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अपने बँधे-बँधाये दायरे से बाहर निकलना मुश्किल होता है पर कभी-कभी नयी राहें खुशनुमा मोड़ों की ओर ले जाती हैं । वरीयता के आधार पर राजस्थान अपने प्रतिष्ठित शहरों जैसे जयपुर, जोधपुर, उदयपुर के लिए विश्वविख्यात है। पर यहाँ और भी कई गुप्त रत्न हैं / छिपे हुए खजाने हैं। बस आपको पता होना चाहिए कि वह कहाँ है ? अगर आप लीक से अलग हटकर चलना चाहते हैं तो चुरू आपके लिए एक अच्छा चुनाव /विकल्प है। किसी भी पर्यटक के लिए अप्रतिम !
थार रेगिस्तान के क्षेत्र में स्थित चुरू राजस्थान का अर्ध शुष्क जलवायु वाला जिला है। चुरू को 'थार का सिंह द्वार ' भी कहा जाता है। सड़क या रेल द्वारा चुरू की यात्रा की जा सकती है। चुरू एनएच 65 पर स्थित है और सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यह दिल्ली से 265 किलोमीटर दूर है और कार द्वारा वहाँ से यहाँ तक पहुँचने में करीब 6 घंटे लगते हैं।जंक्शन के रूप में दिल्ली-रेवाड़ी- बीकानेर-चुरू सरायरोहिला स्टेशन से शुरू होने वाली तीन रेल गाड़ियों के माध्यम से जुड़ा है। यात्रा करने का सबसे अच्छा समयः जब सर्दियाँ होती हैं तब चुरू में धूप सुहानी लगती है। अक्टूबर से मार्च के महीनों और मानसून का मौसम यात्रा करने का सबसे अच्छा समय है। इसकी तुलना में गर्मी के मौसम में यहाँ आने की कम से कम सलाह दी जाती है क्योंकि उस समय पारा 55 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा बढ़ सकता है।
राजस्थान के नक्शे में हर स्थान पर नजर आते महल और किलें यहाँ नहीं हैं पर यहाँ जो है वो कहीं और नहीं !! अलग छवि -चुरू में रंगीन भित्ति चित्रों और शानदार फ़्रेस्को के साथ सुंदर और भव्य हवेली है। छतः ये हवेली स्थापत्य कला के प्रेमियों के लिए एक अनुभव है,एक छायाचित्रकार की खुशी है और इतिहास के प्रशंसकों के लिए एक सपना ! विरासत की सैर करेंः इस तरह के टूर पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं। स्थानीय भोजन का आनंद लेंः यहां पर स्थानीय भोजन स्वादिष्ट पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन भी शामिल हैं। भोजन में बाजरा की रोटी, केर सांगरी - एक तीखी -मीठी स्थानीय विशेष और मसालेदार, गट्टे की सब्जी और पापड मंगोड़ी। चुरु की गलियों में खरीदारी /स्ट्रीट शॉपिंगः चुरु में सड़क के बाज़ारों में आप लकड़ी पर चंदन की कलात्मक नक्काशी से बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं,चन्दन के बादाम आकृति,कब्जे में टिकी हुई डिबिया , और इसे खोलने पर छोटे से देवता की छवि नजर आती है ।जो लोग खरीदारी करना पसंद करते हैं वे और भी देख सकते हैं जैसे लॉकेट, छिपे हुए खांचो के साथ फूलों के पौधे, जो चंदन के देवता या गांव की छवि को प्रकट करने के लिए एक -एक कर खुलते जाते कपाट/बॉक्स वाले खिलौने यहाँ हैं। साथ ही आकर्षक बंधेज दुपट्टे लेना न भूलें ,इसके बिना आपकी खरीदारी पूरी नहीं होगी।
मंत्री की हवेलीः चुरु में मंत्री हवेली 18 वीं सदी में बनाया गया था, और समृद्ध इतिहास और भव्यता को दर्शाता है।राजपूत युग की यह हवेली पूरी तरह से सुंदर चित्रों के साथ आच्छादित है और भीतर से अति सुंदर है ।कांच का काम ,अलंकृत पुष्प, रूपांकनों, और शानदार छज्जे और ताक़/आला , इसकी कलाकृति और वास्तुकला में एक अलग राजपूताना स्पर्श है। सालासर धामः सालासर बालाजी हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व का स्थान है। मंदिर में मुख्य देवता भगवान हनुमान हैं और अन्य तीर्थस्थल की तुलना में बालाजी मंदिर निकट है। जैन मंदिरः स्वर्ण रंगों में पेंट की गई अद्भुत चित्रों की एक झलक के लिए जैन मंदिर की एक यात्रा जरूरी है। यह मंदिर कुछ सदियों पहले बनाया गया था और कोठारीयों द्वारा इसका रखरखाव किया जाता है। सेठानी का जोहराः सेठानी का जोहरा एक जल भंडार है. जब इस इलाके में एक भयंकर अकाल देखा गया था तो इसे बनाया गया था। 1956 में यह भगवान दास बागला की विधवा पत्नी द्वारा बनाया गया था। ताल छापर अभयारण्यः ताल छापर अभयारण्य एक वन्यजीव अभ्यारण्य है जो कृष्णमृग के लिए जाना जाता है ।यहाँ विविध जीव जंतु पाए जाते हैं।।
यद्यपि चुरु छोटा शहर है पर चुरु में रहने के लिए कुछ बेहतरीन विकल्प हैं, जैसे मॉल जी का कमरा , भवानीकोठी और होटल सन सिटी पैलेस। तीनों में से, मॉल जी का कमरा पर्यटक की पहली पसंद है । यह 110 वर्ष पुराना है । फ़िरोज़ा रंग का सफेद आइवरी से निर्मित है। कमरे आरामदेह हैं और यहाँ मूल भित्ति चित्र हैं । चुरू में विरासत के आकर्षण, मंदिरों और स्मारक इतने सारे हैं कि आप हर मोड़ पर इतिहास की यात्रा करेंगे। हमें यकीन है कि आप आ रहे हैं!
| अपने बँधे-बँधाये दायरे से बाहर निकलना मुश्किल होता है पर कभी-कभी नयी राहें खुशनुमा मोड़ों की ओर ले जाती हैं । वरीयता के आधार पर राजस्थान अपने प्रतिष्ठित शहरों जैसे जयपुर, जोधपुर, उदयपुर के लिए विश्वविख्यात है। पर यहाँ और भी कई गुप्त रत्न हैं / छिपे हुए खजाने हैं। बस आपको पता होना चाहिए कि वह कहाँ है ? अगर आप लीक से अलग हटकर चलना चाहते हैं तो चुरू आपके लिए एक अच्छा चुनाव /विकल्प है। किसी भी पर्यटक के लिए अप्रतिम ! थार रेगिस्तान के क्षेत्र में स्थित चुरू राजस्थान का अर्ध शुष्क जलवायु वाला जिला है। चुरू को 'थार का सिंह द्वार ' भी कहा जाता है। सड़क या रेल द्वारा चुरू की यात्रा की जा सकती है। चुरू एनएच पैंसठ पर स्थित है और सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यह दिल्ली से दो सौ पैंसठ किलोग्राममीटर दूर है और कार द्वारा वहाँ से यहाँ तक पहुँचने में करीब छः घंटाटे लगते हैं।जंक्शन के रूप में दिल्ली-रेवाड़ी- बीकानेर-चुरू सरायरोहिला स्टेशन से शुरू होने वाली तीन रेल गाड़ियों के माध्यम से जुड़ा है। यात्रा करने का सबसे अच्छा समयः जब सर्दियाँ होती हैं तब चुरू में धूप सुहानी लगती है। अक्टूबर से मार्च के महीनों और मानसून का मौसम यात्रा करने का सबसे अच्छा समय है। इसकी तुलना में गर्मी के मौसम में यहाँ आने की कम से कम सलाह दी जाती है क्योंकि उस समय पारा पचपन डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा बढ़ सकता है। राजस्थान के नक्शे में हर स्थान पर नजर आते महल और किलें यहाँ नहीं हैं पर यहाँ जो है वो कहीं और नहीं !! अलग छवि -चुरू में रंगीन भित्ति चित्रों और शानदार फ़्रेस्को के साथ सुंदर और भव्य हवेली है। छतः ये हवेली स्थापत्य कला के प्रेमियों के लिए एक अनुभव है,एक छायाचित्रकार की खुशी है और इतिहास के प्रशंसकों के लिए एक सपना ! विरासत की सैर करेंः इस तरह के टूर पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं। स्थानीय भोजन का आनंद लेंः यहां पर स्थानीय भोजन स्वादिष्ट पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन भी शामिल हैं। भोजन में बाजरा की रोटी, केर सांगरी - एक तीखी -मीठी स्थानीय विशेष और मसालेदार, गट्टे की सब्जी और पापड मंगोड़ी। चुरु की गलियों में खरीदारी /स्ट्रीट शॉपिंगः चुरु में सड़क के बाज़ारों में आप लकड़ी पर चंदन की कलात्मक नक्काशी से बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं,चन्दन के बादाम आकृति,कब्जे में टिकी हुई डिबिया , और इसे खोलने पर छोटे से देवता की छवि नजर आती है ।जो लोग खरीदारी करना पसंद करते हैं वे और भी देख सकते हैं जैसे लॉकेट, छिपे हुए खांचो के साथ फूलों के पौधे, जो चंदन के देवता या गांव की छवि को प्रकट करने के लिए एक -एक कर खुलते जाते कपाट/बॉक्स वाले खिलौने यहाँ हैं। साथ ही आकर्षक बंधेज दुपट्टे लेना न भूलें ,इसके बिना आपकी खरीदारी पूरी नहीं होगी। मंत्री की हवेलीः चुरु में मंत्री हवेली अट्ठारह वीं सदी में बनाया गया था, और समृद्ध इतिहास और भव्यता को दर्शाता है।राजपूत युग की यह हवेली पूरी तरह से सुंदर चित्रों के साथ आच्छादित है और भीतर से अति सुंदर है ।कांच का काम ,अलंकृत पुष्प, रूपांकनों, और शानदार छज्जे और ताक़/आला , इसकी कलाकृति और वास्तुकला में एक अलग राजपूताना स्पर्श है। सालासर धामः सालासर बालाजी हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व का स्थान है। मंदिर में मुख्य देवता भगवान हनुमान हैं और अन्य तीर्थस्थल की तुलना में बालाजी मंदिर निकट है। जैन मंदिरः स्वर्ण रंगों में पेंट की गई अद्भुत चित्रों की एक झलक के लिए जैन मंदिर की एक यात्रा जरूरी है। यह मंदिर कुछ सदियों पहले बनाया गया था और कोठारीयों द्वारा इसका रखरखाव किया जाता है। सेठानी का जोहराः सेठानी का जोहरा एक जल भंडार है. जब इस इलाके में एक भयंकर अकाल देखा गया था तो इसे बनाया गया था। एक हज़ार नौ सौ छप्पन में यह भगवान दास बागला की विधवा पत्नी द्वारा बनाया गया था। ताल छापर अभयारण्यः ताल छापर अभयारण्य एक वन्यजीव अभ्यारण्य है जो कृष्णमृग के लिए जाना जाता है ।यहाँ विविध जीव जंतु पाए जाते हैं।। यद्यपि चुरु छोटा शहर है पर चुरु में रहने के लिए कुछ बेहतरीन विकल्प हैं, जैसे मॉल जी का कमरा , भवानीकोठी और होटल सन सिटी पैलेस। तीनों में से, मॉल जी का कमरा पर्यटक की पहली पसंद है । यह एक सौ दस वर्ष पुराना है । फ़िरोज़ा रंग का सफेद आइवरी से निर्मित है। कमरे आरामदेह हैं और यहाँ मूल भित्ति चित्र हैं । चुरू में विरासत के आकर्षण, मंदिरों और स्मारक इतने सारे हैं कि आप हर मोड़ पर इतिहास की यात्रा करेंगे। हमें यकीन है कि आप आ रहे हैं! |
Don't Miss!
बॉलीवुड फ़िल्में वैसे तो अपनी कहानी की वजह से चर्चा में आ जाती हैं. इसी के साथ साथ उसमें दिखाई किरदार भी बहुत ज्यादा अहम माने जाते हैं. लेकिन जब भी कोई फिल्म रिलीज होती है तो हर किसी की नजर उस फिल्म के बजट पर होती है. आज हम आपको कुछ ऐसे ही फिल्मों के बारे में बताने वाले हैं जिनको बनाने के लिए मेकर्स ने बहुत कम पैसा खर्च किया और यह फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट चली गई.
फिल्म स्त्री में श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की जोड़ी को दिखाया गया है. इस फिल्म को 14 करोड़ के बजट में बनाया गया था. लेकिन बाद में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी गिर गई कि 180 करोड़ का इसने बिजनेस कर लिया. इस फिल्म कोसाल 2018 में रिलीज किया गया था.
कंगना रनौत की फिल्म क्वीन भी काफी ज्यादा चर्चा में रही थी. इस फिल्म के बाद में कंगना रनौत खुद ही बॉलीवुड की क्वीन बन गई. इस फिल्म के कारण मेकर्स को खुद फायदा हुआ. बता दें कि इस फिल्म को 12 करोड़ के बजट में बनाया गया था और बॉक्स ऑफिस पर इसने 100 करोड़ का बिजनेस किया. बता दें कि इस फिल्म को 2014 में रिलीज किया गया था.
डर्टी पिक्चर में विद्या बालन को दिखाया गया था और बॉक्स ऑफिस पर इसने काफी अच्छी खासी कमाई कर ली थी. बता दें कि इस फिल्म को 18 करोड़ के बजट में बनाया गया और 117 करोड का इतने बिजनेस भी किया. साल 2011 में इस फिल्म को रिलीज किया गया.
विक्की डोनर फिल्म भी आयुष्मान खुराना की काफी हिट गई थी. बता दें कि इस फिल्म को 15 करोड़ के बजट में बनाया गया था और बॉक्स ऑफिस पर इसने 68.32 करोड़ की कमाई कर ली. इस फिल्म में आयुष्मान खुराना के साथ यामी गौतम लीड रोल में नजर आई. इतना ही नहीं इस फिल्म को 2012 में रिलीज किया गया.
फिल्म कहानी में सुजॉय घोष नजर आई थी और आपको बता दें कि उनके साथ में विद्या बालन को भी देखा गया था. इस फिल्म को 8 करोड़ के बजट में बनाया गया था और वही बॉक्स ऑफिस पर इसने 100 करोड़ की कमाई की. इस फिल्म को साल 2012 में रिलीज किया गया था.
2018 में रिलीज हुई सोनू के टीटू की स्वीटी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धड़ल्ले से कमाई की थी. बता दें कि इस फिल्म को 25 करोड़ के बजट में बनाया गया और बॉक्स ऑफिस पर इसने 150 करोड़ का बिजनेस किया.
| Don't Miss! बॉलीवुड फ़िल्में वैसे तो अपनी कहानी की वजह से चर्चा में आ जाती हैं. इसी के साथ साथ उसमें दिखाई किरदार भी बहुत ज्यादा अहम माने जाते हैं. लेकिन जब भी कोई फिल्म रिलीज होती है तो हर किसी की नजर उस फिल्म के बजट पर होती है. आज हम आपको कुछ ऐसे ही फिल्मों के बारे में बताने वाले हैं जिनको बनाने के लिए मेकर्स ने बहुत कम पैसा खर्च किया और यह फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट चली गई. फिल्म स्त्री में श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की जोड़ी को दिखाया गया है. इस फिल्म को चौदह करोड़ के बजट में बनाया गया था. लेकिन बाद में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी गिर गई कि एक सौ अस्सी करोड़ का इसने बिजनेस कर लिया. इस फिल्म कोसाल दो हज़ार अट्ठारह में रिलीज किया गया था. कंगना रनौत की फिल्म क्वीन भी काफी ज्यादा चर्चा में रही थी. इस फिल्म के बाद में कंगना रनौत खुद ही बॉलीवुड की क्वीन बन गई. इस फिल्म के कारण मेकर्स को खुद फायदा हुआ. बता दें कि इस फिल्म को बारह करोड़ के बजट में बनाया गया था और बॉक्स ऑफिस पर इसने एक सौ करोड़ का बिजनेस किया. बता दें कि इस फिल्म को दो हज़ार चौदह में रिलीज किया गया था. डर्टी पिक्चर में विद्या बालन को दिखाया गया था और बॉक्स ऑफिस पर इसने काफी अच्छी खासी कमाई कर ली थी. बता दें कि इस फिल्म को अट्ठारह करोड़ के बजट में बनाया गया और एक सौ सत्रह करोड का इतने बिजनेस भी किया. साल दो हज़ार ग्यारह में इस फिल्म को रिलीज किया गया. विक्की डोनर फिल्म भी आयुष्मान खुराना की काफी हिट गई थी. बता दें कि इस फिल्म को पंद्रह करोड़ के बजट में बनाया गया था और बॉक्स ऑफिस पर इसने अड़सठ.बत्तीस करोड़ की कमाई कर ली. इस फिल्म में आयुष्मान खुराना के साथ यामी गौतम लीड रोल में नजर आई. इतना ही नहीं इस फिल्म को दो हज़ार बारह में रिलीज किया गया. फिल्म कहानी में सुजॉय घोष नजर आई थी और आपको बता दें कि उनके साथ में विद्या बालन को भी देखा गया था. इस फिल्म को आठ करोड़ के बजट में बनाया गया था और वही बॉक्स ऑफिस पर इसने एक सौ करोड़ की कमाई की. इस फिल्म को साल दो हज़ार बारह में रिलीज किया गया था. दो हज़ार अट्ठारह में रिलीज हुई सोनू के टीटू की स्वीटी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धड़ल्ले से कमाई की थी. बता दें कि इस फिल्म को पच्चीस करोड़ के बजट में बनाया गया और बॉक्स ऑफिस पर इसने एक सौ पचास करोड़ का बिजनेस किया. |
मंगल गीत मधुर धुनि मंजुल,
गांवे भक्त समाजरे नमो भविजन भावे० ॥ ५ ॥
नंदी दिव्य महोत्सव पूर्वक,
श्रीनागोर मझाररे नमो भविजन भावे ।
वाचना चारज पद श्री गुरु दें,
कुशल कीरति को सारे नमो भविजन भावे० ॥ ६ ॥ गुरु वमन्त जन जीवन पावन,
फूल प्रफुलित होतरे, नमो भविजन भावे । जग में जिससे अतिमनोहर,
यसरे परिमल पूररे नमो भविजन भावे० ॥ ७ ॥
वाचना चारज कुशल कुशल गुरु,
सुखसागर भगवानरे नमो भविजन भावे ।
'हरि गुरु पूजी हृदय कमल में,
पावो कुशल निवानरे - नमो भविजन भावे० ॥ ८ ॥ (काव्य)
भव्य - प्रसून - प्रतिबोधकारी,
तत्पाद - पद्म-द्वितयं
दादाभिधानः कुंशलाख्य सूरिः ।
प्रसून-पूजेंः परिपूजयामि ॥
ॐ ह्रीँ श्रीँ अर्ह परम पुरुषाय परम गुरुदेवाय भगवते श्रीजिनशासनोद्दीपकाय श्रीजिनकुशल सूरीश्वराय पुष्पं यजामहे स्वाहा ।
४- धूप पूजा ॥ दोहा ॥
हैं गुरु धर्म दशांगयुत, उरध सिद्ध गति भाव । पूजो धूप दशांग से, गुरुपद गुरुपद दाव ।।
तर्ज - ( हो उमराव थारी वोली प्यारी लागे ) हो गुरुराज पद शुभ भावधरी नित पूजो नर नार । हो गुरुराज पूजा करते भविजन होवें भव पार ।। भवपार हो जी नर नार ॥ टेर ॥
कुशल कीरति मुनिराजकी, कुशल कीर्ति विस्तार । जब छाई जग में यहां, जन चोलें जयकार ॥ हो गुरुराज श्री जिनाशासन भासन कारी पुखकार । हो गुरुराज ॥ १ ॥ श्रीजिनचन्द्र ।
आयु शेष निज जानते, आतम-ध्यान-अमंद ।।
हो गुरुराज निज पदयोग्य कुशल को देखे अविकार । ही गुरुग़ज० ।। २ ।। श्री राजेन्द्राचार्य को, ढ़ं गुरु आज्ञा लेख । कुशल कुशल पद योग्य है, यामें मीन न मे ।। हो गुरुराज जग उपकारी जानी महिमा हितकार ॥ हो गुरुराज० ॥ ३ ॥ आराधक गुरुदेव के श्रमणोपामक वीर । विजयसिंह को ढं गुरु, लेखाज़ा तवीर ।। हो गुरुराज पुण्य प्रकाश विराजित देवें बोधमार ॥ हो गुरुराज० ।। ४ ।। संघ चतुर्विध साथ में. करने धर्मप्राचर । कोसाणा में श्रीगुरु, पहुंचे स्वर्ग मकार ।। हो गुरुराज श्रीजिनचन्द्र विरह में छाया अन्धकार ।। हो गुरुगज० ॥ ५ ॥
तेरहमी सतहत्तरे, ग्यारस मिति बढ़ि जेठ । कुम्भ लगन निश्चित करें, संघ सत्र जग शेठ । हो गुरुराज पाटण पुण्य महोत्सव जाऊ बलिहार हो गुरुगज० ।। ६ ।।
तेजपाल दानी गुणी, रूडपाल सहयोग । आमंत्र श्री संघ को, पूर्व पुण्य - धनयोग ।। हो गुरुराज शोभा पाटणकी क्या वरणथी अपार हो गुरुराज० ।। ७ ।।
श्री राजेन्द्राचार्य तत्र, लेखाज्ञा अनुसार । कुशलकीर्ति मुनिराज का, करें नाम संस्कार ।। हो गुरुराज श्रीजिन कुशल सूरीश्वरकी हो जयकार हो गुरुराज० ॥ ८ ॥
श्रीजिन कुशल सूरीश्वर, दादा युग परधान । अतिशयधारी पूज्यवर, सुख सागर भगवान ॥ हो गुरुराज पद 'हरि' पूजो भावे होवो भवपार हो गुरुराज ० ॥ ६ ॥
धर्म-प्रचारी वर-बोधकारी
तत्पाद - पद्म-द्वितयं नमामि
दशांग-धूप सुपरिक्षिपामि ।।
ॐ ह्रीँ श्रीँ अर्ह परम पुरुपाय परम गुरुदेवाय भगवते श्रीजिनशासनोद्दीपकाय श्रीजिनकुशल सूरीश्वराय धूपं यजामहे स्वाहा ॥
मन सुपात्र गुण वृत्तिकर, सद्गुरु धरम सनेह । ज्ञान उजेला नित करे, दीपक पूजा एह ।। ( तर्ज - जिन मत का डंका आलम में ) अज्ञान तिमिर अति दूर किया,
गुरु दीपक कुशल सूरीश्वर ने ।
वर ज्ञान प्रकाश प्रचार किया,
गुरु दीपक कुशल जिनचन्द्र परम गुरु विरह हुआ,
सूरीश्वर ने ।
अंधेरा सब जग छाया था ।
ज्योतिर्मय पद परकाश किया,
गुरु दीपक कुशल सूरीश्वर ने । अज्ञान तिमिर० ॥ १ ॥ | मंगल गीत मधुर धुनि मंजुल, गांवे भक्त समाजरे नमो भविजन भावेशून्य ॥ पाँच ॥ नंदी दिव्य महोत्सव पूर्वक, श्रीनागोर मझाररे नमो भविजन भावे । वाचना चारज पद श्री गुरु दें, कुशल कीरति को सारे नमो भविजन भावेशून्य ॥ छः ॥ गुरु वमन्त जन जीवन पावन, फूल प्रफुलित होतरे, नमो भविजन भावे । जग में जिससे अतिमनोहर, यसरे परिमल पूररे नमो भविजन भावेशून्य ॥ सात ॥ वाचना चारज कुशल कुशल गुरु, सुखसागर भगवानरे नमो भविजन भावे । 'हरि गुरु पूजी हृदय कमल में, पावो कुशल निवानरे - नमो भविजन भावेशून्य ॥ आठ ॥ भव्य - प्रसून - प्रतिबोधकारी, तत्पाद - पद्म-द्वितयं दादाभिधानः कुंशलाख्य सूरिः । प्रसून-पूजेंः परिपूजयामि ॥ ॐ ह्रीँ श्रीँ अर्ह परम पुरुषाय परम गुरुदेवाय भगवते श्रीजिनशासनोद्दीपकाय श्रीजिनकुशल सूरीश्वराय पुष्पं यजामहे स्वाहा । चार- धूप पूजा ॥ दोहा ॥ हैं गुरु धर्म दशांगयुत, उरध सिद्ध गति भाव । पूजो धूप दशांग से, गुरुपद गुरुपद दाव ।। तर्ज - हो गुरुराज पद शुभ भावधरी नित पूजो नर नार । हो गुरुराज पूजा करते भविजन होवें भव पार ।। भवपार हो जी नर नार ॥ टेर ॥ कुशल कीरति मुनिराजकी, कुशल कीर्ति विस्तार । जब छाई जग में यहां, जन चोलें जयकार ॥ हो गुरुराज श्री जिनाशासन भासन कारी पुखकार । हो गुरुराज ॥ एक ॥ श्रीजिनचन्द्र । आयु शेष निज जानते, आतम-ध्यान-अमंद ।। हो गुरुराज निज पदयोग्य कुशल को देखे अविकार । ही गुरुग़जशून्य ।। दो ।। श्री राजेन्द्राचार्य को, ढ़ं गुरु आज्ञा लेख । कुशल कुशल पद योग्य है, यामें मीन न मे ।। हो गुरुराज जग उपकारी जानी महिमा हितकार ॥ हो गुरुराजशून्य ॥ तीन ॥ आराधक गुरुदेव के श्रमणोपामक वीर । विजयसिंह को ढं गुरु, लेखाज़ा तवीर ।। हो गुरुराज पुण्य प्रकाश विराजित देवें बोधमार ॥ हो गुरुराजशून्य ।। चार ।। संघ चतुर्विध साथ में. करने धर्मप्राचर । कोसाणा में श्रीगुरु, पहुंचे स्वर्ग मकार ।। हो गुरुराज श्रीजिनचन्द्र विरह में छाया अन्धकार ।। हो गुरुगजशून्य ॥ पाँच ॥ तेरहमी सतहत्तरे, ग्यारस मिति बढ़ि जेठ । कुम्भ लगन निश्चित करें, संघ सत्र जग शेठ । हो गुरुराज पाटण पुण्य महोत्सव जाऊ बलिहार हो गुरुगजशून्य ।। छः ।। तेजपाल दानी गुणी, रूडपाल सहयोग । आमंत्र श्री संघ को, पूर्व पुण्य - धनयोग ।। हो गुरुराज शोभा पाटणकी क्या वरणथी अपार हो गुरुराजशून्य ।। सात ।। श्री राजेन्द्राचार्य तत्र, लेखाज्ञा अनुसार । कुशलकीर्ति मुनिराज का, करें नाम संस्कार ।। हो गुरुराज श्रीजिन कुशल सूरीश्वरकी हो जयकार हो गुरुराजशून्य ॥ आठ ॥ श्रीजिन कुशल सूरीश्वर, दादा युग परधान । अतिशयधारी पूज्यवर, सुख सागर भगवान ॥ हो गुरुराज पद 'हरि' पूजो भावे होवो भवपार हो गुरुराज शून्य ॥ छः ॥ धर्म-प्रचारी वर-बोधकारी तत्पाद - पद्म-द्वितयं नमामि दशांग-धूप सुपरिक्षिपामि ।। ॐ ह्रीँ श्रीँ अर्ह परम पुरुपाय परम गुरुदेवाय भगवते श्रीजिनशासनोद्दीपकाय श्रीजिनकुशल सूरीश्वराय धूपं यजामहे स्वाहा ॥ मन सुपात्र गुण वृत्तिकर, सद्गुरु धरम सनेह । ज्ञान उजेला नित करे, दीपक पूजा एह ।। अज्ञान तिमिर अति दूर किया, गुरु दीपक कुशल सूरीश्वर ने । वर ज्ञान प्रकाश प्रचार किया, गुरु दीपक कुशल जिनचन्द्र परम गुरु विरह हुआ, सूरीश्वर ने । अंधेरा सब जग छाया था । ज्योतिर्मय पद परकाश किया, गुरु दीपक कुशल सूरीश्वर ने । अज्ञान तिमिरशून्य ॥ एक ॥ |
पाँच साल पहले भुमरू से झुलनी की शादी तय हो चुकी थी। अगहन की एक शीत-संध्या मे लन भी पक्का हो चुका था । किन्तु ऐन मौके पर भुमरू की मॉ टेढ़ी पड़ी । बोली- "यह शादी तो मै प्रार रहते हरगिज न होने दूँगी ।" "क्यों भई, बात क्या है ? " जातिवालों ने पूछा । भुंमरू की मॉ ने सामने के स्कूल की ओर संकेत किया । वोलीं- "उस स्कूल के बंगाली मास्टर से झुलनी की सॉठ-गाँठ है । झुलनी रोज़ उसके पास पढ़ने जाती है।"
जासिवालों ने कनखियों से दस साल की भुलनी की तरफ देखां । फिर नीची गरदन कर, मुँह दाबे, एक-एक कर सब उठ गये । भुमरू की बहन गजरी ने भुलनी के मुँह के सामने अँगूठा मटकाया । बोली - "बहुत मास्टर जी, मास्टर जी, करती थी । अब ले, पढ़ लें ए-बी-सी-डी.. रोटी लगेगी अब रोटी... दारू-गोश्त, कढ़ी-फुलौरी ।"
फिर विजय गर्व से वह हॅस उठी - "ही -ही-ही-ही । " महेश की हमेशा की नशाभरी आँखे और लाल हो उठीं - मानो अब आग की लपटे निकलना ही चाह रही हों। झुलनी दबी-दबाई, एक कोने मे बैठी, कॉप रही थी । यद्यपि प्रहसन के रहस्य का सब कुछ वह न समझ सकी थी, फिर भी बाप की आँखों से इतना तो पक्का जान रही थी कि प्रलंय होकर ही रहेगी। फिर जब मद्देश को गंडासे में धार देते देखा तब एकदम फफफकर रो उठी- "श्रो दादा रे ! "
महेश के हाथ रुक गये । फिर धीरे-धीरे आँखों मे करुणा छा गई । बेटी की तरफ एकटक देखते हुए भरे गले से उसने इतना ही कहा - "झुलनी ।"
महेश ने बेटी का झुलनी नाम खुद रखा है। छोटेपन मे माँ खोई लड़की को झूले मे डाल महेश ने पाला है । महेश का धन्धा मछली पकड़ने का है, घर बैठने का नही । व शाम को बेटी को फूले में डाल महेश रात को मछली के शिकार को चला जाता था। फिर सुवह घर लौट, उसे झूले से उठाकर पुचकारता, उसका चूमा लेता और फिर नहलाधुला कर कुरता बदल, पड़ोस की चाची के पास ले जाता । कहता - "चाची री, तेरे पास कजरौटी है । आज दे जरा इसकी ऑखन मे । बड़ी-बड़ी सुन्दर आँखे है। खुलेगी खूब ।"
चाची हॅसकर कहती - "बरे तोरी बिटिया की आँख । जरा-सा नोन घोलकर पिला दे । कूला मे टे बोलकर रह जायगो । हत्यारी ने आते ही माँ को खा लिया । ऐसी लड़की पर इतना प्यार...!"
महेश भुतनी को छाती से चिपटा कर अपने घर ले आता। फिर उसे फूले मे सुलाकर कहता - "राना नहीं रानी बिटिया, रात की मछली हाट में वेचकर मै अभी तेरा दूध लाया ।"
वही इतनी साध-प्यार की लड़की, अब कोने मे बैठी, सिसक-सिसक कर रो रही है। महेश ने सोचा - मेरी खूनी
सूरत और खूनी करतूत देख उसका नरम कलेजो कितना धड़क रहा होगा। चिन्ता मात्र से उसने हाथ का गैडासा दूर पटक दिया और दौड़कर उसने भुलनी को छाती से चिपटा लिया । फिर सिर पर थपकियॉ देता हुआ वोला- "बिट्टी, एक तू ही है जो मेरी कौल-कस्मों तक को डावॉडोल कर देती है । नही तो किस की मजाल थी जो आज भुमरू के मॉबाप को मेरे हाथ से बचा लेता । सोचा था, रात को जब मछली खेलते हुए वे दोनों श्मशान घाट तक पहुॅचेगे, तब चुपके से दोनों का सिर उतार कर श्मशान माई को चढ़ा दूँगा।"
AN AN AM
लड़की फिर फफक कर रो उठी - "न-नन, ऐसी बाते न करो दादा, मुझे डर लगता है।"
"अच्छा तो जाने दे। लेकिन तू भी अब कभी पढ़ने न जाना । हम गरीबों का पढ़ना भी क्या " लड़की प्रसन्नता से वोली- "अच्छा।"
निश्चय ही भुलनी फिर कभी पढ़ने न गई । मास्टर ने भी कभी बुलौआ न भेजा।
तीन-एक साल के बाद अचानक एक शम मास्टर सरसों के खेत की मेड़ पर दिखाई दिया । भुलनी कण्डा चीनती उधर से लौट रही थी । उसके मुँह से निकल गया - "इधर कैसे आये मास्टर जी ?"
"अरे, मछली को आया था । यह देख, अभी की पेकड़ी ताजी मछली । हम बंगालियों की यही तो बुरी आदते
है, मछली के बिना निवाला मुँह में नही जाता । " "तो दाम कितना लगा मास्टर जी ?"
मास्टर हँसा । बोला - "राशनकार्ड से कुछ गल्ला बच जाता है। बस, वही बाकी का अन्न मास के अन्त में मछवाहा ले लेगा और बदले में मुझे रोज शाम को ताजी मछली मिल जाया करेगी ।"
झुलनी अब दस साल की नही, तेरह साल की है। राशनिंग-प्रथा से बाप-बेटी को अन्न पुरता नहीं, यह बखूबी सी है। वह ट से कह बैठी - "रोज शाम को ताजी मछली मैं दिया करूँगी । तुम मुझे गल्ला दे दिया करना
मास्टर साब । 3
मास्टर राजी हो गया, लेकिन महेश बिगड़ा । एक रोज कह बैठा - "देखिये साब, हाट मे ढेर सारी मछली मिलती है। आप वही से खरीद लिया करें । "
भौचक्का मास्टर कहने लगा - "मगर... १
महेश ने सीधे रास्ते की तरफ हाथ दिखा कर कहा"अगर-मगर कुछ नहीं, मेरी लड़की काफी जवान हो गई है। यह आप नही समझते साब...?"
मास्टर जीभ दाँतों से काट कर दस हाथ पीछे हट गया । फिर धीरे से बोला - 'ओह.. अच्छा !"
राशन का रहस्य ढका ही रह गया, लेकिन कितने दिन... महेश ने लक्ष्य किया, झुलनी दुबली होती जा रही है। बोलाझुलनी
"दीखता है, अन्न पुरता नही । काहे रे भुजनी, तूने तो हॉडी का सारा भात मुझे ही उड़ेल दिया ?"
झुलनी बोली - "क्या करूँ, तुम बूढ़े हो गये हो । तुम्हें तो दो जून भर पेट खुराक मिलनी ही चाहिये । इसीलिये मास्टर से मैने गल्ला ठहराया था, लेकिन तुम?"
महेश अपनी करनी पर जैसे कटकर रह गया । फिर शाम को मास्टर के पास जाकर बोला- "ग़लती हुई साब, माफ करिये । अब गल्ला मुझे ही मिलना चाहिये । रोज शाम को मछली मैं हाजिर करूँगा ।"
मास्टर वोला- "अच्छा ।"
इसी मास्टर के लिए ताजी मछली की खोज में आज महेश, नदी की इतनी उत्ताल तरंगों में भी, भरी सॉझ को डोंगा बहाकर, जाल फेकता हुआ, अदृश हो गया। इधर रात क्रमशः गहरी होती देख भुतनी उतावली हो रो उठी और उत्तर की आशा में बहुत देर से देहरी पर खड़ा भुमरू भी ऊव उठा । झुलनी उससे बोलेगी नहीं, यह आभास जब पक्का हो गया, तब उसे भी प्रचण्ड क्रोध हो आया । अत्यन्त कटु आघात देता हुआ वह वोला - "इतनी जो फफक-फफक कर रो रही है, यह
किसके लिये - उस मास्टर के लिए ही तो, लेकिन तुझे ख्याल करना था, इतने कीच-पानी में बाबू लोग घर से बाहर नहीं निकलते ।"
गुरसी मे कण्डे की आग धधक रही थी । झुलनी को | पाँच साल पहले भुमरू से झुलनी की शादी तय हो चुकी थी। अगहन की एक शीत-संध्या मे लन भी पक्का हो चुका था । किन्तु ऐन मौके पर भुमरू की मॉ टेढ़ी पड़ी । बोली- "यह शादी तो मै प्रार रहते हरगिज न होने दूँगी ।" "क्यों भई, बात क्या है ? " जातिवालों ने पूछा । भुंमरू की मॉ ने सामने के स्कूल की ओर संकेत किया । वोलीं- "उस स्कूल के बंगाली मास्टर से झुलनी की सॉठ-गाँठ है । झुलनी रोज़ उसके पास पढ़ने जाती है।" जासिवालों ने कनखियों से दस साल की भुलनी की तरफ देखां । फिर नीची गरदन कर, मुँह दाबे, एक-एक कर सब उठ गये । भुमरू की बहन गजरी ने भुलनी के मुँह के सामने अँगूठा मटकाया । बोली - "बहुत मास्टर जी, मास्टर जी, करती थी । अब ले, पढ़ लें ए-बी-सी-डी.. रोटी लगेगी अब रोटी... दारू-गोश्त, कढ़ी-फुलौरी ।" फिर विजय गर्व से वह हॅस उठी - "ही -ही-ही-ही । " महेश की हमेशा की नशाभरी आँखे और लाल हो उठीं - मानो अब आग की लपटे निकलना ही चाह रही हों। झुलनी दबी-दबाई, एक कोने मे बैठी, कॉप रही थी । यद्यपि प्रहसन के रहस्य का सब कुछ वह न समझ सकी थी, फिर भी बाप की आँखों से इतना तो पक्का जान रही थी कि प्रलंय होकर ही रहेगी। फिर जब मद्देश को गंडासे में धार देते देखा तब एकदम फफफकर रो उठी- "श्रो दादा रे ! " महेश के हाथ रुक गये । फिर धीरे-धीरे आँखों मे करुणा छा गई । बेटी की तरफ एकटक देखते हुए भरे गले से उसने इतना ही कहा - "झुलनी ।" महेश ने बेटी का झुलनी नाम खुद रखा है। छोटेपन मे माँ खोई लड़की को झूले मे डाल महेश ने पाला है । महेश का धन्धा मछली पकड़ने का है, घर बैठने का नही । व शाम को बेटी को फूले में डाल महेश रात को मछली के शिकार को चला जाता था। फिर सुवह घर लौट, उसे झूले से उठाकर पुचकारता, उसका चूमा लेता और फिर नहलाधुला कर कुरता बदल, पड़ोस की चाची के पास ले जाता । कहता - "चाची री, तेरे पास कजरौटी है । आज दे जरा इसकी ऑखन मे । बड़ी-बड़ी सुन्दर आँखे है। खुलेगी खूब ।" चाची हॅसकर कहती - "बरे तोरी बिटिया की आँख । जरा-सा नोन घोलकर पिला दे । कूला मे टे बोलकर रह जायगो । हत्यारी ने आते ही माँ को खा लिया । ऐसी लड़की पर इतना प्यार...!" महेश भुतनी को छाती से चिपटा कर अपने घर ले आता। फिर उसे फूले मे सुलाकर कहता - "राना नहीं रानी बिटिया, रात की मछली हाट में वेचकर मै अभी तेरा दूध लाया ।" वही इतनी साध-प्यार की लड़की, अब कोने मे बैठी, सिसक-सिसक कर रो रही है। महेश ने सोचा - मेरी खूनी सूरत और खूनी करतूत देख उसका नरम कलेजो कितना धड़क रहा होगा। चिन्ता मात्र से उसने हाथ का गैडासा दूर पटक दिया और दौड़कर उसने भुलनी को छाती से चिपटा लिया । फिर सिर पर थपकियॉ देता हुआ वोला- "बिट्टी, एक तू ही है जो मेरी कौल-कस्मों तक को डावॉडोल कर देती है । नही तो किस की मजाल थी जो आज भुमरू के मॉबाप को मेरे हाथ से बचा लेता । सोचा था, रात को जब मछली खेलते हुए वे दोनों श्मशान घाट तक पहुॅचेगे, तब चुपके से दोनों का सिर उतार कर श्मशान माई को चढ़ा दूँगा।" AN AN AM लड़की फिर फफक कर रो उठी - "न-नन, ऐसी बाते न करो दादा, मुझे डर लगता है।" "अच्छा तो जाने दे। लेकिन तू भी अब कभी पढ़ने न जाना । हम गरीबों का पढ़ना भी क्या " लड़की प्रसन्नता से वोली- "अच्छा।" निश्चय ही भुलनी फिर कभी पढ़ने न गई । मास्टर ने भी कभी बुलौआ न भेजा। तीन-एक साल के बाद अचानक एक शम मास्टर सरसों के खेत की मेड़ पर दिखाई दिया । भुलनी कण्डा चीनती उधर से लौट रही थी । उसके मुँह से निकल गया - "इधर कैसे आये मास्टर जी ?" "अरे, मछली को आया था । यह देख, अभी की पेकड़ी ताजी मछली । हम बंगालियों की यही तो बुरी आदते है, मछली के बिना निवाला मुँह में नही जाता । " "तो दाम कितना लगा मास्टर जी ?" मास्टर हँसा । बोला - "राशनकार्ड से कुछ गल्ला बच जाता है। बस, वही बाकी का अन्न मास के अन्त में मछवाहा ले लेगा और बदले में मुझे रोज शाम को ताजी मछली मिल जाया करेगी ।" झुलनी अब दस साल की नही, तेरह साल की है। राशनिंग-प्रथा से बाप-बेटी को अन्न पुरता नहीं, यह बखूबी सी है। वह ट से कह बैठी - "रोज शाम को ताजी मछली मैं दिया करूँगी । तुम मुझे गल्ला दे दिया करना मास्टर साब । तीन मास्टर राजी हो गया, लेकिन महेश बिगड़ा । एक रोज कह बैठा - "देखिये साब, हाट मे ढेर सारी मछली मिलती है। आप वही से खरीद लिया करें । " भौचक्का मास्टर कहने लगा - "मगर... एक महेश ने सीधे रास्ते की तरफ हाथ दिखा कर कहा"अगर-मगर कुछ नहीं, मेरी लड़की काफी जवान हो गई है। यह आप नही समझते साब...?" मास्टर जीभ दाँतों से काट कर दस हाथ पीछे हट गया । फिर धीरे से बोला - 'ओह.. अच्छा !" राशन का रहस्य ढका ही रह गया, लेकिन कितने दिन... महेश ने लक्ष्य किया, झुलनी दुबली होती जा रही है। बोलाझुलनी "दीखता है, अन्न पुरता नही । काहे रे भुजनी, तूने तो हॉडी का सारा भात मुझे ही उड़ेल दिया ?" झुलनी बोली - "क्या करूँ, तुम बूढ़े हो गये हो । तुम्हें तो दो जून भर पेट खुराक मिलनी ही चाहिये । इसीलिये मास्टर से मैने गल्ला ठहराया था, लेकिन तुम?" महेश अपनी करनी पर जैसे कटकर रह गया । फिर शाम को मास्टर के पास जाकर बोला- "ग़लती हुई साब, माफ करिये । अब गल्ला मुझे ही मिलना चाहिये । रोज शाम को मछली मैं हाजिर करूँगा ।" मास्टर वोला- "अच्छा ।" इसी मास्टर के लिए ताजी मछली की खोज में आज महेश, नदी की इतनी उत्ताल तरंगों में भी, भरी सॉझ को डोंगा बहाकर, जाल फेकता हुआ, अदृश हो गया। इधर रात क्रमशः गहरी होती देख भुतनी उतावली हो रो उठी और उत्तर की आशा में बहुत देर से देहरी पर खड़ा भुमरू भी ऊव उठा । झुलनी उससे बोलेगी नहीं, यह आभास जब पक्का हो गया, तब उसे भी प्रचण्ड क्रोध हो आया । अत्यन्त कटु आघात देता हुआ वह वोला - "इतनी जो फफक-फफक कर रो रही है, यह किसके लिये - उस मास्टर के लिए ही तो, लेकिन तुझे ख्याल करना था, इतने कीच-पानी में बाबू लोग घर से बाहर नहीं निकलते ।" गुरसी मे कण्डे की आग धधक रही थी । झुलनी को |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
वाशिंगटन, (भाषा)। अमेरिकी सीनेट ने एक मुख्य प्रशासनिक पद के लिए भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अरूण एम कुमार के नाम को मंजूरी दी है। इस पद पर बने रहने के दौरान उन्हें विदेश व्यापार की जिम्मेदारी संभालनी होगी। वाणिज्य मंत्री पेनी प्रित्जकर ने कहा, ``मुझे खुशी है कि अमेरिकी सीनेट ने वाणिज्य सहायक मंत्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रशासन में अमेरिका और विदेश वाणिज्यिक सेवा के महानिदेशक के रूप में अरूण कुमार के नाम को मंजूरी दी है। " वाणिज्य मंत्री ने कहा, ``इस भूमिका में, वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी कंपनियों की सहायता करने और उनका पक्ष रखने के एजेंसी के प्रयासों का नेतृत्व करेंगे। वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अमेरिकी व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देना जरूरी है। हमारे `ओपन फॉर बिजनेस एजेंडा' के लिए यह एक प्रमुख प्राथमिकता है। " कुमार के नामांकन को सीनेट ने ध्वनिमत से मंजूर किया। फिलहाल कुमार केपीएमजी एलएलपी के निदेशक मंडल के सदस्य और साझेदार हैं। वर्ष 2005 से 2013 में सेवानिवृत्ति तक कुमार ने कंपनी के वेस्ट कोस्ट फाइनेंस मैनेजमेंट कंसल्टिंग कार्य की अध्यक्षता की। वर्ष 2007 से 2013 तक उन्होंने कंपनी के अमेरिका-भारत अभ्यास का भी नेतृत्व किया। 1995 में कुमार वित्तीय प्रबंधन अगुआ के रूप में केपीएमजी से जुड़े। वर्ष 1993 से 1995 तक वे सॉफ्टवेयर कंपनी आईएनसी के संस्थापक और प्लानिंग एंड लॉजिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे।
| वाशिंगटन, । अमेरिकी सीनेट ने एक मुख्य प्रशासनिक पद के लिए भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अरूण एम कुमार के नाम को मंजूरी दी है। इस पद पर बने रहने के दौरान उन्हें विदेश व्यापार की जिम्मेदारी संभालनी होगी। वाणिज्य मंत्री पेनी प्रित्जकर ने कहा, ``मुझे खुशी है कि अमेरिकी सीनेट ने वाणिज्य सहायक मंत्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रशासन में अमेरिका और विदेश वाणिज्यिक सेवा के महानिदेशक के रूप में अरूण कुमार के नाम को मंजूरी दी है। " वाणिज्य मंत्री ने कहा, ``इस भूमिका में, वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी कंपनियों की सहायता करने और उनका पक्ष रखने के एजेंसी के प्रयासों का नेतृत्व करेंगे। वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अमेरिकी व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देना जरूरी है। हमारे `ओपन फॉर बिजनेस एजेंडा' के लिए यह एक प्रमुख प्राथमिकता है। " कुमार के नामांकन को सीनेट ने ध्वनिमत से मंजूर किया। फिलहाल कुमार केपीएमजी एलएलपी के निदेशक मंडल के सदस्य और साझेदार हैं। वर्ष दो हज़ार पाँच से दो हज़ार तेरह में सेवानिवृत्ति तक कुमार ने कंपनी के वेस्ट कोस्ट फाइनेंस मैनेजमेंट कंसल्टिंग कार्य की अध्यक्षता की। वर्ष दो हज़ार सात से दो हज़ार तेरह तक उन्होंने कंपनी के अमेरिका-भारत अभ्यास का भी नेतृत्व किया। एक हज़ार नौ सौ पचानवे में कुमार वित्तीय प्रबंधन अगुआ के रूप में केपीएमजी से जुड़े। वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से एक हज़ार नौ सौ पचानवे तक वे सॉफ्टवेयर कंपनी आईएनसी के संस्थापक और प्लानिंग एंड लॉजिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे। |
होते है । वच्चा वयस्को से सबसे अधिक भाषायी सपर्क की बदौलत
• सीखता है। वह मानवजाति द्वारा विकसित सकल्पनाओ और चितन रीतियो को आत्मसात् करता है । वयस्को की अनुकृति करके वह विचारो
• को व्यवस्थित करना तथा निष्कर्ष निकालना सीखता है। बच्चे के । बौद्धिक विकास की चर्चा करते हुए इ० म० सेचेनोव ने लिखा था कि बच्चे को उसके जीवन के प्रथम क्षणो से ही हम क्थनी में भी और करनी मे भो जो अनुभव अतरित करते हैं वह तैयारशुदा, पराया अनुभव होता है।
आरंभिक बाल्यकाल मे वयस्क के शब्द बच्चे के ऐद्रिक नियामूलक चितन के विकास मे सहायक हो सकते है । वयस्व निया द्वारा ही नही, शब्दो के जरिये भी बच्चे को किसी स्थितिमूलक कृत्यक को सपन्न करने की रीति सुझा सकता है। उदाहरणार्थ, यदि बच्चा अपनी पलग के सीखचो मे कोई डिब्बा ज़बर्दस्ती घुसा रहा है और दूसरी तरफ नही निकाल पा रहा है, यानी उसकी किया सफल नहीं हो पा रही है, तो वयस्क की सलाह कि 'घुमाकर डालो, निकल जायेगा " बच्चे को तदनुरूप सोचने व त्रिया करने को प्रेरित करती है ।
आरंभिक बाल्यकाल मे बच्चा कोई काय ज्योज्यो करता जाता है, त्यो त्यो बोलता भी रह सकता है। किंतु पहले चरण मे यह बोलना एक प्रकार से स्वतन प्रक्रिया जैसा होता है इस काल में बच्चे के व्यवहार में दो तरह की सक्रियताएं दिखायी देती है - शाब्दिक और बौद्धिक । आगे चलकर दोनो एक दूसरे में विलयित होकर शब्द चितन का रूप ग्रहण कर लेती है ।
बच्चे के व्यक्तित्व के निर्माण का आरंभ
आरंभिक बाल्यावस्था मे वच्चे और वयस्क की सयुक्त वस्तुमूलक सनियता का सघन विकास होता है। इस सहयोग का स्वरूप वयस्व द्वारा निर्धारित होता है । वयस्क सप्रपण' के निर्देशन का दायित्व सभालता है और परस्पर समझ बनी रह इसकी व्यवस्था करता है। जीवन के तीसरे वप मे बच्चा अधिक आत्मनिर्भर बन जाता है | होते है । वच्चा वयस्को से सबसे अधिक भाषायी सपर्क की बदौलत • सीखता है। वह मानवजाति द्वारा विकसित सकल्पनाओ और चितन रीतियो को आत्मसात् करता है । वयस्को की अनुकृति करके वह विचारो • को व्यवस्थित करना तथा निष्कर्ष निकालना सीखता है। बच्चे के । बौद्धिक विकास की चर्चा करते हुए इशून्य मशून्य सेचेनोव ने लिखा था कि बच्चे को उसके जीवन के प्रथम क्षणो से ही हम क्थनी में भी और करनी मे भो जो अनुभव अतरित करते हैं वह तैयारशुदा, पराया अनुभव होता है। आरंभिक बाल्यकाल मे वयस्क के शब्द बच्चे के ऐद्रिक नियामूलक चितन के विकास मे सहायक हो सकते है । वयस्व निया द्वारा ही नही, शब्दो के जरिये भी बच्चे को किसी स्थितिमूलक कृत्यक को सपन्न करने की रीति सुझा सकता है। उदाहरणार्थ, यदि बच्चा अपनी पलग के सीखचो मे कोई डिब्बा ज़बर्दस्ती घुसा रहा है और दूसरी तरफ नही निकाल पा रहा है, यानी उसकी किया सफल नहीं हो पा रही है, तो वयस्क की सलाह कि 'घुमाकर डालो, निकल जायेगा " बच्चे को तदनुरूप सोचने व त्रिया करने को प्रेरित करती है । आरंभिक बाल्यकाल मे बच्चा कोई काय ज्योज्यो करता जाता है, त्यो त्यो बोलता भी रह सकता है। किंतु पहले चरण मे यह बोलना एक प्रकार से स्वतन प्रक्रिया जैसा होता है इस काल में बच्चे के व्यवहार में दो तरह की सक्रियताएं दिखायी देती है - शाब्दिक और बौद्धिक । आगे चलकर दोनो एक दूसरे में विलयित होकर शब्द चितन का रूप ग्रहण कर लेती है । बच्चे के व्यक्तित्व के निर्माण का आरंभ आरंभिक बाल्यावस्था मे वच्चे और वयस्क की सयुक्त वस्तुमूलक सनियता का सघन विकास होता है। इस सहयोग का स्वरूप वयस्व द्वारा निर्धारित होता है । वयस्क सप्रपण' के निर्देशन का दायित्व सभालता है और परस्पर समझ बनी रह इसकी व्यवस्था करता है। जीवन के तीसरे वप मे बच्चा अधिक आत्मनिर्भर बन जाता है |
नई दिल्लीः मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली से पहले बड़ा गिफ्ट दिया है। सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 5 फीसदी बढ़ाने का एलान किया है। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी।
अब सरकारी कर्मचारियों को 12 फीसदी के बदले 17 फीसदी डीए मिलेगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2019 से लागू होगा। सरकार के इस फैसले से 50 लाख कर्मचारियों और 62 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा।
कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दी है। आमतौर पर महंगाई भत्ते में 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी होती थी। इस बार सरकार ने 5 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इससे सरकार के खजाने पर 16 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
महंगाई भत्ता बढ़ने से सरकारी कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा रकम आएगी। इससे मांग बढ़ने की उम्मीद भी है। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की सैलरी 1 हजार रुपए से बढ़ाकर 2 हजार रुपए की गई है।
इसके साथ ही कैबिनेट ने पीएम किसान योजना के लिए आधार से लिंक करने की तारीख को 31 नवंबर 2019 तक बढ़ा दिया है। 1 अगस्त 2019 के बाद जो रकम जारी होगी उसके लिए 30 नवंबर तक आधार को लिंक किया जा सकता है।
| नई दिल्लीः मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली से पहले बड़ा गिफ्ट दिया है। सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पाँच फीसदी बढ़ाने का एलान किया है। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी। अब सरकारी कर्मचारियों को बारह फीसदी के बदले सत्रह फीसदी डीए मिलेगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता एक जुलाई दो हज़ार उन्नीस से लागू होगा। सरकार के इस फैसले से पचास लाख कर्मचारियों और बासठ लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दी है। आमतौर पर महंगाई भत्ते में दो से तीन फीसदी की बढ़ोतरी होती थी। इस बार सरकार ने पाँच फीसदी की बढ़ोतरी की है। इससे सरकार के खजाने पर सोलह हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। महंगाई भत्ता बढ़ने से सरकारी कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा रकम आएगी। इससे मांग बढ़ने की उम्मीद भी है। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की सैलरी एक हजार रुपए से बढ़ाकर दो हजार रुपए की गई है। इसके साथ ही कैबिनेट ने पीएम किसान योजना के लिए आधार से लिंक करने की तारीख को इकतीस नवंबर दो हज़ार उन्नीस तक बढ़ा दिया है। एक अगस्त दो हज़ार उन्नीस के बाद जो रकम जारी होगी उसके लिए तीस नवंबर तक आधार को लिंक किया जा सकता है। |
तो इस फिल्म के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करेंगी काजोल !!
अपने होम प्रोडक्शन की फिल्म से ही बॉलीवुड में कमबैक करेंगी काजोल !!
