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नई दिल्ली. जम्मू (Jammu) से आ रही बड़ी खबर के अनुसार, यहां के अरनिया (Arnia Seactor) सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आज यानी मंगलवार को पाकिस्तानी रेंजर्स ने BSF के जवानों पर फायरिंग (Firing) की है।
अरनिया सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजर्स ने BSF के पैट्रोलिंग दस्ते पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। BSF जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। BSF ने जानकारी दी है कि जवानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
खबरों के अनुसार, यह फायरिंग तब की गई जब भारतीय जवान बाढ़ लगाने का काम कर रहे थे। इसके बाद BSF ने भी पाकिस्तानी सेना को इसका जवाब दिया है। हालाँकि अब तक, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
दरअसल, पाकिस्तान की तरफ से करीब डेढ़ साल बाद एक बार फिर से युद्धविराम का उल्लंघन कर एक बार फायरिंग की गई है। हालांकि, इस बार भी भारतीय जवानों ने इसका मुंहतोड़ और माकूल जवाब दिया है। पता हो कि, युद्धविराम समझौते के बाद से बंद थी गोलाबारी। लेकिन आज अरनिया सेक्टर में भारत पाकिस्तान सीमा पर पाक रेंजर्स फिर फायरिंग कि है। इसके जवाब में आज BSF ने भी जवाबी कारवाई करते हुए जबरदस्त गोलीबारी कि है।
| नई दिल्ली. जम्मू से आ रही बड़ी खबर के अनुसार, यहां के अरनिया सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आज यानी मंगलवार को पाकिस्तानी रेंजर्स ने BSF के जवानों पर फायरिंग की है। अरनिया सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजर्स ने BSF के पैट्रोलिंग दस्ते पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। BSF जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। BSF ने जानकारी दी है कि जवानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। खबरों के अनुसार, यह फायरिंग तब की गई जब भारतीय जवान बाढ़ लगाने का काम कर रहे थे। इसके बाद BSF ने भी पाकिस्तानी सेना को इसका जवाब दिया है। हालाँकि अब तक, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान की तरफ से करीब डेढ़ साल बाद एक बार फिर से युद्धविराम का उल्लंघन कर एक बार फायरिंग की गई है। हालांकि, इस बार भी भारतीय जवानों ने इसका मुंहतोड़ और माकूल जवाब दिया है। पता हो कि, युद्धविराम समझौते के बाद से बंद थी गोलाबारी। लेकिन आज अरनिया सेक्टर में भारत पाकिस्तान सीमा पर पाक रेंजर्स फिर फायरिंग कि है। इसके जवाब में आज BSF ने भी जवाबी कारवाई करते हुए जबरदस्त गोलीबारी कि है। |
द्वितीय महायुद्ध शुरू हुआ, कई हिन्दुस्तानियों ने ब्रिटेन और फ्रांस का साथ दिया क्योंकि जर्मनी और इटली की "नस्ल श्रेष्ठता" के सिद्धांत से वह असहमत थे. फैज़ 1942 में सेना में भर्ती हो गये. वह चार सालों तक सेना में रहे. पकिस्तान के बनने के बाद फैज़ और एलिस 1947 में पकिस्तान आ गये. वहां वो पकिस्तान टाइम्स के सम्पादक बने.
फैज़ अहमद फैज़ सम्पादक, पकिस्तान टाइम्स
लेकिन जब फैज़ ने देखा कि पकिस्तान को लेकर उनके सपने सच नहीं हो रहे थे तो उन्होंने अपने लेखों में विरोध प्रकट किया. इस कारण रावलपिंडी कांस्पीरेसी केस में उन्हें 1951 में कैद कर लिया.
वह किस्सा जो कभी था ही नहीं वही उनको नागवार गुज़रा. | द्वितीय महायुद्ध शुरू हुआ, कई हिन्दुस्तानियों ने ब्रिटेन और फ्रांस का साथ दिया क्योंकि जर्मनी और इटली की "नस्ल श्रेष्ठता" के सिद्धांत से वह असहमत थे. फैज़ एक हज़ार नौ सौ बयालीस में सेना में भर्ती हो गये. वह चार सालों तक सेना में रहे. पकिस्तान के बनने के बाद फैज़ और एलिस एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में पकिस्तान आ गये. वहां वो पकिस्तान टाइम्स के सम्पादक बने. फैज़ अहमद फैज़ सम्पादक, पकिस्तान टाइम्स लेकिन जब फैज़ ने देखा कि पकिस्तान को लेकर उनके सपने सच नहीं हो रहे थे तो उन्होंने अपने लेखों में विरोध प्रकट किया. इस कारण रावलपिंडी कांस्पीरेसी केस में उन्हें एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में कैद कर लिया. वह किस्सा जो कभी था ही नहीं वही उनको नागवार गुज़रा. |
प्रतीक चौहान. रायपुर. वीआईपी रोड ग्राम टेमरी के पटवारी हल्का नंबर 115/54 में स्थित भूमि खसरा नंबर 40 की शासकीय जमीन में पेट्रोल पंप बनने की शिकायत कलेक्टर रायपुर से की गई है. शिकायतकर्ता राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष देव सोनी ने ये शिकायत की है.
उन्होंने अपनी इस शिकायत में दावा कि है कि प्रकाश लुलिया शासकीय भूमि पर ये पेट्रोल पंप निर्माण कर रहे है. उन्होंने अपनी इस शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भी उपलब्ध कराएं है और जांच की मांग कलेक्टर से की है. लेकिन अब तक इस मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है.
प्रकाश लुलिया ने बताया कि जमीन को लेकर शिकायतकर्ता ने कई बार शिकायत की है, जिसकी जांच हो चुकी है और मुझे एनओसी मिलने के बाद ही काम कर रहा हूं. शिकायतकर्ता की बार बार शिकायत से मैं मानसिक रूप से परेशान हूं.
| प्रतीक चौहान. रायपुर. वीआईपी रोड ग्राम टेमरी के पटवारी हल्का नंबर एक सौ पंद्रह/चौवन में स्थित भूमि खसरा नंबर चालीस की शासकीय जमीन में पेट्रोल पंप बनने की शिकायत कलेक्टर रायपुर से की गई है. शिकायतकर्ता राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष देव सोनी ने ये शिकायत की है. उन्होंने अपनी इस शिकायत में दावा कि है कि प्रकाश लुलिया शासकीय भूमि पर ये पेट्रोल पंप निर्माण कर रहे है. उन्होंने अपनी इस शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भी उपलब्ध कराएं है और जांच की मांग कलेक्टर से की है. लेकिन अब तक इस मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है. प्रकाश लुलिया ने बताया कि जमीन को लेकर शिकायतकर्ता ने कई बार शिकायत की है, जिसकी जांच हो चुकी है और मुझे एनओसी मिलने के बाद ही काम कर रहा हूं. शिकायतकर्ता की बार बार शिकायत से मैं मानसिक रूप से परेशान हूं. |
औरंगाबाद : ब्राह्मण समाज (Brahmin Samaj) की ओर से शहर में राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन (National Astrology Vastu Mahadhiveshan) का आयोजन किया गया था। अधिवेशन में बड़ी संख्या में देश भर से वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) और हस्तरेषा शास्त्र (Palmistry) के ज्योतिषियों ने हिस्सा लिया। ज्योतिष अधिवेशन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi), यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath), दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) के अलावा महाराष्ट्र की राजनीति (Politics of Maharashtra) पर भविष्यवाणी (Prediction) की गई। जिसमें विशेषकर, राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Chief Minister Eknath Shinde) से लेकर डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस (Deputy CM Devendra Fadnavis) पर भी राजनीतिक भविष्यवाणी की गई।
ज्योतिषियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भविष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्हें राजयोग है। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव आतंक और राष्ट्रवाद विषय पर होंगे। प्रधानमंत्री मोदी सन 2028 तक प्रधानमंत्री रहने की भविष्यवाणी करते हुए साफ किया गया कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 418 सीटें मिलेगी। 2028 में मोदी प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी अन्य को सौपेंगे। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी भविष्यवाणी राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन में करते हुए उन्हें भी राजयोग होने की बात की गई। परंतु, देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्हें पार्टी के अंतर्गत विवाद का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा। क्योंकि, उनके कर्म स्थान का गुरु और षष्टम स्थान का रवी मंगल यह ग्रह उन्हें उच्च पद से दूर रख रहा है।
राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन में महाराष्ट्र की राजनीति पर भी भविष्यवाणी की गई। जिसमें प्रमुख रुप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कुंडली पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि उनका वर्तमान काल भाग्योदय का है। उन्हें भी राजयोग है। परंतु, वे आगे सीएम बने रहेंगे या नहीं यह तो आगे आने वाला समय बतायेंगा। राज्य के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर की गई भविष्यवाणी में उनके कुंडली के अनुसार सहकारियों के साथ विवाद होंगे। जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा होगी। उद्धव ठाकरे के जीवन में जनवरी 2023 से बेहतर दिन आएंगे। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जीवन पर की गई भविष्यावाणी में बताया गया कि पार्टी के अंतर्गत उन्हें भरपूर विरोध होगा। कुंडली के अष्टमस्थान के गुरु महाराज के भ्रमण चालू होने के कारण उन्हें पार्टी अंतर्गत और अन्य स्थान से भरपूर विरोध होगा। फडणवीस को अपने राजनीतिक कैरियर में कई संकटों का सामना कर वे बुधादित्य नाम के राज योग से फिर एक बार उच्च पद पर पहुंचेंगे। राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भी राजनीतिक भविष्यवाणी की गई। जिसमें वे दोबारा सीएम होंगे। इसके अलावा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के जीवन पर भी भविष्यवाणी की गई। जिसमें बताया गया कि उनके कुंडली में राजयोग है। इसलिए वे 2026 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहेंगे।
| औरंगाबाद : ब्राह्मण समाज की ओर से शहर में राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन का आयोजन किया गया था। अधिवेशन में बड़ी संख्या में देश भर से वास्तु शास्त्र और हस्तरेषा शास्त्र के ज्योतिषियों ने हिस्सा लिया। ज्योतिष अधिवेशन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ , दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के अलावा महाराष्ट्र की राजनीति पर भविष्यवाणी की गई। जिसमें विशेषकर, राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से लेकर डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस पर भी राजनीतिक भविष्यवाणी की गई। ज्योतिषियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भविष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्हें राजयोग है। दो हज़ार चौबीस में होने वाले लोकसभा चुनाव आतंक और राष्ट्रवाद विषय पर होंगे। प्रधानमंत्री मोदी सन दो हज़ार अट्ठाईस तक प्रधानमंत्री रहने की भविष्यवाणी करते हुए साफ किया गया कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को चार सौ अट्ठारह सीटें मिलेगी। दो हज़ार अट्ठाईस में मोदी प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी अन्य को सौपेंगे। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी भविष्यवाणी राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन में करते हुए उन्हें भी राजयोग होने की बात की गई। परंतु, देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्हें पार्टी के अंतर्गत विवाद का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा। क्योंकि, उनके कर्म स्थान का गुरु और षष्टम स्थान का रवी मंगल यह ग्रह उन्हें उच्च पद से दूर रख रहा है। राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन में महाराष्ट्र की राजनीति पर भी भविष्यवाणी की गई। जिसमें प्रमुख रुप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कुंडली पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि उनका वर्तमान काल भाग्योदय का है। उन्हें भी राजयोग है। परंतु, वे आगे सीएम बने रहेंगे या नहीं यह तो आगे आने वाला समय बतायेंगा। राज्य के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर की गई भविष्यवाणी में उनके कुंडली के अनुसार सहकारियों के साथ विवाद होंगे। जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा होगी। उद्धव ठाकरे के जीवन में जनवरी दो हज़ार तेईस से बेहतर दिन आएंगे। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जीवन पर की गई भविष्यावाणी में बताया गया कि पार्टी के अंतर्गत उन्हें भरपूर विरोध होगा। कुंडली के अष्टमस्थान के गुरु महाराज के भ्रमण चालू होने के कारण उन्हें पार्टी अंतर्गत और अन्य स्थान से भरपूर विरोध होगा। फडणवीस को अपने राजनीतिक कैरियर में कई संकटों का सामना कर वे बुधादित्य नाम के राज योग से फिर एक बार उच्च पद पर पहुंचेंगे। राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु महाधिवेशन में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भी राजनीतिक भविष्यवाणी की गई। जिसमें वे दोबारा सीएम होंगे। इसके अलावा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के जीवन पर भी भविष्यवाणी की गई। जिसमें बताया गया कि उनके कुंडली में राजयोग है। इसलिए वे दो हज़ार छब्बीस तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहेंगे। |
जुखाला - जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जुखाला में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। संस्थान के कार्यकारी प्रधानाचार्य रूप लाल ने प्रवक्ताओं, एसएसए/आरएमएसए के कर्मचारियों तथा जेबीटी प्रशिक्षुओं को शपथ दिलाई गई। इस मौके पर राष्ट्रीय मतदाता दिवस के थीम पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें व्यास सदन से बंटी, चिनाव सदन से हितेश, रावी सदन से गुडो देवी व मनीष धीमान तथा सतलुज सदन से हिमानी शर्मा ने भाग लिया। कार्यकारी प्रधानाचार्य रूप लाल ने प्रशिक्षुओं तथा डाइट के प्रवक्ताओं व कर्मचारियों को संबोधित करते हुए वोट के महत्व पर अपने विचार रखे तथा निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रेरित किया। संस्थान के मीडिया समन्वयक ने बताया कि भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान व्यास सदन के बंटी, रावी सदन के मनीष धीमान ने द्वितीय तथा चिनाव व रावी सदन के प्रशिक्षुओं हितेश तथा गुडो देवी ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान हासिल किया। संस्थान के वरिष्ठ प्रवक्ता कांसी राम शर्मा, देश राज तथा संजय सामा ने जज की भूमिका निभाई। इस अवसर पर इसी थीम पर पेंटिग प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें जिसमें सतलुज सदन के प्रशिक्षु मनप्रीत ने प्रथम, नीलम तथा ममता रावी व सतलुज सदन के प्रशिक्षुओं ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान तथा व्यास सदन के प्रशिक्षु गुरुदेव ने तृतीय स्थान हासिल किया।
| जुखाला - जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जुखाला में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। संस्थान के कार्यकारी प्रधानाचार्य रूप लाल ने प्रवक्ताओं, एसएसए/आरएमएसए के कर्मचारियों तथा जेबीटी प्रशिक्षुओं को शपथ दिलाई गई। इस मौके पर राष्ट्रीय मतदाता दिवस के थीम पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें व्यास सदन से बंटी, चिनाव सदन से हितेश, रावी सदन से गुडो देवी व मनीष धीमान तथा सतलुज सदन से हिमानी शर्मा ने भाग लिया। कार्यकारी प्रधानाचार्य रूप लाल ने प्रशिक्षुओं तथा डाइट के प्रवक्ताओं व कर्मचारियों को संबोधित करते हुए वोट के महत्व पर अपने विचार रखे तथा निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रेरित किया। संस्थान के मीडिया समन्वयक ने बताया कि भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान व्यास सदन के बंटी, रावी सदन के मनीष धीमान ने द्वितीय तथा चिनाव व रावी सदन के प्रशिक्षुओं हितेश तथा गुडो देवी ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान हासिल किया। संस्थान के वरिष्ठ प्रवक्ता कांसी राम शर्मा, देश राज तथा संजय सामा ने जज की भूमिका निभाई। इस अवसर पर इसी थीम पर पेंटिग प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें जिसमें सतलुज सदन के प्रशिक्षु मनप्रीत ने प्रथम, नीलम तथा ममता रावी व सतलुज सदन के प्रशिक्षुओं ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान तथा व्यास सदन के प्रशिक्षु गुरुदेव ने तृतीय स्थान हासिल किया। |
यह सर्वविदित है कि विंडोज के लिए आवेदनविभाजन या हार्ड डिस्क को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से, उस विभाजन के साथ काम करने की अनुमति न दें जिस पर ऑपरेटिंग सिस्टम स्थापित है। अन्य मामलों में, Recuva, Power Data Recovery, Undelete 360, RecoveryDesk इत्यादि जैसे प्रोग्राम हैं, जो न केवल हार्ड ड्राइव पर, बल्कि USB ड्राइव, SD कार्ड सहित रिमूवेबल मीडिया पर भी ये ऑपरेशन आसानी से कर सकते हैं। इतने पर। यदि आपको हार्ड डिस्क विभाजन को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसमें विंडोज शामिल है? सबसे सुविधाजनक तरीका क्या होगा, खासकर उस स्थिति में जब सिस्टम बूट नहीं करता है?
उबंटू लाइव डिस्क का उपयोग करने की अनुमति देता हैउपयोगकर्ता मानक इंस्टॉलेशन विधि का पालन किए बिना एक अलग वातावरण में ऑपरेटिंग सिस्टम चलाते हैं। इस प्रकार, आप इसका उपयोग हार्ड डिस्क को कॉन्फ़िगर करने और डेटा रिकवरी ऑपरेशन चलाने के लिए कर सकते हैं। इसके खुले भंडार में उबंटू में दो व्यापक रूप से प्रयुक्त उपकरण शामिल हैं, जिनमें से आपको टेस्टडिस्क की आवश्यकता होगी।
विभाजन को ठीक करने के लिएइस उपकरण का उपयोग करके डिस्क, अपने कंप्यूटर को BIOS मेनू में "ESC", "F2", "F10", "F9" या किसी अन्य कुंजी को दबाकर पुनः आरंभ करें और मेनू में पहले बूट विकल्प के रूप में "USB" या "CD" सेट करें। जैसे ही बूट प्राथमिकता बदल जाती है, सेटिंग्स को सहेजें, BIOS से बाहर निकलें, और कंप्यूटर को पुनरारंभ करें। उसके बाद, Ubuntu लाइव चलाएं।
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में शामिल नहीं हैTestDisk डिफ़ॉल्ट है, हालांकि आप इस एप्लिकेशन को जल्दी से डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकते हैं। आरंभ करने के लिए, सिस्टम श्रेणी में उपलब्ध प्रशासन मेनू से सिनैप्टिक पैकेज मैनेजर खोलें। सेटिंग्स मेनू से, रिपॉजिटरी का चयन करें। एक डायलॉग बॉक्स खुलता है जो आपको मुफ्त एप्लिकेशन डाउनलोड करने के विकल्प को सक्षम करने की अनुमति देता है। उबंटू सॉफ्टवेयर टैब पर, ओपन सोर्स सपोर्ट को सक्षम करें और क्लोज बटन पर क्लिक करें। फिर "अपडेट" का चयन करें, यह आपकी पसंद के सॉफ़्टवेयर पैकेज को डाउनलोड करना शुरू कर देगा, जो आपको हार्ड डिस्क विभाजन को और पुनर्स्थापित करने की अनुमति देगा।
यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, त्वरित खोज बार में "टेस्टडिस्क" टाइप करें, और यह पता लगाने के बाद, उस पर राइट-क्लिक करें और "मार्क फॉर इंस्टॉलेशन" चुनें।
अब पैनल पर "लागू करें" बटन दबाएंTestDisk डाउनलोड करने के लिए उपकरण। एप्लिकेशन इंस्टॉल होने के बाद, Synaptic पैकेज प्रबंधक को बंद करें। चूंकि टेस्टडिस्क एक कंसोल सेवा है, इसलिए आपको मानक मेनू (एप्लिकेशन में उपलब्ध) से टर्मिनल खोलने की आवश्यकता है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, यह एप्लिकेशन आपको न केवल हार्ड डिस्क विभाजन की बहाली करने की अनुमति देता है, बल्कि हटाने योग्य मीडिया से डेटा भी हटा देता है।
जब आप आवेदन शुरू करते हैं तो इसके बारे में एक प्रश्न पूछेंगेक्या आपको पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के पूरे पाठ्यक्रम को बचाने के लिए फ़ाइलों का एक लॉग बनाने की आवश्यकता है। डिफ़ॉल्ट रूप से इस सुविधा का उपयोग करने के लिए, बस अगले चरण पर जाने के लिए Enter कुंजी दबाएं।
कार्यक्रम आंतरिक हार्ड डिस्क की खोज करेगा।और सभी जुड़े हटाने योग्य मीडिया। स्कैन पूरा होने पर, उस ऑब्जेक्ट का चयन करें जिस पर डेटा और खोए हुए विभाजन को पुनर्प्राप्त करना है।
अब आपको डेटा प्रकार निर्दिष्ट करने की आवश्यकता है,जिसमें इंटेल, EFI GPT, Xbox, Sun और Mac शामिल हैं। आपके मामले में, यह इंटेल है, क्योंकि आप हार्ड डिस्क विभाजन को पुनर्स्थापित करने का इरादा रखते हैं। मेनू संरचना विश्लेषण से चुनें और खोए हुए डेटा की खोज करें।
एक त्वरित या गहरी खोज के बाद टेस्टडिस्कआवश्यक अनुभाग खोजने में सक्षम होगा और उपयोगकर्ता को इसकी विशेषताओं को निर्धारित करने के लिए संकेत देगा। आप पी बटन को दबाकर इसे बेसिक, L को लॉजिकल, E को एडवांस मोड लोड करने के लिए और D को सेक्शन हटाने या जोड़ने के लिए दबा सकते हैं। अब आपको प्रक्रिया शुरू करने के लिए "एन्टर" बटन दबाना होगा। इसके पूरा होने के बाद, आपको सिस्टम को पुनरारंभ करने के लिए संकेत दिया जाएगा ताकि हार्ड डिस्क विभाजन की वसूली पूरी हो जाए।
यदि आप चुनिंदा रूप से देखना चाहते हैं औरहटाए गए फ़ाइलों को पुनर्प्राप्त करें, उन्हें देखने के लिए डाउनलोड करने के लिए "पी" दर्ज करें। हटाए गए डेटा को लाल रंग में प्रदर्शित किया जाता है, जबकि सफेद तत्व वर्तमान डेटा दिखाते हैं। कार्यक्रम रूट डायरेक्टरी में फाइल और फोल्डर प्रदर्शित करता है, लेकिन आप इसे "R" बटन दबाकर बदल सकते हैं और फिर मेनू से चुन सकते हैं।
| यह सर्वविदित है कि विंडोज के लिए आवेदनविभाजन या हार्ड डिस्क को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से, उस विभाजन के साथ काम करने की अनुमति न दें जिस पर ऑपरेटिंग सिस्टम स्थापित है। अन्य मामलों में, Recuva, Power Data Recovery, Undelete तीन सौ साठ, RecoveryDesk इत्यादि जैसे प्रोग्राम हैं, जो न केवल हार्ड ड्राइव पर, बल्कि USB ड्राइव, SD कार्ड सहित रिमूवेबल मीडिया पर भी ये ऑपरेशन आसानी से कर सकते हैं। इतने पर। यदि आपको हार्ड डिस्क विभाजन को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसमें विंडोज शामिल है? सबसे सुविधाजनक तरीका क्या होगा, खासकर उस स्थिति में जब सिस्टम बूट नहीं करता है? उबंटू लाइव डिस्क का उपयोग करने की अनुमति देता हैउपयोगकर्ता मानक इंस्टॉलेशन विधि का पालन किए बिना एक अलग वातावरण में ऑपरेटिंग सिस्टम चलाते हैं। इस प्रकार, आप इसका उपयोग हार्ड डिस्क को कॉन्फ़िगर करने और डेटा रिकवरी ऑपरेशन चलाने के लिए कर सकते हैं। इसके खुले भंडार में उबंटू में दो व्यापक रूप से प्रयुक्त उपकरण शामिल हैं, जिनमें से आपको टेस्टडिस्क की आवश्यकता होगी। विभाजन को ठीक करने के लिएइस उपकरण का उपयोग करके डिस्क, अपने कंप्यूटर को BIOS मेनू में "ESC", "Fदो", "Fदस", "Fनौ" या किसी अन्य कुंजी को दबाकर पुनः आरंभ करें और मेनू में पहले बूट विकल्प के रूप में "USB" या "CD" सेट करें। जैसे ही बूट प्राथमिकता बदल जाती है, सेटिंग्स को सहेजें, BIOS से बाहर निकलें, और कंप्यूटर को पुनरारंभ करें। उसके बाद, Ubuntu लाइव चलाएं। इस ऑपरेटिंग सिस्टम में शामिल नहीं हैTestDisk डिफ़ॉल्ट है, हालांकि आप इस एप्लिकेशन को जल्दी से डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकते हैं। आरंभ करने के लिए, सिस्टम श्रेणी में उपलब्ध प्रशासन मेनू से सिनैप्टिक पैकेज मैनेजर खोलें। सेटिंग्स मेनू से, रिपॉजिटरी का चयन करें। एक डायलॉग बॉक्स खुलता है जो आपको मुफ्त एप्लिकेशन डाउनलोड करने के विकल्प को सक्षम करने की अनुमति देता है। उबंटू सॉफ्टवेयर टैब पर, ओपन सोर्स सपोर्ट को सक्षम करें और क्लोज बटन पर क्लिक करें। फिर "अपडेट" का चयन करें, यह आपकी पसंद के सॉफ़्टवेयर पैकेज को डाउनलोड करना शुरू कर देगा, जो आपको हार्ड डिस्क विभाजन को और पुनर्स्थापित करने की अनुमति देगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, त्वरित खोज बार में "टेस्टडिस्क" टाइप करें, और यह पता लगाने के बाद, उस पर राइट-क्लिक करें और "मार्क फॉर इंस्टॉलेशन" चुनें। अब पैनल पर "लागू करें" बटन दबाएंTestDisk डाउनलोड करने के लिए उपकरण। एप्लिकेशन इंस्टॉल होने के बाद, Synaptic पैकेज प्रबंधक को बंद करें। चूंकि टेस्टडिस्क एक कंसोल सेवा है, इसलिए आपको मानक मेनू से टर्मिनल खोलने की आवश्यकता है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, यह एप्लिकेशन आपको न केवल हार्ड डिस्क विभाजन की बहाली करने की अनुमति देता है, बल्कि हटाने योग्य मीडिया से डेटा भी हटा देता है। जब आप आवेदन शुरू करते हैं तो इसके बारे में एक प्रश्न पूछेंगेक्या आपको पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के पूरे पाठ्यक्रम को बचाने के लिए फ़ाइलों का एक लॉग बनाने की आवश्यकता है। डिफ़ॉल्ट रूप से इस सुविधा का उपयोग करने के लिए, बस अगले चरण पर जाने के लिए Enter कुंजी दबाएं। कार्यक्रम आंतरिक हार्ड डिस्क की खोज करेगा।और सभी जुड़े हटाने योग्य मीडिया। स्कैन पूरा होने पर, उस ऑब्जेक्ट का चयन करें जिस पर डेटा और खोए हुए विभाजन को पुनर्प्राप्त करना है। अब आपको डेटा प्रकार निर्दिष्ट करने की आवश्यकता है,जिसमें इंटेल, EFI GPT, Xbox, Sun और Mac शामिल हैं। आपके मामले में, यह इंटेल है, क्योंकि आप हार्ड डिस्क विभाजन को पुनर्स्थापित करने का इरादा रखते हैं। मेनू संरचना विश्लेषण से चुनें और खोए हुए डेटा की खोज करें। एक त्वरित या गहरी खोज के बाद टेस्टडिस्कआवश्यक अनुभाग खोजने में सक्षम होगा और उपयोगकर्ता को इसकी विशेषताओं को निर्धारित करने के लिए संकेत देगा। आप पी बटन को दबाकर इसे बेसिक, L को लॉजिकल, E को एडवांस मोड लोड करने के लिए और D को सेक्शन हटाने या जोड़ने के लिए दबा सकते हैं। अब आपको प्रक्रिया शुरू करने के लिए "एन्टर" बटन दबाना होगा। इसके पूरा होने के बाद, आपको सिस्टम को पुनरारंभ करने के लिए संकेत दिया जाएगा ताकि हार्ड डिस्क विभाजन की वसूली पूरी हो जाए। यदि आप चुनिंदा रूप से देखना चाहते हैं औरहटाए गए फ़ाइलों को पुनर्प्राप्त करें, उन्हें देखने के लिए डाउनलोड करने के लिए "पी" दर्ज करें। हटाए गए डेटा को लाल रंग में प्रदर्शित किया जाता है, जबकि सफेद तत्व वर्तमान डेटा दिखाते हैं। कार्यक्रम रूट डायरेक्टरी में फाइल और फोल्डर प्रदर्शित करता है, लेकिन आप इसे "R" बटन दबाकर बदल सकते हैं और फिर मेनू से चुन सकते हैं। |
Team India के सबसे सफल टेस्ट कप्तान Virat Kohli ने हाल ही में कप्तानी से इस्तीफ़ा दे कर सभी को चौंका दिया था. इसके बाद से सभी के मन में एक ही सवाल है कि भारतीय टेस्ट टीम का नया कप्तान कौन होगा. इस लिस्ट में लिमिटेड ओवर्स कप्तान रोहित शर्मा और केएल राहुल का नाम भी शामिल है. हालांकि इसी बीच एक ऐसा खिलाड़ी भी है, जिसका कप्तान बनना लगभग तय माना जा रहा है.
इस समय टेस्ट कप्तानी मिलने की रेस में जो खिलाड़ी सबसे आगे माना जा रहा है, वो कोई और नहीं बल्कि टीम के स्टार तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ही हैं. दरअसल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में जसप्रीत बुमराह के आक्रामक तेवर देखने को मिले थे और उनका यह अंदाज़ सभी फेंस को काफी पसंद आया था. इसके अलावा पिछले कुछ समय से बुमराह भारतीय टीम के एक प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं और इसी वजह से इस पद के लिए उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा है.
भारतीय वनडे और टी20 टीम के कप्तान रोहित शर्मा अभी 34 साल के हैं, ऐसे में बीसीसीआई उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहेगी. ऐसे में 28 साल के तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह को यह ज़िम्मेदारी मिल सकती है. विराट कोहली को 27 साल की उम्र में टेस्ट की कप्तानी मिली थी, जबकि वनडे और टी20 की कमान उन्हें 29 साल की उम्र में मिली थी. ऐसे में उन्हें कप्तानी करने का काफी समय मिला था.
ऐसे में BCCI बुमराह को नया कप्तान बनाने के बारे में सोच सकती है, क्योंकि उनके पास भी इस पद को संभालने के लिए काफी समय है. इसके अलावा बुमराह लगातार सभी फॉर्मेट का क्रिकेट खेल रहे हैं और उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है.
| Team India के सबसे सफल टेस्ट कप्तान Virat Kohli ने हाल ही में कप्तानी से इस्तीफ़ा दे कर सभी को चौंका दिया था. इसके बाद से सभी के मन में एक ही सवाल है कि भारतीय टेस्ट टीम का नया कप्तान कौन होगा. इस लिस्ट में लिमिटेड ओवर्स कप्तान रोहित शर्मा और केएल राहुल का नाम भी शामिल है. हालांकि इसी बीच एक ऐसा खिलाड़ी भी है, जिसका कप्तान बनना लगभग तय माना जा रहा है. इस समय टेस्ट कप्तानी मिलने की रेस में जो खिलाड़ी सबसे आगे माना जा रहा है, वो कोई और नहीं बल्कि टीम के स्टार तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ही हैं. दरअसल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में जसप्रीत बुमराह के आक्रामक तेवर देखने को मिले थे और उनका यह अंदाज़ सभी फेंस को काफी पसंद आया था. इसके अलावा पिछले कुछ समय से बुमराह भारतीय टीम के एक प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं और इसी वजह से इस पद के लिए उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा है. भारतीय वनडे और टीबीस टीम के कप्तान रोहित शर्मा अभी चौंतीस साल के हैं, ऐसे में बीसीसीआई उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहेगी. ऐसे में अट्ठाईस साल के तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह को यह ज़िम्मेदारी मिल सकती है. विराट कोहली को सत्ताईस साल की उम्र में टेस्ट की कप्तानी मिली थी, जबकि वनडे और टीबीस की कमान उन्हें उनतीस साल की उम्र में मिली थी. ऐसे में उन्हें कप्तानी करने का काफी समय मिला था. ऐसे में BCCI बुमराह को नया कप्तान बनाने के बारे में सोच सकती है, क्योंकि उनके पास भी इस पद को संभालने के लिए काफी समय है. इसके अलावा बुमराह लगातार सभी फॉर्मेट का क्रिकेट खेल रहे हैं और उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है. |
वेंकटेश द्विवेदी, सतना। सतना जिले के उचेहरा रेलवे स्टेशन में दो आरोपियों को पुलिस ने गांजा तस्करी करते हुए पकड़ा है। यह कार्रवाई सतना आरपीएफ और जबलपुर रेल्वे क्राइम ब्रांच की टीम ने की है। गिरफ्तार आरोपियों में एक आरोपी बजरंग दल का नेता बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
दरअसल, रविवार की शाम आरपीएफ सतना और रेलवे क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने पन्ना जिले के देवेंद्र नगर देवरी गढ़ी में रहने वाले सुंदरम तिवारी और उत्तर प्रदेश चंदौली वैदेही नगर के रहने वाले राज चौरसिया को उचेहरा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी सारनाथ एक्सप्रेस से गांजे की तस्करी करते पकड़े गए हैं। उनके पास से आरपीएफ ने 21 किलो गांजा बरामद किया है। बड़ी बात यह है कि कुछ महीने पहले ही बजरंग दल संगठन ने आरोपी सुंदरम तिवारी को पन्ना जिले के सह संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसकी आड़ में वह गांजे की तस्करी कर रहा था। जो अब खासा खाकी की गिरफ्त में है।
रेलवे पुलिस ने बताया कि सारनाथ एक्सप्रेस से छत्तीसगढ़ से गांजे की खेप लेकर जा रहे पांच आरोपी यूपी ले जा रहे थे। दो आरोपिओं को उचेहरा स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि तीन आरोपी भागने में कामयाब रहे। आरोपी दो ट्राली बैग और दो पिट्ठू बैग में गांजा रखकर जा रहे थे।
पकड़े में आए आरोपी सुंदरम तिवारी पन्ना जिले के देवरी गढ़ी का रहने वाला है, जिसको हाल ही में बजरंग दल के सह संयोजक पद पर नियुक्त किया गया था। हालांकि बजरंग दल ने इस बात से नकार रहा है। वहीं दूसरा अरोपी राज चौरसिया उत्तर प्रदेश वैदेही नगर चंदौली का रहने वाला है। दोनों के पास से कुल 21 किलो 9 सौ ग्राम गाँजा बरामद हुआ है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
| वेंकटेश द्विवेदी, सतना। सतना जिले के उचेहरा रेलवे स्टेशन में दो आरोपियों को पुलिस ने गांजा तस्करी करते हुए पकड़ा है। यह कार्रवाई सतना आरपीएफ और जबलपुर रेल्वे क्राइम ब्रांच की टीम ने की है। गिरफ्तार आरोपियों में एक आरोपी बजरंग दल का नेता बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। दरअसल, रविवार की शाम आरपीएफ सतना और रेलवे क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने पन्ना जिले के देवेंद्र नगर देवरी गढ़ी में रहने वाले सुंदरम तिवारी और उत्तर प्रदेश चंदौली वैदेही नगर के रहने वाले राज चौरसिया को उचेहरा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी सारनाथ एक्सप्रेस से गांजे की तस्करी करते पकड़े गए हैं। उनके पास से आरपीएफ ने इक्कीस किलो गांजा बरामद किया है। बड़ी बात यह है कि कुछ महीने पहले ही बजरंग दल संगठन ने आरोपी सुंदरम तिवारी को पन्ना जिले के सह संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसकी आड़ में वह गांजे की तस्करी कर रहा था। जो अब खासा खाकी की गिरफ्त में है। रेलवे पुलिस ने बताया कि सारनाथ एक्सप्रेस से छत्तीसगढ़ से गांजे की खेप लेकर जा रहे पांच आरोपी यूपी ले जा रहे थे। दो आरोपिओं को उचेहरा स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि तीन आरोपी भागने में कामयाब रहे। आरोपी दो ट्राली बैग और दो पिट्ठू बैग में गांजा रखकर जा रहे थे। पकड़े में आए आरोपी सुंदरम तिवारी पन्ना जिले के देवरी गढ़ी का रहने वाला है, जिसको हाल ही में बजरंग दल के सह संयोजक पद पर नियुक्त किया गया था। हालांकि बजरंग दल ने इस बात से नकार रहा है। वहीं दूसरा अरोपी राज चौरसिया उत्तर प्रदेश वैदेही नगर चंदौली का रहने वाला है। दोनों के पास से कुल इक्कीस किलो नौ सौ ग्राम गाँजा बरामद हुआ है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। |
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IND vs WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरे टेस्ट का पहला दिन काफी रोमांचक रहा। इस मैच में विराट कोहली ने 87 रन बनाए। आपको बता दें कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा टेस्ट मैच विराट कोहली के लिए खास है। टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज अपना 500वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेल रहे हैं। इस मामले में वो सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और एमएस धोनी के बाद चौथे भारतीय खिलाड़ी और दुनिया के 10वें प्लेयर बन गए हैं।
पोर्ट ऑफ स्पेन में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है। कैरिबियाई कप्तान क्रेग ब्रेथवेट ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन रोहित-यशस्वी की जोड़ी ने उनके फैसले को गलत साबित कर दिया। दोनों ने लगातार दूसरी बार 100 रनों से अधिक की पार्टनरशिप की। इस दौरान रोहित शर्मा ने 143 गेंदों में 80 रन बनाए, तो वहीं यशस्वी जायसवाल ने 74 गेंदों में 57 रन की पारी खेली। हालांकि, शुभमन गिल और अजिंक्य रहाणे 8 और 10 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद विराट कोहली और रविंद्र जडेजा क्रीज पर डटे हुए हैं। विराट कोहली ने 161 गेंदों में 87 रन और जडेजा ने 84 गेंदों में 36 रन बनाए हैं।
इस मैच के दौरान रोहित शर्मा ने तीन बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। टीम इंडिया के कप्तान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में 2000 रन पूरे करने वाले पहले भारतीय बने। इसके अलावा उन्होंने बतौर टेस्ट ओपनर अपने दो हजार रन पूरे किए। वहीं हिटमैन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की सूची में पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी को पीछे छोड़ दिया। रोहित अब इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत के लिए रन बनाने के मामले में 5वें नंबर पर आ गए हैं।
| Quick links: IND vs WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरे टेस्ट का पहला दिन काफी रोमांचक रहा। इस मैच में विराट कोहली ने सत्तासी रन बनाए। आपको बता दें कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा टेस्ट मैच विराट कोहली के लिए खास है। टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज अपना पाँच सौवां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेल रहे हैं। इस मामले में वो सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और एमएस धोनी के बाद चौथे भारतीय खिलाड़ी और दुनिया के दसवें प्लेयर बन गए हैं। पोर्ट ऑफ स्पेन में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है। कैरिबियाई कप्तान क्रेग ब्रेथवेट ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन रोहित-यशस्वी की जोड़ी ने उनके फैसले को गलत साबित कर दिया। दोनों ने लगातार दूसरी बार एक सौ रनों से अधिक की पार्टनरशिप की। इस दौरान रोहित शर्मा ने एक सौ तैंतालीस गेंदों में अस्सी रन बनाए, तो वहीं यशस्वी जायसवाल ने चौहत्तर गेंदों में सत्तावन रन की पारी खेली। हालांकि, शुभमन गिल और अजिंक्य रहाणे आठ और दस रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद विराट कोहली और रविंद्र जडेजा क्रीज पर डटे हुए हैं। विराट कोहली ने एक सौ इकसठ गेंदों में सत्तासी रन और जडेजा ने चौरासी गेंदों में छत्तीस रन बनाए हैं। इस मैच के दौरान रोहित शर्मा ने तीन बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। टीम इंडिया के कप्तान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में दो हज़ार रन पूरे करने वाले पहले भारतीय बने। इसके अलावा उन्होंने बतौर टेस्ट ओपनर अपने दो हजार रन पूरे किए। वहीं हिटमैन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की सूची में पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी को पीछे छोड़ दिया। रोहित अब इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत के लिए रन बनाने के मामले में पाँचवें नंबर पर आ गए हैं। |
खाना पकाना भी अपने आप में एक कला है। आप गुनगुनाकर तो खाना पकाती हैं, लेकिन कभी संगीत की धुन के साथ भी पकाकर देखें। अजीब-सा लग रहा होगा न आपको कि रसोईघर में भला संगीत का क्या काम।
आजकल के रूटीन और हलचल वाले जीवन में कामकाजी महिलाएं बहुत तनावग्रस्त पाई जाती हैं। ऎसे में उनकी लाइफस्टाइल में थोडी-सी तब्दीली कर दी जाए तो तनावमुक्त होने में देर नहीं लगती है। खाना पकाना भी एक कला है। संगीत से आपके भीतर की चिंता, तनाव और हडबडी धीरे-धीरे खत्म होती रहेगी और आप खाना पकाने में पूरी तल्लीनता से जुट जाएगी। रसोई में ज्यादातर आप अकेली रहती हैं। संगीत की धुन आपको अकेलेपन के एहसास से दूर रखेगी।
| खाना पकाना भी अपने आप में एक कला है। आप गुनगुनाकर तो खाना पकाती हैं, लेकिन कभी संगीत की धुन के साथ भी पकाकर देखें। अजीब-सा लग रहा होगा न आपको कि रसोईघर में भला संगीत का क्या काम। आजकल के रूटीन और हलचल वाले जीवन में कामकाजी महिलाएं बहुत तनावग्रस्त पाई जाती हैं। ऎसे में उनकी लाइफस्टाइल में थोडी-सी तब्दीली कर दी जाए तो तनावमुक्त होने में देर नहीं लगती है। खाना पकाना भी एक कला है। संगीत से आपके भीतर की चिंता, तनाव और हडबडी धीरे-धीरे खत्म होती रहेगी और आप खाना पकाने में पूरी तल्लीनता से जुट जाएगी। रसोई में ज्यादातर आप अकेली रहती हैं। संगीत की धुन आपको अकेलेपन के एहसास से दूर रखेगी। |
हिरी मोतू जो पुलिस मोतू, पिजिन मोतू या केवल हिरी के नाम से जानी जाती है, पापुआ न्यू गिनी की आधिकारिक भाषा है। यह ऑस्ट्रोनेशियन भाषा परिवार की मोतू भाषा का सरलीकृत संस्करण है। हालाँकि यह भाषा न तो पिजिन है न ही क्रियोल, बल्कि यह दोनों प्रकार की भाषाओँ के गुण रखती है। हिरी मोतू व मोतू दोनों के स्वर तथा व्याकरण में अन्तर है कि हिरी मोतू भाषा बोलने वाला समझ नहीं पता है। यही सामान समस्या मोतू भाषी को भी होती है। .
1 संबंधः दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन के सदस्य राष्ट्र।
दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (Association of Southeast Asian Nations) दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र का संगठन है जिसका लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों के मध्य आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक विकास तथा क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है। आसियान के 10 सदस्य राष्ट्र, एक उम्मीद्वार राष्ट्र तथा एक पर्यवेक्षक राष्ट्र है। आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 में पाँच सदस्यों के साथ की गयी थीः इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन्स, सिंगापुर तथा थाईलैंड। .
| हिरी मोतू जो पुलिस मोतू, पिजिन मोतू या केवल हिरी के नाम से जानी जाती है, पापुआ न्यू गिनी की आधिकारिक भाषा है। यह ऑस्ट्रोनेशियन भाषा परिवार की मोतू भाषा का सरलीकृत संस्करण है। हालाँकि यह भाषा न तो पिजिन है न ही क्रियोल, बल्कि यह दोनों प्रकार की भाषाओँ के गुण रखती है। हिरी मोतू व मोतू दोनों के स्वर तथा व्याकरण में अन्तर है कि हिरी मोतू भाषा बोलने वाला समझ नहीं पता है। यही सामान समस्या मोतू भाषी को भी होती है। . एक संबंधः दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन के सदस्य राष्ट्र। दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र का संगठन है जिसका लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों के मध्य आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक विकास तथा क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है। आसियान के दस सदस्य राष्ट्र, एक उम्मीद्वार राष्ट्र तथा एक पर्यवेक्षक राष्ट्र है। आसियान की स्थापना आठ अगस्त एक हज़ार नौ सौ सरसठ में पाँच सदस्यों के साथ की गयी थीः इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन्स, सिंगापुर तथा थाईलैंड। . |
8. पंडरी कपड़ा बाजार ( सभी 5)
फिलहाल इन 11 बाजारों को ही जिला प्रशासन द्वारा चिन्हांकित किया गया है परंतु सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने पर अन्य सड़को को भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है।
इस दौरान छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चीफ अमर पारवानी ने कहा कि समस्त व्यापारी संघ को विश्वास में लेते हुए जिला प्रशासन ने सार्थक चर्चा कर हल निकाला है जिससे व्यापारियों को व्यापार करने व ग्राहकों को खरीदी करने में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पारवानी ने कहा कि चैम्बर द्वारा सभी व्यापारी संघ के अध्यक्ष-महामंत्री को सूचित किया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में सोशल डिस्टेनसिंग का पालन सुनिश्चित करवाए जिससे कोरोना जैसी घातक बीमारी से लड़ने में मदद मिले और जल्द ही छत्तीसगढ़ प्रदेश कोरोना मुक्त हो। वही पारवानी ने अन्य व्यापार जिन्हें जिला प्रशासन ने खोलने की अनुमति फिलहाल प्रदान नहीं कि है, उनके लिए भी प्रयासरत रहने की बात कही।
| आठ. पंडरी कपड़ा बाजार फिलहाल इन ग्यारह बाजारों को ही जिला प्रशासन द्वारा चिन्हांकित किया गया है परंतु सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने पर अन्य सड़को को भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है। इस दौरान छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चीफ अमर पारवानी ने कहा कि समस्त व्यापारी संघ को विश्वास में लेते हुए जिला प्रशासन ने सार्थक चर्चा कर हल निकाला है जिससे व्यापारियों को व्यापार करने व ग्राहकों को खरीदी करने में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पारवानी ने कहा कि चैम्बर द्वारा सभी व्यापारी संघ के अध्यक्ष-महामंत्री को सूचित किया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में सोशल डिस्टेनसिंग का पालन सुनिश्चित करवाए जिससे कोरोना जैसी घातक बीमारी से लड़ने में मदद मिले और जल्द ही छत्तीसगढ़ प्रदेश कोरोना मुक्त हो। वही पारवानी ने अन्य व्यापार जिन्हें जिला प्रशासन ने खोलने की अनुमति फिलहाल प्रदान नहीं कि है, उनके लिए भी प्रयासरत रहने की बात कही। |
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2021) के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद यहां आए विदेशी खिलाड़ियों ने भले ही अपने घर के लिए कूच कर दी हो. लेकिन न्यूजीलैंड के कुछ खिलाड़ियों को 10 मई तक भारत में ही रुकना होगा. न्यूजीलैंड की टीम को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलने के लिए ब्रिटेन रवाना होना है. उसके टेस्ट टीम के कई सदस्य यहां आईपीएल के लिए भारत में मौजूद हैं उनके क्रिकेट बोर्ड ने अब उन्हें 10 मई तक यहीं रुकने का आदेश दिया है.
न्यूजीलैंड टीम के 10 सदस्यों को भारत से ब्रिटेन रवाना होना है, जिसमें कप्तान केन विलियमसन (Kane Williamson) का भी शामिल है. न्यूजीलैंड क्रिकेटरों (NZC) के संघ के प्रमुख ने बुधवार को यह जानकारी दी. न्यूजीलैंड के बाकी खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ के सदस्य टीमों द्वारा इंतजाम की गई चार्टर्ड उड़ानों से स्वदेश रवाना हो सकते हैं. न्यूजीलैंड प्लेयर्स असोसिएशन के प्रमुख हीथ मिल्स ने यह जानकारी दी.
अभी तक सिर्फ ब्रिटिश नागरिकों को ही भारत से यात्रा की अनुमति है. लेकिन उन्हें सरकार द्वारा अधिकृत केंद्र पर दस दिन पृथकवास में रहना होगा.
विलियमसन के अलावा न्यूजीलैंड के ट्रेंट बोल्ट, काइल जैमीसन, मिशेल सेंटनेर, क्रिस डोनाल्डसन (ट्रेनर), टॉमी सिमसेक (फिजियो) , लॉकी फर्ग्युसन, जिम्मी नीशम और फिन एलेन भी यहां हैं.
न्यूजीलैंड टीम दो जून से इंग्लैंड में दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेगी. इसके बाद साउथेम्पटन में 18 जून से भारत के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल खेला जाएगा.
| इंडियन प्रीमियर लीग के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद यहां आए विदेशी खिलाड़ियों ने भले ही अपने घर के लिए कूच कर दी हो. लेकिन न्यूजीलैंड के कुछ खिलाड़ियों को दस मई तक भारत में ही रुकना होगा. न्यूजीलैंड की टीम को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलने के लिए ब्रिटेन रवाना होना है. उसके टेस्ट टीम के कई सदस्य यहां आईपीएल के लिए भारत में मौजूद हैं उनके क्रिकेट बोर्ड ने अब उन्हें दस मई तक यहीं रुकने का आदेश दिया है. न्यूजीलैंड टीम के दस सदस्यों को भारत से ब्रिटेन रवाना होना है, जिसमें कप्तान केन विलियमसन का भी शामिल है. न्यूजीलैंड क्रिकेटरों के संघ के प्रमुख ने बुधवार को यह जानकारी दी. न्यूजीलैंड के बाकी खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ के सदस्य टीमों द्वारा इंतजाम की गई चार्टर्ड उड़ानों से स्वदेश रवाना हो सकते हैं. न्यूजीलैंड प्लेयर्स असोसिएशन के प्रमुख हीथ मिल्स ने यह जानकारी दी. अभी तक सिर्फ ब्रिटिश नागरिकों को ही भारत से यात्रा की अनुमति है. लेकिन उन्हें सरकार द्वारा अधिकृत केंद्र पर दस दिन पृथकवास में रहना होगा. विलियमसन के अलावा न्यूजीलैंड के ट्रेंट बोल्ट, काइल जैमीसन, मिशेल सेंटनेर, क्रिस डोनाल्डसन , टॉमी सिमसेक , लॉकी फर्ग्युसन, जिम्मी नीशम और फिन एलेन भी यहां हैं. न्यूजीलैंड टीम दो जून से इंग्लैंड में दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेगी. इसके बाद साउथेम्पटन में अट्ठारह जून से भारत के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल खेला जाएगा. |
रुचि वर्मा, नई दिल्ली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले में बिजली देने वाली कंपनी टाटा पावर उनके आवास को 'गलत जानकारी देने' के लिए नोटिस भेजने की तैयारी में है। कंपनी के सूत्रों कहना है कि केजरीवाल के बंगले के लिए डोमेस्टिक कैटिगरी के दो मीटर मांगे गए थे, जबकि एक मीटर को कमर्शल कामों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
केजरीवाल के सरकारी आवास- 6, फ्लैग स्टाफ रोड, सिविल लाइन्स में लगे बिजली के दो मीटरों का जून महीने का बिल करीब 1. 35 लाख रुपये आया है। मगर यह बिल अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी सेंकडरी मीटर के पिछले सभी बिल कमर्शल रेट के हिसाब से वसूल सकती है।
दरअसल टाटा पावर 'गलत जानकारी देने' के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास को नोटिस भेजने जा रही है। सूत्रों का कहना है कि ऑफिस से जुड़े काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा सेकंडरी मीटर कमर्शल होना चाहिए और उसका बिल भी उसी हिसाब से भरा जाना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के घर पर लगे दोनों मीटर डोमेस्टिक कैटिगरी के हैं। एक उनके घर के लिए है, जो 34kW लोड का है और दूसरे का लोड 70kW है। दूसरा मीटर ऑफिस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । आधिकारिक बैठकों और जनता दरबार के लिए इसी मीटर से बिजली इस्तेमाल होती है।
सूत्रों ने बताया, 'मुख्यमंत्री के यहां शिफ्ट होने से पहले दोनों मीटरों का लोड 70kW था, मगर बाद में पीडब्ल्यूडी ने इसे बढ़ाकर 104kW करने की अर्जी थी। ऐप्लिकेशन में कहा गया था कि दोनों मीटर डोमेस्टिक कैटिगरी कनेक्सन के होने चाहिए। '
मुख्यमंत्री के आवास ताजा बिलों की बात करें तो एक मीटर में 2,510 यूनिट्स इस्तेमाल हुए हैं। इसका बिल 22,689 रुपये बना है और इसे 8 जून तक भरा जाना था। दूसरे मीटर में 11,637 यूनिट्स बिजली इस्तेमाल हुई है और बिल बना है 1,13,598 रुपये। यह बिल 18 जून को तैयार हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आवास पर 30 एसी लगे हैं। यह साफ नहीं हो पाया है कि इनमें से कितने उनके प्राइवेट क्वॉर्टर में हैं। कहा जा रहा है कि 35kW के डोमेस्टिक लोड में 12 से 15 एसी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मगर डिस्कॉम का कहना है कि ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल होने वाला मीटर कमर्शल होना चाहिए।
सूत्र ने बताया, 'लोड बढ़ाने के लिए दी गई ऐप्लिकेशन में साफ कहा गया है कि दोनों मीटर डोमेस्टिक पावर के होने चाहिए, मगर सेकंडरी मीटर ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑफिस में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक होती है और जनता दरबार लगता है। ये कमर्शल कैटिगरी में आने वाले काम हैं, ऐसे में हमें अप्रैल से लेकर अब तक रिवाइज्ड बिल भेजने होंगे। '
सरकारी प्रवक्ता ने कहा है, 'हमने पहले भी कहा है कि मुख्यमंत्री के प्राइवेट रेजिडेंस का बिल कम है और सेकंडरी मीटर ऑफिसर पार्टी मीटिंग, जनता संवाद जैसे ऑफिस के कामों के लिए है। सेकंडरी मीटर के बिलों को डोमेस्टिक बिल कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है। अगर सेकंडरी मीटर का कनेक्शन डोमेस्टिक है तो हम प्रशासन से कहेंगे कि इसे कमर्शल में बदला जाए। '
मजेदार बात यह है कि पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर ने भी उत्तरी दिल्ली में अपने आवास पर दो डोमेस्टिक कनेक्शन मांगे थे। इसमें उन्होंने कहा था कि एक उनके घर के लिए होगा और दूसरा पार्टी से जुड़े कामों के लिए। टाटा पावर ने उन्हें डोमेस्टिक कनेक्शन देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उन्हें सेकंडरी कनेक्शन कमर्शल ही मिलेगा।
पावर सेक्टर के एक अधिकारी ने बताया, 'केजरीवाल के डोमेस्टिक मीटर कनेक्शन को कमर्शल में बदलने पर बिल भी डबल हो जाएगा, क्योंकिं डोमेस्टिक के मुकाबले कमर्शल रेट बहुत ज्यादा हैं। '
| रुचि वर्मा, नई दिल्ली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले में बिजली देने वाली कंपनी टाटा पावर उनके आवास को 'गलत जानकारी देने' के लिए नोटिस भेजने की तैयारी में है। कंपनी के सूत्रों कहना है कि केजरीवाल के बंगले के लिए डोमेस्टिक कैटिगरी के दो मीटर मांगे गए थे, जबकि एक मीटर को कमर्शल कामों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। केजरीवाल के सरकारी आवास- छः, फ्लैग स्टाफ रोड, सिविल लाइन्स में लगे बिजली के दो मीटरों का जून महीने का बिल करीब एक. पैंतीस लाख रुपये आया है। मगर यह बिल अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी सेंकडरी मीटर के पिछले सभी बिल कमर्शल रेट के हिसाब से वसूल सकती है। दरअसल टाटा पावर 'गलत जानकारी देने' के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास को नोटिस भेजने जा रही है। सूत्रों का कहना है कि ऑफिस से जुड़े काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा सेकंडरी मीटर कमर्शल होना चाहिए और उसका बिल भी उसी हिसाब से भरा जाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के घर पर लगे दोनों मीटर डोमेस्टिक कैटिगरी के हैं। एक उनके घर के लिए है, जो चौंतीस किलोवाट लोड का है और दूसरे का लोड सत्तर किलोवाट है। दूसरा मीटर ऑफिस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । आधिकारिक बैठकों और जनता दरबार के लिए इसी मीटर से बिजली इस्तेमाल होती है। सूत्रों ने बताया, 'मुख्यमंत्री के यहां शिफ्ट होने से पहले दोनों मीटरों का लोड सत्तर किलोवाट था, मगर बाद में पीडब्ल्यूडी ने इसे बढ़ाकर एक सौ चार किलोवाट करने की अर्जी थी। ऐप्लिकेशन में कहा गया था कि दोनों मीटर डोमेस्टिक कैटिगरी कनेक्सन के होने चाहिए। ' मुख्यमंत्री के आवास ताजा बिलों की बात करें तो एक मीटर में दो,पाँच सौ दस यूनिट्स इस्तेमाल हुए हैं। इसका बिल बाईस,छः सौ नवासी रुपयापये बना है और इसे आठ जून तक भरा जाना था। दूसरे मीटर में ग्यारह,छः सौ सैंतीस यूनिट्स बिजली इस्तेमाल हुई है और बिल बना है एक,तेरह,पाँच सौ अट्ठानवे रुपयापये। यह बिल अट्ठारह जून को तैयार हुआ है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आवास पर तीस एसी लगे हैं। यह साफ नहीं हो पाया है कि इनमें से कितने उनके प्राइवेट क्वॉर्टर में हैं। कहा जा रहा है कि पैंतीस किलोवाट के डोमेस्टिक लोड में बारह से पंद्रह एसी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मगर डिस्कॉम का कहना है कि ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल होने वाला मीटर कमर्शल होना चाहिए। सूत्र ने बताया, 'लोड बढ़ाने के लिए दी गई ऐप्लिकेशन में साफ कहा गया है कि दोनों मीटर डोमेस्टिक पावर के होने चाहिए, मगर सेकंडरी मीटर ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑफिस में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक होती है और जनता दरबार लगता है। ये कमर्शल कैटिगरी में आने वाले काम हैं, ऐसे में हमें अप्रैल से लेकर अब तक रिवाइज्ड बिल भेजने होंगे। ' सरकारी प्रवक्ता ने कहा है, 'हमने पहले भी कहा है कि मुख्यमंत्री के प्राइवेट रेजिडेंस का बिल कम है और सेकंडरी मीटर ऑफिसर पार्टी मीटिंग, जनता संवाद जैसे ऑफिस के कामों के लिए है। सेकंडरी मीटर के बिलों को डोमेस्टिक बिल कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है। अगर सेकंडरी मीटर का कनेक्शन डोमेस्टिक है तो हम प्रशासन से कहेंगे कि इसे कमर्शल में बदला जाए। ' मजेदार बात यह है कि पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर ने भी उत्तरी दिल्ली में अपने आवास पर दो डोमेस्टिक कनेक्शन मांगे थे। इसमें उन्होंने कहा था कि एक उनके घर के लिए होगा और दूसरा पार्टी से जुड़े कामों के लिए। टाटा पावर ने उन्हें डोमेस्टिक कनेक्शन देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उन्हें सेकंडरी कनेक्शन कमर्शल ही मिलेगा। पावर सेक्टर के एक अधिकारी ने बताया, 'केजरीवाल के डोमेस्टिक मीटर कनेक्शन को कमर्शल में बदलने पर बिल भी डबल हो जाएगा, क्योंकिं डोमेस्टिक के मुकाबले कमर्शल रेट बहुत ज्यादा हैं। ' |
उच्चतम न्यायालय ने 'रीजऩल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम" (आरआरटीएस) परियोजना के निर्माण के लिए धन देने में असमर्थता जताने को लेकर दिल्ली सरकार को सोमवार को फटकार लगाई और उसे पिछले तीन वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर खर्च किए गए धन का ब्योरा देने का निर्देश दिया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने अध्यादेश का स्वागत करते हुए 11 मई से कल रात तक के घटनाक्रम को रखा। उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की आड़ में केजरीवाल जो मनमानी कर रहे हैं उसे कोई स्वीकार नहीं करेगा।
पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को भ्रष्टाचार रोधी निगरानी संस्था को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को एक घंटे के भीतर पेश करने का आदेश दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि एजेंसी ने अदालत परिसर में प्रवेश कर और रजिस्ट्रार की अनुमति के बिना खान को गिरफ्तार कर "अदालत की अवमानना" की है।
| उच्चतम न्यायालय ने 'रीजऩल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम" परियोजना के निर्माण के लिए धन देने में असमर्थता जताने को लेकर दिल्ली सरकार को सोमवार को फटकार लगाई और उसे पिछले तीन वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर खर्च किए गए धन का ब्योरा देने का निर्देश दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने अध्यादेश का स्वागत करते हुए ग्यारह मई से कल रात तक के घटनाक्रम को रखा। उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की आड़ में केजरीवाल जो मनमानी कर रहे हैं उसे कोई स्वीकार नहीं करेगा। पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को भ्रष्टाचार रोधी निगरानी संस्था को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को एक घंटे के भीतर पेश करने का आदेश दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि एजेंसी ने अदालत परिसर में प्रवेश कर और रजिस्ट्रार की अनुमति के बिना खान को गिरफ्तार कर "अदालत की अवमानना" की है। |
अमरावती-/दि. 22 विगत दो दिनों से अमरावती के जिला दौरे पर रहनेवाले राज्य के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार सहित उनके बेटे व कर्जत-जामखेडा के विधायक रोहित पवार ने स्थानीय विधायक सुलभा खोडके व राकांपा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खोडके के आवास पर सदिच्छा भेंट दी. इस समय पवार एवं खोडके परिवार के परिचित रहनेवाले नविन खंडुजा भी उपस्थित थे. इन सभी गणमान्यों ेका खोडके दम्पति सहित उनके बेटे यश खोडके ने पुष्पगुच्छ सौंपते हुए भावपूर्ण स्वागत किया.
| अमरावती-/दि. बाईस विगत दो दिनों से अमरावती के जिला दौरे पर रहनेवाले राज्य के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार सहित उनके बेटे व कर्जत-जामखेडा के विधायक रोहित पवार ने स्थानीय विधायक सुलभा खोडके व राकांपा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खोडके के आवास पर सदिच्छा भेंट दी. इस समय पवार एवं खोडके परिवार के परिचित रहनेवाले नविन खंडुजा भी उपस्थित थे. इन सभी गणमान्यों ेका खोडके दम्पति सहित उनके बेटे यश खोडके ने पुष्पगुच्छ सौंपते हुए भावपूर्ण स्वागत किया. |
Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah तारक मेहता का उल्टा चश्मा की रीटा रिपोर्टर ने बताया है कि शो में सालों साल एक्टर्स की सैलरी नहीं बढ़ाई जाती है। अगर करते भी थे तो इसके लिए काफी सारे नियम थे।
नई दिल्ली, जेएनएन। Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता का उल्टा चश्मा इन दिनों विवादों में फंसा हुआ नजर आ रह है। नेहा मेहता, शैलेश लोढ़ा, राज अनादकट, दिशा वकानी और इतने सारे एक्टर्स को शो से जाने के बाद अब मिसेज सोढ़ी यानी जेनिफर जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने प्रोड्यूसर असित मोदी सहित तीन लोगों पर शोषण का आरोप लगाया है।
हाल ही में रीटा रिपोर्टर का किरदार निभा चुकी प्रिया आहूजा ने बताया कि कैसे शो में कई सालों तक सैलरी नहीं बढ़ाई जाती थी। प्रिया ने उन नियमों का भी खुलासा किया, जिनसे कर्मचारियों को गुजरना पड़ता है। जेनिफर के आरोप लगाने के बाद सोसाइटी के एकमेव सेक्रेटरी भिड़े यानी मंदार चंदवाडकर ने कहा कि शो में ऐसा कुछ नहीं होता सब कुछ ठीक है। तो वहीं प्रिया ने जेनिफर का समर्थन किया और टीएमकेओसी सेट पर अपने बुरे अनुभव साझा किए।
सालों नहीं बढ़ाई जाती सैलरी!
