषा, देवपूजा, इत्यादि इन नये विजेताओं ने अपनाली । इस वंश के राजा ज्योंही कमजोर हुए तो सेमेटिक लोगों की एक अन्य जाति ने इस प्रदेश पर हमला किया, बेबीलोन नामका एक सुन्दर नगर बसाया अतएव उनका साम्राज्य भी बेबीलोन साम्राज्य कहलाया । इस जाति का प्रसिद्ध राजा हमुरबी हुआ जिसका काल लगभग दो हज़ार एक सौ ईशून्य पूशून्य अनुमानित किया जाता है । इसके राज्य काल में व्यापार की बहुत उन्नति हुई, शासन के संगठित नियत एवं कानून इस सम्राट ने बनाये । इतिहास में स्यात् यही सर्व प्रथम राजा था जिसने शासन सम्बन्धी एवं व्यक्तियों के सामाजिक व्यवहार सम्बन्धी कानून बनाये । इसके शासनकाल में कई बड़े बड़े नगर बसे, जिनके अब तो अवशेष मात्र मिट्टी के नीचे दबे हुए मिलते हैं । किन्तु इन भग्नावशेषों में विद्वानों को राजा हमुरबी द्वारा लिखे गये अनेक पत्र मिले हैं जो उसने राज्य के भिन्न भिन्न विभागों के अफसरों को लिखे थे और जिनमें उसने शासन संबंधी, तथा मंदिर, धर्म एवं काल गरगना संबंधी अनेक प्रदेश दिये थे । इन पत्रों के अतिरिक्त पत्थर का एक लम्बा टुकड़ा भी मिला है जिस पर हमुरबी के शासन कानून हैं। उन पत्रों में जो प्रदेश हैं - उदाहरण स्वरूप वे इस प्रकार हैं - यूफीटीज नदी में व्यापारिक विकास एवं आवागमन में जितनी रूकावटें आती हैं उनको साफ कर देना चाहिये । कर समय पर एकत्र हो जाना चाहिये, एवं जो लोग कर अदा नहीं करते हैं उनको सजा मिलनी चाहिये । बेईमान न्यायाधीशों एवं राज कर्मचारियों को भी न्याय के सामने प्रस्तुत होना पड़ेगा, इत्यादि इत्यादि । उपरोक्त "प्राप्त पत्थर" में जो कानून खुदे हैं उनमें से कुछ इस से प्रकार हैंः यदि कोई पुत्र अपने पिता को पीटे तो उसका हाथ काट दिया जाय । जो किसी की आँख फोड़े तो उसकी श्रींख फोड़ दी जाय । किसी कारीगर की लापरवाही से यदि मकान गिर जाय तो मकान वाले का जो नुकसान हो वही नुकसान कारीगर का किया जाय । नहरों को खराब करने वाले को कड़ी सजा दी जाय, इत्यादि । राजा के, उपरोक्त पत्रों में जो आदेश लिखित हैं, एवं पत्थर पर जो कानून खुदे हुए हैं, उनसे उस प्राचीन काल की समाज व्यवस्था के विषय में बहुत कुछ मालूम होता है । यह सामाजिक व्यवस्था काफी संगठित एवं विकसित थी । तीन श्रेणी के लोग समाज में थेएक. उच्च वर्ग - जिसमें पुरोहित, पुजारी, शासनकर्त्ता, राज्य कर्मचारी लोग थे । दो. मध्यम वर्ग - जिसमें विशेषतः व्यापारी थे । तीन. गुलाम - जिसमें विशेषतः खेतीहर मजदूर, नौकर थे । ऐसा भी अनुमान होता है कि स्त्रियों की स्थिति बहुत ऊंची थी । स्त्रियां बहुधा व्यापार भी किया करती थीं । बहुपत्नीत्व की प्रथा का प्रचलन था किन्तु स्त्रियों को तलाक का अधिकार था । व्यापार, बैंकिंग , खेती, सिंचाई के लिये नहरें, एवं नगरों की स्वच्छता के लिये नालियां, इत्यादि बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता था । हमुरबी की मृत्यु के पश्चात साम्राज्य फिर तितर बितर हो गया । एक हज़ार सात सौ ईशून्यपूशून्य में इसका पतन होना प्रारम्भ हुआ, किन्तु, आठ वीं शती ईशून्य पूशून्य तक किसी प्रकार यह चलता रहा। नये सेमेटिक लोग इस प्रदेश में आगये, जिन्होंने सब व्यवस्था को नष्ट भ्रष्ट कर दिया। बेबीलोन की सभ्यता से वे कुछ भी लाभ नहीं उठा सके । बेबीलोन की प्राचीन भाषा भी समाप्त हो गई एवं उसकी जगह एक प्रकार की सेमेटिक भाषा का जो उस जमाने की यहूदी भाषा से कुछ कुछ मिलती जुलती थी, प्रचलन हो गया । बेबीलोन के लोगों ने सुमेरियों की ही लेखन कला को अपनाकर उसे अधिक उन्नत कर लिया था। मिट्टी की पट्टियों पर धातु की कलमों से लिखा जाता था । इस प्रकार पुस्तकें लिखी जाकर मन्दिरों में रक्खी जाती थीं । उस काल का एक महाकाव्य मिला है । जो "गिलगमिश" महाकाव्य के नाम से प्रसिद्ध है । अनेक दन्त-कथायें भी उन लोगों में प्रचलित थीं। उन लोगों में सृष्टि रचना और महाप्रलय की एक कहानी प्रचलित थी जो एक चट्टान पर लिखी हुई मिली है । लगभग दो हज़ार ईशून्य दस में इन सबका अस्तित्व होना चाहिये । सृष्टि रचना और प्रलय की इसी कहानी को बाद में यहूदियों ने अपनी बाइबल में अपना लिया, और यहूदियों की बाइबल से मुसलमानों ने अपनी कुरान में । बेवीलोन में गरिणत, ज्योतिष, इतिहास, चिकित्सा शास्त्र, व्याकरण, दर्शन का भी ज्ञान था, जिससे कालांतर में जूडिया, फिलस्तीन, सीरिया, अरब और ग्रीस के लोग भी प्रभावित हुए। जब बेबीलोन साम्राज्य खत्म प्रायः हो रहा था तो टाईग्रीस, युफ्रीटीज इन दो नदियों की घाटी के उत्तर भाग में एक नये राष्ट्र का उदय हो रहा था । इस नये राष्ट्र का मुख्य नगर असुर था, जिससे इस राज्य का नाम ही प्रसीरिया हुआ । असुर पहले एक छोटासा नगर राज्य ही था । यहाँ के निवासियों ने बेबीलोन की सभ्यता से ही काल-गणना, लेखन कला, मूर्तिकला एवं सभ्यता की अन्य बातें सीखीं। प्रसीरियन लोगों ने सीरिया, इजराइल, जूडिया एवं मिस्र साम्राज्य के भी कई भागों पर कुछ काल के लिए विजय प्राप्त की एवं अपना एक महान असीरीयन साम्राज्य स्थापित किया । इस साम्राज्य का सर्व प्रथम प्रसिद्ध सम्राट सागंन द्वितीय था सात सौ पाँच ईशून्य पूशून्य माना जाता है । सार्गन के पुत्र सेनाकरीब ने प्रसिद्ध बेबीलोन नगर को तो विध्वंस कर दिया किन्तु उसने एक नया शानदार नगर बसाया जिसका नाम निनेवेह था; इसी नगर को सेनाकरीब ने असीरियन साम्राज्य की राजधानी बनाया । इसी नगर में सम्राट ने एक बहुत विशाल महल बनवाया । इस महल में अलबस्टर पत्थर पर चित्रित अनेक चित्र मिले हैं। इन चित्रों में सम्राट की विजयों का चित्रण है एवं सिंह और अन्य जंगली जानवरों के शिकार के भी चित्र हैं । ये सब चित्र कलापूर्ण ढंग के हैं। इस महल से लगे हुए अनेक सुन्दर सुन्दर उद्यान भी थे। सेनाकरीब सम्राट का पौत्र असुरबनीपाल बड़ा विद्या प्रेमी था । अपने राज्यकाल में उसने एक विशाल पुस्तकालय बनवाया और जितने भी मिट्टी की पट्टियों पर प्राचीन लिखित लेख अथवा पत्र उसको मिले वे सब उसने अपने पुस्तकालय में संगृहीत किये । उपरोक्त सेनाकरीब द्वारा निर्मित महलों में लगभग तीन लाख मिट्टी की पट्टियों पर लिखित उस काल के धार्मिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक लेख मिले हैं । ये पट्टियौ अब ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में सुरक्षित हैं । उस काल की ऐतिहासिक बातें इन्हीं रिकार्डों से उद्घाटित हुई हैं। इस प्रकार असुरबनीपाल का राज्य 'ज्ञानोदय' का राज्य था । किन्तु सम्राट को अनेक जाति के लोगों को दबाकर अपने प्राधीन रखना पड़ता था, और यह काम सम्राट अपनी सैनिक शक्ति के बल पर कर सकता था । इस दृष्टि से असीरीयन राज्य एक सैनिक साम्राज्य ही था । सीरीयन राज्य के विरुद्ध विद्रोह चलते ही रहते थे । इसी प्रकार छः सौ छः ईशून्य पूशून्य में असीरीयन लोगों के साम्राज्य का दक्षिण की ओर से बढकर प्राती हुई सेमेटिक लोगों की केल्डिया नामक एक जाति द्वारा अन्त किया गया -निनेवीह नगर पर कब्जा कर लिया गया और मेसोपोटेमिया की भूमि पर केल्डियन साम्राज्य की स्थापना हुई । असीरीयन लोगों की इस हार पर उन प्रदेशों की कई छोटी छोटी जाति के लोगों को जैसे जूड़िया के यहूदी, फिल्सतीन के फिल्सतीन लोग एवं सीरीया के सीरीयन लोगों को बहुत ही खुशी हुई, ऐसा एक विवरण यहूदी लोगों की प्राचीन धर्म पुस्तक "प्राचीन बाइबिल " में आता है । केल्डिया इस साम्राज्य का सबसे महान् सम्राट नेबूकाडू जार था- जिसने असीरीयन साम्राज्यकाल में विध्वंस्त पुराने बेबीलोन नगर को फिर से बनवाया और उसे अपने साम्राज्य की राजधानी चुना । इस सम्राट का शासन काल छः सौ चार - पाँच सौ इकसठ ईशून्य पूशून्य था । पड़ोस की सब छोटी छोटी जातियों को जीतकर इस सम्राट ने अपने आधीन किया। जूडिया के यहूदी लोगों को वहाँ से हटाकर वह अपनी राजधानी वेबीलोन में लेगया और वहीं उनको बसाया । सम्राट ने बेबीलोन नगर को बहुत सुन्दर एवं समृद्ध किया । नगर में एक बहुत विशाल और सुन्दर महल बनवाया- इतना सुन्दर कि जितना मेसोपोटेमिया में किसी सम्राट के राज्यकाल में नहीं बना था । अपनी स्त्री को प्रसन्न करने के लिये उसने संसार प्रसिद्ध भूलते बाग भी बनवाये । झूलते बाग - प्राचीन बेबीलोन के लोग अनेक देवी देवताओं को पूजते थे । देवताओं के सुन्दर सुन्दर विशाल मन्दिर बनवाये जाया करते थे जिनमें बड़े बड़े पुजारी पुरोहित लोग रहते थे । बहुधा शासक या सम्राट ही प्रधान पुरोहित भी होता था । बेबीलोन के सम्राट नेबूका जार ने एक बहुत विशाल, स्तम्भशैली का मन्दिर बनवाया । यह मन्दिर बहुत ऊंचा था और इसके अनेक खंड थे । प्रत्येक खंड के बारजों में सुन्दर सुन्दर पुष्पित पौधे, वृक्ष एवं उद्यान लगाये गये थे-मानों मुख्य भवन के भिन्न भिन्न खंडों के बाहर की ओर झरोखों में ये घने पुष्पित पौधे और उद्यान ऐसे लग रहे हों जैसे प्रकाश में लटक रहे हैं। आश्चर्यजनक इंजीनियरिंग ढंग से
UPSC CAPF AC डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म जारी कर दिया गया है. उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाकर एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं. UPSC CAPF DAF 2020 Exam: संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती के लिए डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म (DAF) जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा को क्वालीफाई किया है वे 25 फरवरी शाम 6 बजे तक एप्लीकेशन फॉर्म भर कर जमा कर सकते हैं. एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाना होगा. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन 20 दिसंबर 2020 को किया गया था. इस परीक्षा का रिजल्ट 8 फरवरी 2021 को जारी हुआ था. स्टेप 1: उम्मीदवार सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं. स्टेप 2: अब होमपेज पर दिए गए "DAF for VARIOUS EXAMINATIONS OF UPSC" के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप 3: नया पेज खुलने पर "Click Here" पर क्लिक करें. स्टेप 4: इसके बाद "CENTRAL ARMED POLICE FORCES (ACs) EXAMINATION, 2020" के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप 5: अब लॉग इन करें. स्टेप 6: लॉग इन करने के बाद मांगी गई जानकारी भरकर एप्लीकेशन फॉर्म जमा कर दें. बता दें कि UPSC CAPF परीक्षा का आयोजन सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बाल (SSB) में खाली पदों को भरने के लिए किया जाता है. इस भर्ती के जरिए इस साल 209 पदों को भरा जाना हैं. इनमें से 78 पद बीएसएफ के लिए, 69 सीआईएसएफ के लिए, 27 आईटीबीपी के लिए, 22 एसएसबी के लिए और 13 सीआरपीएफ के लिए हैं.
UPSC CAPF AC डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म जारी कर दिया गया है. उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाकर एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं. UPSC CAPF DAF दो हज़ार बीस Exam: संघ लोक सेवा आयोग ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती के लिए डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा को क्वालीफाई किया है वे पच्चीस फरवरी शाम छः बजे तक एप्लीकेशन फॉर्म भर कर जमा कर सकते हैं. एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाना होगा. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन बीस दिसंबर दो हज़ार बीस को किया गया था. इस परीक्षा का रिजल्ट आठ फरवरी दो हज़ार इक्कीस को जारी हुआ था. स्टेप एक: उम्मीदवार सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं. स्टेप दो: अब होमपेज पर दिए गए "DAF for VARIOUS EXAMINATIONS OF UPSC" के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप तीन: नया पेज खुलने पर "Click Here" पर क्लिक करें. स्टेप चार: इसके बाद "CENTRAL ARMED POLICE FORCES EXAMINATION, दो हज़ार बीस" के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप पाँच: अब लॉग इन करें. स्टेप छः: लॉग इन करने के बाद मांगी गई जानकारी भरकर एप्लीकेशन फॉर्म जमा कर दें. बता दें कि UPSC CAPF परीक्षा का आयोजन सीमा सुरक्षा बल , केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल , केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल , भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बाल में खाली पदों को भरने के लिए किया जाता है. इस भर्ती के जरिए इस साल दो सौ नौ पदों को भरा जाना हैं. इनमें से अठहत्तर पद बीएसएफ के लिए, उनहत्तर सीआईएसएफ के लिए, सत्ताईस आईटीबीपी के लिए, बाईस एसएसबी के लिए और तेरह सीआरपीएफ के लिए हैं.
