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इंदौर. इंटरनेट गेम ब्लू व्हेल खेल रही 19 साल की लड़की ने धारदार हथियार से हाथ पर 25 कट लगा लिए। इसके बाद भी वह सुसाइड में कामयाब नहीं हुई तो छत से कूदकर जान देने की कोशिश की। फैमिली मेंबर्स उसे हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टर्स ने जख्मों पर 100 टांके लगाकर जान बचाई। लड़की मध्य प्रदेश के झाबुआ की रहने वाली है और कुछ दिन पहले दाहोद में बहन के घर आई थी। बता दें कि रूस में बने इस सुसाइड गेम के चलते भारत, चीन, अमेरिका, ईरान समेत कई देशों के 150 से ज्यादा लोग जान दे चुके हैं।
- जानकारी के मुताबिक, लड़की रविवार रात साढ़े तीन बजे बाथरूम में गई। जहां गेम का टास्क पूरा करने के लिए उसने 15 मिनट में हाथ पर कट लगा लिए। लड़की की हालत देखकर बहन की ससुरालवाले घबरा गए और उसे तुंरत हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उसके 25 जख्मों पर 100 टांके लगाए, फिलहाल वह बहन के घर पर आराम कर रही है।
- लड़की का इलाज करने वाले साइकोलॉजिस्ट ने बताया कि हम विक्टिम की दिमागी हालत पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि उसने दो बार सुसाइड की कोशिश की है। फिलहाल उसकी हालत कंट्रोल में है।
- पिता ने बताया कि बेटी पूरी रात मोबाइल में बिजी रहती थी, सोती ही नहीं थी। उसके बर्ताव में चिड़चिड़ापन आने पर 21 सितंबर को हॉस्पिटल भी ले गए थे, लेकिन मोहर्रम होने के चलते उसे भर्ती नहीं किया जा सका।
- वहीं, विक्टिम ने बताया कि कोई उससे कहता है कि तू मर जा नहीं तो मैं तुझे मार डालूंगा।
| इंदौर. इंटरनेट गेम ब्लू व्हेल खेल रही उन्नीस साल की लड़की ने धारदार हथियार से हाथ पर पच्चीस कट लगा लिए। इसके बाद भी वह सुसाइड में कामयाब नहीं हुई तो छत से कूदकर जान देने की कोशिश की। फैमिली मेंबर्स उसे हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टर्स ने जख्मों पर एक सौ टांके लगाकर जान बचाई। लड़की मध्य प्रदेश के झाबुआ की रहने वाली है और कुछ दिन पहले दाहोद में बहन के घर आई थी। बता दें कि रूस में बने इस सुसाइड गेम के चलते भारत, चीन, अमेरिका, ईरान समेत कई देशों के एक सौ पचास से ज्यादा लोग जान दे चुके हैं। - जानकारी के मुताबिक, लड़की रविवार रात साढ़े तीन बजे बाथरूम में गई। जहां गेम का टास्क पूरा करने के लिए उसने पंद्रह मिनट में हाथ पर कट लगा लिए। लड़की की हालत देखकर बहन की ससुरालवाले घबरा गए और उसे तुंरत हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उसके पच्चीस जख्मों पर एक सौ टांके लगाए, फिलहाल वह बहन के घर पर आराम कर रही है। - लड़की का इलाज करने वाले साइकोलॉजिस्ट ने बताया कि हम विक्टिम की दिमागी हालत पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि उसने दो बार सुसाइड की कोशिश की है। फिलहाल उसकी हालत कंट्रोल में है। - पिता ने बताया कि बेटी पूरी रात मोबाइल में बिजी रहती थी, सोती ही नहीं थी। उसके बर्ताव में चिड़चिड़ापन आने पर इक्कीस सितंबर को हॉस्पिटल भी ले गए थे, लेकिन मोहर्रम होने के चलते उसे भर्ती नहीं किया जा सका। - वहीं, विक्टिम ने बताया कि कोई उससे कहता है कि तू मर जा नहीं तो मैं तुझे मार डालूंगा। |
जैसे कि आज पशु करते हैं और वे इसके लिये किसी प्रकार की लज्जा की भावना भी मन में नहीं लाते थे। निस्सन्देह यह विश्व के मानवों के आदिपुरुषों का जीवन था, तब कदाचित् गुप्नेन्द्रियों को छिपाया नहीं जाता था और सम्भवतः सहवास कार्य गोपनीय नहीं माना जाता था । उस काल में मनुष्य को सामाजिक रूप का विकास नहीं हुआ था । हार, कृषि और पशुपालन तक ही उनके सामाजिक जीवन का विकास था ।
ऋग्वेद, जो आर्यों की प्रतिप्राचीन पुस्तक है और ार्यों की प्रारम्भिक सभ्यता का जिसमें प्रदर्शन है, मानव-समाज के बहुत संस्कृत और परिष्कृत काल का उदाहरण हमारे सामने उपस्थित करता है। वह आर्थों की सभ्यता की, जो उस युग मे अन्य मानव जिनसे अधिक और शीघ्र विकसित हो गये थे तथा तत्कालीन मार्यो की प्रति जातियों के सम्बन्ध में भी सभ्यता की साक्षी देता है ।
ऋग्वेद को पढ़ कर हम निश्चयपूर्वक कह सकते हैं कि समाज के नियन्त्रक व्यक्तियों के समक्ष स्त्री-पुरुष मुक्त-सहवास कर सन्तान उत्पन्न कर सकते थे और एक दूसरे के प्रति आजीवन अनुबन्धित रहना उनके लिए आवश्यक न था । उरा काल में पुत्र माता को ही सम्पत्ति होता था पिता की नहीं। इसका उत्कृष्ट उदाहरण छान्दोग्योपनिषद् में प्राप्त है जो सत्यकाम जावाल के उपाख्यान के रूप में 1
ऐतरेय ब्राह्मण में हम इलुषा दासी के विद्वान् पुत्र काविध को जो ऋषि था, देवताओं को जानता था और देवता उसे जानते थे-अपमानित होकर यज्ञ से निकाला हुआ पाते है । यह उदाहरण ब्राह्मण ग्रथ और उपनिषद् की सामाजिक स्थिति का ग्रन्तर प्रकट करता है परन्तु
१. छान्दोग्योपनिपट् ८०४ २. ऐतरेय ब्राह्मण २०१६ | जैसे कि आज पशु करते हैं और वे इसके लिये किसी प्रकार की लज्जा की भावना भी मन में नहीं लाते थे। निस्सन्देह यह विश्व के मानवों के आदिपुरुषों का जीवन था, तब कदाचित् गुप्नेन्द्रियों को छिपाया नहीं जाता था और सम्भवतः सहवास कार्य गोपनीय नहीं माना जाता था । उस काल में मनुष्य को सामाजिक रूप का विकास नहीं हुआ था । हार, कृषि और पशुपालन तक ही उनके सामाजिक जीवन का विकास था । ऋग्वेद, जो आर्यों की प्रतिप्राचीन पुस्तक है और ार्यों की प्रारम्भिक सभ्यता का जिसमें प्रदर्शन है, मानव-समाज के बहुत संस्कृत और परिष्कृत काल का उदाहरण हमारे सामने उपस्थित करता है। वह आर्थों की सभ्यता की, जो उस युग मे अन्य मानव जिनसे अधिक और शीघ्र विकसित हो गये थे तथा तत्कालीन मार्यो की प्रति जातियों के सम्बन्ध में भी सभ्यता की साक्षी देता है । ऋग्वेद को पढ़ कर हम निश्चयपूर्वक कह सकते हैं कि समाज के नियन्त्रक व्यक्तियों के समक्ष स्त्री-पुरुष मुक्त-सहवास कर सन्तान उत्पन्न कर सकते थे और एक दूसरे के प्रति आजीवन अनुबन्धित रहना उनके लिए आवश्यक न था । उरा काल में पुत्र माता को ही सम्पत्ति होता था पिता की नहीं। इसका उत्कृष्ट उदाहरण छान्दोग्योपनिषद् में प्राप्त है जो सत्यकाम जावाल के उपाख्यान के रूप में एक ऐतरेय ब्राह्मण में हम इलुषा दासी के विद्वान् पुत्र काविध को जो ऋषि था, देवताओं को जानता था और देवता उसे जानते थे-अपमानित होकर यज्ञ से निकाला हुआ पाते है । यह उदाहरण ब्राह्मण ग्रथ और उपनिषद् की सामाजिक स्थिति का ग्रन्तर प्रकट करता है परन्तु एक. छान्दोग्योपनिपट् आठ सौ चार दो. ऐतरेय ब्राह्मण दो हज़ार सोलह |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 जुलाई यानी गुरुवार को डिजिटल इंडिया अभियान की छठी वर्षगांठ के मौके पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अभियान के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे. डिजिटल इंडिया न्यू इंडिया की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक रहा है. इससे सेवाओं को सक्षम बनाने, सरकार को नागरिकों के करीब लाने, नागरिक जुड़ाव को बढ़ावा देने और लोगों को सशक्त बनाने में मदद मिलती है.
इस मौके पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर भी मौजूद रहेंगे. डिजिटल इंडिया भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने की दृष्टि से भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है. इस पहल में ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने की योजना शामिल है. इसमें सुरक्षित और स्थिर डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास करना, सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से वितरित करना और सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता शामिल हैं.
मोदी सरकार ने सोमवार को भारतनेट परियोजना के तहत सभी गांवों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन सुविधा पहुंचाने के लिए 19,041 करोड़ रुपए और आवंटित किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को घोषणा की थी कि 1,000 दिन में सभी गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ दिया जाएगा.
सोमवार को वित्त मंत्री ने कहा कि 31 मई तक 1,56,223 ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड नेटवर्क से जोड़ने के काम पर 42,068 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. इस अतिरिक्त 19,041 करोड़ रुपए से शेष परियोजना को पूरा कर सकेंगे. भारतनेट परियोजना के तहत सरकार ने शुरू में सभी 2.52 लाख ग्राम पंचायतों को तेज गति की ब्रॉडबैंड सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा था. प्रधानमंत्री ने बाद में इस परियोजना का विस्तार सभी गांवों तक करने की घोषणा की थी.
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जुलाई यानी गुरुवार को डिजिटल इंडिया अभियान की छठी वर्षगांठ के मौके पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अभियान के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे. डिजिटल इंडिया न्यू इंडिया की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक रहा है. इससे सेवाओं को सक्षम बनाने, सरकार को नागरिकों के करीब लाने, नागरिक जुड़ाव को बढ़ावा देने और लोगों को सशक्त बनाने में मदद मिलती है. इस मौके पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर भी मौजूद रहेंगे. डिजिटल इंडिया भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने की दृष्टि से भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है. इस पहल में ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने की योजना शामिल है. इसमें सुरक्षित और स्थिर डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास करना, सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से वितरित करना और सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता शामिल हैं. मोदी सरकार ने सोमवार को भारतनेट परियोजना के तहत सभी गांवों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन सुविधा पहुंचाने के लिए उन्नीस,इकतालीस करोड़ रुपए और आवंटित किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंद्रह अगस्त दो हज़ार बीस को घोषणा की थी कि एक,शून्य दिन में सभी गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ दिया जाएगा. सोमवार को वित्त मंत्री ने कहा कि इकतीस मई तक एक,छप्पन,दो सौ तेईस ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड नेटवर्क से जोड़ने के काम पर बयालीस,अड़सठ करोड़ रुपए खर्च हुए थे. इस अतिरिक्त उन्नीस,इकतालीस करोड़ रुपए से शेष परियोजना को पूरा कर सकेंगे. भारतनेट परियोजना के तहत सरकार ने शुरू में सभी दो.बावन लाख ग्राम पंचायतों को तेज गति की ब्रॉडबैंड सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा था. प्रधानमंत्री ने बाद में इस परियोजना का विस्तार सभी गांवों तक करने की घोषणा की थी. |
प्राविधिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध राजकीय, अनुदानित एवं निजी क्षेत्र के पॉलीटेक्निक में ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा जारी है। परीक्षा 31 अगस्त से शुरू हुई थी जो 4 सितम्बर तक होगी। प्रवेश परीक्षा के प्रभारी सचिव राम रतन ने बताया कि प्रवेश परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी को प्रश्न एवं उनके उत्तर विकल्पों पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है। चार सितम्बर से सात सितम्बर तक अभ्यर्थी वेबसाइट jeecup.nic.in पर प्रश्न, उत्तर विकल्पों को देखकर 100 आपत्ति शुल्क जमा कर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
राम रतन ने बताया कि आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद 13 सितम्बर को नतीजे जारी होंगे। 14 सितम्बर से काउंसलिंग होगी। प्रभारी सचिव ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश में 55177 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। 33651 परीक्षा में शामिल हुए। लखनऊ में 13708 पंजीकृत थे जिनमें से 8679 (63.13 फीसदी) परीक्षा में बैठे।
| प्राविधिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध राजकीय, अनुदानित एवं निजी क्षेत्र के पॉलीटेक्निक में ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा जारी है। परीक्षा इकतीस अगस्त से शुरू हुई थी जो चार सितम्बर तक होगी। प्रवेश परीक्षा के प्रभारी सचिव राम रतन ने बताया कि प्रवेश परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी को प्रश्न एवं उनके उत्तर विकल्पों पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है। चार सितम्बर से सात सितम्बर तक अभ्यर्थी वेबसाइट jeecup.nic.in पर प्रश्न, उत्तर विकल्पों को देखकर एक सौ आपत्ति शुल्क जमा कर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। राम रतन ने बताया कि आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद तेरह सितम्बर को नतीजे जारी होंगे। चौदह सितम्बर से काउंसलिंग होगी। प्रभारी सचिव ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश में पचपन हज़ार एक सौ सतहत्तर अभ्यर्थी पंजीकृत थे। तैंतीस हज़ार छः सौ इक्यावन परीक्षा में शामिल हुए। लखनऊ में तेरह हज़ार सात सौ आठ पंजीकृत थे जिनमें से आठ हज़ार छः सौ उन्यासी परीक्षा में बैठे। |
चंडीगढ़/पंचकूला, 30 दिसंबर (नस)
नगर निगम चुनाव के लिए पहली बार मैदान में उतरी में आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा 14 सीटों पर ऐतिहासिक जीत के जश्न में बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में शानदार विजय यात्रा निकाली गयी। विजय यात्रा का नेतृत्व करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चंडीगढ़ के लोगों ने दिल्ली मॉडल को देखकर वोट डाली है, अब पंजाब की बारी है। उन्होंने आप के उम्मीदवारों की शानदार जीत की खूब सराहना की।
पार्टी के सांसद और पंजाब के अध्यक्ष भगवंत मान और पंजाब मामलों के सह प्रभारी व विधायक राघव चड्ढा की मौजूदगी में केजरीवाल की यह विजय यात्रा सेक्टर 22 स्थित अरोमा चौक से शुरू हुई और सेक्टर 23 में जाकर समाप्त हुई। उन्होंने इस मौके पर हाजिर सभी 14 पार्षदों को शहर के विकास और यहां के निवासियों की बेहतरी तथा पार्टी के प्रति निष्ठा के लिए शपथ भी दिलवाई। इस मौके पर केजरीवाल के साथ चंडीगढ़ आप के अध्यक्ष प्रेम गर्ग, सह प्रभारी प्रदीप छाबड़ा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री हरमोहन धवन, चुनाव प्रभारी चंद्रमुखी शर्मा सहित बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। विजय यात्रा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी को दिए समर्थन को लेकर चंडीगढ़ वासियों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में भी दिल्ली मॉडल लागू करके इसे सबसे खूबसूरत शहर बनाएंगे। उन्होंने चंडीगढ़ के चुने गए आप पार्षदों को कहा कि निगम चुनाव तक ही पार्टी की राजनीति थी, अब चुनाव जीतने के बाद अन्य पार्टियों के पार्षद भी उनके अपने हैं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास और यहां के लोगों को सुविधाएं देने के नाम पर किसी भी तरह का अन्य पार्टियों के पार्षदों और उनके समर्थकों के साथ पक्षपात न किया जाये।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि हम बस और सरकार दोनों माफिया मुक्त चलाते हैं। आप की सरकार भ्रष्टाचार और माफिया शासन को पूरी तरह खत्म करेगी और लोगों को स्थिर और ईमानदार सरकार देगी। निगम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद बृहस्पतिवार को अरविंद केजरीवाल चंडीगढ़ में विजय यात्रा का नेतृत्व करने पहुंचे थे। केजरीवाल मोहाली के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद मीडिया से रूबरू हुए। दशकों से नगर निगम में शासन करने वाली कांग्रेस और भाजपा ने जगह-जगह कूड़े के ढेर लगाकर शहर की सुंदरता पर जो कालिख पोती है, उसे आम आदमी पार्टी साफ करेगी।
केजरीवाल ने कहा कि चंडीगढ़ शहर को फिर से सिटी ब्यूटीफुल का टैग वापस दिलवाना है और देशभर में सबसे खूबसूरत शहर बनाना है। केजरीवाल ने कहा कि जैसे दिल्ली जीतने के बाद वह चंडीगढ़ के नगर निगम चुनाव जीते है, अब इसी तरह पंजाब की विधानसभा चुनाव में भी ऐतिहासिक जीत हासिल कर चंडीगढ़ में शपथ- ग्रहण करवाने आयेंगे।
| चंडीगढ़/पंचकूला, तीस दिसंबर नगर निगम चुनाव के लिए पहली बार मैदान में उतरी में आम आदमी पार्टी द्वारा चौदह सीटों पर ऐतिहासिक जीत के जश्न में बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में शानदार विजय यात्रा निकाली गयी। विजय यात्रा का नेतृत्व करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चंडीगढ़ के लोगों ने दिल्ली मॉडल को देखकर वोट डाली है, अब पंजाब की बारी है। उन्होंने आप के उम्मीदवारों की शानदार जीत की खूब सराहना की। पार्टी के सांसद और पंजाब के अध्यक्ष भगवंत मान और पंजाब मामलों के सह प्रभारी व विधायक राघव चड्ढा की मौजूदगी में केजरीवाल की यह विजय यात्रा सेक्टर बाईस स्थित अरोमा चौक से शुरू हुई और सेक्टर तेईस में जाकर समाप्त हुई। उन्होंने इस मौके पर हाजिर सभी चौदह पार्षदों को शहर के विकास और यहां के निवासियों की बेहतरी तथा पार्टी के प्रति निष्ठा के लिए शपथ भी दिलवाई। इस मौके पर केजरीवाल के साथ चंडीगढ़ आप के अध्यक्ष प्रेम गर्ग, सह प्रभारी प्रदीप छाबड़ा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री हरमोहन धवन, चुनाव प्रभारी चंद्रमुखी शर्मा सहित बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। विजय यात्रा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी को दिए समर्थन को लेकर चंडीगढ़ वासियों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में भी दिल्ली मॉडल लागू करके इसे सबसे खूबसूरत शहर बनाएंगे। उन्होंने चंडीगढ़ के चुने गए आप पार्षदों को कहा कि निगम चुनाव तक ही पार्टी की राजनीति थी, अब चुनाव जीतने के बाद अन्य पार्टियों के पार्षद भी उनके अपने हैं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास और यहां के लोगों को सुविधाएं देने के नाम पर किसी भी तरह का अन्य पार्टियों के पार्षदों और उनके समर्थकों के साथ पक्षपात न किया जाये। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि हम बस और सरकार दोनों माफिया मुक्त चलाते हैं। आप की सरकार भ्रष्टाचार और माफिया शासन को पूरी तरह खत्म करेगी और लोगों को स्थिर और ईमानदार सरकार देगी। निगम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद बृहस्पतिवार को अरविंद केजरीवाल चंडीगढ़ में विजय यात्रा का नेतृत्व करने पहुंचे थे। केजरीवाल मोहाली के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद मीडिया से रूबरू हुए। दशकों से नगर निगम में शासन करने वाली कांग्रेस और भाजपा ने जगह-जगह कूड़े के ढेर लगाकर शहर की सुंदरता पर जो कालिख पोती है, उसे आम आदमी पार्टी साफ करेगी। केजरीवाल ने कहा कि चंडीगढ़ शहर को फिर से सिटी ब्यूटीफुल का टैग वापस दिलवाना है और देशभर में सबसे खूबसूरत शहर बनाना है। केजरीवाल ने कहा कि जैसे दिल्ली जीतने के बाद वह चंडीगढ़ के नगर निगम चुनाव जीते है, अब इसी तरह पंजाब की विधानसभा चुनाव में भी ऐतिहासिक जीत हासिल कर चंडीगढ़ में शपथ- ग्रहण करवाने आयेंगे। |
देश में बड़ी प्रकर्तिक विपदा हो या जंग के मैदान में दुश्मन को शिकश्त देनी हो भारतीय वायु सेना अपनी हर कसौटी पर खरी उतरी है। दुश्मनं देश के नापाक मंसूबो को हवा में ही ख़तम कर देना भारतीय वायु सेना की खूबी हैं। भारत - पाक युद्ध रहा हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय वायु सेना ने अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को भारतीय वायु सेना द्वारा सुरक्षा हेतु एक कदम आगे रहने पर प्रसन्नता व्यक्त की। अपने भाषण के दौरान, मुर्मू ने अप्रैल में असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन में सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के अनुभव को याद किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को समग्र सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर भारतीय वायु सेना द्वारा तैयार और भविष्य के लिए तैयार रहने के कदमों पर प्रसन्नता व्यक्त की। इससे पहले आज, उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल में वायुसेना अकादमी (एएफए) में 211वें पाठ्यक्रम के संयुक्त स्नातक परेड (सीजीपी) की समीक्षा की। अपने भाषण के दौरान, मुर्मू ने अप्रैल में असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन में सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के अनुभव को याद किया। उन्होंने भारतीय वायुसेना की सभी भूमिकाओं और शाखाओं में महिला अधिकारियों को शामिल करने के लिए वायु सेना की प्रशंसा की। सशस्त्र बलों को रक्षा तैयारियों के एक एकीकृत परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखना होगा। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि हमारी वायु सेना हमेशा के लिए तैयार रहने के लिए कदम उठा रही है, विशेष रूप से भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए, समग्र सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए जिसमें लड़ाई की चुनौतियों सहित उच्च-प्रौद्योगिकी युद्ध। मुर्मू ने कहा, मैं 'आत्मनिर्भर भारत' के राष्ट्रीय एजेंडे को साकार करने के लिए रक्षा मंत्रालय के स्वदेशीकरण के प्रयासों के बारे में जानकर भी खुश हूं।
मुझे खुशी है कि भारतीय वायु सेना अब सभी भूमिकाओं और शाखाओं में महिला अधिकारियों को शामिल कर रही है। महिला लड़ाकू पायलटों की पर्याप्त संख्या है जो बढ़ना तय है। अप्रैल 2023 में, मैंने सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। असम में तेजपुर वायु सेना स्टेशन पर। मैंने वायु सेना स्टेशन पर लौटने से पहले हिमालय के शानदार दृश्य के साथ ब्रह्मपुत्र और तेजपुर घाटियों को कवर करते हुए लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी। लगभग 2 किमी की ऊंचाई पर उड़ान भरना वास्तव में एक शानदार अनुभव था। समुद्र तल से लगभग 800 किमी/घंटा की गति से ऊपर," उसने आगे कहा।
एएफए के अधिकारियों के अनुसार, एएफए के इतिहास में यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति समीक्षा अधिकारी हैं। सीजीपी का आयोजन भारतीय वायु सेना की विभिन्न शाखाओं के फ्लाइट कैडेटों के प्री-कमीशनिंग प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में किया जाता है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि परेड के दौरान, जो प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, फ्लाइट कैडेटों के कंधों पर रैंक का अनावरण किया जाता है, जो राष्ट्रपति आयोग के पुरस्कार का प्रतिनिधित्व करता है। आरओ ने कैडेटों की छाती पर 'विंग्स' और 'ब्रेवेट्स' को पिन किया, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें किस शाखा में कमीशन दिया जा रहा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस समारोह में भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और मित्रवत विदेशी देशों के कैडेटों को 'विंग्स' और 'ब्रेवेट्स' की प्रस्तुति शामिल थी, जिन्हें वायु सेना ने प्रशिक्षित किया है।
विज्ञप्ति के अनुसार, ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम आने वाली फ्लाइंग ब्रांच के फ्लाइट कैडेट को परेड की कमान संभालने का विशेषाधिकार दिया जाएगा और उनके प्रदर्शन के लिए 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और राष्ट्रपति की पट्टिका से सम्मानित किया जाएगा। ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम आने वाले फ्लाइट कैडेट को भी राष्ट्रपति की पट्टिका भेंट की जाएगी। परेड के बाद पिलाटस पीसी-7 ट्रेनर एयरक्राफ्ट द्वारा एरोबैटिक प्रदर्शन, पीसी-7 के गठन द्वारा एक फ्लाई-पास्ट, सुखोई-30 द्वारा एक एरोबेटिक शो और हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम 'सारंग' और सूर्या द्वारा सिंक्रोनस एरोबेटिक डिस्प्ले किया गया। किरण एरोबेटिक टीम ने रिलीज को जोड़ा।
| देश में बड़ी प्रकर्तिक विपदा हो या जंग के मैदान में दुश्मन को शिकश्त देनी हो भारतीय वायु सेना अपनी हर कसौटी पर खरी उतरी है। दुश्मनं देश के नापाक मंसूबो को हवा में ही ख़तम कर देना भारतीय वायु सेना की खूबी हैं। भारत - पाक युद्ध रहा हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय वायु सेना ने अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को भारतीय वायु सेना द्वारा सुरक्षा हेतु एक कदम आगे रहने पर प्रसन्नता व्यक्त की। अपने भाषण के दौरान, मुर्मू ने अप्रैल में असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन में सुखोई तीस एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के अनुभव को याद किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को समग्र सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर भारतीय वायु सेना द्वारा तैयार और भविष्य के लिए तैयार रहने के कदमों पर प्रसन्नता व्यक्त की। इससे पहले आज, उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल में वायुसेना अकादमी में दो सौ ग्यारहवें पाठ्यक्रम के संयुक्त स्नातक परेड की समीक्षा की। अपने भाषण के दौरान, मुर्मू ने अप्रैल में असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन में सुखोई तीस एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के अनुभव को याद किया। उन्होंने भारतीय वायुसेना की सभी भूमिकाओं और शाखाओं में महिला अधिकारियों को शामिल करने के लिए वायु सेना की प्रशंसा की। सशस्त्र बलों को रक्षा तैयारियों के एक एकीकृत परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखना होगा। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि हमारी वायु सेना हमेशा के लिए तैयार रहने के लिए कदम उठा रही है, विशेष रूप से भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए, समग्र सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए जिसमें लड़ाई की चुनौतियों सहित उच्च-प्रौद्योगिकी युद्ध। मुर्मू ने कहा, मैं 'आत्मनिर्भर भारत' के राष्ट्रीय एजेंडे को साकार करने के लिए रक्षा मंत्रालय के स्वदेशीकरण के प्रयासों के बारे में जानकर भी खुश हूं। मुझे खुशी है कि भारतीय वायु सेना अब सभी भूमिकाओं और शाखाओं में महिला अधिकारियों को शामिल कर रही है। महिला लड़ाकू पायलटों की पर्याप्त संख्या है जो बढ़ना तय है। अप्रैल दो हज़ार तेईस में, मैंने सुखोई तीस एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। असम में तेजपुर वायु सेना स्टेशन पर। मैंने वायु सेना स्टेशन पर लौटने से पहले हिमालय के शानदार दृश्य के साथ ब्रह्मपुत्र और तेजपुर घाटियों को कवर करते हुए लगभग तीस मिनट तक उड़ान भरी। लगभग दो किमी की ऊंचाई पर उड़ान भरना वास्तव में एक शानदार अनुभव था। समुद्र तल से लगभग आठ सौ किमी/घंटा की गति से ऊपर," उसने आगे कहा। एएफए के अधिकारियों के अनुसार, एएफए के इतिहास में यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति समीक्षा अधिकारी हैं। सीजीपी का आयोजन भारतीय वायु सेना की विभिन्न शाखाओं के फ्लाइट कैडेटों के प्री-कमीशनिंग प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में किया जाता है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि परेड के दौरान, जो प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, फ्लाइट कैडेटों के कंधों पर रैंक का अनावरण किया जाता है, जो राष्ट्रपति आयोग के पुरस्कार का प्रतिनिधित्व करता है। आरओ ने कैडेटों की छाती पर 'विंग्स' और 'ब्रेवेट्स' को पिन किया, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें किस शाखा में कमीशन दिया जा रहा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस समारोह में भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और मित्रवत विदेशी देशों के कैडेटों को 'विंग्स' और 'ब्रेवेट्स' की प्रस्तुति शामिल थी, जिन्हें वायु सेना ने प्रशिक्षित किया है। विज्ञप्ति के अनुसार, ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम आने वाली फ्लाइंग ब्रांच के फ्लाइट कैडेट को परेड की कमान संभालने का विशेषाधिकार दिया जाएगा और उनके प्रदर्शन के लिए 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और राष्ट्रपति की पट्टिका से सम्मानित किया जाएगा। ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम आने वाले फ्लाइट कैडेट को भी राष्ट्रपति की पट्टिका भेंट की जाएगी। परेड के बाद पिलाटस पीसी-सात ट्रेनर एयरक्राफ्ट द्वारा एरोबैटिक प्रदर्शन, पीसी-सात के गठन द्वारा एक फ्लाई-पास्ट, सुखोई-तीस द्वारा एक एरोबेटिक शो और हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम 'सारंग' और सूर्या द्वारा सिंक्रोनस एरोबेटिक डिस्प्ले किया गया। किरण एरोबेटिक टीम ने रिलीज को जोड़ा। |
Mamata-Kejriwal Meeting: बिल तो बहाना विपक्ष को साधने उतरे अरविंद केजरीवाल, आज ममता बनर्जी के साथ मीटिंग; इस मुलाकात के मायने क्या?
Mamata-Kejriwal Meeting In Kolkata: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने आज कोलकाता आ रहे हैं. ममता बनर्जी के साथ उनकी मीटिंग लोकसभा चुनाव के पहले विरोधी दलों को एकजुट करने की कोशिश मानी जा रही है.
कोलकाताः अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार को लेकर केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब मैदान में उतर गये हैं. राज्यसभा में इस प्रस्तावित विधेयक के विरोध का मुद्दा बनाकर वह लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा विरोधी ताकतों को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बाद आज कोलकाता में अरविंद केजरीवाल बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे.
वह बुधवार को मुंबई में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और शिवसेना के उद्धव-बालासाहेब समूह के नेता उद्धव ठाकरे से मिलने वाले हैं. इसके बाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जाएं। वह सभी विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं. मंगलवार बैठक में ममता बनर्जी के साथ बैठक में 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन बनाने पर भी चर्चा होगी.
अरविंद केजरीवाल राज्यसभा में केंद्र के अध्यादेश को रोककर पीएम मोदी नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव के पहले धक्का देना चाहते हैं. संख्यात्मक रूप से यह संभव है, लेकिन बाधाएं भी बहुत हैं.
ओडिशा के बीजू जनता दल, आंध्र के जगनमोहन रेड्डी की पार्टी अतीत में कई बार ऐसी स्थितियों में भाजपा के साथ खड़ी हुई है. वे बैठकों से अनुपस्थित रहते हैं और न तो सरकार का समर्थन करते हैं और न ही विरोध करते हैं. इसका फायदा सत्ताधारी दल को होता है.
केजरीवाल दूसरी पार्टियों को बिल के खिलाफ वोट करने के लिए मना कर जगन रेड्डी और नवीन पटनायक पर दबाव बनाना चाहते हैं. सीपीएम और सीपीआई पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि वे इस अध्यादेश का विरोध करेंगी.
सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी संकेत दिया कि कांग्रेस अध्यादेश करेगी. शनिवार को अध्यादेश की घोषणा के दिन कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार को इसे वापस लेना चाहिए और अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए.
हालांकि कांग्रेस के साथ केजरीवाल के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के बाद शपथ समारोह में कई विरोधी पार्टियों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उसमें केजरीवाल का नाम शामिल नहीं था. ऐसे में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जहां तक ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के बीच रिश्ते की बात है. गोवा चुनाव के दौरान रिश्तों में आई दूरियां अब बीते दिनों की बात हो गई है. अब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक-दूसरे के करीब आते दिख रहे हैं.
इन दोनों नेताओं के कांग्रेस के साथ संबंधों के संदर्भ में यह मुलाकात विशेष महत्व है. ममता बनर्जी ने हाल ही में कांग्रेस की जीत के बाद कर्नाटक के लोगों को धन्यवाद दिया, लेकिन पहले तो बड़ी सावधानी से कांग्रेस या राहुल गांधी का नाम नहीं लिया था.
उन्होंने कर्नाटक की जीत को जनता की जीत करार दिया था. ममता बनर्जी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं गईं. काकली घोष दस्तीदार ने अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया था.
इस मौके पर अखिलेश यादव भी मौजूद थे. नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव ने हाल ही में ममता बनर्जी से मुलाकात की थी. अखिलेश यादव, एचडी कुमारस्वामी पहले ही बंगाल का दौरा कर चुके हैं. उनमें से प्रत्येक एक राजनीतिक दल का चेहरा है जो भाजपा विरोधी है.
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों की निगाहें भाजपा गठबंधन के दो अहम नेताओं की बैठक पर टिकी हैं. राजनीतिक हलको इस बात पर विचार कर रहा है कि ये दोनों नेता अगले 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर क्या रणनीति बनाते हैं.
लेकिन विरोधी दल के नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल, राज्यपाल के अधिकार का दुरुपयोग, संघीय व्यवस्था का उल्लंघन जैसे कुछ मुद्दे समान रूप से विरोधी दलों को एकजुट करने में मदद कर रहे हैं, लेकिन यह देखना है कि यह एकजुटता बीजेपी के खिलाफ 2024 के पहले बन पाती है या बनने के पहले ही बिखर जाती है.
| Mamata-Kejriwal Meeting: बिल तो बहाना विपक्ष को साधने उतरे अरविंद केजरीवाल, आज ममता बनर्जी के साथ मीटिंग; इस मुलाकात के मायने क्या? Mamata-Kejriwal Meeting In Kolkata: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने आज कोलकाता आ रहे हैं. ममता बनर्जी के साथ उनकी मीटिंग लोकसभा चुनाव के पहले विरोधी दलों को एकजुट करने की कोशिश मानी जा रही है. कोलकाताः अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार को लेकर केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब मैदान में उतर गये हैं. राज्यसभा में इस प्रस्तावित विधेयक के विरोध का मुद्दा बनाकर वह लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा विरोधी ताकतों को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बाद आज कोलकाता में अरविंद केजरीवाल बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे. वह बुधवार को मुंबई में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और शिवसेना के उद्धव-बालासाहेब समूह के नेता उद्धव ठाकरे से मिलने वाले हैं. इसके बाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जाएं। वह सभी विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं. मंगलवार बैठक में ममता बनर्जी के साथ बैठक में दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन बनाने पर भी चर्चा होगी. अरविंद केजरीवाल राज्यसभा में केंद्र के अध्यादेश को रोककर पीएम मोदी नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव के पहले धक्का देना चाहते हैं. संख्यात्मक रूप से यह संभव है, लेकिन बाधाएं भी बहुत हैं. ओडिशा के बीजू जनता दल, आंध्र के जगनमोहन रेड्डी की पार्टी अतीत में कई बार ऐसी स्थितियों में भाजपा के साथ खड़ी हुई है. वे बैठकों से अनुपस्थित रहते हैं और न तो सरकार का समर्थन करते हैं और न ही विरोध करते हैं. इसका फायदा सत्ताधारी दल को होता है. केजरीवाल दूसरी पार्टियों को बिल के खिलाफ वोट करने के लिए मना कर जगन रेड्डी और नवीन पटनायक पर दबाव बनाना चाहते हैं. सीपीएम और सीपीआई पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि वे इस अध्यादेश का विरोध करेंगी. सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी संकेत दिया कि कांग्रेस अध्यादेश करेगी. शनिवार को अध्यादेश की घोषणा के दिन कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार को इसे वापस लेना चाहिए और अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए. हालांकि कांग्रेस के साथ केजरीवाल के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के बाद शपथ समारोह में कई विरोधी पार्टियों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उसमें केजरीवाल का नाम शामिल नहीं था. ऐसे में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जहां तक ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के बीच रिश्ते की बात है. गोवा चुनाव के दौरान रिश्तों में आई दूरियां अब बीते दिनों की बात हो गई है. अब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक-दूसरे के करीब आते दिख रहे हैं. इन दोनों नेताओं के कांग्रेस के साथ संबंधों के संदर्भ में यह मुलाकात विशेष महत्व है. ममता बनर्जी ने हाल ही में कांग्रेस की जीत के बाद कर्नाटक के लोगों को धन्यवाद दिया, लेकिन पहले तो बड़ी सावधानी से कांग्रेस या राहुल गांधी का नाम नहीं लिया था. उन्होंने कर्नाटक की जीत को जनता की जीत करार दिया था. ममता बनर्जी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं गईं. काकली घोष दस्तीदार ने अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया था. इस मौके पर अखिलेश यादव भी मौजूद थे. नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव ने हाल ही में ममता बनर्जी से मुलाकात की थी. अखिलेश यादव, एचडी कुमारस्वामी पहले ही बंगाल का दौरा कर चुके हैं. उनमें से प्रत्येक एक राजनीतिक दल का चेहरा है जो भाजपा विरोधी है. कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों की निगाहें भाजपा गठबंधन के दो अहम नेताओं की बैठक पर टिकी हैं. राजनीतिक हलको इस बात पर विचार कर रहा है कि ये दोनों नेता अगले दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव को लेकर क्या रणनीति बनाते हैं. लेकिन विरोधी दल के नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल, राज्यपाल के अधिकार का दुरुपयोग, संघीय व्यवस्था का उल्लंघन जैसे कुछ मुद्दे समान रूप से विरोधी दलों को एकजुट करने में मदद कर रहे हैं, लेकिन यह देखना है कि यह एकजुटता बीजेपी के खिलाफ दो हज़ार चौबीस के पहले बन पाती है या बनने के पहले ही बिखर जाती है. |
गुरुग्राम। पटौदी के सेक्टर एक में सामुदायिक केंद्र का निर्माण का रास्ता साफ हो गया। सेक्टर विकसित होने के 15 साल बाद नौ करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सामुदायिक केंद्र बनेगा। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने सामुदायिक केंद्र की कार्ययोजना बनाना शुरू कर दिया है। टेंडर जारी होने के बाद वर्क अलॉटमेंट के बाद काम शुरू होगा। इसमें करीब छह महीने का समय लगेगा।
20 प्रतिशत रह रहे लोगों को मिलेगा फायदाः
एचएसवीपी की ओर से पटौदी सेक्टर एक को वर्ष 2007-08 में विकसित किया था। यहां पर 1936 प्लॉट काटे गए। सेक्टर के 20 प्रतिशत प्लॉटो पर लोग मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया है। लेकिन सेक्टर में दो एकड़ जमीन चिह्नित होने के बाद सामुदायिक केंद्र का निर्माण नहीं किया गया। एसएसवीपी के पास बजट का अभाव था। इसको लेकर सेक्टर निवासियों ने क्षेत्रीय विधायक सत्य प्रकाश जरावता से सामुदायिक केंद्र बनाने की गुहार लगाई थी।
पटौदी विधायक ने कहा कि पटौदी सेक्टर का अलग-अलग चरणों में विकास समेत यहां पर आवासीय निर्माण का काम चल रहा है। यहां पर सामुदायिक केंद्र बनने की स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने वाली है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सामुदायिक केंद्र बनाने के लिए नौ करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। क्योंकि यहां तेजी से पटौदी सेक्टर विकसित हो रहा है, इस बात को ध्यान में रखते हुए सेक्टर में भी सामुदायिक केंद्र की जरूरत महसूस अभी से की जा रही है।
एचएसवीपी की ओर से पटौदी सेक्टर के प्लॉटो की ई-नीलामी हो रही है। पिछले महीने यहां पर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी विकसित करने के लिए जमीन की ई-नीलामी हुई। लोगों को प्लॉटो पर कब्जा देकर निर्माण करने की अनुमति दी जा रही है। जिससे लोग घर बना सके।
पटौदी सेक्टर एक में करीब दो एकड़ जमीन सामुदायिक केंद्र का निर्माण किया जाएगा। बजट मंजूरी के बाद कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसमें तीन मंजिला के सामुदायिक केंद्र में एक बड़ा हॉल होगा, इसके परिसर में खेलने कूदने तक सुविधा होगी। कार्ययोजना तैयार कर मुख्यालय को भेजा जाएगा।
| गुरुग्राम। पटौदी के सेक्टर एक में सामुदायिक केंद्र का निर्माण का रास्ता साफ हो गया। सेक्टर विकसित होने के पंद्रह साल बाद नौ करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सामुदायिक केंद्र बनेगा। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने सामुदायिक केंद्र की कार्ययोजना बनाना शुरू कर दिया है। टेंडर जारी होने के बाद वर्क अलॉटमेंट के बाद काम शुरू होगा। इसमें करीब छह महीने का समय लगेगा। बीस प्रतिशत रह रहे लोगों को मिलेगा फायदाः एचएसवीपी की ओर से पटौदी सेक्टर एक को वर्ष दो हज़ार सात-आठ में विकसित किया था। यहां पर एक हज़ार नौ सौ छत्तीस प्लॉट काटे गए। सेक्टर के बीस प्रतिशत प्लॉटो पर लोग मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया है। लेकिन सेक्टर में दो एकड़ जमीन चिह्नित होने के बाद सामुदायिक केंद्र का निर्माण नहीं किया गया। एसएसवीपी के पास बजट का अभाव था। इसको लेकर सेक्टर निवासियों ने क्षेत्रीय विधायक सत्य प्रकाश जरावता से सामुदायिक केंद्र बनाने की गुहार लगाई थी। पटौदी विधायक ने कहा कि पटौदी सेक्टर का अलग-अलग चरणों में विकास समेत यहां पर आवासीय निर्माण का काम चल रहा है। यहां पर सामुदायिक केंद्र बनने की स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने वाली है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सामुदायिक केंद्र बनाने के लिए नौ करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। क्योंकि यहां तेजी से पटौदी सेक्टर विकसित हो रहा है, इस बात को ध्यान में रखते हुए सेक्टर में भी सामुदायिक केंद्र की जरूरत महसूस अभी से की जा रही है। एचएसवीपी की ओर से पटौदी सेक्टर के प्लॉटो की ई-नीलामी हो रही है। पिछले महीने यहां पर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी विकसित करने के लिए जमीन की ई-नीलामी हुई। लोगों को प्लॉटो पर कब्जा देकर निर्माण करने की अनुमति दी जा रही है। जिससे लोग घर बना सके। पटौदी सेक्टर एक में करीब दो एकड़ जमीन सामुदायिक केंद्र का निर्माण किया जाएगा। बजट मंजूरी के बाद कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसमें तीन मंजिला के सामुदायिक केंद्र में एक बड़ा हॉल होगा, इसके परिसर में खेलने कूदने तक सुविधा होगी। कार्ययोजना तैयार कर मुख्यालय को भेजा जाएगा। |
श्रीगंगानगर। शहर के जैड एवं एलएनपी माइनर के आसपास के चकों के साथ-साथ साधुवाली गांव धीरे-धीरे गाजर हब बनता जा रहा है। जिले के तीन हजार बीघा में से अकेले साधुवाली क्षेत्र में 90 प्रतिशत गाजर की बुवाई होती है। यहां की गाजरें प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली, पंजाब एवं हरियाणा में भी बिक्री के लिए जाती है।
फोर जैड के किसान दलीप कुमार ने इस बार अपने पूरे खेत के 90 प्रतिशत हिस्से में गाजर की बुवाई की है। दलीप के अनुसार इलाके में भरपूर पानी होने के कारण साल में प्रति बीघा दो या तीन फसलें लेते हैं। इसके लिए अगस्त के अंत तक गाजरों की बुवाई करते हैं। इसके बाद गेहूं की बुवाई और अप्रेल में ककड़ी, चारा अथवा मूंग की फसल की बुआई।
एलएनपी, डी भागसर, सी एवं जैड माइनर के आसपास के चकों के किसानों को गाजरों की खेती ऐसी रास आई कि वे यह काम जोखिम और कड़ी मेहनत से अच्छे मुनाफे वाली फसल मानने लगे। किसान अगस्त में भूमि खाली कर चार पांच बार अच्छी गहरी जुताई करते हैं। इसके बाद गोबर की खाद डालकर सिंचाई कर गाजरों की बुआई करते हैं। बुआई के दौरान पोटाश एवं सुपर फास्फेट खाद डालते हैं। जब गाजर की फसल तीन चार पत्तों पर आ जाती है तो सिंचाई पानी के साथ 20 किलो यूरिया प्रति बीघा डालते हैं। ज्यादा पानी से गाजर की उपज बढ़ती है। इसमें पांच बार सिंचाई की जाती है। 4 एलएनपी के गोपीराम के अनुसार उनके यहां 50 से 150 क्विंटल तक गाजर होती है। इस बार गर्मी अधिक रहने के कारण अगेती गाजरों की उपज कुछ कम हुई है, अन्यथा एक बीघा में ही 90 दिन की फसल में एक लाख रुपए की उपज निकल आती है। गाजरों की बुवाई अगस्त से 15 अक्टूबर तक की जाती है।
श्रीगंगानगर जिले में पिछले कुछ वर्षों से गाजर का व्यापार जोर पकड़ रहा है। इसका कारण यहां की गाजर की राज्य से बाहर की मंडियों में अच्छी मांग होना भी है। इसमें एक मुख्य कारण स्थानीय वातावरण भी है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो जिले में जो वातावरण अक्टूबर से दिसंबर तक के माह में होता है उससे यहां की गाजर में रस भी भरपूर मात्रा में होता है। इससे गाजर पूरी तरह रसीली हो जाती है। इसके ट्रांसपोर्ट करने पर भी इसका रस कई दिनों तक इसे सूखने नहीं देता और यह श्रीगंगानगर से दूर अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि में भी बेची जा रही है।
गाजर के विपणन में बड़ा काम उसकी धुलाई का है। सीजन में नहर किनारे रोजाना 8 से 10 हजार क्विंटल गाजरों की धुलाई होती है। इसके लिए इंजन पर मोटर पंप के जरिए पानी उठाकर गाजरों की धुलाई की जाती है। बाद में गाजर आगे जालीदार खाली रोलर में जाती है और पानी से दो तीन बार धुलकर साफ हो जाती है। इसे देखते हुए कुछ लोगों ने धुलाई मशीन लगा ली और किसान गाजर धुलाई का किराया चुका देते हैं।
गाजर धोने का काम थोड़े से स्थान पर नहीं हो पाता। पानी भी भरपूर चाहिए, इसलिए फल सब्जी मंडी समिति ने इसे अपने दायरे में लाने का प्रयास नहीं किया। यही वजह है कि गाजर बिचौलियों से मुक्त किसानों से सीधे व्यापारियों के पास पहुंच जाती है। खुले में नेशनल हाइवे-62 पर साधुवाली गांव के पास गंगनहर पर दूर दूर तक गाजरों से भरे बैग्स देखकर पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों से व्यापारी आने लगे। अब यहीं गाजर मंडी बन गई। किसानों को भी अपनी उपज लेकर मंडी तक नहीं भटकना पड़ता और तुलाई का झंझट भी नहीं रहता। इसीलिए साधुवाली गाजर हब के रूप में विकसित होता जा रहा है।
साधुवाली के आसपास के करीब एक दर्जन चकों में इन दिनों खेतों में सैकड़ों श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है। श्रमिक गाजरें उखाड़ने का काम करते हैं, जिन्हें प्रति श्रमिक डेढ़ दो सौ रुपए दिहाड़ी मिलती है। गाजरें उखाड़ने के बाद इसके उपर से हरी शाखा को काटकर अलग कर ट्रालियों में भरकर नहर पर लाकर धुलाई की जाती है। इस प्रकार 15 नवंबर से करीब ढाई महीने तीन चार हजार लोगों को रोजगार भी मिल जाता है।
| श्रीगंगानगर। शहर के जैड एवं एलएनपी माइनर के आसपास के चकों के साथ-साथ साधुवाली गांव धीरे-धीरे गाजर हब बनता जा रहा है। जिले के तीन हजार बीघा में से अकेले साधुवाली क्षेत्र में नब्बे प्रतिशत गाजर की बुवाई होती है। यहां की गाजरें प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली, पंजाब एवं हरियाणा में भी बिक्री के लिए जाती है। फोर जैड के किसान दलीप कुमार ने इस बार अपने पूरे खेत के नब्बे प्रतिशत हिस्से में गाजर की बुवाई की है। दलीप के अनुसार इलाके में भरपूर पानी होने के कारण साल में प्रति बीघा दो या तीन फसलें लेते हैं। इसके लिए अगस्त के अंत तक गाजरों की बुवाई करते हैं। इसके बाद गेहूं की बुवाई और अप्रेल में ककड़ी, चारा अथवा मूंग की फसल की बुआई। एलएनपी, डी भागसर, सी एवं जैड माइनर के आसपास के चकों के किसानों को गाजरों की खेती ऐसी रास आई कि वे यह काम जोखिम और कड़ी मेहनत से अच्छे मुनाफे वाली फसल मानने लगे। किसान अगस्त में भूमि खाली कर चार पांच बार अच्छी गहरी जुताई करते हैं। इसके बाद गोबर की खाद डालकर सिंचाई कर गाजरों की बुआई करते हैं। बुआई के दौरान पोटाश एवं सुपर फास्फेट खाद डालते हैं। जब गाजर की फसल तीन चार पत्तों पर आ जाती है तो सिंचाई पानी के साथ बीस किलो यूरिया प्रति बीघा डालते हैं। ज्यादा पानी से गाजर की उपज बढ़ती है। इसमें पांच बार सिंचाई की जाती है। चार एलएनपी के गोपीराम के अनुसार उनके यहां पचास से एक सौ पचास क्विंटल तक गाजर होती है। इस बार गर्मी अधिक रहने के कारण अगेती गाजरों की उपज कुछ कम हुई है, अन्यथा एक बीघा में ही नब्बे दिन की फसल में एक लाख रुपए की उपज निकल आती है। गाजरों की बुवाई अगस्त से पंद्रह अक्टूबर तक की जाती है। श्रीगंगानगर जिले में पिछले कुछ वर्षों से गाजर का व्यापार जोर पकड़ रहा है। इसका कारण यहां की गाजर की राज्य से बाहर की मंडियों में अच्छी मांग होना भी है। इसमें एक मुख्य कारण स्थानीय वातावरण भी है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो जिले में जो वातावरण अक्टूबर से दिसंबर तक के माह में होता है उससे यहां की गाजर में रस भी भरपूर मात्रा में होता है। इससे गाजर पूरी तरह रसीली हो जाती है। इसके ट्रांसपोर्ट करने पर भी इसका रस कई दिनों तक इसे सूखने नहीं देता और यह श्रीगंगानगर से दूर अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि में भी बेची जा रही है। गाजर के विपणन में बड़ा काम उसकी धुलाई का है। सीजन में नहर किनारे रोजाना आठ से दस हजार क्विंटल गाजरों की धुलाई होती है। इसके लिए इंजन पर मोटर पंप के जरिए पानी उठाकर गाजरों की धुलाई की जाती है। बाद में गाजर आगे जालीदार खाली रोलर में जाती है और पानी से दो तीन बार धुलकर साफ हो जाती है। इसे देखते हुए कुछ लोगों ने धुलाई मशीन लगा ली और किसान गाजर धुलाई का किराया चुका देते हैं। गाजर धोने का काम थोड़े से स्थान पर नहीं हो पाता। पानी भी भरपूर चाहिए, इसलिए फल सब्जी मंडी समिति ने इसे अपने दायरे में लाने का प्रयास नहीं किया। यही वजह है कि गाजर बिचौलियों से मुक्त किसानों से सीधे व्यापारियों के पास पहुंच जाती है। खुले में नेशनल हाइवे-बासठ पर साधुवाली गांव के पास गंगनहर पर दूर दूर तक गाजरों से भरे बैग्स देखकर पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों से व्यापारी आने लगे। अब यहीं गाजर मंडी बन गई। किसानों को भी अपनी उपज लेकर मंडी तक नहीं भटकना पड़ता और तुलाई का झंझट भी नहीं रहता। इसीलिए साधुवाली गाजर हब के रूप में विकसित होता जा रहा है। साधुवाली के आसपास के करीब एक दर्जन चकों में इन दिनों खेतों में सैकड़ों श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है। श्रमिक गाजरें उखाड़ने का काम करते हैं, जिन्हें प्रति श्रमिक डेढ़ दो सौ रुपए दिहाड़ी मिलती है। गाजरें उखाड़ने के बाद इसके उपर से हरी शाखा को काटकर अलग कर ट्रालियों में भरकर नहर पर लाकर धुलाई की जाती है। इस प्रकार पंद्रह नवंबर से करीब ढाई महीने तीन चार हजार लोगों को रोजगार भी मिल जाता है। |
नेपाली कांग्रेस ने इस वर्ष होने वाले संघीय और प्रांतीय चुनावों में मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन को कायम रखने का फैसला किया है। इससे यह आशंका दूर हो गई है कि नेपाली कांग्रेस ऐन वक्त पर अपने कुछ सहयोगी दलों को छोड़ सकती है। लेकिन गठबंधन के अंदर किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इस सवाल का जवाब अभी तय नहीं किया गया है। इसलिए पर्यवेक्षकों की राय में आगे चल कर विवाद की गुंजाइश बनी हुई है।
नेपाली कांग्रेस की सेंट्रल कमेटी ने अपनी एक बैठक में गठबंधन बनाए रखने का फैसला किया। इस बारे में लाए गए प्रस्ताव को आम राय से पारित कर दिया गया। तय किया गया कि अब पार्टी नेतृत्व सीटों के बंटवारे पर सहयोगी दलों से बातचीत शुरू करेगा। सेंट्रल कमेटी ने कहा कि बीते 13 मई को हुए स्थानीय चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। अब उसका लक्ष्य अगले चुनावों में अधिक से अधिक सीटें जीतने का है।
सेंट्रल कमेटी की बैठक हफ्ते भर चली। इसमें प्रमुख मुद्दा चुनाव जीत सकने लायक गठबंधन बनाने का ही रहा। नेपाली संसद के निचले सदन की 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन होता है। बाकी 165 सीटों का फैसला आनुपातिक आधार पर होता है। यानी जिस पार्टी को प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उन 165 में से उतनी सीटें उन्हें मिल जाती हैं।
इस महीने के आरंभ में निर्वाचन आयोग ने 18 नवंबर को आम चुनाव कराने का सुझाव सरकार के सामने रखा था। शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। नेपाली अखबारों में छपी कुछ खबरों में कहा गया है कि सत्ताधारी गठबंधन के कुछ नेता आम चुनाव को अगले साल फरवरी तक टालना चाहते हैं। नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने इस बात की पुष्टि की है।
क्या गठबंधन को साझा न्यूनतम कार्यक्रम बनाना चाहिए, बताया जाता है कि इस बारे में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सेंट्रल कमेटी की बैठक में कोई साफ बात नहीं कही। लेकिन कई नेताओं ने जोर दिया कि नेपाली कांग्रेस को मुख्य मुद्दों पर गठबंधन सहयोगियों के बीच सहमति तैयार करनी चाहिए। इन मुद्दों में संविधान की रक्षा, लोकतंत्र को मजबूत करना, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था में सुधार के उपाय शामिल हैं। सहमति के समर्थक नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ा दल होने के नाते आखिरकार नेपाली कांग्रेस ही जनता के प्रति जवाबदेह होगी।
नेपाली कांग्रेस ने 2017 के चुनाव नतीजों के आधार पर सीटों का बंटवारा करने की बात ठुकरा दी है। तब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को 36 सीटें मिली थीं, जबकि नेपाली कांग्रेस 23 सीटें ही जीत पाई थी। सत्ताधारी गठबंधन में इन दोनों दलों के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी दल और जन मोर्चा शामिल हैं।
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| नेपाली कांग्रेस ने इस वर्ष होने वाले संघीय और प्रांतीय चुनावों में मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन को कायम रखने का फैसला किया है। इससे यह आशंका दूर हो गई है कि नेपाली कांग्रेस ऐन वक्त पर अपने कुछ सहयोगी दलों को छोड़ सकती है। लेकिन गठबंधन के अंदर किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इस सवाल का जवाब अभी तय नहीं किया गया है। इसलिए पर्यवेक्षकों की राय में आगे चल कर विवाद की गुंजाइश बनी हुई है। नेपाली कांग्रेस की सेंट्रल कमेटी ने अपनी एक बैठक में गठबंधन बनाए रखने का फैसला किया। इस बारे में लाए गए प्रस्ताव को आम राय से पारित कर दिया गया। तय किया गया कि अब पार्टी नेतृत्व सीटों के बंटवारे पर सहयोगी दलों से बातचीत शुरू करेगा। सेंट्रल कमेटी ने कहा कि बीते तेरह मई को हुए स्थानीय चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। अब उसका लक्ष्य अगले चुनावों में अधिक से अधिक सीटें जीतने का है। सेंट्रल कमेटी की बैठक हफ्ते भर चली। इसमें प्रमुख मुद्दा चुनाव जीत सकने लायक गठबंधन बनाने का ही रहा। नेपाली संसद के निचले सदन की एक सौ पैंसठ सीटों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन होता है। बाकी एक सौ पैंसठ सीटों का फैसला आनुपातिक आधार पर होता है। यानी जिस पार्टी को प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उन एक सौ पैंसठ में से उतनी सीटें उन्हें मिल जाती हैं। इस महीने के आरंभ में निर्वाचन आयोग ने अट्ठारह नवंबर को आम चुनाव कराने का सुझाव सरकार के सामने रखा था। शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। नेपाली अखबारों में छपी कुछ खबरों में कहा गया है कि सत्ताधारी गठबंधन के कुछ नेता आम चुनाव को अगले साल फरवरी तक टालना चाहते हैं। नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने इस बात की पुष्टि की है। क्या गठबंधन को साझा न्यूनतम कार्यक्रम बनाना चाहिए, बताया जाता है कि इस बारे में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सेंट्रल कमेटी की बैठक में कोई साफ बात नहीं कही। लेकिन कई नेताओं ने जोर दिया कि नेपाली कांग्रेस को मुख्य मुद्दों पर गठबंधन सहयोगियों के बीच सहमति तैयार करनी चाहिए। इन मुद्दों में संविधान की रक्षा, लोकतंत्र को मजबूत करना, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था में सुधार के उपाय शामिल हैं। सहमति के समर्थक नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ा दल होने के नाते आखिरकार नेपाली कांग्रेस ही जनता के प्रति जवाबदेह होगी। नेपाली कांग्रेस ने दो हज़ार सत्रह के चुनाव नतीजों के आधार पर सीटों का बंटवारा करने की बात ठुकरा दी है। तब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल को छत्तीस सीटें मिली थीं, जबकि नेपाली कांग्रेस तेईस सीटें ही जीत पाई थी। सत्ताधारी गठबंधन में इन दोनों दलों के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल , जनता समाजवादी दल और जन मोर्चा शामिल हैं। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news. |
बॉक्सिंग-डे टेस्ट जीतकर भारतीय टीम ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में शानदार वापसी की है। मेलबर्न में खेले गए टेस्ट में भारत का दबदबा रहा और सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबरी पर है। सिडनी में होने वाला तीसरा टेस्ट दोनो टीमों के लिए सीरीज का निर्णय करने वाला मुकाबला हो सकता है। एक नजर डालते हैं उन रिकॉर्ड्स पर जो सिडनी में होने वाले तीसरे टेस्ट के दौरान बन सकते हैं।
79 टेस्ट में 5,903 रन बना चुके चेतेश्वर पुजारा को टेस्ट क्रिकेट में 6,000 रन पूरा करने के लिए 97 रनों की जरूरत है। यदि ऐसा होता है तो वह भारत के लिए 6,000 टेस्ट रन बनाने वाले 11वें बल्लेबाज भी बन सकते हैं। पहले दो टेस्ट मैचों में पुजारा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है, लेकिन उनसे भारतीय टीम को काफी उम्मीदें हैं। पिछले दौरे पर पुजारा सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे।
ऑस्ट्रेलियाई ऑफ स्पिनर नाथन ल्योन ने 98 टेस्ट में 394 विकेट लिए हैं और 400 विकेट पूरा करने के काफी करीब हैं। सिडनी टेस्ट में यदि ल्योन छह विकेट लेने में सफल रहे तो वह टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट लेने वाले छठे स्पिनर होंगे। ऑस्ट्रेलिया में ल्योन ने भारत के खिलाफ खेले 13 टेस्ट मैचों में 55 विकेट हासिल किए हैं जिसमें पारी में सात विकेट लेना उनका सर्वश्रेष्ठ रहा है।
तमाम रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 प्रतिशत फिट नहीं होने के बावजूद वॉर्नर का सिडनी टेस्ट में खेलना लगभग तय है। यदि ऐसा होता है तो वह अपने फेवरिट ग्राउंड पर एक और उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। वॉर्वर ने सिडनी में 66. 54 की औसत के साथ 732 रन बनाए हैं जिसमें चार शतक शामिल हैं। एक और शतक लगाकर वह सिडनी में दूसरे सबसे अधिक टेस्ट शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं।
| बॉक्सिंग-डे टेस्ट जीतकर भारतीय टीम ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में शानदार वापसी की है। मेलबर्न में खेले गए टेस्ट में भारत का दबदबा रहा और सीरीज फिलहाल एक-एक से बराबरी पर है। सिडनी में होने वाला तीसरा टेस्ट दोनो टीमों के लिए सीरीज का निर्णय करने वाला मुकाबला हो सकता है। एक नजर डालते हैं उन रिकॉर्ड्स पर जो सिडनी में होने वाले तीसरे टेस्ट के दौरान बन सकते हैं। उन्यासी टेस्ट में पाँच,नौ सौ तीन रन बना चुके चेतेश्वर पुजारा को टेस्ट क्रिकेट में छः,शून्य रन पूरा करने के लिए सत्तानवे रनों की जरूरत है। यदि ऐसा होता है तो वह भारत के लिए छः,शून्य टेस्ट रन बनाने वाले ग्यारहवें बल्लेबाज भी बन सकते हैं। पहले दो टेस्ट मैचों में पुजारा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है, लेकिन उनसे भारतीय टीम को काफी उम्मीदें हैं। पिछले दौरे पर पुजारा सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे। ऑस्ट्रेलियाई ऑफ स्पिनर नाथन ल्योन ने अट्ठानवे टेस्ट में तीन सौ चौरानवे विकेट लिए हैं और चार सौ विकेट पूरा करने के काफी करीब हैं। सिडनी टेस्ट में यदि ल्योन छह विकेट लेने में सफल रहे तो वह टेस्ट क्रिकेट में चार सौ विकेट लेने वाले छठे स्पिनर होंगे। ऑस्ट्रेलिया में ल्योन ने भारत के खिलाफ खेले तेरह टेस्ट मैचों में पचपन विकेट हासिल किए हैं जिसमें पारी में सात विकेट लेना उनका सर्वश्रेष्ठ रहा है। तमाम रिपोर्ट्स के मुताबिक एक सौ प्रतिशत फिट नहीं होने के बावजूद वॉर्नर का सिडनी टेस्ट में खेलना लगभग तय है। यदि ऐसा होता है तो वह अपने फेवरिट ग्राउंड पर एक और उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। वॉर्वर ने सिडनी में छयासठ. चौवन की औसत के साथ सात सौ बत्तीस रन बनाए हैं जिसमें चार शतक शामिल हैं। एक और शतक लगाकर वह सिडनी में दूसरे सबसे अधिक टेस्ट शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं। |
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Rahul Gandhi: राहुल गांधी ने आरएसएस पर बोला हमला, कहा- 21वीं सदी के कौरव खाकी हाफ पैंट पहनते हैं. .
पठान विवाद के बीच शाहरुख खान ने नया पोस्टर किया जारी, जानें कब आएगा ट्रेलर?
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रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन से आज फिर ईडी ( प्रवर्तन निदेशालय ) पूछताछ करेगी। पूर्व डीसी पर आरोप है कि उन्होंने 150 पुलिस जवानों को तैनात कर जिस हेहल अंचल के बजरा मौजा के 7. 16 एकड़ जमीन की घेराबंदी करवाई थी, वह फर्जी हैं। ईडी को कई लोगों से पूछताछ में यह जानकारी मिली है कि जल्दबाजी में रांची डीसी ने यह फैसला लिया था। इस फैसले के पीछे क्या वजह थी ? आज छवि रंजन से पूछताछ में ईडी इसी सवाल के जवाब की तलाश करेगी। पिछली बार कई सवालों के जवाब में छवि रंजन ने याद नहीं है, याद नहीं कर पा रहा हूं दिया था। ओइस बार जमीन घोटाला मामले में आज के दिन को बेहद अहम माना जा रहा है। छवि रंजन पूर्व के दो समन के बाद भी ईडी के समक्ष नहीं पहुं थे, ईडी ने तीसरा समन भेज कर 24 अप्रैल को रांची स्थित जोनल कार्यालय में बुलाया था। आइएएस छवि रंजन से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गयी थी।
छवि रंजन से ईडी ने उनके और आश्रितों से जुड़ी सारी संपत्ति की जानकारी भी मांगी गयी थी। 24 अप्रैल को पूछताछ के बाद उन्हें पहले एक मई को हाजिर होने का निर्देश दिया गया था। इस तारीख को बदलकर चार मई किया गया था। आज इस मामले में एक बार फिर छवि रंजन ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए मौजूद होंगे। इडी ने आठ मई को व्यापारी विष्णु अग्रवाल को पूछताछ के लिए बुलाया है और 10 मई को जगत बंधु टी स्टेट के निदेशक दिलीप घोष से पूछताछ होगी।
छवि रंजन पर ना सिर्फ इस जमीन बल्कि चेशायर होम रोड की जमीन की खरीद बिक्री मामले में भी नाम आ रहा है। 13 अप्रैल को उनके और जमीन कारोबारियों के ठिकानों पर छापा मारा था। आइएएस छवि रंजन सहित 18 लोगों से जुड़े 22 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। बताया जाता है कि इस छापेमारी में भी ईडी के पास कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। छापेमारी में बड़गांई के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के आवास से भारी मात्रा में डीड मिले थे. वहीं कुछ जमीन माफिया के यहां से फर्जी डीड बनाने के स्टांप आदि मिले।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन से आज फिर ईडी पूछताछ करेगी। पूर्व डीसी पर आरोप है कि उन्होंने एक सौ पचास पुलिस जवानों को तैनात कर जिस हेहल अंचल के बजरा मौजा के सात. सोलह एकड़ जमीन की घेराबंदी करवाई थी, वह फर्जी हैं। ईडी को कई लोगों से पूछताछ में यह जानकारी मिली है कि जल्दबाजी में रांची डीसी ने यह फैसला लिया था। इस फैसले के पीछे क्या वजह थी ? आज छवि रंजन से पूछताछ में ईडी इसी सवाल के जवाब की तलाश करेगी। पिछली बार कई सवालों के जवाब में छवि रंजन ने याद नहीं है, याद नहीं कर पा रहा हूं दिया था। ओइस बार जमीन घोटाला मामले में आज के दिन को बेहद अहम माना जा रहा है। छवि रंजन पूर्व के दो समन के बाद भी ईडी के समक्ष नहीं पहुं थे, ईडी ने तीसरा समन भेज कर चौबीस अप्रैल को रांची स्थित जोनल कार्यालय में बुलाया था। आइएएस छवि रंजन से करीब दस घंटाटे तक पूछताछ की गयी थी। छवि रंजन से ईडी ने उनके और आश्रितों से जुड़ी सारी संपत्ति की जानकारी भी मांगी गयी थी। चौबीस अप्रैल को पूछताछ के बाद उन्हें पहले एक मई को हाजिर होने का निर्देश दिया गया था। इस तारीख को बदलकर चार मई किया गया था। आज इस मामले में एक बार फिर छवि रंजन ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए मौजूद होंगे। इडी ने आठ मई को व्यापारी विष्णु अग्रवाल को पूछताछ के लिए बुलाया है और दस मई को जगत बंधु टी स्टेट के निदेशक दिलीप घोष से पूछताछ होगी। छवि रंजन पर ना सिर्फ इस जमीन बल्कि चेशायर होम रोड की जमीन की खरीद बिक्री मामले में भी नाम आ रहा है। तेरह अप्रैल को उनके और जमीन कारोबारियों के ठिकानों पर छापा मारा था। आइएएस छवि रंजन सहित अट्ठारह लोगों से जुड़े बाईस ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। बताया जाता है कि इस छापेमारी में भी ईडी के पास कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। छापेमारी में बड़गांई के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के आवास से भारी मात्रा में डीड मिले थे. वहीं कुछ जमीन माफिया के यहां से फर्जी डीड बनाने के स्टांप आदि मिले। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मुंबई. Bollywood Style Icon Feroz Khan Life Story: मनोरंजन जगत में कहा जाता है कि राज कुमार (Raj Kumar) ऐसे एक्टर थे जो अपने अक्खड़ स्वभाव के कारण कई लोगों को सेट पर नाराज कर दिया करते थे. अमूमन हर कोई उनसे बात करने में घबराता था लेकिन इंडस्ट्री में कुछ कलाकार हैं, जिन्होंने राज कुमार की बोलती बंद कर दी थी. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के 'पठान' कहे जाने वाले एक्टर की. हैंडसम लड़के का ये फोटो देखकर क्या आप इस 'पठान' (Pathaan) का नाम बता सकते हैं? ये एक्टर हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया करता था और अपने दौर में इनका बॉलीवुड में एक अलग ही जलवा था.
फोटो को ध्यान से देखने पर शायद आप इन्हें पहचान गए होंगे. यदि नहीं तो आपको एक हिंट देते हैं. इनके और जीनत अमान के प्यार के चर्चे बॉलीवुड गलियारों में खूब फेमस हुए थे. यहां तक कि इन पर जीनत पर हाथ उठाने का भी आरोप था. ये अपने उसूलों के काफी पक्के थे और इनके दो भाई भी मनोरंजन जगत का हिस्सा रह चुके हैं.
इतने हिंट के बाद शायद आप इन्हें पहचान गए होंगे यदि नहीं तो ज्यादा परेशान मत होइए हम आपको इनका नाम बता देते हैं. ये हैं बॉलीवुड के खूबसूतर अभिनेताओं में शुमार 'फिरोज खान' (feroz Khan). पठान परिवार में साल 25 सितम्बर 1939 को इनका जन्म हुआ था. जवानी के दिनों में ये काफी हैंडसम लगते थे और बॉलीवुड में इनके खूब चर्चे थे. फिरोज को स्टाइल आइकन माना जाता था, शुरुआती दौर में साइड किरदार निभाने के बाद इन्होंने लीड एक्टर के तौर पर भी खूब फेम हासिल की.
फिरोज खान के लिए कहा जाता था कि वे उसूलों के काफी पक्के थे. उन्होंने अपने कुछ सिद्धांत बना रखे थे, जिन्हें लेकर वे काफी सख्त थे. वे दिल खोलकर प्यार करते थे लेकिन यदि कोई परेशान करता था तो वे उसे छोड़ते भी नहीं थे. 10 सितम्बर 1976 को प्रकाश मेहरा फिल्म 'हेरा फेरी' लेकर आए थे. इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन के साथ पहले फिरोज खान को लिया गया था. लेकिन फिरोज ने यह फिल्म सिर्फ इसलिए ठुकरा दी क्योंकि शूटिंग शेड्यूल में संडे भी शामिल था. उसूलों के मुताबिक, फिरोज संडे को काम नहीं करते थे. ऐसे में उन्होंने फिल्म करने से इनकार कर दिया. इसके बाद फिरोज वाला किरदार अमिताभ ने किया और अमिताभ वाला रोल विनोद खन्ना को दिया गया.
बता दें कि अमिताभ और विनोद खन्ना की साथ में यह छठी फिल्म थी.