ई-टाइम्स के साथ एक नए इंटरव्यू में, प्रिया आहूजा राजदा ने खुलासा किया कि कैसे 5 सालों तक उनकी कोई सैलरी नहीं बढ़ाई गई थी। एक्ट्रेस ने कहा 'शो ज्वाइन करने के 18 महीने के बाद पैसे बढ़ाए जाते हैं, वो भी अगर आप पूछते हो तब और बढ़ाएंगे तो भी 6 महीने का समय लगता है। वो भी बहुत सारे नियम है और शर्तें लागू होती हैं। लेकिन मैंने कभी नहीं पूछा, तो मेरी कभी कोई सैलरी ही नहीं बढ़ी।
प्रिया आहूजा राजदा ने आगे कहा, "और वे मुझे कभी भी किसी शो या कार्यक्रम में नहीं ले गए जहां वे 'टीएमकेओसी' का प्रमोशन करने गए थे। जब मुझे पता चलेगा कि होर्डिंग पर मेरी तस्वीर नहीं है, तो उन्होंने कहा कि ये सब उनकी पीआर टीम की गड़बड़ है! इसके बाद ही इसे ठीक किया जाएगा। लेकिन यह बहुत तकलीफदेह था। मालव अक्सर मजाक करते हैंः अजय देवगन मुझसे ज्यादा 'तारक मेहता' शो में दिखाई दिए हैं। "
| Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah तारक मेहता का उल्टा चश्मा की रीटा रिपोर्टर ने बताया है कि शो में सालों साल एक्टर्स की सैलरी नहीं बढ़ाई जाती है। अगर करते भी थे तो इसके लिए काफी सारे नियम थे। नई दिल्ली, जेएनएन। Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता का उल्टा चश्मा इन दिनों विवादों में फंसा हुआ नजर आ रह है। नेहा मेहता, शैलेश लोढ़ा, राज अनादकट, दिशा वकानी और इतने सारे एक्टर्स को शो से जाने के बाद अब मिसेज सोढ़ी यानी जेनिफर जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने प्रोड्यूसर असित मोदी सहित तीन लोगों पर शोषण का आरोप लगाया है। हाल ही में रीटा रिपोर्टर का किरदार निभा चुकी प्रिया आहूजा ने बताया कि कैसे शो में कई सालों तक सैलरी नहीं बढ़ाई जाती थी। प्रिया ने उन नियमों का भी खुलासा किया, जिनसे कर्मचारियों को गुजरना पड़ता है। जेनिफर के आरोप लगाने के बाद सोसाइटी के एकमेव सेक्रेटरी भिड़े यानी मंदार चंदवाडकर ने कहा कि शो में ऐसा कुछ नहीं होता सब कुछ ठीक है। तो वहीं प्रिया ने जेनिफर का समर्थन किया और टीएमकेओसी सेट पर अपने बुरे अनुभव साझा किए। सालों नहीं बढ़ाई जाती सैलरी! ई-टाइम्स के साथ एक नए इंटरव्यू में, प्रिया आहूजा राजदा ने खुलासा किया कि कैसे पाँच सालों तक उनकी कोई सैलरी नहीं बढ़ाई गई थी। एक्ट्रेस ने कहा 'शो ज्वाइन करने के अट्ठारह महीने के बाद पैसे बढ़ाए जाते हैं, वो भी अगर आप पूछते हो तब और बढ़ाएंगे तो भी छः महीने का समय लगता है। वो भी बहुत सारे नियम है और शर्तें लागू होती हैं। लेकिन मैंने कभी नहीं पूछा, तो मेरी कभी कोई सैलरी ही नहीं बढ़ी। प्रिया आहूजा राजदा ने आगे कहा, "और वे मुझे कभी भी किसी शो या कार्यक्रम में नहीं ले गए जहां वे 'टीएमकेओसी' का प्रमोशन करने गए थे। जब मुझे पता चलेगा कि होर्डिंग पर मेरी तस्वीर नहीं है, तो उन्होंने कहा कि ये सब उनकी पीआर टीम की गड़बड़ है! इसके बाद ही इसे ठीक किया जाएगा। लेकिन यह बहुत तकलीफदेह था। मालव अक्सर मजाक करते हैंः अजय देवगन मुझसे ज्यादा 'तारक मेहता' शो में दिखाई दिए हैं। " |
जहा लाहो तहा लोहो लाहा लोहो पवड्डइ । दोमासाकणयकर्ज कोडीए वि न निवट्टियं ॥ भरवार्थ - जैसा लाभ वैसे ही लोभ । लाम लोम को बढ़ाता । मैं दो माशा सोने के लिए आया था मगर एक करोड माशा से भी मुझ को सन्तोष नहीं हुआ।
इसलिए हे राजा ! लोम को छोड अब मैंने मुनि का वेष घारण किया है। अब मैं द्रव्य और भावसे साधु हूँ । "
राजाने कहाः " मैं एक करोड माशा सोना देने को तैयार हूँ । "
कपिलने उत्तर दियाः - " राजन् ! मैंने सब परिग्रह को छोड़ दिया है । "
इस प्रकार कहकर कपिल मुनि वहाँसे चले गये । शुद्ध चारित्र पालने लगे । इससे उनको लोकालोक का प्रकाश करने चाला केवलज्ञान प्राप्त हुआ।
एकवार मार्ग में उन को चोर मिले । उनको बडी ही उत्तमता के साथ उपदेश दिया। और बलभद्रादि चोरों को सन्मार्ग पर लगाया । उदाहरणार्थ उन के उपदेश में भी एक गाथा यहाँ उद्धृत की जाती है ।
अधुवे असायमी संसारंभि दुक्खपउराए । कि नाम हुज्ज तं कम्मयं जेणाहं दुग्गइ न गच्छेज्जा ?
मावार्थ - - इस अस्थिर अशाश्वत और दुःख पूर्ण संसार में ऐसा कौनसा कर्म है कि जिस के करने से मैं दुर्गति में न जाऊँ ?
ये वाक्य केवली कपिछने चोरों को सम्मार्ग पर लाने के लिए कहा है। अन्यथा वे स्वयं तो कृतकृत्य हो चुके थे ।
केवली कपिल के उदाहरण से मनुष्य को यह शिक्षा प्र हण करनी चाहिए कि लोभ का त्याग करना ही अच्छा है । फपिलने लोभ छोड़ा तब ही वे केवली बनकर अजरामर पद को प्राप्त कर सके । यदि वे ऐसा न करते तो न जाने उनकी क्या दशा होती ?
जो मनुष्य लोभ के आधीन होता है, वह किसी का भी भला नहीं कर सकता है। दूसरे का हित तो दूर रहा वह स्वयं अपना हित भी नहीं कर सकता है। विपत्तियों का पहाड़ सिर पर टूट पड़ने पर भी लोम के वश हो कर वह द्रव्यव्यय द्वारा उस को नहीं हटा सकता है । लोम प्रकृति दुनिया में अनेक प्रकार की विडम्बनाएँ उत्पन्न करती है । इस के कारण जाति बिरादरी में, सज्जन समाज में और अन्यान्य लौकिक कार्यों में वह अमान और अपयश का ही भाजन होता है । लोभी से धर्म साधन भी नहीं होता है । लोम रूपी असंतोष रूपी अमृत के विना शान्त नहीं हो सकती है। कहा है किः( १५४ )
शीतो रविर्भवति शीतरुचिः प्रतापी
स्तब्धं नमो जलनिधिः सरिदम्बुतृप्तः । स्थायी मरुद्विवहनो दहनोऽपि जातु
लोमाऽनलस्तु न कदाचिददाहकः स्यात् ।।
मावार्थ-शायद सूर्य शीतल हो जाय; चंद्र प्रतापी-उष्ण स्वभाववाला बन जाय, आकाश स्तब्ध हो जाय; समुद्र नदियों के जल से तृप्त हो जाय, पवन स्थिर हो जाय और अग्नि अपने दाहक गुण को छोड़ दे; मगर लोभ रूपी अग्नि कमी अदाहक न जलानेवाली नहीं होती है ।
वास्तव में लोम रूपी अभि से प्राणियों के अन्तःकरण भस्मीभूत हो जाते हैं; उन के शरीर में, लोही मांस को सुखाकर, अस्थिपंजर अवशेष रख देता है । इतनी हानि उठा लेने पर भी प्राणी लोभ का त्याग नहीं करते हैं । घृत को पा कर जैसे अनि विशेष रूप से ममक उठती है इसी तरह लाभ के द्वारा लोभानल भी भयंकर रूप धारण करता जाता है। बढ़ते बढ़ते वह अग्नि यहाँ तक बढ़ जाती है कि, जप, तप, संयम और विद्या आदि सब गुणों को जला कर जगत् के पूज्य को भी अपूज्य बना देती है । लोभ के जोर से मनुष्य अपना कर्तव्य भूल कर, दुनिया का दास बन जाता है । शास्त्रकार कहते है किः
आशाया ये दासास्ते दासाः
सर्वलोकस्य ।
आशा दासी येषां तेषां दासायते लोकः ।।
भावार्थ - - जो आशा के दास हैं वे सब के दास हैं और आशा जिन की दासी है उन के सारे लोग दास होते हैं ।
घन की आशा, विषय की आशा, और कीर्ति की आशा आदि अनेक प्रकार की आशाएँ होती हैं। उन सबका लोभ सागर में समावेश हो जाता है । आशा विषकी वेल के समान है। विषवेल के खाने से एक ही शरीर छूटता है; परन्तु आशा रूषी वेल के भक्षण करने से अनेक जन्म मरणादि कष्ट परंपरा को सहन करना पड़ता हैं ।
धन की आशा से मनुष्य खजाने की शोध में फिरता भूमि खोदता है; और स्वर्ण बनाने की रसायन प्राप्त करने के लिए अनेक वेषधारी ठगों को सिद्ध पुरुष समझ कर उन की सेवा करता है; उन की आज्ञा पालता है और उन की बताई हुई बूटियां-जड़ियां - खोजने के लिए भयंकर वनों में और भयानक प र्वत की चोटियों पर जाता है। अपने प्राणों की भी वह बाजी लगा देता है ।
इस प्रकार से बड़ी कठिनता के साथ जडी ला कर, भठ्ठी बनाता है; आग जलाता है और रात दिन उस के सामने खाना, पिना, सोना सत्र छोड कर, बैढता है; मगर अंत में कुछ न मि( १५६ )
लने से दुःखी होता है । भाग्य विना क्या कभी किसी को कुछ मिला है ?
इससे जब कुछ लाभ नहीं होता है तब सेवावृत्ति में लगता है । राजा महाराजाओं का सेवक बनता है और प्रसंग आने पर अपने प्राणों की आहुति देने को भी तत्पर हो जाता है मालिक मिथ्या या अनुचित जो कुछ बोलता है उस को वह अपनी सारी बुद्धि की शक्ति लगाकर, सत्य या उचित प्रमाणित करने का प्रयत्न करता है । धर्मकर्म की उस समय वह कुछ भी परवाह नहीं करता है । ममर वहाँ भी घनाशा पूर्ण नहीं होती ।
तब कुटुंब परिवार को छोड़, बड़े बड़े वनों, पर्वतों और समुद्रों को लांघ विदेशों में जाता है। जिन देशों में प्राणों का डर हो वहाँ भी जाता है और बड़ी ही सावधानी से वहाँ व्यापार करने लगता है । मगर वहाँ भी उसे निराश होजाना पड़ता है, तो फिर वह मंत्र यंत्र की खोज में लगता है।
किसी योगी या फकीर को देखकर सोचता है कि, ये सिद्ध महात्मा है । इनसे मेरा कल्याण होगा। ये प्रसन्न होकर मुझ को कोई ऐसा मंत्र देंगे की जिससे मैं धनवान हो जाऊँगा और इसी विचारसे वह सच्चे दिलसे उसकी सेवा करने लगता है।
किसी समय वह योगी लहर में आकर पूछता है किः" क्यों भक्त कैसा है ? " उस समय घन - लोभ से विहुल बना
हुआ मनुष्य नम्रता और दिनता से उसके पैरों पर गिरकर कहता है कि- " महाराज कोई मार्ग दिखाइए । "
योगी बढी गंभीरता धारण कर कहता है :-" क्यों बच्चे. क्या काम है ? "
तब वह लोमी अपने मरम का इस प्रकार भंडा फोड़ता है महाराज, कृपा करके कोई ऐसा मंत्र या यंत्र बताइए कि जिससे आप का सेवक सुखी हो। दो चार बरस से मैं बराबर विपत्तियों का शिकार बन रहा हूँ ।
तब महाराज पुस्तक खोल कर, या मुँह से कुछ बताते हैं । लोम वश बिचारा उसको सत्य समझ, घनाशा को पूर्ण करने के लिए, देवपूजा, सामायिक, संध्या आदि सारी धर्म कृतियों को भूल कर अपना मन उसी में लगा देता है । उसी की साधना में अपना सारा समय व्यतीत करता है । मगर हतभाग्य, यह नहीं समझता है कि मंत्र, यंत्र आदि सब पुण्यवान के ही सफल होते हैं औरों के नहीं। भाग्यहीन-पुण्यहीन के लिए तो उल्टे ये हानिकारक हो जाते हैं। परिणाम यह होता है कि असफलता के कारण विचारे में जो कुछ बुद्धि होती है वह भी नष्ट हो जाती है, वह पागल हो जाता है, और उद्यम हीन होकर नितान्त दरिद्री बन बैठता है ।
अब हम यह देखेंगे कि विषय की आशा मनुष्य को कैसी
विपत्तियों में डालती है। विषयी मनुष्य रंक के समान जाता है। चाहे कोई राजा हो या फकीर, घनी हो या गरीब, देव हो या दानव, और भूत हो, या पिशाच, चाहे कोई भी हो । विषय की आशा में पड़ कर वे स्त्री के दास हो जाते हैं; सिर पर जूते खाते हैं, और जन समूह में तिरस्कार व अपमानित होते हैं ।
इसी भांति कीर्ति के लोभी भी स्वर्ग और मोक्ष फल के देनेवाले धर्मानुष्ठान को धूल में मिला देते हैं; मिथ्या ढौंग व मायाचार कर संसार के बंधन को दृढ करते हैं और ऐसे कार्य करते हैं; जिन से लोग उन पर तो क्या, मगर सत्य साधुओं पर भी संदेह करने लगते हैं। उन के भक्त लोग भी उन से विमुख हो जाते हैं। यह जो कहा जाता है कि, आशाधीन मनुष्य जगत् के दास होते हैं, इस में लेश मात्र मी अवास्तविकता था अतिशयोक्ति नहीं है। गांची, मोची, तेली, तंबोळी, लोहार, सूतार, दरजी, नाई और पंडित आदि सब ही लोग लोभाधीन हो कर, दूसरों की सेवा में अपना जीवन बिताते हैं । अहो कहां तक कहे लोभ रूपी दावानल समस्त वस्तुओं को नाश क रने में समर्थ है । इस लिए भव्य जीवों को उचित है कि वे लोभ रूपी दावानल को, ज्ञानमेव से बरसनेवाले संतोष ज उसे शान्त कर देवें । | जहा लाहो तहा लोहो लाहा लोहो पवड्डइ । दोमासाकणयकर्ज कोडीए वि न निवट्टियं ॥ भरवार्थ - जैसा लाभ वैसे ही लोभ । लाम लोम को बढ़ाता । मैं दो माशा सोने के लिए आया था मगर एक करोड माशा से भी मुझ को सन्तोष नहीं हुआ। इसलिए हे राजा ! लोम को छोड अब मैंने मुनि का वेष घारण किया है। अब मैं द्रव्य और भावसे साधु हूँ । " राजाने कहाः " मैं एक करोड माशा सोना देने को तैयार हूँ । " कपिलने उत्तर दियाः - " राजन् ! मैंने सब परिग्रह को छोड़ दिया है । " इस प्रकार कहकर कपिल मुनि वहाँसे चले गये । शुद्ध चारित्र पालने लगे । इससे उनको लोकालोक का प्रकाश करने चाला केवलज्ञान प्राप्त हुआ। एकवार मार्ग में उन को चोर मिले । उनको बडी ही उत्तमता के साथ उपदेश दिया। और बलभद्रादि चोरों को सन्मार्ग पर लगाया । उदाहरणार्थ उन के उपदेश में भी एक गाथा यहाँ उद्धृत की जाती है । अधुवे असायमी संसारंभि दुक्खपउराए । कि नाम हुज्ज तं कम्मयं जेणाहं दुग्गइ न गच्छेज्जा ? मावार्थ - - इस अस्थिर अशाश्वत और दुःख पूर्ण संसार में ऐसा कौनसा कर्म है कि जिस के करने से मैं दुर्गति में न जाऊँ ? ये वाक्य केवली कपिछने चोरों को सम्मार्ग पर लाने के लिए कहा है। अन्यथा वे स्वयं तो कृतकृत्य हो चुके थे । केवली कपिल के उदाहरण से मनुष्य को यह शिक्षा प्र हण करनी चाहिए कि लोभ का त्याग करना ही अच्छा है । फपिलने लोभ छोड़ा तब ही वे केवली बनकर अजरामर पद को प्राप्त कर सके । यदि वे ऐसा न करते तो न जाने उनकी क्या दशा होती ? जो मनुष्य लोभ के आधीन होता है, वह किसी का भी भला नहीं कर सकता है। दूसरे का हित तो दूर रहा वह स्वयं अपना हित भी नहीं कर सकता है। विपत्तियों का पहाड़ सिर पर टूट पड़ने पर भी लोम के वश हो कर वह द्रव्यव्यय द्वारा उस को नहीं हटा सकता है । लोम प्रकृति दुनिया में अनेक प्रकार की विडम्बनाएँ उत्पन्न करती है । इस के कारण जाति बिरादरी में, सज्जन समाज में और अन्यान्य लौकिक कार्यों में वह अमान और अपयश का ही भाजन होता है । लोभी से धर्म साधन भी नहीं होता है । लोम रूपी असंतोष रूपी अमृत के विना शान्त नहीं हो सकती है। कहा है किः शीतो रविर्भवति शीतरुचिः प्रतापी स्तब्धं नमो जलनिधिः सरिदम्बुतृप्तः । स्थायी मरुद्विवहनो दहनोऽपि जातु लोमाऽनलस्तु न कदाचिददाहकः स्यात् ।। मावार्थ-शायद सूर्य शीतल हो जाय; चंद्र प्रतापी-उष्ण स्वभाववाला बन जाय, आकाश स्तब्ध हो जाय; समुद्र नदियों के जल से तृप्त हो जाय, पवन स्थिर हो जाय और अग्नि अपने दाहक गुण को छोड़ दे; मगर लोभ रूपी अग्नि कमी अदाहक न जलानेवाली नहीं होती है । वास्तव में लोम रूपी अभि से प्राणियों के अन्तःकरण भस्मीभूत हो जाते हैं; उन के शरीर में, लोही मांस को सुखाकर, अस्थिपंजर अवशेष रख देता है । इतनी हानि उठा लेने पर भी प्राणी लोभ का त्याग नहीं करते हैं । घृत को पा कर जैसे अनि विशेष रूप से ममक उठती है इसी तरह लाभ के द्वारा लोभानल भी भयंकर रूप धारण करता जाता है। बढ़ते बढ़ते वह अग्नि यहाँ तक बढ़ जाती है कि, जप, तप, संयम और विद्या आदि सब गुणों को जला कर जगत् के पूज्य को भी अपूज्य बना देती है । लोभ के जोर से मनुष्य अपना कर्तव्य भूल कर, दुनिया का दास बन जाता है । शास्त्रकार कहते है किः आशाया ये दासास्ते दासाः सर्वलोकस्य । आशा दासी येषां तेषां दासायते लोकः ।। भावार्थ - - जो आशा के दास हैं वे सब के दास हैं और आशा जिन की दासी है उन के सारे लोग दास होते हैं । घन की आशा, विषय की आशा, और कीर्ति की आशा आदि अनेक प्रकार की आशाएँ होती हैं। उन सबका लोभ सागर में समावेश हो जाता है । आशा विषकी वेल के समान है। विषवेल के खाने से एक ही शरीर छूटता है; परन्तु आशा रूषी वेल के भक्षण करने से अनेक जन्म मरणादि कष्ट परंपरा को सहन करना पड़ता हैं । धन की आशा से मनुष्य खजाने की शोध में फिरता भूमि खोदता है; और स्वर्ण बनाने की रसायन प्राप्त करने के लिए अनेक वेषधारी ठगों को सिद्ध पुरुष समझ कर उन की सेवा करता है; उन की आज्ञा पालता है और उन की बताई हुई बूटियां-जड़ियां - खोजने के लिए भयंकर वनों में और भयानक प र्वत की चोटियों पर जाता है। अपने प्राणों की भी वह बाजी लगा देता है । इस प्रकार से बड़ी कठिनता के साथ जडी ला कर, भठ्ठी बनाता है; आग जलाता है और रात दिन उस के सामने खाना, पिना, सोना सत्र छोड कर, बैढता है; मगर अंत में कुछ न मि लने से दुःखी होता है । भाग्य विना क्या कभी किसी को कुछ मिला है ? इससे जब कुछ लाभ नहीं होता है तब सेवावृत्ति में लगता है । राजा महाराजाओं का सेवक बनता है और प्रसंग आने पर अपने प्राणों की आहुति देने को भी तत्पर हो जाता है मालिक मिथ्या या अनुचित जो कुछ बोलता है उस को वह अपनी सारी बुद्धि की शक्ति लगाकर, सत्य या उचित प्रमाणित करने का प्रयत्न करता है । धर्मकर्म की उस समय वह कुछ भी परवाह नहीं करता है । ममर वहाँ भी घनाशा पूर्ण नहीं होती । तब कुटुंब परिवार को छोड़, बड़े बड़े वनों, पर्वतों और समुद्रों को लांघ विदेशों में जाता है। जिन देशों में प्राणों का डर हो वहाँ भी जाता है और बड़ी ही सावधानी से वहाँ व्यापार करने लगता है । मगर वहाँ भी उसे निराश होजाना पड़ता है, तो फिर वह मंत्र यंत्र की खोज में लगता है। किसी योगी या फकीर को देखकर सोचता है कि, ये सिद्ध महात्मा है । इनसे मेरा कल्याण होगा। ये प्रसन्न होकर मुझ को कोई ऐसा मंत्र देंगे की जिससे मैं धनवान हो जाऊँगा और इसी विचारसे वह सच्चे दिलसे उसकी सेवा करने लगता है। किसी समय वह योगी लहर में आकर पूछता है किः" क्यों भक्त कैसा है ? " उस समय घन - लोभ से विहुल बना हुआ मनुष्य नम्रता और दिनता से उसके पैरों पर गिरकर कहता है कि- " महाराज कोई मार्ग दिखाइए । " योगी बढी गंभीरता धारण कर कहता है :-" क्यों बच्चे. क्या काम है ? " तब वह लोमी अपने मरम का इस प्रकार भंडा फोड़ता है महाराज, कृपा करके कोई ऐसा मंत्र या यंत्र बताइए कि जिससे आप का सेवक सुखी हो। दो चार बरस से मैं बराबर विपत्तियों का शिकार बन रहा हूँ । तब महाराज पुस्तक खोल कर, या मुँह से कुछ बताते हैं । लोम वश बिचारा उसको सत्य समझ, घनाशा को पूर्ण करने के लिए, देवपूजा, सामायिक, संध्या आदि सारी धर्म कृतियों को भूल कर अपना मन उसी में लगा देता है । उसी की साधना में अपना सारा समय व्यतीत करता है । मगर हतभाग्य, यह नहीं समझता है कि मंत्र, यंत्र आदि सब पुण्यवान के ही सफल होते हैं औरों के नहीं। भाग्यहीन-पुण्यहीन के लिए तो उल्टे ये हानिकारक हो जाते हैं। परिणाम यह होता है कि असफलता के कारण विचारे में जो कुछ बुद्धि होती है वह भी नष्ट हो जाती है, वह पागल हो जाता है, और उद्यम हीन होकर नितान्त दरिद्री बन बैठता है । अब हम यह देखेंगे कि विषय की आशा मनुष्य को कैसी विपत्तियों में डालती है। विषयी मनुष्य रंक के समान जाता है। चाहे कोई राजा हो या फकीर, घनी हो या गरीब, देव हो या दानव, और भूत हो, या पिशाच, चाहे कोई भी हो । विषय की आशा में पड़ कर वे स्त्री के दास हो जाते हैं; सिर पर जूते खाते हैं, और जन समूह में तिरस्कार व अपमानित होते हैं । इसी भांति कीर्ति के लोभी भी स्वर्ग और मोक्ष फल के देनेवाले धर्मानुष्ठान को धूल में मिला देते हैं; मिथ्या ढौंग व मायाचार कर संसार के बंधन को दृढ करते हैं और ऐसे कार्य करते हैं; जिन से लोग उन पर तो क्या, मगर सत्य साधुओं पर भी संदेह करने लगते हैं। उन के भक्त लोग भी उन से विमुख हो जाते हैं। यह जो कहा जाता है कि, आशाधीन मनुष्य जगत् के दास होते हैं, इस में लेश मात्र मी अवास्तविकता था अतिशयोक्ति नहीं है। गांची, मोची, तेली, तंबोळी, लोहार, सूतार, दरजी, नाई और पंडित आदि सब ही लोग लोभाधीन हो कर, दूसरों की सेवा में अपना जीवन बिताते हैं । अहो कहां तक कहे लोभ रूपी दावानल समस्त वस्तुओं को नाश क रने में समर्थ है । इस लिए भव्य जीवों को उचित है कि वे लोभ रूपी दावानल को, ज्ञानमेव से बरसनेवाले संतोष ज उसे शान्त कर देवें । |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
पराप्राकृतिक संवाद व्यक्ति का स्वयं, या किसी माध्यम द्वारा, चेतना की विशेष अवस्था में पराप्राकृतिक तत्वों, जैसे देवी-देवता, से मानसिक संपर्क में होने वाला अनुभव है, और इसका परिणाम ज्ञान प्राप्ति, समस्या समाधान या कोई विशेष अनुभूति देखा गया है। यह इलहाम या श्रुति का आधार है, और दुनिया के अनेक धर्मों में देखे गए हैं। इस अतार्किक (प्रतिभा या प्रज्ञामूलक) आयाम (देखें भारतीय दर्शन) को हिंदुओं में ज्ञान, इसाईयों में नौसिस, बौद्धों में प्रज्ञा, तथा इस्लाम में मारिफ नाम से जानते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पराप्राकृतिक तत्वों से संवाद की परम्परा लम्बे समय से रही है। मान्यता है कि यह संवाद, चेतना की विशेष अवस्थाओं, में संभव हैं, और चेतना की इन ऊँचाइयों में जाने की लालसा का प्रमाण तपस्या की अनेकों पद्धतियाँ हैं। पराप्राकृतिक संवाद का लोकहित में प्रसार करना देवकार्य माना गया। मनोवैज्ञानिक पिंकर सहज या अतार्किक मानसिक अनुभव को कोरा रूढ़ीवाद समझते हैं। पर ऐसे वैज्ञानिक भी हैं जिनके लिए यह मानसिक अनुभव चुनौती हैं। मन में ऐसे बदलाव का आधार संज्ञान की दो प्रणालियों, तार्किक और अतार्किक, में देखा जा सकता है। . सेंट फ्रांसिस ने अरेज्जो में राक्षसों का भूत-अपसारण किया; गिओटो द्वारा एक फ्रेस्को पर एक चित्रण में. भूत-प्रेत का अपसारण अर्थात एक्सॉसिज़्म (प्राचीन लैटिन शब्द exorcismus, ग्रीक शब्द exorkizein - शपथ देकर बांधना) किसी ऐसे व्यक्ति अथवा स्थान से भूतों या अन्य आत्मिक तत्त्वों को निकालने की प्रथा है। जिसके बारे में विश्वास किया जाता है कि भूत ने उसे शपथ दिलाकर अपने वश में कर लिया है। यह प्रथा अत्यंत प्राचीन है तथा अनेक संस्कृतियों की मान्यताओं का अंग रही है। प्राचीन काल से माना जाता है कि इस दुनिया से परे एक और दुनिया होती है और इस दुनियाँ को मौत कि दुनिया के नाम से जाना जाता हे। जैसे हम सब को पता हे कि मौत कि दुनिया मे मृत लोगो कि आत्माएं होती है लेकिन इसके परे इस मौत कि दुनिया मे राक्षस और आध्यत्मिक संस्था का साया भी होता है। लोग जब मरते है तब उनकी आत्मा का उध्धार नहीं होता या इसके विपरीत बहुत सारी शर्ते होती है। जैसे कि अगर कोइ इन्सान एक ऐसी मौत मरा है जिसमें उसको बहुत तक्लीफ हुई हो या फिर बे मौत मारा गया हो तो इस के कारण उस इन्सान का आत्मा उस जगह पर ही रह जाती है और आसानी से उस आत्मा का उद्धर नहि होता, कोइ ऐसे स्थान भी होते हे जिधर से मृत लोगो कि आत्मा उध्दार होता हैं, यह जगह कोइ घना जंगल मे होता हे यातो फिर कोइ सुन्सान जगह में। ऐसे ही जगह से मृत दुनिया से राक्षस और आध्यात्मिक सन्स्था हमारी दुनिया मे प्रवेश करते है, और जीवित इन्सानो कि आत्मा पर शिकार करते हैं और इसी अवस्था मे झाङ-फूँक कि सन्कल्पना आती हैं। झाड़-फूँक राक्षस और आध्यात्मिक सन्स्थाओ का हटाना उत्ना का अभ्यास होता हे। झाड़-फूँक ऐसे लोग या जगह या चीज़ों पर किया जाता हे जो राक्शस या किसी आध्याथ्मिक सन्स्थाओ के अधीन होते हे। झाड़-फूँक ओझा के आध्याथ्मिक विश्वासो के आधार पर किया जाता हे। धर्म के आधार पर झाड़-फूँक के अन्य तरीके होते हे। कुछ ऐसे दर्वाज़े होते हे जो खुल्ने पर बुरे सप्ने हकीकत मे बदल जाते हे। .
पराप्राकृतिक संवाद और भूत-प्रेत का अपसारण आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): मनोविकारविज्ञानी, यूनान, आत्मा।
मनोविज्ञानी एक ऐसा चिकित्सक होता है जो मनोरोग का विशेषज्ञ होता है और मानसिक विकारों के उपचार के लिए योग्य होता है।अमेरिकी मनोरोग एसोसिएशन.
यूनान यूरोप महाद्वीप में स्थित देश है। यहां के लोगों को यूनानी अथवा यवन कहते हैं। अंग्रेजी तथा अन्य पश्चिमी भाषाओं में इन्हें ग्रीक कहा जाता है। यह भूमध्य सागर के उत्तर पूर्व में स्थित द्वीपों का समूह है। प्राचीन यूनानी लोग इस द्वीप से अन्य कई क्षेत्रों में गए जहाँ वे आज भी अल्पसंख्यक के रूप में मौज़ूद है, जैसे - तुर्की, मिस्र, पश्चिमी यूरोप इत्यादि। यूनानी भाषा ने आधुनिक अंग्रेज़ी तथा अन्य यूरोपीय भाषाओं को कई शब्द दिये हैं। तकनीकी क्षेत्रों में इनकी श्रेष्ठता के कारण तकनीकी क्षेत्र के कई यूरोपीय शब्द ग्रीक भाषा के मूलों से बने हैं। इसके कारण ये अन्य भाषाओं में भी आ गए हैं।ग्रीस की महिलाएं देह व्यापार के धंधे में सबसे आगे है.
आत्मा या आत्मन् पद भारतीय दर्शन के महत्त्वपूर्ण प्रत्ययों (विचार) में से एक है। यह उपनिषदों के मूलभूत विषय-वस्तु के रूप में आता है। जहाँ इससे अभिप्राय व्यक्ति में अन्तर्निहित उस मूलभूत सत् से किया गया है जो कि शाश्वत तत्त्व है तथा मृत्यु के पश्चात् भी जिसका विनाश नहीं होता। आत्मा का निरूपण श्रीमद्भगवदगीता या गीता में किया गया है। आत्मा को शस्त्र से काटा नहीं जा सकता, अग्नि उसे जला नहीं सकती, जल उसे गीला नहीं कर सकता और वायु उसे सुखा नहीं सकती। जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नवीन शरीर धारण करता है। .
पराप्राकृतिक संवाद 32 संबंध है और भूत-प्रेत का अपसारण 34 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 4.55% है = 3 / (32 + 34)।
यह लेख पराप्राकृतिक संवाद और भूत-प्रेत का अपसारण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। पराप्राकृतिक संवाद व्यक्ति का स्वयं, या किसी माध्यम द्वारा, चेतना की विशेष अवस्था में पराप्राकृतिक तत्वों, जैसे देवी-देवता, से मानसिक संपर्क में होने वाला अनुभव है, और इसका परिणाम ज्ञान प्राप्ति, समस्या समाधान या कोई विशेष अनुभूति देखा गया है। यह इलहाम या श्रुति का आधार है, और दुनिया के अनेक धर्मों में देखे गए हैं। इस अतार्किक आयाम को हिंदुओं में ज्ञान, इसाईयों में नौसिस, बौद्धों में प्रज्ञा, तथा इस्लाम में मारिफ नाम से जानते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पराप्राकृतिक तत्वों से संवाद की परम्परा लम्बे समय से रही है। मान्यता है कि यह संवाद, चेतना की विशेष अवस्थाओं, में संभव हैं, और चेतना की इन ऊँचाइयों में जाने की लालसा का प्रमाण तपस्या की अनेकों पद्धतियाँ हैं। पराप्राकृतिक संवाद का लोकहित में प्रसार करना देवकार्य माना गया। मनोवैज्ञानिक पिंकर सहज या अतार्किक मानसिक अनुभव को कोरा रूढ़ीवाद समझते हैं। पर ऐसे वैज्ञानिक भी हैं जिनके लिए यह मानसिक अनुभव चुनौती हैं। मन में ऐसे बदलाव का आधार संज्ञान की दो प्रणालियों, तार्किक और अतार्किक, में देखा जा सकता है। . सेंट फ्रांसिस ने अरेज्जो में राक्षसों का भूत-अपसारण किया; गिओटो द्वारा एक फ्रेस्को पर एक चित्रण में. भूत-प्रेत का अपसारण अर्थात एक्सॉसिज़्म किसी ऐसे व्यक्ति अथवा स्थान से भूतों या अन्य आत्मिक तत्त्वों को निकालने की प्रथा है। जिसके बारे में विश्वास किया जाता है कि भूत ने उसे शपथ दिलाकर अपने वश में कर लिया है। यह प्रथा अत्यंत प्राचीन है तथा अनेक संस्कृतियों की मान्यताओं का अंग रही है। प्राचीन काल से माना जाता है कि इस दुनिया से परे एक और दुनिया होती है और इस दुनियाँ को मौत कि दुनिया के नाम से जाना जाता हे। जैसे हम सब को पता हे कि मौत कि दुनिया मे मृत लोगो कि आत्माएं होती है लेकिन इसके परे इस मौत कि दुनिया मे राक्षस और आध्यत्मिक संस्था का साया भी होता है। लोग जब मरते है तब उनकी आत्मा का उध्धार नहीं होता या इसके विपरीत बहुत सारी शर्ते होती है। जैसे कि अगर कोइ इन्सान एक ऐसी मौत मरा है जिसमें उसको बहुत तक्लीफ हुई हो या फिर बे मौत मारा गया हो तो इस के कारण उस इन्सान का आत्मा उस जगह पर ही रह जाती है और आसानी से उस आत्मा का उद्धर नहि होता, कोइ ऐसे स्थान भी होते हे जिधर से मृत लोगो कि आत्मा उध्दार होता हैं, यह जगह कोइ घना जंगल मे होता हे यातो फिर कोइ सुन्सान जगह में। ऐसे ही जगह से मृत दुनिया से राक्षस और आध्यात्मिक सन्स्था हमारी दुनिया मे प्रवेश करते है, और जीवित इन्सानो कि आत्मा पर शिकार करते हैं और इसी अवस्था मे झाङ-फूँक कि सन्कल्पना आती हैं। झाड़-फूँक राक्षस और आध्यात्मिक सन्स्थाओ का हटाना उत्ना का अभ्यास होता हे। झाड़-फूँक ऐसे लोग या जगह या चीज़ों पर किया जाता हे जो राक्शस या किसी आध्याथ्मिक सन्स्थाओ के अधीन होते हे। झाड़-फूँक ओझा के आध्याथ्मिक विश्वासो के आधार पर किया जाता हे। धर्म के आधार पर झाड़-फूँक के अन्य तरीके होते हे। कुछ ऐसे दर्वाज़े होते हे जो खुल्ने पर बुरे सप्ने हकीकत मे बदल जाते हे। . पराप्राकृतिक संवाद और भूत-प्रेत का अपसारण आम में तीन बातें हैं : मनोविकारविज्ञानी, यूनान, आत्मा। मनोविज्ञानी एक ऐसा चिकित्सक होता है जो मनोरोग का विशेषज्ञ होता है और मानसिक विकारों के उपचार के लिए योग्य होता है।अमेरिकी मनोरोग एसोसिएशन. यूनान यूरोप महाद्वीप में स्थित देश है। यहां के लोगों को यूनानी अथवा यवन कहते हैं। अंग्रेजी तथा अन्य पश्चिमी भाषाओं में इन्हें ग्रीक कहा जाता है। यह भूमध्य सागर के उत्तर पूर्व में स्थित द्वीपों का समूह है। प्राचीन यूनानी लोग इस द्वीप से अन्य कई क्षेत्रों में गए जहाँ वे आज भी अल्पसंख्यक के रूप में मौज़ूद है, जैसे - तुर्की, मिस्र, पश्चिमी यूरोप इत्यादि। यूनानी भाषा ने आधुनिक अंग्रेज़ी तथा अन्य यूरोपीय भाषाओं को कई शब्द दिये हैं। तकनीकी क्षेत्रों में इनकी श्रेष्ठता के कारण तकनीकी क्षेत्र के कई यूरोपीय शब्द ग्रीक भाषा के मूलों से बने हैं। इसके कारण ये अन्य भाषाओं में भी आ गए हैं।ग्रीस की महिलाएं देह व्यापार के धंधे में सबसे आगे है. आत्मा या आत्मन् पद भारतीय दर्शन के महत्त्वपूर्ण प्रत्ययों में से एक है। यह उपनिषदों के मूलभूत विषय-वस्तु के रूप में आता है। जहाँ इससे अभिप्राय व्यक्ति में अन्तर्निहित उस मूलभूत सत् से किया गया है जो कि शाश्वत तत्त्व है तथा मृत्यु के पश्चात् भी जिसका विनाश नहीं होता। आत्मा का निरूपण श्रीमद्भगवदगीता या गीता में किया गया है। आत्मा को शस्त्र से काटा नहीं जा सकता, अग्नि उसे जला नहीं सकती, जल उसे गीला नहीं कर सकता और वायु उसे सुखा नहीं सकती। जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नवीन शरीर धारण करता है। . पराप्राकृतिक संवाद बत्तीस संबंध है और भूत-प्रेत का अपसारण चौंतीस है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक चार.पचपन% है = तीन / । यह लेख पराप्राकृतिक संवाद और भूत-प्रेत का अपसारण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
नोएडा। थाना सेक्टर-49 क्षेत्र के सर्फाबाद गांव में रहने वाले एक युवक ने आज तड़के अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थाना सेक्टर-49 के थानाध्यक्ष गिरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि सर्फाबाद गांव में कमल यादव के मकान में किराये पर रहने वाला अशोक यादव (20 वर्ष) नामक युवक ने आज तड़के अपने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इन्होंने बताया कि मृतक एक कंपनी में काम करता था। पुलिस आत्महत्या के कारणों का पता लगा रही है।
| नोएडा। थाना सेक्टर-उनचास क्षेत्र के सर्फाबाद गांव में रहने वाले एक युवक ने आज तड़के अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना सेक्टर-उनचास के थानाध्यक्ष गिरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि सर्फाबाद गांव में कमल यादव के मकान में किराये पर रहने वाला अशोक यादव नामक युवक ने आज तड़के अपने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इन्होंने बताया कि मृतक एक कंपनी में काम करता था। पुलिस आत्महत्या के कारणों का पता लगा रही है। |
भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। ठंड बढ़ने के साथ ही शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वायु प्रदूषण बढ़ाने में बीसीएलएल की डीजल बसें भी काफी जिम्मेदार हैं। वर्तमान में शहर के 18 रूटों पर 361 बसें दौड़ रही हैं, जिनमें से 291 डीजल वाली हैं। जानकारों का कहना है कि इनके कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर ठंड के दिनों में अधिक दिखाई देता है। डीजल वाली इन बसों की जगह सीएनजी बसों को चलाने की बात कही गई थी, जिसकी शुरुआत कर दी है। लेकिन बीसीएलएल व निगम के अनुसार शहर में ये डीजल बसें 2030 तक दौड़ती रहेंगी।
शहर के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए शहर में अमृत योजना के तहत 300 सीएनजी बसें चलाए जाने की योजना है। इनमें से 70 बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं और इसी के साथ 230 सीएनजी बसों की खरीदी अगले तीन वर्षों में की जाएगी।
हमीदिया रोड पर हर 3 मिनट में एक बस गुजरती है। इनमें 80 फीसदी डीजल बसें दौड़ रही हैं।
कमला पार्क क्षेत्र में 8 मिनट में एक बस गुजरती है। इस हिसाब से यहां से हर घंटे 8 बसें निकलती हैं, जिनमें से 7 डीजल हैं।
आरआरएल से लेकर मंडीदीप तक बीआरटीएस कारीडोर में हर घंटे 7 बसें निकलती हैं, जिनमें से 6 डीजल बसें हैं।
इस महीने के अंत तक 30 सीएनजी बसें और आएंगी। शहर के वातावरण को स्वच्छ बनाने को लेकर नगर निगम तेजी से काम कर रहा है। सीएनजी बसों के चलने से प्रदूषण कम होगा, जिससे शहर का वातावरण स्वच्छ बना रहेगा।
| भोपाल । ठंड बढ़ने के साथ ही शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वायु प्रदूषण बढ़ाने में बीसीएलएल की डीजल बसें भी काफी जिम्मेदार हैं। वर्तमान में शहर के अट्ठारह रूटों पर तीन सौ इकसठ बसें दौड़ रही हैं, जिनमें से दो सौ इक्यानवे डीजल वाली हैं। जानकारों का कहना है कि इनके कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर ठंड के दिनों में अधिक दिखाई देता है। डीजल वाली इन बसों की जगह सीएनजी बसों को चलाने की बात कही गई थी, जिसकी शुरुआत कर दी है। लेकिन बीसीएलएल व निगम के अनुसार शहर में ये डीजल बसें दो हज़ार तीस तक दौड़ती रहेंगी। शहर के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए शहर में अमृत योजना के तहत तीन सौ सीएनजी बसें चलाए जाने की योजना है। इनमें से सत्तर बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं और इसी के साथ दो सौ तीस सीएनजी बसों की खरीदी अगले तीन वर्षों में की जाएगी। हमीदिया रोड पर हर तीन मिनट में एक बस गुजरती है। इनमें अस्सी फीसदी डीजल बसें दौड़ रही हैं। कमला पार्क क्षेत्र में आठ मिनट में एक बस गुजरती है। इस हिसाब से यहां से हर घंटे आठ बसें निकलती हैं, जिनमें से सात डीजल हैं। आरआरएल से लेकर मंडीदीप तक बीआरटीएस कारीडोर में हर घंटे सात बसें निकलती हैं, जिनमें से छः डीजल बसें हैं। इस महीने के अंत तक तीस सीएनजी बसें और आएंगी। शहर के वातावरण को स्वच्छ बनाने को लेकर नगर निगम तेजी से काम कर रहा है। सीएनजी बसों के चलने से प्रदूषण कम होगा, जिससे शहर का वातावरण स्वच्छ बना रहेगा। |
इंदौर में वैलेंटाइन डे से एक दिन पहले 16 साल की नाबालिग का विवाह 13 साल बड़े बॉयफ्रेंड से होने जा रहा था। शादी लड़की की जिद पर पेरेंट्स की मर्जी से हो रही थी। मंडप सजा था और मेहमान जुटे हुए थे, तभी इसकी भनक चाइल्ड-लाइन को लग गई। ऐनवक्त पर हबलानी कैंपस में हो रहे मैरिज फंक्शन में चाइल्ड लाइन और पुलिस की टीम ने पहुंचकर शादी रूकवा दी। लड़की ने टीम को कहा कि मत होने दो शादी, वह बॉयफ्रेंड के साथ लिवइन में रहेंगी। आखिरकार सगाई कराकर सभी को लौटा दिया गया।
टीम ने परिवार को भी हिदायत दी कि जब तक लड़की की उम्र शादी लायक नहीं हो जाती, तब तक शादी नहीं कराएं। लड़की के पेरेंट्स ने भी लव मैरिज की थी। बता दें कि 29 साल के बॉयफ्रेंड से लड़की का रिलेशनशिप 2 साल से चल रहा है। उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से शादी कर रही है।
टीम ने लड़की को बताया कि उसकी शादी अभी नहीं हो सकती। उसे इसके लिए बालिग होने तक इंतजार करना पड़ेगा। लड़की शादी की जिद पर अड़ी थी। टीम ने हबलानी कैंपस के संचालक और शादी में खाना बनाने वालों से लेकर वेटर तक पर जुर्माना लगाने की बात कही तो उन्होंने भी सर्विस देने से इनकार कर दिया।
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| इंदौर में वैलेंटाइन डे से एक दिन पहले सोलह साल की नाबालिग का विवाह तेरह साल बड़े बॉयफ्रेंड से होने जा रहा था। शादी लड़की की जिद पर पेरेंट्स की मर्जी से हो रही थी। मंडप सजा था और मेहमान जुटे हुए थे, तभी इसकी भनक चाइल्ड-लाइन को लग गई। ऐनवक्त पर हबलानी कैंपस में हो रहे मैरिज फंक्शन में चाइल्ड लाइन और पुलिस की टीम ने पहुंचकर शादी रूकवा दी। लड़की ने टीम को कहा कि मत होने दो शादी, वह बॉयफ्रेंड के साथ लिवइन में रहेंगी। आखिरकार सगाई कराकर सभी को लौटा दिया गया। टीम ने परिवार को भी हिदायत दी कि जब तक लड़की की उम्र शादी लायक नहीं हो जाती, तब तक शादी नहीं कराएं। लड़की के पेरेंट्स ने भी लव मैरिज की थी। बता दें कि उनतीस साल के बॉयफ्रेंड से लड़की का रिलेशनशिप दो साल से चल रहा है। उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से शादी कर रही है। टीम ने लड़की को बताया कि उसकी शादी अभी नहीं हो सकती। उसे इसके लिए बालिग होने तक इंतजार करना पड़ेगा। लड़की शादी की जिद पर अड़ी थी। टीम ने हबलानी कैंपस के संचालक और शादी में खाना बनाने वालों से लेकर वेटर तक पर जुर्माना लगाने की बात कही तो उन्होंने भी सर्विस देने से इनकार कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
आषाढ़ माह की शुक्ल त्रयोदशी को जसोलधाम स्थित माता राणी भटियाणी मंदिर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। जसोलधाम में दूरदराज से पैदल यात्रियों के जत्थे आए।
हाथों में ध्वज पताका लिए ढोल नगाड़ों के साथ झूमते, नाचते, गाते माजीसा के दर्शनों को लेकर जसोल धाम मंदिर पहुंचे। अल सवेरे से ही मंदिर में दर्शनार्थियों के आवागमन का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दिन चढ़ने के साथ साथ बढ़ता ही गया, श्रद्धालुओं ने घंटों प्रतीक्षा के बाद आई बारी पर मां के दरबार में शीश झुकाते हुए परिवार व खुशहाली की कामना की।
त्रयोदशी के शुभ अवसर पर कई नवविवाहित जोड़ों ने छेड़ा बंदी बांधकर सुखी दांपत्य जीवन की कामना को लेकर मां के दरबार में जात लगाई। त्रयोदशी को ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां की मंगल आरती कर परिवार में खुशहाली की कामना की। माता राणी भटियाणी की प्रतिमा को नव वस्त्र व आभूषण से श्रृंगारित किया गया। मां के जानकारों से पूरे दिन मंदिर का माहौल भक्तिमय रहा।
झूमते गाते संघ के साथ पहुंचे श्रद्धालु माजीसा के दर्शन के लिए राजस्थान व गुजरात के कई हिस्सों से लंबी दूरी तय कर पैदल जत्थों के रूप में मंदिर पहुंचे। डीजे साउंड पर माजीसा के भजनों पर झूमते नाचते श्रदालु माजीसा की भक्ति में रंगे नजर आए। मंदिर पहुंचते ही माजीसा की प्रतिमा के समक्ष नतमस्तक होकर शीश नवाया व परिवार में खुशहाली की मंगल कामना की।
श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान की ओर से दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए सुरक्षा व जल की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी तथा संस्थान सुरक्षाकर्मियों की गश्त का दौर लगातार जारी रहा। इसको लेकर भक्तों ने ट्रस्ट की ओर से किए गए व्यापक बंदोबस्त कार्यों की सराहना की।
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| आषाढ़ माह की शुक्ल त्रयोदशी को जसोलधाम स्थित माता राणी भटियाणी मंदिर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। जसोलधाम में दूरदराज से पैदल यात्रियों के जत्थे आए। हाथों में ध्वज पताका लिए ढोल नगाड़ों के साथ झूमते, नाचते, गाते माजीसा के दर्शनों को लेकर जसोल धाम मंदिर पहुंचे। अल सवेरे से ही मंदिर में दर्शनार्थियों के आवागमन का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दिन चढ़ने के साथ साथ बढ़ता ही गया, श्रद्धालुओं ने घंटों प्रतीक्षा के बाद आई बारी पर मां के दरबार में शीश झुकाते हुए परिवार व खुशहाली की कामना की। त्रयोदशी के शुभ अवसर पर कई नवविवाहित जोड़ों ने छेड़ा बंदी बांधकर सुखी दांपत्य जीवन की कामना को लेकर मां के दरबार में जात लगाई। त्रयोदशी को ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां की मंगल आरती कर परिवार में खुशहाली की कामना की। माता राणी भटियाणी की प्रतिमा को नव वस्त्र व आभूषण से श्रृंगारित किया गया। मां के जानकारों से पूरे दिन मंदिर का माहौल भक्तिमय रहा। झूमते गाते संघ के साथ पहुंचे श्रद्धालु माजीसा के दर्शन के लिए राजस्थान व गुजरात के कई हिस्सों से लंबी दूरी तय कर पैदल जत्थों के रूप में मंदिर पहुंचे। डीजे साउंड पर माजीसा के भजनों पर झूमते नाचते श्रदालु माजीसा की भक्ति में रंगे नजर आए। मंदिर पहुंचते ही माजीसा की प्रतिमा के समक्ष नतमस्तक होकर शीश नवाया व परिवार में खुशहाली की मंगल कामना की। श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान की ओर से दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए सुरक्षा व जल की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी तथा संस्थान सुरक्षाकर्मियों की गश्त का दौर लगातार जारी रहा। इसको लेकर भक्तों ने ट्रस्ट की ओर से किए गए व्यापक बंदोबस्त कार्यों की सराहना की। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
जीवन का आधार जल, गुरु महिमा, श्रवण कुमार अब कहां ? वर्षा ऋतु के व्यंजन, सम्पादकीय सहित राज्यों के समाचार, कहानी आदि विषय वस्तु पत्रिका को सम्पूर्ण व समृद्ध बनाती है.
जीवन का आधार जल, गुरु महिमा, श्रवण कुमार अब कहां ? वर्षा ऋतु के व्यंजन, सम्पादकीय सहित राज्यों के समाचार, कहानी आदि विषय वस्तु पत्रिका को सम्पूर्ण व समृद्ध बनाती है.