Swadesh Conclave and Awards: स्वदेश कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स अपने आप में एक अनोखी तरह की पहल है। इस पहल के तहत एपीएन न्यूज, बालाजी फाउंडेशन के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित करता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आप Swadesh Conclave 2022 से जुड़ने के लिए कैसे रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और समाज के लिए योगदान देने वाली असाधारण प्रतिभाओं को कैसे सम्मानित करने में योगदान दे सकते हैं। आप 15 जुलाई तक Swadesh Conclave 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को करें फॉलोः स्वदेश कॉन्क्लेव एक थीम आधारित मंच है, जो कि समाज के हाशिये के लोगों को सशक्त करने और प्रेरित करने का काम करता है। जिससे समाज का यह कमजोर तबका न सिर्फ गरीबी से बाहर निकले बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान भी दे सके। जिससे कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत पूरी दुनिया में अपना सही मुकाम हासिल कर सके। स्वदेश अवॉर्ड्स की शुरूआत साल 2020 में की गयी थी। 'स्वदेश' उन लोगों, प्रोजेक्ट और संस्थाओं को सम्मानित करने का काम करता है, जिन्होंने भारत को एक बेहतर राष्ट्र बनाने के लिए अथक प्रयास किया है। स्वदेश अवॉर्ड असाधारण उपलब्धियों को हासिल करने के लिए दिया जाता है। समाज को डिजिटल, वित्तीय और सामाजिक तौर पर समावेशी बनाने के लिए लोगों को पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। स्वदेश मंच के जरिए प्रशासन,समावेशी विकास, टेक्नोलॉजी और उसके एप्लीकेशन, कॉरपोरेट लीडरशिप,कॉरपोरेट गवर्नेंस,सिटिजन सर्विस डिलीवरी, कैपेसिटी बिल्डिंग और इसी तरह के दूसरे क्षेत्रों में योगदान के लिए पुरस्कार दिया जाता है। 'स्वदेश' न सिर्फ असाधारण प्रतिभाओं ,संगठनों और लोगों की पहचान करता है बल्कि समाज का मार्गदर्शन करने और नेतृत्व प्रदान करने का भी काम करता है।
Swadesh Conclave and Awards: स्वदेश कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स अपने आप में एक अनोखी तरह की पहल है। इस पहल के तहत एपीएन न्यूज, बालाजी फाउंडेशन के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित करता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आप Swadesh Conclave दो हज़ार बाईस से जुड़ने के लिए कैसे रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और समाज के लिए योगदान देने वाली असाधारण प्रतिभाओं को कैसे सम्मानित करने में योगदान दे सकते हैं। आप पंद्रह जुलाई तक Swadesh Conclave दो हज़ार बाईस के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को करें फॉलोः स्वदेश कॉन्क्लेव एक थीम आधारित मंच है, जो कि समाज के हाशिये के लोगों को सशक्त करने और प्रेरित करने का काम करता है। जिससे समाज का यह कमजोर तबका न सिर्फ गरीबी से बाहर निकले बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान भी दे सके। जिससे कि आजादी के एक सौ साल पूरे होने तक भारत पूरी दुनिया में अपना सही मुकाम हासिल कर सके। स्वदेश अवॉर्ड्स की शुरूआत साल दो हज़ार बीस में की गयी थी। 'स्वदेश' उन लोगों, प्रोजेक्ट और संस्थाओं को सम्मानित करने का काम करता है, जिन्होंने भारत को एक बेहतर राष्ट्र बनाने के लिए अथक प्रयास किया है। स्वदेश अवॉर्ड असाधारण उपलब्धियों को हासिल करने के लिए दिया जाता है। समाज को डिजिटल, वित्तीय और सामाजिक तौर पर समावेशी बनाने के लिए लोगों को पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। स्वदेश मंच के जरिए प्रशासन,समावेशी विकास, टेक्नोलॉजी और उसके एप्लीकेशन, कॉरपोरेट लीडरशिप,कॉरपोरेट गवर्नेंस,सिटिजन सर्विस डिलीवरी, कैपेसिटी बिल्डिंग और इसी तरह के दूसरे क्षेत्रों में योगदान के लिए पुरस्कार दिया जाता है। 'स्वदेश' न सिर्फ असाधारण प्रतिभाओं ,संगठनों और लोगों की पहचान करता है बल्कि समाज का मार्गदर्शन करने और नेतृत्व प्रदान करने का भी काम करता है।
अनूपगढ़ की चौधरी हंसराज आर्य जाट धर्मशाला में राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत की स्थानीय शाखा का वार्षिक अधिवेशन सुखलाल गोदारा की अध्यक्षता में हुआ। रायसिंहनगर से हरभजन सिंह और हंसराज साईं पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। अधिवेशन दो सत्र में पूरा हुआ। पहले चरण में सचिव गुरदीप सिंह घुमान ने वर्ष भर की गतिविधियों पर आधारित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा कोषाध्यक्ष इकबाल सिंह मान ने वर्ष भर का आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया। उपस्थित सदस्यों ने प्रतिवेदन बहस में भाग लिया। सचिव घुमान ने संशोधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और सर्वसम्मति से पारित किया। अधिवेशन के अध्यक्ष सुखलाल गोदारा ने वर्तमान कार्यकारिणी को भंग करते हुए सत्र 2023-24 के लिए नई कार्यकारिणी गठन की घोषणा की। सत्र 2023-24 के लिए सभाध्यक्ष सुखलाल गोदारा, उप सभाध्यक्ष जयप्रकाश पुरोहित, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह सैनी, अध्यक्ष साहबराम बिरड़ा, उपाध्यक्ष पवन कुमार मीणा और कुलदीप सिंह, सचिव गुरदीप सिंह घुमान, कोषाध्यक्ष इकबाल सिंह मान, संगठन मंत्री पुष्पेंद्र सिंह चौहान, संयोजक संघर्ष समिति मूला राम जाखड़, सह संयोजक प्रेम सिंह बघेला, संयुक्त मंत्री सुनील बावरी, प्रेस प्रवक्ता प्रदीप कुमार मांझू, महिला मंत्री सुमन स्वामी, कार्यालय मंत्री विकास खिलेरी को बनाया गया। सदस्य मलकीत सिंह, सरदुल सिंह, प्रदीप सिंह शेखावत और रविन्द्र पाल सिंह को बनाया गया। गौरतलब है कि साहब राम बीरड़ा लगातार 11वीं बार शिक्षक संघ के अध्यक्ष चुने गए हैं। चुनाव अधिकारी प्रधानाचार्य पंकज कुमार जांगिड़ के सामने नवगठित कार्यकारिणी सदस्यों को संगठन के संविधान के अनुरूप कार्य करने की शपथ ग्रहण की। अंत में इंकलाबी के नारों के साथ अधिवेशन संपन्न हुआ। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अनूपगढ़ की चौधरी हंसराज आर्य जाट धर्मशाला में राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत की स्थानीय शाखा का वार्षिक अधिवेशन सुखलाल गोदारा की अध्यक्षता में हुआ। रायसिंहनगर से हरभजन सिंह और हंसराज साईं पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। अधिवेशन दो सत्र में पूरा हुआ। पहले चरण में सचिव गुरदीप सिंह घुमान ने वर्ष भर की गतिविधियों पर आधारित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा कोषाध्यक्ष इकबाल सिंह मान ने वर्ष भर का आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया। उपस्थित सदस्यों ने प्रतिवेदन बहस में भाग लिया। सचिव घुमान ने संशोधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और सर्वसम्मति से पारित किया। अधिवेशन के अध्यक्ष सुखलाल गोदारा ने वर्तमान कार्यकारिणी को भंग करते हुए सत्र दो हज़ार तेईस-चौबीस के लिए नई कार्यकारिणी गठन की घोषणा की। सत्र दो हज़ार तेईस-चौबीस के लिए सभाध्यक्ष सुखलाल गोदारा, उप सभाध्यक्ष जयप्रकाश पुरोहित, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह सैनी, अध्यक्ष साहबराम बिरड़ा, उपाध्यक्ष पवन कुमार मीणा और कुलदीप सिंह, सचिव गुरदीप सिंह घुमान, कोषाध्यक्ष इकबाल सिंह मान, संगठन मंत्री पुष्पेंद्र सिंह चौहान, संयोजक संघर्ष समिति मूला राम जाखड़, सह संयोजक प्रेम सिंह बघेला, संयुक्त मंत्री सुनील बावरी, प्रेस प्रवक्ता प्रदीप कुमार मांझू, महिला मंत्री सुमन स्वामी, कार्यालय मंत्री विकास खिलेरी को बनाया गया। सदस्य मलकीत सिंह, सरदुल सिंह, प्रदीप सिंह शेखावत और रविन्द्र पाल सिंह को बनाया गया। गौरतलब है कि साहब राम बीरड़ा लगातार ग्यारहवीं बार शिक्षक संघ के अध्यक्ष चुने गए हैं। चुनाव अधिकारी प्रधानाचार्य पंकज कुमार जांगिड़ के सामने नवगठित कार्यकारिणी सदस्यों को संगठन के संविधान के अनुरूप कार्य करने की शपथ ग्रहण की। अंत में इंकलाबी के नारों के साथ अधिवेशन संपन्न हुआ। This website follows the DNPA Code of Ethics.
PATNA: राजद विधायक सीताराम यादव ने बीजेपी नेता और बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार को भावी मुख्यमंत्री बता दिया है। बिहार विधानसभा में कृषि पर चर्चा के दौरान राजद विधायक ने कहा कि जो कृषि और किसानों की बात करेगा वही बिहार की गद्दी पर बैठेगा। ऐसे में कृषि मंत्री प्रेम कुमार भी किसानों के हित की बात कर रहे । ऐसे में ये भी बिहार के भावी मुख्यमंत्री हैं। हालांकि राजद विधायक सीताराम यादव ने आगे कहा कि हमारे नेता तेजस्वी यादव किसानों के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। किसानों की भलाई कैसे हो इस पर विचार कर रहे हैं। तेजस्वी यादव किसानों के साथ खड़े हैं. उन्होंने सदन में चर्चा के दौरान हैं सरकार किसानों के हित में काम करे। किसानों की आमदनी कैसे बढ़े इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जब राजद विधायक सीताराम यादव कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार को भावी मुख्यमंत्री बता रहे थे तो वे मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे।
PATNA: राजद विधायक सीताराम यादव ने बीजेपी नेता और बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार को भावी मुख्यमंत्री बता दिया है। बिहार विधानसभा में कृषि पर चर्चा के दौरान राजद विधायक ने कहा कि जो कृषि और किसानों की बात करेगा वही बिहार की गद्दी पर बैठेगा। ऐसे में कृषि मंत्री प्रेम कुमार भी किसानों के हित की बात कर रहे । ऐसे में ये भी बिहार के भावी मुख्यमंत्री हैं। हालांकि राजद विधायक सीताराम यादव ने आगे कहा कि हमारे नेता तेजस्वी यादव किसानों के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। किसानों की भलाई कैसे हो इस पर विचार कर रहे हैं। तेजस्वी यादव किसानों के साथ खड़े हैं. उन्होंने सदन में चर्चा के दौरान हैं सरकार किसानों के हित में काम करे। किसानों की आमदनी कैसे बढ़े इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जब राजद विधायक सीताराम यादव कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार को भावी मुख्यमंत्री बता रहे थे तो वे मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे।
अहमदाबाद/प्रयागराज। अतीक अहमद (Atiq Ahmed) को गुजरात के साबरमती जेल से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज लाया जा रहा है। उसे 45 पुलिसकर्मियों के काफिले की सुरक्षा के साथ गुजरात से यूपी लाया जा रहा है। अतीक और उसके भाई अशरफ की 28 मार्च को प्रयागराज के एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी है। एक बेहद अहम मामले में प्रयागराज की अदालत अतीक (Atiq Ahmed) और अशरफ की मौजूदगी में फैसला सुनाने वाली है। लेकिन ये मामला यूपी के चर्चित उमेश पाल हत्या कांड का नहीं है। बल्कि जिस मामले में फैसला आना है वह किडनैपिंग से जुड़ा हुआ है। यह केस 17 साल पुराना है। इस केस के लिंक भी उमेश पाल से ही जुड़े हुए हैं। बात 2006 की है। आरोप के मुताबिक 25 जनवरी 2005 को बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल 2006 में अतीक अहमद ने अपहरण करवा लिया था। उमेश पाल का अपहरण करवा कर राजू पाल हत्याकांड में अतीक अहमद ने अपने पक्ष में गवाही करवा ली थी। उमेश पाल ने अपरहण के इसी मामले में अतीक अहमद पर केस दर्ज कराया था। अपहरण के इस केस में ही कोर्ट 28 मार्च को फैसला सुनाएगा। बता दें कि अपहरण के इस मामले पर कोर्ट में बहस के लिए ही 24 फरवरी को उमेश पाल कोर्ट गया था। कोर्ट की कार्रवाई खत्म होने के बाद उमेश पाल अपने भतीजे की क्रेटा कार से घर वापस आ रहे थे। कोर्ट से उनका पीछा कर रहे बदमाशों ने गाड़ी से उतरते ही घर के सामने गोली मारकर उमेश पाल की हत्या कर दी थी। घटना के एक चश्मदीद ने बताया था कि हमले में उमेश पाल को गोली लगी थी। इसके बाद वो अपने घर की तरफ भागने लगे थे। इस पर बदमाशों ने तंग गली में घुसकर फायरिंग की। उमेश पाल का गनर संदीप निषाद भी घायल होने के बाद गली में भागा था, जिसको निशाना बनाते हुए बदमाशों ने गली में बम मार दिया था। संदीप घायल अवस्था में घर के बाहर गिर पड़ा। इस पूरी वारदात को महज 44 सेकेंड के अंदर अंजाम दिया गया था। अतीक को साबरमती जेल से लाने के लिए यूपी पुलिस की टीम रविवार सुबह ही गुजरात पहुंच गई थी। दरअसल, अतीक और उसका भाई अशरफ उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी हैं। अतीक के भाई और पूर्व विधायक अशरफ की बात करें तो वह बरेली जेल में कैद है। उसे सोमवार सुबह 10 बजे यहां से प्रयागराज ले जाया जाएगा। मंगलवार को कोर्ट में उसकी पेशी होनी है। अतीक के साथ अशरफ को भी ट्रायल का सामना करना होगा।
