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खड़ौली के श्मशान घाट में हादसा होते-होते बच गया। जिस समय चिता को मुखाग्नि दी जा रही थी उसी समय छत का प्लास्टर गिर पड़ा और छत नीचे झुक गई। गनीमत रही कि प्लास्टर वहां नहीं गिरा जहां लोग खड़े थे।
मेरठ, जेएनएन। खड़ौली के श्मशान घाट में हादसा होते-होते बच गया। जिस समय चिता को मुखाग्नि दी जा रही थी उसी समय छत का प्लास्टर गिर पड़ा और छत नीचे झुक गई। गनीमत रही कि प्लास्टर वहां नहीं गिरा जहां लोग खड़े थे। वार्ड 38 की पार्षद रेनू सैनी के पति मनोज सैनी ने बताया कि श्मशान घाट में सोमवार को दो अलग स्थानों के लोगों ने दाह संस्कार किया था।
जब दूसरे स्थान के लोग दाह संस्कार कर रहे थे तभी छत का प्लास्टर गिर गया। प्लास्टर तीन स्थानों से गिरा। छत भी झुक गई। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर जानकारी दी गई तो वह मौके पर पहुंचे। बताया कि इसका निर्माण सात साल पहले किया गया था। घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ है। पहले भी इसकी छत थोड़ी झुकी थी जिसकी मरम्मत लोगों ने चंदा एकत्र करके करा लिया था। इसकी शिकायत भी नगर निगम में हुई थी लेकिन जांच हुई न ही नई छत डाली गई।
नगर निगम की ओर से रोहटा रोड के उत्तर दिशा में पानी की निकासी के लिए आरसीसी के नाले का निर्माण कराया जा रहा है। जन कल्याण वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा व उनके साथियों ने घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप लगाया था। प्रयुक्त की गई निर्माण सामग्री को कमिश्नर व डीएम को दिखाया। वीडियो क्लिप भी दिखाई। इसके बावजूद अब तक कोई अधिकारी उसे देखने नहीं पहुंचा।
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खड़ौली के श्मशान घाट में हादसा होते-होते बच गया। जिस समय चिता को मुखाग्नि दी जा रही थी उसी समय छत का प्लास्टर गिर पड़ा और छत नीचे झुक गई। गनीमत रही कि प्लास्टर वहां नहीं गिरा जहां लोग खड़े थे। मेरठ, जेएनएन। खड़ौली के श्मशान घाट में हादसा होते-होते बच गया। जिस समय चिता को मुखाग्नि दी जा रही थी उसी समय छत का प्लास्टर गिर पड़ा और छत नीचे झुक गई। गनीमत रही कि प्लास्टर वहां नहीं गिरा जहां लोग खड़े थे। वार्ड अड़तीस की पार्षद रेनू सैनी के पति मनोज सैनी ने बताया कि श्मशान घाट में सोमवार को दो अलग स्थानों के लोगों ने दाह संस्कार किया था। जब दूसरे स्थान के लोग दाह संस्कार कर रहे थे तभी छत का प्लास्टर गिर गया। प्लास्टर तीन स्थानों से गिरा। छत भी झुक गई। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर जानकारी दी गई तो वह मौके पर पहुंचे। बताया कि इसका निर्माण सात साल पहले किया गया था। घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ है। पहले भी इसकी छत थोड़ी झुकी थी जिसकी मरम्मत लोगों ने चंदा एकत्र करके करा लिया था। इसकी शिकायत भी नगर निगम में हुई थी लेकिन जांच हुई न ही नई छत डाली गई। नगर निगम की ओर से रोहटा रोड के उत्तर दिशा में पानी की निकासी के लिए आरसीसी के नाले का निर्माण कराया जा रहा है। जन कल्याण वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा व उनके साथियों ने घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप लगाया था। प्रयुक्त की गई निर्माण सामग्री को कमिश्नर व डीएम को दिखाया। वीडियो क्लिप भी दिखाई। इसके बावजूद अब तक कोई अधिकारी उसे देखने नहीं पहुंचा।
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चार अप्रैल को रियासत की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर डीजीपी के राजेंद्रा कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। जोनल पुलिस हेडक्वार्टर में आयोजित सीनियर पुलिस अफसरों की बैठक में आयोजन स्थल की सुरक्षा पर विशेष रूप से विचार किया गया।
अफसरों ने डीजीपी को विस्तृत सुरक्षा जानकारी देते हुए बताया कि राजभवन की ओर जाने वाले तमाम रूट पर भी विशेष सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। राजभवन के अलावा एयरपोर्ट रोड सहित शहर के कुछ अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले मेहमानों के ठहरने के स्थान गेस्ट हाउस में भी सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। डीजीपी ने अफसरों को कहा कि एयरपोर्ट और अन्य मार्गों से पहुंचने वाले वीआईपी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जाएं, ताकि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। खासकर ट्रैफिक पुलिस के अफसरों को तमाम मार्गों पर विशेष इंतजाम करने को कहा है।
डीजीपी ने शपथ ग्रहण समारोह में पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की और अफसरों को निर्देश दिए कि वीआईपी वाहनों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसी प्रकार की दिक्कत न हो। चूंकि समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेना है, इसलिए ट्रैफिक प्रबंधन बड़ा मुद्दा है।
बैठक में एडीजीपी (सीआईडी) एसएम सहाय, आईजीपी योगिंदर कौल, जगजीत कुमार, दानेश राणा, एसएसजी डायरेक्टर एसए मुज्तबा, डीआईजी अशकूर अहमद वानी, एसएसपी सुनील गुप्ता, वीरेंद्र शर्मा, अशोक कुमार, रोमेश अंग्राल, मोहन लाल, उदय भास्कर बिल्ला, एसपी रोमेश कोतवाल, शहजाद सलारिया, नसीर अहमद, अरुण गुप्ता, मनता शर्मा, अजीत लाल डोगरा, शमशेर हुसैन और आईजी के एसओ अशोक कुमार आदि उपस्थित थे।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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चार अप्रैल को रियासत की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर डीजीपी के राजेंद्रा कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। जोनल पुलिस हेडक्वार्टर में आयोजित सीनियर पुलिस अफसरों की बैठक में आयोजन स्थल की सुरक्षा पर विशेष रूप से विचार किया गया। अफसरों ने डीजीपी को विस्तृत सुरक्षा जानकारी देते हुए बताया कि राजभवन की ओर जाने वाले तमाम रूट पर भी विशेष सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। राजभवन के अलावा एयरपोर्ट रोड सहित शहर के कुछ अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले मेहमानों के ठहरने के स्थान गेस्ट हाउस में भी सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। डीजीपी ने अफसरों को कहा कि एयरपोर्ट और अन्य मार्गों से पहुंचने वाले वीआईपी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जाएं, ताकि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। खासकर ट्रैफिक पुलिस के अफसरों को तमाम मार्गों पर विशेष इंतजाम करने को कहा है। डीजीपी ने शपथ ग्रहण समारोह में पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की और अफसरों को निर्देश दिए कि वीआईपी वाहनों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसी प्रकार की दिक्कत न हो। चूंकि समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेना है, इसलिए ट्रैफिक प्रबंधन बड़ा मुद्दा है। बैठक में एडीजीपी एसएम सहाय, आईजीपी योगिंदर कौल, जगजीत कुमार, दानेश राणा, एसएसजी डायरेक्टर एसए मुज्तबा, डीआईजी अशकूर अहमद वानी, एसएसपी सुनील गुप्ता, वीरेंद्र शर्मा, अशोक कुमार, रोमेश अंग्राल, मोहन लाल, उदय भास्कर बिल्ला, एसपी रोमेश कोतवाल, शहजाद सलारिया, नसीर अहमद, अरुण गुप्ता, मनता शर्मा, अजीत लाल डोगरा, शमशेर हुसैन और आईजी के एसओ अशोक कुमार आदि उपस्थित थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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विश्व क्रिकेट की सबसे हाई प्रोफाइल द्विपक्षीय सीरीज एशेज सीरीज 2021-22 के शुरू होने से पहले ही क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में एक के बाद एक उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। एशेज सीरीज के लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कुछ दिनों पहले कप्तान के रूप में टिम पेन को ही बरकरार रखा था, लेकिन उन्होंने टिम सेलेक्शन के कुछ दिन बाद ही कप्तानी छोड़ दी।
टिम ने 2018 के एक लड़की को अश्लील मैसेज करने के मामले के सामने आने के बाद कप्तानी से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद अब शुक्रवार की सुबह को टिम पेन को लेकर एक और खबर मिली है, जहां उन्होंने क्रिकेट से ब्रेक लेने का फैसला कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज टिम पेन ने मानसिक स्वास्थ्य के कारण अनिश्चितकाल के लिए क्रिकेट से ब्रेक लिया है। जिसके बाद अब वो ना तो तस्मानिया के लिए मार्श कप में खेलेंगे और ना ही एशेज सीरीज के कुछ मैच खेल पाएंगे।
एशेज सीरीज से टिम पेन के नाम वापस लेने के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के लिए कुछ विकेटकीपर बल्लेबाज जगह बनाने के दावेदार हैं, जिसमें मैथ्यू वेड, एलेक्स कैरी और युवा जॉन इंगलिस के नाम शामिल हो सकते हैं।
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विश्व क्रिकेट की सबसे हाई प्रोफाइल द्विपक्षीय सीरीज एशेज सीरीज दो हज़ार इक्कीस-बाईस के शुरू होने से पहले ही क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में एक के बाद एक उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। एशेज सीरीज के लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कुछ दिनों पहले कप्तान के रूप में टिम पेन को ही बरकरार रखा था, लेकिन उन्होंने टिम सेलेक्शन के कुछ दिन बाद ही कप्तानी छोड़ दी। टिम ने दो हज़ार अट्ठारह के एक लड़की को अश्लील मैसेज करने के मामले के सामने आने के बाद कप्तानी से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद अब शुक्रवार की सुबह को टिम पेन को लेकर एक और खबर मिली है, जहां उन्होंने क्रिकेट से ब्रेक लेने का फैसला कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज टिम पेन ने मानसिक स्वास्थ्य के कारण अनिश्चितकाल के लिए क्रिकेट से ब्रेक लिया है। जिसके बाद अब वो ना तो तस्मानिया के लिए मार्श कप में खेलेंगे और ना ही एशेज सीरीज के कुछ मैच खेल पाएंगे। एशेज सीरीज से टिम पेन के नाम वापस लेने के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के लिए कुछ विकेटकीपर बल्लेबाज जगह बनाने के दावेदार हैं, जिसमें मैथ्यू वेड, एलेक्स कैरी और युवा जॉन इंगलिस के नाम शामिल हो सकते हैं।
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सुप्रसिद्ध कॉमेडीयन राजू श्रीवास्तव यांचे उपचारादरम्यान दिल्ली येथे निधन झाले असून ही घटना मनोरंजन विश्वाला हादरा देणारी आहे. त्यांच्या कुटुंबियांच्या दुःखात मी सहभागी आहे. परमेश्वर श्रीवास्तव यांच्या आत्म्यास सद्गती प्रदान करो हीच प्रार्थना. भावपूर्ण श्रद्धांजली....
राजू श्रीवास्तव मशहूर कॉमेडियन थे। वह कई लोकप्रिय टीवी शो का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी गिनती देश के बेहतरीन कॉमेडियन में होती है। राजू श्रीवास्तव 'बिग बॉस', 'शक्तिमान', 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज', 'कॉमेडी सर्कस' और 'द कपिल शर्मा शो' का भी हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने 'मैंने प्यार किया', 'बाजीगर', 'ऐ आठ खादनी रुपया', 'बिग ब्रदर', 'मैं प्रेम की दीवानी हूं', 'बॉम्बे टू गोवा' जैसी फिल्मों में काम किया।
राजू की सबसे बड़ी सफलता स्टैंडअप कॉमेडी शो 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' में मिली, जहां वह उपविजेता रहे। उनका लोकप्रिय किरदार 'गजोधर भैया' आज भी कई लोगों को याद है। इस शख्सियत में उन्होंने अमिताभ बच्चन, लालू प्रसाद यादव, राम देव बाबा की नकल उतारकर दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने 'शक्तिमान', 'बिग बॉस', 'कॉमेडी का महा मोकवा', 'कॉमेडी सर्कस', 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' आदि टीवी सीरियल्स में भी काम किया।
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सुप्रसिद्ध कॉमेडीयन राजू श्रीवास्तव यांचे उपचारादरम्यान दिल्ली येथे निधन झाले असून ही घटना मनोरंजन विश्वाला हादरा देणारी आहे. त्यांच्या कुटुंबियांच्या दुःखात मी सहभागी आहे. परमेश्वर श्रीवास्तव यांच्या आत्म्यास सद्गती प्रदान करो हीच प्रार्थना. भावपूर्ण श्रद्धांजली.... राजू श्रीवास्तव मशहूर कॉमेडियन थे। वह कई लोकप्रिय टीवी शो का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी गिनती देश के बेहतरीन कॉमेडियन में होती है। राजू श्रीवास्तव 'बिग बॉस', 'शक्तिमान', 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज', 'कॉमेडी सर्कस' और 'द कपिल शर्मा शो' का भी हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने 'मैंने प्यार किया', 'बाजीगर', 'ऐ आठ खादनी रुपया', 'बिग ब्रदर', 'मैं प्रेम की दीवानी हूं', 'बॉम्बे टू गोवा' जैसी फिल्मों में काम किया। राजू की सबसे बड़ी सफलता स्टैंडअप कॉमेडी शो 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' में मिली, जहां वह उपविजेता रहे। उनका लोकप्रिय किरदार 'गजोधर भैया' आज भी कई लोगों को याद है। इस शख्सियत में उन्होंने अमिताभ बच्चन, लालू प्रसाद यादव, राम देव बाबा की नकल उतारकर दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने 'शक्तिमान', 'बिग बॉस', 'कॉमेडी का महा मोकवा', 'कॉमेडी सर्कस', 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' आदि टीवी सीरियल्स में भी काम किया।
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ये हैं इस वक्त की 10 बड़ी खबरें।
खतौली रेल दुर्धटनाः हादसा या साजिश?
रेलवे की लापरवाही की वजह से गई 23 लोगों की जान. . . 150 से ज्यादा लोग घायल. . . मरने वालों के परिवार को राज्य सरकार ने 2 लाख और रेलवे ने साढ़े तीन लाख के मुआवजे का किया ऐलान. .
लापरवाही से गई 23 लोगों की जान!
बिहार का सियासी दंगल!
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ये हैं इस वक्त की दस बड़ी खबरें। खतौली रेल दुर्धटनाः हादसा या साजिश? रेलवे की लापरवाही की वजह से गई तेईस लोगों की जान. . . एक सौ पचास से ज्यादा लोग घायल. . . मरने वालों के परिवार को राज्य सरकार ने दो लाख और रेलवे ने साढ़े तीन लाख के मुआवजे का किया ऐलान. . लापरवाही से गई तेईस लोगों की जान! बिहार का सियासी दंगल!
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बेटियों से रोजाना होने वाली हैवानियत से क्या देश ने कोई सबक सीखा है? शायद नहीं, क्योंकि अगर ऐसा होता तो सड़क पर अकेली लड़की को देखने वाली गिद्ध नजरें न होंती.
हैदराबाद की बेटी से हुई हैवानियत के बाद देश गुस्से में हैं. आरोपियों को फांसी पर लटकाने की मांग हो रही है. सड़क पर कोहराम है, तो संसद में संग्राम, लेकिन क्या नारों से, प्रदर्शनों से देश को नारी सम्मान की सीख मिल सकती है.
बेटियों से रोजाना होने वाली हैवानियत से क्या देश ने कोई सबक सीखा है? शायद नहीं, क्योंकि अगर ऐसा होता तो सड़क पर अकेली लड़की को देखने वाली गिद्ध नजरें न होंती. हम बात देश की राजधानी की कर रहे हैं. उसी दिल्ली की जहां सात साल पहले निर्भया जैसी वारदात ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था. वो भी दिसंबर का महीना था. ये भी दिसंबर का महीना है, जब टीवी9 भारतवर्ष की 6 लेडी रिपोर्टर दिल्ली की सड़कों पर निकलीं, वो भी रात को. ये जानने कि देश की राजधानी महिलाओं के लिए कितनी महफूज़ है.
दिल्ली की खौफनाक रात में टीवी 9 भारतवर्ष की 6 लेडी रिपोर्टर के साथ जो वाकये हुए वो दंग करने वाले हैं. सन्न करने वाली हैं शोहदों की हरकतें. गुस्सा दिलाने वाली हैं उनकी सोच. दिल्ली की सड़कों पर देर रात में किसी भी लड़की से क्या-क्या हो सकता है. कैसे-कैसे लोगों से सामना हो सकता है. कौन किस नीयत से, किस मकसद से किसी अकेली लड़की से बर्ताव करता है ये आप इस वीडियो में देख सकते हैं.
टीवी 9 भारतवर्ष के कैमरें में दिल्ली में घूमने वाले आवारा किस्म के सिरफिरों का कारनामा रिकॉर्ड हुआ है. यह हाल केवल दिल्ली का ही नहीं था. ऐसी ही खौफनाक चेहरा एनसीआर की सड़कों पर भी देखने को मिला.
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बेटियों से रोजाना होने वाली हैवानियत से क्या देश ने कोई सबक सीखा है? शायद नहीं, क्योंकि अगर ऐसा होता तो सड़क पर अकेली लड़की को देखने वाली गिद्ध नजरें न होंती. हैदराबाद की बेटी से हुई हैवानियत के बाद देश गुस्से में हैं. आरोपियों को फांसी पर लटकाने की मांग हो रही है. सड़क पर कोहराम है, तो संसद में संग्राम, लेकिन क्या नारों से, प्रदर्शनों से देश को नारी सम्मान की सीख मिल सकती है. बेटियों से रोजाना होने वाली हैवानियत से क्या देश ने कोई सबक सीखा है? शायद नहीं, क्योंकि अगर ऐसा होता तो सड़क पर अकेली लड़की को देखने वाली गिद्ध नजरें न होंती. हम बात देश की राजधानी की कर रहे हैं. उसी दिल्ली की जहां सात साल पहले निर्भया जैसी वारदात ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था. वो भी दिसंबर का महीना था. ये भी दिसंबर का महीना है, जब टीवीनौ भारतवर्ष की छः लेडी रिपोर्टर दिल्ली की सड़कों पर निकलीं, वो भी रात को. ये जानने कि देश की राजधानी महिलाओं के लिए कितनी महफूज़ है. दिल्ली की खौफनाक रात में टीवी नौ भारतवर्ष की छः लेडी रिपोर्टर के साथ जो वाकये हुए वो दंग करने वाले हैं. सन्न करने वाली हैं शोहदों की हरकतें. गुस्सा दिलाने वाली हैं उनकी सोच. दिल्ली की सड़कों पर देर रात में किसी भी लड़की से क्या-क्या हो सकता है. कैसे-कैसे लोगों से सामना हो सकता है. कौन किस नीयत से, किस मकसद से किसी अकेली लड़की से बर्ताव करता है ये आप इस वीडियो में देख सकते हैं. टीवी नौ भारतवर्ष के कैमरें में दिल्ली में घूमने वाले आवारा किस्म के सिरफिरों का कारनामा रिकॉर्ड हुआ है. यह हाल केवल दिल्ली का ही नहीं था. ऐसी ही खौफनाक चेहरा एनसीआर की सड़कों पर भी देखने को मिला.
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valley) में कोयला जमा (coal deposit) है और हम इस कोयला जमा (coal deposit) राशि को जानते हैं।
और यह रानीगंज कोयला क्षेत्र (Raniganj coalfield) है, यह झरिया (Jharia) है, और यह पूर्वी बकरू (buckaroo) या पश्चिम बोकारो कोयला क्षेत्र है और ये मध्य भारत में शिरोली कोयला क्षेत्र (Shiroli coal fields) हैं और यह तालचेर कोयला क्षेत्र (Talcher coal field) है और हम जानते हैं कि यह तालचेर (Talcher) और आईबी घाटी में महानदी घाटी कोयला (Mahanadi valley coalfield) क्षेत्र है।
इसलिए, जैसा कि हम जानते हैं कि यह कोयला क्षेत्र (coal fields) हैं जो वहां हैं, वे मूल रूप से पूर्वी भारत या दक्षिण पूर्वी भारतीय हिस्से में कोयला क्षेत्र हैं, अनिवार्य रूप से गोंडवाना कोयला (Gondwana coal) के रूप में जाने जाते हैं, जो पारमोकार्बोनिफेरस युग (permocarboniferrous age) से संबंधित हैं और अब एक दरार घाटियों पर कब्जा कर रहे हैं सोन, नर्मदा, महानदी और गोदावरी जैसी अलग-अलग नदी घाटियों पर कब्जा कर लिया गया और ये वे कोयला क्षेत्र (coal fields) हैं जिनका यहाँ पर सीमांकन किया गया है।
इसलिए, यह कोयला क्षेत्र (coal area) देश का एक प्रमुख कोयला (coal) उत्पादक क्षेत्र है, जो ज्यादातर कोयले (coal) की विविधता वाले कोयले (coal) का उत्पादन करता है। और हम यह भी देखते हैं कि उत्तर पूर्वी राज्यों असम और मेघालय में कुछ कोयला क्षेत्र (coal areas) हैं।
इसलिए, इन दोनों क्षेत्रों के बीच मुख्य रूप से अंतर यह है कि गोंडवाना कोयले जो (Gondwana coals) कि फ़्लुविएटी बेसिन (fluviatile basins) में जमा किए गए थे, और बाद में गठबंधन (coalification) की प्रक्रिया में परिवर्तित हो गए, जबकि उत्तर पूर्व में इन कोयला क्षेत्रों में ज्यादातर ओलीगोसिन (Oligocene) से संबंधित तृतीयक कोयला हैं, Eocene तरह की समय सीमा । और ये समझा जाता है कि उन्होंने समुद्री वातावरण (environments) का निर्माण किया है और उनके पास ज्यादातर गोंडवाना कोयला क्षेत्रों (Gondwana coalfields) के ताजे पानी की उत्पत्ति के खिलाफ एक समुद्री मूल है।
इसलिए, भेद की एक सरल विधि के रूप में हम जानते हैं कि गोंडवाना कोयले (Gondwana coals) के मीठे पानी या तरल पदार्थ की उत्पत्ति (fluviatile) मूल रूप से इस तृतीयक कोयले (tertiary coal) के रूप में कुछ मापदंडों से तृतीयक कोयले (tertiary coal) से अलग है, जो गंधक (sulphur) सामग्री की तुलना में सल्फर (sulphur) सामग्री में समृद्ध है।
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valley) में कोयला जमा है और हम इस कोयला जमा राशि को जानते हैं। और यह रानीगंज कोयला क्षेत्र है, यह झरिया है, और यह पूर्वी बकरू या पश्चिम बोकारो कोयला क्षेत्र है और ये मध्य भारत में शिरोली कोयला क्षेत्र हैं और यह तालचेर कोयला क्षेत्र है और हम जानते हैं कि यह तालचेर और आईबी घाटी में महानदी घाटी कोयला क्षेत्र है। इसलिए, जैसा कि हम जानते हैं कि यह कोयला क्षेत्र हैं जो वहां हैं, वे मूल रूप से पूर्वी भारत या दक्षिण पूर्वी भारतीय हिस्से में कोयला क्षेत्र हैं, अनिवार्य रूप से गोंडवाना कोयला के रूप में जाने जाते हैं, जो पारमोकार्बोनिफेरस युग से संबंधित हैं और अब एक दरार घाटियों पर कब्जा कर रहे हैं सोन, नर्मदा, महानदी और गोदावरी जैसी अलग-अलग नदी घाटियों पर कब्जा कर लिया गया और ये वे कोयला क्षेत्र हैं जिनका यहाँ पर सीमांकन किया गया है। इसलिए, यह कोयला क्षेत्र देश का एक प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र है, जो ज्यादातर कोयले की विविधता वाले कोयले का उत्पादन करता है। और हम यह भी देखते हैं कि उत्तर पूर्वी राज्यों असम और मेघालय में कुछ कोयला क्षेत्र हैं। इसलिए, इन दोनों क्षेत्रों के बीच मुख्य रूप से अंतर यह है कि गोंडवाना कोयले जो कि फ़्लुविएटी बेसिन में जमा किए गए थे, और बाद में गठबंधन की प्रक्रिया में परिवर्तित हो गए, जबकि उत्तर पूर्व में इन कोयला क्षेत्रों में ज्यादातर ओलीगोसिन से संबंधित तृतीयक कोयला हैं, Eocene तरह की समय सीमा । और ये समझा जाता है कि उन्होंने समुद्री वातावरण का निर्माण किया है और उनके पास ज्यादातर गोंडवाना कोयला क्षेत्रों के ताजे पानी की उत्पत्ति के खिलाफ एक समुद्री मूल है। इसलिए, भेद की एक सरल विधि के रूप में हम जानते हैं कि गोंडवाना कोयले के मीठे पानी या तरल पदार्थ की उत्पत्ति मूल रूप से इस तृतीयक कोयले के रूप में कुछ मापदंडों से तृतीयक कोयले से अलग है, जो गंधक सामग्री की तुलना में सल्फर सामग्री में समृद्ध है।
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बुधवार को दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर करीब 10 घंटे तक यातायात बाधित रहने की संभावना है।
गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस द्वारा सोमवार देर रात जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय सेना में एक अहीर रेजिमेंट के निर्माण की मांग के समर्थन में राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (एनएच-48) पर खेरकी दौला टोल प्लाजा से हीरो होंडा चौक तक प्रस्तावित मार्च के कारण बुधवार को दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर करीब 10 घंटे तक यातायात बाधित रहने की संभावना है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि राजमार्ग के पूरे 6. 3 किलोमीटर खंड को बुधवार सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक यातायात के लिए बंद कर दिया जाएगा। लोगों की परेशानी को कम करने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाई गई है।
जयपुर से दिल्ली के लिए यातायात खेरकी दौला टोल प्लाजा से ठीक पहले दक्षिणी परिधीय रोड (एसपीआर) से निर्देशित किया जाएगा और यात्री सोहना रोड के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। दिल्ली से जयपुर जाने वाले यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए गोल्फ कोर्स रोड और सोहना रोड के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग लेने की सलाह दी गई है।
विज्ञप्ति के अनुसार, सभी यातायात को हीरो होंडा चौक से सुभाष चौक और पटौदी रोड की ओर मोड़ दिया जाएगा। दिन भर भारी वाहनों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए पूरे मार्ग को बंद रखा जाएगा। जयपुर से जाने वाले ऐसे वाहनों को कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे को पंचगांव से दिल्ली और फरीदाबाद जाने के लिए लेने की सलाह दी गई है और दिल्ली से जयपुर जाने वालों को सोहना रोड और केएमपी लेने की सलाह दी गई है।
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बुधवार को दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर करीब दस घंटाटे तक यातायात बाधित रहने की संभावना है। गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस द्वारा सोमवार देर रात जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय सेना में एक अहीर रेजिमेंट के निर्माण की मांग के समर्थन में राष्ट्रीय राजमार्ग अड़तालीस पर खेरकी दौला टोल प्लाजा से हीरो होंडा चौक तक प्रस्तावित मार्च के कारण बुधवार को दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर करीब दस घंटाटे तक यातायात बाधित रहने की संभावना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राजमार्ग के पूरे छः. तीन किलोग्राममीटर खंड को बुधवार सुबह सात बजे से शाम पाँच बजे तक यातायात के लिए बंद कर दिया जाएगा। लोगों की परेशानी को कम करने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाई गई है। जयपुर से दिल्ली के लिए यातायात खेरकी दौला टोल प्लाजा से ठीक पहले दक्षिणी परिधीय रोड से निर्देशित किया जाएगा और यात्री सोहना रोड के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। दिल्ली से जयपुर जाने वाले यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए गोल्फ कोर्स रोड और सोहना रोड के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग लेने की सलाह दी गई है। विज्ञप्ति के अनुसार, सभी यातायात को हीरो होंडा चौक से सुभाष चौक और पटौदी रोड की ओर मोड़ दिया जाएगा। दिन भर भारी वाहनों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए पूरे मार्ग को बंद रखा जाएगा। जयपुर से जाने वाले ऐसे वाहनों को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे को पंचगांव से दिल्ली और फरीदाबाद जाने के लिए लेने की सलाह दी गई है और दिल्ली से जयपुर जाने वालों को सोहना रोड और केएमपी लेने की सलाह दी गई है।
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(www. arya-tv. com) मेरठ के अब्दुल्लापुर इलाके में सोमवार को अवैध निर्माण ढहाने गई नगर निगम की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अवैध निर्माण पर चलने वाले बुलडोजर के सामने इलाके की महिलाओं ने लेटकर बुलडोजर को रोक दिया। काफी संख्या में अचानक क्षेत्र की महिलाएं उस स्थान पर पहुंचकर बुलडोजर के सामने ही लेट गईं। बुलडोजर को रोक दिया और बुलडोजर पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिया।
अब्दुल्लापुर में नगर निगम की सरकारी जमीन को कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा लिया है। कब्जाई सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए सोमवार को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन बुलडोजर देखकर इलाके की महिलाएं इकट्ठा होकर आ गईं और बुलडोजर के सामने लेट गईं। नगर निगम की टीम को मौके पर भारी संख्या में महिला पुलिस बल बुलानी पड़ी। महिला पुलिस ने महिलाओं को हटाने का प्रयास किया तो विरोध कर रही महिलाओं ने भी हंगामा करके विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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मेरठ के अब्दुल्लापुर इलाके में सोमवार को अवैध निर्माण ढहाने गई नगर निगम की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अवैध निर्माण पर चलने वाले बुलडोजर के सामने इलाके की महिलाओं ने लेटकर बुलडोजर को रोक दिया। काफी संख्या में अचानक क्षेत्र की महिलाएं उस स्थान पर पहुंचकर बुलडोजर के सामने ही लेट गईं। बुलडोजर को रोक दिया और बुलडोजर पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिया। अब्दुल्लापुर में नगर निगम की सरकारी जमीन को कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा लिया है। कब्जाई सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए सोमवार को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन बुलडोजर देखकर इलाके की महिलाएं इकट्ठा होकर आ गईं और बुलडोजर के सामने लेट गईं। नगर निगम की टीम को मौके पर भारी संख्या में महिला पुलिस बल बुलानी पड़ी। महिला पुलिस ने महिलाओं को हटाने का प्रयास किया तो विरोध कर रही महिलाओं ने भी हंगामा करके विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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रक्षा मंत्रालय के डीप सी रिसर्च (GUGI) के मुख्य निदेशालय के हितों में निर्मित ओशनोग्राफिक अनुसंधान पोत "एवगेनी गोरीग्लेज़ान" को स्थानांतरण के लिए तैयार किया जा रहा है। बेड़ा. यह रूसी रक्षा उद्योग के एक स्रोत द्वारा बताया गया था।
OIS "एवगेनी गोरीग्लेद्ज़ान" ने पिछले साल दिसंबर के अंत में समुद्री परीक्षण पूरा किया, जिसके बाद यंतर बाल्टिक शिपयार्ड ने जहाज को राज्य परीक्षणों में लाने के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की। हालाँकि, यंतर, या यूएससी, या रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी शुरुआत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन सेना को OIS के हस्तांतरण के समय के बारे में डेटा था। सूत्र के मुताबिक, यह इसी साल फरवरी में होगा।
रक्षा मंत्रालय के डीप सी रिसर्च के मुख्य निदेशालय के लिए बनाए गए जहाज "एवगेनी गोरीग्लेज़ान" का हस्तांतरण इस साल फरवरी में एक ऑडिट के बाद निर्धारित है।
- जाता है TASS उसके शब्द।
समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत "एवगेनी गोरीग्लेज़ान" वास्तव में V-305 परियोजना के समुद्री टग MB-92 से बनाया गया था, जिसे 1983 में पोलैंड में 02670 परियोजना के अनुसार बनाया गया था, जिसे अल्माज़ सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो में विकसित किया गया था। जहाज का औपचारिक बिछाने (वास्तव में फिर से बिछाने) 19 मार्च, 2016 को हुआ। 2018 में, रक्षा मंत्रालय के साथ अनुबंध पर फिर से बातचीत करने के बाद फरवरी 2020 में निर्माण बंद कर दिया गया और फिर से शुरू किया गया। पोत को दिसंबर 2020 के अंत में लॉन्च किया गया था।
पोत का विस्थापन - 4 हजार टन, लंबाई - 81 मीटर, चौड़ाई - 16 मीटर, स्वायत्तता - 30 दिन, चालक दल - 32 लोग और अभियान के 25 सदस्य। मुख्य उद्देश्य "पानी के नीचे तकनीकी कार्य करना" है। ओआईएस पानी के भीतर और बचाव वाहनों को ले जाने में सक्षम है।
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रक्षा मंत्रालय के डीप सी रिसर्च के मुख्य निदेशालय के हितों में निर्मित ओशनोग्राफिक अनुसंधान पोत "एवगेनी गोरीग्लेज़ान" को स्थानांतरण के लिए तैयार किया जा रहा है। बेड़ा. यह रूसी रक्षा उद्योग के एक स्रोत द्वारा बताया गया था। OIS "एवगेनी गोरीग्लेद्ज़ान" ने पिछले साल दिसंबर के अंत में समुद्री परीक्षण पूरा किया, जिसके बाद यंतर बाल्टिक शिपयार्ड ने जहाज को राज्य परीक्षणों में लाने के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की। हालाँकि, यंतर, या यूएससी, या रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी शुरुआत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन सेना को OIS के हस्तांतरण के समय के बारे में डेटा था। सूत्र के मुताबिक, यह इसी साल फरवरी में होगा। रक्षा मंत्रालय के डीप सी रिसर्च के मुख्य निदेशालय के लिए बनाए गए जहाज "एवगेनी गोरीग्लेज़ान" का हस्तांतरण इस साल फरवरी में एक ऑडिट के बाद निर्धारित है। - जाता है TASS उसके शब्द। समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत "एवगेनी गोरीग्लेज़ान" वास्तव में V-तीन सौ पाँच परियोजना के समुद्री टग MB-बानवे से बनाया गया था, जिसे एक हज़ार नौ सौ तिरासी में पोलैंड में दो हज़ार छः सौ सत्तर परियोजना के अनुसार बनाया गया था, जिसे अल्माज़ सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो में विकसित किया गया था। जहाज का औपचारिक बिछाने उन्नीस मार्च, दो हज़ार सोलह को हुआ। दो हज़ार अट्ठारह में, रक्षा मंत्रालय के साथ अनुबंध पर फिर से बातचीत करने के बाद फरवरी दो हज़ार बीस में निर्माण बंद कर दिया गया और फिर से शुरू किया गया। पोत को दिसंबर दो हज़ार बीस के अंत में लॉन्च किया गया था। पोत का विस्थापन - चार हजार टन, लंबाई - इक्यासी मीटर, चौड़ाई - सोलह मीटर, स्वायत्तता - तीस दिन, चालक दल - बत्तीस लोग और अभियान के पच्चीस सदस्य। मुख्य उद्देश्य "पानी के नीचे तकनीकी कार्य करना" है। ओआईएस पानी के भीतर और बचाव वाहनों को ले जाने में सक्षम है।
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'हर काम को रोकना सही नहीं, अब लोग समझने लगे हैं'; अरविंद केजरीवाल ने क्यों कही ये बात?
वार्षिक बजट पेश करने में हुई देरी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। बुधवार को दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के हर काम को रोकना सही नहीं है।
दिल्ली सरकार के वार्षिक बजट पेश करने में हुई देरी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। बुधवार को दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली के हर काम को रोकना सही नहीं है। अब लोग समझने लगे हैं और आवाज़ उठाने लगे हैं। प्लीज़, रोज़ रोज़ लड़ना बंद कीजिए। आइये मिलकर दिल्ली का विकास करते हैं, लोगों की सेवा करते हैं। लड़ने में कुछ नहीं रखा। " बता दें कि पिछले तीस सालों में ये पहली बार है जब दिल्ली सरकार का बजट पेश करने में देरी हुई है।
आए दिन दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर विवाद देखने को मिलता रहता है। बीते कुछ दिनों में ये विवाद गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले दिनों अबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई थी जिसके बाद दिल्ली सरकार और एलजी के बीच भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी। इससे पहले भी दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी के बीच विवाद बना रहता है। ये विवाद कभी सोशल मीडिया पर देखने को मिलता है तो कभी किसी न्यूज चैनल या किसी प्रेस काँफ्रेंस में भी देखने को मिल जाता है।
बीते दिनों दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर्स को फिनलैंड ट्रेनिंग के लिए भेजना की योजना बनाई थी। इस मुद्दे को लेकर भी केजरीवाल और एलजी के बीच विवाद देखने को मिला था। इस बार ये विवाद दिल्ली के बजट को लेकर उठा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर दिल्ली के कामों में रोक लगाने का आरोप लगाया है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली के हर काम को रोकना अब सही नहीं है। अब जनता समझने लगी है। इस दौरान केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मिल जुल कर काम करने की भी अपील की और केंद्र सरकार से कहा कि रोज-रोज लड़ना बंद कीजिए।
केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच बजट को लेकर हुए विवाद के बाद बुधवार को दिल्ली का बचट पेश होना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वित्तमंत्री दिल्ली विधानसभा पहुंच चुके हैं। इस बजट के दौरान केजरीवाल सरकार दिल्ली के लोगों के लिए क्या-क्या सौगात लेकर आएगी ये देखने वाली बात होगी।
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'हर काम को रोकना सही नहीं, अब लोग समझने लगे हैं'; अरविंद केजरीवाल ने क्यों कही ये बात? वार्षिक बजट पेश करने में हुई देरी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। बुधवार को दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के हर काम को रोकना सही नहीं है। दिल्ली सरकार के वार्षिक बजट पेश करने में हुई देरी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। बुधवार को दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली के हर काम को रोकना सही नहीं है। अब लोग समझने लगे हैं और आवाज़ उठाने लगे हैं। प्लीज़, रोज़ रोज़ लड़ना बंद कीजिए। आइये मिलकर दिल्ली का विकास करते हैं, लोगों की सेवा करते हैं। लड़ने में कुछ नहीं रखा। " बता दें कि पिछले तीस सालों में ये पहली बार है जब दिल्ली सरकार का बजट पेश करने में देरी हुई है। आए दिन दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर विवाद देखने को मिलता रहता है। बीते कुछ दिनों में ये विवाद गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले दिनों अबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई थी जिसके बाद दिल्ली सरकार और एलजी के बीच भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी। इससे पहले भी दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी के बीच विवाद बना रहता है। ये विवाद कभी सोशल मीडिया पर देखने को मिलता है तो कभी किसी न्यूज चैनल या किसी प्रेस काँफ्रेंस में भी देखने को मिल जाता है। बीते दिनों दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर्स को फिनलैंड ट्रेनिंग के लिए भेजना की योजना बनाई थी। इस मुद्दे को लेकर भी केजरीवाल और एलजी के बीच विवाद देखने को मिला था। इस बार ये विवाद दिल्ली के बजट को लेकर उठा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर दिल्ली के कामों में रोक लगाने का आरोप लगाया है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली के हर काम को रोकना अब सही नहीं है। अब जनता समझने लगी है। इस दौरान केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मिल जुल कर काम करने की भी अपील की और केंद्र सरकार से कहा कि रोज-रोज लड़ना बंद कीजिए। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच बजट को लेकर हुए विवाद के बाद बुधवार को दिल्ली का बचट पेश होना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वित्तमंत्री दिल्ली विधानसभा पहुंच चुके हैं। इस बजट के दौरान केजरीवाल सरकार दिल्ली के लोगों के लिए क्या-क्या सौगात लेकर आएगी ये देखने वाली बात होगी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने के पहले हफ्ते में रूस यात्रा के दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मुलाकात की थी। उस समय यह खबर आई थी कि पीएम मोदी ने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया है।
विवादास्पद भारतीय इस्लामिक उपदेशक और आतंकी गतिविधियों का आरोपी जाकिर नाइक एक बार फिर चर्चा में है। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात के दौरान जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण को लेकर कोई बात नहीं की थी। मलेशियाई मीडिया के अनुसार महातिर मोहम्मद ने यह बात उस समय कही जब उनसे जाकिर नाइक को भारत को लौटाने के संबंध में सवाल पूछे गये।
महातिर मोहम्मद ने कहा, 'बहुत से देश उसे नहीं चाहते। मैं प्रधामंत्री मोदी से मिला था। उन्होंने उसे लेकर कोई मांग नहीं रखी। यह आदमी (जाकिर नाइक) भारत के लिए भी एक मुसीबत है। '
साथ ही मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा, 'जाकिर नाइक इस देश का नागरिक नहीं है। उसे पिछली सरकार से स्थायी नागरिकता मिली थी। स्थायी नागरिक को देश के सिस्टम पर टिप्पणी का अधिकार नहीं होता है। उसने इसका उल्लंघन किया इसलिए उसके बोलने पर रोक लगाई गई है। '
पीएम मोदी ने रूस यात्रा के दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मुलाकात की थी। उस समय यह खबर आई थी कि पीएम मोदी ने नाइक के प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया है। पीएम मोदी ने रूस के पूर्वी सुदूर क्षेत्र में यहां पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) की पांचवीं बैठक के इतर मलेशिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।
पीएम मोदी और महातिर की मुलाकात के बाद भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने तब बैठक की जानकारी देते हुए बताया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने महातिर से अपनी मुलाकात में नाइक के मलेशिया से प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया है। कट्टरपंथी उपदेशक नाइक 2016 में भारत से चला गया था और बाद में मुस्लिम बहुल मलेशिया में जाकर रहने लगा। उसे वहां स्थाई निवास की अनुमति मिली है।
नाइक भारत के अधिकारियों के लिए 2016 से कथित धनशोधन के मामले में और नफरत भरे भाषणों से आतंकवाद को भड़काने के मामले में वांछित है। पिछले 8 अगस्त को मलेशियाई हिंदुओं और चीनियों के खिलाफ नाइक के बयान के बाद उसके इस देश में किसी भी सार्वजनिक गतिविधि में शामिल रहने पर रोक लगा दी गयी है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने के पहले हफ्ते में रूस यात्रा के दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मुलाकात की थी। उस समय यह खबर आई थी कि पीएम मोदी ने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया है। विवादास्पद भारतीय इस्लामिक उपदेशक और आतंकी गतिविधियों का आरोपी जाकिर नाइक एक बार फिर चर्चा में है। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात के दौरान जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण को लेकर कोई बात नहीं की थी। मलेशियाई मीडिया के अनुसार महातिर मोहम्मद ने यह बात उस समय कही जब उनसे जाकिर नाइक को भारत को लौटाने के संबंध में सवाल पूछे गये। महातिर मोहम्मद ने कहा, 'बहुत से देश उसे नहीं चाहते। मैं प्रधामंत्री मोदी से मिला था। उन्होंने उसे लेकर कोई मांग नहीं रखी। यह आदमी भारत के लिए भी एक मुसीबत है। ' साथ ही मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा, 'जाकिर नाइक इस देश का नागरिक नहीं है। उसे पिछली सरकार से स्थायी नागरिकता मिली थी। स्थायी नागरिक को देश के सिस्टम पर टिप्पणी का अधिकार नहीं होता है। उसने इसका उल्लंघन किया इसलिए उसके बोलने पर रोक लगाई गई है। ' पीएम मोदी ने रूस यात्रा के दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मुलाकात की थी। उस समय यह खबर आई थी कि पीएम मोदी ने नाइक के प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया है। पीएम मोदी ने रूस के पूर्वी सुदूर क्षेत्र में यहां पूर्वी आर्थिक मंच की पांचवीं बैठक के इतर मलेशिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। पीएम मोदी और महातिर की मुलाकात के बाद भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने तब बैठक की जानकारी देते हुए बताया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने महातिर से अपनी मुलाकात में नाइक के मलेशिया से प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया है। कट्टरपंथी उपदेशक नाइक दो हज़ार सोलह में भारत से चला गया था और बाद में मुस्लिम बहुल मलेशिया में जाकर रहने लगा। उसे वहां स्थाई निवास की अनुमति मिली है। नाइक भारत के अधिकारियों के लिए दो हज़ार सोलह से कथित धनशोधन के मामले में और नफरत भरे भाषणों से आतंकवाद को भड़काने के मामले में वांछित है। पिछले आठ अगस्त को मलेशियाई हिंदुओं और चीनियों के खिलाफ नाइक के बयान के बाद उसके इस देश में किसी भी सार्वजनिक गतिविधि में शामिल रहने पर रोक लगा दी गयी है।
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गोरखपुर (ब्यूरो). एनई रेलवे में वाराणसी, लखनऊ और इज्जत नगर डिवीजन आते हैैं। इनके डिवीजन के अंडर में विभिन्न रेलवे स्टेशनों से यात्री जनरल और रिजर्व टिकट लेकर यात्रा करते हैैं, लेकिन इनमें भी कई ऐसे यात्री होतेे हैैं। जो बिना टिकट यात्रा प्रिफर करते हैैं और बीच रास्ते में पकड़े जाने पर जुर्माना भरते हैैं। ऐसे पैसेंजर्स की धरपकड़ के लिए टीटीई और आरपीएफ की संयुक्त टीम लगातार चेकिंग अभियान भी चलाती है। यही वजह है कि इस बार 2022-23 के अप्रैल, मई और जून में लखनऊ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले गोरखपुर, सहजनवां, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी और लखनऊ स्टेशन से कुल 3,29,087 यात्रियों को बेटिकट पकड़ा गया। वहीं, वाराणसी डिवीजन के अंतर्गत आने वाले छावनी स्टेशन, चौरीचौरा, बैतालपुर, देवरिया, भटनी, वाराणसी आदि स्टेशनों पर कार्रवाई की गई। इज्जतनगर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले काठगोदाम, बरेली स्टेशन आदि से 81,186 यात्री पकड़े गए।
डिवीजन - हाई पेनाल्टी (2022-23) - हाई पेनाल्टी (2021-22)
डिवीजन - वसूला गया जुर्माना (2022-23) - (2021-22)
(नोटः वसूला गया जुर्माना अप्रैल से जून तक रुपए में है. )
पिछले साल की तुलना में इस क्वार्टर में सबसे ज्यादा यात्री बिना टिकट पकड़े गए हैैं। इन सभी से जुर्माना वसूला गया है। लखनऊ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों से ज्यादा यात्री पकड़े गए हैैं। यात्री के साथ-साथ बिना लगेज का भी जुर्माना शामिल है।
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गोरखपुर . एनई रेलवे में वाराणसी, लखनऊ और इज्जत नगर डिवीजन आते हैैं। इनके डिवीजन के अंडर में विभिन्न रेलवे स्टेशनों से यात्री जनरल और रिजर्व टिकट लेकर यात्रा करते हैैं, लेकिन इनमें भी कई ऐसे यात्री होतेे हैैं। जो बिना टिकट यात्रा प्रिफर करते हैैं और बीच रास्ते में पकड़े जाने पर जुर्माना भरते हैैं। ऐसे पैसेंजर्स की धरपकड़ के लिए टीटीई और आरपीएफ की संयुक्त टीम लगातार चेकिंग अभियान भी चलाती है। यही वजह है कि इस बार दो हज़ार बाईस-तेईस के अप्रैल, मई और जून में लखनऊ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले गोरखपुर, सहजनवां, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी और लखनऊ स्टेशन से कुल तीन,उनतीस,सत्तासी यात्रियों को बेटिकट पकड़ा गया। वहीं, वाराणसी डिवीजन के अंतर्गत आने वाले छावनी स्टेशन, चौरीचौरा, बैतालपुर, देवरिया, भटनी, वाराणसी आदि स्टेशनों पर कार्रवाई की गई। इज्जतनगर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले काठगोदाम, बरेली स्टेशन आदि से इक्यासी,एक सौ छियासी यात्री पकड़े गए। डिवीजन - हाई पेनाल्टी - हाई पेनाल्टी डिवीजन - वसूला गया जुर्माना - पिछले साल की तुलना में इस क्वार्टर में सबसे ज्यादा यात्री बिना टिकट पकड़े गए हैैं। इन सभी से जुर्माना वसूला गया है। लखनऊ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों से ज्यादा यात्री पकड़े गए हैैं। यात्री के साथ-साथ बिना लगेज का भी जुर्माना शामिल है।
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शनिवार कि देर शाम किशोर मोनू पुत्र भुवर उम्र 12 वर्ष घर से कुछ ही दूरी पर आम के बगीचे में गया हुआ था। जहां आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गयी।
मीरजापुरः शनिवार की देर शाम जिले में तेज बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से अलग- अलग थाना क्षेत्र में पांच की मौत हो गयी। शनिवार को मड़िहान थाना क्षेत्र के ददरा पहाड़ी गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से सगे भाई बहन की मौत हो गई।
शनिवार की देर शाम सगे भाई बहन घर के दरवाज़े पर खेल रहे थे। इस दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने से पूनम पुत्री विजय उम्र 14 वर्ष व पवन पुत्र विजय उम्र 10 वर्ष की मौत हो गयी। देहात कोतवाली क्षेत्र के टॉड गांव में शनिवार की देर शाम भारी बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत हो गई।
शनिवार कि देर शाम किशोर मोनू पुत्र भुवर उम्र 12 वर्ष घर से कुछ ही दूरी पर आम के बगीचे में गया हुआ था। जहां आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गयी। मड़िहान थाना क्षेत्र के रामपुर रेक्सा गांव में नहर की पुलिया को बैठकर एक युवक हवा ले रहा था।
इसी बीच आकाशीय बिजली की चपेट में आने से यूवक बालनाथ धरकार पुत्र भुल्लर उम्र 38 वर्ष गंभीर रूप से झुलस गया। आनन-फानन में परिजनों ने स्थानीय अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। लालगंज थाना क्षेत्र के धोबहा देवघटा गांव में चपेट में आने से वीरेंद्र कोल पुत्र अवध नारायण कोल उम्र 30 की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। दूसरी घटना हरदी गुलालपुर गाँव निवासी पिंटू पुत्र राममूरत उम्र 30 वर्ष अपने खेत मे जोताई कर रहे थे। उसी समय काल बनकर आकाशीय बिजली गिरने से उनकी मौत हो गयी। जानकारी के मुताबिक मृतक अभी पिता बनने वाला है।
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शनिवार कि देर शाम किशोर मोनू पुत्र भुवर उम्र बारह वर्ष घर से कुछ ही दूरी पर आम के बगीचे में गया हुआ था। जहां आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गयी। मीरजापुरः शनिवार की देर शाम जिले में तेज बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से अलग- अलग थाना क्षेत्र में पांच की मौत हो गयी। शनिवार को मड़िहान थाना क्षेत्र के ददरा पहाड़ी गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से सगे भाई बहन की मौत हो गई। शनिवार की देर शाम सगे भाई बहन घर के दरवाज़े पर खेल रहे थे। इस दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने से पूनम पुत्री विजय उम्र चौदह वर्ष व पवन पुत्र विजय उम्र दस वर्ष की मौत हो गयी। देहात कोतवाली क्षेत्र के टॉड गांव में शनिवार की देर शाम भारी बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बारह वर्षीय किशोर की मौत हो गई। शनिवार कि देर शाम किशोर मोनू पुत्र भुवर उम्र बारह वर्ष घर से कुछ ही दूरी पर आम के बगीचे में गया हुआ था। जहां आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गयी। मड़िहान थाना क्षेत्र के रामपुर रेक्सा गांव में नहर की पुलिया को बैठकर एक युवक हवा ले रहा था। इसी बीच आकाशीय बिजली की चपेट में आने से यूवक बालनाथ धरकार पुत्र भुल्लर उम्र अड़तीस वर्ष गंभीर रूप से झुलस गया। आनन-फानन में परिजनों ने स्थानीय अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। लालगंज थाना क्षेत्र के धोबहा देवघटा गांव में चपेट में आने से वीरेंद्र कोल पुत्र अवध नारायण कोल उम्र तीस की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। दूसरी घटना हरदी गुलालपुर गाँव निवासी पिंटू पुत्र राममूरत उम्र तीस वर्ष अपने खेत मे जोताई कर रहे थे। उसी समय काल बनकर आकाशीय बिजली गिरने से उनकी मौत हो गयी। जानकारी के मुताबिक मृतक अभी पिता बनने वाला है।
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तोरई एक ऐसी सब्जी है जिसे खाना हर कोई पसंद नहीं करता है.
लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इसकी सब्जी बेहद पसंद आती है.
बता दें कि तोरई शरीर को ठंडक पहुंचाती है और यह सेहत के लिए बहुत गुणकारी है.
तोरई में मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से दूर रखते हैं.
इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाया जाता है जो शरीर को इंफेक्शन के खतरे से बचाता है.
शोध के अनुसार तोरई खाने से सिर दर्द ठीक करने में मदद मिलती है.
तोरई में एंटी-अल्सर भी गुण पाया जाता है जो गैस्ट्रिक अल्सर जैसी बीमारी के खतरे से शरीर को बचाता है.
तोरई डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करती है.
पेचिश को ठीक करने में सहायक होती है तोरई.
तोरई का सेवन बढ़ते वजन को कम करने में सहायक होता है.
तोरई के सूखे पत्तों का पाउडर कई तरह की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है.
तोरई की सब्जी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है.
कई सब्जियां मिक्स कर तोरई का सूप बनाकर पीने से शरीर स्वस्थ और एनर्जेटिक रहता है.
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तोरई एक ऐसी सब्जी है जिसे खाना हर कोई पसंद नहीं करता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इसकी सब्जी बेहद पसंद आती है. बता दें कि तोरई शरीर को ठंडक पहुंचाती है और यह सेहत के लिए बहुत गुणकारी है. तोरई में मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से दूर रखते हैं. इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाया जाता है जो शरीर को इंफेक्शन के खतरे से बचाता है. शोध के अनुसार तोरई खाने से सिर दर्द ठीक करने में मदद मिलती है. तोरई में एंटी-अल्सर भी गुण पाया जाता है जो गैस्ट्रिक अल्सर जैसी बीमारी के खतरे से शरीर को बचाता है. तोरई डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करती है. पेचिश को ठीक करने में सहायक होती है तोरई. तोरई का सेवन बढ़ते वजन को कम करने में सहायक होता है. तोरई के सूखे पत्तों का पाउडर कई तरह की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है. तोरई की सब्जी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है. कई सब्जियां मिक्स कर तोरई का सूप बनाकर पीने से शरीर स्वस्थ और एनर्जेटिक रहता है.
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Dhanbad: धनबाद सदर थाना क्षेत्र में अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को एक मरीज की मौत हो गयी. घटना एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल की है, जहां कुमारडुबी निवासी संजय सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक के परिजनों का आरोप है कि 26 अप्रैल की रात मरीज को जालान अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच के नाम पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा पैसे लिये गये. लेकिन ना तो किसी प्रकार की जांच की गयी और ना ही इसकी रिपोर्ट बनायी गयी. यह अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही है.
परिजनों ने कहा है कि लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक अस्पताल प्रबंधन ने लिये. 28 की जगह 29 तारीख को भी जांच करने की बात अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया गया. सारे पैसे भी दिये गये. लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. कहा कि मरीज की मौत के बाद भी अस्पताल में इलाज के नाम पर पैसा मांगा जाता है. इस अस्पताल में कई और मरीजों के साथ भी यही हो रहा है. इसे रोका जाना चाहिए.
वहीं हंगामे के बाद अस्पताल से सभी कर्मी भाग गये. अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर हत्या का मामला दर्ज करवाने की बात कही जा रही है. मृतक के परिजनों ने धनबाद एसएसपी से न्याय की गुहार लगायी है. इस मामले की जांच में पुलिस जुट गई है. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही मामला स्पष्ट हो पायेगा.
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Dhanbad: धनबाद सदर थाना क्षेत्र में अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को एक मरीज की मौत हो गयी. घटना एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल की है, जहां कुमारडुबी निवासी संजय सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक के परिजनों का आरोप है कि छब्बीस अप्रैल की रात मरीज को जालान अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच के नाम पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा पैसे लिये गये. लेकिन ना तो किसी प्रकार की जांच की गयी और ना ही इसकी रिपोर्ट बनायी गयी. यह अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही है. परिजनों ने कहा है कि लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक अस्पताल प्रबंधन ने लिये. अट्ठाईस की जगह उनतीस तारीख को भी जांच करने की बात अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया गया. सारे पैसे भी दिये गये. लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. कहा कि मरीज की मौत के बाद भी अस्पताल में इलाज के नाम पर पैसा मांगा जाता है. इस अस्पताल में कई और मरीजों के साथ भी यही हो रहा है. इसे रोका जाना चाहिए. वहीं हंगामे के बाद अस्पताल से सभी कर्मी भाग गये. अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर हत्या का मामला दर्ज करवाने की बात कही जा रही है. मृतक के परिजनों ने धनबाद एसएसपी से न्याय की गुहार लगायी है. इस मामले की जांच में पुलिस जुट गई है. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही मामला स्पष्ट हो पायेगा.
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सैटरडे को फीमेल हॉस्पिटल में एक प्रेगनेंट महिला जांच के लिए आई। करीब 12. 30 बजे हॉस्पिटल में लैब टेक्नीशियन राम नरेश पटेल ने महिला से जांच के लिए 100 रुपए मांगे। इस पर महिला ने पैसे देने से मना किया, तो आरोपी राम नरेश ने उसे भगा दिया। महिला ने डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में फोर्थ क्लास इंप्लॉई और उसके रिश्तेदार नेत्रपाल से परेशानी बताई। नेत्रपाल ने राम नरेश से इस पर ऑब्जेक्शन जताया तो उसने नेत्रपाल की सबके सामने बुरी तरह पिटाई कर दी।
पीटने की खबर से डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की फोर्थ क्लास इंप्लॉईज एसोसिएशन के मेंबर्स भड़क गए। मेंबर्स दोनों को लेकर फीमेल हॉस्पिटल की सीएमएस से कंप्लेन करने पहुंचे। नाराज इंप्लॉईज ने आरोपी लैब टेक्नीशियन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं हंगामा बढ़ता देख सीएमएस डॉ। स्नेहलता सिंह अपने ऑफिस से बाहर निकल गईं। इस दौरान हंगामे की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस आरोपी लैब टेक्नीशियन और पीडि़त फोर्थ क्लास इंप्लॉई को थाने ले गई।
डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में पेशेंट्स से रिश्वतखोरी के आरोप नए नहीं हैं। 6 दिन पहले ओपीडी में चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ। वीपी भारद्वाज पर एक बीएसएफ जवान और एक लड़की ने मेडिकल बिल पर सिग्नेचर करने और इलाज करने के लिए पैसे लेने के आरोप लगाए। सीएमएस डॉ। आरसी डिमरी ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।
फीमेल हॉस्पिटल के स्टाफ और वहां मौजूद पेशेंट्स ने जांच के लिए रोजाना पैसे लिए जाने की बात एक्सेप्ट की। पेशेंट्स का कहना है कि आरोपी लैब टेक्नीशियन जांच के लिए 40-100 रुपए तक की वसूली करता है। वहीं पैसे ना देने वालों का नंबर आने के बावजूद उनकी पर्ची सबसे नीचे रख देता है। कुछ पेशेंट्स ने कहा कि कई बार सुबह से लाइन में खड़े होने के बावजूद दिन बीत जाने तक नंबर नहीं आता। वहीं कंप्लेन करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। इसलिए मजबूरी में पैसे देकर जांच करानी होती है।
'आरोपी लैब टेक्नीशियन के खिलाफ इंक्वॉयरी शुरू की है। जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट एडी हेल्थ को सौंपी जाएगी। हालांकि पेशेंट ने आरोपी की ओर से पैसे नहीं बल्कि अगले दिन बुलाने की बात कही है. '
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सैटरडे को फीमेल हॉस्पिटल में एक प्रेगनेंट महिला जांच के लिए आई। करीब बारह. तीस बजे हॉस्पिटल में लैब टेक्नीशियन राम नरेश पटेल ने महिला से जांच के लिए एक सौ रुपयापए मांगे। इस पर महिला ने पैसे देने से मना किया, तो आरोपी राम नरेश ने उसे भगा दिया। महिला ने डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में फोर्थ क्लास इंप्लॉई और उसके रिश्तेदार नेत्रपाल से परेशानी बताई। नेत्रपाल ने राम नरेश से इस पर ऑब्जेक्शन जताया तो उसने नेत्रपाल की सबके सामने बुरी तरह पिटाई कर दी। पीटने की खबर से डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की फोर्थ क्लास इंप्लॉईज एसोसिएशन के मेंबर्स भड़क गए। मेंबर्स दोनों को लेकर फीमेल हॉस्पिटल की सीएमएस से कंप्लेन करने पहुंचे। नाराज इंप्लॉईज ने आरोपी लैब टेक्नीशियन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं हंगामा बढ़ता देख सीएमएस डॉ। स्नेहलता सिंह अपने ऑफिस से बाहर निकल गईं। इस दौरान हंगामे की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस आरोपी लैब टेक्नीशियन और पीडि़त फोर्थ क्लास इंप्लॉई को थाने ले गई। डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में पेशेंट्स से रिश्वतखोरी के आरोप नए नहीं हैं। छः दिन पहले ओपीडी में चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ। वीपी भारद्वाज पर एक बीएसएफ जवान और एक लड़की ने मेडिकल बिल पर सिग्नेचर करने और इलाज करने के लिए पैसे लेने के आरोप लगाए। सीएमएस डॉ। आरसी डिमरी ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। फीमेल हॉस्पिटल के स्टाफ और वहां मौजूद पेशेंट्स ने जांच के लिए रोजाना पैसे लिए जाने की बात एक्सेप्ट की। पेशेंट्स का कहना है कि आरोपी लैब टेक्नीशियन जांच के लिए चालीस-एक सौ रुपयापए तक की वसूली करता है। वहीं पैसे ना देने वालों का नंबर आने के बावजूद उनकी पर्ची सबसे नीचे रख देता है। कुछ पेशेंट्स ने कहा कि कई बार सुबह से लाइन में खड़े होने के बावजूद दिन बीत जाने तक नंबर नहीं आता। वहीं कंप्लेन करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। इसलिए मजबूरी में पैसे देकर जांच करानी होती है। 'आरोपी लैब टेक्नीशियन के खिलाफ इंक्वॉयरी शुरू की है। जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट एडी हेल्थ को सौंपी जाएगी। हालांकि पेशेंट ने आरोपी की ओर से पैसे नहीं बल्कि अगले दिन बुलाने की बात कही है. '
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लॉस एंजेलिसः हॉलीवुड के जाने माने अभिनेता और फिल्मकार बेन एफलेक पिछले कुछ वक्त से उन खबरों को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें कहा जा रहा था कि वह अब बैटमैन की फिल्मों में काम करते हुए दिखाई नहीं देंगे। लेकिन हाल ही में एफलेक ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। बल्कि उन्होंने इस सुपरहीरो की भूमिका निभाने को लेकर अपने आप को 'दुनिया का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति' करार दिया। एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, सैन डियागो में चल रहे कॉमिक-कॉन में 'जस्टिस लीग' पर एक पैनल परिचर्चा के दौरान एफलेक ने उन अफवाहों को खारिज किया, जिसमें वार्नर बंधुओं द्वारा एफलेक को इस सीरीज से निकालने की तैयारी करने की बात कही गई है।
एफलेक ने कहा, "मैं दुनिया का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हूं। बैटमैन इसका सबसे अच्छा हिस्सा है। " एफलेक को मूलतः 'द बैटमैन' के निर्देशन के लिए चुना गया था। हालांकि इस साल की शुरुआत में उन्होंने फिल्म के निर्देशन से हाथ खींच लिया और उनकी जगह मैट रीवीस इसका निर्देशन कर रहे हैं।
एफलेक ने कहा, "एक गलतफहमी है कि मैं फिल्म का निर्देशन नहीं कर रहा हूं, इसलिए मैं इसके बारे में उत्साहित नहीं था। " (अब 'लिंकिन पार्क' के लीड सिंगर चेस्टर बेनिंगटन ने किया सुसाइड)
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लॉस एंजेलिसः हॉलीवुड के जाने माने अभिनेता और फिल्मकार बेन एफलेक पिछले कुछ वक्त से उन खबरों को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें कहा जा रहा था कि वह अब बैटमैन की फिल्मों में काम करते हुए दिखाई नहीं देंगे। लेकिन हाल ही में एफलेक ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। बल्कि उन्होंने इस सुपरहीरो की भूमिका निभाने को लेकर अपने आप को 'दुनिया का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति' करार दिया। एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, सैन डियागो में चल रहे कॉमिक-कॉन में 'जस्टिस लीग' पर एक पैनल परिचर्चा के दौरान एफलेक ने उन अफवाहों को खारिज किया, जिसमें वार्नर बंधुओं द्वारा एफलेक को इस सीरीज से निकालने की तैयारी करने की बात कही गई है। एफलेक ने कहा, "मैं दुनिया का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हूं। बैटमैन इसका सबसे अच्छा हिस्सा है। " एफलेक को मूलतः 'द बैटमैन' के निर्देशन के लिए चुना गया था। हालांकि इस साल की शुरुआत में उन्होंने फिल्म के निर्देशन से हाथ खींच लिया और उनकी जगह मैट रीवीस इसका निर्देशन कर रहे हैं। एफलेक ने कहा, "एक गलतफहमी है कि मैं फिल्म का निर्देशन नहीं कर रहा हूं, इसलिए मैं इसके बारे में उत्साहित नहीं था। "
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संबंधित डिग्री कॉलेज के शिक्षकों द्वारा आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में एलुमनाई मीट कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व विद्यालय में अपना विरोध यात्रा निकाला। इस कार्यक्रम के दौरान गुआकटा के अध्यक्ष के डी तिवारी ने कहां के वर्तमान कुलपति तानाशाह है। वह शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं। साथ में छात्रों का भी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के संबंधित डिग्री कॉलेज के शिक्षकों द्वारा आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में एलुमनाई मीट कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व विद्यालय में अपना विरोध यात्रा निकाला। इस कार्यक्रम के दौरान गुआकटा के अध्यक्ष के डी तिवारी ने कहां के वर्तमान कुलपति तानाशाह है। वह शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं। साथ में छात्रों का भी। आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से शोषण किया जा रहा है। पुरातन छात्रों के कार्यक्रम के नाम पर धन की लूट की जा रही है। पुरातन छात्र मतलब जो गोरखपुर विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद अन्य क्षेत्र में अपना कार्य कर रहे हैं। या शिक्षा क्षेत्र में ही कार्य कर रहे हैं। यहां पर जो वर्तमान में छात्रा उनसे भी और शिक्षकों से भी इस कार्यक्रम के नाम पर धन की डिमांड की जा रही है।
वहीं संघ के वर्तमान महामंत्री धीरेंद्र सिंह ने कहा कुलपति पूरी तरह से निरंकुश है। ना तो मुख्यमंत्री की बात मानते हैं। और ना ही प्रबंध समिति की। आए दिन शिक्षकों का शोषण होता रहता है। शारीरिक और मानसिक रूप से। कुलपति द्वारा दुर्व्यवहार भी किया जाता है। हम अपनी मांग से तब तक नहीं हटेंगे जब तक कुलपति के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जाती है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा। विश्वविद्यालय को पूरी तरह से लूटने के प्रयास में है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संबंधित डिग्री कॉलेज के शिक्षकों द्वारा आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में एलुमनाई मीट कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व विद्यालय में अपना विरोध यात्रा निकाला। इस कार्यक्रम के दौरान गुआकटा के अध्यक्ष के डी तिवारी ने कहां के वर्तमान कुलपति तानाशाह है। वह शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं। साथ में छात्रों का भी। गोरखपुर विश्वविद्यालय के संबंधित डिग्री कॉलेज के शिक्षकों द्वारा आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में एलुमनाई मीट कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व विद्यालय में अपना विरोध यात्रा निकाला। इस कार्यक्रम के दौरान गुआकटा के अध्यक्ष के डी तिवारी ने कहां के वर्तमान कुलपति तानाशाह है। वह शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं। साथ में छात्रों का भी। आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से शोषण किया जा रहा है। पुरातन छात्रों के कार्यक्रम के नाम पर धन की लूट की जा रही है। पुरातन छात्र मतलब जो गोरखपुर विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद अन्य क्षेत्र में अपना कार्य कर रहे हैं। या शिक्षा क्षेत्र में ही कार्य कर रहे हैं। यहां पर जो वर्तमान में छात्रा उनसे भी और शिक्षकों से भी इस कार्यक्रम के नाम पर धन की डिमांड की जा रही है। वहीं संघ के वर्तमान महामंत्री धीरेंद्र सिंह ने कहा कुलपति पूरी तरह से निरंकुश है। ना तो मुख्यमंत्री की बात मानते हैं। और ना ही प्रबंध समिति की। आए दिन शिक्षकों का शोषण होता रहता है। शारीरिक और मानसिक रूप से। कुलपति द्वारा दुर्व्यवहार भी किया जाता है। हम अपनी मांग से तब तक नहीं हटेंगे जब तक कुलपति के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जाती है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा। विश्वविद्यालय को पूरी तरह से लूटने के प्रयास में है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।
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नई दिल्लीः सऊदी अरब के मदीना शहर में एक दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया है जहां दिनदहाड़े एक 6 साल के बच्चे की गला रेत कर हत्या कर दी गई. परिवार के सदस्यों के अनुसार 6 साल का ज़कारिया अल-जबर अपनी मां के साथ पैगंबर की मस्जिद जा रहा था तभी टैक्सी चालक ने रास्ता बदल लिया और एक सुनसान जगह टैक्सी लगाकर बच्चे को गाड़ी से बाहर निकलने को कहा.