लोग कहते हैं श्वेत-श्याम चित्रों का जमाना अब लद चुका है। चारों तरफ रंगीनी ही रंगीनी है। लेकिन चित्र रंगीन होते-होते कब श्वेत-श्याम में फरिवर्तित हो जाए इसे कौन जानता है? अब दक्षिण के ही दो चैनलों को देख लीजिए। कन्निमोझी कैसे चैनल को खड़ा करने के चक्कर में खुद फंस गईं। चैनल रंगीन बना रहा, लेकिन कन्निमोझी की छवि श्वेत-श्याम हो गई।
किसी फिल्म के फ्रमोशन की शुरुआत के लिये उचित समय क्या हो यह फ्रश्न वैसे तो आसान सा नजर आता है फरंतु है वास्तव में कठिन और इसका उत्तर कालानुरूफ और फरिस्थितिवश बदलता भी है।
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहाकार परिषद ने हाल में साम्प्रदायिक हिंसा पर प्रस्तावित कानून का एक मसौदा जारी किया है। यह प्रारूप जनचर्चा के लिए पेश है।
इस आलेख के शीर्षक फर ही कुछ लोगों की भौंहें तन सकती हैं। इस वर्ग के लोगों की राय में एक बार तो आज़ादी मिल चुकी है, अब यह दूसरी आज़ादी क्या है? यह वर्ग इसे या तो शब्दजंजाल मानता है या महज राजनीतिक फैंतरेबाजी का नारा। लेकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है। फहली आज़ादी तो 1947 में मिली और वह राजनीतिक आज़ादी थी।
भांप के छल्लों से फूरे रसोईघर में गर्माहट थी। विभिन्न फकवानों की गंध शरीर में समा रही थी। एकदम फवित्रता, उत्साह, हल्कापन महसूस होने लगा। हर सांस एकदम तलुए तक जाकर फिर लौटने लगी। कानों केें किनारे भी किंचित गर्म हो गए। बालों में भी मामूली गीलापन आ गया। थोड़ी भांफ छंटने के बाद रसोइये, अन्य कर्मचारी स्वच्छ, गंभीर और आश्वासक देवदूत जैसे दिखाई देने लगे।
उन्नसवीं सदी के मध्य काल संगीत नाटकों का काल माना जाता है। मराठी रंगमंच ने बाल गंधर्व के रूप में ऐसा कलाकार दिया जिसका जादू आज भी कम नहीं हुआ है। उनकी स्त्री भूमिकाएं इतनी सजीव हुआ करती थीं कि महिलाओं में उन्हीं की शैली फैशन बन जाती थी। हाल में उन पर मराठी में एक फिल्म भी बनी है।
भारत एक धर्मप्राण देश है। यहां के जनजीवन में व्रत-पर्वोत्सव का बड़ा महत्व है। वर्ष के आद्य मास चैत्र से शुरू होकर अंतिम मास फाल्गुन तक अनेक व्रत आते हैं, जिन्हें पूरा परिवार-समाज निष्ठा और आस्था के साथ मनाता है।
फूनम फांडे को आफ अल्फावधि में ही भूल गये होंगे ना? मुंबई के उर्फेागरों में लगे अमिषा फटेल के होर्डिंग भी हट गये हैं। अर्फेी शारीरिक सुंदरता के फ्रदर्शन हेतु किये गये फोटोसेशन के दौरान विभिन्न चैनलों की 'नजर' सोफिया चौधरी फर फडने से उसकी हसरत भी फूरी हो गयी।
मध्य युग में उत्तरी भारत के किसानों के सर्वप्रिय मौसमी विज्ञानी कवि घाघ और भड्डरी थे। आज भी उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण जनों में घाघ की तथा पंजाब और राजस्थान में भड्डरी की कहावतें प्रचलित हैं।
विश्व सिंधी कांग्रेस सिंधियों की अस्मिता के लिए बरसों से आंदोलन चला रही है। 'जिये सिंध की महज' नामक संगठन ने 1971 में फाकिस्तान से मुक्ति के लिए 'जिये सिंध' आंदोलन भी चलाया था, जो समय के साथ ठण्डा फड़ गया है; लेकिन सिंधियों की अस्मिता की खोज कभी खत्म नहीं हुई।
| जीवन का आधार जल, गुरु महिमा, श्रवण कुमार अब कहां ? वर्षा ऋतु के व्यंजन, सम्पादकीय सहित राज्यों के समाचार, कहानी आदि विषय वस्तु पत्रिका को सम्पूर्ण व समृद्ध बनाती है. जीवन का आधार जल, गुरु महिमा, श्रवण कुमार अब कहां ? वर्षा ऋतु के व्यंजन, सम्पादकीय सहित राज्यों के समाचार, कहानी आदि विषय वस्तु पत्रिका को सम्पूर्ण व समृद्ध बनाती है. लोग कहते हैं श्वेत-श्याम चित्रों का जमाना अब लद चुका है। चारों तरफ रंगीनी ही रंगीनी है। लेकिन चित्र रंगीन होते-होते कब श्वेत-श्याम में फरिवर्तित हो जाए इसे कौन जानता है? अब दक्षिण के ही दो चैनलों को देख लीजिए। कन्निमोझी कैसे चैनल को खड़ा करने के चक्कर में खुद फंस गईं। चैनल रंगीन बना रहा, लेकिन कन्निमोझी की छवि श्वेत-श्याम हो गई। किसी फिल्म के फ्रमोशन की शुरुआत के लिये उचित समय क्या हो यह फ्रश्न वैसे तो आसान सा नजर आता है फरंतु है वास्तव में कठिन और इसका उत्तर कालानुरूफ और फरिस्थितिवश बदलता भी है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहाकार परिषद ने हाल में साम्प्रदायिक हिंसा पर प्रस्तावित कानून का एक मसौदा जारी किया है। यह प्रारूप जनचर्चा के लिए पेश है। इस आलेख के शीर्षक फर ही कुछ लोगों की भौंहें तन सकती हैं। इस वर्ग के लोगों की राय में एक बार तो आज़ादी मिल चुकी है, अब यह दूसरी आज़ादी क्या है? यह वर्ग इसे या तो शब्दजंजाल मानता है या महज राजनीतिक फैंतरेबाजी का नारा। लेकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है। फहली आज़ादी तो एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में मिली और वह राजनीतिक आज़ादी थी। भांप के छल्लों से फूरे रसोईघर में गर्माहट थी। विभिन्न फकवानों की गंध शरीर में समा रही थी। एकदम फवित्रता, उत्साह, हल्कापन महसूस होने लगा। हर सांस एकदम तलुए तक जाकर फिर लौटने लगी। कानों केें किनारे भी किंचित गर्म हो गए। बालों में भी मामूली गीलापन आ गया। थोड़ी भांफ छंटने के बाद रसोइये, अन्य कर्मचारी स्वच्छ, गंभीर और आश्वासक देवदूत जैसे दिखाई देने लगे। उन्नसवीं सदी के मध्य काल संगीत नाटकों का काल माना जाता है। मराठी रंगमंच ने बाल गंधर्व के रूप में ऐसा कलाकार दिया जिसका जादू आज भी कम नहीं हुआ है। उनकी स्त्री भूमिकाएं इतनी सजीव हुआ करती थीं कि महिलाओं में उन्हीं की शैली फैशन बन जाती थी। हाल में उन पर मराठी में एक फिल्म भी बनी है। भारत एक धर्मप्राण देश है। यहां के जनजीवन में व्रत-पर्वोत्सव का बड़ा महत्व है। वर्ष के आद्य मास चैत्र से शुरू होकर अंतिम मास फाल्गुन तक अनेक व्रत आते हैं, जिन्हें पूरा परिवार-समाज निष्ठा और आस्था के साथ मनाता है। फूनम फांडे को आफ अल्फावधि में ही भूल गये होंगे ना? मुंबई के उर्फेागरों में लगे अमिषा फटेल के होर्डिंग भी हट गये हैं। अर्फेी शारीरिक सुंदरता के फ्रदर्शन हेतु किये गये फोटोसेशन के दौरान विभिन्न चैनलों की 'नजर' सोफिया चौधरी फर फडने से उसकी हसरत भी फूरी हो गयी। मध्य युग में उत्तरी भारत के किसानों के सर्वप्रिय मौसमी विज्ञानी कवि घाघ और भड्डरी थे। आज भी उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण जनों में घाघ की तथा पंजाब और राजस्थान में भड्डरी की कहावतें प्रचलित हैं। विश्व सिंधी कांग्रेस सिंधियों की अस्मिता के लिए बरसों से आंदोलन चला रही है। 'जिये सिंध की महज' नामक संगठन ने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में फाकिस्तान से मुक्ति के लिए 'जिये सिंध' आंदोलन भी चलाया था, जो समय के साथ ठण्डा फड़ गया है; लेकिन सिंधियों की अस्मिता की खोज कभी खत्म नहीं हुई। |
लखनऊ के जानकीपुरम थाने में एक नाबालिग लड़की ने 19 मई को अगवा कर सामूहिक दुराचार करने की एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस आरोपित को पकड़ लाई। पर, इस मामले ने तब नया मोड़ ले लिया ।
लखनऊ के जानकीपुरम थाने में एक नाबालिग लड़की ने 19 मई को अगवा कर गैंगरेप करने की एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस आरोपित को पकड़ लाई। पर, इस मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब पीड़िता ने धारा 161 के तहत दर्ज कराये बयान में इस आरोपित को निर्दोष बता दिया। इसके बाद पीड़िता की मां ने दूसरे लड़के को आरोपित बताते हुए थाने में दूसरी तहरीर दे दी। इतना ही नहीं पीड़िता और मां ने कई बार बयान बदले। इसी दौरान आरोपित पक्ष ने पीड़िता की मां का एक वीडियो वायरल कर दिया जिसमें वह रिपोर्ट न लिखाने के लिये एक लाख 30 हजार रुपये देने को कह रही है। वहीं एसीपी अलीगंज का कहना है कि पड़ताल में लड़की और आरोपित के बीच दोस्ती की बात सामने आयी है। सामूहिक दुराचार की पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल करा लिया गया है। कोर्ट में बयान दर्ज कराया जायेगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकीपुरम में केन्द्रीय बिहार कालोनी के पास रहने वाली पीड़िता की मां ने पहली तहरीर में रेहान नाम के युवक पर आरोप लगाया कि वह उसकी बेटी को अगवा कर ले गया। फिर उसे नशीला पदार्थ सुंघा कर उसने व दोस्तों ने रेप किया। उसे जब होश आया तो वह मौरंग के ढेर पर मिली। पुलिस ने इस पर रेहान को पकड़ लिया। एसीपी अलीगंज आशुतोष कुमार का कहना है कि जब पीड़िता का बयान लिया गया तो उसने नूर आलम के लड़के को आरोपित बताया। इतना ही नहीं उसकी मां ने दूसरी तहरीर भी नूर आलम व उसके साथियों के खिलाफ दे दी। यह तहरीर कुछ लोगों ने वायरल भी कर दी। एसीपी ने इस तहरीर में लगे आरोपों की जांच की। इसमें बनाये गये दो आरोपितों को थाने भी बुला लिया गया।
पुलिस ने जब पीड़िता के बयान लिये तो उसने एक और नाम फिर बताया। उसने कहा कि उसे भोला नाम का युवक बहला फुसला कर ले गया था। इस दौरान एसीपी और इंस्पेक्टर ने पीड़िता से पूछताछ की। इस दौरान उसने अपनी मां को बताया कि उसकी रेहान नाम के लड़के से दोस्ती है। वह उसके साथ खुद गई थी। मां ने डांटा तो उसने फिर नूर आलम का नाम लेना शुरू कर दिया। 21 मई की शाम तक थाने में ऐसी ही पंचायत होती रही।
जानकीपुरम इंस्पेक्टर बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। लड़की का मेडिकल कराया गया है। इसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एसीपी अलीगंज ने बताया कि अब पीड़िता का कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया जायेगा। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जायेगी।
| लखनऊ के जानकीपुरम थाने में एक नाबालिग लड़की ने उन्नीस मई को अगवा कर सामूहिक दुराचार करने की एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस आरोपित को पकड़ लाई। पर, इस मामले ने तब नया मोड़ ले लिया । लखनऊ के जानकीपुरम थाने में एक नाबालिग लड़की ने उन्नीस मई को अगवा कर गैंगरेप करने की एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस आरोपित को पकड़ लाई। पर, इस मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब पीड़िता ने धारा एक सौ इकसठ के तहत दर्ज कराये बयान में इस आरोपित को निर्दोष बता दिया। इसके बाद पीड़िता की मां ने दूसरे लड़के को आरोपित बताते हुए थाने में दूसरी तहरीर दे दी। इतना ही नहीं पीड़िता और मां ने कई बार बयान बदले। इसी दौरान आरोपित पक्ष ने पीड़िता की मां का एक वीडियो वायरल कर दिया जिसमें वह रिपोर्ट न लिखाने के लिये एक लाख तीस हजार रुपये देने को कह रही है। वहीं एसीपी अलीगंज का कहना है कि पड़ताल में लड़की और आरोपित के बीच दोस्ती की बात सामने आयी है। सामूहिक दुराचार की पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल करा लिया गया है। कोर्ट में बयान दर्ज कराया जायेगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जानकीपुरम में केन्द्रीय बिहार कालोनी के पास रहने वाली पीड़िता की मां ने पहली तहरीर में रेहान नाम के युवक पर आरोप लगाया कि वह उसकी बेटी को अगवा कर ले गया। फिर उसे नशीला पदार्थ सुंघा कर उसने व दोस्तों ने रेप किया। उसे जब होश आया तो वह मौरंग के ढेर पर मिली। पुलिस ने इस पर रेहान को पकड़ लिया। एसीपी अलीगंज आशुतोष कुमार का कहना है कि जब पीड़िता का बयान लिया गया तो उसने नूर आलम के लड़के को आरोपित बताया। इतना ही नहीं उसकी मां ने दूसरी तहरीर भी नूर आलम व उसके साथियों के खिलाफ दे दी। यह तहरीर कुछ लोगों ने वायरल भी कर दी। एसीपी ने इस तहरीर में लगे आरोपों की जांच की। इसमें बनाये गये दो आरोपितों को थाने भी बुला लिया गया। पुलिस ने जब पीड़िता के बयान लिये तो उसने एक और नाम फिर बताया। उसने कहा कि उसे भोला नाम का युवक बहला फुसला कर ले गया था। इस दौरान एसीपी और इंस्पेक्टर ने पीड़िता से पूछताछ की। इस दौरान उसने अपनी मां को बताया कि उसकी रेहान नाम के लड़के से दोस्ती है। वह उसके साथ खुद गई थी। मां ने डांटा तो उसने फिर नूर आलम का नाम लेना शुरू कर दिया। इक्कीस मई की शाम तक थाने में ऐसी ही पंचायत होती रही। जानकीपुरम इंस्पेक्टर बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। लड़की का मेडिकल कराया गया है। इसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एसीपी अलीगंज ने बताया कि अब पीड़िता का कोर्ट में धारा एक सौ चौंसठ के तहत बयान दर्ज कराया जायेगा। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जायेगी। |
है, जिसपर कौण्डिन्यकृत पंचार्थी भाष्य है। इसके अनुसार पाँच पदार्थ है-कार्य, कारण, योग, विधि और दुःखान्त । जीव और जनको कार्य कहते है । परमात्माको कारण कहा जाता है। इसकी शास्त्रीय गंज्ञा पति है, जैसे जीवकी पशु है और जड़की पाढा है । चित्त द्वारा पशु और पति के संयोगको योग कहते है । पतिको प्राप्त करानेवाले मार्गको विधि कहते है । साध्वका पतिवी पूजाके समय हॅसना, गाना, नाचना, जीभ और तालुके संयोगसे वैलकी आवाजको समान हुडहुड शब्द करना, नमस्कार आदि करना विधि है। दुःखोकी आत्यन्तिक निवृत्ति दुःखान्त या मोक्ष है। स्पष्ट है कि पाशुपतमत भी कापालिकों और कालामुखोके मतकी भाँति अतिमागी है ।
शैव सिद्धान्तके मान्य ग्रन्थ तमिलमें है। इसमे पति, पशु और पाश, इन तीन परम तत्त्वोको माना गया है । पनि ईश्वर है । जीत्र पशु है, वह अज्ञ और अणु है । पाश चार प्रकारको है - मल, कर्म, माया और रोधशक्ति । पशुपतिके शक्तिपातमॆ, अर्थात् अनुग्रहसे, पाशरहित होता है । यही उसकी मुक्तावस्था है । काश्मीर शैवमत अद्वैतवाद है । इरामे और अद्वैतवेदान्तमे इतना अन्तर है कि अद्वैतवादके ब्रह्म में कर्तृत्व नही है, जब कि काश्मीर शैवमतके परमेश्वरभे हैं । अद्वैतवाद ज्ञानमार्ग है, उसमे भक्तिका समन्वय ज्ञानसे नहीं होता है। काश्मीर शैवमत में ज्ञान और भक्तिका समन्वय है। काश्मीर शैवमत विवर्तवाद और परिणामवाद न मानकर स्वातन्त्र्यवाद या आभासवाद मानता है, जिसके अनुसार परमेश्वरकी स्वातन्त्र्य शक्तिको कारण बिना बिम्बके ही जगद् पका प्रतिबिम्ब स्वतः उत्पन्न होता है ।
काश्मीर धैवमतकी दो शाखाएँ है - स्पन्दशास्त्र और प्रत्यभिज्ञाशास्त्र । पहले के मुख्य ग्रन्थ वसुगुप्तके 'शिवसूत्र' 'और स्पन्दकारिका' है, दूसरेके सोमानन्दकृत 'शिवदृष्टि', उत्पलाचार्यकृत 'ईश्वरप्रत्यभिज्ञाकारिका' और अभिनवगुप्तरचित 'ईश्वरप्रत्यभिज्ञाकारिकाविमर्शिणी' और 'तन्त्रालोक' है । दोनों शाखाओका तत्त्ववाद एक ही है, जो शाक्त तत्त्ववादसे बिलकुल मिलता-जुलता है। दोनोंमे अन्तर यह है कि स्पन्द्रमतने ईश्वराद्वयकी अनुभूतिका मार्ग ईश्वर दर्शन और तद्वारा मलनिवारण है, जब कि प्रत्यभिज्ञामतने चह मार्ग ईश्वर के रूपमे अपनी ही प्रत्यभिज्ञा है। दोनोंके दर्शनको त्रिकदर्शन या ईश्वराद्वयवाद भी कहते हैं ।
वीर शैवमतका संस्थापक बसब है । इस मतके मान्य ग्रन्थ ब्रह्मसूत्रार 'श्रीकरभाष्य' और 'सिद्धान्तशिखामणि' हैं। इसकी दार्शनिक दृष्टि विशिष्टाद्वैतवाद (३०) है । इसमे स्थूलचिदचिच्छक्ति विशिष्टजीव और सूक्ष्म चिदचिद् विशिष्ट शिवका अद्वैत है। परम तत्व शिव पूर्णहन्तारूप या पूर्णस्वातन्त्र्यरूप है। उनकी परिभाषिकी संज्ञा 'स्थल' है। इस मतको लिंगायत भी कहते हैं, क्योकि इसके अनुयायी शिवलिंग पूजते हैं और पहने भी रहते है।
शैवों और वैष्णवोमे हिन्दी के उद्गमके समय में बड़ा द्वन्द्व युद्ध चलता था । हिन्दी साहित्यको इस वातका श्रेय है कि उसने इनके द्वन्द्वको समाप्त कर दिया और शिव तथा विष्णुको अनन्य ठहराया । गोस्वामी तुलसीदासने इस
कार्यको बड़े दायित्वपूर्ण ढंगसे निभाया । सभी शैव सम्प्रदायोम कश्मीर शैवमतका ही अधिक प्रभाव हिन्दीपर लक्षित होता है। ज्ञान और भक्ति तथा कर्मकें समन्वयका सिद्धान्त हिन्डीके सगुण सन्तोको ही नहीं, वरन् आजतक के अधिकांश हिन्दीके भक्तोको मान्य है, इसका बहुत कुछ कारण कश्मीर शैवमत हैं। वर्तमान युगमे अभिनवगुप्त के धननिवादका हिन्दीके आलोचना साहित्यपर पर्याप्त प्रभाव पडा है । स्वदेशी सौन्दर्यशास्त्र अभी अभिनवगुप्तके सिद्धान्तसे आगे नहीं बढ़ा है, यह कहनेमे जरा-सी भी अतिशयोक्ति नहीं जान पड़ती। इस सौन्दर्य शास्त्रकी दार्शनिक पृष्ठभूमि कश्मीर शैवमत है। है (दे० 'शक्तिमत' ) ।
[सहायक ग्रन्थ - वैष्णविज्म, शैविज्म एण्ड माइनर रिलीजन्स : रामकृष्ण गोपाल भण्डारकर; राधाकृष्णन् सम्पादित : हिस्ट्री ऑव फिलॉसफी, ईस्टर्न ऐण्ड वेस्टर्न, प्रथम भाग : भारतीय दर्शन : बलदेव उपाध्याय । ] शैवागम- दशैवमतके प्रतिपादक शास्त्र । उपागमोंको लेकर इनकी संख्या २०० तक पहुंचती है। इनकी रचना सातवी शती ईसा के पूर्व हो चुकी थी। इन्हींका कालान्तरमे तमिल शैव, वीर शैव और कश्मीर शैवमतोमें विकास हुआ । अनुश्रुतिके अनुसार इनका महत्त्व निगम अर्थश्रुति से कम नहीं है, पर कुछ लोगोका यह भी मत है कि ये मोइशास्त्र है । यह निर्विवाद सत्य है कि शैव उपासना प्राचीनतम उपासनाओं में है और भारतीय जीवनपर इसका बहुत ही व्यापक और गहरा प्रभाव पड़ा है। कहा जाता है, ये ग्रन्थ शिव और दुर्वासाको स्फुरित कराये गये है । इनमे मुख्य है-"मालनीविश्वास', 'स्वच्छन्द्र', 'विज्ञान-भैरव', 'उच्छुष्मभैरव', 'आनन्द-भैरव', 'मृगेन्द्र', 'मातंग', 'नेत्र', 'नैःश्वास', 'स्वयम्भू', 'रुद्रयागल' और 'कामिका' । मूलतः ये द्वैतप्रतिपादक है, किन्तु बादमे उन्हीकी अद्वैतवादी व्याख्या वसुगुप्त और उनके परवर्ती कश्मीरके दार्शनिकोने प्रस्तुत की । इन आगमशास्त्रोंका भारतीय साहित्य और कलापर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है । कालिदासके तीनो नाटकोके मंगलश्लोक स्पष्टतया शैवागमसे प्रेरणा ग्रहण करके लिखे गये है । नाटक, नृत्य, शिल्प, वास्तु, चित्र, संगीत, शब्दशास्त्र, योग-शास्त्र, न्याय-शास्त्र, सांख्य-वैशेषिक के सभी क्षेत्रों में आरम्भमे शैवागमोंका गहरा प्रभाव था। इसका कारण लोकविश्वास के साथ शैवागमोकी समरसता थी । इसीलिए धीरे-धीरे इनकी गणना वेदोंके समकक्ष होने लगी और मध्ययुगके उत्तरार्द्धतक पहुँचते-पहुँचते तो निगम और आगम एक से, स्वतःप्रामाण्ययुक्त हो गये । इन आगमग्रन्थोके अनुसार ३६ तत्त्व होते है । २४ तत्त्व तो सांख्यके ही ज्योके त्यो है; इनके अलावा ७ मिश्र तत्त्व - काल, नियति, कला, विद्या, राग, अशुक्रमाया और प्रकृतिमाया तथा ५ शुद्ध तत्त्व - शिव, शक्ति, सदाशिव, ईश्वर और शुद्ध विद्या - ये कुल ३६ तत्त्व गिनाये गये हैं। - वि०नि० मि०
शोक - करुण रसका स्थायी भाव शोक है । भरतका कथन है कि- "शोको नाम इंष्टजन वियोगविभवनाशवधबन्धनदुःखानुभवनादिभिर्विभावैरुत्पद्यते" (ना० शा०, ७ः १०ग),
अर्थात् इष्ट जनका वियोग, विभवका नाश, किसी प्रिय व्यक्तिके वध अथवा कारावासजन्य दुःख इत्यादि कारणोंसे शोक उत्पन्न होता है । साहित्यदर्पणकारने इसीसे मिलतीजुलती परिभाषा दी है - "इष्टनाशादिभिश्चेतोवैक्लव्यं शोकाशब्दभाक" (३ : १७७), अर्थात् प्रिय वस्तुके नाश इत्यादि के कारण उत्पन्न चित्तकी विकलताको शोक कहते है। 'इष्ट जनवियोग मे वियोगकी बात समझ लेनी चाहिये । स्त्री-पुरुषके वियोगमे, जबतक प्रेमपात्रके जीवित होनेका ज्ञान हो, तबतक व्याकुलतासे पुष्ट किये हुए रतिकी ही प्रधानता होती है । अतएव वहाँ 'विप्रलम्भ' शृगार होता है और उस समयकी विकलता 'व्यभिचारी' भावमात्र ही है । ऐसे प्रसंगोंमे शोक स्थायी नही माना जाता । लेकिन यदि प्रेमपात्रके मरनेका ज्ञान हो जाय, तो वह व्याकुलता शोक ही होगी और वहाँ करुण रस ही माना जायगा । इस दृष्टिसे 'रसतरंगिणी' की यह परिभाषा उपादेय है - "इष्ट विश्लेषजनितो रत्यनालिगितः परिमितो मनोविकारः शोकः" । यहाँ एक बातकी ओर ध्यान आकृष्ट होना वांछनीय है । आधुनिक मनोविज्ञानियोने शोक एवं आनन्द, दोनोको मूल भाव माना है । लेकिन हमारे आचार्योंने शोकको स्थायी भावोमें गृहीत किया है और आनन्दको नही । इसका सुन्दर समाधान रामचन्द्र शुक्लने किया है - " जिस भावकी व्यंजनासे श्रोता या दर्शक के चित्तमे भी आलम्बनको प्रति वही भाव साधारण्याभिमानसे उपस्थित हो सकता है, उसीको रसका प्रवर्तक मानकर आचार्योने प्रधान भावको कोटिमे रखा है", अर्थात् शोकका आलम्बन ऐसा होता है कि वह मनुष्यमात्रको क्षुब्ध कर सकता है, लेकिन किसीके आनन्दोत्सवमे उन्हीका हृदय पूर्ण योग देता है, जिनसे उनका लगाव या प्रेम होता है । इसीसे आनन्दको रसका प्रवर्तक भाव (स्थायी) न मानकर, हर्षको केवल व्यभिचारी भावोमे गृहीत किया है। सर्वजनसुलभ आस्वाद्यता ही वस्तुतः स्थायी भावकी कसौटी है । व्याधि, ग्लानि, मोह, स्मृति, दैन्य, चिन्ता, उन्माद इत्यादि शोक स्थायीके संचारी भाव है । उदा० - "दुखकी दीवारोका बन्दी निरख सका न सुखी जीवन । सुखके मादक स्वप्नोतकसे बनी रही मेरी अनवन" ( हरिकृष्ण प्रेमी) । यहाँ शोक-भावकी व्यंजना है, स्थायी (करुण रस ) का प्रस्फुटन नहीं हो सका है । - २० ति० शोभ - दे० 'अयलज अलंकार', पहला प्रकार तथा 'सात्त्विक गुण' (नायक) ।
श्रम - प्रचलित तैंतीसमेसे एक सचारी भाव । भरतके आधारपर विश्वनाथने इसकी व्याख्या करते हुए लिखा है - "खेदो रत्यध्वगत्यादेः श्वासनिद्रादिकृच्छ्रमः" (सा० द०, ३ : १४६), अर्थात् रति और मार्ग चलने आदिसे उत्पन्न खेदका नाम श्रम है । श्वासका चढ़ना, निद्रा आदि इसके अनुभाव है । इसी परम्परामे हिन्दीके रीतिकालीन आचार्योंने श्रमका लक्षण दिया है - "अति रति अविगतिते जहाँ उपजै अति तन स्वेद" (भाव० : संचारी० ) । रामचन्द्र शुक्लने श्रमके दो अर्थ माने है - एक तो व्यापाराधिक्य या किसी क्रियाका निरन्तर साधन दूसरा उससे उत्पन्न अंगग्लानि या थकावट । दूसरा अर्थ ही विश्वनाथने ग्रहण
शोभ- श्रावकयान
किया है। रामचन्द्र शुक्लने अपने अर्थगर जोर देते हुए कहा है - "किसीके प्रेममे यदि कोई दौड-धूप करे, विद्याकी प्राप्तिके लिए रात-दिन बैठकर पढता रहे, गडा हुआ खजाना पाने के लिए दिनभर मिट्टी खोदता रहे तो उसका यह दौडना धूपना, रात-रातभर बैठना या दिनभर मिट्टी खोदना क्रमशः व्यक्ति, विद्या या धनके प्रति रति भावका संचारी कहा जा सकता है । पर इस ढौड-धूपके कारण यदि कोई थककर बैठ जाय या रातभर मेहनत करनेसे शिथिल हो जाय तो यह थकान या शिथिल होना रति भावसे दूर पड जाने के कारण संचारी नहीं कहा जा सकता" (र० मी०, २३०) ।
किसी प्रकारकी थकावटको भी मंचारीके अन्तर्गत तभी तभी माना जायगा, जब वह मीधे किसी भावसे सम्बद्ध हो । स्थायी भावकी दशामे जो श्रमजन्य थकावट उत्पन्न होगी वह मंचारीके अन्तर्गत नहीं रखी जा सकती । स्वतन्त्र रूपमे जब श्रमका वर्णन होता है तब भी वह मौकुमार्य आदिका योतक होनेके कारण अत्यन्त प्रभावशाली होता है । रामचन्द्र शुक्लने इस प्रकार के भावरूप श्रमका बहुत ही मनोरम उदाहरण उपस्थित किया है - "जलको गये लक्खन है लरिका परिखौ पिय छॉह घरीक है ठढे । पोंछि पसेउ बयारि करौ अरु पॉय पखारिहौ मूभुरि डाढे । तुलसी रघुवीर प्रिया श्रम जानिकै बैठि विलम्बलौ कंटक काढे । जानकी नाहको नेह लख्यो पुलको तन बारि बिलोचन बाढे" (कविना०, २ : १२) । रति भावसे सम्बन्ध श्रम संचारीका उदाहरण - "विन्दु रचे मेंहदीके से कर तापर यों रह्यो आनन आइकै । इन्दु मनो अरबिन्द पै राजत इन्द्र बघुनके बृन्द बिछाह कै" (जगद्वि०, ४८८)। - व० [सं०
श्रव्य काव्य - दे० 'माहित्यरूप' । श्रव्य नाटक - दे० 'रेडियो नाटक ' । श्रावकयान - बौद्ध साहित्यके अनुशीलनमे प्रकट होता है कि हीनयान (३०) को तुच्छ मानते थे और दुवैचनके अवसरपर इस शब्दका प्रयोग करते थे। परन्तु हीनयानमें निहित कुत्सित भावनाको छोडकर शिष्ट या विनीत भावसे इमे 'श्रावकयान' नाममे पुकारते थे । हीनयानका शिष्टाचारयुक्त दूसरा नाम ही श्रावकयान है । प्राचीन साहित्यमें वर्णन आता है कि बुद्धके वे उपासक, जो संघ में आ जाते, श्रावक कहे जाते थे । उसका अर्थ शिष्य या धर्मोपदेशक अथवा आर्य श्रावक से था । श्रावकयान में यह माना जाता था कि बुद्धके पुराने प्रवचन निर्वाणके लिए साधक मार्ग थे । तीसरी शतीके समीप रचित ग्रन्थ 'सद्धर्मपुण्डरीक' मे सबसे पहले श्रावकयान नाम मिलता है, जिसके बाद प्रत्येक - बुद्धयान तथा सहायान शब्द प्रयुक्त है । हीनयानका नामोल्लेख नही है । इस कारण बुद्धधर्मके विचारक यह मानते है कि श्रावक तथा प्रत्येकबुद्धयान हीनयानका अभिन्न अंग था। दोनोकी विचारधारामे कोई अन्तर नही है । प्रत्येकबुद्धमार्गका व्यक्ति श्रावकसे एक-दो अधिक गुण रखता है। परन्तु दोनोंका अन्तिम ध्येय एक ही हैं। दोनो शब्दोके सूक्ष्म विश्लेषणसे पता चलता है कि श्रावक नीचवृत्ति तथा प्रत्येकबुद्ध मध्यम कहे जाते है । बुद्धधर्मका | है, जिसपर कौण्डिन्यकृत पंचार्थी भाष्य है। इसके अनुसार पाँच पदार्थ है-कार्य, कारण, योग, विधि और दुःखान्त । जीव और जनको कार्य कहते है । परमात्माको कारण कहा जाता है। इसकी शास्त्रीय गंज्ञा पति है, जैसे जीवकी पशु है और जड़की पाढा है । चित्त द्वारा पशु और पति के संयोगको योग कहते है । पतिको प्राप्त करानेवाले मार्गको विधि कहते है । साध्वका पतिवी पूजाके समय हॅसना, गाना, नाचना, जीभ और तालुके संयोगसे वैलकी आवाजको समान हुडहुड शब्द करना, नमस्कार आदि करना विधि है। दुःखोकी आत्यन्तिक निवृत्ति दुःखान्त या मोक्ष है। स्पष्ट है कि पाशुपतमत भी कापालिकों और कालामुखोके मतकी भाँति अतिमागी है । शैव सिद्धान्तके मान्य ग्रन्थ तमिलमें है। इसमे पति, पशु और पाश, इन तीन परम तत्त्वोको माना गया है । पनि ईश्वर है । जीत्र पशु है, वह अज्ञ और अणु है । पाश चार प्रकारको है - मल, कर्म, माया और रोधशक्ति । पशुपतिके शक्तिपातमॆ, अर्थात् अनुग्रहसे, पाशरहित होता है । यही उसकी मुक्तावस्था है । काश्मीर शैवमत अद्वैतवाद है । इरामे और अद्वैतवेदान्तमे इतना अन्तर है कि अद्वैतवादके ब्रह्म में कर्तृत्व नही है, जब कि काश्मीर शैवमतके परमेश्वरभे हैं । अद्वैतवाद ज्ञानमार्ग है, उसमे भक्तिका समन्वय ज्ञानसे नहीं होता है। काश्मीर शैवमत में ज्ञान और भक्तिका समन्वय है। काश्मीर शैवमत विवर्तवाद और परिणामवाद न मानकर स्वातन्त्र्यवाद या आभासवाद मानता है, जिसके अनुसार परमेश्वरकी स्वातन्त्र्य शक्तिको कारण बिना बिम्बके ही जगद् पका प्रतिबिम्ब स्वतः उत्पन्न होता है । काश्मीर धैवमतकी दो शाखाएँ है - स्पन्दशास्त्र और प्रत्यभिज्ञाशास्त्र । पहले के मुख्य ग्रन्थ वसुगुप्तके 'शिवसूत्र' 'और स्पन्दकारिका' है, दूसरेके सोमानन्दकृत 'शिवदृष्टि', उत्पलाचार्यकृत 'ईश्वरप्रत्यभिज्ञाकारिका' और अभिनवगुप्तरचित 'ईश्वरप्रत्यभिज्ञाकारिकाविमर्शिणी' और 'तन्त्रालोक' है । दोनों शाखाओका तत्त्ववाद एक ही है, जो शाक्त तत्त्ववादसे बिलकुल मिलता-जुलता है। दोनोंमे अन्तर यह है कि स्पन्द्रमतने ईश्वराद्वयकी अनुभूतिका मार्ग ईश्वर दर्शन और तद्वारा मलनिवारण है, जब कि प्रत्यभिज्ञामतने चह मार्ग ईश्वर के रूपमे अपनी ही प्रत्यभिज्ञा है। दोनोंके दर्शनको त्रिकदर्शन या ईश्वराद्वयवाद भी कहते हैं । वीर शैवमतका संस्थापक बसब है । इस मतके मान्य ग्रन्थ ब्रह्मसूत्रार 'श्रीकरभाष्य' और 'सिद्धान्तशिखामणि' हैं। इसकी दार्शनिक दृष्टि विशिष्टाद्वैतवाद है । इसमे स्थूलचिदचिच्छक्ति विशिष्टजीव और सूक्ष्म चिदचिद् विशिष्ट शिवका अद्वैत है। परम तत्व शिव पूर्णहन्तारूप या पूर्णस्वातन्त्र्यरूप है। उनकी परिभाषिकी संज्ञा 'स्थल' है। इस मतको लिंगायत भी कहते हैं, क्योकि इसके अनुयायी शिवलिंग पूजते हैं और पहने भी रहते है। शैवों और वैष्णवोमे हिन्दी के उद्गमके समय में बड़ा द्वन्द्व युद्ध चलता था । हिन्दी साहित्यको इस वातका श्रेय है कि उसने इनके द्वन्द्वको समाप्त कर दिया और शिव तथा विष्णुको अनन्य ठहराया । गोस्वामी तुलसीदासने इस कार्यको बड़े दायित्वपूर्ण ढंगसे निभाया । सभी शैव सम्प्रदायोम कश्मीर शैवमतका ही अधिक प्रभाव हिन्दीपर लक्षित होता है। ज्ञान और भक्ति तथा कर्मकें समन्वयका सिद्धान्त हिन्डीके सगुण सन्तोको ही नहीं, वरन् आजतक के अधिकांश हिन्दीके भक्तोको मान्य है, इसका बहुत कुछ कारण कश्मीर शैवमत हैं। वर्तमान युगमे अभिनवगुप्त के धननिवादका हिन्दीके आलोचना साहित्यपर पर्याप्त प्रभाव पडा है । स्वदेशी सौन्दर्यशास्त्र अभी अभिनवगुप्तके सिद्धान्तसे आगे नहीं बढ़ा है, यह कहनेमे जरा-सी भी अतिशयोक्ति नहीं जान पड़ती। इस सौन्दर्य शास्त्रकी दार्शनिक पृष्ठभूमि कश्मीर शैवमत है। है । [सहायक ग्रन्थ - वैष्णविज्म, शैविज्म एण्ड माइनर रिलीजन्स : रामकृष्ण गोपाल भण्डारकर; राधाकृष्णन् सम्पादित : हिस्ट्री ऑव फिलॉसफी, ईस्टर्न ऐण्ड वेस्टर्न, प्रथम भाग : भारतीय दर्शन : बलदेव उपाध्याय । ] शैवागम- दशैवमतके प्रतिपादक शास्त्र । उपागमोंको लेकर इनकी संख्या दो सौ तक पहुंचती है। इनकी रचना सातवी शती ईसा के पूर्व हो चुकी थी। इन्हींका कालान्तरमे तमिल शैव, वीर शैव और कश्मीर शैवमतोमें विकास हुआ । अनुश्रुतिके अनुसार इनका महत्त्व निगम अर्थश्रुति से कम नहीं है, पर कुछ लोगोका यह भी मत है कि ये मोइशास्त्र है । यह निर्विवाद सत्य है कि शैव उपासना प्राचीनतम उपासनाओं में है और भारतीय जीवनपर इसका बहुत ही व्यापक और गहरा प्रभाव पड़ा है। कहा जाता है, ये ग्रन्थ शिव और दुर्वासाको स्फुरित कराये गये है । इनमे मुख्य है-"मालनीविश्वास', 'स्वच्छन्द्र', 'विज्ञान-भैरव', 'उच्छुष्मभैरव', 'आनन्द-भैरव', 'मृगेन्द्र', 'मातंग', 'नेत्र', 'नैःश्वास', 'स्वयम्भू', 'रुद्रयागल' और 'कामिका' । मूलतः ये द्वैतप्रतिपादक है, किन्तु बादमे उन्हीकी अद्वैतवादी व्याख्या वसुगुप्त और उनके परवर्ती कश्मीरके दार्शनिकोने प्रस्तुत की । इन आगमशास्त्रोंका भारतीय साहित्य और कलापर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है । कालिदासके तीनो नाटकोके मंगलश्लोक स्पष्टतया शैवागमसे प्रेरणा ग्रहण करके लिखे गये है । नाटक, नृत्य, शिल्प, वास्तु, चित्र, संगीत, शब्दशास्त्र, योग-शास्त्र, न्याय-शास्त्र, सांख्य-वैशेषिक के सभी क्षेत्रों में आरम्भमे शैवागमोंका गहरा प्रभाव था। इसका कारण लोकविश्वास के साथ शैवागमोकी समरसता थी । इसीलिए धीरे-धीरे इनकी गणना वेदोंके समकक्ष होने लगी और मध्ययुगके उत्तरार्द्धतक पहुँचते-पहुँचते तो निगम और आगम एक से, स्वतःप्रामाण्ययुक्त हो गये । इन आगमग्रन्थोके अनुसार छत्तीस तत्त्व होते है । चौबीस तत्त्व तो सांख्यके ही ज्योके त्यो है; इनके अलावा सात मिश्र तत्त्व - काल, नियति, कला, विद्या, राग, अशुक्रमाया और प्रकृतिमाया तथा पाँच शुद्ध तत्त्व - शिव, शक्ति, सदाशिव, ईश्वर और शुद्ध विद्या - ये कुल छत्तीस तत्त्व गिनाये गये हैं। - विशून्यनिशून्य मिशून्य शोक - करुण रसका स्थायी भाव शोक है । भरतका कथन है कि- "शोको नाम इंष्टजन वियोगविभवनाशवधबन्धनदुःखानुभवनादिभिर्विभावैरुत्पद्यते" , अर्थात् इष्ट जनका वियोग, विभवका नाश, किसी प्रिय व्यक्तिके वध अथवा कारावासजन्य दुःख इत्यादि कारणोंसे शोक उत्पन्न होता है । साहित्यदर्पणकारने इसीसे मिलतीजुलती परिभाषा दी है - "इष्टनाशादिभिश्चेतोवैक्लव्यं शोकाशब्दभाक" , अर्थात् प्रिय वस्तुके नाश इत्यादि के कारण उत्पन्न चित्तकी विकलताको शोक कहते है। 'इष्ट जनवियोग मे वियोगकी बात समझ लेनी चाहिये । स्त्री-पुरुषके वियोगमे, जबतक प्रेमपात्रके जीवित होनेका ज्ञान हो, तबतक व्याकुलतासे पुष्ट किये हुए रतिकी ही प्रधानता होती है । अतएव वहाँ 'विप्रलम्भ' शृगार होता है और उस समयकी विकलता 'व्यभिचारी' भावमात्र ही है । ऐसे प्रसंगोंमे शोक स्थायी नही माना जाता । लेकिन यदि प्रेमपात्रके मरनेका ज्ञान हो जाय, तो वह व्याकुलता शोक ही होगी और वहाँ करुण रस ही माना जायगा । इस दृष्टिसे 'रसतरंगिणी' की यह परिभाषा उपादेय है - "इष्ट विश्लेषजनितो रत्यनालिगितः परिमितो मनोविकारः शोकः" । यहाँ एक बातकी ओर ध्यान आकृष्ट होना वांछनीय है । आधुनिक मनोविज्ञानियोने शोक एवं आनन्द, दोनोको मूल भाव माना है । लेकिन हमारे आचार्योंने शोकको स्थायी भावोमें गृहीत किया है और आनन्दको नही । इसका सुन्दर समाधान रामचन्द्र शुक्लने किया है - " जिस भावकी व्यंजनासे श्रोता या दर्शक के चित्तमे भी आलम्बनको प्रति वही भाव साधारण्याभिमानसे उपस्थित हो सकता है, उसीको रसका प्रवर्तक मानकर आचार्योने प्रधान भावको कोटिमे रखा है", अर्थात् शोकका आलम्बन ऐसा होता है कि वह मनुष्यमात्रको क्षुब्ध कर सकता है, लेकिन किसीके आनन्दोत्सवमे उन्हीका हृदय पूर्ण योग देता है, जिनसे उनका लगाव या प्रेम होता है । इसीसे आनन्दको रसका प्रवर्तक भाव न मानकर, हर्षको केवल व्यभिचारी भावोमे गृहीत किया है। सर्वजनसुलभ आस्वाद्यता ही वस्तुतः स्थायी भावकी कसौटी है । व्याधि, ग्लानि, मोह, स्मृति, दैन्य, चिन्ता, उन्माद इत्यादि शोक स्थायीके संचारी भाव है । उदाशून्य - "दुखकी दीवारोका बन्दी निरख सका न सुखी जीवन । सुखके मादक स्वप्नोतकसे बनी रही मेरी अनवन" । यहाँ शोक-भावकी व्यंजना है, स्थायी का प्रस्फुटन नहीं हो सका है । - बीस तिशून्य शोभ - देशून्य 'अयलज अलंकार', पहला प्रकार तथा 'सात्त्विक गुण' । श्रम - प्रचलित तैंतीसमेसे एक सचारी भाव । भरतके आधारपर विश्वनाथने इसकी व्याख्या करते हुए लिखा है - "खेदो रत्यध्वगत्यादेः श्वासनिद्रादिकृच्छ्रमः" , अर्थात् रति और मार्ग चलने आदिसे उत्पन्न खेदका नाम श्रम है । श्वासका चढ़ना, निद्रा आदि इसके अनुभाव है । इसी परम्परामे हिन्दीके रीतिकालीन आचार्योंने श्रमका लक्षण दिया है - "अति रति अविगतिते जहाँ उपजै अति तन स्वेद" । रामचन्द्र शुक्लने श्रमके दो अर्थ माने है - एक तो व्यापाराधिक्य या किसी क्रियाका निरन्तर साधन दूसरा उससे उत्पन्न अंगग्लानि या थकावट । दूसरा अर्थ ही विश्वनाथने ग्रहण शोभ- श्रावकयान किया है। रामचन्द्र शुक्लने अपने अर्थगर जोर देते हुए कहा है - "किसीके प्रेममे यदि कोई दौड-धूप करे, विद्याकी प्राप्तिके लिए रात-दिन बैठकर पढता रहे, गडा हुआ खजाना पाने के लिए दिनभर मिट्टी खोदता रहे तो उसका यह दौडना धूपना, रात-रातभर बैठना या दिनभर मिट्टी खोदना क्रमशः व्यक्ति, विद्या या धनके प्रति रति भावका संचारी कहा जा सकता है । पर इस ढौड-धूपके कारण यदि कोई थककर बैठ जाय या रातभर मेहनत करनेसे शिथिल हो जाय तो यह थकान या शिथिल होना रति भावसे दूर पड जाने के कारण संचारी नहीं कहा जा सकता" । किसी प्रकारकी थकावटको भी मंचारीके अन्तर्गत तभी तभी माना जायगा, जब वह मीधे किसी भावसे सम्बद्ध हो । स्थायी भावकी दशामे जो श्रमजन्य थकावट उत्पन्न होगी वह मंचारीके अन्तर्गत नहीं रखी जा सकती । स्वतन्त्र रूपमे जब श्रमका वर्णन होता है तब भी वह मौकुमार्य आदिका योतक होनेके कारण अत्यन्त प्रभावशाली होता है । रामचन्द्र शुक्लने इस प्रकार के भावरूप श्रमका बहुत ही मनोरम उदाहरण उपस्थित किया है - "जलको गये लक्खन है लरिका परिखौ पिय छॉह घरीक है ठढे । पोंछि पसेउ बयारि करौ अरु पॉय पखारिहौ मूभुरि डाढे । तुलसी रघुवीर प्रिया श्रम जानिकै बैठि विलम्बलौ कंटक काढे । जानकी नाहको नेह लख्यो पुलको तन बारि बिलोचन बाढे" । रति भावसे सम्बन्ध श्रम संचारीका उदाहरण - "विन्दु रचे मेंहदीके से कर तापर यों रह्यो आनन आइकै । इन्दु मनो अरबिन्द पै राजत इन्द्र बघुनके बृन्द बिछाह कै" । - वशून्य [संशून्य श्रव्य काव्य - देशून्य 'माहित्यरूप' । श्रव्य नाटक - देशून्य 'रेडियो नाटक ' । श्रावकयान - बौद्ध साहित्यके अनुशीलनमे प्रकट होता है कि हीनयान को तुच्छ मानते थे और दुवैचनके अवसरपर इस शब्दका प्रयोग करते थे। परन्तु हीनयानमें निहित कुत्सित भावनाको छोडकर शिष्ट या विनीत भावसे इमे 'श्रावकयान' नाममे पुकारते थे । हीनयानका शिष्टाचारयुक्त दूसरा नाम ही श्रावकयान है । प्राचीन साहित्यमें वर्णन आता है कि बुद्धके वे उपासक, जो संघ में आ जाते, श्रावक कहे जाते थे । उसका अर्थ शिष्य या धर्मोपदेशक अथवा आर्य श्रावक से था । श्रावकयान में यह माना जाता था कि बुद्धके पुराने प्रवचन निर्वाणके लिए साधक मार्ग थे । तीसरी शतीके समीप रचित ग्रन्थ 'सद्धर्मपुण्डरीक' मे सबसे पहले श्रावकयान नाम मिलता है, जिसके बाद प्रत्येक - बुद्धयान तथा सहायान शब्द प्रयुक्त है । हीनयानका नामोल्लेख नही है । इस कारण बुद्धधर्मके विचारक यह मानते है कि श्रावक तथा प्रत्येकबुद्धयान हीनयानका अभिन्न अंग था। दोनोकी विचारधारामे कोई अन्तर नही है । प्रत्येकबुद्धमार्गका व्यक्ति श्रावकसे एक-दो अधिक गुण रखता है। परन्तु दोनोंका अन्तिम ध्येय एक ही हैं। दोनो शब्दोके सूक्ष्म विश्लेषणसे पता चलता है कि श्रावक नीचवृत्ति तथा प्रत्येकबुद्ध मध्यम कहे जाते है । बुद्धधर्मका |
कांग्रेस ने गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए छह सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया,
जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसका अध्यक्ष बनाया गया है।
पार्टी के एक बयान में कहा गया है कि स्क्रीनिंग कमेटी के अन्य सदस्य ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी)
मल्लिकार्जुन खड़गे,
राज्य कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट और कांग्रेस विधायक दल के नेता के सी पाडवी हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 7 जुलाई को लोकसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश संभालने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस को यूपी में महज एक सीट हासिल हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के ऊपर पार्टी के नेताओं को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के नेता आए दिन पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं, जबकि विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक हैं।
| कांग्रेस ने गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए छह सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के एक बयान में कहा गया है कि स्क्रीनिंग कमेटी के अन्य सदस्य ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी मल्लिकार्जुन खड़गे, राज्य कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट और कांग्रेस विधायक दल के नेता के सी पाडवी हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सात जुलाई को लोकसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश संभालने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस को यूपी में महज एक सीट हासिल हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के ऊपर पार्टी के नेताओं को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के नेता आए दिन पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं, जबकि विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक हैं। |
अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति के सेट से एक तस्वीर शेयर की है। साथ ही शो के लिए कविता लिखी है।
Neeyat Review: 4 साल बाद हुआ विद्या बालन का दमदार कमबैक, जानिए कैसी है फिल्म 'नीयत'
अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति के सेट से एक तस्वीर शेयर की है। साथ ही शो के लिए कविता लिखी है।
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बॉलीवुड एक्टर अरुणोदय सिंह के तलाक का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है। 2016 में कनेडियन लड़की ली एल्टन से शादी के बंधन में बंधे थे।
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एसआईटी टीम के जिस सदस्य की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, उन्हें क्वारंटीन कर दिया गया है।
फिल्मकार प्रकाश झा द्वारा अभिनीत और एम. गनी द्वारा निर्देशित फिल्म 'मट्टो की साइकिल' दक्षिण कोरिया में आयोजित हो रहे बुसान फिल्म फेस्टिवल के 25वें संस्करण में दिखाए जाने के लिए बिल्कुल तैयार है।
सुनील ग्रोवर इस बार फिर अपने लुक से लोगों को हंसा रहे हैं, उनका ये वीडियो खूब देखा जा रहा है।
सिद्धांत चतुर्वेदी इस समय दीपिका और अनन्या पांडे संग गोवा में फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।
मल्लिका ने एक तस्वीर साझा की है, जिसमें सुशांत अपनी बहन श्वेता सिंह कीर्ति के साथ कार की पीछे वाली सीट पर बैठे नजर आ रहे हैं।
| अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति के सेट से एक तस्वीर शेयर की है। साथ ही शो के लिए कविता लिखी है। Neeyat Review: चार साल बाद हुआ विद्या बालन का दमदार कमबैक, जानिए कैसी है फिल्म 'नीयत' अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति के सेट से एक तस्वीर शेयर की है। साथ ही शो के लिए कविता लिखी है। पंकज त्रिपाठी ने अपने शानदार प्रदर्शनों से प्रशंसकों का खूब मनोरंजन किया है। उनके द्वारा निभाए गए किरदारों में कुछ नकारात्मक भूमिकाएं भी हैं। बॉलीवुड एक्टर अरुणोदय सिंह के तलाक का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है। दो हज़ार सोलह में कनेडियन लड़की ली एल्टन से शादी के बंधन में बंधे थे। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीर शेयर करके फिल्म इंडस्ट्री पर कही ये बात। कार्तिक आर्यन ने आधी रात को 'वर्कआउट' किया। अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम पर 'वर्कआउट' की तस्वीर साझा की। हिना खान और धीरज धूपर का रोमांटिक गाना हमको तुम मिल गए हुआ रिलीज। दोनों की केमिस्ट्री फैन्स को बहुत पसंद आई है। अक्षय कुमार ने बेटे आरव के अट्ठारहवें जन्मदिन पर एक पुरानी तस्वीर के साथ खास नोट शेयर किया है। परिवार ने स्कॉटलैंड में आरव का जन्मदिन मनाया। एसआईटी टीम के जिस सदस्य की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, उन्हें क्वारंटीन कर दिया गया है। फिल्मकार प्रकाश झा द्वारा अभिनीत और एम. गनी द्वारा निर्देशित फिल्म 'मट्टो की साइकिल' दक्षिण कोरिया में आयोजित हो रहे बुसान फिल्म फेस्टिवल के पच्चीसवें संस्करण में दिखाए जाने के लिए बिल्कुल तैयार है। सुनील ग्रोवर इस बार फिर अपने लुक से लोगों को हंसा रहे हैं, उनका ये वीडियो खूब देखा जा रहा है। सिद्धांत चतुर्वेदी इस समय दीपिका और अनन्या पांडे संग गोवा में फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। मल्लिका ने एक तस्वीर साझा की है, जिसमें सुशांत अपनी बहन श्वेता सिंह कीर्ति के साथ कार की पीछे वाली सीट पर बैठे नजर आ रहे हैं। |
हाल में बिजली चालित वाहनों में आग की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ी रही हैं, उससे सुरक्षा संबंधी सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भले ही पर्यावरण के लिहाज से बिजली चालित वाहन आज की जरूरत हैं, लेकिन क्या बिना उचित परीक्षण अथवा जांच-परख के ही इन्हें केवल वाहवाही लूटने के लिए सड़कों पर उतार दिया गया?
ऊर्जा संकट के मद्देनजर और प्रदूषण कम करने के लिए सरकार देश में विद्युत चालित वाहनों (ई-वाहन) को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए खरीद में रियायत और करों में छूट जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे लोगों में इन वाहनों के प्रति उत्साह बढ़ा है। इस समय करीब ग्यारह लाख ई-वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में ही चार लाख से ज्यादा ई-वाहनों की बिक्री हुई।
खासतौर से बैटरी से चलने वाले स्कूटरों की मांग तो काफी तेजी से बढ़ रही है। इस साल केवल मार्च महीने में ही करीब चालीस हजार ई-स्कूटरों की बिक्री हुई थी। अप्रैल में यह आंकड़ा और बढ़ गया। इसका एक कारण यह भी है कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण भी लोग ई-वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा खतरा भी डराने लगा है।
हाल में बिजली चालित वाहनों में आग की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ी रही हैं, उससे सुरक्षा संबंधी सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भले ही पर्यावरण के लिहाज से बिजली चालित वाहन आज की जरूरत हैं, लेकिन क्या बिना उचित परीक्षण अथवा जांच-परख के ही इन्हें केवल वाहवाही लूटने के लिए सड़कों पर उतार दिया गया?
पिछले हफ्ते भोपाल में एक इंजीनियरिंग छात्र उस समय हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गया जब स्कूटर चालू करते समय उसमें आग लग गई। पिछले महीने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में घर में चार्जिंग पर लगी स्कूटर की बैटरी फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। हैदराबाद के पास निजामाबाद में भी स्कूटर की बैटरी में आग लगने में अस्सी साल के बुजुर्ग की मौत हो गई। हाल के महीनों में ऐसी अनगिनत घटनाएं सामने आई हैं। ई-स्कूटरों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं से चिंतित सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 25 अप्रैल को बिजली वाहन निर्माता कंपनियों की बैठक बुलाई थी।
इस बैठक में कंपनियों को आग लगने की घटनाओं की जांच पूरी होने तक नए वाहन बाजार में नहीं उतारने की सलाह दी गई थी। हालांकि बार-बार हो रहे ऐसे हादसों के बाद अब कंपनियां खुद इस बात की जांच करवा रही हैं कि बैटरियों के साथ ऐसी दिक्कतें क्यों आ रही हैं। सरकार के सख्त रुख के बाद कई कंपनियों ने अपने स्कूटर वापस ले लिए।
ऐसे हादसों को लेकर सरकार का सख्त रुख जायज है। यह मुद्दा गंभीर इसलिए भी है कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए सरकार सक्रिय हुई और बिजली वाहन निर्माता कंपनियों को कसा। सरकार ने कहा भी है कि ऐसे मामलों की जांच के लिए उसने जो विशेषज्ञों का पैनल बनाया है, उसकी रिपोर्ट आने के बाद दोषी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने इस बात का भी संकेत दिया है कि वह जल्द ही बिजली चालित वाहनों की गुणवत्ता को लेकर दिशा-निर्देश जारी करेगी।
उल्लेखनीय है कि बिजली वाहनों में आग की घटनाएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सेंटर फार फायर एक्सप्लोसिव एंड एनवायरनमेंट सेफ्टी (सीएफईईएस), डीआरडीओ और आइआइएससी (बंगलुरु) के विशेषज्ञों को ऐसे मामलों की जांच करने का आदेश दिया गया था। समिति की प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों ने देश में लगभग सभी दोपहिया बिजली वाहनों में आग की घटनाओं में बैटरी सेल या डिजाइन में खामियां होने की ओर इशारा किया है। विशेषज्ञ अब बैटरी संबंधी समस्याओं पर वाहन निर्माताओं के साथ मिल कर काम करेंगे।
दरअसल, बिजली वाहनों में लीथियम आयन बैटरी लगाई जाती है, जिनका इस्तेमाल मोबाइल, लैपटाप आदि में भी होता है। इन बैटरियों की खूबी यही है कि ये न केवल बहुत हल्की होती हैं, बल्कि इनमें अधिक ऊर्जा भी एकत्रित हो सकती है। जहां एसिड वाली लेड बैटरी केवल पच्चीस वाट प्रति घंटा प्रति किलो ऊर्जा जमा कर सकती है, वहीं निकेल हाइड्राइड बैटरी प्रति घंटा सौ वाट ऊर्जा संग्रह कर सकती है, जबकि लीथियम आयन बैटरी डेढ़ सौ वाट तक ऊर्जा संग्रहण की क्षमता से युक्त होती है। यह बैटरी भी लंबे समय तक चलती है, इसीलिए इसका चलन भी ज्यादा हो रहा है, लेकिन साथ ही इसमें जोखिम भी बहुत ज्यादा है।
लिथियम आयन के अलावा दुनिया में कुछ जगहों पर लिथियम फास्फेट बैटरी का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह ज्यादा गर्मी को भी सहन कर लेती है। जबकि लिथियम आयन बैटरी बहुत ज्यादा गर्मी सहन करने में सक्षम नहीं होती। इस कारण इनमें आग लगने की समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि लिथियम फास्फेट बैटरी लिथियम आयन की तुलना में सस्ती होती है। लिथियम आयन बैटरी कम तापमान में तो बेहतर काम करती हैं, लेकिन उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में इनका तापमान बढ़ जाने पर इनके फटने का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिजली चालित स्कूटर में बैटरी पैक भारत के वातावरण के अनुरूप इस्तेमाल नहीं किए जा रहे? दरअसल, कई निमार्ताओं ने बिजली वाहनों के लिए अमेरिका जैसे देशों की जलवायु को ध्यान में रख कर बनाई गई बैटरियां आयात की हैं, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के लिए उनका परीक्षण नहीं किया।
हालांकि लिथियम आयन बैटरी में कई तरह के सुरक्षा बंदोबस्त भी किए गए हैं। बैटरी पैक में हर सेल से जुड़ा हुआ एक इलैक्ट्रानिक सिस्टम (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) होता है, जो लगातार बैटरी के वोल्टेज और उनसे गुजरने वाले करंट पर निगरानी रखता है, जिसमें तापमान मापने के सेंसर भी लगे होते हैं। लेकिन फिर भी बड़ा सवाल यही है कि स्कूटरों की बैटरियों में आग क्यों लग रही है? आटो विशेषज्ञों के मुताबिक लिथियम आयन बैटरी से ज्यादा गर्मी निकलती है।
जब बैटरी गर्म होती है, तब इनमें ऊष्मा तेजी से बढ़ने लगती है, इसलिए इन्हें ठंडा रखने के लिए हीट सिंक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। लेकिन चूंकि इन बैटरियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है, इसलिए कीमत और वजन कम रखने के लिए बैटरी निर्माता इनमें हीट सिंक का इस्तेमाल नहीं करते। हालांकि कारों में ज्यादा किलोवाट की बैटरी के साथ हीट सिंक और कूलेंट का भी इस्तेमाल होता है, जबकि स्कूटरों में बैटरी की कूलिंग पर अभी तक अच्छी तरह से काम नहीं किया गया है।
हालांकि ई-स्कूटर बेच रही कंपनियां बैटरियों में आग लगने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता पाई हैं। लेकिन इस संबंध में ओकिनावा ईवी का यह अवश्य कहना है कि इसका एक बड़ा कारण शार्ट सर्किट हो सकता है, जो स्कूटर की चार्जिंग में की गई लापरवाही का नतीजा भी हो सकता है। दरअसल बैटरी पैक में कई बैटरियां होती हैं, जिन्हें काफी पास-पास लगाया जाता है और ऐसे में जरा-सी चूक से एक बैटरी में भी शार्ट सर्किट हो जाता है तो बाकी बैटरियों में भी आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ई-स्कूटर में इस्तेमाल होने वाली बैटरी प्लास्टिक कैबिनेट के साथ आती है। जब बैटरी गर्म होती है तो कई बार यह प्लास्टिक कैबिनेट को भी पिघला देती है और इसमें लगे हुए सर्किट भी पिघलने लगते हैं और बैटरी आग पकड़ लेती है।
बिजली वाहन अब हमारी जरूरत बन चुके हैं। देश में इनका उपयोग निरंतर बढ़ भी रहा है। लेकिन यदि इनमें ऐसे ही हादसे होते रहे, तो लोग इन्हें खरीदने से परहेज करने लगेंगे। इससे भारत के बिजली वाहन उद्योग को झटका लग सकता है। इसलिए ई-वाहनों की पूर्ण सुरक्षा के लिए इन वाहन निर्माताओं की नैतिक जवाबदेही तय किया जाना अब बेहद जरूरी है।
| हाल में बिजली चालित वाहनों में आग की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ी रही हैं, उससे सुरक्षा संबंधी सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भले ही पर्यावरण के लिहाज से बिजली चालित वाहन आज की जरूरत हैं, लेकिन क्या बिना उचित परीक्षण अथवा जांच-परख के ही इन्हें केवल वाहवाही लूटने के लिए सड़कों पर उतार दिया गया? ऊर्जा संकट के मद्देनजर और प्रदूषण कम करने के लिए सरकार देश में विद्युत चालित वाहनों को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए खरीद में रियायत और करों में छूट जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे लोगों में इन वाहनों के प्रति उत्साह बढ़ा है। इस समय करीब ग्यारह लाख ई-वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन के मुताबिक वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में ही चार लाख से ज्यादा ई-वाहनों की बिक्री हुई। खासतौर से बैटरी से चलने वाले स्कूटरों की मांग तो काफी तेजी से बढ़ रही है। इस साल केवल मार्च महीने में ही करीब चालीस हजार ई-स्कूटरों की बिक्री हुई थी। अप्रैल में यह आंकड़ा और बढ़ गया। इसका एक कारण यह भी है कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण भी लोग ई-वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा खतरा भी डराने लगा है। हाल में बिजली चालित वाहनों में आग की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ी रही हैं, उससे सुरक्षा संबंधी सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भले ही पर्यावरण के लिहाज से बिजली चालित वाहन आज की जरूरत हैं, लेकिन क्या बिना उचित परीक्षण अथवा जांच-परख के ही इन्हें केवल वाहवाही लूटने के लिए सड़कों पर उतार दिया गया? पिछले हफ्ते भोपाल में एक इंजीनियरिंग छात्र उस समय हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गया जब स्कूटर चालू करते समय उसमें आग लग गई। पिछले महीने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में घर में चार्जिंग पर लगी स्कूटर की बैटरी फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। हैदराबाद के पास निजामाबाद में भी स्कूटर की बैटरी में आग लगने में अस्सी साल के बुजुर्ग की मौत हो गई। हाल के महीनों में ऐसी अनगिनत घटनाएं सामने आई हैं। ई-स्कूटरों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं से चिंतित सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पच्चीस अप्रैल को बिजली वाहन निर्माता कंपनियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कंपनियों को आग लगने की घटनाओं की जांच पूरी होने तक नए वाहन बाजार में नहीं उतारने की सलाह दी गई थी। हालांकि बार-बार हो रहे ऐसे हादसों के बाद अब कंपनियां खुद इस बात की जांच करवा रही हैं कि बैटरियों के साथ ऐसी दिक्कतें क्यों आ रही हैं। सरकार के सख्त रुख के बाद कई कंपनियों ने अपने स्कूटर वापस ले लिए। ऐसे हादसों को लेकर सरकार का सख्त रुख जायज है। यह मुद्दा गंभीर इसलिए भी है कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए सरकार सक्रिय हुई और बिजली वाहन निर्माता कंपनियों को कसा। सरकार ने कहा भी है कि ऐसे मामलों की जांच के लिए उसने जो विशेषज्ञों का पैनल बनाया है, उसकी रिपोर्ट आने के बाद दोषी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने इस बात का भी संकेत दिया है कि वह जल्द ही बिजली चालित वाहनों की गुणवत्ता को लेकर दिशा-निर्देश जारी करेगी। उल्लेखनीय है कि बिजली वाहनों में आग की घटनाएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सेंटर फार फायर एक्सप्लोसिव एंड एनवायरनमेंट सेफ्टी , डीआरडीओ और आइआइएससी के विशेषज्ञों को ऐसे मामलों की जांच करने का आदेश दिया गया था। समिति की प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों ने देश में लगभग सभी दोपहिया बिजली वाहनों में आग की घटनाओं में बैटरी सेल या डिजाइन में खामियां होने की ओर इशारा किया है। विशेषज्ञ अब बैटरी संबंधी समस्याओं पर वाहन निर्माताओं के साथ मिल कर काम करेंगे। दरअसल, बिजली वाहनों में लीथियम आयन बैटरी लगाई जाती है, जिनका इस्तेमाल मोबाइल, लैपटाप आदि में भी होता है। इन बैटरियों की खूबी यही है कि ये न केवल बहुत हल्की होती हैं, बल्कि इनमें अधिक ऊर्जा भी एकत्रित हो सकती है। जहां एसिड वाली लेड बैटरी केवल पच्चीस वाट प्रति घंटा प्रति किलो ऊर्जा जमा कर सकती है, वहीं निकेल हाइड्राइड बैटरी प्रति घंटा सौ वाट ऊर्जा संग्रह कर सकती है, जबकि लीथियम आयन बैटरी डेढ़ सौ वाट तक ऊर्जा संग्रहण की क्षमता से युक्त होती है। यह बैटरी भी लंबे समय तक चलती है, इसीलिए इसका चलन भी ज्यादा हो रहा है, लेकिन साथ ही इसमें जोखिम भी बहुत ज्यादा है। लिथियम आयन के अलावा दुनिया में कुछ जगहों पर लिथियम फास्फेट बैटरी का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह ज्यादा गर्मी को भी सहन कर लेती है। जबकि लिथियम आयन बैटरी बहुत ज्यादा गर्मी सहन करने में सक्षम नहीं होती। इस कारण इनमें आग लगने की समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि लिथियम फास्फेट बैटरी लिथियम आयन की तुलना में सस्ती होती है। लिथियम आयन बैटरी कम तापमान में तो बेहतर काम करती हैं, लेकिन उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में इनका तापमान बढ़ जाने पर इनके फटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिजली चालित स्कूटर में बैटरी पैक भारत के वातावरण के अनुरूप इस्तेमाल नहीं किए जा रहे? दरअसल, कई निमार्ताओं ने बिजली वाहनों के लिए अमेरिका जैसे देशों की जलवायु को ध्यान में रख कर बनाई गई बैटरियां आयात की हैं, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के लिए उनका परीक्षण नहीं किया। हालांकि लिथियम आयन बैटरी में कई तरह के सुरक्षा बंदोबस्त भी किए गए हैं। बैटरी पैक में हर सेल से जुड़ा हुआ एक इलैक्ट्रानिक सिस्टम होता है, जो लगातार बैटरी के वोल्टेज और उनसे गुजरने वाले करंट पर निगरानी रखता है, जिसमें तापमान मापने के सेंसर भी लगे होते हैं। लेकिन फिर भी बड़ा सवाल यही है कि स्कूटरों की बैटरियों में आग क्यों लग रही है? आटो विशेषज्ञों के मुताबिक लिथियम आयन बैटरी से ज्यादा गर्मी निकलती है। जब बैटरी गर्म होती है, तब इनमें ऊष्मा तेजी से बढ़ने लगती है, इसलिए इन्हें ठंडा रखने के लिए हीट सिंक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। लेकिन चूंकि इन बैटरियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है, इसलिए कीमत और वजन कम रखने के लिए बैटरी निर्माता इनमें हीट सिंक का इस्तेमाल नहीं करते। हालांकि कारों में ज्यादा किलोवाट की बैटरी के साथ हीट सिंक और कूलेंट का भी इस्तेमाल होता है, जबकि स्कूटरों में बैटरी की कूलिंग पर अभी तक अच्छी तरह से काम नहीं किया गया है। हालांकि ई-स्कूटर बेच रही कंपनियां बैटरियों में आग लगने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता पाई हैं। लेकिन इस संबंध में ओकिनावा ईवी का यह अवश्य कहना है कि इसका एक बड़ा कारण शार्ट सर्किट हो सकता है, जो स्कूटर की चार्जिंग में की गई लापरवाही का नतीजा भी हो सकता है। दरअसल बैटरी पैक में कई बैटरियां होती हैं, जिन्हें काफी पास-पास लगाया जाता है और ऐसे में जरा-सी चूक से एक बैटरी में भी शार्ट सर्किट हो जाता है तो बाकी बैटरियों में भी आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ई-स्कूटर में इस्तेमाल होने वाली बैटरी प्लास्टिक कैबिनेट के साथ आती है। जब बैटरी गर्म होती है तो कई बार यह प्लास्टिक कैबिनेट को भी पिघला देती है और इसमें लगे हुए सर्किट भी पिघलने लगते हैं और बैटरी आग पकड़ लेती है। बिजली वाहन अब हमारी जरूरत बन चुके हैं। देश में इनका उपयोग निरंतर बढ़ भी रहा है। लेकिन यदि इनमें ऐसे ही हादसे होते रहे, तो लोग इन्हें खरीदने से परहेज करने लगेंगे। इससे भारत के बिजली वाहन उद्योग को झटका लग सकता है। इसलिए ई-वाहनों की पूर्ण सुरक्षा के लिए इन वाहन निर्माताओं की नैतिक जवाबदेही तय किया जाना अब बेहद जरूरी है। |
नई दिल्ली,(टीम डिजिटल):दिल्ली से सटे नोएडा में शारदीय नवरात्र की नवमी पर भक्तों ने मां आदि शक्ति के नवें सिद्धिदात्री का पूजन किया। भक्तों ने घरों और मंदिरों में हवन कर मां देवी के रूप में कंचकों का पूजन किया। शहर के सोसाइटियों में कई स्थानों पर भडारों का आयोजन भी किया गया ।
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जीवन में केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों और आकांक्षाओं की ओर दौड़ने पर ध्यान केंद्रित करते हैं और इस तरह अपनी सारी ऊर्जा उसी पर केंद्रित करते हैं, और फिर कुछ ऐसे भी होते हैं जो इन सब से परे सोचते हैं और अधिक से अधिक अच्छे की दिशा में काम करने के लिए सीमा से अधिक सोचते हैं।
प्रज्ञा साध्वी का नये बयान के मुताबिक गरबा में एंट्री और धार्मिक कार्यों में उनका समान बैन करने की मांग को आगे बढ़ाकर BJP ने मुसलमानों की पंडाल के पास दुकाने और उनका समान बैन करने की बात कही है।
भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) चलती रेलगाडिय़ों में ई-कैटरिंग के जरिए बुकिंग करवाने वाले यात्रियों को विशेष दुर्गा पूजा व्यंजनों के साथ-साथ बिना प्याज, लहसुन वाले खाने को उपलब्ध करवाएगा।
| नई दिल्ली,:दिल्ली से सटे नोएडा में शारदीय नवरात्र की नवमी पर भक्तों ने मां आदि शक्ति के नवें सिद्धिदात्री का पूजन किया। भक्तों ने घरों और मंदिरों में हवन कर मां देवी के रूप में कंचकों का पूजन किया। शहर के सोसाइटियों में कई स्थानों पर भडारों का आयोजन भी किया गया । कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जीवन में केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों और आकांक्षाओं की ओर दौड़ने पर ध्यान केंद्रित करते हैं और इस तरह अपनी सारी ऊर्जा उसी पर केंद्रित करते हैं, और फिर कुछ ऐसे भी होते हैं जो इन सब से परे सोचते हैं और अधिक से अधिक अच्छे की दिशा में काम करने के लिए सीमा से अधिक सोचते हैं। प्रज्ञा साध्वी का नये बयान के मुताबिक गरबा में एंट्री और धार्मिक कार्यों में उनका समान बैन करने की मांग को आगे बढ़ाकर BJP ने मुसलमानों की पंडाल के पास दुकाने और उनका समान बैन करने की बात कही है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम चलती रेलगाडिय़ों में ई-कैटरिंग के जरिए बुकिंग करवाने वाले यात्रियों को विशेष दुर्गा पूजा व्यंजनों के साथ-साथ बिना प्याज, लहसुन वाले खाने को उपलब्ध करवाएगा। |
आईपीएल के इस सीजन में बुधवार को 41वें मैच में कोलकाता नाइट राईडर्स और राईडजिंग पुणे सुपरजॉइंट के बीच कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान ईडन गार्डन में आमना-सामना हुआ। इस मैच में मेजबान टीम कोलकाता नाइट राईडर्स ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की।
कोलकाता नाइट राईडर्स की शुरूआत इस मैच में अच्छी नहीं रही और उनके शुरूआती तीन विकेट 55 रन के स्कोर पर ही गिर गए। लेकिन इसके बाद कुछ खिलाड़ियों के उपयोगी योगदान की मदद से आखिरकार अपने 20 ओवर में 155 रन बनाने में कामयाब रहा।
डेनियल क्रिश्चियन ने इस ओवर की आखिरी गेंद यानि 17. 6 ओवर में जोरदार बाउंसर गेंद डाली। डेनियल क्रिश्चिनयन की 142 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से ये गेंद बल्लेबाजी कर रहे नाथन कुल्टर नाइल के हेलमेट के ग्रिल पर जा लगी। इस जबरदस्त गेंद पर कुल्टर नाइल एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।
| आईपीएल के इस सीजन में बुधवार को इकतालीसवें मैच में कोलकाता नाइट राईडर्स और राईडजिंग पुणे सुपरजॉइंट के बीच कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान ईडन गार्डन में आमना-सामना हुआ। इस मैच में मेजबान टीम कोलकाता नाइट राईडर्स ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की। कोलकाता नाइट राईडर्स की शुरूआत इस मैच में अच्छी नहीं रही और उनके शुरूआती तीन विकेट पचपन रन के स्कोर पर ही गिर गए। लेकिन इसके बाद कुछ खिलाड़ियों के उपयोगी योगदान की मदद से आखिरकार अपने बीस ओवर में एक सौ पचपन रन बनाने में कामयाब रहा। डेनियल क्रिश्चियन ने इस ओवर की आखिरी गेंद यानि सत्रह. छः ओवर में जोरदार बाउंसर गेंद डाली। डेनियल क्रिश्चिनयन की एक सौ बयालीस किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से ये गेंद बल्लेबाजी कर रहे नाथन कुल्टर नाइल के हेलमेट के ग्रिल पर जा लगी। इस जबरदस्त गेंद पर कुल्टर नाइल एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। |
बीबी जगीर कौर ने कंगना रनोक की ओर से की गई टिप्पणी की आलोचना की है।
जागरण संवादाता, अमृतसर : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की अध्यक्ष बीबी जगीर कौर ने कंगना रनौत की ओर से सिखों के खिलाफ दिए बयान की सख्त निदा की है। उन्होंने कहा कि नफरत भरे बयान देने वाली कंगना को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
जगीर कौर ने कहा कि कंगना जानबूझकर सिखों के प्रति ऐसे शब्दों का उपयोग कर इंटरनेट मीडिया पर पोस्टें डाल रही है। इसके परिणाम घातक हो सकते हैं। कंगना की ओर से किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने की निदा करते हुए सिखों को आतंकवादी कहना और 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से सिखों के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रशंसा करना उसकी बीमार मनोदशा को व्यक्त करता है।
जगीर कौर ने कहा कि कंगना ने शायद सिखों का इतिहास नहीं पढ़ा है। अगर पढ़ा होता तो वह ऐसे बयान न देती। उसे पता होता कि सिखों की कुर्बानियों के कारण ही देश आज आजादी की सांस ले रहा है। देश की आजादी के लिए 80 प्रतिशत कुर्बानियां सिखों ने दी है। उन्होंने मांग की कि इस अभिनेत्री को तुरंत गिरफ्तार करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के तहत मामला दर्ज किया जाए। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से कंगना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है जिसका एसजीपीसी समर्थन करती है।
| बीबी जगीर कौर ने कंगना रनोक की ओर से की गई टिप्पणी की आलोचना की है। जागरण संवादाता, अमृतसर : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जगीर कौर ने कंगना रनौत की ओर से सिखों के खिलाफ दिए बयान की सख्त निदा की है। उन्होंने कहा कि नफरत भरे बयान देने वाली कंगना को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। जगीर कौर ने कहा कि कंगना जानबूझकर सिखों के प्रति ऐसे शब्दों का उपयोग कर इंटरनेट मीडिया पर पोस्टें डाल रही है। इसके परिणाम घातक हो सकते हैं। कंगना की ओर से किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने की निदा करते हुए सिखों को आतंकवादी कहना और एक हज़ार नौ सौ चौरासी में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से सिखों के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रशंसा करना उसकी बीमार मनोदशा को व्यक्त करता है। जगीर कौर ने कहा कि कंगना ने शायद सिखों का इतिहास नहीं पढ़ा है। अगर पढ़ा होता तो वह ऐसे बयान न देती। उसे पता होता कि सिखों की कुर्बानियों के कारण ही देश आज आजादी की सांस ले रहा है। देश की आजादी के लिए अस्सी प्रतिशत कुर्बानियां सिखों ने दी है। उन्होंने मांग की कि इस अभिनेत्री को तुरंत गिरफ्तार करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के तहत मामला दर्ज किया जाए। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से कंगना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है जिसका एसजीपीसी समर्थन करती है। |
जानें दिसंबर माह में पड़ने वाले सभी व्रत-त्योहारों के बारे में।
आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन कुछ खास उपायों को करने से आपको सभी कामों में सफलता प्राप्त होगी। जानें राशिनुसार इन उपायों के बारे में।
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की उदया तिथि दशमी को उत्पन्ना एकादशी पड़ती है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थानी एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और महत्व।
Tulsi Vivah 2019 Samagri List: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी होती है। इस दिन तुलसी विवाह भी कराया जाता है। जानें इसकी सामग्री।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान यानी देवउठनी एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'रम्भा' या 'रमा' एकादशी के नाम से जाना जाता है । रम्भा या रमा एकादशी के दिन श्री केशव, यानी विष्णु जी की पूजा का विधान है।
आज के दिन इन्दिरा एकादशी और आश्लेषा नक्षत्र के संयोग मे आप कौन सा खास उपाय करके लाभ उठा सकते है। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में।
श्राद्ध में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा।
शास्त्रों में कई काम के बारे में बताया गया है। जिन्हें एकादशी के दिन नहीं करना चाहिए। जानें इन कामों के बारे में।
इस दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर सोते हुए करवट लेते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा।
जानकारों की मानें तो एक साल में 24 एकादशी होती हैं, लेकिन मलमास या अधिकमास होने की स्थिति में इनकी संख्या 26 हो जाती है।
शनिवार को एकादशी के साथ बन रहे हैं कई शुभ योग। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से कैसा रहेहगा आपका दिन।
आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक के चार महीनों को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है । साथ ही ये काम भूलकर भी न करें।
विशाखा नक्षत्र और हरिशयनी एकादशी के संयोग में आप कौन सा खास उपाय करके लाभ उठा सकते है। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन है । इसके साथ ही 2 शुभ योग के साथ एकादशी है। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से कैसा रहेगा आपका दिन।
Devshayani Ekadashi 2019: 12 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन है। धार्मिक रुप से इस दिन का बहुत ही अधिक महत्व है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा के बारें में।
July Calender 2019: जुलाई 2019 कूी शुरुआत में ही व्रत-त्योहार का सिलसिला शुरु हो जाएगा। देखें पूरी लिस्ट।
| जानें दिसंबर माह में पड़ने वाले सभी व्रत-त्योहारों के बारे में। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन कुछ खास उपायों को करने से आपको सभी कामों में सफलता प्राप्त होगी। जानें राशिनुसार इन उपायों के बारे में। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की उदया तिथि दशमी को उत्पन्ना एकादशी पड़ती है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थानी एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और महत्व। Tulsi Vivah दो हज़ार उन्नीस Samagri List: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी होती है। इस दिन तुलसी विवाह भी कराया जाता है। जानें इसकी सामग्री। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान यानी देवउठनी एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'रम्भा' या 'रमा' एकादशी के नाम से जाना जाता है । रम्भा या रमा एकादशी के दिन श्री केशव, यानी विष्णु जी की पूजा का विधान है। आज के दिन इन्दिरा एकादशी और आश्लेषा नक्षत्र के संयोग मे आप कौन सा खास उपाय करके लाभ उठा सकते है। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में। श्राद्ध में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा। शास्त्रों में कई काम के बारे में बताया गया है। जिन्हें एकादशी के दिन नहीं करना चाहिए। जानें इन कामों के बारे में। इस दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर सोते हुए करवट लेते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा। जानकारों की मानें तो एक साल में चौबीस एकादशी होती हैं, लेकिन मलमास या अधिकमास होने की स्थिति में इनकी संख्या छब्बीस हो जाती है। शनिवार को एकादशी के साथ बन रहे हैं कई शुभ योग। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से कैसा रहेहगा आपका दिन। आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक के चार महीनों को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है । साथ ही ये काम भूलकर भी न करें। विशाखा नक्षत्र और हरिशयनी एकादशी के संयोग में आप कौन सा खास उपाय करके लाभ उठा सकते है। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन है । इसके साथ ही दो शुभ योग के साथ एकादशी है। जानें आचार्य इंदु प्रकाश से कैसा रहेगा आपका दिन। Devshayani Ekadashi दो हज़ार उन्नीस: बारह जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन है। धार्मिक रुप से इस दिन का बहुत ही अधिक महत्व है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा के बारें में। July Calender दो हज़ार उन्नीस: जुलाई दो हज़ार उन्नीस कूी शुरुआत में ही व्रत-त्योहार का सिलसिला शुरु हो जाएगा। देखें पूरी लिस्ट। |
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की गुरुवार को ईरानी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। उन्होंने विदेश एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भारत में अक्टूबर में होने वाले अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पर सबका ध्यान है और इस पर ही चर्चा की गई।
गौरतलब है कि म्यांमार में सेना एवं पुलिस के अत्याचार के कारण सात लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान बंगलादेश में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। भारत ने म्यांमार के प्रभावित इलाकों में रोहिंग्या शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी है जबकि बंगलादेश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की भी आर्थिक मदद दी गईहै।
| विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की गुरुवार को ईरानी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। उन्होंने विदेश एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भारत में अक्टूबर में होने वाले अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पर सबका ध्यान है और इस पर ही चर्चा की गई। गौरतलब है कि म्यांमार में सेना एवं पुलिस के अत्याचार के कारण सात लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान बंगलादेश में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। भारत ने म्यांमार के प्रभावित इलाकों में रोहिंग्या शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी है जबकि बंगलादेश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की भी आर्थिक मदद दी गईहै। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
प्रथमा बैक, CSM, मलेशिया द्वारा बन्धक दि.10.8.15को रमेश सिहं पुत्र लल्लू सिहंनि. ग्राम की भूमिग् ााटा सं. 22, 124मि, को 1,45,000/-मेबन्धककिया है ह.र.का.25.9.15 .