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| तो इस फिल्म के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करेंगी काजोल !! अपने होम प्रोडक्शन की फिल्म से ही बॉलीवुड में कमबैक करेंगी काजोल !! बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
(हेमेन्द्र क्षीरसागर, स्तंभकार)
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी दुनिया के महान ग्रंथों में अद्वितीय, अमर कीर्ति है। इसे किसी भी जीवित व्यक्ति के बजाय सर्वोच्च आध्यात्मिक अधिकार और सिख धर्म का प्रमुख माना जाता है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का इतिहास बहुत ही अलौकिक, महत्वपूर्ण और पौराणिक है। स्तुत्य, श्री गुरु अर्जन देव जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के मूल संस्करण को संकलित किया। गुरु जी के बड़े भाई पृथ्वी चंद और अन्य लोगों ने गुरुओं को भजन के रूप में उनकी कुछ रचनाएँ देनी शुरू कीं। इस प्रकार गुरु अर्जन देव जी ने सभी गुरुओं के मूल छंदों का संग्रह शुरू किया। श्री गुरु अर्जन देव जी ने पिछले गुरुओं के परिवारों का दौरा करने के लिए गोइंदवाल, खादुर और करतारपुर की यात्रा की। श्री गुरु अर्जन देव जी ने मोहन (गुरु अमर दास के पुत्र), दातू (गुरु अंगद के पुत्र) के साथ-साथ श्री चंद (गुरु नानक के पुत्र) से गुरुओं की मूल पांडुलिपियों का संग्रह किया। मंत्रमुग्ध श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में उल्लेखित दार्शनिकता कर्मवाद को मान्यता देती है। गुरुवाणी के अनुसार व्यक्ति अपने कर्मो के अनुसार ही महत्व पाता है। समाज की मुख्य धारा से कटकर संन्यास में ईश्वर प्राप्ति का साधन ढूंढ रहे साधकों को गुरुग्रन्थ साहिब सबक देता है।
श्री गुरु नानक देव जी के कई भजन और प्रार्थनाओं को गुरु अंगद जी और गुरु अर्जन देव जी द्वारा संरक्षित और अनुपालन किया गया था। इस संग्रह को आदि ग्रंथ के रूप में जाना जाता है। आदि ग्रंथ में 36 हिंदू और मुस्लिम लेखकों जैसे कबीर, रवि दास, नाम देव और शेख फरीद के लेखन भी शामिल हैं। जिस समय यह लिखा जा रहा था, उस समय कुछ लोगों ने मुगल बादशाह जहाँगीर के दिमाग में यह अफ़वाह फैला दी कि गुरु ग्रंथ साहिब जी और गुरबानी मुसलमानों के खिलाफ नफरत का प्रचार करते हैं। क्रोधित जहाँगीर ने गुरु अर्जन देव जी को गुरु ग्रंथ साहिब पांडुलिपि में कुछ भजनों को हटाने का आदेश दिया और 200,000 रुपये का जुर्माना लगाया। श्री गुरु अर्जन देव जी ने तथाकथित अपमानजनक पाठ का खुलासा करने या जुर्माना भरने से इनकार कर दिया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। आदि ग्रंथ 1604 में पूरा हुआ और स्वर्ण मंदिर में स्थापित किया गया। यह मूल प्रति कई अलग-अलग भाषाओं में लिखी गई है, जो इसके कई अलग-अलग लेखकों को दर्शाती है।
आलोकित, 1708 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा घोषित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, सिखों के अनन्त गुरु बन गए। 1708 में श्री गुरु गोविंद सिंह के बलिदान के बाद, बाबा दीप सिंह और भाई मणि सिंह ने वितरण के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की कई प्रतियां तैयार कीं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का मूल संस्करण महाराष्ट्र राज्य के शहर नांदेड़ में पाया जा सकता है। अन्य गुरुद्वारों की अध्यक्षता करने वाले श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के खंड इस संस्करण की प्रतियां हैं। गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला शबद "मूल मंत्र" है। यह एक ईश्वर में विश्वास को रेखांकित करता है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने ग्रन्थ साहिब जी को एक स्थायी गुरु का दर्जा दिया और 1708 में इसे "सिखों का गुरु" की उपाधि से सम्मानित किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को उनके बाद अगला गुरु बनाने की घोषणा करते हुए, श्री गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों को आज्ञा दी।
" आज्ञा भई अकाल की तभी चलायो पंथ,
सब सिखन को हुकम है गुरु मानयो ग्रन्थ।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में कुल 1430 पृष्ठ हैं, पृष्ठ क्षितिज के समानांतर में लिखे गए हैं। आम तौर पर प्रति पृष्ठ पाठ की उन्नीस लाइनें हैं। सुर्खियों वाले पृष्ठ (एक नई राग से शुरू) में उन्नीस पंक्तियों से कम है। कुल पंक्तियों की संख्या - 26852, कुल शब्द - 398697। सबसे अधिक बार दोहराया जाने वाला शब्द "हरि" है - 9288 बार। कोई विराम चिह्न का उपयोग नहीं किया गया है। ऐसे सारगर्भित रोचक तथ्य गुरु ग्रंथ साहिब जी में समावेशित हैं।
छह सिख गुरु, पहले पांच गुरु (श्री गुरु नानक देव जी, गुरु अंगद देव जी, गुरु अमर दास जी, गुरु राम दास जी, गुरु अर्जन देव जी) और नौवें गुरु (गुरु तेग बहादुर जी)। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में श्री गुरु नानक देव जी (974 शबद और श्लोक), श्री गुरु अंगद देव जी (62 श्लोक), श्री गुरु अमरदास जी (907 शबद और श्लोक), श्री गुरु राम दास जी (679 शबद और श्लोक), श्री गुरु अर्जन देव जी शामिल हैं। (2218 शबद और श्लोक) और श्री गुरु तेग बहादुर जी (115 शबद और श्लोक)। तीन सिख (भाई सट्टा जी, भाई बलवानंद जी और भाई सुंदर जी)। 17 भट्टः भट्ट संगीतकारों का एक समूह था जो सोलहवीं शताब्दी में रहते थे। ये सभी विद्वान, कवि और गायक थे। (भट काल, भाट कालसीहर, भट ताल, भट जाल, भट जल, भट किरत, भट सल, भट बहल, भट नल, भट भीख, भट जलन, भट कस, भट गेद, भट सेवक, भट मथरा, भट बल और भट) हरबंस)। 15 भगत (कबीर, नामदेव, रविदास, शेख फरीद, त्रिलोचन, धन्ना, बेनी, शेख भीकन, जयदेव, सूरदास, परमानंद, पीपा, रामानंद, साधना और साईं)। गुरूओं का श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के संकलन में लेखक और योगदानकर्ता के रुप में अमिट छाप छोड़ी।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शुरुआत एक बानी से होती है जिसे जपजी के नाम से जाना जाता है। इन सभी रागों के भीतर, बानी को गुरु के कालानुक्रमिक क्रम में प्रस्तुत किया जाता है। 32 रागों के बाद, राग माला के रूप में जाना जाने वाला एक खंड श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पूरा करता है। अभिभूत, पवित्र श्री गुरु ग्रन्थ साहिब अध्यात्म ज्ञान का मूल स्रोत हैं। अध्यात्म ज्ञान सदा विकास मान होता है। जिस की प्रासंगिकता हर काल में हुआ करती है। ग्रन्थ के वाणीकार जब वाणी का सजृन कर रहे थे तब उस काल में भी इसकी प्रासंगिकता थी और वर्तमान में तो इसकी वाणी की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई।
(साई फीचर्स)
(हेमेन्द्र क्षीरसागर, स्तंभकार)
| श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी दुनिया के महान ग्रंथों में अद्वितीय, अमर कीर्ति है। इसे किसी भी जीवित व्यक्ति के बजाय सर्वोच्च आध्यात्मिक अधिकार और सिख धर्म का प्रमुख माना जाता है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का इतिहास बहुत ही अलौकिक, महत्वपूर्ण और पौराणिक है। स्तुत्य, श्री गुरु अर्जन देव जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के मूल संस्करण को संकलित किया। गुरु जी के बड़े भाई पृथ्वी चंद और अन्य लोगों ने गुरुओं को भजन के रूप में उनकी कुछ रचनाएँ देनी शुरू कीं। इस प्रकार गुरु अर्जन देव जी ने सभी गुरुओं के मूल छंदों का संग्रह शुरू किया। श्री गुरु अर्जन देव जी ने पिछले गुरुओं के परिवारों का दौरा करने के लिए गोइंदवाल, खादुर और करतारपुर की यात्रा की। श्री गुरु अर्जन देव जी ने मोहन , दातू के साथ-साथ श्री चंद से गुरुओं की मूल पांडुलिपियों का संग्रह किया। मंत्रमुग्ध श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में उल्लेखित दार्शनिकता कर्मवाद को मान्यता देती है। गुरुवाणी के अनुसार व्यक्ति अपने कर्मो के अनुसार ही महत्व पाता है। समाज की मुख्य धारा से कटकर संन्यास में ईश्वर प्राप्ति का साधन ढूंढ रहे साधकों को गुरुग्रन्थ साहिब सबक देता है। श्री गुरु नानक देव जी के कई भजन और प्रार्थनाओं को गुरु अंगद जी और गुरु अर्जन देव जी द्वारा संरक्षित और अनुपालन किया गया था। इस संग्रह को आदि ग्रंथ के रूप में जाना जाता है। आदि ग्रंथ में छत्तीस हिंदू और मुस्लिम लेखकों जैसे कबीर, रवि दास, नाम देव और शेख फरीद के लेखन भी शामिल हैं। जिस समय यह लिखा जा रहा था, उस समय कुछ लोगों ने मुगल बादशाह जहाँगीर के दिमाग में यह अफ़वाह फैला दी कि गुरु ग्रंथ साहिब जी और गुरबानी मुसलमानों के खिलाफ नफरत का प्रचार करते हैं। क्रोधित जहाँगीर ने गुरु अर्जन देव जी को गुरु ग्रंथ साहिब पांडुलिपि में कुछ भजनों को हटाने का आदेश दिया और दो सौ,शून्य रुपयापये का जुर्माना लगाया। श्री गुरु अर्जन देव जी ने तथाकथित अपमानजनक पाठ का खुलासा करने या जुर्माना भरने से इनकार कर दिया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। आदि ग्रंथ एक हज़ार छः सौ चार में पूरा हुआ और स्वर्ण मंदिर में स्थापित किया गया। यह मूल प्रति कई अलग-अलग भाषाओं में लिखी गई है, जो इसके कई अलग-अलग लेखकों को दर्शाती है। आलोकित, एक हज़ार सात सौ आठ में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा घोषित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, सिखों के अनन्त गुरु बन गए। एक हज़ार सात सौ आठ में श्री गुरु गोविंद सिंह के बलिदान के बाद, बाबा दीप सिंह और भाई मणि सिंह ने वितरण के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की कई प्रतियां तैयार कीं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का मूल संस्करण महाराष्ट्र राज्य के शहर नांदेड़ में पाया जा सकता है। अन्य गुरुद्वारों की अध्यक्षता करने वाले श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के खंड इस संस्करण की प्रतियां हैं। गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला शबद "मूल मंत्र" है। यह एक ईश्वर में विश्वास को रेखांकित करता है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने ग्रन्थ साहिब जी को एक स्थायी गुरु का दर्जा दिया और एक हज़ार सात सौ आठ में इसे "सिखों का गुरु" की उपाधि से सम्मानित किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को उनके बाद अगला गुरु बनाने की घोषणा करते हुए, श्री गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों को आज्ञा दी। " आज्ञा भई अकाल की तभी चलायो पंथ, सब सिखन को हुकम है गुरु मानयो ग्रन्थ। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में कुल एक हज़ार चार सौ तीस पृष्ठ हैं, पृष्ठ क्षितिज के समानांतर में लिखे गए हैं। आम तौर पर प्रति पृष्ठ पाठ की उन्नीस लाइनें हैं। सुर्खियों वाले पृष्ठ में उन्नीस पंक्तियों से कम है। कुल पंक्तियों की संख्या - छब्बीस हज़ार आठ सौ बावन, कुल शब्द - तीन लाख अट्ठानवे हज़ार छः सौ सत्तानवे। सबसे अधिक बार दोहराया जाने वाला शब्द "हरि" है - नौ हज़ार दो सौ अठासी बार। कोई विराम चिह्न का उपयोग नहीं किया गया है। ऐसे सारगर्भित रोचक तथ्य गुरु ग्रंथ साहिब जी में समावेशित हैं। छह सिख गुरु, पहले पांच गुरु और नौवें गुरु । श्री गुरु ग्रंथ साहिब में श्री गुरु नानक देव जी , श्री गुरु अंगद देव जी , श्री गुरु अमरदास जी , श्री गुरु राम दास जी , श्री गुरु अर्जन देव जी शामिल हैं। और श्री गुरु तेग बहादुर जी । तीन सिख । सत्रह भट्टः भट्ट संगीतकारों का एक समूह था जो सोलहवीं शताब्दी में रहते थे। ये सभी विद्वान, कवि और गायक थे। हरबंस)। पंद्रह भगत । गुरूओं का श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के संकलन में लेखक और योगदानकर्ता के रुप में अमिट छाप छोड़ी। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शुरुआत एक बानी से होती है जिसे जपजी के नाम से जाना जाता है। इन सभी रागों के भीतर, बानी को गुरु के कालानुक्रमिक क्रम में प्रस्तुत किया जाता है। बत्तीस रागों के बाद, राग माला के रूप में जाना जाने वाला एक खंड श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पूरा करता है। अभिभूत, पवित्र श्री गुरु ग्रन्थ साहिब अध्यात्म ज्ञान का मूल स्रोत हैं। अध्यात्म ज्ञान सदा विकास मान होता है। जिस की प्रासंगिकता हर काल में हुआ करती है। ग्रन्थ के वाणीकार जब वाणी का सजृन कर रहे थे तब उस काल में भी इसकी प्रासंगिकता थी और वर्तमान में तो इसकी वाणी की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई। |
अगर आप घर में राधा-कृष्ण की मूर्ति को रख रहे हैं तो आपको इन वास्तु नियमों को भी अवश्य फॉलो करना चाहिए।
घर में लोग कई तरह के भगवान की मूर्तियों व तस्वीरों को अपने घर में रखना पसंद करते हैं। कुछ मूर्तियों को घर के मंदिर या पूजा रूम में तो कुछ तस्वीरों को घर के विभिन्न हिस्सों में लगाया जाता है। लेकिन भगवान की तस्वीरों व मूर्तियों को रखने का भी अपना एक तरीका होता है और अगर उनके वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर इन मूर्तियों को रखा जाए तो लाभ कई गुना अधिक मिलता है।
कुछ लोगों की आदत होती है कि वह अपने आराध्य की तस्वीर को घर के मुख्य दरवाजे पर लगाते हैं। यूं तो विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की तस्वीर को मुख्य द्वार पर लगाया जा सकता है। लेकिन जहां तक बात राधा-कृष्ण की तस्वीर की है तो इसे घर के मुख्य दरवाजे के उपर पर लगाना अच्छा नहीं माना जाता है। कोशिश करें कि आप राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाना अवॉयड करें।
यूं तो विभिन्न भगवान की तस्वीरों को बेडरूम में लगाना अच्छा नहीं माना जाताह है। लेकिन अगर बात राधा-कृष्ण की तस्वीर की हो तो इसे बेडरूम में लगाया जा सकता है। इन्हें प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और इसलिए कपल्स अपने आपसी संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए इनकी तस्वीर को बेडरूम में लगा सकते हैं। जब आप बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगा रहे हैं तो हमेशा इन्हें ईस्ट की दीवार पर लगाएं। साथ ही इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखें। मसलन, कभी भी तस्वीर की तरफ आप पैर करके ना लेटें। वहीं, अगर बेडरूम में अटैच बाथरूम है तो तस्वीर बाथरूम की वॉल पर नहीं होनी चाहिए।
वहीं, अगर कोई महिला संतान प्राप्ति का सुख चाहती है तो ऐसे में बेडरूम में कृष्ण जी के बालरूप की तस्वीर को लगाना अच्छा माना जाता है। अगर आप कृष्ण जी के बाल्य रूप की तस्वीर लगा रही हैं तो इसे ईस्ट और वेस्ट दोनों ही दीवार पर लगाया जा सकता है। हालांकि, इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि कभी भी आपके पैर इनकी तरफ ना हों।
जब आप बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगा रहे हैं तो आपको बेडरूम में इनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। राधा-कृष्ण सहित किसी भी भगवान की पूजा के लिए आप मंदिर या पूजा स्थान को ही चुनें। आपने घर में जहां पर भी पूजा स्थान बना रखा है, वहीं पर इनकी पूजा-आराधना की जानी चाहिए।
अक्सर राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाते समय लोगों के मन में यह सवाल होता है कि राधा जी बाईं तरफ होनी चाहिए या दाईं तरफ। दरअसल, तस्वीर में राधा जी बाईं तरफ होनी चाहिए, जबकि कृष्ण जी दाहिने साइड हो। साथ ही जब आप बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगा रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि उसमें किसी अन्य देवी-देवता या गोपियां ना हो। बस राधा-कृष्ण ही हो। आजकल मार्केट में देवी-देवताओं की तस्वीरों का एक कोलार्ज भी मिलता है, लेकिन उन्हें बेडरूम में भी नहीं लगाना चाहिए।
अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
| अगर आप घर में राधा-कृष्ण की मूर्ति को रख रहे हैं तो आपको इन वास्तु नियमों को भी अवश्य फॉलो करना चाहिए। घर में लोग कई तरह के भगवान की मूर्तियों व तस्वीरों को अपने घर में रखना पसंद करते हैं। कुछ मूर्तियों को घर के मंदिर या पूजा रूम में तो कुछ तस्वीरों को घर के विभिन्न हिस्सों में लगाया जाता है। लेकिन भगवान की तस्वीरों व मूर्तियों को रखने का भी अपना एक तरीका होता है और अगर उनके वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर इन मूर्तियों को रखा जाए तो लाभ कई गुना अधिक मिलता है। कुछ लोगों की आदत होती है कि वह अपने आराध्य की तस्वीर को घर के मुख्य दरवाजे पर लगाते हैं। यूं तो विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की तस्वीर को मुख्य द्वार पर लगाया जा सकता है। लेकिन जहां तक बात राधा-कृष्ण की तस्वीर की है तो इसे घर के मुख्य दरवाजे के उपर पर लगाना अच्छा नहीं माना जाता है। कोशिश करें कि आप राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाना अवॉयड करें। यूं तो विभिन्न भगवान की तस्वीरों को बेडरूम में लगाना अच्छा नहीं माना जाताह है। लेकिन अगर बात राधा-कृष्ण की तस्वीर की हो तो इसे बेडरूम में लगाया जा सकता है। इन्हें प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और इसलिए कपल्स अपने आपसी संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए इनकी तस्वीर को बेडरूम में लगा सकते हैं। जब आप बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगा रहे हैं तो हमेशा इन्हें ईस्ट की दीवार पर लगाएं। साथ ही इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखें। मसलन, कभी भी तस्वीर की तरफ आप पैर करके ना लेटें। वहीं, अगर बेडरूम में अटैच बाथरूम है तो तस्वीर बाथरूम की वॉल पर नहीं होनी चाहिए। वहीं, अगर कोई महिला संतान प्राप्ति का सुख चाहती है तो ऐसे में बेडरूम में कृष्ण जी के बालरूप की तस्वीर को लगाना अच्छा माना जाता है। अगर आप कृष्ण जी के बाल्य रूप की तस्वीर लगा रही हैं तो इसे ईस्ट और वेस्ट दोनों ही दीवार पर लगाया जा सकता है। हालांकि, इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि कभी भी आपके पैर इनकी तरफ ना हों। जब आप बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगा रहे हैं तो आपको बेडरूम में इनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। राधा-कृष्ण सहित किसी भी भगवान की पूजा के लिए आप मंदिर या पूजा स्थान को ही चुनें। आपने घर में जहां पर भी पूजा स्थान बना रखा है, वहीं पर इनकी पूजा-आराधना की जानी चाहिए। अक्सर राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाते समय लोगों के मन में यह सवाल होता है कि राधा जी बाईं तरफ होनी चाहिए या दाईं तरफ। दरअसल, तस्वीर में राधा जी बाईं तरफ होनी चाहिए, जबकि कृष्ण जी दाहिने साइड हो। साथ ही जब आप बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगा रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि उसमें किसी अन्य देवी-देवता या गोपियां ना हो। बस राधा-कृष्ण ही हो। आजकल मार्केट में देवी-देवताओं की तस्वीरों का एक कोलार्ज भी मिलता है, लेकिन उन्हें बेडरूम में भी नहीं लगाना चाहिए। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें। |
खतौली। गृहक्लेश में गोली मारकर पत्नी को मौत के घाट उतारने वाले हत्यारोपित पति को पुलिस ने आला ऐ क़त्ल के साथ दबोचकर जेल रवाना कर दिया है।
जानकारी के अनुसार बुढ़ाना रोड़ निवासी स्क्रेप व्यापारी फिरोज़ ने गृहक्लेश के चलते रविवार प्रातरू अपनी पत्नी खुशनुमा की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
मृतका खुशनुमा के भाई शारिक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करके पुलिस हत्यारोपित की तलाश में जुट गयी थी। सोमवार को कस्बा इन्चार्ज राधेश्याम यादव की टीम ने बुढ़ाना तिराहे के पास फरार होने की फिराक़ में खड़े हत्यारोपित फिरोज़ को आला ए क़त्ल 315 बोर के तमन्चे सहित दबोचकर जेल भेज दिया।
कोतवाल एचएन सिंह ने बताया पति फिरोज़ के नशा करने का पत्नी खुशनुमा विरोध करती थी। जिसके चलते मियाँ बीवी में खटपट रहती थी। इसके अलावा संयुक्त परिवार होने के कारण मृतका खुशनुमा की ससुरालियों से भी अनबन रहती थी।
बताया गया आये दिन की किच किच से परेशान मृतका खुशनुमा पति फिरोज़ से अलग मकान लेकर रहने की बात करती थी। गृहक्लेश से तैश में आकर फिरोज़ ने पत्नी खुशनुमा की गोली मारकर हत्या कर दी।
| खतौली। गृहक्लेश में गोली मारकर पत्नी को मौत के घाट उतारने वाले हत्यारोपित पति को पुलिस ने आला ऐ क़त्ल के साथ दबोचकर जेल रवाना कर दिया है। जानकारी के अनुसार बुढ़ाना रोड़ निवासी स्क्रेप व्यापारी फिरोज़ ने गृहक्लेश के चलते रविवार प्रातरू अपनी पत्नी खुशनुमा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतका खुशनुमा के भाई शारिक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करके पुलिस हत्यारोपित की तलाश में जुट गयी थी। सोमवार को कस्बा इन्चार्ज राधेश्याम यादव की टीम ने बुढ़ाना तिराहे के पास फरार होने की फिराक़ में खड़े हत्यारोपित फिरोज़ को आला ए क़त्ल तीन सौ पंद्रह बोर के तमन्चे सहित दबोचकर जेल भेज दिया। कोतवाल एचएन सिंह ने बताया पति फिरोज़ के नशा करने का पत्नी खुशनुमा विरोध करती थी। जिसके चलते मियाँ बीवी में खटपट रहती थी। इसके अलावा संयुक्त परिवार होने के कारण मृतका खुशनुमा की ससुरालियों से भी अनबन रहती थी। बताया गया आये दिन की किच किच से परेशान मृतका खुशनुमा पति फिरोज़ से अलग मकान लेकर रहने की बात करती थी। गृहक्लेश से तैश में आकर फिरोज़ ने पत्नी खुशनुमा की गोली मारकर हत्या कर दी। |
घांव पर शिस जातो और यह उसया छोर परउपर झटके से उसे सींचना और फिर अपनी आखों पर जमा लेता। उसकी इन ऐंठन की हरकतों से देसपर मुझे 'जेय में मौत' याते पागल इगोशा की याद हो आई ।
"ये गदी मछलियां हमारी मदली नदी में विसविता रही हैं श्री दिन दिन दूनी गदगी उछाल रही है ! " प्योग यासोन्येविच यह रहा था अजनवी ने, जो किसी दुकान या वारिदा मालूम होता था, गा० और निश्चल आयात मे पूछा
"यह सब क्या तुम मेरे बारे मे रह रहे थे ? " "तुम्हारे बारे मे हो सही
अजनबी ने, उतने हो निश्चल प्रदात और आत्मियता से फिर पूछा और खुद अपने बारे मे तुम क्या महते हो, बदे ?" " अपने बारे मे मैं भगवान के दरबार मे बहूगा- वह मेरा नि मामला है
'श्रोह नहीं, बदे, अकेले तुम्हारा ही नहीं, वह मेरा मामला है, " अजनबी ने जोरदार और गम्भीर भावाज मे यहा। "सचाई से भा न चुराना और अपने को जान-बूझकर प्रधान धरना । भगवान और इसा के सामने यह बड़ा पाप है !
कहक मुझे यह अच्छा लगा कि प्योत्र वासील्येविच को उसो 'बदा' सम्बोधित किया। उसको शान्त और गम्भीर वा ने भी मुझपर गह असर किया। वह उसी तरह बोल रहा था जसे कि कोई अच्छा पादा धम-प्रय का पाठ करता है, "सबका स्वामी, इस दुनिया का सिरजनहारवह बोलता जाता था और दुर्सी पर आगे की ओर खिसक्ता जाता था अपने हाथ को मुह के सामने लाकर हिलाते हुए बोला
"मेरो निदा मत करो, मैं तुमसे अधिक पापी नहीं हू प्योत्र वासील्येविच ने तिरस्कारपूर्वक कहा
लगा समोवार खौलने ! "
अजनबी ने उसके शब्दो की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला "केवल भगवान हो यह बता सकता है कि पवित्र आत्मा के सो कोधिक गदा कर रहा है। हो सकता है कि यह पाप तुमने हैं किया हो, - किताबी - कागजी लोगो ने, मैं किताबी नहीं, कागजो नहीं मै तो एक सोधा सादा जीव हू | घांव पर शिस जातो और यह उसया छोर परउपर झटके से उसे सींचना और फिर अपनी आखों पर जमा लेता। उसकी इन ऐंठन की हरकतों से देसपर मुझे 'जेय में मौत' याते पागल इगोशा की याद हो आई । "ये गदी मछलियां हमारी मदली नदी में विसविता रही हैं श्री दिन दिन दूनी गदगी उछाल रही है ! " प्योग यासोन्येविच यह रहा था अजनवी ने, जो किसी दुकान या वारिदा मालूम होता था, गाशून्य और निश्चल आयात मे पूछा "यह सब क्या तुम मेरे बारे मे रह रहे थे ? " "तुम्हारे बारे मे हो सही अजनबी ने, उतने हो निश्चल प्रदात और आत्मियता से फिर पूछा और खुद अपने बारे मे तुम क्या महते हो, बदे ?" " अपने बारे मे मैं भगवान के दरबार मे बहूगा- वह मेरा नि मामला है 'श्रोह नहीं, बदे, अकेले तुम्हारा ही नहीं, वह मेरा मामला है, " अजनबी ने जोरदार और गम्भीर भावाज मे यहा। "सचाई से भा न चुराना और अपने को जान-बूझकर प्रधान धरना । भगवान और इसा के सामने यह बड़ा पाप है ! कहक मुझे यह अच्छा लगा कि प्योत्र वासील्येविच को उसो 'बदा' सम्बोधित किया। उसको शान्त और गम्भीर वा ने भी मुझपर गह असर किया। वह उसी तरह बोल रहा था जसे कि कोई अच्छा पादा धम-प्रय का पाठ करता है, "सबका स्वामी, इस दुनिया का सिरजनहारवह बोलता जाता था और दुर्सी पर आगे की ओर खिसक्ता जाता था अपने हाथ को मुह के सामने लाकर हिलाते हुए बोला "मेरो निदा मत करो, मैं तुमसे अधिक पापी नहीं हू प्योत्र वासील्येविच ने तिरस्कारपूर्वक कहा लगा समोवार खौलने ! " अजनबी ने उसके शब्दो की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और बोला "केवल भगवान हो यह बता सकता है कि पवित्र आत्मा के सो कोधिक गदा कर रहा है। हो सकता है कि यह पाप तुमने हैं किया हो, - किताबी - कागजी लोगो ने, मैं किताबी नहीं, कागजो नहीं मै तो एक सोधा सादा जीव हू |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन।
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद )
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
लंदन के श्री स्वामीनारायण मंदिर ने एक दृष्टिहीन व्यक्ति अमित पटेल से उसके गाइड कुत्ते को उसके साथ अंदर न जाने देने पर माफ़ी मांगी है.
ख़ासतौर से प्रशिक्षित अमित पटेल का कुत्ता कीका उनकी बाहर आने जाने में मदद करता है और अमित को मंदिर में उसके साथ न होेने से असहज सा लगा था जिसके लिए उन्होंने मंदिर प्रशासन की आलोचना की थी.
हालांकि नीस्डेन स्थित मंदिर प्रशासन ने घटना के लिए माफ़ी मांगी है. लेकिन उनका कहना है कि वह गाइड कुत्ते को मंदिर में प्रवेश पर रोक के नियम में छूट नहीं देंगे.
अमित दो साल पहले दृष्टिहीन हो गए थे और कीका हमेशा उनके साथ होता है.
नीस्डेन मंदिर ने एक बयान में कहा है कि मंदिर श्रद्धालुओ की विशेष आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं. क़ानून के अनुसार गाइड कुत्ते सभी सार्वजनिक स्थानों पर जा सकते हैं, लेकिन इस बारे में थोड़े मतभेद हैं कि क्या यह धार्मिक भवनों पर भी लागू होता है. "
दृष्टिहीनों के लिए गाइड कुत्ते उपलब्ध करवाने वाले डेव केंट ने इसी तरह के मामले देश भर में देखे हैं.
नीस्डेन मंदिर ने अमित को आमंत्रित किया है और कहा है कि मंदिर प्रशासन को उन्हें एक निजी गाइड प्रदान कर सकता है और उसे इस बात की ख़ुशी होगी. लेकिन उसने कहा है कि गाइड कुत्ती स्वयंसेवकों की देखरेख में ही रहेंगी और उसे परिसर में नहीं जाने दिया जाएगा.
अमित निर्णय से दुखी हैं और नीति में बदलाव चाहते हैं. उन्हें यह भी लगता है कि कुछ एशियाई लोगों को विकलांगता पर नज़रिया बदलने की ज़रूरत है.
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| लंदन के श्री स्वामीनारायण मंदिर ने एक दृष्टिहीन व्यक्ति अमित पटेल से उसके गाइड कुत्ते को उसके साथ अंदर न जाने देने पर माफ़ी मांगी है. ख़ासतौर से प्रशिक्षित अमित पटेल का कुत्ता कीका उनकी बाहर आने जाने में मदद करता है और अमित को मंदिर में उसके साथ न होेने से असहज सा लगा था जिसके लिए उन्होंने मंदिर प्रशासन की आलोचना की थी. हालांकि नीस्डेन स्थित मंदिर प्रशासन ने घटना के लिए माफ़ी मांगी है. लेकिन उनका कहना है कि वह गाइड कुत्ते को मंदिर में प्रवेश पर रोक के नियम में छूट नहीं देंगे. अमित दो साल पहले दृष्टिहीन हो गए थे और कीका हमेशा उनके साथ होता है. नीस्डेन मंदिर ने एक बयान में कहा है कि मंदिर श्रद्धालुओ की विशेष आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं. क़ानून के अनुसार गाइड कुत्ते सभी सार्वजनिक स्थानों पर जा सकते हैं, लेकिन इस बारे में थोड़े मतभेद हैं कि क्या यह धार्मिक भवनों पर भी लागू होता है. " दृष्टिहीनों के लिए गाइड कुत्ते उपलब्ध करवाने वाले डेव केंट ने इसी तरह के मामले देश भर में देखे हैं. नीस्डेन मंदिर ने अमित को आमंत्रित किया है और कहा है कि मंदिर प्रशासन को उन्हें एक निजी गाइड प्रदान कर सकता है और उसे इस बात की ख़ुशी होगी. लेकिन उसने कहा है कि गाइड कुत्ती स्वयंसेवकों की देखरेख में ही रहेंगी और उसे परिसर में नहीं जाने दिया जाएगा. अमित निर्णय से दुखी हैं और नीति में बदलाव चाहते हैं. उन्हें यह भी लगता है कि कुछ एशियाई लोगों को विकलांगता पर नज़रिया बदलने की ज़रूरत है. |
- 12 min ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल!
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जिया ने रामगोपाल वर्मा की फिल्म निशब्द से बालीवुड में प्रवेश किया था जिसमे उनकी भुमिका ऐसी लड़की की थी जिसे अपनी पिता की उम्र के व्यक्ति से प्यार हो जाता है। उस व्यक्ति की भुमिका में अमिताभ बच्चन ने निभाई थी। इस फिल्म में जिया के अंग प्रदर्शन की काफी चर्चा हुई थी।
उन्होंने बताया, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मैं एक रूढिवादी मुस्लिम परिवार से आती हूं तो मुझे अपनी मां से फिल्मों में अंग प्रदर्शन के लिए कम से कम दस बार पूछना पड़ा था तब जाकर मां ने सहमति दी थी। "
हाल में आई फिल्म गजिनी में उनके काम की काफी तारिफ हुई है। हालांकि इस फिल्म में अंग प्रदर्शन की कोई खास गुंजाइश नही थी। पर अगर होती भी तो वे इसके लिए तैयार थी। वैसे भी बालीवुड में बिकनी पहनना अब कोई बड़ी बात नही रह गई है।
ब्लैक ब्रा पहनकर फिर पूल में उतरीं शेफाली जरीवाला, सुनहरी स्किन देख लोग बोले- 'हाय मेरी दूध मलाई'
तलाकशुदा हसीना ने नाइटी में पोस्ट कर दीं S*xy तस्वीरें, रात होते ही बेडरूम में ऐसे मचलीं कि. .
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पूरे देश में रिकॉर्ड टीकाकरण के बीच फर्जी वैक्सीन का मामला भी प्रकाश में आया है। फर्जी वैक्सीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (1 सितंबर 2021) को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक साथ 10 ठिकानों पर रेड मारी है। इस मामले में जाँच एजेंसी ने टीके की जमाखोरी, कालाबाजारी और नकली दवाओं सहित 6 मामले दर्ज किए हैं। कई लोगों से पूछताछ भी की जा चुकी है।
दरअसल, 3 जुलाई 2021 को SIT टीम के एक जाँच दल ने कोलकाता में फर्जी टीकाकरण केंद्र चला रहे फर्जी IAS अधिकारी देबाजन देब के यहाँ छापा मारा था। मामले का खुलासा होने के बाद कोलकाता पुलिस ने आऱोपित को अरेस्ट कर लिया था। इस दौरान पुलिस ने बहुत सामान बरामद किया था। इसमें अटेंडेंस रजिस्टर, विजिटर स्लिप, नौकरी के लिए आवेदन, फर्जी टेंडर के दस्तावेज़ शामिल थे।
पूछताछ के दौरान आरोपित ने पुलिस को बताया था कि वह कोरोना टीकाकरण केंद्र में कोविशील्ड वैक्सीन की जगह लोगों को निमोनिया का इंजेक्शन दे रहा था। देबांजन देब कोविशील्ड वैक्सीन के ग्राफिक्स को प्रिंट करके उसे टीके की शीशी पर लगाता था। इसके पहले गत वर्ष उसने सैनेटाइजर का भी कारोबार शुरू किया था। फिलहाल उसके टीएमसी के नेताओं के साथ लिंक्स की जांच चल रही है।
| पूरे देश में रिकॉर्ड टीकाकरण के बीच फर्जी वैक्सीन का मामला भी प्रकाश में आया है। फर्जी वैक्सीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक साथ दस ठिकानों पर रेड मारी है। इस मामले में जाँच एजेंसी ने टीके की जमाखोरी, कालाबाजारी और नकली दवाओं सहित छः मामले दर्ज किए हैं। कई लोगों से पूछताछ भी की जा चुकी है। दरअसल, तीन जुलाई दो हज़ार इक्कीस को SIT टीम के एक जाँच दल ने कोलकाता में फर्जी टीकाकरण केंद्र चला रहे फर्जी IAS अधिकारी देबाजन देब के यहाँ छापा मारा था। मामले का खुलासा होने के बाद कोलकाता पुलिस ने आऱोपित को अरेस्ट कर लिया था। इस दौरान पुलिस ने बहुत सामान बरामद किया था। इसमें अटेंडेंस रजिस्टर, विजिटर स्लिप, नौकरी के लिए आवेदन, फर्जी टेंडर के दस्तावेज़ शामिल थे। पूछताछ के दौरान आरोपित ने पुलिस को बताया था कि वह कोरोना टीकाकरण केंद्र में कोविशील्ड वैक्सीन की जगह लोगों को निमोनिया का इंजेक्शन दे रहा था। देबांजन देब कोविशील्ड वैक्सीन के ग्राफिक्स को प्रिंट करके उसे टीके की शीशी पर लगाता था। इसके पहले गत वर्ष उसने सैनेटाइजर का भी कारोबार शुरू किया था। फिलहाल उसके टीएमसी के नेताओं के साथ लिंक्स की जांच चल रही है। |
सिट्रॉन ने भारत से अपनी C3 क्रॉसओवर का अफ्रीका और आसियान देशों के लिए निर्यात शुरू कर दिया है। कंपनी ने हाल ही में C3 कारों का पहला बेड़ा कामराजर पोर्ट से रवाना किया था। सिट्रॉन C3 को देश में जुलाई, 2022 में 5. 70 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) कीमत में पेश किया गया था। इसे अब BS6 स्टेज II और OBD2 मानकों को पूरा करने के लिए अपडेट किया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत 6. 16 लाख (एक्स-शोरूम) हो गई है।
| सिट्रॉन ने भारत से अपनी Cतीन क्रॉसओवर का अफ्रीका और आसियान देशों के लिए निर्यात शुरू कर दिया है। कंपनी ने हाल ही में Cतीन कारों का पहला बेड़ा कामराजर पोर्ट से रवाना किया था। सिट्रॉन Cतीन को देश में जुलाई, दो हज़ार बाईस में पाँच. सत्तर लाख रुपये कीमत में पेश किया गया था। इसे अब BSछः स्टेज II और OBDदो मानकों को पूरा करने के लिए अपडेट किया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत छः. सोलह लाख हो गई है। |
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उत्तर प्रदेश :ललितपुर केस में दुष्कर्म पीड़िता की मां ने भी पति के विरुद्ध दर्ज कराई शिकायत !
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| A password will be e-mailed to you. उत्तर प्रदेश :ललितपुर केस में दुष्कर्म पीड़िता की मां ने भी पति के विरुद्ध दर्ज कराई शिकायत ! © दो हज़ार तेईस Rajsttaexpress. com All rights reserved. |
रोहित कश्यप, मुंगेली. राज्य शासन की महत्वाकांक्षी स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल दाउपारा मुंगेली में अंग्रेजी माध्यम के साथ-साथ अब रोबोटिक्स की पढ़ाई होगी. सीएम बघेल के निर्देश पर कलेक्टर राहुल देव ने आज स्कूल में रोबोटिक्स लैब का शुभारंभ किया. इस दौरान कलेक्टर ने कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूल दाउपारा मुंगेली में रोबोटिक्स लैब शुरू होने से छात्र अब तकनीकी रूप से दक्ष होंगे. इस सत्र से शिक्षकों की मदद से छात्र माॅडल बनाने के साथ इलेक्ट्रानिक डिवाइस बनाना भी सीखेंगे.
कलेक्टर ने कहा, छात्रों को यदि अभी से तकनीकी शिक्षा दी जाएगी तो भविष्य में वो अपना लक्ष्य निर्धारित करके सफल हो सकेंगे. उन्होंने कहा कि तकनीकी उपकरणों से पढ़ाई कराने पर छात्रों की पढ़ने में रूचि होगी. इससे वे पढ़ाई के दौरान रटना छोड़कर नवाचार सीखेंगे.
पुलिस अधीक्षक चन्द्रमोहन सिंह ने कहा कि भविष्य में पढ़ाई पूरी तकनीकी बेस है, इसीलिए छात्रों को अभी से उसके लिए तैयार होना होगा. इस दौरान कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने रोबोटिक्स लैब का अवलोकन किया. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को तकनीकी शिक्षा और इलेक्ट्रानिक डिवाइस बनाने की शिक्षा दी जा सके, इसलिए लैब को यांत्रिक उपकरण, इलेक्ट्रानिक उपकरण, सोल्डरिंग आयरन, ब्रेन बोर्ड, कनेक्टर्स, इन्सुलेशन विस्थापन कनेक्टर्स (आईडीसी) और थ्रीडी प्रिंटर्स से लैस किया जाएगा.
इन उपकरणों की मदद से कक्षा 04थीं से 09वीं तक के बच्चों को इलेक्ट्रनक उपकरण, रोबोट और तकनीकी माॅडल बनाना सिखाया जाएगा. छात्रों को उनकी रचनात्मक सोच के अनुसार कम्प्यूटर के माध्यम से माॅडल बनाने और प्रोग्रामिंग करने का मौका दिया जाएगा.
| रोहित कश्यप, मुंगेली. राज्य शासन की महत्वाकांक्षी स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल दाउपारा मुंगेली में अंग्रेजी माध्यम के साथ-साथ अब रोबोटिक्स की पढ़ाई होगी. सीएम बघेल के निर्देश पर कलेक्टर राहुल देव ने आज स्कूल में रोबोटिक्स लैब का शुभारंभ किया. इस दौरान कलेक्टर ने कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूल दाउपारा मुंगेली में रोबोटिक्स लैब शुरू होने से छात्र अब तकनीकी रूप से दक्ष होंगे. इस सत्र से शिक्षकों की मदद से छात्र माॅडल बनाने के साथ इलेक्ट्रानिक डिवाइस बनाना भी सीखेंगे. कलेक्टर ने कहा, छात्रों को यदि अभी से तकनीकी शिक्षा दी जाएगी तो भविष्य में वो अपना लक्ष्य निर्धारित करके सफल हो सकेंगे. उन्होंने कहा कि तकनीकी उपकरणों से पढ़ाई कराने पर छात्रों की पढ़ने में रूचि होगी. इससे वे पढ़ाई के दौरान रटना छोड़कर नवाचार सीखेंगे. पुलिस अधीक्षक चन्द्रमोहन सिंह ने कहा कि भविष्य में पढ़ाई पूरी तकनीकी बेस है, इसीलिए छात्रों को अभी से उसके लिए तैयार होना होगा. इस दौरान कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने रोबोटिक्स लैब का अवलोकन किया. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को तकनीकी शिक्षा और इलेक्ट्रानिक डिवाइस बनाने की शिक्षा दी जा सके, इसलिए लैब को यांत्रिक उपकरण, इलेक्ट्रानिक उपकरण, सोल्डरिंग आयरन, ब्रेन बोर्ड, कनेक्टर्स, इन्सुलेशन विस्थापन कनेक्टर्स और थ्रीडी प्रिंटर्स से लैस किया जाएगा. इन उपकरणों की मदद से कक्षा चारथीं से नौवीं तक के बच्चों को इलेक्ट्रनक उपकरण, रोबोट और तकनीकी माॅडल बनाना सिखाया जाएगा. छात्रों को उनकी रचनात्मक सोच के अनुसार कम्प्यूटर के माध्यम से माॅडल बनाने और प्रोग्रामिंग करने का मौका दिया जाएगा. |
कोई हाथ में ब्रश थामकर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतार रहा था, तो कोई रोबो फाइट में अपने रोबोट को रिमोट से डायरेक्शन दे रहा था। आमतौर पर प्रोजेक्ट और स्टडी में बिजी रहने वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स मैनिट कैंपस में शनिवार. . . madhya pradeshSun, 19 Oct 2014 03:00 AM (IST)
सक्ती। जेवर चमकाने का झांसा देने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरप्तार किया है, जबकि एक युवक भागने में सपᆬल हो गया। दो युवकों से पुलिस ने एसिड, ब्रश व अन्य सामान जब्त किया है। जानकारी के अनुसार सक्ती थाना क्षेत्र के ग्राम. . . chhattisgarhSun, 13 Jul 2014 12:51 AM (IST)
अगर आपको फुल फिगर बनाते आता है, तो आप लैंडस्केप, स्टील लाइफ एब्स्ट्रेक्ट कुछ भी बना सकते हैं। madhya pradeshWed, 18 Jun 2014 02:41 PM (IST)
विश्व प्रसिद्घ रंगकर्मी हबीब तनवीर और चित्रकार एमएफ हुसैन की याद में जब कैनवास पर शहर के नन्हें कलाकारों के ब्रश चले तो वाकई इन कलाकारों की चित्रकला के सभी कायल हो गए। नई प्रतिभाओं की कला का इस तरह प्रदर्शन वरिष्ठ कलाकार. . . chhattisgarhSun, 08 Jun 2014 11:55 PM (IST)
लॉस एंजिल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिली संदिग्ध वस्तु जांच के बाद निकला इलेक्ट्रिक टूथब्रश। worldThu, 24 Apr 2014 12:08 PM (IST)
छिन्दवाड़ा। केंद्रीय शहरी विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री व सांसद कमलनाथ की प्रेरणा और सोनी कम्प्यूटर एज्यूकेशन सोसायटी द्वारा संचालित नॉलेज पॉईट केंद्रों में शनिवार को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजन किया गया। शिविर के. . . madhya pradeshSun, 09 Feb 2014 12:27 AM (IST)
मुफ्त में बांटे टूथपेस्ट और ब्रश हरदा (निप्र)। मांदला गांव में मंगलवार को नवांकुर महिला आस्था सेवा समिति द्वारा मां भगवती विद्या मंदिर के 250 विद्यार्थियों के दांतों का परीक्षण किया गया। समिति अध्यक्ष एवं समाजसेविका उषा . . . madhya pradeshWed, 22 Jan 2014 01:03 AM (IST)
| कोई हाथ में ब्रश थामकर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतार रहा था, तो कोई रोबो फाइट में अपने रोबोट को रिमोट से डायरेक्शन दे रहा था। आमतौर पर प्रोजेक्ट और स्टडी में बिजी रहने वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स मैनिट कैंपस में शनिवार. . . madhya pradeshSun, उन्नीस अक्टूबर दो हज़ार चौदह तीन:शून्य AM सक्ती। जेवर चमकाने का झांसा देने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरप्तार किया है, जबकि एक युवक भागने में सपᆬल हो गया। दो युवकों से पुलिस ने एसिड, ब्रश व अन्य सामान जब्त किया है। जानकारी के अनुसार सक्ती थाना क्षेत्र के ग्राम. . . chhattisgarhSun, तेरह जुलाई दो हज़ार चौदह बारह:इक्यावन AM अगर आपको फुल फिगर बनाते आता है, तो आप लैंडस्केप, स्टील लाइफ एब्स्ट्रेक्ट कुछ भी बना सकते हैं। madhya pradeshWed, अट्ठारह जून दो हज़ार चौदह दो:इकतालीस PM विश्व प्रसिद्घ रंगकर्मी हबीब तनवीर और चित्रकार एमएफ हुसैन की याद में जब कैनवास पर शहर के नन्हें कलाकारों के ब्रश चले तो वाकई इन कलाकारों की चित्रकला के सभी कायल हो गए। नई प्रतिभाओं की कला का इस तरह प्रदर्शन वरिष्ठ कलाकार. . . chhattisgarhSun, आठ जून दो हज़ार चौदह ग्यारह:पचपन PM लॉस एंजिल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिली संदिग्ध वस्तु जांच के बाद निकला इलेक्ट्रिक टूथब्रश। worldThu, चौबीस अप्रैल दो हज़ार चौदह बारह:आठ PM छिन्दवाड़ा। केंद्रीय शहरी विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री व सांसद कमलनाथ की प्रेरणा और सोनी कम्प्यूटर एज्यूकेशन सोसायटी द्वारा संचालित नॉलेज पॉईट केंद्रों में शनिवार को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजन किया गया। शिविर के. . . madhya pradeshSun, नौ फ़रवरी दो हज़ार चौदह बारह:सत्ताईस AM मुफ्त में बांटे टूथपेस्ट और ब्रश हरदा । मांदला गांव में मंगलवार को नवांकुर महिला आस्था सेवा समिति द्वारा मां भगवती विद्या मंदिर के दो सौ पचास विद्यार्थियों के दांतों का परीक्षण किया गया। समिति अध्यक्ष एवं समाजसेविका उषा . . . madhya pradeshWed, बाईस जनवरी दो हज़ार चौदह एक:तीन AM |
कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसान परेड के दौरान हुई हिंसा के पीछे केंद्र सरकार की साजिश होने का बेहद सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने ही किसानों के वेष में अपने लोगों को लाल किला भेजकर हिंसा करवाई थी। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चर्चा में हिस्सा लेते हुए हिंसा की घटना की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराने की मांग की।
उन्होंने लाल किले की घटना का उल्लेख करते हुए कहा, "सच तो यह है कि आप चाहते थे कि कुछ घटना घटे ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। यह आपकी सोची-समझी साजिश है। आपने अपने लोगों को किसान के वेष में वहां पहुंचा दिया। अगर जांच हो जाए तो पता चल जाएगा कि सरकार इसके पीछे है। अगर ऐसा नहीं है तो जेपीसी की जांच कराएं। "
बहरहाल, कांग्रेस नेता ने स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के किसान आंदोलन का समर्थन करने और इसको लेकर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया का भी हवाला दिया और कहा कि जिस तरह से पूरी सरकार 18 साल की एक लड़की के खिलाफ खड़ी हो गई है, उससे देश की छवि धूमिल हो रही है। किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, "आप एक तरफ मुसलमान और दूसरी तरफ किसान के खिलाफ जंग छेड़े हुए हैं। "
सरकार से पूछा- इतना अहंकार क्यों है?
उन्होंने सवाल किया, "संसद से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हजारों किसान दो महीने से बैठे हैं। 200 से ज्यादा किसानों की जान चली गई। प्रधानमंत्री को किसानों के साथ बातचीत करने की फुर्सत नहीं है क्या? इतना अहंकार क्यों है? " किसानों की स्थिति को दयनीय बताते हुए उन्होंने सरकार से कहा, "आप बहुमत का बाहुबल बंद करिए। " चौधरी ने कहा, "किसानों के खिलाफ जंग बंद करो। "
उन्होंने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक को लेकर एक पत्रकार के कथित वॉट्एसेप चैट के मामले पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस सांसद ने कहा, "जब बालाकोट हमले की खबर किसी को नहीं थी तो एक पत्रकार को कैसे पता चल गया? यह देश की सुरक्षा का विषय है। इस टीआरपी घोटाले की जेपीसी जांच होनी चाहिए। " चौधरी के मुताबिक, इस बातचीत में कहा गया है कि बालाकोट की एयरस्ट्राइक चुनावी फायदे के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए।
| कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसान परेड के दौरान हुई हिंसा के पीछे केंद्र सरकार की साजिश होने का बेहद सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने ही किसानों के वेष में अपने लोगों को लाल किला भेजकर हिंसा करवाई थी। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चर्चा में हिस्सा लेते हुए हिंसा की घटना की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की। उन्होंने लाल किले की घटना का उल्लेख करते हुए कहा, "सच तो यह है कि आप चाहते थे कि कुछ घटना घटे ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। यह आपकी सोची-समझी साजिश है। आपने अपने लोगों को किसान के वेष में वहां पहुंचा दिया। अगर जांच हो जाए तो पता चल जाएगा कि सरकार इसके पीछे है। अगर ऐसा नहीं है तो जेपीसी की जांच कराएं। " बहरहाल, कांग्रेस नेता ने स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के किसान आंदोलन का समर्थन करने और इसको लेकर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया का भी हवाला दिया और कहा कि जिस तरह से पूरी सरकार अट्ठारह साल की एक लड़की के खिलाफ खड़ी हो गई है, उससे देश की छवि धूमिल हो रही है। किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, "आप एक तरफ मुसलमान और दूसरी तरफ किसान के खिलाफ जंग छेड़े हुए हैं। " सरकार से पूछा- इतना अहंकार क्यों है? उन्होंने सवाल किया, "संसद से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हजारों किसान दो महीने से बैठे हैं। दो सौ से ज्यादा किसानों की जान चली गई। प्रधानमंत्री को किसानों के साथ बातचीत करने की फुर्सत नहीं है क्या? इतना अहंकार क्यों है? " किसानों की स्थिति को दयनीय बताते हुए उन्होंने सरकार से कहा, "आप बहुमत का बाहुबल बंद करिए। " चौधरी ने कहा, "किसानों के खिलाफ जंग बंद करो। " उन्होंने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक को लेकर एक पत्रकार के कथित वॉट्एसेप चैट के मामले पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस सांसद ने कहा, "जब बालाकोट हमले की खबर किसी को नहीं थी तो एक पत्रकार को कैसे पता चल गया? यह देश की सुरक्षा का विषय है। इस टीआरपी घोटाले की जेपीसी जांच होनी चाहिए। " चौधरी के मुताबिक, इस बातचीत में कहा गया है कि बालाकोट की एयरस्ट्राइक चुनावी फायदे के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। |
डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी है, जो वर्तमान समय में खराब खानपान, कोई फिजिकल एक्टिविटी न करना और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मधुमेह के रोगी अगर अपने खानपान और लाइफस्टाइल का ध्यान रखें तो इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर लेवल का अधिक ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने से गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
आमतौर पर लोगों में यह धारणा होती है कि इंसुलिन इंजेक्शन और शुगर सप्लीमेंट के जरिए ही डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन किचन के कुछ मसाले हैं, जिनके सेवन से भी ब्लड शुगर लेवल को काबू में किया जा सकता है।
लौंगः एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर लौंग में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं। लौंग में पाया जाने वाला पॉलीफेनॉल तत्व ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। ऐसे में आप या तो लौंग के पानी का सेवन कर सकते हैं या फिर उसकी चाय बनाकर पी सकते हैं।
तुलसीः औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में कारगर है। इसमें मौजूद एंटीऑकसीडेंट ऑक्सीडेटिव तत्व स्ट्रेस को कम करता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीज अपनी डाइट में तुलसी के पत्तों को शामिल कर सकते हैं।
कसूरी मेथीः कसूरी मेथी खाने को स्वादिष्ट बनाने में मदद करती है। लेकिन साथ ही यह खून में शुगर के स्तर को भी काबू में रखती है। आप कसूरी मेथी का सेवन सब्जी में डालकर कर सकते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कसूरी मेथी का सेवन करने से एक घंटे बाद तक कुछ नहीं खाना चाहिए।
हरी इलायचीः चाय, पुलाव, खीर और अन्य खाद्य पदार्थों में हरी इलायची का इस्तेमाल किया जाता है। इससे खाने का स्वाद कई गुना तक बढ़ जाता है। एंटी-इन्फ्लेमेट्री और हाइपोलिपिडेमिक तत्वों से भरपूर हरी इलायची खून में ग्लूकोज के स्तर को भी काबू में रखती है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डायबिटीज के मरीजों को एक चम्मच हरी इलायजी के पाउडर का सेवन कर सकते हैं।
| डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी है, जो वर्तमान समय में खराब खानपान, कोई फिजिकल एक्टिविटी न करना और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मधुमेह के रोगी अगर अपने खानपान और लाइफस्टाइल का ध्यान रखें तो इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर लेवल का अधिक ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने से गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। आमतौर पर लोगों में यह धारणा होती है कि इंसुलिन इंजेक्शन और शुगर सप्लीमेंट के जरिए ही डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन किचन के कुछ मसाले हैं, जिनके सेवन से भी ब्लड शुगर लेवल को काबू में किया जा सकता है। लौंगः एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर लौंग में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं। लौंग में पाया जाने वाला पॉलीफेनॉल तत्व ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। ऐसे में आप या तो लौंग के पानी का सेवन कर सकते हैं या फिर उसकी चाय बनाकर पी सकते हैं। तुलसीः औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में कारगर है। इसमें मौजूद एंटीऑकसीडेंट ऑक्सीडेटिव तत्व स्ट्रेस को कम करता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीज अपनी डाइट में तुलसी के पत्तों को शामिल कर सकते हैं। कसूरी मेथीः कसूरी मेथी खाने को स्वादिष्ट बनाने में मदद करती है। लेकिन साथ ही यह खून में शुगर के स्तर को भी काबू में रखती है। आप कसूरी मेथी का सेवन सब्जी में डालकर कर सकते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कसूरी मेथी का सेवन करने से एक घंटे बाद तक कुछ नहीं खाना चाहिए। हरी इलायचीः चाय, पुलाव, खीर और अन्य खाद्य पदार्थों में हरी इलायची का इस्तेमाल किया जाता है। इससे खाने का स्वाद कई गुना तक बढ़ जाता है। एंटी-इन्फ्लेमेट्री और हाइपोलिपिडेमिक तत्वों से भरपूर हरी इलायची खून में ग्लूकोज के स्तर को भी काबू में रखती है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डायबिटीज के मरीजों को एक चम्मच हरी इलायजी के पाउडर का सेवन कर सकते हैं। |
नैनीतालः उत्तराखंड के नैनीताल जिले में तल्लीताल क्षेत्र में ठंड से बचने को आग ताप रहा दंपति अंगीठी से निकलने वाली गैस से बेहोश हो गया। जी हाँ और इस घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग तुरंत ही दंपति को लेकर नजदीकी अस्पताल पहुंचे। हालाँकि यहाँ उपचार के दौरान महिला के गर्भ में पल रहे आठ माह के शिशु की मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टरों का कहना है अंगीठी से निकली गैस से बच्चे की जान गई है। जी दरअसल बीते शनिवार को गर्भवती दीपिका अपने पति ललित के साथ ठंड से बचने को अंगीठी जलाकर ताप रही थी।
इसी बीच अंगीठी से निकली गैस का असर होने से दोनों बेहोश हो गए। जी हाँ और इसकी जानकारी मिलने पर आसपास के लोग दोनों को तत्काल बीडी पांडे अस्पताल ले गए और यहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। डॉक्टर का कहना है, अंगीठी से आग तापते समय उससे निकली गैस से मां बेहोश हो गई। इसका असर उसके पेट में पल रहे शिशु पर भी हुआ जिससे बच्चे की मौत हो गई। इसी के साथ डॉक्टरों का कहना है कि जलती अंगीठी को बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए क्योंकि अंगीठी की गैस जहरीली होती है। वहीं बीडी पांडे अस्पताल, नैनीताल के सीएमओ, डॉ. एलएमएस रावत ने बताया कि अंगीठी की गैस लगने से महिला के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई।
इसी के साथ यह भी बताया कि मां का इलाज किया जा रहा है, जबकि उसके पति को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉ. रावत ने लोगों से अपील की है कि बंद कमरे में अंगीठी का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें। अंगीठी की गैस जहरीली होती है, और इससे बेहोश होने के बाद मौत भी हो सकती है।
| नैनीतालः उत्तराखंड के नैनीताल जिले में तल्लीताल क्षेत्र में ठंड से बचने को आग ताप रहा दंपति अंगीठी से निकलने वाली गैस से बेहोश हो गया। जी हाँ और इस घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग तुरंत ही दंपति को लेकर नजदीकी अस्पताल पहुंचे। हालाँकि यहाँ उपचार के दौरान महिला के गर्भ में पल रहे आठ माह के शिशु की मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टरों का कहना है अंगीठी से निकली गैस से बच्चे की जान गई है। जी दरअसल बीते शनिवार को गर्भवती दीपिका अपने पति ललित के साथ ठंड से बचने को अंगीठी जलाकर ताप रही थी। इसी बीच अंगीठी से निकली गैस का असर होने से दोनों बेहोश हो गए। जी हाँ और इसकी जानकारी मिलने पर आसपास के लोग दोनों को तत्काल बीडी पांडे अस्पताल ले गए और यहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। डॉक्टर का कहना है, अंगीठी से आग तापते समय उससे निकली गैस से मां बेहोश हो गई। इसका असर उसके पेट में पल रहे शिशु पर भी हुआ जिससे बच्चे की मौत हो गई। इसी के साथ डॉक्टरों का कहना है कि जलती अंगीठी को बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए क्योंकि अंगीठी की गैस जहरीली होती है। वहीं बीडी पांडे अस्पताल, नैनीताल के सीएमओ, डॉ. एलएमएस रावत ने बताया कि अंगीठी की गैस लगने से महिला के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। इसी के साथ यह भी बताया कि मां का इलाज किया जा रहा है, जबकि उसके पति को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉ. रावत ने लोगों से अपील की है कि बंद कमरे में अंगीठी का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें। अंगीठी की गैस जहरीली होती है, और इससे बेहोश होने के बाद मौत भी हो सकती है। |
बॉलीवुड सुपरस्टार रितिक रोशन की अपकमिंग फिल्म 'फाइटर' काफी वक्त से सुर्खियोंमें हैं। इस फिल्म में पहली बार पर्दे पर रितिक और दीपिका पादुकोण की जोड़ी साथ नजर आने वाली हैं। पहले यह फिल्म 28 सितंबर 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
अब फिल्म फाइटर की रिलीज डेट बदल दी गई है। इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों को थोड़ा लंबा इंतजार करना पडेगा। रितिक रोशन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फाइटर का एक पोस्टर शेयर करते हुए फिल्म की नई रिलीज डेट की घोषणा की है।
फिल्म फाइटर अब 2023 के बजाय 25 जनवरी 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में रितिक और दीपिका के साथ अनिल कपूर भी अहम किरदार में नजर आएंगे। यह भारत की पहली एरियल एक्शन फिल्म है।
फिल्म 'फाइटर' को सिद्धार्थ आनंद निर्देशित कर रहे हैं। इससे पहले रितिक और सिद्धार्थ बैंग बैंग और वॉर में साथ काम कर चुके हैं। फिल्म में एक्शन सीन्स को हॉलीवुड के स्टंटमैन कोरियोग्राफ करेंगे।
| बॉलीवुड सुपरस्टार रितिक रोशन की अपकमिंग फिल्म 'फाइटर' काफी वक्त से सुर्खियोंमें हैं। इस फिल्म में पहली बार पर्दे पर रितिक और दीपिका पादुकोण की जोड़ी साथ नजर आने वाली हैं। पहले यह फिल्म अट्ठाईस सितंबर दो हज़ार तेईस को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अब फिल्म फाइटर की रिलीज डेट बदल दी गई है। इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों को थोड़ा लंबा इंतजार करना पडेगा। रितिक रोशन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फाइटर का एक पोस्टर शेयर करते हुए फिल्म की नई रिलीज डेट की घोषणा की है। फिल्म फाइटर अब दो हज़ार तेईस के बजाय पच्चीस जनवरी दो हज़ार चौबीस को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में रितिक और दीपिका के साथ अनिल कपूर भी अहम किरदार में नजर आएंगे। यह भारत की पहली एरियल एक्शन फिल्म है। फिल्म 'फाइटर' को सिद्धार्थ आनंद निर्देशित कर रहे हैं। इससे पहले रितिक और सिद्धार्थ बैंग बैंग और वॉर में साथ काम कर चुके हैं। फिल्म में एक्शन सीन्स को हॉलीवुड के स्टंटमैन कोरियोग्राफ करेंगे। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
- #BrazilPirarucu Fish: एक ऐसी मछली जिसके लिए जंगल में होता है 'खूनखराबा', खाने के लेकर हर चीज में बेशकीमती!