अहमदाबाद/प्रयागराज। अतीक अहमद को गुजरात के साबरमती जेल से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज लाया जा रहा है। उसे पैंतालीस पुलिसकर्मियों के काफिले की सुरक्षा के साथ गुजरात से यूपी लाया जा रहा है। अतीक और उसके भाई अशरफ की अट्ठाईस मार्च को प्रयागराज के एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी है। एक बेहद अहम मामले में प्रयागराज की अदालत अतीक और अशरफ की मौजूदगी में फैसला सुनाने वाली है। लेकिन ये मामला यूपी के चर्चित उमेश पाल हत्या कांड का नहीं है। बल्कि जिस मामले में फैसला आना है वह किडनैपिंग से जुड़ा हुआ है। यह केस सत्रह साल पुराना है। इस केस के लिंक भी उमेश पाल से ही जुड़े हुए हैं। बात दो हज़ार छः की है। आरोप के मुताबिक पच्चीस जनवरी दो हज़ार पाँच को बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल दो हज़ार छः में अतीक अहमद ने अपहरण करवा लिया था। उमेश पाल का अपहरण करवा कर राजू पाल हत्याकांड में अतीक अहमद ने अपने पक्ष में गवाही करवा ली थी। उमेश पाल ने अपरहण के इसी मामले में अतीक अहमद पर केस दर्ज कराया था। अपहरण के इस केस में ही कोर्ट अट्ठाईस मार्च को फैसला सुनाएगा। बता दें कि अपहरण के इस मामले पर कोर्ट में बहस के लिए ही चौबीस फरवरी को उमेश पाल कोर्ट गया था। कोर्ट की कार्रवाई खत्म होने के बाद उमेश पाल अपने भतीजे की क्रेटा कार से घर वापस आ रहे थे। कोर्ट से उनका पीछा कर रहे बदमाशों ने गाड़ी से उतरते ही घर के सामने गोली मारकर उमेश पाल की हत्या कर दी थी। घटना के एक चश्मदीद ने बताया था कि हमले में उमेश पाल को गोली लगी थी। इसके बाद वो अपने घर की तरफ भागने लगे थे। इस पर बदमाशों ने तंग गली में घुसकर फायरिंग की। उमेश पाल का गनर संदीप निषाद भी घायल होने के बाद गली में भागा था, जिसको निशाना बनाते हुए बदमाशों ने गली में बम मार दिया था। संदीप घायल अवस्था में घर के बाहर गिर पड़ा। इस पूरी वारदात को महज चौंतालीस सेकेंड के अंदर अंजाम दिया गया था। अतीक को साबरमती जेल से लाने के लिए यूपी पुलिस की टीम रविवार सुबह ही गुजरात पहुंच गई थी। दरअसल, अतीक और उसका भाई अशरफ उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी हैं। अतीक के भाई और पूर्व विधायक अशरफ की बात करें तो वह बरेली जेल में कैद है। उसे सोमवार सुबह दस बजे यहां से प्रयागराज ले जाया जाएगा। मंगलवार को कोर्ट में उसकी पेशी होनी है। अतीक के साथ अशरफ को भी ट्रायल का सामना करना होगा।
बिलासपुर - खराब मौसम के चलते शनिवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पूर्व सांसद सुरेश चंदेल के बेटे के शादी समारोह में नहीं पहुंच सके। मुख्यमंत्री का हेलिकाप्टर उड़ान नहीं भर पाया। हालांकि उनके आगमन के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पूरी तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन शिमला समेत कई अन्य स्थानों पर बारिश की वजह से उनका दौरा रद्द हो गया। ऐसे में प्रशासन की सारी तैयारियां भी धरी की धरी रह गईं। तीन बार हमीरपुर के सांसद रह चुके एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश चंदेल के बेटे देवेश चंदेल की शादी की रिसेप्शन शनिवार को बैरी के साथ लगते उनके पैतृक गांव गांधी-रोपा में रखी गई थी। पूर्व सांसद ने सीएम जयराम ठाकुर को भी इसका निमंत्रण भेजा था। विवाह समारोह में शिरकत करने के लिए सीएम शनिवार को बिलासपुर आने वाले थे। सरकारी टूअर प्रोग्राम के अनुसार उन्हें दोपहर 1ः30 बजे शिमला से हेलिकाप्टर से आना था। दोपहर दो बजे बिलासपुर सर्किट हाउस में पहुंचने के बाद सीएम द्वारा जनसमस्याएं सुनने का कार्यक्रम भी था। उसके बाद गांधी-रोपा में शादी समारोह में भाग लेकर बिलासपुर से उन्हें हेलिकाप्टर के माध्यम से शिमला वापस लौटना था। सीएम के आगमन के मद्देनजर प्रशासन ने पूरी तैयारियां की थीं। गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए पुलिस की टुकड़ी सर्किट हाउस पहुंच गई। वहीं, लुहणू मैदान में हेलिकाप्टर के लैंडिंग स्थल पर भी पुलिस व एंबुलेंस आदि की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। इस बीच दोपहर के समय मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए कई लोग भी सर्किट हाउस पहुंचने लगे, लेकिन खराब मौसम ने शिमला में ही सीएम की राह रोक ली। बारिश की वजह से उनके हेलिकाप्टर को टेक ऑफ की अनुमति नहीं मिल पाई। इसके चलते न तो सीएम बिलासपुर आ पाए और न ही सुरेश चंदेल के बेटे के शादी समारोह में शिरकत कर पाए।
बिलासपुर - खराब मौसम के चलते शनिवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पूर्व सांसद सुरेश चंदेल के बेटे के शादी समारोह में नहीं पहुंच सके। मुख्यमंत्री का हेलिकाप्टर उड़ान नहीं भर पाया। हालांकि उनके आगमन के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पूरी तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन शिमला समेत कई अन्य स्थानों पर बारिश की वजह से उनका दौरा रद्द हो गया। ऐसे में प्रशासन की सारी तैयारियां भी धरी की धरी रह गईं। तीन बार हमीरपुर के सांसद रह चुके एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश चंदेल के बेटे देवेश चंदेल की शादी की रिसेप्शन शनिवार को बैरी के साथ लगते उनके पैतृक गांव गांधी-रोपा में रखी गई थी। पूर्व सांसद ने सीएम जयराम ठाकुर को भी इसका निमंत्रण भेजा था। विवाह समारोह में शिरकत करने के लिए सीएम शनिवार को बिलासपुर आने वाले थे। सरकारी टूअर प्रोग्राम के अनुसार उन्हें दोपहर एकःतीस बजे शिमला से हेलिकाप्टर से आना था। दोपहर दो बजे बिलासपुर सर्किट हाउस में पहुंचने के बाद सीएम द्वारा जनसमस्याएं सुनने का कार्यक्रम भी था। उसके बाद गांधी-रोपा में शादी समारोह में भाग लेकर बिलासपुर से उन्हें हेलिकाप्टर के माध्यम से शिमला वापस लौटना था। सीएम के आगमन के मद्देनजर प्रशासन ने पूरी तैयारियां की थीं। गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए पुलिस की टुकड़ी सर्किट हाउस पहुंच गई। वहीं, लुहणू मैदान में हेलिकाप्टर के लैंडिंग स्थल पर भी पुलिस व एंबुलेंस आदि की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। इस बीच दोपहर के समय मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए कई लोग भी सर्किट हाउस पहुंचने लगे, लेकिन खराब मौसम ने शिमला में ही सीएम की राह रोक ली। बारिश की वजह से उनके हेलिकाप्टर को टेक ऑफ की अनुमति नहीं मिल पाई। इसके चलते न तो सीएम बिलासपुर आ पाए और न ही सुरेश चंदेल के बेटे के शादी समारोह में शिरकत कर पाए।
सीएम येदियुरप्पा ने कहा, "मैं स्थिति को देखते हुए वहां जाऊंगा. " मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दिल्ली में आलाकमान क्या कहता हैं. सीएम येदियुरप्पा ने 10 नवंबर को 2 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में पार्टी की जीत के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल के संकेत दिये थे. जिसके बाद राज्य में सत्तारूढ़ BJP खेमे के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.
सीएम येदियुरप्पा ने कहा, "मैं स्थिति को देखते हुए वहां जाऊंगा. " मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दिल्ली में आलाकमान क्या कहता हैं. सीएम येदियुरप्पा ने दस नवंबर को दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में पार्टी की जीत के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल के संकेत दिये थे. जिसके बाद राज्य में सत्तारूढ़ BJP खेमे के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। एम॰ जे॰ अकबर (अंग्रेजीः Mobashar Jawed Akbar,बांग्ला भाषाः মবাসের জাবেদ একবার) (जन्मः 11 जनवरी 1951) एक प्रमुख भारतीय पत्रकार, लेखक और राजनेता हैं। एम जे अकबर विदेश मामलों के राज्य मंत्री (एमओएस) और मध्य प्रदेश से राज्यसभा में संसद सदस्य हैं। 5 जुलाई 2016 को उन्हें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। वे अक्टूबर 2012 में अपने इस्तीफे तक लिविंग मीडिया समूह द्वारा प्रकाशित भारत के प्रमुख साप्ताहिक अंग्रेजी समाचार पत्रिका इंडिया टुडे के संपादकीय निदेशक रह चुके हैं। इस दौरान उन्हें मीडिया कंपनियों के संगठन तथा अंग्रेजी समाचार चैनल हेडलाइंस टुडे की देखरेख के लिए एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिली हुई थी। उन्होने 2010 में साप्ताहिक समाचार पत्र "दि संडे गार्जियन" का शुभारंभ किया और वे लगातार इसके प्रधान संपादक रहे। पूर्व के दिनों में वे दक्षिण भारत की प्रमुख अँग्रेजी पत्रिका "एशियन एज" के संस्थापक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ इसके दैनिक मल्टी संस्करण भारतीय समाचार पत्र के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं। वे हैदराबाद के दैनिक समाचार पत्र डेक्कन क्रॉनिकल के प्रधान संपादक रह चुके हैं। उन्होने कई पुस्तकें लिखी है, जिसमें जवाहर लाल नेहरू की जीवनी "द मेकिंग ऑफ इंडिया" और कश्मीर पर आधारित "द सीज विदिन" चर्चित रही है। वे "दि शेड ऑफ शोर्ड" और "ए कोहेसिव हिस्टरी ऑफ जिहाद" के भी लेखक हैं। उनकी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक "ब्लड ब्रदर्स" है, जिसमें भारत में घटनाओं की जानकारी और दुनिया, खासकर हिंदू-मुस्लिम के बदलते संबंधों के साथ तीन पीढ़ियों की गाथा है। उनकी यह पुस्तक "फ्रेटेली डी संग" के नाम से इतालवी में अनुवादित हुई है, जो 15 जनवरी 2008 को रोम में जारी किया गया था। पाकिस्तान में पहचान के संकट और वर्ग संघर्ष पर आधारित उनकी पुस्तक "टिंडरबॉक्सः दि पास्ट एंड फ्यूचर ऑफ पाकिस्तान" जनवरी 2012 में प्रकाशित हुई है। अकबर राजनीति में भी सार्थक हस्तक्षेप रखते हैं। वे 1989 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पहली बार बिहार के किशनगंज से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वे किशनगंज से दो बार सांसद रहे हैं। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रवक्ता भी रहे हैं। मार्च 2014 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये हैं और वर्तमान में इस पार्टी के प्रवक्ता हैं। . भारतीय गणतंत्र में हिन्दू धर्म के बाद इस्लाम दूसरा सर्वाधिक प्रचलित धर्म है, जो देश की जनसंख्या का 14.2% है (2011 की जनगणना के अनुसार 17.2 करोड़)। भारत में इस्लाम का आगमन करीब 7वीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों के आने से हुआ था (629 ईसवी सन्) और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उदय और सांस्कृतिक प्रभुत्व में मुसलमानों ने महती भूमिका निभाई है। हालांकि कुछ इतिहासकार ये दावा करते हैं कि मुसलमानों के शासनकाल में हिंदुओं पर क्रूरता किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। जबरन धर्मपरिवर्तन करा कर मुसलमान बनाया गया। ऐसा भी कहा जाता है कि एक मुसलमान शासक टीपू शुल्तान खुद ये दावा करता था कि उसने चार लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रकाशितः 11 दिसम्बर 1992 विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकार हज यात्रा के लिए विमान के किराया में सब्सिडी देती थी और २००७ के अनुसार प्रति यात्री 47454 खर्च करती थी। हालांकि 2018 से रियायत हटा ली गयी है। . एम॰ जे॰ अकबर और भारत में इस्लाम आम में 10 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): पाकिस्तान, बाङ्ला भाषा, बिहार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, मुसलमान, हिन्दू धर्म, हैदराबाद, इस्लाम, अंग्रेज़ी भाषा। इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . बाङ्ला भाषा अथवा बंगाली भाषा (बाङ्ला लिपि मेंः বাংলা ভাষা / बाङ्ला), बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जानेवाली एक प्रमुख भाषा है। भाषाई परिवार की दृष्टि से यह हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार का सदस्य है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में हिन्दी, नेपाली, पंजाबी, गुजराती, असमिया, ओड़िया, मैथिली इत्यादी भाषाएँ हैं। बंगाली बोलने वालों की सँख्या लगभग २३ करोड़ है और यह विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा है। इसके बोलने वाले बांग्लादेश और भारत के अलावा विश्व के बहुत से अन्य देशों में भी फ़ैले हैं। . बिहार भारत का एक राज्य है। बिहार की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल के विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे पिछड़े योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है। . भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात, भारत के दो प्रमुख राजनैतिक दलों में से एक हैं, जिन में अन्य भारतीय जनता पार्टी हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में २८ दिसंबर १८८५ में हुई थी; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम (थियिसोफिकल सोसाइटी के प्रमुख सदस्य), दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। १९वी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य २०वी सदी में, कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में, अपने १.