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भारत में नीम, हल्दी और अश्वगंधा और अफ्रीकी देशों से हरुंगाना और किनकेलिबा झाड़ के प्रयोगों की जानकारी लेकर विकसित देशों ने इसका काफी लाभ उठाया है। इसलिए भारत अब जेनेवा स्थित संस्थान साउथ सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में इस पहल की शुरुआत कर रहा है। कृतिका सुनेजा भारत अगले महीने, प्राकृतिक सामग्री के बढ़ते व्यवसायिक प्रयोग को लेकर इंटरनैशनल ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का सह-आयोजक है। इस आयोजन में विशेष तौर पर प्राकृतिक उत्पादों के वित्तीय तौर पर दुरुपयोग और इनसे जुड़े समुदायों को बिना उचित मुआवजा दिए पेटेंट कराए जाने के मामलों पर बात होगी। भारत में नीम, हल्दी और अश्वगंधा और अफ्रीकी देशों से हरुंगाना और किनकेलिबा झाड़ के प्रयोगों की जानकारी लेकर विकसित देशों ने इसका काफी लाभ उठाया है। इसलिए भारत अब जेनेवा स्थित संस्थान साउथ सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में इस पहल की शुरुआत कर रहा है। इस बैठक में वैश्विक पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, कॉर्पोरेट द्वारा इस तरह के पेटेंट और बायोपाइरेसी को लेकर बात की जाएगी। मिजोरम स्थित मानावाधिकार से जुड़ी ज़ो इंडिजेनस फर्म इसमें भाग लेगी। इसके अलावा ब्राजील, अमेरिका, चीन, पेरू, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से स्थानीय समुदाय भी शामिल होंगे। इससे जुडे़ एक अधिकारी ने बताया, 'इस बैठक का मकसद जेनेटिक संसाधनों और जन-समुदायों के मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करना और इनके संरक्षण से जुड़े कानूनों को मजबूत करना है। ' इसे विकासशील देशों के हितों के लिए लाभकारी बताते हुए अधिकारी ने यह भी कहा कि इस मामले में एकमत रखने वाले विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) के सदस्य देशों ने पेटेंट के दौरान जैविक संसाधनो के सूत्रों का उल्लेख करने की, समुदायों से पहले सहमती लेने की और उसका प्रमाण देने की भी मांग पर सहमती बनाई है। इससे बायोपाइरेसी जैसे कार्यो में कमी आएगी और समुदायों के हित संरक्षित होंगे।
भारत में नीम, हल्दी और अश्वगंधा और अफ्रीकी देशों से हरुंगाना और किनकेलिबा झाड़ के प्रयोगों की जानकारी लेकर विकसित देशों ने इसका काफी लाभ उठाया है। इसलिए भारत अब जेनेवा स्थित संस्थान साउथ सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में इस पहल की शुरुआत कर रहा है। कृतिका सुनेजा भारत अगले महीने, प्राकृतिक सामग्री के बढ़ते व्यवसायिक प्रयोग को लेकर इंटरनैशनल ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का सह-आयोजक है। इस आयोजन में विशेष तौर पर प्राकृतिक उत्पादों के वित्तीय तौर पर दुरुपयोग और इनसे जुड़े समुदायों को बिना उचित मुआवजा दिए पेटेंट कराए जाने के मामलों पर बात होगी। भारत में नीम, हल्दी और अश्वगंधा और अफ्रीकी देशों से हरुंगाना और किनकेलिबा झाड़ के प्रयोगों की जानकारी लेकर विकसित देशों ने इसका काफी लाभ उठाया है। इसलिए भारत अब जेनेवा स्थित संस्थान साउथ सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में इस पहल की शुरुआत कर रहा है। इस बैठक में वैश्विक पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, कॉर्पोरेट द्वारा इस तरह के पेटेंट और बायोपाइरेसी को लेकर बात की जाएगी। मिजोरम स्थित मानावाधिकार से जुड़ी ज़ो इंडिजेनस फर्म इसमें भाग लेगी। इसके अलावा ब्राजील, अमेरिका, चीन, पेरू, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से स्थानीय समुदाय भी शामिल होंगे। इससे जुडे़ एक अधिकारी ने बताया, 'इस बैठक का मकसद जेनेटिक संसाधनों और जन-समुदायों के मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करना और इनके संरक्षण से जुड़े कानूनों को मजबूत करना है। ' इसे विकासशील देशों के हितों के लिए लाभकारी बताते हुए अधिकारी ने यह भी कहा कि इस मामले में एकमत रखने वाले विश्व स्वास्थ संगठन के सदस्य देशों ने पेटेंट के दौरान जैविक संसाधनो के सूत्रों का उल्लेख करने की, समुदायों से पहले सहमती लेने की और उसका प्रमाण देने की भी मांग पर सहमती बनाई है। इससे बायोपाइरेसी जैसे कार्यो में कमी आएगी और समुदायों के हित संरक्षित होंगे।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बेटे योगेश कुमार मौर्य का आज यानी शनिवार को एक्सीडेंट हो गया। मिली जानकारी के अनुसार यूपी के जालौन के कालपी कोतवाली क्षेत्र के आलमपुर बाईपास के पास योगेश मौर्य के बेटे की फॉर्च्यूनर कार ट्रैक्टर से टकरा गई। हालांकि इस हादसे में योगेश बाल-बाल बच गए। सूचना पाकर कालपी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पीताम्बरा मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे दतिया। आपको बता दें कि योगेश मौर्य,डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के बेटे हैं ।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बेटे योगेश कुमार मौर्य का आज यानी शनिवार को एक्सीडेंट हो गया। मिली जानकारी के अनुसार यूपी के जालौन के कालपी कोतवाली क्षेत्र के आलमपुर बाईपास के पास योगेश मौर्य के बेटे की फॉर्च्यूनर कार ट्रैक्टर से टकरा गई। हालांकि इस हादसे में योगेश बाल-बाल बच गए। सूचना पाकर कालपी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पीताम्बरा मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे दतिया। आपको बता दें कि योगेश मौर्य,डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के बेटे हैं ।
नई दिल्ली : एक परीक्षा को पूरा करने के लिए घोड़े पर सवार एक भारतीय लड़की की वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। अपनी पीठ पर स्कूल बैग के साथ स्कूल यूनिफॉर्म में सजी लड़की सफेद घोड़े पर सवार दिखाई दे रही है। कृष्णा केरल के त्रिशूर जिले के छोटे से शहर माला के होली ग्रेस स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र है। उसके पिता एक मंदिर में पुजारी हैं। लड़की के जीवन के प्रति संवेदनशील रवैये से उत्साहित, भारतीय व्यापारी आनंद महिंद्रा ने कृष्णा की प्रशंसा की और उसे अपना हीरो बताया। भारत के बिजनेस टाइकून आनंद महिंद्रा ने इस लड़की को अपना हीरो बताया और कहा कि वह अपनी स्क्रीनसेवर में घोड़े पर बैठी इस लड़की कि तस्वीर चाहता है ।
नई दिल्ली : एक परीक्षा को पूरा करने के लिए घोड़े पर सवार एक भारतीय लड़की की वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। अपनी पीठ पर स्कूल बैग के साथ स्कूल यूनिफॉर्म में सजी लड़की सफेद घोड़े पर सवार दिखाई दे रही है। कृष्णा केरल के त्रिशूर जिले के छोटे से शहर माला के होली ग्रेस स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र है। उसके पिता एक मंदिर में पुजारी हैं। लड़की के जीवन के प्रति संवेदनशील रवैये से उत्साहित, भारतीय व्यापारी आनंद महिंद्रा ने कृष्णा की प्रशंसा की और उसे अपना हीरो बताया। भारत के बिजनेस टाइकून आनंद महिंद्रा ने इस लड़की को अपना हीरो बताया और कहा कि वह अपनी स्क्रीनसेवर में घोड़े पर बैठी इस लड़की कि तस्वीर चाहता है ।
आमिर और काजोल की रोमांटिक फिल्म 'फना' अमेजन प्राइम पर मौजूद है। 'लूटेरा' आप हॉटस्टार पर फ्री में देख सकते हैं, जिसमें रणवीर सिंह हैं। दीपिका और सैफ की फिल्म 'लव आज कल' एमएक्स प्लेयर पर फ्री में मौजूद है। कार्तिक-कृर्ति की फिल्म 'लुका छुपी' नेटफ्लिक्स पर मौजूद है। फ्री में जिओ सिनेमा पर भी देख सकते हैं। 'मनमर्जियां' भी फ्री में देखने के लिए जिओ सिनेमा पर जा सकते हैं। 'रांझणा' में सोनम कपूर और धनुष की दमदार केमिस्ट्री है। फिल्म जिओ सिनेमा पर मौजूद है। रणबीर कपूर की 'रॉकस्टार' ओटीटी प्लेफॉर्म जी5 पर है। 'शुभ मंगल सावधान' कई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मौजूद है, जिसमें जिओ सिनेमा-एमएक्स प्लेयर भी है। 'ये जवानी है दीवानी' ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम पर है। रणबीर और श्रद्धा की फिल्म 'तू झूठी मैं मक्कार' नेटफ्लिक्स पर मौजूद है। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
आमिर और काजोल की रोमांटिक फिल्म 'फना' अमेजन प्राइम पर मौजूद है। 'लूटेरा' आप हॉटस्टार पर फ्री में देख सकते हैं, जिसमें रणवीर सिंह हैं। दीपिका और सैफ की फिल्म 'लव आज कल' एमएक्स प्लेयर पर फ्री में मौजूद है। कार्तिक-कृर्ति की फिल्म 'लुका छुपी' नेटफ्लिक्स पर मौजूद है। फ्री में जिओ सिनेमा पर भी देख सकते हैं। 'मनमर्जियां' भी फ्री में देखने के लिए जिओ सिनेमा पर जा सकते हैं। 'रांझणा' में सोनम कपूर और धनुष की दमदार केमिस्ट्री है। फिल्म जिओ सिनेमा पर मौजूद है। रणबीर कपूर की 'रॉकस्टार' ओटीटी प्लेफॉर्म जीपाँच पर है। 'शुभ मंगल सावधान' कई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मौजूद है, जिसमें जिओ सिनेमा-एमएक्स प्लेयर भी है। 'ये जवानी है दीवानी' ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम पर है। रणबीर और श्रद्धा की फिल्म 'तू झूठी मैं मक्कार' नेटफ्लिक्स पर मौजूद है। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
में गले मिले। इसके बाद किले का फाटक खोल दिया गया। राजपूत लोग मृत्यु से मिलने के लिए पागलो की नाई भूमते हुए आगे बढ़े और शत्रु पर टूट पड़े। याज राजपूत मन्तिम युद्ध करने आए थे। वे केवल मरने की इच्छा लेकर ही मैदान में आए थे। वे अपने आप बिलकुल भूल कर वादी फोज को मथने लगे। वे क तक लहते रहे जब तक ये सबके सब मर नहीं गए । इस प्रकार वीर दमीर ने, शरण में आए हुए उम मनुष्य की रक्षा करने के लिए, अपने सर सिपाहियों का, अपने राज्यका ने प्यारे परिवार का और में अपना भी बलिदान कर दिया। हमीर का जीवन धन्य था। भारत के इतिहास में इमीर सदा अमर रहेगा। कटिन शब्दन बैंक यूप गृही, भरथ, पलिदान, सीमा, टिड्डोदल, निता, और, मर्वनाश हवाले, संधि, अन्तिम मयने । कानीं डर जबलपुर में एक वृद्ध सज्जन रहते थे। उनका नाम गंगाप्रसाद अग्निहोत्री था । अभी थोड़े ही दिन हुए उनका स्वर्गवास हुआ है। वे गो-सेवा के बड़े पक्षपाती थे। इन महाशय ने इस विषय पर देश और परदेश की गोपालनविधि का अध्ययन किया था। उन्होंने एक सभा में इस विषय पर व्याख्यान दिया था । उसका भाव यह था : हम सब आरोग्य और प्रसन्न रहना चाहते हैं। आरोग्य रहने के लिये हमें हृष्ट-पुष्ट रहना चाहिए। हृष्ट-पुष्ट शरीर पर रोग आक्रमण नहीं कर पाते । हृष्ट-पुष्ट रहने के लिये हमें अच्छा घर, अच्छा भोजन और दूध घी चाहिए । इमारो मिठाइयों में खोवा, घी पड़ता है। हम दही, मही, रखड़ी, मलाई खाते हैं । ये पदार्थ हमें कहाँ से प्राप्त होते हैं ? दूध, दही, मलाई, रवड़ी. खोवा घी. हमें गाय के दूध से प्राप्त होते हैं। हमारी मिठाई में शकर पड़ती है। वह शकर ईख या गन्ने से प्राप्त होती है। गन्ने खेत में होते है। खेत में हल चलाने के लिये, खेती की सीचने के लिये और कुए में पानी निकालने के लिये हमें बैला प्रधान गो वश की
में गले मिले। इसके बाद किले का फाटक खोल दिया गया। राजपूत लोग मृत्यु से मिलने के लिए पागलो की नाई भूमते हुए आगे बढ़े और शत्रु पर टूट पड़े। याज राजपूत मन्तिम युद्ध करने आए थे। वे केवल मरने की इच्छा लेकर ही मैदान में आए थे। वे अपने आप बिलकुल भूल कर वादी फोज को मथने लगे। वे क तक लहते रहे जब तक ये सबके सब मर नहीं गए । इस प्रकार वीर दमीर ने, शरण में आए हुए उम मनुष्य की रक्षा करने के लिए, अपने सर सिपाहियों का, अपने राज्यका ने प्यारे परिवार का और में अपना भी बलिदान कर दिया। हमीर का जीवन धन्य था। भारत के इतिहास में इमीर सदा अमर रहेगा। कटिन शब्दन बैंक यूप गृही, भरथ, पलिदान, सीमा, टिड्डोदल, निता, और, मर्वनाश हवाले, संधि, अन्तिम मयने । कानीं डर जबलपुर में एक वृद्ध सज्जन रहते थे। उनका नाम गंगाप्रसाद अग्निहोत्री था । अभी थोड़े ही दिन हुए उनका स्वर्गवास हुआ है। वे गो-सेवा के बड़े पक्षपाती थे। इन महाशय ने इस विषय पर देश और परदेश की गोपालनविधि का अध्ययन किया था। उन्होंने एक सभा में इस विषय पर व्याख्यान दिया था । उसका भाव यह था : हम सब आरोग्य और प्रसन्न रहना चाहते हैं। आरोग्य रहने के लिये हमें हृष्ट-पुष्ट रहना चाहिए। हृष्ट-पुष्ट शरीर पर रोग आक्रमण नहीं कर पाते । हृष्ट-पुष्ट रहने के लिये हमें अच्छा घर, अच्छा भोजन और दूध घी चाहिए । इमारो मिठाइयों में खोवा, घी पड़ता है। हम दही, मही, रखड़ी, मलाई खाते हैं । ये पदार्थ हमें कहाँ से प्राप्त होते हैं ? दूध, दही, मलाई, रवड़ी. खोवा घी. हमें गाय के दूध से प्राप्त होते हैं। हमारी मिठाई में शकर पड़ती है। वह शकर ईख या गन्ने से प्राप्त होती है। गन्ने खेत में होते है। खेत में हल चलाने के लिये, खेती की सीचने के लिये और कुए में पानी निकालने के लिये हमें बैला प्रधान गो वश की
यूपी के गोरखपुर की एक फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि यहां एक 70 साल के बुजुर्ग ने अपनी ही 28 साल की बहू से शादी कर ली। गोरखपुरः सोशल मीडिया पर इन दिनों मंदिर में विवाह की एक फोटो जमकर वायरल हो रही है। यह फोटो बड़हलगंज कोतवाली क्षेत्र के छपिया उमराव गांव निवासी 70 वर्षीय कैलाश यादव और उनकी 28 वर्षीय बहू पूजा की है। दोनों ने मंदिर में जाकर विवाह कर लिया। जिसके बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। हालांकि वायरल हो रही इस फोटो की पुष्टि एशियानेट न्यूज हिंदी के द्वारा नहीं की जा रही है। बताया जा रहा है कि कैलाश यादव बड़हलगंज थाने में चौकीदार हैं। उनकी पत्नी की मृत्यु 12 साल पहले हो चुकी है। कैलाश के चार बच्चों में से तीसरे नंबर के बेटे की मौत हो गई है। बेटे की मौत के बाद कैलाश ने अपनी बहू की शादी दूसरी जगह पर करवा दी। हालांकि वहां से वह वापस चली गई। इसके बाद वह अपने पहले वाले ससुराल में ही रहने लगी। इस बीच दोनों की शादी की फोटो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों ने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दी। इस मामले को लेकर कोतवाल जेएन शुक्ला के द्वारा जानकारी दी गई कि कैलाश और उनका एक बेटा थाने में चौकीदार और फॉलोअर का काम करते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो को लेकर जानकारी की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस फोटो को लेकर जब कैलाश और उनके परिवार के अन्य लोगों से बातचीत का प्रयास मीडिया के द्वारा किया गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। हालांकि क्षेत्र के व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह फोटो इन दिनों चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। वहीं आसपास के लोग भी इसे कैलाश का पारिवारिक मामला बताते हुए मीडिया के सामने खुलकर कुछ भी बोलने से फिलहाल इंकार कर रहे हैं।
यूपी के गोरखपुर की एक फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि यहां एक सत्तर साल के बुजुर्ग ने अपनी ही अट्ठाईस साल की बहू से शादी कर ली। गोरखपुरः सोशल मीडिया पर इन दिनों मंदिर में विवाह की एक फोटो जमकर वायरल हो रही है। यह फोटो बड़हलगंज कोतवाली क्षेत्र के छपिया उमराव गांव निवासी सत्तर वर्षीय कैलाश यादव और उनकी अट्ठाईस वर्षीय बहू पूजा की है। दोनों ने मंदिर में जाकर विवाह कर लिया। जिसके बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। हालांकि वायरल हो रही इस फोटो की पुष्टि एशियानेट न्यूज हिंदी के द्वारा नहीं की जा रही है। बताया जा रहा है कि कैलाश यादव बड़हलगंज थाने में चौकीदार हैं। उनकी पत्नी की मृत्यु बारह साल पहले हो चुकी है। कैलाश के चार बच्चों में से तीसरे नंबर के बेटे की मौत हो गई है। बेटे की मौत के बाद कैलाश ने अपनी बहू की शादी दूसरी जगह पर करवा दी। हालांकि वहां से वह वापस चली गई। इसके बाद वह अपने पहले वाले ससुराल में ही रहने लगी। इस बीच दोनों की शादी की फोटो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों ने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दी। इस मामले को लेकर कोतवाल जेएन शुक्ला के द्वारा जानकारी दी गई कि कैलाश और उनका एक बेटा थाने में चौकीदार और फॉलोअर का काम करते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो को लेकर जानकारी की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस फोटो को लेकर जब कैलाश और उनके परिवार के अन्य लोगों से बातचीत का प्रयास मीडिया के द्वारा किया गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। हालांकि क्षेत्र के व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह फोटो इन दिनों चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। वहीं आसपास के लोग भी इसे कैलाश का पारिवारिक मामला बताते हुए मीडिया के सामने खुलकर कुछ भी बोलने से फिलहाल इंकार कर रहे हैं।
आपने काला जादू और वशीकरण से जुड़े कई किस्से सुने होंगे. मगर यूपी के बस्ती से जिले से इससे जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने महिलाओं के एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने वशीकरण और काला जादू करके लोगों की कीमती चीजें छूमंतर कर दीं. इन महिलाओं की करतूतों से बस्ती पुलिस लंबे समय से हैरान और परेशान थी. पकड़ी गई महिलाओं ने बताया कि वो लोगों को वश में कर लेती थीं और कीमती चीजें लेकर फरार हो जाती थीं. गौरतलब है कि कलवारी थाना क्षेत्र गायघाट से पुलिस ने 6 महिलाओं को अरेस्ट किया है. ये घुमंतू जाति की हैं. आरोप है कि ये लोगों को अपने जाल में फंसाकर ठगी करती थीं. ज्यादातर महिलाओं को शिकार बनाती थीं. उनका दुख-दर्द दूर करने का भरोसा दिलाती थीं. इसके बाद हाथ की उंगली दबाकर वश में कर लेती थीं और जेवर लेकर फरार हो जाती थीं. 'उन्होंने कहा कि तुम घर से जेवर लेकर आओ. . . ' महिलाओं का शिकार हुई सूर्यनगर की रहने वाली 22 साल राधिका ने बताया कि वो खेत में बकरी चराने गई थी. उसी दौरान भीख मांगने के बहाने घुमंतू जाति की 6 महिलाएं पहुंचीं. उन्होंने कहा कि तुम घर से जेवर लेकर आओ, हम झाडफूंक करके देंगे और तुम्हारा सारा दुख-दर्द दूर हो जाएगा. 'मेरा दाहिना हाथ पकड़ा और बीच की उंगली दबाई' पीड़िता ने कहा, "इस दौरान उन औरतों ने मेरा दाहिना हाथ पकड़ा और बीच की उंगली दबाई. इसके बाद मैं उनके वश में हो गई और सीधे घर पहुंची. वहां से बैग में रखे जेवर निकालकर चली गई. हालांकि, जेवर ले जाते बच्चों ने देख लिया और मां को बताया. इस पर घरवाले पीछा करते हुए आए". वो जेवर देने लगी तो गांववालों ने महिलाओं को पकड़ लिया. इसी बीच वो पूरी तरह होश में आई और बताया कि महिलाओं ने उसकी उंगली दबाई थी. इसके बाद वो सुध-बुध खो बैठी थी. उधर, ग्रामीणों ने ठगी करने वाली महिलाओं को पुलिस के हवाले कर दिया. इस मामले में डिप्टी एसपी विनय चौहान ने कहा कि पकड़ी गई महिलाएं सरिता, प्रतिमा, नूरजहां, संगीता, गुलाबी और फातिमा संतकबीरनगर जिले के धनघटा की रहने वाली हैं. इनके पास से सोने के झाला, एक जोड़ी लड़ी झाला और चांदी के जेवर बरामद हुए हैं. सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 380, 411 के एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया गया है.
आपने काला जादू और वशीकरण से जुड़े कई किस्से सुने होंगे. मगर यूपी के बस्ती से जिले से इससे जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने महिलाओं के एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने वशीकरण और काला जादू करके लोगों की कीमती चीजें छूमंतर कर दीं. इन महिलाओं की करतूतों से बस्ती पुलिस लंबे समय से हैरान और परेशान थी. पकड़ी गई महिलाओं ने बताया कि वो लोगों को वश में कर लेती थीं और कीमती चीजें लेकर फरार हो जाती थीं. गौरतलब है कि कलवारी थाना क्षेत्र गायघाट से पुलिस ने छः महिलाओं को अरेस्ट किया है. ये घुमंतू जाति की हैं. आरोप है कि ये लोगों को अपने जाल में फंसाकर ठगी करती थीं. ज्यादातर महिलाओं को शिकार बनाती थीं. उनका दुख-दर्द दूर करने का भरोसा दिलाती थीं. इसके बाद हाथ की उंगली दबाकर वश में कर लेती थीं और जेवर लेकर फरार हो जाती थीं. 'उन्होंने कहा कि तुम घर से जेवर लेकर आओ. . . ' महिलाओं का शिकार हुई सूर्यनगर की रहने वाली बाईस साल राधिका ने बताया कि वो खेत में बकरी चराने गई थी. उसी दौरान भीख मांगने के बहाने घुमंतू जाति की छः महिलाएं पहुंचीं. उन्होंने कहा कि तुम घर से जेवर लेकर आओ, हम झाडफूंक करके देंगे और तुम्हारा सारा दुख-दर्द दूर हो जाएगा. 'मेरा दाहिना हाथ पकड़ा और बीच की उंगली दबाई' पीड़िता ने कहा, "इस दौरान उन औरतों ने मेरा दाहिना हाथ पकड़ा और बीच की उंगली दबाई. इसके बाद मैं उनके वश में हो गई और सीधे घर पहुंची. वहां से बैग में रखे जेवर निकालकर चली गई. हालांकि, जेवर ले जाते बच्चों ने देख लिया और मां को बताया. इस पर घरवाले पीछा करते हुए आए". वो जेवर देने लगी तो गांववालों ने महिलाओं को पकड़ लिया. इसी बीच वो पूरी तरह होश में आई और बताया कि महिलाओं ने उसकी उंगली दबाई थी. इसके बाद वो सुध-बुध खो बैठी थी. उधर, ग्रामीणों ने ठगी करने वाली महिलाओं को पुलिस के हवाले कर दिया. इस मामले में डिप्टी एसपी विनय चौहान ने कहा कि पकड़ी गई महिलाएं सरिता, प्रतिमा, नूरजहां, संगीता, गुलाबी और फातिमा संतकबीरनगर जिले के धनघटा की रहने वाली हैं. इनके पास से सोने के झाला, एक जोड़ी लड़ी झाला और चांदी के जेवर बरामद हुए हैं. सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा चार सौ बीस, तीन सौ अस्सी, चार सौ ग्यारह के एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया गया है.
युक्त वर्गों का प्रयोग काव्य में कम करना चाहिए । दग्धाक्षरों का प्रयोग न करना चाहिए । समास और संयुक्ताक्षरों का भी प्रयोग अधिक न होना चाहिए। जो कविता सुनते ही हृदय में आनन्द पैदा करे, वही प्रसाद और गुण से युक्त मानी जायगी । कविता का गुण माधुर्य है । मधुर और शब्दों का प्रयोग कविता के अन्दर लाना रौद्र, और भयानक रसों में ओजपूर्ण शब्दों को लाना चाहिए । कविवर ठाकुर ने सुन्दर गुण-युक्त कविता के लक्षण इस प्रकार लिखे हैं"मोतिन की सी मनोहर माल, गुहै तुक अक्षर रोकि रिभावै । धर्म को पंथ कथा हरिनाम की, युक्ति अनूठी बनाय सुनावै ॥ 'ठाकुर' सो कवि भावत मोहिं जो, राजसभा में वड़प्पन पावे । पंडित और प्रवीनन के पुनि, चित्त हरै सो कवित्त कहावै ॥" शब्दों का प्रयोग, तुक की श्रेष्ठता, अनूठी युक्ति, जिल छंद में पाई जाय वही माधुर्य, और प्रसाद गुण से पूर्ण छंद माना जायगा। प्राचीन काल के हिन्दी कवि चंद, भूषण, योजपूर्ण कविता लिखने में प्रसिद्ध हैं। विहारी ने अपने छंदों में गागर में सागर भरने में अच्छी सफलता पाई है। उनके दोहों के शब्दों के प्रयोग में भी एक चमत्कार, और मधुरता पाई जाती है। ब्रजभाषा के कवि सत्यनारायण कविरत्न के छन्दों में मधुरता है। अनुप्रास, यमक अलंकारों से भी छंदों में
युक्त वर्गों का प्रयोग काव्य में कम करना चाहिए । दग्धाक्षरों का प्रयोग न करना चाहिए । समास और संयुक्ताक्षरों का भी प्रयोग अधिक न होना चाहिए। जो कविता सुनते ही हृदय में आनन्द पैदा करे, वही प्रसाद और गुण से युक्त मानी जायगी । कविता का गुण माधुर्य है । मधुर और शब्दों का प्रयोग कविता के अन्दर लाना रौद्र, और भयानक रसों में ओजपूर्ण शब्दों को लाना चाहिए । कविवर ठाकुर ने सुन्दर गुण-युक्त कविता के लक्षण इस प्रकार लिखे हैं"मोतिन की सी मनोहर माल, गुहै तुक अक्षर रोकि रिभावै । धर्म को पंथ कथा हरिनाम की, युक्ति अनूठी बनाय सुनावै ॥ 'ठाकुर' सो कवि भावत मोहिं जो, राजसभा में वड़प्पन पावे । पंडित और प्रवीनन के पुनि, चित्त हरै सो कवित्त कहावै ॥" शब्दों का प्रयोग, तुक की श्रेष्ठता, अनूठी युक्ति, जिल छंद में पाई जाय वही माधुर्य, और प्रसाद गुण से पूर्ण छंद माना जायगा। प्राचीन काल के हिन्दी कवि चंद, भूषण, योजपूर्ण कविता लिखने में प्रसिद्ध हैं। विहारी ने अपने छंदों में गागर में सागर भरने में अच्छी सफलता पाई है। उनके दोहों के शब्दों के प्रयोग में भी एक चमत्कार, और मधुरता पाई जाती है। ब्रजभाषा के कवि सत्यनारायण कविरत्न के छन्दों में मधुरता है। अनुप्रास, यमक अलंकारों से भी छंदों में
You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. (+91) You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. 'आरती कुंज बिहारी की' के बाद 'राधे राधे' को क्यों ट्रेंड करवा रहा है राइट विंग? बीते दो दिनों से सोशल मीडिया (Social Media) का माहौल भगवान कृष्ण की भक्ति से सराबोर हो गया है. 'आरती कुंज बिहारी की' (Aarti Kunj Bihari Ki) के बाद 'राधे राधे' (Radhe Radhe) वायरल वीडियो (Viral Video) ट्रेंड हो रहा है. क्या श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद (Krishna Janmbhoomi Case) पर कोर्ट की ओर से कोई बड़ा फैसला आने वाला है!
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- इसे ज़ोर से बोलें। आप जिस बात को लेकर डर रहे हैं, उसे ज़ोर से बोलना पहले तो उसे बाहर ले आएगा और फिर आपको ये एकदम ओर्डिनरी या नॉर्मल सी चीज लगने लग जाएगा। आपको इसे किसी और से कहने की कोई जरूरत नहीं है, बस खुद से ही कहें। - आप इन सेल्फ-रिफ़्लेक्शन (अपने आप को समझने की प्रोसेस) को अपने लिए मददगार पाएंगे। इस मामले में जहां तक हो सके, उतना स्पेसिफिक और ज्यादा डिटेल में रहे की कोशिश करें। - आप शायद एक मेंटल हैल्थ प्रोफेशनल से बात करके भी अच्छा फील कर सकते हैं। कई लोग ऐसा मानते हैं कि ये थेरेपी केवल उन्हीं लोगो के लिए होती है, जिन्हें कोई बड़ी, अजीब ही परेशानी हो, लेकिन ये हमेशा सही नहीं होता है। अगर आपको डरने की समस्या लगातार बनी रहती है, एक थेरेपिस्ट या काउंसलर शायद इसके पीछे की वजह को समझने में आपकी मदद कर सकेगा और इससे निपटने की स्ट्रेटजीस भी तलाशने में मदद करता है। - निडर होने का एक रास्ता ये है कि हम मान लें कि हर एक चीज में कोई न कोई जोखिम है। आप एक दिन में जो भी कुछ करते हैं - बिस्तर से उठने से लाकर रात के खाने तक - उसमें कोई न कोई रिस्क रहता ही है। लेकिन ये आपको अपनी ज़िंदगी जीने से नहीं रोक लेता। न ही आपके डर आपको जीने से रोक लेते हैं। - किसी चीज में फेल होने का डर भी एक और ऐसा नॉर्मल डर है, जो लगभग हर किसी को होता है। चीजों को सक्सेस और फेलर की तराजू में तौलने की बजाय, इस तरह से सोचें, जिससे आप कुछ सीख सकें। इस तरह से, सभी चीजें किसी न किसी तरीके से मददगार रहेंगी, फिर चाहे ये आपके सोचे हुए अनुसार न भी क्यों न हो। {"smallUrl":"https:\/\/www1एक रोल मॉडल की तलाश करेंः अगर आपको आपकी स्थिति से बाहर निकलने में मुश्किल हो रही है, तो अपने व्यवहार को की ऐसे इंसान की तरह बनाने की कोशिश करें, जिसने भी लाइफ में कोई मुश्किल का सामना किया हो। न केवल ये आपको एक नजरिया दे सकता है ("अरे, कम से कम मेरी परेशानी कोई इतनी भी बड़ी नहीं"), ये शायद आपको और भी हिम्मत वाला बनने के लिए इंस्पायर कर सकता है। - आपकी पहचान में मौजूद लोगों में ही एक रोल मॉडल की तलाश करेंः अगर आपको कम्फ़र्टेबल लगे, तो उनसे पूछकर देखें कि उन्होने उनकी परिस्थिति से निकलने के लिए किस तरह से हिम्मत दिखाई। - कुछ साहसी लोगों के बारे में पढ़ें। हमारे देश के फ़्रीडम फाइटर्स, सैनिकों, जवानों, ज़िंदगी और मौत से जूझने वाले लोगों जैसे ऐसे लोगों की के किस्सों की तलाश करें, जिन्हें उनकी बहदुरी के लिए पहचाना जाता है। - किसी भी बात को जनरलाइज करना (Generalizing) एक कॉमन डिस्टोर्शन या भटकाव होता है। जैसेः "मैं कितना डरपोक हूँ" आपके बारे में एक जनरलाइजिंग स्टेटमेंट है, जो कहीं से भी सही नहीं है। आपको डर महसूस हो सकता है, लेकिन बस आपका डर आपको "डरपोक इंसान" नहीं बना देता। - किसी भी स्थिति के सबसे बदतर मामले के बारे में ही सोचते रहना (Catastrophizing) एक और डिस्टोर्शन है, जिससे भी डर पैदा होता है। आप जब इस तरह से सोचते हैं, आप किसी घटना या अनुभव के सबसे बदतर पहलुओं के एक क्रम को तब तक अपने मन में चलाते रहते हैं, जब तक कि वो आउट ऑफ कंट्रोल न हो जाए। जैसेः "जब मैं हॉल से निकला, तब मेरे बॉस ने मेरी तरफ देखा नहीं। शायद वो मुझसे किसी बात को लेकर नाराज है। शायद मैंने कोई गलती कर दी है। शायद वो मुझे जॉब से भी निकाल दे। फिर मैं अपना घर खो दूंगा।" ये बेशक सबसे बदतर सोचने वाला मामला है, जो शायद ही कभी होने वाला है। - ऑनलाइन आपको डाउनलोड करने गाइडेड मेडिटेशन मिल जाएंगे।[३२] X रिसर्च सोर्स इसके साथ ही आपको कुछ MP3 मेडिटेशन गाइड्स भी डाउनलोड करने लायक मिल सकती हैं।[३३] X रिसर्च सोर्स Harvard Pilgrim का "Mind the Moment" प्रोग्राम पर माइंडफुलनेस प्रैक्टिस के फ्री कोर्स और प्रैक्टिस वीडियो मौजूद हैं। - आपके सामने आने वाली मुसीबतों के बारे में पहले से ही सोचकर रखना मुश्किल के समय में आपको पूरी हिम्मत के साथ सामना करने में मदद कर सकता है। आपके सामने आ सकने वाली मुश्किलों के बारे में सोचें और उनसे निपटने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार करें। {"smallUrl":"https:\/\/www6बस सोचते ही न रहें - करके भी दिखाएँः कुछ समय के बाद, अच्छा होगा अगर आप क्या करने वाले हैं, के बारे में सोचना छोड़ दें और सीधे उसे कर ही दें।[४३] X रिसर्च सोर्स ज्यादा भी सोचना केवल आपको आपके कदम बढ़ाने से पहले रोकने मात्र का काम करता है, ये आपको स्ट्रेस दे सकता है और आपको ऐसा फील करा सकता है, जैसे आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं।[४४] X रिसर्च सोर्स एक गहरी साँस लें और अपने मन को साफ करने की कोशिश करें और आपने जो पहले से डिसाइड किया है, उसे कर लें। हिचकिचाएँ नहीं और बस उसे करने के ऊपर ही फोकस करें। - इस कदम को उठाते समय अगर आप आपके अफर्मेशन या खुद को किसी लायक ठहराने की बात दोहराते रहेंगे, तो ये भी आपके लिए मददगार हो सकता है। पहला कदम बढ़ाने के लिए कॉन्फ़िडेंस का होना बहुत जरूरी होता है। जब आप आगे बढ़ें, तब आप निडर बनते जाएंगे। - जब तक आप निडर "फील" न करने लग जाएँ, तब तक का इंतज़ार न करते रहें। फायरफाइटर्स, सोल्जर्स, डॉक्टर्स -- अक्सर, जिन्हें हम निडर -- समझते हैं, वो असल में उस समय निडर नहीं फील करते हैं। उन्हें सिर्फ पता रहता है कि उन्हें क्या करना है और वो उसे करने के लिए चुनते हैं। - वहीं दूसरी ओर, इस बात को मानना कि आप किसी काम को नहीं कर सकते हैं, केवल आपको आप जो सोचते हैं, उसी पर भरोसा करने लायक बना देता है। आपका खुद के ऊपर भरोसा आपकी परफ़ोर्मेंस को कम करने में मदद कर सकता है या छिपा सकता है। - साहस हमेशा ही सामने दिखाई नहीं देता है। कभी-कभी साहस में ही दोबारा उठने और फिर से ट्राय करने की ताकत होती है। - याद रखें कि निडरता में डर की कमी नहीं होती है, लेकिन उसमें डर का सामना करने की स्ट्रेंथ होती है। - जब आपको साहस जुटाने की जरूरत हो, तब आपके द्वारा हासिल किए दूसरे चैलेंज को याद करें। हर कोई कभी न कभी निडर बना होगा (जैसे बाइक चलाना सीखते समय)। आप भी दोबारा निडर बन सकते हैं। - एक इंस्पायरिंग सॉन्ग या लाइन की तलाश करें। गाना आपको ऐसा फील करने में मदद कर सकता है कि आप अकेले नहीं हैं। इसे एक पेपर पर लिख लें और उसे अपने साथ रखें। उससे भी अच्छा, उसे याद कर लें! जब आप अपने दिन से गुजरें, तब गाना गाएँ या फिर उस लाइन को रिपीट करें! - सक्सेस का मतलब ये नहीं कि आपकी सारी परेशानियाँ जा चुकी हैं, बल्कि आपको उनसे निपटते आना चाहिए। - बस जो सही हो, वही करें। यही सबसे ज्यादा जरूरी बात है और लोगों को आपके निडर होने का अहसास करा सकती है। जैसे, अगर किसी को परेशान किया जा रहा हो, तो आप उसके सपोर्ट में खड़े हो जाएँ। - निडर होने और स्टुपिड होने के बीच में एक अंतर है। आप कितने निडर हैं या नहीं, ऐसे रिस्क न लें, जिन्हें लेने की आपको कोई जरूरत नहीं।
- इसे ज़ोर से बोलें। आप जिस बात को लेकर डर रहे हैं, उसे ज़ोर से बोलना पहले तो उसे बाहर ले आएगा और फिर आपको ये एकदम ओर्डिनरी या नॉर्मल सी चीज लगने लग जाएगा। आपको इसे किसी और से कहने की कोई जरूरत नहीं है, बस खुद से ही कहें। - आप इन सेल्फ-रिफ़्लेक्शन को अपने लिए मददगार पाएंगे। इस मामले में जहां तक हो सके, उतना स्पेसिफिक और ज्यादा डिटेल में रहे की कोशिश करें। - आप शायद एक मेंटल हैल्थ प्रोफेशनल से बात करके भी अच्छा फील कर सकते हैं। कई लोग ऐसा मानते हैं कि ये थेरेपी केवल उन्हीं लोगो के लिए होती है, जिन्हें कोई बड़ी, अजीब ही परेशानी हो, लेकिन ये हमेशा सही नहीं होता है। अगर आपको डरने की समस्या लगातार बनी रहती है, एक थेरेपिस्ट या काउंसलर शायद इसके पीछे की वजह को समझने में आपकी मदद कर सकेगा और इससे निपटने की स्ट्रेटजीस भी तलाशने में मदद करता है। - निडर होने का एक रास्ता ये है कि हम मान लें कि हर एक चीज में कोई न कोई जोखिम है। आप एक दिन में जो भी कुछ करते हैं - बिस्तर से उठने से लाकर रात के खाने तक - उसमें कोई न कोई रिस्क रहता ही है। लेकिन ये आपको अपनी ज़िंदगी जीने से नहीं रोक लेता। न ही आपके डर आपको जीने से रोक लेते हैं। - किसी चीज में फेल होने का डर भी एक और ऐसा नॉर्मल डर है, जो लगभग हर किसी को होता है। चीजों को सक्सेस और फेलर की तराजू में तौलने की बजाय, इस तरह से सोचें, जिससे आप कुछ सीख सकें। इस तरह से, सभी चीजें किसी न किसी तरीके से मददगार रहेंगी, फिर चाहे ये आपके सोचे हुए अनुसार न भी क्यों न हो। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकएक रोल मॉडल की तलाश करेंः अगर आपको आपकी स्थिति से बाहर निकलने में मुश्किल हो रही है, तो अपने व्यवहार को की ऐसे इंसान की तरह बनाने की कोशिश करें, जिसने भी लाइफ में कोई मुश्किल का सामना किया हो। न केवल ये आपको एक नजरिया दे सकता है , ये शायद आपको और भी हिम्मत वाला बनने के लिए इंस्पायर कर सकता है। - आपकी पहचान में मौजूद लोगों में ही एक रोल मॉडल की तलाश करेंः अगर आपको कम्फ़र्टेबल लगे, तो उनसे पूछकर देखें कि उन्होने उनकी परिस्थिति से निकलने के लिए किस तरह से हिम्मत दिखाई। - कुछ साहसी लोगों के बारे में पढ़ें। हमारे देश के फ़्रीडम फाइटर्स, सैनिकों, जवानों, ज़िंदगी और मौत से जूझने वाले लोगों जैसे ऐसे लोगों की के किस्सों की तलाश करें, जिन्हें उनकी बहदुरी के लिए पहचाना जाता है। - किसी भी बात को जनरलाइज करना एक कॉमन डिस्टोर्शन या भटकाव होता है। जैसेः "मैं कितना डरपोक हूँ" आपके बारे में एक जनरलाइजिंग स्टेटमेंट है, जो कहीं से भी सही नहीं है। आपको डर महसूस हो सकता है, लेकिन बस आपका डर आपको "डरपोक इंसान" नहीं बना देता। - किसी भी स्थिति के सबसे बदतर मामले के बारे में ही सोचते रहना एक और डिस्टोर्शन है, जिससे भी डर पैदा होता है। आप जब इस तरह से सोचते हैं, आप किसी घटना या अनुभव के सबसे बदतर पहलुओं के एक क्रम को तब तक अपने मन में चलाते रहते हैं, जब तक कि वो आउट ऑफ कंट्रोल न हो जाए। जैसेः "जब मैं हॉल से निकला, तब मेरे बॉस ने मेरी तरफ देखा नहीं। शायद वो मुझसे किसी बात को लेकर नाराज है। शायद मैंने कोई गलती कर दी है। शायद वो मुझे जॉब से भी निकाल दे। फिर मैं अपना घर खो दूंगा।" ये बेशक सबसे बदतर सोचने वाला मामला है, जो शायद ही कभी होने वाला है। - ऑनलाइन आपको डाउनलोड करने गाइडेड मेडिटेशन मिल जाएंगे।[बत्तीस] X रिसर्च सोर्स इसके साथ ही आपको कुछ MPतीन मेडिटेशन गाइड्स भी डाउनलोड करने लायक मिल सकती हैं।[तैंतीस] X रिसर्च सोर्स Harvard Pilgrim का "Mind the Moment" प्रोग्राम पर माइंडफुलनेस प्रैक्टिस के फ्री कोर्स और प्रैक्टिस वीडियो मौजूद हैं। - आपके सामने आने वाली मुसीबतों के बारे में पहले से ही सोचकर रखना मुश्किल के समय में आपको पूरी हिम्मत के साथ सामना करने में मदद कर सकता है। आपके सामने आ सकने वाली मुश्किलों के बारे में सोचें और उनसे निपटने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwछःबस सोचते ही न रहें - करके भी दिखाएँः कुछ समय के बाद, अच्छा होगा अगर आप क्या करने वाले हैं, के बारे में सोचना छोड़ दें और सीधे उसे कर ही दें।[तैंतालीस] X रिसर्च सोर्स ज्यादा भी सोचना केवल आपको आपके कदम बढ़ाने से पहले रोकने मात्र का काम करता है, ये आपको स्ट्रेस दे सकता है और आपको ऐसा फील करा सकता है, जैसे आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं।[चौंतालीस] X रिसर्च सोर्स एक गहरी साँस लें और अपने मन को साफ करने की कोशिश करें और आपने जो पहले से डिसाइड किया है, उसे कर लें। हिचकिचाएँ नहीं और बस उसे करने के ऊपर ही फोकस करें। - इस कदम को उठाते समय अगर आप आपके अफर्मेशन या खुद को किसी लायक ठहराने की बात दोहराते रहेंगे, तो ये भी आपके लिए मददगार हो सकता है। पहला कदम बढ़ाने के लिए कॉन्फ़िडेंस का होना बहुत जरूरी होता है। जब आप आगे बढ़ें, तब आप निडर बनते जाएंगे। - जब तक आप निडर "फील" न करने लग जाएँ, तब तक का इंतज़ार न करते रहें। फायरफाइटर्स, सोल्जर्स, डॉक्टर्स -- अक्सर, जिन्हें हम निडर -- समझते हैं, वो असल में उस समय निडर नहीं फील करते हैं। उन्हें सिर्फ पता रहता है कि उन्हें क्या करना है और वो उसे करने के लिए चुनते हैं। - वहीं दूसरी ओर, इस बात को मानना कि आप किसी काम को नहीं कर सकते हैं, केवल आपको आप जो सोचते हैं, उसी पर भरोसा करने लायक बना देता है। आपका खुद के ऊपर भरोसा आपकी परफ़ोर्मेंस को कम करने में मदद कर सकता है या छिपा सकता है। - साहस हमेशा ही सामने दिखाई नहीं देता है। कभी-कभी साहस में ही दोबारा उठने और फिर से ट्राय करने की ताकत होती है। - याद रखें कि निडरता में डर की कमी नहीं होती है, लेकिन उसमें डर का सामना करने की स्ट्रेंथ होती है। - जब आपको साहस जुटाने की जरूरत हो, तब आपके द्वारा हासिल किए दूसरे चैलेंज को याद करें। हर कोई कभी न कभी निडर बना होगा । आप भी दोबारा निडर बन सकते हैं। - एक इंस्पायरिंग सॉन्ग या लाइन की तलाश करें। गाना आपको ऐसा फील करने में मदद कर सकता है कि आप अकेले नहीं हैं। इसे एक पेपर पर लिख लें और उसे अपने साथ रखें। उससे भी अच्छा, उसे याद कर लें! जब आप अपने दिन से गुजरें, तब गाना गाएँ या फिर उस लाइन को रिपीट करें! - सक्सेस का मतलब ये नहीं कि आपकी सारी परेशानियाँ जा चुकी हैं, बल्कि आपको उनसे निपटते आना चाहिए। - बस जो सही हो, वही करें। यही सबसे ज्यादा जरूरी बात है और लोगों को आपके निडर होने का अहसास करा सकती है। जैसे, अगर किसी को परेशान किया जा रहा हो, तो आप उसके सपोर्ट में खड़े हो जाएँ। - निडर होने और स्टुपिड होने के बीच में एक अंतर है। आप कितने निडर हैं या नहीं, ऐसे रिस्क न लें, जिन्हें लेने की आपको कोई जरूरत नहीं।
मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट ये वो युवा चेहरे हैं जिन्हें राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड के नाम से जाना जाता रहा है. लेकिन पार्टी में मचे घमासन से धीरे धीरे ये युवा ब्रिगेड बिखरती जा रही है, सिंधिया और प्रसाद अब बीजेपी में हैं, जबकि पायलट भी लगातार बगावती तेवर दिखाते हुए दिख रहे हैं. क्यों कि पार्टी ने भी उनसे सारे पद छीन लिए हैं और वो केवल विधायक ही हैं. इसके अलावा मिलिंद देवड़ा भी पार्टी में खुश नज़र नहीं आ रहे हैं. वो भी किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं इस बात संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. जो कांग्रेस की मुसबीतें बढ़ाने वाले हैं. दरअसल ब्राह्मणों के बड़े नेता माने जाते हैं और कांग्रेस पार्टी में 20 साल गुजारने के बाद आखिरकार पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को बीजेपी का दामन थाम लिया. हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रहे प्रसाद को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक युवा ब्राह्मण नेता के तौर पर देखा जाता था. ऐसे में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. तो अब प्रसाद के जाने से एक बार फिर से कांग्रेस में कई युवा नेताओं की नाराजगी और पाला बदलने की अटकलों को हवा मिल गई है. सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा ऐसे नेताओं में शामिल हैं जिनकी नाराजगी की चर्चा इन दिनों हो रही है. इस बीच, मिलिंद देवड़ा ने गुजरात सरकार के कामकाज की तारीफ कर कांग्रेस की चिंता और बढ़ा दी है. दरअसल, कोरोना महामारी की वजह से पिछले एक साल से गुजरात में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, रिजार्ट और वॉटर पार्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. आर्थिक नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने उनका पिछले एक साल का प्रॉपर्टी टैक्स और बिजली बिल माफ करने का फैसला लिया है. कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ये खबर शेयर करते हुए गुजरात सरकार की तारीफ की है. उन्होंने लिखा है- 'दूसरे राज्यों के अनुकरण के लिए एक स्वागत योग्य कदम. यदि हम भारत के आतिथ्य क्षेत्र में और नौकरियों के नुकसान को रोकना चाहते हैं तो सभी राज्यों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए. तो इस तरह से जितिन प्रसाद के बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस में खलबली मच गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर उथल-पुथल देखने को मिल सकती है. जो कांग्रेस के डूबते भविष्य के बीच हालात और भी ज्यादा खराब करने वाले हैं.
मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट ये वो युवा चेहरे हैं जिन्हें राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड के नाम से जाना जाता रहा है. लेकिन पार्टी में मचे घमासन से धीरे धीरे ये युवा ब्रिगेड बिखरती जा रही है, सिंधिया और प्रसाद अब बीजेपी में हैं, जबकि पायलट भी लगातार बगावती तेवर दिखाते हुए दिख रहे हैं. क्यों कि पार्टी ने भी उनसे सारे पद छीन लिए हैं और वो केवल विधायक ही हैं. इसके अलावा मिलिंद देवड़ा भी पार्टी में खुश नज़र नहीं आ रहे हैं. वो भी किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं इस बात संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. जो कांग्रेस की मुसबीतें बढ़ाने वाले हैं. दरअसल ब्राह्मणों के बड़े नेता माने जाते हैं और कांग्रेस पार्टी में बीस साल गुजारने के बाद आखिरकार पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को बीजेपी का दामन थाम लिया. हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रहे प्रसाद को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक युवा ब्राह्मण नेता के तौर पर देखा जाता था. ऐसे में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. तो अब प्रसाद के जाने से एक बार फिर से कांग्रेस में कई युवा नेताओं की नाराजगी और पाला बदलने की अटकलों को हवा मिल गई है. सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा ऐसे नेताओं में शामिल हैं जिनकी नाराजगी की चर्चा इन दिनों हो रही है. इस बीच, मिलिंद देवड़ा ने गुजरात सरकार के कामकाज की तारीफ कर कांग्रेस की चिंता और बढ़ा दी है. दरअसल, कोरोना महामारी की वजह से पिछले एक साल से गुजरात में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, रिजार्ट और वॉटर पार्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. आर्थिक नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने उनका पिछले एक साल का प्रॉपर्टी टैक्स और बिजली बिल माफ करने का फैसला लिया है. कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ये खबर शेयर करते हुए गुजरात सरकार की तारीफ की है. उन्होंने लिखा है- 'दूसरे राज्यों के अनुकरण के लिए एक स्वागत योग्य कदम. यदि हम भारत के आतिथ्य क्षेत्र में और नौकरियों के नुकसान को रोकना चाहते हैं तो सभी राज्यों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए. तो इस तरह से जितिन प्रसाद के बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस में खलबली मच गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर उथल-पुथल देखने को मिल सकती है. जो कांग्रेस के डूबते भविष्य के बीच हालात और भी ज्यादा खराब करने वाले हैं.
अनियंत्रित टेम्पो की ठोकर से शुक्रवार की दोपहर गोबरसही रेल गुमटी का बूमर क्षतिग्रस्त हो गया। इससे करीब एक घंटे तक पावर हाउस चौक से गोबरसही चौक तक सड़क जाम रहा। घटना के बाद गुमटी पर अफरातफरी रही। जाम में बड़ी संख्या में मैट्रिक परीक्षार्थी व उनके अभिभावक फंसे थे। किसी तरह गुमटी को दुरुस्त किया गया। इसके बाद सड़क जाम हटा। आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक वेद प्रकाश वर्मा ने बताया कि घटना के बाद चालक टायर लदा टेम्पो छोड़कर फरार हो गया। टेम्पो को जब्त कर फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए निर्देश दिया गया है।
अनियंत्रित टेम्पो की ठोकर से शुक्रवार की दोपहर गोबरसही रेल गुमटी का बूमर क्षतिग्रस्त हो गया। इससे करीब एक घंटे तक पावर हाउस चौक से गोबरसही चौक तक सड़क जाम रहा। घटना के बाद गुमटी पर अफरातफरी रही। जाम में बड़ी संख्या में मैट्रिक परीक्षार्थी व उनके अभिभावक फंसे थे। किसी तरह गुमटी को दुरुस्त किया गया। इसके बाद सड़क जाम हटा। आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक वेद प्रकाश वर्मा ने बताया कि घटना के बाद चालक टायर लदा टेम्पो छोड़कर फरार हो गया। टेम्पो को जब्त कर फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए निर्देश दिया गया है।
हिन्दू धर्म में विवाह के समय सबसे आवश्यक कारक है कुंडली मिलान। वर-वधू के कुंडली और गुण मिलान के आधार पर ही विवाह ते किया जाता है। विवाह तय करने से पूर्व जब वर और वधू के गुणों का मिलन किया जाता है। इसमें वर और वधू की कुंडलियों को देखकर उनके 36 गुणों को मिलाया जाता है। जब दोनों के न्यूनतम गुण मिल जाते हैं तो ही उनकी शादी के सफल होने की संभावना बनती है। कुंडली का साथवन भाव विवाह के विषय में जानकारी देता है। जब कुंडली में गुण मिलान की प्रक्रिया संपन्न हो जाती है तब वर-वधू की जन्म राशि के आधार पर विवाह संस्कार के लिए निश्चित तिथि, वार, नक्षत्र तथा समय को निकाला जाता है, जो विवाह मुहूर्त कहलाता है। विवाह मुहूर्त के लिए ग्रहों की दशा व नक्षत्रों का ऐसे विश्लेषण किया जाता है। आइए जानते हैं कैसे वर-वधू के गुणों के आधार पर विवाह मुहूर्त निकाला जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर-वधू की कुंडलियों का मिलान किया जाता है। कुंडली में 36 गुण होते हैं। इन 36 गुणों के आधार पर ही विवाह तय होता है। विवाह हेतु न्यूनतम 18 गुण मिलना बहुत आवश्यक है। विवाह के लिए 18 से 25 गुण मिलना सामान्य माना जाता है। 25 से 32 गुण मिलना उत्तम माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में 25 से 32 गुण मिल जाते हैं, उनकी कुंडली आती उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा जिन वर वधू के 32 से 36 गुण मिलते हैं उनकी कुंडली सर्वोत्तम मानी गई है। ऐसा माना जाता है कि जिन जातकों की कुंडली में 32 से 36 गुण मिल जाते हैं, उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखद और खुशहाल होता है। हालांकि, ऐसा बहुत ही कम होता है कि किसी के 32-36 गुण मिलें। जब गुणों का मिलान हो जाता है उसके बाद वर वधू की जन्म राशि के आधार पर विवाह मुहूर्त निकाला जाता ही। विवाह संस्कार के लिए जन्म राशि के आधार पर एक निश्चित तिथि, वार, नक्षत्र और समय निकाला जाता है। जब कुंडली में गुण मिलान की प्रक्रिया संपन्न हो जाती है तब वर-वधू की जन्म राशि के आधार पर विवाह संस्कार के लिए निश्चित तिथि, वार, नक्षत्र तथा समय को निकाला जाता है, जो विवाह मुहूर्त कहलाता है। वर या वधू के चंद्र राशि यानि उनका जन्म जिस चंद्र नक्षत्र में होता है उसके आधार पर विवाह की तिथि ज्ञात करने का प्रयोग किया जाता है। वर-कन्या की राशियों में विवाह के लिए एक समान तिथि को विवाह मुहूर्त के लिए लिया जाता है। वधू की राशि में बृहस्पति यदि द्वितीया, पंचम, सप्तम, नवम और एकादश भाव में हो तो वो शुभ माना जाता है और चतुर्थ, अष्टम, और द्वादश भाव में गुरु होना अशुभ माना जाता है। ठीक इसी प्रकार वर की राशि में यदि सूर्य तृतीय, षष्ठम, दशम और एकादश भाव में हो तो वो शुभ होता हैं इसके अलावा चतुर्थ, अष्टम, द्वादश भाव अशुभ माना जाता है। विवाह में लग्न का समय निकाला जाता है। यहां लग्न का अर्थ फेरे का समय है। लग्न का निर्धारण विवाह की तिथि तय होने के उपरांत किया जाता है। अगर लग्न तय करने में थोड़ी भी त्रुटि होती है तो यह एक दोष माना जाता है। ऐसा माना जाता है की विवाह में तिथि को शरीर, चंद्रमा को मन, योग और नक्षत्रों को शरीर का अंग और लग्न को आत्मा माना गया है। लग्न तय करते समय ध्यान रखें कि जन्म कुंडली में अष्टम भाव का स्वामी विवाह लग्न में स्थित नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त लग्न से पीड़ित चंद्र, शुक्र और मंगल अष्टम भाव में स्थित नहीं होने चाहिए।
हिन्दू धर्म में विवाह के समय सबसे आवश्यक कारक है कुंडली मिलान। वर-वधू के कुंडली और गुण मिलान के आधार पर ही विवाह ते किया जाता है। विवाह तय करने से पूर्व जब वर और वधू के गुणों का मिलन किया जाता है। इसमें वर और वधू की कुंडलियों को देखकर उनके छत्तीस गुणों को मिलाया जाता है। जब दोनों के न्यूनतम गुण मिल जाते हैं तो ही उनकी शादी के सफल होने की संभावना बनती है। कुंडली का साथवन भाव विवाह के विषय में जानकारी देता है। जब कुंडली में गुण मिलान की प्रक्रिया संपन्न हो जाती है तब वर-वधू की जन्म राशि के आधार पर विवाह संस्कार के लिए निश्चित तिथि, वार, नक्षत्र तथा समय को निकाला जाता है, जो विवाह मुहूर्त कहलाता है। विवाह मुहूर्त के लिए ग्रहों की दशा व नक्षत्रों का ऐसे विश्लेषण किया जाता है। आइए जानते हैं कैसे वर-वधू के गुणों के आधार पर विवाह मुहूर्त निकाला जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर-वधू की कुंडलियों का मिलान किया जाता है। कुंडली में छत्तीस गुण होते हैं। इन छत्तीस गुणों के आधार पर ही विवाह तय होता है। विवाह हेतु न्यूनतम अट्ठारह गुण मिलना बहुत आवश्यक है। विवाह के लिए अट्ठारह से पच्चीस गुण मिलना सामान्य माना जाता है। पच्चीस से बत्तीस गुण मिलना उत्तम माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में पच्चीस से बत्तीस गुण मिल जाते हैं, उनकी कुंडली आती उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा जिन वर वधू के बत्तीस से छत्तीस गुण मिलते हैं उनकी कुंडली सर्वोत्तम मानी गई है। ऐसा माना जाता है कि जिन जातकों की कुंडली में बत्तीस से छत्तीस गुण मिल जाते हैं, उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखद और खुशहाल होता है। हालांकि, ऐसा बहुत ही कम होता है कि किसी के बत्तीस-छत्तीस गुण मिलें। जब गुणों का मिलान हो जाता है उसके बाद वर वधू की जन्म राशि के आधार पर विवाह मुहूर्त निकाला जाता ही। विवाह संस्कार के लिए जन्म राशि के आधार पर एक निश्चित तिथि, वार, नक्षत्र और समय निकाला जाता है। जब कुंडली में गुण मिलान की प्रक्रिया संपन्न हो जाती है तब वर-वधू की जन्म राशि के आधार पर विवाह संस्कार के लिए निश्चित तिथि, वार, नक्षत्र तथा समय को निकाला जाता है, जो विवाह मुहूर्त कहलाता है। वर या वधू के चंद्र राशि यानि उनका जन्म जिस चंद्र नक्षत्र में होता है उसके आधार पर विवाह की तिथि ज्ञात करने का प्रयोग किया जाता है। वर-कन्या की राशियों में विवाह के लिए एक समान तिथि को विवाह मुहूर्त के लिए लिया जाता है। वधू की राशि में बृहस्पति यदि द्वितीया, पंचम, सप्तम, नवम और एकादश भाव में हो तो वो शुभ माना जाता है और चतुर्थ, अष्टम, और द्वादश भाव में गुरु होना अशुभ माना जाता है। ठीक इसी प्रकार वर की राशि में यदि सूर्य तृतीय, षष्ठम, दशम और एकादश भाव में हो तो वो शुभ होता हैं इसके अलावा चतुर्थ, अष्टम, द्वादश भाव अशुभ माना जाता है। विवाह में लग्न का समय निकाला जाता है। यहां लग्न का अर्थ फेरे का समय है। लग्न का निर्धारण विवाह की तिथि तय होने के उपरांत किया जाता है। अगर लग्न तय करने में थोड़ी भी त्रुटि होती है तो यह एक दोष माना जाता है। ऐसा माना जाता है की विवाह में तिथि को शरीर, चंद्रमा को मन, योग और नक्षत्रों को शरीर का अंग और लग्न को आत्मा माना गया है। लग्न तय करते समय ध्यान रखें कि जन्म कुंडली में अष्टम भाव का स्वामी विवाह लग्न में स्थित नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त लग्न से पीड़ित चंद्र, शुक्र और मंगल अष्टम भाव में स्थित नहीं होने चाहिए।
फ्रांस के बाद अब एक और यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड में भी मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर बैन लगाने की तैयारी हो गई है। स्विट्जरलैंड के 51 फीसदी लोगों ने बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में मतदान किया है। बुर्के पर बैन को लेकर मतदान के दौरान कड़ी टक्कर देखी गई। इस फैसले की जहां समर्थक प्रशंसा कर रहे हैं और इसे कट्टर इस्लाम के खिलाफ कदम बता रहे हैं, वहीं इसके विरोधी इसे नस्लीय बता रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों में दिखाया गया है कि 51. 21 प्रतिशत मतदाताओं ने बुर्के पर बैन लगाने का समर्थन किया और ज्यादातर संघीय प्रांतों ने इस बैन का समर्थन किया। कुल 1,426,992 मतदाताओं ने इस बैन का समर्थन किया और 1,359,621 लोग इस बैन के खिलाफ थे। कुल 50 . 8 प्रतिशत लोगों ने इस जनमत संग्रह में मतदान किया था। इस जनमत संग्रह में लोगों से पूछा गया था कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर नकाब को प्रतिबंधित किया जाए या नहीं? अब 51. 21 फीसदी लोगों ने बुर्के और नकाब को प्रतिबंधित करने के पक्ष में मतदान किया है। गौरतलब है कि एक महीने पहले स्विट्जरलैंड की सरकार एक प्रस्ताव लाई थी कि कोई भी सार्वजनिक रूप से अपने चेहरे को कवर नहीं करेगा, न ही उन क्षेत्रों में जहां सेवाएं सभी के लिए समान रूप से सुलभ हैं। जिसके बाद से इस प्रस्ताव का कई संगठनों ने विरोध किया। सरकार ने कोई रास्ता न देखते हुए लोगों से ही इसके बारे में रेफरेंडम के जरिए राय मांगी थी। जिसे लेकर रविवार को मतदान हुआ। बता दें कि स्विट्जरलैंड की 86 लाख की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 5. 2 फीसदी है। इस देश में रहने वाले अधिकांश मुस्लिम, बोस्निया, तुर्की और कोसोवो के रहने वाले हैं। इन देशों के निवासी मुस्लिम परिवारों की महिलाएं नकाब और बुर्का पहनती हैं। नकाब से चेहरे के आधे हिस्से को ढंका जाता है, जबकि बुर्का से पूरे शरीर को कवर किया जाता है। यूरोप के कई देशों ने बुर्के पर आंशिक या पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसमें नीदरलैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, जर्मनी और डेनमार्क शामिल हैं। हाल के दिनों में जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क ने कट्टरपंथ को देखते हुए और भी कई तरह के नए प्रतिबंधों को लगाने का ऐलान किया हुआ है।
फ्रांस के बाद अब एक और यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड में भी मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर बैन लगाने की तैयारी हो गई है। स्विट्जरलैंड के इक्यावन फीसदी लोगों ने बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में मतदान किया है। बुर्के पर बैन को लेकर मतदान के दौरान कड़ी टक्कर देखी गई। इस फैसले की जहां समर्थक प्रशंसा कर रहे हैं और इसे कट्टर इस्लाम के खिलाफ कदम बता रहे हैं, वहीं इसके विरोधी इसे नस्लीय बता रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों में दिखाया गया है कि इक्यावन. इक्कीस प्रतिशत मतदाताओं ने बुर्के पर बैन लगाने का समर्थन किया और ज्यादातर संघीय प्रांतों ने इस बैन का समर्थन किया। कुल एक,चार सौ छब्बीस,नौ सौ बानवे मतदाताओं ने इस बैन का समर्थन किया और एक,तीन सौ उनसठ,छः सौ इक्कीस लोग इस बैन के खिलाफ थे। कुल पचास . आठ प्रतिशत लोगों ने इस जनमत संग्रह में मतदान किया था। इस जनमत संग्रह में लोगों से पूछा गया था कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर नकाब को प्रतिबंधित किया जाए या नहीं? अब इक्यावन. इक्कीस फीसदी लोगों ने बुर्के और नकाब को प्रतिबंधित करने के पक्ष में मतदान किया है। गौरतलब है कि एक महीने पहले स्विट्जरलैंड की सरकार एक प्रस्ताव लाई थी कि कोई भी सार्वजनिक रूप से अपने चेहरे को कवर नहीं करेगा, न ही उन क्षेत्रों में जहां सेवाएं सभी के लिए समान रूप से सुलभ हैं। जिसके बाद से इस प्रस्ताव का कई संगठनों ने विरोध किया। सरकार ने कोई रास्ता न देखते हुए लोगों से ही इसके बारे में रेफरेंडम के जरिए राय मांगी थी। जिसे लेकर रविवार को मतदान हुआ। बता दें कि स्विट्जरलैंड की छियासी लाख की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी पाँच. दो फीसदी है। इस देश में रहने वाले अधिकांश मुस्लिम, बोस्निया, तुर्की और कोसोवो के रहने वाले हैं। इन देशों के निवासी मुस्लिम परिवारों की महिलाएं नकाब और बुर्का पहनती हैं। नकाब से चेहरे के आधे हिस्से को ढंका जाता है, जबकि बुर्का से पूरे शरीर को कवर किया जाता है। यूरोप के कई देशों ने बुर्के पर आंशिक या पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसमें नीदरलैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, जर्मनी और डेनमार्क शामिल हैं। हाल के दिनों में जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क ने कट्टरपंथ को देखते हुए और भी कई तरह के नए प्रतिबंधों को लगाने का ऐलान किया हुआ है।