- #BrazilBRICS meet: नई करेंसी, नये देश. . दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक, डॉलर को तोड़ने की तैयारी!
Woman Gives Birth to Superbaby: महिला को डॉक्टरो ने कह दिया था कि अब वो कभी गर्भवती नहीं हो पाएंगी, वो ही महिला ना ही केवल प्रेग्नेंट हुई बल्कि एक बहुत ही स्वस्थ बच्चें को जन्म दिया है। बच्ची का वजन और लंबाई ने डॉक्टरों तक को हैरान कारण मां ने अपनी इस बच्ची को सुपरबेबी बताया है।
41 साल की उम्र में पांच किलो के बच्चे को जन्म देने वाली महिला का नाम लुसियाना ब्रांट है जो ब्राजील में रहती हैं। लुसियाना ने बताया कि जन्म के बाद बच्ची को देखकर मैं क्या डॉक्टर तक हैरान थे। बच्ची का वजन और लंबाई के कारण मां ने अपनी इस बच्ची को सुपरबेबी बताया है।
द सन की रिपोर्ट के अनुसार लुसियाना ने बताया था कि डॉक्टरों ने उसे कहा था कि उम्र के चलते हार्मोन्स की कमी होने के कारण वो अब कभी मां नहीं बन सकती लेकिन उसके बाद मैं गर्भवती हुई और पांच किलो के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
हालांकि बिट्रेन की लुसियाना का ये पहला बच्चा नहीं है, उनके पहले से पांच बच्चे है, और उनकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र 23 साल है। लुसियाना ने कहा मुझे डॉक्टरों ने कहा था कि मेरे गर्भवती होने की संभावना कम है लेकिन मैंने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और गॉड ने मुझे ये खुशी दी।
लुसियाना ने अपनी इस साढ़े 5 किलो की बेटी को सुपर बेबी होने का दावा किया है और उसका नाम मारिया रखा है। मारिया की लंबाई 20 इंच और वजन साढ़े 5 किलो है। बच्चे का वजन अधिक होने के कारण डॉक्टर ने सिजेरियन डिलीवरी करवाई। डॉक्टरों के अनुसार जन्म के बाद बच्चों का वजन दो से तीन किलो ही होता है, जबकि मारिया का वजन साढ़े 5 किलो है। वजन के कारण मारिया बहुत ही क्यूट नजर आ रही, उसके जन्म के बाद अस्पाताल के लोग उसे देखने के लिए पहुंच रहे थे।
| - #BrazilPirarucu Fish: एक ऐसी मछली जिसके लिए जंगल में होता है 'खूनखराबा', खाने के लेकर हर चीज में बेशकीमती! - #BrazilBRICS meet: नई करेंसी, नये देश. . दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक, डॉलर को तोड़ने की तैयारी! Woman Gives Birth to Superbaby: महिला को डॉक्टरो ने कह दिया था कि अब वो कभी गर्भवती नहीं हो पाएंगी, वो ही महिला ना ही केवल प्रेग्नेंट हुई बल्कि एक बहुत ही स्वस्थ बच्चें को जन्म दिया है। बच्ची का वजन और लंबाई ने डॉक्टरों तक को हैरान कारण मां ने अपनी इस बच्ची को सुपरबेबी बताया है। इकतालीस साल की उम्र में पांच किलो के बच्चे को जन्म देने वाली महिला का नाम लुसियाना ब्रांट है जो ब्राजील में रहती हैं। लुसियाना ने बताया कि जन्म के बाद बच्ची को देखकर मैं क्या डॉक्टर तक हैरान थे। बच्ची का वजन और लंबाई के कारण मां ने अपनी इस बच्ची को सुपरबेबी बताया है। द सन की रिपोर्ट के अनुसार लुसियाना ने बताया था कि डॉक्टरों ने उसे कहा था कि उम्र के चलते हार्मोन्स की कमी होने के कारण वो अब कभी मां नहीं बन सकती लेकिन उसके बाद मैं गर्भवती हुई और पांच किलो के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। हालांकि बिट्रेन की लुसियाना का ये पहला बच्चा नहीं है, उनके पहले से पांच बच्चे है, और उनकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र तेईस साल है। लुसियाना ने कहा मुझे डॉक्टरों ने कहा था कि मेरे गर्भवती होने की संभावना कम है लेकिन मैंने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और गॉड ने मुझे ये खुशी दी। लुसियाना ने अपनी इस साढ़े पाँच किलो की बेटी को सुपर बेबी होने का दावा किया है और उसका नाम मारिया रखा है। मारिया की लंबाई बीस इंच और वजन साढ़े पाँच किलो है। बच्चे का वजन अधिक होने के कारण डॉक्टर ने सिजेरियन डिलीवरी करवाई। डॉक्टरों के अनुसार जन्म के बाद बच्चों का वजन दो से तीन किलो ही होता है, जबकि मारिया का वजन साढ़े पाँच किलो है। वजन के कारण मारिया बहुत ही क्यूट नजर आ रही, उसके जन्म के बाद अस्पाताल के लोग उसे देखने के लिए पहुंच रहे थे। |
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के बीच जारी विवाद मंगलवार को उस समय और गहरा गया, जब उपराज्यपाल ने दिल्ली की भ्रष्टाचार-निवारक शाखा (एसीबी) में बिहार के छह पुलिसकर्मियों की नियुक्ति के दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि एसीबी का संचालन उनके अधिकार, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन आता है।
जंग की आपत्ति पर दिल्ली की आप सरकार ने उन पर तीखे प्रहार किए। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जंग पर आरोप लगाया कि वह राजधानी में शासन को मजाक बना रहे हैं और दिल्ली के लोगों के भारी जनादेश का मजाक उड़ा रहे हैं। वहीँ दूसरी और बिहार के डीएसपी संजय भारती ने दिल्ली में एसीबी ( एंटी करप्शन ब्यूरो) ज्वाइन कर ने से इनकार कर दिया है. बाकि के पांच पुलिस वालों ने समय से पहले ही ऑफिस ज्वाइन कर लिया. एंटी करप्शन ब्यूरो में बिहार के छह पुलिस वालों को जगह मिली है.
उल्लेखनीय है कि राजधानी में अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले को लेकर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच ठनी हुई है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार और एसीबी के पास पुलिस अधिकारियों को नियुक्त करने का पूर अधिकार है। उन्होंने जंग पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जंग को कहा गया है कि उनका काम यही है कि वह दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार को काम करने से रोकें। यह घोषणा मीडिया में आई उन खबरों के प्रतिक्रिया स्वरूप की गई, जिनमें कहा गया था कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने बिहार पुलिस के छह अधिकारियों को एसीबी में नियुक्त किया है।
उपराज्यपाल के कार्यालय ने बिहार पुलिस के अधिकारियों के नियुक्ति को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए फैसले से असहमति जताई और अपना पक्ष रखा। जंग के कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि पुलिस संस्था होने के नाते एसीबी का संचालन उपराज्यपाल के अधिकार, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन है। उपराज्यपाल के अधिकारों को गृह मंत्रालय ने 21 मई को अधिसूचना जारी कर स्पष्ट कर दिया था। बयान में कहा गया है कि दिल्ली के बाहर के पुलिस अधिकारियों की एसीबी में नियुक्ति को लेकर किसी तरह का प्रस्ताव उपराज्यपाल को अबतक नहीं मिला है। जंग ने कहा कि उन्हें इस मामले से अवगत नहीं रखा गया।
राजभवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, "दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग से उपराज्यपाल को आधिकारिक रूप से प्रस्ताव मिलने के बाद मामले की गहनता से जांच की जाएगी। " वहीं मनीष सिसोदिया के कहा "दिल्ली सरकार और एसीबी के पास पुलिस अधिकारियों को देश के किसी भी हिस्से से पुलिसकर्मी नियुक्त करने का पूर अधिकार है। " आप प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा, "हमारे पास उत्तर प्रदेश और हरियाणा के प्रतिनियुक्त अधिकारी भी हैं। क्या बिहार के अधिकारियों की नियुक्ति गुनाह है? "
आप नेता आशुतोष ने मीडिया से कहा, "ऐसा लगता है कि अगर ओबामा (अमेरिका के राष्ट्रपति) को किसी मामले की जांच करनी हो तो उन्हें भी दिल्ली के उपराज्यपाल से आज्ञा लेनी होगी। " 21 मई को जारी गृहमंत्रालय की अधिसूचना में एसीबी के अधिकार क्षेत्र में भी कमी की गई थी। इसमें कहा गया था कि एसीबी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। आप सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
न्यायालय ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन सप्ताह के भीतर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने कहा कि एसीबी में अधिकारियों की नियुक्ति उसके अधिकार क्षेत्र में आती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आप सरकार की आलोचना की। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केजरीवाल को निशाना बनाते हुए कहा, "सरकार चलाना एक गंभीर काम है। कृपया इसे करें। "
| नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच जारी विवाद मंगलवार को उस समय और गहरा गया, जब उपराज्यपाल ने दिल्ली की भ्रष्टाचार-निवारक शाखा में बिहार के छह पुलिसकर्मियों की नियुक्ति के दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि एसीबी का संचालन उनके अधिकार, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन आता है। जंग की आपत्ति पर दिल्ली की आप सरकार ने उन पर तीखे प्रहार किए। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जंग पर आरोप लगाया कि वह राजधानी में शासन को मजाक बना रहे हैं और दिल्ली के लोगों के भारी जनादेश का मजाक उड़ा रहे हैं। वहीँ दूसरी और बिहार के डीएसपी संजय भारती ने दिल्ली में एसीबी ज्वाइन कर ने से इनकार कर दिया है. बाकि के पांच पुलिस वालों ने समय से पहले ही ऑफिस ज्वाइन कर लिया. एंटी करप्शन ब्यूरो में बिहार के छह पुलिस वालों को जगह मिली है. उल्लेखनीय है कि राजधानी में अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले को लेकर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच ठनी हुई है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार और एसीबी के पास पुलिस अधिकारियों को नियुक्त करने का पूर अधिकार है। उन्होंने जंग पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जंग को कहा गया है कि उनका काम यही है कि वह दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार को काम करने से रोकें। यह घोषणा मीडिया में आई उन खबरों के प्रतिक्रिया स्वरूप की गई, जिनमें कहा गया था कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने बिहार पुलिस के छह अधिकारियों को एसीबी में नियुक्त किया है। उपराज्यपाल के कार्यालय ने बिहार पुलिस के अधिकारियों के नियुक्ति को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए फैसले से असहमति जताई और अपना पक्ष रखा। जंग के कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि पुलिस संस्था होने के नाते एसीबी का संचालन उपराज्यपाल के अधिकार, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन है। उपराज्यपाल के अधिकारों को गृह मंत्रालय ने इक्कीस मई को अधिसूचना जारी कर स्पष्ट कर दिया था। बयान में कहा गया है कि दिल्ली के बाहर के पुलिस अधिकारियों की एसीबी में नियुक्ति को लेकर किसी तरह का प्रस्ताव उपराज्यपाल को अबतक नहीं मिला है। जंग ने कहा कि उन्हें इस मामले से अवगत नहीं रखा गया। राजभवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, "दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग से उपराज्यपाल को आधिकारिक रूप से प्रस्ताव मिलने के बाद मामले की गहनता से जांच की जाएगी। " वहीं मनीष सिसोदिया के कहा "दिल्ली सरकार और एसीबी के पास पुलिस अधिकारियों को देश के किसी भी हिस्से से पुलिसकर्मी नियुक्त करने का पूर अधिकार है। " आप प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा, "हमारे पास उत्तर प्रदेश और हरियाणा के प्रतिनियुक्त अधिकारी भी हैं। क्या बिहार के अधिकारियों की नियुक्ति गुनाह है? " आप नेता आशुतोष ने मीडिया से कहा, "ऐसा लगता है कि अगर ओबामा को किसी मामले की जांच करनी हो तो उन्हें भी दिल्ली के उपराज्यपाल से आज्ञा लेनी होगी। " इक्कीस मई को जारी गृहमंत्रालय की अधिसूचना में एसीबी के अधिकार क्षेत्र में भी कमी की गई थी। इसमें कहा गया था कि एसीबी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। आप सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायालय ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन सप्ताह के भीतर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने कहा कि एसीबी में अधिकारियों की नियुक्ति उसके अधिकार क्षेत्र में आती है। भारतीय जनता पार्टी ने आप सरकार की आलोचना की। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केजरीवाल को निशाना बनाते हुए कहा, "सरकार चलाना एक गंभीर काम है। कृपया इसे करें। " |
मानवता में अपने विकास की प्रक्रिया आधुनिक समाज के लिए पशु मंच से एक लंबा सफर तय किया है। जानवरों के साम्राज्य का मुख्य आकर्षण, मनुष्य अपने अवचेतन खुद को जैसे लोगों (अपने जनजाति के लोगों), और उपस्थिति, व्यवहार और जीवन शैली में दिखाई अंतर के साथ लोगों की ओर दुश्मनी के साथ खुद को चारों ओर की इच्छा से विरासत में मिली है। का यह निशान लोग हैं, जो बहुमत से अलग - पशु मानव की स्थिति "सफेद कौवा" की असहिष्णुता को जन्म देता है। आदिम जनजातियों नहीं पता था, सहिष्णुता है क्याः जनजाति संरक्षण वृत्ति तय पुरुषों केवल बच्चों के बारे में परवाह है, और जनजाति कि अपने सदस्यों के बहुमत से अलग है के अन्य सदस्यों, लोग विरोध कर रहीं थीं।
क्या पर मानव विकास की अवस्था , सहिष्णुता की धारणा? जैसे ही जनजातियों बंटवारे के आधार पर एक शांति में प्रवेश करने, एक दूसरे के साथ संवाद स्थापित करने के लिए शुरू किया, लोगों को "अन्य" की खोज करने लगे। विद्वेष, वह है, एक विदेशी के डर से, अपरिचित, नए अज्ञात के लिए तैयार रास्ता देने के लिए शुरू किया। सब कुछ है जब एक जनजाति के लोगों के अन्य आवासों में बसे अधिक बार स्थितियों होने के लिए, अपने खुद के सीमा शुल्क का पालन करने, भाषा और परंपराओं के संरक्षण जारी करना शुरू किया। प्राचीन ग्रंथों में, हम पहले नैतिक मांगों और सहिष्णुता के लिए कॉल को पूरा। उदाहरण के लिए, बाइबल (Iskh. 22: 21, Lev. 19: 33) स्पष्ट मार्गदर्शन सहिष्णु होने के लिए देता है, और एक ही समय में इस तरह के एक सहिष्णु व्यवहार के लिए कारणों का पता चलता हैः विदेशी अन्धेर नहीं है, के लिए आप भी मिस्र में अजनबियों को अजनबियों थे।
यहाँ हम विदेशियों के प्रति सहिष्णुता देखते हैं, वह है, अन्य भाषाओं और अन्य संस्कृतियों के वक्ताओं। लेकिन सहिष्णुता की आधुनिक अवधारणा प्राचीन काल के दिनों में की तुलना में काफी व्यापक है। इसके लिए सहिष्णुता का क्या मतलब है आधुनिक आदमी? इस शब्द का अलग व्यवहार, जीवन शैली, व्यवहार, धर्म की सहिष्णुता का मतलब है। लेकिन शब्द में "धैर्य" पहले से ही हम सहन करने की है क्या से कुछ, "दुख" दूर करने के लिए शामिल किया गया है। यह - traybolichesky निशान जब हम जीवन और सोच के हमारे रास्ते से अलग पसंद नहीं आया। हम अभी भी स्वीकार करने के लिए जब "अन्य" कहीं मौजूद दूर को तैयार हैं, लेकिन जब वे हमारे पास पड़ोसियों हो जाते हैं, लोगों को असहज महसूस करने लगते हैं।
वर्षों से यह अन्य जातियों, राष्ट्रों और जातीय समूहों के प्रतिनिधियों की ओर असहिष्णुता के कई घटनाओं किया गया है। यहूदी विरोधी भावना पहली और नहीं पिछले एक नहीं है। लेकिन क्या होगा अगर अपने देश के एक प्रतिनिधि, लोगों को अपनी भाषा है, जो, सिद्धांत रूप में, अपने लोगों से संबंधित के तथ्य पर, बहुमत से अलग नहीं किया जाना चाहिए शब्दों में, अचानक एक और विश्वास, जीवन का एक और तरीका, अन्य मूल्यों का चुनाव? में मध्य युग, जब अन्य लोगों को पहले से ही सहिष्णु के मानदंडों को अपनाया गया है व्यवहार, नजरिए यूरोपीय ईसाई धर्म की गहराई में धार्मिक असंतुष्टों की ओर अभी भी बर्बर था। यही कारण है कि सहिष्णुता, तेरहवें सदी में भी जाना जाता है जब Béziers के शहर के निवासियों ने धर्मयोद्धाओं सभी heretics जो इसे में रहते हैं देने के लिए आग्रह किया, लेकिन लोगों को है - हालांकि वे कैथोलिक के बहुमत में थे - ऐसा करने के लिए मना कर दिया। तब धर्मयोद्धाओं के लिए Beziers के सभी निवासियों को मार डाला "सहनशीलता का पाप। "
धार्मिक युद्ध के युग में यह निर्धारित करने के लिए सहिष्णुता है क्या विशेष रूप से तत्काल आवश्यकता बन गया है। यूरोपीय देशों "कैथोलिक", जहां जनसंख्या के अधिकांश कैथोलिक थे, और "प्रोटेस्टेंट", जहाँ कैथोलिक अल्पसंख्यक थे में विभाजित किया गया है। तो फिर धार्मिक सहिष्णुता के मानदंडों को अपनाया गया है, जो करने के लिए विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को अपने धर्म का अभ्यास करने के लिए स्वतंत्र थे अनुसार।
वॉल्टेयर क्या सहिष्णुता है के सबसे विशाल परिभाषा में से एक के अंतर्गत आता हैः "मैं गहराई से अपने विचार, सर के विरुद्ध हूँ, - वह अपने प्रतिद्वंद्वी को पत्र लिखा है - लेकिन मैं अपने जीवन देना आप उन्हें स्वतंत्र रूप से साझा करने का अवसर के लिए। " आधुनिक न्यायशास्त्र में सहिष्णुता के सिद्धांत केवल 1995 में तय किया गया है, जब यूनेस्को सहिष्णुता पर सिद्धांतों की घोषणा को अपनाया।
| मानवता में अपने विकास की प्रक्रिया आधुनिक समाज के लिए पशु मंच से एक लंबा सफर तय किया है। जानवरों के साम्राज्य का मुख्य आकर्षण, मनुष्य अपने अवचेतन खुद को जैसे लोगों , और उपस्थिति, व्यवहार और जीवन शैली में दिखाई अंतर के साथ लोगों की ओर दुश्मनी के साथ खुद को चारों ओर की इच्छा से विरासत में मिली है। का यह निशान लोग हैं, जो बहुमत से अलग - पशु मानव की स्थिति "सफेद कौवा" की असहिष्णुता को जन्म देता है। आदिम जनजातियों नहीं पता था, सहिष्णुता है क्याः जनजाति संरक्षण वृत्ति तय पुरुषों केवल बच्चों के बारे में परवाह है, और जनजाति कि अपने सदस्यों के बहुमत से अलग है के अन्य सदस्यों, लोग विरोध कर रहीं थीं। क्या पर मानव विकास की अवस्था , सहिष्णुता की धारणा? जैसे ही जनजातियों बंटवारे के आधार पर एक शांति में प्रवेश करने, एक दूसरे के साथ संवाद स्थापित करने के लिए शुरू किया, लोगों को "अन्य" की खोज करने लगे। विद्वेष, वह है, एक विदेशी के डर से, अपरिचित, नए अज्ञात के लिए तैयार रास्ता देने के लिए शुरू किया। सब कुछ है जब एक जनजाति के लोगों के अन्य आवासों में बसे अधिक बार स्थितियों होने के लिए, अपने खुद के सीमा शुल्क का पालन करने, भाषा और परंपराओं के संरक्षण जारी करना शुरू किया। प्राचीन ग्रंथों में, हम पहले नैतिक मांगों और सहिष्णुता के लिए कॉल को पूरा। उदाहरण के लिए, बाइबल स्पष्ट मार्गदर्शन सहिष्णु होने के लिए देता है, और एक ही समय में इस तरह के एक सहिष्णु व्यवहार के लिए कारणों का पता चलता हैः विदेशी अन्धेर नहीं है, के लिए आप भी मिस्र में अजनबियों को अजनबियों थे। यहाँ हम विदेशियों के प्रति सहिष्णुता देखते हैं, वह है, अन्य भाषाओं और अन्य संस्कृतियों के वक्ताओं। लेकिन सहिष्णुता की आधुनिक अवधारणा प्राचीन काल के दिनों में की तुलना में काफी व्यापक है। इसके लिए सहिष्णुता का क्या मतलब है आधुनिक आदमी? इस शब्द का अलग व्यवहार, जीवन शैली, व्यवहार, धर्म की सहिष्णुता का मतलब है। लेकिन शब्द में "धैर्य" पहले से ही हम सहन करने की है क्या से कुछ, "दुख" दूर करने के लिए शामिल किया गया है। यह - traybolichesky निशान जब हम जीवन और सोच के हमारे रास्ते से अलग पसंद नहीं आया। हम अभी भी स्वीकार करने के लिए जब "अन्य" कहीं मौजूद दूर को तैयार हैं, लेकिन जब वे हमारे पास पड़ोसियों हो जाते हैं, लोगों को असहज महसूस करने लगते हैं। वर्षों से यह अन्य जातियों, राष्ट्रों और जातीय समूहों के प्रतिनिधियों की ओर असहिष्णुता के कई घटनाओं किया गया है। यहूदी विरोधी भावना पहली और नहीं पिछले एक नहीं है। लेकिन क्या होगा अगर अपने देश के एक प्रतिनिधि, लोगों को अपनी भाषा है, जो, सिद्धांत रूप में, अपने लोगों से संबंधित के तथ्य पर, बहुमत से अलग नहीं किया जाना चाहिए शब्दों में, अचानक एक और विश्वास, जीवन का एक और तरीका, अन्य मूल्यों का चुनाव? में मध्य युग, जब अन्य लोगों को पहले से ही सहिष्णु के मानदंडों को अपनाया गया है व्यवहार, नजरिए यूरोपीय ईसाई धर्म की गहराई में धार्मिक असंतुष्टों की ओर अभी भी बर्बर था। यही कारण है कि सहिष्णुता, तेरहवें सदी में भी जाना जाता है जब Béziers के शहर के निवासियों ने धर्मयोद्धाओं सभी heretics जो इसे में रहते हैं देने के लिए आग्रह किया, लेकिन लोगों को है - हालांकि वे कैथोलिक के बहुमत में थे - ऐसा करने के लिए मना कर दिया। तब धर्मयोद्धाओं के लिए Beziers के सभी निवासियों को मार डाला "सहनशीलता का पाप। " धार्मिक युद्ध के युग में यह निर्धारित करने के लिए सहिष्णुता है क्या विशेष रूप से तत्काल आवश्यकता बन गया है। यूरोपीय देशों "कैथोलिक", जहां जनसंख्या के अधिकांश कैथोलिक थे, और "प्रोटेस्टेंट", जहाँ कैथोलिक अल्पसंख्यक थे में विभाजित किया गया है। तो फिर धार्मिक सहिष्णुता के मानदंडों को अपनाया गया है, जो करने के लिए विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को अपने धर्म का अभ्यास करने के लिए स्वतंत्र थे अनुसार। वॉल्टेयर क्या सहिष्णुता है के सबसे विशाल परिभाषा में से एक के अंतर्गत आता हैः "मैं गहराई से अपने विचार, सर के विरुद्ध हूँ, - वह अपने प्रतिद्वंद्वी को पत्र लिखा है - लेकिन मैं अपने जीवन देना आप उन्हें स्वतंत्र रूप से साझा करने का अवसर के लिए। " आधुनिक न्यायशास्त्र में सहिष्णुता के सिद्धांत केवल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में तय किया गया है, जब यूनेस्को सहिष्णुता पर सिद्धांतों की घोषणा को अपनाया। |
एकादशी को हिंदू धर्म में बेहत ही महत्वपूर्ण मानते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान विष्णु की पूजा एकादशी के दिन करने और व्रत रखने से सुख और शांति घर में आती है।
हर एकादशी का अपना एक महत्व हिंदू धर्म में होता है। लेकिन सफला एकादशी जो पौष माह में आती है उस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और व्रत करने से धन लाभ और स्वास्थ्य अच्छा होता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि श्रीहरि की कृपा की संपन्नता सफला एकादशी के दिन भक्तों को प्राप्त होती है। अगर मनुष्य इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखते हैं तो ऐसा करने से खुशहाली और सफलता जीवन में आती है। 22 दिसंबर को इस साल सफला एकादशी है।
श्री हरि की पूजा और मंत्र का जाप एकादशी के दिन सुबह उठकर विधि पूर्वक करें।
श्रीहरि की पूजा करने के समय सफेद चंदन का टीका सबसे पहले माथे पर लगाएं।
फूल, मौसमी फल और पंचामृत श्रीहरि को अर्पित करें और साथ में हाथ जोड़ कर उनका आशीर्वाद लें।
ऊॅं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप 108 बार करें।
श्रीहरि की सुबह इस दिन पूजा करने के बाद शाम को भी उनके सामने दीपक जलाएं।
एकादशी के दिन कुछ चीजें श्रीहरि को अपनी सुरक्षा और संपन्नता के लिए अर्पित करनी चाहिए।
श्रीहरि को इस दिन रेशम का पीला धागा या वस्त्र अपने कैरियर में सफलता पाने के लिए जरूर करें।
पीला धागा आपने श्रीहरि को अर्पित किया है तो पूजा के बाद अपने दाहिने हाथ में इसे बांध लें।
अगर श्रीहरि को धागा महिलाएं अर्पित करती हैं तो वह पूजा के बाद उसे अपने बाएं हाथ में बांधे।
पौराणिक मान्यताओं में बताया गया है कि राजा महिष्मान के चार पुत्र थे। राजा के बड़े पुत्र का नाम लुम्पक महापापी था। जब राजा को अपने इस पुत्र के कुकर्मों का पता चला तो अपने राज्य से लुम्पक को राजा ने निकाल दिया। लेकिन अपने पिता की इस बात को लुम्पक समझ नहीं पाया और उसने चोरी करने की अपने पिता की नगरी में ठान ली। राज्य से वह बाहर दिन में रहता था और रात में आकर राज्य में चारियां करता था।
बता दें कि धीरे-धीरे लुम्पक के पाप बढ़ते गए साथ ही लोगों को भी उसने नुकसान पहुंचाना शुरु कर दिया। वन में वह एक पीपल के पेड़ के नीचे लुम्पक रहता था। ठंड से वह पौष माह की दशम तिथि को बेहोश हो गया। जब लुम्पक को अगले दिन होश आया तो उसके अंदर इतनी कमजोरी थी कि वह कुछ खा नहीं पाया था और जो फल उसे मिले थे उसने पीपल की जड़ में रख दिए थे।
इस तरह से एकादशी का व्रत उससे अनजान में ही पूरा हो गया। भगवान एकादशी के व्रत से प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के सारे पाप को माफ कर देते हैं। जब लुम्पक को अपनी गलती का एहसास हो जाता है तो उसके पिता उसे दोबारा से अपना लेते हैं।
| एकादशी को हिंदू धर्म में बेहत ही महत्वपूर्ण मानते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान विष्णु की पूजा एकादशी के दिन करने और व्रत रखने से सुख और शांति घर में आती है। हर एकादशी का अपना एक महत्व हिंदू धर्म में होता है। लेकिन सफला एकादशी जो पौष माह में आती है उस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और व्रत करने से धन लाभ और स्वास्थ्य अच्छा होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि श्रीहरि की कृपा की संपन्नता सफला एकादशी के दिन भक्तों को प्राप्त होती है। अगर मनुष्य इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखते हैं तो ऐसा करने से खुशहाली और सफलता जीवन में आती है। बाईस दिसंबर को इस साल सफला एकादशी है। श्री हरि की पूजा और मंत्र का जाप एकादशी के दिन सुबह उठकर विधि पूर्वक करें। श्रीहरि की पूजा करने के समय सफेद चंदन का टीका सबसे पहले माथे पर लगाएं। फूल, मौसमी फल और पंचामृत श्रीहरि को अर्पित करें और साथ में हाथ जोड़ कर उनका आशीर्वाद लें। ऊॅं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप एक सौ आठ बार करें। श्रीहरि की सुबह इस दिन पूजा करने के बाद शाम को भी उनके सामने दीपक जलाएं। एकादशी के दिन कुछ चीजें श्रीहरि को अपनी सुरक्षा और संपन्नता के लिए अर्पित करनी चाहिए। श्रीहरि को इस दिन रेशम का पीला धागा या वस्त्र अपने कैरियर में सफलता पाने के लिए जरूर करें। पीला धागा आपने श्रीहरि को अर्पित किया है तो पूजा के बाद अपने दाहिने हाथ में इसे बांध लें। अगर श्रीहरि को धागा महिलाएं अर्पित करती हैं तो वह पूजा के बाद उसे अपने बाएं हाथ में बांधे। पौराणिक मान्यताओं में बताया गया है कि राजा महिष्मान के चार पुत्र थे। राजा के बड़े पुत्र का नाम लुम्पक महापापी था। जब राजा को अपने इस पुत्र के कुकर्मों का पता चला तो अपने राज्य से लुम्पक को राजा ने निकाल दिया। लेकिन अपने पिता की इस बात को लुम्पक समझ नहीं पाया और उसने चोरी करने की अपने पिता की नगरी में ठान ली। राज्य से वह बाहर दिन में रहता था और रात में आकर राज्य में चारियां करता था। बता दें कि धीरे-धीरे लुम्पक के पाप बढ़ते गए साथ ही लोगों को भी उसने नुकसान पहुंचाना शुरु कर दिया। वन में वह एक पीपल के पेड़ के नीचे लुम्पक रहता था। ठंड से वह पौष माह की दशम तिथि को बेहोश हो गया। जब लुम्पक को अगले दिन होश आया तो उसके अंदर इतनी कमजोरी थी कि वह कुछ खा नहीं पाया था और जो फल उसे मिले थे उसने पीपल की जड़ में रख दिए थे। इस तरह से एकादशी का व्रत उससे अनजान में ही पूरा हो गया। भगवान एकादशी के व्रत से प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के सारे पाप को माफ कर देते हैं। जब लुम्पक को अपनी गलती का एहसास हो जाता है तो उसके पिता उसे दोबारा से अपना लेते हैं। |
मंदसौर की नाहरगढ़ पुलिस ने दो आरोपियों को 8 किलो अवैध अफीम के साथ गिरफ्तार किया है। अवैध मादक पदार्थ अफीम की कीमत करीब 14 लाख रुपए बताई जा रही है। थाना नाहरगढ़ पुलिस ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए नापाखेड़ा बिल्लोद रोड पर मिंडारा फंटे के पास नाकाबंदी कर एक बिना नंबर की बाइक पर सवार शांतिलाल पिता भेरूलाल पाटीदार (35) और सुंदरलाल पिता बापुलाल पाटीदार (48), से कुल 8 किलो 800 ग्राम अवैध मादक पदार्थ जब्त किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार अवैध मादक पदार्थ अफीम के साथ दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर बाइक को जब्त किया है। पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि उक्त अवैध मादक पदार्थ वे नीमच जिले के मानसा के बनी गांव निवासी अरविन्द पाटीदार से लेकर आए थे और राजस्थान के किसी तस्कर को देने जाना था।
मामले में अरविन्द पाटीदार एवं बाइक मलिक लाला पिता रूपा मीणा निवासी साकतली, प्रतापगढ़ को भी आरोपी बनाया गया है। नाहरगढ़ थाना पुलिस ने मामले में एनडीपीएस एक्ट 8/18, 25, 29 की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। मामले में अवैध अफीम मुहैया करवाने वाला अरविंद पाटीदार और बाइक मालिक लाला मीणा फरार है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है।
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| मंदसौर की नाहरगढ़ पुलिस ने दो आरोपियों को आठ किलो अवैध अफीम के साथ गिरफ्तार किया है। अवैध मादक पदार्थ अफीम की कीमत करीब चौदह लाख रुपए बताई जा रही है। थाना नाहरगढ़ पुलिस ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए नापाखेड़ा बिल्लोद रोड पर मिंडारा फंटे के पास नाकाबंदी कर एक बिना नंबर की बाइक पर सवार शांतिलाल पिता भेरूलाल पाटीदार और सुंदरलाल पिता बापुलाल पाटीदार , से कुल आठ किलो आठ सौ ग्राम अवैध मादक पदार्थ जब्त किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार अवैध मादक पदार्थ अफीम के साथ दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर बाइक को जब्त किया है। पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि उक्त अवैध मादक पदार्थ वे नीमच जिले के मानसा के बनी गांव निवासी अरविन्द पाटीदार से लेकर आए थे और राजस्थान के किसी तस्कर को देने जाना था। मामले में अरविन्द पाटीदार एवं बाइक मलिक लाला पिता रूपा मीणा निवासी साकतली, प्रतापगढ़ को भी आरोपी बनाया गया है। नाहरगढ़ थाना पुलिस ने मामले में एनडीपीएस एक्ट आठ/अट्ठारह, पच्चीस, उनतीस की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। मामले में अवैध अफीम मुहैया करवाने वाला अरविंद पाटीदार और बाइक मालिक लाला मीणा फरार है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
एमएस धोनी ने शनिवार शाम को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने कैप्शन में लिखा, "धन्यवाद. आपके प्यार और समर्थन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. 19:29 बजे से मैं रिटायर्ड हूं. "
ऐसे में धोनी को विदाई देते हुए अमूल ने वीडियो शेयर कर लिखा, "हम उनके जीवन की अगली पारी के लिए एमएस धोनी @msdhoni को शुभकामनाएं देते हैं! " बता दें कि यह वीडियो बेहद इमोशनल करने वाला है.
इसके अलावा एक डूडल शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है ,"अमूल टॉपिकलः एमएस धोनी हुए इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर. " साथ ही डूडल में लिखा है, "ओ माही, ओ राही. . . तू कहीं न रुका हार के! "
धोने के रिटायर होने से उनके फैंस ही नहीं बल्कि बॉलीवुड सेलेब्स में भी बेहद इमोशनल हैं.
(Source: Instagram/ Twitter)
| एमएस धोनी ने शनिवार शाम को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने कैप्शन में लिखा, "धन्यवाद. आपके प्यार और समर्थन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. उन्नीस:उनतीस बजे से मैं रिटायर्ड हूं. " ऐसे में धोनी को विदाई देते हुए अमूल ने वीडियो शेयर कर लिखा, "हम उनके जीवन की अगली पारी के लिए एमएस धोनी @msdhoni को शुभकामनाएं देते हैं! " बता दें कि यह वीडियो बेहद इमोशनल करने वाला है. इसके अलावा एक डूडल शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है ,"अमूल टॉपिकलः एमएस धोनी हुए इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर. " साथ ही डूडल में लिखा है, "ओ माही, ओ राही. . . तू कहीं न रुका हार के! " धोने के रिटायर होने से उनके फैंस ही नहीं बल्कि बॉलीवुड सेलेब्स में भी बेहद इमोशनल हैं. |
बरकट्ठा। प्रखंड क्षेत्र के ग्राम गंगपाचो स्थित प्लस टू तक मान्यता प्राप्त डिवाइन पब्लिक स्कूल में जन्माष्टमी पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर नन्हें मुन्ने बच्चों ने राधा कृष्ण का रूप धरकर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत निदेशक आईपी भारती, प्राचार्य भानु प्रताप सिंह तथा अन्य शिक्षिकाओं के द्वारा बालरूप श्री कृष्ण की पूजा अर्चना के साथ किया गया। निदेशक ने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन से समरसता और मातृ प्रेम की सीख लेनी चाहिए। प्रधानाचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण के समान ही हमें कठिन परिस्थिति आने पर अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए. कार्यक्रम में बच्चों द्वारा श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित नृत्य भी किया गया।
नृत्य नाटिका " बड़ा नटखट है मेरा गोपाल" सभी का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण राधा रानी के रूप में श्रेया राज, रमय रंजन, कृतिका कुमारी ने जीवंत झांकी प्रस्तुत किया। नृत्य में स्वेच्छा राय, रोनित कुमार, कृष्णा पंडित, सिद्धार्थ पंडित आदि का नृत्य सराहनीय रहा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रीति प्रभा कुमारी, काशीनाथ महतो, पुनम कुमारी, संजय कुमार यादव, मनोहर सिंह, कुलदीप पासवान, सुलेखा मोदी, सोनाली कुमारी, रामनन्दन कुमार, मानती लकड़ा, अलीस्बा टुडू, राधा कुमारी, अंजू मरांडी आदि का योगदान रहा।
| बरकट्ठा। प्रखंड क्षेत्र के ग्राम गंगपाचो स्थित प्लस टू तक मान्यता प्राप्त डिवाइन पब्लिक स्कूल में जन्माष्टमी पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नन्हें मुन्ने बच्चों ने राधा कृष्ण का रूप धरकर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत निदेशक आईपी भारती, प्राचार्य भानु प्रताप सिंह तथा अन्य शिक्षिकाओं के द्वारा बालरूप श्री कृष्ण की पूजा अर्चना के साथ किया गया। निदेशक ने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन से समरसता और मातृ प्रेम की सीख लेनी चाहिए। प्रधानाचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण के समान ही हमें कठिन परिस्थिति आने पर अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए. कार्यक्रम में बच्चों द्वारा श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित नृत्य भी किया गया। नृत्य नाटिका " बड़ा नटखट है मेरा गोपाल" सभी का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण राधा रानी के रूप में श्रेया राज, रमय रंजन, कृतिका कुमारी ने जीवंत झांकी प्रस्तुत किया। नृत्य में स्वेच्छा राय, रोनित कुमार, कृष्णा पंडित, सिद्धार्थ पंडित आदि का नृत्य सराहनीय रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रीति प्रभा कुमारी, काशीनाथ महतो, पुनम कुमारी, संजय कुमार यादव, मनोहर सिंह, कुलदीप पासवान, सुलेखा मोदी, सोनाली कुमारी, रामनन्दन कुमार, मानती लकड़ा, अलीस्बा टुडू, राधा कुमारी, अंजू मरांडी आदि का योगदान रहा। |
बेंगलुरुः कर्नाटक में कोरोना का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है, लगातार मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रह हैं. वहीं, गुरुवार को कर्नाटक में कोरोना के एक दिन में सबसे ज्यादा 9,386 केस सामने आए जिससे कुल मरीजों की संख्या 3. 09 लाख तक पहुंच गई है. स्वास्थ्य डिपार्टमेंट ने यह सूचना दी हैं.
डिपार्टमेंट के मुताबिक एक दिन में प्रदेश में 7,866 लोग ठीक होकर हॉस्पिटलों से घर जा चुके हैं. प्रदेश में गुरुवार को संक्रमण से 141 लोगों की मृत्यु के बाद मृतक संख्या 5,232 हो गई है. गुरुवार को सामने आए 9,386 नए केसों में से 3,357 केस बेंगलुरु सिटी से ही थे. स्वास्थ्य डिपार्टमेंट के मुताबिक मृतकों में ज्यादातर लोगों को तो गंभीर श्वसन संबंधी संक्रमण (एसएआरआई) था या इन्फ्लुएंजा जैसी कोई बीमारी थी.
बता दें की भारत में कोरोना के केस 33. 87 लाख की संख्या को पार कर चुके हैं. शुक्रवार को एक बार फिर कोरोना वायरस के केसों में सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला हैं. शुक्रवार को पहली बार एक दिन में 77,266 नए केस सामने आए हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या साढ़े 25 लाख से अधिक हो गई है और पड़ताल में तेजी आई है. शुक्रवार प्रातः अद्यतन किए गए आंकड़े के मुताबिक, बीते 24 घंटे में 1,057 लोगों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 61,529 हो गई है. भारत में कोरोना के केस बढ़कर 33,87,501 हो गए हैं, जिनमें से 7,42,023 लोगों का इलाज चल रहा है और 25,83,948 लोग इलाज के बाद इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं. कोरोना के कुल केसों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.
| बेंगलुरुः कर्नाटक में कोरोना का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है, लगातार मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रह हैं. वहीं, गुरुवार को कर्नाटक में कोरोना के एक दिन में सबसे ज्यादा नौ,तीन सौ छियासी केस सामने आए जिससे कुल मरीजों की संख्या तीन. नौ लाख तक पहुंच गई है. स्वास्थ्य डिपार्टमेंट ने यह सूचना दी हैं. डिपार्टमेंट के मुताबिक एक दिन में प्रदेश में सात,आठ सौ छयासठ लोग ठीक होकर हॉस्पिटलों से घर जा चुके हैं. प्रदेश में गुरुवार को संक्रमण से एक सौ इकतालीस लोगों की मृत्यु के बाद मृतक संख्या पाँच,दो सौ बत्तीस हो गई है. गुरुवार को सामने आए नौ,तीन सौ छियासी नए केसों में से तीन,तीन सौ सत्तावन केस बेंगलुरु सिटी से ही थे. स्वास्थ्य डिपार्टमेंट के मुताबिक मृतकों में ज्यादातर लोगों को तो गंभीर श्वसन संबंधी संक्रमण था या इन्फ्लुएंजा जैसी कोई बीमारी थी. बता दें की भारत में कोरोना के केस तैंतीस. सत्तासी लाख की संख्या को पार कर चुके हैं. शुक्रवार को एक बार फिर कोरोना वायरस के केसों में सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला हैं. शुक्रवार को पहली बार एक दिन में सतहत्तर,दो सौ छयासठ नए केस सामने आए हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या साढ़े पच्चीस लाख से अधिक हो गई है और पड़ताल में तेजी आई है. शुक्रवार प्रातः अद्यतन किए गए आंकड़े के मुताबिक, बीते चौबीस घंटाटे में एक,सत्तावन लोगों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या बढ़कर इकसठ,पाँच सौ उनतीस हो गई है. भारत में कोरोना के केस बढ़कर तैंतीस,सत्तासी,पाँच सौ एक हो गए हैं, जिनमें से सात,बयालीस,तेईस लोगों का इलाज चल रहा है और पच्चीस,तिरासी,नौ सौ अड़तालीस लोग इलाज के बाद इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं. कोरोना के कुल केसों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. |
भारत के नागरिक अब कोरोना वायरस जुड़ी जानकारी Google Search, Google Maps और Google Voice Assistants के जरिए ले सकते हैं। Google ने ऐलान किया है कि ये Covid-19 वैक्सीन से जुड़ी जानकारी जैसे वैक्सीन उपलब्धता, कीमत को Google Search और Google Maps के जरिए दिखाने जा रहा है।
इसके लिए यूजर को बस Covid vaccine near me गूगल सर्च करना है। इसके बाद ये पास के हॉस्पिटल्स की लिस्ट दिखाएगा जहां पर Covid-19 वैक्सीन स्लॉट उपलब्ध है। आप इसमें से पास के स्लॉट को सेलेक्ट करके Book appointment पर टैप करके कोविड फर्स्ट या सेकेंड डोज ले सकते हैं।
Google Search के डायरेक्टर Hema Budaraju ने एक स्टेटमेंट में बताया कि कोविड से बचने का एकमात्र उपाय अभी वैक्सीन ही है। इसके लिए पास के वैक्सीनेशन सेंटर, वैक्सीन उपलब्धता, कीमत को लेकर जानकारी होनी जरूरी है।
यूजर्स कोविड-19 से जुड़ी जानकारी पास के एरिया के अलावा किसी स्पेसिफिक जगह के बारे में भी ले सकते हैं। ये जानकारी Google Search, Google Maps और Google Voice Assistants के जरिए ली जा सकती है। इस पर इंग्लिश के अलावा आठ भारतीय भाषाओं में जानकारी हासिल की जा सकती है।
भारत के नागरिक अब कोरोना वायरस जुड़ी जानकारी Google Search, Google Maps और Google Voice Assistants के जरिए ले सकते हैं। Google ने ऐलान किया है कि ये Covid-19 वैक्सीन से जुड़ी जानकारी जैसे वैक्सीन उपलब्धता, कीमत को Google Search और Google Maps के जरिए दिखाने जा रहा है।
| भारत के नागरिक अब कोरोना वायरस जुड़ी जानकारी Google Search, Google Maps और Google Voice Assistants के जरिए ले सकते हैं। Google ने ऐलान किया है कि ये Covid-उन्नीस वैक्सीन से जुड़ी जानकारी जैसे वैक्सीन उपलब्धता, कीमत को Google Search और Google Maps के जरिए दिखाने जा रहा है। इसके लिए यूजर को बस Covid vaccine near me गूगल सर्च करना है। इसके बाद ये पास के हॉस्पिटल्स की लिस्ट दिखाएगा जहां पर Covid-उन्नीस वैक्सीन स्लॉट उपलब्ध है। आप इसमें से पास के स्लॉट को सेलेक्ट करके Book appointment पर टैप करके कोविड फर्स्ट या सेकेंड डोज ले सकते हैं। Google Search के डायरेक्टर Hema Budaraju ने एक स्टेटमेंट में बताया कि कोविड से बचने का एकमात्र उपाय अभी वैक्सीन ही है। इसके लिए पास के वैक्सीनेशन सेंटर, वैक्सीन उपलब्धता, कीमत को लेकर जानकारी होनी जरूरी है। यूजर्स कोविड-उन्नीस से जुड़ी जानकारी पास के एरिया के अलावा किसी स्पेसिफिक जगह के बारे में भी ले सकते हैं। ये जानकारी Google Search, Google Maps और Google Voice Assistants के जरिए ली जा सकती है। इस पर इंग्लिश के अलावा आठ भारतीय भाषाओं में जानकारी हासिल की जा सकती है। भारत के नागरिक अब कोरोना वायरस जुड़ी जानकारी Google Search, Google Maps और Google Voice Assistants के जरिए ले सकते हैं। Google ने ऐलान किया है कि ये Covid-उन्नीस वैक्सीन से जुड़ी जानकारी जैसे वैक्सीन उपलब्धता, कीमत को Google Search और Google Maps के जरिए दिखाने जा रहा है। |
जीएम फैबियानो कारुआना में राउंड तीन का एकमात्र विजेता था सुपरबेट क्लासिक रोमानिया 2023जीएम को ध्वस्त करना मैक्सिम वाचियर-लाग्रेवरैडिकल 3. h4 के साथ 'एस किंग्स इंडियन डिफेन्स' - शास्त्रीय उद्घाटन सिद्धांतों को हवा में उछालना। वह जीएम में शामिल हो गया इयान नेपोमनियात्चीजीएम रिचर्ड रैपर्टऔर जीएम वेस्ले सो लीड के चार-तरफ़ा हिस्से में।
ग्रैंड शतरंज टूर का पहला चरण मंगलवार, 9 मई को सुबह 5:00 बजे प्रशांत/14:00 सीईएसटी से शुरू होकर चौथे दौर के साथ जारी रहेगा।
सभी की निगाहें नेपोमनियात्ची बनाम डिंग पर थीं, जो उनके रोमांचक, कड़े मुकाबले वाले विश्व चैंपियनशिप मैच के तुरंत बाद फिर से एक-दूसरे का सामना कर रहे थे। डिंग की हालिया सफलता के बावजूद, नेपोमनियाचची के पास अभी भी छह जीत बनाम पांच हार के साथ 16 ड्रॉ के साथ अपने शास्त्रीय सिर-से-सिर में थोड़ी सी बढ़त है।
प्रतिशोध की उनकी उम्मीदों से परे, परिणाम में नेपोमनियाचची की एक और व्यक्तिगत हिस्सेदारी थीः खेल में प्रवेश करते हुए उनकी लाइव रेटिंग 2797―इंच दूर थी, जो 2800 से अधिक दुनिया के एकमात्र अन्य खिलाड़ी के रूप में कार्लसन में शामिल होने से थी। अपनी असफलताओं के बावजूद, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सर्वश्रेष्ठ बनने की अपनी आकांक्षा को नहीं छोड़ेंगे।
क्वीन्स गैम्बिट डिक्लाइन्ड में (अस्ताना में नेपोमनियाचची की 1. e4 की प्रमुख पसंद से एक आश्चर्यजनक स्विच), विश्व चैंपियन ने अप्रत्याशित 6...Bf5 खेला, जो मूल रूप से उनके मैच के लिए तैयार किया गया था। F6 पर एक प्रारंभिक रानी व्यापार ने डिंग को दोगुने, पृथक f-प्यादों के साथ छोड़ दिया। नेपोमनियाचची ने डिंग की स्थिति के कमजोर बिंदुओं पर दबाव डाला, लेकिन डिंग ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बचाव को संतुलित करते हुए संसाधनपूर्ण तरीके से जवाब दिया। खेल शुरू से अंत तक एक आकर्षक लड़ाई थी जो राजा बनाम राजा के साथ समाप्त हुई।
जीएम रिचर्ड रैपर्ट तैयार जीएम अलिर्ज़ा फ़िरोज़ादुर्लभ 8...Bf5 के साथ आसानी से पेट्रॉफ़ में व्हाइट के लाभ को निष्प्रभावी कर दिया।
हालांकि फिरोजा ने विपरीत दिशा में कास्ट किया और किंगसाइड पर आक्रामक इरादों के साथ अपने एच-प्यादे को आगे बढ़ाया, बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान हुआ जब सभी बदमाशों को खुली ई-फाइल पर कारोबार किया गया और रैपोर्ट की रानी ने व्हाइट की क्वीनसाइड में प्रवेश किया। खिलाड़ी एक समान रंग के बिशप के अंत तक पहुंचे और जल्द ही आकर्षित हुए।
वह सब कुछ खेलता है, इसलिए उसके खिलाफ तैयारी करना नामुमकिन है। वह सहीं मे अद्भुत है।
कारुआना और वाचिएर-लाग्रेव दो खिलाड़ी हैं जो एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं और उनके बीच शास्त्रीय खेलों का एक लंबा इतिहास रहा है। कारुआना ने 25 ड्रॉ के साथ 9-5 से जीत को लगभग दोगुना कर दिया है।
कारूआना ने उद्यमी 3. h4 बनाम वाचियर-लाग्रेव के किंग्स इंडियन डिफेंस को चुना-बिना किसी विकसित गोटियों के अपने फ्लैंक मोहरे को आगे बढ़ाया। टीकाकार जीएम यासिर सेरावान इस दृष्टिकोण को विस्मय के साथ देखते हैंः
"जब मैंने शतरंज खेलना शुरू किया, तो मेरी शुरुआती चाल h4 और Rh3 और a4 और Ra3 थी। जब मेरे विरोधियों ने मेरे बदमाशों पर कब्जा करना शुरू किया, आप जानते हैं, मुझे अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
बाद में, जब मैं 1200 का खिलाड़ी बन गया, तो h4 चाल की पूरी तरह से निंदा की गई। आप बस h4 नहीं खेल सके।
सौभाग्य से, इस तरह के खेलों का मतलब यह नहीं है कि अन्य सभी शतरंज खिलाड़ियों को वह सब कुछ बाहर फेंक देना चाहिए जो उन्होंने सोचा था कि वे खेल के बारे में जानते हैं और आत्मविश्वास के साथ उद्घाटन में अपने राजा के प्यादों को आगे बढ़ाना शुरू करते हैं।
मेरी अच्छाई, यह एक शुरुआती चाल है। यह नौसिखियों की चाल क्यों नहीं है?
बहुत शीर्ष खिलाड़ी नए विचारों के लिए बॉक्स के बाहर खोज करते हैं क्योंकि उनके सभी विरोधी मानक विकासशील चालों और योजनाओं के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार हैं। दोनों पक्षों को इस बात की इतनी मजबूत समझ है कि "बॉक्स के अंदर" खेलने का क्या मतलब है - एक उद्घाटन में सभी मूल सिद्धांत और मुख्य योजनाएँ - कि वे जानते हैं कि वे कहाँ कुछ असामान्य परीक्षण कर सकते हैं।
यह रचनात्मकता का आधार हैः एक नए विचार के साथ समझ की एक मजबूत नींव पर निर्माण करना।
कारुआना के अपरंपरागत दृष्टिकोण ने भुगतान किया। अपने प्रतिद्वंद्वी के बोल्ड किंगसाइड एडवांस से प्रेरित होकर, वाचियर-लाग्रेव ने क्वीन्ससाइड पर बेनको-शैली के प्यादा बलिदान के साथ मुकाबला किया और फिर अपने शूरवीरों को व्हाइट के दिल में छलांग लगाने के लिए अपने ई- और डी-प्यादे दोनों के केंद्र का आधार छोड़ दिया। पद। अमेरिकी ग्रैंडमास्टर ने उत्सुकता से सभी सामग्री को हटा दिया, अपने प्रतिद्वंद्वी के साहसी शूरवीरों को चकमा दिया, और डी5 और ई5 पर प्यादों के साथ एक अजेय केंद्र बनाया, जिसके कारण वाचियर-लाग्रेव ने 23 चाल पर सफेद झंडा फहराया।
जीएम द्वारा विश्लेषण किए गए विचारों की यह गतिशील लड़ाई हमारा गेम ऑफ द डे है राफेल लीताओ.
पहले टाई में शामिल होने के साथ, इस जीत ने कारुआना को लाइव रैंकिंग में साथी प्रतियोगी जीएम से एक स्थान आगे कर दिया। अनीश गिरी.
रोसोलिमो सिसिलियन में, जीएम जन-क्रिज़्सटॉफ़ डूडा जीएम बनाम स्पष्ट बढ़त हासिल की बोगडान-डैनियल डीक. एक चतुर सामरिक विचार द्वारा समर्थित, डूडा ने अपने प्रतिद्वंद्वी को एक अलग डी-प्यादा लेने के लिए मजबूर किया। क्या आप व्हाइट की प्रतिक्रिया को देख सकते हैं यदि डीक ने अपनी रानी के बजाय मोहरे के साथ ई 4 पर कब्जा करके अलग-थलग प्यादे से परहेज किया हो?