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| मुंबई. Bollywood Style Icon Feroz Khan Life Story: मनोरंजन जगत में कहा जाता है कि राज कुमार ऐसे एक्टर थे जो अपने अक्खड़ स्वभाव के कारण कई लोगों को सेट पर नाराज कर दिया करते थे. अमूमन हर कोई उनसे बात करने में घबराता था लेकिन इंडस्ट्री में कुछ कलाकार हैं, जिन्होंने राज कुमार की बोलती बंद कर दी थी. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के 'पठान' कहे जाने वाले एक्टर की. हैंडसम लड़के का ये फोटो देखकर क्या आप इस 'पठान' का नाम बता सकते हैं? ये एक्टर हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया करता था और अपने दौर में इनका बॉलीवुड में एक अलग ही जलवा था. फोटो को ध्यान से देखने पर शायद आप इन्हें पहचान गए होंगे. यदि नहीं तो आपको एक हिंट देते हैं. इनके और जीनत अमान के प्यार के चर्चे बॉलीवुड गलियारों में खूब फेमस हुए थे. यहां तक कि इन पर जीनत पर हाथ उठाने का भी आरोप था. ये अपने उसूलों के काफी पक्के थे और इनके दो भाई भी मनोरंजन जगत का हिस्सा रह चुके हैं. इतने हिंट के बाद शायद आप इन्हें पहचान गए होंगे यदि नहीं तो ज्यादा परेशान मत होइए हम आपको इनका नाम बता देते हैं. ये हैं बॉलीवुड के खूबसूतर अभिनेताओं में शुमार 'फिरोज खान' . पठान परिवार में साल पच्चीस सितम्बर एक हज़ार नौ सौ उनतालीस को इनका जन्म हुआ था. जवानी के दिनों में ये काफी हैंडसम लगते थे और बॉलीवुड में इनके खूब चर्चे थे. फिरोज को स्टाइल आइकन माना जाता था, शुरुआती दौर में साइड किरदार निभाने के बाद इन्होंने लीड एक्टर के तौर पर भी खूब फेम हासिल की. फिरोज खान के लिए कहा जाता था कि वे उसूलों के काफी पक्के थे. उन्होंने अपने कुछ सिद्धांत बना रखे थे, जिन्हें लेकर वे काफी सख्त थे. वे दिल खोलकर प्यार करते थे लेकिन यदि कोई परेशान करता था तो वे उसे छोड़ते भी नहीं थे. दस सितम्बर एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर को प्रकाश मेहरा फिल्म 'हेरा फेरी' लेकर आए थे. इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन के साथ पहले फिरोज खान को लिया गया था. लेकिन फिरोज ने यह फिल्म सिर्फ इसलिए ठुकरा दी क्योंकि शूटिंग शेड्यूल में संडे भी शामिल था. उसूलों के मुताबिक, फिरोज संडे को काम नहीं करते थे. ऐसे में उन्होंने फिल्म करने से इनकार कर दिया. इसके बाद फिरोज वाला किरदार अमिताभ ने किया और अमिताभ वाला रोल विनोद खन्ना को दिया गया. बता दें कि अमिताभ और विनोद खन्ना की साथ में यह छठी फिल्म थी. . |
बॉलीवुड के ज्यादातर सेलेब्रिटीज को पालतु जानवरों से काफी लगाव है। कुछ सेलेब्स ने अपने घर में डॉग पाले हुए हैं तो कुछ ने बिल्लियां। फिल्म इंडस्ट्री में कई एक्ट्रेसेस हैं जो अपनी बिल्लियों से बहुत प्यार करती हैं और अक्सर उनके साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते नजर आ जाती हैं। यहां तक ये एक्ट्रेसेस अपनी बिल्लियों को छुट्टियों पर भी लेकर जाना नहीं भूलतीं। आइये जानते हैं ऐसी एक्ट्रेसेस के बारे में जो अपनी बल्लियों को बच्चों से भी ज्यादा प्यार करती हैं।
| बॉलीवुड के ज्यादातर सेलेब्रिटीज को पालतु जानवरों से काफी लगाव है। कुछ सेलेब्स ने अपने घर में डॉग पाले हुए हैं तो कुछ ने बिल्लियां। फिल्म इंडस्ट्री में कई एक्ट्रेसेस हैं जो अपनी बिल्लियों से बहुत प्यार करती हैं और अक्सर उनके साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते नजर आ जाती हैं। यहां तक ये एक्ट्रेसेस अपनी बिल्लियों को छुट्टियों पर भी लेकर जाना नहीं भूलतीं। आइये जानते हैं ऐसी एक्ट्रेसेस के बारे में जो अपनी बल्लियों को बच्चों से भी ज्यादा प्यार करती हैं। |
(श्री बलदेवविद्याभूषणकृता वैष्णवनन्दिनी)
महदपराधिनः कृपापि विपरीतफलव भवेदिति द्योतितम् ।
(श्रीमविश्वनाथचक्रवर्ति कृता सारार्थदर्शिनी)
सौभरि ऋषि का शाप था कि यहाँ आकर गरुड़ मछली खायेंगे तो अनुक्षण मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे; 'यदि केवल आयेंगे और मत्स्य भक्षण नहीं करेंगे तो भी मृत्यु को प्राप्त होंगे किन्तु अनुक्षण नहीं' यह वाक्य ऋषि के तपोबलाभिमान को सूचित करता है।
यहाँ (१) प्रभु के नित्य पार्षद गरुड़ जी को शापित करना ।
उनके अभीष्ट के प्रतिकूल आज्ञा ।
मछली पर दया करना ।
ये तीन अपराध ऋषि द्वारा हुए। जिस मछली पर दया की, उसी के संभोग को देखकर दुर्वासना हृदय में जागी, जिसने चिरार्जित तप को नष्ट कर दिया, तपोमय जीवन भोगमय हो गया। मछलियों पर जो दया की गई थी, महद् अपराध से वह भी विनाशकारी सिद्ध हुई।
नौझील से १३.१ कि.मी. की दूरी पर स्थित है सुरीर ग्राम ।
हैं तो ये सब आद्य पौगण्ड के बालक किन्तु कार्य कोई भी इनसे अछूता न रहा। केवल चोरी से ही सम्बन्ध नहीं है इनका, शौर्य व पराक्रम में भी पारङ्गत हैं ।
यह वह गढ़ है जहाँ इन नन्हे-मुन्हों ने परस्पर किया शौर्य का प्रदर्शन और अपना भीम रूप प्रकट कर दिखाया । ये बालक भी न, विचित्र चरित्रवान् हैं। कभी हौवा से डर जाते हैं और कभी दूसरों के लिए स्वयं हौवा बन जाते हैं। क्यों न हो इनका स्वामी "कृष्ण" भी तो ऐसा ही है, कहो तो अँधेरा देख के रो दे............. और कहो तो अघ के अंधकार भरे मुख में चला जाय ।
बिना दीपक सदन में हरि नेंकु धरत नहिं पाइ । अघासुर मुख पैठि निकसे, बाल वच्छ छुड़ाइ ॥ बलि- बलि चरित गोकुलराइ
नमन हैं इनके अनवगम्य चरित्रों को! | महदपराधिनः कृपापि विपरीतफलव भवेदिति द्योतितम् । सौभरि ऋषि का शाप था कि यहाँ आकर गरुड़ मछली खायेंगे तो अनुक्षण मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे; 'यदि केवल आयेंगे और मत्स्य भक्षण नहीं करेंगे तो भी मृत्यु को प्राप्त होंगे किन्तु अनुक्षण नहीं' यह वाक्य ऋषि के तपोबलाभिमान को सूचित करता है। यहाँ प्रभु के नित्य पार्षद गरुड़ जी को शापित करना । उनके अभीष्ट के प्रतिकूल आज्ञा । मछली पर दया करना । ये तीन अपराध ऋषि द्वारा हुए। जिस मछली पर दया की, उसी के संभोग को देखकर दुर्वासना हृदय में जागी, जिसने चिरार्जित तप को नष्ट कर दिया, तपोमय जीवन भोगमय हो गया। मछलियों पर जो दया की गई थी, महद् अपराध से वह भी विनाशकारी सिद्ध हुई। नौझील से तेरह.एक कि.मी. की दूरी पर स्थित है सुरीर ग्राम । हैं तो ये सब आद्य पौगण्ड के बालक किन्तु कार्य कोई भी इनसे अछूता न रहा। केवल चोरी से ही सम्बन्ध नहीं है इनका, शौर्य व पराक्रम में भी पारङ्गत हैं । यह वह गढ़ है जहाँ इन नन्हे-मुन्हों ने परस्पर किया शौर्य का प्रदर्शन और अपना भीम रूप प्रकट कर दिखाया । ये बालक भी न, विचित्र चरित्रवान् हैं। कभी हौवा से डर जाते हैं और कभी दूसरों के लिए स्वयं हौवा बन जाते हैं। क्यों न हो इनका स्वामी "कृष्ण" भी तो ऐसा ही है, कहो तो अँधेरा देख के रो दे............. और कहो तो अघ के अंधकार भरे मुख में चला जाय । बिना दीपक सदन में हरि नेंकु धरत नहिं पाइ । अघासुर मुख पैठि निकसे, बाल वच्छ छुड़ाइ ॥ बलि- बलि चरित गोकुलराइ नमन हैं इनके अनवगम्य चरित्रों को! |
झंडूता। ग्राम पंचायत बलघाड़ के शारदा महिला मंडल पपलाह का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ। सर्वसम्मति से प्रधान कमलेश कुमारी को चुना गया। इसके अलावा सचिव पूजा देवी, कोषाध्यक्ष निर्मला देवी व रोशनी देवी, श्वेता देवी, उषा देवी, तृप्ता देवी, मंजु बाला, चांदनी, रेखा, सुनीता देवी, ज्योति देवी, उर्मिला देवी, प्रेमलता, सुनीता व अंजना को सदस्य बनाया गया।
| झंडूता। ग्राम पंचायत बलघाड़ के शारदा महिला मंडल पपलाह का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ। सर्वसम्मति से प्रधान कमलेश कुमारी को चुना गया। इसके अलावा सचिव पूजा देवी, कोषाध्यक्ष निर्मला देवी व रोशनी देवी, श्वेता देवी, उषा देवी, तृप्ता देवी, मंजु बाला, चांदनी, रेखा, सुनीता देवी, ज्योति देवी, उर्मिला देवी, प्रेमलता, सुनीता व अंजना को सदस्य बनाया गया। |
कई महीनों से ये खबर खूब चल रही थी की एक्ट्रेस जान्हवी कपूर शिखर पहाड़िया को डेट कर रहीं हैं। अक्सर दोनों साथ में कई बार स्पॉट भी किये गए हैं। हाल में ही जाह्नवी कपूर के रुमर्ड ब्वॉयफ्रेंड शिखर पहाड़िया उनके पापा बोनी कपूर के साथ भी नजर आए हैं। पहले मुंबई एयरपोर्ट पर फिर दोनों मुंबई में आने में एनएमएसीसी कार्यक्रम में पहुंचे थे। एक तरह से माना जा रहा है की जान्हवी और शिखर के रिश्ते को पापा की भी मंज़ूरी मिल गयी है। जान्हवी ने अपने बॉयफ्रेंड के जन्मदिन को भी विशेष तरह से मनाया है। जान्हवी बॉयफ्रेंड शिखर पहाड़िया संग तिरुपति स्थित तिरुमाला बालाजी मंदिर के दर्शन करने पहुंची हैं। इस दौरान उनकी बहन खुशी कपूर भी नजर आईं। वहां दर्शन करने पहुंचीं एक्ट्रेस को साउथ इंडियन ड्रेस में देखा गया।
सोशल मीडिया पर जाह्नवी कपूर और शिखर पहाड़िया का एक वीडियो सामने आया है जिसमें दोनों ट्रेडिशनल अटायर में दिख रहे हैं। वीडियो तिरुपति बालाजी मंदिर का बताया जा रहा है। दोनों को साथ-साथ मंदिर के दर पर माथा टेकते हुए देखा जा रहा है। वीडियो में एक्ट्रेस ने साउथ इंडियन अटायर पहना है जबकि शिखर सिर्फ धोती में दिख रहे हैं। दोनों को साथ में मंदिर की परिक्रमा करते हुए भी देखा गया है। अब वीडियो सामने आने के बाद फैंस का विश्वास और भी पक्का हो गया है कि दोनों के बीच कुछ पक रहा है।
गौरतलब है कि शेखर पहाड़िया महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे के पोते हैं। दोनों ने इसके पहले ब्रेकअप कर लिया था। हालांकि, अब दोनों एक बार फिर साथ नजर आते हैं। इसके पहले कॉफी विद करण 7 पर करण जौहर ने जाह्नवी कपूर और शेखर पहाड़िया के रिश्ते की खबर को लगभग कंफर्म कर दिया था।
| कई महीनों से ये खबर खूब चल रही थी की एक्ट्रेस जान्हवी कपूर शिखर पहाड़िया को डेट कर रहीं हैं। अक्सर दोनों साथ में कई बार स्पॉट भी किये गए हैं। हाल में ही जाह्नवी कपूर के रुमर्ड ब्वॉयफ्रेंड शिखर पहाड़िया उनके पापा बोनी कपूर के साथ भी नजर आए हैं। पहले मुंबई एयरपोर्ट पर फिर दोनों मुंबई में आने में एनएमएसीसी कार्यक्रम में पहुंचे थे। एक तरह से माना जा रहा है की जान्हवी और शिखर के रिश्ते को पापा की भी मंज़ूरी मिल गयी है। जान्हवी ने अपने बॉयफ्रेंड के जन्मदिन को भी विशेष तरह से मनाया है। जान्हवी बॉयफ्रेंड शिखर पहाड़िया संग तिरुपति स्थित तिरुमाला बालाजी मंदिर के दर्शन करने पहुंची हैं। इस दौरान उनकी बहन खुशी कपूर भी नजर आईं। वहां दर्शन करने पहुंचीं एक्ट्रेस को साउथ इंडियन ड्रेस में देखा गया। सोशल मीडिया पर जाह्नवी कपूर और शिखर पहाड़िया का एक वीडियो सामने आया है जिसमें दोनों ट्रेडिशनल अटायर में दिख रहे हैं। वीडियो तिरुपति बालाजी मंदिर का बताया जा रहा है। दोनों को साथ-साथ मंदिर के दर पर माथा टेकते हुए देखा जा रहा है। वीडियो में एक्ट्रेस ने साउथ इंडियन अटायर पहना है जबकि शिखर सिर्फ धोती में दिख रहे हैं। दोनों को साथ में मंदिर की परिक्रमा करते हुए भी देखा गया है। अब वीडियो सामने आने के बाद फैंस का विश्वास और भी पक्का हो गया है कि दोनों के बीच कुछ पक रहा है। गौरतलब है कि शेखर पहाड़िया महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे के पोते हैं। दोनों ने इसके पहले ब्रेकअप कर लिया था। हालांकि, अब दोनों एक बार फिर साथ नजर आते हैं। इसके पहले कॉफी विद करण सात पर करण जौहर ने जाह्नवी कपूर और शेखर पहाड़िया के रिश्ते की खबर को लगभग कंफर्म कर दिया था। |
वोल्टा झील अफ्रीका के घाना देश में स्थित एक मानव निर्मित झील है। यह अकोसोम्बो बाँध के द्वारा सफ़ेद वोल्टा नदी और काली वोल्टा नदियों के पानी को रोककर बनाया गया जलाशय है जो अपने 8,502 km² (3,275 वर्ग मील) क्षेत्रफल के साथ विश्व का सतही क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जलाशय या मानव निर्मित झील है। इसकी जलधारण क्षमता 153,000,000,000 cubic m है। .
8 संबंधोंः झील, नासा, पश्चिमी अफ्रीका, घाना, वोल्टा नदी, अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन, अफ़्रीका, अकोसोम्बो बाँध।
एक अनूप झील बैकाल झील झील जल का वह स्थिर भाग है जो चारो तरफ से स्थलखंडों से घिरा होता है। झील की दूसरी विशेषता उसका स्थायित्व है। सामान्य रूप से झील भूतल के वे विस्तृत गड्ढे हैं जिनमें जल भरा होता है। झीलों का जल प्रायः स्थिर होता है। झीलों की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनका खारापन होता है लेकिन अनेक झीलें मीठे पानी की भी होती हैं। झीलें भूपटल के किसी भी भाग पर हो सकती हैं। ये उच्च पर्वतों पर मिलती हैं, पठारों और मैदानों पर भी मिलती हैं तथा स्थल पर सागर तल से नीचे भी पाई जाती हैं। किसी अंतर्देशीय गर्त में पाई जानेवाली ऐसी प्रशांत जलराशि को झील कहते हैं जिसका समुद्र से किसी प्रकार का संबंध नहीं रहता। कभी-कभी इस शब्द का प्रयोग नदियों के चौड़े और विस्तृत भाग के लिए तथा उन समुद्र तटीय जलराशियों के लिए भी किया जाता है, जिनका समुद्र से अप्रत्यक्ष संबंध रहता है। इनके विस्तार में भिन्नता पाई जाती है; छोटे छोटे तालाबों और सरोवर से लेकर मीठे पानीवाली विशाल सुपीरियर झील और लवणजलीय कैस्पियन सागर तक के भी झील के ही संज्ञा दी गई है। अधिकांशतः झीलें समुद्र की सतह से ऊपर पर्वतीय प्रदेशों में पाई जाती हैं, जिनमें मृत सागर, (डेड सी) जो समुद्र की सतह से नीचे स्थित है, अपवाद है। मैदानी भागों में सामान्यतः झीलें उन नदियों के समीप पाई जाती हैं जिनकी ढाल कम हो गई हो। झीलें मीठे पानीवाली तथा खारे पानीवाली, दोनों होती हैं। झीलों में पाया जानेवाला जल मुख्यतः वर्ष से, हिम के पिघलने से अथवा झरनों तथा नदियों से प्राप्त होता है। झीले बनती हैं, विकसित होती हैं, धीरे-धीरे तलछट से भरकर दलदल में बदल जाती हैं तथा उत्थान होंने पर समीपी स्थल के बराबर हो जाती हैं। ऐसी आशंका है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की बृहत झीलें ४५,००० वर्षों में समाप्त हो जाएंगी। भू-तल पर अधिकांश झीलें उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं। फिनलैंड में तो इतनी अधिक झीलें हैं कि इसे झीलों का देश ही कहा जाता है। यहाँ पर १,८७,८८८ झीलें हैं जिसमें से ६०,००० झीलें बेहद बड़ी हैं। पृथ्वी पर अनेक झीलें कृत्रिम हैं जिन्हें मानव ने विद्युत उत्पादन के लिए, कृषि-कार्यों के लिए या अपने आमोद-प्रमोद के लिए बनाया है। झीलें उपयोगी भी होती हैं। स्थानीय जलवायु को वे सुहावना बना देती हैं। ये विपुल जलराशि को रोक लेती हैं, जिससे बाढ़ की संभावना घट जाती है। झीलों से मछलियाँ भी प्राप्त होती हैं। .
नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (हिन्दी अनुवादःराष्ट्रीय वैमानिकी और अन्तरिक्ष प्रबंधन; National Aeronautics and Space Administration) या जिसे संक्षेप में नासा (NASA) कहते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है। फ़रवरी 2006 से नासा का लक्ष्य वाक्य "भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना" है। 14 सितंबर 2011 में नासा ने घोषणा की कि उन्होंने एक नए स्पेस लॉन्च सिस्टम के डिज़ाइन का चुनाव किया है जिसके चलते संस्था के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में और दूर तक सफर करने में सक्षम होंगे और अमेरिका द्वारा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया कदम साबित होंगे। नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स (एनसीए) के स्थान पर किया गया था। इस संस्था ने 1 अक्टूबर 1948 से कार्य करना शुरू किया। तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है। वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है और ओरायन बहु-उपयोगी कर्मीदल वाहन व व्यापारिक कर्मीदल वाहन के निर्माण व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। संस्था लॉन्च सेवा कार्यक्रम (एलएसपी) के लिए भी जिम्मेदार है जो लॉन्च कार्यों व नासा के मानवरहित लॉन्चों कि उलटी गिनती पर ध्यान रखता है। .
अफ्रीका महाद्वीप के दक्षिणी भाग को दक्षिणी अफ्रीका कहते हैं। इसमें बोत्सवानालेसोथोनामीबियादक्षिण अफ्रीकास्वाजीलैंड देश आते हैं। इनके विस्तृत आंकड़े इस प्रकार से हैंः- .
घाना गणराज्य पश्चिम अफ्रीका में स्थित एक देश है। इसकी सीमा पश्चिम में कोट द' आईवोर (आइवरी कोस्ट), उत्तर में बुर्किना फासो, पूर्व में टोगो और दक्षिण में गिनी की खाड़ी से मिलती है। घाना शब्द का अर्थ "लड़ाकू राजा" है। औपनिवेशिक समय से पूर्व घाना पर अनेक प्राचीन राजवंशों का प्रभुत्व था, जिनमें पूर्वी तट पर गा-दामेस और अंदरुनी क्षेत्र में अशांति साम्राज्य के अलावा तटीय और अंदरुनी क्षेत्रों में अनेक फान्ते और इवे राज्य शामिल थे। १५ वीं सदी में पुर्तगालियों के साथ संपर्क में आने के बाद यूरोपिय देशों के साथ व्यापार की बढ़ोतरी हुई और ब्रिटेन ने १८७४ में गोल्ड कोस्ट, के नाम से राजशाही उपनिवेश की स्थापना की। गोल्ड कोस्ट १९५७ में यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता हासिल करने वाला पहला उप सहारा अफ्रीकी राष्ट्र बना। प्राचीन साम्राज्य घाना, जिसका विस्तार एक समय पूरे पश्चिम अफ्रीका में था, के नाम पर नए देश का नाम घाना रखा गया। घाना अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सदस्य है, जिनमें राष्ट्रमंडल, पश्चिम अफ्रीकी राज्यों का आर्थिक सामुदायिक, अफ्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र शामिल हैं। .
वोल्टा नदी पश्चिमी अफ़्रीका में बहने वाली एक नदी है। यह बुर्कीना फ़ासो देश में आरम्भ होती है, जहाँ इसकी तीन उपनदियाँ - श्वेत वोल्टा, लाल वोल्टा और काली वोल्टा - अलग-अलग चलती हैं। यह तीनो फिर घाना देश में प्रवेश करती हैं, जहाँ पहले श्वेत और लाल वोल्टा का संगम होता है और फिर काली वोल्टा इस नदी में मिलती है। आगे चलकर इसका पानी एक झील बनाता है, जिसका नाम वोल्टा झील है। वोल्टा नदी पर लगे आकोसोम्बो बांध द्वारा बनी यह झील विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है और इसका क्षेत्रफल लगभग 8,502 वर्ग किमी है (तुलना के लिए यह भारत के सिक्किम राज्य से बड़ा है)। इस बांध से जलविद्युत बनाई जाती है। झील से दक्षिण में उभरकर यह गिनी की खाड़ी में विलय हो जाती है जो अटलांटिक महासागर की एक खाड़ी है। .
अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन या केन्द्र (संक्षेप में आईएसएस, अंग्रेज़ीः International Space Station इंटर्नॅशनल् स्पेस् स्टेशन्, ISS) बाहरी अन्तरिक्ष में अनुसंधान सुविधा या शोध स्थल है जिसे पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया है। इस परियोजना का आरंभ १९९८ में हुआ था और यह २०११ तक बन कर तैयार होगा। वर्तमान समय तक आईएसएस अब तक बनाया गया सबसे बड़ा मानव निर्मित उपग्रह होगा। आईएसएस कार्यक्रम विश्व की कई स्पेस एजेंसियों का संयुक्त उपक्रम है। इसे बनाने में संयुक्त राज्य की नासा के साथ रूस की रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी (आरकेए), जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए), कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी (सीएसए) और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ईएसए) काम कर रही हैं। इनके अतिरिक्त ब्राजीलियन स्पेस एजेंसी (एईबी) भी कुछ अनुबंधों के साथ नासा के साथ कार्यरत है। इसी तरह इटालियन स्पेस एजेंसी (एएसआई) भी कुछ अलग अनुबंधों के साथ कार्यरत है। पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने के बाद आईएसएस को नंगी आंखों से देखा जा सकेगा। यह पृथ्वी से करीब ३५० किलोमीटर ऊपर औसतन २७,७२४ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से परिक्रमा करेगा और प्रतिदिन १५.७ चक्कर पूरे करेगा। पिछले आईएसएस में, जिसे नवंबर २००० में कक्षा में स्थापित किया गया था, के बाद से उसमें लगातार मानवीय उपस्थिति बनी हुई है। वर्तमान समय में इसमें तीन व्यक्तियों का स्थान है। भविष्य में इसमें छह व्यक्तियों के रहने लायक जगह बनेगी। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थित एक वेधशाला के तौर पर कार्य करता है। अन्य अंतरिक्ष यानों के मुकाबले इसके कई फायदे हैं जिसमें इसमें रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहकर काम करने का मौका मिलता है। चित्रःISS after STS-116 in December 2006.jpg।अन्तरराष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन खींचने अन्तरिक्ष यान डिस्कवरी से, 19 दिसम्बर, 2006 पर File:ISS_on_20_August_2001.jpg।२००१ में आई। एस.एस File:MLM_-_ISS_module.jpg।बहु-उद्देशीय मॉड्यूल File:Good Morning From the International Space Station.jpg।अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन से अमरीका पर चन्द्रोदय का दृश्य। .
अफ़्रीका वा कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह 37°14' उत्तरी अक्षांश से 34°50' दक्षिणी अक्षांश एवं 17°33' पश्चिमी देशान्तर से 51°23' पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। अफ्रीका के उत्तर में भूमध्यसागर एवं यूरोप महाद्वीप, पश्चिम में अंध महासागर, दक्षिण में दक्षिण महासागर तथा पूर्व में अरब सागर एवं हिन्द महासागर हैं। पूर्व में स्वेज भूडमरूमध्य इसे एशिया से जोड़ता है तथा स्वेज नहर इसे एशिया से अलग करती है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य इसे उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलग करता है। इस महाद्वीप में विशाल मरुस्थल, अत्यन्त घने वन, विस्तृत घास के मैदान, बड़ी-बड़ी नदियाँ व झीलें तथा विचित्र जंगली जानवर हैं। मुख्य मध्याह्न रेखा (0°) अफ्रीका महाद्वीप के घाना देश की राजधानी अक्रा शहर से होकर गुजरती है। यहाँ सेरेनगेती और क्रुजर राष्ट्रीय उद्यान है तो जलप्रपात और वर्षावन भी हैं। एक ओर सहारा मरुस्थल है तो दूसरी ओर किलिमंजारो पर्वत भी है और सुषुप्त ज्वालामुखी भी है। युगांडा, तंजानिया और केन्या की सीमा पर स्थित विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी तथा सम्पूर्ण पृथ्वी पर मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झीलहै। यह झील दुनिया की सबसे लम्बी नदी नील के पानी का स्रोत भी है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी महाद्वीप में सबसे पहले मानव का जन्म व विकास हुआ और यहीं से जाकर वे दूसरे महाद्वीपों में बसे, इसलिए इसे मानव सभ्यता की जन्मभूमि माना जाता है। यहाँ विश्व की दो प्राचीन सभ्यताओं (मिस्र एवं कार्थेज) का भी विकास हुआ था। अफ्रीका के बहुत से देश द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए हैं एवं सभी अपने आर्थिक विकास में लगे हुए हैं। अफ़्रीका अपनी बहुरंगी संस्कृति और जमीन से जुड़े साहित्य के कारण भी विश्व में जाना जाता है। .
अकोसोम्बो बाँध अफ्रीका के घाना देश में स्थित हाइड्रोइलेक्ट्रिक बाँध है। यह वोल्टा नदी पर बनाया गया है। इसको 1961 में प्रारम्भ किया गया। यह 114 मीटर ऊँचा और 660 मीटर लंबा है। यह रॉक -फिल बाँध है। इस बाँध के कारण दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील वोल्टा झील का निर्माण हुआ है। श्रेणीःअफ्रीका के बाँध.
| वोल्टा झील अफ्रीका के घाना देश में स्थित एक मानव निर्मित झील है। यह अकोसोम्बो बाँध के द्वारा सफ़ेद वोल्टा नदी और काली वोल्टा नदियों के पानी को रोककर बनाया गया जलाशय है जो अपने आठ,पाँच सौ दो km² क्षेत्रफल के साथ विश्व का सतही क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जलाशय या मानव निर्मित झील है। इसकी जलधारण क्षमता एक सौ तिरेपन,शून्य,शून्य,शून्य cubic m है। . आठ संबंधोंः झील, नासा, पश्चिमी अफ्रीका, घाना, वोल्टा नदी, अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन, अफ़्रीका, अकोसोम्बो बाँध। एक अनूप झील बैकाल झील झील जल का वह स्थिर भाग है जो चारो तरफ से स्थलखंडों से घिरा होता है। झील की दूसरी विशेषता उसका स्थायित्व है। सामान्य रूप से झील भूतल के वे विस्तृत गड्ढे हैं जिनमें जल भरा होता है। झीलों का जल प्रायः स्थिर होता है। झीलों की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनका खारापन होता है लेकिन अनेक झीलें मीठे पानी की भी होती हैं। झीलें भूपटल के किसी भी भाग पर हो सकती हैं। ये उच्च पर्वतों पर मिलती हैं, पठारों और मैदानों पर भी मिलती हैं तथा स्थल पर सागर तल से नीचे भी पाई जाती हैं। किसी अंतर्देशीय गर्त में पाई जानेवाली ऐसी प्रशांत जलराशि को झील कहते हैं जिसका समुद्र से किसी प्रकार का संबंध नहीं रहता। कभी-कभी इस शब्द का प्रयोग नदियों के चौड़े और विस्तृत भाग के लिए तथा उन समुद्र तटीय जलराशियों के लिए भी किया जाता है, जिनका समुद्र से अप्रत्यक्ष संबंध रहता है। इनके विस्तार में भिन्नता पाई जाती है; छोटे छोटे तालाबों और सरोवर से लेकर मीठे पानीवाली विशाल सुपीरियर झील और लवणजलीय कैस्पियन सागर तक के भी झील के ही संज्ञा दी गई है। अधिकांशतः झीलें समुद्र की सतह से ऊपर पर्वतीय प्रदेशों में पाई जाती हैं, जिनमें मृत सागर, जो समुद्र की सतह से नीचे स्थित है, अपवाद है। मैदानी भागों में सामान्यतः झीलें उन नदियों के समीप पाई जाती हैं जिनकी ढाल कम हो गई हो। झीलें मीठे पानीवाली तथा खारे पानीवाली, दोनों होती हैं। झीलों में पाया जानेवाला जल मुख्यतः वर्ष से, हिम के पिघलने से अथवा झरनों तथा नदियों से प्राप्त होता है। झीले बनती हैं, विकसित होती हैं, धीरे-धीरे तलछट से भरकर दलदल में बदल जाती हैं तथा उत्थान होंने पर समीपी स्थल के बराबर हो जाती हैं। ऐसी आशंका है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की बृहत झीलें पैंतालीस,शून्य वर्षों में समाप्त हो जाएंगी। भू-तल पर अधिकांश झीलें उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं। फिनलैंड में तो इतनी अधिक झीलें हैं कि इसे झीलों का देश ही कहा जाता है। यहाँ पर एक,सत्तासी,आठ सौ अठासी झीलें हैं जिसमें से साठ,शून्य झीलें बेहद बड़ी हैं। पृथ्वी पर अनेक झीलें कृत्रिम हैं जिन्हें मानव ने विद्युत उत्पादन के लिए, कृषि-कार्यों के लिए या अपने आमोद-प्रमोद के लिए बनाया है। झीलें उपयोगी भी होती हैं। स्थानीय जलवायु को वे सुहावना बना देती हैं। ये विपुल जलराशि को रोक लेती हैं, जिससे बाढ़ की संभावना घट जाती है। झीलों से मछलियाँ भी प्राप्त होती हैं। . नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन या जिसे संक्षेप में नासा कहते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है। फ़रवरी दो हज़ार छः से नासा का लक्ष्य वाक्य "भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना" है। चौदह सितंबर दो हज़ार ग्यारह में नासा ने घोषणा की कि उन्होंने एक नए स्पेस लॉन्च सिस्टम के डिज़ाइन का चुनाव किया है जिसके चलते संस्था के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में और दूर तक सफर करने में सक्षम होंगे और अमेरिका द्वारा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया कदम साबित होंगे। नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत उन्नीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स के स्थान पर किया गया था। इस संस्था ने एक अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस से कार्य करना शुरू किया। तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है। वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है और ओरायन बहु-उपयोगी कर्मीदल वाहन व व्यापारिक कर्मीदल वाहन के निर्माण व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। संस्था लॉन्च सेवा कार्यक्रम के लिए भी जिम्मेदार है जो लॉन्च कार्यों व नासा के मानवरहित लॉन्चों कि उलटी गिनती पर ध्यान रखता है। . अफ्रीका महाद्वीप के दक्षिणी भाग को दक्षिणी अफ्रीका कहते हैं। इसमें बोत्सवानालेसोथोनामीबियादक्षिण अफ्रीकास्वाजीलैंड देश आते हैं। इनके विस्तृत आंकड़े इस प्रकार से हैंः- . घाना गणराज्य पश्चिम अफ्रीका में स्थित एक देश है। इसकी सीमा पश्चिम में कोट द' आईवोर , उत्तर में बुर्किना फासो, पूर्व में टोगो और दक्षिण में गिनी की खाड़ी से मिलती है। घाना शब्द का अर्थ "लड़ाकू राजा" है। औपनिवेशिक समय से पूर्व घाना पर अनेक प्राचीन राजवंशों का प्रभुत्व था, जिनमें पूर्वी तट पर गा-दामेस और अंदरुनी क्षेत्र में अशांति साम्राज्य के अलावा तटीय और अंदरुनी क्षेत्रों में अनेक फान्ते और इवे राज्य शामिल थे। पंद्रह वीं सदी में पुर्तगालियों के साथ संपर्क में आने के बाद यूरोपिय देशों के साथ व्यापार की बढ़ोतरी हुई और ब्रिटेन ने एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर में गोल्ड कोस्ट, के नाम से राजशाही उपनिवेश की स्थापना की। गोल्ड कोस्ट एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता हासिल करने वाला पहला उप सहारा अफ्रीकी राष्ट्र बना। प्राचीन साम्राज्य घाना, जिसका विस्तार एक समय पूरे पश्चिम अफ्रीका में था, के नाम पर नए देश का नाम घाना रखा गया। घाना अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सदस्य है, जिनमें राष्ट्रमंडल, पश्चिम अफ्रीकी राज्यों का आर्थिक सामुदायिक, अफ्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र शामिल हैं। . वोल्टा नदी पश्चिमी अफ़्रीका में बहने वाली एक नदी है। यह बुर्कीना फ़ासो देश में आरम्भ होती है, जहाँ इसकी तीन उपनदियाँ - श्वेत वोल्टा, लाल वोल्टा और काली वोल्टा - अलग-अलग चलती हैं। यह तीनो फिर घाना देश में प्रवेश करती हैं, जहाँ पहले श्वेत और लाल वोल्टा का संगम होता है और फिर काली वोल्टा इस नदी में मिलती है। आगे चलकर इसका पानी एक झील बनाता है, जिसका नाम वोल्टा झील है। वोल्टा नदी पर लगे आकोसोम्बो बांध द्वारा बनी यह झील विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है और इसका क्षेत्रफल लगभग आठ,पाँच सौ दो वर्ग किमी है । इस बांध से जलविद्युत बनाई जाती है। झील से दक्षिण में उभरकर यह गिनी की खाड़ी में विलय हो जाती है जो अटलांटिक महासागर की एक खाड़ी है। . अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन या केन्द्र बाहरी अन्तरिक्ष में अनुसंधान सुविधा या शोध स्थल है जिसे पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया है। इस परियोजना का आरंभ एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में हुआ था और यह दो हज़ार ग्यारह तक बन कर तैयार होगा। वर्तमान समय तक आईएसएस अब तक बनाया गया सबसे बड़ा मानव निर्मित उपग्रह होगा। आईएसएस कार्यक्रम विश्व की कई स्पेस एजेंसियों का संयुक्त उपक्रम है। इसे बनाने में संयुक्त राज्य की नासा के साथ रूस की रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी , जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी , कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी काम कर रही हैं। इनके अतिरिक्त ब्राजीलियन स्पेस एजेंसी भी कुछ अनुबंधों के साथ नासा के साथ कार्यरत है। इसी तरह इटालियन स्पेस एजेंसी भी कुछ अलग अनुबंधों के साथ कार्यरत है। पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने के बाद आईएसएस को नंगी आंखों से देखा जा सकेगा। यह पृथ्वी से करीब तीन सौ पचास किलोग्राममीटर ऊपर औसतन सत्ताईस,सात सौ चौबीस किलोग्राममीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से परिक्रमा करेगा और प्रतिदिन पंद्रह.सात चक्कर पूरे करेगा। पिछले आईएसएस में, जिसे नवंबर दो हज़ार में कक्षा में स्थापित किया गया था, के बाद से उसमें लगातार मानवीय उपस्थिति बनी हुई है। वर्तमान समय में इसमें तीन व्यक्तियों का स्थान है। भविष्य में इसमें छह व्यक्तियों के रहने लायक जगह बनेगी। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थित एक वेधशाला के तौर पर कार्य करता है। अन्य अंतरिक्ष यानों के मुकाबले इसके कई फायदे हैं जिसमें इसमें रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहकर काम करने का मौका मिलता है। चित्रःISS after STS-एक सौ सोलह in December दो हज़ार छः.jpg।अन्तरराष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन खींचने अन्तरिक्ष यान डिस्कवरी से, उन्नीस दिसम्बर, दो हज़ार छः पर File:ISS_on_बीस_August_दो हज़ार एक.jpg।दो हज़ार एक में आई। एस.एस File:MLM_-_ISS_module.jpg।बहु-उद्देशीय मॉड्यूल File:Good Morning From the International Space Station.jpg।अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन से अमरीका पर चन्द्रोदय का दृश्य। . अफ़्रीका वा कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह सैंतीस°चौदह' उत्तरी अक्षांश से चौंतीस°पचास' दक्षिणी अक्षांश एवं सत्रह°तैंतीस' पश्चिमी देशान्तर से इक्यावन°तेईस' पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। अफ्रीका के उत्तर में भूमध्यसागर एवं यूरोप महाद्वीप, पश्चिम में अंध महासागर, दक्षिण में दक्षिण महासागर तथा पूर्व में अरब सागर एवं हिन्द महासागर हैं। पूर्व में स्वेज भूडमरूमध्य इसे एशिया से जोड़ता है तथा स्वेज नहर इसे एशिया से अलग करती है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य इसे उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलग करता है। इस महाद्वीप में विशाल मरुस्थल, अत्यन्त घने वन, विस्तृत घास के मैदान, बड़ी-बड़ी नदियाँ व झीलें तथा विचित्र जंगली जानवर हैं। मुख्य मध्याह्न रेखा अफ्रीका महाद्वीप के घाना देश की राजधानी अक्रा शहर से होकर गुजरती है। यहाँ सेरेनगेती और क्रुजर राष्ट्रीय उद्यान है तो जलप्रपात और वर्षावन भी हैं। एक ओर सहारा मरुस्थल है तो दूसरी ओर किलिमंजारो पर्वत भी है और सुषुप्त ज्वालामुखी भी है। युगांडा, तंजानिया और केन्या की सीमा पर स्थित विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी तथा सम्पूर्ण पृथ्वी पर मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झीलहै। यह झील दुनिया की सबसे लम्बी नदी नील के पानी का स्रोत भी है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी महाद्वीप में सबसे पहले मानव का जन्म व विकास हुआ और यहीं से जाकर वे दूसरे महाद्वीपों में बसे, इसलिए इसे मानव सभ्यता की जन्मभूमि माना जाता है। यहाँ विश्व की दो प्राचीन सभ्यताओं का भी विकास हुआ था। अफ्रीका के बहुत से देश द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए हैं एवं सभी अपने आर्थिक विकास में लगे हुए हैं। अफ़्रीका अपनी बहुरंगी संस्कृति और जमीन से जुड़े साहित्य के कारण भी विश्व में जाना जाता है। . अकोसोम्बो बाँध अफ्रीका के घाना देश में स्थित हाइड्रोइलेक्ट्रिक बाँध है। यह वोल्टा नदी पर बनाया गया है। इसको एक हज़ार नौ सौ इकसठ में प्रारम्भ किया गया। यह एक सौ चौदह मीटर ऊँचा और छः सौ साठ मीटर लंबा है। यह रॉक -फिल बाँध है। इस बाँध के कारण दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील वोल्टा झील का निर्माण हुआ है। श्रेणीःअफ्रीका के बाँध. |
सदफ हामिद, भोपाल। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतदान के आखिरी समय में कुछ बड़ा खेल कर सकती है। कांग्रेस के छल कपट पर बीजेपी विशेष नजर रखेगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कार्यकर्ता बूथ-बूथ पर नजर रखेंगे। कांग्रेस कुछ भी करेगी उस पर पैनी नजर रखी जाएगी। एक कुशल प्रबंधन जो हुआ है और काउंटिंग जो होगी तब तक के लिए रणनीति बनी है। दरअसल बीजेपी की चुनाव प्रबंधन समिति की आज एक अहम बैठक हुई। जिसमें उपचुनाव को लेकर रणनीति बनाई गई है। बैठक खत्म होने के बाद वीडी शर्मा मीडिया से बात कर रहे थे।
बीजेपी के आरोप पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिनके नेता आचार संहिता तोड़ते हुए पकड़े गए, मंत्री सांसदों पर एफआईआर हुई, प्रशासनिक जिम्मेदारियों को दरकिनार करके आज भी जगह-जगह चुनावी क्षेत्रों में बैठे हुए हैं, वह कांग्रेस पर निगाह करने की बात करते हैं। यह मध्य प्रदेश की जनता इनके तांडव को देख रही है। इनके आलौकिक चेहरे को देख रही है यह चुनाव मुँह पर तगड़ा तमाचा होगा।
| सदफ हामिद, भोपाल। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतदान के आखिरी समय में कुछ बड़ा खेल कर सकती है। कांग्रेस के छल कपट पर बीजेपी विशेष नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कार्यकर्ता बूथ-बूथ पर नजर रखेंगे। कांग्रेस कुछ भी करेगी उस पर पैनी नजर रखी जाएगी। एक कुशल प्रबंधन जो हुआ है और काउंटिंग जो होगी तब तक के लिए रणनीति बनी है। दरअसल बीजेपी की चुनाव प्रबंधन समिति की आज एक अहम बैठक हुई। जिसमें उपचुनाव को लेकर रणनीति बनाई गई है। बैठक खत्म होने के बाद वीडी शर्मा मीडिया से बात कर रहे थे। बीजेपी के आरोप पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिनके नेता आचार संहिता तोड़ते हुए पकड़े गए, मंत्री सांसदों पर एफआईआर हुई, प्रशासनिक जिम्मेदारियों को दरकिनार करके आज भी जगह-जगह चुनावी क्षेत्रों में बैठे हुए हैं, वह कांग्रेस पर निगाह करने की बात करते हैं। यह मध्य प्रदेश की जनता इनके तांडव को देख रही है। इनके आलौकिक चेहरे को देख रही है यह चुनाव मुँह पर तगड़ा तमाचा होगा। |
Uttarkashi Minor abduction Case: नाबालिग को भगाने के मामले में उत्तरकाशी में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आज शनिवार को बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पसीने छुड़ा दिए। व्यापारियों ने बाहरी लोगों का सत्यापन तेज करने मांग की।
उत्तरकाशी के पुरोला में गत सप्ताह नाबालिग को भगा ले जाने की कोशिश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यमुनाघाटी हिन्दू जागृति संगठन के आह्वान पर व्यापारियों ने समूची यमुनाघाटी के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कर विशाल जुलूस निकाला। भारी संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पसीने छुड़ा दिए।
शनिवार को भी उत्तरकाशी पुरोला में मामले को लेकर लोगों का आक्रोश दिखाई दिया। बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। व्यापारियों ने नगर में रैली निकाली और प्रदर्शन करते हुए समुदाय विशेष के दुकानदारों के बैनर साइन बोर्ड तोड़ दिए। उन्होंने बाहरी लोगों का सत्यापन तेज करने, उनकी ओर से अतिक्रमण कर लगाई जा रही दुकानें हटाने की मांग की। शुक्रवार को भी व्यापारियों ने नगरपालिका में बाहरी व्यापारियों की सही जानकारी न मिलने पर ईओ का घेराव किया।
कहा कि जिला मुख्यालय में जिस तरह से बाहरी व्यापारियों की संख्या बढ़ रही है इससे यहां पर कभी भी पुरोला और विकासनगर जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसके बाद भी सत्यापन में कोताही बरती जा रही है। उन्होंने शहर में बाहरी लोगों की ओर से लगाई जा रही फड़, रेड़ियों और छोटी-छोटी दुकानों के नाम पर किए जा रहे अतिक्रमण को हटाने, शहर की सभी कबाड़ की दुकानें हटाने की मांग की।
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| Uttarkashi Minor abduction Case: नाबालिग को भगाने के मामले में उत्तरकाशी में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आज शनिवार को बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पसीने छुड़ा दिए। व्यापारियों ने बाहरी लोगों का सत्यापन तेज करने मांग की। उत्तरकाशी के पुरोला में गत सप्ताह नाबालिग को भगा ले जाने की कोशिश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यमुनाघाटी हिन्दू जागृति संगठन के आह्वान पर व्यापारियों ने समूची यमुनाघाटी के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कर विशाल जुलूस निकाला। भारी संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पसीने छुड़ा दिए। शनिवार को भी उत्तरकाशी पुरोला में मामले को लेकर लोगों का आक्रोश दिखाई दिया। बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। व्यापारियों ने नगर में रैली निकाली और प्रदर्शन करते हुए समुदाय विशेष के दुकानदारों के बैनर साइन बोर्ड तोड़ दिए। उन्होंने बाहरी लोगों का सत्यापन तेज करने, उनकी ओर से अतिक्रमण कर लगाई जा रही दुकानें हटाने की मांग की। शुक्रवार को भी व्यापारियों ने नगरपालिका में बाहरी व्यापारियों की सही जानकारी न मिलने पर ईओ का घेराव किया। कहा कि जिला मुख्यालय में जिस तरह से बाहरी व्यापारियों की संख्या बढ़ रही है इससे यहां पर कभी भी पुरोला और विकासनगर जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसके बाद भी सत्यापन में कोताही बरती जा रही है। उन्होंने शहर में बाहरी लोगों की ओर से लगाई जा रही फड़, रेड़ियों और छोटी-छोटी दुकानों के नाम पर किए जा रहे अतिक्रमण को हटाने, शहर की सभी कबाड़ की दुकानें हटाने की मांग की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
Patna, Beforeprint : पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने डिप्टी सीएम पर आरोप लगाते हुए कहा है कि डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद के दबाव में राज्य सरकार राजनीतिक बदले की भावना से भाजपा के पूर्व उप मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस थमाकर उनसे भारी जुर्माना वसूलना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि हिम्मत है नीतीश कुमार सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे के मुद्दे पर श्वेत पत्र जारी करें।
सुशील मोदी ने कहा कि भाजपा का कोई जनप्रतिनिधि किसी सरकारी आवास में तेजस्वी यादव की तरह जबरदस्ती नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा कि 2017 में महागठबंधन सरकार गिरने के बाद तत्कालीन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने पांच, देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी बंगला खाली करने की नोटिस के बावजूद बिना कोई अतिरिक्त भुगतान किए उसका डेढ़ साल तक उपयोग किया। हाईकोर्ट में मुकदमा हारने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट तक गए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा कर तेजस्वी यादव को वह बंगला खाली करने का आदेश दिया था। इस बंगले की साज-सज्जा पर जनता के करोड़ों रुपये बहाये गए थे। इस बंगले के बाथरूम समेत कुल 46 एसी लगे थे। आगे सुशील मोदी ने कहा कि जिन भाजपा नेताओं को आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है, पहले उनके नाम आवंटित आवास को खाली करा कर और उसे रहने लायक बना कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ दल के दर्जनों लोग अवैध तरीके से सरकारी आवासों में रह रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
| Patna, Beforeprint : पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने डिप्टी सीएम पर आरोप लगाते हुए कहा है कि डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद के दबाव में राज्य सरकार राजनीतिक बदले की भावना से भाजपा के पूर्व उप मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस थमाकर उनसे भारी जुर्माना वसूलना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि हिम्मत है नीतीश कुमार सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे के मुद्दे पर श्वेत पत्र जारी करें। सुशील मोदी ने कहा कि भाजपा का कोई जनप्रतिनिधि किसी सरकारी आवास में तेजस्वी यादव की तरह जबरदस्ती नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा कि दो हज़ार सत्रह में महागठबंधन सरकार गिरने के बाद तत्कालीन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने पांच, देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी बंगला खाली करने की नोटिस के बावजूद बिना कोई अतिरिक्त भुगतान किए उसका डेढ़ साल तक उपयोग किया। हाईकोर्ट में मुकदमा हारने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट तक गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पचास हजार रुपये का जुर्माना लगा कर तेजस्वी यादव को वह बंगला खाली करने का आदेश दिया था। इस बंगले की साज-सज्जा पर जनता के करोड़ों रुपये बहाये गए थे। इस बंगले के बाथरूम समेत कुल छियालीस एसी लगे थे। आगे सुशील मोदी ने कहा कि जिन भाजपा नेताओं को आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है, पहले उनके नाम आवंटित आवास को खाली करा कर और उसे रहने लायक बना कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ दल के दर्जनों लोग अवैध तरीके से सरकारी आवासों में रह रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। |
जानकारी के अनुसार रिंकी पुत्री भरोसा जाटव उम्र 15 निवासी अमारा थाना इंदार बीते रोज अपने घर पर अकेली थी। जहां किशोरी ने अज्ञात कारणो के चलते जहर खा लिया। परिजन को जब इसकी सूचना मिली तो परिजनो ने किशोरी को तत्काल जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया जहां चिकित्सको ने रिंकी को मृत घोषित कर दिया। इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला विवेचना में ले लिया है।
| जानकारी के अनुसार रिंकी पुत्री भरोसा जाटव उम्र पंद्रह निवासी अमारा थाना इंदार बीते रोज अपने घर पर अकेली थी। जहां किशोरी ने अज्ञात कारणो के चलते जहर खा लिया। परिजन को जब इसकी सूचना मिली तो परिजनो ने किशोरी को तत्काल जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया जहां चिकित्सको ने रिंकी को मृत घोषित कर दिया। इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला विवेचना में ले लिया है। |
पौढ़ि रही सुग्व-सेज छबीली, दिनकर- किरन झरोखहि भाई । उठि बैठे लाल बिलोकि मदन विधु, निरखत नैना रहे लुभाई ।। पलक ललन-मुख चितवत, मृदु मुसकात, हँभि लेत जँभाई । 'कृष्णदास' प्रभु गिरिधर नागर, लटकि-लटकि हँसि कंठ लगाई ।। - कृष्णदास
वियोग शृंगार पर भी सूरदास, परमानंददास और नंददास की रचनाएँ बड़ी उत्तम हुई हैं । गोपियों के विरह-वर्णन में वियोग की समस्त दशाओं का मूर्तिमान स्वरूप दिखलाया गया है। सूरदास और नंददास के भ्रमरगीत भी इसी प्रकार की रचनाएँ हैं। यहाँ पर वियोग व गार के कुछ छंद दिये जाते हैं-मधुकर ! इतनी कहियहु जाय । अति कृस गात भई ये तुम बिन, परम दुखारी गाय ।। जल-समूह बरसत दोउ आँखें, कति तीन्हें नाँउ । जहाँ-तहाँ गो-दोहन कीनों, सूँघत सोई ठाँउ ।। परति पछार खाइ बिन ही छिन, अति आतुर हदीन । मानहुँ 'सूर' काढ़ि डारी हैं, वारि मध्य तें मीन ।।
रैन पपीहा बोल्यो री माई ।
नींद गई, चिंता बहु बाढ़ी, सुरति स्याम की आई ।। सावन मास देखि वरषा- रितु, हौं उठि आँगन धाई । गरजत गगन, दामिनी दमकत, तामैं जीउ उड़ाई ।। राग मलार कियौ जब काहू, मुरली मधुर बजाई । विरहिन विकल 'दास परमानंद' घरनि परी मुरझाई ।।
- परमानंददास
सुनत स्याम कौ नाम, ग्राम गृह की सुधि भूलीं । भरि आनंद रस हृदय, प्रेम-वेली द्रुम फूलीं ॥ पुतकि गेम सग भए, भरि आए जल नैन । कंठ घुट्यौ, गद्गद् गिरा, बोले जात न बैन ।
विवस्था प्रेम की ।
की रचनाओं में शृंगार रस के विभिन्न प्रसंगों के इतने सुंदर शब्द-चित्र मिलते हैं, जिनके मनन से पाठक स्वयं चित्रवत् रह जाता है। इस प्रकार की रचनाओं के दो-चार उदाहरण दे देने से उनका यथार्थ स्वरूप समझ में नहीं था सकता, अतः गत पृष्ठों के 'काव्य संग्रह' द्वारा प्रत्येक कवि की रचनाओं का रसास्वादन करना चाहिए ।
ब्रजभाषा साहित्य की शृंगारिक रचनाओं में नायिकाभेद का शास्त्रीय विवेचन अधिकतर रीति-काल की दैन है, किंतु इसका प्रारंभ भक्तिकाल में ही हो गया था। भक्तिकालीन कवियों ने राधा-कृष्ण का जो शृंगारिक वर्णन किया है, इसमें नायिकाभेदोक्त कथन भी प्रचुर परिमाण में आ गये हैं। अष्टछाप के कवियों ने राधा-कृष्ण के पारस्परिक अनुराग के क्रमिक विकास, उनके संयोग एवं वियोग की अनेक चेष्टाओं तथा उनके मान, उपालंभ, मिलन श्रादि के विविध कथनों में नायिकाभेद की अधिकांश सामग्रीश्रा गयी है ।
बल्लभ संप्रदाय में चैतन्य संप्रदाय की भाँति परकीया भक्ति का महत्व नहीं है, तब भी इसमें परकीया भक्ति सर्वथा अग्राह्य भी नहीं है। बल्लभ संप्रदाय की भक्ति-भावना के अनुसार राधिका जी स्वकीया और चंद्रावली जी परकीया हैं। अष्टछाप के कवियों ने अपनी रचनाओं में अधिकतर स्वकीया भक्ति का ही कथन किया है, किंतु नंददास ने 'रूपमंजरी' में परकीया भक्ति को भी महत्व दिया है। उन्होंने कहा हैरस में जो
उपपति-रसह ।
रस की अवधि, कहति कवि ताहीं ।।
परकीया भक्ति के आधारभूत इस उपपति-रस की व्याख्या नंददास ने 'विरह-मंजरी' में भी की है। अपने 'दशमस्कंघ' ग्रंथ में उन्होंने गोपियों के मुख से उपपति-रस की इस प्रकार पुष्टि करवायी है-जो कहो उपपति-रस नहिं स्वच्छ । सब कोउ निंदत अरु अति तुच्छ ॥ तहाँ कहति हैं, ब्रज भामिनी । लहलहाति जनु नव दामिनी ॥ तुम्हरी ये कऩगी तजि पिय । त्रिभुवन मांझ कवन असतिय ।। सुनतहिं आरज-पथ नहिं तजै । सुंदर नंद-सुबन नहिं भजै ॥
यह होने पर भी अष्टछाप के काव्य में जो नायिकाभेदोक्त कथन मिलते हैं, वे प्रायः स्वकीया के ही अनुकूल हैं। अष्टछाप के कवियों की रचनाओं में स्वकीया नायिका से अनुकूल अज्ञातयौवना से लेकर मध्या, प्रौढ़ा नायिकाओं | पौढ़ि रही सुग्व-सेज छबीली, दिनकर- किरन झरोखहि भाई । उठि बैठे लाल बिलोकि मदन विधु, निरखत नैना रहे लुभाई ।। पलक ललन-मुख चितवत, मृदु मुसकात, हँभि लेत जँभाई । 'कृष्णदास' प्रभु गिरिधर नागर, लटकि-लटकि हँसि कंठ लगाई ।। - कृष्णदास वियोग शृंगार पर भी सूरदास, परमानंददास और नंददास की रचनाएँ बड़ी उत्तम हुई हैं । गोपियों के विरह-वर्णन में वियोग की समस्त दशाओं का मूर्तिमान स्वरूप दिखलाया गया है। सूरदास और नंददास के भ्रमरगीत भी इसी प्रकार की रचनाएँ हैं। यहाँ पर वियोग व गार के कुछ छंद दिये जाते हैं-मधुकर ! इतनी कहियहु जाय । अति कृस गात भई ये तुम बिन, परम दुखारी गाय ।। जल-समूह बरसत दोउ आँखें, कति तीन्हें नाँउ । जहाँ-तहाँ गो-दोहन कीनों, सूँघत सोई ठाँउ ।। परति पछार खाइ बिन ही छिन, अति आतुर हदीन । मानहुँ 'सूर' काढ़ि डारी हैं, वारि मध्य तें मीन ।। रैन पपीहा बोल्यो री माई । नींद गई, चिंता बहु बाढ़ी, सुरति स्याम की आई ।। सावन मास देखि वरषा- रितु, हौं उठि आँगन धाई । गरजत गगन, दामिनी दमकत, तामैं जीउ उड़ाई ।। राग मलार कियौ जब काहू, मुरली मधुर बजाई । विरहिन विकल 'दास परमानंद' घरनि परी मुरझाई ।। - परमानंददास सुनत स्याम कौ नाम, ग्राम गृह की सुधि भूलीं । भरि आनंद रस हृदय, प्रेम-वेली द्रुम फूलीं ॥ पुतकि गेम सग भए, भरि आए जल नैन । कंठ घुट्यौ, गद्गद् गिरा, बोले जात न बैन । विवस्था प्रेम की । की रचनाओं में शृंगार रस के विभिन्न प्रसंगों के इतने सुंदर शब्द-चित्र मिलते हैं, जिनके मनन से पाठक स्वयं चित्रवत् रह जाता है। इस प्रकार की रचनाओं के दो-चार उदाहरण दे देने से उनका यथार्थ स्वरूप समझ में नहीं था सकता, अतः गत पृष्ठों के 'काव्य संग्रह' द्वारा प्रत्येक कवि की रचनाओं का रसास्वादन करना चाहिए । ब्रजभाषा साहित्य की शृंगारिक रचनाओं में नायिकाभेद का शास्त्रीय विवेचन अधिकतर रीति-काल की दैन है, किंतु इसका प्रारंभ भक्तिकाल में ही हो गया था। भक्तिकालीन कवियों ने राधा-कृष्ण का जो शृंगारिक वर्णन किया है, इसमें नायिकाभेदोक्त कथन भी प्रचुर परिमाण में आ गये हैं। अष्टछाप के कवियों ने राधा-कृष्ण के पारस्परिक अनुराग के क्रमिक विकास, उनके संयोग एवं वियोग की अनेक चेष्टाओं तथा उनके मान, उपालंभ, मिलन श्रादि के विविध कथनों में नायिकाभेद की अधिकांश सामग्रीश्रा गयी है । बल्लभ संप्रदाय में चैतन्य संप्रदाय की भाँति परकीया भक्ति का महत्व नहीं है, तब भी इसमें परकीया भक्ति सर्वथा अग्राह्य भी नहीं है। बल्लभ संप्रदाय की भक्ति-भावना के अनुसार राधिका जी स्वकीया और चंद्रावली जी परकीया हैं। अष्टछाप के कवियों ने अपनी रचनाओं में अधिकतर स्वकीया भक्ति का ही कथन किया है, किंतु नंददास ने 'रूपमंजरी' में परकीया भक्ति को भी महत्व दिया है। उन्होंने कहा हैरस में जो उपपति-रसह । रस की अवधि, कहति कवि ताहीं ।। परकीया भक्ति के आधारभूत इस उपपति-रस की व्याख्या नंददास ने 'विरह-मंजरी' में भी की है। अपने 'दशमस्कंघ' ग्रंथ में उन्होंने गोपियों के मुख से उपपति-रस की इस प्रकार पुष्टि करवायी है-जो कहो उपपति-रस नहिं स्वच्छ । सब कोउ निंदत अरु अति तुच्छ ॥ तहाँ कहति हैं, ब्रज भामिनी । लहलहाति जनु नव दामिनी ॥ तुम्हरी ये कऩगी तजि पिय । त्रिभुवन मांझ कवन असतिय ।। सुनतहिं आरज-पथ नहिं तजै । सुंदर नंद-सुबन नहिं भजै ॥ यह होने पर भी अष्टछाप के काव्य में जो नायिकाभेदोक्त कथन मिलते हैं, वे प्रायः स्वकीया के ही अनुकूल हैं। अष्टछाप के कवियों की रचनाओं में स्वकीया नायिका से अनुकूल अज्ञातयौवना से लेकर मध्या, प्रौढ़ा नायिकाओं |
'बहु क्षमा' स्वभाव जाग्रत है । क्षमा अर्थात् स्वभावसे परिपूर्ण ज्ञानदृष्टि में किसीके दोष दिखाई नहीं पड़ते, क्योंकि कोई वस्तु दोपरूप नही है । भले ही घोर प्रतिकूलताका प्रसंग ज्ञानकी स्वच्छतामें जाना जाय, किन्तु उससे ज्ञानीको बाधा नहीं होती । अशुभ कर्म के संयोगमें ज्ञानी जानता है कि विपरीत पुरुषार्थ द्वारा विकारी पर्याय पहले अपनाई थी उसी भूलका फल यह अशुभ कर्मका संयोगघर्तमान में दिखाई दे रहा है, किन्तु अब मैं त्रिकाली अखंड ज्ञानस्वभावका स्वामी होनेसे भूलरूप परिणमन नहीं करता किन्तु निर्दोष ज्ञाताभावरूप होनेसे भूलरहित स्वभावके भानमे स्थिर होकर भूतकालीन अवस्था और निमित्तका ज्ञान मात्र करता हूँ ।
ज्ञानी जिन संयोगोंको देखता है उनमें हर्ष-शोक नहीं करता । निर्दोष ज्ञानस्वभावका लक्ष्य रख कर भी ज्ञानी अल्प राग-द्वेपमें लग जाता है किन्तु उसकी मुख्यता नहीं है; में त्रिकाली ज्ञानस्वभावी हूँ इसकी मुख्यता है। ऐसा विचारकर निःशंकस्वभावमें सञ्चा अभिप्राय लाओ कि मैं राग, द्वेष, मोहरूप नहीं है क्योंकि वे मेरे स्वभाव नहीं हैं, इसलिये कपाय अशमात्र भी करने योग्य नहीं है, राग-द्वेष न होने देऊ अर्थात् जाग्रत ज्ञानस्वभावकी बेहदतामें स्थिर रह /- ऐसा अभिप्राय जानत रखना ही ज्ञानकी क्रिया है । अल्प रागका अंश अभी होता है यह अलग बात है किन्तु हमें राग-द्वेष करने पड़ते हैं ऐसा माननेमें तो बहुत अहित है । मैं दूसरोंको समझा दूं, मेरे द्वारा दूसरे समझते हैं, मेरी सलाहसे सव भली प्रकारसे रहते हैं, इस प्रकार परकी व्यवस्थाका कर्तृत्व एवं ममत्व रखूँ ऐसी मान्यता महापाप है।
परका कुछ भी कार्य कर सकूँ यह विपरीत अभिप्राय है और उस अभिप्रायमें अनन्ती आसक्ति है इसलिए सर्वप्रथम इस अभिप्रायको बदलना चाहिए ।
में सदा ही परसे भिन्न ज्ञानानन्द स्वरूपी है, ज्ञान सिवा कुछ भी नहीं कर सकता । मैं पराश्रयमें लगनेवाले भावको नित्य स्वभावकी भावना द्वारा दूर करनेवाला हूँ, 'पर' मुझे सहायक नहीं हो सकता । मेरा कर्त्तव्य तो यह है कि राग रंहित, परावलम्बन रहित ज्ञान करूँ। मैं पूर्ण पवित्र ज्ञान मात्र हूं- ऐसे अभिप्रायको मै निरन्तर बना रखूं और स्वरूपकी दृढ़ता बढ़े यही हितकर है।
भले ही किसीको प्रसंगवश सलाह- सूचना देने का विकल्प आवे, किन्तु उसमें किसी प्रकारका आग्रह समत्व न होना चाहिये । मेरी वातसे कोई सुधरे या बिगड़े इसका कर्तृत्वममत्त्व छोड़ देता हूँ । तत्पश्चात् वह सुधरे या न सुधरे यह उसके भावों पर निर्भर है, मैं किसीको कुछ कर नहीं देता । मैं तीनों कालमें ज्ञान ही करता हूँ ऐसा माननेसे राग-द्वेष होनेका अवकाश नहीं रहता, सुधरना तो उसे स्वयंको है । त्रिकाली द्रव्यस्वभावमें कुछ बिगाड़ नहीं होता । वर्तमान एक समयकी अवस्था में पराश्रय कर जीव नये राग-द्वेष करता है यह उसकी भूल है। इस भूलको वह नित्य ज्ञानस्वभावके लक्ष्य और स्थिरता द्वारा दूर कर सकता है। इसलिये समाधान स्वयं का ही करना है, परसे कुछ भी नहीं है। इसी में अनेक प्रश्नोंका समाधान हो जाता है। मैं दूसरेको शीघ्र समझा दूँ, परकी व्यवस्था रख सकता हूँ-ऐसी मान्यतायें सव मिथ्या हैं । जिसने अपने आपको सुधार लिया उसका सारा जगत सुधर गया, जिसने स्वाधीन स्वरूप में निजात्माको
अविरोध रूपसे जान लिया उसके कोई विघ्न नहीं है । चाहे अनुकूल या प्रतिकूल बहुत उपसर्ग आवे उनमें ज्ञानको क्या ? उपसर्ग चार प्रकारके हैं - देव, मनुष्य, पशु और अचेतन कृत । उनमें किसीके प्रति भी क्रोध नहीं आवे ऐसी भावना है ।
कोई माने कि मैं अपने भाई, मित्र, पुत्र, समाज आदिका इतना उपकारी रहा हू किन्तु वे फिर भी मेरी निन्दा आदि द्वारा प्रतिकूलता उपस्थित कर मुझे हैरान कर देते हैं, ऐसा मानना भी मिथ्या भ्रम है। ये सव सयोगमें पूर्वकर्म निमित्त हैं, तू उनमें अपने इट- अनिष्टरूप होनेकी कल्पना करता है । निमित्त आत्मामें नहीं है, तुझे दूसरा जबरदस्तीसे विगाड़ नहीं सकता ।
कोई भी परवस्तु दूसरेको राग, द्वेष, क्रोधादि नहीं करा देती । आत्मा अरूपी, ज्ञानघन, ज्ञानपिंड है, उसमें राग-द्वेष उपाधिका अश नहीं है, तब परवस्तुके प्रति क्षोभ किसलिए करना चाहिए ? जो वस्तु पर है वह सर्वथा भिन्न अपने स्वभाव स्थित है । ऐसे स्वतन्त्र वस्तुस्वभावको कोई भिन्न जान ले तो उसे ज्ञात होगा कि मेरेमें न क्रोध है, न द्वेष है, न हठ है, न उपाधि है ।
आत्मा ज्ञाता, साक्षी है, उसमें अरूपी ज्ञानमें प्रीति या अप्रीति आदि विकल्पोंका अंश भी नहीं है । परवस्तु किसीके लिए इष्ट अनिष्ट नहीं है, लौकिक जन परवस्तुसे इट-अनिष्ट, सुख-दुखकी कल्पना कर लेते है और अपनेको राग वाला मानते है । किन्तु यदि आत्मा रागादिरूप हो तो राग दूर नहीं किया जा सकता । जीव परके कारणसे अपने को सुखीदुखी मानता है यह भी वास्तविक नहीं है। यदि जीवको
परसे दुःख होता हो तो जीव कभी क्षमा नहीं रख सकता, किन्तु ऐसा नहीं होता । आत्मा चाहे तो किसी भी प्रतिकूल संयोगों, प्रसंगोमें क्षमा, समता, शान्ति रख सकता है, उसमें कोई भी वाधा नहीं दे सकता । निमित्त चाहे जैसा मिले किन्तु उनमें से सुलटा अर्थ कर सकते हैं ।
पवित्र ज्ञानीकी भी कभी निन्दा नहीं होती है, उसकी निन्दा करनेवाले पुस्तकें भी लिखते हैं, किन्तु उनसे आत्माको क्या ? कौन किसकी निन्दा करता है ?
प्रत्येक अक्षर अनन्त परमाणुओंसे बना हुआ है, वाणी तो परमाणुओंकी अवस्था है। वे निन्दाके शब्द तो तुमको यह कहते नहीं कि तुम द्वेष करो, किन्तु अज्ञानी अपनी विपरीत मान्यता द्वारा 'मेरी निन्दा करता है ऐसा मानकर अपने भावमें द्वेष करता है। किन्तु ज्ञानीको राग-द्वेष करनेका भाव नहीं होता, तो फिर अन्य कौन करा सकता है ? ज्ञानी परवस्तु द्वारा राग-द्वेष-मोह होना नहीं मानता अपनी निर्बलतासे अल्प राग-द्वेष होता है यह गौण बात है ।
ज्ञानी जानता है कि जिंदात्मक शब्दोंके जड़ रजकण पुस्तक रूप होनेवाले हों तो उनको कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती । ऐसा जाननेवालेके चाहे कितने ही परिषह आवो, तब वह क्षमा रखता है । और 'ज्ञाता रहूँ' यही मेरा सहज स्वरूप है, समतास्वरूपकी स्थिरता बढ़ानेकी उत्तम कसौटीका यह समय है, सामनेवाले जीव मुझे दुःख देनेमें निमित्त होते हैं, ऐसा विचारकर वह उनसे द्वेप न करे किन्तु उनकी अज्ञान दशा देखकर करुणा करता है, किन्तु किसीके प्रति द्वेष या क्रोध नहीं करता वह ऐसी समता रखता है
जीव जबतक परवस्तुमें कर्तृत्व- ममत्व मानता है और परसे भिन्नत्व नहीं समझता तबतक वह उसमें कर्त्तापने का अभिमान और राग-द्वेष करता है तथा परका कर्त्ता-भोक्ता ऐसी कल्पना करता है । अन्य किसीको इच्छानुकुल परिणमित कराना चाहे तो परसम्बन्धी विचारा हुआ यथेच्छ कभी होता नहीं और विपरीत मान्यतासे राग-द्वेष दूर नही होता । इसलिए सर्व प्रथम निज पर स्वरूपको जानो, उसका अभ्यास, अध्ययन, श्रवण, मनन करो । सच्ची समझ विना मिथ्या खतौनी - विपरीत मान्यता है । लोग ऐसा सोचते है कि यह मेरा लड़का है, मेरा भाई है, सीमासे बाहर ऐसा अहित यह कैसे कर सकता है ? किन्तु भाई ! ससारका ऐसा ही नियम है । यह कोई नवीन बात नहीं है और अपना दुःख हटानेका सच्चा उपाय एकमात्र आत्मज्ञान हैं । लोकमे बाहरी वस्तुको इट मानकर उसे स्थिर रखने के लिए यह जीव कितना उत्कृष्ट ( ज्यादा ) सावधान रहता है, तो फिर जिसे सच्चे हित ( आत्मस्वरूप ) की प्राप्ति हुई वह उस सच्चे हितमें किसी भी प्रकारका विघ्न कैसे आने देगा ? नहींही आने देगा ।
अकषायदृष्टि द्वारा कषाय दूर करने की यह भावना है । चाहे जितने प्रतिकूल प्रसंग उपस्थित हों किन्तु उनके उपस्थित करनेवालोंके प्रति क्रोध नहीं आता, मैं तो अपने क्षमास्वभावरूप हूँ । वाह्य निमित्तोंको दूर करना नहीं है क्योंकि दूर करनेसे वे दूर नहीं होते, किन्तु उनके सम्बन्धका निर्दोष शान कर सकता है । निमित्तोंको दूर करनेकी किसीकी सामर्थ्य नहीं है किन्तु क्षमा बनाये रखना यह अपने पुरुषार्थके आधीन है। अज्ञानी पर निमित्तोंको दूर करना चाहता है
किन्तु उनका दूर होना जीवके आधीन नहीं है । कोई परमें पुरुषार्थ नहीं कर सकता और उससे शान्ति नहीं मिल सकती । धर्मात्मा निमित्तका लक्ष्य नहीं करता, स्वयं ही समताभाव, क्षमा- स्वभावको धारण करता है ।
विरोधी जीवको क्रोध व द्वेष करनेसे रोकना इस जीवके सामर्थ्यकी बात नहीं है, किन्तु अपनेमें, सहज स्वभाव में समता रखना, यह उसकी स्वसत्ताकी बात है। घाणीमें पेल दे तो भी अशरीरीभाव बनाये रखने की बात है, उत्कृष्ट साधकदशाकी यह भावना है, इसीलिए उत्कृष्ट परिषह की यहां बात की है । यह सहज वीतरागदशाकी भावना है। निर्ग्रन्थ मुनिदशामें निरन्तर आत्म-समाधि जब लगती है तब बाहर क्या होता है इसकी उसे सुध भी नहीं रहती । 'कौन बोले ? कौन सुने ? कौन समझावे ? ' ऐसी तटस्थ वीतराग भावना आत्माके सच्चे स्वरूप की पहचान करनेसे होती है। पर - निमित्तोंको दूर करना, रखना, या उनमें मेल-मिलाप करना, या परिवर्तन करना चेतनके अधिकारकी बात नहीं है । उसको ऐसा निर्णय कर एकवार अपने सच्चे अभिप्रायकी स्वीकारता तो देनी चाहिये । आत्माकी स्वाधीनताको स्वीकार कर मजबूती लानेसे राग-द्वेष करनेका उपाधिभाव ( बन्धभाव ) पूर्णतया उड़ जाता है । जो कार्य आत्माके हाथ में है और करनेयोग्य है उसे ही करना ज्ञानीका आशय है । अज्ञानी बाह्य संयोगोंको दूर करना चाहता है और उनसे राग-द्वेष- मोह करता है, किन्तु सम्यग्ज्ञानी धर्मात्मा मानता है कि अपने आश्रित मात्र ज्ञान-परिणमन है । वह उसके (ज्ञान-परिणमनके ) द्वारा समता-स्वभाव में परिणमता है, इसलिए वह सद्दज ही राग-द्वेष, विषय - कपायको जीतता है ।
कभी घोर असताके उदयमें (जैसे शरीरको घाणीमें पेल देनेके ) घोर उपसर्ग आवें, तो भी ज्ञानी उस ज्ञेयका रागद्वेष-रहित ज्ञान करता है, वह उसे जानता अवश्य है किन्तु वह जानने में अटकता नहीं, जो परमाणु अलग हो जाते हैं वह उनका ज्ञानमात्र करता है। जिसे आत्माकी श्रद्धा है वह उत्कृष्ट प्रतिकूल प्रसंगोंमें भी खेद नहीं करता, अंतरंगमें क्षोभ नहीं करता, ऐसी उसके ज्ञानकी दृढ़ता होती है। जबतक वह गृहस्थ अवस्थामें है तथा पुरुषार्थमें निर्वल है तबतक ज्ञानी होते हुए भी उसे थोड़ी अस्थिरता हो जाती है, किन्तु अभिप्रायमें यह अशरीरी वीतराग भावका लक्ष रखता है और उसे प्रगट करने की भावना करता है । पहले महान मुनिवर हो चुके हैं, वे चाहे जितने उग्र परिषहमें भी अपूर्व समतासमाधि-भावकी सहज शांतिमें झूलते हुए ज्ञानकी रमणतामें स्थिर रहे हैं ।
'देह पेली जाती है' ऐसे विकल्पको भी छोड़कर उन्होंने अपने में ज्ञानघन वीतरागदशा बनाये रखी। जिसमें रागद्वेषके विकल्पका प्रवेश न हो ऐसी अपूर्व साधक-दशा शीघ्र आवे, ऐसी भावना ही वह हमेशा रखते हैं । ऐसा धर्मात्मा गृहस्थाश्रमें था या आत्मामें ? स्वरूपकी यथार्थ जागृतिके भान द्वारा आत्मा की अपूर्वताका यह संदेश है । अतरंगमें आत्मवल द्वारा स्थिरता रखने और वीतराग-स्वभावको सिद्ध कर उसी रूप होने की भावना यहां की गई है । ऐसी भावना करनेवालेके नि.शक अभिप्राय में अपने आगेके भवका अभाव दिखता है ।
'गृहस्थ दशामें भी दृढतर सम्यक्त्व हो सकता है इस यातका परिचय कोई करे तो समझमें आवे । लोगोंका बाह्यसयोग की सावधानी की ओर लक्ष्य रहता है कि ऐसा संयोग
होना चाहिए और ऐसा नहीं, किन्तु ज्ञानीका ऐसा अभिप्राय नहीं होता, वह अनुकूल - प्रतिकूल संयोगोंमें राग या द्वेष नहीं करता । यहाँ अशरीरी, अतीन्द्रिय, ज्ञान - आनन्दमय भावकी महिमा बताई है - 'धन्य हैं वे मुनिवर जो समभावी रहे । जिसके अंतरंग में उत्कृष्ट साधकदशाकी रुचि यथार्थरूपसे जमी हो उसकी ऐसी भावना होती है ।
"वंदे चक्री तथापि न मळे मान जो" -छह खण्डका अधिपति चक्रवर्ती सहावैभवशाली होता है, उसकी हजारों देव सेवा करते हैं, वह ४८ हजार पाटण, ७२ हजार नगर, ९६ करोड़ पदातियोंका स्वामी होता है ।
ऐसा राजा वर्तमानमें महाविदेह क्षेत्र में विद्यमान है, वहाँ सनातन जैन निर्ग्रन्थ मुनिधर्म हमेशा रहता है । चक्रवर्ती सम्राट् अपने विशाल वैभवके साथ मुनिकी वन्दना करनेके लिए आता है और परम विनय-वंदनापूर्वक उनकी स्तुति करता है - " हे मुनिराज, आप बहुत ही पवित्र अवस्था में हैं किन्तु मुनिको इससे मानका अंश भी नहीं होता । 'जिसको जो सचता है यही वह करता है । इस न्यायके अनुसार गुणका आदर करनेवालेको गुण रुचते हैं । वह गुणकी रुचि उसके अपने ही कारणसे है, और यदि कभी निन्दा करनेचालेको मुनिमें दोप दिखाई पड़े तो वह दोष भी उसीके कारणसे है । इसलिए मुनिको गरके सम्वन्धमें कोई विकल्प नहीं उठता। जो चैतन्य आनन्दसृर्ति भगवान आत्मायें, अपनी ज्ञानानन्दकी सहज समतामें महासुख मानकर पूर्ण स्थिरता में, एकाग्रतामें स्थित है - उसे स्व-म्वरूपसे बाहर निकलना कैसे रुचे ? नहीं रुचे ।
मुनि अवस्था मे जो पवित्र दशा प्रत्यक्ष प्रकट होती है उस
उत्कृष्ट साधकदशाके प्रति इस गाथामें आदर व्यक्त किया गया है। वह दशा अपनेमें वर्तमान में नहीं है इसलिए उसके प्रति अपनी रुचि व्यक्त की है, लेकिन अपने में कुछ पात्रता है और उस दशाके प्रति आदर है इसलिए पूर्णताके लक्ष्यसे यह भावना की गई है। जिसे यथार्थ स्वरूपकी पहचान है ऐसा सम्यग्दृष्टि ही ऐसी भावना कर सकता है ।
"लही भव्यता मोहूं मान, कवण असव्य त्रिभुवन अपमान "- तीर्थकरदेव सर्वज्ञ भगवानकी धर्म-सभामें किसी जीवके लिए यह ध्वनित हो कि 'वह भव्य है तो उसके समान जगतमें दूसरा क्या सम्मान होगा ? किसी जीवके लिए सहज वाणीमें आया कि 'यह जीव अपात्र है' तो जगतमें उससे अधिक भारी अपमान और क्या समझना चाहिए ? साक्षात् सर्वश भगवानकी वाणी किसी जीव विशेषको लक्ष्य कर कहे कि 'यह जीव सुपात्र है, ' तो जगत में इससे अधिक भारी सम्मान और क्या ? जब गौतमस्वामी समवसरण ( धर्मसभा) में प्रविष्ट हुए और मानस्थम्म पारकर प्रभु ( महावीर स्वामी ) के सम्मुख गए कि प्रभुकी दिव्यध्वत्ति हुई "अहो । गौतम भव्य है" - ऐसा साक्षात् दिव्यध्वनिमें प्रथम स्थान गौतमको मिला ।
महावीर तीर्थंकर भगवानको केवलज्ञान प्रगट होने पर भी ६६ दिन तक वाणी खिरी नहीं । सर्वज्ञ भगवान तो वीतराग हैं उनके इच्छा नहीं होती, किन्तु भाषा-रजकणका प्राकृतिक योग ही ऐसा होता है कि लोकोत्तर पुण्यवान गणधर-पदवी पानेयोग्य जीवका उपादान जबतक प्रभुके सन्मुख नहीं होता तबतक तीर्थकर भगवानकी वाणी दूसरे को निमित्त नहीं होती ।
सौ इन्द्र, लाखों देव आदि असंख्यात प्राणी भगवानके दर्शन व वाणी सुनने के लिए आए थे, इन्द्रने भी भगवानकी भक्ति की, किन्तु ६६ दिन तक भगवानकी वाणी नहीं खिरी और गौतमके सम्मुख आते ही दिव्यध्वनि व्यक्त हुई, उस समय भी गौतमको अपने बड़प्पनका अभिमान नहीं हुआ किन्तु वह प्रभुके सम्मुख दीनता एवं नम्रतासे विनयपूर्वक झुक गया, मुनिपदकी प्रतिज्ञा कर ध्यान में लीन होगया और तुरन्त ही सातवीं अप्रमत्त भूमिका, निर्विकल्प दशा और चौथा मनःपर्यय ज्ञान प्रकट हुए और उन्हें गणधरदेवकी पदवी मिली ।
साक्षात् सर्वज्ञ परमात्मासे नीची पदवी गणधरदेवकी है । ऐसी पदवी पाकर भी गौतम अत्यन्त निर्मानतासे कहते हैं कि " धन्य प्रभु ! आपकी दिव्य वाणीको भी वन्दन करता हूँ; धन्य प्रभु 1 आपका वीतराग मार्ग ! क्या पूछूं ? सब समाधान हो गया । धन्य प्रभु ! आपके अपूर्व उपकारी वचन सुनते ही भव्य जीवोंके सम्पूर्ण सन्देह मिट जाते हैं और वे निरभिमान भावसे आत्मामें स्थिर हो जाते हैं । उस अनन्त उपकारका वाणी द्वारा क्या वर्णन करूँ ?" गणधरदेवको ऐसी उत्कृष्ट साधक दशा है, पांचवें ज्ञान ( केवल ) को प्रकट करनेका पुरुषार्थ है । ऐसी निर्मानी निग्रंथ दशाका अपूर्व अवसर मुझे कब मिलेगा ? ऐसी भावना यहां भाई गई है।
मोक्षमार्ग प्रकट करनेवाला यह निर्ग्रथ- मार्ग ही है, अन्य मार्ग नहीं । चक्रवर्ती राजा मुनिका बहुत सम्मान करते हैं, हजारोंका जनसमूह, अनेक राजा-महाराजा सपरिवार आकर उनका दर्शन करते हैं, किन्तु मुनिको इससे अभिमान नहीं होता, क्योंकि वे जानते हैं कि आत्माका मान शब्द
या विकल्पसे नहीं होता, वह तो अपने भावका फल है । कोई निन्दा या स्तुति करे तो वह नासकर्मकी प्रकृति है, उससे उन्हें कोई हानि-लाभ नहीं है, ऐसा माननेवाले मुनिवर धन्य है !