५ करोड़ से अधिक सदस्यों और ७ करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी। १९४७ में आजादी के बाद, कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर २०१६ तक, १६ आम चुनावों में से, कांग्रेस ने ६ में पूर्ण बहुमत जीता हैं और ४ में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया; अतः, कुल ४९ वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में, कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं; पहले जवाहरलाल नेहरू (१९४७-१९६५) थे और हाल ही में मनमोहन सिंह (२००४-२०१४) थे। २०१४ के आम चुनाव में, कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब आम चुनावी प्रदर्शन किया और ५४३ सदस्यीय लोक सभा में केवल ४४ सीट जीती। तब से लेकर अब तक कोंग्रेस कई विवादों में घिरी हुई है, कोंग्रेस द्वारा भारतीय आर्मी का मनोबल गिराने का देश में विरोध किया जा रहा है । http://www.allianceofdemocrats.org/index.php?option. भारतीय जनता पार्टी (संक्षेप में, भाजपा) भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक हैं, जिसमें दूसरा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है। यह राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है।. मिसरी (ईजिप्ट) मुस्लिमान नमाज़ पढ रहे हैं, एक तस्वीर। मुसलमान (अरबीः مسلم، مسلمة फ़ारसीः مسلمان،, अंग्रेजीः Muslim) का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम में विश्वास रखता हो। हालाँकि मुसलमानों के आस्था के अनुसार इस्लाम ईश्वर का धर्म है और धर्म हज़रत मुहम्मद से पहले मौजूद था और जो लोग अल्लाह के धर्म का पालन करते रहे वह मुसलमान हैं। जैसे कुरान के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी मुसलमान थे। मगर आजकल मुसलमान का मतलब उसे लिया जाता है जो हज़रत मुहम्मद लाए हुए दीन का पालन करता हो और विश्वास रखता हो। मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने भारत को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान कहा है । . हिन्दू धर्म (संस्कृतः सनातन धर्म) एक धर्म (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। . हैदराबाद (तेलुगुः హైదరాబాదు,उर्दूः حیدر آباد) भारत के राज्य तेलंगाना तथा आन्ध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी है, जो दक्कन के पठार पर मूसी नदी के किनारे स्थित है। प्राचीन काल के दस्तावेजों के अनुसार इसे भाग्यनगर के नाम से जाना जाता था। आज भी यह प्राचीन नाम अत्यन्त ही लोकप्रिय है। कहा जाता है कि किसी समय में इस ख़ूबसूरत शहर को क़ुतुबशाही परम्परा के पाँचवें शासक मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने अपनी प्रेमिका भागमती को उपहार स्वरूप भेंट किया था, उस समय यह शहर भागनगर के नाम से जाना जाता था। भागनगर समय के साथ हैदराबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसे 'निज़ामों का शहर' तथा 'मोतियों का शहर' भी कहा जाता है। यह भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों में से एक है और भारत में सूचना प्रौधोगिकी एवं जैव प्रौद्यौगिकी का केन्द्र बनता जा रहा है। हुसैन सागर से विभाजित, हैदराबाद और सिकंदराबाद जुड़वां शहर हैं। हुसैन सागर का निर्माण सन १५६२ में इब्राहीम कुतुब शाह के शासन काल में हुआ था और यह एक मानव निर्मित झील है। चारमीनार, इस क्षेत्र में प्लेग महामारी के अंत की यादगार के तौर पर मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने १५९१ में, शहर के बीचों बीच बनवाया था। गोलकुंडा के क़ुतुबशाही सुल्तानों द्वारा बसाया गया यह शहर ख़ूबसूरत इमारतों, निज़ामी शानो-शौक़त और लजीज खाने के कारण मशहूर है और भारत के मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग अहमियत रखता है। निज़ामों के इस शहर में आज भी हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द्र से एक-दूसरे के साथ रहकर उनकी खुशियों में शरीक होते हैं। अपने उन्नत इतिहास, संस्कृति, उत्तर तथा दक्षिण भारत के स्थापत्य के मौलिक संगम, तथा अपनी बहुभाषी संस्कृति के लिये भौगोलिक तथा सांस्कृतिक दोनों रूपों में जाना जाता है। यह वह स्थान रहा है जहां हिन्दू और मुसलमान शांतिपूर्वक शताब्दियों से साथ साथ रह रहे हैं। निजामी ठाठ-बाट के इस शहर का मुख्य आकर्षण चारमीनार, हुसैन सागर झील, बिड़ला मंदिर, सालारजंग संग्रहालय आदि है, जो देश-विदेश इस शहर को एक अलग पहचान देते हैं। यह भारतीय महानगर बंगलौर से 574 किलोमीटर दक्षिण में, मुंबई से 750 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में तथा चेन्नई से 700 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। किसी समय नवाबी परम्परा के इस शहर में शाही हवेलियाँ और निज़ामों की संस्कृति के बीच हीरे जवाहरात का रंग उभर कर सामने आया तो कभी स्वादिष्ट नवाबी भोजन का स्वाद। इस शहर के ऐतिहासिक गोलकुंडा दुर्ग की प्रसिद्धि पार-द्वार तक पहुँची और इसे उत्तर भारत और दक्षिणांचल के बीच संवाद का अवसर सालाजार संग्रहालय तथा चारमीनार ने प्रदान किया है। वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार इस महानगर की जनसंख्या ६८ लाख से अधिक है। . इस्लाम (अरबीः الإسلام) एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के 25% हिस्से, यानी लगभग 1.6 से 1.8 अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से (स्रोतों के अनुसार) लगभग 20 से 30 करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। . अंग्रेज़ी भाषा (अंग्रेज़ीः English हिन्दी उच्चारणः इंग्लिश) हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में आती है और इस दृष्टि से हिंदी, उर्दू, फ़ारसी आदि के साथ इसका दूर का संबंध बनता है। ये इस परिवार की जर्मनिक शाखा में रखी जाती है। इसे दुनिया की सर्वप्रथम अन्तरराष्ट्रीय भाषा माना जाता है। ये दुनिया के कई देशों की मुख्य राजभाषा है और आज के दौर में कई देशों में (मुख्यतः भूतपूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों में) विज्ञान, कम्प्यूटर, साहित्य, राजनीति और उच्च शिक्षा की भी मुख्य भाषा है। अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो-सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के 19 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध और ब्रिटिश साम्राज्य के 18 वीं, 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के सैन्य, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव के परिणाम स्वरूप यह दुनिया के कई भागों में सामान्य (बोलचाल की) भाषा बन गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रमंडल देशों में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल एक द्वितीय भाषा और अधिकारिक भाषा के रूप में होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति ५वीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो-सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेजी कहा जाता है, से हुई है। वाइकिंग हमलावरों की प्राचीन नोर्स भाषा का अंग्रेजी भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मन विजय के बाद पुरानी अंग्रेजी का विकास मध्य अंग्रेजी के रूप में हुआ, इसके लिए नॉर्मन शब्दावली और वर्तनी के नियमों का भारी मात्र में उपयोग हुआ। वहां से आधुनिक अंग्रेजी का विकास हुआ और अभी भी इसमें अनेक भाषाओँ से विदेशी शब्दों को अपनाने और साथ ही साथ नए शब्दों को गढ़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। एक बड़ी मात्र में अंग्रेजी के शब्दों, खासकर तकनीकी शब्दों, का गठन प्राचीन ग्रीक और लैटिन की जड़ों पर आधारित है। . एम॰ जे॰ अकबर 20 संबंध है और भारत में इस्लाम 201 है। वे आम 10 में है, समानता सूचकांक 4.52% है = 10 / (20 + 201)। यह लेख एम॰ जे॰ अकबर और भारत में इस्लाम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। एम॰ जे॰ अकबर एक प्रमुख भारतीय पत्रकार, लेखक और राजनेता हैं। एम जे अकबर विदेश मामलों के राज्य मंत्री और मध्य प्रदेश से राज्यसभा में संसद सदस्य हैं। पाँच जुलाई दो हज़ार सोलह को उन्हें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। वे अक्टूबर दो हज़ार बारह में अपने इस्तीफे तक लिविंग मीडिया समूह द्वारा प्रकाशित भारत के प्रमुख साप्ताहिक अंग्रेजी समाचार पत्रिका इंडिया टुडे के संपादकीय निदेशक रह चुके हैं। इस दौरान उन्हें मीडिया कंपनियों के संगठन तथा अंग्रेजी समाचार चैनल हेडलाइंस टुडे की देखरेख के लिए एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिली हुई थी। उन्होने दो हज़ार दस में साप्ताहिक समाचार पत्र "दि संडे गार्जियन" का शुभारंभ किया और वे लगातार इसके प्रधान संपादक रहे। पूर्व के दिनों में वे दक्षिण भारत की प्रमुख अँग्रेजी पत्रिका "एशियन एज" के संस्थापक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ इसके दैनिक मल्टी संस्करण भारतीय समाचार पत्र के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं। वे हैदराबाद के दैनिक समाचार पत्र डेक्कन क्रॉनिकल के प्रधान संपादक रह चुके हैं। उन्होने कई पुस्तकें लिखी है, जिसमें जवाहर लाल नेहरू की जीवनी "द मेकिंग ऑफ इंडिया" और कश्मीर पर आधारित "द सीज विदिन" चर्चित रही है। वे "दि शेड ऑफ शोर्ड" और "ए कोहेसिव हिस्टरी ऑफ जिहाद" के भी लेखक हैं। उनकी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक "ब्लड ब्रदर्स" है, जिसमें भारत में घटनाओं की जानकारी और दुनिया, खासकर हिंदू-मुस्लिम के बदलते संबंधों के साथ तीन पीढ़ियों की गाथा है। उनकी यह पुस्तक "फ्रेटेली डी संग" के नाम से इतालवी में अनुवादित हुई है, जो पंद्रह जनवरी दो हज़ार आठ को रोम में जारी किया गया था। पाकिस्तान में पहचान के संकट और वर्ग संघर्ष पर आधारित उनकी पुस्तक "टिंडरबॉक्सः दि पास्ट एंड फ्यूचर ऑफ पाकिस्तान" जनवरी दो हज़ार बारह में प्रकाशित हुई है। अकबर राजनीति में भी सार्थक हस्तक्षेप रखते हैं। वे एक हज़ार नौ सौ नवासी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पहली बार बिहार के किशनगंज से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वे किशनगंज से दो बार सांसद रहे हैं। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रवक्ता भी रहे हैं। मार्च दो हज़ार चौदह में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये हैं और वर्तमान में इस पार्टी के प्रवक्ता हैं। . भारतीय गणतंत्र में हिन्दू धर्म के बाद इस्लाम दूसरा सर्वाधिक प्रचलित धर्म है, जो देश की जनसंख्या का चौदह.दो% है । भारत में इस्लाम का आगमन करीब सातवीं शताब्दी में अरब के व्यापारियों के आने से हुआ था और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उदय और सांस्कृतिक प्रभुत्व में मुसलमानों ने महती भूमिका निभाई है। हालांकि कुछ इतिहासकार ये दावा करते हैं कि मुसलमानों के शासनकाल में हिंदुओं पर क्रूरता किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। जबरन धर्मपरिवर्तन करा कर मुसलमान बनाया गया। ऐसा भी कहा जाता है कि एक मुसलमान शासक टीपू शुल्तान खुद ये दावा करता था कि उसने चार लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रकाशितः ग्यारह दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ बानवे विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सरकार हज यात्रा के लिए विमान के किराया में सब्सिडी देती थी और दो हज़ार सात के अनुसार प्रति यात्री सैंतालीस हज़ार चार सौ चौवन खर्च करती थी। हालांकि दो हज़ार अट्ठारह से रियायत हटा ली गयी है। . एम॰ जे॰ अकबर और भारत में इस्लाम आम में दस बातें हैं : पाकिस्तान, बाङ्ला भाषा, बिहार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, मुसलमान, हिन्दू धर्म, हैदराबाद, इस्लाम, अंग्रेज़ी भाषा। इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। बीस करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् एक हज़ार नौ सौ तीस में कवि मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् एक हज़ार नौ सौ तैंतीस में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान शब्द का सृजन किया। सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से एक हज़ार नौ सौ सत्तर तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . बाङ्ला भाषा अथवा बंगाली भाषा , बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जानेवाली एक प्रमुख भाषा है। भाषाई परिवार की दृष्टि से यह हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार का सदस्य है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में हिन्दी, नेपाली, पंजाबी, गुजराती, असमिया, ओड़िया, मैथिली इत्यादी भाषाएँ हैं। बंगाली बोलने वालों की सँख्या लगभग तेईस करोड़ है और यह विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा है। इसके बोलने वाले बांग्लादेश और भारत के अलावा विश्व के बहुत से अन्य देशों में भी फ़ैले हैं। . बिहार भारत का एक राज्य है। बिहार की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल के विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे पिछड़े योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है। . भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात, भारत के दो प्रमुख राजनैतिक दलों में से एक हैं, जिन में अन्य भारतीय जनता पार्टी हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में अट्ठाईस दिसंबर एक हज़ार आठ सौ पचासी में हुई थी; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम , दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। उन्नीसवी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य बीसवी सदी में, कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में, अपने एक.