मिडलगेम के माध्यम से अंत में, डूडा ने जमे हुए पृथक मोहरे को अपने अधिक आराम से रखे हुए टुकड़ों के साथ दबाया। आखिरकार, डीक ने अपने बदमाश को दूसरी रैंक पर सक्रिय करने के लिए मोहरे को छोड़ दिया। एक अतिरिक्त मोहरे के साथ समय पर नियंत्रण करते हुए, डूडा ने क्षितिज पर जीत का मौका देखा और उस क्षण 41 की चाल में, उसने एक गलत चाल चली जिससे उसका फायदा हाथ से निकल गया। निष्क्रिय 41. Ndc1 के साथ b3 पर अपने अतिरिक्त मोहरे का बचाव करने के लिए, व्हाइट ने काले बदमाश को अपनी क्षमता को कम करते हुए, राहगीर के पीछे जाने दिया।
जीएम वेस्ले सो बनाम जीएम अनीश गिरी बर्लिन रक्षा में एक सूक्ष्म और संतुलित द्वंद्व था जो 56 चालों के बाद समाप्त होने वाले विपरीत रंग के बिशप में समाप्त हुआ।
रोमांचक मुकाबले राउंड 4 में आगे हैं जब सभी नेता आमने-सामने होंगे। कारुआना को लगातार दूसरी बार पहली चाल का फायदा होगा, इस बार बनाम नेपोमनियाचची। इसके अलावा, रैपॉर्ट के पास अपनी रचनात्मकता को सफेद मोहरों बनाम सो के साथ बहने देने का मौका है।
हालांकि दो सबसे कम उम्र के प्रतियोगियों, फ़िरोज़ा और डीक ने एक कठिन शुरुआत की है, उनका आगामी मैचअप एक को जहाज को सही करने का अवसर देता है जबकि दूसरे को समुद्र में और भी खो देता है।
पिछला कवरेजः
| जीएम फैबियानो कारुआना में राउंड तीन का एकमात्र विजेता था सुपरबेट क्लासिक रोमानिया दो हज़ार तेईसजीएम को ध्वस्त करना मैक्सिम वाचियर-लाग्रेवरैडिकल तीन. hचार के साथ 'एस किंग्स इंडियन डिफेन्स' - शास्त्रीय उद्घाटन सिद्धांतों को हवा में उछालना। वह जीएम में शामिल हो गया इयान नेपोमनियात्चीजीएम रिचर्ड रैपर्टऔर जीएम वेस्ले सो लीड के चार-तरफ़ा हिस्से में। ग्रैंड शतरंज टूर का पहला चरण मंगलवार, नौ मई को सुबह पाँच:शून्य बजे प्रशांत/चौदह:शून्य सीईएसटी से शुरू होकर चौथे दौर के साथ जारी रहेगा। सभी की निगाहें नेपोमनियात्ची बनाम डिंग पर थीं, जो उनके रोमांचक, कड़े मुकाबले वाले विश्व चैंपियनशिप मैच के तुरंत बाद फिर से एक-दूसरे का सामना कर रहे थे। डिंग की हालिया सफलता के बावजूद, नेपोमनियाचची के पास अभी भी छह जीत बनाम पांच हार के साथ सोलह ड्रॉ के साथ अपने शास्त्रीय सिर-से-सिर में थोड़ी सी बढ़त है। प्रतिशोध की उनकी उम्मीदों से परे, परिणाम में नेपोमनियाचची की एक और व्यक्तिगत हिस्सेदारी थीः खेल में प्रवेश करते हुए उनकी लाइव रेटिंग दो हज़ार सात सौ सत्तानवे―इंच दूर थी, जो दो हज़ार आठ सौ से अधिक दुनिया के एकमात्र अन्य खिलाड़ी के रूप में कार्लसन में शामिल होने से थी। अपनी असफलताओं के बावजूद, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सर्वश्रेष्ठ बनने की अपनी आकांक्षा को नहीं छोड़ेंगे। क्वीन्स गैम्बिट डिक्लाइन्ड में , विश्व चैंपियन ने अप्रत्याशित छः...Bfपाँच खेला, जो मूल रूप से उनके मैच के लिए तैयार किया गया था। Fछः पर एक प्रारंभिक रानी व्यापार ने डिंग को दोगुने, पृथक f-प्यादों के साथ छोड़ दिया। नेपोमनियाचची ने डिंग की स्थिति के कमजोर बिंदुओं पर दबाव डाला, लेकिन डिंग ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बचाव को संतुलित करते हुए संसाधनपूर्ण तरीके से जवाब दिया। खेल शुरू से अंत तक एक आकर्षक लड़ाई थी जो राजा बनाम राजा के साथ समाप्त हुई। जीएम रिचर्ड रैपर्ट तैयार जीएम अलिर्ज़ा फ़िरोज़ादुर्लभ आठ...Bfपाँच के साथ आसानी से पेट्रॉफ़ में व्हाइट के लाभ को निष्प्रभावी कर दिया। हालांकि फिरोजा ने विपरीत दिशा में कास्ट किया और किंगसाइड पर आक्रामक इरादों के साथ अपने एच-प्यादे को आगे बढ़ाया, बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान हुआ जब सभी बदमाशों को खुली ई-फाइल पर कारोबार किया गया और रैपोर्ट की रानी ने व्हाइट की क्वीनसाइड में प्रवेश किया। खिलाड़ी एक समान रंग के बिशप के अंत तक पहुंचे और जल्द ही आकर्षित हुए। वह सब कुछ खेलता है, इसलिए उसके खिलाफ तैयारी करना नामुमकिन है। वह सहीं मे अद्भुत है। कारुआना और वाचिएर-लाग्रेव दो खिलाड़ी हैं जो एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं और उनके बीच शास्त्रीय खेलों का एक लंबा इतिहास रहा है। कारुआना ने पच्चीस ड्रॉ के साथ नौ-पाँच से जीत को लगभग दोगुना कर दिया है। कारूआना ने उद्यमी तीन. hचार बनाम वाचियर-लाग्रेव के किंग्स इंडियन डिफेंस को चुना-बिना किसी विकसित गोटियों के अपने फ्लैंक मोहरे को आगे बढ़ाया। टीकाकार जीएम यासिर सेरावान इस दृष्टिकोण को विस्मय के साथ देखते हैंः "जब मैंने शतरंज खेलना शुरू किया, तो मेरी शुरुआती चाल hचार और Rhतीन और aचार और Raतीन थी। जब मेरे विरोधियों ने मेरे बदमाशों पर कब्जा करना शुरू किया, आप जानते हैं, मुझे अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। बाद में, जब मैं एक हज़ार दो सौ का खिलाड़ी बन गया, तो hचार चाल की पूरी तरह से निंदा की गई। आप बस hचार नहीं खेल सके। सौभाग्य से, इस तरह के खेलों का मतलब यह नहीं है कि अन्य सभी शतरंज खिलाड़ियों को वह सब कुछ बाहर फेंक देना चाहिए जो उन्होंने सोचा था कि वे खेल के बारे में जानते हैं और आत्मविश्वास के साथ उद्घाटन में अपने राजा के प्यादों को आगे बढ़ाना शुरू करते हैं। मेरी अच्छाई, यह एक शुरुआती चाल है। यह नौसिखियों की चाल क्यों नहीं है? बहुत शीर्ष खिलाड़ी नए विचारों के लिए बॉक्स के बाहर खोज करते हैं क्योंकि उनके सभी विरोधी मानक विकासशील चालों और योजनाओं के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार हैं। दोनों पक्षों को इस बात की इतनी मजबूत समझ है कि "बॉक्स के अंदर" खेलने का क्या मतलब है - एक उद्घाटन में सभी मूल सिद्धांत और मुख्य योजनाएँ - कि वे जानते हैं कि वे कहाँ कुछ असामान्य परीक्षण कर सकते हैं। यह रचनात्मकता का आधार हैः एक नए विचार के साथ समझ की एक मजबूत नींव पर निर्माण करना। कारुआना के अपरंपरागत दृष्टिकोण ने भुगतान किया। अपने प्रतिद्वंद्वी के बोल्ड किंगसाइड एडवांस से प्रेरित होकर, वाचियर-लाग्रेव ने क्वीन्ससाइड पर बेनको-शैली के प्यादा बलिदान के साथ मुकाबला किया और फिर अपने शूरवीरों को व्हाइट के दिल में छलांग लगाने के लिए अपने ई- और डी-प्यादे दोनों के केंद्र का आधार छोड़ दिया। पद। अमेरिकी ग्रैंडमास्टर ने उत्सुकता से सभी सामग्री को हटा दिया, अपने प्रतिद्वंद्वी के साहसी शूरवीरों को चकमा दिया, और डीपाँच और ईपाँच पर प्यादों के साथ एक अजेय केंद्र बनाया, जिसके कारण वाचियर-लाग्रेव ने तेईस चाल पर सफेद झंडा फहराया। जीएम द्वारा विश्लेषण किए गए विचारों की यह गतिशील लड़ाई हमारा गेम ऑफ द डे है राफेल लीताओ. पहले टाई में शामिल होने के साथ, इस जीत ने कारुआना को लाइव रैंकिंग में साथी प्रतियोगी जीएम से एक स्थान आगे कर दिया। अनीश गिरी. रोसोलिमो सिसिलियन में, जीएम जन-क्रिज़्सटॉफ़ डूडा जीएम बनाम स्पष्ट बढ़त हासिल की बोगडान-डैनियल डीक. एक चतुर सामरिक विचार द्वारा समर्थित, डूडा ने अपने प्रतिद्वंद्वी को एक अलग डी-प्यादा लेने के लिए मजबूर किया। क्या आप व्हाइट की प्रतिक्रिया को देख सकते हैं यदि डीक ने अपनी रानी के बजाय मोहरे के साथ ई चार पर कब्जा करके अलग-थलग प्यादे से परहेज किया हो? मिडलगेम के माध्यम से अंत में, डूडा ने जमे हुए पृथक मोहरे को अपने अधिक आराम से रखे हुए टुकड़ों के साथ दबाया। आखिरकार, डीक ने अपने बदमाश को दूसरी रैंक पर सक्रिय करने के लिए मोहरे को छोड़ दिया। एक अतिरिक्त मोहरे के साथ समय पर नियंत्रण करते हुए, डूडा ने क्षितिज पर जीत का मौका देखा और उस क्षण इकतालीस की चाल में, उसने एक गलत चाल चली जिससे उसका फायदा हाथ से निकल गया। निष्क्रिय इकतालीस. Ndcएक के साथ bतीन पर अपने अतिरिक्त मोहरे का बचाव करने के लिए, व्हाइट ने काले बदमाश को अपनी क्षमता को कम करते हुए, राहगीर के पीछे जाने दिया। जीएम वेस्ले सो बनाम जीएम अनीश गिरी बर्लिन रक्षा में एक सूक्ष्म और संतुलित द्वंद्व था जो छप्पन चालों के बाद समाप्त होने वाले विपरीत रंग के बिशप में समाप्त हुआ। रोमांचक मुकाबले राउंड चार में आगे हैं जब सभी नेता आमने-सामने होंगे। कारुआना को लगातार दूसरी बार पहली चाल का फायदा होगा, इस बार बनाम नेपोमनियाचची। इसके अलावा, रैपॉर्ट के पास अपनी रचनात्मकता को सफेद मोहरों बनाम सो के साथ बहने देने का मौका है। हालांकि दो सबसे कम उम्र के प्रतियोगियों, फ़िरोज़ा और डीक ने एक कठिन शुरुआत की है, उनका आगामी मैचअप एक को जहाज को सही करने का अवसर देता है जबकि दूसरे को समुद्र में और भी खो देता है। पिछला कवरेजः |
उज्जैन के महाकालेश्वर में सुबह चार बजे भस्म आरती हुई। भीड़ ऐसी कि महाकाल मंदिर से लेकर क्षिप्रा नदी के किनारे तक महाकाल के भक्त ही भक्त दिखाई दिए। सावन का ये पहला सोमवार है, इसलिए कोई भी भक्त इस खास मौके से पीछे नहीं रहना चाहता है।
झारखंड के बाबा वैद्यनाथ धाम में देश के कोने-कोने से शिवभक्त आए हैं। कोई कांवड़ लेकर आया है तो कोई सिर्फ बाबा के दर्शन करने। कई भक्तों ने तो आधी रात को ही बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक कर लिया है।
| उज्जैन के महाकालेश्वर में सुबह चार बजे भस्म आरती हुई। भीड़ ऐसी कि महाकाल मंदिर से लेकर क्षिप्रा नदी के किनारे तक महाकाल के भक्त ही भक्त दिखाई दिए। सावन का ये पहला सोमवार है, इसलिए कोई भी भक्त इस खास मौके से पीछे नहीं रहना चाहता है। झारखंड के बाबा वैद्यनाथ धाम में देश के कोने-कोने से शिवभक्त आए हैं। कोई कांवड़ लेकर आया है तो कोई सिर्फ बाबा के दर्शन करने। कई भक्तों ने तो आधी रात को ही बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक कर लिया है। |
नेरचौक - अभिलाषी कालेज ऑफ फार्मेसी के 12 छात्रों की जॉब पढ़ाई के दौरान ही पक्की हो गई है। इन छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट के दौरान हिमाचल के फार्मा क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी में आकर्षक वेतन पर जॉब मिली है। रविवार को कालेज परिसर में कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया, जिसमें कालेज में आमंत्रित की गई र्स्टेनफोर्ड लैबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड के एचआर मैनेजर केवल कुमार और प्रोडक्ट मैनेजर सुरेश ने संस्थान के 12 छात्रों को जॉब के लिए चयनित किया। संस्थान के प्राचार्य डा. एल राजू ने बताया कि जॉब के लिए चयनित होने वाले सभी 12 छात्र बी फार्मेसी अंतिम सेमेस्टर के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में छात्रों के लिए क्वालिटी एजुकेशन मुहैया कराने के साथ-साथ पढ़ाई पूरी होते ही छात्रों की जॉब के लिए कैपंस प्लेसमेंट कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें प्रदेश और देश की निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को संस्थान में आमंत्रित किया जाता है। संस्थान के अध्यक्ष डा. आरके अभिलाषी और एमडी डा. ललित अभिलाषी ने जॉब के लिए चयनित होने वाले छात्रों, उनके शिक्षकों और अभिभावको को बधाई दी है।
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| नेरचौक - अभिलाषी कालेज ऑफ फार्मेसी के बारह छात्रों की जॉब पढ़ाई के दौरान ही पक्की हो गई है। इन छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट के दौरान हिमाचल के फार्मा क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी में आकर्षक वेतन पर जॉब मिली है। रविवार को कालेज परिसर में कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया, जिसमें कालेज में आमंत्रित की गई र्स्टेनफोर्ड लैबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड के एचआर मैनेजर केवल कुमार और प्रोडक्ट मैनेजर सुरेश ने संस्थान के बारह छात्रों को जॉब के लिए चयनित किया। संस्थान के प्राचार्य डा. एल राजू ने बताया कि जॉब के लिए चयनित होने वाले सभी बारह छात्र बी फार्मेसी अंतिम सेमेस्टर के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में छात्रों के लिए क्वालिटी एजुकेशन मुहैया कराने के साथ-साथ पढ़ाई पूरी होते ही छात्रों की जॉब के लिए कैपंस प्लेसमेंट कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें प्रदेश और देश की निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को संस्थान में आमंत्रित किया जाता है। संस्थान के अध्यक्ष डा. आरके अभिलाषी और एमडी डा. ललित अभिलाषी ने जॉब के लिए चयनित होने वाले छात्रों, उनके शिक्षकों और अभिभावको को बधाई दी है। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन! |
लंदन (पीटीआई)। इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज में मैच रेफरी फिल व्हिटिकेस को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया है। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने रविवार को यह जानकारी दी। 56 वर्षीय फिल एसिंप्टोमैटिक हैं और अब 10 दिनों के लिए खुद को अलग कर लेंगे। हालांकि इसका दोनों टीमों के किसी सदस्य पर कोई असर नहीं पड़ा है।
ईसीबी ने एक बयान में कहा, "शुक्रवार 25 जून को साउथेम्प्टन के एजेस बाउल में पीसीआर परीक्षण के बाद, आईसीसी मैच रेफरी फिल व्हिटिकेस ने सीओवीआईडी -19 के लिए सकारात्मक परीक्षण किया है। व्हिटिकेस, जो इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच तीन मैचों की T20 सीरीज के दौरान मैच रेफरी थे, वह फिलहाल ठीक है और उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण हैं। वह अब 25 जून से 10 दिनों के लिए सेल्फ क्वारंटीन में रहेंगे। यूके सरकार के क्वारंटीन प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसा करना अनिवार्य है। "
इंग्लैंड ने श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज 3-0 से जीती।
| लंदन । इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच तीन मैचों की टीबीस सीरीज में मैच रेफरी फिल व्हिटिकेस को कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाया गया है। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने रविवार को यह जानकारी दी। छप्पन वर्षीय फिल एसिंप्टोमैटिक हैं और अब दस दिनों के लिए खुद को अलग कर लेंगे। हालांकि इसका दोनों टीमों के किसी सदस्य पर कोई असर नहीं पड़ा है। ईसीबी ने एक बयान में कहा, "शुक्रवार पच्चीस जून को साउथेम्प्टन के एजेस बाउल में पीसीआर परीक्षण के बाद, आईसीसी मैच रेफरी फिल व्हिटिकेस ने सीओवीआईडी -उन्नीस के लिए सकारात्मक परीक्षण किया है। व्हिटिकेस, जो इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच तीन मैचों की Tबीस सीरीज के दौरान मैच रेफरी थे, वह फिलहाल ठीक है और उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण हैं। वह अब पच्चीस जून से दस दिनों के लिए सेल्फ क्वारंटीन में रहेंगे। यूके सरकार के क्वारंटीन प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसा करना अनिवार्य है। " इंग्लैंड ने श्रीलंका के खिलाफ टीबीस सीरीज तीन-शून्य से जीती। |
मुंबई। अपने सुसाइड नोट में वैशाली ठक्कर ने जिस राहुल नवलानी का नाम लिखा था, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। राहुल नवलानी वैशाली का एक्स बॉयफ्रेंड था जो लगातार वैशाली को परेशान कर रहा था। साथ ही वो वैशाली की शादी भी नहीं होने दे रहा था। वैशाली ने अपने सुसाइड नोट में राहुल और उसके परिवार पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, जिसकी वजह से उन्होंने ये कदम उठाया। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर के पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने पुष्टि की कि राहुल को कल रात गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसकी पत्नी दिशा अभी भी फरार है।
कमिश्नर ने कहा, "आरोपी एक पड़ोसी था, इसलिए वह आगे की घटनाओं के बारे में जानता था और भागने में सफल रहा। अलग-अलग राज्यों में टीमें भेजी गईं, हमने इनाम की भी घोषणा की। लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। उससे पूछताछ की जा रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि अपराधी का फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हिरासत में हैं और जांच अभी भी जारी है।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
| मुंबई। अपने सुसाइड नोट में वैशाली ठक्कर ने जिस राहुल नवलानी का नाम लिखा था, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। राहुल नवलानी वैशाली का एक्स बॉयफ्रेंड था जो लगातार वैशाली को परेशान कर रहा था। साथ ही वो वैशाली की शादी भी नहीं होने दे रहा था। वैशाली ने अपने सुसाइड नोट में राहुल और उसके परिवार पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, जिसकी वजह से उन्होंने ये कदम उठाया। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर के पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने पुष्टि की कि राहुल को कल रात गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसकी पत्नी दिशा अभी भी फरार है। कमिश्नर ने कहा, "आरोपी एक पड़ोसी था, इसलिए वह आगे की घटनाओं के बारे में जानता था और भागने में सफल रहा। अलग-अलग राज्यों में टीमें भेजी गईं, हमने इनाम की भी घोषणा की। लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। उससे पूछताछ की जा रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि अपराधी का फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हिरासत में हैं और जांच अभी भी जारी है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है। |
देशभर में छठ पूजा का त्योहार 28 अक्टूबर, यानी आज से शुरू हो गया है. आज इस पर्व का पहला दिन है. छठ को लेकर आए दिन कोई ना कोई गीत आ रहा है जो लोगों के दिल को छू रहे हैं. वहीं अब खेसारी लाल यादव का नया छठ गीत रिलीज हो चुका है. जिसका नाम है 'पटना के घाट पे' (Patna Ke Ghat Pe). इस गाने में उनके साथ खूबसूरत एक्ट्रेस आरोही सिंह (Arohi Singh) भी नजर आ रही हैं. वीडियो में दोनों की केमिस्ट्री को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. ये गाना आते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. फैंस इस गाने को दिल खोलकर प्यार दे रहे हैं. सारेगामा हम भोजपुरी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुए इस गाने को कुछ ही घंटों में एक मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. यह भी पढ़ेंः OMG! क्या अजय देवगन की बेटी न्यासा ने प्लास्टिक सर्जरी करवा कर जाह्नवी कपूर जैसी बनवा ली है अपनी शक्ल?
पटना के घाट पे के वीडियो में खेसारी लाल यादव पारंपरिक परिधानों में दिख रहे हैं. अभिनेता के बैकग्राउंड डांसर्स भी उनसे मैच करते हुए छठ माता की भक्ति में झूमते दिख रहे हैं. इस गाने को खेसारी ने आवाज दी है जबकि आरोही सिंह इसकी लीड स्टार हैं और आर्या शर्मा ने इसे म्यूजिक दिया है. खेसारी के इस गाने ने धमाल मचा दिया है और इसके व्यूज तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे पहले उनका 'बलकवा तू देदा छठी माई' (Balkwa Tu Deda Chhathi Maiya) आया था जिसमें उनके साथ शिल्पी राघवानी नजर आ रही हैं. वो पहले भी एक्टर के साथ कई म्यूजिक वीडियो में काम कर चुकी हैं. वहीं हाल ही में पवन सिंह और टीवी एक्ट्रेस पूजा बनर्जी का भी एक छठ गीत सामने आया था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था.
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| देशभर में छठ पूजा का त्योहार अट्ठाईस अक्टूबर, यानी आज से शुरू हो गया है. आज इस पर्व का पहला दिन है. छठ को लेकर आए दिन कोई ना कोई गीत आ रहा है जो लोगों के दिल को छू रहे हैं. वहीं अब खेसारी लाल यादव का नया छठ गीत रिलीज हो चुका है. जिसका नाम है 'पटना के घाट पे' . इस गाने में उनके साथ खूबसूरत एक्ट्रेस आरोही सिंह भी नजर आ रही हैं. वीडियो में दोनों की केमिस्ट्री को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. ये गाना आते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. फैंस इस गाने को दिल खोलकर प्यार दे रहे हैं. सारेगामा हम भोजपुरी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुए इस गाने को कुछ ही घंटों में एक मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. यह भी पढ़ेंः OMG! क्या अजय देवगन की बेटी न्यासा ने प्लास्टिक सर्जरी करवा कर जाह्नवी कपूर जैसी बनवा ली है अपनी शक्ल? पटना के घाट पे के वीडियो में खेसारी लाल यादव पारंपरिक परिधानों में दिख रहे हैं. अभिनेता के बैकग्राउंड डांसर्स भी उनसे मैच करते हुए छठ माता की भक्ति में झूमते दिख रहे हैं. इस गाने को खेसारी ने आवाज दी है जबकि आरोही सिंह इसकी लीड स्टार हैं और आर्या शर्मा ने इसे म्यूजिक दिया है. खेसारी के इस गाने ने धमाल मचा दिया है और इसके व्यूज तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे पहले उनका 'बलकवा तू देदा छठी माई' आया था जिसमें उनके साथ शिल्पी राघवानी नजर आ रही हैं. वो पहले भी एक्टर के साथ कई म्यूजिक वीडियो में काम कर चुकी हैं. वहीं हाल ही में पवन सिंह और टीवी एक्ट्रेस पूजा बनर्जी का भी एक छठ गीत सामने आया था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था. बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः |
देशों के बीच नफ़रत, लोगों में मुहब्बत कैसे?
पिछले महीने जम्मू में भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ मंत्री से मेरी मुलाक़ात हुई. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में लगा है.
लेकिन इंटरव्यू के बाद उन्होंने कहा, "मैं पहली बार पाकिस्तान गया था. मैं ये देखकर हैरान रह गया कि वहाँ के 95 प्रतिशत लोग अच्छे हैं. "
मैंने कहा, आप थोड़ा ज़्यादा नहीं बोल रहे? वे नहीं माने, "नहीं जी, वहां के 95 प्रतिशत लोग अच्छे हैं. वो हमारी ही तरह के लोग हैं. "
ख़ैर, हम दोनों में बहस के बाद ये तय हुआ कि पाकिस्तानी जनता और सरकार में फ़र्क़ करना ज़रूरी है. एक तरफ जनता और दूसरी तरफ फ़ौज, नेता, पाकिस्तान सरकार और वहां सक्रिय चरमपंथी.
इसी तरह भारत की जनता एक तरफ. दूसरी तरफ यहाँ की सरकार, यहाँ के नेता और पाकिस्तान के खिलाफ़ ज़हर उगलने वाला भारतीय मीडिया.
इन दिनों भारत और पाकिस्तान में एक दूसरे के खिलाफ चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें ज़ोर-शोर से रोज़ सुनाई दे रही हैं. दोनों देशों के न्यूज़ चैनल और नेता इस में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं. हर कोई देशप्रेमी दिखना चाहता है. थोड़ी अलग राय रखी नहीं कि इन चैनलों पर आपको एक मिनट में देशद्रोही घोषित कर दिया जाएगा.
कोई अनजान और बाहरी व्यक्ति देखेगा तो उसे लगेगा कि ये दोनों देशों के लोग वाक़ई एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं.
मैं भारतीय अख़बारों की पाकिस्तान विरोधी सुर्खियां पढ़कर जवान हुआ. पत्रकार बनने के बाद भी पाकिस्तान के लोगों को दुश्मन समझता रहा, मेरी नज़र में पाकिस्तानी मुल्ला और चरमपंथी थे.
कई साल पहले बीबीसी हिंदी और उर्दू ने फ़ैसला किया कि मुझे और एक पाकिस्तानी सहकर्मी को एक-दूसरे के देश भेजा जाए. मैं अपने दिल में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जितनी नफरत लेकर गया था उतनी ही जिज्ञासा भी मेरे मन में थी, यही हाल मेरे पाकिस्तानी दोस्त का भी था.
लेकिन हम दोनों को झटका लगा. एक बड़ा झटका, दोनों तरफ के मीडिया और नेताओं ने हमें जैसा बताया था, मेरे लिए उससे बहुत अलग था पाकिस्तान, मेरे साथी के मन में भारत की जो तस्वीर थी वो भी पूरी तरह बदल गई.
इसीलिए जब जम्मू में बीजेपी मंत्री ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में 95 प्रतिशत लोग अच्छे हैं, तो मैं हैरान नहीं हुआ. मुझे भी वहां के लोग वैसे ही लगे जैसे भारत के. वो भी रोज़ी रोटी कमाने में जुटे हैं जैसे हम. उनकी शहरी समस्याएं वैसी ही हैं जैसी हमारी.
मुझे पाकिस्तान में मुल्ला कम नज़र आए, कराची के मुक़ाबले पुरानी दिल्ली में बुर्का वाली महिलाएँ ज़्यादा दिखती हैं.
भारत आए मेरे पाकिस्तानी दोस्त को यही बताया गया कि भारत में मुसलमानों को आज़ादी नहीं है लेकिन उसका भ्रम जल्दी ही टूट गया.
सच जानने-समझने के लिए हमें एक दूसरे के देश जाना पड़ा, कितने लोग ऐसा कर सकते हैं.
| देशों के बीच नफ़रत, लोगों में मुहब्बत कैसे? पिछले महीने जम्मू में भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ मंत्री से मेरी मुलाक़ात हुई. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में लगा है. लेकिन इंटरव्यू के बाद उन्होंने कहा, "मैं पहली बार पाकिस्तान गया था. मैं ये देखकर हैरान रह गया कि वहाँ के पचानवे प्रतिशत लोग अच्छे हैं. " मैंने कहा, आप थोड़ा ज़्यादा नहीं बोल रहे? वे नहीं माने, "नहीं जी, वहां के पचानवे प्रतिशत लोग अच्छे हैं. वो हमारी ही तरह के लोग हैं. " ख़ैर, हम दोनों में बहस के बाद ये तय हुआ कि पाकिस्तानी जनता और सरकार में फ़र्क़ करना ज़रूरी है. एक तरफ जनता और दूसरी तरफ फ़ौज, नेता, पाकिस्तान सरकार और वहां सक्रिय चरमपंथी. इसी तरह भारत की जनता एक तरफ. दूसरी तरफ यहाँ की सरकार, यहाँ के नेता और पाकिस्तान के खिलाफ़ ज़हर उगलने वाला भारतीय मीडिया. इन दिनों भारत और पाकिस्तान में एक दूसरे के खिलाफ चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें ज़ोर-शोर से रोज़ सुनाई दे रही हैं. दोनों देशों के न्यूज़ चैनल और नेता इस में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं. हर कोई देशप्रेमी दिखना चाहता है. थोड़ी अलग राय रखी नहीं कि इन चैनलों पर आपको एक मिनट में देशद्रोही घोषित कर दिया जाएगा. कोई अनजान और बाहरी व्यक्ति देखेगा तो उसे लगेगा कि ये दोनों देशों के लोग वाक़ई एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं. मैं भारतीय अख़बारों की पाकिस्तान विरोधी सुर्खियां पढ़कर जवान हुआ. पत्रकार बनने के बाद भी पाकिस्तान के लोगों को दुश्मन समझता रहा, मेरी नज़र में पाकिस्तानी मुल्ला और चरमपंथी थे. कई साल पहले बीबीसी हिंदी और उर्दू ने फ़ैसला किया कि मुझे और एक पाकिस्तानी सहकर्मी को एक-दूसरे के देश भेजा जाए. मैं अपने दिल में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जितनी नफरत लेकर गया था उतनी ही जिज्ञासा भी मेरे मन में थी, यही हाल मेरे पाकिस्तानी दोस्त का भी था. लेकिन हम दोनों को झटका लगा. एक बड़ा झटका, दोनों तरफ के मीडिया और नेताओं ने हमें जैसा बताया था, मेरे लिए उससे बहुत अलग था पाकिस्तान, मेरे साथी के मन में भारत की जो तस्वीर थी वो भी पूरी तरह बदल गई. इसीलिए जब जम्मू में बीजेपी मंत्री ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में पचानवे प्रतिशत लोग अच्छे हैं, तो मैं हैरान नहीं हुआ. मुझे भी वहां के लोग वैसे ही लगे जैसे भारत के. वो भी रोज़ी रोटी कमाने में जुटे हैं जैसे हम. उनकी शहरी समस्याएं वैसी ही हैं जैसी हमारी. मुझे पाकिस्तान में मुल्ला कम नज़र आए, कराची के मुक़ाबले पुरानी दिल्ली में बुर्का वाली महिलाएँ ज़्यादा दिखती हैं. भारत आए मेरे पाकिस्तानी दोस्त को यही बताया गया कि भारत में मुसलमानों को आज़ादी नहीं है लेकिन उसका भ्रम जल्दी ही टूट गया. सच जानने-समझने के लिए हमें एक दूसरे के देश जाना पड़ा, कितने लोग ऐसा कर सकते हैं. |
देश भर के विभिन्न डाक विभाग के सर्किलों में 40 हजार से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती की जानी है। यह भर्ती ब्रांच पोस्ट मास्टर (बीपीएम), असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर (एबीपीएम) और डाक सेवक के तौर पर होगी। इन खाली पदों की संख्या 40,889 है। इनमें सबसे अधिक 7,987 वैकेंसी उत्तर प्रदेश सर्किल के लिए है। वहीं, इसके बाद दूसरी सबसे अधिक 3,167 वैकेंसी तमिलनाडु, 3,036 कर्नाटक और 2,480 आंध्र प्रदेश सर्किल के लिए हैं।
उम्मीदवारों की उम्र आवेदन की आखिरी तारीख को 18 वर्ष से कम और 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। विभिन्न आरक्षित वर्गों (एससी, एसटी, ओबीसी, आदि) के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी।
उम्मीदवार मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास होना चाहिए।
उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट,indiapostgdsonline. gov. in पर उपलब्ध कराए जाने वाले ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया के लिए जीडीएस एप्लीकेशन फॉर्म 2023 को डाक विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट, indiapost. gov. in पर एक्टिव किया जा सकता है।
उम्मीदवार 16 फरवरी 2023 तक अपनी एप्लीकेशन सबमिट कर सकेंगे। इसके बाद 17 से 19 फरवरी 2023 के बीच डाक विभाग द्वारा एप्लीकेशन में करेक्शन का मौका दिया जाएगा।
एसएससी (SSC) ने मल्टी टास्किंग स्टाफ और हवलदार भर्ती के लिए वैकेंसी बढ़ा दी है। 18 जनवरी को आयोग द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, एसएससी एमटीएस और हवलदार (SSC MTS and Havaldar) के 11,409 पदों को भरा जाना था। आयोग ने अब 12,523 पदों को भरने के लिए 10वीं पास उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आयोग ने इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया नोटिफिकेशन के दिन से ही शुरू कर दी है। आवेदन फॉर्म आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट ssc. nic. in से भरे जाएंगे। उम्मीदवार एसएससी की इस भर्ती (SSC recruitment) के लिए 17 फरवरी 2023 तक अप्लाई कर सकते हैं।
इन पदों पर योग्य उम्मीदवारों के चयन के लिए आयोग परीक्षा का आयोजन करेगी। यह परीक्षा कम्प्यूटर बेस्ड होगी। परीक्षा का आयोजन अप्रैल में किया जाएगा।
एक्स सर्विसमैन को कोई शुल्क नहीं देना है।
उम्मीदवारों की उम्र 18 से 25 साल के बीच होनी चाहिए। उम्मीदवारों का जन्म दो जनवरी 1998 और पहली जनवरी 2005 से पहले का होना जरूरी है। हालांकि अधिकतम आयु सीमा में आरक्षित वर्ग को सरकार के नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।
इस भर्ती के लिए सिर्फ वे ही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से 10वीं की परीक्षा पास की है।
एलआईसी ने नोटिफिकेशन जारी कर अपरेंटिस डिवेलपमेंट ऑफिसर पदों पर भर्ती निकाली है। इसके तहत कुल 9394 वैकेंसी निकाली गई हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया एलआईसी की ऑफिशियल वेबसाइट licindia. in पर आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार 10 फरवरी 2023 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा 12 मार्च 2023 को होगी। जबकि मुख्य परीक्षा आठ अप्रैल 2023 को होगी। प्रारंभिक परीक्षा का एडमिट कार्ड चार मार्च को रिलीज किया जाएगा।
आवेदन करने वाले उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होने चाहिए या उनके पास भारतीय बीमा संस्थान, मुम्बई की फेलोशिप होना जरूरी है।
| देश भर के विभिन्न डाक विभाग के सर्किलों में चालीस हजार से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती की जानी है। यह भर्ती ब्रांच पोस्ट मास्टर , असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर और डाक सेवक के तौर पर होगी। इन खाली पदों की संख्या चालीस,आठ सौ नवासी है। इनमें सबसे अधिक सात,नौ सौ सत्तासी वैकेंसी उत्तर प्रदेश सर्किल के लिए है। वहीं, इसके बाद दूसरी सबसे अधिक तीन,एक सौ सरसठ वैकेंसी तमिलनाडु, तीन,छत्तीस कर्नाटक और दो,चार सौ अस्सी आंध्र प्रदेश सर्किल के लिए हैं। उम्मीदवारों की उम्र आवेदन की आखिरी तारीख को अट्ठारह वर्ष से कम और चालीस वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। विभिन्न आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी। उम्मीदवार मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास होना चाहिए। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट,indiapostgdsonline. gov. in पर उपलब्ध कराए जाने वाले ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया के लिए जीडीएस एप्लीकेशन फॉर्म दो हज़ार तेईस को डाक विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट, indiapost. gov. in पर एक्टिव किया जा सकता है। उम्मीदवार सोलह फरवरी दो हज़ार तेईस तक अपनी एप्लीकेशन सबमिट कर सकेंगे। इसके बाद सत्रह से उन्नीस फरवरी दो हज़ार तेईस के बीच डाक विभाग द्वारा एप्लीकेशन में करेक्शन का मौका दिया जाएगा। एसएससी ने मल्टी टास्किंग स्टाफ और हवलदार भर्ती के लिए वैकेंसी बढ़ा दी है। अट्ठारह जनवरी को आयोग द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, एसएससी एमटीएस और हवलदार के ग्यारह,चार सौ नौ पदों को भरा जाना था। आयोग ने अब बारह,पाँच सौ तेईस पदों को भरने के लिए दसवीं पास उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आयोग ने इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया नोटिफिकेशन के दिन से ही शुरू कर दी है। आवेदन फॉर्म आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट ssc. nic. in से भरे जाएंगे। उम्मीदवार एसएससी की इस भर्ती के लिए सत्रह फरवरी दो हज़ार तेईस तक अप्लाई कर सकते हैं। इन पदों पर योग्य उम्मीदवारों के चयन के लिए आयोग परीक्षा का आयोजन करेगी। यह परीक्षा कम्प्यूटर बेस्ड होगी। परीक्षा का आयोजन अप्रैल में किया जाएगा। एक्स सर्विसमैन को कोई शुल्क नहीं देना है। उम्मीदवारों की उम्र अट्ठारह से पच्चीस साल के बीच होनी चाहिए। उम्मीदवारों का जन्म दो जनवरी एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे और पहली जनवरी दो हज़ार पाँच से पहले का होना जरूरी है। हालांकि अधिकतम आयु सीमा में आरक्षित वर्ग को सरकार के नियमों के अनुसार छूट मिलेगी। इस भर्ती के लिए सिर्फ वे ही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास की है। एलआईसी ने नोटिफिकेशन जारी कर अपरेंटिस डिवेलपमेंट ऑफिसर पदों पर भर्ती निकाली है। इसके तहत कुल नौ हज़ार तीन सौ चौरानवे वैकेंसी निकाली गई हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया एलआईसी की ऑफिशियल वेबसाइट licindia. in पर आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार दस फरवरी दो हज़ार तेईस तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा बारह मार्च दो हज़ार तेईस को होगी। जबकि मुख्य परीक्षा आठ अप्रैल दो हज़ार तेईस को होगी। प्रारंभिक परीक्षा का एडमिट कार्ड चार मार्च को रिलीज किया जाएगा। आवेदन करने वाले उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होने चाहिए या उनके पास भारतीय बीमा संस्थान, मुम्बई की फेलोशिप होना जरूरी है। |
- पोर्नोग्राफी कंटेंट मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा और रेयान नाम के शख्स को 23 जुलाई तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। राज कुंद्रा अश्लील फिल्में बनाने और उन्हें कुछ ऐप के माध्यम से प्रसारित करने के मामले में सोमवार को गिरफ्तार हुए हैं। मामले में राज कुंद्रा समेत अब तक 6 लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी है।
मुंबई पुलिस ने भारतीय मूल के ब्रिटिश बिजनेसमैन राज को आज एक स्थानीय कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने रेयान और राज कुंद्रा को 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज कुंद्रा एक व्हाट्सग्रुप ग्रुप में शामिल थे, जिसमें अश्लील फिल्मों के कारोबार के बारे में बातचीत होती थी।
| - पोर्नोग्राफी कंटेंट मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा और रेयान नाम के शख्स को तेईस जुलाई तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। राज कुंद्रा अश्लील फिल्में बनाने और उन्हें कुछ ऐप के माध्यम से प्रसारित करने के मामले में सोमवार को गिरफ्तार हुए हैं। मामले में राज कुंद्रा समेत अब तक छः लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी है। मुंबई पुलिस ने भारतीय मूल के ब्रिटिश बिजनेसमैन राज को आज एक स्थानीय कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने रेयान और राज कुंद्रा को तेईस जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज कुंद्रा एक व्हाट्सग्रुप ग्रुप में शामिल थे, जिसमें अश्लील फिल्मों के कारोबार के बारे में बातचीत होती थी। |
चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है. शायद ये मुफ़ीद समय है कि पिछले करीब डेढ़ महीने से जारी चुनाव प्रचार का विश्लेषण किया जाए. मध्यप्रदेश में शायद ये पहली बार है कि विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्वयं प्रधानमंत्री ने एक-दो या तीन नहीं, बल्कि दर्जनों सभाओं और रैलियों में हिस्सा लिया. मालवा-निमाड़ हो या बुंदेलखंड, विंध्य हो या फिर चंबल, प्रदेश का कोई इलाका ऐसा न था, जहां राहुल, मोदी और अमित शाह के कदम न पड़े हों.
प्रचार की इस सरगर्मी से बयानबाजी का सैलाब तो आना ही था. पूरे इलेक्शन कैम्पेन के दौरान दोनों ही ओर से बयानों के तीर बराबरी से चले. बयानों के स्तर की तो बात न ही की जाए तो बेहतर है. ताज्जुब की बात है कि रोजाना सभाओं, रैलियों और मीडिया के जरिये होने वाले इन वाकयुद्धों से न केवल मूल मुद्दे गायब रहे, बल्कि ये सारे बयान विरोधियों की आलोचना व उन पर हमले से ज्यादा कुछ नहीं थे. हमने क्या किया या हम क्या करेंगे, से ज्यादा जोर इस बात पर था कि विरोधी कितना निकम्मा और नाकाबिल है.
यह भी पढ़ें- OPINION: क्या चुनाव 'ज्यादा बुरे' और 'कम बुरे' में से किसी एक को चुनने की मजबूरी है!
प्रधानमंत्री सहित सभी राष्ट्रीय नेताओं का फोकस विरोधियों को निकम्मा साबित करने पर ज्यादा रहा. शायद यही वजह है कि दोनों ही पार्टियों के घोषणा पत्र, चुनावी तड़के वाले बयानों के सामने फीके रह गए.
इंदौर में प्रधानमंत्री की मां को लेकर राज बब्बर के बयान ने मुद्दे की दिशा ही बदल दी. मुद्दा था रुपए के अवमूल्यन का और बहस 'जाना था जापान, पहुंच गए चीन' होकर रह गई. रुपया क्यों और कैसे गिरा, ये सवाल किनारे रह गया और ये बयान कितना गिरा हुआ था, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई. बीजेपी ने भी इस पर सहानुभूति कार्ड खेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यानी वोट इस आधार पर मांगे जा रहे थे कि बुजुर्ग महिला का अपमान करने वालों को वोट न दें.
यह भी पढ़ें- PM मोदी का कांग्रेस से सवाल, 'मां के बाद मेरे पिता को भी राजनीति में क्यों घसीट लिया? '
इससे पहले राज बब्बर ने प्रधानमंत्री को मनहूस तक कह डाला. ये न केवल एक बेहद हल्के दर्ज का वक्तव्य था, बल्कि सवाल ये भी उठता है कि क्या उन्हें वोट इसी आधार पर चाहिए कि उनके विरोधी 'अशुभ' हैं. खुद को प्रगतिशील कहने वाली पार्टी का शुभ-अशुभ के आधार पर वोट मांगना नेताओं की परिपक्वता पर सवाल उठाता है.
सागर जिले में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा- 'रसोई का तवा भी 10 साल में खराब हो जाता है. उस पर रोटी जल जाती है. मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार तवे की तरह खराब हो गई है. " राहुल की बातों का निहितार्थ स्पष्ट है कि बीजेपी सरकार खराब है, इसलिए हमें चुनो.
सिवनी में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कांग्रेस में प्रधानमंत्री के पेट से प्रधानमंत्री निकलता है और MLA के पेट से MLA निकलता है. कांग्रेस में वंशवाद को लेकर बीजेपी हमेशा से हमला करती रही है, लेकिन इस बयान ने तो शालीनता की सारी हदें पार कर दीं. निहितार्थ ये कि 'वे' वंशवादी हैं, इसलिए हमें चुनो.
'कमलनाथ जी, आपके लिए भले ही अली महत्वपूर्ण हो, हमारे लिए बजरंगबली ही सब कुछ हैं. ' ये बयान था उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का. भोपाल में एक रैली के दौरान कहे गए योगी आदित्यनाथ के इन शब्दों का निहितार्थ भी स्पष्ट है कि 'उनके' लिए अली ज्यादा अहम हैं, इसलिए हमें चुनो.
जब राष्ट्रीय नेताओं का प्रचार ही नकारात्मकता भरा हो, तो भला स्थानीय नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है. शायद इसीलिए इंदौर में बीजेपी प्रत्याशी ने अपने विरोधी प्रत्याशी के पिता को 'हिस्ट्रीशीटर' तक कह डाला. उन्हें इतना भी याद नहीं रहा जिन्हें वे हिस्ट्रीशीटर कह रहे हैं, वे बीजेपी के ही एक वरिष्ठ नेता हैं. (जी हां, इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 के कांग्रेस प्रत्याशी के पिता बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं). जाहिर है बवाल होना था, हुआ भी. बयान के निहितार्थ देखें तो साफ है कि विरोधी पार्टी का प्रत्याशी हिस्ट्रीशीटर/गुंडा है, इसलिए मुझे वोट दें.
नकारात्मक प्रचार की इस होड़ में संबित पात्रा ने एक और तड़का लगाया और कमलनाथ को 'कमीशन नाथ' कह डाला. निहितार्थ फिर वही कि 'वे' कमीशनबाज हैं, इसलिए हमें वोट दें.
ऐसा नहीं कि नकारात्मक बयानों के इस खेल में केवल बीजेपी और कांग्रेस के नेता ही शामिल रहे हैं. मध्यप्रदेश में अपनी जमीन तलाशती समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में कहा- 'अब कांग्रेस और बीजेपी में कोई फर्क नहीं रह गया है. बीजेपी की तरह छोटा है कांग्रेस का दिल. ' निहितार्थ छोटे दिल वाली पार्टियों को वोट न दें, समाजवादी पार्टी को चुनें.
कुल मिलाकर पूरे चुनाव प्रचार अभियान में अपनी लकीर बढ़ाने के बजाय दूसरे की लकीर छोटी बताने की प्रवृत्ति हावी रही. कई देशों में चुनाव के दौरान प्रत्याशी अपनी नीतियां और एजेंडा जनता के सामने ले जाते हैं और उसी आधार पर वोटरों से समर्थन की मांग करते हैं. लेकिन यहां प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र पर चर्चा तक नहीं होती. कोई ये भी नहीं पूछ रहा कि पार्टी ने अपने पुराने घोषणा पत्र में क्या वादे किए थे और उनमें से कितने पूरे किए. शायद इसलिए क्योंकि हमारी व्यवस्था में घोषणा पत्र की अहमियत औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं है. यहां वोट तो इसी आधार पर मिलेंगे कि उनके विरोधी उनसे ज्यादा बुरे हैं.
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| चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है. शायद ये मुफ़ीद समय है कि पिछले करीब डेढ़ महीने से जारी चुनाव प्रचार का विश्लेषण किया जाए. मध्यप्रदेश में शायद ये पहली बार है कि विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्वयं प्रधानमंत्री ने एक-दो या तीन नहीं, बल्कि दर्जनों सभाओं और रैलियों में हिस्सा लिया. मालवा-निमाड़ हो या बुंदेलखंड, विंध्य हो या फिर चंबल, प्रदेश का कोई इलाका ऐसा न था, जहां राहुल, मोदी और अमित शाह के कदम न पड़े हों. प्रचार की इस सरगर्मी से बयानबाजी का सैलाब तो आना ही था. पूरे इलेक्शन कैम्पेन के दौरान दोनों ही ओर से बयानों के तीर बराबरी से चले. बयानों के स्तर की तो बात न ही की जाए तो बेहतर है. ताज्जुब की बात है कि रोजाना सभाओं, रैलियों और मीडिया के जरिये होने वाले इन वाकयुद्धों से न केवल मूल मुद्दे गायब रहे, बल्कि ये सारे बयान विरोधियों की आलोचना व उन पर हमले से ज्यादा कुछ नहीं थे. हमने क्या किया या हम क्या करेंगे, से ज्यादा जोर इस बात पर था कि विरोधी कितना निकम्मा और नाकाबिल है. यह भी पढ़ें- OPINION: क्या चुनाव 'ज्यादा बुरे' और 'कम बुरे' में से किसी एक को चुनने की मजबूरी है! प्रधानमंत्री सहित सभी राष्ट्रीय नेताओं का फोकस विरोधियों को निकम्मा साबित करने पर ज्यादा रहा. शायद यही वजह है कि दोनों ही पार्टियों के घोषणा पत्र, चुनावी तड़के वाले बयानों के सामने फीके रह गए. इंदौर में प्रधानमंत्री की मां को लेकर राज बब्बर के बयान ने मुद्दे की दिशा ही बदल दी. मुद्दा था रुपए के अवमूल्यन का और बहस 'जाना था जापान, पहुंच गए चीन' होकर रह गई. रुपया क्यों और कैसे गिरा, ये सवाल किनारे रह गया और ये बयान कितना गिरा हुआ था, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई. बीजेपी ने भी इस पर सहानुभूति कार्ड खेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यानी वोट इस आधार पर मांगे जा रहे थे कि बुजुर्ग महिला का अपमान करने वालों को वोट न दें. यह भी पढ़ें- PM मोदी का कांग्रेस से सवाल, 'मां के बाद मेरे पिता को भी राजनीति में क्यों घसीट लिया? ' इससे पहले राज बब्बर ने प्रधानमंत्री को मनहूस तक कह डाला. ये न केवल एक बेहद हल्के दर्ज का वक्तव्य था, बल्कि सवाल ये भी उठता है कि क्या उन्हें वोट इसी आधार पर चाहिए कि उनके विरोधी 'अशुभ' हैं. खुद को प्रगतिशील कहने वाली पार्टी का शुभ-अशुभ के आधार पर वोट मांगना नेताओं की परिपक्वता पर सवाल उठाता है. सागर जिले में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा- 'रसोई का तवा भी दस साल में खराब हो जाता है. उस पर रोटी जल जाती है. मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार तवे की तरह खराब हो गई है. " राहुल की बातों का निहितार्थ स्पष्ट है कि बीजेपी सरकार खराब है, इसलिए हमें चुनो. सिवनी में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कांग्रेस में प्रधानमंत्री के पेट से प्रधानमंत्री निकलता है और MLA के पेट से MLA निकलता है. कांग्रेस में वंशवाद को लेकर बीजेपी हमेशा से हमला करती रही है, लेकिन इस बयान ने तो शालीनता की सारी हदें पार कर दीं. निहितार्थ ये कि 'वे' वंशवादी हैं, इसलिए हमें चुनो. 'कमलनाथ जी, आपके लिए भले ही अली महत्वपूर्ण हो, हमारे लिए बजरंगबली ही सब कुछ हैं. ' ये बयान था उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का. भोपाल में एक रैली के दौरान कहे गए योगी आदित्यनाथ के इन शब्दों का निहितार्थ भी स्पष्ट है कि 'उनके' लिए अली ज्यादा अहम हैं, इसलिए हमें चुनो. जब राष्ट्रीय नेताओं का प्रचार ही नकारात्मकता भरा हो, तो भला स्थानीय नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है. शायद इसीलिए इंदौर में बीजेपी प्रत्याशी ने अपने विरोधी प्रत्याशी के पिता को 'हिस्ट्रीशीटर' तक कह डाला. उन्हें इतना भी याद नहीं रहा जिन्हें वे हिस्ट्रीशीटर कह रहे हैं, वे बीजेपी के ही एक वरिष्ठ नेता हैं. . जाहिर है बवाल होना था, हुआ भी. बयान के निहितार्थ देखें तो साफ है कि विरोधी पार्टी का प्रत्याशी हिस्ट्रीशीटर/गुंडा है, इसलिए मुझे वोट दें. नकारात्मक प्रचार की इस होड़ में संबित पात्रा ने एक और तड़का लगाया और कमलनाथ को 'कमीशन नाथ' कह डाला. निहितार्थ फिर वही कि 'वे' कमीशनबाज हैं, इसलिए हमें वोट दें. ऐसा नहीं कि नकारात्मक बयानों के इस खेल में केवल बीजेपी और कांग्रेस के नेता ही शामिल रहे हैं. मध्यप्रदेश में अपनी जमीन तलाशती समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में कहा- 'अब कांग्रेस और बीजेपी में कोई फर्क नहीं रह गया है. बीजेपी की तरह छोटा है कांग्रेस का दिल. ' निहितार्थ छोटे दिल वाली पार्टियों को वोट न दें, समाजवादी पार्टी को चुनें. कुल मिलाकर पूरे चुनाव प्रचार अभियान में अपनी लकीर बढ़ाने के बजाय दूसरे की लकीर छोटी बताने की प्रवृत्ति हावी रही. कई देशों में चुनाव के दौरान प्रत्याशी अपनी नीतियां और एजेंडा जनता के सामने ले जाते हैं और उसी आधार पर वोटरों से समर्थन की मांग करते हैं. लेकिन यहां प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र पर चर्चा तक नहीं होती. कोई ये भी नहीं पूछ रहा कि पार्टी ने अपने पुराने घोषणा पत्र में क्या वादे किए थे और उनमें से कितने पूरे किए. शायद इसलिए क्योंकि हमारी व्यवस्था में घोषणा पत्र की अहमियत औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं है. यहां वोट तो इसी आधार पर मिलेंगे कि उनके विरोधी उनसे ज्यादा बुरे हैं. . |
फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. फैन्स के बीच जोरों-शोरों से इस फिल्म को लेकर क्रेज देखा जा रहा है. हर कोई इसे आईमैक्स 3डी में देखना प्रिफर कर रहा है. फिल्म में शानदार वीएफएक्स का इस्तेमाल हुआ है. 9 सितंबर को तो फिल्म रिलीज हुई है. इससे पहले फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई थी, जहां फिल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी, स्टार कास्ट में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के अलावा कई बॉलीवुड सेलेब्स और फैन्स मौजूद थे.
इस स्पेशल स्क्रीनिंग से अयान मुखर्जी की एक फोटो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. फोटो में अयान मुखर्जी को काफी इमोशनल होते देखा जा सकता है. स्टेज पर ऑडियन्स संग बातचीत में अयान चेयर पर बैठे हैं और साथ में रणबीर कपूर बैठे नजर आ रहे हैं. फोटो में साफ देखा जा सकता है कि ऑडियन्स के फिल्म देखने के बाद के रिएक्शन को देखकर अयान रो रहे हैं. अयान मुखर्जी की यह फोटो एक ट्विटर यूजर ने शेयर की है जो वहां पर मौजूद था.
I had not shared this picture yet , but I will share it now.
Ayan mukerji was crying tears of happiness after First Fan show of #Brahmastra.
This Guy was trolled and abused but he didnt stop his work.
Now numbers justify it.
यूजर ने अयान मुखर्जी की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि मैंने पहले तो यह फोटो शेयर नहीं की थी, लेकिन अब कर रहा हूं. अयान मुखर्जी फिल्म का पॉजिटिव रिस्पॉन्स देखकर काफी इमोशनल हो गए थे. यह 'ब्रह्मास्त्र' का पहला फैन शो था. यह लड़का ट्रोल हुआ और इसे अब्यूज भी किया गया, लेकिन इसने अपना काम नहीं रोका. यह मेहनत करता रहा. अब नंबर्स और कमाई बताएगी कि आखिर अयान मुखर्जी ने फिल्म के पीछे कितनी मेहनत की है. यह खुशियां डिजर्व करता है.
'ब्रह्मास्त्र' के ओपनिंग बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो यह पहले ही दिन काफी इंप्रेसिव रहा. करण जौहर ने फिल्म को प्रोड्यूस किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए फैन्स को बताया कि 'ब्रह्मास्त्र' ने 75 करोड़ से ओपनिंग की है. पिछले जितने भी समय से बॉलीवुड में फिल्में कमाई नहीं कर रही थीं. ऐसे में करण जौहर और अयान मुखर्जी की यह फिल्म रामबाण साबित हुई है. पहले ही दिन इस फिल्म के कलेक्शन ने कई रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं. पहले ही दिन डोमेस्टिक लेवल पर 'ब्रह्मास्त्र' ने 36 करोड़ रुपये कमाए हैं. वीकेंड पर तो इसके और भी अच्छा परफॉर्म करने की बात सामने आ रही है.
| फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. फैन्स के बीच जोरों-शोरों से इस फिल्म को लेकर क्रेज देखा जा रहा है. हर कोई इसे आईमैक्स तीनडी में देखना प्रिफर कर रहा है. फिल्म में शानदार वीएफएक्स का इस्तेमाल हुआ है. नौ सितंबर को तो फिल्म रिलीज हुई है. इससे पहले फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई थी, जहां फिल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी, स्टार कास्ट में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के अलावा कई बॉलीवुड सेलेब्स और फैन्स मौजूद थे. इस स्पेशल स्क्रीनिंग से अयान मुखर्जी की एक फोटो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. फोटो में अयान मुखर्जी को काफी इमोशनल होते देखा जा सकता है. स्टेज पर ऑडियन्स संग बातचीत में अयान चेयर पर बैठे हैं और साथ में रणबीर कपूर बैठे नजर आ रहे हैं. फोटो में साफ देखा जा सकता है कि ऑडियन्स के फिल्म देखने के बाद के रिएक्शन को देखकर अयान रो रहे हैं. अयान मुखर्जी की यह फोटो एक ट्विटर यूजर ने शेयर की है जो वहां पर मौजूद था. I had not shared this picture yet , but I will share it now. Ayan mukerji was crying tears of happiness after First Fan show of #Brahmastra. This Guy was trolled and abused but he didnt stop his work. Now numbers justify it. यूजर ने अयान मुखर्जी की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि मैंने पहले तो यह फोटो शेयर नहीं की थी, लेकिन अब कर रहा हूं. अयान मुखर्जी फिल्म का पॉजिटिव रिस्पॉन्स देखकर काफी इमोशनल हो गए थे. यह 'ब्रह्मास्त्र' का पहला फैन शो था. यह लड़का ट्रोल हुआ और इसे अब्यूज भी किया गया, लेकिन इसने अपना काम नहीं रोका. यह मेहनत करता रहा. अब नंबर्स और कमाई बताएगी कि आखिर अयान मुखर्जी ने फिल्म के पीछे कितनी मेहनत की है. यह खुशियां डिजर्व करता है. 'ब्रह्मास्त्र' के ओपनिंग बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो यह पहले ही दिन काफी इंप्रेसिव रहा. करण जौहर ने फिल्म को प्रोड्यूस किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए फैन्स को बताया कि 'ब्रह्मास्त्र' ने पचहत्तर करोड़ से ओपनिंग की है. पिछले जितने भी समय से बॉलीवुड में फिल्में कमाई नहीं कर रही थीं. ऐसे में करण जौहर और अयान मुखर्जी की यह फिल्म रामबाण साबित हुई है. पहले ही दिन इस फिल्म के कलेक्शन ने कई रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं. पहले ही दिन डोमेस्टिक लेवल पर 'ब्रह्मास्त्र' ने छत्तीस करोड़ रुपये कमाए हैं. वीकेंड पर तो इसके और भी अच्छा परफॉर्म करने की बात सामने आ रही है. |
Jammu, 13 September: भारी भूस्खलन की वजह से दो दिनों तक बंद रहने के बाद 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को आज हल्के मोटर वाहनों के लिए फिर से खोल दिया गया है.
एक यातायात अधिकारी ने बताया कि हल्के वाहनों को अब सुबह पांच बजे से रात 10 बजे तक नगरोटा से श्रीनगर की ओर और सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक लेवडोरा से काजीकुंड की ओर जाने की अनुमति दी गयी है. यात्री जम्मू को कश्मीर से जोड़ने वाली जवाहर सुरंग से दोपहर तीन बजे तक पार कर सकेंगे. सभी मौसम में कश्मीर को देश के शेष हिस्सों से जोड़ने वाले राजमार्ग को 11 सितंबर को बंद कर दिया गया था. उधमपुर जिले में मोढ़ पासी में एक भारी भूस्खलन के कारण एक पुल को नुकसान पहुंचने और सड़क बंद होने के कारण यातायात को रोका गया था.