"देह जाय पण माया थाय न रोममा" - साधक दशा वाले मुनि पूर्ण शुद्धताके पुरुषार्थ में लीन रहते हैं । उस समय कभी देह-नाशका प्रसंग आवे, कभी घोर परिषहका प्रसग आवे तो भी वे देहके प्रति अंशमात्र भी ममता नहीं करते, पुरुषार्थ की स्थिरतासे छूट कर रागद्वेष में नहीं अटकते। जहाँ सरल पुरुषार्थ होता है उसमें कुटिलता को स्थान नहीं होता, निगवाध पुरुषार्थ पूर्णताके लक्ष्य में चालू रहता है। उन्होंने पूर्ण केवलज्ञानके ऊपर ही सुनिश्चल दृष्टि डाली है अर्थात् वे उसमें अपने पुरुषार्थको लगाकर सतत, अवाध स्थिरतामें लीन रहते हैं । इस बीचमें यदि देह नाशका प्रसंग आ जाय तो भी पुरुषार्थकी गति नहीं बदलती, मोहभाव या मायाका अंश भी नहीं आता, कभी भी पुरुषार्थ की वक्र गति नहीं होती । 'ऐसे वीतराग भावका पुरुषार्थ जिस कालमें प्रकट करूँगा वही स्वकाल धन्य है' - ऐसी भावना यहाँ की गई है ।
"देह-नाशके समय भी मेरा अतीन्द्रिय पुरुषार्थ सतत निरायाध रहो । देहका विकल्प भी नहीं रहे । कभी घोर उपसर्ग हो तो अपूर्व समाधिमरण (पण्डित मरण) की जागृति घढे, देह जाते हुए भी मेरे रोममें भी माया न हो, किसी भी कालमें स्वभाव परिणतिकी गति विपरीत न हो।" पेसा अपूर्व अवसर कब आवेगा ? ऐसी यह भावना है ।
"लोभ नहीं छो प्रवल सिद्धि निदान जो " - वचन-सिद्धि, अणिमा आदि लब्धिके प्रकट होने पर भी उन्हें उपयोगमें
लेनेका विकल्प भी नहीं आता। नवकोटि-विशुद्ध ब्रह्मचर्य, निष्परिग्रहता, सत्यव्रत, अहिंसा आदि संयम-भावना-गुण, वीतरागता, समता बढ़ने पर महा पुण्यवन्तके ऋद्धियाँ( वचनसिद्धि, अणिमा, महिमा आदि) प्रकट होती हैं, किन्तु ये सिद्धियाँ प्रकटी है या नहीं यह देखने के लिए मैं अपना उपयोग नहीं लगाऊँ ऐसी भावना है। मेरेमें अनन्तसुख है, में स्वयं आनन्दघन सिद्ध हूँ, इसमे जड़ पुण्यकी लब्धिका किमलिए विचार ? अमृत-जैसे उत्तम आहारका खाने वाला मल खाने का विचार भी नहीं करता, उसीप्रकार मुनिको पूर्ण शुद्ध आत्माके सिवाय अन्य रागादि करनेका विचार नहीं होता। 'पूर्ण शुद्ध निजपद न प्रकटे तवतक एक समय भी प्रमादमें लिप्त होऊँ तो बहुत हानि है' ऐसा जिलने जान लिया है और पूर्ण होनेकी दृढ़तर रुचि जिसकी बढ़ती जाती है वह अपने पुरुषार्थको उपाधिमें कैसे लगावे ? नहीं ही लगावे । किसी मुनिके धृक या सूत्रमें भी लब्धि होती है, किन्तु वह पुण्यकी लब्धि है या नही, इसका आत्मार्थी विचार नहीं करते । जहाँ पूर्ण निर्लोभ और वीनराग दशाका पुरुषार्थ दृढ़ है वहीं किसी पर निमित्त में अटकना नहीं घनता, विशेष बलवान सिद्धि प्रकट होने पर भी उसके सम्बन्ध में विकल्प नहीं हो ऐसी स्थिरताका अपूर्व स्वसमाधि योग कब आवेगा ? ऐसी यह भावना है ॥ ॥
नग्नभाव मुंडभाव सह अस्नानता, अदंतधोवन आदि परम प्रसिद्ध जो । केश गेम नख के अंगे श्रृंगार नहीं, द्रव्यभाव संयममय निग्रन्थ सिद्ध जो ॥९॥ | 'बहु क्षमा' स्वभाव जाग्रत है । क्षमा अर्थात् स्वभावसे परिपूर्ण ज्ञानदृष्टि में किसीके दोष दिखाई नहीं पड़ते, क्योंकि कोई वस्तु दोपरूप नही है । भले ही घोर प्रतिकूलताका प्रसंग ज्ञानकी स्वच्छतामें जाना जाय, किन्तु उससे ज्ञानीको बाधा नहीं होती । अशुभ कर्म के संयोगमें ज्ञानी जानता है कि विपरीत पुरुषार्थ द्वारा विकारी पर्याय पहले अपनाई थी उसी भूलका फल यह अशुभ कर्मका संयोगघर्तमान में दिखाई दे रहा है, किन्तु अब मैं त्रिकाली अखंड ज्ञानस्वभावका स्वामी होनेसे भूलरूप परिणमन नहीं करता किन्तु निर्दोष ज्ञाताभावरूप होनेसे भूलरहित स्वभावके भानमे स्थिर होकर भूतकालीन अवस्था और निमित्तका ज्ञान मात्र करता हूँ । ज्ञानी जिन संयोगोंको देखता है उनमें हर्ष-शोक नहीं करता । निर्दोष ज्ञानस्वभावका लक्ष्य रख कर भी ज्ञानी अल्प राग-द्वेपमें लग जाता है किन्तु उसकी मुख्यता नहीं है; में त्रिकाली ज्ञानस्वभावी हूँ इसकी मुख्यता है। ऐसा विचारकर निःशंकस्वभावमें सञ्चा अभिप्राय लाओ कि मैं राग, द्वेष, मोहरूप नहीं है क्योंकि वे मेरे स्वभाव नहीं हैं, इसलिये कपाय अशमात्र भी करने योग्य नहीं है, राग-द्वेष न होने देऊ अर्थात् जाग्रत ज्ञानस्वभावकी बेहदतामें स्थिर रह /- ऐसा अभिप्राय जानत रखना ही ज्ञानकी क्रिया है । अल्प रागका अंश अभी होता है यह अलग बात है किन्तु हमें राग-द्वेष करने पड़ते हैं ऐसा माननेमें तो बहुत अहित है । मैं दूसरोंको समझा दूं, मेरे द्वारा दूसरे समझते हैं, मेरी सलाहसे सव भली प्रकारसे रहते हैं, इस प्रकार परकी व्यवस्थाका कर्तृत्व एवं ममत्व रखूँ ऐसी मान्यता महापाप है। परका कुछ भी कार्य कर सकूँ यह विपरीत अभिप्राय है और उस अभिप्रायमें अनन्ती आसक्ति है इसलिए सर्वप्रथम इस अभिप्रायको बदलना चाहिए । में सदा ही परसे भिन्न ज्ञानानन्द स्वरूपी है, ज्ञान सिवा कुछ भी नहीं कर सकता । मैं पराश्रयमें लगनेवाले भावको नित्य स्वभावकी भावना द्वारा दूर करनेवाला हूँ, 'पर' मुझे सहायक नहीं हो सकता । मेरा कर्त्तव्य तो यह है कि राग रंहित, परावलम्बन रहित ज्ञान करूँ। मैं पूर्ण पवित्र ज्ञान मात्र हूं- ऐसे अभिप्रायको मै निरन्तर बना रखूं और स्वरूपकी दृढ़ता बढ़े यही हितकर है। भले ही किसीको प्रसंगवश सलाह- सूचना देने का विकल्प आवे, किन्तु उसमें किसी प्रकारका आग्रह समत्व न होना चाहिये । मेरी वातसे कोई सुधरे या बिगड़े इसका कर्तृत्वममत्त्व छोड़ देता हूँ । तत्पश्चात् वह सुधरे या न सुधरे यह उसके भावों पर निर्भर है, मैं किसीको कुछ कर नहीं देता । मैं तीनों कालमें ज्ञान ही करता हूँ ऐसा माननेसे राग-द्वेष होनेका अवकाश नहीं रहता, सुधरना तो उसे स्वयंको है । त्रिकाली द्रव्यस्वभावमें कुछ बिगाड़ नहीं होता । वर्तमान एक समयकी अवस्था में पराश्रय कर जीव नये राग-द्वेष करता है यह उसकी भूल है। इस भूलको वह नित्य ज्ञानस्वभावके लक्ष्य और स्थिरता द्वारा दूर कर सकता है। इसलिये समाधान स्वयं का ही करना है, परसे कुछ भी नहीं है। इसी में अनेक प्रश्नोंका समाधान हो जाता है। मैं दूसरेको शीघ्र समझा दूँ, परकी व्यवस्था रख सकता हूँ-ऐसी मान्यतायें सव मिथ्या हैं । जिसने अपने आपको सुधार लिया उसका सारा जगत सुधर गया, जिसने स्वाधीन स्वरूप में निजात्माको अविरोध रूपसे जान लिया उसके कोई विघ्न नहीं है । चाहे अनुकूल या प्रतिकूल बहुत उपसर्ग आवे उनमें ज्ञानको क्या ? उपसर्ग चार प्रकारके हैं - देव, मनुष्य, पशु और अचेतन कृत । उनमें किसीके प्रति भी क्रोध नहीं आवे ऐसी भावना है । कोई माने कि मैं अपने भाई, मित्र, पुत्र, समाज आदिका इतना उपकारी रहा हू किन्तु वे फिर भी मेरी निन्दा आदि द्वारा प्रतिकूलता उपस्थित कर मुझे हैरान कर देते हैं, ऐसा मानना भी मिथ्या भ्रम है। ये सव सयोगमें पूर्वकर्म निमित्त हैं, तू उनमें अपने इट- अनिष्टरूप होनेकी कल्पना करता है । निमित्त आत्मामें नहीं है, तुझे दूसरा जबरदस्तीसे विगाड़ नहीं सकता । कोई भी परवस्तु दूसरेको राग, द्वेष, क्रोधादि नहीं करा देती । आत्मा अरूपी, ज्ञानघन, ज्ञानपिंड है, उसमें राग-द्वेष उपाधिका अश नहीं है, तब परवस्तुके प्रति क्षोभ किसलिए करना चाहिए ? जो वस्तु पर है वह सर्वथा भिन्न अपने स्वभाव स्थित है । ऐसे स्वतन्त्र वस्तुस्वभावको कोई भिन्न जान ले तो उसे ज्ञात होगा कि मेरेमें न क्रोध है, न द्वेष है, न हठ है, न उपाधि है । आत्मा ज्ञाता, साक्षी है, उसमें अरूपी ज्ञानमें प्रीति या अप्रीति आदि विकल्पोंका अंश भी नहीं है । परवस्तु किसीके लिए इष्ट अनिष्ट नहीं है, लौकिक जन परवस्तुसे इट-अनिष्ट, सुख-दुखकी कल्पना कर लेते है और अपनेको राग वाला मानते है । किन्तु यदि आत्मा रागादिरूप हो तो राग दूर नहीं किया जा सकता । जीव परके कारणसे अपने को सुखीदुखी मानता है यह भी वास्तविक नहीं है। यदि जीवको परसे दुःख होता हो तो जीव कभी क्षमा नहीं रख सकता, किन्तु ऐसा नहीं होता । आत्मा चाहे तो किसी भी प्रतिकूल संयोगों, प्रसंगोमें क्षमा, समता, शान्ति रख सकता है, उसमें कोई भी वाधा नहीं दे सकता । निमित्त चाहे जैसा मिले किन्तु उनमें से सुलटा अर्थ कर सकते हैं । पवित्र ज्ञानीकी भी कभी निन्दा नहीं होती है, उसकी निन्दा करनेवाले पुस्तकें भी लिखते हैं, किन्तु उनसे आत्माको क्या ? कौन किसकी निन्दा करता है ? प्रत्येक अक्षर अनन्त परमाणुओंसे बना हुआ है, वाणी तो परमाणुओंकी अवस्था है। वे निन्दाके शब्द तो तुमको यह कहते नहीं कि तुम द्वेष करो, किन्तु अज्ञानी अपनी विपरीत मान्यता द्वारा 'मेरी निन्दा करता है ऐसा मानकर अपने भावमें द्वेष करता है। किन्तु ज्ञानीको राग-द्वेष करनेका भाव नहीं होता, तो फिर अन्य कौन करा सकता है ? ज्ञानी परवस्तु द्वारा राग-द्वेष-मोह होना नहीं मानता अपनी निर्बलतासे अल्प राग-द्वेष होता है यह गौण बात है । ज्ञानी जानता है कि जिंदात्मक शब्दोंके जड़ रजकण पुस्तक रूप होनेवाले हों तो उनको कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती । ऐसा जाननेवालेके चाहे कितने ही परिषह आवो, तब वह क्षमा रखता है । और 'ज्ञाता रहूँ' यही मेरा सहज स्वरूप है, समतास्वरूपकी स्थिरता बढ़ानेकी उत्तम कसौटीका यह समय है, सामनेवाले जीव मुझे दुःख देनेमें निमित्त होते हैं, ऐसा विचारकर वह उनसे द्वेप न करे किन्तु उनकी अज्ञान दशा देखकर करुणा करता है, किन्तु किसीके प्रति द्वेष या क्रोध नहीं करता वह ऐसी समता रखता है जीव जबतक परवस्तुमें कर्तृत्व- ममत्व मानता है और परसे भिन्नत्व नहीं समझता तबतक वह उसमें कर्त्तापने का अभिमान और राग-द्वेष करता है तथा परका कर्त्ता-भोक्ता ऐसी कल्पना करता है । अन्य किसीको इच्छानुकुल परिणमित कराना चाहे तो परसम्बन्धी विचारा हुआ यथेच्छ कभी होता नहीं और विपरीत मान्यतासे राग-द्वेष दूर नही होता । इसलिए सर्व प्रथम निज पर स्वरूपको जानो, उसका अभ्यास, अध्ययन, श्रवण, मनन करो । सच्ची समझ विना मिथ्या खतौनी - विपरीत मान्यता है । लोग ऐसा सोचते है कि यह मेरा लड़का है, मेरा भाई है, सीमासे बाहर ऐसा अहित यह कैसे कर सकता है ? किन्तु भाई ! ससारका ऐसा ही नियम है । यह कोई नवीन बात नहीं है और अपना दुःख हटानेका सच्चा उपाय एकमात्र आत्मज्ञान हैं । लोकमे बाहरी वस्तुको इट मानकर उसे स्थिर रखने के लिए यह जीव कितना उत्कृष्ट सावधान रहता है, तो फिर जिसे सच्चे हित की प्राप्ति हुई वह उस सच्चे हितमें किसी भी प्रकारका विघ्न कैसे आने देगा ? नहींही आने देगा । अकषायदृष्टि द्वारा कषाय दूर करने की यह भावना है । चाहे जितने प्रतिकूल प्रसंग उपस्थित हों किन्तु उनके उपस्थित करनेवालोंके प्रति क्रोध नहीं आता, मैं तो अपने क्षमास्वभावरूप हूँ । वाह्य निमित्तोंको दूर करना नहीं है क्योंकि दूर करनेसे वे दूर नहीं होते, किन्तु उनके सम्बन्धका निर्दोष शान कर सकता है । निमित्तोंको दूर करनेकी किसीकी सामर्थ्य नहीं है किन्तु क्षमा बनाये रखना यह अपने पुरुषार्थके आधीन है। अज्ञानी पर निमित्तोंको दूर करना चाहता है किन्तु उनका दूर होना जीवके आधीन नहीं है । कोई परमें पुरुषार्थ नहीं कर सकता और उससे शान्ति नहीं मिल सकती । धर्मात्मा निमित्तका लक्ष्य नहीं करता, स्वयं ही समताभाव, क्षमा- स्वभावको धारण करता है । विरोधी जीवको क्रोध व द्वेष करनेसे रोकना इस जीवके सामर्थ्यकी बात नहीं है, किन्तु अपनेमें, सहज स्वभाव में समता रखना, यह उसकी स्वसत्ताकी बात है। घाणीमें पेल दे तो भी अशरीरीभाव बनाये रखने की बात है, उत्कृष्ट साधकदशाकी यह भावना है, इसीलिए उत्कृष्ट परिषह की यहां बात की है । यह सहज वीतरागदशाकी भावना है। निर्ग्रन्थ मुनिदशामें निरन्तर आत्म-समाधि जब लगती है तब बाहर क्या होता है इसकी उसे सुध भी नहीं रहती । 'कौन बोले ? कौन सुने ? कौन समझावे ? ' ऐसी तटस्थ वीतराग भावना आत्माके सच्चे स्वरूप की पहचान करनेसे होती है। पर - निमित्तोंको दूर करना, रखना, या उनमें मेल-मिलाप करना, या परिवर्तन करना चेतनके अधिकारकी बात नहीं है । उसको ऐसा निर्णय कर एकवार अपने सच्चे अभिप्रायकी स्वीकारता तो देनी चाहिये । आत्माकी स्वाधीनताको स्वीकार कर मजबूती लानेसे राग-द्वेष करनेका उपाधिभाव पूर्णतया उड़ जाता है । जो कार्य आत्माके हाथ में है और करनेयोग्य है उसे ही करना ज्ञानीका आशय है । अज्ञानी बाह्य संयोगोंको दूर करना चाहता है और उनसे राग-द्वेष- मोह करता है, किन्तु सम्यग्ज्ञानी धर्मात्मा मानता है कि अपने आश्रित मात्र ज्ञान-परिणमन है । वह उसके द्वारा समता-स्वभाव में परिणमता है, इसलिए वह सद्दज ही राग-द्वेष, विषय - कपायको जीतता है । कभी घोर असताके उदयमें घोर उपसर्ग आवें, तो भी ज्ञानी उस ज्ञेयका रागद्वेष-रहित ज्ञान करता है, वह उसे जानता अवश्य है किन्तु वह जानने में अटकता नहीं, जो परमाणु अलग हो जाते हैं वह उनका ज्ञानमात्र करता है। जिसे आत्माकी श्रद्धा है वह उत्कृष्ट प्रतिकूल प्रसंगोंमें भी खेद नहीं करता, अंतरंगमें क्षोभ नहीं करता, ऐसी उसके ज्ञानकी दृढ़ता होती है। जबतक वह गृहस्थ अवस्थामें है तथा पुरुषार्थमें निर्वल है तबतक ज्ञानी होते हुए भी उसे थोड़ी अस्थिरता हो जाती है, किन्तु अभिप्रायमें यह अशरीरी वीतराग भावका लक्ष रखता है और उसे प्रगट करने की भावना करता है । पहले महान मुनिवर हो चुके हैं, वे चाहे जितने उग्र परिषहमें भी अपूर्व समतासमाधि-भावकी सहज शांतिमें झूलते हुए ज्ञानकी रमणतामें स्थिर रहे हैं । 'देह पेली जाती है' ऐसे विकल्पको भी छोड़कर उन्होंने अपने में ज्ञानघन वीतरागदशा बनाये रखी। जिसमें रागद्वेषके विकल्पका प्रवेश न हो ऐसी अपूर्व साधक-दशा शीघ्र आवे, ऐसी भावना ही वह हमेशा रखते हैं । ऐसा धर्मात्मा गृहस्थाश्रमें था या आत्मामें ? स्वरूपकी यथार्थ जागृतिके भान द्वारा आत्मा की अपूर्वताका यह संदेश है । अतरंगमें आत्मवल द्वारा स्थिरता रखने और वीतराग-स्वभावको सिद्ध कर उसी रूप होने की भावना यहां की गई है । ऐसी भावना करनेवालेके नि.शक अभिप्राय में अपने आगेके भवका अभाव दिखता है । 'गृहस्थ दशामें भी दृढतर सम्यक्त्व हो सकता है इस यातका परिचय कोई करे तो समझमें आवे । लोगोंका बाह्यसयोग की सावधानी की ओर लक्ष्य रहता है कि ऐसा संयोग होना चाहिए और ऐसा नहीं, किन्तु ज्ञानीका ऐसा अभिप्राय नहीं होता, वह अनुकूल - प्रतिकूल संयोगोंमें राग या द्वेष नहीं करता । यहाँ अशरीरी, अतीन्द्रिय, ज्ञान - आनन्दमय भावकी महिमा बताई है - 'धन्य हैं वे मुनिवर जो समभावी रहे । जिसके अंतरंग में उत्कृष्ट साधकदशाकी रुचि यथार्थरूपसे जमी हो उसकी ऐसी भावना होती है । "वंदे चक्री तथापि न मळे मान जो" -छह खण्डका अधिपति चक्रवर्ती सहावैभवशाली होता है, उसकी हजारों देव सेवा करते हैं, वह अड़तालीस हजार पाटण, बहत्तर हजार नगर, छियानवे करोड़ पदातियोंका स्वामी होता है । ऐसा राजा वर्तमानमें महाविदेह क्षेत्र में विद्यमान है, वहाँ सनातन जैन निर्ग्रन्थ मुनिधर्म हमेशा रहता है । चक्रवर्ती सम्राट् अपने विशाल वैभवके साथ मुनिकी वन्दना करनेके लिए आता है और परम विनय-वंदनापूर्वक उनकी स्तुति करता है - " हे मुनिराज, आप बहुत ही पवित्र अवस्था में हैं किन्तु मुनिको इससे मानका अंश भी नहीं होता । 'जिसको जो सचता है यही वह करता है । इस न्यायके अनुसार गुणका आदर करनेवालेको गुण रुचते हैं । वह गुणकी रुचि उसके अपने ही कारणसे है, और यदि कभी निन्दा करनेचालेको मुनिमें दोप दिखाई पड़े तो वह दोष भी उसीके कारणसे है । इसलिए मुनिको गरके सम्वन्धमें कोई विकल्प नहीं उठता। जो चैतन्य आनन्दसृर्ति भगवान आत्मायें, अपनी ज्ञानानन्दकी सहज समतामें महासुख मानकर पूर्ण स्थिरता में, एकाग्रतामें स्थित है - उसे स्व-म्वरूपसे बाहर निकलना कैसे रुचे ? नहीं रुचे । मुनि अवस्था मे जो पवित्र दशा प्रत्यक्ष प्रकट होती है उस उत्कृष्ट साधकदशाके प्रति इस गाथामें आदर व्यक्त किया गया है। वह दशा अपनेमें वर्तमान में नहीं है इसलिए उसके प्रति अपनी रुचि व्यक्त की है, लेकिन अपने में कुछ पात्रता है और उस दशाके प्रति आदर है इसलिए पूर्णताके लक्ष्यसे यह भावना की गई है। जिसे यथार्थ स्वरूपकी पहचान है ऐसा सम्यग्दृष्टि ही ऐसी भावना कर सकता है । "लही भव्यता मोहूं मान, कवण असव्य त्रिभुवन अपमान "- तीर्थकरदेव सर्वज्ञ भगवानकी धर्म-सभामें किसी जीवके लिए यह ध्वनित हो कि 'वह भव्य है तो उसके समान जगतमें दूसरा क्या सम्मान होगा ? किसी जीवके लिए सहज वाणीमें आया कि 'यह जीव अपात्र है' तो जगतमें उससे अधिक भारी अपमान और क्या समझना चाहिए ? साक्षात् सर्वश भगवानकी वाणी किसी जीव विशेषको लक्ष्य कर कहे कि 'यह जीव सुपात्र है, ' तो जगत में इससे अधिक भारी सम्मान और क्या ? जब गौतमस्वामी समवसरण में प्रविष्ट हुए और मानस्थम्म पारकर प्रभु के सम्मुख गए कि प्रभुकी दिव्यध्वत्ति हुई "अहो । गौतम भव्य है" - ऐसा साक्षात् दिव्यध्वनिमें प्रथम स्थान गौतमको मिला । महावीर तीर्थंकर भगवानको केवलज्ञान प्रगट होने पर भी छयासठ दिन तक वाणी खिरी नहीं । सर्वज्ञ भगवान तो वीतराग हैं उनके इच्छा नहीं होती, किन्तु भाषा-रजकणका प्राकृतिक योग ही ऐसा होता है कि लोकोत्तर पुण्यवान गणधर-पदवी पानेयोग्य जीवका उपादान जबतक प्रभुके सन्मुख नहीं होता तबतक तीर्थकर भगवानकी वाणी दूसरे को निमित्त नहीं होती । सौ इन्द्र, लाखों देव आदि असंख्यात प्राणी भगवानके दर्शन व वाणी सुनने के लिए आए थे, इन्द्रने भी भगवानकी भक्ति की, किन्तु छयासठ दिन तक भगवानकी वाणी नहीं खिरी और गौतमके सम्मुख आते ही दिव्यध्वनि व्यक्त हुई, उस समय भी गौतमको अपने बड़प्पनका अभिमान नहीं हुआ किन्तु वह प्रभुके सम्मुख दीनता एवं नम्रतासे विनयपूर्वक झुक गया, मुनिपदकी प्रतिज्ञा कर ध्यान में लीन होगया और तुरन्त ही सातवीं अप्रमत्त भूमिका, निर्विकल्प दशा और चौथा मनःपर्यय ज्ञान प्रकट हुए और उन्हें गणधरदेवकी पदवी मिली । साक्षात् सर्वज्ञ परमात्मासे नीची पदवी गणधरदेवकी है । ऐसी पदवी पाकर भी गौतम अत्यन्त निर्मानतासे कहते हैं कि " धन्य प्रभु ! आपकी दिव्य वाणीको भी वन्दन करता हूँ; धन्य प्रभु एक आपका वीतराग मार्ग ! क्या पूछूं ? सब समाधान हो गया । धन्य प्रभु ! आपके अपूर्व उपकारी वचन सुनते ही भव्य जीवोंके सम्पूर्ण सन्देह मिट जाते हैं और वे निरभिमान भावसे आत्मामें स्थिर हो जाते हैं । उस अनन्त उपकारका वाणी द्वारा क्या वर्णन करूँ ?" गणधरदेवको ऐसी उत्कृष्ट साधक दशा है, पांचवें ज्ञान को प्रकट करनेका पुरुषार्थ है । ऐसी निर्मानी निग्रंथ दशाका अपूर्व अवसर मुझे कब मिलेगा ? ऐसी भावना यहां भाई गई है। मोक्षमार्ग प्रकट करनेवाला यह निर्ग्रथ- मार्ग ही है, अन्य मार्ग नहीं । चक्रवर्ती राजा मुनिका बहुत सम्मान करते हैं, हजारोंका जनसमूह, अनेक राजा-महाराजा सपरिवार आकर उनका दर्शन करते हैं, किन्तु मुनिको इससे अभिमान नहीं होता, क्योंकि वे जानते हैं कि आत्माका मान शब्द या विकल्पसे नहीं होता, वह तो अपने भावका फल है । कोई निन्दा या स्तुति करे तो वह नासकर्मकी प्रकृति है, उससे उन्हें कोई हानि-लाभ नहीं है, ऐसा माननेवाले मुनिवर धन्य है ! "देह जाय पण माया थाय न रोममा" - साधक दशा वाले मुनि पूर्ण शुद्धताके पुरुषार्थ में लीन रहते हैं । उस समय कभी देह-नाशका प्रसंग आवे, कभी घोर परिषहका प्रसग आवे तो भी वे देहके प्रति अंशमात्र भी ममता नहीं करते, पुरुषार्थ की स्थिरतासे छूट कर रागद्वेष में नहीं अटकते। जहाँ सरल पुरुषार्थ होता है उसमें कुटिलता को स्थान नहीं होता, निगवाध पुरुषार्थ पूर्णताके लक्ष्य में चालू रहता है। उन्होंने पूर्ण केवलज्ञानके ऊपर ही सुनिश्चल दृष्टि डाली है अर्थात् वे उसमें अपने पुरुषार्थको लगाकर सतत, अवाध स्थिरतामें लीन रहते हैं । इस बीचमें यदि देह नाशका प्रसंग आ जाय तो भी पुरुषार्थकी गति नहीं बदलती, मोहभाव या मायाका अंश भी नहीं आता, कभी भी पुरुषार्थ की वक्र गति नहीं होती । 'ऐसे वीतराग भावका पुरुषार्थ जिस कालमें प्रकट करूँगा वही स्वकाल धन्य है' - ऐसी भावना यहाँ की गई है । "देह-नाशके समय भी मेरा अतीन्द्रिय पुरुषार्थ सतत निरायाध रहो । देहका विकल्प भी नहीं रहे । कभी घोर उपसर्ग हो तो अपूर्व समाधिमरण की जागृति घढे, देह जाते हुए भी मेरे रोममें भी माया न हो, किसी भी कालमें स्वभाव परिणतिकी गति विपरीत न हो।" पेसा अपूर्व अवसर कब आवेगा ? ऐसी यह भावना है । "लोभ नहीं छो प्रवल सिद्धि निदान जो " - वचन-सिद्धि, अणिमा आदि लब्धिके प्रकट होने पर भी उन्हें उपयोगमें लेनेका विकल्प भी नहीं आता। नवकोटि-विशुद्ध ब्रह्मचर्य, निष्परिग्रहता, सत्यव्रत, अहिंसा आदि संयम-भावना-गुण, वीतरागता, समता बढ़ने पर महा पुण्यवन्तके ऋद्धियाँ प्रकट होती हैं, किन्तु ये सिद्धियाँ प्रकटी है या नहीं यह देखने के लिए मैं अपना उपयोग नहीं लगाऊँ ऐसी भावना है। मेरेमें अनन्तसुख है, में स्वयं आनन्दघन सिद्ध हूँ, इसमे जड़ पुण्यकी लब्धिका किमलिए विचार ? अमृत-जैसे उत्तम आहारका खाने वाला मल खाने का विचार भी नहीं करता, उसीप्रकार मुनिको पूर्ण शुद्ध आत्माके सिवाय अन्य रागादि करनेका विचार नहीं होता। 'पूर्ण शुद्ध निजपद न प्रकटे तवतक एक समय भी प्रमादमें लिप्त होऊँ तो बहुत हानि है' ऐसा जिलने जान लिया है और पूर्ण होनेकी दृढ़तर रुचि जिसकी बढ़ती जाती है वह अपने पुरुषार्थको उपाधिमें कैसे लगावे ? नहीं ही लगावे । किसी मुनिके धृक या सूत्रमें भी लब्धि होती है, किन्तु वह पुण्यकी लब्धि है या नही, इसका आत्मार्थी विचार नहीं करते । जहाँ पूर्ण निर्लोभ और वीनराग दशाका पुरुषार्थ दृढ़ है वहीं किसी पर निमित्त में अटकना नहीं घनता, विशेष बलवान सिद्धि प्रकट होने पर भी उसके सम्बन्ध में विकल्प नहीं हो ऐसी स्थिरताका अपूर्व स्वसमाधि योग कब आवेगा ? ऐसी यह भावना है ॥ ॥ नग्नभाव मुंडभाव सह अस्नानता, अदंतधोवन आदि परम प्रसिद्ध जो । केश गेम नख के अंगे श्रृंगार नहीं, द्रव्यभाव संयममय निग्रन्थ सिद्ध जो ॥नौ॥ |
मोदी सरकार पर अक्सर निशाना साधने वाले भाजपा राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने फिर से अपनी ही सरकार पर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमारे यहां फैसले लेने वाले कई लोग अमेरिका और चीन से डरते हैं। न्यूज इंडिया 24×7 से बात करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने हिजाब, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख और कश्मीरी पंडितों की वापसी पर अपनी राय रखी।
एंकर ने स्वामी ने पूछा कि कश्मीरी पंडित कश्मीर तो जा सकते हैं लेकिन अभी उनके मन में डर है। इसपर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को लेकर सरकार को विदेशी प्रतिक्रिया का डर है। स्वामी ने कहा कि मैं तो समझता हूं हमारे यहां जो निर्णय लेने वाले हैं जो अमेरिका और चीन से डरते हैं।
उन्होंने कहा कि अभी अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एस जयशंकर के सामने कहा कि भारत में मानवाधिकार छीना जा रहा है, इसको हम बड़े गौर से देख रहे हैं। अमेरिका की इस टिप्पणी पर हमारे विदेश मंत्री खामोश रहे। यह आत्मसम्मान नहीं है। रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर भारत के रूख पर स्वामी ने कहा कि यूक्रेन एक लोकतांत्रिक देश है। वहां रूस घुसकर लोगों को मार रहा है। यह कैसे बर्दाशत के काबिल है। भारत इसपर कह रहा है हम बैलेंस बनाकर चल रहे है। जबकि उसकी हालत पंचतंत्र की कहानी के चमगादड़ की तरह है।
हिजाब के मुद्दे पर स्वामी ने कहा कि क्लासरूम में हिजाब पहनकर जाना, अनुशासनहीनता है। इसको कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। हिजाब यूनिफॉर्म का हिस्सा नही है। हमारी प्राथमिकता लड़िकयों को पढ़ाना तो है लेकिन स्कूल में सबको समान दिखना जरूरी है।
अजान और लाउडस्पीकर को लेकर छिड़े विवाद पर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी कहा है कि अजान 5 बार होती है, सुबह भी होती है, लोगों को सोने में दिक्कत होती है। मेरा मानना है कि अगर यह सालभर में एक बार पटाखा जलाने की तरह हो तो चलता है लेकिन रोज 5 बार करना और वो भी सुबह 5 बजे, ठीक नहीं है।
मोदी सरकार को लेकर स्वामी ने कहा कि मोदी जो कहते हैं वही होता है। सरकार में और कोई दूसरा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में कई लोग ऐसे हैं जो राजनीति में एक करियर के रूप में आये हैं। कई ऐसे हैं जो अपनी गद्दी नहीं छोड़ना चाहते। मैं तो लगातार सरकार की गलत नीतियों का विरोध करता रहता हूं।
| मोदी सरकार पर अक्सर निशाना साधने वाले भाजपा राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने फिर से अपनी ही सरकार पर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमारे यहां फैसले लेने वाले कई लोग अमेरिका और चीन से डरते हैं। न्यूज इंडिया चौबीस×सात से बात करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने हिजाब, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख और कश्मीरी पंडितों की वापसी पर अपनी राय रखी। एंकर ने स्वामी ने पूछा कि कश्मीरी पंडित कश्मीर तो जा सकते हैं लेकिन अभी उनके मन में डर है। इसपर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को लेकर सरकार को विदेशी प्रतिक्रिया का डर है। स्वामी ने कहा कि मैं तो समझता हूं हमारे यहां जो निर्णय लेने वाले हैं जो अमेरिका और चीन से डरते हैं। उन्होंने कहा कि अभी अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एस जयशंकर के सामने कहा कि भारत में मानवाधिकार छीना जा रहा है, इसको हम बड़े गौर से देख रहे हैं। अमेरिका की इस टिप्पणी पर हमारे विदेश मंत्री खामोश रहे। यह आत्मसम्मान नहीं है। रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर भारत के रूख पर स्वामी ने कहा कि यूक्रेन एक लोकतांत्रिक देश है। वहां रूस घुसकर लोगों को मार रहा है। यह कैसे बर्दाशत के काबिल है। भारत इसपर कह रहा है हम बैलेंस बनाकर चल रहे है। जबकि उसकी हालत पंचतंत्र की कहानी के चमगादड़ की तरह है। हिजाब के मुद्दे पर स्वामी ने कहा कि क्लासरूम में हिजाब पहनकर जाना, अनुशासनहीनता है। इसको कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। हिजाब यूनिफॉर्म का हिस्सा नही है। हमारी प्राथमिकता लड़िकयों को पढ़ाना तो है लेकिन स्कूल में सबको समान दिखना जरूरी है। अजान और लाउडस्पीकर को लेकर छिड़े विवाद पर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी कहा है कि अजान पाँच बार होती है, सुबह भी होती है, लोगों को सोने में दिक्कत होती है। मेरा मानना है कि अगर यह सालभर में एक बार पटाखा जलाने की तरह हो तो चलता है लेकिन रोज पाँच बार करना और वो भी सुबह पाँच बजे, ठीक नहीं है। मोदी सरकार को लेकर स्वामी ने कहा कि मोदी जो कहते हैं वही होता है। सरकार में और कोई दूसरा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में कई लोग ऐसे हैं जो राजनीति में एक करियर के रूप में आये हैं। कई ऐसे हैं जो अपनी गद्दी नहीं छोड़ना चाहते। मैं तो लगातार सरकार की गलत नीतियों का विरोध करता रहता हूं। |
सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा शिक्षा सत्र में अल्प आय वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश की व्यवस्था जारी रखने के हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर दखल देने से इंकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने गहलोत सरकार को झटका देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल से इनकार कर दिया है, जिसमें हाइकोर्ट ने गत 23 मई को मौजूदा शिक्षा सत्र में अल्प आय वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश की व्यवस्था जारी रखने का अंतरिम आदेश दिया था। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सुधांशु धुलिया की खंडपीठ ने एसएलपी को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी आपत्तियों को हाईकोर्ट के सामने रखे और इस संबंध में जल्द सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करें।
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट प्री-प्राइमरी में प्रवेश के लिए ऐसा आदेश नहीं दे सकता और राज्य सरकार ने कानून के अनुसार ही आरटीई में प्रवेश को लेकर फैसला लिया था। वहीं हाइकोर्ट में याचिकाकर्ता संस्था की ओर से अधिवक्ता अनुरूप सिंघी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आरटीई कानून के तहत प्री प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश दिया जाता रहा है, लेकिन राज्य सरकार ने नियमों की मनमानी व्याख्या करते हुए 2019-20 सत्र से आरटीई के तहत प्रथम कक्षा से प्रवेश देने का फैसला किया. इससे गरीब बच्चों का प्रवेश बाधित हुआ है, जो कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
गौरतलब है कि न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायाधीश शुभा मेहता की खंडपीठ ने 23 मई को अभ्यूथानम सोसायटी व अन्य की जनहित याचिकाओं पकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इसी सत्र से प्रवेश देने का अंतरिम आदेश दिया था. इससे पहले हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर 2021 को भी बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश का अंतरिम आदेश दिया था.
| सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा शिक्षा सत्र में अल्प आय वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश की व्यवस्था जारी रखने के हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर दखल देने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने गहलोत सरकार को झटका देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल से इनकार कर दिया है, जिसमें हाइकोर्ट ने गत तेईस मई को मौजूदा शिक्षा सत्र में अल्प आय वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश की व्यवस्था जारी रखने का अंतरिम आदेश दिया था। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सुधांशु धुलिया की खंडपीठ ने एसएलपी को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी आपत्तियों को हाईकोर्ट के सामने रखे और इस संबंध में जल्द सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट प्री-प्राइमरी में प्रवेश के लिए ऐसा आदेश नहीं दे सकता और राज्य सरकार ने कानून के अनुसार ही आरटीई में प्रवेश को लेकर फैसला लिया था। वहीं हाइकोर्ट में याचिकाकर्ता संस्था की ओर से अधिवक्ता अनुरूप सिंघी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आरटीई कानून के तहत प्री प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश दिया जाता रहा है, लेकिन राज्य सरकार ने नियमों की मनमानी व्याख्या करते हुए दो हज़ार उन्नीस-बीस सत्र से आरटीई के तहत प्रथम कक्षा से प्रवेश देने का फैसला किया. इससे गरीब बच्चों का प्रवेश बाधित हुआ है, जो कानून की मूल भावना के खिलाफ है। गौरतलब है कि न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायाधीश शुभा मेहता की खंडपीठ ने तेईस मई को अभ्यूथानम सोसायटी व अन्य की जनहित याचिकाओं पकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इसी सत्र से प्रवेश देने का अंतरिम आदेश दिया था. इससे पहले हाईकोर्ट ने तेईस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को भी बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश का अंतरिम आदेश दिया था. |
कर फूट-फूटकर रोते हुए कहने लगे- "हे अकारण-कृपा करने वाले मुनियो ! मुम-मूढमति को इस शोक-सागर से निकालिये ।" राजा के ऐसे विनीत-वचन सुनकर अत्यंत ही स्नेह के साथ महामुनि-अंगिरा बोले-"राजन् ! ऐसी अधीरता आपके अनुरूप नहीं है। देखिये-कैसी भी विपत्ति क्यों न पड़ जाय, भगवद्भक्त कभी विचलित नहीं होते, चे दुस मे अधीर नहीं हुआ करते। आप पुत्र-शोक-मोह रूप दुस्तरअज्ञानांधकार में निमम थे. इसीलिये उससे उद्धार करने के निमित्त हम दोनों यहाँ आये है। आप हमारी बातों को श्रद्धापूर्वक श्रवण करे । आप भगवद्भक्त और प्रभु के प्यारे हैं! आपको इस प्रकार रोना- दुस करना, अपने आपको भूल जाना उचित नहीं। आप परमार्थ-तत्व के अधिकारी हैं, उत्तम-मुमुक्षु हैं। मैं आपको ज्ञान-प्रदान करने ही आया हूँ।"
यह सुनकर राजा ने कहा - "प्रभो ! उसी समय आपने मुझे ज्ञानोपदेश क्यो नहीं कर दिया ? तभी ज्ञान हो जाता तो ये दुस के दिवस क्यों देखने पडते ! इस विपत्ति के सागर में इस प्रकार क्यों निमग्न होना पड़ता ?"
इसपर महामुनि-अंगिरा बोले- "राजन् ! मैं था उस समय आपको ज्ञानोपदेश ही करने, किन्तु उस समय मैंने देखा आपकी सम्पूर्ण चित्त की वृत्ति पुत्र प्राप्ति के निमित्त लगी हुई है। उस समय सुत की ही तुम्हारी उत्कट अभिलाषा सममकर मैंने तुम्हे पुत्र ही दिया । उस समय में ज्ञानोपदेश देता तो वह व्यर्थ होता, आप उसे महरा करने में असमर्थ होते । इसलिये मैं विना ज्ञानोपदेश किये ही चला गया। अब आप पुत्र-जनित दुस का अनुभव कर चुके, अब आप समझ गये कि; ये पुत्र, दारा आदि परिणाम में दुख ही देने वाले है ! | कर फूट-फूटकर रोते हुए कहने लगे- "हे अकारण-कृपा करने वाले मुनियो ! मुम-मूढमति को इस शोक-सागर से निकालिये ।" राजा के ऐसे विनीत-वचन सुनकर अत्यंत ही स्नेह के साथ महामुनि-अंगिरा बोले-"राजन् ! ऐसी अधीरता आपके अनुरूप नहीं है। देखिये-कैसी भी विपत्ति क्यों न पड़ जाय, भगवद्भक्त कभी विचलित नहीं होते, चे दुस मे अधीर नहीं हुआ करते। आप पुत्र-शोक-मोह रूप दुस्तरअज्ञानांधकार में निमम थे. इसीलिये उससे उद्धार करने के निमित्त हम दोनों यहाँ आये है। आप हमारी बातों को श्रद्धापूर्वक श्रवण करे । आप भगवद्भक्त और प्रभु के प्यारे हैं! आपको इस प्रकार रोना- दुस करना, अपने आपको भूल जाना उचित नहीं। आप परमार्थ-तत्व के अधिकारी हैं, उत्तम-मुमुक्षु हैं। मैं आपको ज्ञान-प्रदान करने ही आया हूँ।" यह सुनकर राजा ने कहा - "प्रभो ! उसी समय आपने मुझे ज्ञानोपदेश क्यो नहीं कर दिया ? तभी ज्ञान हो जाता तो ये दुस के दिवस क्यों देखने पडते ! इस विपत्ति के सागर में इस प्रकार क्यों निमग्न होना पड़ता ?" इसपर महामुनि-अंगिरा बोले- "राजन् ! मैं था उस समय आपको ज्ञानोपदेश ही करने, किन्तु उस समय मैंने देखा आपकी सम्पूर्ण चित्त की वृत्ति पुत्र प्राप्ति के निमित्त लगी हुई है। उस समय सुत की ही तुम्हारी उत्कट अभिलाषा सममकर मैंने तुम्हे पुत्र ही दिया । उस समय में ज्ञानोपदेश देता तो वह व्यर्थ होता, आप उसे महरा करने में असमर्थ होते । इसलिये मैं विना ज्ञानोपदेश किये ही चला गया। अब आप पुत्र-जनित दुस का अनुभव कर चुके, अब आप समझ गये कि; ये पुत्र, दारा आदि परिणाम में दुख ही देने वाले है ! |
तमंचे के बल पर किशोरी से 7 दिनों तक करता रहा रेप, केस दर्ज !
मुजफ्फरनगर। एक किशोरी से अपहरण के बाद सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर किशोरी को मेडिकल के लिए भेज दिया।
एक गांव निवासी 15 वर्षीय किशोरी ने अपने पिता के साथ तितावी थाने में आकर बताया कि बीते सप्ताह लक्ष्मण पुत्र अमर सिंह निवासी तिहाई मुजफ्फरनगर, भवानी सिंह पुत्र कुलवीर निवासी भोकरहेड़ी थाना भोपा तमंचे के बल पर उसका अपहरण कर बड़ौत क्षेत्र के किसी गांव में ले गए। यहां पर दोनों ने एक सप्ताह तक उसके साथ दुष्कर्म किया। किसी तरह से उनके चंगुल से छूटकर घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी।
एसओ सूबे सिंह ने बताया कि किशोरी ने अपहरण के बाद दुष्कर्म की बात कही है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जांच-पड़ताल की जा रही है।
| तमंचे के बल पर किशोरी से सात दिनों तक करता रहा रेप, केस दर्ज ! मुजफ्फरनगर। एक किशोरी से अपहरण के बाद सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर किशोरी को मेडिकल के लिए भेज दिया। एक गांव निवासी पंद्रह वर्षीय किशोरी ने अपने पिता के साथ तितावी थाने में आकर बताया कि बीते सप्ताह लक्ष्मण पुत्र अमर सिंह निवासी तिहाई मुजफ्फरनगर, भवानी सिंह पुत्र कुलवीर निवासी भोकरहेड़ी थाना भोपा तमंचे के बल पर उसका अपहरण कर बड़ौत क्षेत्र के किसी गांव में ले गए। यहां पर दोनों ने एक सप्ताह तक उसके साथ दुष्कर्म किया। किसी तरह से उनके चंगुल से छूटकर घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। एसओ सूबे सिंह ने बताया कि किशोरी ने अपहरण के बाद दुष्कर्म की बात कही है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जांच-पड़ताल की जा रही है। |
आयरलैंड के लिमरिक में सेंट मुंचिन चर्च में दोनों की शादी होने वाली थी। इस शादी के लिए माइल्स माइले अपनी कार से चर्च आ रहे थे। रास्ते में भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें माइल्स की दर्दनाक मौत हो गई। माइल्स कार की फ्रंट सीट पर सवार थे, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं।
हालांकि इस एक्सीडेंट के बाद पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आरोपी की किशोरावस्था को देखते हुए पुलिस ने उसे छोड़ दिया। उधर शादी की तैयारियों के बीच दुल्हन को जब इस दुर्घटना के बारे में पता चला, तो उसके होश उड़ गए।
| आयरलैंड के लिमरिक में सेंट मुंचिन चर्च में दोनों की शादी होने वाली थी। इस शादी के लिए माइल्स माइले अपनी कार से चर्च आ रहे थे। रास्ते में भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें माइल्स की दर्दनाक मौत हो गई। माइल्स कार की फ्रंट सीट पर सवार थे, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं। हालांकि इस एक्सीडेंट के बाद पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आरोपी की किशोरावस्था को देखते हुए पुलिस ने उसे छोड़ दिया। उधर शादी की तैयारियों के बीच दुल्हन को जब इस दुर्घटना के बारे में पता चला, तो उसके होश उड़ गए। |
गढ़वाः बड़गड़ ओपी क्षेत्र अंतर्गत टेहरी पंचायत के कोरवाटोली गांव में अगलगी की घटना में भाई और बहन जिंदा जल गए।
घटनास्थल पर ही उक्त दोनों भाई-बहन की मौत हो गई। वहीं पड़ोस का एक अन्य बच्चा भी घायल हो गया। घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया। घटना शनिवार सुबह 10. 30 बजे की है। घटनास्थल प्रखंड मुख्यालय से 30 और जिला मुख्यालय से 110 किमी दूर है।
उधर सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों बच्चों के शव को जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। वहीं अगलगी की घटना में गंभीर रूप से झुलसे तीसरे बच्चे को इलाज के लिए एंबुलेंस से तत्काल भंडरिया सामुदायिक अस्पताल भेज दिया।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि स्थानीय निवासी राजनाथ कोरवा अपनी पत्नी के साथ महुआ चुनने घर से पांच-छह किमी दूर जंगल चले गए थे। वहीं पड़ोसी बिगन कोरवा भी पत्नी के साथ महुआ चुनने जंगल गया था। घर में राजनाथ के चार वर्षीय पुत्र चंद्रेश कुमार और तीन साल की बेटी रूबिता कुमारी और पड़ोसी बिगन का तीन वर्षीय पुत्र चंदन कोरवा घर पर अकेले थे।
तीनों बच्चे अन्य पड़ोसी टिगड़ा कोरवा के घर के बरामदे पर खेल रहे थे। टिगड़ा के घर में भी कोई नहीं था। उसी क्रम में बरामदे में रखे पुआल में आग लग गई। बरामदे के दरवाजे के रूप में लगी चटाई में भी आग पकड़ लिया। बच्चों को कुछ समझ नहीं आया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। घटना में राजनाथ के दोनों बच्चे बेटा चंद्रेश और बेटी रूबिता आग की लपटों के बीच घिर गई। चंदन किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहा। घटना में दोनों भाई बहन जिंदा जल गए वहीं घायलवस्था में डर के कारण चंदन बरामदे से निकलकर नदी की ओर भाग गया।
उधर घटनास्थल के पास ही बहेराटोली में बन रहे पुलिस पिकेट में तैनात संतरी ने घर से आग की लपटें निकलता देखा। वह तुरंत अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचा। वेलोग किसी तरह आग पर काबू पाने में सफल रहे। सूचना मिलने में बच्चों के माता पिता भी घर लौटे। सूचना पाकर बीडीओ विपिन कुमार भारती घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पहुंच घटना की जानकारी ली। वहीं मृतक बच्चों के परिजन को पांच-पांच हजार रुपये पारिवारिक लाभ योजना के तहत और 70 किग्रा चावल उपलब्ध कराया।
| गढ़वाः बड़गड़ ओपी क्षेत्र अंतर्गत टेहरी पंचायत के कोरवाटोली गांव में अगलगी की घटना में भाई और बहन जिंदा जल गए। घटनास्थल पर ही उक्त दोनों भाई-बहन की मौत हो गई। वहीं पड़ोस का एक अन्य बच्चा भी घायल हो गया। घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया। घटना शनिवार सुबह दस. तीस बजे की है। घटनास्थल प्रखंड मुख्यालय से तीस और जिला मुख्यालय से एक सौ दस किमी दूर है। उधर सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों बच्चों के शव को जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। वहीं अगलगी की घटना में गंभीर रूप से झुलसे तीसरे बच्चे को इलाज के लिए एंबुलेंस से तत्काल भंडरिया सामुदायिक अस्पताल भेज दिया। घटना के संबंध में बताया जाता है कि स्थानीय निवासी राजनाथ कोरवा अपनी पत्नी के साथ महुआ चुनने घर से पांच-छह किमी दूर जंगल चले गए थे। वहीं पड़ोसी बिगन कोरवा भी पत्नी के साथ महुआ चुनने जंगल गया था। घर में राजनाथ के चार वर्षीय पुत्र चंद्रेश कुमार और तीन साल की बेटी रूबिता कुमारी और पड़ोसी बिगन का तीन वर्षीय पुत्र चंदन कोरवा घर पर अकेले थे। तीनों बच्चे अन्य पड़ोसी टिगड़ा कोरवा के घर के बरामदे पर खेल रहे थे। टिगड़ा के घर में भी कोई नहीं था। उसी क्रम में बरामदे में रखे पुआल में आग लग गई। बरामदे के दरवाजे के रूप में लगी चटाई में भी आग पकड़ लिया। बच्चों को कुछ समझ नहीं आया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। घटना में राजनाथ के दोनों बच्चे बेटा चंद्रेश और बेटी रूबिता आग की लपटों के बीच घिर गई। चंदन किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहा। घटना में दोनों भाई बहन जिंदा जल गए वहीं घायलवस्था में डर के कारण चंदन बरामदे से निकलकर नदी की ओर भाग गया। उधर घटनास्थल के पास ही बहेराटोली में बन रहे पुलिस पिकेट में तैनात संतरी ने घर से आग की लपटें निकलता देखा। वह तुरंत अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचा। वेलोग किसी तरह आग पर काबू पाने में सफल रहे। सूचना मिलने में बच्चों के माता पिता भी घर लौटे। सूचना पाकर बीडीओ विपिन कुमार भारती घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पहुंच घटना की जानकारी ली। वहीं मृतक बच्चों के परिजन को पांच-पांच हजार रुपये पारिवारिक लाभ योजना के तहत और सत्तर किग्रा चावल उपलब्ध कराया। |
चेन्नई, (भाषा)। भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद सिंह धोनी को विश्व कप से पहले एक गंभीर समस्या से जूझना होगा और उनका कहना है कि टीम में खिलाड़ियों का अंतिम एकादश में शामिल किये जाने के बजाय `बल्लेबाजी क्रम के स्थान के लिये कड़ी मशक्कत' करनी होगी जिसमें विराट कोहली को सुरेश रैना पर प्राथमिकता दी जायेगी। भारत ने दोनों अभ्यास मैचों में जीत दर्ज की है और धोनी को अपने सभी खिलाड़ियों को परखने का मौका मिल गया जिसके कारण वह अंतिम एकादश चुनने के लिये परेशानी में फंस जायेंगे। उनका कहना है कि चौथे नंबर के लिये कोहली को रैना पर प्राथमिकता दी जा सकती है। धोनी ने कहा कि 19 फरवरी से शुरू होने वाले विश्व कप की अंतिम एकादश टीम में युवराज सिंह को खेलते देखना चाहते हैं। धोनी ने बीती रात दूसरे और अंतिम अभ्यास मैच में न्यूजीलैंड पर मिली 117 रन की जीत के बाद कहा, सबसे बड़ी मुश्किल तब आयेगी जब युवराज अच्छा प्रदर्शन करेगा और एक या दो अर्धशतक बना लेगा। इस समय हम असमंजस में फंस जायेंगे। हमारे लिये चौथे नंबर का स्थान भी काफी अहम है। इस समय इस स्थान के लिये कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। चौथे नंबर पर कोहली को तीसरे नंबर पर खेलने वाले गौतम गंभीर के साथ बल्लेबाजी करने की जरूरत है। धोनी ने कहा, विराट को अपनी क्षमता के हिसाब से प्रदर्शन करने के लिये उढपरी क्रम में बल्लेबाजी करनी होगी। वहीं रैना निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए भी रन बना सकते हैं और उसने पांचवें और छ"s नंबर पर भी अच्छी बल्लेबाजी की है इसलिये अंतिम एकादश के बजाय इसमें बल्लेबाजी स्थान के लिये ज्यादा प्रतिस्पर्धा होगी। उन्होंने कहा, कोहली ऐसा खिलाड़ी है जो क्रीज पर जमने में थोड़ा समय लेता है। फिर भी ऐसा हो सकता है कि विराट की मौजूदा फार्म को देखते हुए उन्हें रैना पर प्राथमिकता दी जाये। युवराज की टीम में महत्ता के बारे में बात करते हुए धोनी ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण है कि हम चार गेंदबाजों के साथ खेल रहे हैं। कामचलाउढ स्पिनर सचमुच अहम है, विशेषकर अगर यह बायें हाथ का स्पिनर हो। इससे गेंदबाजी मजबूत होती है इसलिये वह अन्य खिलाड़ियों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। एक बार वह रन बनाना शुरू कर देता है तो उसे रोकना काफी मुश्किल होता है। यह पूछने पर कि क्या वह इस बात से चिंतित है कि युवराज हाल के दिनों में स्कोर नहीं बना रहा है तो उन्होंने कहा, उसे बल्लेबाजी का मौका नहीं मिल सका, अगर वह बल्लेबाजी करता तो अच्छा रहता। कुछ रन बनाना अहम होता है। आप प्रतिभाशाली हो सकते हो लेकिन अंत में आपको 30 या 40 रन चाहिए होते हैं जिसके बाद आप सकारात्मक सोचना शुरू कर देते हो। इसके बाद आप गेंदबाजों पर दबदबा बनाने के बारे में सोचते हो। धोनी ने तेज गेंदबाजों के औसत से कम प्रदर्शन करने पर उनका बचाव करते हुए कहा कि उन्हें अपनी उढर्जा बचाकर रखने के लिये कहा गया है। धोनी ने कहा, तेज गेंदबाजों को निश्चित रूप से सुधरना होगा। वे अभ्यास में इस समय अपना 100 प्रतिशत नहीं दे रहे हैं क्योंकि हमने अपने तेज गेंदबाजों को मुख्य खेल के लिये खुद को बचाकर रखने के लिये कहा है। भारतीय कप्तान ने कहा, संभवतः यही उनके प्रदर्शन में भी दिख रहा है। लेकिन आशा है कि जब टूर्नामेंट शुरू होगा वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे और इसके लिये अतिरिक्त प्रयास भी करेंगे। धोनी ने आज दूसरे अभ्यास मैच में मिली 117 रन की शानदार जीत पर खुशी जताते हुए कहा, पहले मैच में बहुत आक्रामक नहीं थे। इसलिये विश्वकप से पहले हम अपने अंतिम मैच में आक्रामक होना चाहते थे।
| चेन्नई, । भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद सिंह धोनी को विश्व कप से पहले एक गंभीर समस्या से जूझना होगा और उनका कहना है कि टीम में खिलाड़ियों का अंतिम एकादश में शामिल किये जाने के बजाय `बल्लेबाजी क्रम के स्थान के लिये कड़ी मशक्कत' करनी होगी जिसमें विराट कोहली को सुरेश रैना पर प्राथमिकता दी जायेगी। भारत ने दोनों अभ्यास मैचों में जीत दर्ज की है और धोनी को अपने सभी खिलाड़ियों को परखने का मौका मिल गया जिसके कारण वह अंतिम एकादश चुनने के लिये परेशानी में फंस जायेंगे। उनका कहना है कि चौथे नंबर के लिये कोहली को रैना पर प्राथमिकता दी जा सकती है। धोनी ने कहा कि उन्नीस फरवरी से शुरू होने वाले विश्व कप की अंतिम एकादश टीम में युवराज सिंह को खेलते देखना चाहते हैं। धोनी ने बीती रात दूसरे और अंतिम अभ्यास मैच में न्यूजीलैंड पर मिली एक सौ सत्रह रन की जीत के बाद कहा, सबसे बड़ी मुश्किल तब आयेगी जब युवराज अच्छा प्रदर्शन करेगा और एक या दो अर्धशतक बना लेगा। इस समय हम असमंजस में फंस जायेंगे। हमारे लिये चौथे नंबर का स्थान भी काफी अहम है। इस समय इस स्थान के लिये कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। चौथे नंबर पर कोहली को तीसरे नंबर पर खेलने वाले गौतम गंभीर के साथ बल्लेबाजी करने की जरूरत है। धोनी ने कहा, विराट को अपनी क्षमता के हिसाब से प्रदर्शन करने के लिये उढपरी क्रम में बल्लेबाजी करनी होगी। वहीं रैना निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए भी रन बना सकते हैं और उसने पांचवें और छ"s नंबर पर भी अच्छी बल्लेबाजी की है इसलिये अंतिम एकादश के बजाय इसमें बल्लेबाजी स्थान के लिये ज्यादा प्रतिस्पर्धा होगी। उन्होंने कहा, कोहली ऐसा खिलाड़ी है जो क्रीज पर जमने में थोड़ा समय लेता है। फिर भी ऐसा हो सकता है कि विराट की मौजूदा फार्म को देखते हुए उन्हें रैना पर प्राथमिकता दी जाये। युवराज की टीम में महत्ता के बारे में बात करते हुए धोनी ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण है कि हम चार गेंदबाजों के साथ खेल रहे हैं। कामचलाउढ स्पिनर सचमुच अहम है, विशेषकर अगर यह बायें हाथ का स्पिनर हो। इससे गेंदबाजी मजबूत होती है इसलिये वह अन्य खिलाड़ियों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। एक बार वह रन बनाना शुरू कर देता है तो उसे रोकना काफी मुश्किल होता है। यह पूछने पर कि क्या वह इस बात से चिंतित है कि युवराज हाल के दिनों में स्कोर नहीं बना रहा है तो उन्होंने कहा, उसे बल्लेबाजी का मौका नहीं मिल सका, अगर वह बल्लेबाजी करता तो अच्छा रहता। कुछ रन बनाना अहम होता है। आप प्रतिभाशाली हो सकते हो लेकिन अंत में आपको तीस या चालीस रन चाहिए होते हैं जिसके बाद आप सकारात्मक सोचना शुरू कर देते हो। इसके बाद आप गेंदबाजों पर दबदबा बनाने के बारे में सोचते हो। धोनी ने तेज गेंदबाजों के औसत से कम प्रदर्शन करने पर उनका बचाव करते हुए कहा कि उन्हें अपनी उढर्जा बचाकर रखने के लिये कहा गया है। धोनी ने कहा, तेज गेंदबाजों को निश्चित रूप से सुधरना होगा। वे अभ्यास में इस समय अपना एक सौ प्रतिशत नहीं दे रहे हैं क्योंकि हमने अपने तेज गेंदबाजों को मुख्य खेल के लिये खुद को बचाकर रखने के लिये कहा है। भारतीय कप्तान ने कहा, संभवतः यही उनके प्रदर्शन में भी दिख रहा है। लेकिन आशा है कि जब टूर्नामेंट शुरू होगा वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे और इसके लिये अतिरिक्त प्रयास भी करेंगे। धोनी ने आज दूसरे अभ्यास मैच में मिली एक सौ सत्रह रन की शानदार जीत पर खुशी जताते हुए कहा, पहले मैच में बहुत आक्रामक नहीं थे। इसलिये विश्वकप से पहले हम अपने अंतिम मैच में आक्रामक होना चाहते थे। |
फवरि । ]
स्वामी ब्राह्मण से अन्य को दीक्षा नहीं देते तत्र वे अत्यन्त हतोत्साह हुए। उन्होंने सोचा कि बिना ● कौशल रचे इनसे काम निकलना कठिन है। यह सोच कर फीर गङ्गा के किनारे मुर्दा वन कर पड़ गये। स्वामी रामानन्द भी उसी घाट पर स्नान करने जाया करते थे । दैवयोग से उस दिन बदली भी थी और अन्वेश छाया हुआ था, पांस की वस्तु भी दिखलाई नहीं पड़ती थी, यथा समय रामानन्द स्वामी जब स्नान कर के खौटने लगे त उनका पैर कदीर पर पड़ा । मुर्दा समझ कर रामानन्द स्वामी कहने लगे "राम कह, राम कह" कवीर ने रामानन्द स्वामी से इस प्रकार मूल मन्त्र की दीक्षा पायी और कहा, गुरुदेव हमारी यद दीक्षा हुई।
कवीर ने अपने घर थाकर शिर मुंडाय तिलक और माला धारण की । माता के पूँछने पर कधीर ने कहा में रामानन्द स्वामी का शिष्य हुआ है। उनकी माता ने उस समय के दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोदी के दरबार में फरयाद की । परन्तु कवीर के धर्मभाव और युक्तियुक्त वचन से परास्त हो कर बादशाह ने कार को छोड़ दिया। ये सन् १४०० ई० में वर्तमान थे, कहा जाता है कि ये तीन सौ वर्ष तक जीते रहे । इनके बनाये ग्रन्थ ये हैं१ सुखनिधान, २ गोरखनाथ की गोष्ठी, ३ कवीरपांजी, ४. वलव की रमायनी, २ रामानन्द की गोष्टी, ६ थानन्दरामसागर, ● शब्दावली, ८ मङ्गल, ६ वसन्त, 10 होली, 39 देखता, १२ भूलना, १३ खमरा, १४ हिण्डोला, १५ बारहमासा १६ चाँचर, १७ घाँतीस ३८ लामा, १६ रमाइनी, २० माखी, २१ बीजक । इनके अतिरिक्त "अगमवाणी" नामक एक और भी पुस्तक है । ( श्रदर्शमहात्मागण ) कवीरपन्थी =कवीर का चलाया धर्मसम्प्रदाय । शमानन्द के शिष्यों में कबीरदास प्रधान थे । इन्होंने जो धर्म पन्थ चलाया है उसका नाम कबीरपन्थी है। कवीरपन्थी सम्प्रदाय में धन्य देवताथों से विष्णु को प्रधान ग्रासन दिया जाता है। रामानन्दी वैवों से इनके
[ 'कक्षसेन ।
आचार व्यवहार में बहुत ही अन्तर है तथापि रामानन्दी वैष्णवों के साथ इनकी सहानुभूति रहती है। इनमें देव देवी की पूजा निषिद्ध है । इनमें न तो पूजा करने का मन्त्र ही माना जाता औौर न प्रणाम करने की रीति । यह पन्थ अदृश्य कवीर की पूजा करता है। कीर्तन ही इनकी उपासना है । गृहस्थ कवीरपन्थी देवी देवता पूजा करते हैं परन्तु संन्यासी पूजा से बरी कर दिये जाते हैं। कवीर के मुख्य वारद शिष्य इस सम्प्रदाय के प्रचारक समझे जाते हैं। कवीरपन्थी सम्प्रदाय की अनेक शाखाएँ हैं इनके टेसफविरी, दानकविरी, मङ्गलकविरी, श्रादि नाम हैं ।
( भारतवर्षीय इतिहास ) कश- राजा सुहोत्र के पुत्र का नाम । ये सुत्र पुरुरवा के पुत्र श्रायु के वंशज थे। कश, काशी के राजा थे ।
कश्य- एक राजकुमार का नाम यें सेनजित् के पुत्र थे ।
कश्यप विख्यात प्रजापति ऋषि । ये प्रह्मा के पौत्र औौर मरीचि के मानस पुत्र थे । किसी के मत से मरीचि के औौरसकला नाम की उनकी श्री के गर्भ से इनकी उत्पत्ति मानी जाती है। महर्षि कश्यप की सात खियाँ थीं । दिति से दैत्य, अदिति से श्रादित्य ( देवता ), विनता से पक्षी, कह से सर्प, सुरभि से गौ महिप थादि, सरमा से कुकुर यादि धौर दनु से दानच उत्पन्न हुए । ( ब्रह्मवैवर्तपुराण )
मार्कण्डेयपुराण और हरिवंश में लिखा है कि कश्यप की १३ स्त्रियाँ थीं। जिनके नाम ये थे, दिति, प्रदिति, दनु, विनता, ख़सा, कद्दू, मुनि, क्रोधा, अरिer, इरा, ताम्रा, इला और प्रधा। रामायण के श्रादिकाण्ड में कश्यप की वंशावली इस प्रकार की गयी है कश्यायता दक्ष की कन्या की सन्तान । जिसका विवाह एक ऋऋषि से हुआ था । कसेरु-भारत के नौ वर्षों में से एक वर्ष का नाम । कहोड=महर्षि उद्दालक के शिष्य का नाम ये ऋषि अष्टावक के पिता थे । कक्षसेन= चन्द्रवंशी राजा परीक्षित के ग्राउ पुत्रों में से एक पुत्र का नाम । ये रात्र स बड़े थे ।
कक्षे । ]
कक्षेयु -पुरुवंशी राजा रौद्राश्व के पुत्र का नाम । रौद्राश्व के पाँच पुत्र थे। उनमें ये मध्यम थे ।. का=दक्षप्रजापति का दूसरा नाम । मूत्रस्थान और मलस्थान के देवता ।
काकमुख एक प्राचीन जाति। पहले एक जाति - के लोगों को चिढ़ाने के लिये उनका नाम लोगों ने रख दिया था। काकमुख काकवर्ण-मगध के राजाओं के एक राजा का नाम । इन्होंने ३६ वर्ष तक राज्य किया था। ये शिशुनाग के पुत्र थे । काकस =प्राचीन जाति का नाम है यह जाति जहाँ से सिन्धुनद निकला है वहीं सिन्धुनद के तट पर रहती थी ।
काकुत्स्थ = ( देखो फाकुत्स्थ )
काञ्चन = पुरुरवा के वंशज थीम के पुत्र का नाम । काञ्चनप्रभ=श्रमावसू के पौत्र, और भीम के पुत्र
का नाम ।
कात्यायन = (१) विख्यात धर्मशासफार। ये विश्वा मित्र वंश में उत्पन्न हुए थे। इनके बनाये कात्यायन श्रौतसूत्र और फास्यायन गृह्यसूत्र का पडित समाज में विशेष आदर है । गृह्यसूत्र में ब्राह्मणों के दशविध संस्कार और वास्तु क्रिया श्रादि का विवरण दिया गया है।
( २ ) विख्यात स्मृतिशासकार । ये महर्षि गोमिल के पुत्र थे और इनके बनाये स्मृतिग्रन्थ का नाम कर्मप्रदीप है।
( ३ ) प्रसिद्ध वैयाकरण । इनका दूसरा नाम वररुचि भी था । ये वररुचि राजा विक्रमादित्य की सभा के नवरमों में के वररुचि से भिन्न थे। कात्यायन वैदिक मुनि हैं और पाणिनि के समकालीन हैं। इनके रचित ग्रन्थों के नाम वाजीसूत्र, क्रमप्रदीप, प्राकृत व्याकरण और पाणिनीय व्याकरण पर वार्सिक हैं। कथा सरित्सागर में लिखा है कि कात्यायन बचपन ही से अति अद्भुत बुद्धिमान् थे। वे नाव्यशाला में किसी नाटक का खेल देखते तो उसे अपनी माता के निकट आ कर समग्र आद्योपान्त कह दे सकते थे और जनेऊ होने के पहले ही व्याडी श्रादि मुनियों से सुने प्रातिशारूप को फण्ठाग्र कह जा सकते थे। ये वर्षमुनि के शिष्य थे और वे वेदाङ्ग में इतने
[ कात्यायनसंहिना ।
निपुण थे कि पाणिनि भी इनकी समानता नहीं कर सके । इनसे स्पर्श करके पायिणनि ने महादेव की धारापना की थौर पाणिनि ने इन्हें जीता। ये राजा नन्द के मन्त्री थे। राजा नन्द पाटली. पुत्र के राजा चन्द्रगुप्त के पिता है । चन्द्रगुम कह राज्यकाल सन् ६० के पूर्व चौधी शताब्दी में निश्रित हुआ है। इसके अनुसार सृष्टीय चौंधी शताब्दी या उसके भी कुछ पूर्वका समय माना जा सकता है। रमेशचन्द्रद्रत रहते है कि का समय सृष्टीय सदी से ८०० वर्ष पूर्व है और वे अनुमान करते हैं कि कारयायन पाणिनि के समकालीन होने के कारण नव सदी में रहे होंगे। डाक्टर भाडारकर कात्यायन का समय सृष्टीय सन् से पूर्व चौथी सदी के पूर्वार्द्ध में मानते हैं । कात्यायन का जन्म कौशाम्बी में हुआ था। इनके पिता का नाम सोमदत्त था । चेद की सर्वानुक्रमणी भी इन्ही कात्यायन मुनि श्री चना हुई है। महाराज नन्द के समकालीन और मन्त्री मानने से कात्यायन मुनि का समय सूट के पूर्व २१५ वर्ष से (जब चन्द्रगुप्त राज्य पर बैठा था ) भी पहिले स्थिर होता है। कात्यायनसंहिता=इस संहिता के उनतीस ध्यम हैं। इनमें पाँच सौ से अधिक लोक है। इसमें कितने ही स्थानों पर गय भी दिये गये हैं। गृहसूत्रकार गोभित ने जिन फर्मों का विव रग्य किया है, उन्हीं कमों के कठिन भाग का विवरण कात्यायनमुनि ने अपनी संहिता में किया है। श्राद्ध और सदाचार का वर्णन इसमें कई अध्याय में किया गया है। इस संहिता में गौरी, पथा, शची, मेधा, सावित्री, विजया, जया, देवसेना, स्वधा, स्वाहा, धृति, पुष्टि तुष्टि और श्रात्मदेवता मातृगण तथा गणेश की पूजा का विधान है। सफल फर्मों में गणेश और मातृकागए की पूजा करने की धाशा है। चित्र प्रतिमा और पट की पूजा करने की विधि लिसी है। तर्पण पिट और शौच आदि का भी इस संहिता में विधान है। ज्येष्ठ को वर्तमा नता में कनिष्ट का ध्याह किस प्रकार फरना साहिये । कात्यायन नामक अनेक ऋऋhियों का