ड्राइवर ने कांच की बोतल तोड़कर उससे बच्चे का गला काट दिया और तब तक उसे मारता रहा जब तक उसकी मौत नहीं हो गयी. बच्चे की मां ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन असफल रही. हालांकि वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने भी उस आदमी को बच्चे पर हमला करने से रोकने की कोशिश की थी लेकिन वह भी बच्चे को बचाने में असफल रहा लेकिन पुलिसकर्मी ने उसे पकड़ लिया.
साऊदी अरब के अधिकारियों द्वारा यह दावा किया गया है कि टैक्सी ड्राइवर की मानसिक हालत ठीक नहीं थी जिसकी वजह से उसने बच्चे की हत्या की लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो यह एक सांप्रदायिक हिंसा का एक भाग था जो सऊदी अरब के शिया अल्पसंख्यकों के खिलाफ पिछले काफी समय से चल रही है.
इस घटना के बाद से सऊदी अरब की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सवाल उठने लगे है. मानव अधिकार मामलों में सऊदी अरब के रिकॅार्ड्स की बात करें तो इसका रिकॅार्ड बहुत खराब रहा है. चूंकि बच्चा अल्पसंख्यक शिया समुदाय का हिस्सा था जिसके बाद से समुदाय की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं.
घटना की जांच चल रही है लेकिन जांच में संप्रदायवाद की संभावित कड़ी पर अब तक पुलिस विभाग या सऊदी अरब द्वारा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. हादसे में मारे गए बच्चे के अंतिम संस्कार के वीडियो फुटेज को फेसबुक पर पोस्ट किया गया था.
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नई दिल्लीः सऊदी अरब के मदीना शहर में एक दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया है जहां दिनदहाड़े एक छः साल के बच्चे की गला रेत कर हत्या कर दी गई. परिवार के सदस्यों के अनुसार छः साल का ज़कारिया अल-जबर अपनी मां के साथ पैगंबर की मस्जिद जा रहा था तभी टैक्सी चालक ने रास्ता बदल लिया और एक सुनसान जगह टैक्सी लगाकर बच्चे को गाड़ी से बाहर निकलने को कहा. ड्राइवर ने कांच की बोतल तोड़कर उससे बच्चे का गला काट दिया और तब तक उसे मारता रहा जब तक उसकी मौत नहीं हो गयी. बच्चे की मां ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन असफल रही. हालांकि वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने भी उस आदमी को बच्चे पर हमला करने से रोकने की कोशिश की थी लेकिन वह भी बच्चे को बचाने में असफल रहा लेकिन पुलिसकर्मी ने उसे पकड़ लिया. साऊदी अरब के अधिकारियों द्वारा यह दावा किया गया है कि टैक्सी ड्राइवर की मानसिक हालत ठीक नहीं थी जिसकी वजह से उसने बच्चे की हत्या की लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो यह एक सांप्रदायिक हिंसा का एक भाग था जो सऊदी अरब के शिया अल्पसंख्यकों के खिलाफ पिछले काफी समय से चल रही है. इस घटना के बाद से सऊदी अरब की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सवाल उठने लगे है. मानव अधिकार मामलों में सऊदी अरब के रिकॅार्ड्स की बात करें तो इसका रिकॅार्ड बहुत खराब रहा है. चूंकि बच्चा अल्पसंख्यक शिया समुदाय का हिस्सा था जिसके बाद से समुदाय की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं. घटना की जांच चल रही है लेकिन जांच में संप्रदायवाद की संभावित कड़ी पर अब तक पुलिस विभाग या सऊदी अरब द्वारा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. हादसे में मारे गए बच्चे के अंतिम संस्कार के वीडियो फुटेज को फेसबुक पर पोस्ट किया गया था.
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बिहार के सारण से सांसद राजीव प्रताप रूडी एंबुलेंस का दुरुपयोग करने और दर्जनों एंबुलेंस का इस्तेमाल नहीं करने के मामले में घिर गए हैं। पप्पू यादव ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रूडी ने बचाव में यादव पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व बिहार के सारण क्षेत्र से लोकसभा सदस्य राजीव प्रताप रूडी पर पूर्व सांसद पप्पू यादव ने जनसंसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल रही हैं और सांसद कोटे से खरीदी गई एंबुलेंस में बालू ढोई जा रही है। यादव ने एक जगह दो दर्जन एंबुलेंस बिना इस्तेमाल के खड़ी होने का भी दावा किया। उन्होंने ट्वीट कर मामले में पीएम से शिकायत की है। वहीं रूडी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण ड्राइवर नहीं मिलने से एंबुलेंस रखी हुई थी।
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मधेपुरा के पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी (जाप) के अध्यक्ष हैं। यादव ने कहा कि इन सभी एंबुलेंस की खरीदी सांसद राजीव प्रताप रूडी के कोष से की गई थी। बालू ढोने वाली एंबुलेंस पर रूडी का नाम लिखा था और संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) के कोष से इसकी खरीदारी हुई थी।
अपने समर्थकों के साथ पप्पू यादव शुक्रवार को अचानक उस जगह पहुंच गए जहां कई सारी एंबुलेंस खड़ी थी और सुरक्षा कर्मियों से बहस होने के बाद वह परिसर के भीतर चले। परिसर में कई एंबुलेंस को तिरपाल से ढककर रखा गया था।
कोविड-19 महामारी जब अपने चरम पर है, ऐसे में मरीजों को पहुंचाने में एंबुलेंस का इस्तेमाल नहीं करने के लिए पप्पू यादव ने भाजपा सांसद रूडी की तीखी आलोचना की। यादव ने कहा कि लोगों को एक किलोमीटर तक कोविड मरीज को ले जाने के लिए 12,000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। एंबुलेंस की घोर किल्लत है। ऐसे में सारण के सांसद ने एंबुलेंस को बिना इस्तेमाल के खड़ा कर रखा है। पप्पू यादव ने कहा, कि उन्होंने (रूडी) अपने कुछ लोगों को एंबुलेंस बांट दी। इस मामले की जांच होनी चाहिए। एमपीलैड कोष जनता का धन है।
वहीं, रूडी के एक समर्थक ने यादव पर परिसर में जबरन घुसने और एंबुलेंस में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि शनिवार को अमनौर थाने में यादव के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गयी।
एंबुलेंस बिना इस्तेमाल के रखे होने का मामला सामने आने के बाद रूडी और यादव के बीच जुबानी जंग हुई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सारण के मौजूदा सांसद रूडी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण ड्राइवर नहीं मिलने से एंबुलेंस रखी हुई थी। रूडी ने यादव पर मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया और उन्हें ड्राइवरों की व्यवस्था करने की चुनौती दी।
इसके बाद, यादव ने कुछ ड्राइवरों के साथ पटना में संवाददाता सम्मेलन किया। यादव ने कहा कि उन्होंने ड्राइवरों की व्यवस्था कर दी है और वे एंबुलेंस चलाने के लिए तैयार हैं। यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ऐसी गतिविधियां रोकने और काम करने के लिए राजी ड्राइवरों की सेवाएं लेने की अपील की।
मधेपुरा से कई बार सांसद रहे पप्पू यादव कोविड-19 महामारी के दौरान लगातार मरीजों की सेवा में जुटे हैं। उन्होंने जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर और बिस्तर दिलाने में भी मदद की है। पप्पू यादव 2019 के आम चुनाव में जद(यू) नेता दिनेश चंद्र यादव से हार गए थे।
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बिहार के सारण से सांसद राजीव प्रताप रूडी एंबुलेंस का दुरुपयोग करने और दर्जनों एंबुलेंस का इस्तेमाल नहीं करने के मामले में घिर गए हैं। पप्पू यादव ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रूडी ने बचाव में यादव पर राजनीति करने का आरोप लगाया। पूर्व केंद्रीय मंत्री व बिहार के सारण क्षेत्र से लोकसभा सदस्य राजीव प्रताप रूडी पर पूर्व सांसद पप्पू यादव ने जनसंसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल रही हैं और सांसद कोटे से खरीदी गई एंबुलेंस में बालू ढोई जा रही है। यादव ने एक जगह दो दर्जन एंबुलेंस बिना इस्तेमाल के खड़ी होने का भी दावा किया। उन्होंने ट्वीट कर मामले में पीएम से शिकायत की है। वहीं रूडी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण ड्राइवर नहीं मिलने से एंबुलेंस रखी हुई थी। राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मधेपुरा के पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष हैं। यादव ने कहा कि इन सभी एंबुलेंस की खरीदी सांसद राजीव प्रताप रूडी के कोष से की गई थी। बालू ढोने वाली एंबुलेंस पर रूडी का नाम लिखा था और संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के कोष से इसकी खरीदारी हुई थी। अपने समर्थकों के साथ पप्पू यादव शुक्रवार को अचानक उस जगह पहुंच गए जहां कई सारी एंबुलेंस खड़ी थी और सुरक्षा कर्मियों से बहस होने के बाद वह परिसर के भीतर चले। परिसर में कई एंबुलेंस को तिरपाल से ढककर रखा गया था। कोविड-उन्नीस महामारी जब अपने चरम पर है, ऐसे में मरीजों को पहुंचाने में एंबुलेंस का इस्तेमाल नहीं करने के लिए पप्पू यादव ने भाजपा सांसद रूडी की तीखी आलोचना की। यादव ने कहा कि लोगों को एक किलोमीटर तक कोविड मरीज को ले जाने के लिए बारह,शून्य रुपयापये तक देने पड़ रहे हैं। एंबुलेंस की घोर किल्लत है। ऐसे में सारण के सांसद ने एंबुलेंस को बिना इस्तेमाल के खड़ा कर रखा है। पप्पू यादव ने कहा, कि उन्होंने अपने कुछ लोगों को एंबुलेंस बांट दी। इस मामले की जांच होनी चाहिए। एमपीलैड कोष जनता का धन है। वहीं, रूडी के एक समर्थक ने यादव पर परिसर में जबरन घुसने और एंबुलेंस में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि शनिवार को अमनौर थाने में यादव के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गयी। एंबुलेंस बिना इस्तेमाल के रखे होने का मामला सामने आने के बाद रूडी और यादव के बीच जुबानी जंग हुई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सारण के मौजूदा सांसद रूडी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण ड्राइवर नहीं मिलने से एंबुलेंस रखी हुई थी। रूडी ने यादव पर मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया और उन्हें ड्राइवरों की व्यवस्था करने की चुनौती दी। इसके बाद, यादव ने कुछ ड्राइवरों के साथ पटना में संवाददाता सम्मेलन किया। यादव ने कहा कि उन्होंने ड्राइवरों की व्यवस्था कर दी है और वे एंबुलेंस चलाने के लिए तैयार हैं। यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ऐसी गतिविधियां रोकने और काम करने के लिए राजी ड्राइवरों की सेवाएं लेने की अपील की। मधेपुरा से कई बार सांसद रहे पप्पू यादव कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान लगातार मरीजों की सेवा में जुटे हैं। उन्होंने जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर और बिस्तर दिलाने में भी मदद की है। पप्पू यादव दो हज़ार उन्नीस के आम चुनाव में जद नेता दिनेश चंद्र यादव से हार गए थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोडती हैं। अब स्मृति ईरानी ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों में महिलाओं के लिए टॉयलेट की उचित व्यवस्था ना होने की खबर पर कांग्रेस पर तंज कसा है। हिमाचल प्रदेश चुनाव में उतरीं प्रियंका गांधी पर इशारों ही इशारों में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लड़की हूं लड़ सकती हूं, एक जुमला था।
स्मृति ईरानी ने एक अखबार की कटींग को शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि राजस्थान के हजारों स्कूलों में बाथरूम नहीं है, बाथरूम है तो पानी नहीं है। यहां तक कि महिला अध्यापिकाओं को भी टॉयलेट जाने की व्यवस्था नहीं है। इस पर तंज कसते हुए स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर लिखा कि "लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ" एक चुनावी जुमला ही है। वर्ना कांग्रेस शासित राजस्थान में महिला टीचर्स हेतु 68,000 स्कूलों में अलग टॉयलेट नहीं है। 6,803 स्कूलों में बेटियों के लिए टॉयलेट नहीं हैं।
स्मृति ईरानी के इस ट्वीट पर तमाम लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। अरविंद दुबे नाम के यूजर ने लिखा कि देश की महिला एवं बाल विकास मंत्री को समस्या नहीं दिखी, कांग्रेस की सरकार दिखी। ऐसी ही समस्याओं के लिए तो आप मंत्री हैं। @AapkoRajasthani यूजर ने लिखा कि कांग्रेस शासित राज्य कि जानकारी तो मिल गई। अब थोड़ा बीजेपी शासित राज्यों के बारे में बता दें? क्या सारे राज्यों में महिलो के अलग टॉयलेट की सुविधा है।
@mantriji1978 यूजर ने लिखा कि ईरानी जी दूसरे राज्य के आकड़े दिखाते समय अपने राज्य के आकड़े भी दिखाया करें। प्रियंका चारण नाम की यूजर ने लिखा कि यह तो सिर्फ आंकड़े हैं, वास्तविक स्तिथि तो इससे भी बुरी है। मेरा निवेदन है राजस्थान के सभी विधायकों से कि एक बार सरकारी विद्यालयों के साफ सुथरे और सुविधा युक्त शौचालयों का उपयोग तो कर देखें। संतोष कुमार नाम के यूजर ने लिखा कि माननीया, केवल यही नहीं, स्टांप पर लड़कियों की बिक्री, बाल-विवाह, बलात्कार, दलितों और आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार, धार्मिक और जातीय उत्पीडन भी, कांग्रेस शासित राजस्थान में खूब होता है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रियंका गांधी के कैंपेन को 'लड़की हूं, लड़की सकती हूं' नाम दिया गया था। यह कैंपेन काफी सुर्ख़ियों में था। अब एक बार हिमाचल प्रदेश चुनाव में प्रियंका गांधी सभाएं कर रही हैं तो फिर पुराने कैंपेन की चर्चा शुरू हो गई है। स्मृति ईरानी ने पुराने कैंपेन का जिक्र कर कांग्रेस पर तंज कसा है।
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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोडती हैं। अब स्मृति ईरानी ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों में महिलाओं के लिए टॉयलेट की उचित व्यवस्था ना होने की खबर पर कांग्रेस पर तंज कसा है। हिमाचल प्रदेश चुनाव में उतरीं प्रियंका गांधी पर इशारों ही इशारों में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लड़की हूं लड़ सकती हूं, एक जुमला था। स्मृति ईरानी ने एक अखबार की कटींग को शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि राजस्थान के हजारों स्कूलों में बाथरूम नहीं है, बाथरूम है तो पानी नहीं है। यहां तक कि महिला अध्यापिकाओं को भी टॉयलेट जाने की व्यवस्था नहीं है। इस पर तंज कसते हुए स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर लिखा कि "लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ" एक चुनावी जुमला ही है। वर्ना कांग्रेस शासित राजस्थान में महिला टीचर्स हेतु अड़सठ,शून्य स्कूलों में अलग टॉयलेट नहीं है। छः,आठ सौ तीन स्कूलों में बेटियों के लिए टॉयलेट नहीं हैं। स्मृति ईरानी के इस ट्वीट पर तमाम लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। अरविंद दुबे नाम के यूजर ने लिखा कि देश की महिला एवं बाल विकास मंत्री को समस्या नहीं दिखी, कांग्रेस की सरकार दिखी। ऐसी ही समस्याओं के लिए तो आप मंत्री हैं। @AapkoRajasthani यूजर ने लिखा कि कांग्रेस शासित राज्य कि जानकारी तो मिल गई। अब थोड़ा बीजेपी शासित राज्यों के बारे में बता दें? क्या सारे राज्यों में महिलो के अलग टॉयलेट की सुविधा है। @mantrijiएक हज़ार नौ सौ अठहत्तर यूजर ने लिखा कि ईरानी जी दूसरे राज्य के आकड़े दिखाते समय अपने राज्य के आकड़े भी दिखाया करें। प्रियंका चारण नाम की यूजर ने लिखा कि यह तो सिर्फ आंकड़े हैं, वास्तविक स्तिथि तो इससे भी बुरी है। मेरा निवेदन है राजस्थान के सभी विधायकों से कि एक बार सरकारी विद्यालयों के साफ सुथरे और सुविधा युक्त शौचालयों का उपयोग तो कर देखें। संतोष कुमार नाम के यूजर ने लिखा कि माननीया, केवल यही नहीं, स्टांप पर लड़कियों की बिक्री, बाल-विवाह, बलात्कार, दलितों और आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार, धार्मिक और जातीय उत्पीडन भी, कांग्रेस शासित राजस्थान में खूब होता है। बता दें कि उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रियंका गांधी के कैंपेन को 'लड़की हूं, लड़की सकती हूं' नाम दिया गया था। यह कैंपेन काफी सुर्ख़ियों में था। अब एक बार हिमाचल प्रदेश चुनाव में प्रियंका गांधी सभाएं कर रही हैं तो फिर पुराने कैंपेन की चर्चा शुरू हो गई है। स्मृति ईरानी ने पुराने कैंपेन का जिक्र कर कांग्रेस पर तंज कसा है।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
गुरुत्वाकर्षण के कारण ही ग्रह, सूर्य के चारों ओर चक्कर लगा पाते हैं और यही उन्हें रोके रखती है। गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटेशन) एक पदार्थ द्वारा एक दूसरे की ओर आकृष्ट होने की प्रवृति है। गुरुत्वाकर्षण के बारे में पहली बार कोई गणितीय सूत्र देने की कोशिश आइजक न्यूटन द्वारा की गयी जो आश्चर्यजनक रूप से सही था। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का प्रतिपादन किया। न्यूटन के सिद्धान्त को बाद में अलबर्ट आइंस्टाइन द्वारा सापेक्षता सिद्धांत से बदला गया। इससे पूर्व वराह मिहिर ने कहा था कि किसी प्रकार की शक्ति ही वस्तुओं को पृथिवी पर चिपकाए रखती है। . अलग-अलग द्रव्यमान वाली चार गेंदों के निकाय का "'संहति-केन्द्र भौतिकी में, संहतियों के किसी वितरण का संहति-केंद्र (center of mass) वह बिन्दु है जिस पर वह सारी संहतियाँ केन्द्रीभूत मानी जा सकती हैं। संहति केन्द्र के कुछ विशेष गुण हैं, उदाहरण के लिये यदि किसी वस्तु पर कोई बल लगाया जाय जिसकी क्रियारेखा उस वस्तु के संहति-केन्द्र से होकर जाती हो तो उस वस्तु में केवल स्थानातरण गति होगी (घूर्णी गति नहीं)। संहति-केन्द्र के सापेक्ष उस वस्तु में निहित सभी संहतियों के आघूर्णों (मोमेण्ट) का योग शून्य होता है। दूसरे शब्दों में, संहति-केन्द्र के सापेक्ष, सभी संहतियों की स्थिति का भारित औसत (वेटेड एवरेज) शून्य होता है। कणों के किसी निकाय का संहति केन्द्र वह बिन्दु है जहाँ, अधिकांश उद्देश्यों के लिए, निकाय ऐसे गति करता है जैसे निकाय का सब द्रव्यमान उस बिन्दु पर संकेंद्रित हो। संहति केन्द्र, केवल निकाय के कणों के स्थिति-सदिश और द्रव्यमान पर निर्भर होता है। संहति केन्द्र पर वास्तविक पदार्थ होना अनिवार्य नहीं है (जैसे, एक खोखले गोले का संहति-केन्द्र उस गोले के केन्द्र पर होता है जहाँ कोई द्रव्यमान ही नहीं है)। गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के एकसमान होने की स्थिति में कभी-कभी इसे गलती से गुरुत्वाकर्षण केन्द्र भी कहा जाता है। किसी वस्तु का रेखागणितीय केन्द्र, द्रव्यमान केन्द्र तथा गुरुत्व केन्द्र अलग-अलग हो सकते हैं। संवेग-केन्द्रीय निर्देश तंत्र वह निर्देश तंत्र है जिसमें निकाय का द्रव्यमान केन्द्र स्थिर है। यह एक जड़त्वीय फ्रेम है। एक द्रव्यमान-केन्द्रीय निर्देश तंत्र वह तंत्र है जहाँ द्रव्यमान केन्द्र न केवल स्थिर है बल्कि निर्देशांक निकाय के मूल बिन्दु पर स्थित है। .
गुरुत्वाकर्षण और संहति-केन्द्र आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
गुरुत्वाकर्षण 16 संबंध है और संहति-केन्द्र 11 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (16 + 11)।
यह लेख गुरुत्वाकर्षण और संहति-केन्द्र के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गुरुत्वाकर्षण के कारण ही ग्रह, सूर्य के चारों ओर चक्कर लगा पाते हैं और यही उन्हें रोके रखती है। गुरुत्वाकर्षण एक पदार्थ द्वारा एक दूसरे की ओर आकृष्ट होने की प्रवृति है। गुरुत्वाकर्षण के बारे में पहली बार कोई गणितीय सूत्र देने की कोशिश आइजक न्यूटन द्वारा की गयी जो आश्चर्यजनक रूप से सही था। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का प्रतिपादन किया। न्यूटन के सिद्धान्त को बाद में अलबर्ट आइंस्टाइन द्वारा सापेक्षता सिद्धांत से बदला गया। इससे पूर्व वराह मिहिर ने कहा था कि किसी प्रकार की शक्ति ही वस्तुओं को पृथिवी पर चिपकाए रखती है। . अलग-अलग द्रव्यमान वाली चार गेंदों के निकाय का "'संहति-केन्द्र भौतिकी में, संहतियों के किसी वितरण का संहति-केंद्र वह बिन्दु है जिस पर वह सारी संहतियाँ केन्द्रीभूत मानी जा सकती हैं। संहति केन्द्र के कुछ विशेष गुण हैं, उदाहरण के लिये यदि किसी वस्तु पर कोई बल लगाया जाय जिसकी क्रियारेखा उस वस्तु के संहति-केन्द्र से होकर जाती हो तो उस वस्तु में केवल स्थानातरण गति होगी । संहति-केन्द्र के सापेक्ष उस वस्तु में निहित सभी संहतियों के आघूर्णों का योग शून्य होता है। दूसरे शब्दों में, संहति-केन्द्र के सापेक्ष, सभी संहतियों की स्थिति का भारित औसत शून्य होता है। कणों के किसी निकाय का संहति केन्द्र वह बिन्दु है जहाँ, अधिकांश उद्देश्यों के लिए, निकाय ऐसे गति करता है जैसे निकाय का सब द्रव्यमान उस बिन्दु पर संकेंद्रित हो। संहति केन्द्र, केवल निकाय के कणों के स्थिति-सदिश और द्रव्यमान पर निर्भर होता है। संहति केन्द्र पर वास्तविक पदार्थ होना अनिवार्य नहीं है । गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के एकसमान होने की स्थिति में कभी-कभी इसे गलती से गुरुत्वाकर्षण केन्द्र भी कहा जाता है। किसी वस्तु का रेखागणितीय केन्द्र, द्रव्यमान केन्द्र तथा गुरुत्व केन्द्र अलग-अलग हो सकते हैं। संवेग-केन्द्रीय निर्देश तंत्र वह निर्देश तंत्र है जिसमें निकाय का द्रव्यमान केन्द्र स्थिर है। यह एक जड़त्वीय फ्रेम है। एक द्रव्यमान-केन्द्रीय निर्देश तंत्र वह तंत्र है जहाँ द्रव्यमान केन्द्र न केवल स्थिर है बल्कि निर्देशांक निकाय के मूल बिन्दु पर स्थित है। . गुरुत्वाकर्षण और संहति-केन्द्र आम में शून्य बातें हैं । गुरुत्वाकर्षण सोलह संबंध है और संहति-केन्द्र ग्यारह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख गुरुत्वाकर्षण और संहति-केन्द्र के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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जीमेल प्रेषक के नाम के आगे उनकी पहचान सत्यापित करने के लिए एक सुंदर पारंपरिक नीला चेकमार्क दिखाना शुरू कर देगा। एक ब्लॉग पोस्ट में, Google बताता है कि इस सुविधा से उपयोगकर्ताओं को यह पहचानने में मदद मिलनी चाहिए कि उन्हें प्राप्त होने वाला ईमेल वैध स्रोत से है या स्कैमर से है।
जैसा कि ट्विटर विश्वास के संकेत के रूप में नीले चेकमार्क की अखंडता को कम करना चाहता है, Google अपनी स्वयं की प्रमाणन प्रणाली को चालू कर रहा है, जीमेल उपयोगकर्ताओं को अब अपने इनबॉक्स में स्वीकृत ब्रांड प्रोफाइल के बगल में नए नीले चेकमार्क दिखाई दे रहे हैं।
इस उपाय का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को वैध प्रेषकों के संदेशों बनाम प्रतिरूपणकर्ताओं के संदेशों की पहचान करने में सहायता करना है। नीला चेकमार्क स्वचालित रूप से उन कंपनियों के बगल में दिखाई देता है जिन्होंने BIMI (संदेश पहचान के लिए ब्रांड संकेतक) सुविधा को अपनाया है, जिसके लिए जीमेल को मजबूत प्रमाणीकरण का उपयोग करने की आवश्यकता होती है और इस लोगो को अपने ईमेल संदेशों में एक अवतार के रूप में प्रदर्शित करने के लिए ब्रांड लोगो को सत्यापित करना पड़ता है।
जब आप प्रेषक के नाम के आगे नीले चेक मार्क पर माउस कर्सर घुमाते हैं, तो आपको "पुष्टि करें कि इस ईमेल के प्रेषक के पास उनके प्रोफ़ाइल चित्र में डोमेन और लोगो का स्वामित्व है" बताते हुए एक संदेश दिखाई देगा।
वर्तमान में, यदि आप एक सत्यापित खाते से एक ईमेल प्राप्त करते हैं, तो ब्रांड लोगो अवतार स्लॉट में उनके आद्याक्षर के बजाय दिखाई देगा। इसलिए, यदि आप ट्विटर से एक ईमेल प्राप्त करने जा रहे हैं, तो आपको लोगो के बजाय एक साधारण अक्षर "L" के बजाय प्रेषक के नाम के आगे ट्विटर लोगो दिखाई देना चाहिए।
इस नई सुविधा का उद्देश्य सरल हैः उपयोगकर्ताओं को दुर्भावनापूर्ण स्रोतों द्वारा भेजे गए ईमेल पर भरोसा करने से रोकना। यह ब्लू टिक यूजर्स के लिए स्कैमर और कंपनियों के बीच अंतर बताना काफी आसान बना देगा।
ध्यान दें कि नई सुविधा आज से सभी Gmail और Google Workspace उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। इसका मतलब यह है कि Google Workspace के ग्राहक, लीगेसी G Suite बेसिक और व्यावसायिक ग्राहक और व्यक्तिगत Google खातों वाले उपयोगकर्ताओं को अगले कुछ दिनों में नया अपडेट मिल जाएगा.
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जीमेल प्रेषक के नाम के आगे उनकी पहचान सत्यापित करने के लिए एक सुंदर पारंपरिक नीला चेकमार्क दिखाना शुरू कर देगा। एक ब्लॉग पोस्ट में, Google बताता है कि इस सुविधा से उपयोगकर्ताओं को यह पहचानने में मदद मिलनी चाहिए कि उन्हें प्राप्त होने वाला ईमेल वैध स्रोत से है या स्कैमर से है। जैसा कि ट्विटर विश्वास के संकेत के रूप में नीले चेकमार्क की अखंडता को कम करना चाहता है, Google अपनी स्वयं की प्रमाणन प्रणाली को चालू कर रहा है, जीमेल उपयोगकर्ताओं को अब अपने इनबॉक्स में स्वीकृत ब्रांड प्रोफाइल के बगल में नए नीले चेकमार्क दिखाई दे रहे हैं। इस उपाय का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को वैध प्रेषकों के संदेशों बनाम प्रतिरूपणकर्ताओं के संदेशों की पहचान करने में सहायता करना है। नीला चेकमार्क स्वचालित रूप से उन कंपनियों के बगल में दिखाई देता है जिन्होंने BIMI सुविधा को अपनाया है, जिसके लिए जीमेल को मजबूत प्रमाणीकरण का उपयोग करने की आवश्यकता होती है और इस लोगो को अपने ईमेल संदेशों में एक अवतार के रूप में प्रदर्शित करने के लिए ब्रांड लोगो को सत्यापित करना पड़ता है। जब आप प्रेषक के नाम के आगे नीले चेक मार्क पर माउस कर्सर घुमाते हैं, तो आपको "पुष्टि करें कि इस ईमेल के प्रेषक के पास उनके प्रोफ़ाइल चित्र में डोमेन और लोगो का स्वामित्व है" बताते हुए एक संदेश दिखाई देगा। वर्तमान में, यदि आप एक सत्यापित खाते से एक ईमेल प्राप्त करते हैं, तो ब्रांड लोगो अवतार स्लॉट में उनके आद्याक्षर के बजाय दिखाई देगा। इसलिए, यदि आप ट्विटर से एक ईमेल प्राप्त करने जा रहे हैं, तो आपको लोगो के बजाय एक साधारण अक्षर "L" के बजाय प्रेषक के नाम के आगे ट्विटर लोगो दिखाई देना चाहिए। इस नई सुविधा का उद्देश्य सरल हैः उपयोगकर्ताओं को दुर्भावनापूर्ण स्रोतों द्वारा भेजे गए ईमेल पर भरोसा करने से रोकना। यह ब्लू टिक यूजर्स के लिए स्कैमर और कंपनियों के बीच अंतर बताना काफी आसान बना देगा। ध्यान दें कि नई सुविधा आज से सभी Gmail और Google Workspace उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। इसका मतलब यह है कि Google Workspace के ग्राहक, लीगेसी G Suite बेसिक और व्यावसायिक ग्राहक और व्यक्तिगत Google खातों वाले उपयोगकर्ताओं को अगले कुछ दिनों में नया अपडेट मिल जाएगा.
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आहत नायक का सिर चकरा रहा था। वह ६धे हुए कण्ट से बोना - "प्रभो !"
अजातशत्रु विना एक शब्द बोले पर पटकता हुए महल की सीढ़ियों पर चढ़ता चला गया। उसने लौट कर देखा भी नहीं कि उमका सेनानायक जयमों से निकलने वाले खून से भीगा हुआ सड़ा है, दो सैनिकों ने उसे मँभाल रखा है। अन्तिम मीढ़ी पर पहुँच कर अजातशत्रु का और कुछ मोच कर लौट पड़ा। वह यही से गुर्रा कर बोना - "सेनानायक, तुम जा सकते हो ।
सेनानायक के कानों के भीतर सागर का हाहाकार गूंज रहा था और आँखों के भागे तारे भूल रहे थे, आग के गोले तैर रहे थे। वह अजातशत्रु के जाते ही मूटिन हो गया - उसके भीतर जो जीवन का उत्ताप था वह शून्य में विलीन हो गया। मंगममंर की चमकदार चिकने फर्श पर उसके शरीर से निकलने वाला खून फैल गया। उसने आँखें वन्द कर ली, पराजय के भयानक चित्र को पलकों के भीतर छिपाये । वे आँखें फिर नहीं खुली । युद्ध से लौटने वाला वह अकेला सिपाही था, सभी कट मरे थे । उसके सो जाने के बाद कोई भी पराजय का प्रत्यक्षदर्शी नहीं रह गया, अपान की कहानी कहने वाला कोई भी नही रह गया, अजातशत्रु की हार का साक्षी कोई भी नहीं रह गया ।
अजातशत्रु सर्प की तरह, विषवर की तरह फूत्कार करता हुआ अपने पिता विम्बमार के निकट गया जो अपने पालतू मयूरों से मन बहला रहे थे । उनको सबसे छोटो रानी परम रूपवती और पत्रिता क्षेमा बैठी वीणा बजा रही थी। वीणा की स्वर लहरी गंगा को कल-कल ध्वनि की तरह गूंजनी हुई वातावरण में क्षोभ उत्पन्न कर रही थी। अजातशत्रु मला उठा और उसने दोनो वान बन्द करके अपने को सँभालने या प्रयत्न किया किन्तु विफल रहा। वह दांत पीसता हुआ क्रोध के आवेश में बड़बड़ाया - छिः ! बूढ़े को रंग रलियाँ सूझी हैं और इधर मगध का साम्राज्य का गौरव लुप्त हुआ चाहता है।"
वह रुका और फिर पैर पटकता हुआ आगे बढ़ा। वह ज्यों-ज्यो आगे बढता था वीणा की भंकार अधिक स्पष्टता पूर्वक उसके कानों में प्रवेश करके उसके रोप को भड़काती थी । घृणा से अजातशत्रु का चेहरा भयानक हो गया और वह तेजी से आगे बढ़ा। लम्बे बरामदे को पार करके वह रुका। उसका उत्तरीय धरती को स्पर्श कर रहा था और हवा से उसके सिर के घुंघराले बाल कन्धो पर लहरा रहे थे । शीतल हवा के स्पर्श से उस उत्तप्त ललाट को कुछ शान्ति मिली। उसने एक बार बाहर की ओर देखा, राजगृह की शान्त पहाड़ियों पर सूर्य की कोमल किरणें सोना बरसा रही थी और पहाड़ियों की हरित शोभा मरकत मणि की तरह चमकती हुई बहुत हो भली लगती थी । अजातशत्रु का मन क्षण भर के लिये प्रकृति की इस रंगशाला में उलझ गया । उसने अपनी इस कमजोरी को भटका देकर दूर कर दिया, वह आगे बढ़ा। वरामदा जन-शून्य था। अब वह उस प्रकोष्ठ के विशाल दरवाजे पर पहुँच गया जिस पर मोतियों की झालरें लटक रही थी और एक भरे अंगों वाली श्यामवर्ण की सुन्दरी दासी कोमल हायो मे ढाल-तलवार लिए खड़ी थी । वीणा को भंकार अजातशत्रु के कानो मे बाण की तरह सनसनाती हुई घुस रही थो । अभिवादन करके वह द्वार-रक्षिका एक ओर हट गई । झालर को विना हटाये, शरीर को आगे की ओर धकेलता हुआ अजातशत्रु भीतर घुसा ! वोणा को स्वर लहरी अचानक शून्य में विलीन हो गई। जो वातारण क्षण भर पहले आनन्द की रंगोनियो से जगमगा रहा घा वह हठात् आतंक के कुहरे से घमिल हो गया या गरम भाप से
भर गया ।
विम्बसार का यौवन चला गया था किन्तु नाना उपायो से उन्होंने उसे रोक रखा था। बालो मे खिजाब' और कानों मे रत्न खचित कुण्डल - बिम्बसार दूल्हे की तरह शृंगार करके बैठे थे । अचंचल१. बौद्ध युग में खिजाब लगाने की प्रथा थी । देखिये -प्रम्बजातक ३४४
यौवना रानी क्षेमा विम्वसार के सामने बैठी वीणावादन कर रही थी । पालतू मयूर इधर-उधर बैठे थे । अजातशत्रु ने जैसे ही घर में प्रवेश किया शान्त मयूर चकित होकर उसकी ओर देखने लगे। परिस्थिति की स्पष्ट भलक शायद अवोध पशु-पछियों को तुरन्त मिल जाती है। अपने पिता को देख कर अजातशत्रु को भौहें तन गईं । उसने देख कर भी क्षेमा को नहीं देखा। स्नेह भरे स्वर से कुशल क्षेम पूछ कर विम्बसार ने अपने सम्राट् पुत्र की बांह पकड़ कर अपने निकट बैठाया। उद्धत अजातशत्रु ने पिता के प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं दिया । विम्वसार मन हो मन डर गये । वे अजातशत्रु के उग्र स्वभाव से परिचित थे । क्षेमा ने भय-मिश्रित स्वर में पूछा - "आयुष्मान् का किधर आना हुआ ?" अजातशत्रु होंठ चवा कर बोला -"वीणा बजाने मे जो मेरे कारण विघ्न हुआ उस के लिए क्षमा कीजिएगा ।" क्षेमा का हृदय धक् से करके रह गया । विम्बसार का कंठ सूखने लगा। मयूर एक-एक करके घर के बाहर निकल गये। विम्बसार ने धीरे से कहा "आयुष्मान्, हम उत्सुक हैं यह जानने को कि.......
अपनी चट्टान जैसी जाँघ पर हाथ पटक कर अजातशत्रु बोला - "क्या उत्सुक हैं आप ? आप को मालूम है वैशाली वालों ने हमारी सेना का सफाया कर दिया ? आप जानते हैं, गंगा में हमारे सैनिकों की लाशें तैर रही हैं ? आप जानते हैं आज मगध साम्राज्य का गौरव धूल में मिल गया ? हम किस मुंह से जनता को कहेंगे कि हम तुम्हारे रक्षक और त्राता हैं ।"
अजातशत्रू एकाएक उत्तेजित होकर चिल्ला उठा-'आप सो रहे हैं क्या ?"
विम्बसार चौंक उठे और बोले- "शान्ति ! आयुष्मान्, मन को स्वस्थ करो।"
अजातशत्रु गरजा --"मन को स्वस्थ करूं ? आप क्या कहते हैं यह शान्ति की प्राणहीन बातें आप बौद्धों से सीख आये हैं।"
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आहत नायक का सिर चकरा रहा था। वह छःधे हुए कण्ट से बोना - "प्रभो !" अजातशत्रु विना एक शब्द बोले पर पटकता हुए महल की सीढ़ियों पर चढ़ता चला गया। उसने लौट कर देखा भी नहीं कि उमका सेनानायक जयमों से निकलने वाले खून से भीगा हुआ सड़ा है, दो सैनिकों ने उसे मँभाल रखा है। अन्तिम मीढ़ी पर पहुँच कर अजातशत्रु का और कुछ मोच कर लौट पड़ा। वह यही से गुर्रा कर बोना - "सेनानायक, तुम जा सकते हो । सेनानायक के कानों के भीतर सागर का हाहाकार गूंज रहा था और आँखों के भागे तारे भूल रहे थे, आग के गोले तैर रहे थे। वह अजातशत्रु के जाते ही मूटिन हो गया - उसके भीतर जो जीवन का उत्ताप था वह शून्य में विलीन हो गया। मंगममंर की चमकदार चिकने फर्श पर उसके शरीर से निकलने वाला खून फैल गया। उसने आँखें वन्द कर ली, पराजय के भयानक चित्र को पलकों के भीतर छिपाये । वे आँखें फिर नहीं खुली । युद्ध से लौटने वाला वह अकेला सिपाही था, सभी कट मरे थे । उसके सो जाने के बाद कोई भी पराजय का प्रत्यक्षदर्शी नहीं रह गया, अपान की कहानी कहने वाला कोई भी नही रह गया, अजातशत्रु की हार का साक्षी कोई भी नहीं रह गया । अजातशत्रु सर्प की तरह, विषवर की तरह फूत्कार करता हुआ अपने पिता विम्बमार के निकट गया जो अपने पालतू मयूरों से मन बहला रहे थे । उनको सबसे छोटो रानी परम रूपवती और पत्रिता क्षेमा बैठी वीणा बजा रही थी। वीणा की स्वर लहरी गंगा को कल-कल ध्वनि की तरह गूंजनी हुई वातावरण में क्षोभ उत्पन्न कर रही थी। अजातशत्रु मला उठा और उसने दोनो वान बन्द करके अपने को सँभालने या प्रयत्न किया किन्तु विफल रहा। वह दांत पीसता हुआ क्रोध के आवेश में बड़बड़ाया - छिः ! बूढ़े को रंग रलियाँ सूझी हैं और इधर मगध का साम्राज्य का गौरव लुप्त हुआ चाहता है।" वह रुका और फिर पैर पटकता हुआ आगे बढ़ा। वह ज्यों-ज्यो आगे बढता था वीणा की भंकार अधिक स्पष्टता पूर्वक उसके कानों में प्रवेश करके उसके रोप को भड़काती थी । घृणा से अजातशत्रु का चेहरा भयानक हो गया और वह तेजी से आगे बढ़ा। लम्बे बरामदे को पार करके वह रुका। उसका उत्तरीय धरती को स्पर्श कर रहा था और हवा से उसके सिर के घुंघराले बाल कन्धो पर लहरा रहे थे । शीतल हवा के स्पर्श से उस उत्तप्त ललाट को कुछ शान्ति मिली। उसने एक बार बाहर की ओर देखा, राजगृह की शान्त पहाड़ियों पर सूर्य की कोमल किरणें सोना बरसा रही थी और पहाड़ियों की हरित शोभा मरकत मणि की तरह चमकती हुई बहुत हो भली लगती थी । अजातशत्रु का मन क्षण भर के लिये प्रकृति की इस रंगशाला में उलझ गया । उसने अपनी इस कमजोरी को भटका देकर दूर कर दिया, वह आगे बढ़ा। वरामदा जन-शून्य था। अब वह उस प्रकोष्ठ के विशाल दरवाजे पर पहुँच गया जिस पर मोतियों की झालरें लटक रही थी और एक भरे अंगों वाली श्यामवर्ण की सुन्दरी दासी कोमल हायो मे ढाल-तलवार लिए खड़ी थी । वीणा को भंकार अजातशत्रु के कानो मे बाण की तरह सनसनाती हुई घुस रही थो । अभिवादन करके वह द्वार-रक्षिका एक ओर हट गई । झालर को विना हटाये, शरीर को आगे की ओर धकेलता हुआ अजातशत्रु भीतर घुसा ! वोणा को स्वर लहरी अचानक शून्य में विलीन हो गई। जो वातारण क्षण भर पहले आनन्द की रंगोनियो से जगमगा रहा घा वह हठात् आतंक के कुहरे से घमिल हो गया या गरम भाप से भर गया । विम्बसार का यौवन चला गया था किन्तु नाना उपायो से उन्होंने उसे रोक रखा था। बालो मे खिजाब' और कानों मे रत्न खचित कुण्डल - बिम्बसार दूल्हे की तरह शृंगार करके बैठे थे । अचंचलएक. बौद्ध युग में खिजाब लगाने की प्रथा थी । देखिये -प्रम्बजातक तीन सौ चौंतालीस यौवना रानी क्षेमा विम्वसार के सामने बैठी वीणावादन कर रही थी । पालतू मयूर इधर-उधर बैठे थे । अजातशत्रु ने जैसे ही घर में प्रवेश किया शान्त मयूर चकित होकर उसकी ओर देखने लगे। परिस्थिति की स्पष्ट भलक शायद अवोध पशु-पछियों को तुरन्त मिल जाती है। अपने पिता को देख कर अजातशत्रु को भौहें तन गईं । उसने देख कर भी क्षेमा को नहीं देखा। स्नेह भरे स्वर से कुशल क्षेम पूछ कर विम्बसार ने अपने सम्राट् पुत्र की बांह पकड़ कर अपने निकट बैठाया। उद्धत अजातशत्रु ने पिता के प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं दिया । विम्वसार मन हो मन डर गये । वे अजातशत्रु के उग्र स्वभाव से परिचित थे । क्षेमा ने भय-मिश्रित स्वर में पूछा - "आयुष्मान् का किधर आना हुआ ?" अजातशत्रु होंठ चवा कर बोला -"वीणा बजाने मे जो मेरे कारण विघ्न हुआ उस के लिए क्षमा कीजिएगा ।" क्षेमा का हृदय धक् से करके रह गया । विम्बसार का कंठ सूखने लगा। मयूर एक-एक करके घर के बाहर निकल गये। विम्बसार ने धीरे से कहा "आयुष्मान्, हम उत्सुक हैं यह जानने को कि....... अपनी चट्टान जैसी जाँघ पर हाथ पटक कर अजातशत्रु बोला - "क्या उत्सुक हैं आप ? आप को मालूम है वैशाली वालों ने हमारी सेना का सफाया कर दिया ? आप जानते हैं, गंगा में हमारे सैनिकों की लाशें तैर रही हैं ? आप जानते हैं आज मगध साम्राज्य का गौरव धूल में मिल गया ? हम किस मुंह से जनता को कहेंगे कि हम तुम्हारे रक्षक और त्राता हैं ।" अजातशत्रू एकाएक उत्तेजित होकर चिल्ला उठा-'आप सो रहे हैं क्या ?" विम्बसार चौंक उठे और बोले- "शान्ति ! आयुष्मान्, मन को स्वस्थ करो।" अजातशत्रु गरजा --"मन को स्वस्थ करूं ? आप क्या कहते हैं यह शान्ति की प्राणहीन बातें आप बौद्धों से सीख आये हैं।"
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अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 जुलाई तय की है। इस मामले पर 25 मई को अदालत ने कोर्ट से एटीआर मांगा था जिसे आज पुलिस ने जमा किया। बता दें कि अदालत बम बम महाराज नौहटिया द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में एक याचिका के संबंध में एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) फाइल करते हुए अदालत को बताया कि पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई हेट स्पीच नहीं दी है।
बता दें कि अदालत बम बम महाराज नौहटिया द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक पर एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई थी।
इस याचिका में पहलवानों पर आरोप लगे थे कि उन्होंने बृजभूषण पर गलत इलजाम लगाए हैं और उनके खिलाफ हेट स्पीच भी दी है। इसके लिए शिकायतकर्ता ने वीडियो भी सबूत के रूप में दिया था।
इसी वीडियो को आधार बनाकर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कहीं भी इसमें पहलवान बृजभूषण सिंह के खिलाफ नारेबाजी या हेट स्पीच करते नहीं दिख रहे, इसलिए कोर्ट इस आवेदन को खारिज कर दे।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 जुलाई तय की है। इस मामले पर 25 मई को अदालत ने कोर्ट से एटीआर मांगा था जिसे आज पुलिस ने जमा किया।
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अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख सात जुलाई तय की है। इस मामले पर पच्चीस मई को अदालत ने कोर्ट से एटीआर मांगा था जिसे आज पुलिस ने जमा किया। बता दें कि अदालत बम बम महाराज नौहटिया द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में एक याचिका के संबंध में एक्शन टेकन रिपोर्ट फाइल करते हुए अदालत को बताया कि पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई हेट स्पीच नहीं दी है। बता दें कि अदालत बम बम महाराज नौहटिया द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक पर एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई थी। इस याचिका में पहलवानों पर आरोप लगे थे कि उन्होंने बृजभूषण पर गलत इलजाम लगाए हैं और उनके खिलाफ हेट स्पीच भी दी है। इसके लिए शिकायतकर्ता ने वीडियो भी सबूत के रूप में दिया था। इसी वीडियो को आधार बनाकर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कहीं भी इसमें पहलवान बृजभूषण सिंह के खिलाफ नारेबाजी या हेट स्पीच करते नहीं दिख रहे, इसलिए कोर्ट इस आवेदन को खारिज कर दे। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख सात जुलाई तय की है। इस मामले पर पच्चीस मई को अदालत ने कोर्ट से एटीआर मांगा था जिसे आज पुलिस ने जमा किया।
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गंगापुर सिटी सहित आसपास के क्षेत्र में रविवार रात को शुरू हुआ बारिश का दौर सुबह तक चलता रहा। पिछले कई दिनों से ठंडा मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया। रविवार रात करीब 1:30 बजे अचानक बिजलियां कड़कने के साथ-साथ बादलों की गर्जना होने लगी। रात करीब ढाई बजे से बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ और इसके बाद तेज बारिश होने लगी। सुबह करीब 4 बजे तक बारिश हुई, जिसके कारण मौसम खुशनुमा हो गया।
सुबह जब लोगों की नींद खुली तो आसमान में बादल छाए हुए थे और एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो गया। दूसरे दौर में करीब आधे घंटे तक हुई तेज बरसात के बाद सड़कों पर पानी बह निकला। शहर के आवारा चौक, नया बाजार, उदयपुर मोर, सालोदा सहित कई स्थानों पर बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। तहसील ऑफिस के कानूनगो राजेंद्र जायसवाल के अनुसार रविवार सुबह 8. 30 बजे से सोमवार सुबह 8:30 बजे तक गंगापुर सिटी में 56 एमएम बारिश दर्ज की गई। उपखंड क्षेत्र में 1 जून से अब तक 462 एमएम बारिश हो चुकी है। गंगापुर में औसत बारिश का आंकड़ा करीब 550 एमएम है। सोमवार को हुई बारिश के बाद उम्मीद है कि जल्द ही औसत बारिश का आंकड़ा पार हो जाएगा।
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गंगापुर सिटी सहित आसपास के क्षेत्र में रविवार रात को शुरू हुआ बारिश का दौर सुबह तक चलता रहा। पिछले कई दिनों से ठंडा मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया। रविवार रात करीब एक:तीस बजे अचानक बिजलियां कड़कने के साथ-साथ बादलों की गर्जना होने लगी। रात करीब ढाई बजे से बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ और इसके बाद तेज बारिश होने लगी। सुबह करीब चार बजे तक बारिश हुई, जिसके कारण मौसम खुशनुमा हो गया। सुबह जब लोगों की नींद खुली तो आसमान में बादल छाए हुए थे और एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो गया। दूसरे दौर में करीब आधे घंटे तक हुई तेज बरसात के बाद सड़कों पर पानी बह निकला। शहर के आवारा चौक, नया बाजार, उदयपुर मोर, सालोदा सहित कई स्थानों पर बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। तहसील ऑफिस के कानूनगो राजेंद्र जायसवाल के अनुसार रविवार सुबह आठ. तीस बजे से सोमवार सुबह आठ:तीस बजे तक गंगापुर सिटी में छप्पन एमएम बारिश दर्ज की गई। उपखंड क्षेत्र में एक जून से अब तक चार सौ बासठ एमएम बारिश हो चुकी है। गंगापुर में औसत बारिश का आंकड़ा करीब पाँच सौ पचास एमएम है। सोमवार को हुई बारिश के बाद उम्मीद है कि जल्द ही औसत बारिश का आंकड़ा पार हो जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हैडमास्टर साहब का काम पूरा हो चुका था। उन्हांेने देखंेगे का भाव चेहरे पर चिपकाया ओर शुक्लाजी ने कक्ष से बाहर आकर पसीना पांेछा।
हैडमास्टर साहब शिक्षा के मामले मंे बहुत कोरे थे। वे तो अपने निजि सम्बन्धों के सहारे जी रहे थे, मैनेजमंेट, पार्टी पोलिटिक्स ट्रस्ट, अध्यापक, छात्र, छात्राआंे आदि की आपसी राजनीति उनके प्रिय शगल थे। विद्यालय मंे किसी प्रिन्सिपल की नियुक्ति की अफवाहों से वे बड़े विचलित थे। इस विचलन को ठीक करने का एक ही रास्ता था। मैनेजमंेट के मुख्य ट्रस्टी को अपनी ओर मिलाये रखना। मुख्य ट्रस्टी शहर के व्यापारी थे। उनके पास कई काम थे। उन्हांेने कॉलेज का काम-काज अपनी पत्नी माधुरी के जिम्मे कर दिया था। माधुरी कभी-कदा कॉलेज आती। संभालती। एक-दो को डॉट-डपट करती। निलम्बन की धमकी देती और चली जाती। वो पढ़ी-लिखी ज्यादा नही थी मगर सेठानी थी और पैसा ही उसकी योग्यता थी।
हैडमास्टरजी उससे खांेफ खाते थे, कारण स्पष्ट था। सेठजी खुश तो हैडमास्टरी चलती रहती और नाराज तो हैडमास्टर चले जाते। शिक्षा की दुर्गति ही थी एम.ए., बी.एड., एम.एड., पी.एच.डी. जैसी डिग्रियांे के धारक सेठानी की आवाज पर चुप लगा जाते। स्थानीय अध्यापकांे का गुट अलग था, जो हमेशा से ही मैनेजमंेट का गुट कहलाता था और बाह्य अध्यापकांे को कभी भी कान पकड़कर निकाला जा सकता था।
पढ़ाई लिखाई के अलावा ज्यादा काम कॉलेज मंे दूसरे होते थे। सर्दियांे मंे अवकाश के दौरान सेठजी अपनी दुकान का सामान भी कॉलेज मंे रखवा देते थे। कॉलेज मंे पिछवाड़े सेठजी की गायें, भैंसें बंधती थी और कॉलेज के चपरासी उनकी अनवरत सेवा सुश्रुषा, टहल करने पर ही नौकरी पर चलते थे। कॉलेज मंे मौज-मस्ती, फैशन, करने के लिए पूरे शहर के लौण्डे-लौण्डियां आते थे। नाभिदर्शना-लो-हिप जीन्स और लोकट टॉप के सहारे लड़कियां कॉलेज लाइफ के मजे ले रही थी और लड़के गुरूआंें से ज्यादा लवगुरूआंे के पास मंडराते थे।
माधुरी इस हाईस्कूल को कभी निजी विश्वविद्यालय बनाने के सपने देखती थी। ऐसा सपना उन्हंे हैडमास्टर साहब दिखाते थे। माधुरी का मानना था कि एक बार उन्हंें विधानसभा का टिकट मिल जाये बस यह स्कूल राज्य का विश्वविद्यालय बनकर रहेगा और वे इसकी आजीवन कुलपति रहेगी।
प्रदेश को स्वर्ग बनाने की घोषणाऐं अक्सर होती रहती थी और इन घोषणाआंे की अध्यापक बड़ी मजाक बनाते थे। प्रदेश स्वर्ग होगा और प्रदेशवासी स्वर्गवासी, जैंसे जुमले अक्सर स्टाफरूम मंे सुनने को मिलते थे। दूसरा अध्यापक तुरन्त बोल पड़ता, आप स्वर्ग जाकर क्या करंेगे माटसाब आपके तो सभी रिश्तेदार नरक मंे मिलंेगे। सभी मिलकर अट्टहास करते। वैसे प्राइवेट कॉलेज मंे पूरे वेतन की मांग करने वाले ज्यादा दिन नहीं टिक सकते थे। पूरे वेतन पर हस्ताक्षर, शेष वेतन का मैनेजमंेट के नाम पर अग्रिम चैक और बकाया का नकद भुगतान। इसी फण्डे पर कॉलेज चल रहे थे। माधुरी भी इसी फण्डे पर कॉलेज, कॉलेज की राजनीति को चला रही थी और एक दिन इस चार कमरे के कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने के सपने को साकार करने मंे लगी हुई थी। बस एक टिकट का सवाल था जिसे हल करना बड़ा मुश्किल था।
शुक्लाजी ने हैडमास्टर साहब के चारे पर घर आकर शुक्लाइन से विचार-विमर्श किया। शुक्लाईन को मामला जम गया। वैसे भी घर मंे बैठकर बोर हाने से यह अच्छा था। शुक्लाजी ने हैडमास्टर साहब का दामन पकड़ा, हैडमास्टरजी ने माधुरी को कहा, माधुरी ने शुक्लाइन को घर पर साक्षात्कार के लिए बुलाया और इस प्रकार शुक्लाइन भी हाईस्कूल मंे प्रोफेसराईन हो गयी। मगर माधुरी ने कच्ची गोलियां नही खेली थी, वे शुक्लाईन के सहारे राजनीति की सीढ़ी चढ़ना चाहती थी।
उत्तर आधुनिकता की इस आंधी मंे वैश्विक समानीकरण की दौड़ मंे जब स्वतन्त्र अर्थ व्यवस्था और विश्व एक गांव की अवधरणा का तड़का लग जाता है तो देश प्रदेश की जो स्थिति होती है, वही इस समय पूरे देश की हो रही है। गरीब और गरीब हो रहा है, अमीर और अमीर हो रहा है। ऐसा लगता है कि शेयर बाजार ही देश है, शेयर बाजार मंे मामूली उठापटक से सरकारांे की चूले हिलने लग जाती हैं। कुलदीपकजी यही सब सोच रहे थे। देखते-देखते धर्मयुग, सारिका, पराग, दिनमान रविवार, सण्डेमेल, सण्डे ओब्जवर, इतवारी पत्रिका और सैकड़ांे लघु पत्रिकाएं काल के गाल मंे समा गई थी। साहित्य पहले हाशिये पर आया, फिर गायब ही हो गया। कुछ सिरफिरे अभी भी साहित्य की वापसी का इन्तजार करते करते हथेली पर सरसांे उगाने का असफल प्रयास कर रहे है। लघु पत्रिका का भारी उद्योग अब इन्टरनेट और ब्लागांे की दुनियां मंे चल निकला था। छोटे-बड़े अखबार अब प्रादेशिक होकर पचासांे संस्करणांे मंे छप रहे थे। विज्ञापनांे की आय बढ़ रही थी, सेठांे के पेट भर रहे थे। अखबारांे के पेट भर रहे थे, मगर पत्रकारिता, साहित्य और रचनात्मक मिशनरी लेखन भूखे मरने की कगार तक पहुंच गया था।
ऐसे मंे कुलदीपकजी को सम्पादक ने बुलाया और कहा।
'जैसा भी आपका आदेश होगा, वैसी पालना कर दूंगा।' कुलदीपकजी ने कहा आप कहे तो कविता लिखने लगंू।
कुलदीपकजी चुप ही रहे। आखिर सम्पादक उनका बोस था। और वे जानते थे नेता, अफसर और सम्पादक जब तक कुर्सी पर होते है किसी को कुछ नहीं समझते और कुर्सी से उतरने के बाद उन्हंे कोई कुछ नहीं समझता। अभी सम्पादक कुर्सी पर था। समीक्षाएं छप रही थी और सायंकालीन आचमन हेतु कुछ राशि नियमित रूप से हस्तगत हो रही थी। कुलदीपकजी इसी से खुश थे। सन्तुष्ट थे।
कुलदीपकजी की बांछे खिल गई। वे मन ही मन बड़े खुश हुए। चलो कालम मिला। अब वे पुराने शत्रुआंे से गिनगिन कर बदला ले सकंेगे। मगर अभी रोटी एक तरफ से सिकी थी। सम्पादक ने आगे कहा।
इस प्रकार एक हास्यास्पद रस के कवि हास्य के चलते इस व्यंग्य के स्तम्भ लेखन की पटरी पर दौड़ने लगे।
सायंकाल जब वे घर पहंुचेे उन्हंे असली ज्ञान मिला। जब मां ने बताया कि यशोधरा ने सम्पादकजी से आर्य समाज मंे शादी रचा ली थी और यह खम्भ-लेखन उन्हंे इसी उपहार मंे मिला था।
रोने-धोने के बाद मां, बाऊजी ने बेटी को विदा कर दिया। मोहल्ले पड़ोस को एक पार्टी दी और बिटिया इस एक कमरे के महल को छोड़कर पासवाली बड़ी बिल्डिंग के तीसरे माले पर सम्पादकजी के फ्लेट पर रहने चली गई।
उत्तर आधुनिक साहित्य मंे ऐसी घटनाएंे या दुर्घटनाएं जो भी आप कहना चाहे अक्सर घटती रहती है, जिन्हंे सोच समझ कर कहानी या उपन्यास मंे ढाला जा सकता है। आखिर टी.वी. चैनलांे के सास बहू मार्का धारावाहिकांे का कुछ असर तो समाज पर भी होना ही चाहिये। अच्छी बात ये रही कि यशोधरा ने नौकरी छोड़कर घर-बार संभाल लिया। कुलदीपकजी का काम अब और भी कठिन हो गया था, मगर नियमित लेखन की आमदनी और बापू की पंेशन से आराम से गुजारा हो रहा था। मगर ऊपर वाले से किसी का भी सुख लम्बे समय तक देखा नहीं जाता।
रात का दूसरा प्रहर। कुलदीपकजी प्रेस से निकलना चाहते थे कि सूचना आई। बाबूजी का स्वास्थ्य अचानक गड़बड़ा गया है। कुलदीपकजी घर की और दौड़ पड़े। बापू को श्वास की पुरानी बीमारी थी, मगर अभी शायद हृदयाघात हुआ था। सब तेजी से बापू को लेकर रावरे की डिस्पेन्सरी तक ले गये। वहां पर नर्स थी, सौभाग्य से डॉक्टर भी था, मगर आपातकालीन दवायंे नही थी। सघन चिकित्सा इकाई नहीं थी। डॉक्टर ने बापू को देखा। समझा। समझ गया। सौरी बोला। मगर तब तक कुलदीपकजी ने पास पड़ोस के कुछ लड़के इकट्ठे कर लिये, जो ऐसे शुभ-अशुभ अवसरांे पर वहीं सब करते थे जो करना उन्हंे उचित लगता था। उन्होंने डॉक्टर से गाली-गलोच की, नर्स के कपड़े फाड़े, चपरासी की पिटाई की। अस्पताल मंे तोडफोड़ की, हल्ला मचाया। यहां तक तो सहनीय था, मगर जब लड़कांे ने, नर्स और डॉक्टर को एक साथ पीटना शुरू किया तो डॉक्टर ने पुलिस को फोन कर दिया।
भारतीय पुलिस नियमानुसार घटना घटने के बाद पहुंचती है।। दोनांे पक्षांे को समझाने का असफल प्रयास पुलिस ने किया। दरोगा ने नर्स-डॉक्टर और लड़को को रातभर थाने मंे बंद कर दिया और बोला।
'सुबह देखेंगे।' 'यह हत्या थी, आत्महत्या थी या प्राकृतिक मृत्यु।' इस वाक्य से दोनांे पक्ष सहम गये। मगर पुलिस तो पुलिस थी। रातभर बापू की लाश अस्पताल के बरामदे मंे पड़ी रही।
पास मंे ही जबरा कुत्ता पहरेदारी कर रहा था। काफी रात गये तक कुत्ता भौंकता रहा मगर प्रजातन्त्र के कानांे तक उसकी बात नहीं पहुंची।
सुबह होते-होते दोनांे पक्षांे ने सम्पादक की सलाह पर केस उठा लिए और बापू के क्रियाकर्म के पैसे डॉक्टर, नर्स, चपरासी से वसूल पाये।
जैसा कि सौन्दर्यवान महिलाएं और बुद्धिमान पुरूष जानते है अस्पताल वह स्थान है जहां पर आदमी जिंदा जाता तो है, मगर उसका वहां से जिन्दा आना बहुत मुश्किल काम है। डॉक्टर मरीज के बच जाने पर खुद को शाबाशी देता है और मर जाने पर ईश्वर को दोष देकर अलग हो जाता है। ज्यादा होशियार डॉक्टर साफ कह देते हैं कि मैं इलाज करता हूं, मरना-जीना तो ईश्वर के हाथ मंे है। वास्तव मंे ईश्वर और किस्मत दो ऐसी चीजंे है जिन पर कोई भी दोष, अपराध आसानी से मढ़ा जा सकता है और मजा ये यारांे कि ये दोनांे शिकायत करने कभी नहीं आते। सब संकट झेल जाते हैं।
डॉक्टर और नर्स ईलाज मंे लापरवाही के आरोप से तो बच गये मगर जो कुछ हुआ उससे डॉक्टर और नर्स की बड़ी सार्वजनिक बेइज्जती हुई थी, डॉक्टर परेशान, दुःखी था। नर्स अवसाद मंे थी, और चपरासी ने अस्पताल आना बन्द कर दिया था। डॉक्टर अपना स्थानान्तरण चाहता था। नर्स भी इसी फिराक मंे थी, मगर ये सब इतना आसान नहीं था। आज अस्पताल मंे नर्स की ड्यूटी थी, डॉक्टर शहर से ही नही आया था, उसका कुत्ता बीमार था और उसे पशु चिकित्सक को दिखाना आवश्यक था।
नर्स अस्पताल मंे अकेली बैठी-बैठी बोर हो रही थी। ठीक इसी समय झपकलाल ने मंच पर प्रवेश किया। झपकलाल को देखते ही नर्स पहचान गई। वो चिल्लाना चाहती थी, मगर दिन का समय, सरकारी कार्यालय और सिस्टर के पवित्र कार्य को ध्यान मंे रखकर क्राइस्ट का क्रास बनाकर चुप रह गई। झपकलाल भी आज ठीक-ठाक मूड मंे थे। आते ही वो बोल पड़े ।
नर्स क्या कहती। शिष्टाचार के नाते चुप रही। झपकलाल फिर बोल पड़े।
नर्स फिर चुप रही। अब झपकलाल से सहन नही हुआ।
झपकलाल बैठक की सूचना देने ही आया था। सूचना देकर चला गया। बैठक की सूचना अखबार मंे भी छप गई थी। विज्ञापन के पैसे भी नहीं लगे थे।
शाम का समय। बैठक का समय। घर के सामने ही दरियां बिछा दी गई थी। बापू की एक पुरानी फोटो लगाकर उस पर माला चढ़ा कर अगरबत्ती लगा दी गई थी। पण्डित जी आ गये थे। धीरे-धीरे लोग बाग भी आ रहे थे। कुछ पास पड़ोस की महिलाएंे और रिश्तेदारी की अधेड़ चाचियां, मामियां, काकियां, भुवाएं आदि भी धीरे-धीरे आ रही थी। नर्स बहिन जी भी आ गई थी। गीता रहस्य पढ़ा जा रहा था।
लोग-बाग आपस मंे अपनी-अपनी चर्चा कर रहे थे। कुछ महिलाएं एक-दूसरे की साड़ियांें पर ध्यान दे रही थी। कुछ अपने आभूषणांे की चिंता मंे व्यस्त थी। मृतक की आत्मा की शान्ति के लिए पाठ जारी था। पुरूष लोगांे को अपने उतारे हुए जूतांे और वाहनांे की चिन्ता थी। कुछ दूर जाने की चिंता कर रहे थे। मृतक की आत्मा अब शान्त थी। राम-राम करके पाठ पूरा हुआ। पुष्पाजंलि हुई। तुलसी बांटी गई। और बैठक शिव मन्दिर मंे जाकर पूरी हुई। कुलदीपक ने सबको नमस्कार किया। सबने उन्हंे और रिश्तेदारांे को प्रणाम किया। लोग-बाग धीरे-धीरे घर गृहस्थी की चर्चा करते-करते चले गये।
महिलाएं मृतक की पत्नी को सांत्वना देकर आंसू पौंछती चली गई। रह गया केवल शून्य। सन्नाटा। घर मंे उदासी। कुलदीपक के मन मंे भविष्य की चिन्ता। यशोधरा ने सब संभाल रखा था। मां को भी। कुलदीपक ने झपकलाल की मदद से दरियां समेटी। पण्डित जी को दक्षिणा सहित विदा किया और मां के पास आकर बैठ गये।
धीरे-धीरे दिन बीते। दुःख घटे। अवसाद कम हुए। कुलदीपकजी वापस दैनिक कार्यक्रमांे मंे रमने लगे। बापू नित्यलीला मंे चले गये। मां और भी ज्यादा बुढ़ा गई। यशोधरा का आना-जाना लगा रहा। कुलदीपकजी अपना खटकर्म करते रहे।
मां को एक बहू चाहिये थी। मगर इधर समाज मंे लड़कियांे की संख्या निरन्तर गिर रही थी। और अच्छी, खानदानी लड़कियांे की तो और कमी थी। कोई रिश्ता आता ही नहीं था। आता तो दायें-बायें देखने लायक। कन्या भू्रण हत्याआंे के चलते नरः नारी का अनुपात अपना असर दिखाने लग गया था।
मां की चिन्ता वाजिब थी। मगर क्या करती। कूलभूषण जहां कभी पूरे गांव शहर की लड़कियांे से इकतरफा प्यार करते थे, एक प्रेमिका, पत्नी के लिए तरस गये।
शाम का जुटपुटा था। बाहर रोशनी हो रही थी मगर कुलभूषण के अन्दर अन्धकार था। वे आप्पदीपांे भव की भी सोच रहे थे। तमसो मां ज्योतिर्गमय उवाच रहे थे। मगर इनसे क्या होना जाना था। किसी के जाने से जीवन ठहर तो नहीं जाता।
कल्लू मोची जिस ठीये पर बैठकर जूतांे की मरम्मत का काम करता था। उसके पास की एक गन्दा नाला था, जो चौबीसांे घन्टे बहता रहता था। नाला खुला था। इसकी बदबू पूरे शहर का वातावरण, पर्यावरण, प्रदूषण आदि से जुड़ी संस्थाआंे को रोजी-रोटी देती थी। वास्तव मंे स्वयं सेवी संस्था का मतलब खुद की सेवा करने वाली संस्था होता है। कल्लू मोची को इस नाले से बड़ा डर था। नाला आगे जाकर झील मंे गिरता था। नाले के किनारे पर खुली हवा मंे संडास की सार्वजनिक व्यवस्था थी। अक्सर मुंह अन्धरे से ही लोग-बाग इस नाले को पवित्र करने का राष्ट्रीय कर्मकाण्ड प्रारम्भ कर देते थे। नाल मंे मल, मूत्र, गन्दगी, एमसी के कपड़े आदि अनवरत गिरते बहते रहते थे। शहर के बच्चे यहां पर लगातार मल-मूत्र का विसर्जन करते रहते थे। साथ मंे हवा मंे प्राणवायु का भी संचार करते रहते थे।
सभी रात का खाया सुबह इस नाले मंे प्रवाहित करते थे। महिलाएं भी मुंह अन्धेरे इस दैनिक कर्म को निपटा देती थी। सरकारी शौचलाय नहीं था। सुलभ वाले दुर्लभ थे और सबसे बड़ी बात नाले की सुविधा निःशुल्क, निर्वाध थी, जो हर किसी को रास आती थी। नाले के और भी बहुत सारे उपयोग थे।
सुबह-सवेरे नाले के किनारे पर बड़ी भीड़ थी। कल्लू मोची, उसका जबरा कुत्ता, और सैकड़ांे की भीड़ वहां खड़ी थी। नाले के अन्दर एक कन्या भू्रण पड़ी थी। झबरे कुत्ते की बड़ी इच्छा थी कि नाले मंे कूदे और भू्रण का भक्षण करे। मगर नाले की गहराई देखकर हिम्मत नहीं हो रही थी। भीड़ तरह-तरह के कयास लगा रही थी। घोर कलियुग की घोषणा करते हुए एक पण्डितजी ने राम-राम करके सबको पुलिस को सूचना देने का आदेश दिया। मगर पुलिस के लफड़े मंे कौन पड़े।
मगर पुलिस बिना बुलाये ही आ गई। भीड़ छट गई। पुलिस ने सबसे पूछा और भू्रण को कब्जे मंे किया। पंचनामा बनाया, अस्पताल मंे भू्रण को रखवाया और एक दरोगा को इन्क्वायरी आफिसर नियुक्त कर दिया। ये सब कार्यवाही करके पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए मीडिया को सूचित किया कि शीध्र ही ये पता लगा लिया जायेगा कि कन्या भू्रण की हत्या कब कहां कैसे हुई और हत्यारे या भू्रण के माता पिता को शीघ्र ही ढूंढ़ निकाला जायेगा।
पुलिस के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा। पुलिस ने जांच शुरू कर दी और सबसे पहले कल्लू मोची को ही थाणे मंे बुला भेजा।
कल्लू मोची हॉफता-कॉपता थाने पहुँचा, उसकी समझ मंे ये नहीं आया की उसका कसूर क्या है? मगर कसूरवार को थाणे मंे कौन बुलाता है। अपराधी तक तो थानेदार खुद जाता है। गरीब, असहाय निरपराधी को थाणे बुलाने का पुराना रिवाज चला आ रहा है और थानेदार की निगाह मंे घटना स्थल पर सबसे नजदीक कल्लू ही था।
थानेदार ने डण्डा दिखाते हुए पूछा,
थानेदार ने कल्लू को एक तड़ी देकर जाने का कहा और जाते-जाते कहा।
'देख बे कल्लू कोई ऐसी वैसी बात सुनाई पड़े तो मुझे तुरन्त खबर करना। तुझे सरकारी मुखबिर बनाकर बचा लूंगा।
कालू चुपचाप अपनी किस्मत को रोता हुआ चला गया।
इधर स्थानीय पत्रकारांे, चैनल वालांे ने मीडिया मंे इस कन्या भू्रण हत्या की बात का बतंगड़ बना दिया, राई से पहाड़ का, निर्माण कर न्यूज कैपसूल सुबह पंाच बजे से निरन्तर दिखाये गये। ऐसा शानदार मसालेदार, समाचार स्थानीय चैनलांे से लेकर नेशनल चैनल तक दिखाये जाने लगे। मीडिया के अलावा स्वय सेवी संगठन, छुटभैये नेता, महिला संगठनांे के पदाधिकारी और प्रगतिशील बुद्धिजीवियों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
पुलिस भी कुछ कम न थी। उन्हांेने धीरे-धीरे खोजबीन करके एक वेश्या से यह कबूल करवा लिया कि भू्रण मेरा था मैंने फिकवा दिया। मगर लाख टके का सवाल ये था कि भू्रण का बाप कौन था। वेश्या से बाप का नाम उगलवाना आसान न था, मगर वो किस-किस का नाम लेती। सो कन्या भू्रण हत्या का यह मामला धीरे-धीरे अन्य मामलांे की तरह ही मर गया। दो-चार दिन समाचार पत्रांे मंे पहले पन्ने पर फिर तीसरे-चौथे पन्ने पर फिर धीरे-धीरे समाचार अपनी मौत मर गया। समाज मंे यह सब चलता ही रहता है, ऐसा सोचकर भीड़ ने अपना ध्यान अन्यत्र लगाना शुरू कर दिया, वैसे भी भीड़ की स्मरण शक्ति बड़ी कमजोर होती है।
कन्या भू्रण हत्या का मामला निपटा ही था कि कल्लू पर एक और मुसीबत आई। उसका जबरा कुत्ता कहीं भाग गया था। कल्लू ने इधर-उधर दौड़ धूप की और कुछ दिनांे के बाद झबरा कुत्ता वापस तो आया, मगर उसके साथ कुतिया भी थी। कल्लू अब घर से दो रोटियां लाने लगा। दोपहर मंे उन दोनांे को चाय पिलाने लगा और सामने वाले हलवाई के यहां सर कड़ाई मंे डाल दोनांे एक साथ डिनर करने लगे। कुतिया पेट से थी। उसने अपने पिल्लांे की भू्रण हत्या नहीं करके उन्हंे जन्म दिया।
कल्लू के ठीये के पास के पेड़ के नीचे कुतिया अपने पिल्लांे को दूध पिलाती, चाटती, उनसे खेलती, खुश रहती, मगर नगरपालिका वालांे से यह सुख देखा नहीं गया वे कुतिया और उसके पिल्लांे को पकड़कर ले गये और जंगल मंे छोड़ आये। कल्लू का जबरा कुत्ता फिर अकेला हो गया।