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी हालात में भूस्खलन संभावित या संवेदनशील क्षेत्रों में वाहन खड़े नहीं किये जायें.
| Jammu, तेरह सितंबरtember: भारी भूस्खलन की वजह से दो दिनों तक बंद रहने के बाद तीन सौ किलोग्राममीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को आज हल्के मोटर वाहनों के लिए फिर से खोल दिया गया है. एक यातायात अधिकारी ने बताया कि हल्के वाहनों को अब सुबह पांच बजे से रात दस बजे तक नगरोटा से श्रीनगर की ओर और सुबह दस बजे से दोपहर तीन बजे तक लेवडोरा से काजीकुंड की ओर जाने की अनुमति दी गयी है. यात्री जम्मू को कश्मीर से जोड़ने वाली जवाहर सुरंग से दोपहर तीन बजे तक पार कर सकेंगे. सभी मौसम में कश्मीर को देश के शेष हिस्सों से जोड़ने वाले राजमार्ग को ग्यारह सितंबर को बंद कर दिया गया था. उधमपुर जिले में मोढ़ पासी में एक भारी भूस्खलन के कारण एक पुल को नुकसान पहुंचने और सड़क बंद होने के कारण यातायात को रोका गया था. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी हालात में भूस्खलन संभावित या संवेदनशील क्षेत्रों में वाहन खड़े नहीं किये जायें. |
Meerut। अपने लाख दावों और कोशिशों के बाद भी मेरठ सिटी स्टेशन देशभर के रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता के लिए जारी रैंकिंग में पिछड़ते हुए पिछले साल से भी 77 अंक पीछे चल गया। इस बार देश भर के सिटी स्टेशनों की रैंकिंग में मेरठ को 166वां स्थान प्राप्त हुआ है जबकि पिछले साल मेरठ 89वें पायदान पर था। उम्मीद की जा रही थी कि मेरठ इस बार टॉप 50 में शामिल होगा, लेकिन ऐसा होना तो दूर टॉप 100 में भी मेरठ अपनी जगह नही बना सका।
इस सर्वेक्षण के तहत देश के 720 स्टेशनों को शामिल किया गया था। जिसमें ए1 ग्रेड वाले मेरठ सिटी स्टेशन को शामिल किया गया था। रेलवे साल 2016 से हर साल स्वच्छ स्टेशनों के लेकर सर्वे करवाता है। रेलवे की तरफ से देश के बड़े स्टेशनों के लिए यह सर्वे थर्ड पार्टी ऑडिट और स्वच्छता रैंकिंग पर आधारित होता है। इस साल सर्वे में पहली बार 720 स्टेशन और उप नगरीय रेलवे स्टेशनों को भी शामिल किया गया था। सर्वे में एनजीटी के मूल्यांकन को भी शामिल किया गया था।
रैंकिंग में प्लेटफॉर्म पर ओपन सिटिंग एरिया, वेंडर एरिया, शौचालय, पीने के पानी के बूथ, वेटिंग रूम, रेलवे ट्रैक की सफाई को भी शामिल किया गया। इसके अलावा टिकट काउंटर की सफाई समेत अंतिम चरण में शामिल यात्रियों का फीड बैक भी लिया गया संभावना जताई जा रही है यात्रियों के फीडबैठ से मेरठ की रैंकिंग डाउन हुई है। स्टेशन परिसर में साल भर से बंद पड़ी लिफ्ट, एक्सरलेटर, वाटर आरओ, टिकट वेंडिंग मशीन, डिस्पले बोर्ड आदि इस सर्वे में रैंकिंग डाउन होने का प्रमुख कारण रही हैं।
सर्वे में ए1 कैटेगरी में उन स्टेशनों को शामिल किया जाता है जहां से वार्षिक यात्री राजस्व 50 करोड़ से अधिक होता है। वहीं ए कैटेगरी में 6-50 करोड़ वार्षिक यात्री राजस्व वाले स्टेशनों को रखा जाता है। इसमें स्टेशन का पार्किंग एरिया, रेलवे स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार पर साफ सफाई, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज के साथ ही रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम की साफ सफाई आदि शामिल था। जिसके लिए मेरठ में दो बार टीम द्वारा बारिकी से निरीक्षण कर मार्किंग की गई थी।
पूरी कोशिश की गई थी। साफ-सफाई भी पहले से बेहतर है लेकिन किन मानकों पर मेरठ स्टेशन पीछे रहा, उनकी जानकारी लेकर सुधार करने का प्रयास किया जाएगा।
| Meerut। अपने लाख दावों और कोशिशों के बाद भी मेरठ सिटी स्टेशन देशभर के रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता के लिए जारी रैंकिंग में पिछड़ते हुए पिछले साल से भी सतहत्तर अंक पीछे चल गया। इस बार देश भर के सिटी स्टेशनों की रैंकिंग में मेरठ को एक सौ छयासठवां स्थान प्राप्त हुआ है जबकि पिछले साल मेरठ नवासीवें पायदान पर था। उम्मीद की जा रही थी कि मेरठ इस बार टॉप पचास में शामिल होगा, लेकिन ऐसा होना तो दूर टॉप एक सौ में भी मेरठ अपनी जगह नही बना सका। इस सर्वेक्षण के तहत देश के सात सौ बीस स्टेशनों को शामिल किया गया था। जिसमें एएक ग्रेड वाले मेरठ सिटी स्टेशन को शामिल किया गया था। रेलवे साल दो हज़ार सोलह से हर साल स्वच्छ स्टेशनों के लेकर सर्वे करवाता है। रेलवे की तरफ से देश के बड़े स्टेशनों के लिए यह सर्वे थर्ड पार्टी ऑडिट और स्वच्छता रैंकिंग पर आधारित होता है। इस साल सर्वे में पहली बार सात सौ बीस स्टेशन और उप नगरीय रेलवे स्टेशनों को भी शामिल किया गया था। सर्वे में एनजीटी के मूल्यांकन को भी शामिल किया गया था। रैंकिंग में प्लेटफॉर्म पर ओपन सिटिंग एरिया, वेंडर एरिया, शौचालय, पीने के पानी के बूथ, वेटिंग रूम, रेलवे ट्रैक की सफाई को भी शामिल किया गया। इसके अलावा टिकट काउंटर की सफाई समेत अंतिम चरण में शामिल यात्रियों का फीड बैक भी लिया गया संभावना जताई जा रही है यात्रियों के फीडबैठ से मेरठ की रैंकिंग डाउन हुई है। स्टेशन परिसर में साल भर से बंद पड़ी लिफ्ट, एक्सरलेटर, वाटर आरओ, टिकट वेंडिंग मशीन, डिस्पले बोर्ड आदि इस सर्वे में रैंकिंग डाउन होने का प्रमुख कारण रही हैं। सर्वे में एएक कैटेगरी में उन स्टेशनों को शामिल किया जाता है जहां से वार्षिक यात्री राजस्व पचास करोड़ से अधिक होता है। वहीं ए कैटेगरी में छः-पचास करोड़ वार्षिक यात्री राजस्व वाले स्टेशनों को रखा जाता है। इसमें स्टेशन का पार्किंग एरिया, रेलवे स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार पर साफ सफाई, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज के साथ ही रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम की साफ सफाई आदि शामिल था। जिसके लिए मेरठ में दो बार टीम द्वारा बारिकी से निरीक्षण कर मार्किंग की गई थी। पूरी कोशिश की गई थी। साफ-सफाई भी पहले से बेहतर है लेकिन किन मानकों पर मेरठ स्टेशन पीछे रहा, उनकी जानकारी लेकर सुधार करने का प्रयास किया जाएगा। |
छोटे बच्चों के लिए स्वेटर आदि बनाने के लिए महिलाएं खरीद रहीं ऊन। दुकानदारों ने निकाला पुराना माल दीपावली बाद आएगा नया स्टाक। नवंबर की शुरुआत से ही ठंडक का एहसास होने लगा था। सुबह- शाम की ठंडक ने लोगों को गर्म कपड़े पहना दिए।
आगरा, जागरण संवाददाता। पिछले कई दिनों से बढ़ी ठंडक ने बाजार में गर्म कपड़ों व ऊनी सामान की मांग बढ़ा दी है। ऊन विक्रेताओं के यहां महिलाओं की भीड़भाड़ नजर आ रही है। महिलाएं अपने छोटे बच्चों के लिए भी ऊनी कपड़े खरीद रही हैं।
नवंबर की शुरुआत से ही ठंडक का एहसास होने लगा था। सुबह- शाम की ठंडक ने लोगों को गर्म कपड़े पहना दिए। पिछले एक हफ्ते से सुबह और रात के समय होने वाली धुंध और घटते तापमान के कारण लोगों को सर्दी की दस्तक का अहसास हुआ है। लोगों को सर्दी से बचाव की जितनी अपनी चिंता है, उससे कहीं ज्यादा वह बच्चों के लिए मौसम के लिहाज से संवेदनशील हो रहे हैं। जहां बक्सों से पुराने गर्म कपड़े निकल आए हैं। वहीं जरूरत के अनुसार नए गर्म कपड़ों की भी तैयारी होने लगी है। राजामंडी, बोदला और बिजलीघर में ऊन विक्रेताओं के यहां पिछले एक सप्ताह से महिलाओं की भीड़ लग रही है। महिलाएं ज्यादा सर्दी शुरू होने से पहले ही बच्चों के लिए ऊनी कपड़े तैयार करने के लिए ऊन खरीद रही हैं। उधर बच्चों के लिए बाजार में रेडीमेड ऊनी कपड़ों की भरमार दिख रही है। इनर, ऊनी टोपी, छोटे स्वेटर, ऊनी पाजामा आदि काफी बिक रहे हैं। ऊनी कपड़ों के विक्रेता दिनेश कुमार ने बताया कि अभी तो पुराना ही माल निकाला है, दीपावली के बाद नया माल आएगा।
हल्की सर्दियों के लिए सबसे ज्यादा मांग स्वेट शर्ट व वूलन टाप की है। स्वेट शर्ट की कीमत जहां 500 से एक हजार रुपये तक है वहीं वूलन टाप 250 से 800 रुपये तक है। इसके अलावा वूलन श्रग 450 से 700 रुपये, पोंचू 800 से 1000 रुपये में नए डिजाइन में उपलब्ध है।
| छोटे बच्चों के लिए स्वेटर आदि बनाने के लिए महिलाएं खरीद रहीं ऊन। दुकानदारों ने निकाला पुराना माल दीपावली बाद आएगा नया स्टाक। नवंबर की शुरुआत से ही ठंडक का एहसास होने लगा था। सुबह- शाम की ठंडक ने लोगों को गर्म कपड़े पहना दिए। आगरा, जागरण संवाददाता। पिछले कई दिनों से बढ़ी ठंडक ने बाजार में गर्म कपड़ों व ऊनी सामान की मांग बढ़ा दी है। ऊन विक्रेताओं के यहां महिलाओं की भीड़भाड़ नजर आ रही है। महिलाएं अपने छोटे बच्चों के लिए भी ऊनी कपड़े खरीद रही हैं। नवंबर की शुरुआत से ही ठंडक का एहसास होने लगा था। सुबह- शाम की ठंडक ने लोगों को गर्म कपड़े पहना दिए। पिछले एक हफ्ते से सुबह और रात के समय होने वाली धुंध और घटते तापमान के कारण लोगों को सर्दी की दस्तक का अहसास हुआ है। लोगों को सर्दी से बचाव की जितनी अपनी चिंता है, उससे कहीं ज्यादा वह बच्चों के लिए मौसम के लिहाज से संवेदनशील हो रहे हैं। जहां बक्सों से पुराने गर्म कपड़े निकल आए हैं। वहीं जरूरत के अनुसार नए गर्म कपड़ों की भी तैयारी होने लगी है। राजामंडी, बोदला और बिजलीघर में ऊन विक्रेताओं के यहां पिछले एक सप्ताह से महिलाओं की भीड़ लग रही है। महिलाएं ज्यादा सर्दी शुरू होने से पहले ही बच्चों के लिए ऊनी कपड़े तैयार करने के लिए ऊन खरीद रही हैं। उधर बच्चों के लिए बाजार में रेडीमेड ऊनी कपड़ों की भरमार दिख रही है। इनर, ऊनी टोपी, छोटे स्वेटर, ऊनी पाजामा आदि काफी बिक रहे हैं। ऊनी कपड़ों के विक्रेता दिनेश कुमार ने बताया कि अभी तो पुराना ही माल निकाला है, दीपावली के बाद नया माल आएगा। हल्की सर्दियों के लिए सबसे ज्यादा मांग स्वेट शर्ट व वूलन टाप की है। स्वेट शर्ट की कीमत जहां पाँच सौ से एक हजार रुपये तक है वहीं वूलन टाप दो सौ पचास से आठ सौ रुपयापये तक है। इसके अलावा वूलन श्रग चार सौ पचास से सात सौ रुपयापये, पोंचू आठ सौ से एक हज़ार रुपयापये में नए डिजाइन में उपलब्ध है। |
पीएम मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है. करोड़ों किसानों की आजीविका दूध पर निर्भर करती है. सालाना 8.5 लाख करोड़ रुपए मूल्य का दूध उत्पादन हो रहा है, जिस पर बड़े अर्थशास्त्रियों सहित कई लोग ध्यान नहीं देते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि भारत सालाना 8.5 लाख करोड़ रुपए की कीमत का दूध का उत्पादन करता है, जो गेहूं और चावल की पैदावार से अधिक है. छोटे किसान डेयरी (Dairy) क्षेत्र के सबसे बड़े लाभार्थी हैं. पीएम मोदी ने परोक्ष रूप से कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक पूर्व प्रधानमंत्री कहा करते थे कि दिल्ली से जारी होने के बाद एक रुपए में से केवल 15 पैसे (लाभार्थियों तक) पहुंचते हैं, लेकिन वह (मोदी) यह सुनिश्चित करते हैं कि पूरा 100 पैसा लाभार्थियों तक पहुंचे और किसानों (Farmers) के खाते में जमा किया जाए.
उन्होंने कहा, 'गांवों की विकेन्द्रीकृत अर्थव्यवस्था प्रणाली इसका एक उदाहरण है. इसके विपरीत, गेहूं और चावल की पैदावार भी 8.5 लाख करोड़ रुपए दूध उत्पादन के बराबर नहीं है और छोटे किसान डेयरी क्षेत्र के सबसे बड़े लाभार्थी हैं.' उन्होंने बनास डेयरी की कई अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.
पीएम मोदी ने कहा, 'दिल्ली जाने के बाद (2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद) मैंने देशभर के छोटे किसानों की जिम्मेदारी संभाली और आज मैं साल में तीन बार किसानों के बैंक खातों में 2,000 रुपए हस्तांतरित करता हूं.' उन्होंने कहा कि बनास डेयरी के नए डेयरी परिसर और आलू प्रसंस्करण संयंत्र का उद्देश्य स्थानीय किसानों को सशक्त बनाना और क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है.
बनास डेयरी का नया परिसर और आलू प्रसंस्करण संयंत्र 600 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनाया गया है. इसका मकसद प्रतिदिन लगभग 30 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण, लगभग 80 टन मक्खन, एक लाख लीटर आइसक्रीम, 20 टन खोया और छह टन चॉकलेट का उत्पादन करना है. आलू प्रसंस्करण संयंत्र में फ्रेंच फ्राइज, आलू के चिप्स, आलू टिक्की आदि जैसे उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा जिनमें से कई उत्पाद अन्य देशों को निर्यात किए जाएंगे.
प्रधानमंत्री ने बनास सामुदायिक रेडियो स्टेशन, पालनपुर में पनीर उत्पादों एवं मट्ठा पाउडर के उत्पादन के लिए विस्तारित सुविधाओं और दामा में स्थापित जैविक खाद एवं बायोगैस संयंत्र को भी राष्ट्र को समर्पित किया. उन्होंने चार अलग-अलग स्थानों पर स्थापित होने वाले 100 टन क्षमता के चार गोबर गैस संयंत्रों की आधारशिला भी रखी.
| पीएम मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है. करोड़ों किसानों की आजीविका दूध पर निर्भर करती है. सालाना आठ.पाँच लाख करोड़ रुपए मूल्य का दूध उत्पादन हो रहा है, जिस पर बड़े अर्थशास्त्रियों सहित कई लोग ध्यान नहीं देते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सालाना आठ.पाँच लाख करोड़ रुपए की कीमत का दूध का उत्पादन करता है, जो गेहूं और चावल की पैदावार से अधिक है. छोटे किसान डेयरी क्षेत्र के सबसे बड़े लाभार्थी हैं. पीएम मोदी ने परोक्ष रूप से कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक पूर्व प्रधानमंत्री कहा करते थे कि दिल्ली से जारी होने के बाद एक रुपए में से केवल पंद्रह पैसे पहुंचते हैं, लेकिन वह यह सुनिश्चित करते हैं कि पूरा एक सौ पैसा लाभार्थियों तक पहुंचे और किसानों के खाते में जमा किया जाए. उन्होंने कहा, 'गांवों की विकेन्द्रीकृत अर्थव्यवस्था प्रणाली इसका एक उदाहरण है. इसके विपरीत, गेहूं और चावल की पैदावार भी आठ.पाँच लाख करोड़ रुपए दूध उत्पादन के बराबर नहीं है और छोटे किसान डेयरी क्षेत्र के सबसे बड़े लाभार्थी हैं.' उन्होंने बनास डेयरी की कई अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. पीएम मोदी ने कहा, 'दिल्ली जाने के बाद मैंने देशभर के छोटे किसानों की जिम्मेदारी संभाली और आज मैं साल में तीन बार किसानों के बैंक खातों में दो,शून्य रुपयापए हस्तांतरित करता हूं.' उन्होंने कहा कि बनास डेयरी के नए डेयरी परिसर और आलू प्रसंस्करण संयंत्र का उद्देश्य स्थानीय किसानों को सशक्त बनाना और क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है. बनास डेयरी का नया परिसर और आलू प्रसंस्करण संयंत्र छः सौ करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनाया गया है. इसका मकसद प्रतिदिन लगभग तीस लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण, लगभग अस्सी टन मक्खन, एक लाख लीटर आइसक्रीम, बीस टन खोया और छह टन चॉकलेट का उत्पादन करना है. आलू प्रसंस्करण संयंत्र में फ्रेंच फ्राइज, आलू के चिप्स, आलू टिक्की आदि जैसे उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा जिनमें से कई उत्पाद अन्य देशों को निर्यात किए जाएंगे. प्रधानमंत्री ने बनास सामुदायिक रेडियो स्टेशन, पालनपुर में पनीर उत्पादों एवं मट्ठा पाउडर के उत्पादन के लिए विस्तारित सुविधाओं और दामा में स्थापित जैविक खाद एवं बायोगैस संयंत्र को भी राष्ट्र को समर्पित किया. उन्होंने चार अलग-अलग स्थानों पर स्थापित होने वाले एक सौ टन क्षमता के चार गोबर गैस संयंत्रों की आधारशिला भी रखी. |
सागर पुलिस ने बस स्टैंड के पास यात्री प्रतीक्षालय से गांजे के साथ दो आरोपियों को दबोचा है। आरोपी भिंड से गांजा लेकर सागर में बेचने के लिए पहुंचे थे। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार बस स्टैंड पर गांजे के साथ दो संदिग्धों के खड़े होने की सूचना मखुबिर से मिली थी। सूचना मिलते ही गोपालगंज थाना की टीम कार्रवाई के लिए रवाना हुई। टीम बस स्टैंड के पास पहुंची तो संदिग्ध युवक यात्री प्रतिक्षालय के पास गांजा बेचने की फिराक में खड़े हुए थे।
पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को धरदबोचा। पूछताछ की तो उन्होंने अपना नाम मानवेन्द्र सिंह पुत्र रामप्रताप कौरव उम्र 28 साल और रामराजा पिता रणवीर कौरव उम्र 22 साल दोनों निवासी ग्राम मारपुरा जिला भिंड बताया। उनके पास से जब्त बैग की तलाशी ली गई तो उसमें से 3 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद हुआ, जो आरोपी सागर में बेचने के लिए लेकर आए थे। गांजा जब्त होने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और थाने लेकर पहुंची। गोपालगंज थाना प्रभारी सतीश सिंह ने बताया कि आरोपी मानवेंद्र और रामराजा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया है। आरोपियों से गांजे के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
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| सागर पुलिस ने बस स्टैंड के पास यात्री प्रतीक्षालय से गांजे के साथ दो आरोपियों को दबोचा है। आरोपी भिंड से गांजा लेकर सागर में बेचने के लिए पहुंचे थे। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार बस स्टैंड पर गांजे के साथ दो संदिग्धों के खड़े होने की सूचना मखुबिर से मिली थी। सूचना मिलते ही गोपालगंज थाना की टीम कार्रवाई के लिए रवाना हुई। टीम बस स्टैंड के पास पहुंची तो संदिग्ध युवक यात्री प्रतिक्षालय के पास गांजा बेचने की फिराक में खड़े हुए थे। पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को धरदबोचा। पूछताछ की तो उन्होंने अपना नाम मानवेन्द्र सिंह पुत्र रामप्रताप कौरव उम्र अट्ठाईस साल और रामराजा पिता रणवीर कौरव उम्र बाईस साल दोनों निवासी ग्राम मारपुरा जिला भिंड बताया। उनके पास से जब्त बैग की तलाशी ली गई तो उसमें से तीन किलो छः सौ ग्राम गांजा बरामद हुआ, जो आरोपी सागर में बेचने के लिए लेकर आए थे। गांजा जब्त होने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और थाने लेकर पहुंची। गोपालगंज थाना प्रभारी सतीश सिंह ने बताया कि आरोपी मानवेंद्र और रामराजा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया है। आरोपियों से गांजे के संबंध में पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
हमने उनसे कहा कि इस्लाम में औरतों को ऐसे हक़ भी दिए हैं जो हमें नहीं पता था। तो फिर उन्होंने कहा कि इन तरीकों के बारे में मुस्लिम समाज में 90 या 95% लोगों को नहीं मालूम है। इस्लामिक विद्वान् या मौलाना इसके बारे में बहुत ही कम बताते हैं।
तलाक-ए-तफवीज़ :इस तरीके में ललड़की निकाह के वक़्त ही शर्त रख कर निकाहनामे पर लिखवा सकती है कि शादी के बाद अगर लड़का उसकी जरूरतों पर पूरा नहीं उतर या वो उसके काबिल नही है तो वो लड़की तलाक़ ले सकती है (क्योंकि ऐसा होता है कि लड़के में कमी या गलत होने पर भी वो लोग तलाक़ नही देते है) तो ऐसी हालातो में वो इस तरीके से तलाक़ ले सकती है ।
फसख - ए - निकाह :फसख-ए-निक़ाह का मतलब निकाह को तोड़ना (शरीयत कोर्ट के क़ाज़ी के जरिये निकाह को तोड़ना)। इस तरीके में लड़की को उसके ससुराल में कुछ दिक्कत है, वो नही रहना चाहती है और उसका शौहर उसे तलाक़ नही दे रहा या उसका शौहर कई सालों से लापता है, उसके बारे में कुछ भी खबर नही तो इन सूरतो में वो लड़की शरियत कोर्ट जा सकती है और वह क़ाज़ी से मदद ले सकती है लेकिन इन सब के लिए उसके कोई ठीक वजह होनी चाहिए। अगर सचमे ऐसा लगता है की औरत अपने रिश्ते में नहीं रह सकती तब क़ाज़ी दोनो का निकाह तोड़ देता है।
सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक़ पर फैसला :तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आवाज़-ए-निस्वा (AEN) खुश है और उसे मानता भी है आवाज़-ए-निस्वा का कहना कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वो बहुत ही सही फैसला है ये कानून बहुत पहले आना चाहिए था लेकिन अब आया है तो भी सही है इससे बहुत सी लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद होने से बच जाएगी। एक झटके में तीन तलाक़ की वजह से लड़कियों की ज़िंदगियां बर्बाद हो जाती है। तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले लोग डरेंगे और ये तलाक़ नही नही देंगे। ऐसा आवाज़ ए निस्वा का मानना है । आवाज़-ए-निस्वा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता है लेकिन बिल (तीन तलाक़ देने वालो को तीन साल की सज़ा) के खिलाफ है उनक कहना है कि सज़ा थोड़ी कम होनी चाहिए तीन साल बहुत ज्यादा है और इसे क्रिमिनल लॉ में नही सिविल लॉ के तहत रखना चाहिये ।
#आवाज़ ए निस्वा से चर्चा करके हमारे ग्रुप को बहुत सी जानकारि मिली जो हमे पहले नही मालूम थी और हमे पता चला कि वो औरतो के लिए कैसे काम करता है उन्हें उनका हक दिलाता है। उनके पास तीन तलाक़शुदा कुछ औरतो के केसेस थे उसके बारे में भी बताया कि कैसे उनके मसले को हल किया। और हमे एक तीन तलाक़शुदा महिला से बात करने का मौका भी दिया जो हमारे रिसर्च के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। उससे हमे काफी कुछ जानने मिला की एक तलाक़शुदा औरत को काफी कुछ परेशानियां झेलनी पड़ती है।
आवाज़ - ए - निस्वा से बात करके हमे हमारे रिसर्च में काफी मदद मिली।
रज़िया पटेल
मुस्लिम समाज के आम लोगो के सर्वेक्षण द्वारा हमे उनकी राय मालूम हुई। हर समाज और कम्युनिटी में लोगो की राय उनके तबके और प्रोफेशन के हिसाब से अलग अलग होती है, उनकी सोच विचार अलग होते है, इसलिए हमने 413 मुस्लिम लोगों का सर्वे करने के साथ साथ हमने सोचा कि इस मुद्दे को लेकर एक्सपर्ट्स से भी बातचीत करनी चाहिए इसलिए हमने रज़िया पटेल जी से तीन तलाक़ इस विषय पर बातचीत की ।
रज़िया पटेल जी मुस्लिम धर्मीय समाजिक कार्यकर्ता हैं। जो मुस्लिम समाज के लिए मुस्लिम कम्युनिटी में शिक्षा, औरतों की परेशानी, गरीबी और उनमें शिक्षा इतनी कम क्यों है इस तरह के सभी मुद्दों पर समग्र रहकर काम करती हैं ।
हमने उनसे तीन तलाक़ के मुद्दे से जुड़ी बात की। बातचीत के दौरान रज़िया पटेल ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) मुसलमानों को रिप्रेजेंट करने के लिए नहीं हैं वह भी एक संस्था की तरह ही है। उनका कहना है की ऑल इंडिया मुलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और तीन तलाक़ देने के ऊपर तीन साल की सजा इस बिल का विरोध किया है। लेकिन उन्होंने रैली में बिल की बात ही नही की रैली में उनका नारा था शरीयत बचाओ " इसके बदले वो बिल में सुधार लाने की बात कर सकते थे उनकी रैली में हज़ारों महिलाएँ थी वे बिल में सुधार लाने की बात कर सकते थे ।
रज़िया पटेल जी कहती हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक़ के केस सामने आ रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि इसमे सरकार कि कही न कही खामी नज़र आती है। रज़िया पटेल जी का कहना है कि इस केस को DOMESTIC VIOLENCE ACT के तहत सुलझाना चहिए। रज़िया पटेल जी के हिसाब से बिल को क्रिमीनलाइज करने की ज़रूरत नही थी। नॉन मुस्लिम्स के कानून तो क्रिमिनलाइज नही किए है तो यहाँ पर क्रिमीनलाइज करने की क्या वजह है। सजा के बदले आपसी समझौता और बातचीत के लिए स्पेस होना चाहिए। वो कहती हैं कि भारतीय समाज में बहुत सी औरतों को उनके पति ने ऐसे ही छोड़ दिया हैं इसलिए सभी औरतों के लिए कुछ करना चाहिए ।
रज़िया पटेल जी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती हैं लेकिन तीन तलाक़ के बिल का विरोध करती हैं उनके हिसाब से तीन साल की सजा गलत है इससे औरत का क्या फायदा होगा, उसका खर्च कहा से आएगा। रज़िया पटेल जी ने बिल का विरोध करते ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि इस बिल का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। हो सकता है कोई बदला लेने के लिए उस इंसान के मोबाइल से उसकी बीवी को तलाक दे। इस तरह में असल मे तो शौहर ने तलाक दी ही नही किसी और ने उसके फोन से दी। लेकिन इस बिल के हिसाब से तो उस बेगुनाह को सजा हो जाएगी वो भी Non-Bailable इससे उसका पूरा परिवार परेशानी में आ जाएगा ।
रज़िया पटेल जी कहती हैं कि तलाक ए बिद्दत का प्रमान बहुत ही कम है लेकिन देश कि किसी एक औरत के साथ भी ऐसे होता है तो उसे न्याय मिलना चहिये और उसके लिए कानून ठीक बनाने पड़ेंगे या फिर शरीयत के हिसाब से तलाक़ के और सही तरीकों को लाना चाहिए। वे कहती हैं कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कॉउंसलिंग सेशंस भी कर सकते थे। रज़िया पटेल जी कहती हैं कि जिन्हें फैमिली या धर्म के हिसाब से शादी नही करनी है तो वे SPECIAL MARRIAGE ACT के तहत शादी कर सकते हैं जिसमे औरतों के सभी हक़ होते हैं। उनका कहना हैं कि मुस्लिम समाज के लोगो में जागरूकता कम है। उनमें जागरूकता तब आएगी जब सरकार उनके बीच जाकर साक्षरता और गरीबी पर काम करेगी। उनके सुख दुख में काम आएगी। उनके बच्चों के लिए आज समाज मे दो घंटे देने वाला कोई नही है। इन सब लेवल पर काम करना चाहिए तभी वे विश्वास कर पाएंगे। लेकिन अगर सरकार ने आजतक उनके लिए कुछ नही किया, उनके सुख दुख में काम नही आई और अचानक से औरतों को हक़ दिलाने की बात कर रही है, तो इससे उनमे क्या विश्वास होगा? उनमे केवल डर होगा की उन्हें टारगेट तो नहीं किया जा रहा है उनके शौहर को ही जेल में डाल देंगे तो उससे उस औरत का क्या फायदा होगा। इसका तो मतलब सिर्फ यही होता है की शौहर ने तलाक दी तो बदला लेने के लिए उसे सजा होगी क्योंकि इससे औरत को कोई समर्थन तो नही मिल रहा है। कठुआ केस में AIMPLB नही किया। अगर ईन सब मुद्दों की आड़ में हिन्दू मुस्लिम पॉलिटिक्स खेलेंगे तो इसका तो गलत असर होगा कि ये देश विराधी हैं देश का कानून नही मानते, इसलिए अगर औरतो के
कुछ किया जाता है तो उस लेवल पर ही करना चाहिए। वे कहती हैं कि बाकी देशों में तलाक ए बिद्दत बैन है लेकिन हमारे देश में अब तक नही क्योंकि यहां पर पूरी राजनीति हैं। रजिया पटेल से मिलकर हमने यह जाना की असल में सरकार को सिर्फ तीन तलाक़ ही नहीं बल्कि और भी दूसरे मुद्दों पर अपना रुख मोड़ना चाहिए और अगर सरकार सचमें औरतों के हकों के लिए काम करना चाहती है तो उन्हें सभी धर्मों के औरतों के बारे में सोचना चाहिए।
INDIAN INSTITUTE OF EDUCATION
राम पुनियानी ANAIRA AKsawa
WHEN YOU CAN TS A CHEAP
मुस्लिम समाज के आम लोगो के सर्वेक्षणे द्वारा हमे उनकी राय मालूम हुई और क्योंकि समाज में लोगो की राय उनके तबके और प्रोफेशन के हिसाब से अलग अलग होती उनकी सोच विचार अलग होते है इसलिए 413 मुस्लिम औरत और मर्द का सर्वे करने के साथ साथ हमने सोचा कि इस मुद्दे को लेकर एक्सपर्ट्स से भी बातचीत करनी चाहिए इसलिए हमने राम पुनियानी जी से बातचीत की।
हम कुछ राम पुनियानी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) मुंबई के साथ संबंधित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के एक पूर्व प्रोफ़ैसर और पूर्व सीनियर मेडिकल अफ़सर है। उन्होंने 1973 में अपना मेडिकल करियर शुरू किया और 1977 से शुरू करके 27 साल के लिए विभिन्न सामर्थ्य में आईआईटी की सेवा की। 2004 में उन्होंने भारत में सांप्रदायिक सद्भावना के लिए पूर्णकालिक कार्य करने की इच्छा के साथ सेवा से मुक्ति ले ली। वह मानवाधिकारों के लिए सरगर्मियों,
सांप्रदायिक सद्भावना और भारत में बढ़ रहे कट्टरवाद का विरोध करने के लिए पहलकदमियों में जुटे हुए है।
राम पुनियानी जी से जब हमने अपने विषय के बारे में बात चीत की हमें पता चलता है की वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं किंतु उनका यह भी सवाल था कि क्या सचमे मुस्लिम समाज मे तीन तलाक़ की यह सुविधा होने के कारण इस क़ौम में तलाक का प्रमाण ज़्यादा दिखता है इसके लिए उन्होंने कहा कि जबसे ये तलाक़ बन हुआ है तब से अबतक के टाइम गैप में यह देखना होगा कि इस टाइम पीरियड में बाकी धर्मो मे कितने तलाक़ के केस हुए तो इससे हमें पता चलेगा कि क्या ट्रिपल तलाक़ की वजह से इस कम्युनिटी में तलाक का प्रमाण ज़्यादा है जिस के कारण तलाक ज्याद होता है हम इसकी तुलना कर सकते हैं हिंदू धर्म और दूसरे धर्मों से हो रहे तलाक की संख्या और उसी वक्त में मुस्लिम समाज में तलाक से इतना ही नहीं तलाक के बाद औरत का क्या होता है उसे भी दूसरे धर्म से तुलना करनी चाहिए और कितने लोग सिविल कोर्ट से तलाक लेते हैं या ऐसे ही छोड़ देते हैं उन की संख्या क्या है । अगर यह सब हमें मुस्लिम समाज में ज्यादा दिखाई देता है तो हम कह सकते हैं कि लोग तीन तलाक का फायदा उठा रहे या यह कहा जा सकता है कि मुस्लिम मर्द अपनी औरतों पर अत्याचार करते हैं राम पुनियानी जी से बात करने पर पता चला कि उनके नजदीक तीन तलाक पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है क्योंकि यह तलाक जो तलाक- एबिद्दत कहलाती है कुरआन शरीफ में भी नहीं है और कई मुस्लिम देशों में भी बंद है। लेकिन साथ ही तीन साल की सजा के बारे में उनका कहना था कि यह बिल्कुल गलत काम इसमें मुस्लिम महिला की भलाई नहीं राजनीति नज़र आती है।। हमारे सर्वे के दौरान काफी सारे लोग ऐसे मिले जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश थे या यूं कहें कि उनके मन कोई झिझक या डर था। राम पुनियानी जी ने इस डर का कारण स्वाभाविक बताया उनका कहना था कि हर देश में अल्पसंख्या(Minority) के मन में इस तरह का डर होता है वह भी ऐसे माहौल में जब मुजफ्फरनगर और गुजरात जैसे दंगे हुए हो । उनका कहना था कि उन्हें (Minority) को ऐसा महसूस होने लगता है कि उन्हें दबाया जा रहा है और कोई कानून लाया जा रहा है । तो उन पर निशाना साधा जा रहा है। और यही डर वजह बनती है बंधन की जो औरत मान लेती है ।
राम पुनियानी जी का मानना है कि देश में कई धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं तो ऐसा कानून जो सब धर्मों के लोगों पर लागू हो उसकी बजाए एक ऐसे कानून की जरूरत है जो लैंगिक न्याय (Gender justice law) पर आधारित हो । उन्होंने तीन तलाक को लेकर मुस्लिम समाज में जागरूकता के विषय में कहा कि कई ऐसे मुस्लिम विद्वान जैसे "जकिया सोमन" और "असगर अली इंजीनियर" जो तीन तलाक को नहीं मानते उनके बारे में बताया जा सकता है ।
इस तरह हमने एक ऐसे विद्वान से बात की जो भले ही मुस्लिम नहीं थे लेकिन बरसों से उनका इस समाज में और संप्रदायक शांति ( Communal Harmony) को लेकर महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।
मजलिस लॉ
DOMESTIC VIOLENCE
हमने अपना काफी वक़्त ये सोचने में बिताया कि रिसर्च के लिए कौनसा विषय का चयन करे और हमारी काफी चर्चा और बातचीत के बाद आखिर हमने तीन तलाक़ यह विषय निश्चित किया जो उस वक़्त और अभी भी मीडिया न्यूज़, धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में मुख्य किरदार निभा रहा है। हम बेबाक कलेक्टिव की एक मीटिंग में गए थे । वही पर हमारी मुलाकात मजलिस की एक सदस्य से हुई जिसने हमसे काफी अच्छे से बात
की और मजलिस ऑफिस आने के लिए आमंत्रीत किया।
मजलिस संस्था की स्थापना 1991 में एडवोकेट (वकील) फ्लेविया एग्नेस ने कि। ये संस्था सभी औरतों के हकों के लिए काम करती है। एडवोकेट फ्लेविया एग्नेस ने इस संस्था को स्थापित किया ताकी सभी औरतो को कानूनी तौर पर मदद और इंसाफ के द्वारा औरतो को सशक्त कर सके। फ्लेविया एग्नेस की बेटी एडवोकेट ऑड्रे डी मेल्लो इस संस्था की डायरेक्टर है जो इस संस्था के लिए काम कर रही है और मजलिस को आगे चला रही है। जब हम एडवोकेट ऑड्रे डी मेल्लो से मिले और बातचीत शुरू की तो सबसे पहले उन्होंने हम सब से एक सवाल पूछा की हम सब में से कितनो ने तीन तलाक़ होते हुए देखा है या हम में से कितनो के परिवार में तीन
तलाक़ हुआ है। हम सब मे से सभी ने कहा कि नही, हमने किसी का तीन तलाक़ होते हुए देखा है, ना ही हमारे परिवार में किसी का तलाक हुआ है। हमारे ग्रुप मेंबर में से दो के परिवार में हुआ था लेकिन कोर्ट के जरिये। तब उन्होंने साफ़ साफ़ हमसे ये कहा कि जब तुम में से किसी ने तीन तलाक़ कभी होते हुए नही देखा और ना ही तुम्हारे परिवार में किसी का हुआ है तो तीन तलाक़ क्या सचमे एक बड़ी तादाद पर होने वाली समस्या है ? यहाँ तक के मजलिस के पास भी आज तक कोई तीन तलाक़ का केस नही आया । तो इससे ये बात तो साफ़ है कि तीन तलाक़ ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है लेकिन सामाजिक सुधार से ही इसका कुछ हल निकल सकता है। उन्होंने यह भी बताया की दुसरे कुछ अहम् मुद्दे जो मुस्लिम समाज से जुड़े हुए है उनपर न ध्यान देते हुए तीन तलाक़ को मुद्दा बनाया जा रहा है। ऑड्रे जी ने हमे तीन तलाक़ का पूरा इतिहास बताया कि इसकी आखिर बुनयादी जड़ क्या है।
तीन तलाक़ के खिलाफ पहली आवाज़ शाह बानो की सुनी गई जब उनके शौहर ने उन्हें तीन तलाक़ दी थी । उन्होंने पहली बार सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा अपने हक़ के लिए खटखटाया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने ये तय किया कि तलाक़ के बाद औरत अपने रहन-सहन, खानेपीने इन सब चीज़ो का दावा कर सकती है और 2002 में एक और औरत (शमीम आरा) ने इलाहाबाद उच्चन्यायालय में अपील कि । इलाहाबाद उच्चन्यायालय ने शमीम आरा केस की दलीले सुनी और यह फैसला सुनाया कि तलाक-ए-बिद्दत गलत है और यह सुझाव दिया की कुरआन में जो सही तरीके दिए गए है उस तरीको से तलाक दी जाए। उसके कई सालों बाद 2016 में शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में केस दायर की और उसे भी बहुत से संस्था और एक्टिविस्ट के ज़रिये इस प्रथा को बंद करने के लिए मदद मिली।
काशीपुर के हेमपुर निवासी शायरा बानो की शादी 2002 में इलाहाबाद के प्रॉपर्टी डीलर रिजवान के साथ थी। शायरा ने बताया कि ससुराल वाले एक कार की मांग करने लगे। वे शायरा के मायके वालों से चार-पांच लाख रुपये कैश की डिमांड करने लगे। शायरा के मायके वालों की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि यह मांग पूरी कर सकें। जब शायरा को तलाक दिया गया तब उनको दो छोटे बच्चे थे। 13 साल का बेटा और 11 साल की बेटी ।
शायरा का आरोप है कि शादी के बाद उसे हर दिन पिटा जाता था। रिजवान जो उनके शौहर थे हर दिन छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करता था।
अप्रैल 2015 में शायरा को उसके ससुराली मुरादाबाद रेलवे स्टेशन छोड़कर चले गए थे। शायरा के घरवाले उसे मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से काशीपुर ले आए। शायरा ने बताया कि जब वह काशीपुर आ गई, तो मुझे लौट आने को कहा जाने लगा। अक्टूबर में रिजवान ने शायरा को टेलीग्राम के जरिए तलाकनामा भेज दिया। शायरा एक मुफ्ती के पास गई तो उन्होंने कहा कि टेलीग्राम से भेजा गया तलाक जायज है। | हमने उनसे कहा कि इस्लाम में औरतों को ऐसे हक़ भी दिए हैं जो हमें नहीं पता था। तो फिर उन्होंने कहा कि इन तरीकों के बारे में मुस्लिम समाज में नब्बे या पचानवे% लोगों को नहीं मालूम है। इस्लामिक विद्वान् या मौलाना इसके बारे में बहुत ही कम बताते हैं। तलाक-ए-तफवीज़ :इस तरीके में ललड़की निकाह के वक़्त ही शर्त रख कर निकाहनामे पर लिखवा सकती है कि शादी के बाद अगर लड़का उसकी जरूरतों पर पूरा नहीं उतर या वो उसके काबिल नही है तो वो लड़की तलाक़ ले सकती है तो ऐसी हालातो में वो इस तरीके से तलाक़ ले सकती है । फसख - ए - निकाह :फसख-ए-निक़ाह का मतलब निकाह को तोड़ना । इस तरीके में लड़की को उसके ससुराल में कुछ दिक्कत है, वो नही रहना चाहती है और उसका शौहर उसे तलाक़ नही दे रहा या उसका शौहर कई सालों से लापता है, उसके बारे में कुछ भी खबर नही तो इन सूरतो में वो लड़की शरियत कोर्ट जा सकती है और वह क़ाज़ी से मदद ले सकती है लेकिन इन सब के लिए उसके कोई ठीक वजह होनी चाहिए। अगर सचमे ऐसा लगता है की औरत अपने रिश्ते में नहीं रह सकती तब क़ाज़ी दोनो का निकाह तोड़ देता है। सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक़ पर फैसला :तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आवाज़-ए-निस्वा खुश है और उसे मानता भी है आवाज़-ए-निस्वा का कहना कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वो बहुत ही सही फैसला है ये कानून बहुत पहले आना चाहिए था लेकिन अब आया है तो भी सही है इससे बहुत सी लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद होने से बच जाएगी। एक झटके में तीन तलाक़ की वजह से लड़कियों की ज़िंदगियां बर्बाद हो जाती है। तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले लोग डरेंगे और ये तलाक़ नही नही देंगे। ऐसा आवाज़ ए निस्वा का मानना है । आवाज़-ए-निस्वा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता है लेकिन बिल के खिलाफ है उनक कहना है कि सज़ा थोड़ी कम होनी चाहिए तीन साल बहुत ज्यादा है और इसे क्रिमिनल लॉ में नही सिविल लॉ के तहत रखना चाहिये । #आवाज़ ए निस्वा से चर्चा करके हमारे ग्रुप को बहुत सी जानकारि मिली जो हमे पहले नही मालूम थी और हमे पता चला कि वो औरतो के लिए कैसे काम करता है उन्हें उनका हक दिलाता है। उनके पास तीन तलाक़शुदा कुछ औरतो के केसेस थे उसके बारे में भी बताया कि कैसे उनके मसले को हल किया। और हमे एक तीन तलाक़शुदा महिला से बात करने का मौका भी दिया जो हमारे रिसर्च के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। उससे हमे काफी कुछ जानने मिला की एक तलाक़शुदा औरत को काफी कुछ परेशानियां झेलनी पड़ती है। आवाज़ - ए - निस्वा से बात करके हमे हमारे रिसर्च में काफी मदद मिली। रज़िया पटेल मुस्लिम समाज के आम लोगो के सर्वेक्षण द्वारा हमे उनकी राय मालूम हुई। हर समाज और कम्युनिटी में लोगो की राय उनके तबके और प्रोफेशन के हिसाब से अलग अलग होती है, उनकी सोच विचार अलग होते है, इसलिए हमने चार सौ तेरह मुस्लिम लोगों का सर्वे करने के साथ साथ हमने सोचा कि इस मुद्दे को लेकर एक्सपर्ट्स से भी बातचीत करनी चाहिए इसलिए हमने रज़िया पटेल जी से तीन तलाक़ इस विषय पर बातचीत की । रज़िया पटेल जी मुस्लिम धर्मीय समाजिक कार्यकर्ता हैं। जो मुस्लिम समाज के लिए मुस्लिम कम्युनिटी में शिक्षा, औरतों की परेशानी, गरीबी और उनमें शिक्षा इतनी कम क्यों है इस तरह के सभी मुद्दों पर समग्र रहकर काम करती हैं । हमने उनसे तीन तलाक़ के मुद्दे से जुड़ी बात की। बातचीत के दौरान रज़िया पटेल ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों को रिप्रेजेंट करने के लिए नहीं हैं वह भी एक संस्था की तरह ही है। उनका कहना है की ऑल इंडिया मुलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और तीन तलाक़ देने के ऊपर तीन साल की सजा इस बिल का विरोध किया है। लेकिन उन्होंने रैली में बिल की बात ही नही की रैली में उनका नारा था शरीयत बचाओ " इसके बदले वो बिल में सुधार लाने की बात कर सकते थे उनकी रैली में हज़ारों महिलाएँ थी वे बिल में सुधार लाने की बात कर सकते थे । रज़िया पटेल जी कहती हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक़ के केस सामने आ रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि इसमे सरकार कि कही न कही खामी नज़र आती है। रज़िया पटेल जी का कहना है कि इस केस को DOMESTIC VIOLENCE ACT के तहत सुलझाना चहिए। रज़िया पटेल जी के हिसाब से बिल को क्रिमीनलाइज करने की ज़रूरत नही थी। नॉन मुस्लिम्स के कानून तो क्रिमिनलाइज नही किए है तो यहाँ पर क्रिमीनलाइज करने की क्या वजह है। सजा के बदले आपसी समझौता और बातचीत के लिए स्पेस होना चाहिए। वो कहती हैं कि भारतीय समाज में बहुत सी औरतों को उनके पति ने ऐसे ही छोड़ दिया हैं इसलिए सभी औरतों के लिए कुछ करना चाहिए । रज़िया पटेल जी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती हैं लेकिन तीन तलाक़ के बिल का विरोध करती हैं उनके हिसाब से तीन साल की सजा गलत है इससे औरत का क्या फायदा होगा, उसका खर्च कहा से आएगा। रज़िया पटेल जी ने बिल का विरोध करते ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि इस बिल का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। हो सकता है कोई बदला लेने के लिए उस इंसान के मोबाइल से उसकी बीवी को तलाक दे। इस तरह में असल मे तो शौहर ने तलाक दी ही नही किसी और ने उसके फोन से दी। लेकिन इस बिल के हिसाब से तो उस बेगुनाह को सजा हो जाएगी वो भी Non-Bailable इससे उसका पूरा परिवार परेशानी में आ जाएगा । रज़िया पटेल जी कहती हैं कि तलाक ए बिद्दत का प्रमान बहुत ही कम है लेकिन देश कि किसी एक औरत के साथ भी ऐसे होता है तो उसे न्याय मिलना चहिये और उसके लिए कानून ठीक बनाने पड़ेंगे या फिर शरीयत के हिसाब से तलाक़ के और सही तरीकों को लाना चाहिए। वे कहती हैं कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कॉउंसलिंग सेशंस भी कर सकते थे। रज़िया पटेल जी कहती हैं कि जिन्हें फैमिली या धर्म के हिसाब से शादी नही करनी है तो वे SPECIAL MARRIAGE ACT के तहत शादी कर सकते हैं जिसमे औरतों के सभी हक़ होते हैं। उनका कहना हैं कि मुस्लिम समाज के लोगो में जागरूकता कम है। उनमें जागरूकता तब आएगी जब सरकार उनके बीच जाकर साक्षरता और गरीबी पर काम करेगी। उनके सुख दुख में काम आएगी। उनके बच्चों के लिए आज समाज मे दो घंटे देने वाला कोई नही है। इन सब लेवल पर काम करना चाहिए तभी वे विश्वास कर पाएंगे। लेकिन अगर सरकार ने आजतक उनके लिए कुछ नही किया, उनके सुख दुख में काम नही आई और अचानक से औरतों को हक़ दिलाने की बात कर रही है, तो इससे उनमे क्या विश्वास होगा? उनमे केवल डर होगा की उन्हें टारगेट तो नहीं किया जा रहा है उनके शौहर को ही जेल में डाल देंगे तो उससे उस औरत का क्या फायदा होगा। इसका तो मतलब सिर्फ यही होता है की शौहर ने तलाक दी तो बदला लेने के लिए उसे सजा होगी क्योंकि इससे औरत को कोई समर्थन तो नही मिल रहा है। कठुआ केस में AIMPLB नही किया। अगर ईन सब मुद्दों की आड़ में हिन्दू मुस्लिम पॉलिटिक्स खेलेंगे तो इसका तो गलत असर होगा कि ये देश विराधी हैं देश का कानून नही मानते, इसलिए अगर औरतो के कुछ किया जाता है तो उस लेवल पर ही करना चाहिए। वे कहती हैं कि बाकी देशों में तलाक ए बिद्दत बैन है लेकिन हमारे देश में अब तक नही क्योंकि यहां पर पूरी राजनीति हैं। रजिया पटेल से मिलकर हमने यह जाना की असल में सरकार को सिर्फ तीन तलाक़ ही नहीं बल्कि और भी दूसरे मुद्दों पर अपना रुख मोड़ना चाहिए और अगर सरकार सचमें औरतों के हकों के लिए काम करना चाहती है तो उन्हें सभी धर्मों के औरतों के बारे में सोचना चाहिए। INDIAN INSTITUTE OF EDUCATION राम पुनियानी ANAIRA AKsawa WHEN YOU CAN TS A CHEAP मुस्लिम समाज के आम लोगो के सर्वेक्षणे द्वारा हमे उनकी राय मालूम हुई और क्योंकि समाज में लोगो की राय उनके तबके और प्रोफेशन के हिसाब से अलग अलग होती उनकी सोच विचार अलग होते है इसलिए चार सौ तेरह मुस्लिम औरत और मर्द का सर्वे करने के साथ साथ हमने सोचा कि इस मुद्दे को लेकर एक्सपर्ट्स से भी बातचीत करनी चाहिए इसलिए हमने राम पुनियानी जी से बातचीत की। हम कुछ राम पुनियानी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मुंबई के साथ संबंधित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के एक पूर्व प्रोफ़ैसर और पूर्व सीनियर मेडिकल अफ़सर है। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में अपना मेडिकल करियर शुरू किया और एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर से शुरू करके सत्ताईस साल के लिए विभिन्न सामर्थ्य में आईआईटी की सेवा की। दो हज़ार चार में उन्होंने भारत में सांप्रदायिक सद्भावना के लिए पूर्णकालिक कार्य करने की इच्छा के साथ सेवा से मुक्ति ले ली। वह मानवाधिकारों के लिए सरगर्मियों, सांप्रदायिक सद्भावना और भारत में बढ़ रहे कट्टरवाद का विरोध करने के लिए पहलकदमियों में जुटे हुए है। राम पुनियानी जी से जब हमने अपने विषय के बारे में बात चीत की हमें पता चलता है की वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं किंतु उनका यह भी सवाल था कि क्या सचमे मुस्लिम समाज मे तीन तलाक़ की यह सुविधा होने के कारण इस क़ौम में तलाक का प्रमाण ज़्यादा दिखता है इसके लिए उन्होंने कहा कि जबसे ये तलाक़ बन हुआ है तब से अबतक के टाइम गैप में यह देखना होगा कि इस टाइम पीरियड में बाकी धर्मो मे कितने तलाक़ के केस हुए तो इससे हमें पता चलेगा कि क्या ट्रिपल तलाक़ की वजह से इस कम्युनिटी में तलाक का प्रमाण ज़्यादा है जिस के कारण तलाक ज्याद होता है हम इसकी तुलना कर सकते हैं हिंदू धर्म और दूसरे धर्मों से हो रहे तलाक की संख्या और उसी वक्त में मुस्लिम समाज में तलाक से इतना ही नहीं तलाक के बाद औरत का क्या होता है उसे भी दूसरे धर्म से तुलना करनी चाहिए और कितने लोग सिविल कोर्ट से तलाक लेते हैं या ऐसे ही छोड़ देते हैं उन की संख्या क्या है । अगर यह सब हमें मुस्लिम समाज में ज्यादा दिखाई देता है तो हम कह सकते हैं कि लोग तीन तलाक का फायदा उठा रहे या यह कहा जा सकता है कि मुस्लिम मर्द अपनी औरतों पर अत्याचार करते हैं राम पुनियानी जी से बात करने पर पता चला कि उनके नजदीक तीन तलाक पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है क्योंकि यह तलाक जो तलाक- एबिद्दत कहलाती है कुरआन शरीफ में भी नहीं है और कई मुस्लिम देशों में भी बंद है। लेकिन साथ ही तीन साल की सजा के बारे में उनका कहना था कि यह बिल्कुल गलत काम इसमें मुस्लिम महिला की भलाई नहीं राजनीति नज़र आती है।। हमारे सर्वे के दौरान काफी सारे लोग ऐसे मिले जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश थे या यूं कहें कि उनके मन कोई झिझक या डर था। राम पुनियानी जी ने इस डर का कारण स्वाभाविक बताया उनका कहना था कि हर देश में अल्पसंख्या के मन में इस तरह का डर होता है वह भी ऐसे माहौल में जब मुजफ्फरनगर और गुजरात जैसे दंगे हुए हो । उनका कहना था कि उन्हें को ऐसा महसूस होने लगता है कि उन्हें दबाया जा रहा है और कोई कानून लाया जा रहा है । तो उन पर निशाना साधा जा रहा है। और यही डर वजह बनती है बंधन की जो औरत मान लेती है । राम पुनियानी जी का मानना है कि देश में कई धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं तो ऐसा कानून जो सब धर्मों के लोगों पर लागू हो उसकी बजाए एक ऐसे कानून की जरूरत है जो लैंगिक न्याय पर आधारित हो । उन्होंने तीन तलाक को लेकर मुस्लिम समाज में जागरूकता के विषय में कहा कि कई ऐसे मुस्लिम विद्वान जैसे "जकिया सोमन" और "असगर अली इंजीनियर" जो तीन तलाक को नहीं मानते उनके बारे में बताया जा सकता है । इस तरह हमने एक ऐसे विद्वान से बात की जो भले ही मुस्लिम नहीं थे लेकिन बरसों से उनका इस समाज में और संप्रदायक शांति को लेकर महत्वपूर्ण योगदान रहा है । मजलिस लॉ DOMESTIC VIOLENCE हमने अपना काफी वक़्त ये सोचने में बिताया कि रिसर्च के लिए कौनसा विषय का चयन करे और हमारी काफी चर्चा और बातचीत के बाद आखिर हमने तीन तलाक़ यह विषय निश्चित किया जो उस वक़्त और अभी भी मीडिया न्यूज़, धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में मुख्य किरदार निभा रहा है। हम बेबाक कलेक्टिव की एक मीटिंग में गए थे । वही पर हमारी मुलाकात मजलिस की एक सदस्य से हुई जिसने हमसे काफी अच्छे से बात की और मजलिस ऑफिस आने के लिए आमंत्रीत किया। मजलिस संस्था की स्थापना एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में एडवोकेट फ्लेविया एग्नेस ने कि। ये संस्था सभी औरतों के हकों के लिए काम करती है। एडवोकेट फ्लेविया एग्नेस ने इस संस्था को स्थापित किया ताकी सभी औरतो को कानूनी तौर पर मदद और इंसाफ के द्वारा औरतो को सशक्त कर सके। फ्लेविया एग्नेस की बेटी एडवोकेट ऑड्रे डी मेल्लो इस संस्था की डायरेक्टर है जो इस संस्था के लिए काम कर रही है और मजलिस को आगे चला रही है। जब हम एडवोकेट ऑड्रे डी मेल्लो से मिले और बातचीत शुरू की तो सबसे पहले उन्होंने हम सब से एक सवाल पूछा की हम सब में से कितनो ने तीन तलाक़ होते हुए देखा है या हम में से कितनो के परिवार में तीन तलाक़ हुआ है। हम सब मे से सभी ने कहा कि नही, हमने किसी का तीन तलाक़ होते हुए देखा है, ना ही हमारे परिवार में किसी का तलाक हुआ है। हमारे ग्रुप मेंबर में से दो के परिवार में हुआ था लेकिन कोर्ट के जरिये। तब उन्होंने साफ़ साफ़ हमसे ये कहा कि जब तुम में से किसी ने तीन तलाक़ कभी होते हुए नही देखा और ना ही तुम्हारे परिवार में किसी का हुआ है तो तीन तलाक़ क्या सचमे एक बड़ी तादाद पर होने वाली समस्या है ? यहाँ तक के मजलिस के पास भी आज तक कोई तीन तलाक़ का केस नही आया । तो इससे ये बात तो साफ़ है कि तीन तलाक़ ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है लेकिन सामाजिक सुधार से ही इसका कुछ हल निकल सकता है। उन्होंने यह भी बताया की दुसरे कुछ अहम् मुद्दे जो मुस्लिम समाज से जुड़े हुए है उनपर न ध्यान देते हुए तीन तलाक़ को मुद्दा बनाया जा रहा है। ऑड्रे जी ने हमे तीन तलाक़ का पूरा इतिहास बताया कि इसकी आखिर बुनयादी जड़ क्या है। तीन तलाक़ के खिलाफ पहली आवाज़ शाह बानो की सुनी गई जब उनके शौहर ने उन्हें तीन तलाक़ दी थी । उन्होंने पहली बार सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा अपने हक़ के लिए खटखटाया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने ये तय किया कि तलाक़ के बाद औरत अपने रहन-सहन, खानेपीने इन सब चीज़ो का दावा कर सकती है और दो हज़ार दो में एक और औरत ने इलाहाबाद उच्चन्यायालय में अपील कि । इलाहाबाद उच्चन्यायालय ने शमीम आरा केस की दलीले सुनी और यह फैसला सुनाया कि तलाक-ए-बिद्दत गलत है और यह सुझाव दिया की कुरआन में जो सही तरीके दिए गए है उस तरीको से तलाक दी जाए। उसके कई सालों बाद दो हज़ार सोलह में शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में केस दायर की और उसे भी बहुत से संस्था और एक्टिविस्ट के ज़रिये इस प्रथा को बंद करने के लिए मदद मिली। काशीपुर के हेमपुर निवासी शायरा बानो की शादी दो हज़ार दो में इलाहाबाद के प्रॉपर्टी डीलर रिजवान के साथ थी। शायरा ने बताया कि ससुराल वाले एक कार की मांग करने लगे। वे शायरा के मायके वालों से चार-पांच लाख रुपये कैश की डिमांड करने लगे। शायरा के मायके वालों की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि यह मांग पूरी कर सकें। जब शायरा को तलाक दिया गया तब उनको दो छोटे बच्चे थे। तेरह साल का बेटा और ग्यारह साल की बेटी । शायरा का आरोप है कि शादी के बाद उसे हर दिन पिटा जाता था। रिजवान जो उनके शौहर थे हर दिन छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करता था। अप्रैल दो हज़ार पंद्रह में शायरा को उसके ससुराली मुरादाबाद रेलवे स्टेशन छोड़कर चले गए थे। शायरा के घरवाले उसे मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से काशीपुर ले आए। शायरा ने बताया कि जब वह काशीपुर आ गई, तो मुझे लौट आने को कहा जाने लगा। अक्टूबर में रिजवान ने शायरा को टेलीग्राम के जरिए तलाकनामा भेज दिया। शायरा एक मुफ्ती के पास गई तो उन्होंने कहा कि टेलीग्राम से भेजा गया तलाक जायज है। |
परन्तु, इस काल की इब्रानी चेतना, साहित्य निर्माण, वैज्ञानिक खोज का स्वर्णयुग वास्तव में स्पेन में विकसित हुआ, जहाँ मूर-शासन की छाया में यहूदियों को तपना न पड़ा । वहाँ वे ईसाई-कट्टरता से परे थे । इस्लाम को सदा मजहबी कट्टरता का कुवाच्य मिलता है, परन्तु ईसाइयों के जुल्म के बढ़ते हुए मरु में स्पेन के अरब-शासन ने यहूदियों के लिए हरी भूमि उपलब्ध कर संरक्षित कर दी और वहाँ इब्रानी - काव्य, दर्शन और विज्ञान के पौधे लहलहा उठे ।
साडिया के शिष्य और वैयाकरण डुनाश बेन लबराट' ने पहले-पहल कविता में मात्रिक छन्दों का उपयोग किया । परन्तु युग का पहला यथार्थ कवि सैमुएल इब्न नग्डिलाह था । वह कोर्दोवा में जन्मा था। अपने जीवन काल में उसका बड़ा मान हुआ । उसने तुक और मात्रा का उपयोग किया और सुन्दर प्रवाहमयी इब्रानी शैली में लिखा । उसने बाइबिल के गीतों के अनुकरण में प्रार्थनाओं की एक पुस्तक - 'बेन थिलिम' (गीतों का पुत्र ) लिखा । 'वेन मिश्ले' ( कहावतों का बेटा) उसकी दूसरी कृति थी, और 'बेन कोहेलेथ' (धार्मिकों का पुत्र ) तीसरी । यह तीसरी रचना एक प्रकार का दार्शनिक स्वप्न
था ।
परन्तु, उस मध्य-काल का सबसे महान् और मधुर कवि सोलोमान इब्न गाबिरोल था । वह जन्मा मलागा में और मरा वालेन्शिया में । वह विपत्ति और संघर्ष का मारा था । इसी से वह निराशावादी बन गया । इसी से उसमें अत्यन्त वेदना और करुणा भी भर गई । उसकी कविता गम्भीर और मधुर है। उसकी प्रधान राजमुकुट विषयक कृति पाँच भागों में विभक्त है । वह स्तुति प्रधान है, दार्शनिक और गंभीर । उसका उपयोग पूजा में भी होता है । उसकी सांसारिक कविताओं में बड़ी वेदना है । इसी प्रकार की करुण कविताएँ उसने अपने मित्र और संरक्षक येथील की स्मृति में भी लिखीं। उसने अरबी में तीन दार्शनिक ग्रन्थ लिखे । उसका जीवन स्रोत विषयक ग्रन्थ तो सदियों ईसाई दार्शनिक द्वारा रचित माना गया था । मध्यकालीन चर्च और राज्य के झगड़ों में टॉमस ऐक्विनस ने उसकी इस पुस्तक के उद्धरण भी दिए। इसका अरबी मूल खोया गया, पर इब्रानी 'म'कोर हायिम' खूब चला । इसी प्रकार उसके 'मिब्बहर हा पेनीनिम' ( मोतियों का चुनाव ) को भी बड़ी ख्याति मिली ।
इब्रानी साहित्य का सबसे बड़ा कवि जूडा हालेवी था । उसका जन्म तोलेडो (स्पेन) में हुआ । वह अविराम गायक था । उसकी कविता मधुर और प्रसाद गुण से ओतप्रोत थी ।
१. Dunash Ben Labarat (९२०-७० ) ; २. Samuel Ibn Nagdilab ( ८३३१०५५); ३. Solomon Ibn Gabirol (१०२०-५२) | परन्तु, इस काल की इब्रानी चेतना, साहित्य निर्माण, वैज्ञानिक खोज का स्वर्णयुग वास्तव में स्पेन में विकसित हुआ, जहाँ मूर-शासन की छाया में यहूदियों को तपना न पड़ा । वहाँ वे ईसाई-कट्टरता से परे थे । इस्लाम को सदा मजहबी कट्टरता का कुवाच्य मिलता है, परन्तु ईसाइयों के जुल्म के बढ़ते हुए मरु में स्पेन के अरब-शासन ने यहूदियों के लिए हरी भूमि उपलब्ध कर संरक्षित कर दी और वहाँ इब्रानी - काव्य, दर्शन और विज्ञान के पौधे लहलहा उठे । साडिया के शिष्य और वैयाकरण डुनाश बेन लबराट' ने पहले-पहल कविता में मात्रिक छन्दों का उपयोग किया । परन्तु युग का पहला यथार्थ कवि सैमुएल इब्न नग्डिलाह था । वह कोर्दोवा में जन्मा था। अपने जीवन काल में उसका बड़ा मान हुआ । उसने तुक और मात्रा का उपयोग किया और सुन्दर प्रवाहमयी इब्रानी शैली में लिखा । उसने बाइबिल के गीतों के अनुकरण में प्रार्थनाओं की एक पुस्तक - 'बेन थिलिम' लिखा । 'वेन मिश्ले' उसकी दूसरी कृति थी, और 'बेन कोहेलेथ' तीसरी । यह तीसरी रचना एक प्रकार का दार्शनिक स्वप्न था । परन्तु, उस मध्य-काल का सबसे महान् और मधुर कवि सोलोमान इब्न गाबिरोल था । वह जन्मा मलागा में और मरा वालेन्शिया में । वह विपत्ति और संघर्ष का मारा था । इसी से वह निराशावादी बन गया । इसी से उसमें अत्यन्त वेदना और करुणा भी भर गई । उसकी कविता गम्भीर और मधुर है। उसकी प्रधान राजमुकुट विषयक कृति पाँच भागों में विभक्त है । वह स्तुति प्रधान है, दार्शनिक और गंभीर । उसका उपयोग पूजा में भी होता है । उसकी सांसारिक कविताओं में बड़ी वेदना है । इसी प्रकार की करुण कविताएँ उसने अपने मित्र और संरक्षक येथील की स्मृति में भी लिखीं। उसने अरबी में तीन दार्शनिक ग्रन्थ लिखे । उसका जीवन स्रोत विषयक ग्रन्थ तो सदियों ईसाई दार्शनिक द्वारा रचित माना गया था । मध्यकालीन चर्च और राज्य के झगड़ों में टॉमस ऐक्विनस ने उसकी इस पुस्तक के उद्धरण भी दिए। इसका अरबी मूल खोया गया, पर इब्रानी 'म'कोर हायिम' खूब चला । इसी प्रकार उसके 'मिब्बहर हा पेनीनिम' को भी बड़ी ख्याति मिली । इब्रानी साहित्य का सबसे बड़ा कवि जूडा हालेवी था । उसका जन्म तोलेडो में हुआ । वह अविराम गायक था । उसकी कविता मधुर और प्रसाद गुण से ओतप्रोत थी । एक. Dunash Ben Labarat ; दो. Samuel Ibn Nagdilab ; तीन. Solomon Ibn Gabirol |
सोलन. लोगों में बजट का मिला जुला असर देखने को मिला. कुछ लोग बजट से खुश नजर आए, तो कुछ नाखुश भी दिखे. लोगो का कहना था की उनकी उम्मीद थी की इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कुछ बढ़ोतरी होगी और उन्हें कुछ राहत प्रदान की जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिसके चलते व्यापारियों और मध्यम वर्गों को निराशा हाथ लगी है.