पाँच करोड़ से अधिक सदस्यों और सात करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में आजादी के बाद, कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर दो हज़ार सोलह तक, सोलह आम चुनावों में से, कांग्रेस ने छः में पूर्ण बहुमत जीता हैं और चार में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया; अतः, कुल उनचास वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में, कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं; पहले जवाहरलाल नेहरू थे और हाल ही में मनमोहन सिंह थे। दो हज़ार चौदह के आम चुनाव में, कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब आम चुनावी प्रदर्शन किया और पाँच सौ तैंतालीस सदस्यीय लोक सभा में केवल चौंतालीस सीट जीती। तब से लेकर अब तक कोंग्रेस कई विवादों में घिरी हुई है, कोंग्रेस द्वारा भारतीय आर्मी का मनोबल गिराने का देश में विरोध किया जा रहा है । http://www.allianceofdemocrats.org/index.php?option. भारतीय जनता पार्टी भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक हैं, जिसमें दूसरा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है। यह राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है।. मिसरी मुस्लिमान नमाज़ पढ रहे हैं, एक तस्वीर। मुसलमान का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम में विश्वास रखता हो। हालाँकि मुसलमानों के आस्था के अनुसार इस्लाम ईश्वर का धर्म है और धर्म हज़रत मुहम्मद से पहले मौजूद था और जो लोग अल्लाह के धर्म का पालन करते रहे वह मुसलमान हैं। जैसे कुरान के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी मुसलमान थे। मगर आजकल मुसलमान का मतलब उसे लिया जाता है जो हज़रत मुहम्मद लाए हुए दीन का पालन करता हो और विश्वास रखता हो। मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने भारत को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान कहा है । . हिन्दू धर्म एक धर्म है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। . हैदराबाद भारत के राज्य तेलंगाना तथा आन्ध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी है, जो दक्कन के पठार पर मूसी नदी के किनारे स्थित है। प्राचीन काल के दस्तावेजों के अनुसार इसे भाग्यनगर के नाम से जाना जाता था। आज भी यह प्राचीन नाम अत्यन्त ही लोकप्रिय है। कहा जाता है कि किसी समय में इस ख़ूबसूरत शहर को क़ुतुबशाही परम्परा के पाँचवें शासक मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने अपनी प्रेमिका भागमती को उपहार स्वरूप भेंट किया था, उस समय यह शहर भागनगर के नाम से जाना जाता था। भागनगर समय के साथ हैदराबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसे 'निज़ामों का शहर' तथा 'मोतियों का शहर' भी कहा जाता है। यह भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों में से एक है और भारत में सूचना प्रौधोगिकी एवं जैव प्रौद्यौगिकी का केन्द्र बनता जा रहा है। हुसैन सागर से विभाजित, हैदराबाद और सिकंदराबाद जुड़वां शहर हैं। हुसैन सागर का निर्माण सन एक हज़ार पाँच सौ बासठ में इब्राहीम कुतुब शाह के शासन काल में हुआ था और यह एक मानव निर्मित झील है। चारमीनार, इस क्षेत्र में प्लेग महामारी के अंत की यादगार के तौर पर मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने एक हज़ार पाँच सौ इक्यानवे में, शहर के बीचों बीच बनवाया था। गोलकुंडा के क़ुतुबशाही सुल्तानों द्वारा बसाया गया यह शहर ख़ूबसूरत इमारतों, निज़ामी शानो-शौक़त और लजीज खाने के कारण मशहूर है और भारत के मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग अहमियत रखता है। निज़ामों के इस शहर में आज भी हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द्र से एक-दूसरे के साथ रहकर उनकी खुशियों में शरीक होते हैं। अपने उन्नत इतिहास, संस्कृति, उत्तर तथा दक्षिण भारत के स्थापत्य के मौलिक संगम, तथा अपनी बहुभाषी संस्कृति के लिये भौगोलिक तथा सांस्कृतिक दोनों रूपों में जाना जाता है। यह वह स्थान रहा है जहां हिन्दू और मुसलमान शांतिपूर्वक शताब्दियों से साथ साथ रह रहे हैं। निजामी ठाठ-बाट के इस शहर का मुख्य आकर्षण चारमीनार, हुसैन सागर झील, बिड़ला मंदिर, सालारजंग संग्रहालय आदि है, जो देश-विदेश इस शहर को एक अलग पहचान देते हैं। यह भारतीय महानगर बंगलौर से पाँच सौ चौहत्तर किलोग्राममीटर दक्षिण में, मुंबई से सात सौ पचास किलोग्राममीटर दक्षिण-पूर्व में तथा चेन्नई से सात सौ किलोग्राममीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। किसी समय नवाबी परम्परा के इस शहर में शाही हवेलियाँ और निज़ामों की संस्कृति के बीच हीरे जवाहरात का रंग उभर कर सामने आया तो कभी स्वादिष्ट नवाबी भोजन का स्वाद। इस शहर के ऐतिहासिक गोलकुंडा दुर्ग की प्रसिद्धि पार-द्वार तक पहुँची और इसे उत्तर भारत और दक्षिणांचल के बीच संवाद का अवसर सालाजार संग्रहालय तथा चारमीनार ने प्रदान किया है। वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार इस महानगर की जनसंख्या अड़सठ लाख से अधिक है। . इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के पच्चीस% हिस्से, यानी लगभग एक.छः से एक.आठ अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से लगभग बीस से तीस करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। . अंग्रेज़ी भाषा हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में आती है और इस दृष्टि से हिंदी, उर्दू, फ़ारसी आदि के साथ इसका दूर का संबंध बनता है। ये इस परिवार की जर्मनिक शाखा में रखी जाती है। इसे दुनिया की सर्वप्रथम अन्तरराष्ट्रीय भाषा माना जाता है। ये दुनिया के कई देशों की मुख्य राजभाषा है और आज के दौर में कई देशों में विज्ञान, कम्प्यूटर, साहित्य, राजनीति और उच्च शिक्षा की भी मुख्य भाषा है। अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो-सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के उन्नीस वीं शताब्दी के पूर्वार्ध और ब्रिटिश साम्राज्य के अट्ठारह वीं, उन्नीस वीं और बीस वीं शताब्दी के सैन्य, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव के परिणाम स्वरूप यह दुनिया के कई भागों में सामान्य भाषा बन गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रमंडल देशों में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल एक द्वितीय भाषा और अधिकारिक भाषा के रूप में होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति पाँचवीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो-सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेजी कहा जाता है, से हुई है। वाइकिंग हमलावरों की प्राचीन नोर्स भाषा का अंग्रेजी भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मन विजय के बाद पुरानी अंग्रेजी का विकास मध्य अंग्रेजी के रूप में हुआ, इसके लिए नॉर्मन शब्दावली और वर्तनी के नियमों का भारी मात्र में उपयोग हुआ। वहां से आधुनिक अंग्रेजी का विकास हुआ और अभी भी इसमें अनेक भाषाओँ से विदेशी शब्दों को अपनाने और साथ ही साथ नए शब्दों को गढ़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। एक बड़ी मात्र में अंग्रेजी के शब्दों, खासकर तकनीकी शब्दों, का गठन प्राचीन ग्रीक और लैटिन की जड़ों पर आधारित है। . एम॰ जे॰ अकबर बीस संबंध है और भारत में इस्लाम दो सौ एक है। वे आम दस में है, समानता सूचकांक चार.बावन% है = दस / । यह लेख एम॰ जे॰ अकबर और भारत में इस्लाम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
लखनऊः वाराणसी में आज देव दीपावली के अवसर पर ग्यारह लाख दीपक से सजेगे गंगा घाट। नजारा कुछ ऐसा होगा कि मानो स्वर्ग उतर आयेगा काशी के गंगा घाटो पर। देश और विदेश से आए लाखों लोग इस अद्भूत दृश्य को देखेंगे। आज मुख्यमंत्री योगी जी राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल भी यहां मौजूद रहेंगी। हलांकि प्रशासन द्वारा गंगा मे मंच बनने की अनुमती न देने पर दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा महाआरती नहीं होगी। यह पहला अवसर होगा तीस वर्षो मे की देव दीपावली पर गंगा महाआरती नही होगी।
लखनऊः वाराणसी में आज देव दीपावली के अवसर पर ग्यारह लाख दीपक से सजेगे गंगा घाट। नजारा कुछ ऐसा होगा कि मानो स्वर्ग उतर आयेगा काशी के गंगा घाटो पर। देश और विदेश से आए लाखों लोग इस अद्भूत दृश्य को देखेंगे। आज मुख्यमंत्री योगी जी राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल भी यहां मौजूद रहेंगी। हलांकि प्रशासन द्वारा गंगा मे मंच बनने की अनुमती न देने पर दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा महाआरती नहीं होगी। यह पहला अवसर होगा तीस वर्षो मे की देव दीपावली पर गंगा महाआरती नही होगी।
- 9 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 9 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 की शुरुआत हो चुकी है और इस बार भारतीय खिलाड़ी लगातार हमें गर्वांन्वित महसूस करवा रहे है। बता दे इसकी शुरुआत से ही भारत मे कई गोल्डमेडल भी आ चुके है। बता दे कि इस बात की खुशी जितनी भारतीय आम जनता को है उतनी ही खुशी बॉलीवुड के स्टार्स को है। बता दें कि इस बार वेटलिफ्टिंग मे कई गोल्ड मेडल भारत आ चुके हैं और आने का सिलसिला अभी भी जारी है। बता दे कि इस बात से खुश हुए बॉलीवुड के कई सितारे और बड़ी बड़ी हस्तियों ने सोशल मीडिया और ट्विटर पर ट्वीट करते हुए अपनी खुशी जाहिर की है। इसके आगे बता दें कि सुनील शेट्टी, अमिताभ बच्चन से लेकर अजय देवगन ने भी इसकी बधाई दी है। इस बात से इतना तो जरूर तय हो जाता है कि वहां पर खेल रहे है हमारे खिलाड़ियों का हौसला अफजाई जरूर होता है। इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ साथ आइपीएल भी इस बार साथ में है और भारत में क्रिकेट की दीवानगी के बारे में तो सभी जानते है। खैर हम जानते हैं उन ट्वीट्स के बारे में जो कि हिंदी सिनेमा के बड़े बड़े दिग्गजों ने हमारे खिलाड़ियों के लिए किए है।
- नौ hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - नौ hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? कॉमनवेल्थ गेम्स दो हज़ार अट्ठारह की शुरुआत हो चुकी है और इस बार भारतीय खिलाड़ी लगातार हमें गर्वांन्वित महसूस करवा रहे है। बता दे इसकी शुरुआत से ही भारत मे कई गोल्डमेडल भी आ चुके है। बता दे कि इस बात की खुशी जितनी भारतीय आम जनता को है उतनी ही खुशी बॉलीवुड के स्टार्स को है। बता दें कि इस बार वेटलिफ्टिंग मे कई गोल्ड मेडल भारत आ चुके हैं और आने का सिलसिला अभी भी जारी है। बता दे कि इस बात से खुश हुए बॉलीवुड के कई सितारे और बड़ी बड़ी हस्तियों ने सोशल मीडिया और ट्विटर पर ट्वीट करते हुए अपनी खुशी जाहिर की है। इसके आगे बता दें कि सुनील शेट्टी, अमिताभ बच्चन से लेकर अजय देवगन ने भी इसकी बधाई दी है। इस बात से इतना तो जरूर तय हो जाता है कि वहां पर खेल रहे है हमारे खिलाड़ियों का हौसला अफजाई जरूर होता है। इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ साथ आइपीएल भी इस बार साथ में है और भारत में क्रिकेट की दीवानगी के बारे में तो सभी जानते है। खैर हम जानते हैं उन ट्वीट्स के बारे में जो कि हिंदी सिनेमा के बड़े बड़े दिग्गजों ने हमारे खिलाड़ियों के लिए किए है।
हमीरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर ने धूमल परिवार पर तीखा हमला बोला है। रामलाल ठाकुर ने कहा कि ये लोग जिस तरह के ब्यान मीडिया में देकर जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं उससे मैं यह कह सकता हूं कि धूमल या तो अपनी सुजानपुर की हार के बाद सठिया गए हैं या फिर अभी भी कोमा में हैं। उन्होंने कहा कि कभी आरो को लेकर तो कभी टीडी को लेकर इनके बयान हास्यास्पद इसलिए है क्योंकि धूमल खुद 2 बार प्रदेश के सीएम रह चुके हैं और उनके इस तरह के आरोप समझ से परे हैं। वहीं रामलाल ठाकुर ने अनुराग पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार अनुराग का चौका नहीं लगेगा। बल्कि इस बार अनुराग क्लीन बोल्ड होंगे। अनुराग का बीसीसीआी में झूठा हल्फनामा आज भी लोगों की चर्चा में हैं और लोग लोकसभा चुनाव में इसका जवाब जरूर मांग रहे हैं। रामलाल ठाकुर में प्रदेश में हो रही रेप की घटनाओं पर उनकी चुप्पी को लेकर पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं रेप के मुद्दे पर बोलूं या चुनाव लडूं। उनके इस तरह के ब्यान से साफ होता है कि एक बार फिर आम जनता की समस्याएं चुनावों तक ही सीमित रहेंगी।
हमीरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर ने धूमल परिवार पर तीखा हमला बोला है। रामलाल ठाकुर ने कहा कि ये लोग जिस तरह के ब्यान मीडिया में देकर जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं उससे मैं यह कह सकता हूं कि धूमल या तो अपनी सुजानपुर की हार के बाद सठिया गए हैं या फिर अभी भी कोमा में हैं। उन्होंने कहा कि कभी आरो को लेकर तो कभी टीडी को लेकर इनके बयान हास्यास्पद इसलिए है क्योंकि धूमल खुद दो बार प्रदेश के सीएम रह चुके हैं और उनके इस तरह के आरोप समझ से परे हैं। वहीं रामलाल ठाकुर ने अनुराग पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार अनुराग का चौका नहीं लगेगा। बल्कि इस बार अनुराग क्लीन बोल्ड होंगे। अनुराग का बीसीसीआी में झूठा हल्फनामा आज भी लोगों की चर्चा में हैं और लोग लोकसभा चुनाव में इसका जवाब जरूर मांग रहे हैं। रामलाल ठाकुर में प्रदेश में हो रही रेप की घटनाओं पर उनकी चुप्पी को लेकर पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं रेप के मुद्दे पर बोलूं या चुनाव लडूं। उनके इस तरह के ब्यान से साफ होता है कि एक बार फिर आम जनता की समस्याएं चुनावों तक ही सीमित रहेंगी।
यह 5 बेहतरीन क्वालिटी के Prestige Mixer Grinder हैं। इनमें आपको 500 से लेकर 750 वाट तक की मोटर मिल रही है। ये अभी 45% तक की छूट पर मिलेंगे। हम आपके लिए यहां पर बढ़िया क्वालिटी की Prestige Mixer Grinder लेकर आए हैं। इनमें आपको 750 वाट तक की मोटर मिल रही है। ये ड्राय और वेट ग्राइंडिंग के लिए भी सूटेबल है। ये 750 वाट तक की मोटर के साथ आ रहा है। ये मिक्सर ग्राइंडर आपको कई कलर ऑप्शन में मिल जाएंगे। इनके साथ आपको जूसर जार मिल रहा है। ये ग्राइंडिंग और जूसिंग जार के साथ आ रहा है। इन पर आपको Amazon Great Indian Sale के दौरान भारी डिस्काउंट भी मिल रहा है। इनकी बॉडी काफी ज्यादा हल्की और मजबूत प्लास्टिक से बनी हुई है।