Vat Savitri Vrat 2023:वट सावित्री व्रत धर्म क्या कहता है, जानिए इसमे व्रत में क्या खाया जाता है? Vat Savitri Vrat 2023: वट सावित्री के दिन व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास रहता है। वट वृक्ष कभी ना क्षय होने वाला पेड़ है जो सदियों तक रहता है। वट सावित्री का व्रत कुछ जगहों पर ज्येष्ठ की अमावस्या और ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस व्रत की शुरुआत सावित्री ने की थी। अपने मृत पति को वट वृक्ष के नीचे तब तक लेकर बैठी रही जब तक कि यमराज ने उनके पति सत्यवान के प्राण वापस नहीं कर दिए। हिंदू धर्म के साथ बौद्ध और जैन धर्म में भी बरगद के पेड़ का महत्वपूर्ण स्थान है। भविष्य पुराण, स्कंदपुराण के अनुसार इसे अमरता का प्रतीक भी माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन माना जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की स्त्रियां ज्येष्ठ पूर्णिमा को यह व्रत करती हैं। वट वृक्ष के ब्रह्मा,विष्णु और शिव का रूप माना गया है तो दूसरी ओर पद्म पुराण में इसे भगवान विष्णु का अवतार कहते हैं। अतः सौभाग्यवती महिलाएं ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा और अमावस्या को व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं, जिसे वट सावित्री व्रत कहते हैं। इस दिन महिलाएं वट की पूजा-अर्चना तथा परिक्रमा पुत्र कामना तथा सुख-शांति के लिए भी करती हैं। इस दिन वट वृक्ष को जल से सींचकर उसमें सूत लपेटते हुए उसकी 108 बार परिक्रमा की जाती है। वट सावित्री के दिन व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास रहता है। वट वृक्ष कभी ना क्षय होने वाला पेड़ है जो सदियों तक रहता है। इस वृक्ष के नीचे सबसे अधिक ऑक्सीजन मिलता है। सावित्री ने इस वृक्ष के नीचे अपने मृत पति सत्यवान को लिटाया था और अपने सूझबूझ और धैर्य से यमराज से सुहाग की रक्षा की थी और जान बचाई थी। कहते हैं कि जब सत्यवान को यमराज ने जीवित कर दिया तब सावित्री ने बरगद के पेड का फल खाकर इस दिन जल से व्रत तोड़ा था, तभी से यह व्रत मनाया जाता है और वट की पूजा की जाती है। बरगद के पेड़ के पत्ते में भगवान शिव ने मार्कंडेय ऋषि को दर्शन दिए थे। वट सावित्री व्रत अखंड सुहाग सुहागिन महिलाएं रखती हैं क्योंकि इसी दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से बचा लिए थे। कहा जाता है कि सत्यवान राजपाट छिनने के बाद अपनी पतिव्रता पत्नी सावित्री के साथ साधारण जीवन यापन कर रहे थे। एक दिन जंगल में लकड़ी काटते समय यमराज आए और सत्यवान के प्राण हर लिए और अपने साथ लेकर जाने लगे। इस पर सावित्री भी यमराज के पीछे पीछे चल दी। सावित्री का अपने अक्षय और अखण्ड सुहाग के लिए यह तप देखकर यमराज प्रसन्न हो गए। उन्होंने कहा तुम क्या मांगना चाहती हो तो सावित्री पहले अपने अंधे माता-पिता के नेत्र ठीक करने का वरदान मांगा। इसके बाद अपना खोया हुआ राजपाट मांगा और फिर पुत्रवती होने का वरदान मांगा। यमराज ने सावित्री को यह वरदान तथास्तु कह कर दे दिये। थोड़ी दूर आगे चलने के बाद यमराज ने जब फिर पीछे मुड़कर देखा तो सावित्री अभी भी पीछे चली आ रही थीं इस पर यमराज ने पूछा कि अब क्या बात है, तो सावित्री बोलीं कि आप मेरे पति के प्राण तो हर कर ले जा रहे हैं अब मैं पुत्रवती कैसे होउंगी। इस पर यमराज असमंजस में पड़ गए। हारकर यमराज को सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े। जिस जगह ये वाकया हुआ वहां वट वृक्ष था, तभी से वट सावित्री पूजन अक्षय सुहाग के लिए किया जाने लगा। वट सावित्री व्रत के दिन सूर्योदय से पहले प्रातःकाल पूरे घर की सफाई करके स्नान के बाद सम्पूर्ण घर को गंगाजल का छिड़काव करने से सकारात्मकता बढ़ती है। उसके बाद एक बांस की टोकरी में वट सावित्री व्रत की पूजा की सामग्री (सत्यवान - सावित्री की तस्वीर या मूर्ति, बॉस का पंखा, लाल धागा, धूप, मिट्टी का दीपक, घी, फूल, फल, चना, रोली, कपडा, सिंदूर, जल से भरा हुआ पात्र) को व्यवस्थित कर लें। उसके बाद वट वृक्ष के आस - पास भी सफाई कर लें, फिर वट सावित्री व्रत की पूजा शुरू कर दें। पहले पूजा स्थल पर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति स्थापित करें। अब धूप, रोली, सिंदूर व दीप जलाकर पूजा करें। लाल रंग का कपडा सावित्री और सत्यवान को अर्पित करें और फूल समर्पित करें। बांस के पंखे से सावित्री और सत्यवान को हवा करें। पंखा करने के बाद वट वृक्ष के तने पर कच्चा धागा लपेटते हुए 5, 11, 21, 51 या 108 बार परिक्रमा करें । परिक्रमा करेने के पश्चात वट सावित्री व्रत की कथा सुने। वट सावित्री व्रत में क्या खाया जाता है? सावित्री ने पति के प्राणों की रक्षा के लिए अपनी सुध-बुध छोड़ दी थी और यमराज से प्राणों की रक्षा की थी। वैसे ही आज कलयुग में भी महिलाएं अपने पति और परिवार की रक्षा के लिए व्रत उपवास करती हैं। वट सावित्री के दिन व्रत रखकर माता सावित्री से अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती है। पौराणिक कथा के माध्यम से पता चलता है कि सावित्री ने कैसे पति के प्राणों की रक्षा की, लेकिन आज के समय में इस व्रत में उपवास और पूजा के साथ किन चीजों का सेवन करना चाहिए जानते हैं। वट सावित्री का व्रत अन्य व्रतों से थोड़ा अलग है। इस व्रत में पूरे दिन व्रत नहीं रखा जाता है। लेकिन कहीं-कहीं लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं। खासकर यूपी , पंजाब हरियाणा और राजस्थान में इस व्रत को पूरे विधि-विधान से रखा जाता है। इस दिन पूजा में जो चढ़ाया जाता है,उसे ही खाया जाता है। आम,चना, खरबूजा, पुरी , गुलगुला पुआ से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। व्रत के संपन्न होने के बाद इन्ही चीजों को प्रसाद के रुप में खाते हैं। व्रत के दौरान और पूजा के बाद चने को सीधे निगला जाता है और बाद में चने की सब्जी बनाकर खाई जाती है। इसी तरह आम और आम का मुरब्बा, खरबूजा की पूजा करते हैं और प्रसाद खाते हैं। आम को चढ़ाकर उसका मुरब्बा बनाकर खाया जाता है। खरबूजे को भी व्रत के दौरान खाते हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री के व्रत के दौरान सत्यवान-सावित्री की कथा महात्मय को सुनकर जो विधि-विधान से पूजा करता है। फिर उपरोक्त चीजों का सेवन करता है। उनका सुहाग अमर हो जाता है। बिहार, मध्यप्रदेश ,उत्तर प्रदेश और झारखंड में वट सावित्री व्रत से जुड़ा एक जैसा नियम है। यहां महिलाएँ ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट वृक्ष की पूजा कर व्रत रखती है और पति और संतान के दीर्घायु की कामना करती है। इस दिन यहां वट वृक्ष की 12 या 108 बार परिक्रमा करने का विधान है। व्रत सामग्री में मीठा पुआ, आटा से बनाया वर, पुड़ी , चना, खरबूजा, आम, खीरा और हाथ से बने बांस के पंखे को रखकर पूजा की जाती है और व्रत रखकर कथा सुनती है। वट वृक्ष के फल से पानी के साथ व्रत को तोड़ती है। राजस्थान में भी अमावस्या तिथि का बहुत महत्व है। यहां भी सुहाग की रक्षा के लिए सुहागिनें व्रत रखती है। मिठाई , फल और चुरमा से पूजा करती है। साथ में 108 परिक्रमा भी वट वृक्ष की करके सदा सुहाग रहने की कामना करती है। इस दिन राजस्थान में दाल बाटी और चूरमा बनाकर व्रत तोड़ा जाता है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को महाराष्ट्र-गुजरात में वट सावित्री का व्रत रखा जाता है जो 24 जून को है और वट सावित्री की पूजा के साथ वट वृक्ष की 108 परिक्रमा की जाती है। महाराष्ट्र में इस दिन पोरणपोली बनाया जाता है। सुहागिनें एक-दूसरे को सुहाग देती है।
Vat Savitri Vrat दो हज़ार तेईस:वट सावित्री व्रत धर्म क्या कहता है, जानिए इसमे व्रत में क्या खाया जाता है? Vat Savitri Vrat दो हज़ार तेईस: वट सावित्री के दिन व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास रहता है। वट वृक्ष कभी ना क्षय होने वाला पेड़ है जो सदियों तक रहता है। वट सावित्री का व्रत कुछ जगहों पर ज्येष्ठ की अमावस्या और ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस व्रत की शुरुआत सावित्री ने की थी। अपने मृत पति को वट वृक्ष के नीचे तब तक लेकर बैठी रही जब तक कि यमराज ने उनके पति सत्यवान के प्राण वापस नहीं कर दिए। हिंदू धर्म के साथ बौद्ध और जैन धर्म में भी बरगद के पेड़ का महत्वपूर्ण स्थान है। भविष्य पुराण, स्कंदपुराण के अनुसार इसे अमरता का प्रतीक भी माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन माना जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की स्त्रियां ज्येष्ठ पूर्णिमा को यह व्रत करती हैं। वट वृक्ष के ब्रह्मा,विष्णु और शिव का रूप माना गया है तो दूसरी ओर पद्म पुराण में इसे भगवान विष्णु का अवतार कहते हैं। अतः सौभाग्यवती महिलाएं ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा और अमावस्या को व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं, जिसे वट सावित्री व्रत कहते हैं। इस दिन महिलाएं वट की पूजा-अर्चना तथा परिक्रमा पुत्र कामना तथा सुख-शांति के लिए भी करती हैं। इस दिन वट वृक्ष को जल से सींचकर उसमें सूत लपेटते हुए उसकी एक सौ आठ बार परिक्रमा की जाती है। वट सावित्री के दिन व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास रहता है। वट वृक्ष कभी ना क्षय होने वाला पेड़ है जो सदियों तक रहता है। इस वृक्ष के नीचे सबसे अधिक ऑक्सीजन मिलता है। सावित्री ने इस वृक्ष के नीचे अपने मृत पति सत्यवान को लिटाया था और अपने सूझबूझ और धैर्य से यमराज से सुहाग की रक्षा की थी और जान बचाई थी। कहते हैं कि जब सत्यवान को यमराज ने जीवित कर दिया तब सावित्री ने बरगद के पेड का फल खाकर इस दिन जल से व्रत तोड़ा था, तभी से यह व्रत मनाया जाता है और वट की पूजा की जाती है। बरगद के पेड़ के पत्ते में भगवान शिव ने मार्कंडेय ऋषि को दर्शन दिए थे। वट सावित्री व्रत अखंड सुहाग सुहागिन महिलाएं रखती हैं क्योंकि इसी दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से बचा लिए थे। कहा जाता है कि सत्यवान राजपाट छिनने के बाद अपनी पतिव्रता पत्नी सावित्री के साथ साधारण जीवन यापन कर रहे थे। एक दिन जंगल में लकड़ी काटते समय यमराज आए और सत्यवान के प्राण हर लिए और अपने साथ लेकर जाने लगे। इस पर सावित्री भी यमराज के पीछे पीछे चल दी। सावित्री का अपने अक्षय और अखण्ड सुहाग के लिए यह तप देखकर यमराज प्रसन्न हो गए। उन्होंने कहा तुम क्या मांगना चाहती हो तो सावित्री पहले अपने अंधे माता-पिता के नेत्र ठीक करने का वरदान मांगा। इसके बाद अपना खोया हुआ राजपाट मांगा और फिर पुत्रवती होने का वरदान मांगा। यमराज ने सावित्री को यह वरदान तथास्तु कह कर दे दिये। थोड़ी दूर आगे चलने के बाद यमराज ने जब फिर पीछे मुड़कर देखा तो सावित्री अभी भी पीछे चली आ रही थीं इस पर यमराज ने पूछा कि अब क्या बात है, तो सावित्री बोलीं कि आप मेरे पति के प्राण तो हर कर ले जा रहे हैं अब मैं पुत्रवती कैसे होउंगी। इस पर यमराज असमंजस में पड़ गए। हारकर यमराज को सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े। जिस जगह ये वाकया हुआ वहां वट वृक्ष था, तभी से वट सावित्री पूजन अक्षय सुहाग के लिए किया जाने लगा। वट सावित्री व्रत के दिन सूर्योदय से पहले प्रातःकाल पूरे घर की सफाई करके स्नान के बाद सम्पूर्ण घर को गंगाजल का छिड़काव करने से सकारात्मकता बढ़ती है। उसके बाद एक बांस की टोकरी में वट सावित्री व्रत की पूजा की सामग्री को व्यवस्थित कर लें। उसके बाद वट वृक्ष के आस - पास भी सफाई कर लें, फिर वट सावित्री व्रत की पूजा शुरू कर दें। पहले पूजा स्थल पर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति स्थापित करें। अब धूप, रोली, सिंदूर व दीप जलाकर पूजा करें। लाल रंग का कपडा सावित्री और सत्यवान को अर्पित करें और फूल समर्पित करें। बांस के पंखे से सावित्री और सत्यवान को हवा करें। पंखा करने के बाद वट वृक्ष के तने पर कच्चा धागा लपेटते हुए पाँच, ग्यारह, इक्कीस, इक्यावन या एक सौ आठ बार परिक्रमा करें । परिक्रमा करेने के पश्चात वट सावित्री व्रत की कथा सुने। वट सावित्री व्रत में क्या खाया जाता है? सावित्री ने पति के प्राणों की रक्षा के लिए अपनी सुध-बुध छोड़ दी थी और यमराज से प्राणों की रक्षा की थी। वैसे ही आज कलयुग में भी महिलाएं अपने पति और परिवार की रक्षा के लिए व्रत उपवास करती हैं। वट सावित्री के दिन व्रत रखकर माता सावित्री से अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती है। पौराणिक कथा के माध्यम से पता चलता है कि सावित्री ने कैसे पति के प्राणों की रक्षा की, लेकिन आज के समय में इस व्रत में उपवास और पूजा के साथ किन चीजों का सेवन करना चाहिए जानते हैं। वट सावित्री का व्रत अन्य व्रतों से थोड़ा अलग है। इस व्रत में पूरे दिन व्रत नहीं रखा जाता है। लेकिन कहीं-कहीं लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं। खासकर यूपी , पंजाब हरियाणा और राजस्थान में इस व्रत को पूरे विधि-विधान से रखा जाता है। इस दिन पूजा में जो चढ़ाया जाता है,उसे ही खाया जाता है। आम,चना, खरबूजा, पुरी , गुलगुला पुआ से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। व्रत के संपन्न होने के बाद इन्ही चीजों को प्रसाद के रुप में खाते हैं। व्रत के दौरान और पूजा के बाद चने को सीधे निगला जाता है और बाद में चने की सब्जी बनाकर खाई जाती है। इसी तरह आम और आम का मुरब्बा, खरबूजा की पूजा करते हैं और प्रसाद खाते हैं। आम को चढ़ाकर उसका मुरब्बा बनाकर खाया जाता है। खरबूजे को भी व्रत के दौरान खाते हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री के व्रत के दौरान सत्यवान-सावित्री की कथा महात्मय को सुनकर जो विधि-विधान से पूजा करता है। फिर उपरोक्त चीजों का सेवन करता है। उनका सुहाग अमर हो जाता है। बिहार, मध्यप्रदेश ,उत्तर प्रदेश और झारखंड में वट सावित्री व्रत से जुड़ा एक जैसा नियम है। यहां महिलाएँ ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट वृक्ष की पूजा कर व्रत रखती है और पति और संतान के दीर्घायु की कामना करती है। इस दिन यहां वट वृक्ष की बारह या एक सौ आठ बार परिक्रमा करने का विधान है। व्रत सामग्री में मीठा पुआ, आटा से बनाया वर, पुड़ी , चना, खरबूजा, आम, खीरा और हाथ से बने बांस के पंखे को रखकर पूजा की जाती है और व्रत रखकर कथा सुनती है। वट वृक्ष के फल से पानी के साथ व्रत को तोड़ती है। राजस्थान में भी अमावस्या तिथि का बहुत महत्व है। यहां भी सुहाग की रक्षा के लिए सुहागिनें व्रत रखती है। मिठाई , फल और चुरमा से पूजा करती है। साथ में एक सौ आठ परिक्रमा भी वट वृक्ष की करके सदा सुहाग रहने की कामना करती है। इस दिन राजस्थान में दाल बाटी और चूरमा बनाकर व्रत तोड़ा जाता है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को महाराष्ट्र-गुजरात में वट सावित्री का व्रत रखा जाता है जो चौबीस जून को है और वट सावित्री की पूजा के साथ वट वृक्ष की एक सौ आठ परिक्रमा की जाती है। महाराष्ट्र में इस दिन पोरणपोली बनाया जाता है। सुहागिनें एक-दूसरे को सुहाग देती है।
श्रीपूज्य बिनपतिसूरि भो गुजरात के राजा का प्रादेश-पत्र और प्रभयकुमार की दो विज्ञप्तियां पढ़कर संघ की प्रार्थना से श्रीमजमेर के संघ के साथ तीर्थ वन्दनार्थ चले । विधिजिन घर में प्रविधि की प्रवृत्ति सत्त में धी ढलने जैसी बात है । २४ वें पच में विधिघमियों की इस फरियाद पर कि "राजा ने दसही विधि-चैत्य प्रविधि करने वालों के हवाले दे दिये हैं।" प्राचार्य कहते हैं- यद्यपि राजा ने दुष्षम काल के वश हो दश विधि-चैत्य तुमसे ले लिए हैं, तथापि धार्मिकों को उनमें जाकर विधिचैत्य का ही व्यवहार करना चाहिए, भले ही ये सव लाठियों के साथ सामना करने को खड़े हो । "घम्मिउ धम्मुकज्जु साहंतउ, परू मारह कीवह जुज्झन्तउ । तुवि तसु धम्मु प्रत्थि नहु नासइ, परम पइ निवसइ सो सास ॥२६॥ ( अपभ्रंश का० ऋ० पृ० ४२ ) ऊपर के पद्य में प्राचार्य ने धार्मिकों को उत्साहित करते हुए कहा है - धर्मकार्य को साधन करते हुए धार्मिकों को कोई क्रोध के वश हो मार डाले तब भी उसका घर्म नहीं जाता और वह मर कर शाश्वत पद अर्थात् "मोक्ष स्थान में निवास करता है ।" जिनदत्तसूरि के उपर्युक्त प्रकार के उपदेशों से ही उनके पाटन के बिहार पर प्रतिबन्ध लगाया गया था और कुमारपाल को राजस्वकाल में तो केवल जिनदत्त तथा इनके अनुयायियों का ही नहीं, पौरमिक, भांचलिक, विधिधर्म प्रवर्तक आदि सभी नये गच्छ वालों का पाटन में ग्राना बन्द हो गया था। कुमारपाल के स्वर्गवास को बाद १२३६ में एक पौरमिक साधु पाटन में आया और पता लगने पर राजकर्मचारियों ने पूछा- कि "तुम पौमिक गच्छ को हो," उसने कहा - "मैं पौर्णमिक नहीं हूँ, मैं तो साधु-पौमिक हूं." इस प्रकार पौमिक से अपने को जुदा बताने पर हो उसे पाटन में ठहरने दिया, कुमारपाल के राज्य तक ही नहीं उसके बाद द्वितीय भीमदेव के राज्य तक उक्त पौगंमिक खरतर आादि गच्छों का पाटन में माना जाना बन्द था । अजमेर से जिनपतिसूरि को भक्तों ने शत्रुञ्जय यादि तीर्थों की यात्रा के लिए संघ की तैयारी कर रक्खी थी औौर गुजरात के राजा पर मर्जी लिखने पर गुजरात में होकर संघ को जाने की प्रज्ञा भी मिल सकती थी, परन्तु सवाल यह था कि पाटन में संघ को जाने पर "खरतर प्राचार्य को" नगर में माने का मनाई हुक्म हो जाय तो मुश्किली खड़ी हो सकती है, इस भविष्य की चिन्ता को लक्ष्य में अजमेर के संघ को बात चारों ओर फैली और विक्रमपुर, उच्चा, मरुफोट, जैसलमेर, फलोधी, दिल्ली, वागड़, मण्डोवर पादि नगरों के रहने वाले यात्रियों के समूह श्रा मिले । श्रीपूज्य भी अपने विद्या-तपो प्रादि गुणों से स्थान-स्थान में जैन प्रवचन की शोभा बढ़ाते हुए संघ के साथ चन्द्रावती पहुंचे। वहां पर पूर्णिमा- पक्ष के प्राचार्य "भकलंकदेवसूरि" ने भी ज्ञानगोष्ठी करते हुए जिनपतिसूरि को पूछा कि "क्या साधु को तीर्थयात्रा के लिए घूमना शास्त्रोक्त है ?" श्रीपूज्य ने कहा "कारणवश रखकर पाटन निवासी विधि-धर्म का अनुयायी एक भगशाली गृहस्थ किसी बड़े प्रादमी को कहकर खरतराचार्यों का पाटन में माना जाना शुरु करवाना चाहता था । एक दिन वह भांडशालिक गृहस्थ व्यवहारी साधु अभयकुमार सेठ के साथ बैठा हुआ था, सेठ को प्रसन्नचित्त देखकर उसने अभयकुमार को सम्बोधित किया "अभयकुमार ! तव सोजम्येन तव कोटिसंख्यद्रव्याधिपत्येन तव राज्यमान्यतया किमस्मः कं फलै । यत्त्वमस्मद्गुरु श्री उज्जयन्त शत्रुञ्जया! दितीर्थेषु यात्रा न कारयसि ?" भरणशाली के उपर्युक्त शब्द जो अपने सम्ब न्धी अभयकुमार को उपालम्भ पूर्वक कहे गए है, इससे यही सूचित होता है कि अभयकुमार सेठ जैसे राजमान्य और धनाढ्य गृहस्थों के बिना पाटन में प्रान जाने का मार्ग खुलना कठिन था, अपने सांसारिक सम्बन्धी को इस प्रार्थना पर अभयकुमार ने तुरंत ध्यान दिया और संघ को गुजरात प्राने की प्राय के प्रति रिक्त उनके साथ जो आचार्य आदि हों उनको भी किसी प्रकार की रोक टोक न होने की वाचिक मञ्जरी ले ली और उसकी सूचना अजमेर को संघ और जिनपतिसूरिजी को अपने पत्रों द्वारा दे दी, यह कार्य अभयकुमार नो प्रच्छा ही किया, राजकीय प्राज्ञा, निषेध, परिस्थितियों के वश होते हैं तो परिस्थिति को बदलने पर, उनको बदलना ही चाहिए, परन्तु पाटन नगर अनेक गच्छों का केन्द्रस्थान था। खरतर, पौर्णमिक आदि सुधारक गच्छों से पुराने गच्छ नाराज तो थे ही फिर वे पुरानी राजाज्ञाओं को क्यों शिथिल होने देते? खरतरगच्छ वालों के लिए तो १३ वीं शती के मध्यभाग में ही मार्ग खुल गया था, परन्तु पौर्णमिक, आंचलिक, गच्छ वाले तो जब तक पाटन में राजपूतों का राज्य रहा तब तक पाटन से दूर-दूर ही फिरते थे । जब पुराने पाटन का मुसलमानों को प्राक्रमरण से भंग हुआ और मुसलमानों ने वहां अपना राज्य जमा कर नया पाटन बसाया तब से पौमिक आदि पाटन में प्रवेश कर पाए थे । मुझे आचार्य पद पर बैठा दिया है, इसलिए संघ के साथ विचरता हुमा प्रज्ञात देशों की भाषा से भो परिचित हो जाऊंगा मोर साथ-साथ तीर्थयात्रा भी हो जायगी। इसके प्रतिरिक्त संघ ने प्रत्यन्त प्रार्थना की कि प्रभो ! अनेक चार्वाक लोकों से भरी हुई गुर्जर भूमि में तीर्थ प्राए हुए हैं, हम वहां तीर्थ यात्रार्थ जाते हैं। कोई नास्तिक हमारे सामने तीर्थ यात्रा का निषेध प्रमाणित करेगा तो हम भज्ञानी उसको क्या उत्तर देंगे, इसलिए भाप संघ के साथ अवश्य पधारें ताकि जिनशासन का लाघव न हो, इसलिए हम संघ के साथ जा रहे हैं।" श्री मकलंकदेवसरिजी ने जिनपतिसूरिजी के इस उत्तर को योग्य माना। दोनों प्राचार्यों के बीच देर तक ज्ञान-गोष्ठी होती रही । मिक्षा का समय हो जाने पर प्रकलंकसूरि प्रपने स्थान पर गए । दूसरे दिन जिनपतिसूरि संघ के साथ कासहृद गए। वहां पौरगंमिक प्राचार्य श्री तिलकप्रभ अनेक साधुओं के साथ संघ के स्थान पर भाए । परस्पर सुखवार्ताद शिष्टाचार हुमा और तिलकप्रम के साथ श्रीपूज्य ने ज्ञानगोष्ठी की। मन्त में तिलकप्रभसूरि ने भी श्रीपूज्य को प्रशंसा की। वहां से संघ प्राशापल्ली पहुंचा, वहां श्रावक क्षेमकर अपने संसारी पुत्र प्रद्युम्नाचार्य को वन्दनार्थ वादिदेवाचार्य सम्बन्धी पौषधशाला में गया । वन्दन के बाद प्रद्युम्नाचार्य ने क्षेमंकर को कहा - जिनपतिसूरि को गुरु के रूप में स्वीकार कर अच्छा नहीं किया। क्षेमंकर ने कहा- मेरी समझ से तो मैंने प्रच्छा ही किया है। प्रद्युम्नसूरि ने कहा - मरुस्थली के जड़ लोगों को पाकर आपके गुरु ने अपने को सर्वज्ञ मान लिया है सो ठीक है, क्योंकि "निवृक्षे देशे एरण्डोsपि कल्पवृक्षायते" परन्तु तुम्हारे जैसे देवसूरि के वचनामृत का पान करने वाले समझदारों का मनोभाव बदल गया, इससे हमारा दिल दुःखता है । वहां से भागे बढ़कर संघ ने स्तम्भनक, गिरनार मादि तीर्थों की यात्रा की। मार्ग की तकलीफ के कारण संघ शत्रुञ्जय नहीं गया। यात्रा से लौट कर संघ वापस प्राशापल्ली भाया । इस समय क्षेमंकर ने जिनपति के साथ प्रद्युम्नाचार्य का शास्त्रार्थ होने की बात फैलाई१ और दोनों को ग्रामने-सामने भिड़ाया। शास्त्रार्थ का नाटक हुमा और जिनपति ने कहा- दूसरे सिद्धान्त ग्रन्थ तो दूर रहो, हम "प्रोषनियुक्ति " के प्रमाणों से देवगृह तथा जिनप्रतिमा को मनायतन प्रमाणित कर दें तो हमारी जीत मानी जायगी ? प्रद्युम्नसूरि ने कहा- प्रमाण, परन्तु अभी टाइम बहुत हो गया है, प्रागे बात कल प्रभात को होगी। प्रद्युम्नाचार्य ने रात्रि के समय अपने पक्ष के प्राचार्य मोर पण्डितों के साथ प्रदीप के प्रकाश में "प्रोध- नियुक्ति" सूत्रवृत्ति के पुस्तक पड़े, परन्तु १. क्षेमंकर यद्यपि प्रद्य म्नाचार्य का पिता लगता था, तथापि वह स्वयं खरतरगच्छ का अनुयायी बन चुका था और अपने पुत्र प्रद्य म्नाचार्य को किसी प्रकार खरतरगच्छ में खींचना चाहता था। प्रद्य स्नाचार्य एक विद्वान भाचार्य थे, माशापल्ली के लोग उन पर मुग्ध थे। क्षेमंकर ने उन्हें शास्त्रार्थ के नाम पर प्रपंच में फंसा दिया। कैसा भी विद्वान् क्यों न हो वह झूठे जाल में फंसकर अपमानित हो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। जिनपतिसूरि के भक्त "जिनहितोपाध्याय" मोर "रामदेव" जैसे गृहस्थ जाल बिछाने में सिद्धहस्त थे। अजमेर में ऊकेशगच्छय भाचार्य पद्मप्रभ को इसी प्रकार के जाल में फांसकर अपमानित किया था, अजमेर के राजा पृथ्वीराज के परिकर को जिनमें से अनेक पद्मप्रभाचार्य के पुरान भक्त थे, धन की थैलियां पाकर पद्यप्रभाचार्य के विरुद्ध हो चुके थे, जिस बात की पद्मप्रभाचार्य ने पृथ्वीराज के सामने सभा में खुल्ली शिकायत की थी, पाचार्य ने कहा- "महाराज ! मण्डलेश्वरो लञ्चाग्रहरण एव प्रवीणो न गुरिगनां गुरगग्रहणे" अर्थात् हे राजा साहब ! भापका मण्डलेश्वर कई मास लांच लेने में ही प्रवीण है गुणी के गुण ग्रहरण करने में नहीं, इस प्रकार राजा के सामने शिकायत होने पर भी राजा न उस तरफ कुछ ध्यान नहीं दिया। शास्त्रार्थ करने के लिए इस प्रकार की सभाएं नहीं होती, उसमें प्रमुख होता है, मध्यस्थ सभ्य होते हैं, वादी प्रतिवादी के वक्तव्यों को लेखबद्ध कर उनके ऊपर से फैसला देने वाले निरर्णायक होते हैं, प्रजमेर की शास्त्रार्थसभा क्या थी, तमाशा करने वालों का थियेटर था। तमाशाबीन लोग इकट्ठे हो जाते, शास्त्रार्य करने वाले मुल से असभ्य वचन निकालकर विरोधी को अपमानित करते थे, राजा साहब सभा में प्रात मोर पूछते - कैसे कौन जीता ? कौन हारा ? उनके गुर्गे जिनकी तरफ से पेट भर जाता, उनकी तरफ अगुली कर कहते - ये जीते और उनकी जय तृतीम-परिच्छेद ] "अनायतन" प्रतिपादक स्थान नहीं मिला। श्रीपूज्य के पास उन्होंने मनुष्य भेजा और पूज्य ने उनकी पृच्छा के अनुसार "बोधनियुक्ति" का के उद्देश कहा, प्रद्युम्नसूरि मादि ने पूज्य के कथनानुसार उद्देश की गवेषणा करते हुए वह स्थल पाया। मनायतन प्रतिपादक गाथा-सम्बद्ध-वृत्ति के बक्षर मन्य गाथाक्षरों के साथ मिला कर उन पर विचार किया। प्रातः समय प्रद्युम्नाचार्य प्रभयड दण्डनायक के साथ जिनपतिसूरि के स्थान पर जयकार पुकारते, क्या वादसभामों का यही पोजिशन होता है ? अजमेर में इसी प्रकार की धांधागर्दी से पद्मप्रभाचार्य को अपमानित किया था । सभा शास्त्रार्थ का मनचाहा वर्णन करने के बाद गुर्वावलीकार लिखता है"विनद्वयानन्तरं प्रतिज्ञातार्थनिर्वाहकः सबलवाहनो महाराजाधिराजश्रीपृथ्वीराजः श्री अजयमेरी निजभवलगृहे समागत्य ततः स्थानाढस्तिस्कन्याघिरूढेन जयपत्रेरण सह पौषधशालायामागतो ददौ व जयपत्रं श्रीपूज्यानां हस्ते । पठितश्चाशीर्वादः श्रीपूज्यैः श्रावकंश्च कारित महावर्धापनकं, तस्मिंश्च वर्धापनके श्रे० रामदेवेनात्मगृहात पारुत्थद्रम्माः षोडश सहस्रारिण व्ययीकृताः ।" अजमेर के राजा साहब हाथी पर भारुढ़ होकर जिनपतिसूरिजी को उनक स्थान पर "जयपत्र" देने जाते हैं, सूरिजी राजा साहब को प्राशीर्वाद देते हैं प्रौर सूरिजी के भक्त बधाई बांटते हैं, सूरिजी के भक्त सेठ रामदेव अपने घर से सोलह हजार रुपया खर्च करते हैं । यहां कोई गुर्वावलीकार को पूछे कि आपके प्राचार्य की विजय पर नगर में वर्धापन तो श्रावकों ने ही किया था। तब सेठ रामदेव को घर से खर्च होने वाल १६००० ) सोलह हजार रुपया किस मार्ग से गया, इसका कोई उत्तर दे सकता है ? जिस प्रकार से भजमेर में घांघागर्दी से पद्मप्रभाचार्य का अपमान किया गया, उसी प्रकार से प्राशापाल्ली में प्रद्य म्नाचार्य को कृत्रिम प्रमाण उपस्थित करके अपनी जीत दिखाई गई, दो पत्र छिपाने का जो हो हल्ला मचाया था, वास्तव में वे दो पत्र "भोधनियुक्ति" की वृत्ति में घुसेड़े हुए थे, उनका तथा मूल वृत्ति का सम्बन्ध ठीक ढंग से न बैठने के कारण प्रद्य म्नसूरि दो पत्रों को एक तरफ रखकर भगले पत्र के साथ पूर्वपत्र का सम्बन्ध मिलता है या नहीं इसकी जांच कर रहे थे, इतने में जिनहितोपाध्याय ने पान छिपाने का जो हल्ला मचाया, वीरनाग जैसे ने चोरी करने को दण्ड की बात चलाई और हण्टर चलने लगे। क्या शास्त्रार्थ- सभाएं इसी
श्रीपूज्य बिनपतिसूरि भो गुजरात के राजा का प्रादेश-पत्र और प्रभयकुमार की दो विज्ञप्तियां पढ़कर संघ की प्रार्थना से श्रीमजमेर के संघ के साथ तीर्थ वन्दनार्थ चले । विधिजिन घर में प्रविधि की प्रवृत्ति सत्त में धी ढलने जैसी बात है । चौबीस वें पच में विधिघमियों की इस फरियाद पर कि "राजा ने दसही विधि-चैत्य प्रविधि करने वालों के हवाले दे दिये हैं।" प्राचार्य कहते हैं- यद्यपि राजा ने दुष्षम काल के वश हो दश विधि-चैत्य तुमसे ले लिए हैं, तथापि धार्मिकों को उनमें जाकर विधिचैत्य का ही व्यवहार करना चाहिए, भले ही ये सव लाठियों के साथ सामना करने को खड़े हो । "घम्मिउ धम्मुकज्जु साहंतउ, परू मारह कीवह जुज्झन्तउ । तुवि तसु धम्मु प्रत्थि नहु नासइ, परम पइ निवसइ सो सास ॥छब्बीस॥ ऊपर के पद्य में प्राचार्य ने धार्मिकों को उत्साहित करते हुए कहा है - धर्मकार्य को साधन करते हुए धार्मिकों को कोई क्रोध के वश हो मार डाले तब भी उसका घर्म नहीं जाता और वह मर कर शाश्वत पद अर्थात् "मोक्ष स्थान में निवास करता है ।" जिनदत्तसूरि के उपर्युक्त प्रकार के उपदेशों से ही उनके पाटन के बिहार पर प्रतिबन्ध लगाया गया था और कुमारपाल को राजस्वकाल में तो केवल जिनदत्त तथा इनके अनुयायियों का ही नहीं, पौरमिक, भांचलिक, विधिधर्म प्रवर्तक आदि सभी नये गच्छ वालों का पाटन में ग्राना बन्द हो गया था। कुमारपाल के स्वर्गवास को बाद एक हज़ार दो सौ छत्तीस में एक पौरमिक साधु पाटन में आया और पता लगने पर राजकर्मचारियों ने पूछा- कि "तुम पौमिक गच्छ को हो," उसने कहा - "मैं पौर्णमिक नहीं हूँ, मैं तो साधु-पौमिक हूं." इस प्रकार पौमिक से अपने को जुदा बताने पर हो उसे पाटन में ठहरने दिया, कुमारपाल के राज्य तक ही नहीं उसके बाद द्वितीय भीमदेव के राज्य तक उक्त पौगंमिक खरतर आादि गच्छों का पाटन में माना जाना बन्द था । अजमेर से जिनपतिसूरि को भक्तों ने शत्रुञ्जय यादि तीर्थों की यात्रा के लिए संघ की तैयारी कर रक्खी थी औौर गुजरात के राजा पर मर्जी लिखने पर गुजरात में होकर संघ को जाने की प्रज्ञा भी मिल सकती थी, परन्तु सवाल यह था कि पाटन में संघ को जाने पर "खरतर प्राचार्य को" नगर में माने का मनाई हुक्म हो जाय तो मुश्किली खड़ी हो सकती है, इस भविष्य की चिन्ता को लक्ष्य में अजमेर के संघ को बात चारों ओर फैली और विक्रमपुर, उच्चा, मरुफोट, जैसलमेर, फलोधी, दिल्ली, वागड़, मण्डोवर पादि नगरों के रहने वाले यात्रियों के समूह श्रा मिले । श्रीपूज्य भी अपने विद्या-तपो प्रादि गुणों से स्थान-स्थान में जैन प्रवचन की शोभा बढ़ाते हुए संघ के साथ चन्द्रावती पहुंचे। वहां पर पूर्णिमा- पक्ष के प्राचार्य "भकलंकदेवसूरि" ने भी ज्ञानगोष्ठी करते हुए जिनपतिसूरि को पूछा कि "क्या साधु को तीर्थयात्रा के लिए घूमना शास्त्रोक्त है ?" श्रीपूज्य ने कहा "कारणवश रखकर पाटन निवासी विधि-धर्म का अनुयायी एक भगशाली गृहस्थ किसी बड़े प्रादमी को कहकर खरतराचार्यों का पाटन में माना जाना शुरु करवाना चाहता था । एक दिन वह भांडशालिक गृहस्थ व्यवहारी साधु अभयकुमार सेठ के साथ बैठा हुआ था, सेठ को प्रसन्नचित्त देखकर उसने अभयकुमार को सम्बोधित किया "अभयकुमार ! तव सोजम्येन तव कोटिसंख्यद्रव्याधिपत्येन तव राज्यमान्यतया किमस्मः कं फलै । यत्त्वमस्मद्गुरु श्री उज्जयन्त शत्रुञ्जया! दितीर्थेषु यात्रा न कारयसि ?" भरणशाली के उपर्युक्त शब्द जो अपने सम्ब न्धी अभयकुमार को उपालम्भ पूर्वक कहे गए है, इससे यही सूचित होता है कि अभयकुमार सेठ जैसे राजमान्य और धनाढ्य गृहस्थों के बिना पाटन में प्रान जाने का मार्ग खुलना कठिन था, अपने सांसारिक सम्बन्धी को इस प्रार्थना पर अभयकुमार ने तुरंत ध्यान दिया और संघ को गुजरात प्राने की प्राय के प्रति रिक्त उनके साथ जो आचार्य आदि हों उनको भी किसी प्रकार की रोक टोक न होने की वाचिक मञ्जरी ले ली और उसकी सूचना अजमेर को संघ और जिनपतिसूरिजी को अपने पत्रों द्वारा दे दी, यह कार्य अभयकुमार नो प्रच्छा ही किया, राजकीय प्राज्ञा, निषेध, परिस्थितियों के वश होते हैं तो परिस्थिति को बदलने पर, उनको बदलना ही चाहिए, परन्तु पाटन नगर अनेक गच्छों का केन्द्रस्थान था। खरतर, पौर्णमिक आदि सुधारक गच्छों से पुराने गच्छ नाराज तो थे ही फिर वे पुरानी राजाज्ञाओं को क्यों शिथिल होने देते? खरतरगच्छ वालों के लिए तो तेरह वीं शती के मध्यभाग में ही मार्ग खुल गया था, परन्तु पौर्णमिक, आंचलिक, गच्छ वाले तो जब तक पाटन में राजपूतों का राज्य रहा तब तक पाटन से दूर-दूर ही फिरते थे । जब पुराने पाटन का मुसलमानों को प्राक्रमरण से भंग हुआ और मुसलमानों ने वहां अपना राज्य जमा कर नया पाटन बसाया तब से पौमिक आदि पाटन में प्रवेश कर पाए थे । मुझे आचार्य पद पर बैठा दिया है, इसलिए संघ के साथ विचरता हुमा प्रज्ञात देशों की भाषा से भो परिचित हो जाऊंगा मोर साथ-साथ तीर्थयात्रा भी हो जायगी। इसके प्रतिरिक्त संघ ने प्रत्यन्त प्रार्थना की कि प्रभो ! अनेक चार्वाक लोकों से भरी हुई गुर्जर भूमि में तीर्थ प्राए हुए हैं, हम वहां तीर्थ यात्रार्थ जाते हैं। कोई नास्तिक हमारे सामने तीर्थ यात्रा का निषेध प्रमाणित करेगा तो हम भज्ञानी उसको क्या उत्तर देंगे, इसलिए भाप संघ के साथ अवश्य पधारें ताकि जिनशासन का लाघव न हो, इसलिए हम संघ के साथ जा रहे हैं।" श्री मकलंकदेवसरिजी ने जिनपतिसूरिजी के इस उत्तर को योग्य माना। दोनों प्राचार्यों के बीच देर तक ज्ञान-गोष्ठी होती रही । मिक्षा का समय हो जाने पर प्रकलंकसूरि प्रपने स्थान पर गए । दूसरे दिन जिनपतिसूरि संघ के साथ कासहृद गए। वहां पौरगंमिक प्राचार्य श्री तिलकप्रभ अनेक साधुओं के साथ संघ के स्थान पर भाए । परस्पर सुखवार्ताद शिष्टाचार हुमा और तिलकप्रम के साथ श्रीपूज्य ने ज्ञानगोष्ठी की। मन्त में तिलकप्रभसूरि ने भी श्रीपूज्य को प्रशंसा की। वहां से संघ प्राशापल्ली पहुंचा, वहां श्रावक क्षेमकर अपने संसारी पुत्र प्रद्युम्नाचार्य को वन्दनार्थ वादिदेवाचार्य सम्बन्धी पौषधशाला में गया । वन्दन के बाद प्रद्युम्नाचार्य ने क्षेमंकर को कहा - जिनपतिसूरि को गुरु के रूप में स्वीकार कर अच्छा नहीं किया। क्षेमंकर ने कहा- मेरी समझ से तो मैंने प्रच्छा ही किया है। प्रद्युम्नसूरि ने कहा - मरुस्थली के जड़ लोगों को पाकर आपके गुरु ने अपने को सर्वज्ञ मान लिया है सो ठीक है, क्योंकि "निवृक्षे देशे एरण्डोsपि कल्पवृक्षायते" परन्तु तुम्हारे जैसे देवसूरि के वचनामृत का पान करने वाले समझदारों का मनोभाव बदल गया, इससे हमारा दिल दुःखता है । वहां से भागे बढ़कर संघ ने स्तम्भनक, गिरनार मादि तीर्थों की यात्रा की। मार्ग की तकलीफ के कारण संघ शत्रुञ्जय नहीं गया। यात्रा से लौट कर संघ वापस प्राशापल्ली भाया । इस समय क्षेमंकर ने जिनपति के साथ प्रद्युम्नाचार्य का शास्त्रार्थ होने की बात फैलाईएक और दोनों को ग्रामने-सामने भिड़ाया। शास्त्रार्थ का नाटक हुमा और जिनपति ने कहा- दूसरे सिद्धान्त ग्रन्थ तो दूर रहो, हम "प्रोषनियुक्ति " के प्रमाणों से देवगृह तथा जिनप्रतिमा को मनायतन प्रमाणित कर दें तो हमारी जीत मानी जायगी ? प्रद्युम्नसूरि ने कहा- प्रमाण, परन्तु अभी टाइम बहुत हो गया है, प्रागे बात कल प्रभात को होगी। प्रद्युम्नाचार्य ने रात्रि के समय अपने पक्ष के प्राचार्य मोर पण्डितों के साथ प्रदीप के प्रकाश में "प्रोध- नियुक्ति" सूत्रवृत्ति के पुस्तक पड़े, परन्तु एक. क्षेमंकर यद्यपि प्रद्य म्नाचार्य का पिता लगता था, तथापि वह स्वयं खरतरगच्छ का अनुयायी बन चुका था और अपने पुत्र प्रद्य म्नाचार्य को किसी प्रकार खरतरगच्छ में खींचना चाहता था। प्रद्य स्नाचार्य एक विद्वान भाचार्य थे, माशापल्ली के लोग उन पर मुग्ध थे। क्षेमंकर ने उन्हें शास्त्रार्थ के नाम पर प्रपंच में फंसा दिया। कैसा भी विद्वान् क्यों न हो वह झूठे जाल में फंसकर अपमानित हो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। जिनपतिसूरि के भक्त "जिनहितोपाध्याय" मोर "रामदेव" जैसे गृहस्थ जाल बिछाने में सिद्धहस्त थे। अजमेर में ऊकेशगच्छय भाचार्य पद्मप्रभ को इसी प्रकार के जाल में फांसकर अपमानित किया था, अजमेर के राजा पृथ्वीराज के परिकर को जिनमें से अनेक पद्मप्रभाचार्य के पुरान भक्त थे, धन की थैलियां पाकर पद्यप्रभाचार्य के विरुद्ध हो चुके थे, जिस बात की पद्मप्रभाचार्य ने पृथ्वीराज के सामने सभा में खुल्ली शिकायत की थी, पाचार्य ने कहा- "महाराज ! मण्डलेश्वरो लञ्चाग्रहरण एव प्रवीणो न गुरिगनां गुरगग्रहणे" अर्थात् हे राजा साहब ! भापका मण्डलेश्वर कई मास लांच लेने में ही प्रवीण है गुणी के गुण ग्रहरण करने में नहीं, इस प्रकार राजा के सामने शिकायत होने पर भी राजा न उस तरफ कुछ ध्यान नहीं दिया। शास्त्रार्थ करने के लिए इस प्रकार की सभाएं नहीं होती, उसमें प्रमुख होता है, मध्यस्थ सभ्य होते हैं, वादी प्रतिवादी के वक्तव्यों को लेखबद्ध कर उनके ऊपर से फैसला देने वाले निरर्णायक होते हैं, प्रजमेर की शास्त्रार्थसभा क्या थी, तमाशा करने वालों का थियेटर था। तमाशाबीन लोग इकट्ठे हो जाते, शास्त्रार्य करने वाले मुल से असभ्य वचन निकालकर विरोधी को अपमानित करते थे, राजा साहब सभा में प्रात मोर पूछते - कैसे कौन जीता ? कौन हारा ? उनके गुर्गे जिनकी तरफ से पेट भर जाता, उनकी तरफ अगुली कर कहते - ये जीते और उनकी जय तृतीम-परिच्छेद ] "अनायतन" प्रतिपादक स्थान नहीं मिला। श्रीपूज्य के पास उन्होंने मनुष्य भेजा और पूज्य ने उनकी पृच्छा के अनुसार "बोधनियुक्ति" का के उद्देश कहा, प्रद्युम्नसूरि मादि ने पूज्य के कथनानुसार उद्देश की गवेषणा करते हुए वह स्थल पाया। मनायतन प्रतिपादक गाथा-सम्बद्ध-वृत्ति के बक्षर मन्य गाथाक्षरों के साथ मिला कर उन पर विचार किया। प्रातः समय प्रद्युम्नाचार्य प्रभयड दण्डनायक के साथ जिनपतिसूरि के स्थान पर जयकार पुकारते, क्या वादसभामों का यही पोजिशन होता है ? अजमेर में इसी प्रकार की धांधागर्दी से पद्मप्रभाचार्य को अपमानित किया था । सभा शास्त्रार्थ का मनचाहा वर्णन करने के बाद गुर्वावलीकार लिखता है"विनद्वयानन्तरं प्रतिज्ञातार्थनिर्वाहकः सबलवाहनो महाराजाधिराजश्रीपृथ्वीराजः श्री अजयमेरी निजभवलगृहे समागत्य ततः स्थानाढस्तिस्कन्याघिरूढेन जयपत्रेरण सह पौषधशालायामागतो ददौ व जयपत्रं श्रीपूज्यानां हस्ते । पठितश्चाशीर्वादः श्रीपूज्यैः श्रावकंश्च कारित महावर्धापनकं, तस्मिंश्च वर्धापनके श्रेशून्य रामदेवेनात्मगृहात पारुत्थद्रम्माः षोडश सहस्रारिण व्ययीकृताः ।" अजमेर के राजा साहब हाथी पर भारुढ़ होकर जिनपतिसूरिजी को उनक स्थान पर "जयपत्र" देने जाते हैं, सूरिजी राजा साहब को प्राशीर्वाद देते हैं प्रौर सूरिजी के भक्त बधाई बांटते हैं, सूरिजी के भक्त सेठ रामदेव अपने घर से सोलह हजार रुपया खर्च करते हैं । यहां कोई गुर्वावलीकार को पूछे कि आपके प्राचार्य की विजय पर नगर में वर्धापन तो श्रावकों ने ही किया था। तब सेठ रामदेव को घर से खर्च होने वाल सोलह हज़ार ) सोलह हजार रुपया किस मार्ग से गया, इसका कोई उत्तर दे सकता है ? जिस प्रकार से भजमेर में घांघागर्दी से पद्मप्रभाचार्य का अपमान किया गया, उसी प्रकार से प्राशापाल्ली में प्रद्य म्नाचार्य को कृत्रिम प्रमाण उपस्थित करके अपनी जीत दिखाई गई, दो पत्र छिपाने का जो हो हल्ला मचाया था, वास्तव में वे दो पत्र "भोधनियुक्ति" की वृत्ति में घुसेड़े हुए थे, उनका तथा मूल वृत्ति का सम्बन्ध ठीक ढंग से न बैठने के कारण प्रद्य म्नसूरि दो पत्रों को एक तरफ रखकर भगले पत्र के साथ पूर्वपत्र का सम्बन्ध मिलता है या नहीं इसकी जांच कर रहे थे, इतने में जिनहितोपाध्याय ने पान छिपाने का जो हल्ला मचाया, वीरनाग जैसे ने चोरी करने को दण्ड की बात चलाई और हण्टर चलने लगे। क्या शास्त्रार्थ- सभाएं इसी
४४ = । शिक्षा मनोविज्ञान कार्य करने और करने की वर्तमान अमंदिनी भा सदानीनवि मेरा देश है। यह जो है जो और विचार करने के वर्ण मनुष्ट है। उप मशीन के नहीं होती। वह जो में समस्या पाता है केहि रहा है या कोई गरे बम से विचार मानवीय के लिए आरम्भ गर्क तथा गोकोत पहिरोग है। मिनाउरको अग्य मानसिक विवाए मिनी है बोके में की जाती है जैअनुभ, गाहपर्य या प्रतिषी जाग है। किताबदारको प्रयास पर होता है । पर अपना गमावासमाधान के अन्दर को देना है कि सृजना है।गमा काह राजन র বরধ রক आने वर्णन पहा है तो वास्तव में व हमार रहा है जो उनके हुई है। पर treanet #शानन्द कोईर 21 {vr 42zा के दो प fer है और दिया है। हमार
चौंतालीस = । शिक्षा मनोविज्ञान कार्य करने और करने की वर्तमान अमंदिनी भा सदानीनवि मेरा देश है। यह जो है जो और विचार करने के वर्ण मनुष्ट है। उप मशीन के नहीं होती। वह जो में समस्या पाता है केहि रहा है या कोई गरे बम से विचार मानवीय के लिए आरम्भ गर्क तथा गोकोत पहिरोग है। मिनाउरको अग्य मानसिक विवाए मिनी है बोके में की जाती है जैअनुभ, गाहपर्य या प्रतिषी जाग है। किताबदारको प्रयास पर होता है । पर अपना गमावासमाधान के अन्दर को देना है कि सृजना है।गमा काह राजन র বরধ রক आने वर्णन पहा है तो वास्तव में व हमार रहा है जो उनके हुई है। पर treanet #शानन्द कोईर इक्कीस {vr बयालीसzा के दो प fer है और दिया है। हमार
बुमराह सितंबर 2022 से एक्शन से बाहर हैं और बाद में पीठ की चोट के कारण आईसीसी टी20 विश्व कप से बाहर हो गए थे। बीसीसीआई ने एक बयान में कहा, तेज गेंदबाज रिहैबिलिटेशन से गुजरे हैं और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) ने उन्हें फिट घोषित किया है। वह जल्द ही टीम इंडिया की वनडे टीम में शामिल होंगे। श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज 10 जनवरी से गुवाहाटी में शुरू होगी। दूसरा और तीसरा मैच 12 और 15 जनवरी को कोलकाता और तिरुवनंतपुरम में खेले जाएंगे। भारत ने दिसंबर में वनडे टीम की घोषणा की थी और शुरूआत में बुमराह को टीम में शामिल नहीं किया गया था, जिसमें कहा गया था कि बीसीसीआई तेज गेंदबाज को तेज गेंदबाजी विभाग में लाने के बारे में विचार करेगी। बुमराह के अलावा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक और अर्शदीप सिंह टीम में अन्य तेज गेंदबाज हैं, जिसमें तेज गेंदबाजी आलराउंडर हार्दिक पांड्या भी शामिल हैं। भारत ने दिसंबर में वनडे टीम की घोषणा की थी और शुरूआत में बुमराह को टीम में शामिल नहीं किया गया था, जिसमें कहा गया था कि बीसीसीआई तेज गेंदबाज को तेज गेंदबाजी विभाग में लाने के बारे में विचार करेगी।
बुमराह सितंबर दो हज़ार बाईस से एक्शन से बाहर हैं और बाद में पीठ की चोट के कारण आईसीसी टीबीस विश्व कप से बाहर हो गए थे। बीसीसीआई ने एक बयान में कहा, तेज गेंदबाज रिहैबिलिटेशन से गुजरे हैं और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी ने उन्हें फिट घोषित किया है। वह जल्द ही टीम इंडिया की वनडे टीम में शामिल होंगे। श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज दस जनवरी से गुवाहाटी में शुरू होगी। दूसरा और तीसरा मैच बारह और पंद्रह जनवरी को कोलकाता और तिरुवनंतपुरम में खेले जाएंगे। भारत ने दिसंबर में वनडे टीम की घोषणा की थी और शुरूआत में बुमराह को टीम में शामिल नहीं किया गया था, जिसमें कहा गया था कि बीसीसीआई तेज गेंदबाज को तेज गेंदबाजी विभाग में लाने के बारे में विचार करेगी। बुमराह के अलावा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, उमरान मलिक और अर्शदीप सिंह टीम में अन्य तेज गेंदबाज हैं, जिसमें तेज गेंदबाजी आलराउंडर हार्दिक पांड्या भी शामिल हैं। भारत ने दिसंबर में वनडे टीम की घोषणा की थी और शुरूआत में बुमराह को टीम में शामिल नहीं किया गया था, जिसमें कहा गया था कि बीसीसीआई तेज गेंदबाज को तेज गेंदबाजी विभाग में लाने के बारे में विचार करेगी।
सिस्मिक इंजीनियरिंग d MAHNmm संजय गोस्वामी संजय गोस्वामी विगत पंद्रह वर्षों से विज्ञान लेखन से जुड़े हैं आपने हिन्दी विज्ञान के क्षेत्र में तीन सौ से अधिक कॅरियर लेख लिखे हैं जो विज्ञान विषयक होते हैं। 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये' में वे विगत लगभग पांच वर्षों से शृंखलाबद्ध लिख रहे हैं । इसके अतिरिक्त विज्ञान लेख, विज्ञान समाचार, विज्ञान कविता, विज्ञान रपट, विज्ञान समीक्षा आदि का लेखन और प्रकाशन हुआ है । कई पुरस्कारों से सम्मानित संजय गोस्वामी हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद्, भा.प.अ. केन्द्र, मुंबई के कार्यकारी सदस्य हैं । आप इन दिनों मुंबई में रहकर हिन्दी विज्ञान पत्रिका में लेखन एवं संपादन से संबद्ध हैं। परिमाण को आधार मानकर उसकी व्यापकता को मापते हैं। भूकंप के परिमाण को मापने की अनेक विधियां हैं।हमारी धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये पचास किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है । ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। भूकंप एक विनाशकारी प्राकृतिक घटना है । भूकंप से होने वाले जोखिम का संबंध मृदा स्थितियों, भूवैज्ञानिक संरचना और संरचनात्मक गतिविधियों के साथ है, जिनका अध्ययन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। भूकंप वैज्ञानिकों का काम भूकंपीय घटनाओं के स्रोत, स्वरूप और आकार का पता लगाना है जिससे विभिन्न एजेंसियों द्वारा उसका इस्तेमाल किया जा सके । प्राकृतिक रूप से आने वाले भूकंप विवर्तनिक भूकंप भी कहलाते हैं क्योंकि ये पृथ्वी के विवर्तनिक गुण से संबंधित होते हैं। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के चलते प्रतिवर्ष देश-विदेश में लाखों लोग न सिर्फ बेघर हो जाते हैं, बल्कि सैकड़ों भूकंप पीड़ितों को अपने परिजनों को भी खोना पड़ता है। पृथ्वी के भूपटल में उत्पन्न तनाव का, उसकी सतह पर अचानक मुक्त होने के कारण पृथ्वी की सतह का हिलना या कांपना, भूकंप कहलाता है। भूकंप प्राकृतिक आपदाओं में से सबसे विनाशकारी विपदा है जिससे मानवीय जीवन की हानि हो सकती है। आमतौर पर भूकंप का प्रभाव अत्यंत विस्तृत क्षेत्र में होता है। भूकंप, व्यक्तियों को घायल करने और उनकी मौत का कारण बनने के साथ ही व्यापक स्तर पर तबाही का कारण बनता है। इस तबाही के अचानक और तीव्र गति से होने के कारण जनमानस को इससे बचाव का समय नहीं मिल पाता है। बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों के दौरान पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर 26 बड़े भूकंप आए, जिससे वैश्विक स्तर पर करीब डेढ़ लाख लोगों की असमय मौत हुई। यह दुर्भाग्य ही है कि भूकंप का परिणाम अत्यंत व्यापक होने के बावजूद अभी तक इसके बारे में सही-सही भविष्यवाणी करने में सफलता नहीं मिली है। इसी कारण से इस आपदा की संभावित प्रतिक्रिया के अनुसार ही कुछ कदम उठाए जाते हैं । इंजीनियरिंग की वह शाखा जिसके अंतर्गत भूकंप का अध्ययन किया जाता है, भूकंप इंजीनियरिंग कहलाती है और भूकंप इंजीनियरिंग का अध्ययन करने वाले इंजीनियर / वैज्ञानिक को इंजीनियरिंग भूकंप कहते हैं । भूकंप के समय एक हल्का सा झटका महसूस होता है । फिर कुछ अंतराल के बाद एक लहरदार या झटकेदार कंपन महसूस होता है, जो पहले झटके से अधिक प्रबल होता है। छोटे भूकंपों के दौरान भूमि कुछ सेकंड तक कांपती है, लेकिन बड़े भूकंपों में यह अवधि एक मिनट से भी अधिक हो सकती है। सन् 1964 में अलास्का में आए भूकंप के दौरान धरती लगभग तीन मिनट तक कंपित होती रही थी। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप को चार साल पूरे हो गए । 25 अप्रैल 2015 को भूकंप ने नेपाल को हिला दिया था। यह भूकंप नेपाल के लिए बहुत विनाशकारी था । 7.9 तीव्रता का था भूकंप । इसने लाखों परिवारों को विस्थापित करने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया। इस भूकंप और इसके बाद आए झटकों ने काठमांडू सहित मध्य नेपाल को प्रभावित किया था तथा इस भूकंप में बारह हजार लोगों की जान गई थी और अरबों डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ था। इसमें 22,000 लोगा घायल भी हुए थे । भूकंप के कारण धरती के कांपने की अवधि विभिन्न इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए • 41 नवम्बर 2019
सिस्मिक इंजीनियरिंग d MAHNmm संजय गोस्वामी संजय गोस्वामी विगत पंद्रह वर्षों से विज्ञान लेखन से जुड़े हैं आपने हिन्दी विज्ञान के क्षेत्र में तीन सौ से अधिक कॅरियर लेख लिखे हैं जो विज्ञान विषयक होते हैं। 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये' में वे विगत लगभग पांच वर्षों से शृंखलाबद्ध लिख रहे हैं । इसके अतिरिक्त विज्ञान लेख, विज्ञान समाचार, विज्ञान कविता, विज्ञान रपट, विज्ञान समीक्षा आदि का लेखन और प्रकाशन हुआ है । कई पुरस्कारों से सम्मानित संजय गोस्वामी हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद्, भा.प.अ. केन्द्र, मुंबई के कार्यकारी सदस्य हैं । आप इन दिनों मुंबई में रहकर हिन्दी विज्ञान पत्रिका में लेखन एवं संपादन से संबद्ध हैं। परिमाण को आधार मानकर उसकी व्यापकता को मापते हैं। भूकंप के परिमाण को मापने की अनेक विधियां हैं।हमारी धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये पचास किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है । ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। भूकंप एक विनाशकारी प्राकृतिक घटना है । भूकंप से होने वाले जोखिम का संबंध मृदा स्थितियों, भूवैज्ञानिक संरचना और संरचनात्मक गतिविधियों के साथ है, जिनका अध्ययन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। भूकंप वैज्ञानिकों का काम भूकंपीय घटनाओं के स्रोत, स्वरूप और आकार का पता लगाना है जिससे विभिन्न एजेंसियों द्वारा उसका इस्तेमाल किया जा सके । प्राकृतिक रूप से आने वाले भूकंप विवर्तनिक भूकंप भी कहलाते हैं क्योंकि ये पृथ्वी के विवर्तनिक गुण से संबंधित होते हैं। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के चलते प्रतिवर्ष देश-विदेश में लाखों लोग न सिर्फ बेघर हो जाते हैं, बल्कि सैकड़ों भूकंप पीड़ितों को अपने परिजनों को भी खोना पड़ता है। पृथ्वी के भूपटल में उत्पन्न तनाव का, उसकी सतह पर अचानक मुक्त होने के कारण पृथ्वी की सतह का हिलना या कांपना, भूकंप कहलाता है। भूकंप प्राकृतिक आपदाओं में से सबसे विनाशकारी विपदा है जिससे मानवीय जीवन की हानि हो सकती है। आमतौर पर भूकंप का प्रभाव अत्यंत विस्तृत क्षेत्र में होता है। भूकंप, व्यक्तियों को घायल करने और उनकी मौत का कारण बनने के साथ ही व्यापक स्तर पर तबाही का कारण बनता है। इस तबाही के अचानक और तीव्र गति से होने के कारण जनमानस को इससे बचाव का समय नहीं मिल पाता है। बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों के दौरान पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर छब्बीस बड़े भूकंप आए, जिससे वैश्विक स्तर पर करीब डेढ़ लाख लोगों की असमय मौत हुई। यह दुर्भाग्य ही है कि भूकंप का परिणाम अत्यंत व्यापक होने के बावजूद अभी तक इसके बारे में सही-सही भविष्यवाणी करने में सफलता नहीं मिली है। इसी कारण से इस आपदा की संभावित प्रतिक्रिया के अनुसार ही कुछ कदम उठाए जाते हैं । इंजीनियरिंग की वह शाखा जिसके अंतर्गत भूकंप का अध्ययन किया जाता है, भूकंप इंजीनियरिंग कहलाती है और भूकंप इंजीनियरिंग का अध्ययन करने वाले इंजीनियर / वैज्ञानिक को इंजीनियरिंग भूकंप कहते हैं । भूकंप के समय एक हल्का सा झटका महसूस होता है । फिर कुछ अंतराल के बाद एक लहरदार या झटकेदार कंपन महसूस होता है, जो पहले झटके से अधिक प्रबल होता है। छोटे भूकंपों के दौरान भूमि कुछ सेकंड तक कांपती है, लेकिन बड़े भूकंपों में यह अवधि एक मिनट से भी अधिक हो सकती है। सन् एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में अलास्का में आए भूकंप के दौरान धरती लगभग तीन मिनट तक कंपित होती रही थी। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप को चार साल पूरे हो गए । पच्चीस अप्रैल दो हज़ार पंद्रह को भूकंप ने नेपाल को हिला दिया था। यह भूकंप नेपाल के लिए बहुत विनाशकारी था । सात.नौ तीव्रता का था भूकंप । इसने लाखों परिवारों को विस्थापित करने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया। इस भूकंप और इसके बाद आए झटकों ने काठमांडू सहित मध्य नेपाल को प्रभावित किया था तथा इस भूकंप में बारह हजार लोगों की जान गई थी और अरबों डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ था। इसमें बाईस,शून्य लोगा घायल भी हुए थे । भूकंप के कारण धरती के कांपने की अवधि विभिन्न इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए • इकतालीस नवम्बर दो हज़ार उन्नीस
Don't Miss! ALERT: अक्षय कुमार की धमाकेदार है तैयारी.. शाहरूख, सलमान.. बच के! साल 2016 अक्षय कुमार के लिए काफी जबरदस्त रहा। एयरलिफ्ट, हाउसफुल 3 और रूस्तम.. तीनों ही फिल्में सुपरहिट रही हैं। बहरहाल, अगले साल की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। नीरज पांडे के निर्देशन में बनने वाली फिल्म 'क्रैक' की बात करें तो फिल्म की शूटिंग जनवरी में शुरु होगी। उम्मीद है कि जनवरी में शुरू होकर फिल्म की शूटिंग मार्च तक चलेगी। बता दें, अक्षय कुमार की यह फिल्म 2017 के अगस्त में रिलीज होगी। इससे पहले नीरज पांडे और अक्षय कुमार ने बेबी और स्पेशल 26 जैसी बेहतरीन फिल्में दी हैं। शाहरूख- सलमान- अक्षय.. जब हुआ जोरदार टक्कर.. नीरज पांडे के निर्देशन में बन रही फिल्म 'क्रैक' साल 2017 के अगस्त में रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय कुमार मेनलीड एक्टर होंगे। अक्षय कुमार की फिल्म जॉली एलएलबी 2 फरवरी 2017 में रिलीज होने वाली है। फिल्म की शूटिंग शुरु हो चुकी है। अक्षय कुमार ने रजनीकांत स्टारर रोबोट 2 के लिए नमस्ते इंग्लैंड को पोस्टपोंड कर दिया है। रजनीकांत की इस फिल्म के विलेन अक्षय कुमार हैं और इस फिल्म के लिए अब उनके फैन्स को हीरो अक्षय कुमार की नमस्ते इंग्लैंड के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा। विपुल अमृतलाल शाह के निर्देशन में बन रही फिल्म नमस्ते इंग्लैंड भी तैयारी भी अगले साल से शुरु कर दी जाएगी। नीरज पांडे औक अक्षय कुमार की फिल्म, टॉयलेट - एक प्रेम कथा। फिल्म एक व्यंग्य होगा और ये कॉमेडी ड्रामा नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होगा। काफी उटल पलट के बाद आखिरकार अक्षय कुमार एक बार हेरा फेरी 3 में फाइनल हो गए हैं। विजय स्टारर फिल्म थेरी की हिंदी रीमेक में अक्षय कुमार फाइनल हो चुके हैं। फिल्म की शूटिंग अगले साल शुरू होगी। रिपोर्ट्स की मानें तो उमंग कुमार की अगली फिल्म में अक्षय कुमार दिख सकते हैं। यह एक साइकोलॉजिकल फिल्म होगी।
Don't Miss! ALERT: अक्षय कुमार की धमाकेदार है तैयारी.. शाहरूख, सलमान.. बच के! साल दो हज़ार सोलह अक्षय कुमार के लिए काफी जबरदस्त रहा। एयरलिफ्ट, हाउसफुल तीन और रूस्तम.. तीनों ही फिल्में सुपरहिट रही हैं। बहरहाल, अगले साल की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। नीरज पांडे के निर्देशन में बनने वाली फिल्म 'क्रैक' की बात करें तो फिल्म की शूटिंग जनवरी में शुरु होगी। उम्मीद है कि जनवरी में शुरू होकर फिल्म की शूटिंग मार्च तक चलेगी। बता दें, अक्षय कुमार की यह फिल्म दो हज़ार सत्रह के अगस्त में रिलीज होगी। इससे पहले नीरज पांडे और अक्षय कुमार ने बेबी और स्पेशल छब्बीस जैसी बेहतरीन फिल्में दी हैं। शाहरूख- सलमान- अक्षय.. जब हुआ जोरदार टक्कर.. नीरज पांडे के निर्देशन में बन रही फिल्म 'क्रैक' साल दो हज़ार सत्रह के अगस्त में रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय कुमार मेनलीड एक्टर होंगे। अक्षय कुमार की फिल्म जॉली एलएलबी दो फरवरी दो हज़ार सत्रह में रिलीज होने वाली है। फिल्म की शूटिंग शुरु हो चुकी है। अक्षय कुमार ने रजनीकांत स्टारर रोबोट दो के लिए नमस्ते इंग्लैंड को पोस्टपोंड कर दिया है। रजनीकांत की इस फिल्म के विलेन अक्षय कुमार हैं और इस फिल्म के लिए अब उनके फैन्स को हीरो अक्षय कुमार की नमस्ते इंग्लैंड के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा। विपुल अमृतलाल शाह के निर्देशन में बन रही फिल्म नमस्ते इंग्लैंड भी तैयारी भी अगले साल से शुरु कर दी जाएगी। नीरज पांडे औक अक्षय कुमार की फिल्म, टॉयलेट - एक प्रेम कथा। फिल्म एक व्यंग्य होगा और ये कॉमेडी ड्रामा नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होगा। काफी उटल पलट के बाद आखिरकार अक्षय कुमार एक बार हेरा फेरी तीन में फाइनल हो गए हैं। विजय स्टारर फिल्म थेरी की हिंदी रीमेक में अक्षय कुमार फाइनल हो चुके हैं। फिल्म की शूटिंग अगले साल शुरू होगी। रिपोर्ट्स की मानें तो उमंग कुमार की अगली फिल्म में अक्षय कुमार दिख सकते हैं। यह एक साइकोलॉजिकल फिल्म होगी।