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हैडमास्टर साहब का काम पूरा हो चुका था। उन्हांेने देखंेगे का भाव चेहरे पर चिपकाया ओर शुक्लाजी ने कक्ष से बाहर आकर पसीना पांेछा। हैडमास्टर साहब शिक्षा के मामले मंे बहुत कोरे थे। वे तो अपने निजि सम्बन्धों के सहारे जी रहे थे, मैनेजमंेट, पार्टी पोलिटिक्स ट्रस्ट, अध्यापक, छात्र, छात्राआंे आदि की आपसी राजनीति उनके प्रिय शगल थे। विद्यालय मंे किसी प्रिन्सिपल की नियुक्ति की अफवाहों से वे बड़े विचलित थे। इस विचलन को ठीक करने का एक ही रास्ता था। मैनेजमंेट के मुख्य ट्रस्टी को अपनी ओर मिलाये रखना। मुख्य ट्रस्टी शहर के व्यापारी थे। उनके पास कई काम थे। उन्हांेने कॉलेज का काम-काज अपनी पत्नी माधुरी के जिम्मे कर दिया था। माधुरी कभी-कदा कॉलेज आती। संभालती। एक-दो को डॉट-डपट करती। निलम्बन की धमकी देती और चली जाती। वो पढ़ी-लिखी ज्यादा नही थी मगर सेठानी थी और पैसा ही उसकी योग्यता थी। हैडमास्टरजी उससे खांेफ खाते थे, कारण स्पष्ट था। सेठजी खुश तो हैडमास्टरी चलती रहती और नाराज तो हैडमास्टर चले जाते। शिक्षा की दुर्गति ही थी एम.ए., बी.एड., एम.एड., पी.एच.डी. जैसी डिग्रियांे के धारक सेठानी की आवाज पर चुप लगा जाते। स्थानीय अध्यापकांे का गुट अलग था, जो हमेशा से ही मैनेजमंेट का गुट कहलाता था और बाह्य अध्यापकांे को कभी भी कान पकड़कर निकाला जा सकता था। पढ़ाई लिखाई के अलावा ज्यादा काम कॉलेज मंे दूसरे होते थे। सर्दियांे मंे अवकाश के दौरान सेठजी अपनी दुकान का सामान भी कॉलेज मंे रखवा देते थे। कॉलेज मंे पिछवाड़े सेठजी की गायें, भैंसें बंधती थी और कॉलेज के चपरासी उनकी अनवरत सेवा सुश्रुषा, टहल करने पर ही नौकरी पर चलते थे। कॉलेज मंे मौज-मस्ती, फैशन, करने के लिए पूरे शहर के लौण्डे-लौण्डियां आते थे। नाभिदर्शना-लो-हिप जीन्स और लोकट टॉप के सहारे लड़कियां कॉलेज लाइफ के मजे ले रही थी और लड़के गुरूआंें से ज्यादा लवगुरूआंे के पास मंडराते थे। माधुरी इस हाईस्कूल को कभी निजी विश्वविद्यालय बनाने के सपने देखती थी। ऐसा सपना उन्हंे हैडमास्टर साहब दिखाते थे। माधुरी का मानना था कि एक बार उन्हंें विधानसभा का टिकट मिल जाये बस यह स्कूल राज्य का विश्वविद्यालय बनकर रहेगा और वे इसकी आजीवन कुलपति रहेगी। प्रदेश को स्वर्ग बनाने की घोषणाऐं अक्सर होती रहती थी और इन घोषणाआंे की अध्यापक बड़ी मजाक बनाते थे। प्रदेश स्वर्ग होगा और प्रदेशवासी स्वर्गवासी, जैंसे जुमले अक्सर स्टाफरूम मंे सुनने को मिलते थे। दूसरा अध्यापक तुरन्त बोल पड़ता, आप स्वर्ग जाकर क्या करंेगे माटसाब आपके तो सभी रिश्तेदार नरक मंे मिलंेगे। सभी मिलकर अट्टहास करते। वैसे प्राइवेट कॉलेज मंे पूरे वेतन की मांग करने वाले ज्यादा दिन नहीं टिक सकते थे। पूरे वेतन पर हस्ताक्षर, शेष वेतन का मैनेजमंेट के नाम पर अग्रिम चैक और बकाया का नकद भुगतान। इसी फण्डे पर कॉलेज चल रहे थे। माधुरी भी इसी फण्डे पर कॉलेज, कॉलेज की राजनीति को चला रही थी और एक दिन इस चार कमरे के कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने के सपने को साकार करने मंे लगी हुई थी। बस एक टिकट का सवाल था जिसे हल करना बड़ा मुश्किल था। शुक्लाजी ने हैडमास्टर साहब के चारे पर घर आकर शुक्लाइन से विचार-विमर्श किया। शुक्लाईन को मामला जम गया। वैसे भी घर मंे बैठकर बोर हाने से यह अच्छा था। शुक्लाजी ने हैडमास्टर साहब का दामन पकड़ा, हैडमास्टरजी ने माधुरी को कहा, माधुरी ने शुक्लाइन को घर पर साक्षात्कार के लिए बुलाया और इस प्रकार शुक्लाइन भी हाईस्कूल मंे प्रोफेसराईन हो गयी। मगर माधुरी ने कच्ची गोलियां नही खेली थी, वे शुक्लाईन के सहारे राजनीति की सीढ़ी चढ़ना चाहती थी। उत्तर आधुनिकता की इस आंधी मंे वैश्विक समानीकरण की दौड़ मंे जब स्वतन्त्र अर्थ व्यवस्था और विश्व एक गांव की अवधरणा का तड़का लग जाता है तो देश प्रदेश की जो स्थिति होती है, वही इस समय पूरे देश की हो रही है। गरीब और गरीब हो रहा है, अमीर और अमीर हो रहा है। ऐसा लगता है कि शेयर बाजार ही देश है, शेयर बाजार मंे मामूली उठापटक से सरकारांे की चूले हिलने लग जाती हैं। कुलदीपकजी यही सब सोच रहे थे। देखते-देखते धर्मयुग, सारिका, पराग, दिनमान रविवार, सण्डेमेल, सण्डे ओब्जवर, इतवारी पत्रिका और सैकड़ांे लघु पत्रिकाएं काल के गाल मंे समा गई थी। साहित्य पहले हाशिये पर आया, फिर गायब ही हो गया। कुछ सिरफिरे अभी भी साहित्य की वापसी का इन्तजार करते करते हथेली पर सरसांे उगाने का असफल प्रयास कर रहे है। लघु पत्रिका का भारी उद्योग अब इन्टरनेट और ब्लागांे की दुनियां मंे चल निकला था। छोटे-बड़े अखबार अब प्रादेशिक होकर पचासांे संस्करणांे मंे छप रहे थे। विज्ञापनांे की आय बढ़ रही थी, सेठांे के पेट भर रहे थे। अखबारांे के पेट भर रहे थे, मगर पत्रकारिता, साहित्य और रचनात्मक मिशनरी लेखन भूखे मरने की कगार तक पहुंच गया था। ऐसे मंे कुलदीपकजी को सम्पादक ने बुलाया और कहा। 'जैसा भी आपका आदेश होगा, वैसी पालना कर दूंगा।' कुलदीपकजी ने कहा आप कहे तो कविता लिखने लगंू। कुलदीपकजी चुप ही रहे। आखिर सम्पादक उनका बोस था। और वे जानते थे नेता, अफसर और सम्पादक जब तक कुर्सी पर होते है किसी को कुछ नहीं समझते और कुर्सी से उतरने के बाद उन्हंे कोई कुछ नहीं समझता। अभी सम्पादक कुर्सी पर था। समीक्षाएं छप रही थी और सायंकालीन आचमन हेतु कुछ राशि नियमित रूप से हस्तगत हो रही थी। कुलदीपकजी इसी से खुश थे। सन्तुष्ट थे। कुलदीपकजी की बांछे खिल गई। वे मन ही मन बड़े खुश हुए। चलो कालम मिला। अब वे पुराने शत्रुआंे से गिनगिन कर बदला ले सकंेगे। मगर अभी रोटी एक तरफ से सिकी थी। सम्पादक ने आगे कहा। इस प्रकार एक हास्यास्पद रस के कवि हास्य के चलते इस व्यंग्य के स्तम्भ लेखन की पटरी पर दौड़ने लगे। सायंकाल जब वे घर पहंुचेे उन्हंे असली ज्ञान मिला। जब मां ने बताया कि यशोधरा ने सम्पादकजी से आर्य समाज मंे शादी रचा ली थी और यह खम्भ-लेखन उन्हंे इसी उपहार मंे मिला था। रोने-धोने के बाद मां, बाऊजी ने बेटी को विदा कर दिया। मोहल्ले पड़ोस को एक पार्टी दी और बिटिया इस एक कमरे के महल को छोड़कर पासवाली बड़ी बिल्डिंग के तीसरे माले पर सम्पादकजी के फ्लेट पर रहने चली गई। उत्तर आधुनिक साहित्य मंे ऐसी घटनाएंे या दुर्घटनाएं जो भी आप कहना चाहे अक्सर घटती रहती है, जिन्हंे सोच समझ कर कहानी या उपन्यास मंे ढाला जा सकता है। आखिर टी.वी. चैनलांे के सास बहू मार्का धारावाहिकांे का कुछ असर तो समाज पर भी होना ही चाहिये। अच्छी बात ये रही कि यशोधरा ने नौकरी छोड़कर घर-बार संभाल लिया। कुलदीपकजी का काम अब और भी कठिन हो गया था, मगर नियमित लेखन की आमदनी और बापू की पंेशन से आराम से गुजारा हो रहा था। मगर ऊपर वाले से किसी का भी सुख लम्बे समय तक देखा नहीं जाता। रात का दूसरा प्रहर। कुलदीपकजी प्रेस से निकलना चाहते थे कि सूचना आई। बाबूजी का स्वास्थ्य अचानक गड़बड़ा गया है। कुलदीपकजी घर की और दौड़ पड़े। बापू को श्वास की पुरानी बीमारी थी, मगर अभी शायद हृदयाघात हुआ था। सब तेजी से बापू को लेकर रावरे की डिस्पेन्सरी तक ले गये। वहां पर नर्स थी, सौभाग्य से डॉक्टर भी था, मगर आपातकालीन दवायंे नही थी। सघन चिकित्सा इकाई नहीं थी। डॉक्टर ने बापू को देखा। समझा। समझ गया। सौरी बोला। मगर तब तक कुलदीपकजी ने पास पड़ोस के कुछ लड़के इकट्ठे कर लिये, जो ऐसे शुभ-अशुभ अवसरांे पर वहीं सब करते थे जो करना उन्हंे उचित लगता था। उन्होंने डॉक्टर से गाली-गलोच की, नर्स के कपड़े फाड़े, चपरासी की पिटाई की। अस्पताल मंे तोडफोड़ की, हल्ला मचाया। यहां तक तो सहनीय था, मगर जब लड़कांे ने, नर्स और डॉक्टर को एक साथ पीटना शुरू किया तो डॉक्टर ने पुलिस को फोन कर दिया। भारतीय पुलिस नियमानुसार घटना घटने के बाद पहुंचती है।। दोनांे पक्षांे को समझाने का असफल प्रयास पुलिस ने किया। दरोगा ने नर्स-डॉक्टर और लड़को को रातभर थाने मंे बंद कर दिया और बोला। 'सुबह देखेंगे।' 'यह हत्या थी, आत्महत्या थी या प्राकृतिक मृत्यु।' इस वाक्य से दोनांे पक्ष सहम गये। मगर पुलिस तो पुलिस थी। रातभर बापू की लाश अस्पताल के बरामदे मंे पड़ी रही। पास मंे ही जबरा कुत्ता पहरेदारी कर रहा था। काफी रात गये तक कुत्ता भौंकता रहा मगर प्रजातन्त्र के कानांे तक उसकी बात नहीं पहुंची। सुबह होते-होते दोनांे पक्षांे ने सम्पादक की सलाह पर केस उठा लिए और बापू के क्रियाकर्म के पैसे डॉक्टर, नर्स, चपरासी से वसूल पाये। जैसा कि सौन्दर्यवान महिलाएं और बुद्धिमान पुरूष जानते है अस्पताल वह स्थान है जहां पर आदमी जिंदा जाता तो है, मगर उसका वहां से जिन्दा आना बहुत मुश्किल काम है। डॉक्टर मरीज के बच जाने पर खुद को शाबाशी देता है और मर जाने पर ईश्वर को दोष देकर अलग हो जाता है। ज्यादा होशियार डॉक्टर साफ कह देते हैं कि मैं इलाज करता हूं, मरना-जीना तो ईश्वर के हाथ मंे है। वास्तव मंे ईश्वर और किस्मत दो ऐसी चीजंे है जिन पर कोई भी दोष, अपराध आसानी से मढ़ा जा सकता है और मजा ये यारांे कि ये दोनांे शिकायत करने कभी नहीं आते। सब संकट झेल जाते हैं। डॉक्टर और नर्स ईलाज मंे लापरवाही के आरोप से तो बच गये मगर जो कुछ हुआ उससे डॉक्टर और नर्स की बड़ी सार्वजनिक बेइज्जती हुई थी, डॉक्टर परेशान, दुःखी था। नर्स अवसाद मंे थी, और चपरासी ने अस्पताल आना बन्द कर दिया था। डॉक्टर अपना स्थानान्तरण चाहता था। नर्स भी इसी फिराक मंे थी, मगर ये सब इतना आसान नहीं था। आज अस्पताल मंे नर्स की ड्यूटी थी, डॉक्टर शहर से ही नही आया था, उसका कुत्ता बीमार था और उसे पशु चिकित्सक को दिखाना आवश्यक था। नर्स अस्पताल मंे अकेली बैठी-बैठी बोर हो रही थी। ठीक इसी समय झपकलाल ने मंच पर प्रवेश किया। झपकलाल को देखते ही नर्स पहचान गई। वो चिल्लाना चाहती थी, मगर दिन का समय, सरकारी कार्यालय और सिस्टर के पवित्र कार्य को ध्यान मंे रखकर क्राइस्ट का क्रास बनाकर चुप रह गई। झपकलाल भी आज ठीक-ठाक मूड मंे थे। आते ही वो बोल पड़े । नर्स क्या कहती। शिष्टाचार के नाते चुप रही। झपकलाल फिर बोल पड़े। नर्स फिर चुप रही। अब झपकलाल से सहन नही हुआ। झपकलाल बैठक की सूचना देने ही आया था। सूचना देकर चला गया। बैठक की सूचना अखबार मंे भी छप गई थी। विज्ञापन के पैसे भी नहीं लगे थे। शाम का समय। बैठक का समय। घर के सामने ही दरियां बिछा दी गई थी। बापू की एक पुरानी फोटो लगाकर उस पर माला चढ़ा कर अगरबत्ती लगा दी गई थी। पण्डित जी आ गये थे। धीरे-धीरे लोग बाग भी आ रहे थे। कुछ पास पड़ोस की महिलाएंे और रिश्तेदारी की अधेड़ चाचियां, मामियां, काकियां, भुवाएं आदि भी धीरे-धीरे आ रही थी। नर्स बहिन जी भी आ गई थी। गीता रहस्य पढ़ा जा रहा था। लोग-बाग आपस मंे अपनी-अपनी चर्चा कर रहे थे। कुछ महिलाएं एक-दूसरे की साड़ियांें पर ध्यान दे रही थी। कुछ अपने आभूषणांे की चिंता मंे व्यस्त थी। मृतक की आत्मा की शान्ति के लिए पाठ जारी था। पुरूष लोगांे को अपने उतारे हुए जूतांे और वाहनांे की चिन्ता थी। कुछ दूर जाने की चिंता कर रहे थे। मृतक की आत्मा अब शान्त थी। राम-राम करके पाठ पूरा हुआ। पुष्पाजंलि हुई। तुलसी बांटी गई। और बैठक शिव मन्दिर मंे जाकर पूरी हुई। कुलदीपक ने सबको नमस्कार किया। सबने उन्हंे और रिश्तेदारांे को प्रणाम किया। लोग-बाग धीरे-धीरे घर गृहस्थी की चर्चा करते-करते चले गये। महिलाएं मृतक की पत्नी को सांत्वना देकर आंसू पौंछती चली गई। रह गया केवल शून्य। सन्नाटा। घर मंे उदासी। कुलदीपक के मन मंे भविष्य की चिन्ता। यशोधरा ने सब संभाल रखा था। मां को भी। कुलदीपक ने झपकलाल की मदद से दरियां समेटी। पण्डित जी को दक्षिणा सहित विदा किया और मां के पास आकर बैठ गये। धीरे-धीरे दिन बीते। दुःख घटे। अवसाद कम हुए। कुलदीपकजी वापस दैनिक कार्यक्रमांे मंे रमने लगे। बापू नित्यलीला मंे चले गये। मां और भी ज्यादा बुढ़ा गई। यशोधरा का आना-जाना लगा रहा। कुलदीपकजी अपना खटकर्म करते रहे। मां को एक बहू चाहिये थी। मगर इधर समाज मंे लड़कियांे की संख्या निरन्तर गिर रही थी। और अच्छी, खानदानी लड़कियांे की तो और कमी थी। कोई रिश्ता आता ही नहीं था। आता तो दायें-बायें देखने लायक। कन्या भू्रण हत्याआंे के चलते नरः नारी का अनुपात अपना असर दिखाने लग गया था। मां की चिन्ता वाजिब थी। मगर क्या करती। कूलभूषण जहां कभी पूरे गांव शहर की लड़कियांे से इकतरफा प्यार करते थे, एक प्रेमिका, पत्नी के लिए तरस गये। शाम का जुटपुटा था। बाहर रोशनी हो रही थी मगर कुलभूषण के अन्दर अन्धकार था। वे आप्पदीपांे भव की भी सोच रहे थे। तमसो मां ज्योतिर्गमय उवाच रहे थे। मगर इनसे क्या होना जाना था। किसी के जाने से जीवन ठहर तो नहीं जाता। कल्लू मोची जिस ठीये पर बैठकर जूतांे की मरम्मत का काम करता था। उसके पास की एक गन्दा नाला था, जो चौबीसांे घन्टे बहता रहता था। नाला खुला था। इसकी बदबू पूरे शहर का वातावरण, पर्यावरण, प्रदूषण आदि से जुड़ी संस्थाआंे को रोजी-रोटी देती थी। वास्तव मंे स्वयं सेवी संस्था का मतलब खुद की सेवा करने वाली संस्था होता है। कल्लू मोची को इस नाले से बड़ा डर था। नाला आगे जाकर झील मंे गिरता था। नाले के किनारे पर खुली हवा मंे संडास की सार्वजनिक व्यवस्था थी। अक्सर मुंह अन्धरे से ही लोग-बाग इस नाले को पवित्र करने का राष्ट्रीय कर्मकाण्ड प्रारम्भ कर देते थे। नाल मंे मल, मूत्र, गन्दगी, एमसी के कपड़े आदि अनवरत गिरते बहते रहते थे। शहर के बच्चे यहां पर लगातार मल-मूत्र का विसर्जन करते रहते थे। साथ मंे हवा मंे प्राणवायु का भी संचार करते रहते थे। सभी रात का खाया सुबह इस नाले मंे प्रवाहित करते थे। महिलाएं भी मुंह अन्धेरे इस दैनिक कर्म को निपटा देती थी। सरकारी शौचलाय नहीं था। सुलभ वाले दुर्लभ थे और सबसे बड़ी बात नाले की सुविधा निःशुल्क, निर्वाध थी, जो हर किसी को रास आती थी। नाले के और भी बहुत सारे उपयोग थे। सुबह-सवेरे नाले के किनारे पर बड़ी भीड़ थी। कल्लू मोची, उसका जबरा कुत्ता, और सैकड़ांे की भीड़ वहां खड़ी थी। नाले के अन्दर एक कन्या भू्रण पड़ी थी। झबरे कुत्ते की बड़ी इच्छा थी कि नाले मंे कूदे और भू्रण का भक्षण करे। मगर नाले की गहराई देखकर हिम्मत नहीं हो रही थी। भीड़ तरह-तरह के कयास लगा रही थी। घोर कलियुग की घोषणा करते हुए एक पण्डितजी ने राम-राम करके सबको पुलिस को सूचना देने का आदेश दिया। मगर पुलिस के लफड़े मंे कौन पड़े। मगर पुलिस बिना बुलाये ही आ गई। भीड़ छट गई। पुलिस ने सबसे पूछा और भू्रण को कब्जे मंे किया। पंचनामा बनाया, अस्पताल मंे भू्रण को रखवाया और एक दरोगा को इन्क्वायरी आफिसर नियुक्त कर दिया। ये सब कार्यवाही करके पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए मीडिया को सूचित किया कि शीध्र ही ये पता लगा लिया जायेगा कि कन्या भू्रण की हत्या कब कहां कैसे हुई और हत्यारे या भू्रण के माता पिता को शीघ्र ही ढूंढ़ निकाला जायेगा। पुलिस के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा। पुलिस ने जांच शुरू कर दी और सबसे पहले कल्लू मोची को ही थाणे मंे बुला भेजा। कल्लू मोची हॉफता-कॉपता थाने पहुँचा, उसकी समझ मंे ये नहीं आया की उसका कसूर क्या है? मगर कसूरवार को थाणे मंे कौन बुलाता है। अपराधी तक तो थानेदार खुद जाता है। गरीब, असहाय निरपराधी को थाणे बुलाने का पुराना रिवाज चला आ रहा है और थानेदार की निगाह मंे घटना स्थल पर सबसे नजदीक कल्लू ही था। थानेदार ने डण्डा दिखाते हुए पूछा, थानेदार ने कल्लू को एक तड़ी देकर जाने का कहा और जाते-जाते कहा। 'देख बे कल्लू कोई ऐसी वैसी बात सुनाई पड़े तो मुझे तुरन्त खबर करना। तुझे सरकारी मुखबिर बनाकर बचा लूंगा। कालू चुपचाप अपनी किस्मत को रोता हुआ चला गया। इधर स्थानीय पत्रकारांे, चैनल वालांे ने मीडिया मंे इस कन्या भू्रण हत्या की बात का बतंगड़ बना दिया, राई से पहाड़ का, निर्माण कर न्यूज कैपसूल सुबह पंाच बजे से निरन्तर दिखाये गये। ऐसा शानदार मसालेदार, समाचार स्थानीय चैनलांे से लेकर नेशनल चैनल तक दिखाये जाने लगे। मीडिया के अलावा स्वय सेवी संगठन, छुटभैये नेता, महिला संगठनांे के पदाधिकारी और प्रगतिशील बुद्धिजीवियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस भी कुछ कम न थी। उन्हांेने धीरे-धीरे खोजबीन करके एक वेश्या से यह कबूल करवा लिया कि भू्रण मेरा था मैंने फिकवा दिया। मगर लाख टके का सवाल ये था कि भू्रण का बाप कौन था। वेश्या से बाप का नाम उगलवाना आसान न था, मगर वो किस-किस का नाम लेती। सो कन्या भू्रण हत्या का यह मामला धीरे-धीरे अन्य मामलांे की तरह ही मर गया। दो-चार दिन समाचार पत्रांे मंे पहले पन्ने पर फिर तीसरे-चौथे पन्ने पर फिर धीरे-धीरे समाचार अपनी मौत मर गया। समाज मंे यह सब चलता ही रहता है, ऐसा सोचकर भीड़ ने अपना ध्यान अन्यत्र लगाना शुरू कर दिया, वैसे भी भीड़ की स्मरण शक्ति बड़ी कमजोर होती है। कन्या भू्रण हत्या का मामला निपटा ही था कि कल्लू पर एक और मुसीबत आई। उसका जबरा कुत्ता कहीं भाग गया था। कल्लू ने इधर-उधर दौड़ धूप की और कुछ दिनांे के बाद झबरा कुत्ता वापस तो आया, मगर उसके साथ कुतिया भी थी। कल्लू अब घर से दो रोटियां लाने लगा। दोपहर मंे उन दोनांे को चाय पिलाने लगा और सामने वाले हलवाई के यहां सर कड़ाई मंे डाल दोनांे एक साथ डिनर करने लगे। कुतिया पेट से थी। उसने अपने पिल्लांे की भू्रण हत्या नहीं करके उन्हंे जन्म दिया। कल्लू के ठीये के पास के पेड़ के नीचे कुतिया अपने पिल्लांे को दूध पिलाती, चाटती, उनसे खेलती, खुश रहती, मगर नगरपालिका वालांे से यह सुख देखा नहीं गया वे कुतिया और उसके पिल्लांे को पकड़कर ले गये और जंगल मंे छोड़ आये। कल्लू का जबरा कुत्ता फिर अकेला हो गया।
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इंदौर। 2 साल बाद आखिरकार इंदौर (Indore) फिर रंगपंचमी पर ऐतिहासिक नजारा दिखाई दिया। कोरोना के बाद आज रंगपंचमी (Rangpanchami) मनाई जा रही है। ऐतिहासिक गेर का आयोजन होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड 5 लाख से ज्यादा लोग गेर में शामिल होंगे। ऐतिहासिक गेर में करीब 5 लाख लोग शामिल हुए।
इंदौरवासियों के उमंग को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से पूरी गेर पर नजर रखी जाएगी। मालवा में होली (Holi) से ज्यादा रंगपंचमी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। आसमान से उड़ते रंग के साथ जमीन पर लोगों के मन में उमंग दिखाई दे रही है।
युवाओं का कहना था कि हम इंदौर की रंगपंचमी बहुत धूमधाम से मनाते हैं और आज भी हम विभिन्न गली-मोहल्लों में इकट्ठा होकर युवा आपस में एक दूसरे को गले लगा रहे हैं। 75 साल से चल रहे इस समारोह का आयोजन को इस बार यूनेस्को (UNESCO) में शामिल करवाने का प्रयास है। आयोजकों का कहना है कि कोरोनावायरस के कारण 2 साल बाद रंग पंचमी महोत्सव मनाया जा रहा है।
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इंदौर। दो साल बाद आखिरकार इंदौर फिर रंगपंचमी पर ऐतिहासिक नजारा दिखाई दिया। कोरोना के बाद आज रंगपंचमी मनाई जा रही है। ऐतिहासिक गेर का आयोजन होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड पाँच लाख से ज्यादा लोग गेर में शामिल होंगे। ऐतिहासिक गेर में करीब पाँच लाख लोग शामिल हुए। इंदौरवासियों के उमंग को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से पूरी गेर पर नजर रखी जाएगी। मालवा में होली से ज्यादा रंगपंचमी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। आसमान से उड़ते रंग के साथ जमीन पर लोगों के मन में उमंग दिखाई दे रही है। युवाओं का कहना था कि हम इंदौर की रंगपंचमी बहुत धूमधाम से मनाते हैं और आज भी हम विभिन्न गली-मोहल्लों में इकट्ठा होकर युवा आपस में एक दूसरे को गले लगा रहे हैं। पचहत्तर साल से चल रहे इस समारोह का आयोजन को इस बार यूनेस्को में शामिल करवाने का प्रयास है। आयोजकों का कहना है कि कोरोनावायरस के कारण दो साल बाद रंग पंचमी महोत्सव मनाया जा रहा है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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PATNA : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने बाम दलों द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में शिक्षक नियमावली का सदन में विरोध करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके द्वारा नियमावली का विरोध का निर्णय मात्र दिखावा है। सिन्हा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सी पी आई, सी पी एम औऱ सी पी आई(एम एल) की चुप्पी को सरकार ने उनकी मौन सहमति के रूप में ग्रहण किया। अब ये कह रहे हैं कि नियमावली लागू करने से पूर्व उनसे बिचार विमर्श नहीं किया गया। यदि वे वास्तव में इसका विरोध करते हैं तो आगामी सत्र में इस नियमावली को निरस्त करने हेतु प्रस्ताव लायें, भाजपा इसका समर्थन करेगी।
सिन्हा ने कहा कि बाहर में तो कांग्रेस भी कभी कभी नियमावली के विरोध में वयान देती है लेकिन इस दल के मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने कैबिनेट की बैठक में नियमावली का विरोध नहीं किया। यदि महागठबंधन के लोग चाहें तो इस नियमावली में संशोधन करने हेतु सरकार मजबूर होगी। सिन्हा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नियोजित शिक्षकों औऱ पात्रता परीक्षा उतीर्ण शिक्षक अभ्यर्थियों को सीधी नियुक्ति और राज्यकर्मी का दर्जा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन सरकार में आने पर इनकी नीयत में खोट आ गई और इन्होंने छलावा किया। विडम्बना यह है कि इन्हीं के दल के पास शिक्षा विभाग है और फिर भी ये कुछ नहीं कर रहें हैं। शिक्षा मंत्री औऱ विभागीय अपर मुख्य सचिव की लड़ाई से न तो शिक्षकों का भला होगा न ही राज्य के छात्रों का।
सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी इस विवाद को हल करने में कोई रुचि नहीं ली है। मुख्यमंत्री से मिलने के वाद शिक्षा मंत्री को वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी के कार्यालय में वुलाया गया, यह शिक्षा मंत्री का अपमान है क्योंकि मंत्रियों का दर्जा एक समान है। मंत्रियों को अपमानित करने की सरकार की यह कार्यशैली पुरानी है। सिन्हा ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था अस्तव्यस्त हो गई है। पटना में अवस्थित महाविद्यालयों में छात्र नामांकन लेने से परहेज कर रहे हैं औऱ सीट खाली रह जा रही है। बिभाग में रोज नया नया विवाद के कारण शिक्षा का माहौल विगड़ते जा रहा है। बिहार के छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवड़ किया जा रहा है। राज्य में शिक्षा को रसातल में ले जाने के लिए राज्य की बर्तमान सरकार को राज्य की जनता माफ नहीं करेगी।
सिन्हा ने कहा कि नौकरशाही द्वारा विधायिका को अपमानित करने की परंपरा बिहार में शुरू हो गई है। सरकार इसमें भरपूर प्रोत्साहन दे रही है। राज्य की जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में पदाधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह लोकतंत्र का अपमान है। मुख्यमंत्री जी को इसपर संज्ञान लेना चाहिए और जनप्रतिनिधियों के अधिकार को बहाल करने हेतु कार्रवाई करनी चाहिए।
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PATNA : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने बाम दलों द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में शिक्षक नियमावली का सदन में विरोध करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके द्वारा नियमावली का विरोध का निर्णय मात्र दिखावा है। सिन्हा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सी पी आई, सी पी एम औऱ सी पी आई की चुप्पी को सरकार ने उनकी मौन सहमति के रूप में ग्रहण किया। अब ये कह रहे हैं कि नियमावली लागू करने से पूर्व उनसे बिचार विमर्श नहीं किया गया। यदि वे वास्तव में इसका विरोध करते हैं तो आगामी सत्र में इस नियमावली को निरस्त करने हेतु प्रस्ताव लायें, भाजपा इसका समर्थन करेगी। सिन्हा ने कहा कि बाहर में तो कांग्रेस भी कभी कभी नियमावली के विरोध में वयान देती है लेकिन इस दल के मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने कैबिनेट की बैठक में नियमावली का विरोध नहीं किया। यदि महागठबंधन के लोग चाहें तो इस नियमावली में संशोधन करने हेतु सरकार मजबूर होगी। सिन्हा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नियोजित शिक्षकों औऱ पात्रता परीक्षा उतीर्ण शिक्षक अभ्यर्थियों को सीधी नियुक्ति और राज्यकर्मी का दर्जा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन सरकार में आने पर इनकी नीयत में खोट आ गई और इन्होंने छलावा किया। विडम्बना यह है कि इन्हीं के दल के पास शिक्षा विभाग है और फिर भी ये कुछ नहीं कर रहें हैं। शिक्षा मंत्री औऱ विभागीय अपर मुख्य सचिव की लड़ाई से न तो शिक्षकों का भला होगा न ही राज्य के छात्रों का। सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी इस विवाद को हल करने में कोई रुचि नहीं ली है। मुख्यमंत्री से मिलने के वाद शिक्षा मंत्री को वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी के कार्यालय में वुलाया गया, यह शिक्षा मंत्री का अपमान है क्योंकि मंत्रियों का दर्जा एक समान है। मंत्रियों को अपमानित करने की सरकार की यह कार्यशैली पुरानी है। सिन्हा ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था अस्तव्यस्त हो गई है। पटना में अवस्थित महाविद्यालयों में छात्र नामांकन लेने से परहेज कर रहे हैं औऱ सीट खाली रह जा रही है। बिभाग में रोज नया नया विवाद के कारण शिक्षा का माहौल विगड़ते जा रहा है। बिहार के छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवड़ किया जा रहा है। राज्य में शिक्षा को रसातल में ले जाने के लिए राज्य की बर्तमान सरकार को राज्य की जनता माफ नहीं करेगी। सिन्हा ने कहा कि नौकरशाही द्वारा विधायिका को अपमानित करने की परंपरा बिहार में शुरू हो गई है। सरकार इसमें भरपूर प्रोत्साहन दे रही है। राज्य की जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में पदाधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह लोकतंत्र का अपमान है। मुख्यमंत्री जी को इसपर संज्ञान लेना चाहिए और जनप्रतिनिधियों के अधिकार को बहाल करने हेतु कार्रवाई करनी चाहिए।
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मुंबईः महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे ने अपने पिता और भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे की हत्या किए जाने की खबरों को बुधवार को सिरे से खारिज किया। अमेरिका में रहने वाले एक स्वयं-भू साइबर विशेषज्ञ ने दावा किया है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और इसकी जानकारी मुंडे को थी, इसलिए उनकी हत्या कर दी गई।
पंकजा ने कहा, "जब मुंडे जी की मृत्यु हुई, मैंने (केन्द्रीय गृहमंत्री) राजनाथ सिंह जी से सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया था, जांच हो चुकी है। " उन्होंने कहा कि हैकर द्वारा ईवीएम हैक करने के दावों को निर्वाचन आयोग पहले ही नकार चुका है, ऐसे में इस मुद्दे पर कहने को कुछ नहीं बचा है।
अमेरिका में राजनीतिक शरण की इच्छा रखने वाले सैयद शुजा नामक स्वयंभू साइबर विशेषज्ञ ने सोमवार को दावा किया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में ईवीएम के माध्यम से धांधली हुई और इन मशीनों को हैक किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने आरोपों से इंकार किया है।
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मुंबईः महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे ने अपने पिता और भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे की हत्या किए जाने की खबरों को बुधवार को सिरे से खारिज किया। अमेरिका में रहने वाले एक स्वयं-भू साइबर विशेषज्ञ ने दावा किया है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और इसकी जानकारी मुंडे को थी, इसलिए उनकी हत्या कर दी गई। पंकजा ने कहा, "जब मुंडे जी की मृत्यु हुई, मैंने राजनाथ सिंह जी से सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया था, जांच हो चुकी है। " उन्होंने कहा कि हैकर द्वारा ईवीएम हैक करने के दावों को निर्वाचन आयोग पहले ही नकार चुका है, ऐसे में इस मुद्दे पर कहने को कुछ नहीं बचा है। अमेरिका में राजनीतिक शरण की इच्छा रखने वाले सैयद शुजा नामक स्वयंभू साइबर विशेषज्ञ ने सोमवार को दावा किया कि दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में ईवीएम के माध्यम से धांधली हुई और इन मशीनों को हैक किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने आरोपों से इंकार किया है।
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Tajinder Pal Singh Bagga: पंजाब पुलिस द्वारा दिल्ली में भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद से केंद्र में सत्ताधारी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की AAP पर जोरदार हमला बोला है। घटना के वीडियो और तस्वीरें साझा करने से लेकर बग्गा के पिता के साथ मारपीट का आरोप लगाने तक, भाजपा नेताओं ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है।
ऐसे में आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि कौन हैं ये तेजिंदर पाल बग्गा? क्यों इनकी गिरफ्तारी को लेकर हंगामा हो रहा है? आइए यहां हम तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के बारे में विस्तार से बताते हैंः
कौन हैं Tajinder Pal Singh Bagga?
तेजिंदर पाल सिंह बग्गा राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी संगठन भगत सिंह क्रांति सेना के संस्थापक सदस्य हैं। इनका जन्म 24 सितंबर, 1985 को हुआ था। बग्गा दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता भी हैं। बता दें कि tshirtbhaiya. com उनका ही कंपनी है। आपने अक्सर देखा होगा कि बाजारों में टीशर्ट मिलता है जिस पर "देशभक्तों" की तस्वीर छपी होती है। उन्होंने अपने व्यवसाय के लिए देशभक्ति और राष्ट्रवाद का बखूबी इस्तेमाल किया है।
Tajinder Pal Singh Bagga का राजनीतिक करियर?
तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की बचपन से ही देश के लिए कुछ करने की तीव्र इच्छा थी। बग्गा ने इसी इच्छा शक्ति के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत मात्र 14 साल की उम्र में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से की थी। वे मात्र 23 वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बन गए, जिसके बाद उन्हें 31 वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी, दिल्ली का सबसे कम उम्र का प्रवक्ता बनाया गया।
भारतीय जनता पार्टी ने बग्गा को दिल्ली विधान सभा चुनाव 2020 में हरिनगर से टिकट दिया था और इसके साथ ही वह दिल्ली विधान सभा 2020 में चुनाव लड़ने वाले सबसे कम उम्र के उम्मीदवार भी बन गए थे।
क्यों हुई है बग्गा की गिरफ्तारी?
पंजाब पुलिस के अनुसार, बग्गा को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह पंजाब में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले की जांच में शामिल नहीं हुए थे। आरोपी को जांच में शामिल होने और आने के लिए पांच नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद आरोपी जानबूझकर जांच में शामिल नहीं हुए। इसके बाद आज सुबह, कानून की उचित प्रक्रिया के बाद, तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को दिल्ली में उनके घर से गिरफ्तार किया गया। बग्गा भाजपा की युवा शाखा के राष्ट्रीय सचिव हैं और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता भी हैं।
बग्गा पर किस मामले में दर्ज है केस ?
बता दें कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरिवाल को धमकाने का आरोप है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सनी सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। बग्गा पर आरोप है कि उन्होंने भड़काऊ बयान दिए, अफवाहें फैलाईं और धार्मिक और सांप्रदायिक शत्रुता को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
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Tajinder Pal Singh Bagga: पंजाब पुलिस द्वारा दिल्ली में भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद से केंद्र में सत्ताधारी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की AAP पर जोरदार हमला बोला है। घटना के वीडियो और तस्वीरें साझा करने से लेकर बग्गा के पिता के साथ मारपीट का आरोप लगाने तक, भाजपा नेताओं ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है। ऐसे में आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि कौन हैं ये तेजिंदर पाल बग्गा? क्यों इनकी गिरफ्तारी को लेकर हंगामा हो रहा है? आइए यहां हम तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के बारे में विस्तार से बताते हैंः कौन हैं Tajinder Pal Singh Bagga? तेजिंदर पाल सिंह बग्गा राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी संगठन भगत सिंह क्रांति सेना के संस्थापक सदस्य हैं। इनका जन्म चौबीस सितंबर, एक हज़ार नौ सौ पचासी को हुआ था। बग्गा दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता भी हैं। बता दें कि tshirtbhaiya. com उनका ही कंपनी है। आपने अक्सर देखा होगा कि बाजारों में टीशर्ट मिलता है जिस पर "देशभक्तों" की तस्वीर छपी होती है। उन्होंने अपने व्यवसाय के लिए देशभक्ति और राष्ट्रवाद का बखूबी इस्तेमाल किया है। Tajinder Pal Singh Bagga का राजनीतिक करियर? तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की बचपन से ही देश के लिए कुछ करने की तीव्र इच्छा थी। बग्गा ने इसी इच्छा शक्ति के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत मात्र चौदह साल की उम्र में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से की थी। वे मात्र तेईस वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बन गए, जिसके बाद उन्हें इकतीस वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी, दिल्ली का सबसे कम उम्र का प्रवक्ता बनाया गया। भारतीय जनता पार्टी ने बग्गा को दिल्ली विधान सभा चुनाव दो हज़ार बीस में हरिनगर से टिकट दिया था और इसके साथ ही वह दिल्ली विधान सभा दो हज़ार बीस में चुनाव लड़ने वाले सबसे कम उम्र के उम्मीदवार भी बन गए थे। क्यों हुई है बग्गा की गिरफ्तारी? पंजाब पुलिस के अनुसार, बग्गा को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह पंजाब में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले की जांच में शामिल नहीं हुए थे। आरोपी को जांच में शामिल होने और आने के लिए पांच नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद आरोपी जानबूझकर जांच में शामिल नहीं हुए। इसके बाद आज सुबह, कानून की उचित प्रक्रिया के बाद, तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को दिल्ली में उनके घर से गिरफ्तार किया गया। बग्गा भाजपा की युवा शाखा के राष्ट्रीय सचिव हैं और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता भी हैं। बग्गा पर किस मामले में दर्ज है केस ? बता दें कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरिवाल को धमकाने का आरोप है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सनी सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। बग्गा पर आरोप है कि उन्होंने भड़काऊ बयान दिए, अफवाहें फैलाईं और धार्मिक और सांप्रदायिक शत्रुता को बढ़ावा देने का प्रयास किया। संबंधित खबरें....
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रायपुर। देश में 1 मई से 18 उम्र से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में टीके की कमी के चलते फिलहाल 1 मई को टीकाकरण पर ब्रेक लग सकता है।
वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि देश में वैक्सीन की उपलब्धता के बगैर ही 18 से ज्यादा उम्र के लोगों का टीकाकरण का ऐलान कर दिया।
वहीं आज सीएम बघेल ने वैक्सीनेशन में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए कहा कि केवल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था से इस वर्ग के टीकाकरण से वंचित होने की संभावना है।
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रायपुर। देश में एक मई से अट्ठारह उम्र से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में टीके की कमी के चलते फिलहाल एक मई को टीकाकरण पर ब्रेक लग सकता है। वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि देश में वैक्सीन की उपलब्धता के बगैर ही अट्ठारह से ज्यादा उम्र के लोगों का टीकाकरण का ऐलान कर दिया। वहीं आज सीएम बघेल ने वैक्सीनेशन में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए कहा कि केवल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था से इस वर्ग के टीकाकरण से वंचित होने की संभावना है।
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नवरात्रि में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के 9 दिन रोजाना एक गुलाब के साथ मां दुर्गा को लौंग का एक जोड़ा चढ़ाएं। नवरात्रि में धन प्राप्ति के लिए लौंग का यह टोटका बहुत ही असरदार माना जाता है। इस उपाय को करने से आपके घर में बरकत बढ़ती है और मन में सकारात्मक विचार आते हैं।
नवरात्रि का महापर्व मां दुर्गा का प्रसन्न करने के साथ ही अपनी शक्तियों को जागृत करने का भी पर्व है। नवरात्रि में बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए भी लौंग का टोटका किया जा सकता है। नवरात्रि में मंगलवार या शनिवार को हनुमानजी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उस दीपक में लौंग का एक जोड़ा डाल दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें। उसके बाद हनुमानजी की मूर्ति से बात करने के लहजे में अपनी समस्या या फिर अपनी मनोकामना बताएं। ऐसा माना जाता है बजरंगबली के दरबार में आपकी सुनवाई जल्द होगी।
अगर आपके घर में भी अजीब सा नकारात्मकता का माहौल बना हुआ है और आपस में सभी लोगों के बीच में अच्छा तालमेल नहीं है। तो नवरात्रि में लौंग का उपाय आपकी समस्या को दूर कर सकता है। नवरात्रि के नौ दिन रोजाना सुबह लौंग और कपूर का धुंआ पूरे घर में करना चाहिए। ऐसा करने से आपके घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
नवरात्रि राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए सबसे अच्छा वक्त माना जाता है। नवरात्रि में रोजाना आपको लौंग का दान करना चाहिए। इसके अलावा नवरात्रि में शिवलिंग पर रोजाना लौंग का जोड़ा चढ़ाएं। ऐसा करने से आपकी कुंडली से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और आपके घर में खुशहाली आती है।
अगर आपके घर में पैसों को लेकर हमेशा किल्लत बनी रहती है तो नवरात्रि में लौंग का उपाय करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। लौंग का एक जोड़ा छोटे से पीले रंग के कपड़े में बांधकर घर के किसी कोने में लटका दें। या फिर अपने घर के धन के स्थान पर रख दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे आपकी कमाई बढ़ने लगेगी और पैसों की किल्लत कम होने लगेगी।
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके घर में हर सुख सुविधा है लेकिन आपके दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द नहीं है तो यह नवरात्रि में यह उपाय करने से आपको प्रेम की प्राप्ति हो सकती है। नवरात्रि में अष्टमी के दिन मां दुर्गा के किसी मंदिर में 3 लौंग लाल कपड़े में बांधकर किसी मंदिर में दान कर दें। आपके जीवन में प्रेम बढ़ेगा। इसके साथ ही मां महागौरी को गुलाब की पंखुड़ियों के साथ लौंग का एक जोड़ा चढ़ाएं। उसके बाद इन पत्तियों को अपने कमरे में रख लें और लौंग का जोड़ा चाय में डालकर पति को चाय पिलाएं। मां दुर्गा आपके जीवन को प्यार और खुशियों से भर देंगी।
अगर कई जगहों पर इंटरव्यू देने के बाद भी आपकी नौकरी नहीं लग रही है तो नवरात्रि में लौंग का यह उपाय आजमाकर देखें। नवरात्रि के पहले दिन लौंग का एक जोड़ा अपने ऊपर से 7 बार घुमाएं और उसे मां दुर्गा के चरणों में अर्पित कर दें। उसके बाद नवमी के दिन फिर से यही उपाय करें। आपकी नौकरी में आ रही बाधाएं शीघ्र ही दूर होंगी।
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नवरात्रि में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के नौ दिन रोजाना एक गुलाब के साथ मां दुर्गा को लौंग का एक जोड़ा चढ़ाएं। नवरात्रि में धन प्राप्ति के लिए लौंग का यह टोटका बहुत ही असरदार माना जाता है। इस उपाय को करने से आपके घर में बरकत बढ़ती है और मन में सकारात्मक विचार आते हैं। नवरात्रि का महापर्व मां दुर्गा का प्रसन्न करने के साथ ही अपनी शक्तियों को जागृत करने का भी पर्व है। नवरात्रि में बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए भी लौंग का टोटका किया जा सकता है। नवरात्रि में मंगलवार या शनिवार को हनुमानजी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उस दीपक में लौंग का एक जोड़ा डाल दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें। उसके बाद हनुमानजी की मूर्ति से बात करने के लहजे में अपनी समस्या या फिर अपनी मनोकामना बताएं। ऐसा माना जाता है बजरंगबली के दरबार में आपकी सुनवाई जल्द होगी। अगर आपके घर में भी अजीब सा नकारात्मकता का माहौल बना हुआ है और आपस में सभी लोगों के बीच में अच्छा तालमेल नहीं है। तो नवरात्रि में लौंग का उपाय आपकी समस्या को दूर कर सकता है। नवरात्रि के नौ दिन रोजाना सुबह लौंग और कपूर का धुंआ पूरे घर में करना चाहिए। ऐसा करने से आपके घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। नवरात्रि राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए सबसे अच्छा वक्त माना जाता है। नवरात्रि में रोजाना आपको लौंग का दान करना चाहिए। इसके अलावा नवरात्रि में शिवलिंग पर रोजाना लौंग का जोड़ा चढ़ाएं। ऐसा करने से आपकी कुंडली से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और आपके घर में खुशहाली आती है। अगर आपके घर में पैसों को लेकर हमेशा किल्लत बनी रहती है तो नवरात्रि में लौंग का उपाय करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। लौंग का एक जोड़ा छोटे से पीले रंग के कपड़े में बांधकर घर के किसी कोने में लटका दें। या फिर अपने घर के धन के स्थान पर रख दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे आपकी कमाई बढ़ने लगेगी और पैसों की किल्लत कम होने लगेगी। अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके घर में हर सुख सुविधा है लेकिन आपके दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द नहीं है तो यह नवरात्रि में यह उपाय करने से आपको प्रेम की प्राप्ति हो सकती है। नवरात्रि में अष्टमी के दिन मां दुर्गा के किसी मंदिर में तीन लौंग लाल कपड़े में बांधकर किसी मंदिर में दान कर दें। आपके जीवन में प्रेम बढ़ेगा। इसके साथ ही मां महागौरी को गुलाब की पंखुड़ियों के साथ लौंग का एक जोड़ा चढ़ाएं। उसके बाद इन पत्तियों को अपने कमरे में रख लें और लौंग का जोड़ा चाय में डालकर पति को चाय पिलाएं। मां दुर्गा आपके जीवन को प्यार और खुशियों से भर देंगी। अगर कई जगहों पर इंटरव्यू देने के बाद भी आपकी नौकरी नहीं लग रही है तो नवरात्रि में लौंग का यह उपाय आजमाकर देखें। नवरात्रि के पहले दिन लौंग का एक जोड़ा अपने ऊपर से सात बार घुमाएं और उसे मां दुर्गा के चरणों में अर्पित कर दें। उसके बाद नवमी के दिन फिर से यही उपाय करें। आपकी नौकरी में आ रही बाधाएं शीघ्र ही दूर होंगी।
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उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि सरकारी क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों को पहली पदोन्नति के लिए ग्रामीण इलाके में उनकी सेवा को अनिवार्य बनाना चाहिए।
आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक यहां आयोजित 11वें वार्षिक चिकित्सा शिक्षक दिवस पुरस्कार सम्मान में राष्ट्रपति ने कहा कि युवा डॉक्टरों के लिए तीन से पांच साल ग्रामीण इलाकों में सेवा देना जरूरी है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की 60 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है।
उपराष्ट्रपति ने सरकार द्वारा देश में डॉक्टर-मरीज अनुपात के अंतर को पाटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का संदर्भ देते हुए जोर दिया कि चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर-मरीजों का अनुपात एक डॉक्टर पर 1456 मरीजों का है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक एक डॉक्टर पर एक हजार मरीज का है।
उन्होंने सरकार की प्रत्येक जिले में कम से कम एक चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की योजना की प्रशंसा की। साथ ही रेखांकित किया कि शहरी-ग्रामीण डॉक्टरों में भारी अंतर है क्योंकि अधिकतर चिकित्सा पेशेवर शहरी इलाकों में प्रैक्टिस करने का विकल्प चुनते हैं।
उप राष्ट्रपति ने पूर्व राष्ट्रपति, राजनेता और दार्शनिक दिवंगत सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर रविवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने सभी शिक्षकों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया जिन्होंने उनके करियर को दिशा दी।
इससे पहले उन्होंने प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ.के श्रीनाथ रेड्डी और डॉ.देवी शेट्टी सहित अन्य को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।
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उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि सरकारी क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों को पहली पदोन्नति के लिए ग्रामीण इलाके में उनकी सेवा को अनिवार्य बनाना चाहिए। आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक यहां आयोजित ग्यारहवें वार्षिक चिकित्सा शिक्षक दिवस पुरस्कार सम्मान में राष्ट्रपति ने कहा कि युवा डॉक्टरों के लिए तीन से पांच साल ग्रामीण इलाकों में सेवा देना जरूरी है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की साठ प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। उपराष्ट्रपति ने सरकार द्वारा देश में डॉक्टर-मरीज अनुपात के अंतर को पाटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का संदर्भ देते हुए जोर दिया कि चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर-मरीजों का अनुपात एक डॉक्टर पर एक हज़ार चार सौ छप्पन मरीजों का है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक एक डॉक्टर पर एक हजार मरीज का है। उन्होंने सरकार की प्रत्येक जिले में कम से कम एक चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की योजना की प्रशंसा की। साथ ही रेखांकित किया कि शहरी-ग्रामीण डॉक्टरों में भारी अंतर है क्योंकि अधिकतर चिकित्सा पेशेवर शहरी इलाकों में प्रैक्टिस करने का विकल्प चुनते हैं। उप राष्ट्रपति ने पूर्व राष्ट्रपति, राजनेता और दार्शनिक दिवंगत सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर रविवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने सभी शिक्षकों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया जिन्होंने उनके करियर को दिशा दी। इससे पहले उन्होंने प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ.के श्रीनाथ रेड्डी और डॉ.देवी शेट्टी सहित अन्य को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।
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बनाफरों का सर्वनाश
या। उन्होंने तुरन्त चौंड़ा के मोर्चे की ओर पचशावद को बढ़ाया । वहाँ पहुँचकर उन्होंने चौंड़ा से डटकर युद्ध किया । थोड़ी देर में उन्हें ऊदल का स्मरण हो आया, तब उनकी आँखें लाल हो गई। उन्होंने तुरन्त बढ़कर चौंड़ा को पकड़ लिया । कहते हैं कि आल्हा ने गला घोंटकर चौंड़ा को मार डाला। यह देखकर पृथ्वीराज को बहुत क्रोध आया। उन्होंने तुरन्त आदिभयङ्कर को पचशावद के सामने लाकर खड़ा कर दिया। अब पृथ्वीराज को सामने देखकर आल्हा ने देवी की दी हुई अपनी तलवार निकाल ली। और पचशावद की सूँड़ में साँकल भी दे दी । इन्दल की तलवारों की मार से दिल्ली की फ़ौज के धुर्रे उड़ गये । शत्रु के सभी सैनिकों के मारे जाने और केवल चन्द्र भाट तथा पृथ्वीराज के बच जाने पर आल्हा पृथ्वीराज की ओर झपटे ।
इसी समय महान् योगीश्वर बाबा गोरखनाथ वहाँ आ गये। उन्होंने तुरन्त प्रल्हा का हाथ पकड़ लिया और कहा - "बच्चा ! रहने दो। तुम्हारी वीरता सराहनीय है। अब तुम इसे अपनाकर छोड़ दो और हमारे साथ तपस्या को चलो।" हा ने गोरखनाथ को देखकर प्रणाम किया। फिर म्यान में तलवार करके इन्दल को साथ ले वे चल दिये ।
महोवे में जब इस दुःखान्त नाटक की खबर पहुँची तब सुनवाँ, फुलवा दि रानियाँ युद्धक्षेत्र में आई और सबसे पूछने लगीं- "कहीं किसी ने चाल्हा-ऊदल को देखा है ?" यह सुनकर आल्हा ने इन्दल से कहा - "वेटा ! अव घोर कलिकाल है; क्योंकि स्त्रियाँ अपने पतियों का नाम अपने मुँह से लेने लगी हैं। "
आल्हा को जाते देख विलाप करते-करते सुनवाँ ने उनका पीछा किया । उसने जब उनके घोड़े की पूँछ पकड़ ली तब आल्हा तलवार के चार से पूछ काटकर हवा हो गये । सुनवाँ वहीं गिर पड़ी। सबके देखते-देखते आल्हा और इन्दल आँखों से हो गये ।
हैं। अतः जब ऊदल मर गये तत्र चाल्दा ने जाना कि में ही आल्हा का पुत्र इन्दल भी देवी के वरदान से अमर हो चुका था । आल्हा को शारदा देवी ने एक तलवार भी दी थी ।
पाठ्को ! इसके बाद सुनवाँ, फुलवा, देवै और इन्दल की स्त्रियाँ वहीं चिता करें जल गई। बनाफरों का वंश इस प्रकार जगत् से सदा के लिए लुस हो गया ।
महाराज परमाल ने भी दुखी होकर प्राण त्याग दिये । मल्हना-ने पारस पत्थर को सागर में फेंक दिया । गहने वग़ैरह सब चीज़ों के साथ वह सती हो गई । मल्हना के साथ ही महोबे के राजवंश की सभी स्त्रियाँ जलकर मर गई । इस प्रकार चन्देलों, चौहानों, बनाफरों और राठौरों के राजवंश का सत्यानाश हो गया ।
* उरई का राजा माहिल जीवित तो रहा, परन्तु कीरतसागर पर भुजरियां
में अभयसिंह के मारे जाने से उसका भी नाश हो गया था ।
ऐपनवारी - जब बारात पहुँच जाती है तब बारात का नाई अथवा बारी बारात के आने की सूचना देने को एक हँडिया या सकोरे में कुछ लेकर लड़कीवाले के यहाँ जाता है। इसी हँडिया या सकोरे को एपनवारी कहते हैं ।
श्रौड़ - युद्ध में जब वीर लोग शत्रु को दुचित्ता या अपने सन्निकट देखते थे तब ढाल का वार करके उसे नीचे गिरा देते थे। इस प्रकार ढाल की मार को ढाल की औकड़ मारना कहते हैं । इससे शत्रु मरता न था बल्कि गिर पड़ता था तब कैद कर लिया जाता था ।
खोटा होना - यदि किसी त्यौहार के दिन घर का कोई आदमी मर जाय अथवा किसी प्रकार के अनिष्ट होने से वह त्यौहार न हो सके तो वह त्यौहार सदा के लिए खोटा हो जाता है अर्थात् वह त्यौहार फिर कभी नहीं मनाया जाता । यदि भविष्य में उसी खोटे त्यौहार के दिन किसी बालक का जन्म हो अथवा कोई अन्य उत्सव या मङ्गल कार्य हो जाय तब वह त्यौहार फिर मनाया जाने लगता है। महोने में पहले श्रावणी के दिन तालाब में भुजरियाँ सिराई जाती थीं परन्तु जब इस वर्ष युद्ध के कारण उस दिन न सिराई जा सकीं और दूसरे दिन अर्थात् भा कृष्ण प्रतिपदा को सिराई गई तब से महोबे में भावरणी के दिन भुजरियाँ नहीं सिराई जातीं बल्कि प्रतिपदा के दिन सिराई जाती हैं ।
चौथी ~ जब लड़की को उसकी ससुराल से पहली बार माँ-बाप या भाई आदि बुलाते हैं तो उस बुलाने को चौथी चलाना कहते हैं। पहली बार विदा कराने को जाने के समय जो वस्तुएँ या पकवान उसकी ससुराल को ले जाये जाते हैं उनको भी चौथी कहते हैं ।
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बनाफरों का सर्वनाश या। उन्होंने तुरन्त चौंड़ा के मोर्चे की ओर पचशावद को बढ़ाया । वहाँ पहुँचकर उन्होंने चौंड़ा से डटकर युद्ध किया । थोड़ी देर में उन्हें ऊदल का स्मरण हो आया, तब उनकी आँखें लाल हो गई। उन्होंने तुरन्त बढ़कर चौंड़ा को पकड़ लिया । कहते हैं कि आल्हा ने गला घोंटकर चौंड़ा को मार डाला। यह देखकर पृथ्वीराज को बहुत क्रोध आया। उन्होंने तुरन्त आदिभयङ्कर को पचशावद के सामने लाकर खड़ा कर दिया। अब पृथ्वीराज को सामने देखकर आल्हा ने देवी की दी हुई अपनी तलवार निकाल ली। और पचशावद की सूँड़ में साँकल भी दे दी । इन्दल की तलवारों की मार से दिल्ली की फ़ौज के धुर्रे उड़ गये । शत्रु के सभी सैनिकों के मारे जाने और केवल चन्द्र भाट तथा पृथ्वीराज के बच जाने पर आल्हा पृथ्वीराज की ओर झपटे । इसी समय महान् योगीश्वर बाबा गोरखनाथ वहाँ आ गये। उन्होंने तुरन्त प्रल्हा का हाथ पकड़ लिया और कहा - "बच्चा ! रहने दो। तुम्हारी वीरता सराहनीय है। अब तुम इसे अपनाकर छोड़ दो और हमारे साथ तपस्या को चलो।" हा ने गोरखनाथ को देखकर प्रणाम किया। फिर म्यान में तलवार करके इन्दल को साथ ले वे चल दिये । महोवे में जब इस दुःखान्त नाटक की खबर पहुँची तब सुनवाँ, फुलवा दि रानियाँ युद्धक्षेत्र में आई और सबसे पूछने लगीं- "कहीं किसी ने चाल्हा-ऊदल को देखा है ?" यह सुनकर आल्हा ने इन्दल से कहा - "वेटा ! अव घोर कलिकाल है; क्योंकि स्त्रियाँ अपने पतियों का नाम अपने मुँह से लेने लगी हैं। " आल्हा को जाते देख विलाप करते-करते सुनवाँ ने उनका पीछा किया । उसने जब उनके घोड़े की पूँछ पकड़ ली तब आल्हा तलवार के चार से पूछ काटकर हवा हो गये । सुनवाँ वहीं गिर पड़ी। सबके देखते-देखते आल्हा और इन्दल आँखों से हो गये । हैं। अतः जब ऊदल मर गये तत्र चाल्दा ने जाना कि में ही आल्हा का पुत्र इन्दल भी देवी के वरदान से अमर हो चुका था । आल्हा को शारदा देवी ने एक तलवार भी दी थी । पाठ्को ! इसके बाद सुनवाँ, फुलवा, देवै और इन्दल की स्त्रियाँ वहीं चिता करें जल गई। बनाफरों का वंश इस प्रकार जगत् से सदा के लिए लुस हो गया । महाराज परमाल ने भी दुखी होकर प्राण त्याग दिये । मल्हना-ने पारस पत्थर को सागर में फेंक दिया । गहने वग़ैरह सब चीज़ों के साथ वह सती हो गई । मल्हना के साथ ही महोबे के राजवंश की सभी स्त्रियाँ जलकर मर गई । इस प्रकार चन्देलों, चौहानों, बनाफरों और राठौरों के राजवंश का सत्यानाश हो गया । * उरई का राजा माहिल जीवित तो रहा, परन्तु कीरतसागर पर भुजरियां में अभयसिंह के मारे जाने से उसका भी नाश हो गया था । ऐपनवारी - जब बारात पहुँच जाती है तब बारात का नाई अथवा बारी बारात के आने की सूचना देने को एक हँडिया या सकोरे में कुछ लेकर लड़कीवाले के यहाँ जाता है। इसी हँडिया या सकोरे को एपनवारी कहते हैं । श्रौड़ - युद्ध में जब वीर लोग शत्रु को दुचित्ता या अपने सन्निकट देखते थे तब ढाल का वार करके उसे नीचे गिरा देते थे। इस प्रकार ढाल की मार को ढाल की औकड़ मारना कहते हैं । इससे शत्रु मरता न था बल्कि गिर पड़ता था तब कैद कर लिया जाता था । खोटा होना - यदि किसी त्यौहार के दिन घर का कोई आदमी मर जाय अथवा किसी प्रकार के अनिष्ट होने से वह त्यौहार न हो सके तो वह त्यौहार सदा के लिए खोटा हो जाता है अर्थात् वह त्यौहार फिर कभी नहीं मनाया जाता । यदि भविष्य में उसी खोटे त्यौहार के दिन किसी बालक का जन्म हो अथवा कोई अन्य उत्सव या मङ्गल कार्य हो जाय तब वह त्यौहार फिर मनाया जाने लगता है। महोने में पहले श्रावणी के दिन तालाब में भुजरियाँ सिराई जाती थीं परन्तु जब इस वर्ष युद्ध के कारण उस दिन न सिराई जा सकीं और दूसरे दिन अर्थात् भा कृष्ण प्रतिपदा को सिराई गई तब से महोबे में भावरणी के दिन भुजरियाँ नहीं सिराई जातीं बल्कि प्रतिपदा के दिन सिराई जाती हैं । चौथी ~ जब लड़की को उसकी ससुराल से पहली बार माँ-बाप या भाई आदि बुलाते हैं तो उस बुलाने को चौथी चलाना कहते हैं। पहली बार विदा कराने को जाने के समय जो वस्तुएँ या पकवान उसकी ससुराल को ले जाये जाते हैं उनको भी चौथी कहते हैं ।
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शिमलाः हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज यानि रविवार को एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया इस बैठक में यह फैसला लिया गया है कि हिमाचल प्रदेश के चार जिलों में 27 अप्रैल से नाईट कर्फ्यू लगाने की घोषणा की हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देवभूमि हिमाचल में लगातार कोरोना के आंकड़ा में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही प्रदेश में मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।
पिछले तीन दिनों से प्रदेश में लगातार मौत के आंकड़ा में बढ़ोतरी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आज प्रदेश के चार जिलों में नाईट कर्फ्यू का ऐलान किया हुआ है। जिनमें कांगड़ा, ऊना, सोलन और सिरमौर शमिल है। यहां पर शाम दस बजे से सुबह पांच बजे तक संपूर्ण कर्फ्यू रहेगा। साथ ही यह नाईट कर्फ्यू दस मई तक लगाया गया है। इस दौरान बहारी राज्यों से प्रदेश में आने वालों के पासआरटीपीसीआर की रिपोर्ट जरूरी है।
जिसके बाद ही उन्हें आने की अनुमती दी जाएगी। अगर किस के पास रिपोर्ट नहीं है तो उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया जाएगा। प्रदेश के इन चार जिलों में नाईट कर्फ्यू के दौरान उलंघल करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रदेश में इन चार जिलों में लगातार कोरोना के अपना रूद्र रूप धारण किया हुआ है। जिसकों लेकर आज सीएम ने उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई थी। जिसमें यह बड़ा फैसला लिया गया है।
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शिमलाः हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज यानि रविवार को एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया इस बैठक में यह फैसला लिया गया है कि हिमाचल प्रदेश के चार जिलों में सत्ताईस अप्रैल से नाईट कर्फ्यू लगाने की घोषणा की हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देवभूमि हिमाचल में लगातार कोरोना के आंकड़ा में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही प्रदेश में मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश में लगातार मौत के आंकड़ा में बढ़ोतरी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आज प्रदेश के चार जिलों में नाईट कर्फ्यू का ऐलान किया हुआ है। जिनमें कांगड़ा, ऊना, सोलन और सिरमौर शमिल है। यहां पर शाम दस बजे से सुबह पांच बजे तक संपूर्ण कर्फ्यू रहेगा। साथ ही यह नाईट कर्फ्यू दस मई तक लगाया गया है। इस दौरान बहारी राज्यों से प्रदेश में आने वालों के पासआरटीपीसीआर की रिपोर्ट जरूरी है। जिसके बाद ही उन्हें आने की अनुमती दी जाएगी। अगर किस के पास रिपोर्ट नहीं है तो उन्हें चौदह दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया जाएगा। प्रदेश के इन चार जिलों में नाईट कर्फ्यू के दौरान उलंघल करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रदेश में इन चार जिलों में लगातार कोरोना के अपना रूद्र रूप धारण किया हुआ है। जिसकों लेकर आज सीएम ने उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई थी। जिसमें यह बड़ा फैसला लिया गया है।
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दुनिया का पसंदीदा सोनिक द हेजहोग 2 का फाइनल ट्रेलर रिलीज़ किया जा चुका है। ग्रीन हिल्स में बसने के उपरांत, सोनिक यह साबित करने के लिए बेचैन है कि उसके पास एक सच्चा हीरो बनने के लिए क्या होने वाला है। उसकी परीक्षा तब शुरु होती है जब डॉक्टर रोबोटनिक इस बार एक नये साथी नकलेस के साथ वापसी कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिसके पास सभ्यताओं को समाप्त करने की ताकत वाला एक पन्ना है। सोनिक अपनी साइडकिक, टेल्स के साथ एक टीम बनाता है और वह पन्ना गलत हाथों में पड़ने से पहले उसे खोजने के लिए एक ग्लोब-ट्रॉटिंग यात्रा पर निकल गया है।
मूवी में जेम्स मार्सडेन, जिम कैरी, टीका सम्पटर, नताशा रोथवेल, एडम पल्ली, ली मजदौब और शेमर मूर ने एक्टिंग की है। वॉइस कास्ट में बेन श्वार्ट्ज (सोनिक), इदरीस एल्बा (नक्कल्स) और कोलीन ओ'शॉघनेसी (टेल्स) शामिल हैं। सोनिक द हेजहोग 2 22 अप्रैल, 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।
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दुनिया का पसंदीदा सोनिक द हेजहोग दो का फाइनल ट्रेलर रिलीज़ किया जा चुका है। ग्रीन हिल्स में बसने के उपरांत, सोनिक यह साबित करने के लिए बेचैन है कि उसके पास एक सच्चा हीरो बनने के लिए क्या होने वाला है। उसकी परीक्षा तब शुरु होती है जब डॉक्टर रोबोटनिक इस बार एक नये साथी नकलेस के साथ वापसी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिसके पास सभ्यताओं को समाप्त करने की ताकत वाला एक पन्ना है। सोनिक अपनी साइडकिक, टेल्स के साथ एक टीम बनाता है और वह पन्ना गलत हाथों में पड़ने से पहले उसे खोजने के लिए एक ग्लोब-ट्रॉटिंग यात्रा पर निकल गया है। मूवी में जेम्स मार्सडेन, जिम कैरी, टीका सम्पटर, नताशा रोथवेल, एडम पल्ली, ली मजदौब और शेमर मूर ने एक्टिंग की है। वॉइस कास्ट में बेन श्वार्ट्ज , इदरीस एल्बा और कोलीन ओ'शॉघनेसी शामिल हैं। सोनिक द हेजहोग दो बाईस अप्रैल, दो हज़ार बाईस को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।
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इमरान खान (Imran Khan) ने कहा, भारत के साथ संबंध फिर से स्थापित करना उनके (कश्मीरियों) सभी संघर्षों और एक लाख से अधिक कश्मीरियों के शहीद होने की अनदेखी करना होगा.
पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) भारत के साथ रिश्तों को सामान्य करने पर जोर नहीं देना चाहते हैं. इमरान का हालिया बयान इस बात की ओर इशारा कर रहा है. हाल ही में पाकिस्तानी पीएम ने भारत के साथ रिश्तों (India-Pakistan Relations) को सामान्य करने की संभावना को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसा करना कश्मीरियों के साथ धोखा (Betrayal with Kashmiris) करना होगा. गौरतलब है कि दोनों मुल्कों के बीच रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे हैं.
बता दें कि भारत ने पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाकर जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) को दिए विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था. इसके बाद राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया. इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत संग सभी व्यापारिक रिश्तों को सस्पेंड कर दिया और नई दिल्ली संग राजनयिक रिश्तों को कम कर दिया गया.
हालांकि, इस साल की शुरुआत में इस बात की रिपोर्ट्स सामने आईं कि परमाणु हथियारों से संपन्न दोनों मुल्कों के शीर्ष खुफिया अधिकारियों ने यूनाइटेड अरब अमीरात में जनवरी में मुलाकात की. इसे भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों को कम करने के प्रयास के तौर पर देखा गया. पिछले महीने वाशिंगटन में UAE के राजदूत युसूफ अल-ओतैयब्बा ने इस बात की पुष्टि की कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच एक सुखद और सुचारू रिश्ते को कायम करने को लेकर मध्यस्थता कर रहा है.
फरवरी में भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं ने नियंत्रण रेखा (LOC) पर 2003 के युद्धविराम समझौते को लागू करने पर सहमति जताई. इस हैरानी भरे कदम से दुनिया चकित रह गई. कुछ दिन बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) ने कहा कि दोनों मुल्कों को अपने अतीत को दफन कर देना चाहिए और आपस में सहयोग बढ़ाना चाहिए. पिछले महीने इमरान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति और सौहार्दपूर्ण संबंध के लिए एक दूसरे को पत्र भी लिखा.
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इमरान खान ने कहा, भारत के साथ संबंध फिर से स्थापित करना उनके सभी संघर्षों और एक लाख से अधिक कश्मीरियों के शहीद होने की अनदेखी करना होगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के साथ रिश्तों को सामान्य करने पर जोर नहीं देना चाहते हैं. इमरान का हालिया बयान इस बात की ओर इशारा कर रहा है. हाल ही में पाकिस्तानी पीएम ने भारत के साथ रिश्तों को सामान्य करने की संभावना को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसा करना कश्मीरियों के साथ धोखा करना होगा. गौरतलब है कि दोनों मुल्कों के बीच रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे हैं. बता दें कि भारत ने पांच अगस्त दो हज़ार उन्नीस को अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को हटाकर जम्मू-कश्मीर को दिए विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था. इसके बाद राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया. इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत संग सभी व्यापारिक रिश्तों को सस्पेंड कर दिया और नई दिल्ली संग राजनयिक रिश्तों को कम कर दिया गया. हालांकि, इस साल की शुरुआत में इस बात की रिपोर्ट्स सामने आईं कि परमाणु हथियारों से संपन्न दोनों मुल्कों के शीर्ष खुफिया अधिकारियों ने यूनाइटेड अरब अमीरात में जनवरी में मुलाकात की. इसे भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों को कम करने के प्रयास के तौर पर देखा गया. पिछले महीने वाशिंगटन में UAE के राजदूत युसूफ अल-ओतैयब्बा ने इस बात की पुष्टि की कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच एक सुखद और सुचारू रिश्ते को कायम करने को लेकर मध्यस्थता कर रहा है. फरवरी में भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं ने नियंत्रण रेखा पर दो हज़ार तीन के युद्धविराम समझौते को लागू करने पर सहमति जताई. इस हैरानी भरे कदम से दुनिया चकित रह गई. कुछ दिन बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा कि दोनों मुल्कों को अपने अतीत को दफन कर देना चाहिए और आपस में सहयोग बढ़ाना चाहिए. पिछले महीने इमरान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति और सौहार्दपूर्ण संबंध के लिए एक दूसरे को पत्र भी लिखा.
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Pakistan Squad For Asia Cup 2022: पाकिस्तान को तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी का रिप्लेसमेंट मिल गया है। उसने एशिया कप 2022 के लिए अफरीदी की जगह मोहम्मद हसनैन को जगह दी है। 22 वर्षीय तेज गेंदबाज ने 18 T20I खेले हैं। इस तरह पाकिस्तान के तेज गेंदबाजी आक्रमकण में नसीम शाह, शाहनवाज दहानी, मोहम्मद वसीम जूनियर और हारिस रऊफ के साथ हसनैन भी शामिल हो गए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वह शाहीन से भी खतरनाक हो सकते हैं।
मई 2019 में T20 इंटरनेशनल पदार्पण करने वाले हसनैन ने 7. 90 की इकॉनमी रेट से 17 विकेट लिए हैं। पेसर ने क्वेटा ग्लैडिएटर्स, सिडनी थंडर और ट्रिनबागो नाइटराइडर्स टीमों के लिए 82 टी20 खेले हैं, जिसमें 8. 51 की इकॉनमी से 100 विकेट लिए हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सोमवार को घोषणा की कि हसनैन यूनाइटेड किंगडम से टीम में शामिल होंगे, जहां वह वर्तमान में द हंड्रेड में ओवल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बीच आसिफ अली, हैदर अली, इफ्तिखार अहमद और उस्मान कादिर मंगलवार तड़के दुबई के लिए रवाना होंगे। वे अब्दुल्ला शफीक, इमाम-उल-हक, मोहम्मद हारिस, सलमान अली आगा और जाहिद महमूद की जगह लेंगे, जो नीदरलैंड के खिलाफ 16 सदस्यीय एकदिवसीय टीम का हिस्सा थे।
पाकिस्तान अपने एशिया कप अभियान की शुरुआत 28 अगस्त को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत के खिलाफ करेगा। शाहीन अफरीदी का चोटिल होना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ सीनियर क्रिकेटर भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि उनके नहीं होने से पाकिस्तान टीम का अभियान कमजोर हो जाएगा।
पाकिस्तान टीमः बाबर आजम (कप्तान), शादाब खान (उप-कप्तान) आसिफ अली, फखर जमां, हैदर अली, हारिस रऊफ, इफ्तिखार अहमद, खुशदिल शाह, मोहम्मद हसनैन, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद वसीम जूनियर, नसीम शाह, शाहनवाज दहानी और उस्मान कादिर।
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Pakistan Squad For Asia Cup दो हज़ार बाईस: पाकिस्तान को तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी का रिप्लेसमेंट मिल गया है। उसने एशिया कप दो हज़ार बाईस के लिए अफरीदी की जगह मोहम्मद हसनैन को जगह दी है। बाईस वर्षीय तेज गेंदबाज ने अट्ठारह TबीसI खेले हैं। इस तरह पाकिस्तान के तेज गेंदबाजी आक्रमकण में नसीम शाह, शाहनवाज दहानी, मोहम्मद वसीम जूनियर और हारिस रऊफ के साथ हसनैन भी शामिल हो गए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वह शाहीन से भी खतरनाक हो सकते हैं। मई दो हज़ार उन्नीस में Tबीस इंटरनेशनल पदार्पण करने वाले हसनैन ने सात. नब्बे की इकॉनमी रेट से सत्रह विकेट लिए हैं। पेसर ने क्वेटा ग्लैडिएटर्स, सिडनी थंडर और ट्रिनबागो नाइटराइडर्स टीमों के लिए बयासी टीबीस खेले हैं, जिसमें आठ. इक्यावन की इकॉनमी से एक सौ विकेट लिए हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सोमवार को घोषणा की कि हसनैन यूनाइटेड किंगडम से टीम में शामिल होंगे, जहां वह वर्तमान में द हंड्रेड में ओवल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बीच आसिफ अली, हैदर अली, इफ्तिखार अहमद और उस्मान कादिर मंगलवार तड़के दुबई के लिए रवाना होंगे। वे अब्दुल्ला शफीक, इमाम-उल-हक, मोहम्मद हारिस, सलमान अली आगा और जाहिद महमूद की जगह लेंगे, जो नीदरलैंड के खिलाफ सोलह सदस्यीय एकदिवसीय टीम का हिस्सा थे। पाकिस्तान अपने एशिया कप अभियान की शुरुआत अट्ठाईस अगस्त को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत के खिलाफ करेगा। शाहीन अफरीदी का चोटिल होना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ सीनियर क्रिकेटर भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि उनके नहीं होने से पाकिस्तान टीम का अभियान कमजोर हो जाएगा। पाकिस्तान टीमः बाबर आजम , शादाब खान आसिफ अली, फखर जमां, हैदर अली, हारिस रऊफ, इफ्तिखार अहमद, खुशदिल शाह, मोहम्मद हसनैन, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद वसीम जूनियर, नसीम शाह, शाहनवाज दहानी और उस्मान कादिर।
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आजकल नेटफ्लिक्स पर कई भारतीय फिल्में रिलीज होती हैं. हाल ही में प्रसिद्ध शो 'बिग बैंग थ्योरी' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुआ है. सियासी विश्लेषक मिथुन विजय कुमार ने आरोप लगाया है कि माधुरी पर शो में आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया. मिथुन विजय कुमार ने इस मुद्दे में नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी किया है.
'बिग बैंग थ्योरी' के दूसरे सीज़न की पहली कड़ी में जिम पार्सन्स ने शेल्डम कूपर की किरदार निभाई. जिम पार्सन्स शो में माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय की तुलना करते हैं. वह फिर माधुरी के बारे में एक टिप्पणी करता है. इस कमेंट पर अब मिथुन विजय कुमार ने विरोध जताई है.
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आजकल नेटफ्लिक्स पर कई भारतीय फिल्में रिलीज होती हैं. हाल ही में प्रसिद्ध शो 'बिग बैंग थ्योरी' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुआ है. सियासी विश्लेषक मिथुन विजय कुमार ने आरोप लगाया है कि माधुरी पर शो में आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया. मिथुन विजय कुमार ने इस मुद्दे में नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी किया है. 'बिग बैंग थ्योरी' के दूसरे सीज़न की पहली कड़ी में जिम पार्सन्स ने शेल्डम कूपर की किरदार निभाई. जिम पार्सन्स शो में माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय की तुलना करते हैं. वह फिर माधुरी के बारे में एक टिप्पणी करता है. इस कमेंट पर अब मिथुन विजय कुमार ने विरोध जताई है.
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IND Playing 11 for Bangladesh: बांग्लादेश के खिलाफ भारतीय टीम की कोशिश वनडे सीरीज का आगाज जीत के साथ करने की होगी। ढाका में रविवार को खेले जाने वाले पहले मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा टीम में अपने बेस्ट खिलाड़ियों को मौका देंगे। विराट कोहली और केएल राहुल की वापसी के साथ ही प्लेइंग इलेवन का चयन करना टीम के लिए इतना आसान काम नहीं होगा।
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा पहले मुकाबले में किन 11 खिलाड़ियों पर मैदान पर उतारते हैं, इस पर सभी की निगाहें रहेगी। कप्तान रोहित शर्मा और शिखर धवन पहले वनडे में ओपनिंग करते नजर आ सकते हैं। वहीं नंबर तीन पर विराट कोहली और चार पर श्रेयस अय्यर को मौका दिया जा सकता है। टीम के उपकप्तान केएल राहुल नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने के लिए उतर सकते हैं।
न्यूजीलैंड दौरे पर निराशाजनक प्रदर्शन करने वाले ऋषभ पंत को इस मैच में खेलने का मौका मिल सकता है। नंबर छह पर बल्लेबाजी करते हुए पंत टीम में विकेटकीपर की भूमिका निभाएंगे। अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर के रूप में दो ऑलराउंडर को शामिल किया जा सकता है। मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक और दीपक चाहर टीम के तीन तेज गेंदबाज हो सकते हैं।
संभावित प्लेइंग इलेवन- रोहित शर्मा (कप्तान), शिखर धवन, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (उपकप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक, दीपक चाहर।
वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम- रोहित शर्मा (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), दीपक चाहर, शिखर धवन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, विराट कोहली, मोहम्मद सिराज, ऋषभ पंत, अक्षर पटेल, रजत पाटीदार, कुलदीप सेन, शाहबाज अहमद, उमरान मलिक, शार्दुल ठाकुर, राहुल त्रिपाठी, वॉशिंगटन सुंदर।
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IND Playing ग्यारह for Bangladesh: बांग्लादेश के खिलाफ भारतीय टीम की कोशिश वनडे सीरीज का आगाज जीत के साथ करने की होगी। ढाका में रविवार को खेले जाने वाले पहले मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा टीम में अपने बेस्ट खिलाड़ियों को मौका देंगे। विराट कोहली और केएल राहुल की वापसी के साथ ही प्लेइंग इलेवन का चयन करना टीम के लिए इतना आसान काम नहीं होगा। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा पहले मुकाबले में किन ग्यारह खिलाड़ियों पर मैदान पर उतारते हैं, इस पर सभी की निगाहें रहेगी। कप्तान रोहित शर्मा और शिखर धवन पहले वनडे में ओपनिंग करते नजर आ सकते हैं। वहीं नंबर तीन पर विराट कोहली और चार पर श्रेयस अय्यर को मौका दिया जा सकता है। टीम के उपकप्तान केएल राहुल नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने के लिए उतर सकते हैं। न्यूजीलैंड दौरे पर निराशाजनक प्रदर्शन करने वाले ऋषभ पंत को इस मैच में खेलने का मौका मिल सकता है। नंबर छह पर बल्लेबाजी करते हुए पंत टीम में विकेटकीपर की भूमिका निभाएंगे। अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर के रूप में दो ऑलराउंडर को शामिल किया जा सकता है। मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक और दीपक चाहर टीम के तीन तेज गेंदबाज हो सकते हैं। संभावित प्लेइंग इलेवन- रोहित शर्मा , शिखर धवन, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल , ऋषभ पंत , अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक, दीपक चाहर। वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम- रोहित शर्मा , केएल राहुल , दीपक चाहर, शिखर धवन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, विराट कोहली, मोहम्मद सिराज, ऋषभ पंत, अक्षर पटेल, रजत पाटीदार, कुलदीप सेन, शाहबाज अहमद, उमरान मलिक, शार्दुल ठाकुर, राहुल त्रिपाठी, वॉशिंगटन सुंदर।
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उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इलाहाबाद और फैजाबाद जैसे जिलों का नाम बदलने के कदम पर योगी सरकार की तीव्र आलोचना करते हुए कहा कि सरकार असली मुद्दों से जनता का ध्यान परवर्तित करने के लिए यह सब नाटक कर रही है। श्री राजभर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी और सुहेल्देयो भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी को केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन समेत अपने मुस्लिम नेताओं के नाम भी बदलना चाहिए। इलाहाबाद और फैजाबाद जिलों के नाम बदलने के बाद , कई क्षेत्रों और राज्यों में भाजपा नेता अन्य शहरों के नाम बदलने की भी मांग कर रहे हैं ।
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उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इलाहाबाद और फैजाबाद जैसे जिलों का नाम बदलने के कदम पर योगी सरकार की तीव्र आलोचना करते हुए कहा कि सरकार असली मुद्दों से जनता का ध्यान परवर्तित करने के लिए यह सब नाटक कर रही है। श्री राजभर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी और सुहेल्देयो भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी को केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन समेत अपने मुस्लिम नेताओं के नाम भी बदलना चाहिए। इलाहाबाद और फैजाबाद जिलों के नाम बदलने के बाद , कई क्षेत्रों और राज्यों में भाजपा नेता अन्य शहरों के नाम बदलने की भी मांग कर रहे हैं ।
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जसवां प्रागपुर (कांगड़ा)। बीजेपी के फायर ब्रांड नेता बिक्रम सिंह ठाकुर (Bikram Singh Thakur) ने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (CM Sukhwinder Singh Sukhu) के पर कांगड़ा जिला से भेदभाव करने का आरोप लगाया है। जसवां प्रागपुर से बीजेपी के विधायक व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने प्रागपुर के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मीडिया से यह बात कही। उन्होंने कहा कि जब से हिमाचल में सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बनी है। तभी से हम लोग यह बोल रहे हैं कि कांगड़ा (Kangra) के साथ लगातार भेदभाव हुआ है। जब मंत्री बनाने की बात आई तो कांगड़ा के हिस्से में केवल एक मंत्री ही आया। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आप लंबे समय से अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना करेंगे। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह (Late Virbhadra Singh) हों प्रो प्रेम कुमार धूमल हों चाहे जयराम ठाकुर हों सब ने चार-चार मंत्री कांगड़ा से बनाए थे। लेकिन मौजूदा समय की सरकार कांगड़ा जिला के साथ भेदभाव कर रही है।
वहीं उन्होंने सीएम सुक्खू के कांगडा जिला में शीतकालीन प्रवास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीएम सुक्खू ने ना तो शीतकालीन प्रवास किया और ना ही यहां के लोगों की समस्याओं को सुना। कांगड़ा जिला को उसका हक मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं कांगडा जिला का बीजेपी विधायक (BJP MLA) होने के नाते कांग्रेस सरकार की घोर निंदा करता हूं। ठाकुर ने आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा कांग्रेस सरकार पूर्व सीएम स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की परंपराओं को तोड़ने का सबसे ज्यादा काम कर रही है। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह बोलते थे कि एक बच्चा भी अगर पढ़ने आएगा तो उसके लिए भी स्कूल खोलूंगा। लेकिन दूसरी तरफ मौजूदा कांग्रेस सरकार ने उन स्कूलों को बंद कर दिया जहां सैंकड़ों बच्चे पढ़ रहे हैं। सैंकड़ों संस्थानों को भी बंद कर दिया है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष व सांसद प्रतिभा सिंह (Pratibha Singh) को विंटर कार्निवाल में निमंत्रण ना मिलने पर भी बीजेपी नेता ने चुटकी ली है। बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि इन सभी बातों से कांग्रेस की गुटबाजी नजर आ रही है। कांग्रेस की लड़ाई अब सड़कों पर नजर आ रही है। वहीं बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि देहरा में जू बनने वाली पुरानी बात है। यह केंद्र सरकार का प्रॉजेक्ट और केंद्र में हमारी सरकार है। वहीं कांगड़ा जिला को टूरिज्म कैपिटल बनाने का सपना जरूर सीएम सुक्खू देखें।
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जसवां प्रागपुर । बीजेपी के फायर ब्रांड नेता बिक्रम सिंह ठाकुर ने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के पर कांगड़ा जिला से भेदभाव करने का आरोप लगाया है। जसवां प्रागपुर से बीजेपी के विधायक व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने प्रागपुर के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मीडिया से यह बात कही। उन्होंने कहा कि जब से हिमाचल में सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बनी है। तभी से हम लोग यह बोल रहे हैं कि कांगड़ा के साथ लगातार भेदभाव हुआ है। जब मंत्री बनाने की बात आई तो कांगड़ा के हिस्से में केवल एक मंत्री ही आया। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आप लंबे समय से अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना करेंगे। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह हों प्रो प्रेम कुमार धूमल हों चाहे जयराम ठाकुर हों सब ने चार-चार मंत्री कांगड़ा से बनाए थे। लेकिन मौजूदा समय की सरकार कांगड़ा जिला के साथ भेदभाव कर रही है। वहीं उन्होंने सीएम सुक्खू के कांगडा जिला में शीतकालीन प्रवास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीएम सुक्खू ने ना तो शीतकालीन प्रवास किया और ना ही यहां के लोगों की समस्याओं को सुना। कांगड़ा जिला को उसका हक मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं कांगडा जिला का बीजेपी विधायक होने के नाते कांग्रेस सरकार की घोर निंदा करता हूं। ठाकुर ने आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा कांग्रेस सरकार पूर्व सीएम स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की परंपराओं को तोड़ने का सबसे ज्यादा काम कर रही है। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह बोलते थे कि एक बच्चा भी अगर पढ़ने आएगा तो उसके लिए भी स्कूल खोलूंगा। लेकिन दूसरी तरफ मौजूदा कांग्रेस सरकार ने उन स्कूलों को बंद कर दिया जहां सैंकड़ों बच्चे पढ़ रहे हैं। सैंकड़ों संस्थानों को भी बंद कर दिया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष व सांसद प्रतिभा सिंह को विंटर कार्निवाल में निमंत्रण ना मिलने पर भी बीजेपी नेता ने चुटकी ली है। बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि इन सभी बातों से कांग्रेस की गुटबाजी नजर आ रही है। कांग्रेस की लड़ाई अब सड़कों पर नजर आ रही है। वहीं बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि देहरा में जू बनने वाली पुरानी बात है। यह केंद्र सरकार का प्रॉजेक्ट और केंद्र में हमारी सरकार है। वहीं कांगड़ा जिला को टूरिज्म कैपिटल बनाने का सपना जरूर सीएम सुक्खू देखें।
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समझा कि, यह प्रणय-कुपिता है। मैं बहुत दिनोंमें आया इससे नाराज़ी दिखाती और नखरे करती है। वह उसे बारम्बार प्रणाम करके और अत्यन्त मीठी बातें कह कह कर समझाने लगा- "प्यारी ! पहले तो तू ऐसी नहीं थी, यह तुझे क्या हुआ ? तू तो मेरो जीवन-डोरी है । तेरे बिना मैं क्षण भर भी जी नहीं सकता। अगर तू मुझसे न बोलेगी, मेरी ओर न देखेगी, तो मैं अपनी जान खो दूँगा । अरी मधुर मल्लिका ! एक बार तो मेरी तरफ़ नज़र भरके देख देख तेरा यह दास तेरे प्रेमकी आशासे तेरी सेवा करनेके लिए तड़फ रहा है। मुझ जैसे आज्ञाकारी सेवकको इस तरह निराश करना क्या उचित है ? मेरी समझमें, मैं निरपराध हूँ। अगर मुझसे कोई अपराध हो गया है, तो मुझे क्षमा कर देख, ईश्वर भी भयङ्कर-सेभयङ्कर अपराधीको क्षमा कर देता है। क्या तू अपने सेवकको क्षमादान न देगी ?"
गुणनिधिने इस तरह सैकड़ों दोनता को बातें कहीं, हाथ जोड़े, प्रणाम किया, तरह-तरहसे मुहब्बत जताई; पर वह ज़रा भी न पसीजी । उस वज्रहृदयाके कठोरतम हृदयमें लेशमात्र भी प्रेमका सञ्चार न हुआ। प्रेमका सञ्चार हो कहाँ से ? वह तो दूसरे पर मरती थी और उसीको चाहती थी। उसे अपना पति तो हलाहल विपसे भी बुरा और वह यार अमृतसे भी उत्तम मालूम होता था । गुणनिधि सब तरहसे वुद्धिमान और चतुर होनेपर भी, स्त्रियोंके छल-कपट जाननेमें निरा अवोध था। कामने
उसकी बुद्धि औरभी हर ली थी। कन्दर्पकला की तरह अनेकों स्त्रियाँ, अपने व्याहता पतियोंको धोखा देकर, पर- पुरुषोंके साथ रमण करता हैं। उनके पति उनका भीतरी हाल न जानकर, उनकी बारम्बार खुशामद करते और प्रेमको भिक्षा मांगते हुए लम्पटपन दर्शाते हैं। ऐसे लोगोंका जीवन किरकरा हो जाता है। अगर स्त्रो अपने साथ प्रेम करे, अपने ऊपर ही आसक्त रहे, तब तो इस संसारमें ही स्वर्ग है, अन्यथा नरक है। जो स्त्रो पराये मर्दको प्यार करती है, अपने पतिको धोखा देती है, उसके जीनेको धिक्कार है । और जो भोला-भाला पुरुष अपनी स्त्रोके दुश्चरित्र का हाल न जानकर, उससे प्रेम करता, उसकी खुशामद करता उसका भी जीवन भ्रष्ट है।
कामशास्त्र में लिखा है :नाभिपश्यन्ति भत्तरं नोत्तरं संप्रतीच्छति । वियोगे सुखमाप्नोति संयोगे चाति सीदति ॥ शय्यामुपगताशेते
तन्मित्रैद्वेष्टिमानञ्च विरक्ता नाभिवांछति ।।
जो स्त्री अपनी पतिको नहीं चाहती, वह उसकी तरफ़ नहीं देखती; हँसकर बोलना तो दूर की बात है, पूछी हुई बातका भी जवाब नहीं देती; जब तक पति घरमें रहता है, दुखी रहती है और उसके घरसे चले जाने पर सुखो होती हैं; उसके साथ एक पलंग पर नहीं सोती; अगर लेट भी जाता है, तो या तो
जाती है या मुँह फेर लेती है
अगर पति मुख
तो गालको पोंछ डालती है; पतिके मित्रसे द्वेष पति उसे कितना ही चाहे, पर वह राजी नहीं होती,
नींद में सो
चूमता है, रखती है;
मुँह फुलाये रहती हैं ।
"पञ्चतन्त्र" में लिखा हैपर्य्येष्वास्तरां पतिमनुकूलं मनोहरं शयनम् । तृणमिव लघु मन्यन्ते कामिन्यश्चार्य्यरतलुब्धाः ।।
पलंग पर सोना, पतिको अनुकूलता और मनोहर शयनको चोरीसे रत करने की इच्छा रखनेवाली स्त्रियाँ तिनकेके समान सकती हैं।
अगर गुणनिधि इन बातोंको जानता होता, तो उस हरजाई की इतनी खुशामद न करता ।
बहुत देर तक कन्दर्प कलाकी खुशामद करता-करता गुणनिधि थक गया । उस बेवफ़ा औरतको ज़रा भी रहम न आया । उसका दिल गुणनिधिकी ओर ज़रा भी न झुका और अपने यार से मिलनेका उत्साह कम न हुआ। अन्तमें थका-मांदा गुणनिधि रतकी आशा छोड़कर सो गया; मगर उसे अच्छी तरह नींद न आई। इन्हीं बातोंमें आधी रात बीत गई। घड़ियाली ने टन टन करके चारह वजाये । सारे शहरमें सन्नाटा छा गया। सड़कों पर आदमियोंका चलना-फिरना बन्द हो गया। कोई इक्का-दुक्का आदमी इधर-से-उधर जाता नज़र आता था। सारा
संसार निद्रादेवीकी गोद में चला गया। ऐसे समयमें कन्दर्पकला 'को अपने यारकी फिर याद आई। वह मन-ही-मन कहने लगी"मेरा प्राणप्यारा उस उपवनकी लताकुओं में मेरी बाट जोह रहा होगा, मुझसे मिलनेके लिए घबरा रहा होगा। हाय ! मेरे बिना आज उसका कैसा हाल होगा ! आज इस दुष्टके यकायक आ जानेसे, मैं उसके पास नियत समय पर न पहुँच सकी । प्यारे ! मुझे क्षमा करना आज मैं 9 मजबूर हूँ, मेरा दोष नहीं आज मेरे तुम्हारे सुखमें बाधा पहुँचाने वाला आ गया है ।" ये शब्द मन-ही-मन कहती हुई, वह बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ी । गुणनिधि इस समय भी पूरी तरह न सोया था । वह धमाका सुनते ही अच्छी तरह जाग पड़ा । उस प्रेमान्धने कन्दर्पकलाको ज़मीन परसे उठाया और छातीसे लगाकर पंखा करने लगा। ज्योंही उसे होश हुआ वह अपने तईं पतिकी गोद में देखकर लम्बे-लम्बे साँस लेने लगी और गोदसे उतर कर फिर अलग जा बैठी। पतिने पत्नीको मनानेके फिर भी बहुत यत्त किये, पर सब व्यर्थ । इस विघ्नकारीके विनय-वचन उस परपुरुषरता कामिनीके वियोगाग्निसे दग्ध हुए हृदयको कैसे शान्त कर सकते थे ?
जब गुणनिधि सो गया । घोर नींद में निमग्न हो जानेसे खुर्राटो लेने लगा, तब कन्दर्पकलाने उसे नींदके वशीभूत जान यारसे मिलनेकी ठानी। उसने उठकर सोलह शृंगार किये और सजधज कर यारसे मिलने चली । आज घरमें महोत्सव था,
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कन्दर्पकलाने, उसे नींदके वशीभूत जान, यारसे मिलने की ठानी । उसने उठकर सोलह शृंगार किये और सजधज कर यारसे मिलने चली । घरमे चोरी करनेकी ग़रज़से आया हुआ चोर भी, राहमे उसके क़ीमती ज़ेवरात छीन लेनेकी इच्छासे, उसके पीछे लग लिया ।
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समझा कि, यह प्रणय-कुपिता है। मैं बहुत दिनोंमें आया इससे नाराज़ी दिखाती और नखरे करती है। वह उसे बारम्बार प्रणाम करके और अत्यन्त मीठी बातें कह कह कर समझाने लगा- "प्यारी ! पहले तो तू ऐसी नहीं थी, यह तुझे क्या हुआ ? तू तो मेरो जीवन-डोरी है । तेरे बिना मैं क्षण भर भी जी नहीं सकता। अगर तू मुझसे न बोलेगी, मेरी ओर न देखेगी, तो मैं अपनी जान खो दूँगा । अरी मधुर मल्लिका ! एक बार तो मेरी तरफ़ नज़र भरके देख देख तेरा यह दास तेरे प्रेमकी आशासे तेरी सेवा करनेके लिए तड़फ रहा है। मुझ जैसे आज्ञाकारी सेवकको इस तरह निराश करना क्या उचित है ? मेरी समझमें, मैं निरपराध हूँ। अगर मुझसे कोई अपराध हो गया है, तो मुझे क्षमा कर देख, ईश्वर भी भयङ्कर-सेभयङ्कर अपराधीको क्षमा कर देता है। क्या तू अपने सेवकको क्षमादान न देगी ?" गुणनिधिने इस तरह सैकड़ों दोनता को बातें कहीं, हाथ जोड़े, प्रणाम किया, तरह-तरहसे मुहब्बत जताई; पर वह ज़रा भी न पसीजी । उस वज्रहृदयाके कठोरतम हृदयमें लेशमात्र भी प्रेमका सञ्चार न हुआ। प्रेमका सञ्चार हो कहाँ से ? वह तो दूसरे पर मरती थी और उसीको चाहती थी। उसे अपना पति तो हलाहल विपसे भी बुरा और वह यार अमृतसे भी उत्तम मालूम होता था । गुणनिधि सब तरहसे वुद्धिमान और चतुर होनेपर भी, स्त्रियोंके छल-कपट जाननेमें निरा अवोध था। कामने उसकी बुद्धि औरभी हर ली थी। कन्दर्पकला की तरह अनेकों स्त्रियाँ, अपने व्याहता पतियोंको धोखा देकर, पर- पुरुषोंके साथ रमण करता हैं। उनके पति उनका भीतरी हाल न जानकर, उनकी बारम्बार खुशामद करते और प्रेमको भिक्षा मांगते हुए लम्पटपन दर्शाते हैं। ऐसे लोगोंका जीवन किरकरा हो जाता है। अगर स्त्रो अपने साथ प्रेम करे, अपने ऊपर ही आसक्त रहे, तब तो इस संसारमें ही स्वर्ग है, अन्यथा नरक है। जो स्त्रो पराये मर्दको प्यार करती है, अपने पतिको धोखा देती है, उसके जीनेको धिक्कार है । और जो भोला-भाला पुरुष अपनी स्त्रोके दुश्चरित्र का हाल न जानकर, उससे प्रेम करता, उसकी खुशामद करता उसका भी जीवन भ्रष्ट है। कामशास्त्र में लिखा है :नाभिपश्यन्ति भत्तरं नोत्तरं संप्रतीच्छति । वियोगे सुखमाप्नोति संयोगे चाति सीदति ॥ शय्यामुपगताशेते तन्मित्रैद्वेष्टिमानञ्च विरक्ता नाभिवांछति ।। जो स्त्री अपनी पतिको नहीं चाहती, वह उसकी तरफ़ नहीं देखती; हँसकर बोलना तो दूर की बात है, पूछी हुई बातका भी जवाब नहीं देती; जब तक पति घरमें रहता है, दुखी रहती है और उसके घरसे चले जाने पर सुखो होती हैं; उसके साथ एक पलंग पर नहीं सोती; अगर लेट भी जाता है, तो या तो जाती है या मुँह फेर लेती है अगर पति मुख तो गालको पोंछ डालती है; पतिके मित्रसे द्वेष पति उसे कितना ही चाहे, पर वह राजी नहीं होती, नींद में सो चूमता है, रखती है; मुँह फुलाये रहती हैं । "पञ्चतन्त्र" में लिखा हैपर्य्येष्वास्तरां पतिमनुकूलं मनोहरं शयनम् । तृणमिव लघु मन्यन्ते कामिन्यश्चार्य्यरतलुब्धाः ।। पलंग पर सोना, पतिको अनुकूलता और मनोहर शयनको चोरीसे रत करने की इच्छा रखनेवाली स्त्रियाँ तिनकेके समान सकती हैं। अगर गुणनिधि इन बातोंको जानता होता, तो उस हरजाई की इतनी खुशामद न करता । बहुत देर तक कन्दर्प कलाकी खुशामद करता-करता गुणनिधि थक गया । उस बेवफ़ा औरतको ज़रा भी रहम न आया । उसका दिल गुणनिधिकी ओर ज़रा भी न झुका और अपने यार से मिलनेका उत्साह कम न हुआ। अन्तमें थका-मांदा गुणनिधि रतकी आशा छोड़कर सो गया; मगर उसे अच्छी तरह नींद न आई। इन्हीं बातोंमें आधी रात बीत गई। घड़ियाली ने टन टन करके चारह वजाये । सारे शहरमें सन्नाटा छा गया। सड़कों पर आदमियोंका चलना-फिरना बन्द हो गया। कोई इक्का-दुक्का आदमी इधर-से-उधर जाता नज़र आता था। सारा संसार निद्रादेवीकी गोद में चला गया। ऐसे समयमें कन्दर्पकला 'को अपने यारकी फिर याद आई। वह मन-ही-मन कहने लगी"मेरा प्राणप्यारा उस उपवनकी लताकुओं में मेरी बाट जोह रहा होगा, मुझसे मिलनेके लिए घबरा रहा होगा। हाय ! मेरे बिना आज उसका कैसा हाल होगा ! आज इस दुष्टके यकायक आ जानेसे, मैं उसके पास नियत समय पर न पहुँच सकी । प्यारे ! मुझे क्षमा करना आज मैं नौ मजबूर हूँ, मेरा दोष नहीं आज मेरे तुम्हारे सुखमें बाधा पहुँचाने वाला आ गया है ।" ये शब्द मन-ही-मन कहती हुई, वह बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ी । गुणनिधि इस समय भी पूरी तरह न सोया था । वह धमाका सुनते ही अच्छी तरह जाग पड़ा । उस प्रेमान्धने कन्दर्पकलाको ज़मीन परसे उठाया और छातीसे लगाकर पंखा करने लगा। ज्योंही उसे होश हुआ वह अपने तईं पतिकी गोद में देखकर लम्बे-लम्बे साँस लेने लगी और गोदसे उतर कर फिर अलग जा बैठी। पतिने पत्नीको मनानेके फिर भी बहुत यत्त किये, पर सब व्यर्थ । इस विघ्नकारीके विनय-वचन उस परपुरुषरता कामिनीके वियोगाग्निसे दग्ध हुए हृदयको कैसे शान्त कर सकते थे ? जब गुणनिधि सो गया । घोर नींद में निमग्न हो जानेसे खुर्राटो लेने लगा, तब कन्दर्पकलाने उसे नींदके वशीभूत जान यारसे मिलनेकी ठानी। उसने उठकर सोलह शृंगार किये और सजधज कर यारसे मिलने चली । आज घरमें महोत्सव था, you th Počesky palag कन्दर्पकलाने, उसे नींदके वशीभूत जान, यारसे मिलने की ठानी । उसने उठकर सोलह शृंगार किये और सजधज कर यारसे मिलने चली । घरमे चोरी करनेकी ग़रज़से आया हुआ चोर भी, राहमे उसके क़ीमती ज़ेवरात छीन लेनेकी इच्छासे, उसके पीछे लग लिया ।
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गोरा बादिल पदमिणी या घरुपई
पृथ्वी परगट रांण प्रताप, प्रतपइ दिन-दिन अधिक प्रताप ।
तस मंत्रीसर वुद्धिनिघांन, कावेड्यां कुलि तिलक समान ॥ ६१३ ॥ सांमिघरमि धुरि भांमुसाह, वयरी-वंस विघुंसण राह ।
तस लघु भाई ताराचंद, अवनि जाणि अवतरीज इंद्र ॥ ६१४॥ धूय जिम अविचल पालइ धरा, शत्रु सहू कीधा पाधरा । तसु आदेस लही सुभ भाइ, सभा सहित पांमी सुपसाइ ॥ ६१५॥ वात रची ए वादिल तणी, सांमिघरमि अति सोहामणी । वीररस सिणगार विशेष रस वे सरस इ सवित्तेप ॥ ६१६ ॥ सुणतां सवि सुख संपद मिलइ, भणतां भावठि दूरई टल । ऊजम अंगि हुइ अति घणु, मुहकम जाणइ करि मंत्रणु ।। ६१७ ॥ षट सित षोडस गाथा वंधि, सुणिउ तिसु भाष्यु संबंध । अधिक ऊन जे हुइ उच्चरिडं, सयण सुणी ते करयो खरुं ।। ६१८ ॥ सामिधरम पालंतां सदा, सगली आव घरि संपदा । सुर नर सहू प्रसंसा करई, वरमाला लै लिखमी वरइ ॥ ६१६ ॥
इति श्री गोरायादिल-चरित्रे । बादिल-जयलक्ष्मी-वर्णनो नाम प्रथमः खंडः ।। संवत् १६४६ वर्षे मगशिर सुवि १५ दिने श्री सादडी मध्ये । वा० हेमरत्नेन लिखितं ।। श्रीरस्तु ।। कल्यारण भूयात् ।। मगलाभ्युदयोस्तु ॥ ( १e b. )
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गोरा बादिल पदमिणी या घरुपई पृथ्वी परगट रांण प्रताप, प्रतपइ दिन-दिन अधिक प्रताप । तस मंत्रीसर वुद्धिनिघांन, कावेड्यां कुलि तिलक समान ॥ छः सौ तेरह ॥ सांमिघरमि धुरि भांमुसाह, वयरी-वंस विघुंसण राह । तस लघु भाई ताराचंद, अवनि जाणि अवतरीज इंद्र ॥ छः सौ चौदह॥ धूय जिम अविचल पालइ धरा, शत्रु सहू कीधा पाधरा । तसु आदेस लही सुभ भाइ, सभा सहित पांमी सुपसाइ ॥ छः सौ पंद्रह॥ वात रची ए वादिल तणी, सांमिघरमि अति सोहामणी । वीररस सिणगार विशेष रस वे सरस इ सवित्तेप ॥ छः सौ सोलह ॥ सुणतां सवि सुख संपद मिलइ, भणतां भावठि दूरई टल । ऊजम अंगि हुइ अति घणु, मुहकम जाणइ करि मंत्रणु ।। छः सौ सत्रह ॥ षट सित षोडस गाथा वंधि, सुणिउ तिसु भाष्यु संबंध । अधिक ऊन जे हुइ उच्चरिडं, सयण सुणी ते करयो खरुं ।। छः सौ अट्ठारह ॥ सामिधरम पालंतां सदा, सगली आव घरि संपदा । सुर नर सहू प्रसंसा करई, वरमाला लै लिखमी वरइ ॥ छः सौ सोलह ॥ इति श्री गोरायादिल-चरित्रे । बादिल-जयलक्ष्मी-वर्णनो नाम प्रथमः खंडः ।। संवत् एक हज़ार छः सौ छियालीस वर्षे मगशिर सुवि पंद्रह दिने श्री सादडी मध्ये । वाशून्य हेमरत्नेन लिखितं ।। श्रीरस्तु ।। कल्यारण भूयात् ।। मगलाभ्युदयोस्तु ॥
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वर्ष की अंतिम संकष्टी चतुर्थी 22 दिसंबर को है। तृतीया तिथि शाम 4. 53 बजे तक है। इस व्रत में चतुर्थी का चंद्रमा होना अनिवार्य है, इसलिए 22 दिसंबर को ही गणेश चतुर्थी है। जिन पर शनि की साढ़ेसाती (धनु, मकर व कुंभ राशि के जातक) और ढैया (मिथुन व तुला राशि के जातक) चल रही है, उन्हें यह व्रत रखना चाहिए। जिनको धन की कमी महसूस हो रही है, उन्हें हरे रंग के गणेश की और जिनकी सेहत खराब है, उन्हें लाल गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। मोक्ष हेतु सफेद रंग के गणेशजी की पूजा करें।
ऐसे रखें व्रत : सुबह स्नान के बाद मम सकलाभीष्टसिद्धये चतुर्थीव्रत करिष्ये मंत्र से संकल्प करके दिन भर मौन रहें। गणेशजी को बेलपत्र, अपामार्ग, शमीपत्र, दूर्वा अर्पण करें। लड्डू के साथ फल, पंचमेवा आदि चढ़ाएं। आरती आदि करके गणेश्वर गणाध्यक्ष गौरीपुत्र गजानन। व्रतं संपूर्णता यातु त्वत्प्रसादादिभानन। । मंत्र से प्रार्थना करें। रात्रि में पुनः स्नान कर गणपति पूजन के बाद चंद्रमा का पूजन करें और अर्घ्य दें। गणेश चतुर्थी व्रत करने वाले को उदित चंद्रमा, गणेश और चतुर्थी माता को अर्घ्य अवश्य देना चाहिए। गणेशजी को अर्घ्य देने का मंत्र- गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धिप्रदायक। संकष्टहर म देव गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते। । कृष्णपक्षे चतुर्थ्यां तु सम्पूजित विधूदये। क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते। ।
चतुर्थी माता को इस मंत्र से अर्घ्य दें- तिथिनामुत्तमे देवि गणेशप्रियवल्लभे। सर्वसंकटनाशाय गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते। । चतुर्थ्यै नमः इदमर्घ्यं समर्पयामि।
इसके बाद चंद्रमा का गंध-पुष्पादि से पूजन कर तांबे के लोटे में लाल चंदन, कुश, दूर्वा, फूल, अक्षत, शमीपत्र, दही और जल एकत्र कर, नारद पुराण के इस मंत्र का पाठ करते हुए अर्घ्य दें-गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक। ।
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वर्ष की अंतिम संकष्टी चतुर्थी बाईस दिसंबर को है। तृतीया तिथि शाम चार. तिरेपन बजे तक है। इस व्रत में चतुर्थी का चंद्रमा होना अनिवार्य है, इसलिए बाईस दिसंबर को ही गणेश चतुर्थी है। जिन पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया चल रही है, उन्हें यह व्रत रखना चाहिए। जिनको धन की कमी महसूस हो रही है, उन्हें हरे रंग के गणेश की और जिनकी सेहत खराब है, उन्हें लाल गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। मोक्ष हेतु सफेद रंग के गणेशजी की पूजा करें। ऐसे रखें व्रत : सुबह स्नान के बाद मम सकलाभीष्टसिद्धये चतुर्थीव्रत करिष्ये मंत्र से संकल्प करके दिन भर मौन रहें। गणेशजी को बेलपत्र, अपामार्ग, शमीपत्र, दूर्वा अर्पण करें। लड्डू के साथ फल, पंचमेवा आदि चढ़ाएं। आरती आदि करके गणेश्वर गणाध्यक्ष गौरीपुत्र गजानन। व्रतं संपूर्णता यातु त्वत्प्रसादादिभानन। । मंत्र से प्रार्थना करें। रात्रि में पुनः स्नान कर गणपति पूजन के बाद चंद्रमा का पूजन करें और अर्घ्य दें। गणेश चतुर्थी व्रत करने वाले को उदित चंद्रमा, गणेश और चतुर्थी माता को अर्घ्य अवश्य देना चाहिए। गणेशजी को अर्घ्य देने का मंत्र- गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धिप्रदायक। संकष्टहर म देव गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते। । कृष्णपक्षे चतुर्थ्यां तु सम्पूजित विधूदये। क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते। । चतुर्थी माता को इस मंत्र से अर्घ्य दें- तिथिनामुत्तमे देवि गणेशप्रियवल्लभे। सर्वसंकटनाशाय गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते। । चतुर्थ्यै नमः इदमर्घ्यं समर्पयामि। इसके बाद चंद्रमा का गंध-पुष्पादि से पूजन कर तांबे के लोटे में लाल चंदन, कुश, दूर्वा, फूल, अक्षत, शमीपत्र, दही और जल एकत्र कर, नारद पुराण के इस मंत्र का पाठ करते हुए अर्घ्य दें-गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक। ।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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माफिया अतीक अहमद ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपने बेटे असद का शव देखने और जनाजे में शामिल होने के लिए शुक्रवार कोरिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दायर की है।
अतीक अहमद के वकील मनीष खन्ना ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि चूंकि शुक्रवार को जिला अदालत में आंबेडकर जयंती पर अवकाश था, इसलिए अतीक की ओर से रिमांड मजिस्ट्रेट के पास अर्जी देकर बेटे के जनाजे में शामिल होने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया है। खन्ना ने बताया कि शनिवार को यह अर्जी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में दायर की जाएगी।
इस बीच, मुठभेड़ में मारे गए असद और गुलाम के शव लेने उनके परिजन शुक्रवार की शाम झांसी पहुंचे। असद का शव लेने उसका फूफा उस्मान पहुंचा है, जबकिगुलाम का शव लेने उसका साला नूर आलम पहुंचा है।
शुक्रवार की शाम अतीक के मोहल्ले कसारी मसारी में भारी संख्या में लोग जमा थे और असद का शव लाए जाने की चर्चा रही। असद का शव दफनाने के लिए कसारी मसारी कब्रिस्तान में शाम तक कब्र तैयार कर ली गई थी।
हालांकि देर शाम तक परिजनों को शव सुपुर्द नहीं किए जाने से अब अंतिम संस्कार शनिवार को किए जाने की संभावना है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि असद के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहेगा ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे।
उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को झांसी में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के साथ मुठभेड़ में अतीक अहमद के बेटे असद और उमेश पाल हत्याकांड में नामजद अन्य आरोपी गुलाम की मौत हो गई थी। यह घटना उस समय हुई जब अतीक और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज की सीजेएम अदालत में पेशी हो रही थी।
माफिया अतीक अहमद ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपने बेटे असद का शव देखने और जनाजे में शामिल होने के लिए शुक्रवार कोरिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दायर की है।
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माफिया अतीक अहमद ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपने बेटे असद का शव देखने और जनाजे में शामिल होने के लिए शुक्रवार कोरिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दायर की है। अतीक अहमद के वकील मनीष खन्ना ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि चूंकि शुक्रवार को जिला अदालत में आंबेडकर जयंती पर अवकाश था, इसलिए अतीक की ओर से रिमांड मजिस्ट्रेट के पास अर्जी देकर बेटे के जनाजे में शामिल होने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया है। खन्ना ने बताया कि शनिवार को यह अर्जी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर की जाएगी। इस बीच, मुठभेड़ में मारे गए असद और गुलाम के शव लेने उनके परिजन शुक्रवार की शाम झांसी पहुंचे। असद का शव लेने उसका फूफा उस्मान पहुंचा है, जबकिगुलाम का शव लेने उसका साला नूर आलम पहुंचा है। शुक्रवार की शाम अतीक के मोहल्ले कसारी मसारी में भारी संख्या में लोग जमा थे और असद का शव लाए जाने की चर्चा रही। असद का शव दफनाने के लिए कसारी मसारी कब्रिस्तान में शाम तक कब्र तैयार कर ली गई थी। हालांकि देर शाम तक परिजनों को शव सुपुर्द नहीं किए जाने से अब अंतिम संस्कार शनिवार को किए जाने की संभावना है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि असद के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहेगा ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को झांसी में विशेष कार्य बल के साथ मुठभेड़ में अतीक अहमद के बेटे असद और उमेश पाल हत्याकांड में नामजद अन्य आरोपी गुलाम की मौत हो गई थी। यह घटना उस समय हुई जब अतीक और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज की सीजेएम अदालत में पेशी हो रही थी। माफिया अतीक अहमद ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपने बेटे असद का शव देखने और जनाजे में शामिल होने के लिए शुक्रवार कोरिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दायर की है।
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विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाए जाने के लिए चलाए जा रहे 'वंदे भारत मिशन' का दूसरा चरण 16 मई से शुरू होगा और 22 मई तक चलेगा। 'NDTV' की रिपोर्ट के अनुसार, इस चरण में 149 उड़ानों में 31 देशों में फंसे भारतीयों को वापस लाया जाएगा। जिन देशों से भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा उनमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (UK), कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब आदि शामिल हैं।
4 मई को केंद्र सरकार ने विदेशों में फंसे भारतीयों को चरणों में नौसेना के जहाजों और विमानों के जरिए भारत वापस लाने के लिए 'वंदे मातरम' मिशन का ऐलान किया था। भारतीय दूतावास भारत लौटने के इच्छुक भारतीयों की सूची तैयार कर रहे हैं और 7 मई से इसका पहला चरण शुरू हो चुका है। हवाई यात्रा के लिए व्यावसायिक उड़ानों का इंतजाम किया जाएगा और वापस आने वाले लोगों को अपना किराया खुद देना होगा।
7 मई से शुरू हुआ मिशन का पहला चरण 13 मई तक चलना है और इस दौरान 13 देशों से फंसे 14,800 भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। इस चरण के दौरान 64 विमान भेजे जाएंगे। इस चरण में जिन देशों से भारतीय नागरिकों को लाया जा रहा है उनमें फिलीपींस, सिंगापुर, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), यूनाइटेड किंगडम (UK), सऊदी अरब, कतर, अमेरिका, ओमान, बहरीन और मलेशिया आदि शामिल हैं।
इस बीच सरकार दूसरे चरण की भी तैयारी कर रही है और NDTV के सूत्रों के अनुसार, 16 मई से 22 मई तक चलने वाले इस चरण में 149 उड़ानों के जरिए 31 देशों से भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा। अमेरिका से 13, कनाडा से 10, UK से नौ, UAE से 11, सऊदी अरब से नौ, रूस से छह और ऑस्ट्रेलिया से सात फ्लाइट आएंगीं। फ्रांस, इटली, जर्मनी, आयरलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों से भी फ्लाइट आएंगी।
पड़ोसी देशों की बात करें तो बांग्लादेश और नेपाल से एक-एक फ्लाइट के जरिए भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा। बता दें कि अपने इस मिशन के तहत भारत सरकार की जून के मध्य तक लगभग चार लाख भारतीयों को वापस लाने की योजना है।
केंद्र सरकार ने विदेश से वापस लौट रहे इन यात्रियों के लिए गाइडलाइंस भी जारी की हैं जिनका उन्हें पालन करना होगा। इन गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाएगी और जिनमें कोरोना वायरस जैसे लक्षण नहीं होंगे, केवल उन्हीं को यात्रा की इजाजत होगी। यात्रा के दौरान सभी यात्रियों को स्वास्थ्य मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी प्रोटोकॉल्स का पालन करना होगा। भारत पहुंचने पर उन्हें 'आरोग्य सेतु' ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा।
गाइडलाइंस के अनुसार, भारत पहुंचने के बाद यात्रियों की मेडिकल स्क्रीनिंग की जाएगी और इस जांच के बाद उन्हें 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। यात्री पैसे देकर राज्य सरकारों द्वारा तैयार क्वारंटाइन केंद्रों में भी रह सकेंगे। 14 दिन के बाद उनका कोरोना वायरस का टेस्ट किया जाएगा और उनके नतीजे के बाद गाइडलाइंस के तहत कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने राज्यों से टेस्टिंग और क्वारंटाइन समेत सभी तैयारियां करने को कहा है।
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विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाए जाने के लिए चलाए जा रहे 'वंदे भारत मिशन' का दूसरा चरण सोलह मई से शुरू होगा और बाईस मई तक चलेगा। 'NDTV' की रिपोर्ट के अनुसार, इस चरण में एक सौ उनचास उड़ानों में इकतीस देशों में फंसे भारतीयों को वापस लाया जाएगा। जिन देशों से भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा उनमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम , कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब आदि शामिल हैं। चार मई को केंद्र सरकार ने विदेशों में फंसे भारतीयों को चरणों में नौसेना के जहाजों और विमानों के जरिए भारत वापस लाने के लिए 'वंदे मातरम' मिशन का ऐलान किया था। भारतीय दूतावास भारत लौटने के इच्छुक भारतीयों की सूची तैयार कर रहे हैं और सात मई से इसका पहला चरण शुरू हो चुका है। हवाई यात्रा के लिए व्यावसायिक उड़ानों का इंतजाम किया जाएगा और वापस आने वाले लोगों को अपना किराया खुद देना होगा। सात मई से शुरू हुआ मिशन का पहला चरण तेरह मई तक चलना है और इस दौरान तेरह देशों से फंसे चौदह,आठ सौ भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। इस चरण के दौरान चौंसठ विमान भेजे जाएंगे। इस चरण में जिन देशों से भारतीय नागरिकों को लाया जा रहा है उनमें फिलीपींस, सिंगापुर, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात , यूनाइटेड किंगडम , सऊदी अरब, कतर, अमेरिका, ओमान, बहरीन और मलेशिया आदि शामिल हैं। इस बीच सरकार दूसरे चरण की भी तैयारी कर रही है और NDTV के सूत्रों के अनुसार, सोलह मई से बाईस मई तक चलने वाले इस चरण में एक सौ उनचास उड़ानों के जरिए इकतीस देशों से भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा। अमेरिका से तेरह, कनाडा से दस, UK से नौ, UAE से ग्यारह, सऊदी अरब से नौ, रूस से छह और ऑस्ट्रेलिया से सात फ्लाइट आएंगीं। फ्रांस, इटली, जर्मनी, आयरलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों से भी फ्लाइट आएंगी। पड़ोसी देशों की बात करें तो बांग्लादेश और नेपाल से एक-एक फ्लाइट के जरिए भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा। बता दें कि अपने इस मिशन के तहत भारत सरकार की जून के मध्य तक लगभग चार लाख भारतीयों को वापस लाने की योजना है। केंद्र सरकार ने विदेश से वापस लौट रहे इन यात्रियों के लिए गाइडलाइंस भी जारी की हैं जिनका उन्हें पालन करना होगा। इन गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाएगी और जिनमें कोरोना वायरस जैसे लक्षण नहीं होंगे, केवल उन्हीं को यात्रा की इजाजत होगी। यात्रा के दौरान सभी यात्रियों को स्वास्थ्य मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी प्रोटोकॉल्स का पालन करना होगा। भारत पहुंचने पर उन्हें 'आरोग्य सेतु' ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा। गाइडलाइंस के अनुसार, भारत पहुंचने के बाद यात्रियों की मेडिकल स्क्रीनिंग की जाएगी और इस जांच के बाद उन्हें चौदह दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। यात्री पैसे देकर राज्य सरकारों द्वारा तैयार क्वारंटाइन केंद्रों में भी रह सकेंगे। चौदह दिन के बाद उनका कोरोना वायरस का टेस्ट किया जाएगा और उनके नतीजे के बाद गाइडलाइंस के तहत कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने राज्यों से टेस्टिंग और क्वारंटाइन समेत सभी तैयारियां करने को कहा है।
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एक संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित इससे अफगानिस्तान बांग्लादेश और बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों के अवैध प्रवासी ले सकेंगे भारतीय नागरिकता
दो उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में आये फैसले पर पुनर्विचार की सभी याचिकाएं खारिज की
तीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कानपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चौदह दिसम्बर को प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर तैयारियों का लिया जायजा
और चार प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी शहरी और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रत्येक रविवार को अनिवार्य रूप से आरोग्य मेला आयोजित करने के दिये निर्देश
नागरिकता संशोधन विधेयक दो हज़ार उन्नीस संसद में पारित हो गया है
राज्य सभा ने कल रात इस विधेयक को मंजूरी दे दी
विधेयक के समर्थन में एक सौ पच्चीस और विरोध में एक सौ पाँच सदस्यों के मत पड़े
सदन ने विधेयक को मंजूरी देते समय विपक्षी दलों के संशोधनों को खारिज कर दिया
यह विधेयक लोक सभा में सोमवार को पारित हुआ था
लोकसभा में तीन सौ ग्यारह सदस्यों ने इस के पक्ष में और अस्सी सदस्यों ने विरोध में मतदान किया था
राज्य सभा में विधेयक के बारे में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कानून उन लोगों के जीवन में नई रोशनी लाएगा जिनपर पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अत्याचार हो रहा है
हम कोई एक धर्म को नहीं दे रहे हैं
हम एक तीन देशों की माइनॉरटी को ले रहे हैं और सभी की सभी माइनॉरटी को ले रहे हैं एक क्लास को ले रहे हैं और उसमें भी वो क्लास को जो धार्मिक प्रताडना से प्रताडित है
इसलिए रिजनेबल क्लीसिफिकेशन के आधार पर ये संसद को कानून बनाने का अधिकार है
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिकता संशोधन विधेयक राज्य सभा में पारित होने पर प्रसन्न्ता व्यक्त की है
उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है और देश के करूणा तथा भाईचारे के मूल्यों का प्रतीक है
प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा कि यह विधेयक उन लोगों के कष्ट दूर करेगा जो वर्षों से अत्याचार का सामना कर रहे हैं
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नागरिकता संशोधन विधेयक दो हज़ार उन्नीस पारित होने को भारत के बहुलवाद पर संकुचित विचारधारा की जीत कहा
उन्होंने एक बयान में भारतीय जनता पार्टी के ध्रुवीकरण एजेंडा के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की कांग्रेस की प्रतिबद्धता व्यक्त की
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन विधेयक के संसद में पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बधाई दी है
विधेयक के पारित होने पर प्रदेश में खुशी का माहौल है
लोगों का कहना है कि यह विधेयक धार्मिक प्रताड़ना पीड़ित शरणार्थियों को राहत देगा
मुजफ्फरनगर निवासी विकास बालियान ने बताया नागरिक संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुका है और बनने वाला है
कानून बनने के बाद अफगानिस्तार बांग्लादेश पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के शिकार जो हिन्दू सिख पारसी ईसासी समुदाय के लोग जो भारत आए हुए है उन्हें भारत की नागरिता मिल सकेगी
उधर पीलीभीत में बांग्लादेश से आकर बसे हजारों शरणार्थियों को इस विधेयक के पारित होने के बाद नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है
पीलीभीत अब ये कानून निवासी अशोक राजा ने बताया हम सभी भारतीयों के लिये यह बड़े गर्व की बात है खुशी की बात है
भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल पास कर यह हमारे बहुत से शरणार्थी जो बंगाल से आये हुए थे उन्हें भारत की नागरिकता प्राप्त हुई है
पीलीभीत में बावन हजार बंगाली समाज के लोग जिन्हें आज तक नागरिकता प्रदान नहीं की गई थी वह भारत के नागरिक नहीं माने जाते थे
लेकिन आज उनमें एक उत्साह एक उमंग की लहर दौड़ गई हैं उनहें खुशी है कि हम लोग भी आज भारत के नागरिक बन गये है यह मोदी सरकार की देन है
वहीं प्रतापगढ़ के महेश कुमार गुप्ता ने बताया लोकसभा में नागरिक संशोधन विधेयक के पारित हो जाने से देश के उन सभी हिन्दू शरणार्थियों को राहत मिलेगी जो एक विदेशी की भांति देश में रह रहे थे
उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार की सभी याचिकाएं खारिज कर दी है
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने अपने चम्बर में इन याचिकाओं पर विचार किया और इन्हें निराधार पाया
इसके साथ ही इन याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की संभावना भी खत्म हो गई
इस पीठ में न्यायामूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ न्यायामूर्ति अशोक भूषण न्यायामूर्ति एसए नजीर और न्यायामूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे
न्यायालय ने सिर्फ उन्हीं चार पक्षों की याचिकाओं पर विचार किया जो आरंभ में इस मुकदमे में पक्षकार थे
थे इस मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुल अट्ठारह याचिकाएं दायर की गई थीं
इनमें नौ मुकदमे से संबंधित पक्षकारों की थीं जबकि नौ अन्य पक्षों की थीं
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चौदह दिसम्बर को प्रस्तावित कानपुर दौरे के मद्देनजर आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया
इस दौरान उन्होंने गंगा नदी का निरीक्षण कर नमामि गंगा मिशन के तहत हुए कार्यो की प्रगति का जायजा लिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से नमामि गंगे परियोजना के अन्तर्गत जो कार्य हुए है उससे आज गंगा का पानी आचमन लायक हो गया है
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करने कानपुर आ रहे हैं
मां गंगा की निर्मलता को लेकर के आदरणीय प्रधानमंत्री जो नरेन्द्र मोदी जी नमामि गंगे अभियान को आगे बढ़ाया
शीशामऊ नाला यह एशिया का सबसे बड़ा सीवर नाला था और एक सौ बीस वर्षों से कानपुर शहर का पूरा सीवर गंगाजी में इसी नाले से गिरता था
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा प्रारम्भ किये गये नमामि गंगे मिशन के कारण यह शीशामऊ नाला पूरी तरह टेप हुआ है
यहां का पूरा सीवर एसटीपी में टेप डायवर्ड किया गया है
इस नाले में एक भी बूंद सीवर अब गंगाजी में नहीं गिर रहा हैं ऐसे दर्जनों नाले टेप किये गये है और नमामि गंगे परियोजना को सफलतापूर्वक इसी प्रकार से आग बढ़ाया जा रहा है
प्रधानमंत्री चौदह दिसम्बर को राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में शामिल होने के लिये कानपुर आ रहे हैं
प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी शहरी एवं ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों पर प्रत्येक रविवार को अनिवार्य रूप से आरोग्य मेला आयोजित किये जाने के निर्देश दिये हैं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिये ठोस कार्य योजना बना कर इसे शीघ्र लागू करने के लिये कहा है
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग इसके लिये नोडल विभाग होगा
चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग भी इसमें शामिल होंगे
इन आरोग्य मेलों में डॉक्टरों की टीम उपलब्ध रहेगी और साथ ही एक सौ आठ और एक सौ दो एम्बलेंस सेवाओं की भी सुविधा होगी
मुख्यमंत्री कल अपने आवास पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्तुतीकरण अवसर पर कार्यो की समीक्षा कर रहे थे
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के तहत अधिक से अधिक लोगों को कवर किया जायेगा
मुख्यमंत्री ने गोल्डेन कार्ड के वितरण में शीघ्रता बरतते हुए इसके संबंध में कैम्प आयोजित कर कार्य करने के भी निर्देश दिये
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि एक्सरे अल्ट्रा साउंड तथा अन्य उपकरण को दुरूस्त रखा जाये
बहराइच में कल रात हुई एक सड़क दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गये
यह दुर्घटना बहराइचनानापारा रोड पर गौरा धनोली गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक और कार में आमनेसामने टक्कर में हुई
घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है
यह सभी लोग बहराइच जिले के निवासी थे और एक शादी समारोह में जा रहे थे
जापानी इंसेफ्लाइटिस और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण के लिये प्रदेश में चलाये गये दस्तक अभियान के गोरखपुर माडल को हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवार्ड दिया गया है
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय हेल्थकेयर इनोवेशन समिट में कल प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रताप सिंह ने यह अवार्ड प्राप्त किया
इंसेफ्लाइटिस पर रोकथाम के लिये पिछले दिनों राज्य में लखनऊ सहित अट्ठारह जिलों में दस्तक अभियान चलाया गया था जिसमें खासतौर पर उत्कृष्ट कार्य के लिये गोरखपुर में संचालित दस्तक अभियान के माडल की सराहना की गई
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने सेकेण्ड्री मुंशी मौलवी सीनियर सेकेण्ड्री आलिम कामिल एवं फाजिल परीक्षा वर्ष दो हज़ार बीस के परीक्षा शुल्क जमा करने की तिथि तेरह दिसम्बर तक तथा ऑन लाइन परीक्षा आवेदन करने की तिथि सोलह दिसम्बर तक बढ़ा दी है
यह जानकारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आर0पी0 सिंह ने दी
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड ने एक मुश्त समाधान योजना को मार्च दो हज़ार बीस तक के लिये बढ़ा दिया गया है
सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने बताया कि बकायेदार किसानों को राहत पहुंचाने के लिये यह अवधि बढ़ाई गई है
समाप्त
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एक संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित इससे अफगानिस्तान बांग्लादेश और बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों के अवैध प्रवासी ले सकेंगे भारतीय नागरिकता दो उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में आये फैसले पर पुनर्विचार की सभी याचिकाएं खारिज की तीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कानपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चौदह दिसम्बर को प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर तैयारियों का लिया जायजा और चार प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी शहरी और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रत्येक रविवार को अनिवार्य रूप से आरोग्य मेला आयोजित करने के दिये निर्देश नागरिकता संशोधन विधेयक दो हज़ार उन्नीस संसद में पारित हो गया है राज्य सभा ने कल रात इस विधेयक को मंजूरी दे दी विधेयक के समर्थन में एक सौ पच्चीस और विरोध में एक सौ पाँच सदस्यों के मत पड़े सदन ने विधेयक को मंजूरी देते समय विपक्षी दलों के संशोधनों को खारिज कर दिया यह विधेयक लोक सभा में सोमवार को पारित हुआ था लोकसभा में तीन सौ ग्यारह सदस्यों ने इस के पक्ष में और अस्सी सदस्यों ने विरोध में मतदान किया था राज्य सभा में विधेयक के बारे में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कानून उन लोगों के जीवन में नई रोशनी लाएगा जिनपर पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अत्याचार हो रहा है हम कोई एक धर्म को नहीं दे रहे हैं हम एक तीन देशों की माइनॉरटी को ले रहे हैं और सभी की सभी माइनॉरटी को ले रहे हैं एक क्लास को ले रहे हैं और उसमें भी वो क्लास को जो धार्मिक प्रताडना से प्रताडित है इसलिए रिजनेबल क्लीसिफिकेशन के आधार पर ये संसद को कानून बनाने का अधिकार है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिकता संशोधन विधेयक राज्य सभा में पारित होने पर प्रसन्न्ता व्यक्त की है उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है और देश के करूणा तथा भाईचारे के मूल्यों का प्रतीक है प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा कि यह विधेयक उन लोगों के कष्ट दूर करेगा जो वर्षों से अत्याचार का सामना कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नागरिकता संशोधन विधेयक दो हज़ार उन्नीस पारित होने को भारत के बहुलवाद पर संकुचित विचारधारा की जीत कहा उन्होंने एक बयान में भारतीय जनता पार्टी के ध्रुवीकरण एजेंडा के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की कांग्रेस की प्रतिबद्धता व्यक्त की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन विधेयक के संसद में पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बधाई दी है विधेयक के पारित होने पर प्रदेश में खुशी का माहौल है लोगों का कहना है कि यह विधेयक धार्मिक प्रताड़ना पीड़ित शरणार्थियों को राहत देगा मुजफ्फरनगर निवासी विकास बालियान ने बताया नागरिक संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुका है और बनने वाला है कानून बनने के बाद अफगानिस्तार बांग्लादेश पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के शिकार जो हिन्दू सिख पारसी ईसासी समुदाय के लोग जो भारत आए हुए है उन्हें भारत की नागरिता मिल सकेगी उधर पीलीभीत में बांग्लादेश से आकर बसे हजारों शरणार्थियों को इस विधेयक के पारित होने के बाद नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है पीलीभीत अब ये कानून निवासी अशोक राजा ने बताया हम सभी भारतीयों के लिये यह बड़े गर्व की बात है खुशी की बात है भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल पास कर यह हमारे बहुत से शरणार्थी जो बंगाल से आये हुए थे उन्हें भारत की नागरिकता प्राप्त हुई है पीलीभीत में बावन हजार बंगाली समाज के लोग जिन्हें आज तक नागरिकता प्रदान नहीं की गई थी वह भारत के नागरिक नहीं माने जाते थे लेकिन आज उनमें एक उत्साह एक उमंग की लहर दौड़ गई हैं उनहें खुशी है कि हम लोग भी आज भारत के नागरिक बन गये है यह मोदी सरकार की देन है वहीं प्रतापगढ़ के महेश कुमार गुप्ता ने बताया लोकसभा में नागरिक संशोधन विधेयक के पारित हो जाने से देश के उन सभी हिन्दू शरणार्थियों को राहत मिलेगी जो एक विदेशी की भांति देश में रह रहे थे उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार की सभी याचिकाएं खारिज कर दी है प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने अपने चम्बर में इन याचिकाओं पर विचार किया और इन्हें निराधार पाया इसके साथ ही इन याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की संभावना भी खत्म हो गई इस पीठ में न्यायामूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ न्यायामूर्ति अशोक भूषण न्यायामूर्ति एसए नजीर और न्यायामूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे न्यायालय ने सिर्फ उन्हीं चार पक्षों की याचिकाओं पर विचार किया जो आरंभ में इस मुकदमे में पक्षकार थे थे इस मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुल अट्ठारह याचिकाएं दायर की गई थीं इनमें नौ मुकदमे से संबंधित पक्षकारों की थीं जबकि नौ अन्य पक्षों की थीं बक यह समाचार आप आकाशवाणी लखनऊ से सुन रहे हैं ताज़ा समाचार जानने के लिये आप हमारी वेबसाइट न्यूज़ ऑन एशून्यआईशून्यआरशून्य डॉट एनशून्यआईशून्यसीशून्य डॉट ए आईएन पर लॉगिन कर सकते हैं प्रादेशिक समाचारों के इस बुलेटिन में आपका फिर से स्वागत है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चौदह दिसम्बर को प्रस्तावित कानपुर दौरे के मद्देनजर आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया इस दौरान उन्होंने गंगा नदी का निरीक्षण कर नमामि गंगा मिशन के तहत हुए कार्यो की प्रगति का जायजा लिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से नमामि गंगे परियोजना के अन्तर्गत जो कार्य हुए है उससे आज गंगा का पानी आचमन लायक हो गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करने कानपुर आ रहे हैं मां गंगा की निर्मलता को लेकर के आदरणीय प्रधानमंत्री जो नरेन्द्र मोदी जी नमामि गंगे अभियान को आगे बढ़ाया शीशामऊ नाला यह एशिया का सबसे बड़ा सीवर नाला था और एक सौ बीस वर्षों से कानपुर शहर का पूरा सीवर गंगाजी में इसी नाले से गिरता था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा प्रारम्भ किये गये नमामि गंगे मिशन के कारण यह शीशामऊ नाला पूरी तरह टेप हुआ है यहां का पूरा सीवर एसटीपी में टेप डायवर्ड किया गया है इस नाले में एक भी बूंद सीवर अब गंगाजी में नहीं गिर रहा हैं ऐसे दर्जनों नाले टेप किये गये है और नमामि गंगे परियोजना को सफलतापूर्वक इसी प्रकार से आग बढ़ाया जा रहा है प्रधानमंत्री चौदह दिसम्बर को राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में शामिल होने के लिये कानपुर आ रहे हैं प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी शहरी एवं ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों पर प्रत्येक रविवार को अनिवार्य रूप से आरोग्य मेला आयोजित किये जाने के निर्देश दिये हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिये ठोस कार्य योजना बना कर इसे शीघ्र लागू करने के लिये कहा है मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग इसके लिये नोडल विभाग होगा चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग भी इसमें शामिल होंगे इन आरोग्य मेलों में डॉक्टरों की टीम उपलब्ध रहेगी और साथ ही एक सौ आठ और एक सौ दो एम्बलेंस सेवाओं की भी सुविधा होगी मुख्यमंत्री कल अपने आवास पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्तुतीकरण अवसर पर कार्यो की समीक्षा कर रहे थे उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के तहत अधिक से अधिक लोगों को कवर किया जायेगा मुख्यमंत्री ने गोल्डेन कार्ड के वितरण में शीघ्रता बरतते हुए इसके संबंध में कैम्प आयोजित कर कार्य करने के भी निर्देश दिये मुख्यमंत्री ने प्रत्येक अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि एक्सरे अल्ट्रा साउंड तथा अन्य उपकरण को दुरूस्त रखा जाये बहराइच में कल रात हुई एक सड़क दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गये यह दुर्घटना बहराइचनानापारा रोड पर गौरा धनोली गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक और कार में आमनेसामने टक्कर में हुई घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है यह सभी लोग बहराइच जिले के निवासी थे और एक शादी समारोह में जा रहे थे जापानी इंसेफ्लाइटिस और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण के लिये प्रदेश में चलाये गये दस्तक अभियान के गोरखपुर माडल को हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवार्ड दिया गया है नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय हेल्थकेयर इनोवेशन समिट में कल प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रताप सिंह ने यह अवार्ड प्राप्त किया इंसेफ्लाइटिस पर रोकथाम के लिये पिछले दिनों राज्य में लखनऊ सहित अट्ठारह जिलों में दस्तक अभियान चलाया गया था जिसमें खासतौर पर उत्कृष्ट कार्य के लिये गोरखपुर में संचालित दस्तक अभियान के माडल की सराहना की गई उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने सेकेण्ड्री मुंशी मौलवी सीनियर सेकेण्ड्री आलिम कामिल एवं फाजिल परीक्षा वर्ष दो हज़ार बीस के परीक्षा शुल्क जमा करने की तिथि तेरह दिसम्बर तक तथा ऑन लाइन परीक्षा आवेदन करने की तिथि सोलह दिसम्बर तक बढ़ा दी है यह जानकारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आरशून्यपीशून्य सिंह ने दी उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड ने एक मुश्त समाधान योजना को मार्च दो हज़ार बीस तक के लिये बढ़ा दिया गया है सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने बताया कि बकायेदार किसानों को राहत पहुंचाने के लिये यह अवधि बढ़ाई गई है समाप्त
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क्रिकेट के दुनिया में आज के समय में यदि सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज की बात करें तो कई नाम सामने नजर आते हैं. जिन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी खेल प्रेमियों का दिल जीता है. अब पूर्व भारतीय दिग्गज खिलाड़ी चेतन शर्मा ने भारतीय टीम के जसप्रीत बुमराह को मौजूदा समय का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बताया है. उसके अलावा उन्होंने एक और गेंदबाज की तारीफ की है.
ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर 2016 में जब पहली जसप्रीत बुमराह ने भारतीय टीम के लिए खेला था. उसी समय से उन्होने अपने योर्कर गेंदों पर विश्व के कई बड़े बल्लेबाजों को नचा दिया. हालाँकि उस समय कुछ दिग्गज कहते थे की बुमराह टेस्ट फ़ॉर्मेट में सफलता हासिल नहीं कर पाएंगे. लेकिन दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उन्होंने इस फ़ॉर्मेट में भी बहुत अच्छा करके सभी को चौका दिया.
आज के समय में जब भारतीय टीम के तीनो फ़ॉर्मेट के गेंदबाजो का नाम आता है तो उसमें जसप्रीत बुमराह ही वो गेंदबाज नजर आता है. जिनकी तीनो फ़ॉर्मेट में ही जगह पक्की है. उनके सामने कोई और गेंदबाज प्रभावी नहीं नजर आता है. उनके एक्शन को लेकर भी कई सवाल उठे थे. जो अब पूरी तरह से बंद हो गया है.
कोरोना वायरस के कारण फ़िलहाल देश में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. जिसके कारण खेल भी बंद चल रहा है. लेकिन इसी समय चेतन शर्मा उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं. जिन्होंने इस समय का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर फैन्स से जुड़ने और क्रिकेट पर अपनी राय रखने में दिया है. जो अब उनकी पहचान भी बन गयी है.
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क्रिकेट के दुनिया में आज के समय में यदि सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज की बात करें तो कई नाम सामने नजर आते हैं. जिन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी खेल प्रेमियों का दिल जीता है. अब पूर्व भारतीय दिग्गज खिलाड़ी चेतन शर्मा ने भारतीय टीम के जसप्रीत बुमराह को मौजूदा समय का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बताया है. उसके अलावा उन्होंने एक और गेंदबाज की तारीफ की है. ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर दो हज़ार सोलह में जब पहली जसप्रीत बुमराह ने भारतीय टीम के लिए खेला था. उसी समय से उन्होने अपने योर्कर गेंदों पर विश्व के कई बड़े बल्लेबाजों को नचा दिया. हालाँकि उस समय कुछ दिग्गज कहते थे की बुमराह टेस्ट फ़ॉर्मेट में सफलता हासिल नहीं कर पाएंगे. लेकिन दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उन्होंने इस फ़ॉर्मेट में भी बहुत अच्छा करके सभी को चौका दिया. आज के समय में जब भारतीय टीम के तीनो फ़ॉर्मेट के गेंदबाजो का नाम आता है तो उसमें जसप्रीत बुमराह ही वो गेंदबाज नजर आता है. जिनकी तीनो फ़ॉर्मेट में ही जगह पक्की है. उनके सामने कोई और गेंदबाज प्रभावी नहीं नजर आता है. उनके एक्शन को लेकर भी कई सवाल उठे थे. जो अब पूरी तरह से बंद हो गया है. कोरोना वायरस के कारण फ़िलहाल देश में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. जिसके कारण खेल भी बंद चल रहा है. लेकिन इसी समय चेतन शर्मा उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं. जिन्होंने इस समय का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर फैन्स से जुड़ने और क्रिकेट पर अपनी राय रखने में दिया है. जो अब उनकी पहचान भी बन गयी है.
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बिग बॉस 15 का लेटेस्ट वीकेंड का वार यादगार पलों से भरा रहा। म्यूजिक, ड्रामा, मस्ती से लेकर एक्शन तक, एपिसोड में सब कुछ देखने को मिला। इस एपिसोड में एक प्रपोजल भी देखा गया जिसने कई दिलों को पिघला दिया। एपिसोड के दौरान, शमिता शेट्टी और विशाल कोटियन को एक रेडियो शो 'द अक्का अन्ना शो' आयोजित करने का काम दिया गया। इश दौरान शमिता और विशाल ने बाकि घरवालों से बात की और लगे हाथ उनकी टांग खिचाई भी कर दी। इन्हीं सब मौज मस्ती के बीच ईशान और मायशा से अपनी फिलिंग का इजहार करने के लिए भी कहा गया।
ईशान ने मायशा की आंखों में देखते हुए कहा, 'जो कनेक्शन मैं तुम्हारे साथ महसूस करता हूं, मैं किसी के साथ महसूस नहीं करता। मैं ईशान तुम्हें चाहता हूं मायशा, क्या तुम मिशान? "। मायशा ने ईशान को गले लगाया और तीन जादुई शब्द 'आई लव यू' उनके कानों में कहे। सभी हाउसमेट्स ने उनके लिए तालियां बजाईं। इसके बाद उन्होंने इश्क वाला लव पर डांस किया।
बाद में, फराह खान ने एक स्पेशल गेस्ट के रूप में शो में प्रवेश किया और वह मंच पर होस्ट सलमान खान से मिलीं। जब सलमान ने उन्हें मायशा को ईशान के प्रपोजल के बारे में बताया, तो उन्होंने कहा कि कोई इतनी जल्दी कैसे प्यार में पड़ सकता है। उन्होंने यहां तक कि मजाक में कहा, 'पहली नजर में प्यार तो सुना था, तुम पहली रात में प्यार हो गया।
जहां मायशा इस प्रपोजल से काफी खुश नजर आ रही थीं, वहीं निशांत भट उन्हें अपने दिमाग का इस्तेमाल करने और शो में खुद को बेवकूफ न बनाने की सलाह दी। वह डर गई और उससे ऐसी बात न कहने के लिए कहा क्योंकि मायशा का मानना है कि ईशान रियल हैं और उनका प्यार भी शो के लिए नहीं है बल्कि सच्चा है।
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बिग बॉस पंद्रह का लेटेस्ट वीकेंड का वार यादगार पलों से भरा रहा। म्यूजिक, ड्रामा, मस्ती से लेकर एक्शन तक, एपिसोड में सब कुछ देखने को मिला। इस एपिसोड में एक प्रपोजल भी देखा गया जिसने कई दिलों को पिघला दिया। एपिसोड के दौरान, शमिता शेट्टी और विशाल कोटियन को एक रेडियो शो 'द अक्का अन्ना शो' आयोजित करने का काम दिया गया। इश दौरान शमिता और विशाल ने बाकि घरवालों से बात की और लगे हाथ उनकी टांग खिचाई भी कर दी। इन्हीं सब मौज मस्ती के बीच ईशान और मायशा से अपनी फिलिंग का इजहार करने के लिए भी कहा गया। ईशान ने मायशा की आंखों में देखते हुए कहा, 'जो कनेक्शन मैं तुम्हारे साथ महसूस करता हूं, मैं किसी के साथ महसूस नहीं करता। मैं ईशान तुम्हें चाहता हूं मायशा, क्या तुम मिशान? "। मायशा ने ईशान को गले लगाया और तीन जादुई शब्द 'आई लव यू' उनके कानों में कहे। सभी हाउसमेट्स ने उनके लिए तालियां बजाईं। इसके बाद उन्होंने इश्क वाला लव पर डांस किया। बाद में, फराह खान ने एक स्पेशल गेस्ट के रूप में शो में प्रवेश किया और वह मंच पर होस्ट सलमान खान से मिलीं। जब सलमान ने उन्हें मायशा को ईशान के प्रपोजल के बारे में बताया, तो उन्होंने कहा कि कोई इतनी जल्दी कैसे प्यार में पड़ सकता है। उन्होंने यहां तक कि मजाक में कहा, 'पहली नजर में प्यार तो सुना था, तुम पहली रात में प्यार हो गया। जहां मायशा इस प्रपोजल से काफी खुश नजर आ रही थीं, वहीं निशांत भट उन्हें अपने दिमाग का इस्तेमाल करने और शो में खुद को बेवकूफ न बनाने की सलाह दी। वह डर गई और उससे ऐसी बात न कहने के लिए कहा क्योंकि मायशा का मानना है कि ईशान रियल हैं और उनका प्यार भी शो के लिए नहीं है बल्कि सच्चा है।
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रांची /पटना : चारा घोटाले में देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये फर्जी तरीके से निकाले जाने के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सहित 16 दोषियों को सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह आज शनिवार को फैसला सुना सकते हैं.
उल्लेखनीय है कि उक्त मामले में लालू यादव को सजा सुनाए जाने का फैसला दो बार टल चुका है. वैसे लालू के अधिवक्ता प्रभात कुमार के अनुसार शनिवार का दिन सभी दोषियों को सजा सुनाने के लिए तय हुआ है. जबकि अभी छह दोषियों सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील गांधी, संजय कुमार अग्रवाल और त्रिपुरारी मोहन प्रसाद के अलावा पूर्व ट्रेजरी ऑफिसर सुबीर भट्टाचार्य की सजा पर सुनवाई होनी बाकी है. ऐसे में नहीं लगता कि आज शनिवार को भी फैसला आ जाए. यदि आज भी लालू की सजा की घोषणा नहीं हुई तो इसके लिए सोमवार तक का इंतजार करना पड़ेगा.
इस बीच दूसरी ओर लालू की सजा को लेकर राजद चिंतित है. यदि लालू को ज्यादा वक्त जेल में रहना पड़ा तो पार्टी की रणनीति क्या होगी इसको लेकर बिहार की पूर्व सीएम और लालू की पत्नी राबड़ी यादव आज दोपहर में अपने आवास पर पार्टी की बैठक करने जा रहीं हैं. इस बैठक में परिवार के साथ कुछ और करीबी नेता भी शामिल हो सकते हैं. लालू के दोनों बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव भी बैठक में होंगे ही. साथ में लालू की सबसे बड़ी बेटी मीसा यादव भी पार्टी की बैठक चर्चा कर सकतीं हैं.
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रांची /पटना : चारा घोटाले में देवघर कोषागार से नवासी लाख रुपये फर्जी तरीके से निकाले जाने के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सहित सोलह दोषियों को सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह आज शनिवार को फैसला सुना सकते हैं. उल्लेखनीय है कि उक्त मामले में लालू यादव को सजा सुनाए जाने का फैसला दो बार टल चुका है. वैसे लालू के अधिवक्ता प्रभात कुमार के अनुसार शनिवार का दिन सभी दोषियों को सजा सुनाने के लिए तय हुआ है. जबकि अभी छह दोषियों सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील गांधी, संजय कुमार अग्रवाल और त्रिपुरारी मोहन प्रसाद के अलावा पूर्व ट्रेजरी ऑफिसर सुबीर भट्टाचार्य की सजा पर सुनवाई होनी बाकी है. ऐसे में नहीं लगता कि आज शनिवार को भी फैसला आ जाए. यदि आज भी लालू की सजा की घोषणा नहीं हुई तो इसके लिए सोमवार तक का इंतजार करना पड़ेगा. इस बीच दूसरी ओर लालू की सजा को लेकर राजद चिंतित है. यदि लालू को ज्यादा वक्त जेल में रहना पड़ा तो पार्टी की रणनीति क्या होगी इसको लेकर बिहार की पूर्व सीएम और लालू की पत्नी राबड़ी यादव आज दोपहर में अपने आवास पर पार्टी की बैठक करने जा रहीं हैं. इस बैठक में परिवार के साथ कुछ और करीबी नेता भी शामिल हो सकते हैं. लालू के दोनों बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव भी बैठक में होंगे ही. साथ में लालू की सबसे बड़ी बेटी मीसा यादव भी पार्टी की बैठक चर्चा कर सकतीं हैं.
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कोरोना ने हमारे कई अपनों को हमसे छीना है. हमारे कई अजीज इस महामारी में हमेशा के लिए बिछड़ गए हैं. अब इस सूची में एक नाम और जुड़ गया है. मध्यप्रदेश में जन्मे और फिल्मी दुनिया में अलहदा शायरी से अपना सिक्का जमाने वाले ख्यात शायर इब्राहिम अश्क का निधन हो गया. वे कोरोना से पीडि़त थे और मुंबई में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. उनका जाना समकालीन ग़ज़ल को मालामल कर रहे एक नर्म मिजाज शायर का चला जाना है. वे हमेशा अपने प्रशंसकों से अपने कलाम के जरिए मिले हैं और आज जब वे नहीं हैं तो उनकी कमी का अहसास बताने के लिए हमें उनका ही लिखा याद आता हैः
न जाने कितनी ज़बानों से हम बयां होंगे.
पत्रकार, शायर, रंगकर्मी और फिल्म गीतकार. इब्राहिम अश्क के इतने परिचय हैं और हर परिचय कमाल का है. मध्य प्रदेश के मंदसौर में 20 जुलाई 1951 में उनका जन्म हुआ. प्रारंभिक शिक्षा बडनगर में हुई. बाद में, इंदौर से उच्च अध्ययन किया और वहीं पत्रकारिता में करियर शुरू किया. डेढ़ दशक लंबी पत्रकारिता के दौरान उन्होंने मशहूर पत्रिका सरिता, शमा सुषमा, इंदौर समाचार आदि के लिए काम किया. उस दौर के आम आदमी के संघर्ष की तरह करियर के लिए इब्राहिम अश्क के संघर्ष की अपनी ही एक कहानी है. मगर, जीवन के इस संघर्ष से अलग वे बतौर शायर अपनी खास पहचान बना रहे थे. ग़ज़लों का आरंभ अरबी साहित्य की काव्य विधा के रूप में हुआ.
स्त्री के सौंदर्य पर लिखी जाने वाली ग़ज़ल जब अरबी भाषा से उर्दू तक पहुंची, तो उसका चेहरा वही रहा मगर आत्मा बदल गई. अमीर ख़ुसरो ने जिस ग़ज़ल विधा को मकबूल किया था, उसे बाद के शायरों ने हिन्दुस्तानी प्रतीकों, बिंबों और अपने आसपास के अनुभवों से समृद्ध किया. इब्राहिम अश्क भी ऐसे ही शायर थे. जिन्होंने इश्क और दिल के अहसास को बयान करती ग़ज़लें लिखीं तो ईश्वर की सत्ता के आगे झुकते हुए हम्द भी लिखीं. डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रकाशित किताबों के खजाने में दोहें भी हैं और रूबाइयां भी. उनकी प्रकाशित किताबों में `इलहाम', `आगही', `कर्बला', `अलाव', `अन्दाज़े बयां और तकीदी शऊर', `रामजी का दुख', `बिजूका', `नया मंजरनामा', `आसमां अकेला', `मुहाफिजे मिल्लत', `अल्लामा इकबाल', `आसमाने-गजल', `सरमाया', `मुंबईनामा', `अलमास' प्रमुख हैं.
वे ऐसे शायर थे जो अपने बारे में कम बोलते थे मगर उनकी रचनाएं पाठकों और श्रोताओं के सिर चढ़ कर बोलती थी. एक मुलाकात में उन्होंने बहुत सहजता से इसबात को स्वीकार किया था कि आयोजनों में कई लोग उनसे वाकिफ नहीं होते हैं लेकिन रचना पाठ के बाद उनसे बात करने वालों की भीड़ लग जाती थी. लोग उन्हें नाम से खोजते हुए आते थे. यह उनकी रचनाओं का जादू था. उन्हें सार्वजनिक रूप से केवल रचनाएं सुनाते और उन पर बात करते हुए ही सुना गया है. उनका लेखन संसार इतना समृद्ध है कि जब कोई उन पर शोध शुरू करता तो उसकी पीएचडी पूरी होने तक लाइब्रेरी में इब्राहिम अश्क की किताबों और रचनाओं की संख्या बढ़ जाती. वे अदब के ऐसे पूत थे जिसकी सृजनात्मक उपस्थिति ने साहित्य को ऐसे ही समृद्ध किया है जैसा उन्होंने अपने एक दोहे में लिखा हैः
इब्राहीम 'अश्क' उन शायरों में शुमार किए जाते हैं जो अपने लिखे के कारण फिल्मी दुनिया में भी समान रूप से ख्यात हुए हैं. फिल्म गीतकार के रूप में इब्राहिम अश्क को पहली बार रितिक रोशन की पहली फिल्म `कहो न प्यार है के' गाने के कारण प्रसिद्धि मिली थी. "क्यों चलती है पवन, क्यों झूमे हैं गगन, क्यों मचलता है मन, न तुम जानो न हम" से पूरी दुनिया ने उन्हें बतौर फिल्म गीतकार जाना. इस फिल्म में गीत शामिल होने की भी कथा दिलचस्प है. यह कथा खुद इब्राहिम अश्क ने एक इंटरव्यू में बताई थी. उन्होंने बताया कि इस फिल्म के लिए पहले सावन कुमार टाक गाने लिख रहे थे. उनके कुछ गीतों से डिस्ट्रीब्यूटर संतुष्ट नहीं थे. तब निर्माता राकेश रोशन ने इब्राहिम इश्क से गाने लिखने को कहा. उन्होंने टाइटल सांग सहित अन्य गीत लिखे और क्या कमाल लिखा इसका गवाह फिल्म के गीतों को मिली ख्याति है.
इसके बाद इब्राहिम अश्क ने इसके बाद भी बहुत से गीत लिखे. राकेश रोशन ने 'कहो न प्यार है' के बाद उनसे 'कोई मिल गया' और 'कृष' फिल्म के गाने भी लिखवाए. 'दस कहानियां', 'वेलकम', 'आप मुझे अच्छे लगने लगे', 'कोई मेरे दिल से पूछे', 'ये तेरा घर ये मेरा घर', 'बहार आने तक', 'जीना मरना तेरे संग', 'दो पल', 'इन कस्टडी', 'तृष्णा', 'समझौता एक्सप्रेस' फिल्मों के गाने भी उन्होंने लिखे हैं. सुभाष घई की फिल्म 'ब्लैक एंड व्हाइट' में लिखे गए सूफियाना अंदाज के गानों से इब्राहिम अश्क को अलग ऊंचाई मिली. तमाम प्रायवेट अल्बम भी हैं जो हमें इब्राहिम अश्क से रचना संसार की ऊंचाई बताते हैं.
इब्राहिम अश्क के लिए शायरी हमेशा ऐसा इल्म रही जिसे खुदा अपने खास बंदों को ही अता करता है. यही कारण है कि ताउम्र शायरी के प्रति खासतौर पर ईमानदार रहे. कहा जा सकता है कि वे शायरी करते वक्त सजदे में रहने जितना पाक रहते थे. फिल्मों के लिए भी उन्होंने कभी फिल्मी हो कर नहीं लिखा बल्कि जमीन से जुड़े रह कर लिखा. और इस तरह उनके होने से पूरा साहित्य जगत खूब आबाद हुआ. उनके बारे में कहने के लिए कई पहलू हैं मगर उनकी रचनाओं को पढ़ा कर आप भी जानिए कि कौन शख्स हमारे बीच से चला गया है.
तो हमने इसको समझाया बहुत है.
तेरा अंदाज़ मनभाया बहुत है.
मगर दुनिया से टकराया बहुत है.
कि सर पे माँ का इस साया बहुत है.
पयम्बर ने तो फ़रमाया बहुत है.
तेरी बातों ने ललचाया बहुत है.
जहाँ में जो भी मुहब्बत को आम करता है.
सैकड़ों में एक दो भी ख़ुश-नवा मिलते नहीं.
चुप था तो कोई और था बोला तो कोई और.
ठहरा तो कोई और था गुज़रा तो कोई और.
अनजाने में वो और है जाना तो कोई और.
खोने पे कुछ और है पाया तो कोई और.
बैठा मैं अपने घर में अकेला ही रह गया.
इलाही इतना भी उस शख्स को हिज़ाब न दे.
ऐ मेरे दोस्त मेरे हाथ में क़िताब न दे.
कुछ और दे मेरे साक़ी मुझे शराब न दे.
तो ऐसी हूर का दुनिया में कोई ख़्वाब न दे.
वो 'अश्क' दे के ज़माने को को इंकिलाब न दे.
आबाद जो देखा घर मेरा, तो आग लगाई लोगों ने.
चंदा में भी नूर है, सूरज में भी नूर.
सब में जिसका नूर है वह कितना भरपूर. .
एक शख्श अगर तू है तो दुनिया हो जा.
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कोरोना ने हमारे कई अपनों को हमसे छीना है. हमारे कई अजीज इस महामारी में हमेशा के लिए बिछड़ गए हैं. अब इस सूची में एक नाम और जुड़ गया है. मध्यप्रदेश में जन्मे और फिल्मी दुनिया में अलहदा शायरी से अपना सिक्का जमाने वाले ख्यात शायर इब्राहिम अश्क का निधन हो गया. वे कोरोना से पीडि़त थे और मुंबई में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. उनका जाना समकालीन ग़ज़ल को मालामल कर रहे एक नर्म मिजाज शायर का चला जाना है. वे हमेशा अपने प्रशंसकों से अपने कलाम के जरिए मिले हैं और आज जब वे नहीं हैं तो उनकी कमी का अहसास बताने के लिए हमें उनका ही लिखा याद आता हैः न जाने कितनी ज़बानों से हम बयां होंगे. पत्रकार, शायर, रंगकर्मी और फिल्म गीतकार. इब्राहिम अश्क के इतने परिचय हैं और हर परिचय कमाल का है. मध्य प्रदेश के मंदसौर में बीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में उनका जन्म हुआ. प्रारंभिक शिक्षा बडनगर में हुई. बाद में, इंदौर से उच्च अध्ययन किया और वहीं पत्रकारिता में करियर शुरू किया. डेढ़ दशक लंबी पत्रकारिता के दौरान उन्होंने मशहूर पत्रिका सरिता, शमा सुषमा, इंदौर समाचार आदि के लिए काम किया. उस दौर के आम आदमी के संघर्ष की तरह करियर के लिए इब्राहिम अश्क के संघर्ष की अपनी ही एक कहानी है. मगर, जीवन के इस संघर्ष से अलग वे बतौर शायर अपनी खास पहचान बना रहे थे. ग़ज़लों का आरंभ अरबी साहित्य की काव्य विधा के रूप में हुआ. स्त्री के सौंदर्य पर लिखी जाने वाली ग़ज़ल जब अरबी भाषा से उर्दू तक पहुंची, तो उसका चेहरा वही रहा मगर आत्मा बदल गई. अमीर ख़ुसरो ने जिस ग़ज़ल विधा को मकबूल किया था, उसे बाद के शायरों ने हिन्दुस्तानी प्रतीकों, बिंबों और अपने आसपास के अनुभवों से समृद्ध किया. इब्राहिम अश्क भी ऐसे ही शायर थे. जिन्होंने इश्क और दिल के अहसास को बयान करती ग़ज़लें लिखीं तो ईश्वर की सत्ता के आगे झुकते हुए हम्द भी लिखीं. डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रकाशित किताबों के खजाने में दोहें भी हैं और रूबाइयां भी. उनकी प्रकाशित किताबों में `इलहाम', `आगही', `कर्बला', `अलाव', `अन्दाज़े बयां और तकीदी शऊर', `रामजी का दुख', `बिजूका', `नया मंजरनामा', `आसमां अकेला', `मुहाफिजे मिल्लत', `अल्लामा इकबाल', `आसमाने-गजल', `सरमाया', `मुंबईनामा', `अलमास' प्रमुख हैं. वे ऐसे शायर थे जो अपने बारे में कम बोलते थे मगर उनकी रचनाएं पाठकों और श्रोताओं के सिर चढ़ कर बोलती थी. एक मुलाकात में उन्होंने बहुत सहजता से इसबात को स्वीकार किया था कि आयोजनों में कई लोग उनसे वाकिफ नहीं होते हैं लेकिन रचना पाठ के बाद उनसे बात करने वालों की भीड़ लग जाती थी. लोग उन्हें नाम से खोजते हुए आते थे. यह उनकी रचनाओं का जादू था. उन्हें सार्वजनिक रूप से केवल रचनाएं सुनाते और उन पर बात करते हुए ही सुना गया है. उनका लेखन संसार इतना समृद्ध है कि जब कोई उन पर शोध शुरू करता तो उसकी पीएचडी पूरी होने तक लाइब्रेरी में इब्राहिम अश्क की किताबों और रचनाओं की संख्या बढ़ जाती. वे अदब के ऐसे पूत थे जिसकी सृजनात्मक उपस्थिति ने साहित्य को ऐसे ही समृद्ध किया है जैसा उन्होंने अपने एक दोहे में लिखा हैः इब्राहीम 'अश्क' उन शायरों में शुमार किए जाते हैं जो अपने लिखे के कारण फिल्मी दुनिया में भी समान रूप से ख्यात हुए हैं. फिल्म गीतकार के रूप में इब्राहिम अश्क को पहली बार रितिक रोशन की पहली फिल्म `कहो न प्यार है के' गाने के कारण प्रसिद्धि मिली थी. "क्यों चलती है पवन, क्यों झूमे हैं गगन, क्यों मचलता है मन, न तुम जानो न हम" से पूरी दुनिया ने उन्हें बतौर फिल्म गीतकार जाना. इस फिल्म में गीत शामिल होने की भी कथा दिलचस्प है. यह कथा खुद इब्राहिम अश्क ने एक इंटरव्यू में बताई थी. उन्होंने बताया कि इस फिल्म के लिए पहले सावन कुमार टाक गाने लिख रहे थे. उनके कुछ गीतों से डिस्ट्रीब्यूटर संतुष्ट नहीं थे. तब निर्माता राकेश रोशन ने इब्राहिम इश्क से गाने लिखने को कहा. उन्होंने टाइटल सांग सहित अन्य गीत लिखे और क्या कमाल लिखा इसका गवाह फिल्म के गीतों को मिली ख्याति है. इसके बाद इब्राहिम अश्क ने इसके बाद भी बहुत से गीत लिखे. राकेश रोशन ने 'कहो न प्यार है' के बाद उनसे 'कोई मिल गया' और 'कृष' फिल्म के गाने भी लिखवाए. 'दस कहानियां', 'वेलकम', 'आप मुझे अच्छे लगने लगे', 'कोई मेरे दिल से पूछे', 'ये तेरा घर ये मेरा घर', 'बहार आने तक', 'जीना मरना तेरे संग', 'दो पल', 'इन कस्टडी', 'तृष्णा', 'समझौता एक्सप्रेस' फिल्मों के गाने भी उन्होंने लिखे हैं. सुभाष घई की फिल्म 'ब्लैक एंड व्हाइट' में लिखे गए सूफियाना अंदाज के गानों से इब्राहिम अश्क को अलग ऊंचाई मिली. तमाम प्रायवेट अल्बम भी हैं जो हमें इब्राहिम अश्क से रचना संसार की ऊंचाई बताते हैं. इब्राहिम अश्क के लिए शायरी हमेशा ऐसा इल्म रही जिसे खुदा अपने खास बंदों को ही अता करता है. यही कारण है कि ताउम्र शायरी के प्रति खासतौर पर ईमानदार रहे. कहा जा सकता है कि वे शायरी करते वक्त सजदे में रहने जितना पाक रहते थे. फिल्मों के लिए भी उन्होंने कभी फिल्मी हो कर नहीं लिखा बल्कि जमीन से जुड़े रह कर लिखा. और इस तरह उनके होने से पूरा साहित्य जगत खूब आबाद हुआ. उनके बारे में कहने के लिए कई पहलू हैं मगर उनकी रचनाओं को पढ़ा कर आप भी जानिए कि कौन शख्स हमारे बीच से चला गया है. तो हमने इसको समझाया बहुत है. तेरा अंदाज़ मनभाया बहुत है. मगर दुनिया से टकराया बहुत है. कि सर पे माँ का इस साया बहुत है. पयम्बर ने तो फ़रमाया बहुत है. तेरी बातों ने ललचाया बहुत है. जहाँ में जो भी मुहब्बत को आम करता है. सैकड़ों में एक दो भी ख़ुश-नवा मिलते नहीं. चुप था तो कोई और था बोला तो कोई और. ठहरा तो कोई और था गुज़रा तो कोई और. अनजाने में वो और है जाना तो कोई और. खोने पे कुछ और है पाया तो कोई और. बैठा मैं अपने घर में अकेला ही रह गया. इलाही इतना भी उस शख्स को हिज़ाब न दे. ऐ मेरे दोस्त मेरे हाथ में क़िताब न दे. कुछ और दे मेरे साक़ी मुझे शराब न दे. तो ऐसी हूर का दुनिया में कोई ख़्वाब न दे. वो 'अश्क' दे के ज़माने को को इंकिलाब न दे. आबाद जो देखा घर मेरा, तो आग लगाई लोगों ने. चंदा में भी नूर है, सूरज में भी नूर. सब में जिसका नूर है वह कितना भरपूर. . एक शख्श अगर तू है तो दुनिया हो जा.
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एपिसोर्ड 12 ( ट्यूमर )
श्रेया : क्या हुआ , आप ऐसे क्यूँ बैठे है जैसे कोई मार गया हो ?
श्रेया : डॉक्टर क्या हुआ है मुझे ? सब ठीक है न ?
डॉक्टर : मिस्टर जिंदल , मुझे आपसे कुछ बात करनी है । क्या आप यहाँ आयेंगे ?
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एपिसोर्ड बारह श्रेया : क्या हुआ , आप ऐसे क्यूँ बैठे है जैसे कोई मार गया हो ? श्रेया : डॉक्टर क्या हुआ है मुझे ? सब ठीक है न ? डॉक्टर : मिस्टर जिंदल , मुझे आपसे कुछ बात करनी है । क्या आप यहाँ आयेंगे ?
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वासनाओं और राग, द्वेष तथा मोहके कुसंस्कारोंको नष्ट करने का एक मात्र मुख्य साधन है - - 'ध्यान' - अर्थात् चित्तकी वृत्तियोंका निरोध करके उसे एकाग्र करना ।
इस प्रकार भगवान् महावीरने बन्ध ( दुःख ), बन्धके कारण ( आस्रव ), मोक्ष और मोक्षके कारण ( संवर और निर्जरा ) इन पाँच तत्त्वोंके साथ-ही-साथ उस आत्मतत्त्वके ज्ञानकी खास आवश्यकता बताई जिसे बन्धन और मोक्ष होता
। इसी तरह उस अजीव तत्त्वके ज्ञानकी भी आवश्यकता है जिससे बँधकर यह जीव अनादि कालसे स्वरूपच्युत हो रहा है ।
मोक्षके साधन :
वैदिक संस्कृतिमें विचार या तत्त्वज्ञानको मोक्षका साधन माना है जब कि श्रमणसंस्कृति चारित्र अर्थात् आचारको मोक्षका साधन स्वीकार करती है । यद्यपि वैदिक संस्कृतिने तत्त्वज्ञानके साथ-ही-साथ वैराग्य और संन्यासको भी मुक्तिका अङ्ग माना है, पर वैराग्यका उपयोग तत्त्वज्ञानको पुष्टिमें किया है, अर्थात् वैराग्यसे तत्त्वज्ञान पुष्ट होता है और फिर उससे मुक्ति मिलती है। पर जैनतीर्थंकरोंने सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः ।" ( त० सू० १११ ) सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक् चारित्रको मोक्षका मार्ग बताया है । ऐसा सम्यग्ज्ञान जो सम्यक्चारित्रका पोषक या वर्धक नहीं है, मोक्षका साधन नहीं होता । जो ज्ञान जीवनमें उतरकर आत्मशोधन करे, वही मोक्षका साधन है । अन्ततः सच्ची श्रद्धा और ज्ञानका फल चौरित्र-शुद्धि ही है । ज्ञान थोड़ा भी हो, पर यदि वह जीवनशुद्धि में प्रेरणा देता है तो सार्थक है । अहिंसा, संयम और तप साधनाएँ हैं, मात्र ज्ञानरूप नहीं हैं । कोरा ज्ञान भार ही है यदि वह आत्मशोधन नहीं करता । तत्त्वोंकी दृढ़ श्रद्धा अर्थात् सम्यग्दर्शन मोक्षमहलकी पहिली सीढ़ी है । भय, आशा, स्नेह और लोभसे जो श्रद्धा चल और मलिन हो जाती है वह श्रद्धा अन्धविश्वासकी सीमामें हो है । जीवन्त श्रद्धा वह है जिसमें प्राणों तककी बाजी लगाकर तत्त्वको कायम रखा जाता है। उस परम अवगाढ़ दृढ़ निष्ठाको दुनियाका कोई भी प्रलोभन विचलित नहीं कर सकता, उसे हिला नहीं सकता। इस ज्योतिके जगते ही साधकको अपने लक्ष्यका स्पष्ट दर्शन होने लगता है। उसे प्रतिक्षण भेदविज्ञान और स्वानुभूति होती है । वह समझता है कि धर्म आत्मस्वरूपकी प्राप्ति में है, न कि शुष्क बाह्य क्रियाकाण्डमें । इसलिये उसकी परिणति एक विलक्षण प्रकारकी हो जाती है । आत्मकल्याण, समाजहित, देशनिर्माण और मानवताके उद्धारका स्पष्ट मार्ग उसकी आँखोंमें झूलता है और वह उसके लिये प्राणों की बाजी तक लगा देता है । स्वरूपज्ञान और स्वाधिकारकी मर्यादाका ज्ञान सम्यग्ज्ञान है । और
अपने अधिकार और स्वरूपकी सुरक्षाके अनुकूल जीवनव्यवहार बनाना सम्यक् - चारित्र है । तात्पर्य यह कि आत्माकी वह परिणति सम्यक्चारित्र है जिसमें केवल अपने गुण और पर्यायों तक ही अपना अधिकार माना जाता है और जीवनव्यवहारमें तदनुकूल ही प्रवृत्ति होती है, दूसरेके अधिकारोंको हड़पनेकी भावना भी नहीं होती । यह व्यक्तिस्वातन्त्र्यकी स्वावलम्बी चर्या ही परम सम्यकुचारित्र है । अतः श्रमणसंस्कृतिने जीवनसाधना अहिंसाके मौलिक समत्व पर प्रतिष्ठित की है, और प्राणिमात्रके अभय और जीवित रहनेका सतत विचार किया है । निष्कर्ष यह है कि सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञानसे परिपुष्ट सम्यक्चारित्र ही मोक्षका साक्षात् साधन होता है ।
८. प्रमाणमीमांसा
ज्ञान और दर्शन :
जड़ पदार्थोंसे आत्माको भिन्न करनेवाला आत्माका गुण और स्वरूप चैतन्य • है, यह बात सिद्ध है। यही चैतन्य अवस्थाविशेषमें निराकार रहकर 'दर्शन' कहलाता है और साकार होकर 'ज्ञान । आत्माके अनन्त गुणोंमें यह चैतन्यात्मक उपयोग ही ऐसा असाधारण गुण है, जिससे आत्मा लक्षित होता है । जब यह उपयोग आत्मेतर पदार्थों को जानने के समय ज्ञेयाकार या साकार होता है; तब उसकी ज्ञान-पर्याय विकसित होती है और जब वह बाह्य पदार्थों में उपयुक्त न होकर मात्र चैतन्यरूप रहता है, तब निराकार अवस्था में दर्शन कहलाता है । यद्यपि दार्शनिक कालमें 'दर्शन' की व्याख्या बदली है और वह चैतन्याकारकी परिधिको लाँघकर पदार्थोंके सामान्यावलोकन तक पहुँची । परन्तु सिद्धान्त-ग्रन्थों में दर्शनका वर्णन अन्तरंगार्थविषयक और निराकार रूपसे मिलता है । दर्शनका काल विषय और विषयी ( इन्द्रियाँ ) के सन्निपात के पहले है । जब आत्मा अमुक पदार्थविषयक ज्ञानोपयोगसे हटकर अन्यपदार्थविषयक ज्ञानमें प्रवृत्त होता है तब बीचकी वह चैतन्याकार या निराकार अवस्था दर्शन कहलाती है, जिसमें ज्ञेयका प्रतिभास नहीं होता । दार्शनिक ग्रन्थों में दर्शनका काल 3 विषय और विषयोके सन्निपातके अनन्तर है । यही कारण है कि पदार्थके सामान्यावलोकनके रूपमें दर्शनकी प्रसिद्धि हुई । बौद्धका निर्विकल्पक ज्ञान और नैयायिकादिसम्मत निर्विकल्पप्रत्यक्ष यही है ।
१. "ततः सामान्यविशेषात्मकबाह्यार्थग्रहणं ज्ञानं तदात्मकस्वरूपग्रहणं दर्शनमिति सिद्धम् ।... भावानां बाह्यार्थानामाकारं प्रतिकर्मव्यवस्थामकृत्वा यद् ग्रहणं तद् दर्शनम् ( पृ० १४७ ) प्रकाशवृत्तिर्वा दर्शनम् । अस्य गमनिका - प्रकाशो ज्ञानम्, तदर्थमात्मनो वृत्तिः प्रकाशवृत्तिः तद्दर्शनम्, विषयविषयिसम्पातात् पूर्वावस्था इत्यर्थः । ( पृ० १४९ ) नैते दोषाः दर्शनमाडौकन्ते, तस्य अन्तरङ्गार्थविषयत्वात् ।" -धवला टीका, सत्प्ररू० प्रथम पुस्तक । २. " उत्तरज्ञानोत्पत्तिनिमित्तं यत्प्रयत्नं तद्रूपं यत् स्वस्यात्मनः परिच्छेद नमवलोकनं तदर्शनं भण्यते । तदनन्तरं यद्बहिर्विषयविकल्परूपेण पदार्थग्रहणं तज्ज्ञानमिति वार्तिकम् । यथा कोऽपि पुरुषो घटविषयविकल्पं कुर्वन्नास्ते, पश्चात् पटपरिज्ञानार्थं चित्ते जाते सति घटविकल्पाद् व्यावृत्त्य यत् स्वरूपे प्रथममवलोकनं परिच्छेदनं करोति तदर्शनमिति । तदनन्तरं पटोऽयमिति निश्चयं यद् बहिर्विषयरूपेण पदार्थग्रहणविकल्पं करोति तज्ज्ञानं भण्यते । "
- बृहद्रव्यसं० टी० गा० ४३ ।
३. "विषयविषयिसन्निपाते सति दर्शनं भवति ।" - सर्वार्थसि० १११५ ।
आधार :
ज्ञान, प्रमाण और प्रमाणाभास इनकी व्यवस्था बाह्य अर्थ के प्रतिभास करने, और प्रतिभासके अनुसार बाह्य पदार्थके प्राप्त होने और न होने पर निर्भर करती । जिस ज्ञानका प्रतिभासित पदार्थ ठीक उसी रूपमें मिल जाय, जिस रूप में कि उसका बोध हुआ है तो वह ज्ञान प्रमाण कहा जाता है अन्य प्रमाणाभास । यहाँ मुख्य प्रश्न यह है कि प्रमाणाभासोंमें जो 'दर्शन' गिनाया गया है वह क्या यही निराकार चैतन्यरूप दर्शन है ? जिस चैतन्यमें पदार्थका स्पर्श ही नहीं हुआ उस चैतन्यको ज्ञानकी विशेषकक्षा -प्रमाण और प्रमाणाभासमें दाखिल करना किसी तरह उचित नहीं है । ये व्यवहार तो ज्ञानमें होते हैं । दर्शन तो प्रमाणु और प्रमाणाभाससे परेकी वस्तु है । विषय और विषयोके सन्निपात के बाद जो सामान्यावलोकनरूप दर्शन है वह तो बौद्ध और नैयायिकोंके निर्विकल्प ज्ञानकी तरह वस्तुस्पर्शी होनेसे प्रमाण और प्रमाणाभासकी विवेचनाके क्षेत्रमें आ जाता है । उस सामान्यवस्तुग्राही दर्शनको प्रमाणाभास इसलिए कहा है कि वह किसी वस्तुका व्यवसाय अर्थात् निर्णय नहीं करता । वह सामान्य अंशका भी मात्र आलोचन ही करता है; निश्चय नहीं । यही कारण है कि बौद्ध, नैयायिकादि-सम्मत निर्विकल्पको प्रमाणसे बहिर्भूत अर्थात् प्रमाणाभास माना गया है ।
२ आगमिक क्षेत्र में ज्ञानको सम्यक्त्व और मिथ्यात्व माननेके आधार जुदे हैं । वहाँ तो जो ज्ञान मिथ्यादर्शनका सहचारी है वह मिथ्या और जो सम्यग्दर्शनका सहभावी है वह सम्यक् कहलाता है। यानी मिथ्यादर्शनवालेका व्यवहारसत्य प्रमाणज्ञान भी मिथ्या है और सम्यग्दर्शनवालेका व्यवहारमें असत्य अप्रमाण ज्ञान भी सम्यक् है । तात्पर्य यह कि सम्यग्दृष्टिका प्रत्येक ज्ञान मोक्षमार्गोपयोगी होनेके कारण सम्यक् है और मिथ्यादृष्टिका प्रत्येक ज्ञान संसारमें भटकानेवाला होने से मिथ्या है । परन्तु दार्शनिक क्षेत्रमें ज्ञानके मोक्षोपयोगी या संसारवर्धक होनेके आधारसे प्रमाणता- अप्रमाणताका विचार प्रस्तुत नहीं है। यहाँ तो प्रतिभासित विषयका अव्यभिचारी होना ही प्रमाणताकी कुञ्जी है । जिस ज्ञानका प्रतिभासित पदार्थ जैसा-का-तैसा मिल जाता है वह अविसंवादो ज्ञान सत्य है और प्रमाण है; उ शेष अप्रमाण हैं, भले ही उनका उपयोग संसारमें हो या मोक्षमें ।
१. देखो, परीक्षामुख ६।१ ।
२. "मतिश्रुतावधयो विपर्ययश्च" - त० सू० १ । ३१ ।
३. "यथा यत्राविसंवादस्तथा तत्र प्रमाणता ।" सिद्धिवि० १।२० ।
आगमोंमें जो पाँच ज्ञानोंका वर्णन आता है वह ज्ञातावरणकर्मके क्षयोपशमसे या क्षयसे प्रकट होनेवाली ज्ञानको अवस्थाओंका निरूपण है। आत्माके 'ज्ञान' गुणको एक ज्ञानावरणकर्म रोकता है और इसीके क्षयोपशमके तारतम्यसे मति, श्रुत, अवधि और मनःपर्यय ये चार ज्ञान प्रकट होते हैं और सम्पूर्ण ज्ञानावरणका क्षय हो जाने पर निरावरण केवलज्ञानका आविर्भाव होता है। इसी तरह मतिज्ञानावरण कर्मके क्षयोपशमसे होनेवाली मति, स्मृति, संज्ञा, चिन्ता और अभिनिबोध आदि मतिज्ञानकी अवस्थाओंका अनेक रूपसे विवेचन मिलता है । जो मतिP ज्ञानके विविध आकार और प्रकारोंका निर्देश मात्र है । वह निर्देश भी तत्त्वाधिगम के उपयोगोंके रूपमें है । जिन तत्त्वोंका श्रद्धान और ज्ञान करके मोक्षमार्ग में जुटा जा सकता है उन तत्त्वोंका अधिगम ज्ञानसे हो तो संभव है । यही ज्ञान प्रमाण और नयके रूपसे अधिगमके उपायोंको दो रूपमें विभाजित कर देता. तत्त्वाधिगमके दो. मूल भेद होते हैं - प्रमाण और नय। इन्हीं पाँच ज्ञानोंका और परोक्ष इन दो प्रमाणोंके रूपमें विभाजन भी आगमिक परम्परामें पहलेसे ही रहा है; किन्तु यहाँ प्रत्यक्षता और परोक्षताका आधार बिलकुल भिन्न है । जो ज्ञान स्वावलम्बी है - इन्द्रिय और मनकी सहायताकी भी अपेक्षा नहीं करता, वह आत्ममात्रसापेक्ष ज्ञान प्रत्यक्ष है और इन्द्रिय तथा मनसे उत्पन्न होनेवाला ज्ञान परोक्ष । इस तरह आगमिक क्षेत्रके सम्मक-मिथ्या विभाग और प्रत्यक्ष परोक्ष विभागके आधार दार्शनिक क्षेत्र से विलकुल ही जुदे प्रकार के हैं । जैन दार्शनिकोंके सामने उपर्युक्त आगमिक परम्पराको दार्शनिक ढाँचेमें ढालनेका महान् कार्यक्रम था, जिसे सुव्यवस्थित रूपमें निभाने का प्रयत्न किया गया है ।
प्रमाणका स्वरूप :
प्रमाणका सामान्यतया व्युत्पत्तिलभ्य अर्थ है - "प्रमीयते येन तत्प्रमाणम्" अर्थात् जिसके द्वारा पदार्थोंका ज्ञान हो उस द्वारका नाम प्रमाण है । दूसरे शब्दों में जो प्रमाणका साधकतम करण हो वह प्रमाण है । इस सामान्यनिर्वचनमें कोई विवाद न होने पर भी उस द्वारमें विवाद हैं । नैयायिकादि प्रमामें साधकतम इन्द्रिय और सन्निकर्षको मानते हैं जब कि जैन और बौद्ध ज्ञानको ही प्रमानें साधकतम कहते हैं । जैनदर्शनकी दृष्टि है कि 'जानना या प्रमारूप क्रिया चूँकि चेतन है, अतः उसमें साधकतम उसीका गुण - ज्ञान ही हो सकता है, अचेतन सन्निकर्षादि नहीं, क्योंकि सन्निकर्षादिके रहने पर भी ज्ञान उत्पन्न नहीं होता और सन्त्रि -
१. त० सू० १ । १३ । नन्दी प्र० मति० गा० ८० ।
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वासनाओं और राग, द्वेष तथा मोहके कुसंस्कारोंको नष्ट करने का एक मात्र मुख्य साधन है - - 'ध्यान' - अर्थात् चित्तकी वृत्तियोंका निरोध करके उसे एकाग्र करना । इस प्रकार भगवान् महावीरने बन्ध , बन्धके कारण , मोक्ष और मोक्षके कारण इन पाँच तत्त्वोंके साथ-ही-साथ उस आत्मतत्त्वके ज्ञानकी खास आवश्यकता बताई जिसे बन्धन और मोक्ष होता । इसी तरह उस अजीव तत्त्वके ज्ञानकी भी आवश्यकता है जिससे बँधकर यह जीव अनादि कालसे स्वरूपच्युत हो रहा है । मोक्षके साधन : वैदिक संस्कृतिमें विचार या तत्त्वज्ञानको मोक्षका साधन माना है जब कि श्रमणसंस्कृति चारित्र अर्थात् आचारको मोक्षका साधन स्वीकार करती है । यद्यपि वैदिक संस्कृतिने तत्त्वज्ञानके साथ-ही-साथ वैराग्य और संन्यासको भी मुक्तिका अङ्ग माना है, पर वैराग्यका उपयोग तत्त्वज्ञानको पुष्टिमें किया है, अर्थात् वैराग्यसे तत्त्वज्ञान पुष्ट होता है और फिर उससे मुक्ति मिलती है। पर जैनतीर्थंकरोंने सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः ।" सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक् चारित्रको मोक्षका मार्ग बताया है । ऐसा सम्यग्ज्ञान जो सम्यक्चारित्रका पोषक या वर्धक नहीं है, मोक्षका साधन नहीं होता । जो ज्ञान जीवनमें उतरकर आत्मशोधन करे, वही मोक्षका साधन है । अन्ततः सच्ची श्रद्धा और ज्ञानका फल चौरित्र-शुद्धि ही है । ज्ञान थोड़ा भी हो, पर यदि वह जीवनशुद्धि में प्रेरणा देता है तो सार्थक है । अहिंसा, संयम और तप साधनाएँ हैं, मात्र ज्ञानरूप नहीं हैं । कोरा ज्ञान भार ही है यदि वह आत्मशोधन नहीं करता । तत्त्वोंकी दृढ़ श्रद्धा अर्थात् सम्यग्दर्शन मोक्षमहलकी पहिली सीढ़ी है । भय, आशा, स्नेह और लोभसे जो श्रद्धा चल और मलिन हो जाती है वह श्रद्धा अन्धविश्वासकी सीमामें हो है । जीवन्त श्रद्धा वह है जिसमें प्राणों तककी बाजी लगाकर तत्त्वको कायम रखा जाता है। उस परम अवगाढ़ दृढ़ निष्ठाको दुनियाका कोई भी प्रलोभन विचलित नहीं कर सकता, उसे हिला नहीं सकता। इस ज्योतिके जगते ही साधकको अपने लक्ष्यका स्पष्ट दर्शन होने लगता है। उसे प्रतिक्षण भेदविज्ञान और स्वानुभूति होती है । वह समझता है कि धर्म आत्मस्वरूपकी प्राप्ति में है, न कि शुष्क बाह्य क्रियाकाण्डमें । इसलिये उसकी परिणति एक विलक्षण प्रकारकी हो जाती है । आत्मकल्याण, समाजहित, देशनिर्माण और मानवताके उद्धारका स्पष्ट मार्ग उसकी आँखोंमें झूलता है और वह उसके लिये प्राणों की बाजी तक लगा देता है । स्वरूपज्ञान और स्वाधिकारकी मर्यादाका ज्ञान सम्यग्ज्ञान है । और अपने अधिकार और स्वरूपकी सुरक्षाके अनुकूल जीवनव्यवहार बनाना सम्यक् - चारित्र है । तात्पर्य यह कि आत्माकी वह परिणति सम्यक्चारित्र है जिसमें केवल अपने गुण और पर्यायों तक ही अपना अधिकार माना जाता है और जीवनव्यवहारमें तदनुकूल ही प्रवृत्ति होती है, दूसरेके अधिकारोंको हड़पनेकी भावना भी नहीं होती । यह व्यक्तिस्वातन्त्र्यकी स्वावलम्बी चर्या ही परम सम्यकुचारित्र है । अतः श्रमणसंस्कृतिने जीवनसाधना अहिंसाके मौलिक समत्व पर प्रतिष्ठित की है, और प्राणिमात्रके अभय और जीवित रहनेका सतत विचार किया है । निष्कर्ष यह है कि सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञानसे परिपुष्ट सम्यक्चारित्र ही मोक्षका साक्षात् साधन होता है । आठ. प्रमाणमीमांसा ज्ञान और दर्शन : जड़ पदार्थोंसे आत्माको भिन्न करनेवाला आत्माका गुण और स्वरूप चैतन्य • है, यह बात सिद्ध है। यही चैतन्य अवस्थाविशेषमें निराकार रहकर 'दर्शन' कहलाता है और साकार होकर 'ज्ञान । आत्माके अनन्त गुणोंमें यह चैतन्यात्मक उपयोग ही ऐसा असाधारण गुण है, जिससे आत्मा लक्षित होता है । जब यह उपयोग आत्मेतर पदार्थों को जानने के समय ज्ञेयाकार या साकार होता है; तब उसकी ज्ञान-पर्याय विकसित होती है और जब वह बाह्य पदार्थों में उपयुक्त न होकर मात्र चैतन्यरूप रहता है, तब निराकार अवस्था में दर्शन कहलाता है । यद्यपि दार्शनिक कालमें 'दर्शन' की व्याख्या बदली है और वह चैतन्याकारकी परिधिको लाँघकर पदार्थोंके सामान्यावलोकन तक पहुँची । परन्तु सिद्धान्त-ग्रन्थों में दर्शनका वर्णन अन्तरंगार्थविषयक और निराकार रूपसे मिलता है । दर्शनका काल विषय और विषयी के सन्निपात के पहले है । जब आत्मा अमुक पदार्थविषयक ज्ञानोपयोगसे हटकर अन्यपदार्थविषयक ज्ञानमें प्रवृत्त होता है तब बीचकी वह चैतन्याकार या निराकार अवस्था दर्शन कहलाती है, जिसमें ज्ञेयका प्रतिभास नहीं होता । दार्शनिक ग्रन्थों में दर्शनका काल तीन विषय और विषयोके सन्निपातके अनन्तर है । यही कारण है कि पदार्थके सामान्यावलोकनके रूपमें दर्शनकी प्रसिद्धि हुई । बौद्धका निर्विकल्पक ज्ञान और नैयायिकादिसम्मत निर्विकल्पप्रत्यक्ष यही है । एक. "ततः सामान्यविशेषात्मकबाह्यार्थग्रहणं ज्ञानं तदात्मकस्वरूपग्रहणं दर्शनमिति सिद्धम् ।... भावानां बाह्यार्थानामाकारं प्रतिकर्मव्यवस्थामकृत्वा यद् ग्रहणं तद् दर्शनम् प्रकाशवृत्तिर्वा दर्शनम् । अस्य गमनिका - प्रकाशो ज्ञानम्, तदर्थमात्मनो वृत्तिः प्रकाशवृत्तिः तद्दर्शनम्, विषयविषयिसम्पातात् पूर्वावस्था इत्यर्थः । नैते दोषाः दर्शनमाडौकन्ते, तस्य अन्तरङ्गार्थविषयत्वात् ।" -धवला टीका, सत्प्ररूशून्य प्रथम पुस्तक । दो. " उत्तरज्ञानोत्पत्तिनिमित्तं यत्प्रयत्नं तद्रूपं यत् स्वस्यात्मनः परिच्छेद नमवलोकनं तदर्शनं भण्यते । तदनन्तरं यद्बहिर्विषयविकल्परूपेण पदार्थग्रहणं तज्ज्ञानमिति वार्तिकम् । यथा कोऽपि पुरुषो घटविषयविकल्पं कुर्वन्नास्ते, पश्चात् पटपरिज्ञानार्थं चित्ते जाते सति घटविकल्पाद् व्यावृत्त्य यत् स्वरूपे प्रथममवलोकनं परिच्छेदनं करोति तदर्शनमिति । तदनन्तरं पटोऽयमिति निश्चयं यद् बहिर्विषयरूपेण पदार्थग्रहणविकल्पं करोति तज्ज्ञानं भण्यते । " - बृहद्रव्यसंशून्य टीशून्य गाशून्य तैंतालीस । तीन. "विषयविषयिसन्निपाते सति दर्शनं भवति ।" - सर्वार्थसिशून्य एक हज़ार एक सौ पंद्रह । आधार : ज्ञान, प्रमाण और प्रमाणाभास इनकी व्यवस्था बाह्य अर्थ के प्रतिभास करने, और प्रतिभासके अनुसार बाह्य पदार्थके प्राप्त होने और न होने पर निर्भर करती । जिस ज्ञानका प्रतिभासित पदार्थ ठीक उसी रूपमें मिल जाय, जिस रूप में कि उसका बोध हुआ है तो वह ज्ञान प्रमाण कहा जाता है अन्य प्रमाणाभास । यहाँ मुख्य प्रश्न यह है कि प्रमाणाभासोंमें जो 'दर्शन' गिनाया गया है वह क्या यही निराकार चैतन्यरूप दर्शन है ? जिस चैतन्यमें पदार्थका स्पर्श ही नहीं हुआ उस चैतन्यको ज्ञानकी विशेषकक्षा -प्रमाण और प्रमाणाभासमें दाखिल करना किसी तरह उचित नहीं है । ये व्यवहार तो ज्ञानमें होते हैं । दर्शन तो प्रमाणु और प्रमाणाभाससे परेकी वस्तु है । विषय और विषयोके सन्निपात के बाद जो सामान्यावलोकनरूप दर्शन है वह तो बौद्ध और नैयायिकोंके निर्विकल्प ज्ञानकी तरह वस्तुस्पर्शी होनेसे प्रमाण और प्रमाणाभासकी विवेचनाके क्षेत्रमें आ जाता है । उस सामान्यवस्तुग्राही दर्शनको प्रमाणाभास इसलिए कहा है कि वह किसी वस्तुका व्यवसाय अर्थात् निर्णय नहीं करता । वह सामान्य अंशका भी मात्र आलोचन ही करता है; निश्चय नहीं । यही कारण है कि बौद्ध, नैयायिकादि-सम्मत निर्विकल्पको प्रमाणसे बहिर्भूत अर्थात् प्रमाणाभास माना गया है । दो आगमिक क्षेत्र में ज्ञानको सम्यक्त्व और मिथ्यात्व माननेके आधार जुदे हैं । वहाँ तो जो ज्ञान मिथ्यादर्शनका सहचारी है वह मिथ्या और जो सम्यग्दर्शनका सहभावी है वह सम्यक् कहलाता है। यानी मिथ्यादर्शनवालेका व्यवहारसत्य प्रमाणज्ञान भी मिथ्या है और सम्यग्दर्शनवालेका व्यवहारमें असत्य अप्रमाण ज्ञान भी सम्यक् है । तात्पर्य यह कि सम्यग्दृष्टिका प्रत्येक ज्ञान मोक्षमार्गोपयोगी होनेके कारण सम्यक् है और मिथ्यादृष्टिका प्रत्येक ज्ञान संसारमें भटकानेवाला होने से मिथ्या है । परन्तु दार्शनिक क्षेत्रमें ज्ञानके मोक्षोपयोगी या संसारवर्धक होनेके आधारसे प्रमाणता- अप्रमाणताका विचार प्रस्तुत नहीं है। यहाँ तो प्रतिभासित विषयका अव्यभिचारी होना ही प्रमाणताकी कुञ्जी है । जिस ज्ञानका प्रतिभासित पदार्थ जैसा-का-तैसा मिल जाता है वह अविसंवादो ज्ञान सत्य है और प्रमाण है; उ शेष अप्रमाण हैं, भले ही उनका उपयोग संसारमें हो या मोक्षमें । एक. देखो, परीक्षामुख छः।एक । दो. "मतिश्रुतावधयो विपर्ययश्च" - तशून्य सूशून्य एक । इकतीस । तीन. "यथा यत्राविसंवादस्तथा तत्र प्रमाणता ।" सिद्धिविशून्य एक।बीस । आगमोंमें जो पाँच ज्ञानोंका वर्णन आता है वह ज्ञातावरणकर्मके क्षयोपशमसे या क्षयसे प्रकट होनेवाली ज्ञानको अवस्थाओंका निरूपण है। आत्माके 'ज्ञान' गुणको एक ज्ञानावरणकर्म रोकता है और इसीके क्षयोपशमके तारतम्यसे मति, श्रुत, अवधि और मनःपर्यय ये चार ज्ञान प्रकट होते हैं और सम्पूर्ण ज्ञानावरणका क्षय हो जाने पर निरावरण केवलज्ञानका आविर्भाव होता है। इसी तरह मतिज्ञानावरण कर्मके क्षयोपशमसे होनेवाली मति, स्मृति, संज्ञा, चिन्ता और अभिनिबोध आदि मतिज्ञानकी अवस्थाओंका अनेक रूपसे विवेचन मिलता है । जो मतिP ज्ञानके विविध आकार और प्रकारोंका निर्देश मात्र है । वह निर्देश भी तत्त्वाधिगम के उपयोगोंके रूपमें है । जिन तत्त्वोंका श्रद्धान और ज्ञान करके मोक्षमार्ग में जुटा जा सकता है उन तत्त्वोंका अधिगम ज्ञानसे हो तो संभव है । यही ज्ञान प्रमाण और नयके रूपसे अधिगमके उपायोंको दो रूपमें विभाजित कर देता. तत्त्वाधिगमके दो. मूल भेद होते हैं - प्रमाण और नय। इन्हीं पाँच ज्ञानोंका और परोक्ष इन दो प्रमाणोंके रूपमें विभाजन भी आगमिक परम्परामें पहलेसे ही रहा है; किन्तु यहाँ प्रत्यक्षता और परोक्षताका आधार बिलकुल भिन्न है । जो ज्ञान स्वावलम्बी है - इन्द्रिय और मनकी सहायताकी भी अपेक्षा नहीं करता, वह आत्ममात्रसापेक्ष ज्ञान प्रत्यक्ष है और इन्द्रिय तथा मनसे उत्पन्न होनेवाला ज्ञान परोक्ष । इस तरह आगमिक क्षेत्रके सम्मक-मिथ्या विभाग और प्रत्यक्ष परोक्ष विभागके आधार दार्शनिक क्षेत्र से विलकुल ही जुदे प्रकार के हैं । जैन दार्शनिकोंके सामने उपर्युक्त आगमिक परम्पराको दार्शनिक ढाँचेमें ढालनेका महान् कार्यक्रम था, जिसे सुव्यवस्थित रूपमें निभाने का प्रयत्न किया गया है । प्रमाणका स्वरूप : प्रमाणका सामान्यतया व्युत्पत्तिलभ्य अर्थ है - "प्रमीयते येन तत्प्रमाणम्" अर्थात् जिसके द्वारा पदार्थोंका ज्ञान हो उस द्वारका नाम प्रमाण है । दूसरे शब्दों में जो प्रमाणका साधकतम करण हो वह प्रमाण है । इस सामान्यनिर्वचनमें कोई विवाद न होने पर भी उस द्वारमें विवाद हैं । नैयायिकादि प्रमामें साधकतम इन्द्रिय और सन्निकर्षको मानते हैं जब कि जैन और बौद्ध ज्ञानको ही प्रमानें साधकतम कहते हैं । जैनदर्शनकी दृष्टि है कि 'जानना या प्रमारूप क्रिया चूँकि चेतन है, अतः उसमें साधकतम उसीका गुण - ज्ञान ही हो सकता है, अचेतन सन्निकर्षादि नहीं, क्योंकि सन्निकर्षादिके रहने पर भी ज्ञान उत्पन्न नहीं होता और सन्त्रि - एक. तशून्य सूशून्य एक । तेरह । नन्दी प्रशून्य मतिशून्य गाशून्य अस्सी ।
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शिमला, 7 अप्रैल (निस)
हिल्स क्वीन शिमला भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के स्वागत के लिए सजने लगी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर में भाजपा के मिशन रिपीट को कामयाब बनाने के बाद नड्डा 3 दिवसीय प्रवास पर हिमाचल आ रहे हैं। 4 राज्यों में भाजपा सरकार के गठन के बाद हिमाचल आ रहे जेपी नड्डा का 9 अप्रैल को शिमला में रोड शो व जनसभा होगी। 10 अप्रैल को नड्डा शिमला से बिलासपुर जाएंगे। बिलासपुर पहुंचने से पहले टुटू, दाड़लाघाट व नम्होल में उनका स्वागत होगा। नड्डा अर्की विधान सभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र में भी जाएंगे। 11 अप्रैल को दोपहर बाद नड्डा दिल्ली लौट जाएंगे।
जेपी नड्डा का जन्म बेशक बिहार के पटना में हुआ हो, मगर भाजपा की सक्रिय राजनीति में उन्होंने हिमाचल से कदम रखा। जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आने वाले जेपी नड्डा पटना विश्व विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। वह प्रदेश विश्व विद्यालय छात्र संघ के एबीवीपी के पहले अध्यक्ष रहे। छात्र राजनीति के बाद नड्डा ने जनहित के मुद्दों को लेकर बिलासपुर में आंदोलन किया। कंदरौर पुल में एक स्कूल खोलने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन से वह सुर्खियों में आए। जेपी नड्डा 1993 में पहली मर्तबा प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद वह 1998 व 2007 में फिर से विधान सभा चुनाव जीते तथा प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में काबिना मंत्री रहे। इस बीच 2012 में जेपी नड्डा ने केंद्र की राजनीति में जाने का मन बनाया। वह प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुने गए तथा 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। आयुष्मान भारत जैसी अहम योजना उन्होंने शुरू की। साथ ही प्रदेश को एम्स व पीजीआई का सेटेलाइट सेंटर के साथ साथ टरशरी कैंसर केयर हॉस्पिटल उन्होंने प्रदान किए।
छात्र राजनीति के बाद तीन मर्तबा विधायक रहे जेपी नड्डा को जून 2019 में भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 20 जनवरी 2020 को गृह मंत्री अमित शाह के स्थान पर पार्टी की कमान उन्हें सौंपी गई। बतौर भाजपा अध्यक्ष 4 राज्यों में भाजपा ने मिशन रिपीट को कामयाब बनाया है। उनके हिमाचल आगमन को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित प्रदेश भाजपा के तमाम नेता व कार्यकर्ता उत्साहित हैं। कनेडी चौक से पीटरहॉफ जाने वाली सड़क भाजपा के झंडों से पटी है। जगह-जगह नड्डा के स्वागत में होर्डिंग लगाई गई हैं।