कात्यायनसंहिता । 3
पता मिलता है । परन्तु संहिताकार कात्यायन महर्षि गोभिल के पुत्र थे।
( भारतवर्षीय इतिहास ) कात्यायनी मंगवती की मूर्ति विशेष । महर्षि फाल्यायन ने सघ से पहले इस मूर्ति की पूजा की थी । इसी कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा । सौ वर्ष के युद्ध के धनन्तर महिषासुर ने देवताओं को राज्य कर दिया, देवता लोग ब्रह्मा को धागे करके शिव और विष्णु के समीप उपस्थित हुए। हरि हर मझा के मुख से देवताओं की विपत्ति का हाल सुन अत्यन्त कुरु हुए । तीनों देवों के मुखमद्दल से एक तेज निर्गत हुआ । उस तेज ने एक सी की मूर्ति धारण की । उस भयकर जी को देवताओं ने अपने अपने अन दिये। महिषासुर अपने सेना धौर सेनापति के साथ देवी से युद्ध करके मारा गया । यह सिंहवाहिनी कात्यायनी ग्राश्विन कृष्ण चतुद्देशी को उत्पन्न हुई थी और उसी महीने की शुक्र सप्तमी, थटमी और नवमी को कात्यायन की पूजा से कर देवी ने दशमी को महिषासुर का वध किया था। यह देवीमूर्ति दशभुजा है । महियापुर रम्भासुर का पुत्र था। अपने ही वर के प्रभाव से महादेव रम्भासुर के तीन बार पुत्र रूप से उत्पन्न हुए थे। तीनोयार भगवती ने मूर्ति धारण कर महिषासुर का नाश किया था । महिपार अत्यन्त मायावी था । उसने एक समय कात्यायन के एक शिष्य को मनोहर जी मूर्ति धारण करके विखाना चाहा था, हिमालगवासी कात्यायन यह जान कर अत्यन्त हुनु
और उन्होंने उसे शाप दिया कि तुमने जी का रूप धर कर जो हमारे शिष्य की तपस्या में विघ्न डालने की चेष्टां फी, अतः श्री ही के द्वारा तुम्हारी मृत्यु होगी। इसी शाप से महिषासुर भगवती के हाथ से मारा गया ।
( मार्कण्डेयपुराण ) 'कादम्बरी-वाणहनिर्मित ग्रन्थ विशेष । इस ग्रन्थ की नायिका का नाम कादम्बरी है, जो चित्ररथ नामक गन्धर्वराज की कन्या थी । कान्यकुज (देखो कीज ) कापालिका सम्पदाय की एक शाखा ।
[ कामन्दक ।
• पुस्तकों के देखने से करारी नामक एक शाक्ल सम्प्रदाय की शाखा का पता चलता है । इसी करारी सम्प्रदाय को अघोरघट या कापालिक भी कहते हैं। कहते हैं कि सात घाठ सौ वर्ष पूर्व काली चामुण्डा छिनमस्ता आदि देवियों के सामने ये नरवलि दिया करते थे। शङ्करदिग्विजय में लिखा है कि कापालिक उच्छिष्ट गणपति या हैडिम्य सम्प्रदाय के अन्तर्गत है। इस समय कापालिकों का बड़ा अपवाद संसार में फैला है। इसमें सन्देह नहीं कि भारत के बुरे दिनों में इस सम्प्रदाय के भी कतिपय मनुष्य उच्छृद्ध लता और व्यभिचार दोषग्रस्त हो गये थे, परन्तु उनके उद्देश्य आदि को बिना जाने कभी वे बुरे नहीं कहे जा सकते । यद्यपि वलिदान यादि की निन्दित मथा इस सम्प्रदाय में इस समय पायी जाती है, जो इनके सचमुच अधःपात के सूचक हैं; तथापि इनके ग्रन्थ देखने से स्पष्ट मालूम होता है कि पार्थिव शरीर का वलिदान करने की थाज्ञा इनके ग्रन्थों में नहीं है । फिन्तु काम क्रोध यादि रिपुत्र के चलिदान का ही उपदेश है। कामदेव = प्रेम के देवता । ये कृष्ण या विष्णु के
औौरस और लक्ष्मी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । जो उस समय माया या रुक्मिणी कही जाती थी। दूसरी जगह ऐसा लिखा मिलता है कि ये प्रया से ली के रूप में उत्पन्न हुए हैं। इनके रूप के विषय में लिखा है कि ये सर्वदा युवावस्था में रहते हैं, अपनी माता के साथ कभी कभी घूमने जाते और उनसे बातें भी करते हैं । ये कभी कभी तोतों पर सवार हो कर चांदनी में घूमने भी निकलते हैं। इनकी ध्वजा पर मछली का चिन्ह है, और ध्वजा के कपड़े की जमील लाल है । ( देखो नङ्ग ) कामन्दक-इनका बनाया कामन्दकीय नीतिसार नामक एक ग्रन्थ है । इसमें इन्होंने चाणक्य का नामोल्लेख किया है। इससे निश्चय होता है कि ये घाणक्य की अपेक्षा अर्वाचीन है । यह चाणक्य नही हैं जिन्हों ने मगध के राजा नन्द का विनाश कर चन्द्रगुप्त को उनके सिंहासन पर बैठाया । चाणक्य का समय सृष्ट ६० से ३१५ वर्ष पूर्व निश्चित हुया है। अतएव कामन्दक | फवरि । ] स्वामी ब्राह्मण से अन्य को दीक्षा नहीं देते तत्र वे अत्यन्त हतोत्साह हुए। उन्होंने सोचा कि बिना ● कौशल रचे इनसे काम निकलना कठिन है। यह सोच कर फीर गङ्गा के किनारे मुर्दा वन कर पड़ गये। स्वामी रामानन्द भी उसी घाट पर स्नान करने जाया करते थे । दैवयोग से उस दिन बदली भी थी और अन्वेश छाया हुआ था, पांस की वस्तु भी दिखलाई नहीं पड़ती थी, यथा समय रामानन्द स्वामी जब स्नान कर के खौटने लगे त उनका पैर कदीर पर पड़ा । मुर्दा समझ कर रामानन्द स्वामी कहने लगे "राम कह, राम कह" कवीर ने रामानन्द स्वामी से इस प्रकार मूल मन्त्र की दीक्षा पायी और कहा, गुरुदेव हमारी यद दीक्षा हुई। कवीर ने अपने घर थाकर शिर मुंडाय तिलक और माला धारण की । माता के पूँछने पर कधीर ने कहा में रामानन्द स्वामी का शिष्य हुआ है। उनकी माता ने उस समय के दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोदी के दरबार में फरयाद की । परन्तु कवीर के धर्मभाव और युक्तियुक्त वचन से परास्त हो कर बादशाह ने कार को छोड़ दिया। ये सन् एक हज़ार चार सौ ईशून्य में वर्तमान थे, कहा जाता है कि ये तीन सौ वर्ष तक जीते रहे । इनके बनाये ग्रन्थ ये हैंएक सुखनिधान, दो गोरखनाथ की गोष्ठी, तीन कवीरपांजी, चार. वलव की रमायनी, दो रामानन्द की गोष्टी, छः थानन्दरामसागर, ● शब्दावली, आठ मङ्गल, छः वसन्त, दस होली, उनतालीस देखता, बारह भूलना, तेरह खमरा, चौदह हिण्डोला, पंद्रह बारहमासा सोलह चाँचर, सत्रह घाँतीस अड़तीस लामा, सोलह रमाइनी, बीस माखी, इक्कीस बीजक । इनके अतिरिक्त "अगमवाणी" नामक एक और भी पुस्तक है । कवीरपन्थी =कवीर का चलाया धर्मसम्प्रदाय । शमानन्द के शिष्यों में कबीरदास प्रधान थे । इन्होंने जो धर्म पन्थ चलाया है उसका नाम कबीरपन्थी है। कवीरपन्थी सम्प्रदाय में धन्य देवताथों से विष्णु को प्रधान ग्रासन दिया जाता है। रामानन्दी वैवों से इनके [ 'कक्षसेन । आचार व्यवहार में बहुत ही अन्तर है तथापि रामानन्दी वैष्णवों के साथ इनकी सहानुभूति रहती है। इनमें देव देवी की पूजा निषिद्ध है । इनमें न तो पूजा करने का मन्त्र ही माना जाता औौर न प्रणाम करने की रीति । यह पन्थ अदृश्य कवीर की पूजा करता है। कीर्तन ही इनकी उपासना है । गृहस्थ कवीरपन्थी देवी देवता पूजा करते हैं परन्तु संन्यासी पूजा से बरी कर दिये जाते हैं। कवीर के मुख्य वारद शिष्य इस सम्प्रदाय के प्रचारक समझे जाते हैं। कवीरपन्थी सम्प्रदाय की अनेक शाखाएँ हैं इनके टेसफविरी, दानकविरी, मङ्गलकविरी, श्रादि नाम हैं । कश- राजा सुहोत्र के पुत्र का नाम । ये सुत्र पुरुरवा के पुत्र श्रायु के वंशज थे। कश, काशी के राजा थे । कश्य- एक राजकुमार का नाम यें सेनजित् के पुत्र थे । कश्यप विख्यात प्रजापति ऋषि । ये प्रह्मा के पौत्र औौर मरीचि के मानस पुत्र थे । किसी के मत से मरीचि के औौरसकला नाम की उनकी श्री के गर्भ से इनकी उत्पत्ति मानी जाती है। महर्षि कश्यप की सात खियाँ थीं । दिति से दैत्य, अदिति से श्रादित्य , विनता से पक्षी, कह से सर्प, सुरभि से गौ महिप थादि, सरमा से कुकुर यादि धौर दनु से दानच उत्पन्न हुए । मार्कण्डेयपुराण और हरिवंश में लिखा है कि कश्यप की तेरह स्त्रियाँ थीं। जिनके नाम ये थे, दिति, प्रदिति, दनु, विनता, ख़सा, कद्दू, मुनि, क्रोधा, अरिer, इरा, ताम्रा, इला और प्रधा। रामायण के श्रादिकाण्ड में कश्यप की वंशावली इस प्रकार की गयी है कश्यायता दक्ष की कन्या की सन्तान । जिसका विवाह एक ऋऋषि से हुआ था । कसेरु-भारत के नौ वर्षों में से एक वर्ष का नाम । कहोड=महर्षि उद्दालक के शिष्य का नाम ये ऋषि अष्टावक के पिता थे । कक्षसेन= चन्द्रवंशी राजा परीक्षित के ग्राउ पुत्रों में से एक पुत्र का नाम । ये रात्र स बड़े थे । कक्षे । ] कक्षेयु -पुरुवंशी राजा रौद्राश्व के पुत्र का नाम । रौद्राश्व के पाँच पुत्र थे। उनमें ये मध्यम थे ।. का=दक्षप्रजापति का दूसरा नाम । मूत्रस्थान और मलस्थान के देवता । काकमुख एक प्राचीन जाति। पहले एक जाति - के लोगों को चिढ़ाने के लिये उनका नाम लोगों ने रख दिया था। काकमुख काकवर्ण-मगध के राजाओं के एक राजा का नाम । इन्होंने छत्तीस वर्ष तक राज्य किया था। ये शिशुनाग के पुत्र थे । काकस =प्राचीन जाति का नाम है यह जाति जहाँ से सिन्धुनद निकला है वहीं सिन्धुनद के तट पर रहती थी । काकुत्स्थ = काञ्चन = पुरुरवा के वंशज थीम के पुत्र का नाम । काञ्चनप्रभ=श्रमावसू के पौत्र, और भीम के पुत्र का नाम । कात्यायन = विख्यात धर्मशासफार। ये विश्वा मित्र वंश में उत्पन्न हुए थे। इनके बनाये कात्यायन श्रौतसूत्र और फास्यायन गृह्यसूत्र का पडित समाज में विशेष आदर है । गृह्यसूत्र में ब्राह्मणों के दशविध संस्कार और वास्तु क्रिया श्रादि का विवरण दिया गया है। विख्यात स्मृतिशासकार । ये महर्षि गोमिल के पुत्र थे और इनके बनाये स्मृतिग्रन्थ का नाम कर्मप्रदीप है। प्रसिद्ध वैयाकरण । इनका दूसरा नाम वररुचि भी था । ये वररुचि राजा विक्रमादित्य की सभा के नवरमों में के वररुचि से भिन्न थे। कात्यायन वैदिक मुनि हैं और पाणिनि के समकालीन हैं। इनके रचित ग्रन्थों के नाम वाजीसूत्र, क्रमप्रदीप, प्राकृत व्याकरण और पाणिनीय व्याकरण पर वार्सिक हैं। कथा सरित्सागर में लिखा है कि कात्यायन बचपन ही से अति अद्भुत बुद्धिमान् थे। वे नाव्यशाला में किसी नाटक का खेल देखते तो उसे अपनी माता के निकट आ कर समग्र आद्योपान्त कह दे सकते थे और जनेऊ होने के पहले ही व्याडी श्रादि मुनियों से सुने प्रातिशारूप को फण्ठाग्र कह जा सकते थे। ये वर्षमुनि के शिष्य थे और वे वेदाङ्ग में इतने [ कात्यायनसंहिना । निपुण थे कि पाणिनि भी इनकी समानता नहीं कर सके । इनसे स्पर्श करके पायिणनि ने महादेव की धारापना की थौर पाणिनि ने इन्हें जीता। ये राजा नन्द के मन्त्री थे। राजा नन्द पाटली. पुत्र के राजा चन्द्रगुप्त के पिता है । चन्द्रगुम कह राज्यकाल सन् साठ के पूर्व चौधी शताब्दी में निश्रित हुआ है। इसके अनुसार सृष्टीय चौंधी शताब्दी या उसके भी कुछ पूर्वका समय माना जा सकता है। रमेशचन्द्रद्रत रहते है कि का समय सृष्टीय सदी से आठ सौ वर्ष पूर्व है और वे अनुमान करते हैं कि कारयायन पाणिनि के समकालीन होने के कारण नव सदी में रहे होंगे। डाक्टर भाडारकर कात्यायन का समय सृष्टीय सन् से पूर्व चौथी सदी के पूर्वार्द्ध में मानते हैं । कात्यायन का जन्म कौशाम्बी में हुआ था। इनके पिता का नाम सोमदत्त था । चेद की सर्वानुक्रमणी भी इन्ही कात्यायन मुनि श्री चना हुई है। महाराज नन्द के समकालीन और मन्त्री मानने से कात्यायन मुनि का समय सूट के पूर्व दो सौ पंद्रह वर्ष से भी पहिले स्थिर होता है। कात्यायनसंहिता=इस संहिता के उनतीस ध्यम हैं। इनमें पाँच सौ से अधिक लोक है। इसमें कितने ही स्थानों पर गय भी दिये गये हैं। गृहसूत्रकार गोभित ने जिन फर्मों का विव रग्य किया है, उन्हीं कमों के कठिन भाग का विवरण कात्यायनमुनि ने अपनी संहिता में किया है। श्राद्ध और सदाचार का वर्णन इसमें कई अध्याय में किया गया है। इस संहिता में गौरी, पथा, शची, मेधा, सावित्री, विजया, जया, देवसेना, स्वधा, स्वाहा, धृति, पुष्टि तुष्टि और श्रात्मदेवता मातृगण तथा गणेश की पूजा का विधान है। सफल फर्मों में गणेश और मातृकागए की पूजा करने की धाशा है। चित्र प्रतिमा और पट की पूजा करने की विधि लिसी है। तर्पण पिट और शौच आदि का भी इस संहिता में विधान है। ज्येष्ठ को वर्तमा नता में कनिष्ट का ध्याह किस प्रकार फरना साहिये । कात्यायन नामक अनेक ऋऋhियों का कात्यायनसंहिता । तीन पता मिलता है । परन्तु संहिताकार कात्यायन महर्षि गोभिल के पुत्र थे। कात्यायनी मंगवती की मूर्ति विशेष । महर्षि फाल्यायन ने सघ से पहले इस मूर्ति की पूजा की थी । इसी कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा । सौ वर्ष के युद्ध के धनन्तर महिषासुर ने देवताओं को राज्य कर दिया, देवता लोग ब्रह्मा को धागे करके शिव और विष्णु के समीप उपस्थित हुए। हरि हर मझा के मुख से देवताओं की विपत्ति का हाल सुन अत्यन्त कुरु हुए । तीनों देवों के मुखमद्दल से एक तेज निर्गत हुआ । उस तेज ने एक सी की मूर्ति धारण की । उस भयकर जी को देवताओं ने अपने अपने अन दिये। महिषासुर अपने सेना धौर सेनापति के साथ देवी से युद्ध करके मारा गया । यह सिंहवाहिनी कात्यायनी ग्राश्विन कृष्ण चतुद्देशी को उत्पन्न हुई थी और उसी महीने की शुक्र सप्तमी, थटमी और नवमी को कात्यायन की पूजा से कर देवी ने दशमी को महिषासुर का वध किया था। यह देवीमूर्ति दशभुजा है । महियापुर रम्भासुर का पुत्र था। अपने ही वर के प्रभाव से महादेव रम्भासुर के तीन बार पुत्र रूप से उत्पन्न हुए थे। तीनोयार भगवती ने मूर्ति धारण कर महिषासुर का नाश किया था । महिपार अत्यन्त मायावी था । उसने एक समय कात्यायन के एक शिष्य को मनोहर जी मूर्ति धारण करके विखाना चाहा था, हिमालगवासी कात्यायन यह जान कर अत्यन्त हुनु और उन्होंने उसे शाप दिया कि तुमने जी का रूप धर कर जो हमारे शिष्य की तपस्या में विघ्न डालने की चेष्टां फी, अतः श्री ही के द्वारा तुम्हारी मृत्यु होगी। इसी शाप से महिषासुर भगवती के हाथ से मारा गया । 'कादम्बरी-वाणहनिर्मित ग्रन्थ विशेष । इस ग्रन्थ की नायिका का नाम कादम्बरी है, जो चित्ररथ नामक गन्धर्वराज की कन्या थी । कान्यकुज कापालिका सम्पदाय की एक शाखा । [ कामन्दक । • पुस्तकों के देखने से करारी नामक एक शाक्ल सम्प्रदाय की शाखा का पता चलता है । इसी करारी सम्प्रदाय को अघोरघट या कापालिक भी कहते हैं। कहते हैं कि सात घाठ सौ वर्ष पूर्व काली चामुण्डा छिनमस्ता आदि देवियों के सामने ये नरवलि दिया करते थे। शङ्करदिग्विजय में लिखा है कि कापालिक उच्छिष्ट गणपति या हैडिम्य सम्प्रदाय के अन्तर्गत है। इस समय कापालिकों का बड़ा अपवाद संसार में फैला है। इसमें सन्देह नहीं कि भारत के बुरे दिनों में इस सम्प्रदाय के भी कतिपय मनुष्य उच्छृद्ध लता और व्यभिचार दोषग्रस्त हो गये थे, परन्तु उनके उद्देश्य आदि को बिना जाने कभी वे बुरे नहीं कहे जा सकते । यद्यपि वलिदान यादि की निन्दित मथा इस सम्प्रदाय में इस समय पायी जाती है, जो इनके सचमुच अधःपात के सूचक हैं; तथापि इनके ग्रन्थ देखने से स्पष्ट मालूम होता है कि पार्थिव शरीर का वलिदान करने की थाज्ञा इनके ग्रन्थों में नहीं है । फिन्तु काम क्रोध यादि रिपुत्र के चलिदान का ही उपदेश है। कामदेव = प्रेम के देवता । ये कृष्ण या विष्णु के औौरस और लक्ष्मी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । जो उस समय माया या रुक्मिणी कही जाती थी। दूसरी जगह ऐसा लिखा मिलता है कि ये प्रया से ली के रूप में उत्पन्न हुए हैं। इनके रूप के विषय में लिखा है कि ये सर्वदा युवावस्था में रहते हैं, अपनी माता के साथ कभी कभी घूमने जाते और उनसे बातें भी करते हैं । ये कभी कभी तोतों पर सवार हो कर चांदनी में घूमने भी निकलते हैं। इनकी ध्वजा पर मछली का चिन्ह है, और ध्वजा के कपड़े की जमील लाल है । कामन्दक-इनका बनाया कामन्दकीय नीतिसार नामक एक ग्रन्थ है । इसमें इन्होंने चाणक्य का नामोल्लेख किया है। इससे निश्चय होता है कि ये घाणक्य की अपेक्षा अर्वाचीन है । यह चाणक्य नही हैं जिन्हों ने मगध के राजा नन्द का विनाश कर चन्द्रगुप्त को उनके सिंहासन पर बैठाया । चाणक्य का समय सृष्ट साठ से तीन सौ पंद्रह वर्ष पूर्व निश्चित हुया है। अतएव कामन्दक |
चेन्नई। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार राम की तमिल फिल्म 'तारामणि' 11 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। इसमें एंड्रिया जेरेमियाह और वसंत जैसे सितारे प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
फिल्म निर्माताओं ने रविवार का एक आधिकारिक पोस्टर में रिलीज की तारीख की पुष्टि की। रोमांटिक फिल्म 'तारामणि' राम और जे. एस. के सतीश द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित है। इसमें अंजलि अतिथि भूमिका में दिखाई देंगी। फिल्म का संगीत युवान शंकर राजा ने दिया है।
अंजलि ने कहा कि राम ने मुझसे यह भूमिका स्वीकार करने के लिए व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया था। यह मेरी अब तक की गई भूमिकाओं से काफी अलग है। राम के मुताबिक यह फिल्म आधुनिक जीवन में स्त्री-पुरुष के संबंधों के विविध पहलुओं को उठाती है।
इस बारे में राम ने कहा कि यह एक हल्की फुल्की और मनोरंजक फिल्म है। दर्शक खुद को फिल्म के किरदारों से जोड़ कर देख पाएंगे। चेन्नई को सामान्यतः उत्तर और दक्षिण चेन्नई के रूप में जाना जाता है, फिल्म में मैं तीसरा और नया चेन्नई पेश करने जा रहा हूं।
| चेन्नई। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार राम की तमिल फिल्म 'तारामणि' ग्यारह अगस्त को रिलीज होने जा रही है। इसमें एंड्रिया जेरेमियाह और वसंत जैसे सितारे प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म निर्माताओं ने रविवार का एक आधिकारिक पोस्टर में रिलीज की तारीख की पुष्टि की। रोमांटिक फिल्म 'तारामणि' राम और जे. एस. के सतीश द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित है। इसमें अंजलि अतिथि भूमिका में दिखाई देंगी। फिल्म का संगीत युवान शंकर राजा ने दिया है। अंजलि ने कहा कि राम ने मुझसे यह भूमिका स्वीकार करने के लिए व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया था। यह मेरी अब तक की गई भूमिकाओं से काफी अलग है। राम के मुताबिक यह फिल्म आधुनिक जीवन में स्त्री-पुरुष के संबंधों के विविध पहलुओं को उठाती है। इस बारे में राम ने कहा कि यह एक हल्की फुल्की और मनोरंजक फिल्म है। दर्शक खुद को फिल्म के किरदारों से जोड़ कर देख पाएंगे। चेन्नई को सामान्यतः उत्तर और दक्षिण चेन्नई के रूप में जाना जाता है, फिल्म में मैं तीसरा और नया चेन्नई पेश करने जा रहा हूं। |
चंडीगढ़। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को पंजाब और हरियाणा में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। कुछ ही देर में वह गुरदासपुर पहुंचने वाले है। पंजाब में अमित शाह की रैली से पहले कौमी इंसाफ मोर्चा के नेताओं समेत कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया है। इसके अलावा प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। हरियाणा सरकार ने गृहमंत्री की सुरक्षा को लेकर 13 एसपी और करीब 30 डीएसपी, पांच आरएएफ की टुकड़ियों को तैनात किया है।
अमित शाह की रैली को लेकर गुरदासपुर के एसएसपी हरीश दयामा ने रैली स्थल पर पहुंचकर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि गृहमंत्री की रैली को देखते हुए अन्य जिलों से भी पुलिस फोर्स को बुलाया गया है। इसके अलावा रैली स्थल के चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर रहेगी। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमें को भी तैनात किया गया है।
बंदी सिखों की तुरंत रिहाई और श्री गुरु ग्रंख साहिब की बेअदबी मुद्दे पर कौमी इंसाफ मोर्चा ने रैली में दाखिल होकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। जिसके चलते कई दिनों से इसे लेकर पोस्टर भी बांटे जा रहे थे। जिसके बाद पुलिस ने कौमी इंसाफ मोर्चा के कई नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा हरियाणा पुलिस ने रोहतक में सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद को भी हिरासत में लिया है। जयहिंद ने अमित शाह से रैली में जाकर गृहमंत्री से पांच सवाल पूछने की मांग की थी। जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
| चंडीगढ़। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को पंजाब और हरियाणा में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। कुछ ही देर में वह गुरदासपुर पहुंचने वाले है। पंजाब में अमित शाह की रैली से पहले कौमी इंसाफ मोर्चा के नेताओं समेत कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया है। इसके अलावा प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। हरियाणा सरकार ने गृहमंत्री की सुरक्षा को लेकर तेरह एसपी और करीब तीस डीएसपी, पांच आरएएफ की टुकड़ियों को तैनात किया है। अमित शाह की रैली को लेकर गुरदासपुर के एसएसपी हरीश दयामा ने रैली स्थल पर पहुंचकर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि गृहमंत्री की रैली को देखते हुए अन्य जिलों से भी पुलिस फोर्स को बुलाया गया है। इसके अलावा रैली स्थल के चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर रहेगी। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमें को भी तैनात किया गया है। बंदी सिखों की तुरंत रिहाई और श्री गुरु ग्रंख साहिब की बेअदबी मुद्दे पर कौमी इंसाफ मोर्चा ने रैली में दाखिल होकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। जिसके चलते कई दिनों से इसे लेकर पोस्टर भी बांटे जा रहे थे। जिसके बाद पुलिस ने कौमी इंसाफ मोर्चा के कई नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा हरियाणा पुलिस ने रोहतक में सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद को भी हिरासत में लिया है। जयहिंद ने अमित शाह से रैली में जाकर गृहमंत्री से पांच सवाल पूछने की मांग की थी। जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। |
पुणेः कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों में मास्क लगाने को लेकर असमंजस की स्थित व्याप्त है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने राज्य में मास्क को अनिवार्य बनाने का फैसला नहीं किया है, लेकिन लोगों से बंद जगहों पर मास्क का उपयोग करने की अपील की है।
पुणे में मीडिया से बात करते हुए राजेश टोपे ने कहा कि स्थानीय निकायों को भेजे गए तीन पन्नों के पत्र में कुछ शब्दों के इस्तेमाल से भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। पुणे, मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जैसे जिलों में संख्या में कोरोना के मामलों में वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। पत्र में 'जरूरी' शब्द था जिससे लगता है कि भ्रम पैदा हुआ है।
सप्ताह की शुरुआत में, मीडिया रिपोर्ट में यह बताया था कि राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों की बढ़ती संख्या के कारण बंद जगहों पर मास्क लगाना अनिवार्य है। टोपे ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि मास्क को लेकर अभी कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन लोगों से बंद जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और 10-15 दिनों के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी उन्होंने कहा कि रिपोर्ट किए जा रहे ज्यादातर कोरोना के मामले हल्के हैं। टोपे ने कहा कि जिला अधिकारियों को टीकाकरण में तेजी लाने और परीक्षण बढ़ाने के लिए कहा गया है।
| पुणेः कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों में मास्क लगाने को लेकर असमंजस की स्थित व्याप्त है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने राज्य में मास्क को अनिवार्य बनाने का फैसला नहीं किया है, लेकिन लोगों से बंद जगहों पर मास्क का उपयोग करने की अपील की है। पुणे में मीडिया से बात करते हुए राजेश टोपे ने कहा कि स्थानीय निकायों को भेजे गए तीन पन्नों के पत्र में कुछ शब्दों के इस्तेमाल से भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। पुणे, मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जैसे जिलों में संख्या में कोरोना के मामलों में वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। पत्र में 'जरूरी' शब्द था जिससे लगता है कि भ्रम पैदा हुआ है। सप्ताह की शुरुआत में, मीडिया रिपोर्ट में यह बताया था कि राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों की बढ़ती संख्या के कारण बंद जगहों पर मास्क लगाना अनिवार्य है। टोपे ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि मास्क को लेकर अभी कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन लोगों से बंद जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और दस-पंद्रह दिनों के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी उन्होंने कहा कि रिपोर्ट किए जा रहे ज्यादातर कोरोना के मामले हल्के हैं। टोपे ने कहा कि जिला अधिकारियों को टीकाकरण में तेजी लाने और परीक्षण बढ़ाने के लिए कहा गया है। |
मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री गिरिराज सिंह आज गुरुवार को खंडवा पहुंचे। जिले के आला अधिकारियों की कलेक्टोरेट सभाकक्ष में बैठक लेते हुए खंडवा में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान मंत्री गिरिराज सिंह के साथ वनमंत्री विजय शाह, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायकगण तथा कलेक्टर-एसपी सहित आला अधिकारी मौजूद रहे।
मीडिया से बात करते हुए मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के 117 जिलों को चिन्हित किया था, जो किसी न किसी रूप में विकास से दूर हैं। उन जिलों को चिन्हित कर विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया है जिन्हें आकांक्षी जिलों के रूप में नामांकित किया गया है।
इसी तरह खंडवा में भी आकांक्षी जिले के तहत होने वाले कामों को लेकर आज समीक्षा की गई जिसके माध्यम से सभी अधिकारियों को ब्लॉक लेवल पर आकांक्षी ब्लॉक बनाने के भी निर्देश दिए हैं। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि विकास की मुख्य धारा से हर गांव जुड़े और हर गांव में रहने वाले लोगों का विकास हो।
| मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री गिरिराज सिंह आज गुरुवार को खंडवा पहुंचे। जिले के आला अधिकारियों की कलेक्टोरेट सभाकक्ष में बैठक लेते हुए खंडवा में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान मंत्री गिरिराज सिंह के साथ वनमंत्री विजय शाह, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायकगण तथा कलेक्टर-एसपी सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। मीडिया से बात करते हुए मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के एक सौ सत्रह जिलों को चिन्हित किया था, जो किसी न किसी रूप में विकास से दूर हैं। उन जिलों को चिन्हित कर विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया है जिन्हें आकांक्षी जिलों के रूप में नामांकित किया गया है। इसी तरह खंडवा में भी आकांक्षी जिले के तहत होने वाले कामों को लेकर आज समीक्षा की गई जिसके माध्यम से सभी अधिकारियों को ब्लॉक लेवल पर आकांक्षी ब्लॉक बनाने के भी निर्देश दिए हैं। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि विकास की मुख्य धारा से हर गांव जुड़े और हर गांव में रहने वाले लोगों का विकास हो। |
दिल्ली से सटे नोएडा के स्कूलों में नर्सरी एडमिशन के फॉर्म उपलब्ध हैं। छह किमी के दायरे में रहने वाले दिल्ली के अभिभावकों के अलावा नोएडा के अभिभावक इन स्कूलों से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं।
सेक्टर-12 स्थित मॉडर्न स्कूल में नर्सरी के फॉर्म उपलब्ध हैं। मयूर विहार, कोंडली, अशोक नगर समेत आसपास रहने वाले पूर्वी दिल्ली के अभिभावक यहां से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं।
सेक्टर-11 स्थित नेहरू इंटरनेशनल स्कूल में भी कुछ सीटें खाली हैं। हालांकि नेबरहुड क्राइटेरिया के तहत स्कूल में नोएडा से सटे क्षेत्रों के लिए सीटें रिजर्व करने का कोई नियम नहीं है।
सेक्टर-19 स्थित मैरी गोल्ड स्कूल के प्रिंसिपल विक्रम शारदा ने बताया कि नर्सरी में आठ से दस सीटें खाली हैं।
नेहरू इंटरनेशनल स्कूल में नर्सरी में ईडब्लूएस की 25 सीटें खाली हैं। प्रिंसिपल एलीना दयाल ने बताया कि हर साल यह सीटें खाली रहती हैं।
प्राधिकरण और जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी मांगी गई है कि ईडब्लूएस कोटे से बच्चे दाखिले के लिए स्कूल नहीं आ रहे हैं।
ऐसे में क्या किया जाए? अभी तक पत्र का जवाब नहीं मिला है। यदि जनवरी तक जवाब नहीं मिलता है तो फरवरी में सामान्य श्रेणी के बच्चों के लिए दाखिला खोल दिया जाएगा।
| दिल्ली से सटे नोएडा के स्कूलों में नर्सरी एडमिशन के फॉर्म उपलब्ध हैं। छह किमी के दायरे में रहने वाले दिल्ली के अभिभावकों के अलावा नोएडा के अभिभावक इन स्कूलों से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। सेक्टर-बारह स्थित मॉडर्न स्कूल में नर्सरी के फॉर्म उपलब्ध हैं। मयूर विहार, कोंडली, अशोक नगर समेत आसपास रहने वाले पूर्वी दिल्ली के अभिभावक यहां से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। सेक्टर-ग्यारह स्थित नेहरू इंटरनेशनल स्कूल में भी कुछ सीटें खाली हैं। हालांकि नेबरहुड क्राइटेरिया के तहत स्कूल में नोएडा से सटे क्षेत्रों के लिए सीटें रिजर्व करने का कोई नियम नहीं है। सेक्टर-उन्नीस स्थित मैरी गोल्ड स्कूल के प्रिंसिपल विक्रम शारदा ने बताया कि नर्सरी में आठ से दस सीटें खाली हैं। नेहरू इंटरनेशनल स्कूल में नर्सरी में ईडब्लूएस की पच्चीस सीटें खाली हैं। प्रिंसिपल एलीना दयाल ने बताया कि हर साल यह सीटें खाली रहती हैं। प्राधिकरण और जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी मांगी गई है कि ईडब्लूएस कोटे से बच्चे दाखिले के लिए स्कूल नहीं आ रहे हैं। ऐसे में क्या किया जाए? अभी तक पत्र का जवाब नहीं मिला है। यदि जनवरी तक जवाब नहीं मिलता है तो फरवरी में सामान्य श्रेणी के बच्चों के लिए दाखिला खोल दिया जाएगा। |
उसीसे दूसरे के हृदय के भावोको परखता है। घोर अपराधी भी वचनोके द्वारा अपने आन्तरिक अभि प्राय को प्रकट कर क्षमापात्र बन जाता है । तथा एक निरपराधी भी अपने कटुभाषणके द्वारा सर्वसाधा रण की दृष्टि मे भी अपराधी बन जाता है । मधुरभाषियो की प्रकृति समान न होने पर भी परस्पर मेल खा जाती है, समान प्रकृतिवाले व्यक्तियो मे भी यदि किसी प्रसगमे कठोर शब्दो द्वारा वार्ता हो जावे तो विरोध उत्पन्न हो जाता है । बडासे बडा अपराधी अपने मधुर भाषणसे अपने अपराधको माफ करा लेता है ।
मे वचन का बहुत मूल्य है, वचन अमृत है यदि हित मित और प्रिय हो । श्री तीर्थंकर भगवान् जन्मके समय से जो १० अतिशय ( विशेषताए जिनके कारण वे सर्वोच्च माने जाते है ) होते हैं उनमे प्रियहित वचन भी एक महान् अतिशय माना गया है। इससे यह स्पष्ट प्रमाणित हो जाता है कि भगवान् तीर्थंकर देव अनेको गुणोके द्वारा यद्यपि विभूषित थे तथापि ससारके समस्त प्राणियोके लिए वे इसी लिये महान् बन सके कि उनके वचन जन्म से ही प्रिय और हितकारक थे ।
भगवान्की दिव्यध्वनिका महत्त्व उसकी गंभीरता सर्वार्थप्रतिपादकत्वादि गुणोके ही कारण नही प्रकट हुआ बल्कि इसलिए महत्त्व प्रकट हुआ कि उनकी वाणी इतनी मधुर थी कि उसे सुनने के लिए देवता भी तरसते थे और साधारण प्राणियोमे पशु-पक्षी भी उसे सुनने के लिए आकर्षित होते थे । यह आकर्षण तत्त्वप्रकाशनके कारण नही था क्योकि सर्वसाधारण मनुष्य, देव, या पशुपक्षी तत्त्ववार्ताको उतना समझते नही, किन्तु उनकी प्रिय मधुर हितकारक वाणी मे यह आश्चर्यकारी आकर्षण था ।
मुनियो के चारित्र मे वचन गुप्ति और भाषा समिति को प्रधान स्थान प्राप्त है। इसका अर्थ यह है कि या तो वचन ही न बोलें और बोलें तो प्रिय, हित वचन थोडे बोलें । जो चीज अपने सम्पूर्ण रूपमे तीर्थंकरको भी महत्त्व प्रदान करती है और जो मुनि जीवनमे भी अपना प्रधान स्थान रखती है वह गृहस्थ जीवनके लिए क्यो न उपयोगी होगी। गृहस्थका चारित्र भी मुनिके चारित्रका एकदेशरूप है इसलिए गृहस्थ को भी उचित है कि यदि वचन बोले तो हित, मित और प्रिय बोले, अन्यथा भाषण ही न कर मौन रखे । यह मधुर भाषण पद्धति जिस तरह बाहिरी ससारमे हमारे जीवनको सुखी बनाती है इसी तरह इसका सफल प्रयोग घरू ससारके प्राणियोमे भी सम्पूर्ण कष्ट और सन्तापोको दूर करनेको महौषधि है । वर्तमान समयमे घर-घरमे कलह देखनेमे आती है उसका एकमात्र कारण अप्रिय कटुक वार्तालाप ही है । पुरुष वर्ग यदि शिक्षित होता है तो वह अपनी विद्वत्ताके अभिमानके कारण अपनी अशिक्षित पत्नीका निरन्तर अनादर करता है, उससे प्रियसलाप नहीं करता । इसी तरह यदि स्त्रिया अशिक्षित होती हैं तो वे शिष्ट भाषणका नाम तक नही जानती। स्त्री वर्गके शिक्षित और पुरुषवर्गके अशिक्षित होने पर भी ठीक यही दशा होती है । दम्पतिको उचित है कि एक दूसरेको उत्तम शिक्षा देकर प्रिय भाषण द्वारा सुखी बनावे । वे तभी ससारमे उच्च आदर्शका सृजन कर सकते हैं ।
परमार्थ सिद्धि के लिए जैसे साधु सस्था है वैसे ही इहलौकिक उन्नतिके लिये गृहस्थ जीवन अगीकार करना भी आवश्यक है । ये दोनो श्रेणिया प्राणी को यथायोग्य सुखी बनानेके लिये हैं। इनके अतिरिक्त तीसरी श्रेणो मध्यममार्गियोकी है जो गृहस्थ जीवनका क्रमशः त्यागकर साधु मार्ग पर जाना चाहते हैं । यह श्रेणी भी ग्राह्य है। इन तीनोके अतिरिक्त अनियमित और असयत जीवन व्यतीत करनेवाले, एक दूसरेके सुख दुखका साथ न देनेवाले, दूसरोको कष्ट पहुँचाकर अपना स्वार्थ साधन करनेवाले, अप्रिय सलापके द्वारा दूसरोको कष्ट पहुँचाकर खुश होनेवाले लोगोकी श्रेणी ग्रहण करने योग्य नहो। ऐसे लोगोका गृहस्थ जीवन कष्टमय व्यतीत होता है । अप्रियसलापी स्त्री पुरुषोमे परस्पर वात-वातमे विरोध | उसीसे दूसरे के हृदय के भावोको परखता है। घोर अपराधी भी वचनोके द्वारा अपने आन्तरिक अभि प्राय को प्रकट कर क्षमापात्र बन जाता है । तथा एक निरपराधी भी अपने कटुभाषणके द्वारा सर्वसाधा रण की दृष्टि मे भी अपराधी बन जाता है । मधुरभाषियो की प्रकृति समान न होने पर भी परस्पर मेल खा जाती है, समान प्रकृतिवाले व्यक्तियो मे भी यदि किसी प्रसगमे कठोर शब्दो द्वारा वार्ता हो जावे तो विरोध उत्पन्न हो जाता है । बडासे बडा अपराधी अपने मधुर भाषणसे अपने अपराधको माफ करा लेता है । मे वचन का बहुत मूल्य है, वचन अमृत है यदि हित मित और प्रिय हो । श्री तीर्थंकर भगवान् जन्मके समय से जो दस अतिशय होते हैं उनमे प्रियहित वचन भी एक महान् अतिशय माना गया है। इससे यह स्पष्ट प्रमाणित हो जाता है कि भगवान् तीर्थंकर देव अनेको गुणोके द्वारा यद्यपि विभूषित थे तथापि ससारके समस्त प्राणियोके लिए वे इसी लिये महान् बन सके कि उनके वचन जन्म से ही प्रिय और हितकारक थे । भगवान्की दिव्यध्वनिका महत्त्व उसकी गंभीरता सर्वार्थप्रतिपादकत्वादि गुणोके ही कारण नही प्रकट हुआ बल्कि इसलिए महत्त्व प्रकट हुआ कि उनकी वाणी इतनी मधुर थी कि उसे सुनने के लिए देवता भी तरसते थे और साधारण प्राणियोमे पशु-पक्षी भी उसे सुनने के लिए आकर्षित होते थे । यह आकर्षण तत्त्वप्रकाशनके कारण नही था क्योकि सर्वसाधारण मनुष्य, देव, या पशुपक्षी तत्त्ववार्ताको उतना समझते नही, किन्तु उनकी प्रिय मधुर हितकारक वाणी मे यह आश्चर्यकारी आकर्षण था । मुनियो के चारित्र मे वचन गुप्ति और भाषा समिति को प्रधान स्थान प्राप्त है। इसका अर्थ यह है कि या तो वचन ही न बोलें और बोलें तो प्रिय, हित वचन थोडे बोलें । जो चीज अपने सम्पूर्ण रूपमे तीर्थंकरको भी महत्त्व प्रदान करती है और जो मुनि जीवनमे भी अपना प्रधान स्थान रखती है वह गृहस्थ जीवनके लिए क्यो न उपयोगी होगी। गृहस्थका चारित्र भी मुनिके चारित्रका एकदेशरूप है इसलिए गृहस्थ को भी उचित है कि यदि वचन बोले तो हित, मित और प्रिय बोले, अन्यथा भाषण ही न कर मौन रखे । यह मधुर भाषण पद्धति जिस तरह बाहिरी ससारमे हमारे जीवनको सुखी बनाती है इसी तरह इसका सफल प्रयोग घरू ससारके प्राणियोमे भी सम्पूर्ण कष्ट और सन्तापोको दूर करनेको महौषधि है । वर्तमान समयमे घर-घरमे कलह देखनेमे आती है उसका एकमात्र कारण अप्रिय कटुक वार्तालाप ही है । पुरुष वर्ग यदि शिक्षित होता है तो वह अपनी विद्वत्ताके अभिमानके कारण अपनी अशिक्षित पत्नीका निरन्तर अनादर करता है, उससे प्रियसलाप नहीं करता । इसी तरह यदि स्त्रिया अशिक्षित होती हैं तो वे शिष्ट भाषणका नाम तक नही जानती। स्त्री वर्गके शिक्षित और पुरुषवर्गके अशिक्षित होने पर भी ठीक यही दशा होती है । दम्पतिको उचित है कि एक दूसरेको उत्तम शिक्षा देकर प्रिय भाषण द्वारा सुखी बनावे । वे तभी ससारमे उच्च आदर्शका सृजन कर सकते हैं । परमार्थ सिद्धि के लिए जैसे साधु सस्था है वैसे ही इहलौकिक उन्नतिके लिये गृहस्थ जीवन अगीकार करना भी आवश्यक है । ये दोनो श्रेणिया प्राणी को यथायोग्य सुखी बनानेके लिये हैं। इनके अतिरिक्त तीसरी श्रेणो मध्यममार्गियोकी है जो गृहस्थ जीवनका क्रमशः त्यागकर साधु मार्ग पर जाना चाहते हैं । यह श्रेणी भी ग्राह्य है। इन तीनोके अतिरिक्त अनियमित और असयत जीवन व्यतीत करनेवाले, एक दूसरेके सुख दुखका साथ न देनेवाले, दूसरोको कष्ट पहुँचाकर अपना स्वार्थ साधन करनेवाले, अप्रिय सलापके द्वारा दूसरोको कष्ट पहुँचाकर खुश होनेवाले लोगोकी श्रेणी ग्रहण करने योग्य नहो। ऐसे लोगोका गृहस्थ जीवन कष्टमय व्यतीत होता है । अप्रियसलापी स्त्री पुरुषोमे परस्पर वात-वातमे विरोध |
नई दिल्ली। राजस्थान और तेलंगाना का मतदान खत्म होते ही पाँचों राज्यों के एग्जिट पोल जारी कर दिए गए। सभी की नजरें मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर टिकी थी, जहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। सभी एग्जिट पोल के हिसाब से जानिए कहां किस पार्टी की सरकार बनती नजर आ रही है।
मध्यप्रदेशः 10 एग्जिट पोल, 4 में करीबी मुकाबला, 4 भाजपा और 2 कांग्रेस के पक्ष में मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर 28 नवंबर को मतदान हुआ था। यहां भाजपा और कांग्रेस पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी हैं, वहीं तीसरी ताकत के रूप में बसपा व अन्य ने दम लगाया था। प्रदेश को लेकर जारी 4 एग्जिट पोल में करीबी मुकाबला बताया गया है, वहीं 4 एग्जिट पोल प्रदेश में भाजपा और 2 कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना बता रहे हैं।
सभी एग्जिट पोल पर नजर डालें तो इंडिया न्यूज-नेता एग्जिट पोल, इंडिया टुडे- एक्सिस माय इंडिया, न्यूज 24 और न्यूज नेशन ने मध्य प्रदेश में करीबी मुकाबला बताया है। वहीं एबीपी और रिपब्लिक-सी वोटर सर्वे ने कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा सीटें जीतते हुए बताया हैं, दूसरी ओर टाइम्स नाउ- सीएनएक्स, रिपब्लिक-जन की बात, जी न्यूज और इंडिया टीवी ने भाजपा को ज्यादा सीटें जीतने वाला बताया है।
छत्तीसगढ़ः 10 में से 6 एग्जिट पोल ने दिखाई भाजपा की जीत छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सीटें हैं, जिनके लिए दो चरणों, 12 और 20 नवंबर, को वोटिंग हुई थी। 10 बड़ी और प्रमुख एजेंसियों द्वारा दिखाए गए एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है तो 4 पोल में कांग्रेस को ज्यादा सीटें दी गई हैं। संख्या से लिहाज से एग्जिट पोल को देखें तो छत्तीसगढ़ में लगातार चौथी बार भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है, वहीं कुछ एग्जिट पोल दावा कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी।
राजस्थानः 8 एग्जिट पोल बता रहे बन सकती है कांग्रेस की सरकार राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं, लेकिन शुक्रवार को 199 सीटों पर वोटिंग हुई। 8 एग्जिट पोल ने राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनती नजर आ रही है और एक पोल यहां मुकाबला बता रहा है। इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया, न्यूज 24, न्यूज नेशन, न्यूज एक्स, इंडिया टीवी, टाइम्स नाउ-सीएनएक्स, न्यूज 24 और एबीपी के एग्जिट पोल में राजस्थन में कांग्रेस की सरकार बनती नजर आ रही है। वहीं रिपब्लिक टीवी राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा में करीबी मुकाबला बता रहा है।
तेलंगानाः एग्जिट पोल में टीआरएस को स्पष्ट बहुमत तेलंगाना में कुल 119 सीटे हैं, जिनके लिए शुक्रवार को वोट डाले गए। एग्जिट पोल के मुताबिक, यहां टीआरएस को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। यानी चंद्रशेखर राव सत्ता में वापसी कर रहे हैं। टाइम्स नाउ-CNX के मुताबिक तेलंगाना में 119 में से TRS को 66, कांग्रेस को 37 और भाजपा को 7 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इस तरह से सत्तारुढ़ TRS की सत्ता में वापसी हो रही है।
मिजोरमः किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिजोरम की 40 सीटों पर 28 नवंबर को मतदान हुआ था। यहां कोई एग्जिट पोल किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत देता नजर नहीं आ रहा है। टाइम्स नाउ-CNX के मुताबिक मिजो नेशनल फ्रंट को 18, कांग्रेस को 16 और अन्य के खाते में 6 सीटें जाती दिखाई दे रही है। रिपब्लिक-सी वोटर के एग्जिट पोल के आंकड़ों के मुताबिक मिजोरम नेशनल फ्रंट को 16-20, कांग्रेस को 14-18 और अन्य के खाते में 0-3 सीटें मिल सकती है।
| नई दिल्ली। राजस्थान और तेलंगाना का मतदान खत्म होते ही पाँचों राज्यों के एग्जिट पोल जारी कर दिए गए। सभी की नजरें मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर टिकी थी, जहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। सभी एग्जिट पोल के हिसाब से जानिए कहां किस पार्टी की सरकार बनती नजर आ रही है। मध्यप्रदेशः दस एग्जिट पोल, चार में करीबी मुकाबला, चार भाजपा और दो कांग्रेस के पक्ष में मध्यप्रदेश की दो सौ तीस विधानसभा सीटों पर अट्ठाईस नवंबर को मतदान हुआ था। यहां भाजपा और कांग्रेस पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी हैं, वहीं तीसरी ताकत के रूप में बसपा व अन्य ने दम लगाया था। प्रदेश को लेकर जारी चार एग्जिट पोल में करीबी मुकाबला बताया गया है, वहीं चार एग्जिट पोल प्रदेश में भाजपा और दो कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना बता रहे हैं। सभी एग्जिट पोल पर नजर डालें तो इंडिया न्यूज-नेता एग्जिट पोल, इंडिया टुडे- एक्सिस माय इंडिया, न्यूज चौबीस और न्यूज नेशन ने मध्य प्रदेश में करीबी मुकाबला बताया है। वहीं एबीपी और रिपब्लिक-सी वोटर सर्वे ने कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा सीटें जीतते हुए बताया हैं, दूसरी ओर टाइम्स नाउ- सीएनएक्स, रिपब्लिक-जन की बात, जी न्यूज और इंडिया टीवी ने भाजपा को ज्यादा सीटें जीतने वाला बताया है। छत्तीसगढ़ः दस में से छः एग्जिट पोल ने दिखाई भाजपा की जीत छत्तीसगढ़ विधानसभा में नब्बे सीटें हैं, जिनके लिए दो चरणों, बारह और बीस नवंबर, को वोटिंग हुई थी। दस बड़ी और प्रमुख एजेंसियों द्वारा दिखाए गए एग्जिट पोल में से छः में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है तो चार पोल में कांग्रेस को ज्यादा सीटें दी गई हैं। संख्या से लिहाज से एग्जिट पोल को देखें तो छत्तीसगढ़ में लगातार चौथी बार भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है, वहीं कुछ एग्जिट पोल दावा कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी। राजस्थानः आठ एग्जिट पोल बता रहे बन सकती है कांग्रेस की सरकार राजस्थान विधानसभा में कुल दो सौ सीटें हैं, लेकिन शुक्रवार को एक सौ निन्यानवे सीटों पर वोटिंग हुई। आठ एग्जिट पोल ने राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनती नजर आ रही है और एक पोल यहां मुकाबला बता रहा है। इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया, न्यूज चौबीस, न्यूज नेशन, न्यूज एक्स, इंडिया टीवी, टाइम्स नाउ-सीएनएक्स, न्यूज चौबीस और एबीपी के एग्जिट पोल में राजस्थन में कांग्रेस की सरकार बनती नजर आ रही है। वहीं रिपब्लिक टीवी राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा में करीबी मुकाबला बता रहा है। तेलंगानाः एग्जिट पोल में टीआरएस को स्पष्ट बहुमत तेलंगाना में कुल एक सौ उन्नीस सीटे हैं, जिनके लिए शुक्रवार को वोट डाले गए। एग्जिट पोल के मुताबिक, यहां टीआरएस को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। यानी चंद्रशेखर राव सत्ता में वापसी कर रहे हैं। टाइम्स नाउ-CNX के मुताबिक तेलंगाना में एक सौ उन्नीस में से TRS को छयासठ, कांग्रेस को सैंतीस और भाजपा को सात सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इस तरह से सत्तारुढ़ TRS की सत्ता में वापसी हो रही है। मिजोरमः किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिजोरम की चालीस सीटों पर अट्ठाईस नवंबर को मतदान हुआ था। यहां कोई एग्जिट पोल किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत देता नजर नहीं आ रहा है। टाइम्स नाउ-CNX के मुताबिक मिजो नेशनल फ्रंट को अट्ठारह, कांग्रेस को सोलह और अन्य के खाते में छः सीटें जाती दिखाई दे रही है। रिपब्लिक-सी वोटर के एग्जिट पोल के आंकड़ों के मुताबिक मिजोरम नेशनल फ्रंट को सोलह-बीस, कांग्रेस को चौदह-अट्ठारह और अन्य के खाते में शून्य-तीन सीटें मिल सकती है। |
डाक विभाग (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक) द्वारा नई पहल की गई है। अब जीवन प्रमाण के लिए अपने भारतीय डाक विभाग के इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा पेंशनभोगियों के लिए एक बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल सेवा की शुरुआत की गई हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य सरकारी संस्थाओं के पेंशनभोगी इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं, जिसके अंतर्गत डाकिया घर पर ही मात्र पांच मिनट में ही बायोमेट्रिक द्वारा जीवन प्रमाण पत्र जारी कर सकता हैं। इस पहल के द्वारा अब पेंशनभोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है एवं इस तरह उन्हें अनावश्यक बाधाओं का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है।
| डाक विभाग द्वारा नई पहल की गई है। अब जीवन प्रमाण के लिए अपने भारतीय डाक विभाग के इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा पेंशनभोगियों के लिए एक बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल सेवा की शुरुआत की गई हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य सरकारी संस्थाओं के पेंशनभोगी इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं, जिसके अंतर्गत डाकिया घर पर ही मात्र पांच मिनट में ही बायोमेट्रिक द्वारा जीवन प्रमाण पत्र जारी कर सकता हैं। इस पहल के द्वारा अब पेंशनभोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है एवं इस तरह उन्हें अनावश्यक बाधाओं का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। |
इंदौर में पत्नी पति की गंभीर स्थिति का सुन सदमे में चली गई. दो घंटे में परिवार बिखर गया. (सांकेतिक तस्वीर)
रांची. झारखंड में एक दिन में कोरोना से मौत का रिकॉर्ड मंगलवार को टूट गया. राज्यभर में आज 29 लोगों की इलाज के दौरान कोरोना से मौत हो गई. अभी तक राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1261 हो गई है. आज बोकारो में दो, पूर्वी सिंहभूम में छह, रांची में छह, हजारीबाग में चार, रामगढ़ और सिमडेगा में तीन-तीन तो धनबाद, गोड्डा, जामताड़ा, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम में एक-एक मौत कोरोना की वजह से हो गई. पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 2844 नए कोरोना केस सामने आए हैं.
राज्य में आज 31, 311 लोगों की कोरोना जांच की गई. 2844 लोग ऐसे मिले जिनमें कोरोना का संक्रमण था. सबसे ज्यादा 1049 संक्रमित रांची में मिले. वहीं पूर्वी सिंघभूम में 434, हजारीबाग में 209, धनबाद में 117, रामगढ़ में 91 ऐसे प्रमुख जिले रहें जहां सबसे ज्यादा केस मिले. प्रदेश में आज जहां 2844 नए कोरोना संक्रमित मिले वहीं 1003 संक्रमित ठीक भी हुए. राज्य में अभी तक 01 लाख 26 हजार 178 लोगों ने कोरोना को मात दी है. 17 हजार 155 एक्टिव केस हैं.
झारखंड में कोरोना संक्रमण की रफ्तार और तेज हो गई है. राष्ट्रीय औसत 0. 82% की तुलना में राज्य में संक्रमण का 7डेज ग्रोथ 01. 29% से भी बढ़कर 1. 43% हो गया है. इसी तरह 7डेज डबलिंग भी घटकर 54. 12 दिन से घटकर 48. 80 दिन का रह गया है. वही इसका राष्ट्रीय औसत 84. 84 दिन है. रिकवरी रेट भी राष्ट्रीय औसत से नीचे चले जाना चिंता बढ़ाने वाला है. राज्य में कोरोना का रिकवरी रेट 88. 3% से घटकर 87. 62% रह गया है जबकि राष्ट्रीय औसत उससे ज्यादा 89. 50 % है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कोरोना कैसे भयावह रूप लेता जा रहा है.
रांची के सभी निजी अस्पतालों के साथ डीसी की वर्चुअल मीटिंग में डीसी रांची ने सभी अस्पताल प्रबंधकों को राज्य सरकार के निर्देशानुसार 50% बेड कोरोना मरीजों हेतु आरक्षित रखने सम्बन्धी अनुपालन की समीक्षा की. चार अस्पताल संचालकों को डीडीसी ने नोटिस जारी किया. मेडिका हॉस्पिटल, मेदान्ता हॉस्पिटल , सीसी एल हॉस्पिटल गांधीनगर और सेवा सदन को 50 % बेड रिज़र्व नहीं रखने पर शो कॉज जारी किया गया. डीसी ने साफ किया कि सभी अस्पताल जल्द से जल्द 50 बेड आरक्षित करने का दें रिपोर्ट अन्यथा डीएम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी.
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| इंदौर में पत्नी पति की गंभीर स्थिति का सुन सदमे में चली गई. दो घंटे में परिवार बिखर गया. रांची. झारखंड में एक दिन में कोरोना से मौत का रिकॉर्ड मंगलवार को टूट गया. राज्यभर में आज उनतीस लोगों की इलाज के दौरान कोरोना से मौत हो गई. अभी तक राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर एक हज़ार दो सौ इकसठ हो गई है. आज बोकारो में दो, पूर्वी सिंहभूम में छह, रांची में छह, हजारीबाग में चार, रामगढ़ और सिमडेगा में तीन-तीन तो धनबाद, गोड्डा, जामताड़ा, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम में एक-एक मौत कोरोना की वजह से हो गई. पिछले चौबीस घंटाटे में रिकॉर्ड दो हज़ार आठ सौ चौंतालीस नए कोरोना केस सामने आए हैं. राज्य में आज इकतीस, तीन सौ ग्यारह लोगों की कोरोना जांच की गई. दो हज़ार आठ सौ चौंतालीस लोग ऐसे मिले जिनमें कोरोना का संक्रमण था. सबसे ज्यादा एक हज़ार उनचास संक्रमित रांची में मिले. वहीं पूर्वी सिंघभूम में चार सौ चौंतीस, हजारीबाग में दो सौ नौ, धनबाद में एक सौ सत्रह, रामगढ़ में इक्यानवे ऐसे प्रमुख जिले रहें जहां सबसे ज्यादा केस मिले. प्रदेश में आज जहां दो हज़ार आठ सौ चौंतालीस नए कोरोना संक्रमित मिले वहीं एक हज़ार तीन संक्रमित ठीक भी हुए. राज्य में अभी तक एक लाख छब्बीस हजार एक सौ अठहत्तर लोगों ने कोरोना को मात दी है. सत्रह हजार एक सौ पचपन एक्टिव केस हैं. झारखंड में कोरोना संक्रमण की रफ्तार और तेज हो गई है. राष्ट्रीय औसत शून्य. बयासी% की तुलना में राज्य में संक्रमण का सातडेज ग्रोथ एक. उनतीस% से भी बढ़कर एक. तैंतालीस% हो गया है. इसी तरह सातडेज डबलिंग भी घटकर चौवन. बारह दिन से घटकर अड़तालीस. अस्सी दिन का रह गया है. वही इसका राष्ट्रीय औसत चौरासी. चौरासी दिन है. रिकवरी रेट भी राष्ट्रीय औसत से नीचे चले जाना चिंता बढ़ाने वाला है. राज्य में कोरोना का रिकवरी रेट अठासी. तीन% से घटकर सत्तासी. बासठ% रह गया है जबकि राष्ट्रीय औसत उससे ज्यादा नवासी. पचास % है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कोरोना कैसे भयावह रूप लेता जा रहा है. रांची के सभी निजी अस्पतालों के साथ डीसी की वर्चुअल मीटिंग में डीसी रांची ने सभी अस्पताल प्रबंधकों को राज्य सरकार के निर्देशानुसार पचास% बेड कोरोना मरीजों हेतु आरक्षित रखने सम्बन्धी अनुपालन की समीक्षा की. चार अस्पताल संचालकों को डीडीसी ने नोटिस जारी किया. मेडिका हॉस्पिटल, मेदान्ता हॉस्पिटल , सीसी एल हॉस्पिटल गांधीनगर और सेवा सदन को पचास % बेड रिज़र्व नहीं रखने पर शो कॉज जारी किया गया. डीसी ने साफ किया कि सभी अस्पताल जल्द से जल्द पचास बेड आरक्षित करने का दें रिपोर्ट अन्यथा डीएम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. . |
सशस्त्र बलों में प्रवेश करने से पहले डीयूके (स्वयंसेवक यूक्रेनी कोर) की उन्नत इकाइयों की तैयारी के संबंध में, दुश्मन के साथ सीधे संपर्क की रेखा पर हमारे लड़ाकू नहीं हैं।
पहले यह बताया गया था कि "राइट सेक्टर" के उग्रवादियों - रूस द्वारा चरमपंथी के रूप में मान्यता प्राप्त एक संगठन - यूक्रेन के सशस्त्र बलों का हिस्सा होगा, और स्वायत्त बन जाएगा। यूक्रेनी सांसदों के नेता यरोश को सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ में एक पद के लिए नियुक्त किया जाता है, और इस पद को जनरल स्टाफ मुजेंको के प्रमुख के सीधे जमा करने से हटा दिया गया है।
कानून प्रवर्तन अधिकारियों की प्रेस सेवा की रिपोर्टों के आधार पर, यह स्पष्ट हो जाता है कि अधिकार क्षेत्र की इकाइयां तुरंत एएफयू इकाइयों की संख्या में स्थानांतरित होने के तुरंत बाद डोनबास में वापस आ सकती हैं।
यह तथ्य कि पीएस आतंकवादी यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सैनिकों के रूप में पहचाने जाते हैं, साथ ही साथ यरोश के सशस्त्र बलों के कमांड स्टाफ में यूक्रेन के सशस्त्र बल का परिचय देते हैं कि वर्तमान यूक्रेनी सरकार सभी धारियों के कट्टरपंथियों की तलाश कर रही है और मिन्स्क समझौतों के पत्रों का पालन करने का इरादा नहीं रखती है, जो जरूरत को पूरा करती हैं। संरचनाओं। अब कीव अवैध सशस्त्र समूहों को "कानूनी" बनाता है।
| सशस्त्र बलों में प्रवेश करने से पहले डीयूके की उन्नत इकाइयों की तैयारी के संबंध में, दुश्मन के साथ सीधे संपर्क की रेखा पर हमारे लड़ाकू नहीं हैं। पहले यह बताया गया था कि "राइट सेक्टर" के उग्रवादियों - रूस द्वारा चरमपंथी के रूप में मान्यता प्राप्त एक संगठन - यूक्रेन के सशस्त्र बलों का हिस्सा होगा, और स्वायत्त बन जाएगा। यूक्रेनी सांसदों के नेता यरोश को सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ में एक पद के लिए नियुक्त किया जाता है, और इस पद को जनरल स्टाफ मुजेंको के प्रमुख के सीधे जमा करने से हटा दिया गया है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों की प्रेस सेवा की रिपोर्टों के आधार पर, यह स्पष्ट हो जाता है कि अधिकार क्षेत्र की इकाइयां तुरंत एएफयू इकाइयों की संख्या में स्थानांतरित होने के तुरंत बाद डोनबास में वापस आ सकती हैं। यह तथ्य कि पीएस आतंकवादी यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सैनिकों के रूप में पहचाने जाते हैं, साथ ही साथ यरोश के सशस्त्र बलों के कमांड स्टाफ में यूक्रेन के सशस्त्र बल का परिचय देते हैं कि वर्तमान यूक्रेनी सरकार सभी धारियों के कट्टरपंथियों की तलाश कर रही है और मिन्स्क समझौतों के पत्रों का पालन करने का इरादा नहीं रखती है, जो जरूरत को पूरा करती हैं। संरचनाओं। अब कीव अवैध सशस्त्र समूहों को "कानूनी" बनाता है। |
Happy Birthday Sunny Deol: बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल 19 अक्टूबर को यानी आज अपना 64वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. सनी देओल (Sunny Deol) ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने शानदार अभिनय के दम पर एक अलग पहचान बनाई है. सनी पापा धर्मेंद्र (Dharmendra) के आज्ञाकारी, बॉबी के आदर्शवादी बड़े भाई, पत्नी-बच्चों के प्यारे हैं. मतलब वो एक कम्प्लीट फैमिली मैन हैं. आइये जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके हेमा मालिनी और ईशा देओल संग रिश्ते के बारे में!
सनी देओल का असली नाम अजय देओल है. उन्होंने अपने फिल्मी करियर अमृता सिंह (Amrita Singh) के साथ 1983 में फिल्म बेताब से शुरू किया. बेताब में सनी को खूब पसंद किया गया था. सनी देओल को लेकर कहते हैं कि वो एक फैमिली मैन हैं. सनी अपने पिता धर्मेंद्र को सबकुछ मानते हैं. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि पापा मेरे लिए सबसे बढ़कर हैं. वो सबसे हैंडसम और सबसे अच्छा काम करने वालों में से एक हैं.
सनी देओल अपने पिता धर्मेंद्र (Dharmendra) को लेकर बताते हैं कि वो एक ऐसे इंसान हैं उनके लिए कोई काम नहीं जो वो ना कर पाएं. वो किसी भी चीज से कभी घबराते नहीं हैं. अगर उनके हिसाब से कोई बात गलत है तो है, सही है तो है.
वहीं अगर भाई की बात की जाए तो सनी देओल अपने छोटे भाई बॉबी देओल के भी बेहद करीब हैं. सनी अपने भाई के प्रति जरूरत से ज्यादा हिफाजती हैं और इसके लिए उन्हें अफसोस भी होता है. उन्होंने बताया कि भाइयों के लिए मेरा जल्दी सोने चले जाना ही डिसीप्लीन है. लेकिन मेरे लिए वो जिंदगी जीने का तरीका है. मुझे सुबह उठना और उठकर शूटिंग पर जाना बेहद पसंद है.
अगर बात सनी देओल और ईशा देओल के रिश्ते की की जाए तो दोनों भाई-बहनों के बीच हमेशा से ही 36 का आंकड़ा बताया जाता है. सनी और ईशा भले ही मुंबई में रहते हैं लेकिन अक्सर ये देखने को मिलता है कि सनी देओल अपनी सौतेली बहन ईशा देओल के साथ बहुत कम स्पॉट किए जानते हैं. हालांकि अफवाहे ये भी है कि सनी देओल और ईशा देओल बीच 36 का आंकड़ा रहता है.
ईशा और सनी का परिवार पास में ही रहता है. दोनों के घर बहुत नजदीक हैं. लेकिन इसके बावजूद भी दोनों के रिश्ते मधुर नहीं हैं. इतना ही नहीं जब जब ईशा देओल की शादी हुई थी तब भी सनी देओल, बॉबी देओल और प्रकाश कौर में से कोई भी उनकी शादी में शामिल नहीं था.