स्थापित हो जायगी । तब यह अवस्था नहीं रहेगी कि तुम्हारी प्रकृतिका एक भाग तो भगवान्के अर्पित हो और बाकी के भाग अपनी साधारण वृत्तियों में पड़े हों, साधारण चीजोंमें लिप्त हों, बल्कि तब यह होगा कि तुम्हारे सम्पूर्ण जीवनको भगवान् अपने हाथमें ले लेंगे और तुम्हारी प्रकृतिका सम्पूर्ण रूपान्तर क्रमशः साधित होता रहेगा । पूर्णयोगकी साधना में सम्पूर्ण जीवनका रूपान्तर करना होगा, उसको दिव्य बनाना होगा । इस कामको पूरे ब्योरेके साथ करना होगा और यह देखना होगा कि कहीं कोई छोटी-से-छोटी चीज भी बाकी न जाय । इस साधनामें ऐसी कोई चीज नहीं है जो तुच्छ या उपेक्षणीय समझी जाय । तुम यह नहीं कह सकते कि 'जब मैं ध्यान करता हूँ, दर्शनशास्त्रसम्बन्धी पुस्तकें पढ़ता हूँ या इन बार्तालापोंको सुनता हूँ तब तो मैं भागवत-ज्योतिकी ओर अपने आपको खोलकर रक्खूँगा और उसका आवाहन करूँगा, किन्तु जब मैंटा हूँ या किसी मित्रसे मिलता हूँ तब यदि उसको बिल्कुल भूल भी जाऊँ तो चल सकता है।' इस भावको बनाये रखनेका तो यह अर्थ हुआ कि तुम्हारा कभी भी रूपान्तर न हो सकेगा और कभी भी तुम्हें भगवान्के साथ सच्ची एकता न प्राप्त होगी । सदा तुम्हारे दो भाग बने रहेंगे, अधिक-सेअधिक जो कुछ तुम्हें मिल सकेगा वह इस महत्तर जीवनकी कुछ झाँकीमात्र होगी। इसका कारण यह है कि इस अस्थायद्यपि ध्यानके समय तुम्हारी आन्तर चेतनामें कतिप। अनुभूतियाँ और साक्षात्कार तुम्हें भले ही हों, पर तुम्हारा स्थूल शरीर और तुम्हारा बाह्य जीवन तो रूपान्तरित हुए विना यों ही पड़ा रह जायगा । जिस आन्तर प्रकाशका शरीर और बाह्य जीवनपर कोई असर नहीं होता वह किसी विशेष उपयोग में नहीं आता । कारण, इससे यह जगत् तो जैसा-का-तैसा ही रह जाता है। और यही है जो अभीतक लगातार होता आ रहा है। वे लोग भी जिन्हें अति महान् और शक्तिशाली उपलब्धि हुई थी जगत्से अलग हट गये, जिससे वे अपनी आन्तर स्थिरता और शान्तिमें अक्षुब्ध रूपसे निवास कर सकें। इन लोगोंने जगत् को अपने ही मार्गपर चलते रहनेके लिये छोड़ दिया, परिणाम यह हुआ कि विश्वसत्ताकी इस भौतिक भूमिकापर दुःख और जड़ता, मृत्यु और अज्ञानका राज्य पूर्ववत् अबाध गतिसे चालू रहा । जो लोग इस प्रकार किनारा खींच लेते हैं उनके लिये इस उपद्रवसे त्राण पाना, इन कटिनाइयोंसे दूर भागना और दूसरे लोकमें अपने लिये एक सुखी अवस्थाका पा लेना भन्ने ही सुखकर हो, किन्तु इसमें सन्देह नहीं कि वे इस जगत् और जीवनको अमार्जित और अरूपान्तरित अवस्था में ही छोड़ जाते हैं; यही नहीं, बल्कि वे अपनी निजी बाह्य चेतनाको भी अपरिवर्तित अवस्थामें और अपने शरीरको सदाकी नाईं असंस्कृत अवस्था में ही छोड़ देते है । ये लोग जब भौतिक जगत् में वापस लौटें तब यह सम्भव है कि इनकी दशा एक साधारण मनुष्यकी अपेक्षा भी बुरी हो, कारण इन लोगोंने स्थूल वस्तुओंपर प्रभुता प्राप्त करनेकी शक्तिको गँवा दिया होता है, अतएव यह सम्भव है कि भौतिक जीवनके साथ इनका व्यवहार बिल्कुल बेढंगा हो और इस जीवनकी धारामें वे अपनेको असहाय बोध करें तथा उनका जीवन प्रत्येक गुजरती हुई शक्तिकी दयापर निर्भर करे । इस प्रकारका आदर्श उनके लिये भले ही ठीक हो जो इसे चाहते हैं, किन्तु हम लोगोंका योग यह नहीं है। कारण हम चाहते हैं इस जगत्पर तथा उसकी समस्त गतियोंपर भगवान्की विजय और यहाँ, इस पार्थिव जगत्में ही भगवान्की उपलब्धि । परन्तु यदि हम चाहते हैं कि यहाँ भगवान्का राज्य हो तो जो कुछ भी हम हैं, जो कुछ भी हमारे पास है और जो कुछ भी हम यहाँ करते हैं, उस सबको हमें भगवान्को दे देना चाहिये । इस प्रकार सोचनेसे काम नहीं चलेगा कि अमुक बात गौण है अथवा बाह्य जीवन और उसकी आवश्यकताओंसे दिव्य जीवनका कोई सम्बन्ध नहीं है । यदि हम इस तरहका बर्ताव करेंगे तो हम वहाँ ही पड़े रहेंगे जहाँ हम सदा रहे हैं और इस बाह्य जगत्पर विजय कभी मिलेगी ही नहीं, यहाँ इस पार्थिव भूमिकापर किसी चिरस्थायी परिणामकी प्राप्ति होगी ही नहीं । 'जो लोग बहुत अधिक ऊपर उठ चुके हैं, क्या वे इस भूमिकापर फिर वापस आते हैं ?? हाँ, यदि इस भूमिकाका रूपान्तर करनेका उनका सङ्कल्प हो तो जितना अधिक वे ऊपर उठे होंगे, उतना ही उनका यहाँ वापस आना निश्चित है । और जिन लोगोंकी इच्छा यहाँसे भाग जानेकी है, वे भी, जब दूमरी दिशामें पहुँच जाते हैं तब हो सकता है कि यह अनुभव करें कि आखिर इस प्रकार भाग आनेका कोई विशेष फल नहीं हुआ । 'क्या इस बातका स्मरण बहुतोंको रहता है कि वे ऊपर पहुँच गये थे और पुनः वापस आये हैं ?? चेतनाकी एक विशेष अवस्था में पहुँच जानेपर यह स्मृति हो सकती है । आंशिक रूपमे किसी थोड़ेसे कालके लिये इस अवस्थाका स्पर्श करना बहुत अधिक कठिन नहीं है, गभीर ध्यान में, स्वप्नमें अथवा सूक्ष्म जगतोंके दृश्य जब दिखायी देते हैं तब किसीको इस प्रकारका अनुभव या आभास हो सकता है कि पहले वह अमुक जीवन बिता चुका है, उसको अमुक प्रकारका साक्षात्कार हुआ था, अमुक सत्यका उसको ज्ञान हुआ था । परन्तु इसे पूर्ण साक्षात्कार नहीं कहा जा सकता । पूर्ण अवस्थाको प्राप्त करनेके लिये यह आवश्यक है कि साधक उस स्थायी चेतनाको प्राप्त कर ले जो हमारे अंदर ही है, जो सनातन है तथा हमारे भूत, वर्त्तमान और भात्री जीवनको एक साथ धारण किये हुए है । ' जिस समय हम मानसिक प्रवृत्तियों में अथवा बुद्धि के व्यापारोंमें एकाग्र रहते हैं उस समय हम भगवान् को कभीकभी क्यों भूल जाते अथवा उनके स्पर्शको क्यों गँवा देते हैं? यह इसलिये होता है कि तुम्हारी चेतना अभीतक बँटी हुई है । तुम्हारे मनमें भगवान् अभीतक अच्छी तरह बस नहीं गये हैं, अभीतक तुम दिव्य जीवनपर पूर्णरूपसे न्योछावर नहीं हुए हो । नहीं तो चाहे जितना तुम मन-बुद्धिके व्यापारोंमें लीन क्यों न रहो फिर भी तुमको यह भान रहेगा कि भगवान् तुम्हारी सहायता कर रहे हैं और तुमको धारण किये हुए हैं। अपनी प्रत्येक प्रवृत्तिमें, चाहे वह बौद्धिक हो या बाह्य, तुम्हारा एकमात्र मन्त्र होना चाहिये 'स्मरण रखो और समर्पण करो।" तुम जो कुछ भी करो वह सब भगवान् के अर्पणरूप हो । और यह भी तुम्हारे लिये एक सुन्दर साधना बन जायगा और अनेकों मूर्खतापूर्ण और निरर्थक कामोंसे तुम्हारी रक्षा करेगा । 'कर्म करनेके आरम्भ में प्रायः ऐसा किया जा सकता है, किन्तु जैसे-जैसे कोई कार्य में लीन होता जाता है वैसे-वैसे वह भूलता जाता है । स्मृति बनाये रखनेका क्या उपाय है ?" जिस अवस्थाको प्राप्त करना है, जो योगकी वास्तविक पूर्णता है, अन्तिम प्राप्ति और सिद्धि है, जिसके लिये बाकी सब कुछ केवल तैयारीमात्र ही है, वह तो एक ऐसी चेनना है जिसमें भगवान्के त्रिना कुछ भी काम ही नहीं चलता। कारण, उस समय यदि तुम भगवान्के बिना होओ तो तुम्हारी क्रियाका आधार ही लुप्त हो जाता है, ज्ञान, शक्ति सब कुछ चले जाते हैं । परन्तु जबतक तुम यह अनुभव करते रहोगे कि जिन शक्तियोंका तुम उपयोग कर रहे हो वे तुम्हारी अपनी हैं तबतक तुम भगवान्के सहारेको नहीं गँवा दोगे । योगसाधनकी आरम्भिक अवस्था में यह बहुत सम्भव है कि बहुधा तुम भगवान्को भूल जाओ। परन्तु सतत अभीप्साके द्वारा तुम्हारी स्मृति बढ़ जाती है और विस्मृति घटती जाती है। परन्तु इसको किसी कठोर तपस्या या ड्यूटीके रूपमें नहीं करना चाहिये, यह साधना तो प्रेम और आनन्दकी एक सहज अभिव्यक्ति स्वरूप होनी चाहिये । जब तुम इस प्रकार कर सकोगे तब तुम्हारी साधनामें शीघ्र ही एक ऐसी अवस्था आ जायगी कि तुम यदि प्रत्येक क्षण और अपने प्रत्येक कार्यमें भगवान्की उपस्थितिका अनुभव न करो, तो तुम तुरन्त अपने-आपको अकेला, उदास और दुःखी अनुभव करने लगोगे । जब भी तुम्हें यह दिग्वायी पड़े कि तुम भगवान्की उपस्थितिका अनुभव किये बिना ही किसी कामको कर सकते हो और फिर भी चैनसे रह सकते हो, तो तुमको यह समझना चाहिये कि तुम्हारी सत्ताके उस भागका अभीतक समर्पण नहीं हुआ है । यह तो साधारण मानव-समाजका तरीका है, जिसे भगवान्की जरूरत ही क्या है ? परन्तु दिव्य जीवन के साधकका मार्ग सर्वथा भिन्न होता है। और जब भगवान्के साथ तुम्हारी पूर्णरूपसे एकता हो जाती है, तब यदि क्षणभरके लिये भी भगवान् तुमसे अलंग हो जायँ, तो तुम बस निर्जीव हो जाओगे और पछाड़ खाकर गिर पड़ोगे । कारण अब भगवान् ही होते हैं तुम्हारे प्राणके प्राण, तुम्हारे समग्र जीवन, तुम्हारे एकमात्र और सम्पूर्ण शरण । अब यदि भगवान् तुम्हारे साथ न हों तो फिर तुम्हारे पास कुछ रह ही नहीं जाता । 'साधनाकी आरम्भिक अवस्थामें साधारण कोटिकी पुस्तकोंका पढ़ना, साधकके लिये उचित है क्या ?" रूपान्तरके खादको तुम चख न लो तबतक रूपान्तरित चेतना और उसकी गतियोंको समझना असम्भव है । भगवान् के साथ एकताको प्राप्त हुई चेतनाका एक मार्ग है जिसके द्वारा तुम जो कुछ भी पढ़ो, जो देखो उस सबमें रस ले सकते हो, यहाँतक कि अत्यन्त निरर्थक पुस्तकोंमें भी और अत्यन्त अरुचिकर दृश्योंमें भी। तुम अत्यन्त घटिया संगीतको - ऐसे संगीतको भी जिसे सुनकर कोई बहाँसे भाग जाना चाहे - सुनकर - भी उसमें आनन्द ले सकते हो, उसके बाह्य स्वरूपके कारण नहीं, बल्कि उस संगीतके पीछे जो कुछ उसके कारण । यह नहीं कि इस अवस्थामें तुम उच्च कोटिके संगीत और हीन कोटिके संगीतमें जो भेद है उसके विवेकको गँवा देते हो, बल्कि तुम इन दोनोंके परे जाकर वहाँ पहुँच जाते हो जिसको वह संगीत व्यक्त करता है। कारण संसारमें ऐसी कोई चीज है ही नहीं जिसका अन्तिम सत्य और आश्रय भगवान्में न हो । और यदि किसी चीजके भौतिक, नैतिक या रसमय रूपको देखकर तुम वहीं न रुक जाओ, बल्कि उसके परे पहुँचकर उसका जो आत्मा है, उस चीजके अंदर वर्तमान जो भगवान्का अंश है, उसका स्पर्श करो तो साधारण इन्द्रियोंको जो कुछ तुच्छ, दुःग्वदायी अथवा बेसुरा लगता है उसके अंदर भी तुम सौन्दर्य और आनन्दको प्राप्त कर सकते हो । धर्म-ग्रन्थोंको पढ़ते हुए भी तुम भगवान्से दूर रह सकते हो, और अत्यन्त मूर्खतापूर्ण प्रकाशनोंको पढ़ते हुए भी तुम भगवान्के स्पर्श में रह सकते हो। जबतक 'किसी मनुष्यको भूतकालका औचित्य दिखलाने के लिये क्या यह कहा जा सकता है कि उसके जीवनमें जो कुछ घटना हुई है यह होनी ही चाहिये थी ?" यह तो स्पष्ट ही है, जो कुछ हुआ है वह होनेको ही था, यदि उस प्रकार अभिप्रेत न होता तो वैसा होता ही नहीं। हमने जो भूलें की हैं, हमपर जो विपत्तियों पड़ी हैं, वे भी होनी ही चाहिये थीं, कारण उनकी कोई आवश्यकता थी, हमारे जीवनमें उनकी कोई उपयोगिता थी । परन्तु सच पूछो तो इन बातोंको मनके द्वारा समझाना असम्भव है और चाहिये भी नहीं। कारण जो कुछ हमारे जीवनमें बीता है उसकी कोई आवश्यकता थी, यह आवश्यकता मानसिक तर्कके लिये नहीं थी, किन्तु इसलिये थी कि यह हमको वहाँ पहुँचा दे जो मनकी कल्पनाशक्तिसे परे है। परन्तु इसकी व्याख्या करनेकी कोई आवश्यकता है क्या ? यह समग्र विश्वब्रह्माण्ड प्रत्येक चीजकी व्याख्या प्रत्येक क्षण स्वयं कर रहा है। और यह समग्र वित्र जैसा है इस कारणको लेकर ही कोई विशिष्ट घटना घटती है। परन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि प्रकृतिके निष्ठुर नियमोंको हम अपनी अन्ध अनुमति देनेके लिये बँधे हुए हैं। अपने भूतकालको तुम निश्चित तथ्य कहकर स्वीकार कर सकते हो, और उसकी एक आवश्यकता थी ऐसा बोध कर सकते हो, फिर भी उससे तुम्हें जो अनुभव मिला उसका उपयोग तुम उस शक्तिके निर्माण के लिये कर सकते हो जो तुम्हें अपने वर्तमान और भविष्य कालका सचेतन रूप से सञ्चालन और गठन करनेकी क्षमता प्रदान करेगी । 'भगवान्को योजनामें हरेक घटनाका काल भी निश्चित किया हुआ रहता है क्या ?? कौन किस भूमिकासे देखना और बोलता है, इस बातपर इस प्रश्नका उत्तर निर्भर करता है। भागवत चेतनाकी एक भूमिका है जहाँ सत्र कुछ परमार्थतः जाना हुआ रहता है और सृष्टिकी समम्त योजना पूर्वदृष्ट और पूर्वनिश्चित रहती है। इस प्रकारकी दृष्टि तो विज्ञानमय लोककी उच्चतम भूमिका में पहुँचनेपर ही प्राप्त होती है, यह् पुरुषोत्तमकी अपनी दृष्टि हैं। परन्तु जब तक हम इस चेतनाको प्राप्त न कर लें तबतक वहाँकी बातें करना निरर्थक है, क्योंकि वहाँकी बातें उस भूमिकापर ही काम देती हैं और वे हमारी वर्तमान दृष्टिसे परे हैं । चेतनाकी निम्नतर भूमिकामें तो पहलेसे कुछ भी सिद्ध या नियत नहीं होता, सब कुछ तैयार होनेकी प्रक्रियामें होता है। यहाँ इस भूमिकामें निर्धारित घटनाएँ हैं ही नहीं, यहाँ तो केवल सम्भावनाओंका खेल है, और इन सम्भावनाओंके संघर्ष के भीतरसे ही वह वस्तु सिद्ध की जाती है जो होनेको होती है। इस भूमिका पर हम पसन्दगी और चुनाव कर सकते हैं। हम चाहें तो किसी एक सम्भावनाका त्याग कर दूसरीको स्वीकार कर सकते हैं, किसी एक मार्गका अनुसरण कर दूसरेको छोड़ दे सकते हैं । हम यह सब कुछ कर सकते हैं। फिर जो कुछ वस्तुतः घटित होता है वह चाहे किसी उच्चतर भूमिकामें पूर्वदृष्ट और पूर्वनिश्चित किया हुआ ही क्यों न हो । परम चेतना प्रत्येक बातको पहलेसे जानती है, कारण वहाँ उसकी अनन्ततामें सब कुछ पहलेसे सिद्ध किया हुआ रहता है। परन्तु अपनी लीलाके लिये और जो कुछ उसके परम आत्मामें पूर्वनिर्दिष्ट है उसको पार्थिव भूमिकापर कार्यान्वित करने के लिये, यहों, इस पृथ्वीपर वह इस प्रकार विचरती है मानो समस्त कहानी उसे ज्ञात ही न हो, वह इस प्रकार कार्य करती है मानो वह किसी नये और अपरिचित सूतको बुन रही हो । उच्चतर चेतनामें पूर्वनिश्चित समस्त चित्रयोंके सम्बन्ध में उसको जो भविष्य ज्ञान है उसकी आपात दृष्ट यह विस्मृति ही है जो क्रियात्मक जीवन में व्यक्तिको उसकी अपनी स्वतन्त्रता, स्वाधीनता और आरम्भ-शक्तिका भान कराती है। व्यक्ति के अंदर जो ये तत्त्व हैं वे ही उसके व्यावहारिक यन्त्र और साधन हैं और इनके द्वारा ही वे सत्र गतियाँ और परिणाम जो चेतनाकी अन्य भूमिकापर योजित किये हुए और पूर्वदृष्ट होते हैं, यहाँ इस पार्थिव भूमिकापर सिद्ध किये जाते हैं । यदि तुम नाटकके एक पात्रका उदाहरण लो तो इस विषयके समझने में तुम्हें सहायता मिलेगी । नाटकके पात्रको अपने पार्टका सम्पूर्णरूपसे ज्ञान रहता है । रंगमञ्चपर जो घटना घटनेवाली है उसका क्रम और परिणाम उसके मनके अंदर होता है। परन्तु जब वह रंगमञ्चपर आता है तो उसे इस प्रकार आना पड़ता है मानो वह कुछ जानता ही नहीं, उसे इस प्रकार अनुभत्र करना और पार्ट करना पड़ता है, मानो वह इन समस्त बातोंका जीवन में प्रथम अनुभव कर रहा हो, मानो सम्भावनाओं, घटनाओं और आश्चर्योंसे भरा हुआ यह कोई एकदम नया जगत् है जिसका पट उसकी आँखोंके आगे खुल रहा हो। 'तो क्या वास्तविक स्वतन्त्रता जैसी कोई चीज है ही नहीं ? क्या सब कुछ यहाँतक कि जीवकी स्वतन्त्रता भी पूर्णरूपसे पूर्व निर्धारित की हुई होती है, और क्या प्रारब्ध बाद ही परम रहस्य है ?" स्वतन्त्रता और प्रारब्ध, स्वाधीनता और नियतिवाद, ये चेतनाके विभिन्न स्तरोंके सत्य हैं। अज्ञानके कारण यह होता है कि मन इन्हें एक ही स्तरपर लाकर रख देता है और एक दूसरेमें विरोध देखता है। चेतना कोई एक ही प्रकारकी सद्वस्तु नहीं है, वह बहुविध हैं, वह किसी समतल भूमिकी जैसी नहीं है, वह तो अनेक दिशाओं में फैली हुई है । उच्चतम ऊँचाईपर पुरुषोत्तम हैं और निम्नतम गहराईपर जड प्रकृति ( Matter ) है, और इस निम्नतम गहराई और उच्चतम ऊँचाईके बीचमें चेतनाओंकी अनन्त भूमिकाओंका क्रमविन्यास है । उनकी तुम प्रतिध्वनिमात्र करते हो, उसके विश्वयन्त्रके कुचल देनेवाले मायाचक्रपर आरूढ़ होकर तुम असहाय रूपसे भ्रमण करते रहते हो । जड प्रकृतिके क्षेत्र में और साधारण चेतनाके स्तरपर तुम हर ओरसे बँधे हुए हो । प्रकृतिकी यान्त्रिकताके गुलाम होनेके कारण तुम कर्मकी सांकलसे जकड़े हुए हो, और इस सांकलके बन्धनमें जो कुछ घटना घटती है वह अचूक रूपसे पूर्व कर्मोके परिणामस्वरूप होती है। इस अवस्थामें भी तुम्हें जो यह भान होता है कि तुम्हारी गति स्वतन्त्र है सो तो एक भ्रम ही है, यथार्थ - में इस भूमिकापर दूसरे लोग जो कुछ करते हैं उसको ही तुम दोहराते भर हो, प्रकृतिकी जो सम्पूर्ण गतियाँ हैं, परन्तु ऐसा होना कोई आवश्यक बात नहीं है । तुम चाहो तो अपनी स्थितिको बदल दे सकते हो और नीचे पड़े रहकर रौंदे जाने या कठपुतलीकी तरह नचाये जानेके स्थानपर इसके ऊपरकी स्थिति में उठ जा सकते हो और वहाँसे ही संसारचक्र और उसकी अवस्थाओंपर दृष्टिपात कर सकते हो तथा अपनी चेतनाके परिवर्तनद्वारा तुम यहाँतक कर सकते हो कि इस चक्रको फिरानेवाले किसी हत्थेको हथिया लो, जिससे कि इन आपातदृष्ट अनिवार्य घटनाओंको परिचालित कर सको और इन निश्चित अवस्थाओंको परिवर्तित कर सको। एक बार जहाँ तुम अपने आपको इस भँवरसे बाहर निकाल लाये और ऊपर ऊर्ध्वमें जाकर खड़े हुए कि तुम अपने आपको मुक्त पाओगे । समस्त गुलामीसे मुक्ति पाकर केवल इतना ही नहीं होगा कि अब तुम प्रकृतिके एक निष्क्रिय उपकरण नहीं रहे, बल्कि अब तुम उसके एक सक्रिय प्रतिनिधि बन जाओगे । अब केवल यही नहीं होगा कि तुम अपने कर्मफलोके बन्धनसे मुक्त हो गये, बल्कि अब तो तुम अपने कर्मफलोंको भी बदल दे सकोगे। एक बार जहाँ तुम शक्तियोंकी लीलाको देख पाओगे, एक बार जहाँ तुम चेतनाकी उस भूमिका में ऊपर उठ गये जहाँसे शक्तियोंका प्रादुर्भाव होता है और इन गतिशील उद्गमोंके साथ अपने आपको एक कर लोगे, तो फिर तुम उस श्रेणीके नहीं रहोगे जिनका परिचालन किया जाता है, बल्कि उस श्रेणीके हो जाओगे जो परिचालन करती है । अस्तु ! यही है योगका वास्तविक ध्येय कर्म चकसे बाहर निकलकर भागवत गतिमें प्रवेश करना । योगके द्वारा तुम प्रकृतिकी उस यान्त्रिक गतिसे छुटकारा पा जाते हो जिसमें तुम्हारी अवस्था एक मूढ़ गुलामकीसी है, जहाँ तुम एक असहाय और बेबस उपकरणकी तरह हो, और तुम एक दूसरी ही भूमिका में ऊपर उठ जाते हो जहाँ किसी उच्चतर भवितव्यताको कार्यमें परिणत करने में तुम एक सचेतन सहयोग देनेवाले और उस कार्यके लिये भगवान्के एक सक्रिय प्रतिनिधि बन जाते हो । चेतनाकी यह गति द्विविध होती है। पहले तो चेतनाका आरोहण होता है, तुम अपनेको जड प्राकृतिक चेतनाकी सतह से ऊपर उठाकर श्रेष्ठतर क्षेत्रोंमें ले जाते हो । परन्तु निम्नतर क्षेत्रोंसे ऊर्ध्वतर क्षेत्रोंमं जो यह आरोहण होता है वह ऊर्ध्वतर चेतनाको निम्नतर क्षेत्रों में अवतरण करनेके लिये आवाहन करता है। पार्थिव भूमिकासे ऊपर उठने के फलस्वरूप ऊपरकी किसी चीजको भी तुम इस पृथ्वीपर उतार लाते हो - किसी ऐसी ज्योति या शक्तिको उतार लाते हो जो इस पृथ्वीकी पुरानी प्रकृतिका या तो स्वयं रूपान्तर कर देती है या उसको रूपान्तरित होने के लिये प्रवृत्त कर देती है । और तत्र यह होता है कि वे जो अभीतक एक दूसरेसे अलग, बेमेल और विषम थे - तुम्हारे अंदर जो कुछ उच्च है वह और जो कुछ निम्न है वह, दूसरे शब्दों में तुम्हारी सत्ता और चेतनाके आन्तर और बाह्य स्तर - एक दूसरेसे मिल जाते और धीरे-धीरे आपसमें जुड़ जाते हैं तथा क्रमशः एक सत्य और एक सामञ्जस्य में परिणत हो जाते हैं । लोग जिन्हें चमत्कार कहते हैं, वे इसी तरह घटिन होते हैं। यह जगत् चेतनाकी अनेक भूमिकाओं द्वारा निर्मित हुआ है और प्रत्येक भूमिकाके अपने-अपने जुदा नियम हैं । एक भूमिकाके नियम दूसरी भूमिकापर लागू नहीं होते। चमत्कारका अर्थ ही है किसी प्रकारका आकस्मिक अवतरण, किसी अन्य चेतना और उसकी शक्तियोंका - जो बहुधा प्राणकी शक्तियाँ होती हैं - इस स्थूल-भौतिक लोकमें आविर्भूत हो जाना । यहाँकी स्थूल - भौतिक यन्त्र रचनापर किसी उच्चतर भूमिकाकी - - यन्त्र रचना हठात् उतर आती है। यह इस तरह होता है मानो कोई बिजली हमारी साधारण चेतनाके बादलोंको चीरकर उसमें उतर आयी हो और अन्य शक्तियों, अन्य गतियों तथा अन्य परिणामोंको उसमें भर दिया हो । और इसके फलको ही हम चमत्कार कहते हैं, क्योंकि हमारी साधारण भूमिकामें जो स्वाभाविक नियम काम कर रहे हैं उनमें अचानक एक परिवर्तन हो गया दिखायी देता है, ऐसा जान पड़ता है कि इन नियमों में एकाएक कोई हेर-फेर हो गया है, किन्तु इस परिवर्तन या हेरफेरके कारण और व्यवस्थाको हम जान या देख नहीं पाते, क्योंकि इस चमत्कारका मूल कारण तो किसी दूसरी भूमिकामें विद्यमान होता है । अपने इस पार्थिव लोकपर अन्य ऊर्ध्व लोकोंके इस प्रकारके हमले होना कोई बहुत असाधारण बात नहीं है । ये तो बराबर होते ही रहते हैं, और यदि हमको दृष्टि हो और इनको किस प्रकार देखा जाता है इस बातका ज्ञान हो तो चमत्कार तो हमको प्रचुर परिमाणमें होते हुए दिखायी देंगे। विशेषतः वे साधक जो उच्चतर भूमिकाओंकी शक्तियोंको इस पार्थिव चेतनापर नीचे उतार लानेका प्रयत्न कर रहे हैं, उनमें तो ये अनवरत होते ही रहते हैं । 'क्या सृष्टिका कोई निश्चित लक्ष्य है ? क्या इसका कोई अन्तिम ध्येय है जिसकी ओर यह अग्रसर हो रही है ?? नहीं, यह विश्त्र एक ऐसी गति है जो शाश्वतरूपसे स्वतः उद्घाटित हो रही है । यहाँ ऐसा कुछ नहीं है जिसको यह कहा जा सके कि यही इसका अन्त है, यही एक लक्ष्य है। परन्तु कार्यसञ्चालन के लिये हमको इस गतिका - जो स्त्रयं अनन्त है - खण्ड कर लेना पड़ता है और यह कहना पड़ता है कि हमारा अमुक लक्ष्य है, कारण कार्य करनेके लिये हमें किसी ऐसी चीजकी आवश्यकता पड़ती है जिसपर हम अपना लक्ष्य बाँध सकें । एक चित्र आँकनेमें तुम्हें उसकी रचना और रंगोंकी एक निश्चित आयोजना कर लेनेकी आवश्यकता होती है, तुम्हें एक सीमा बाँधनी होती है, जो कुछ चित्रित करना है वह सब कुछ एक नियत ढाँचेमें या जाय ऐसा करना होता है, किन्तु वह सीमा मिथ्या होती है, वह ढाँचा केवल सांकेतिक होता है। असल में चित्रको एक सतत निरवच्छिन्न धारावाहिता होती है जो किसी भी विशिष्ट ढाँचेका अतिक्रमण करती है, और उसकी प्रत्येक निरत्रच्छिन्नता, प्रत्येक धारा उसी प्रकारसे एक-एक ढाँचेमें उतारी जा सकती है और इस प्रकार अनगिनती ढाँचोंका कभी न समाप्त होनेवाला एक ढेर लग जा सकता है। हम यह कहते हैं सही कि हमारा लक्ष्य अमुक है, किन्तु हम यह जानते हैं कि इस लक्ष्यके परे जो दूसरा लक्ष्य होगा उसका यह प्रारम्भमात्र है, और इस प्रकार हमारे सामने एकके बाद दूसरा लक्ष्य आता रहता है और यह श्रृंखला सदा बढ़ती ही रहती है, कभी भी बन्द नहीं होती । साधना और अध्यात्मवाद ( लेखक - श्रीलालजीरामजी शुक्ल एम्० ए० ) साधना प्रत्येक धर्मका एक मुख्य अङ्ग है । प्रत्येक धर्ममें तीन प्रकारकी भावनाएँ होती हैं। मनुष्य जीवनके लक्ष्यकी कल्पना, उसकी वर्तमान परिस्थिति और लक्ष्यको प्राप्त करने का उपाय । साधना लक्ष्यको प्राप्त करने का उपाय है । प्रत्येक धर्मका सामाजिक स्वरूप और वैयक्तिक स्वरूप होता है । जिस धर्मके अंशको समाजमें नैतिक नींव या सामाजिक प्रतिबन्धोंके रूप में देखा जाता है वही वैयक्तिक जीवनमें साधनाके रूप में व्यक्त होता है। व्यक्ति और समष्टिमें इतना प्रगाढ़ सम्बन्ध है कि हम एककी स्थिति दूसरेके विना नहीं पाते । समाज और व्यक्तिका भी वैसा ही सम्बन्ध है । सुव्यवस्थित समाज मनुष्यको अपने जीवनके लक्ष्य की प्राप्ति करनेमें सुविधाएँ देता है और अनेक प्रकारके नियन्त्रणोंसे उसे उस ओर अग्रसर करता है। इसी तरह एक साधक अपने-आपके ऊपर पूरा अधिकार प्राप्त करके और अपने जीवनको सुव्यवस्थित रूपसे चलाकर समाजका स्वभावतः ही कल्याण करता है। इस तरह यदि हम देखें तो व्यक्तिके सुख और शान्तिमें समाजका सुख और शान्ति है। अच्छा समाज वही है जिसमें मनुष्यों में साधनाकी भावनाएँ उठें। उपर्युक्त कथनसे यह स्पष्ट है कि साधनाकी प्रथम आवश्यकता सुयोग्य वातावरण है। यह् वातावरण मनुष्य अपनी पूर्व सुकृतिसे प्राप्त करता है । श्रीकृष्ण भगवान् इस प्रसङ्गमें कहते हैंप्राप्य पुण्यकृतां लोकानुपित्वा शाश्वतीः समाः । शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रोऽभिजायते ॥ अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् । एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥ तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् । यतते च ततो भूयः संसिद्धा कुरुनन्दन ॥ योगभ्रष्ट पुरुष पुण्यत्रानोंके लोकोंको प्राप्त होकर उनमें बहुत वर्षोंतक निवास करके फिर शुद्ध आचरणवाले श्रीमान् पुरुषोंके घर जन्म लेता है। अथवा वैराग्यवान् पुरुष उन लोकोंमें न जाकर ज्ञानवान् योगियोंके ही कुलमें जन्म लेता है। इस प्रकारका जन्म संसारमें अत्यन्त दुर्लभ है। वहाँ उस पहले शरीरमें संग्रह किये हुए बुद्धिसंयोगको अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे अर्जुन ! उसके प्रभावसे वह फिर परमात्माकी प्राप्तिरूप सिद्धिके लिये ( पहलेसे बढ़कर ) प्रयत्न करता है ।
स्थापित हो जायगी । तब यह अवस्था नहीं रहेगी कि तुम्हारी प्रकृतिका एक भाग तो भगवान्के अर्पित हो और बाकी के भाग अपनी साधारण वृत्तियों में पड़े हों, साधारण चीजोंमें लिप्त हों, बल्कि तब यह होगा कि तुम्हारे सम्पूर्ण जीवनको भगवान् अपने हाथमें ले लेंगे और तुम्हारी प्रकृतिका सम्पूर्ण रूपान्तर क्रमशः साधित होता रहेगा । पूर्णयोगकी साधना में सम्पूर्ण जीवनका रूपान्तर करना होगा, उसको दिव्य बनाना होगा । इस कामको पूरे ब्योरेके साथ करना होगा और यह देखना होगा कि कहीं कोई छोटी-से-छोटी चीज भी बाकी न जाय । इस साधनामें ऐसी कोई चीज नहीं है जो तुच्छ या उपेक्षणीय समझी जाय । तुम यह नहीं कह सकते कि 'जब मैं ध्यान करता हूँ, दर्शनशास्त्रसम्बन्धी पुस्तकें पढ़ता हूँ या इन बार्तालापोंको सुनता हूँ तब तो मैं भागवत-ज्योतिकी ओर अपने आपको खोलकर रक्खूँगा और उसका आवाहन करूँगा, किन्तु जब मैंटा हूँ या किसी मित्रसे मिलता हूँ तब यदि उसको बिल्कुल भूल भी जाऊँ तो चल सकता है।' इस भावको बनाये रखनेका तो यह अर्थ हुआ कि तुम्हारा कभी भी रूपान्तर न हो सकेगा और कभी भी तुम्हें भगवान्के साथ सच्ची एकता न प्राप्त होगी । सदा तुम्हारे दो भाग बने रहेंगे, अधिक-सेअधिक जो कुछ तुम्हें मिल सकेगा वह इस महत्तर जीवनकी कुछ झाँकीमात्र होगी। इसका कारण यह है कि इस अस्थायद्यपि ध्यानके समय तुम्हारी आन्तर चेतनामें कतिप। अनुभूतियाँ और साक्षात्कार तुम्हें भले ही हों, पर तुम्हारा स्थूल शरीर और तुम्हारा बाह्य जीवन तो रूपान्तरित हुए विना यों ही पड़ा रह जायगा । जिस आन्तर प्रकाशका शरीर और बाह्य जीवनपर कोई असर नहीं होता वह किसी विशेष उपयोग में नहीं आता । कारण, इससे यह जगत् तो जैसा-का-तैसा ही रह जाता है। और यही है जो अभीतक लगातार होता आ रहा है। वे लोग भी जिन्हें अति महान् और शक्तिशाली उपलब्धि हुई थी जगत्से अलग हट गये, जिससे वे अपनी आन्तर स्थिरता और शान्तिमें अक्षुब्ध रूपसे निवास कर सकें। इन लोगोंने जगत् को अपने ही मार्गपर चलते रहनेके लिये छोड़ दिया, परिणाम यह हुआ कि विश्वसत्ताकी इस भौतिक भूमिकापर दुःख और जड़ता, मृत्यु और अज्ञानका राज्य पूर्ववत् अबाध गतिसे चालू रहा । जो लोग इस प्रकार किनारा खींच लेते हैं उनके लिये इस उपद्रवसे त्राण पाना, इन कटिनाइयोंसे दूर भागना और दूसरे लोकमें अपने लिये एक सुखी अवस्थाका पा लेना भन्ने ही सुखकर हो, किन्तु इसमें सन्देह नहीं कि वे इस जगत् और जीवनको अमार्जित और अरूपान्तरित अवस्था में ही छोड़ जाते हैं; यही नहीं, बल्कि वे अपनी निजी बाह्य चेतनाको भी अपरिवर्तित अवस्थामें और अपने शरीरको सदाकी नाईं असंस्कृत अवस्था में ही छोड़ देते है । ये लोग जब भौतिक जगत् में वापस लौटें तब यह सम्भव है कि इनकी दशा एक साधारण मनुष्यकी अपेक्षा भी बुरी हो, कारण इन लोगोंने स्थूल वस्तुओंपर प्रभुता प्राप्त करनेकी शक्तिको गँवा दिया होता है, अतएव यह सम्भव है कि भौतिक जीवनके साथ इनका व्यवहार बिल्कुल बेढंगा हो और इस जीवनकी धारामें वे अपनेको असहाय बोध करें तथा उनका जीवन प्रत्येक गुजरती हुई शक्तिकी दयापर निर्भर करे । इस प्रकारका आदर्श उनके लिये भले ही ठीक हो जो इसे चाहते हैं, किन्तु हम लोगोंका योग यह नहीं है। कारण हम चाहते हैं इस जगत्पर तथा उसकी समस्त गतियोंपर भगवान्की विजय और यहाँ, इस पार्थिव जगत्में ही भगवान्की उपलब्धि । परन्तु यदि हम चाहते हैं कि यहाँ भगवान्का राज्य हो तो जो कुछ भी हम हैं, जो कुछ भी हमारे पास है और जो कुछ भी हम यहाँ करते हैं, उस सबको हमें भगवान्को दे देना चाहिये । इस प्रकार सोचनेसे काम नहीं चलेगा कि अमुक बात गौण है अथवा बाह्य जीवन और उसकी आवश्यकताओंसे दिव्य जीवनका कोई सम्बन्ध नहीं है । यदि हम इस तरहका बर्ताव करेंगे तो हम वहाँ ही पड़े रहेंगे जहाँ हम सदा रहे हैं और इस बाह्य जगत्पर विजय कभी मिलेगी ही नहीं, यहाँ इस पार्थिव भूमिकापर किसी चिरस्थायी परिणामकी प्राप्ति होगी ही नहीं । 'जो लोग बहुत अधिक ऊपर उठ चुके हैं, क्या वे इस भूमिकापर फिर वापस आते हैं ?? हाँ, यदि इस भूमिकाका रूपान्तर करनेका उनका सङ्कल्प हो तो जितना अधिक वे ऊपर उठे होंगे, उतना ही उनका यहाँ वापस आना निश्चित है । और जिन लोगोंकी इच्छा यहाँसे भाग जानेकी है, वे भी, जब दूमरी दिशामें पहुँच जाते हैं तब हो सकता है कि यह अनुभव करें कि आखिर इस प्रकार भाग आनेका कोई विशेष फल नहीं हुआ । 'क्या इस बातका स्मरण बहुतोंको रहता है कि वे ऊपर पहुँच गये थे और पुनः वापस आये हैं ?? चेतनाकी एक विशेष अवस्था में पहुँच जानेपर यह स्मृति हो सकती है । आंशिक रूपमे किसी थोड़ेसे कालके लिये इस अवस्थाका स्पर्श करना बहुत अधिक कठिन नहीं है, गभीर ध्यान में, स्वप्नमें अथवा सूक्ष्म जगतोंके दृश्य जब दिखायी देते हैं तब किसीको इस प्रकारका अनुभव या आभास हो सकता है कि पहले वह अमुक जीवन बिता चुका है, उसको अमुक प्रकारका साक्षात्कार हुआ था, अमुक सत्यका उसको ज्ञान हुआ था । परन्तु इसे पूर्ण साक्षात्कार नहीं कहा जा सकता । पूर्ण अवस्थाको प्राप्त करनेके लिये यह आवश्यक है कि साधक उस स्थायी चेतनाको प्राप्त कर ले जो हमारे अंदर ही है, जो सनातन है तथा हमारे भूत, वर्त्तमान और भात्री जीवनको एक साथ धारण किये हुए है । ' जिस समय हम मानसिक प्रवृत्तियों में अथवा बुद्धि के व्यापारोंमें एकाग्र रहते हैं उस समय हम भगवान् को कभीकभी क्यों भूल जाते अथवा उनके स्पर्शको क्यों गँवा देते हैं? यह इसलिये होता है कि तुम्हारी चेतना अभीतक बँटी हुई है । तुम्हारे मनमें भगवान् अभीतक अच्छी तरह बस नहीं गये हैं, अभीतक तुम दिव्य जीवनपर पूर्णरूपसे न्योछावर नहीं हुए हो । नहीं तो चाहे जितना तुम मन-बुद्धिके व्यापारोंमें लीन क्यों न रहो फिर भी तुमको यह भान रहेगा कि भगवान् तुम्हारी सहायता कर रहे हैं और तुमको धारण किये हुए हैं। अपनी प्रत्येक प्रवृत्तिमें, चाहे वह बौद्धिक हो या बाह्य, तुम्हारा एकमात्र मन्त्र होना चाहिये 'स्मरण रखो और समर्पण करो।" तुम जो कुछ भी करो वह सब भगवान् के अर्पणरूप हो । और यह भी तुम्हारे लिये एक सुन्दर साधना बन जायगा और अनेकों मूर्खतापूर्ण और निरर्थक कामोंसे तुम्हारी रक्षा करेगा । 'कर्म करनेके आरम्भ में प्रायः ऐसा किया जा सकता है, किन्तु जैसे-जैसे कोई कार्य में लीन होता जाता है वैसे-वैसे वह भूलता जाता है । स्मृति बनाये रखनेका क्या उपाय है ?" जिस अवस्थाको प्राप्त करना है, जो योगकी वास्तविक पूर्णता है, अन्तिम प्राप्ति और सिद्धि है, जिसके लिये बाकी सब कुछ केवल तैयारीमात्र ही है, वह तो एक ऐसी चेनना है जिसमें भगवान्के त्रिना कुछ भी काम ही नहीं चलता। कारण, उस समय यदि तुम भगवान्के बिना होओ तो तुम्हारी क्रियाका आधार ही लुप्त हो जाता है, ज्ञान, शक्ति सब कुछ चले जाते हैं । परन्तु जबतक तुम यह अनुभव करते रहोगे कि जिन शक्तियोंका तुम उपयोग कर रहे हो वे तुम्हारी अपनी हैं तबतक तुम भगवान्के सहारेको नहीं गँवा दोगे । योगसाधनकी आरम्भिक अवस्था में यह बहुत सम्भव है कि बहुधा तुम भगवान्को भूल जाओ। परन्तु सतत अभीप्साके द्वारा तुम्हारी स्मृति बढ़ जाती है और विस्मृति घटती जाती है। परन्तु इसको किसी कठोर तपस्या या ड्यूटीके रूपमें नहीं करना चाहिये, यह साधना तो प्रेम और आनन्दकी एक सहज अभिव्यक्ति स्वरूप होनी चाहिये । जब तुम इस प्रकार कर सकोगे तब तुम्हारी साधनामें शीघ्र ही एक ऐसी अवस्था आ जायगी कि तुम यदि प्रत्येक क्षण और अपने प्रत्येक कार्यमें भगवान्की उपस्थितिका अनुभव न करो, तो तुम तुरन्त अपने-आपको अकेला, उदास और दुःखी अनुभव करने लगोगे । जब भी तुम्हें यह दिग्वायी पड़े कि तुम भगवान्की उपस्थितिका अनुभव किये बिना ही किसी कामको कर सकते हो और फिर भी चैनसे रह सकते हो, तो तुमको यह समझना चाहिये कि तुम्हारी सत्ताके उस भागका अभीतक समर्पण नहीं हुआ है । यह तो साधारण मानव-समाजका तरीका है, जिसे भगवान्की जरूरत ही क्या है ? परन्तु दिव्य जीवन के साधकका मार्ग सर्वथा भिन्न होता है। और जब भगवान्के साथ तुम्हारी पूर्णरूपसे एकता हो जाती है, तब यदि क्षणभरके लिये भी भगवान् तुमसे अलंग हो जायँ, तो तुम बस निर्जीव हो जाओगे और पछाड़ खाकर गिर पड़ोगे । कारण अब भगवान् ही होते हैं तुम्हारे प्राणके प्राण, तुम्हारे समग्र जीवन, तुम्हारे एकमात्र और सम्पूर्ण शरण । अब यदि भगवान् तुम्हारे साथ न हों तो फिर तुम्हारे पास कुछ रह ही नहीं जाता । 'साधनाकी आरम्भिक अवस्थामें साधारण कोटिकी पुस्तकोंका पढ़ना, साधकके लिये उचित है क्या ?" रूपान्तरके खादको तुम चख न लो तबतक रूपान्तरित चेतना और उसकी गतियोंको समझना असम्भव है । भगवान् के साथ एकताको प्राप्त हुई चेतनाका एक मार्ग है जिसके द्वारा तुम जो कुछ भी पढ़ो, जो देखो उस सबमें रस ले सकते हो, यहाँतक कि अत्यन्त निरर्थक पुस्तकोंमें भी और अत्यन्त अरुचिकर दृश्योंमें भी। तुम अत्यन्त घटिया संगीतको - ऐसे संगीतको भी जिसे सुनकर कोई बहाँसे भाग जाना चाहे - सुनकर - भी उसमें आनन्द ले सकते हो, उसके बाह्य स्वरूपके कारण नहीं, बल्कि उस संगीतके पीछे जो कुछ उसके कारण । यह नहीं कि इस अवस्थामें तुम उच्च कोटिके संगीत और हीन कोटिके संगीतमें जो भेद है उसके विवेकको गँवा देते हो, बल्कि तुम इन दोनोंके परे जाकर वहाँ पहुँच जाते हो जिसको वह संगीत व्यक्त करता है। कारण संसारमें ऐसी कोई चीज है ही नहीं जिसका अन्तिम सत्य और आश्रय भगवान्में न हो । और यदि किसी चीजके भौतिक, नैतिक या रसमय रूपको देखकर तुम वहीं न रुक जाओ, बल्कि उसके परे पहुँचकर उसका जो आत्मा है, उस चीजके अंदर वर्तमान जो भगवान्का अंश है, उसका स्पर्श करो तो साधारण इन्द्रियोंको जो कुछ तुच्छ, दुःग्वदायी अथवा बेसुरा लगता है उसके अंदर भी तुम सौन्दर्य और आनन्दको प्राप्त कर सकते हो । धर्म-ग्रन्थोंको पढ़ते हुए भी तुम भगवान्से दूर रह सकते हो, और अत्यन्त मूर्खतापूर्ण प्रकाशनोंको पढ़ते हुए भी तुम भगवान्के स्पर्श में रह सकते हो। जबतक 'किसी मनुष्यको भूतकालका औचित्य दिखलाने के लिये क्या यह कहा जा सकता है कि उसके जीवनमें जो कुछ घटना हुई है यह होनी ही चाहिये थी ?" यह तो स्पष्ट ही है, जो कुछ हुआ है वह होनेको ही था, यदि उस प्रकार अभिप्रेत न होता तो वैसा होता ही नहीं। हमने जो भूलें की हैं, हमपर जो विपत्तियों पड़ी हैं, वे भी होनी ही चाहिये थीं, कारण उनकी कोई आवश्यकता थी, हमारे जीवनमें उनकी कोई उपयोगिता थी । परन्तु सच पूछो तो इन बातोंको मनके द्वारा समझाना असम्भव है और चाहिये भी नहीं। कारण जो कुछ हमारे जीवनमें बीता है उसकी कोई आवश्यकता थी, यह आवश्यकता मानसिक तर्कके लिये नहीं थी, किन्तु इसलिये थी कि यह हमको वहाँ पहुँचा दे जो मनकी कल्पनाशक्तिसे परे है। परन्तु इसकी व्याख्या करनेकी कोई आवश्यकता है क्या ? यह समग्र विश्वब्रह्माण्ड प्रत्येक चीजकी व्याख्या प्रत्येक क्षण स्वयं कर रहा है। और यह समग्र वित्र जैसा है इस कारणको लेकर ही कोई विशिष्ट घटना घटती है। परन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि प्रकृतिके निष्ठुर नियमोंको हम अपनी अन्ध अनुमति देनेके लिये बँधे हुए हैं। अपने भूतकालको तुम निश्चित तथ्य कहकर स्वीकार कर सकते हो, और उसकी एक आवश्यकता थी ऐसा बोध कर सकते हो, फिर भी उससे तुम्हें जो अनुभव मिला उसका उपयोग तुम उस शक्तिके निर्माण के लिये कर सकते हो जो तुम्हें अपने वर्तमान और भविष्य कालका सचेतन रूप से सञ्चालन और गठन करनेकी क्षमता प्रदान करेगी । 'भगवान्को योजनामें हरेक घटनाका काल भी निश्चित किया हुआ रहता है क्या ?? कौन किस भूमिकासे देखना और बोलता है, इस बातपर इस प्रश्नका उत्तर निर्भर करता है। भागवत चेतनाकी एक भूमिका है जहाँ सत्र कुछ परमार्थतः जाना हुआ रहता है और सृष्टिकी समम्त योजना पूर्वदृष्ट और पूर्वनिश्चित रहती है। इस प्रकारकी दृष्टि तो विज्ञानमय लोककी उच्चतम भूमिका में पहुँचनेपर ही प्राप्त होती है, यह् पुरुषोत्तमकी अपनी दृष्टि हैं। परन्तु जब तक हम इस चेतनाको प्राप्त न कर लें तबतक वहाँकी बातें करना निरर्थक है, क्योंकि वहाँकी बातें उस भूमिकापर ही काम देती हैं और वे हमारी वर्तमान दृष्टिसे परे हैं । चेतनाकी निम्नतर भूमिकामें तो पहलेसे कुछ भी सिद्ध या नियत नहीं होता, सब कुछ तैयार होनेकी प्रक्रियामें होता है। यहाँ इस भूमिकामें निर्धारित घटनाएँ हैं ही नहीं, यहाँ तो केवल सम्भावनाओंका खेल है, और इन सम्भावनाओंके संघर्ष के भीतरसे ही वह वस्तु सिद्ध की जाती है जो होनेको होती है। इस भूमिका पर हम पसन्दगी और चुनाव कर सकते हैं। हम चाहें तो किसी एक सम्भावनाका त्याग कर दूसरीको स्वीकार कर सकते हैं, किसी एक मार्गका अनुसरण कर दूसरेको छोड़ दे सकते हैं । हम यह सब कुछ कर सकते हैं। फिर जो कुछ वस्तुतः घटित होता है वह चाहे किसी उच्चतर भूमिकामें पूर्वदृष्ट और पूर्वनिश्चित किया हुआ ही क्यों न हो । परम चेतना प्रत्येक बातको पहलेसे जानती है, कारण वहाँ उसकी अनन्ततामें सब कुछ पहलेसे सिद्ध किया हुआ रहता है। परन्तु अपनी लीलाके लिये और जो कुछ उसके परम आत्मामें पूर्वनिर्दिष्ट है उसको पार्थिव भूमिकापर कार्यान्वित करने के लिये, यहों, इस पृथ्वीपर वह इस प्रकार विचरती है मानो समस्त कहानी उसे ज्ञात ही न हो, वह इस प्रकार कार्य करती है मानो वह किसी नये और अपरिचित सूतको बुन रही हो । उच्चतर चेतनामें पूर्वनिश्चित समस्त चित्रयोंके सम्बन्ध में उसको जो भविष्य ज्ञान है उसकी आपात दृष्ट यह विस्मृति ही है जो क्रियात्मक जीवन में व्यक्तिको उसकी अपनी स्वतन्त्रता, स्वाधीनता और आरम्भ-शक्तिका भान कराती है। व्यक्ति के अंदर जो ये तत्त्व हैं वे ही उसके व्यावहारिक यन्त्र और साधन हैं और इनके द्वारा ही वे सत्र गतियाँ और परिणाम जो चेतनाकी अन्य भूमिकापर योजित किये हुए और पूर्वदृष्ट होते हैं, यहाँ इस पार्थिव भूमिकापर सिद्ध किये जाते हैं । यदि तुम नाटकके एक पात्रका उदाहरण लो तो इस विषयके समझने में तुम्हें सहायता मिलेगी । नाटकके पात्रको अपने पार्टका सम्पूर्णरूपसे ज्ञान रहता है । रंगमञ्चपर जो घटना घटनेवाली है उसका क्रम और परिणाम उसके मनके अंदर होता है। परन्तु जब वह रंगमञ्चपर आता है तो उसे इस प्रकार आना पड़ता है मानो वह कुछ जानता ही नहीं, उसे इस प्रकार अनुभत्र करना और पार्ट करना पड़ता है, मानो वह इन समस्त बातोंका जीवन में प्रथम अनुभव कर रहा हो, मानो सम्भावनाओं, घटनाओं और आश्चर्योंसे भरा हुआ यह कोई एकदम नया जगत् है जिसका पट उसकी आँखोंके आगे खुल रहा हो। 'तो क्या वास्तविक स्वतन्त्रता जैसी कोई चीज है ही नहीं ? क्या सब कुछ यहाँतक कि जीवकी स्वतन्त्रता भी पूर्णरूपसे पूर्व निर्धारित की हुई होती है, और क्या प्रारब्ध बाद ही परम रहस्य है ?" स्वतन्त्रता और प्रारब्ध, स्वाधीनता और नियतिवाद, ये चेतनाके विभिन्न स्तरोंके सत्य हैं। अज्ञानके कारण यह होता है कि मन इन्हें एक ही स्तरपर लाकर रख देता है और एक दूसरेमें विरोध देखता है। चेतना कोई एक ही प्रकारकी सद्वस्तु नहीं है, वह बहुविध हैं, वह किसी समतल भूमिकी जैसी नहीं है, वह तो अनेक दिशाओं में फैली हुई है । उच्चतम ऊँचाईपर पुरुषोत्तम हैं और निम्नतम गहराईपर जड प्रकृति है, और इस निम्नतम गहराई और उच्चतम ऊँचाईके बीचमें चेतनाओंकी अनन्त भूमिकाओंका क्रमविन्यास है । उनकी तुम प्रतिध्वनिमात्र करते हो, उसके विश्वयन्त्रके कुचल देनेवाले मायाचक्रपर आरूढ़ होकर तुम असहाय रूपसे भ्रमण करते रहते हो । जड प्रकृतिके क्षेत्र में और साधारण चेतनाके स्तरपर तुम हर ओरसे बँधे हुए हो । प्रकृतिकी यान्त्रिकताके गुलाम होनेके कारण तुम कर्मकी सांकलसे जकड़े हुए हो, और इस सांकलके बन्धनमें जो कुछ घटना घटती है वह अचूक रूपसे पूर्व कर्मोके परिणामस्वरूप होती है। इस अवस्थामें भी तुम्हें जो यह भान होता है कि तुम्हारी गति स्वतन्त्र है सो तो एक भ्रम ही है, यथार्थ - में इस भूमिकापर दूसरे लोग जो कुछ करते हैं उसको ही तुम दोहराते भर हो, प्रकृतिकी जो सम्पूर्ण गतियाँ हैं, परन्तु ऐसा होना कोई आवश्यक बात नहीं है । तुम चाहो तो अपनी स्थितिको बदल दे सकते हो और नीचे पड़े रहकर रौंदे जाने या कठपुतलीकी तरह नचाये जानेके स्थानपर इसके ऊपरकी स्थिति में उठ जा सकते हो और वहाँसे ही संसारचक्र और उसकी अवस्थाओंपर दृष्टिपात कर सकते हो तथा अपनी चेतनाके परिवर्तनद्वारा तुम यहाँतक कर सकते हो कि इस चक्रको फिरानेवाले किसी हत्थेको हथिया लो, जिससे कि इन आपातदृष्ट अनिवार्य घटनाओंको परिचालित कर सको और इन निश्चित अवस्थाओंको परिवर्तित कर सको। एक बार जहाँ तुम अपने आपको इस भँवरसे बाहर निकाल लाये और ऊपर ऊर्ध्वमें जाकर खड़े हुए कि तुम अपने आपको मुक्त पाओगे । समस्त गुलामीसे मुक्ति पाकर केवल इतना ही नहीं होगा कि अब तुम प्रकृतिके एक निष्क्रिय उपकरण नहीं रहे, बल्कि अब तुम उसके एक सक्रिय प्रतिनिधि बन जाओगे । अब केवल यही नहीं होगा कि तुम अपने कर्मफलोके बन्धनसे मुक्त हो गये, बल्कि अब तो तुम अपने कर्मफलोंको भी बदल दे सकोगे। एक बार जहाँ तुम शक्तियोंकी लीलाको देख पाओगे, एक बार जहाँ तुम चेतनाकी उस भूमिका में ऊपर उठ गये जहाँसे शक्तियोंका प्रादुर्भाव होता है और इन गतिशील उद्गमोंके साथ अपने आपको एक कर लोगे, तो फिर तुम उस श्रेणीके नहीं रहोगे जिनका परिचालन किया जाता है, बल्कि उस श्रेणीके हो जाओगे जो परिचालन करती है । अस्तु ! यही है योगका वास्तविक ध्येय कर्म चकसे बाहर निकलकर भागवत गतिमें प्रवेश करना । योगके द्वारा तुम प्रकृतिकी उस यान्त्रिक गतिसे छुटकारा पा जाते हो जिसमें तुम्हारी अवस्था एक मूढ़ गुलामकीसी है, जहाँ तुम एक असहाय और बेबस उपकरणकी तरह हो, और तुम एक दूसरी ही भूमिका में ऊपर उठ जाते हो जहाँ किसी उच्चतर भवितव्यताको कार्यमें परिणत करने में तुम एक सचेतन सहयोग देनेवाले और उस कार्यके लिये भगवान्के एक सक्रिय प्रतिनिधि बन जाते हो । चेतनाकी यह गति द्विविध होती है। पहले तो चेतनाका आरोहण होता है, तुम अपनेको जड प्राकृतिक चेतनाकी सतह से ऊपर उठाकर श्रेष्ठतर क्षेत्रोंमें ले जाते हो । परन्तु निम्नतर क्षेत्रोंसे ऊर्ध्वतर क्षेत्रोंमं जो यह आरोहण होता है वह ऊर्ध्वतर चेतनाको निम्नतर क्षेत्रों में अवतरण करनेके लिये आवाहन करता है। पार्थिव भूमिकासे ऊपर उठने के फलस्वरूप ऊपरकी किसी चीजको भी तुम इस पृथ्वीपर उतार लाते हो - किसी ऐसी ज्योति या शक्तिको उतार लाते हो जो इस पृथ्वीकी पुरानी प्रकृतिका या तो स्वयं रूपान्तर कर देती है या उसको रूपान्तरित होने के लिये प्रवृत्त कर देती है । और तत्र यह होता है कि वे जो अभीतक एक दूसरेसे अलग, बेमेल और विषम थे - तुम्हारे अंदर जो कुछ उच्च है वह और जो कुछ निम्न है वह, दूसरे शब्दों में तुम्हारी सत्ता और चेतनाके आन्तर और बाह्य स्तर - एक दूसरेसे मिल जाते और धीरे-धीरे आपसमें जुड़ जाते हैं तथा क्रमशः एक सत्य और एक सामञ्जस्य में परिणत हो जाते हैं । लोग जिन्हें चमत्कार कहते हैं, वे इसी तरह घटिन होते हैं। यह जगत् चेतनाकी अनेक भूमिकाओं द्वारा निर्मित हुआ है और प्रत्येक भूमिकाके अपने-अपने जुदा नियम हैं । एक भूमिकाके नियम दूसरी भूमिकापर लागू नहीं होते। चमत्कारका अर्थ ही है किसी प्रकारका आकस्मिक अवतरण, किसी अन्य चेतना और उसकी शक्तियोंका - जो बहुधा प्राणकी शक्तियाँ होती हैं - इस स्थूल-भौतिक लोकमें आविर्भूत हो जाना । यहाँकी स्थूल - भौतिक यन्त्र रचनापर किसी उच्चतर भूमिकाकी - - यन्त्र रचना हठात् उतर आती है। यह इस तरह होता है मानो कोई बिजली हमारी साधारण चेतनाके बादलोंको चीरकर उसमें उतर आयी हो और अन्य शक्तियों, अन्य गतियों तथा अन्य परिणामोंको उसमें भर दिया हो । और इसके फलको ही हम चमत्कार कहते हैं, क्योंकि हमारी साधारण भूमिकामें जो स्वाभाविक नियम काम कर रहे हैं उनमें अचानक एक परिवर्तन हो गया दिखायी देता है, ऐसा जान पड़ता है कि इन नियमों में एकाएक कोई हेर-फेर हो गया है, किन्तु इस परिवर्तन या हेरफेरके कारण और व्यवस्थाको हम जान या देख नहीं पाते, क्योंकि इस चमत्कारका मूल कारण तो किसी दूसरी भूमिकामें विद्यमान होता है । अपने इस पार्थिव लोकपर अन्य ऊर्ध्व लोकोंके इस प्रकारके हमले होना कोई बहुत असाधारण बात नहीं है । ये तो बराबर होते ही रहते हैं, और यदि हमको दृष्टि हो और इनको किस प्रकार देखा जाता है इस बातका ज्ञान हो तो चमत्कार तो हमको प्रचुर परिमाणमें होते हुए दिखायी देंगे। विशेषतः वे साधक जो उच्चतर भूमिकाओंकी शक्तियोंको इस पार्थिव चेतनापर नीचे उतार लानेका प्रयत्न कर रहे हैं, उनमें तो ये अनवरत होते ही रहते हैं । 'क्या सृष्टिका कोई निश्चित लक्ष्य है ? क्या इसका कोई अन्तिम ध्येय है जिसकी ओर यह अग्रसर हो रही है ?? नहीं, यह विश्त्र एक ऐसी गति है जो शाश्वतरूपसे स्वतः उद्घाटित हो रही है । यहाँ ऐसा कुछ नहीं है जिसको यह कहा जा सके कि यही इसका अन्त है, यही एक लक्ष्य है। परन्तु कार्यसञ्चालन के लिये हमको इस गतिका - जो स्त्रयं अनन्त है - खण्ड कर लेना पड़ता है और यह कहना पड़ता है कि हमारा अमुक लक्ष्य है, कारण कार्य करनेके लिये हमें किसी ऐसी चीजकी आवश्यकता पड़ती है जिसपर हम अपना लक्ष्य बाँध सकें । एक चित्र आँकनेमें तुम्हें उसकी रचना और रंगोंकी एक निश्चित आयोजना कर लेनेकी आवश्यकता होती है, तुम्हें एक सीमा बाँधनी होती है, जो कुछ चित्रित करना है वह सब कुछ एक नियत ढाँचेमें या जाय ऐसा करना होता है, किन्तु वह सीमा मिथ्या होती है, वह ढाँचा केवल सांकेतिक होता है। असल में चित्रको एक सतत निरवच्छिन्न धारावाहिता होती है जो किसी भी विशिष्ट ढाँचेका अतिक्रमण करती है, और उसकी प्रत्येक निरत्रच्छिन्नता, प्रत्येक धारा उसी प्रकारसे एक-एक ढाँचेमें उतारी जा सकती है और इस प्रकार अनगिनती ढाँचोंका कभी न समाप्त होनेवाला एक ढेर लग जा सकता है। हम यह कहते हैं सही कि हमारा लक्ष्य अमुक है, किन्तु हम यह जानते हैं कि इस लक्ष्यके परे जो दूसरा लक्ष्य होगा उसका यह प्रारम्भमात्र है, और इस प्रकार हमारे सामने एकके बाद दूसरा लक्ष्य आता रहता है और यह श्रृंखला सदा बढ़ती ही रहती है, कभी भी बन्द नहीं होती । साधना और अध्यात्मवाद साधना प्रत्येक धर्मका एक मुख्य अङ्ग है । प्रत्येक धर्ममें तीन प्रकारकी भावनाएँ होती हैं। मनुष्य जीवनके लक्ष्यकी कल्पना, उसकी वर्तमान परिस्थिति और लक्ष्यको प्राप्त करने का उपाय । साधना लक्ष्यको प्राप्त करने का उपाय है । प्रत्येक धर्मका सामाजिक स्वरूप और वैयक्तिक स्वरूप होता है । जिस धर्मके अंशको समाजमें नैतिक नींव या सामाजिक प्रतिबन्धोंके रूप में देखा जाता है वही वैयक्तिक जीवनमें साधनाके रूप में व्यक्त होता है। व्यक्ति और समष्टिमें इतना प्रगाढ़ सम्बन्ध है कि हम एककी स्थिति दूसरेके विना नहीं पाते । समाज और व्यक्तिका भी वैसा ही सम्बन्ध है । सुव्यवस्थित समाज मनुष्यको अपने जीवनके लक्ष्य की प्राप्ति करनेमें सुविधाएँ देता है और अनेक प्रकारके नियन्त्रणोंसे उसे उस ओर अग्रसर करता है। इसी तरह एक साधक अपने-आपके ऊपर पूरा अधिकार प्राप्त करके और अपने जीवनको सुव्यवस्थित रूपसे चलाकर समाजका स्वभावतः ही कल्याण करता है। इस तरह यदि हम देखें तो व्यक्तिके सुख और शान्तिमें समाजका सुख और शान्ति है। अच्छा समाज वही है जिसमें मनुष्यों में साधनाकी भावनाएँ उठें। उपर्युक्त कथनसे यह स्पष्ट है कि साधनाकी प्रथम आवश्यकता सुयोग्य वातावरण है। यह् वातावरण मनुष्य अपनी पूर्व सुकृतिसे प्राप्त करता है । श्रीकृष्ण भगवान् इस प्रसङ्गमें कहते हैंप्राप्य पुण्यकृतां लोकानुपित्वा शाश्वतीः समाः । शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रोऽभिजायते ॥ अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् । एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥ तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् । यतते च ततो भूयः संसिद्धा कुरुनन्दन ॥ योगभ्रष्ट पुरुष पुण्यत्रानोंके लोकोंको प्राप्त होकर उनमें बहुत वर्षोंतक निवास करके फिर शुद्ध आचरणवाले श्रीमान् पुरुषोंके घर जन्म लेता है। अथवा वैराग्यवान् पुरुष उन लोकोंमें न जाकर ज्ञानवान् योगियोंके ही कुलमें जन्म लेता है। इस प्रकारका जन्म संसारमें अत्यन्त दुर्लभ है। वहाँ उस पहले शरीरमें संग्रह किये हुए बुद्धिसंयोगको अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे अर्जुन ! उसके प्रभावसे वह फिर परमात्माकी प्राप्तिरूप सिद्धिके लिये प्रयत्न करता है ।
प्रयागराज(www. arya-tv. com) प्रयागराज जनपद में किसान की हत्या कर दी गई है। सोरांव थाना क्षेत्र के तेजूपुर गांव में 50 वर्षीय किसान को जिंदा जलाकर मारने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। घरवालों ने गांव के ही चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। वारदात के पीछे जमीन का विवाद बताया जा रहा है। हत्या की वारदात को शुक्रवार की रात अंजाम दिया गया। तेजूपुर गांव निवासी हरिश्चंद्र शर्मा खेती करते थे। गांव में ही उसे पट्टे की जमीन मिली थी। उसी जमीन पर पुआल रखा हुआ था। वहीं पर हरिश्चंद्र शुक्रवार रात सो रहा था। इसी दौरान पुआल में आ लग गई। आग की चपेट में आने से हरिश्चंद्र की जलकर मौत हो गई। शनिवार सुबह परिवार वाले और कुछ ग्रामीण वहां पहुंचे तो जला हुआ पुआल देखकर परेशान हो गए। उनकी नजर लाश पर पड़ी तो हतप्रभ रह गए। स्वजनों ने हत्या का आरोप लगाया तो खलबली मच गई। सूचना मिलते ही सीओए इंस्पेक्टर समेत कई थाने की फोर्स मौके पर पहुंच गई। नाराज लोगों को किसी तरह समझाते हुए शव को कब्जे में पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया गया। स्वजनों ने आरोप लगाया कि पट्टे की जमीन को लेकर गांव के ही कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। वह लोग जमीन पर कब्जा करना चाहते थेए जिसका विरोध हो रहा था। इसी के चलते हरिश्चंद्र को जिंदा जलाकर मार डाला गया। सीओ सोरांव अमिता सिंह का कहना है कि घरवालों ने गांव के आजाद रमेश समेत चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। दो युवकों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है। घटना के पीछे जमीन का विवाद बताया गया हैए जिसकी जांच चल रही है।
प्रयागराज प्रयागराज जनपद में किसान की हत्या कर दी गई है। सोरांव थाना क्षेत्र के तेजूपुर गांव में पचास वर्षीय किसान को जिंदा जलाकर मारने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। घरवालों ने गांव के ही चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। वारदात के पीछे जमीन का विवाद बताया जा रहा है। हत्या की वारदात को शुक्रवार की रात अंजाम दिया गया। तेजूपुर गांव निवासी हरिश्चंद्र शर्मा खेती करते थे। गांव में ही उसे पट्टे की जमीन मिली थी। उसी जमीन पर पुआल रखा हुआ था। वहीं पर हरिश्चंद्र शुक्रवार रात सो रहा था। इसी दौरान पुआल में आ लग गई। आग की चपेट में आने से हरिश्चंद्र की जलकर मौत हो गई। शनिवार सुबह परिवार वाले और कुछ ग्रामीण वहां पहुंचे तो जला हुआ पुआल देखकर परेशान हो गए। उनकी नजर लाश पर पड़ी तो हतप्रभ रह गए। स्वजनों ने हत्या का आरोप लगाया तो खलबली मच गई। सूचना मिलते ही सीओए इंस्पेक्टर समेत कई थाने की फोर्स मौके पर पहुंच गई। नाराज लोगों को किसी तरह समझाते हुए शव को कब्जे में पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया गया। स्वजनों ने आरोप लगाया कि पट्टे की जमीन को लेकर गांव के ही कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। वह लोग जमीन पर कब्जा करना चाहते थेए जिसका विरोध हो रहा था। इसी के चलते हरिश्चंद्र को जिंदा जलाकर मार डाला गया। सीओ सोरांव अमिता सिंह का कहना है कि घरवालों ने गांव के आजाद रमेश समेत चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। दो युवकों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है। घटना के पीछे जमीन का विवाद बताया गया हैए जिसकी जांच चल रही है।
लगातार कट्टरपंथ की ओर जा रहे पाकिस्तान में अब सोशल मीडिया को लेकर भी नया नियम आ गया है. इसके तहत अगर वॉट्सऐप इजाजत दे तो सरकार किसी भी आम ग्राहक के वॉट्सऐप चैट को खंगाल सकती है. बात यहीं तक सीमित नहीं, ग्राहक किसी भी सोशल साइट का इस्तेमाल बगैर डरे नहीं कर सकेंगे कि कभी भी उनकी जानकारी सार्वजनिक हो सकती है. कुल मिलाकर इस मामले में भी पाकिस्तान चीन के रास्ते पर है. सीमा हैदर को पाकिस्तानी नहीं, बल्कि ये भारतीय क्रिकेटर है 'सबसे ज्यादा पसंद' इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम 2016 के अंतर्गत नए नियम रिमूवल एंड ब्लॉकिंग ऑफ अनलाफुल ऑनलाइन कंटेंट रूल्स 2020 लाए गए हैं. इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सरकारी जांच कंपनी की मांग पर कोई भी जानकारी देनी पड़ सकती है. इसमें बेहद निजी जानकारियां जैसे ग्राहक की सूचना और यहां तक कि उसकी सारी बातचीत भी शामिल है. अब ऐसे में ग्राहक सोशल मीडिया के इस्तेमाल से परहेज करेंगे. यही देखते हुए सोशल नेटवर्किंग कंपनियां जमकर बवाल कर रही हैं. फेसबुक, गूगल और ट्विटर ने मिलकर इस पर एतराज दिखाते हुए कहा कि यही चलता रहा तो उन्हें पाकिस्तान से अपना बोरिया-बिस्तरा समेटने की तैयारी करनी होगी. नए डिजिटल नियम के पालन के लिए सारी सोशल नेटवर्किंग कंपनियों को पाकिस्तान में एक कार्यालय बनाना होगा, जहां के अधिकारी को पाकिस्तान की सरकार चाहे जब तलब कर सके. ये भी पढ़ेंः क्या है मेघालय के घने जंगलों में हरी-नीली रोशनी वाले मशरूमों का रहस्य? बता दें कि इसके लिए सरकार ने उन कंपनियों से कहा है, जिसके देश में 50 लाख से ज्यादा ग्राहक हों. ऐसी कंपनियों को इस्लामाबाद में अपना दफ्तर रखना होगा और समय-समय पर सरकार से बात करनी होगी. वहीं अगर कोई बात सरकार के कायदे के मुताबिक न हो तो कंपनी पर लगभग 50 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है. इस नियम पर पहले ही फरवरी में ड्राफ्ट पर बात हो चुकी है, जिस पर ऑफिस बनाने से कंपनियों ने इनकार कर दिया. इसके अलावा भी पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी के कई नियम काफी अजीब हैं, जिनका पालन करना मुश्किल हो सकता है. जैसे फिलहाल सोशल मीडिया पॉलिसी के अनुसार अगर कोई आपत्तिजनक कंटेट पोस्ट हो जाता है तो उसे हटाने के लिए 24 घंटे का समय मिलता है ताकि पूरी जांच के बाद हटाया जा सके. वही पीटीए ने इमरजेंसी में सूचना हटाने के लिए 6 घंटे का समय दिया है. इसके बाद भी लंबा-चौड़ा जुर्माना भरना पड़ सकता है. ये भी पढ़ेंः क्या है अराकान आर्मी, जो चीन की शह पर भारत के काम में अड़ंगा डाल रही है? सबसे ज्यादा बवाल ग्राहकों की जानकारी को सरकार को उपलब्ध कराने की बात पर हो रहा है. समा टीवी में इस बारे में आई रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनी अगर चाहे तो कंपनी को उपभोक्ता की सारी डिटेल देने को कह सकती है. जैसे अब तक वॉट्सऐप चैट एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड होते रहे लेकिन अगर पाकिस्तान का ये नियम लागू हो सका तो उपभोक्ता की जानकारी निजी नहीं रह सकेगी. इसके लिए सोशल मीडिया कंपनियों को अपना डाटा सेंटर पाकिस्तान में बनाने को कहा जा रहा है. चीन तो पाकिस्तान से भी आगे है. वहां सोशल मीडिया की ग्लोबल साइट्स पर पहले से ही बैन लगा हुआ है. इसकी तोड़ के तौर पर तकनीक में बेहद माहिर चीनियों ने अपनी ही सोशल नेटवर्किंग साइट्स बना डाली हैं. ये भी पढ़ेंः क्या बाइडन का आना कट्टर मुल्क ईरान को इजरायल पर हमले की छूट दे देगा? यही कारण है कि वहां फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप सबकी नकल हाजिर है, जो वहां काफी लोकप्रिय है. जैसे वीबो चीन का अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. यह ट्विटर और फेसबुक का मिलाजुला रूप है. इसी तरह से गूगल की जगह एक दूसरा सर्च इंजन है, जिसके बाइडू कहते हैं. साल 2005 में चीन में गूगल की एंट्री हुई थी लेकिन 2009 खत्म होते-होते चीन ने इसे सेंसर कर दिया और बाइडू ले आया. और तो और, सुरक्षा का हवाला देकर उसने ट्विटर को भी बैन कर रखा है. .
लगातार कट्टरपंथ की ओर जा रहे पाकिस्तान में अब सोशल मीडिया को लेकर भी नया नियम आ गया है. इसके तहत अगर वॉट्सऐप इजाजत दे तो सरकार किसी भी आम ग्राहक के वॉट्सऐप चैट को खंगाल सकती है. बात यहीं तक सीमित नहीं, ग्राहक किसी भी सोशल साइट का इस्तेमाल बगैर डरे नहीं कर सकेंगे कि कभी भी उनकी जानकारी सार्वजनिक हो सकती है. कुल मिलाकर इस मामले में भी पाकिस्तान चीन के रास्ते पर है. सीमा हैदर को पाकिस्तानी नहीं, बल्कि ये भारतीय क्रिकेटर है 'सबसे ज्यादा पसंद' इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम दो हज़ार सोलह के अंतर्गत नए नियम रिमूवल एंड ब्लॉकिंग ऑफ अनलाफुल ऑनलाइन कंटेंट रूल्स दो हज़ार बीस लाए गए हैं. इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सरकारी जांच कंपनी की मांग पर कोई भी जानकारी देनी पड़ सकती है. इसमें बेहद निजी जानकारियां जैसे ग्राहक की सूचना और यहां तक कि उसकी सारी बातचीत भी शामिल है. अब ऐसे में ग्राहक सोशल मीडिया के इस्तेमाल से परहेज करेंगे. यही देखते हुए सोशल नेटवर्किंग कंपनियां जमकर बवाल कर रही हैं. फेसबुक, गूगल और ट्विटर ने मिलकर इस पर एतराज दिखाते हुए कहा कि यही चलता रहा तो उन्हें पाकिस्तान से अपना बोरिया-बिस्तरा समेटने की तैयारी करनी होगी. नए डिजिटल नियम के पालन के लिए सारी सोशल नेटवर्किंग कंपनियों को पाकिस्तान में एक कार्यालय बनाना होगा, जहां के अधिकारी को पाकिस्तान की सरकार चाहे जब तलब कर सके. ये भी पढ़ेंः क्या है मेघालय के घने जंगलों में हरी-नीली रोशनी वाले मशरूमों का रहस्य? बता दें कि इसके लिए सरकार ने उन कंपनियों से कहा है, जिसके देश में पचास लाख से ज्यादा ग्राहक हों. ऐसी कंपनियों को इस्लामाबाद में अपना दफ्तर रखना होगा और समय-समय पर सरकार से बात करनी होगी. वहीं अगर कोई बात सरकार के कायदे के मुताबिक न हो तो कंपनी पर लगभग पचास करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है. इस नियम पर पहले ही फरवरी में ड्राफ्ट पर बात हो चुकी है, जिस पर ऑफिस बनाने से कंपनियों ने इनकार कर दिया. इसके अलावा भी पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी के कई नियम काफी अजीब हैं, जिनका पालन करना मुश्किल हो सकता है. जैसे फिलहाल सोशल मीडिया पॉलिसी के अनुसार अगर कोई आपत्तिजनक कंटेट पोस्ट हो जाता है तो उसे हटाने के लिए चौबीस घंटाटे का समय मिलता है ताकि पूरी जांच के बाद हटाया जा सके. वही पीटीए ने इमरजेंसी में सूचना हटाने के लिए छः घंटाटे का समय दिया है. इसके बाद भी लंबा-चौड़ा जुर्माना भरना पड़ सकता है. ये भी पढ़ेंः क्या है अराकान आर्मी, जो चीन की शह पर भारत के काम में अड़ंगा डाल रही है? सबसे ज्यादा बवाल ग्राहकों की जानकारी को सरकार को उपलब्ध कराने की बात पर हो रहा है. समा टीवी में इस बारे में आई रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनी अगर चाहे तो कंपनी को उपभोक्ता की सारी डिटेल देने को कह सकती है. जैसे अब तक वॉट्सऐप चैट एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड होते रहे लेकिन अगर पाकिस्तान का ये नियम लागू हो सका तो उपभोक्ता की जानकारी निजी नहीं रह सकेगी. इसके लिए सोशल मीडिया कंपनियों को अपना डाटा सेंटर पाकिस्तान में बनाने को कहा जा रहा है. चीन तो पाकिस्तान से भी आगे है. वहां सोशल मीडिया की ग्लोबल साइट्स पर पहले से ही बैन लगा हुआ है. इसकी तोड़ के तौर पर तकनीक में बेहद माहिर चीनियों ने अपनी ही सोशल नेटवर्किंग साइट्स बना डाली हैं. ये भी पढ़ेंः क्या बाइडन का आना कट्टर मुल्क ईरान को इजरायल पर हमले की छूट दे देगा? यही कारण है कि वहां फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप सबकी नकल हाजिर है, जो वहां काफी लोकप्रिय है. जैसे वीबो चीन का अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. यह ट्विटर और फेसबुक का मिलाजुला रूप है. इसी तरह से गूगल की जगह एक दूसरा सर्च इंजन है, जिसके बाइडू कहते हैं. साल दो हज़ार पाँच में चीन में गूगल की एंट्री हुई थी लेकिन दो हज़ार नौ खत्म होते-होते चीन ने इसे सेंसर कर दिया और बाइडू ले आया. और तो और, सुरक्षा का हवाला देकर उसने ट्विटर को भी बैन कर रखा है. .
रोमन साम्राज्य (27 ई. पू. -- 476 (पश्चिम); 1453 (पूर्व)) यूरोप के रोम नगर में केन्द्रित एक साम्राज्य था। इस साम्राज्य का विस्तार पूरे दक्षिणी यूरोप के अलावा उत्तरी अफ्रीका और अनातोलिया के क्षेत्र थे।
रोमन साम्राज्य ; एक हज़ार चार सौ तिरेपन ) यूरोप के रोम नगर में केन्द्रित एक साम्राज्य था। इस साम्राज्य का विस्तार पूरे दक्षिणी यूरोप के अलावा उत्तरी अफ्रीका और अनातोलिया के क्षेत्र थे।
राजस्थान के जोधपुर में शुक्रवार की दोपहर हुए एक भीषण सड़क हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई तथा 8 अन्य घायल हुए हैं। यह हादसा बालेसर थाना क्षेत्र में उस समय हुआ जब एक सिटी बस का टायर फट गया और वह सामने से आ रही जीप से जा टकराई। बालेसर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग 125 पर हुआ है और 13 लोगों की मौत हो गई है। घायलों की हालत गंभीर है इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजन के प्रति संवेदनाएं जाहिर की हैं। इस हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच गया। घायलों को अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर किया गया है। यह हादसा बालेसर थाना क्षेत्र के ढाढनिया गांव के पास हुआ। साभार : यह लेख मूल रूप से समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया है। यह मूल लेख का हिंदी अनुवाद है।
राजस्थान के जोधपुर में शुक्रवार की दोपहर हुए एक भीषण सड़क हादसे में तेरह लोगों की मौत हो गई तथा आठ अन्य घायल हुए हैं। यह हादसा बालेसर थाना क्षेत्र में उस समय हुआ जब एक सिटी बस का टायर फट गया और वह सामने से आ रही जीप से जा टकराई। बालेसर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग एक सौ पच्चीस पर हुआ है और तेरह लोगों की मौत हो गई है। घायलों की हालत गंभीर है इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजन के प्रति संवेदनाएं जाहिर की हैं। इस हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच गया। घायलों को अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर किया गया है। यह हादसा बालेसर थाना क्षेत्र के ढाढनिया गांव के पास हुआ। साभार : यह लेख मूल रूप से समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया है। यह मूल लेख का हिंदी अनुवाद है।
गागल-आखिरकार टिक्कर-मनसा माता सड़क को पक्की करने की कवायद शुरू हो गई। लंबे समय से कच्ची सड़क से उड़ती धूल-मिट्टी से टिक्कर के जीरो प्वाइंट का पास इस सड़क पर दौड़ती गाडि़यों द्वारा उड़ाई जाने वाली धूल से यहां के निवासियों का जीना दूभर ही गया था। गौरतलब है कि उक्त सड़क के उद्घाटन को ढाई साल से ऊपर हो चुका है, लेकिन इस मार्ग पर अव्यवस्था का ही आलम रहा है। बरसात में निरंतर बहते बारिश के पानी से गड्ढों में तबदील होती और अन्य दिनों में धूल-मिट्टी से सरोबार इस सड़क के आसपास के घरों पर रोज धूल-मिट्टी की परत जमने से यहां के बाशिंदों को सांस लेना भी दूभर हो गया था। दैनिक समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल' ने लोगों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। इसके चलते लोक निर्माण विभाग ने सड़क के इस भाग को पक्का करने की कवायद को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए सड़क पर रोड़ी बिछाने का कार्य शुरू कर दिया है। लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता चमन सकलानी ने बताया कि टिक्कर जीरो प्वाइंट से आगे एक किलोमीटर सड़क को पक्का करने का कार्य अविलंब पूरा कर लिया जाएगा, ताकि यहां के निवासियों को धूल-मिट्टी से निजात मिल सके।
गागल-आखिरकार टिक्कर-मनसा माता सड़क को पक्की करने की कवायद शुरू हो गई। लंबे समय से कच्ची सड़क से उड़ती धूल-मिट्टी से टिक्कर के जीरो प्वाइंट का पास इस सड़क पर दौड़ती गाडि़यों द्वारा उड़ाई जाने वाली धूल से यहां के निवासियों का जीना दूभर ही गया था। गौरतलब है कि उक्त सड़क के उद्घाटन को ढाई साल से ऊपर हो चुका है, लेकिन इस मार्ग पर अव्यवस्था का ही आलम रहा है। बरसात में निरंतर बहते बारिश के पानी से गड्ढों में तबदील होती और अन्य दिनों में धूल-मिट्टी से सरोबार इस सड़क के आसपास के घरों पर रोज धूल-मिट्टी की परत जमने से यहां के बाशिंदों को सांस लेना भी दूभर हो गया था। दैनिक समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल' ने लोगों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। इसके चलते लोक निर्माण विभाग ने सड़क के इस भाग को पक्का करने की कवायद को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए सड़क पर रोड़ी बिछाने का कार्य शुरू कर दिया है। लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता चमन सकलानी ने बताया कि टिक्कर जीरो प्वाइंट से आगे एक किलोमीटर सड़क को पक्का करने का कार्य अविलंब पूरा कर लिया जाएगा, ताकि यहां के निवासियों को धूल-मिट्टी से निजात मिल सके।
India vs England: विराट कोहली (Virat Kohli) की अगुआई में भारतीय क्रिकेट टीम ने अहमदाबाद टेस्ट दस विकेट से अपने नाम किया. अहमदाबाद (Ahmedabad Test) में सिर्फ दो दिन में टेस्ट जीतने के अलावा भी भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) के लिए तीसरा टेस्ट बेहद खास रहा. वो इसलिए क्योंकि विराट ने इस जीत के साथ ही पूर्व दिग्गज कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) का बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. ये रिकॉर्ड घरेलू जमीन पर सबसे ज्यादा टेस्ट जीत बतौर कप्तान हासिल करने का था. एमएस धोनी ने भारत में जिन 30 टेस्ट में टीम इंडिया की अगुआई की थी, उनमें उन्हें 21 में जीत मिली थी. वहीं विराट कोहली के नाम अब घरेलू जमीन पर बतौर कप्तान 22 टेस्ट जीत दर्ज हो गईं हैं. विराट ने भारत में 29 टेस्ट में टीम इंडिया की कप्तानी की है. भारतीय टीम ने अहमदाबाद के नए बन नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड को दूसरे ही दिन दस विकेट से मात दी. पिंक बॉल टेस्ट में दबदबे भरी जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया ने सीरीज में 2-1 से अजेय बढ़त भी बना ली है. दोनों टीमों के बीच सीरीज का चौथा और आखिरी मैच अहमदाबाद के इसी स्टेडियम में खेला जाएगा. इससे पहले चेन्नई में हुए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरा मुकाबला चेन्नई में ही भारतीय टीम के खाते में दर्ज हुआ था. विराट कोहली अब घरेलू जमीन पर सबसे ज्यादा टेस्ट जीत हासिल करने वाले कप्तान बन गए हैं, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी का बतौर कप्तान एक रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए इतना आसान नहीं रहने वाला. और वो है सभी प्रारूपों में भारतीय जमीन पर सबसे ज्यादा जीत हासिल करने वाले कप्तान बनने का. धोनी की अगुआई में टीम इंडिया ने भारत में टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में सबसे ज्यादा 74 जीत हासिल की है. वहीं इस मामले में भी विराट कोहली ने एक और पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की बराबरी कर ली है. अजहर और विराट कोहली दोनों ही भारतीय जमीन पर सभी प्रारूपों में एक बराबर 53 जीतें हासिल कर चुके हैं. ये अलग बात है कि अजहरुद्दीन ये 53 जीत टेस्ट और वनडे में ही हासिल की हैं जबकि विराट कोहली के खाते में टी20 मुकाबले भी दर्ज हैं.
India vs England: विराट कोहली की अगुआई में भारतीय क्रिकेट टीम ने अहमदाबाद टेस्ट दस विकेट से अपने नाम किया. अहमदाबाद में सिर्फ दो दिन में टेस्ट जीतने के अलावा भी भारतीय कप्तान विराट कोहली के लिए तीसरा टेस्ट बेहद खास रहा. वो इसलिए क्योंकि विराट ने इस जीत के साथ ही पूर्व दिग्गज कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. ये रिकॉर्ड घरेलू जमीन पर सबसे ज्यादा टेस्ट जीत बतौर कप्तान हासिल करने का था. एमएस धोनी ने भारत में जिन तीस टेस्ट में टीम इंडिया की अगुआई की थी, उनमें उन्हें इक्कीस में जीत मिली थी. वहीं विराट कोहली के नाम अब घरेलू जमीन पर बतौर कप्तान बाईस टेस्ट जीत दर्ज हो गईं हैं. विराट ने भारत में उनतीस टेस्ट में टीम इंडिया की कप्तानी की है. भारतीय टीम ने अहमदाबाद के नए बन नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंग्लैंड को दूसरे ही दिन दस विकेट से मात दी. पिंक बॉल टेस्ट में दबदबे भरी जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया ने सीरीज में दो-एक से अजेय बढ़त भी बना ली है. दोनों टीमों के बीच सीरीज का चौथा और आखिरी मैच अहमदाबाद के इसी स्टेडियम में खेला जाएगा. इससे पहले चेन्नई में हुए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरा मुकाबला चेन्नई में ही भारतीय टीम के खाते में दर्ज हुआ था. विराट कोहली अब घरेलू जमीन पर सबसे ज्यादा टेस्ट जीत हासिल करने वाले कप्तान बन गए हैं, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी का बतौर कप्तान एक रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए इतना आसान नहीं रहने वाला. और वो है सभी प्रारूपों में भारतीय जमीन पर सबसे ज्यादा जीत हासिल करने वाले कप्तान बनने का. धोनी की अगुआई में टीम इंडिया ने भारत में टेस्ट, वनडे और टीबीस तीनों प्रारूपों में सबसे ज्यादा चौहत्तर जीत हासिल की है. वहीं इस मामले में भी विराट कोहली ने एक और पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की बराबरी कर ली है. अजहर और विराट कोहली दोनों ही भारतीय जमीन पर सभी प्रारूपों में एक बराबर तिरेपन जीतें हासिल कर चुके हैं. ये अलग बात है कि अजहरुद्दीन ये तिरेपन जीत टेस्ट और वनडे में ही हासिल की हैं जबकि विराट कोहली के खाते में टीबीस मुकाबले भी दर्ज हैं.