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन।
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। प्रथमा बैक, CSM, मलेशिया द्वारा बन्धक दि.दस.आठ.पंद्रहको रमेश सिहं पुत्र लल्लू सिहंनि. ग्राम की भूमिग् ााटा सं. बाईस, एक सौ चौबीसमि, को एक,पैंतालीस,शून्य/-मेबन्धककिया है ह.र.का.पच्चीस.नौ.पंद्रह . ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपराधी विकास दुबे के बाद एनकाउंटर का दौर जारी है जिसके चलते इनामी अपराधी हनुमान पांडे उर्फ़ राकेश पांडे की हो रही ताबड़तोड़ तलाश के दौरान आज सुबह लखनऊ के सरोजिनी नगर में एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया है। वह बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या को अंजाम देने के बाद से फरार चल रहा था।
अपराधी हनुमान पांडे बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी का बेहद खास और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का करीबी बताया जा रहा है। वह बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या को अंजाम देने के बाद से फरार चल रहा था। मिली जानकारी के अनुसार इनोवा कार में 5 बदमाशों के होने की सूचना मिली जब एसटीएफ ने इनको रोकने का प्रयास किया तो ये बदमाश भागने लगे।
इसी दौरान बदमाशों की गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई जिससे बाद बदमाशों ने एसटीएफ की टीम पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोलियां चलाना शुरू कर दीं जिसमें एक बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गया और अन्य फरार होने में कामयाब हो गए।
घायल बदमाश को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। जांच-पड़ताल करने पर जानकारी हुई थी कि मुठभेड़ में मारा गया अपराधी हनुमान पांडे है। मुठभेड़ को लेकर एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए अपराधी हनुमान पांडे के ऊपर एक लाख का इनाम घोषित था और उसकी तलाश काफी लंबे समय से एसटीएफ को थी।
कुछ दिन पूर्व खान मुबारक गैंग के शूटर नीरज की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ था कि हनुमान पांडे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाला है, जिसके बाद से एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थी। आज लखनऊ के सरोजिनी नगर इलाके में एसटीएफ एक गाड़ी में कुछ बदमाशों की होने की जानकारी मिली। जिस पर एसटीएफ ने घेराबंदी की तो सभी ने भागने का प्रयास किया और फिर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में हनुमान पांडे को गोली लगी और वह मारा गया।
| लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपराधी विकास दुबे के बाद एनकाउंटर का दौर जारी है जिसके चलते इनामी अपराधी हनुमान पांडे उर्फ़ राकेश पांडे की हो रही ताबड़तोड़ तलाश के दौरान आज सुबह लखनऊ के सरोजिनी नगर में एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया है। वह बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या को अंजाम देने के बाद से फरार चल रहा था। अपराधी हनुमान पांडे बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी का बेहद खास और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का करीबी बताया जा रहा है। वह बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या को अंजाम देने के बाद से फरार चल रहा था। मिली जानकारी के अनुसार इनोवा कार में पाँच बदमाशों के होने की सूचना मिली जब एसटीएफ ने इनको रोकने का प्रयास किया तो ये बदमाश भागने लगे। इसी दौरान बदमाशों की गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई जिससे बाद बदमाशों ने एसटीएफ की टीम पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोलियां चलाना शुरू कर दीं जिसमें एक बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गया और अन्य फरार होने में कामयाब हो गए। घायल बदमाश को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। जांच-पड़ताल करने पर जानकारी हुई थी कि मुठभेड़ में मारा गया अपराधी हनुमान पांडे है। मुठभेड़ को लेकर एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए अपराधी हनुमान पांडे के ऊपर एक लाख का इनाम घोषित था और उसकी तलाश काफी लंबे समय से एसटीएफ को थी। कुछ दिन पूर्व खान मुबारक गैंग के शूटर नीरज की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ था कि हनुमान पांडे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाला है, जिसके बाद से एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थी। आज लखनऊ के सरोजिनी नगर इलाके में एसटीएफ एक गाड़ी में कुछ बदमाशों की होने की जानकारी मिली। जिस पर एसटीएफ ने घेराबंदी की तो सभी ने भागने का प्रयास किया और फिर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में हनुमान पांडे को गोली लगी और वह मारा गया। |
दिल्ली। आम आदमी पार्टी के नेता व दिल्ली डायलॉग कमीशन के वाइस चेयरमैन आशीष खेतान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे को लेकर किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए उन्होंने साफ किया है कि वह वकालत की प्रैक्टिस करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रैक्टिस करने के लिए वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। आशीष खेतान को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सलाहकार बनाया गया था। आशीष खेतान पूर्व में पत्रकार भी रह चुके हैं।
आशीष खेतान साल 2014 में आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े, इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने नई दिल्ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर भी चुनाव लड़ा था हालांकि वह जीत दर्ज नहीं करा सके थे।
पिछले साल खेतान को कट्टरपंथी हिंदू संगठनों द्वारा जान से मारने की कथित धमकी मिली थी। खेतान ने धमकी की सूचना केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को देते हुए उनसे इस पर उचित कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि गृह मंत्रालय की ओर से इस पर कोई प्रतिकिया देखने को नहीं मिली थी।
| दिल्ली। आम आदमी पार्टी के नेता व दिल्ली डायलॉग कमीशन के वाइस चेयरमैन आशीष खेतान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे को लेकर किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए उन्होंने साफ किया है कि वह वकालत की प्रैक्टिस करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रैक्टिस करने के लिए वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। आशीष खेतान को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सलाहकार बनाया गया था। आशीष खेतान पूर्व में पत्रकार भी रह चुके हैं। आशीष खेतान साल दो हज़ार चौदह में आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े, इसके बाद दो हज़ार चौदह लोकसभा चुनाव में उन्होंने नई दिल्ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर भी चुनाव लड़ा था हालांकि वह जीत दर्ज नहीं करा सके थे। पिछले साल खेतान को कट्टरपंथी हिंदू संगठनों द्वारा जान से मारने की कथित धमकी मिली थी। खेतान ने धमकी की सूचना केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को देते हुए उनसे इस पर उचित कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि गृह मंत्रालय की ओर से इस पर कोई प्रतिकिया देखने को नहीं मिली थी। |
ने एक इंजेक्शन के द्वारा एक पौधे को ज़हर दिया। सिद्धांततः पौधे को क्षणभर में मुरझा जाना था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उपस्थित जन समुदाय हंसने लगा । बसु के लिए यह बड़ी कठिन घड़ी थी ।
'पौधे को विष देने से कोई हानि नहीं हुई, इसका मतलब है कि विष मुझे भी नहीं मार सकता।' ऐसा कहकर उन्होंने ज़हर की शीशी उठाकर पी ली । विस्मय से लोग चिल्ला उठे और हाय-तोबा मच गई।
इसी बीच एक व्यक्ति खड़ा हुआ और सबको शांत करके उसने भरी सभा में स्वीकार किया कि उसने ज़हर के बदले उसी रंग का पानी शीशी में भर दिया था।
फिर क्या था, बसु ने वास्तविक विष लेकर पुनः पौधे को इंजेक्शन दिया। देखते ही देखते पौधा मुरझा गया। उपस्थित समुदाय खुशी से झूम उठा और आचार्य बसु ने आंखें उठाकर भीड़ पर नजर डाली, मानो उन्हें अपनी खोज का पुरस्कार मिल चुका था।
एक-एक मिनट का हिसाब
भारत के प्रतिभाशाली इंजीनियर भारतरत्न डॉ. मोक्षगुंडम् विश्वेश्वरैया वक्त के बड़े पाबंद थे । वे एक-एक मिनट का हिसाब रखते। एक दिन एक व्यक्ति उनसे मिलने आया । वह उनकी इस आदत को जानता था। अतः जल्दी में वह समय से एक मिनट पहले उनके घर पहुंच गया। डॉक्टर विश्वेश्वरैया किसी काम में लगे हुए थे । अपना काम छोड़कर वे उससे मिलने आए। घड़ी देखी और बोले- 'आपने एक मिनट पहले आकर मेरा एक अमूल्य मिनट नष्ट कर दिया। इस मिनट में मैं कोई और काम कर सकता था । '
गुड़िया की मरम्मत
एक बार मारकोनी आयरलैंड गए। उनके आने की खबर सुनकर अखबारों के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे लेकिन मिल नहीं सके क्योंकि फुरसत ही नहीं थी। बाद में पता चला कि एक छोटी-सी बच्ची अपनी टूटी हुई गुड़िया लेकर उनके पास आयी थी जिसकी मरम्मत करने में मारकोनी देर तक व्यस्त रहे ।
★ वैज्ञानिकों की बातें *
नियम के पक्के
जिस तरह डॉ. विश्वेश्वरैया वक्त के पाबंद थे, उसी तरह नियम के भी बड़े पक्के थे। बात तब की है, जब वह 'भारत रत्न' की उपाधि लेने दिल्ली आये थे। सरकारी मेहमान के नाते वह राष्ट्रपति भवन
में ठहराए गए थे ।
एक दिन सुबह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से वह बोले- 'अब मुझे इजाजत दीजिए । | ने एक इंजेक्शन के द्वारा एक पौधे को ज़हर दिया। सिद्धांततः पौधे को क्षणभर में मुरझा जाना था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उपस्थित जन समुदाय हंसने लगा । बसु के लिए यह बड़ी कठिन घड़ी थी । 'पौधे को विष देने से कोई हानि नहीं हुई, इसका मतलब है कि विष मुझे भी नहीं मार सकता।' ऐसा कहकर उन्होंने ज़हर की शीशी उठाकर पी ली । विस्मय से लोग चिल्ला उठे और हाय-तोबा मच गई। इसी बीच एक व्यक्ति खड़ा हुआ और सबको शांत करके उसने भरी सभा में स्वीकार किया कि उसने ज़हर के बदले उसी रंग का पानी शीशी में भर दिया था। फिर क्या था, बसु ने वास्तविक विष लेकर पुनः पौधे को इंजेक्शन दिया। देखते ही देखते पौधा मुरझा गया। उपस्थित समुदाय खुशी से झूम उठा और आचार्य बसु ने आंखें उठाकर भीड़ पर नजर डाली, मानो उन्हें अपनी खोज का पुरस्कार मिल चुका था। एक-एक मिनट का हिसाब भारत के प्रतिभाशाली इंजीनियर भारतरत्न डॉ. मोक्षगुंडम् विश्वेश्वरैया वक्त के बड़े पाबंद थे । वे एक-एक मिनट का हिसाब रखते। एक दिन एक व्यक्ति उनसे मिलने आया । वह उनकी इस आदत को जानता था। अतः जल्दी में वह समय से एक मिनट पहले उनके घर पहुंच गया। डॉक्टर विश्वेश्वरैया किसी काम में लगे हुए थे । अपना काम छोड़कर वे उससे मिलने आए। घड़ी देखी और बोले- 'आपने एक मिनट पहले आकर मेरा एक अमूल्य मिनट नष्ट कर दिया। इस मिनट में मैं कोई और काम कर सकता था । ' गुड़िया की मरम्मत एक बार मारकोनी आयरलैंड गए। उनके आने की खबर सुनकर अखबारों के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे लेकिन मिल नहीं सके क्योंकि फुरसत ही नहीं थी। बाद में पता चला कि एक छोटी-सी बच्ची अपनी टूटी हुई गुड़िया लेकर उनके पास आयी थी जिसकी मरम्मत करने में मारकोनी देर तक व्यस्त रहे । ★ वैज्ञानिकों की बातें * नियम के पक्के जिस तरह डॉ. विश्वेश्वरैया वक्त के पाबंद थे, उसी तरह नियम के भी बड़े पक्के थे। बात तब की है, जब वह 'भारत रत्न' की उपाधि लेने दिल्ली आये थे। सरकारी मेहमान के नाते वह राष्ट्रपति भवन में ठहराए गए थे । एक दिन सुबह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से वह बोले- 'अब मुझे इजाजत दीजिए । |
साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में अमला पॉल एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है। साथ ही वह सोशल मीडिया पर भी अपने फैंस के लिए कुछ न कुछ साझा करती ही रहती हैं। अमला को उनकी फिल्म अदाई के लिए भी जाना जाता है, वो इसलिए क्योंकि इस फिल्म में अमला ने न्यूड सीन देकर सभी को हैरान कर दिया था।
साल 2019 के जुलाई महीने में अमला एक दम से सुर्खियों में आ गई थीं। दरअसल अमला ने फिल्म 'अदाई' में अमला पॉल ने न्यूड सीन दिया था, जिसकी वजह से वो चर्चा में आ गई थीं। फिल्म में अमला पॉल ने एक ऐसी बेटी का किरदार निभाया था जो एक रात नशे में लापता हो जाती है। अमला पॉल ने बताया था कि जब वह न्यूड सीन कर रही थीं तो उस समय फिल्म के सेट पर करीब 15 लोग मौजूद थे।
अमला ने बताया था, मैं इस सीन को लेकर काफी परेशान थीं। मैं जानना चाहती थी कि सेट पर क्या होने वाला है और सेट पर कौन-कौन मौजूद रहेगा। मुझे परेशान देखकर डायरेक्टर रत्ना कुमार ने कहा कि न्यूड सीन की शूटिंग के दौरान तुम एक स्पेशल कॉस्ट्यूम पहन सकती हो लेकिन मैंने बिना कॉस्ट्यूम के वो सीन कर दिखाया।
बात करें अमला के करियर की तो उन्होंने अपनी फिल्म करियर की शुरूआत मलयालम फिल्म नीलमथारा में सहायक भूमिका निभाई थी। फिल्म एक ब्लॉकबस्टर हिट थी। लेकिन इसके बाद कई फिल्मों में भूमिका पाने में सफल रही। अदाई के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल भी किया गया था।
अमला पॉल जब अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीर शेयर करती हैं तो वो तुरंत ही इंटरनेट पर वायरल हो जाती है। अमला को लोग इंटरनेट सेंसेशन मानते हैं। याद दिला दें कि साउथ की ये अभिनेत्री जल्दी ही हिंदी सिनेमा में भी नजर आने वाली हैं। फिल्मकार महेश भट्ट सत्तर के दशक की चर्चित अभिनेत्री रहीं परवीन बॉबी पर आधारित वेब सीरीज का निर्माण कर रहे हैं।
| साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में अमला पॉल एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है। साथ ही वह सोशल मीडिया पर भी अपने फैंस के लिए कुछ न कुछ साझा करती ही रहती हैं। अमला को उनकी फिल्म अदाई के लिए भी जाना जाता है, वो इसलिए क्योंकि इस फिल्म में अमला ने न्यूड सीन देकर सभी को हैरान कर दिया था। साल दो हज़ार उन्नीस के जुलाई महीने में अमला एक दम से सुर्खियों में आ गई थीं। दरअसल अमला ने फिल्म 'अदाई' में अमला पॉल ने न्यूड सीन दिया था, जिसकी वजह से वो चर्चा में आ गई थीं। फिल्म में अमला पॉल ने एक ऐसी बेटी का किरदार निभाया था जो एक रात नशे में लापता हो जाती है। अमला पॉल ने बताया था कि जब वह न्यूड सीन कर रही थीं तो उस समय फिल्म के सेट पर करीब पंद्रह लोग मौजूद थे। अमला ने बताया था, मैं इस सीन को लेकर काफी परेशान थीं। मैं जानना चाहती थी कि सेट पर क्या होने वाला है और सेट पर कौन-कौन मौजूद रहेगा। मुझे परेशान देखकर डायरेक्टर रत्ना कुमार ने कहा कि न्यूड सीन की शूटिंग के दौरान तुम एक स्पेशल कॉस्ट्यूम पहन सकती हो लेकिन मैंने बिना कॉस्ट्यूम के वो सीन कर दिखाया। बात करें अमला के करियर की तो उन्होंने अपनी फिल्म करियर की शुरूआत मलयालम फिल्म नीलमथारा में सहायक भूमिका निभाई थी। फिल्म एक ब्लॉकबस्टर हिट थी। लेकिन इसके बाद कई फिल्मों में भूमिका पाने में सफल रही। अदाई के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल भी किया गया था। अमला पॉल जब अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीर शेयर करती हैं तो वो तुरंत ही इंटरनेट पर वायरल हो जाती है। अमला को लोग इंटरनेट सेंसेशन मानते हैं। याद दिला दें कि साउथ की ये अभिनेत्री जल्दी ही हिंदी सिनेमा में भी नजर आने वाली हैं। फिल्मकार महेश भट्ट सत्तर के दशक की चर्चित अभिनेत्री रहीं परवीन बॉबी पर आधारित वेब सीरीज का निर्माण कर रहे हैं। |
नही । धनी ज़मीदार पुलाव खाया करता है । वह अपनी किसी दरिद्र प्रजाको बासी भात खाते देखकर सोचता है कि 'इसके दुःखकी कोई सीमा नहीं हैं' - जिस तरह वह भूलता है, उसी तरह तुम भी भूलते हो ।
- श्रीकान्त पर्व २
जैसे लोग ही समाजकी अधिक निन्दा करते फिरने हैं, जो समाज से कोई सम्बन्ध ही नहीं रखते, बल्कि उसकी ओरसे सर्वथा उपेक्षित रहते है । तुम लोग न तो अच्छी तरह पराये समाजको जानते हो और न अच्छी तरह अपने ही समाजको ।
- श्रीकान्त, पर्व २
घरकी मालकिन सब लोगोसे ख़राब खाती-पीती है, कभी-कभी तो नौकरीकी अपेक्षा भी । बहुधा उसे नौकरोसे भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है; किन्तु, तुम ( मर्द ) इस दुःखसे व्याकुल होकर रोते हुए मत फिरो; हम लोगोको दासीके समान ही बनी रहने दो, दूसरे देशो-जैसी रानी बना डालने की चेष्टा मत करो ।
श्रीकान्त पर्व २
एकका मर्मान्तक दुःख जब कि दूसरे के लिए उपहासकी वस्तु हो जाता है, तो इससे बढकर, ट्रैजेडी संसारमें और क्या हो सकती है? फिर भी होता यही है । लोक-समाज में रहते हुए भी जिस आदमीने लोकाचारको नही माना - विद्रोह किया है, वह फ़रियाद भी करे तो किससे ? -- श्रीकान्त, पर्व ३
X X अफसोस तो इस बातका है कि मनुष्य, पड़ोसी होकर, अपने दूसरे पडोसीकी जीवन-यात्राका मार्ग, बिना किसी दोपके, इतना दुर्गम और दु.खमय बना दे सकता है, ऐसी हृदयहीन निर्दय वर्बरताका उदाहरण दुनियामे शायद सिर्फ हिन्दू समाजके सिवा और कहीं न मिलेगा ।
- श्रीकान्त, पर्व ३ | नही । धनी ज़मीदार पुलाव खाया करता है । वह अपनी किसी दरिद्र प्रजाको बासी भात खाते देखकर सोचता है कि 'इसके दुःखकी कोई सीमा नहीं हैं' - जिस तरह वह भूलता है, उसी तरह तुम भी भूलते हो । - श्रीकान्त पर्व दो जैसे लोग ही समाजकी अधिक निन्दा करते फिरने हैं, जो समाज से कोई सम्बन्ध ही नहीं रखते, बल्कि उसकी ओरसे सर्वथा उपेक्षित रहते है । तुम लोग न तो अच्छी तरह पराये समाजको जानते हो और न अच्छी तरह अपने ही समाजको । - श्रीकान्त, पर्व दो घरकी मालकिन सब लोगोसे ख़राब खाती-पीती है, कभी-कभी तो नौकरीकी अपेक्षा भी । बहुधा उसे नौकरोसे भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है; किन्तु, तुम इस दुःखसे व्याकुल होकर रोते हुए मत फिरो; हम लोगोको दासीके समान ही बनी रहने दो, दूसरे देशो-जैसी रानी बना डालने की चेष्टा मत करो । श्रीकान्त पर्व दो एकका मर्मान्तक दुःख जब कि दूसरे के लिए उपहासकी वस्तु हो जाता है, तो इससे बढकर, ट्रैजेडी संसारमें और क्या हो सकती है? फिर भी होता यही है । लोक-समाज में रहते हुए भी जिस आदमीने लोकाचारको नही माना - विद्रोह किया है, वह फ़रियाद भी करे तो किससे ? -- श्रीकान्त, पर्व तीन X X अफसोस तो इस बातका है कि मनुष्य, पड़ोसी होकर, अपने दूसरे पडोसीकी जीवन-यात्राका मार्ग, बिना किसी दोपके, इतना दुर्गम और दु.खमय बना दे सकता है, ऐसी हृदयहीन निर्दय वर्बरताका उदाहरण दुनियामे शायद सिर्फ हिन्दू समाजके सिवा और कहीं न मिलेगा । - श्रीकान्त, पर्व तीन |
कोरोनावायरस के चलते हरियाणा सरकार ने अहम फैसला लेते हुए पहली से 12वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि सामान्य परिस्थितियां होने तक ऑनलाइन पढ़ाने का निर्णय लिया है। स्कूल खुलने तक विद्यार्थियों को घर पर ही रहकर अपने अभिभावकों की मदद से तथा फोन एवं वाट्सएप के माध्यम से अध्यापकों की सहायता से पढ़ाई करनी होगी।
शिक्षा मंत्री ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष नए शैक्षिक सत्रों का आरंभ एक अप्रैल से शुरू होता है, परंतु इस साल कोरोना वायरस की महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाऊन है जिसके के कारण यह सत्र अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है।
उन्होंने बताया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं और इस बारे में सभी को पहले ही सूचित भी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विभाग ने ई-लर्निंग में मदद करने के लिए वेबसाइट www. haryanaedusat. com बनाई है।
शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने आगे बताया कि एजूसेट नेटवर्क पर टेलीकास्ट की जाने वाली ऑडियो/वीडियो सामग्री भी इस पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है ताकि विद्यार्थी उसका उपयोग कर सकें। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए एक सामान्य टाइम टेबल/शेड्यूल बनाया गया है जो उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा, अध्यापक प्रतिदिन सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक विद्यार्थियों को फोन/वाट्सएप के माध्यम से पाठ पढ़ाएंगे। इस प्रकार विद्यार्थी घर पर रहकर अपने माता-पिता/बड़ों की मदद से अध्ययन करेंगे। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे जानकारी दी कि उक्त वेबसाइट में शिक्षा विभाग की विभिन्न अन्य पहल जैसे 'दीक्षा' और 'चॉक-लिट' के लिंक भी होंगे। यही नहीं विद्यार्थियों की लर्निंग का परीक्षण करने के लिए वेबसाइट पर 'ऑब्जेक्टिव टाइप प्रशन बैंक' भी जोड़ा जा रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| कोरोनावायरस के चलते हरियाणा सरकार ने अहम फैसला लेते हुए पहली से बारहवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि सामान्य परिस्थितियां होने तक ऑनलाइन पढ़ाने का निर्णय लिया है। स्कूल खुलने तक विद्यार्थियों को घर पर ही रहकर अपने अभिभावकों की मदद से तथा फोन एवं वाट्सएप के माध्यम से अध्यापकों की सहायता से पढ़ाई करनी होगी। शिक्षा मंत्री ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष नए शैक्षिक सत्रों का आरंभ एक अप्रैल से शुरू होता है, परंतु इस साल कोरोना वायरस की महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाऊन है जिसके के कारण यह सत्र अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। उन्होंने बताया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं और इस बारे में सभी को पहले ही सूचित भी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विभाग ने ई-लर्निंग में मदद करने के लिए वेबसाइट www. haryanaedusat. com बनाई है। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने आगे बताया कि एजूसेट नेटवर्क पर टेलीकास्ट की जाने वाली ऑडियो/वीडियो सामग्री भी इस पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है ताकि विद्यार्थी उसका उपयोग कर सकें। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए एक सामान्य टाइम टेबल/शेड्यूल बनाया गया है जो उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, अध्यापक प्रतिदिन सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक विद्यार्थियों को फोन/वाट्सएप के माध्यम से पाठ पढ़ाएंगे। इस प्रकार विद्यार्थी घर पर रहकर अपने माता-पिता/बड़ों की मदद से अध्ययन करेंगे। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे जानकारी दी कि उक्त वेबसाइट में शिक्षा विभाग की विभिन्न अन्य पहल जैसे 'दीक्षा' और 'चॉक-लिट' के लिंक भी होंगे। यही नहीं विद्यार्थियों की लर्निंग का परीक्षण करने के लिए वेबसाइट पर 'ऑब्जेक्टिव टाइप प्रशन बैंक' भी जोड़ा जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
चश्मे का सही चयन एक जरूरी मुद्दा हैसब कुछ और हर समय, क्योंकि इस विशेष सहायक को चेहरे पर पहना जाता है और इसे सार्वजनिक प्रदर्शन पर रखा जाता है। कोई भी अपनी चेहरे की विशेषताओं को खराब नहीं करना चाहता, यही कारण है कि सभी जिम्मेदारियों के साथ चश्मे के चयन से संपर्क करना उचित है।
कई प्रकार के चेहरे के आकार होते हैंःवर्ग, दौर, त्रिभुज और आयताकार। चश्मे बेचने वाले अधिकांश विक्रेता कहते हैं कि चयन में सबसे लगातार सवाल यह है कि कौन से चश्मे गोल दौर के लिए उपयुक्त हैं। चेहरे का यह रूप बहुत आम है, खासकर स्लाव लोगों के बीच। यही कारण है कि वास्तविक समस्या बन जाती है कि चश्मा गोल चेहरे पर जाते हैं।
यह कैसे निर्धारित किया जाए कि चेहरा गोल है?यह बहुत आसान हैः इस चेहरे की विशेषताएं आमतौर पर अप्रत्याशित होती हैं, डिंपल के डिंपल होते हैं, और चेहरे की चौड़ाई और लंबाई लगभग एक दूसरे के बराबर होती है। एक गोल चेहरे अपने मालिक को छोटा बनाता हैः उदाहरण के लिए, गोल चेहरे वाली युवा लड़कियां बच्चों के समान ही होती हैं।
लेकिन ऐसे व्यक्ति का ऋण यह है कि गालों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, सुंदर आंखें और होंठ खो जाते हैं, जो लड़कियां मेक-अप की मदद से जोर देने की कोशिश करती हैं।
तो फिर भी, कौन से चश्मे दौर के लिए उपयुक्त हैंव्यक्ति, कौन सा रूप चुनने के लिए सबसे अच्छा है? चश्मे की ऊपरी सीमा भौहें के नीचे जरूरी है, और आकार को भौहें के झुकाव का समर्थन करना चाहिए। आप गोल चश्मे या "बूंदों" नहीं ले सकते हैं, वरीयता को वर्ग के आकार में दिया जाना चाहिए या आयत में फैलाया जाना चाहिए। यदि चेहरा बहुत व्यापक नहीं है, तो आप तितली के आकार के साथ प्रयोग कर सकते हैं, जो न केवल चेहरे को फैलाएगा, बल्कि आंखों पर जोर देगा।
किस बिंदु के सवाल में अगला कारकएक गोल चेहरे के लिए उपयुक्त, रंग है। इस रूप के साथ, आप एक तेज विपरीत नहीं बना सकते हैं और चमकीले रंगों का चयन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह केवल स्थिति को खराब करता है, साथ ही, इसके विपरीत, आवश्यक नहीं है, लेकिन तेज नहीं है। आपकी पसंद ब्राउन टोन या पेस्टल के बिंदुओं को दी जानी चाहिए, आप धातु भी चुन सकते हैं। इन रंगों को सार्वभौमिक और गोरे और ब्रुनेट दोनों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
लेकिन न केवल शानदार फ्रेम भी महत्वपूर्ण हैएक गोल चेहरे के लिए कौन से चश्मा उपयुक्त हैं और साथ ही सूरज की रोशनी से बचाने में मदद करने के लिए कई युक्तियां हैं। मंदिरों में विस्तार करने वाले बिंदुओं को वरीयता देना उचित है। इस तरह के चालाक का सहारा ले कर, आप अपने गाल की हड्डी को दृढ़ता से संकीर्ण करते हैं। इसके अलावा उन चश्मे पर ध्यान देने योग्य है जो चेहरे को दृष्टि से फैलाने में मदद करेंगे। इस प्रकार के चेहरे, पैटर्न और सजावटी गहने वाले लोगों के लिए धूप का चश्मा भी अस्वीकार्य है, गहने के बिना विस्तारित आकार के विशेष रिम्स, लेकिन सुंदर रंग के लिए, उनके लिए बने होते हैं।
सूरज से चश्मा चुनने में अगला कदम रंग हैलेंस। कल्पना की उड़ान के लिए पूरी आजादी है। आप उज्ज्वल और मानक अंधेरे लेंस के बीच चयन कर सकते हैं। मुख्य बात यह है कि नियम का पालन करनाः कोई तेज विपरीत नहीं है।
| चश्मे का सही चयन एक जरूरी मुद्दा हैसब कुछ और हर समय, क्योंकि इस विशेष सहायक को चेहरे पर पहना जाता है और इसे सार्वजनिक प्रदर्शन पर रखा जाता है। कोई भी अपनी चेहरे की विशेषताओं को खराब नहीं करना चाहता, यही कारण है कि सभी जिम्मेदारियों के साथ चश्मे के चयन से संपर्क करना उचित है। कई प्रकार के चेहरे के आकार होते हैंःवर्ग, दौर, त्रिभुज और आयताकार। चश्मे बेचने वाले अधिकांश विक्रेता कहते हैं कि चयन में सबसे लगातार सवाल यह है कि कौन से चश्मे गोल दौर के लिए उपयुक्त हैं। चेहरे का यह रूप बहुत आम है, खासकर स्लाव लोगों के बीच। यही कारण है कि वास्तविक समस्या बन जाती है कि चश्मा गोल चेहरे पर जाते हैं। यह कैसे निर्धारित किया जाए कि चेहरा गोल है?यह बहुत आसान हैः इस चेहरे की विशेषताएं आमतौर पर अप्रत्याशित होती हैं, डिंपल के डिंपल होते हैं, और चेहरे की चौड़ाई और लंबाई लगभग एक दूसरे के बराबर होती है। एक गोल चेहरे अपने मालिक को छोटा बनाता हैः उदाहरण के लिए, गोल चेहरे वाली युवा लड़कियां बच्चों के समान ही होती हैं। लेकिन ऐसे व्यक्ति का ऋण यह है कि गालों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, सुंदर आंखें और होंठ खो जाते हैं, जो लड़कियां मेक-अप की मदद से जोर देने की कोशिश करती हैं। तो फिर भी, कौन से चश्मे दौर के लिए उपयुक्त हैंव्यक्ति, कौन सा रूप चुनने के लिए सबसे अच्छा है? चश्मे की ऊपरी सीमा भौहें के नीचे जरूरी है, और आकार को भौहें के झुकाव का समर्थन करना चाहिए। आप गोल चश्मे या "बूंदों" नहीं ले सकते हैं, वरीयता को वर्ग के आकार में दिया जाना चाहिए या आयत में फैलाया जाना चाहिए। यदि चेहरा बहुत व्यापक नहीं है, तो आप तितली के आकार के साथ प्रयोग कर सकते हैं, जो न केवल चेहरे को फैलाएगा, बल्कि आंखों पर जोर देगा। किस बिंदु के सवाल में अगला कारकएक गोल चेहरे के लिए उपयुक्त, रंग है। इस रूप के साथ, आप एक तेज विपरीत नहीं बना सकते हैं और चमकीले रंगों का चयन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह केवल स्थिति को खराब करता है, साथ ही, इसके विपरीत, आवश्यक नहीं है, लेकिन तेज नहीं है। आपकी पसंद ब्राउन टोन या पेस्टल के बिंदुओं को दी जानी चाहिए, आप धातु भी चुन सकते हैं। इन रंगों को सार्वभौमिक और गोरे और ब्रुनेट दोनों के लिए उपयुक्त माना जाता है। लेकिन न केवल शानदार फ्रेम भी महत्वपूर्ण हैएक गोल चेहरे के लिए कौन से चश्मा उपयुक्त हैं और साथ ही सूरज की रोशनी से बचाने में मदद करने के लिए कई युक्तियां हैं। मंदिरों में विस्तार करने वाले बिंदुओं को वरीयता देना उचित है। इस तरह के चालाक का सहारा ले कर, आप अपने गाल की हड्डी को दृढ़ता से संकीर्ण करते हैं। इसके अलावा उन चश्मे पर ध्यान देने योग्य है जो चेहरे को दृष्टि से फैलाने में मदद करेंगे। इस प्रकार के चेहरे, पैटर्न और सजावटी गहने वाले लोगों के लिए धूप का चश्मा भी अस्वीकार्य है, गहने के बिना विस्तारित आकार के विशेष रिम्स, लेकिन सुंदर रंग के लिए, उनके लिए बने होते हैं। सूरज से चश्मा चुनने में अगला कदम रंग हैलेंस। कल्पना की उड़ान के लिए पूरी आजादी है। आप उज्ज्वल और मानक अंधेरे लेंस के बीच चयन कर सकते हैं। मुख्य बात यह है कि नियम का पालन करनाः कोई तेज विपरीत नहीं है। |
सीबीआई की टीमों ने इसके बाद दिल्ली, नोएडा और हापुड़ स्थित चीनी मिल के निदेशकों, फैक्ट्री, कॉरपोरेट ऑफिस और दिल्ली स्थित कंपनी के दफ्तर समेत आठ ठिकानों पर छापेमारी भी की। वहीं ईडी ने भी इसका केस दर्ज करने के बाद चीनी मिल परिसर, नोएडा स्थित कॉरपोरेट ऑफिस और मेरठ स्थित बैंक के जोनल कार्यालय में छापा मारा था।
सीबीआई के मुताबिक निजी कंपनी द्वारा वर्ष 2011 में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से 148. 60 करोड़ का लोन लिया था। यह लोन 5762 गन्ना किसानों से गन्ने की आपूर्ति के एवज में लिया गया था जबकि कंपनी ने इसे अपने निजी लाभ के लिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया। बाद में मार्च 2015 में इसे एनपीए घोषित कर दिया गया। वहीं आरबीआई ने इसे बैक द्वारा किया गया फ्रॉड करार दे डाला। वहीं एनपीए के बावजूद जनवरी 2015 में बैंक द्वारा निजी चीनी मिल को 110 करोड़ रुपये का लोन और स्वीकृत कर दिया गया जबकि उसने पुराना 97. 85 करोड़ का लोन वापस नहीं किया था।
सिंभौली शुगर मिल लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी गुरमीत सिंह मान, गुरपाल सिंह (डिप्टी एमडी), जीएससी राव (चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर), संजय तापरिया (सीएफओ), गुरसिमरन कौर मान (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, कमर्शियल), एसके गांगुली, एससी कुमार, बीके गोस्वामी, यशवंत वर्मा, राम शर्मा (नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर), बैक अधिकारी।
| सीबीआई की टीमों ने इसके बाद दिल्ली, नोएडा और हापुड़ स्थित चीनी मिल के निदेशकों, फैक्ट्री, कॉरपोरेट ऑफिस और दिल्ली स्थित कंपनी के दफ्तर समेत आठ ठिकानों पर छापेमारी भी की। वहीं ईडी ने भी इसका केस दर्ज करने के बाद चीनी मिल परिसर, नोएडा स्थित कॉरपोरेट ऑफिस और मेरठ स्थित बैंक के जोनल कार्यालय में छापा मारा था। सीबीआई के मुताबिक निजी कंपनी द्वारा वर्ष दो हज़ार ग्यारह में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से एक सौ अड़तालीस. साठ करोड़ का लोन लिया था। यह लोन पाँच हज़ार सात सौ बासठ गन्ना किसानों से गन्ने की आपूर्ति के एवज में लिया गया था जबकि कंपनी ने इसे अपने निजी लाभ के लिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया। बाद में मार्च दो हज़ार पंद्रह में इसे एनपीए घोषित कर दिया गया। वहीं आरबीआई ने इसे बैक द्वारा किया गया फ्रॉड करार दे डाला। वहीं एनपीए के बावजूद जनवरी दो हज़ार पंद्रह में बैंक द्वारा निजी चीनी मिल को एक सौ दस करोड़ रुपये का लोन और स्वीकृत कर दिया गया जबकि उसने पुराना सत्तानवे. पचासी करोड़ का लोन वापस नहीं किया था। सिंभौली शुगर मिल लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी गुरमीत सिंह मान, गुरपाल सिंह , जीएससी राव , संजय तापरिया , गुरसिमरन कौर मान , एसके गांगुली, एससी कुमार, बीके गोस्वामी, यशवंत वर्मा, राम शर्मा , बैक अधिकारी। |
आज के समय में तकनकी दुनिया में तरह तरह के रोबोट बनाये जा रहे है, ऐसे में हाल में एक ऐसे रोबोट डॉग का निर्मण किया गया है, जो भौंक कर नोटोफिकेशन की जानकारी देगा. रोबोट प्रोजैक्ट निर्माता जेसन बूज़ी (Jason Buzi) ने लंदन के जॉन नोलन स्टूडियो में एक सोशी (Soshee) नामक रोबोट डॉग विकसित किया है जो सोशल मीडिया से मैसेज आने पर नोटिफिकेशन अलर्ट देने में मदद करेगा.
इस रोबोट को ब्लूटुथ की सहायता से स्मार्टफोन के साथ कनैक्ट किया जा सकता है. यह फेसबुक, इंस्टाग्राम व ट्विटर अकाऊंट के नोटिफिकेशन्स का खड़े होकर, भौंक कर, सिर घुमाकर व पूंछ हिलाकर अलर्ट देगा. इस रोबोट की कीमत 149 डॉलर (लगभग 9756 रुपए) बताई गयी है.
रोबोट डॉग 4. 5 इंच ऊंचा, 6 इंच लम्बा व 2. 75 इंच चौड़ा है, जिसमे ऑडियो बोर्ड व माइक्रोकंट्रोलर लगाया गया है. इसकी फर के नीचे चार मोटर्स लगाई गई हैं जो बैटरी की मदद से चलती है. इसे अभी किक स्टार्टर के तौर पर तैयार किया गया है, किन्तु उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही इसे सभी यूज़र्स के लिए पेश किया जा सकता है, जिसमे काले, सफेद व भूरे रंग में इसे यूज़र्स खरीद सकेंगे.
तो क्या 2050 तक संबंध बनाने के लिए नहीं पड़ेगी मर्दों की जरुरत ?
| आज के समय में तकनकी दुनिया में तरह तरह के रोबोट बनाये जा रहे है, ऐसे में हाल में एक ऐसे रोबोट डॉग का निर्मण किया गया है, जो भौंक कर नोटोफिकेशन की जानकारी देगा. रोबोट प्रोजैक्ट निर्माता जेसन बूज़ी ने लंदन के जॉन नोलन स्टूडियो में एक सोशी नामक रोबोट डॉग विकसित किया है जो सोशल मीडिया से मैसेज आने पर नोटिफिकेशन अलर्ट देने में मदद करेगा. इस रोबोट को ब्लूटुथ की सहायता से स्मार्टफोन के साथ कनैक्ट किया जा सकता है. यह फेसबुक, इंस्टाग्राम व ट्विटर अकाऊंट के नोटिफिकेशन्स का खड़े होकर, भौंक कर, सिर घुमाकर व पूंछ हिलाकर अलर्ट देगा. इस रोबोट की कीमत एक सौ उनचास डॉलर बताई गयी है. रोबोट डॉग चार. पाँच इंच ऊंचा, छः इंच लम्बा व दो. पचहत्तर इंच चौड़ा है, जिसमे ऑडियो बोर्ड व माइक्रोकंट्रोलर लगाया गया है. इसकी फर के नीचे चार मोटर्स लगाई गई हैं जो बैटरी की मदद से चलती है. इसे अभी किक स्टार्टर के तौर पर तैयार किया गया है, किन्तु उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही इसे सभी यूज़र्स के लिए पेश किया जा सकता है, जिसमे काले, सफेद व भूरे रंग में इसे यूज़र्स खरीद सकेंगे. तो क्या दो हज़ार पचास तक संबंध बनाने के लिए नहीं पड़ेगी मर्दों की जरुरत ? |
इन दिनों देश की राजनीति में चुनावों का दौर जारी है जहां देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव, उपचुनाव, निकाव चुनाव हो रहें हैं। जहां अपनी जीत का दावा बोलने के लिए पार्टी एक दूसरे पर हमलावर दिख रहें हैं और इन सब के बीच दिल्ली में एमसीडी चुनावों के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने इस चुनाव में प्रचार के लिए चार राज्यों मुख्यमंत्रियों के अलावा कई स्टार प्रचारकों की भारी भरकम फौज उतार दी है।
इस चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को धूल चटाने के लिए यह बीजेपी का बड़ा दाव माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टी इस चुनाव को महज एक नगर निगम का चुनाव नहीं मान रही। इसलिए खुद राष्ट्रीय नेतृत्व इस चुनाव में व्यवस्था की निगरानी कर रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव की कमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने हाथ में ले ली है. वह खुद दिल्ली के संगम विहार में रोड शो कर चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे. वहीं उत्तम नगर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रोड शो करेंगे. इसी प्रकार नरेला में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तो पटपड़गंज में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी रोड शो कर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करेंगे. इसी क्रम में हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को केशवपुरम जिले की जिम्मेदारी दी गई है. जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सर्मा दिल्ली के घोंडा क्षेत्र में रोड शो करते हुए मतदाताओं का बीजेपी के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करेंगे.
एमसीडी चुनाव में बीजेपी ने कई केंद्रीय मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी है. बताया जा रहा है कि यह मंत्री पहले से निर्धारित क्षेत्र में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार का काम कर रहे थे, लेकिन पार्टी की ओर से अब इन्हें अधिकृत तौर पर दिशा निर्देश दिया गया है. इनमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत का देवली विधानसभा क्षेत्र में रोड शो की जिम्मेदारी दी गई है. इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को रोहिणी क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है. वह यहां रोड शो भी करेंगे. इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को नई दिल्ली की ज़िम्मेदारी दी गई है. इन सभी नेताओं को पूरे दम खम के साथ तत्काल काम पर जुट जाने को कहा गया है।
| इन दिनों देश की राजनीति में चुनावों का दौर जारी है जहां देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव, उपचुनाव, निकाव चुनाव हो रहें हैं। जहां अपनी जीत का दावा बोलने के लिए पार्टी एक दूसरे पर हमलावर दिख रहें हैं और इन सब के बीच दिल्ली में एमसीडी चुनावों के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने इस चुनाव में प्रचार के लिए चार राज्यों मुख्यमंत्रियों के अलावा कई स्टार प्रचारकों की भारी भरकम फौज उतार दी है। इस चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को धूल चटाने के लिए यह बीजेपी का बड़ा दाव माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टी इस चुनाव को महज एक नगर निगम का चुनाव नहीं मान रही। इसलिए खुद राष्ट्रीय नेतृत्व इस चुनाव में व्यवस्था की निगरानी कर रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव की कमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने हाथ में ले ली है. वह खुद दिल्ली के संगम विहार में रोड शो कर चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे. वहीं उत्तम नगर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रोड शो करेंगे. इसी प्रकार नरेला में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तो पटपड़गंज में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी रोड शो कर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करेंगे. इसी क्रम में हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को केशवपुरम जिले की जिम्मेदारी दी गई है. जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सर्मा दिल्ली के घोंडा क्षेत्र में रोड शो करते हुए मतदाताओं का बीजेपी के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करेंगे. एमसीडी चुनाव में बीजेपी ने कई केंद्रीय मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी है. बताया जा रहा है कि यह मंत्री पहले से निर्धारित क्षेत्र में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार का काम कर रहे थे, लेकिन पार्टी की ओर से अब इन्हें अधिकृत तौर पर दिशा निर्देश दिया गया है. इनमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत का देवली विधानसभा क्षेत्र में रोड शो की जिम्मेदारी दी गई है. इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को रोहिणी क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है. वह यहां रोड शो भी करेंगे. इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को नई दिल्ली की ज़िम्मेदारी दी गई है. इन सभी नेताओं को पूरे दम खम के साथ तत्काल काम पर जुट जाने को कहा गया है। |
शाहिद कपूर स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म कबीर सिंह (Kabir Singh) के बाद डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा (Sandeep Reddy Vanga) ने अपनी अगली फिल्म की तैयारी शुरू कर दी है। ये फिल्म दर्शकों के क्रेज को कई गुणा बढ़ाने वाली है।
शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) -किआरा आडवाणी (Kiara Advani) स्टारर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म कबीर सिंह (Kabir Singh) देने के बाद निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा (Sandeep Reddy Vanga) सांतवे आसमान पर है। साल 2017 में तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डी (Arjun Reddy) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के साथ अपने निर्देशन के करियर की शुरुआत करने वाले डायरेक्टर ने दूसरी ही फिल्म कबीर में भी सक्सेस रेट बरकरार रखा और तमाम आलोचनाओं और रुकावटों के बावजूद साल की पहली हाईएस्ट ग्रोसर फिल्म साबित हुई।
इसके बाद से ही सुपर टैलेंटेड डायरेक्टर की ओर फिल्मी दुनिया की निगाहें रुक गई है। इस फिल्म के बाद संदीप रेड्डी वांगा की अगली फिल्म क्या होगी ये सवाल सभी के मन में बना हुआ है। हाल ही में संदीप की अगली फिल्म से जुड़ी ताजा जानकारी सामने आई है। एंटरटेनमेंट पोर्ट्ल स्पॉटबॉयई की खबर की मानें तो डायरेक्टर अगली फिल्म शुगर मिल की बैकड्रॉप पर लेकर सामने आएंगे। ये फिल्म धमाकेदार एक्शन सीन्स से भरी होने वाली है। पोर्ट्ल ने फिल्म से जुड़े करीबी सूत्र के हवाले से ये जानकारी दी है।
संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म कबीर सिंह और अर्जुन रेड्डी के क्रॉफ्ट को देखते हुए लगता है कि अगर ये एक्शन फिल्म हुई तो इसका लेवल कई गुणा ऊंचा होने वाला है। एक्शन फिल्मों के शौकिन सिनेप्रेमियों के लिए ये बात किसी सोने पर सुहागा से कम नहीं होगी। हालांकि सुपर सक्सेस हासिल कर चुकी डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की ये फिल्म जरुर कई आलोचनाओं का शिकार भी हो चुकी है।
इसे भी पढ़ें- 'कबीर सिंह' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने आलोचकों को दिया मुंह तोड़ जवाब, कहा- 'नासमझ लोग ही...'