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| Happy Birthday Sunny Deol: बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल उन्नीस अक्टूबर को यानी आज अपना चौंसठवां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. सनी देओल ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने शानदार अभिनय के दम पर एक अलग पहचान बनाई है. सनी पापा धर्मेंद्र के आज्ञाकारी, बॉबी के आदर्शवादी बड़े भाई, पत्नी-बच्चों के प्यारे हैं. मतलब वो एक कम्प्लीट फैमिली मैन हैं. आइये जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके हेमा मालिनी और ईशा देओल संग रिश्ते के बारे में! सनी देओल का असली नाम अजय देओल है. उन्होंने अपने फिल्मी करियर अमृता सिंह के साथ एक हज़ार नौ सौ तिरासी में फिल्म बेताब से शुरू किया. बेताब में सनी को खूब पसंद किया गया था. सनी देओल को लेकर कहते हैं कि वो एक फैमिली मैन हैं. सनी अपने पिता धर्मेंद्र को सबकुछ मानते हैं. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि पापा मेरे लिए सबसे बढ़कर हैं. वो सबसे हैंडसम और सबसे अच्छा काम करने वालों में से एक हैं. सनी देओल अपने पिता धर्मेंद्र को लेकर बताते हैं कि वो एक ऐसे इंसान हैं उनके लिए कोई काम नहीं जो वो ना कर पाएं. वो किसी भी चीज से कभी घबराते नहीं हैं. अगर उनके हिसाब से कोई बात गलत है तो है, सही है तो है. वहीं अगर भाई की बात की जाए तो सनी देओल अपने छोटे भाई बॉबी देओल के भी बेहद करीब हैं. सनी अपने भाई के प्रति जरूरत से ज्यादा हिफाजती हैं और इसके लिए उन्हें अफसोस भी होता है. उन्होंने बताया कि भाइयों के लिए मेरा जल्दी सोने चले जाना ही डिसीप्लीन है. लेकिन मेरे लिए वो जिंदगी जीने का तरीका है. मुझे सुबह उठना और उठकर शूटिंग पर जाना बेहद पसंद है. अगर बात सनी देओल और ईशा देओल के रिश्ते की की जाए तो दोनों भाई-बहनों के बीच हमेशा से ही छत्तीस का आंकड़ा बताया जाता है. सनी और ईशा भले ही मुंबई में रहते हैं लेकिन अक्सर ये देखने को मिलता है कि सनी देओल अपनी सौतेली बहन ईशा देओल के साथ बहुत कम स्पॉट किए जानते हैं. हालांकि अफवाहे ये भी है कि सनी देओल और ईशा देओल बीच छत्तीस का आंकड़ा रहता है. ईशा और सनी का परिवार पास में ही रहता है. दोनों के घर बहुत नजदीक हैं. लेकिन इसके बावजूद भी दोनों के रिश्ते मधुर नहीं हैं. इतना ही नहीं जब जब ईशा देओल की शादी हुई थी तब भी सनी देओल, बॉबी देओल और प्रकाश कौर में से कोई भी उनकी शादी में शामिल नहीं था. बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः |
आलीराजपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के चंद्रशेखर आजादनगर थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ सरेआम बर्बरतापूर्वक मारपीट का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने महिला के मायके और ससुराल पक्ष के चार लोगों पर केस दर्ज किया है। घटना 10 दिन पुरानी बताई जा रही है।
आलीराजपुर एसपी विजय भागवानी ने बताया कि ग्राम एरण निवासी महिला अपने पति, देवर व बधाों के साथ करीब एक साल पहले गुजरात मजदूरी करने के लिए गई थी। करीब 10 दिन पहले वह पति को बिना बताए अपने देवर के साथ गांव लौट आई। यह बात उसके पति को बुरी लगी। इस पर मायके वाले भी एरण पहुंच गए और चरित्र शंका में महिला के साथ बुरी तरह मारपीट की गई।
वायरल हो रहे वीडियो में आरोपित डंडे और लात-घूसों से महिला को पीटते नजर आ रहे हैं। इस बीच एक व्यक्ति महिला के पैरों पर लात रखकर उसे दबाते तथा एक अन्य पंजों में लाठी मारते दिख रहा है। इस दौरान महिला लगातार दर्द से कराहती और चीखती रही, मगर गांव के लोग तमाशबीन बनकर वीडियो बनाते रहे। एसपी के अनुसार महिला के सगे बाबा, मामा, भाई और जेठ के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीम गांव भेजी गई है। जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि यह वीडियो करीब एक सप्ताह से वायरल हो रहा है। अब जाकर पुलिस ने इस पर संज्ञान लिया है।
| आलीराजपुर । जिले के चंद्रशेखर आजादनगर थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ सरेआम बर्बरतापूर्वक मारपीट का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने महिला के मायके और ससुराल पक्ष के चार लोगों पर केस दर्ज किया है। घटना दस दिन पुरानी बताई जा रही है। आलीराजपुर एसपी विजय भागवानी ने बताया कि ग्राम एरण निवासी महिला अपने पति, देवर व बधाों के साथ करीब एक साल पहले गुजरात मजदूरी करने के लिए गई थी। करीब दस दिन पहले वह पति को बिना बताए अपने देवर के साथ गांव लौट आई। यह बात उसके पति को बुरी लगी। इस पर मायके वाले भी एरण पहुंच गए और चरित्र शंका में महिला के साथ बुरी तरह मारपीट की गई। वायरल हो रहे वीडियो में आरोपित डंडे और लात-घूसों से महिला को पीटते नजर आ रहे हैं। इस बीच एक व्यक्ति महिला के पैरों पर लात रखकर उसे दबाते तथा एक अन्य पंजों में लाठी मारते दिख रहा है। इस दौरान महिला लगातार दर्द से कराहती और चीखती रही, मगर गांव के लोग तमाशबीन बनकर वीडियो बनाते रहे। एसपी के अनुसार महिला के सगे बाबा, मामा, भाई और जेठ के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीम गांव भेजी गई है। जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि यह वीडियो करीब एक सप्ताह से वायरल हो रहा है। अब जाकर पुलिस ने इस पर संज्ञान लिया है। |
मुंबई। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुलाकात से महाराष्ट्र को लाभ ही होगा। देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि आज मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला । इस मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अकेले आधे घंटे तक मिले और उनसे चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के साथ मधुर संबंध रहा है। इसलिए आधे घंटे हुई अकेले में बैठक को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री जिन मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री से मिले, उनमें से कई मुद्दे राज्य सरकार से ही संबंधित हैं। ओबीसी का राजनीतिक आरक्षण सर्वोच्च न्यायालय ने सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही रद्द किया है। इसी तरह मराठा आरक्षण में भी राज्य सरकार की भूमिका संदेहास्पद रही है। फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान राज्य सरकार ने उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले मुद्दों को भी केंद्र सरकार के दायरे में डालने का प्रयास किया है। फडणवीस ने कहा कि कुछ भी हो, अगर आज राज्य सरकार ने केंद्र से चर्चा की है, तो इसे भविष्य में भी जारी रखना चाहिए, जिससे राज्य के विकास में अवरोध उत्पन्न न हो सके।
| मुंबई। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुलाकात से महाराष्ट्र को लाभ ही होगा। देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि आज मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला । इस मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अकेले आधे घंटे तक मिले और उनसे चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के साथ मधुर संबंध रहा है। इसलिए आधे घंटे हुई अकेले में बैठक को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री जिन मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री से मिले, उनमें से कई मुद्दे राज्य सरकार से ही संबंधित हैं। ओबीसी का राजनीतिक आरक्षण सर्वोच्च न्यायालय ने सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही रद्द किया है। इसी तरह मराठा आरक्षण में भी राज्य सरकार की भूमिका संदेहास्पद रही है। फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान राज्य सरकार ने उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले मुद्दों को भी केंद्र सरकार के दायरे में डालने का प्रयास किया है। फडणवीस ने कहा कि कुछ भी हो, अगर आज राज्य सरकार ने केंद्र से चर्चा की है, तो इसे भविष्य में भी जारी रखना चाहिए, जिससे राज्य के विकास में अवरोध उत्पन्न न हो सके। |
दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा के ताजमहल का नाम बदलकर 'तेजो महालय' रखने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है. आगरा नगर निगम में रखे गए इस प्रस्ताव को मेयर ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए खारिज कर दिया.
बीजेपी के पार्षद शोभाराम ने नगर निगम के सामने ये प्रस्ताव रखा था. नगर निगम सदन में जैसे ही बीजेपी पार्षद शोभाराम राठौर ने ताजमहल का नाम बदलकर तेजो महालय रखे जाने का प्रस्ताव पढ़ा, विपक्षी दलों के पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया.
हालांकि, इस दौरान पार्षद शोभाराम राठौर अपना प्रस्ताव पढ़ते रहे. पूरा प्रस्ताव पढ़े जाने के बाद महापौर नवीन जैन ने कहा, "ताजमहल का नाम बदलने का अधिकार नगर निगम सदन को नहीं है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए महापौर नवीन जैन ने बीजेपी पार्षद शोभाराम राठौर के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. "
प्रस्ताव खारिज होते ही विपक्षी दल के पार्षदों में उत्साह की लहर दौड़ गई. इस दौरान किसी पार्षद ने शोभाराम राठौर के प्रस्ताव पर टिप्पणी कर दी. इस पर बात बिगड़ गई और दोनों पक्षों के पार्षद आमने-सामने आ गए. पार्षदों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई. मेयर के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो पाया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी.
ताजमहल का नाम बदलकर तेजो महालय रखे जाने का प्रस्ताव लाने वाले शोभाराम राठौर हजूपुरा से पार्षद हैं. प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद राठौर ने कहा कि जन भावना को देखते हुए वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.
बता दें कि आगरा नगर निगम के सदन में एक अन्य प्रस्ताव को लेकर 31 अगस्त को भी पार्षदों के बीच तीखी बहस हो गई थी. इसके बाद सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था.
बहस के दौरान नगर निगम के सदन में पार्षदों के बीच गहमागहमी और नारेबाजी हुई थी. साथ ही महापौर की डाइस के सामने धरना दिया गया था. इसके बाद मेयर नवीन जैन ने अनिश्चित काल के लिए सदन को स्थगित कर दिया था.
अचानक सदन स्थगित हो जाने की वजह से उस वक्त ताजमहल का नाम तेजो महालय रखने के प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं हो पाई थी. इस पर 31 अगस्त को चर्चा होनी थी, लेकिन सदन स्थगित होने के बाद आज यानी 12 अक्टूबर को सदन बुला कर इस पर चर्चा की गई.
| दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा के ताजमहल का नाम बदलकर 'तेजो महालय' रखने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है. आगरा नगर निगम में रखे गए इस प्रस्ताव को मेयर ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए खारिज कर दिया. बीजेपी के पार्षद शोभाराम ने नगर निगम के सामने ये प्रस्ताव रखा था. नगर निगम सदन में जैसे ही बीजेपी पार्षद शोभाराम राठौर ने ताजमहल का नाम बदलकर तेजो महालय रखे जाने का प्रस्ताव पढ़ा, विपक्षी दलों के पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया. हालांकि, इस दौरान पार्षद शोभाराम राठौर अपना प्रस्ताव पढ़ते रहे. पूरा प्रस्ताव पढ़े जाने के बाद महापौर नवीन जैन ने कहा, "ताजमहल का नाम बदलने का अधिकार नगर निगम सदन को नहीं है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए महापौर नवीन जैन ने बीजेपी पार्षद शोभाराम राठौर के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. " प्रस्ताव खारिज होते ही विपक्षी दल के पार्षदों में उत्साह की लहर दौड़ गई. इस दौरान किसी पार्षद ने शोभाराम राठौर के प्रस्ताव पर टिप्पणी कर दी. इस पर बात बिगड़ गई और दोनों पक्षों के पार्षद आमने-सामने आ गए. पार्षदों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई. मेयर के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो पाया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी. ताजमहल का नाम बदलकर तेजो महालय रखे जाने का प्रस्ताव लाने वाले शोभाराम राठौर हजूपुरा से पार्षद हैं. प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद राठौर ने कहा कि जन भावना को देखते हुए वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. बता दें कि आगरा नगर निगम के सदन में एक अन्य प्रस्ताव को लेकर इकतीस अगस्त को भी पार्षदों के बीच तीखी बहस हो गई थी. इसके बाद सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था. बहस के दौरान नगर निगम के सदन में पार्षदों के बीच गहमागहमी और नारेबाजी हुई थी. साथ ही महापौर की डाइस के सामने धरना दिया गया था. इसके बाद मेयर नवीन जैन ने अनिश्चित काल के लिए सदन को स्थगित कर दिया था. अचानक सदन स्थगित हो जाने की वजह से उस वक्त ताजमहल का नाम तेजो महालय रखने के प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं हो पाई थी. इस पर इकतीस अगस्त को चर्चा होनी थी, लेकिन सदन स्थगित होने के बाद आज यानी बारह अक्टूबर को सदन बुला कर इस पर चर्चा की गई. |
नई दिल्लीः भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उन्हीं के घर में चौथे टेस्ट में पराजित कर 5 मैचों की सीरीज में 2-1 से बढ़त बना ली है. इस जीत के बाद टीम इंडिया की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है. बड़े-बड़े दिग्गज भारतीय कप्तान विराट कोहली की सराहना कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच इंग्लैंड के ही एक दिग्गज क्रिकेटर ने विराट कोहली को लेकर एक दिल जीतने वाला बयान दिया है.
भारतीय टीम के लिए यह जीत शानदार है क्योंकि भारत की पहली पारी 191 रन पर सिमटी थी और उसने इंग्लैंड को सिर्फ 99 रनों की बढ़त ही लेने दी थी. भारतीय बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में बेहतरीन बल्लेबाजी की और 466 रन बनाकर इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 368 रनों का लक्ष्य रखा.
हुसैन ने कहा, 'हर गेंदबाजी परिवर्तन ने काम किया. जब कोहली ने टी के बाद दूसरी नई गेंद ली तो इसने विकेट पर सीधा प्रहार किया और उमेश यादव ने क्रैग ओवरटोन का विकेट लिया. यह कोहली का मिडास टेस्ट था और वह जिस चीज को छू रहे थे वो सोने में बदल रही थी. भारत अब प्रसिद्ध सीरीज जीतने से एक मैच दूर रह गया है. ' उन्होंने कहा कि भारत ने शायद ही चौथे टेस्ट में शीर्ष रैंकिंग के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को मिस किया होगा.
| नई दिल्लीः भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उन्हीं के घर में चौथे टेस्ट में पराजित कर पाँच मैचों की सीरीज में दो-एक से बढ़त बना ली है. इस जीत के बाद टीम इंडिया की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है. बड़े-बड़े दिग्गज भारतीय कप्तान विराट कोहली की सराहना कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच इंग्लैंड के ही एक दिग्गज क्रिकेटर ने विराट कोहली को लेकर एक दिल जीतने वाला बयान दिया है. भारतीय टीम के लिए यह जीत शानदार है क्योंकि भारत की पहली पारी एक सौ इक्यानवे रन पर सिमटी थी और उसने इंग्लैंड को सिर्फ निन्यानवे रनों की बढ़त ही लेने दी थी. भारतीय बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में बेहतरीन बल्लेबाजी की और चार सौ छयासठ रन बनाकर इंग्लैंड के सामने जीत के लिए तीन सौ अड़सठ रनों का लक्ष्य रखा. हुसैन ने कहा, 'हर गेंदबाजी परिवर्तन ने काम किया. जब कोहली ने टी के बाद दूसरी नई गेंद ली तो इसने विकेट पर सीधा प्रहार किया और उमेश यादव ने क्रैग ओवरटोन का विकेट लिया. यह कोहली का मिडास टेस्ट था और वह जिस चीज को छू रहे थे वो सोने में बदल रही थी. भारत अब प्रसिद्ध सीरीज जीतने से एक मैच दूर रह गया है. ' उन्होंने कहा कि भारत ने शायद ही चौथे टेस्ट में शीर्ष रैंकिंग के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को मिस किया होगा. |
गुरुवार को कानपुर के स्वराज्य वृद्धा आश्रम का नज़ारा हर दिन से कुछ अलग दिखाई दिया। यहां पर 37 महिलाओं में से 24 महिलायें जिस पूजन में लगी थी उसके मायने इकतरफा नज़र आये। यह बुजुर्ग महिलाये जिन बेटों की लंबी उम्र के लिये पूजन कर रही थी, उन बेटे ने वर्षो पहले मुँह मोड़ लिया था। फिर भी बेटों की खुशी के लिये व्याकुल यह वृद्ध महिलाएं प्रार्थना में उनके लिए आशीष मांगती नज़र आई। आश्रम की संचालिका मंजू भाटिया ने बताया कि यह महिलायें बेटों को आज भी याद करती है पर बेटों ने बिन माँ के दुनियां बसा ली है। उन्होंने बताया कि अहोई अष्टमी के पूजन में रस्म अदायगी के लिये बेटों की भी जरूरत रहती है, लेकिन उनके बैगेर ही मजबूरन इन महिलाओं को पूजन करना पड़ता है।
ढेड़ दशक से नही आये बेटे फिर भी लंबी उम्र के लिये निर्जला ब्रत,
मंजू भाटिया ने बताया कि आश्रम में पिछले 15 वर्षों से रह रही राजकिशोरी जिनकी उम्र 80 साल है। उनके दो बेटे और नाती भी है। कोई भी उनका हाल लेने नही आता है। फिर भी अहोई अष्टमी क़ई एक रात पहले से जल त्याग कर राज किशोरी और उनके साथ 24 महिलायें अपने बेटों की लंबी उम्र की कामना करने से नही थकती है।
स्वराज आश्रम में कई महिलाएं अधिक उम्र के कारण शुगर बीपी थायराइड से ग्रसित है। लेकिन बेटों की लंबी उम्र के लिए अपनी उम्र घटाने का काम करती हैं। निर्जला व्रत अहोई अष्टमी के दिन दवा भी नहीं खाती। मंजू भाटिया बताती है कि इनको समझाने की कई बार कोशिश हुई जो कि नाकाफी साबित हुई है। उन्होंने बताया कि 65 साल की आशा मेहरोत्रा को बीपी और शुगर की बीमारी है। ब्रत के दिन दवा नही खाती है। इनकी जिद है बच्चों ने रिश्ता तोड़ा है लेकिन उनका रिश्ता तो अपने बच्चों से अंतिम सासों का है।
37 में से 24 महिलायें अहोई अष्ठमी पूजन के लिये एक दिन पहले से ही तैयारी कर लेती है। फिर सभी सुबह समूह बना कर पूजन अर्चन करती है। इस पूजन विधि के मुताबिक बेटे के हाथ मे पुआ और हलुआ रखा जाता है। पूजन के बाद काले धागे से माँ बेटे की बलाये अपने ऊपर लेती है। लेकिन मजबूरी में बेटों के साथ क़ई रस्म अधूरी रह जाती। लेकिन माँ के दिन से निकली दुआयें हर साल आशीष दे जाती है।
स्वराज्य वृद्धाश्रम आश्रम गंभीरपुर में 37 महिलाएं और 25 फुट पुरुष रहते हैं। इस आश्रम की स्थापना लगभग 20 साल पहले की गई थी। समाजसेवी मंजू भाटिया ने ऐसे बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों के लिए आश्रम बनाया है जो बेघर है। लेकिन यहां रहने वाले बुजुर्गों का घर यह आश्रम बन गया है। मंजू भाटिया कहती हैं कि यहां पर रहने वाली सभी महिलाएं और पुरुष एक अच्छे वातावरण में हंसते खेलते और मुस्कराते हैं। लेकिन अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं जरूर दुखी नजर आती है। उन्होंने बताया कि साल में एक बार अहोई अष्टमी पर इन महिलाओं की आंखों से आंसू बहते नज़र आते हैं।
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| गुरुवार को कानपुर के स्वराज्य वृद्धा आश्रम का नज़ारा हर दिन से कुछ अलग दिखाई दिया। यहां पर सैंतीस महिलाओं में से चौबीस महिलायें जिस पूजन में लगी थी उसके मायने इकतरफा नज़र आये। यह बुजुर्ग महिलाये जिन बेटों की लंबी उम्र के लिये पूजन कर रही थी, उन बेटे ने वर्षो पहले मुँह मोड़ लिया था। फिर भी बेटों की खुशी के लिये व्याकुल यह वृद्ध महिलाएं प्रार्थना में उनके लिए आशीष मांगती नज़र आई। आश्रम की संचालिका मंजू भाटिया ने बताया कि यह महिलायें बेटों को आज भी याद करती है पर बेटों ने बिन माँ के दुनियां बसा ली है। उन्होंने बताया कि अहोई अष्टमी के पूजन में रस्म अदायगी के लिये बेटों की भी जरूरत रहती है, लेकिन उनके बैगेर ही मजबूरन इन महिलाओं को पूजन करना पड़ता है। ढेड़ दशक से नही आये बेटे फिर भी लंबी उम्र के लिये निर्जला ब्रत, मंजू भाटिया ने बताया कि आश्रम में पिछले पंद्रह वर्षों से रह रही राजकिशोरी जिनकी उम्र अस्सी साल है। उनके दो बेटे और नाती भी है। कोई भी उनका हाल लेने नही आता है। फिर भी अहोई अष्टमी क़ई एक रात पहले से जल त्याग कर राज किशोरी और उनके साथ चौबीस महिलायें अपने बेटों की लंबी उम्र की कामना करने से नही थकती है। स्वराज आश्रम में कई महिलाएं अधिक उम्र के कारण शुगर बीपी थायराइड से ग्रसित है। लेकिन बेटों की लंबी उम्र के लिए अपनी उम्र घटाने का काम करती हैं। निर्जला व्रत अहोई अष्टमी के दिन दवा भी नहीं खाती। मंजू भाटिया बताती है कि इनको समझाने की कई बार कोशिश हुई जो कि नाकाफी साबित हुई है। उन्होंने बताया कि पैंसठ साल की आशा मेहरोत्रा को बीपी और शुगर की बीमारी है। ब्रत के दिन दवा नही खाती है। इनकी जिद है बच्चों ने रिश्ता तोड़ा है लेकिन उनका रिश्ता तो अपने बच्चों से अंतिम सासों का है। सैंतीस में से चौबीस महिलायें अहोई अष्ठमी पूजन के लिये एक दिन पहले से ही तैयारी कर लेती है। फिर सभी सुबह समूह बना कर पूजन अर्चन करती है। इस पूजन विधि के मुताबिक बेटे के हाथ मे पुआ और हलुआ रखा जाता है। पूजन के बाद काले धागे से माँ बेटे की बलाये अपने ऊपर लेती है। लेकिन मजबूरी में बेटों के साथ क़ई रस्म अधूरी रह जाती। लेकिन माँ के दिन से निकली दुआयें हर साल आशीष दे जाती है। स्वराज्य वृद्धाश्रम आश्रम गंभीरपुर में सैंतीस महिलाएं और पच्चीस फुट पुरुष रहते हैं। इस आश्रम की स्थापना लगभग बीस साल पहले की गई थी। समाजसेवी मंजू भाटिया ने ऐसे बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों के लिए आश्रम बनाया है जो बेघर है। लेकिन यहां रहने वाले बुजुर्गों का घर यह आश्रम बन गया है। मंजू भाटिया कहती हैं कि यहां पर रहने वाली सभी महिलाएं और पुरुष एक अच्छे वातावरण में हंसते खेलते और मुस्कराते हैं। लेकिन अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं जरूर दुखी नजर आती है। उन्होंने बताया कि साल में एक बार अहोई अष्टमी पर इन महिलाओं की आंखों से आंसू बहते नज़र आते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
रविप्रकाश बहुत खुश हो रहा है। उसके द्वारा चित्रित 'बैलगाड़ी पर जाते हुए ग्रामीण' चित्र को इनाम आया। बाल दिवस के दिन दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में इनाम लेने अपने मामा वेणुगोपाल के साथ वह दिल्ली जा रहा है। नवंबर १० तारीख के दिन अपने गांव तांडूर से दिल्ली जाने के लिए तैयार हुआ। 11.1. बस में यात्रा
गाँव से दिल्ली तक
(From Village to Delhi)
रविप्रकाश पहली बार हैदराबाद जा रहा है। हैदराबाद जाने वाली बस एक बस स्टैंड में है। रविप्रकाश ने पूछा 'इस बस में चलेंगे • मामा जी?' वेणुगोपाल ने कहा कि ये साधारण बस है। इसको 'पल्ले वेलुगु' बस भी कहते हैं। एक्सप्रेस बस में जायेंगे। रविप्रकाश ने पूछा,
'इस बस में क्यों नहीं? एक्सप्रेस बस में जाने के लिए वेणुगोपाल ने क्यों कहा?
समूह में चर्चा कीजिए७●●●
साधारण बस और एक्सप्रेस बस के बीच अंतर लिखिए। बसें और किस-किस प्रकार की होती हैं ? मालूम करके लिखिए।
बस टिकट पर क्या-क्या विवरण होते हैं?
क्या तुम्हें पता है ?
बसों में अब मशीन द्वारा टिकट दे रहे हैं। इन्हें 'टिम्स' (टिकेट इश्यूइंग मेशीन सिस्टम) कहते हैं। टिकट फाड़कर, पंच करके देने की कठिनाई इसमें नहीं है।
तेलंगाणा सरकार द्वारा निशुल्क वितरण 2020-21
| रविप्रकाश बहुत खुश हो रहा है। उसके द्वारा चित्रित 'बैलगाड़ी पर जाते हुए ग्रामीण' चित्र को इनाम आया। बाल दिवस के दिन दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में इनाम लेने अपने मामा वेणुगोपाल के साथ वह दिल्ली जा रहा है। नवंबर दस तारीख के दिन अपने गांव तांडूर से दिल्ली जाने के लिए तैयार हुआ। ग्यारह.एक. बस में यात्रा गाँव से दिल्ली तक रविप्रकाश पहली बार हैदराबाद जा रहा है। हैदराबाद जाने वाली बस एक बस स्टैंड में है। रविप्रकाश ने पूछा 'इस बस में चलेंगे • मामा जी?' वेणुगोपाल ने कहा कि ये साधारण बस है। इसको 'पल्ले वेलुगु' बस भी कहते हैं। एक्सप्रेस बस में जायेंगे। रविप्रकाश ने पूछा, 'इस बस में क्यों नहीं? एक्सप्रेस बस में जाने के लिए वेणुगोपाल ने क्यों कहा? समूह में चर्चा कीजिएसात●●● साधारण बस और एक्सप्रेस बस के बीच अंतर लिखिए। बसें और किस-किस प्रकार की होती हैं ? मालूम करके लिखिए। बस टिकट पर क्या-क्या विवरण होते हैं? क्या तुम्हें पता है ? बसों में अब मशीन द्वारा टिकट दे रहे हैं। इन्हें 'टिम्स' कहते हैं। टिकट फाड़कर, पंच करके देने की कठिनाई इसमें नहीं है। तेलंगाणा सरकार द्वारा निशुल्क वितरण दो हज़ार बीस-इक्कीस |
कौन व्यक्ति हाल ही में, TATA AIA लाइफ इंश्योरेंस के ब्रांड एंबेसडर बने है?
हाल ही में, TATA AIA Life Insurance ने ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) को अपना ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। बता दे की नीरज को ब्रांड एम्बैसडर नियुक्त करने का कम्पनी का मकसद पॉलिसीधारकों के बीच स्वास्थ्य और रखरखाव को बढ़ावा देना है और दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में पैठ बढ़ाना है।
Haal Hee Me , TATA AIA Life Insurance ne Olympic Me Gold Jeetne Wale Athlete Neeraj Chopda (Neeraj Chopra) Ko Apna Brand एम्बेसडर Niyukt Kiya Hai . Bata De Ki Neeraj Ko Brand एम्बैसडर Niyukt Karne का Company का Maksad पॉलिसीधारकों Ke Beech Swasthya Aur Rakhrakhav Ko Badhawa Dena Hai Aur Doosri Aur Teesari Series Ke Shaharon Me Paith Badhaana Hai .
| कौन व्यक्ति हाल ही में, TATA AIA लाइफ इंश्योरेंस के ब्रांड एंबेसडर बने है? हाल ही में, TATA AIA Life Insurance ने ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा को अपना ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। बता दे की नीरज को ब्रांड एम्बैसडर नियुक्त करने का कम्पनी का मकसद पॉलिसीधारकों के बीच स्वास्थ्य और रखरखाव को बढ़ावा देना है और दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में पैठ बढ़ाना है। Haal Hee Me , TATA AIA Life Insurance ne Olympic Me Gold Jeetne Wale Athlete Neeraj Chopda Ko Apna Brand एम्बेसडर Niyukt Kiya Hai . Bata De Ki Neeraj Ko Brand एम्बैसडर Niyukt Karne का Company का Maksad पॉलिसीधारकों Ke Beech Swasthya Aur Rakhrakhav Ko Badhawa Dena Hai Aur Doosri Aur Teesari Series Ke Shaharon Me Paith Badhaana Hai . |
अनाज और खाने की आपूर्ति करने वाले खाद्यान्न ढांचे में बड़े बदलावों ने कुपोषण के मुद्दे को और उलझा दिया है। ख़ासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में। लांसेट के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि "खाद्यान्नों ढांचे में बड़े बदलावों" के चलते ग़रीब देशों में मोटापा और अल्प पोषण बढ़ रहा है।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्थ कैरोलिना के चैपल हिल गिलिंग स्कूल ऑफ़ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ में प्रोफ़ेसर और पहले पेपर के मुख्य लेखक एम पॉपकिन और न्यूट्रीशन प्रोफ़ेसर वी आर केनन बताते हैं "हमारे शोध के मुताबिक़, कम आय वाले देशों में 20 फ़ीसदी युवा, मोटापे से प्रभावित हैं। अल्प पोषण और मोटापे से जुड़े "अधिभार (Over weight)" की दोहरी मार भी कम आय वाले देशों पर ही पड़ती है। वैश्विक पहुंच वाली यह दोहरी मार आधुनिक खानपान की आदतों से जुड़ी है। यह आधुनिक खाद्यान्न कम और मध्यम आय वाले देशों के परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ्य खुराक की आपूर्ति को रोकते हैं।"
दुनियाभर में 2.3 अरब बच्चे और युवा अधिभार से प्रभावित हैं। वहीं 15 करोड़ बच्चे अविकसित हैं। हालांकि मध्यम आय वाले देशों में यह मुद्दे व्यक्ति, परिवारों और समुदायों में एक-दूसरे से पारस्परिक हैं। "कुपोषण के दोहरे भार" के नाम से मशहूर लांसेट अध्ययन इन पारस्परिकताओं की जांच करता है। इनमें ज़िम्मेदार सामाजिक कारक और खाद्यान्न ढांचे के बदलाव, बॉयोलॉजिकल प्रभाव और कुपोषण से निपटने वाली नीतियों का अध्ययन हैं।
रिसर्चर ने सर्वे के डाटा को अपने काम के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने 1990 और 2010 के दशक में मध्य और निम्न आय वाले देशों के डाटा का इस्तेमाल मार झेलने वाले देशों की पहचान के लिए किया है। इसके मुताबिक़, " 20 फ़ीसदी से ज़्यादा महिलाएं दुबलेपन की शिकार हैं। 20 फ़ीसदी लोग अधिभार से पीड़ित हैं। वहीं 30 फ़ीसदी लोग वेस्टिंग (ऊंचाई की तुलना में कम वजन) से जूझ रहे हैं।"
विश्लेषण के नतीजों से पता चलता है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में एक तिहाई से ज्यादा देश कुपोषण की इस दोहरी पारस्परिकता से पीड़ित थे। 1990 के दशक में 123 देशों में से 45 और 2010 के दशक में 126 देशों में से 48 देश इसका शिकार थे। सहारा क्षेत्र के 29, दक्षिण एशिया के सात, पूर्वी एशिया के नौ और प्रशांत महासागर के तीन देश इसमें शामिल थे।
2010 के दशक में, 1990 की तुलना में 14 निम्न आय वाले देशों में कुपोषण की दोहरी मार की समस्या पैदा हुई। यह ट्रेंड बताते हैं कि ग़रीब देशों में मोटापा बढ़ रहा है, जबकि एक बड़ी आबादी दुबलेपन और बौनेपन जैसी समस्याओं का शिकार है।
पेपर के लेखक पॉपकिन बताते हैं, "कुपोषण के उभरते मुद्दे उन लोगों की भयावहता बताते हैं, जिनकी ख़राब खुराक से सुरक्षा नहीं है। ग़रीब, न्यूनतम और मध्यम आय वाले देश लोगों के खान-पान, घर-ऑफ़िस में चलाफिरी, यातायात में आवाजाही की आदतों में बड़े परिवर्तन आ रहे हैं। नई पोषण वास्तविकता खाद्यान्न ढांचे से जु़ड़ी हुई है, जिसने वैश्विक स्तर पर प्रसंस्कृत खाद्यान्नों की उपलब्धता करवाई है। यह प्रसंस्कृत खाद्यान्न अधिभार से जुड़े होने के साथ-साथ छोटे बच्चों और शिशुओं पर भी बुरा असर डालते हैं। इनकी वजह से अब ताज़ा सब्ज़ियों और खाद्यान्नों के बाज़ार ख़त्म हो रहे हैं। बड़े सुपरमार्केट बढ़ रहे हैं। इन बदलावों में खाद्यान्न चेन का अधिकार सुपरमार्केट के हाथों में होना और कृषि व्यवसाय से जुड़ी कंपनियों का उभार भी शामिल है।
अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
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| अनाज और खाने की आपूर्ति करने वाले खाद्यान्न ढांचे में बड़े बदलावों ने कुपोषण के मुद्दे को और उलझा दिया है। ख़ासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में। लांसेट के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि "खाद्यान्नों ढांचे में बड़े बदलावों" के चलते ग़रीब देशों में मोटापा और अल्प पोषण बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्थ कैरोलिना के चैपल हिल गिलिंग स्कूल ऑफ़ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ में प्रोफ़ेसर और पहले पेपर के मुख्य लेखक एम पॉपकिन और न्यूट्रीशन प्रोफ़ेसर वी आर केनन बताते हैं "हमारे शोध के मुताबिक़, कम आय वाले देशों में बीस फ़ीसदी युवा, मोटापे से प्रभावित हैं। अल्प पोषण और मोटापे से जुड़े "अधिभार " की दोहरी मार भी कम आय वाले देशों पर ही पड़ती है। वैश्विक पहुंच वाली यह दोहरी मार आधुनिक खानपान की आदतों से जुड़ी है। यह आधुनिक खाद्यान्न कम और मध्यम आय वाले देशों के परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ्य खुराक की आपूर्ति को रोकते हैं।" दुनियाभर में दो.तीन अरब बच्चे और युवा अधिभार से प्रभावित हैं। वहीं पंद्रह करोड़ बच्चे अविकसित हैं। हालांकि मध्यम आय वाले देशों में यह मुद्दे व्यक्ति, परिवारों और समुदायों में एक-दूसरे से पारस्परिक हैं। "कुपोषण के दोहरे भार" के नाम से मशहूर लांसेट अध्ययन इन पारस्परिकताओं की जांच करता है। इनमें ज़िम्मेदार सामाजिक कारक और खाद्यान्न ढांचे के बदलाव, बॉयोलॉजिकल प्रभाव और कुपोषण से निपटने वाली नीतियों का अध्ययन हैं। रिसर्चर ने सर्वे के डाटा को अपने काम के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ नब्बे और दो हज़ार दस के दशक में मध्य और निम्न आय वाले देशों के डाटा का इस्तेमाल मार झेलने वाले देशों की पहचान के लिए किया है। इसके मुताबिक़, " बीस फ़ीसदी से ज़्यादा महिलाएं दुबलेपन की शिकार हैं। बीस फ़ीसदी लोग अधिभार से पीड़ित हैं। वहीं तीस फ़ीसदी लोग वेस्टिंग से जूझ रहे हैं।" विश्लेषण के नतीजों से पता चलता है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में एक तिहाई से ज्यादा देश कुपोषण की इस दोहरी पारस्परिकता से पीड़ित थे। एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में एक सौ तेईस देशों में से पैंतालीस और दो हज़ार दस के दशक में एक सौ छब्बीस देशों में से अड़तालीस देश इसका शिकार थे। सहारा क्षेत्र के उनतीस, दक्षिण एशिया के सात, पूर्वी एशिया के नौ और प्रशांत महासागर के तीन देश इसमें शामिल थे। दो हज़ार दस के दशक में, एक हज़ार नौ सौ नब्बे की तुलना में चौदह निम्न आय वाले देशों में कुपोषण की दोहरी मार की समस्या पैदा हुई। यह ट्रेंड बताते हैं कि ग़रीब देशों में मोटापा बढ़ रहा है, जबकि एक बड़ी आबादी दुबलेपन और बौनेपन जैसी समस्याओं का शिकार है। पेपर के लेखक पॉपकिन बताते हैं, "कुपोषण के उभरते मुद्दे उन लोगों की भयावहता बताते हैं, जिनकी ख़राब खुराक से सुरक्षा नहीं है। ग़रीब, न्यूनतम और मध्यम आय वाले देश लोगों के खान-पान, घर-ऑफ़िस में चलाफिरी, यातायात में आवाजाही की आदतों में बड़े परिवर्तन आ रहे हैं। नई पोषण वास्तविकता खाद्यान्न ढांचे से जु़ड़ी हुई है, जिसने वैश्विक स्तर पर प्रसंस्कृत खाद्यान्नों की उपलब्धता करवाई है। यह प्रसंस्कृत खाद्यान्न अधिभार से जुड़े होने के साथ-साथ छोटे बच्चों और शिशुओं पर भी बुरा असर डालते हैं। इनकी वजह से अब ताज़ा सब्ज़ियों और खाद्यान्नों के बाज़ार ख़त्म हो रहे हैं। बड़े सुपरमार्केट बढ़ रहे हैं। इन बदलावों में खाद्यान्न चेन का अधिकार सुपरमार्केट के हाथों में होना और कृषि व्यवसाय से जुड़ी कंपनियों का उभार भी शामिल है। अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें। |
Palmistry Sign: हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की भाग्य रेखा पर तिल होता है वो अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ये तिल इंसान के भाग्य में अड़चन डालता है और ऐसे लोगों के जीवन में बड़ी कठिनाइयां आती हैं। spiritualSun, 11 Dec 2022 10:55 PM (IST)
Palmistry News हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक यदि स्त्री की ठोड़ी गोल, पुष्ट, कोमल हो तो बहुत ही शुभ रहता है। वहीं जिन लड़कियों के गाल चारों तरफ से गोल हो तो ऐसी स्त्रियां भी पति के लिए काफी शुभ होती है। spiritualFri, 25 Nov 2022 01:49 PM (IST)
Supari Ke Upay: मां दुर्गा को पान-सुपारी चढ़ाई जाती है। पूजा-पाठ के अलावा ज्योतिष शास्त्र में सुपारी से जुड़े कुछ खास उपाय भी बताए गए हैं। आइये जानते हैं सुपारी से जुड़े कुछ खास उपायों के बारे में। spiritualWed, 23 Nov 2022 10:32 PM (IST)
Palmistry: हथेली पर बने कई पर्वत और रेखाएं बताती हैं कि आपके भाग्य में न्यायाधीश और वकील बनने के योग हैं। आइए जानते हैं वह कौन सी रेखाएं और पर्वत हैं, जो व्यक्ति को वकील और जज बनाती हैं। spiritualWed, 23 Nov 2022 04:52 PM (IST)
दूसरे आपके बारे मे क्या सोचते हैं इन्हें नजरअंदाज कर कुछ अलग करें। स्वभाव से विपरीत व्यक्ति से मुलाक़ात हो सकती है। नया और साहसिक करने का समय है। आप ऊर्जावान महसूस करेंगे। इस ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करें। spiritualMon, 14 Nov 2022 09:24 PM (IST)
हस्तरेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं को देखकर भविष्य के बारे के जानने के तरीके बताए हैं। हाथ की रेखाओं से धन, करियर, सेहत, रिश्ते, विवाह के साथ-साथ व्यक्ति अपनी उम्र के बारे में भी जान सकता है। spiritualFri, 11 Nov 2022 11:27 AM (IST)
Hastrekha Shastra: हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों के हाथ में H का निशान होता है। वे लोग भाग्यशाली होते हैं। उन्हें 40 साल की उम्र पार करने के बाद धन की प्राप्ति होती है। आरामदेह जीवन जीने का मौका मिलता है। spiritualSun, 30 Oct 2022 10:35 PM (IST)
हथेली पर उभरी विवाह रेखा में कई राज़ छुपे होते हैं। जैसे आपका प्रेम विवाह होगा या नहीं, कहीं आपके भाग्य में दो विवाह योग तो नही है? ये सभी ऐसी बातें हैं जो युवाओं की उत्सुकता को बढ़ाती है। spiritualSat, 29 Oct 2022 04:30 PM (IST)
Lucky Girls for Life Partner सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक जिन लड़कियों की उंगलियां पतली और छोटी होती है, वे काफी कंजूस होती है। मामूली बात पर नाराज हो जाती है और दोस्ती निभाने में भी पीछे रहती है। रिश्तों को निभाने में भ. . . spiritualSat, 29 Oct 2022 10:46 AM (IST)
Palmistry Signs हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक नाखूनों का गुलाबी चिकना और मुलायम होना व्यक्ति के भाग्यशाली होने की निशानी है। गुलाबी और मुलायम नाखून वाले व्यक्ति को हर काम में सफलता मिलती है। धन के मामले में हमेशा सफलता मिल. . . spiritualFri, 28 Oct 2022 01:00 PM (IST)
| Palmistry Sign: हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की भाग्य रेखा पर तिल होता है वो अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ये तिल इंसान के भाग्य में अड़चन डालता है और ऐसे लोगों के जीवन में बड़ी कठिनाइयां आती हैं। spiritualSun, ग्यारह दिसंबर दो हज़ार बाईस दस:पचपन PM Palmistry News हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक यदि स्त्री की ठोड़ी गोल, पुष्ट, कोमल हो तो बहुत ही शुभ रहता है। वहीं जिन लड़कियों के गाल चारों तरफ से गोल हो तो ऐसी स्त्रियां भी पति के लिए काफी शुभ होती है। spiritualFri, पच्चीस नवंबर दो हज़ार बाईस एक:उनचास PM Supari Ke Upay: मां दुर्गा को पान-सुपारी चढ़ाई जाती है। पूजा-पाठ के अलावा ज्योतिष शास्त्र में सुपारी से जुड़े कुछ खास उपाय भी बताए गए हैं। आइये जानते हैं सुपारी से जुड़े कुछ खास उपायों के बारे में। spiritualWed, तेईस नवंबर दो हज़ार बाईस दस:बत्तीस PM Palmistry: हथेली पर बने कई पर्वत और रेखाएं बताती हैं कि आपके भाग्य में न्यायाधीश और वकील बनने के योग हैं। आइए जानते हैं वह कौन सी रेखाएं और पर्वत हैं, जो व्यक्ति को वकील और जज बनाती हैं। spiritualWed, तेईस नवंबर दो हज़ार बाईस चार:बावन PM दूसरे आपके बारे मे क्या सोचते हैं इन्हें नजरअंदाज कर कुछ अलग करें। स्वभाव से विपरीत व्यक्ति से मुलाक़ात हो सकती है। नया और साहसिक करने का समय है। आप ऊर्जावान महसूस करेंगे। इस ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करें। spiritualMon, चौदह नवंबर दो हज़ार बाईस नौ:चौबीस PM हस्तरेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं को देखकर भविष्य के बारे के जानने के तरीके बताए हैं। हाथ की रेखाओं से धन, करियर, सेहत, रिश्ते, विवाह के साथ-साथ व्यक्ति अपनी उम्र के बारे में भी जान सकता है। spiritualFri, ग्यारह नवंबर दो हज़ार बाईस ग्यारह:सत्ताईस AM Hastrekha Shastra: हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों के हाथ में H का निशान होता है। वे लोग भाग्यशाली होते हैं। उन्हें चालीस साल की उम्र पार करने के बाद धन की प्राप्ति होती है। आरामदेह जीवन जीने का मौका मिलता है। spiritualSun, तीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस दस:पैंतीस PM हथेली पर उभरी विवाह रेखा में कई राज़ छुपे होते हैं। जैसे आपका प्रेम विवाह होगा या नहीं, कहीं आपके भाग्य में दो विवाह योग तो नही है? ये सभी ऐसी बातें हैं जो युवाओं की उत्सुकता को बढ़ाती है। spiritualSat, उनतीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस चार:तीस PM Lucky Girls for Life Partner सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक जिन लड़कियों की उंगलियां पतली और छोटी होती है, वे काफी कंजूस होती है। मामूली बात पर नाराज हो जाती है और दोस्ती निभाने में भी पीछे रहती है। रिश्तों को निभाने में भ. . . spiritualSat, उनतीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस दस:छियालीस AM Palmistry Signs हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक नाखूनों का गुलाबी चिकना और मुलायम होना व्यक्ति के भाग्यशाली होने की निशानी है। गुलाबी और मुलायम नाखून वाले व्यक्ति को हर काम में सफलता मिलती है। धन के मामले में हमेशा सफलता मिल. . . spiritualFri, अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार बाईस एक:शून्य PM |
Satya Pal Malik ने एक बार फिर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मैं अगर कृषि कानून के मुद्दे पर कहूंगा तो विवाद हो जाएगा। हालांकि एक राज्यपाल (Governor) को नहीं हटाया जा सकता लेकिन मेरे कुछ शुभचिंतक मेरे कुछ कहने का इंतजार करते हैं कि ये कुछ बोले और ये हटे। देश में इतना बड़ा आंदोलन आज तक नहीं चला जिसमें 600 लोग शहीद हुए। मेघालय के राज्यपाल ने कहा कि कोई हादसा होता है तो दिल्ली के नेताओं का शोक संदेश जाता है।
लेकिन किसानों की मौत पर कोई प्रस्ताव नहीं गया। संसद में भी कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुझे दिल्ली के 2-3 लोगों ने राज्यपाल बनाया है। लेकिन में उनकी इच्छा के विपरीत ही बयान देता हूं। अगर वो लोग कहेंगे तो मैं राज्यपाल के पद से हट जाऊंगा।
Satya Pal Malik ने आरएसएस को लेकर दिया गया अपना बयान वापस ले लिया था। हाल ही में उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर में जब वो गवर्नर थे तो उन्हें आरएसएस से जुड़े एक व्यक्ति ने रिश्वत का ऑफर दिया था। उनके इस बयान के बाद लोगों ने आरएसएस पर सवाल खड़ा किया था। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ बात करते हुए आरएसएस से माफी मांग ली। उन्होंने कहा कि उस मामले का आरएसएस (RSS) से कोई मतलब नही था। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।
Satya Pal Malik ने क्या कहा था?
सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब वो कश्मीर (Kashmir) में राज्यपाल बनाए गए थे तब उनके पास 150-150 करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश आयी थी। उन्होंने कहा कि एक पेशकश अंबानी की तरफ से और एक आरएसएस (RSS) के एक अधिकारी की तरफ से की गयी थी। मुझे अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। मैंने तुरंत प्रधानमंत्री से बात कर इसकी जानकारी दी और उनसे कहा कि अगर आप इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं तो मुझे मेरे पद से मुक्त कर दिया जाए।
| Satya Pal Malik ने एक बार फिर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मैं अगर कृषि कानून के मुद्दे पर कहूंगा तो विवाद हो जाएगा। हालांकि एक राज्यपाल को नहीं हटाया जा सकता लेकिन मेरे कुछ शुभचिंतक मेरे कुछ कहने का इंतजार करते हैं कि ये कुछ बोले और ये हटे। देश में इतना बड़ा आंदोलन आज तक नहीं चला जिसमें छः सौ लोग शहीद हुए। मेघालय के राज्यपाल ने कहा कि कोई हादसा होता है तो दिल्ली के नेताओं का शोक संदेश जाता है। लेकिन किसानों की मौत पर कोई प्रस्ताव नहीं गया। संसद में भी कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुझे दिल्ली के दो-तीन लोगों ने राज्यपाल बनाया है। लेकिन में उनकी इच्छा के विपरीत ही बयान देता हूं। अगर वो लोग कहेंगे तो मैं राज्यपाल के पद से हट जाऊंगा। Satya Pal Malik ने आरएसएस को लेकर दिया गया अपना बयान वापस ले लिया था। हाल ही में उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर में जब वो गवर्नर थे तो उन्हें आरएसएस से जुड़े एक व्यक्ति ने रिश्वत का ऑफर दिया था। उनके इस बयान के बाद लोगों ने आरएसएस पर सवाल खड़ा किया था। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ बात करते हुए आरएसएस से माफी मांग ली। उन्होंने कहा कि उस मामले का आरएसएस से कोई मतलब नही था। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। Satya Pal Malik ने क्या कहा था? सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब वो कश्मीर में राज्यपाल बनाए गए थे तब उनके पास एक सौ पचास-एक सौ पचास करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश आयी थी। उन्होंने कहा कि एक पेशकश अंबानी की तरफ से और एक आरएसएस के एक अधिकारी की तरफ से की गयी थी। मुझे अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। मैंने तुरंत प्रधानमंत्री से बात कर इसकी जानकारी दी और उनसे कहा कि अगर आप इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं तो मुझे मेरे पद से मुक्त कर दिया जाए। |
उत्तर प्रदेश के इटावा में एक मकान मालिक के बेटे के द्वारा महिला के साथ बलात्कार करने का मामला सामने आया है। महिला ने आरोप लगाया है कि मकान मालिक का बेटा फोटो वायरल करने धमकी देकर मेरे साथ बलात्कार करता रहा।
अशरफ अंसारी, इटावा उत्तर प्रदेश के इटावा में किराए के मकान में रह रही एक महिला के साथ मकान मालिक के बेटे के पर बलात्कार करने का आरोप लगा है। आरोपी से परेशान होकर महिला ने फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और जांच-पड़ताल शुरू की है।
फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में रहने वाली पीड़ित महिला ने जानकारी देते हुए बताया कि वह कई सालों से एक किराए के मकान में रह रही थी। महिला ने बताया, '15 अक्टूबर 2019 को मकान मालिक के बेटे ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर मुझे दिया था, जिसके बाद मैं बेहोश हो गई थी। इसी दौरान मकान मालिक के बेटे ने मेरे साथ बलात्कार किया। बलात्कार की घटना के बाद मकान मालिक के बेटे ने मेरी कुछ अश्लील फोटो भी खींची और बाद में लगातार हमें पैसे के लिए ब्लैकमेल करने लगा। '
महिला ने बताया, 'मकान मालिक के बेटे से परेशान होकर मैंने अपना मकान बदल लिया। इस दौरान 22 मई 2021 को आरोपी ने मेरी अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी और फिर मेरे साथ रेप किया। परेशान होकर मैंने थाने में शिकायत दर्ज कराई। एसएसपी ने पीड़ित महिला से की मुलाकात महिला के द्वारा थाने में रिपोर्ट देने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार सिंह सिटी मैजिस्ट्रेट उमेश मिश्रा और जिले के तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान एसएसपी ने पीड़ित महिला से मुलाकात की। वहीं उसकी परेशानियों को भी सुना गया। इस दौरान एसएसपी ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। महिला की शिकायत के आधार पर इस संबंध में धारा 376 और 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पूरे मामले की जांच क्षेत्र अधिकारी को दे दी गई है।
| उत्तर प्रदेश के इटावा में एक मकान मालिक के बेटे के द्वारा महिला के साथ बलात्कार करने का मामला सामने आया है। महिला ने आरोप लगाया है कि मकान मालिक का बेटा फोटो वायरल करने धमकी देकर मेरे साथ बलात्कार करता रहा। अशरफ अंसारी, इटावा उत्तर प्रदेश के इटावा में किराए के मकान में रह रही एक महिला के साथ मकान मालिक के बेटे के पर बलात्कार करने का आरोप लगा है। आरोपी से परेशान होकर महिला ने फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और जांच-पड़ताल शुरू की है। फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में रहने वाली पीड़ित महिला ने जानकारी देते हुए बताया कि वह कई सालों से एक किराए के मकान में रह रही थी। महिला ने बताया, 'पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस को मकान मालिक के बेटे ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर मुझे दिया था, जिसके बाद मैं बेहोश हो गई थी। इसी दौरान मकान मालिक के बेटे ने मेरे साथ बलात्कार किया। बलात्कार की घटना के बाद मकान मालिक के बेटे ने मेरी कुछ अश्लील फोटो भी खींची और बाद में लगातार हमें पैसे के लिए ब्लैकमेल करने लगा। ' महिला ने बताया, 'मकान मालिक के बेटे से परेशान होकर मैंने अपना मकान बदल लिया। इस दौरान बाईस मई दो हज़ार इक्कीस को आरोपी ने मेरी अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी और फिर मेरे साथ रेप किया। परेशान होकर मैंने थाने में शिकायत दर्ज कराई। एसएसपी ने पीड़ित महिला से की मुलाकात महिला के द्वारा थाने में रिपोर्ट देने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार सिंह सिटी मैजिस्ट्रेट उमेश मिश्रा और जिले के तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान एसएसपी ने पीड़ित महिला से मुलाकात की। वहीं उसकी परेशानियों को भी सुना गया। इस दौरान एसएसपी ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। महिला की शिकायत के आधार पर इस संबंध में धारा तीन सौ छिहत्तर और पाँच सौ छः के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पूरे मामले की जांच क्षेत्र अधिकारी को दे दी गई है। |
मास्को से दिल्ली आ रही फ्लाइट में बम की सूचना पर मचा हड़कंप, जांच जारी (सांकेतिक तस्वीर)
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गुरुवार देर रात मास्को से दिल्ली आ रहे विमान में बम होने की फोन पर सूचना मिली थी. फ्लाइट करीब 3. 20 बजे दिल्ली में लैंड हुई. सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को उतार दिया गया. फ्लाइट की जांच की जा रही है. अभी तक की जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया है.
बताया जा रहा है कि मास्को से दिल्ली आ रही जिस फ्लाइट में बम होने की खबर मिली, उसे दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे 29 पर उतारा गया. फ्लाइट संख्या SU 232 में बम की सूचना से चारों तरफ हड़कंप मच गया. आनन-फानन में फ्लाइट से 386 यात्रियों और 16 क्रू मेंबर्स को उतारा गया. फिलहाल, विमान की सघन तलाशी ली जा रही है.
बता दें कि इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में एक ईरानी विमान में बम की सूचना मिली ती. दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वायु यातायात नियंत्रण (एटीसी) से ईरान-चीन के एक विमान में बम रखे होने के बारे में फोन आया था लेकिन बाद में उसे सूचित किया गया कि विमान दिल्ली में नहीं उतर रहा है.
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200 रुपये से कम प्लान में लंबी वैलिडिटी, डेटा-कॉल सबकुछ, जिसने सुना वो रिचार्ज कराने दौड़ पड़ा!
वो एक्टर जिसकी 'दस्तक' से, हिलने लगी थी अमिताभ बच्चन-दिलीप कुमार की 'दीवार', कैसे कहलाए 'एक्टर्स का रोल मॉडल'
| मास्को से दिल्ली आ रही फ्लाइट में बम की सूचना पर मचा हड़कंप, जांच जारी दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गुरुवार देर रात मास्को से दिल्ली आ रहे विमान में बम होने की फोन पर सूचना मिली थी. फ्लाइट करीब तीन. बीस बजे दिल्ली में लैंड हुई. सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को उतार दिया गया. फ्लाइट की जांच की जा रही है. अभी तक की जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया है. बताया जा रहा है कि मास्को से दिल्ली आ रही जिस फ्लाइट में बम होने की खबर मिली, उसे दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे उनतीस पर उतारा गया. फ्लाइट संख्या SU दो सौ बत्तीस में बम की सूचना से चारों तरफ हड़कंप मच गया. आनन-फानन में फ्लाइट से तीन सौ छियासी यात्रियों और सोलह क्रू मेंबर्स को उतारा गया. फिलहाल, विमान की सघन तलाशी ली जा रही है. बता दें कि इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में एक ईरानी विमान में बम की सूचना मिली ती. दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वायु यातायात नियंत्रण से ईरान-चीन के एक विमान में बम रखे होने के बारे में फोन आया था लेकिन बाद में उसे सूचित किया गया कि विमान दिल्ली में नहीं उतर रहा है. . दो सौ रुपयापये से कम प्लान में लंबी वैलिडिटी, डेटा-कॉल सबकुछ, जिसने सुना वो रिचार्ज कराने दौड़ पड़ा! वो एक्टर जिसकी 'दस्तक' से, हिलने लगी थी अमिताभ बच्चन-दिलीप कुमार की 'दीवार', कैसे कहलाए 'एक्टर्स का रोल मॉडल' |
हम इस छोटोसो पुस्तक का ऐसा उमदा ज़रिया ( उत्तम उपाय ) अपने स्वदेशी भाइयों को जहालत (अवि द्या ) दूर करने का समझते हैं कि अगर गु नायश होतो तो अकसर जगह से मज़मून के मज़मून बतौर नमूने हदिये नाज़रीन ( पाठकों के अर्पण ) करते । ताहम ( तो भो ) हम कुछ थोड़ासा श्राशय इस पुस्तक का अपने नाज़रौन (पाठकों ) पर ज़ाहिर करना मुनासिब सम झते हैं ।
यह लुसखा बे नज़ोर ( अनुपम पुस्तक ) एक दोबायचे ( उपक्रम ) से शुरू किया गया है जिसमें ईश्वरोपा सना के बाद अपने मुल्क की मौजूदा ( वर्तमान ) हालत का नकशा खींच, उस पर अफ़सोस कर प्राचीन समय से उस का मुक़ाबला करके ग्रन्थ की ज़रूरत ज़ाहिर की गई है । इस के बाद मज़ामीन ज़ैल ( निम्न लिखित विषयों ) को ठीक ठीक प्राचीन ज्योतिषविद्या के अनुसार ज़ाहिर करके दिख लाया गया है कि यौरप देश निवासी इस बात का फख ( अभिमान ) नहीं कर सकते कि उन्होंने हमें विद्या सिखाई है- ज़मीन का गोल होना, ज़मीन का आधार, पातालनिवासौ, नमोन का कुतर ( व्यास ) वगै़रह, ज़मीन वगैरह ( पृथिवी आदि ) कुरों ( गोली ) का घूमना, वगैरह वगैरह ( इत्यादि ) । साथ ही साथ पौराणिक ख़्यालात का खण्डन सद्ग्रन्थों के प्रमाण से किया गया है ।
आखिर में फलादेश के ग्रन्थों का ख़्तलाफ़ बाहमो ( परस्पर विरोध ) और नोज़ बईद अज़ अकूल व तजरुवे ( बुद्धि और अनुभव के विरुद्ध ) होना साबित करके अपने
देशहितैषियों से संस्कृत विद्या के प्रचार के लिये एक ज़ोरदार अपील की गई है। हमारी राय में यह किताब द यानन्द एङ्गलो वैदिकस्कूल में ख़स्सन ( विशेष कर, ) और दोगर मदारिस ( अन्यपाठशालाओ ) में अमूमन पढ़ाए जाने के लायक है ।
क़ीमत फ़ो जिल्द 8 ) लाला रामचन्द्र वैश्य लाला का बाज़ार मेरठ शहर से मिल सकती है ।
" आर्थ्यसिद्धान्त, " प्रयाग,
भाग ३ अङ्क ४ । दिसंबर सन् १८८e ई०
( ज्योतिश्चन्द्रिका ) यह पुस्तक गङ्गाप्रसाद जी विद्यार्थो आगरा कालिन मेरठ निवासी ने बनाया है । इस में ज्योतिष का सिद्धान्त अच्छे प्रकार लिखा है । जिस से स्पष्ट सिद्ध कर दिया है कि पृथिवी गोल है, उस का आधार, आकर्षण, भ्रमण, उस को परिधि और व्यास का मान आदि जैसा इङ्गलैण्ड निवासी सिद्ध करते हैं, वह इन २ सिद्धान्त शिरोमणि आदि प्रामाणिक आर्ष ग्रन्थों के अनुसार हम आयों की वेदमूलक सनातन विद्या है। और द्वितीय आजकल पौराशिक लोग जिस फलित को ज्योतिष मानते हैं उस में निर्बलता और विरोध स्पष्ट दिखा दिया है । इत्यादि का रणों से यह पुस्तक अति उत्तम देखने योग्य है। | हम इस छोटोसो पुस्तक का ऐसा उमदा ज़रिया अपने स्वदेशी भाइयों को जहालत दूर करने का समझते हैं कि अगर गु नायश होतो तो अकसर जगह से मज़मून के मज़मून बतौर नमूने हदिये नाज़रीन करते । ताहम हम कुछ थोड़ासा श्राशय इस पुस्तक का अपने नाज़रौन पर ज़ाहिर करना मुनासिब सम झते हैं । यह लुसखा बे नज़ोर एक दोबायचे से शुरू किया गया है जिसमें ईश्वरोपा सना के बाद अपने मुल्क की मौजूदा हालत का नकशा खींच, उस पर अफ़सोस कर प्राचीन समय से उस का मुक़ाबला करके ग्रन्थ की ज़रूरत ज़ाहिर की गई है । इस के बाद मज़ामीन ज़ैल को ठीक ठीक प्राचीन ज्योतिषविद्या के अनुसार ज़ाहिर करके दिख लाया गया है कि यौरप देश निवासी इस बात का फख नहीं कर सकते कि उन्होंने हमें विद्या सिखाई है- ज़मीन का गोल होना, ज़मीन का आधार, पातालनिवासौ, नमोन का कुतर वगै़रह, ज़मीन वगैरह कुरों का घूमना, वगैरह वगैरह । साथ ही साथ पौराणिक ख़्यालात का खण्डन सद्ग्रन्थों के प्रमाण से किया गया है । आखिर में फलादेश के ग्रन्थों का ख़्तलाफ़ बाहमो और नोज़ बईद अज़ अकूल व तजरुवे होना साबित करके अपने देशहितैषियों से संस्कृत विद्या के प्रचार के लिये एक ज़ोरदार अपील की गई है। हमारी राय में यह किताब द यानन्द एङ्गलो वैदिकस्कूल में ख़स्सन और दोगर मदारिस में अमूमन पढ़ाए जाने के लायक है । क़ीमत फ़ो जिल्द आठ ) लाला रामचन्द्र वैश्य लाला का बाज़ार मेरठ शहर से मिल सकती है । " आर्थ्यसिद्धान्त, " प्रयाग, भाग तीन अङ्क चार । दिसंबर सन् एक सौ अठासीe ईशून्य यह पुस्तक गङ्गाप्रसाद जी विद्यार्थो आगरा कालिन मेरठ निवासी ने बनाया है । इस में ज्योतिष का सिद्धान्त अच्छे प्रकार लिखा है । जिस से स्पष्ट सिद्ध कर दिया है कि पृथिवी गोल है, उस का आधार, आकर्षण, भ्रमण, उस को परिधि और व्यास का मान आदि जैसा इङ्गलैण्ड निवासी सिद्ध करते हैं, वह इन दो सिद्धान्त शिरोमणि आदि प्रामाणिक आर्ष ग्रन्थों के अनुसार हम आयों की वेदमूलक सनातन विद्या है। और द्वितीय आजकल पौराशिक लोग जिस फलित को ज्योतिष मानते हैं उस में निर्बलता और विरोध स्पष्ट दिखा दिया है । इत्यादि का रणों से यह पुस्तक अति उत्तम देखने योग्य है। |
ऐलनाबाद उपचुनाव में भाजपा कैंडिडेट गोविंद कांडा का चुनाव प्रचार करने के लिए हिसार से सिरसा आ रहे सीएम मनोहर लाल के काफिले को किसानों ने काले झंडे दिखाए। सीएम का काफिला जब डिंग में टोल प्लाजा के पास पहुंचे तो सड़क किनारे खड़े किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। इस बीच डिंग में मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने का प्रयास कर रहे एक युवक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस युवक का नाम नन्नू है और वह बग्गुवालाी का रहने वाला है। पुलिस ने युवक को कुछ देर हिरासत में रखा जिसे बाद में किसान रिहा करवाकर ले गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिसार से सिरसा जाते समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल डिंग में अपने एक रिश्तेदार के घर पहुंचे। केंद्र सरकार के तीन खेती कानूनों के खिलाफ सालभर से आंदोलन कर रहे किसानों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वह डिंग में इकट्ठा होना शुरू हो गए। कुछ किसान CM के रिश्तेदार के घर के बाहर भी पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। हालांकि किसानों के पहुंचने से पहले ही सीएम वहां से आगे के लिए रवाना हो चुके थे।
घर के बाहर किसानों की नारेबाजी देखकर CM के रिश्तेदार के पारिवारिक सदस्यों ने मकान को अंदर से ताला लगा लिया। कुछ देर नारेबाजी करने के बाद किसान वहां से चले गए। उसी बीच किसान संगठनों के कुछ लोग डिंग में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दूर के रिश्तेदार की दुकान पर पहुंच गए और वहां धरना शुरू कर दिया। किसानों ने उक्त दुकानदार के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान भी किया।
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| ऐलनाबाद उपचुनाव में भाजपा कैंडिडेट गोविंद कांडा का चुनाव प्रचार करने के लिए हिसार से सिरसा आ रहे सीएम मनोहर लाल के काफिले को किसानों ने काले झंडे दिखाए। सीएम का काफिला जब डिंग में टोल प्लाजा के पास पहुंचे तो सड़क किनारे खड़े किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। इस बीच डिंग में मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने का प्रयास कर रहे एक युवक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस युवक का नाम नन्नू है और वह बग्गुवालाी का रहने वाला है। पुलिस ने युवक को कुछ देर हिरासत में रखा जिसे बाद में किसान रिहा करवाकर ले गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिसार से सिरसा जाते समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल डिंग में अपने एक रिश्तेदार के घर पहुंचे। केंद्र सरकार के तीन खेती कानूनों के खिलाफ सालभर से आंदोलन कर रहे किसानों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वह डिंग में इकट्ठा होना शुरू हो गए। कुछ किसान CM के रिश्तेदार के घर के बाहर भी पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। हालांकि किसानों के पहुंचने से पहले ही सीएम वहां से आगे के लिए रवाना हो चुके थे। घर के बाहर किसानों की नारेबाजी देखकर CM के रिश्तेदार के पारिवारिक सदस्यों ने मकान को अंदर से ताला लगा लिया। कुछ देर नारेबाजी करने के बाद किसान वहां से चले गए। उसी बीच किसान संगठनों के कुछ लोग डिंग में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दूर के रिश्तेदार की दुकान पर पहुंच गए और वहां धरना शुरू कर दिया। किसानों ने उक्त दुकानदार के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान भी किया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में बर्फ तीन दशक पहले की तुलना में तीन गुना तेजी से पिघल रही है। इस वजह से समुद्र का स्तर दोगुना हो गया है। आपको बता दें कि ग्रीनलैंड एक बहुत बड़ा भूमि क्षेत्र है और आर्कटिक महासागर में दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। ग्रीनलैंड में महीने के ज्यादातर समय बर्फ जमी रहती है। महासागर बदलने लगे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, ग्रीनलैंड 1,000 साल में पहली बार सबसे ज्यादा गर्म हो रहा है। 2019 में वैश्विक समुद्री स्तर में 40% वृद्धि के लिए आर्कटिक का पिघलना जिम्मेदार था। ग्रीनलैंड का पीटरमैन ग्लेशियर भी अब शांत हो रहा है।
वैज्ञानिकों को डर है कि समुद्र के निकटतम ग्लेशियर के सिकुड़ने से बर्फ एक बड़े क्षेत्र में फैल जाएगी, जो समुद्र के गर्म पानी के साथ मिल जाएगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि ग्लेशियर में सफेद बर्फ के साथ-साथ काली बर्फ की तेजी से वृद्धि भी ग्लेशियर के सिकुड़ने की त्वरित दर के लिए जिम्मेदार है। दरअसल, सफेद बर्फ की तुलना में काली बर्फ तेजी से पिघलती है। इसलिए ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। अब सवाल यह है कि बर्फ-सफेद रेगिस्तान में यह सारी काली बर्फ कैसे बनी? शोधकर्ताओं के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जैसे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वैसे ही इन क्षेत्रों में चट्टानी और धूल भरे मैदान भी पिघल रहे हैं। इन चट्टानी और धूल भरी मिट्टी के मैदानों की वजह से सफेद बर्फ काली बर्फ में तब्दील हो रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि काली बर्फ अब हिमालय से अंटार्कटिका तक बढ़ रही है। ज्यादातर जगहों पर मैदानी इलाकों से धूल उड़ती है, जंगल की आग का धुआं और औद्योगिक और डीजल इंजनों से निकलने वाले ब्लैक कार्बन के बहुत छोटे कण। ग्लेशियरों में हजारों मील की यात्रा करें और सफेद बर्फ को काली बर्फ में बदल दें। जहां सफेद बर्फ सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करती है, काली या धूसर बर्फ उसके अवशोषित तापमान को बढ़ा देती है। सफेद बर्फ की तुलना में मिट्टी में चट्टानें और धूल से ढके ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि कोई भी काला पदार्थ सफेद पदार्थ की तुलना में सूर्य से अधिक ऊर्जा अवशोषित करता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये पत्थर और चट्टानें अधिक ऊंचाई पर 40 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकती हैं।
ऐसे में जब बर्फ पिघलनी शुरू होती है तो इससे ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा पिघल जाता है। इस बीच, पश्चिमी ग्रीनलैंड में अचानक बैंगनी शैवाल बनना भी एक बड़ी समस्या बन गई है। यह बैंगनी शैवाल ग्रीनलैंड को गाढ़ा और काला कर रहा है। बर्फ की सतह। इसलिए यह अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचने के लिए ये शैवाल बैंगनी और फिर काले हो जाते हैं। इससे तापमान भी बढ़ जाता है। अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में ग्लेशियर समुद्र के तेजी से पिघलने से समुद्र के स्तर में वृद्धि निचले द्वीपों और तटीय क्षेत्रों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाएगी। वैज्ञानिकों को दुनिया भर में ग्लेशियरों के पिघलने की दर और समुद्र के स्तर के बढ़ने की दर के बारे में बहुत चिंतित माना जाता है, और दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के अलावा इसके कारण क्या हो रहा है। पड़ रही है।
| वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में बर्फ तीन दशक पहले की तुलना में तीन गुना तेजी से पिघल रही है। इस वजह से समुद्र का स्तर दोगुना हो गया है। आपको बता दें कि ग्रीनलैंड एक बहुत बड़ा भूमि क्षेत्र है और आर्कटिक महासागर में दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। ग्रीनलैंड में महीने के ज्यादातर समय बर्फ जमी रहती है। महासागर बदलने लगे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, ग्रीनलैंड एक,शून्य साल में पहली बार सबसे ज्यादा गर्म हो रहा है। दो हज़ार उन्नीस में वैश्विक समुद्री स्तर में चालीस% वृद्धि के लिए आर्कटिक का पिघलना जिम्मेदार था। ग्रीनलैंड का पीटरमैन ग्लेशियर भी अब शांत हो रहा है। वैज्ञानिकों को डर है कि समुद्र के निकटतम ग्लेशियर के सिकुड़ने से बर्फ एक बड़े क्षेत्र में फैल जाएगी, जो समुद्र के गर्म पानी के साथ मिल जाएगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि ग्लेशियर में सफेद बर्फ के साथ-साथ काली बर्फ की तेजी से वृद्धि भी ग्लेशियर के सिकुड़ने की त्वरित दर के लिए जिम्मेदार है। दरअसल, सफेद बर्फ की तुलना में काली बर्फ तेजी से पिघलती है। इसलिए ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। अब सवाल यह है कि बर्फ-सफेद रेगिस्तान में यह सारी काली बर्फ कैसे बनी? शोधकर्ताओं के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जैसे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वैसे ही इन क्षेत्रों में चट्टानी और धूल भरे मैदान भी पिघल रहे हैं। इन चट्टानी और धूल भरी मिट्टी के मैदानों की वजह से सफेद बर्फ काली बर्फ में तब्दील हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि काली बर्फ अब हिमालय से अंटार्कटिका तक बढ़ रही है। ज्यादातर जगहों पर मैदानी इलाकों से धूल उड़ती है, जंगल की आग का धुआं और औद्योगिक और डीजल इंजनों से निकलने वाले ब्लैक कार्बन के बहुत छोटे कण। ग्लेशियरों में हजारों मील की यात्रा करें और सफेद बर्फ को काली बर्फ में बदल दें। जहां सफेद बर्फ सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करती है, काली या धूसर बर्फ उसके अवशोषित तापमान को बढ़ा देती है। सफेद बर्फ की तुलना में मिट्टी में चट्टानें और धूल से ढके ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि कोई भी काला पदार्थ सफेद पदार्थ की तुलना में सूर्य से अधिक ऊर्जा अवशोषित करता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये पत्थर और चट्टानें अधिक ऊंचाई पर चालीस डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकती हैं। ऐसे में जब बर्फ पिघलनी शुरू होती है तो इससे ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा पिघल जाता है। इस बीच, पश्चिमी ग्रीनलैंड में अचानक बैंगनी शैवाल बनना भी एक बड़ी समस्या बन गई है। यह बैंगनी शैवाल ग्रीनलैंड को गाढ़ा और काला कर रहा है। बर्फ की सतह। इसलिए यह अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचने के लिए ये शैवाल बैंगनी और फिर काले हो जाते हैं। इससे तापमान भी बढ़ जाता है। अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में ग्लेशियर समुद्र के तेजी से पिघलने से समुद्र के स्तर में वृद्धि निचले द्वीपों और तटीय क्षेत्रों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाएगी। वैज्ञानिकों को दुनिया भर में ग्लेशियरों के पिघलने की दर और समुद्र के स्तर के बढ़ने की दर के बारे में बहुत चिंतित माना जाता है, और दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के अलावा इसके कारण क्या हो रहा है। पड़ रही है। |
संदर्भ (स.)