World Milk Day 2022 ऊधमपुर के नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक राजेश दत्ता ने बताया कि ऊधमपुर की कलाड़ी की अपनी अलग विशेषता और स्वाद है इसकी जीआई टैगिंग करवाने की प्रक्रिया जारी है। जीआई टैगिंग होने के बाद देश व दुनिया में यहां की कलाड़ी को पहचान मिलेगी। अमित माही, ऊधमपुरः World Milk Day 2022 इटली की गलियों से निकल विश्व भर में प्रसिद्ध हुए मोजरेला चीज का प्रयोग भारत में भी खूब होता है। लोगों की जुबान पर इसका स्वाद बस सा गया है, लेकिन इस पर जम्मू-कश्मीर के देसी व्यंजन कलाड़ी का स्वाद भारी पडऩे लगा है। विश्व दुग्ध दिवस (एक जून) पर हम आपको पनीर से बनने वाले इस देसी व्यंजन से परिचित कराने के साथ ही इसे पूरे देश व विश्व में लोकप्रिय बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। एक बार जीआइ टैग और व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद कलाड़ी जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निवासियों का जीवन समृद्ध करने के साथ प्रदेश की इकोनमी को बेहतर करने का माध्यम भी बन सकेगी। जम्मू-कश्मीर का जिक्र होते ही यहां के सेब, केसर और राजमा की बात न छिड़े, ऐसा भला कैसे हो सकता है, लेकिन यहां की पके पनीर की कुरकुरी कलाड़ी भी खान-पान के शौकीनों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है। परंपरागत तौर पर ऊधमपुर में बनने वाला यह उत्पाद ग्रामीण आबादी के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। स्वाद में मोजरेला चीज से बेहतर बताई जा रही कलाड़ी के व्यावसायिक उत्पादन पर अब प्रशासन ध्यान दे रहा है और इसकी जीआइ टैगिंग के लि भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वैसे तो जम्मू कश्मीर में कलाड़ी कई जगह बनाई जाती है, लेकिन ऊधमपुर जिले के रामनगर, चनैनी और पंचैरी की कलाड़ी का स्वाद ही अलग है। यही वजह है कि घर की रसोई से लेकर रेस्त्रां और स्ट्रीट फूड से लेकर शादी समारोह तक में रामनगर की कलाड़ी को बड़े चाव से परोसा और खाया जाता है। कलाड़ी को सहेजती महिलाएं। कच्चे दूध से तैयार होने वाले इस पनीर को रोस्ट कर ही कई तरह से परोसा जाता है। कलाड़ी एक पारंपरिक पनीर उत्पाद है। मुख्य रूप से इसे गाय या भैंस के दूध से तैयार किया जाता है। कच्चे दूध को उबाल कर उसे फाड़ा जाता है। इससे बाद उसे हाथों से छोटे-छोटे पेड़ों का आकार दिया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे पत्तों के दोने या चीड़ की पत्तियों पर रख कर छाया में सुखाया जाता है। इससे अतिरिक्त पानी बहकर निकल जाता है और शेष नमी सूखने के बाद कलाड़ी बाहर से शुष्क हो जाती है, मगर इसके अंदर नमी बरकरार रहती है। यही वजह है कि मोजरेला चीज से इसका स्वाद कई गुना बेहतर हो जाता है। इसे आसानी से 10 से 15 दिन तक संभालकर रखा जा सकता है। आवश्यकतानुसार कलाड़ी को गर्म तवे पर मक्खन, घी या अन्य खाद्य तेल संग रोस्ट कर इसे कुरकुरा बनाया जाता है और ब्रेड या अन्य उत्पाद के साथ परोसा जाता है। पक जाने के बाद बाहर से इसकी परत भूरी और कुरकुरी होती है, जबकि अंदर से नरम, मलाईदार पिघले हुए पनीर की तरह होती है। चूंकि इसे काफी दिन तक रखा जा सकता है, ऐसे में अब व्यावसायिक तौर पर कलाड़ी का उत्पादन शुरू हुआ है। हालांकि अभी भी स्वाद का यह खजाना जम्मू -कश्मीर के बाहर की दुनिया से छिपा हुआ ही है। प्रशासन ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट के अंतर्गत कलाड़ी को देश और विश्व में प्रसिद्ध बनाने के लिए काम शुरू कर दिया है। जीआइ टैग मिलने के बाद ऊधमपुर की कलाड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड के रूप पहचान मिलेगी। जिले के बसंतगढ़ में स्थानीय उद्यमी व स्वयं सहायता समूह की मदद से जम्मू की एक कंपनी ने कलाड़ी की पैकिंग शुरू करवाई है। रेस्त्रां में कलाड़ी के उत्पाद तैयार करता कर्मचारी। स्थानीय उद्यमिता के विकास की उम्मीदः कलाड़ी की खोज दुधारू मवेशी पालने वाले गुज्जर बक्करवाल समुदाय ने की थी। वह लंबे समय तक पशुओं के साथ एक स्थान तक दूसरे स्थान पर विचरण करते थे। ऐसे में दूध को कलाड़ी के तौर पर संरक्षित कर लेते थे। अब यह परंपरा व्यावसायिक रूप ले रही है। चूंकि अब जम्मू-कश्मीर में दुग्ध उत्पादन सरप्लस हो रहा है, ऐसे में इस देसी व्यंजन के उत्पादन और विपणन की अपार संभावनांए दिखती हैं। बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग से इसके दिल्ली, मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों के रिटेल स्टोर में जगह बनाने की अपार संभावना है। नाश्ते से लेकर स्ट्रीट फूड तकः कलाड़ी एक आल वेदर स्ट्रीट स्नैक है, जिसे आमतौर पर कुलचा या ब्रेड के साथ खाया जाता है। जम्मू संभाग में लोगों के घरों में कलाड़ी एक लोकप्रिय नाश्ता है। इसे सुबह, शाम या किसी भी समय खाया जाता है। यह प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड भी है। संभाग के ज्यादातर टी-स्टालों, ढाबों, छोटे-बड़े होटलों से लेकर रेहड़ी व खोमचों पर यह आसानी से मिलती है। बदलता जा रहा परोसने का अंदाजः पहले कलाड़ी को अकेले परोसा जाता था। अब कलाड़ी को सैंडविच, बर्गर, कलाड़ी रोल, कलाड़ी पराठा व कई अन्य व्यंजनों के साथ परोसा जाने लगा है। इमली, लाल मिर्च पाउडर, नमक व कुछ अन्य मसाले डालकर तैयार की जाने वाली चटनी इसके स्वाद को और भी बढ़ा देती है। कलाड़ी की सब्जी भी बनाई जाती है, इसके पकौड़े भी बनते हैं। घरेलू पनीर उत्पाद कलाड़ी अब पैकिंग के तौर पर स्टोर में पहुंचने लगी है। यूं कहें कि कलाड़ी अब उत्पाद के तौर पर बाजार में जगह बना रही है। खुल चुकी द कलाड़ी फैक्ट्रीः कोरोना काल में ऊधमपुर में द कलाड़ी फैक्ट्री के नाम से एक रेस्त्रां शुरू किया गया। इसमें कलाड़ी से 20 से अधिक व्यंजन तैयार किए जाते हैैं। यह कितने पंसद किए जा रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि महज दो वर्ष में जम्मू में भी द कलाड़ी फैक्ट्री की एक शाखा खोल दी गई।
World Milk Day दो हज़ार बाईस ऊधमपुर के नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक राजेश दत्ता ने बताया कि ऊधमपुर की कलाड़ी की अपनी अलग विशेषता और स्वाद है इसकी जीआई टैगिंग करवाने की प्रक्रिया जारी है। जीआई टैगिंग होने के बाद देश व दुनिया में यहां की कलाड़ी को पहचान मिलेगी। अमित माही, ऊधमपुरः World Milk Day दो हज़ार बाईस इटली की गलियों से निकल विश्व भर में प्रसिद्ध हुए मोजरेला चीज का प्रयोग भारत में भी खूब होता है। लोगों की जुबान पर इसका स्वाद बस सा गया है, लेकिन इस पर जम्मू-कश्मीर के देसी व्यंजन कलाड़ी का स्वाद भारी पडऩे लगा है। विश्व दुग्ध दिवस पर हम आपको पनीर से बनने वाले इस देसी व्यंजन से परिचित कराने के साथ ही इसे पूरे देश व विश्व में लोकप्रिय बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। एक बार जीआइ टैग और व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद कलाड़ी जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निवासियों का जीवन समृद्ध करने के साथ प्रदेश की इकोनमी को बेहतर करने का माध्यम भी बन सकेगी। जम्मू-कश्मीर का जिक्र होते ही यहां के सेब, केसर और राजमा की बात न छिड़े, ऐसा भला कैसे हो सकता है, लेकिन यहां की पके पनीर की कुरकुरी कलाड़ी भी खान-पान के शौकीनों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है। परंपरागत तौर पर ऊधमपुर में बनने वाला यह उत्पाद ग्रामीण आबादी के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। स्वाद में मोजरेला चीज से बेहतर बताई जा रही कलाड़ी के व्यावसायिक उत्पादन पर अब प्रशासन ध्यान दे रहा है और इसकी जीआइ टैगिंग के लि भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वैसे तो जम्मू कश्मीर में कलाड़ी कई जगह बनाई जाती है, लेकिन ऊधमपुर जिले के रामनगर, चनैनी और पंचैरी की कलाड़ी का स्वाद ही अलग है। यही वजह है कि घर की रसोई से लेकर रेस्त्रां और स्ट्रीट फूड से लेकर शादी समारोह तक में रामनगर की कलाड़ी को बड़े चाव से परोसा और खाया जाता है। कलाड़ी को सहेजती महिलाएं। कच्चे दूध से तैयार होने वाले इस पनीर को रोस्ट कर ही कई तरह से परोसा जाता है। कलाड़ी एक पारंपरिक पनीर उत्पाद है। मुख्य रूप से इसे गाय या भैंस के दूध से तैयार किया जाता है। कच्चे दूध को उबाल कर उसे फाड़ा जाता है। इससे बाद उसे हाथों से छोटे-छोटे पेड़ों का आकार दिया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे पत्तों के दोने या चीड़ की पत्तियों पर रख कर छाया में सुखाया जाता है। इससे अतिरिक्त पानी बहकर निकल जाता है और शेष नमी सूखने के बाद कलाड़ी बाहर से शुष्क हो जाती है, मगर इसके अंदर नमी बरकरार रहती है। यही वजह है कि मोजरेला चीज से इसका स्वाद कई गुना बेहतर हो जाता है। इसे आसानी से दस से पंद्रह दिन तक संभालकर रखा जा सकता है। आवश्यकतानुसार कलाड़ी को गर्म तवे पर मक्खन, घी या अन्य खाद्य तेल संग रोस्ट कर इसे कुरकुरा बनाया जाता है और ब्रेड या अन्य उत्पाद के साथ परोसा जाता है। पक जाने के बाद बाहर से इसकी परत भूरी और कुरकुरी होती है, जबकि अंदर से नरम, मलाईदार पिघले हुए पनीर की तरह होती है। चूंकि इसे काफी दिन तक रखा जा सकता है, ऐसे में अब व्यावसायिक तौर पर कलाड़ी का उत्पादन शुरू हुआ है। हालांकि अभी भी स्वाद का यह खजाना जम्मू -कश्मीर के बाहर की दुनिया से छिपा हुआ ही है। प्रशासन ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट के अंतर्गत कलाड़ी को देश और विश्व में प्रसिद्ध बनाने के लिए काम शुरू कर दिया है। जीआइ टैग मिलने के बाद ऊधमपुर की कलाड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड के रूप पहचान मिलेगी। जिले के बसंतगढ़ में स्थानीय उद्यमी व स्वयं सहायता समूह की मदद से जम्मू की एक कंपनी ने कलाड़ी की पैकिंग शुरू करवाई है। रेस्त्रां में कलाड़ी के उत्पाद तैयार करता कर्मचारी। स्थानीय उद्यमिता के विकास की उम्मीदः कलाड़ी की खोज दुधारू मवेशी पालने वाले गुज्जर बक्करवाल समुदाय ने की थी। वह लंबे समय तक पशुओं के साथ एक स्थान तक दूसरे स्थान पर विचरण करते थे। ऐसे में दूध को कलाड़ी के तौर पर संरक्षित कर लेते थे। अब यह परंपरा व्यावसायिक रूप ले रही है। चूंकि अब जम्मू-कश्मीर में दुग्ध उत्पादन सरप्लस हो रहा है, ऐसे में इस देसी व्यंजन के उत्पादन और विपणन की अपार संभावनांए दिखती हैं। बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग से इसके दिल्ली, मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों के रिटेल स्टोर में जगह बनाने की अपार संभावना है। नाश्ते से लेकर स्ट्रीट फूड तकः कलाड़ी एक आल वेदर स्ट्रीट स्नैक है, जिसे आमतौर पर कुलचा या ब्रेड के साथ खाया जाता है। जम्मू संभाग में लोगों के घरों में कलाड़ी एक लोकप्रिय नाश्ता है। इसे सुबह, शाम या किसी भी समय खाया जाता है। यह प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड भी है। संभाग के ज्यादातर टी-स्टालों, ढाबों, छोटे-बड़े होटलों से लेकर रेहड़ी व खोमचों पर यह आसानी से मिलती है। बदलता जा रहा परोसने का अंदाजः पहले कलाड़ी को अकेले परोसा जाता था। अब कलाड़ी को सैंडविच, बर्गर, कलाड़ी रोल, कलाड़ी पराठा व कई अन्य व्यंजनों के साथ परोसा जाने लगा है। इमली, लाल मिर्च पाउडर, नमक व कुछ अन्य मसाले डालकर तैयार की जाने वाली चटनी इसके स्वाद को और भी बढ़ा देती है। कलाड़ी की सब्जी भी बनाई जाती है, इसके पकौड़े भी बनते हैं। घरेलू पनीर उत्पाद कलाड़ी अब पैकिंग के तौर पर स्टोर में पहुंचने लगी है। यूं कहें कि कलाड़ी अब उत्पाद के तौर पर बाजार में जगह बना रही है। खुल चुकी द कलाड़ी फैक्ट्रीः कोरोना काल में ऊधमपुर में द कलाड़ी फैक्ट्री के नाम से एक रेस्त्रां शुरू किया गया। इसमें कलाड़ी से बीस से अधिक व्यंजन तैयार किए जाते हैैं। यह कितने पंसद किए जा रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि महज दो वर्ष में जम्मू में भी द कलाड़ी फैक्ट्री की एक शाखा खोल दी गई।
(Swami Vivekanada) हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद द्वारा वर्ष 1893 में शिकागो में दिये गए प्रतिष्ठित भाषण को याद करते हुए कहा कि इसमें पृथ्वी को अधिक न्यायपूर्ण, समृद्ध एवं समावेशी बनाने की क्षमता है। - स्वामी विवेकानंद को भारत के सबसे बेहतरीन आध्यात्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों में से एक माना जाता है। - जन्मः स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था। - प्रतिवर्ष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर 'राष्ट्रीय युवा दिवस' का आयोजन किया जाता है। - वर्ष 1893 में खेतड़ी राज्य के महाराजा अजीत सिंह के अनुरोध पर उन्होंने 'विवेकानंद' की उपाधि धारण की। - उन्होंने दुनिया को वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से परिचित कराया। - उन्होंने 'नव-वेदांत' (पश्चिमी दृष्टिकोण के माध्यम से हिंदू धर्म की व्याख्या) का प्रचार किया और भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिकता के संयोजन में विश्वास किया। - विवेकानंद ने मातृभूमि के उत्थान के लिये शिक्षा पर सबसे अधिक बल दिया। साथ ही उन्होंने मानव हेतु चरित्र-निर्माण की शिक्षा की वकालत की। - उन्हें वर्ष 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिये गए उनके भाषण के लिये जाना जाता है। - उन्होंने अपनी पुस्तकों (राजयोग, कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग) में सांसारिक सुख एवं मोह से मोक्ष प्राप्त करने के चार मार्गों का वर्णन किया है। - नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने विवेकानंद को "आधुनिक भारत का निर्माता" कहा था। - वह 19वीं सदी के रहस्यवादी रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्य थे और उन्होंने वर्ष 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। - रामकृष्ण मिशन एक ऐसा संगठन है जो मूल्य आधारित शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, युवा एवं आदिवासी कल्याण और राहत तथा पुनर्वास के क्षेत्र में काम करता है। - वर्ष 1899 में उन्होंने 'बेलूर मठ' की स्थापना की, जो उनका स्थायी निवास बन गया। - मृत्युः वर्ष 1902 में बेलूर मठ में उनकी मृत्यु हो गई। पश्चिम बंगाल में स्थित बेलूर मठ, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है। स्वतंत्रता सेनानी और महान कवि 'सुब्रमण्यम भारती' की 100वीं पुण्यतिथि को चिह्नित करने हेतु तमिलनाडु सरकार ने 11 सितंबर को 'महाकवि' दिवस के रूप में घोषित किया है। माना जाता है कि तमिल कविता और गद्य में भारती के अभिनव योगदान ने 20वीं सदी में तमिल साहित्य में पुनर्जागरण को जन्म दिया। उन्होंने अंग्रेज़ी में भी व्यापक स्तर पर लिखा, हालाँकि उन्हें अंग्रेज़ी के लिये काफी कम प्रसिद्धि मिली। सुब्रमण्यम भारती का जन्म 1882 में सी. सुब्रमण्यम के रूप में 'एट्टायपुरम' में हुआ था, जो कि वर्तमान तमिलनाडु के 'थूथुकुडी' में स्थित है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी से प्राप्त की थी। वह मात्र 11 वर्ष के थे, जब एट्टायपुरम के तत्कालीन राजा ने उनकी कविता से प्रभावित होकर उन्हें 'भारती' की उपाधि दी थी, जिसका अर्थ है 'देवी सरस्वती का आशीर्वाद'। यद्यपि उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ उनकी मातृभाषा तमिल में हैं, किंतु माना जाता है कि सुब्रमण्यम भारती को तीन विदेशी भाषाओं सहित 14 भाषाओं में प्रवीणता प्राप्त थी। उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध चिंता ज़ाहिर की और ब्राह्मणवाद की समाप्ति तथा धार्मिक सुधार की वकालत की। उन्हें अपने लेखन के कारण ब्रिटिश सरकार की कार्यवाही का सामना करना पड़ा और अपना अधिकांश जीवन निर्वासन में बिताया। बाद में वह पांडिचेरी (वर्तमान पुद्दुचेरी) चले गए, जो कि उस समय फ्राँसीसी शासन के अधीन था। वहाँ उन्होंने साप्ताहिक पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया। वर्ष 1921 में 38 वर्ष की अल्प आयु में उनका निधन हो गया। प्रतिवर्ष 09 सितंबर को वैश्विक स्तर पर 'शिक्षा को हमले से बचाने हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस' का आयोजन किया जाता है। इस प्रकार का पहला अंतर्राष्ट्रीय दिवस वर्ष 2020 में आयोजित किया गया था। इस दिवस के आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित देशों में रहने वाले लाखों बच्चों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस की घोषणा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संकल्प को 'कतर' द्वारा प्रस्तुत किया गया था और कुल 62 देशों द्वारा इसे सह-प्रायोजित किया गया था। यह दिवस स्पष्ट करता है कि सभी शिक्षार्थियों को सुरक्षा प्रदान करना और सभी स्तरों पर समावेशी एवं समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकारों का प्राथमिक उत्तरदायित्व है। यह दिवस स्कूलों, शिक्षार्थियों और शैक्षिक कर्मियों को किसी भी प्रकार के हमले से बचाने हेतु सभी संभव उपायों द्वारा मानवीय आपात स्थितियों में सुरक्षित और सुरक्षात्मक स्कूल वातावरण को बढ़ावा देने के लिये प्रयासों को तेज़ करने, वित्तपोषण बढ़ाने और सशस्त्र संघर्ष की स्थितियों में शिक्षा तक पहुँच को सुविधाजनक बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है, साथ ही यह उन कार्यों पर रोक लगाता है, जो बच्चों की शिक्षा तक पहुँच में बाधा उत्पन्न करते हैं। 10 सितंबर, 2021 को 'प्रवासियों के संरक्षक' (POE) सम्मेलन का चौथा संस्करण आयोजित किया गया। संयोगवश इसी दिन 'इमिग्रेंट एक्ट, 1983' को भी अधिनियमित किया गया था। विदेश मंत्रालय के तहत 'प्रवासियों के संरक्षक जनरल' (PGE) भारतीय कामगारों के हितों की रक्षा हेतु उत्तरदायी प्राधिकरण है। PGE विदेशी जनशक्ति निर्यात व्यवसाय के लिये भर्ती एजेंटों को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने का पंजीकरण प्राधिकरण भी है। 'प्रवासियों के संरक्षक' 'इमिग्रेंट एक्ट, 1983' के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक प्रवासियों को इमिग्रेशन हेतु मंज़ूरी देने के लिये उत्तरदायी होते हैं। 'प्रवासियों के संरक्षक' प्रायः 'प्रवासियों के संरक्षक जनरल' के नियंत्रण में कार्य करते हैं। इस संबंध में विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, गतिशीलता एवं साझेदारी पर ब्रिटेन के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन, 14 क्षेत्रों में जापान के साथ विशिष्ट कुशल कामगारों पर समझौते और हाल ही में भारत एवं पुर्तगाल के बीच कुशल जनशक्ति गतिशीलता पर कैबिनेट की मंज़ूरी की पृष्ठभूमि में युवाओं व श्रमिकों को नए गंतव्यों और अवसरों के बारे में सूचित करने में POEs की महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। सेंटर फॉर ओल्डेस्ट आइस एक्सप्लोरेशन (COLDEX) अंटार्कटिका की सबसे पुरानी बर्फ की खोज हेतु अन्वेषण करने और पिछले कई मिलियन वर्षों में पृथ्वी की जलवायु में आए बदलावों का पता लगाने के उद्देश्य से जल्द ही 'सेंटर फॉर ओल्डेस्ट आइस एक्सप्लोरेशन' (COLDEX) की स्थापना की जाएगी। इस अन्वेषण अभियान को अमेरिका के 'नेशनल साइंस फाउंडेशन' द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और इसमें विभिन्न विश्विद्यालयों के शोधकर्त्ता शामिल होंगे। इस अध्ययन का प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना है कि पिछले दस लाख वर्षों की तुलना में अधिक गर्म होने पर वर्तमान में पृथ्वी किस प्रकार व्यवहार कर रही है। इस अध्ययन के हिस्से के तौर पर अंटार्कटिका में बर्फ के सबसे पुराने हिस्से को खोजने का प्रयास किया जाएगा। इस अध्ययन के माध्यम से प्राप्त सूचना जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों को दूर करने के प्रयासों को आगे भी जारी रखने हेतु काफी महत्त्वपूर्ण हो सकती है। अंटार्कटिका की बर्फ का सबसे पुराना रिकॉर्ड वर्तमान में लगभग 800,000 वर्ष पुराना है, जिसे महाद्वीप की सतह से मीलों नीचे ड्रिलिंग करके एकत्र किया गया था। शोधकर्त्ताओं को उम्मीद है कि इस अध्ययन के माध्यम से 1.5 मिलियन वर्ष से 3 मिलियन वर्ष तक के पुराने बर्फ के टुकड़े खोजे जा सकेंगे।
हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद द्वारा वर्ष एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में शिकागो में दिये गए प्रतिष्ठित भाषण को याद करते हुए कहा कि इसमें पृथ्वी को अधिक न्यायपूर्ण, समृद्ध एवं समावेशी बनाने की क्षमता है। - स्वामी विवेकानंद को भारत के सबसे बेहतरीन आध्यात्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों में से एक माना जाता है। - जन्मः स्वामी विवेकानंद का जन्म बारह जनवरी, एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ को नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था। - प्रतिवर्ष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर 'राष्ट्रीय युवा दिवस' का आयोजन किया जाता है। - वर्ष एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में खेतड़ी राज्य के महाराजा अजीत सिंह के अनुरोध पर उन्होंने 'विवेकानंद' की उपाधि धारण की। - उन्होंने दुनिया को वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से परिचित कराया। - उन्होंने 'नव-वेदांत' का प्रचार किया और भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिकता के संयोजन में विश्वास किया। - विवेकानंद ने मातृभूमि के उत्थान के लिये शिक्षा पर सबसे अधिक बल दिया। साथ ही उन्होंने मानव हेतु चरित्र-निर्माण की शिक्षा की वकालत की। - उन्हें वर्ष एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिये गए उनके भाषण के लिये जाना जाता है। - उन्होंने अपनी पुस्तकों में सांसारिक सुख एवं मोह से मोक्ष प्राप्त करने के चार मार्गों का वर्णन किया है। - नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने विवेकानंद को "आधुनिक भारत का निर्माता" कहा था। - वह उन्नीसवीं सदी के रहस्यवादी रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्य थे और उन्होंने वर्ष एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। - रामकृष्ण मिशन एक ऐसा संगठन है जो मूल्य आधारित शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, युवा एवं आदिवासी कल्याण और राहत तथा पुनर्वास के क्षेत्र में काम करता है। - वर्ष एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे में उन्होंने 'बेलूर मठ' की स्थापना की, जो उनका स्थायी निवास बन गया। - मृत्युः वर्ष एक हज़ार नौ सौ दो में बेलूर मठ में उनकी मृत्यु हो गई। पश्चिम बंगाल में स्थित बेलूर मठ, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है। स्वतंत्रता सेनानी और महान कवि 'सुब्रमण्यम भारती' की एक सौवीं पुण्यतिथि को चिह्नित करने हेतु तमिलनाडु सरकार ने ग्यारह सितंबर को 'महाकवि' दिवस के रूप में घोषित किया है। माना जाता है कि तमिल कविता और गद्य में भारती के अभिनव योगदान ने बीसवीं सदी में तमिल साहित्य में पुनर्जागरण को जन्म दिया। उन्होंने अंग्रेज़ी में भी व्यापक स्तर पर लिखा, हालाँकि उन्हें अंग्रेज़ी के लिये काफी कम प्रसिद्धि मिली। सुब्रमण्यम भारती का जन्म एक हज़ार आठ सौ बयासी में सी. सुब्रमण्यम के रूप में 'एट्टायपुरम' में हुआ था, जो कि वर्तमान तमिलनाडु के 'थूथुकुडी' में स्थित है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी से प्राप्त की थी। वह मात्र ग्यारह वर्ष के थे, जब एट्टायपुरम के तत्कालीन राजा ने उनकी कविता से प्रभावित होकर उन्हें 'भारती' की उपाधि दी थी, जिसका अर्थ है 'देवी सरस्वती का आशीर्वाद'। यद्यपि उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ उनकी मातृभाषा तमिल में हैं, किंतु माना जाता है कि सुब्रमण्यम भारती को तीन विदेशी भाषाओं सहित चौदह भाषाओं में प्रवीणता प्राप्त थी। उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध चिंता ज़ाहिर की और ब्राह्मणवाद की समाप्ति तथा धार्मिक सुधार की वकालत की। उन्हें अपने लेखन के कारण ब्रिटिश सरकार की कार्यवाही का सामना करना पड़ा और अपना अधिकांश जीवन निर्वासन में बिताया। बाद में वह पांडिचेरी चले गए, जो कि उस समय फ्राँसीसी शासन के अधीन था। वहाँ उन्होंने साप्ताहिक पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया। वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में अड़तीस वर्ष की अल्प आयु में उनका निधन हो गया। प्रतिवर्ष नौ सितंबर को वैश्विक स्तर पर 'शिक्षा को हमले से बचाने हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस' का आयोजन किया जाता है। इस प्रकार का पहला अंतर्राष्ट्रीय दिवस वर्ष दो हज़ार बीस में आयोजित किया गया था। इस दिवस के आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित देशों में रहने वाले लाखों बच्चों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस की घोषणा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संकल्प को 'कतर' द्वारा प्रस्तुत किया गया था और कुल बासठ देशों द्वारा इसे सह-प्रायोजित किया गया था। यह दिवस स्पष्ट करता है कि सभी शिक्षार्थियों को सुरक्षा प्रदान करना और सभी स्तरों पर समावेशी एवं समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकारों का प्राथमिक उत्तरदायित्व है। यह दिवस स्कूलों, शिक्षार्थियों और शैक्षिक कर्मियों को किसी भी प्रकार के हमले से बचाने हेतु सभी संभव उपायों द्वारा मानवीय आपात स्थितियों में सुरक्षित और सुरक्षात्मक स्कूल वातावरण को बढ़ावा देने के लिये प्रयासों को तेज़ करने, वित्तपोषण बढ़ाने और सशस्त्र संघर्ष की स्थितियों में शिक्षा तक पहुँच को सुविधाजनक बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है, साथ ही यह उन कार्यों पर रोक लगाता है, जो बच्चों की शिक्षा तक पहुँच में बाधा उत्पन्न करते हैं। दस सितंबर, दो हज़ार इक्कीस को 'प्रवासियों के संरक्षक' सम्मेलन का चौथा संस्करण आयोजित किया गया। संयोगवश इसी दिन 'इमिग्रेंट एक्ट, एक हज़ार नौ सौ तिरासी' को भी अधिनियमित किया गया था। विदेश मंत्रालय के तहत 'प्रवासियों के संरक्षक जनरल' भारतीय कामगारों के हितों की रक्षा हेतु उत्तरदायी प्राधिकरण है। PGE विदेशी जनशक्ति निर्यात व्यवसाय के लिये भर्ती एजेंटों को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने का पंजीकरण प्राधिकरण भी है। 'प्रवासियों के संरक्षक' 'इमिग्रेंट एक्ट, एक हज़ार नौ सौ तिरासी' के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक प्रवासियों को इमिग्रेशन हेतु मंज़ूरी देने के लिये उत्तरदायी होते हैं। 'प्रवासियों के संरक्षक' प्रायः 'प्रवासियों के संरक्षक जनरल' के नियंत्रण में कार्य करते हैं। इस संबंध में विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, गतिशीलता एवं साझेदारी पर ब्रिटेन के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन, चौदह क्षेत्रों में जापान के साथ विशिष्ट कुशल कामगारों पर समझौते और हाल ही में भारत एवं पुर्तगाल के बीच कुशल जनशक्ति गतिशीलता पर कैबिनेट की मंज़ूरी की पृष्ठभूमि में युवाओं व श्रमिकों को नए गंतव्यों और अवसरों के बारे में सूचित करने में POEs की महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। सेंटर फॉर ओल्डेस्ट आइस एक्सप्लोरेशन अंटार्कटिका की सबसे पुरानी बर्फ की खोज हेतु अन्वेषण करने और पिछले कई मिलियन वर्षों में पृथ्वी की जलवायु में आए बदलावों का पता लगाने के उद्देश्य से जल्द ही 'सेंटर फॉर ओल्डेस्ट आइस एक्सप्लोरेशन' की स्थापना की जाएगी। इस अन्वेषण अभियान को अमेरिका के 'नेशनल साइंस फाउंडेशन' द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और इसमें विभिन्न विश्विद्यालयों के शोधकर्त्ता शामिल होंगे। इस अध्ययन का प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना है कि पिछले दस लाख वर्षों की तुलना में अधिक गर्म होने पर वर्तमान में पृथ्वी किस प्रकार व्यवहार कर रही है। इस अध्ययन के हिस्से के तौर पर अंटार्कटिका में बर्फ के सबसे पुराने हिस्से को खोजने का प्रयास किया जाएगा। इस अध्ययन के माध्यम से प्राप्त सूचना जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों को दूर करने के प्रयासों को आगे भी जारी रखने हेतु काफी महत्त्वपूर्ण हो सकती है। अंटार्कटिका की बर्फ का सबसे पुराना रिकॉर्ड वर्तमान में लगभग आठ सौ,शून्य वर्ष पुराना है, जिसे महाद्वीप की सतह से मीलों नीचे ड्रिलिंग करके एकत्र किया गया था। शोधकर्त्ताओं को उम्मीद है कि इस अध्ययन के माध्यम से एक.पाँच मिलियन वर्ष से तीन मिलियन वर्ष तक के पुराने बर्फ के टुकड़े खोजे जा सकेंगे।
चौधरी चरण विश्विद्यालय ने कबाड़ से जुगाड मुहिम को जारी रखते हुए विश्वविधालय परिसर के स्टोर में पड़े कबाड़ का उचित प्रयोग कर, Waste To Wonder विशेषज्ञ फर्म ECO India Innovations के द्वारा यह निर्माण कराया गया है। यह रहट (Persian Wheel) छात्रों में इन्नोवेशन को जाग्रत करेगा व भारत के इतिहास को बताएगा कि किस तकनीक से पूर्व समय में खेतों तक पानी पहुंचाया जाता था। विश्विद्यालय परिसर में विजिट करने वाले अन्य कॉलेज के प्रतिनिधि भी इस रहट को देखने आ रहे है और इसके साथ ही कॉलेज के द्वारा भी कबाड़ से सौंदर्यकरण को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जा रहा है। निरंतर मेरठ व अन्य शहर भी कबाड़ से जुगाड पर विशेष ध्यान दे रहे है। यह सभी कार्य Eco India Innovations के डायरेक्टर अभिषेक यादव के कंसल्टेशन में कराया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चौधरी चरण विश्विद्यालय ने कबाड़ से जुगाड मुहिम को जारी रखते हुए विश्वविधालय परिसर के स्टोर में पड़े कबाड़ का उचित प्रयोग कर, Waste To Wonder विशेषज्ञ फर्म ECO India Innovations के द्वारा यह निर्माण कराया गया है। यह रहट छात्रों में इन्नोवेशन को जाग्रत करेगा व भारत के इतिहास को बताएगा कि किस तकनीक से पूर्व समय में खेतों तक पानी पहुंचाया जाता था। विश्विद्यालय परिसर में विजिट करने वाले अन्य कॉलेज के प्रतिनिधि भी इस रहट को देखने आ रहे है और इसके साथ ही कॉलेज के द्वारा भी कबाड़ से सौंदर्यकरण को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जा रहा है। निरंतर मेरठ व अन्य शहर भी कबाड़ से जुगाड पर विशेष ध्यान दे रहे है। यह सभी कार्य Eco India Innovations के डायरेक्टर अभिषेक यादव के कंसल्टेशन में कराया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) में मची भगदड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से ही टीएमसी के विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का दौर शुरू हो गया। चुनाव परिणाम के आए लगभग एक महीना गुजर चुका है, लेकिन ममता की पार्टी के विधायक का पार्टी छोड़कर जाने का सिलसिला जारी है। अब टीएमसी के एक और विधायक के साथ ही 18 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की खबर है। अलीपुरद्वार में कलचीनी से विधायक विल्सन चामपरामरी ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि वो सोमवार (जून 24, 2019) को भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि उनके साथ 18 पार्षद भी सदस्यता लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने ये जानकारी भी दी कि पार्टी के कई और नेता भी भाजपा में शामिल होने के लिए पार्टी हाईकमान के संपर्क में है। दरअसल, विल्सन टीएमसी पार्टी से खुश नहीं है। उनका कहना है कि वो एक विधायक हैं, इसके बावजूद वो स्वतंत्र रुप से अपने क्षेत्र में कोई काम नहीं करवा सकते हैं और उनके द्वारा योजना लाए जाए की बात पर भी पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। गौरतलब है कि, इससे पहले दिल्ली में 18 जून को बोनगाँव से टीएमसी विधायक विश्वजीत दास पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। इसके अलावा 12 पार्षदों ने भी टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में नोआपाड़ा के टीएमसी विधायक सुनील सिंह टीएमसी के 12 पार्षदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे। इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के दौरान पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी नेता मुकुल राय मौजूद थे।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस में मची भगदड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से ही टीएमसी के विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का दौर शुरू हो गया। चुनाव परिणाम के आए लगभग एक महीना गुजर चुका है, लेकिन ममता की पार्टी के विधायक का पार्टी छोड़कर जाने का सिलसिला जारी है। अब टीएमसी के एक और विधायक के साथ ही अट्ठारह पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की खबर है। अलीपुरद्वार में कलचीनी से विधायक विल्सन चामपरामरी ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि वो सोमवार को भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि उनके साथ अट्ठारह पार्षद भी सदस्यता लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने ये जानकारी भी दी कि पार्टी के कई और नेता भी भाजपा में शामिल होने के लिए पार्टी हाईकमान के संपर्क में है। दरअसल, विल्सन टीएमसी पार्टी से खुश नहीं है। उनका कहना है कि वो एक विधायक हैं, इसके बावजूद वो स्वतंत्र रुप से अपने क्षेत्र में कोई काम नहीं करवा सकते हैं और उनके द्वारा योजना लाए जाए की बात पर भी पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। गौरतलब है कि, इससे पहले दिल्ली में अट्ठारह जून को बोनगाँव से टीएमसी विधायक विश्वजीत दास पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। इसके अलावा बारह पार्षदों ने भी टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में नोआपाड़ा के टीएमसी विधायक सुनील सिंह टीएमसी के बारह पार्षदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे। इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के दौरान पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी नेता मुकुल राय मौजूद थे।
- Movies Anupamaa Written Update: बेटी का हाल देखकर बदहवास होगा अनुज, अनुपमा भी ऐन मौके पर रोकेगी अपनी उड़ान! - Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग? दूरसंचार नियामक ट्राई ने आपरेटरों को निदेंश दिया है कि वे उपभोक्ताओं को नियमित आधार पर टैरिफ प्लान के बारे में जानकारी प्रदान करें। उन्हें टैरिफ प्लान के बारे में एक सुनिश्चित फार्मेट दिया जाए, जिससे ग्राहकों को तुलना करने में आसानी हो। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई ने आपरेटरों से यह भी कहा है कि वे अलग-अलग फार्मेट में प्रीपेड और पोस्ट पेड टैरिफ प्लान की जानकारी प्रदान करें। ट्राई के निर्देश में कहा गया है कि इस फामेर्ट में दूरसंचार एक्सेस सेवा प्रदाता द्वारा सेवा क्षेत्र में दिए जा रहे सभी टैरिफ प्लान शामिल होने चाहिए। Read more about:
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Himachal Assembly Election आज शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमाचल प्रदेश के जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिमाचल में फिर प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी। राज्य ब्यूरो, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार बनाकर मिथक तोड़ने का कार्य किया, उसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी। उन्होंने शुक्रवार को हिमाचल के जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में हुई चुनावी सभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड के बीच सीमाओं का रेखांकन भले ही हो गया हो, लेकिन हमारे दिल एक-दूसरे से जुड़े हैं। हिमाचल व उत्तराखंड का रोटी-बेटी का रिश्ता है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ वे लोग हैं, जिन्होंने झूठे वादे किए, 55 साल तक राज्य किया, लेकिन हमेशा पहचान को समाप्त करने का काम किया। दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आगे बढ़ रही है, उसी तरह हिमाचल में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश आगे बढ़ रहा है। पहले के समय में अयोध्या में रामलला को टेंट में देखकर मन दुखी होता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वहां भव्य मंदिर बन रहा है। चुनावी सभा से पहले मुख्यमंत्री श्री हाटकेश्वरी दुर्गा माता मंदिर में मां भगवती दुर्गा और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इगास के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पत्नी गीता धामी के साथ मुख्यमंत्री आवास में गो पूजन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने देवउठनी एकादशी के अवसर पर तुलसी पूजन भी किया।
Himachal Assembly Election आज शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमाचल प्रदेश के जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिमाचल में फिर प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी। राज्य ब्यूरो, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार बनाकर मिथक तोड़ने का कार्य किया, उसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी। उन्होंने शुक्रवार को हिमाचल के जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में हुई चुनावी सभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड के बीच सीमाओं का रेखांकन भले ही हो गया हो, लेकिन हमारे दिल एक-दूसरे से जुड़े हैं। हिमाचल व उत्तराखंड का रोटी-बेटी का रिश्ता है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ वे लोग हैं, जिन्होंने झूठे वादे किए, पचपन साल तक राज्य किया, लेकिन हमेशा पहचान को समाप्त करने का काम किया। दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आगे बढ़ रही है, उसी तरह हिमाचल में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश आगे बढ़ रहा है। पहले के समय में अयोध्या में रामलला को टेंट में देखकर मन दुखी होता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वहां भव्य मंदिर बन रहा है। चुनावी सभा से पहले मुख्यमंत्री श्री हाटकेश्वरी दुर्गा माता मंदिर में मां भगवती दुर्गा और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इगास के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पत्नी गीता धामी के साथ मुख्यमंत्री आवास में गो पूजन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने देवउठनी एकादशी के अवसर पर तुलसी पूजन भी किया।
एनजीटी ने केजरीवाल सरकार से पूछा कि क्या ऑड-ईवन योजना से प्रदूषण घटा है, एनजीटी ने यह भी पूछा कि दिल्ली सरकार ने कंस्ट्रक्शन डस्ट की वजह से प्रदूषण रोकने के लिए क्या किया? उसने पूछा कि सरकार बताए कि नियमों का उल्लंघन करनेवाले बिल्डरों पर क्या कार्रवाई की गई? एनजीटी ने पंजाब सरकार को भी कड़ी चेतावनी दी है। एनजीटी ने कहा कि अगर पंजाब सरकार पराली जलाने पर रोक नहीं लगा पाती है तो वह कड़ी कार्रवाई और जुर्माने के लिए तैयार रहे।
एनजीटी ने केजरीवाल सरकार से पूछा कि क्या ऑड-ईवन योजना से प्रदूषण घटा है, एनजीटी ने यह भी पूछा कि दिल्ली सरकार ने कंस्ट्रक्शन डस्ट की वजह से प्रदूषण रोकने के लिए क्या किया? उसने पूछा कि सरकार बताए कि नियमों का उल्लंघन करनेवाले बिल्डरों पर क्या कार्रवाई की गई? एनजीटी ने पंजाब सरकार को भी कड़ी चेतावनी दी है। एनजीटी ने कहा कि अगर पंजाब सरकार पराली जलाने पर रोक नहीं लगा पाती है तो वह कड़ी कार्रवाई और जुर्माने के लिए तैयार रहे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीडी सावरकर(V D Savarkar) को दोहरी उम्र कैद की सजा सुनाई गई और उन्होंने जेल में यातनापूर्ण समय बिताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने अपनी कैद के दौरान आराम से समय बिताया। शिवसेना को चुनाव आयोग ने तीर-धनुष वाला सिंबल साल 1989 में दिया था। इसके पहले शिवसेना कई चुनाव चिह्नों पर चुनाव लड़ चुकी है। इसके पहले शिवसेना ने तलवार और ढाल, नारियल के पेड़, रेलवे इंजन, कप और प्लेट जैसे विभिन्न प्रतीकों पर चुनाव लड़ा है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे धड़े ने चुनाव आयोग को दिए लिस्ट में पार्टी के चुनाव चिह्न के रूप में त्रिशूल को पहली और उगता हुआ सूरज को दूसरी पसंद बताया है। इसी तरह पार्टी के नाम के लिए 'शिवसेना बालासाहेब ठाकरे' पहली और 'शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे'दूसरी पसंद बताया गया है। शिवसेना की लड़ाई चुनाव आयोग में पहुंचने के बाद दोनों गुटों को जोरदार झटका लगा है। चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने वाले दोनों गुटों को चुनाव आयोग ने तीर-धनुष के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमें जाति प्रथा को पूरी तरह से त्याग देना चाहिए। पिछली पीढ़ियों ने कई गलतियां की हैं, हमें इसे स्वीकार करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र के नासिक में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई और 29 लोग घायल हो गए। बस में 40 से अधिक लोग सवार थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता अनिल देसाई ने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए समस्त दस्तावेजों को समय से उपलब्ध कराएगी। शिवसेना का चुनाव चिन्ह उनके पास ही रहेगा। उद्धव ठाकरे ही शिवसेना के असली नेता हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बड़ा निशाना साधा है। शिवसेना ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की दशहरा रैली भारतीय जनता पार्टी समर्थित कार्यक्रम था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीडी सावरकर को दोहरी उम्र कैद की सजा सुनाई गई और उन्होंने जेल में यातनापूर्ण समय बिताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने अपनी कैद के दौरान आराम से समय बिताया। शिवसेना को चुनाव आयोग ने तीर-धनुष वाला सिंबल साल एक हज़ार नौ सौ नवासी में दिया था। इसके पहले शिवसेना कई चुनाव चिह्नों पर चुनाव लड़ चुकी है। इसके पहले शिवसेना ने तलवार और ढाल, नारियल के पेड़, रेलवे इंजन, कप और प्लेट जैसे विभिन्न प्रतीकों पर चुनाव लड़ा है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे धड़े ने चुनाव आयोग को दिए लिस्ट में पार्टी के चुनाव चिह्न के रूप में त्रिशूल को पहली और उगता हुआ सूरज को दूसरी पसंद बताया है। इसी तरह पार्टी के नाम के लिए 'शिवसेना बालासाहेब ठाकरे' पहली और 'शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे'दूसरी पसंद बताया गया है। शिवसेना की लड़ाई चुनाव आयोग में पहुंचने के बाद दोनों गुटों को जोरदार झटका लगा है। चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने वाले दोनों गुटों को चुनाव आयोग ने तीर-धनुष के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमें जाति प्रथा को पूरी तरह से त्याग देना चाहिए। पिछली पीढ़ियों ने कई गलतियां की हैं, हमें इसे स्वीकार करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र के नासिक में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में ग्यारह लोगों की मौत हो गई और उनतीस लोग घायल हो गए। बस में चालीस से अधिक लोग सवार थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता अनिल देसाई ने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए समस्त दस्तावेजों को समय से उपलब्ध कराएगी। शिवसेना का चुनाव चिन्ह उनके पास ही रहेगा। उद्धव ठाकरे ही शिवसेना के असली नेता हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बड़ा निशाना साधा है। शिवसेना ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की दशहरा रैली भारतीय जनता पार्टी समर्थित कार्यक्रम था।
फिल्मः 'डेडपूल 2' कास्ट- रयान रेनॉल्ड, जोश ब्रोलिन, मोरेना Baccarin, हॉलीवुड की फिल्म 'डेडपूल 2' आज रिलीज हो चुकी हैं और सभी को इस फिल्म से यहीं उम्मीद है कि यह ताबड़तोड़ कमाई कर आगे निकल जाएगी। फिल्म को लेकर स्टार्स की बहुत सी उम्मीदे हैं। इस फिल्म में लीड किरदार निभाने वाले एक्टर को बॉलीवुड के खिलजी उर्फ़ रणवीर सिंह ने अपनी आवाज दी हैं। आप सभी को पता ही होगा कि इस फिल्म के पहले पार्ट ने जोरदार कमाई की थी और अब उसके बाद इस फिल्म से भी सभी की वही उम्मीदे हैं। 'डेडपूल 2' के पहले भारत में फिल्म 'एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर' ने जमकर कमाई की थी और लोगों के द्वारा खूब पसंद भी की गई थी. अब आज आने वाली 'डेडपूल 2'
फिल्मः 'डेडपूल दो' कास्ट- रयान रेनॉल्ड, जोश ब्रोलिन, मोरेना Baccarin, हॉलीवुड की फिल्म 'डेडपूल दो' आज रिलीज हो चुकी हैं और सभी को इस फिल्म से यहीं उम्मीद है कि यह ताबड़तोड़ कमाई कर आगे निकल जाएगी। फिल्म को लेकर स्टार्स की बहुत सी उम्मीदे हैं। इस फिल्म में लीड किरदार निभाने वाले एक्टर को बॉलीवुड के खिलजी उर्फ़ रणवीर सिंह ने अपनी आवाज दी हैं। आप सभी को पता ही होगा कि इस फिल्म के पहले पार्ट ने जोरदार कमाई की थी और अब उसके बाद इस फिल्म से भी सभी की वही उम्मीदे हैं। 'डेडपूल दो' के पहले भारत में फिल्म 'एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर' ने जमकर कमाई की थी और लोगों के द्वारा खूब पसंद भी की गई थी. अब आज आने वाली 'डेडपूल दो'
चेन्नई ने इस मैच के लिए सुरेश रैना की जगह मुरली विजय को टीम में शामिल किया है। वहीं पंजाब ने अक्षर पटेल के स्थान पर बरिंन्दर शरण को और मार्कस स्टोयनिस की जगह क्रिस गेल को अंतिम एकादश में मौका दिया है। टीमें : किंग्स इलेवन पंजाबः रविचंद्रन अश्विन (कप्तान), मयंक अग्रवाल, करुण नायर, युवराज सिंह, एरॉन फिंच, क्रिस गेल, बरिन्दर शरण, एंड्रयू टाई, मोहित शर्मा और मुजीब उर रहमान। चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धौनी (कप्तान/ विकेटकीपर), मुरली विजय , रवींद्र जडेजा, ड्वयान ब्रावो,शेन वाटसन, सैम बिलिंग्स, इमरान ताहिर, अंबाती रायुडू, शार्दूल ठाकुर, हरभजन सिंह और दीपक चहर।
चेन्नई ने इस मैच के लिए सुरेश रैना की जगह मुरली विजय को टीम में शामिल किया है। वहीं पंजाब ने अक्षर पटेल के स्थान पर बरिंन्दर शरण को और मार्कस स्टोयनिस की जगह क्रिस गेल को अंतिम एकादश में मौका दिया है। टीमें : किंग्स इलेवन पंजाबः रविचंद्रन अश्विन , मयंक अग्रवाल, करुण नायर, युवराज सिंह, एरॉन फिंच, क्रिस गेल, बरिन्दर शरण, एंड्रयू टाई, मोहित शर्मा और मुजीब उर रहमान। चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धौनी , मुरली विजय , रवींद्र जडेजा, ड्वयान ब्रावो,शेन वाटसन, सैम बिलिंग्स, इमरान ताहिर, अंबाती रायुडू, शार्दूल ठाकुर, हरभजन सिंह और दीपक चहर।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी ने पहली सूची जारी कर दी है. इसमें 177 नामों का ऐलान किया गया है. दो मंत्रियों समेत 37 विधायकों के टिकट काटे गए हैं. वहीं 2013 के चुनाव में हार चुके कुछ नेताओं को भी मौका दिया गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी सीट से ही चुनाव लड़ेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की गोविंदपुरा सीट और पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सीट महू का इस सूची में जिक्र नहीं है. (इसे पढ़ें- MP विधानसभा चुनावः बीजेपी की पहली सूची में 27 विधायक और दो मंत्रियों के कटे टिकट) पहली लिस्ट की खास बात यह रही कि बीजेपी ने दो मंत्रियों माया सिंह औऱ हर्ष सिंह के टिकट कटे वहीं तीसरे मंत्री गौरीशंकर शेजवार का टिकट कटा जरूर लेकिन उन्होंने अपने बेटे मुदित शेजवार को टिकट दिलवा दिया. वहीं बीजेपी के दो सांसद विधानसभा चुनाव मैदान में उतारे गए हैं. जिनमें खजुराहो से सांसद नागेन्द्र सिंह को नागौद से उतारा गया और आगर से सांसद मनोहर उंटवाल को टिकट दिया गया है. इसके अलावा इंदौर क्षेत्र से अभी तक टिकटों की घोषणा नहीं की गई है. जानकारी के अनुसार यहां सुमित्रा महाजन, कैलाश विजयवर्गीय और गौड़ परिवार के बीच टिकटों को लेकर चल रही खींचतान की वजह से टिकट बांटने का काम टाल दिया गया है. बता दें कि एक दिन पहले ही दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी. इसी में संभावित उम्मीदवारों के बारे में चर्चा की गई थी. बैठक में पीएम मोदी के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए थे. यह पढ़ें- इंदौर से एक भी टिकट का ऐलान क्यों नहीं कर पाई बीजेपी! . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए 800 करोड़!
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी ने पहली सूची जारी कर दी है. इसमें एक सौ सतहत्तर नामों का ऐलान किया गया है. दो मंत्रियों समेत सैंतीस विधायकों के टिकट काटे गए हैं. वहीं दो हज़ार तेरह के चुनाव में हार चुके कुछ नेताओं को भी मौका दिया गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी सीट से ही चुनाव लड़ेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की गोविंदपुरा सीट और पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सीट महू का इस सूची में जिक्र नहीं है. पहली लिस्ट की खास बात यह रही कि बीजेपी ने दो मंत्रियों माया सिंह औऱ हर्ष सिंह के टिकट कटे वहीं तीसरे मंत्री गौरीशंकर शेजवार का टिकट कटा जरूर लेकिन उन्होंने अपने बेटे मुदित शेजवार को टिकट दिलवा दिया. वहीं बीजेपी के दो सांसद विधानसभा चुनाव मैदान में उतारे गए हैं. जिनमें खजुराहो से सांसद नागेन्द्र सिंह को नागौद से उतारा गया और आगर से सांसद मनोहर उंटवाल को टिकट दिया गया है. इसके अलावा इंदौर क्षेत्र से अभी तक टिकटों की घोषणा नहीं की गई है. जानकारी के अनुसार यहां सुमित्रा महाजन, कैलाश विजयवर्गीय और गौड़ परिवार के बीच टिकटों को लेकर चल रही खींचतान की वजह से टिकट बांटने का काम टाल दिया गया है. बता दें कि एक दिन पहले ही दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी. इसी में संभावित उम्मीदवारों के बारे में चर्चा की गई थी. बैठक में पीएम मोदी के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए थे. यह पढ़ें- इंदौर से एक भी टिकट का ऐलान क्यों नहीं कर पाई बीजेपी! . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए आठ सौ करोड़!
कोरोेना वायरस के केस अब चंडीगढ़ में काफी कम आने लगे हैं। ऐसे में पाबंदियों में चंडीगढ़ प्रशासन ने और छूट दी है। अब किसी भी तरह की भर्ती या फिर किसी भी तरह के एग्जाम करवाए जाने की मंजूरी दे दी गई है। इसको लेकर चंडीगढ़ के एडवाइजर कम चेयरपर्सन स्टेट एग्ज्यूकेटिव कमेटी ऑफ स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथाॅरिटी चंडीगढ़ धर्मपाल ने निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि किसी भी एजेंसी या इंस्टीट्यूट की तरफ से करवाए जाने वाले रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन या अन्य एग्जाम करवाए जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान कोविड प्रोटोकोल का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा एक एग्जामिनेशन हाॅल में 50 फीसदी एप्लीकेंट्स ही बैठ सकेंगे। मास्क पहनना जरूरी होगा। शहर में बैंकों से लेकर बाकी इंस्टीट्यूट्स भर्तियों को लेकर एग्जाम करवाते हैं। अभी 1 अगस्त को ही फाॅरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की तरफ से फाॅरेस्टर और फाॅरेस्ट गार्ड की पोस्टों के लिए एग्जाम करवाया जाना है। इसमें करीब 38 हजार एप्लीकेंट्स आएंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोरोेना वायरस के केस अब चंडीगढ़ में काफी कम आने लगे हैं। ऐसे में पाबंदियों में चंडीगढ़ प्रशासन ने और छूट दी है। अब किसी भी तरह की भर्ती या फिर किसी भी तरह के एग्जाम करवाए जाने की मंजूरी दे दी गई है। इसको लेकर चंडीगढ़ के एडवाइजर कम चेयरपर्सन स्टेट एग्ज्यूकेटिव कमेटी ऑफ स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथाॅरिटी चंडीगढ़ धर्मपाल ने निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि किसी भी एजेंसी या इंस्टीट्यूट की तरफ से करवाए जाने वाले रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन या अन्य एग्जाम करवाए जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान कोविड प्रोटोकोल का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा एक एग्जामिनेशन हाॅल में पचास फीसदी एप्लीकेंट्स ही बैठ सकेंगे। मास्क पहनना जरूरी होगा। शहर में बैंकों से लेकर बाकी इंस्टीट्यूट्स भर्तियों को लेकर एग्जाम करवाते हैं। अभी एक अगस्त को ही फाॅरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की तरफ से फाॅरेस्टर और फाॅरेस्ट गार्ड की पोस्टों के लिए एग्जाम करवाया जाना है। इसमें करीब अड़तीस हजार एप्लीकेंट्स आएंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टीवी के चर्चित सीरियल गुम है किसी के प्यार में दिखाया जाएगा कि सई और पाखी के बीच हुए ड्रामे से वीनू डर जाएगा। वह सई को धक्का देगा एवं बुरा भला बोलेगा। वीनू पाखी से बोलेगा कि उसे घर ले चले। सई टूट जाएगी और विराट को उसके लिए दुख होगा। घर पर चव्हाण परिवार भी सई को दोष देगी जिस पर विराट भिड़ जाएगा। यहां सई वीनू के कारण मानसिक तौर पर परेशान हो जाएगी। घर पर वीनू बुरा सपना देखेगा। पाखी वीनू की हालत के लिए सई को दोष देगी। स्कूल में पाखी घबराकर विनायक के सामने सच का खुलासा कर देती है कि सई उसकी असली मां है। पाखी के बुरी तरह रोने एवं अचानक से सच सामने आने से विनायक डर जाता है। वह सई को गंदा बोलता है एवं विराट, पाखी से घर चलने को बोलता है। सई हर्ट होकर वहीं बैठी रह जाती है एवं विराट को उसके लिए बुरा लगता है। वह वीनू से बोलता है कि सई को बुरा न समझे मगर पाखी बीच में बोल पड़ती है। तभी सवि वहां पहुंचती है एवं अपनी मां को गले लगाती है। सई सवि से पूछती है कि क्या वह इतनी गंदी है? इस पर सवि उसे समझाती है कि शायद वीनू नाराज है। सवि बोलती है कि वह उसकी एवं वीनू की दोस्ती करवा देगी। वही विनायक घर आकर डरा रहता है। वह अश्विनी और भवानी से बोलता है कि उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा। वह उन लोगों को बताता है कि सई बोल रही थी कि वह उन लोगों की असली मां है। भवानी सई पर भड़क जाती है। विराट बीच में बोलता है कि सई एक मां है। वह अकेली अपनी हर जंग लड़ रही है। उसके पास कोई नहीं है। उन व्यक्तियों को सई का दर्द समझना चाहिए। इधर घर पर सई टेडी बियर को वीनू समझकर बातें करती है। सई कहती है कि जब उसने धक्का दिया तो वह बहुत हर्ट हो गई। वीनू बोलता है कि वह डर गया था। वह तो स्वयं ही सई को छोटी मां बोलना चाहता था। वह सई से बोलता है कि उसे छोटी मां बोलेगा। सई बात कर रही होती है तभी वहां सवि आ जाती है। सवि उससे पूछती है कि वह किससे बात कर रही है, यहां तो टेडी बियर है। वीनू बुरा सपना देखता है कि सई उसे पाखी से अलग कर रही है। वह जाग जाता है तो पाखी सई को दोष देती है। विराट उसे याद दिलाता है कि सई नहीं बल्कि उसके कारण यह सब हुआ है।
टीवी के चर्चित सीरियल गुम है किसी के प्यार में दिखाया जाएगा कि सई और पाखी के बीच हुए ड्रामे से वीनू डर जाएगा। वह सई को धक्का देगा एवं बुरा भला बोलेगा। वीनू पाखी से बोलेगा कि उसे घर ले चले। सई टूट जाएगी और विराट को उसके लिए दुख होगा। घर पर चव्हाण परिवार भी सई को दोष देगी जिस पर विराट भिड़ जाएगा। यहां सई वीनू के कारण मानसिक तौर पर परेशान हो जाएगी। घर पर वीनू बुरा सपना देखेगा। पाखी वीनू की हालत के लिए सई को दोष देगी। स्कूल में पाखी घबराकर विनायक के सामने सच का खुलासा कर देती है कि सई उसकी असली मां है। पाखी के बुरी तरह रोने एवं अचानक से सच सामने आने से विनायक डर जाता है। वह सई को गंदा बोलता है एवं विराट, पाखी से घर चलने को बोलता है। सई हर्ट होकर वहीं बैठी रह जाती है एवं विराट को उसके लिए बुरा लगता है। वह वीनू से बोलता है कि सई को बुरा न समझे मगर पाखी बीच में बोल पड़ती है। तभी सवि वहां पहुंचती है एवं अपनी मां को गले लगाती है। सई सवि से पूछती है कि क्या वह इतनी गंदी है? इस पर सवि उसे समझाती है कि शायद वीनू नाराज है। सवि बोलती है कि वह उसकी एवं वीनू की दोस्ती करवा देगी। वही विनायक घर आकर डरा रहता है। वह अश्विनी और भवानी से बोलता है कि उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा। वह उन लोगों को बताता है कि सई बोल रही थी कि वह उन लोगों की असली मां है। भवानी सई पर भड़क जाती है। विराट बीच में बोलता है कि सई एक मां है। वह अकेली अपनी हर जंग लड़ रही है। उसके पास कोई नहीं है। उन व्यक्तियों को सई का दर्द समझना चाहिए। इधर घर पर सई टेडी बियर को वीनू समझकर बातें करती है। सई कहती है कि जब उसने धक्का दिया तो वह बहुत हर्ट हो गई। वीनू बोलता है कि वह डर गया था। वह तो स्वयं ही सई को छोटी मां बोलना चाहता था। वह सई से बोलता है कि उसे छोटी मां बोलेगा। सई बात कर रही होती है तभी वहां सवि आ जाती है। सवि उससे पूछती है कि वह किससे बात कर रही है, यहां तो टेडी बियर है। वीनू बुरा सपना देखता है कि सई उसे पाखी से अलग कर रही है। वह जाग जाता है तो पाखी सई को दोष देती है। विराट उसे याद दिलाता है कि सई नहीं बल्कि उसके कारण यह सब हुआ है।
Top Five Hill Stations in Uttarakhand : नया वर्ष 2023 आने वाला है. क्या नए वर्ष पर कुछ खास करने की योजना बना रहे हैं? वर्ष की आरंभ वीकेंड से हो रही है, इसलिए कई लोग घूमने का विचार कर रहे होंगे. नए वर्ष पर किसी खूबसूरत स्थान पर नए वर्ष के पहले दिन का स्वागत करने का मन बना रहे होंगे. घूमने के लिए आपके पास बेहतर समय भी है. 31 दिसंबर को शुक्रवार है. 1 जनवरी 2023 और 2 जनवरी शनिवार और रविवार को है. ऐसे में सर्दी का मौसम और उसपर से वीकेंड पर नए वर्ष का उत्सव घूमने के लिए ठीक मौका है. अब प्रश्न ये है कि दो से तीन दिन की छुट्टी में वीकेंड पर ऐसी कौन सी स्थान है, जहां कम समय और कम पैसों में घूम सकते हैं. सर्दी के मौसम में आप किसी कम बजट वाले हिल स्टेशन पर जा सकते हैं. दिल्ली एनसीआर के आसपास रहते हैं तो नए वर्ष पर या कभी भी उत्तराखंड के इन पांच सस्ते हिल स्टेशन पर सरलता से पहुंच सकते हैं. उत्तराखंड में ऐसे हिल स्टेशन हैं, जहां कुछ घंटों का यात्रा तय करके पहुंचा जा सकता है. यहां के नजारे किसी विदेशी स्थान से कम नहीं, कम पैसों में आप किसी भी मौसम में यहां घूमने जा सकते हैं. यह रहे उत्तराखंड के सबसे सस्ते हिल स्टेशन. उत्तराखंड में लैंसडाउन नाम का हिल स्टेशन है. दिल्ली से लैंसडाउन की दूरी 280 किमी है और लगभग 7 घंटे का यात्रा तय करके यहां पहुंचा जा सकता है. कम बजट में वीकेंड का लुत्फ उठाने के लिए लैंसडाउन बेहतर स्थान है. यहां घूमने के लिए अधिक विकल्प नहीं हैं लेकिन यदि आपको शाँति से समय बिताना है, परिवार या दोस्तों के साथ प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाना है तो लैंसडाउन जाना ठीक निर्णय हो सकता है. लैंसडाउन में ट्रैकिंग और बोटिंग जैसी एक्टिविटी का मजा ले सकते हैं. महज 5 हजार रुपये में आप आराम से दो रात और तीन दिन लैंसडाउन में ठहर सकते हैं. अल्मोड़ा उत्तराखंड के प्रसिद्ध और बेस्ट हिल स्टेशनों में शामिल हैं. अल्मोड़ा कुमाऊं की पहाड़ियों पर बसा है. यह हिल स्टेशन चारों ओर से हिमालय के पहाड़ों से घिरा है. अल्मोड़ा में कई प्राचीन मंदिर हैं. वहीं यहां का जीरो प्वाइंट डियर पार्क शाँति के पल बिताने के लिए अच्छी स्थान है. दिल्ली से अल्मोड़ा की दूरी 305 किलोमीटर है, जहां पहुंचने में लगभग 8 घंटे लग सकते हैं. उत्तराखंड के सबसे मशहूर और लोकप्रिय हिल स्टेशनों में ऋषिकेश का नाम भी शामिल है. पूरे वर्ष ऋषिकेश में सैलानी नजर आते हैं. हिंदुस्तान के साथ ही विदेश से भी लोग ऋषिकेश घूमने आते हैं. ऋषिकेश को आध्यात्म की नगरी, धर्म और योग का केंद्र भी माना जाता है. यहां कई ऐसे आश्रम हैं, जहां निःशुल्क में ठहर सकते हैं. रोमांचक एक्टिविटी जैसे रिवर राफ्टिंग, बज्जी जंपिंग और कैंपिंग के लिए भी ऋषिकेश बेहतरीन स्थान है. कम पैसों में आप यहां छुट्टियों का लुत्फ उठा सकते हैं. दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 263 किमी है. यहां पहुंचने में लगभग 5 घंटे का समय लगता है. बस या ट्रेन का किराया बहुत कम होता है. उत्तराखंड के नैनीताल का नाम तो सुना ही होगा लेकिन यदि आप नैनीताल जैसी प्राकृतिक सुंदरता का मजा लेना चाहते हैं और बहुत अधिक भीड़ भाड़ से दूर कम पैसों में छुट्टियों का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो भीमताल जा सकते हैं. भीमताल पहुंचने के लिए लगभग 7 घंटे लगते हैं, दिल्ली से भीमताल की दूरी 323 किमी है. भीमताल में घूमने के लिए कई सारे पर्यटन स्थल भी हैं. भीमेस्वर महादेव मंदिर, भीमताल झील और सैयद बाबा का मकबरा घूमने लायक स्थान हैं.
Top Five Hill Stations in Uttarakhand : नया वर्ष दो हज़ार तेईस आने वाला है. क्या नए वर्ष पर कुछ खास करने की योजना बना रहे हैं? वर्ष की आरंभ वीकेंड से हो रही है, इसलिए कई लोग घूमने का विचार कर रहे होंगे. नए वर्ष पर किसी खूबसूरत स्थान पर नए वर्ष के पहले दिन का स्वागत करने का मन बना रहे होंगे. घूमने के लिए आपके पास बेहतर समय भी है. इकतीस दिसंबर को शुक्रवार है. एक जनवरी दो हज़ार तेईस और दो जनवरी शनिवार और रविवार को है. ऐसे में सर्दी का मौसम और उसपर से वीकेंड पर नए वर्ष का उत्सव घूमने के लिए ठीक मौका है. अब प्रश्न ये है कि दो से तीन दिन की छुट्टी में वीकेंड पर ऐसी कौन सी स्थान है, जहां कम समय और कम पैसों में घूम सकते हैं. सर्दी के मौसम में आप किसी कम बजट वाले हिल स्टेशन पर जा सकते हैं. दिल्ली एनसीआर के आसपास रहते हैं तो नए वर्ष पर या कभी भी उत्तराखंड के इन पांच सस्ते हिल स्टेशन पर सरलता से पहुंच सकते हैं. उत्तराखंड में ऐसे हिल स्टेशन हैं, जहां कुछ घंटों का यात्रा तय करके पहुंचा जा सकता है. यहां के नजारे किसी विदेशी स्थान से कम नहीं, कम पैसों में आप किसी भी मौसम में यहां घूमने जा सकते हैं. यह रहे उत्तराखंड के सबसे सस्ते हिल स्टेशन. उत्तराखंड में लैंसडाउन नाम का हिल स्टेशन है. दिल्ली से लैंसडाउन की दूरी दो सौ अस्सी किमी है और लगभग सात घंटाटे का यात्रा तय करके यहां पहुंचा जा सकता है. कम बजट में वीकेंड का लुत्फ उठाने के लिए लैंसडाउन बेहतर स्थान है. यहां घूमने के लिए अधिक विकल्प नहीं हैं लेकिन यदि आपको शाँति से समय बिताना है, परिवार या दोस्तों के साथ प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाना है तो लैंसडाउन जाना ठीक निर्णय हो सकता है. लैंसडाउन में ट्रैकिंग और बोटिंग जैसी एक्टिविटी का मजा ले सकते हैं. महज पाँच हजार रुपये में आप आराम से दो रात और तीन दिन लैंसडाउन में ठहर सकते हैं. अल्मोड़ा उत्तराखंड के प्रसिद्ध और बेस्ट हिल स्टेशनों में शामिल हैं. अल्मोड़ा कुमाऊं की पहाड़ियों पर बसा है. यह हिल स्टेशन चारों ओर से हिमालय के पहाड़ों से घिरा है. अल्मोड़ा में कई प्राचीन मंदिर हैं. वहीं यहां का जीरो प्वाइंट डियर पार्क शाँति के पल बिताने के लिए अच्छी स्थान है. दिल्ली से अल्मोड़ा की दूरी तीन सौ पाँच किलोग्राममीटर है, जहां पहुंचने में लगभग आठ घंटाटे लग सकते हैं. उत्तराखंड के सबसे मशहूर और लोकप्रिय हिल स्टेशनों में ऋषिकेश का नाम भी शामिल है. पूरे वर्ष ऋषिकेश में सैलानी नजर आते हैं. हिंदुस्तान के साथ ही विदेश से भी लोग ऋषिकेश घूमने आते हैं. ऋषिकेश को आध्यात्म की नगरी, धर्म और योग का केंद्र भी माना जाता है. यहां कई ऐसे आश्रम हैं, जहां निःशुल्क में ठहर सकते हैं. रोमांचक एक्टिविटी जैसे रिवर राफ्टिंग, बज्जी जंपिंग और कैंपिंग के लिए भी ऋषिकेश बेहतरीन स्थान है. कम पैसों में आप यहां छुट्टियों का लुत्फ उठा सकते हैं. दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग दो सौ तिरेसठ किमी है. यहां पहुंचने में लगभग पाँच घंटाटे का समय लगता है. बस या ट्रेन का किराया बहुत कम होता है. उत्तराखंड के नैनीताल का नाम तो सुना ही होगा लेकिन यदि आप नैनीताल जैसी प्राकृतिक सुंदरता का मजा लेना चाहते हैं और बहुत अधिक भीड़ भाड़ से दूर कम पैसों में छुट्टियों का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो भीमताल जा सकते हैं. भीमताल पहुंचने के लिए लगभग सात घंटाटे लगते हैं, दिल्ली से भीमताल की दूरी तीन सौ तेईस किमी है. भीमताल में घूमने के लिए कई सारे पर्यटन स्थल भी हैं. भीमेस्वर महादेव मंदिर, भीमताल झील और सैयद बाबा का मकबरा घूमने लायक स्थान हैं.