लेकिन निर्देशक ने इन सभी बातों का जवाब देते हुए कहा था, 'जब आप किसी से गहरे प्यार में हो और अगर आपको एक दूसरे को चांटा मारने की आजादी नहीं है, तो मुझे वहां कुछ भी दिखाई नहीं देता। उसने (कबीर सिंह ने) बिना किसी कारण के उसे थप्पड़ मारा, कम से कम कबीर के पास उसे थप्पड़ मारने की एक वजह तो थी लेकिन उसने (प्रीति) ने उसे बिना कारण थप्पड़ मारा था। यदि आप उसे चांटा नहीं लगा सकते या आप अपनीे प्यार को जहां चाहें वहां नहीं छू सकते या किस नहीं कर सकते तो मुझे वहां कोई भावानाएं नहीं दिखती।' हालांकि उनके इस बयान की काफी आलोचना भी हुई थी।
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| शाहिद कपूर स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म कबीर सिंह के बाद डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने अपनी अगली फिल्म की तैयारी शुरू कर दी है। ये फिल्म दर्शकों के क्रेज को कई गुणा बढ़ाने वाली है। शाहिद कपूर -किआरा आडवाणी स्टारर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म कबीर सिंह देने के बाद निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा सांतवे आसमान पर है। साल दो हज़ार सत्रह में तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के साथ अपने निर्देशन के करियर की शुरुआत करने वाले डायरेक्टर ने दूसरी ही फिल्म कबीर में भी सक्सेस रेट बरकरार रखा और तमाम आलोचनाओं और रुकावटों के बावजूद साल की पहली हाईएस्ट ग्रोसर फिल्म साबित हुई। इसके बाद से ही सुपर टैलेंटेड डायरेक्टर की ओर फिल्मी दुनिया की निगाहें रुक गई है। इस फिल्म के बाद संदीप रेड्डी वांगा की अगली फिल्म क्या होगी ये सवाल सभी के मन में बना हुआ है। हाल ही में संदीप की अगली फिल्म से जुड़ी ताजा जानकारी सामने आई है। एंटरटेनमेंट पोर्ट्ल स्पॉटबॉयई की खबर की मानें तो डायरेक्टर अगली फिल्म शुगर मिल की बैकड्रॉप पर लेकर सामने आएंगे। ये फिल्म धमाकेदार एक्शन सीन्स से भरी होने वाली है। पोर्ट्ल ने फिल्म से जुड़े करीबी सूत्र के हवाले से ये जानकारी दी है। संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म कबीर सिंह और अर्जुन रेड्डी के क्रॉफ्ट को देखते हुए लगता है कि अगर ये एक्शन फिल्म हुई तो इसका लेवल कई गुणा ऊंचा होने वाला है। एक्शन फिल्मों के शौकिन सिनेप्रेमियों के लिए ये बात किसी सोने पर सुहागा से कम नहीं होगी। हालांकि सुपर सक्सेस हासिल कर चुकी डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की ये फिल्म जरुर कई आलोचनाओं का शिकार भी हो चुकी है। इसे भी पढ़ें- 'कबीर सिंह' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने आलोचकों को दिया मुंह तोड़ जवाब, कहा- 'नासमझ लोग ही...' लेकिन निर्देशक ने इन सभी बातों का जवाब देते हुए कहा था, 'जब आप किसी से गहरे प्यार में हो और अगर आपको एक दूसरे को चांटा मारने की आजादी नहीं है, तो मुझे वहां कुछ भी दिखाई नहीं देता। उसने बिना किसी कारण के उसे थप्पड़ मारा, कम से कम कबीर के पास उसे थप्पड़ मारने की एक वजह तो थी लेकिन उसने ने उसे बिना कारण थप्पड़ मारा था। यदि आप उसे चांटा नहीं लगा सकते या आप अपनीे प्यार को जहां चाहें वहां नहीं छू सकते या किस नहीं कर सकते तो मुझे वहां कोई भावानाएं नहीं दिखती।' हालांकि उनके इस बयान की काफी आलोचना भी हुई थी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
वैश्विक बाजार से मिले निगेटिव संंकेतों के बाद शुक्रवार को बाजार लाल निशान पर खुले। सेंसेक्स में इस दौरान दो अंकों की कमजोरी दिखी। वहीं, निफ्टी 300 अंकों के बीचे आ गया। रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकाॅर्ड निचले स्तर पर लुढ़क गया। सेंसेक्स शुक्रवार को 200 अंकों की गिरावट के साथ 58014 अंकों के स्तर पर कारोबार करता दिखा वहीं निफ्टी भी 50 अंक लुढ़ककर 17281 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है।
| वैश्विक बाजार से मिले निगेटिव संंकेतों के बाद शुक्रवार को बाजार लाल निशान पर खुले। सेंसेक्स में इस दौरान दो अंकों की कमजोरी दिखी। वहीं, निफ्टी तीन सौ अंकों के बीचे आ गया। रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकाॅर्ड निचले स्तर पर लुढ़क गया। सेंसेक्स शुक्रवार को दो सौ अंकों की गिरावट के साथ अट्ठावन हज़ार चौदह अंकों के स्तर पर कारोबार करता दिखा वहीं निफ्टी भी पचास अंक लुढ़ककर सत्रह हज़ार दो सौ इक्यासी के लेवल पर ट्रेड कर रहा है। |
रसगुल्ला बर्ड्स नेस्ट बनाने में आसान है।
रसगुल्ला बर्ड्स नेस्ट बनाने में आसान है। आइए जानते हैं विधि।
1. सबसे पहले एक कटोरे में चेन्ना तथा कॉर्न फ्लोर मिलाएं।
2. अपने हाथों में कुछ मिश्रण लें और छोटे आकार के गोले बनाएं।
3. एक कड़ाही में 500 मिलीलीटर पानी गर्म करें। इसमें चीनी मिलाएं और उबाल आने दें।
4. अब इसमें तैयार गोले मिलाएं और मध्यम आंच पर 7-10 मिनट के लिए ढक्क कर उबाल लें।
5. ढक्कन खोलें और इसे गैस से हटा दें,गोले निकालें और ठंडा करें।
6. कड़ाही में 280 ग्राम वर्मीसेली भूनें। इसमें 45 मिलीलीटर मक्खन मिलाएं।
7. अब दूध मिलाएं और मध्यम आंच पर 3 - 5 मिनट के लिए कुक करें।
8. एक छोटा कटोरा लें और इसमें तैयार वर्मीसेली मिलाएं।
9. एक घोंसला बनाने के लिए कटोरे के किनारों पर तैयार वर्मीसेली फैलाएं। 30 मिनट के लिए ठंडा करें।
10. अब कटोरे से तैयार घोंसला हटा दें। उस पर मिंट के पत्तों लगाएं।
11. उस पर तैयार रसगुल्ला रखें। चेरी और पिस्ता के साथ गार्निश करें।
12. आपके रसहुल्ले तैयार हैं सर्व करें।
| रसगुल्ला बर्ड्स नेस्ट बनाने में आसान है। रसगुल्ला बर्ड्स नेस्ट बनाने में आसान है। आइए जानते हैं विधि। एक. सबसे पहले एक कटोरे में चेन्ना तथा कॉर्न फ्लोर मिलाएं। दो. अपने हाथों में कुछ मिश्रण लें और छोटे आकार के गोले बनाएं। तीन. एक कड़ाही में पाँच सौ मिलीलीटर पानी गर्म करें। इसमें चीनी मिलाएं और उबाल आने दें। चार. अब इसमें तैयार गोले मिलाएं और मध्यम आंच पर सात-दस मिनट के लिए ढक्क कर उबाल लें। पाँच. ढक्कन खोलें और इसे गैस से हटा दें,गोले निकालें और ठंडा करें। छः. कड़ाही में दो सौ अस्सी ग्राम वर्मीसेली भूनें। इसमें पैंतालीस मिलीलीटर मक्खन मिलाएं। सात. अब दूध मिलाएं और मध्यम आंच पर तीन - पाँच मिनट के लिए कुक करें। आठ. एक छोटा कटोरा लें और इसमें तैयार वर्मीसेली मिलाएं। नौ. एक घोंसला बनाने के लिए कटोरे के किनारों पर तैयार वर्मीसेली फैलाएं। तीस मिनट के लिए ठंडा करें। दस. अब कटोरे से तैयार घोंसला हटा दें। उस पर मिंट के पत्तों लगाएं। ग्यारह. उस पर तैयार रसगुल्ला रखें। चेरी और पिस्ता के साथ गार्निश करें। बारह. आपके रसहुल्ले तैयार हैं सर्व करें। |
एक दीप का आएउ तोरे । सब संसार पाँय-तर. मोरे ॥ दहिने फिर सो अस उजियारा । जस जग चाँद सुरुज मनियारा ॥ मुहमंद बाई दिसि तजा, एक स्रवन, एक आँखि
जब तें दाहिन होइ मिला बोल पपीहा पाँखि ॥८॥ है। ध्रुव अचल सौ दाहिन लावा । फिरि सुमेरु चिवडर-गढ़ आवा ।। देखेउ तोरे मंदिर घमाई । मातु तोरि रिभराई ॥ जस सरवन बिनु संधो अंधा । तस ररि मुई, तोहि चित बँधा ॥ कहेसि मरौं, को काँवरि लेई ? । पूव नाहि, पानी को देई ? ॥ गई पियास लागि तेहि साधा । पानि दोन्ह दसरथ के हाधा । पानि न पिये, आगि पै चाहा । तोहि अस सुत जनमे अस लाहा ॥ होइ भगीरथ करु वह फेरा । जाहि सबार, मरन कै वेरा ।।
तू सपूत माता कर, अस परदेस न लेहि । अब ताई मुई होइहि, मुए जाइ गति देहि ॥ १० ॥ नागमती दुख बिरह अपारा । धरती सरग जरै देहि झारा ॥ नगर कोट घर बाहर सूना । नौजि होइ घर पुरुष बिहूना ।। तू काँवरू परा बस टोना । भूला जोग, छरा तोहि लोना ॥ वह तोहि फारन मरि भइ छारा । रही नाग होइ पवन अघारा ।। कहुँ घोल हि 'म' कहँ लेइ खाहू' । माँसु न, काया रुचै जो काहू ॥
संसार में थाए हैं। मनियार = रौनकु, धमक्ता हुआ। मुहमद पाँई' घाँखि = मुहम्मद कवि ने याई और घसि चोर कान करना छोड़ दिया (जायसी काने थे भी ) अर्थात् वाम मार्ग छोड़कर दक्षिण मार्ग का अनुसरण किया । पोल = कहलाता है। (१०) दाहिन लावा = प्रदक्षिणा की। घमोई = सस्यानासी या मँदर्भा नामक कटोला पौधा जो सँडहरों पर उजड़े मकानों में प्रायः उगता है। सवार = जल्दी । ( 19 ) नीजि = न, ईश्वर न करे (अवध) । कविरू
खोना = लेना घमारी जो जादू
कामरूप में जो जादू के लिये प्रसिद्ध है । में में एक थी। | एक दीप का आएउ तोरे । सब संसार पाँय-तर. मोरे ॥ दहिने फिर सो अस उजियारा । जस जग चाँद सुरुज मनियारा ॥ मुहमंद बाई दिसि तजा, एक स्रवन, एक आँखि जब तें दाहिन होइ मिला बोल पपीहा पाँखि ॥आठ॥ है। ध्रुव अचल सौ दाहिन लावा । फिरि सुमेरु चिवडर-गढ़ आवा ।। देखेउ तोरे मंदिर घमाई । मातु तोरि रिभराई ॥ जस सरवन बिनु संधो अंधा । तस ररि मुई, तोहि चित बँधा ॥ कहेसि मरौं, को काँवरि लेई ? । पूव नाहि, पानी को देई ? ॥ गई पियास लागि तेहि साधा । पानि दोन्ह दसरथ के हाधा । पानि न पिये, आगि पै चाहा । तोहि अस सुत जनमे अस लाहा ॥ होइ भगीरथ करु वह फेरा । जाहि सबार, मरन कै वेरा ।। तू सपूत माता कर, अस परदेस न लेहि । अब ताई मुई होइहि, मुए जाइ गति देहि ॥ दस ॥ नागमती दुख बिरह अपारा । धरती सरग जरै देहि झारा ॥ नगर कोट घर बाहर सूना । नौजि होइ घर पुरुष बिहूना ।। तू काँवरू परा बस टोना । भूला जोग, छरा तोहि लोना ॥ वह तोहि फारन मरि भइ छारा । रही नाग होइ पवन अघारा ।। कहुँ घोल हि 'म' कहँ लेइ खाहू' । माँसु न, काया रुचै जो काहू ॥ संसार में थाए हैं। मनियार = रौनकु, धमक्ता हुआ। मुहमद पाँई' घाँखि = मुहम्मद कवि ने याई और घसि चोर कान करना छोड़ दिया अर्थात् वाम मार्ग छोड़कर दक्षिण मार्ग का अनुसरण किया । पोल = कहलाता है। दाहिन लावा = प्रदक्षिणा की। घमोई = सस्यानासी या मँदर्भा नामक कटोला पौधा जो सँडहरों पर उजड़े मकानों में प्रायः उगता है। सवार = जल्दी । नीजि = न, ईश्वर न करे । कविरू खोना = लेना घमारी जो जादू कामरूप में जो जादू के लिये प्रसिद्ध है । में में एक थी। |
नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में आसाराम को अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी है। लेकिन उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने में नरेंद्र यादव नाम के उस पत्रकार की भी बहुत बड़ी भूमिका है, जो किसी प्रलोभन में नहीं आए और निडरता से रिपोर्टिंग की। आसाराम को सजा सुनाए जाने के बाद बीबीसी से बातचीत में शाहजहांपुर के पत्रकार नरेंद्र यादव ने इस पूरी प्रक्रिया में उनके सामने आने वाली तमाम बाधाओं और चुनौतियों पर विस्तार से बात की।
नरेंद्र यादव बताते हैं कि पहले सामान्य तौर पर इसे एक क्राइम की खबर की तरह हमने किया लेकिन जब मामले की गहराई तक पहुंचा और आध्यात्मिक चोले में लिपटे इतने 'खतरनाक' व्यक्ति का पता चला तो हमने इसे मिशन बना लिया।
नरेंद्र यादव बताते हैं कि ऐसी तमाम कोशिशें हुईं जिससे मैं इस खबर से दूर हो जाऊं लेकिन वे लोग सफल नहीं हो पाए।
नरेंद्र यादव बताते हैं कि पैकेट खोलकर देखा तो उसमें एक ऋषि प्रसाद पत्रिका थी, कुछ अखबार थे जिसमें अशोक सिंघल और तमाम बड़े नेताओं के बयान आसाराम के पक्ष में छपे थे।
नरेंद्र यादव ने इस बात को बहुत गंभीरता से नहीं लिया लेकिन अगले कुछ दिन में उन पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला हो गया।
नरेंद्र यादव शाहजहांपुर में दैनिक जागरण अखबार में काम करते हैं और उस वक्त भी वहीं काम कर रहे थे। वो बताते हैं कि अखबार ने उन्हें बहुत समर्थन दिया और पूरी छूट दी सही खबर छापने की।
नरेंद्र यादव बताते हैं कि उन्होंने करीब 287 खबरें इस मामले में लिखीं और सबका बहुत प्रभाव पड़ा। हालांकि इस दौरान उन पर न सिर्फ जानलेवा हमला हुआ बल्कि आसाराम के तमाम समर्थकों ने उनका बहिष्कार किया और बापू को निर्दोष बताते हुए मुझ पर गलत खबरें लिखने का आरोप लगाया।
(साभारः bbc. com)
| नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में आसाराम को अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी है। लेकिन उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने में नरेंद्र यादव नाम के उस पत्रकार की भी बहुत बड़ी भूमिका है, जो किसी प्रलोभन में नहीं आए और निडरता से रिपोर्टिंग की। आसाराम को सजा सुनाए जाने के बाद बीबीसी से बातचीत में शाहजहांपुर के पत्रकार नरेंद्र यादव ने इस पूरी प्रक्रिया में उनके सामने आने वाली तमाम बाधाओं और चुनौतियों पर विस्तार से बात की। नरेंद्र यादव बताते हैं कि पहले सामान्य तौर पर इसे एक क्राइम की खबर की तरह हमने किया लेकिन जब मामले की गहराई तक पहुंचा और आध्यात्मिक चोले में लिपटे इतने 'खतरनाक' व्यक्ति का पता चला तो हमने इसे मिशन बना लिया। नरेंद्र यादव बताते हैं कि ऐसी तमाम कोशिशें हुईं जिससे मैं इस खबर से दूर हो जाऊं लेकिन वे लोग सफल नहीं हो पाए। नरेंद्र यादव बताते हैं कि पैकेट खोलकर देखा तो उसमें एक ऋषि प्रसाद पत्रिका थी, कुछ अखबार थे जिसमें अशोक सिंघल और तमाम बड़े नेताओं के बयान आसाराम के पक्ष में छपे थे। नरेंद्र यादव ने इस बात को बहुत गंभीरता से नहीं लिया लेकिन अगले कुछ दिन में उन पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला हो गया। नरेंद्र यादव शाहजहांपुर में दैनिक जागरण अखबार में काम करते हैं और उस वक्त भी वहीं काम कर रहे थे। वो बताते हैं कि अखबार ने उन्हें बहुत समर्थन दिया और पूरी छूट दी सही खबर छापने की। नरेंद्र यादव बताते हैं कि उन्होंने करीब दो सौ सत्तासी खबरें इस मामले में लिखीं और सबका बहुत प्रभाव पड़ा। हालांकि इस दौरान उन पर न सिर्फ जानलेवा हमला हुआ बल्कि आसाराम के तमाम समर्थकों ने उनका बहिष्कार किया और बापू को निर्दोष बताते हुए मुझ पर गलत खबरें लिखने का आरोप लगाया। |
अमेरिकी सेना ने नेवादा और मैरीलैंड राज्यों में पहले दो तीन अल्ट्रा लाइट व्हीकल (ULV) की उत्तरजीविता का परीक्षण करना शुरू कर दिया ताकि उनकी खदान और बैलिस्टिक की क्षमता की पुष्टि हो सके।
2011 में महासचिव कार्यालय के अनुरोध पर TARDEC यूएस ऑटोमोबाइल एंड टैंक एडमिनिस्ट्रेशन (TARDEC) द्वारा विकसित, ULV परियोजना अनुसंधान के लिए एक मंच के रूप में काम करेगी जिसके परिणामस्वरूप भविष्य में अन्य TARDEC कार्यक्रमों का उपयोग किया जा सकता है। उपकरण।
ULV बनाने के अपने प्रयासों के तहत, TARDEC गैर-पारंपरिक रक्षा ठेकेदारों के साथ सहयोग करता है, जो वजन, जीवन शक्ति, लागत और आवश्यक तकनीकी विशिष्टताओं के बीच सबसे अच्छा समझौता प्राप्त करने में विभिन्न कंपनियों के अद्वितीय अनुभव का उपयोग करता है। यह एक सार्वभौमिक मंच बनाने की योजना है जहां आप बाजार पर उपलब्ध वाणिज्यिक तैयार-निर्मित वाणिज्यिक प्रणालियों (सीओटीएस) का उपयोग करने की प्रभावशीलता और परीक्षण कर सकते हैं और उन्हें नए विकसित प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत कर सकते हैं जो वर्तमान में तत्परता के विभिन्न स्तरों पर हैं। यह कार्यक्रम केवल 16 महीनों में डिजाइन से पहले प्रोटोटाइप के निर्माण तक चला गया है।
प्रोटोटाइप का डिज़ाइन एक हाइब्रिड पावर प्लांट द्वारा संचालित होता है, जिसमें ऊर्जा का उत्पादन डीजल इंजन द्वारा किया जाता है, और फिर इसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, जिसे दो ड्राइविंग मोटरों में आपूर्ति की जाती है - एक सामने और एक पीछे। इस तरह का एक समाधान, उच्च कर्षण गुणों को सुनिश्चित करने के अलावा, एक कार्डन शाफ्ट और मशीन के नीचे स्थित अन्य पारंपरिक मोटर वाहन घटकों की आवश्यकता को समाप्त करके, एक खदान के विस्फोट होने पर प्लेटफ़ॉर्म की उत्तरजीविता को बढ़ाता है।
रहने योग्य डिब्बे में, मेरा सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक विनाशकारी फ्लोटिंग फ़्लोर का उपयोग किया गया था, जो चालक दल के पैरों और पैरों को स्टील की पतवार से अलग करता है और विस्फोट की ऊर्जा को अवशोषित करता है। इसके अलावा, एक स्लाइडिंग ऊर्जा अवशोषित निलंबन, पांच-बिंदु सीट बेल्ट और सिर को नरम करने के लिए सिर को नरम करने के लिए कवर करने और चोटों को रोकने पर चोटों को रोकने के साथ सीटें हैं।
TARDEC विज्ञापन में कहा गया है कि ULV "उच्च शक्ति वाले स्टील्स और उन्नत मिश्रित सामग्री का उपयोग करता है जो विभिन्न प्रकार के खतरों के साथ कम वजन वाली बैलिस्टिक सुरक्षा प्रदान करता है, साथ ही मशीन के समग्र वजन को कम रखने के लिए नए विकसित पारदर्शी सिरेमिक कवच का उपयोग करता है। "
"कैब को सात निकास बिंदुओं के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो त्वरित-उद्घाटन और त्वरित-रिलीज़ तत्वों द्वारा संरक्षित हैं, इसमें व्यक्तिगत उपकरण और विशेष उपकरण के लिए जगह है, सामने और पीछे में लगे चौड़े कोण थर्मल इमेजर्स के माध्यम से परिपत्र स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करता है," व्लादिमीर गैटलिन, TARDEC इंजीनियर ने कहा )।
कार में हल्के पहिये, टायर और अन्य ऑटोमोटिव सिस्टम, एक विस्फोट-विस्फ़ोटक अधोमानक, और कमान, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटिंग, टोही, निगरानी और टोही (C4ISR) के लिए उन्नत उपकरण हैं।
ULV कार्यक्रम के प्रबंधक माइक कराकी (माइक कराकी) ने कहा कि ULV कार्यक्रम में आशाजनक वाहनों, साथ ही अन्य हाइब्रिड वाहनों की उत्तरजीविता को बढ़ाने में मदद करने की संभावना है।
"आप इस कार्यक्रम से किसी भी समय कुछ भी उपयोग करने में सक्षम होना चाहते हैं ताकि भविष्य में लागतों की नकल न करें," कराची ने कहा।
पारंपरिक डिज़ाइन के विपरीत, मशीन में एक "चिकनी तल" होता है, जब मानक इकाइयाँ नीचे की ओर खुली होती हैं, जिससे तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IED) के विस्फोट के प्रतिरोध में वृद्धि होती है।
कराकी ने कहाः "यदि आपके पास मशीन के नीचे कम उपकरण, घटक और सिस्टम हैं, और नीचे की ज्यामिति को वह करने की अनुमति दें जो आपको करने की आवश्यकता है . . . तो आप मशीन से ब्लास्ट ऊर्जा को निर्देशित करने के अपने अवसरों को बढ़ा सकते हैं। "
यह योजना बनाई गई है कि दोनों ULV नमूने अंततः नष्ट हो जाएंगे, और तीसरी मशीन, जो वर्तमान में अमेरिका के वारेन में TARDEC ग्राउंड पावर एंड एनर्जी सिस्टम लेबोरेटरी में हाइब्रिड इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन के सामान्य परीक्षण और मूल्यांकन से गुजर रही है, परीक्षण के रूप में संग्रहीत किया जाएगा। मंच।
ULV अनुसंधान कार्यक्रम के चार मुख्य उद्देश्य हैं, जिसमें 2000 किलो की पेलोड क्षमता, 6300 किलो मशीन का कुल वजन, मौजूदा MRAP मशीनों (मेरा और घात संरक्षण वाली मशीनें) और एक काल्पनिक मात्रा के लिए प्रति यूनिट $ 250 000 की तुलना में सुरक्षा का स्तर शामिल है। 5000 इकाइयों का आदेश, यह मानते हुए कि 2014 वर्ष में आदेश प्राप्त किया जा सकता है।
| अमेरिकी सेना ने नेवादा और मैरीलैंड राज्यों में पहले दो तीन अल्ट्रा लाइट व्हीकल की उत्तरजीविता का परीक्षण करना शुरू कर दिया ताकि उनकी खदान और बैलिस्टिक की क्षमता की पुष्टि हो सके। दो हज़ार ग्यारह में महासचिव कार्यालय के अनुरोध पर TARDEC यूएस ऑटोमोबाइल एंड टैंक एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा विकसित, ULV परियोजना अनुसंधान के लिए एक मंच के रूप में काम करेगी जिसके परिणामस्वरूप भविष्य में अन्य TARDEC कार्यक्रमों का उपयोग किया जा सकता है। उपकरण। ULV बनाने के अपने प्रयासों के तहत, TARDEC गैर-पारंपरिक रक्षा ठेकेदारों के साथ सहयोग करता है, जो वजन, जीवन शक्ति, लागत और आवश्यक तकनीकी विशिष्टताओं के बीच सबसे अच्छा समझौता प्राप्त करने में विभिन्न कंपनियों के अद्वितीय अनुभव का उपयोग करता है। यह एक सार्वभौमिक मंच बनाने की योजना है जहां आप बाजार पर उपलब्ध वाणिज्यिक तैयार-निर्मित वाणिज्यिक प्रणालियों का उपयोग करने की प्रभावशीलता और परीक्षण कर सकते हैं और उन्हें नए विकसित प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत कर सकते हैं जो वर्तमान में तत्परता के विभिन्न स्तरों पर हैं। यह कार्यक्रम केवल सोलह महीनों में डिजाइन से पहले प्रोटोटाइप के निर्माण तक चला गया है। प्रोटोटाइप का डिज़ाइन एक हाइब्रिड पावर प्लांट द्वारा संचालित होता है, जिसमें ऊर्जा का उत्पादन डीजल इंजन द्वारा किया जाता है, और फिर इसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, जिसे दो ड्राइविंग मोटरों में आपूर्ति की जाती है - एक सामने और एक पीछे। इस तरह का एक समाधान, उच्च कर्षण गुणों को सुनिश्चित करने के अलावा, एक कार्डन शाफ्ट और मशीन के नीचे स्थित अन्य पारंपरिक मोटर वाहन घटकों की आवश्यकता को समाप्त करके, एक खदान के विस्फोट होने पर प्लेटफ़ॉर्म की उत्तरजीविता को बढ़ाता है। रहने योग्य डिब्बे में, मेरा सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक विनाशकारी फ्लोटिंग फ़्लोर का उपयोग किया गया था, जो चालक दल के पैरों और पैरों को स्टील की पतवार से अलग करता है और विस्फोट की ऊर्जा को अवशोषित करता है। इसके अलावा, एक स्लाइडिंग ऊर्जा अवशोषित निलंबन, पांच-बिंदु सीट बेल्ट और सिर को नरम करने के लिए सिर को नरम करने के लिए कवर करने और चोटों को रोकने पर चोटों को रोकने के साथ सीटें हैं। TARDEC विज्ञापन में कहा गया है कि ULV "उच्च शक्ति वाले स्टील्स और उन्नत मिश्रित सामग्री का उपयोग करता है जो विभिन्न प्रकार के खतरों के साथ कम वजन वाली बैलिस्टिक सुरक्षा प्रदान करता है, साथ ही मशीन के समग्र वजन को कम रखने के लिए नए विकसित पारदर्शी सिरेमिक कवच का उपयोग करता है। " "कैब को सात निकास बिंदुओं के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो त्वरित-उद्घाटन और त्वरित-रिलीज़ तत्वों द्वारा संरक्षित हैं, इसमें व्यक्तिगत उपकरण और विशेष उपकरण के लिए जगह है, सामने और पीछे में लगे चौड़े कोण थर्मल इमेजर्स के माध्यम से परिपत्र स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करता है," व्लादिमीर गैटलिन, TARDEC इंजीनियर ने कहा )। कार में हल्के पहिये, टायर और अन्य ऑटोमोटिव सिस्टम, एक विस्फोट-विस्फ़ोटक अधोमानक, और कमान, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटिंग, टोही, निगरानी और टोही के लिए उन्नत उपकरण हैं। ULV कार्यक्रम के प्रबंधक माइक कराकी ने कहा कि ULV कार्यक्रम में आशाजनक वाहनों, साथ ही अन्य हाइब्रिड वाहनों की उत्तरजीविता को बढ़ाने में मदद करने की संभावना है। "आप इस कार्यक्रम से किसी भी समय कुछ भी उपयोग करने में सक्षम होना चाहते हैं ताकि भविष्य में लागतों की नकल न करें," कराची ने कहा। पारंपरिक डिज़ाइन के विपरीत, मशीन में एक "चिकनी तल" होता है, जब मानक इकाइयाँ नीचे की ओर खुली होती हैं, जिससे तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों के विस्फोट के प्रतिरोध में वृद्धि होती है। कराकी ने कहाः "यदि आपके पास मशीन के नीचे कम उपकरण, घटक और सिस्टम हैं, और नीचे की ज्यामिति को वह करने की अनुमति दें जो आपको करने की आवश्यकता है . . . तो आप मशीन से ब्लास्ट ऊर्जा को निर्देशित करने के अपने अवसरों को बढ़ा सकते हैं। " यह योजना बनाई गई है कि दोनों ULV नमूने अंततः नष्ट हो जाएंगे, और तीसरी मशीन, जो वर्तमान में अमेरिका के वारेन में TARDEC ग्राउंड पावर एंड एनर्जी सिस्टम लेबोरेटरी में हाइब्रिड इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन के सामान्य परीक्षण और मूल्यांकन से गुजर रही है, परीक्षण के रूप में संग्रहीत किया जाएगा। मंच। ULV अनुसंधान कार्यक्रम के चार मुख्य उद्देश्य हैं, जिसमें दो हज़ार किलो की पेलोड क्षमता, छः हज़ार तीन सौ किलो मशीन का कुल वजन, मौजूदा MRAP मशीनों और एक काल्पनिक मात्रा के लिए प्रति यूनिट दो सौ पचास डॉलर शून्य की तुलना में सुरक्षा का स्तर शामिल है। पाँच हज़ार इकाइयों का आदेश, यह मानते हुए कि दो हज़ार चौदह वर्ष में आदेश प्राप्त किया जा सकता है। |
पोप फ्रांसिस ने पादरियों की आगामी बैठक में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने का फैसला किया है। यह ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है। यहां महिलाएं निर्णय लेने में अधिक जिम्मेदारियों और अधिकारों की लंबे समय से मांग कर रहीं थीं।
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| पोप फ्रांसिस ने पादरियों की आगामी बैठक में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने का फैसला किया है। यह ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है। यहां महिलाएं निर्णय लेने में अधिक जिम्मेदारियों और अधिकारों की लंबे समय से मांग कर रहीं थीं। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news. |
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को झंडारोहण के बाद लखनऊ के जनेश्वर मिश्र उद्यान मे पतंग उड़ाने का भी आनन्द लिया. सीएम एक संस्था द्वारा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पतंगबाजी के आयोजन में शरीक हुए.
पतंगबाजी के दौरान मुख्यमंत्री ने किसी की पतंग नही काटी मगर जल्द ही डोर छोड़ दी क्योंकि शायद उन्हे अपनी पतंग कटने का डर था. इस मौके पर अखिलेश ने कहा कि पंतग उड़ाना एक दीवानगी होती है, हालांकि उन्होंने पतंग कम उड़ाई है मगर उन्हें पता है कि पतंग उड़ाने वाले न दिन देखते हैं न शाम. कई बार तो छत पर पतंग उड़ाते हुए दीवार भी नहीं दिखती और उसका नुकसान भी उठाना पड़ता है.
| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को झंडारोहण के बाद लखनऊ के जनेश्वर मिश्र उद्यान मे पतंग उड़ाने का भी आनन्द लिया. सीएम एक संस्था द्वारा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पतंगबाजी के आयोजन में शरीक हुए. पतंगबाजी के दौरान मुख्यमंत्री ने किसी की पतंग नही काटी मगर जल्द ही डोर छोड़ दी क्योंकि शायद उन्हे अपनी पतंग कटने का डर था. इस मौके पर अखिलेश ने कहा कि पंतग उड़ाना एक दीवानगी होती है, हालांकि उन्होंने पतंग कम उड़ाई है मगर उन्हें पता है कि पतंग उड़ाने वाले न दिन देखते हैं न शाम. कई बार तो छत पर पतंग उड़ाते हुए दीवार भी नहीं दिखती और उसका नुकसान भी उठाना पड़ता है. |
Ambikapur Women Auto Driver गीता सिंह को सभी जानते हैं। आज से सात साल पहले जब छत्तीसगढ़ में गीता ने महिला ऑटो चालक के रूप में समाज में अपनी पहचान बनाई, तो सभी उनके इस जज्बे को सलाम करने लगे। लेकिन गीता आज अम्बिकापुर के सैकड़ों महिलाओ के लिए मिसाल बन चुकी हैं। क्योंकि अब गीता अम्बिकापुर की उन महिलाओं की मदद के लिए आगे आ रहीं। जो घरेलू हिंसा के शिकार होती है।
गीता आज ऑटो चलाकर स्वयं के परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। और इसके साथ साथ गरीब महिलाओं की मदद भी कर रहीं हैं। गीता ने महिलाओं को सशक्त बनाने "गुलाबी नारी शक्ति" का गठन किया है। इस संगठन में लगभग 3000 से अधिक महिलाएं सदस्य हैं। जो ग्रामीण इलाकों या दूसरे क्षेत्रों की महिलाओं की मदद कर रही हैं। संगठन की अध्यक्ष गीता बताती हैं, कि इस संगठन के माध्यम से उन महिलाओं की मदद की जाती है। जो पति से प्रताड़ित, घर से भागी हुई, दहेज के लिए प्रताड़ित है। इसके साथ ही महिलाओं को कानूनी रूप से न्याय दिलाने के लिए "गुलाबी नारी शक्ति" के सदस्य मदद करतें हैं।
अम्बिकापुर की पहली महिला ऑटो चालक गीता सिंह कहतीं हैं कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं। आज भी वे पुरुषों की तरह अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। हां अकेले पति के कंधे पर घर चलाने का बोझ नही होना चाहिए। पति पत्नी को मिलकर यह जिम्मेदारी उठानी चाहिए। ऑटो चालक गीता सिंह जो पिछले 7 साल से शहर में ऑटो चला रहीं हैं, और इसके साथ-साथ महिलाओं को अपने अधिकार के लिए लड़कर, पुरुष प्रधान समाज में कंधे से कंधा मिलाकर चलना सिखा रही हैं।
दरअसल महिला ऑटो चालक गीता सिंह का परिवार कभी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इस तंग हाल जिंदगी से बाहर निकलने के लिए गीता ने खुद ऑटो का हैंडल अपने हाथों में लेने की ठानी। जिसके बाद गीता ने खुद ऑटो चलाना सीखा अब इस बात को भले ही 7 साल बीत चुके हैं। लेकिन गीता अब अपने साथ-साथ समाज के उन महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश कर रही हैं। जो स्वयं को कमजोर मानती हैं। गीता को सरगुजा संभाग के ऑटो यूनियन की संभागीय अध्यक्ष भी बनाया गया था।
आज शहर की 100 से अधिक महिलाएं गीता से प्रेरित होकर स्वरोजगार कर रही हैं। तो गीता को देखकर 20 महिलाएं अब तक ऑटो चालक बन चुकी हैं। इस सभी को गीता ने ही ऑटो चलाना सिखाया। वही ये सभी महिलाएं स्वयं ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। अब यह महिला ऑटो चालक आत्मनिर्भर होकर शहर में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ऑटो चला रही है वही गीता इनके लिए मिसाल बन चुकी हैं। सरगुजा जिले का अंबिकापुर प्रदेश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां पर महिलाएं ऑटो चलाती हैं।
गीता के संघर्ष को देखते हुए कई जनप्रतिनिधियों ने गीता को सम्मानित किया है। महिला दिवस , श्रम दिवस या फिर अन्य मौकों पर गीता को सम्मानित किया जाता है। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह भी गीता को सम्मानित कर चुके हैं। उसे दंतेवाड़ा रायपुर, जगदलपुर, कोरिया, बलरामपुर जिले में ही कॉलेज, जेल और पुलिस विभाग से सम्मान मिला है। गीता कहती है कि महिला ऑटो चालक के रूप में सम्मान तो सभी ने किया लिया । सरकार की योजनाओं का लाभ एभी तक नहीं मिल सका।
| Ambikapur Women Auto Driver गीता सिंह को सभी जानते हैं। आज से सात साल पहले जब छत्तीसगढ़ में गीता ने महिला ऑटो चालक के रूप में समाज में अपनी पहचान बनाई, तो सभी उनके इस जज्बे को सलाम करने लगे। लेकिन गीता आज अम्बिकापुर के सैकड़ों महिलाओ के लिए मिसाल बन चुकी हैं। क्योंकि अब गीता अम्बिकापुर की उन महिलाओं की मदद के लिए आगे आ रहीं। जो घरेलू हिंसा के शिकार होती है। गीता आज ऑटो चलाकर स्वयं के परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। और इसके साथ साथ गरीब महिलाओं की मदद भी कर रहीं हैं। गीता ने महिलाओं को सशक्त बनाने "गुलाबी नारी शक्ति" का गठन किया है। इस संगठन में लगभग तीन हज़ार से अधिक महिलाएं सदस्य हैं। जो ग्रामीण इलाकों या दूसरे क्षेत्रों की महिलाओं की मदद कर रही हैं। संगठन की अध्यक्ष गीता बताती हैं, कि इस संगठन के माध्यम से उन महिलाओं की मदद की जाती है। जो पति से प्रताड़ित, घर से भागी हुई, दहेज के लिए प्रताड़ित है। इसके साथ ही महिलाओं को कानूनी रूप से न्याय दिलाने के लिए "गुलाबी नारी शक्ति" के सदस्य मदद करतें हैं। अम्बिकापुर की पहली महिला ऑटो चालक गीता सिंह कहतीं हैं कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं। आज भी वे पुरुषों की तरह अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। हां अकेले पति के कंधे पर घर चलाने का बोझ नही होना चाहिए। पति पत्नी को मिलकर यह जिम्मेदारी उठानी चाहिए। ऑटो चालक गीता सिंह जो पिछले सात साल से शहर में ऑटो चला रहीं हैं, और इसके साथ-साथ महिलाओं को अपने अधिकार के लिए लड़कर, पुरुष प्रधान समाज में कंधे से कंधा मिलाकर चलना सिखा रही हैं। दरअसल महिला ऑटो चालक गीता सिंह का परिवार कभी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इस तंग हाल जिंदगी से बाहर निकलने के लिए गीता ने खुद ऑटो का हैंडल अपने हाथों में लेने की ठानी। जिसके बाद गीता ने खुद ऑटो चलाना सीखा अब इस बात को भले ही सात साल बीत चुके हैं। लेकिन गीता अब अपने साथ-साथ समाज के उन महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश कर रही हैं। जो स्वयं को कमजोर मानती हैं। गीता को सरगुजा संभाग के ऑटो यूनियन की संभागीय अध्यक्ष भी बनाया गया था। आज शहर की एक सौ से अधिक महिलाएं गीता से प्रेरित होकर स्वरोजगार कर रही हैं। तो गीता को देखकर बीस महिलाएं अब तक ऑटो चालक बन चुकी हैं। इस सभी को गीता ने ही ऑटो चलाना सिखाया। वही ये सभी महिलाएं स्वयं ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। अब यह महिला ऑटो चालक आत्मनिर्भर होकर शहर में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ऑटो चला रही है वही गीता इनके लिए मिसाल बन चुकी हैं। सरगुजा जिले का अंबिकापुर प्रदेश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां पर महिलाएं ऑटो चलाती हैं। गीता के संघर्ष को देखते हुए कई जनप्रतिनिधियों ने गीता को सम्मानित किया है। महिला दिवस , श्रम दिवस या फिर अन्य मौकों पर गीता को सम्मानित किया जाता है। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह भी गीता को सम्मानित कर चुके हैं। उसे दंतेवाड़ा रायपुर, जगदलपुर, कोरिया, बलरामपुर जिले में ही कॉलेज, जेल और पुलिस विभाग से सम्मान मिला है। गीता कहती है कि महिला ऑटो चालक के रूप में सम्मान तो सभी ने किया लिया । सरकार की योजनाओं का लाभ एभी तक नहीं मिल सका। |
रज़ा उत्सव पर रज़ा फॉउण्डेशन द्वारा आयोजित कवि समवाय के एक सत्र 'तम शून्य में जगत समीक्षाः कविता के अँधेरे-उजाले' में मुक्तिबोध की इस पंक्ति पर वक्तव्य दिए गए। उनमें से नन्दकिशोर आचार्य जी का वक्तव्य कुछ अंशों में यहाँ प्रस्तुत है। हिन्दी कविता की वर्तमान विश्लेषण प्रक्रिया पर एक नज़र और कविता का वास्तविक उद्देश्य को जानने के लिए यह वक्तव्य बेहद महत्त्वपूर्ण है।
यह जो विषय है और अभी जो इसको चारों तरफ से काफी समझने की कोशिश की गयी है, मैं इस विषय को एक और ढंग से भी देखने की कोशिश कर रहा हूँ। एक तो यह है कि जब हम कविता के अँधेरे-उजाले की बात करते हैं तो हम यह देखना चाहते हैं कि अपने समय का अँधेरा-उजाला कविता में किस तरह व्यक्त हुआ है। कैसे उसे चित्रित किया गया है, कैसे सम्प्रेषित (convey) किया गया है, कैसे कहा गया है और उसके क्या रूप हैं! यानी समय कविता में कैसे व्यक्त होता है! लेकिन मुझे एक दूसरी समस्या दिखायी देती है जिसपर मैं मानता हूँ कवियों को तो ज़रूर विचार करना चाहिए और कविता के जो सुधि पाठक हैं उन्हें भी। वह यह कि कविता के अपने अँधेरे-उजाले क्या हैं?
मुझे कोई ऐसा ज्ञान-विज्ञान का अनुशासन नज़र नहीं आता जिसमें अपने समय के अँधेरे-उजाले व्यक्त न होते हों। बस उनकी विधियां अलग-अलग हैं, उनको समझने की, कहने की, करने की। और अपनी विधियों के कारण ही वो अलग अनुशासन बनते हैं। लेकिन कविता के अपने अँधेरे-उजाले क्या हो सकते हैं? क्या हम कवि लोग उसको पहचानते हैं? या नहीं पहचानते हैं और हमारा ज़्यादा ध्यान विश्लेषण पर लगा रहता है? कि इतने विमर्श आ गए हैं और कविता में यह विमर्श है, वह विमर्श है।
मैं यह मानता हूँ कि कविता अपने में और सारी कलाएँ व अन्य अनुशासन भी, सभी अन्वेषण (exploration) की प्रक्रिया हैं जिसे अभी जगत समीक्षा कहा जा रहा था। जगत समीक्षा जो मुक्तिबोध का ही पद है, तो क्या कवि जो जगत समीक्षा करता है, क्या वह समीक्षा वैसी ही होती है एवं उन्हीं धारणाओं व अवधारणाओं तक पहुँचती है जिनपर दूसरे अनुशासन पहुँचते हैं? अगर वह अपने में एक अन्वेषण की प्रक्रिया है, तो वह अन्वेषण एक संवेदनात्मक या अनुभूतियात्मक अन्वेषण है। वह विमर्शात्मक अन्वेषण नहीं है। और अगर वह संवेदनात्मक या अनुभूतियात्मक अन्वेषण है, तो इस ज्ञान को एक संवेदनात्मक स्तर पर पाने की कोशिश होनी चाहिए। और वह जो अनुभूतियात्मक अन्वेषण है, वह अन्य अनुशासनों से कविता और कलाओं को अलग करता है। क्योंकि बाकी सारे अनुशासन विश्लेष्णात्मक होते हैं, वो एक तर्क पद्धति का अनुसरण करते हैं, कुछ अन्य आंकड़ों को लेकर चर्चा-ज़िक्र करते हैं, लेकिन अंततः कलाओं को छोड़कर सारे ज्ञान के अनुशासन हर चीज़ को एक अवधारणा में रिड्यूस कर देते हैं। अगर वो इसे एक अवधारणा में रिड्यूस नहीं कर पाते हैं, तो यह माना जाता है कि अच्छा काम नहीं हुआ है।
सत्य का वक्तव्य नहीं किया जाता, उसको सम्प्रेषित किया जाता है। यही कविता का काम है। सम्प्रेषण का अर्थ वहां पर एक अनुभूति प्रक्रिया का सम्प्रेषण है। कवि उसी प्रक्रिया में से पाठक को गुज़ारने की या ग्रहीता को गुज़ारने की कोशिश करता है, जिसमें से होकर के उसने उस अनुभव में प्रवेश किया है। इसलिए अगर कविता और कलाएँ यह नहीं करेंगी तो और कौन करेगा?
अब सवाल यह है कि इसमें अँधेरा कहाँ हैं? जहाँ हम अपनी कविता की प्रमाणिकता विमर्शों, अवधारणाओं, विचारधाराओं, राजनैतिक सम्प्रदायों, चाहे वह किसी भी तरह का दर्शन हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह गांधीवाद है या मार्क्सवाद है या अद्वैत है, वहां से हासिल या सिद्ध करने की कोशिश करते हैं तो यही कविता का अँधेरा है, क्योंकि इस तरह वह अनुभूति की प्रक्रिया का खंडन है। उसका नकार है। हमारी हिन्दी की एक परंपरा यह रही है और अभी भी चल रही है कि हम हमेशा किसी कवि, कलाकार या उपन्यासकार के बारे में यह देखने की कोशिश करते हैं कि वह किस दर्शन से कैसे प्रभावित हुआ।
साहित्य का सारा विवेचन इन्हीं आधारों पर होता है कि वो रामानंद से प्रभावित थे या अद्वैत से प्रभावित हुए या बाकी किसी से प्रभावित थे! यही सब प्रभाव उनकी कविताओं में ढूंढें जाते हैं और इससे बड़ा कविता का अपमान और कोई नहीं हो सकता। क्योंकि कविता वह सब नहीं करती है जो आप उसमें इन तरीकों से ढूंढ रहे हैं। उसकी मुख्य चुनौती यह है कि वह उस अनुभूति की प्रक्रिया को अपनी पूरी संश्लिष्टता के साथ (जिसे जटिलता भी कहा गया, मैं उसे संश्लिष्टता कहता हूँ) आप तक कैसे सम्प्रेषित करती है कि उसमें एक संभावना इस बात की रहे कि आपके मन में उसे जाग्रत कर दे। वह कविता अधूरी कविता है जो आपके मन में अनुभूति को जाग्रत नहीं करती और केवल अर्थ समझाती है। इसलिए सही कविता वह होगी जो उस कविता को आपके मन में, और न केवल उस अनुभूति को बल्कि आपकी अपनी कई अनुभूतियों को, उनकी स्मृतियों को जाग्रत कर दे। तभी उसे एक अच्छी कविता माना जा सकता है या उस दिशा में उसे जाती हुई कविता माना जा सकता है।
अक्सर सब दूसरी कलाओं की तुलना में संगीत को बड़ा महत्त्व देते हैं। लेकिन ऐसा क्यों है? क्यों संगीत को ही शुद्ध कला माना गया? इसीलिए माना गया क्योंकि दूसरी कलाओं की तुलना में उसे किसी निश्चित अर्थ में रिड्यूस करना सबसे अधिक मुश्किल है। और मैं यह मानता हूँ कि कविता की असली चुनौती यह होती है कि वह संगीत के उस स्तर को कैसे छू सकती है! और यह भी कि वह ऐसा कैसे करती है क्योंकि वहां तो अर्थ है। एक शब्द अगर आप इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसका एक अर्थ होगा। तो उसे उस अर्थ से कैसे बचाया जा सकता है? उसकी असली चुनौती यही है कि वहां पर शब्द किसी और का इंस्ट्रूमेंट हुए बिना, अपने समय में से गुज़रता हुआ, खुद को अनुभूति में रूपांतरित कर दे। जो शब्द का अनुभूति में रूपांतरित होना है, वो अर्थोत्त्तर कर देता है। हम अर्थ को हमेशा एक अवधारणा में रिड्यूस करके देखते हैं।
मुझे जे. कृष्णमूर्ति का एक कथन याद आता है- "सारा कॉन्सेप्चुअल नॉलेज सेकंड-हैंड नॉलेज है"। वह बासी ज्ञान है। जो ताज़गी अनुभूतियात्मक ज्ञान में होती है उसमें वो ताज़गी नहीं होती। लेकिन हम पता नहीं क्यों उसी के पीछे पड़े रहते हैं और उसी के आधार पर सभी चीज़ों को समझना चाहते हैं। लगातार हम यह समझने की कोशिश करते रहते हैं कि जो कविता में कहा गया है वो किसी मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, समाज शास्त्री ने कहा है या नहीं कहा है। जिसके मानी ही यह हैं कि हमने स्वयं यह मान लिया है कि हमारी जो ज्ञान की प्रक्रिया है, वह प्रक्रिया एक दूसरे दर्जे की प्रक्रिया है और उसकी प्रमाणिकता की तलाश हमको सिर्फ बाहर किसी और ज्ञान के आधार पर करनी है। मैं इसे कविता की प्रक्रिया में सबसे बड़ा अँधेरा मानता हूँ और इससे हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। यह करना ही कविता के उजाले को पहचानना है। इस चीज़ को समझ पाना कि हम इसमें कहाँ-कहाँ ठोकर खा सकते हैं, इसे पहचान पाना ही कविता के उजाले को पहचान पाना है। तभी कविता का अपना उजाला आपके सामने प्रकट होता है, चाहे वह किसी अँधेरे को व्यक्त करने में ही प्रकट होता हो!
लोग कहते हैं- "अँधेरे में कुछ नहीं दिखता! इतना घना अँधेरा था कि कुछ नहीं दिखायी देता था!" मैं कहता हूँ- "अँधेरा तो दिखायी दे रहा था न?" वह अँधेरा हमारी आँख के प्रकाश के कारण दिखायी दिया। अगर आँख में रौशनी नहीं होती तो वह अँधेरा दिखायी नहीं देता। सो, अँधेरा भी दिखायी देता है। कविता की आँख के पास वह रौशनी है जिससे वह अँधेरा देख सकती है लेकिन वह 'कविता के ढंग' से देखती है। वह किसी और की आँख से उसे देखने की कोशिश नहीं करती। और यह सभी कलाओं के बारे में सही है। इसीलिए किसी पेंटर ने कभी कहा था- "जब भी कोई मेरी पेंटिंग को इन्टरप्रेट करने की कोशिश करता है तो वो मेरी पेंटिंग पर आघात कर रहा होता है"। हमारी कक्षाओं से इन्टरप्रेट करने की आदत पड़ गयी है और उसे इस तरह इन्टरप्रेट किया जाता है जिससे इम्तिहान में बस उसका अर्थ लिख दिया जाए। अच्छे अच्छे आलोचक भी वही करते रहते हैं।
Technique शब्द जिसे कविता में शिल्प कहा जाता है, ग्रीक वर्ड 'techne' से बना है जिसका मूल अर्थ होता है 'जानने की विधि'। हम आजकल उसे 'करने की विधि' की तरह इस्तेमाल करते हैं। जिस तरह से जाना गया, अगर उसी तरह से किया जाए तो वह चीज़ रिपीट होती है और जानने की विधि ही करने की विधि हो जाती है। मैं यह मानता हूँ कि अगर कविता एक जानने की विधि है, तो उस जानने की विधि में कितने-कितने परिवर्तन हो पा रहे हैं, यह देखना ज़रूरी है। नई शैल्पिक युक्तियों के बिना, नई उद्भावनाएँ भी प्रकट नहीं हो पाती हैं। विज्ञान में भी अगर आप एक नया आविष्कार करते हैं तो आपको एक नई भाषा की ज़रुरत वहां पर पड़ती है। तो इस नई भाषा की खोज न कर पाना भी या उसकी तरफ सचेत न हो पाना भी दूसरा अँधेरा है।
यही कविता की प्रक्रिया में मिलने वाले अँधेरे हैं जिनसे हमें बचकर चलने की आवश्यकता होती है। सवाल सिर्फ इस बात का है कि क्या हम इस बात को समझने की कोशिश करते हैं या हमारा ध्यान सिर्फ इसी पर लगा रहता है कि मैंने क्या-क्या कह दिया है। मैंने क्या 'जान' लिया है यह हमारे लिए महत्त्वपूर्ण नहीं रहता। और मैंने जो जान भी लिया है वो किस विधि से जाना है? एक कवि के रूप में क्या मैंने उसे अपनी अनुभूति से जाना है या मैंने किसी विमर्श से, किसी विचार से, किसी दर्शन से, किसी सम्प्रदाय से, किसी राजनैतिक चिंतक से जाना है और उसे मान लिया है! उसे मानने में कोई आपत्ति नहीं है पर क्या वह सत्य मेरी अनुभूति से उपजता है? क्या मैं अपनी कविता को बिना किसी स्थूल अर्थ में रिड्यूस किए सम्प्रेषित कर सकता हूँ? क्या वो होती है? अगर वह नहीं होती है, तो कहीं न कहीं कोई समस्या है!
| रज़ा उत्सव पर रज़ा फॉउण्डेशन द्वारा आयोजित कवि समवाय के एक सत्र 'तम शून्य में जगत समीक्षाः कविता के अँधेरे-उजाले' में मुक्तिबोध की इस पंक्ति पर वक्तव्य दिए गए। उनमें से नन्दकिशोर आचार्य जी का वक्तव्य कुछ अंशों में यहाँ प्रस्तुत है। हिन्दी कविता की वर्तमान विश्लेषण प्रक्रिया पर एक नज़र और कविता का वास्तविक उद्देश्य को जानने के लिए यह वक्तव्य बेहद महत्त्वपूर्ण है। यह जो विषय है और अभी जो इसको चारों तरफ से काफी समझने की कोशिश की गयी है, मैं इस विषय को एक और ढंग से भी देखने की कोशिश कर रहा हूँ। एक तो यह है कि जब हम कविता के अँधेरे-उजाले की बात करते हैं तो हम यह देखना चाहते हैं कि अपने समय का अँधेरा-उजाला कविता में किस तरह व्यक्त हुआ है। कैसे उसे चित्रित किया गया है, कैसे सम्प्रेषित किया गया है, कैसे कहा गया है और उसके क्या रूप हैं! यानी समय कविता में कैसे व्यक्त होता है! लेकिन मुझे एक दूसरी समस्या दिखायी देती है जिसपर मैं मानता हूँ कवियों को तो ज़रूर विचार करना चाहिए और कविता के जो सुधि पाठक हैं उन्हें भी। वह यह कि कविता के अपने अँधेरे-उजाले क्या हैं? मुझे कोई ऐसा ज्ञान-विज्ञान का अनुशासन नज़र नहीं आता जिसमें अपने समय के अँधेरे-उजाले व्यक्त न होते हों। बस उनकी विधियां अलग-अलग हैं, उनको समझने की, कहने की, करने की। और अपनी विधियों के कारण ही वो अलग अनुशासन बनते हैं। लेकिन कविता के अपने अँधेरे-उजाले क्या हो सकते हैं? क्या हम कवि लोग उसको पहचानते हैं? या नहीं पहचानते हैं और हमारा ज़्यादा ध्यान विश्लेषण पर लगा रहता है? कि इतने विमर्श आ गए हैं और कविता में यह विमर्श है, वह विमर्श है। मैं यह मानता हूँ कि कविता अपने में और सारी कलाएँ व अन्य अनुशासन भी, सभी अन्वेषण की प्रक्रिया हैं जिसे अभी जगत समीक्षा कहा जा रहा था। जगत समीक्षा जो मुक्तिबोध का ही पद है, तो क्या कवि जो जगत समीक्षा करता है, क्या वह समीक्षा वैसी ही होती है एवं उन्हीं धारणाओं व अवधारणाओं तक पहुँचती है जिनपर दूसरे अनुशासन पहुँचते हैं? अगर वह अपने में एक अन्वेषण की प्रक्रिया है, तो वह अन्वेषण एक संवेदनात्मक या अनुभूतियात्मक अन्वेषण है। वह विमर्शात्मक अन्वेषण नहीं है। और अगर वह संवेदनात्मक या अनुभूतियात्मक अन्वेषण है, तो इस ज्ञान को एक संवेदनात्मक स्तर पर पाने की कोशिश होनी चाहिए। और वह जो अनुभूतियात्मक अन्वेषण है, वह अन्य अनुशासनों से कविता और कलाओं को अलग करता है। क्योंकि बाकी सारे अनुशासन विश्लेष्णात्मक होते हैं, वो एक तर्क पद्धति का अनुसरण करते हैं, कुछ अन्य आंकड़ों को लेकर चर्चा-ज़िक्र करते हैं, लेकिन अंततः कलाओं को छोड़कर सारे ज्ञान के अनुशासन हर चीज़ को एक अवधारणा में रिड्यूस कर देते हैं। अगर वो इसे एक अवधारणा में रिड्यूस नहीं कर पाते हैं, तो यह माना जाता है कि अच्छा काम नहीं हुआ है। सत्य का वक्तव्य नहीं किया जाता, उसको सम्प्रेषित किया जाता है। यही कविता का काम है। सम्प्रेषण का अर्थ वहां पर एक अनुभूति प्रक्रिया का सम्प्रेषण है। कवि उसी प्रक्रिया में से पाठक को गुज़ारने की या ग्रहीता को गुज़ारने की कोशिश करता है, जिसमें से होकर के उसने उस अनुभव में प्रवेश किया है। इसलिए अगर कविता और कलाएँ यह नहीं करेंगी तो और कौन करेगा? अब सवाल यह है कि इसमें अँधेरा कहाँ हैं? जहाँ हम अपनी कविता की प्रमाणिकता विमर्शों, अवधारणाओं, विचारधाराओं, राजनैतिक सम्प्रदायों, चाहे वह किसी भी तरह का दर्शन हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह गांधीवाद है या मार्क्सवाद है या अद्वैत है, वहां से हासिल या सिद्ध करने की कोशिश करते हैं तो यही कविता का अँधेरा है, क्योंकि इस तरह वह अनुभूति की प्रक्रिया का खंडन है। उसका नकार है। हमारी हिन्दी की एक परंपरा यह रही है और अभी भी चल रही है कि हम हमेशा किसी कवि, कलाकार या उपन्यासकार के बारे में यह देखने की कोशिश करते हैं कि वह किस दर्शन से कैसे प्रभावित हुआ। साहित्य का सारा विवेचन इन्हीं आधारों पर होता है कि वो रामानंद से प्रभावित थे या अद्वैत से प्रभावित हुए या बाकी किसी से प्रभावित थे! यही सब प्रभाव उनकी कविताओं में ढूंढें जाते हैं और इससे बड़ा कविता का अपमान और कोई नहीं हो सकता। क्योंकि कविता वह सब नहीं करती है जो आप उसमें इन तरीकों से ढूंढ रहे हैं। उसकी मुख्य चुनौती यह है कि वह उस अनुभूति की प्रक्रिया को अपनी पूरी संश्लिष्टता के साथ आप तक कैसे सम्प्रेषित करती है कि उसमें एक संभावना इस बात की रहे कि आपके मन में उसे जाग्रत कर दे। वह कविता अधूरी कविता है जो आपके मन में अनुभूति को जाग्रत नहीं करती और केवल अर्थ समझाती है। इसलिए सही कविता वह होगी जो उस कविता को आपके मन में, और न केवल उस अनुभूति को बल्कि आपकी अपनी कई अनुभूतियों को, उनकी स्मृतियों को जाग्रत कर दे। तभी उसे एक अच्छी कविता माना जा सकता है या उस दिशा में उसे जाती हुई कविता माना जा सकता है। अक्सर सब दूसरी कलाओं की तुलना में संगीत को बड़ा महत्त्व देते हैं। लेकिन ऐसा क्यों है? क्यों संगीत को ही शुद्ध कला माना गया? इसीलिए माना गया क्योंकि दूसरी कलाओं की तुलना में उसे किसी निश्चित अर्थ में रिड्यूस करना सबसे अधिक मुश्किल है। और मैं यह मानता हूँ कि कविता की असली चुनौती यह होती है कि वह संगीत के उस स्तर को कैसे छू सकती है! और यह भी कि वह ऐसा कैसे करती है क्योंकि वहां तो अर्थ है। एक शब्द अगर आप इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसका एक अर्थ होगा। तो उसे उस अर्थ से कैसे बचाया जा सकता है? उसकी असली चुनौती यही है कि वहां पर शब्द किसी और का इंस्ट्रूमेंट हुए बिना, अपने समय में से गुज़रता हुआ, खुद को अनुभूति में रूपांतरित कर दे। जो शब्द का अनुभूति में रूपांतरित होना है, वो अर्थोत्त्तर कर देता है। हम अर्थ को हमेशा एक अवधारणा में रिड्यूस करके देखते हैं। मुझे जे. कृष्णमूर्ति का एक कथन याद आता है- "सारा कॉन्सेप्चुअल नॉलेज सेकंड-हैंड नॉलेज है"। वह बासी ज्ञान है। जो ताज़गी अनुभूतियात्मक ज्ञान में होती है उसमें वो ताज़गी नहीं होती। लेकिन हम पता नहीं क्यों उसी के पीछे पड़े रहते हैं और उसी के आधार पर सभी चीज़ों को समझना चाहते हैं। लगातार हम यह समझने की कोशिश करते रहते हैं कि जो कविता में कहा गया है वो किसी मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, समाज शास्त्री ने कहा है या नहीं कहा है। जिसके मानी ही यह हैं कि हमने स्वयं यह मान लिया है कि हमारी जो ज्ञान की प्रक्रिया है, वह प्रक्रिया एक दूसरे दर्जे की प्रक्रिया है और उसकी प्रमाणिकता की तलाश हमको सिर्फ बाहर किसी और ज्ञान के आधार पर करनी है। मैं इसे कविता की प्रक्रिया में सबसे बड़ा अँधेरा मानता हूँ और इससे हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। यह करना ही कविता के उजाले को पहचानना है। इस चीज़ को समझ पाना कि हम इसमें कहाँ-कहाँ ठोकर खा सकते हैं, इसे पहचान पाना ही कविता के उजाले को पहचान पाना है। तभी कविता का अपना उजाला आपके सामने प्रकट होता है, चाहे वह किसी अँधेरे को व्यक्त करने में ही प्रकट होता हो! लोग कहते हैं- "अँधेरे में कुछ नहीं दिखता! इतना घना अँधेरा था कि कुछ नहीं दिखायी देता था!" मैं कहता हूँ- "अँधेरा तो दिखायी दे रहा था न?" वह अँधेरा हमारी आँख के प्रकाश के कारण दिखायी दिया। अगर आँख में रौशनी नहीं होती तो वह अँधेरा दिखायी नहीं देता। सो, अँधेरा भी दिखायी देता है। कविता की आँख के पास वह रौशनी है जिससे वह अँधेरा देख सकती है लेकिन वह 'कविता के ढंग' से देखती है। वह किसी और की आँख से उसे देखने की कोशिश नहीं करती। और यह सभी कलाओं के बारे में सही है। इसीलिए किसी पेंटर ने कभी कहा था- "जब भी कोई मेरी पेंटिंग को इन्टरप्रेट करने की कोशिश करता है तो वो मेरी पेंटिंग पर आघात कर रहा होता है"। हमारी कक्षाओं से इन्टरप्रेट करने की आदत पड़ गयी है और उसे इस तरह इन्टरप्रेट किया जाता है जिससे इम्तिहान में बस उसका अर्थ लिख दिया जाए। अच्छे अच्छे आलोचक भी वही करते रहते हैं। Technique शब्द जिसे कविता में शिल्प कहा जाता है, ग्रीक वर्ड 'techne' से बना है जिसका मूल अर्थ होता है 'जानने की विधि'। हम आजकल उसे 'करने की विधि' की तरह इस्तेमाल करते हैं। जिस तरह से जाना गया, अगर उसी तरह से किया जाए तो वह चीज़ रिपीट होती है और जानने की विधि ही करने की विधि हो जाती है। मैं यह मानता हूँ कि अगर कविता एक जानने की विधि है, तो उस जानने की विधि में कितने-कितने परिवर्तन हो पा रहे हैं, यह देखना ज़रूरी है। नई शैल्पिक युक्तियों के बिना, नई उद्भावनाएँ भी प्रकट नहीं हो पाती हैं। विज्ञान में भी अगर आप एक नया आविष्कार करते हैं तो आपको एक नई भाषा की ज़रुरत वहां पर पड़ती है। तो इस नई भाषा की खोज न कर पाना भी या उसकी तरफ सचेत न हो पाना भी दूसरा अँधेरा है। यही कविता की प्रक्रिया में मिलने वाले अँधेरे हैं जिनसे हमें बचकर चलने की आवश्यकता होती है। सवाल सिर्फ इस बात का है कि क्या हम इस बात को समझने की कोशिश करते हैं या हमारा ध्यान सिर्फ इसी पर लगा रहता है कि मैंने क्या-क्या कह दिया है। मैंने क्या 'जान' लिया है यह हमारे लिए महत्त्वपूर्ण नहीं रहता। और मैंने जो जान भी लिया है वो किस विधि से जाना है? एक कवि के रूप में क्या मैंने उसे अपनी अनुभूति से जाना है या मैंने किसी विमर्श से, किसी विचार से, किसी दर्शन से, किसी सम्प्रदाय से, किसी राजनैतिक चिंतक से जाना है और उसे मान लिया है! उसे मानने में कोई आपत्ति नहीं है पर क्या वह सत्य मेरी अनुभूति से उपजता है? क्या मैं अपनी कविता को बिना किसी स्थूल अर्थ में रिड्यूस किए सम्प्रेषित कर सकता हूँ? क्या वो होती है? अगर वह नहीं होती है, तो कहीं न कहीं कोई समस्या है! |
वाॅर्नर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट एक तस्वीर शेयर कर अफने आईपीएल करियर के सबसे पसंदीदा पल का खुलासा किया। वॉर्नर ने सनराइजर्स हैदराबाद टीम के वर्ष 2016 में चैंपियन बनने वाला फोटो पोस्ट किया है और इसे अपना फेवरेट मूमेंट बताया है। अपने पोस्ट में लिखा-निश्चित रूप से यह मेरा फेवरेट आईपीएल मूवमेंट होगा। माई इंडियन फैमिली @SunRisers.
हैदराबाद को 2016 में चैंपियन बनाने में वाॅर्नर ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने तब 17 मैचों में 151. 42 की स्ट्राइक रेट से 848 रन ठोके थे जिसमें 9 अर्धशतक शामिल रहे थे। 33 साल के वॉर्नर की टीम हैदराबाद ने फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम को हराकर ट्राॅफी अपने नाम की थी। वाॅर्नर 126 आईपीएल मैचों में 43. 17 की औसत से 4706 रन बना चुके हैं जिसमें 4 शतक चो 44 अर्धशतक शामिल हैं। वाॅर्नर ने आखिरी सीजन में भी 12 मैचों में 692 रन ठोके थे।
लॉकडाउन के बीच वॉर्नर अपने घर में परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। वह लोगों को ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने की भी सलाह दे रहे हैं। कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनियाभर में अब तक 47 हजार से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी है जबकि नौ लाख से अधिक लोग इसके कारण प्रभावित हुए हैं। चीन, अमेरिका, इटली, स्पेन और ईरान जैसे देश कोरोना वायरस के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
| वाॅर्नर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट एक तस्वीर शेयर कर अफने आईपीएल करियर के सबसे पसंदीदा पल का खुलासा किया। वॉर्नर ने सनराइजर्स हैदराबाद टीम के वर्ष दो हज़ार सोलह में चैंपियन बनने वाला फोटो पोस्ट किया है और इसे अपना फेवरेट मूमेंट बताया है। अपने पोस्ट में लिखा-निश्चित रूप से यह मेरा फेवरेट आईपीएल मूवमेंट होगा। माई इंडियन फैमिली @SunRisers. हैदराबाद को दो हज़ार सोलह में चैंपियन बनाने में वाॅर्नर ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने तब सत्रह मैचों में एक सौ इक्यावन. बयालीस की स्ट्राइक रेट से आठ सौ अड़तालीस रन ठोके थे जिसमें नौ अर्धशतक शामिल रहे थे। तैंतीस साल के वॉर्नर की टीम हैदराबाद ने फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम को हराकर ट्राॅफी अपने नाम की थी। वाॅर्नर एक सौ छब्बीस आईपीएल मैचों में तैंतालीस. सत्रह की औसत से चार हज़ार सात सौ छः रन बना चुके हैं जिसमें चार शतक चो चौंतालीस अर्धशतक शामिल हैं। वाॅर्नर ने आखिरी सीजन में भी बारह मैचों में छः सौ बानवे रन ठोके थे। लॉकडाउन के बीच वॉर्नर अपने घर में परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। वह लोगों को ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने की भी सलाह दे रहे हैं। कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनियाभर में अब तक सैंतालीस हजार से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी है जबकि नौ लाख से अधिक लोग इसके कारण प्रभावित हुए हैं। चीन, अमेरिका, इटली, स्पेन और ईरान जैसे देश कोरोना वायरस के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। |
सिद्धार्थ शुक्ला के निधन से हर कोई सदमे में है. ऐसे में अभिनेत्री गौहर खान ने सिद्धार्थ के साथ अपनी तसवीरें शेयर करते हुए लिखा कि - नटखट, मस्तीखोर बच्चा. स्वर्ग में मुस्कुरा रहा होगा. मुझे यकीन है. मैं आपके लिए प्रार्थना कर रही हूँ सिड. #CantGetOverIt ?
बता दें कि सिद्धार्थ और गौहर की मुलाक़ात बिग्ग बॉस 14 के सेट पर हुई थी, जहाँ दोनों की दोस्ती हुई थी.
इतना ही नहीं, गौहर ने सिद्धार्थ के साथ एक वीडियो भी शेयर की और लिखा कि, 'एक ऑडियंस के तौर पर हो या एक दोस्त के तौर पर, मैं @colorstv और #BiggBoss का शुक्रिया कहना चाहूंगी जिसने मुझे इस GEM से मिलाया. आप कैसे बच्चों की तरह थे. निर्मल दिल, देखभाल करने वाला, प्यार करने वाला, जिद्दी भी और अमारे ग्रुप में सबसे ज्यादा नॉटियेस्ट'.
सिद्धार्थ शुक्ला का इस तरह शान्ति से दुनिया से चले जाना बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं है.