Dennis Rodman ने अपने जीवन का आरम्भ अनुकूल वातावरण में किया था। यह कहा जा सकता है कि Dennis Rodman एक उत्तम जन्मकुण्डली लेकर पैदा हुए हैं। साधारणतः Dennis Rodman की स्मरणशक्ति उत्तम है और Dennis Rodman एहसान को कभी नहीं भूलते हैं। Dennis Rodman आवश्यकता से अधिक उदार हैं। Dennis Rodman एक व्यवस्थित व्यक्ति हैं, जोकि Dennis Rodman के काम में झलकता भी है, खासकर Dennis Rodman के पहनावे और निवास-स्थान में।Dennis Rodman व्यक्तिगत रूप से आकर्षक, शालीन और सुलझे हुए हैं। Dennis Rodman बड़े दिल वाले और खुले दिमाग के व्यक्ति हैं। Dennis Rodman विपरीत परिस्थितियों में भी विचारवान रहते हैं। Dennis Rodman दृढ़चरित्र है।जन्म से ही Dennis Rodman के अन्दर नेतृत्व का गुण विद्यमान है, किन्तु Dennis Rodman इसका दिखावा पसन्द नहीं करते। Dennis Rodman का दृष्टिकोण व्यापक है और Dennis Rodman छोटी-छोटी बातों की परवाह नहीं करते हैं।Dennis Rodman एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति हैं और अपने लिये ऊंचे लक्ष्य रखते हैं। प्रायः Dennis Rodman लक्ष्य से दूर रह जाते हैं, लेकिन जो Dennis Rodman को प्राप्त होता है वह भी सामान्य से अधिक होता है।
Dennis Rodman व्यावहारिक व्यक्तित्व के धनी हैं। यह जानते हुए कि Dennis Rodman को सफलता के लिये काम करना चहिए, Dennis Rodman में अपने जीवन को नियमबद्ध रूप से व्यवस्थित करने की क्षमता है। Dennis Rodman एकान्त प्रिय व्यक्ति हैं, चिन्तन व अध्ययन पसन्द करने वाले, मुश्किल समस्याओं का निराकरण करने वाले हैं। यद्यपि Dennis Rodman शान्त और सचेत हैं, Dennis Rodman जीवन में अधिक सफल होंगे यदि Dennis Rodman जीवन का सकारात्मक पहलू देखेंगे। Dennis Rodman जीवन में अधिक सुखी होंगे जब Dennis Rodman को यह अनुभूति होगी कि जीवन उतना बुरा नहीं है जितना कि Dennis Rodman समझते हैं।Dennis Rodman अपने Dennis Rodman में व्यवहारिक हैं और किसी भी स्थिति का आकलन व्यवहारिक तौर पर ही करते हैं। Dennis Rodman के अंदर ज्ञान ग्रहण करने की अच्छी समझ भी है और Dennis Rodman में योग्यता भी कूट-कूट कर भरी है। कोई भी ऐसी शिक्षा जो Dennis Rodman को व्यवहारिक तौर पर सीखने का मौका दे, Dennis Rodman को पसंद आएगी। Dennis Rodman की गिनती मेधावी विद्यार्थियों में होगी और अपने तेज दिमाग तथा अच्छी तार्किक शक्ति के बल पर Dennis Rodman बड़ी से बड़ी परीक्षा को आसानी से उत्तीर्ण कर लेंगे। बचपन से ही Dennis Rodman तीव्र बुद्धि के स्वामी होंगे और अन्य लोगों को देखकर Dennis Rodman सीखना प्रारंभ करेंगे। Dennis Rodman की स्मरण शक्ति काफी अच्छी होगी और Dennis Rodman को काफी लंबे समय तक की घटनाएँ भी आसानी से स्मरण हो सकती हैं। इसका लाभ Dennis Rodman को अपनी शिक्षा में भी मिलेगा और इसी के दम पर Dennis Rodman शिक्षा के क्षेत्र में कामयाबी के शिखर तक जा सकते हैं, लेकिन अति व्यावहारिक होने से Dennis Rodman को बचना चाहिए।
बच्चे Dennis Rodman को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने में अत्यधिक प्रेरणा देते हैं। Dennis Rodman को उनके प्रति कर्तव्य का अनुभव करना चाहिए। इस प्रेरणा का Dennis Rodman को पूर्णतः प्रयोग करना चाहिए, लेकिन ये ध्यान रखें कि Dennis Rodman वही कर रहे हैं जो Dennis Rodman करना चाहते हैं तथा सिर्फ उन्हें अपने कर्तव्यों के कारण ही नहीं कर रहे हैं।
| संदर्भ Dennis Rodman ने अपने जीवन का आरम्भ अनुकूल वातावरण में किया था। यह कहा जा सकता है कि Dennis Rodman एक उत्तम जन्मकुण्डली लेकर पैदा हुए हैं। साधारणतः Dennis Rodman की स्मरणशक्ति उत्तम है और Dennis Rodman एहसान को कभी नहीं भूलते हैं। Dennis Rodman आवश्यकता से अधिक उदार हैं। Dennis Rodman एक व्यवस्थित व्यक्ति हैं, जोकि Dennis Rodman के काम में झलकता भी है, खासकर Dennis Rodman के पहनावे और निवास-स्थान में।Dennis Rodman व्यक्तिगत रूप से आकर्षक, शालीन और सुलझे हुए हैं। Dennis Rodman बड़े दिल वाले और खुले दिमाग के व्यक्ति हैं। Dennis Rodman विपरीत परिस्थितियों में भी विचारवान रहते हैं। Dennis Rodman दृढ़चरित्र है।जन्म से ही Dennis Rodman के अन्दर नेतृत्व का गुण विद्यमान है, किन्तु Dennis Rodman इसका दिखावा पसन्द नहीं करते। Dennis Rodman का दृष्टिकोण व्यापक है और Dennis Rodman छोटी-छोटी बातों की परवाह नहीं करते हैं।Dennis Rodman एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति हैं और अपने लिये ऊंचे लक्ष्य रखते हैं। प्रायः Dennis Rodman लक्ष्य से दूर रह जाते हैं, लेकिन जो Dennis Rodman को प्राप्त होता है वह भी सामान्य से अधिक होता है। Dennis Rodman व्यावहारिक व्यक्तित्व के धनी हैं। यह जानते हुए कि Dennis Rodman को सफलता के लिये काम करना चहिए, Dennis Rodman में अपने जीवन को नियमबद्ध रूप से व्यवस्थित करने की क्षमता है। Dennis Rodman एकान्त प्रिय व्यक्ति हैं, चिन्तन व अध्ययन पसन्द करने वाले, मुश्किल समस्याओं का निराकरण करने वाले हैं। यद्यपि Dennis Rodman शान्त और सचेत हैं, Dennis Rodman जीवन में अधिक सफल होंगे यदि Dennis Rodman जीवन का सकारात्मक पहलू देखेंगे। Dennis Rodman जीवन में अधिक सुखी होंगे जब Dennis Rodman को यह अनुभूति होगी कि जीवन उतना बुरा नहीं है जितना कि Dennis Rodman समझते हैं।Dennis Rodman अपने Dennis Rodman में व्यवहारिक हैं और किसी भी स्थिति का आकलन व्यवहारिक तौर पर ही करते हैं। Dennis Rodman के अंदर ज्ञान ग्रहण करने की अच्छी समझ भी है और Dennis Rodman में योग्यता भी कूट-कूट कर भरी है। कोई भी ऐसी शिक्षा जो Dennis Rodman को व्यवहारिक तौर पर सीखने का मौका दे, Dennis Rodman को पसंद आएगी। Dennis Rodman की गिनती मेधावी विद्यार्थियों में होगी और अपने तेज दिमाग तथा अच्छी तार्किक शक्ति के बल पर Dennis Rodman बड़ी से बड़ी परीक्षा को आसानी से उत्तीर्ण कर लेंगे। बचपन से ही Dennis Rodman तीव्र बुद्धि के स्वामी होंगे और अन्य लोगों को देखकर Dennis Rodman सीखना प्रारंभ करेंगे। Dennis Rodman की स्मरण शक्ति काफी अच्छी होगी और Dennis Rodman को काफी लंबे समय तक की घटनाएँ भी आसानी से स्मरण हो सकती हैं। इसका लाभ Dennis Rodman को अपनी शिक्षा में भी मिलेगा और इसी के दम पर Dennis Rodman शिक्षा के क्षेत्र में कामयाबी के शिखर तक जा सकते हैं, लेकिन अति व्यावहारिक होने से Dennis Rodman को बचना चाहिए। बच्चे Dennis Rodman को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने में अत्यधिक प्रेरणा देते हैं। Dennis Rodman को उनके प्रति कर्तव्य का अनुभव करना चाहिए। इस प्रेरणा का Dennis Rodman को पूर्णतः प्रयोग करना चाहिए, लेकिन ये ध्यान रखें कि Dennis Rodman वही कर रहे हैं जो Dennis Rodman करना चाहते हैं तथा सिर्फ उन्हें अपने कर्तव्यों के कारण ही नहीं कर रहे हैं। |
कोदो या कोदों या कोदरा (Paspalum scrobiculatum) एक अनाज है जो कम वर्षा में भी पैदा हो जाता है। नेपाल व भारत के विभिन्न भागों में इसकी खेती की जाती है। धान आदि के कारण इसकी खेती अब कम होती जा रही है। इसका पौधा धान या बडी़ घास के आकार का होता है। इसकी फसल पहली बर्षा होते ही बो दी जाती है और भादों में तैयार हो जाती है। इसके लिये बढि़या भूमि या अधिक परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती। कहीं-कहीं यह रूई या अरहर के खेत में भी बो दिया जाता है। अधिक पकने पर इसके दाने झड़कर खेत में गिर जाते हैं, इसलिये इसे पकने से कुछ पहले ही काटकर खलिहान में डाल देते हैं। छिलका उतरने पर इसके अंदर से एक प्रकार के गोल चावल निकलते हैं जो खाए जाते हैं। कभी कभी इसके खेत में 'अगिया' नाम की घास उत्पन्न हो जाती है जो इसके पौधों को जला देती है। यदि इसकी कटाई से कुछ पहले बदली हो जाय, तो इसके चावलों में एक प्रकार का विष आ जाता है। वैद्यक के मत से यह मधुर, तिक्त, रूखा, कफ और पित्तनाशक होता है। नया कोदो कुरु पाक होता है, फोडे़ के रोगी को इसका पथ्य दिया जाता है। कोदो के दानों को चावल के रूप में खाया जाता है और स्थानीय बोली में 'भगर के चावल' के नाम पर इसे उपवास में भी खाया जाता है। इसके दाने में 8.3 प्रतिशत प्रोटीन, 1.4 प्रतिशत वसा तथा 65.9 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाई जाती है। कोदो-कुटकी मधुमेह नियन्त्रण, यकृत (गुर्दों) और मूत्राशय के लिए लाभकारी है। .
11 संबंधोंः चेना, नूडल, नेपाल, बजड़ी, राप्ती अंचल, रागी, साँवा, ज्वार, कुटकी, अरहर दाल, छुईखदान।
चेना की फसल चेना के दाने चेना (Proso millet) मोटा अन्न है। इसे 'पुनर्वा' भी कहते है। इसे सबसे पहले कहा उगाया गया, यह ज्ञात नही है, किंतु एक फसल के रूप में यह काकेशिया तथा चीन में ७,००० वर्ष पूर्व से उत्पादित किया जा रहा है। माना जाता है की इसे स्वतंत्र रूप से उगाया जाना सीखा गया होगा। इसे आज भी भारत, रूस, यूक्रेन, मध्य पूर्व एशिया, तुर्की तथा रोमानिया में बड़े पैमाने पे उगाया जाता है। इसे स्वास्थ्य रक्षक माना जाता है। इसमे ग्लूटेन नही होने से वे लोग भी इसे प्रयोग कर सकते है जिन्हें गेंहू से एलर्जी हो जाती है। यह कई प्रकार के जलवायु में उग जाता है। बहुत कम जल की जरूरत होती है, तथा कई प्रकार की मृदा में उग जाता है। इसे उगने के लिए कम समय की जरूरत होती है, सूखे क्षेत्रों हेतु यह आदर्श फसल है, मुख्य अन्नो में यह न्यूनतम जल मांगती है, इसका पादप ४ फीट तक ऊँचा हो सकता है, बीज गुच्छो में उगते है तथा २-३ मिलीमीटर के होते है, ये पीले, संतरी, या भूरे रंग के हो सकते है। यधपि यह घास है लेकिन अन्य मोटे अन्नो से इसका कोई रिश्ता नही है। .
ताइवान के लुकांग शहर में बनते हुए मीसुआ नूडल्ज़ नूड्ल्ज़ गेहूं, चावल, बाजरे या अन्य क़िस्म के आटे से बनाकर सुखाये गए पतले, लम्बे रेशे होते हैं जिन्हें उबलते हुए पाने या तेल में डालकर खाने के लिए पकाया जाता है। जब नूड्ल्ज़ सूखे होते हैं तो अक्सर तीली की तरह सख़्त होतें हैं लेकिन उबालने के बाद मुलायम पड़कर खाने योग्य हो जाते हैं। नूड्ल्ज़ के एक रेशे को "नूड्ल" कहा जाता है। .
नेपाल, (आधिकारिक रूप में, संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल) भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित एक दक्षिण एशियाई स्थलरुद्ध हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के ८१ प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है। एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्ण फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित हैं। संसार का सबसे ऊँची १४ हिम श्रृंखलाओं में से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सागरमाथा एवरेस्ट (नेपाल और चीन की सीमा पर) भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बड़ा नगर काठमांडू है। काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगंज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगंज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है। वर्तमान नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा के शाह वंशीय राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का एक अंश है। अंग्रेज़ों के साथ हुई संधियों में नेपाल को उस समय (१८१४ में) एक तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े, जो आज भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में विलय हो गये हैं। बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतांत्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए। अंततः २००८ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से यह आन्दोलन समाप्त हुआ। लेकिन सेना अध्यक्ष के निष्कासन को लेकर राष्ट्रपति से हुए मतभेद और टीवी पर सेना में माओवादियों की नियुक्ति को लेकर वीडियो फुटेज के प्रसारण के बाद सरकार से सहयोगी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद प्रचण्ड को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने से पहले सन् २००६ में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था। दक्षिण एशिया में नेपाल की सेना पांचवीं सबसे बड़ी सेना है और विशेषकर विश्व युद्धों के दौरान, अपने गोरखा इतिहास के लिए उल्लेखनीय रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है। .
बाजरा फसल फल रूप में लगे बाजरे के दाने अथवा सीटे ("Pennisetum glaucum") बाजरा एक प्रमुख फसल है। एक प्रकार की बड़ी घास जिसकी बालियों में हरे रंग के छोटे छोटे दाने लगते हैं। इन दानों की गिनती मोटे अन्नों में होती है। प्रायाः सारे उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत में लोग इसे खाते हैं। बाजरा मोटे अन्नों में सबसे अधिक उगाया जाने वाला अनाज है। इसे अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रागेतिहासिक काल से उगाया जाता रहा है, यद्यपि इसका मूल अफ्रीका में माना गया है। भारत में इसे बाद में प्रस्तुत किया गया था। भारत में इसे इसा पूर्व २००० वर्ष से उगाये जाने के प्रमाण मिलते है। इसका मतलब है कि यह अफ्रीका में इससे पहले ही उगाया जाने लगा था। यह पश्चिमी अफ्रीका के सहल क्षेत्र से निकल कर फैला है। बाजरे की विशेषता है सूखा प्रभावित क्षेत्र में भी उग जाना, तथा ऊँचा तापक्रम झेल जाना। यह अम्लीयता को भी झेल जाता है। यही कारण है कि यह उन क्षेत्रों में उगाया जाता है जहां मक्का या गेहूँ नही उगाये जा सकते। आज विश्व भर में बाजरा २६०,००० वर्ग किलोमीटर में उगाया जाता है। मोटे अन्न उत्पादन का आधा भाग बाजरा होता है। इस अनाज की खेती बहुत सी बातों में ज्वार की खेती से मिलती जुलती होती है। यह खरीफ की फसल है और प्रायः ज्वार के कुछ पीछे वर्षा ऋतु में बोई और उससे कुछ पहले अर्थात् जाड़े के आरंभ में काटी जाती हैं। इसके खेतों में खाद देने या सिंचाई करने की विशेष आवश्यकता नहीं होती। इसके लिये पहले तीन चार बार जमीन जोत दी जाती है और तब बीज बो दिए जाते हैं। एकाध बार निराई करना अवश्य आवश्यक होता है। इसके लिये किसी बहुत अच्छी जमीन की आवश्यकता नहीं होती और यह साधारण से साधारण जमीन में भी प्रायः अच्छी तरह होता है। यहाँ तक कि राजस्थान की बलुई भूमि में भी यह अधिकता से होता है। गुजरात आदि देशों में तो अच्छी करारी रूई बोने से पहले जमीन तयार करने के लिय इसे बोते हैं। बाजरे के दानों का आटा पीसकर और उसकी रोटी बनाकर खाई जाती है। इसकी रोटी बहुत ही बलवर्धक और पुष्टिकारक मानी जाती है। कुछ लोग दानों को यों ही उबालकर और उसमें नमक मिर्च आदि डालकर खाते हैं। इस रूप में इसे 'खिचड़ी' कहते हैं। कहीं कहीं लोग इसे पशुओं के चारे के लिये ही वोते हैं। वैद्यक में यह वादि, गरम, रूखा, अग्निदीपक पित्त को कुपित करनेवाला, देर में पचनेवाला, कांतिजनक, बलवर्धक और स्त्रियों के काम को बढा़नेवाला माना गया है। .
राप्ती अंचल मध्यपस्चिमान्चल नेपाल में पड़ता है, इस अन्चल में दांग, रोल्पा रूकुम, प्युठान व सल्यान जिले पडते है, भित्री मधेस कहेजाने वाला दांग उपत्यका इसी अंचलमे पड़ता है, इस अंचलकी पुर्वमे लुंबिनी अंचल, उत्तर, पुर्वमे धवलागिरी अंचल व उत्तरमे कर्णाली अंचल पश्चिम में भेरी अंचल व दक्षिण में भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश पडताहै। .
रागी या मड़ुआ अफ्रीका और एशिया के सूखे क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक मोटा अन्न है। यह एक वर्ष में पक कर तैयार हो जाता है। यह मूल रूप से इथियोपिया के उच्च इलाकों का पौधा है जिसे भारत में कोई चार हजार साल पहले लाया गया। ऊँचे इलाकों में अनुकूलित होने में यह काफी समर्थ है। हिमालय में यह २,३०० मीटर की ऊंचाई तक उगाया जाता है। .
सांवा घास साँवा या 'सावाँ' (Indian barnyard millet; वानस्पतिक नामः Echinochloa frumentacea) एक मोटा अनाज है। इसके दाने या बीज बाजरे के साथ मिलाकर खाये भी जाते हैं। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में यह खूब पैदा होती है। अनुपजाऊ भूमि पर भी इसकी खेती की जा सकती है जहाँ धान की फसल नहीं होती। Echinochloa colona नामक एक प्रकार की लंबी घास इसकी पूर्वज मानी जाती है जिसकी बालें चारे के काम आती हैं। .
ज्वार ज्वार के दाने ज्वार (Sorghum vulgare; संस्कृतः यवनाल, यवाकार या जूर्ण) एक प्रमुख फसल है। ज्वार कम वर्षा वाले क्षेत्र में अनाज तथा चारा दोनों के लिए बोई जाती हैं। ज्वार जानवरों का महत्वपूर्ण एवं पौष्टिक चारा हैं। भारत में यह फसल लगभग सवा चार करोड़ एकड़ भूमि में बोई जाती है। यह खरीफ की मुख्य फसलों में है। यह एक प्रकार की घास है जिसकी बाली के दाने मोटे अनाजों में गिने जाते हैं। .
कुटकी इसका वैज्ञानिक नाम पनिकम अन्तीदोटेल (Panicum antidotale) है। यह मुख्य रूप से पंजाब, गंगा के मैदान तथा हिमालय में पाई जाती है, यह भी पनिकम परिवार की घास है। पंजाब में इसे घिरी या घमूर कहते है .
अरहर की दाल को तुवर भी कहा जाता है। इसमें खनिज, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, कैल्शियम आदि पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह सुगमता से पचने वाली दाल है, अतः रोगी को भी दी जा सकती है, परंतु गैस, कब्ज एवं साँस के रोगियों को इसका सेवन कम ही करना चाहिए। भारत में अरहर की खेती तीन हजार वर्ष पूर्व से होती आ रही है किन्तु भारत के जंगलों में इसके पौधे नहीं पाये जाते है। अफ्रीका के जंगलों में इसके जंगली पौधे पाये जाते है। इस आधार पर इसका उत्पत्ति स्थल अफ्रीका को माना जाता है। सम्भवतया इस पौधें को अफ्रीका से ही एशिया में लाया गया है। दलहन प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत है जिसको आम जनता भी खाने में प्रयोग कर सकती है, लेकिन भारत में इसका उत्पादन आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। यदि प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ानी है तो दलहनों का उत्पादन बढ़ाना होगा। इसके लिए उन्नतशील प्रजातियां और उनकी उन्नतशील कृषि विधियों का विकास करना होगा। अरहर एक विलक्षण गुण सम्पन्न फसल है। इसका उपयोग अन्य दलहनी फसलों की तुलना में दाल के रूप में सर्वाधिक किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसकी हरी फलियां सब्जी के लिये, खली चूरी पशुओं के लिए रातव, हरी पत्ती चारा के लिये तथा तना ईंधन, झोपड़ी और टोकरी बनाने के काम लाया जाता है। इसके पौधों पर लाख के कीट का पालन करके लाख भी बनाई जाती है। मांस की तुलना में इसमें प्रोटीन भी अधिक (21-26 प्रतिशत) पाई जाती है। .
छुईखदान, मध्य प्रदेश के राजनांदगाँव की एक नगर पंचायत है। यह मध्य प्रदेश का भूतपूर्व राज्य था; इसका क्षेत्रफल 154 वर्ग मील था। यह भूभाग उपजाऊ मैदान हैं। इसमें 107 गाँव थे। छुई खदान नगर प्रधान कार्यालय है। यह दक्षिण-पूर्व रेलवे के राजनाँदगाँव स्टेशन से 31 मील है। कोदो यहाँ की प्रमुख उपज है। गेहूँ एवं धान भी होते हैं। यहाँ कई स्कूल एवं अस्पताल हैं। यहाँ छुई मिट्टी (एक प्रकार की सफेद मिट्टी) की खदानें मिलने के कारण इसका नाम छुई खदान पड़ा। .
| कोदो या कोदों या कोदरा एक अनाज है जो कम वर्षा में भी पैदा हो जाता है। नेपाल व भारत के विभिन्न भागों में इसकी खेती की जाती है। धान आदि के कारण इसकी खेती अब कम होती जा रही है। इसका पौधा धान या बडी़ घास के आकार का होता है। इसकी फसल पहली बर्षा होते ही बो दी जाती है और भादों में तैयार हो जाती है। इसके लिये बढि़या भूमि या अधिक परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती। कहीं-कहीं यह रूई या अरहर के खेत में भी बो दिया जाता है। अधिक पकने पर इसके दाने झड़कर खेत में गिर जाते हैं, इसलिये इसे पकने से कुछ पहले ही काटकर खलिहान में डाल देते हैं। छिलका उतरने पर इसके अंदर से एक प्रकार के गोल चावल निकलते हैं जो खाए जाते हैं। कभी कभी इसके खेत में 'अगिया' नाम की घास उत्पन्न हो जाती है जो इसके पौधों को जला देती है। यदि इसकी कटाई से कुछ पहले बदली हो जाय, तो इसके चावलों में एक प्रकार का विष आ जाता है। वैद्यक के मत से यह मधुर, तिक्त, रूखा, कफ और पित्तनाशक होता है। नया कोदो कुरु पाक होता है, फोडे़ के रोगी को इसका पथ्य दिया जाता है। कोदो के दानों को चावल के रूप में खाया जाता है और स्थानीय बोली में 'भगर के चावल' के नाम पर इसे उपवास में भी खाया जाता है। इसके दाने में आठ.तीन प्रतिशत प्रोटीन, एक.चार प्रतिशत वसा तथा पैंसठ.नौ प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाई जाती है। कोदो-कुटकी मधुमेह नियन्त्रण, यकृत और मूत्राशय के लिए लाभकारी है। . ग्यारह संबंधोंः चेना, नूडल, नेपाल, बजड़ी, राप्ती अंचल, रागी, साँवा, ज्वार, कुटकी, अरहर दाल, छुईखदान। चेना की फसल चेना के दाने चेना मोटा अन्न है। इसे 'पुनर्वा' भी कहते है। इसे सबसे पहले कहा उगाया गया, यह ज्ञात नही है, किंतु एक फसल के रूप में यह काकेशिया तथा चीन में सात,शून्य वर्ष पूर्व से उत्पादित किया जा रहा है। माना जाता है की इसे स्वतंत्र रूप से उगाया जाना सीखा गया होगा। इसे आज भी भारत, रूस, यूक्रेन, मध्य पूर्व एशिया, तुर्की तथा रोमानिया में बड़े पैमाने पे उगाया जाता है। इसे स्वास्थ्य रक्षक माना जाता है। इसमे ग्लूटेन नही होने से वे लोग भी इसे प्रयोग कर सकते है जिन्हें गेंहू से एलर्जी हो जाती है। यह कई प्रकार के जलवायु में उग जाता है। बहुत कम जल की जरूरत होती है, तथा कई प्रकार की मृदा में उग जाता है। इसे उगने के लिए कम समय की जरूरत होती है, सूखे क्षेत्रों हेतु यह आदर्श फसल है, मुख्य अन्नो में यह न्यूनतम जल मांगती है, इसका पादप चार फीट तक ऊँचा हो सकता है, बीज गुच्छो में उगते है तथा दो-तीन मिलीमीटर के होते है, ये पीले, संतरी, या भूरे रंग के हो सकते है। यधपि यह घास है लेकिन अन्य मोटे अन्नो से इसका कोई रिश्ता नही है। . ताइवान के लुकांग शहर में बनते हुए मीसुआ नूडल्ज़ नूड्ल्ज़ गेहूं, चावल, बाजरे या अन्य क़िस्म के आटे से बनाकर सुखाये गए पतले, लम्बे रेशे होते हैं जिन्हें उबलते हुए पाने या तेल में डालकर खाने के लिए पकाया जाता है। जब नूड्ल्ज़ सूखे होते हैं तो अक्सर तीली की तरह सख़्त होतें हैं लेकिन उबालने के बाद मुलायम पड़कर खाने योग्य हो जाते हैं। नूड्ल्ज़ के एक रेशे को "नूड्ल" कहा जाता है। . नेपाल, भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित एक दक्षिण एशियाई स्थलरुद्ध हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के इक्यासी प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है। एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्ण फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित हैं। संसार का सबसे ऊँची चौदह हिम श्रृंखलाओं में से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सागरमाथा एवरेस्ट भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बड़ा नगर काठमांडू है। काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर , भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगंज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगंज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है। वर्तमान नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा के शाह वंशीय राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का एक अंश है। अंग्रेज़ों के साथ हुई संधियों में नेपाल को उस समय एक तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े, जो आज भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में विलय हो गये हैं। बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतांत्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए। अंततः दो हज़ार आठ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से यह आन्दोलन समाप्त हुआ। लेकिन सेना अध्यक्ष के निष्कासन को लेकर राष्ट्रपति से हुए मतभेद और टीवी पर सेना में माओवादियों की नियुक्ति को लेकर वीडियो फुटेज के प्रसारण के बाद सरकार से सहयोगी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद प्रचण्ड को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने से पहले सन् दो हज़ार छः में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था। दक्षिण एशिया में नेपाल की सेना पांचवीं सबसे बड़ी सेना है और विशेषकर विश्व युद्धों के दौरान, अपने गोरखा इतिहास के लिए उल्लेखनीय रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है। . बाजरा फसल फल रूप में लगे बाजरे के दाने अथवा सीटे बाजरा एक प्रमुख फसल है। एक प्रकार की बड़ी घास जिसकी बालियों में हरे रंग के छोटे छोटे दाने लगते हैं। इन दानों की गिनती मोटे अन्नों में होती है। प्रायाः सारे उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत में लोग इसे खाते हैं। बाजरा मोटे अन्नों में सबसे अधिक उगाया जाने वाला अनाज है। इसे अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रागेतिहासिक काल से उगाया जाता रहा है, यद्यपि इसका मूल अफ्रीका में माना गया है। भारत में इसे बाद में प्रस्तुत किया गया था। भारत में इसे इसा पूर्व दो हज़ार वर्ष से उगाये जाने के प्रमाण मिलते है। इसका मतलब है कि यह अफ्रीका में इससे पहले ही उगाया जाने लगा था। यह पश्चिमी अफ्रीका के सहल क्षेत्र से निकल कर फैला है। बाजरे की विशेषता है सूखा प्रभावित क्षेत्र में भी उग जाना, तथा ऊँचा तापक्रम झेल जाना। यह अम्लीयता को भी झेल जाता है। यही कारण है कि यह उन क्षेत्रों में उगाया जाता है जहां मक्का या गेहूँ नही उगाये जा सकते। आज विश्व भर में बाजरा दो सौ साठ,शून्य वर्ग किलोमीटर में उगाया जाता है। मोटे अन्न उत्पादन का आधा भाग बाजरा होता है। इस अनाज की खेती बहुत सी बातों में ज्वार की खेती से मिलती जुलती होती है। यह खरीफ की फसल है और प्रायः ज्वार के कुछ पीछे वर्षा ऋतु में बोई और उससे कुछ पहले अर्थात् जाड़े के आरंभ में काटी जाती हैं। इसके खेतों में खाद देने या सिंचाई करने की विशेष आवश्यकता नहीं होती। इसके लिये पहले तीन चार बार जमीन जोत दी जाती है और तब बीज बो दिए जाते हैं। एकाध बार निराई करना अवश्य आवश्यक होता है। इसके लिये किसी बहुत अच्छी जमीन की आवश्यकता नहीं होती और यह साधारण से साधारण जमीन में भी प्रायः अच्छी तरह होता है। यहाँ तक कि राजस्थान की बलुई भूमि में भी यह अधिकता से होता है। गुजरात आदि देशों में तो अच्छी करारी रूई बोने से पहले जमीन तयार करने के लिय इसे बोते हैं। बाजरे के दानों का आटा पीसकर और उसकी रोटी बनाकर खाई जाती है। इसकी रोटी बहुत ही बलवर्धक और पुष्टिकारक मानी जाती है। कुछ लोग दानों को यों ही उबालकर और उसमें नमक मिर्च आदि डालकर खाते हैं। इस रूप में इसे 'खिचड़ी' कहते हैं। कहीं कहीं लोग इसे पशुओं के चारे के लिये ही वोते हैं। वैद्यक में यह वादि, गरम, रूखा, अग्निदीपक पित्त को कुपित करनेवाला, देर में पचनेवाला, कांतिजनक, बलवर्धक और स्त्रियों के काम को बढा़नेवाला माना गया है। . राप्ती अंचल मध्यपस्चिमान्चल नेपाल में पड़ता है, इस अन्चल में दांग, रोल्पा रूकुम, प्युठान व सल्यान जिले पडते है, भित्री मधेस कहेजाने वाला दांग उपत्यका इसी अंचलमे पड़ता है, इस अंचलकी पुर्वमे लुंबिनी अंचल, उत्तर, पुर्वमे धवलागिरी अंचल व उत्तरमे कर्णाली अंचल पश्चिम में भेरी अंचल व दक्षिण में भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश पडताहै। . रागी या मड़ुआ अफ्रीका और एशिया के सूखे क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक मोटा अन्न है। यह एक वर्ष में पक कर तैयार हो जाता है। यह मूल रूप से इथियोपिया के उच्च इलाकों का पौधा है जिसे भारत में कोई चार हजार साल पहले लाया गया। ऊँचे इलाकों में अनुकूलित होने में यह काफी समर्थ है। हिमालय में यह दो,तीन सौ मीटर की ऊंचाई तक उगाया जाता है। . सांवा घास साँवा या 'सावाँ' एक मोटा अनाज है। इसके दाने या बीज बाजरे के साथ मिलाकर खाये भी जाते हैं। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में यह खूब पैदा होती है। अनुपजाऊ भूमि पर भी इसकी खेती की जा सकती है जहाँ धान की फसल नहीं होती। Echinochloa colona नामक एक प्रकार की लंबी घास इसकी पूर्वज मानी जाती है जिसकी बालें चारे के काम आती हैं। . ज्वार ज्वार के दाने ज्वार एक प्रमुख फसल है। ज्वार कम वर्षा वाले क्षेत्र में अनाज तथा चारा दोनों के लिए बोई जाती हैं। ज्वार जानवरों का महत्वपूर्ण एवं पौष्टिक चारा हैं। भारत में यह फसल लगभग सवा चार करोड़ एकड़ भूमि में बोई जाती है। यह खरीफ की मुख्य फसलों में है। यह एक प्रकार की घास है जिसकी बाली के दाने मोटे अनाजों में गिने जाते हैं। . कुटकी इसका वैज्ञानिक नाम पनिकम अन्तीदोटेल है। यह मुख्य रूप से पंजाब, गंगा के मैदान तथा हिमालय में पाई जाती है, यह भी पनिकम परिवार की घास है। पंजाब में इसे घिरी या घमूर कहते है . अरहर की दाल को तुवर भी कहा जाता है। इसमें खनिज, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, कैल्शियम आदि पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह सुगमता से पचने वाली दाल है, अतः रोगी को भी दी जा सकती है, परंतु गैस, कब्ज एवं साँस के रोगियों को इसका सेवन कम ही करना चाहिए। भारत में अरहर की खेती तीन हजार वर्ष पूर्व से होती आ रही है किन्तु भारत के जंगलों में इसके पौधे नहीं पाये जाते है। अफ्रीका के जंगलों में इसके जंगली पौधे पाये जाते है। इस आधार पर इसका उत्पत्ति स्थल अफ्रीका को माना जाता है। सम्भवतया इस पौधें को अफ्रीका से ही एशिया में लाया गया है। दलहन प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत है जिसको आम जनता भी खाने में प्रयोग कर सकती है, लेकिन भारत में इसका उत्पादन आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। यदि प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ानी है तो दलहनों का उत्पादन बढ़ाना होगा। इसके लिए उन्नतशील प्रजातियां और उनकी उन्नतशील कृषि विधियों का विकास करना होगा। अरहर एक विलक्षण गुण सम्पन्न फसल है। इसका उपयोग अन्य दलहनी फसलों की तुलना में दाल के रूप में सर्वाधिक किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसकी हरी फलियां सब्जी के लिये, खली चूरी पशुओं के लिए रातव, हरी पत्ती चारा के लिये तथा तना ईंधन, झोपड़ी और टोकरी बनाने के काम लाया जाता है। इसके पौधों पर लाख के कीट का पालन करके लाख भी बनाई जाती है। मांस की तुलना में इसमें प्रोटीन भी अधिक पाई जाती है। . छुईखदान, मध्य प्रदेश के राजनांदगाँव की एक नगर पंचायत है। यह मध्य प्रदेश का भूतपूर्व राज्य था; इसका क्षेत्रफल एक सौ चौवन वर्ग मील था। यह भूभाग उपजाऊ मैदान हैं। इसमें एक सौ सात गाँव थे। छुई खदान नगर प्रधान कार्यालय है। यह दक्षिण-पूर्व रेलवे के राजनाँदगाँव स्टेशन से इकतीस मील है। कोदो यहाँ की प्रमुख उपज है। गेहूँ एवं धान भी होते हैं। यहाँ कई स्कूल एवं अस्पताल हैं। यहाँ छुई मिट्टी की खदानें मिलने के कारण इसका नाम छुई खदान पड़ा। . |
बैकी लिंच (Becky Lynch)
जॉन सीना (John Cena)
ट्रिपल एच (Triple H)
WWE Fastlane में रोमन रेंस और डेनियल ब्रायन के बीच होने वाले यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच का रिजल्ट हुआ लीक?
WWE Fastlane 2021 प्रीव्यूः 129 किलो के दिग्गज की महीनों बाद होगी वापसी, रोमन रेंस हारेंगे चैंपियनशिप?
WWE Fastlane Roundup: पूर्व यूनिवर्सल चैंपियन के मैच को पीपीवी से हटाया गया, दिग्गज की तीन महीने बाद होगी वापसी?
"WWE Fastlane रिंग में डेनियल ब्रायन जैसे सुपरस्टार के खिलाफ टैपआउट करने से अच्छा मैं मरना पसंद करूंगा"
R U Next?
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15 फरवरी से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए शुरू की गई नई पेंशन योजना के एक प्रावधान पर विवाद हो सकता है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना को लेकर जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उसमें कहा गया है कि पति-पत्नी की मृत्यु की स्थिति में पेंशन फंड में जमा कराई गई पूरी रकम फंड में ही जमा रहेगी। यानी, अगर पेंशन फंड में योगदान करने वाले/वाली कामगार और उनकी पत्नी/उनके पति की मृत्यु हो जाए तो उनकी ओर से जमा की गई पूरी रकम सरकारी खजाने में चली जाएगी, उनके बच्चों को नहीं मिलेगा। विवाद इस बात पर हो सकता है कि बाकी सारी पेंशन योजनाओं में जमा फंड के पैसे पति-पत्नी की मृत्यु की स्थिति में उनके अविवाहित बच्चे को दिए जाने का प्रावधान है।
ध्यान रहे कि 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को 60 वर्ष की उम्र के बाद 3 हजार रुपये प्रति माह पेंशन दिए जाने के मकसद से प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना (PM-SYM) का ऐलान किया था। यह योजना 15 फरवरी से लागू हो चुकी है। योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की उम्र के असंगठित कामगार हर महीने 55 से 200 रुपये तक का योगदान करेंगे और बराबर की रकम सरकार जमा करेगी। नीचे चार्ट में देखें, किस उम्र के कामगार को कितनी प्रति माह कितनी रकम जमा करानी होगी।
गौरतलब है कि घरेलू कामगारों, फेरी वालों, मध्याह्नन भोजन (मिड डे मिल) बनाने वालों, बोझा ढोने वालों, ईंट भट्ठे में काम करने वालों, मोची, कूड़ा बीनने वालों, धोबी, रिक्शा चालक, ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक, बीड़ी मजदूर, हथकरघा मजदूर आदि को इस योजना का लाभ मिलेगा। जिनका मासिक आय 15 हजार रुपये से कम हो और जो इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते हों, वही इस योजना का लाभ उठा पाएंगे। योजना से जुड़े बाकी सभी नियम जानने के लिए यहां क्लिक करें।
| पंद्रह फरवरी से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए शुरू की गई नई पेंशन योजना के एक प्रावधान पर विवाद हो सकता है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना को लेकर जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उसमें कहा गया है कि पति-पत्नी की मृत्यु की स्थिति में पेंशन फंड में जमा कराई गई पूरी रकम फंड में ही जमा रहेगी। यानी, अगर पेंशन फंड में योगदान करने वाले/वाली कामगार और उनकी पत्नी/उनके पति की मृत्यु हो जाए तो उनकी ओर से जमा की गई पूरी रकम सरकारी खजाने में चली जाएगी, उनके बच्चों को नहीं मिलेगा। विवाद इस बात पर हो सकता है कि बाकी सारी पेंशन योजनाओं में जमा फंड के पैसे पति-पत्नी की मृत्यु की स्थिति में उनके अविवाहित बच्चे को दिए जाने का प्रावधान है। ध्यान रहे कि एक फरवरी को पेश अंतरिम बजट में केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को साठ वर्ष की उम्र के बाद तीन हजार रुपये प्रति माह पेंशन दिए जाने के मकसद से प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना का ऐलान किया था। यह योजना पंद्रह फरवरी से लागू हो चुकी है। योजना के तहत अट्ठारह से चालीस वर्ष की उम्र के असंगठित कामगार हर महीने पचपन से दो सौ रुपयापये तक का योगदान करेंगे और बराबर की रकम सरकार जमा करेगी। नीचे चार्ट में देखें, किस उम्र के कामगार को कितनी प्रति माह कितनी रकम जमा करानी होगी। गौरतलब है कि घरेलू कामगारों, फेरी वालों, मध्याह्नन भोजन बनाने वालों, बोझा ढोने वालों, ईंट भट्ठे में काम करने वालों, मोची, कूड़ा बीनने वालों, धोबी, रिक्शा चालक, ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक, बीड़ी मजदूर, हथकरघा मजदूर आदि को इस योजना का लाभ मिलेगा। जिनका मासिक आय पंद्रह हजार रुपये से कम हो और जो इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते हों, वही इस योजना का लाभ उठा पाएंगे। योजना से जुड़े बाकी सभी नियम जानने के लिए यहां क्लिक करें। |
"हम सुबह खेत जाते हैं काम करने। फिर अम्मा घर का सारा काम करवाती है और बोलती है कि स्कूल गई तो टांगें तोड़ दूंगी"
सुबह के 9 बज चुके हैं और सीमा दौड़ती, हांफती हुई स्कूल पहुँचती है। दो दिन बाद आज वह स्कूल आई, पर सीमा को आज फ़िर देर हो गई। बच्चे प्रार्थना खत्म कर अपनी-अपनी कक्षा में पहुंच चुके हैं। सीमा सहमते हुए, धीरे से, कक्षा की ओर बढ़ ही रही थी की पीछे से संगम मैडम की आवाज़ आती है, "कहाँ थी अब तक?"
सीमा, अपर प्राथमिक विद्यालय, जगसर के नकहा ब्लॉक की कक्षा छठवीं में पढ़ने वाली छात्रा है। नकहा, उत्तर प्रदेश की राजधानी, लखनऊ से करीब 150 किलोमीटर दूर, लखीमपुर शहर से 30 मिनट की दूरी पर स्थित है।
सीमा को अक्सर देरी से आते देख आज जब संगम मैडम ने उस से देरी की वजह पूछी तो सीमा रोने लगी। बहुत समझाने और पूछने पर आखिरकार जवाब आया, "हम सुबह खेत जाते हैं काम करने। फिर अम्मा घर का सारा काम करवाती है और बोलती है कि स्कूल गई तो टांगें तोड़ दूंगी।"
सीमा को खुल कर सामने आते देख मनीषा, प्रियंका और अनुराधा ने भी साहस जुटाया और अपनी दिनचर्या मैडम जी को बताई तो विद्यालय की बालिकाओं की इस दिक्कत का पता चला। संगम वर्मा, जो की विद्यालय की सहायक अध्यापिका हैं, बताती हैं, "जब हमें पता चला कि चाहते हुए भी हमारी लड़कियां लगातार स्कूल नहीं आ पा रहीं हैं तो हमने उनके घरों में बात की। लड़कियों के माता-पिता को उनसे काम न करा कर विद्यालय भेजने के लिए मनाना काफ़ी मुश्किल होता है। फ़िर कुछ कोशिशों के बाद हमने बीच का रास्ता निकाला।"
जब महिला शिक्षकों ने अभिभावकों से बात की तो उनके पक्ष की बात भी पूरी तरह नकारने लायक नहीं थी। अभिभावकों ने बताया वह सुबह ही काम पर निकल जाते हैं। कोई खेती करने तो कोई मौजदूरी पर। उन्होंने कहा, "ऐसे में अगर हमारी बेटियां खाना नहीं बनाएंगी तो सब खाएंगे कैसे? बिना पढ़ाये ज़िंदा रहा जा सकता है पर बिना खाये नहीं।"
पर लड़कियों की स्कूल आने की ललक को देखते हुए शिक्षकों ने लड़कियों को देर से ही सही, पर प्रतिदिन स्कूल आने की हिदायत दी। "हमने लड़कियों से कहा कि वह चाहे तो सुबह थोड़ी देर से भी पहुचें, पर हर रोज़ स्कूल ज़रूर आएं," संगम ने बताया।
इसी स्कूल में पढ़ने वाले शिवम्, राहुल और रोहित के संघर्ष का रूप दूसरा है। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले ये विद्यार्थी 6 किलोमीटर दूर अपने घरों से पैदल चलकर अपने विद्यालय जगसर तक आते हैं। शिवम् अपनी कक्षा में हमेशा उत्तीर्ण आने वाला छात्र है और यह 6 किलोमीटर की दूरी उसके लिए महज़ एक मौका है। "मुझे तो मज़ा आता है दूर से चल कर आने में। हम तीनों मिलकर जामुन और आम तोड़ लेते हैं और फिर स्कूल आकर अपने दोस्तों को भी बांटते हैं," रोहित ने बताया।
शिक्षा में तमाम चुनौतियों के बाद भी उत्तर प्रदेश के इस गाँव में बदलाव की किरणों ने भी फूटना शुरू कर दिया है।
अब सीमा भी सुबह जल्दी उठकर पहले घर का सारा काम निपटाती है और फिर अम्मा का चूल्हा-चौका निपटा कर, प्रार्थना के बाद ही सही, पर स्कूल ज़रूर पहुँच जाती है।
| "हम सुबह खेत जाते हैं काम करने। फिर अम्मा घर का सारा काम करवाती है और बोलती है कि स्कूल गई तो टांगें तोड़ दूंगी" सुबह के नौ बज चुके हैं और सीमा दौड़ती, हांफती हुई स्कूल पहुँचती है। दो दिन बाद आज वह स्कूल आई, पर सीमा को आज फ़िर देर हो गई। बच्चे प्रार्थना खत्म कर अपनी-अपनी कक्षा में पहुंच चुके हैं। सीमा सहमते हुए, धीरे से, कक्षा की ओर बढ़ ही रही थी की पीछे से संगम मैडम की आवाज़ आती है, "कहाँ थी अब तक?" सीमा, अपर प्राथमिक विद्यालय, जगसर के नकहा ब्लॉक की कक्षा छठवीं में पढ़ने वाली छात्रा है। नकहा, उत्तर प्रदेश की राजधानी, लखनऊ से करीब एक सौ पचास किलोग्राममीटर दूर, लखीमपुर शहर से तीस मिनट की दूरी पर स्थित है। सीमा को अक्सर देरी से आते देख आज जब संगम मैडम ने उस से देरी की वजह पूछी तो सीमा रोने लगी। बहुत समझाने और पूछने पर आखिरकार जवाब आया, "हम सुबह खेत जाते हैं काम करने। फिर अम्मा घर का सारा काम करवाती है और बोलती है कि स्कूल गई तो टांगें तोड़ दूंगी।" सीमा को खुल कर सामने आते देख मनीषा, प्रियंका और अनुराधा ने भी साहस जुटाया और अपनी दिनचर्या मैडम जी को बताई तो विद्यालय की बालिकाओं की इस दिक्कत का पता चला। संगम वर्मा, जो की विद्यालय की सहायक अध्यापिका हैं, बताती हैं, "जब हमें पता चला कि चाहते हुए भी हमारी लड़कियां लगातार स्कूल नहीं आ पा रहीं हैं तो हमने उनके घरों में बात की। लड़कियों के माता-पिता को उनसे काम न करा कर विद्यालय भेजने के लिए मनाना काफ़ी मुश्किल होता है। फ़िर कुछ कोशिशों के बाद हमने बीच का रास्ता निकाला।" जब महिला शिक्षकों ने अभिभावकों से बात की तो उनके पक्ष की बात भी पूरी तरह नकारने लायक नहीं थी। अभिभावकों ने बताया वह सुबह ही काम पर निकल जाते हैं। कोई खेती करने तो कोई मौजदूरी पर। उन्होंने कहा, "ऐसे में अगर हमारी बेटियां खाना नहीं बनाएंगी तो सब खाएंगे कैसे? बिना पढ़ाये ज़िंदा रहा जा सकता है पर बिना खाये नहीं।" पर लड़कियों की स्कूल आने की ललक को देखते हुए शिक्षकों ने लड़कियों को देर से ही सही, पर प्रतिदिन स्कूल आने की हिदायत दी। "हमने लड़कियों से कहा कि वह चाहे तो सुबह थोड़ी देर से भी पहुचें, पर हर रोज़ स्कूल ज़रूर आएं," संगम ने बताया। इसी स्कूल में पढ़ने वाले शिवम्, राहुल और रोहित के संघर्ष का रूप दूसरा है। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले ये विद्यार्थी छः किलोग्राममीटर दूर अपने घरों से पैदल चलकर अपने विद्यालय जगसर तक आते हैं। शिवम् अपनी कक्षा में हमेशा उत्तीर्ण आने वाला छात्र है और यह छः किलोग्राममीटर की दूरी उसके लिए महज़ एक मौका है। "मुझे तो मज़ा आता है दूर से चल कर आने में। हम तीनों मिलकर जामुन और आम तोड़ लेते हैं और फिर स्कूल आकर अपने दोस्तों को भी बांटते हैं," रोहित ने बताया। शिक्षा में तमाम चुनौतियों के बाद भी उत्तर प्रदेश के इस गाँव में बदलाव की किरणों ने भी फूटना शुरू कर दिया है। अब सीमा भी सुबह जल्दी उठकर पहले घर का सारा काम निपटाती है और फिर अम्मा का चूल्हा-चौका निपटा कर, प्रार्थना के बाद ही सही, पर स्कूल ज़रूर पहुँच जाती है। |
जनजातीय मामले मंत्रालय के जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राइफेड) द्वारा आज शाम आदि महोत्सव (जनजातीय त्यौहार) की एक्सपो सेंटर सेक्टर -62, नोएडा (यूपी) में रंगारंग शुरूआत हुई। जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह ने महोत्सव का उद्घाटन किया। जनजातीय मामले सचिव श्री दीपक खांडेकर, ट्राइफेड के अध्यक्ष श्री रमेश चंद मीणा और कई गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। यह महोत्सव 8 अक्टूबर, 2019 तक रोजाना सुबह 11 बजे से रात 8.30 बजे तक जारी रहेगा।
मंत्री ने महोत्सव का भ्रमण किया और जनजातीय कलाकारों के साथ बातचीत की और देश की दुर्लभ लोक कला और शिल्प के रक्षण, संरक्षण और संवर्धन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोगों को जोड़ने और भारत को एकीकृत करने के लिए देश भर में इस तरह के उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करके और जनजातीय कारीगरों को अपनी कलात्मक कृतियों को एक बड़े और व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करके ट्राइफेड एक उत्कृष्ट काम कर रहा है। उन्होंने उस एकता का भी उल्लेख किया जिसे इस प्रकार के आयोजनों में देखा जा सकता है।
श्री रमेश चंद मीणा ने विस्तृत रूप से बताया कि हस्तशिल्प के अलावा, जनजातियाँ जंगलों से कई प्रकार के वन उत्पाद इकट्ठा करती हैं, जिनमें फूल, फल, बीज, छाल और पत्ते जैसे विभिन्न पेड़-पौधे और शहद की तरह विभिन्न कीट उत्पाद शामिल होते हैं। ये सभी शत प्रतिशत जैविक उत्पाद हैं। यह जानते हुए कि जैविक खाद्य उत्पादों की कीमत अधिक होती है ट्राइफेड ने इस प्रीमियम उत्कृष्ट बाजार का दोहन करने की योजना बनाई है। इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया है कि उच्च मूल्यों का लाभ आदिवासियों को प्राप्त हो सके।
जनजातीय मामलों के सचिव श्री दीपक खांडेकर ने इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक शुरू किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने लोगों को जनजातीय मामलों के मंत्रालय की योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्राइफेड इस दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रहा है और अब इस व्यवसाय को आगे ले जाने के लिए उसने ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करना शुरू कर दिया है।
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश (मप्र), ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित देश के 20 से अधिक राज्यों के कुशल कलाकार और कारीगर इस मेगा सांस्कृतिक आयोजन का एक हिस्सा हैं और वे अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। जिज्ञासु खरीदारों के लिए पारंपरिक आदिवासी आभूषण, दुर्लभ शिल्प वस्तुओं और कलाकृतियों का संग्रह एक बड़ा आकर्षण होगा।
ट्राइफेड छोटे और सीमांत कलाकारों और कारीगरों को इस तरह के मेगा सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमंत्रित करके और उन्हें खरीदारों से उनके उत्पाद की वास्तविक कीमत दिलाने के कार्य में पूरी तरह जुटा हुआ है। इससे उन्हें बिचौलियों से छुटकारा पाने में भी मदद मिलती है, जो उनके मुनाफे को हड़प लेता है। पहली बार, नकदी रहित व्यापार की राष्ट्रीय आकांक्षा के अनुरूप क्रेडिट और डेबिट कार्ड के माध्यम से आदिवासी व्यापारिक भुगतान स्वीकार किए जाएंगे। ट्राइफेड व्यापक तरीके से अमेज़न, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम और जीईएम जैसे ऑनलाइन मंच पर भी अपने सभी जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है।
| जनजातीय मामले मंत्रालय के जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ द्वारा आज शाम आदि महोत्सव की एक्सपो सेंटर सेक्टर -बासठ, नोएडा में रंगारंग शुरूआत हुई। जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह ने महोत्सव का उद्घाटन किया। जनजातीय मामले सचिव श्री दीपक खांडेकर, ट्राइफेड के अध्यक्ष श्री रमेश चंद मीणा और कई गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। यह महोत्सव आठ अक्टूबर, दो हज़ार उन्नीस तक रोजाना सुबह ग्यारह बजे से रात आठ.तीस बजे तक जारी रहेगा। मंत्री ने महोत्सव का भ्रमण किया और जनजातीय कलाकारों के साथ बातचीत की और देश की दुर्लभ लोक कला और शिल्प के रक्षण, संरक्षण और संवर्धन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोगों को जोड़ने और भारत को एकीकृत करने के लिए देश भर में इस तरह के उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करके और जनजातीय कारीगरों को अपनी कलात्मक कृतियों को एक बड़े और व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करके ट्राइफेड एक उत्कृष्ट काम कर रहा है। उन्होंने उस एकता का भी उल्लेख किया जिसे इस प्रकार के आयोजनों में देखा जा सकता है। श्री रमेश चंद मीणा ने विस्तृत रूप से बताया कि हस्तशिल्प के अलावा, जनजातियाँ जंगलों से कई प्रकार के वन उत्पाद इकट्ठा करती हैं, जिनमें फूल, फल, बीज, छाल और पत्ते जैसे विभिन्न पेड़-पौधे और शहद की तरह विभिन्न कीट उत्पाद शामिल होते हैं। ये सभी शत प्रतिशत जैविक उत्पाद हैं। यह जानते हुए कि जैविक खाद्य उत्पादों की कीमत अधिक होती है ट्राइफेड ने इस प्रीमियम उत्कृष्ट बाजार का दोहन करने की योजना बनाई है। इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया है कि उच्च मूल्यों का लाभ आदिवासियों को प्राप्त हो सके। जनजातीय मामलों के सचिव श्री दीपक खांडेकर ने इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक शुरू किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने लोगों को जनजातीय मामलों के मंत्रालय की योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्राइफेड इस दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रहा है और अब इस व्यवसाय को आगे ले जाने के लिए उसने ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश , ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित देश के बीस से अधिक राज्यों के कुशल कलाकार और कारीगर इस मेगा सांस्कृतिक आयोजन का एक हिस्सा हैं और वे अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। जिज्ञासु खरीदारों के लिए पारंपरिक आदिवासी आभूषण, दुर्लभ शिल्प वस्तुओं और कलाकृतियों का संग्रह एक बड़ा आकर्षण होगा। ट्राइफेड छोटे और सीमांत कलाकारों और कारीगरों को इस तरह के मेगा सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमंत्रित करके और उन्हें खरीदारों से उनके उत्पाद की वास्तविक कीमत दिलाने के कार्य में पूरी तरह जुटा हुआ है। इससे उन्हें बिचौलियों से छुटकारा पाने में भी मदद मिलती है, जो उनके मुनाफे को हड़प लेता है। पहली बार, नकदी रहित व्यापार की राष्ट्रीय आकांक्षा के अनुरूप क्रेडिट और डेबिट कार्ड के माध्यम से आदिवासी व्यापारिक भुगतान स्वीकार किए जाएंगे। ट्राइफेड व्यापक तरीके से अमेज़न, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम और जीईएम जैसे ऑनलाइन मंच पर भी अपने सभी जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है। |
सेवा की और स्त्रय चिद्भानु होकर, मानाभिमानको जीतकर जो 'भगवत्पावन' हुए, जिनकी 'पदबन्ध - प्राप्ति' से श्रीबिट्ठल-मूर्ति के दर्शन हुए । उन भानुदासके पुत्र चक्रपाणि हुए, चक्रपाणिके सुलक्षण सुतका नाम सूर्य रखकर भानुदास निजमें निज होकर रहे । उन सूर्यके प्रभा-प्रताप-किरणसे माता रुक्मिणी प्रसूत हुई जो मेरी माता हैं । ग्रन्थारम्भमें पूर्वजमालाको यह वन्दन किया है । यह मेरी भाग्यलीला धन्य है जो ऐसे वैष्णवकुलमें मेरा जन्म हुआ ।'
इन उद्गारोंसे यह मालूम हो जाता है कि एकनाथ भानुदासको कितना मानते थे । भानुदासके कारण हमारा वंश भगवान्को प्रिय हुआ और ऐसे वैष्णव पवित्र कुलमें मेरा जन्म हुआ यह मेरा अहोभाग्य है, इत्यादि प्रेमभरे उद्गार हृदयको हिलानेवाले हैं। बड़े सात्त्विक अभिमानके साथ एकनाथ कहते हैं कि भानुदासके पावन कुलमें मेरा जन्म हुआ इसीसे भगवत्-भक्तिमें मेरी प्रीति हुई ! इस वैष्णत्र-कुलमें जन्म होनेपर अपनी 'भाग्यलीला' को एकनाथने 'धन्य' कहा है । इस धन्योद्गारका मर्म अनुभवसे ही जाना जा सकता है । भानुदासकी सत्यनिष्ठा, उनकी एकविध भक्ति और उनका शुद्धाचरण इत्यादि गुणोंका विचार करनेसे यही प्रतीत होता है कि 'शुचीनां श्रीमता गेहे' एकनाथ एक योगभ्रष्ट महात्मा ही उत्पन्न हुए । इससे शुद्ध कुल परम्पराको रक्षाका कितना महत्त्व है यह भी प्रकट होता है ।
एकनाथके पिता सूर्यनारायणका नामकरण भानुदासने ही किया था और इसके बाद ही उनका देहावसान हुआ यह श्रीएकनाथके ही उपर्युक्त लेखसे स्पष्ट है । यह घटना शाके १४३५ (संवत् १५७० ) के लगभग हुई होगी । | सेवा की और स्त्रय चिद्भानु होकर, मानाभिमानको जीतकर जो 'भगवत्पावन' हुए, जिनकी 'पदबन्ध - प्राप्ति' से श्रीबिट्ठल-मूर्ति के दर्शन हुए । उन भानुदासके पुत्र चक्रपाणि हुए, चक्रपाणिके सुलक्षण सुतका नाम सूर्य रखकर भानुदास निजमें निज होकर रहे । उन सूर्यके प्रभा-प्रताप-किरणसे माता रुक्मिणी प्रसूत हुई जो मेरी माता हैं । ग्रन्थारम्भमें पूर्वजमालाको यह वन्दन किया है । यह मेरी भाग्यलीला धन्य है जो ऐसे वैष्णवकुलमें मेरा जन्म हुआ ।' इन उद्गारोंसे यह मालूम हो जाता है कि एकनाथ भानुदासको कितना मानते थे । भानुदासके कारण हमारा वंश भगवान्को प्रिय हुआ और ऐसे वैष्णव पवित्र कुलमें मेरा जन्म हुआ यह मेरा अहोभाग्य है, इत्यादि प्रेमभरे उद्गार हृदयको हिलानेवाले हैं। बड़े सात्त्विक अभिमानके साथ एकनाथ कहते हैं कि भानुदासके पावन कुलमें मेरा जन्म हुआ इसीसे भगवत्-भक्तिमें मेरी प्रीति हुई ! इस वैष्णत्र-कुलमें जन्म होनेपर अपनी 'भाग्यलीला' को एकनाथने 'धन्य' कहा है । इस धन्योद्गारका मर्म अनुभवसे ही जाना जा सकता है । भानुदासकी सत्यनिष्ठा, उनकी एकविध भक्ति और उनका शुद्धाचरण इत्यादि गुणोंका विचार करनेसे यही प्रतीत होता है कि 'शुचीनां श्रीमता गेहे' एकनाथ एक योगभ्रष्ट महात्मा ही उत्पन्न हुए । इससे शुद्ध कुल परम्पराको रक्षाका कितना महत्त्व है यह भी प्रकट होता है । एकनाथके पिता सूर्यनारायणका नामकरण भानुदासने ही किया था और इसके बाद ही उनका देहावसान हुआ यह श्रीएकनाथके ही उपर्युक्त लेखसे स्पष्ट है । यह घटना शाके एक हज़ार चार सौ पैंतीस के लगभग हुई होगी । |
राजस्थान के क्षेत्र मेवाड़ में कश्मीरी छात्रों पर हिंसा पर उतारू कुछ लोगों के हमले के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस तरह की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसकी कड़ी निंदा की।
संवाददाता के अनुसार, राजनाथ सिंह ने देश के सभी राज्यों का आह्वान किया कि वे कश्मीरियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। उन्होंने कश्मीरी छात्रों को प्रताड़ित करने और हमले के दोषियों को कड़ी सज़ा दिए जाने की बात कही और सभी मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे इस बात को सुनिश्चित बनाएं कि देश के किसी भी भाग में कश्मीरी युवाओं के साथ दुर्व्यवहार न किया जाए।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी भी भारत के नागरिक हैं और कोई भी इस वास्तविकता को नहीं नकार सकता कि भारत की सुरक्षा और समृद्धि में बहुत से कश्मीरी योगदान दे रहे हैं।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, कश्मीरी छात्रों पर बुधवार को चित्तौड़गढ़ में उस समय हमला हुआ जब वे बाज़ार में खाने पीने की चीज़ें ख़रीद रहे थे। एक अज्ञात गुट ने पहले उनका नाम और पता पूछा और फिर उनकी पिटाई शुरु कर दी। हमलावरों की खोज जारी है। इस हमलें में कश्मीरी छात्रों को हलकी चोटें आयीं जिन्हें एलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। (MAQ/N)
| राजस्थान के क्षेत्र मेवाड़ में कश्मीरी छात्रों पर हिंसा पर उतारू कुछ लोगों के हमले के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस तरह की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसकी कड़ी निंदा की। संवाददाता के अनुसार, राजनाथ सिंह ने देश के सभी राज्यों का आह्वान किया कि वे कश्मीरियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। उन्होंने कश्मीरी छात्रों को प्रताड़ित करने और हमले के दोषियों को कड़ी सज़ा दिए जाने की बात कही और सभी मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे इस बात को सुनिश्चित बनाएं कि देश के किसी भी भाग में कश्मीरी युवाओं के साथ दुर्व्यवहार न किया जाए। उन्होंने कहा कि कश्मीरी भी भारत के नागरिक हैं और कोई भी इस वास्तविकता को नहीं नकार सकता कि भारत की सुरक्षा और समृद्धि में बहुत से कश्मीरी योगदान दे रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, कश्मीरी छात्रों पर बुधवार को चित्तौड़गढ़ में उस समय हमला हुआ जब वे बाज़ार में खाने पीने की चीज़ें ख़रीद रहे थे। एक अज्ञात गुट ने पहले उनका नाम और पता पूछा और फिर उनकी पिटाई शुरु कर दी। हमलावरों की खोज जारी है। इस हमलें में कश्मीरी छात्रों को हलकी चोटें आयीं जिन्हें एलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। |
नासा के मार्स 2020 रोवर का नया आधिकारिक नाम क्या है?
उत्तर - परसेवेरांस (Perseverance)
नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने घोषणा की है कि उसके मार्स 2020 रोवर का आधिकारिक नाम परसेवेरांस (Perseverance) होगा। रोवर के नाम का चयन करने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, इस प्रतियोगिता में सातवीं कक्षा के छात्र अलेक्जेंडर माथेर द्वारा सुझाए गये नाम को चुना गया है। इसके मिशन में माइक्रोबियल जीवन के संकेतों की खोज करना और मंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान को दर्शाना शामिल है।
| नासा के मार्स दो हज़ार बीस रोवर का नया आधिकारिक नाम क्या है? उत्तर - परसेवेरांस नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने घोषणा की है कि उसके मार्स दो हज़ार बीस रोवर का आधिकारिक नाम परसेवेरांस होगा। रोवर के नाम का चयन करने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, इस प्रतियोगिता में सातवीं कक्षा के छात्र अलेक्जेंडर माथेर द्वारा सुझाए गये नाम को चुना गया है। इसके मिशन में माइक्रोबियल जीवन के संकेतों की खोज करना और मंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान को दर्शाना शामिल है। |
"आज, सैनिकों को काफी आधुनिक विमान मिल रहे हैं जो किसी भी तरह से Su-34 और Su-35 जैसे पश्चिमी मॉडल से कमतर नहीं हैं। यह हमारे सशस्त्र बलों का गौरव है। वे आने वाले लंबे समय के लिए हमारे उड्डयन की स्थिति का निर्धारण करेंगे। आप जानते हैं कि आज ये नमूने अपनी लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें सीरियाई संघर्ष भी शामिल है। उनके पीछे खरीदारों की कतार पहले से ही लगी हुई है, "बोरिसोव ने रूस -24 चैनल की हवा पर घोषित किया।
| "आज, सैनिकों को काफी आधुनिक विमान मिल रहे हैं जो किसी भी तरह से Su-चौंतीस और Su-पैंतीस जैसे पश्चिमी मॉडल से कमतर नहीं हैं। यह हमारे सशस्त्र बलों का गौरव है। वे आने वाले लंबे समय के लिए हमारे उड्डयन की स्थिति का निर्धारण करेंगे। आप जानते हैं कि आज ये नमूने अपनी लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें सीरियाई संघर्ष भी शामिल है। उनके पीछे खरीदारों की कतार पहले से ही लगी हुई है, "बोरिसोव ने रूस -चौबीस चैनल की हवा पर घोषित किया। |
राज एक्सप्रेस। एक समय ऐसा भी था जब दक्षिण भारत में वीरप्पन के नाम से मशहूर कुख्यात चन्दन तस्कर कूज मुनिस्वामी वीरप्पन का जबरदस्त खौफ था। बड़ी-बड़ी मुछों वाला वीरप्पन कई सालों तक सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहा था। उसने हाथी दांत की तस्करी के लिए कई हाथियों की जान ली तो वहीं दूसरी तरफ चंदन तस्करी के लिए करीब 150 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इनमें आधे से ज्यादा तो पुलिसकर्मी थे। तो चलिए जानते हैं 18 जनवरी 1952 को पैदा हुए कूज मुनिस्वामी वीरप्पन की पूरी कहानी।
10 साल की उम्र में की हत्या :
वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 10 साल की उम्र में ही एक तस्कर का कत्ल कर दिया था। ये उसका पहला अपराध था। इसके अलावा उसने वन विभाग के तीन अफसरों को भी मारा था। इसके बाद वीरप्पन जंगल में भाग गया। वह 17 साल की उम्र में हाथियों का शिकार करने लगा था। उसने हाथी दांत की तस्करी के लिए कई हाथियों की हत्या कर दी। इसके अलावा वह जंगल में रहकर चंदन की तस्करी भी करने लगा था।
97 पुलिसवालों की हत्या :
देखते ही देखते वीरप्पन सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। साल 1987 में वीरप्पन उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया जब उसने एक फॉरेस्ट अफसर को किडनैप कर लिया। इसके बाद एक पुलिस टीम को उड़ा दिया, जिसमें 22 लोगों की जान चली गई। इस तरह वीरप्पन ने तस्करी के लिए करीब 150 लोगों की जान ली। इनमें 97 पुलिसकर्मी थे। साल 2000 में वीरप्पन ने कन्नड़ फिल्मों के हीरो राजकुमार को किडनैप कर लिया। वीरप्पन ने राजकुमार की रिहाई के बदले 50 करोड़ रूपए की मांग की थी।
साढ़े पांच करोड़ रूपए का इनाम :
तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार के लिए वीरप्पन एक बड़ी मुसीबत बन चुका था। दोनों सरकारों ने मिलकर उस पर साढ़े पांच करोड़ रूपए का भारी भरकम इनाम रखा था। हालांकि इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ तो साल 2003 में जयललिता ने वीरप्पन को मारने के लिए एक अफसर विजय कुमार को नियुक्त किया। विजय ने सबसे पहले एसटीएफ के साथियों को वीरप्पन की गैंग में शामिल कराया। इसके बाद से उन्हें वीरप्पन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिलने लगी।
ऐसे मारा गया वीरप्पन :
एक बार वीरप्पन अपनी आंख का इलाज कराने के लिए जा रहा था। उसकी गैंग में शामिल एसटीएफ के साथियों ने वीरप्पन को एंबुलेंस से सलेम के हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार किया। इसके बाद एंबुलेंस चला रहे एसटीएफ के एक कर्मी ने रास्ते में पहले से खड़े पुलिसकर्मियों की गाड़ी के बीच ले जाकर एंबुलेंस रोक दी और भाग गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने वीरप्पन से सरेंडर करने के लिए कहा लेकिन वीरप्पन ने गोलियां चलाना शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें वीरप्पन मारा गया।
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| राज एक्सप्रेस। एक समय ऐसा भी था जब दक्षिण भारत में वीरप्पन के नाम से मशहूर कुख्यात चन्दन तस्कर कूज मुनिस्वामी वीरप्पन का जबरदस्त खौफ था। बड़ी-बड़ी मुछों वाला वीरप्पन कई सालों तक सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहा था। उसने हाथी दांत की तस्करी के लिए कई हाथियों की जान ली तो वहीं दूसरी तरफ चंदन तस्करी के लिए करीब एक सौ पचास लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इनमें आधे से ज्यादा तो पुलिसकर्मी थे। तो चलिए जानते हैं अट्ठारह जनवरी एक हज़ार नौ सौ बावन को पैदा हुए कूज मुनिस्वामी वीरप्पन की पूरी कहानी। दस साल की उम्र में की हत्या : वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने दस साल की उम्र में ही एक तस्कर का कत्ल कर दिया था। ये उसका पहला अपराध था। इसके अलावा उसने वन विभाग के तीन अफसरों को भी मारा था। इसके बाद वीरप्पन जंगल में भाग गया। वह सत्रह साल की उम्र में हाथियों का शिकार करने लगा था। उसने हाथी दांत की तस्करी के लिए कई हाथियों की हत्या कर दी। इसके अलावा वह जंगल में रहकर चंदन की तस्करी भी करने लगा था। सत्तानवे पुलिसवालों की हत्या : देखते ही देखते वीरप्पन सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। साल एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में वीरप्पन उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया जब उसने एक फॉरेस्ट अफसर को किडनैप कर लिया। इसके बाद एक पुलिस टीम को उड़ा दिया, जिसमें बाईस लोगों की जान चली गई। इस तरह वीरप्पन ने तस्करी के लिए करीब एक सौ पचास लोगों की जान ली। इनमें सत्तानवे पुलिसकर्मी थे। साल दो हज़ार में वीरप्पन ने कन्नड़ फिल्मों के हीरो राजकुमार को किडनैप कर लिया। वीरप्पन ने राजकुमार की रिहाई के बदले पचास करोड़ रूपए की मांग की थी। साढ़े पांच करोड़ रूपए का इनाम : तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार के लिए वीरप्पन एक बड़ी मुसीबत बन चुका था। दोनों सरकारों ने मिलकर उस पर साढ़े पांच करोड़ रूपए का भारी भरकम इनाम रखा था। हालांकि इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ तो साल दो हज़ार तीन में जयललिता ने वीरप्पन को मारने के लिए एक अफसर विजय कुमार को नियुक्त किया। विजय ने सबसे पहले एसटीएफ के साथियों को वीरप्पन की गैंग में शामिल कराया। इसके बाद से उन्हें वीरप्पन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिलने लगी। ऐसे मारा गया वीरप्पन : एक बार वीरप्पन अपनी आंख का इलाज कराने के लिए जा रहा था। उसकी गैंग में शामिल एसटीएफ के साथियों ने वीरप्पन को एंबुलेंस से सलेम के हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार किया। इसके बाद एंबुलेंस चला रहे एसटीएफ के एक कर्मी ने रास्ते में पहले से खड़े पुलिसकर्मियों की गाड़ी के बीच ले जाकर एंबुलेंस रोक दी और भाग गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने वीरप्पन से सरेंडर करने के लिए कहा लेकिन वीरप्पन ने गोलियां चलाना शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें वीरप्पन मारा गया। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें। |
साल 2020 में एशिया इलेवन और वर्ल्ड इलेवन के बीच 3 टी-20 मुकाबले होने वाले है। पहले दो मैचों का आयोजन बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड करवाएगी। देश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान की 100वीं जयंती के मौके पर इसका आयोजन कराया जाएगा। वहीं एक मैच बीसीसीआई अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम पर आयोजित करवाएगी।
पाकिस्तानी खिलाड़ी खेलेंगे?