उत्तर प्ररदेश के बुलंदशहर के कोतवाली खुर्जा नगर क्षेत्र के कॉलेज रोड स्थित नॉर्मल स्कूल के निकट से कार सवार बदमाशों ने शनिवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर आए हार्डवेयर व्यापारी का अपहरण कर लिया। बताया जा रहा है कि सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए एक्टिवा पर सवार होकर व्यापारी राजकुमार घर से निकले थे। इस दौरान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नावेल्टी रोड स्थित एक इंटर कॉलेज के समीप पहले से घात लगाए मौजूद कुछ कार सवार बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया। जिसके बाद उनका स्कूटर इंटर कॉलेज के समीप लावारिस हालत में पड़ा मिला है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस पूरे घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है तो वही सूचना मिलने के बाद पूरे जनपद में सनसनी फैल गई है. आईजी मेरठ मंडल प्रवीण कुमार भी सूचना के बाद मौके पर पहुंचे और और घटना की बारीकी से जांच में जुट गए. स्थानीय पुलिस ने डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया है। पूरे मामले में एसएसपी श्लोक कुमार सिंह का कहना है कि आज व्यापारी के अपहरण की थाना पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी, मौके पर पुलिस के तमाम आला अधिकारी हैं। घटना की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द घटना का खुलासा किया जाएगा। जनपद के साथ-साथ अन्य भी पड़ोसी जनपदों को सूचित कर दिया गया। चेकिंग की जा रही है। बताया जा रहा है कि कार सवार अपहरणकर्ताओं ने घटना को अंजाम दिया है, फिलहाल सभी सीसीटीवी चेक किए जा रहे हैं और जल्द घटना का खुलासा होगा ।
उत्तर प्ररदेश के बुलंदशहर के कोतवाली खुर्जा नगर क्षेत्र के कॉलेज रोड स्थित नॉर्मल स्कूल के निकट से कार सवार बदमाशों ने शनिवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर आए हार्डवेयर व्यापारी का अपहरण कर लिया। बताया जा रहा है कि सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए एक्टिवा पर सवार होकर व्यापारी राजकुमार घर से निकले थे। इस दौरान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नावेल्टी रोड स्थित एक इंटर कॉलेज के समीप पहले से घात लगाए मौजूद कुछ कार सवार बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया। जिसके बाद उनका स्कूटर इंटर कॉलेज के समीप लावारिस हालत में पड़ा मिला है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस पूरे घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है तो वही सूचना मिलने के बाद पूरे जनपद में सनसनी फैल गई है. आईजी मेरठ मंडल प्रवीण कुमार भी सूचना के बाद मौके पर पहुंचे और और घटना की बारीकी से जांच में जुट गए. स्थानीय पुलिस ने डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया है। पूरे मामले में एसएसपी श्लोक कुमार सिंह का कहना है कि आज व्यापारी के अपहरण की थाना पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी, मौके पर पुलिस के तमाम आला अधिकारी हैं। घटना की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द घटना का खुलासा किया जाएगा। जनपद के साथ-साथ अन्य भी पड़ोसी जनपदों को सूचित कर दिया गया। चेकिंग की जा रही है। बताया जा रहा है कि कार सवार अपहरणकर्ताओं ने घटना को अंजाम दिया है, फिलहाल सभी सीसीटीवी चेक किए जा रहे हैं और जल्द घटना का खुलासा होगा ।
अज आपका दिन कैसे गुजरेगा इसकी जानकारी के लिए आप जानिए पूरी राशियों के बारे में. अज आपका दिन कैसे गुजरेगा इसकी जानकारी के लिए आप जानिए पूरी राशियों के बारे में. मेष राशिः आज बुरी आदतों के कारण परेशानी होगी। व्यर्थ क्रोध से कामकाज में नुकसान। मान-सम्मान को ठेस लग सकती है। खर्च की अधिकता रह सकती है। वृष राशिः आज व्यापार-व्यवसाय में साझेदारी से लाभ। सम्पत्ति का अधिग्रहण कर सकते हैं। व्यापारिक स्थिति आपके पक्ष में रहेगी। आय के साधन बढ़ेंगे। स्वयं को मजबूत बनाएंगे। मिथुन राशिः आज आलस्य दूर होगा। लाभ की स्थितियां बनेगी। समाज में पद प्रतिष्ठा बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में लोग आपका लोहा मानेंगे। व्यापारिक यात्रा सफल होगी। मन प्रसन्न रहेगा। कर्क राशिः आज घनिष्ठ मित्रों से सहयोग मिलेगा। कामकाज में आसानी रहेगी। मान-सम्मान बढ़ने से हर्ष। सुखपूर्वक समय बीतेगा। सामाजिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी। सिंह राशिः आज रिश्तेदारों की आवाजाही से घर में रौनक रहेगी। किसी नए रिश्तों से जुड़ सकते हैं। मित्रता आपको लाभ के अवसर देगी। कार्य कुशलता बढ़ने से लाभ मिलेगा। कन्या राशिः आज रिश्तेदारों की आवाजाही से घर में रौनक रहेगी। किसी नए रिश्तों से जुड़ सकते हैं। मित्रता आपको लाभ के अवसर देगी। कार्य कुशलता बढ़ने से लाभ मिलेगा। तुला राशिः आज वरिष्ठजनों को पूर्ण सहयोग मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपका दबदबा बना रहेगा। विद्यार्थियों के लिए समय उत्तम रहेगा। धैर्य पूर्वक कार्य करने से लाभ। मन प्रसन्न रहेगा। वृश्चिक राशिः आज सकारात्मक दृष्टिकोण लाभकारी रहेगा। कार्यों में आए व्यवधान दूर होंगे। योजनाएं गुप्त रखने में सफल होंगे। मन में प्रसन्नता के साथ आलस्य दूर होगा। धनु राशिः आज मनमुटाव बढ़ने से तनाव में रह सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर परेशान होंगे। अनुचित कार्यों में लिप्त ना रहें। व्यापार में घाटे का सौदा। वाणी में मधुरता रखें। मकर राशिः आज अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल। आर्थिक मामलों की पहल लाभकारी। जीवन में सुकून व सार्थकता आएगी। सुख-शांति रहने से परिवार में हर्ष। शौक पूरे करेंगे। कुंभ राशिः आज बड़े बुजुर्गों से सलाह लेकर निवेश लाभदायक। पिकनिक पर जा सकते हैं। प्रेम संबंधों में सकारात्मक परिणाम। घर परिवार में शुभ प्रसंग की चर्चा। यात्रा शुभ। मीन राशि : आजआप किसी बड़े समारोह की शान बनेंगे। रुका पैसा प्राप्त होगा। आर्थिक पक्ष में सुधार होगा। व्यापार-व्यवसाय में आए व्यवधान दूर होंगे। अतिरिक्त आय से प्रसन्नाता।
अज आपका दिन कैसे गुजरेगा इसकी जानकारी के लिए आप जानिए पूरी राशियों के बारे में. अज आपका दिन कैसे गुजरेगा इसकी जानकारी के लिए आप जानिए पूरी राशियों के बारे में. मेष राशिः आज बुरी आदतों के कारण परेशानी होगी। व्यर्थ क्रोध से कामकाज में नुकसान। मान-सम्मान को ठेस लग सकती है। खर्च की अधिकता रह सकती है। वृष राशिः आज व्यापार-व्यवसाय में साझेदारी से लाभ। सम्पत्ति का अधिग्रहण कर सकते हैं। व्यापारिक स्थिति आपके पक्ष में रहेगी। आय के साधन बढ़ेंगे। स्वयं को मजबूत बनाएंगे। मिथुन राशिः आज आलस्य दूर होगा। लाभ की स्थितियां बनेगी। समाज में पद प्रतिष्ठा बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में लोग आपका लोहा मानेंगे। व्यापारिक यात्रा सफल होगी। मन प्रसन्न रहेगा। कर्क राशिः आज घनिष्ठ मित्रों से सहयोग मिलेगा। कामकाज में आसानी रहेगी। मान-सम्मान बढ़ने से हर्ष। सुखपूर्वक समय बीतेगा। सामाजिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी। सिंह राशिः आज रिश्तेदारों की आवाजाही से घर में रौनक रहेगी। किसी नए रिश्तों से जुड़ सकते हैं। मित्रता आपको लाभ के अवसर देगी। कार्य कुशलता बढ़ने से लाभ मिलेगा। कन्या राशिः आज रिश्तेदारों की आवाजाही से घर में रौनक रहेगी। किसी नए रिश्तों से जुड़ सकते हैं। मित्रता आपको लाभ के अवसर देगी। कार्य कुशलता बढ़ने से लाभ मिलेगा। तुला राशिः आज वरिष्ठजनों को पूर्ण सहयोग मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपका दबदबा बना रहेगा। विद्यार्थियों के लिए समय उत्तम रहेगा। धैर्य पूर्वक कार्य करने से लाभ। मन प्रसन्न रहेगा। वृश्चिक राशिः आज सकारात्मक दृष्टिकोण लाभकारी रहेगा। कार्यों में आए व्यवधान दूर होंगे। योजनाएं गुप्त रखने में सफल होंगे। मन में प्रसन्नता के साथ आलस्य दूर होगा। धनु राशिः आज मनमुटाव बढ़ने से तनाव में रह सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर परेशान होंगे। अनुचित कार्यों में लिप्त ना रहें। व्यापार में घाटे का सौदा। वाणी में मधुरता रखें। मकर राशिः आज अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल। आर्थिक मामलों की पहल लाभकारी। जीवन में सुकून व सार्थकता आएगी। सुख-शांति रहने से परिवार में हर्ष। शौक पूरे करेंगे। कुंभ राशिः आज बड़े बुजुर्गों से सलाह लेकर निवेश लाभदायक। पिकनिक पर जा सकते हैं। प्रेम संबंधों में सकारात्मक परिणाम। घर परिवार में शुभ प्रसंग की चर्चा। यात्रा शुभ। मीन राशि : आजआप किसी बड़े समारोह की शान बनेंगे। रुका पैसा प्राप्त होगा। आर्थिक पक्ष में सुधार होगा। व्यापार-व्यवसाय में आए व्यवधान दूर होंगे। अतिरिक्त आय से प्रसन्नाता।
क्रिकेट के लिए कल यानी शुक्रवार का दिन काफी खास है। शुक्रवार को केरल के कोच्चि में आईपीएल-2023 के लिए टीमें खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी। इस ऑक्शन में 991 क्रिकेटर्स ने अपना नाम दिया है। आईपीएल के मुताबिक भारत के 714 खिलाड़ी इस ऑक्शन में शामिल किए गए हैं।
क्रिकेट के लिए कल यानी शुक्रवार का दिन काफी खास है। शुक्रवार को केरल के कोच्चि में आईपीएल-दो हज़ार तेईस के लिए टीमें खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी। इस ऑक्शन में नौ सौ इक्यानवे क्रिकेटर्स ने अपना नाम दिया है। आईपीएल के मुताबिक भारत के सात सौ चौदह खिलाड़ी इस ऑक्शन में शामिल किए गए हैं।
1 मई, मुम्बई (CRICKETNMORE): रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 10वें संस्करण के 38वें मैच में सोमवार को वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाने वाले मैच में मुंबई इंडियंस के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है। मुंबई की टीम इस संस्करण में शुरू से ही शानदार फॉर्म में है। वहीं बेंगलोर की टीम खराब दौर से गुजर रही है और प्ले ऑफ की रेस से लगभग बाहर हो चुकी है। बेंगलोर की टीम आठ टीमों की अंकतालिका में सातवें स्थान पर है, वहीं मुंबई की टीम दूसरे स्थान पर है। बेंगलोर ने अपनी टीम में तीन बदलाव किया है। सैमुएल बद्री, सचिन बेबी, और स्टुअर्ट बिन्नी की जगह शेन वाटसन, मनदीप सिंह, और अनिकेत चौधरी को अंतिम एकादश में चुना है। मुंबई ने अपनी टीम में एक बदलाव किया है। चोटिल हरभजन सिंह के स्थान पर कर्ण शर्मा को टीम में जगह मिली है।
एक मई, मुम्बई : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने इंडियन प्रीमियर लीग के दसवें संस्करण के अड़तीसवें मैच में सोमवार को वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाने वाले मैच में मुंबई इंडियंस के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है। मुंबई की टीम इस संस्करण में शुरू से ही शानदार फॉर्म में है। वहीं बेंगलोर की टीम खराब दौर से गुजर रही है और प्ले ऑफ की रेस से लगभग बाहर हो चुकी है। बेंगलोर की टीम आठ टीमों की अंकतालिका में सातवें स्थान पर है, वहीं मुंबई की टीम दूसरे स्थान पर है। बेंगलोर ने अपनी टीम में तीन बदलाव किया है। सैमुएल बद्री, सचिन बेबी, और स्टुअर्ट बिन्नी की जगह शेन वाटसन, मनदीप सिंह, और अनिकेत चौधरी को अंतिम एकादश में चुना है। मुंबई ने अपनी टीम में एक बदलाव किया है। चोटिल हरभजन सिंह के स्थान पर कर्ण शर्मा को टीम में जगह मिली है।
अनूप चंद्र पांडे 1984 बैच के आईएएस हैं। यूपी इन्वेस्टर्स समिट और किसान कर्ज माफी योजना में पांडे ने अहम भूमिका निभाई थी। वरिष्ठ आईएएस अफसर अनूप चंद्र पांडे उत्तर प्रदेश के नए मुख्य सचिव होंगे। बुधवार शाम हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। पांडे 1984 बैच के आईएएस हैं। वर्तमान में राजीव कुमार यूपी के मुख्य सचिव हैं, उनका कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि शायद राजीव कुमार को सेवा विस्तार मिल जाए। पांडे फिलहाल अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास तथा संस्थागत वित्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यूपी इन्वेस्टर्स समिट और किसान कर्ज माफी योजना में पांडे ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वह प्रमुख सचिव वित्त सहित कई अहम विभागों की अगुआई कर चुके हैं।
अनूप चंद्र पांडे एक हज़ार नौ सौ चौरासी बैच के आईएएस हैं। यूपी इन्वेस्टर्स समिट और किसान कर्ज माफी योजना में पांडे ने अहम भूमिका निभाई थी। वरिष्ठ आईएएस अफसर अनूप चंद्र पांडे उत्तर प्रदेश के नए मुख्य सचिव होंगे। बुधवार शाम हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। पांडे एक हज़ार नौ सौ चौरासी बैच के आईएएस हैं। वर्तमान में राजीव कुमार यूपी के मुख्य सचिव हैं, उनका कार्यकाल तीस जून को खत्म हो रहा है। पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि शायद राजीव कुमार को सेवा विस्तार मिल जाए। पांडे फिलहाल अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास तथा संस्थागत वित्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यूपी इन्वेस्टर्स समिट और किसान कर्ज माफी योजना में पांडे ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वह प्रमुख सचिव वित्त सहित कई अहम विभागों की अगुआई कर चुके हैं।
कोलकाता, 12 मार्च पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुक्रवार की शाम सरकारी एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों ने उनकी हालत "संतोषजनक" पाई, जिसके बाद उन्हें छुट्टी दी गई। टीएमसी सुप्रीमो (66 वर्षीय) ने अस्पताल से छुट्टी देने की बार-बार अपील की, जिसके बाद चिकित्सकों ने यह निर्णय किया। अस्पताल के वुडबर्न ब्लॉक के बाहर मौजूद काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं का बनर्जी ने अभिवादन किया। वह व्हीलचेयर पर बैठी हुई थीं और उनके बायें पैर में प्लास्टर लगा हुआ था। वह अपने वाहन से कालीघाट स्थित आवास के लिए रवाना हुईं। उनके भतीजा और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी, पार्टी के सहयोगी और राज्य के मंत्री फरहाद हाकिम भी अस्पताल में मौजूद थे। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में बुधवार की शाम को चुनाव प्रचार के दौरान बनर्जी को चार-पांच अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर धक्का दिया, जिससे वह गिर पड़ीं और जख्मी हो गईं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कोलकाता, बारह मार्च पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुक्रवार की शाम सरकारी एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों ने उनकी हालत "संतोषजनक" पाई, जिसके बाद उन्हें छुट्टी दी गई। टीएमसी सुप्रीमो ने अस्पताल से छुट्टी देने की बार-बार अपील की, जिसके बाद चिकित्सकों ने यह निर्णय किया। अस्पताल के वुडबर्न ब्लॉक के बाहर मौजूद काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं का बनर्जी ने अभिवादन किया। वह व्हीलचेयर पर बैठी हुई थीं और उनके बायें पैर में प्लास्टर लगा हुआ था। वह अपने वाहन से कालीघाट स्थित आवास के लिए रवाना हुईं। उनके भतीजा और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी, पार्टी के सहयोगी और राज्य के मंत्री फरहाद हाकिम भी अस्पताल में मौजूद थे। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में बुधवार की शाम को चुनाव प्रचार के दौरान बनर्जी को चार-पांच अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर धक्का दिया, जिससे वह गिर पड़ीं और जख्मी हो गईं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
मेरे बनने से रांची से जमशेदपुर जानेवाले लोगों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही नामकुम रेलवे फाटक पर डेली घंटों लगनेवाले जाम से भी लोगों को निजात भी मिलेगी। लेकिन क्या आप जानते हैं, मुझे यहां तक पहुंचने के लिए इन 12 सालों में क्या-क्या सहना पड़ा है। अगर झारखंड हाईकोर्ट ने मेरी मॉनिटरिंग नहीं की होती, तो शायद आज भी मैं अधूरा रहता। सिटी में बढ़ती जाम की प्रॉब्लम और नामकुम रेलवे फाटक पर आए दिन हो रही दुर्घटना को रोकने के लिए साल 1998 में मेरे निर्माण के लिए धनंजय दुबे ने जनहित याचिका दायर की थी। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और मेरे निर्माण के लिए आदेश दिया। लेकिन सरकार ने शुरू से मेरी उपेक्षा की। हाईकोर्ट ने सरकार को 83 बार आदेश दिया। साल 2001 से मेरी मॉनिटरिंग शुरू की, फिर भी मुझको लेकर लेट-लतीफी चलती रही। सरकार ने हाईकोर्ट के सामने यह कबूल भी किया कि साल 2005 तक मेरा निर्माण हो जाएगा, लेकिन सरकार अपने वादे पर खरा नहीं उतर पाई। एक बार फिर मुझको लेकर याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और तय समय से काम पूरा करने की हिदायत दी। लेकिन इसके बावजूद भी साल 2008 तक मेरा काम पूरा नहीं हो पाया। सरकार के रवैये से तंग आकर छह अगस्त 2008 को झारखंड हाईकोर्ट ने छह माह के अंदर मेरा निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। तब मेरे निर्माण काम में कुछ तेजी लाई गई। लेकिन समय बीतते एक बार फिर मेरी उपेक्षा की जाने लगी. फिर हाईकोर्ट ने सरकार को लताड़ लगाई और 31 मार्च 2011 तक काम पूरा करने का सरकार को अल्टीमेटम दिया। लेकिन फिर भी समय से मेरा निर्माण नहीं हो पाया। सरकार ने कोर्ट से एक बार फिर कुछ मोहलत मांगी। कोर्ट ने मार्च 2011 तक काम पूरा करने का आदेश दिया। लेकिन यह समय सीमा पूरी होती उसके पहले ही फरवरी 2012 में सरकार ने हलफनामा दायर कर जून 2012 तक का समय मांगा। लेकिन इस तय सीमा के अंदर भी मेरा निर्माण पूरा नहीं हो पाया। हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकार को तलब किया, तब जाकर सरकार ने इस साल 7 जनवरी को हाईकोर्ट को बताया कि काम पूरा हो चुका है। अब इस महीने से मेरे ऊपर से वाहन आ जा सकेंगे। नामकुम रेलवे फाटक से होकर जानेवाले लोगों को काफी परेशानी होती थी। सिंगल रोड होने के कारण कांटाटोली से लेकर नामकुम तक ट्रैफिक जाम हो जाता था। रेलवे फाटक औसत एक दिन में तीन घंटे बंद रहता था, जिसके कारण लोगों को फाटक के पास गाडिय़ां रोकनी पड़ती थी। इससे हजारों लीटर तेल बेकार में जल जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेरे बनने से लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी। जमशेदपुर और पुरुलिया से बड़ी संख्या में वाहन सिटी में आते हैं। इन वाहनों के कारण नामकुम में लेकर कांटाटोली तक जाम लग जाता था। जिसका असर सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ता था। इससे पूरी सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दो लेन में मेरे ऊपर से गाडिय़ां गुजरेंगी, जिससे अब जाम नहीं लगेगा और सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था ठीक रहेगी। नामकुम रेलवे फाटक के बंद होने और ट्रैफिक जाम होने से डेली हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल यूं ही बेकार में जल जाता था, लेकिन अब मेरे बनने से यह नहीं जलेगा। इससे लोगों के डीजल और पेट्रोल पर बेवजह खर्च होनेवाले पैसे की बचत होगी।
मेरे बनने से रांची से जमशेदपुर जानेवाले लोगों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही नामकुम रेलवे फाटक पर डेली घंटों लगनेवाले जाम से भी लोगों को निजात भी मिलेगी। लेकिन क्या आप जानते हैं, मुझे यहां तक पहुंचने के लिए इन बारह सालों में क्या-क्या सहना पड़ा है। अगर झारखंड हाईकोर्ट ने मेरी मॉनिटरिंग नहीं की होती, तो शायद आज भी मैं अधूरा रहता। सिटी में बढ़ती जाम की प्रॉब्लम और नामकुम रेलवे फाटक पर आए दिन हो रही दुर्घटना को रोकने के लिए साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में मेरे निर्माण के लिए धनंजय दुबे ने जनहित याचिका दायर की थी। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और मेरे निर्माण के लिए आदेश दिया। लेकिन सरकार ने शुरू से मेरी उपेक्षा की। हाईकोर्ट ने सरकार को तिरासी बार आदेश दिया। साल दो हज़ार एक से मेरी मॉनिटरिंग शुरू की, फिर भी मुझको लेकर लेट-लतीफी चलती रही। सरकार ने हाईकोर्ट के सामने यह कबूल भी किया कि साल दो हज़ार पाँच तक मेरा निर्माण हो जाएगा, लेकिन सरकार अपने वादे पर खरा नहीं उतर पाई। एक बार फिर मुझको लेकर याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और तय समय से काम पूरा करने की हिदायत दी। लेकिन इसके बावजूद भी साल दो हज़ार आठ तक मेरा काम पूरा नहीं हो पाया। सरकार के रवैये से तंग आकर छह अगस्त दो हज़ार आठ को झारखंड हाईकोर्ट ने छह माह के अंदर मेरा निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। तब मेरे निर्माण काम में कुछ तेजी लाई गई। लेकिन समय बीतते एक बार फिर मेरी उपेक्षा की जाने लगी. फिर हाईकोर्ट ने सरकार को लताड़ लगाई और इकतीस मार्च दो हज़ार ग्यारह तक काम पूरा करने का सरकार को अल्टीमेटम दिया। लेकिन फिर भी समय से मेरा निर्माण नहीं हो पाया। सरकार ने कोर्ट से एक बार फिर कुछ मोहलत मांगी। कोर्ट ने मार्च दो हज़ार ग्यारह तक काम पूरा करने का आदेश दिया। लेकिन यह समय सीमा पूरी होती उसके पहले ही फरवरी दो हज़ार बारह में सरकार ने हलफनामा दायर कर जून दो हज़ार बारह तक का समय मांगा। लेकिन इस तय सीमा के अंदर भी मेरा निर्माण पूरा नहीं हो पाया। हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकार को तलब किया, तब जाकर सरकार ने इस साल सात जनवरी को हाईकोर्ट को बताया कि काम पूरा हो चुका है। अब इस महीने से मेरे ऊपर से वाहन आ जा सकेंगे। नामकुम रेलवे फाटक से होकर जानेवाले लोगों को काफी परेशानी होती थी। सिंगल रोड होने के कारण कांटाटोली से लेकर नामकुम तक ट्रैफिक जाम हो जाता था। रेलवे फाटक औसत एक दिन में तीन घंटे बंद रहता था, जिसके कारण लोगों को फाटक के पास गाडिय़ां रोकनी पड़ती थी। इससे हजारों लीटर तेल बेकार में जल जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेरे बनने से लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी। जमशेदपुर और पुरुलिया से बड़ी संख्या में वाहन सिटी में आते हैं। इन वाहनों के कारण नामकुम में लेकर कांटाटोली तक जाम लग जाता था। जिसका असर सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ता था। इससे पूरी सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दो लेन में मेरे ऊपर से गाडिय़ां गुजरेंगी, जिससे अब जाम नहीं लगेगा और सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था ठीक रहेगी। नामकुम रेलवे फाटक के बंद होने और ट्रैफिक जाम होने से डेली हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल यूं ही बेकार में जल जाता था, लेकिन अब मेरे बनने से यह नहीं जलेगा। इससे लोगों के डीजल और पेट्रोल पर बेवजह खर्च होनेवाले पैसे की बचत होगी।
डार्क आत्माओं 2 - एक सफल खेल के एक निरंतरता है कि उनके कट्टर विश्वभर के गेमर के लाखों मोहित। इस लेख में हम कैसे मदद करने के लिए खिलाड़ियों को डार्क आत्माओं 2. छल्ले, हथियार और अन्य उपकरणों की कठोर दुनिया में जीवित रहने के बारे में बात करेंगे - यह सब हम आगे चर्चा करेंगे। कई खिलाड़ी सवाल में रुचि रखते हैं की तरह, "डार्क आत्माओं 2 इतना लोकप्रिय है क्यों है? " इस सवाल का जवाब बहुत सरल है। बस आधुनिक गेमिंग उद्योग को देखो। खेल अधिक आरामदायक बन गए हैं। बेवकूफ दुश्मन, हर कदम पर प्राथमिक चिकित्सा किट, और हर पांच मीटर की दूरी पर सहेजें। सब से पहले यह नहीं था। खेल 80-90s बहुत मुश्किल थे, और उन्हें प्राप्त करने के लिए, यह दृढ़ता, धैर्य अविश्वसनीय है करने के लिए जरूरी हो गया था। इससे पहले खेल के पारित होने के एक असली चुनौती है, जो केवल सबसे मजबूत रखा था। अब कई igrodely इसके बारे में भूल गया था। कई, लेकिन सभी नहीं। वहाँ भी उन कंपनियों जो समझते हैं खेल gamers एक चुनौती फेंक करने के लिए मुश्किल हो गया है कि थे। उन में से एक - सॉफ्टवेयर से। सॉफ्टवेयर से लोगों से कहा जाता है डार्क आत्माओं 2. एक पुराने Battletoads सबसे कठिन खेल पर विचार एक अविश्वसनीय प्रोजेक्ट बनाया हुआ है? तो आप बस नहीं खेला है डार्क आत्माओं 2. सॉफ्टवेयर, साहसिक लड़ टोड से दिमाग की उपज के साथ तुलना में - sophomoric। आप इस पर शक? फिर अंधेरे आत्माओं 2 में खेलते हैं और यह पहले हाथ देखते हैं। कैसे डार्क आत्माओं 2 में जीवित रहने के लिए? यह सबसे चुनौतीपूर्ण गेम सभी खिलाड़ियों को प्रसन्न करने के लिए सुनिश्चित है कि से एक है। घातक जाल, खतरनाक दुश्मन, क्रूर राक्षस - यह डार्क आत्माओं 2. हथियार के सभी नहीं है - केवल एक चीज है कि आप मौत से बचा सकता है। इसलिए, जीवित रहने के लिए, आपको पहले एक शक्तिशाली हथियार प्राप्त करने के लिए की जरूरत है। हम 2. छल्ले, हथियार, वर्दी आदि डार्क आत्माओं में गियर के बारे में बात - यह सब इस लेख में चर्चा की जाएगी। पता है कि खेल में सबसे शक्तिशाली हथियार चाहते हैं? और पढ़ें। आपको क्या लगता है, जो डार्क आत्माओं 2 के लिए विशिष्ट है? ताकतवर मालिकों? खतरनाक राक्षसों की भीड़? सुंदर स्थान? नहीं! हथियारों की एक बड़ी शस्त्रागार - कि, डार्क आत्माओं 2. तलवार के लिए प्रसिद्ध है अक्ष, धनुष, halberds, और अधिक - यह खेल में सब वहाँ है। हमें "डार्क कोल्स 2" में सबसे प्रभावी और घातक हथियारों को परिभाषित करते हैं। एक अद्वितीय हथियार - हथियारों के प्रकार है कि खेल में दिखाई देते हैं में से एक। यह मिनी मालिकों जो अक्सर में विशाल डार्क आत्माओं 2 घटित से स्पष्ट हो सकता है (डी। ड्रैगन परनाला, Wyvern और मी। )। एक सामान्य नियम के रूप में, क्रम हथियार "एक ड्रॉप" के लिए, आपको नुकसान और भीड़ की एक निश्चित राशि पूंछ काट डाला जाना चाहिए। पूंछ के तुरंत बाद काट हथियार अपनी सूची में दिखाई देगा। इसके अलावा, समय पर, एक अद्वितीय हथियार प्राप्त करने के लिए, आप एक छोटे से खोज करना चाहिए। क्या अद्वितीय हथियार सामान्य से बेहतर है? सुंदर कठिन, कहने के लिए है क्योंकि प्रत्येक की अपनी अनूठी गुण है। उदाहरण के लिए, ब्लू नाइट परशु, जो हत्या Targreya के लिए प्राप्त किया जा सकता, नुकसान का एक बहुत कारण। इसके अलावा, यह मंद प्रकाश Tanita द्वारा सुधार किया जा सकता है। छायादार कटार धुएँ के रंग का चुड़ैलों के "शुरू छोड़ने", काफी उच्च क्षति है। इसके अलावा, हथियार बोनस क्षति सौदा करता है, तो झटका पीठ में मारा गया था। हैमर "ड्रैगन टूथ" कहा जाता है (गिर जाता है, यदि आप अंडा अजगर को तोड़ने) स्वामी आग करने के लिए विरोध देता है। निडर ब्लेड - सभी Catan, जो पागल योद्धा की हत्या करके प्राप्त किया जा सकता का सबसे छोटा। मुख्य विशेषता - उच्च क्षति और स्केलिंग, हथियार की इजाजत दी काफी सार्वभौमिक है। शानदार दो हाथ तलवार उपयोगी सुविधाओं और प्रभाव की एक पूरी गुच्छा है। यहाँ और अतिरिक्त क्षति और अस्वाभाविक muvset, और यहां तक कि एक बोनस पलटवार करने के लिए। एक टावर शापित मूर्ति नडाल द्वारा सुरक्षित में छाती खोलकर हथियार प्राप्त करें। बहुत तकलीफ - एक अद्वितीय कटाना, जो अमाना के मंदिर में मिल सकता है। इस हथियार की मुख्य विशेषता - विध्वंसक बहुत कम सहनशीलता खर्च करता है और इस तरह सभ्य क्षति है। स्नान के हथियारों - डार्क आत्माओं में हथियारों के प्रकार 2. हथियार बौछार से बाहर निकल सकते में से एक, मालिक को नष्ट करने और उसकी आत्मा को मिलता है। इस मालिक आत्मा हथियारों के लिए बदला जा सकता है के बाद। लेकिन यह देखा कि के लिए विदेशी मुद्रा के संचालन के लिए एक अतिरिक्त आत्मा का भुगतान करना होगा लायक है। धनुष Dragonslayer - हथियार के इस प्रकार का सबसे अच्छा प्रतिनिधियों में से एक। जब फायरिंग प्याज काफी सहनशक्ति का एक बहुत की खपत है, लेकिन पागल क्षति है। धनुष पाने के लिए, यह पुरानी राजा की आत्मा हो और Ornifeks पर यह आदान-प्रदान करने के लिए आवश्यक है। 10 हजार आत्माओं - विनिमय की कीमत न अधिक है और न ही कम होगा। महान दो हाथ तलवार धुआँ - एक बहुत शक्तिशाली हथियार। उच्च क्षति तलवार इसके अलावा एक उत्कृष्ट ब्लॉक प्रतिशत है। तथ्य यह है कि तलवार के बावजूद बहुत भारी हमले अपेक्षाकृत जल्दी ही कारण बनता है। क्या वास्तव में वहाँ है शार्पनिंग और अतिरिक्त नुकसान की संभावना के बारे में बात करने के लिए। जाओ इस चमत्कार संभव है Ornifeks उसकी स्मोकी नाइट देना है पर। एक्सचेंज में ही आप 25 हजार आत्माओं के रूप में के रूप में ज्यादा खर्च होंगे। गुस्से में कुल्हाड़ी - उत्कृष्ट भारी हथियार। इसकी मुख्य विशेषता - एक विशेष हमले (चरित्र के आसपास गुप्त ऊर्जा विस्फोट) प्रदर्शन करने की क्षमता। प्राप्त करने के लिए कुल्हाड़ी एलना, Fel रानी की आत्मा को निकालने के लिए होगा, और दे यह Ornifeks और उन्हें 24 हजार आत्माओं भुगतान करते हैं।
डार्क आत्माओं दो - एक सफल खेल के एक निरंतरता है कि उनके कट्टर विश्वभर के गेमर के लाखों मोहित। इस लेख में हम कैसे मदद करने के लिए खिलाड़ियों को डार्क आत्माओं दो. छल्ले, हथियार और अन्य उपकरणों की कठोर दुनिया में जीवित रहने के बारे में बात करेंगे - यह सब हम आगे चर्चा करेंगे। कई खिलाड़ी सवाल में रुचि रखते हैं की तरह, "डार्क आत्माओं दो इतना लोकप्रिय है क्यों है? " इस सवाल का जवाब बहुत सरल है। बस आधुनिक गेमिंग उद्योग को देखो। खेल अधिक आरामदायक बन गए हैं। बेवकूफ दुश्मन, हर कदम पर प्राथमिक चिकित्सा किट, और हर पांच मीटर की दूरी पर सहेजें। सब से पहले यह नहीं था। खेल अस्सी-नब्बे सेकंड बहुत मुश्किल थे, और उन्हें प्राप्त करने के लिए, यह दृढ़ता, धैर्य अविश्वसनीय है करने के लिए जरूरी हो गया था। इससे पहले खेल के पारित होने के एक असली चुनौती है, जो केवल सबसे मजबूत रखा था। अब कई igrodely इसके बारे में भूल गया था। कई, लेकिन सभी नहीं। वहाँ भी उन कंपनियों जो समझते हैं खेल gamers एक चुनौती फेंक करने के लिए मुश्किल हो गया है कि थे। उन में से एक - सॉफ्टवेयर से। सॉफ्टवेयर से लोगों से कहा जाता है डार्क आत्माओं दो. एक पुराने Battletoads सबसे कठिन खेल पर विचार एक अविश्वसनीय प्रोजेक्ट बनाया हुआ है? तो आप बस नहीं खेला है डार्क आत्माओं दो. सॉफ्टवेयर, साहसिक लड़ टोड से दिमाग की उपज के साथ तुलना में - sophomoric। आप इस पर शक? फिर अंधेरे आत्माओं दो में खेलते हैं और यह पहले हाथ देखते हैं। कैसे डार्क आत्माओं दो में जीवित रहने के लिए? यह सबसे चुनौतीपूर्ण गेम सभी खिलाड़ियों को प्रसन्न करने के लिए सुनिश्चित है कि से एक है। घातक जाल, खतरनाक दुश्मन, क्रूर राक्षस - यह डार्क आत्माओं दो. हथियार के सभी नहीं है - केवल एक चीज है कि आप मौत से बचा सकता है। इसलिए, जीवित रहने के लिए, आपको पहले एक शक्तिशाली हथियार प्राप्त करने के लिए की जरूरत है। हम दो. छल्ले, हथियार, वर्दी आदि डार्क आत्माओं में गियर के बारे में बात - यह सब इस लेख में चर्चा की जाएगी। पता है कि खेल में सबसे शक्तिशाली हथियार चाहते हैं? और पढ़ें। आपको क्या लगता है, जो डार्क आत्माओं दो के लिए विशिष्ट है? ताकतवर मालिकों? खतरनाक राक्षसों की भीड़? सुंदर स्थान? नहीं! हथियारों की एक बड़ी शस्त्रागार - कि, डार्क आत्माओं दो. तलवार के लिए प्रसिद्ध है अक्ष, धनुष, halberds, और अधिक - यह खेल में सब वहाँ है। हमें "डार्क कोल्स दो" में सबसे प्रभावी और घातक हथियारों को परिभाषित करते हैं। एक अद्वितीय हथियार - हथियारों के प्रकार है कि खेल में दिखाई देते हैं में से एक। यह मिनी मालिकों जो अक्सर में विशाल डार्क आत्माओं दो घटित से स्पष्ट हो सकता है । एक सामान्य नियम के रूप में, क्रम हथियार "एक ड्रॉप" के लिए, आपको नुकसान और भीड़ की एक निश्चित राशि पूंछ काट डाला जाना चाहिए। पूंछ के तुरंत बाद काट हथियार अपनी सूची में दिखाई देगा। इसके अलावा, समय पर, एक अद्वितीय हथियार प्राप्त करने के लिए, आप एक छोटे से खोज करना चाहिए। क्या अद्वितीय हथियार सामान्य से बेहतर है? सुंदर कठिन, कहने के लिए है क्योंकि प्रत्येक की अपनी अनूठी गुण है। उदाहरण के लिए, ब्लू नाइट परशु, जो हत्या Targreya के लिए प्राप्त किया जा सकता, नुकसान का एक बहुत कारण। इसके अलावा, यह मंद प्रकाश Tanita द्वारा सुधार किया जा सकता है। छायादार कटार धुएँ के रंग का चुड़ैलों के "शुरू छोड़ने", काफी उच्च क्षति है। इसके अलावा, हथियार बोनस क्षति सौदा करता है, तो झटका पीठ में मारा गया था। हैमर "ड्रैगन टूथ" कहा जाता है स्वामी आग करने के लिए विरोध देता है। निडर ब्लेड - सभी Catan, जो पागल योद्धा की हत्या करके प्राप्त किया जा सकता का सबसे छोटा। मुख्य विशेषता - उच्च क्षति और स्केलिंग, हथियार की इजाजत दी काफी सार्वभौमिक है। शानदार दो हाथ तलवार उपयोगी सुविधाओं और प्रभाव की एक पूरी गुच्छा है। यहाँ और अतिरिक्त क्षति और अस्वाभाविक muvset, और यहां तक कि एक बोनस पलटवार करने के लिए। एक टावर शापित मूर्ति नडाल द्वारा सुरक्षित में छाती खोलकर हथियार प्राप्त करें। बहुत तकलीफ - एक अद्वितीय कटाना, जो अमाना के मंदिर में मिल सकता है। इस हथियार की मुख्य विशेषता - विध्वंसक बहुत कम सहनशीलता खर्च करता है और इस तरह सभ्य क्षति है। स्नान के हथियारों - डार्क आत्माओं में हथियारों के प्रकार दो. हथियार बौछार से बाहर निकल सकते में से एक, मालिक को नष्ट करने और उसकी आत्मा को मिलता है। इस मालिक आत्मा हथियारों के लिए बदला जा सकता है के बाद। लेकिन यह देखा कि के लिए विदेशी मुद्रा के संचालन के लिए एक अतिरिक्त आत्मा का भुगतान करना होगा लायक है। धनुष Dragonslayer - हथियार के इस प्रकार का सबसे अच्छा प्रतिनिधियों में से एक। जब फायरिंग प्याज काफी सहनशक्ति का एक बहुत की खपत है, लेकिन पागल क्षति है। धनुष पाने के लिए, यह पुरानी राजा की आत्मा हो और Ornifeks पर यह आदान-प्रदान करने के लिए आवश्यक है। दस हजार आत्माओं - विनिमय की कीमत न अधिक है और न ही कम होगा। महान दो हाथ तलवार धुआँ - एक बहुत शक्तिशाली हथियार। उच्च क्षति तलवार इसके अलावा एक उत्कृष्ट ब्लॉक प्रतिशत है। तथ्य यह है कि तलवार के बावजूद बहुत भारी हमले अपेक्षाकृत जल्दी ही कारण बनता है। क्या वास्तव में वहाँ है शार्पनिंग और अतिरिक्त नुकसान की संभावना के बारे में बात करने के लिए। जाओ इस चमत्कार संभव है Ornifeks उसकी स्मोकी नाइट देना है पर। एक्सचेंज में ही आप पच्चीस हजार आत्माओं के रूप में के रूप में ज्यादा खर्च होंगे। गुस्से में कुल्हाड़ी - उत्कृष्ट भारी हथियार। इसकी मुख्य विशेषता - एक विशेष हमले प्रदर्शन करने की क्षमता। प्राप्त करने के लिए कुल्हाड़ी एलना, Fel रानी की आत्मा को निकालने के लिए होगा, और दे यह Ornifeks और उन्हें चौबीस हजार आत्माओं भुगतान करते हैं।
Jamshedpur : सुंदरनगर थाना क्षेत्र यूसील कॉलोनी में रहने वाले दो पड़ोसियों ने आपस में मारपीट कर ली. घटना के संबंध में एक पक्ष आशा आस्थाना की ओर से आशीष आस्थाना और नेहा आस्थाना के खिलाफ मामला मामला दर्ज कराया गया है. मामले में आशा का कहना है कि दोनों आरोपी 17 दिसंबर से ही उनके साथ मारपीट कर रहे हैं. 24 दिसंबर को जब मामला ज्यादा बढ़ गया तब मामला थाने तक पहुंचा है. घटना के दिन दोनों आरोपी आशा के घर में घुस गये थे और मारपीट की थी. मामला थाने तक पहुंचते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है.
Jamshedpur : सुंदरनगर थाना क्षेत्र यूसील कॉलोनी में रहने वाले दो पड़ोसियों ने आपस में मारपीट कर ली. घटना के संबंध में एक पक्ष आशा आस्थाना की ओर से आशीष आस्थाना और नेहा आस्थाना के खिलाफ मामला मामला दर्ज कराया गया है. मामले में आशा का कहना है कि दोनों आरोपी सत्रह दिसंबर से ही उनके साथ मारपीट कर रहे हैं. चौबीस दिसंबर को जब मामला ज्यादा बढ़ गया तब मामला थाने तक पहुंचा है. घटना के दिन दोनों आरोपी आशा के घर में घुस गये थे और मारपीट की थी. मामला थाने तक पहुंचते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है.
डांसिंग क्वीन नोरा फतेही आज दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। नोरा ना सिर्फ डांस और एक्टिंग बल्कि अपने ग्लैमरस अवतार के लिए काफी मशहूर हैं। नोरा आए दिन अपने बोल्ड लुक्स से फैंस को दीवाना बनाती रहती हैं। वैसे तो नोरा इन दिनों रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' को भी जज कर रही हैं। नोरा ऑनस्क्रीन तो फैंस का दिल जीत ही रही है लेकिन वो ऑफस्क्रीन भी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़ी रहती हैं। नोरा ने फैंस के साथ अपना एक डांस वीडियो साझा किया है जिसमें वो किलर डांस मूव्स करती दिख रही है। यह वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है और फैंस इसे खूब पसंद भी कर रहे हैं। नोरा फतेही ने इंस्टाग्राम पर अपना एक डांस वीडियो शेयर किया है। जिसमें वो अपने नो-मेकअप लुक में नजर आ रही हैं। इस वीडियो में नोरा अपने दोस्तों कोरियोग्राफर रजित देव और मेकअप आर्टिस्ट मार्से पेड्रोज़ो के साथ मॉरीशस बीच पर डांस कर रही हैं। वीडियो में नोरा क्रिस ब्राउन के सॉन्ग कॉल मी एवरी डे पर थिरकती दिख रही हैं। अपने इस लेटेस्ट वीडियो को शेयर करते हुए नोरा ने कैप्शन में लिखा, "वाइबिंग. . . कॉल मी एवरी डे। " वीडियो में टाई हेयर बन स्टाइल के साथ पिंक बिकिनी टॉप के साथ हॉट पेंट्स में नोरा का लुक भी बेहद अट्रैक्टिव लग रहा है। वीडियो में स्लो मोशन में उनके कर्वी बॉडी के साथ डांस स्टेप्स देखना किसी ट्रीट से कम नहीं है। फैंस को अपनी पसंदीदा नोरा का ये डांस वीडियो बहुत पसंद आया है। नोरा के वीडियो पर यूजर्स जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं एक यूजर ने कॉमेंट कर लिखा, 'टू मच फायर नोरा'। दूसर यूजर ने लिखा, 'किलर'। वर्क फ्रंट की बात करें तो हाल ही में अजय देवगन और सिद्धार्थ मल्होत्रा स्टारर थैंक गॉड में अपने आइटम नंबर के लिए नोरा ने खूब तारीफें बटोरी थी। वहीं अब नोरा जल्द ही जॉन अब्राहम संग एक कॉमेडी फिल्म में अहम किरदार में नजर आएंगी।
डांसिंग क्वीन नोरा फतेही आज दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। नोरा ना सिर्फ डांस और एक्टिंग बल्कि अपने ग्लैमरस अवतार के लिए काफी मशहूर हैं। नोरा आए दिन अपने बोल्ड लुक्स से फैंस को दीवाना बनाती रहती हैं। वैसे तो नोरा इन दिनों रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' को भी जज कर रही हैं। नोरा ऑनस्क्रीन तो फैंस का दिल जीत ही रही है लेकिन वो ऑफस्क्रीन भी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़ी रहती हैं। नोरा ने फैंस के साथ अपना एक डांस वीडियो साझा किया है जिसमें वो किलर डांस मूव्स करती दिख रही है। यह वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है और फैंस इसे खूब पसंद भी कर रहे हैं। नोरा फतेही ने इंस्टाग्राम पर अपना एक डांस वीडियो शेयर किया है। जिसमें वो अपने नो-मेकअप लुक में नजर आ रही हैं। इस वीडियो में नोरा अपने दोस्तों कोरियोग्राफर रजित देव और मेकअप आर्टिस्ट मार्से पेड्रोज़ो के साथ मॉरीशस बीच पर डांस कर रही हैं। वीडियो में नोरा क्रिस ब्राउन के सॉन्ग कॉल मी एवरी डे पर थिरकती दिख रही हैं। अपने इस लेटेस्ट वीडियो को शेयर करते हुए नोरा ने कैप्शन में लिखा, "वाइबिंग. . . कॉल मी एवरी डे। " वीडियो में टाई हेयर बन स्टाइल के साथ पिंक बिकिनी टॉप के साथ हॉट पेंट्स में नोरा का लुक भी बेहद अट्रैक्टिव लग रहा है। वीडियो में स्लो मोशन में उनके कर्वी बॉडी के साथ डांस स्टेप्स देखना किसी ट्रीट से कम नहीं है। फैंस को अपनी पसंदीदा नोरा का ये डांस वीडियो बहुत पसंद आया है। नोरा के वीडियो पर यूजर्स जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं एक यूजर ने कॉमेंट कर लिखा, 'टू मच फायर नोरा'। दूसर यूजर ने लिखा, 'किलर'। वर्क फ्रंट की बात करें तो हाल ही में अजय देवगन और सिद्धार्थ मल्होत्रा स्टारर थैंक गॉड में अपने आइटम नंबर के लिए नोरा ने खूब तारीफें बटोरी थी। वहीं अब नोरा जल्द ही जॉन अब्राहम संग एक कॉमेडी फिल्म में अहम किरदार में नजर आएंगी।
रूस के रक्षामंत्रालय ने सीरिया में आतंकवादियों के ठिकानों पर रूसी वायु सेना की बमबारी से 100 आतंकियों के मारे जाने की ख़बर है। मीडिया सूत्रों के अनुसार सीरिया में रूस के शांति केन्द्र के उप प्रमुख मेजर जनरल ओलीग एगूरोफ़ ने सीरिया में आतंकियों के एक प्रशिक्षण केन्द्र पर हमले की सूचना दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार रूसी युद्ध विमानों के हमले में लगभग 100 आतंकी मारे गये हैं। तुर्किए के नियंत्रण वाले सीरिया के उत्तरी क्षेत्र एफ़रीन और एज़ाज़ में आतंकियों के बीच झड़पें जारी हैं। रूस के रक्षामंत्रालय के इस अधिकारी ने कहा कि रूसी सेना ने आतंकियों से मुक़ाबला करने के मक़सद से उत्तरी सीरिया के क्षेत्र क़तमा में आतंकियों के एक प्रशिक्षण केन्द्र पर हमला किया। इस हमले में आतंकियों का कमान्ड सेन्टर, हथियारों का भंडार, हेडक्वाटर, गोले बारूद से भरी 15 गाड़ियां और मीज़ाइल लांचर पैड पूरी तरह से तबाह हो गये। (AK) हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
रूस के रक्षामंत्रालय ने सीरिया में आतंकवादियों के ठिकानों पर रूसी वायु सेना की बमबारी से एक सौ आतंकियों के मारे जाने की ख़बर है। मीडिया सूत्रों के अनुसार सीरिया में रूस के शांति केन्द्र के उप प्रमुख मेजर जनरल ओलीग एगूरोफ़ ने सीरिया में आतंकियों के एक प्रशिक्षण केन्द्र पर हमले की सूचना दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार रूसी युद्ध विमानों के हमले में लगभग एक सौ आतंकी मारे गये हैं। तुर्किए के नियंत्रण वाले सीरिया के उत्तरी क्षेत्र एफ़रीन और एज़ाज़ में आतंकियों के बीच झड़पें जारी हैं। रूस के रक्षामंत्रालय के इस अधिकारी ने कहा कि रूसी सेना ने आतंकियों से मुक़ाबला करने के मक़सद से उत्तरी सीरिया के क्षेत्र क़तमा में आतंकियों के एक प्रशिक्षण केन्द्र पर हमला किया। इस हमले में आतंकियों का कमान्ड सेन्टर, हथियारों का भंडार, हेडक्वाटर, गोले बारूद से भरी पंद्रह गाड़ियां और मीज़ाइल लांचर पैड पूरी तरह से तबाह हो गये। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
वृषभः आप अपनी वाणी से किसी को मंत्रमुग्ध कर लाभ ले पाएंगे तथा मेलजोल के सम्बंध बना सकेंगे ऐसा गणेशजी कहते हैं। आपकी वैचारिक समृद्धि में बढ़ोतरी होगी, तथा आप का मन प्रफुल्लित रहेगा। मिथुनः आज आपके मन में भांति-भांति के विचारों की तरंगे उठेंगी, ऐसा गणेशजी कहते हैं। आप उन विचारों में खोए रहेंगे। आज बौद्धिक कार्यों में जुड़ना होगा, लेकिन वाद-विवाद में न उतरने की गणेशजी सलाह देते हैं। आज आप संवेदनशील रहेंगे। कर्कः गणेशजी कहते हैं कि आज आपका दिन शुभ रहेगा। नए कार्य प्रारंभ करने के लिए दिन शुभ है। मित्र एवं स्वजनों से भेंट होगी। प्रियजनों से सुख एवं आनंदप्राप्ति होगी। पर्यटन के लिए मित्र तथा परिजनों के साथ योजना बन सकती है। सिंहः आज का आपका दिन मध्यम फलदायी कहा जा सकता है परंतु आर्थिक रूप से लाभदायी रहेगा, ऐसा गणेशजी कहते हैं। व्यय अधिक होगा। दूर-सदूर के लोगों से संदेश-व्यवहार से लाभ होगा। कन्याः गणेशजी कहते हैं कि आपका दिन मध्यम फलदायी होगा। विचारों की समृद्धि बढे़गी। लाभकारी तथा मेलजोल भरे संबंध आप वाणी की सहायता से बना सकेंगे। व्यवसायिक रूप से दिन लाभदायी रहेगा। आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। तुलाः आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए गणेशजी सूचित करते हैं। असंयमित या अविचारी वर्तन आपको परेशानी में डाल सकता है। अतः ऐसे व्यवहार से बचें। दुर्घटना से सावधान रहें। खर्च अधिक रहेगा। वृश्चिकः गणेशजी कहते है कि आपका आज का दिन लाभदायी रहेगा। नौकरी-व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। मित्रों के साथ भेंट हो सकती है तथा प्राकृतिक स्थल पर घूमने की योजना भी बन सकती है। विवाह योग्य युवक-युवतियों को योग्यपात्र मिल सकते हैं। धनुः कार्य सफलता का दिन है। नए कार्य की शुरुआत कर सकेंगे। व्यापारी अपने बिजनेस का आयोजन और विस्तार अच्छी तरह कर सकेंगे। नौकरी में उच्च पदाधिकारी आपकी पदोन्नति के लिए विचार करेंगे। गृहजीवन में आनंद और संतोष रहेगा। मकरः गणेशजी कहते हैं कि बौद्धिक कार्यों एवं व्यवसाय में आप नई शैली अपनाएंगे। साहित्य तथा लेखन की प्रवृत्ति को गति मिलेगी। शरीर में बेचैनी और थकान अनुभव करेंगे। संतान की समस्या चिंता का कारण बनेगी। लंबी यात्रा की संभावना है। कुंभः अनैतिक और निषेधात्मक कार्यों तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने के लिए गणेशजी कहते हैं। अत्यधिक विचार और क्रोध आपकी मानसिक स्वस्थता में खलल पहुंचा सकते हैं। परिवार में टकराव होने की संभावना रहेगी। मीनः गणेशजी आज व्यापारियों के लिए खूब उज्जवल भविष्य देखते हैं। व्यवसाय में भागीदारी करने के लिए भी शुभ समय है। साहित्य सृजक, कलाकार और कारीगर अपनी सृजनात्मकता निखार सकेंगे और आदर पाएंगे।
वृषभः आप अपनी वाणी से किसी को मंत्रमुग्ध कर लाभ ले पाएंगे तथा मेलजोल के सम्बंध बना सकेंगे ऐसा गणेशजी कहते हैं। आपकी वैचारिक समृद्धि में बढ़ोतरी होगी, तथा आप का मन प्रफुल्लित रहेगा। मिथुनः आज आपके मन में भांति-भांति के विचारों की तरंगे उठेंगी, ऐसा गणेशजी कहते हैं। आप उन विचारों में खोए रहेंगे। आज बौद्धिक कार्यों में जुड़ना होगा, लेकिन वाद-विवाद में न उतरने की गणेशजी सलाह देते हैं। आज आप संवेदनशील रहेंगे। कर्कः गणेशजी कहते हैं कि आज आपका दिन शुभ रहेगा। नए कार्य प्रारंभ करने के लिए दिन शुभ है। मित्र एवं स्वजनों से भेंट होगी। प्रियजनों से सुख एवं आनंदप्राप्ति होगी। पर्यटन के लिए मित्र तथा परिजनों के साथ योजना बन सकती है। सिंहः आज का आपका दिन मध्यम फलदायी कहा जा सकता है परंतु आर्थिक रूप से लाभदायी रहेगा, ऐसा गणेशजी कहते हैं। व्यय अधिक होगा। दूर-सदूर के लोगों से संदेश-व्यवहार से लाभ होगा। कन्याः गणेशजी कहते हैं कि आपका दिन मध्यम फलदायी होगा। विचारों की समृद्धि बढे़गी। लाभकारी तथा मेलजोल भरे संबंध आप वाणी की सहायता से बना सकेंगे। व्यवसायिक रूप से दिन लाभदायी रहेगा। आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। तुलाः आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए गणेशजी सूचित करते हैं। असंयमित या अविचारी वर्तन आपको परेशानी में डाल सकता है। अतः ऐसे व्यवहार से बचें। दुर्घटना से सावधान रहें। खर्च अधिक रहेगा। वृश्चिकः गणेशजी कहते है कि आपका आज का दिन लाभदायी रहेगा। नौकरी-व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। मित्रों के साथ भेंट हो सकती है तथा प्राकृतिक स्थल पर घूमने की योजना भी बन सकती है। विवाह योग्य युवक-युवतियों को योग्यपात्र मिल सकते हैं। धनुः कार्य सफलता का दिन है। नए कार्य की शुरुआत कर सकेंगे। व्यापारी अपने बिजनेस का आयोजन और विस्तार अच्छी तरह कर सकेंगे। नौकरी में उच्च पदाधिकारी आपकी पदोन्नति के लिए विचार करेंगे। गृहजीवन में आनंद और संतोष रहेगा। मकरः गणेशजी कहते हैं कि बौद्धिक कार्यों एवं व्यवसाय में आप नई शैली अपनाएंगे। साहित्य तथा लेखन की प्रवृत्ति को गति मिलेगी। शरीर में बेचैनी और थकान अनुभव करेंगे। संतान की समस्या चिंता का कारण बनेगी। लंबी यात्रा की संभावना है। कुंभः अनैतिक और निषेधात्मक कार्यों तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने के लिए गणेशजी कहते हैं। अत्यधिक विचार और क्रोध आपकी मानसिक स्वस्थता में खलल पहुंचा सकते हैं। परिवार में टकराव होने की संभावना रहेगी। मीनः गणेशजी आज व्यापारियों के लिए खूब उज्जवल भविष्य देखते हैं। व्यवसाय में भागीदारी करने के लिए भी शुभ समय है। साहित्य सृजक, कलाकार और कारीगर अपनी सृजनात्मकता निखार सकेंगे और आदर पाएंगे।
एक्ट्रेस Urfi Javed कभी कीवी से खुद को ढकी नजर आती हैं, तो कभी घास और पत्तों से इस बार तो उन्होंने सारी हद ही पार कर दी है. उन्होंने मोतियों की लड़ से खुद को छुपाया है. Urfi फिर से टॉपलेस होकर अपनी नई वीडियो इंस्टाग्राम ने शेयर की है, जो गर्मी के मौसम में तापमान को और भी कहीं ज्यादा बढ़ाने का काम कर रही है. लोग Urfi के वीडियो में तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. कुछ लोगों ने कपड़े पहनने की राय दी है तो कुछ उन्हें पागल कह रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट किया, उठा ले रे बाबा इसे. ' एक ने कहा, अरे कोई इसे मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती कराओ. ' एक अन्य ने कहा, ये नहीं सुधरेगी. ' फैंसी नहीं सोशल मीडिया में अब बॉलीवुड एक्टर और एक्ट्रेस भी Urfi के इस फैशन सेंस को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. कुछ लोग उनके इस फैशन को पसंद कर रहे हैं तो कुछ लोगों ने उन्हें गलत कहा है. इसमें हाल ही में रणबीर कपूर का नाम शामिल हुआ है, जिसके कमेंट्स के बाद Urfi ने उन्हें पलटकर करारा जवाब दिया था.
एक्ट्रेस Urfi Javed कभी कीवी से खुद को ढकी नजर आती हैं, तो कभी घास और पत्तों से इस बार तो उन्होंने सारी हद ही पार कर दी है. उन्होंने मोतियों की लड़ से खुद को छुपाया है. Urfi फिर से टॉपलेस होकर अपनी नई वीडियो इंस्टाग्राम ने शेयर की है, जो गर्मी के मौसम में तापमान को और भी कहीं ज्यादा बढ़ाने का काम कर रही है. लोग Urfi के वीडियो में तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. कुछ लोगों ने कपड़े पहनने की राय दी है तो कुछ उन्हें पागल कह रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट किया, उठा ले रे बाबा इसे. ' एक ने कहा, अरे कोई इसे मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती कराओ. ' एक अन्य ने कहा, ये नहीं सुधरेगी. ' फैंसी नहीं सोशल मीडिया में अब बॉलीवुड एक्टर और एक्ट्रेस भी Urfi के इस फैशन सेंस को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. कुछ लोग उनके इस फैशन को पसंद कर रहे हैं तो कुछ लोगों ने उन्हें गलत कहा है. इसमें हाल ही में रणबीर कपूर का नाम शामिल हुआ है, जिसके कमेंट्स के बाद Urfi ने उन्हें पलटकर करारा जवाब दिया था.
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री सहित भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे कद्दावर नेता है. इसके बाद भी वह अपना दल, निषाद पार्टी और भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के ऊपर निर्भर है. ऐसे में साफ है कि जिन नेताओं का मैजिक प्रदेश के बाहर बताया जा रहा है उनका अपने क्षेत्र में कितना प्रभाव है? उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल हिस्से से ही देश के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे कद्दावर नेता चुनाव जीत चुके है. केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में कई और बड़े नेता भी पूर्वांचल से ही है. इसके बाद भी पूर्वांचल में भाजपा छोटे-छोटे दलों से गठबंधन करने को मजबूर है. 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दल अनुप्रिया गुट का सहयोग था. इसके बाद भी गोरखपुर उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पडा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके गढ़ में निषाद पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने समाजवादी पार्टी के सहयोग से चुनाव हरा दिया. लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अब उसी निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल कर लिया है. गोरखुपर में प्रवीण निषाद को साथ लेने के बाद यह साबित होता है कि वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनावी कौशल पर भाजपा को यकीन नहीं है. भाजपा को यह डर सता रहा है कि उपचुनाव की तरह आम चुनाव में भी पार्टी को हार को मुंह न देखना पड़ जाये. भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरे देश में भले ही चुनाव प्रचार का ब्रांड एबेंसडर बनाकर घुमा रही हो पर उनके गृह जनपद गोरखुपर में निषाद पार्टी के सामने झुक गई है.
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री सहित भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे कद्दावर नेता है. इसके बाद भी वह अपना दल, निषाद पार्टी और भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के ऊपर निर्भर है. ऐसे में साफ है कि जिन नेताओं का मैजिक प्रदेश के बाहर बताया जा रहा है उनका अपने क्षेत्र में कितना प्रभाव है? उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल हिस्से से ही देश के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे कद्दावर नेता चुनाव जीत चुके है. केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में कई और बड़े नेता भी पूर्वांचल से ही है. इसके बाद भी पूर्वांचल में भाजपा छोटे-छोटे दलों से गठबंधन करने को मजबूर है. दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में अपना दल अनुप्रिया गुट का सहयोग था. इसके बाद भी गोरखपुर उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पडा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके गढ़ में निषाद पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने समाजवादी पार्टी के सहयोग से चुनाव हरा दिया. लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अब उसी निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल कर लिया है. गोरखुपर में प्रवीण निषाद को साथ लेने के बाद यह साबित होता है कि वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनावी कौशल पर भाजपा को यकीन नहीं है. भाजपा को यह डर सता रहा है कि उपचुनाव की तरह आम चुनाव में भी पार्टी को हार को मुंह न देखना पड़ जाये. भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरे देश में भले ही चुनाव प्रचार का ब्रांड एबेंसडर बनाकर घुमा रही हो पर उनके गृह जनपद गोरखुपर में निषाद पार्टी के सामने झुक गई है.
अजमेर। अजमेर जिला वैश्य महासम्मेलन द्वारा श्री कृष्णगोपाल आयुर्वेदिक भवन धमार्थ ट्रस्ट एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजमेर के सहयोग से स्वाईन फ्लू के बचाव के लिए गुरुवार को काढ़ा वितरण अभियान आरम्भ किया गया। महामंत्री उमेश गर्ग ने बताया कि अभियान 24 से 27 जनवरी तक चलेगा। गुरुवार को केसरगंज गोल चक्कर पर पृथ्वी मसाले के बाहर स्टॉल लगाकर काढ़ा वितरित किया गया। अभियान का उद्घाटन अपर एवं जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डॉ. शक्ति सिंह शेखावत ने किया। अध्यक्षता कृष्णगोपाल आयुर्वेदिक भवन के मैनेजिंग ट्रस्टी श्यामसुन्दर छापरवाल एवं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कालीचरणदास खण्डेलवाल ने की। कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन एवं पूर्व पार्षद भारती श्रीवास्तव विशिष्ठ अतिथि रहे। कार्यक्रम का संयोजन सुनील गोयल, विष्णु मंगल एवं दीपक खण्डेलवाल ने किया। जिला अध्यक्ष रमेश तापडिय़ा ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। दिनेश गुप्ता, युवा महामंत्री अंकुर मित्तल सहित अनेक समाज बन्धुओं का सहयोग रहा। जिला अध्यक्ष रमेश तापडिय़ा ने बताया कि दूसरे दिन 25 जनवरी को शिविर जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में सुबह 10 बजे से 12 बजे तक रहेगा। शिविर में एडीजे डॉ. शक्ति सिंह शेखावत, महापौर धर्मेन्द्र गहलोत एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गणेशीलाल अग्रवाल, आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका शर्मा के आतिथ्य में एवं धर्मेन्द्र कासट के संयोजन में उपरोक्त शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
अजमेर। अजमेर जिला वैश्य महासम्मेलन द्वारा श्री कृष्णगोपाल आयुर्वेदिक भवन धमार्थ ट्रस्ट एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजमेर के सहयोग से स्वाईन फ्लू के बचाव के लिए गुरुवार को काढ़ा वितरण अभियान आरम्भ किया गया। महामंत्री उमेश गर्ग ने बताया कि अभियान चौबीस से सत्ताईस जनवरी तक चलेगा। गुरुवार को केसरगंज गोल चक्कर पर पृथ्वी मसाले के बाहर स्टॉल लगाकर काढ़ा वितरित किया गया। अभियान का उद्घाटन अपर एवं जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डॉ. शक्ति सिंह शेखावत ने किया। अध्यक्षता कृष्णगोपाल आयुर्वेदिक भवन के मैनेजिंग ट्रस्टी श्यामसुन्दर छापरवाल एवं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कालीचरणदास खण्डेलवाल ने की। कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन एवं पूर्व पार्षद भारती श्रीवास्तव विशिष्ठ अतिथि रहे। कार्यक्रम का संयोजन सुनील गोयल, विष्णु मंगल एवं दीपक खण्डेलवाल ने किया। जिला अध्यक्ष रमेश तापडिय़ा ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। दिनेश गुप्ता, युवा महामंत्री अंकुर मित्तल सहित अनेक समाज बन्धुओं का सहयोग रहा। जिला अध्यक्ष रमेश तापडिय़ा ने बताया कि दूसरे दिन पच्चीस जनवरी को शिविर जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में सुबह दस बजे से बारह बजे तक रहेगा। शिविर में एडीजे डॉ. शक्ति सिंह शेखावत, महापौर धर्मेन्द्र गहलोत एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गणेशीलाल अग्रवाल, आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका शर्मा के आतिथ्य में एवं धर्मेन्द्र कासट के संयोजन में उपरोक्त शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
खार्तूम, 14 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिमी सूडान में रविवार को सड़क दुर्घटना में 14 लोगों की मौत हो गई। बयान के मुताबिक, यह दुर्घटना उत्तरी दारफूर और पश्चिमी कोरडोफान के बीच सीमा पर वेस्टर्न साल्वेशन रोड पर हुई। उम कडाडा के आयुक्त मोहम्मद ओस्मान ने कहा कि घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। अभी घायलों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। उन्होंने बताया कि एक यात्री बस के पार्किं ग में खड़े ट्रक से टकराने की वजह से यह दुर्घटना हुई।
खार्तूम, चौदह जनवरी । पश्चिमी सूडान में रविवार को सड़क दुर्घटना में चौदह लोगों की मौत हो गई। बयान के मुताबिक, यह दुर्घटना उत्तरी दारफूर और पश्चिमी कोरडोफान के बीच सीमा पर वेस्टर्न साल्वेशन रोड पर हुई। उम कडाडा के आयुक्त मोहम्मद ओस्मान ने कहा कि घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। अभी घायलों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। उन्होंने बताया कि एक यात्री बस के पार्किं ग में खड़े ट्रक से टकराने की वजह से यह दुर्घटना हुई।
रजत पती प्रत्य हिन्दी केसरी का प्रकाशन प्रारम्भ किया। काशीकी प्रथम एक लिपि-विस्तार परिषरका अधिवेशन सन् १९४ मे बडौदा राज्यकतासीन वीमान स्वरमेन्सकी बम्पमतामें सम्पन्न हुआ। मराठा रियासत-बासियर इन्दौर, देवास धार भारिने हिन्दी ही को राजभाषा के रूप में अपनाया। बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव तो हिन्दी के प्रबल समर्थक थे ही । मुजरात में स्वामी दयानन्द सरस्वतीने आर्य समाजकी स्थापना कर जब उसका प्रचार प्रारम्भ किया तो उनके सामने समाज प्रचार के लिए एक सर्वसामान्य भाषामा अत्यन्त विचारभीम एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उपस्थित हुआ। आपने सोच-विचार कर हिन्दी भाषाको ही समाज के प्रचारका माध्यम बनाया। बापके प्रभाव से जार्य समाज के सभी गुरुकुमा शिक्षाका साम्पम हिन्दी बनी। जापने सपना का हिन्दीमे ही मिला और बेदाका अनुबाद भी इसी भाषामे करवाया । गुरुकुम कामडीके संस्थापक महात्मा मुन्शीराम ( बाबमे स्वामी श्रद्धानन्य) भी हिन्दी के प्रबल समर्थकोमसे से। आप हिन्दीको "आर्य भाषा कहते थे। सम्बत् १७७ के लगभग एक गुजराती सज्जनने ब्रजभाषा-व्याकरण और बज-मापा-धातुमाला लिखकर ब्रजमापाके तीन जोपर प्रकाश डाला जिसमें इस भाषाके प्राचीन रूपकी व्याकरणसम्मत विवेचना मिलती है। विवेचना सिखनेका कारण इन्होने निम्ममिति द्वारा बताया है - तर दानी मर-कोक सुगम पहत संसार । ताकी बोलन रीतिको कही विचार । व्याकरण सम्बन्धी यह विचार और वह भी एक हिन्दीवर प्रान्तबासी द्वारा व्यक्त होना इस बातका सूचक है कि उस समय हिन्दीको कितना व्यापक महत्त्व प्राप्त हो चुका था। पजाब उईका गढ़ होते हुए भी बहाँक प्रामीनोम पजाबी एक हिन्दीका काफी प्रचार रहा। महाँ हिन्दी प्रचारक निमित्त मार्म-समाजते जो कार्य किया वह प्रशसनीय है। पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार नवीनरायने यहाँ हिन्दी प्रचारका स्वरूप कार्य किया। सन् १८६७ मे ज्ञान-प्रदायिनी पत्रिका प्रकाशित कर मापने इस प्रदेशमं हिन्दी पक्षका प्रचलन किया । आपका मत बा कि-उर्दू कभी भी बन साधारणकी भाषा नहीं बन सपती हिन्दी ही उसके सर्वमा मोम्य है। इस प्रस्मस ही हिन्दीको अपनाया और पुरुष भी इसे सीखने के लिए बिवस किया। धीरे-धीरे हिन्दी के लिए सभी प्रान्तोम मातावरण अनुक्स होने लगा था और इसे सभी प्रान्त मनीवियोनेपाना बारम्भ किया। यह प्रयास भी किया जाने क्या कि देश की राष्ट्रभाषाके रूप में हिन्दीको स्वीकार कर लिया बाग बौर इसका प्रचार किया जाय। कुछ मीर बननायक मौर चितोके विचार इस सम्बन्धम यहाँ दिए गए है विश्व कवि रवीनाथ ठाकुर बवालके पुरु पुरुष विभिन्न विदेशी भाषाओके बेता मातृभावाके परम उपासक एबम् सैक विषय-कमि रवि ठाकुर रामाया हिन्दी के प्रतियोबपनीमा व्यक्त की मबि हम प्रत्येक भारतीय नैसनिक अधिकाराके सिद्धान्तको स्वीकार करते हैं, तो हमें राष्ट्रमापाके
रजत पती प्रत्य हिन्दी केसरी का प्रकाशन प्रारम्भ किया। काशीकी प्रथम एक लिपि-विस्तार परिषरका अधिवेशन सन् एक सौ चौरानवे मे बडौदा राज्यकतासीन वीमान स्वरमेन्सकी बम्पमतामें सम्पन्न हुआ। मराठा रियासत-बासियर इन्दौर, देवास धार भारिने हिन्दी ही को राजभाषा के रूप में अपनाया। बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव तो हिन्दी के प्रबल समर्थक थे ही । मुजरात में स्वामी दयानन्द सरस्वतीने आर्य समाजकी स्थापना कर जब उसका प्रचार प्रारम्भ किया तो उनके सामने समाज प्रचार के लिए एक सर्वसामान्य भाषामा अत्यन्त विचारभीम एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उपस्थित हुआ। आपने सोच-विचार कर हिन्दी भाषाको ही समाज के प्रचारका माध्यम बनाया। बापके प्रभाव से जार्य समाज के सभी गुरुकुमा शिक्षाका साम्पम हिन्दी बनी। जापने सपना का हिन्दीमे ही मिला और बेदाका अनुबाद भी इसी भाषामे करवाया । गुरुकुम कामडीके संस्थापक महात्मा मुन्शीराम भी हिन्दी के प्रबल समर्थकोमसे से। आप हिन्दीको "आर्य भाषा कहते थे। सम्बत् एक सौ सतहत्तर के लगभग एक गुजराती सज्जनने ब्रजभाषा-व्याकरण और बज-मापा-धातुमाला लिखकर ब्रजमापाके तीन जोपर प्रकाश डाला जिसमें इस भाषाके प्राचीन रूपकी व्याकरणसम्मत विवेचना मिलती है। विवेचना सिखनेका कारण इन्होने निम्ममिति द्वारा बताया है - तर दानी मर-कोक सुगम पहत संसार । ताकी बोलन रीतिको कही विचार । व्याकरण सम्बन्धी यह विचार और वह भी एक हिन्दीवर प्रान्तबासी द्वारा व्यक्त होना इस बातका सूचक है कि उस समय हिन्दीको कितना व्यापक महत्त्व प्राप्त हो चुका था। पजाब उईका गढ़ होते हुए भी बहाँक प्रामीनोम पजाबी एक हिन्दीका काफी प्रचार रहा। महाँ हिन्दी प्रचारक निमित्त मार्म-समाजते जो कार्य किया वह प्रशसनीय है। पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार नवीनरायने यहाँ हिन्दी प्रचारका स्वरूप कार्य किया। सन् एक हज़ार आठ सौ सरसठ मे ज्ञान-प्रदायिनी पत्रिका प्रकाशित कर मापने इस प्रदेशमं हिन्दी पक्षका प्रचलन किया । आपका मत बा कि-उर्दू कभी भी बन साधारणकी भाषा नहीं बन सपती हिन्दी ही उसके सर्वमा मोम्य है। इस प्रस्मस ही हिन्दीको अपनाया और पुरुष भी इसे सीखने के लिए बिवस किया। धीरे-धीरे हिन्दी के लिए सभी प्रान्तोम मातावरण अनुक्स होने लगा था और इसे सभी प्रान्त मनीवियोनेपाना बारम्भ किया। यह प्रयास भी किया जाने क्या कि देश की राष्ट्रभाषाके रूप में हिन्दीको स्वीकार कर लिया बाग बौर इसका प्रचार किया जाय। कुछ मीर बननायक मौर चितोके विचार इस सम्बन्धम यहाँ दिए गए है विश्व कवि रवीनाथ ठाकुर बवालके पुरु पुरुष विभिन्न विदेशी भाषाओके बेता मातृभावाके परम उपासक एबम् सैक विषय-कमि रवि ठाकुर रामाया हिन्दी के प्रतियोबपनीमा व्यक्त की मबि हम प्रत्येक भारतीय नैसनिक अधिकाराके सिद्धान्तको स्वीकार करते हैं, तो हमें राष्ट्रमापाके
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के करीब दादी-पौत्र की हत्या में अब पुलिस को दाढ़ी मजदूर और हिरासत में लिए गए राजू के करीबियों की तलाश है। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस हाथ-पैर चला रही है। मकान निर्माण में काम करने वाले मामा-भांजे मजदूर को पुलिस रात में ही उठा लाई। सबसे पहले घटना देखने वाले मजदूर धीरज से पुलिस पूछताछ कर रही है। नगर कोतवाली के बलीपुर गाजी चौराहा निवासी सरस्वती देवी व उसके पौत्र अनमोल की रक्तरंजित शव मंगलवार की सुबह घर में पड़ा मिला था। दोनों का बेरहमी से कत्ल करने के बाद हत्यारे दरवाजा खुला छोड़कर फरार हो गए थे। घटना की जानकारी पर मृतका के बेटे धर्मेंद्र व बहू राधा के साथ घर पहुंचे प्रयागराज के मऊआइमा निवासी राजू पटेल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उससे पूछताछ के बाद पुलिस रात में ही मकान का निर्माण करने वाले दो मजदूरों को उठा लाई। उनसे पूछताछ करने के बाद पुलिस उस मजदूर की तलाश में जुट गई जो रात में सरस्वती के घर पर रुका हुआ था। दाढ़ी नाम का यह मजदूर शहर में ही मंदिर में रहता था। वह डेरवा या लालगंज का रहने वाला है। मजदूर धीरज ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह मंगलवार की सुबह घर पहुंचा तो दंग रह गया। आधा दरवाजा खुला था। आवाज देते हुए भीतर पहुंचा तो उल्टे पांव लौट पड़ा। भय के कारण वह वहां से निकलकर भंगवाचुंगी पहुंचा। एक परिचित के मोबाइल से साथ में मजदूरी करने वाले मामा के पास संदेश भेजकर घटना की जानकारी दी। मामा ने राजू को घटना की जानकारी दी थी। रात में सरस्वती के घर पर मजदूरी करने वाला दाढ़ी रुका हुआ था। वह घटना के बाद से ही गायब है। इसके अलावा राजू के करीबियों पर भी पुलिस की निगाह टिकी हुई है। राजू से पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। एसपी एस आनंद ने बताया कि मृतका के घर पर रुका मजदूर दाढ़ी डेरवा के करीब का रहने वाला है। वह शहर में भी घूमकर रहता था। उसकी तलाश की जा रही है। राजू के करीबी भी हत्या में संदेह के दायरे में हैं। बलीपुर गाजी चौराहा निवासी सरस्वती देवी और उसके पौत्र अनमोल के शव का बुधवार को बेल्हा देवी घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। बेटे व मां की चिता को धर्मेंद्र ने मुखाग्नि दी। जिसके बाद घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पुलिस लाइन में मंगलवार की देर शाम तक बहू राधा व उसकी बहन चंदा से पुलिस पूछताछ करती रही। रात में अंतू पुलिस दोनों बहनों को लेकर अंतू चली गई। चंदा के घर राधा को भी रोका गया। पति धर्मेंद्र के साथ बेटे सूरज को रोका गया। बुधवार की सुबह करीब सवा दस बजे बहू राधा को अंतु पुलिस अपने साथ गाजी चौराहा लाई। वह शवों से लिपटकर रोने लगी। अंतिम संस्कार की तैयारी में धर्मेंद्र के साथ परिवार के लोग भी जुटे थे। जिन पर फिर राधा ने हमला बोलते हुए आरोप प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिया। बोली कि कोई मेरे सास की लाश न छुए। जीतेजी सभी उनसे नफरत करते थे। अब क्यों आए हैं। जिस तरह उसके सास की हत्या कर दी गई। उसी तरह उन लोगों की भी हत्या हो जाएगी। मंगलवार की देर रात दादी व पौत्र के शवों का डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम हुआ। सरस्वती के सिर पर वजनदार हथियार से ऐसा हमला किया गया था कि सिर का ऊपरी हिस्सा ही गायब हो गया था। अनमोल के सिर पर पहले प्रहार किया गया था। बाद में उसे फर्श पर पटका गया था। सिर में चोट आने के कारण उसकी मौत हो गई थी। सरस्वती के घर का निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। सूत्रों की मानें तो कुंभ स्नान के लिए पहले राजू अपने साथ राधा व उसके बच्चों को ले जाना चाहता था। बाद में राजू धर्मेंद्र को अपने साथ ले गया। बच्चों को साथ नहीं ले जाया गया था। ऐसे में राजू की नियत पर पुलिस का शक गहराता जा रहा है। वैसे तो सरस्वती के घर को राजू ने अपना ठिकाना बना लिया था। जब से मकान के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ तब से राजू व उसके परिवार के लोगों का भी आना-जाना था। पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि राजू का भाई सोमवार को सरस्वती के घर आया था। शाम को लौटा था। सोमवार की सुबह धर्मेंद्र व बहू राधा के कुंभ स्नान जाने के बाद सरस्वती घर पर अकेले थी। केवल पौत्र अनमोल और सूरज ही उसके साथ थे। उसी दिन मकान के निर्माण का कार्य भी बंद हो गया था। ऐसे में सरस्वती ने दाढ़ी को घर में रोक लिया था। रात करीब सात बजे सरस्वती का मोबाइल बंद हो गया था। सरस्वती देवी व उसके पौत्र की हत्या सोमवार की रात 9 से 10 बजे के बीच हुई। पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है। खून के काला पड़ जाने व मोबाइल बंद होने के समय को लेकर पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आ रही है। अंतू से धर्मेंद्र की पत्नी राधा को बेटे अमर के साथ सुबह शहर लाया गया। उसके साथ बहन चंदा भी थी। शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के बाद राधा को पुलिस की निगहबानी में रखा गया। महिला आरक्षियों के साथ सिपाहियों को भी लगाया गया था। ताकि राधा की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। किसी तरह का विवाद पड़ोसियों से न हो सके। दादी-पोते की हत्या में नामजद सुनील गुप्ता घर से फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। बुधवार को भी राधा परिवार के सुनील के ऊपर हत्या का आरोप लगाते हुए चीखती रही। पति मोतीलाल की मौत के बाद शहर में करोड़ों की संपत्ति की मालकिन सरस्वती बन गई। कटरा रोड, गाजी तिराहा व गोपाल मंदिर के पास करोड़ों की संपत्ति है। गोपाल मंदिर के बगल की दुकान मोतीलाल ने 35 साल पहले खरीदी थी। उस दुकान में रहने वाले दुकानदार ने अभी तक खाली नही किया। जिसका मुकदमा भी न्यायालय में चल रहा है। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सरस्वती के घर एक साल पहले राजू पटेल का आना-जाना शुरू हुआ। इसके पहले सरस्वती के घर में कुंडा के रहने वाले एक युवक का आना-जाना था। वह परिवार के काफी करीब था, लेकिन राजू के पैर जमाने के बाद उसका पत्ता कट गया। धीरे-धीरे उसका आना जाना भी बंद हो गया। कभी-कभार ही वह आता था। राजू का घर में आना-जाना सरस्वती को पसंद नहीं था। बहू राधा के बाहर जाने पर वह उसे उल्टा सीधा बोला करती थी। पुलिस की मानें तो राजू के साथ बहू राधा के बाहर जाने पर वह मजदूरों के सामने भी उल्टा सीधा बोला करती थी, लेकिन जब राधा घर आ जाती थी तो वह मौन साध लेती थी। राजू भी पूरी तरह से परिवार के सदस्य की तरह हो गया। उस पर सरस्वती भी भरोसा करते हुए मकान निर्माण के लिए रुपये भी दे दिया करती थी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. 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पुलिस अधीक्षक कार्यालय के करीब दादी-पौत्र की हत्या में अब पुलिस को दाढ़ी मजदूर और हिरासत में लिए गए राजू के करीबियों की तलाश है। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस हाथ-पैर चला रही है। मकान निर्माण में काम करने वाले मामा-भांजे मजदूर को पुलिस रात में ही उठा लाई। सबसे पहले घटना देखने वाले मजदूर धीरज से पुलिस पूछताछ कर रही है। नगर कोतवाली के बलीपुर गाजी चौराहा निवासी सरस्वती देवी व उसके पौत्र अनमोल की रक्तरंजित शव मंगलवार की सुबह घर में पड़ा मिला था। दोनों का बेरहमी से कत्ल करने के बाद हत्यारे दरवाजा खुला छोड़कर फरार हो गए थे। घटना की जानकारी पर मृतका के बेटे धर्मेंद्र व बहू राधा के साथ घर पहुंचे प्रयागराज के मऊआइमा निवासी राजू पटेल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उससे पूछताछ के बाद पुलिस रात में ही मकान का निर्माण करने वाले दो मजदूरों को उठा लाई। उनसे पूछताछ करने के बाद पुलिस उस मजदूर की तलाश में जुट गई जो रात में सरस्वती के घर पर रुका हुआ था। दाढ़ी नाम का यह मजदूर शहर में ही मंदिर में रहता था। वह डेरवा या लालगंज का रहने वाला है। मजदूर धीरज ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह मंगलवार की सुबह घर पहुंचा तो दंग रह गया। आधा दरवाजा खुला था। आवाज देते हुए भीतर पहुंचा तो उल्टे पांव लौट पड़ा। भय के कारण वह वहां से निकलकर भंगवाचुंगी पहुंचा। एक परिचित के मोबाइल से साथ में मजदूरी करने वाले मामा के पास संदेश भेजकर घटना की जानकारी दी। मामा ने राजू को घटना की जानकारी दी थी। रात में सरस्वती के घर पर मजदूरी करने वाला दाढ़ी रुका हुआ था। वह घटना के बाद से ही गायब है। इसके अलावा राजू के करीबियों पर भी पुलिस की निगाह टिकी हुई है। राजू से पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। एसपी एस आनंद ने बताया कि मृतका के घर पर रुका मजदूर दाढ़ी डेरवा के करीब का रहने वाला है। वह शहर में भी घूमकर रहता था। उसकी तलाश की जा रही है। राजू के करीबी भी हत्या में संदेह के दायरे में हैं। बलीपुर गाजी चौराहा निवासी सरस्वती देवी और उसके पौत्र अनमोल के शव का बुधवार को बेल्हा देवी घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। बेटे व मां की चिता को धर्मेंद्र ने मुखाग्नि दी। जिसके बाद घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पुलिस लाइन में मंगलवार की देर शाम तक बहू राधा व उसकी बहन चंदा से पुलिस पूछताछ करती रही। रात में अंतू पुलिस दोनों बहनों को लेकर अंतू चली गई। चंदा के घर राधा को भी रोका गया। पति धर्मेंद्र के साथ बेटे सूरज को रोका गया। बुधवार की सुबह करीब सवा दस बजे बहू राधा को अंतु पुलिस अपने साथ गाजी चौराहा लाई। वह शवों से लिपटकर रोने लगी। अंतिम संस्कार की तैयारी में धर्मेंद्र के साथ परिवार के लोग भी जुटे थे। जिन पर फिर राधा ने हमला बोलते हुए आरोप प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिया। बोली कि कोई मेरे सास की लाश न छुए। जीतेजी सभी उनसे नफरत करते थे। अब क्यों आए हैं। जिस तरह उसके सास की हत्या कर दी गई। उसी तरह उन लोगों की भी हत्या हो जाएगी। मंगलवार की देर रात दादी व पौत्र के शवों का डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम हुआ। सरस्वती के सिर पर वजनदार हथियार से ऐसा हमला किया गया था कि सिर का ऊपरी हिस्सा ही गायब हो गया था। अनमोल के सिर पर पहले प्रहार किया गया था। बाद में उसे फर्श पर पटका गया था। सिर में चोट आने के कारण उसकी मौत हो गई थी। सरस्वती के घर का निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। सूत्रों की मानें तो कुंभ स्नान के लिए पहले राजू अपने साथ राधा व उसके बच्चों को ले जाना चाहता था। बाद में राजू धर्मेंद्र को अपने साथ ले गया। बच्चों को साथ नहीं ले जाया गया था। ऐसे में राजू की नियत पर पुलिस का शक गहराता जा रहा है। वैसे तो सरस्वती के घर को राजू ने अपना ठिकाना बना लिया था। जब से मकान के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ तब से राजू व उसके परिवार के लोगों का भी आना-जाना था। पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि राजू का भाई सोमवार को सरस्वती के घर आया था। शाम को लौटा था। सोमवार की सुबह धर्मेंद्र व बहू राधा के कुंभ स्नान जाने के बाद सरस्वती घर पर अकेले थी। केवल पौत्र अनमोल और सूरज ही उसके साथ थे। उसी दिन मकान के निर्माण का कार्य भी बंद हो गया था। ऐसे में सरस्वती ने दाढ़ी को घर में रोक लिया था। रात करीब सात बजे सरस्वती का मोबाइल बंद हो गया था। सरस्वती देवी व उसके पौत्र की हत्या सोमवार की रात नौ से दस बजे के बीच हुई। पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है। खून के काला पड़ जाने व मोबाइल बंद होने के समय को लेकर पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आ रही है। अंतू से धर्मेंद्र की पत्नी राधा को बेटे अमर के साथ सुबह शहर लाया गया। उसके साथ बहन चंदा भी थी। शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के बाद राधा को पुलिस की निगहबानी में रखा गया। महिला आरक्षियों के साथ सिपाहियों को भी लगाया गया था। ताकि राधा की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। किसी तरह का विवाद पड़ोसियों से न हो सके। दादी-पोते की हत्या में नामजद सुनील गुप्ता घर से फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। बुधवार को भी राधा परिवार के सुनील के ऊपर हत्या का आरोप लगाते हुए चीखती रही। पति मोतीलाल की मौत के बाद शहर में करोड़ों की संपत्ति की मालकिन सरस्वती बन गई। कटरा रोड, गाजी तिराहा व गोपाल मंदिर के पास करोड़ों की संपत्ति है। गोपाल मंदिर के बगल की दुकान मोतीलाल ने पैंतीस साल पहले खरीदी थी। उस दुकान में रहने वाले दुकानदार ने अभी तक खाली नही किया। जिसका मुकदमा भी न्यायालय में चल रहा है। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सरस्वती के घर एक साल पहले राजू पटेल का आना-जाना शुरू हुआ। इसके पहले सरस्वती के घर में कुंडा के रहने वाले एक युवक का आना-जाना था। वह परिवार के काफी करीब था, लेकिन राजू के पैर जमाने के बाद उसका पत्ता कट गया। धीरे-धीरे उसका आना जाना भी बंद हो गया। कभी-कभार ही वह आता था। राजू का घर में आना-जाना सरस्वती को पसंद नहीं था। बहू राधा के बाहर जाने पर वह उसे उल्टा सीधा बोला करती थी। पुलिस की मानें तो राजू के साथ बहू राधा के बाहर जाने पर वह मजदूरों के सामने भी उल्टा सीधा बोला करती थी, लेकिन जब राधा घर आ जाती थी तो वह मौन साध लेती थी। राजू भी पूरी तरह से परिवार के सदस्य की तरह हो गया। उस पर सरस्वती भी भरोसा करते हुए मकान निर्माण के लिए रुपये भी दे दिया करती थी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. 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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) रूस (Russia) के सामने खड़ी नहीं हो पाए और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) उन्हें ड्रम की तरह बजा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन उनके मित्र हैं, लेकिन यूक्रेन पर रूस का हमला मानवता के खिलाफ और भयावह है। ट्रंप ने पुतिन को स्मार्ट और अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) एवं नाटो (NATO) को बेवकूफ बताया है। उन्होंने कहा कि अगर वह अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन में रूस का हमला (Russia-Ukraine War) नहीं हुआ होता। बाइडेन की आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा कि रूस को हमला करने के लिए छोड़कर बाइदेन ने न सिर्फ मानवता के लिए विश्वासघात किया है, बल्कि देशद्रोह भी किया है। अमेरिका के फ्लोरिडा में कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस (सीपीएसी) में ट्रंप ने कहा, "यूक्रेन पर रूस का हमला भयावह है। यह एक अत्याचार और नरसंहार है। यह कभी नहीं होना चाहिए था। हम यूक्रेन के स्वाभिमानी लोगों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। " इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमिर जेलेंस्की की सराहना की और उन्हें बहादुर बताया। ट्रंप ने शनिवार (26 फरवरी) को कहा था कि वह 21वीं सदी के एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति थे, जिन्होंने विदेशों में रूस की सैन्य कार्रवाई पर अंकुश रखा। उन्होंने कहा, "हम एक स्मार्ट देश थे। अब हम एक मूर्ख देश हैं। " ट्रम्प ने कहा कि जब वह राष्ट्रपति थे तो रूस अमेरिका का सम्मान करता था, लेकिन अब जो बाइडेन को वह 'कमजोर' के रूप में देख रहा है। इसके एक दिन पहले ट्रंप ने पुतिन को स्मार्ट और नाटो (NATO) और जो बाइडेन की कार्यों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि पुतिन बहुत स्मार्ट तरीके से अपना काम कर गए और जो बाइडेन और नाटो देश बेवकूफों की तरह देखते रह गए।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन रूस के सामने खड़ी नहीं हो पाए और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उन्हें ड्रम की तरह बजा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन उनके मित्र हैं, लेकिन यूक्रेन पर रूस का हमला मानवता के खिलाफ और भयावह है। ट्रंप ने पुतिन को स्मार्ट और अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडेन एवं नाटो को बेवकूफ बताया है। उन्होंने कहा कि अगर वह अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन में रूस का हमला नहीं हुआ होता। बाइडेन की आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा कि रूस को हमला करने के लिए छोड़कर बाइदेन ने न सिर्फ मानवता के लिए विश्वासघात किया है, बल्कि देशद्रोह भी किया है। अमेरिका के फ्लोरिडा में कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, "यूक्रेन पर रूस का हमला भयावह है। यह एक अत्याचार और नरसंहार है। यह कभी नहीं होना चाहिए था। हम यूक्रेन के स्वाभिमानी लोगों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। " इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमिर जेलेंस्की की सराहना की और उन्हें बहादुर बताया। ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह इक्कीसवीं सदी के एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति थे, जिन्होंने विदेशों में रूस की सैन्य कार्रवाई पर अंकुश रखा। उन्होंने कहा, "हम एक स्मार्ट देश थे। अब हम एक मूर्ख देश हैं। " ट्रम्प ने कहा कि जब वह राष्ट्रपति थे तो रूस अमेरिका का सम्मान करता था, लेकिन अब जो बाइडेन को वह 'कमजोर' के रूप में देख रहा है। इसके एक दिन पहले ट्रंप ने पुतिन को स्मार्ट और नाटो और जो बाइडेन की कार्यों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि पुतिन बहुत स्मार्ट तरीके से अपना काम कर गए और जो बाइडेन और नाटो देश बेवकूफों की तरह देखते रह गए।
Adani Wilmar Share New High: अडानी विल्मर के शेयर में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है. लगातार दूसरे दिन शेयर में 20 फीसदी का अपर सर्किट लगा है. गुरुवार को सुबह शेयर 356 रुपये पर खुला लेकिन देखते ही देखते खरीदारी के बदौलत 20 फीसदी के उछाल के साथ शेयर 386. 25 रुपये पर जा पहुंचा. जिसके बाद अपर सर्किट लगने के बाद शेयर में ट्रेडिंग को रोकना पड़ा. मंगलवार को अडानी विल्मर के शेयर बाजार में लिस्टिंग निराशाजनक हुई थी. शेयर का भाव आईपीओ प्राइस 230 रुपये के नीचे जा लुढ़का था. लेकिन पहले दिन शेयर 15 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ. लेकिन उसके बाद दो दिनों से शेयर में हर दिन 20 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. यानि अडानी विल्मर ने आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों को 67 फीसदी का रिटर्न दे चुका है. बाजार के जानकारों की मानें तो अडानी विल्मर में तेजी जारी रह सकती है क्योंकि शेयर अभी भी महंगा नहीं हुआ है. प्राइस टू अर्निंग रेश्यो यानि पीई रेश्यो की तुलना नेस्ले, ब्रिटानिया जैसी एफएमसीजी कंपनियों से करें तो अडानी विल्मर का शेयर 38 के पीई पर मिल रहा है जबकि उसके मुकाबले नेस्ले का 81 से ज्यादा और ब्रिटानिया 55 के पीई रेश्यो पर मिल रहा है. अडानी विल्मर ने 3600 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिए जुटाये हैं. आपको बता दें आईपीओ का प्राइस बैंड 218 से 230 रुपये तय किया गया था. आपको बता दें आईपीओ में पूरी तरह फ्रेश इश्यू जारी किया गया है प्रोमोटर ने अपनी हिस्सेदारी नहीं बेची है. डिस्क्लेमरः (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive. com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है. )
Adani Wilmar Share New High: अडानी विल्मर के शेयर में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है. लगातार दूसरे दिन शेयर में बीस फीसदी का अपर सर्किट लगा है. गुरुवार को सुबह शेयर तीन सौ छप्पन रुपयापये पर खुला लेकिन देखते ही देखते खरीदारी के बदौलत बीस फीसदी के उछाल के साथ शेयर तीन सौ छियासी. पच्चीस रुपयापये पर जा पहुंचा. जिसके बाद अपर सर्किट लगने के बाद शेयर में ट्रेडिंग को रोकना पड़ा. मंगलवार को अडानी विल्मर के शेयर बाजार में लिस्टिंग निराशाजनक हुई थी. शेयर का भाव आईपीओ प्राइस दो सौ तीस रुपयापये के नीचे जा लुढ़का था. लेकिन पहले दिन शेयर पंद्रह फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ. लेकिन उसके बाद दो दिनों से शेयर में हर दिन बीस फीसदी की तेजी देखी जा रही है. यानि अडानी विल्मर ने आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों को सरसठ फीसदी का रिटर्न दे चुका है. बाजार के जानकारों की मानें तो अडानी विल्मर में तेजी जारी रह सकती है क्योंकि शेयर अभी भी महंगा नहीं हुआ है. प्राइस टू अर्निंग रेश्यो यानि पीई रेश्यो की तुलना नेस्ले, ब्रिटानिया जैसी एफएमसीजी कंपनियों से करें तो अडानी विल्मर का शेयर अड़तीस के पीई पर मिल रहा है जबकि उसके मुकाबले नेस्ले का इक्यासी से ज्यादा और ब्रिटानिया पचपन के पीई रेश्यो पर मिल रहा है. अडानी विल्मर ने तीन हज़ार छः सौ करोड़ रुपये आईपीओ के जरिए जुटाये हैं. आपको बता दें आईपीओ का प्राइस बैंड दो सौ अट्ठारह से दो सौ तीस रुपयापये तय किया गया था. आपको बता दें आईपीओ में पूरी तरह फ्रेश इश्यू जारी किया गया है प्रोमोटर ने अपनी हिस्सेदारी नहीं बेची है. डिस्क्लेमरः
द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट. फंड का प्रबंधन करने के लिए कंसल्टेंसी कंपनी द्वारा अदालत में दी गई जानकारी के मुताबिक़, 2019 में एनएसओ समूह को एक निजी इक्विटी कंपनी नोवलपिना कैपिटल ने एक अरब डॉलर में खरीदा था लेकिन यह स्पष्ट है कि एनएसओ की इक्विटी का अब कोई मूल्य नहीं है. एल्गार परिषद मामले में 83 वर्षीय वरवरा राव पिछले साल फरवरी से अस्थायी चिकित्सा ज़मानत पर जेल से बाहर हैं. उन्होंने ज़मानत पर बाहर रहते हुए अपने गृह नगर हैदराबाद में रहने और सुनवाई पूरी होने तक स्वास्थ्य आधार पर स्थायी ज़मानत का अनुरोध किया था. हालांकि अदालत ने इससे इनकार कर दिया. रामनवमी पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद खरगोन में ज़िला प्रशासन द्वारा कई घरों और दुकानों को गिराने की कार्रवाई की गई थी. अब एक परिवार के पास उपलब्ध दस्तावेज़ दिखाते हैं कि जिस मकान को अवैध बताकर ढहाया गया वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाया गया था. गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल की कई नर्सों का आरोप है कि प्रशासनिक कर्मचारी भ्रष्टाचार व अन्य अनियमितताओं में लिप्त हैं. इन आरोपों के बीच चिकित्सा अधीक्षक ने तीन नर्सिंग अधिकारियों और एक नर्सिंग अधीक्षक को सेवा से हटा दिया है. इनमें से दो अधिकारी भ्रष्टाचार मामले में शिकायतकर्ता थे. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों में महत्वपूर्ण पदों के ख़ाली होने पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है. आम आदमी पार्टी सरकार ने कहा कि उन्हें इस बारे में केंद्र से संपर्क करना चाहिए क्योंकि स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती सेवा विभाग द्वारा की जाती है जो सीधे उपराज्यपाल के अधीन आता है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है. केंद्र सरकार ने पहली बार छात्रों को एक ही विश्वविद्यालय या अलग-अलग संस्थानों से समान स्तर के दो पूर्णकालिक डिग्री कार्यक्रमों में एक साथ प्रत्यक्ष तरीके से पढ़ाई करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है. हालांकि कई शिक्षाविदों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता कमतर हो सकती है. यह घटना द्वारका के छावला क्षेत्र में 11 अप्रैल की है. गोहत्या के शक में खुद को 'गौरक्षक' बताने वाले 10-15 अज्ञात लोगों का एक समूह फार्महाउस एक पहुंचा और वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया. गोहत्या के आरोप में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि हमला करने और हत्या के मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. उत्तरी मुंबई के मालवणी इलाके में रामनवमी जुलूस के दौरान समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में भाजपा नेताओं तेजिंदर तिवाना, विनोद शेलार और बजरंग दल के पदाधिकारियों समेत 20 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा मानखुर्द इलाके में इसी दिन हुई हिंसा में शामिल होने के आरोप में सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया और चार अन्य को हिरासत में लिया गया है. ठेकेदार संतोष पाटिल ने चार करोड़ रुपये की एक परियोजना में निवेश किया था. कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री केएस ईश्वरप्पा पर आरोप है कि वे परियोजना से संबंधित भुगतान को मंजूरी देने के एवज में 40 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे थे.