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आंवला सेहत और त्वचा के साथ ही बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आंवला पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन ए, सी और ई अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। आंवले के लाभ पाने के लिए अकसर लोग इसे डाइट में शामिल करते हैं। आप चाहें तो आंवले का उपयोग बालों के लिए भी कर सकते हैं। जी हां, आंवला सिर्फ खाने नहीं बल्कि बालों पर लगाने के काम भी आता है। आंवले से बालों को पर्याप्त पोषण मिलता है, इससे बाल मजबूत बनते हैं और हेयर ग्रोथ में मदद मिलती है। आप हेयर मास्क के रूप में आंवले का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप हेयर ग्रोथ करना चाहते हैं, तो आंवला पाउडर काफी लाभकारी साबित हो सकता है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि बालों को बढ़ाने के लिए आंवला पाउडर में क्या मिलाकर लगाना चाहिए? या फिर बालों पर आंवला पाउडर में क्या मिलाकर लगाएं? आंवला पाउडर में रीठा और शिकाकाई मिलाकर बालों पर लगाना काफी फायदेमंद होता है। अगर आपके बालों की ग्रोथ धीमी है, तो आप आंवला, रीठा और शिकाकाई हेयर मास्क लगा सकते हैं। इसके लिए आप आंवला, रीठा और शिकाकाई पाउडर लें। इसमें पानी डालें, अब इस पेस्ट को अपने बालों और स्कैल्प पर लगाएं। आधे घंटे बाद बालों को माइल्ड शैंपू से धो लें। सप्ताह में 2-3 बार आंवला पाउडर में रीठा और शिकाकाई मिलाकर लगाने से बालों की ग्रोथ बढ़ सकती है। साथ ही बाल मुलायम और चमकदार भी बनेंगे। आंवला पाउडर में नारियल तेल मिलाकर भी बालों पर लगाना लाभकारी हो सकता है। इससे बालों की ग्रोथ में काफी मदद मिल सकती है। इसके लिए आप नारियल तेल लें। इसमें गुड़हल के 4-5 फूल डालें। अब इसे थोड़ा गर्म करें और आंवला पाउडर मिक्स कर दें। ठंडा होने के बाद आप इस पेस्ट को अपने बालों और स्कैल्प पर लगा सकते हैं। 40-50 मिनट बाद हेयर वॉश कर लें। आंवला पाउडर में नारियल तेल और गुड़हल के फूलों को मिलाकर लगाने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। इससे बालों को प्रोटीन मिलता है, हेयर फॉलिकल्स मजबूत बनते हैं। हेयर फॉल रुकता है और बालों की लंबाई बढ़ती है। अगर आप आंवला पाउडर में दही मिलाकर बालों पर लगाएंगे, तो इससे हेयर ग्रोथ में मदद मिल सकती है। आपको बता दें कि दही बालों को मॉइश्चराइज और हाइड्रेट करता है। आंवला पाउडर में दही मिलाकर लगाने से स्कैल्प का पीएच लेवल भी बैलेंस रहता है। इंफेक्शन से बचाव होता है और हेयर फॉल कंट्रोल होता है। नियमित रूप से आंवला और दही हेयर मास्क लगाने से आपके बालों की ग्रोथ धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी। इसके लिए आप 2 चम्मच आंवला पाउडर लें। इसमें 2-3 चम्मच दही मिलाएं। अब इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर लगाएं। एक घंटे बाद बालों को अच्छी तरह से साफ कर लें।
आंवला सेहत और त्वचा के साथ ही बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आंवला पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन ए, सी और ई अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। आंवले के लाभ पाने के लिए अकसर लोग इसे डाइट में शामिल करते हैं। आप चाहें तो आंवले का उपयोग बालों के लिए भी कर सकते हैं। जी हां, आंवला सिर्फ खाने नहीं बल्कि बालों पर लगाने के काम भी आता है। आंवले से बालों को पर्याप्त पोषण मिलता है, इससे बाल मजबूत बनते हैं और हेयर ग्रोथ में मदद मिलती है। आप हेयर मास्क के रूप में आंवले का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप हेयर ग्रोथ करना चाहते हैं, तो आंवला पाउडर काफी लाभकारी साबित हो सकता है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि बालों को बढ़ाने के लिए आंवला पाउडर में क्या मिलाकर लगाना चाहिए? या फिर बालों पर आंवला पाउडर में क्या मिलाकर लगाएं? आंवला पाउडर में रीठा और शिकाकाई मिलाकर बालों पर लगाना काफी फायदेमंद होता है। अगर आपके बालों की ग्रोथ धीमी है, तो आप आंवला, रीठा और शिकाकाई हेयर मास्क लगा सकते हैं। इसके लिए आप आंवला, रीठा और शिकाकाई पाउडर लें। इसमें पानी डालें, अब इस पेस्ट को अपने बालों और स्कैल्प पर लगाएं। आधे घंटे बाद बालों को माइल्ड शैंपू से धो लें। सप्ताह में दो-तीन बार आंवला पाउडर में रीठा और शिकाकाई मिलाकर लगाने से बालों की ग्रोथ बढ़ सकती है। साथ ही बाल मुलायम और चमकदार भी बनेंगे। आंवला पाउडर में नारियल तेल मिलाकर भी बालों पर लगाना लाभकारी हो सकता है। इससे बालों की ग्रोथ में काफी मदद मिल सकती है। इसके लिए आप नारियल तेल लें। इसमें गुड़हल के चार-पाँच फूल डालें। अब इसे थोड़ा गर्म करें और आंवला पाउडर मिक्स कर दें। ठंडा होने के बाद आप इस पेस्ट को अपने बालों और स्कैल्प पर लगा सकते हैं। चालीस-पचास मिनट बाद हेयर वॉश कर लें। आंवला पाउडर में नारियल तेल और गुड़हल के फूलों को मिलाकर लगाने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। इससे बालों को प्रोटीन मिलता है, हेयर फॉलिकल्स मजबूत बनते हैं। हेयर फॉल रुकता है और बालों की लंबाई बढ़ती है। अगर आप आंवला पाउडर में दही मिलाकर बालों पर लगाएंगे, तो इससे हेयर ग्रोथ में मदद मिल सकती है। आपको बता दें कि दही बालों को मॉइश्चराइज और हाइड्रेट करता है। आंवला पाउडर में दही मिलाकर लगाने से स्कैल्प का पीएच लेवल भी बैलेंस रहता है। इंफेक्शन से बचाव होता है और हेयर फॉल कंट्रोल होता है। नियमित रूप से आंवला और दही हेयर मास्क लगाने से आपके बालों की ग्रोथ धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी। इसके लिए आप दो चम्मच आंवला पाउडर लें। इसमें दो-तीन चम्मच दही मिलाएं। अब इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर लगाएं। एक घंटे बाद बालों को अच्छी तरह से साफ कर लें।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्मी विलास बैंक लिमिटेड (एलवीबी) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) में विलय की योजना को मंजूरी दे दी। जमाकर्ताओं के हित की रक्षा और वित्तीय एवं बैंकिंग स्थिरता के हित में, बैंकिंग विनियमन कानून, 1949 के सेक्शन 45 के तहत आरबीआई के आवेदन पर विलय की यह योजना बनाई गई है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार की सलाह से जमाकर्ताओं के हित की रक्षा के लिए 17.11.2020 को एलवीबी पर 30 दिन की अवधि के लिए मोरेटोरियम लगा दिया था और उसके निदेशक मंडल के ऊपर एक प्रशासक की नियुक्ति कर दी थी। जनता और हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक ने विलय की यह योजना तैयार की और उसे सरकार की मंजूरी के लिए पेश किया था। यह कार्य मोरेटोरियम की अवधि के समाप्त होने से काफी पहले कर लिया गया ताकि लागू मोरेटोरियम के कारण अपने धन की निकासी नहीं कर पाने की जमाकर्ताओं की परेशानी को कम किया जा सके। इस योजना के मंजूर हो जाने के बाद एलवीबी का एक उचित तिथि पर डीबीआईएल के साथ विलय हो जाएगा और तब जमाकर्ताओं पर अपना धन निकालने को लेकर किसी भी तरह की रोक नहीं रहेगी। डीबीआईएल एक बैंकिंग कंपनी है जिसे आरबीआई का लाइसेंस प्राप्त है और जो पूर्ण स्वामित्व वाले सहायक मॉडल पर भारत में परिचालन करती है। डीबीआईएल की सुदृढ़ बैलेंस शीट (तुलन पत्र) है, उसके पास पर्याप्त पूंजी है और डीबीएस से सम्बद्ध होने के कारण वह अतिरिक्त लाभ की स्थिति में भी है। डीबीएस एशिया का एक प्रमुख वित्तीय सेवा ग्रुप है जिसकी 18 बाजारों में उपस्थिति है और जिसका मुख्यालय सिंगापुर में है। वह सिंगापुर के शेयर बाजार में लिस्टिड भी है। विलय के बाद भी डीबीआईएल का संयुक्त बैलेंस शीट सुदृढ़ रहेगा और इसकी शाखाओं की संख्या बढ़कर 600 हो जाएगी। एलवीबी का तेजी से विलय और उसकी समस्या का समाधान, सरकार की स्वच्छ बैंकिंग व्यवस्था स्थापित करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और यह जमाकर्ताओं और आम जनता के साथ-साथ वित्तीय प्रणाली के हित में भी है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्मी विलास बैंक लिमिटेड के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड में विलय की योजना को मंजूरी दे दी। जमाकर्ताओं के हित की रक्षा और वित्तीय एवं बैंकिंग स्थिरता के हित में, बैंकिंग विनियमन कानून, एक हज़ार नौ सौ उनचास के सेक्शन पैंतालीस के तहत आरबीआई के आवेदन पर विलय की यह योजना बनाई गई है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार की सलाह से जमाकर्ताओं के हित की रक्षा के लिए सत्रह.ग्यारह.दो हज़ार बीस को एलवीबी पर तीस दिन की अवधि के लिए मोरेटोरियम लगा दिया था और उसके निदेशक मंडल के ऊपर एक प्रशासक की नियुक्ति कर दी थी। जनता और हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक ने विलय की यह योजना तैयार की और उसे सरकार की मंजूरी के लिए पेश किया था। यह कार्य मोरेटोरियम की अवधि के समाप्त होने से काफी पहले कर लिया गया ताकि लागू मोरेटोरियम के कारण अपने धन की निकासी नहीं कर पाने की जमाकर्ताओं की परेशानी को कम किया जा सके। इस योजना के मंजूर हो जाने के बाद एलवीबी का एक उचित तिथि पर डीबीआईएल के साथ विलय हो जाएगा और तब जमाकर्ताओं पर अपना धन निकालने को लेकर किसी भी तरह की रोक नहीं रहेगी। डीबीआईएल एक बैंकिंग कंपनी है जिसे आरबीआई का लाइसेंस प्राप्त है और जो पूर्ण स्वामित्व वाले सहायक मॉडल पर भारत में परिचालन करती है। डीबीआईएल की सुदृढ़ बैलेंस शीट है, उसके पास पर्याप्त पूंजी है और डीबीएस से सम्बद्ध होने के कारण वह अतिरिक्त लाभ की स्थिति में भी है। डीबीएस एशिया का एक प्रमुख वित्तीय सेवा ग्रुप है जिसकी अट्ठारह बाजारों में उपस्थिति है और जिसका मुख्यालय सिंगापुर में है। वह सिंगापुर के शेयर बाजार में लिस्टिड भी है। विलय के बाद भी डीबीआईएल का संयुक्त बैलेंस शीट सुदृढ़ रहेगा और इसकी शाखाओं की संख्या बढ़कर छः सौ हो जाएगी। एलवीबी का तेजी से विलय और उसकी समस्या का समाधान, सरकार की स्वच्छ बैंकिंग व्यवस्था स्थापित करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और यह जमाकर्ताओं और आम जनता के साथ-साथ वित्तीय प्रणाली के हित में भी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश अपनी विशेषता के साथ संभावनाओं के लिए भी जाना जाता है। आज उत्तर प्रदेश माफिया के गठजोड़ नहीं, बल्कि महोत्सव प्रदेश के रूप में जाना जाता है। जब पीएम मोदी ने देश का नेतृत्व संभाला तो यूपी में भी छटपटाहट हुई। छह साल में यहां बदलाव आया है। राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, चयन बोर्ड, पुलिस भर्ती की परीक्षा में शिकायत और सैकड़ों केस थे। पुलिस विभाग में डेढ़ लाख पद खाली थे। भर्तियों में भाई-भतीजावाद और जातिवाद था। उन्होंने कहा कि यह सारा खेल सामाजिक न्याय का मुखौटा लगाकर किया जाता था। हमने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। इसमें भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। अच्छे अधिकारी तैनात किए। छह साल में 1. 64 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती की जिसमें सभी 75 जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है। प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरे देश के लिए नजीर बनी है। आज प्रदेश में कोई दंगा नहीं होता है। आज ईद है। ईद की नमाज सड़क पर नहीं ईदगाह में पढ़ी जा रही है। कानून का राज सबके लिए समान है। The post प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरे देश के लिए नजीर बनी- योगी appeared first on Red File News- Latest Hindi News Headlines, Breaking News.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश अपनी विशेषता के साथ संभावनाओं के लिए भी जाना जाता है। आज उत्तर प्रदेश माफिया के गठजोड़ नहीं, बल्कि महोत्सव प्रदेश के रूप में जाना जाता है। जब पीएम मोदी ने देश का नेतृत्व संभाला तो यूपी में भी छटपटाहट हुई। छह साल में यहां बदलाव आया है। राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, चयन बोर्ड, पुलिस भर्ती की परीक्षा में शिकायत और सैकड़ों केस थे। पुलिस विभाग में डेढ़ लाख पद खाली थे। भर्तियों में भाई-भतीजावाद और जातिवाद था। उन्होंने कहा कि यह सारा खेल सामाजिक न्याय का मुखौटा लगाकर किया जाता था। हमने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। इसमें भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। अच्छे अधिकारी तैनात किए। छह साल में एक. चौंसठ लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती की जिसमें सभी पचहत्तर जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है। प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरे देश के लिए नजीर बनी है। आज प्रदेश में कोई दंगा नहीं होता है। आज ईद है। ईद की नमाज सड़क पर नहीं ईदगाह में पढ़ी जा रही है। कानून का राज सबके लिए समान है। The post प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरे देश के लिए नजीर बनी- योगी appeared first on Red File News- Latest Hindi News Headlines, Breaking News.
मौनी रॉय (Mouni Roy) आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। मौनी रॉय ने सीरियल से लेकर फिल्मो तक का कामयाब सफर तय किया है। आज वह एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं। वह सोशल मीडिया पर भी अपने फैंस के लिए काफी एक्टिव रहती है। आए दिन वह अपने हॉट और बोल्ड फोटोज से फैंस को तड़पा कर रख देती है। हाल ही में मौनी (Mouni Roy) ने अपने इंस्टाग्राम पर साड़ी में फोटो शेयर किए हैं ,जिसे देखने के बाद लोग अपना दिल थाम कर बैठ गए हैं। उन्होंने (Mouni Roy) पीच कलर की साड़ी पहन रखी है जिसमे वह क़यामत ढ़ा रही हैं। उन्होंने अपनी अदाएं दिखते हुए एक वीडियो भी शेयर किया है। साड़ी पर शिमर है ,जो की बेहद खूबसूरत लग रहा है। यह देखें वीडियोः यह देखने के बाद फैंस अलग अलग कमैंट्स कर रहे हैं। उन्हें (Mouni Roy) इस पोस्ट पर जमकर लाइक्स मिले हैं। कमैंट्स में युज़र्स ने ज़्यदातर दिल भेज रखे हैं। यह देखने के बाद फैंस अलग अलग कमैंट्स कर रहे हैं। उन्हें इस पोस्ट पर जमकर लाइक्स मिले हैं। कमैंट्स में युज़र्स ने ज़्यदातर दिल भेज रखे हैं। एक फैन ने कमेंट में कहा, "सेक्सी नागिन" तो वही अन्य ने कहा, "बंगाली ब्यूटी", एक और चाहने वाले ने कहा, "कितनी सोनी है यार यह "। उन्होंने एक जगह पहले साड़ी में फोटो पोस्ट किए फिर इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर करी हैं। रील में अपनी क़ातिल अदाओं से सबको घायल करती नज़र आ रही हैं। मौनी रॉय को साड़ी में बहुत ज़्यादा लोग पसंद करते हैं। इनको नागिन सीरियल से फेम हासिल हुआ और आज वह एक बेहतरीन एक्ट्रेस के रूप में इंडस्ट्री पर राज कर रही हैं । अभी हाल ही में मौनी शादी के बंधन में बंधी हैं। वह अपने हस्बैंड के साथ भी काफी फोटो पोस्ट करती रहती हैं।