बांग्लादेश में होने वाले मैचों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने में कोई बाधा नहीं है लेकिन भारत में होने वाले मैच में उनके खेलने पर सवाल रहेगा। पाकिस्तान को भारत में द्विपक्षीय मैच खेलने की अनुमति नहीं है लेकिन आईसीसी टूर्नामेंट के लिए वह भारत आ सकते हैं।
हालांकि, मोटेरा स्टेडियम में होने वाले मैच का आयोजन बीसीसीआई करवा रही है। यहीं वजह है कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों के खेलने पर सवाल बने हुए हैं। 2012 के बाद से दोनों टीमों के बीच कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं हुई है।
सरकार से करेगी बात?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को माने तो पाकिस्तान के खिलाड़ियों के इस मैच में खेलने की उम्मीद काफी कम है। अभी तक बीसीसीआई ने यह फैसला भी नहीं किया है कि क्या इस मामले पर वह सरकार से बात करेगी या नहीं।
इसके साथ ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने मांग की है कि उनके यहां होने वाले दोनों मैच और भारत में होने वाले मैच को एक सीरीज की तरह आयोजित करवाया जाए। बोर्ड ने अभी तक इस पर भी अपना अंतिम फैसला नहीं लिया है।
| साल दो हज़ार बीस में एशिया इलेवन और वर्ल्ड इलेवन के बीच तीन टी-बीस मुकाबले होने वाले है। पहले दो मैचों का आयोजन बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड करवाएगी। देश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान की एक सौवीं जयंती के मौके पर इसका आयोजन कराया जाएगा। वहीं एक मैच बीसीसीआई अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम पर आयोजित करवाएगी। पाकिस्तानी खिलाड़ी खेलेंगे? बांग्लादेश में होने वाले मैचों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने में कोई बाधा नहीं है लेकिन भारत में होने वाले मैच में उनके खेलने पर सवाल रहेगा। पाकिस्तान को भारत में द्विपक्षीय मैच खेलने की अनुमति नहीं है लेकिन आईसीसी टूर्नामेंट के लिए वह भारत आ सकते हैं। हालांकि, मोटेरा स्टेडियम में होने वाले मैच का आयोजन बीसीसीआई करवा रही है। यहीं वजह है कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों के खेलने पर सवाल बने हुए हैं। दो हज़ार बारह के बाद से दोनों टीमों के बीच कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं हुई है। सरकार से करेगी बात? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को माने तो पाकिस्तान के खिलाड़ियों के इस मैच में खेलने की उम्मीद काफी कम है। अभी तक बीसीसीआई ने यह फैसला भी नहीं किया है कि क्या इस मामले पर वह सरकार से बात करेगी या नहीं। इसके साथ ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने मांग की है कि उनके यहां होने वाले दोनों मैच और भारत में होने वाले मैच को एक सीरीज की तरह आयोजित करवाया जाए। बोर्ड ने अभी तक इस पर भी अपना अंतिम फैसला नहीं लिया है। |
हरिद्वार से बद्रीनारायणं हवाई जहाज़से उड़कर गई थीं। पूजा में उन्होंने एक बहुमूल्य हार ही नहीं चढ़ाया था; बल्कि पुजारियों और पंडोंको इतनी दान-दक्षिणा दी कि सारे पहाड़ में आज भी उसकी गूँज है । काली कमली वाले के क्षेत्र में उन्होंने दस हज़ार दान दिया और अपनी स्वर्गीय माता के नामसे ततकुंडपर संगमर्मर लगाने का विचार प्रकट किया । बद्रीनारायण के बर्फ और तसकुंड के तापमें संगमर्मर के टिकाऊ होनेपर संदेह प्रकट करने पर उन्होंने विशेषज्ञ के परामर्शपर अभी इस बातको छोड़ रखा है। सेठानीजीकी लड़कियाँ भी फरफर ग्रेज़ी बोलती हैं, और दो तो विलायत में पढ़ रही है; किन्तु सेठानीजी माँ के घरसे रामायण पढ़कर आई थीं, यहाँ सेठजी और विदेशयात्रा के कारण टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलना भी सीख पाया है। यद्यपि सेठजीने घरके मालिक होनेके बाद मेम रखकर अंग्रेज़ी घोल पिलानेकी बहुत कोशिश की, किन्तु 'बूढ़ा तोता राम-राम कहाँसे सीखे ?' सेठानीजी को पहिले छूत छातका भी बहुत खयाल था । एक समय था, जब कि विलायतसे घूमकर आप अपने पतिको धर्मभ्रष्ट समझती थीं; और उन्होंने अपना चौका रखोइया तक अलग कर लिया था । किन्तु, कुछ ही समय बाद सेठजाक नाम विलायत से आई एक विठ्ठीको उन्होंने कौतूहलवश खोल डाला । उसमें एक अनुपम गौरांग सुंदरीका सुगंधित फोटो था । सेठानीजीको साँप हँस गया। उन्होंने चिट्ठीको
फिर उसी तरह बंद करके चुपचाप रख दिया; किन्तु दिल में रह-रहकर टीस उठने लगी । उनको बहुत अफसोस होने लगा कि सेठने जब पढ़ाने का प्रस्ताव किया था, तो स्वीकार क्यों नहीं कर लिया - 'यदि मैं अंग्रेजी जानता होती, तो इस नागिन के षड्यंत्रको जान 'मातो।' सेठानाने कभी इस बातका जिक्र सेठके सामने नहीं किया; किन्तु अगले साल गर्मियों में जब सेटजीने विलायत जानेकी चर्चा चलाई, तो सेठानीके मुँह से अनायास निकल आया- "मैं भी
चलूँगी ।" सेठको आश्चर्य हुआ इस परिवर्त्तनपर, किन्तु असली रहस्य उनकी समझ में नहीं आया । ऊपरसे सेठानीने यह कहकर उन्हें और सन्तुष्ट कर दिया, कि स्त्रीके लिये पति से अलग धर्म-कर्म नहीं है । उन्होंने यह नहीं बतलाया कि मैं तुम्हारी रखवाली के लिये चल रही हूँ । उसी दिन अँग्रेज़ी पढ़ाने के लिये तीन सौ रुपये महीनेपर एक मेम रखी गई, और वे यात्रा में भी बराबर उनके साथ रहीं । सेठानी के दान-पुण्यकी बहुत शोहरत है । 'कल्याण' की एक हज़ार कापियाँ खर्च से मुक्त बँटवाती है।
सेठजीके परिवारमें आमदनी में से धर्मादा निकालनेका जो तरीका दादाके समयसे चला आ रहा था, वह अब भी चल रहा है। एक बार उनकी नई रोशनीने इसे बेवकूफी समझ बंद करना चाहा ; किन्तु माँ, स्त्री और समाजके विरोधके डर से वह अपने विचारको कार्य-रूप में परिणत न कर सके, और अब तो इसे पूर्वजोंकी अग्र-सोच, समझते हैं। आखिर धर्मादेका पैसा भी तो ग्राहकपर लादा जाता है । इस धर्मादा-खाते के पैसेको उनके बाप-दादा तीर्थ-व्रत, श्रद्धापर्व, ब्रह्मभोज, धर्मशाला में खर्च करते थे, बच रहता था, तो पूँजी बनाकर उसके नफे से कहीं सदाव्रत भी लगा देते थे। सेठजी का कारबार कई लाखका नहीं, कई करोड़का हो गया है, और अब वे व्यापारी नहीं, कारखानेदार है; जिससे उनका नफा कई गुना बढ़ गया है, तो भी धर्मादा-खाता बदस्तूर ही नहीं, आमदनी के साथ बढ़ता चला गया है । सेठजीने इसी धर्मादा-खाता से मिलके भीतर मंदिर बनाया और मालवीयजीको पच्चीस हज़ारका चेक दिया। इसीसे गांधीजी के खादी-फंड, इरिजन-फंड तथा दूसरी अपीलोंमें वे दान देते हैं । बाइसराय और गवर्नरके फंडोंमें भी इस दानका रुपया जाता है । उस दिन प्रान्त के चीफ जस्टिसने जब देशी ईसाइयोंके गिज़े के लिये सेठजीको कुछ सहायता करने को कहा, तो सेठजीने इसी मदसे दस हज़ार | हरिद्वार से बद्रीनारायणं हवाई जहाज़से उड़कर गई थीं। पूजा में उन्होंने एक बहुमूल्य हार ही नहीं चढ़ाया था; बल्कि पुजारियों और पंडोंको इतनी दान-दक्षिणा दी कि सारे पहाड़ में आज भी उसकी गूँज है । काली कमली वाले के क्षेत्र में उन्होंने दस हज़ार दान दिया और अपनी स्वर्गीय माता के नामसे ततकुंडपर संगमर्मर लगाने का विचार प्रकट किया । बद्रीनारायण के बर्फ और तसकुंड के तापमें संगमर्मर के टिकाऊ होनेपर संदेह प्रकट करने पर उन्होंने विशेषज्ञ के परामर्शपर अभी इस बातको छोड़ रखा है। सेठानीजीकी लड़कियाँ भी फरफर ग्रेज़ी बोलती हैं, और दो तो विलायत में पढ़ रही है; किन्तु सेठानीजी माँ के घरसे रामायण पढ़कर आई थीं, यहाँ सेठजी और विदेशयात्रा के कारण टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलना भी सीख पाया है। यद्यपि सेठजीने घरके मालिक होनेके बाद मेम रखकर अंग्रेज़ी घोल पिलानेकी बहुत कोशिश की, किन्तु 'बूढ़ा तोता राम-राम कहाँसे सीखे ?' सेठानीजी को पहिले छूत छातका भी बहुत खयाल था । एक समय था, जब कि विलायतसे घूमकर आप अपने पतिको धर्मभ्रष्ट समझती थीं; और उन्होंने अपना चौका रखोइया तक अलग कर लिया था । किन्तु, कुछ ही समय बाद सेठजाक नाम विलायत से आई एक विठ्ठीको उन्होंने कौतूहलवश खोल डाला । उसमें एक अनुपम गौरांग सुंदरीका सुगंधित फोटो था । सेठानीजीको साँप हँस गया। उन्होंने चिट्ठीको फिर उसी तरह बंद करके चुपचाप रख दिया; किन्तु दिल में रह-रहकर टीस उठने लगी । उनको बहुत अफसोस होने लगा कि सेठने जब पढ़ाने का प्रस्ताव किया था, तो स्वीकार क्यों नहीं कर लिया - 'यदि मैं अंग्रेजी जानता होती, तो इस नागिन के षड्यंत्रको जान 'मातो।' सेठानाने कभी इस बातका जिक्र सेठके सामने नहीं किया; किन्तु अगले साल गर्मियों में जब सेटजीने विलायत जानेकी चर्चा चलाई, तो सेठानीके मुँह से अनायास निकल आया- "मैं भी चलूँगी ।" सेठको आश्चर्य हुआ इस परिवर्त्तनपर, किन्तु असली रहस्य उनकी समझ में नहीं आया । ऊपरसे सेठानीने यह कहकर उन्हें और सन्तुष्ट कर दिया, कि स्त्रीके लिये पति से अलग धर्म-कर्म नहीं है । उन्होंने यह नहीं बतलाया कि मैं तुम्हारी रखवाली के लिये चल रही हूँ । उसी दिन अँग्रेज़ी पढ़ाने के लिये तीन सौ रुपये महीनेपर एक मेम रखी गई, और वे यात्रा में भी बराबर उनके साथ रहीं । सेठानी के दान-पुण्यकी बहुत शोहरत है । 'कल्याण' की एक हज़ार कापियाँ खर्च से मुक्त बँटवाती है। सेठजीके परिवारमें आमदनी में से धर्मादा निकालनेका जो तरीका दादाके समयसे चला आ रहा था, वह अब भी चल रहा है। एक बार उनकी नई रोशनीने इसे बेवकूफी समझ बंद करना चाहा ; किन्तु माँ, स्त्री और समाजके विरोधके डर से वह अपने विचारको कार्य-रूप में परिणत न कर सके, और अब तो इसे पूर्वजोंकी अग्र-सोच, समझते हैं। आखिर धर्मादेका पैसा भी तो ग्राहकपर लादा जाता है । इस धर्मादा-खाते के पैसेको उनके बाप-दादा तीर्थ-व्रत, श्रद्धापर्व, ब्रह्मभोज, धर्मशाला में खर्च करते थे, बच रहता था, तो पूँजी बनाकर उसके नफे से कहीं सदाव्रत भी लगा देते थे। सेठजी का कारबार कई लाखका नहीं, कई करोड़का हो गया है, और अब वे व्यापारी नहीं, कारखानेदार है; जिससे उनका नफा कई गुना बढ़ गया है, तो भी धर्मादा-खाता बदस्तूर ही नहीं, आमदनी के साथ बढ़ता चला गया है । सेठजीने इसी धर्मादा-खाता से मिलके भीतर मंदिर बनाया और मालवीयजीको पच्चीस हज़ारका चेक दिया। इसीसे गांधीजी के खादी-फंड, इरिजन-फंड तथा दूसरी अपीलोंमें वे दान देते हैं । बाइसराय और गवर्नरके फंडोंमें भी इस दानका रुपया जाता है । उस दिन प्रान्त के चीफ जस्टिसने जब देशी ईसाइयोंके गिज़े के लिये सेठजीको कुछ सहायता करने को कहा, तो सेठजीने इसी मदसे दस हज़ार |
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीएमए (दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एरिया) नगरों का मूल्यांकन।
- औद्योगिक विकास केंद्र योजना, निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क और विशेष आर्थिक क्षेत्र पर दस्तावेज़।
- शहरी स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन मंर क्षमता निर्माण - आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र का एक केस अध्ययन।
- चयनित छह महानगरों के लिए तुलनात्मक परिवहन प्रोफ़ाइल।
- छोटे और मझौले नगरों में सामाजिक अवसंरचना परिदृश्य।
- भारत के प्रथम श्रेणी के शहरों में नगर सड़क परिदृश्य।
- हैदराबाद, बैंगलोर, पुणे, तिरुवनंतपुरम और लखनऊ में आवासीय भूमि मूल्य परिदृश्य।
- भारत के प्रथम श्रेणी के शहरों में नगर सड़क परिदृश्य।
- भारत में आर्थिक सुधार और रोजगार वृद्धि।
- भारत में पेयजल, शौचालय और जल निकासी (ड्रेनेज) सुविधाओं और बिजली कनेक्शन के लिए परिवारों की पहुंच, 2001।
- भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चयनित जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक संकेतक।
- नगर एवं ग्राम नियोजन संगठन,
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय,
भारत सरकार,
नोटः इस वेबसाइट पर सामग्री को प्रकाशित और प्रबंधित नगर एवं ग्राम नियोजन संगठन द्वारा किया जाता है।
इस वेबसाइट के संबंध में किसी भी प्रश्न के लिए कृपया वेब सूचना प्रबंधक- श्री नरेश कुमार धीरन (अपर मुख्य नियोजक) से ई-मेल आईडीः nkdhiran[at]gov[dot]in, फोनः +91-9990394481 पर संपर्क कर सकते हैं।
| - राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीएमए नगरों का मूल्यांकन। - औद्योगिक विकास केंद्र योजना, निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क और विशेष आर्थिक क्षेत्र पर दस्तावेज़। - शहरी स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन मंर क्षमता निर्माण - आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र का एक केस अध्ययन। - चयनित छह महानगरों के लिए तुलनात्मक परिवहन प्रोफ़ाइल। - छोटे और मझौले नगरों में सामाजिक अवसंरचना परिदृश्य। - भारत के प्रथम श्रेणी के शहरों में नगर सड़क परिदृश्य। - हैदराबाद, बैंगलोर, पुणे, तिरुवनंतपुरम और लखनऊ में आवासीय भूमि मूल्य परिदृश्य। - भारत के प्रथम श्रेणी के शहरों में नगर सड़क परिदृश्य। - भारत में आर्थिक सुधार और रोजगार वृद्धि। - भारत में पेयजल, शौचालय और जल निकासी सुविधाओं और बिजली कनेक्शन के लिए परिवारों की पहुंच, दो हज़ार एक। - भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चयनित जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक संकेतक। - नगर एवं ग्राम नियोजन संगठन, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, नोटः इस वेबसाइट पर सामग्री को प्रकाशित और प्रबंधित नगर एवं ग्राम नियोजन संगठन द्वारा किया जाता है। इस वेबसाइट के संबंध में किसी भी प्रश्न के लिए कृपया वेब सूचना प्रबंधक- श्री नरेश कुमार धीरन से ई-मेल आईडीः nkdhiran[at]gov[dot]in, फोनः +इक्यानवे- नौ नौ नौ शून्य तीन नौ चार चार आठ एक पर संपर्क कर सकते हैं। |
Sushant Suicide Case: सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) सुसाइड केस में जहां आए दिन नए नए बयान सामने आ रहे हैं। वहीं इस बीच एक खबर सामने आई है कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) अपने परिवार और बड़े सूटकेस के साथ घर से आधी रात को ही चली गईं। पिछले हफ्ते सुशांत सिंह राजपूत के पिता के. के. सिंह ने रिया चक्रवर्ती और उनसे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है थी जिसके बाद रिया घर से चली गईं। जब से रिया के लिखाफ FIR दर्ज कराई गई है तब से रिया लोगों की नज़रों से गायब है।
एक समाचार पोर्टल के मुताबिक रिया एफआईआर दर्ज होने के कुछ दिनों बाद अपने परिवार के साथ घर छोड़ दिया है। समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार रिया जिस बिल्डिंग में रहती है, उसके सुपरवाइजर ने बताया कि रिया अपने परिवार के साथ लगभग तीन दिन पहले बड़े, पैक सूटकेस के साथ घर छोड़ दिया है। सुपरवाइजर ने आगे कहा कि कैसे एक नीले रंग की कार में पूरा चक्रवर्ती परिवार रात के दौरान अपने घर से निकल गया और उनके साथ बड़े सूटकेस भी थे।
#WATCH: Rhea Chakraborty releases video on #SushantSinghRajputDeathCase.
सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून 2020 को अपने मुंबई के बांद्रा स्थित अपार्टमेंट में फांसी लगा ली थी। बताया गया था कि वे डिप्रेशन से पीड़ित थे। वहीं बीते दिनों इस केस से जुड़े कई बयान सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच तेज कर दी है।
| Sushant Suicide Case: सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में जहां आए दिन नए नए बयान सामने आ रहे हैं। वहीं इस बीच एक खबर सामने आई है कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती अपने परिवार और बड़े सूटकेस के साथ घर से आधी रात को ही चली गईं। पिछले हफ्ते सुशांत सिंह राजपूत के पिता के. के. सिंह ने रिया चक्रवर्ती और उनसे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है थी जिसके बाद रिया घर से चली गईं। जब से रिया के लिखाफ FIR दर्ज कराई गई है तब से रिया लोगों की नज़रों से गायब है। एक समाचार पोर्टल के मुताबिक रिया एफआईआर दर्ज होने के कुछ दिनों बाद अपने परिवार के साथ घर छोड़ दिया है। समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार रिया जिस बिल्डिंग में रहती है, उसके सुपरवाइजर ने बताया कि रिया अपने परिवार के साथ लगभग तीन दिन पहले बड़े, पैक सूटकेस के साथ घर छोड़ दिया है। सुपरवाइजर ने आगे कहा कि कैसे एक नीले रंग की कार में पूरा चक्रवर्ती परिवार रात के दौरान अपने घर से निकल गया और उनके साथ बड़े सूटकेस भी थे। #WATCH: Rhea Chakraborty releases video on #SushantSinghRajputDeathCase. सुशांत सिंह राजपूत ने चौदह जून दो हज़ार बीस को अपने मुंबई के बांद्रा स्थित अपार्टमेंट में फांसी लगा ली थी। बताया गया था कि वे डिप्रेशन से पीड़ित थे। वहीं बीते दिनों इस केस से जुड़े कई बयान सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच तेज कर दी है। |
मिला मिला सतगुरु से, धर्मराय नहिँ खूँट गहै ॥२॥ जौ लाँ अटक न छूटै, तो लौँ भर्म खुवार करी ।।३।। दुविधा के मारे सुर नर मुनि बेहाल भये ॥४॥ कहि कहि समुझाऊँ, ताहि मन गाफिल खबर नहीं ॥५॥ भवसागर नदिया, साहेब कबीर गुरु पार करी ॥६॥
ऐसी रहनि रहै बैरागी ।
सदा उदास रहै माया से, सत्तनाम अनुरागी ॥१॥ छिमा की कंठी सील सरौनी, सुरति सुमिरनी जागी । टोपी अभय भक्ति माथे पर, काल कल्पना त्यागी ॥२॥ ज्ञान गूदरी मुक्ति मेखला, सहज सुई लै तागी । जुक्ति जमात कुबरी करनी, अनहद धुनि लौ लागी ॥३॥ सब्द अधार अधारी कहिये, भीख दया की माँगी । कहैं कबीर प्रीति सतगुरु से, सदा निरंतर लागी ॥४॥
सोइ बैरागी जिन दुबिधा खोई ॥ टेक ।। टोपी तंत सुमिरनी चितवे, सेली अनहद होई । नाम निरंतर चोलना पहिरे, सो लै सुरति समोई ॥१॥ छिमा भाव सहज की चोबी, झोरी ज्ञान की डोरी । दिल माँगे तो सौदा कीजे, ऊँच नीच ना कोई ।। २ ।। भुँइ कर आसन अकास को ओढ़न, जोति चंद्रमा साई । रैन पौन दुइ करै रखवारी, दृढ़ आसन करि सोई ।। ३ ।। उनमुनि दृष्टि उदास जगल में, भरम के महल ढहाई । करि असमान सोहं सागर में, बिमल अनहद धुनि होई ॥४
कान में लगाने की डाट ।
छड़ी ।
एक एक से मिलै रैन में, दिल की दुबिधा धोई। कहै कबीर अमर घर पावै, हंस बिछाह न होई ॥५॥
॥ शब्द है ।
अगम की सतगुरु राह उघारी ॥ टेक ॥ जतन जतन जो तन मन सिरजे, सुखमनि सेज सँवारी । जागत रहे पलक नहिँ लागै, चाखत असल करारी ॥१॥ सुमति क अंजन भरि भरि दीजै, मिटै लहर अँधियारी । छूटै त्रिबिधि भरम अय जन का, सहजेभइ उँजियारी ॥२॥ ज्ञान गली मुक्ती के द्वारे, पच्छिम खुलै किवारी । नौबत बाजि धुजा फहरानी, सूरति चढ़ी अटारी ॥३॥ एही चाल मिला साहेब से, मानो कही हमारी । कहैं कबीर सुनो भाइ साधे, चेत चलो नर नारी ॥४॥
॥ माया ॥
साधो बाघिन खाइ गइ लेोई ॥ टेक ॥ अंजन नैन दरस चमकावै, हँसि हँसि पारै गारी । हुभुकि लुलुकि चरै अभि अंतर, खात करेजा काढ़ी ॥ १॥ नाक घरे मुलना कान घरे काजी, औलिया बछरू पारी । छत्र भूपती राम बिडारा, सोखि लीन्ह नर नारी ।। २ ।। दिन बाघिन चकचौंधी लावै, राति समुंदर सोखी । ऐसन बाउर नगरि के लोगवा, घर घर बाघिन पोसी ॥३॥
इन्द्राजित और ब्रह्मादिक दुनि, सिव मुख बाघिन आई । गिरि गोबरधन नख पर राख्यो बाघिन उनहुँ मरोरी ॥४॥ उतपति परलै दोउ दिसि बाघिन, कहैं कबीर बिचारी । जो जन सत्त कै भजन करत है, ता से बाघिन न्यारी ।।५।।
॥ शब्द २॥
यह समधिन जग ठगे मजगूती ॥ टेक ॥ यह समधिन के मात पिता नहिँ, और धिया नापून ॥१॥ यह समधिन के गाँव ठाँव नहिँ, करत फिरै सगरे अजगूत । २ ठगत ठगत यह सुर पुर खाये, ब्रह्मा बिस्नु महेस का खात ३ कहैं कबीर सुनो भाइ साधो, ठगनी के अंत काहु नहिँ पात ४
॥ मिश्रित ॥
ठगिया हाट लगाये भवसागर तिरवा ॥ टेक ॥ आगे आगे पंडित चालत, पाछे सब दुनियाई ॥ १ ॥ कोटिन बेदे स्वान के लागे, मिटे न पूँछ टेढ़ाई ॥ २ ॥ एक दुइ होय ताहि समझाओं, सृष्टि गई बौराई ॥३॥ कहै कबीर सुनो भाइ साधो, को बकि मरै लबगई ।। ४ ।।
कुमतिया दारुन नितहिँ लरै ॥ टेक ।। सुमति कुमतिया ठून बहिनी, कुमति देखि के सुमति डरै ॥१ औषद नलागै ढाई न लागै, घूमि घूमि जस बीछु चढ़ ॥२॥
श्रीकृष्ण । मिज़बूत। अधरज । ई बिधि, भाँति ।
कितना कहाँ कहा नहि मानै, लाख जीव नित भच्छ करै ॥३ कहैं कबीर सुनो भाई साधो, यह बिष संत के कारे करे ॥४
नर ताहिँ नाच नचावत माया ।
नाम हेत कबह नहि नाचे, जिन यह सिरजल काया ॥१॥ सकल बटोर करै बाजीगर, अपनी सुरति नचाया । नावत माथ फिरो बिषयन सँग, नाम अमल बिसराया ॥२॥ भुगते अपनी करनी करि करि, जो यह जग में आया । नाम बिसारि यही गति सब की, निसु दिन भरम भुलाया ३ जेहि सुमिरे तँ अचल अछय पद, भक्ति अखंडित पाया । कहँ कबीर सुनो भाइ साधो, भक्त अमर पद पाया ॥४॥
।। शब्द ४ ॥
सखी हो सुनि लो हमरो ज्ञाना ॥ टेक ॥ मात पिता घर जन्म लिया है, नैहर मे अभिमाना । रैन दिवस पिय संग रहत है, मैं पापिनि नहिँ जाना ॥१॥ मात पिता घर जन्म बीति गे, आयगवन नगिचाना । का ले मिलाँ पिया अपने से, करिहौं कौन बहाना ।। २ ।। मानुष जन्म तो बिरथा खोये, सत्तनाम नहिँ जाना । हे सखि मेरो तन मन काँपै, सोई सब्द सुना काना ॥३॥ रोम रोम जा के पद परगासा, ता को निर्मल ज्ञाना । कहैं कबीर सुनो भाइ साधो, करो इस्थिर मन ध्याना ॥४॥ | मिला मिला सतगुरु से, धर्मराय नहिँ खूँट गहै ॥दो॥ जौ लाँ अटक न छूटै, तो लौँ भर्म खुवार करी ।।तीन।। दुविधा के मारे सुर नर मुनि बेहाल भये ॥चार॥ कहि कहि समुझाऊँ, ताहि मन गाफिल खबर नहीं ॥पाँच॥ भवसागर नदिया, साहेब कबीर गुरु पार करी ॥छः॥ ऐसी रहनि रहै बैरागी । सदा उदास रहै माया से, सत्तनाम अनुरागी ॥एक॥ छिमा की कंठी सील सरौनी, सुरति सुमिरनी जागी । टोपी अभय भक्ति माथे पर, काल कल्पना त्यागी ॥दो॥ ज्ञान गूदरी मुक्ति मेखला, सहज सुई लै तागी । जुक्ति जमात कुबरी करनी, अनहद धुनि लौ लागी ॥तीन॥ सब्द अधार अधारी कहिये, भीख दया की माँगी । कहैं कबीर प्रीति सतगुरु से, सदा निरंतर लागी ॥चार॥ सोइ बैरागी जिन दुबिधा खोई ॥ टेक ।। टोपी तंत सुमिरनी चितवे, सेली अनहद होई । नाम निरंतर चोलना पहिरे, सो लै सुरति समोई ॥एक॥ छिमा भाव सहज की चोबी, झोरी ज्ञान की डोरी । दिल माँगे तो सौदा कीजे, ऊँच नीच ना कोई ।। दो ।। भुँइ कर आसन अकास को ओढ़न, जोति चंद्रमा साई । रैन पौन दुइ करै रखवारी, दृढ़ आसन करि सोई ।। तीन ।। उनमुनि दृष्टि उदास जगल में, भरम के महल ढहाई । करि असमान सोहं सागर में, बिमल अनहद धुनि होई ॥चार कान में लगाने की डाट । छड़ी । एक एक से मिलै रैन में, दिल की दुबिधा धोई। कहै कबीर अमर घर पावै, हंस बिछाह न होई ॥पाँच॥ ॥ शब्द है । अगम की सतगुरु राह उघारी ॥ टेक ॥ जतन जतन जो तन मन सिरजे, सुखमनि सेज सँवारी । जागत रहे पलक नहिँ लागै, चाखत असल करारी ॥एक॥ सुमति क अंजन भरि भरि दीजै, मिटै लहर अँधियारी । छूटै त्रिबिधि भरम अय जन का, सहजेभइ उँजियारी ॥दो॥ ज्ञान गली मुक्ती के द्वारे, पच्छिम खुलै किवारी । नौबत बाजि धुजा फहरानी, सूरति चढ़ी अटारी ॥तीन॥ एही चाल मिला साहेब से, मानो कही हमारी । कहैं कबीर सुनो भाइ साधे, चेत चलो नर नारी ॥चार॥ ॥ माया ॥ साधो बाघिन खाइ गइ लेोई ॥ टेक ॥ अंजन नैन दरस चमकावै, हँसि हँसि पारै गारी । हुभुकि लुलुकि चरै अभि अंतर, खात करेजा काढ़ी ॥ एक॥ नाक घरे मुलना कान घरे काजी, औलिया बछरू पारी । छत्र भूपती राम बिडारा, सोखि लीन्ह नर नारी ।। दो ।। दिन बाघिन चकचौंधी लावै, राति समुंदर सोखी । ऐसन बाउर नगरि के लोगवा, घर घर बाघिन पोसी ॥तीन॥ इन्द्राजित और ब्रह्मादिक दुनि, सिव मुख बाघिन आई । गिरि गोबरधन नख पर राख्यो बाघिन उनहुँ मरोरी ॥चार॥ उतपति परलै दोउ दिसि बाघिन, कहैं कबीर बिचारी । जो जन सत्त कै भजन करत है, ता से बाघिन न्यारी ।।पाँच।। ॥ शब्द दो॥ यह समधिन जग ठगे मजगूती ॥ टेक ॥ यह समधिन के मात पिता नहिँ, और धिया नापून ॥एक॥ यह समधिन के गाँव ठाँव नहिँ, करत फिरै सगरे अजगूत । दो ठगत ठगत यह सुर पुर खाये, ब्रह्मा बिस्नु महेस का खात तीन कहैं कबीर सुनो भाइ साधो, ठगनी के अंत काहु नहिँ पात चार ॥ मिश्रित ॥ ठगिया हाट लगाये भवसागर तिरवा ॥ टेक ॥ आगे आगे पंडित चालत, पाछे सब दुनियाई ॥ एक ॥ कोटिन बेदे स्वान के लागे, मिटे न पूँछ टेढ़ाई ॥ दो ॥ एक दुइ होय ताहि समझाओं, सृष्टि गई बौराई ॥तीन॥ कहै कबीर सुनो भाइ साधो, को बकि मरै लबगई ।। चार ।। कुमतिया दारुन नितहिँ लरै ॥ टेक ।। सुमति कुमतिया ठून बहिनी, कुमति देखि के सुमति डरै ॥एक औषद नलागै ढाई न लागै, घूमि घूमि जस बीछु चढ़ ॥दो॥ श्रीकृष्ण । मिज़बूत। अधरज । ई बिधि, भाँति । कितना कहाँ कहा नहि मानै, लाख जीव नित भच्छ करै ॥तीन कहैं कबीर सुनो भाई साधो, यह बिष संत के कारे करे ॥चार नर ताहिँ नाच नचावत माया । नाम हेत कबह नहि नाचे, जिन यह सिरजल काया ॥एक॥ सकल बटोर करै बाजीगर, अपनी सुरति नचाया । नावत माथ फिरो बिषयन सँग, नाम अमल बिसराया ॥दो॥ भुगते अपनी करनी करि करि, जो यह जग में आया । नाम बिसारि यही गति सब की, निसु दिन भरम भुलाया तीन जेहि सुमिरे तँ अचल अछय पद, भक्ति अखंडित पाया । कहँ कबीर सुनो भाइ साधो, भक्त अमर पद पाया ॥चार॥ ।। शब्द चार ॥ सखी हो सुनि लो हमरो ज्ञाना ॥ टेक ॥ मात पिता घर जन्म लिया है, नैहर मे अभिमाना । रैन दिवस पिय संग रहत है, मैं पापिनि नहिँ जाना ॥एक॥ मात पिता घर जन्म बीति गे, आयगवन नगिचाना । का ले मिलाँ पिया अपने से, करिहौं कौन बहाना ।। दो ।। मानुष जन्म तो बिरथा खोये, सत्तनाम नहिँ जाना । हे सखि मेरो तन मन काँपै, सोई सब्द सुना काना ॥तीन॥ रोम रोम जा के पद परगासा, ता को निर्मल ज्ञाना । कहैं कबीर सुनो भाइ साधो, करो इस्थिर मन ध्याना ॥चार॥ |
कोरोना वायरस के केस आए दिन बढ़ते जा रहे हैं. दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात के बाद से हालात और खराब होते जा रहे हैं. अब खबर आई है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से जहां एक 52 वर्षीय व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. इस बात की जानकारी कोरबा जिले की कलेक्टर किरण कौशल ने गुरुवार को दी. उसे रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया है.
कौशल ने बताया कि जिला प्रशासन को जानकारी मिली है कि यह व्यक्ति तब्लीगी जमात के लोगों के संपर्क में था। वहीं इसके मस्जिद में नमाज में शामिल होने की भी जानकारी मिली है। इसके परिवार के अन्य सदस्यों को पृथक रखा गया है तथा कटघोरा शहर को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है।
कटघोरा शहर में बीते शनिवार को तब्लीगी जमात से जुड़े 16 वर्षीय एक लड़के में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई थी। लड़के का इलाज रायपुर के एम्स में किया जा रहा है। लड़के को कोरोना वायरस होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके संपर्क में आए अन्य लोगों को पृथक में रहने को कहा था।
छत्तीसगढ़ में अभी तक कोविड-19 के 11 मामले सामने आए हैं, जिनमें से नौ लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे गई है। वहीं कोरबा जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का यह तीसरा मामला है।
देश में संपूर्ण लॉकडाउन के बीच कोरोना वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोरोना के 540 नए मामले आए हैं और 17 लोगों की मौत हुई है। इसी के साथ देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 5734 हो गई है। जिसमें 5095 सक्रिय हैं, 473 लोग स्वस्थ हो गए या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 166 लोगों की मौत हुई है।
| कोरोना वायरस के केस आए दिन बढ़ते जा रहे हैं. दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात के बाद से हालात और खराब होते जा रहे हैं. अब खबर आई है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से जहां एक बावन वर्षीय व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. इस बात की जानकारी कोरबा जिले की कलेक्टर किरण कौशल ने गुरुवार को दी. उसे रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया है. कौशल ने बताया कि जिला प्रशासन को जानकारी मिली है कि यह व्यक्ति तब्लीगी जमात के लोगों के संपर्क में था। वहीं इसके मस्जिद में नमाज में शामिल होने की भी जानकारी मिली है। इसके परिवार के अन्य सदस्यों को पृथक रखा गया है तथा कटघोरा शहर को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है। कटघोरा शहर में बीते शनिवार को तब्लीगी जमात से जुड़े सोलह वर्षीय एक लड़के में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई थी। लड़के का इलाज रायपुर के एम्स में किया जा रहा है। लड़के को कोरोना वायरस होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके संपर्क में आए अन्य लोगों को पृथक में रहने को कहा था। छत्तीसगढ़ में अभी तक कोविड-उन्नीस के ग्यारह मामले सामने आए हैं, जिनमें से नौ लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे गई है। वहीं कोरबा जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का यह तीसरा मामला है। देश में संपूर्ण लॉकडाउन के बीच कोरोना वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के पाँच सौ चालीस नए मामले आए हैं और सत्रह लोगों की मौत हुई है। इसी के साथ देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या पाँच हज़ार सात सौ चौंतीस हो गई है। जिसमें पाँच हज़ार पचानवे सक्रिय हैं, चार सौ तिहत्तर लोग स्वस्थ हो गए या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और एक सौ छयासठ लोगों की मौत हुई है। |
Budh Rashi Parivartan 2021: बुद्धि के कारक बुध ग्रह 22 सितंबर को राशि परिवर्तन कर रहा है। बुध अपनी राशि कन्या से निकलकर तुला राशि में गोचर करेंगे। वह 2 अक्टूबर तक विराजमान करेंगे। तुला राशि में शुक्र पहले से गोचर कर रहे हैं। ऐसे में दो ग्रहों की युति बनेगी। बुध के राशि परिवर्तन से मेष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मकर राशियों के जातकों को लाभ होगा। आइए जानते हैं बुध ग्रह के गोचर से क्या असर होने वाला है।
बुध का गोचर मेष राशि के सप्तम भाव में हो रहा है। इस दौरान कारोबार करने वाले जातकों को लाभ मिलेगा। टेक्निकल फील्ड से जुड़ों लोगों को करियर में अच्छा मौका मिलेगा। इस दौरान नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
इस राशि में बुध का गोचर पंचव भाव में हो रहा है। इस दौरान नौकरी पेशा जातकों से अधिकारी खुश रहेंगे। परिवार के साथ कहीं घूमने का प्लान बन सकता है। कहीं से अतिरिक्त इनकम कमाने का मौका मिलेगा। ऊर्जा स्तर और उत्साह में वृद्धि होगी।
कन्या राशि में बुध का परिवर्तन द्वितीय भाव में हो रहा है। इस दौरान राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े लोगों को लाभ हो सकता है। बीमारी से परेशान जातकों को राहत मिलेगी। घर में खुशहाली का माहौल रहेगा। धन खर्च करने में संकोच नहीं करेंगे।
तुला राशिवालों का कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिलेगा। लोग आपकी तारीफ करेंगे। आर्थिक लाभ होगा और अपनी मेहनत से कार्यक्षेत्र में जीत दर्ज करेंगे।
बुध का गोचर धनु राशि के एकादश भाव में हो रहा है। कोई अच्छी डील मिलने संभावना है। प्रमोशन के योग बनेंगे। कुंवारों को शादी का प्रस्ताव मिलेगा।
मकर राशि के जातकों को करियर में नए अवसर प्राप्त होंगे। विदेश में शिक्षा और नौकरी करने की इच्छा रखने वालों के लिए अच्छा समय है। परिवार से आर्थिक सहयोग मिलेगा।
| Budh Rashi Parivartan दो हज़ार इक्कीस: बुद्धि के कारक बुध ग्रह बाईस सितंबर को राशि परिवर्तन कर रहा है। बुध अपनी राशि कन्या से निकलकर तुला राशि में गोचर करेंगे। वह दो अक्टूबर तक विराजमान करेंगे। तुला राशि में शुक्र पहले से गोचर कर रहे हैं। ऐसे में दो ग्रहों की युति बनेगी। बुध के राशि परिवर्तन से मेष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मकर राशियों के जातकों को लाभ होगा। आइए जानते हैं बुध ग्रह के गोचर से क्या असर होने वाला है। बुध का गोचर मेष राशि के सप्तम भाव में हो रहा है। इस दौरान कारोबार करने वाले जातकों को लाभ मिलेगा। टेक्निकल फील्ड से जुड़ों लोगों को करियर में अच्छा मौका मिलेगा। इस दौरान नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इस राशि में बुध का गोचर पंचव भाव में हो रहा है। इस दौरान नौकरी पेशा जातकों से अधिकारी खुश रहेंगे। परिवार के साथ कहीं घूमने का प्लान बन सकता है। कहीं से अतिरिक्त इनकम कमाने का मौका मिलेगा। ऊर्जा स्तर और उत्साह में वृद्धि होगी। कन्या राशि में बुध का परिवर्तन द्वितीय भाव में हो रहा है। इस दौरान राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े लोगों को लाभ हो सकता है। बीमारी से परेशान जातकों को राहत मिलेगी। घर में खुशहाली का माहौल रहेगा। धन खर्च करने में संकोच नहीं करेंगे। तुला राशिवालों का कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिलेगा। लोग आपकी तारीफ करेंगे। आर्थिक लाभ होगा और अपनी मेहनत से कार्यक्षेत्र में जीत दर्ज करेंगे। बुध का गोचर धनु राशि के एकादश भाव में हो रहा है। कोई अच्छी डील मिलने संभावना है। प्रमोशन के योग बनेंगे। कुंवारों को शादी का प्रस्ताव मिलेगा। मकर राशि के जातकों को करियर में नए अवसर प्राप्त होंगे। विदेश में शिक्षा और नौकरी करने की इच्छा रखने वालों के लिए अच्छा समय है। परिवार से आर्थिक सहयोग मिलेगा। |
THE GAZETTE OF INDIA MARCH 16, 1995 / PHALGUNA 26, 1917 [ PART II - SEC 3 (ii)]
2. Whereas the Central Government has reasony to believe that the aforesaid person has absconded or is concealing himself so that the order cannot bo executed;
771:--भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने जिंगे विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, 1974 ( 1974 का 52 ) की धारा 3 की उपधारा के अश्रीन प्रदेश फा. सं. 673/98/95 - - सौ. शु. 8 दिनांक 18-11-1995 को यह निदेश जारी किया था कि डा. सन्तोष रामेश्वर राऊत, 24 अलकनंदा दसवां गुलमोहर न्यूक्लिन पार्ले स्कीम, जुहू, बम्बई -- 19, ( 2 )
कौशल्या नर्सिंग होम, प्रथम तल, रिंकू पाटमेंट्स लिकिंग रोड, खैर, नम्बईई-52 को निरुद्ध कर लिया जाए और केन्द्रीय कारागार, यर्वदा में अभिरक्षा में रखा जाए ताकि उसे भविष्य में विदेशी मुद्रा के संवर्धन के प्रतिकूल कोई भो कार्य करने से रोका जा सके ।
2. केन्द्रीय सरकार के पास यह विश्वास करने का कारण है कि पूर्वोत व्यक्ति फरार हो गया है या अपने की छिपा रहा है जिससे उक्त आदेश का निष्पादन नहीं हो सके;
3. अतः अब केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा 7 को उपधारा ( 1 ) के खण्ड (ख) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह निर्देश देती है कि पूर्वोक्त व्यक्ति इस श्रादेश के शासकीय राजपत्र में प्रकाशन के 7 दिन के भीतर पुलिम आयुक्त बम्बई के समक्ष हाजिर हो । [फा. सं. 673/98/95 - - सी. शु. 8 ] रूप चन्द, श्रवर सचिव
S.O. 771 - Whereas the Joint Secretary to the Government of India, specially empowered under subsection ( 1 ) of section 3 of the Conservation of Foreign Exchange and prevention of Smuggling Activities Act, 1974 (52 of 1974 ) issued order F No. 673 । 98।95-Cus. VII dated 18-11-1995 under the said sub-section directing that Dr. Santosh Rameshwar Raut, 24, Alaknanda, 10th Gulamahar Cross Road, New Vile Parle Scheme, Juhu, Bombay - 49 (ii) Kaushalya Nursing Home, 1st Floor, Rinku Apartments Linking Road, Khar, Bombay-52 be detained and kept in custody in the Central Prison Yerawada with a view to preventing him from acting in any nannar prejudicial to the augmentation of foreign exchange in future.
3. Now therefore, in cxercise of the power conferred by clause (b) of sub-section (1) of Secrion 7 of the said Act, the Central Government hereby directs the aforesaid person to appear before the Commissioner Director General of Police, Bombay within 7 days of the publication of this order in the Official Gazette
[F. No. 673 । 98।95-Cus. VIII] ROOP CHAND, Under Secy.
772:--भारत सरकार के संयुक्त सचिव
ने जिसे विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, 1971 (1974 का 52 ) की धारा 3 की उपधारा के अधीन आदेश फा. सं. 673 / 138 / 95 -- सी. णु. 8 दिनांक 19-12-1995 को यह निदेश जारी किया था कि श्री रतन बगारिया सुपुत्र श्रीसी. डी. बगारिया पे 130, अशोक बिहार, फेस- 3, नई दिल्ली -110052 को निरुद्ध कर लिया जाए और केन्द्रीय कारागार, तिहाड़, नई दिल्ली मे अभिरक्षा में ताकि रखा जाए उसे भविष्य में माल की तस्करी करने से रोका जा सके ।
2. केन्द्रीय सरकार के पास यह विश्वास करने का कारण है कि कि पूर्वोक्त फरार व्यक्ति हो गया है या अपने को दिपा रहा है जिससे देश का दिन नहीं हो सके;
3. अतः श्रन केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा 7 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ख ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह निर्देश देती है कि पूर्वोक्त व्यक्ति इस प्रदेश के शासकीय राजपत्र में प्रकाशन के 7 दिन के भीतर पुलिस श्रायुवत दिल्ली के समय हाजिर हो ।
ए. के. सिन्हा, श्रवर सचिव | THE GAZETTE OF INDIA MARCH सोलह, एक हज़ार नौ सौ पचानवे / PHALGUNA छब्बीस, एक हज़ार नौ सौ सत्रह [ PART II - SEC तीन ] दो. Whereas the Central Government has reasony to believe that the aforesaid person has absconded or is concealing himself so that the order cannot bo executed; सात सौ इकहत्तर:--भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने जिंगे विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर की धारा तीन की उपधारा के अश्रीन प्रदेश फा. सं. छःतिहत्तर अट्ठानवे पचानवे - - सौ. शु. आठ दिनांक अट्ठारह नवंबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे को यह निदेश जारी किया था कि डा. सन्तोष रामेश्वर राऊत, चौबीस अलकनंदा दसवां गुलमोहर न्यूक्लिन पार्ले स्कीम, जुहू, बम्बई -- उन्नीस, कौशल्या नर्सिंग होम, प्रथम तल, रिंकू पाटमेंट्स लिकिंग रोड, खैर, नम्बईई-बावन को निरुद्ध कर लिया जाए और केन्द्रीय कारागार, यर्वदा में अभिरक्षा में रखा जाए ताकि उसे भविष्य में विदेशी मुद्रा के संवर्धन के प्रतिकूल कोई भो कार्य करने से रोका जा सके । दो. केन्द्रीय सरकार के पास यह विश्वास करने का कारण है कि पूर्वोत व्यक्ति फरार हो गया है या अपने की छिपा रहा है जिससे उक्त आदेश का निष्पादन नहीं हो सके; तीन. अतः अब केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा सात को उपधारा के खण्ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह निर्देश देती है कि पूर्वोक्त व्यक्ति इस श्रादेश के शासकीय राजपत्र में प्रकाशन के सात दिन के भीतर पुलिम आयुक्त बम्बई के समक्ष हाजिर हो । [फा. सं. छःतिहत्तर अट्ठानवे पचानवे - - सी. शु. आठ ] रूप चन्द, श्रवर सचिव S.O. सात सौ इकहत्तर - Whereas the Joint Secretary to the Government of India, specially empowered under subsection of section तीन of the Conservation of Foreign Exchange and prevention of Smuggling Activities Act, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर issued order F No. छः सौ तिहत्तर । अट्ठानवे।पचानवे-Cus. VII dated अट्ठारह नवंबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे under the said sub-section directing that Dr. Santosh Rameshwar Raut, चौबीस, Alaknanda, दसth Gulamahar Cross Road, New Vile Parle Scheme, Juhu, Bombay - उनचास Kaushalya Nursing Home, एकst Floor, Rinku Apartments Linking Road, Khar, Bombay-बावन be detained and kept in custody in the Central Prison Yerawada with a view to preventing him from acting in any nannar prejudicial to the augmentation of foreign exchange in future. तीन. Now therefore, in cxercise of the power conferred by clause of sub-section of Secrion सात of the said Act, the Central Government hereby directs the aforesaid person to appear before the Commissioner Director General of Police, Bombay within सात days of the publication of this order in the Official Gazette [F. No. छः सौ तिहत्तर । अट्ठानवे।पचानवे-Cus. VIII] ROOP CHAND, Under Secy. सात सौ बहत्तर:--भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने जिसे विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की धारा तीन की उपधारा के अधीन आदेश फा. सं. छः सौ तिहत्तर / एक सौ अड़तीस / पचानवे -- सी. णु. आठ दिनांक उन्नीस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे को यह निदेश जारी किया था कि श्री रतन बगारिया सुपुत्र श्रीसी. डी. बगारिया पे एक सौ तीस, अशोक बिहार, फेस- तीन, नई दिल्ली -एक लाख दस हज़ार बावन को निरुद्ध कर लिया जाए और केन्द्रीय कारागार, तिहाड़, नई दिल्ली मे अभिरक्षा में ताकि रखा जाए उसे भविष्य में माल की तस्करी करने से रोका जा सके । दो. केन्द्रीय सरकार के पास यह विश्वास करने का कारण है कि कि पूर्वोक्त फरार व्यक्ति हो गया है या अपने को दिपा रहा है जिससे देश का दिन नहीं हो सके; तीन. अतः श्रन केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा सात की उपधारा के खण्ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह निर्देश देती है कि पूर्वोक्त व्यक्ति इस प्रदेश के शासकीय राजपत्र में प्रकाशन के सात दिन के भीतर पुलिस श्रायुवत दिल्ली के समय हाजिर हो । ए. के. सिन्हा, श्रवर सचिव |
कथं मियाया अनुकम्तिायाः,
सङ्गं रहस्यं रुचिरांच मन्त्रान् । सुहृत्सु च स्नेहसितः शिशूनाम्,
कलाक्षराणामनुरक्त चित्तः ॥ॐ ( श्री भा० ७ स्क० ५ ० २८०)
नहीं कठिन वैराग्य होहि नहिं यदि द्वे जगमहँ । कनक कामिनी पाश न लिपटें यदि नर-पगमहॅ प्राननि पैऊ खेलि करै पैदा जा धन कूँ । तामें प्रति आसक्त हटापै कैसे मन कूँ ।। अति प्यारी प्रियतमा की, बानी सरस सुधा सनी । कैसे छोडे शिशुनिकी, तोतरि बानी सोहनी ॥ मन में विषयों के प्रति स्वाभाविक अनुराग है और विषयों
* प्रह्लादजी असुर बालकों से कह रहे है - "देसो, भैया ! जिसका चित्त अपने स्नेह करने वाली प्रियतमा पत्नी के एकान्त सहवास में, मीठी-मीठी प्रेम की बतोडियों में ग्रासक्त है, तथा बन्धु बान्धुओं के प्रेम बालकों की तोतली प्यारी वाणी में फंसा है, उसे वैराग्य कैसे हो सकता है ? | कथं मियाया अनुकम्तिायाः, सङ्गं रहस्यं रुचिरांच मन्त्रान् । सुहृत्सु च स्नेहसितः शिशूनाम्, कलाक्षराणामनुरक्त चित्तः ॥ॐ नहीं कठिन वैराग्य होहि नहिं यदि द्वे जगमहँ । कनक कामिनी पाश न लिपटें यदि नर-पगमहॅ प्राननि पैऊ खेलि करै पैदा जा धन कूँ । तामें प्रति आसक्त हटापै कैसे मन कूँ ।। अति प्यारी प्रियतमा की, बानी सरस सुधा सनी । कैसे छोडे शिशुनिकी, तोतरि बानी सोहनी ॥ मन में विषयों के प्रति स्वाभाविक अनुराग है और विषयों * प्रह्लादजी असुर बालकों से कह रहे है - "देसो, भैया ! जिसका चित्त अपने स्नेह करने वाली प्रियतमा पत्नी के एकान्त सहवास में, मीठी-मीठी प्रेम की बतोडियों में ग्रासक्त है, तथा बन्धु बान्धुओं के प्रेम बालकों की तोतली प्यारी वाणी में फंसा है, उसे वैराग्य कैसे हो सकता है ? |
नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने आज यहां रायपुर में शासकीय आवास पर प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आये लोगों से भेंट की। डॉ. डहरिया को लोगों ने क्षेत्रीय विकास कार्यो की जानकारी दी एवं अपनी समास्याओं के संबंध में आवेदन दिये। नगरीय प्रशासन मंत्री ने लोगों के आवेदनों पर हर संभव कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया। गौरतलब है कि डॉॅ. डहरिया से प्रत्येक मंगलवार को जनदर्शन भेंट मुलाकात कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से लोग स्वस्फूत मिलने आते है और अपनी विभिन्न समास्याओं के निराकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत करते है।
| नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने आज यहां रायपुर में शासकीय आवास पर प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आये लोगों से भेंट की। डॉ. डहरिया को लोगों ने क्षेत्रीय विकास कार्यो की जानकारी दी एवं अपनी समास्याओं के संबंध में आवेदन दिये। नगरीय प्रशासन मंत्री ने लोगों के आवेदनों पर हर संभव कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया। गौरतलब है कि डॉॅ. डहरिया से प्रत्येक मंगलवार को जनदर्शन भेंट मुलाकात कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से लोग स्वस्फूत मिलने आते है और अपनी विभिन्न समास्याओं के निराकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत करते है। |
धीरे धीरे उसके लगाए बीज ने अंकुर फेंका । विप्लव की आग जल उठी। अपोलोदत्त ने राजधानी छोड़ बाहर भागने का प्रयत्न किया परन्तु हेलिकल के अश्व उसे भले प्रकार पहिचानते थे। उसके घोड़े अब हेलिकल के थे और उन्होंने अपने पूर्व स्वामी को अपनी टापों तले रौंद डाला ।
हेलिकल गद्दी पर बैठा । उसने पिता के पुनरुद्धार किया । अवसर उसके पक्ष में था।
योग्य पुत्र ने पिता के वध का प्रतिशोध लिया । हेलिक ने पुष्टि दी । उसने अपोलोदत्त के की प्रतिमूर्ति फिर छापी।
इस प्रकार यह विप्लव का तारतम्य चलता रहा। दिमितिय से लेकर युक्रेतिद ने अपोलोदत्त को, अपोलोदत्त ने हेलिकल को दिया। और हेलिक ? क्या वह स्वयं उस लिप्सा को देर तक भोग सका ?
शीघ्र चीन की पश्चिमोत्तर सीमा पर एक भयंकर आँधी उठी । वहाँ के भगोड़े हूणों की, जो ऋषिकों को धकेलती हुई पश्चिम के शकों से जा टकराई। शकों ने पार्थव राजा फ़ात का ध्वंस कर वंतु की तलेटी में शरण ली। उनके धक्के से रीढ़ टूट गई । दिमितिय और युक्रेतिद का यवन साम्राज्य चूर चूर हो गया ।
सारे कार्यों का लोगों ने जाना इस विचार से सिक्कों पर पिता | धीरे धीरे उसके लगाए बीज ने अंकुर फेंका । विप्लव की आग जल उठी। अपोलोदत्त ने राजधानी छोड़ बाहर भागने का प्रयत्न किया परन्तु हेलिकल के अश्व उसे भले प्रकार पहिचानते थे। उसके घोड़े अब हेलिकल के थे और उन्होंने अपने पूर्व स्वामी को अपनी टापों तले रौंद डाला । हेलिकल गद्दी पर बैठा । उसने पिता के पुनरुद्धार किया । अवसर उसके पक्ष में था। योग्य पुत्र ने पिता के वध का प्रतिशोध लिया । हेलिक ने पुष्टि दी । उसने अपोलोदत्त के की प्रतिमूर्ति फिर छापी। इस प्रकार यह विप्लव का तारतम्य चलता रहा। दिमितिय से लेकर युक्रेतिद ने अपोलोदत्त को, अपोलोदत्त ने हेलिकल को दिया। और हेलिक ? क्या वह स्वयं उस लिप्सा को देर तक भोग सका ? शीघ्र चीन की पश्चिमोत्तर सीमा पर एक भयंकर आँधी उठी । वहाँ के भगोड़े हूणों की, जो ऋषिकों को धकेलती हुई पश्चिम के शकों से जा टकराई। शकों ने पार्थव राजा फ़ात का ध्वंस कर वंतु की तलेटी में शरण ली। उनके धक्के से रीढ़ टूट गई । दिमितिय और युक्रेतिद का यवन साम्राज्य चूर चूर हो गया । सारे कार्यों का लोगों ने जाना इस विचार से सिक्कों पर पिता |
सोहूः जब रूसी चौथी पीढ़ी का विमान 4वीं पीढ़ी के विमान से थोड़ी दूरी पर था, तब हम F-5A की श्रेष्ठता के बारे में बात नहीं कर सकते।
चीनी प्रेस इतालवी वायु सेना के F-30 फाइटर को रूसी Su-35SM फाइटर द्वारा बाल्टिक सागर के ऊपर आसमान में रोके जाने पर प्रतिक्रिया दे रहा है। Voennoye Obozreniye पहले इसके एक में समाचार भूखंडों ने जानकारी प्रकाशित की कि रूसी Su-30SM कुछ समय के लिए बाल्टिक के ऊपर इतालवी F-35A के साथ था। एक बिंदु पर, रूसी लड़ाकू के रॉकेट आयुध को इतालवी पायलट को आकाश में प्रदर्शित किया गया था, जिसके बाद विमान "छितरी हुई" थे।
सोहू सामग्री सेः
यह एक क्लासिक इंटरसेप्शन था। पीढ़ी 4,5 (4+ - "सैन्य समीक्षा" की टिप्पणी) से संबंधित एक रूसी विमान ने इतालवी वायु सेना के विमान तक उड़ान भरी, जब उसने रूसी सैन्य परिवहन के करीब जाने की कोशिश की।
चीनी पर्यवेक्षक का कहना है कि रूसी Su-30SM की गतिशीलता, साथ ही बाल्टिक सागर की स्थिति के बारे में रूसी पायलटों की उत्कृष्ट जागरूकता ने "नाटो वायु पुलिस के F-35 विमान को अनिवार्य रूप से लक्ष्य में बदल दिया। " यह जोड़ा गया है कि इतालवी वायु सेना के लड़ाकू के निर्देशांक "निस्संदेह जमीनी सेवाओं और वायु रक्षा कर्मचारियों को स्थानांतरित कर दिए गए थे। "
यह भी संकेत दिया गया है कि "इतालवी पायलट ने, Su-30SM के साथ बैठक के बाद, विमान को रूसी हवाई सीमाओं से दिशा में घुमाया। "
एस्कॉर्ट फुटेज, जिसे सोहू इंटरसेप्शन कहते हैंः
| सोहूः जब रूसी चौथी पीढ़ी का विमान चारवीं पीढ़ी के विमान से थोड़ी दूरी पर था, तब हम F-पाँच एम्पीयर की श्रेष्ठता के बारे में बात नहीं कर सकते। चीनी प्रेस इतालवी वायु सेना के F-तीस फाइटर को रूसी Su-पैंतीसSM फाइटर द्वारा बाल्टिक सागर के ऊपर आसमान में रोके जाने पर प्रतिक्रिया दे रहा है। Voennoye Obozreniye पहले इसके एक में समाचार भूखंडों ने जानकारी प्रकाशित की कि रूसी Su-तीसSM कुछ समय के लिए बाल्टिक के ऊपर इतालवी F-पैंतीस एम्पीयर के साथ था। एक बिंदु पर, रूसी लड़ाकू के रॉकेट आयुध को इतालवी पायलट को आकाश में प्रदर्शित किया गया था, जिसके बाद विमान "छितरी हुई" थे। सोहू सामग्री सेः यह एक क्लासिक इंटरसेप्शन था। पीढ़ी चार,पाँच से संबंधित एक रूसी विमान ने इतालवी वायु सेना के विमान तक उड़ान भरी, जब उसने रूसी सैन्य परिवहन के करीब जाने की कोशिश की। चीनी पर्यवेक्षक का कहना है कि रूसी Su-तीसSM की गतिशीलता, साथ ही बाल्टिक सागर की स्थिति के बारे में रूसी पायलटों की उत्कृष्ट जागरूकता ने "नाटो वायु पुलिस के F-पैंतीस विमान को अनिवार्य रूप से लक्ष्य में बदल दिया। " यह जोड़ा गया है कि इतालवी वायु सेना के लड़ाकू के निर्देशांक "निस्संदेह जमीनी सेवाओं और वायु रक्षा कर्मचारियों को स्थानांतरित कर दिए गए थे। " यह भी संकेत दिया गया है कि "इतालवी पायलट ने, Su-तीसSM के साथ बैठक के बाद, विमान को रूसी हवाई सीमाओं से दिशा में घुमाया। " एस्कॉर्ट फुटेज, जिसे सोहू इंटरसेप्शन कहते हैंः |
वास्तुशास्त्रों में जीवन के कई बातें बताई गई है। उत्तर या पूर्व दिशा में की गई जल की निकासी आर्थिक दृष्टि से शुभ होती है। इसी तरह से मकान में 3 दरवाजे एक ही रेखा में न हों। सूखे फूल घर में नहीं रखें। इस तरह के कई उपाय है जो ज्योतिषशास्त्रों बताया गया है।
संत-महात्माओं के चित्र आशीर्वाद देते हुए बैठक में लगाएं। घर में टूटी-फूटी, कबाड़, अनावश्यक वस्तुओं को नहीं रखें। दक्षिण-पूर्व दिशा के कोने में हरियाली से परिपूर्ण चित्र लगाएं। घर में टपकने वाले नल नहीं होना चाहिए। घर में गोल किनारों के फर्नीचर ही शुभ हैं। घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा की गैलरी में या पूजा स्थान के पास रखें।
हर गुरुवार को तुलसी के पौधे को दूध चढ़ाना चाहिए। तवे पर रोटी सेंकने के पूर्व दूध के छींटें मारना शुभ है। पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें। घर में सप्ताह में एक बार गूगल का धुआं करना शुभ होता है। गेहूं में नागकेशर के 2 दाने तथा तुलसी की 11 पत्तियां डालकर पिसाया जाना शुभ है। घर में सरसों के तेल के दीये में लौंग डालकर लगाना शुभ है।
| वास्तुशास्त्रों में जीवन के कई बातें बताई गई है। उत्तर या पूर्व दिशा में की गई जल की निकासी आर्थिक दृष्टि से शुभ होती है। इसी तरह से मकान में तीन दरवाजे एक ही रेखा में न हों। सूखे फूल घर में नहीं रखें। इस तरह के कई उपाय है जो ज्योतिषशास्त्रों बताया गया है। संत-महात्माओं के चित्र आशीर्वाद देते हुए बैठक में लगाएं। घर में टूटी-फूटी, कबाड़, अनावश्यक वस्तुओं को नहीं रखें। दक्षिण-पूर्व दिशा के कोने में हरियाली से परिपूर्ण चित्र लगाएं। घर में टपकने वाले नल नहीं होना चाहिए। घर में गोल किनारों के फर्नीचर ही शुभ हैं। घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा की गैलरी में या पूजा स्थान के पास रखें। हर गुरुवार को तुलसी के पौधे को दूध चढ़ाना चाहिए। तवे पर रोटी सेंकने के पूर्व दूध के छींटें मारना शुभ है। पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें। घर में सप्ताह में एक बार गूगल का धुआं करना शुभ होता है। गेहूं में नागकेशर के दो दाने तथा तुलसी की ग्यारह पत्तियां डालकर पिसाया जाना शुभ है। घर में सरसों के तेल के दीये में लौंग डालकर लगाना शुभ है। |
पटना साहिब के सांसद और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को AIIMS पटना में कोविड वैक्सीन लगवाई। उन्होंने इसके लिए अस्पताल प्रशासन को सहयोग राशि भी दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल परिषद के सभी सदस्यों ने यह निर्णय किया था कि वे सभी मुफ्त में कोरोना वैक्सीन नही लेंगे, इसके लिए निर्धारित 250 रुपए की सहयोग राशि भुगतान करेंगे। बिहार के पूर्व डिप्टी CM और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने भी कोरोना का टीका लगवाया। साथ ही कह दिया कि राबड़ी देवी भी टीका लगवाएं, विपक्ष कोरोना टीकाकरण को राजनीति से ऊपर रखें।
AIIMS में टीका लगवाने के बाद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत बनी कोरोना वैक्सीन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अन्य दर्जनों देशों में भी उपयोग में लाई जा रही है। रविशंकर प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस निर्णय का स्वागत किया जिसके अंतर्गत बिहार में सभी को मुफ्त में वैक्सीन लगवाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। रविशंकर प्रसाद ने बिहार के लोगों से आग्रह किया कि वे बढ़-चढ़कर कोरोना का टीका लगवाएं और एक नई जागरुकता का परिचय दें।
सुशील मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अनुसरण करते हुए मैंने भी कोरोना का टीका लिया और अनुभव किया कि इसमें न कोई तकलीफ होती है, न बाद में कोई परेशानी। हम टीके लेकर न केवल स्वयं को सुरक्षित करते हैं, बल्कि भारत में विकसित वैक्सीन के प्रति उन 100 से अधिक देशों का भरोसा बढ़ाते हैं, जिन्हें टीके की खुराक भेजी जा रही है।
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| पटना साहिब के सांसद और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को AIIMS पटना में कोविड वैक्सीन लगवाई। उन्होंने इसके लिए अस्पताल प्रशासन को सहयोग राशि भी दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल परिषद के सभी सदस्यों ने यह निर्णय किया था कि वे सभी मुफ्त में कोरोना वैक्सीन नही लेंगे, इसके लिए निर्धारित दो सौ पचास रुपयापए की सहयोग राशि भुगतान करेंगे। बिहार के पूर्व डिप्टी CM और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने भी कोरोना का टीका लगवाया। साथ ही कह दिया कि राबड़ी देवी भी टीका लगवाएं, विपक्ष कोरोना टीकाकरण को राजनीति से ऊपर रखें। AIIMS में टीका लगवाने के बाद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत बनी कोरोना वैक्सीन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अन्य दर्जनों देशों में भी उपयोग में लाई जा रही है। रविशंकर प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस निर्णय का स्वागत किया जिसके अंतर्गत बिहार में सभी को मुफ्त में वैक्सीन लगवाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। रविशंकर प्रसाद ने बिहार के लोगों से आग्रह किया कि वे बढ़-चढ़कर कोरोना का टीका लगवाएं और एक नई जागरुकता का परिचय दें। सुशील मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अनुसरण करते हुए मैंने भी कोरोना का टीका लिया और अनुभव किया कि इसमें न कोई तकलीफ होती है, न बाद में कोई परेशानी। हम टीके लेकर न केवल स्वयं को सुरक्षित करते हैं, बल्कि भारत में विकसित वैक्सीन के प्रति उन एक सौ से अधिक देशों का भरोसा बढ़ाते हैं, जिन्हें टीके की खुराक भेजी जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
1/5 Winter-sex-tips-in-hindi 5 सेक्स को लेकर अक्सर लोगों में देखा जाता है कि सर्दी के मौसम में परेशानी होती है। सेक्स की समस्या को लेकर लोग बहुत कम डॉक्टर के पास जाते हैं। आजकल तो सेक्स के थेरपिस्ट भी सलाह देते हैं। वहीं कुछ लोग सेक्स की समस्या को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते हैं। कुछ लोग तो इस बारे में बात करने में असहज होते है इसलिए भी नहीं जाना चाहते हैं। खैर इन सब बातों का क्या हैं. . . . आइए हम जानने की कोशिश करते हैं सर्दी में होने वाली तीन सेक्स की समस्याओं के बारे में।
| एक/पाँच Winter-sex-tips-in-hindi पाँच सेक्स को लेकर अक्सर लोगों में देखा जाता है कि सर्दी के मौसम में परेशानी होती है। सेक्स की समस्या को लेकर लोग बहुत कम डॉक्टर के पास जाते हैं। आजकल तो सेक्स के थेरपिस्ट भी सलाह देते हैं। वहीं कुछ लोग सेक्स की समस्या को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते हैं। कुछ लोग तो इस बारे में बात करने में असहज होते है इसलिए भी नहीं जाना चाहते हैं। खैर इन सब बातों का क्या हैं. . . . आइए हम जानने की कोशिश करते हैं सर्दी में होने वाली तीन सेक्स की समस्याओं के बारे में। |
आज बड़ी बेगम का मकान परिस्तान बना हुआ है। जिधर देखिए, सजावट की बहार है। बेगमें धमा-चौकड़ी मचा रही हैं।
जानी - दूल्हा के यहाँ तो आज मीरासिनों की धूम है। कहाँ तो मियाँ आजाद को नाच-गाने से इतनी चिढ़ थी कि मजाल क्या, कोई डोमिनी घर के अंदर कदम रखने पाए। और आज सुनती हूँ कि तबले पर थाप पड़ रही है और गजलें, ठुमरियाँ, टप्पे गाए जाते हैं।
नाजुक - सुना है, आज सुरैया बेगम भी आने वाली हैं।
बहार - उस मालजादी का हमारे सामने जिक्र न किया करो।
नाजुक - (दाँतों तले उँगली दबा कर।) ऐसा न कहो, बहन!
जानी - ऐसी पाक-दामन औरत है कि उसका सा होना मुश्किल है।
नाजुक - यह लोग खुदा जाने, क्या समझती हैं सुरैया बेगम को।
बहार - ऐ है! सच कहना, सत्तर चूहे खाके बिल्ली हज को चली।
इतने में एक पालकी से एक बेगम साहब उतरीं। जानी बेगम और नाजुक अदा में इशारे होने लगे। यह सुरैया बेगम थीं।
सुरैया - हमने कहा, चलके जरी दुलहिन को देख आएँ।
रूहअफजा - अच्छी तरह आराम से बैठिए।
सुरैया - मैं बहुत अच्छी बैठी हूँ। तकल्लुफ क्या है।
नाजुक - यहाँ तो आपको हमारे और जानी बेगम के सिवा किसी ने न देखा होगा।
सुरैया - मैं तो एक बार हुस्नआरा से मिल चुकी हूँ।
सिपहआरा - और हमसे भी?
सुरैया - हाँ, तुमसे मिले थे, मगर बताएँगे नहीं।
सिपहआरा - कब मिले थे अल्लाह! किस मकान में थे?
सुरैया - अजी, मैं मजाक करती थी। हुस्नआरा बेगम को देख कर दिल शाद हो गया।
नाजुक - क्या हमसे ज्यादा खूबसूरत हैं?
सुरैया - तुम्हारी तो दुनिया के परदे पर जवाब नहीं है।
नाजुक - भला दूल्हा से आपसे बातचीत हुई थी?
सुरैया - बातचीत आपसे हुई होगी। मैंने तो एक दफा राह में देखा था।
नाजुक - भला दूसरा निकाह भी मंजूर करते हैं वह।
सुरैया - यह तो उनसे कोई जाके पूछे।
नाजुक - तुम्हीं पूछ लो बहन, खुदा के वास्ते।
सुरैया - अगर मंजूर हो दूसरा निकाह, तो फिर क्या?
नाजुक - फिर क्या, तुमको इससे क्या मतलब?
रूहअफजा - आखिर दूसरे निकाह के लिए किसे तजवीजा है।
नाजुक - हम खुद अपना पैगाम करेंगे।
रूहअफजा - बस, हद हो गई नाजुकअदा बहन! ओफ्फोह!
नाजुक - (आहिस्ता से) सुरैया बेगम, तुमने गलती की। धीरज न रख सकीं।
सुरैया - हम जान फिदा करते, गर वादा वफा होता,
मरना ही मुकद्दर था, वह आते तो क्या होता!
नाजुक - हाँ, है तो यही बात। खैर, जो हुआ, अच्छा ही हुआ, मसलहत भी यही थी।
हुस्नआरा बेगम ने यह शेर सुना और नाजुक बेगम की बातें को तौला, तो समझ गईं कि हो न हो, सुरैया बेगम यही हैं। कनखियों से देखा और गरदन फेर कर इशारे से सिपहआरा को बुला कर कहा - इनको पहचाना? सोचो तो, यह कौन हैं?
सिपहआरा - ऐ बाजी, तुम तो पहेलियाँ बुझवाती हो।
हुस्नआरा - तुम ऐसी तबीयतदार, और कब तक न समझ सकीं?
सिपहआरा - तो कोई उड़ती चिड़िया तो नहीं पकड़ सकता।
हुस्नआरा - उस शेर पर गौर करो।
सिपहआरा - अख्खाह, (सुरैया बेगम की तरफ देख कर) अब समझ गई।
हुस्नआरा - है औरत हसीन।
सिपहआरा - हाँ हैं; मगर तुमसे क्या मुकाबिला।
हुस्नआरा - सच कहना, कितनी जल्द समझ गई हूँ।
सिपहआरा - इसमें क्या शक है, मगर यह तुमसे कब मिली थीं? मुझे तो बाद नहीं आता।
हुस्नआरा - खुदा जाने। अलारक्खी बनके आने न पाती, जोगिन के भेस में कोई फटकने न देता। शिब्बोजान का यहाँ क्या काम?
सिपहआरा - शायद महरी-वहरी बनके गुजर हुआ हो।
हुस्नआरा - सच तो यह है कि हमको इनका आना बहुत खटकता है। इन्हें तो यह चाहिए था कि जहाँ आजाद का नाम सुनतीं, वहाँ से हट जातीं, न कि ऐसी जगह आना।
सिपहआरा - इनसे यहाँ तक आया क्योंकर गया?
हुस्नआरा - ऐसा न हो कि यहाँ कोई गुल खिले।
सिपहआरा ने जा कर बहार बेगम से कहा - जो बेगम अभी आई हैं, उनको तुमने पहचाना? सुरैया बेगम यही हैं। तब तो बहार बेगम के कान खड़े हुए। गौर से देख कर बोलीं - माशा-अल्लाह! कितनी हसीन औरत है! ऐसी नमकीनी भी कम देखने में आई।
सिपहआरा - बाजी को खौफ है कि कोई गुल न खिलाएँ।
बहार - गुल क्या खिलाएँगी। अब तो इनका निकाह हो गया।
सिपहआरा - ऐ है, बाजी! निकाह पर न जाना। यह वह खिलाड़ है कि घूँघट के आड़ में शिकार खेलें।
बहार - ऐ नहीं, क्यों बिचारी को बदनाम करती हो।
सिपहआरा - वाह! बदनामी की एक ही कही। कोई पेशा, कोई कर्म इनसे छूटा? लगावटबाजी में इनकी धूम है।
बहार - हम जब इस ढब पर आने भी दें।
उधर नाजुकअदा बेगम ने बातों-बातों में सुरैया बेगम से पूछा - बहन, यह बात अब तक न खुली कि तुम पादरी के यहाँ से क्यों निकल आईं। सुरैया बेगम ने कहा - बहन, इस जिक्र से रंज होता है। जो हुआ; वह हुआ, अब उसका घड़ी-घड़ी जिक्र करना फजूल है। लेकिन जब नाजुकअदा बेगम ने बहुत जिद की तो उन्होंने कहा - बात यह हुई कि बेचारे पादरी ने मुझ पर तरस खा कर अपने घर में रखा और जिस तरह कोई खास अपनी बेटियों से पेश आता है, उसी तरह मुझसे पेश आते। मुझे पढ़ाया-लिखाया, मुझसे रोज कहते कि तुम ईसाई हो जाओ; लेकिन मैं हँस के टाल दिया करती थी। एक दिन पादरी साहब तो चले गए थे किसी काम को, उनका भतीजा, तो फौज में नौकर है, उनसे मिलने आया। पूछा - कहाँ गए हैं? मैंने कहा - कहीं बाहर गए हैं। इतना सुनना था कि वह गाड़ी से उतर आया और अपनी जेब से बोतल निकाल कर शराब पी। जब नशा हुआ तो मुझसे कहने लगा, तुम भी पियो। उसने समझा, मैं राजी हूँ। मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं उससे अपना हाथ छुड़ाने लगी। मगर वह मर्द, मैं औरत! फिर फौजी जवान, कुछ करते-धरते नहीं बनती थी। आखिर बोली - साहब, तुम फौज के जवान हो। मैं भला तुमसे क्या जीत पाऊँगी? मेरा हाथ छोड़ दो। इस पर हँस कर बोला - हम बिना पिलाए न मानेंगे। मेरा तो खून सूख गया। अब करूँ तो क्या करूँ। अगर किसी को पुकारती हूँ, तो यह इस वक्त मार ही डालगा। और बेइज्जत करने पर तो तुला ही हुआ है। चाहा कि झपट के निकल जाऊँ, पर उसने मुझे गोद में उठा लिया और बोला - हमसे शादी क्यों नहीं कर लेतीं? मेरा बदन थर-थर काँप रहा था कि या खुदा, आज कैसे इज्जत बचेगी, और क्या होगा! मगर आबरू को बचानेवाला अल्लाह है। उसी वक्त पादरी साहब आ पहुँचे। बस, अपना सा मुँह ले कर रह गया। चुपके से खिसक गया। पादरी साहब उसको तो क्या कहते। जब बराबर का लड़का या भतीजा कमाता-धमाता हो, तो बड़ा-बूढ़ा उसका लिहाज करता ही है। जब वह भाग गया, तो मेरे पास आ कर बोले - मिस पालेन, अब तुम यहाँ नहीं रह सकतीं।
मैं - पादरी साहब, इसमें मेरा जरा कुसूर नहीं।
पादरी - मैंने खुद देखा कि तुम और वह हाथापाई करते थे।
मैं - वह मुझे जबर्दस्ती शराब पिलाना चाहते थे।
पादरी - अजी, मैं खूब जानता हूँ। मैं तुमको बहुत नेक समझता था।
मैं - पूरी बात तो सुन लीजिए।
पादरी - अब तुम मेरी आँखों से गिर गईं। बस अब तुम्हारा निबाह यहाँ नहीं हो सकता। कल तक तुम अपना बंदोबस्त कर लो। मैं नहीं जानता था कि तुम्हारे यह ढंग हैं।
उसी दिन रात को मैं वहाँ से भागी।
उधर बड़ी बेगम साहब इंतजाम करने में लगी हुई थीं। बात-बात पर कहती जाती थीं कि अल्लाह! आत तो बहुत थकी। अब मेरा सिन थोड़ा हैं कि इतने चक्कर लगाऊँ। उस्तानी जी हाँ-में-हाँ मिलाती जाती थीं।
बड़ी बेगम - उस्तानी जी, अल्लाह गवाह है, आज बहुत शल हो गई।
उस्तारी - अरे तो हुजूर दौड़ती भी कितनी हैं! इधर से उधर, उधर से इधर।
महरी - दूसरा हो तो बैठ जाय।
उस्तानी - इस सिन में इतनी दौड़-धूप मुश्किल है।
महरी - ऐसा न हो, दुश्मनों की तबीयत खराब हो जाय। आखिर हम लोग किस लिए हैं?
बड़ी बेगम - अभी दो-तीन दिन तो न बोलो, फिर देखा जायगा। इसके बाद करना ही क्या है।
उस्तानी - यह क्यों? खुदा सलामत रखे; पोते-पोतियाँ न होंगे?
बड़ी बेगम - बहन, जिंदगानी का कौन ठिकाना है।
अब बरात का हाल सुनिए। कोई पहर रात गए बड़ी धूम-धाम से बरात रवाना हुई। सबके आगे निशान का हाथी झूमता हुआ जाता था। हाथी के सामने कदम-कदम पर अनार छूटते जाते थे। महताब की रोशनी से चाँद का रंग फक था। चर्खी की आनबान से आसमान का कलेजा धक था। तमाशाइयों की भीड़ से दोनों तरफ के कमरे फटे पड़ते थे। जिस वक्त गोरों का बाजा चौक में पहुँचा और उन्होंने बैंड बजाया तो लोग समझे कि आसमान के फरिश्ते बाजा बजाते-बजाते उतर आए हैं।
इतने में मियाँ खोजी इधर-उधर फुदकते हुए आए।
खोजी - ओ शहनाईवालो! मुँह न फैलाओ बहुत।
लोग - आइए, आइए! बस आप ही की कसर थी।
खोजी - अरे, हम क्या कहते हैं? मुँह न फैलाओ बहुत।
लोग - कोई आपकी सुनता ही नहीं।
खोजी - ये तो नौसिखिए हैं। मेरी बातें क्या समझेंगे।
लोग - इनसे कुछ फर्माइश कीजिए;
करेजवा में दरद उठी;कासे कहूँ ननदी मोरे राम।सोती थी मैं अपने मँदिल में;अचानक चौंक पड़ी मोरे राम।(करेजवा में दरद उठी....।)
लोग - सुभान-अल्लाह! आप इस फन के उस्ताद हैं। मगर शहनाईवाले अब तक आपका हुक्म नहीं मानते।
खोजी - नहीं भई, हुक्म तो मानें दौड़ते हुए और न मानें तो मैं निकाल दूँ। मगर इसको क्या किया जाय कि अनाड़ी हैं। बस, जरा मुझे आने में देर हुई और सारा काम बिगड़ गया।
इतने में एक दूसरे आदमी ने खोजी के नजदीक जा कर जरा कंधे का इशारा किया तो खोजी लड़खड़ाए और उनके चेले अफीमी भाइयों ने बिगड़ना शुरू किया।
एक - अरे मियाँ! क्या आँखों के अंधे हो?
दूसरा - ईंट की ऐनक लगाओ मियाँ।
तीसरा - और ख्वाजा साहब भी धक्का देते तो कैसी होती?