द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट. फंड का प्रबंधन करने के लिए कंसल्टेंसी कंपनी द्वारा अदालत में दी गई जानकारी के मुताबिक़, दो हज़ार उन्नीस में एनएसओ समूह को एक निजी इक्विटी कंपनी नोवलपिना कैपिटल ने एक अरब डॉलर में खरीदा था लेकिन यह स्पष्ट है कि एनएसओ की इक्विटी का अब कोई मूल्य नहीं है. एल्गार परिषद मामले में तिरासी वर्षीय वरवरा राव पिछले साल फरवरी से अस्थायी चिकित्सा ज़मानत पर जेल से बाहर हैं. उन्होंने ज़मानत पर बाहर रहते हुए अपने गृह नगर हैदराबाद में रहने और सुनवाई पूरी होने तक स्वास्थ्य आधार पर स्थायी ज़मानत का अनुरोध किया था. हालांकि अदालत ने इससे इनकार कर दिया. रामनवमी पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद खरगोन में ज़िला प्रशासन द्वारा कई घरों और दुकानों को गिराने की कार्रवाई की गई थी. अब एक परिवार के पास उपलब्ध दस्तावेज़ दिखाते हैं कि जिस मकान को अवैध बताकर ढहाया गया वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाया गया था. गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल की कई नर्सों का आरोप है कि प्रशासनिक कर्मचारी भ्रष्टाचार व अन्य अनियमितताओं में लिप्त हैं. इन आरोपों के बीच चिकित्सा अधीक्षक ने तीन नर्सिंग अधिकारियों और एक नर्सिंग अधीक्षक को सेवा से हटा दिया है. इनमें से दो अधिकारी भ्रष्टाचार मामले में शिकायतकर्ता थे. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों में महत्वपूर्ण पदों के ख़ाली होने पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है. आम आदमी पार्टी सरकार ने कहा कि उन्हें इस बारे में केंद्र से संपर्क करना चाहिए क्योंकि स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती सेवा विभाग द्वारा की जाती है जो सीधे उपराज्यपाल के अधीन आता है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है. केंद्र सरकार ने पहली बार छात्रों को एक ही विश्वविद्यालय या अलग-अलग संस्थानों से समान स्तर के दो पूर्णकालिक डिग्री कार्यक्रमों में एक साथ प्रत्यक्ष तरीके से पढ़ाई करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है. हालांकि कई शिक्षाविदों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता कमतर हो सकती है. यह घटना द्वारका के छावला क्षेत्र में ग्यारह अप्रैल की है. गोहत्या के शक में खुद को 'गौरक्षक' बताने वाले दस-पंद्रह अज्ञात लोगों का एक समूह फार्महाउस एक पहुंचा और वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया. गोहत्या के आरोप में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि हमला करने और हत्या के मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. उत्तरी मुंबई के मालवणी इलाके में रामनवमी जुलूस के दौरान समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में भाजपा नेताओं तेजिंदर तिवाना, विनोद शेलार और बजरंग दल के पदाधिकारियों समेत बीस लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा मानखुर्द इलाके में इसी दिन हुई हिंसा में शामिल होने के आरोप में सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया और चार अन्य को हिरासत में लिया गया है. ठेकेदार संतोष पाटिल ने चार करोड़ रुपये की एक परियोजना में निवेश किया था. कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री केएस ईश्वरप्पा पर आरोप है कि वे परियोजना से संबंधित भुगतान को मंजूरी देने के एवज में चालीस प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे थे.
2. रिद्धिमान साहा (नाबाद 115 रन) 1 जून, 2014 में आईपीएल (IPL) के सातवें संस्करण का फाइनल मैच था और सामने थीं किंग्स इलेवेन पंजाब और कोलकाता नाईट राइडर्स की टीमें। टॉस जीतकर कोलकाता ने पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला किया। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए रिद्धिमान साहा (Wriddhiman Saha) ने 55 गेंदों में 8 छक्कों और 10 चौकों की मदद से नाबाद 115 रन बनाए। उनके शतक की मदद से टीम ने कोलकाता को 200 रनों का लक्ष्य दिया। इस लक्ष्य का पीछा करते हुए कोलकाता के बल्लेबाज मनीष पांडे ने 50 गेंदों में 94 रन बनाए। जिसकी मदद से कोलकाता उस साल आईपीएल विजेता बन गई।
दो. रिद्धिमान साहा एक जून, दो हज़ार चौदह में आईपीएल के सातवें संस्करण का फाइनल मैच था और सामने थीं किंग्स इलेवेन पंजाब और कोलकाता नाईट राइडर्स की टीमें। टॉस जीतकर कोलकाता ने पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला किया। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए रिद्धिमान साहा ने पचपन गेंदों में आठ छक्कों और दस चौकों की मदद से नाबाद एक सौ पंद्रह रन बनाए। उनके शतक की मदद से टीम ने कोलकाता को दो सौ रनों का लक्ष्य दिया। इस लक्ष्य का पीछा करते हुए कोलकाता के बल्लेबाज मनीष पांडे ने पचास गेंदों में चौरानवे रन बनाए। जिसकी मदद से कोलकाता उस साल आईपीएल विजेता बन गई।
(स्लाइड समय देखें: 21:09 ) Bajaj 195904_amended.pdf - Adobe Reader Eile Edit View Window Help Tools Fill & Sign Comment Steeve wiur respect to the spark prug and possiore amage to me Omg. This has been solved by fixing the replaceable sleeve by push fitting instead of using threads. This arrangement will now be explained in detail with reference to accompanying figures wherein Figure 1 shows the cross-section of the prior art engine with one Spark plug. आप देख सकते हैं कि 4534322 संख्या लिखी है, हमने ड्राइंग्स का इसका संक्षिप्त विवरण देखा, चित्र 1, चित्र 2 ..और ड्राइंग्स का विस्तृत विवरण है। (स्लाइड समय देखें: 21:16 ) 7 Bajaj_195904_amended.pdf Adobe Reader Eile Edit View Window Help Figure 2 shows the cross-section of the improved engine with two spark plugs. Tools | Fill & Sign | Comment The invented two valve per cylinder engine with improved combustion characteristics for efficient air fuel mixture burning, essentially comprises of a pair of spark plugs ( 21 & 22), sleeve (23), O rings (24 and 24a), cylinder head (25), circlip (26) and sleeve cap (27). With reference to figure 1, the spark plug ( 1 ) is located in the cylinder head (2) opposite to the timing chain (7) side. The spark plug (1) is fixed to the cylinder head (2) to reach in combustion chamber (3). The inlet (4) and exhaust (5) valves also open in the combustion chamber (3). तो, आप कोष्ठक में जो पाते हैं वे ऐसे भाग हैं जो ड्राइंग ( एक अलग दस्तावेज़) में है। तो, स्पार्क प्लग वाले हिस्से में हैं संख्या (21 और 22) स्लीव की संख्या (23) है। तो, अब आपको एक तस्वीर मिलती है, जो आपने यूएस एप्लिकेशन में देखी थी। वहां विशेष रूप से हैडिंग थे। हालांकि भारतीय आवेदन में हैडिंग्स नहीं हैं। फिर भी वे अभी भी उसी योजना का पालन करते हैं। (स्लाइड समय देखें: 21:47) Bajaj 195904_amended.pdf Adobe Reader Eile Edit View Window Help essentially comprises of a pair of spark plugs (21 & ZZ), sleeve (23), rings (24 and 24a), cylinder head (25), circlip (26) and sleeve cap (27). With reference to figure 1, the spark plug (1) is located in the cylinder head (2) opposite to the timing chain ( 7 ) side. The spark plug (1) is fixed to the cylinder head ( 2 ) to reach in combustion chamber ( 3 ). The inlet (4) and exhaust ( 5 ) valves also open in the combustion chamber (3). The cylinder head ( 2 ) is having a cavity ( 6 ) through which the timing chain (7) drives the driven sprocket (8). The driven sprocket (8) further drives the cam shaft (9) which actuate the valves (4) and (5) through rocker arms (not shown). When the engine runs, the timing chain carries oil from the crankcase (not shown) for the lubrication of the driven sprocket (8) and the cavity ( 6 ) is splashed with oil. Any opening made on Tools Fill & Sign | Comment तो, चित्र एक का संदर्भ लें। तो, यह ड्राइंग्स का विस्तृत विवरण है और यह एक समान तरीके से किया जाता है। यह एक सार्वजनिक दस्तावेज़ है। इसलिए आप पेटेंट कार्यालय की वेबसाइट पर जा सकते हैं। यदि आप इसे पढ़ने में रुचि रखते हैं तो आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं । (स्लाइड समय देखें: 22:07 )
Bajaj एक लाख पचानवे हज़ार नौ सौ चार_amended.pdf - Adobe Reader Eile Edit View Window Help Tools Fill & Sign Comment Steeve wiur respect to the spark prug and possiore amage to me Omg. This has been solved by fixing the replaceable sleeve by push fitting instead of using threads. This arrangement will now be explained in detail with reference to accompanying figures wherein Figure एक shows the cross-section of the prior art engine with one Spark plug. आप देख सकते हैं कि पैंतालीस लाख चौंतीस हज़ार तीन सौ बाईस संख्या लिखी है, हमने ड्राइंग्स का इसका संक्षिप्त विवरण देखा, चित्र एक, चित्र दो ..और ड्राइंग्स का विस्तृत विवरण है। सात Bajaj_एक लाख पचानवे हज़ार नौ सौ चार_amended.pdf Adobe Reader Eile Edit View Window Help Figure दो shows the cross-section of the improved engine with two spark plugs. Tools | Fill & Sign | Comment The invented two valve per cylinder engine with improved combustion characteristics for efficient air fuel mixture burning, essentially comprises of a pair of spark plugs , sleeve , O rings , cylinder head , circlip and sleeve cap . With reference to figure एक, the spark plug is located in the cylinder head opposite to the timing chain side. The spark plug is fixed to the cylinder head to reach in combustion chamber . The inlet and exhaust valves also open in the combustion chamber . तो, आप कोष्ठक में जो पाते हैं वे ऐसे भाग हैं जो ड्राइंग में है। तो, स्पार्क प्लग वाले हिस्से में हैं संख्या स्लीव की संख्या है। तो, अब आपको एक तस्वीर मिलती है, जो आपने यूएस एप्लिकेशन में देखी थी। वहां विशेष रूप से हैडिंग थे। हालांकि भारतीय आवेदन में हैडिंग्स नहीं हैं। फिर भी वे अभी भी उसी योजना का पालन करते हैं। Bajaj एक लाख पचानवे हज़ार नौ सौ चार_amended.pdf Adobe Reader Eile Edit View Window Help essentially comprises of a pair of spark plugs , sleeve , rings , cylinder head , circlip and sleeve cap . With reference to figure एक, the spark plug is located in the cylinder head opposite to the timing chain side. The spark plug is fixed to the cylinder head to reach in combustion chamber . The inlet and exhaust valves also open in the combustion chamber . The cylinder head is having a cavity through which the timing chain drives the driven sprocket . The driven sprocket further drives the cam shaft which actuate the valves and through rocker arms . When the engine runs, the timing chain carries oil from the crankcase for the lubrication of the driven sprocket and the cavity is splashed with oil. Any opening made on Tools Fill & Sign | Comment तो, चित्र एक का संदर्भ लें। तो, यह ड्राइंग्स का विस्तृत विवरण है और यह एक समान तरीके से किया जाता है। यह एक सार्वजनिक दस्तावेज़ है। इसलिए आप पेटेंट कार्यालय की वेबसाइट पर जा सकते हैं। यदि आप इसे पढ़ने में रुचि रखते हैं तो आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं ।
बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर मामले में राज्यपाल सत्यपाल मलिका के दखल के बाद नीतीश कुमार को चौंका दिया है। राज्यपाल ने नीतीश कुमार को इस मामले दो पत्र लिखे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर मामले में राज्यपाल सत्यपाल मलिका के दखल के बाद नीतीश कुमार को चौंका दिया है। राज्यपाल ने नीतीश कुमार को इस मामले दो पत्र लिखे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने दो पत्र लिखे हैं। इस पत्र के बाद जेडीयू में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी नेता ने बताया कि ये घटना बिहार के लिए शर्मिंदगी की बात है। रेप के मामले में एक खुलासा हुआ है कि इस मामले में सिर्फ बृजेश ठाकुर ही नहीं बल्कि नीतीश के एक मंत्री के पति भी शामिल है। बता दें कि इस मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब नीतीश सरकार रिपोर्ट में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को सस्पेंड कर रही है। वहीं दूसरी तरफ आरजेडी ने इस मामले को लेकर अपना धरना प्रदर्शन तेज कर दिया है। इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार से भी तेजस्वी ने इस्तीफे की मांग की है।
बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर मामले में राज्यपाल सत्यपाल मलिका के दखल के बाद नीतीश कुमार को चौंका दिया है। राज्यपाल ने नीतीश कुमार को इस मामले दो पत्र लिखे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर मामले में राज्यपाल सत्यपाल मलिका के दखल के बाद नीतीश कुमार को चौंका दिया है। राज्यपाल ने नीतीश कुमार को इस मामले दो पत्र लिखे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने दो पत्र लिखे हैं। इस पत्र के बाद जेडीयू में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी नेता ने बताया कि ये घटना बिहार के लिए शर्मिंदगी की बात है। रेप के मामले में एक खुलासा हुआ है कि इस मामले में सिर्फ बृजेश ठाकुर ही नहीं बल्कि नीतीश के एक मंत्री के पति भी शामिल है। बता दें कि इस मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब नीतीश सरकार रिपोर्ट में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को सस्पेंड कर रही है। वहीं दूसरी तरफ आरजेडी ने इस मामले को लेकर अपना धरना प्रदर्शन तेज कर दिया है। इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार से भी तेजस्वी ने इस्तीफे की मांग की है।
'बीस-पाँच', 'उन्तीस' की जगह 'बीस-नौ', 'छत्तीस' की जगह 'तीस-छः', अठावन की जगह 'पचास-आठ', 'तिरासी' की जगह 'अस्सी-तीन' इत्यादि, इससे संख्या-वाचक शब्द संख्या मे कम होते हैं, अर्थ समझना भी सहज होता है । (४) क्रिया का रूपान्तरवचन और लिंग भेद से क्रिया के रूप में अन्तर नहीं होता । रूप से तीन पुरुषों और दोनों वचनों का काम होता है । कर्मणि और भावे प्रयोग अज्ञात हैं । सकर्मक क्रिया के भूतकाल के रूप में, कर्त्ता में 'ने' प्रत्यय का व्यवहार नहीं होता । अस्तित्व वाचक धातु 'हो'( १ ) अनुज्ञा - 'तुम हो, हो-आप होइए । ( १ क ) भविष्यत् अनुज्ञा - 'तुम होयगा, आप होइयेगा'। २) क्रिया का साधारण रूप - 'होना'; अनुसर्ग युक्त होने पर 'होने' । ३) शतृवाचक या वर्त्तमानकालिक विशेषण -'होता' । ( ४ ) भूतकालिक विशेषण- 'हुआ'। ( ५ ) अपूर्ण भूतकालिक विशेषण - ' होता हुआ' । ( ६ ) सामान्य वर्त्तमान-'है' । (७) संदिग्ध वर्त्तमान --'हो' या 'होवे' । ( ८ ) अपूर्ण वर्त्तमान - 'होता है' । ( ६ ) पूर्ण वर्त्तमान - 'हुआ है' । ( १० ) सामान्य भूत - 'था ( अस्तित्व वाचक ), हुआ (घटना-वाचक)' । भारत की भाषाएँ और भाषा संबंधी समस्याएँ ( ११ ) अपूर्ण भूत--'होता था' । ( १२ ) पूर्ण भूत-हुआ था । ( १३ ) हेतुहेतुमत - 'होता' ( यदि, अगर ) 'होता' । ( १४ ) सामान्य भविष्यत् -- 'होगा, या होयगा' । ( १५ ) संदिग्ध वर्तमान -- 'होता होगा' । ( १६ ) पूर्ण भविष्यत् या संदिग्ध भूत - 'हुआ होगा' । ( १७ ) कर्तृवाचक विशेषण --' होने वाला' । दूसरी धातु - 'चल, देख' । ( १ ) 'चलो, चलिये; देखो, देखिये' । ( १ क ) 'चलेगा, चलियेगा; देखेगा, देखियेगा' । (२) 'चलना (चलने +); देखना (देखने + ) ' । ( ३ ) 'चलता, देखता'। ( ४ ) 'चला; देखा' । (५) 'चलता हुआ; देखता हुआ । ( ६ ) और (७) 'चले; देखे' (= प्राचीन सामान्य वर्त्तमान, आधुनिक संदिग्ध वत्त मान ) । (८) 'चलता है; देखता है । ( ६ ) 'चला है; देखा है । ( १० ) 'चला; देखा' । ( ११ ) 'चलता था, देखता था' । ( १२ ) 'चला था'; देखा था' । ( १३ ) 'चलता; देखता'; ( यदि अगर ) 'चलता; देखता' । (१४) 'चलेगा; देखेगा'। (१५) 'चलता होगा, देखता होगा' । (१६) 'चला होगा; देखा होगा' । ( १७ ) 'चलने वाला; देखने वाला । । आदरा व्यवहृत सर्वनाम 'आप' के साथ अनुज्ञा में कुछ धातुओं में 'इये' के स्थान पर 'ईजिये,' भविष्य में 'ईजियेगा' प्रत्यय होता है; जैसे - 'कर -करिये, कीजिये, कीजियेगा; ले, दे - लीजिये, लीजियेगा; दीजिये, दीजियेगा; पी-पीजिये, पीजियेगा'; 'जा' -भूत में 'गया'; 'कर'- भूत में 'किया' ; - इन दोनों के रूप भी लक्षणीय हैं । गिजन्त आदि दूसरे क्रियापद और दूसरे सभी साधारण रूप शुद्ध हिन्दी के ही अनुकारी होते हैं, इस विषय में ब्योरा भारत के भिन्न-भिन्न अंचलों में प्रचलित हिन्दी की धातु-रूपावलियों ही के अनुसार निर्धारित करना होगा। शब्दावली के विषय में चलती हिन्दी बहुत ही उदार है - इसमें प्रविष्ट और बहुशः व्यवहृत अरबी, फारसी या अंगरेजी शब्दों के बहिष्कार की चेष्टा नहीं की गई है। लेकिन उच्चभावों के शब्द आवश्यकतानुसार संस्कृत से ही लेना चलती हिन्दी के लिए स्त्राभाविक होगा । शुद्ध हिन्दी-उर्दू में जो प्राकृतज और देशी एवं अर्ध-तत्सम शब्द प्रचलित हैं, वे ही चलती हिन्दी के देहस्वरूप हैं। नीचे चलती हिन्दी या बाजारिया हिन्दुस्थानी के कुछ नमूने दिये जा रहे हैं[ १ ] उतरंगा ( या उत्तरी, उत्तर का ) हवा ( या बयार )
'बीस-पाँच', 'उन्तीस' की जगह 'बीस-नौ', 'छत्तीस' की जगह 'तीस-छः', अठावन की जगह 'पचास-आठ', 'तिरासी' की जगह 'अस्सी-तीन' इत्यादि, इससे संख्या-वाचक शब्द संख्या मे कम होते हैं, अर्थ समझना भी सहज होता है । क्रिया का रूपान्तरवचन और लिंग भेद से क्रिया के रूप में अन्तर नहीं होता । रूप से तीन पुरुषों और दोनों वचनों का काम होता है । कर्मणि और भावे प्रयोग अज्ञात हैं । सकर्मक क्रिया के भूतकाल के रूप में, कर्त्ता में 'ने' प्रत्यय का व्यवहार नहीं होता । अस्तित्व वाचक धातु 'हो' अनुज्ञा - 'तुम हो, हो-आप होइए । भविष्यत् अनुज्ञा - 'तुम होयगा, आप होइयेगा'। दो) क्रिया का साधारण रूप - 'होना'; अनुसर्ग युक्त होने पर 'होने' । तीन) शतृवाचक या वर्त्तमानकालिक विशेषण -'होता' । भूतकालिक विशेषण- 'हुआ'। अपूर्ण भूतकालिक विशेषण - ' होता हुआ' । सामान्य वर्त्तमान-'है' । संदिग्ध वर्त्तमान --'हो' या 'होवे' । अपूर्ण वर्त्तमान - 'होता है' । पूर्ण वर्त्तमान - 'हुआ है' । सामान्य भूत - 'था , हुआ ' । भारत की भाषाएँ और भाषा संबंधी समस्याएँ अपूर्ण भूत--'होता था' । पूर्ण भूत-हुआ था । हेतुहेतुमत - 'होता' 'होता' । सामान्य भविष्यत् -- 'होगा, या होयगा' । संदिग्ध वर्तमान -- 'होता होगा' । पूर्ण भविष्यत् या संदिग्ध भूत - 'हुआ होगा' । कर्तृवाचक विशेषण --' होने वाला' । दूसरी धातु - 'चल, देख' । 'चलो, चलिये; देखो, देखिये' । 'चलेगा, चलियेगा; देखेगा, देखियेगा' । 'चलना ; देखना ' । 'चलता, देखता'। 'चला; देखा' । 'चलता हुआ; देखता हुआ । और 'चले; देखे' । 'चलता है; देखता है । 'चला है; देखा है । 'चला; देखा' । 'चलता था, देखता था' । 'चला था'; देखा था' । 'चलता; देखता'; 'चलता; देखता' । 'चलेगा; देखेगा'। 'चलता होगा, देखता होगा' । 'चला होगा; देखा होगा' । 'चलने वाला; देखने वाला । । आदरा व्यवहृत सर्वनाम 'आप' के साथ अनुज्ञा में कुछ धातुओं में 'इये' के स्थान पर 'ईजिये,' भविष्य में 'ईजियेगा' प्रत्यय होता है; जैसे - 'कर -करिये, कीजिये, कीजियेगा; ले, दे - लीजिये, लीजियेगा; दीजिये, दीजियेगा; पी-पीजिये, पीजियेगा'; 'जा' -भूत में 'गया'; 'कर'- भूत में 'किया' ; - इन दोनों के रूप भी लक्षणीय हैं । गिजन्त आदि दूसरे क्रियापद और दूसरे सभी साधारण रूप शुद्ध हिन्दी के ही अनुकारी होते हैं, इस विषय में ब्योरा भारत के भिन्न-भिन्न अंचलों में प्रचलित हिन्दी की धातु-रूपावलियों ही के अनुसार निर्धारित करना होगा। शब्दावली के विषय में चलती हिन्दी बहुत ही उदार है - इसमें प्रविष्ट और बहुशः व्यवहृत अरबी, फारसी या अंगरेजी शब्दों के बहिष्कार की चेष्टा नहीं की गई है। लेकिन उच्चभावों के शब्द आवश्यकतानुसार संस्कृत से ही लेना चलती हिन्दी के लिए स्त्राभाविक होगा । शुद्ध हिन्दी-उर्दू में जो प्राकृतज और देशी एवं अर्ध-तत्सम शब्द प्रचलित हैं, वे ही चलती हिन्दी के देहस्वरूप हैं। नीचे चलती हिन्दी या बाजारिया हिन्दुस्थानी के कुछ नमूने दिये जा रहे हैं[ एक ] उतरंगा हवा
एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म दिल बेचारा बस कुछ देर में पूरी दुनिया के लिए रिलीज कर दी जाएगी. बॉलीवुड के इस जगमगाते सितारे की ये खूबसूरत पेशकर को हर कोई देखना चाहता है. हर कोई फिल्म देख सुशांत की यादों में खोना चाहता है. सुशांत तो जरूर सभी को अलविदा कह चले गए लेकिन पूरा बॉलीवुड उनकी फिल्म को प्रमोट कर रहा है. इसी कड़ी में एक्टर अनुपम खेर ने अब सुशांत की फिल्म दिल बेचारा के लिए एक स्पेशल मैसेज लिखा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर दो फोटो शेयर की हैं. एक फोटो में तो वे खुद सुशांत संग नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी फोटो में दिल बेचारा का पोस्टर शेयर किया गया है. अनुपम खेर ने एक भावुक कर देने वाला पोस्ट लिखा है. उन्होंने दावा किया है कि वे इस फिल्म को अपनी दिल की आंखों से देखेंगे. पोस्ट में लिखा है- प्यारे सुशांत सिंह राजपूत! आज आपकी फ़िल्म 'दिल बेचारा' रिलीज़ होने जा रही है. आप भौतिक दुनिया में हमारे साथ नहीं है और हमें हमेशा इस बात का दुख रहेगा। पर आपकी ये फ़िल्म हम सब दिल की आँखों से देखेंगे. और हर आँख से आँसू बहेगा. हम आपको मिस करते है! अनुपर खेर की इस पोस्ट को पढ़ हर कोई इमोशनल हो रहा है. इस पोस्ट पर सभी फैन्स की प्रतिक्रिया देख साफ समझा जा सकता है कि हर कोई दिल बेचारा देखने के लिए खासा उत्साहित है. सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कई हैशटैग भी वायरल चल रहे हैं. मालूम हो कि दिल बेचारा का डायरेक्शन मुकेश छाबड़ा ने किया है. फिल्म में सुशांत के अपोजिट संजना संघी अपना डेब्यू कर रही हैं. फिल्म शुक्रवार को शाम 7. 30 बजे डिज्नी हॉटस्टार पर रिलीज की जा रही है.
एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म दिल बेचारा बस कुछ देर में पूरी दुनिया के लिए रिलीज कर दी जाएगी. बॉलीवुड के इस जगमगाते सितारे की ये खूबसूरत पेशकर को हर कोई देखना चाहता है. हर कोई फिल्म देख सुशांत की यादों में खोना चाहता है. सुशांत तो जरूर सभी को अलविदा कह चले गए लेकिन पूरा बॉलीवुड उनकी फिल्म को प्रमोट कर रहा है. इसी कड़ी में एक्टर अनुपम खेर ने अब सुशांत की फिल्म दिल बेचारा के लिए एक स्पेशल मैसेज लिखा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर दो फोटो शेयर की हैं. एक फोटो में तो वे खुद सुशांत संग नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी फोटो में दिल बेचारा का पोस्टर शेयर किया गया है. अनुपम खेर ने एक भावुक कर देने वाला पोस्ट लिखा है. उन्होंने दावा किया है कि वे इस फिल्म को अपनी दिल की आंखों से देखेंगे. पोस्ट में लिखा है- प्यारे सुशांत सिंह राजपूत! आज आपकी फ़िल्म 'दिल बेचारा' रिलीज़ होने जा रही है. आप भौतिक दुनिया में हमारे साथ नहीं है और हमें हमेशा इस बात का दुख रहेगा। पर आपकी ये फ़िल्म हम सब दिल की आँखों से देखेंगे. और हर आँख से आँसू बहेगा. हम आपको मिस करते है! अनुपर खेर की इस पोस्ट को पढ़ हर कोई इमोशनल हो रहा है. इस पोस्ट पर सभी फैन्स की प्रतिक्रिया देख साफ समझा जा सकता है कि हर कोई दिल बेचारा देखने के लिए खासा उत्साहित है. सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कई हैशटैग भी वायरल चल रहे हैं. मालूम हो कि दिल बेचारा का डायरेक्शन मुकेश छाबड़ा ने किया है. फिल्म में सुशांत के अपोजिट संजना संघी अपना डेब्यू कर रही हैं. फिल्म शुक्रवार को शाम सात. तीस बजे डिज्नी हॉटस्टार पर रिलीज की जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर सुनील गावस्कर ने भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल को खरी-खोटी सुनाई है और कहा है कि भारतीय क्रिकेट टीम का कबाड़ा करने के लिए चैपल ही ज़िम्मेदार हैं. सुनील गावस्कर ने इस पर भी सवाल उठाया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) क्यों चैपल को नेशनल क्रिकेट एकेडमी के सलाहकार पद की पेशकश कर रहा है. अपने साप्ताहिक कॉलम में सुनील गावस्कर ने लिखा है, "किसी को हटाना आसान नहीं होता भले ही वो कितना भी निकम्मा और अयोग्य हो लेकिन उसे कोई दूसरा पद देना और वो भी ऐसा पद जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य से जुड़ा हो. इससे मैं यह सोचने लगा हूँ कि क्या हम कभी अपने को छोटा मानने की प्रवृत्ति से बाहर निकल पाएँगे या नहीं. " वेस्टइंडीज़ में चल रहे विश्व कप में भारत पहले ही दौर में बाहर हो गया था. उसे बांग्लादेश और श्रीलंका ने हरा दिया था और इस कारण ख़िताब की दावेदार मानी जा रही टीम सुपर-8 में भी नहीं पहुँच पाई. इसके बाद कोच ग्रेग चैपल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. गावस्कर ने टीम की ख़राब हालत के लिए चैपल पर अपना ग़ुस्सा निकाला. गावस्कर ने कहा कि जब ग्रेग चैपल ने भारतीय टीम के कोच का पद संभाला था, उस समय भारतीय क्रिकेट टीम बड़ा क़दम आगे बढ़ाने को तैयार थी. उन्होंने कहा, "उस समय भारतीय टीम को लेकर हर ओर उम्मीद की किरण थी. लोगों को यह भरोसा था कि भारतीय टीम विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार होगी. " गावस्कर अपने कॉलम में लिखते हैं कि आज जो स्थिति है उसमें क्या हुआ- सब जानते हैं. उन्होंने कहा, "आज भारतीय क्रिकेट निचले स्तर पर पहुँच गया है. विश्व कप के पहले ही दौर से टीम बाहर हो गई और टीम ऐसी विभाजित है जैसा पहले कभी नहीं रही. " अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की रैंकिंग में भारतीय टीम वनडे में छठे और टेस्ट रैंकिंग में चौथे स्थान पर हैं. गावसकर ने चैपल के कार्यकाल के दौरान युवा खिलाड़ियों की दुर्गति की भी बात कही. उन्होंने कहा कि कुछ युवा खिलाड़ी, जिन्हें आईसीसी ने भी सम्मानित किया था. आज वो अपनी राह भूल गए हैं. गावस्कर ने चैपल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस खिलाड़ी को क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में एक माना जाता है, उसके अधीन भारतीय क्रिकेट टीम की बल्लेबाज़ी ने अपनी चमक खो दी. गावस्कर ने चैपल को नेशनल क्रिकेट एकेडमी के सलाहकार पद की पेशकश के बारे में कहा, "जिसने प्रेस इंटरव्यू में यहाँ तक कह दिया कि बीसीसीआई ज़िम्बाब्वे की तरह काम करती है, माना जा रहा है कि वही बीसीसीआई उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी के सलाहकार का पद सौंपने की पेशकश कर रही है. " गावस्कर ने ऐसी ख़बरों पर चुटकी ली कि ग्रेग चैपल को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट एकेडमी का प्रमुख कोच बनाने की तैयारी चल रही है. गावस्कर ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो यह विश्व क्रिकेट के लिए बहुत अच्छी बात होगी और देर-सबेर आयरलैंड जैसी टीम को भी ऑस्ट्रेलिया को हराने का मौक़ा मिल सकता है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर सुनील गावस्कर ने भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल को खरी-खोटी सुनाई है और कहा है कि भारतीय क्रिकेट टीम का कबाड़ा करने के लिए चैपल ही ज़िम्मेदार हैं. सुनील गावस्कर ने इस पर भी सवाल उठाया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड क्यों चैपल को नेशनल क्रिकेट एकेडमी के सलाहकार पद की पेशकश कर रहा है. अपने साप्ताहिक कॉलम में सुनील गावस्कर ने लिखा है, "किसी को हटाना आसान नहीं होता भले ही वो कितना भी निकम्मा और अयोग्य हो लेकिन उसे कोई दूसरा पद देना और वो भी ऐसा पद जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य से जुड़ा हो. इससे मैं यह सोचने लगा हूँ कि क्या हम कभी अपने को छोटा मानने की प्रवृत्ति से बाहर निकल पाएँगे या नहीं. " वेस्टइंडीज़ में चल रहे विश्व कप में भारत पहले ही दौर में बाहर हो गया था. उसे बांग्लादेश और श्रीलंका ने हरा दिया था और इस कारण ख़िताब की दावेदार मानी जा रही टीम सुपर-आठ में भी नहीं पहुँच पाई. इसके बाद कोच ग्रेग चैपल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. गावस्कर ने टीम की ख़राब हालत के लिए चैपल पर अपना ग़ुस्सा निकाला. गावस्कर ने कहा कि जब ग्रेग चैपल ने भारतीय टीम के कोच का पद संभाला था, उस समय भारतीय क्रिकेट टीम बड़ा क़दम आगे बढ़ाने को तैयार थी. उन्होंने कहा, "उस समय भारतीय टीम को लेकर हर ओर उम्मीद की किरण थी. लोगों को यह भरोसा था कि भारतीय टीम विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार होगी. " गावस्कर अपने कॉलम में लिखते हैं कि आज जो स्थिति है उसमें क्या हुआ- सब जानते हैं. उन्होंने कहा, "आज भारतीय क्रिकेट निचले स्तर पर पहुँच गया है. विश्व कप के पहले ही दौर से टीम बाहर हो गई और टीम ऐसी विभाजित है जैसा पहले कभी नहीं रही. " अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की रैंकिंग में भारतीय टीम वनडे में छठे और टेस्ट रैंकिंग में चौथे स्थान पर हैं. गावसकर ने चैपल के कार्यकाल के दौरान युवा खिलाड़ियों की दुर्गति की भी बात कही. उन्होंने कहा कि कुछ युवा खिलाड़ी, जिन्हें आईसीसी ने भी सम्मानित किया था. आज वो अपनी राह भूल गए हैं. गावस्कर ने चैपल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस खिलाड़ी को क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में एक माना जाता है, उसके अधीन भारतीय क्रिकेट टीम की बल्लेबाज़ी ने अपनी चमक खो दी. गावस्कर ने चैपल को नेशनल क्रिकेट एकेडमी के सलाहकार पद की पेशकश के बारे में कहा, "जिसने प्रेस इंटरव्यू में यहाँ तक कह दिया कि बीसीसीआई ज़िम्बाब्वे की तरह काम करती है, माना जा रहा है कि वही बीसीसीआई उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी के सलाहकार का पद सौंपने की पेशकश कर रही है. " गावस्कर ने ऐसी ख़बरों पर चुटकी ली कि ग्रेग चैपल को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट एकेडमी का प्रमुख कोच बनाने की तैयारी चल रही है. गावस्कर ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो यह विश्व क्रिकेट के लिए बहुत अच्छी बात होगी और देर-सबेर आयरलैंड जैसी टीम को भी ऑस्ट्रेलिया को हराने का मौक़ा मिल सकता है.
एकल विद्यालय की बहिनों ने कोतवाली पहुंचकर पुलिसकर्मियों को राखी बांधी। इस उपलक्ष्य में सितारगंज अध्यक्ष लाल सिंह दायमा जी, सितारगंज चैयरमेन हरीश दुबे, सुमन दिगारी, लक्ष्मण राणा, आशीष पांडेय, रामेश्वरी राना, सरोजिनी राना, किरण राना मौजूद रहीं। इधर, स्कालर्स वैली इण्टरनेशनल स्कूल में राखी बनाओ प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों ने एसडीएम कार्यालय, तहसील, अस्पताल, कोतवाली पहुंचकर अधिकारियों व कर्मचारियों को राखी बांधकर आशीर्वाद लिया।
एकल विद्यालय की बहिनों ने कोतवाली पहुंचकर पुलिसकर्मियों को राखी बांधी। इस उपलक्ष्य में सितारगंज अध्यक्ष लाल सिंह दायमा जी, सितारगंज चैयरमेन हरीश दुबे, सुमन दिगारी, लक्ष्मण राणा, आशीष पांडेय, रामेश्वरी राना, सरोजिनी राना, किरण राना मौजूद रहीं। इधर, स्कालर्स वैली इण्टरनेशनल स्कूल में राखी बनाओ प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों ने एसडीएम कार्यालय, तहसील, अस्पताल, कोतवाली पहुंचकर अधिकारियों व कर्मचारियों को राखी बांधकर आशीर्वाद लिया।
कोरोना महामारी के बीच कल 14 सितंबर से 18 दिनों के मानसून सत्र की शुरुआत हो गई है। सत्र के दूसरे दिन आज पहले राज्यसभा की कार्यवाही हो रही है। ऊपरी सदन की कार्यवाही सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक चलेगी तो लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे से शाम सात बजे तक जारी रहेगी। लोकसभा में आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत-चीन सीमा पर जारी विवाद पर बयान देंगे। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है। इससे आज संसद में हंगामे के आसार लग रहे हैं ।
कोरोना महामारी के बीच कल चौदह सितंबर से अट्ठारह दिनों के मानसून सत्र की शुरुआत हो गई है। सत्र के दूसरे दिन आज पहले राज्यसभा की कार्यवाही हो रही है। ऊपरी सदन की कार्यवाही सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक चलेगी तो लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे से शाम सात बजे तक जारी रहेगी। लोकसभा में आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत-चीन सीमा पर जारी विवाद पर बयान देंगे। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है। इससे आज संसद में हंगामे के आसार लग रहे हैं ।
शिमला - ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महत्वाकांक्षी अभियान हॉर्न नॉट ओके को शिमला शहर में सफलतापूर्वक लागू करने के लिए शुक्रवार को बचत भवन में जिला प्रशासन शिमला द्वारा बैठक आयोजित की गई। बैठक में निदेशक, पर्यावरण विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी डीसी राणा और जिला के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए डीसी राणा ने कहा कि हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण होता है और इससे आदमी स्वयं ही नहीं बल्कि अन्य लोगों व संपूर्ण वातावरण को भी प्रभावित करता है। हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और इससे स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं व अन्य कई तरह के दुष्प्रभाव सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि हॉर्न बजाना एक व्यवहार का विषय भी है। इसका उपयोग करने से हम ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। हॉर्न के माध्यम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश सरकार ने शिमला और मनाली में हॉर्न नॉट ओके अभियान को आरंभ करने का निर्णय लिया है जिसके तहत पहले दो माह तक इस अभियान के बारे में लोगों को विभिन्न माध्यमों द्वारा जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा शोर नहीं मोबाईल ऐप लॉंच की गई है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति प्रदेश में ध्वनि प्रदूषण के बारे में अपनी शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेज सकता है। इस ऐप के माध्यम से की गई शिकायत में शिकायतकर्ता का पूर्ण विवरण गुप्त रखा जाता है। इससे पूर्व अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी शिमला प्रभा राजीव ने हॉर्न नॉट ओके अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए लोगों से शिमला शहर में वाहनों में हॉर्न नहीं बजाने का आग्रह करते हुए इस अभियान के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने विभिन्न स्कूलों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से हॉर्न नॉट ओके अभियान को सफल बनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने का भी आग्रह किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों के प्रधानाचार्यों/प्रतिनिधियों तथा टैक्सी ऑपरेटर यूनियनों के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस मौके पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
शिमला - ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महत्वाकांक्षी अभियान हॉर्न नॉट ओके को शिमला शहर में सफलतापूर्वक लागू करने के लिए शुक्रवार को बचत भवन में जिला प्रशासन शिमला द्वारा बैठक आयोजित की गई। बैठक में निदेशक, पर्यावरण विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी डीसी राणा और जिला के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए डीसी राणा ने कहा कि हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण होता है और इससे आदमी स्वयं ही नहीं बल्कि अन्य लोगों व संपूर्ण वातावरण को भी प्रभावित करता है। हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और इससे स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं व अन्य कई तरह के दुष्प्रभाव सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि हॉर्न बजाना एक व्यवहार का विषय भी है। इसका उपयोग करने से हम ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। हॉर्न के माध्यम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश सरकार ने शिमला और मनाली में हॉर्न नॉट ओके अभियान को आरंभ करने का निर्णय लिया है जिसके तहत पहले दो माह तक इस अभियान के बारे में लोगों को विभिन्न माध्यमों द्वारा जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा शोर नहीं मोबाईल ऐप लॉंच की गई है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति प्रदेश में ध्वनि प्रदूषण के बारे में अपनी शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेज सकता है। इस ऐप के माध्यम से की गई शिकायत में शिकायतकर्ता का पूर्ण विवरण गुप्त रखा जाता है। इससे पूर्व अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी शिमला प्रभा राजीव ने हॉर्न नॉट ओके अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए लोगों से शिमला शहर में वाहनों में हॉर्न नहीं बजाने का आग्रह करते हुए इस अभियान के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने विभिन्न स्कूलों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से हॉर्न नॉट ओके अभियान को सफल बनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने का भी आग्रह किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों के प्रधानाचार्यों/प्रतिनिधियों तथा टैक्सी ऑपरेटर यूनियनों के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस मौके पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
भारतीय जनता पार्टी (BJP)के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। हाल ही में उन्होंने दिवगंत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मौत मामले में सीबीआई जांच को लेकर मुहिम चलाई थी। नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने रविवार (16 अगस्त) को ट्वीट कर कहा है कि 16 मई, 2014 को हिंदुत्व के लिए युद्ध शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत में 15 अगस्त 1947 को देश के अंदर छिपे हुए पश्चिमीकरण से मुक्ति के लिए तीसरे युद्ध की शुरुआत हुई थी। रविवार (16 अगस्त) को किए अपने ट्वीट में सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा, "ब्रिटिश साम्राज्यवाद से भारत की मुक्ति का पहला युद्ध 1857 में हुआ था। दूसरा युद्ध 21 अक्टूबर, 1943 को हुआ था। देश के अंदर गुप्त पश्चिमीकरण से मुक्ति का तीसरा युद्ध 15 अगस्त, 1947 को शुरू हुआ और 16 मई, 2014 को हिंदुत्व के लिए शुरू हुआ। " बता दें, 16 मई 2014 को नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी और केंद्र में कांग्रेस को हटाकर सरकार बनाई थी। बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले रिकॉर्ड तौर वोट मिले थे। सुब्रमण्यम स्वामी अक्सर हिंदू अधिकारों और हिन्दुत्व के बारे में बात करते हैं। राम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कई बार अपनी आवाज बुलंद की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बीते 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया है। इस माैक पर पीएम मोदी, यूपी सीएम योगी और संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत भी मौजूद थे।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। हाल ही में उन्होंने दिवगंत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मौत मामले में सीबीआई जांच को लेकर मुहिम चलाई थी। नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने रविवार को ट्वीट कर कहा है कि सोलह मई, दो हज़ार चौदह को हिंदुत्व के लिए युद्ध शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत में पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को देश के अंदर छिपे हुए पश्चिमीकरण से मुक्ति के लिए तीसरे युद्ध की शुरुआत हुई थी। रविवार को किए अपने ट्वीट में सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा, "ब्रिटिश साम्राज्यवाद से भारत की मुक्ति का पहला युद्ध एक हज़ार आठ सौ सत्तावन में हुआ था। दूसरा युद्ध इक्कीस अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस को हुआ था। देश के अंदर गुप्त पश्चिमीकरण से मुक्ति का तीसरा युद्ध पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को शुरू हुआ और सोलह मई, दो हज़ार चौदह को हिंदुत्व के लिए शुरू हुआ। " बता दें, सोलह मई दो हज़ार चौदह को नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी और केंद्र में कांग्रेस को हटाकर सरकार बनाई थी। बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले रिकॉर्ड तौर वोट मिले थे। सुब्रमण्यम स्वामी अक्सर हिंदू अधिकारों और हिन्दुत्व के बारे में बात करते हैं। राम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कई बार अपनी आवाज बुलंद की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बीते पाँच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया है। इस माैक पर पीएम मोदी, यूपी सीएम योगी और संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत भी मौजूद थे।
राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की विपक्षी दलों को जोड़ने की कोशिश के बीच यूपी और बिहार से अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी में दो फाड़ सामने आ गया है। अब मुलायम सिंह यादव को तय करना है कि वे बेटे अखिलेश की पार्टी में संरक्षक की भूमिका में रहेंगे या भाई शिवपाल की नई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। पहले से अंक गणित को लेकर कमजोर दिख रहे विपक्ष का गणित इस झगड़े में गड़बड़ा सकता है। उधर, बिहार की खबर भी विपक्षी एकता की मुश्किलें बढ़ा सकती है। कांग्रेस समाजवादी पार्टी से दो स्तर पर बातचीत कर रही थी। सोनिया गांधी की मुलायम सिंह यादव से और राहुल गांधी की अखिलेश यादव से बातचीत हो रही थी। अखिलेश यादव ने एक बार फिर दोहराया है कि उन्होंने कांग्रेस के साथ लंबी पारी खेलेंगे के लिए हाथ मिलाया है। दूसरी ओर, विधानसभा चुनाव में शिवपाल यादव कांग्रेस से गठबंधन के खिलाफ थे। अब शिवपाल के अलग पार्टी बना लेने से उनके समर्थक विधायक और सांसद भी उनके साथ जा सकते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में उनकी भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। उधर, लालू प्रसाद यादव और शहाबुद्दीन के बीच बातचीत के कथित टेप का खुलासा होने के बाद बिहार में गठबंधन की राजनीति का प्रभावित होना लाजमी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच रिश्तों में खटास लंबे समय से है, जो गठबंधन की राजनीति को प्रभावित करती रही है। ऐसे में एक बार फिर इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सीधे तौर कटघरे में नीतीश कुमार की सरकार होगी। राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए जल्द ही लालू प्रसाद यादव की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात होनी है। नीतीश कुमार पहले ही सोनिया से मिलकर अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। अब लालू और नीतीश कुमार के रिश्तों की तल्खी से कांग्रेस को धक्का लग सकता है। कांग्रेस के नेता इस संबंध में फिलहाल कुछ कहने से बच रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक समाजवादी पार्टी का झगड़ा पारिवारिक है। ऐसे में उससे विपक्षी एकता में बाधा नहीं आएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की विपक्षी दलों को जोड़ने की कोशिश के बीच यूपी और बिहार से अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी में दो फाड़ सामने आ गया है। अब मुलायम सिंह यादव को तय करना है कि वे बेटे अखिलेश की पार्टी में संरक्षक की भूमिका में रहेंगे या भाई शिवपाल की नई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। पहले से अंक गणित को लेकर कमजोर दिख रहे विपक्ष का गणित इस झगड़े में गड़बड़ा सकता है। उधर, बिहार की खबर भी विपक्षी एकता की मुश्किलें बढ़ा सकती है। कांग्रेस समाजवादी पार्टी से दो स्तर पर बातचीत कर रही थी। सोनिया गांधी की मुलायम सिंह यादव से और राहुल गांधी की अखिलेश यादव से बातचीत हो रही थी। अखिलेश यादव ने एक बार फिर दोहराया है कि उन्होंने कांग्रेस के साथ लंबी पारी खेलेंगे के लिए हाथ मिलाया है। दूसरी ओर, विधानसभा चुनाव में शिवपाल यादव कांग्रेस से गठबंधन के खिलाफ थे। अब शिवपाल के अलग पार्टी बना लेने से उनके समर्थक विधायक और सांसद भी उनके साथ जा सकते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में उनकी भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। उधर, लालू प्रसाद यादव और शहाबुद्दीन के बीच बातचीत के कथित टेप का खुलासा होने के बाद बिहार में गठबंधन की राजनीति का प्रभावित होना लाजमी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच रिश्तों में खटास लंबे समय से है, जो गठबंधन की राजनीति को प्रभावित करती रही है। ऐसे में एक बार फिर इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सीधे तौर कटघरे में नीतीश कुमार की सरकार होगी। राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए जल्द ही लालू प्रसाद यादव की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात होनी है। नीतीश कुमार पहले ही सोनिया से मिलकर अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। अब लालू और नीतीश कुमार के रिश्तों की तल्खी से कांग्रेस को धक्का लग सकता है। कांग्रेस के नेता इस संबंध में फिलहाल कुछ कहने से बच रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक समाजवादी पार्टी का झगड़ा पारिवारिक है। ऐसे में उससे विपक्षी एकता में बाधा नहीं आएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
स्वभाव से शर्मीला लेकिन अनजाने में तबाही मचाने वाला बहरादेव हाथी जल्दी सामने नहीं आता। लेकिन जब आता है तो किसी की नहीं सुनता, कितना भी ढोल बजा लो, हल्ला कर लो वो पलट के देखता तक नहीं, लेकिन अपने सामने आए लोगों को देख कर उत्तेजित हो जाने वाले बहरादेव हाथी ने बीती रात पहाड़खडूवा गांव में उत्पात मचा दिया। पढ़िए छत्तीसगढ़ी हाथियों के नाम और स्वभाव से जुडी ये ख़बर. . बलरामपुरः जिले से लगे राजपुर वन परीक्षेत्र के पहाड़खडूवा गांव में बीती रात अचानक बहरादेव हाथी ने उत्पात मचा दिया. ग्रामीणों के तीन घरों को तोड़ते हुए घर के सामान को भी नुकसान पहुंचाया और अनाज को भी रात में चट कर दिया. हाथी की दहशत में ग्रामीण जान बचाकर गांव से भागते हुए नजर आए. बहरादेव के आने की ख़बर मिलते ही वन अमला गांव में आ गया। दरअसल छत्तीसगढ़ के जंगलों में विचरण करने वाले हाथियों के लिए नाम ही पहचान है। गांव, नदी, त्योहार और व्यवहार से उनका नामकरण किया जाता है। इसी आधार पर ग्रामीण तथा वन विभाग के अधिकारी 1990 से इनके नाम तय कर रहे हैं। वर्तमान में 80 हाथी अलग-अलग दलों में और अकेले भी विचरण कर रहे हैं। प्रदेश के सरगुजा वनक्षेत्र में झारखंड के कुसमी जंगल के हाथियों की आवाजाही 1990 में शुरू हुई थी। बीच के वर्षों में नामकरण की प्रक्रिया बंद हो गई थी, परंतु पिछले चार वर्षों से नामकरण फिर शुरू हो गया है। 1990 में जनहानि करने वाले एक हाथी को सिविलदाग गांव में पकड़ा गया था। उसी आधार पर हाथी का नामकरण सिविल बहादुर किया गया। उक्त हाथी आज भी रेस्क्यू सेंटर में है। इसी तरह बहरादेव, महान, प्यारे ये सभी ऐसे हाथी हैं, जो अकेले विचरण करते हैं। क्षेत्र के लोग व्यवहार के आधार पर उनकी पहचान कर लेते हैं। - बहरादेव- विशालकाय कदकाठी, तोड़फोड़ के दौरान प्रतिक्रिया नहीं दिखाने के कारण सुनाई न देने के ग्रामीणों के दावे पर नामकरण, जल्दी जंगल से बाहर नहीं आता। - सिविल बहादुर- कुसमी के सिविलदाग बस्ती में पकड़ा गया। - लाली- अंबिकापुर से लगे लालमाटी के जंगल में कब्जे में आया। - महान- विचरण क्षेत्र सूरजपुर जिले के महान नदी के आसपास मिला। - प्यारे- सेटेलाइट रेडियो कालिंग के दौरान मिला सहयोग, कद-काठी भी बेहतर। - मोहन- सूरजपुर वन परिक्षेत्र के मोहनपुर जंगल में कई महीनों तक डेरा। - खोपादेव- सरगुजा अंचल की आराध्य खोपा देवस्थल के नजदीक जंगल में विचरण, वर्तमान में मध्यप्रदेश के सीधी जिले में मौजूदगी। वर्तमान में 80 हाथी अलग-अलग दलों में और अकेले भी विचरण कर रहे हैं। देखिए विडियो. .
स्वभाव से शर्मीला लेकिन अनजाने में तबाही मचाने वाला बहरादेव हाथी जल्दी सामने नहीं आता। लेकिन जब आता है तो किसी की नहीं सुनता, कितना भी ढोल बजा लो, हल्ला कर लो वो पलट के देखता तक नहीं, लेकिन अपने सामने आए लोगों को देख कर उत्तेजित हो जाने वाले बहरादेव हाथी ने बीती रात पहाड़खडूवा गांव में उत्पात मचा दिया। पढ़िए छत्तीसगढ़ी हाथियों के नाम और स्वभाव से जुडी ये ख़बर. . बलरामपुरः जिले से लगे राजपुर वन परीक्षेत्र के पहाड़खडूवा गांव में बीती रात अचानक बहरादेव हाथी ने उत्पात मचा दिया. ग्रामीणों के तीन घरों को तोड़ते हुए घर के सामान को भी नुकसान पहुंचाया और अनाज को भी रात में चट कर दिया. हाथी की दहशत में ग्रामीण जान बचाकर गांव से भागते हुए नजर आए. बहरादेव के आने की ख़बर मिलते ही वन अमला गांव में आ गया। दरअसल छत्तीसगढ़ के जंगलों में विचरण करने वाले हाथियों के लिए नाम ही पहचान है। गांव, नदी, त्योहार और व्यवहार से उनका नामकरण किया जाता है। इसी आधार पर ग्रामीण तथा वन विभाग के अधिकारी एक हज़ार नौ सौ नब्बे से इनके नाम तय कर रहे हैं। वर्तमान में अस्सी हाथी अलग-अलग दलों में और अकेले भी विचरण कर रहे हैं। प्रदेश के सरगुजा वनक्षेत्र में झारखंड के कुसमी जंगल के हाथियों की आवाजाही एक हज़ार नौ सौ नब्बे में शुरू हुई थी। बीच के वर्षों में नामकरण की प्रक्रिया बंद हो गई थी, परंतु पिछले चार वर्षों से नामकरण फिर शुरू हो गया है। एक हज़ार नौ सौ नब्बे में जनहानि करने वाले एक हाथी को सिविलदाग गांव में पकड़ा गया था। उसी आधार पर हाथी का नामकरण सिविल बहादुर किया गया। उक्त हाथी आज भी रेस्क्यू सेंटर में है। इसी तरह बहरादेव, महान, प्यारे ये सभी ऐसे हाथी हैं, जो अकेले विचरण करते हैं। क्षेत्र के लोग व्यवहार के आधार पर उनकी पहचान कर लेते हैं। - बहरादेव- विशालकाय कदकाठी, तोड़फोड़ के दौरान प्रतिक्रिया नहीं दिखाने के कारण सुनाई न देने के ग्रामीणों के दावे पर नामकरण, जल्दी जंगल से बाहर नहीं आता। - सिविल बहादुर- कुसमी के सिविलदाग बस्ती में पकड़ा गया। - लाली- अंबिकापुर से लगे लालमाटी के जंगल में कब्जे में आया। - महान- विचरण क्षेत्र सूरजपुर जिले के महान नदी के आसपास मिला। - प्यारे- सेटेलाइट रेडियो कालिंग के दौरान मिला सहयोग, कद-काठी भी बेहतर। - मोहन- सूरजपुर वन परिक्षेत्र के मोहनपुर जंगल में कई महीनों तक डेरा। - खोपादेव- सरगुजा अंचल की आराध्य खोपा देवस्थल के नजदीक जंगल में विचरण, वर्तमान में मध्यप्रदेश के सीधी जिले में मौजूदगी। वर्तमान में अस्सी हाथी अलग-अलग दलों में और अकेले भी विचरण कर रहे हैं। देखिए विडियो. .
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों से स्वाइन फ्लू से पीड़ित चल रहे हैं। इस ख़तरनाक बीमारी के चलते उन्हें इलाज़ के लिए AIIMS में भर्ती करवाया गया है। इस बात की जानकारी अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट के जरिये दी है। उन्होंने ट्वीट किया है कि 'मुझे स्वाइन फ्लू हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है। ईश्वर की कृपा, आप सभी के प्रेम और शुभकामनाओं से शीघ्र ही स्वस्थ हो जाऊंगा। ' मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छाती में दर्द और सांस लेने में तक्लीफ की शिकायत के बाद उन्हें एम्स ले जाया गया था, जहां स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। वहीं, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अमित शाह के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने ट्वीट किया, 'अमित भाई, आपके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की मैं ईश्वर से कामना करता हूं।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों से स्वाइन फ्लू से पीड़ित चल रहे हैं। इस ख़तरनाक बीमारी के चलते उन्हें इलाज़ के लिए AIIMS में भर्ती करवाया गया है। इस बात की जानकारी अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट के जरिये दी है। उन्होंने ट्वीट किया है कि 'मुझे स्वाइन फ्लू हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है। ईश्वर की कृपा, आप सभी के प्रेम और शुभकामनाओं से शीघ्र ही स्वस्थ हो जाऊंगा। ' मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छाती में दर्द और सांस लेने में तक्लीफ की शिकायत के बाद उन्हें एम्स ले जाया गया था, जहां स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। वहीं, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अमित शाह के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने ट्वीट किया, 'अमित भाई, आपके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की मैं ईश्वर से कामना करता हूं।
बेमेतरा (नईदुनिया न्यूज)। महिलाओं की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग द्वारा तैयार 'अभिव्यक्ति' एप से महिलाओं को तत्काल सहायता मिलेगी। इसके अलावा इस एप के माध्यम से महिलाएं कहीं से भी अपनी शिकायत पुलिस के पास दर्ज करा सकेंगी। यानी अब महिलाओं को थाने का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा महिलाएं अब अपनी सुरक्षा को लेकर सुझाव भी पुलिस विभाग तक पहुंचा सकेंगी। अभिव्यक्ति महिला सुरक्षा टीम की महिला प्रधान आरक्षक वर्षा चौबे ने लायनेस क्लब अध्यक्ष विनोद राघव, लायनेस क्लब सचिव ममता ताम्रकार व लायनेस क्लब की अन्य सदस्य और कस्तूरबा छात्रावास बेमेतरा अधीक्षिका सुषमा शर्मा, कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास आवासीय विद्यालय के छात्राओं की उपस्थित में चेतना कार्यक्रम के तहत महिलाओं और बालिकाओं पर हो रहे लैंगिक शोषण के बचाव और कारण से संबंधित, गुडटच व बेडटच, सेल्फ डिफेंस, महिलाओं पर हो रहे अपराध की रोकथाम की जानकारी दी गयी। व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा : पुलिस अधीक्षक बेमेतरा धर्मेन्द्र सिंह एवं अति. पुलिस अधीक्षक बेमेतरा पंकज पटेल जिले के 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा एप के नोडल अधिकारी के निर्देशन पर बेमेतरा जिले में 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा ऐप का व्यापक प्रचार - प्रसार किया जा रहा हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बेमेतरा के बालिकाओं को 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा एप के संबंध में विस्तृत जानकारी देकर प्रचार प्रसार किया गया। इस एप के इस्तमाल के लिए सबसे पहले महिला/बालिकाओ को अपने मोबाईल फोन में प्ले स्टोर से 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा एप डाउनलोड करना है, जिसमें उन्हें साइन इन करना है, अपना मोबाइल नंबर डालना है, एप में महिलाएं बलात्कार, अपहरण, मानव तस्करी, एसिड अटैक, अवयस्क के साथ लैंगिक उत्पीडन, साइबर अपराध व महिलाओं से संबंधित अन्य शिकायत रजिस्टर्ड कर सकेंगी। बेमेतरा (नईदुनिया न्यूज)। जिला बेमेतरा अंतर्गत आज 27 जून से 10 जुलाई 2022 तक जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत कलेक्टर विलास भोसकर संदीपान के मार्गदर्शन में सास-बहू और नव-दंपत्ति सम्मेलन का आयोजन जिला चिकित्सालय बेमेतरा में किया गया। परिवार नियोजन के स्थाई साधन नसबंदी और अस्थाई साधन कापर-टी, अंतरा इंजेक्शन, कंडोम, छाया गोली के लिए पात्र लोगों को प्रोत्साहित करने जिले में पखवाड़ा का शुभारंभ किया गया। इस क्रम में जिले में समुदाय के बीच सास-बहू सम्मेलन कराये जाएंगे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा परिवार नियोजन के साधनों के प्रसार के लिए सारथी रथ का शुभारंभ किया गया। पुरस्कार वितरण किया गया : सम्मेलन के दौरान समस्त लक्ष्य दंपत्ति को परिवार नियोजन साधनों के बारे में जागरूक किया गया। क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से प्रोत्साहित कर पुरस्कार वितरण किया गया। सिविल सर्जन डा वंदना भेले, जिला कार्यक्रम प्रबंधक लता बंजारे, जिला सलाहकार शोभिका गजपाल उपस्थित थे।
बेमेतरा । महिलाओं की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग द्वारा तैयार 'अभिव्यक्ति' एप से महिलाओं को तत्काल सहायता मिलेगी। इसके अलावा इस एप के माध्यम से महिलाएं कहीं से भी अपनी शिकायत पुलिस के पास दर्ज करा सकेंगी। यानी अब महिलाओं को थाने का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा महिलाएं अब अपनी सुरक्षा को लेकर सुझाव भी पुलिस विभाग तक पहुंचा सकेंगी। अभिव्यक्ति महिला सुरक्षा टीम की महिला प्रधान आरक्षक वर्षा चौबे ने लायनेस क्लब अध्यक्ष विनोद राघव, लायनेस क्लब सचिव ममता ताम्रकार व लायनेस क्लब की अन्य सदस्य और कस्तूरबा छात्रावास बेमेतरा अधीक्षिका सुषमा शर्मा, कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास आवासीय विद्यालय के छात्राओं की उपस्थित में चेतना कार्यक्रम के तहत महिलाओं और बालिकाओं पर हो रहे लैंगिक शोषण के बचाव और कारण से संबंधित, गुडटच व बेडटच, सेल्फ डिफेंस, महिलाओं पर हो रहे अपराध की रोकथाम की जानकारी दी गयी। व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा : पुलिस अधीक्षक बेमेतरा धर्मेन्द्र सिंह एवं अति. पुलिस अधीक्षक बेमेतरा पंकज पटेल जिले के 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा एप के नोडल अधिकारी के निर्देशन पर बेमेतरा जिले में 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा ऐप का व्यापक प्रचार - प्रसार किया जा रहा हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बेमेतरा के बालिकाओं को 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा एप के संबंध में विस्तृत जानकारी देकर प्रचार प्रसार किया गया। इस एप के इस्तमाल के लिए सबसे पहले महिला/बालिकाओ को अपने मोबाईल फोन में प्ले स्टोर से 'अभिव्यक्ति' महिला सुरक्षा एप डाउनलोड करना है, जिसमें उन्हें साइन इन करना है, अपना मोबाइल नंबर डालना है, एप में महिलाएं बलात्कार, अपहरण, मानव तस्करी, एसिड अटैक, अवयस्क के साथ लैंगिक उत्पीडन, साइबर अपराध व महिलाओं से संबंधित अन्य शिकायत रजिस्टर्ड कर सकेंगी। बेमेतरा । जिला बेमेतरा अंतर्गत आज सत्ताईस जून से दस जुलाई दो हज़ार बाईस तक जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत कलेक्टर विलास भोसकर संदीपान के मार्गदर्शन में सास-बहू और नव-दंपत्ति सम्मेलन का आयोजन जिला चिकित्सालय बेमेतरा में किया गया। परिवार नियोजन के स्थाई साधन नसबंदी और अस्थाई साधन कापर-टी, अंतरा इंजेक्शन, कंडोम, छाया गोली के लिए पात्र लोगों को प्रोत्साहित करने जिले में पखवाड़ा का शुभारंभ किया गया। इस क्रम में जिले में समुदाय के बीच सास-बहू सम्मेलन कराये जाएंगे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा परिवार नियोजन के साधनों के प्रसार के लिए सारथी रथ का शुभारंभ किया गया। पुरस्कार वितरण किया गया : सम्मेलन के दौरान समस्त लक्ष्य दंपत्ति को परिवार नियोजन साधनों के बारे में जागरूक किया गया। क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से प्रोत्साहित कर पुरस्कार वितरण किया गया। सिविल सर्जन डा वंदना भेले, जिला कार्यक्रम प्रबंधक लता बंजारे, जिला सलाहकार शोभिका गजपाल उपस्थित थे।
सियोल, 30 अक्टूबर (वार्ता) दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के एक लोकप्रिय नाइटलाइफ़ क्षेत्र में हैलोवीन समारोह (halloween celebration) के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ (stampede) मच जाने से कम से कम 146 लोगों की मौत (146 people died) हो गई और करीब डेढ़ सौ से ज्यादा घायल हो गये । दमकल अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना शनिवार रात प्रसिद्ध नाइटलाइफ़ जिले के हैमिल्टन होटल के पास एक संकरी ढलान वाली गली में हुई, जब पार्टी में जाने वालों की भारी भीड़ उसमें आ गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि दुर्घटना से सबसे अधिक 20 वर्ष आयुवर्ग के युवा प्रभावित हुये है। दमकल अधिकारियों को शुरू में इटावन क्षेत्र के लोगों से सांस लेने में कठिनाई वाले रोगियों के बारे में दर्जनों रिपोर्टें मिलीं। घटनास्थल पर भेजे गए बचावकर्मियों ने पास की सड़क पर दर्जनों पीड़ितों को सीपीआर दिया था। घटनास्थल पर अफवाहें थीं कि एक सेलिब्रिटी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी या क्लबों में ड्रग्स से लदी कैंडी बांटी गई थी, लेकिन दुर्घटना का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि भगदड़ के फौरन बाद राष्ट्रपति यूं सुक-योल ने लगातार दो आपातकालीन बैठकों की अध्यक्षता की, जिससे अधिकारियों को प्राथमिक उपचार और घायलों का इलाज करने का आदेश दिया गया। श्री यूं ने अधिकारियों को इटावन में आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों को तैनात करने और आपातकालीन बिस्तरों को सुरक्षित करने का भी आदेश दिया। भगदड़ पर एक आपात बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, यूं ने अधिकारियों को दुर्घटना के कारणों की पूरी तरह से जांच करने का निर्देश दिया। इसके अलावा प्रधान मंत्री हान डक-सू ने अधिकारियों को नुकसान को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया। इस बीच शहर के अधिकारियों ने कहा कि सियोल के मेयर ओह से-हून, जो यूरोप की यात्रा पर हैं, ने दुर्घटना के मद्देनजर स्वदेश लौटने का फैसला किया। क्षेत्र के लिए 346 अग्निशामकों सहित कुल 848 कर्मियों को लगाया गया था। पुलिस जल्द ही इस बात की जांच शुरू करने की योजना बना रही है कि क्या इलाके के बार और क्लब सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं।
सियोल, तीस अक्टूबर दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के एक लोकप्रिय नाइटलाइफ़ क्षेत्र में हैलोवीन समारोह के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच जाने से कम से कम एक सौ छियालीस लोगों की मौत हो गई और करीब डेढ़ सौ से ज्यादा घायल हो गये । दमकल अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना शनिवार रात प्रसिद्ध नाइटलाइफ़ जिले के हैमिल्टन होटल के पास एक संकरी ढलान वाली गली में हुई, जब पार्टी में जाने वालों की भारी भीड़ उसमें आ गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि दुर्घटना से सबसे अधिक बीस वर्ष आयुवर्ग के युवा प्रभावित हुये है। दमकल अधिकारियों को शुरू में इटावन क्षेत्र के लोगों से सांस लेने में कठिनाई वाले रोगियों के बारे में दर्जनों रिपोर्टें मिलीं। घटनास्थल पर भेजे गए बचावकर्मियों ने पास की सड़क पर दर्जनों पीड़ितों को सीपीआर दिया था। घटनास्थल पर अफवाहें थीं कि एक सेलिब्रिटी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी या क्लबों में ड्रग्स से लदी कैंडी बांटी गई थी, लेकिन दुर्घटना का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि भगदड़ के फौरन बाद राष्ट्रपति यूं सुक-योल ने लगातार दो आपातकालीन बैठकों की अध्यक्षता की, जिससे अधिकारियों को प्राथमिक उपचार और घायलों का इलाज करने का आदेश दिया गया। श्री यूं ने अधिकारियों को इटावन में आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों को तैनात करने और आपातकालीन बिस्तरों को सुरक्षित करने का भी आदेश दिया। भगदड़ पर एक आपात बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, यूं ने अधिकारियों को दुर्घटना के कारणों की पूरी तरह से जांच करने का निर्देश दिया। इसके अलावा प्रधान मंत्री हान डक-सू ने अधिकारियों को नुकसान को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया। इस बीच शहर के अधिकारियों ने कहा कि सियोल के मेयर ओह से-हून, जो यूरोप की यात्रा पर हैं, ने दुर्घटना के मद्देनजर स्वदेश लौटने का फैसला किया। क्षेत्र के लिए तीन सौ छियालीस अग्निशामकों सहित कुल आठ सौ अड़तालीस कर्मियों को लगाया गया था। पुलिस जल्द ही इस बात की जांच शुरू करने की योजना बना रही है कि क्या इलाके के बार और क्लब सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (Punjab Vigilance Bureau) ने 2008 बैच के आईएएस अधिकारी संजय पोपली (IAS officer Sanjay Popli) को रिश्वतखोरी (Bribe) के आरोप में चंडीगढ़ (Chandigarh) से गिरफ्तार किया है। मैंने सुना है कि हमारे विधायक गुजरात राज्य के सूरत में हैं और उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है। लेकिन, वे निश्चित रूप से लौटेंगे क्योंकि ये सभी शिवसेना को समर्पित हैं। महाराष्ट्रः उद्धव सरकार को बड़ा झटका लगने का अंदेशा, एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के दो दर्जन विधायकों ने गुजरात में डाला डेरा! महा विकास अघाड़ी सरकार (MVA Government) में शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) समेत शिवसेना के दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के बागी होने की खबर है। अगर कोरोना संक्रमण से एक दिन में ठीक होने वाले मरीजों की बात की जाए तो 7293 लोग ठीक हुए हैं। इसके बाद देश में कुल ठीक होने वालों की संख्या 4 करोड़ 27 लाख 15 हजार 193 हो गई है। तलाशी अभियान के दौरान जब आतंकियों ने खुद को सुरक्षाबलों से घिरा देखा तो उनपर फायरिंग कर दी। जिसके बाद जवानों में जवाबी कार्रवाई करते हुए एक आतंकी को मार गिराया। इस बीच, आज ही जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के तुज्जन इलाके से एक और मुठभेड़ हो गई। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित भारत-चीन सीमाओं पर विभिन्न उच्च ऊंचाई वाले हिमालय पर्वतों पर योग किया। योगा शरीर के शारीरिक और मानसिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है। नूपुर के विवादित बयान के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में गुस्से की आग भड़क गई थी। पश्चिम बंगाल में भी नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर बीते दिनों विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था। अडानी विल्मर ने एक लीटर फॉर्च्यून रिफाइंड सूरजमुखी तेल की कीमत 220 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 210 रुपये प्रति लीटर कर दी है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए joinindianarmy. nic. in पर जाना होगा। जुलाई से सेना की विभिन्न भर्ती शाखाएं अपने-अपने तरीके से नोटिफिकेशन जारी करेंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश (India) में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस (Corona Virus) के 12,781 नए मामले सामने आए हैं। नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने कहा, 'बीती रात बाढ़ बचाव अभियान के दौरान असम पुलिस की एक टीम नगांव के कामपुर इलाके में एक जलाशय में गिर गई।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने दो हज़ार आठ बैच के आईएएस अधिकारी संजय पोपली को रिश्वतखोरी के आरोप में चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया है। मैंने सुना है कि हमारे विधायक गुजरात राज्य के सूरत में हैं और उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है। लेकिन, वे निश्चित रूप से लौटेंगे क्योंकि ये सभी शिवसेना को समर्पित हैं। महाराष्ट्रः उद्धव सरकार को बड़ा झटका लगने का अंदेशा, एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के दो दर्जन विधायकों ने गुजरात में डाला डेरा! महा विकास अघाड़ी सरकार में शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के बागी होने की खबर है। अगर कोरोना संक्रमण से एक दिन में ठीक होने वाले मरीजों की बात की जाए तो सात हज़ार दो सौ तिरानवे लोग ठीक हुए हैं। इसके बाद देश में कुल ठीक होने वालों की संख्या चार करोड़ सत्ताईस लाख पंद्रह हजार एक सौ तिरानवे हो गई है। तलाशी अभियान के दौरान जब आतंकियों ने खुद को सुरक्षाबलों से घिरा देखा तो उनपर फायरिंग कर दी। जिसके बाद जवानों में जवाबी कार्रवाई करते हुए एक आतंकी को मार गिराया। इस बीच, आज ही जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के तुज्जन इलाके से एक और मुठभेड़ हो गई। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित भारत-चीन सीमाओं पर विभिन्न उच्च ऊंचाई वाले हिमालय पर्वतों पर योग किया। योगा शरीर के शारीरिक और मानसिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है। नूपुर के विवादित बयान के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में गुस्से की आग भड़क गई थी। पश्चिम बंगाल में भी नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर बीते दिनों विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था। अडानी विल्मर ने एक लीटर फॉर्च्यून रिफाइंड सूरजमुखी तेल की कीमत दो सौ बीस रुपयापये प्रति लीटर से घटाकर दो सौ दस रुपयापये प्रति लीटर कर दी है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए joinindianarmy. nic. in पर जाना होगा। जुलाई से सेना की विभिन्न भर्ती शाखाएं अपने-अपने तरीके से नोटिफिकेशन जारी करेंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस के बारह,सात सौ इक्यासी नए मामले सामने आए हैं। नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने कहा, 'बीती रात बाढ़ बचाव अभियान के दौरान असम पुलिस की एक टीम नगांव के कामपुर इलाके में एक जलाशय में गिर गई।
इरफान ने कहा, 'जब मैं भारत के खिलाफ खेल रहा था तो वे मेरे खिलाफ बल्लेबाजी करने में सहज नहीं थे. उनमें से कुछ ने मुझे बताया कि 2012 की सीरीज में वो मेरी ऊंचाई के कारण मेरी गेंद को ठीक से नहीं देख पा रहे थे और वह मेरी गति को भी नहीं पढ़ सके थे." क्रिकेट जगत में गौतम गंभीर एक जाना-माना नाम हैं और शायद ही उनका अब इस खेल में कुछ साबित करना बाकी रहा हो. राजनीतिक पारी की शुरुआत करने से पहले गंभीर ने भारत के लिए 147 एकदिवसीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने 11 शतक और 34 अर्धशतक के साथ 5,238 रन बनाए. गंभीर ने 37 टी-20 मैच भी खेले, और 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा भी रहे. उनकी एक यादगार पारी 2011 विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ थी, जिसमें उन्होंने 97 रन बनाकर अपनी टीम को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी दिलाई थी. अब पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद इरफान दावा कर रहे हैं कि वह गंभीर के वनडे करियर के अंत का कारण थे. हाल ही में एक इंटरव्यू में इरफान ने कहा कि 2012 की द्विपक्षीय सीरीज के दौरान गौतम गंभीर उनकी गेंदों के सामने असहज हो गए थे. इरफान ने दावा किया कि उन्होंने ही वास्तव में गंभीर के वनडे करियर को खत्म किया था. 7 फीट 1 इंच लंबे इस क्रिकेटर का कहना है कि उन्होंने इस सीरीज में गंभीर को चार बार आउट किया और इसके बाद गंभीर ने भारत की ओर से सिर्फ एक सीरीज और खेली. इंटरव्यू में इरफान ने कहा, "वह (गंभीर) मैच में मेरा सामना करना पसंद नहीं कर रहे थे और जब दोनों टीमें नेट्स में प्रैक्टिस करती थीं, तब वह मुझसे आखें नहीं मिलाते थे. मुझे याद है कि मैंने 2012 में सीमित ओवर सीरीज में उन्हें चार बार आउट किया था और वह मेरे खिलाफ खेलने में सहज नहीं थे. गंभीर ने उस सीरीज में पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लिए अपना आखिरी टी 20 मैच खेला था.