वहीं अन्य व्यापारी जेटली की पोटली से खुश नज़र आए और कहा की बजट में पहली बार लोगों को पांच लाख तक की मेडिकल सुविधा का ऐलान किया गया है जो एक सराहनीय कदम है जिस से सभी लोग खुश हैं.
| सोलन. लोगों में बजट का मिला जुला असर देखने को मिला. कुछ लोग बजट से खुश नजर आए, तो कुछ नाखुश भी दिखे. लोगो का कहना था की उनकी उम्मीद थी की इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कुछ बढ़ोतरी होगी और उन्हें कुछ राहत प्रदान की जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिसके चलते व्यापारियों और मध्यम वर्गों को निराशा हाथ लगी है. वहीं अन्य व्यापारी जेटली की पोटली से खुश नज़र आए और कहा की बजट में पहली बार लोगों को पांच लाख तक की मेडिकल सुविधा का ऐलान किया गया है जो एक सराहनीय कदम है जिस से सभी लोग खुश हैं. |
भारणिया नाम का एक छोटा-सा गांव थां उस गांव में सात-आठ घर राजा परिवार से जुड़े भाइयों और भतीजों के थे। ये सब 'भायात' कहलाते थें जो भी पैदावार होती, सो खा-पी लेते और पड़े रहते। उनके बीच एक गए़वी रहते थे। नाम था, रलाभाई। पर रलाभाई की किसी से कभी पटती नहीं थी। रलाभाई मुंहफट थे। कोई उनसे कुछ कहता, तो वे फौरन ही उलटकर सवाल पूछते और सामनेवाले को चूप कर दिया करते।
भायातों के पास भैसें बहुत थीं। पर रलाभाई के पास एक भी भैस नहीं थी। हां, एक भैंसा जरुर था। वह बड़े डील-डौल वाला था। भैसे के गले में एक घण्टी बंधी रहती थी। जब भैंसा चलता, तो घण्टी टन-टन-टन बजती रहती। जब रोज़ सुबह भायातों की भैसें चरने को निकलतीं, तो उनके पीछे-पीछे रलाभाई भी अपने भैंसे के साथ निकल पड़ते और कहतेः
टन-टन घण्टी बजती है,
रला का भैसा चरने जाता है।
होते-होते कई दिन बीत गए। गांव के लोगों को लगा कि ये सारी भैसें रलाभाई की होंगी, इसीलिए वे कहते हैंः
टन-टन घण्टी बजती है,
रला का भैंसा चरने जाता है।
जब भायातों को इसका पता चला, तो वे नाराज हो गये। सब कहने लगें, "लो, देखा, यह स्वयं इतनी भैसों का मालिक बन गया है! इसकी अपनी तो एक बांडी भैंसे भी नहीं है। फिर यह क्यों कहता हैः
टन-टम घण्टी बजती है,
रला के ढोर चरने जाते है।
इसका तो अपना एक बड़ा भैंसा ही है। भैंसे के गले में इसने एक घण्टी बांध रखी है। बस, इतने में ही यह बहक गया-सा लगता है। अच्छा है, किसी दिन इसे भी समझ लेंगे।",
मौका पाकर भायातों ने रलाभाई के भैंसे को मार डाला। सबने कहा, "बला टली!"
रलाभाई बड़े घाघ थे। वे इस बात को पी गए। मन ही मन बोले, 'ठीक है, कभी मौक़ा मिलेगा, तो मैं देख लूंगा।',
रलाभाई ने भैंसे की पूरी खाल चमार से उतरवा ली। खाल की सफाई करवा लेने के बाद उन्होंने उसकी तह काट ली और सिर पर उठाकर चल पड़े।
चलते-चलते एक घने जंगल में पहुंचे। वहां बरगद का एक पेड़ था। उसका नाम था, चोर बरगद।सब चोर जब भी चोरी जब भी चोरी करके आते, तो इसी बरगद के नीचे बैठकर चोरी के माल का बंटवारा किया करते। रलाभाई बरगद पर चढ़कर 'बैठ गए। डाल पर चमड़ा टांग दिया।
जब रात के दो बजे, तो चोऱ वहां पहुंचे। किसी नगर सेठ की हेवली में सेंध लगाकर और बड़ी चोरी करके वे वहां आए थे। चोर चोरी के माला का बंटवारा करने बैठे। एक चोर नपे कहा, " सुनों भैया, कोई अपने पास का माल दबाकर रखेगा, तो उस ऊपर से आसमान टूट पड़ेगा"
बंटवारा करते सयम एक चोर ने पीछे कोई चीज़ छिपाई। रलाभाई नेइसे देख लिया। उनहोंने ऊपर से चमड़ा फेका, जो कड़कड़ाता हुआ नीचे गिरा।
चारे बोले, "भागो रे, भागो! यह तोक कड़कड़ाती हुई बिजली गिरी है।"
चोर डर गए और भाग खड़े हुए। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तक नहीं। बाद में बड़े आराम के साथ रलाभाई नीचे उतरे और सारी माया लेकर अपने घर पहुंचे।
अपने झोंपडे का दरवाजा बन्द करके रलाभाई रुपए गिनने बैठे। वे सुनकर पास-पड़ोस के लोग कहने लगे, "अरे, इपन रलभाई के पास तो एक कानी कौड़ी तक नहीं थी अब ये इतने बड़े पैसे वाले कैसे बन गए?",
सबने पूछा, "रलाभाई! इतनी बड़ी कमाई आप कहां से कर लाये?"
रलाभाई ने कहा, "मैंने अपने भैंसे का चमड़ा जो बेचा, उसी के ये दाम मिले हैं। ओहो, उधर चमड़े की कितनी मांग है! बस, कूछ पूछिए मत। मेरा तो एक ही भैंसा था। उसके मुश्किल से इतने रुपए मिले हैं। अगर कई भैंसे होते, तो एक लाख रूपय मिल जाते ।"
भायातों को पता चला। उन्होंने कहा, "तो आओ हम भी चलें, और रलाभाई की रतह कमाई करके लायें।" भायातों ने अपनी सब भैंसें मार डालीं। उनकी खालें उतरवाई। खालों की सफाई करवाई, और सिर पर खालें रखकर बेचने चले ।
लेकिन इतनी सारी खालें कौन खीरदता? मुश्किल से चार-छह खालें बिकीं और दस-पन्द्रह रूपए मिले। खालों के लाख रूपये कौन देने बैठा था!
शाम हुई और भायात सब इकट्ठे हुए। सबने कहा, "अरे, इन रलाभाई ने तो हम सबकों ठग लिया है! ठीक हैं, कभी देखेंगे।"
जलाया है, लेकिन मैं आप सबके घर न जलवा दूं, तो मेरा नाम रला गढ़वी नहीं।"
रलाभाई ने झोपड़े की राख एक थैले में इकट्ठी की। एक लद्दू बैल पर राख का थैला लादा और पालीनाना जा रहे यात्रियों के एक संघ के साथ रलाभाई भी जुड गए। संघ मे एक बूढ़ी मांजी थीं। बेचारी चल नहीं पाती थी।
मांजी के पास बहुत-सा धन था। रलाभाई के लद्दू बैल को देखकर मांजी ने कहा, "भैया! क्या अपने इस बैल पर मुझे बैठा लोगे?"
रलाभाई बोले, " मांजी, मैं ज़रुर बैठा लूंगा। लेकिन इस थैले में मेरा धन भरा है। अगर बैल पर बैठे-बैठे आपने हवा नहीं निकालें, तो मैं आपको बैठने दूं।"
मांजी ने कहा, "भैया! मुझे तुम्हारी बात मंजूर है।"
चलते-चलते पालीनाना आ पहुंचा और मांजी बैल पर से उतर पड़ी। रलाभाई ने कहा, "मांजी, जरा, ठहरिए। मुझे अपना धन देख लेने दीजिए।"
थैले में तो राख ही थी। देखने पर राख ही दिखाई पड़ी। रलाभाई ने कहा, "मांजी! इसमें तो राख है। क्या आपनें हवा निकाली?"
मांजी सच बोलनेवाली थीं। बेचारी बोलीं, "हां भैया! थोड़ी हवा निकाली तो थी।"
रलाभाई बोले, "तब तो मांजी! आपको अपना सब धन मुझको दे देना होगा।"
मांजी ने लाचार होकर अपना सारा धन दे दिया।
रलाभाई मांजी का धन लेकर घर लौटे। रात होते ही रलाभाई फिर रुपये खनखनाने बैठ गए।
लोगों ने पूछा, "रलाभाई! इतने रुपये तुम और कहां से ले आए!
रलाभाई ने कहा, "मेरे झोंपड़े की जो राख निकली थी, उसे मैंने बेचडाला। उसी के ये रूपय मिले हैं। मेरा कोई बड़ा घर तो था ही नहीं, जो मुझे ज्यादा रूपय मिलते, नहीं तो एक लाख रुपय मिल जाते।"
भायातों ने जमा होकर अपने सारे घर जला डाले। इन घरों की राख के बड़े बड़े ढेर खड़े हो गए। भायात टोकनों में राख भर-भरकर उसे बेचने निकले बोलते चले-" लेनी है, किसी को राख? राख लेनी है?"
गांव के लोगों ने कहा, " राख को तो तुम अपने सिरों पर ही मल लो भला इतनी राख कौन खरीदेगा?"
सब उदास चेहरे लेकर घर वापस आए। सबने कहा, " इन रलाभाई तो हमें खूब ही ठगा!"
फिर रलाभाई ने अपने लिए बड़े-बड़े घर बनवाए। बहुत-सी भैंसे खरी ली। एक भैंसा भी पला लिया, और उसके गले में एक घण्टी लटका दी।
अब तो रलाभाई अपनी भैंसों के साथ भैसें को जगंल मे चराने ले जा और रास्ते-भर गाते जातेः
टन-टन घण्टी बजती है,
रलाभाई की भैंसे चरती हैं।.
| भारणिया नाम का एक छोटा-सा गांव थां उस गांव में सात-आठ घर राजा परिवार से जुड़े भाइयों और भतीजों के थे। ये सब 'भायात' कहलाते थें जो भी पैदावार होती, सो खा-पी लेते और पड़े रहते। उनके बीच एक गए़वी रहते थे। नाम था, रलाभाई। पर रलाभाई की किसी से कभी पटती नहीं थी। रलाभाई मुंहफट थे। कोई उनसे कुछ कहता, तो वे फौरन ही उलटकर सवाल पूछते और सामनेवाले को चूप कर दिया करते। भायातों के पास भैसें बहुत थीं। पर रलाभाई के पास एक भी भैस नहीं थी। हां, एक भैंसा जरुर था। वह बड़े डील-डौल वाला था। भैसे के गले में एक घण्टी बंधी रहती थी। जब भैंसा चलता, तो घण्टी टन-टन-टन बजती रहती। जब रोज़ सुबह भायातों की भैसें चरने को निकलतीं, तो उनके पीछे-पीछे रलाभाई भी अपने भैंसे के साथ निकल पड़ते और कहतेः टन-टन घण्टी बजती है, रला का भैसा चरने जाता है। होते-होते कई दिन बीत गए। गांव के लोगों को लगा कि ये सारी भैसें रलाभाई की होंगी, इसीलिए वे कहते हैंः टन-टन घण्टी बजती है, रला का भैंसा चरने जाता है। जब भायातों को इसका पता चला, तो वे नाराज हो गये। सब कहने लगें, "लो, देखा, यह स्वयं इतनी भैसों का मालिक बन गया है! इसकी अपनी तो एक बांडी भैंसे भी नहीं है। फिर यह क्यों कहता हैः टन-टम घण्टी बजती है, रला के ढोर चरने जाते है। इसका तो अपना एक बड़ा भैंसा ही है। भैंसे के गले में इसने एक घण्टी बांध रखी है। बस, इतने में ही यह बहक गया-सा लगता है। अच्छा है, किसी दिन इसे भी समझ लेंगे।", मौका पाकर भायातों ने रलाभाई के भैंसे को मार डाला। सबने कहा, "बला टली!" रलाभाई बड़े घाघ थे। वे इस बात को पी गए। मन ही मन बोले, 'ठीक है, कभी मौक़ा मिलेगा, तो मैं देख लूंगा।', रलाभाई ने भैंसे की पूरी खाल चमार से उतरवा ली। खाल की सफाई करवा लेने के बाद उन्होंने उसकी तह काट ली और सिर पर उठाकर चल पड़े। चलते-चलते एक घने जंगल में पहुंचे। वहां बरगद का एक पेड़ था। उसका नाम था, चोर बरगद।सब चोर जब भी चोरी जब भी चोरी करके आते, तो इसी बरगद के नीचे बैठकर चोरी के माल का बंटवारा किया करते। रलाभाई बरगद पर चढ़कर 'बैठ गए। डाल पर चमड़ा टांग दिया। जब रात के दो बजे, तो चोऱ वहां पहुंचे। किसी नगर सेठ की हेवली में सेंध लगाकर और बड़ी चोरी करके वे वहां आए थे। चोर चोरी के माला का बंटवारा करने बैठे। एक चोर नपे कहा, " सुनों भैया, कोई अपने पास का माल दबाकर रखेगा, तो उस ऊपर से आसमान टूट पड़ेगा" बंटवारा करते सयम एक चोर ने पीछे कोई चीज़ छिपाई। रलाभाई नेइसे देख लिया। उनहोंने ऊपर से चमड़ा फेका, जो कड़कड़ाता हुआ नीचे गिरा। चारे बोले, "भागो रे, भागो! यह तोक कड़कड़ाती हुई बिजली गिरी है।" चोर डर गए और भाग खड़े हुए। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तक नहीं। बाद में बड़े आराम के साथ रलाभाई नीचे उतरे और सारी माया लेकर अपने घर पहुंचे। अपने झोंपडे का दरवाजा बन्द करके रलाभाई रुपए गिनने बैठे। वे सुनकर पास-पड़ोस के लोग कहने लगे, "अरे, इपन रलभाई के पास तो एक कानी कौड़ी तक नहीं थी अब ये इतने बड़े पैसे वाले कैसे बन गए?", सबने पूछा, "रलाभाई! इतनी बड़ी कमाई आप कहां से कर लाये?" रलाभाई ने कहा, "मैंने अपने भैंसे का चमड़ा जो बेचा, उसी के ये दाम मिले हैं। ओहो, उधर चमड़े की कितनी मांग है! बस, कूछ पूछिए मत। मेरा तो एक ही भैंसा था। उसके मुश्किल से इतने रुपए मिले हैं। अगर कई भैंसे होते, तो एक लाख रूपय मिल जाते ।" भायातों को पता चला। उन्होंने कहा, "तो आओ हम भी चलें, और रलाभाई की रतह कमाई करके लायें।" भायातों ने अपनी सब भैंसें मार डालीं। उनकी खालें उतरवाई। खालों की सफाई करवाई, और सिर पर खालें रखकर बेचने चले । लेकिन इतनी सारी खालें कौन खीरदता? मुश्किल से चार-छह खालें बिकीं और दस-पन्द्रह रूपए मिले। खालों के लाख रूपये कौन देने बैठा था! शाम हुई और भायात सब इकट्ठे हुए। सबने कहा, "अरे, इन रलाभाई ने तो हम सबकों ठग लिया है! ठीक हैं, कभी देखेंगे।" जलाया है, लेकिन मैं आप सबके घर न जलवा दूं, तो मेरा नाम रला गढ़वी नहीं।" रलाभाई ने झोपड़े की राख एक थैले में इकट्ठी की। एक लद्दू बैल पर राख का थैला लादा और पालीनाना जा रहे यात्रियों के एक संघ के साथ रलाभाई भी जुड गए। संघ मे एक बूढ़ी मांजी थीं। बेचारी चल नहीं पाती थी। मांजी के पास बहुत-सा धन था। रलाभाई के लद्दू बैल को देखकर मांजी ने कहा, "भैया! क्या अपने इस बैल पर मुझे बैठा लोगे?" रलाभाई बोले, " मांजी, मैं ज़रुर बैठा लूंगा। लेकिन इस थैले में मेरा धन भरा है। अगर बैल पर बैठे-बैठे आपने हवा नहीं निकालें, तो मैं आपको बैठने दूं।" मांजी ने कहा, "भैया! मुझे तुम्हारी बात मंजूर है।" चलते-चलते पालीनाना आ पहुंचा और मांजी बैल पर से उतर पड़ी। रलाभाई ने कहा, "मांजी, जरा, ठहरिए। मुझे अपना धन देख लेने दीजिए।" थैले में तो राख ही थी। देखने पर राख ही दिखाई पड़ी। रलाभाई ने कहा, "मांजी! इसमें तो राख है। क्या आपनें हवा निकाली?" मांजी सच बोलनेवाली थीं। बेचारी बोलीं, "हां भैया! थोड़ी हवा निकाली तो थी।" रलाभाई बोले, "तब तो मांजी! आपको अपना सब धन मुझको दे देना होगा।" मांजी ने लाचार होकर अपना सारा धन दे दिया। रलाभाई मांजी का धन लेकर घर लौटे। रात होते ही रलाभाई फिर रुपये खनखनाने बैठ गए। लोगों ने पूछा, "रलाभाई! इतने रुपये तुम और कहां से ले आए! रलाभाई ने कहा, "मेरे झोंपड़े की जो राख निकली थी, उसे मैंने बेचडाला। उसी के ये रूपय मिले हैं। मेरा कोई बड़ा घर तो था ही नहीं, जो मुझे ज्यादा रूपय मिलते, नहीं तो एक लाख रुपय मिल जाते।" भायातों ने जमा होकर अपने सारे घर जला डाले। इन घरों की राख के बड़े बड़े ढेर खड़े हो गए। भायात टोकनों में राख भर-भरकर उसे बेचने निकले बोलते चले-" लेनी है, किसी को राख? राख लेनी है?" गांव के लोगों ने कहा, " राख को तो तुम अपने सिरों पर ही मल लो भला इतनी राख कौन खरीदेगा?" सब उदास चेहरे लेकर घर वापस आए। सबने कहा, " इन रलाभाई तो हमें खूब ही ठगा!" फिर रलाभाई ने अपने लिए बड़े-बड़े घर बनवाए। बहुत-सी भैंसे खरी ली। एक भैंसा भी पला लिया, और उसके गले में एक घण्टी लटका दी। अब तो रलाभाई अपनी भैंसों के साथ भैसें को जगंल मे चराने ले जा और रास्ते-भर गाते जातेः टन-टन घण्टी बजती है, रलाभाई की भैंसे चरती हैं।. |
अजमेर में अपने दोस्त से मिलने जा रहे युवक के अपहरण कर मारपीट करने का मामला सामने आया है। जिसे आरोपी बेसुध हालात में सुनसान जगह पर छोड़ गए। होश में आने पर युवक का अस्पताल में उपचार किया गया। पीड़ित की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ क्लॉक टावर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, पादुकला-नागौर, हाल-अर्जुन लाल सेठी नगर अजमेर निवासी महेन्द्र पुत्र पन्नालाल रेगर (32) ने रिपोर्ट देकर बताया कि वह उसके जीजा सत्यनारायण की मुम्बई के चैम्बर इलाके में रेगजीन मटेरियल की दुकान पर काम करता है। 17 फरवरी को अजमेर आया। इसके बाद मुम्बई जाने के लिए 26 फरवरी को रेल्वे स्टेशन से अजमेर पहुंचा। पैसे कम होने के कारण पहाड़गंज में रहने वाले अपने दोस्त छोटू लाईट वाले के पास जा रहा था।
जब राजेन्द्र गउशाला के पास पहुंचा तो उसी समय एक सफेद रंग की कार पास आकर रुकी। उसमें से 4-5 लोग उतरे और उसका मुंह बंद कर कार में पटक लिया। पीछे व आगे वाली सीट पर बूटटा सिंह का भाई विष्णु बैठा देखा। इन व्यक्तियों ने उसे पैरो में पटककर कार के शीशे बंद कर लिए। पुष्कर से आगे चावण्डीया गांव के पास एक सूनसान जगह पर ले जाकर डंडों और बैल्ट से मारा। इसके बाद वह बेहोश हो गया। सुबह जब होश आया तो देखा कि गांव के व्यक्ति खडे़ थे। उनमें से एक ने उसे पानी पिलाया। बाद में जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में उपचार कराया। अतः आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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| अजमेर में अपने दोस्त से मिलने जा रहे युवक के अपहरण कर मारपीट करने का मामला सामने आया है। जिसे आरोपी बेसुध हालात में सुनसान जगह पर छोड़ गए। होश में आने पर युवक का अस्पताल में उपचार किया गया। पीड़ित की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ क्लॉक टावर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, पादुकला-नागौर, हाल-अर्जुन लाल सेठी नगर अजमेर निवासी महेन्द्र पुत्र पन्नालाल रेगर ने रिपोर्ट देकर बताया कि वह उसके जीजा सत्यनारायण की मुम्बई के चैम्बर इलाके में रेगजीन मटेरियल की दुकान पर काम करता है। सत्रह फरवरी को अजमेर आया। इसके बाद मुम्बई जाने के लिए छब्बीस फरवरी को रेल्वे स्टेशन से अजमेर पहुंचा। पैसे कम होने के कारण पहाड़गंज में रहने वाले अपने दोस्त छोटू लाईट वाले के पास जा रहा था। जब राजेन्द्र गउशाला के पास पहुंचा तो उसी समय एक सफेद रंग की कार पास आकर रुकी। उसमें से चार-पाँच लोग उतरे और उसका मुंह बंद कर कार में पटक लिया। पीछे व आगे वाली सीट पर बूटटा सिंह का भाई विष्णु बैठा देखा। इन व्यक्तियों ने उसे पैरो में पटककर कार के शीशे बंद कर लिए। पुष्कर से आगे चावण्डीया गांव के पास एक सूनसान जगह पर ले जाकर डंडों और बैल्ट से मारा। इसके बाद वह बेहोश हो गया। सुबह जब होश आया तो देखा कि गांव के व्यक्ति खडे़ थे। उनमें से एक ने उसे पानी पिलाया। बाद में जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में उपचार कराया। अतः आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Fasting Tips For Navratri: चैत्र नवरात्रि की आरंभ हो चुकी है। यह हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है और नो दिनों तक इस पर्व की देशभर में धूम रहेगी। बड़ी संख्या में लोग नवरात्रि के 9 दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं। व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में लाभकारी माना जाता है, लेकिन इस दौरान कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। व्रत के दौरान कुछ भी न खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। आज आपको बताएंगे कि 9 दिनों तक व्रत रखने का ठीक उपाय क्या होता है और व्रत के दौरान लोगों को किस तरह की डाइट लेनी चाहिए। ये बातें जानना महत्वपूर्ण हैं।
यूपी के नोएडा के डाइट मंत्रा की फाउंडर कामिनी सिन्हा कहती हैं कि नवरात्रि में ठीक ढंग से व्रत रखना हेल्थ के लिए लाभकारी हो सकता है। ठीक ढंग से फास्टिंग करने से बॉडी डिटॉक्स होती है और इंटेस्टाइन रिलेक्स हो जाती हैं। फास्टिंग से काफी हद तक वेट को भी मैनेज किया जा सकता है। हालांकि व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखा रहना स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। ऐसा करने से एसिडिटी, वीकनेस और सिरदर्द की परेशानी हो सकती है। इतना ही नहीं लंबे समय तक भूखा रहने से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने का ठीक उपाय सभी को जान लेना चाहिए।
- नवरात्रि व्रत के दौरान प्रत्येक दिन कम से कम 2-3 लीटर पानी पीना चाहिए। स्वयं को हाइड्रेटेड रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे बॉडी में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है और किसी तरह की कठिनाई नहीं होती।
- व्रत के दौरान लोगों को खूब फ्रूट्स खाने चाहिए। साथ ही समय-समय पर ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर को पोषक तत्वों की ठीक मात्रा मिलती रहेगी और वीकनेस महसूस नहीं होगी।
- नवरात्रि व्रत के दौरान प्रोटीन वाले फूड्स जैसे- पनीर, दही और बादाम जैसी चीजों का सेवन करें। प्रोटीन को पचने में समय लगता है और इससे पेट भरा हुआ महसूस होता है। प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।
- अक्सर आपने लोगों को व्रत में फ्राइड आइटम्स खाते हुए देखा होगा, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। लोगों को फ्राइड आइटम्स के बजाय बिना तली-भुनी चीजें खानी चाहिए। ऑयली चीजें आपकी स्वास्थ्य को हानि पहुंचाती हैं।
- व्रत के दौरान अधिक देर खाली पेट नहीं रहना चाहिए। हर 2-3 घंटे में कुछ न कुछ खाना चाहिए। ऐसा न करने से सिरदर्द, एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। साथ ही वीकनेस भी आ सकती है। इसलिए कुछ न कुछ हेल्दी जरूर खाना चाहिए।
डाइटिशियन कामिनी सिन्हा कहती हैं कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, टीवी, कैंसर या अन्य रोंगों से जूझ रहे लोगों को 9 दिन व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से उनकी कंडीशन खराब हो सकती है। इसके अतिरिक्त प्रेग्नेंट महिलाएं भी 9 दिनों तक व्रत न रखें। ऐसा करने से परेशानी पैदा हो सकती हैं। यदि वे चिकित्सक की राय के बाद व्रत रख रही हैं, तो सेंधा नमक के बजाय सादा नमक खाएं। सेंधा नमक में सोडियम नहीं होता और इसे खाने से शरीर में सोडियम की कमी हो सकती है। बुजुर्ग और बच्चों को भी 9 दिनों तक व्रत रखने की राय नहीं दी जाती। स्वस्थ लोगों को ही व्रत रखना चाहिए।
| Fasting Tips For Navratri: चैत्र नवरात्रि की आरंभ हो चुकी है। यह हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है और नो दिनों तक इस पर्व की देशभर में धूम रहेगी। बड़ी संख्या में लोग नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं। व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में लाभकारी माना जाता है, लेकिन इस दौरान कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। व्रत के दौरान कुछ भी न खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। आज आपको बताएंगे कि नौ दिनों तक व्रत रखने का ठीक उपाय क्या होता है और व्रत के दौरान लोगों को किस तरह की डाइट लेनी चाहिए। ये बातें जानना महत्वपूर्ण हैं। यूपी के नोएडा के डाइट मंत्रा की फाउंडर कामिनी सिन्हा कहती हैं कि नवरात्रि में ठीक ढंग से व्रत रखना हेल्थ के लिए लाभकारी हो सकता है। ठीक ढंग से फास्टिंग करने से बॉडी डिटॉक्स होती है और इंटेस्टाइन रिलेक्स हो जाती हैं। फास्टिंग से काफी हद तक वेट को भी मैनेज किया जा सकता है। हालांकि व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखा रहना स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। ऐसा करने से एसिडिटी, वीकनेस और सिरदर्द की परेशानी हो सकती है। इतना ही नहीं लंबे समय तक भूखा रहने से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने का ठीक उपाय सभी को जान लेना चाहिए। - नवरात्रि व्रत के दौरान प्रत्येक दिन कम से कम दो-तीन लीटरटर पानी पीना चाहिए। स्वयं को हाइड्रेटेड रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे बॉडी में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है और किसी तरह की कठिनाई नहीं होती। - व्रत के दौरान लोगों को खूब फ्रूट्स खाने चाहिए। साथ ही समय-समय पर ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर को पोषक तत्वों की ठीक मात्रा मिलती रहेगी और वीकनेस महसूस नहीं होगी। - नवरात्रि व्रत के दौरान प्रोटीन वाले फूड्स जैसे- पनीर, दही और बादाम जैसी चीजों का सेवन करें। प्रोटीन को पचने में समय लगता है और इससे पेट भरा हुआ महसूस होता है। प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। - अक्सर आपने लोगों को व्रत में फ्राइड आइटम्स खाते हुए देखा होगा, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। लोगों को फ्राइड आइटम्स के बजाय बिना तली-भुनी चीजें खानी चाहिए। ऑयली चीजें आपकी स्वास्थ्य को हानि पहुंचाती हैं। - व्रत के दौरान अधिक देर खाली पेट नहीं रहना चाहिए। हर दो-तीन घंटाटे में कुछ न कुछ खाना चाहिए। ऐसा न करने से सिरदर्द, एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। साथ ही वीकनेस भी आ सकती है। इसलिए कुछ न कुछ हेल्दी जरूर खाना चाहिए। डाइटिशियन कामिनी सिन्हा कहती हैं कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, टीवी, कैंसर या अन्य रोंगों से जूझ रहे लोगों को नौ दिन व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से उनकी कंडीशन खराब हो सकती है। इसके अतिरिक्त प्रेग्नेंट महिलाएं भी नौ दिनों तक व्रत न रखें। ऐसा करने से परेशानी पैदा हो सकती हैं। यदि वे चिकित्सक की राय के बाद व्रत रख रही हैं, तो सेंधा नमक के बजाय सादा नमक खाएं। सेंधा नमक में सोडियम नहीं होता और इसे खाने से शरीर में सोडियम की कमी हो सकती है। बुजुर्ग और बच्चों को भी नौ दिनों तक व्रत रखने की राय नहीं दी जाती। स्वस्थ लोगों को ही व्रत रखना चाहिए। |
उत्तराखण्ड सहित पांच महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखण्ड में यूं तो 14 फरवरी को मतदान हो चुका है। नतीजे 10 मार्च को आएंगे जिसके बाद ही तय होगा कि आखिर इस बार राज्य में किसकी सरकार सत्ता पर काबिज होगी, लेकिन कांग्रेस में नतीजे आने से पहले ही सीएम पद को लेकर एक बार फिर घमासान शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस बयान पर कि पार्टी के सत्ता में आने पर या तो वह सीएम बनेंगे या घर बैठेंगे, को लेकर अब नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सीएम कौन बनेगा, यह राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा। प्रीतम सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने तय किया था कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। चुनाव परिणाम के बाद जब सरकार बनेगी तो कांग्रेस विधानमंडल दल और राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि किसे जिम्मेदारी सौंपी जानी है। हर व्यक्ति की अपनी इच्छा हो सकती है, लेकिन जब हम राजनीतिक दल में होते हैं तो दल ही निर्णय लेता है। उनके इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर कुछ हद तक नरम पड़ गए हैं। हरीश रावत ने कहा है कि मुख्यमंत्री का चयन पार्टी हाईकमान करेगा।
प्रदेश उपाध्यक्ष और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार ने रावत के बयान की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता रावत को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। इस चुनाव में ही नहीं बल्कि अब तक हुए हर चुनाव में रावत के नाम पर वोट पड़ते आए हैं। रावत को तो साल 2002 में ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। रावत ने अभी कुछ दिन पहले भी खुद को सीएम बनाने की बात कही है, और अब एक बार फिर उन्होंने जनता की भावना को ही सामने रखा है।
दूसरी तरफ राज्य में 14 फरवरी को मतदान के बाद जहां कांग्रेस बहुमत के साथ सत्ता में आने के दावे कर रही है। वहीं चुनाव के बाद देहरादून पहुंचे पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रेज होने की बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रत्याशियों को लोगों ने व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं किया, लेकिन खास तौर पर पहाड़ों में मोदी का क्रेज दिखाई दिया है। हरक सिंह रावत इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन कई सीटों पर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया है।
बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रावत इस बातचीत में कहते सुने जा रहे हैं कि 'मैं यदि हूं तो अपनी सोच के उत्तराखण्ड का विकास करूंगा। यह जरूर है कि सभी की सोच को समावेशित करूंगा। अब वक्त नहीं है कि केवल पद के लिए मैं अपनी सोच के साथ समझौता कर लूं। अब मेरी उम्र यह नहीं रही है कि मैं मैं मैं कहूं कुछ करूं। यह साफ सी बात है कि हरीश रावत या तो मुख्यमंत्री बने या फिर घर बैठे। मैं पद के लिए सोच के साथ समझौता नहीं कर सकता।' वोटिंग के दिन भी रावत ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर वीडियो जारी करते हुए जनता से मतदान की अपील की थी। इसमें उन्होंने कहा कि आप मुझे सीएम के रूप में देखना चाहते हैं तो फिर घर से निकलिए, वोट डालिए और कांग्रेस को बहुमत से विजयी बनाइए।
कांग्रेस पार्टी राज्य में लड़ रहे निर्दलियों पर भी नजर रखे हुए है। अगर पिछले चार चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर बार निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। राज्य में 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में चार-चार निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीते थे। जबकि 2017 में दो निर्दलीय जीतने में कामयाब रहे। लिहाजा कांग्रेस को लग रहा है कि उसे अगर बहुमत के लिए कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल जाए तो वह राज्य में सरकार आसानी से बना सकती है। फिलहाल चुनाव में यमुनोत्री से संजय डोभाल, केदारनाथ से कुलदीप रावत, रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल, देवप्रयाग से यूकेडी दिवाकर भट्ट और खानपुर से उमेश कुमार सहित कई सीटों पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
असल में चुनाव के बाद हल्द्वानी में डेरा जमाए हरीश रावत अपना किला मजबूत कर रहे हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि 10 मार्च के बाद अगर कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो वह सीएम के दावेदार हो सकते हैं। वहीं प्रीतम सिंह और गणेश गोदियाल भी हरीश रावत के लिए चुनौती बन सकते हैं। लिहाजा वह वहां बैठकर सियासी रणनीति बना रहे हैं। पिछले दिनों ही कांग्रेस के कई बड़े नेता, विधायक-पूर्व विधायक रावत से मिलने हल्द्वानी पहुंचे। इन नेताओं में पूर्व मंत्री यशपाल आर्या, विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, हरीश सिंह धामी और महेश शर्मा, सुमित हृदयेश शामिल रहे।
| उत्तराखण्ड सहित पांच महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखण्ड में यूं तो चौदह फरवरी को मतदान हो चुका है। नतीजे दस मार्च को आएंगे जिसके बाद ही तय होगा कि आखिर इस बार राज्य में किसकी सरकार सत्ता पर काबिज होगी, लेकिन कांग्रेस में नतीजे आने से पहले ही सीएम पद को लेकर एक बार फिर घमासान शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस बयान पर कि पार्टी के सत्ता में आने पर या तो वह सीएम बनेंगे या घर बैठेंगे, को लेकर अब नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सीएम कौन बनेगा, यह राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा। प्रीतम सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने तय किया था कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। चुनाव परिणाम के बाद जब सरकार बनेगी तो कांग्रेस विधानमंडल दल और राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि किसे जिम्मेदारी सौंपी जानी है। हर व्यक्ति की अपनी इच्छा हो सकती है, लेकिन जब हम राजनीतिक दल में होते हैं तो दल ही निर्णय लेता है। उनके इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर कुछ हद तक नरम पड़ गए हैं। हरीश रावत ने कहा है कि मुख्यमंत्री का चयन पार्टी हाईकमान करेगा। प्रदेश उपाध्यक्ष और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार ने रावत के बयान की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता रावत को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। इस चुनाव में ही नहीं बल्कि अब तक हुए हर चुनाव में रावत के नाम पर वोट पड़ते आए हैं। रावत को तो साल दो हज़ार दो में ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। रावत ने अभी कुछ दिन पहले भी खुद को सीएम बनाने की बात कही है, और अब एक बार फिर उन्होंने जनता की भावना को ही सामने रखा है। दूसरी तरफ राज्य में चौदह फरवरी को मतदान के बाद जहां कांग्रेस बहुमत के साथ सत्ता में आने के दावे कर रही है। वहीं चुनाव के बाद देहरादून पहुंचे पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रेज होने की बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रत्याशियों को लोगों ने व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं किया, लेकिन खास तौर पर पहाड़ों में मोदी का क्रेज दिखाई दिया है। हरक सिंह रावत इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन कई सीटों पर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया है। बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रावत इस बातचीत में कहते सुने जा रहे हैं कि 'मैं यदि हूं तो अपनी सोच के उत्तराखण्ड का विकास करूंगा। यह जरूर है कि सभी की सोच को समावेशित करूंगा। अब वक्त नहीं है कि केवल पद के लिए मैं अपनी सोच के साथ समझौता कर लूं। अब मेरी उम्र यह नहीं रही है कि मैं मैं मैं कहूं कुछ करूं। यह साफ सी बात है कि हरीश रावत या तो मुख्यमंत्री बने या फिर घर बैठे। मैं पद के लिए सोच के साथ समझौता नहीं कर सकता।' वोटिंग के दिन भी रावत ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर वीडियो जारी करते हुए जनता से मतदान की अपील की थी। इसमें उन्होंने कहा कि आप मुझे सीएम के रूप में देखना चाहते हैं तो फिर घर से निकलिए, वोट डालिए और कांग्रेस को बहुमत से विजयी बनाइए। कांग्रेस पार्टी राज्य में लड़ रहे निर्दलियों पर भी नजर रखे हुए है। अगर पिछले चार चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर बार निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। राज्य में दो हज़ार दो, दो हज़ार सात और दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में चार-चार निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीते थे। जबकि दो हज़ार सत्रह में दो निर्दलीय जीतने में कामयाब रहे। लिहाजा कांग्रेस को लग रहा है कि उसे अगर बहुमत के लिए कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल जाए तो वह राज्य में सरकार आसानी से बना सकती है। फिलहाल चुनाव में यमुनोत्री से संजय डोभाल, केदारनाथ से कुलदीप रावत, रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल, देवप्रयाग से यूकेडी दिवाकर भट्ट और खानपुर से उमेश कुमार सहित कई सीटों पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। असल में चुनाव के बाद हल्द्वानी में डेरा जमाए हरीश रावत अपना किला मजबूत कर रहे हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि दस मार्च के बाद अगर कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो वह सीएम के दावेदार हो सकते हैं। वहीं प्रीतम सिंह और गणेश गोदियाल भी हरीश रावत के लिए चुनौती बन सकते हैं। लिहाजा वह वहां बैठकर सियासी रणनीति बना रहे हैं। पिछले दिनों ही कांग्रेस के कई बड़े नेता, विधायक-पूर्व विधायक रावत से मिलने हल्द्वानी पहुंचे। इन नेताओं में पूर्व मंत्री यशपाल आर्या, विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, हरीश सिंह धामी और महेश शर्मा, सुमित हृदयेश शामिल रहे। |
परेश दानी : अरे मानी , तू भी क्या बके जा रहा है,
अपने साथ ही रखता हु, वो नहीं है , टेबल पर ,
(ये सुनकर मानिकचंद और मंगल महेता थोड़े स्वस्थ होते है और फिर मानिकचंद कहता है)
परेशदानीः हा , वो भी बहोत पुराना था , मेरी माँ कि आखरी निशानी थी वो , मेरा कुंजा (बड़े दुखी भाव से )
(इतनेमे प्रेमलता उसे कहती है )
यदि नहीं मिला और रात में माँ स्वप्ने में आयी और मुजसे उसने पूछा कि ,
परेश, तुम , मेरी इक दी हुयी निशानी भी ठीक से संभालकर नहीं रख सके ?
तो मै उसे क्या जवाब दूंगा.... प्रेमलता ...।
(ये सुनकर मंगलमहेता बोलते है )
परेश दानी : हा हा मेहताजी ने ठीक ही कहा ,
परेश दानी : क्या कहा तुमने मानी?
मानिकचंदः अरे भाई कुछ नहीं ये गुजराती मुहावरा है ,
(ये सुनकर प्रेमलता बोलती है)
प्रेमलता : हा.... हा ...दानी भाई सही कहते है , ये समय कुंजा ढूंढनेका है ,
मुहावरे समजने का नहीं ,
(ये सुन कर परेश थोडा परेशान होता है और फिर बोलता है )
प्रेमलता : (ज्यादा नहीं बोलती और थोड़ी शर्मिंदगी के साथ बोलकर आगे चली जाती है )हा हा चलो चलो ,
(फिर सब लोग घर में कुंजा ढूंढने लगते है)
सामने खड़ा रखते है और फिर अब्जल राजीव से पूछता है)
(इतनेमे मधुर बीचमे ही टापसी पुरता है )
मधुरः तो चलो उसके दर्शन करले !!
अफ़ज़ल मधुर से कहता है )
अफ़ज़लः अबे देख दकुभाभी आ रही है ,
(इतनेमे दकुभाभी उसके पास पहुचती है कि तुरंत राजीव उसे पूछता है )
आपही बताओना कौन है ?
दकुभाभीः अरे वो हमारे मानिकचंदजी के दोस्त है , बड़े ही अच्छे है वो ,
(ये सुनकर अफ़ज़ल तुरंत बोलता है )
दकुभाभीः हा ,
अफ़ज़लः तो चलो हम भी आपके साथ चलते है ,
(राजीव तुरंत बीच में ही बोल पड़ता है )
(फिर ये चारो परेश दानी के घरके दरवाजे कि ओर जाते है ,)
है इतने में अफ़ज़ल बोल पड़ता है )
अफ़ज़लः अरे ! मंगल चाचा क्या ढूंढ रहे है आप ?
अभी तक पानी नहीं मिला क्या ?
,फिर दकुभाभी बोलती है )
दकुभाभी :(प्रेमलता के पास आकर )क्यों क्या हुआ है प्रेमलता भाभी ?
प्रेमलताः कुछ नहीं दकुभाभी,
दकुभाभीःकुछ नहीं ....!!!!
तो फिर ये सब इधर से उधर ,और उधर से इधर क्यों दौड़ रहे है ? (हाथ कि एक्शन बता कर )
(इतनेमे मंगल महेता बोलते है)
(ये सुनकर राजीव, अफ़ज़ल और मधुर हसने लगते है और फिर राजीव बोलता है)
(राजीव हसता है कि इतनेमे अफ़ज़ल बीचमे ही बोलता है )
(ये सुन कर मंगल महेता अफ़ज़ल के पीछे दौड़ते है ,और )
मंगल महेता : रुक तू अभी तुजे बताता हु कि मै क्या ढूंढ रहा हु ?
(ये दोनों सबके आगे -पीछे दौड़ते है , ये सब देख कर परेश दानी को थोडा गुस्सा आता है और वो बोलता है )
मधुर कि और इशारा करके बोलता है )
यहाँ , इस घर में कैसे अंदर आये ?
(इतनेमे मानिकचंद बोलता है )
मानिकचन्द; अरे दानी , शांत , दिमाग को थोडा ठंडा रख ,
ये हमारे ही लडके है , हमारे ही परिवार के ,
मैंने तुम्हे बतायाथाना कि अभी तीन और बाकी है ,
वो ये थे ,
करदियाना तुम्हे दौड़ता ,
(फिर मानिकचंद उन तीनो को कहते है )
मानिकचंदः बच्चो , अब शरारत नहीं ,
इस समय हमारे दानी साहब , बिचारे परेशान है , और आज वे हमारे महेमान कि तरह है ,
(ये सुनकर राजीव बोलता है )
राजीव : ठीक है अंकल ,
आप बताओ कि समस्या क्या है ?
मानिकचंदः बेटा , दानी अंकल का कुंजा खो गया है ,
जो इसको ,उनकी माताजी ने अपनी निशानी के तौर पे दिया था ,
(इतनेमे प्रेमलताभाभी बोलती है )
(फिर दकुभाभी बोलती है )
कुंजा खो गया ?
कैसा कुंजा था दानी भाई ?
परेश दानी : अरे दकुभाभी काय बतऊ आपको इस कुंजे के बारे में ,
वो तो बहोत साल पुराना था ,
मेरी माँ कि आखरी निशानी थी वो मेरे लिए ,
पता नहीं आज वो कब और कैसे ...... ?
(बड़े दुख के साथ )
दकुभाभीः अरे दानीभाई निराशा में भी इक अमर आशा छुपी होती है ,
इसीलिए आप धीरज रखो ,
(ये सुनकलर मंगल महेता तुरंत बोलता है)
थोड़ी धीरज रखो , और ठन्डे दिमाग से काम लो .
गयी ...।
(इतनेमे अफ़ज़ल बोला पड़ता है )
(ये सुनकर सब लोगो कि जान में जान आ गई और परेश दानी बड़ा ही खुश हो कर बोला )
परेश दानी ; क्या है .....?,
जल्दी से बोल , क्या आईडिया है तुम्हारे पास ?
अफ़ज़लः आईडिया तो अछा है ,
अफ़ज़ल : (बड़े शरारती अंदाज़ में सबके बिच आ कर )तो दानी अंकल आप मुझे ये बताओ कि ,
सबसे पहेले आपने अपना कुंजा कहा देखा था ?
परेश दानी ; सबसे पहेले मैंने मेरा कुंजा..... हा.... मेरी माँ के पास देखा था ,
अफ़ज़ल; और उसके बाद आपने उसे कहा रखाथा ?
(टेबल कि तरफ निर्देश करते हुए)
से कुंजा भी लिया होगा ,
अफ़ज़लः तो फिर , आपने टेबल और कुंजे को आखरी बार कहा एकसाथ देखा था ?
अफ़ज़लः और तब आपने कुंजा कहा रखा था ?.
बोलता है)
तब मैंने .........कुंजा , तो अपने पास ही ,
अपने हाथ में पकड़ कर रखा था ,
(इतने में मानिकचंद बोलता है )
मानिकचंदः क्या ऑटो .........?
(तुरंत प्रेमलताभाभी बोलती है)
प्रेमलताः हा याद आया ,भाई साहब ,
परेश दानीः (थोड़ी हताशा के साथ )हा मानी , अब मई उस ऑटो वाले को कैसे ढूंढूंगा इस बड़े शहरमे .?
और कैसे मेरा कुंजा मुझे मिलेगा ?
(तुरंत अफ़ज़ल बोलता है)
अरे यहाँ लोगो को जिंदगी मिलजाती है, तो आपका इक कुंजा नहीं मिलेगा ...?
(तुरंत दकुभाभी बोलती है )
(तुरंत मंगल महेता बोलता है)
उस ऑटो वाले को कैसे ढूंढेंगे ?
(तो परेश दानी कहता है)
परेश दानी : हा .....चाचाजी सही कहते है ,
अब हमें ये सोचना चाहिए कि ऑटो वाले को कैसे ढूंढेंगे हम ?
(तो राजीव बोलता है)
परेश दानी : नहीं ,
राजीवः तो ,फिर कैसे ढूंढेंगे ऑटो वाले को...?
(तब मानिकचंद थोड़े गम्भीर होकर बोलते है परेश दानी से)
मानिकचंदः अच्छा तो ये बताओ कि दानी ,तुमने ऑटो कहासे ली थी ?
मानिकचंद : तब तो मुश्किल है यार (थोड़े उदासीके साथ )
(तो प्रेमलता बोलती है )
प्रेमलताः तो क्या ,अब ऑटो वाला नहीं मिलेगा हमें ?
और हमारा कुंजा ....!!!!
(तुरंत दकुभाभी उसे सान्तवना देते है)
दकुभाभीः नहीं नहीं प्रेमलताभाभी ऐसा मत बोलिये ,
आपका कुंजा आपको जरूर मिलेगा ऐसा मेरा दिल कहता है और,
(फिर मंगल महेता कहता है )
क्यों .... ढूंढ निकालेंगे ना..... ? (सबको कहते हुए )
(तो सब बोलते है)
परेश दानीः किन्तु कैसे ?
और हम कैसे ढूंढ निकालेंगे उसे ?
और वो .... भी इतने बड़े शहर में ?
लगता है आज यहाँ आते ही मेरा कुंजा गया ,
अब माँ मुझे मिलेगी तो क्या कहेगी ......(बड़ी ही उदासी के साथ )
(तभी मानिकचंद उसे कहता है कि)
मानिकचंदः देखो दानी , तुम हिम्मत मत हारो ,
हम है ना...!
(तो मंगल चाचा कहता है)
यहाँ खड़े खड़े ढूंढेंगे क्या ?
(ये सुन कर सब इक पल के लिए डर जाते है तभी मानिकचंद कहता है)
मानिकचंद : नहीं नहीं मेहताजी ,
यहाँ थोड़ी ना है कुंजा तो हम ढूंढेंगे इसे ,यहाँ ....!
(तो दानी कहता है )
परेश दानी : हा हा मेहताजी ठीक ही कहते है ,
(तो सभी इक दूसरेको कहने लगता है)
(और सभी परेश दानी के घर से बाहर आते है)
(डॉली आंटी सबके पास आकर उत्सुकता से पूछती है ,उसके साथ मुकुला भाभी भी है )
डॉली आंटीः अरे क्या हुआ मानिकचंद भाई ,?
क्या हुआ मेहताजी ?
(तुरंत साथ ही साथ में मुकुलाभाभी बड़ी उत्सुकता से पूछती है)
मुकुलाभाभी : हा हा क्या हुआ ,मौसमी के पापा ,
ये आपके दोस्त दानी भाई को क्या हुआ ?
(ये सुनकर सब थोड़े गम्भीर हो जाते है और फिर मानिकचंद कहता है )
मानिकचंदः कुछ नहीं मुकुला ,
(तो डॉली आंटी फिर पूछती है)
डॉली आंटीः किन्तु उस कुंजे में ऐसी तो क्या खासियत थी कि उसके लिए इतने चिंतिंत लग रहे हो ?
तो मुकुलाभाभी तुरंत बोलती है ?
मुकुलाभाभी ; अरे डोलीजी ,कुंजा बहोत कि कीमती होगा ,
तभी तो ये सभी इतने गम्भीर ,और चिंतित दिख रहे हे ना ,
मानिकचंद उसका इशारा समज जाता है और वो मुकुला से कहता है)
मानिकचंद : अरे मुकुला , केम तू दाजवा पर डाम दे छो ,
(ये सुन कर परेश फिर हैरानी से पूछता है)
परेश दानी ; ये अभी अभी तूने क्या बोला ?
(तो मानिकचंद उसे कहता है)
(तो तभी मंगल महेता बिचमेंही बोलते है )
(तो मानिकचंद बोलता है )
मानिकचंदः हा हा चाचाजी ,
(फिर मुकुलाने प्रेमलताभाभी से पूछा बीचमे आ कर )
कि कुंजे के लिए आप सब क्यों इतने परेशान है ?
(तभी प्रेमलता उसे कहती है )
(प्रेमलताभाभी इतना बोलती है कि तुरंत मानिकचंद बिच में ही बोलता है और मुकुला को कहता है )
मानिकचंदः मुकुला ,
(तो मुकुला थोड़ी भावुक हो कर बोलती है )
(ये बात सुन कर फिर परेश दानी बोलता है )
परेश दानी : पर कैसे ?
अफ़ज़लः दानी अंकल आपको उस ऑटो वाले का चहेरा मालुम है ?
( तो परेश दानी तुरंत बोलता है )
परेश दानी : हा हा हा मुझे उसका चहेरा , अच्छी तरह से मालुम है ,
(तोअफ्ज़ल बोलता है)
सभी : कैसे ?
(तो मंगल महेता अफ़ज़ल को कहते है कि)
इस ऑटो वाले कि ऑटो में कुंजा रह गया है,
(ये सुन कर मानिकचंद बोलते है )
(तो तुरंत अफ़ज़ल बोलता है)
हम कोई क्राइम ब्रांच के चक्करमे नहीं पड़ेंगे ,
(तुरंत परेश दानी बोलता है )
परेशदानी : तो फिर तुम उस ऑटो वाले का स्केच क्यों बनवाना चाहते हो ?
(तो राजीव अफ़ज़ल का साथ देते हुए अब बोलता है)
राजीव : अरे अंकल सीधी सी बात है ,
यदि हमने उसका स्केच बनवा लिया और उसे यही आस-पास के सभी ऑटोवाले को दिखाएँगे,
उसके जरिये हम उस ऑटो तक पहोच सकते है ,
(और इतने में मधुर भी तुरंत बीचमे बोलता है)
(ये सुनकर डॉली आंटी बोलती है)
दकुभाभीः हा हां , अब तो आपको बच्चो कि बात माननी ही पड़ेगी,
(तो तुरंत मंगल चाचा बोलते है)
मंगल चाचा ; किन्तु दकुडी, ये सब करने में हमें बहोत समय लगेगा ,
और इतने समय में पता नहीं ,
क्या से क्या हो जाये ?,
| परेश दानी : अरे मानी , तू भी क्या बके जा रहा है, अपने साथ ही रखता हु, वो नहीं है , टेबल पर , परेशदानीः हा , वो भी बहोत पुराना था , मेरी माँ कि आखरी निशानी थी वो , मेरा कुंजा यदि नहीं मिला और रात में माँ स्वप्ने में आयी और मुजसे उसने पूछा कि , परेश, तुम , मेरी इक दी हुयी निशानी भी ठीक से संभालकर नहीं रख सके ? तो मै उसे क्या जवाब दूंगा.... प्रेमलता ...। परेश दानी : हा हा मेहताजी ने ठीक ही कहा , परेश दानी : क्या कहा तुमने मानी? मानिकचंदः अरे भाई कुछ नहीं ये गुजराती मुहावरा है , प्रेमलता : हा.... हा ...दानी भाई सही कहते है , ये समय कुंजा ढूंढनेका है , मुहावरे समजने का नहीं , प्रेमलता : हा हा चलो चलो , सामने खड़ा रखते है और फिर अब्जल राजीव से पूछता है) मधुरः तो चलो उसके दर्शन करले !! अफ़ज़ल मधुर से कहता है ) अफ़ज़लः अबे देख दकुभाभी आ रही है , आपही बताओना कौन है ? दकुभाभीः अरे वो हमारे मानिकचंदजी के दोस्त है , बड़े ही अच्छे है वो , दकुभाभीः हा , अफ़ज़लः तो चलो हम भी आपके साथ चलते है , है इतने में अफ़ज़ल बोल पड़ता है ) अफ़ज़लः अरे ! मंगल चाचा क्या ढूंढ रहे है आप ? अभी तक पानी नहीं मिला क्या ? ,फिर दकुभाभी बोलती है ) दकुभाभी :क्यों क्या हुआ है प्रेमलता भाभी ? प्रेमलताः कुछ नहीं दकुभाभी, दकुभाभीःकुछ नहीं ....!!!! तो फिर ये सब इधर से उधर ,और उधर से इधर क्यों दौड़ रहे है ? मंगल महेता : रुक तू अभी तुजे बताता हु कि मै क्या ढूंढ रहा हु ? मधुर कि और इशारा करके बोलता है ) यहाँ , इस घर में कैसे अंदर आये ? मानिकचन्द; अरे दानी , शांत , दिमाग को थोडा ठंडा रख , ये हमारे ही लडके है , हमारे ही परिवार के , मैंने तुम्हे बतायाथाना कि अभी तीन और बाकी है , वो ये थे , करदियाना तुम्हे दौड़ता , मानिकचंदः बच्चो , अब शरारत नहीं , इस समय हमारे दानी साहब , बिचारे परेशान है , और आज वे हमारे महेमान कि तरह है , राजीव : ठीक है अंकल , आप बताओ कि समस्या क्या है ? मानिकचंदः बेटा , दानी अंकल का कुंजा खो गया है , जो इसको ,उनकी माताजी ने अपनी निशानी के तौर पे दिया था , कुंजा खो गया ? कैसा कुंजा था दानी भाई ? परेश दानी : अरे दकुभाभी काय बतऊ आपको इस कुंजे के बारे में , वो तो बहोत साल पुराना था , मेरी माँ कि आखरी निशानी थी वो मेरे लिए , पता नहीं आज वो कब और कैसे ...... ? दकुभाभीः अरे दानीभाई निराशा में भी इक अमर आशा छुपी होती है , इसीलिए आप धीरज रखो , थोड़ी धीरज रखो , और ठन्डे दिमाग से काम लो . गयी ...। परेश दानी ; क्या है .....?, जल्दी से बोल , क्या आईडिया है तुम्हारे पास ? अफ़ज़लः आईडिया तो अछा है , अफ़ज़ल : तो दानी अंकल आप मुझे ये बताओ कि , सबसे पहेले आपने अपना कुंजा कहा देखा था ? परेश दानी ; सबसे पहेले मैंने मेरा कुंजा..... हा.... मेरी माँ के पास देखा था , अफ़ज़ल; और उसके बाद आपने उसे कहा रखाथा ? से कुंजा भी लिया होगा , अफ़ज़लः तो फिर , आपने टेबल और कुंजे को आखरी बार कहा एकसाथ देखा था ? अफ़ज़लः और तब आपने कुंजा कहा रखा था ?. बोलता है) तब मैंने .........कुंजा , तो अपने पास ही , अपने हाथ में पकड़ कर रखा था , मानिकचंदः क्या ऑटो .........? प्रेमलताः हा याद आया ,भाई साहब , परेश दानीः हा मानी , अब मई उस ऑटो वाले को कैसे ढूंढूंगा इस बड़े शहरमे .? और कैसे मेरा कुंजा मुझे मिलेगा ? अरे यहाँ लोगो को जिंदगी मिलजाती है, तो आपका इक कुंजा नहीं मिलेगा ...? उस ऑटो वाले को कैसे ढूंढेंगे ? परेश दानी : हा .....चाचाजी सही कहते है , अब हमें ये सोचना चाहिए कि ऑटो वाले को कैसे ढूंढेंगे हम ? परेश दानी : नहीं , राजीवः तो ,फिर कैसे ढूंढेंगे ऑटो वाले को...? मानिकचंदः अच्छा तो ये बताओ कि दानी ,तुमने ऑटो कहासे ली थी ? मानिकचंद : तब तो मुश्किल है यार प्रेमलताः तो क्या ,अब ऑटो वाला नहीं मिलेगा हमें ? और हमारा कुंजा ....!!!! दकुभाभीः नहीं नहीं प्रेमलताभाभी ऐसा मत बोलिये , आपका कुंजा आपको जरूर मिलेगा ऐसा मेरा दिल कहता है और, क्यों .... ढूंढ निकालेंगे ना..... ? परेश दानीः किन्तु कैसे ? और हम कैसे ढूंढ निकालेंगे उसे ? और वो .... भी इतने बड़े शहर में ? लगता है आज यहाँ आते ही मेरा कुंजा गया , अब माँ मुझे मिलेगी तो क्या कहेगी ...... मानिकचंदः देखो दानी , तुम हिम्मत मत हारो , हम है ना...! यहाँ खड़े खड़े ढूंढेंगे क्या ? मानिकचंद : नहीं नहीं मेहताजी , यहाँ थोड़ी ना है कुंजा तो हम ढूंढेंगे इसे ,यहाँ ....! परेश दानी : हा हा मेहताजी ठीक ही कहते है , डॉली आंटीः अरे क्या हुआ मानिकचंद भाई ,? क्या हुआ मेहताजी ? मुकुलाभाभी : हा हा क्या हुआ ,मौसमी के पापा , ये आपके दोस्त दानी भाई को क्या हुआ ? मानिकचंदः कुछ नहीं मुकुला , डॉली आंटीः किन्तु उस कुंजे में ऐसी तो क्या खासियत थी कि उसके लिए इतने चिंतिंत लग रहे हो ? तो मुकुलाभाभी तुरंत बोलती है ? मुकुलाभाभी ; अरे डोलीजी ,कुंजा बहोत कि कीमती होगा , तभी तो ये सभी इतने गम्भीर ,और चिंतित दिख रहे हे ना , मानिकचंद उसका इशारा समज जाता है और वो मुकुला से कहता है) मानिकचंद : अरे मुकुला , केम तू दाजवा पर डाम दे छो , परेश दानी ; ये अभी अभी तूने क्या बोला ? मानिकचंदः हा हा चाचाजी , कि कुंजे के लिए आप सब क्यों इतने परेशान है ? मानिकचंदः मुकुला , परेश दानी : पर कैसे ? अफ़ज़लः दानी अंकल आपको उस ऑटो वाले का चहेरा मालुम है ? परेश दानी : हा हा हा मुझे उसका चहेरा , अच्छी तरह से मालुम है , सभी : कैसे ? इस ऑटो वाले कि ऑटो में कुंजा रह गया है, हम कोई क्राइम ब्रांच के चक्करमे नहीं पड़ेंगे , परेशदानी : तो फिर तुम उस ऑटो वाले का स्केच क्यों बनवाना चाहते हो ? राजीव : अरे अंकल सीधी सी बात है , यदि हमने उसका स्केच बनवा लिया और उसे यही आस-पास के सभी ऑटोवाले को दिखाएँगे, उसके जरिये हम उस ऑटो तक पहोच सकते है , दकुभाभीः हा हां , अब तो आपको बच्चो कि बात माननी ही पड़ेगी, मंगल चाचा ; किन्तु दकुडी, ये सब करने में हमें बहोत समय लगेगा , और इतने समय में पता नहीं , क्या से क्या हो जाये ?, |
हाल ही में 'Creature 3D' के प्रमोशनल सांग में सुरवीन चावला और रजनीश दुग्गल के हॉट और इंटीमेट सींस चर्चा में रहे हैं. इसके अलावा भी फिल्म में बोल्ड सींस की भरमार होने की बात की जा रही है. इसके बावजूद बिपाशा बसु की अपकमिंग थ्रिलर फिल्म 'क्रीचर 3डी' को सेंट्रल फिल्म सेंसर बोर्ड ने UA सर्टिफिकेट दिया है. कहा जा रहा है कि यह एक साइंस फिक्शन फिल्म है और इसका डायरेक्शन विक्रम भट्ट ने किया है. फिल्म में काफी बोल्ड सीन हैं.