मौनी रॉय आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। मौनी रॉय ने सीरियल से लेकर फिल्मो तक का कामयाब सफर तय किया है। आज वह एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं। वह सोशल मीडिया पर भी अपने फैंस के लिए काफी एक्टिव रहती है। आए दिन वह अपने हॉट और बोल्ड फोटोज से फैंस को तड़पा कर रख देती है। हाल ही में मौनी ने अपने इंस्टाग्राम पर साड़ी में फोटो शेयर किए हैं ,जिसे देखने के बाद लोग अपना दिल थाम कर बैठ गए हैं। उन्होंने पीच कलर की साड़ी पहन रखी है जिसमे वह क़यामत ढ़ा रही हैं। उन्होंने अपनी अदाएं दिखते हुए एक वीडियो भी शेयर किया है। साड़ी पर शिमर है ,जो की बेहद खूबसूरत लग रहा है। यह देखें वीडियोः यह देखने के बाद फैंस अलग अलग कमैंट्स कर रहे हैं। उन्हें इस पोस्ट पर जमकर लाइक्स मिले हैं। कमैंट्स में युज़र्स ने ज़्यदातर दिल भेज रखे हैं। यह देखने के बाद फैंस अलग अलग कमैंट्स कर रहे हैं। उन्हें इस पोस्ट पर जमकर लाइक्स मिले हैं। कमैंट्स में युज़र्स ने ज़्यदातर दिल भेज रखे हैं। एक फैन ने कमेंट में कहा, "सेक्सी नागिन" तो वही अन्य ने कहा, "बंगाली ब्यूटी", एक और चाहने वाले ने कहा, "कितनी सोनी है यार यह "। उन्होंने एक जगह पहले साड़ी में फोटो पोस्ट किए फिर इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर करी हैं। रील में अपनी क़ातिल अदाओं से सबको घायल करती नज़र आ रही हैं। मौनी रॉय को साड़ी में बहुत ज़्यादा लोग पसंद करते हैं। इनको नागिन सीरियल से फेम हासिल हुआ और आज वह एक बेहतरीन एक्ट्रेस के रूप में इंडस्ट्री पर राज कर रही हैं । अभी हाल ही में मौनी शादी के बंधन में बंधी हैं। वह अपने हस्बैंड के साथ भी काफी फोटो पोस्ट करती रहती हैं।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! चीन के वुहान शहर से शुरु हुए कोरोनावायरस से अभी पूरी दुनिया जूझ ही रही है कि चीन में एक नया वायरस जन्म ले चुका है। कोरोनावायरस दुनियाभर में करीब 1 करोड़ लोगों को अपना शिकार बना चुका है तो वहीं, करीब 5 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया अभी कोविड-19 के खौफ से उभर नहीं पाई है कि चाइना में एक नए तरह का वायरस जन्म ले चुका है। चीन के शोधकर्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा है कि हाल ही में एक नए प्रकार के स्वाइन फ्लू पाया गया है। इस नए वायरस का नाम जी-4 है। यह वायरस 2009 में महामारी के कारण बने एच1एन1 वायरस में जेनेटिक बदलाव से बना है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि नए फ्लू वायरस ने ट्रैक्शन या कि खिचांव प्राप्त कर लिया है और यह दिन-ब-दिन और अधिक संक्रामक होता जा रहा है, और इसकी बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अगर इसे नजरअंदाज किया जाता है तो वायरस "महामारी वायरस" बन सकता है। चीन की कई यूनिवर्सिटी और चीन के सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नया स्वाइन फ्लू इस हद तक खतरनाक है कि यदि यह इंसानों में फैल गया तो उन्हें बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। हालांकि WHO का कहना है कि वह अभी नई स्टडी को ध्यान से पढ़ रहे हैं उसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुचेंगे। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि जिस मुद्दे पर प्रकाश डालने की जरूरत है, वह है जारी महामारी और आने वाले महामारी पर निगरानी रखना।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! चीन के वुहान शहर से शुरु हुए कोरोनावायरस से अभी पूरी दुनिया जूझ ही रही है कि चीन में एक नया वायरस जन्म ले चुका है। कोरोनावायरस दुनियाभर में करीब एक करोड़ लोगों को अपना शिकार बना चुका है तो वहीं, करीब पाँच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया अभी कोविड-उन्नीस के खौफ से उभर नहीं पाई है कि चाइना में एक नए तरह का वायरस जन्म ले चुका है। चीन के शोधकर्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा है कि हाल ही में एक नए प्रकार के स्वाइन फ्लू पाया गया है। इस नए वायरस का नाम जी-चार है। यह वायरस दो हज़ार नौ में महामारी के कारण बने एचएकएनएक वायरस में जेनेटिक बदलाव से बना है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि नए फ्लू वायरस ने ट्रैक्शन या कि खिचांव प्राप्त कर लिया है और यह दिन-ब-दिन और अधिक संक्रामक होता जा रहा है, और इसकी बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अगर इसे नजरअंदाज किया जाता है तो वायरस "महामारी वायरस" बन सकता है। चीन की कई यूनिवर्सिटी और चीन के सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नया स्वाइन फ्लू इस हद तक खतरनाक है कि यदि यह इंसानों में फैल गया तो उन्हें बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। हालांकि WHO का कहना है कि वह अभी नई स्टडी को ध्यान से पढ़ रहे हैं उसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुचेंगे। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि जिस मुद्दे पर प्रकाश डालने की जरूरत है, वह है जारी महामारी और आने वाले महामारी पर निगरानी रखना।
६४ : जेनसाहित्यका इतिहास रहने वाले मनुष्योका प्रमाणादि, मेका वर्णन, विदेह क्षेत्रके तीर्थकरोंका कथन जम्बूद्वीपके सूर्य चन्द्रादिका कथन है । यह सत्र कथन निलोय पण्णत्तिके प्राय समान है । ति०प०के चौथे अविकारका नाम नरलोकपण्णत्ति अथवा मनुष्यलोक प्रज्ञप्ति है। उनका प्रारम्भ पैतालिम लाग्य योजन प्रमाण मनुष्यलोको निर्देशर्म होता है । क्षेत्र समाम की भी वही शैली है । अन्तर केवल इतना ही है कि ति०प० में प्रत्येक वर्णन विस्तार में है और क्षेनगमागंगे गंधेप में है। उसीका सूचक 'समाम' शब्द है । वर्णनकी समानताकी दृष्टि कुछ गाथाएँ उद्धरणीय है'चत्तारिदुवारा पुण उद्दिराि जवृदीवग्ग ॥१६॥ चउजोयण विच्छिन्ना अट्टेव य जोगणार उच्चिट्टा । उभओ वि फोनको कुरा वाहल्लओ तेग ॥१७॥ पुत्रेण होइ विजय दाहिणओ होउ वैजयत तु । अवरेण तु जगत अवराज्य उत्तरं पागे ॥१८॥' -वृ००गं० । विजयंतवैजयत जगत अपराजयतणामेहि । चत्तारि दुवाराड जचूदी नउदिनासु ॥४१॥ पुव्वदिमाए विजय दक्सिणआमाए वडजयत हि । अवरदिमाए जयत अवराजिदमुत्तरमाए ॥४२॥ एदाण दाराण पत्तेक्क अट्टजोयणा उदओ । उच्छेहद्ध रुद होदि पवेसी वि वासमम ॥४३॥ गणितके नियमो में तो प्राय समानता है ही, किन्तु गणितके सूत्रोमे भी समानता कही कही पाई जाती है । यथा - अभीष्ट स्थानमे मेरुका विस्तार निकालनेकी रीति जत्यिच्छसि विक्खभ मंदिरसिहराहि उवइत्ताण । एक्कारसहि विभत्त सहस्ससहिय च विक्खभ ।।३०७।। वृ०क्षे०स० । जत्यिच्छसि विक्खभं मंदरसिहराउ समवदिण्णाण । त एक्कारस भजिद सहस्ससहिद च तत्थवित्थार ।। १७१९॥ चूलिका विस्तार जत्थिच्छसि विक्खभ चूलीयसिहराहि उवइत्ताण । त पचहि पविभत्त चउहिं जुय जाण विक्खभ ॥३५० ॥ - वृ०क्षे०स० १ । भूगोल- खगोल विषयक साहित्य ६५ जत्यिच्छसि विक्खंभं चूलियसिहराउ समवदिण्णाण । त पचेहि विहत्त चउजुत्त तत्य तव्वास ।।१७९७ - ति०प० ४ । दूसरे लवणाव्धि अधिकारमें लवण समुद्रका विस्तार, परिधि, उसमें स्थित पाताल, जलकी हानिवृद्धि, वेलधर नागकुमारोकी सख्या आदि, छप्पन अन्तरद्वीप, अन्तरद्वीपमें रहने वाले मनुष्योका उत्सेध आदि, लवण समुद्र के उत्सेधादिका प्रमाण तथा चन्द्रमा, सूर्य आदिकी संख्याका कथन है । इस अधिकारमें अन्तरद्वीप छप्पन बतलाये है । जिनमेंसे अट्ठाईस द्वीप हिमालय पर्वत सम्बन्धी और २८ द्वीप शिखरी पर्वत सम्बन्धी है। इनके नाम क्रमश एकोरुक, आभाषिक, वैपाणिक, लाङ्गलिक आदि हैं । ( वृ०क्षे०स०, २-५६ आदि ) । श्वेताम्बर साहित्यमें छप्पन अन्तर्द्वीप माने गये है किन्तु दिगम्बर साहित्यमें अन्तर्द्वीप माने गये है । तत्त्वार्थाधिगम सूत्रके उमास्वाति रचित भाष्यमें भी ९६ अन्तर्द्वीप माने है । उस पर टीकाकार' सिद्ध सेनगणिने रोप प्रकट करते लिखा है कि यह कथन आर्ष विरुद्ध है । अत तिलोयपण्णत्तिमें अन्तर्द्वीप ९६ वतलाये है । सर्वार्थसिद्धि तत्त्वार्थवार्तिक आदिमें भी ९६ ही बतलाये है । वृहत्क्षेत्र समासमें द्वीपोका नाम एकोरुक आदि बतलाया है और द्वीपोके नामके कारण उनमें रहने वाले मनुष्यो का भी वही नाम बतलाया है। किन्तु दिगम्बर साहित्यमें अन्तद्वीपोमें रहने वाले मनुष्योको एकोरुक-जिनके एक पैर है, आदि बतलाया है। और उनका अर्थ उन शब्दोके अनुसार यही किया जाता है कि उनके एक जघा है, वे गूँगे है, उनमें से किसीका मुख मत्स्यकी तरह, किसीका बन्दरकी तरह है, आदि । तिलोयपण्णत्तिमें भी अर्न्तद्वीपोके मनुष्योको एकोरुक, लागलिक आदि बतलाया है मगर नाममात्रसे । यथा - 'एकोरुक लगुलिका वेसणका भासका य णामेहि । पुव्वादिसु दिसासु चउदीवाण कुमाणुसा होति ।।२४८४।।" आगे भी कमानुषोको 'तण्णामा' लिखकर एकोरुक आदि नाम बतलाया है । अत एकोरुक आदिका शब्दार्थ लेना विचारणीय है । अस्तु तिलोयपण्णत्तिसे वृहत् क्षेत्र समासमें द्वीपोका अवस्थान भी भिन्न रूपसे बतलाया है । यह केवल ग्रन्थगत भेद नही है किन्तु परम्परागत भेद है । १. 'एतच्चान्तरद्वीपकभाष्य प्रायो विनाशित सर्वत्र कैरपि दुविदग्धैर्येन षण्णवतिरन्तरद्वीपका भाष्येपु दृश्यन्ते । अनार्षं चैतदध्यवसीयते जीवाभिगमादिषु पट्पञ्चाशदन्तरद्वीपकाध्ययनात् ।' - सिद्धक्षे० टीका, भा० १, पु० २६७ । ६६. जेनसाहित्यका इतिहास दिगम्बर परम्परा के ग्रन्थोमे तिलोयपण्णत्तिके अनुसार कथन है और श्वेताम्बर परम्पराके ग्रन्थोमें वृहत्क्षेत्रके अनुसार कथन मिलता है । तीसरे धातकी खण्ड अधिकारमे धातकी खण्ड द्वीपका विस्तार, परिधि, इन्वाकार पर्वत, मेरु पर्वत, भरतादिक क्षेत्रोका तथा हिमवदादि पर्वतोंका आकार विस्तारादि, तथा चन्द्र सूर्य वगैरहकी संख्या आदिका कथन है । तिलोयपण्णत्तिमें (४- २५७८) मेरुका विस्तार तल भागमें दस हजार योजन और भूतल पर ९४०० योजन वतलाया है। आगे (गा० २५८१) लिखा है कि कुछ आचार्य मेरुके तल विस्तारको नो हजार पाँच सो योजन मानते है । तत्त्वार्थ वार्तिक ( पृ० १९५ ) में मेरुका मूल में विस्तार ९५०० ओर भूतल पर ९४०० वतलाया है । वृहत् क्षेत्र समासमें ( गा० ३-५८) भी उतना बतलाया है । जो ति० प० के मतान्तरके अनुसार है । दोनो ग्रन्थोमें मेरुकी हानि वृद्धि निकालनेके लिये जो गणित सूत्र दिया है वह पूर्ववत् प्राय समान ही है यथा - जत्थिच्छसि विक्कभ मदरसिंहराहि उच्चइत्ताण । त दसहि भइय लद्ध सहस्स सहिय तु विस्कभ ।।५९।। T००स० ३ । जत्यिच्छसि विक्खभ खुल्लयमेरूण समवदिण्णाण । दसभजिदे ज लद्ध एक्क सहस्सेण समिलिद ।।२५८२ ।। - ति०५०४ चौथे अधिकारमे कालोद समुद्रके विस्तार, परिधि, द्वीप, चन्द्र सूर्य आदि की संख्या, आदिका कथन है । तिलोयपण्णत्तिमें कालोद समुद्रमें भी लवण समुद्रकी तरह अन्तर्द्वीप और उनमें रहने वाले कुमनुष्योका कथन है। किन्तु वृहत्क्षेत्र समासमें वह सव कथन नही है। इसका कारण यह है कि श्वेताम्वरमें कालोदधिमें ऐसे अन्तर्द्वीप नही माने गये है । पाँचवे अधिकारमें पुष्कर द्वीप व उसके मध्यमें स्थित मानुपोत्तर पर्वतके विस्तारादिका, तथा इष्वाकार पर्वत, भरतादि क्षेत्र, हिमवदादि पर्वतोके विस्तारादिका तथा चन्द्र सूर्यादिकी संख्या आदिका कथन है । वृहत्सग्रहणि ' जिन भद्रगणि क्षमाश्रमण विरचित वृहत्सग्रहणि भी लोकानुयोगका एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है । इस पर भी मलयगिरिकी संस्कृत टीका है । वृहत् क्षेत्र १ मलयगिरिकी संस्कृत टीकाके साथ वृहत्सग्रहणीका प्रकाशन श्री जैन आत्मानन्द सभा भावनगरसे हुआ है । और उसका गुजराती अनुवाद श्री जैन धर्म प्रसारक सभा भावनगरसे प्रकाशित हुआ है । भूगोल- खगोल विषयक साहित्य ६७ समासकी तरह ही वृहत् सग्रहिणीमें भी ग्रन्थकारका कोई निर्देश नही मिलता । किन्तु टीकाकारने उसे जिनभद्र गणिजीकी कृति वतलाया है । उसके गुजराती अनुवादकी प्रस्तावनामे लिखा है कि बृहत्सग्रहणिकी मूल गाथाएं ३५३ है, क्योकि मलयगिरिकी टीकाके साथ छपे हुए ग्रन्थके अन्तमें ३५३ मूल गाथाएँ दी है । टीकाकारने अपनी टीकामे २४ क्षेपक गाथाओको भी सम्मिलित कर लिया है इससे गाया सख्या ३६७ हो गई है । ग्रन्थ के प्रारम्भमे उसका नाम 'सगहणि' बतलाया है। तथा उसमे देवो और नारकियोकी स्थिति, भवन, अवगाहना और मनुष्यो तथा तिर्यञ्चोंके शरीर और आयुका प्रमाण तथा उत्पत्ति ओर च्यवनका विरहकाल, एक समयमें उत्पन्न होने वाले और च्युत होने वाले जीवोकी सख्या और गति आगतिका कथन करनेका निर्देश किया है । तथा अन्तमें ( गा० ३६४ ) कहा है कि मैंने भव्य जीवोके हितके लिये आगमसे उद्धृत करके यह सक्षिप्त संग्रहणी कही है। और अन्तिम गायामें कहा है कि मैंने पूर्वाचार्य कृत श्र तमसे अपनी मतिके अनुसार जो कुछ उद्धृत किया हो उसे श्रु तधर क्षमा करें। इसमे स्पष्ट है कि इस सग्रहणीका सग्रह पूर्वाचार्य कृत श्रु तमेंसे किया गया है । दिगम्बर परम्परामें एक मूलाचार नामक ग्रन्थ है इस ग्रन्थका उल्लेख तिलोयपण्णत्तिमें मिलता है और उससे उसमें कुछ गायाएँ भी ली गई है यह पहले वतला आये है । मूलाचारके अन्तिम प्रकरणका नाम 'पज्जति सग्रहणी है । इस प्रकरणको अनेक गाथाएं वृहत् सग्रहणीमें संगृहीत है। कुछ गाथाएँ तो यथाक्रम पाई जाती है । विवरण इस प्रकार है-जम्बूद्वीपसे लेकर क्रौचवर द्वीपपर्यन्त सोलह द्वीपोके नाम दोनो ग्रन्थोमें दो गाथाओसे बतलाये गये है। इन दोनो गाथाओकी क्रमसख्या मूलाचारमें ३३-३४ और सग्रहणीमें ८२-८३ है । दोनोमें प्राय समानता है। उसके पश्चात् मूलाचार - में यह गाया है - एव दीवसमुद्दा दुगुण दुगुणवित्थडा असखेज्जा । एदे दु तिरियलोए सयभुरमणोदहिं जाव ॥३५॥ सग्रहणीमें यही गाथा थोडेसे पाठभेदको लिए हुए इस प्रकार हैएव दीवसमुद्दा दुगुणा दुगुणा भवे असंखेज्जा । भणिओ य तिरियलोए सयभुरमणोदही जाव ॥८५॥ उक्त दो गाथा और उक्त गाथाके बीचमें सग्रहणी में जो ८४ नम्बरकी गाथा ६८ : जेनसाहित्यका इतिहास है वह मूलाचारमे आगे दो है उसका नम्बर ३६ है। उसके पश्चात् ३८, ३९ ओर ४० नम्बरको गाथाएँ सग्रहणीमे ८७, ८८ ओर ९० नम्बर पर है। इस तरह द्वीप समुद्रोके कथन सम्बन्धी गाथाएँ दोनो सग्रहणियोमें प्राय समान है । आगे योनियोके कथन सम्बन्धी मूलाचार गाया ५८-५९ मग्रहिणीमें ३५८३५९ नम्बर पर है । ६० तथा ३६० नम्वरकी गाथाका अर्थ समान होते हुए भी शब्दोंमें थोडा अन्तर अन्तर पाया जाता है । आगे ६१-६२ तथा ३६१३६२ गाथाएँ प्राय समान है। मूलाचारको ६२वी गाथाके अन्तिम चरणका पाठ है - 'सेसा सेसेसु जोणीसु' । ओर सग्रहणीकी ३६२वी गाथाके अन्तिम चरणमे पाठ है - 'रोसाए सेरागजणो य' । गोम्मटगार जीवकाण्डमें यह गाथा सग्रहणी वाले पाठके साथ पाई जाती है । मूलाचारमे कुलोको वतलाने वाली १६६ मे १६९ तक की चार गाथाएं इसी क्रमसे सग्रहणीमें है और उनकी क्रमसख्या ३५३-३५६ तक है । और भी कितनी ही गाथाएँ दोनो ग्रथोमें समान है । विशेपावश्यक भाष्यकार जिनभद्रगणी सातवी शताब्दीमे हुए है । तिलोयपण्णत्तिकी रचना उससे बहुत पहले हो चुकी थी ओर तिलोयपण्णत्तिमें मूलाचार का निर्देश है तथा उससे कुछ गायाएं भी ली गई है । अत. मूलाचार ति०प० से भी प्राचीन है । अत सग्रहणीमे उक्त गाथाएँ मूलाचारके अन्तमें स्थित 'पज्जती सग्रहणी' से ली गई हो, यह सभव है । और भी कुछ गाथाएँ सग्रहणीमे ऐसी है जो अन्य गथोमें मिलती है । सगहणीकी 'पदमक्खर पि इक्क' आदि १६७वी गाथा भगवती आराधनाकी ३९वी गाथा है और 'सुत्त गणहरइय' आदि १६८वी गाया भ० आराधनाकी ३४वी गाथा है । अन्तर केवल इतना है कि उसमें 'रइय' के स्थान पर 'गथिद' और 'कहिय' पाठ है । 'कथिद' पाठके साथ यही गाथा मूलाचारके पञ्चाचाराधिकारमें भी पाई जाती है । फिर सग्रहणीमें ये दोनो गाथाएं विना किसी प्रकरणके स्वर्गोमे उपपादके प्रकरणमे सगृहीत की गई है । अत निश्चय ही इन्हें अन्यत्रसे लिया गया है । भगवती आराधना तिलोयपण्णत्तिसे भी प्राचीन है । इसी तरह 'पुव्वस्स उ परिमाण' आदि ३१६वी गाथा पूज्यपादकी सर्वार्थ - सिद्धिमें उद्धृत है । और पूज्यपाद ५ - ६ वी शतीके आचार्य है । अत यह गाथा प्राचीन होनी चाहिये । सग्रहणीमें पहली पृथिवीकी स्थिति बतलाकर शेष पृथि - वियोमें स्थिति बतलानेके लिए एक करणसूत्र दिया है जो इस प्रकार है
चौंसठ : जेनसाहित्यका इतिहास रहने वाले मनुष्योका प्रमाणादि, मेका वर्णन, विदेह क्षेत्रके तीर्थकरोंका कथन जम्बूद्वीपके सूर्य चन्द्रादिका कथन है । यह सत्र कथन निलोय पण्णत्तिके प्राय समान है । तिशून्यपशून्यके चौथे अविकारका नाम नरलोकपण्णत्ति अथवा मनुष्यलोक प्रज्ञप्ति है। उनका प्रारम्भ पैतालिम लाग्य योजन प्रमाण मनुष्यलोको निर्देशर्म होता है । क्षेत्र समाम की भी वही शैली है । अन्तर केवल इतना ही है कि तिशून्यपशून्य में प्रत्येक वर्णन विस्तार में है और क्षेनगमागंगे गंधेप में है। उसीका सूचक 'समाम' शब्द है । वर्णनकी समानताकी दृष्टि कुछ गाथाएँ उद्धरणीय है'चत्तारिदुवारा पुण उद्दिराि जवृदीवग्ग ॥सोलह॥ चउजोयण विच्छिन्ना अट्टेव य जोगणार उच्चिट्टा । उभओ वि फोनको कुरा वाहल्लओ तेग ॥सत्रह॥ पुत्रेण होइ विजय दाहिणओ होउ वैजयत तु । अवरेण तु जगत अवराज्य उत्तरं पागे ॥अट्ठारह॥' -वृशून्यगंशून्य । विजयंतवैजयत जगत अपराजयतणामेहि । चत्तारि दुवाराड जचूदी नउदिनासु ॥इकतालीस॥ पुव्वदिमाए विजय दक्सिणआमाए वडजयत हि । अवरदिमाए जयत अवराजिदमुत्तरमाए ॥बयालीस॥ एदाण दाराण पत्तेक्क अट्टजोयणा उदओ । उच्छेहद्ध रुद होदि पवेसी वि वासमम ॥तैंतालीस॥ गणितके नियमो में तो प्राय समानता है ही, किन्तु गणितके सूत्रोमे भी समानता कही कही पाई जाती है । यथा - अभीष्ट स्थानमे मेरुका विस्तार निकालनेकी रीति जत्यिच्छसि विक्खभ मंदिरसिहराहि उवइत्ताण । एक्कारसहि विभत्त सहस्ससहिय च विक्खभ ।।तीन सौ सात।। वृशून्यक्षेशून्यसशून्य । जत्यिच्छसि विक्खभं मंदरसिहराउ समवदिण्णाण । त एक्कारस भजिद सहस्ससहिद च तत्थवित्थार ।। एक हज़ार सात सौ उन्नीस॥ चूलिका विस्तार जत्थिच्छसि विक्खभ चूलीयसिहराहि उवइत्ताण । त पचहि पविभत्त चउहिं जुय जाण विक्खभ ॥तीन सौ पचास ॥ - वृशून्यक्षेशून्यसशून्य एक । भूगोल- खगोल विषयक साहित्य पैंसठ जत्यिच्छसि विक्खंभं चूलियसिहराउ समवदिण्णाण । त पचेहि विहत्त चउजुत्त तत्य तव्वास ।।एक हज़ार सात सौ सत्तानवे - तिशून्यपशून्य चार । दूसरे लवणाव्धि अधिकारमें लवण समुद्रका विस्तार, परिधि, उसमें स्थित पाताल, जलकी हानिवृद्धि, वेलधर नागकुमारोकी सख्या आदि, छप्पन अन्तरद्वीप, अन्तरद्वीपमें रहने वाले मनुष्योका उत्सेध आदि, लवण समुद्र के उत्सेधादिका प्रमाण तथा चन्द्रमा, सूर्य आदिकी संख्याका कथन है । इस अधिकारमें अन्तरद्वीप छप्पन बतलाये है । जिनमेंसे अट्ठाईस द्वीप हिमालय पर्वत सम्बन्धी और अट्ठाईस द्वीप शिखरी पर्वत सम्बन्धी है। इनके नाम क्रमश एकोरुक, आभाषिक, वैपाणिक, लाङ्गलिक आदि हैं । । श्वेताम्बर साहित्यमें छप्पन अन्तर्द्वीप माने गये है किन्तु दिगम्बर साहित्यमें अन्तर्द्वीप माने गये है । तत्त्वार्थाधिगम सूत्रके उमास्वाति रचित भाष्यमें भी छियानवे अन्तर्द्वीप माने है । उस पर टीकाकार' सिद्ध सेनगणिने रोप प्रकट करते लिखा है कि यह कथन आर्ष विरुद्ध है । अत तिलोयपण्णत्तिमें अन्तर्द्वीप छियानवे वतलाये है । सर्वार्थसिद्धि तत्त्वार्थवार्तिक आदिमें भी छियानवे ही बतलाये है । वृहत्क्षेत्र समासमें द्वीपोका नाम एकोरुक आदि बतलाया है और द्वीपोके नामके कारण उनमें रहने वाले मनुष्यो का भी वही नाम बतलाया है। किन्तु दिगम्बर साहित्यमें अन्तद्वीपोमें रहने वाले मनुष्योको एकोरुक-जिनके एक पैर है, आदि बतलाया है। और उनका अर्थ उन शब्दोके अनुसार यही किया जाता है कि उनके एक जघा है, वे गूँगे है, उनमें से किसीका मुख मत्स्यकी तरह, किसीका बन्दरकी तरह है, आदि । तिलोयपण्णत्तिमें भी अर्न्तद्वीपोके मनुष्योको एकोरुक, लागलिक आदि बतलाया है मगर नाममात्रसे । यथा - 'एकोरुक लगुलिका वेसणका भासका य णामेहि । पुव्वादिसु दिसासु चउदीवाण कुमाणुसा होति ।।दो हज़ार चार सौ चौरासी।।" आगे भी कमानुषोको 'तण्णामा' लिखकर एकोरुक आदि नाम बतलाया है । अत एकोरुक आदिका शब्दार्थ लेना विचारणीय है । अस्तु तिलोयपण्णत्तिसे वृहत् क्षेत्र समासमें द्वीपोका अवस्थान भी भिन्न रूपसे बतलाया है । यह केवल ग्रन्थगत भेद नही है किन्तु परम्परागत भेद है । एक. 'एतच्चान्तरद्वीपकभाष्य प्रायो विनाशित सर्वत्र कैरपि दुविदग्धैर्येन षण्णवतिरन्तरद्वीपका भाष्येपु दृश्यन्ते । अनार्षं चैतदध्यवसीयते जीवाभिगमादिषु पट्पञ्चाशदन्तरद्वीपकाध्ययनात् ।' - सिद्धक्षेशून्य टीका, भाशून्य एक, पुशून्य दो सौ सरसठ । छयासठ. जेनसाहित्यका इतिहास दिगम्बर परम्परा के ग्रन्थोमे तिलोयपण्णत्तिके अनुसार कथन है और श्वेताम्बर परम्पराके ग्रन्थोमें वृहत्क्षेत्रके अनुसार कथन मिलता है । तीसरे धातकी खण्ड अधिकारमे धातकी खण्ड द्वीपका विस्तार, परिधि, इन्वाकार पर्वत, मेरु पर्वत, भरतादिक क्षेत्रोका तथा हिमवदादि पर्वतोंका आकार विस्तारादि, तथा चन्द्र सूर्य वगैरहकी संख्या आदिका कथन है । तिलोयपण्णत्तिमें मेरुका विस्तार तल भागमें दस हजार योजन और भूतल पर नौ हज़ार चार सौ योजन वतलाया है। आगे लिखा है कि कुछ आचार्य मेरुके तल विस्तारको नो हजार पाँच सो योजन मानते है । तत्त्वार्थ वार्तिक में मेरुका मूल में विस्तार नौ हज़ार पाँच सौ ओर भूतल पर नौ हज़ार चार सौ वतलाया है । वृहत् क्षेत्र समासमें भी उतना बतलाया है । जो तिशून्य पशून्य के मतान्तरके अनुसार है । दोनो ग्रन्थोमें मेरुकी हानि वृद्धि निकालनेके लिये जो गणित सूत्र दिया है वह पूर्ववत् प्राय समान ही है यथा - जत्थिच्छसि विक्कभ मदरसिंहराहि उच्चइत्ताण । त दसहि भइय लद्ध सहस्स सहिय तु विस्कभ ।।उनसठ।। Tशून्यसशून्य तीन । जत्यिच्छसि विक्खभ खुल्लयमेरूण समवदिण्णाण । दसभजिदे ज लद्ध एक्क सहस्सेण समिलिद ।।दो हज़ार पाँच सौ बयासी ।। - तिपाँच सौ चार चौथे अधिकारमे कालोद समुद्रके विस्तार, परिधि, द्वीप, चन्द्र सूर्य आदि की संख्या, आदिका कथन है । तिलोयपण्णत्तिमें कालोद समुद्रमें भी लवण समुद्रकी तरह अन्तर्द्वीप और उनमें रहने वाले कुमनुष्योका कथन है। किन्तु वृहत्क्षेत्र समासमें वह सव कथन नही है। इसका कारण यह है कि श्वेताम्वरमें कालोदधिमें ऐसे अन्तर्द्वीप नही माने गये है । पाँचवे अधिकारमें पुष्कर द्वीप व उसके मध्यमें स्थित मानुपोत्तर पर्वतके विस्तारादिका, तथा इष्वाकार पर्वत, भरतादि क्षेत्र, हिमवदादि पर्वतोके विस्तारादिका तथा चन्द्र सूर्यादिकी संख्या आदिका कथन है । वृहत्सग्रहणि ' जिन भद्रगणि क्षमाश्रमण विरचित वृहत्सग्रहणि भी लोकानुयोगका एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है । इस पर भी मलयगिरिकी संस्कृत टीका है । वृहत् क्षेत्र एक मलयगिरिकी संस्कृत टीकाके साथ वृहत्सग्रहणीका प्रकाशन श्री जैन आत्मानन्द सभा भावनगरसे हुआ है । और उसका गुजराती अनुवाद श्री जैन धर्म प्रसारक सभा भावनगरसे प्रकाशित हुआ है । भूगोल- खगोल विषयक साहित्य सरसठ समासकी तरह ही वृहत् सग्रहिणीमें भी ग्रन्थकारका कोई निर्देश नही मिलता । किन्तु टीकाकारने उसे जिनभद्र गणिजीकी कृति वतलाया है । उसके गुजराती अनुवादकी प्रस्तावनामे लिखा है कि बृहत्सग्रहणिकी मूल गाथाएं तीन सौ तिरेपन है, क्योकि मलयगिरिकी टीकाके साथ छपे हुए ग्रन्थके अन्तमें तीन सौ तिरेपन मूल गाथाएँ दी है । टीकाकारने अपनी टीकामे चौबीस क्षेपक गाथाओको भी सम्मिलित कर लिया है इससे गाया सख्या तीन सौ सरसठ हो गई है । ग्रन्थ के प्रारम्भमे उसका नाम 'सगहणि' बतलाया है। तथा उसमे देवो और नारकियोकी स्थिति, भवन, अवगाहना और मनुष्यो तथा तिर्यञ्चोंके शरीर और आयुका प्रमाण तथा उत्पत्ति ओर च्यवनका विरहकाल, एक समयमें उत्पन्न होने वाले और च्युत होने वाले जीवोकी सख्या और गति आगतिका कथन करनेका निर्देश किया है । तथा अन्तमें कहा है कि मैंने भव्य जीवोके हितके लिये आगमसे उद्धृत करके यह सक्षिप्त संग्रहणी कही है। और अन्तिम गायामें कहा है कि मैंने पूर्वाचार्य कृत श्र तमसे अपनी मतिके अनुसार जो कुछ उद्धृत किया हो उसे श्रु तधर क्षमा करें। इसमे स्पष्ट है कि इस सग्रहणीका सग्रह पूर्वाचार्य कृत श्रु तमेंसे किया गया है । दिगम्बर परम्परामें एक मूलाचार नामक ग्रन्थ है इस ग्रन्थका उल्लेख तिलोयपण्णत्तिमें मिलता है और उससे उसमें कुछ गायाएँ भी ली गई है यह पहले वतला आये है । मूलाचारके अन्तिम प्रकरणका नाम 'पज्जति सग्रहणी है । इस प्रकरणको अनेक गाथाएं वृहत् सग्रहणीमें संगृहीत है। कुछ गाथाएँ तो यथाक्रम पाई जाती है । विवरण इस प्रकार है-जम्बूद्वीपसे लेकर क्रौचवर द्वीपपर्यन्त सोलह द्वीपोके नाम दोनो ग्रन्थोमें दो गाथाओसे बतलाये गये है। इन दोनो गाथाओकी क्रमसख्या मूलाचारमें तैंतीस-चौंतीस और सग्रहणीमें बयासी-तिरासी है । दोनोमें प्राय समानता है। उसके पश्चात् मूलाचार - में यह गाया है - एव दीवसमुद्दा दुगुण दुगुणवित्थडा असखेज्जा । एदे दु तिरियलोए सयभुरमणोदहिं जाव ॥पैंतीस॥ सग्रहणीमें यही गाथा थोडेसे पाठभेदको लिए हुए इस प्रकार हैएव दीवसमुद्दा दुगुणा दुगुणा भवे असंखेज्जा । भणिओ य तिरियलोए सयभुरमणोदही जाव ॥पचासी॥ उक्त दो गाथा और उक्त गाथाके बीचमें सग्रहणी में जो चौरासी नम्बरकी गाथा अड़सठ : जेनसाहित्यका इतिहास है वह मूलाचारमे आगे दो है उसका नम्बर छत्तीस है। उसके पश्चात् अड़तीस, उनतालीस ओर चालीस नम्बरको गाथाएँ सग्रहणीमे सत्तासी, अठासी ओर नब्बे नम्बर पर है। इस तरह द्वीप समुद्रोके कथन सम्बन्धी गाथाएँ दोनो सग्रहणियोमें प्राय समान है । आगे योनियोके कथन सम्बन्धी मूलाचार गाया अट्ठावन-उनसठ मग्रहिणीमें तीन लाख अट्ठावन हज़ार तीन सौ उनसठ नम्बर पर है । साठ तथा तीन सौ साठ नम्वरकी गाथाका अर्थ समान होते हुए भी शब्दोंमें थोडा अन्तर अन्तर पाया जाता है । आगे इकसठ-बासठ तथा तीन लाख इकसठ हज़ार तीन सौ बासठ गाथाएँ प्राय समान है। मूलाचारको बासठवी गाथाके अन्तिम चरणका पाठ है - 'सेसा सेसेसु जोणीसु' । ओर सग्रहणीकी तीन सौ बासठवी गाथाके अन्तिम चरणमे पाठ है - 'रोसाए सेरागजणो य' । गोम्मटगार जीवकाण्डमें यह गाथा सग्रहणी वाले पाठके साथ पाई जाती है । मूलाचारमे कुलोको वतलाने वाली एक सौ छयासठ मे एक सौ उनहत्तर तक की चार गाथाएं इसी क्रमसे सग्रहणीमें है और उनकी क्रमसख्या तीन सौ तिरेपन-तीन सौ छप्पन तक है । और भी कितनी ही गाथाएँ दोनो ग्रथोमें समान है । विशेपावश्यक भाष्यकार जिनभद्रगणी सातवी शताब्दीमे हुए है । तिलोयपण्णत्तिकी रचना उससे बहुत पहले हो चुकी थी ओर तिलोयपण्णत्तिमें मूलाचार का निर्देश है तथा उससे कुछ गायाएं भी ली गई है । अत. मूलाचार तिशून्यपशून्य से भी प्राचीन है । अत सग्रहणीमे उक्त गाथाएँ मूलाचारके अन्तमें स्थित 'पज्जती सग्रहणी' से ली गई हो, यह सभव है । और भी कुछ गाथाएँ सग्रहणीमे ऐसी है जो अन्य गथोमें मिलती है । सगहणीकी 'पदमक्खर पि इक्क' आदि एक सौ सरसठवी गाथा भगवती आराधनाकी उनतालीसवी गाथा है और 'सुत्त गणहरइय' आदि एक सौ अड़सठवी गाया भशून्य आराधनाकी चौंतीसवी गाथा है । अन्तर केवल इतना है कि उसमें 'रइय' के स्थान पर 'गथिद' और 'कहिय' पाठ है । 'कथिद' पाठके साथ यही गाथा मूलाचारके पञ्चाचाराधिकारमें भी पाई जाती है । फिर सग्रहणीमें ये दोनो गाथाएं विना किसी प्रकरणके स्वर्गोमे उपपादके प्रकरणमे सगृहीत की गई है । अत निश्चय ही इन्हें अन्यत्रसे लिया गया है । भगवती आराधना तिलोयपण्णत्तिसे भी प्राचीन है । इसी तरह 'पुव्वस्स उ परिमाण' आदि तीन सौ सोलहवी गाथा पूज्यपादकी सर्वार्थ - सिद्धिमें उद्धृत है । और पूज्यपाद पाँच - छः वी शतीके आचार्य है । अत यह गाथा प्राचीन होनी चाहिये । सग्रहणीमें पहली पृथिवीकी स्थिति बतलाकर शेष पृथि - वियोमें स्थिति बतलानेके लिए एक करणसूत्र दिया है जो इस प्रकार है
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