इरफान ने कहा, 'जब मैं भारत के खिलाफ खेल रहा था तो वे मेरे खिलाफ बल्लेबाजी करने में सहज नहीं थे. उनमें से कुछ ने मुझे बताया कि दो हज़ार बारह की सीरीज में वो मेरी ऊंचाई के कारण मेरी गेंद को ठीक से नहीं देख पा रहे थे और वह मेरी गति को भी नहीं पढ़ सके थे." क्रिकेट जगत में गौतम गंभीर एक जाना-माना नाम हैं और शायद ही उनका अब इस खेल में कुछ साबित करना बाकी रहा हो. राजनीतिक पारी की शुरुआत करने से पहले गंभीर ने भारत के लिए एक सौ सैंतालीस एकदिवसीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने ग्यारह शतक और चौंतीस अर्धशतक के साथ पाँच,दो सौ अड़तीस रन बनाए. गंभीर ने सैंतीस टी-बीस मैच भी खेले, और दो हज़ार सात में टी-बीस वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा भी रहे. उनकी एक यादगार पारी दो हज़ार ग्यारह विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ थी, जिसमें उन्होंने सत्तानवे रन बनाकर अपनी टीम को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी दिलाई थी. अब पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद इरफान दावा कर रहे हैं कि वह गंभीर के वनडे करियर के अंत का कारण थे. हाल ही में एक इंटरव्यू में इरफान ने कहा कि दो हज़ार बारह की द्विपक्षीय सीरीज के दौरान गौतम गंभीर उनकी गेंदों के सामने असहज हो गए थे. इरफान ने दावा किया कि उन्होंने ही वास्तव में गंभीर के वनडे करियर को खत्म किया था. सात फीट एक इंच लंबे इस क्रिकेटर का कहना है कि उन्होंने इस सीरीज में गंभीर को चार बार आउट किया और इसके बाद गंभीर ने भारत की ओर से सिर्फ एक सीरीज और खेली. इंटरव्यू में इरफान ने कहा, "वह मैच में मेरा सामना करना पसंद नहीं कर रहे थे और जब दोनों टीमें नेट्स में प्रैक्टिस करती थीं, तब वह मुझसे आखें नहीं मिलाते थे. मुझे याद है कि मैंने दो हज़ार बारह में सीमित ओवर सीरीज में उन्हें चार बार आउट किया था और वह मेरे खिलाफ खेलने में सहज नहीं थे. गंभीर ने उस सीरीज में पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लिए अपना आखिरी टी बीस मैच खेला था.
बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब ( Image Source : सतपाल सिंह ) MP Rainfall: मध्यप्रदेश में इस महीने हुई आफत की बारिश ने किसानों की आंखों में आंसू ला दिए है. आंधी, ओले और पानी से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो गई है. सरकारी सिस्टम में अभी तक जो आंकड़े आए हैं, उसके मुताबिक प्रदेश भर में 33 हजार 884 किसानों की 38 हजार 985 हेक्टेयर फसल खराब या प्रभावित हुई है. इसमें पिछले दो दिनों में महाकौशल (Mahakoshal) और बुंदेलखंड (Bundelkhand) इलाके में आई तबाही के आंकड़े शामिल नहीं है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने सोमवार को एक बैठक में ओलावृष्टि की जानकारी ली. राज्य के कृषि और राजस्व विभाग ने बताया कि ओलावृष्टि से गेंहू, चना, लहसुन, इसबगोल, धनिया, अलसी, मसूर, सरसों, मक्का एवं सब्जी की फसलें खराब हो गई हैं. इसके साथ ही 12 जिलों में बिजली गिरने से 22 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है. सीएम चौहान ने प्रभावित जिलों में तत्काल सर्वे शुरू कराने के निर्देश दिए. उन्होंने एक हफ्ते में सर्वे रिपोर्ट मांगी है. सूबे में मार्च के महीनें में 20 से 22 जिलों में ओले के साथ आफत की बारिश हुई. इससे नुकसान का आंकलन शुरू हो चुका है जिसका पूरा डाटा एक हफ्ते बाद मिल पाएगा. सरकार को मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 19 जिलों के 525 गांवों में 33 हजार 884 किसानों की 38 हजार 985 हेक्टेयर फसल खराब या प्रभावित हुई है. इस आंकड़े से सरकार भी चिंतित है. सरकार ने सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों का संयुक्त दल भी बनाया है. जानकारी के अनुसार सबसे पहले मालवा की तरफ ओलावृष्टि हुई. रतलाम, आगरमालवा, मंदसौर, विदिशा, नीमच, खरगोन, राजगढ़, रायसेन, बड़वानी, भोपाल, शाजापुर, ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना और धार जिलों में ओले गिरे. सर्वे के बाद पता चला कि रतलाम, मंदसौर, विदिशा और धार में 25% से ज्यादा नुकसान हुआ है. बाकी 12 जिलों में नुकसान कम है. नियमानुसार 25 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले जिलों में ही किसानों को राहत मिल पाएगी. दूसरे चरण में नर्मदापुरम, शहडोल, जबलपुर, चंबल, उज्जैन, सागर, इंदौर, ग्वालियर, रीवा और भोपाल संभाग के जिलों में बारिश हुई. 19 मार्च को मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर बारिश हुई. सोमवार को जबलपुर और आसपास के इलाकों में भी जबरदस्त बारिश हुई. वहीं सोमवार को विधानसभा में ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों और 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के पेपर लीक (Board Exam Paper Leak) को लेकर कांग्रेस ने हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (Govind Singh) ने कहा कि प्रदेश के 13 से 14 जिलों में ओलावृष्टि हुई और इससे फसलें खराब हो गईं. किसानों में हाहाकार मचा है लेकिन सरकार ने अब तक सर्वे शुरू नहीं कराया है. नायब तहसीलदार- तहसीलदार हड़ताल पर हैं. वहीं जब सदन में इस पर चर्चा नहीं हुई तो विरोध में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया.
बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब MP Rainfall: मध्यप्रदेश में इस महीने हुई आफत की बारिश ने किसानों की आंखों में आंसू ला दिए है. आंधी, ओले और पानी से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो गई है. सरकारी सिस्टम में अभी तक जो आंकड़े आए हैं, उसके मुताबिक प्रदेश भर में तैंतीस हजार आठ सौ चौरासी किसानों की अड़तीस हजार नौ सौ पचासी हेक्टेयर फसल खराब या प्रभावित हुई है. इसमें पिछले दो दिनों में महाकौशल और बुंदेलखंड इलाके में आई तबाही के आंकड़े शामिल नहीं है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को एक बैठक में ओलावृष्टि की जानकारी ली. राज्य के कृषि और राजस्व विभाग ने बताया कि ओलावृष्टि से गेंहू, चना, लहसुन, इसबगोल, धनिया, अलसी, मसूर, सरसों, मक्का एवं सब्जी की फसलें खराब हो गई हैं. इसके साथ ही बारह जिलों में बिजली गिरने से बाईस से ज्यादा लोगों की जान चली गई है. सीएम चौहान ने प्रभावित जिलों में तत्काल सर्वे शुरू कराने के निर्देश दिए. उन्होंने एक हफ्ते में सर्वे रिपोर्ट मांगी है. सूबे में मार्च के महीनें में बीस से बाईस जिलों में ओले के साथ आफत की बारिश हुई. इससे नुकसान का आंकलन शुरू हो चुका है जिसका पूरा डाटा एक हफ्ते बाद मिल पाएगा. सरकार को मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के उन्नीस जिलों के पाँच सौ पच्चीस गांवों में तैंतीस हजार आठ सौ चौरासी किसानों की अड़तीस हजार नौ सौ पचासी हेक्टेयर फसल खराब या प्रभावित हुई है. इस आंकड़े से सरकार भी चिंतित है. सरकार ने सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों का संयुक्त दल भी बनाया है. जानकारी के अनुसार सबसे पहले मालवा की तरफ ओलावृष्टि हुई. रतलाम, आगरमालवा, मंदसौर, विदिशा, नीमच, खरगोन, राजगढ़, रायसेन, बड़वानी, भोपाल, शाजापुर, ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना और धार जिलों में ओले गिरे. सर्वे के बाद पता चला कि रतलाम, मंदसौर, विदिशा और धार में पच्चीस% से ज्यादा नुकसान हुआ है. बाकी बारह जिलों में नुकसान कम है. नियमानुसार पच्चीस प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले जिलों में ही किसानों को राहत मिल पाएगी. दूसरे चरण में नर्मदापुरम, शहडोल, जबलपुर, चंबल, उज्जैन, सागर, इंदौर, ग्वालियर, रीवा और भोपाल संभाग के जिलों में बारिश हुई. उन्नीस मार्च को मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर बारिश हुई. सोमवार को जबलपुर और आसपास के इलाकों में भी जबरदस्त बारिश हुई. वहीं सोमवार को विधानसभा में ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों और दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षा के पेपर लीक को लेकर कांग्रेस ने हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि प्रदेश के तेरह से चौदह जिलों में ओलावृष्टि हुई और इससे फसलें खराब हो गईं. किसानों में हाहाकार मचा है लेकिन सरकार ने अब तक सर्वे शुरू नहीं कराया है. नायब तहसीलदार- तहसीलदार हड़ताल पर हैं. वहीं जब सदन में इस पर चर्चा नहीं हुई तो विरोध में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया.
विधायकों और सांसदों के खिलाफ क्रिमिनल केसों की लंबी पेंडेंसी पर उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इस मामले को डील करने के लिए ज्यादा स्पेशल और सीबीआई कोर्ट के गठन की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वह जहां भी स्पेशल कोर्ट के गठन की जरूरत है वहां इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने में मदद करे। इसके साथ पीठ ने यह निर्देश भी दिया है कि संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विधायकों के खिलाफ कोई भी आपराधिक मुकदमा वापस नहीं लिया जाना चाहिए तथा सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों को देखने वाले न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय के अगले आदेश तक, उनकी मृत्यु या सेवानिवृत्ति के अधीन, अपने पद पर बने रहना चाहिए। पीठ ने विशेष / सीबीआई न्यायालयों की स्थापना को युक्तिसंगत बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि एक राज्य में एक/दो न्यायालयों के लिए यह संभव नहीं है कि वे सभी परीक्षणों में तेजी लाएं या धारा 309, सीआरपीसी के संदर्भ में दिन-प्रतिदिन के आधार पर इसे लें। पीठ ने सुझाव दिया कि जिस राज्य में 100 से अधिक मामले हैं, उसके विभिन्न हिस्सों में विशेष / सीबीआई अदालतें होनी चाहिए। पीठ ने उच्च न्यायालयों को सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों के शीघ्र निपटान के लिए जहां भी आवश्यक हो, विशेष / सीबीआई अदालतें स्थापित करने के लिए कहा। पीठ ने उच्च न्यायालयों को केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा किसी भी असहयोग की स्थिति में आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्चतम न्यायालय को स्थिति रिपोर्ट भेजने का भी निर्देश दिया। पीठ ने उच्च न्यायालयों से कहा है कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि समय पर ऐसे मामले का ट्रायल सुनिश्चित हो। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की अर्जी पर सुनवाई के दौरान पीठ ने उक्त आदेश पारित किया। उपाध्याय ने कहा है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल केस के जल्द निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाए। पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य में एक या दो स्पेशल कोर्ट न्याय का उपहास होगा क्योंकि बड़ी संख्या में पेंडिंग केस हैं। पीठ ने इस संबंध में उच्च न्यायालयों द्वारा गठित विशेष खंडपीठ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जहां तक शीघ्र निपटान में सहयोग का संबंध है, राज्य पुलिस या अभियोजन एजेंसी की ओर से कोई ढिलाई न बरती जाए। उच्च न्यायालयों द्वारा निरंतर न्यायिक निगरानी, पर्यवेक्षण और सतर्कता होनी चाहिए। पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को पर्याप्त न्यायालय स्थापित करने और समय-समय पर शीर्ष न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का सावधानीपूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करने की उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई है। पीठ ने मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि भोपाल में एक स्पेशल कोर्ट है राज्य के अलग-अलग इलाके से फिजिकल तौर पर लोगों की पेशी संभव नहीं है। ये न्याय का उपहास है। पीठ ने कहा कि राज्यों में कई स्पेशल कोर्ट और सीबीआई कोर्ट के गठन की जरूरत है। ये संभव नहीं है कि राज्य में एक या दो स्पेशल कोर्ट में ट्रायल हो। पीठ ने सुझाया है कि राज्य के अलग-अलग इलाके में स्पेशल कोर्ट का गठन हो और जहां 100 से ज्यादा केस पेंडिंग है वहां कोर्ट का गठन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि पेंडिंग केसों के ट्रायल के लिए जहां भी जरूरत है वहां स्पेशल कोर्ट का गठन करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें हाई कोर्ट को पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराएं ताकि जरूरत के हिसाब से स्पेशल कोर्ट का गठन किया जा सके। पीठ ने कहा कि अदालत के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि वह सीबीआई डायरेक्टर से मिलकर मामला उठाएंगे कि पर्याप्त मैन पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सीबीआई को मिले ताकि समय पर छानबीन पूरा किया जा सके। पीठ ने एसजी मेहता को अदालत के आदेशों का पालन करने और लंबित मामलों से संबंधित स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया था। पीठ ने सीबीआई निर्देश दिया है कि सीबीआई आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी और आरोप तय करने और मुकदमे को समाप्त करने के लिए आगे बढ़ने के लिए सीबीआई अदालतों को आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। सीबीआई यह सुनिश्चित करेगी कि अभियोजन पक्ष गवाह को पेश करने में उसकी ओर से कोई चूक न हो। पीठ ने सीबीआई द्वारा पेश स्थिति रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए उपरोक्त निर्देश पारित किए। रिपोर्ट से पता चला है कि विभिन्न सीबीआई अदालतों में मौजूदा सांसदों और पूर्व सांसदों से जुड़े 121 मामले और मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों से जुड़े 112 मामले लंबित हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, 37 मामले अभी भी जांच के चरण में हैं, जिनमें से सबसे पुराने 24 अक्टूबर 2013 को दर्ज किए गए हैं। लंबित मुकदमे के विवरण से पता चलता है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें वर्ष 2000 तक आरोप पत्र दायर किया गया था, लेकिन अभी भी या तो आरोपी की पेशी, आरोप तय करने या अभियोजन साक्ष्य के लिए लंबित हैं। (जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)
विधायकों और सांसदों के खिलाफ क्रिमिनल केसों की लंबी पेंडेंसी पर उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इस मामले को डील करने के लिए ज्यादा स्पेशल और सीबीआई कोर्ट के गठन की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वह जहां भी स्पेशल कोर्ट के गठन की जरूरत है वहां इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने में मदद करे। इसके साथ पीठ ने यह निर्देश भी दिया है कि संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विधायकों के खिलाफ कोई भी आपराधिक मुकदमा वापस नहीं लिया जाना चाहिए तथा सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों को देखने वाले न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय के अगले आदेश तक, उनकी मृत्यु या सेवानिवृत्ति के अधीन, अपने पद पर बने रहना चाहिए। पीठ ने विशेष / सीबीआई न्यायालयों की स्थापना को युक्तिसंगत बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि एक राज्य में एक/दो न्यायालयों के लिए यह संभव नहीं है कि वे सभी परीक्षणों में तेजी लाएं या धारा तीन सौ नौ, सीआरपीसी के संदर्भ में दिन-प्रतिदिन के आधार पर इसे लें। पीठ ने सुझाव दिया कि जिस राज्य में एक सौ से अधिक मामले हैं, उसके विभिन्न हिस्सों में विशेष / सीबीआई अदालतें होनी चाहिए। पीठ ने उच्च न्यायालयों को सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों के शीघ्र निपटान के लिए जहां भी आवश्यक हो, विशेष / सीबीआई अदालतें स्थापित करने के लिए कहा। पीठ ने उच्च न्यायालयों को केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा किसी भी असहयोग की स्थिति में आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्चतम न्यायालय को स्थिति रिपोर्ट भेजने का भी निर्देश दिया। पीठ ने उच्च न्यायालयों से कहा है कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि समय पर ऐसे मामले का ट्रायल सुनिश्चित हो। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की अर्जी पर सुनवाई के दौरान पीठ ने उक्त आदेश पारित किया। उपाध्याय ने कहा है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल केस के जल्द निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाए। पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य में एक या दो स्पेशल कोर्ट न्याय का उपहास होगा क्योंकि बड़ी संख्या में पेंडिंग केस हैं। पीठ ने इस संबंध में उच्च न्यायालयों द्वारा गठित विशेष खंडपीठ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जहां तक शीघ्र निपटान में सहयोग का संबंध है, राज्य पुलिस या अभियोजन एजेंसी की ओर से कोई ढिलाई न बरती जाए। उच्च न्यायालयों द्वारा निरंतर न्यायिक निगरानी, पर्यवेक्षण और सतर्कता होनी चाहिए। पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को पर्याप्त न्यायालय स्थापित करने और समय-समय पर शीर्ष न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का सावधानीपूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करने की उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई है। पीठ ने मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि भोपाल में एक स्पेशल कोर्ट है राज्य के अलग-अलग इलाके से फिजिकल तौर पर लोगों की पेशी संभव नहीं है। ये न्याय का उपहास है। पीठ ने कहा कि राज्यों में कई स्पेशल कोर्ट और सीबीआई कोर्ट के गठन की जरूरत है। ये संभव नहीं है कि राज्य में एक या दो स्पेशल कोर्ट में ट्रायल हो। पीठ ने सुझाया है कि राज्य के अलग-अलग इलाके में स्पेशल कोर्ट का गठन हो और जहां एक सौ से ज्यादा केस पेंडिंग है वहां कोर्ट का गठन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि पेंडिंग केसों के ट्रायल के लिए जहां भी जरूरत है वहां स्पेशल कोर्ट का गठन करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें हाई कोर्ट को पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराएं ताकि जरूरत के हिसाब से स्पेशल कोर्ट का गठन किया जा सके। पीठ ने कहा कि अदालत के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि वह सीबीआई डायरेक्टर से मिलकर मामला उठाएंगे कि पर्याप्त मैन पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सीबीआई को मिले ताकि समय पर छानबीन पूरा किया जा सके। पीठ ने एसजी मेहता को अदालत के आदेशों का पालन करने और लंबित मामलों से संबंधित स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। पीठ ने सीबीआई निर्देश दिया है कि सीबीआई आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी और आरोप तय करने और मुकदमे को समाप्त करने के लिए आगे बढ़ने के लिए सीबीआई अदालतों को आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। सीबीआई यह सुनिश्चित करेगी कि अभियोजन पक्ष गवाह को पेश करने में उसकी ओर से कोई चूक न हो। पीठ ने सीबीआई द्वारा पेश स्थिति रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए उपरोक्त निर्देश पारित किए। रिपोर्ट से पता चला है कि विभिन्न सीबीआई अदालतों में मौजूदा सांसदों और पूर्व सांसदों से जुड़े एक सौ इक्कीस मामले और मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों से जुड़े एक सौ बारह मामले लंबित हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, सैंतीस मामले अभी भी जांच के चरण में हैं, जिनमें से सबसे पुराने चौबीस अक्टूबर दो हज़ार तेरह को दर्ज किए गए हैं। लंबित मुकदमे के विवरण से पता चलता है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें वर्ष दो हज़ार तक आरोप पत्र दायर किया गया था, लेकिन अभी भी या तो आरोपी की पेशी, आरोप तय करने या अभियोजन साक्ष्य के लिए लंबित हैं।
लखनऊः लखनऊ के खिलाड़ियों ने इंदौर में चल रही राष्ट्रीय स्कूली कराटे प्रतियोगिता के दूसरे दिन एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते. पदक विजेता खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार है. :- स्वर्णः प्रशांत सिंह यादव -30 किग्रा, रजतः सक्षम राज -35 किग्रा, कांस्यः रितिक सोनकर -40 किग्रा. स्वर्ण पदकः रिया चौहान, अनिकेत चौधरी, प्रदीप यादव, दिव्यांशी सिंह, श्वेता, सिद्धार्थ कुमार, पीहू साखिया, सत्यम यादव, अनिमेश विश्वकर्मा, विहान अग्रवाल, विहान आदित्य, रविन्द्र कुमार, श्रेयांश सिंह, सिद्धार्थ सिंह, पावनी सिंह, जन्नत खान, मिहूल शुक्ला, प्रगनया सिंह, ओम शुक्ला, देवांश श्रीवास्तव, जैनब, अथर्व मिश्रा, रजत पदकः पलक चौहान, सौर्य कुमार,सैजी खान, सान्य अवस्थी, यशराज गुप्ता, युवराज जायसवाल, समृद्धि राय, नेवान दीक्षित, श्रेयांशी शुक्ला, अनवेश कुमार, वैष्णवी द्विवेदी, अनुज सिंह, आयुष्मिता पटेल, अक्षिता शाह, प्रथम अवस्थी, स्वर्णिमा तिवारी, शिवम वर्मा, राघवेन्द्र पाण्डेय, कांस्य पदकः शिवांश वर्मा, हरून्य सिंह, अभ्युदय विक्रम सिंह, यजत सिंह, अक्षत शाह, प्रतीक कुमार, वगीशा आलम, फातिमाह जहरा, बबीता वर्मा, नील यादव, विनायक गुप्ता, विशाल सिंह, रोहित चौधरी, श्रेयांश गुप्ता।
लखनऊः लखनऊ के खिलाड़ियों ने इंदौर में चल रही राष्ट्रीय स्कूली कराटे प्रतियोगिता के दूसरे दिन एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते. पदक विजेता खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार है. :- स्वर्णः प्रशांत सिंह यादव -तीस किग्रा, रजतः सक्षम राज -पैंतीस किग्रा, कांस्यः रितिक सोनकर -चालीस किग्रा. स्वर्ण पदकः रिया चौहान, अनिकेत चौधरी, प्रदीप यादव, दिव्यांशी सिंह, श्वेता, सिद्धार्थ कुमार, पीहू साखिया, सत्यम यादव, अनिमेश विश्वकर्मा, विहान अग्रवाल, विहान आदित्य, रविन्द्र कुमार, श्रेयांश सिंह, सिद्धार्थ सिंह, पावनी सिंह, जन्नत खान, मिहूल शुक्ला, प्रगनया सिंह, ओम शुक्ला, देवांश श्रीवास्तव, जैनब, अथर्व मिश्रा, रजत पदकः पलक चौहान, सौर्य कुमार,सैजी खान, सान्य अवस्थी, यशराज गुप्ता, युवराज जायसवाल, समृद्धि राय, नेवान दीक्षित, श्रेयांशी शुक्ला, अनवेश कुमार, वैष्णवी द्विवेदी, अनुज सिंह, आयुष्मिता पटेल, अक्षिता शाह, प्रथम अवस्थी, स्वर्णिमा तिवारी, शिवम वर्मा, राघवेन्द्र पाण्डेय, कांस्य पदकः शिवांश वर्मा, हरून्य सिंह, अभ्युदय विक्रम सिंह, यजत सिंह, अक्षत शाह, प्रतीक कुमार, वगीशा आलम, फातिमाह जहरा, बबीता वर्मा, नील यादव, विनायक गुप्ता, विशाल सिंह, रोहित चौधरी, श्रेयांश गुप्ता।
इंडिया न्यूज, मुंबईः Kiara Advani Sister Ishita Advani Wedding Photo: बॉलीवुड की मोस्ट ब्यूटीफुल हीरोइन कियारा आडवाणी (Kiara Advani) की बहन इशिता (Ishita Advani Wedding) की शादी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बता दें कि कियारा ने अपनी बहन इशिता की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। इन फोटोज में अदाकारा अपनी बहन को खुद हाथों से सजाती दिख रही हैं। वहीं कियारा आडवाणी इन दिनों अपनी बहन इशिता की शादी की तैयारी में बिजी हैं। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी बहन इशिता आडवाणी की शादी की तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें फिल्म स्टार अपनी बहन इशिता को दुल्हन के रुप में तैयार करती दिख रही हैं। साथ ही कियारा आडवाणी की बहन इशिता लाल रंग के जोड़े में नजर आ रही हैं। कियारा आडवाणी ने अपनी बहन इशिता की शादी के लिए तैयार होने के बाद अपनी नई तस्वीर शेयर कर शादी का लुक शेयर किया था। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी ने दुल्हन बनी अपनी बहन इशिता के साथ दुल्हन के कमरे से ये तस्वीर शेयर की है। जिसमें एक्ट्रेस बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी ने अपनी बहन इशिता को अपने हाथों से दुल्हन बनाया। जिसकी तस्वीर अदाकारा ने इंस्टाग्राम पर शेयर की है। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी की बहन इशिता की शादी गोवा में हो रही है। जहां अदाकारा के परिवार ने डेस्टिनेशन वेडिंग प्लान की है।
इंडिया न्यूज, मुंबईः Kiara Advani Sister Ishita Advani Wedding Photo: बॉलीवुड की मोस्ट ब्यूटीफुल हीरोइन कियारा आडवाणी की बहन इशिता की शादी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बता दें कि कियारा ने अपनी बहन इशिता की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। इन फोटोज में अदाकारा अपनी बहन को खुद हाथों से सजाती दिख रही हैं। वहीं कियारा आडवाणी इन दिनों अपनी बहन इशिता की शादी की तैयारी में बिजी हैं। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी बहन इशिता आडवाणी की शादी की तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें फिल्म स्टार अपनी बहन इशिता को दुल्हन के रुप में तैयार करती दिख रही हैं। साथ ही कियारा आडवाणी की बहन इशिता लाल रंग के जोड़े में नजर आ रही हैं। कियारा आडवाणी ने अपनी बहन इशिता की शादी के लिए तैयार होने के बाद अपनी नई तस्वीर शेयर कर शादी का लुक शेयर किया था। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी ने दुल्हन बनी अपनी बहन इशिता के साथ दुल्हन के कमरे से ये तस्वीर शेयर की है। जिसमें एक्ट्रेस बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी ने अपनी बहन इशिता को अपने हाथों से दुल्हन बनाया। जिसकी तस्वीर अदाकारा ने इंस्टाग्राम पर शेयर की है। फिल्म स्टार कियारा आडवाणी की बहन इशिता की शादी गोवा में हो रही है। जहां अदाकारा के परिवार ने डेस्टिनेशन वेडिंग प्लान की है।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की छात्रा रहीं कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की नेता शेहला रशीद की तरफ से लगाए गए आरोपों पर सेना ने पलटवार किया है। शेहला ने आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के बड़े फैसले के बाद घाटी के हालात को लेकर कुछ आरोप लगाए थे, जिन्हें सेना ने बेबुनियाद करार दिया। सेना ने बयान जारी करते हुए कहा, 'इस तरह की अपुष्ट और फर्जी खबरें विरोधी तत्वों की तरफ से फैलाई जा रही हैं। ' सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला रशीद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने भारत सरकार और सेना के के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने पर शेहला को गिरफ्तार करने की मांग की। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लगभग दो हफ्तों बाद श्रीनगर में 190 स्कूलों को फिर से खोल दिया है। मुख्य सचिव (योजना-विकास) रोहित कंसल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि धीरे-धीरे घाटी में लोगों पर प्रतिबंध कम कर उन्हें राहत दी जा रही है।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की छात्रा रहीं कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की नेता शेहला रशीद की तरफ से लगाए गए आरोपों पर सेना ने पलटवार किया है। शेहला ने आर्टिकल तीन सौ सत्तर और जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के बड़े फैसले के बाद घाटी के हालात को लेकर कुछ आरोप लगाए थे, जिन्हें सेना ने बेबुनियाद करार दिया। सेना ने बयान जारी करते हुए कहा, 'इस तरह की अपुष्ट और फर्जी खबरें विरोधी तत्वों की तरफ से फैलाई जा रही हैं। ' सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला रशीद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने भारत सरकार और सेना के के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने पर शेहला को गिरफ्तार करने की मांग की। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लगभग दो हफ्तों बाद श्रीनगर में एक सौ नब्बे स्कूलों को फिर से खोल दिया है। मुख्य सचिव रोहित कंसल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि धीरे-धीरे घाटी में लोगों पर प्रतिबंध कम कर उन्हें राहत दी जा रही है।
हरिद्वार में धर्म संसद के नाम पर जिस तरह खास समुदाय के नरसंहार के लिए उकसाया गया, उसके खिलाफ कांग्रेस और राजद आगे आए। जदयू में सन्नाटा। हरिद्वार और दिल्ली में एक खास समुदाय का नरसंहार करने की धमकी दी गई। देश-विदेश में ये वीडियो देखे गए। नफरत और हिंसा की बात करनेवालों को कोई अफसोस नहीं है। वे अपने बयान को दुहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें किसी से डर नहीं लगता। वे संविधान को मानने से इंकार कर रहे। कह रहे कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक वीडियो जारी करके कहा कि अगर आज भारत के लोग चुप रहे, तो पीढ़ियां तबाह हो जाएंगी। कहा, बहुत चिंता के साथ वीडियो जारी कर रहा हूं। आज हिंदू धर्म को सबसे बड़ा खतरा स्वयंभू ठेकेदारों से हैं। हिंदू राष्ट्र का आह्वान हुआ। नरसंहार का आह्वान हुआ। कहा हैं प्रधानमंत्री, कहां है पुलिस, कहां है मीडिया? अब खतरा हमारे वजूद पर है। हिंदुस्तान को समावेशी राष्ट्र बनाने का हमने जो सपना देखा था, वह खतरे में है। अगर आज हम चुप रहे, तो माफ कीजिए यह रास्ता तबाही का रास्ता है। दुनिया का इतिहास उटाकर देख लीजिए। आज हमने आवाज नहीं उठाई, तो कल हम अपने बच्चों से आंख नहीं मिला पाएंगे। बच्चे पूछेंगे कि जब आज ये धमकी दे रहे हैं, कल ये कुछ करेंगे। देश की अवाम इन्हें रोकने के लिए आगे आए। बिहार के सबसे बड़े दल राजद ने भी तीखी प्रतिक्रिया जताई है। पार्टी ने ट्वीट किया-कण-कण में व्यापें है राम ढोंगियों मत फैलाओं दंगा, लेकर उनका नाम ये आतंकवादी है। इन नरपिशाचों की तत्काल गिरफ़्तारी होनी चाहिए। RJ साएमा ने कहा-अब इस देश को हिंदू ही बचा सकते हैं। लेखक अशोक कुमार पांडेय ने कहा-वो आपके बच्चों दो चीज़ें देना चाहते हैं - पाँच हज़ार का मोबाइल और एक लाख का हथियार। ताकि उनके मालिकों के बच्चों को किताबें, स्वास्थ्य, शिक्षा, शांतिपूर्ण जीवन और ऐश-ओ-आराम मिल सके। क्या आप अपने बच्चों को अपराधी बनाने के लिए तैयार हैं?
हरिद्वार में धर्म संसद के नाम पर जिस तरह खास समुदाय के नरसंहार के लिए उकसाया गया, उसके खिलाफ कांग्रेस और राजद आगे आए। जदयू में सन्नाटा। हरिद्वार और दिल्ली में एक खास समुदाय का नरसंहार करने की धमकी दी गई। देश-विदेश में ये वीडियो देखे गए। नफरत और हिंसा की बात करनेवालों को कोई अफसोस नहीं है। वे अपने बयान को दुहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें किसी से डर नहीं लगता। वे संविधान को मानने से इंकार कर रहे। कह रहे कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक वीडियो जारी करके कहा कि अगर आज भारत के लोग चुप रहे, तो पीढ़ियां तबाह हो जाएंगी। कहा, बहुत चिंता के साथ वीडियो जारी कर रहा हूं। आज हिंदू धर्म को सबसे बड़ा खतरा स्वयंभू ठेकेदारों से हैं। हिंदू राष्ट्र का आह्वान हुआ। नरसंहार का आह्वान हुआ। कहा हैं प्रधानमंत्री, कहां है पुलिस, कहां है मीडिया? अब खतरा हमारे वजूद पर है। हिंदुस्तान को समावेशी राष्ट्र बनाने का हमने जो सपना देखा था, वह खतरे में है। अगर आज हम चुप रहे, तो माफ कीजिए यह रास्ता तबाही का रास्ता है। दुनिया का इतिहास उटाकर देख लीजिए। आज हमने आवाज नहीं उठाई, तो कल हम अपने बच्चों से आंख नहीं मिला पाएंगे। बच्चे पूछेंगे कि जब आज ये धमकी दे रहे हैं, कल ये कुछ करेंगे। देश की अवाम इन्हें रोकने के लिए आगे आए। बिहार के सबसे बड़े दल राजद ने भी तीखी प्रतिक्रिया जताई है। पार्टी ने ट्वीट किया-कण-कण में व्यापें है राम ढोंगियों मत फैलाओं दंगा, लेकर उनका नाम ये आतंकवादी है। इन नरपिशाचों की तत्काल गिरफ़्तारी होनी चाहिए। RJ साएमा ने कहा-अब इस देश को हिंदू ही बचा सकते हैं। लेखक अशोक कुमार पांडेय ने कहा-वो आपके बच्चों दो चीज़ें देना चाहते हैं - पाँच हज़ार का मोबाइल और एक लाख का हथियार। ताकि उनके मालिकों के बच्चों को किताबें, स्वास्थ्य, शिक्षा, शांतिपूर्ण जीवन और ऐश-ओ-आराम मिल सके। क्या आप अपने बच्चों को अपराधी बनाने के लिए तैयार हैं?
वेलिंगटन। न्यूजीलैंड के शीर्ष खिलाड़ी इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दिन-रात का टेस्ट खेलने के प्रस्ताव के खिलाफ है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि इससे खेल का महत्व कम होगा। न्यूजीलैंड क्रिकेटर संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीथ मिल्स ने कहा कि दिन-रात के क्रिकेट में दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद से खला जाता है और सीए इसे बढ़ावा दे रहा है। उसने शेफील्ड शील्ड मैचों में यह प्रयोग किया और नवंबर में न्यूजीलैंड टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी यह प्रयोग करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेटर इसके खिलाफ है। हमने खिलाड़ियों के बीच सर्वे कराया और पाया कि वे दिन-रात के टेस्ट क्रिकेट पक्ष में नहीं है। न्यूजीलैंड को ऑस्ट्रेलिया में तीन टेस्ट खेलने हैं। उन्होंने कहा कि कीवी क्रिकेटर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज को बहुत अहमियत देते हैं और चाहते हैं कि यह पारंपरिक नियमों के तहत ही खेली जाए। हम ऑस्ट्रेलिया से बहुत ज्यादा नहीं खेल पाते। लिहाजा यह दुर्लभ मौका है। कई खिलाड़ियों के लिए यह उनके करियर की सबसे अहम सीरीज है। वह ऐसा कुछ नहीं चाहते जिससे इसका महत्व कम हो।
वेलिंगटन। न्यूजीलैंड के शीर्ष खिलाड़ी इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दिन-रात का टेस्ट खेलने के प्रस्ताव के खिलाफ है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि इससे खेल का महत्व कम होगा। न्यूजीलैंड क्रिकेटर संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीथ मिल्स ने कहा कि दिन-रात के क्रिकेट में दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद से खला जाता है और सीए इसे बढ़ावा दे रहा है। उसने शेफील्ड शील्ड मैचों में यह प्रयोग किया और नवंबर में न्यूजीलैंड टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी यह प्रयोग करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेटर इसके खिलाफ है। हमने खिलाड़ियों के बीच सर्वे कराया और पाया कि वे दिन-रात के टेस्ट क्रिकेट पक्ष में नहीं है। न्यूजीलैंड को ऑस्ट्रेलिया में तीन टेस्ट खेलने हैं। उन्होंने कहा कि कीवी क्रिकेटर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज को बहुत अहमियत देते हैं और चाहते हैं कि यह पारंपरिक नियमों के तहत ही खेली जाए। हम ऑस्ट्रेलिया से बहुत ज्यादा नहीं खेल पाते। लिहाजा यह दुर्लभ मौका है। कई खिलाड़ियों के लिए यह उनके करियर की सबसे अहम सीरीज है। वह ऐसा कुछ नहीं चाहते जिससे इसका महत्व कम हो।
मिर्जापुर। नौंवे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पावन शुभ अवसर पर पतंजलि युवा भारत एवं विंध्य योग सेवा धाम ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में छानबे के गैपुरा स्तिथ राजकीय औद्योगिक शिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राओं संघ अध्यापकों ने विश्व योग दिवस पर किया अभ्यास। पतंजलि युवा भारत के राज्य महामंत्री योग गुरु योगी ज्वाला ने विश्व योग दिवस के प्रोटोकॉल का अभ्यास कराते हुए जनपद के विभिन्न स्थानों से आए हुए छात्र छात्राओं को खड़े होकर करने वाले आसन बैठकर करने वाले आसन पेट के बल लेट कर करने वाले आसन एवं पीठ के बल लेटकर करने वाले आसनों का अभ्यास कराते हुए उससे होने वाले लाभ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी । इस अवसर पर उन्होंने योग प्रोटोकॉल के साथ-साथ मकरासन शलभासन भुजंगासन तिर्यक भुजंगासन विपरीत नौकासन पश्चिमोत्तानासन वक्रासन गोमुखासन त्रिकोणासन ताड़ासन वृक्षासन कोणासन कुर्सीआसन पादहस्तासन के साथ-साथ भस्त्रिका अनुलोम विलोम कपालभाति शीतली शीतकारी भ्रामरी उद्गीथ आदि प्राणायामो का अभ्यास कराते हुए उससे होने वाले लाभ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए लोगों को परिचित कराया। जिला योगासन खेल संघ के उपाध्यक्ष अश्वनी पांडेय ने कहा कि जीरो बैलेंस में स्वस्थ रहने का मार्ग है योग जिसे स्वीकार कर मनुष्य अपने जीवन को पूर्ण रूप से स्वस्थ एवं निरोग बना सकता है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य आलोक कुमार ने कहा कि विश्व योग गुरु बाबा रामदेव एवं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के भागीरथी के प्रयास से विश्व पटल पर छाया योग , जहां देश ही नहीं अभी तो पूरे विश्व में युग का शंखनाद गूंज रहा है , जो इस बात का परिचायक है कि आने वाले समय में योग के सहारे ही भारत विश्व गुरु बनने जा रहा है। पतंजलि युवा भारत के जिला प्रभारी प्रवीण आर्य ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि एक भारतीय वजीर व फकीर मिलकर भारत देश की दशा और दिशा को योग के सहारे परिवर्तित कर तथा योगासन को खेल में शामिल कर योग को विश्व पटल पर स्थापित कर एक नया इतिहास रचा है । इस अवसर पर जिला योगासन खेल संघ के अध्यक्ष अमन यादव योग प्रशिक्षक करुणानिधि यादव अनिल मौर्य शिक्षक एवं शिक्षिकाओ में अभिषेक पांडेय अजीत कुमार मीनाक्षी शर्मा सरिता सिंह रामजी गजराज सविता मौर्या अंजली नेहा निर्जला ईशा निशा यादव जितेंद्र कुमार प्राची यादव प्रतिभा आदि लोगों ने पूरी उत्साह के साथ मनाया विश्व योग दिवस।
मिर्जापुर। नौंवे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पावन शुभ अवसर पर पतंजलि युवा भारत एवं विंध्य योग सेवा धाम ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में छानबे के गैपुरा स्तिथ राजकीय औद्योगिक शिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राओं संघ अध्यापकों ने विश्व योग दिवस पर किया अभ्यास। पतंजलि युवा भारत के राज्य महामंत्री योग गुरु योगी ज्वाला ने विश्व योग दिवस के प्रोटोकॉल का अभ्यास कराते हुए जनपद के विभिन्न स्थानों से आए हुए छात्र छात्राओं को खड़े होकर करने वाले आसन बैठकर करने वाले आसन पेट के बल लेट कर करने वाले आसन एवं पीठ के बल लेटकर करने वाले आसनों का अभ्यास कराते हुए उससे होने वाले लाभ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी । इस अवसर पर उन्होंने योग प्रोटोकॉल के साथ-साथ मकरासन शलभासन भुजंगासन तिर्यक भुजंगासन विपरीत नौकासन पश्चिमोत्तानासन वक्रासन गोमुखासन त्रिकोणासन ताड़ासन वृक्षासन कोणासन कुर्सीआसन पादहस्तासन के साथ-साथ भस्त्रिका अनुलोम विलोम कपालभाति शीतली शीतकारी भ्रामरी उद्गीथ आदि प्राणायामो का अभ्यास कराते हुए उससे होने वाले लाभ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए लोगों को परिचित कराया। जिला योगासन खेल संघ के उपाध्यक्ष अश्वनी पांडेय ने कहा कि जीरो बैलेंस में स्वस्थ रहने का मार्ग है योग जिसे स्वीकार कर मनुष्य अपने जीवन को पूर्ण रूप से स्वस्थ एवं निरोग बना सकता है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य आलोक कुमार ने कहा कि विश्व योग गुरु बाबा रामदेव एवं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के भागीरथी के प्रयास से विश्व पटल पर छाया योग , जहां देश ही नहीं अभी तो पूरे विश्व में युग का शंखनाद गूंज रहा है , जो इस बात का परिचायक है कि आने वाले समय में योग के सहारे ही भारत विश्व गुरु बनने जा रहा है। पतंजलि युवा भारत के जिला प्रभारी प्रवीण आर्य ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि एक भारतीय वजीर व फकीर मिलकर भारत देश की दशा और दिशा को योग के सहारे परिवर्तित कर तथा योगासन को खेल में शामिल कर योग को विश्व पटल पर स्थापित कर एक नया इतिहास रचा है । इस अवसर पर जिला योगासन खेल संघ के अध्यक्ष अमन यादव योग प्रशिक्षक करुणानिधि यादव अनिल मौर्य शिक्षक एवं शिक्षिकाओ में अभिषेक पांडेय अजीत कुमार मीनाक्षी शर्मा सरिता सिंह रामजी गजराज सविता मौर्या अंजली नेहा निर्जला ईशा निशा यादव जितेंद्र कुमार प्राची यादव प्रतिभा आदि लोगों ने पूरी उत्साह के साथ मनाया विश्व योग दिवस।
फगवाड़ा (जलोटा): जीएनए विश्वविद्यालय ने पुष्पा गुजराल साइंस सिटी (पीजीएससी) कपूरथला के साथ पर्यावरण, वास्तविक समय सामुदायिक मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम करने और समाज के लिए अभिनव समाधान विकसित करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। पुष्पा गुजराल साइंस सिटी (पीजीएससी) की महानिदेशक डॉ. नीलिमा जेरथ ने कहा कि "यह समझौता ज्ञापन आधिकारिक तौर पर पर्यावरण, नवाचार, छात्र और शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्रों में विकास की खोज में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को चिह्नित करता है। जीएनए विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर एस. गुरदीप सिंह सिहरा ने कहा कि "मुझे इस प्रतिष्ठित संस्थान के साथ ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने और समाज हित के लिए काम करने की खुशी है। यह समझौता ज्ञापन अभिनव समाधान लाने के लिए मिलकर काम करने के अवसरों का भी पता लगाएगा जो वास्तविक समय के मुद्दों को हल करने के लिए समाज के लिए काम कर सकते हैं। जीएनए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ वीके रतन ने कहा कि पुष्पा गुजराल साइंस सिटी हमारे छात्रों को व्यावहारिक तरीके से पर्यावरण का अध्ययन करने में मदद कर सकता है जो यूजीसी द्वारा अनिवार्य भी है। जीएनए विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. हेमंत शर्मा ने कहा कि पुष्पा गुजराल साइंस सिटी और जीएनए विश्वविद्यालय विभिन्न पहलुओं में समाज की सेवा करने के लिए विज्ञान, नवाचार और हालिया प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं। इस मौके पर अनेक गण्यमान्य मौजूद थे।
फगवाड़ा : जीएनए विश्वविद्यालय ने पुष्पा गुजराल साइंस सिटी कपूरथला के साथ पर्यावरण, वास्तविक समय सामुदायिक मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम करने और समाज के लिए अभिनव समाधान विकसित करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की महानिदेशक डॉ. नीलिमा जेरथ ने कहा कि "यह समझौता ज्ञापन आधिकारिक तौर पर पर्यावरण, नवाचार, छात्र और शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्रों में विकास की खोज में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को चिह्नित करता है। जीएनए विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर एस. गुरदीप सिंह सिहरा ने कहा कि "मुझे इस प्रतिष्ठित संस्थान के साथ ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने और समाज हित के लिए काम करने की खुशी है। यह समझौता ज्ञापन अभिनव समाधान लाने के लिए मिलकर काम करने के अवसरों का भी पता लगाएगा जो वास्तविक समय के मुद्दों को हल करने के लिए समाज के लिए काम कर सकते हैं। जीएनए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ वीके रतन ने कहा कि पुष्पा गुजराल साइंस सिटी हमारे छात्रों को व्यावहारिक तरीके से पर्यावरण का अध्ययन करने में मदद कर सकता है जो यूजीसी द्वारा अनिवार्य भी है। जीएनए विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. हेमंत शर्मा ने कहा कि पुष्पा गुजराल साइंस सिटी और जीएनए विश्वविद्यालय विभिन्न पहलुओं में समाज की सेवा करने के लिए विज्ञान, नवाचार और हालिया प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं। इस मौके पर अनेक गण्यमान्य मौजूद थे।
'दिनकर' जी कवि-रूप में प्रकाशमान हैं । पर जहाँ-कहीं गम्भीर या सहज गद्य लिखा है वहाँ अपने नाम के अनुरूप चमक रहे हैं । प्रसिद्ध औपन्यामिक श्रीअनूपलाल मंडल की भाषा भी कहीं गम्भीर और कहीं सरल होती है। श्रीभुवनेश्वर सिंह 'भुवन' की गद्यशैली भी यथोचित प्रसंग के अनुकूल चड़ी मनभावनी होती है। इनकी गद्य- गरिमा 'वैशाली' के प्रांगण में चमक चुकी है। श्रीजयकिशोरनारायण सिंह में ललित साहित्य की रचना की आश्चर्यजनक प्रतिभा है। आपके कलामंडित निबन्ध सचमुच साहित्य को अक्षय्य सम्पत्ति हैं । आपके गद्य में आपकी कवित्व शक्ति का सहयोग मणिकाञ्चन-संयोग के सदृश श्रादकर प्रतीत होता है। कविवर 'आरसी' जी की गद्य-रचना भी मनोहारिणी होती है। उनकी चितचोर कहानियाँ बड़ी दिलचस्पी से पढ़ी जाती हैं । उनका गद्य सुस्वादु और चित्तप्रसादक होता है। गोपालसिंह 'नैपाली' का कविहृदय गद्य का हीरक हार पहने देख पड़ता है। इनका गद्य वड़ा स्निग्ध, शीतल, सुरुचिवर्द्धक और शोभन होता है। श्रीभोलालाल दास, वी० ए०, बी० एल० ने गम्भीर गद्य भी लिखा है, सरल भी । 'अक्षरो की लड़ाई' सरीखी नये ढंग की पुस्तक में सरसता और सरलता पूरी सफाई से दिखाई है । 'विद्यापति - साहित्य' के स्वाध्यायी आलोचक श्रीनरेन्द्रनाथ दास भी इसी शैली के लेखक हैं । इनका 'विद्यापति-काव्य लोक' कमनीय गद्य-ग्रन्थ है । इनके अतिरिक्त बिहार में और भी उच्च कोटि के गद्यकार हैं जिनकी शैली वड़ी निर्मल, मधुर, प्रसन्न और आलोकप्रद होती है । यथा - डाक्टर जनार्दन मिश्र, प्रोफेसर कृपानाथ मिश्र एम० ए०, प्रोफेसर धर्मेन्द्रब्रह्मचारी शास्त्री एम० ए०, प्रोफेसर विश्वनाथप्रसाद साहित्याचार्य साहित्यरत्र एम० ए०, प्रोफेसर महेश्वरीप्रसाद सिंह 'महेश' एम० ए०, श्रीरामावतार शर्मा एम० ए० वी० एल०, श्रीदुर्गाशंकरप्रसाद सिंह, साहित्याचार्य मग, श्रीरामधारीप्रसाद 'विशारद', श्रीमथुराप्रसाद दीक्षित, श्रीगोवर्द्धनलाल गुम एम० ए० बी० एल०, श्रीजानकीवल्लभ शास्त्री, श्रीहंसकुमार तिवारी, भीललितकुमार सिंह 'नटवर', श्रीराधारमण शास्त्री, प्रोफेसर नवलकिशोर गौड़ एम० ए० इत्यादि । इनमे डाक्टर जनार्दन मिश्र और प्रोफेसर धर्मेन्द्र शास्त्री बड़े विद्वान समालोचक और अन्वेषक हैं। दोनों के गद्य-मन्थ प्रकाशित और प्रचारित आदि प्रथितयशा पत्र-पत्रिकाओं का सफलतापूर्वक सम्पादन करके पर्याप्त प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके हैं। आपके लिखे हुए सम्पादकीय लेख आपकी प्रगतिशील विचार धारा के परिचायक हैं। पं० दिनेशदत्त का बी. ए. हिन्दी-संसार के अनुभवी पत्रकार हैं। आपके गम्भीराशय विशुद्ध गद्य से सर्वश्रेष्ठ दैनिक 'आज' लगभग पन्द्रह-चोस वर्षों तक उपकृत रहा। इस समय आप पटना के सुन्दर दैनिक 'आर्यावर्त्त' के प्रधान सम्पादक हैं। आपका गद्य भारतीय संस्कृति का भावोद्रेक करता है । मासिक 'विश्वमित्र' के भूतपूर्व सफल सम्पादक प्रोफेसर जगन्नाथप्रसाद मिन्न की गम्भीर लेखन-शैली से हिन्दीससार पूर्ण परिचित है। आपका गद्य उदात्तभावपूर्ण शब्दयोजना से अलंकृत होता है। उसके प्रत्येक वाक्यविन्यास में उत्साहोत्तेजन का वल रहता है। ठाकुर लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु' एम० ए० वस्तुत गम्भीर विचारपूर्ण गद्य के अत्युत्कृष्ट लेखक है। आप आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शिष्य हो नहीं, उनको अभिव्यंजना-शैली के प्रतिनिधि भी हैं । आपके साहित्यिक निबंधों और मार्मिकतापूर्ण आलोचनाओं मे आचार्य शुक्लजी को दिव्यात्मा चोलती है। 'काव्य में अभिव्यंजनावाद' आपका बड़ा ही अनूठा गद्य-ग्रंथ है। पं० भुवनेश्वरनाथ मिश्र 'माधव' एम० ए० को साधु गद्य-रचनाओं ने भक्तिः साहित्य और सन्त-साहित्य का मर्मोद्घाटन करने मे अभूतपूर्व भावुकता एव सहृदयता प्रदर्शित की है। 'क' (गीताप्रेस ) के सम्पादक-मडल के पुण्यश्लोक सदस्य हैं। यदि सुधांशुजी बिहार के रामचन्द्र शुक्ल हैं, तो माधवजी बिहार के वियोगी हरि हैं । तीसरी शैली की गद्य-धारा के प्रधान कर्णधारो में श्रीमोहनलाल महतो गयाषाल 'वियोगी' एवं महापंडित राहुल सांकृत्यायन के नाम अग्रगण्य हैं। 'वियोगी'जी के गद्य में कविकल्पना का चमत्कार ठौर - ठौर वड़ा मनोरम मिलता है । इन्होने कहानियों एवं संस्मरणो में कहीं गम्भीर और कहीं सरल शैली की छटा दिखाई है। और, राहुलजी ने तो कुछ ही वर्गों मे हिन्दी का भांडार इस प्रकार सुसम्पन्न कर दिया है कि हिन्दी-साहित्य के इतिहास मे उनकी यह सेवा चिरस्मरणीय रहेगी। उनके दर्जनों सुन्दर और उपादेय गद्य-मंथ प्रकाशित होकर यथेष्ट लोकप्रियता सम्पादित कर चुके हैं। 'दिनकर' जी कवि-रूप में प्रकाशमान हैं । पर जहाँ-कहीं गम्भीर या सहज गद्य लिखा है वहाँ अपने नाम के अनुरूप चमक रहे हैं। प्रसिद्ध औपन्यासिक श्री अनूपलाल मंडल की भाषा भी कहीं गम्भीर और कहीं सरल होती है। श्रीभुवनेश्वर सिंह 'भुवन' की गद्यशैली भी यथोचित प्रसंग के अनुकूल बड़ी मनभावनी होती है। इनकी गद्य गरिमा 'वैशाली' के प्रांगण में चमक चुकी है । श्रीजयकिशोरनारायण सिंह में ललित साहित्य की रचना की आश्चर्यजनक प्रतिभा है। आपके कलामंडित निबन्ध सचमुच साहित्य की अक्षय्य सम्पत्ति हैं । द्यी कवित्व-शक्ति का सहयोग मणिकाञ्चन-संयोग के सदृश प्रतीत होता है। कविवर 'आरसी' जी की गद्य-रचना भी मनोहारिणी होती है। उनकी चितचोर कहानियाँ बड़ी दिलचस्पी से पढ़ी जाती हैं। उनका गद्य सुस्वादु और चित्तप्रसादक होता है । गोपालसिंह 'नैपाली' का कविहृदय गद्य का हीरक हार पहने देख पड़ता है। इनका गद्य बड़ा स्निग्ध, शीतल, सुरुचिवर्द्धक और शोभन होता है। श्रीभोलालाल दास, बी० ए०, बी० एल० ने गम्भीर गद्य भी लिखा है, सरल भो । 'अक्षरों की लड़ाई' सरीखी नये ढंग की पुस्तक में सरसता और सरलता पूरी सफाई से दिखाई है । 'विद्यापति-साहित्य' के स्वाध्यायी आलोचक श्रीनरेन्द्रनाथ दास भी इसी शैली के लेखक हैं। इनका 'विद्यापति-काव्यालोक' कमनीय गद्य-प्रन्थ है । इनके अतिरिक्त बिहार मे और भी उच्च कोटि के गद्यकार हैं जिनकी शैली बड़ी निर्मल, मधुर, प्रसन्न और आलोकप्रद होती है । यथा - डाक्टर जनार्दन मिश्र, प्रोफेसर कृपानाथ मिश्र एम० ए०, प्रोफेसर धर्मेन्द्रब्रह्मचारी शास्त्री एम० ए०, प्रोफेसर विश्वनाथप्रसाद साहित्याचार्य साहित्यरत्न एम० ए०, प्रोफेसर महेश्वरीप्रसाद सिंह 'महेश' एम० ए०, श्रीरामावतार शर्मा एम० ए० वी० एल०, श्रीदुर्गाशंकरप्रसाद सिंह, साहित्याचार्य सग, श्रीरामधारीप्रसाद 'विशारद', श्रीमथुराप्रसाद दीक्षित, श्रीगोवर्द्धनलाल गुप्त एम० ए० बी० एल०, श्रीजानकीवल्लभ शास्त्री, श्रीहंसकुमार तिवारी, श्रीललितकुमार सिंह 'नटवर', श्रीराधारमण शास्त्री, प्रोफेसर नवलकिशोर गौड़ एम० ए० इत्यादि । इनमें डाक्टर जनार्दन मिश्र और प्रोफेसर धर्मेन्द्र शास्त्री बड़े विद्वान समालोचक और अन्वेषक हैं। दोनों के गद्य-मन्थ प्रकाशित और प्रचारित होकर हिन्दी प्रेमियों द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। महेशजी और रामावतारजी प्रभावशाली गद्य-लेखक हैं । दुर्गाशंकरजी और 'मग'जी गद्यकाव्य और कहानी में वड़ी रसज्ञता दिखाते है । रामधारी बाबू और दीक्षितजी बिहार प्रादेशिक हिन्दी - साहित्य-सम्मेलन के संस्थापकों में हैं और गद्यक्षेत्र में बरसों कीर्त्ति कमा चुके हैं। गुप्तजी सुप्रतिष्ठित निवन्धकार हैं। जानकीवल्लभजी समालोचना, कहानी और निबंध के सिद्धहस्त लेखक हैं - साथ ही, संस्कृत के बहुत ही अच्छे विद्वान् और कवि भी । तिवारीजी भी कवि होने के साथ-साथ निबधकार ओर समालोचक हैं। 'नटवर' जी का गद्य वडा चटकीला-भडकीला होता है और उसमें चुलबुलाहट काफी रहती है। राधारमणजी की कहानियाँ साहित्यिक आनन्द देती हैं । गौड़जी का एकांकी नाटक बड़ा सुन्दर बन पडा है। हर तरह से और हर तरफ से गद्य की उन्नति और परिपुष्टि तथा सजावट का ही प्रयत्न हो रहा है। बिहार के गद्यकारों का यह सामूहिक प्रयत्न उज्ज्वल भविष्य के सामोप्य का सूचक है। वर्त्तमान समय के बिहारी गद्य लेखको मे सारन (छपरा ) जिले के डॉक्टर सत्यनारायण, पो-एच्० डी० का नाम अपूर्व ज्योति के साथ जाज्वल्यमान दृष्टिगत होता है। आपके समान बहुज्ञ एवं बहुश्रुत लेखक पर बिहार को गर्व होना स्वाभाविक है। आपने सर्वथा नूतन गद्य-रचना प्रणालो का सूत्रपात किया है। आपकी हृदयहारिणो गद्य शैली हिन्दी पाठकों के लिये अद्भुत आकर्षण की वस्तु है । 'अपराजित अत्रोसीनिया', 'आवारे की योरप-यात्रा', 'युद्ध-यात्रा', 'रोमांचक रूस मे', 'हवाई युद्ध', 'लड़ाई के मोर्चे पर', 'उन्नीस सौ चालीस' आदि आपकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं, जो हिन्दी-संसार में अपने विषय और अपनी शैली का कोई जोड नहीं रखतीं । विलकुल नया विपय, नई वर्णन-शैली, नई कल्पना, नई सूझ । अव आप बॅगला- भाषा में अपनी हिन्दी पुस्तको को स्वयं ही लिखकर प्रकाशित करा रहे हैं। बॅगला की प्रसिद्ध पत्रिका 'शनिवारेर चिट्ठी' (कलकत्ता) के सम्पादक ने उसके एक अंक (जनवरी, १६४१ ) में आपके विषय मे जो कुछ लिखा है, उसका यथार्थ अनुवाद हम नीचे दे रहे है । हिन्दी - पत्र - सम्पादक क्या इस प्रतिभा सम्पन्न बिहारी लेखक के विषय में इस तरह दिल खोलकर कभी लिख सकेगे ?"श्री सत्यनारायण अबंगाली भारतवासी हैं । जर्मनी के फ्रांकफोर्ट-विश्वविद्यालय से आपने 'डाक्टरेट' की उपाधि पाई है। आपके विषय थे अर्थनीति और राष्ट्रनीति । ऐसे विचित्र और अभिज्ञता - सम्पन्न मनुष्य भारत में बहुत थोड़े ही देखे गये हैं। इस समय आपकी अवस्था तीस से अधिक नहीं है । इसी अल्प वयस में आपने भारत, अफ्रिका का उत्तरी भाग और सारा योरप छान डाला है - वह भी खाली हाथ ! भारत की कई प्रान्तीय तथा योरप की अनेक भाषाओं पर आपका अधिकार उन स्थानों के निवासियों-सा है । रूस में रूसी और जर्मनी में जर्मन के रूप में आप अपनेको प्रकट करने में समर्थ हुए थे। इन दिनों आप बंगाल में ही हैं। बातचीत, वेशभूषा से हम आपको अबंगाली कह ही नहीं सकते। विभिन्न देशों को भाषाएँ और संस्कृतियाँ अपनाने में आप बड़े पटु हैं, इनमें आपको आश्चर्यजनक सफलता मिली है। अपने घुमक्कड़ जीवन के आरम्भ में आपने अपने गुरु से जो तीन बहुमूल्य शिक्षाएँ प्राप्त की थीं उनका पालन आप आज तक करते आ रहे हैं। उन्हीं शिक्षाओं के फलस्वरूप आपने अपने जीवन में खूब ही जानकारी पाई है। उन शिक्षाओं का सारांश है- 'पृथ्वी के देशों और मनुष्यों को जानने के लिये जिस ओर आँखे जायँ, निकल पड़ो; उस देश के मनुष्यों के बीच अपनेको खपा दो; यदि वहाँ की भाषा का ज्ञान न हो तो इशारे से या किसी तरह उनके संग बोलने की चेष्टा करो; उनलोगों की तरह उन्हीं के बीच बैठ करो। वस्तुतः यही आदर्श अपनाकर आपने अनेक देशों का सच्चा परिचय प्राप्त किया है । रूस और जर्मनी की आन्तरिक स्थिति का सच्चा परिचय इस प्रकार किसी ने पाया है, हम नहीं कह सकते । साधारण भ्रमणकारियों के समान ट्रेन, मोटर, होटल और विलास के साथ, गाइडबुकों में वर्णित प्रसिद्ध स्थानों को छूकर ही, आपने अपना कर्त्तव्य समाप्त नहीं कर लिया, बल्कि बहुत आत्मत्याग और दुःख मेलने के उपरान्त प्रत्येक देश के मर्म का स्पर्श करने में आप समर्थ हो सके हैं। जर्मनी के युवक-आन्दोलन में आपने स्वयं विशेष रूप से योगदान किया था । यहाँ की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के मेम्बर थे । हिटलर के अभ्युदय काल में नेशनल, सोशल और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच जो घर्ष हुआ था, उसे देखने का आपको सुयोग मिला था। रूस का प्रथम परिचय मैक्सिम गोर्की की सहायता से पाया। वहाँ की वर्णमाला से गोर्की ने ही आपका परिचय कराया । गोर्की की सहायता से ही अपने 'सोवियट' की राष्ट्रनीति और उसका आदर्श समझा । इटली अबीसीनिया युद्ध के समय योरप की एक प्रसिद्ध समाचार - एजेन्सी के प्रथम श्रेणी के संवाददाता की हैसियत से आप अबीसीनिया गये । व्यक्तिगत रूप से आपने असीनिया के पक्ष में योगदान किया; वहाँ के भारतवासियों के उद्धार में सहायता पहुँचाई । सन् १९३६ में स्वदेश लौटकर, तीन वर्षों के अन्दर, योरप और इटली अवीसीनिया युद्ध के विषय में आपने हिन्दी में दस पुस्तकें लिखीं और उन्हें प्रकाशित करवाया। हाल में वंगभाषा में आपकी 'रोमांचक रशियाय' नामक पुस्तक निकली है । इसे पढ़ने पर कविहृदय का सूक्ष्म और अपूर्व परिचय मिलता है । रवीन्द्रनाथ ने पुस्तक पढकर प्रकट किया है। हमलोग चंगभाषा में पाएँ करते हैं । इन दिनों आप 'दिशेहारा योरपे' नामक पुस्तक लिखने में व्यस्त हैं। इसके एक-दो अध्याय 'शनिवारेर चिट्ठी' में भी प्रकाशित होंगे। इसके अतिरिक्त योरप के अनुभवों के विषय में आपकी रचनाएँ भी हम प्रकाशित करेंगे।" नये ढंग की गद्य-शैली में कलापूर्ण एवं चमत्कारपूर्ण रचना करनेवाले एक दूसरे विहारी लेखक भी हैं, जिनका शुभ नाम है पंडित लक्ष्मीकान्त झा, एम. ए. आप 'आइ. सी. एस. और वेकन, एडिसन, चेस्टर्टन, गार्डिनर आदि जगत्प्रसिद्ध अॅगरेजी-लेखकों की शैली पर आपने हिन्दी मे कई ऐसे मनोहर निबंध रचे हैं, जिनमें आपकी प्रतिभा की प्रभा देखकर स्वभावत गौरव का अनुभव होता है। आपकी ऐसी रचनाओं का एक संग्रह, 'मैंने कहा' नाम से प्रयाग के लोडर प्रेस से निकला है । यद्यपि शासक वर्ग मे चले गये, तथापि हिन्दी को आपसे बड़ी-बड़ी आशाएँ हैं। उदीयमान साहित्यिकों में सुपरिचित कहानीकार एवं व्यंग्यविनोद-लेखक श्रीराधाकृष्णजी, हास्यरस के रसिक लेखक श्रीसरयू पंडा गौड़, गद्य-पद्य के उत्साही लेखक साहित्याचार्य श्रीहवलदार त्रिपाठी 'रुहृदय', श्रीतारकेश्वर प्रसाद वर्मा, श्रीमोहनलाल गुप्त, श्रीसूर्यदेवनारायण श्रीवास्तव, श्रीराधाकृष्णप्रसाद, श्रीवन्धु, श्रीनगेन्द्र कुमर वी० ए०, श्रीजयकान्त मिश्र, श्रीउमाशंकर, श्रीलक्ष्मीपति सिह, श्रीराकेश, श्रीपरमानन्द दत्त 'परमार्थी', श्रीलक्ष्मीनारायण गुप्त, श्रोगिरिधारीलाल शर्मा 'गर्ग' बी० ए०, श्रीशुकदेवनारायण आदि प्रतिभावान् लेखको की सुघड लेखनी से हिन्दी गद्य का जो शृंगार हो रहा है, वह बिहार के लिये बहुत ही आशाप्रद है। इस तरह बिहार में हिन्दी गद्य- निर्माण की जो चेष्टाएँ हुई हैं और हो रही उन्हें देखकर वहुलांश में सन्तोष ही होता है । आशा है, बिहार में हिन्दी गद्य निर्माण का कार्य दिन-दिन प्रगतिशील होता जायगा । और, बिहार की गद्य-गंगा में अवगाहन कर हिन्दी - संसार मानसिक शीतलता प्राप्त करेगा ।