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शिमला, सात अप्रैल हिल्स क्वीन शिमला भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के स्वागत के लिए सजने लगी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर में भाजपा के मिशन रिपीट को कामयाब बनाने के बाद नड्डा तीन दिवसीय प्रवास पर हिमाचल आ रहे हैं। चार राज्यों में भाजपा सरकार के गठन के बाद हिमाचल आ रहे जेपी नड्डा का नौ अप्रैल को शिमला में रोड शो व जनसभा होगी। दस अप्रैल को नड्डा शिमला से बिलासपुर जाएंगे। बिलासपुर पहुंचने से पहले टुटू, दाड़लाघाट व नम्होल में उनका स्वागत होगा। नड्डा अर्की विधान सभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र में भी जाएंगे। ग्यारह अप्रैल को दोपहर बाद नड्डा दिल्ली लौट जाएंगे। जेपी नड्डा का जन्म बेशक बिहार के पटना में हुआ हो, मगर भाजपा की सक्रिय राजनीति में उन्होंने हिमाचल से कदम रखा। जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आने वाले जेपी नड्डा पटना विश्व विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। वह प्रदेश विश्व विद्यालय छात्र संघ के एबीवीपी के पहले अध्यक्ष रहे। छात्र राजनीति के बाद नड्डा ने जनहित के मुद्दों को लेकर बिलासपुर में आंदोलन किया। कंदरौर पुल में एक स्कूल खोलने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन से वह सुर्खियों में आए। जेपी नड्डा एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में पहली मर्तबा प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद वह एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे व दो हज़ार सात में फिर से विधान सभा चुनाव जीते तथा प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में काबिना मंत्री रहे। इस बीच दो हज़ार बारह में जेपी नड्डा ने केंद्र की राजनीति में जाने का मन बनाया। वह प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुने गए तथा दो हज़ार चौदह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। आयुष्मान भारत जैसी अहम योजना उन्होंने शुरू की। साथ ही प्रदेश को एम्स व पीजीआई का सेटेलाइट सेंटर के साथ साथ टरशरी कैंसर केयर हॉस्पिटल उन्होंने प्रदान किए। छात्र राजनीति के बाद तीन मर्तबा विधायक रहे जेपी नड्डा को जून दो हज़ार उन्नीस में भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद बीस जनवरी दो हज़ार बीस को गृह मंत्री अमित शाह के स्थान पर पार्टी की कमान उन्हें सौंपी गई। बतौर भाजपा अध्यक्ष चार राज्यों में भाजपा ने मिशन रिपीट को कामयाब बनाया है। उनके हिमाचल आगमन को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित प्रदेश भाजपा के तमाम नेता व कार्यकर्ता उत्साहित हैं। कनेडी चौक से पीटरहॉफ जाने वाली सड़क भाजपा के झंडों से पटी है। जगह-जगह नड्डा के स्वागत में होर्डिंग लगाई गई हैं।
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शुक्रवार को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच ट्राई सीरीज का फाइनल मैच खेला गया। इस मैच को पाकिस्तान ने 5 विकेट से जीतकर टी20 विश्व कप से पहले सभी टीमों को चौंकाया दिया है।
शुक्रवार को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच ट्राई सीरीज का फाइनल मैच खेला गया। इस मैच को पाकिस्तान ने 5 विकेट से जीतकर टी20 विश्व कप से पहले सभी टीमों को चौंकाया दिया है। बता दे, टी20 विश्व में पाकिस्तान का पहला मुकाबला भारतीय टीम के साथ होगा उससे पहले पाक ने ट्राई सीरीज जीतकर अपनी पुख्ता तैयारियों की जानकारी दे दी है। फाइनल मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 163 रन बनाए। न्यूजीलैंड की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए कप्तान केन विलियमसन ने 38 गेंदो पर 59 रनों की शानदार पारी खेली।
इसके अलावा ग्लैंन फिलिप्स ने 25 रनों का योगदान दिया। वहीं पाकिस्तान की तरफ से गेंदबाजी करे हुए नशीम शाह और हैरिश रॉफ ने 2-2 विकेट हासिल किए। इसके अलावा शादाब खान और नवाज ने 1-1 विकेट हासिल किया। वहीं 164 रनों के लक्ष्य को पाकिस्तान टीम ने 19. 3 ओवर में हासिल करके इस सीरीज को अपने नाम कर लिया। पाकिस्तान की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए मोहम्मद नवाज से सबसे ज्यादा 38 रनों की पारी खेली।
इसके अलावा मोहम्मद रिजवान 34 और हैदर अली ने 31 रनों की पारी खेली। इस मैच में पाक टीम के लिए जीत के हीरो मोहम्मद नवाज रहे। जिन्होंने आखिरी में आकर 38 रनों की अहम पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई। न्यूजीलैंड की तरफ से गेंदबाजी करते हुए मिचेल ब्रैशवेल ने सबसे ज्यादा 2 विकेट हासिल किए।
इसके अलावा टिम साउदी और ईश सोडी ने 1-1 विकेट हासिल किया। टी20 विश्व कप से पहले पाकिस्तान के लिए यह बहुत अच्छी खबर है। जिस तरह से पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड को उसके घर पर हराया है टी20 विश्व कप से पहले उसका आत्मविश्वास बड़ा होगा। वहीं इस ट्राई सीरीज में बांग्लादेश की भी टीम थी जो हारकर पहले ही बाहर हो चुकी थी।
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शुक्रवार को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच ट्राई सीरीज का फाइनल मैच खेला गया। इस मैच को पाकिस्तान ने पाँच विकेट से जीतकर टीबीस विश्व कप से पहले सभी टीमों को चौंकाया दिया है। शुक्रवार को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच ट्राई सीरीज का फाइनल मैच खेला गया। इस मैच को पाकिस्तान ने पाँच विकेट से जीतकर टीबीस विश्व कप से पहले सभी टीमों को चौंकाया दिया है। बता दे, टीबीस विश्व में पाकिस्तान का पहला मुकाबला भारतीय टीम के साथ होगा उससे पहले पाक ने ट्राई सीरीज जीतकर अपनी पुख्ता तैयारियों की जानकारी दे दी है। फाइनल मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बीस ओवर में सात विकेट खोकर एक सौ तिरेसठ रन बनाए। न्यूजीलैंड की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए कप्तान केन विलियमसन ने अड़तीस गेंदो पर उनसठ रनों की शानदार पारी खेली। इसके अलावा ग्लैंन फिलिप्स ने पच्चीस रनों का योगदान दिया। वहीं पाकिस्तान की तरफ से गेंदबाजी करे हुए नशीम शाह और हैरिश रॉफ ने दो-दो विकेट हासिल किए। इसके अलावा शादाब खान और नवाज ने एक-एक विकेट हासिल किया। वहीं एक सौ चौंसठ रनों के लक्ष्य को पाकिस्तान टीम ने उन्नीस. तीन ओवर में हासिल करके इस सीरीज को अपने नाम कर लिया। पाकिस्तान की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए मोहम्मद नवाज से सबसे ज्यादा अड़तीस रनों की पारी खेली। इसके अलावा मोहम्मद रिजवान चौंतीस और हैदर अली ने इकतीस रनों की पारी खेली। इस मैच में पाक टीम के लिए जीत के हीरो मोहम्मद नवाज रहे। जिन्होंने आखिरी में आकर अड़तीस रनों की अहम पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई। न्यूजीलैंड की तरफ से गेंदबाजी करते हुए मिचेल ब्रैशवेल ने सबसे ज्यादा दो विकेट हासिल किए। इसके अलावा टिम साउदी और ईश सोडी ने एक-एक विकेट हासिल किया। टीबीस विश्व कप से पहले पाकिस्तान के लिए यह बहुत अच्छी खबर है। जिस तरह से पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड को उसके घर पर हराया है टीबीस विश्व कप से पहले उसका आत्मविश्वास बड़ा होगा। वहीं इस ट्राई सीरीज में बांग्लादेश की भी टीम थी जो हारकर पहले ही बाहर हो चुकी थी।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन द्वारा शुक्रवार को मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सोलन अंशु चौधरी ने इस अवसर पर शेल्टर होम कथेड़ तथा झुग्गी झोंपड़ी कथेड़ में रहने वाले लोगों को मानवाधिकारों के बारे में जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1948 में 10 सिंबर को मानवाधिकार दिवस घोषित किया है। इसका उद्देश्य विश्वभर में लोगों को मानवाधिकारों के महत्व के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों में मुख्य रूप से जीवन व स्वतंत्रता का अधिकार, गुलामी व यातना से मुक्ति का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार तथा काम व शिक्षा का अधिकार सम्मिलित हंै।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन द्वारा शुक्रवार को मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सोलन अंशु चौधरी ने इस अवसर पर शेल्टर होम कथेड़ तथा झुग्गी झोंपड़ी कथेड़ में रहने वाले लोगों को मानवाधिकारों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में दस सिंबर को मानवाधिकार दिवस घोषित किया है। इसका उद्देश्य विश्वभर में लोगों को मानवाधिकारों के महत्व के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों में मुख्य रूप से जीवन व स्वतंत्रता का अधिकार, गुलामी व यातना से मुक्ति का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार तथा काम व शिक्षा का अधिकार सम्मिलित हंै।
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पंजाब के मानसा जिले में एक सरकारी चिकित्सक के निजी सहायक को चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच के बाद सतर्कता ब्यूरो ने रेखा सिंह को गिरफ्तार कर लिया और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया।
चंडीगढ़, पीटीआईः मानसा जिले में एक सरकारी चिकित्सक के निजी सहायक को चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। मानसा सिविल अस्पताल में पदस्थापित एक डॉक्टर के निजी सहायक के रूप में कार्यरत रेखा सिंह को शुक्रवार को एक सरकारी बयान के अनुसार एक व्यक्ति से 3,500 रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
वीबी ने कहा कि शिकायतकर्ता मानसा निवासी हरदीप सिंह था, जिसने आरोप लगाया था कि रेखा ने उसकी पत्नी की सर्जरी के लिए रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने बातचीत को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ब्यूरो को दे दिया। जांच के बाद सतर्कता ब्यूरो ने रेखा सिंह को गिरफ्तार कर लिया और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया।
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पंजाब के मानसा जिले में एक सरकारी चिकित्सक के निजी सहायक को चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच के बाद सतर्कता ब्यूरो ने रेखा सिंह को गिरफ्तार कर लिया और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया। चंडीगढ़, पीटीआईः मानसा जिले में एक सरकारी चिकित्सक के निजी सहायक को चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। मानसा सिविल अस्पताल में पदस्थापित एक डॉक्टर के निजी सहायक के रूप में कार्यरत रेखा सिंह को शुक्रवार को एक सरकारी बयान के अनुसार एक व्यक्ति से तीन,पाँच सौ रुपयापये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वीबी ने कहा कि शिकायतकर्ता मानसा निवासी हरदीप सिंह था, जिसने आरोप लगाया था कि रेखा ने उसकी पत्नी की सर्जरी के लिए रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने बातचीत को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ब्यूरो को दे दिया। जांच के बाद सतर्कता ब्यूरो ने रेखा सिंह को गिरफ्तार कर लिया और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया।
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खैरा प्रखंड अंतर्गत रायपुरा गांव के खेल मैदान में सुपर सिक्स क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। टूर्नामेंट का उदघाटन एसएसबी 16वीं बटालियन बेल पकरी के डिप्टी कामांडेंट सरदार सिंह चौहान एवं सहायक कमांडेंट पंकज पाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। टूर्नामेंट में कुल आठ टीमें शामिल हुए थे।
मंगलवार को नीमारंग टीम और एसएसबी के जवानों के बीच मैच खेला गया। नीमारंग की टीम ने एसएसबी के जवानों को हराकर टूर्नामेंट का पहला मैच अपने नाम किया। इस अवसर पर डिप्टी कामांडेंट ने कहा कि खेल से युवा की मानसिक, शारीरिक, आर्थिक सुधार होता है। आज के समय में आईएएस, आईपीएस, डाक्टर, अधिवक्ता बनकर देश एवं विदेश में पहचान नहीं बना सकते है वे खेल के माध्यम से बना सकते है।
उन्होंने क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी का नाम लेते हुए कहा कि वे खेल के माध्यम से अपना पहचान देश और विदेश में बनाये है। बच्चों, नवयुवकों से कहना है कि आप जेएनयू और डीयू का सपना छोड़कर इस गांव के माहौल में रहकर अच्छे मुकाम पर पहुंच सकते है। आज धौनी के चाचा एसएसबी बेला में अधिकारी के पद पर हैं। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण मुरारी चौधरी, विवेक आचार्य, रंजय तांती, अभिनव आचार्य के अलावा कई खेल प्रेमी मौजूद थे।
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खैरा प्रखंड अंतर्गत रायपुरा गांव के खेल मैदान में सुपर सिक्स क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। टूर्नामेंट का उदघाटन एसएसबी सोलहवीं बटालियन बेल पकरी के डिप्टी कामांडेंट सरदार सिंह चौहान एवं सहायक कमांडेंट पंकज पाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। टूर्नामेंट में कुल आठ टीमें शामिल हुए थे। मंगलवार को नीमारंग टीम और एसएसबी के जवानों के बीच मैच खेला गया। नीमारंग की टीम ने एसएसबी के जवानों को हराकर टूर्नामेंट का पहला मैच अपने नाम किया। इस अवसर पर डिप्टी कामांडेंट ने कहा कि खेल से युवा की मानसिक, शारीरिक, आर्थिक सुधार होता है। आज के समय में आईएएस, आईपीएस, डाक्टर, अधिवक्ता बनकर देश एवं विदेश में पहचान नहीं बना सकते है वे खेल के माध्यम से बना सकते है। उन्होंने क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी का नाम लेते हुए कहा कि वे खेल के माध्यम से अपना पहचान देश और विदेश में बनाये है। बच्चों, नवयुवकों से कहना है कि आप जेएनयू और डीयू का सपना छोड़कर इस गांव के माहौल में रहकर अच्छे मुकाम पर पहुंच सकते है। आज धौनी के चाचा एसएसबी बेला में अधिकारी के पद पर हैं। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण मुरारी चौधरी, विवेक आचार्य, रंजय तांती, अभिनव आचार्य के अलावा कई खेल प्रेमी मौजूद थे।
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सोमवार सुबह खाना बनाते वक्त सिलिंडर में आग लगने से एक परिवार के 10 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सभी को अस्पताल पहुंचाया। यहां इलाज के दौरान परिवार की एक सात वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।
हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सोमवार सुबह खाना बनाते वक्त सिलिंडर में आग लगने से एक परिवार के 10 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सभी को अस्पताल पहुंचाया। यहां इलाज के दौरान परिवार की एक सात वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक सीतापुर के धामापुर गांव के निवासी गोविंद कश्यप के घर सोमवार सुबह महिलाएं खाना बना रही थीं। इसी दौरान रसोई में रखे एक गैस सिलिंडर में आग लग गई। हादसे के दौरान जब तक की घर के लोग कुछ समझ पाते तब तक घर में रखा सामान भी आग की चपेट में आ गया। आग के कारण परिवार के 10 लोग बुरी तरह से झुलस गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से लोगों को आग के बीच से बाहर निकालकर तत्काल स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया। जहां हालत गंभीर होने पर सभी को जिला चिकित्सालय में भेज दिया गया, जहां परिवार की एक सात वर्षीय बच्ची काजल की मौत हो गई।
बच्चों को बचाने में झुलसे परिवार के लोग प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग के बीच परिवार के लोग घर के बच्चों को बचाने का प्रयास करते रहे और इसी बीच आग ने विकराल रूप ले लिया। इसी बीच परिवार के अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ गए। पुलिस के मुताबिक इस घटना में झुलसे 9 लोगों को हरदोई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम इनका उपचार कर रही है।
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सोमवार सुबह खाना बनाते वक्त सिलिंडर में आग लगने से एक परिवार के दस लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सभी को अस्पताल पहुंचाया। यहां इलाज के दौरान परिवार की एक सात वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सोमवार सुबह खाना बनाते वक्त सिलिंडर में आग लगने से एक परिवार के दस लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सभी को अस्पताल पहुंचाया। यहां इलाज के दौरान परिवार की एक सात वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक सीतापुर के धामापुर गांव के निवासी गोविंद कश्यप के घर सोमवार सुबह महिलाएं खाना बना रही थीं। इसी दौरान रसोई में रखे एक गैस सिलिंडर में आग लग गई। हादसे के दौरान जब तक की घर के लोग कुछ समझ पाते तब तक घर में रखा सामान भी आग की चपेट में आ गया। आग के कारण परिवार के दस लोग बुरी तरह से झुलस गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से लोगों को आग के बीच से बाहर निकालकर तत्काल स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया। जहां हालत गंभीर होने पर सभी को जिला चिकित्सालय में भेज दिया गया, जहां परिवार की एक सात वर्षीय बच्ची काजल की मौत हो गई। बच्चों को बचाने में झुलसे परिवार के लोग प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग के बीच परिवार के लोग घर के बच्चों को बचाने का प्रयास करते रहे और इसी बीच आग ने विकराल रूप ले लिया। इसी बीच परिवार के अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ गए। पुलिस के मुताबिक इस घटना में झुलसे नौ लोगों को हरदोई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम इनका उपचार कर रही है।
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PRAYAGRAJ: सीबीएसई हमेशा से बच्चों को बेहतर एजुकेशन के लिए इंस्पायर करता है। अब सीबीएससी की तरफ से बच्चों को सोशल इश्यूज को लेकर अवेयर करने की मुहिम शुरू की गई है। इसके तहत प्लांटेशन करने के बदले बच्चों को ग्रेड देने का सिस्टम बनाया गया है। बच्चों को यह ग्रेडिंग फाइनल एग्जाम में मिलेगी।
-सीबीएसई की ओर से बच्चों में पर्यावरण के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 'वन चाइल्ड, वन प्लांट' कैंपेन शुरू किया गया है।
-इसके लिए सीबीएसई की ओर से सभी स्कूलों को निर्देश भी दिया गया है।
-इसमें बच्चों को प्लांटेशन के लिए पे्ररित करने के लिएकम से कम एक पौधा जरूर लगवाने की बात कही गई है।
-बच्चों से समय-समय पर पौधों की स्थिति की जानकारी ली जाए।
-जिससे पौधों की ग्रोथ हो सके और बच्चों में पौधों के संरक्षण की प्रवृत्ति बन सके।
-साल के आखिर में बच्चों से उनके द्वारा लगाए गए प्लांट की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी ली जाए।
-इसके बाद उनको इंटरनल एग्जाम में प्लांट की स्थिति के हिसाब से ग्रेडिंग दी जाए।
एमपीवीएम की प्रिंसिपल सुष्मिता कानूनगो ने बताया कि सीबीएसई की ओर से लगातार सोशल वैल्यूज के लिए इंस्पायर किया जाता है। प्लांटेशन के साथ ही बच्चों को हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन के अन्तर्गत ओल्ड एज होम, प्रौढ़ शिक्षा, स्कूल के रिर्सोसेस को बचाने जैसे दूसरे सामाजिक कार्यो के लिए भी कई प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इसके लिए भी ग्रेडिंग की व्यवस्था की गई है।
सीबीएसई का यह कदम बेहद सराहनीय है। इससे बच्चों में सोशल वैल्यूज के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
ग्रेडिंग के जरिए बच्चों के अंदर ऐसे इश्यूज को लेकर रुचि बढ़ाने में भी काफी मदद मिलती है। इससे सोसाइटी के साथ ही बच्चों को भी काफी लाभ होता है।
PRAYAGRAJ: प्लांटेशन को लेकर अवेयरनेस का असर भी दिखने लगा है। यहां बच्चे ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के बाद से खुद पौधों की सेफ्टी का ख्याल रखने में जुटे हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने पिछले माह प्लांट डिस्ट्रीब्यूशन के बाद मिले पौधों के बारे में जानकारी ली। एमपीवीएम स्कूल के बच्चों ने अपने-अपने हाथों से लगाए गए पौधों की जानकारी शेयर की।
घर के अंदर तुलसी का पौधा लगाया है। घर में तुलसी के महत्व को बताया गया है। उसकी पूजा भी होती है। मेरे लगाए तुलसी के पौधे की देखभाल दूसरे फैमिली मेंबर्स भी करते हैं।
घर में ही दो पौधे पॉट में लगाए हैं। मैं इनका खास ध्यान रखता हूं। मेरी कोशिश होती है पौधों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। साथ ही इनकी ग्रोथ भी अच्छे से होती रहे।
परेड ग्राउंड पर जो पौधे मिले थे, उनको घर की छत पर ही पॉट में लगा दिया है। इसमें रेगुलरली पानी और खाद देता हूं। मेरी अच्छी कोशिश है कि मेरे इन पौधों की ग्रोथ अच्छे से हो।
खुद के लगाए पौधे को बड़े होते देखना दिल को छू जाने वाला अहसास है। मैं इस बात को बहुत ही दिल से महसूस कर रहा हूं। स्कूल से पहले और स्कूल से आकर इसकी देखभाल करना मेरा रूटीन है।
मैंने खुद से ही नींबू का पौधा लगाया है। अब वह काफी बड़ा हो गया है। घर या आस-पास बड़ा पौधा लगाने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में गमले में लगाए गए पौधे की ही देखभाल करती हूं।
परेड ग्राउंड पर पौधा लगाया है। इसकी सिक्योरिटी के लिए भी ट्री गार्ड लगाया है। दो महीने हो गए हैं और वह बढ़ रहा है। डेली इसमें पानी डालने के लिए जाती हूं। मेरे लिए यह अनोखा एहसास है।
पौधे मिलने के बाद उसके घर के पास ही लगाया है। नियमित रूप से पौधों को पानी देना और उनकी देखभाल करना जिम्मेदारी समझता हुं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सबको पौधे लगाने चाहिए।
प्लांटेशन डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान जो प्लांट मिला था उसे घर के सामने ही लगाया है। ऐसे में रोज उसकी देखभाल करने में आसानी होती है। साथ ही इस पेड़ को देखने में बहुत अच्छा लगता है।
प्लांट डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान मुझे नीम का पौधा मिला था। इसे मैंने अपने घर में ही लगाया था। डेली स्कूल आने के पहले उसमें पानी डालता हुं। खुद को गर्व होता है कि मैंने नीम का पौधा लगाया है।
खुद के द्वारा लगाए गए पौधों को बढ़ते हुए देखना बेहद अच्छा लगाता है। इसी कारण रोज अपने पौधे को बढ़ते हुए देखती हूं। यह एक्सपीरियंस मुझे एक खास तरह की एनर्जी देता है।
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PRAYAGRAJ: सीबीएसई हमेशा से बच्चों को बेहतर एजुकेशन के लिए इंस्पायर करता है। अब सीबीएससी की तरफ से बच्चों को सोशल इश्यूज को लेकर अवेयर करने की मुहिम शुरू की गई है। इसके तहत प्लांटेशन करने के बदले बच्चों को ग्रेड देने का सिस्टम बनाया गया है। बच्चों को यह ग्रेडिंग फाइनल एग्जाम में मिलेगी। -सीबीएसई की ओर से बच्चों में पर्यावरण के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 'वन चाइल्ड, वन प्लांट' कैंपेन शुरू किया गया है। -इसके लिए सीबीएसई की ओर से सभी स्कूलों को निर्देश भी दिया गया है। -इसमें बच्चों को प्लांटेशन के लिए पे्ररित करने के लिएकम से कम एक पौधा जरूर लगवाने की बात कही गई है। -बच्चों से समय-समय पर पौधों की स्थिति की जानकारी ली जाए। -जिससे पौधों की ग्रोथ हो सके और बच्चों में पौधों के संरक्षण की प्रवृत्ति बन सके। -साल के आखिर में बच्चों से उनके द्वारा लगाए गए प्लांट की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी ली जाए। -इसके बाद उनको इंटरनल एग्जाम में प्लांट की स्थिति के हिसाब से ग्रेडिंग दी जाए। एमपीवीएम की प्रिंसिपल सुष्मिता कानूनगो ने बताया कि सीबीएसई की ओर से लगातार सोशल वैल्यूज के लिए इंस्पायर किया जाता है। प्लांटेशन के साथ ही बच्चों को हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन के अन्तर्गत ओल्ड एज होम, प्रौढ़ शिक्षा, स्कूल के रिर्सोसेस को बचाने जैसे दूसरे सामाजिक कार्यो के लिए भी कई प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इसके लिए भी ग्रेडिंग की व्यवस्था की गई है। सीबीएसई का यह कदम बेहद सराहनीय है। इससे बच्चों में सोशल वैल्यूज के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ग्रेडिंग के जरिए बच्चों के अंदर ऐसे इश्यूज को लेकर रुचि बढ़ाने में भी काफी मदद मिलती है। इससे सोसाइटी के साथ ही बच्चों को भी काफी लाभ होता है। PRAYAGRAJ: प्लांटेशन को लेकर अवेयरनेस का असर भी दिखने लगा है। यहां बच्चे ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के बाद से खुद पौधों की सेफ्टी का ख्याल रखने में जुटे हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने पिछले माह प्लांट डिस्ट्रीब्यूशन के बाद मिले पौधों के बारे में जानकारी ली। एमपीवीएम स्कूल के बच्चों ने अपने-अपने हाथों से लगाए गए पौधों की जानकारी शेयर की। घर के अंदर तुलसी का पौधा लगाया है। घर में तुलसी के महत्व को बताया गया है। उसकी पूजा भी होती है। मेरे लगाए तुलसी के पौधे की देखभाल दूसरे फैमिली मेंबर्स भी करते हैं। घर में ही दो पौधे पॉट में लगाए हैं। मैं इनका खास ध्यान रखता हूं। मेरी कोशिश होती है पौधों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। साथ ही इनकी ग्रोथ भी अच्छे से होती रहे। परेड ग्राउंड पर जो पौधे मिले थे, उनको घर की छत पर ही पॉट में लगा दिया है। इसमें रेगुलरली पानी और खाद देता हूं। मेरी अच्छी कोशिश है कि मेरे इन पौधों की ग्रोथ अच्छे से हो। खुद के लगाए पौधे को बड़े होते देखना दिल को छू जाने वाला अहसास है। मैं इस बात को बहुत ही दिल से महसूस कर रहा हूं। स्कूल से पहले और स्कूल से आकर इसकी देखभाल करना मेरा रूटीन है। मैंने खुद से ही नींबू का पौधा लगाया है। अब वह काफी बड़ा हो गया है। घर या आस-पास बड़ा पौधा लगाने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में गमले में लगाए गए पौधे की ही देखभाल करती हूं। परेड ग्राउंड पर पौधा लगाया है। इसकी सिक्योरिटी के लिए भी ट्री गार्ड लगाया है। दो महीने हो गए हैं और वह बढ़ रहा है। डेली इसमें पानी डालने के लिए जाती हूं। मेरे लिए यह अनोखा एहसास है। पौधे मिलने के बाद उसके घर के पास ही लगाया है। नियमित रूप से पौधों को पानी देना और उनकी देखभाल करना जिम्मेदारी समझता हुं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सबको पौधे लगाने चाहिए। प्लांटेशन डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान जो प्लांट मिला था उसे घर के सामने ही लगाया है। ऐसे में रोज उसकी देखभाल करने में आसानी होती है। साथ ही इस पेड़ को देखने में बहुत अच्छा लगता है। प्लांट डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान मुझे नीम का पौधा मिला था। इसे मैंने अपने घर में ही लगाया था। डेली स्कूल आने के पहले उसमें पानी डालता हुं। खुद को गर्व होता है कि मैंने नीम का पौधा लगाया है। खुद के द्वारा लगाए गए पौधों को बढ़ते हुए देखना बेहद अच्छा लगाता है। इसी कारण रोज अपने पौधे को बढ़ते हुए देखती हूं। यह एक्सपीरियंस मुझे एक खास तरह की एनर्जी देता है।
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मोर्शी/दि. 12- पाऊले चालती उजेडाची वाट इस संकल्पना से हरीना नेत्रदान समिति की ओर से विश्व नेत्रदान दिन निमित्त जनजागृति रैली का आयोजन किया गया. इस पदयात्रा में सैकड़ों नागरिक सहभागी हुए.
पाऊले चालती प्रकाशाची वाट, नेत्रदान करें, मृत्यु पश्चात विश्व देखे, नेत्रदान यह श्रेष्ठदान, जीवन का अमूल्य वरदान, नेत्रहीनों को नेत्रदान इस तरह की घोषणा करते शहर के विविध भागों से यह रैली निकाली गई. इस जनजागृति पदयात्रा की शुरुआत जपाली हनुमान मंदिर, जयस्तंभ चौक से की गई. पश्चात यह रैली जयस्तंभ चौक पहुंची, उस समय युवा एकता कला मंच की ओर से नया सवेरा विषय पर व अंध व्यक्ति के जीवन में आने वाले दुख पर पथनाट्य आयोजित किया गया. पश्चात इस पदयात्रा का मुख्य बाजारपेठ, प्रभात चौक, गांधी चौक, गुजरी बाजार, रामजी बाबा नगर, पुराना बस स्टेशन मार्ग से होते हुए जपाली हनुमा मंदिर में समापन किया गया. हम मरणोपरांत नेत्रदान कर अंध व्यक्ति के जीवन में प्रकाश दे सकते हैं. इसके लिए अधिक से अधिक नागरिक नेत्रदान का संकल्प करें व नेत्रदान बाबत समाज में जनजागृति हो, इसके लिए इस रैली का आयोजन किया गया था.
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष के रुप में हरीना नेत्रदान समिति के अध्यक्ष नरेश अंगणानी व प्रमुख अतिथि के रुप में आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गजानन पाटील, डॉ. दीपक ढोले, डॉ. प्रदीप कुर्हाडे, नवीनकुमार पेठे मंचासीन थे. पदयात्रा शुरु होने से पूर्व ओडिसा में रेल्वे दुर्घटना में मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. वहीं मोर्शी शहर में अपनी माता का प्रथम नेत्रदान करने वाले विष्णु सरोदे का शाल व श्रीफल देकर सत्कार किया गया. रैली की शुरुआत उपविभागीय पुलिस अधिकारी डॉ. नीलेश पांडे ने हरी झंडी दिखाकर की. रैली में शहर के डॉक्टर, विविध राजकीय पार्टी के पदाधिकारी, नागरिक व शिवाजी बहुउद्देशीय मंडल, न्यू जनरेशन केअर फाऊंडेशन, वृक्ष संवर्धन समिति, युवा एकता कला मंच, सिंधी नवयुवक संगठना, माहेश्वरी संगठना, डॉक्टर्स असोसिएशन, व्यापारी संगठना, मेडिकल असोसिएशन, क्षत्रिय कलाल समाज, पत्रकार संगठना, राधाकृष्ण गणेश मंडल, कॉलोनी परिसर युवक गणेश मंडल, शिवम दुर्गा मंडल, श्रीकृष्ण महानुभाव मंडल, हनुमान क्रीडा मंडल, आपली मोर्शी लंच बॉक्स, समर्थ कोचिंग क्लासेस सहित अन्य समाजिक संगठनाओं ने सहभाग लिया. रैली की सफलतार्थ नवीनकुमार पेठे, नीलेश रोडे, संतोष पेठे, संजय उल्ले, शरद कनेर, रुपेश मेश्राम, श्रीकांत देशमुख, राजेश मुंगसे, राजू राठी, नील जावले, बंटी नागले आदि ने परिश्रम किया.
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मोर्शी/दि. बारह- पाऊले चालती उजेडाची वाट इस संकल्पना से हरीना नेत्रदान समिति की ओर से विश्व नेत्रदान दिन निमित्त जनजागृति रैली का आयोजन किया गया. इस पदयात्रा में सैकड़ों नागरिक सहभागी हुए. पाऊले चालती प्रकाशाची वाट, नेत्रदान करें, मृत्यु पश्चात विश्व देखे, नेत्रदान यह श्रेष्ठदान, जीवन का अमूल्य वरदान, नेत्रहीनों को नेत्रदान इस तरह की घोषणा करते शहर के विविध भागों से यह रैली निकाली गई. इस जनजागृति पदयात्रा की शुरुआत जपाली हनुमान मंदिर, जयस्तंभ चौक से की गई. पश्चात यह रैली जयस्तंभ चौक पहुंची, उस समय युवा एकता कला मंच की ओर से नया सवेरा विषय पर व अंध व्यक्ति के जीवन में आने वाले दुख पर पथनाट्य आयोजित किया गया. पश्चात इस पदयात्रा का मुख्य बाजारपेठ, प्रभात चौक, गांधी चौक, गुजरी बाजार, रामजी बाबा नगर, पुराना बस स्टेशन मार्ग से होते हुए जपाली हनुमा मंदिर में समापन किया गया. हम मरणोपरांत नेत्रदान कर अंध व्यक्ति के जीवन में प्रकाश दे सकते हैं. इसके लिए अधिक से अधिक नागरिक नेत्रदान का संकल्प करें व नेत्रदान बाबत समाज में जनजागृति हो, इसके लिए इस रैली का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष के रुप में हरीना नेत्रदान समिति के अध्यक्ष नरेश अंगणानी व प्रमुख अतिथि के रुप में आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गजानन पाटील, डॉ. दीपक ढोले, डॉ. प्रदीप कुर्हाडे, नवीनकुमार पेठे मंचासीन थे. पदयात्रा शुरु होने से पूर्व ओडिसा में रेल्वे दुर्घटना में मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. वहीं मोर्शी शहर में अपनी माता का प्रथम नेत्रदान करने वाले विष्णु सरोदे का शाल व श्रीफल देकर सत्कार किया गया. रैली की शुरुआत उपविभागीय पुलिस अधिकारी डॉ. नीलेश पांडे ने हरी झंडी दिखाकर की. रैली में शहर के डॉक्टर, विविध राजकीय पार्टी के पदाधिकारी, नागरिक व शिवाजी बहुउद्देशीय मंडल, न्यू जनरेशन केअर फाऊंडेशन, वृक्ष संवर्धन समिति, युवा एकता कला मंच, सिंधी नवयुवक संगठना, माहेश्वरी संगठना, डॉक्टर्स असोसिएशन, व्यापारी संगठना, मेडिकल असोसिएशन, क्षत्रिय कलाल समाज, पत्रकार संगठना, राधाकृष्ण गणेश मंडल, कॉलोनी परिसर युवक गणेश मंडल, शिवम दुर्गा मंडल, श्रीकृष्ण महानुभाव मंडल, हनुमान क्रीडा मंडल, आपली मोर्शी लंच बॉक्स, समर्थ कोचिंग क्लासेस सहित अन्य समाजिक संगठनाओं ने सहभाग लिया. रैली की सफलतार्थ नवीनकुमार पेठे, नीलेश रोडे, संतोष पेठे, संजय उल्ले, शरद कनेर, रुपेश मेश्राम, श्रीकांत देशमुख, राजेश मुंगसे, राजू राठी, नील जावले, बंटी नागले आदि ने परिश्रम किया.
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सीआईए के निदेशक माइक पोम्पेओ ने हाल ही में अमेरिकी विदेश नीति की रणनीति के बारे में सीधे तौर पर याद कियाः "रूस को हराना होगा। " हमारे कई दोस्त, सामान्य तौर पर, रूस की रणनीति के समान, सिर पर प्रतिक्रिया की मांग करते हैंः संयुक्त राज्य अमेरिका को हराएं। लेकिन इस संबंध में अन्य प्रश्न हैंः एक हार को क्या माना जाता है और इसे कैसे भड़काया जा सकता है? सैन्य हार, रंग तख्तापलट और सत्ता का परिवर्तन अर्ध-औपनिवेशिक या कुछ और? सामान्य रूप से रूस की विदेश नीति की रणनीति क्या है?
हमारे कई विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस के पास विदेश नीति की रणनीति नहीं हैः यह हर बार अमेरिकी सैन्य-राजनीतिक चुनौतियों का जवाब देता है। इसमें सच्चाई का एक दाना है। रूस आज विश्व-वित्तीय और आर्थिक व्यवस्था में, यानी अमेरिकी, पश्चिमी व्यवस्था में, रूस-यूएसएसआर के विपरीत है। इसके फायदे और इसके नुकसान हैं।
रूस ने अपने स्वयं के वित्तीय और आर्थिक उपकरणों का अधिग्रहण किया, सोवियत काल के दौरान होने वाले जीवन की गुणवत्ता में अंतराल को समाप्त कर दिया, लेकिन इस प्रणाली में मौजूद नियमों के साथ फिर से करने के लिए मजबूर किया गया। वैसे भी, बाय। रूस को विश्व आर्थिक व्यवस्था से बाहर करने के लिए, और इस प्रकार अलग-थलग करने के लिए, कई विशेषज्ञों के अनुसार, रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का उद्देश्य है। चूंकि रूस, अपने हितों, प्रयासों का बचाव कर रहा था, जैसा कि सिस्टम के भीतर से, इसमें पश्चिम की प्रमुख स्थिति पर था। यदि ऐसा होता है, तो रूस इस आधार पर USSR - 2 बन जाएगा। अमेरिकियों की मदद से!
दूसरी ओर, अगर रूसी विदेशी समकक्ष पोम्पिओ और व्लादिमीर पुतिन वैश्विक विदेश नीति की रणनीति के बारे में खुलकर नहीं बोलते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसी कोई रणनीति नहीं है। केवल एक ही कह सकता है कि यह सार्वजनिक रूप से और स्पष्ट रूप से तैयार नहीं है, जैसा कि माइक पोम्पेओ करता है।
मान लीजिए कि हम एक दर्पण अमेरिकी रणनीति अपनाते हैंः रूस को अमेरिका को हराने की जरूरत है। उसी समय, परमाणु महाशक्तियों का एक प्रत्यक्ष सैन्य टकराव असंभव माना जाता है, क्योंकि यह गारंटीकृत पारस्परिक विनाश के साथ-साथ बाकी दुनिया के विनाश को समाप्त कर देगा। फिर अमेरिका और पश्चिम की हार को समग्र रूप से क्या माना जा सकता है?
एक राय है कि गैर-पश्चिमी राज्यों (गैस स्टेशनों) के एंटी-वेस्टर्न यूनियन के निर्माण को पश्चिम की हार माना जा सकता है, और वास्तव में, रूस और चीन द्वारा राज्यों का ऐसा संघ बनाया जा रहा है, वास्तव में, हालांकि वे सीधे इस बारे में बात नहीं करेंगे, जैसे कि पोम्पेओ।
रूस, चीन और कई अन्य राज्य व्यंजना द्वारा गैस स्टेशन बनाने की वास्तविक रणनीति के बारे में बोलते हैं, जब उचित कारण दिए जाते हैं - यह एक बहुध्रुवीय विश्व और यूरेशियन संघ, ब्रिक्स, एससीओ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की अवधारणा है, लेकिन पश्चिमी देशों की भागीदारी के बिना। पोम्पेओ के स्तर तक नीचे जाने के लिए, समय से पहले कार्ड खोलना शायद अब राजनीतिक रूप से गलत है। इस तरह के संघ के निर्माण और उद्देश्यों को सीधे और आधिकारिक रूप से स्पष्ट करें।
आखिर ब्रिक्स, एससीओ, ईएसी, सीएसटीओ और अन्य समान संगठनों को एक साथ क्या लिया जाता है? वास्तव में, यह गैर-पश्चिमी देशों का नव निर्मित एंटी-वेस्टर्न यूनियन है। इस संघ का असेंबली पॉइंट रूस एक ऐसा देश था जिसके पास अमेरिका के साथ परमाणु समानता है, जो कि बुनियादी विज्ञान और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के साथ सैन्य रूप से संरक्षित है - इसलिए, संयुक्त राज्य अमेरिका और पूरे पश्चिम ने "निवारक" रूस पर ध्यान केंद्रित कियाः उन्होंने गैस स्टेशन असेंबली पॉइंट को मारा। हालांकि वे चीन पर ध्यान दे रहे हैं। क्यों?
चीन पश्चिम से एक तेजी से स्वतंत्र आर्थिक नीति का अनुसरण करता है और गंभीर परिस्थितियों में रूस की मदद के लिए आता है जब अस्वीकार्य क्षति संभव है। उदाहरण के लिए, 2014 वर्ष में, जब ओबामा ने "रूसी अर्थव्यवस्था को चीरने के लिए आंसू बहाए" करने का उपक्रम किया, तो चीन ने अमेरिका के विशेष दूतों द्वारा बीजिंग की यात्रा के बावजूद रूस को अलग-थलग करने से इनकार कर दिया और रूस के ऋण की पेशकश की (रूस ने इनकार कर दिया, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि उसने पेशकश की)। यह चीनी विशेष इंजीनियरिंग जहाज था जिसने कर्च जलडमरूमध्य के नीचे रूस द्वारा क्रीमिया को बुरी तरह से आवश्यक बिजली केबल बिछाई थी।
सरकारी दस्तावेजों के स्तर पर, संयुक्त राज्य अमेरिका भी विश्व प्रभुत्व की अपनी इच्छा के बारे में बात नहीं करता है, लेकिन केवल नेतृत्व के लिए। और रूस एक बहुध्रुवीय दुनिया के बारे में बोलता है, लेकिन पश्चिम में वे समझते हैं कि यह दुनिया के लिए होगाः इसकी बहुध्रुवीयता, वास्तव में, दो के बराबर होगी।
रूस और पश्चिम द्वारा पूरे गैर-पश्चिमी दुनिया की "भागीदारी" आज विभिन्न अनुमोदन युद्धों में शामिल हो रही है, जिसमें सांस्कृतिक और खेल, पश्चिमी जागीरदारों पर आर्थिक दबाव, अटलांटिक अनुशासन बनाए रखना और दुनिया के ग्रे ज़ोन में रंग तख्तापलट करना, सैन्य बल का उपयोग करना या खतरे में है। आवेदन। यूगोस्लाविया, लीबिया, इराक और यूक्रेन में, पश्चिम के लिए "रंग क्रांतियां" सफल रही हैं।
रूस, सामान्य रूप से प्रतिबंधों और "रंग" को मारता है, और क्रीमिया में, डॉनबास में और सीरिया में सफलतापूर्वक पलटवार करता है। मिस्र, तुर्की, पाकिस्तान जैसे कई अमेरिकी उपग्रह अपनी निर्भर स्थिति से असंतुष्ट हो रहे हैं, और रूस और चीन के साथ तालमेल की ओर बढ़ रहे हैं। यह रूस और चीन द्वारा भूराजनीतिक संघर्ष में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देता है, अगर इसका मतलब पश्चिम पर सैन्य जीत नहीं है, लेकिन पश्चिम के लिए एक प्रतिक्रांति का निर्माण - एंटी-वेस्टर्न यूनियन। इसकी अंतिम राजनीतिक और आर्थिक डिजाइन संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिम की भू-राजनीतिक हार का कारण बनेगी।
अमेरिका अपनी विधानसभा को पूरा होने से रोकने के लिए उभरते हुए एंटी-वेस्टर्न यूनियन को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। जवाब में रूस और चीन ने पश्चिम में नकारात्मक रुझान जगाया। यह एक वस्तुनिष्ठ गतिरोध है, और कोई भी चुनाव और राष्ट्रपति, जैसा कि डोनाल्ड ट्रम्प घटना साबित करती है, इसके बारे में कुछ नहीं कर सकती है।
आज मुख्य प्रश्न यह हैः समय किसके लिए काम करता है? पश्चिम को या पूर्व-पश्चिम को? आंकड़े इसका जवाब देते हैंः संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिम की आर्थिक स्थिति दुनिया में कमजोर हो रही है।
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सीआईए के निदेशक माइक पोम्पेओ ने हाल ही में अमेरिकी विदेश नीति की रणनीति के बारे में सीधे तौर पर याद कियाः "रूस को हराना होगा। " हमारे कई दोस्त, सामान्य तौर पर, रूस की रणनीति के समान, सिर पर प्रतिक्रिया की मांग करते हैंः संयुक्त राज्य अमेरिका को हराएं। लेकिन इस संबंध में अन्य प्रश्न हैंः एक हार को क्या माना जाता है और इसे कैसे भड़काया जा सकता है? सैन्य हार, रंग तख्तापलट और सत्ता का परिवर्तन अर्ध-औपनिवेशिक या कुछ और? सामान्य रूप से रूस की विदेश नीति की रणनीति क्या है? हमारे कई विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस के पास विदेश नीति की रणनीति नहीं हैः यह हर बार अमेरिकी सैन्य-राजनीतिक चुनौतियों का जवाब देता है। इसमें सच्चाई का एक दाना है। रूस आज विश्व-वित्तीय और आर्थिक व्यवस्था में, यानी अमेरिकी, पश्चिमी व्यवस्था में, रूस-यूएसएसआर के विपरीत है। इसके फायदे और इसके नुकसान हैं। रूस ने अपने स्वयं के वित्तीय और आर्थिक उपकरणों का अधिग्रहण किया, सोवियत काल के दौरान होने वाले जीवन की गुणवत्ता में अंतराल को समाप्त कर दिया, लेकिन इस प्रणाली में मौजूद नियमों के साथ फिर से करने के लिए मजबूर किया गया। वैसे भी, बाय। रूस को विश्व आर्थिक व्यवस्था से बाहर करने के लिए, और इस प्रकार अलग-थलग करने के लिए, कई विशेषज्ञों के अनुसार, रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का उद्देश्य है। चूंकि रूस, अपने हितों, प्रयासों का बचाव कर रहा था, जैसा कि सिस्टम के भीतर से, इसमें पश्चिम की प्रमुख स्थिति पर था। यदि ऐसा होता है, तो रूस इस आधार पर USSR - दो बन जाएगा। अमेरिकियों की मदद से! दूसरी ओर, अगर रूसी विदेशी समकक्ष पोम्पिओ और व्लादिमीर पुतिन वैश्विक विदेश नीति की रणनीति के बारे में खुलकर नहीं बोलते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसी कोई रणनीति नहीं है। केवल एक ही कह सकता है कि यह सार्वजनिक रूप से और स्पष्ट रूप से तैयार नहीं है, जैसा कि माइक पोम्पेओ करता है। मान लीजिए कि हम एक दर्पण अमेरिकी रणनीति अपनाते हैंः रूस को अमेरिका को हराने की जरूरत है। उसी समय, परमाणु महाशक्तियों का एक प्रत्यक्ष सैन्य टकराव असंभव माना जाता है, क्योंकि यह गारंटीकृत पारस्परिक विनाश के साथ-साथ बाकी दुनिया के विनाश को समाप्त कर देगा। फिर अमेरिका और पश्चिम की हार को समग्र रूप से क्या माना जा सकता है? एक राय है कि गैर-पश्चिमी राज्यों के एंटी-वेस्टर्न यूनियन के निर्माण को पश्चिम की हार माना जा सकता है, और वास्तव में, रूस और चीन द्वारा राज्यों का ऐसा संघ बनाया जा रहा है, वास्तव में, हालांकि वे सीधे इस बारे में बात नहीं करेंगे, जैसे कि पोम्पेओ। रूस, चीन और कई अन्य राज्य व्यंजना द्वारा गैस स्टेशन बनाने की वास्तविक रणनीति के बारे में बोलते हैं, जब उचित कारण दिए जाते हैं - यह एक बहुध्रुवीय विश्व और यूरेशियन संघ, ब्रिक्स, एससीओ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की अवधारणा है, लेकिन पश्चिमी देशों की भागीदारी के बिना। पोम्पेओ के स्तर तक नीचे जाने के लिए, समय से पहले कार्ड खोलना शायद अब राजनीतिक रूप से गलत है। इस तरह के संघ के निर्माण और उद्देश्यों को सीधे और आधिकारिक रूप से स्पष्ट करें। आखिर ब्रिक्स, एससीओ, ईएसी, सीएसटीओ और अन्य समान संगठनों को एक साथ क्या लिया जाता है? वास्तव में, यह गैर-पश्चिमी देशों का नव निर्मित एंटी-वेस्टर्न यूनियन है। इस संघ का असेंबली पॉइंट रूस एक ऐसा देश था जिसके पास अमेरिका के साथ परमाणु समानता है, जो कि बुनियादी विज्ञान और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के साथ सैन्य रूप से संरक्षित है - इसलिए, संयुक्त राज्य अमेरिका और पूरे पश्चिम ने "निवारक" रूस पर ध्यान केंद्रित कियाः उन्होंने गैस स्टेशन असेंबली पॉइंट को मारा। हालांकि वे चीन पर ध्यान दे रहे हैं। क्यों? चीन पश्चिम से एक तेजी से स्वतंत्र आर्थिक नीति का अनुसरण करता है और गंभीर परिस्थितियों में रूस की मदद के लिए आता है जब अस्वीकार्य क्षति संभव है। उदाहरण के लिए, दो हज़ार चौदह वर्ष में, जब ओबामा ने "रूसी अर्थव्यवस्था को चीरने के लिए आंसू बहाए" करने का उपक्रम किया, तो चीन ने अमेरिका के विशेष दूतों द्वारा बीजिंग की यात्रा के बावजूद रूस को अलग-थलग करने से इनकार कर दिया और रूस के ऋण की पेशकश की । यह चीनी विशेष इंजीनियरिंग जहाज था जिसने कर्च जलडमरूमध्य के नीचे रूस द्वारा क्रीमिया को बुरी तरह से आवश्यक बिजली केबल बिछाई थी। सरकारी दस्तावेजों के स्तर पर, संयुक्त राज्य अमेरिका भी विश्व प्रभुत्व की अपनी इच्छा के बारे में बात नहीं करता है, लेकिन केवल नेतृत्व के लिए। और रूस एक बहुध्रुवीय दुनिया के बारे में बोलता है, लेकिन पश्चिम में वे समझते हैं कि यह दुनिया के लिए होगाः इसकी बहुध्रुवीयता, वास्तव में, दो के बराबर होगी। रूस और पश्चिम द्वारा पूरे गैर-पश्चिमी दुनिया की "भागीदारी" आज विभिन्न अनुमोदन युद्धों में शामिल हो रही है, जिसमें सांस्कृतिक और खेल, पश्चिमी जागीरदारों पर आर्थिक दबाव, अटलांटिक अनुशासन बनाए रखना और दुनिया के ग्रे ज़ोन में रंग तख्तापलट करना, सैन्य बल का उपयोग करना या खतरे में है। आवेदन। यूगोस्लाविया, लीबिया, इराक और यूक्रेन में, पश्चिम के लिए "रंग क्रांतियां" सफल रही हैं। रूस, सामान्य रूप से प्रतिबंधों और "रंग" को मारता है, और क्रीमिया में, डॉनबास में और सीरिया में सफलतापूर्वक पलटवार करता है। मिस्र, तुर्की, पाकिस्तान जैसे कई अमेरिकी उपग्रह अपनी निर्भर स्थिति से असंतुष्ट हो रहे हैं, और रूस और चीन के साथ तालमेल की ओर बढ़ रहे हैं। यह रूस और चीन द्वारा भूराजनीतिक संघर्ष में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देता है, अगर इसका मतलब पश्चिम पर सैन्य जीत नहीं है, लेकिन पश्चिम के लिए एक प्रतिक्रांति का निर्माण - एंटी-वेस्टर्न यूनियन। इसकी अंतिम राजनीतिक और आर्थिक डिजाइन संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिम की भू-राजनीतिक हार का कारण बनेगी। अमेरिका अपनी विधानसभा को पूरा होने से रोकने के लिए उभरते हुए एंटी-वेस्टर्न यूनियन को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। जवाब में रूस और चीन ने पश्चिम में नकारात्मक रुझान जगाया। यह एक वस्तुनिष्ठ गतिरोध है, और कोई भी चुनाव और राष्ट्रपति, जैसा कि डोनाल्ड ट्रम्प घटना साबित करती है, इसके बारे में कुछ नहीं कर सकती है। आज मुख्य प्रश्न यह हैः समय किसके लिए काम करता है? पश्चिम को या पूर्व-पश्चिम को? आंकड़े इसका जवाब देते हैंः संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिम की आर्थिक स्थिति दुनिया में कमजोर हो रही है।
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बेगम मेरो विश्वात २६३
छोटे सरकार ने पूछा, "क्या ?"
"बता नहीं सकता, आप जानते हैं या नहीं। इधर तो यह संकट है उभर हतियागढ़ का डिहीदार रजा अली भो इसो बोच यहाँ आ पहुँचा है।" "अरे ? वह किस मतलब से आया है ? उसे भी क्या स्वर मिल गयी थी ?"
जगहसेठ ने कहा, "उसे कैसे खबर मिलतो ? वह शायद में बोया है। जब यहाँ आने के बाद यह सब देख रहा है।"
अपने किसो मतलव
छोटे सरकार ने कहा, "मुझे तो उसके आने की बात सुनकर बड़ा डर लग रहा है। मैं तो इतियागढ़ ऐसे हो छोड़कर चला आया हूँ। वहाँ के खजांची बाबू को सारा जिम्मा सौरकर में घूम रहा हूँ। मेरी इतनी दौड़-धूप, देखता हूँ, बेकार गयो । आपने ही एक वार महाराज कृष्णचन्द्र के पास मुझे भेजा था। आपने ही मुझे क्लाइव साहब के पास भेजा था। कहाँ हतियागढ़ है और कहाँ कलकत्ता, फिर कहाँ कृष्णनगर है और कही यह मुर्शिदाबाद। अब देख रहा हूँ कोई आशा नही है । आर को ठीक से मालूम है न कि रजा अली आमा है ?"
जगत्सेठ ने कहा, "आया ही नहीं, वह मेंहदी निसार से मिल भो चुका है।" छोटे सरकार चितित हो उठे।
कहा, "अब मैं क्या करूँ कुछ बता सकते हैं ? हतियागढ़ लौट जाऊँ ?" जगत्सेठ ने कहा, "आप जब देख आये हैं कि आपकी पत्नी को उन लोगों ने मोतीझील में कैद रखा है तो आप वहाँ जाकर क्या करेंगे ? बल्कि अपनी पत्नी के ने का ही कोई बंदोबस्त करें ।"
"ऐसा कैसे होगा ?"