चौथा - मुँह के बल गिरे होते और क्या।
पाँचवाँ - अजी, यों कहो कि नाक सिलपट हो जाती।
खोजी - अरे भाई, अब इससे क्या वास्ता है। हम किसी से लड़ते-झगड़ते थोड़े ही हैं। मगर हाँ, अगर कोई गीदी हमसे बोले तो इतनी करौलियाँ भोंकी हों कि याद करे।
जब बरात दुलहिन के घर पहुँची तो दूल्हे को दरवाजे के सामने लाए और दुलहिन का नहाया हुआ पानी घोड़े के सुमों के नीचे डाला। इसके बाद घी और शक्कर मिला कर घोड़े के पाँव में लगाया। दूल्हा महल में आया। दूल्हा की बहनें उस पर दुपट्टे का आँचल डाले हुए थीं। दुलहिन की तरफ से औरतें बीड़ा हर कदम पर डालती जाती थीं। इस तरह दूल्हा मड़वे के नीचे पहुँचा। उसी वक्त एक औरत उठी और रूमाल से आँखें पोंछती हुई बाहर चली गई। यह सुरैया बेगम थीं।
आजाद मँड़वे के नीचे उस चौकी पर खड़े किए गए जिस पर दुलहिन नहाई थी। मीरासिनों ने दुलहिन के उबटन का, जो माँझे के दिन से रखा हुआ था, एक भेड़ और एक शेर बनाया और दूल्हा से कहा - कहिए, दूल्हा भेड़, दुलहिन शेर।
आजाद - अच्छा साहब, हम शेर, वह भेड़, बस?
डोमिनी - ऐ वाह! यह तो अच्छे दूल्हा आए। आप भेड़, वह शेर।
आजाद - अच्छा साहब यों सही। आप भेड़, वह शेर।
डोमिनी - ऐ हुजूर, कहिए, यह शेर, मैं भेड़।
आजाद - अच्छा साहब, मैं भेड़, वह शेर।
इस पर खूब कहकहा पड़ा। इसी तरह और भी कई रस्में अदा हुई, और तब दूल्हा महफिल में गया। यहाँ नाच-गाना हो रहा था। एक नाजनीन बीच में बैठी थीं, मजाक हो रहा था। एक नवाब साहब ने यह फिकरा कसा - बी साहब, आपने गजब का गला पाया है। उसकी तारीफ ही करना फजूल है।
नाजनीन - कोई समझदार तारीफ करे तो खैर, अताई-अनाड़ी ने तारीफ की तो क्या?
नवाब - ऐ साहब, हम तो खुद तारीफ करते हैं।
नाजनीन - तो आप अपना शुमार भी समझदारों में करते हैं? बतलाइए, यह बिहाग का वक्त है या घनाक्षरी का।
नवाब - यह किसी ढाड़ी-बचे से पूछो जाके।
नाजनीन - ऐ लो! जो इस फन के नुकते समझे, वह ढाड़ी-बचा कहलाए। वाह री अक्ल, वह अमीर नहीं, गँवार है, जो दो बातें न जानता हो - गाना और पकाना। आपके से दो-एक घामड़ रईस शहर में और हों तो सारा शहर बस जाय।
लगा न रहने दे झगड़े को यार तू बाकी;रुके न हाथ अभी है रँगे-गुलू बाकी।जो एक रात भी सोया वह गुल गले मिल कर;तो भीनी-भीनी महीनों रही है बू बाकी।हमारे फूल उठा के वह बोला गुँच-देहन;अभी तलक है मुहब्बत की इसमें बू बाकी।फिना है सबके लिए मुझप' कुछ नहीं मौकूफ;यह रंज है कि अकेला रहेगा तू बाकी।जो इस जमाने में रह जाय आबरू बाकी।
नवाब - हाँ, यह सबसे ज्यादा मुकद्दम चीज है।
नाजनीन - मगर हयादारों के लिए। बगड़ेबाजों को क्या?
इस पर इस जोर से कहकहा पड़ा कि नवाब साहब झेंप गए।
नाजनीन - अब कुछ और फरमाइए हुजूर! चेहरे का रंग क्यों फक हो गया?
मिरजा - आपसे नवाब साहब बहुत डरते हैं।
नवाब - जी हाँ, हरामजादे से सभी डरा करते हें।
नाजनीन - ऐ है, जभी आप अपने अब्बाजान से इतना डरते हैं।
इस पर फिर कहकहा पड़ा और नवाब साहब की जबान बंद हो गई।
उधर दुलहिन को सात सुहागिनों ने मिल कर इस तरह सँवारा कि हुस्न की आब और भी भड़क उठी। निकाह की रस्म शुरू हुई। काजी साहब अंदर आए और दो गवाहों को साथ लाए। इसके बाद दुलहिन से पूछा गया कि आजाद पाशा के साथ निकाह मंजूर है? दुलहिन ने शर्म से सिर झुका लिया।
बड़ी बेगम - ऐ बेटा, कह दो।
रूहअफजा - हुस्नआरा, बोलो बहन। देर क्यों करती हो?
नाजुक - बस, तुम हाँ कह दो।
जानी - (आहिस्ता से) बजरे पर सैर कर चुकीं, हवा खा चुकीं और अब इस वक्त नखरे बघारती हैं।
आखिर बड़ी कोशिश के बाद हुस्नआरा ने धीरे से 'हूँ' कहा।
बड़ी बेगम - लीजिए, दुलहिन ने हुँकारी भरी।
काजी - हमने तो आवाज नहीं सुनी।
बड़ी बेगम - हमने सुन लिया, बहुत से गवाह हैं।
काजी साहब ने बाहर आ कर दूल्हा से भी यही सवाल किया।
आजाद - जी हाँ कुबूल किया!
तड़प रहे हैं शबे-इंतजार सोने दे;न छेड़ हमको दिले-बेकरार सोने दे।कफस में आँख लगी है अभी असीरों की,गरज न बाग में अबरे-बहार सोने दे।अभी तो सोए हैं यादे-चमन में अहले-कफस;जगा न उनको नसीमे बहार सोने दे।तड़प रहे हैं दिले-बेकरार सोने दे।
शरबत-पिलाई के बाद दूल्हा और दुलहिन एक ही पलंग पर बिठाए गए। गेतीआरा ने कहा - बहन, जूती तो छुलाओ।
जानी - वाह! यह तो सिमटी-सिमटाई बैठी हैं।
बहार - आखिर हया भी तो कोई चीज है!
नाजुक - अरे, जूती कंधे पर छुआ लो बहन, वाह!
उस्तानी - अगले वक्तों में तो सिर पर पड़ती थीं।
नाजुक - इस जूती का मजा कोई मर्दों के दिल से पूछे।
जब दुलहिन ने जरा भी जुंबिश न की तो बहार बेगम ने दुलहिन के दाहने पैर की जूती दूल्हा के कंधे पर छुला ली।
नाजुक - कहिए, आपकी डोली के साथ चलूँगा।
रूहअफजा - और जूतियाँ झाड़के धरूँगा।
जानी - और सुराही हाथ में ले चलूँगा।
आजाद - ऐ! क्यों नहीं, जरूर कहूँगा।
जानी - रंडियों से नखरे बहुत सीखे हैं।
इस फिकरे पर ऐसा कहकहा पड़ा कि मियाँ आजाद शर्मा गए। जानी बेगम इक्कीस पान का बीड़ा लाईं और उसे कई बार आजाद के मुँह तक ला-ला कर हटाने के बाद खिला दिया।
सिपहआरा - सुहाग लाईं और दूल्हा के कान में कहा - कहो, सोने में सुहागा मोतियों में धागा और बने का जी बनी से लागा!
इसके बाद आरसी की रस्म अदा हुई।
जानी - बन्नू, जल्दी आँख न खोलना।
नाजुक - जब तक अपने मुँह से गुलाम न बनें।
हैदरी - कहिए, बीबी, मैं आपका गुलाम हूँ।
आजाद - बीबी मैं आपका बिन दामों गुलाम हूँ।
बड़ी बेगम - बेटा, अब तो कहवा लिया, अब आँखें खोल दो।
जानी - एक ही बार तो कहा।
हैदरी - ऐ हुजूर, खुशामद तो कीजिए।
आजाद - यह खुशामद से न मानेंगी।
हैदरी - हो कहा है, उसका खयाल रहे। बीवी के गुलाम बने रहिएगा।
आखिर बड़ी मुश्किलों से दुलहिन ने आँखें खोलीं, मगर आँखों में आँसू भरे हुए थे। बे-अख्तियार रोने लगीं। लोग समझाते-समझाते आरी हो गए, मगर आँसू न थमे। तब आजाद ने सिर झुका कर कान में कहा - यह क्या करती हो, दिल को मजबूत रखो।
रूहअफजा - बहन, खुदा के लिए चुप हो जाओ। इसका कौन-सा मौका है?
बहार - अम्माँजान, आप ही समझाएँ। नाहक अपने को हलाकान करती हैं हुस्नआरा।
उस्तानी - तर कपड़े से मुँह पोंछो।
रुहअफजा - अल्लाह करे, आजाद ने जितनी तकलीफें उठाई हैं, उतना ही आराम भी पाएँ।
अब्बासी - अल्लाह ऐसा ही करेगा।
जानी - मगर आजाद का सा दूल्हा भी किसी ने कम देखा होगा।
नाजुक - लाखों कुओं का पानी पी चुके हैं।
बहार - बड़े खुशमजाक आदमी मालूम होते हैं।
जानी - इस वक्त हुस्नआरा के दिल का क्या हाल होगा?
नाजुक - चौथी के दिन हम ताक-ताक निशाने लगाएँगे।
रूहअफजा - आजाद से कोई न जीत पाएगा।
जानी - कौन! देख लेना बहन, अगर हारी न बोलें जभी कहना। वह अगर तेज हैं, तो हम भी कम नहीं।
| आज बड़ी बेगम का मकान परिस्तान बना हुआ है। जिधर देखिए, सजावट की बहार है। बेगमें धमा-चौकड़ी मचा रही हैं। जानी - दूल्हा के यहाँ तो आज मीरासिनों की धूम है। कहाँ तो मियाँ आजाद को नाच-गाने से इतनी चिढ़ थी कि मजाल क्या, कोई डोमिनी घर के अंदर कदम रखने पाए। और आज सुनती हूँ कि तबले पर थाप पड़ रही है और गजलें, ठुमरियाँ, टप्पे गाए जाते हैं। नाजुक - सुना है, आज सुरैया बेगम भी आने वाली हैं। बहार - उस मालजादी का हमारे सामने जिक्र न किया करो। नाजुक - ऐसा न कहो, बहन! जानी - ऐसी पाक-दामन औरत है कि उसका सा होना मुश्किल है। नाजुक - यह लोग खुदा जाने, क्या समझती हैं सुरैया बेगम को। बहार - ऐ है! सच कहना, सत्तर चूहे खाके बिल्ली हज को चली। इतने में एक पालकी से एक बेगम साहब उतरीं। जानी बेगम और नाजुक अदा में इशारे होने लगे। यह सुरैया बेगम थीं। सुरैया - हमने कहा, चलके जरी दुलहिन को देख आएँ। रूहअफजा - अच्छी तरह आराम से बैठिए। सुरैया - मैं बहुत अच्छी बैठी हूँ। तकल्लुफ क्या है। नाजुक - यहाँ तो आपको हमारे और जानी बेगम के सिवा किसी ने न देखा होगा। सुरैया - मैं तो एक बार हुस्नआरा से मिल चुकी हूँ। सिपहआरा - और हमसे भी? सुरैया - हाँ, तुमसे मिले थे, मगर बताएँगे नहीं। सिपहआरा - कब मिले थे अल्लाह! किस मकान में थे? सुरैया - अजी, मैं मजाक करती थी। हुस्नआरा बेगम को देख कर दिल शाद हो गया। नाजुक - क्या हमसे ज्यादा खूबसूरत हैं? सुरैया - तुम्हारी तो दुनिया के परदे पर जवाब नहीं है। नाजुक - भला दूल्हा से आपसे बातचीत हुई थी? सुरैया - बातचीत आपसे हुई होगी। मैंने तो एक दफा राह में देखा था। नाजुक - भला दूसरा निकाह भी मंजूर करते हैं वह। सुरैया - यह तो उनसे कोई जाके पूछे। नाजुक - तुम्हीं पूछ लो बहन, खुदा के वास्ते। सुरैया - अगर मंजूर हो दूसरा निकाह, तो फिर क्या? नाजुक - फिर क्या, तुमको इससे क्या मतलब? रूहअफजा - आखिर दूसरे निकाह के लिए किसे तजवीजा है। नाजुक - हम खुद अपना पैगाम करेंगे। रूहअफजा - बस, हद हो गई नाजुकअदा बहन! ओफ्फोह! नाजुक - सुरैया बेगम, तुमने गलती की। धीरज न रख सकीं। सुरैया - हम जान फिदा करते, गर वादा वफा होता, मरना ही मुकद्दर था, वह आते तो क्या होता! नाजुक - हाँ, है तो यही बात। खैर, जो हुआ, अच्छा ही हुआ, मसलहत भी यही थी। हुस्नआरा बेगम ने यह शेर सुना और नाजुक बेगम की बातें को तौला, तो समझ गईं कि हो न हो, सुरैया बेगम यही हैं। कनखियों से देखा और गरदन फेर कर इशारे से सिपहआरा को बुला कर कहा - इनको पहचाना? सोचो तो, यह कौन हैं? सिपहआरा - ऐ बाजी, तुम तो पहेलियाँ बुझवाती हो। हुस्नआरा - तुम ऐसी तबीयतदार, और कब तक न समझ सकीं? सिपहआरा - तो कोई उड़ती चिड़िया तो नहीं पकड़ सकता। हुस्नआरा - उस शेर पर गौर करो। सिपहआरा - अख्खाह, अब समझ गई। हुस्नआरा - है औरत हसीन। सिपहआरा - हाँ हैं; मगर तुमसे क्या मुकाबिला। हुस्नआरा - सच कहना, कितनी जल्द समझ गई हूँ। सिपहआरा - इसमें क्या शक है, मगर यह तुमसे कब मिली थीं? मुझे तो बाद नहीं आता। हुस्नआरा - खुदा जाने। अलारक्खी बनके आने न पाती, जोगिन के भेस में कोई फटकने न देता। शिब्बोजान का यहाँ क्या काम? सिपहआरा - शायद महरी-वहरी बनके गुजर हुआ हो। हुस्नआरा - सच तो यह है कि हमको इनका आना बहुत खटकता है। इन्हें तो यह चाहिए था कि जहाँ आजाद का नाम सुनतीं, वहाँ से हट जातीं, न कि ऐसी जगह आना। सिपहआरा - इनसे यहाँ तक आया क्योंकर गया? हुस्नआरा - ऐसा न हो कि यहाँ कोई गुल खिले। सिपहआरा ने जा कर बहार बेगम से कहा - जो बेगम अभी आई हैं, उनको तुमने पहचाना? सुरैया बेगम यही हैं। तब तो बहार बेगम के कान खड़े हुए। गौर से देख कर बोलीं - माशा-अल्लाह! कितनी हसीन औरत है! ऐसी नमकीनी भी कम देखने में आई। सिपहआरा - बाजी को खौफ है कि कोई गुल न खिलाएँ। बहार - गुल क्या खिलाएँगी। अब तो इनका निकाह हो गया। सिपहआरा - ऐ है, बाजी! निकाह पर न जाना। यह वह खिलाड़ है कि घूँघट के आड़ में शिकार खेलें। बहार - ऐ नहीं, क्यों बिचारी को बदनाम करती हो। सिपहआरा - वाह! बदनामी की एक ही कही। कोई पेशा, कोई कर्म इनसे छूटा? लगावटबाजी में इनकी धूम है। बहार - हम जब इस ढब पर आने भी दें। उधर नाजुकअदा बेगम ने बातों-बातों में सुरैया बेगम से पूछा - बहन, यह बात अब तक न खुली कि तुम पादरी के यहाँ से क्यों निकल आईं। सुरैया बेगम ने कहा - बहन, इस जिक्र से रंज होता है। जो हुआ; वह हुआ, अब उसका घड़ी-घड़ी जिक्र करना फजूल है। लेकिन जब नाजुकअदा बेगम ने बहुत जिद की तो उन्होंने कहा - बात यह हुई कि बेचारे पादरी ने मुझ पर तरस खा कर अपने घर में रखा और जिस तरह कोई खास अपनी बेटियों से पेश आता है, उसी तरह मुझसे पेश आते। मुझे पढ़ाया-लिखाया, मुझसे रोज कहते कि तुम ईसाई हो जाओ; लेकिन मैं हँस के टाल दिया करती थी। एक दिन पादरी साहब तो चले गए थे किसी काम को, उनका भतीजा, तो फौज में नौकर है, उनसे मिलने आया। पूछा - कहाँ गए हैं? मैंने कहा - कहीं बाहर गए हैं। इतना सुनना था कि वह गाड़ी से उतर आया और अपनी जेब से बोतल निकाल कर शराब पी। जब नशा हुआ तो मुझसे कहने लगा, तुम भी पियो। उसने समझा, मैं राजी हूँ। मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं उससे अपना हाथ छुड़ाने लगी। मगर वह मर्द, मैं औरत! फिर फौजी जवान, कुछ करते-धरते नहीं बनती थी। आखिर बोली - साहब, तुम फौज के जवान हो। मैं भला तुमसे क्या जीत पाऊँगी? मेरा हाथ छोड़ दो। इस पर हँस कर बोला - हम बिना पिलाए न मानेंगे। मेरा तो खून सूख गया। अब करूँ तो क्या करूँ। अगर किसी को पुकारती हूँ, तो यह इस वक्त मार ही डालगा। और बेइज्जत करने पर तो तुला ही हुआ है। चाहा कि झपट के निकल जाऊँ, पर उसने मुझे गोद में उठा लिया और बोला - हमसे शादी क्यों नहीं कर लेतीं? मेरा बदन थर-थर काँप रहा था कि या खुदा, आज कैसे इज्जत बचेगी, और क्या होगा! मगर आबरू को बचानेवाला अल्लाह है। उसी वक्त पादरी साहब आ पहुँचे। बस, अपना सा मुँह ले कर रह गया। चुपके से खिसक गया। पादरी साहब उसको तो क्या कहते। जब बराबर का लड़का या भतीजा कमाता-धमाता हो, तो बड़ा-बूढ़ा उसका लिहाज करता ही है। जब वह भाग गया, तो मेरे पास आ कर बोले - मिस पालेन, अब तुम यहाँ नहीं रह सकतीं। मैं - पादरी साहब, इसमें मेरा जरा कुसूर नहीं। पादरी - मैंने खुद देखा कि तुम और वह हाथापाई करते थे। मैं - वह मुझे जबर्दस्ती शराब पिलाना चाहते थे। पादरी - अजी, मैं खूब जानता हूँ। मैं तुमको बहुत नेक समझता था। मैं - पूरी बात तो सुन लीजिए। पादरी - अब तुम मेरी आँखों से गिर गईं। बस अब तुम्हारा निबाह यहाँ नहीं हो सकता। कल तक तुम अपना बंदोबस्त कर लो। मैं नहीं जानता था कि तुम्हारे यह ढंग हैं। उसी दिन रात को मैं वहाँ से भागी। उधर बड़ी बेगम साहब इंतजाम करने में लगी हुई थीं। बात-बात पर कहती जाती थीं कि अल्लाह! आत तो बहुत थकी। अब मेरा सिन थोड़ा हैं कि इतने चक्कर लगाऊँ। उस्तानी जी हाँ-में-हाँ मिलाती जाती थीं। बड़ी बेगम - उस्तानी जी, अल्लाह गवाह है, आज बहुत शल हो गई। उस्तारी - अरे तो हुजूर दौड़ती भी कितनी हैं! इधर से उधर, उधर से इधर। महरी - दूसरा हो तो बैठ जाय। उस्तानी - इस सिन में इतनी दौड़-धूप मुश्किल है। महरी - ऐसा न हो, दुश्मनों की तबीयत खराब हो जाय। आखिर हम लोग किस लिए हैं? बड़ी बेगम - अभी दो-तीन दिन तो न बोलो, फिर देखा जायगा। इसके बाद करना ही क्या है। उस्तानी - यह क्यों? खुदा सलामत रखे; पोते-पोतियाँ न होंगे? बड़ी बेगम - बहन, जिंदगानी का कौन ठिकाना है। अब बरात का हाल सुनिए। कोई पहर रात गए बड़ी धूम-धाम से बरात रवाना हुई। सबके आगे निशान का हाथी झूमता हुआ जाता था। हाथी के सामने कदम-कदम पर अनार छूटते जाते थे। महताब की रोशनी से चाँद का रंग फक था। चर्खी की आनबान से आसमान का कलेजा धक था। तमाशाइयों की भीड़ से दोनों तरफ के कमरे फटे पड़ते थे। जिस वक्त गोरों का बाजा चौक में पहुँचा और उन्होंने बैंड बजाया तो लोग समझे कि आसमान के फरिश्ते बाजा बजाते-बजाते उतर आए हैं। इतने में मियाँ खोजी इधर-उधर फुदकते हुए आए। खोजी - ओ शहनाईवालो! मुँह न फैलाओ बहुत। लोग - आइए, आइए! बस आप ही की कसर थी। खोजी - अरे, हम क्या कहते हैं? मुँह न फैलाओ बहुत। लोग - कोई आपकी सुनता ही नहीं। खोजी - ये तो नौसिखिए हैं। मेरी बातें क्या समझेंगे। लोग - इनसे कुछ फर्माइश कीजिए; करेजवा में दरद उठी;कासे कहूँ ननदी मोरे राम।सोती थी मैं अपने मँदिल में;अचानक चौंक पड़ी मोरे राम। लोग - सुभान-अल्लाह! आप इस फन के उस्ताद हैं। मगर शहनाईवाले अब तक आपका हुक्म नहीं मानते। खोजी - नहीं भई, हुक्म तो मानें दौड़ते हुए और न मानें तो मैं निकाल दूँ। मगर इसको क्या किया जाय कि अनाड़ी हैं। बस, जरा मुझे आने में देर हुई और सारा काम बिगड़ गया। इतने में एक दूसरे आदमी ने खोजी के नजदीक जा कर जरा कंधे का इशारा किया तो खोजी लड़खड़ाए और उनके चेले अफीमी भाइयों ने बिगड़ना शुरू किया। एक - अरे मियाँ! क्या आँखों के अंधे हो? दूसरा - ईंट की ऐनक लगाओ मियाँ। तीसरा - और ख्वाजा साहब भी धक्का देते तो कैसी होती? चौथा - मुँह के बल गिरे होते और क्या। पाँचवाँ - अजी, यों कहो कि नाक सिलपट हो जाती। खोजी - अरे भाई, अब इससे क्या वास्ता है। हम किसी से लड़ते-झगड़ते थोड़े ही हैं। मगर हाँ, अगर कोई गीदी हमसे बोले तो इतनी करौलियाँ भोंकी हों कि याद करे। जब बरात दुलहिन के घर पहुँची तो दूल्हे को दरवाजे के सामने लाए और दुलहिन का नहाया हुआ पानी घोड़े के सुमों के नीचे डाला। इसके बाद घी और शक्कर मिला कर घोड़े के पाँव में लगाया। दूल्हा महल में आया। दूल्हा की बहनें उस पर दुपट्टे का आँचल डाले हुए थीं। दुलहिन की तरफ से औरतें बीड़ा हर कदम पर डालती जाती थीं। इस तरह दूल्हा मड़वे के नीचे पहुँचा। उसी वक्त एक औरत उठी और रूमाल से आँखें पोंछती हुई बाहर चली गई। यह सुरैया बेगम थीं। आजाद मँड़वे के नीचे उस चौकी पर खड़े किए गए जिस पर दुलहिन नहाई थी। मीरासिनों ने दुलहिन के उबटन का, जो माँझे के दिन से रखा हुआ था, एक भेड़ और एक शेर बनाया और दूल्हा से कहा - कहिए, दूल्हा भेड़, दुलहिन शेर। आजाद - अच्छा साहब, हम शेर, वह भेड़, बस? डोमिनी - ऐ वाह! यह तो अच्छे दूल्हा आए। आप भेड़, वह शेर। आजाद - अच्छा साहब यों सही। आप भेड़, वह शेर। डोमिनी - ऐ हुजूर, कहिए, यह शेर, मैं भेड़। आजाद - अच्छा साहब, मैं भेड़, वह शेर। इस पर खूब कहकहा पड़ा। इसी तरह और भी कई रस्में अदा हुई, और तब दूल्हा महफिल में गया। यहाँ नाच-गाना हो रहा था। एक नाजनीन बीच में बैठी थीं, मजाक हो रहा था। एक नवाब साहब ने यह फिकरा कसा - बी साहब, आपने गजब का गला पाया है। उसकी तारीफ ही करना फजूल है। नाजनीन - कोई समझदार तारीफ करे तो खैर, अताई-अनाड़ी ने तारीफ की तो क्या? नवाब - ऐ साहब, हम तो खुद तारीफ करते हैं। नाजनीन - तो आप अपना शुमार भी समझदारों में करते हैं? बतलाइए, यह बिहाग का वक्त है या घनाक्षरी का। नवाब - यह किसी ढाड़ी-बचे से पूछो जाके। नाजनीन - ऐ लो! जो इस फन के नुकते समझे, वह ढाड़ी-बचा कहलाए। वाह री अक्ल, वह अमीर नहीं, गँवार है, जो दो बातें न जानता हो - गाना और पकाना। आपके से दो-एक घामड़ रईस शहर में और हों तो सारा शहर बस जाय। लगा न रहने दे झगड़े को यार तू बाकी;रुके न हाथ अभी है रँगे-गुलू बाकी।जो एक रात भी सोया वह गुल गले मिल कर;तो भीनी-भीनी महीनों रही है बू बाकी।हमारे फूल उठा के वह बोला गुँच-देहन;अभी तलक है मुहब्बत की इसमें बू बाकी।फिना है सबके लिए मुझप' कुछ नहीं मौकूफ;यह रंज है कि अकेला रहेगा तू बाकी।जो इस जमाने में रह जाय आबरू बाकी। नवाब - हाँ, यह सबसे ज्यादा मुकद्दम चीज है। नाजनीन - मगर हयादारों के लिए। बगड़ेबाजों को क्या? इस पर इस जोर से कहकहा पड़ा कि नवाब साहब झेंप गए। नाजनीन - अब कुछ और फरमाइए हुजूर! चेहरे का रंग क्यों फक हो गया? मिरजा - आपसे नवाब साहब बहुत डरते हैं। नवाब - जी हाँ, हरामजादे से सभी डरा करते हें। नाजनीन - ऐ है, जभी आप अपने अब्बाजान से इतना डरते हैं। इस पर फिर कहकहा पड़ा और नवाब साहब की जबान बंद हो गई। उधर दुलहिन को सात सुहागिनों ने मिल कर इस तरह सँवारा कि हुस्न की आब और भी भड़क उठी। निकाह की रस्म शुरू हुई। काजी साहब अंदर आए और दो गवाहों को साथ लाए। इसके बाद दुलहिन से पूछा गया कि आजाद पाशा के साथ निकाह मंजूर है? दुलहिन ने शर्म से सिर झुका लिया। बड़ी बेगम - ऐ बेटा, कह दो। रूहअफजा - हुस्नआरा, बोलो बहन। देर क्यों करती हो? नाजुक - बस, तुम हाँ कह दो। जानी - बजरे पर सैर कर चुकीं, हवा खा चुकीं और अब इस वक्त नखरे बघारती हैं। आखिर बड़ी कोशिश के बाद हुस्नआरा ने धीरे से 'हूँ' कहा। बड़ी बेगम - लीजिए, दुलहिन ने हुँकारी भरी। काजी - हमने तो आवाज नहीं सुनी। बड़ी बेगम - हमने सुन लिया, बहुत से गवाह हैं। काजी साहब ने बाहर आ कर दूल्हा से भी यही सवाल किया। आजाद - जी हाँ कुबूल किया! तड़प रहे हैं शबे-इंतजार सोने दे;न छेड़ हमको दिले-बेकरार सोने दे।कफस में आँख लगी है अभी असीरों की,गरज न बाग में अबरे-बहार सोने दे।अभी तो सोए हैं यादे-चमन में अहले-कफस;जगा न उनको नसीमे बहार सोने दे।तड़प रहे हैं दिले-बेकरार सोने दे। शरबत-पिलाई के बाद दूल्हा और दुलहिन एक ही पलंग पर बिठाए गए। गेतीआरा ने कहा - बहन, जूती तो छुलाओ। जानी - वाह! यह तो सिमटी-सिमटाई बैठी हैं। बहार - आखिर हया भी तो कोई चीज है! नाजुक - अरे, जूती कंधे पर छुआ लो बहन, वाह! उस्तानी - अगले वक्तों में तो सिर पर पड़ती थीं। नाजुक - इस जूती का मजा कोई मर्दों के दिल से पूछे। जब दुलहिन ने जरा भी जुंबिश न की तो बहार बेगम ने दुलहिन के दाहने पैर की जूती दूल्हा के कंधे पर छुला ली। नाजुक - कहिए, आपकी डोली के साथ चलूँगा। रूहअफजा - और जूतियाँ झाड़के धरूँगा। जानी - और सुराही हाथ में ले चलूँगा। आजाद - ऐ! क्यों नहीं, जरूर कहूँगा। जानी - रंडियों से नखरे बहुत सीखे हैं। इस फिकरे पर ऐसा कहकहा पड़ा कि मियाँ आजाद शर्मा गए। जानी बेगम इक्कीस पान का बीड़ा लाईं और उसे कई बार आजाद के मुँह तक ला-ला कर हटाने के बाद खिला दिया। सिपहआरा - सुहाग लाईं और दूल्हा के कान में कहा - कहो, सोने में सुहागा मोतियों में धागा और बने का जी बनी से लागा! इसके बाद आरसी की रस्म अदा हुई। जानी - बन्नू, जल्दी आँख न खोलना। नाजुक - जब तक अपने मुँह से गुलाम न बनें। हैदरी - कहिए, बीबी, मैं आपका गुलाम हूँ। आजाद - बीबी मैं आपका बिन दामों गुलाम हूँ। बड़ी बेगम - बेटा, अब तो कहवा लिया, अब आँखें खोल दो। जानी - एक ही बार तो कहा। हैदरी - ऐ हुजूर, खुशामद तो कीजिए। आजाद - यह खुशामद से न मानेंगी। हैदरी - हो कहा है, उसका खयाल रहे। बीवी के गुलाम बने रहिएगा। आखिर बड़ी मुश्किलों से दुलहिन ने आँखें खोलीं, मगर आँखों में आँसू भरे हुए थे। बे-अख्तियार रोने लगीं। लोग समझाते-समझाते आरी हो गए, मगर आँसू न थमे। तब आजाद ने सिर झुका कर कान में कहा - यह क्या करती हो, दिल को मजबूत रखो। रूहअफजा - बहन, खुदा के लिए चुप हो जाओ। इसका कौन-सा मौका है? बहार - अम्माँजान, आप ही समझाएँ। नाहक अपने को हलाकान करती हैं हुस्नआरा। उस्तानी - तर कपड़े से मुँह पोंछो। रुहअफजा - अल्लाह करे, आजाद ने जितनी तकलीफें उठाई हैं, उतना ही आराम भी पाएँ। अब्बासी - अल्लाह ऐसा ही करेगा। जानी - मगर आजाद का सा दूल्हा भी किसी ने कम देखा होगा। नाजुक - लाखों कुओं का पानी पी चुके हैं। बहार - बड़े खुशमजाक आदमी मालूम होते हैं। जानी - इस वक्त हुस्नआरा के दिल का क्या हाल होगा? नाजुक - चौथी के दिन हम ताक-ताक निशाने लगाएँगे। रूहअफजा - आजाद से कोई न जीत पाएगा। जानी - कौन! देख लेना बहन, अगर हारी न बोलें जभी कहना। वह अगर तेज हैं, तो हम भी कम नहीं। |
1. उस बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थिति की पहचान कीजिये जहाँ मुदुमलाई वन्यजीव अभयारण्य और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं?
उत्तर : नीलगिरि बायोस्फीयर (तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक का त्रिजंक्शन) नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व मालाबार वर्षा वन के जैव-भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मुदुमलाई वन्यजीव अभयारण्य, वायनाड वन्यजीव अभयारण्य, बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान, नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान, मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान और साइलेंट वैली इस रिज़र्व के भीतर मौजूद संरक्षित क्षेत्र हैं।
2. उस स्थान की पहचान कीजिये जिसे एम.आई.टी.-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने एक नई डैम्फ्लाइज़ प्रजाति की खोज की है, जिसे 'आर्मगेडन रीडटेल' (प्रोटोस्टिक्टा आर्मागेडोनिया) नाम दिया गया है।
उत्तर : दक्षिणी-पश्चिमी घाट, केरल, हाल ही में केरल के पश्चिमी घाट में एम.आई.टी.-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने एक नई डैम्फ्लाइज़ प्रजाति की खोज की है, जिसे 'आर्मगेडन रीडटेल' (प्रोटोस्टिक्टा आर्मागेडोनिया/Protosticta Armageddonia) नाम दिया गया है।
3. उस भारतीय राज्य का पता लगाइये जहाँ एक बाँध के ढहने से भूटान में भारत की जलविद्युत परियोजनाओं, जो दोनों देशों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, की सुरक्षा एवं व्यवहार्यता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
उत्तर : सिक्किम, हाल ही में सिक्किम में हिमनद झील के फटने से आई बाढ़ (Glacial Lake Outburst Flood- GLOF) के कारण 1200 मेगावाट का तीस्ता-III बाँध बह गया। सिक्किम में इस बाँध के ढहने से भूटान में भारत की जलविद्युत परियोजनाओं, जो दोनों देशों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, की सुरक्षा एवं व्यवहार्यता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
4. उस भारतीय राज्य की पहचान कीजिये जिसने शासन व्यवस्था में सुधार तथा सार्वजनिक सेवाओं के कुशल वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 5T पहल शुरू की है।
उत्तर : ओडिशा, ओडिशा की 5T पहल एक शासन व्यवस्था मॉडल है जो टीम वर्क, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी, समय-सीमा और बदलाव के लियेउपयुक्त है, जिसे शासन व्यवस्था में सुधार तथा सार्वजनिक सेवाओं का कुशल वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
5. उस भारतीय राज्य की पहचान कीजिये जहाँ धोर्डो नामक गाँव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव का पुरस्कार दिया गया है।
उत्तर : गुजरात, गुजरात के धोर्डो को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव का प्रतिष्ठित खिताब प्रदान किया गया है। उज़्बेकिस्तान के समरकंद में UNWTO द्वारा आयोजित बेस्ट टूरिज़्म विलेज-2023 पुरस्कार समारोह में धोर्डो को यह खिताब मिला।
| एक. उस बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थिति की पहचान कीजिये जहाँ मुदुमलाई वन्यजीव अभयारण्य और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं? उत्तर : नीलगिरि बायोस्फीयर नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व मालाबार वर्षा वन के जैव-भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मुदुमलाई वन्यजीव अभयारण्य, वायनाड वन्यजीव अभयारण्य, बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान, नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान, मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान और साइलेंट वैली इस रिज़र्व के भीतर मौजूद संरक्षित क्षेत्र हैं। दो. उस स्थान की पहचान कीजिये जिसे एम.आई.टी.-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने एक नई डैम्फ्लाइज़ प्रजाति की खोज की है, जिसे 'आर्मगेडन रीडटेल' नाम दिया गया है। उत्तर : दक्षिणी-पश्चिमी घाट, केरल, हाल ही में केरल के पश्चिमी घाट में एम.आई.टी.-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने एक नई डैम्फ्लाइज़ प्रजाति की खोज की है, जिसे 'आर्मगेडन रीडटेल' नाम दिया गया है। तीन. उस भारतीय राज्य का पता लगाइये जहाँ एक बाँध के ढहने से भूटान में भारत की जलविद्युत परियोजनाओं, जो दोनों देशों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, की सुरक्षा एवं व्यवहार्यता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। उत्तर : सिक्किम, हाल ही में सिक्किम में हिमनद झील के फटने से आई बाढ़ के कारण एक हज़ार दो सौ मेगावाट का तीस्ता-III बाँध बह गया। सिक्किम में इस बाँध के ढहने से भूटान में भारत की जलविद्युत परियोजनाओं, जो दोनों देशों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, की सुरक्षा एवं व्यवहार्यता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। चार. उस भारतीय राज्य की पहचान कीजिये जिसने शासन व्यवस्था में सुधार तथा सार्वजनिक सेवाओं के कुशल वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पाँचT पहल शुरू की है। उत्तर : ओडिशा, ओडिशा की पाँचT पहल एक शासन व्यवस्था मॉडल है जो टीम वर्क, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी, समय-सीमा और बदलाव के लियेउपयुक्त है, जिसे शासन व्यवस्था में सुधार तथा सार्वजनिक सेवाओं का कुशल वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। पाँच. उस भारतीय राज्य की पहचान कीजिये जहाँ धोर्डो नामक गाँव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव का पुरस्कार दिया गया है। उत्तर : गुजरात, गुजरात के धोर्डो को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव का प्रतिष्ठित खिताब प्रदान किया गया है। उज़्बेकिस्तान के समरकंद में UNWTO द्वारा आयोजित बेस्ट टूरिज़्म विलेज-दो हज़ार तेईस पुरस्कार समारोह में धोर्डो को यह खिताब मिला। |
पिछले एक महीने के दौरान उत्तराखंड के ऊचाई वाले जिलों में इस प्रकार की दी गयी यह दूसरी चेतावनी है. ऐसा ही चेतावनी पिछले महीने भी जारी की गयी थी. चमोली,पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी कुमांयू क्षेत्रों में हिमस्खलन की चेतावनी के मद्देनजर सुरक्षा के सभी इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है. जनवरी के शुरूआत में पिथौरागढ़ जिले में बर्फीले तूफान के कारण कई घरों को नुकसान पहुंचा था. वहीं मौसम विभाग ने निचली क्षेत्रों में बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई है.
| पिछले एक महीने के दौरान उत्तराखंड के ऊचाई वाले जिलों में इस प्रकार की दी गयी यह दूसरी चेतावनी है. ऐसा ही चेतावनी पिछले महीने भी जारी की गयी थी. चमोली,पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी कुमांयू क्षेत्रों में हिमस्खलन की चेतावनी के मद्देनजर सुरक्षा के सभी इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है. जनवरी के शुरूआत में पिथौरागढ़ जिले में बर्फीले तूफान के कारण कई घरों को नुकसान पहुंचा था. वहीं मौसम विभाग ने निचली क्षेत्रों में बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई है. |
Meerut: सलमान और शारिक गैंग में चल रही गैंगवार का खात्मा करने के लिए बड़ी प्लानिंग आईजी रेंज रामकुमार बना रहे हैं। डबल मर्डर के बाद आईजी के निर्देशन में मेरठ पुलिस दोनों गैंग से जुड़े प्रत्येक शख्स का ब्यौरा जुटाने के बाद उस पर नजर रखनी शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर समी और सलीम की हत्या में शामिल शूटर्स तक पहुंच गई है। शूटर्स लिसाड़ीगेट के रहने वाले है।
गत दिनों मेरठ में हुए गैंगवार ने पुलिस-प्रशासन की मुश्किल बढ़ा दी है। ऐन चुनावी मौके पर हुए दोहरे मर्डर पर पुलिस अफसरों को राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को जबाव देते नहीं बन रहा है। वहीं दूसरी ओर आईजी रेंज रामकुमार ने मेरठ पुलिस को दोनों गैंग के शूटर्स की धरपकड़ के लिए योजना बना ली है। सभी के नंबर्स सर्विलांस पर लगे हैं तो वहीं शनिवार तक दोहरे हत्याकांड में शामिल शूटर्स की पहचान पुलिस ने कर ली है, पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह शूटर लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के हैं।
शनिवार को पुलिस ने मौके पर पहुंच कर वारदात का क्राइम सीन क्रिएट किया है। पुलिस ने दोनों गैंग से संपर्क रख रहे कुछ शूटर्स को भी चिह्नित किया है। वहीं दूसरी ओर एसएसपी मंजिल सैनी ने जेल में बंद शारिक और फईक दोनों भाइयों को पूर्वाचल की जेलों में शिफ्ट कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही जेल प्रशासन और डीएम को भी पत्र लिखकर जेल में बंद शारिक, सलमान और फईक से मिलाई करने वाले के प्रॉपर वेरीफिकेशन की मांग की है। एसएसपी ने कहा कि पेशी पर लाने के लिए जिन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाए। उनका एक चार्ट एसएसपी, एसपी सिटी और सिविल लाइन सीओ को भी दिया जाए, ताकि पेशी से पहले कचहरी में भी उक्त अपराधियों से किसी को मिलने नहीं दिया जाए।
डबल मर्डर में शामिल शूटर्स की धरपकड़ के लिए बड़े स्तर पर कोशिश चल रही है। मेरठ पुलिस को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। दोनों ही गैंग के शूटर्स पुलिस के रडार पर हैं।
| Meerut: सलमान और शारिक गैंग में चल रही गैंगवार का खात्मा करने के लिए बड़ी प्लानिंग आईजी रेंज रामकुमार बना रहे हैं। डबल मर्डर के बाद आईजी के निर्देशन में मेरठ पुलिस दोनों गैंग से जुड़े प्रत्येक शख्स का ब्यौरा जुटाने के बाद उस पर नजर रखनी शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर समी और सलीम की हत्या में शामिल शूटर्स तक पहुंच गई है। शूटर्स लिसाड़ीगेट के रहने वाले है। गत दिनों मेरठ में हुए गैंगवार ने पुलिस-प्रशासन की मुश्किल बढ़ा दी है। ऐन चुनावी मौके पर हुए दोहरे मर्डर पर पुलिस अफसरों को राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को जबाव देते नहीं बन रहा है। वहीं दूसरी ओर आईजी रेंज रामकुमार ने मेरठ पुलिस को दोनों गैंग के शूटर्स की धरपकड़ के लिए योजना बना ली है। सभी के नंबर्स सर्विलांस पर लगे हैं तो वहीं शनिवार तक दोहरे हत्याकांड में शामिल शूटर्स की पहचान पुलिस ने कर ली है, पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह शूटर लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के हैं। शनिवार को पुलिस ने मौके पर पहुंच कर वारदात का क्राइम सीन क्रिएट किया है। पुलिस ने दोनों गैंग से संपर्क रख रहे कुछ शूटर्स को भी चिह्नित किया है। वहीं दूसरी ओर एसएसपी मंजिल सैनी ने जेल में बंद शारिक और फईक दोनों भाइयों को पूर्वाचल की जेलों में शिफ्ट कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही जेल प्रशासन और डीएम को भी पत्र लिखकर जेल में बंद शारिक, सलमान और फईक से मिलाई करने वाले के प्रॉपर वेरीफिकेशन की मांग की है। एसएसपी ने कहा कि पेशी पर लाने के लिए जिन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाए। उनका एक चार्ट एसएसपी, एसपी सिटी और सिविल लाइन सीओ को भी दिया जाए, ताकि पेशी से पहले कचहरी में भी उक्त अपराधियों से किसी को मिलने नहीं दिया जाए। डबल मर्डर में शामिल शूटर्स की धरपकड़ के लिए बड़े स्तर पर कोशिश चल रही है। मेरठ पुलिस को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। दोनों ही गैंग के शूटर्स पुलिस के रडार पर हैं। |
इस भाग-दौड भरी जिन्दगी में हर किसी के कंधों पर काम की जिम्मेदारी इतनी अधिक हो जाती है। कि यह टेंशन कभीकभी डिप्रेशन का विक्राल रूप धारल कर लेती है जिससे के कारण व्यक्ति के सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं है और ना ही डिप्रेशन से बचने के लिए ढेर सारी दवाइयाँ खाने की जरूरत है। आपको जानकर ताज्जुब हो कि सिर्फ मीठी खाने से ही आपको डिप्रेशन से राहत मिल सकती है।
| इस भाग-दौड भरी जिन्दगी में हर किसी के कंधों पर काम की जिम्मेदारी इतनी अधिक हो जाती है। कि यह टेंशन कभीकभी डिप्रेशन का विक्राल रूप धारल कर लेती है जिससे के कारण व्यक्ति के सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं है और ना ही डिप्रेशन से बचने के लिए ढेर सारी दवाइयाँ खाने की जरूरत है। आपको जानकर ताज्जुब हो कि सिर्फ मीठी खाने से ही आपको डिप्रेशन से राहत मिल सकती है। |
न्यूक्लियर हथियारों से लैस अग्नि- 5 मिसाइल का टेस्ट को कामयाब रहा। यह इंटरकांटिनेंटल लोंग रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है, जो पांच हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसकी रेंज में चीन के ज्यादातर शहर हैं। इसका टेस्ट ओडिशा के बालासोर में अब्दुल कलाम आईलैंड से किया गया। डिफेंस रिसर्च डिवेलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के अनुसार अग्नि- 5 देश की सबसे लंबी रेंज वाली न्यूक्लियर कैपेबल मिसाइल है। इसे सुबह 9. 55 बजे अब्दुल कलाम आईलैंड से छोड़ा गया। इसका जो काम है, वो इसने पूरा कर दिखाया। यह मिसाइल तीन स्टेज में काम करती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। सही वक्त पर यह बंगाल की खाड़ी में गिरी। बता दें कि अग्नि 5 को पूरी तरह देश में ही तैयार किया गया है। इसके लिए कम्पोजिट रॉकेट मोटर इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें भी भारत में ही बनाया गया है। मिसाइल की लॉन्चिंग के साथ ही इसका रियल टाइम डाटा लिया गया।
अपनी जद में ले सकता है। चीन के नॉर्थ-ईस्ट हिस्से के अलावा यूरोप भी इसके रेंज में है।
क्यों खास है अग्नि?
- 1000 किलो तक वॉरहैड ले जा सकती है।
- 17 मीटर लंबी अग्नि-5 का वजन 50 टन है। इस पर 1 टन का पे लोड (हथियार) भी रखा जा सकता है।
लांचिंग सिस्टम में कैनस्टर टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है।
इसकी वजह से मिसाइल को आसानी से कहीं भी ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
- सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल को आसानी से डिटेक्ट नहीं किया जा सकता।
- मिसाइल की तीन स्टेज हैं। ये सॉलिड फ्यूल से चलती है। कई न्यूक्लियर वारहैड एक साथ छोड़े जा सकेंगे। एक बार छोड़ने पर इसे रोका नहीं जा सकेगा।
| न्यूक्लियर हथियारों से लैस अग्नि- पाँच मिसाइल का टेस्ट को कामयाब रहा। यह इंटरकांटिनेंटल लोंग रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है, जो पांच हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसकी रेंज में चीन के ज्यादातर शहर हैं। इसका टेस्ट ओडिशा के बालासोर में अब्दुल कलाम आईलैंड से किया गया। डिफेंस रिसर्च डिवेलपमेंट आर्गेनाइजेशन के अनुसार अग्नि- पाँच देश की सबसे लंबी रेंज वाली न्यूक्लियर कैपेबल मिसाइल है। इसे सुबह नौ. पचपन बजे अब्दुल कलाम आईलैंड से छोड़ा गया। इसका जो काम है, वो इसने पूरा कर दिखाया। यह मिसाइल तीन स्टेज में काम करती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। सही वक्त पर यह बंगाल की खाड़ी में गिरी। बता दें कि अग्नि पाँच को पूरी तरह देश में ही तैयार किया गया है। इसके लिए कम्पोजिट रॉकेट मोटर इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें भी भारत में ही बनाया गया है। मिसाइल की लॉन्चिंग के साथ ही इसका रियल टाइम डाटा लिया गया। अपनी जद में ले सकता है। चीन के नॉर्थ-ईस्ट हिस्से के अलावा यूरोप भी इसके रेंज में है। क्यों खास है अग्नि? - एक हज़ार किलो तक वॉरहैड ले जा सकती है। - सत्रह मीटर लंबी अग्नि-पाँच का वजन पचास टन है। इस पर एक टन का पे लोड भी रखा जा सकता है। लांचिंग सिस्टम में कैनस्टर टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से मिसाइल को आसानी से कहीं भी ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। - सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल को आसानी से डिटेक्ट नहीं किया जा सकता। - मिसाइल की तीन स्टेज हैं। ये सॉलिड फ्यूल से चलती है। कई न्यूक्लियर वारहैड एक साथ छोड़े जा सकेंगे। एक बार छोड़ने पर इसे रोका नहीं जा सकेगा। |
(राशि नाम अक्षर : रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
परिवार और दोस्तों के प्रति आपकी भावनाएं आपको चिंतित कर सकती हैं, बस तनाव से बचें। मदद के लिए अपने स्वीटहार्ट को याद करें, उसका साथ आपको दुविधा से बचाएगा। अपने सोलमेट पर ध्यान दें और उसकी इच्छाएं पूरी करें। आज का दिन नए रिश्तों के लिए अच्छा नहीं है इसलिए सब्र से जीवन के इस चरण का मज़ा लें।
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| परिवार और दोस्तों के प्रति आपकी भावनाएं आपको चिंतित कर सकती हैं, बस तनाव से बचें। मदद के लिए अपने स्वीटहार्ट को याद करें, उसका साथ आपको दुविधा से बचाएगा। अपने सोलमेट पर ध्यान दें और उसकी इच्छाएं पूरी करें। आज का दिन नए रिश्तों के लिए अच्छा नहीं है इसलिए सब्र से जीवन के इस चरण का मज़ा लें। Also Read : |
18 साल की उम्र पूरी करने के बाद किशोर सबसे पहले अपने दस्तावेज जैसे वॉटर आईडी, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते हैं। ये दस्तावेज आपके जीवन भर काम आते हैं। 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद कुछ दस्तावेज आसानी से बन जाते हैं लेकिन अगर ड्राइविंग लाइसेंस की बात करें तो उससे पहले ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी है।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले आपको ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना होता है। कुछ लोग इसमें असफल भी हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप ड्राइविंग टेस्ट में फेल होकर ड्राइविंग लाइसेंस नहीं लेना चाहते हैं तो ये 5 टिप्स आपका काम आसान कर सकते हैं।
यदि आप ड्राइविंग टेस्ट पास करना चाहते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले अच्छी तरह से ड्राइव करना सीखें। इसके लिए जितना हो सके ड्राइव करें। टेस्ट ड्राइविंग में अधिक समय देने का आपको फायदा होगा।
ड्राइविंग टेस्ट के लिए जाते समय उसी वाहन को लेने की कोशिश करें जिससे आपने गाड़ी चलाना सीखा हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप वाहन से बहुत परिचित होंगे और परीक्षण के दौरान इसे चलाना आपके लिए आसान होगा।
यह भी जांचना न भूलें कि आप जिस वाहन को परीक्षण के लिए ले जा रहे हैं, वह सभी मानदंडों को पूरा करता है या नहीं। क्योंकि अगर टेस्ट के दौरान गाड़ी की लाइट भी काम नहीं करती है तो मान लीजिए कि आप टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इसलिए इसे अच्छी तरह जांच के बाद ही टेस्ट के लिए लें।
कार के शीशे को ठीक से चेक करने के बाद ही ड्राइविंग टेस्ट दें। ताकि हम सड़क पर समस्याओं का ठीक से पता लगा सकें। क्योंकि ड्राइविंग टेस्ट में यह भी देखा जाता है कि आप गाड़ी चलाते समय अपने शीशों का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
अंत में, महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक आप पूरी तरह से सहज न हों तब तक ड्राइविंग सीखें और अभ्यास करें। क्योंकि ड्राइविंग टेस्ट के दौरान आपसे कोई भी और हर प्रकार का प्रश्न पूछा जा सकता है। गाड़ी के कागजात साथ रखें।
| अट्ठारह साल की उम्र पूरी करने के बाद किशोर सबसे पहले अपने दस्तावेज जैसे वॉटर आईडी, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते हैं। ये दस्तावेज आपके जीवन भर काम आते हैं। अट्ठारह साल की उम्र पूरी होने के बाद कुछ दस्तावेज आसानी से बन जाते हैं लेकिन अगर ड्राइविंग लाइसेंस की बात करें तो उससे पहले ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले आपको ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना होता है। कुछ लोग इसमें असफल भी हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप ड्राइविंग टेस्ट में फेल होकर ड्राइविंग लाइसेंस नहीं लेना चाहते हैं तो ये पाँच टिप्स आपका काम आसान कर सकते हैं। यदि आप ड्राइविंग टेस्ट पास करना चाहते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले अच्छी तरह से ड्राइव करना सीखें। इसके लिए जितना हो सके ड्राइव करें। टेस्ट ड्राइविंग में अधिक समय देने का आपको फायदा होगा। ड्राइविंग टेस्ट के लिए जाते समय उसी वाहन को लेने की कोशिश करें जिससे आपने गाड़ी चलाना सीखा हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप वाहन से बहुत परिचित होंगे और परीक्षण के दौरान इसे चलाना आपके लिए आसान होगा। यह भी जांचना न भूलें कि आप जिस वाहन को परीक्षण के लिए ले जा रहे हैं, वह सभी मानदंडों को पूरा करता है या नहीं। क्योंकि अगर टेस्ट के दौरान गाड़ी की लाइट भी काम नहीं करती है तो मान लीजिए कि आप टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इसलिए इसे अच्छी तरह जांच के बाद ही टेस्ट के लिए लें। कार के शीशे को ठीक से चेक करने के बाद ही ड्राइविंग टेस्ट दें। ताकि हम सड़क पर समस्याओं का ठीक से पता लगा सकें। क्योंकि ड्राइविंग टेस्ट में यह भी देखा जाता है कि आप गाड़ी चलाते समय अपने शीशों का इस्तेमाल कैसे करते हैं। अंत में, महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक आप पूरी तरह से सहज न हों तब तक ड्राइविंग सीखें और अभ्यास करें। क्योंकि ड्राइविंग टेस्ट के दौरान आपसे कोई भी और हर प्रकार का प्रश्न पूछा जा सकता है। गाड़ी के कागजात साथ रखें। |
पालघरः महाराष्ट्र के पालघर की स्थानीय अदालत ने वैध पासपोर्ट के बिना भारत में निवास कर रहे 54 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक बाबु रज्जाक मंडल को दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे. आर. मुलानी ने मंडल को सजा सुनाते हुए उसपर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। मंडल जिले के एक मंदिर में पुजारी का काम कर रहा था। सरकारी वकील मनीषा परमार ने बमाया कि स्थानीय निवासियों ने शिकायत की थी कि मंडल वैध पासपोर्ट के बगैर यहां रह रहा है।
उसे पुलिस ने सितंबर, 2013 में गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश ने कल सजा सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने मंडल पर लगे आरोपों को संदेह से परे पूरी तौर पर साबित किया है। देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों का मुद्दा समय समय पर उठता रहता है। असम चुनाव के समय बीजेपी ने वादा भी किया था अगर उनकी सरकार चुनी जाती है तो अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को वापस भेजे जाने का काम किया जाएगा।
| पालघरः महाराष्ट्र के पालघर की स्थानीय अदालत ने वैध पासपोर्ट के बिना भारत में निवास कर रहे चौवन वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक बाबु रज्जाक मंडल को दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे. आर. मुलानी ने मंडल को सजा सुनाते हुए उसपर बीस,शून्य रुपयापये का जुर्माना भी लगाया। मंडल जिले के एक मंदिर में पुजारी का काम कर रहा था। सरकारी वकील मनीषा परमार ने बमाया कि स्थानीय निवासियों ने शिकायत की थी कि मंडल वैध पासपोर्ट के बगैर यहां रह रहा है। उसे पुलिस ने सितंबर, दो हज़ार तेरह में गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश ने कल सजा सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने मंडल पर लगे आरोपों को संदेह से परे पूरी तौर पर साबित किया है। देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों का मुद्दा समय समय पर उठता रहता है। असम चुनाव के समय बीजेपी ने वादा भी किया था अगर उनकी सरकार चुनी जाती है तो अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को वापस भेजे जाने का काम किया जाएगा। |
Meerut। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मरीजों के मद्देनजर कमिश्नर ने शनिवार को समीक्षा बैठक की। सभी जिलों की वर्चुअल बैठक में डीएम को अस्पतालों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए। इसके अलावा कोविड रोगियों के उपचार के लिए हॉस्पिटल में कोविड ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर बेड की निरंतर क्षमता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। वहीं प्राइवेट लैब्स के माध्यम से अधिक से अधिक टेस्ट कराने के भी निर्देश दिए।
कमिश्नर ने जिलों को ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए उद्यमियों से कोओर्डिनेट करने के लिए कहा है। इसके तहत ऑक्सीजन की निरंतर आपूíत के लिए ये व्यवस्था जरूरी है। नियमित आपूíतकर्ताओं के अलावा भी स्पेयर स्टॉक में ऑक्सीजन सिलेंडर लिए जाएं। वहीं निगरानी समितियों, सíवलांस टीम, सैनिटाइजेशन दल सहित सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना से बचाव संबंधी मास्क, ग्लव्स पीपीई किट आदि की पूरी सप्लाई के लिए निर्देश दिए हैं।
मेरठ में फेस मास्क ना पहनने पर होने वाली चालान की कार्रवाई को लेकर भी कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं। उन्होंनें कहा कि मंडल में इस मामले में मेरठ सबसे पीछे है। इसमें तत्काल प्रभाव से तेजी लाई जाएं।
जिले में विकट होते कोरोना संक्रमण के हालातों को लेकर डीएम ने शनिवार को प्राइवेट नìसग होम एसोसिएशन व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को डेडिकेटिड कोविड अस्पताल या अलग से कोविड-19 ब्लॉक बनाने के लिए सभी अस्पताल निर्धारित प्रारूप पर सूचना भरकर तत्काल उपलब्ध करवाएं ताकि इसे समय से इन्हें फाइनल किया जा सके। वहीं, किट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
| Meerut। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मरीजों के मद्देनजर कमिश्नर ने शनिवार को समीक्षा बैठक की। सभी जिलों की वर्चुअल बैठक में डीएम को अस्पतालों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए। इसके अलावा कोविड रोगियों के उपचार के लिए हॉस्पिटल में कोविड ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर बेड की निरंतर क्षमता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। वहीं प्राइवेट लैब्स के माध्यम से अधिक से अधिक टेस्ट कराने के भी निर्देश दिए। कमिश्नर ने जिलों को ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए उद्यमियों से कोओर्डिनेट करने के लिए कहा है। इसके तहत ऑक्सीजन की निरंतर आपूíत के लिए ये व्यवस्था जरूरी है। नियमित आपूíतकर्ताओं के अलावा भी स्पेयर स्टॉक में ऑक्सीजन सिलेंडर लिए जाएं। वहीं निगरानी समितियों, सíवलांस टीम, सैनिटाइजेशन दल सहित सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना से बचाव संबंधी मास्क, ग्लव्स पीपीई किट आदि की पूरी सप्लाई के लिए निर्देश दिए हैं। मेरठ में फेस मास्क ना पहनने पर होने वाली चालान की कार्रवाई को लेकर भी कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं। उन्होंनें कहा कि मंडल में इस मामले में मेरठ सबसे पीछे है। इसमें तत्काल प्रभाव से तेजी लाई जाएं। जिले में विकट होते कोरोना संक्रमण के हालातों को लेकर डीएम ने शनिवार को प्राइवेट नìसग होम एसोसिएशन व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को डेडिकेटिड कोविड अस्पताल या अलग से कोविड-उन्नीस ब्लॉक बनाने के लिए सभी अस्पताल निर्धारित प्रारूप पर सूचना भरकर तत्काल उपलब्ध करवाएं ताकि इसे समय से इन्हें फाइनल किया जा सके। वहीं, किट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। |
नई दिल्लीः
Suhana Khan Boyfriend: सुपरस्टार शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) अपकमिंग फिल्म 'जवान' (Jawan) लेकर आ रहे हैं. दूसरी ओर उनकी बेटी सुहाना खान (Suhana Khan) भी ओटीटी पर डेब्यू करने को तैयार हैं. सुहाना जल्द ही जोया अख्तर की आने वाली फिल्म 'द आर्चीज' (The Archies) में नजर आएंगी. एक लटेस्ट इंटरव्यू में सुहाना ने अपनी जिंदगी के कुछ पन्ने खोले हैं. एक्ट्रेस ने फिल्म में उनके करेक्टर वेरोनिका को लेकर भी खुलकर बात की. SRK की लाडली से जब पूछा गया कि अगर उन्हें पता चला कि उनका बॉयफ्रेंड अन्य महिलाओं के साथ ऑनलाइन फ़्लर्ट कर रहा है और उन्हें मैसेज कर रहा है तो वो क्या करेंगी?
सुहाना ने वोग इंडिया को दिए इंटरव्यू में अपने जवाब से सबकी बोलती बंद कर दी. उन्होंने बताया कि वेरोनिका के पास पहले से ही उसका पीछा करने वाले लड़कों की एक लंबी लिस्ट है. अगर उसका बॉयफ्रेंड उसे धोखा देगा तो वह खुद दूसरे लड़कों को मैसेज कर लेगी.
वहीं रियल लाइफ में सुहाना वेरोनिका से अलग महसूस करती है. उन्होंने किरदार के लिए अपने ड्रीम लवर के बारे में भी बताया. सुहाना ने कहा कि अगर उन्हें पता चला कि उनका बॉयफ्रेंड उनके साथ चीट कर रहा है, तो वो अपने धोखेबाज प्रेमी को छोड़ देगी. क्योंकि वो सिंगल वूमेन लड़कों को पसंद करती हैं. वो इस मामले में बेहद सख्त हैं.'
इसी इंटरव्यू में सुहाना से आगे पूछा गया कि अगर कोई उनके बारे में गंदी अफवाहें फैलाएगा तो उनका क्या रिएक्शन होगा? इस पर सुहाना ने अपने किरदार वेरोनिका की तरह जवाब दिया कि लोग उसके बारे में केवल इसलिए बात करते हैं क्योंकि जब वे अपने बारे में बात करते हैं तो कोई नहीं सुनता." फिर सुहाना के रूप में, उन्होंने कहा, "ठीक है, मुझे लगता है कि मैं जो किरदार निभाती हूं उससे बहुत अलग हूं. कोई मेरे बारे में गंदी अफवाहें उड़ाएगा तो मैं खूब रोऊंगी."
हाल में द आर्चीज़ के मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा कर दी है. नेटफ्लिक्स पर द आर्चीज 7 दिसंबर को रिलीज होने वाली है. फिल्म में सुहाना के अलावा बोनी कपूर की बेटी खुशी कपूर और अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य नंदा भी हैं.
| नई दिल्लीः Suhana Khan Boyfriend: सुपरस्टार शाहरुख खान अपकमिंग फिल्म 'जवान' लेकर आ रहे हैं. दूसरी ओर उनकी बेटी सुहाना खान भी ओटीटी पर डेब्यू करने को तैयार हैं. सुहाना जल्द ही जोया अख्तर की आने वाली फिल्म 'द आर्चीज' में नजर आएंगी. एक लटेस्ट इंटरव्यू में सुहाना ने अपनी जिंदगी के कुछ पन्ने खोले हैं. एक्ट्रेस ने फिल्म में उनके करेक्टर वेरोनिका को लेकर भी खुलकर बात की. SRK की लाडली से जब पूछा गया कि अगर उन्हें पता चला कि उनका बॉयफ्रेंड अन्य महिलाओं के साथ ऑनलाइन फ़्लर्ट कर रहा है और उन्हें मैसेज कर रहा है तो वो क्या करेंगी? सुहाना ने वोग इंडिया को दिए इंटरव्यू में अपने जवाब से सबकी बोलती बंद कर दी. उन्होंने बताया कि वेरोनिका के पास पहले से ही उसका पीछा करने वाले लड़कों की एक लंबी लिस्ट है. अगर उसका बॉयफ्रेंड उसे धोखा देगा तो वह खुद दूसरे लड़कों को मैसेज कर लेगी. वहीं रियल लाइफ में सुहाना वेरोनिका से अलग महसूस करती है. उन्होंने किरदार के लिए अपने ड्रीम लवर के बारे में भी बताया. सुहाना ने कहा कि अगर उन्हें पता चला कि उनका बॉयफ्रेंड उनके साथ चीट कर रहा है, तो वो अपने धोखेबाज प्रेमी को छोड़ देगी. क्योंकि वो सिंगल वूमेन लड़कों को पसंद करती हैं. वो इस मामले में बेहद सख्त हैं.' इसी इंटरव्यू में सुहाना से आगे पूछा गया कि अगर कोई उनके बारे में गंदी अफवाहें फैलाएगा तो उनका क्या रिएक्शन होगा? इस पर सुहाना ने अपने किरदार वेरोनिका की तरह जवाब दिया कि लोग उसके बारे में केवल इसलिए बात करते हैं क्योंकि जब वे अपने बारे में बात करते हैं तो कोई नहीं सुनता." फिर सुहाना के रूप में, उन्होंने कहा, "ठीक है, मुझे लगता है कि मैं जो किरदार निभाती हूं उससे बहुत अलग हूं. कोई मेरे बारे में गंदी अफवाहें उड़ाएगा तो मैं खूब रोऊंगी." हाल में द आर्चीज़ के मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा कर दी है. नेटफ्लिक्स पर द आर्चीज सात दिसंबर को रिलीज होने वाली है. फिल्म में सुहाना के अलावा बोनी कपूर की बेटी खुशी कपूर और अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य नंदा भी हैं. |
यह आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस होगा. यूनिपार्ट्स इण्डिया का आईपीओ पूरी तरह से प्रमोटर ग्रुप, संस्थाओं और मौजूदा निवेशकों द्वारा 14,481,942 इक्विटी शेयरों की बिक्री के लिए एक प्रस्ताव (OFS) है. बता दें कि कंपनी तीसरी बार अपना आईपीओ लाने की प्रयास कर रही है. इससे पहले दिसंबर 2018 और सितंबर 2014 में सेबी को आईपीओ के लिए आवेदन दिया था. लेकिन स्वीकृति मिलने के बाद भी आईपीओ नहीं आ पाया.
द करण सोनी 2018 सीजी-एनजी नेवादा ट्रस्ट, द मेहर सोनी 2018 सीजी-एनजी नेवादा ट्रस्ट, पामेला सोनी, और निवेशक अशोका इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड और अंबादेवी मॉरीशस होल्डिंग लिमिटेड प्रवर्तक समूह संस्थाएं हैं जो ओएफएस में शेयरों की पेशकश कर रही हैं.
यूनिपार्ट्स इण्डिया लिमिटेड को 26 सितंबर 1994 को शामिल किया गया था. सिस्टम और साॅल्युशन कंपनी यूनिपार्ट्स इंजीनियर ग्लोबल कंपनी है. यह कृषि और निर्माण, वानिकी और खनन में ऑफ-हाइवे बाजार के लिए सिस्टम और घटकों के प्रमुख सप्लायर में से एक है. वित्तीय साल 2022 में कंपनी का वैश्विक स्तर पर 25 से अधिक राष्ट्रों में 125 से अधिक ग्राहक शामिल थे.
| यह आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस होगा. यूनिपार्ट्स इण्डिया का आईपीओ पूरी तरह से प्रमोटर ग्रुप, संस्थाओं और मौजूदा निवेशकों द्वारा चौदह,चार सौ इक्यासी,नौ सौ बयालीस इक्विटी शेयरों की बिक्री के लिए एक प्रस्ताव है. बता दें कि कंपनी तीसरी बार अपना आईपीओ लाने की प्रयास कर रही है. इससे पहले दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह और सितंबर दो हज़ार चौदह में सेबी को आईपीओ के लिए आवेदन दिया था. लेकिन स्वीकृति मिलने के बाद भी आईपीओ नहीं आ पाया. द करण सोनी दो हज़ार अट्ठारह सीजी-एनजी नेवादा ट्रस्ट, द मेहर सोनी दो हज़ार अट्ठारह सीजी-एनजी नेवादा ट्रस्ट, पामेला सोनी, और निवेशक अशोका इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड और अंबादेवी मॉरीशस होल्डिंग लिमिटेड प्रवर्तक समूह संस्थाएं हैं जो ओएफएस में शेयरों की पेशकश कर रही हैं. यूनिपार्ट्स इण्डिया लिमिटेड को छब्बीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ चौरानवे को शामिल किया गया था. सिस्टम और साॅल्युशन कंपनी यूनिपार्ट्स इंजीनियर ग्लोबल कंपनी है. यह कृषि और निर्माण, वानिकी और खनन में ऑफ-हाइवे बाजार के लिए सिस्टम और घटकों के प्रमुख सप्लायर में से एक है. वित्तीय साल दो हज़ार बाईस में कंपनी का वैश्विक स्तर पर पच्चीस से अधिक राष्ट्रों में एक सौ पच्चीस से अधिक ग्राहक शामिल थे. |
शिवहर जिले के विद्युत विभाग के संविदा कर्मी को घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूल करना महंगा पड़ गया। बिजली विभाग ने संविदा कर्मी अभिजीत तिवारी के घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूलने पर लगाम लगा दी है। उनका कांट्रैक्ट रद्द कर दिया गया है।
दरअसल, पेट्रोल की कीमत बढ़ने के साथ ही अभिजीत रोजाना घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूल कर रहे थे। इस पहल ने उन्हें बिहार में घोड़े वाला बिजली बाबू बना दिया था। उनका वीडियो भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अभिजीत मूल रूप से शिवहर प्रखंड के विशनपुर किशन देव गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता शिव शंकर तिवारी ने शौक से घोड़ा पाल रखा है।
कर्मचारी का कहना था कि पेट्रोल की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब बाइक से चलना मुश्किल हो गया है। बाइक पर एक दिन का 250 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है। घोड़े पर 60-70 में काम हो जाता है। दुर्गम रास्ते पर परेशानी भी होती थी। पर घोड़ा रहने के कारण घुड़सवारी भी जानता है। यही वजह है कि बाइक खड़ी कर घोड़े पर सवार होकर बिल वसूलना शुरू कर दिया। अभिजीत की इस पहल की लोगों ने जहां सराहना की। वहीं विद्युत विभाग को यह नागवार गुजरा और त्वरित कार्रवाई करते हुए बिजली बाबू की संविदा रद्द कर दी गई। इस संबंध में कार्यपालक अभियंता श्रवण कुमार ठाकुर ने बताया कि उनकी संविदा रद्द कर दी गई है।
कार्रवाई से पहले बिजली विभाग के अधिकारी श्रवण कुमार ठाकुर ने कहा था कि यह उनका निजी मामला है। कर्मी बाइक से वसूली करें या फिर घोड़े से, यह उनका मामला है। उन्होंने बताया था कि घोड़े के मेंटेनेंस और बाइक के मेंटेनेंस में काफी अंतर है। घोड़े का मेंटेनेंस सस्ता है। बावजूद इसके अब कर्मचारी की संविदा रद्द कर दी गई है।
विभाग की इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के युवाओं में आक्रोश भी देखा जा रहा है। शिवहर के दर्जनों युवाओं ने विद्युत विभाग के इस कार्रवाई को वापस लेने की। उन्होंने समाहरणालय से लेकर विद्युत विभाग के कार्यालय तक धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी। इधर युवाओं ने इंटरनेट मीडिया पर विभागीय कार्रवाई को गलत करार दिया है।
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| शिवहर जिले के विद्युत विभाग के संविदा कर्मी को घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूल करना महंगा पड़ गया। बिजली विभाग ने संविदा कर्मी अभिजीत तिवारी के घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूलने पर लगाम लगा दी है। उनका कांट्रैक्ट रद्द कर दिया गया है। दरअसल, पेट्रोल की कीमत बढ़ने के साथ ही अभिजीत रोजाना घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूल कर रहे थे। इस पहल ने उन्हें बिहार में घोड़े वाला बिजली बाबू बना दिया था। उनका वीडियो भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अभिजीत मूल रूप से शिवहर प्रखंड के विशनपुर किशन देव गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता शिव शंकर तिवारी ने शौक से घोड़ा पाल रखा है। कर्मचारी का कहना था कि पेट्रोल की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब बाइक से चलना मुश्किल हो गया है। बाइक पर एक दिन का दो सौ पचास रुपयापए से ज्यादा का खर्च आता है। घोड़े पर साठ-सत्तर में काम हो जाता है। दुर्गम रास्ते पर परेशानी भी होती थी। पर घोड़ा रहने के कारण घुड़सवारी भी जानता है। यही वजह है कि बाइक खड़ी कर घोड़े पर सवार होकर बिल वसूलना शुरू कर दिया। अभिजीत की इस पहल की लोगों ने जहां सराहना की। वहीं विद्युत विभाग को यह नागवार गुजरा और त्वरित कार्रवाई करते हुए बिजली बाबू की संविदा रद्द कर दी गई। इस संबंध में कार्यपालक अभियंता श्रवण कुमार ठाकुर ने बताया कि उनकी संविदा रद्द कर दी गई है। कार्रवाई से पहले बिजली विभाग के अधिकारी श्रवण कुमार ठाकुर ने कहा था कि यह उनका निजी मामला है। कर्मी बाइक से वसूली करें या फिर घोड़े से, यह उनका मामला है। उन्होंने बताया था कि घोड़े के मेंटेनेंस और बाइक के मेंटेनेंस में काफी अंतर है। घोड़े का मेंटेनेंस सस्ता है। बावजूद इसके अब कर्मचारी की संविदा रद्द कर दी गई है। विभाग की इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के युवाओं में आक्रोश भी देखा जा रहा है। शिवहर के दर्जनों युवाओं ने विद्युत विभाग के इस कार्रवाई को वापस लेने की। उन्होंने समाहरणालय से लेकर विद्युत विभाग के कार्यालय तक धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी। इधर युवाओं ने इंटरनेट मीडिया पर विभागीय कार्रवाई को गलत करार दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण 15 अप्रैल, 2023 के मुख्य समाचार निम्नलिखित हैंः
- हिमाचल प्रदेश ने 15 अप्रैल को अपना 75वां स्थापना दिवस मनाया।
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती को चिह्नित करने के लिए भारत गौरव पर्यटक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई।
- NISAR उपग्रह, संयुक्त रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित, हिमालय के भूकंपीय क्षेत्रों को मैप करेगा।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.3 अरब डॉलर बढ़कर 584.75 अरब डॉलर हो गया।
- चीनी नेता शी जिनपिंग ने संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से मुलाकात की।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को 1 बिलियन अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता की पुष्टि की।
- खेलो इंडिया अभियान के तहत भारत में अगले 5 वर्षों में खेल सुविधाओं पर 3,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
| प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण पंद्रह अप्रैल, दो हज़ार तेईस के मुख्य समाचार निम्नलिखित हैंः - हिमाचल प्रदेश ने पंद्रह अप्रैल को अपना पचहत्तरवां स्थापना दिवस मनाया। - डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती को चिह्नित करने के लिए भारत गौरव पर्यटक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई। - NISAR उपग्रह, संयुक्त रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा विकसित, हिमालय के भूकंपीय क्षेत्रों को मैप करेगा। - भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार छः.तीन अरब डॉलर बढ़कर पाँच सौ चौरासी.पचहत्तर अरब डॉलर हो गया। - चीनी नेता शी जिनपिंग ने संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से मुलाकात की। - संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को एक बिलियन अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता की पुष्टि की। - खेलो इंडिया अभियान के तहत भारत में अगले पाँच वर्षों में खेल सुविधाओं पर तीन,दो सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। |
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