'Creature 3D' को यूए सर्टिफिकेट मिलने के बाद बेहद खुश बिपाशा का कहना है, उन्हें खुशी है कि अब बच्चे भी अपने पेरेंटस की गाइडेंस में फिल्म को इंज्वॉय कर सकेंगे. बिपाशा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपनी खुशी को शेयर करते हुए पोस्ट भी किया.
इन दिनों हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तान से आए एक्टर्स का नंबर बढ़ता जा रहा है. हुमैमा मलिक और फव्वाद खान के बाद इस फिल्म से भी एक पाकिस्तानी एक्टर इमरान अब्बास नकवी बॉलीवुड में अपना डेब्यु करने जा रहे हैं कर रहे हैं. फिल्म 12 सितंबर को रिलीज होगी.
| हाल ही में 'Creature तीनD' के प्रमोशनल सांग में सुरवीन चावला और रजनीश दुग्गल के हॉट और इंटीमेट सींस चर्चा में रहे हैं. इसके अलावा भी फिल्म में बोल्ड सींस की भरमार होने की बात की जा रही है. इसके बावजूद बिपाशा बसु की अपकमिंग थ्रिलर फिल्म 'क्रीचर तीनडी' को सेंट्रल फिल्म सेंसर बोर्ड ने UA सर्टिफिकेट दिया है. कहा जा रहा है कि यह एक साइंस फिक्शन फिल्म है और इसका डायरेक्शन विक्रम भट्ट ने किया है. फिल्म में काफी बोल्ड सीन हैं. 'Creature तीनD' को यूए सर्टिफिकेट मिलने के बाद बेहद खुश बिपाशा का कहना है, उन्हें खुशी है कि अब बच्चे भी अपने पेरेंटस की गाइडेंस में फिल्म को इंज्वॉय कर सकेंगे. बिपाशा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपनी खुशी को शेयर करते हुए पोस्ट भी किया. इन दिनों हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तान से आए एक्टर्स का नंबर बढ़ता जा रहा है. हुमैमा मलिक और फव्वाद खान के बाद इस फिल्म से भी एक पाकिस्तानी एक्टर इमरान अब्बास नकवी बॉलीवुड में अपना डेब्यु करने जा रहे हैं कर रहे हैं. फिल्म बारह सितंबर को रिलीज होगी. |
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में आर अश्विन को मौका मिलेगा या फिर उनकी जगह टीम में युजवेंद्रा चहल आएंगे इसके बारे में बात करते हुए कपिल देव ने कहा कि ये टीम मैनेजमेंट पर निर्भर करता है कि उन्हें किसे प्लेइंग इलेवन में शामिल करना है।
नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम ने रोहित शर्मा की कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप 2022 के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। भारतीय टीम ने सुपर 12 स्टेज के पांच मैचों में से 4 में जीत दर्ज की थी और 8 अंक के साथ शान से टाप 4 में जगह बनाई। अब सेमीफाइनल में टीम इंडिया का सामना इंग्लैंड के साथ एडिलेड में 10 नवंबर को होगा। इस सेमीफाइनल मुकाबले से पहले टीम इंडिया को पहला वनडे वर्ल्ड कप खिताब दिलाने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव ने सीनियर स्पिनर आर अश्विन के प्रदर्शन पर सवाल उठाए और उन पर टिप्पणी भी की।
आर अश्विन को पांचों ग्रुप मैच में प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई और उन्होंने 5 मैचों में 6 विकेट लिए जबकि 7. 52 की इकोनामी रेट के साथ रन दिए, लेकिन कपिल देव उनके प्रदर्शन से संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने आर अश्विन के बारे में कहा कि उन्होंने कुछ ऐसा नहीं किया कि मैं उन पर विश्वास कर सकूं। उन्होंने विकेट जरूर लिए, लेकिन ऐसा लगा नहीं कि ये विकेट उन्होंने लिए। दरअसल बल्लेबाज इस तरह से आउट हुए कि उन्हें खुद भी 1-2 विकेट लेते हुए शर्म आ रही थी और वो अपना चेहरा छुपा रहे थे।
कपिल देव ने आगे कहा कि विकेट लेने के बाद गेंदबाज का आत्मविश्वास बढ़ता है, लेकिन हम जिस अश्विन को जानते हैं हमने उन्हें पूरी तरह से लय में नहीं देखा। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में आर अश्विन को मौका मिलेगा या फिर उनकी जगह टीम में युजवेंद्रा चहल आएंगे इसके बारे में बात करते हुए कपिल देव ने कहा कि ये टीम मैनेजमेंट पर निर्भर करता है कि उन्हें किसे प्लेइंग इलेवन में शामिल करना है। अगर उन्हें अश्विन पर भरोसा है तो ठीक है क्योंकि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में खेला है और वो जरूरत पड़ने पर चीजों को सही तरीके के साथ कर सकते हैं। वहीं अगर आप विरोधी टीम को चौंकाना चाहते हैं तो आप रिस्ट स्पिनर चहल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां पर कप्तान और टीम प्रबंधन का जिस पर ज्यादा विश्वास होगा उसे ही प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी।
| इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में आर अश्विन को मौका मिलेगा या फिर उनकी जगह टीम में युजवेंद्रा चहल आएंगे इसके बारे में बात करते हुए कपिल देव ने कहा कि ये टीम मैनेजमेंट पर निर्भर करता है कि उन्हें किसे प्लेइंग इलेवन में शामिल करना है। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम ने रोहित शर्मा की कप्तानी में टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। भारतीय टीम ने सुपर बारह स्टेज के पांच मैचों में से चार में जीत दर्ज की थी और आठ अंक के साथ शान से टाप चार में जगह बनाई। अब सेमीफाइनल में टीम इंडिया का सामना इंग्लैंड के साथ एडिलेड में दस नवंबर को होगा। इस सेमीफाइनल मुकाबले से पहले टीम इंडिया को पहला वनडे वर्ल्ड कप खिताब दिलाने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव ने सीनियर स्पिनर आर अश्विन के प्रदर्शन पर सवाल उठाए और उन पर टिप्पणी भी की। आर अश्विन को पांचों ग्रुप मैच में प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई और उन्होंने पाँच मैचों में छः विकेट लिए जबकि सात. बावन की इकोनामी रेट के साथ रन दिए, लेकिन कपिल देव उनके प्रदर्शन से संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने आर अश्विन के बारे में कहा कि उन्होंने कुछ ऐसा नहीं किया कि मैं उन पर विश्वास कर सकूं। उन्होंने विकेट जरूर लिए, लेकिन ऐसा लगा नहीं कि ये विकेट उन्होंने लिए। दरअसल बल्लेबाज इस तरह से आउट हुए कि उन्हें खुद भी एक-दो विकेट लेते हुए शर्म आ रही थी और वो अपना चेहरा छुपा रहे थे। कपिल देव ने आगे कहा कि विकेट लेने के बाद गेंदबाज का आत्मविश्वास बढ़ता है, लेकिन हम जिस अश्विन को जानते हैं हमने उन्हें पूरी तरह से लय में नहीं देखा। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में आर अश्विन को मौका मिलेगा या फिर उनकी जगह टीम में युजवेंद्रा चहल आएंगे इसके बारे में बात करते हुए कपिल देव ने कहा कि ये टीम मैनेजमेंट पर निर्भर करता है कि उन्हें किसे प्लेइंग इलेवन में शामिल करना है। अगर उन्हें अश्विन पर भरोसा है तो ठीक है क्योंकि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में खेला है और वो जरूरत पड़ने पर चीजों को सही तरीके के साथ कर सकते हैं। वहीं अगर आप विरोधी टीम को चौंकाना चाहते हैं तो आप रिस्ट स्पिनर चहल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां पर कप्तान और टीम प्रबंधन का जिस पर ज्यादा विश्वास होगा उसे ही प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी। |
बी. ए. पास के बाद आ रही फिल्म 'एम. ए. पास- सरकारी नौकरी' का 01 मई, 2022 को फिल्मीबॉक्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक्सक्लूसिव प्रीमियर किया जाएगा.
आज से 10 साल पहले यानी साल 2012 में रिलीज हुई निर्माता नरेंद्र सिंह की फिल्म 'बी. ए. पास' (B. A. Pass) ने बोल्ड विषयों पर बनने वाली फिल्मों में अपनी एक खास जगह बनाई थी. आज भी उस फिल्म को कहानी कहने के अलग अंदाज के लिए याद किया जाता है. फिल्म 'बी. ए. पास' की सफलता के बाद निर्माता ने 'बी. ए. पास 2' बनाया जो कि 2017 में रिलीज हुई, वो फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी थी जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए और शादी करने से बचने के लिए कुछ गलत फैसले लेती है और बुरी आदतों का शिकार होकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर देती है. दोनों फिल्मों की कामयाबी के बाद निर्माता नरेंद्र सिंह (Narendra Singh) अब 'एम. ए. पास- सरकारी नौकरी' (M. A. Pass- Sarkari Naukari) लेकर आ रहे हैं और इस फिल्म का निर्देशन अक्षय कुमार कर रहे हैं.
इस फिल्म में सनी सचदेवा और मुस्कान मेहता मुख्य भूमिका में नजर आएंगे. इस फिल्म का निर्माण फिल्म बॉक्स के बैनर तले नरेंद्र सिंह ने किया है. फिल्म का लेखन दीप चुघ ने किया है तो वहीं फिल्म के छायांकन की जिम्मेदारी अंशुल शर्मा ने निभाई है. 'एम. ए. पास- सरकारी नौकरी' का 01 मई, 2022 को फिल्मीबॉक्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक्सक्लूसिव प्रीमियर किया जाएगा.
| बी. ए. पास के बाद आ रही फिल्म 'एम. ए. पास- सरकारी नौकरी' का एक मई, दो हज़ार बाईस को फिल्मीबॉक्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक्सक्लूसिव प्रीमियर किया जाएगा. आज से दस साल पहले यानी साल दो हज़ार बारह में रिलीज हुई निर्माता नरेंद्र सिंह की फिल्म 'बी. ए. पास' ने बोल्ड विषयों पर बनने वाली फिल्मों में अपनी एक खास जगह बनाई थी. आज भी उस फिल्म को कहानी कहने के अलग अंदाज के लिए याद किया जाता है. फिल्म 'बी. ए. पास' की सफलता के बाद निर्माता ने 'बी. ए. पास दो' बनाया जो कि दो हज़ार सत्रह में रिलीज हुई, वो फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी थी जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए और शादी करने से बचने के लिए कुछ गलत फैसले लेती है और बुरी आदतों का शिकार होकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर देती है. दोनों फिल्मों की कामयाबी के बाद निर्माता नरेंद्र सिंह अब 'एम. ए. पास- सरकारी नौकरी' लेकर आ रहे हैं और इस फिल्म का निर्देशन अक्षय कुमार कर रहे हैं. इस फिल्म में सनी सचदेवा और मुस्कान मेहता मुख्य भूमिका में नजर आएंगे. इस फिल्म का निर्माण फिल्म बॉक्स के बैनर तले नरेंद्र सिंह ने किया है. फिल्म का लेखन दीप चुघ ने किया है तो वहीं फिल्म के छायांकन की जिम्मेदारी अंशुल शर्मा ने निभाई है. 'एम. ए. पास- सरकारी नौकरी' का एक मई, दो हज़ार बाईस को फिल्मीबॉक्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक्सक्लूसिव प्रीमियर किया जाएगा. |
नई दिल्ली। कोरोना अवधि के दौरान, देश में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण इस दौरान इंटरनेट का बढ़ता उपयोग है। साइबर अपराधी इसका फायदा उठाकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। आपको बता दें कि इन दिनों ये धोखाधड़ी कोरोना के नाम पर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बना रही है। इस मामले की जानकारी गृह मंत्रालय ने दी है। साइबर फ्रेंड नामक सरकार के एक ट्विटर हैंडल के माध्यम से लोगों को इस नए तरीके से सतर्क किया गया है।
मंत्रालय ने लोगों को ऐसी कोई गलती नहीं करने की चेतावनी दी है। यह भी कहा जाता है कि आपके पास आने वाले किसी भी कॉल, मैसेज या ई-मेल पर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
मंत्रालय ने लोगों को ऐसी कोई गलती नहीं करने की चेतावनी दी है। यह भी कहा जाता है कि आपके पास आने वाले किसी भी कॉल, मैसेज या ई-मेल पर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले अधिक सामने आए हैं। सरकार और बैंकों ने प्रतिज्ञा की कि उन लोगों को साइबर अपराध के बारे में जागरूक किया जाएगा। लेकिन फिर भी ऐसे अपराध रुक नहीं रहे हैं। साइबरक्रिमिनल लोगों को लूटने के लिए कई तरीके अपनाता है।आपको बता दें कि इस लिंक पर क्लिक करके हैकर्स आपकी सारी जानकारी चुरा सकते हैं। ऐसे में कभी भी ऐसे लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि कई बार लोग बिना सोचे लिंक पर क्लिक कर देते हैं और हैकर्स को उनकी जानकारी मिल जाती है। इस संदेश का प्रारूप ट्वीट में दिखाया गया है कि गृह मंत्रालय ने साइबर मित्र के माध्यम से ट्वीट किया है। अगर आपको भी ऐसा कोई मैसेज आता है, तो तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को इसकी सूचना दें। इसके अलावा, संदेश में दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।फर्जी संदेशों से कैसे बचें? सरकार द्वारा समय-समय पर नकली संदेशों के बारे में चेतावनी जारी की जाती है। इसके साथ, आपको किसी अज्ञात नंबर से संदेशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और ऐसे संदेशों को अग्रेषित करने से बचना चाहिए। ताकि यूजर फ्रॉड का शिकार न हो।
| नई दिल्ली। कोरोना अवधि के दौरान, देश में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण इस दौरान इंटरनेट का बढ़ता उपयोग है। साइबर अपराधी इसका फायदा उठाकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। आपको बता दें कि इन दिनों ये धोखाधड़ी कोरोना के नाम पर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बना रही है। इस मामले की जानकारी गृह मंत्रालय ने दी है। साइबर फ्रेंड नामक सरकार के एक ट्विटर हैंडल के माध्यम से लोगों को इस नए तरीके से सतर्क किया गया है। मंत्रालय ने लोगों को ऐसी कोई गलती नहीं करने की चेतावनी दी है। यह भी कहा जाता है कि आपके पास आने वाले किसी भी कॉल, मैसेज या ई-मेल पर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। मंत्रालय ने लोगों को ऐसी कोई गलती नहीं करने की चेतावनी दी है। यह भी कहा जाता है कि आपके पास आने वाले किसी भी कॉल, मैसेज या ई-मेल पर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले अधिक सामने आए हैं। सरकार और बैंकों ने प्रतिज्ञा की कि उन लोगों को साइबर अपराध के बारे में जागरूक किया जाएगा। लेकिन फिर भी ऐसे अपराध रुक नहीं रहे हैं। साइबरक्रिमिनल लोगों को लूटने के लिए कई तरीके अपनाता है।आपको बता दें कि इस लिंक पर क्लिक करके हैकर्स आपकी सारी जानकारी चुरा सकते हैं। ऐसे में कभी भी ऐसे लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि कई बार लोग बिना सोचे लिंक पर क्लिक कर देते हैं और हैकर्स को उनकी जानकारी मिल जाती है। इस संदेश का प्रारूप ट्वीट में दिखाया गया है कि गृह मंत्रालय ने साइबर मित्र के माध्यम से ट्वीट किया है। अगर आपको भी ऐसा कोई मैसेज आता है, तो तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को इसकी सूचना दें। इसके अलावा, संदेश में दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।फर्जी संदेशों से कैसे बचें? सरकार द्वारा समय-समय पर नकली संदेशों के बारे में चेतावनी जारी की जाती है। इसके साथ, आपको किसी अज्ञात नंबर से संदेशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और ऐसे संदेशों को अग्रेषित करने से बचना चाहिए। ताकि यूजर फ्रॉड का शिकार न हो। |
मुंबई। चार दिन के नाटकीय घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस करके इस्तीफा वापस लेने का ऐलान किया। उससे पहले एनसीपी अध्यक्ष के नाम पर फैसला करने के लिए बनी 15 सदस्यों की कमेटी की एक अहम बैठक हुई थी और बैठक के बाद प्रफुल्ल पटेल ने बताया था कि कमेटी ने शरद पवार का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है। गौरतलब है कि पवार ने दो मई को एक कार्यक्रम में एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था।
बहरहाल, शरद पवार ने एक दिन पहले गुरुवार को ही इस बात का संकेत दे दिया था वे इस्तीफा वापस लेंगे। उन्होंने कहा था कि उनसे गलती हुई, जो उन्होंने नेताओं, कार्यकर्ताओं से पहले बात नहीं की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि उन पर इस्तीफा वापस लेने का बड़ा दबाव है। उसके बाद शुक्रवार की सुबह कमेटी ने उनका इस्तीफा नामंजूर किया और उसके साथ ही एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने जश्न शुरू कर दिया। शरद पवार के भतीजे अजित पवार न जश्न में शामिल हुए और न शरद पवार की प्रेस कांफ्रेंस में हिस्सा लिया।
शरद पवार की प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। प्रेस कांफ्रेंस में पवार ने कहा- पद छोड़ने के बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुझसे मेरे फैसले पर विचार करने को कहा था। वो चाहते थे कि मैं अपने पद पर बना रहा हूं। उनके आग्रह के बाद ही मैंने अपने फैसले पर फिर से विचार किया। इसके बाद ही मैंने आज अपना इस्तीफा वापस ले रहा हूं। उन्होंने कहा- मैं अपने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करता हूं। मेरे चाहने वाले भी चाहते थे कि मैं अपने फैसले पर फिर से विचार करूं।
पवार ने कहा- मेरे इस्तीफे को लेकर दूसरे पार्टी के नेता और मेरे दोस्त भी यही चाहते थे। पूरे देश से लोग और खासतौर पर महाराष्ट्र के लोगों ने मुझे अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर किया। सबकी भावना का सम्मान करते हुए ही मैंने अपना इस्तीफा वापस लेने का एलान किया है। शरद पवार ने कहा- मैं आगे भी अध्यक्ष बना रहूंगा लेकिन मैंने अब ये सोचा है कि पार्टी के अंदर किसी भी पद या जिम्मेदारी के लिए उत्तराधिकार योजना पर काम करने की जरूरत है। मैं लोगों को नई जिम्मेदारी दूंगा और नए लीडर भी तैयार करूंगा।
प्रेस कांफ्रेंस में अजित पवार के मौजूद नहीं होने को लेकर पूछे गए सवाल पर शरद पवार ने कहा- ये अनिवार्य नहीं है कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता इस प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद ही रहें। ऐसे कई हैं जो यहां अभी मौजूद नहीं हैं लेकिन वो सुबह कमेटी की बैठक में मौजूद थे। इसके बाद सभी ने एक साथ आकर मुझे बताया था कि वो मेरे साथ हैं और वो सब ये चाहते हैं कि मैं अपने फैसले को वापस लूं। उन्होंने कहा- मैं इस बात से सहमत हूं कि मुझे अपने इस्तीफे की घोषणा से पहले पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात करनी चाहिए थी। पार्टी के टूट के बारे में पवार ने कहा- अगर कोई पार्टी छोड़कर जाना चाहता है तो उसे कोई रोक नहीं सकता है। लेकिन हमारी पार्टी से कोई जाना चाहता है इस बात में कोई सच्चाई नहीं है।
| मुंबई। चार दिन के नाटकीय घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस करके इस्तीफा वापस लेने का ऐलान किया। उससे पहले एनसीपी अध्यक्ष के नाम पर फैसला करने के लिए बनी पंद्रह सदस्यों की कमेटी की एक अहम बैठक हुई थी और बैठक के बाद प्रफुल्ल पटेल ने बताया था कि कमेटी ने शरद पवार का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है। गौरतलब है कि पवार ने दो मई को एक कार्यक्रम में एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। बहरहाल, शरद पवार ने एक दिन पहले गुरुवार को ही इस बात का संकेत दे दिया था वे इस्तीफा वापस लेंगे। उन्होंने कहा था कि उनसे गलती हुई, जो उन्होंने नेताओं, कार्यकर्ताओं से पहले बात नहीं की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि उन पर इस्तीफा वापस लेने का बड़ा दबाव है। उसके बाद शुक्रवार की सुबह कमेटी ने उनका इस्तीफा नामंजूर किया और उसके साथ ही एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने जश्न शुरू कर दिया। शरद पवार के भतीजे अजित पवार न जश्न में शामिल हुए और न शरद पवार की प्रेस कांफ्रेंस में हिस्सा लिया। शरद पवार की प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। प्रेस कांफ्रेंस में पवार ने कहा- पद छोड़ने के बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुझसे मेरे फैसले पर विचार करने को कहा था। वो चाहते थे कि मैं अपने पद पर बना रहा हूं। उनके आग्रह के बाद ही मैंने अपने फैसले पर फिर से विचार किया। इसके बाद ही मैंने आज अपना इस्तीफा वापस ले रहा हूं। उन्होंने कहा- मैं अपने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करता हूं। मेरे चाहने वाले भी चाहते थे कि मैं अपने फैसले पर फिर से विचार करूं। पवार ने कहा- मेरे इस्तीफे को लेकर दूसरे पार्टी के नेता और मेरे दोस्त भी यही चाहते थे। पूरे देश से लोग और खासतौर पर महाराष्ट्र के लोगों ने मुझे अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर किया। सबकी भावना का सम्मान करते हुए ही मैंने अपना इस्तीफा वापस लेने का एलान किया है। शरद पवार ने कहा- मैं आगे भी अध्यक्ष बना रहूंगा लेकिन मैंने अब ये सोचा है कि पार्टी के अंदर किसी भी पद या जिम्मेदारी के लिए उत्तराधिकार योजना पर काम करने की जरूरत है। मैं लोगों को नई जिम्मेदारी दूंगा और नए लीडर भी तैयार करूंगा। प्रेस कांफ्रेंस में अजित पवार के मौजूद नहीं होने को लेकर पूछे गए सवाल पर शरद पवार ने कहा- ये अनिवार्य नहीं है कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता इस प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद ही रहें। ऐसे कई हैं जो यहां अभी मौजूद नहीं हैं लेकिन वो सुबह कमेटी की बैठक में मौजूद थे। इसके बाद सभी ने एक साथ आकर मुझे बताया था कि वो मेरे साथ हैं और वो सब ये चाहते हैं कि मैं अपने फैसले को वापस लूं। उन्होंने कहा- मैं इस बात से सहमत हूं कि मुझे अपने इस्तीफे की घोषणा से पहले पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात करनी चाहिए थी। पार्टी के टूट के बारे में पवार ने कहा- अगर कोई पार्टी छोड़कर जाना चाहता है तो उसे कोई रोक नहीं सकता है। लेकिन हमारी पार्टी से कोई जाना चाहता है इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। |
UP News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी (Varanasi) जिले से एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहां सिलेंडर फटने से एक घर घराशायी हो गया। मकान में मलबे में दबने से एक महिला की मौत हो गई। जबकि करीब तीन लोग दब गए। मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें राहत कार्य में जुटी है। धमाका इतना तेज था कि मकान की छत उड़ गई।
हादसा वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के जंगमबाड़ी इलाके में हुआ। यहां सिलेंडर फटने से एक मकान ढह गया। बताया गया है कि घर में सुबह के समय खाना बन रहा था। तभी किन्हीं कारणों से गैस सिलेंडर में आग लग गई। आग लगते ही सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। मलबे के नीचे दबने से एक महिला की मौत हो गई है। मरने वाली महिला की पहचान बेबी वर्मा के रूप में हुई है।
सूचना पर वाराणसी के जिलाधिकारी (डीएम) एस राजलिंगम भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि चार कमरों का घर था। दो कमरों की छत गिरने से चार लोग मलबे में दब गए थे। बेबी वर्मा नाम की महिला की मौत हो गई है। वाराणसी के डीएम राजलिंगम ने बताया कि धमाका काफी तेज था, जिसके बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसा शुक्रवार सुबह हुआ। तेज धमाके की आवाज के साथ एक घर के कमरों की दीवारें और छत भरभराकर गिर गई। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग घर से बाहर निकले। पड़ोसी भी घर की हालत को देख कर सहम गए। उन्होंने बताया कि मकान की छत पूरी तरह से गायब हो गई थी।
पता चला कि परिवार के सदस्य मलबे के नीचे दबे हुए थे। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मदद के लिए शोर मचाना शुरू किया और पुलिस को मामला की जानकारी दी। पुलिस और दमकल विभाग के लोगों ने मौके पर पहुंच कर राहत-बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
| UP News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहां सिलेंडर फटने से एक घर घराशायी हो गया। मकान में मलबे में दबने से एक महिला की मौत हो गई। जबकि करीब तीन लोग दब गए। मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें राहत कार्य में जुटी है। धमाका इतना तेज था कि मकान की छत उड़ गई। हादसा वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के जंगमबाड़ी इलाके में हुआ। यहां सिलेंडर फटने से एक मकान ढह गया। बताया गया है कि घर में सुबह के समय खाना बन रहा था। तभी किन्हीं कारणों से गैस सिलेंडर में आग लग गई। आग लगते ही सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। मलबे के नीचे दबने से एक महिला की मौत हो गई है। मरने वाली महिला की पहचान बेबी वर्मा के रूप में हुई है। सूचना पर वाराणसी के जिलाधिकारी एस राजलिंगम भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि चार कमरों का घर था। दो कमरों की छत गिरने से चार लोग मलबे में दब गए थे। बेबी वर्मा नाम की महिला की मौत हो गई है। वाराणसी के डीएम राजलिंगम ने बताया कि धमाका काफी तेज था, जिसके बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसा शुक्रवार सुबह हुआ। तेज धमाके की आवाज के साथ एक घर के कमरों की दीवारें और छत भरभराकर गिर गई। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग घर से बाहर निकले। पड़ोसी भी घर की हालत को देख कर सहम गए। उन्होंने बताया कि मकान की छत पूरी तरह से गायब हो गई थी। पता चला कि परिवार के सदस्य मलबे के नीचे दबे हुए थे। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मदद के लिए शोर मचाना शुरू किया और पुलिस को मामला की जानकारी दी। पुलिस और दमकल विभाग के लोगों ने मौके पर पहुंच कर राहत-बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। |
(५६) श्री जम्योदेवसूरि पाटि ५६ सवत १६६२ स्वर्ग (६०) श्री नन्नसूरि पाटि ६० सवत १७१८ स्वर्ग
(६१) श्री विद्यमान भट्टा (रक) श्री उजोगसूरि पाटि ६१ सवत १६८७ वाचक पद सवत १७२८ ज्येष्ठ सुदि १२ वार शनिदिने सूरिपद विद्यमान विजय राज्ये ।
लेखक प्रशस्ति - सवत १७२५ वर्षे श्री शालिवाहन राज्ये शाके १५६३ प्रवर्तमाने श्री भाद्रपद मास शुभ शुक्लपक्षे नवमी ६ दिने वार शनिदिने श्रीमत् परिलवीय गच्छे भट्टा० श्री शातिसूरि तत्पट्टे भ० श्री श्री ७ जस्योदेवमूरि सताने श्री श्री उपाध्याय श्री महेन्द्रसागर तत्शिष्य मु० श्री जयसागर शिष्य चेला परमसागर वाचनायें श्री गुरारो पट्टावली लिख्यत ॥ श्री ॥
उपरोक्त पट्टावली प्रकाशित है । यह पट्टावली वीकानेर वडा उपाश्रय के वृहत् ज्ञान भण्डार को सूची बनाते समय एक गुटकाकार पुस्तक के रूप मे श्री प्रगरचदजी नाहटा जी को प्राप्त हुई थी । गुटका उसी गच्छ के यतियो द्वारा लिखा हुआ है । उसो गुटके की नकल करके श्री नाहटा जी ने अपने लेख 'पल्लीवाल गच्छ पट्टावली' मे श्री आत्मानद अर्धगताब्दी ग्रथ मे उमे प्रकाशित की है ।
१६ वें श्री शातिसूरि से २२ व श्री श्रमदेवसूर पर्यंत सातो नाम श्रागे के पट्टधरो के लिये कमय रूढि बनकर चलते रहे है । नामो की रूढता अन्य गच्छो मे भी पायी जाती है । | श्री जम्योदेवसूरि पाटि छप्पन सवत एक हज़ार छः सौ बासठ स्वर्ग श्री नन्नसूरि पाटि साठ सवत एक हज़ार सात सौ अट्ठारह स्वर्ग श्री विद्यमान भट्टा श्री उजोगसूरि पाटि इकसठ सवत एक हज़ार छः सौ सत्तासी वाचक पद सवत एक हज़ार सात सौ अट्ठाईस ज्येष्ठ सुदि बारह वार शनिदिने सूरिपद विद्यमान विजय राज्ये । लेखक प्रशस्ति - सवत एक हज़ार सात सौ पच्चीस वर्षे श्री शालिवाहन राज्ये शाके एक हज़ार पाँच सौ तिरेसठ प्रवर्तमाने श्री भाद्रपद मास शुभ शुक्लपक्षे नवमी छः दिने वार शनिदिने श्रीमत् परिलवीय गच्छे भट्टाशून्य श्री शातिसूरि तत्पट्टे भशून्य श्री श्री सात जस्योदेवमूरि सताने श्री श्री उपाध्याय श्री महेन्द्रसागर तत्शिष्य मुशून्य श्री जयसागर शिष्य चेला परमसागर वाचनायें श्री गुरारो पट्टावली लिख्यत ॥ श्री ॥ उपरोक्त पट्टावली प्रकाशित है । यह पट्टावली वीकानेर वडा उपाश्रय के वृहत् ज्ञान भण्डार को सूची बनाते समय एक गुटकाकार पुस्तक के रूप मे श्री प्रगरचदजी नाहटा जी को प्राप्त हुई थी । गुटका उसी गच्छ के यतियो द्वारा लिखा हुआ है । उसो गुटके की नकल करके श्री नाहटा जी ने अपने लेख 'पल्लीवाल गच्छ पट्टावली' मे श्री आत्मानद अर्धगताब्दी ग्रथ मे उमे प्रकाशित की है । सोलह वें श्री शातिसूरि से बाईस व श्री श्रमदेवसूर पर्यंत सातो नाम श्रागे के पट्टधरो के लिये कमय रूढि बनकर चलते रहे है । नामो की रूढता अन्य गच्छो मे भी पायी जाती है । |
राजधानी लखनऊ में पुलिस से गुंडई की घटना सामने आई। रास्ते से गाड़ी हटाने को कहा तो दबंगों ने दरोगा को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। मामले में पुलिस पड़ताल कर रही है।
लखनऊ में बिजनौर कोतवाली से ड्यूटी कर लौट रहे दरोगा ने रास्ते में खड़ी गाड़ी हटाने के लिए कहा। दरोगा की यह बात दबंगों को पसंद नहीं आई। तैश में आकर युवकों ने दरोगा पर हमला कर दिया। उन्हें दौड़ा कर पीटा गया। जिसमें दरोगा को गम्भीर चोट लगी। झगड़े के दौरान हमलावर चेन भी छीन ले गए। रविवार रात हुई वारदात का मुकदमा सोमवार दोपहर सरोजनीनगर कोतवाली में दर्ज कराया गया। जिसके आधार पर पुलिस पड़ताल कर रही है।
सत्यलोक कॉलोनी निवासी एसआई अनुराग पाण्डेय बिजनौर कोतवाली में तैनात हैं। रविवार रात करीब दस बजे वह ड्यूटी खत्म करने के बाद घर लौटने लगे। बदालीखेड़ा पहुंचने पर रास्ते में एक बाइक खड़ी नजर आई। रास्ता बाधित होने पर अनुराग ने बाइक हटाने के लिए कहा। उनकी आवाज सुन कर अक्षय द्विवेदी के मकान से ऋतुराज और शिवराज बाहर निकल आए। जो नशे में धुत था। उन्होंने बाइक हटाने से मना कर दिया। जिसे लेकर कहासुनी हुई। विवाद के दौरान ही ऋतुराज के घर से डेढ़ दर्जन युवक बाहर आ गए। जिन्होंने भी शराब पी हुई थी। आरोपियों ने अनुराग को घेर कर हमला कर दिया। हमलावरों से बचने के लिए अनुराग ने शोर मचाया। स्थानीय लोगों को मदद के लिए आते देख ऋतुराज और शिवराज साथियों भाग निकले।
हमले के दौरान अनुराग के सिर पर वार किए गए। जिससे वह बेसुध होकर गिर पड़ा। होश आने पर अनुराग अस्पताल में थे। दरोगा की चेन भी गायब है। वहीं स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि आरोपी पहले भी गाड़ी खड़ी करने को लेकर कई लोगों से विवाद कर चुके हैं। अस्पताल में इलाज कराने के बाद सोमवार दोपहर को दरोगा ने सरोजनीनगर कोतवाली में तहरीर दी। जिसके आधार पर ऋतुराज और शिवराज के खिलाफ बलवा, गम्भीर चोट पहुंचा कर बेहोश करना और धमकी देने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर सरोजनीनगर ने बताया कि दरोगा पर हमला करने वाले आरोपियों की तलाश की जा रही है।
| राजधानी लखनऊ में पुलिस से गुंडई की घटना सामने आई। रास्ते से गाड़ी हटाने को कहा तो दबंगों ने दरोगा को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। मामले में पुलिस पड़ताल कर रही है। लखनऊ में बिजनौर कोतवाली से ड्यूटी कर लौट रहे दरोगा ने रास्ते में खड़ी गाड़ी हटाने के लिए कहा। दरोगा की यह बात दबंगों को पसंद नहीं आई। तैश में आकर युवकों ने दरोगा पर हमला कर दिया। उन्हें दौड़ा कर पीटा गया। जिसमें दरोगा को गम्भीर चोट लगी। झगड़े के दौरान हमलावर चेन भी छीन ले गए। रविवार रात हुई वारदात का मुकदमा सोमवार दोपहर सरोजनीनगर कोतवाली में दर्ज कराया गया। जिसके आधार पर पुलिस पड़ताल कर रही है। सत्यलोक कॉलोनी निवासी एसआई अनुराग पाण्डेय बिजनौर कोतवाली में तैनात हैं। रविवार रात करीब दस बजे वह ड्यूटी खत्म करने के बाद घर लौटने लगे। बदालीखेड़ा पहुंचने पर रास्ते में एक बाइक खड़ी नजर आई। रास्ता बाधित होने पर अनुराग ने बाइक हटाने के लिए कहा। उनकी आवाज सुन कर अक्षय द्विवेदी के मकान से ऋतुराज और शिवराज बाहर निकल आए। जो नशे में धुत था। उन्होंने बाइक हटाने से मना कर दिया। जिसे लेकर कहासुनी हुई। विवाद के दौरान ही ऋतुराज के घर से डेढ़ दर्जन युवक बाहर आ गए। जिन्होंने भी शराब पी हुई थी। आरोपियों ने अनुराग को घेर कर हमला कर दिया। हमलावरों से बचने के लिए अनुराग ने शोर मचाया। स्थानीय लोगों को मदद के लिए आते देख ऋतुराज और शिवराज साथियों भाग निकले। हमले के दौरान अनुराग के सिर पर वार किए गए। जिससे वह बेसुध होकर गिर पड़ा। होश आने पर अनुराग अस्पताल में थे। दरोगा की चेन भी गायब है। वहीं स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि आरोपी पहले भी गाड़ी खड़ी करने को लेकर कई लोगों से विवाद कर चुके हैं। अस्पताल में इलाज कराने के बाद सोमवार दोपहर को दरोगा ने सरोजनीनगर कोतवाली में तहरीर दी। जिसके आधार पर ऋतुराज और शिवराज के खिलाफ बलवा, गम्भीर चोट पहुंचा कर बेहोश करना और धमकी देने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर सरोजनीनगर ने बताया कि दरोगा पर हमला करने वाले आरोपियों की तलाश की जा रही है। |
मेरठ में यूरोलॉजी के सेमिनार में डॉक्टरों को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने मंच पर योग करके दिखाए। उन्होंने सेमिनार में बोलते हुए दावा किया कि डायबिटिज, ब्लड प्रेशर, गंजापन और इसी तरह की अन्य अनुवांशिक बीमारियों को योग की मदद से जड़ से खत्म किया जा सकता है। बाबा ने कहा कि वह PGI के साथ मिलकर 9 दिन में किडनी फंक्शन को ठीक कर चुके हैं। दावा किया कि योग से सांस एवं मन पर नियंत्रण से सौ वर्ष की उम्र पाई जा सकती है।
इस मौके पर स्वामी रामदेव ने कहा कि ज्यादा दूध देने की क्षमता पैदा करने के लिए देशी गायों पर अनुसंधान चल रहा है। उन्होंने कहा कि अब ज्यादा दूध के लिए विदेशी नस्ल की गाय नहीं, बल्कि देसी गायों में 40 लीटर की क्षमता पैदा की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए अनुसंधान चल रहा है। बाबा रामदेव ने कहा कि 25 लीटर की क्षमता वाली गाय हमारे संस्थान की शोभा बढ़ा रही है।
| मेरठ में यूरोलॉजी के सेमिनार में डॉक्टरों को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने मंच पर योग करके दिखाए। उन्होंने सेमिनार में बोलते हुए दावा किया कि डायबिटिज, ब्लड प्रेशर, गंजापन और इसी तरह की अन्य अनुवांशिक बीमारियों को योग की मदद से जड़ से खत्म किया जा सकता है। बाबा ने कहा कि वह PGI के साथ मिलकर नौ दिन में किडनी फंक्शन को ठीक कर चुके हैं। दावा किया कि योग से सांस एवं मन पर नियंत्रण से सौ वर्ष की उम्र पाई जा सकती है। इस मौके पर स्वामी रामदेव ने कहा कि ज्यादा दूध देने की क्षमता पैदा करने के लिए देशी गायों पर अनुसंधान चल रहा है। उन्होंने कहा कि अब ज्यादा दूध के लिए विदेशी नस्ल की गाय नहीं, बल्कि देसी गायों में चालीस लीटरटर की क्षमता पैदा की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए अनुसंधान चल रहा है। बाबा रामदेव ने कहा कि पच्चीस लीटरटर की क्षमता वाली गाय हमारे संस्थान की शोभा बढ़ा रही है। |
की शुद्ध भेंट को वेदान्त समझते हैं । दर्शन-शास्त्र और तर्क, पुस्तक और प्रमाण, पाण्डित्य और अलङ्कार - विद्या से बुद्धि की अनुमति पुष्टि पाकर बढ़ सकती है, किंतु इन उपायों से राम के वेदान्त की प्राप्ति किसी को नहीं हो सकती । शरीर और मनकामी और सच्चा त्याग तभो होता है, जब चिस ने प्रेम की ज्वाला प्रदीप्त होता है शरीर का मानसिक त्याग और शरीर की हर एक नस का प्रेम के चरणों में अर्पण और प्रेममयी सेवा में वित्त का समर्पण मनुष्य के भीतरी स्वर्ग के कपाट खोल देता है। राम का वेदांत उस दिव्य चेतनता की सुंदर शान्ति है कि जो शरीर और चित्त के बन्धनों से मुक्त है, जहाँ वाणो मूक हो जाती है, जहाँ सूर्य और चंद्र का लोप हो जाता है, जहाँ समग्र दृष्टि स्वप्न की तरह हिलोरे लेकर अनंत में चक्कर लगाती है। इस स्थान से राम नाचे सीढ़ी लटकाते हैं कि हम उन तक पहुँच सकें और वहाँ से नांचे को दुनिया के दृश्य देख सकें । श्रक्षय शांति वहाँ बँट रही है और वहाँ मनुष्य पूरी तरह ईश्वर में लीन हो जाता है। वहां सब तर्क-वितर्क बंद हो जाता है। वहाँ जो भी हैं अपने चारों ओर केवल देखते और सकते हैं, और हरेक से कहते हैं, "तू अच्छा है" "तू विशुद्ध है", "तू पवित्र है", "तू हो वह है" ।
Neither the sun shines there, nor sparkles the moon, Pranas and sound are hushed into Silence, All life reposes in Soul's Swect Slumber, No God, no man, no cosmos there, no soul, Naught but golden Calm and Peace and Splendour.
न वहां सूर्य चमकता है, न चंद्र जगमगाता है, प्राण और शब्द मौन हैं, | की शुद्ध भेंट को वेदान्त समझते हैं । दर्शन-शास्त्र और तर्क, पुस्तक और प्रमाण, पाण्डित्य और अलङ्कार - विद्या से बुद्धि की अनुमति पुष्टि पाकर बढ़ सकती है, किंतु इन उपायों से राम के वेदान्त की प्राप्ति किसी को नहीं हो सकती । शरीर और मनकामी और सच्चा त्याग तभो होता है, जब चिस ने प्रेम की ज्वाला प्रदीप्त होता है शरीर का मानसिक त्याग और शरीर की हर एक नस का प्रेम के चरणों में अर्पण और प्रेममयी सेवा में वित्त का समर्पण मनुष्य के भीतरी स्वर्ग के कपाट खोल देता है। राम का वेदांत उस दिव्य चेतनता की सुंदर शान्ति है कि जो शरीर और चित्त के बन्धनों से मुक्त है, जहाँ वाणो मूक हो जाती है, जहाँ सूर्य और चंद्र का लोप हो जाता है, जहाँ समग्र दृष्टि स्वप्न की तरह हिलोरे लेकर अनंत में चक्कर लगाती है। इस स्थान से राम नाचे सीढ़ी लटकाते हैं कि हम उन तक पहुँच सकें और वहाँ से नांचे को दुनिया के दृश्य देख सकें । श्रक्षय शांति वहाँ बँट रही है और वहाँ मनुष्य पूरी तरह ईश्वर में लीन हो जाता है। वहां सब तर्क-वितर्क बंद हो जाता है। वहाँ जो भी हैं अपने चारों ओर केवल देखते और सकते हैं, और हरेक से कहते हैं, "तू अच्छा है" "तू विशुद्ध है", "तू पवित्र है", "तू हो वह है" । Neither the sun shines there, nor sparkles the moon, Pranas and sound are hushed into Silence, All life reposes in Soul's Swect Slumber, No God, no man, no cosmos there, no soul, Naught but golden Calm and Peace and Splendour. न वहां सूर्य चमकता है, न चंद्र जगमगाता है, प्राण और शब्द मौन हैं, |
. . . मेरा मतलब है, इस तथ्य के अलावा कि यदि आप उसे आते देखते हैं, तो आप बेहतर दौड़ेंगे!
वह सबसे ज्यादा बात करने वाली ऑनलाइन घटनाओं में से एक है, और अच्छे कारण के लिए - स्लेण्डर मैन एक डरावना दोस्त है, जो डिजिटल युग के लिए एक डरावना प्रेरणादायक बूगीमैन है। उनके पास कम से कम आधे दर्जन उपनाम हैं, जिनमें "स्लेन्डी," "द टाल मैन", श्री स्लिम, "" डैडी लॉन्गलेग्स "और" द ऑपरेटर "शामिल हैं। 200 9 में शुरूआत की गई, जब रहस्यमय तस्वीरों ने एक दिखाया विद्यालयों और खेल के मैदानों में काले डंठल वाले बच्चों में डरावना, भूतिया आंकड़ा पहना जाता था। यह अफवाह थी कि तस्वीर लेने वाले लोगों को कभी नहीं देखा या फिर से सुना नहीं गया था। उनके गायब होने से स्लेण्डर मैन पर दोषी ठहराया गया था, जैसा कि कई लापता बच्चों के थे, और यहां तक कि दुनिया भर में कुछ वयस्कों।
जब आप उसे देखते हैं तो आपको पतला आदमी पता चलेगा। वह गौंट है, आठ से दस फीट लंबा है, और बाहों और हाथों की बजाय कई, झुकाव वाले तम्बू हैं जो रेज़र-तेज बिंदुओं पर आते हैं (उनके पीड़ितों को कम करने के लिए बेहतर! )। सबसे ज्यादा, वे कहते हैं कि पतला आदमी का चेहरा नहीं है। तस्वीरों और चित्रों में उसका चेहरा या तो पूरी तरह से फीचर रहित और खाली होता है - एक अस्पष्ट, असफ़ल ब्लॉब - या एक माँ की तरह गज में लपेटा जाता है।
वह अपना आकार बदल सकता है, अदृश्य हो सकता है, और स्थान से "टेलीपोर्ट" कर सकता हैयदि यह स्पष्ट नहीं था कि हम यहां एक अलौकिक इकाई से निपट रहे हैं, ऑनलाइन स्रोतों के मुताबिक पतला आदमी अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति बदल सकता है, अदृश्यता से आगे बढ़ सकता है, और अंतरिक्ष और समय झुकाकर दुनिया में कहीं भी "टेलीपोर्ट" बदल सकता है। (यदि आप सोच रहे हैं कि उसे कभी पकड़ा नहीं गया है . . . अच्छा, दुह! )
स्लेडी का सार्टोरियल ट्रेडमार्क एक काला सूट है, और कुछ तस्वीरों में वह नेकटा पहनने को भी दिखाया गया है! उस विवरण के अलावा - नेकटाई - पतला आदमी का अलमारी शायद ही कभी उसके भौतिक चित्रण में भिन्न होता है। इसके बारे में जानने के लिए आपको क्या देखना चाहिएः हथियार के लिए तम्बू के साथ एक आठ-दस-दस-लंबा लंबा मुखौटा आदमी, निर्दोष रूप से एक साफ काले सूट और टाई में पहना जाता है। किसी और के लिए उसे कोई गलती नहीं है!
सबसे पहले वह आपको डांटता है, फिर वह आपको बीमार बनाता है, फिर वह आपको मार देता हैकोई भी नहीं जानता कि पतला आदमी अपने पीड़ितों को कैसे चुनता है या क्यों, लेकिन एक बार चुने जाने पर, उन्हें एक अलग स्थान (अक्सर जंगल में) ले जाया जाता है, और मार डाला जाता है। कुछ कहते हैं कि वह उन लोगों से मित्रता करता है जिन्हें वह मारना चाहता है, उन्हें दयालुता और सहानुभूति के प्रस्तावों के साथ उनकी मृत्यु के लिए लुभाना। दूसरों का कहना है कि वह अपने पीड़ितों को अदृश्य तरीके से डांटता है, और आपको केवल एकमात्र स्पष्ट संकेत दिया गया है जिसे "पतला बीमारी" कहा जाता है, जिसके लक्षणों में मतली, नाक का खून, दुःस्वप्न, भेदभाव, और "बड़े पैमाने पर परावर्तक" शामिल हैं। यदि आप इनमें से किसी भी स्पष्ट कारण के लिए अनुभव करना शुरू करते हैं, तो देखें - पतला बीमारी आपके गायब होने और गंभीर रूप से निधन का प्रस्ताव है।
. . . और आप खाओ! पतला आदमी के पीड़ितों के अंतिम भाग्य पर कुछ असहमति है, लेकिन एक बहुत से स्रोतों का दावा है कि वह उन्हें खाता है। कोई भी पूछ सकता है कि वह मुंह के बिना उस काम को कैसे पूरा करता है, लेकिन याद रखें - दृढ़ता इच्छा पर अपना आकार बदल सकती है, जिसमें स्थिति की मांग होने पर रेज़र-तेज दांतों के साथ मुंह बढ़ाना शामिल है, लेकिन इतनी ही सीमित नहीं है।
स्लेण्डर मैन "मिथोस" दस्तावेज करने वाली वेबसाइटों के मुताबिक, पतला आदमी दृष्टि 1500 के दशक तक वापस जाती है। उन्होंने जर्मनी में जाने वाले एक प्राणी के 16 वीं शताब्दी के लकड़ी के कटोरे का उद्धरण दिया, जो कि डर ग्रॉसमैन ("द टाल मैन") के रूप में जाना जाता है, जो वयस्कों को अपनाने और / या अपने बच्चों को चुरा लेने के कार्य में चित्रित कई पैरों और भाले की तरह हथियारों के साथ एक कंकाल चित्र है। उद्धृत स्रोतों में डर ग्रॉसमैन को "बुराई परी" के रूप में वर्णित किया गया है जो ब्लैक फॉरेस्ट में रहता है और अकेले वहां जाने के लिए पर्याप्त "बुरे बच्चों" को शिकार करता है।
स्लेन्डर मैन विकी, स्लेन्डी मैन और विकी के बारे में जानकारी के भंडार (जिसमें विभिन्न भूमिका-खेल वाले गेम शामिल हैं) की रिपोर्ट में स्लेण्डर मैन के पास कई प्रॉक्सी, या पागल व्यक्तियों के नियंत्रण या प्रभाव के संबंध हैं। "यह संदेह है कि प्रॉक्सी स्लेंडर मैन के लिए वास्तविक, भौतिक काम करते हैं, जैसे वस्तुओं को बनाना और छेड़छाड़ करना, सबूत नष्ट करना और छोड़ना, वीडियो बनाना और ट्विटर पर प्रतिक्रिया देना, और पीड़ितों को प्रभावित करना। "
दो अलग-अलग घटनाओं में, किशोरावस्था के लड़कियों पर चाकू के हमलों के बारे में कथित तौर पर प्रेरित कहानियों से प्रेरित चाकू के हमलों का आरोप लगाया गया था। 31 मई, 2014 को पहली बार दो 12 वर्षीय लड़कियां शामिल थीं, जिन्होंने विस्कॉन्सिन के वूखेसा में एक सहपाठी को मारा था। उन्होंने पुलिस को बताया कि हमला स्लेंडर मैन को "प्रभावित" करने के लिए था ताकि वे अपनी प्रॉक्सी बन सकें। कुछ हफ्ते बाद, एक 13 वर्षीय ओहियो लड़की "स्लेण्डर मैन के साथ जुनूनी" ने अपनी मां को एक चाकू से हमला किया, जिससे मामूली चोटें आईं। दूसरे हमले में लड़की को उनकी मां ने "मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों" के रूप में वर्णित किया था और कम से कम एक हमले में अपराधियों को परीक्षण के लिए मानसिक रूप से अक्षम माना गया था।
पतला आदमी नहीं है!