जगत्सेठ ने कहा, "बहुत दिनों पहले आपकी पत्नी एक बार मेरे माँ बायो थीं। यह तो आपको मालूम है न ? उस समय उन्होंने मुझसे कहा था, चौक बाजार में शराफत अली की जो दुकान है न, वहीं कान्त नाम का एक आदमो रहता है। उसी को खबर देने से आपकी पत्नी को खबर मिल जायेगी ।"
छोटे सरकार ने कहा, "पहले में एक बार वहाँ गया था लेकिन उस समय वह बादमी नहीं था ।"
"एक बार अब भी देख लें न । शायद वह आदमी मिल जाय । शायद वह कोई रास्ता बता सके । अगर वह न मिले तो वापस आ जाइएगा । तब तक मैं नवाब से मिल आऊँ । नवाब ने बहुत जल्दी आने के लिए कहला नेजा है।"
"ठीक है।"
छोटे सरकार फिर निकल पड़े। उस समय दिन की रोशनी खूब निकल आयो थी । सड़क पर लोगों की भीड़ भी ज्यादा थी ।
छोटे सरकार के चले जाने के बाद जगत्सेठ का तानजान भी निकला । कई दिनों से जगत्सेठ को नींद नहीं आ रही थो। दोवान, सत्रांनो, मुदिर सभी कई दिनों
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बेगम मेरो विश्वात दो सौ तिरेसठ छोटे सरकार ने पूछा, "क्या ?" "बता नहीं सकता, आप जानते हैं या नहीं। इधर तो यह संकट है उभर हतियागढ़ का डिहीदार रजा अली भो इसो बोच यहाँ आ पहुँचा है।" "अरे ? वह किस मतलब से आया है ? उसे भी क्या स्वर मिल गयी थी ?" जगहसेठ ने कहा, "उसे कैसे खबर मिलतो ? वह शायद में बोया है। जब यहाँ आने के बाद यह सब देख रहा है।" अपने किसो मतलव छोटे सरकार ने कहा, "मुझे तो उसके आने की बात सुनकर बड़ा डर लग रहा है। मैं तो इतियागढ़ ऐसे हो छोड़कर चला आया हूँ। वहाँ के खजांची बाबू को सारा जिम्मा सौरकर में घूम रहा हूँ। मेरी इतनी दौड़-धूप, देखता हूँ, बेकार गयो । आपने ही एक वार महाराज कृष्णचन्द्र के पास मुझे भेजा था। आपने ही मुझे क्लाइव साहब के पास भेजा था। कहाँ हतियागढ़ है और कहाँ कलकत्ता, फिर कहाँ कृष्णनगर है और कही यह मुर्शिदाबाद। अब देख रहा हूँ कोई आशा नही है । आर को ठीक से मालूम है न कि रजा अली आमा है ?" जगत्सेठ ने कहा, "आया ही नहीं, वह मेंहदी निसार से मिल भो चुका है।" छोटे सरकार चितित हो उठे। कहा, "अब मैं क्या करूँ कुछ बता सकते हैं ? हतियागढ़ लौट जाऊँ ?" जगत्सेठ ने कहा, "आप जब देख आये हैं कि आपकी पत्नी को उन लोगों ने मोतीझील में कैद रखा है तो आप वहाँ जाकर क्या करेंगे ? बल्कि अपनी पत्नी के ने का ही कोई बंदोबस्त करें ।" "ऐसा कैसे होगा ?" जगत्सेठ ने कहा, "बहुत दिनों पहले आपकी पत्नी एक बार मेरे माँ बायो थीं। यह तो आपको मालूम है न ? उस समय उन्होंने मुझसे कहा था, चौक बाजार में शराफत अली की जो दुकान है न, वहीं कान्त नाम का एक आदमो रहता है। उसी को खबर देने से आपकी पत्नी को खबर मिल जायेगी ।" छोटे सरकार ने कहा, "पहले में एक बार वहाँ गया था लेकिन उस समय वह बादमी नहीं था ।" "एक बार अब भी देख लें न । शायद वह आदमी मिल जाय । शायद वह कोई रास्ता बता सके । अगर वह न मिले तो वापस आ जाइएगा । तब तक मैं नवाब से मिल आऊँ । नवाब ने बहुत जल्दी आने के लिए कहला नेजा है।" "ठीक है।" छोटे सरकार फिर निकल पड़े। उस समय दिन की रोशनी खूब निकल आयो थी । सड़क पर लोगों की भीड़ भी ज्यादा थी । छोटे सरकार के चले जाने के बाद जगत्सेठ का तानजान भी निकला । कई दिनों से जगत्सेठ को नींद नहीं आ रही थो। दोवान, सत्रांनो, मुदिर सभी कई दिनों
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भारतीय टीम के पूर्व स्टार मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज सुरेश रैना ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली आगामी टेस्ट सीरीज को लेकर भविष्यवाणी की हैं। उन्होंने कहा है कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी काफी रोमांचक होने वाला हैं। सुरेश रैना कल एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के अंबेडकर स्टेडियम पहुंचे थे और मिशन औलिंपिक्स एनुअल स्पोर्ट्स मीट 2023 की क्लोजिंग सेरेमनी का हिस्सा थे।
इसी दौरान उन्होंने कुछ सवालों के जवाब देते हुए कह रहे थे कि यह सीरीज काफी रोचक होने वाली है। हालांकि कौन सी टीम जीत हासिल करेगी,यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। वहीं रैना ने जडेजा के वापसी पर भी अपना बयान देते हुए कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि रवींद्र जडेजा ने भारतीय टीम में वापसी कर लिए हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में काफी बढ़िया प्रदर्शन किया हैं। टीम को इसका फायदा होगा। जडेजा के अलावा उन्होंने भारत के मुख्य खिलाड़ियों को लेकर भी कहा कि विराट कोहली शानदार फॉर्म में है और रोहित भी अच्छी लय में हैं, जिसका फायदा ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध होने वाला हैं।
वहीं रैना से पूछा गया कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ प्रैक्टिस मैच खेलने से मना कर दिया तब उन्होंने कहा कि क्रिकेट में आप जितना अभ्यास मैच खेलोगे, उतना ही फायदा होता हैं। वहीं महिला प्रिमियर लीग को लेकर भी उन्होंने कहा कि अंडर-19 महिला टीम ने पहला महिला अंडर-19 टी20 विश्व कर खिताब जीती हैं। हमारे देश की महिला खिलाड़ी हर खेल में अच्छा कर रही हैं और महिला आईपीएल की शुरुआत महिला क्रिकेटर्स के लिए बेहतरीन है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुरेश रैना ने भारतीय टीम के लिए काफी बड़ा योगदान दिया हैं। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जब भारतीय टीम 2011 में विश्व कप जीती थी तब रैना ने काफी अहम किरदार निभाया था। वहीं उन्हें मिस्टर आईपीएल के नाम से भी जाना जाता है। सुरेश रैना महेंद्र सिंह धोनी को अपना खास मानते थे और इसी वजह से उन्होंने भी माही के साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था।
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भारतीय टीम के पूर्व स्टार मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज सुरेश रैना ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली आगामी टेस्ट सीरीज को लेकर भविष्यवाणी की हैं। उन्होंने कहा है कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी काफी रोमांचक होने वाला हैं। सुरेश रैना कल एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के अंबेडकर स्टेडियम पहुंचे थे और मिशन औलिंपिक्स एनुअल स्पोर्ट्स मीट दो हज़ार तेईस की क्लोजिंग सेरेमनी का हिस्सा थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ सवालों के जवाब देते हुए कह रहे थे कि यह सीरीज काफी रोचक होने वाली है। हालांकि कौन सी टीम जीत हासिल करेगी,यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। वहीं रैना ने जडेजा के वापसी पर भी अपना बयान देते हुए कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि रवींद्र जडेजा ने भारतीय टीम में वापसी कर लिए हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में काफी बढ़िया प्रदर्शन किया हैं। टीम को इसका फायदा होगा। जडेजा के अलावा उन्होंने भारत के मुख्य खिलाड़ियों को लेकर भी कहा कि विराट कोहली शानदार फॉर्म में है और रोहित भी अच्छी लय में हैं, जिसका फायदा ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध होने वाला हैं। वहीं रैना से पूछा गया कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ प्रैक्टिस मैच खेलने से मना कर दिया तब उन्होंने कहा कि क्रिकेट में आप जितना अभ्यास मैच खेलोगे, उतना ही फायदा होता हैं। वहीं महिला प्रिमियर लीग को लेकर भी उन्होंने कहा कि अंडर-उन्नीस महिला टीम ने पहला महिला अंडर-उन्नीस टीबीस विश्व कर खिताब जीती हैं। हमारे देश की महिला खिलाड़ी हर खेल में अच्छा कर रही हैं और महिला आईपीएल की शुरुआत महिला क्रिकेटर्स के लिए बेहतरीन है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुरेश रैना ने भारतीय टीम के लिए काफी बड़ा योगदान दिया हैं। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जब भारतीय टीम दो हज़ार ग्यारह में विश्व कप जीती थी तब रैना ने काफी अहम किरदार निभाया था। वहीं उन्हें मिस्टर आईपीएल के नाम से भी जाना जाता है। सुरेश रैना महेंद्र सिंह धोनी को अपना खास मानते थे और इसी वजह से उन्होंने भी माही के साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था।
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खैरागढ़, 21 मार्च। महिला जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत थाना छुईखदान के ग्राम पुरैना में अभिव्यक्ति महिला जागरूकता कार्यक्रम आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में अभिव्यक्ति एप के बारे में विस्तार से जानकारी देकर उपस्थित गणमान्य महिलाओं को अभिव्यक्ति एप का डेमो देकर डाउनलोड कराया गया। इसके पश्चात हमर बेटी हमर मान, महिला संबधित अपराध, सायबर अपराध, यातायात नियमों , पॉक्सो एक्ट , घरेलू हिंसा के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दिया गया पश्चात महिलाओ एवं बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु नृत्य एवं खेल तथा रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
जिसमें बच्चों एवं महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिए । कार्यक्रम के अंत मे नृत्य, खेल एवं रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम, दृतीय एवं तृतीय स्थान आये प्रतिभागियों को उत्साहवर्धन हेतु इनाम देकर सम्मानित किया गया गया। कार्यक्रम आयोजन से ग्रामीण एवं उपस्थित बच्चों एवं महिलाओं में काफी हर्ष का माहौल था। उक्त कार्यक्रम में ग्राम पुरैना सहित आसपास के तीन ग्रामों की गणमान्य महिलाएं एवं बच्चे लगभग 250 की संख्या में उपस्थित रहे तथा थाना छुईखदान पुलिस स्टाफ उपस्थित रहे।
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खैरागढ़, इक्कीस मार्च। महिला जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत थाना छुईखदान के ग्राम पुरैना में अभिव्यक्ति महिला जागरूकता कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अभिव्यक्ति एप के बारे में विस्तार से जानकारी देकर उपस्थित गणमान्य महिलाओं को अभिव्यक्ति एप का डेमो देकर डाउनलोड कराया गया। इसके पश्चात हमर बेटी हमर मान, महिला संबधित अपराध, सायबर अपराध, यातायात नियमों , पॉक्सो एक्ट , घरेलू हिंसा के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दिया गया पश्चात महिलाओ एवं बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु नृत्य एवं खेल तथा रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों एवं महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिए । कार्यक्रम के अंत मे नृत्य, खेल एवं रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम, दृतीय एवं तृतीय स्थान आये प्रतिभागियों को उत्साहवर्धन हेतु इनाम देकर सम्मानित किया गया गया। कार्यक्रम आयोजन से ग्रामीण एवं उपस्थित बच्चों एवं महिलाओं में काफी हर्ष का माहौल था। उक्त कार्यक्रम में ग्राम पुरैना सहित आसपास के तीन ग्रामों की गणमान्य महिलाएं एवं बच्चे लगभग दो सौ पचास की संख्या में उपस्थित रहे तथा थाना छुईखदान पुलिस स्टाफ उपस्थित रहे।
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जान्हवी कपूर की बहन खुशी कपूर बिना बॉलीवुड में एंट्री के ही जबरदस्त फैन फॉलोइंग रखती हैं। हो भी क्यों ना स्टाइल के मामले में वो सबसे जुदा जो हैं। अभी हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। जिसमे उनका लुक देख कोई भी फैन हो जाए।
लॉकडाउन के समय में घर पर भी वो इतने स्टाइलिश कपड़ों में पोज दे रही हैं। जिसे देख उन्हें प्रिसेंज ऑफ बेडरूम कहने का दिल कर रहा है। पर्पल कलर की फ्लोरल ड्रेस खुशी पर शानदार लग रही है।
खुशी कपूर की ये ड्रेस हाउस ऑफ सीबी से ली गई है। जिसमे नेकलाइन पर इलास्टिक की डिटेलिंग की गई है। वहीं पफ स्लीव इसे क्यूट प्रिसेंज लुक दे रही है। जबकि बस्ट एरिया पर टाइट फिटिंग फिगर को भी फ्लांट करने में मदद कर रही है। खुशी कपूर की इस खूबसूरत फ्लोरल ड्रेस में ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए थाई हाई स्लिट भी ऐड की गई है। जो इस ड्रेस को पूरी तरह से परफेक्ट बना रही है।
वहीं खुशी इस शानदार ड्रेस को पहने अपने बेडरूम में पोज दे रही हैं। तस्वीरों में उनका मेकअप भी शानदार नजर आ रहा है। ब्लश चिक्स और विंग्ड आईलाइनर के साथ स्ट्रेट हेयर खूबसूरत लग रहे हैं।
बता दें कि खुशी कपूर लॉकडाउन के समय में भारत लौट आईं हैं। अक्सर ही खुशी आउटिंग करते नजर आ जाती हैं। जब वो अपने कुत्ते को टहलाने निकलती हैं। इसके साथ ही बहन जान्हवी कपूर के साथ साइकिलिंग करते हुए वो कैमरे में भी कैद हो जाती हैं। जिसमे उनका कैजुअल लुक हर किसी का ध्यान खींच लेता है।
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जान्हवी कपूर की बहन खुशी कपूर बिना बॉलीवुड में एंट्री के ही जबरदस्त फैन फॉलोइंग रखती हैं। हो भी क्यों ना स्टाइल के मामले में वो सबसे जुदा जो हैं। अभी हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। जिसमे उनका लुक देख कोई भी फैन हो जाए। लॉकडाउन के समय में घर पर भी वो इतने स्टाइलिश कपड़ों में पोज दे रही हैं। जिसे देख उन्हें प्रिसेंज ऑफ बेडरूम कहने का दिल कर रहा है। पर्पल कलर की फ्लोरल ड्रेस खुशी पर शानदार लग रही है। खुशी कपूर की ये ड्रेस हाउस ऑफ सीबी से ली गई है। जिसमे नेकलाइन पर इलास्टिक की डिटेलिंग की गई है। वहीं पफ स्लीव इसे क्यूट प्रिसेंज लुक दे रही है। जबकि बस्ट एरिया पर टाइट फिटिंग फिगर को भी फ्लांट करने में मदद कर रही है। खुशी कपूर की इस खूबसूरत फ्लोरल ड्रेस में ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए थाई हाई स्लिट भी ऐड की गई है। जो इस ड्रेस को पूरी तरह से परफेक्ट बना रही है। वहीं खुशी इस शानदार ड्रेस को पहने अपने बेडरूम में पोज दे रही हैं। तस्वीरों में उनका मेकअप भी शानदार नजर आ रहा है। ब्लश चिक्स और विंग्ड आईलाइनर के साथ स्ट्रेट हेयर खूबसूरत लग रहे हैं। बता दें कि खुशी कपूर लॉकडाउन के समय में भारत लौट आईं हैं। अक्सर ही खुशी आउटिंग करते नजर आ जाती हैं। जब वो अपने कुत्ते को टहलाने निकलती हैं। इसके साथ ही बहन जान्हवी कपूर के साथ साइकिलिंग करते हुए वो कैमरे में भी कैद हो जाती हैं। जिसमे उनका कैजुअल लुक हर किसी का ध्यान खींच लेता है।
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सराफ ने बताया कि तंबाकू विभिन्न बीमारियों के उत्पन्न होने का प्रमुख कारण होने के साथ ही विकास के लक्ष्यों को अर्जित करने में बाधक है। तंबाकू पदार्थों के उपयोग को हतोत्साहित कर सामान्य व युवा नागरिकों को संरक्षित करने, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 2003 में कोटपा एक्ट बनाया गया था।
स्वास्थ्य सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम नवीन जैन ने आदेश जारी कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालयों के अधीक्षकों, सभी जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला, उपजिला व सैटेलाइट अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों को कोटपा के तहत इन आदेशों की अनुपालना करवाने के निर्देश दिए हैं। इस कार्य के लिए स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. एस. एन. धौलपुरिया को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। जैन ने बताया कि उपस्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रवेश द्वारों, बैठक कक्ष, लिफ्ट इत्यादि महत्वपूर्ण स्थलों पर तंबाकू के उपयोग को प्रतिबंधित करने वाले संकेत चिन्ह अंकित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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सराफ ने बताया कि तंबाकू विभिन्न बीमारियों के उत्पन्न होने का प्रमुख कारण होने के साथ ही विकास के लक्ष्यों को अर्जित करने में बाधक है। तंबाकू पदार्थों के उपयोग को हतोत्साहित कर सामान्य व युवा नागरिकों को संरक्षित करने, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए वर्ष दो हज़ार तीन में कोटपा एक्ट बनाया गया था। स्वास्थ्य सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम नवीन जैन ने आदेश जारी कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालयों के अधीक्षकों, सभी जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला, उपजिला व सैटेलाइट अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों को कोटपा के तहत इन आदेशों की अनुपालना करवाने के निर्देश दिए हैं। इस कार्य के लिए स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. एस. एन. धौलपुरिया को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। जैन ने बताया कि उपस्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रवेश द्वारों, बैठक कक्ष, लिफ्ट इत्यादि महत्वपूर्ण स्थलों पर तंबाकू के उपयोग को प्रतिबंधित करने वाले संकेत चिन्ह अंकित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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टीकाकरण महाअभियान से पहले शहरवासियों को कोरोना का टीका लगवाने के लिए जागरूक करने स्वास्थ्य विभाग ने यमराज को शहर को सड़कों पर घुमाया। इस दौरान यमराज ने सीएमएचओ डॉ. पवन जैन और जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर से उन लोगों की सूची भी मांगी, जिन्होंने, टीकाकरण नहीं करवाया था। यमराज बना युवक लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करते हुए पूछ रहा था कि उन्होंने टीका लगवाया है या नहीं। जिन लोगों ने यह बताया कि उन्होंने अभी टीका नहीं लगवाया है। उन्हें उक्त यमराज का किरदार निभा रहे युवक ने आगाह किया कि या तो वह टीका लगवाएं या फिर यमपुरी के लिए तैयार हो जाएं। कुल मिलाकर प्रशासन लोगों को सम्पूर्ण टीकाकरण के लिए जागरूक करने का अलग-अलग तरह से प्रयास कर रहा है, ताकि लोग यह समझ सकें कि सम्पूर्ण टीकाकरण उनके लिए कितना जरूरी है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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टीकाकरण महाअभियान से पहले शहरवासियों को कोरोना का टीका लगवाने के लिए जागरूक करने स्वास्थ्य विभाग ने यमराज को शहर को सड़कों पर घुमाया। इस दौरान यमराज ने सीएमएचओ डॉ. पवन जैन और जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर से उन लोगों की सूची भी मांगी, जिन्होंने, टीकाकरण नहीं करवाया था। यमराज बना युवक लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करते हुए पूछ रहा था कि उन्होंने टीका लगवाया है या नहीं। जिन लोगों ने यह बताया कि उन्होंने अभी टीका नहीं लगवाया है। उन्हें उक्त यमराज का किरदार निभा रहे युवक ने आगाह किया कि या तो वह टीका लगवाएं या फिर यमपुरी के लिए तैयार हो जाएं। कुल मिलाकर प्रशासन लोगों को सम्पूर्ण टीकाकरण के लिए जागरूक करने का अलग-अलग तरह से प्रयास कर रहा है, ताकि लोग यह समझ सकें कि सम्पूर्ण टीकाकरण उनके लिए कितना जरूरी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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तथा देवसम्बन्धी, ज्ञानसम्बन्धी, और साधारण सम्बन्धी जो कुछ घर, दुकान, खेत, बाग, पाषाण, ईंट, काष्ठ, बांस, खपरैल, मिट्टी, खड़ी, चूना, रंग, रोगन, चन्दन, केसर, वरास, फूल, छाव, रकेवी, धूप धाता, कलश, वासकुम्पी, बालाकची, छत्र, सिंहासन, ध्वजा, चामर, चन्द्रवा, झालर, नंगारा, मृदंग, बाजा, समापना, सरावला, पडदा, कम्बलियां, वस्त्र, पाट, पाटला, चौकी, कुम्भ, आरसी, दीपक ढांकना, दियेसे पड़ा हुवा काजल, दीपक, मन्दिरकी छत पर नालसे पडता हुवा पानी, वगैरह कोई भी वस्तु अपने घर कार्यके उपयोग में कदापि न लेना। जिस प्रकार देव द्रव्य उपयोग में लेना योग्य नहीं वैसे ही उपरोक्त पदार्थ के जरा मात्र अंशका भी उपयोग एक चार या अनेक वार होनेसे भी देवद्रव्य के उपभोग का दोष अवश्य लगता है। याँद चामर, छत्र, सिंहासन समियाना, वगैरह मन्दिरकी कोई भी वस्तु अपने हाथसे मलीन हो या टूट फूट जाय तो बड़ा दोष लगता है। उपरोक्त मन्दिरकी कोई भी वस्तु श्रावकके उपयोग में नही आ सकती इस लिए कहा है कि,
विधाय दीपं देवार्ना । पुरस्ते न पुनर्नहि ।।
गृह कार्या कार्याणि । तीयँचोपि भवेद्यतः ।।
घर मन्दिर में भी देवके पास दीपक किये वाद उस दीपकसे कुछ भी घरके काम न करना। यदि करे तो वह प्राणी मर कर तिथंच होता है ।
"देव दीपकसे घरका काम करनेमें ऊंटनीका दृष्टान्त"
इन्द्रपुर नगरमे देवसेन नामक एक गृहस्थ रहता था। उसका धनसेन नामक ऊंट संभालने वाला एक नौकर था। उस धनसेन के घरसे एक ऊंटनी प्रतिदिन देवसेन के घर मा खड़ी रहती थी। धनसेन उसे बहुत भारता पीटता परन्तु देवसेन का घर वह नहीं छोडती थी। कदापि मार पीट कर उसे धनसेन अपने घर लेजाय और चाहे जैसे वन्धनसे बांधे तो उसे तोड़ कर भी वह फिर देवसेनके घर आ खड़ी रहती। कदाचित् ऐसा न बन सके तो बह धनसेन के घर कुछ नहीं खाती और डकरा कर सारे घरको गजमजा देती थी। अन्तमें देवसेन के घर आवे तब ही उसे शान्ति मिलती। यह देखाव देख कर देवसेन ने उसका मूल्य दे कर उसे अपने घरके आंगन आगे बांध रक्खी । वह देवसेन को देख कर बड़ी ही प्रसन्न होती। ऐसे करते हुए दोनोंको अरस परस प्रीति हो गई। किसी समय ज्ञानी गुरु मिले तब देवसेन ने पूछा महाराज इस ऊंटनीका मेरे साथ क्या सम्बन्ध है कि जिससे यह मेरा घर नहीं छोड़ती और मुझे देख कर प्रसन्न होती है। गुरुने कहा कि, पूर्व भवमें यह तेरी माता थी, तूने मन्दिर में प्रभुके आगे दीपक किया था उस दीपक के प्रकाशले इसने अपने घरके काम किये थे, तथा धूप धानामें सुलगते अगारसे इसने एक दफा चूव्हा सुलगाया था। उस कर्मसे यह मृत्यु पाकर ऊंटनी उत्पन्न हुई है, इससे तुझ पर स्नेह रखती है कहा है किः२४
जो जिावराण हेउ । दीवं धूवं च करित्र निअकज्जं ॥ मोहे कुणई मूढो । तिरियतं सो लाइ बहुसो ।।
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तथा देवसम्बन्धी, ज्ञानसम्बन्धी, और साधारण सम्बन्धी जो कुछ घर, दुकान, खेत, बाग, पाषाण, ईंट, काष्ठ, बांस, खपरैल, मिट्टी, खड़ी, चूना, रंग, रोगन, चन्दन, केसर, वरास, फूल, छाव, रकेवी, धूप धाता, कलश, वासकुम्पी, बालाकची, छत्र, सिंहासन, ध्वजा, चामर, चन्द्रवा, झालर, नंगारा, मृदंग, बाजा, समापना, सरावला, पडदा, कम्बलियां, वस्त्र, पाट, पाटला, चौकी, कुम्भ, आरसी, दीपक ढांकना, दियेसे पड़ा हुवा काजल, दीपक, मन्दिरकी छत पर नालसे पडता हुवा पानी, वगैरह कोई भी वस्तु अपने घर कार्यके उपयोग में कदापि न लेना। जिस प्रकार देव द्रव्य उपयोग में लेना योग्य नहीं वैसे ही उपरोक्त पदार्थ के जरा मात्र अंशका भी उपयोग एक चार या अनेक वार होनेसे भी देवद्रव्य के उपभोग का दोष अवश्य लगता है। याँद चामर, छत्र, सिंहासन समियाना, वगैरह मन्दिरकी कोई भी वस्तु अपने हाथसे मलीन हो या टूट फूट जाय तो बड़ा दोष लगता है। उपरोक्त मन्दिरकी कोई भी वस्तु श्रावकके उपयोग में नही आ सकती इस लिए कहा है कि, विधाय दीपं देवार्ना । पुरस्ते न पुनर्नहि ।। गृह कार्या कार्याणि । तीयँचोपि भवेद्यतः ।। घर मन्दिर में भी देवके पास दीपक किये वाद उस दीपकसे कुछ भी घरके काम न करना। यदि करे तो वह प्राणी मर कर तिथंच होता है । "देव दीपकसे घरका काम करनेमें ऊंटनीका दृष्टान्त" इन्द्रपुर नगरमे देवसेन नामक एक गृहस्थ रहता था। उसका धनसेन नामक ऊंट संभालने वाला एक नौकर था। उस धनसेन के घरसे एक ऊंटनी प्रतिदिन देवसेन के घर मा खड़ी रहती थी। धनसेन उसे बहुत भारता पीटता परन्तु देवसेन का घर वह नहीं छोडती थी। कदापि मार पीट कर उसे धनसेन अपने घर लेजाय और चाहे जैसे वन्धनसे बांधे तो उसे तोड़ कर भी वह फिर देवसेनके घर आ खड़ी रहती। कदाचित् ऐसा न बन सके तो बह धनसेन के घर कुछ नहीं खाती और डकरा कर सारे घरको गजमजा देती थी। अन्तमें देवसेन के घर आवे तब ही उसे शान्ति मिलती। यह देखाव देख कर देवसेन ने उसका मूल्य दे कर उसे अपने घरके आंगन आगे बांध रक्खी । वह देवसेन को देख कर बड़ी ही प्रसन्न होती। ऐसे करते हुए दोनोंको अरस परस प्रीति हो गई। किसी समय ज्ञानी गुरु मिले तब देवसेन ने पूछा महाराज इस ऊंटनीका मेरे साथ क्या सम्बन्ध है कि जिससे यह मेरा घर नहीं छोड़ती और मुझे देख कर प्रसन्न होती है। गुरुने कहा कि, पूर्व भवमें यह तेरी माता थी, तूने मन्दिर में प्रभुके आगे दीपक किया था उस दीपक के प्रकाशले इसने अपने घरके काम किये थे, तथा धूप धानामें सुलगते अगारसे इसने एक दफा चूव्हा सुलगाया था। उस कर्मसे यह मृत्यु पाकर ऊंटनी उत्पन्न हुई है, इससे तुझ पर स्नेह रखती है कहा है किःचौबीस जो जिावराण हेउ । दीवं धूवं च करित्र निअकज्जं ॥ मोहे कुणई मूढो । तिरियतं सो लाइ बहुसो ।।
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अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अंतिम संस्कार के लिए शव को राजघाट लेकर जाते लोग।
अमर उजाला के पत्रकार योगेश्वर सिंह को शहर के लोगों ने शुक्रवार को राप्ती नदी के राजघाट पर नम आंखों से अंतिम विदाई दी। पिता काशीनाथ सिंह ने जब सिसकियों के साथ कांपते हाथों से योगेश्वर की चिता को मुखाग्नि दी तो घाट पर उमड़ा जनसमूह भी सिसक पड़ा। जिंदादिल और मृदुभाषी योगेश्वर को श्रद्धांजलि देने के लिए घाट पर उमड़ी भीड़ उनकी लोकप्रियता की कहानी बयां कर रही थी।
सड़क हादसेमें घायल योगेश्वर का गुरुवार की देर शाम लखनऊ के सहारा हास्पिटल में निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को जब न्यू महेवा कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंचा तो समूचा इलाका लोगों की चीत्कार से गूंज उठा। पहले वैदिक औपचारिकता पूरी की गई, उसके बाद सैकड़ों की तादाद में लोग शव को लेकर राजघाट पहुंचे, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
घाट पर श्रद्धांजलि देने वालों में सदर सांसद महंत आदित्यनाथ, नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. सैयद जमाल, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. मोहसिन खान, महानगर अध्यक्ष कृष्ण कुमार त्रिपाठी, संजय सिंह, विपिन सिंह, बसपा नेता राजेश पांडेय, स्पोर्ट्स कॉलेज की प्रधानाचार्य संतोष रावत, सीओ कैंट ए. मिश्रा, अंतरराष्ट्रीय पहलवान पन्नेलाल यादव, रामाश्रय यादव, दिलीप कुमार, जर्नादन सिंह, चंद्रविजय सिंह, डॉ. त्रिलोचन रंजन, राजेश जायसवाल, जितेंद्र सैनी, रामभुआल कुशवाहा, रणंजय सिंह जुगनू, श्याम यादव, जिला पंचायत सदस्य पवन सिंह, क्रिकेट खिलाड़ी रीना सिंह, कोच विजय लक्ष्मी सिंह, सीमा विश्वकर्मा, अनुराधा सिंह, अभय सिंह आदि शामिल रहे।
अमर उजाला के पत्रकार योगेश्वर सिंह को शहर में विभिन्न संगठनों ने शोकसभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। शुक्रवार को सेंट एंड्रयूज कालेज में आयोजित फुटबाल मैच स्थगित कर दिया गया। भाजपा कार्यालय में हुई शोकसभा में नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त किया। क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ल एवं प्रवक्ता सत्येंद्र सिन्हा ने कहा कि पत्रकारिता जगत ने एक होनहार, मिलनसार व युवा पत्रकार खो दिया है। ईश्वर उनके परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें। भाजपा नेताओं ने दो मिनट का मौन भी रखा। इस दौरान जर्नादन तिवारी, कामेश्वर सिंह, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राहुल श्रीवास्तव, संतराज यादव, देवेंद्र पाल, विश्वजीताशु सिंह आसू, रमेश सिंह, राधेश्याम सिंह चिंतामणि, निर्मला द्विवेदी, अमिता गुप्ता, अनिता रानी, ओमप्रकाश शर्मा, देवेश श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
उधर, रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी की अध्यक्षता में हुई शोक सभा में क्षेत्रीय खेल अधिकारी एके पांडेय, हरीराम यादव, अनिल तिवारी, पीसी शुक्ला, प्रवीण कुमार, सीमा, विजय, लक्ष्मी सिंह आदि मौजूद थे। महाराणा प्रताप इंटर कालेज में भी दो मिनट का मौन रखा गया। यहां कृष्णकांत यादव, हरिशंकर गुप्ता, यशवंत सिंह, यागेंद्र नाथ यादव, ओम प्रकाश धर दुबे, किशोर कुमार जायसवाल, नियाज, मुरलीधर त्रिपाठी, अंगद यादव, रोहित आदि मौजूद थे। उधर, सेंट एंड्रयूज कालेज में शोक के चलते फुटबाल मैच स्थगित कर दिया गया। इस दौरान हुई शोक सभा में नसीम अहमद, शिव कुमार, गौतम सरकार, मनीष राना, विकास कुमार, कुबान अली, संजय चौहान, योगेंद्र प्रसाद आदि मौजूद थे।
पत्रकार योगेश्वर सिंह के निधन पर आर्यनगर व्यापार मंडल के सदस्यों ने शोक सभा की। दो मिनट मौन रहकर उनकी आत्मा के शांति की प्रार्थना की। आनंद शंकर, कवलजीत सिंह, शक्ति मोहन, सोनी अग्रवाल, अजय कुमार, शहनवाज, दीप अग्रवाल, अंकित, संजीव, नवोदित, राकेश गुप्ता आदि उपस्थित थे। बार एसोसिएशन की ओर से भी योगेश्वर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर अभिमन्यु सिंह, प्रियानंद सिंह आदि मौजूद थे।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ की जिला इकाई की तरफ से लोक निर्माण विभाग कार्यालय पर हुई सभा में शहीद सैनिकों और पत्रकार योगेश्वर को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि देने वालाें में अमरनाथ यादव, बृजेश कुमार श्रीवास्तव, शेखर शरण श्रीवास्तव, हरिनारायण पांडेय, संजीव कुमार गुप्ता, अखंड प्रताप सिंह, समीर पांडेय, उमेश श्रीवास्तव, मानदेय सिंह, रूपेश मिश्रा, राजेश राव, आरडी चतुर्वेदी, कौशल शुक्ला, रामप्रताप सिंह, रवींद्र कुंवर, दिनेश सिंह, रामकरन, अजय सिंह, मुरलीधर आदि शामिल थे।
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अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। अंतिम संस्कार के लिए शव को राजघाट लेकर जाते लोग। अमर उजाला के पत्रकार योगेश्वर सिंह को शहर के लोगों ने शुक्रवार को राप्ती नदी के राजघाट पर नम आंखों से अंतिम विदाई दी। पिता काशीनाथ सिंह ने जब सिसकियों के साथ कांपते हाथों से योगेश्वर की चिता को मुखाग्नि दी तो घाट पर उमड़ा जनसमूह भी सिसक पड़ा। जिंदादिल और मृदुभाषी योगेश्वर को श्रद्धांजलि देने के लिए घाट पर उमड़ी भीड़ उनकी लोकप्रियता की कहानी बयां कर रही थी। सड़क हादसेमें घायल योगेश्वर का गुरुवार की देर शाम लखनऊ के सहारा हास्पिटल में निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को जब न्यू महेवा कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंचा तो समूचा इलाका लोगों की चीत्कार से गूंज उठा। पहले वैदिक औपचारिकता पूरी की गई, उसके बाद सैकड़ों की तादाद में लोग शव को लेकर राजघाट पहुंचे, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। घाट पर श्रद्धांजलि देने वालों में सदर सांसद महंत आदित्यनाथ, नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. सैयद जमाल, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. मोहसिन खान, महानगर अध्यक्ष कृष्ण कुमार त्रिपाठी, संजय सिंह, विपिन सिंह, बसपा नेता राजेश पांडेय, स्पोर्ट्स कॉलेज की प्रधानाचार्य संतोष रावत, सीओ कैंट ए. मिश्रा, अंतरराष्ट्रीय पहलवान पन्नेलाल यादव, रामाश्रय यादव, दिलीप कुमार, जर्नादन सिंह, चंद्रविजय सिंह, डॉ. त्रिलोचन रंजन, राजेश जायसवाल, जितेंद्र सैनी, रामभुआल कुशवाहा, रणंजय सिंह जुगनू, श्याम यादव, जिला पंचायत सदस्य पवन सिंह, क्रिकेट खिलाड़ी रीना सिंह, कोच विजय लक्ष्मी सिंह, सीमा विश्वकर्मा, अनुराधा सिंह, अभय सिंह आदि शामिल रहे। अमर उजाला के पत्रकार योगेश्वर सिंह को शहर में विभिन्न संगठनों ने शोकसभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। शुक्रवार को सेंट एंड्रयूज कालेज में आयोजित फुटबाल मैच स्थगित कर दिया गया। भाजपा कार्यालय में हुई शोकसभा में नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त किया। क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ल एवं प्रवक्ता सत्येंद्र सिन्हा ने कहा कि पत्रकारिता जगत ने एक होनहार, मिलनसार व युवा पत्रकार खो दिया है। ईश्वर उनके परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें। भाजपा नेताओं ने दो मिनट का मौन भी रखा। इस दौरान जर्नादन तिवारी, कामेश्वर सिंह, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राहुल श्रीवास्तव, संतराज यादव, देवेंद्र पाल, विश्वजीताशु सिंह आसू, रमेश सिंह, राधेश्याम सिंह चिंतामणि, निर्मला द्विवेदी, अमिता गुप्ता, अनिता रानी, ओमप्रकाश शर्मा, देवेश श्रीवास्तव आदि मौजूद थे। उधर, रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी की अध्यक्षता में हुई शोक सभा में क्षेत्रीय खेल अधिकारी एके पांडेय, हरीराम यादव, अनिल तिवारी, पीसी शुक्ला, प्रवीण कुमार, सीमा, विजय, लक्ष्मी सिंह आदि मौजूद थे। महाराणा प्रताप इंटर कालेज में भी दो मिनट का मौन रखा गया। यहां कृष्णकांत यादव, हरिशंकर गुप्ता, यशवंत सिंह, यागेंद्र नाथ यादव, ओम प्रकाश धर दुबे, किशोर कुमार जायसवाल, नियाज, मुरलीधर त्रिपाठी, अंगद यादव, रोहित आदि मौजूद थे। उधर, सेंट एंड्रयूज कालेज में शोक के चलते फुटबाल मैच स्थगित कर दिया गया। इस दौरान हुई शोक सभा में नसीम अहमद, शिव कुमार, गौतम सरकार, मनीष राना, विकास कुमार, कुबान अली, संजय चौहान, योगेंद्र प्रसाद आदि मौजूद थे। पत्रकार योगेश्वर सिंह के निधन पर आर्यनगर व्यापार मंडल के सदस्यों ने शोक सभा की। दो मिनट मौन रहकर उनकी आत्मा के शांति की प्रार्थना की। आनंद शंकर, कवलजीत सिंह, शक्ति मोहन, सोनी अग्रवाल, अजय कुमार, शहनवाज, दीप अग्रवाल, अंकित, संजीव, नवोदित, राकेश गुप्ता आदि उपस्थित थे। बार एसोसिएशन की ओर से भी योगेश्वर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर अभिमन्यु सिंह, प्रियानंद सिंह आदि मौजूद थे। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ की जिला इकाई की तरफ से लोक निर्माण विभाग कार्यालय पर हुई सभा में शहीद सैनिकों और पत्रकार योगेश्वर को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि देने वालाें में अमरनाथ यादव, बृजेश कुमार श्रीवास्तव, शेखर शरण श्रीवास्तव, हरिनारायण पांडेय, संजीव कुमार गुप्ता, अखंड प्रताप सिंह, समीर पांडेय, उमेश श्रीवास्तव, मानदेय सिंह, रूपेश मिश्रा, राजेश राव, आरडी चतुर्वेदी, कौशल शुक्ला, रामप्रताप सिंह, रवींद्र कुंवर, दिनेश सिंह, रामकरन, अजय सिंह, मुरलीधर आदि शामिल थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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ट्रक में आग लगने के बाद एनएच-31 पर गाड़ियों के आने-जाने पर रोक लगा दिया गया। क्योकि सिलेंडर एक के बाद एक फट रहे थे। एसडीपीओ दिलीप कुमार ने बताया कि भागलपुर-खगड़िया सीमा पर एनएच-31 पर यह हादसा हुआ है।
भागलपुरःबिहार के भागलपुर में एक ट्रेक में आग लगने के बाद उसमें लदे एलपीजी सिलेंडर एक एक कर फट गए। इस घटना वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में सिलेंडर के धमाकों के आवाज को सुना जा सकता है। यह हादसा यहां मौजूद एक पेट्रोल पंप से 200-मीटर दूर हुआ जिसमें ट्रक जलकर राख हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रक के ड्राइवर की जलने से मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि यह हादसा एनएच-31 पर हुआ।
घटना रात के करीब 2. 30 से तीन बजे के आसपास की बताई जा रही है। गैस सिलेंडर के धमाके से पूरा इलाका दहल उठा। लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। वीडियो कुछ दूर से बनाया गया है। वीडियो में एक-एक कर सिलेंडरों में धमाके हो रहे हैं। आग में ट्रक जलकर खाक हो गया वहीं ड्राइवर की भी जलने से मौत हो गई। ड्राइवर का नाम मंटू यादव बताया जा रहा है जो मुंगेर के शंकरपुर गांव का रहनेवाला था। सूचना मिलने के बाद परिवार वाले घटनास्थल पर पहुंचे।
ट्रक में आग लगने के बाद एनएच-31 पर गाड़ियों के आने-जाने पर रोक लगा दिया गया। क्योकि सिलेंडर एक के बाद एक फट रहे थे। एसडीपीओ दिलीप कुमार ने बताया कि भागलपुर-खगड़िया सीमा पर एनएच-31 पर यह हादसा हुआ है। ट्रक में अचानक आग लग गई उसके बाद एक-एक कर सिलेंडर ब्लास्ट होने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और आग बुझाने के लिए चार दमकल की गाड़ियां भी पहुंची जो कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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ट्रक में आग लगने के बाद एनएच-इकतीस पर गाड़ियों के आने-जाने पर रोक लगा दिया गया। क्योकि सिलेंडर एक के बाद एक फट रहे थे। एसडीपीओ दिलीप कुमार ने बताया कि भागलपुर-खगड़िया सीमा पर एनएच-इकतीस पर यह हादसा हुआ है। भागलपुरःबिहार के भागलपुर में एक ट्रेक में आग लगने के बाद उसमें लदे एलपीजी सिलेंडर एक एक कर फट गए। इस घटना वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में सिलेंडर के धमाकों के आवाज को सुना जा सकता है। यह हादसा यहां मौजूद एक पेट्रोल पंप से दो सौ-मीटर दूर हुआ जिसमें ट्रक जलकर राख हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रक के ड्राइवर की जलने से मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि यह हादसा एनएच-इकतीस पर हुआ। घटना रात के करीब दो. तीस से तीन बजे के आसपास की बताई जा रही है। गैस सिलेंडर के धमाके से पूरा इलाका दहल उठा। लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। वीडियो कुछ दूर से बनाया गया है। वीडियो में एक-एक कर सिलेंडरों में धमाके हो रहे हैं। आग में ट्रक जलकर खाक हो गया वहीं ड्राइवर की भी जलने से मौत हो गई। ड्राइवर का नाम मंटू यादव बताया जा रहा है जो मुंगेर के शंकरपुर गांव का रहनेवाला था। सूचना मिलने के बाद परिवार वाले घटनास्थल पर पहुंचे। ट्रक में आग लगने के बाद एनएच-इकतीस पर गाड़ियों के आने-जाने पर रोक लगा दिया गया। क्योकि सिलेंडर एक के बाद एक फट रहे थे। एसडीपीओ दिलीप कुमार ने बताया कि भागलपुर-खगड़िया सीमा पर एनएच-इकतीस पर यह हादसा हुआ है। ट्रक में अचानक आग लग गई उसके बाद एक-एक कर सिलेंडर ब्लास्ट होने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और आग बुझाने के लिए चार दमकल की गाड़ियां भी पहुंची जो कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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सुपौल जिले में एसएसबी की 45वीं बटालियन के वीरपुर कैंप में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। करंट लगने से 3 ट्रेनी जवानों की मौत हो गई जबकि आठ झुलस कर घायल हो गए। इसमें से चार घायलों को रेफर कर दिया गया है। हादसे के बाद कैंप में अफरा तफरी का माहौल है।
बताया जा रही है कि सुपौल में शुक्रवार को बीरपुर स्थित SSB कैम्प में हाई वोल्टेज करंट लगने से SSB 45वीं बटालियन के 3 जवानों की मौत हो गई, जबकि 9 जवान घायल हो गए है. बताया जा रहा है कि वीरपुर स्थित SSB के कैंप में सभी जवान बिजली करंट की चपेट में आए हैं. घटना के संबंध में सशस्त्र सीमा बल की ओर से जानकारी दी गई कि बिजली विभाग को ट्रेनिंग वाले मैदान से हाई वोल्टेज तार और पोल को हटाने के लिए बारंबार पत्र लिखा गया, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों के कान के ऊपर जूं तक नहीं रेंगी. इसका नतीजा ये हुआ कि शुक्रवार को तार टूटकर गिर गया, जिसकी चपेट में ट्रेनिंग लेने वाले जवान आ गए।
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सुपौल जिले में एसएसबी की पैंतालीसवीं बटालियन के वीरपुर कैंप में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। करंट लगने से तीन ट्रेनी जवानों की मौत हो गई जबकि आठ झुलस कर घायल हो गए। इसमें से चार घायलों को रेफर कर दिया गया है। हादसे के बाद कैंप में अफरा तफरी का माहौल है। बताया जा रही है कि सुपौल में शुक्रवार को बीरपुर स्थित SSB कैम्प में हाई वोल्टेज करंट लगने से SSB पैंतालीसवीं बटालियन के तीन जवानों की मौत हो गई, जबकि नौ जवान घायल हो गए है. बताया जा रहा है कि वीरपुर स्थित SSB के कैंप में सभी जवान बिजली करंट की चपेट में आए हैं. घटना के संबंध में सशस्त्र सीमा बल की ओर से जानकारी दी गई कि बिजली विभाग को ट्रेनिंग वाले मैदान से हाई वोल्टेज तार और पोल को हटाने के लिए बारंबार पत्र लिखा गया, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों के कान के ऊपर जूं तक नहीं रेंगी. इसका नतीजा ये हुआ कि शुक्रवार को तार टूटकर गिर गया, जिसकी चपेट में ट्रेनिंग लेने वाले जवान आ गए।
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अब अवनी के पास कोई और रास्ता नहीं बचा था,क्योंकि पवन दिन-रात वंशिका को याद करता रहता था और वो नहीं चाहती थी पवन की और हालत बिगड़े इसलिए उसने एक फैसला लिया और ये फैसला था वंशिका को चिट्ठी लिखना,
अवनी (वंशिका को चिट्ठी लिखती है)- हाय !!मेरा नाम अवनी है, और मैं दिल्ली शहर की रहने वाली हूं, मैं जानती हूं कि तुम्हारा नाम वंशिका हैं, अब तुम्हें इस बात की हैरानी हो रही होगी कि मुझे तुम्हारा नाम कैसे पता,
दरअसल मैं और पवन एक दूसरे से प्यार करते हैं,और हमारी जल्द शादी भी होने वाली थी, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, हमारी शादी के कुछ दिन पहले ही पवन का एक्सीडेंट हो गया और उसकी याददाश्त चली गई वो अपना present भूल चुका है, उससे सिर्फ अपना past याद है,
जिस मैं नही तुम हो और अब वो तुम्हें पागलों की तरह याद करता है क्योंकि कभी वो तुमसे प्यार करता था, वो बात अलग हैं कि तुमने उसके प्यार को समझा नही, पर अब शायद भगवान ने तुम्हे एक chance दिया है,अब उसके लिए कुछ करने का बस मैं यह चाहती हूं,
तुम पवन की याददाश्त वापस लाने में मेरी मदद करो तुम्हें जल्दी ही सिकर आना होगा पवन के घर, तुम्हारे आने से पवन ठीक हो सकता हैं, बस एक ही ज़िद पकड़ के बैठा हैं कि वो तुमसे मिलना चाहता है, किसी की नही सुन रहा बस दिन रात तुम्हें याद करता रहता हैं, मैं आशा करती हूं कि तुम मेरी बात को समझ को समझो और इंडिया आ जाओ मैं तुम्हारे जवाब का इंतजार करूंगी.
अवनी वह चिट्ठी post office जाकर पोस्ट कर देती है और रोज हर एक नई उम्मीद में होती है उसकी चिट्ठी का जवाब आएगा वह रोज गेट की तरफ देखती है कि कोई पोस्टमैन उसकी छुट्टी उसे देकर जाए पर ऐसा नहीं होता,
काफी दिन बीत जाते हैं पर उस चिट्ठी का कोई जवाब नहीं आता फिर वह खुद post office जाकर वहां पूछती है कि क्या उसकी लंदन से कोई चिट्ठी आई है?? पर वहां पर भी कुछ पता नहीं चल पाता वह बहुत निराश हो जाती है उसे समझ नहीं आता कि अब वह क्या करेगी??
फिर एक दिन योगेंद्र जी का अवनी को फ़ोन आता हैं,
योगेंद्र जी (परेशान हो कर)-अवनी तुम कहाँ हों?? तुम जल्दी से घर आ जाओ पवन की हालत खरब होती जा रही हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ??
अवनी (घबरा कर)- आप चिंता मत कीजिए मैं बस वहाँ आती हूँ और पवन से बात करती हूँ.
अवनी पवन के घर के लिए निकल जाती हैं।
जब अपनी पवन के घर पहुंचती हैं तो वह देखती है कि योगेंद्र जी और माया जी एक कोने में बैठे होते हैं, अवनी को वह दोनों बहुत परेशान लग रहे होते हैं अवनी उनके पास जाती है।
अवनी- अंकल,आंटी क्या हुआ सब ठीक तो है ना?
माया जी (परेशान हों कर )- कुछ ठीक नहीं है अवनी बेटा उसने तो ज़िद पकड़ ली कि जब तक वंशिका से नहीं मिलेगा, और अब सो उसने दवाइयां भी छोड़ दी, तुम ही बताओ बेटा अगर वह दवाईया नहीं लेगा तो ठीक कैसे होगा,
अब हम वंशिका को कहां से ढूंढ कर लाए वह इस बात को समझने के लिए तैयार ही नहीं है, मेरा तो दिल बैठा जा रहा है इन सब चक्कर में कहीं मैं अपने बेटे को ही ना खो दूं,
हमें समझ नहीं आ रहा कि हम उसे कैसे समझाएं ना कुछ खा रहा है ना ढंग से हम से बात कर रहा हैं बस एक ही नाम है जुबान पर वंशिका! वंशिका!.
योगेंद्र जी- हां बेटा माया बिल्कुल ठीक कह रही है अब हम हिम्मत हार रहे हैं बेटा हम उसे से घर से बाहर नहीं जाने दे सकते उसकी हालत ठीक नहीं है पर वो यह बात सुनने को तैयार नहीं है, कहता हैं कि हमने उसे घर में कैद करके रखा है अब हम उसे कैसे बताएं कि हमें उसकी कितनी चिंता है, उसे हम नहीं बस वो लड़की दिख रही है जिसके लिए वह अपनी जिंदगी दाऊ पर लगाने के लिए तैयार हैं, अवनी बताओ बेटा हम क्या करें?
अवनी( गुस्से से)- आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं भी जाकर बात करती हूं कि वह यह सब जो कर रहा है ना ना यह उसके लिए ठीक है और ना ही हम सबके लिए ठीक है उसे समझाना बहुत जरूरी है मैं बस अभी आती हूं।
अवनी पवन के कमरे में जाती है जब कमरे में पवन को देखती है तो वह सोफे पर बैठी आंखें मीचे एक गहरी सोच में खोया हुआ होता हैं अवनी जब उसे देखती है तो उसका गुस्सा शांत हो जाता है।
अवनी- पवन?
अवनी उसे धीरे से पुकारती है,
पवन अपनी आंखें खोलता है और अवनी की तरफ देखता है,
पवन - अब तुम यहां क्या कर रही हो तुम भी मुझे समझाने आई हो क्या? मैं किसी की नहीं सुनने वाला और तुम्हारी तो बिल्कुल भी नहीं मुझे वंशिका से मिलना है जब तक मैं वंशिका से नहीं मिल लेता, मैं कोई दवाई नहीं खाऊंगा चाहे कुछ भी हो जाए इसलिए तुम अपना time मत खराब करो और यहां से चली जाओ मुझे कुछ नहीं सुनना,
अवनी- देखो मैं जानती हूं कि तुम वंशिका से बहुत प्यार करते हो उससे मिलना चाहते हो उससे बात करना चाहते हो पर अभी वह यहां नहीं है,और तुम उसके लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हो कम से कम अपने मां बाप के बारे में तो सोचो तो तुमसे कितना प्यार करते हैं,पहले जैसे कि उन्होंने तुम्हें खो ही दिया था,पर वो दुबारा तुम्हें खोना नहीं चाहते इसलिए तुम्हें वह कहीं जाने नहीं दे रहे हैं, पर एक बार उनकी तरफ देखो और उनकी तरह सोचो तब तुम्हें पता चलेगा कि वह अपनी जगह सही है, इसलिए कह रही हो please यह दवाइयां खा लो, और रही वंशिका की बात तो मैं तुम्हें बता दूं वो तुमसे अब प्यार नहीं करती हैं मैंने उसे चिट्ठी लिखी थी तुम्हारी हालत के बारे में बताया फिर भी उसने मेरी चिट्ठी को कोई जवाब नहीं दिया, वह अपनी लाइफ में आगे बढ़ चुकी है फिर तुम क्यों पीछे पड़े हो ?
एक बार अपने मां बाप के बारे में सोच कर देखो वो तुमसे बहुत प्यार करते हैं उनसे ज्यादा प्यार तुम्हें कोई और नहीं कर सकता वो लड़की भी नहीं, अगर उसे तुम्हारी फिक्र होती तो तुमसे मिलने जरूर आती पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, मेरी बात मान जाओ यह दवाई ले लो और अपना ध्यान रखो पवन.
पवन को अवनी की बातें सुनकर उस पर गुस्सा आता है अवनी का हाथ पकड़ के बाहर की और लाता है।
पवन (गुस्से से)- यह मनगढ़ंत कहानियां बनाना बंद करो और मुझे वंशिका के खिलाफ भड़काना भी,तुम्हें क्या पाता कि वो मुझसे कितना प्यार करती थी, अच्छा अब समझ में आया कि तुम यह सब मुझसे क्यों कह रही हो मैं बर्दाश्त नहीं हो रहा ना तुम्हें जलन हो रही है कि कि मैं तुमसे नहीं उससे प्यार करता हूं मुझे नहीं पता कि तुम कौन हो क्या हमारे बीच क्या था वह मुझे कुछ भी याद नहीं और ना ही मैं याद करना चाहता हूं मुझे सिर्फ वंशिका से प्यार है और मैं उसी के साथ अपनी जिंदगी जीना चाहता हूं, इसलिए अपनी बकवास बंद करो और यहां से चली जाओ और अब दुबारा वंशिका के खिलाफ एक word भी बोला ना तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा,
अवनी (रोते हुए)- मेरा यकीन करो मैं सच कह रही हूं मैंने उससे मदद मांगी थी पर उसने कोई जवाब नहीं दिया मैं सच बोल रही हूं, अच्छा तुम यह चाहते हों ना कि मैं यहां से चली जाऊं तो ठीक है मैं चली जाऊंगी पर तुम दवाइयां खा लो प्लीज मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं.
पवन (चिढ़ते हुए)- यह सब नाटक मेरे सामने मत करो मुझे कोई दवाई नहीं खानी जब तक मैं वंशिका से नहीं मिलूंगा, और मैं इतना कमजोर नहीं हूं कि कुछ दिन दवाइयां नहीं खाऊंगा तो मर जाऊं मैं अपने आप को संभाल लूंगा तुम्हें मेरी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,
पवन अवनी की हाथ से दवाइयां फेंक देता है, ये सब कुछ पवन के मां-बाप देख रहे होते हैं, और वह दवाइयां जाकर बाहर खड़ी दरवाजे पर एक लड़की के पैरों पर जाकर गिरती है,
क्या वंशिका सच में अवनी की मदद करने के लिए आई है या उसके पीछे कोई उसका मकसद है???
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अब अवनी के पास कोई और रास्ता नहीं बचा था,क्योंकि पवन दिन-रात वंशिका को याद करता रहता था और वो नहीं चाहती थी पवन की और हालत बिगड़े इसलिए उसने एक फैसला लिया और ये फैसला था वंशिका को चिट्ठी लिखना, अवनी - हाय !!मेरा नाम अवनी है, और मैं दिल्ली शहर की रहने वाली हूं, मैं जानती हूं कि तुम्हारा नाम वंशिका हैं, अब तुम्हें इस बात की हैरानी हो रही होगी कि मुझे तुम्हारा नाम कैसे पता, दरअसल मैं और पवन एक दूसरे से प्यार करते हैं,और हमारी जल्द शादी भी होने वाली थी, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, हमारी शादी के कुछ दिन पहले ही पवन का एक्सीडेंट हो गया और उसकी याददाश्त चली गई वो अपना present भूल चुका है, उससे सिर्फ अपना past याद है, जिस मैं नही तुम हो और अब वो तुम्हें पागलों की तरह याद करता है क्योंकि कभी वो तुमसे प्यार करता था, वो बात अलग हैं कि तुमने उसके प्यार को समझा नही, पर अब शायद भगवान ने तुम्हे एक chance दिया है,अब उसके लिए कुछ करने का बस मैं यह चाहती हूं, तुम पवन की याददाश्त वापस लाने में मेरी मदद करो तुम्हें जल्दी ही सिकर आना होगा पवन के घर, तुम्हारे आने से पवन ठीक हो सकता हैं, बस एक ही ज़िद पकड़ के बैठा हैं कि वो तुमसे मिलना चाहता है, किसी की नही सुन रहा बस दिन रात तुम्हें याद करता रहता हैं, मैं आशा करती हूं कि तुम मेरी बात को समझ को समझो और इंडिया आ जाओ मैं तुम्हारे जवाब का इंतजार करूंगी. अवनी वह चिट्ठी post office जाकर पोस्ट कर देती है और रोज हर एक नई उम्मीद में होती है उसकी चिट्ठी का जवाब आएगा वह रोज गेट की तरफ देखती है कि कोई पोस्टमैन उसकी छुट्टी उसे देकर जाए पर ऐसा नहीं होता, काफी दिन बीत जाते हैं पर उस चिट्ठी का कोई जवाब नहीं आता फिर वह खुद post office जाकर वहां पूछती है कि क्या उसकी लंदन से कोई चिट्ठी आई है?? पर वहां पर भी कुछ पता नहीं चल पाता वह बहुत निराश हो जाती है उसे समझ नहीं आता कि अब वह क्या करेगी?? फिर एक दिन योगेंद्र जी का अवनी को फ़ोन आता हैं, योगेंद्र जी -अवनी तुम कहाँ हों?? तुम जल्दी से घर आ जाओ पवन की हालत खरब होती जा रही हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ?? अवनी - आप चिंता मत कीजिए मैं बस वहाँ आती हूँ और पवन से बात करती हूँ. अवनी पवन के घर के लिए निकल जाती हैं। जब अपनी पवन के घर पहुंचती हैं तो वह देखती है कि योगेंद्र जी और माया जी एक कोने में बैठे होते हैं, अवनी को वह दोनों बहुत परेशान लग रहे होते हैं अवनी उनके पास जाती है। अवनी- अंकल,आंटी क्या हुआ सब ठीक तो है ना? माया जी - कुछ ठीक नहीं है अवनी बेटा उसने तो ज़िद पकड़ ली कि जब तक वंशिका से नहीं मिलेगा, और अब सो उसने दवाइयां भी छोड़ दी, तुम ही बताओ बेटा अगर वह दवाईया नहीं लेगा तो ठीक कैसे होगा, अब हम वंशिका को कहां से ढूंढ कर लाए वह इस बात को समझने के लिए तैयार ही नहीं है, मेरा तो दिल बैठा जा रहा है इन सब चक्कर में कहीं मैं अपने बेटे को ही ना खो दूं, हमें समझ नहीं आ रहा कि हम उसे कैसे समझाएं ना कुछ खा रहा है ना ढंग से हम से बात कर रहा हैं बस एक ही नाम है जुबान पर वंशिका! वंशिका!. योगेंद्र जी- हां बेटा माया बिल्कुल ठीक कह रही है अब हम हिम्मत हार रहे हैं बेटा हम उसे से घर से बाहर नहीं जाने दे सकते उसकी हालत ठीक नहीं है पर वो यह बात सुनने को तैयार नहीं है, कहता हैं कि हमने उसे घर में कैद करके रखा है अब हम उसे कैसे बताएं कि हमें उसकी कितनी चिंता है, उसे हम नहीं बस वो लड़की दिख रही है जिसके लिए वह अपनी जिंदगी दाऊ पर लगाने के लिए तैयार हैं, अवनी बताओ बेटा हम क्या करें? अवनी- आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं भी जाकर बात करती हूं कि वह यह सब जो कर रहा है ना ना यह उसके लिए ठीक है और ना ही हम सबके लिए ठीक है उसे समझाना बहुत जरूरी है मैं बस अभी आती हूं। अवनी पवन के कमरे में जाती है जब कमरे में पवन को देखती है तो वह सोफे पर बैठी आंखें मीचे एक गहरी सोच में खोया हुआ होता हैं अवनी जब उसे देखती है तो उसका गुस्सा शांत हो जाता है। अवनी- पवन? अवनी उसे धीरे से पुकारती है, पवन अपनी आंखें खोलता है और अवनी की तरफ देखता है, पवन - अब तुम यहां क्या कर रही हो तुम भी मुझे समझाने आई हो क्या? मैं किसी की नहीं सुनने वाला और तुम्हारी तो बिल्कुल भी नहीं मुझे वंशिका से मिलना है जब तक मैं वंशिका से नहीं मिल लेता, मैं कोई दवाई नहीं खाऊंगा चाहे कुछ भी हो जाए इसलिए तुम अपना time मत खराब करो और यहां से चली जाओ मुझे कुछ नहीं सुनना, अवनी- देखो मैं जानती हूं कि तुम वंशिका से बहुत प्यार करते हो उससे मिलना चाहते हो उससे बात करना चाहते हो पर अभी वह यहां नहीं है,और तुम उसके लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हो कम से कम अपने मां बाप के बारे में तो सोचो तो तुमसे कितना प्यार करते हैं,पहले जैसे कि उन्होंने तुम्हें खो ही दिया था,पर वो दुबारा तुम्हें खोना नहीं चाहते इसलिए तुम्हें वह कहीं जाने नहीं दे रहे हैं, पर एक बार उनकी तरफ देखो और उनकी तरह सोचो तब तुम्हें पता चलेगा कि वह अपनी जगह सही है, इसलिए कह रही हो please यह दवाइयां खा लो, और रही वंशिका की बात तो मैं तुम्हें बता दूं वो तुमसे अब प्यार नहीं करती हैं मैंने उसे चिट्ठी लिखी थी तुम्हारी हालत के बारे में बताया फिर भी उसने मेरी चिट्ठी को कोई जवाब नहीं दिया, वह अपनी लाइफ में आगे बढ़ चुकी है फिर तुम क्यों पीछे पड़े हो ? एक बार अपने मां बाप के बारे में सोच कर देखो वो तुमसे बहुत प्यार करते हैं उनसे ज्यादा प्यार तुम्हें कोई और नहीं कर सकता वो लड़की भी नहीं, अगर उसे तुम्हारी फिक्र होती तो तुमसे मिलने जरूर आती पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, मेरी बात मान जाओ यह दवाई ले लो और अपना ध्यान रखो पवन. पवन को अवनी की बातें सुनकर उस पर गुस्सा आता है अवनी का हाथ पकड़ के बाहर की और लाता है। पवन - यह मनगढ़ंत कहानियां बनाना बंद करो और मुझे वंशिका के खिलाफ भड़काना भी,तुम्हें क्या पाता कि वो मुझसे कितना प्यार करती थी, अच्छा अब समझ में आया कि तुम यह सब मुझसे क्यों कह रही हो मैं बर्दाश्त नहीं हो रहा ना तुम्हें जलन हो रही है कि कि मैं तुमसे नहीं उससे प्यार करता हूं मुझे नहीं पता कि तुम कौन हो क्या हमारे बीच क्या था वह मुझे कुछ भी याद नहीं और ना ही मैं याद करना चाहता हूं मुझे सिर्फ वंशिका से प्यार है और मैं उसी के साथ अपनी जिंदगी जीना चाहता हूं, इसलिए अपनी बकवास बंद करो और यहां से चली जाओ और अब दुबारा वंशिका के खिलाफ एक word भी बोला ना तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा, अवनी - मेरा यकीन करो मैं सच कह रही हूं मैंने उससे मदद मांगी थी पर उसने कोई जवाब नहीं दिया मैं सच बोल रही हूं, अच्छा तुम यह चाहते हों ना कि मैं यहां से चली जाऊं तो ठीक है मैं चली जाऊंगी पर तुम दवाइयां खा लो प्लीज मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं. पवन - यह सब नाटक मेरे सामने मत करो मुझे कोई दवाई नहीं खानी जब तक मैं वंशिका से नहीं मिलूंगा, और मैं इतना कमजोर नहीं हूं कि कुछ दिन दवाइयां नहीं खाऊंगा तो मर जाऊं मैं अपने आप को संभाल लूंगा तुम्हें मेरी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, पवन अवनी की हाथ से दवाइयां फेंक देता है, ये सब कुछ पवन के मां-बाप देख रहे होते हैं, और वह दवाइयां जाकर बाहर खड़ी दरवाजे पर एक लड़की के पैरों पर जाकर गिरती है, क्या वंशिका सच में अवनी की मदद करने के लिए आई है या उसके पीछे कोई उसका मकसद है???
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इस मौसम का खास फल है सेब। सेब की जितनी किस्में हैं, उतना ही फायदेमंद है सेब खाना (Apple benefits in type 2 diabetes)। डॉक्टर अकसर बरसों पुरानी कहावत दोहराते हैं इसके फायदे गिनवाते हैं। इन दिनों बाजार में सेब आने शुरू हो गए हैं। इस मौसम में सेब को अपनी डाइट में शामिल करना सिर्फ आपकी सेहत ही नहीं बल्कि सुंदरता के लिए भी बहुत फायदेमंद है। आइए जानते हैं सेब खाने के फायदे (Apple benefits in type 2 diabetes)।
सेब में मौजूद पोषक तत्व (Apple benefits in type 2 diabetes)
यह फल पोषक तत्वों का खजाना है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, शर्करा, डायटरी फाइबर, वसा, प्रोटीन, विटामिन, थायमीन (विटामिन बी 1), राइबोफ्लेविन (विटामिन बी 2), नायसिन (विटामिन बी 3), पैंटोथैनिक अम्ल (बी 5), विटामिन बी 6, फोलेट (विटामिन बी), विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, मैगनीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, जस्ता आदि मौजूद होते हैं। जो एक साथ शरीर को कई सारे फायदे देते हैं।
क्या है टाइप 2 डायबिटीज (Apple benefits in type 2 diabetes)
टाइप 2 डायबिटीज अमूमन मोटापा, हाइपरटेंशन, नींद की कमी और खराब लाइफस्टाइल की वजह से होती है। कभी-कभी फैमिली हिस्ट्री भी इसके लिए जिम्मेदार होती है। इसमें शरीर में या तो इंसुलिन कम बनता है या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं। टाइप 2 के लिए चूंकि खराब जीवनशैली जिम्मेदार है इसलिए यह कभी भी हो सकती है। पर अमूमन यह वयस्क लोगों में होती है।
टाइप 2 डायबिटीज में सेब (Apple benefits in type 2 diabetes)
जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज है या जो डायबिटीज की बॉर्डर लाइन पर हैं उन्हें अपनी डाइट में सेब को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक मिठास होती है। जो आपके ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करती है। ध्यान रहें डायबिटीज में शुगर लेवल कम या ज्यादा होना दोनों ही खतरनाक है। जबकि सेब इसे नियंत्रित करके रखता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल खाना सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है। वे फल जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है वे ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखते हैं। सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स केवल 36 होता है।
यूं तो सेब कभी भी खाया जाए यह सेहत के लिए फायदेमंद ही होता है। इसे आप चाहें तो शाम के स्नैक्स में भी शामिल कर सकते हैं। डिनर में खीरे-प्याज के सलाद की बजाए आप सेब का सलाद भी खा सकते हैं। पर सुबह खाली पेट सेब खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। जो लोग खाली पेट रोजाना सुबह 1 सेब का सेवन करते हैं, उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है। इसके अलावा पाचन तंत्र भी इससे दुरूस्त रहता है और आप ओवर ईटिंग से बच जाते हैं।
Total Wellness is now just a click away.
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इस मौसम का खास फल है सेब। सेब की जितनी किस्में हैं, उतना ही फायदेमंद है सेब खाना । डॉक्टर अकसर बरसों पुरानी कहावत दोहराते हैं इसके फायदे गिनवाते हैं। इन दिनों बाजार में सेब आने शुरू हो गए हैं। इस मौसम में सेब को अपनी डाइट में शामिल करना सिर्फ आपकी सेहत ही नहीं बल्कि सुंदरता के लिए भी बहुत फायदेमंद है। आइए जानते हैं सेब खाने के फायदे । सेब में मौजूद पोषक तत्व यह फल पोषक तत्वों का खजाना है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, शर्करा, डायटरी फाइबर, वसा, प्रोटीन, विटामिन, थायमीन , राइबोफ्लेविन , नायसिन , पैंटोथैनिक अम्ल , विटामिन बी छः, फोलेट , विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, मैगनीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, जस्ता आदि मौजूद होते हैं। जो एक साथ शरीर को कई सारे फायदे देते हैं। क्या है टाइप दो डायबिटीज टाइप दो डायबिटीज अमूमन मोटापा, हाइपरटेंशन, नींद की कमी और खराब लाइफस्टाइल की वजह से होती है। कभी-कभी फैमिली हिस्ट्री भी इसके लिए जिम्मेदार होती है। इसमें शरीर में या तो इंसुलिन कम बनता है या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं। टाइप दो के लिए चूंकि खराब जीवनशैली जिम्मेदार है इसलिए यह कभी भी हो सकती है। पर अमूमन यह वयस्क लोगों में होती है। टाइप दो डायबिटीज में सेब जिन लोगों को टाइप दो डायबिटीज है या जो डायबिटीज की बॉर्डर लाइन पर हैं उन्हें अपनी डाइट में सेब को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक मिठास होती है। जो आपके ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करती है। ध्यान रहें डायबिटीज में शुगर लेवल कम या ज्यादा होना दोनों ही खतरनाक है। जबकि सेब इसे नियंत्रित करके रखता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल खाना सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है। वे फल जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है वे ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखते हैं। सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स केवल छत्तीस होता है। यूं तो सेब कभी भी खाया जाए यह सेहत के लिए फायदेमंद ही होता है। इसे आप चाहें तो शाम के स्नैक्स में भी शामिल कर सकते हैं। डिनर में खीरे-प्याज के सलाद की बजाए आप सेब का सलाद भी खा सकते हैं। पर सुबह खाली पेट सेब खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। जो लोग खाली पेट रोजाना सुबह एक सेब का सेवन करते हैं, उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है। इसके अलावा पाचन तंत्र भी इससे दुरूस्त रहता है और आप ओवर ईटिंग से बच जाते हैं। Total Wellness is now just a click away.
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फूलों की दुकानें और घर संग्रह अक्सर पाया में बहुत ही आकर्षक फूल लग रहा है मोटी मांसल साथ उपजी और मजबूत, विश्वास है सभी दिशाओं में जमीन, चमकदार, गहरे हरे रंग की, चमड़े, काँटेदार पत्तियों के साथ कवर से बाहर चिपके हुए। यह संयंत्र - Zamioculcas। उन की देखभाल, सरल, सरल संयंत्र है, इसलिए घर फूलों की खेती के प्रशंसकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। बाहरी पर्यावरण की स्थिति और देखभाल अफ्रीकी रेगिस्तान में अपने उद्भव के कारण करने के लिए उदार सजावटी फूल। शाइनी तनों और पत्तियों मोम की एक परत है, जो परिसर यह भी भयानक नहीं है में नमी, उच्च तापमान और शुष्क हवा को बनाए रखने में मदद करता है के साथ कवर किया जाता है। और फिर भी, के लिए संयंत्र आकर्षक लग रहे हैं, यह स्वस्थ और मजबूत था, वहाँ उनके लिए देखभाल के कुछ नियमों, जो मुख्य रूप से पानी और वातावरण के तापमान शासन के साथ पालन करने के लिए कम कर रहे हैं, साथ ही उर्वरक आवेदन के समय और रोशनी का स्तर है।
यह संयंत्र गर्मी और अच्छा प्रकाश प्यार करता है। मजबूत चमड़े पत्ते उज्ज्वल से डरते नहीं हैं सूरज की रोशनी। गर्मियों के दौरान वह अक्सर पसंद है, लेकिन मध्यम पानी, और परिवेश के तापमान के बारे में बीस डिग्री कम है। मैं सूरज, प्रकाश और गर्मी तथ्य यह है कि दक्षिण की ओर, एक उज्ज्वल खुली जगह है संयंत्र के सामान्य विकास के लिए सबसे उपयुक्त में परिलक्षित प्यार करता हूँ। वसंत, ग्रीष्म और शरद ऋतु की शुरुआत के दौरान Zamioculcas नियमित निषेचन उर्वरक की जरूरत है। इस संयंत्र के लिए सबसे उपयुक्त विशेषता भंडार में खरीदा जा सकता है नागफनी के लिए पूर्ण उर्वरक कर रहे हैं। "बाल" अफ्रीकी रेगिस्तान, पसंद करते हैं सबसे आसान Zamioculcas सर्दियों में परवाह है। साल के इस समय में पानी यह यथासंभव कम किया जाना चाहिए, केवल जब बर्तन में गेंद भूमि बहुत शुष्क हो जाएगा। स्प्रे संयंत्र सर्दियों में आवश्यक नहीं है, यह इस पूरी तरह से की जरूरत नहीं है में है।
हर साल, जल्दी वसंत ऋतु में, संयंत्र एक नया भूमि है, जो काली मिट्टी, पीट और नदी रेत के बराबर भागों से बना है में प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए। पॉट के नीचे पर ध्यान से जल निकासी परत डाल दिया। एडल्ट बारहमासी एक वर्ष में नहीं प्रत्यारोपित किया जा सकता है, और एक बार हर दो साल में।
हमारे अक्षांशों में सजावटी फूल दो तरह से प्रचारित किया जाता हैः वानस्पतिक चादर पक्ष और झाड़ी है, जो आसान और सबसे आम है विभाजित करके। प्रक्रियाओं हिस्सेदारी के साथ पौधों की जड़ रोपाई के दौरान, थोड़ा मिट्टी के कमरे सूखे और तैयार जमीन के साथ अलग अलग बर्तन में बैठे हैं।
चादर के माध्यम से प्रजनन - एक लंबी और जटिल प्रक्रिया। सबसे पहले, एक चादर संलग्न विकास गुर्दे के साथ चुना जाता है। ध्यान से स्टेम काट और कई दिनों के लिए सूखे। जबकि चादर सुखाने के लिए है, मिट्टी का बर्तन है, जो अच्छी तरह से गरम किया जाना चाहिए पकाना। शीट एक बर्तन में लगाए, पानी पिलाया और बंद शीर्ष ग्लास जार या पारदर्शी पैकेज एक ग्रीनहाउस जलवायु बनाने के लिए। पचास दिन के लिए इन शर्तों Zamioculcas जड़ चादर के तहत।
उचित पानी, नियमित रूप से निषेचन और सख्ती से vymerennaya अच्छा विकास, आकर्षक उपस्थिति घर संयंत्र Zamioculcas को बढ़ावा देने के। सभी सरल प्रक्रियाओं के साथ देखभाल, और अवांछनीय रोगों की एक किस्म की घटना को खत्म करने। हालांकि, ध्यान रखें कि अत्यधिक पानी और अत्यधिक नमी जड़ों उन्हें सड़ने के लिए पैदा कर सकता है हो सकता है। सिंचाई और सूखी मिट्टी के गँवार का अभाव पीली और पत्ती गिरावट के लिए योगदान देगा। सबसे आम कीट संयंत्र को प्रभावित करने वालेः एफिड्स, जोस पैमाने पर और मकड़ी के कण। वे पत्ते और जड़ गँवार विशेष तैयारी है कि आप एक विशेषज्ञ की दुकान में खरीद सकते हैं छिड़काव द्वारा लड़ा जाना चाहिए।
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फूलों की दुकानें और घर संग्रह अक्सर पाया में बहुत ही आकर्षक फूल लग रहा है मोटी मांसल साथ उपजी और मजबूत, विश्वास है सभी दिशाओं में जमीन, चमकदार, गहरे हरे रंग की, चमड़े, काँटेदार पत्तियों के साथ कवर से बाहर चिपके हुए। यह संयंत्र - Zamioculcas। उन की देखभाल, सरल, सरल संयंत्र है, इसलिए घर फूलों की खेती के प्रशंसकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। बाहरी पर्यावरण की स्थिति और देखभाल अफ्रीकी रेगिस्तान में अपने उद्भव के कारण करने के लिए उदार सजावटी फूल। शाइनी तनों और पत्तियों मोम की एक परत है, जो परिसर यह भी भयानक नहीं है में नमी, उच्च तापमान और शुष्क हवा को बनाए रखने में मदद करता है के साथ कवर किया जाता है। और फिर भी, के लिए संयंत्र आकर्षक लग रहे हैं, यह स्वस्थ और मजबूत था, वहाँ उनके लिए देखभाल के कुछ नियमों, जो मुख्य रूप से पानी और वातावरण के तापमान शासन के साथ पालन करने के लिए कम कर रहे हैं, साथ ही उर्वरक आवेदन के समय और रोशनी का स्तर है। यह संयंत्र गर्मी और अच्छा प्रकाश प्यार करता है। मजबूत चमड़े पत्ते उज्ज्वल से डरते नहीं हैं सूरज की रोशनी। गर्मियों के दौरान वह अक्सर पसंद है, लेकिन मध्यम पानी, और परिवेश के तापमान के बारे में बीस डिग्री कम है। मैं सूरज, प्रकाश और गर्मी तथ्य यह है कि दक्षिण की ओर, एक उज्ज्वल खुली जगह है संयंत्र के सामान्य विकास के लिए सबसे उपयुक्त में परिलक्षित प्यार करता हूँ। वसंत, ग्रीष्म और शरद ऋतु की शुरुआत के दौरान Zamioculcas नियमित निषेचन उर्वरक की जरूरत है। इस संयंत्र के लिए सबसे उपयुक्त विशेषता भंडार में खरीदा जा सकता है नागफनी के लिए पूर्ण उर्वरक कर रहे हैं। "बाल" अफ्रीकी रेगिस्तान, पसंद करते हैं सबसे आसान Zamioculcas सर्दियों में परवाह है। साल के इस समय में पानी यह यथासंभव कम किया जाना चाहिए, केवल जब बर्तन में गेंद भूमि बहुत शुष्क हो जाएगा। स्प्रे संयंत्र सर्दियों में आवश्यक नहीं है, यह इस पूरी तरह से की जरूरत नहीं है में है। हर साल, जल्दी वसंत ऋतु में, संयंत्र एक नया भूमि है, जो काली मिट्टी, पीट और नदी रेत के बराबर भागों से बना है में प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए। पॉट के नीचे पर ध्यान से जल निकासी परत डाल दिया। एडल्ट बारहमासी एक वर्ष में नहीं प्रत्यारोपित किया जा सकता है, और एक बार हर दो साल में। हमारे अक्षांशों में सजावटी फूल दो तरह से प्रचारित किया जाता हैः वानस्पतिक चादर पक्ष और झाड़ी है, जो आसान और सबसे आम है विभाजित करके। प्रक्रियाओं हिस्सेदारी के साथ पौधों की जड़ रोपाई के दौरान, थोड़ा मिट्टी के कमरे सूखे और तैयार जमीन के साथ अलग अलग बर्तन में बैठे हैं। चादर के माध्यम से प्रजनन - एक लंबी और जटिल प्रक्रिया। सबसे पहले, एक चादर संलग्न विकास गुर्दे के साथ चुना जाता है। ध्यान से स्टेम काट और कई दिनों के लिए सूखे। जबकि चादर सुखाने के लिए है, मिट्टी का बर्तन है, जो अच्छी तरह से गरम किया जाना चाहिए पकाना। शीट एक बर्तन में लगाए, पानी पिलाया और बंद शीर्ष ग्लास जार या पारदर्शी पैकेज एक ग्रीनहाउस जलवायु बनाने के लिए। पचास दिन के लिए इन शर्तों Zamioculcas जड़ चादर के तहत। उचित पानी, नियमित रूप से निषेचन और सख्ती से vymerennaya अच्छा विकास, आकर्षक उपस्थिति घर संयंत्र Zamioculcas को बढ़ावा देने के। सभी सरल प्रक्रियाओं के साथ देखभाल, और अवांछनीय रोगों की एक किस्म की घटना को खत्म करने। हालांकि, ध्यान रखें कि अत्यधिक पानी और अत्यधिक नमी जड़ों उन्हें सड़ने के लिए पैदा कर सकता है हो सकता है। सिंचाई और सूखी मिट्टी के गँवार का अभाव पीली और पत्ती गिरावट के लिए योगदान देगा। सबसे आम कीट संयंत्र को प्रभावित करने वालेः एफिड्स, जोस पैमाने पर और मकड़ी के कण। वे पत्ते और जड़ गँवार विशेष तैयारी है कि आप एक विशेषज्ञ की दुकान में खरीद सकते हैं छिड़काव द्वारा लड़ा जाना चाहिए।
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सरकार में रहते हुए सत्ता के नशे में चूर रहने वाले कमलनाथ जी आप अपनी पार्टी और सरकार दोनों को नहीं संभाल पाए।
कमलनाथ जी आपने किसान को कर्जमाफी के नाम पर धोखा दिया, नौजवानों के साथ छलावा किया, गरीबों की संबल योजना को बंद किया।
दोनों सत्ता के नशे में चूर थे ना उनका कसूर ना उनका कसूरए ना सिग्नल इन्होंने देखा ना उन्होंने सिंगल देखा। एक्सीडेंट हो गया रब्बा रब्बा...एक्सीडेंट और कसूर आपका यह था कि आप अपनी पार्टी को ही नहीं संभाल पाए..आपका कसूर था कि आपने किसान को धोखा दिया 10 दिन में 2 लाख का कर्जा माफ नहीं किया अन्य योजनाएं बंद कर दी...कसूर पूछ रहे हो आपको कांग्रेस के लोग ही आपको आपका कसूर बता देंगे।
अरु धरि लाल लंगूर,
जय जय जय कपि सूर"
भगवान बजरंगबली के चरणों में प्रणाम।
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सरकार में रहते हुए सत्ता के नशे में चूर रहने वाले कमलनाथ जी आप अपनी पार्टी और सरकार दोनों को नहीं संभाल पाए। कमलनाथ जी आपने किसान को कर्जमाफी के नाम पर धोखा दिया, नौजवानों के साथ छलावा किया, गरीबों की संबल योजना को बंद किया। दोनों सत्ता के नशे में चूर थे ना उनका कसूर ना उनका कसूरए ना सिग्नल इन्होंने देखा ना उन्होंने सिंगल देखा। एक्सीडेंट हो गया रब्बा रब्बा...एक्सीडेंट और कसूर आपका यह था कि आप अपनी पार्टी को ही नहीं संभाल पाए..आपका कसूर था कि आपने किसान को धोखा दिया दस दिन में दो लाख का कर्जा माफ नहीं किया अन्य योजनाएं बंद कर दी...कसूर पूछ रहे हो आपको कांग्रेस के लोग ही आपको आपका कसूर बता देंगे। अरु धरि लाल लंगूर, जय जय जय कपि सूर" भगवान बजरंगबली के चरणों में प्रणाम।
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पाकिस्तान टीम को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने स्पिन गेंदबाज आसिफ अफरीदी को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। क्योंकि उन्हें पीसीबी के भ्रष्टाचार निरोधक संहिता के तहत दो उल्लंघनों के लिए दोषी पाया गया था।
पीसीबी ने एक बयान में कहा कि अनुच्छेद 2. 4. 10 के उल्लंघन के लिए आसिफ अफरीदी पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि उन्हें अनुच्छेद 2. 4. 4 के उल्लंघन के लिए छह महीने का प्रतिबंध दिया गया था। अपात्रता की दोनों अवधि एक साथ चलेंगी और आगे बढ़ेंगी। उनके अनंतिम निलंबन के दिन से शुरू होगा, जो 12 सितंबर 2022 को शुरू हुआ था।
आसिफ अफरीदी ने यह दावा किया था कि उन्होंने अनजाने में संहिता का उल्लंघन किया था। स्वीकृति अवधि पर अपने निर्धारण पर पहुंचने के दौरान पीसीबी ने अपराध की स्वीकृति और पश्चाताप की अभिव्यक्ति को देखते हुए उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड और आसिफ के अनुरोध पर विचार किया कि पीसीबी उनके मामले पर दयापूर्वक विचार करे।
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पाकिस्तान टीम को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने स्पिन गेंदबाज आसिफ अफरीदी को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। क्योंकि उन्हें पीसीबी के भ्रष्टाचार निरोधक संहिता के तहत दो उल्लंघनों के लिए दोषी पाया गया था। पीसीबी ने एक बयान में कहा कि अनुच्छेद दो. चार. दस के उल्लंघन के लिए आसिफ अफरीदी पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि उन्हें अनुच्छेद दो. चार. चार के उल्लंघन के लिए छह महीने का प्रतिबंध दिया गया था। अपात्रता की दोनों अवधि एक साथ चलेंगी और आगे बढ़ेंगी। उनके अनंतिम निलंबन के दिन से शुरू होगा, जो बारह सितंबर दो हज़ार बाईस को शुरू हुआ था। आसिफ अफरीदी ने यह दावा किया था कि उन्होंने अनजाने में संहिता का उल्लंघन किया था। स्वीकृति अवधि पर अपने निर्धारण पर पहुंचने के दौरान पीसीबी ने अपराध की स्वीकृति और पश्चाताप की अभिव्यक्ति को देखते हुए उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड और आसिफ के अनुरोध पर विचार किया कि पीसीबी उनके मामले पर दयापूर्वक विचार करे।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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नई गाइडलाइन में वर्किंग डे के पहले दिन सोमवार को कलेक्टर और एसपी एक साथ सड़कों पर उतरे। दोनों ने बाजारों का हाल जाना तो देखा कि कुछ दुकानें खुली हैं और सब्जी ठेले वाले पास-पास खड़े हैं। कुछ लोग सड़कों पर बेवजह घूम रहे थे और जो दुकानें खुली थीं उनके खिलाफ एक्शन लेते हुए उनके चालान कटवाए और सब्जी के ठेले वालों को दूर-दूर खड़ा कराया। कलेक्टर और एसपी ने पुलिस अधिकारियों को कहा कि वे ऐसी छोटी- छोटी बातों का ध्यान रखें और गाइडलाइन का पालन कराएं।
दोनों अधिकारियों ने गणेश मंदिर, जैन मंदिर नसियां के इलाकों में राउंड किया। एक बाजार में अंदर टेलर की दो दुकानें खुली हुई थी। इस पर उन्हें सीज करवा दिया। कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी ने एक जगह लगे सब्जी के कई ठेलों को अलग-अलग जगह करवाया। उन्हें दस फीट की दूरी पर खड़े होने को कहा है। वहीं एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने भी पुलिसकर्मियों को नाके पर बेवजह घूमने वालों को रोकने और चालान काटने के लिए कहा।
गृह विभाग की ओर से नई गाइडलाइन में सब्जी और फल बेचने वाले ठेलों को शाम 5 बजे तक की अनुमति दी है। इसके बाद आज पुलिसकर्मियों ने उन्हें नहीं हटाया। जबकि कल सुबह सभी को हटा दिया था। उल्लेखनीय है कि जिले में रविवार को 595 कोरोना संक्रमित सामने आए थे, वहीं 7 की मौत हो गई थी। यहां राहत की बात यह है कि जितने लोग संक्रमित हो रहे हैं उससे ज्यादा लोग बीमारी से बाहर भी आ रहे हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई गाइडलाइन में वर्किंग डे के पहले दिन सोमवार को कलेक्टर और एसपी एक साथ सड़कों पर उतरे। दोनों ने बाजारों का हाल जाना तो देखा कि कुछ दुकानें खुली हैं और सब्जी ठेले वाले पास-पास खड़े हैं। कुछ लोग सड़कों पर बेवजह घूम रहे थे और जो दुकानें खुली थीं उनके खिलाफ एक्शन लेते हुए उनके चालान कटवाए और सब्जी के ठेले वालों को दूर-दूर खड़ा कराया। कलेक्टर और एसपी ने पुलिस अधिकारियों को कहा कि वे ऐसी छोटी- छोटी बातों का ध्यान रखें और गाइडलाइन का पालन कराएं। दोनों अधिकारियों ने गणेश मंदिर, जैन मंदिर नसियां के इलाकों में राउंड किया। एक बाजार में अंदर टेलर की दो दुकानें खुली हुई थी। इस पर उन्हें सीज करवा दिया। कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी ने एक जगह लगे सब्जी के कई ठेलों को अलग-अलग जगह करवाया। उन्हें दस फीट की दूरी पर खड़े होने को कहा है। वहीं एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने भी पुलिसकर्मियों को नाके पर बेवजह घूमने वालों को रोकने और चालान काटने के लिए कहा। गृह विभाग की ओर से नई गाइडलाइन में सब्जी और फल बेचने वाले ठेलों को शाम पाँच बजे तक की अनुमति दी है। इसके बाद आज पुलिसकर्मियों ने उन्हें नहीं हटाया। जबकि कल सुबह सभी को हटा दिया था। उल्लेखनीय है कि जिले में रविवार को पाँच सौ पचानवे कोरोना संक्रमित सामने आए थे, वहीं सात की मौत हो गई थी। यहां राहत की बात यह है कि जितने लोग संक्रमित हो रहे हैं उससे ज्यादा लोग बीमारी से बाहर भी आ रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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4 सितंबर, नई दिल्ली (CRICKERNMORE)। एबी डिविलियर्स की किताब "एबीः द ऑटोबायोग्राफी" के रिलीज होने से पहले ही कई बातों का खुलासा हो रहा है। ऐसे में एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए अपने साक्षात्कार में डिविलिययर्स ने कोहली के बारे में कहा है कि वो एक बेहतरीन बल्लेबाज है और मेरे साथ उसकी तुलना करना बईमानी है। OMG: क्या कोहली टेस्ट क्रिकेट में बने इस बड़े रिकॉर्ड को तोड़ पाएगें ?