यह भी पढ़ें :
जापान का पीएम पद छोड़ेंगे योशिहिदे सुगा, कोरोना को रोकने में रहे नाकाम!
| सिद्धार्थ शुक्ला के निधन से हर कोई सदमे में है. ऐसे में अभिनेत्री गौहर खान ने सिद्धार्थ के साथ अपनी तसवीरें शेयर करते हुए लिखा कि - नटखट, मस्तीखोर बच्चा. स्वर्ग में मुस्कुरा रहा होगा. मुझे यकीन है. मैं आपके लिए प्रार्थना कर रही हूँ सिड. #CantGetOverIt ? बता दें कि सिद्धार्थ और गौहर की मुलाक़ात बिग्ग बॉस चौदह के सेट पर हुई थी, जहाँ दोनों की दोस्ती हुई थी. इतना ही नहीं, गौहर ने सिद्धार्थ के साथ एक वीडियो भी शेयर की और लिखा कि, 'एक ऑडियंस के तौर पर हो या एक दोस्त के तौर पर, मैं @colorstv और #BiggBoss का शुक्रिया कहना चाहूंगी जिसने मुझे इस GEM से मिलाया. आप कैसे बच्चों की तरह थे. निर्मल दिल, देखभाल करने वाला, प्यार करने वाला, जिद्दी भी और अमारे ग्रुप में सबसे ज्यादा नॉटियेस्ट'. सिद्धार्थ शुक्ला का इस तरह शान्ति से दुनिया से चले जाना बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं है. यह भी पढ़ें : जापान का पीएम पद छोड़ेंगे योशिहिदे सुगा, कोरोना को रोकने में रहे नाकाम! |
केंद्रीय बजट के आने में अब एक पखवाड़े से भी कम समय बचा है, इस बीच गैर-जीवन बीमाकर्ताओं ने सरकार को आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत कर कटौती की सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है। उन्होंने यह सुझाव इसलिए दिया है कि लोगों को व्यापक स्वास्थ्य बीमा लेने के लिए अधिक प्रोत्साहित किया जा सके और उन्होंने आवास बीमा लेने वालों के लिए कर लाभ देने का सुझाव दिया है।
80डी धारा के तहत 60 साल से कम के व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा पर 25,000 रुपये तक का कर छूट मिलता है। वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के लिए यह रकम 50,000 रुपये तक है। इसमें यह भी कहा गया है कि व्यक्ति अपने माता पिता के स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भरने पर भी 25,000 रुपये तक कर छूट का दावा कर सकता है। यदि माता पिता वरिष्ठï नागरिक हैं तो वैसे मामले में कर छूट का दावा 50,000 रुपये तक किया जा सकता है।
इफको टोकिया जनरल इंश्योरेंस की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अनामिका रॉय राष्ट्रवार ने कहा, 'व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा के लिए चुकाई जानी वाली प्रीमियम की समूची राशि को आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत व्यक्ति की कुल आमदनी से छूट मिलनी चाहिए। ' देश में स्वास्थ्य बीमा को लेकर जागरूकता में महामारी के बाद से सुधार हुआ है जो स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के आंकड़ों से भी झलकता है। कोविड को लेकर डर में कमी आने के बाद उस उत्साह में काफी कमी आई है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से निकट भविष्य में स्वास्थ्य उत्पादों की मांग को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।
| केंद्रीय बजट के आने में अब एक पखवाड़े से भी कम समय बचा है, इस बीच गैर-जीवन बीमाकर्ताओं ने सरकार को आयकर अधिनियम की धारा अस्सीडी के तहत कर कटौती की सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है। उन्होंने यह सुझाव इसलिए दिया है कि लोगों को व्यापक स्वास्थ्य बीमा लेने के लिए अधिक प्रोत्साहित किया जा सके और उन्होंने आवास बीमा लेने वालों के लिए कर लाभ देने का सुझाव दिया है। अस्सीडी धारा के तहत साठ साल से कम के व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा पर पच्चीस,शून्य रुपयापये तक का कर छूट मिलता है। वहीं साठ वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के लिए यह रकम पचास,शून्य रुपयापये तक है। इसमें यह भी कहा गया है कि व्यक्ति अपने माता पिता के स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भरने पर भी पच्चीस,शून्य रुपयापये तक कर छूट का दावा कर सकता है। यदि माता पिता वरिष्ठï नागरिक हैं तो वैसे मामले में कर छूट का दावा पचास,शून्य रुपयापये तक किया जा सकता है। इफको टोकिया जनरल इंश्योरेंस की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अनामिका रॉय राष्ट्रवार ने कहा, 'व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा के लिए चुकाई जानी वाली प्रीमियम की समूची राशि को आयकर अधिनियम की धारा अस्सीडी के तहत व्यक्ति की कुल आमदनी से छूट मिलनी चाहिए। ' देश में स्वास्थ्य बीमा को लेकर जागरूकता में महामारी के बाद से सुधार हुआ है जो स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के आंकड़ों से भी झलकता है। कोविड को लेकर डर में कमी आने के बाद उस उत्साह में काफी कमी आई है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से निकट भविष्य में स्वास्थ्य उत्पादों की मांग को बरकरार रखने में मदद मिलेगी। |
Aishwarya Rai Viral Video सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वो करण जौहर को बताती नजर आ रही है कि आखिर क्यों बॉलीवुड की किसी भी एक्ट्रेस से उनकी दोस्ती नहीं है।
नई दिल्ली, जेएनएन। ऐश्वर्या राय बच्चन एक ऐसी एक्ट्रेस हैं जिनके फिल्म इंडस्ट्री में ज्यादा दोस्त नहीं है। उन्होंने खुद ही माना है कि बॉलीवुड में उनकी दोस्ती लड़कियों से ज्यादा लड़कों से है। ऐश्वर्या राय ने करण जौहर को इसके पीछे की वजह भी बताई। ऐश का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने करण जौहर के शो कॉफी विद करण में अपने दिल की बात कही थी।
वायरल वीडियो में ऐश्वर्या राय अपने पति अभिषेक बच्चन के साथ कॉफी विद करण में पहुंचीं थी और यहां उन्होंने करण जौहर से खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ज्यादातर पार्टिज में वो लड़कों के साथ ही नजर आती हैं। इस दौरान उन्होंने करण की तरफ इशारा करते हुए कहा, "आपने भी नोटिस किया होगा"। करण जब ऐश से इसका कारण पूछते हैं, तो वो हंसने लगती हैं।
ऐश ने करण से कहा कि वो बाकी एक्ट्रेसेस की तरह गर्ली टाइप की बातें नहीं कर सकती। जूतों और बैग्स के बारे में बात करना उन्हें पसंद नहीं है। बाकी लड़कियां हमेशा ही मेकअप, फैशन और आउटफिट्स के बारे में बातें करती हैं। पूर्व मिस वर्ल्ड ने अपनी बात में जोड़ा कि वो इस तरह से बोलकर बाकी महिलाओं को नीचा नहीं दिखा रही हैं, बल्कि यह केवल उनका नजरिया है।
खैर, यह वीडियो काफी पुराना है, क्योंकि सिर्फ कुछ साल पहले ही हमने ऐश्वर्या को दीपिका पादुकोण के साथ एक शादी में बीएफएफ की तरह मस्ती करते देखा था। जिस तरह से ऐश्वर्या ने दीपिका को अपने साथ डांस फ्लोर पर खींचा, उससे पता चलता है कि बी-टाउन में इनकी दोस्ती भी काफी खास है।
सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को लेकर काफी रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि ज्यादातर वीडियो में ये अपने परिवार के साथ ही बिजी नजर आती हैं। तो किसी ने कहा कि हमने तो कभी इन्हें किसी दूसरे एक्टर के साथ चिट चैट करते हुए नहीं देखा।
| Aishwarya Rai Viral Video सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वो करण जौहर को बताती नजर आ रही है कि आखिर क्यों बॉलीवुड की किसी भी एक्ट्रेस से उनकी दोस्ती नहीं है। नई दिल्ली, जेएनएन। ऐश्वर्या राय बच्चन एक ऐसी एक्ट्रेस हैं जिनके फिल्म इंडस्ट्री में ज्यादा दोस्त नहीं है। उन्होंने खुद ही माना है कि बॉलीवुड में उनकी दोस्ती लड़कियों से ज्यादा लड़कों से है। ऐश्वर्या राय ने करण जौहर को इसके पीछे की वजह भी बताई। ऐश का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने करण जौहर के शो कॉफी विद करण में अपने दिल की बात कही थी। वायरल वीडियो में ऐश्वर्या राय अपने पति अभिषेक बच्चन के साथ कॉफी विद करण में पहुंचीं थी और यहां उन्होंने करण जौहर से खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ज्यादातर पार्टिज में वो लड़कों के साथ ही नजर आती हैं। इस दौरान उन्होंने करण की तरफ इशारा करते हुए कहा, "आपने भी नोटिस किया होगा"। करण जब ऐश से इसका कारण पूछते हैं, तो वो हंसने लगती हैं। ऐश ने करण से कहा कि वो बाकी एक्ट्रेसेस की तरह गर्ली टाइप की बातें नहीं कर सकती। जूतों और बैग्स के बारे में बात करना उन्हें पसंद नहीं है। बाकी लड़कियां हमेशा ही मेकअप, फैशन और आउटफिट्स के बारे में बातें करती हैं। पूर्व मिस वर्ल्ड ने अपनी बात में जोड़ा कि वो इस तरह से बोलकर बाकी महिलाओं को नीचा नहीं दिखा रही हैं, बल्कि यह केवल उनका नजरिया है। खैर, यह वीडियो काफी पुराना है, क्योंकि सिर्फ कुछ साल पहले ही हमने ऐश्वर्या को दीपिका पादुकोण के साथ एक शादी में बीएफएफ की तरह मस्ती करते देखा था। जिस तरह से ऐश्वर्या ने दीपिका को अपने साथ डांस फ्लोर पर खींचा, उससे पता चलता है कि बी-टाउन में इनकी दोस्ती भी काफी खास है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को लेकर काफी रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि ज्यादातर वीडियो में ये अपने परिवार के साथ ही बिजी नजर आती हैं। तो किसी ने कहा कि हमने तो कभी इन्हें किसी दूसरे एक्टर के साथ चिट चैट करते हुए नहीं देखा। |
(जी. एन. एस) ता. 14मुंबईमहाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में सोमवार को एक निजी कोचिंग के एक शिक्षक को बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कथित तौर पर अपने छात्रों को नकल करने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। विले पार्ले पुलिस थाने के मलाड में एक कोचिंग चलाने वाले मुकेश यादव ने एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था।
| ता. चौदहमुंबईमहाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में सोमवार को एक निजी कोचिंग के एक शिक्षक को बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कथित तौर पर अपने छात्रों को नकल करने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। विले पार्ले पुलिस थाने के मलाड में एक कोचिंग चलाने वाले मुकेश यादव ने एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था। |
आईसीसी टी20 रैंकिंग (ICC T20 Ranking) में भारतीय टीम (Indian Team), उसके बल्लेबाज और गेंदबाजों की क्या है स्थिति, यहां जानिए पूरा मामला.
नई दिल्ली. वनडे सीरीज तो अब खत्म हो चुकी है. मुकाबला अब टी20 में होगा. भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) के धुरंधर जब तीन मैचों की इस सीरीज में आमने सामने होंगे तो क्रिकेट फैंस को मिलने वाली इससे बड़ी सौगात और क्या ही होगी. मगर क्या विराट कोहली (Virat Kohli) के धुरंधर मेजबान टीम के योद्धाओं को किसी तरह की चुनौती दे पाएंगे, अगर इस गणित को समझना हो तो दोनों टीमों की आईसीसी टी20 रैंकिंग (ICC T20 Ranking) पर नजर डालना जरूरी है, जहां टीम इंडिया की हालत मेजबान ऑस्ट्रेलिया की तुलना में बहुत अच्छी नहीं है.
आईसीसी रैंकिंग में भी पीछे है भारत आईसीसी रैंकिंग में भी भारतीय टीम इस वक्त विरोधी ऑस्ट्रेलिया से पीछे है. नंबर वन पाकिस्तान के बाद दूसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया है और तीसरे नंबर पर भारत. ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच 9 अंक का अंतर है. ऑस्ट्रेलिया के पास 275 प्वाइंट्स हैं और टीम इंडिया के पास 266 अंक.
टॉप 10 में 3 बल्लेबाज, जहां तक आईसीसी टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग का सवाल है तो टॉप-3 खिलाड़ियों में कोई भारतीय बल्लेबाज शामिल नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एरॉन फिंच इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है. केएल राहुल चौथे, विराट कोहली 9वें और रोहित शर्मा 10वें पायदान पर हैं. टॉप-10 में ऑस्ट्रेलिया के मैक्सवेल भी शामिल हैं, वो सातवें नंबर पर हैं. पहले नंबर पर इंग्लैंड के डेविड मलान और दूसरे पर पाकिस्तान के बाबर आजम का कब्जा है.
शीर्ष 10 गेंदबाजों में एक भी भारतीय नहीं वहीं, गेंदबाजी रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया के तीन खिलाड़ी हैं. एश्टन एगर तीसरे, एडम जैम्पा छठे और केन रिचर्डसन आठवें स्थान पर काबिज हैं. पहले नंबर पर अफगानिस्तान के स्पिनर राशिद खान हैं, जबकि दूसरा स्थान भी अफगानिस्तान के मुजीब उर रहमान को ही मिला है. दिलचस्प बात है कि टी20 रैंकिंग के शीर्ष दस गेंदबाजों की सूची में भारतीय टीम का एक भी खिलाड़ी शामिल नहीं है. अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 दिसंबर से शुरू हो रही तीन मैच की सीरीज में भारत और भारतीय खिलाड़ी अपनी रेटिंग्स बेहतर कर सकते हैं.
| आईसीसी टीबीस रैंकिंग में भारतीय टीम , उसके बल्लेबाज और गेंदबाजों की क्या है स्थिति, यहां जानिए पूरा मामला. नई दिल्ली. वनडे सीरीज तो अब खत्म हो चुकी है. मुकाबला अब टीबीस में होगा. भारत और ऑस्ट्रेलिया के धुरंधर जब तीन मैचों की इस सीरीज में आमने सामने होंगे तो क्रिकेट फैंस को मिलने वाली इससे बड़ी सौगात और क्या ही होगी. मगर क्या विराट कोहली के धुरंधर मेजबान टीम के योद्धाओं को किसी तरह की चुनौती दे पाएंगे, अगर इस गणित को समझना हो तो दोनों टीमों की आईसीसी टीबीस रैंकिंग पर नजर डालना जरूरी है, जहां टीम इंडिया की हालत मेजबान ऑस्ट्रेलिया की तुलना में बहुत अच्छी नहीं है. आईसीसी रैंकिंग में भी पीछे है भारत आईसीसी रैंकिंग में भी भारतीय टीम इस वक्त विरोधी ऑस्ट्रेलिया से पीछे है. नंबर वन पाकिस्तान के बाद दूसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया है और तीसरे नंबर पर भारत. ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच नौ अंक का अंतर है. ऑस्ट्रेलिया के पास दो सौ पचहत्तर प्वाइंट्स हैं और टीम इंडिया के पास दो सौ छयासठ अंक. टॉप दस में तीन बल्लेबाज, जहां तक आईसीसी टीबीस बल्लेबाजी रैंकिंग का सवाल है तो टॉप-तीन खिलाड़ियों में कोई भारतीय बल्लेबाज शामिल नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एरॉन फिंच इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है. केएल राहुल चौथे, विराट कोहली नौवें और रोहित शर्मा दसवें पायदान पर हैं. टॉप-दस में ऑस्ट्रेलिया के मैक्सवेल भी शामिल हैं, वो सातवें नंबर पर हैं. पहले नंबर पर इंग्लैंड के डेविड मलान और दूसरे पर पाकिस्तान के बाबर आजम का कब्जा है. शीर्ष दस गेंदबाजों में एक भी भारतीय नहीं वहीं, गेंदबाजी रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया के तीन खिलाड़ी हैं. एश्टन एगर तीसरे, एडम जैम्पा छठे और केन रिचर्डसन आठवें स्थान पर काबिज हैं. पहले नंबर पर अफगानिस्तान के स्पिनर राशिद खान हैं, जबकि दूसरा स्थान भी अफगानिस्तान के मुजीब उर रहमान को ही मिला है. दिलचस्प बात है कि टीबीस रैंकिंग के शीर्ष दस गेंदबाजों की सूची में भारतीय टीम का एक भी खिलाड़ी शामिल नहीं है. अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार दिसंबर से शुरू हो रही तीन मैच की सीरीज में भारत और भारतीय खिलाड़ी अपनी रेटिंग्स बेहतर कर सकते हैं. |
साइमन कैटिच ने 2001 के एशेज में हेडिंग्ले में खेले गए टेस्ट करियर का आगाज़ बतौर मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज किया। इसके बाद बल्लेबाज ने 2005 में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया।
परिणामस्वरूप 2007 में कैटिच ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट खो दिया। उसी साल के अंत में घरेलू पुरा कप में न्यू साउथ वेल्स के लिए 1506 रन बना डाले। जिसने एक ही सीज़न में सर्वाधिक रन बनाने के माइकल बेवन के रिकॉर्ड को धराशाई कर दिया।
इसके बाद कैरेबियाई दौरे के लिए कैटिच को बतौर ओपनर फिल जैक्स के साथ ओपनिंग करने को कहा गया। इसके बाद इनके करियर में बड़ा बदलाव आया। कैटिच ने ओपनिंग करते हुए 50 से अधिक की औसत से 2928 रन बनाए।
इसके साथ ही उनके कुछ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हुए, जिसमें 2008 में ब्रिस्बेन में न्यूजीलैंड के खिलाफ 131 रन की पारी को याद किया जाता है। फिर उसी साल उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ 157 रनों की पारी वेस्टइंडीज के खिलाफ आई।
| साइमन कैटिच ने दो हज़ार एक के एशेज में हेडिंग्ले में खेले गए टेस्ट करियर का आगाज़ बतौर मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज किया। इसके बाद बल्लेबाज ने दो हज़ार पाँच में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया। परिणामस्वरूप दो हज़ार सात में कैटिच ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट खो दिया। उसी साल के अंत में घरेलू पुरा कप में न्यू साउथ वेल्स के लिए एक हज़ार पाँच सौ छः रन बना डाले। जिसने एक ही सीज़न में सर्वाधिक रन बनाने के माइकल बेवन के रिकॉर्ड को धराशाई कर दिया। इसके बाद कैरेबियाई दौरे के लिए कैटिच को बतौर ओपनर फिल जैक्स के साथ ओपनिंग करने को कहा गया। इसके बाद इनके करियर में बड़ा बदलाव आया। कैटिच ने ओपनिंग करते हुए पचास से अधिक की औसत से दो हज़ार नौ सौ अट्ठाईस रन बनाए। इसके साथ ही उनके कुछ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हुए, जिसमें दो हज़ार आठ में ब्रिस्बेन में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक सौ इकतीस रन की पारी को याद किया जाता है। फिर उसी साल उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ एक सौ सत्तावन रनों की पारी वेस्टइंडीज के खिलाफ आई। |
जब हार्दिक ने किया था शुभमन गिल को स्लेज- ए मार ना, ये अंडर-19 नहीं है!
शुभमन गिल को 2018 अंडर-19 वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। भारत ने खिताब अपने नाम किया था और गिल ने अपनी बल्लेबाजी से काफी प्रभावित किया था। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में गिल फ्रेंचाइजी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए खेलते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान स्पोर्ट्स इवेंट्स स्थगित या रद्द हुए हैं, आईपीएल को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है। इस बीच केकेआर के साथ लाइव चैट के दौरान गिल ने बताया कि कैसे एक बार हार्दिक पांड्या ने एक डोमेस्टिक मैच के दौरान उन्हें स्लेज किया था।
केकेआर के साथ चैट सेशन के दौरान गिल ने इस मजेदार स्लेजिंग इंसिडेंट के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि डोमेस्टिक क्रिकेट में उनका पहला सीजन था और वो पंजाब की ओर बड़ौदा के खिलाफ खेल रहे थे। दोनों टीमों के बीच वनडे मैच खेला जा रहा था। जिसमें हार्दिक पांड्या ने गिल को उकसाने की कोशिश की थी। गिल ने बताया, 'यह मेरा रणजी ट्रॉफी सीजन वाला साल था और हम बड़ौदा के खिलाफ वनडे मैच खेल रहे थे। मुझे याद है कि हार्दिक मुझे गेंदबाजी के दौरान लगातार स्लेज कर रहे थे। मुझे नहीं पता कि क्यों वो स्लेजिंग कर रहे थे। '
गिल ने इस किस्से को याद करते हुए कहा, 'दरअसल वो मुझे गेंदबाजी कर रहे थे और मैं उनकी गेंद पर शॉट लगाने की कोशिश कर रहा था, एक बार गेंद फील्डर के हाथों में गई, जिसके बाद वो आए और कहने लगे- ए चल मार ना! चल ना ये अंडर-19 नहीं है, चल ना मार ना! ' गिल को लेकर हाल में लिमिटेड ओवर में टीम इंडिया के उप-कप्तान रोहित शर्मा ने कहा था कि वो इंडियन क्रिकेट का फ्यूचर हैं।
| जब हार्दिक ने किया था शुभमन गिल को स्लेज- ए मार ना, ये अंडर-उन्नीस नहीं है! शुभमन गिल को दो हज़ार अट्ठारह अंडर-उन्नीस वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। भारत ने खिताब अपने नाम किया था और गिल ने अपनी बल्लेबाजी से काफी प्रभावित किया था। इंडियन प्रीमियर लीग में गिल फ्रेंचाइजी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलते हैं। कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान स्पोर्ट्स इवेंट्स स्थगित या रद्द हुए हैं, आईपीएल को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है। इस बीच केकेआर के साथ लाइव चैट के दौरान गिल ने बताया कि कैसे एक बार हार्दिक पांड्या ने एक डोमेस्टिक मैच के दौरान उन्हें स्लेज किया था। केकेआर के साथ चैट सेशन के दौरान गिल ने इस मजेदार स्लेजिंग इंसिडेंट के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि डोमेस्टिक क्रिकेट में उनका पहला सीजन था और वो पंजाब की ओर बड़ौदा के खिलाफ खेल रहे थे। दोनों टीमों के बीच वनडे मैच खेला जा रहा था। जिसमें हार्दिक पांड्या ने गिल को उकसाने की कोशिश की थी। गिल ने बताया, 'यह मेरा रणजी ट्रॉफी सीजन वाला साल था और हम बड़ौदा के खिलाफ वनडे मैच खेल रहे थे। मुझे याद है कि हार्दिक मुझे गेंदबाजी के दौरान लगातार स्लेज कर रहे थे। मुझे नहीं पता कि क्यों वो स्लेजिंग कर रहे थे। ' गिल ने इस किस्से को याद करते हुए कहा, 'दरअसल वो मुझे गेंदबाजी कर रहे थे और मैं उनकी गेंद पर शॉट लगाने की कोशिश कर रहा था, एक बार गेंद फील्डर के हाथों में गई, जिसके बाद वो आए और कहने लगे- ए चल मार ना! चल ना ये अंडर-उन्नीस नहीं है, चल ना मार ना! ' गिल को लेकर हाल में लिमिटेड ओवर में टीम इंडिया के उप-कप्तान रोहित शर्मा ने कहा था कि वो इंडियन क्रिकेट का फ्यूचर हैं। |
नौ बार सीनियर नेशनल चैंपियन बनने वाले भारत के शीर्ष टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंता शरत कमल एक बार फिर राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन को तैयार हैं।
चार साल की उम्र में टेबल टेनिस खेल में कदम रखने वाले शरत के खून में ही टेबल टेनिस बसा था। उनके पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव भी टेबल टेनिस खिलाड़ी रह चुके हैं। जिस वजह से 15 साल की उम्र में उन्होंने अपनी जिन्दगी का सबसे अहम फैसला लिया, और टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया।
अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई को छोड़कर उन्होंने टेबल टेनिस में अपना करियर बनाने का फैसला किया और उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। चेन्नई में जन्मे शरत कमल का जन्म 12 जुलाई 1982 में हुआ था।
2002 के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए 16 सदस्यीय संभावित टीम में शामिल होने के बाद उनका जीवन ही बदल गया। तब से लेकर अब तक शरत लगातार शानदार प्रदर्शन करते आए हैं।
बता दें 2019 में शरत ने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 30 हासिल की और अगले वर्ष यानी की 2020 में अपना दूसरा अंतरराष्ट्रीय खिताब ओमान ओपन अपने नाम किया। उन्होंने 2004 में एथेंस, 2008 में बीजिंग और 2016 में रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। साथ ही उन्होंने 2006 कतर में हुए एशियाई खेलों में भी देश का प्रतिनिधित्व किया हैं।
राष्ट्रमंडल खेल 2018, गोल्ड कोस्ट - स्वर्ण पदक (पुरुष टीम)
राष्ट्रमंडल खेल 2018, गोल्ड कोस्ट - रजत पदक (पुरुष युगल)
राष्ट्रमंडल खेल 2018, गोल्ड कोस्ट - कांस्य पदक (पुरुष एकल)
राष्ट्रमंडल खेल 2014, ग्लासगो - रजत पदक (पुरुष युगल)
राष्ट्रमंडल खेल 2010, दिल्ली - स्वर्ण पदक (पुरुष युगल)
राष्ट्रमंडल खेल 2010, दिल्ली - कांस्य पदक (पुरुष टीम)
राष्ट्रमंडल खेल 2010, दिल्ली - कांस्य पदक (पुरुष एकल)
राष्ट्रमंडल खेल 2006, मेलबोर्न - स्वर्ण पदक (पुरुष टीम)
राष्ट्रमंडल खेल 2006, मेलबोर्न - स्वर्ण पदक (पुरुष एकल)
इसके अलावा अचंता शरत कमल को 2004 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 2019 में उन्हें भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री भी मिला हैं।
| नौ बार सीनियर नेशनल चैंपियन बनने वाले भारत के शीर्ष टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंता शरत कमल एक बार फिर राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन को तैयार हैं। चार साल की उम्र में टेबल टेनिस खेल में कदम रखने वाले शरत के खून में ही टेबल टेनिस बसा था। उनके पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव भी टेबल टेनिस खिलाड़ी रह चुके हैं। जिस वजह से पंद्रह साल की उम्र में उन्होंने अपनी जिन्दगी का सबसे अहम फैसला लिया, और टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया। अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई को छोड़कर उन्होंने टेबल टेनिस में अपना करियर बनाने का फैसला किया और उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। चेन्नई में जन्मे शरत कमल का जन्म बारह जुलाई एक हज़ार नौ सौ बयासी में हुआ था। दो हज़ार दो के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सोलह सदस्यीय संभावित टीम में शामिल होने के बाद उनका जीवन ही बदल गया। तब से लेकर अब तक शरत लगातार शानदार प्रदर्शन करते आए हैं। बता दें दो हज़ार उन्नीस में शरत ने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग तीस हासिल की और अगले वर्ष यानी की दो हज़ार बीस में अपना दूसरा अंतरराष्ट्रीय खिताब ओमान ओपन अपने नाम किया। उन्होंने दो हज़ार चार में एथेंस, दो हज़ार आठ में बीजिंग और दो हज़ार सोलह में रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। साथ ही उन्होंने दो हज़ार छः कतर में हुए एशियाई खेलों में भी देश का प्रतिनिधित्व किया हैं। राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार अट्ठारह, गोल्ड कोस्ट - स्वर्ण पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार अट्ठारह, गोल्ड कोस्ट - रजत पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार अट्ठारह, गोल्ड कोस्ट - कांस्य पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार चौदह, ग्लासगो - रजत पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार दस, दिल्ली - स्वर्ण पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार दस, दिल्ली - कांस्य पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार दस, दिल्ली - कांस्य पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार छः, मेलबोर्न - स्वर्ण पदक राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार छः, मेलबोर्न - स्वर्ण पदक इसके अलावा अचंता शरत कमल को दो हज़ार चार में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया और दो हज़ार उन्नीस में उन्हें भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री भी मिला हैं। |
आगरा। सदर की पार्किग को लेकर समस्या काफी दिनों से खड़ी होती रही है। छावनी की ओर से कभी भी यहां हस्तक्षेप कर पार्किग व्यवस्था प्रभावित कर दी है। सदर बाजार के कारोबारियों का कहना है कि इसी वजह से प्रोवोग, रीबोक जैसे कई नामचीन ब्रांड के शोरूम बंद हो गए। हाल ही में पार्किग बंदी को लेकर ही लगभग एक करोड़ का लॉस सदर बाजार झेल चुका है। हालांकि पिछले दिनों के आन्दोलन के बाद पार्किग बहाल हो गई है लेकिन डिवाइडर के नाम पर अभी भी इस व्यवस्था को लेकर अड़ंगेबाजी लगाने की तैयारी की जा रही है।
ताज रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के सेक्रेट्री बिल्लू चौहान का कहना है कि सदर बाजार को लेकर छावनी का रवैया ठीक नहीं है। पार्किग व्यवस्था को ठप कर बाजार को बर्बाद करने की मंशा है। पिछले दिनों इसी मंशा के तहत ही पार्किग को बंद कर हिटलरशाही रवैया अपनाया गया था। जिसकी वजह से लगभग एक करोड़ रुपये का लॉस बाजार झेल चुका है। सेक्रेट्री ने चेतावनी देते हुए ऐलान किया है कि अगर पार्किग व्यवस्था प्रॉपर नहीं रहने दी गई तो भविष्य में आन्दोलन को और भी तीव्र किया जाएगा। कारोबारी रवीन्द्र पाल सिंह टिम्मा ने सवाल खड़ा किया है कि जब दुकानदार के नजदीक पार्किग ही नहीं होगी तो वह कारोबार कैसे कर पाएगा? टिम्मा के अनुसार छावनी परिषद अभी भी सदर बाजार की पार्किग को लेकर अड़ंगेबाजी का रुख अपना रही है। सड़क पर नया डिवाइडर बनाकर पार्किग को ठप करने की मंशा है।
पंछी पेठा स्टोर की ओनर पूनम गर्ग का कहना है कि बिना पार्किग व्यवस्था के कारोबार करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि बिना पार्किग के स्टोर का कारोबार काफी प्रभावित रहा है। पार्किग में अड़ंगेबाजी से यहां टूरिस्ट ने आना नहीं के बराबर कर दिया है। जब टूरिस्ट नहीं आएगा तो सदर का कारोबार बंदी के कगार पर पहुंचना तय है।
कारोबारी हेमंत भटीजा और संगीत शर्मा का कहना है कि सदर की पार्किग व्यवस्था को लेकर बाजार की इतनी बदनामी हो चुकी है कि ट्रेवल्स एजेंसी और एजेंट टूरिस्ट को यहां लेकर ही नहीं आना चाहते हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले दिनों में सदर से रीबोक, एडिडास, प्रोवोग आदि जाने-माने ब्रांड के स्टोर अपना कारोबार समेट चुके हैं। व्यापारी नेता रवीन्द्र पाल सिंह टिम्मा का कहना है कि इस मामले में शासन-प्रशासन को सदर की पार्किग के सुचारू संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
फिर कैसे पूरा होगा नाइट बाजार का सपना!
एक तरफ तो शासन आगरा में टूरिज्म को बढ़ावा देने को लेकर खासी सीरियस है। इसको लेकर सीएम की ओर से भी ड्रीम प्रोजेक्ट का सपना देखा गया है। इसी के तहत सदर बाजार में नाइट बाजार भी डेवलप किया जाना है। प्रशासन भी इसको लेकर खासी कवायद में लगा रहता है। वहीं, दूसरी तरफ यहां पार्किग को लेकर समस्या चली आ रही है। इसकी वजह से टूरिस्ट की इस बाजार में आमद नहीं के बराबर ही रह जाती है।
| आगरा। सदर की पार्किग को लेकर समस्या काफी दिनों से खड़ी होती रही है। छावनी की ओर से कभी भी यहां हस्तक्षेप कर पार्किग व्यवस्था प्रभावित कर दी है। सदर बाजार के कारोबारियों का कहना है कि इसी वजह से प्रोवोग, रीबोक जैसे कई नामचीन ब्रांड के शोरूम बंद हो गए। हाल ही में पार्किग बंदी को लेकर ही लगभग एक करोड़ का लॉस सदर बाजार झेल चुका है। हालांकि पिछले दिनों के आन्दोलन के बाद पार्किग बहाल हो गई है लेकिन डिवाइडर के नाम पर अभी भी इस व्यवस्था को लेकर अड़ंगेबाजी लगाने की तैयारी की जा रही है। ताज रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के सेक्रेट्री बिल्लू चौहान का कहना है कि सदर बाजार को लेकर छावनी का रवैया ठीक नहीं है। पार्किग व्यवस्था को ठप कर बाजार को बर्बाद करने की मंशा है। पिछले दिनों इसी मंशा के तहत ही पार्किग को बंद कर हिटलरशाही रवैया अपनाया गया था। जिसकी वजह से लगभग एक करोड़ रुपये का लॉस बाजार झेल चुका है। सेक्रेट्री ने चेतावनी देते हुए ऐलान किया है कि अगर पार्किग व्यवस्था प्रॉपर नहीं रहने दी गई तो भविष्य में आन्दोलन को और भी तीव्र किया जाएगा। कारोबारी रवीन्द्र पाल सिंह टिम्मा ने सवाल खड़ा किया है कि जब दुकानदार के नजदीक पार्किग ही नहीं होगी तो वह कारोबार कैसे कर पाएगा? टिम्मा के अनुसार छावनी परिषद अभी भी सदर बाजार की पार्किग को लेकर अड़ंगेबाजी का रुख अपना रही है। सड़क पर नया डिवाइडर बनाकर पार्किग को ठप करने की मंशा है। पंछी पेठा स्टोर की ओनर पूनम गर्ग का कहना है कि बिना पार्किग व्यवस्था के कारोबार करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि बिना पार्किग के स्टोर का कारोबार काफी प्रभावित रहा है। पार्किग में अड़ंगेबाजी से यहां टूरिस्ट ने आना नहीं के बराबर कर दिया है। जब टूरिस्ट नहीं आएगा तो सदर का कारोबार बंदी के कगार पर पहुंचना तय है। कारोबारी हेमंत भटीजा और संगीत शर्मा का कहना है कि सदर की पार्किग व्यवस्था को लेकर बाजार की इतनी बदनामी हो चुकी है कि ट्रेवल्स एजेंसी और एजेंट टूरिस्ट को यहां लेकर ही नहीं आना चाहते हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले दिनों में सदर से रीबोक, एडिडास, प्रोवोग आदि जाने-माने ब्रांड के स्टोर अपना कारोबार समेट चुके हैं। व्यापारी नेता रवीन्द्र पाल सिंह टिम्मा का कहना है कि इस मामले में शासन-प्रशासन को सदर की पार्किग के सुचारू संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। फिर कैसे पूरा होगा नाइट बाजार का सपना! एक तरफ तो शासन आगरा में टूरिज्म को बढ़ावा देने को लेकर खासी सीरियस है। इसको लेकर सीएम की ओर से भी ड्रीम प्रोजेक्ट का सपना देखा गया है। इसी के तहत सदर बाजार में नाइट बाजार भी डेवलप किया जाना है। प्रशासन भी इसको लेकर खासी कवायद में लगा रहता है। वहीं, दूसरी तरफ यहां पार्किग को लेकर समस्या चली आ रही है। इसकी वजह से टूरिस्ट की इस बाजार में आमद नहीं के बराबर ही रह जाती है। |
नई दिल्ली. वह दिन गए जब आपको इन्सटेंट लोन के लिए संघर्ष करना होता था. लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता था. हालांकि, अब इसी वजह से फ्रॉड के केस भी बढ़ रहे हैं और डेटा सुरक्षा के सवाल भी उठ रहे हैं.
न्यूज18 ने विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर बात की. स्मार्टकॉइन के सीईओ और को-फाउंडर रोहित गर्ग बताते हैं कि इन्सटेंट लोन ऐप्स की पहुंच के साथ आप आसानी से अपने डिवाइस से पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं. लोन की तलाश कर रहे व्यक्ति के नजरिए से जिस तेज़ी से लोन राशि मिलती है, वह सराहनीय लग सकता है. इसके बाद भी कुछ लोगों को इसमें कोई गड़बड़ी नजर आ सकती है. क्या मेरा डेटा सुरक्षित है या कंपनी मुझसे ली गई जानकारी का कहां उपयोग करेगी, यह ऐसे प्रश्न हैं जो उठेंगे ही, तो आइए इन अहम सवालों के जवाब खोजें.
ऐसे समय में जब पर्सनल डेटा को डिजिटल करेंसी माना जाता है तो इसकी सुरक्षा पर विचार करना गलत नहीं है. व्यक्तिगत जानकारी का कोई भी लीक, चाहे वह केवाईसी दस्तावेज हो या बैंकिंग डिटेल्स, भयावह हो सकता है. आपके पर्सनल डेटा के लीक होने और दुरुपयोग होने की संभावना पूरी तरह से इन दो फेक्टरों पर निर्भर करती है, तो चलिए इसे विस्तार से जानते हैं.
आपकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है, यह सुनिश्चित करने के लिए पहला कदम एक वास्तविक लोन प्रोवाइडर चुनना है. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि लोन देने वाली संस्था एक प्रमाणित संस्था है और कोई कम ब्याज दर पर ज्यादा लोन राशि देने का वादा कर आपको लुभा नहीं रहा है. यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप ऑनलाइन लोन पोर्टल की वैधता को सत्यापित कर सकते हैं.
आपको ऐसी लोन देने वाली संस्थाओं की छानबीन करन चाहिए और उनकी प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए उनकी वेबसाइट से उनके संपर्क/पते के विवरण को नोट करना चाहिए. आपको यह भी पता चल जाएगा कि कंपनी मौजूद है या नहीं या यह केवल धोखेबाजों द्वारा चलाई जा रही फर्जी कंपनी है. यदि आवश्यक हो तो कंपनी की वैधता सुनिश्चित करने के लिए दिए गए नंबर पर संपर्क करें.
हमेशा याद रखें - हर कंपनी की वेबसाइट व्यवसाय के रूप में उसके इरादों को दर्शाती है. यदि कोई वेबसाइट सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड है, तो यह दर्शाता है कि यह एक वास्तविक पोर्टल है. हालांकि, यदि आपका ब्राउज़र सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को सूचीबद्ध करता है, तो यह कमोबेश आपको ऐसी तस्वीर देता है, जिसकी आप उम्मीद कर सकते हैं. जब आप किसी ऑनलाइन लोन वेबसाइट पर जाएं, तो एड्रेस बार पर एक नज़र डालें. यदि आपको वेब पते के बगल में एक 'लॉक आइकन' दिखाई देता है और URL 'HTTP' के बजाय 'https' से शुरू होता है, तो वेबसाइट एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित है.
लुभावनी डील्स यानी स्कैम का अलर्ट!
आपके सामने कई ऐसे लुभावनी डील्स आ सकती हैं, जो आपको लगभग अविश्वसनीय लग सकती हैं. प्री-प्रोसेसिंग पेमेंट के लिए पूछने, या बैकग्राउंड की जांच किए बिना सीधे आपको लोन देने जैसे घोटालों से सावधान रहें और सतर्क रहें. यह रोमांचक लग सकता है लेकिन इस पर आगे बढ़ने से पहले हमेशा दो बार सोचें. लिहाजा, लोन पोर्टल एक वास्तविक यूनिट की तरह लग सकता है, फिर भी आप डेटा चोरी के रडार पर होंगे, यदि उनके पास आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं नहीं हैं.
पोर्टल से संपर्क करने में हिचक न रखें और अपने सभी संदेहों को दूर कर लें. डेटा को सुरक्षित रखने और लेनदेन की सुरक्षा के लिए किन टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है, यह जानने के लिए बेझिझक सवाल पूछिए. उदाहरण के लिए, स्मार्टकॉइन में डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और उसके सभी संभावित उपयोगों की जानकारी स्पष्ट तौर पर प्राइवेसी पॉलिसी में दर्ज है.
कम्युनिटी की समीक्षाओं को हमेशा पढ़ने की आदत डालें-अच्छे और बुरे दोनों. इससे आपको पोर्टल की कमियों का अंदाजा हो जाएगा. यदि कई लोगों ने डेटा चोरी और सुरक्षा चिंताओं का मुद्दा उठाया है, तो संभवतः उपलब्ध वैकल्पिक विकल्पों की तलाश करना सबसे अच्छा है.
जांचें कि क्या कंपनी में कोई थर्ड-पार्टी यूनिट शामिल है जो आपको लोन सर्विसेस प्रदान करती है. पता करें कि इन कंपनियों के साथ कौन-सी जानकारी साझा की जा रही है और यह भी सत्यापित करें कि क्या वे वास्तविक हैं. यह आमतौर पर इस बिंदु पर होता है कि डेटा का एक्सचेंज होता है और अक्सर मॉनेटाइज होता है.
चूंकि, यह जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, इसलिए स्कैमर्स के पास इसका अध्ययन करने और इससे सीखने की पहुंच है. इस वजह से यह सुनिश्चित करने के लिए आपकी ओर से सतर्कता और जागरूकता दोनों की आवश्यकता है कि आपका डेटा सुरक्षित हाथों में है. स्मार्टकॉइन में, हम न केवल अपने ऐप के माध्यम से आपके लोन का जल्द से जल्द डिस्बर्सल करते हैं बल्कि हम आपका डेटा भी सुरक्षित रखते हैं.
तत्काल सेवा के साथ-साथ यह भी तथ्य है कि बिना किसी कोलेटरल के इन लोन का लाभ उठाया जा सकता है. इन प्लेटफार्मों पर आवेदन करते समय लोन लेने वाले से केवल केवाईसी दस्तावेज, आय की रसीद जैसी बुनियादी जानकारी मांगी जाती है, और वे पात्रता मानदंड के आधार पर तुरंत लोन राशि प्राप्त करते हैं.
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| नई दिल्ली. वह दिन गए जब आपको इन्सटेंट लोन के लिए संघर्ष करना होता था. लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता था. हालांकि, अब इसी वजह से फ्रॉड के केस भी बढ़ रहे हैं और डेटा सुरक्षा के सवाल भी उठ रहे हैं. न्यूजअट्ठारह ने विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर बात की. स्मार्टकॉइन के सीईओ और को-फाउंडर रोहित गर्ग बताते हैं कि इन्सटेंट लोन ऐप्स की पहुंच के साथ आप आसानी से अपने डिवाइस से पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं. लोन की तलाश कर रहे व्यक्ति के नजरिए से जिस तेज़ी से लोन राशि मिलती है, वह सराहनीय लग सकता है. इसके बाद भी कुछ लोगों को इसमें कोई गड़बड़ी नजर आ सकती है. क्या मेरा डेटा सुरक्षित है या कंपनी मुझसे ली गई जानकारी का कहां उपयोग करेगी, यह ऐसे प्रश्न हैं जो उठेंगे ही, तो आइए इन अहम सवालों के जवाब खोजें. ऐसे समय में जब पर्सनल डेटा को डिजिटल करेंसी माना जाता है तो इसकी सुरक्षा पर विचार करना गलत नहीं है. व्यक्तिगत जानकारी का कोई भी लीक, चाहे वह केवाईसी दस्तावेज हो या बैंकिंग डिटेल्स, भयावह हो सकता है. आपके पर्सनल डेटा के लीक होने और दुरुपयोग होने की संभावना पूरी तरह से इन दो फेक्टरों पर निर्भर करती है, तो चलिए इसे विस्तार से जानते हैं. आपकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है, यह सुनिश्चित करने के लिए पहला कदम एक वास्तविक लोन प्रोवाइडर चुनना है. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि लोन देने वाली संस्था एक प्रमाणित संस्था है और कोई कम ब्याज दर पर ज्यादा लोन राशि देने का वादा कर आपको लुभा नहीं रहा है. यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप ऑनलाइन लोन पोर्टल की वैधता को सत्यापित कर सकते हैं. आपको ऐसी लोन देने वाली संस्थाओं की छानबीन करन चाहिए और उनकी प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए उनकी वेबसाइट से उनके संपर्क/पते के विवरण को नोट करना चाहिए. आपको यह भी पता चल जाएगा कि कंपनी मौजूद है या नहीं या यह केवल धोखेबाजों द्वारा चलाई जा रही फर्जी कंपनी है. यदि आवश्यक हो तो कंपनी की वैधता सुनिश्चित करने के लिए दिए गए नंबर पर संपर्क करें. हमेशा याद रखें - हर कंपनी की वेबसाइट व्यवसाय के रूप में उसके इरादों को दर्शाती है. यदि कोई वेबसाइट सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड है, तो यह दर्शाता है कि यह एक वास्तविक पोर्टल है. हालांकि, यदि आपका ब्राउज़र सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को सूचीबद्ध करता है, तो यह कमोबेश आपको ऐसी तस्वीर देता है, जिसकी आप उम्मीद कर सकते हैं. जब आप किसी ऑनलाइन लोन वेबसाइट पर जाएं, तो एड्रेस बार पर एक नज़र डालें. यदि आपको वेब पते के बगल में एक 'लॉक आइकन' दिखाई देता है और URL 'HTTP' के बजाय 'https' से शुरू होता है, तो वेबसाइट एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित है. लुभावनी डील्स यानी स्कैम का अलर्ट! आपके सामने कई ऐसे लुभावनी डील्स आ सकती हैं, जो आपको लगभग अविश्वसनीय लग सकती हैं. प्री-प्रोसेसिंग पेमेंट के लिए पूछने, या बैकग्राउंड की जांच किए बिना सीधे आपको लोन देने जैसे घोटालों से सावधान रहें और सतर्क रहें. यह रोमांचक लग सकता है लेकिन इस पर आगे बढ़ने से पहले हमेशा दो बार सोचें. लिहाजा, लोन पोर्टल एक वास्तविक यूनिट की तरह लग सकता है, फिर भी आप डेटा चोरी के रडार पर होंगे, यदि उनके पास आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं नहीं हैं. पोर्टल से संपर्क करने में हिचक न रखें और अपने सभी संदेहों को दूर कर लें. डेटा को सुरक्षित रखने और लेनदेन की सुरक्षा के लिए किन टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है, यह जानने के लिए बेझिझक सवाल पूछिए. उदाहरण के लिए, स्मार्टकॉइन में डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और उसके सभी संभावित उपयोगों की जानकारी स्पष्ट तौर पर प्राइवेसी पॉलिसी में दर्ज है. कम्युनिटी की समीक्षाओं को हमेशा पढ़ने की आदत डालें-अच्छे और बुरे दोनों. इससे आपको पोर्टल की कमियों का अंदाजा हो जाएगा. यदि कई लोगों ने डेटा चोरी और सुरक्षा चिंताओं का मुद्दा उठाया है, तो संभवतः उपलब्ध वैकल्पिक विकल्पों की तलाश करना सबसे अच्छा है. जांचें कि क्या कंपनी में कोई थर्ड-पार्टी यूनिट शामिल है जो आपको लोन सर्विसेस प्रदान करती है. पता करें कि इन कंपनियों के साथ कौन-सी जानकारी साझा की जा रही है और यह भी सत्यापित करें कि क्या वे वास्तविक हैं. यह आमतौर पर इस बिंदु पर होता है कि डेटा का एक्सचेंज होता है और अक्सर मॉनेटाइज होता है. चूंकि, यह जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, इसलिए स्कैमर्स के पास इसका अध्ययन करने और इससे सीखने की पहुंच है. इस वजह से यह सुनिश्चित करने के लिए आपकी ओर से सतर्कता और जागरूकता दोनों की आवश्यकता है कि आपका डेटा सुरक्षित हाथों में है. स्मार्टकॉइन में, हम न केवल अपने ऐप के माध्यम से आपके लोन का जल्द से जल्द डिस्बर्सल करते हैं बल्कि हम आपका डेटा भी सुरक्षित रखते हैं. तत्काल सेवा के साथ-साथ यह भी तथ्य है कि बिना किसी कोलेटरल के इन लोन का लाभ उठाया जा सकता है. इन प्लेटफार्मों पर आवेदन करते समय लोन लेने वाले से केवल केवाईसी दस्तावेज, आय की रसीद जैसी बुनियादी जानकारी मांगी जाती है, और वे पात्रता मानदंड के आधार पर तुरंत लोन राशि प्राप्त करते हैं. . |
लखनऊ। अजीत सिहं हत्याकांड के आरोपित गिरधारी एनकाउंटर मामले में शनिवार दोपहर राजधानी पुलिस ने घटना का नाट्य रुपांतरण किया। इस दौरान फॉरेंसिक टीम भी मौजूद रही। घटना के री-क्रिएशन की वीडियोग्राफी भी की गई।
रि-क्रिएशन के दौरान दिखाया गया कि विभूतिखंड पुलिस गिरधारी को लेकर असलहा बरामदगी के लिए जा रही थी। इसी दौरान उसने पास में बैठे दारोगा की सर्विस पिस्टल छीन ली थी और उन्हें धक्का देकर गाड़ी से नीचे गिरा दिया था।
इसके बाद आरोपित ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग शुरु कर दी थी। अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपित झाडिय़ों में भागने लगा था। पुलिस टीम ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वह लगातार फायरिंग कर रहा था। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली से गिरधारी घायल हो गया था, जिसे लोहिया अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
गौरतलब है कि 14-15 फ रवरी के देर रात्रि करीब 2:30 बजे के आस-पास पुलिस मुठभेड़ में गिरधारी की मौत हो गई थी। मुठभेड़ के बाद कई सवाल उठ रहे थे। गिरधारी के परिवारजन न्यायालय में अर्जी देकर मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। इस पर न्यायालय ने हजरतगंज कोतवाली में इंस्पेक्टर विभूति खंड और डीसीपी पूर्वी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि पुलिस ने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अर्जी दी थी। फिलहाल कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है।
| लखनऊ। अजीत सिहं हत्याकांड के आरोपित गिरधारी एनकाउंटर मामले में शनिवार दोपहर राजधानी पुलिस ने घटना का नाट्य रुपांतरण किया। इस दौरान फॉरेंसिक टीम भी मौजूद रही। घटना के री-क्रिएशन की वीडियोग्राफी भी की गई। रि-क्रिएशन के दौरान दिखाया गया कि विभूतिखंड पुलिस गिरधारी को लेकर असलहा बरामदगी के लिए जा रही थी। इसी दौरान उसने पास में बैठे दारोगा की सर्विस पिस्टल छीन ली थी और उन्हें धक्का देकर गाड़ी से नीचे गिरा दिया था। इसके बाद आरोपित ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग शुरु कर दी थी। अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपित झाडिय़ों में भागने लगा था। पुलिस टीम ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वह लगातार फायरिंग कर रहा था। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली से गिरधारी घायल हो गया था, जिसे लोहिया अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। गौरतलब है कि चौदह-पंद्रह फ रवरी के देर रात्रि करीब दो:तीस बजे के आस-पास पुलिस मुठभेड़ में गिरधारी की मौत हो गई थी। मुठभेड़ के बाद कई सवाल उठ रहे थे। गिरधारी के परिवारजन न्यायालय में अर्जी देकर मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। इस पर न्यायालय ने हजरतगंज कोतवाली में इंस्पेक्टर विभूति खंड और डीसीपी पूर्वी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि पुलिस ने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अर्जी दी थी। फिलहाल कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। |
खुशियों और आपसी भाईचारे का त्योहार ईद-उल-फितर आज देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नमाज के लिए मस्जिदों को बखूबी सजाया गया है। मुस्लिम समुदाय के लोग विभिन्न मस्जिदों व ईदगाहों में पहुंचकर नमाज अदा कर रहे हैं। बताते चलें कि ईद पहले शुक्रवार के दिन मनाई जानी थी लेकिन शुक्रवार को चांद का दीदार नहीं होने के चलते यह शनिवार को मनाई जा रही है। राजधानी दिल्ली समेत देशभर की मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर देशवासियों को ईद-उल-फितर की बधाई दी। पीएम ने ट्वीट कर लिखा कि यह दिन समाज में एकता और शांति लेकर आए। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी लोगों को ईद-उल-फितर की बधाई दी है। साथ ही उन्होंने समाज में भाईचारा और आपसी सौहार्य बढ़ने की कामना की है।
राजधानी दिल्ली स्थित जामा मस्जिद में ईद-उल-फितर के मौके पर नमाज अदा करने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं।
ईद के मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ राजधानी भोपाल के ईदगाह पहुंचे है। यहां पर संख्या में लोगों ने नमाज अदा की।
| खुशियों और आपसी भाईचारे का त्योहार ईद-उल-फितर आज देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नमाज के लिए मस्जिदों को बखूबी सजाया गया है। मुस्लिम समुदाय के लोग विभिन्न मस्जिदों व ईदगाहों में पहुंचकर नमाज अदा कर रहे हैं। बताते चलें कि ईद पहले शुक्रवार के दिन मनाई जानी थी लेकिन शुक्रवार को चांद का दीदार नहीं होने के चलते यह शनिवार को मनाई जा रही है। राजधानी दिल्ली समेत देशभर की मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर देशवासियों को ईद-उल-फितर की बधाई दी। पीएम ने ट्वीट कर लिखा कि यह दिन समाज में एकता और शांति लेकर आए। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी लोगों को ईद-उल-फितर की बधाई दी है। साथ ही उन्होंने समाज में भाईचारा और आपसी सौहार्य बढ़ने की कामना की है। राजधानी दिल्ली स्थित जामा मस्जिद में ईद-उल-फितर के मौके पर नमाज अदा करने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं। ईद के मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ राजधानी भोपाल के ईदगाह पहुंचे है। यहां पर संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। |
इंडिया न्यूज, लखनऊः
Lucknow Municipal Corporation नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने नगर निगम का औचक निरीक्षण 16 अप्रैल को किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी सुबह के समय अपनी ड्यूटी पर नहीं मिले थे। इसके बाद इन कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऐसे में ड्यटी पर समय से न पहुंचने वाले नगर निगम के 119 कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी में है निगम प्रशासन।
अब नगर निगम कर्मचारियों को एप 311 के साथ-साथ रजिस्टर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। 16 अप्रैल को नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी को निरीक्षण में नगर निगम मुख्यालय में 25 फीसदी ये कर्मचारी सुबह सवा दस बजे अपनी सीट पर नहीं मिले थे। इसके बाद नियमों को और ज्यादा सख्त किया जा रहा है।
| इंडिया न्यूज, लखनऊः Lucknow Municipal Corporation नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने नगर निगम का औचक निरीक्षण सोलह अप्रैल को किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी सुबह के समय अपनी ड्यूटी पर नहीं मिले थे। इसके बाद इन कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऐसे में ड्यटी पर समय से न पहुंचने वाले नगर निगम के एक सौ उन्नीस कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी में है निगम प्रशासन। अब नगर निगम कर्मचारियों को एप तीन सौ ग्यारह के साथ-साथ रजिस्टर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। सोलह अप्रैल को नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी को निरीक्षण में नगर निगम मुख्यालय में पच्चीस फीसदी ये कर्मचारी सुबह सवा दस बजे अपनी सीट पर नहीं मिले थे। इसके बाद नियमों को और ज्यादा सख्त किया जा रहा है। |
ग्वालियर, 18 सितंबर । मध्य प्रदेश में उप-चुनाव से पहले ग्वालियर-चंबल इलाके में सियासत गर्माने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेषाध्यक्ष कमल नाथ शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे और रोड-शो के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता उनके विरोध में उतरे।
राज्य में 28 सीटों पर विधानसभा के उप-चुनाव होने वाले हैं। उनमें 16 सीटें ग्वालियर-चंबल अंचल से हैं। बीते दो साल में यह पहला मौका है जब कमल नाथ ग्वालियर के प्रवास पर हैं।
कमल नाथ शुक्रवार को पहुंचे तो कार्यकर्ता उनका स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आए। उनका रोड शो कई किलोमीटर लंबा रहा। कमल नाथ ने काफी देर कार से बाहर निकलकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।
कमल नाथ का जब रोड शो निकल रहा था इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध करते हुए नारेबाजी की। पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के प्रभारी केके मिश्रा ने बताया है कि ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के अभूतपूर्व स्वागत ने सभी रिकार्ड ध्वस्त किये। सरकार-भाजपा के पार्टीजनों के काफिलों को रोकने के बाद भी सारे कुप्रयास किए जो असफल रहा।
रोड शो के दौरान कमल नाथ ने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के समाधिस्थल पर पुष्प अर्पित किए।
Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
| ग्वालियर, अट्ठारह सितंबर । मध्य प्रदेश में उप-चुनाव से पहले ग्वालियर-चंबल इलाके में सियासत गर्माने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेषाध्यक्ष कमल नाथ शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे और रोड-शो के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता उनके विरोध में उतरे। राज्य में अट्ठाईस सीटों पर विधानसभा के उप-चुनाव होने वाले हैं। उनमें सोलह सीटें ग्वालियर-चंबल अंचल से हैं। बीते दो साल में यह पहला मौका है जब कमल नाथ ग्वालियर के प्रवास पर हैं। कमल नाथ शुक्रवार को पहुंचे तो कार्यकर्ता उनका स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आए। उनका रोड शो कई किलोमीटर लंबा रहा। कमल नाथ ने काफी देर कार से बाहर निकलकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। कमल नाथ का जब रोड शो निकल रहा था इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध करते हुए नारेबाजी की। पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। कांग्रेस के मीडिया विभाग के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के प्रभारी केके मिश्रा ने बताया है कि ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के अभूतपूर्व स्वागत ने सभी रिकार्ड ध्वस्त किये। सरकार-भाजपा के पार्टीजनों के काफिलों को रोकने के बाद भी सारे कुप्रयास किए जो असफल रहा। रोड शो के दौरान कमल नाथ ने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के समाधिस्थल पर पुष्प अर्पित किए। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service. |
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य ने कहा कि मॉर्टिन-गुडनाइट जैसे मॉस्किटो किलर्स का इस्तेमाल अहिंसक समाज का हिस्सा नहीं है। मच्छरों को मारना भी हिंसा है। आचार्य श्री के परम शिष्य श्री विनम्र सागर जी महाराज 72 समोशरण एवं अरिहंत चक्र महामंडल विधान, भव्य वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए छतरपुर आए हैं।
जैन मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने कहा, बाजार में कई केमिकल्स मच्छर मारने के लिए उपयोग होता है। यह अहिंसक समाज में वर्जित है, यह एक हिंसा है। जो भी इसका इस्तेमाल करता है, वह गलत है। मच्छरों को मारना भी हिंसा की श्रेणी में ही आता है।
लंपी वायरस पर मुनिश्री जी ने कहा कि गायों में लंपी वायरस की वजह बायो केमिकल के स्टूडेंट्स हैं। छात्रों ने गायों पर ऐसे कैमिकल्स प्रयोग किए हैं, जिनके चलते गायों को लंपी वायरस की बीमारी हो गई। जैसे कोरोना तेजी से फैला है, वैसे ही लंपी वायरस भी गायों में खूब फैला है।
आजकल लोग गायों को रेडी-टू-ईट भोज पदार्थ खिलाते हैं। इनमें भी केमिकल्स होते हैं। इस वजह से कैमिकल्स गायों में फैल गए। देखते ही देखते 60 हजार फिर 70 हजार फिर 80 हजार से 1 लाख और इससे भी अधिक गाय लंपी की चपेट में आ गईं। लंपी के कारण 50 हजार से अधिक गायों की मौत हो गई। रेडी-टू-ईट फूड प्रोडक्ट्स और बायो मेडिकल स्टूडेंट्स का प्रयोग गोहत्याओं और लंपी का कारण है।
मुनिश्री ने कहा कि गायों की मौत की वजह जाने अनजाने हमसे ही हुई है। पाप के लिए हम प्रायश्चित कर सकते हैं, इसी प्रायश्चित के लिए हम आयोजन कर रहे हैं। जिसमें शामिल होकर हम अपने पाप की भागीदारी को कम कर सकते हैं।
सकल दिगंबर जैन समाज छतरपुर में 72 समोशरण और अरिहंत चक्र महामंडल विधान, भव्य वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। 11 से 20 दिसंबर तक मुनि श्री विनम्र सागर महाराज के सानिध्य में अजीतनाथ जिनालय मेला ग्राउंड, जैन मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिनालय मेला ग्राउंड में जैन समाज बड़े ही उत्साह से तैयारियों में जुटा है। धार्मिक अनुष्ठान में पूरे देश से श्रद्धालु छतरपुर आएंगे।
10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगाम में विद्यासागर महाराज का जन्म हुआ था। पिता मल्लप्पा और मां श्रीमंती जैन ने उनका नाम विद्याधर रखा था। कक्षा 9वीं तक लौकिक शिक्षा लेने के बाद 1966 में आचार्य देशभूषण महाराज से उन्होंने ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और 30 जून 1968 को उन्हें आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने मुनि पद की दीक्षा दी थी।
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| आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य ने कहा कि मॉर्टिन-गुडनाइट जैसे मॉस्किटो किलर्स का इस्तेमाल अहिंसक समाज का हिस्सा नहीं है। मच्छरों को मारना भी हिंसा है। आचार्य श्री के परम शिष्य श्री विनम्र सागर जी महाराज बहत्तर समोशरण एवं अरिहंत चक्र महामंडल विधान, भव्य वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए छतरपुर आए हैं। जैन मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने कहा, बाजार में कई केमिकल्स मच्छर मारने के लिए उपयोग होता है। यह अहिंसक समाज में वर्जित है, यह एक हिंसा है। जो भी इसका इस्तेमाल करता है, वह गलत है। मच्छरों को मारना भी हिंसा की श्रेणी में ही आता है। लंपी वायरस पर मुनिश्री जी ने कहा कि गायों में लंपी वायरस की वजह बायो केमिकल के स्टूडेंट्स हैं। छात्रों ने गायों पर ऐसे कैमिकल्स प्रयोग किए हैं, जिनके चलते गायों को लंपी वायरस की बीमारी हो गई। जैसे कोरोना तेजी से फैला है, वैसे ही लंपी वायरस भी गायों में खूब फैला है। आजकल लोग गायों को रेडी-टू-ईट भोज पदार्थ खिलाते हैं। इनमें भी केमिकल्स होते हैं। इस वजह से कैमिकल्स गायों में फैल गए। देखते ही देखते साठ हजार फिर सत्तर हजार फिर अस्सी हजार से एक लाख और इससे भी अधिक गाय लंपी की चपेट में आ गईं। लंपी के कारण पचास हजार से अधिक गायों की मौत हो गई। रेडी-टू-ईट फूड प्रोडक्ट्स और बायो मेडिकल स्टूडेंट्स का प्रयोग गोहत्याओं और लंपी का कारण है। मुनिश्री ने कहा कि गायों की मौत की वजह जाने अनजाने हमसे ही हुई है। पाप के लिए हम प्रायश्चित कर सकते हैं, इसी प्रायश्चित के लिए हम आयोजन कर रहे हैं। जिसमें शामिल होकर हम अपने पाप की भागीदारी को कम कर सकते हैं। सकल दिगंबर जैन समाज छतरपुर में बहत्तर समोशरण और अरिहंत चक्र महामंडल विधान, भव्य वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। ग्यारह से बीस दिसंबर तक मुनि श्री विनम्र सागर महाराज के सानिध्य में अजीतनाथ जिनालय मेला ग्राउंड, जैन मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिनालय मेला ग्राउंड में जैन समाज बड़े ही उत्साह से तैयारियों में जुटा है। धार्मिक अनुष्ठान में पूरे देश से श्रद्धालु छतरपुर आएंगे। दस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ छियालीस को कर्नाटक के बेलगाम में विद्यासागर महाराज का जन्म हुआ था। पिता मल्लप्पा और मां श्रीमंती जैन ने उनका नाम विद्याधर रखा था। कक्षा नौवीं तक लौकिक शिक्षा लेने के बाद एक हज़ार नौ सौ छयासठ में आचार्य देशभूषण महाराज से उन्होंने ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और तीस जून एक हज़ार नौ सौ अड़सठ को उन्हें आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने मुनि पद की दीक्षा दी थी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मैथोडिस्ट गर्ल्स पीजी कालेज में दो दिवसीय युवा महोत्सव का आगाज हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं की प्रतिभा को मंच प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ाना था। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। कार्यक्रम से पूर्व महाविद्यालय प्रबंधिका जे. सिंह व प्राचार्य डॉ. अमिता श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि नगर विधायक प्रदीप बत्रा व मनीषा बत्रा का स्वागत किया।
इस दौरान मेहंदी प्रतियोगिता में कुमकुम प्रथम, आशु द्वितीय व भूमि तृतीय तथा राहिल को सांत्वना पुरस्कार मिला। केश सज्जा में यशिका प्रथम, प्रियंका द्वितीय नेहा तृतीय तथा सांत्वना पुरस्कार सारिका, आयशा, पूजा, रीतू, संध्या को दिया गया वहीं फेस पेन्टिंग में सानिया प्रथम, अफसरी द्वितीय, नेहा तृतीय तथा अवंतिका व खुशनसीब को सांत्वना पुरुस्कार मिला। नेल आर्ट में शालिनी प्रथम, नीलम द्वितीय व प्रिती तीसरे स्थान पर रही। कोलाराज में रिया सिंह व महरीन पहले, अफसरी दूसरे व इफत तीसरे स्थान पर रही। बेस्ट आउट आफ वेस्ट में दीपशिखा, तन्नु, अफसरी क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय तथा अमरीन, तन्नु सैनी को सांत्वना पुरुस्कार मिला। फेंसी ड्रेस में अंशी प्रथम, साबिया बानो द्वितीय व अतिया तीसरे स्थान पर रही जबकि आकांक्षा राणा को सांत्वना पुरस्कार मिला। ग्रुप डांस में दीपा सिंह ग्रुप पहले, शालिनी ग्रुप दूसरे व लक्ष्मी ग्रुप तीसरे तथा प्राची ग्रुप चौथे स्थान पर आया। सोलो डांस में तन्नु, शिवानी, अंसी, मुस्कान पहले, दूसरे, तीसरे व चौथे स्थान पर रही। गायन प्रतियोगिता में सबिया पहले, मरियम दूसरे, अफशा तीसरे व अनुष्का चौथे स्थान पर रही। इस अवसर पर आयशा, अंकिता सिंह, नेहा चंद्रा, आफरीन, मीनू, सुरभि, वर्णिका, रिधिमा, अंशिका सिंघल, कीर्ति पाल, वंशिका त्यागी को पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। मौके पर शशि कपूर, अंजू कपूर आदि उपस्थित रहे। इस दौरान प्रतियोगिता की विजेता छात्राओं को इनर व्हील क्लब ने पुरस्कृत किया।
| मैथोडिस्ट गर्ल्स पीजी कालेज में दो दिवसीय युवा महोत्सव का आगाज हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं की प्रतिभा को मंच प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ाना था। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। कार्यक्रम से पूर्व महाविद्यालय प्रबंधिका जे. सिंह व प्राचार्य डॉ. अमिता श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि नगर विधायक प्रदीप बत्रा व मनीषा बत्रा का स्वागत किया। इस दौरान मेहंदी प्रतियोगिता में कुमकुम प्रथम, आशु द्वितीय व भूमि तृतीय तथा राहिल को सांत्वना पुरस्कार मिला। केश सज्जा में यशिका प्रथम, प्रियंका द्वितीय नेहा तृतीय तथा सांत्वना पुरस्कार सारिका, आयशा, पूजा, रीतू, संध्या को दिया गया वहीं फेस पेन्टिंग में सानिया प्रथम, अफसरी द्वितीय, नेहा तृतीय तथा अवंतिका व खुशनसीब को सांत्वना पुरुस्कार मिला। नेल आर्ट में शालिनी प्रथम, नीलम द्वितीय व प्रिती तीसरे स्थान पर रही। कोलाराज में रिया सिंह व महरीन पहले, अफसरी दूसरे व इफत तीसरे स्थान पर रही। बेस्ट आउट आफ वेस्ट में दीपशिखा, तन्नु, अफसरी क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय तथा अमरीन, तन्नु सैनी को सांत्वना पुरुस्कार मिला। फेंसी ड्रेस में अंशी प्रथम, साबिया बानो द्वितीय व अतिया तीसरे स्थान पर रही जबकि आकांक्षा राणा को सांत्वना पुरस्कार मिला। ग्रुप डांस में दीपा सिंह ग्रुप पहले, शालिनी ग्रुप दूसरे व लक्ष्मी ग्रुप तीसरे तथा प्राची ग्रुप चौथे स्थान पर आया। सोलो डांस में तन्नु, शिवानी, अंसी, मुस्कान पहले, दूसरे, तीसरे व चौथे स्थान पर रही। गायन प्रतियोगिता में सबिया पहले, मरियम दूसरे, अफशा तीसरे व अनुष्का चौथे स्थान पर रही। इस अवसर पर आयशा, अंकिता सिंह, नेहा चंद्रा, आफरीन, मीनू, सुरभि, वर्णिका, रिधिमा, अंशिका सिंघल, कीर्ति पाल, वंशिका त्यागी को पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। मौके पर शशि कपूर, अंजू कपूर आदि उपस्थित रहे। इस दौरान प्रतियोगिता की विजेता छात्राओं को इनर व्हील क्लब ने पुरस्कृत किया। |
इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा के छठे दिन शनिवार को दोनों पालियों में 1005 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। अच्छी बात यह रही कि छठे दिन एक भी परीक्षार्थी निष्कासित नहीं हुए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से परीक्षा हुई। परीक्षा में परीक्षार्थी अब अपने ज्ञान के अनुसार किसी विषय में या ज्यादा या कम प्रश्न पत्र हल किये।
शनिवार की प्रथम पाली में कुल 7723 परीक्षार्थियों में 6744 ही उपस्थित हुए। जबकि 979 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। वहीं द्वितीय पाली में 948 में 922 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इस पाली में 26 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। दोनों पालियों में कई पदाधिकारी विभिन्न केन्द्रों का जायजा लेते रहे।
कल साइकॉलजी, एग्रीकल्चर व बिजनेस स्टडी विषय की होगी परीक्षा : परीक्षा के सातवें दिन सोमवार को प्रथम पाली में साइंस में एग्रीकल्चर, कामर्स का बिजनेस स्टडी तथा द्वितीय पाली आर्टस के सायकॉलजी विषय की परीक्षा होगी।
कहते डीईओ : डीईओ जयशंकर ठाकुर ने कहा कि छठे दिन दोनों पालियों की परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न हुई। एक भी परीक्षार्थी कदाचार में नहीं पकड़े गए।
सिमरी बख्तियारपुर से ए. सं. के अनुसार अनुमंडल में इंटर के दो परीक्षा केंद्र पर शनिवार को छठे दिन परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त वातावरण में परीक्षा संपन्न हो गया। उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर प्रथम पाली में हिन्दी की परीक्षा में कुल 133 परीक्षार्थी में 2 परीक्षार्थी अनुपस्थित रही, वहीं दूसरी पाली अर्थशास्त्र विषय के 13 परीक्षार्थी में सभी उपस्थित रही।
डीसी इंटर कॉलेज में हिन्दी के प्रथम पाली में 219 परीक्षार्थी में सभी उपस्थित थीं। एवं दूसरी पारी में अर्थशास्त्र में 8 परीक्षार्थी में 1 परीक्षार्थी अनुपस्थित रही। एएसडीएम अश्वनी कुमार, नपं ईओ कमलेश कुमार प्रसाद एवं बख्तियारपुर थाना अध्यक्ष सुधाकर कुमार चरणबद्ध तरीके से दोनों परीक्षा केंद्र पर निरीक्षण करते रहे।
| इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा के छठे दिन शनिवार को दोनों पालियों में एक हज़ार पाँच परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। अच्छी बात यह रही कि छठे दिन एक भी परीक्षार्थी निष्कासित नहीं हुए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से परीक्षा हुई। परीक्षा में परीक्षार्थी अब अपने ज्ञान के अनुसार किसी विषय में या ज्यादा या कम प्रश्न पत्र हल किये। शनिवार की प्रथम पाली में कुल सात हज़ार सात सौ तेईस परीक्षार्थियों में छः हज़ार सात सौ चौंतालीस ही उपस्थित हुए। जबकि नौ सौ उन्यासी परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। वहीं द्वितीय पाली में नौ सौ अड़तालीस में नौ सौ बाईस परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इस पाली में छब्बीस परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। दोनों पालियों में कई पदाधिकारी विभिन्न केन्द्रों का जायजा लेते रहे। कल साइकॉलजी, एग्रीकल्चर व बिजनेस स्टडी विषय की होगी परीक्षा : परीक्षा के सातवें दिन सोमवार को प्रथम पाली में साइंस में एग्रीकल्चर, कामर्स का बिजनेस स्टडी तथा द्वितीय पाली आर्टस के सायकॉलजी विषय की परीक्षा होगी। कहते डीईओ : डीईओ जयशंकर ठाकुर ने कहा कि छठे दिन दोनों पालियों की परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न हुई। एक भी परीक्षार्थी कदाचार में नहीं पकड़े गए। सिमरी बख्तियारपुर से ए. सं. के अनुसार अनुमंडल में इंटर के दो परीक्षा केंद्र पर शनिवार को छठे दिन परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त वातावरण में परीक्षा संपन्न हो गया। उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर प्रथम पाली में हिन्दी की परीक्षा में कुल एक सौ तैंतीस परीक्षार्थी में दो परीक्षार्थी अनुपस्थित रही, वहीं दूसरी पाली अर्थशास्त्र विषय के तेरह परीक्षार्थी में सभी उपस्थित रही। डीसी इंटर कॉलेज में हिन्दी के प्रथम पाली में दो सौ उन्नीस परीक्षार्थी में सभी उपस्थित थीं। एवं दूसरी पारी में अर्थशास्त्र में आठ परीक्षार्थी में एक परीक्षार्थी अनुपस्थित रही। एएसडीएम अश्वनी कुमार, नपं ईओ कमलेश कुमार प्रसाद एवं बख्तियारपुर थाना अध्यक्ष सुधाकर कुमार चरणबद्ध तरीके से दोनों परीक्षा केंद्र पर निरीक्षण करते रहे। |
विराट कोहली (Virat Kohli) की कप्तानी में भारत ने 33 टेस्ट मैचों में जीत दर्ज की है और वह भारत के सबसे सफल कप्तान हैं, लेकिन हालिया रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है.
भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) के लिए पिछला एक साल बेहद खराब गुजर रहा है. खुद की बैटिंग से लेकर टीम की कमान संभालने तक कप्तान कोहली पिछड़ रहे हैं. अब इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई (Chennai) में हुए पहले टेस्ट में मिली 227 रनों की हार ने इसे और बद्तर बना दिया है. कोहली की कप्तानी में ये भारत की लगातार चौथी टेस्ट हार है. एक साल के अंदर में कोहली ने सिर्फ 4 टेस्ट मैचों में कप्तानी की है और चारों में ही टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा है.
इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट (Chennai Test) के आखिरी दिन भारत को जीत के लिए 381 और रनों की जरूरत थी, लेकिन टीम इंडिया (Team India) दो सेशन भी नहीं टिक पाई. पहले सेशन में 6 विकेट गंवाने के बाद भारतीय टीम ने कप्तान कोहली समेत आखिरी 3 विकेट दूसरे सेशन में गंवा दिए. टीम इंडिया आखिरी दिन सिर्फ 153 रन जोड़ पाई और 192 रनों पर ढेर हो गई.
पहले से ही कप्तानी को लेकर आलोचना झेल रहे कोहली पर एक और हार के साथ दबाव बढ़ गया. कोहली की कप्तानी में भारत की ये लगातार टेस्ट हार है. 2014 के आखिरी महीने में पहली बार टीम की कमान संभालने वाले कोहली के 6 साल के कार्यकाल में ये पहला मौका है, जब टीम की ऐसी स्थिति हुई है.
पिछले साल फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर खेले गए दोनों टेस्ट मैच में भारत को हार मिली थी. पहले टेस्ट में भारत को न्यूजीलैंड ने 10 विकेट से हराया था. इसके बाद दूसरे मैच में भी टीम को 7 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था.
फिर करीब 10 महीने के इंतजार के बाद जब टीम इंडिया फिर से टेस्ट क्रिकेट के लिए मैदान में उतरी, तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड टेस्ट में सिर्फ ढाई दिनों में ही भारत को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. दूसरी पारी में भारतीय टीम सिर्फ 36 रनों पर ढेर हो गई थी और ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट से हराया था.
अब इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के साथ ही कोहली की कप्तानी में लगातार चौथी हार मिली है. इन सबके बीच भारतीय टीम ने 3 मैच ऐसे खेले, जिसमें से 2 में जीत मिली, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा. ये तीनों मैच ऑस्ट्रेलिया में खेले गए थे और इस दौरान टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथ में थी.
| विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने तैंतीस टेस्ट मैचों में जीत दर्ज की है और वह भारत के सबसे सफल कप्तान हैं, लेकिन हालिया रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान विराट कोहली के लिए पिछला एक साल बेहद खराब गुजर रहा है. खुद की बैटिंग से लेकर टीम की कमान संभालने तक कप्तान कोहली पिछड़ रहे हैं. अब इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में हुए पहले टेस्ट में मिली दो सौ सत्ताईस रनों की हार ने इसे और बद्तर बना दिया है. कोहली की कप्तानी में ये भारत की लगातार चौथी टेस्ट हार है. एक साल के अंदर में कोहली ने सिर्फ चार टेस्ट मैचों में कप्तानी की है और चारों में ही टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट के आखिरी दिन भारत को जीत के लिए तीन सौ इक्यासी और रनों की जरूरत थी, लेकिन टीम इंडिया दो सेशन भी नहीं टिक पाई. पहले सेशन में छः विकेट गंवाने के बाद भारतीय टीम ने कप्तान कोहली समेत आखिरी तीन विकेट दूसरे सेशन में गंवा दिए. टीम इंडिया आखिरी दिन सिर्फ एक सौ तिरेपन रन जोड़ पाई और एक सौ बानवे रनों पर ढेर हो गई. पहले से ही कप्तानी को लेकर आलोचना झेल रहे कोहली पर एक और हार के साथ दबाव बढ़ गया. कोहली की कप्तानी में भारत की ये लगातार टेस्ट हार है. दो हज़ार चौदह के आखिरी महीने में पहली बार टीम की कमान संभालने वाले कोहली के छः साल के कार्यकाल में ये पहला मौका है, जब टीम की ऐसी स्थिति हुई है. पिछले साल फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर खेले गए दोनों टेस्ट मैच में भारत को हार मिली थी. पहले टेस्ट में भारत को न्यूजीलैंड ने दस विकेट से हराया था. इसके बाद दूसरे मैच में भी टीम को सात विकेट से हार का सामना करना पड़ा था. फिर करीब दस महीने के इंतजार के बाद जब टीम इंडिया फिर से टेस्ट क्रिकेट के लिए मैदान में उतरी, तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड टेस्ट में सिर्फ ढाई दिनों में ही भारत को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. दूसरी पारी में भारतीय टीम सिर्फ छत्तीस रनों पर ढेर हो गई थी और ऑस्ट्रेलिया ने आठ विकेट से हराया था. अब इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के साथ ही कोहली की कप्तानी में लगातार चौथी हार मिली है. इन सबके बीच भारतीय टीम ने तीन मैच ऐसे खेले, जिसमें से दो में जीत मिली, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा. ये तीनों मैच ऑस्ट्रेलिया में खेले गए थे और इस दौरान टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथ में थी. |
[ ताकी उपयोगिता
सुख और दुःख आत्मा के भीतर से आता है बाहर से नही । समस्त प्रकृति के वैभव की प्राप्त करके भी मनुष्य का हृदय महादुखी हो सकता है और कारागार मे पड़ कर भी आत्मा को सुख की प्राप्ति हो सकती है। जो नास्तिक है उसको तो वस्तुत यह भी पता नही कि सुख है क्या ? वह तो चारत्राकों के समान साधारण सुखों की सामग्री को हो सुख समझा हुआ है। जिस समय उम पर आपत्ति जिस समय उसको किसी मानवी-शक्ति का सहारा नहीं मिलेगा, जिस समय उसको धैर्य वधाने के लिये कोई न होगा उस समय उसके सामने अंधकार ही अधकार तो होगा, उस समय कौन उसको सान्त्वना देगा ? कौन इस तप्त हृदय से कहेगा कि "घवराओ मत मै तुम्हारे साथ हूँ" ? ऐसे मनुष्य के लिये तो वस्तुतः मध्याह भी आधी रात के तुल्य है। वह अपने बाहुबल पर भरोसा रखता है परन्तु एक घड़ी ऐसी आती है जब यह बाहु भी मनुष्य को धोखा दे बैठते है। इससे तुलना करो उस मनुष्य की जा ईश्वर का विश्वासी है। निर्जन वन हो, आधी रात हो, समुद्र हो, तुफान उठ रहा हो, कारागार हो, समस्त शरीर रोग ग्रसित हो । अग्निकुण्ड हो, चाहे कैसे भी कष्ट क्यों न हों, ईश्वर का ध्यान आया नहीं उसके आनन्द का स्रोत बहा नहीं जलते हुये शरीर के होठों पर भी एक वार हर्ष और मुस्कराहट के चिह्न प्रकाशित हो जाते हैं। माता की गोद मे रोगी बालक को भी बैन मिल ही जाता है । फिह जगदम्बा की गोद में बैठ कर, उसकी लौरिया सुन कर उसका हाथ अपने सिर पर पाकर कौन सा संतप्त हृदय होगा जो अपने दुःखों को न भूल जाय और जिसमें श्राह्लाद की किरण का प्रकाश न हो सके।
नित्थेनित्यानां चेतनश्चेतनानामेको बहूनांयोविदधातिकामान् । तमात्मस्थं येऽनुपश्यन्तिवीरास्तेषां सुख शाश्वतं नेतरेषाम् ।। | [ ताकी उपयोगिता सुख और दुःख आत्मा के भीतर से आता है बाहर से नही । समस्त प्रकृति के वैभव की प्राप्त करके भी मनुष्य का हृदय महादुखी हो सकता है और कारागार मे पड़ कर भी आत्मा को सुख की प्राप्ति हो सकती है। जो नास्तिक है उसको तो वस्तुत यह भी पता नही कि सुख है क्या ? वह तो चारत्राकों के समान साधारण सुखों की सामग्री को हो सुख समझा हुआ है। जिस समय उम पर आपत्ति जिस समय उसको किसी मानवी-शक्ति का सहारा नहीं मिलेगा, जिस समय उसको धैर्य वधाने के लिये कोई न होगा उस समय उसके सामने अंधकार ही अधकार तो होगा, उस समय कौन उसको सान्त्वना देगा ? कौन इस तप्त हृदय से कहेगा कि "घवराओ मत मै तुम्हारे साथ हूँ" ? ऐसे मनुष्य के लिये तो वस्तुतः मध्याह भी आधी रात के तुल्य है। वह अपने बाहुबल पर भरोसा रखता है परन्तु एक घड़ी ऐसी आती है जब यह बाहु भी मनुष्य को धोखा दे बैठते है। इससे तुलना करो उस मनुष्य की जा ईश्वर का विश्वासी है। निर्जन वन हो, आधी रात हो, समुद्र हो, तुफान उठ रहा हो, कारागार हो, समस्त शरीर रोग ग्रसित हो । अग्निकुण्ड हो, चाहे कैसे भी कष्ट क्यों न हों, ईश्वर का ध्यान आया नहीं उसके आनन्द का स्रोत बहा नहीं जलते हुये शरीर के होठों पर भी एक वार हर्ष और मुस्कराहट के चिह्न प्रकाशित हो जाते हैं। माता की गोद मे रोगी बालक को भी बैन मिल ही जाता है । फिह जगदम्बा की गोद में बैठ कर, उसकी लौरिया सुन कर उसका हाथ अपने सिर पर पाकर कौन सा संतप्त हृदय होगा जो अपने दुःखों को न भूल जाय और जिसमें श्राह्लाद की किरण का प्रकाश न हो सके। नित्थेनित्यानां चेतनश्चेतनानामेको बहूनांयोविदधातिकामान् । तमात्मस्थं येऽनुपश्यन्तिवीरास्तेषां सुख शाश्वतं नेतरेषाम् ।। |
Palamu: जिले में मंगलवार को पिपराटांड़ पुलिस की एक विशेष दल ने एक मदरसा के एक शिक्षक से एक देशी पिस्तौल एवं एक गोली बरामद करते हुए गिरफ्तार किया है. शिक्षक अपने पास पिस्तौल और गोली किस वजह से रखे हुए था, इसकी जांच में पुलिस जुटी हुई है. कहां से उसने हथियार खरीदे थे, इसके लिए शिक्षक से पूछताछ की जा रही है. जिला मुख्यालय डालटनगंज से 60 किलोमीटर एवं पिपराटांङ थाना क्षेत्र से 7 से 8 किलोमीटर दूर होटवार के मदरसा में उक्त कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गयी.
इस बारे में जिले के पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि शिक्षक नदीम अंसारी (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है. यह मदरसा राज्य सरकार से अनुदानित है. उन्होंने बताया कि शिक्षक को उस वक्त दबोचा गया, जब वह मदरसा में बच्चों को पढ़ाने जा रहा था और जैसे ही मदरसा में कदम रखा, उसके पांच मिनट बाद गिरफ्तार कर लिया गया. SP ने बताया कि शिक्षक मूल रुप से इसी थाना क्षेत्र के लोहरसी का निवासी है और वह मदरसा का नियमित शिक्षक है. गिरफ्तारी अभियान में पिपराटांड़ के थाना प्रभारी हीरालाल साह दल बल के साथ शामिल थे. उन्होंने जानकारी दी कि गुप्त सूचना मिलने के बाद मजिस्ट्रेट के साथ टीम बनाकर छापामारी की गई और मदरसा शिक्षक नदीम को धर दबोचा गया.
| Palamu: जिले में मंगलवार को पिपराटांड़ पुलिस की एक विशेष दल ने एक मदरसा के एक शिक्षक से एक देशी पिस्तौल एवं एक गोली बरामद करते हुए गिरफ्तार किया है. शिक्षक अपने पास पिस्तौल और गोली किस वजह से रखे हुए था, इसकी जांच में पुलिस जुटी हुई है. कहां से उसने हथियार खरीदे थे, इसके लिए शिक्षक से पूछताछ की जा रही है. जिला मुख्यालय डालटनगंज से साठ किलोग्राममीटर एवं पिपराटांङ थाना क्षेत्र से सात से आठ किलोग्राममीटर दूर होटवार के मदरसा में उक्त कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गयी. इस बारे में जिले के पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि शिक्षक नदीम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है. यह मदरसा राज्य सरकार से अनुदानित है. उन्होंने बताया कि शिक्षक को उस वक्त दबोचा गया, जब वह मदरसा में बच्चों को पढ़ाने जा रहा था और जैसे ही मदरसा में कदम रखा, उसके पांच मिनट बाद गिरफ्तार कर लिया गया. SP ने बताया कि शिक्षक मूल रुप से इसी थाना क्षेत्र के लोहरसी का निवासी है और वह मदरसा का नियमित शिक्षक है. गिरफ्तारी अभियान में पिपराटांड़ के थाना प्रभारी हीरालाल साह दल बल के साथ शामिल थे. उन्होंने जानकारी दी कि गुप्त सूचना मिलने के बाद मजिस्ट्रेट के साथ टीम बनाकर छापामारी की गई और मदरसा शिक्षक नदीम को धर दबोचा गया. |
किसी भी राष्ट्र की प्रतिभा खेलों में उसकी उत्कृष्टता से बहुत कुछ जुड़ी होती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में अच्छा प्रदर्शन केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं होता बल्कि राष्ट्र के स्वास्थ्य, मानसिक अवस्था एवं लक्ष्य के प्रति सतर्कता व जागरुकता को भी निरुपित करता है। साथ ही मानव के समग्र विकास में भी खेलों की अहम भूमिका होती है। खेल मनोरंजन के साधन और शारीरिक दक्षता पाने के एक माध्यम के साथ-साथ लोगों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने और उनके बीच के संबंधों को बेहतर बनाने में भी सहायता करता है। दो राय नहीं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्ध्यिों ने हमेशा ही देश को गौरान्वित किया है। लेकिन सच्चाई यह है कि सवा अरब की आबादी वाले देश में उत्कृष्ट खिलाड़ियों, अकादमियों और प्रशिक्षकों की भारी कमी है और उसका नतीजा यह है कि देश खेल के क्षेत्र में अभी भी बहुत पीछे है। एक आंकड़े के मुताबिक देश में सिर्फ पंद्रह प्रतिशत लोग ही खेलों में अभिरुचि रखते हैं। गौर करें तो इसके लिए समाज का नजरिया और सरकार की नीतियां दोनों जिम्मेदार हैं। समाज में अभी भी वहीं पुरानी धारणा स्थापित है कि खेल के बजाए पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। दरअसल समाज को लगता है कि खेलकूद के जरिए नौकरी या रोजी-रोजगार हासिल नहीं किया जा सकता। यह सच्चाई भी है। गौर करें तो सरकार का ध्यान भी खेलों के आधारभूत ढांचे में परिवर्तन और उससे रोजगार को जोड़ने के प्रति नहीं है। उसका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि राष्ट्रीय खेल अकादमियों को अध्यक्ष व सदस्य कौन होगा। देखा भी जाता है कि जब भी सरकारें बदलती हैं तो खेल में खेल होना शुरु हो जाता है। यहां तक कि मामला न्यायालय की चैखट तक पहुंच जाता है और उसे दखल देना पड़ता है। दुर्भाग्यपूर्ण यह कि खेल संगठनों के नियंता भी ऐसे लोग हैं जिन्हें खेल का एबीसीडी भी मालूम नहीं लेकिन उन्हीं के हाथों में खेल का भविष्य है। भला ऐसे माहौल में खेल का विकास कैसे होगा। खेलों के विकास के लिए जरुरी है कि सरकार स्पष्ट नीति के साथ स्कूलों, काॅलेजों, विश्वविद्यालयों व खेल अकादमियों में धनराशि बढ़ाकर बुनियादी ढांचे के विकास की गति तेज करे ताकि खेल की क्षमता बढ़ सके। उचित होगा कि सरकारें स्कूल स्तर से ही खेल को बढ़ावा देने का काम शुरु करें। स्कूलों में बच्चों की प्रतिभा एवं विभिन्न खेलों में उनकी अभिरुचित का ध्यान रखकर उन्हें विभिन्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। इसके बाद उन्हें उचित प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन सच्चाई है कि स्कूलों में खेल के प्रति उदासीनता है और उसका मूल कारण खेल संबंधी संसाधनों की भारी कमी और खेल से जुड़े योग्य अध्यापकों का अभाव है। कमोवेश स्कूलों जैसे ही हालात माध्यमिक विद्यालयों की भी है। यहां खेल का केवल औपचारिकता निभाया जाता है। दूसरी ओर काॅलेजों और विश्वविद्यालयों की बात करें तो यहां संसाधन तो हैं लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में खेलों के प्रति छात्रों की अनासक्ति बनी हुई है। उचित होगा कि केंद्र व राज्य सरकारें खेलों में सुधार के लिए पटियाला में स्थापित खेल संस्थान की तरह देश के अन्य स्थानों पर भी संस्थान खोलें। ऐसा इसलिए कि उचित प्रशिक्षण के जरिए देश में खेलों का स्तर ऊंचा उठाया जा सकता है। यहां यह भी ध्यान देना होगा कि जब तक खेलों को रोजगार से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक देश में खेलों की दशा सुधरने वाली नहीं है। अगर खेलों में नौजवानों को अपना भविष्य सुनिश्चित नजर आएगा तभी वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। खेलों में भविष्य सुरक्षित न होने के कारण ही नौजवानों में उदासीनता है और खेल के क्षेत्र में देश की गिनती फिसड्डी देशों में होती है। यहां यह भी ध्यान देना होगा कि खेल में स्थिति न सुधरने का एकमात्र कारण सरकार की उदासीनता भर नहीं है। बल्कि खेल से विमुखता के लिए काफी हद तक समाज का नजरिया भी जिम्मेदार है। आज भी देश में एक कहावत खूब प्रचलित है कि 'पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होगे खराब'। देखा जाता है कि अकसर माता-पिता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच आती हैं जब उनका बच्चा आवश्यकता से कुछ ज्यादा खेलने लगता है। उन्हें डर सताने लगता है कि उनका बच्चा खेलेगा तो पढ़ेगा ही नहीं। स्कूलों में भी गुरुजनों द्वारा बच्चों को डांटते हुए सुना जाता है कि दिन भर खेलोगे तो पढ़ोगे कब। अगर सरकार की नीतियों में खेल से रोजगार का जुड़ाव हो तो फिर माता-पिता के मन में बच्चे के भविष्य को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं होगी। सच तो यह है कि देश में खेल के प्रति उत्साहजनक वातावरण निर्मित नहीं हो पा रहा है और उसी का नतीजा है कि आज देश अंतर्राष्ट्रीय खेलपदकों से महरुम रह जाता है। हां, यह सही है कि अब पहले के मुकाबले ओलंपिक और एशियाड खेलों में भारत के खिलाड़ी उत्तम प्रदर्शन कर रहे हैं और वे पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रहे हैं। लेकिन सच यह भी है कि देश में खेल का मतलब क्रिकेट बनकर रह गया है और बाकी खेलों को दरकिनार कर दिया गया है। फुटबाल, कबड्डी, तीरंदाजी, जिमनास्टिक जैसे खेल के खिलाड़ियों को उस तरह का सम्मान नहीं मिलता जितना कि क्रिकेटरों को। यहां तक कि विज्ञापनों में भी क्रिकेटर ही छाए रहते हैं। यहीं वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में भारत की दशा चिंतनीय और शोचनीय है। खेल प्रदर्शनों पर गौर करें तो ब्राजील के रियो ओलंपिक 2016 में भारत का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक व लचर रहा। रियो में 119 खिलाड़ियों का दल भेजा गया था लेकिन भारत को सिर्फ दो मेडल मिले। रियो में सिर्फ पीवी सिंधु (सिल्वर) और साक्षी मलिक (कांस्य) ही मेडल जीत पायी। किसी भी भारतीय पुरुष को मेडल नहीं मिला। दो मेडल के साथ भारत को मेडल लिस्ट में 67 वां स्थान मिला। इस दयनीय स्थिति से समझा जा सकता है कि भारत में खेलों की क्या स्थिति है। यह सच्चाई है कि दुनिया के दूसरे सर्वाधिक जनसंख्या वाले हमारे देश में खेलों का जो स्तर होना चाहिए वह नहीं है। भारत को अपने पड़ोसी देश चीन से सीखना चाहिए कि 1949 में आजाद होने के बाद 1952 के ओलंपिक में एक भी पदक नहीं जीता लेकिन 32 वर्ष बाद 1984 के ओलंपिक में 15 स्वर्ण पदक झटक लिया। आज चीन हर ओलंपिक खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दुनिया को अचंभित कर रहा है। उसके ओलंपिक पदकधारकों में महिलाओं की तादाद भी अच्छी होती है। अच्छी बात यह है कि अब भारत में भी महिला खिलाड़ी कीर्तिमान रच रही हैं। दरअसल चीन ने खेल को प्राथमिकता में शामिल कर अपनी नीतियों को उसी अनुरुप ढाला है जिसके अपेक्षित परिणाम सामने आ रहे हैं। अगर भारत भी नई प्र्रतिभाओं को खेल के प्रति आकर्षित करना चाहता है तो उसे गांवों से लेकर नगरों तक के खेल की बुनियादी ढांचे में आमुलचूल परिवर्तन करना होगा। उसे खेल प्रशिक्षण की आधुनिक अकादमियों की स्थापना के साथ-साथ समुचित प्रशिक्षण, खेल धनराशि में वृद्धि तथा प्रतियोगिताओं का आयोजन करना होगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को सम्मानित करना होगा। यही नहीं मेजर ध्यानचंद जैसे अन्य महान खिलाड़ी को भी भारत रत्न की उपाधि से विभुषित करना होगा। गौरतलब है कि आज भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मन पद्मभूषण से सम्मानित मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन है। खेल में उनके महत्वपूर्ण योगदान के सम्मान में उनके जन्मदिन को भारत में खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद विश्व हाॅकी में शुमार महानतम खिलाड़ियों में से एक अद्भुत खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा व लगन से देश का मस्तक गौरान्वित किया। दो राय नहीं कि अब खेलों के प्रति बदलते नजरिए से भारत खेल के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है लेकिन सच तो यही है कि अभी भी चुनौती जस की तस बरकरार है। यहां समझना होगा कि जब तक खेल के विकास के लिए ईमानदार नीतियों को आकार नहीं दिया जाएगा और खेल को रोजगार से जोड़ा नहीं जाएगा तब तक भारत में खेल के विकास की गति धीमी ही रहेगी।
| किसी भी राष्ट्र की प्रतिभा खेलों में उसकी उत्कृष्टता से बहुत कुछ जुड़ी होती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में अच्छा प्रदर्शन केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं होता बल्कि राष्ट्र के स्वास्थ्य, मानसिक अवस्था एवं लक्ष्य के प्रति सतर्कता व जागरुकता को भी निरुपित करता है। साथ ही मानव के समग्र विकास में भी खेलों की अहम भूमिका होती है। खेल मनोरंजन के साधन और शारीरिक दक्षता पाने के एक माध्यम के साथ-साथ लोगों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने और उनके बीच के संबंधों को बेहतर बनाने में भी सहायता करता है। दो राय नहीं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्ध्यिों ने हमेशा ही देश को गौरान्वित किया है। लेकिन सच्चाई यह है कि सवा अरब की आबादी वाले देश में उत्कृष्ट खिलाड़ियों, अकादमियों और प्रशिक्षकों की भारी कमी है और उसका नतीजा यह है कि देश खेल के क्षेत्र में अभी भी बहुत पीछे है। एक आंकड़े के मुताबिक देश में सिर्फ पंद्रह प्रतिशत लोग ही खेलों में अभिरुचि रखते हैं। गौर करें तो इसके लिए समाज का नजरिया और सरकार की नीतियां दोनों जिम्मेदार हैं। समाज में अभी भी वहीं पुरानी धारणा स्थापित है कि खेल के बजाए पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। दरअसल समाज को लगता है कि खेलकूद के जरिए नौकरी या रोजी-रोजगार हासिल नहीं किया जा सकता। यह सच्चाई भी है। गौर करें तो सरकार का ध्यान भी खेलों के आधारभूत ढांचे में परिवर्तन और उससे रोजगार को जोड़ने के प्रति नहीं है। उसका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि राष्ट्रीय खेल अकादमियों को अध्यक्ष व सदस्य कौन होगा। देखा भी जाता है कि जब भी सरकारें बदलती हैं तो खेल में खेल होना शुरु हो जाता है। यहां तक कि मामला न्यायालय की चैखट तक पहुंच जाता है और उसे दखल देना पड़ता है। दुर्भाग्यपूर्ण यह कि खेल संगठनों के नियंता भी ऐसे लोग हैं जिन्हें खेल का एबीसीडी भी मालूम नहीं लेकिन उन्हीं के हाथों में खेल का भविष्य है। भला ऐसे माहौल में खेल का विकास कैसे होगा। खेलों के विकास के लिए जरुरी है कि सरकार स्पष्ट नीति के साथ स्कूलों, काॅलेजों, विश्वविद्यालयों व खेल अकादमियों में धनराशि बढ़ाकर बुनियादी ढांचे के विकास की गति तेज करे ताकि खेल की क्षमता बढ़ सके। उचित होगा कि सरकारें स्कूल स्तर से ही खेल को बढ़ावा देने का काम शुरु करें। स्कूलों में बच्चों की प्रतिभा एवं विभिन्न खेलों में उनकी अभिरुचित का ध्यान रखकर उन्हें विभिन्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। इसके बाद उन्हें उचित प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन सच्चाई है कि स्कूलों में खेल के प्रति उदासीनता है और उसका मूल कारण खेल संबंधी संसाधनों की भारी कमी और खेल से जुड़े योग्य अध्यापकों का अभाव है। कमोवेश स्कूलों जैसे ही हालात माध्यमिक विद्यालयों की भी है। यहां खेल का केवल औपचारिकता निभाया जाता है। दूसरी ओर काॅलेजों और विश्वविद्यालयों की बात करें तो यहां संसाधन तो हैं लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में खेलों के प्रति छात्रों की अनासक्ति बनी हुई है। उचित होगा कि केंद्र व राज्य सरकारें खेलों में सुधार के लिए पटियाला में स्थापित खेल संस्थान की तरह देश के अन्य स्थानों पर भी संस्थान खोलें। ऐसा इसलिए कि उचित प्रशिक्षण के जरिए देश में खेलों का स्तर ऊंचा उठाया जा सकता है। यहां यह भी ध्यान देना होगा कि जब तक खेलों को रोजगार से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक देश में खेलों की दशा सुधरने वाली नहीं है। अगर खेलों में नौजवानों को अपना भविष्य सुनिश्चित नजर आएगा तभी वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। खेलों में भविष्य सुरक्षित न होने के कारण ही नौजवानों में उदासीनता है और खेल के क्षेत्र में देश की गिनती फिसड्डी देशों में होती है। यहां यह भी ध्यान देना होगा कि खेल में स्थिति न सुधरने का एकमात्र कारण सरकार की उदासीनता भर नहीं है। बल्कि खेल से विमुखता के लिए काफी हद तक समाज का नजरिया भी जिम्मेदार है। आज भी देश में एक कहावत खूब प्रचलित है कि 'पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होगे खराब'। देखा जाता है कि अकसर माता-पिता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच आती हैं जब उनका बच्चा आवश्यकता से कुछ ज्यादा खेलने लगता है। उन्हें डर सताने लगता है कि उनका बच्चा खेलेगा तो पढ़ेगा ही नहीं। स्कूलों में भी गुरुजनों द्वारा बच्चों को डांटते हुए सुना जाता है कि दिन भर खेलोगे तो पढ़ोगे कब। अगर सरकार की नीतियों में खेल से रोजगार का जुड़ाव हो तो फिर माता-पिता के मन में बच्चे के भविष्य को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं होगी। सच तो यह है कि देश में खेल के प्रति उत्साहजनक वातावरण निर्मित नहीं हो पा रहा है और उसी का नतीजा है कि आज देश अंतर्राष्ट्रीय खेलपदकों से महरुम रह जाता है। हां, यह सही है कि अब पहले के मुकाबले ओलंपिक और एशियाड खेलों में भारत के खिलाड़ी उत्तम प्रदर्शन कर रहे हैं और वे पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रहे हैं। लेकिन सच यह भी है कि देश में खेल का मतलब क्रिकेट बनकर रह गया है और बाकी खेलों को दरकिनार कर दिया गया है। फुटबाल, कबड्डी, तीरंदाजी, जिमनास्टिक जैसे खेल के खिलाड़ियों को उस तरह का सम्मान नहीं मिलता जितना कि क्रिकेटरों को। यहां तक कि विज्ञापनों में भी क्रिकेटर ही छाए रहते हैं। यहीं वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में भारत की दशा चिंतनीय और शोचनीय है। खेल प्रदर्शनों पर गौर करें तो ब्राजील के रियो ओलंपिक दो हज़ार सोलह में भारत का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक व लचर रहा। रियो में एक सौ उन्नीस खिलाड़ियों का दल भेजा गया था लेकिन भारत को सिर्फ दो मेडल मिले। रियो में सिर्फ पीवी सिंधु और साक्षी मलिक ही मेडल जीत पायी। किसी भी भारतीय पुरुष को मेडल नहीं मिला। दो मेडल के साथ भारत को मेडल लिस्ट में सरसठ वां स्थान मिला। इस दयनीय स्थिति से समझा जा सकता है कि भारत में खेलों की क्या स्थिति है। यह सच्चाई है कि दुनिया के दूसरे सर्वाधिक जनसंख्या वाले हमारे देश में खेलों का जो स्तर होना चाहिए वह नहीं है। भारत को अपने पड़ोसी देश चीन से सीखना चाहिए कि एक हज़ार नौ सौ उनचास में आजाद होने के बाद एक हज़ार नौ सौ बावन के ओलंपिक में एक भी पदक नहीं जीता लेकिन बत्तीस वर्ष बाद एक हज़ार नौ सौ चौरासी के ओलंपिक में पंद्रह स्वर्ण पदक झटक लिया। आज चीन हर ओलंपिक खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दुनिया को अचंभित कर रहा है। उसके ओलंपिक पदकधारकों में महिलाओं की तादाद भी अच्छी होती है। अच्छी बात यह है कि अब भारत में भी महिला खिलाड़ी कीर्तिमान रच रही हैं। दरअसल चीन ने खेल को प्राथमिकता में शामिल कर अपनी नीतियों को उसी अनुरुप ढाला है जिसके अपेक्षित परिणाम सामने आ रहे हैं। अगर भारत भी नई प्र्रतिभाओं को खेल के प्रति आकर्षित करना चाहता है तो उसे गांवों से लेकर नगरों तक के खेल की बुनियादी ढांचे में आमुलचूल परिवर्तन करना होगा। उसे खेल प्रशिक्षण की आधुनिक अकादमियों की स्थापना के साथ-साथ समुचित प्रशिक्षण, खेल धनराशि में वृद्धि तथा प्रतियोगिताओं का आयोजन करना होगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को सम्मानित करना होगा। यही नहीं मेजर ध्यानचंद जैसे अन्य महान खिलाड़ी को भी भारत रत्न की उपाधि से विभुषित करना होगा। गौरतलब है कि आज भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मन पद्मभूषण से सम्मानित मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन है। खेल में उनके महत्वपूर्ण योगदान के सम्मान में उनके जन्मदिन को भारत में खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद विश्व हाॅकी में शुमार महानतम खिलाड़ियों में से एक अद्भुत खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा व लगन से देश का मस्तक गौरान्वित किया। दो राय नहीं कि अब खेलों के प्रति बदलते नजरिए से भारत खेल के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है लेकिन सच तो यही है कि अभी भी चुनौती जस की तस बरकरार है। यहां समझना होगा कि जब तक खेल के विकास के लिए ईमानदार नीतियों को आकार नहीं दिया जाएगा और खेल को रोजगार से जोड़ा नहीं जाएगा तब तक भारत में खेल के विकास की गति धीमी ही रहेगी। |
One educated person in a family can brighten the future of the whole family like one sandalwood tree fills the whole forest with fragrance.
बचपन वो है, जो लौट नही सकती दोस्ती पल में फिर कट्टीस भी हो जाया करते थे। अगले ही दिन दो उंगली दिखाकर दोस्त बन खेल लेते थे। आज तो दोस्ती सभी से है, कट्टीस हम किसी से भी नही। पर दिल के उतने नज़दीक आज कोई नही, शायद वो बचपन वाले दोस्त भी नही।
Thank you teacher. God gave me eyes, You gave me the sight. God gave me ears, You gave me the music. God gave me mouth And you gave me the song. The song of life, the song of soul, the liberty to express and reach the goal. Thank you teacher.
मातृभूमि से बड़ा कोई स्वर्ग नही। मातृभाषा से सरल कोई भाषा नही। मा से बड़ा कोई गुरू नही और माँ भारती के जैसे कहीं संस्कार नही।
व्यक्ति की सूरत समय के साथ क्षीण और बलहीन होती जाती है परंतु उसकी सीरत वक़्त के साथ प्रभावशाली और अतिसुंदर हो जाती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को उसकी सूरत से नही सीरत से पहचान मिलती है।
| One educated person in a family can brighten the future of the whole family like one sandalwood tree fills the whole forest with fragrance. बचपन वो है, जो लौट नही सकती दोस्ती पल में फिर कट्टीस भी हो जाया करते थे। अगले ही दिन दो उंगली दिखाकर दोस्त बन खेल लेते थे। आज तो दोस्ती सभी से है, कट्टीस हम किसी से भी नही। पर दिल के उतने नज़दीक आज कोई नही, शायद वो बचपन वाले दोस्त भी नही। Thank you teacher. God gave me eyes, You gave me the sight. God gave me ears, You gave me the music. God gave me mouth And you gave me the song. The song of life, the song of soul, the liberty to express and reach the goal. Thank you teacher. मातृभूमि से बड़ा कोई स्वर्ग नही। मातृभाषा से सरल कोई भाषा नही। मा से बड़ा कोई गुरू नही और माँ भारती के जैसे कहीं संस्कार नही। व्यक्ति की सूरत समय के साथ क्षीण और बलहीन होती जाती है परंतु उसकी सीरत वक़्त के साथ प्रभावशाली और अतिसुंदर हो जाती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को उसकी सूरत से नही सीरत से पहचान मिलती है। |
लॉस एंजेलिसः
अपनी आवाज की जादू से हॉलीवुड के साथ करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सिंगर ज़ायन मलिक के फैंस के लिए एक बुरी खबर है। पिछले दो सालों से एक दूसरे को डेट कर रहे ज़ायन मलिक और मशहूर मॉडल गीगी हदीद ने अपनी रस्ते अलग कर लिए है।
'वन डायरेक्शन' बैंड के पूर्व सदस्य जायन और हदीद ने मंगलवार को अपने अलगाव की घोषणा की। दोनों पिछले दो सालों से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे।
दोनों के एक-दूसरे के प्यार में पड़ने की अटकलें वर्ष 2016 की शुरुआत में उस समय आई थीं, जब जायन के 'पिलोटॉक' वीडियो में हदीद भी नजर आई थीं।
दोनों की जोड़ी इंटरनेट पर काफी फेमस थी और कई इवेंट्स में दोनों की बेहतरीन केमिस्ट्री भी नज़र आ चुकी है। फिलहाल, जायन इंस्टाग्राम पर हदीद को फॉलो नहीं कर रहे हैं।
| लॉस एंजेलिसः अपनी आवाज की जादू से हॉलीवुड के साथ करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सिंगर ज़ायन मलिक के फैंस के लिए एक बुरी खबर है। पिछले दो सालों से एक दूसरे को डेट कर रहे ज़ायन मलिक और मशहूर मॉडल गीगी हदीद ने अपनी रस्ते अलग कर लिए है। 'वन डायरेक्शन' बैंड के पूर्व सदस्य जायन और हदीद ने मंगलवार को अपने अलगाव की घोषणा की। दोनों पिछले दो सालों से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। दोनों के एक-दूसरे के प्यार में पड़ने की अटकलें वर्ष दो हज़ार सोलह की शुरुआत में उस समय आई थीं, जब जायन के 'पिलोटॉक' वीडियो में हदीद भी नजर आई थीं। दोनों की जोड़ी इंटरनेट पर काफी फेमस थी और कई इवेंट्स में दोनों की बेहतरीन केमिस्ट्री भी नज़र आ चुकी है। फिलहाल, जायन इंस्टाग्राम पर हदीद को फॉलो नहीं कर रहे हैं। |
Weather News: अगले 24 घंटों में पश्चिमी हिमालय के अलग-अलग हिस्सों पर बर्फबारी हो सकती है, जिसके चलते उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री लुढ़क सकता है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावत दर्ज की गई है. तापमान गिरने से गलन और ठिठुरन बढ़ गई है. उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में 3 से 4 डिग्री न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है. वहीं आशंका जताई जा रही है कि अगले 24 घंटों में पश्चिमी हिमालय पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. साथ ही साथ अलग-अलग स्थानों पर बर्फबारी की भी संभावना जताई जा रही है. मौसम में अचानक आए बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ बताया जा रहा है.
स्काईमेट वेदर की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पूर्वोत्तर राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश,ओडिशा, पूर्वी गुजरात और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है. इसके अलावा गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ हिस्सों में बर्फबारी हुई है, जिसके बाद ठंड और बढ़ गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 24 घंटों के दौरान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, असम, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, दक्षिण कोंकण, गोवा और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है. साथ ही साथ पश्चिमी हिमालय के अलग-अलग हिस्सों पर बर्फबारी हो सकती है, जिसके चलते उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री लुढ़क सकता है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, शनिवार देर रात हुई बारिश के बाद इस साल जनवरी में दिल्ली में कुल 88.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो 1901 के बाद से इस महीने में हुई सबसे अधिक बारिश है. इससे पहले राजधानी में 1989 में 79.7 मिलीमीटर और 1953 में 73.7 मिलीमीटर बारिश हुई थी. सफदरजंग वेधशाला में छह दिन बारिश दर्ज की गई और इस महीने अब तक 88.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की. रविवार को रात साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटे में 19.7 मिलीमीटर वर्षा हुई. इस महीने पालम वेधशाला में 110 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.
उत्तराखंड में लगातार जारी बारिश से ऊंचाई वाले स्थानों पर जमकर हिमपात हो रहा है जिसने कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. भारी बर्फवारी के चलते समूचे प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और ज्यादातर लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए जिससे सामान्य जनजीवन ठहर सा गया है. सोमवार को भी प्रदेश में बारिश और 3000 मीटर से अधिक ऊंचे स्थानों पर हिमपात जारी रहने का अनुमान है. बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, औली, मुनस्यारी जैसे ऊंचाई वाले स्थानों पर इस सीजन का सबसे भारी हिमपात हुआ. मसूरी के लाल टिब्बा और धनोल्टी में बर्फवारी हुई. नैनीताल के ऊंचाई वाले स्थानों में भी बर्फ पड़ रही है. बर्फबारी के कारण गंगोत्री-यमुनोत्री राजमार्ग सहित चार संपर्क मार्ग भी बंद पड़े हैं. केदारनाथ, घनसाली और लंबगांव मोटरमार्ग भी बर्फबारी के कारण ठप है.
कश्मीर घाटी के कई इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई, जबकि अन्य इलाकों में बारिश दर्ज की गई. इसकी वजह घाटी के कई इलाकों के न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है. वहीं ताजा हिमपात-बारिश की वजह से श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग बंद हो गया है और खराब मौसम की वजह से वैष्णो देवी धाम के लिए परिचालित हेलीकॉप्टर सेवा स्थगित कर दी गई है. घाटी के कई इलाकों में खासतौर पर दक्षिण इलाके में रात के दौरान फिर हिमपात हुआ. घाटी के प्रवेश द्वारा माने जाने वाले दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड और नजदीकी कोकरनाग में करीब छह इंच बर्फबारी दर्ज की गई है. अनंतनाग में भी तीन इंच बर्फ गिरी है.
(भाषा इनपुट के साथ)
| Weather News: अगले चौबीस घंटाटों में पश्चिमी हिमालय के अलग-अलग हिस्सों पर बर्फबारी हो सकती है, जिसके चलते उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान तीन से चार डिग्री लुढ़क सकता है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावत दर्ज की गई है. तापमान गिरने से गलन और ठिठुरन बढ़ गई है. उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में तीन से चार डिग्री न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है. वहीं आशंका जताई जा रही है कि अगले चौबीस घंटाटों में पश्चिमी हिमालय पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. साथ ही साथ अलग-अलग स्थानों पर बर्फबारी की भी संभावना जताई जा रही है. मौसम में अचानक आए बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ बताया जा रहा है. स्काईमेट वेदर की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पूर्वोत्तर राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश,ओडिशा, पूर्वी गुजरात और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है. इसके अलावा गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ हिस्सों में बर्फबारी हुई है, जिसके बाद ठंड और बढ़ गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले चौबीस घंटाटों के दौरान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, असम, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, दक्षिण कोंकण, गोवा और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है. साथ ही साथ पश्चिमी हिमालय के अलग-अलग हिस्सों पर बर्फबारी हो सकती है, जिसके चलते उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान तीन से चार डिग्री लुढ़क सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शनिवार देर रात हुई बारिश के बाद इस साल जनवरी में दिल्ली में कुल अठासी दशमलव दो मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो एक हज़ार नौ सौ एक के बाद से इस महीने में हुई सबसे अधिक बारिश है. इससे पहले राजधानी में एक हज़ार नौ सौ नवासी में उन्यासी दशमलव सात मिलीमीटर और एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में तिहत्तर दशमलव सात मिलीमीटर बारिश हुई थी. सफदरजंग वेधशाला में छह दिन बारिश दर्ज की गई और इस महीने अब तक अठासी दशमलव दो मिलीमीटर बारिश दर्ज की. रविवार को रात साढ़े आठ बजे तक पिछले चौबीस घंटाटे में उन्नीस दशमलव सात मिलीमीटर वर्षा हुई. इस महीने पालम वेधशाला में एक सौ दस मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. उत्तराखंड में लगातार जारी बारिश से ऊंचाई वाले स्थानों पर जमकर हिमपात हो रहा है जिसने कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. भारी बर्फवारी के चलते समूचे प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और ज्यादातर लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए जिससे सामान्य जनजीवन ठहर सा गया है. सोमवार को भी प्रदेश में बारिश और तीन हज़ार मीटर से अधिक ऊंचे स्थानों पर हिमपात जारी रहने का अनुमान है. बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, औली, मुनस्यारी जैसे ऊंचाई वाले स्थानों पर इस सीजन का सबसे भारी हिमपात हुआ. मसूरी के लाल टिब्बा और धनोल्टी में बर्फवारी हुई. नैनीताल के ऊंचाई वाले स्थानों में भी बर्फ पड़ रही है. बर्फबारी के कारण गंगोत्री-यमुनोत्री राजमार्ग सहित चार संपर्क मार्ग भी बंद पड़े हैं. केदारनाथ, घनसाली और लंबगांव मोटरमार्ग भी बर्फबारी के कारण ठप है. कश्मीर घाटी के कई इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई, जबकि अन्य इलाकों में बारिश दर्ज की गई. इसकी वजह घाटी के कई इलाकों के न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है. वहीं ताजा हिमपात-बारिश की वजह से श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग बंद हो गया है और खराब मौसम की वजह से वैष्णो देवी धाम के लिए परिचालित हेलीकॉप्टर सेवा स्थगित कर दी गई है. घाटी के कई इलाकों में खासतौर पर दक्षिण इलाके में रात के दौरान फिर हिमपात हुआ. घाटी के प्रवेश द्वारा माने जाने वाले दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड और नजदीकी कोकरनाग में करीब छह इंच बर्फबारी दर्ज की गई है. अनंतनाग में भी तीन इंच बर्फ गिरी है. |
कबाब तो सभी को बहुत पसंद होता है इसलिए आज हम आपको दाल कबाब की रेसिपी के बारे में बतायेगे. यह खाने में बहुत टेस्टी होती है.
1. सबसे पहले दालों को भिगो दे और कुकर में उबाल लें.
2. इसे ठंडा कर के इसमें अदरक, नमक, गरममसाला मिलाएं और मिक्सी में पीस लें.
3. अब प्याज को बारीक़ काट लें और हल्का गुलाबी होने तक भुने. फिर चने व मसूर की दाल को इसमें मिलाएं और थोड़ा और भुने.
4. अब इस मिश्रण की छोटी-छोटी टिक्कियां बना लें और फ्राइंगपैन में थोडा घी डाल कर तल लें.
5. बीच-बीच में कबाब कडा न हो, इसलिए तलते समय पानी के छीटे मारती रहें.
6. इन्हे हल्का गुलाबी होने तक फ्राइ करे और निकाल कर गरमा गरम सर्व करे.
| कबाब तो सभी को बहुत पसंद होता है इसलिए आज हम आपको दाल कबाब की रेसिपी के बारे में बतायेगे. यह खाने में बहुत टेस्टी होती है. एक. सबसे पहले दालों को भिगो दे और कुकर में उबाल लें. दो. इसे ठंडा कर के इसमें अदरक, नमक, गरममसाला मिलाएं और मिक्सी में पीस लें. तीन. अब प्याज को बारीक़ काट लें और हल्का गुलाबी होने तक भुने. फिर चने व मसूर की दाल को इसमें मिलाएं और थोड़ा और भुने. चार. अब इस मिश्रण की छोटी-छोटी टिक्कियां बना लें और फ्राइंगपैन में थोडा घी डाल कर तल लें. पाँच. बीच-बीच में कबाब कडा न हो, इसलिए तलते समय पानी के छीटे मारती रहें. छः. इन्हे हल्का गुलाबी होने तक फ्राइ करे और निकाल कर गरमा गरम सर्व करे. |
Chocolate Kulfi Recipe : चॉकलेट का इस्तेमाल शेक से लेकर केक तक कई रेसिपी में किया जाता है. इससे आप गर्मियों में कुल्फी भी तैयार कर सकते हैं. आइए जानें घर कैसे बना सकते हैं चॉकलेट कुल्फी.
चॉकलेट अधिकतर लोग पसंद करते हैं. इसका सेवन आप कई तरह से कर सकते हैं जैसे चॉकलेट शेक और चॉकलेट आइसक्रीम आदि. चॉकलेट से आप कुल्फी भी बना सकते हैं. ये एक अनोखी रेसिपी है जो काफी स्वादिष्ट होती है. ये हर उम्र के लोगों को काफी पसंद आएगी. आप इसे आसानी से घर पर बना सकते हैं. इसे बनाने के लिए आपको लगभग 5 से 7 घंटे के लिए कुल्फी को फ्रिज में रखना होगा. इसके बाद आप इसे परोसें परिवार और दोस्तों के साथ इसका आनंद लें. आप इससे बनाने के लिए चीनी के जगह गुड़ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये एक स्वस्थ विकल्प है. चॉकलेट कुल्फी घर पर कैसे बना सकते हैं आइए जानें.
एक पैन में दूध, फ्रेश क्रीम और मिल्क पाउडर डालें. इसमें उबाल आने दें और फिर इसे धीमी आंच पर 10 मिनट तक पकने दें.
चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं. इसे और 5 मिनट तक उबलने दें.
दूध के क्रीमी हो जाने पर इसमें चोको चिप्स और कोको पाउडर डाल दीजिए. सब कुछ मिलाने के लिए अच्छी तरह मिलाएं.
मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें. कुल्फी के मोल्ड में डालकर फ्रिजर में रख दें. इसे 6-8 घंटे के लिए लगा रहने दें.
अच्छी तरह सैट होने के बाद कुल्फी को सांचों से निकाल कर सर्व करें.
चॉकलेट सेहत के लिए फायदेमंद है. चॉकलेट में फ्लेवोनोइड्स होते हैं. ये हृदय संबंधी बीमारियों को कम करने में मदद करती है. चॉकलेट में कोको और फ्लेवनॉल्स की मात्रा अधिक होती है. ये याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है. अधिक उम्र में इसका सेवन फायदेमंद है. ये खराब मूड को बेहतर बनाने का काम करती है. आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है. इसलिए अगर खराब मूड हो तो डार्क चॉकलेट का सेवन कर सकते हैं. कुछ अध्ययन के अनुसार डॉर्क चॉकलेट शरीर में फैट का काम करती है. दरअसल इसमें भरपूर मात्रा में मोनोसैचुरेटेड फैटी ऐसिड होते हैं. ये मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करते हैं. इसलिए ये वजन को कंट्रोल करने में मदद करती है.
| Chocolate Kulfi Recipe : चॉकलेट का इस्तेमाल शेक से लेकर केक तक कई रेसिपी में किया जाता है. इससे आप गर्मियों में कुल्फी भी तैयार कर सकते हैं. आइए जानें घर कैसे बना सकते हैं चॉकलेट कुल्फी. चॉकलेट अधिकतर लोग पसंद करते हैं. इसका सेवन आप कई तरह से कर सकते हैं जैसे चॉकलेट शेक और चॉकलेट आइसक्रीम आदि. चॉकलेट से आप कुल्फी भी बना सकते हैं. ये एक अनोखी रेसिपी है जो काफी स्वादिष्ट होती है. ये हर उम्र के लोगों को काफी पसंद आएगी. आप इसे आसानी से घर पर बना सकते हैं. इसे बनाने के लिए आपको लगभग पाँच से सात घंटाटे के लिए कुल्फी को फ्रिज में रखना होगा. इसके बाद आप इसे परोसें परिवार और दोस्तों के साथ इसका आनंद लें. आप इससे बनाने के लिए चीनी के जगह गुड़ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये एक स्वस्थ विकल्प है. चॉकलेट कुल्फी घर पर कैसे बना सकते हैं आइए जानें. एक पैन में दूध, फ्रेश क्रीम और मिल्क पाउडर डालें. इसमें उबाल आने दें और फिर इसे धीमी आंच पर दस मिनट तक पकने दें. चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं. इसे और पाँच मिनट तक उबलने दें. दूध के क्रीमी हो जाने पर इसमें चोको चिप्स और कोको पाउडर डाल दीजिए. सब कुछ मिलाने के लिए अच्छी तरह मिलाएं. मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें. कुल्फी के मोल्ड में डालकर फ्रिजर में रख दें. इसे छः-आठ घंटाटे के लिए लगा रहने दें. अच्छी तरह सैट होने के बाद कुल्फी को सांचों से निकाल कर सर्व करें. चॉकलेट सेहत के लिए फायदेमंद है. चॉकलेट में फ्लेवोनोइड्स होते हैं. ये हृदय संबंधी बीमारियों को कम करने में मदद करती है. चॉकलेट में कोको और फ्लेवनॉल्स की मात्रा अधिक होती है. ये याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है. अधिक उम्र में इसका सेवन फायदेमंद है. ये खराब मूड को बेहतर बनाने का काम करती है. आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है. इसलिए अगर खराब मूड हो तो डार्क चॉकलेट का सेवन कर सकते हैं. कुछ अध्ययन के अनुसार डॉर्क चॉकलेट शरीर में फैट का काम करती है. दरअसल इसमें भरपूर मात्रा में मोनोसैचुरेटेड फैटी ऐसिड होते हैं. ये मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करते हैं. इसलिए ये वजन को कंट्रोल करने में मदद करती है. |
PM मोदी शिलान्यास करने आएगें अथवा राममंदिर का भूमिपूजन. . . ?