'दिनकर' जी कवि-रूप में प्रकाशमान हैं । पर जहाँ-कहीं गम्भीर या सहज गद्य लिखा है वहाँ अपने नाम के अनुरूप चमक रहे हैं । प्रसिद्ध औपन्यामिक श्रीअनूपलाल मंडल की भाषा भी कहीं गम्भीर और कहीं सरल होती है। श्रीभुवनेश्वर सिंह 'भुवन' की गद्यशैली भी यथोचित प्रसंग के अनुकूल चड़ी मनभावनी होती है। इनकी गद्य- गरिमा 'वैशाली' के प्रांगण में चमक चुकी है। श्रीजयकिशोरनारायण सिंह में ललित साहित्य की रचना की आश्चर्यजनक प्रतिभा है। आपके कलामंडित निबन्ध सचमुच साहित्य को अक्षय्य सम्पत्ति हैं । आपके गद्य में आपकी कवित्व शक्ति का सहयोग मणिकाञ्चन-संयोग के सदृश श्रादकर प्रतीत होता है। कविवर 'आरसी' जी की गद्य-रचना भी मनोहारिणी होती है। उनकी चितचोर कहानियाँ बड़ी दिलचस्पी से पढ़ी जाती हैं । उनका गद्य सुस्वादु और चित्तप्रसादक होता है। गोपालसिंह 'नैपाली' का कविहृदय गद्य का हीरक हार पहने देख पड़ता है। इनका गद्य वड़ा स्निग्ध, शीतल, सुरुचिवर्द्धक और शोभन होता है। श्रीभोलालाल दास, वीशून्य एशून्य, बीशून्य एलशून्य ने गम्भीर गद्य भी लिखा है, सरल भी । 'अक्षरो की लड़ाई' सरीखी नये ढंग की पुस्तक में सरसता और सरलता पूरी सफाई से दिखाई है । 'विद्यापति - साहित्य' के स्वाध्यायी आलोचक श्रीनरेन्द्रनाथ दास भी इसी शैली के लेखक हैं । इनका 'विद्यापति-काव्य लोक' कमनीय गद्य-ग्रन्थ है । इनके अतिरिक्त बिहार में और भी उच्च कोटि के गद्यकार हैं जिनकी शैली वड़ी निर्मल, मधुर, प्रसन्न और आलोकप्रद होती है । यथा - डाक्टर जनार्दन मिश्र, प्रोफेसर कृपानाथ मिश्र एमशून्य एशून्य, प्रोफेसर धर्मेन्द्रब्रह्मचारी शास्त्री एमशून्य एशून्य, प्रोफेसर विश्वनाथप्रसाद साहित्याचार्य साहित्यरत्र एमशून्य एशून्य, प्रोफेसर महेश्वरीप्रसाद सिंह 'महेश' एमशून्य एशून्य, श्रीरामावतार शर्मा एमशून्य एशून्य वीशून्य एलशून्य, श्रीदुर्गाशंकरप्रसाद सिंह, साहित्याचार्य मग, श्रीरामधारीप्रसाद 'विशारद', श्रीमथुराप्रसाद दीक्षित, श्रीगोवर्द्धनलाल गुम एमशून्य एशून्य बीशून्य एलशून्य, श्रीजानकीवल्लभ शास्त्री, श्रीहंसकुमार तिवारी, भीललितकुमार सिंह 'नटवर', श्रीराधारमण शास्त्री, प्रोफेसर नवलकिशोर गौड़ एमशून्य एशून्य इत्यादि । इनमे डाक्टर जनार्दन मिश्र और प्रोफेसर धर्मेन्द्र शास्त्री बड़े विद्वान समालोचक और अन्वेषक हैं। दोनों के गद्य-मन्थ प्रकाशित और प्रचारित आदि प्रथितयशा पत्र-पत्रिकाओं का सफलतापूर्वक सम्पादन करके पर्याप्त प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके हैं। आपके लिखे हुए सम्पादकीय लेख आपकी प्रगतिशील विचार धारा के परिचायक हैं। पंशून्य दिनेशदत्त का बी. ए. हिन्दी-संसार के अनुभवी पत्रकार हैं। आपके गम्भीराशय विशुद्ध गद्य से सर्वश्रेष्ठ दैनिक 'आज' लगभग पन्द्रह-चोस वर्षों तक उपकृत रहा। इस समय आप पटना के सुन्दर दैनिक 'आर्यावर्त्त' के प्रधान सम्पादक हैं। आपका गद्य भारतीय संस्कृति का भावोद्रेक करता है । मासिक 'विश्वमित्र' के भूतपूर्व सफल सम्पादक प्रोफेसर जगन्नाथप्रसाद मिन्न की गम्भीर लेखन-शैली से हिन्दीससार पूर्ण परिचित है। आपका गद्य उदात्तभावपूर्ण शब्दयोजना से अलंकृत होता है। उसके प्रत्येक वाक्यविन्यास में उत्साहोत्तेजन का वल रहता है। ठाकुर लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु' एमशून्य एशून्य वस्तुत गम्भीर विचारपूर्ण गद्य के अत्युत्कृष्ट लेखक है। आप आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शिष्य हो नहीं, उनको अभिव्यंजना-शैली के प्रतिनिधि भी हैं । आपके साहित्यिक निबंधों और मार्मिकतापूर्ण आलोचनाओं मे आचार्य शुक्लजी को दिव्यात्मा चोलती है। 'काव्य में अभिव्यंजनावाद' आपका बड़ा ही अनूठा गद्य-ग्रंथ है। पंशून्य भुवनेश्वरनाथ मिश्र 'माधव' एमशून्य एशून्य को साधु गद्य-रचनाओं ने भक्तिः साहित्य और सन्त-साहित्य का मर्मोद्घाटन करने मे अभूतपूर्व भावुकता एव सहृदयता प्रदर्शित की है। 'क' के सम्पादक-मडल के पुण्यश्लोक सदस्य हैं। यदि सुधांशुजी बिहार के रामचन्द्र शुक्ल हैं, तो माधवजी बिहार के वियोगी हरि हैं । तीसरी शैली की गद्य-धारा के प्रधान कर्णधारो में श्रीमोहनलाल महतो गयाषाल 'वियोगी' एवं महापंडित राहुल सांकृत्यायन के नाम अग्रगण्य हैं। 'वियोगी'जी के गद्य में कविकल्पना का चमत्कार ठौर - ठौर वड़ा मनोरम मिलता है । इन्होने कहानियों एवं संस्मरणो में कहीं गम्भीर और कहीं सरल शैली की छटा दिखाई है। और, राहुलजी ने तो कुछ ही वर्गों मे हिन्दी का भांडार इस प्रकार सुसम्पन्न कर दिया है कि हिन्दी-साहित्य के इतिहास मे उनकी यह सेवा चिरस्मरणीय रहेगी। उनके दर्जनों सुन्दर और उपादेय गद्य-मंथ प्रकाशित होकर यथेष्ट लोकप्रियता सम्पादित कर चुके हैं। 'दिनकर' जी कवि-रूप में प्रकाशमान हैं । पर जहाँ-कहीं गम्भीर या सहज गद्य लिखा है वहाँ अपने नाम के अनुरूप चमक रहे हैं। प्रसिद्ध औपन्यासिक श्री अनूपलाल मंडल की भाषा भी कहीं गम्भीर और कहीं सरल होती है। श्रीभुवनेश्वर सिंह 'भुवन' की गद्यशैली भी यथोचित प्रसंग के अनुकूल बड़ी मनभावनी होती है। इनकी गद्य गरिमा 'वैशाली' के प्रांगण में चमक चुकी है । श्रीजयकिशोरनारायण सिंह में ललित साहित्य की रचना की आश्चर्यजनक प्रतिभा है। आपके कलामंडित निबन्ध सचमुच साहित्य की अक्षय्य सम्पत्ति हैं । द्यी कवित्व-शक्ति का सहयोग मणिकाञ्चन-संयोग के सदृश प्रतीत होता है। कविवर 'आरसी' जी की गद्य-रचना भी मनोहारिणी होती है। उनकी चितचोर कहानियाँ बड़ी दिलचस्पी से पढ़ी जाती हैं। उनका गद्य सुस्वादु और चित्तप्रसादक होता है । गोपालसिंह 'नैपाली' का कविहृदय गद्य का हीरक हार पहने देख पड़ता है। इनका गद्य बड़ा स्निग्ध, शीतल, सुरुचिवर्द्धक और शोभन होता है। श्रीभोलालाल दास, बीशून्य एशून्य, बीशून्य एलशून्य ने गम्भीर गद्य भी लिखा है, सरल भो । 'अक्षरों की लड़ाई' सरीखी नये ढंग की पुस्तक में सरसता और सरलता पूरी सफाई से दिखाई है । 'विद्यापति-साहित्य' के स्वाध्यायी आलोचक श्रीनरेन्द्रनाथ दास भी इसी शैली के लेखक हैं। इनका 'विद्यापति-काव्यालोक' कमनीय गद्य-प्रन्थ है । इनके अतिरिक्त बिहार मे और भी उच्च कोटि के गद्यकार हैं जिनकी शैली बड़ी निर्मल, मधुर, प्रसन्न और आलोकप्रद होती है । यथा - डाक्टर जनार्दन मिश्र, प्रोफेसर कृपानाथ मिश्र एमशून्य एशून्य, प्रोफेसर धर्मेन्द्रब्रह्मचारी शास्त्री एमशून्य एशून्य, प्रोफेसर विश्वनाथप्रसाद साहित्याचार्य साहित्यरत्न एमशून्य एशून्य, प्रोफेसर महेश्वरीप्रसाद सिंह 'महेश' एमशून्य एशून्य, श्रीरामावतार शर्मा एमशून्य एशून्य वीशून्य एलशून्य, श्रीदुर्गाशंकरप्रसाद सिंह, साहित्याचार्य सग, श्रीरामधारीप्रसाद 'विशारद', श्रीमथुराप्रसाद दीक्षित, श्रीगोवर्द्धनलाल गुप्त एमशून्य एशून्य बीशून्य एलशून्य, श्रीजानकीवल्लभ शास्त्री, श्रीहंसकुमार तिवारी, श्रीललितकुमार सिंह 'नटवर', श्रीराधारमण शास्त्री, प्रोफेसर नवलकिशोर गौड़ एमशून्य एशून्य इत्यादि । इनमें डाक्टर जनार्दन मिश्र और प्रोफेसर धर्मेन्द्र शास्त्री बड़े विद्वान समालोचक और अन्वेषक हैं। दोनों के गद्य-मन्थ प्रकाशित और प्रचारित होकर हिन्दी प्रेमियों द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। महेशजी और रामावतारजी प्रभावशाली गद्य-लेखक हैं । दुर्गाशंकरजी और 'मग'जी गद्यकाव्य और कहानी में वड़ी रसज्ञता दिखाते है । रामधारी बाबू और दीक्षितजी बिहार प्रादेशिक हिन्दी - साहित्य-सम्मेलन के संस्थापकों में हैं और गद्यक्षेत्र में बरसों कीर्त्ति कमा चुके हैं। गुप्तजी सुप्रतिष्ठित निवन्धकार हैं। जानकीवल्लभजी समालोचना, कहानी और निबंध के सिद्धहस्त लेखक हैं - साथ ही, संस्कृत के बहुत ही अच्छे विद्वान् और कवि भी । तिवारीजी भी कवि होने के साथ-साथ निबधकार ओर समालोचक हैं। 'नटवर' जी का गद्य वडा चटकीला-भडकीला होता है और उसमें चुलबुलाहट काफी रहती है। राधारमणजी की कहानियाँ साहित्यिक आनन्द देती हैं । गौड़जी का एकांकी नाटक बड़ा सुन्दर बन पडा है। हर तरह से और हर तरफ से गद्य की उन्नति और परिपुष्टि तथा सजावट का ही प्रयत्न हो रहा है। बिहार के गद्यकारों का यह सामूहिक प्रयत्न उज्ज्वल भविष्य के सामोप्य का सूचक है। वर्त्तमान समय के बिहारी गद्य लेखको मे सारन जिले के डॉक्टर सत्यनारायण, पो-एच्शून्य डीशून्य का नाम अपूर्व ज्योति के साथ जाज्वल्यमान दृष्टिगत होता है। आपके समान बहुज्ञ एवं बहुश्रुत लेखक पर बिहार को गर्व होना स्वाभाविक है। आपने सर्वथा नूतन गद्य-रचना प्रणालो का सूत्रपात किया है। आपकी हृदयहारिणो गद्य शैली हिन्दी पाठकों के लिये अद्भुत आकर्षण की वस्तु है । 'अपराजित अत्रोसीनिया', 'आवारे की योरप-यात्रा', 'युद्ध-यात्रा', 'रोमांचक रूस मे', 'हवाई युद्ध', 'लड़ाई के मोर्चे पर', 'उन्नीस सौ चालीस' आदि आपकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं, जो हिन्दी-संसार में अपने विषय और अपनी शैली का कोई जोड नहीं रखतीं । विलकुल नया विपय, नई वर्णन-शैली, नई कल्पना, नई सूझ । अव आप बॅगला- भाषा में अपनी हिन्दी पुस्तको को स्वयं ही लिखकर प्रकाशित करा रहे हैं। बॅगला की प्रसिद्ध पत्रिका 'शनिवारेर चिट्ठी' के सम्पादक ने उसके एक अंक में आपके विषय मे जो कुछ लिखा है, उसका यथार्थ अनुवाद हम नीचे दे रहे है । हिन्दी - पत्र - सम्पादक क्या इस प्रतिभा सम्पन्न बिहारी लेखक के विषय में इस तरह दिल खोलकर कभी लिख सकेगे ?"श्री सत्यनारायण अबंगाली भारतवासी हैं । जर्मनी के फ्रांकफोर्ट-विश्वविद्यालय से आपने 'डाक्टरेट' की उपाधि पाई है। आपके विषय थे अर्थनीति और राष्ट्रनीति । ऐसे विचित्र और अभिज्ञता - सम्पन्न मनुष्य भारत में बहुत थोड़े ही देखे गये हैं। इस समय आपकी अवस्था तीस से अधिक नहीं है । इसी अल्प वयस में आपने भारत, अफ्रिका का उत्तरी भाग और सारा योरप छान डाला है - वह भी खाली हाथ ! भारत की कई प्रान्तीय तथा योरप की अनेक भाषाओं पर आपका अधिकार उन स्थानों के निवासियों-सा है । रूस में रूसी और जर्मनी में जर्मन के रूप में आप अपनेको प्रकट करने में समर्थ हुए थे। इन दिनों आप बंगाल में ही हैं। बातचीत, वेशभूषा से हम आपको अबंगाली कह ही नहीं सकते। विभिन्न देशों को भाषाएँ और संस्कृतियाँ अपनाने में आप बड़े पटु हैं, इनमें आपको आश्चर्यजनक सफलता मिली है। अपने घुमक्कड़ जीवन के आरम्भ में आपने अपने गुरु से जो तीन बहुमूल्य शिक्षाएँ प्राप्त की थीं उनका पालन आप आज तक करते आ रहे हैं। उन्हीं शिक्षाओं के फलस्वरूप आपने अपने जीवन में खूब ही जानकारी पाई है। उन शिक्षाओं का सारांश है- 'पृथ्वी के देशों और मनुष्यों को जानने के लिये जिस ओर आँखे जायँ, निकल पड़ो; उस देश के मनुष्यों के बीच अपनेको खपा दो; यदि वहाँ की भाषा का ज्ञान न हो तो इशारे से या किसी तरह उनके संग बोलने की चेष्टा करो; उनलोगों की तरह उन्हीं के बीच बैठ करो। वस्तुतः यही आदर्श अपनाकर आपने अनेक देशों का सच्चा परिचय प्राप्त किया है । रूस और जर्मनी की आन्तरिक स्थिति का सच्चा परिचय इस प्रकार किसी ने पाया है, हम नहीं कह सकते । साधारण भ्रमणकारियों के समान ट्रेन, मोटर, होटल और विलास के साथ, गाइडबुकों में वर्णित प्रसिद्ध स्थानों को छूकर ही, आपने अपना कर्त्तव्य समाप्त नहीं कर लिया, बल्कि बहुत आत्मत्याग और दुःख मेलने के उपरान्त प्रत्येक देश के मर्म का स्पर्श करने में आप समर्थ हो सके हैं। जर्मनी के युवक-आन्दोलन में आपने स्वयं विशेष रूप से योगदान किया था । यहाँ की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के मेम्बर थे । हिटलर के अभ्युदय काल में नेशनल, सोशल और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच जो घर्ष हुआ था, उसे देखने का आपको सुयोग मिला था। रूस का प्रथम परिचय मैक्सिम गोर्की की सहायता से पाया। वहाँ की वर्णमाला से गोर्की ने ही आपका परिचय कराया । गोर्की की सहायता से ही अपने 'सोवियट' की राष्ट्रनीति और उसका आदर्श समझा । इटली अबीसीनिया युद्ध के समय योरप की एक प्रसिद्ध समाचार - एजेन्सी के प्रथम श्रेणी के संवाददाता की हैसियत से आप अबीसीनिया गये । व्यक्तिगत रूप से आपने असीनिया के पक्ष में योगदान किया; वहाँ के भारतवासियों के उद्धार में सहायता पहुँचाई । सन् एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में स्वदेश लौटकर, तीन वर्षों के अन्दर, योरप और इटली अवीसीनिया युद्ध के विषय में आपने हिन्दी में दस पुस्तकें लिखीं और उन्हें प्रकाशित करवाया। हाल में वंगभाषा में आपकी 'रोमांचक रशियाय' नामक पुस्तक निकली है । इसे पढ़ने पर कविहृदय का सूक्ष्म और अपूर्व परिचय मिलता है । रवीन्द्रनाथ ने पुस्तक पढकर प्रकट किया है। हमलोग चंगभाषा में पाएँ करते हैं । इन दिनों आप 'दिशेहारा योरपे' नामक पुस्तक लिखने में व्यस्त हैं। इसके एक-दो अध्याय 'शनिवारेर चिट्ठी' में भी प्रकाशित होंगे। इसके अतिरिक्त योरप के अनुभवों के विषय में आपकी रचनाएँ भी हम प्रकाशित करेंगे।" नये ढंग की गद्य-शैली में कलापूर्ण एवं चमत्कारपूर्ण रचना करनेवाले एक दूसरे विहारी लेखक भी हैं, जिनका शुभ नाम है पंडित लक्ष्मीकान्त झा, एम. ए. आप 'आइ. सी. एस. और वेकन, एडिसन, चेस्टर्टन, गार्डिनर आदि जगत्प्रसिद्ध अॅगरेजी-लेखकों की शैली पर आपने हिन्दी मे कई ऐसे मनोहर निबंध रचे हैं, जिनमें आपकी प्रतिभा की प्रभा देखकर स्वभावत गौरव का अनुभव होता है। आपकी ऐसी रचनाओं का एक संग्रह, 'मैंने कहा' नाम से प्रयाग के लोडर प्रेस से निकला है । यद्यपि शासक वर्ग मे चले गये, तथापि हिन्दी को आपसे बड़ी-बड़ी आशाएँ हैं। उदीयमान साहित्यिकों में सुपरिचित कहानीकार एवं व्यंग्यविनोद-लेखक श्रीराधाकृष्णजी, हास्यरस के रसिक लेखक श्रीसरयू पंडा गौड़, गद्य-पद्य के उत्साही लेखक साहित्याचार्य श्रीहवलदार त्रिपाठी 'रुहृदय', श्रीतारकेश्वर प्रसाद वर्मा, श्रीमोहनलाल गुप्त, श्रीसूर्यदेवनारायण श्रीवास्तव, श्रीराधाकृष्णप्रसाद, श्रीवन्धु, श्रीनगेन्द्र कुमर वीशून्य एशून्य, श्रीजयकान्त मिश्र, श्रीउमाशंकर, श्रीलक्ष्मीपति सिह, श्रीराकेश, श्रीपरमानन्द दत्त 'परमार्थी', श्रीलक्ष्मीनारायण गुप्त, श्रोगिरिधारीलाल शर्मा 'गर्ग' बीशून्य एशून्य, श्रीशुकदेवनारायण आदि प्रतिभावान् लेखको की सुघड लेखनी से हिन्दी गद्य का जो शृंगार हो रहा है, वह बिहार के लिये बहुत ही आशाप्रद है। इस तरह बिहार में हिन्दी गद्य- निर्माण की जो चेष्टाएँ हुई हैं और हो रही उन्हें देखकर वहुलांश में सन्तोष ही होता है । आशा है, बिहार में हिन्दी गद्य निर्माण का कार्य दिन-दिन प्रगतिशील होता जायगा । और, बिहार की गद्य-गंगा में अवगाहन कर हिन्दी - संसार मानसिक शीतलता प्राप्त करेगा ।
साइबर क्राइम की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। साइबर ठग ठगी के नए नए पैंतरें आजमा रहे हैं। इस बीच Google Play Store पर एक ऐसा वायरस देखा गया है, जो लोगों के बहुत ही सेंसेटिव डाटा का चुराता है और साथ ही वह आपके मैसेज भी पढ़ रहा है। यह आपके बैंकिंग ऐप से भी लॉगिन डिटेल्स चुरा लेता है। डेटा लीक होते ही आपके खाते में रखे पैसों पर खतरा आ सकता है और आपका अकाउंट खाली हो सकता है। यह वायरस एंड्रॉयड बैंकिंग ट्रोजन (banking trojan) है, जो 2021 में सामने आया था। इस वायरस की मदद से यूजर के टेक्स्ट एसएमएस को चुराने के लिए बनाया गया था। यह मोबाइल यूजर के फोन में गूगल प्लेस्टोर के जरिए एंटर होकर बैंकिंग डिटेल्स चुराने वाला खतरनाक एंड्रॉयड बैंकिंग मैलवेयर 'TeaBot' को हजारों बार डाउनलोड किया जा चुका है। ऑनलाइन फ्रॉड मैनेजमेंट एंड प्रिवेंशन सोल्यूशन प्रोवाइडर क्लीफी के एक रिपोर्ट के अनुसार, TeaBot को कैंपेन के जरिए टीटीवी, वीएलसी मीडिया प्लेयर, डीएचएल और यूपीएस स्मिशिंग के द्वारा भेजा जा रहा है। रिपोर्ट और रिसर्च से जानकारी हुई है कि 400 से ज्यादा एप्लीकेशन को इस बीच टारगेट किया गया है। इन एप्लीकेशन में बैंक्स, क्रिप्टो एक्सचेंज, वॉलेट और डिजिटल इंश्योरेंस से जुड़े केस शामिल हैं। यह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि रूस, होंग कॉन्ग, और अमेरिका जैसे देशों में भी सामने आए हैं। 21 फरवरी को Cleafy Threat Intelligence and Incident Response (TIR) टीम ने ऑफिशियल गूगल प्ले स्टोर पर जारी एक एप्लीकेशन को खोजा जिसमें एक नकली अपडेट के जरिए टीबॉट वायरस को डिलीवर किया जा रहा था। यह कई अन्य भाषाओं जैसे- शियन, स्लोवक, मंदारिन चाईनीज में भी सामने आया है। रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि ड्रॉपर एक सामान्य क्यूआर कोड और बारकोड स्कैनर के पीछे है और इसे 10,000 से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। यह ऐप को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है और आसानी से काम करने देता है। एक बार डाउनलोड हो जाने पर यह थोड़े ही समय में ड्रॉपर पॉपअप संदेश के माध्यम से तुरंत अपडेट का अनुरोध करता है। आधिकारिक Google Play Store के माध्यम से अपडेट करने वाले वैध ऐप्स के उलट यह ड्रॉपर एप्लिकेशन दूसरे एप्लिकेशन को डाउनलोड और इंस्टॉल करने का विकल्प देता है और अनुरोध करता है। अगर आपके स्मार्टफोन में ऐसा हो जरा है तो सतर्क हो जाने की आवश्यकता है।
साइबर क्राइम की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। साइबर ठग ठगी के नए नए पैंतरें आजमा रहे हैं। इस बीच Google Play Store पर एक ऐसा वायरस देखा गया है, जो लोगों के बहुत ही सेंसेटिव डाटा का चुराता है और साथ ही वह आपके मैसेज भी पढ़ रहा है। यह आपके बैंकिंग ऐप से भी लॉगिन डिटेल्स चुरा लेता है। डेटा लीक होते ही आपके खाते में रखे पैसों पर खतरा आ सकता है और आपका अकाउंट खाली हो सकता है। यह वायरस एंड्रॉयड बैंकिंग ट्रोजन है, जो दो हज़ार इक्कीस में सामने आया था। इस वायरस की मदद से यूजर के टेक्स्ट एसएमएस को चुराने के लिए बनाया गया था। यह मोबाइल यूजर के फोन में गूगल प्लेस्टोर के जरिए एंटर होकर बैंकिंग डिटेल्स चुराने वाला खतरनाक एंड्रॉयड बैंकिंग मैलवेयर 'TeaBot' को हजारों बार डाउनलोड किया जा चुका है। ऑनलाइन फ्रॉड मैनेजमेंट एंड प्रिवेंशन सोल्यूशन प्रोवाइडर क्लीफी के एक रिपोर्ट के अनुसार, TeaBot को कैंपेन के जरिए टीटीवी, वीएलसी मीडिया प्लेयर, डीएचएल और यूपीएस स्मिशिंग के द्वारा भेजा जा रहा है। रिपोर्ट और रिसर्च से जानकारी हुई है कि चार सौ से ज्यादा एप्लीकेशन को इस बीच टारगेट किया गया है। इन एप्लीकेशन में बैंक्स, क्रिप्टो एक्सचेंज, वॉलेट और डिजिटल इंश्योरेंस से जुड़े केस शामिल हैं। यह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि रूस, होंग कॉन्ग, और अमेरिका जैसे देशों में भी सामने आए हैं। इक्कीस फरवरी को Cleafy Threat Intelligence and Incident Response टीम ने ऑफिशियल गूगल प्ले स्टोर पर जारी एक एप्लीकेशन को खोजा जिसमें एक नकली अपडेट के जरिए टीबॉट वायरस को डिलीवर किया जा रहा था। यह कई अन्य भाषाओं जैसे- शियन, स्लोवक, मंदारिन चाईनीज में भी सामने आया है। रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि ड्रॉपर एक सामान्य क्यूआर कोड और बारकोड स्कैनर के पीछे है और इसे दस,शून्य से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। यह ऐप को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है और आसानी से काम करने देता है। एक बार डाउनलोड हो जाने पर यह थोड़े ही समय में ड्रॉपर पॉपअप संदेश के माध्यम से तुरंत अपडेट का अनुरोध करता है। आधिकारिक Google Play Store के माध्यम से अपडेट करने वाले वैध ऐप्स के उलट यह ड्रॉपर एप्लिकेशन दूसरे एप्लिकेशन को डाउनलोड और इंस्टॉल करने का विकल्प देता है और अनुरोध करता है। अगर आपके स्मार्टफोन में ऐसा हो जरा है तो सतर्क हो जाने की आवश्यकता है।
नई दिल्लीः भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्त निर्जला व्रत रखकर सच्चे मन से शिव जी से कुछ भी मांगता है, उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना इस दिन बेहद ही शुभ होता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में 12 ज्योतिर्लिंग मौजूद है। लोगों का ऐसा मानना है कि इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही आपके जीवन का सब कष्ट खत्म हो जाता है और साथी सारे मनोकामनाएं भी पूरी होती है। आज इस लेख के जरिए हम बात करेंगे भगवान शिव के छठे ज्योतिर्लिंग भीम शंकर की। महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर से 110 किलोमीटर दूर सह्याद्रि पर्वत पर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग स्थापित है। एक पौराणिक कथा बताई गई इस ज्योतिर्लिंग के स्थापना की। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण के अलावा उसके भाई कुंभकरण का भी वध किया था। कुंभकरण के वध के बाद उसके पुत्र भीमा का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है कि कुंभकरण की वध के बाद जब उसका पुत्र भीमा पैदा हुआ तो उसके बड़े होने के बाद उसे पता चला कि उसके पिता का वध भगवान श्री राम के द्वारा किया गया है। इस बात की जानकारी मिलते ही भीमा बेहद क्रोधित हो गया और उसने भगवान श्रीराम को मारने की प्रण ले ली। इस प्रण को पूरा करने के लिए भी भीमा ने कई वर्षों तक भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और उनसे वरदान में यह मांगा कि वह कभी भी पराजय ना हो सके। ब्रह्मा जी से वरदान को पाने के बाद भीमा बिल्कुल पागल हो गया। उसने अपनी शक्तियों का गलत फायदा उठाते हुए मनुष्य समेत देवी देवताओं को भी हरकाने लगा। भीमा के इस हरकंप से सभी देवताओं परेशान होकर भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे मन्नते करने लगे कि भीमा के इस कहर से उनको भगवान शिव बचाएं। सभी देवताओं की बातों को सुनकर भगवान शिव ने भीमा से युद्ध करने का फैसला किया और उसे परास्त कर दिया। युद्ध की समाप्ति के बाद सारे देवी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वह इसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो जाए। उनकी प्रार्थना को सुनकर भोले बाबा वहीं पर स्थापित हो गए। यही वह जगह है जो कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से 1 ज्योतिर्लिंग के नाम से आगे चलकर मशहूर हुआ।
नई दिल्लीः भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्त निर्जला व्रत रखकर सच्चे मन से शिव जी से कुछ भी मांगता है, उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना इस दिन बेहद ही शुभ होता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में बारह ज्योतिर्लिंग मौजूद है। लोगों का ऐसा मानना है कि इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही आपके जीवन का सब कष्ट खत्म हो जाता है और साथी सारे मनोकामनाएं भी पूरी होती है। आज इस लेख के जरिए हम बात करेंगे भगवान शिव के छठे ज्योतिर्लिंग भीम शंकर की। महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर से एक सौ दस किलोग्राममीटर दूर सह्याद्रि पर्वत पर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग स्थापित है। एक पौराणिक कथा बताई गई इस ज्योतिर्लिंग के स्थापना की। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण के अलावा उसके भाई कुंभकरण का भी वध किया था। कुंभकरण के वध के बाद उसके पुत्र भीमा का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है कि कुंभकरण की वध के बाद जब उसका पुत्र भीमा पैदा हुआ तो उसके बड़े होने के बाद उसे पता चला कि उसके पिता का वध भगवान श्री राम के द्वारा किया गया है। इस बात की जानकारी मिलते ही भीमा बेहद क्रोधित हो गया और उसने भगवान श्रीराम को मारने की प्रण ले ली। इस प्रण को पूरा करने के लिए भी भीमा ने कई वर्षों तक भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और उनसे वरदान में यह मांगा कि वह कभी भी पराजय ना हो सके। ब्रह्मा जी से वरदान को पाने के बाद भीमा बिल्कुल पागल हो गया। उसने अपनी शक्तियों का गलत फायदा उठाते हुए मनुष्य समेत देवी देवताओं को भी हरकाने लगा। भीमा के इस हरकंप से सभी देवताओं परेशान होकर भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे मन्नते करने लगे कि भीमा के इस कहर से उनको भगवान शिव बचाएं। सभी देवताओं की बातों को सुनकर भगवान शिव ने भीमा से युद्ध करने का फैसला किया और उसे परास्त कर दिया। युद्ध की समाप्ति के बाद सारे देवी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वह इसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो जाए। उनकी प्रार्थना को सुनकर भोले बाबा वहीं पर स्थापित हो गए। यही वह जगह है जो कि बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग के नाम से आगे चलकर मशहूर हुआ।
१.२० लाख इौंडो वर्मन, ८, ८७ लाख हिन्दुस्तानी भी रहते हैं। जनताका अधिकांश बौद्ध धर्म का अनुयायी है; प्रति १००० व्यक्तियों में ८४३. व्यक्ति बौद्ध हैं । ईस्ट इंडिया कम्पनी के दिनों में अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान में कदम रखते समय बर्मा के प्रमुख नगरों में भी कारखाने और अपने एजेन्टों के दफ्तर खोल दिए थे। युद्ध और कूटनीति ने व्यापारका स्थान राजनीतिक प्रभुत्व को दिलाया और बर्मा में अंग्रेजोंका एकाधिकार स्थापित होगया । १६२३ में १६१६ के गवर्नमेंट इण्डिया एक्ट के अनुसार बर्मा को आफ गवर्नर द्वारा शासित प्रान्त का दर्जा दिया गया । ११३७ में बर्मा को हिन्दुस्तान से पृथक कर दिया गया। द्वितीय महायुद्ध में मार्च १९४२ को राजधानी रंगून पर जापानियों का कब्जा हुआ । अक्टूबर १९४५ में देश का शासन एक बार फिर अँग्रेजों के हाथ में श्रा गया । वर्मा के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान में १९४७ में फैसला हुआ कि देश को राजनीतिक स्वतन्त्रता दे दी जाय । ४ जनवरी १९४८ को स्वतन्त्र वर्मा ने जन्म लिया । साश्रो श्वे थायक बर्मी लोकतन्त्र के प्रधान बने । १ मार्च ४८ को १७ मन्त्रियों के जिस मन्त्रिमंडल ने शासन की बागडोर अपने हाथों में ली, थाकिन नू उसके प्रधान मन्त्री थे । स्वतन्त्र वर्मा का विधान बनाने वाली विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या २५५ थी जिसमें विविध पार्टियों को इस प्रकार प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ : फासिज्म विरोधी पीपल्ज़फ्रीडम लीगः १७३, कम्यूनिस्ट ७, एंग्लो बर्मन ४, केरन २४, सीमान्त प्रदेश के प्रतिनिधि ४५ । विधान परिषद ने एक राय से २४ सितम्बर १९४७ को नए विधान का मसविदा स्वीकार किया । बर्मा पर २२ करोड़ १७ लाख पाउण्ड का विदेशी कर्ज़ा है । इस कर्जे का अधिकांश इंगलैंड का है । वर्मा की समुद्री फौज में १ फिगेट, २ सुरंगें साफ करने वाले जहाज और बाकी कुछ छोटी नौकाएँ हैं । कृषि का उत्पादन : चावल, तिल, मूंगफली । १९४५-४६ में २६ लाख ३० हजार टन चावल पैदा हुआ । वर्मा के खनिज उत्पादनों में सिक्का, टीन, टंगस्टन, चाँदी व पेट्रोल मुख्य हैं । पेट्रोल का वार्षिक उत्पादन लगभग २ अरव ८५ करोड़ गैलन के है । कई प्रदेशों में कम्यूनिस्टों का प्रभाव बढ़ गया है और स्थापित सरकार के विरुद्ध विद्रोह व हिंसात्मक आन्दोलन फैल रहा है । हिमालय की तराइयों में स्थित एक रियासत, १९० मील लम्बी १० मील चौड़ी । क्षेत्रफल १८,००० वर्ग मील । श्राबादी लगभग ३ लाख । राजनीतिक दृष्टिकोण से इस देश का शासन बहुत ही पिछड़ा हुआ है । १६०७ तक देश के शासन में धर्मराज व देवराज का साँझा प्रभुत्व रहता था । उस वर्ष धर्मराज व देवराज का पद एक हो व्यक्ति के हाथों में था। उसके स्तीफा देने पर सर डायेन वांगचुक ने राज्यगद्दी संभाली। १९२६ में उसकी मृत्यु पर महाराज जिग्मी वांगचुक राजा बने । अधिकांश लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं धौर तिब्बत के धर्मग्रन्थों के उद्धरणों का प्रयोग किया करते हैं । भूटान के लोग हिन्दुस्तान की सीमाओं पर उपद्रव न किया करें, इसके लिए १८६५ की एक सन्धि के अनुसार भूटान को हिन्दुस्तान से प्रतिवर्ष ५० हज़ार रुपया मिला करता था। १९१० से यह रकन लाड व १६४२ से २ लाख रुपया कर दी गई । मलाया-संघ में प्रायःद्वीप की है रियासतें और अंग्रेजी अधिय
एक.बीस लाख इौंडो वर्मन, आठ, सत्तासी लाख हिन्दुस्तानी भी रहते हैं। जनताका अधिकांश बौद्ध धर्म का अनुयायी है; प्रति एक हज़ार व्यक्तियों में आठ सौ तैंतालीस. व्यक्ति बौद्ध हैं । ईस्ट इंडिया कम्पनी के दिनों में अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान में कदम रखते समय बर्मा के प्रमुख नगरों में भी कारखाने और अपने एजेन्टों के दफ्तर खोल दिए थे। युद्ध और कूटनीति ने व्यापारका स्थान राजनीतिक प्रभुत्व को दिलाया और बर्मा में अंग्रेजोंका एकाधिकार स्थापित होगया । एक हज़ार छः सौ तेईस में एक हज़ार छः सौ सोलह के गवर्नमेंट इण्डिया एक्ट के अनुसार बर्मा को आफ गवर्नर द्वारा शासित प्रान्त का दर्जा दिया गया । एक हज़ार एक सौ सैंतीस में बर्मा को हिन्दुस्तान से पृथक कर दिया गया। द्वितीय महायुद्ध में मार्च एक हज़ार नौ सौ बयालीस को राजधानी रंगून पर जापानियों का कब्जा हुआ । अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में देश का शासन एक बार फिर अँग्रेजों के हाथ में श्रा गया । वर्मा के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान में एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में फैसला हुआ कि देश को राजनीतिक स्वतन्त्रता दे दी जाय । चार जनवरी एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को स्वतन्त्र वर्मा ने जन्म लिया । साश्रो श्वे थायक बर्मी लोकतन्त्र के प्रधान बने । एक मार्च अड़तालीस को सत्रह मन्त्रियों के जिस मन्त्रिमंडल ने शासन की बागडोर अपने हाथों में ली, थाकिन नू उसके प्रधान मन्त्री थे । स्वतन्त्र वर्मा का विधान बनाने वाली विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या दो सौ पचपन थी जिसमें विविध पार्टियों को इस प्रकार प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ : फासिज्म विरोधी पीपल्ज़फ्रीडम लीगः एक सौ तिहत्तर, कम्यूनिस्ट सात, एंग्लो बर्मन चार, केरन चौबीस, सीमान्त प्रदेश के प्रतिनिधि पैंतालीस । विधान परिषद ने एक राय से चौबीस सितम्बर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को नए विधान का मसविदा स्वीकार किया । बर्मा पर बाईस करोड़ सत्रह लाख पाउण्ड का विदेशी कर्ज़ा है । इस कर्जे का अधिकांश इंगलैंड का है । वर्मा की समुद्री फौज में एक फिगेट, दो सुरंगें साफ करने वाले जहाज और बाकी कुछ छोटी नौकाएँ हैं । कृषि का उत्पादन : चावल, तिल, मूंगफली । एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस-छियालीस में छब्बीस लाख तीस हजार टन चावल पैदा हुआ । वर्मा के खनिज उत्पादनों में सिक्का, टीन, टंगस्टन, चाँदी व पेट्रोल मुख्य हैं । पेट्रोल का वार्षिक उत्पादन लगभग दो अरव पचासी करोड़ गैलन के है । कई प्रदेशों में कम्यूनिस्टों का प्रभाव बढ़ गया है और स्थापित सरकार के विरुद्ध विद्रोह व हिंसात्मक आन्दोलन फैल रहा है । हिमालय की तराइयों में स्थित एक रियासत, एक सौ नब्बे मील लम्बी दस मील चौड़ी । क्षेत्रफल अट्ठारह,शून्य वर्ग मील । श्राबादी लगभग तीन लाख । राजनीतिक दृष्टिकोण से इस देश का शासन बहुत ही पिछड़ा हुआ है । एक हज़ार छः सौ सात तक देश के शासन में धर्मराज व देवराज का साँझा प्रभुत्व रहता था । उस वर्ष धर्मराज व देवराज का पद एक हो व्यक्ति के हाथों में था। उसके स्तीफा देने पर सर डायेन वांगचुक ने राज्यगद्दी संभाली। एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में उसकी मृत्यु पर महाराज जिग्मी वांगचुक राजा बने । अधिकांश लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं धौर तिब्बत के धर्मग्रन्थों के उद्धरणों का प्रयोग किया करते हैं । भूटान के लोग हिन्दुस्तान की सीमाओं पर उपद्रव न किया करें, इसके लिए एक हज़ार आठ सौ पैंसठ की एक सन्धि के अनुसार भूटान को हिन्दुस्तान से प्रतिवर्ष पचास हज़ार रुपया मिला करता था। एक हज़ार नौ सौ दस से यह रकन लाड व एक हज़ार छः सौ बयालीस से दो लाख रुपया कर दी गई । मलाया-संघ में प्रायःद्वीप की है रियासतें और अंग्रेजी अधिय
ढेरों ऐसे रीचार्ज प्लान्स हैं, जिनके साथ यूजर्स को OTT प्लेटफॉर्म्स का फ्री ऐक्सेस मिलता है। वहीं JioFiber के मंथली प्लान के साथ Amazon Prime, Netflix और Disney+ Hotstar सब फ्री मिलते हैं। लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन पाने के लिए अलग से उनके लिए भुगतान करना पड़ता है। हालांकि टेलिकॉम कंपनियां कई ऐसे प्लान्स दे रही हैं, जिनके साथ अतिरिक्त फायदों के तौर पर OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन मिल जाता है। हम एक ऐसे प्रीपेड प्लान की जानकारी लेकर आए हैं, जिसके साथ Netflix, Amazon Prime और Disney+ Hotstar सभी का सब्सक्रिप्शन फ्री मिल जाता है। ज्यादातर प्रीपेड प्लान्स या तो किसी एक OTT सेवा का सब्सक्रिप्शन देते हैं, या फिर उनमें ज्यादा डाटा का फायदा नहीं मिलता। हम जिस प्लान की जानकारी देने जा रहे हैं, वह रिलायंस जियोफाइबर का प्रीपेड प्लान है। यानी कि अगर आपके पास जियोफाइबर का कनेक्शन है, तो इससे प्लान के साथ रीचार्ज करने का विकल्प मिलेगा। बता दें, यह प्लान अनलिमिटेड डाटा के अलावा अन्य फायदे भी देता है। रीचार्ज प्लान का फायदा जियोफाइबर सब्सक्राइबर्स को मिलता है और यह प्लान एक महीने की वैलिडिटी के साथ आता है। अगर आप चाहें तो जियोफाइबर लगवा सकते हैं या फिर अपने मौजूदा प्रीपेड जियोफाइबर कनेक्शन में इसकी मदद से रीचार्ज कर सकते हैं। यह प्लान 300Mbps की टॉप स्पीड का फायदा भी जियोफाइबर सब्सक्राइबर्स को देता है। जियोफाइबर प्लान की कीमत 1,499 रुपये है और इसकी वैलिडिटी 30 दिन की है। इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड डाटा के साथ किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग भी दी जाती है। इस प्लान के साथ 300Mbps की अपलोड और 300Mbps की डाउनलोड स्पीड का फायदा मिल जाता है। हालांकि, इस प्लान की कीमत पर 18 पर्सेंट GST का भुगतान अलग से करना पड़ता है। प्लान में Netflix Basic, Amazon Prime Video और Disney+ Hotstar के अलावा Voot Select, Sony Liv, ZEE5, Voot Kids, Sun NXT, Hoichoi, Universal+, Lionsgate Play, Discovery+, ShemarooMe, Eros Now, AltBalaji, JioCinema और JioSaavn का सब्सक्रिप्शन भी मिलता है।
ढेरों ऐसे रीचार्ज प्लान्स हैं, जिनके साथ यूजर्स को OTT प्लेटफॉर्म्स का फ्री ऐक्सेस मिलता है। वहीं JioFiber के मंथली प्लान के साथ Amazon Prime, Netflix और Disney+ Hotstar सब फ्री मिलते हैं। लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन पाने के लिए अलग से उनके लिए भुगतान करना पड़ता है। हालांकि टेलिकॉम कंपनियां कई ऐसे प्लान्स दे रही हैं, जिनके साथ अतिरिक्त फायदों के तौर पर OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन मिल जाता है। हम एक ऐसे प्रीपेड प्लान की जानकारी लेकर आए हैं, जिसके साथ Netflix, Amazon Prime और Disney+ Hotstar सभी का सब्सक्रिप्शन फ्री मिल जाता है। ज्यादातर प्रीपेड प्लान्स या तो किसी एक OTT सेवा का सब्सक्रिप्शन देते हैं, या फिर उनमें ज्यादा डाटा का फायदा नहीं मिलता। हम जिस प्लान की जानकारी देने जा रहे हैं, वह रिलायंस जियोफाइबर का प्रीपेड प्लान है। यानी कि अगर आपके पास जियोफाइबर का कनेक्शन है, तो इससे प्लान के साथ रीचार्ज करने का विकल्प मिलेगा। बता दें, यह प्लान अनलिमिटेड डाटा के अलावा अन्य फायदे भी देता है। रीचार्ज प्लान का फायदा जियोफाइबर सब्सक्राइबर्स को मिलता है और यह प्लान एक महीने की वैलिडिटी के साथ आता है। अगर आप चाहें तो जियोफाइबर लगवा सकते हैं या फिर अपने मौजूदा प्रीपेड जियोफाइबर कनेक्शन में इसकी मदद से रीचार्ज कर सकते हैं। यह प्लान तीन सौMbps की टॉप स्पीड का फायदा भी जियोफाइबर सब्सक्राइबर्स को देता है। जियोफाइबर प्लान की कीमत एक,चार सौ निन्यानवे रुपयापये है और इसकी वैलिडिटी तीस दिन की है। इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड डाटा के साथ किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग भी दी जाती है। इस प्लान के साथ तीन सौMbps की अपलोड और तीन सौMbps की डाउनलोड स्पीड का फायदा मिल जाता है। हालांकि, इस प्लान की कीमत पर अट्ठारह पर्सेंट GST का भुगतान अलग से करना पड़ता है। प्लान में Netflix Basic, Amazon Prime Video और Disney+ Hotstar के अलावा Voot Select, Sony Liv, ZEEपाँच, Voot Kids, Sun NXT, Hoichoi, Universal+, Lionsgate Play, Discovery+, ShemarooMe, Eros Now, AltBalaji, JioCinema और JioSaavn का सब्सक्रिप्शन भी मिलता है।
LUCKNOW: आईपीएल मैचों में सट्टेबाजी का गोरखधंधा संचालित करने वाले गैंग का एसटीएफ ने राजफाश करते हुए प्रमुख बुकी रोहित गुप्ता समेत सात लोगों को अरेस्ट कर लिया है। नोएडा को बेस बनाकर ऑनलाइन इस धंधे को संचालित किया जा रहा था। एसटीएफ टीम ने मौके से 27 लाख रुपये नकद, 4 लैपटॉप, दो अटैची फोन, दो आईपैड, 19 मोबाइल फोन, डेटा कार्ड व 2 टीवी बरामद किये हैं। पूछताछ के दौरान रोहित ने बताया कि वह बीते पांच साल से सट्टे का यह कारोबार चला रहा था। एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से प्रदेश के मुख्य शहरों में ऑनलाइन सट्टा संचालित होने की शिकायत मिल रही थी। जिस पर एएसपी शाहाब रशीद खान व उनकी टीम को जांच में जुटाया गया। जांच में पता चला कि यह गैंग नोएडा के फेज-2 थाना क्षेत्र में यह कारोबार संचालित कर रहा है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड रोहित गुप्ता है। सूचना की पुष्टि होने पर एसटीएफ की टीम ने सुपरटेक इमराल्ड स्थित फ्लैट नंबर 1106 में छापा मारकर वहां मौजूद मास्टरमाइंट रोहित गुप्ता, गाजियाबाद निवासी आकाश विज, दिल्ली निवासी अशोक गर्ग, गाजियाबाद निवासी सैमुएल जैकब, राहुल चाना और बुलंदशहर निवासी नीरज गुप्ता व अंकुर गोविल को अरेस्ट कर लिया। टीम ने मौके से 27 लाख रुपये नकद, 4 लैपटॉप, दो अटैची फोन, दो आईपैड, 19 मोबाइल फोन, डेटा कार्ड व 2 टीवी बरामद किये। पूछताछ के दौरान आरोपी रोहित ने बताया कि यह फ्लैट उसने 50 हजार रुपये किराये पर ले रखा है। गिरफ्त में आए रोहित गुप्ता ने बताया कि वह बीकॉम पास है। उसने पांच साल पहले बुलंदशहर में सट्टे का कारोबार शुरू किया था। इसके बाद वह दिल्ली के सट्टा रैकेट से जुड़ गया और डेढ़ साल पहले नोएडा में ऑनलाइन सट्टा संचालित करना शुरू कर दिया। उसने बताया कि साथ में अरेस्ट हुए सभी छह आरोपी उसके साथी हैं और धंधे में उसकी मदद करते हैं। इन साथियों को कमाई में से कमीशन दिया जाता है। उसने बताया कि हर मैच में 40 लाख रुपये तक का कारोबार हो जाता था। हर मैच में रोहित, आकाश व अशोक का हिस्सा रहता था और राहुल पैसा लगाने वालो के दाम लिखता था, जिसे अंकुर लैपटॉप में फीड करता था। पैसा लगाने वालों से रकम वसूलने का काम राहुल, अंकुर, नीरज एवं सैमुअल करते थे। पूछताछ में आरोपी रोहित गुप्ता ने कबूल किया कि उसके गैंग का कनेक्शन गोवा, दिल्ली के बुकी के साथ ही श्रीलंका व नेपाल के बड़े बुकी से भी है। जिनसे ऑनलाइन दांव लगाया जाता था। एसएसपी पाठक ने बताया कि उसका एक फ्लैट नोएडा के सेक्टर 93 स्थित एटीएस विलेज में है। जिसकी कीमत 1. 70 करोड़ रुपये बताई जाती है। इसके अलावा उसके पास बीएमडब्ल्यू जीटी, एक अल्टो कार व हार्ली डेविडसन बाइक है। पूछताछ में रोहित ने बताया कि वह सट्टे के अलावा कोई कारोबार नहीं करता।
LUCKNOW: आईपीएल मैचों में सट्टेबाजी का गोरखधंधा संचालित करने वाले गैंग का एसटीएफ ने राजफाश करते हुए प्रमुख बुकी रोहित गुप्ता समेत सात लोगों को अरेस्ट कर लिया है। नोएडा को बेस बनाकर ऑनलाइन इस धंधे को संचालित किया जा रहा था। एसटीएफ टीम ने मौके से सत्ताईस लाख रुपये नकद, चार लैपटॉप, दो अटैची फोन, दो आईपैड, उन्नीस मोबाइल फोन, डेटा कार्ड व दो टीवी बरामद किये हैं। पूछताछ के दौरान रोहित ने बताया कि वह बीते पांच साल से सट्टे का यह कारोबार चला रहा था। एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से प्रदेश के मुख्य शहरों में ऑनलाइन सट्टा संचालित होने की शिकायत मिल रही थी। जिस पर एएसपी शाहाब रशीद खान व उनकी टीम को जांच में जुटाया गया। जांच में पता चला कि यह गैंग नोएडा के फेज-दो थाना क्षेत्र में यह कारोबार संचालित कर रहा है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड रोहित गुप्ता है। सूचना की पुष्टि होने पर एसटीएफ की टीम ने सुपरटेक इमराल्ड स्थित फ्लैट नंबर एक हज़ार एक सौ छः में छापा मारकर वहां मौजूद मास्टरमाइंट रोहित गुप्ता, गाजियाबाद निवासी आकाश विज, दिल्ली निवासी अशोक गर्ग, गाजियाबाद निवासी सैमुएल जैकब, राहुल चाना और बुलंदशहर निवासी नीरज गुप्ता व अंकुर गोविल को अरेस्ट कर लिया। टीम ने मौके से सत्ताईस लाख रुपये नकद, चार लैपटॉप, दो अटैची फोन, दो आईपैड, उन्नीस मोबाइल फोन, डेटा कार्ड व दो टीवी बरामद किये। पूछताछ के दौरान आरोपी रोहित ने बताया कि यह फ्लैट उसने पचास हजार रुपये किराये पर ले रखा है। गिरफ्त में आए रोहित गुप्ता ने बताया कि वह बीकॉम पास है। उसने पांच साल पहले बुलंदशहर में सट्टे का कारोबार शुरू किया था। इसके बाद वह दिल्ली के सट्टा रैकेट से जुड़ गया और डेढ़ साल पहले नोएडा में ऑनलाइन सट्टा संचालित करना शुरू कर दिया। उसने बताया कि साथ में अरेस्ट हुए सभी छह आरोपी उसके साथी हैं और धंधे में उसकी मदद करते हैं। इन साथियों को कमाई में से कमीशन दिया जाता है। उसने बताया कि हर मैच में चालीस लाख रुपये तक का कारोबार हो जाता था। हर मैच में रोहित, आकाश व अशोक का हिस्सा रहता था और राहुल पैसा लगाने वालो के दाम लिखता था, जिसे अंकुर लैपटॉप में फीड करता था। पैसा लगाने वालों से रकम वसूलने का काम राहुल, अंकुर, नीरज एवं सैमुअल करते थे। पूछताछ में आरोपी रोहित गुप्ता ने कबूल किया कि उसके गैंग का कनेक्शन गोवा, दिल्ली के बुकी के साथ ही श्रीलंका व नेपाल के बड़े बुकी से भी है। जिनसे ऑनलाइन दांव लगाया जाता था। एसएसपी पाठक ने बताया कि उसका एक फ्लैट नोएडा के सेक्टर तिरानवे स्थित एटीएस विलेज में है। जिसकी कीमत एक. सत्तर करोड़ रुपये बताई जाती है। इसके अलावा उसके पास बीएमडब्ल्यू जीटी, एक अल्टो कार व हार्ली डेविडसन बाइक है। पूछताछ में रोहित ने बताया कि वह सट्टे के अलावा कोई कारोबार नहीं करता।
पिछले कुछ वर्षों में 2 पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का बहुत क्रेज देखने के लिए मिल रहा है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है। खबरों का कहना है बहुत लोगों की ऐसा आंकड़ा है जो पेट्रोल के दामों के बढ़ने की वजह से इलेक्ट्रिक बाइक में निवेश करने लगे है। कुछ लोगों का झुकाव इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की तरफ पर्यावरण फैक्टर्स के कारण भी है। यही कारण है कि मार्केट में इनकी डिमांड बनती जा रही है। हालांकि बीच में आग लगने की आई छुटपुट घटनाओं की वजह से लोगों के ऊपर हल्का फुल्का नेगेटिव प्रभाव भी पड़ने लगा है। मार्केट में आपको इस सेक्टर में बहुत मॉडल देखने के लिए मिल रही है, जो 45 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपए तक के व्हीकल्स इस कैटेगरी में पेश की जा चुकी है। रिवॉल्ट आरवी 400- यदि आप बाइक में दिलचस्पी रखते हैं तो रिवॉल्ट RV400 आपके लिए अच्छा विकल्प होने वाला है। खबरों का कहना है कि रिवॉल्ट RV400 सिंगल चार्ज पर 150 किलोमीटर तक चलाया जा सकेगा। वहीं इसकी बैटरी को फुल चार्ज करने में साढ़े 4 घण्टे का वक़्त लगने वाला है। जिसके मूल्य के बारें में बात की जाए तो बात करें तो 1। 25 लाख रुपये है। ओला इलेक्ट्रिक एस1 प्रो- बता दें कि इस लिस्ट में ओला की एस1 प्रो भी शामिल की जा चुकी है। कंपनी के दावे के मुताबिक यह 90 किमी प्रतिघंटा की टॉप-स्पीड से दौड़ने में काम कर रहे है। खबरों का कहना है कि इसे एक बार चार्ज करने पर 121 किलोमीटर तक चलाया जाने वाला है। वहीं इसकी बैटरी को फुल करने में 5 घण्टे का समय लगता है। वहीं कीमत की बात करें तो 85,099 रुपए (एक्स-शोरूम) है।
पिछले कुछ वर्षों में दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का बहुत क्रेज देखने के लिए मिल रहा है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है। खबरों का कहना है बहुत लोगों की ऐसा आंकड़ा है जो पेट्रोल के दामों के बढ़ने की वजह से इलेक्ट्रिक बाइक में निवेश करने लगे है। कुछ लोगों का झुकाव इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की तरफ पर्यावरण फैक्टर्स के कारण भी है। यही कारण है कि मार्केट में इनकी डिमांड बनती जा रही है। हालांकि बीच में आग लगने की आई छुटपुट घटनाओं की वजह से लोगों के ऊपर हल्का फुल्का नेगेटिव प्रभाव भी पड़ने लगा है। मार्केट में आपको इस सेक्टर में बहुत मॉडल देखने के लिए मिल रही है, जो पैंतालीस हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपए तक के व्हीकल्स इस कैटेगरी में पेश की जा चुकी है। रिवॉल्ट आरवी चार सौ- यदि आप बाइक में दिलचस्पी रखते हैं तो रिवॉल्ट RVचार सौ आपके लिए अच्छा विकल्प होने वाला है। खबरों का कहना है कि रिवॉल्ट RVचार सौ सिंगल चार्ज पर एक सौ पचास किलोग्राममीटर तक चलाया जा सकेगा। वहीं इसकी बैटरी को फुल चार्ज करने में साढ़े चार घण्टे का वक़्त लगने वाला है। जिसके मूल्य के बारें में बात की जाए तो बात करें तो एक। पच्चीस लाख रुपये है। ओला इलेक्ट्रिक एसएक प्रो- बता दें कि इस लिस्ट में ओला की एसएक प्रो भी शामिल की जा चुकी है। कंपनी के दावे के मुताबिक यह नब्बे किमी प्रतिघंटा की टॉप-स्पीड से दौड़ने में काम कर रहे है। खबरों का कहना है कि इसे एक बार चार्ज करने पर एक सौ इक्कीस किलोग्राममीटर तक चलाया जाने वाला है। वहीं इसकी बैटरी को फुल करने में पाँच घण्टे का समय लगता है। वहीं कीमत की बात करें तो पचासी,निन्यानवे रुपयापए है।
हेल्थ डेस्कः आज के समय में बहुत से लोग ऐसे हैं जो झड़ते बालों को लेकर परेशान रहते हैं। इस परेशानी के कारण कई बार इंसान की मानसिक स्थिति भी ख़राब हो जाती हैं और लोग तनाव में रहने लगते हैं। आज जानने की कोशिश करेंगे कुछ ऐसे घरेलू उपाय के बारे में जिन उपाय को अपना कर आप अपने झड़ते बालों से छुटकारा पा सकते हैं तथा अपने बालों को स्वस्थ और सेहतमंद बना सकते हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से की झड़ते बालों से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय। मेथी, अगर आप झड़ते हुए बालों से छुटकारा चाहते हैं तो आपके लिए मेथी सबसे फायदेमंद साबित होगा। आप मेथी को पीस कर उसे दही के साथ मिला लें और फिर उसे अपनी बालों में लगाएं। इससे आपके बालों का झड़ना कम जायेगा। इतना ही नहीं मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन मौजूद होता हैं। जिससे आपके बालों में ग्रोथ आने लगेगा तथा आपके बाल मुलायम और कोमल हो जाएंगे। उड़द की दाल, सबसे पहले आप उड़द की दाल को उबाल लें और फिर इसे पेस्ट बना करें रात को सोने से पहले अपने बालों में लगाए और सुबह ठंडे पानी से अपने बाल या सिर को धो लें। इससे आपके बालों का झड़ना कम हो जायेगा तथा सिर में उत्पन गंजेपन की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा। इस घरेलू उपाय को आप सप्ताह में दो से तीन बार आजमाएं। इसका लाभ आपको बहुत जल्द मिलेगा। प्याज, अगर आप बाल झड़ने की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप प्याज के रस को नारियल तेल के साथ मिलकर अपने बालों में लगाएं। एक घंटे के बाद अपने बालों को अच्छी तरह से धो लें। इससे आपके बालों का झड़ना रूक जायेगा तथा आपके सिर पर नए बाल उगने लगेंगे। साथ ही साथ आपके बालों में ग्रोथ भी होने लगेगा। अनार, झड़ते हुए बालों से छुटकारा पाने के लिए अनार बहुत लाभदायक साबित होता हैं। आप अनार के पत्तियों को पीस कर उसका पेस्ट बना लें और उसे अपने बालों में लगाएं। इससे बालों का झड़ना कम हो जायेगा। साथ ही साथ बालों में उत्पन डेंड्रफ और खुजली की समस्या से भी छुटकारा मिल जायेगा। इस उपाय को आप सप्ताह में एक बार जरूर अपनाएं आपके बालों के लिए फायदेमंद साबित होगा। मुलेठी, थोड़ी सी मुलेठी लेकर इसे अच्छी तरह से पीस लें और उसे दूध में मिलाकर अपने बालों में लगाएं। इससे आपके बालों का झड़ना कम हो जायेगा तथा आपको गंजेपन की समस्या से भी छुटकारा मिल जायेगा। इतना ही नहीं इससे आपके बालों में मजबूती आएगी और बालों से जुड़ी सभी प्रकार की समस्या दूर हो जाएगी। इस उपाय को आजमाने से आपके बाल घने और मुलायम हो जाएंगे।
हेल्थ डेस्कः आज के समय में बहुत से लोग ऐसे हैं जो झड़ते बालों को लेकर परेशान रहते हैं। इस परेशानी के कारण कई बार इंसान की मानसिक स्थिति भी ख़राब हो जाती हैं और लोग तनाव में रहने लगते हैं। आज जानने की कोशिश करेंगे कुछ ऐसे घरेलू उपाय के बारे में जिन उपाय को अपना कर आप अपने झड़ते बालों से छुटकारा पा सकते हैं तथा अपने बालों को स्वस्थ और सेहतमंद बना सकते हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से की झड़ते बालों से छुटकारा पाने के पाँच घरेलू उपाय। मेथी, अगर आप झड़ते हुए बालों से छुटकारा चाहते हैं तो आपके लिए मेथी सबसे फायदेमंद साबित होगा। आप मेथी को पीस कर उसे दही के साथ मिला लें और फिर उसे अपनी बालों में लगाएं। इससे आपके बालों का झड़ना कम जायेगा। इतना ही नहीं मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन मौजूद होता हैं। जिससे आपके बालों में ग्रोथ आने लगेगा तथा आपके बाल मुलायम और कोमल हो जाएंगे। उड़द की दाल, सबसे पहले आप उड़द की दाल को उबाल लें और फिर इसे पेस्ट बना करें रात को सोने से पहले अपने बालों में लगाए और सुबह ठंडे पानी से अपने बाल या सिर को धो लें। इससे आपके बालों का झड़ना कम हो जायेगा तथा सिर में उत्पन गंजेपन की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा। इस घरेलू उपाय को आप सप्ताह में दो से तीन बार आजमाएं। इसका लाभ आपको बहुत जल्द मिलेगा। प्याज, अगर आप बाल झड़ने की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप प्याज के रस को नारियल तेल के साथ मिलकर अपने बालों में लगाएं। एक घंटे के बाद अपने बालों को अच्छी तरह से धो लें। इससे आपके बालों का झड़ना रूक जायेगा तथा आपके सिर पर नए बाल उगने लगेंगे। साथ ही साथ आपके बालों में ग्रोथ भी होने लगेगा। अनार, झड़ते हुए बालों से छुटकारा पाने के लिए अनार बहुत लाभदायक साबित होता हैं। आप अनार के पत्तियों को पीस कर उसका पेस्ट बना लें और उसे अपने बालों में लगाएं। इससे बालों का झड़ना कम हो जायेगा। साथ ही साथ बालों में उत्पन डेंड्रफ और खुजली की समस्या से भी छुटकारा मिल जायेगा। इस उपाय को आप सप्ताह में एक बार जरूर अपनाएं आपके बालों के लिए फायदेमंद साबित होगा। मुलेठी, थोड़ी सी मुलेठी लेकर इसे अच्छी तरह से पीस लें और उसे दूध में मिलाकर अपने बालों में लगाएं। इससे आपके बालों का झड़ना कम हो जायेगा तथा आपको गंजेपन की समस्या से भी छुटकारा मिल जायेगा। इतना ही नहीं इससे आपके बालों में मजबूती आएगी और बालों से जुड़ी सभी प्रकार की समस्या दूर हो जाएगी। इस उपाय को आजमाने से आपके बाल घने और मुलायम हो जाएंगे।
बोले हरिश्चन्द्र हूँ नौकर यहाँ पर । देकर के कर को बेटे का दाह कर ॥ धर्म छोड़ करके न होगा गुजारा॥३॥ नहीं पास कुछ कैसे कर चुकाऊँ। ठहरो किसी से कुछ माँग करके लाऊँ॥ बनेगा नरेश कोई सहायक हमारा ॥४॥ ज्ञान गंगा सुनो ज्ञान गंगा की धारा प्रबल है । इसमें नहाना न इतना सरल है। विषय वासना की न इसमें कथाएँ। जो काग बगुलों के मन को रिझाएँ । इसी वास्ते नित्य रहते विकल हैं ॥ १ ॥ वचन सिंह जैसे सुने दुर्जनों के। पर्वत की भाँति काम परिजनों के॥ नदी पर रुके जहाँ कुतर्कों का जल है॥२॥ मद मोह का वन विकट ऐसा आया। बड़ी मुश्किलों में निकल उससे पाया ॥ मुझे नींद ने जकड़ा कितनी सबल है ॥ ३ ॥ जाड़ा मुझे मूर्खता का जो लागा। नहाये बिना ही नरेश उलटा भागा॥ चढ़ा मुझको अभिमान का फिर गरल है॥४॥ विद्या - भजन तर्ज-(शोखियों में घोला जाये...........) जिन पुरुषों का मन करता है विद्या में विलास उनके मन में हो जाता है विद्या का प्रकाश ॥ करते हैं जो अविद्या का नाश वो धन्य हैं । धैर्य शीलता शिक्षा को जो भी अपनाये। सत्य वृत्ति होकर जो सत्य के नियम निभाये॥ अभिमान के न जाये पास वो धन्य है ॥ १ ॥ दूर करें दुर्गुण को सद्गुण जीवन में धारें। विद्या के द्वारा जो संसार के दुःख निवारें ॥ करता जो सुखों का विकास वो धन्य है ॥ २ ॥ आठ वर्ष का लड़का पढ़ने गुरुकुल में जाये। कन्या गुरुकुल में लड़की भी अपना नाम लिखाये ॥ में योग्य आचार्यों के पास वो धन्य है ॥ ३ ॥ जिसने ईक्षण से अखिल विश्व को बनाया है। वही विश्वकर्मा सारे विश्व में कहाया है । सत् रज तम अवस्था सूक्ष्म थी प्रकृति की। पाँच स्थूल भूतों से नई कृति की ॥ जिसका प्रादुर्भूत होना ही जग कहाया है ॥ १ ॥ जैसे अन्धकार में नहीं कुछ भी दीख पाता है। दिन निकलते ही सब कुछ नजर में आता है। सृष्टि का बनना ही ब्रह्म दिन कहाया है॥२॥ हाथ औजार बिन संसार रचाया जिसने । पशु-पक्षी नदी पर्वत को बनाया जिसने ॥ फल व फूलों से सकल सृष्टि को सजाया है ॥ ३ ॥ सकल रचना प्रभु अन्दर से किया करता है । उसका बीज भी उसी में दिया करता है । फल से फल फूल से ही फूल को उगाया है ॥४॥ प्रभु की रचना में विकास हुआ करता है। पूर्ण अवस्था के बाद ह्रास हुआ करता है ।। महा प्रलय ने ही ब्रह्म रात्रि नाम पाया है॥५॥ जिसने ब्रह्म दिन में बिन औजार के निर्माण किया। प्रकृति से कृति कर जीवों का कल्याण किया ॥ प्रथम कर्त्ता ने भी विश्वकर्मा नाम पाया है॥६॥ मनुष्य निर्माण सदा बाहर से किया करता है। इसका निर्माण सदा निर्बीज हुआ करता है ॥ कार ने कार से नहीं जन्म कभी पाया है॥७॥
बोले हरिश्चन्द्र हूँ नौकर यहाँ पर । देकर के कर को बेटे का दाह कर ॥ धर्म छोड़ करके न होगा गुजारा॥तीन॥ नहीं पास कुछ कैसे कर चुकाऊँ। ठहरो किसी से कुछ माँग करके लाऊँ॥ बनेगा नरेश कोई सहायक हमारा ॥चार॥ ज्ञान गंगा सुनो ज्ञान गंगा की धारा प्रबल है । इसमें नहाना न इतना सरल है। विषय वासना की न इसमें कथाएँ। जो काग बगुलों के मन को रिझाएँ । इसी वास्ते नित्य रहते विकल हैं ॥ एक ॥ वचन सिंह जैसे सुने दुर्जनों के। पर्वत की भाँति काम परिजनों के॥ नदी पर रुके जहाँ कुतर्कों का जल है॥दो॥ मद मोह का वन विकट ऐसा आया। बड़ी मुश्किलों में निकल उससे पाया ॥ मुझे नींद ने जकड़ा कितनी सबल है ॥ तीन ॥ जाड़ा मुझे मूर्खता का जो लागा। नहाये बिना ही नरेश उलटा भागा॥ चढ़ा मुझको अभिमान का फिर गरल है॥चार॥ विद्या - भजन तर्ज- जिन पुरुषों का मन करता है विद्या में विलास उनके मन में हो जाता है विद्या का प्रकाश ॥ करते हैं जो अविद्या का नाश वो धन्य हैं । धैर्य शीलता शिक्षा को जो भी अपनाये। सत्य वृत्ति होकर जो सत्य के नियम निभाये॥ अभिमान के न जाये पास वो धन्य है ॥ एक ॥ दूर करें दुर्गुण को सद्गुण जीवन में धारें। विद्या के द्वारा जो संसार के दुःख निवारें ॥ करता जो सुखों का विकास वो धन्य है ॥ दो ॥ आठ वर्ष का लड़का पढ़ने गुरुकुल में जाये। कन्या गुरुकुल में लड़की भी अपना नाम लिखाये ॥ में योग्य आचार्यों के पास वो धन्य है ॥ तीन ॥ जिसने ईक्षण से अखिल विश्व को बनाया है। वही विश्वकर्मा सारे विश्व में कहाया है । सत् रज तम अवस्था सूक्ष्म थी प्रकृति की। पाँच स्थूल भूतों से नई कृति की ॥ जिसका प्रादुर्भूत होना ही जग कहाया है ॥ एक ॥ जैसे अन्धकार में नहीं कुछ भी दीख पाता है। दिन निकलते ही सब कुछ नजर में आता है। सृष्टि का बनना ही ब्रह्म दिन कहाया है॥दो॥ हाथ औजार बिन संसार रचाया जिसने । पशु-पक्षी नदी पर्वत को बनाया जिसने ॥ फल व फूलों से सकल सृष्टि को सजाया है ॥ तीन ॥ सकल रचना प्रभु अन्दर से किया करता है । उसका बीज भी उसी में दिया करता है । फल से फल फूल से ही फूल को उगाया है ॥चार॥ प्रभु की रचना में विकास हुआ करता है। पूर्ण अवस्था के बाद ह्रास हुआ करता है ।। महा प्रलय ने ही ब्रह्म रात्रि नाम पाया है॥पाँच॥ जिसने ब्रह्म दिन में बिन औजार के निर्माण किया। प्रकृति से कृति कर जीवों का कल्याण किया ॥ प्रथम कर्त्ता ने भी विश्वकर्मा नाम पाया है॥छः॥ मनुष्य निर्माण सदा बाहर से किया करता है। इसका निर्माण सदा निर्बीज हुआ करता है ॥ कार ने कार से नहीं जन्म कभी पाया है॥सात॥
मुंबईः जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर की फिल्म धड़क बॉक्स अॉफिस पर अच्छा कलेक्शन कर रही है। स्टार्स से लेकर फैंस फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं बॉलीवुड की पॉपुलर सिंगर लता मंगेशकर ने भी धड़क देखी और जाह्नवी और ईशान की खूब प्रशंसा की है। लता जी ने कहा कि बोनी और अनिल दोनों हमारे बहुत करीबी हैं। मैं अनिल और सुनीता की सगाई में भी गई थी, हालांकि मैं उनकी शादी में शामिल नहीं हो सकी। मुझे बहुत खुशी है कि उनकी बेटी सोनम की शादी हो गई और वो वाकई अच्छा काम कर रही है। एक समय था जब शादी के बाद अभिनेत्रियां काम नहीं करती थी या बहुत कम काम करती थीं। उन्होंने कहा कि शुक्र है वो दिन खत्म हो गए। एक कामकाजी महिला के रूप में और मैं 12 साल की उम्र से काम कर रही हूं। शादी के बाद करियर छोड़ना मेरे लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है। बोनी भी मंगेशकर परिवार के करीबी हैं। उन्होंने कहा, श्रीदवी के अचानक जाने के बाद उनकी बेटी का फिल्म डेब्यू उनके (बोनी) के लिए मुस्कुराने की वजह है। जाह्नवी बहुत प्यारी हैं। मैं उसके लिए फिल्म में गाना गाना पसंद करूंगी। फिल्म की बात करें तो जाह्नवी और ईशान की फिल्म "धड़क" इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है। फिल्म ने 3 दिन में 33 करोड़ की कमाई की है।
मुंबईः जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर की फिल्म धड़क बॉक्स अॉफिस पर अच्छा कलेक्शन कर रही है। स्टार्स से लेकर फैंस फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं बॉलीवुड की पॉपुलर सिंगर लता मंगेशकर ने भी धड़क देखी और जाह्नवी और ईशान की खूब प्रशंसा की है। लता जी ने कहा कि बोनी और अनिल दोनों हमारे बहुत करीबी हैं। मैं अनिल और सुनीता की सगाई में भी गई थी, हालांकि मैं उनकी शादी में शामिल नहीं हो सकी। मुझे बहुत खुशी है कि उनकी बेटी सोनम की शादी हो गई और वो वाकई अच्छा काम कर रही है। एक समय था जब शादी के बाद अभिनेत्रियां काम नहीं करती थी या बहुत कम काम करती थीं। उन्होंने कहा कि शुक्र है वो दिन खत्म हो गए। एक कामकाजी महिला के रूप में और मैं बारह साल की उम्र से काम कर रही हूं। शादी के बाद करियर छोड़ना मेरे लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है। बोनी भी मंगेशकर परिवार के करीबी हैं। उन्होंने कहा, श्रीदवी के अचानक जाने के बाद उनकी बेटी का फिल्म डेब्यू उनके के लिए मुस्कुराने की वजह है। जाह्नवी बहुत प्यारी हैं। मैं उसके लिए फिल्म में गाना गाना पसंद करूंगी। फिल्म की बात करें तो जाह्नवी और ईशान की फिल्म "धड़क" इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है। फिल्म ने तीन दिन में तैंतीस करोड़ की कमाई की है।
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी का कहर जारी है। दिनभर तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार लू और तपिश झेल रहे दिल्लीवासियों को आज थोड़ी राहत मिलने की संभावना है। शाम के समय आंधी और बूंदाबादी की होने से तापमान में थोड़ी कम हो सकती है। आईएमडी के ताजा अपडेट के मुताबिक आज दिल्ली-एनसीआर के अलावा असम, मेघालय और आसपास के राज्यों में बारिश के आसार बने हुए हैं। दिल्ली में मंगलवार को तापमान 42. 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोकि औसत तापमान से छह डिग्री अधिक था, जबकि न्यूनतम तापमान 23. 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से दो डिग्री अधिक है। मौसम विभाग का कहना है कि आज बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं और यही नहीं 21 और 22 अप्रैल के आसपास गरज के साथ बूंदाबांदी होने की संभावना है। सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही है। दिल्ली का एक्यूआई इंडेक्स 317 बहुत खराब,गुरुग्राम का एक्यूआई इंडेक्स 279 खराब, फरीदाबाद का एक्यूआई 390 बहुत खराब दर्ज किया गया। ध्यान योग्य है कि शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 को 'मध्यम', 201 और 300 को 'खराब', 301 और 400 को 'बहुत खराब' और 401 और 500 को 'गंभीर' माना जाता है।
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी का कहर जारी है। दिनभर तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार लू और तपिश झेल रहे दिल्लीवासियों को आज थोड़ी राहत मिलने की संभावना है। शाम के समय आंधी और बूंदाबादी की होने से तापमान में थोड़ी कम हो सकती है। आईएमडी के ताजा अपडेट के मुताबिक आज दिल्ली-एनसीआर के अलावा असम, मेघालय और आसपास के राज्यों में बारिश के आसार बने हुए हैं। दिल्ली में मंगलवार को तापमान बयालीस. छः डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोकि औसत तापमान से छह डिग्री अधिक था, जबकि न्यूनतम तापमान तेईस. सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से दो डिग्री अधिक है। मौसम विभाग का कहना है कि आज बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं और यही नहीं इक्कीस और बाईस अप्रैल के आसपास गरज के साथ बूंदाबांदी होने की संभावना है। सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही है। दिल्ली का एक्यूआई इंडेक्स तीन सौ सत्रह बहुत खराब,गुरुग्राम का एक्यूआई इंडेक्स दो सौ उन्यासी खराब, फरीदाबाद का एक्यूआई तीन सौ नब्बे बहुत खराब दर्ज किया गया। ध्यान योग्य है कि शून्य से पचास के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', इक्यावन और एक सौ के बीच 'संतोषजनक', एक सौ एक और दो सौ को 'मध्यम', दो सौ एक और तीन सौ को 'खराब', तीन सौ एक और चार सौ को 'बहुत खराब' और चार सौ एक और पाँच सौ को 'गंभीर' माना जाता है।
भिवानी, 5 दिसंबर (हप्र) प्रदेश सरकार ने क्रीमीलेयर के संबंध में नई अधिसूचना जारी की है, जिसके विरोध में अब पिछड़ा वर्ग के लोग उतर आए है तथा सरकार से 17 नवंबर को जारी की गई अधिसूचना वापस लेने तथा 1995 की अधिसूचना यथास्थिति लागू किए जाने की मांग कर रहे है। इसी के तहत लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के सरंक्षक शांता कुमार आर्य, मुख्य वक्ता पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. आरसी लिंबा भिवानी पहुंचे। इस मौके पर राष्ट्रीय कुम्हार महासभा के प्रवक्ता गणेशीलाल वर्मा एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के सरंक्षक शांता कुमार आर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा क्रीमीलेर के संबंध में जारी की गई नई अधिसूचना पूर्णतया असंवैधानिक है तथा सर्वोच्च न्यायालय के 24 अगस्त के फैसले की अवमानना है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार 1995 की अधिसूचना यथास्थिति लागू करे, अन्यथा पिछड़ा वर्ग सरकार की घेराबंदी से पीछे नहीं हटेगी। इस अवसर पर रामकुमार सुधीवास, डॉ. मनोज कुमार, कृष्ण कुमार, शीला देवी, रामकिशन वर्मा, बाबूलाल, ओमकार यादव सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
भिवानी, पाँच दिसंबर प्रदेश सरकार ने क्रीमीलेयर के संबंध में नई अधिसूचना जारी की है, जिसके विरोध में अब पिछड़ा वर्ग के लोग उतर आए है तथा सरकार से सत्रह नवंबर को जारी की गई अधिसूचना वापस लेने तथा एक हज़ार नौ सौ पचानवे की अधिसूचना यथास्थिति लागू किए जाने की मांग कर रहे है। इसी के तहत लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के सरंक्षक शांता कुमार आर्य, मुख्य वक्ता पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. आरसी लिंबा भिवानी पहुंचे। इस मौके पर राष्ट्रीय कुम्हार महासभा के प्रवक्ता गणेशीलाल वर्मा एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के सरंक्षक शांता कुमार आर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा क्रीमीलेर के संबंध में जारी की गई नई अधिसूचना पूर्णतया असंवैधानिक है तथा सर्वोच्च न्यायालय के चौबीस अगस्त के फैसले की अवमानना है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार एक हज़ार नौ सौ पचानवे की अधिसूचना यथास्थिति लागू करे, अन्यथा पिछड़ा वर्ग सरकार की घेराबंदी से पीछे नहीं हटेगी। इस अवसर पर रामकुमार सुधीवास, डॉ. मनोज कुमार, कृष्ण कुमार, शीला देवी, रामकिशन वर्मा, बाबूलाल, ओमकार यादव सहित अनेक लोग मौजूद रहे।