भारत में साल 2008 में खेले गए अहमदाबाद टेस्ट मैच में भारत के खिलाफ 217 रन की पारी डिविलियर्स के अनुसार सबसे यादगार पारी थी और साथ ही एबी ने कहा कि यह पारी मेरे करियर की टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, इस पारी के बाद ही मुझे लगा था कि मैं अपने करियर में बड़ी पारी खेल सकता हूं। फाइटर युवराज सिंह की वापसी होगी इंटरनेशनल क्रिकेट में क्योंकि..
इस साक्षात्कार में डिविलियर्स ने कहा है कि आईपीएल में कोहली ओर क्रिस गेल के साथ एक ही टीम में खेलना गर्व की बात है। दोनों खिलाड़ी महान हैं और अपने गेम में कमाल करते रहते हैं। हम तीनों अब काफी अच्छे दोस्त हो चुके हैं और अब हमारे बीच किसी प्रकार की कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।
डिविलियर्स कोहली को अपना फेवरेट इंडिया क्रिकेटर मानते हैं।
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चार सितंबर, नई दिल्ली । एबी डिविलियर्स की किताब "एबीः द ऑटोबायोग्राफी" के रिलीज होने से पहले ही कई बातों का खुलासा हो रहा है। ऐसे में एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए अपने साक्षात्कार में डिविलिययर्स ने कोहली के बारे में कहा है कि वो एक बेहतरीन बल्लेबाज है और मेरे साथ उसकी तुलना करना बईमानी है। OMG: क्या कोहली टेस्ट क्रिकेट में बने इस बड़े रिकॉर्ड को तोड़ पाएगें ? भारत में साल दो हज़ार आठ में खेले गए अहमदाबाद टेस्ट मैच में भारत के खिलाफ दो सौ सत्रह रन की पारी डिविलियर्स के अनुसार सबसे यादगार पारी थी और साथ ही एबी ने कहा कि यह पारी मेरे करियर की टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, इस पारी के बाद ही मुझे लगा था कि मैं अपने करियर में बड़ी पारी खेल सकता हूं। फाइटर युवराज सिंह की वापसी होगी इंटरनेशनल क्रिकेट में क्योंकि.. इस साक्षात्कार में डिविलियर्स ने कहा है कि आईपीएल में कोहली ओर क्रिस गेल के साथ एक ही टीम में खेलना गर्व की बात है। दोनों खिलाड़ी महान हैं और अपने गेम में कमाल करते रहते हैं। हम तीनों अब काफी अच्छे दोस्त हो चुके हैं और अब हमारे बीच किसी प्रकार की कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। डिविलियर्स कोहली को अपना फेवरेट इंडिया क्रिकेटर मानते हैं।
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होम बिलेट - हालांकि यह परेशानी है, लेकिनबहुत उपयोगी। और सर्दियों में, जब यह इन सलाद के सभी, adzhika, अचार और न केवल महान marinades मेज सजाने के लिए, यह विविध बनाने के लिए, लेकिन यह भी यह आसान रसोई मालकिन में रहने के लिए बनाने के लिए बर्तन के बाद बर्तन को खोलने के लिए बारी है, में। खासकर जब पहले भोजन की तैयारी, वह डिब्बाबंद सामग्री का उपयोग करता।
सर्दियों के लिए - यह बोर्सट के लिए चुकंदर से ड्रेसिंगएक वास्तविक खोज एक तरफ, इसमें इस डिश के लिए सभी आवश्यक सामग्री शामिल हैं। दूसरी ओर - यह एक पूर्ण सलाद के रूप में की पेशकश करने के लिए काफी संभव है। या एक मोड़ सब्जी स्टू के आधार पर पकाना। एक अद्भुत बात, वैसे! इस तरह के उत्पादों की सर्दियों के लिए इस भरने चुकंदर बोर्स्ट तैयार कर रहा हैः - 3.5-4 किलो, प्याज - 1-1.5 किलो, गाजर - 2 किलो, गोभी - 2 किलो, लाल शिमला मिर्च - 2 किलो, चुकंदर लाल टमाटर - टमाटर की चटनी के 2 किलो - 500 ग्राम सूरजमुखी तेल - 1.5, पानी - 200 ग्राम, नमक, चीनी, काली मिर्च - स्वाद के लिए, मसाले - बहुत।
तैयारी के चरणोंः गाजर और बीट को साफ करने की जरूरत है और ब्रूसोच्कामी के साथ कम से कम काटा जाना चाहिए। गोभी और काट प्याज काली मिर्च और स्ट्रिप्स में कटौती, और प्याज - ringlets, टमाटर - स्लाइस प्रक्रिया के दूसरे चरण में जब चुकंदर की तैयारी सर्दियों के लिए बोर्स्ट के लिए ड्रेसिंग, इस तरहः बर्तन में सब्जियों रखो, टमाटर की चटनी (या रस) में डालना, मसाले, नमक, काली मिर्च डाल, चीनी और वनस्पति तेल जोड़ें। ढक्कन को कवर करें, और बिलेट खड़े होने दें, सब्जियां एक दूसरे के रस के साथ सोख लेंगी। आधा घंटे आग लगने के बाद, काम के टुकड़े को फोड़ा दें। फिर बीट के लिए एक घंटे (सर्दियों के लिए बोर्स्च) के लिए फिर से मध्यम गर्मी पर पकाया जाना चाहिए। अगर यह चिपचिपा हो जाता है, तो पानी में डालें। पैमाने निकालें, वर्कपीस को आज़माएं यदि आपके पास पर्याप्त नमक या मिठाई नहीं है, तो अधिक सामग्री जोड़ें। आग से हटाने के बिना तैयार ईंधन भरने, बाँझ के डिब्बे पर पैक करें और उन्हें बाँझ लेड्स के साथ रोल करें।
एक और मूल पकवान, स्वादिष्ट जैसा कि पर हैखुद या सर्दियों के लिए चुकंदर का भरने के रूप में - लहसुन और अन्य सब्जियों के साथ। यह विटामिन, खनिज और कई अन्य उपयोगी घटक शामिल हैं, और इसलिए किसी भी गृहिणी के लिए मेरे पेंट्री में खाली है - पहला मामला। इसके लिए क्या आवश्यक है? चुकंदर - के बारे में 3 किलो, गाजर - 2-2.5 किलो काली मिर्च - 1.5 किलो, तीरंदाजी - अलमारियों, सूरजमुखी तेल - 150-200 ग्राम, लहसुन से - 3-4 प्रमुख हैं। 1 बड़ा चम्मच नमक - - के बारे में 100 ग्राम या स्वाद, पानी - 200-250 मिलीलीटर यह गाजर और गर्म मिर्च (2-3 फली या स्वाद), सिरका के रूप में बीट के ईंधन भरने भी शामिल है। सब्जियां छोटे टुकड़ों में काटती हैं, लहसुन को बारीकी से काट लें। बर्तन में डाल दिया, 2-2.5 के बारे में घंटे के लिए शेष सामग्री और उबाल पकाना जोड़ें। गर्म रूप में, बाँझ जार में ड्रेसिंग रखें और इसे रोल करें।
और एक और बहुत स्वादिष्ट ड्रेसिंग, जिसमें शामिल हैंबीट्स और गाजर से ये इसके मुख्य घटक हैं डिब्बा बंद की तैयारी के लिए की आवश्यकता हैः जमीन सब्जी - 3 किलो, गाजर - पानी की 2 किलो - के बारे में एक लीटर, चीनी - 100 ग्राम, नमक - 30-40 ग और साइट्रिक एसिड का स्वाद। उन्हें नरम करने के लिए ओवन में सब्जियों और जगह धो लें। फिर इसे साफ करें, छोटे क्यूब्स में इसे काट लें। उबलते पानी और नमक, साइट्रिक एसिड, चीनी भंग द्वारा अचार बनाना। बाँझ जार पर सब्जियों की व्यवस्था, गर्म अचार डालना। लगभग 10 मिनट और रोल के लिए स्पिन उबालें।
Refueling न केवल मसाले से किया जा सकता हैसब्जियां, लेकिन किण्वित भी। यह बड़ी मात्रा में तैयार है। बीटः पानी के 3-4 किलो - - नमक के 2 लीटर से ऊपर - - एक छोटे से आधे से एक किलो, जीरा, allspice की तुलना में अधिक, कड़वा मिर्च, लौंग कैसे तैयार करने मोड़ के 5 उदाहरण के लिए, गोभी के सेवारत एक के बारे में 10 किलो, चुकंदर चला जाता है आपको सेंकना या फोड़ा जाना चाहिए, फिर छीलने और पतली हलकों में काट लें। गोभी को ऊपरी पत्तियों से हटा दिया जाना चाहिए, और सिर कटा हुआ होना चाहिए। , एक कटोरी या एक कटोरी में गोभी रखो नमक और मसालों का मिश्रण करने के साथ छिड़के। इसे लगभग 2 घंटे होने दें। बाद निर्धारित समय रस के निकास के लिए आवश्यक है, बीट जोड़ने के लिए, कंटेनर, जिसमें नमकीन हो जाएगा में पारित करने के लिए। पानी में, नमक के अवशेषों को भंग कर लें और समुद्र की सब्जियों से भरें। उत्पीड़न रखो और एक गर्म स्थान में एक सप्ताह के लिए छोड़ देते हैं, तो एक ठंडे स्थान पर ले जाने के लिए और इसे refilling रखने के लिए।
स्टॉक में अच्छी व्यंजनों के द्वारा इस तरह के स्वादिष्ट रिफाइवलिंग तैयार किया जा सकता है!
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होम बिलेट - हालांकि यह परेशानी है, लेकिनबहुत उपयोगी। और सर्दियों में, जब यह इन सलाद के सभी, adzhika, अचार और न केवल महान marinades मेज सजाने के लिए, यह विविध बनाने के लिए, लेकिन यह भी यह आसान रसोई मालकिन में रहने के लिए बनाने के लिए बर्तन के बाद बर्तन को खोलने के लिए बारी है, में। खासकर जब पहले भोजन की तैयारी, वह डिब्बाबंद सामग्री का उपयोग करता। सर्दियों के लिए - यह बोर्सट के लिए चुकंदर से ड्रेसिंगएक वास्तविक खोज एक तरफ, इसमें इस डिश के लिए सभी आवश्यक सामग्री शामिल हैं। दूसरी ओर - यह एक पूर्ण सलाद के रूप में की पेशकश करने के लिए काफी संभव है। या एक मोड़ सब्जी स्टू के आधार पर पकाना। एक अद्भुत बात, वैसे! इस तरह के उत्पादों की सर्दियों के लिए इस भरने चुकंदर बोर्स्ट तैयार कर रहा हैः - तीन.पाँच-चार किलो, प्याज - एक-एक.पाँच किलो, गाजर - दो किलो, गोभी - दो किलो, लाल शिमला मिर्च - दो किलो, चुकंदर लाल टमाटर - टमाटर की चटनी के दो किलो - पाँच सौ ग्राम सूरजमुखी तेल - एक.पाँच, पानी - दो सौ ग्राम, नमक, चीनी, काली मिर्च - स्वाद के लिए, मसाले - बहुत। तैयारी के चरणोंः गाजर और बीट को साफ करने की जरूरत है और ब्रूसोच्कामी के साथ कम से कम काटा जाना चाहिए। गोभी और काट प्याज काली मिर्च और स्ट्रिप्स में कटौती, और प्याज - ringlets, टमाटर - स्लाइस प्रक्रिया के दूसरे चरण में जब चुकंदर की तैयारी सर्दियों के लिए बोर्स्ट के लिए ड्रेसिंग, इस तरहः बर्तन में सब्जियों रखो, टमाटर की चटनी में डालना, मसाले, नमक, काली मिर्च डाल, चीनी और वनस्पति तेल जोड़ें। ढक्कन को कवर करें, और बिलेट खड़े होने दें, सब्जियां एक दूसरे के रस के साथ सोख लेंगी। आधा घंटे आग लगने के बाद, काम के टुकड़े को फोड़ा दें। फिर बीट के लिए एक घंटे के लिए फिर से मध्यम गर्मी पर पकाया जाना चाहिए। अगर यह चिपचिपा हो जाता है, तो पानी में डालें। पैमाने निकालें, वर्कपीस को आज़माएं यदि आपके पास पर्याप्त नमक या मिठाई नहीं है, तो अधिक सामग्री जोड़ें। आग से हटाने के बिना तैयार ईंधन भरने, बाँझ के डिब्बे पर पैक करें और उन्हें बाँझ लेड्स के साथ रोल करें। एक और मूल पकवान, स्वादिष्ट जैसा कि पर हैखुद या सर्दियों के लिए चुकंदर का भरने के रूप में - लहसुन और अन्य सब्जियों के साथ। यह विटामिन, खनिज और कई अन्य उपयोगी घटक शामिल हैं, और इसलिए किसी भी गृहिणी के लिए मेरे पेंट्री में खाली है - पहला मामला। इसके लिए क्या आवश्यक है? चुकंदर - के बारे में तीन किलो, गाजर - दो-दो.पाँच किलो काली मिर्च - एक.पाँच किलो, तीरंदाजी - अलमारियों, सूरजमुखी तेल - एक सौ पचास-दो सौ ग्राम, लहसुन से - तीन-चार प्रमुख हैं। एक बड़ा चम्मच नमक - - के बारे में एक सौ ग्राम या स्वाद, पानी - दो सौ-दो सौ पचास मिलीलीटर यह गाजर और गर्म मिर्च , सिरका के रूप में बीट के ईंधन भरने भी शामिल है। सब्जियां छोटे टुकड़ों में काटती हैं, लहसुन को बारीकी से काट लें। बर्तन में डाल दिया, दो-दो.पाँच के बारे में घंटे के लिए शेष सामग्री और उबाल पकाना जोड़ें। गर्म रूप में, बाँझ जार में ड्रेसिंग रखें और इसे रोल करें। और एक और बहुत स्वादिष्ट ड्रेसिंग, जिसमें शामिल हैंबीट्स और गाजर से ये इसके मुख्य घटक हैं डिब्बा बंद की तैयारी के लिए की आवश्यकता हैः जमीन सब्जी - तीन किलो, गाजर - पानी की दो किलो - के बारे में एक लीटर, चीनी - एक सौ ग्राम, नमक - तीस-चालीस ग और साइट्रिक एसिड का स्वाद। उन्हें नरम करने के लिए ओवन में सब्जियों और जगह धो लें। फिर इसे साफ करें, छोटे क्यूब्स में इसे काट लें। उबलते पानी और नमक, साइट्रिक एसिड, चीनी भंग द्वारा अचार बनाना। बाँझ जार पर सब्जियों की व्यवस्था, गर्म अचार डालना। लगभग दस मिनट और रोल के लिए स्पिन उबालें। Refueling न केवल मसाले से किया जा सकता हैसब्जियां, लेकिन किण्वित भी। यह बड़ी मात्रा में तैयार है। बीटः पानी के तीन-चार किलो - - नमक के दो लीटरटर से ऊपर - - एक छोटे से आधे से एक किलो, जीरा, allspice की तुलना में अधिक, कड़वा मिर्च, लौंग कैसे तैयार करने मोड़ के पाँच उदाहरण के लिए, गोभी के सेवारत एक के बारे में दस किलो, चुकंदर चला जाता है आपको सेंकना या फोड़ा जाना चाहिए, फिर छीलने और पतली हलकों में काट लें। गोभी को ऊपरी पत्तियों से हटा दिया जाना चाहिए, और सिर कटा हुआ होना चाहिए। , एक कटोरी या एक कटोरी में गोभी रखो नमक और मसालों का मिश्रण करने के साथ छिड़के। इसे लगभग दो घंटाटे होने दें। बाद निर्धारित समय रस के निकास के लिए आवश्यक है, बीट जोड़ने के लिए, कंटेनर, जिसमें नमकीन हो जाएगा में पारित करने के लिए। पानी में, नमक के अवशेषों को भंग कर लें और समुद्र की सब्जियों से भरें। उत्पीड़न रखो और एक गर्म स्थान में एक सप्ताह के लिए छोड़ देते हैं, तो एक ठंडे स्थान पर ले जाने के लिए और इसे refilling रखने के लिए। स्टॉक में अच्छी व्यंजनों के द्वारा इस तरह के स्वादिष्ट रिफाइवलिंग तैयार किया जा सकता है!
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आज कहा कि वे भोलेभाले किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे झूठे प्रचार के विपरीत नए कानून के अनुसार, किसान किसी भी समय अनुबंध को खत्म कर सकता है और वह बिना कोई जुर्माना भरे कभी भी अनुबंध समझौते से पीछे हट सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के मजल्ता क्षेत्र के किसानों और गांव के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि अनुबंध समझौते से किसानों को निर्धारित मूल्य प्राप्त करने की गारंटी मिलेगी। इसके अलावा, नया कानून किसानों की भूमि की बिक्री, पट्टे या बंधक पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाता है। इसलिए कांग्रेस नेताओं के इस आरोप में कोई दम नहीं है कि बड़ी कंपनियां अनुबंध के नाम पर किसानों का शोषण करेंगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष रूप से दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए नई विधायी व्यवस्था एक वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहले किसान अपनी फसलों की कटाई करते थे और फिर किसी बिचौलिये के आने का इंतजार करते थे। बिचौलिये अपनी इच्छा और पसंद के आधार पर खरीदारी करते थे। इसलिए वे औनेपौने दाम देकर किसानों की पूरी फसल हथिया लेते थे और किसानों को मामूली लागत की भरपाई से ही संतोष करना पड़ता था।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि किसी सरकार ने महज छह साल के न्यूनतम समय में किसानों के लिए अधिकतम काम किया है तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार है। उन्होंने पिछले छह वर्षों के दौरान मोदी सरकार द्वारा किए गए कई नवोन्मेषी सुधारों का जिक्र किया जिसमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि योजना, किसान कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई, ई-मंडियों का निर्माण और एफपीओ शामिल हैं।
इस बातचीत में थेलोरा और आसपास की पंचायतों के किसानों के लावा गांव काले एवं समीपवर्ती क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे। अधिवक्ता अमित शर्मा ने बातचीत का संचालन किया। अन्य वक्ताओं में कैप्टन (सेवानिवृत्त) गोपाल सिंह, बिशन दास और सुरेश कुमार शामिल थे।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आज कहा कि वे भोलेभाले किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे झूठे प्रचार के विपरीत नए कानून के अनुसार, किसान किसी भी समय अनुबंध को खत्म कर सकता है और वह बिना कोई जुर्माना भरे कभी भी अनुबंध समझौते से पीछे हट सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के मजल्ता क्षेत्र के किसानों और गांव के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि अनुबंध समझौते से किसानों को निर्धारित मूल्य प्राप्त करने की गारंटी मिलेगी। इसके अलावा, नया कानून किसानों की भूमि की बिक्री, पट्टे या बंधक पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाता है। इसलिए कांग्रेस नेताओं के इस आरोप में कोई दम नहीं है कि बड़ी कंपनियां अनुबंध के नाम पर किसानों का शोषण करेंगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष रूप से दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए नई विधायी व्यवस्था एक वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि पहले किसान अपनी फसलों की कटाई करते थे और फिर किसी बिचौलिये के आने का इंतजार करते थे। बिचौलिये अपनी इच्छा और पसंद के आधार पर खरीदारी करते थे। इसलिए वे औनेपौने दाम देकर किसानों की पूरी फसल हथिया लेते थे और किसानों को मामूली लागत की भरपाई से ही संतोष करना पड़ता था। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि किसी सरकार ने महज छह साल के न्यूनतम समय में किसानों के लिए अधिकतम काम किया है तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार है। उन्होंने पिछले छह वर्षों के दौरान मोदी सरकार द्वारा किए गए कई नवोन्मेषी सुधारों का जिक्र किया जिसमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि योजना, किसान कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई, ई-मंडियों का निर्माण और एफपीओ शामिल हैं। इस बातचीत में थेलोरा और आसपास की पंचायतों के किसानों के लावा गांव काले एवं समीपवर्ती क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे। अधिवक्ता अमित शर्मा ने बातचीत का संचालन किया। अन्य वक्ताओं में कैप्टन गोपाल सिंह, बिशन दास और सुरेश कुमार शामिल थे।
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हर युवा की जिंदगी में IAS बनना सपना होता है। एक IAS की जिंदगी, उसकी मोहब्बत और रिलेशनशिप बड़े परदे पर आने वाली है। 'बरेली की बर्फ़ी' में सेल्समैन और 'न्यूटन' में सरकारी क्लर्क बने राजकुमार राव ये किरदार निभाएंगे।
फिल्म का नाम है 'शादी में जरूर आना' और ये फिल्म इस 10 नवंबर को रिलीज होगी। फिल्म में राजकुमार राव सत्येंद्र यानि सत्तू नाम का किरदार निभा रहे हैं, जबकि कृति खरबंदा एक पीसीएस अफ़सर हैं, उनका नाम आरती है। फ़िल्म को रत्ना सिन्हा ने निर्देशित किया है।
राजकुमार राव ने कहा कि 'शादी में जरूर आना' फ़िल्म में एक आईएएस की ज़िंदगी है। उसकी पर्सनल लाइफ़ है। रिलेशनशिप है। ड्यूटीज़ हैं। हिंदी फ़िल्मों में IAS जैसे संजीदा पेशे का बहुत कम इस्तेमाल हुआ है, इसलिए उन्होंने इस किरदार को पूरी शिद्दत से निभाया है।
राजकुमार राव आगे कहते हैं कि मैं डेविड धवन का बड़ा फैन हूं। मैं उनकी फिल्में देखते हुए बड़ा हुआ हूं। डेविड धवन के साथ काम करने में मजा आएगा। ये अलग अनुभव होगा। दरअसल, हाल ही में डेविड धवन ने राजकुमार राव फिल्म 'बरेली की बर्फी' देखी। उन्हें राजकुमार राव का काम बेहद पसंद आया। इसके बाद उन्होंने खुद ही राजकुमार राव के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की। डेविड धवन की इच्छा के बाद राजकुमार राव ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
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हर युवा की जिंदगी में IAS बनना सपना होता है। एक IAS की जिंदगी, उसकी मोहब्बत और रिलेशनशिप बड़े परदे पर आने वाली है। 'बरेली की बर्फ़ी' में सेल्समैन और 'न्यूटन' में सरकारी क्लर्क बने राजकुमार राव ये किरदार निभाएंगे। फिल्म का नाम है 'शादी में जरूर आना' और ये फिल्म इस दस नवंबर को रिलीज होगी। फिल्म में राजकुमार राव सत्येंद्र यानि सत्तू नाम का किरदार निभा रहे हैं, जबकि कृति खरबंदा एक पीसीएस अफ़सर हैं, उनका नाम आरती है। फ़िल्म को रत्ना सिन्हा ने निर्देशित किया है। राजकुमार राव ने कहा कि 'शादी में जरूर आना' फ़िल्म में एक आईएएस की ज़िंदगी है। उसकी पर्सनल लाइफ़ है। रिलेशनशिप है। ड्यूटीज़ हैं। हिंदी फ़िल्मों में IAS जैसे संजीदा पेशे का बहुत कम इस्तेमाल हुआ है, इसलिए उन्होंने इस किरदार को पूरी शिद्दत से निभाया है। राजकुमार राव आगे कहते हैं कि मैं डेविड धवन का बड़ा फैन हूं। मैं उनकी फिल्में देखते हुए बड़ा हुआ हूं। डेविड धवन के साथ काम करने में मजा आएगा। ये अलग अनुभव होगा। दरअसल, हाल ही में डेविड धवन ने राजकुमार राव फिल्म 'बरेली की बर्फी' देखी। उन्हें राजकुमार राव का काम बेहद पसंद आया। इसके बाद उन्होंने खुद ही राजकुमार राव के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की। डेविड धवन की इच्छा के बाद राजकुमार राव ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
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बचपन की यादें हर किसी को प्यारी होती हैं। जब बच्चे बड़े होते हैं तो वो अपने माता-पिता से ये सवाल जरूर करते हैं कि वो बचपन में कैसे दिखते थे। माता-पिता भी बच्चों के प्यारे बचपन को तस्वीरों में संजो कर रखते हैं। हर युवा अपने बचपन की तस्वीरों को देखकर खुश होता है। ऐसे ही हैं हमारे बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे भी, जिन्होंने अपने बचपन की यादों को संजो कर रखा है और वो अक्सर अपने बचपन की तस्वीर अपने प्रशंसकों के साथ सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं और उनके प्रशंसक भी उनकी इन तस्वीरों को देखने के बाद उनकी तारीफ करते नहीं थकते।
वैसे तो अधिकतर बच्चों को सुबह-सुबह स्कूल जाने के लिए उठना बिलकुल भी पसंद नहीं होता, लेकिन जब आप बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों की स्कूल यूनिफॉर्म पहने तस्वीरें देखेंगे तो आप इस बात पर बिलकुल भी यकीन नहीं करेंगे। स्कूल यूनिफॉर्म पहने ये सितारें सिर्फ अपनी मुस्कराहट से लोगों का दिल ही नहीं जीतते बल्कि बचपन से ही पोज देने में भी ये बिलकुल आगे भी हैं। आज हमारे इस आर्टिकल में आप देखेंगे कि आपकी ये चहेती अभिनेत्रियां स्कूल यूनिफॉर्म में कैसी लगती थीं।
देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा आज एक अंतराष्ट्रीय नाम बन चुकी हैं। बॉलीवुड के साथ-साथ वो हॉलीवुड पर भी राज कर रही हैं। प्रियंका बचपन से ही काफी प्रतिभाशली हैं और उनके स्कूल की ये तस्वीर इस बात का प्रमाण हैं। प्रियंका अपने स्कूल के दिनों में कैबिनेट का हिस्सा और नीलगिरि हाउस की कैप्टन थीं। इस तस्वीर में प्रियंका अपने दोस्तों के साथ पोज देते हुए मुस्कुरा रही हैं।
दीपिका अभिनय के मामले में तो प्रतिभाशाली हैं ही, लेकिन इसी के साथ वो हमेशा एक्स्ट्रा एक्टिविटी में भी आगे रहतीं हैं। बता दें कि दीपिका राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल चुकी हैं। दीपिका की ये तस्वीर बताती है कि वो पढ़ाई के साथ-साथ अपने स्कूल में प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेती थीं।
परिणीति चोपड़ा की भी स्कूल के दिनों की तस्वीर हम आपके लिए लेकर आए हैं। इन तस्वीरों में इशकजादे गर्ल परिणीति अपने दोनों भाइयों शिवांग और सहज के साथ पोज दे रही हैं। इस तस्वीर में उन्होंने अपनी यूनिफॉर्म पहनी है, जिसके साथ परिणीति ने दो चोटी बांधी है। इस तस्वीर में परी बहुत ही प्यारी लग रही हैं।
दिशा पाटनी के चेहरे पर मासूमियत बचपन से ही है। दिशा के स्कूल की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। इस तस्वीर में दिशा अपने कुछ स्कूल दोस्तों के साथ हैं और तस्वीर देखकर लग रहा है कि वह किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में व्यस्त हैं। तस्वीर में दिशा ने ग्रे रंग का सूट और सफेद रंग की सलवार पहनी है, जिसके साथ उन्होंने दुपट्टा ओढ़ा है। ये उनके स्कूल की यूनिफॉर्म है जिसमें वो कमाल की लग रही हैं। स्कूल समय में दिशा के छोटे बाल हुआ करते थे।
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बचपन की यादें हर किसी को प्यारी होती हैं। जब बच्चे बड़े होते हैं तो वो अपने माता-पिता से ये सवाल जरूर करते हैं कि वो बचपन में कैसे दिखते थे। माता-पिता भी बच्चों के प्यारे बचपन को तस्वीरों में संजो कर रखते हैं। हर युवा अपने बचपन की तस्वीरों को देखकर खुश होता है। ऐसे ही हैं हमारे बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे भी, जिन्होंने अपने बचपन की यादों को संजो कर रखा है और वो अक्सर अपने बचपन की तस्वीर अपने प्रशंसकों के साथ सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं और उनके प्रशंसक भी उनकी इन तस्वीरों को देखने के बाद उनकी तारीफ करते नहीं थकते। वैसे तो अधिकतर बच्चों को सुबह-सुबह स्कूल जाने के लिए उठना बिलकुल भी पसंद नहीं होता, लेकिन जब आप बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों की स्कूल यूनिफॉर्म पहने तस्वीरें देखेंगे तो आप इस बात पर बिलकुल भी यकीन नहीं करेंगे। स्कूल यूनिफॉर्म पहने ये सितारें सिर्फ अपनी मुस्कराहट से लोगों का दिल ही नहीं जीतते बल्कि बचपन से ही पोज देने में भी ये बिलकुल आगे भी हैं। आज हमारे इस आर्टिकल में आप देखेंगे कि आपकी ये चहेती अभिनेत्रियां स्कूल यूनिफॉर्म में कैसी लगती थीं। देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा आज एक अंतराष्ट्रीय नाम बन चुकी हैं। बॉलीवुड के साथ-साथ वो हॉलीवुड पर भी राज कर रही हैं। प्रियंका बचपन से ही काफी प्रतिभाशली हैं और उनके स्कूल की ये तस्वीर इस बात का प्रमाण हैं। प्रियंका अपने स्कूल के दिनों में कैबिनेट का हिस्सा और नीलगिरि हाउस की कैप्टन थीं। इस तस्वीर में प्रियंका अपने दोस्तों के साथ पोज देते हुए मुस्कुरा रही हैं। दीपिका अभिनय के मामले में तो प्रतिभाशाली हैं ही, लेकिन इसी के साथ वो हमेशा एक्स्ट्रा एक्टिविटी में भी आगे रहतीं हैं। बता दें कि दीपिका राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल चुकी हैं। दीपिका की ये तस्वीर बताती है कि वो पढ़ाई के साथ-साथ अपने स्कूल में प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेती थीं। परिणीति चोपड़ा की भी स्कूल के दिनों की तस्वीर हम आपके लिए लेकर आए हैं। इन तस्वीरों में इशकजादे गर्ल परिणीति अपने दोनों भाइयों शिवांग और सहज के साथ पोज दे रही हैं। इस तस्वीर में उन्होंने अपनी यूनिफॉर्म पहनी है, जिसके साथ परिणीति ने दो चोटी बांधी है। इस तस्वीर में परी बहुत ही प्यारी लग रही हैं। दिशा पाटनी के चेहरे पर मासूमियत बचपन से ही है। दिशा के स्कूल की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। इस तस्वीर में दिशा अपने कुछ स्कूल दोस्तों के साथ हैं और तस्वीर देखकर लग रहा है कि वह किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में व्यस्त हैं। तस्वीर में दिशा ने ग्रे रंग का सूट और सफेद रंग की सलवार पहनी है, जिसके साथ उन्होंने दुपट्टा ओढ़ा है। ये उनके स्कूल की यूनिफॉर्म है जिसमें वो कमाल की लग रही हैं। स्कूल समय में दिशा के छोटे बाल हुआ करते थे।
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मटन समयबाहदयों के लिये बम । जब तक नाम
इस रूप को बड़ी समभाएगा तब तक इस विद्या प्रत्व के महत्व का नही किया का सबसे पहले 'नाट्य-न्यास्त्र' नाटक
के अमिताभ को दृष्टि में रखकर लिया गया। इस हम्म मे करण अबहाद चारी धादि की विधियों की विस्तारपूर्वक समभाबी गई है, नृत्य पीव और भूस्तृत विवेचन है वह भी अमिता को ध्यान में रखकर किया गया है। रहम कर विभाग अमिताभ की सुविधा को ही दृष्टि में रखकर दिया जाता था। प्राधारमत रगमंच या प्रेमागृह तीन प्रचार के होते थे। जी के बड़े होने से देवाके मेला कहता व मीर १ होते में दूसरे राजा के होते मे ६४
हीच होने मे तीसरे प्रकार ने प्रेक्षागृह त्रिभुजाकार होते मे और उसकी मुजो की लम्बाई ३२ हाथी की। सम्भवत दूसरी श्रेणी के बाद ही अधिक प्रचलित ने ऐसा काम पडता है कि तो में और बरे हे भवनों में ऐसे प्रागृह स्वायीमा पर मे। प्रतिमा के प्रारम्भ मे ही राजभवन मे ताटक नेपथ्यमामा की बाद बाई है। राजा रामपुरमै एक याला वी महाँमि के लिए बक्कल मादि सामी रखी हुई दी। साधारण नामरिक विवाह का प्रत्य उत्सर्गों के समय प्रस्वामी करती
यो बनवा किया करते थे। प्रेमदानाचो का निर्माण अभिनेता की सुविधा के लिए हुमा करता था। इस बात का ध्यान रखा जाता था कि रक्यूमि मे प्रभिनय करने वालों की प्राभान मन्तिम किनारी ब भामा पहुँच सके और उनकी प्रत्येक भाव-भविमा की मासानी से देव ।
प्रजिनमनातीपा बजता है कि मामा के पूर्ववर्ती टीका कार ऐसा ही मानते थे कि
मासी भारतीय परम्परा
को शिक्षा देने के लिए मिला गया है। पर स्वयं प्रमिनबमुप्त ऐसा नहीं मानते। उगमा कहना है कि माय-शास्त्र केवल दबिया और प्रमिनाओं को सिमित भरने के उद्दषय से ही बना था। उसका मत प्रारम्भ के पाँच प्रस्तो वे विश्लेषण पर प्राचारित है। सविन पूरे माटम प्रास्त्र को पढ़ने पर पूषवत टीपाकारों की बात ही माम्प बाड़ती है।
'नाम-पार' रगमंच के निर्माण को बहुत महत्व देता है। भूमि निर्वाचित से लेकर रंगम की क्रिया तक वह बहुत साबमानी से समामा बाता था। सम स्थिर और कठिन भूमि तथा नामी या गौर वर्षी मिट्टी धुम मानी जाती थी। भूमि को पहले इस से बोठा जाता था। उसम से स्किीम कपास तुम मुस्यादि को साफ किया जाता था उसे सम और पटसर बनाया जाता था और तब प्रेक्षागृह के पी विधि पुरु होती थी। 'नाम-प्रास्त्र' को देखने से पता चलता है कि प्रेमागृह वा नापना बहुत महत्वपूर्ण कार्य समभा जाता था। माप के समयमादूट गामा बहुत प्रमगत चमक समझा जाता था। सूत्र ऐसा बनाया जाता था जो सहम ही न टूट समे। वह मा ही रूपास से बनता बामाबेट की छाल से बनता था मा मूंज से बनता था और किमी वृद्ध पीछा को मजबूत रस्मी भी मनाई जा सती थी। ऐसा विश्वास किया जाता था कि यदि सूत्र मा से टूट जाए तो स्वामी दी मृत्यु होती है विहा से टूट जाए तो राजी होती है
चौबाई से टूटे तो प्रयोक्ता का नाम होता है ? एम-भर मै टूटे तो कुछ सामग्री पट जाती है। इस प्रकार मूत्र-धारच का नाम बहुत ही महत्व पर मार्यमा जाता था। तिथि नराम करन प्रादि की पुरविय
से ध्यान दिया जाता था और इस बात मा पूरा ध्यान रमा जाता था कि कोई बयाप बस्तवारी हीन पुथा बिरलाय पुरुप भाप स्थापना के अजय पचानक भावर तुमसत्पन्न कराने म भी बडी सावधानी बरती जाती थी। सम्मा दिन गया शिवक गया जागर गया तो भने प्रकार के अपडया की सम्भावना मामी
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मटन समयबाहदयों के लिये बम । जब तक नाम इस रूप को बड़ी समभाएगा तब तक इस विद्या प्रत्व के महत्व का नही किया का सबसे पहले 'नाट्य-न्यास्त्र' नाटक के अमिताभ को दृष्टि में रखकर लिया गया। इस हम्म मे करण अबहाद चारी धादि की विधियों की विस्तारपूर्वक समभाबी गई है, नृत्य पीव और भूस्तृत विवेचन है वह भी अमिता को ध्यान में रखकर किया गया है। रहम कर विभाग अमिताभ की सुविधा को ही दृष्टि में रखकर दिया जाता था। प्राधारमत रगमंच या प्रेमागृह तीन प्रचार के होते थे। जी के बड़े होने से देवाके मेला कहता व मीर एक होते में दूसरे राजा के होते मे चौंसठ हीच होने मे तीसरे प्रकार ने प्रेक्षागृह त्रिभुजाकार होते मे और उसकी मुजो की लम्बाई बत्तीस हाथी की। सम्भवत दूसरी श्रेणी के बाद ही अधिक प्रचलित ने ऐसा काम पडता है कि तो में और बरे हे भवनों में ऐसे प्रागृह स्वायीमा पर मे। प्रतिमा के प्रारम्भ मे ही राजभवन मे ताटक नेपथ्यमामा की बाद बाई है। राजा रामपुरमै एक याला वी महाँमि के लिए बक्कल मादि सामी रखी हुई दी। साधारण नामरिक विवाह का प्रत्य उत्सर्गों के समय प्रस्वामी करती यो बनवा किया करते थे। प्रेमदानाचो का निर्माण अभिनेता की सुविधा के लिए हुमा करता था। इस बात का ध्यान रखा जाता था कि रक्यूमि मे प्रभिनय करने वालों की प्राभान मन्तिम किनारी ब भामा पहुँच सके और उनकी प्रत्येक भाव-भविमा की मासानी से देव । प्रजिनमनातीपा बजता है कि मामा के पूर्ववर्ती टीका कार ऐसा ही मानते थे कि मासी भारतीय परम्परा को शिक्षा देने के लिए मिला गया है। पर स्वयं प्रमिनबमुप्त ऐसा नहीं मानते। उगमा कहना है कि माय-शास्त्र केवल दबिया और प्रमिनाओं को सिमित भरने के उद्दषय से ही बना था। उसका मत प्रारम्भ के पाँच प्रस्तो वे विश्लेषण पर प्राचारित है। सविन पूरे माटम प्रास्त्र को पढ़ने पर पूषवत टीपाकारों की बात ही माम्प बाड़ती है। 'नाम-पार' रगमंच के निर्माण को बहुत महत्व देता है। भूमि निर्वाचित से लेकर रंगम की क्रिया तक वह बहुत साबमानी से समामा बाता था। सम स्थिर और कठिन भूमि तथा नामी या गौर वर्षी मिट्टी धुम मानी जाती थी। भूमि को पहले इस से बोठा जाता था। उसम से स्किीम कपास तुम मुस्यादि को साफ किया जाता था उसे सम और पटसर बनाया जाता था और तब प्रेक्षागृह के पी विधि पुरु होती थी। 'नाम-प्रास्त्र' को देखने से पता चलता है कि प्रेमागृह वा नापना बहुत महत्वपूर्ण कार्य समभा जाता था। माप के समयमादूट गामा बहुत प्रमगत चमक समझा जाता था। सूत्र ऐसा बनाया जाता था जो सहम ही न टूट समे। वह मा ही रूपास से बनता बामाबेट की छाल से बनता था मा मूंज से बनता था और किमी वृद्ध पीछा को मजबूत रस्मी भी मनाई जा सती थी। ऐसा विश्वास किया जाता था कि यदि सूत्र मा से टूट जाए तो स्वामी दी मृत्यु होती है विहा से टूट जाए तो राजी होती है चौबाई से टूटे तो प्रयोक्ता का नाम होता है ? एम-भर मै टूटे तो कुछ सामग्री पट जाती है। इस प्रकार मूत्र-धारच का नाम बहुत ही महत्व पर मार्यमा जाता था। तिथि नराम करन प्रादि की पुरविय से ध्यान दिया जाता था और इस बात मा पूरा ध्यान रमा जाता था कि कोई बयाप बस्तवारी हीन पुथा बिरलाय पुरुप भाप स्थापना के अजय पचानक भावर तुमसत्पन्न कराने म भी बडी सावधानी बरती जाती थी। सम्मा दिन गया शिवक गया जागर गया तो भने प्रकार के अपडया की सम्भावना मामी
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रायपुर। सूर्य का राशि परिवर्तन 14 मार्च 2022 सोमवार को मध्यरात्रि में 12 बजकर 15 मिनट पर हो रहा है। सूर्य 14 अप्रैल को प्रातः 10. 59 बजे तक इसी राशि में रहेगा। सूर्य के मीन राशि में रहने के कारण एक माह का मलमास प्रारंभ होगा जिसमें प्रत्येक शुभ कार्य करना वर्जित रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य एक राशि में 30 दिन तक भ्रमण करता है। इस प्रकार 12 माह अर्थात् एक वर्ष में सूर्य 12 राशियों का एक चक्र पूरा कर लेता है।
भ्रमण करते हुए सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशि धनु और मीन में आता है, तो उसे मलमास कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र और मुहूर्त शास्त्र के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य में बृहस्पति का साक्षी होना अनिवार्य है। सूर्य जब भी किसी ग्रह की राशि में जाता है, तो उसे अस्त के समान कर देता है। यहां मीन राशि में सूर्य आने से राशि स्वामी बृहस्पति मलिन हो जाता है, इसलिए इसे मलमास कहा जाता है। मलमास में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। मलमास में सगाई, विवाह, नूतन गृह प्रवेश, मुंडन, गृह निर्माण कार्य, भूमि, भवन संपत्ति आदि की खरीदी जैसे कार्यो पर प्रतिबंध लग जाएगा।
राशियों पर प्रभाव सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने से राशियों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव होगा।
मेष : खर्च में वृद्धि होगी। बाएं नेत्र में रोग आ सकता है। कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में लाभ मिलेगा।
वृषभ : आय के साधनों में वृद्धि होगी। सुख-सम्मान प्राप्त होगा। साथ ही खर्च भी बढ़ेगा।
कर्क : भाग्य को बल मिलेगा। कार्यो में उन्नति प्राप्त होगी। सुख-सम्मान प्राप्त होगा। सिंह : रोग पीड़ित करेंगे। सम्मान में कमी आ सकती है। आर्थिक संकट की आशंका।
कन्या : दांपत्य जीवन में कष्ट, जीवनसाथी से मतभेद। साझेदारी में व्यापार से हानि।
तुला : रोग दूर होंगे। शत्रु परास्त होंगे। सुखों में वृद्धि, जीवन में उन्नति प्राप्त होगी।
वृश्चिक : शिक्षा और संतान से लाभ। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। सुख प्राप्त होगा।
धनु : सुख, समृद्धि में वृद्धि, मातृ पक्ष की ओर से सहयोग, भौतिक वस्तुएं प्राप्त होंगी।
मकर : भाई-बहनों से अच्छा तालमेल, पैतृक संपत्ति प्राप्त होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी।
कुंभ : वाणी और बुद्धि का लाभ मिलेगा, दाएं नेत्र में रोग आ सकता है। धन प्राप्त होगा।
मीन : आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। सुख प्राप्त होगा। रोग दूर होंगे। धन की प्राप्ति संभव है।
सूर्य के मीन राशि में रहने की अवधि में सभी राशि के जातक नियमित रूप से सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें। नियमित रूप से आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। नित्य प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें। गायत्री मंत्र का जाप करें।
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रायपुर। सूर्य का राशि परिवर्तन चौदह मार्च दो हज़ार बाईस सोमवार को मध्यरात्रि में बारह बजकर पंद्रह मिनट पर हो रहा है। सूर्य चौदह अप्रैल को प्रातः दस. उनसठ बजे तक इसी राशि में रहेगा। सूर्य के मीन राशि में रहने के कारण एक माह का मलमास प्रारंभ होगा जिसमें प्रत्येक शुभ कार्य करना वर्जित रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य एक राशि में तीस दिन तक भ्रमण करता है। इस प्रकार बारह माह अर्थात् एक वर्ष में सूर्य बारह राशियों का एक चक्र पूरा कर लेता है। भ्रमण करते हुए सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशि धनु और मीन में आता है, तो उसे मलमास कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र और मुहूर्त शास्त्र के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य में बृहस्पति का साक्षी होना अनिवार्य है। सूर्य जब भी किसी ग्रह की राशि में जाता है, तो उसे अस्त के समान कर देता है। यहां मीन राशि में सूर्य आने से राशि स्वामी बृहस्पति मलिन हो जाता है, इसलिए इसे मलमास कहा जाता है। मलमास में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। मलमास में सगाई, विवाह, नूतन गृह प्रवेश, मुंडन, गृह निर्माण कार्य, भूमि, भवन संपत्ति आदि की खरीदी जैसे कार्यो पर प्रतिबंध लग जाएगा। राशियों पर प्रभाव सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने से राशियों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव होगा। मेष : खर्च में वृद्धि होगी। बाएं नेत्र में रोग आ सकता है। कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में लाभ मिलेगा। वृषभ : आय के साधनों में वृद्धि होगी। सुख-सम्मान प्राप्त होगा। साथ ही खर्च भी बढ़ेगा। कर्क : भाग्य को बल मिलेगा। कार्यो में उन्नति प्राप्त होगी। सुख-सम्मान प्राप्त होगा। सिंह : रोग पीड़ित करेंगे। सम्मान में कमी आ सकती है। आर्थिक संकट की आशंका। कन्या : दांपत्य जीवन में कष्ट, जीवनसाथी से मतभेद। साझेदारी में व्यापार से हानि। तुला : रोग दूर होंगे। शत्रु परास्त होंगे। सुखों में वृद्धि, जीवन में उन्नति प्राप्त होगी। वृश्चिक : शिक्षा और संतान से लाभ। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। सुख प्राप्त होगा। धनु : सुख, समृद्धि में वृद्धि, मातृ पक्ष की ओर से सहयोग, भौतिक वस्तुएं प्राप्त होंगी। मकर : भाई-बहनों से अच्छा तालमेल, पैतृक संपत्ति प्राप्त होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। कुंभ : वाणी और बुद्धि का लाभ मिलेगा, दाएं नेत्र में रोग आ सकता है। धन प्राप्त होगा। मीन : आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। सुख प्राप्त होगा। रोग दूर होंगे। धन की प्राप्ति संभव है। सूर्य के मीन राशि में रहने की अवधि में सभी राशि के जातक नियमित रूप से सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें। नियमित रूप से आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। नित्य प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें। गायत्री मंत्र का जाप करें।
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Vivo का रंग बदलने वाला 5G Smartphone मिल रहा आधे दाम पर, Flipkart की डील ने बनाया दीवाना!
Flipkart Sale : फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर सेल (Big Saving Days Sale) चल रही है। होली पर Big Saving Days Sale 12 मार्च से शुरू हुई और 16 मार्च को ख़त्म हो गई।
सेल के बाद भी स्मार्टफोन्स और बाकी प्रोडक्ट्स पर धमाकेदार डिस्काउंट (Discount) मिल रहा है। अगर आप नए स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आज शानदार मौका है।
5G स्मार्टफोन्स का अच्छा-खासा क्रेज है। सभी कंपनियों ने अपने-अपने 5G स्मार्टफोन्स को लॉन्च किया है।
Vivo V23 5G के 8GB RAM+128GB स्टोरेज वैरिएंट की लॉन्चिंग प्राइज 34,990 रुपये है, लेकिन फ्लिपकार्ट सेल में फोन 29,990 रुपये में उपलब्ध है। यानी फोन पर 5 हजार का डिस्काउंट मिल रहा है। इसके अलावा कई बैंक और एक्सचेंज ऑफर है, जिससे फोन की कीमत काफी कम हो जाती है।
अगर आप फोन को खरीदने के लिए HDFC के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करते हैं, तो आपको 2500 का डिस्काउंट मिलेगा, यानी फोन की कीमत 27,490 रुपये हो जाएगी। उसके बाद एक्सचेंज ऑफर भी है।
Vivo V23 5G पर 13 हजार रुपये का एक्सचेंज ऑफर मिल रहा है। अगर आप पुराना स्मार्टफोन एक्सचेंज करते हैं, तो आपको इतना ऑफ मिल सकता है। 13 हजार रुपये का पूरा Discount तभी मिलेगा जब फोन की कंडीशन अच्छी हो और मॉडल लेटेस्ट हो।
पूरा Discount पाने में कामयाब रहे, तो फोन की कीमत 13,990 रुपये हो जाएगी। यानी 34,990 का फोन आप 13,990 रुपये में खरीद सकते हैं।
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Vivo का रंग बदलने वाला पाँचG Smartphone मिल रहा आधे दाम पर, Flipkart की डील ने बनाया दीवाना! Flipkart Sale : फ्लिपकार्ट पर सेल चल रही है। होली पर Big Saving Days Sale बारह मार्च से शुरू हुई और सोलह मार्च को ख़त्म हो गई। सेल के बाद भी स्मार्टफोन्स और बाकी प्रोडक्ट्स पर धमाकेदार डिस्काउंट मिल रहा है। अगर आप नए स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आज शानदार मौका है। पाँचG स्मार्टफोन्स का अच्छा-खासा क्रेज है। सभी कंपनियों ने अपने-अपने पाँचG स्मार्टफोन्स को लॉन्च किया है। Vivo Vतेईस पाँचG के आठGB RAM+एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वैरिएंट की लॉन्चिंग प्राइज चौंतीस,नौ सौ नब्बे रुपयापये है, लेकिन फ्लिपकार्ट सेल में फोन उनतीस,नौ सौ नब्बे रुपयापये में उपलब्ध है। यानी फोन पर पाँच हजार का डिस्काउंट मिल रहा है। इसके अलावा कई बैंक और एक्सचेंज ऑफर है, जिससे फोन की कीमत काफी कम हो जाती है। अगर आप फोन को खरीदने के लिए HDFC के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करते हैं, तो आपको दो हज़ार पाँच सौ का डिस्काउंट मिलेगा, यानी फोन की कीमत सत्ताईस,चार सौ नब्बे रुपयापये हो जाएगी। उसके बाद एक्सचेंज ऑफर भी है। Vivo Vतेईस पाँचG पर तेरह हजार रुपये का एक्सचेंज ऑफर मिल रहा है। अगर आप पुराना स्मार्टफोन एक्सचेंज करते हैं, तो आपको इतना ऑफ मिल सकता है। तेरह हजार रुपये का पूरा Discount तभी मिलेगा जब फोन की कंडीशन अच्छी हो और मॉडल लेटेस्ट हो। पूरा Discount पाने में कामयाब रहे, तो फोन की कीमत तेरह,नौ सौ नब्बे रुपयापये हो जाएगी। यानी चौंतीस,नौ सौ नब्बे का फोन आप तेरह,नौ सौ नब्बे रुपयापये में खरीद सकते हैं।
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श्वेत रेखाएँ बनी हुई थी और जहाँ दूर किनारे पर, एक-दो गाडियाँ इधरउधर खडी इस बातका स्मरण दिला रही थीं कि आज वॉलिंग अपने ढलाईके यंत्र का परीक्षण कर रहा है ।
उस झुटपुटे मे आँखे गड़ाते हुए उसने वॉलिंग की बालुका रंगवाली ब्यूक गाड़ी देख ली और उसे पहचानते ही उसने देखा कि गाडी चल दी है । उसके पीछे-पीछे दो और गाड़ियाँ भी चली आ रही है । एक और गाडी पाइक स्ट्रीट पर घूम रही है । यह स्पष्ट था कि परीक्षण असफल हो गया । यदि यह बात न होती तो वॉलिंग इतने शीघ्र न जाता । जेसी ग्रिम ने धीरे-धीरे साँस ली। उसने अपनी स्मृति के कोने में सब से अधिक छिपाकर जो वस्तु रक्खी थी, वह थी डॉन वॉलिंग के विरुद्ध बहुत दिनोंसे संचित विरोध ।
वह जानता था कि मैं जिस प्रकारका विरोध ठाने हुए हूँ उसका कोई अर्थ नहीं । डॉन वॉलिंग से विरोधकी पहली स्मृति उसे उस समय की थी, जब पिट्सबर्ग में प्रारंभिक महीनों में वॉलिग ने आकर बुलार्ड का प्रतिरूप बननेका प्रयत्न किया था । उसने उसे उस ढंग से चलने नही दिया. उसने उसे ऐसा मरोड़ा जैसा उसने कभी और किसी को मरोड़ा नहीं था. और वॉलिंग ने भी समझ लिया था. . . यहाँ तक कि धन्यवाद भी दिया था । वॉलिंग ऐसा पहला ही कच्चा बकरा नहीं था, जिसने उसे उस प्रकारके व्यवहारके लिए धन्यवाद दिया हो । पर वॉलिंग ने उसे बहुत शीघ्र ही धन्यवाद दे दिया। यही तो था वॉलिंग.. सदा अत्यन्त वेगशील, अत्यन्त शीघ्रतायुक्त,' अत्यन्त निश्चयपूर्ण, अत्यन्त चतुर ।
जंब-जब बॉलिंग पास रहता, तब-तब वह शक्तिको ऐंठनेवाला तनाव उठ खड़ा होता. और जब बुलार्ड जान जाता था कि आप किसी बातका वह उत्तर नहीं दे रहे हैं, जो वह चाहता है तो वह झट वॉलिंगसे कहता- "अच्छा डॉन ? जो काम जेसीने छोड़ दिया है वह यदि तुम्हे सौंप दिया जाता तो ।'
और तब दुष्ट वॉलिंग का भाग्य काम करने लगता था । हाँ, उसे "भाग्य ही कहना चाहिए । बुलार्ड जितना उसे मानता था उसका यदि आधा भी वॉलिंग था तो उसका कुछ अश निश्चित ही भाग्य था । यदि कोई अच्छा यंत्र - शिल्पी भी न हो, उसे उत्पादनका अभ्यास भी न हो और फिर भी उससे काम चले तो उसका भाग्य ही समझना चाहिए; और हो ही क्या संकता है ?
किन्तु कारखाना चलानेके लिए भाग्य से अधिक की आवश्यकता होती
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श्वेत रेखाएँ बनी हुई थी और जहाँ दूर किनारे पर, एक-दो गाडियाँ इधरउधर खडी इस बातका स्मरण दिला रही थीं कि आज वॉलिंग अपने ढलाईके यंत्र का परीक्षण कर रहा है । उस झुटपुटे मे आँखे गड़ाते हुए उसने वॉलिंग की बालुका रंगवाली ब्यूक गाड़ी देख ली और उसे पहचानते ही उसने देखा कि गाडी चल दी है । उसके पीछे-पीछे दो और गाड़ियाँ भी चली आ रही है । एक और गाडी पाइक स्ट्रीट पर घूम रही है । यह स्पष्ट था कि परीक्षण असफल हो गया । यदि यह बात न होती तो वॉलिंग इतने शीघ्र न जाता । जेसी ग्रिम ने धीरे-धीरे साँस ली। उसने अपनी स्मृति के कोने में सब से अधिक छिपाकर जो वस्तु रक्खी थी, वह थी डॉन वॉलिंग के विरुद्ध बहुत दिनोंसे संचित विरोध । वह जानता था कि मैं जिस प्रकारका विरोध ठाने हुए हूँ उसका कोई अर्थ नहीं । डॉन वॉलिंग से विरोधकी पहली स्मृति उसे उस समय की थी, जब पिट्सबर्ग में प्रारंभिक महीनों में वॉलिग ने आकर बुलार्ड का प्रतिरूप बननेका प्रयत्न किया था । उसने उसे उस ढंग से चलने नही दिया. उसने उसे ऐसा मरोड़ा जैसा उसने कभी और किसी को मरोड़ा नहीं था. और वॉलिंग ने भी समझ लिया था. . . यहाँ तक कि धन्यवाद भी दिया था । वॉलिंग ऐसा पहला ही कच्चा बकरा नहीं था, जिसने उसे उस प्रकारके व्यवहारके लिए धन्यवाद दिया हो । पर वॉलिंग ने उसे बहुत शीघ्र ही धन्यवाद दे दिया। यही तो था वॉलिंग.. सदा अत्यन्त वेगशील, अत्यन्त शीघ्रतायुक्त,' अत्यन्त निश्चयपूर्ण, अत्यन्त चतुर । जंब-जब बॉलिंग पास रहता, तब-तब वह शक्तिको ऐंठनेवाला तनाव उठ खड़ा होता. और जब बुलार्ड जान जाता था कि आप किसी बातका वह उत्तर नहीं दे रहे हैं, जो वह चाहता है तो वह झट वॉलिंगसे कहता- "अच्छा डॉन ? जो काम जेसीने छोड़ दिया है वह यदि तुम्हे सौंप दिया जाता तो ।' और तब दुष्ट वॉलिंग का भाग्य काम करने लगता था । हाँ, उसे "भाग्य ही कहना चाहिए । बुलार्ड जितना उसे मानता था उसका यदि आधा भी वॉलिंग था तो उसका कुछ अश निश्चित ही भाग्य था । यदि कोई अच्छा यंत्र - शिल्पी भी न हो, उसे उत्पादनका अभ्यास भी न हो और फिर भी उससे काम चले तो उसका भाग्य ही समझना चाहिए; और हो ही क्या संकता है ? किन्तु कारखाना चलानेके लिए भाग्य से अधिक की आवश्यकता होती
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोविड केसों को लेकर रायपुर हॉट-स्पॉट बना हुआ है। बीते 24 घंटों में राज्य में कोविड के 476 मामले सामने आए हैं। प्रशासन ने लोगों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की है।
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोविड केसों को लेकर रायपुर हॉट-स्पॉट बना हुआ है। बीते चौबीस घंटाटों में राज्य में कोविड के चार सौ छिहत्तर मामले सामने आए हैं। प्रशासन ने लोगों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की है।
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- इस 15 अगस्त को देखें ये 6 फिल्में, दमदार कहानी और देशभक्ति के जज्बें ने जीता दिल!
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पलाश नाम के फूलों की गिनती दुनिया के चुनिंदा खूबसूरत फूलों में की जाती है। ये फूल जितने दिखने में आकर्षक लगते हैं, उससे कहीं ज्यादा गुणकारी होते है। आपको जानकर हैरानी होगी कि लाल और संतरी रंग के पलाश के फूल रक्त को साफ करने से लेकर मधुमेह को नियंत्रित करने जैसी कई शारीरिक समस्याओं से राहत दिलाने में कारगर सिद्ध हो सकते हैं। चलिए फिर आज पलाश के फूलों के फायदे जानते हैं।
खून में शुगर की मात्रा बढ़ने से मधुमेह का खतरा उत्पन्न होता है। इस बीमारी के स्तर को नियंत्रित रखने में पलाश के फूल का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, पलाश के फूलों में मौजूद एंटी-डायबिटिक और एंटी-ऑक्सीडेंट का प्रभाव उपस्थित होता है। ये दोनों ही प्रभाव रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर मधुमेह की समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
पलाश के फूल के इस्तेमाल से पुरानी से पूरानी सूजन को कम करने में काफी मदद मिल सकती है। NCBI की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, पलाश के फूलों के अर्क में एंटी-इंफ्लेमेट्री (सूजन कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। इसलिए सूजन को कम करने में पलाश के फूल सहायक साबित हो सकते हैं। सूजन को कम करने के लिए पलाश के फूलों का पेस्ट से प्रभावित जगह पर लगाकर मलें।
दाद की समस्या से तुरंत राहत दिलाने में पलाश के फूल का इस्तेमाल फायदेमंद सिद्ध हो सकता है। रिसर्चगेट की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, पलाश के फूल मौजूद एंटी-फंगल गुण दाद से पैदा होने वाले फंगस को पनपने नहीं देता है और दाद से जल्द राहत मिल जाती है। समस्या से राहत पाने के लिए पलाश के फूल का पेस्ट दाद से प्रभावित त्वचा पर लगाकर छोड़ दें।
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पलाश नाम के फूलों की गिनती दुनिया के चुनिंदा खूबसूरत फूलों में की जाती है। ये फूल जितने दिखने में आकर्षक लगते हैं, उससे कहीं ज्यादा गुणकारी होते है। आपको जानकर हैरानी होगी कि लाल और संतरी रंग के पलाश के फूल रक्त को साफ करने से लेकर मधुमेह को नियंत्रित करने जैसी कई शारीरिक समस्याओं से राहत दिलाने में कारगर सिद्ध हो सकते हैं। चलिए फिर आज पलाश के फूलों के फायदे जानते हैं। खून में शुगर की मात्रा बढ़ने से मधुमेह का खतरा उत्पन्न होता है। इस बीमारी के स्तर को नियंत्रित रखने में पलाश के फूल का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, पलाश के फूलों में मौजूद एंटी-डायबिटिक और एंटी-ऑक्सीडेंट का प्रभाव उपस्थित होता है। ये दोनों ही प्रभाव रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर मधुमेह की समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं। पलाश के फूल के इस्तेमाल से पुरानी से पूरानी सूजन को कम करने में काफी मदद मिल सकती है। NCBI की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, पलाश के फूलों के अर्क में एंटी-इंफ्लेमेट्री प्रभाव पाया जाता है। इसलिए सूजन को कम करने में पलाश के फूल सहायक साबित हो सकते हैं। सूजन को कम करने के लिए पलाश के फूलों का पेस्ट से प्रभावित जगह पर लगाकर मलें। दाद की समस्या से तुरंत राहत दिलाने में पलाश के फूल का इस्तेमाल फायदेमंद सिद्ध हो सकता है। रिसर्चगेट की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, पलाश के फूल मौजूद एंटी-फंगल गुण दाद से पैदा होने वाले फंगस को पनपने नहीं देता है और दाद से जल्द राहत मिल जाती है। समस्या से राहत पाने के लिए पलाश के फूल का पेस्ट दाद से प्रभावित त्वचा पर लगाकर छोड़ दें।
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PATNA : बिहार में डीएसपी रैंक के के पांच अधिकारियों के ऊपर सरकार ने कार्रवाई की है। राज्य के अलग-अलग अनुमंडल में एसडीपीओ के पद पर तैनात रहे डीएसपी रैंक के इन पांच अधिकारियों के ऊपर ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप है। इसी मामले में इनके ऊपर एक्शन लिया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि इन सभी डीएसपी के ऊपर जो एक्शन लिया गया वह वेतन वृद्धि पर रोक और आर्थिक दंड से जुड़ा हुआ है।
जिन अधिकारियों के ऊपर एक्शन लिया गया है उनमें पटोरी के तत्कालीन एसडीपीओ विजय कुमार को पहले ही निंदन वेतन वृद्धि पर रोक की सजा दी गई थी। इस सजा को बरकरार रखा गया है जबकि जयनगर के तत्कालीन एसडीपीओ सुधीर कुमार के साथ-साथ बगहा के एसडीपीओ रहे संजीव कुमार और जहानाबाद के एसडीपीओ रहे अशफाक अंसारी को अलग-अलग मामलों में दंड दिया गया है। तीन अधिकारियों को नंदन के साथ साथ दो वेतन वृद्धि पर रोक की सजा दी गई है।
डीएसपी रैंक के एक अधिकारी ऐसे भी हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उन्हें पेंशन में आर्थिक दंड दिया गया है। दलसिंहसराय के तत्कालीन एसडीपीओ राम सागर शर्मा को पेंशन में 10 फ़ीसदी की राशि 3 सालों के लिए कटौती का दंड दिया गया है। गृह विभाग ने इन अधिकारियों के ऊपर दंड से जुड़ा आदेश जारी किया है।
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PATNA : बिहार में डीएसपी रैंक के के पांच अधिकारियों के ऊपर सरकार ने कार्रवाई की है। राज्य के अलग-अलग अनुमंडल में एसडीपीओ के पद पर तैनात रहे डीएसपी रैंक के इन पांच अधिकारियों के ऊपर ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप है। इसी मामले में इनके ऊपर एक्शन लिया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि इन सभी डीएसपी के ऊपर जो एक्शन लिया गया वह वेतन वृद्धि पर रोक और आर्थिक दंड से जुड़ा हुआ है। जिन अधिकारियों के ऊपर एक्शन लिया गया है उनमें पटोरी के तत्कालीन एसडीपीओ विजय कुमार को पहले ही निंदन वेतन वृद्धि पर रोक की सजा दी गई थी। इस सजा को बरकरार रखा गया है जबकि जयनगर के तत्कालीन एसडीपीओ सुधीर कुमार के साथ-साथ बगहा के एसडीपीओ रहे संजीव कुमार और जहानाबाद के एसडीपीओ रहे अशफाक अंसारी को अलग-अलग मामलों में दंड दिया गया है। तीन अधिकारियों को नंदन के साथ साथ दो वेतन वृद्धि पर रोक की सजा दी गई है। डीएसपी रैंक के एक अधिकारी ऐसे भी हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उन्हें पेंशन में आर्थिक दंड दिया गया है। दलसिंहसराय के तत्कालीन एसडीपीओ राम सागर शर्मा को पेंशन में दस फ़ीसदी की राशि तीन सालों के लिए कटौती का दंड दिया गया है। गृह विभाग ने इन अधिकारियों के ऊपर दंड से जुड़ा आदेश जारी किया है।
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