लखनऊः अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट के गठन क बाद राममंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने लगा है। साथ ही मंदिर निर्माण की तैयारियां भी तेज होने लगी हैं लेकिन सवाल इस बात का है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मंदिर के शिलान्यास के लिए बुलाया गया है अथवा भूमि पूजन के लिए। इस बात को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है।
गुरूवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर उन्हे अयोध्या आने के लिए आमंत्रित किया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से नरेंद्र मोदी को ट्रस्ट की पहली बैठक के दौरान हुई बातों की जानकारी दी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने शिलान्यास के मुहूर्त पर मोदी को अयोध्या आने के लिए आमंत्रित किया तो प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया।
इसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि अब ज्यादा प्रतीक्षा का समय नहीं है, मंदिर का निर्माण अब तेजी से होनी चाहिए। महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि राम मंदिर भव्य एवं दिव्य बनेगा। निर्माण कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ही पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने मंदिर के पुराने मॉडल को ही स्वीकार किया है।
बता दें कि अयोध्या विवाद में 9 नवंबर 1989 विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंहल ने हजारों रामभक्तों के साथ अयोध्या में राम जन्म भूमिक का शिलान्यास किया था। राजनैतिक हस्तियों, बड़े-बड़े साधु-संतों के बीच उस वक्त 35 साल के रहे एक दलित युवक कामेश्वर चैपाल के हाथों राम मंदिर के नींव की पहली ईंट रखवायी गई थी।
रामजन्मभूमि न्यास की दिल्ली में हाल ही में हुई बैठक में महंत नृत्य गोपालदास को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का अध्यक्ष प्रबंध, विहिप के चंपत राय को महासचिव एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह नृपेन्द्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया गया है। स्वामी गोविंददेव गिरि जी को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। अयोध्या में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में न्यास का बैंक खाता खोलने का निर्णय किया गया है।
यहां ये भी बताना जरूरी है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में उच्चतम न्यायालय के पिछले साल 9 नवंबर को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया था।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि यह बात सही है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का शिलान्यास तो पहले ही हो चुका है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को शिलान्यास के लिए बुलाया गया है अथवा भूमि पूजन के लिए इसकी जानकारी तो ट्रस्ट से जुडे़ लोग ही बता सकते हैं।
| PM मोदी शिलान्यास करने आएगें अथवा राममंदिर का भूमिपूजन. . . ? लखनऊः अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट के गठन क बाद राममंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने लगा है। साथ ही मंदिर निर्माण की तैयारियां भी तेज होने लगी हैं लेकिन सवाल इस बात का है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मंदिर के शिलान्यास के लिए बुलाया गया है अथवा भूमि पूजन के लिए। इस बात को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। गुरूवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर उन्हे अयोध्या आने के लिए आमंत्रित किया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से नरेंद्र मोदी को ट्रस्ट की पहली बैठक के दौरान हुई बातों की जानकारी दी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने शिलान्यास के मुहूर्त पर मोदी को अयोध्या आने के लिए आमंत्रित किया तो प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि अब ज्यादा प्रतीक्षा का समय नहीं है, मंदिर का निर्माण अब तेजी से होनी चाहिए। महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि राम मंदिर भव्य एवं दिव्य बनेगा। निर्माण कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ही पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने मंदिर के पुराने मॉडल को ही स्वीकार किया है। बता दें कि अयोध्या विवाद में नौ नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंहल ने हजारों रामभक्तों के साथ अयोध्या में राम जन्म भूमिक का शिलान्यास किया था। राजनैतिक हस्तियों, बड़े-बड़े साधु-संतों के बीच उस वक्त पैंतीस साल के रहे एक दलित युवक कामेश्वर चैपाल के हाथों राम मंदिर के नींव की पहली ईंट रखवायी गई थी। रामजन्मभूमि न्यास की दिल्ली में हाल ही में हुई बैठक में महंत नृत्य गोपालदास को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का अध्यक्ष प्रबंध, विहिप के चंपत राय को महासचिव एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह नृपेन्द्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया गया है। स्वामी गोविंददेव गिरि जी को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। अयोध्या में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में न्यास का बैंक खाता खोलने का निर्णय किया गया है। यहां ये भी बताना जरूरी है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में उच्चतम न्यायालय के पिछले साल नौ नवंबर को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस पंद्रह सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया था। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि यह बात सही है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का शिलान्यास तो पहले ही हो चुका है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को शिलान्यास के लिए बुलाया गया है अथवा भूमि पूजन के लिए इसकी जानकारी तो ट्रस्ट से जुडे़ लोग ही बता सकते हैं। |
UK PM Race To be End : टैक्स कटौती के वादों के साथ आईं लिज ट्रस ने सुनक के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन्हीं वादों की वजह से कई ओपिनियन पोल ट्रस को बढ़त देते हुए दिख रहे थे। सट्टेबाजों का कहना है कि लिज ट्रस एक बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही हैं।
लंदन : आने वाले कुछ दिनों में ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री (New Prime Minister of Britain) मिल जाएगा। 10 डाउनिंग स्ट्रीट की चाबी ऋषि सुनक को मिलेगी या लिज ट्रस को, इसका फैसला लाखों टोरी सदस्य करेंगे। दोनों उम्मीदवार की किस्मत का फैसला शुक्रवार को बैलेट बॉक्स में बंद हो जाएगा। शुक्रवार शाम 5 बजे वोटिंग की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी जिसके बाद 5 सितंबर को विजेता के नाम की घोषणा होगी। ब्रिटेन में सात हफ्तों की प्रतिद्वंद्विता अब खत्म होने वाली है। गुरुवार को बोरिस जॉनसन ने विजेता को अपना 'पुरजोर समर्थन' देने का वादा किया है।
बोरिस जॉनसन के बाद जो भी 10 डाउनिंग स्ट्रीट में जाएगा उसके सामने कई चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ी समस्या फिलहाल कॉस्ट ऑफ लिविंग की है क्योंकि महंगाई ने लोगों के आम जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ब्रिटेन के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक के इस्तीफे ने इस राजनीतिक बदलाव की नींव रखी थी। नए प्रधानमंत्री की रेस में सुनक शुरुआत से ही आगे चल रहे हैं और उन्हें सबसे अधिक सांसदों का समर्थन हासिल है।
आखिरी चुनाव कार्यक्रम में लगे 'ऋषि-ऋषि' के नारे, सुनक ने माता-पिता को दिया धन्यवाद, सुनाई अपनी लव-स्टोरी सट्टेबाज लिज ट्रस के साथ टैक्स कटौती के वादों के साथ आईं लिज ट्रस ने सुनक के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन्हीं वादों की वजह से कई ओपिनियन पोल ट्रस को बढ़त देते हुए दिख रहे थे। सट्टेबाजों का कहना है कि लिज ट्रस एक बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही हैं। सुनक और ट्रस की गर्मियां चुनाव प्रचार में गुजरी हैं। उन्होंने एक-दूसरे पर आरोप लगाए और टोरी सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए लुभावने वादे किए। करीब 180,000 टोरी सदस्यों के पास 2 सितंबर तक किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने का अधिकार है।
क्या ब्रिटेन को मिलेगा पहला अश्वेत प्रधानमंत्री? सबसे अधिक वोट हासिल करने वाला टोरी पार्टी का नेता और ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री बनेगा। सुनक को टोरी पार्टी में एक 'उभरते हुए नेता' के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति में आने से पहले वह एक इन्वेस्टमेंट फर्म के को-फाउंडर थे। वहीं लिज ट्रस सितंबर 2019 से ब्रिटेन की विदेश मंत्री हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक इकोनॉमिस्ट और अकाउंटेंट के रूप में कार्य करती थीं। अगर सुनक यह चुनाव जीतते हैं तो वह ब्रिटेन के पहले अश्वेत प्रधानमंत्री होंगे।
| UK PM Race To be End : टैक्स कटौती के वादों के साथ आईं लिज ट्रस ने सुनक के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन्हीं वादों की वजह से कई ओपिनियन पोल ट्रस को बढ़त देते हुए दिख रहे थे। सट्टेबाजों का कहना है कि लिज ट्रस एक बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही हैं। लंदन : आने वाले कुछ दिनों में ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा। दस डाउनिंग स्ट्रीट की चाबी ऋषि सुनक को मिलेगी या लिज ट्रस को, इसका फैसला लाखों टोरी सदस्य करेंगे। दोनों उम्मीदवार की किस्मत का फैसला शुक्रवार को बैलेट बॉक्स में बंद हो जाएगा। शुक्रवार शाम पाँच बजे वोटिंग की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी जिसके बाद पाँच सितंबर को विजेता के नाम की घोषणा होगी। ब्रिटेन में सात हफ्तों की प्रतिद्वंद्विता अब खत्म होने वाली है। गुरुवार को बोरिस जॉनसन ने विजेता को अपना 'पुरजोर समर्थन' देने का वादा किया है। बोरिस जॉनसन के बाद जो भी दस डाउनिंग स्ट्रीट में जाएगा उसके सामने कई चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ी समस्या फिलहाल कॉस्ट ऑफ लिविंग की है क्योंकि महंगाई ने लोगों के आम जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ब्रिटेन के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक के इस्तीफे ने इस राजनीतिक बदलाव की नींव रखी थी। नए प्रधानमंत्री की रेस में सुनक शुरुआत से ही आगे चल रहे हैं और उन्हें सबसे अधिक सांसदों का समर्थन हासिल है। आखिरी चुनाव कार्यक्रम में लगे 'ऋषि-ऋषि' के नारे, सुनक ने माता-पिता को दिया धन्यवाद, सुनाई अपनी लव-स्टोरी सट्टेबाज लिज ट्रस के साथ टैक्स कटौती के वादों के साथ आईं लिज ट्रस ने सुनक के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन्हीं वादों की वजह से कई ओपिनियन पोल ट्रस को बढ़त देते हुए दिख रहे थे। सट्टेबाजों का कहना है कि लिज ट्रस एक बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही हैं। सुनक और ट्रस की गर्मियां चुनाव प्रचार में गुजरी हैं। उन्होंने एक-दूसरे पर आरोप लगाए और टोरी सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए लुभावने वादे किए। करीब एक सौ अस्सी,शून्य टोरी सदस्यों के पास दो सितंबर तक किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने का अधिकार है। क्या ब्रिटेन को मिलेगा पहला अश्वेत प्रधानमंत्री? सबसे अधिक वोट हासिल करने वाला टोरी पार्टी का नेता और ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री बनेगा। सुनक को टोरी पार्टी में एक 'उभरते हुए नेता' के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति में आने से पहले वह एक इन्वेस्टमेंट फर्म के को-फाउंडर थे। वहीं लिज ट्रस सितंबर दो हज़ार उन्नीस से ब्रिटेन की विदेश मंत्री हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक इकोनॉमिस्ट और अकाउंटेंट के रूप में कार्य करती थीं। अगर सुनक यह चुनाव जीतते हैं तो वह ब्रिटेन के पहले अश्वेत प्रधानमंत्री होंगे। |
प्रयागराज। जिले में अब तक कोरोना संक्रमित 14 लोग ठीक होकर मुक्त हो चुके हैं, पर मात्र 6 दिन में कोरोना वायरस को पछाड़ कर मां और बेटी घर लौट आयी हैं। लूकरगंज में इंजीनियर (जिनकी कोरोना से मौत हो गई है।) के घर काम करने वाली कहार गल्ला मोहल्ले की कोरोना संक्रमित मां-बेटी अब स्वस्थ हो गई हैं। सोमवार की देर शाम उन्हें कोटवा के एल-1 अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। अब वह 14 दिनों तक होम क्वरेंटाइन में रहेंगी। दोनों में 12 मई को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
| प्रयागराज। जिले में अब तक कोरोना संक्रमित चौदह लोग ठीक होकर मुक्त हो चुके हैं, पर मात्र छः दिन में कोरोना वायरस को पछाड़ कर मां और बेटी घर लौट आयी हैं। लूकरगंज में इंजीनियर के घर काम करने वाली कहार गल्ला मोहल्ले की कोरोना संक्रमित मां-बेटी अब स्वस्थ हो गई हैं। सोमवार की देर शाम उन्हें कोटवा के एल-एक अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। अब वह चौदह दिनों तक होम क्वरेंटाइन में रहेंगी। दोनों में बारह मई को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। |
कल्याण आयुर्वेद - केले खाने के फायदे तो सभी जानते होंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि केले के छिलके भी आपको कई सारे फायदे पहुंचा करते हैं. लेकिन हम इसके फायदे नहीं जानते हैं. जिसकी वजह से इसे फालतू समझ कर फेंकने गलती करते हैं. आपको बता दें केले के छिलके में फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन सी, विटामिन बी सिक्स, विटामिन B12, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल्स जैसे गुण पाए जाते हैं.
यह सभी पोषक तत्व आपकी त्वचा की कई सारी समस्याओं को दूर करने का काम करते हैं. केले के छिलके से झुर्रियां और पिंपल भी दूर हो जाते हैं. इतना ही नहीं केले के छिलके को खाने से आपका पाचन तंत्र बेहतर हो जाता है. आज हम आपको इसके कुछ अद्भुत फायदे बताने जा रहे हैं.
पिंपल्स और झुर्रियों से राहत पाने के लिए केले का छिलका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें विटामिन सी एंटी ऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल्स गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स और झुर्रियों को दूर करने में मदद करते हैं. फेस क्लींजिंग के बाद आप केले के छिलके से चेहरे की स्क्रबिंग करें. आपको बहुत अच्छे फायदे मिलेंगे.
कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए केले का छिलका बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. केले के छिलके में फाइबर पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है.
केले के छिलके से पाचन तंत्र को भी ठीक किया जा सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो आपके पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है. इसका सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. केले के छिलके से कब्ज और दस्त की समस्याएं भी दूर हो जाते हैं.
इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए आप केले के छिलके का सेवन कर सकते हैं. इसमें विटामिन ए पया जाता है जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है. शरीर को इंफेक्शन से लड़ने के लिए भी विटामिन ए की जरूरत होती है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, केले के छिलकों को एक हफ्ते तक करीब 1 मिनट तक रगड़ने से दांतों में चमक आ जाती है. इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. जब इसे रगड़ा जाता है तो इसमें मौजूद मेग्नेसियम की वजह से दातों में चमक आ जाती है. ऐसे में आप दांतों को साफ करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
एक स्टडी के अनुसार, केले के छिलके में बायो एक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं. जिसमें कैरोटिनोइड और पॉलीफेनॉल पाया जाता है. इसमें एंटी ऑक्सीडेंट पर भरपूर गुण होते हैं, जो पेट दर्द से छुटकारा दिलाने में मदद करता है.
आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को लाइक तथा शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर कर लें. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
| कल्याण आयुर्वेद - केले खाने के फायदे तो सभी जानते होंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि केले के छिलके भी आपको कई सारे फायदे पहुंचा करते हैं. लेकिन हम इसके फायदे नहीं जानते हैं. जिसकी वजह से इसे फालतू समझ कर फेंकने गलती करते हैं. आपको बता दें केले के छिलके में फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन सी, विटामिन बी सिक्स, विटामिन Bबारह, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल्स जैसे गुण पाए जाते हैं. यह सभी पोषक तत्व आपकी त्वचा की कई सारी समस्याओं को दूर करने का काम करते हैं. केले के छिलके से झुर्रियां और पिंपल भी दूर हो जाते हैं. इतना ही नहीं केले के छिलके को खाने से आपका पाचन तंत्र बेहतर हो जाता है. आज हम आपको इसके कुछ अद्भुत फायदे बताने जा रहे हैं. पिंपल्स और झुर्रियों से राहत पाने के लिए केले का छिलका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें विटामिन सी एंटी ऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल्स गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स और झुर्रियों को दूर करने में मदद करते हैं. फेस क्लींजिंग के बाद आप केले के छिलके से चेहरे की स्क्रबिंग करें. आपको बहुत अच्छे फायदे मिलेंगे. कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए केले का छिलका बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. केले के छिलके में फाइबर पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है. केले के छिलके से पाचन तंत्र को भी ठीक किया जा सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो आपके पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है. इसका सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. केले के छिलके से कब्ज और दस्त की समस्याएं भी दूर हो जाते हैं. इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए आप केले के छिलके का सेवन कर सकते हैं. इसमें विटामिन ए पया जाता है जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है. शरीर को इंफेक्शन से लड़ने के लिए भी विटामिन ए की जरूरत होती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, केले के छिलकों को एक हफ्ते तक करीब एक मिनट तक रगड़ने से दांतों में चमक आ जाती है. इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. जब इसे रगड़ा जाता है तो इसमें मौजूद मेग्नेसियम की वजह से दातों में चमक आ जाती है. ऐसे में आप दांतों को साफ करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. एक स्टडी के अनुसार, केले के छिलके में बायो एक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं. जिसमें कैरोटिनोइड और पॉलीफेनॉल पाया जाता है. इसमें एंटी ऑक्सीडेंट पर भरपूर गुण होते हैं, जो पेट दर्द से छुटकारा दिलाने में मदद करता है. आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को लाइक तथा शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर कर लें. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद. |
महाराष्ट्रः महाराष्ट्र के पुणे से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई ह। दरअसल यहां वाघोली इलाके में प्रसंग के चलते एक प्रेमिका ने प्रेमी की हत्या कर दी है। ऐसे में अब इस घटना से सनसनी मच गई है। यह घटना आज सुबह सामने आई है। जिस फ्लैट में वे दोनों रहते थे, उस फ्लैट में प्रेमी खून से लथपथ पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलने पर लोनीकंद पुलिस मौके पर पहुंची, उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। आइए जानते है क्या है पूरा मामला....
घटना के बारे में अधिक जानकारी यह है कि वाघोली में एक प्रेमिका ने प्रेम प्रसंग के चलते युवक की हत्या कर दी है। आपको बता दें कि दोनों पिछले कुछ महीनों से वाघोली इलाके में किराए के फ्लैट में रह रहे थे। इतना ही नहीं बल्कि दोनों में प्रेम प्रसंग था। लेकिन यह युवक आज सुबह खून से लथपथ पड़ा मिला।
घटना की जानकारी मिलते ही लोनीखंड पुलिस मौके पर पहुंच गई। उन्होंने युवक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रेमिका ने रसोई के चाकू से प्रेमी के शव पर वार किया था। इस बीच इस घटना में प्रेमिका भी घायल हो गई है। इस घटना से पुणे दहल उठा है।
| महाराष्ट्रः महाराष्ट्र के पुणे से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई ह। दरअसल यहां वाघोली इलाके में प्रसंग के चलते एक प्रेमिका ने प्रेमी की हत्या कर दी है। ऐसे में अब इस घटना से सनसनी मच गई है। यह घटना आज सुबह सामने आई है। जिस फ्लैट में वे दोनों रहते थे, उस फ्लैट में प्रेमी खून से लथपथ पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलने पर लोनीकंद पुलिस मौके पर पहुंची, उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। आइए जानते है क्या है पूरा मामला.... घटना के बारे में अधिक जानकारी यह है कि वाघोली में एक प्रेमिका ने प्रेम प्रसंग के चलते युवक की हत्या कर दी है। आपको बता दें कि दोनों पिछले कुछ महीनों से वाघोली इलाके में किराए के फ्लैट में रह रहे थे। इतना ही नहीं बल्कि दोनों में प्रेम प्रसंग था। लेकिन यह युवक आज सुबह खून से लथपथ पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही लोनीखंड पुलिस मौके पर पहुंच गई। उन्होंने युवक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रेमिका ने रसोई के चाकू से प्रेमी के शव पर वार किया था। इस बीच इस घटना में प्रेमिका भी घायल हो गई है। इस घटना से पुणे दहल उठा है। |
भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कुछ समय के लिए 1 अप्रैल यानी आज एसबीआई की ऑनलाइन सर्विस बंद हो जाएगी।
भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कुछ समय के लिए 1 अप्रैल यानी आज एसबीआई की ऑनलाइन सर्विस बंद हो जाएगी। एसबीआई ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी देते हुए कहा, एक अप्रैल को एनुअल क्लोजिंग एक्टिविटी के चलते ऑनलाइन सर्विसेज बंद रहने से ग्राहकों को दिक्कत आ सकती है।
आगे बैंक ने ग्राहकों की नेट बैंकिंग, मोबाईल एप और यूपीआई सेवाएं दोपहर 1 बजे से शाम 4:30 बजे तक बंद रहेगी। बता दे, 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष 2022-23 शुरु हो गया है। जिसके बाद से अब कई चीजें बदलने वाली है।
| भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कुछ समय के लिए एक अप्रैल यानी आज एसबीआई की ऑनलाइन सर्विस बंद हो जाएगी। भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कुछ समय के लिए एक अप्रैल यानी आज एसबीआई की ऑनलाइन सर्विस बंद हो जाएगी। एसबीआई ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी देते हुए कहा, एक अप्रैल को एनुअल क्लोजिंग एक्टिविटी के चलते ऑनलाइन सर्विसेज बंद रहने से ग्राहकों को दिक्कत आ सकती है। आगे बैंक ने ग्राहकों की नेट बैंकिंग, मोबाईल एप और यूपीआई सेवाएं दोपहर एक बजे से शाम चार:तीस बजे तक बंद रहेगी। बता दे, एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस शुरु हो गया है। जिसके बाद से अब कई चीजें बदलने वाली है। |
अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में हमारा देश आज विश्व के अग्रणी देशों में आता है. भारत में ना सिर्फ भारतीय उपग्रहों का प्रक्षेपण होता है अपितु दुनिया के बहुत से देशों के उपग्रहों का प्रक्षेपण भारत के स्पेस सेंटर से होता है.
चंद्रयान और मंगलयान कार्यक्रम के बाद भारत का नाम विश्व में और ऊँचा हो गया है. जहाँ भारत अन्तरिक्ष अनुसन्धान के क्षेत्र में इतनी प्रगति कर चूका है वहीँ पाकिस्तान आज तक इस क्षेत्र में कुछ नहीं कर सका है.
इस बात को लेकर पाकिस्तानी मीडिया भारत कि बहुत तारीफ करता है. जिस प्रकार भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति की है.
| अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में हमारा देश आज विश्व के अग्रणी देशों में आता है. भारत में ना सिर्फ भारतीय उपग्रहों का प्रक्षेपण होता है अपितु दुनिया के बहुत से देशों के उपग्रहों का प्रक्षेपण भारत के स्पेस सेंटर से होता है. चंद्रयान और मंगलयान कार्यक्रम के बाद भारत का नाम विश्व में और ऊँचा हो गया है. जहाँ भारत अन्तरिक्ष अनुसन्धान के क्षेत्र में इतनी प्रगति कर चूका है वहीँ पाकिस्तान आज तक इस क्षेत्र में कुछ नहीं कर सका है. इस बात को लेकर पाकिस्तानी मीडिया भारत कि बहुत तारीफ करता है. जिस प्रकार भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति की है. |
लखनऊ (ब्यूरो)। एलडीए जल्द अनाधिकृत कालोनी एवं प्लाटिंग की सूची बनाकर उनके खिलाफ अभियान चलाएगा। इसके साथ ही अवैध निर्माणों पर लगाम कसने के लिए सील बिल्डिंगों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग की जाएगी। वीसी डॉ। इंद्रमणि त्रिपाठी ने अनाधिकृत कालोनियों एवं अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए इस संबंध में आदेश जारी किये हैं।
वीसी ने बताया कि प्राधिकरण सीमा के अंतर्गत अवैध कालोनी एवं प्लाटिंग की सूची बनाई जाएगी, जिसका समाचार पत्रों में प्रकाशन कराने के साथ ही प्रत्येक अवैध प्लाटिंग स्थल पर डिजिटल बोर्ड लगवाये जाएंगे। उन्होंने इसके लिए सभी जोन के अधिकारियों को एक सप्ताह में अवैध कालोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिये हैं। वीसी ने बताया कि सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में हो रही अवैध प्लाटिंग को सूचीबद्ध करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है। उसके बाद यदि यह पता चलता है कि किसी अवैध प्लाटिंग को सूचीबद्ध नहीं किया गया है, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वीसी ने बताया कि पूर्व में कुछ ऐसे प्रकरण संज्ञान में आये हैं, जहां विहित प्राधिकारी द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की गई और बाद में सील खोलकर बिल्डर को अवैध निर्माण को पूरा करने का अवसर दे दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में सचेत करते हुए दो टूक कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिये हैं कि सील खोलने के सभी प्रार्थना पत्रों को सचिव के माध्यम से उनके संज्ञान में लाया जाए। तत्पश्चात यदि प्रकरण वैधानिक हो, तभी उसमें नियमानुसार निर्णय लेते हुए आगे की कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त वीसी ने निर्देश दिये हैं कि प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा सील बिल्डिंगों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग की जाये, जिसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करायी जाए।
| लखनऊ । एलडीए जल्द अनाधिकृत कालोनी एवं प्लाटिंग की सूची बनाकर उनके खिलाफ अभियान चलाएगा। इसके साथ ही अवैध निर्माणों पर लगाम कसने के लिए सील बिल्डिंगों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग की जाएगी। वीसी डॉ। इंद्रमणि त्रिपाठी ने अनाधिकृत कालोनियों एवं अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए इस संबंध में आदेश जारी किये हैं। वीसी ने बताया कि प्राधिकरण सीमा के अंतर्गत अवैध कालोनी एवं प्लाटिंग की सूची बनाई जाएगी, जिसका समाचार पत्रों में प्रकाशन कराने के साथ ही प्रत्येक अवैध प्लाटिंग स्थल पर डिजिटल बोर्ड लगवाये जाएंगे। उन्होंने इसके लिए सभी जोन के अधिकारियों को एक सप्ताह में अवैध कालोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिये हैं। वीसी ने बताया कि सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में हो रही अवैध प्लाटिंग को सूचीबद्ध करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है। उसके बाद यदि यह पता चलता है कि किसी अवैध प्लाटिंग को सूचीबद्ध नहीं किया गया है, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वीसी ने बताया कि पूर्व में कुछ ऐसे प्रकरण संज्ञान में आये हैं, जहां विहित प्राधिकारी द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की गई और बाद में सील खोलकर बिल्डर को अवैध निर्माण को पूरा करने का अवसर दे दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में सचेत करते हुए दो टूक कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिये हैं कि सील खोलने के सभी प्रार्थना पत्रों को सचिव के माध्यम से उनके संज्ञान में लाया जाए। तत्पश्चात यदि प्रकरण वैधानिक हो, तभी उसमें नियमानुसार निर्णय लेते हुए आगे की कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त वीसी ने निर्देश दिये हैं कि प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा सील बिल्डिंगों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग की जाये, जिसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करायी जाए। |
गुमलाः रायडीह थाना क्षेत्र स्थित माझा टोली गांव के समीप कल देर शाम सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया.
जानकारी के अनुसार, दोनों युवक मोटरसाइकिल से गुमला लौट रहे थे, तभी एक स्कार्पियों से टकरा गए. घायलों को रायडीह के समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल रेफर किया गया. लेकिन रास्ते में ही एक ने दम तोड़ दिया. मृतक गुमला के बड़ाईक मुहल्ला का रहने वाला था.
| गुमलाः रायडीह थाना क्षेत्र स्थित माझा टोली गांव के समीप कल देर शाम सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया. जानकारी के अनुसार, दोनों युवक मोटरसाइकिल से गुमला लौट रहे थे, तभी एक स्कार्पियों से टकरा गए. घायलों को रायडीह के समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल रेफर किया गया. लेकिन रास्ते में ही एक ने दम तोड़ दिया. मृतक गुमला के बड़ाईक मुहल्ला का रहने वाला था. |
फर्जीवाड़े के तहत असम लोक सेवा आयोग(एपीएसी) की परीक्षा में उत्तीर्ण होकर पुलिस के हत्थे चढ़े 14 एसीएस व एपीएस अधिकारियों को यहां विशेष अदालत में हाजिर कराया गया, जहां से अदालत ने इन सभी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सोमवार को यहां विशेष अदालय में पेशी के बाद अदालत ने सभी 14 अधिकारियों को न्यायिक जिम्मे पर भेजने का निर्देश जारी कर दिया। इनमें रुमी सइकिया भी शामिल है।
जांच अधिकारी तथा डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पानेसर ने बताया कि इन सभी फर्जीवाड़े के तहत एपीएससी उत्तीर्ण हुए अधिकारियों की केस डायरी अदालत को सौंप दी गई है।
इसी बीच पूर्व मंत्री नीलमणिसेन डेका के पुत्र राजर्षिसेन डेका ने अदालत में फिर से जमानत मांगते हुए आवेदन दाखिल किया है। मंगलवार को राजर्षि की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।
| फर्जीवाड़े के तहत असम लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उत्तीर्ण होकर पुलिस के हत्थे चढ़े चौदह एसीएस व एपीएस अधिकारियों को यहां विशेष अदालत में हाजिर कराया गया, जहां से अदालत ने इन सभी को चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सोमवार को यहां विशेष अदालय में पेशी के बाद अदालत ने सभी चौदह अधिकारियों को न्यायिक जिम्मे पर भेजने का निर्देश जारी कर दिया। इनमें रुमी सइकिया भी शामिल है। जांच अधिकारी तथा डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पानेसर ने बताया कि इन सभी फर्जीवाड़े के तहत एपीएससी उत्तीर्ण हुए अधिकारियों की केस डायरी अदालत को सौंप दी गई है। इसी बीच पूर्व मंत्री नीलमणिसेन डेका के पुत्र राजर्षिसेन डेका ने अदालत में फिर से जमानत मांगते हुए आवेदन दाखिल किया है। मंगलवार को राजर्षि की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। |
भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के पूर्व दिग्गज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) अपने कई अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं। क्रिकेट इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले सचिन ने बुधवार को पुणे की यात्रा के दौरान अपने पुराने दिनों को याद किया और अपने फैंस के साथ इसको शेयर किया।
ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में 'मास्टर ब्लास्टर' ने पुणे में अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया। सचिन ने अपने फैंस को बताया कि वह पहली बार पुणे में पीवाईसी जिमखाना में अंडर-15 टूर्नामेंट में मुंबई के लिए खेले थे। 35 साल बाद इस जगह पर आकर वह भावुक हो गए।
सचिन ने आगे बताया कि वह उस मैच में रन आउट हो गए थे और पवेलियन लौटने तक रोते हुए गए थे, जिसके बाद कई सीनियर खिलाड़ियों ने उन्हें चुप कराया था। एक मिनट 28 सेकेंड के इस वीडियो में सचिन ने बताया कि वह उस मैच में सिर्फ चार रन ही बना सके थे।
सचिन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और समय-समय पर अपनी फोटो या वीडियो अपने फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। उन्होंने हाल ही में स्वतंत्रता दिवस से पहले 'हर घर तिरंगा' अभियान का समर्थन किया था और तिरंगा फहराते हुए अपना वीडियो पोस्ट किया था।
उस वीडियो में सचिन अपने घर की बालकनी पर तिरंगा लगाते हुए नजर आ रहे हैं। 31 सेकेंड के इस वीडियो में सचिन ने देशवासियों के लिए संदेश भी दिया था। सचिन वीडियो में कहते दिख रहे हैं, 'हमेशा रहा मेरे दिल में तिरंगा, आज लहराएगा मेरे घर पर भी तिरंगा। तिरंगे को अपने बालकनी में लगाते हुए उन्होंने आगे कहा था, 'दिल में भी तिरंगा, घर में भी तिरंगा, जय हिन्द। '
| भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज सचिन तेंदुलकर अपने कई अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं। क्रिकेट इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले सचिन ने बुधवार को पुणे की यात्रा के दौरान अपने पुराने दिनों को याद किया और अपने फैंस के साथ इसको शेयर किया। ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में 'मास्टर ब्लास्टर' ने पुणे में अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया। सचिन ने अपने फैंस को बताया कि वह पहली बार पुणे में पीवाईसी जिमखाना में अंडर-पंद्रह टूर्नामेंट में मुंबई के लिए खेले थे। पैंतीस साल बाद इस जगह पर आकर वह भावुक हो गए। सचिन ने आगे बताया कि वह उस मैच में रन आउट हो गए थे और पवेलियन लौटने तक रोते हुए गए थे, जिसके बाद कई सीनियर खिलाड़ियों ने उन्हें चुप कराया था। एक मिनट अट्ठाईस सेकेंड के इस वीडियो में सचिन ने बताया कि वह उस मैच में सिर्फ चार रन ही बना सके थे। सचिन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और समय-समय पर अपनी फोटो या वीडियो अपने फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। उन्होंने हाल ही में स्वतंत्रता दिवस से पहले 'हर घर तिरंगा' अभियान का समर्थन किया था और तिरंगा फहराते हुए अपना वीडियो पोस्ट किया था। उस वीडियो में सचिन अपने घर की बालकनी पर तिरंगा लगाते हुए नजर आ रहे हैं। इकतीस सेकेंड के इस वीडियो में सचिन ने देशवासियों के लिए संदेश भी दिया था। सचिन वीडियो में कहते दिख रहे हैं, 'हमेशा रहा मेरे दिल में तिरंगा, आज लहराएगा मेरे घर पर भी तिरंगा। तिरंगे को अपने बालकनी में लगाते हुए उन्होंने आगे कहा था, 'दिल में भी तिरंगा, घर में भी तिरंगा, जय हिन्द। ' |
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) पर निशाना साधा है. उन्होंने मॉब लिंचिंग के बयान पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर पलटवार किया है. दिग्विजय सिंह ने कहा है कि जिस दिन मोहन भागवत एकजुटता का संदेश देकर उसका पालन करने लगेंगे तब मॉब लिंचिंग भी खत्म हो जाएगी.
भोपाल में विजयदशमी के मौके पर एक कार्यक्रम में शामिल होने आए दिग्विजय सिंह ने कहा 'जिस दिन मोहन भागवत एकजुटता का संदेश देकर उसका पालन करने लगेंगे तब सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी, मॉब लिंचिंग भी खत्म हो जाएगी. इसके अलावा नफरतें और हमारी शिकायतें भी खत्म हो जाएंगी. वहीं प्रेम, सद्भाव और महात्मा गांधी का रास्ता अपना लेंगे. '
वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार रहे आचार्य प्रमोद ने ट्वीट कर मोहन भागवत के बयान पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत में मॉब लिंचिंग नहीं होती है. तो फिर पहलू खान, अखलाक, तबरेज अंसारी और इंस्पेक्टर सुबोध सिंह ने आत्महत्या की थी क्या ?
क्या कहा मोहन भागवत ने?
विजयदशमी पर नागपुर में सालाना पथ संचलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर कहा कि कानून व्यवस्था की सीमा का उल्लंघन कर हिंसा की प्रवृत्ति समाज में परस्पर संबंधों को नष्ट कर अपना प्रताप दिखाती है. यह प्रवृत्ति हमारे देश की परंपरा नहीं है, न ही हमारे संविधान में यह है. कितना भी मतभेद हो, कानून और संविधान की मर्यादा में रहें. न्याय व्यवस्था में चलना पड़ेगा.
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से संघ का कोई लेनादेना नहीं है. मॉब लिंचिंग को लेकर कानून बनाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को पेश कर षड्यंत्र चलाया जा रहा है. ये सबको समझना चाहिए.
| मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक पर निशाना साधा है. उन्होंने मॉब लिंचिंग के बयान पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर पलटवार किया है. दिग्विजय सिंह ने कहा है कि जिस दिन मोहन भागवत एकजुटता का संदेश देकर उसका पालन करने लगेंगे तब मॉब लिंचिंग भी खत्म हो जाएगी. भोपाल में विजयदशमी के मौके पर एक कार्यक्रम में शामिल होने आए दिग्विजय सिंह ने कहा 'जिस दिन मोहन भागवत एकजुटता का संदेश देकर उसका पालन करने लगेंगे तब सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी, मॉब लिंचिंग भी खत्म हो जाएगी. इसके अलावा नफरतें और हमारी शिकायतें भी खत्म हो जाएंगी. वहीं प्रेम, सद्भाव और महात्मा गांधी का रास्ता अपना लेंगे. ' वहीं लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस में कांग्रेस उम्मीदवार रहे आचार्य प्रमोद ने ट्वीट कर मोहन भागवत के बयान पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत में मॉब लिंचिंग नहीं होती है. तो फिर पहलू खान, अखलाक, तबरेज अंसारी और इंस्पेक्टर सुबोध सिंह ने आत्महत्या की थी क्या ? क्या कहा मोहन भागवत ने? विजयदशमी पर नागपुर में सालाना पथ संचलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर कहा कि कानून व्यवस्था की सीमा का उल्लंघन कर हिंसा की प्रवृत्ति समाज में परस्पर संबंधों को नष्ट कर अपना प्रताप दिखाती है. यह प्रवृत्ति हमारे देश की परंपरा नहीं है, न ही हमारे संविधान में यह है. कितना भी मतभेद हो, कानून और संविधान की मर्यादा में रहें. न्याय व्यवस्था में चलना पड़ेगा. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से संघ का कोई लेनादेना नहीं है. मॉब लिंचिंग को लेकर कानून बनाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को पेश कर षड्यंत्र चलाया जा रहा है. ये सबको समझना चाहिए. |
सिरसा उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने शुक्रवार को भूजल सुधार को लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक ली।
उपायुक्त ने कहा कि किसी भी कार्य को सही ढंग से पूरा करवाने में संबंधित विभागों के बीच में आपसी तालमेल का होना बहुत जरूरी है। भूजल में सुधार लाने के लिए सभी संभावित समाधान जैसे सोखता गडढों के लक्ष्य को पूरा करें, धान की फसल में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दें। इसके अलावा फसल विविधिकरण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, मल्चिंग आदि तकनीकों को अपनाना बहुत जरूरी है। इसके लिए किसानों में अधिक से अधिक जागरूकता लाई जाए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड के डाटा के आधार पर अटल भूजल योजना के तहत वाटर सिक्योरिटी प्लान बनाया जाए। उन्होंने ऐलनाबाद व रानियां क्षेत्र में भूजल स्थिति सुधार को लेकर प्रत्येक गांव स्तर पर वॉटर सिक्योरिटी प्लान के तहत काम करने के निर्देश दिए। जल संरक्षण लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं है, इसलिए वॉटर सिक्योरिटी प्लॉन में ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जाए।
| सिरसा उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने शुक्रवार को भूजल सुधार को लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। उपायुक्त ने कहा कि किसी भी कार्य को सही ढंग से पूरा करवाने में संबंधित विभागों के बीच में आपसी तालमेल का होना बहुत जरूरी है। भूजल में सुधार लाने के लिए सभी संभावित समाधान जैसे सोखता गडढों के लक्ष्य को पूरा करें, धान की फसल में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दें। इसके अलावा फसल विविधिकरण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, मल्चिंग आदि तकनीकों को अपनाना बहुत जरूरी है। इसके लिए किसानों में अधिक से अधिक जागरूकता लाई जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड के डाटा के आधार पर अटल भूजल योजना के तहत वाटर सिक्योरिटी प्लान बनाया जाए। उन्होंने ऐलनाबाद व रानियां क्षेत्र में भूजल स्थिति सुधार को लेकर प्रत्येक गांव स्तर पर वॉटर सिक्योरिटी प्लान के तहत काम करने के निर्देश दिए। जल संरक्षण लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं है, इसलिए वॉटर सिक्योरिटी प्लॉन में ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जाए। |
Best 5 Bluetooth Calling Smartwatch मार्केट में कई सारी ऐसी ब्लूटूथ कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच मौजूद हैं जो 5000 रुपये से कम कीमत में आती हैं। इन स्मार्टवॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग के साथ ही हर्ट रेट मॉनिटर स्लीप ट्रैकिंग जैसे कई कमाल के फिटनेस फीचर्स मौजूद हैं।
नई दिल्ली, टेक डेस्क। Best Calling Smartwatch: अगर आप कार ड्राइव कर रहे हैं या फिर किसी अन्य काम में व्यस्त हैं, तो पॉकेट से फोन निकालकर कॉलिंग में दिक्कत होती है। इस काम में स्मार्टवॉच आपकी मुसीबत को कम कर सकती है। लेकिन आम लोगों का मानना होता है कि ब्लूटूथ कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच की कीमत ज्यादा होती है। लेकिन ऐसा नहीं है। मार्केट में कई सारी ऐसी ब्लूटूथ कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच मौजूद हैं, जो 5000 रुपये से कम कीमत में आती हैं। इन स्मार्टवॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग के साथ ही हर्ट रेट मॉनिटर, स्लीप ट्रैकिंग जैसे कई कमाल के फिटनेस फीचर्स मौजूद हैं।
Noise Colorfit Navbn स्मार्टवॉच में तेज परफॉर्मेंस के साथ बड़ी डिस्पले मिलेगी। स्मार्टवॉच IP68 डस्ट और वाटर रजिस्टेंस के साथ आएगी। Noise Colorfit Nav स्मार्टवॉच में स्कवॉयर शेप 1. 4 इंच का TFT LCD डिस्पले दिया गया है। Colorfit Nav स्मार्टवॉच में पावरबैकअप के लिए 180mAh की Lithium-Polymer बैटरी दी गई है। स्मार्टवॉच में इन-बिल्ट GPS सेंसर दिया गया है। इसमें 10 स्पोर्ट मोड जैसे ट्रैक स्पीड, डिस्टेंस और वर्कआउट मिलेंगे।
Realme Watch S स्मार्टवॉच में 100 से अधिक यूनिक वॉच फेस मिलेंगे। Realme Watch S स्मार्टवॉच में 390mAh की बैटरी दी गई है, जो जीरो से 100 प्रतिशत चार्ज होने में 2 घंटे का समय लेती है। Realme Watch S में रियल टाइम हार्ट-रेट मॉनिटर और SpO2 सेंसर दिया गया है, जो ब्लड में ऑक्सीजन लेवल को मापता है। इसके साथ ही वॉच में कनेक्टिविटी के लिए ब्लूटूथ 5. 0 का सपोर्ट मिलेगा।
Crossbeats Orbit Sports में 1. 3-इंच टच स्क्रीन डिस्प्ले दी गई है. इसमें ब्लूटूथ कॉलिंग फीचर दिया गया है. इस डिवाइस में इन-बिल्ट माइक और स्पीकर्स दिए गए हैं. इससे आप स्मार्चवॉच से कॉल कर सकते हैं. इसमें 10 दिन की बैटरी लाइफ दी गई है।
Fire-Boltt Ring स्मार्टवॉच में SpO2 सेंसर दिया गया है. इसमें 1. 7-इंच HD डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 2. 5D कर्व्ड ग्लास और मेटल बॉडी डिजाइन दिया गया है. स्मार्टवॉच में मल्टीपल स्पोर्ट मोड्स दिए गए हैं. कंपनी का दावा है सिंगल चार्ज पर ये 8 घंटे तक चलती है.
Realme Watch में 1. 4 इंच के LCD कलर टच-स्क्रीन डिस्प्ले के साथ आता है। इसमें 24- घंटे रियल टाइम हॉर्ट रेट मॉनिटरिंग सिस्टम भी दिया गया है। इसके साथ ही ब्लड-ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर और कई हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम दिए गए हैं। Realme Watch 14 स्पोर्ट मोड्स को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसमें स्मार्ट नोटिफिकेशन, म्यूजिक और कैमरा कंट्रोल जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।
| Best पाँच Bluetooth Calling Smartwatch मार्केट में कई सारी ऐसी ब्लूटूथ कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच मौजूद हैं जो पाँच हज़ार रुपयापये से कम कीमत में आती हैं। इन स्मार्टवॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग के साथ ही हर्ट रेट मॉनिटर स्लीप ट्रैकिंग जैसे कई कमाल के फिटनेस फीचर्स मौजूद हैं। नई दिल्ली, टेक डेस्क। Best Calling Smartwatch: अगर आप कार ड्राइव कर रहे हैं या फिर किसी अन्य काम में व्यस्त हैं, तो पॉकेट से फोन निकालकर कॉलिंग में दिक्कत होती है। इस काम में स्मार्टवॉच आपकी मुसीबत को कम कर सकती है। लेकिन आम लोगों का मानना होता है कि ब्लूटूथ कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच की कीमत ज्यादा होती है। लेकिन ऐसा नहीं है। मार्केट में कई सारी ऐसी ब्लूटूथ कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच मौजूद हैं, जो पाँच हज़ार रुपयापये से कम कीमत में आती हैं। इन स्मार्टवॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग के साथ ही हर्ट रेट मॉनिटर, स्लीप ट्रैकिंग जैसे कई कमाल के फिटनेस फीचर्स मौजूद हैं। Noise Colorfit Navbn स्मार्टवॉच में तेज परफॉर्मेंस के साथ बड़ी डिस्पले मिलेगी। स्मार्टवॉच IPअड़सठ डस्ट और वाटर रजिस्टेंस के साथ आएगी। Noise Colorfit Nav स्मार्टवॉच में स्कवॉयर शेप एक. चार इंच का TFT LCD डिस्पले दिया गया है। Colorfit Nav स्मार्टवॉच में पावरबैकअप के लिए एक सौ अस्सीmAh की Lithium-Polymer बैटरी दी गई है। स्मार्टवॉच में इन-बिल्ट GPS सेंसर दिया गया है। इसमें दस स्पोर्ट मोड जैसे ट्रैक स्पीड, डिस्टेंस और वर्कआउट मिलेंगे। Realme Watch S स्मार्टवॉच में एक सौ से अधिक यूनिक वॉच फेस मिलेंगे। Realme Watch S स्मार्टवॉच में तीन सौ नब्बेmAh की बैटरी दी गई है, जो जीरो से एक सौ प्रतिशत चार्ज होने में दो घंटाटे का समय लेती है। Realme Watch S में रियल टाइम हार्ट-रेट मॉनिटर और SpOदो सेंसर दिया गया है, जो ब्लड में ऑक्सीजन लेवल को मापता है। इसके साथ ही वॉच में कनेक्टिविटी के लिए ब्लूटूथ पाँच. शून्य का सपोर्ट मिलेगा। Crossbeats Orbit Sports में एक. तीन-इंच टच स्क्रीन डिस्प्ले दी गई है. इसमें ब्लूटूथ कॉलिंग फीचर दिया गया है. इस डिवाइस में इन-बिल्ट माइक और स्पीकर्स दिए गए हैं. इससे आप स्मार्चवॉच से कॉल कर सकते हैं. इसमें दस दिन की बैटरी लाइफ दी गई है। Fire-Boltt Ring स्मार्टवॉच में SpOदो सेंसर दिया गया है. इसमें एक. सात-इंच HD डिस्प्ले दिया गया है. इसमें दो. पाँचD कर्व्ड ग्लास और मेटल बॉडी डिजाइन दिया गया है. स्मार्टवॉच में मल्टीपल स्पोर्ट मोड्स दिए गए हैं. कंपनी का दावा है सिंगल चार्ज पर ये आठ घंटाटे तक चलती है. Realme Watch में एक. चार इंच के LCD कलर टच-स्क्रीन डिस्प्ले के साथ आता है। इसमें चौबीस- घंटे रियल टाइम हॉर्ट रेट मॉनिटरिंग सिस्टम भी दिया गया है। इसके साथ ही ब्लड-ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर और कई हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम दिए गए हैं। Realme Watch चौदह स्पोर्ट मोड्स को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसमें स्मार्ट नोटिफिकेशन, म्यूजिक और कैमरा कंट्रोल जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। |
नई दिल्ली : काला धन मामले में कुछ समय पहले ही व्हिसलब्लोअर हर्व फल्सियानी के द्वारा HSBC में पैसा रखने वालो की एक सूची जारी की गई थी. और अब मामले में ही यह बात भी सामने आ रही है कि हर्व ने यह दावा किया है कि भारत से अब भी करोडो की तादात में काला धन बाहर भेजा जा रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि काला धन मामले में जाँच को लेकर वे पूरा सहयोग करने को तैयार है. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वे मदद करने को तैयार है लेकिन यदि उन्हें इसके लिए संरक्षण प्रदान किया गया तो.
गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड में स्थित HSBC की जिनेवा शाखा पर यह आरोप लगा हुआ है कि वहाँ से खाताधारकों की सूचनाएं लीक की जाती है. इसको लेकर जैसे ही फ़्रांस गवर्नमेंट को जानकारी मिली उन्होंने जाँच-पड़ताल को अंजाम दिया और भारतीय ग्राहकों के बारे में भारत सरकार को जानकारी दी.
इस मामले में जब हर्व से यह पूछा गया कि वे यह जानकारी भारत के साथ किसी कमाई के उदेश्य से साझा करना चाहते है तो उनका यह कहना है कि वे केवल सरकार की मदद के लिए आगे आ रहे है, उनका पैसे कमाने का कोई मकसद नहीं है. इसके तहत ही उन्होंने यह भी कहा है कि भारत से करोडो की तादाद में जो धन बाहर भेजा जा रहा है वे उसकी जानकरी भारत सरकार को देना चाहते है.
| नई दिल्ली : काला धन मामले में कुछ समय पहले ही व्हिसलब्लोअर हर्व फल्सियानी के द्वारा HSBC में पैसा रखने वालो की एक सूची जारी की गई थी. और अब मामले में ही यह बात भी सामने आ रही है कि हर्व ने यह दावा किया है कि भारत से अब भी करोडो की तादात में काला धन बाहर भेजा जा रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि काला धन मामले में जाँच को लेकर वे पूरा सहयोग करने को तैयार है. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वे मदद करने को तैयार है लेकिन यदि उन्हें इसके लिए संरक्षण प्रदान किया गया तो. गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड में स्थित HSBC की जिनेवा शाखा पर यह आरोप लगा हुआ है कि वहाँ से खाताधारकों की सूचनाएं लीक की जाती है. इसको लेकर जैसे ही फ़्रांस गवर्नमेंट को जानकारी मिली उन्होंने जाँच-पड़ताल को अंजाम दिया और भारतीय ग्राहकों के बारे में भारत सरकार को जानकारी दी. इस मामले में जब हर्व से यह पूछा गया कि वे यह जानकारी भारत के साथ किसी कमाई के उदेश्य से साझा करना चाहते है तो उनका यह कहना है कि वे केवल सरकार की मदद के लिए आगे आ रहे है, उनका पैसे कमाने का कोई मकसद नहीं है. इसके तहत ही उन्होंने यह भी कहा है कि भारत से करोडो की तादाद में जो धन बाहर भेजा जा रहा है वे उसकी जानकरी भारत सरकार को देना चाहते है. |
यदि आप टैक्स फाइलिंग की समयसीमा याद करते हैं, तो आपके व्यवसाय का मूल्यांकन आईआरएस द्वारा 5% प्रति माह जुर्माना लगाया जाएगा जो रिटर्न दाखिल होने तक बढ़ता रहेगा। यदि आप अपने करों का भुगतान करने की उपेक्षा करते हैं, तो आईआरएस आपको 6% ब्याज के साथ-साथ अप्रैल की समयसीमा के बाद प्रत्येक महीने . 5% का देरी भुगतान जुर्माना भी देगा।
यह स्पष्ट है कि आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता क्यों है कि आप अपने कर दर्ज करें और समय पर अपना भुगतान करें; दंड गंभीर हैं। सबसे खराब स्थिति परिदृश्य, आप थोड़ा और समय देने और दंड से बचने के लिए एक फाइलिंग एक्सटेंशन का अनुरोध कर सकते हैं। आईआरएस साइट आपको यह पता लगाने में मदद कर सकती है कि टैक्स फाइलिंग एक्सटेंशन के लिए आपको कौन सा फॉर्म जमा करना होगा।
आईआरएस के मुताबिक, यदि आप एकमात्र मालिक, साझेदार, एस निगम शेयरधारक, और / या स्वयं-नियोजित व्यक्ति के रूप में दाखिल हैं, तो आपको आम तौर पर अनुमानित कर भुगतान करना पड़ता है यदि आप अपनी वापसी दर्ज करते समय $ 1,000 या उससे अधिक का भुगतान करते हैं ।
यदि आप निगम के रूप में दाखिल हैं तो आपको आमतौर पर अपने निगम के लिए अनुमानित कर भुगतान करना होगा यदि आप उम्मीद करते हैं कि यह $ 500 या उससे अधिक का कर देय है। आपका बुककीपर आपको अनुमानित कर भुगतान पर सलाह दे सकता है जिसे आपको सबमिट करना चाहिए। आप यह भी पता लगा सकते हैं कि फॉर्म 1040-ईएस वर्कशीट के साथ अनुमानित करों में आपको कितना भुगतान करना चाहिए।
यदि आप वास्तव में अपने करों पर अधिक भुगतान नहीं करना चाहते हैं, तो व्यवसाय कटौती इसे करने का तरीका है। इतने सारे कटौती हैं कि आपका व्यवसाय कार्यालय फर्नीचर और आपूर्ति, विज्ञापन, लाइसेंस, उपकरण, स्टार्ट-अप व्यय और अधिक सहित योग्यता प्राप्त कर सकता है। संभावित व्यापार कर कटौती की इस सूची की समीक्षा करें ताकि आप यह देख सकें कि आप अपनी देनदारियों पर वापस कटौती कर सकते हैं।
यदि आपके पास उन खर्चों का रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड नहीं है तो कोई कर कटौती करना बहुत मुश्किल है। इसका मतलब है कि आपको बचत व्यवसायों, माइलेज के लिए यात्रा लॉग रखने और खर्चों को वर्गीकृत करने और वर्गीकृत करने सहित अपने व्यावसायिक रिकॉर्ड के साथ बहुत विस्तृत होना चाहिए।
यदि आप अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक खर्चों को जोड़कर वित्तीय जल को गड़बड़ कर देते हैं तो आप एक बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं जिसे टैक्स टाइम चारों ओर घूमने पर साफ किया जाना चाहिए।
अलग-अलग बैंक और क्रेडिट कार्ड खातों को बनाए रखने, और उपयोग करके, अलग-अलग रसीदों को रखने और अपने व्यापार खातों से सीधे ड्राइंग करने के बजाय खुद को वेतन का भुगतान करके अपने व्यवसाय और व्यक्तिगत खर्चों को अलग करें। यह एक और क्षेत्र है जहां एक बुककीपर आपको सलाह दे सकता है कि कितना खर्च अलग रखना है।
कम महंगी मार्ग जाने और व्यवसाय कर सॉफ्टवेयर के साथ अपने व्यवसाय करों को करने के लिए यह बहुत मोहक है। हालांकि यह एक जटिल सेटअप के साथ एकमात्र स्वामित्व के लिए काम कर सकता है, यह अधिक जटिल व्यवसायों के लिए एक अच्छा विचार नहीं है। न केवल आप अपनी वापसी को मिसफिल करने का जोखिम चलाते हैं, लेकिन आप कुछ प्रमुख कटौती को याद कर सकते हैं क्योंकि आप नहीं जानते कि आप उनके लिए अर्हता प्राप्त करते हैं।
एकाउंटेंट चुनते समय, उसे प्रमाणित किया जाता है और आपके उद्योग में और टैक्स प्लानिंग के साथ अनुभव होता है।
आप संदर्भ प्राप्त करना चाहते हैं या एकाउंटेंट के साथ जाना चाहते हैं जिसे आपको एक सहयोगी द्वारा संदर्भित किया गया है। कर भरने का कार्य प्रति वर्ष केवल एक बार हो सकता है, लेकिन कर प्रक्रिया में कार्य, भुगतान और विचारों की आवश्यकता होती है, जो पूरे साल प्रभाव डालती हैं। यहां सूचीबद्ध गलतियों से बचने से टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया बहुत कम दर्दनाक हो जाएगी।
| यदि आप टैक्स फाइलिंग की समयसीमा याद करते हैं, तो आपके व्यवसाय का मूल्यांकन आईआरएस द्वारा पाँच% प्रति माह जुर्माना लगाया जाएगा जो रिटर्न दाखिल होने तक बढ़ता रहेगा। यदि आप अपने करों का भुगतान करने की उपेक्षा करते हैं, तो आईआरएस आपको छः% ब्याज के साथ-साथ अप्रैल की समयसीमा के बाद प्रत्येक महीने . पाँच% का देरी भुगतान जुर्माना भी देगा। यह स्पष्ट है कि आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता क्यों है कि आप अपने कर दर्ज करें और समय पर अपना भुगतान करें; दंड गंभीर हैं। सबसे खराब स्थिति परिदृश्य, आप थोड़ा और समय देने और दंड से बचने के लिए एक फाइलिंग एक्सटेंशन का अनुरोध कर सकते हैं। आईआरएस साइट आपको यह पता लगाने में मदद कर सकती है कि टैक्स फाइलिंग एक्सटेंशन के लिए आपको कौन सा फॉर्म जमा करना होगा। आईआरएस के मुताबिक, यदि आप एकमात्र मालिक, साझेदार, एस निगम शेयरधारक, और / या स्वयं-नियोजित व्यक्ति के रूप में दाखिल हैं, तो आपको आम तौर पर अनुमानित कर भुगतान करना पड़ता है यदि आप अपनी वापसी दर्ज करते समय एक डॉलर,शून्य या उससे अधिक का भुगतान करते हैं । यदि आप निगम के रूप में दाखिल हैं तो आपको आमतौर पर अपने निगम के लिए अनुमानित कर भुगतान करना होगा यदि आप उम्मीद करते हैं कि यह पाँच सौ डॉलर या उससे अधिक का कर देय है। आपका बुककीपर आपको अनुमानित कर भुगतान पर सलाह दे सकता है जिसे आपको सबमिट करना चाहिए। आप यह भी पता लगा सकते हैं कि फॉर्म एक हज़ार चालीस-ईएस वर्कशीट के साथ अनुमानित करों में आपको कितना भुगतान करना चाहिए। यदि आप वास्तव में अपने करों पर अधिक भुगतान नहीं करना चाहते हैं, तो व्यवसाय कटौती इसे करने का तरीका है। इतने सारे कटौती हैं कि आपका व्यवसाय कार्यालय फर्नीचर और आपूर्ति, विज्ञापन, लाइसेंस, उपकरण, स्टार्ट-अप व्यय और अधिक सहित योग्यता प्राप्त कर सकता है। संभावित व्यापार कर कटौती की इस सूची की समीक्षा करें ताकि आप यह देख सकें कि आप अपनी देनदारियों पर वापस कटौती कर सकते हैं। यदि आपके पास उन खर्चों का रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड नहीं है तो कोई कर कटौती करना बहुत मुश्किल है। इसका मतलब है कि आपको बचत व्यवसायों, माइलेज के लिए यात्रा लॉग रखने और खर्चों को वर्गीकृत करने और वर्गीकृत करने सहित अपने व्यावसायिक रिकॉर्ड के साथ बहुत विस्तृत होना चाहिए। यदि आप अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक खर्चों को जोड़कर वित्तीय जल को गड़बड़ कर देते हैं तो आप एक बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं जिसे टैक्स टाइम चारों ओर घूमने पर साफ किया जाना चाहिए। अलग-अलग बैंक और क्रेडिट कार्ड खातों को बनाए रखने, और उपयोग करके, अलग-अलग रसीदों को रखने और अपने व्यापार खातों से सीधे ड्राइंग करने के बजाय खुद को वेतन का भुगतान करके अपने व्यवसाय और व्यक्तिगत खर्चों को अलग करें। यह एक और क्षेत्र है जहां एक बुककीपर आपको सलाह दे सकता है कि कितना खर्च अलग रखना है। कम महंगी मार्ग जाने और व्यवसाय कर सॉफ्टवेयर के साथ अपने व्यवसाय करों को करने के लिए यह बहुत मोहक है। हालांकि यह एक जटिल सेटअप के साथ एकमात्र स्वामित्व के लिए काम कर सकता है, यह अधिक जटिल व्यवसायों के लिए एक अच्छा विचार नहीं है। न केवल आप अपनी वापसी को मिसफिल करने का जोखिम चलाते हैं, लेकिन आप कुछ प्रमुख कटौती को याद कर सकते हैं क्योंकि आप नहीं जानते कि आप उनके लिए अर्हता प्राप्त करते हैं। एकाउंटेंट चुनते समय, उसे प्रमाणित किया जाता है और आपके उद्योग में और टैक्स प्लानिंग के साथ अनुभव होता है। आप संदर्भ प्राप्त करना चाहते हैं या एकाउंटेंट के साथ जाना चाहते हैं जिसे आपको एक सहयोगी द्वारा संदर्भित किया गया है। कर भरने का कार्य प्रति वर्ष केवल एक बार हो सकता है, लेकिन कर प्रक्रिया में कार्य, भुगतान और विचारों की आवश्यकता होती है, जो पूरे साल प्रभाव डालती हैं। यहां सूचीबद्ध गलतियों से बचने से टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया बहुत कम दर्दनाक हो जाएगी। |
आपने ऐसी कोई इमारत शायद ही कभी देखी होगी, जिसमें कोई खिड़की ही न हो. हैरान करने वाली बात तो ये है कि ये इमारत 29 मंजिला ऊंची है. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है.
ये दुनिया अजीबोगरीब चीजों से भरी पड़ी है, जिनमें से कुछ चीजें तो प्राकृतिक हैं, जबकि कुछ चीजों को इंसानों ने खुद बनाया है, पर इंसानों की बनाई चीजें भी किसी आश्चर्य से कम नहीं होती हैं. अब बुर्ज खलीफा को ही देख लीजिए. ये दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है, जो बादलों के ऊपर भी दिखती है. ये किसी आश्चर्य से कम है क्या? ऐसी ही आश्चर्यजनक और भी कई इमारतें दुनियाभर में मौजूद हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं. सोशल मीडिया पर आजकल ऐसी ही एक इमारत का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देख कर लोग चौंक गए हैं.
आपने वैंपायर्स यानी पिशाचों की कहानियां तो सुनी ही होंगी. इसपर कई फिल्में भी बन चुकी हैं. कई फिल्मों में उन घरों को भी दिखाया गया है, जहां वैंपायर्स रहते हैं. वो एक अंधेर इमारत होती है, जहां रोशनी के आने की कोई जगह ही नहीं होती. वीडियो में दिखाई गई ये इमारत भी कुछ वैसी ही है. ये कोई छोटी-मोटी इमारत नहीं है बल्कि 29 मंजिला इमारत है, लेकिन इसमें खिड़कियां तो कहीं दिख ही नहीं रहीं. ऐसे में लोग हैरान हैं कि इस ऊंची इमारत में रहता कौन होगा. लोग मजाक-मजाक में कहने लगे हैं कि जरूर इस इमारत में पिशाच यानी वैंपायर्स रहते होंगे. फिल्मों में भी कुछ-कुछ ऐसी ही इमारतें दिखाई गई हैं, जो पिशाचों के घर होते हैं.
बताया जा रहा है कि ये 29 मंजिला इमारत अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है. इस अनोखी इमारत की खासियत ही यही है कि इसमें कोई भी खिड़की नहीं है, पर ये सोचने वाली बात है कि यहां लोग रहते कैसे होंगे? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर इस वीडियो को @NoCapFights नाम की आईडी से शेयर किया गया है.
महज 15 सेकंड के इस वीडियो को अब तक 3 लाख 76 हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि 6 हजार से अधिक लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने लिखा है, 'मुझे लगता है कि यह एक फेडरल जेल है. शिकागो शहर में ऐसा ही एक है', तो एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा है, 'मेरा मानना है कि यह 'मेन इन ब्लैक' का मुख्यालय है'.
| आपने ऐसी कोई इमारत शायद ही कभी देखी होगी, जिसमें कोई खिड़की ही न हो. हैरान करने वाली बात तो ये है कि ये इमारत उनतीस मंजिला ऊंची है. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है. ये दुनिया अजीबोगरीब चीजों से भरी पड़ी है, जिनमें से कुछ चीजें तो प्राकृतिक हैं, जबकि कुछ चीजों को इंसानों ने खुद बनाया है, पर इंसानों की बनाई चीजें भी किसी आश्चर्य से कम नहीं होती हैं. अब बुर्ज खलीफा को ही देख लीजिए. ये दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है, जो बादलों के ऊपर भी दिखती है. ये किसी आश्चर्य से कम है क्या? ऐसी ही आश्चर्यजनक और भी कई इमारतें दुनियाभर में मौजूद हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं. सोशल मीडिया पर आजकल ऐसी ही एक इमारत का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देख कर लोग चौंक गए हैं. आपने वैंपायर्स यानी पिशाचों की कहानियां तो सुनी ही होंगी. इसपर कई फिल्में भी बन चुकी हैं. कई फिल्मों में उन घरों को भी दिखाया गया है, जहां वैंपायर्स रहते हैं. वो एक अंधेर इमारत होती है, जहां रोशनी के आने की कोई जगह ही नहीं होती. वीडियो में दिखाई गई ये इमारत भी कुछ वैसी ही है. ये कोई छोटी-मोटी इमारत नहीं है बल्कि उनतीस मंजिला इमारत है, लेकिन इसमें खिड़कियां तो कहीं दिख ही नहीं रहीं. ऐसे में लोग हैरान हैं कि इस ऊंची इमारत में रहता कौन होगा. लोग मजाक-मजाक में कहने लगे हैं कि जरूर इस इमारत में पिशाच यानी वैंपायर्स रहते होंगे. फिल्मों में भी कुछ-कुछ ऐसी ही इमारतें दिखाई गई हैं, जो पिशाचों के घर होते हैं. बताया जा रहा है कि ये उनतीस मंजिला इमारत अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है. इस अनोखी इमारत की खासियत ही यही है कि इसमें कोई भी खिड़की नहीं है, पर ये सोचने वाली बात है कि यहां लोग रहते कैसे होंगे? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर इस वीडियो को @NoCapFights नाम की आईडी से शेयर किया गया है. महज पंद्रह सेकंड के इस वीडियो को अब तक तीन लाख छिहत्तर हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि छः हजार से अधिक लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने लिखा है, 'मुझे लगता है कि यह एक फेडरल जेल है. शिकागो शहर में ऐसा ही एक है', तो एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा है, 'मेरा मानना है कि यह 'मेन इन ब्लैक' का मुख्यालय है'. |
नई दिल्लीः साउथ एक्ट्रेस अनुष्का शेट्टी आज अपना 36वां जन्मदिन मना रही हैं। यूं तो अनुष्का ने अपने करियर में कई बड़ी फिल्में की हैं, लेकिन जो नाम और शोहरत उन्हें बाहुबली के जरिए मिली वो पहले नहीं मिली थी। अनुष्का शेट्टी ने अपने लुक और अपने अभिनय से लोगों को दीवाना बना दिया। एस एस राजामौली की इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड तोड़े और कई नए रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। अब तक वर्ल्डवाइड 1500 करोड़ रुपये की कमाई करके 'बाहुबली 2' भारत की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म बन गई। फिल्म में प्रभास और अनुष्का शेट्टी ने लीड रोल प्ले किया था। अनुष्का जहां देवसेना के किरदार में थीं, वहीं प्रभास ने अमरेंद्र बाहुबली और महेंद्र बाहुबली का किरदार निभाया था। दोनों की लोकप्रियता इतनी बढ़ी की साउथ के अलावा अब उत्तर भारत में भी इनकी फैन फॉलोइंग काफी बढ़ गई है।
अब अनुष्का और प्रभास के फैंस ने मशहूर गाने 'मेरे रश्के कमर' का एक नया वर्जन तैयार किया है, इस गाने में प्रभास और अनुष्का रोमांस करते नजर आ रहे हैं। दरअसल, बाहुबली से पहले प्रभास और अनुष्का ने 'मिर्ची' और 'बिल्ला' में साथ नजर आ चुके हैं। उन्हीं की फिल्म 'मिर्ची' के एक गाने को लेकर उनके फैंस ने उसमें 'रश्के कमर' गाना डाल दिया है। अब ये गाना यूट्यूब पर वायरल हो गया है, और लोगों को खूब पंसद आ रहा है।
साउथ में दोनों की जोड़ी काफी हिट है। लोग इन्हें साथ देखना काफी पसंद करते हैं। दोनों की दोस्ती भी काफी गहरी है, तभी तो अनु्ष्का शेट्टी ने राणा दग्गुबाती का ब्रदरजोन में डालते हुए प्रभास को सबसे सेक्सी हीरो कह दिया था।
- यहां पढ़िए क्या होता है 'रश्के कमर' का मतलब?
| नई दिल्लीः साउथ एक्ट्रेस अनुष्का शेट्टी आज अपना छत्तीसवां जन्मदिन मना रही हैं। यूं तो अनुष्का ने अपने करियर में कई बड़ी फिल्में की हैं, लेकिन जो नाम और शोहरत उन्हें बाहुबली के जरिए मिली वो पहले नहीं मिली थी। अनुष्का शेट्टी ने अपने लुक और अपने अभिनय से लोगों को दीवाना बना दिया। एस एस राजामौली की इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड तोड़े और कई नए रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। अब तक वर्ल्डवाइड एक हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपये की कमाई करके 'बाहुबली दो' भारत की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म बन गई। फिल्म में प्रभास और अनुष्का शेट्टी ने लीड रोल प्ले किया था। अनुष्का जहां देवसेना के किरदार में थीं, वहीं प्रभास ने अमरेंद्र बाहुबली और महेंद्र बाहुबली का किरदार निभाया था। दोनों की लोकप्रियता इतनी बढ़ी की साउथ के अलावा अब उत्तर भारत में भी इनकी फैन फॉलोइंग काफी बढ़ गई है। अब अनुष्का और प्रभास के फैंस ने मशहूर गाने 'मेरे रश्के कमर' का एक नया वर्जन तैयार किया है, इस गाने में प्रभास और अनुष्का रोमांस करते नजर आ रहे हैं। दरअसल, बाहुबली से पहले प्रभास और अनुष्का ने 'मिर्ची' और 'बिल्ला' में साथ नजर आ चुके हैं। उन्हीं की फिल्म 'मिर्ची' के एक गाने को लेकर उनके फैंस ने उसमें 'रश्के कमर' गाना डाल दिया है। अब ये गाना यूट्यूब पर वायरल हो गया है, और लोगों को खूब पंसद आ रहा है। साउथ में दोनों की जोड़ी काफी हिट है। लोग इन्हें साथ देखना काफी पसंद करते हैं। दोनों की दोस्ती भी काफी गहरी है, तभी तो अनु्ष्का शेट्टी ने राणा दग्गुबाती का ब्रदरजोन में डालते हुए प्रभास को सबसे सेक्सी हीरो कह दिया था। - यहां पढ़िए क्या होता है 'रश्के कमर' का मतलब? |
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