यह भालू दोहराता हैः पतला आदमी मौजूद नहीं है! वह एक आविष्कारित चरित्र है , जो एक भीड़दार डरावनी कहानी में एक काल्पनिक बूगीमैन है। असली जीवन छेड़छाड़ की घटनाओं के अलावा स्लेण्डर मैन लोअर के साथ कुछ बच्चों के जुनून के कारण जिम्मेदार ठहराया गया, जो कुछ भी आपने उसके बारे में पढ़ा है वह पूरी तरह से तैयार हो गया था। चरित्र 200 9 में ऑनलाइन फ़ोटोशॉप प्रतियोगिता में प्रतिभागियों द्वारा खरोंच से बनाया गया था, और उत्साही तब से "मिथकों" में शामिल हो रहे हैं। यहां तक कि पतला आदमी के ऐतिहासिक पूर्ववर्ती, डेर ग्रॉसमैन, एक फ़ोटोशॉप निर्माण (उनके "वुडकूट" का निर्माण 16 वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कलाकार हंस होल्बेन द्वारा मूल प्रिंटों को बदलकर बनाया गया था)।
पतला आदमी असली नहीं है। वह एक इंटरनेट शहरी किंवदंती है। उसे डराओ मत!
| . . . मेरा मतलब है, इस तथ्य के अलावा कि यदि आप उसे आते देखते हैं, तो आप बेहतर दौड़ेंगे! वह सबसे ज्यादा बात करने वाली ऑनलाइन घटनाओं में से एक है, और अच्छे कारण के लिए - स्लेण्डर मैन एक डरावना दोस्त है, जो डिजिटल युग के लिए एक डरावना प्रेरणादायक बूगीमैन है। उनके पास कम से कम आधे दर्जन उपनाम हैं, जिनमें "स्लेन्डी," "द टाल मैन", श्री स्लिम, "" डैडी लॉन्गलेग्स "और" द ऑपरेटर "शामिल हैं। दो सौ नौ में शुरूआत की गई, जब रहस्यमय तस्वीरों ने एक दिखाया विद्यालयों और खेल के मैदानों में काले डंठल वाले बच्चों में डरावना, भूतिया आंकड़ा पहना जाता था। यह अफवाह थी कि तस्वीर लेने वाले लोगों को कभी नहीं देखा या फिर से सुना नहीं गया था। उनके गायब होने से स्लेण्डर मैन पर दोषी ठहराया गया था, जैसा कि कई लापता बच्चों के थे, और यहां तक कि दुनिया भर में कुछ वयस्कों। जब आप उसे देखते हैं तो आपको पतला आदमी पता चलेगा। वह गौंट है, आठ से दस फीट लंबा है, और बाहों और हाथों की बजाय कई, झुकाव वाले तम्बू हैं जो रेज़र-तेज बिंदुओं पर आते हैं । सबसे ज्यादा, वे कहते हैं कि पतला आदमी का चेहरा नहीं है। तस्वीरों और चित्रों में उसका चेहरा या तो पूरी तरह से फीचर रहित और खाली होता है - एक अस्पष्ट, असफ़ल ब्लॉब - या एक माँ की तरह गज में लपेटा जाता है। वह अपना आकार बदल सकता है, अदृश्य हो सकता है, और स्थान से "टेलीपोर्ट" कर सकता हैयदि यह स्पष्ट नहीं था कि हम यहां एक अलौकिक इकाई से निपट रहे हैं, ऑनलाइन स्रोतों के मुताबिक पतला आदमी अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति बदल सकता है, अदृश्यता से आगे बढ़ सकता है, और अंतरिक्ष और समय झुकाकर दुनिया में कहीं भी "टेलीपोर्ट" बदल सकता है। स्लेडी का सार्टोरियल ट्रेडमार्क एक काला सूट है, और कुछ तस्वीरों में वह नेकटा पहनने को भी दिखाया गया है! उस विवरण के अलावा - नेकटाई - पतला आदमी का अलमारी शायद ही कभी उसके भौतिक चित्रण में भिन्न होता है। इसके बारे में जानने के लिए आपको क्या देखना चाहिएः हथियार के लिए तम्बू के साथ एक आठ-दस-दस-लंबा लंबा मुखौटा आदमी, निर्दोष रूप से एक साफ काले सूट और टाई में पहना जाता है। किसी और के लिए उसे कोई गलती नहीं है! सबसे पहले वह आपको डांटता है, फिर वह आपको बीमार बनाता है, फिर वह आपको मार देता हैकोई भी नहीं जानता कि पतला आदमी अपने पीड़ितों को कैसे चुनता है या क्यों, लेकिन एक बार चुने जाने पर, उन्हें एक अलग स्थान ले जाया जाता है, और मार डाला जाता है। कुछ कहते हैं कि वह उन लोगों से मित्रता करता है जिन्हें वह मारना चाहता है, उन्हें दयालुता और सहानुभूति के प्रस्तावों के साथ उनकी मृत्यु के लिए लुभाना। दूसरों का कहना है कि वह अपने पीड़ितों को अदृश्य तरीके से डांटता है, और आपको केवल एकमात्र स्पष्ट संकेत दिया गया है जिसे "पतला बीमारी" कहा जाता है, जिसके लक्षणों में मतली, नाक का खून, दुःस्वप्न, भेदभाव, और "बड़े पैमाने पर परावर्तक" शामिल हैं। यदि आप इनमें से किसी भी स्पष्ट कारण के लिए अनुभव करना शुरू करते हैं, तो देखें - पतला बीमारी आपके गायब होने और गंभीर रूप से निधन का प्रस्ताव है। . . . और आप खाओ! पतला आदमी के पीड़ितों के अंतिम भाग्य पर कुछ असहमति है, लेकिन एक बहुत से स्रोतों का दावा है कि वह उन्हें खाता है। कोई भी पूछ सकता है कि वह मुंह के बिना उस काम को कैसे पूरा करता है, लेकिन याद रखें - दृढ़ता इच्छा पर अपना आकार बदल सकती है, जिसमें स्थिति की मांग होने पर रेज़र-तेज दांतों के साथ मुंह बढ़ाना शामिल है, लेकिन इतनी ही सीमित नहीं है। स्लेण्डर मैन "मिथोस" दस्तावेज करने वाली वेबसाइटों के मुताबिक, पतला आदमी दृष्टि एक हज़ार पाँच सौ के दशक तक वापस जाती है। उन्होंने जर्मनी में जाने वाले एक प्राणी के सोलह वीं शताब्दी के लकड़ी के कटोरे का उद्धरण दिया, जो कि डर ग्रॉसमैन के रूप में जाना जाता है, जो वयस्कों को अपनाने और / या अपने बच्चों को चुरा लेने के कार्य में चित्रित कई पैरों और भाले की तरह हथियारों के साथ एक कंकाल चित्र है। उद्धृत स्रोतों में डर ग्रॉसमैन को "बुराई परी" के रूप में वर्णित किया गया है जो ब्लैक फॉरेस्ट में रहता है और अकेले वहां जाने के लिए पर्याप्त "बुरे बच्चों" को शिकार करता है। स्लेन्डर मैन विकी, स्लेन्डी मैन और विकी के बारे में जानकारी के भंडार की रिपोर्ट में स्लेण्डर मैन के पास कई प्रॉक्सी, या पागल व्यक्तियों के नियंत्रण या प्रभाव के संबंध हैं। "यह संदेह है कि प्रॉक्सी स्लेंडर मैन के लिए वास्तविक, भौतिक काम करते हैं, जैसे वस्तुओं को बनाना और छेड़छाड़ करना, सबूत नष्ट करना और छोड़ना, वीडियो बनाना और ट्विटर पर प्रतिक्रिया देना, और पीड़ितों को प्रभावित करना। " दो अलग-अलग घटनाओं में, किशोरावस्था के लड़कियों पर चाकू के हमलों के बारे में कथित तौर पर प्रेरित कहानियों से प्रेरित चाकू के हमलों का आरोप लगाया गया था। इकतीस मई, दो हज़ार चौदह को पहली बार दो बारह वर्षीय लड़कियां शामिल थीं, जिन्होंने विस्कॉन्सिन के वूखेसा में एक सहपाठी को मारा था। उन्होंने पुलिस को बताया कि हमला स्लेंडर मैन को "प्रभावित" करने के लिए था ताकि वे अपनी प्रॉक्सी बन सकें। कुछ हफ्ते बाद, एक तेरह वर्षीय ओहियो लड़की "स्लेण्डर मैन के साथ जुनूनी" ने अपनी मां को एक चाकू से हमला किया, जिससे मामूली चोटें आईं। दूसरे हमले में लड़की को उनकी मां ने "मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों" के रूप में वर्णित किया था और कम से कम एक हमले में अपराधियों को परीक्षण के लिए मानसिक रूप से अक्षम माना गया था। पतला आदमी नहीं है! यह भालू दोहराता हैः पतला आदमी मौजूद नहीं है! वह एक आविष्कारित चरित्र है , जो एक भीड़दार डरावनी कहानी में एक काल्पनिक बूगीमैन है। असली जीवन छेड़छाड़ की घटनाओं के अलावा स्लेण्डर मैन लोअर के साथ कुछ बच्चों के जुनून के कारण जिम्मेदार ठहराया गया, जो कुछ भी आपने उसके बारे में पढ़ा है वह पूरी तरह से तैयार हो गया था। चरित्र दो सौ नौ में ऑनलाइन फ़ोटोशॉप प्रतियोगिता में प्रतिभागियों द्वारा खरोंच से बनाया गया था, और उत्साही तब से "मिथकों" में शामिल हो रहे हैं। यहां तक कि पतला आदमी के ऐतिहासिक पूर्ववर्ती, डेर ग्रॉसमैन, एक फ़ोटोशॉप निर्माण । पतला आदमी असली नहीं है। वह एक इंटरनेट शहरी किंवदंती है। उसे डराओ मत! |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
दिवाली पर ट्रेडिशनल अंदाज में दिखीं सारा अली खान। फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है।
मााधुरी दीक्षित ने अपने पति के साथ ये तस्वीर की।
दिवाली के दिन पिंक ड्रेस में दिखीं दिया मिर्जा।
रंभा साउथ इंडियन लुक में दिखीं।
रंभा की बेटी कुछ ऐसी नजर आई।
दिवाली के दिन कुछ ऐसी नजर आईं संजय कपूर कीी बेटी सनाया कपूर।
टीवी एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना और एकता कपूर एक साथ दिवाली सेलिब्रेशन करने को हैं तैयार।
मौनी राय का अंदाज तो हमेशा ही सबको पसंद आता है। उनका ये अंदाज भी फैंस को काफी पसंद आ रहा है।
ईशा देओल ने जया बच्चन के साथ दीवाली सेलिब्रेशन का प्लान किया है।
फिल्म के क्रू मेंबर के साथ सोनम कपूर और दिया मिर्जा।
सोनाली बेंद्रे का ट्रेडिशनल लुक दिवाली पर कुछ यूं दिखा।
दिवाली पर भूमि पेडनेरकर भी पीछे नहीं रहीं। उनका ये अंदाज बाकई बेहद खूबसूरत लगा।
बिपाशा बसु और करण जौहर सबसे यूनीक दिखे।
| दिवाली पर ट्रेडिशनल अंदाज में दिखीं सारा अली खान। फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। मााधुरी दीक्षित ने अपने पति के साथ ये तस्वीर की। दिवाली के दिन पिंक ड्रेस में दिखीं दिया मिर्जा। रंभा साउथ इंडियन लुक में दिखीं। रंभा की बेटी कुछ ऐसी नजर आई। दिवाली के दिन कुछ ऐसी नजर आईं संजय कपूर कीी बेटी सनाया कपूर। टीवी एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना और एकता कपूर एक साथ दिवाली सेलिब्रेशन करने को हैं तैयार। मौनी राय का अंदाज तो हमेशा ही सबको पसंद आता है। उनका ये अंदाज भी फैंस को काफी पसंद आ रहा है। ईशा देओल ने जया बच्चन के साथ दीवाली सेलिब्रेशन का प्लान किया है। फिल्म के क्रू मेंबर के साथ सोनम कपूर और दिया मिर्जा। सोनाली बेंद्रे का ट्रेडिशनल लुक दिवाली पर कुछ यूं दिखा। दिवाली पर भूमि पेडनेरकर भी पीछे नहीं रहीं। उनका ये अंदाज बाकई बेहद खूबसूरत लगा। बिपाशा बसु और करण जौहर सबसे यूनीक दिखे। |
है।' और देशो में आर्यों की मूल भाषा रूपान्तरित होकर नयी-नयी भाषाओं मे बदल गयी। केवल भारत में संस्कृत ने नयी भाषाओ को जन्म देकर भी अपने अस्तित्व को कायम रखा है। उसमें आज भी पत्र निकलते है, नया साहित्य लिखा जाता है और बौद्धिक विषयो पर शास्त्रार्थ चलता है।
आर्यों की शाखाएँ जब यूरोप और ईरान की ओर चली, तब आर्यों को लेखन का ज्ञान था या नहीं, यह अज्ञात है। किन्तु यह माने विना नहीं चल सकता कि आर्य ईरान से पजाब ईसा से तीन हजार वर्ष पहले पहुँच चुके थे अथवा उस समय ईरान से पजाब तक वे सर्वत्र भरे थे । वेदो की रचना का आरंभ उन्होने, कदाचित्, वाद को पजाब आने पर किया, किन्तु, अपनी सभ्यता का विकास वे उससे पहले से करते आ रहे थे । वेद की ऋचाएँ किसी असभ्य या अर्ध-सभ्य जाति की रचना नहीं है। उनसे सकेतित सभ्यता अत्यन्त पुष्ट और परिमार्जित दिखायी देती है तथा वेदो की शैली साहित्य की सुविकसित शैली मानी जाती है। सोचने की एक बात यह भी है कि वेदो के सूक्त समाचार - पत्रो के स्तभ नहीं है जिनमे शाम की घटनाएँ सुबह को छप जाती है, न वे दैनन्दिनी के पृष्ठ है जिनमें ऋषि हर रोज की घटनाएँ लिखा करते थे । वेद साहित्य है और साहित्य मे, मुख्यत, ऐसी घटनाएँ ही प्रवेश पाती है जो परपरा में समा चुकी हो। इस दृष्टि से वेदो को यदि १५०० ई० पू० की रचना माने, तब भी यही समझना चाहिए कि उनमें उल्लिखित घटनाएँ हजार पाँच सौ वर्ष पूर्व की घटनाएँ रही होगी।
जो लोग यह मानते है कि आर्य ब्रह्मावर्त देश के वासी थे और वही से वे ईरान और यूरोप की ओर गये, उनके विरुद्ध दो युक्तियाँ अत्यत प्रबल है। पहली तो यह की भारत की भूमि इतनी सुखदायिनी रही है कि जो जाति यहाँ एक वार बस गयी, वह फिर कभी
शब्द-साम्य की खोज बडी ही अद्भुत और मनोरजक प्रक्रिया है। पेटर, फादर, पितृ और ब्रदर, बिरादर, भ्रातृ में जो साम्य है, वह अत्यत स्पष्ट है। किन्तु, साम्य कुछ ऐसे शब्दो मे भी खोजा जा सकता है जहाँ उसकी कोई गाशा नहीं दीखती । उदाहरणार्थ, भाषाशास्त्रियों के अनुसार अगरेजी का tooth शब्द संस्कृत के दन्त से निकला है और hand शब्द हुन् धातु से । nose का उत्पत्ति स्थान नसु है और cup का उद्गम कुप्य । इसी प्रकार, station शब्द स्या से, कही न कही, जुडा हुआ है और sound स्वन का वशज है। मन से mind, भणु से phone और ध्वनि से tone का जन्मे हुआ हो तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं । संस्कृत का सूनु शब्द पुत्र, सूर्य और अनुज का अर्थ देता था। यूरोप में अनुज अर्थ तो लुप्त हो गया, लेकिन, son और sun विद्यमान है जो, क्रमश, पुत्र और का अर्थ देते है। donation शब्द की अगरेजी में कोई धातु नही है। लातीनी में डोयरे धातु मिलती है। इस पर से मेरे एक मित्र, ५० भवानीशकर में त्रिवेदी ने यह अनुमान लगाया है कि डोयरे शब्द संस्कृत की दा धातु से निकला होगा। त्रिवेदी जी यहाँ तक जाते हैं कि अगरेजी का garage शब्द सस्कृत के गृहास से निकला है, जिसका अर्थ कमी तो गृह-समूह और कभी बडा घर होता था। | है।' और देशो में आर्यों की मूल भाषा रूपान्तरित होकर नयी-नयी भाषाओं मे बदल गयी। केवल भारत में संस्कृत ने नयी भाषाओ को जन्म देकर भी अपने अस्तित्व को कायम रखा है। उसमें आज भी पत्र निकलते है, नया साहित्य लिखा जाता है और बौद्धिक विषयो पर शास्त्रार्थ चलता है। आर्यों की शाखाएँ जब यूरोप और ईरान की ओर चली, तब आर्यों को लेखन का ज्ञान था या नहीं, यह अज्ञात है। किन्तु यह माने विना नहीं चल सकता कि आर्य ईरान से पजाब ईसा से तीन हजार वर्ष पहले पहुँच चुके थे अथवा उस समय ईरान से पजाब तक वे सर्वत्र भरे थे । वेदो की रचना का आरंभ उन्होने, कदाचित्, वाद को पजाब आने पर किया, किन्तु, अपनी सभ्यता का विकास वे उससे पहले से करते आ रहे थे । वेद की ऋचाएँ किसी असभ्य या अर्ध-सभ्य जाति की रचना नहीं है। उनसे सकेतित सभ्यता अत्यन्त पुष्ट और परिमार्जित दिखायी देती है तथा वेदो की शैली साहित्य की सुविकसित शैली मानी जाती है। सोचने की एक बात यह भी है कि वेदो के सूक्त समाचार - पत्रो के स्तभ नहीं है जिनमे शाम की घटनाएँ सुबह को छप जाती है, न वे दैनन्दिनी के पृष्ठ है जिनमें ऋषि हर रोज की घटनाएँ लिखा करते थे । वेद साहित्य है और साहित्य मे, मुख्यत, ऐसी घटनाएँ ही प्रवेश पाती है जो परपरा में समा चुकी हो। इस दृष्टि से वेदो को यदि एक हज़ार पाँच सौ ईशून्य पूशून्य की रचना माने, तब भी यही समझना चाहिए कि उनमें उल्लिखित घटनाएँ हजार पाँच सौ वर्ष पूर्व की घटनाएँ रही होगी। जो लोग यह मानते है कि आर्य ब्रह्मावर्त देश के वासी थे और वही से वे ईरान और यूरोप की ओर गये, उनके विरुद्ध दो युक्तियाँ अत्यत प्रबल है। पहली तो यह की भारत की भूमि इतनी सुखदायिनी रही है कि जो जाति यहाँ एक वार बस गयी, वह फिर कभी शब्द-साम्य की खोज बडी ही अद्भुत और मनोरजक प्रक्रिया है। पेटर, फादर, पितृ और ब्रदर, बिरादर, भ्रातृ में जो साम्य है, वह अत्यत स्पष्ट है। किन्तु, साम्य कुछ ऐसे शब्दो मे भी खोजा जा सकता है जहाँ उसकी कोई गाशा नहीं दीखती । उदाहरणार्थ, भाषाशास्त्रियों के अनुसार अगरेजी का tooth शब्द संस्कृत के दन्त से निकला है और hand शब्द हुन् धातु से । nose का उत्पत्ति स्थान नसु है और cup का उद्गम कुप्य । इसी प्रकार, station शब्द स्या से, कही न कही, जुडा हुआ है और sound स्वन का वशज है। मन से mind, भणु से phone और ध्वनि से tone का जन्मे हुआ हो तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं । संस्कृत का सूनु शब्द पुत्र, सूर्य और अनुज का अर्थ देता था। यूरोप में अनुज अर्थ तो लुप्त हो गया, लेकिन, son और sun विद्यमान है जो, क्रमश, पुत्र और का अर्थ देते है। donation शब्द की अगरेजी में कोई धातु नही है। लातीनी में डोयरे धातु मिलती है। इस पर से मेरे एक मित्र, पचास भवानीशकर में त्रिवेदी ने यह अनुमान लगाया है कि डोयरे शब्द संस्कृत की दा धातु से निकला होगा। त्रिवेदी जी यहाँ तक जाते हैं कि अगरेजी का garage शब्द सस्कृत के गृहास से निकला है, जिसका अर्थ कमी तो गृह-समूह और कभी बडा घर होता था। |
स्वास्थ्य रहने के लिए भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी हैं। अगर नींद पूरी न हो तो सारा दिन थकावट और सुस्ती महसूस होती है।
इसका असर आपके काम पर भी पड़ता है। एक शोध में पाया गया है कि नींद पूरी न होेने से शरीर सर्दी-जुकाम की चपेट में आता है। जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती, उन्हें सर्दी-जुकाम अधिक रहता है।
हाल में हुए शोध में पाया गया है कि जो लोग सात घंटे से कम सोते है या पूरी नींद नहीं लेते उन्हें सर्दी-जुकाम का खतरा तीन फीसदी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक नींद का सीधा संबंध इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता की मजबूती से है। यही कारण है कि कम नींद लेने पर लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं। अगर आप स्वास्थ्य रहना चाहते है तो भरपूर नींद लें।
भरपूर नींद न लेने से इम्युन सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इम्युन सिस्टम कमजोर होने से व्यक्ति सर्दी-खांसी की चपेट में जल्दी आ जाता है।
| स्वास्थ्य रहने के लिए भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी हैं। अगर नींद पूरी न हो तो सारा दिन थकावट और सुस्ती महसूस होती है। इसका असर आपके काम पर भी पड़ता है। एक शोध में पाया गया है कि नींद पूरी न होेने से शरीर सर्दी-जुकाम की चपेट में आता है। जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती, उन्हें सर्दी-जुकाम अधिक रहता है। हाल में हुए शोध में पाया गया है कि जो लोग सात घंटे से कम सोते है या पूरी नींद नहीं लेते उन्हें सर्दी-जुकाम का खतरा तीन फीसदी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक नींद का सीधा संबंध इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता की मजबूती से है। यही कारण है कि कम नींद लेने पर लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं। अगर आप स्वास्थ्य रहना चाहते है तो भरपूर नींद लें। भरपूर नींद न लेने से इम्युन सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इम्युन सिस्टम कमजोर होने से व्यक्ति सर्दी-खांसी की चपेट में जल्दी आ जाता है। |
शादी में मायरा भरने की प्रथा को लेकर राजस्थान का नागौर जिला एक बार फिर चर्चा में है। रविवार को 6 भाइयों ने अपने भांजे की शादी में 8 करोड़ रुपए का मायरा भरा। ये जब थाली में कैश, ज्वेलरी लेकर पहुंचे तो लोग हैरान रह गए। मामला जिले से 30 किलोमीटर दूर शिवपुरा गांव का है। संभवतः यह सबसे बड़ा मायरा है।
नागौर के ढींगसरा गांव निवासी मेहरिया परिवार की ओर से यह मायरा रविवार को भरा गया। अर्जुन राम मेहरिया, भागीरथ मेहरिया, उम्मेदाराम मेहरिया, हरिराम मेहरिया, मेहराम मेहरिया, प्रह्लाद मेहरिया अपनी इकलौती बहन भंवरी देवी के मायरा लेकर पहुंचे। इनके भांजे सुभाष गोदारा की आज ही शादी हुई।
मायरा कुल 8 करोड़ 1 लाख रुपए का भरा गया। इसमें इसमें 2. 21 करोड़ कैश, 1 किलो सोना, 14 किलो चांदी, 100 बीघा जमीन दी गई। साथ ही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भर कर गेहूं दिया गया है।
ढींगसरा गांव मेहरिया परिवार भांजे का मायरा भरने के लिए सुबह 10 बजे ट्रैक्टर में टेन्ट सजाकर नाचते गाते, अपने-अपने वाहनों से निकले। साथ में हजारों गाड़ियों का काफिला 5 किलोमीटर तक पीछे-पीछे चला। काफिले में बैलगाड़ी, ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रेलर, बसों समेत लग्जरी वाहन भी थे। मायरा में पांच हजार लोग शामिल हुए । सभी मेहमानों को चांदी का सिक्का भी दिया गया। जैसा मायरा लेकर भाई पहुंचे वैसा ही इंतजाम बहन के परिवार वालों ने भी किया।
नागौर के भागीरथ मेहरिया का परिवार सरकारी ठेके, प्रॉपर्टी और खेती किसानी से जुड़ा है। इनका मुख्य काम खेती है।
मारवाड़ में नागौर के मायरा को काफी सम्मान की नजर से देखा जाता है। मुगल शासन के दौरान के यहां के खिंयाला और जायल के जाटों द्वारा लिछमा गुजरी को अपनी बहन मान कर भरे गए मायरे को तो महिलाएं लोक गीतों में भी गाती हैं। कहा जाता है कि यहां के धर्माराम जाट और गोपालराम जाट मुगल शासन में बादशाह के लिए टैक्स कलेक्शन कर दिल्ली दरबार में ले जाकर जमा करने का काम करते थे।
इस दौरान एक बार जब वो टैक्स कलेक्शन कर दिल्ली जा रहे थे तो उन्हें बीच रास्ते में रोती हुई लिछमा गुजरी मिली। उसने बताया था कि उसके कोई भाई नहीं है और अब उसके बच्चों की शादी में मायरा कौन लाएगा ? इस पर धर्माराम और गोपालराम ने लिछमा गुजरी के भाई बन टैक्स कलेक्शन के सारे रुपए और सामग्री से मायरा भर दिया। बादशाह ने भी पूरी बात जान दोनों को सजा देने के बजाय माफ कर दिया था।
बहन के बच्चों की शादी होने पर ननिहाल पक्ष की ओर से मायरा भरा जाता है। इसे सामान्य तौर पर भात भी कहते हैं। इस रस्म में ननिहाल पक्ष की ओर से बहन के बच्चों के लिए कपड़े, गहने, रुपए और अन्य सामान दिया जाता है। इसमें बहन के ससुराल पक्ष के लोगों के लिए भी कपड़े और जेवरात आदि होते हैं।
मायरे की शुरुआत नरसी भगत के जीवन से हुई थी। नरसी का जन्म गुजरात के जूनागढ़ में आज से 600 साल पूर्व हुमायूं के शासनकाल में हुआ था। नरसी जन्म से ही गूंगे-बहरे थे। वो अपनी दादी के पास रहते थे। उनका एक भाई-भाभी भी थे। भाभी का स्वभाव कड़क था। एक संत की कृपा से नरसी की आवाज वापस आ गई थी और उनका बहरापन भी ठीक हो गया था। नरसी के माता-पिता गांव की एक महामारी का शिकार हो गए थे। नरसी की शादी हुई, लेकिन छोटी उम्र में पत्नी भगवान को प्यारी हो गई। नरसी का दूसरा विवाह कराया गया था।
समय बीतने पर नरसी की लड़की नानीबाई का विवाह अंजार नगर में हुआ था। इधर नरसी की भाभी ने उन्हें घर से निकाल दिया था। नरसी श्रीकृष्ण के अटूट भक्त थे। वे उन्हीं की भक्ति में लग गए थे। भगवान शंकर की कृपा से उन्होंने ठाकुर जी के दर्शन किए थे। इसके बाद तो नरसी ने सांसारिक मोह त्याग दिया और संत बन गए थे। उधर नानीबाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लायक हो गई थी। लड़की के विवाह पर ननिहाल की तरफ से भात भरने की रस्म के चलते नरसी को सूचित किया गया था। नरसी के पास देने को कुछ नहीं था। उसने भाई-बंधु से मदद की गुहार लगाई, मदद तो दूर कोई भी चलने तक को तैयार नहीं हुआ था। अंत में टूटी-फूटी बैलगाड़ी लेकर नरसी खुद ही लड़की के ससुराल के लिए निकल पड़े थे। बताया जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण खुद भात भरने पहुंचे थे।
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| शादी में मायरा भरने की प्रथा को लेकर राजस्थान का नागौर जिला एक बार फिर चर्चा में है। रविवार को छः भाइयों ने अपने भांजे की शादी में आठ करोड़ रुपए का मायरा भरा। ये जब थाली में कैश, ज्वेलरी लेकर पहुंचे तो लोग हैरान रह गए। मामला जिले से तीस किलोग्राममीटर दूर शिवपुरा गांव का है। संभवतः यह सबसे बड़ा मायरा है। नागौर के ढींगसरा गांव निवासी मेहरिया परिवार की ओर से यह मायरा रविवार को भरा गया। अर्जुन राम मेहरिया, भागीरथ मेहरिया, उम्मेदाराम मेहरिया, हरिराम मेहरिया, मेहराम मेहरिया, प्रह्लाद मेहरिया अपनी इकलौती बहन भंवरी देवी के मायरा लेकर पहुंचे। इनके भांजे सुभाष गोदारा की आज ही शादी हुई। मायरा कुल आठ करोड़ एक लाख रुपए का भरा गया। इसमें इसमें दो. इक्कीस करोड़ कैश, एक किलो सोना, चौदह किलो चांदी, एक सौ बीघा जमीन दी गई। साथ ही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भर कर गेहूं दिया गया है। ढींगसरा गांव मेहरिया परिवार भांजे का मायरा भरने के लिए सुबह दस बजे ट्रैक्टर में टेन्ट सजाकर नाचते गाते, अपने-अपने वाहनों से निकले। साथ में हजारों गाड़ियों का काफिला पाँच किलोग्राममीटर तक पीछे-पीछे चला। काफिले में बैलगाड़ी, ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रेलर, बसों समेत लग्जरी वाहन भी थे। मायरा में पांच हजार लोग शामिल हुए । सभी मेहमानों को चांदी का सिक्का भी दिया गया। जैसा मायरा लेकर भाई पहुंचे वैसा ही इंतजाम बहन के परिवार वालों ने भी किया। नागौर के भागीरथ मेहरिया का परिवार सरकारी ठेके, प्रॉपर्टी और खेती किसानी से जुड़ा है। इनका मुख्य काम खेती है। मारवाड़ में नागौर के मायरा को काफी सम्मान की नजर से देखा जाता है। मुगल शासन के दौरान के यहां के खिंयाला और जायल के जाटों द्वारा लिछमा गुजरी को अपनी बहन मान कर भरे गए मायरे को तो महिलाएं लोक गीतों में भी गाती हैं। कहा जाता है कि यहां के धर्माराम जाट और गोपालराम जाट मुगल शासन में बादशाह के लिए टैक्स कलेक्शन कर दिल्ली दरबार में ले जाकर जमा करने का काम करते थे। इस दौरान एक बार जब वो टैक्स कलेक्शन कर दिल्ली जा रहे थे तो उन्हें बीच रास्ते में रोती हुई लिछमा गुजरी मिली। उसने बताया था कि उसके कोई भाई नहीं है और अब उसके बच्चों की शादी में मायरा कौन लाएगा ? इस पर धर्माराम और गोपालराम ने लिछमा गुजरी के भाई बन टैक्स कलेक्शन के सारे रुपए और सामग्री से मायरा भर दिया। बादशाह ने भी पूरी बात जान दोनों को सजा देने के बजाय माफ कर दिया था। बहन के बच्चों की शादी होने पर ननिहाल पक्ष की ओर से मायरा भरा जाता है। इसे सामान्य तौर पर भात भी कहते हैं। इस रस्म में ननिहाल पक्ष की ओर से बहन के बच्चों के लिए कपड़े, गहने, रुपए और अन्य सामान दिया जाता है। इसमें बहन के ससुराल पक्ष के लोगों के लिए भी कपड़े और जेवरात आदि होते हैं। मायरे की शुरुआत नरसी भगत के जीवन से हुई थी। नरसी का जन्म गुजरात के जूनागढ़ में आज से छः सौ साल पूर्व हुमायूं के शासनकाल में हुआ था। नरसी जन्म से ही गूंगे-बहरे थे। वो अपनी दादी के पास रहते थे। उनका एक भाई-भाभी भी थे। भाभी का स्वभाव कड़क था। एक संत की कृपा से नरसी की आवाज वापस आ गई थी और उनका बहरापन भी ठीक हो गया था। नरसी के माता-पिता गांव की एक महामारी का शिकार हो गए थे। नरसी की शादी हुई, लेकिन छोटी उम्र में पत्नी भगवान को प्यारी हो गई। नरसी का दूसरा विवाह कराया गया था। समय बीतने पर नरसी की लड़की नानीबाई का विवाह अंजार नगर में हुआ था। इधर नरसी की भाभी ने उन्हें घर से निकाल दिया था। नरसी श्रीकृष्ण के अटूट भक्त थे। वे उन्हीं की भक्ति में लग गए थे। भगवान शंकर की कृपा से उन्होंने ठाकुर जी के दर्शन किए थे। इसके बाद तो नरसी ने सांसारिक मोह त्याग दिया और संत बन गए थे। उधर नानीबाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लायक हो गई थी। लड़की के विवाह पर ननिहाल की तरफ से भात भरने की रस्म के चलते नरसी को सूचित किया गया था। नरसी के पास देने को कुछ नहीं था। उसने भाई-बंधु से मदद की गुहार लगाई, मदद तो दूर कोई भी चलने तक को तैयार नहीं हुआ था। अंत में टूटी-फूटी बैलगाड़ी लेकर नरसी खुद ही लड़की के ससुराल के लिए निकल पड़े थे। बताया जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण खुद भात भरने पहुंचे थे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
गुजरात में दूसरे चरण की वोटिंग के बीच एक बार फिर मौत का सौदागर जुमला गूंज रहा है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा है। वाघेला फिलहाल किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे महेंद्र सिंह वाघेला कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं।
वाघेला ने ABP न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, '1 दिसंबर को गुजरात में हुई वोटिंग एंटी BJP और नीरस रही। 5 दिसंबर को भाजपा का भविष्य EVM में बंद हो जाएगा। गुजरात की जनता व्यापार को समझने वाली जनता है। उसका भविष्य क्या होना चाहिए वह जानती है। '
उन्होंने कहा- 27 सालों गुजरात में शासन कर रही BJP ने सिर्फ हिंदू-मुस्लिम की राजनीति की है। बात का बतंगड़ बनाना, विकास की बात न करना सिर्फ बयानबाजी करना। इससे लोग ऊब गए हैं। इसलिए पार्टी इस बार गुजरात में हारने वाली है।
जब वाघेला से पूछा गया कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर अपमान का आरोप लगाया है, क्या इस बात से चुनाव में फर्क पड़ेगा। इस पर वाघेला बोले- ऐसी मार्केटिंग करना इनकी पुरानी आदत है। खड़गे ने ये कहा, प्रियंका ने ये कहा, सोनिया ने मौत का सौदागर कहा। सोनिया ही नहीं, मैं भी कहता हूं कि मोदी मौत का सौदगर है। ये अहमदाबाद में गोधरा के शवों की शवयात्रा निकालने वाले थे। ये मौत का सौदागर नहीं तो क्या हैं। "
गुजरात चुनाव में कांग्रेस PM मोदी को लेकर लगातार हमलावर रही है। अहमदाबाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि क्या रावण की तरह मोदी के 100 मुख हैं? मुझे समझ नहीं आता। इसके पहले उन्होंने खुद को अछूत और प्रधानमंत्री मोदी को झूठों का सरदार बताया था।
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| गुजरात में दूसरे चरण की वोटिंग के बीच एक बार फिर मौत का सौदागर जुमला गूंज रहा है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा है। वाघेला फिलहाल किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे महेंद्र सिंह वाघेला कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं। वाघेला ने ABP न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'एक दिसंबर को गुजरात में हुई वोटिंग एंटी BJP और नीरस रही। पाँच दिसंबर को भाजपा का भविष्य EVM में बंद हो जाएगा। गुजरात की जनता व्यापार को समझने वाली जनता है। उसका भविष्य क्या होना चाहिए वह जानती है। ' उन्होंने कहा- सत्ताईस सालों गुजरात में शासन कर रही BJP ने सिर्फ हिंदू-मुस्लिम की राजनीति की है। बात का बतंगड़ बनाना, विकास की बात न करना सिर्फ बयानबाजी करना। इससे लोग ऊब गए हैं। इसलिए पार्टी इस बार गुजरात में हारने वाली है। जब वाघेला से पूछा गया कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर अपमान का आरोप लगाया है, क्या इस बात से चुनाव में फर्क पड़ेगा। इस पर वाघेला बोले- ऐसी मार्केटिंग करना इनकी पुरानी आदत है। खड़गे ने ये कहा, प्रियंका ने ये कहा, सोनिया ने मौत का सौदागर कहा। सोनिया ही नहीं, मैं भी कहता हूं कि मोदी मौत का सौदगर है। ये अहमदाबाद में गोधरा के शवों की शवयात्रा निकालने वाले थे। ये मौत का सौदागर नहीं तो क्या हैं। " गुजरात चुनाव में कांग्रेस PM मोदी को लेकर लगातार हमलावर रही है। अहमदाबाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि क्या रावण की तरह मोदी के एक सौ मुख हैं? मुझे समझ नहीं आता। इसके पहले उन्होंने खुद को अछूत और प्रधानमंत्री मोदी को झूठों का सरदार बताया था। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा था कि अल्पसंख्यकों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इस संबंध में कोई भी निर्णय राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा।
नई दिल्लीःसुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राज्य स्तर पर हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यकों की पहचान से जुड़े मामले का समाधान किए जाने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में अलग-अलग रुख अपनाने से कोई फायदा नहीं होगा।
इससे पहले, केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा था कि अल्पसंख्यकों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इस संबंध में कोई भी निर्णय राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा।
जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने मंगलवार को कहा कि ये ऐसे मामले हैं, जिनके समाधान की जरूरत है और हर चीज पर फैसला नहीं सुनाया जा सकता।
सुनवाई शुरू होने पर एक कनिष्ठ वकील ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई बाद में करने का अनुरोध किया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता किसी अन्य अदालत में व्यस्त हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने केंद्र द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे का जिक्र किया।
मामले पर कुछ देर बार दोबारा सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने पूर्व में केंद्र को उस याचिका का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था, जिसमें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के आदेश देने का अनुरोध करते हुए कहा गया था कि 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों के लिए राष्ट्रीय आयोग अधिनियम-1992 की धारा-2 सी के तहत छह समुदायों को अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया है।
मंत्रालय ने कहा कि इससे सुनिश्चित होगा कि केंद्र सरकार इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे के संबंध में भविष्य में किसी भी अनापेक्षित जटिलताओं को दूर करने के लिए कई सामाजिक, तार्किक और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत के समक्ष एक सुविचारित दृष्टिकोण रखने में सक्षम हो पाएगी।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने पूर्व में शीर्ष अदालत को बताया था कि राज्य सरकारें संबंधित राज्य के भीतर हिंदुओं सहित किसी भी धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं।
| केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा था कि अल्पसंख्यकों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इस संबंध में कोई भी निर्णय राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा। नई दिल्लीःसुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राज्य स्तर पर हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यकों की पहचान से जुड़े मामले का समाधान किए जाने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में अलग-अलग रुख अपनाने से कोई फायदा नहीं होगा। इससे पहले, केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा था कि अल्पसंख्यकों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इस संबंध में कोई भी निर्णय राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने मंगलवार को कहा कि ये ऐसे मामले हैं, जिनके समाधान की जरूरत है और हर चीज पर फैसला नहीं सुनाया जा सकता। सुनवाई शुरू होने पर एक कनिष्ठ वकील ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई बाद में करने का अनुरोध किया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता किसी अन्य अदालत में व्यस्त हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने केंद्र द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे का जिक्र किया। मामले पर कुछ देर बार दोबारा सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने पूर्व में केंद्र को उस याचिका का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था, जिसमें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के आदेश देने का अनुरोध करते हुए कहा गया था कि दस राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों के लिए राष्ट्रीय आयोग अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ बानवे की धारा-दो सी के तहत छह समुदायों को अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया है। मंत्रालय ने कहा कि इससे सुनिश्चित होगा कि केंद्र सरकार इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे के संबंध में भविष्य में किसी भी अनापेक्षित जटिलताओं को दूर करने के लिए कई सामाजिक, तार्किक और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत के समक्ष एक सुविचारित दृष्टिकोण रखने में सक्षम हो पाएगी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने पूर्व में शीर्ष अदालत को बताया था कि राज्य सरकारें संबंधित राज्य के भीतर हिंदुओं सहित किसी भी धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं। |
चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारत अमेरिका के साथ संंबंध मजबूत करने में जुटा हुआ है। अमेरिकी सरकार के दो बड़े मंत्री भारत के दौरे पर हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम जारी है। भारत और अमेरिका ने सोमवार को कहा है कि वे मंगलवार को होने वाली 'टू प्लस टू' बैठक में बेसिक एक्सचेंज एंड को-ऑपरेशन एग्रीमेंट (बीईसीए) सैन्य समझौते पर दस्तख़त करेंगे।
इस बात की घोषणा भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी समकक्ष मार्क एस्पर से मुलाक़ात के बाद की। एस्पर के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी भारत के दौरे पर हैं। पोम्पियो ने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाक़ात की।
बीईसीए सैन्य समझौते पर दस्तख़त हैदराबाद हाउस में होंगे। इस समझौते से भारत की मिसाइल क्षमता बेहतर होगी।
अमेरिकी के आला मंत्रियों का यह दौरा हिंदुस्तान के लिए कितना अहम है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि सोमवार को दोनों देशों के बीच हुई बैठक में भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा सीडीएस जनरल बिपिन रावत, तीनों सेनाओं के और डीआरडीओ प्रमुख भी मौजूद रहे। अमेरिका की ओर से भी मार्क एस्पर के अलावा चारों सुरक्षा बलों के अधिकारी और भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर मौजूद रहे।
राजनाथ-एस्पर की मुलाक़ात के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दोनों देशों के मंत्रियों ने बीईसीए पर दस्तख़त होने को लेकर संतोष व्यक्त किया। मार्क एस्पर ने मालाबार 2020 में आस्ट्रेलिया के भी शामिल होने का स्वागत किया।
ड्रैगन के साथ 5 मई से चल रही सैन्य तनातनी के बीच भारत ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को भी चौथे साझेदार के तौर पर शामिल कर चीन को साफ कर दिया है कि राजनयिक स्तर पर 4 देशों का जो साझा राजनयिक मंच 'क्वाड' के नाम से बन चुका है, उसका अब सैन्य मंच भी होगा।
हाल के सालों में भारत चीन से रिश्तों की संवेदनशीलता के कारण ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रित करने में हिचक रहा था। क्वाड और मालाबार के चारों साझीदार देशों के चीन के साथ कटु रिश्ते चल रहे हैं। चारों देश पिछले कुछ सालों से चीन से कहते आ रहे हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय सागरीय इलाक़े में इससे जुड़े क़ानूनों का पालन करे, लेकिन चीन लगातार इस विश्व व्यवस्था का अनादर ही करता रहा है।
इससे पहले कि दक्षिण और पूर्वी चीन सागर के इलाक़ों पर चीन अपनी सैन्य ताक़त के बल पर पूरा दबदबा स्थापित कर ले, चारों देशों के लिये ज़रूरी हो गया था कि वे एक साझा मंच बनाकर अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा करें।
जहां तक भारत का सवाल है- ट्रंप की आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और हिंद प्रशांत की नीतियों की वजह से भारत को काफी राहत मिली है और अमेरिका से भारत की बढ़ती नजदीकियों की यही बड़ी वजह भी है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान और ईरान को लेकर उसकी नीतियों से भारत की क्षेत्रीय समरनीति को भारी धक्का लगा है।
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका अपनी फौज़ हटा लेगा तो वहां न केवल तालिबान सत्ता पर काबिज होगा बल्कि चीन को भी तालिबान के सबसे बड़े मददगार के तौर पर पेश होने का मौका मिलेगा। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान, पाकिस्तान और चीन का गठजोड़ भारत के लिए विनाशकारी साबित होगा।
उसी तरह ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी नीतियों ने भारत की ईरान से दोस्ती और मध्य एशिया नीति को भारी धक्का पहुंचाया है। भारत की मध्य एशिया नीति में अफ़ग़ानिस्तान और ईरान का अहम स्थान माना जाता है लेकिन ईरान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों पर जब चीन का दबदबा होगा तो दोनों देश भारत की मध्य एशिया समर नीति में बाधक ही बनेंगे।
| चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारत अमेरिका के साथ संंबंध मजबूत करने में जुटा हुआ है। अमेरिकी सरकार के दो बड़े मंत्री भारत के दौरे पर हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम जारी है। भारत और अमेरिका ने सोमवार को कहा है कि वे मंगलवार को होने वाली 'टू प्लस टू' बैठक में बेसिक एक्सचेंज एंड को-ऑपरेशन एग्रीमेंट सैन्य समझौते पर दस्तख़त करेंगे। इस बात की घोषणा भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी समकक्ष मार्क एस्पर से मुलाक़ात के बाद की। एस्पर के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी भारत के दौरे पर हैं। पोम्पियो ने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाक़ात की। बीईसीए सैन्य समझौते पर दस्तख़त हैदराबाद हाउस में होंगे। इस समझौते से भारत की मिसाइल क्षमता बेहतर होगी। अमेरिकी के आला मंत्रियों का यह दौरा हिंदुस्तान के लिए कितना अहम है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि सोमवार को दोनों देशों के बीच हुई बैठक में भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा सीडीएस जनरल बिपिन रावत, तीनों सेनाओं के और डीआरडीओ प्रमुख भी मौजूद रहे। अमेरिका की ओर से भी मार्क एस्पर के अलावा चारों सुरक्षा बलों के अधिकारी और भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर मौजूद रहे। राजनाथ-एस्पर की मुलाक़ात के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दोनों देशों के मंत्रियों ने बीईसीए पर दस्तख़त होने को लेकर संतोष व्यक्त किया। मार्क एस्पर ने मालाबार दो हज़ार बीस में आस्ट्रेलिया के भी शामिल होने का स्वागत किया। ड्रैगन के साथ पाँच मई से चल रही सैन्य तनातनी के बीच भारत ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को भी चौथे साझेदार के तौर पर शामिल कर चीन को साफ कर दिया है कि राजनयिक स्तर पर चार देशों का जो साझा राजनयिक मंच 'क्वाड' के नाम से बन चुका है, उसका अब सैन्य मंच भी होगा। हाल के सालों में भारत चीन से रिश्तों की संवेदनशीलता के कारण ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रित करने में हिचक रहा था। क्वाड और मालाबार के चारों साझीदार देशों के चीन के साथ कटु रिश्ते चल रहे हैं। चारों देश पिछले कुछ सालों से चीन से कहते आ रहे हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय सागरीय इलाक़े में इससे जुड़े क़ानूनों का पालन करे, लेकिन चीन लगातार इस विश्व व्यवस्था का अनादर ही करता रहा है। इससे पहले कि दक्षिण और पूर्वी चीन सागर के इलाक़ों पर चीन अपनी सैन्य ताक़त के बल पर पूरा दबदबा स्थापित कर ले, चारों देशों के लिये ज़रूरी हो गया था कि वे एक साझा मंच बनाकर अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा करें। जहां तक भारत का सवाल है- ट्रंप की आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और हिंद प्रशांत की नीतियों की वजह से भारत को काफी राहत मिली है और अमेरिका से भारत की बढ़ती नजदीकियों की यही बड़ी वजह भी है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान और ईरान को लेकर उसकी नीतियों से भारत की क्षेत्रीय समरनीति को भारी धक्का लगा है। अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका अपनी फौज़ हटा लेगा तो वहां न केवल तालिबान सत्ता पर काबिज होगा बल्कि चीन को भी तालिबान के सबसे बड़े मददगार के तौर पर पेश होने का मौका मिलेगा। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान, पाकिस्तान और चीन का गठजोड़ भारत के लिए विनाशकारी साबित होगा। उसी तरह ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी नीतियों ने भारत की ईरान से दोस्ती और मध्य एशिया नीति को भारी धक्का पहुंचाया है। भारत की मध्य एशिया नीति में अफ़ग़ानिस्तान और ईरान का अहम स्थान माना जाता है लेकिन ईरान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों पर जब चीन का दबदबा होगा तो दोनों देश भारत की मध्य एशिया समर नीति में बाधक ही बनेंगे। |
ये मामला साल 2016 में सामने आया था। उस वक्त अमानतुल्लाह खान दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन थे। उनके अलावा तब बोर्ड के सीईओ रहे महबूब आलम पर भी एलजी ने केस चलाने की मंजूरी दी है। बता दें कि दिल्ली में सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी अमानतुल्लाह का नाम सामने आया था।
| ये मामला साल दो हज़ार सोलह में सामने आया था। उस वक्त अमानतुल्लाह खान दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन थे। उनके अलावा तब बोर्ड के सीईओ रहे महबूब आलम पर भी एलजी ने केस चलाने की मंजूरी दी है। बता दें कि दिल्ली में सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी अमानतुल्लाह का नाम सामने आया था। |
- Kids Nutrition (2-15 Yrs)
M Gat P Eye Drop is a combination of two medicines used in the treatment of bacterial eye infections. यह माइक्रोऑर्गेनिज्म को बढ़ने को रोकता है और इंफेक्शन पैदा करने वाले मौजूदा माइक्रोऑर्गनिज्म को मारता है. यह आंखों में लालिमा, सूजन और खुजली पैदा करने वाले केमिकल मैसेंजर के रिलीज को ब्लॉक करता है.
M Gat P Eye Drop is to be used only in the affected eye. डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक और अवधि में इसका इस्तेमाल करें. दवा का उपयोग करने से पहले निर्देश के लिए लेबल को ध्यान से पढ़ें. इस दवा का इस्तेमाल करने से पहले अपने हाथों को धोएं. बहुत अधिक या बहुत कम मात्रा का उपयोग न करें. डॉक्टर द्वारा सलाह के अनुसार या लेबल में निर्देशानुसार सटीक खुराक में इसका इस्तेमाल करें.
इस दवा के इस्तेमाल से लगाई गई जगह पर चुभन और जलन हो सकती है. ये आमतौर पर अस्थायी होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं. हालांकि, अगर वे बने रहते हैं या और बढ़ जाते हैं तो अपने डॉक्टर को सूचित करें. अपने कान, नाक या मुंह के साथ अचानक संपर्क में आने पर इसे तुरंत पानी से धो लें.
यदि आपको इस दवा के किसी भी इंग्रीडिएंट से एलर्जी है या यदि आप कोई अन्य दवा ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर को बताएं. इस दवा का इस्तेमाल करने के बाद गाड़ी या भारी मशीनरी न चलाएं क्योंकि इससे आंखों की रोशनी धुंधली हो सकती है और गाड़ी चलाने की आपकी क्षमता प्रभावित हो सकती है.
M Gat P Eye Drop is to be used only in the affected eye. डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक और अवधि में इसका इस्तेमाल करें. दवा का उपयोग करने से पहले निर्देश के लिए लेबल को ध्यान से पढ़ें. इस दवा का इस्तेमाल करने से पहले अपने हाथों को धोएं. बहुत अधिक या बहुत कम मात्रा का उपयोग न करें. डॉक्टर द्वारा सलाह के अनुसार या लेबल में निर्देशानुसार सटीक खुराक में इसका इस्तेमाल करें.
इस दवा के इस्तेमाल से लगाई गई जगह पर चुभन और जलन हो सकती है. ये आमतौर पर अस्थायी होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं. हालांकि, अगर वे बने रहते हैं या और बढ़ जाते हैं तो अपने डॉक्टर को सूचित करें. अपने कान, नाक या मुंह के साथ अचानक संपर्क में आने पर इसे तुरंत पानी से धो लें.
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M Gat P Eye Drop is used to treat bacterial infections of the eyes such as conjunctivitis or pink eye. यह इन्फेक्शन का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के विकास को रोकता है और आंखों में दर्द, सूजन, लालपन, खुजली या जलन से राहत देता है.. इसे दिन में 2-3 बार कम से कम एक सप्ताह तक इस्तेमाल करें या डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करें.. Your symptoms might improve after using M Gat P Eye Drop. हालांकि, इलाज का पूरा कोर्स जरूर पूरा करें.. इससे यह सुनिश्चित होगा कि इन्फेक्शन का पूरी तरह से इलाज हो जाए तथा यह वापस न आए.
यह दवाई केवल बाहरी इस्तेमाल के लिए है. इसे डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि के अनुसार लें. इस्तेमाल करने के पहले लेवल की जांच कर लें. इसे छूए बिना ड्रॉपर को आंखों के पास रखें. ड्रॉपर को हल्के से दबाएं और दवा को निचली पलक के अंदर डालें. अतिरिक्त लिक्विड को पोछ दें.
M Gat P Eye Drop is a combination of two medicines. गैटीफ्लॉक्सासिन एक एंटीबायोटिक है जो डीएनए-गाइरेज नामक बैक्टीरियल एंजाइम की क्रिया को रोककर काम करता है. यह बैक्टीरियल कोशिकाओं को विभाजन और मरम्मत से रोकता है, जिससे उन्हें मार देता है. प्रेड्निसोलोन एक स्टेरॉयड है जो शरीर के केमिकल मैसेंजर के उत्पादन को रोकता है जिसके कारण इन्फ्लेमेशन (सूजन और लाली) तथा एलर्जी होता है. यह आंख में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज के लिए कैसे काम करता है.
M Gat P Eye Drop may be unsafe to use during pregnancy. हालांकि, इंसानों से जुड़े शोध सीमित हैं लेकिन जानवरों पर किए शोधों से पता चलता है कि ये विकसित हो रहे शिशु पर हानिकारक प्रभाव डालता है. आपके डॉक्टर पहले इससे होने वाले लाभ और संभावित जोखिमों की तुलना करेंगें और उसके बाद ही इसे लेने की सलाह देंगें. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
M Gat P Eye Drop should be used with caution during breastfeeding. जब तक मां का इलाज पूरा नहीं हो जाता है और दवा उनके शरीर से पूरी तरह बाहर नहीं निकल जाती है तब तक स्तनपान ना कराएं.
M Gat P Eye Drop may cause blurring of your vision for a short time just after its use. ऐसे में तब तक गाड़ी ना चलाएं जब तक आपको सब कुछ साफ़ ना नज़र आने लगे.
If you miss a dose of M Gat P Eye Drop, skip it and continue with your normal schedule. खुराक को डबल न करें.
यह जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है. कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें.
- M Gat P Eye Drop must be used as per dose and duration suggested by the doctor.
- अगर आप सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो इन आई ड्रॉप को लगाने से पहले उन्हें हटा दें और अपने लेंस को वापस रखने से पहले कम से कम 1 मिनट तक प्रतीक्षा करें.
- डाइल्यूशन से बचने के लिए उसी आंख में अगली दवा डालने से पहले कम से कम 5-10 मिनट तक प्रतीक्षा करें.
- M Gat P Eye Drop might cause blurring of vision. जब तक आप जान न लें कि दवा आपको कैसे प्रभावित करती है तब तक ड्राइव या मशीनरी का संचालन न करें.
- अपनी नाक या मुंह के संपर्क से बचें. अगर गलती से इन जगहों पर ड्रॉप लग जाए, तो उसे पानी से धो लें.
Disclaimer:टाटा 1mg's का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके उपभोक्ताओं को एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. यहां उपलब्ध जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. यहां दिए गए विवरण सिर्फ़ आपकी जानकारी के लिए हैं. यह संभव है कि इसमें स्वास्थ्य संबधी किसी विशेष समस्या, लैब टेस्ट, दवाओं और उनके सभी संभावित दुष्प्रभावों, पारस्परिक प्रभाव और उनसे जुड़ी सावधानियां एवं चेतावनियों के बारे में सारी जानकारी सम्मिलित ना हो। किसी भी दवा या बीमारी से जुड़े अपने सभी सवालों के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. हमारा उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध को मजबूत बनाना है, उसका विकल्प बनना नहीं.
The list of available options shown with the same composition has been prepared upon the advice of registered medical practitioners, pharmacists affiliated with TATA 1MG. TATA 1MG does not promote any pharmaceutical product of any particular company, and all recommendations are based on the medical opinion, advisories from specialist medical and pharmaceutical professionals.
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Same salt composition:गैटिफ्लोक्सासिन (0.3% w/v), प्रेडनीसोलोन (1% w/v)
Why buy these from 1mg?
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M Gat P Eye Drop is used to treat bacterial infections of the eyes such as conjunctivitis or pink eye. यह इन्फेक्शन का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के विकास को रोकता है और आंखों में दर्द, सूजन, लालपन, खुजली या जलन से राहत देता है.. इसे दिन में दो-तीन बार कम से कम एक सप्ताह तक इस्तेमाल करें या डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करें.. Your symptoms might improve after using M Gat P Eye Drop. हालांकि, इलाज का पूरा कोर्स जरूर पूरा करें.. इससे यह सुनिश्चित होगा कि इन्फेक्शन का पूरी तरह से इलाज हो जाए तथा यह वापस न आए. यह दवाई केवल बाहरी इस्तेमाल के लिए है. इसे डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि के अनुसार लें. इस्तेमाल करने के पहले लेवल की जांच कर लें. इसे छूए बिना ड्रॉपर को आंखों के पास रखें. ड्रॉपर को हल्के से दबाएं और दवा को निचली पलक के अंदर डालें. अतिरिक्त लिक्विड को पोछ दें. M Gat P Eye Drop is a combination of two medicines. गैटीफ्लॉक्सासिन एक एंटीबायोटिक है जो डीएनए-गाइरेज नामक बैक्टीरियल एंजाइम की क्रिया को रोककर काम करता है. यह बैक्टीरियल कोशिकाओं को विभाजन और मरम्मत से रोकता है, जिससे उन्हें मार देता है. प्रेड्निसोलोन एक स्टेरॉयड है जो शरीर के केमिकल मैसेंजर के उत्पादन को रोकता है जिसके कारण इन्फ्लेमेशन तथा एलर्जी होता है. यह आंख में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज के लिए कैसे काम करता है. M Gat P Eye Drop may be unsafe to use during pregnancy. हालांकि, इंसानों से जुड़े शोध सीमित हैं लेकिन जानवरों पर किए शोधों से पता चलता है कि ये विकसित हो रहे शिशु पर हानिकारक प्रभाव डालता है. आपके डॉक्टर पहले इससे होने वाले लाभ और संभावित जोखिमों की तुलना करेंगें और उसके बाद ही इसे लेने की सलाह देंगें. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. M Gat P Eye Drop should be used with caution during breastfeeding. जब तक मां का इलाज पूरा नहीं हो जाता है और दवा उनके शरीर से पूरी तरह बाहर नहीं निकल जाती है तब तक स्तनपान ना कराएं. M Gat P Eye Drop may cause blurring of your vision for a short time just after its use. ऐसे में तब तक गाड़ी ना चलाएं जब तक आपको सब कुछ साफ़ ना नज़र आने लगे. If you miss a dose of M Gat P Eye Drop, skip it and continue with your normal schedule. खुराक को डबल न करें. यह जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है. कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें. - M Gat P Eye Drop must be used as per dose and duration suggested by the doctor. - अगर आप सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो इन आई ड्रॉप को लगाने से पहले उन्हें हटा दें और अपने लेंस को वापस रखने से पहले कम से कम एक मिनट तक प्रतीक्षा करें. - डाइल्यूशन से बचने के लिए उसी आंख में अगली दवा डालने से पहले कम से कम पाँच-दस मिनट तक प्रतीक्षा करें. - M Gat P Eye Drop might cause blurring of vision. जब तक आप जान न लें कि दवा आपको कैसे प्रभावित करती है तब तक ड्राइव या मशीनरी का संचालन न करें. - अपनी नाक या मुंह के संपर्क से बचें. अगर गलती से इन जगहों पर ड्रॉप लग जाए, तो उसे पानी से धो लें. Disclaimer:टाटा एक मिलीग्राम's का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके उपभोक्ताओं को एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. यहां उपलब्ध जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. यहां दिए गए विवरण सिर्फ़ आपकी जानकारी के लिए हैं. यह संभव है कि इसमें स्वास्थ्य संबधी किसी विशेष समस्या, लैब टेस्ट, दवाओं और उनके सभी संभावित दुष्प्रभावों, पारस्परिक प्रभाव और उनसे जुड़ी सावधानियां एवं चेतावनियों के बारे में सारी जानकारी सम्मिलित ना हो। किसी भी दवा या बीमारी से जुड़े अपने सभी सवालों के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. हमारा उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध को मजबूत बनाना है, उसका विकल्प बनना नहीं. The list of available options shown with the same composition has been prepared upon the advice of registered medical practitioners, pharmacists affiliated with TATA एकMG. TATA एकMG does not promote any pharmaceutical product of any particular company, and all recommendations are based on the medical opinion, advisories from specialist medical and pharmaceutical professionals. The list of available options shown with the same composition has been prepared upon the advice of registered medical practitioners, pharmacists affiliated with TATA एकMG. TATA एकMG does not promote any pharmaceutical product of any particular company, and all recommendations are based on the medical opinion, advisories from specialist medical and pharmaceutical professionals. Same salt composition:गैटिफ्लोक्सासिन , प्रेडनीसोलोन Why buy these from एक मिलीग्राम? |
उमरिया जिले सहित आसपास के क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण पानी के निकासी को लेकर भी परेशानी हो रही है। पानी की निकासी को लेकर पड़ोसी ने महिला पर हमला कर दिया। सिर पर सब्बल से हमला होने के कारण महिला की मौत हो गई।
नौरोजाबाद थाना क्षेत्र के भुंडी गांव में प्रेमवती राय पति चूड़ामन राय (46) के खेत में पानी भरा हुआ था। जो पड़ोसी शुदधू कोल के खेत में जा रहा था। पड़ोसी से इसी बात को लेकर सुबह विवाद हो गया। जिसके बाद शुद्धू कोल ने महिला पर हमला कर दिया। और सब्बल से हमले के कारण महिला की मौत हो गई। जानकारी लगते ही नौरोजाबाद पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।
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| उमरिया जिले सहित आसपास के क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण पानी के निकासी को लेकर भी परेशानी हो रही है। पानी की निकासी को लेकर पड़ोसी ने महिला पर हमला कर दिया। सिर पर सब्बल से हमला होने के कारण महिला की मौत हो गई। नौरोजाबाद थाना क्षेत्र के भुंडी गांव में प्रेमवती राय पति चूड़ामन राय के खेत में पानी भरा हुआ था। जो पड़ोसी शुदधू कोल के खेत में जा रहा था। पड़ोसी से इसी बात को लेकर सुबह विवाद हो गया। जिसके बाद शुद्धू कोल ने महिला पर हमला कर दिया। और सब्बल से हमले के कारण महिला की मौत हो गई। जानकारी लगते ही नौरोजाबाद पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
के पैगम्बर
जिन्दगी में बहुत ज्यादा तादाद मे मौजूद थी । पूज्य गुरुदेव तो सरापा रूहानियत ही थे । वह रूहानियत जिसकी तारीफ मे उर्दू शायर कलम तोडते हुए कह रहा है -
रूहानियत का अर्श से आगे मुकाम है, रूहानियत कमाले-हकीकत का नाम है । रूहानियत शराये- मुहब्बत का जाम है रूहानियत में श्रमनो - सुकू का पयाम है ।।
रूहानियत वह एक ही जामे सुरूर है, वहदत का आईना है मुसर्रत का नूर है । इसकी तजल्लियो में झलकती है जिन्दगी, इसकी लताफतो से महकती है जिन्दगी ।।
रूहानियत की खुशबू से महकते हुए, जिन्दगी के रास्ते पर श्रद्धेय पूज्य गुरुदेव अपनी सिर्फ ६ बरस की तिफ्लाना उम्र मे ही चल पडे थे । पूज्य गुरुदेव श्री ऋषिराज जी महाराज की महरबानी से इल्म के भरपूर खजाने के मालिक वे बन बैठे थे । इल्म की रूहानी दौलत को पाकर पूज्य गुरुदेव ने १६ बरस की उम्र मे जवानी की शुरूआत में ही, बा अमल फकीरी की राह पकड ली थी और मुश्तैद कदमों से वे अपनी रूहानी मजिल की जानिब बढ़ चले थे । १६ बरस की उम्र से ही, सच्ची दरवेशी तो, पूज्य गुरुदेव की रूहानी जिन्दगी का एक जुज ही बनकर रह गई थी । वह सच्ची फकीरी, जिसके सामने दुनियावी ऐशो-इशरत कुछ भी औकात नही रखते, पूज्य गुरुदेव ने सच्चे यकीन के साथ हासिल की थी । उर्दू शायर भी इसी बात को, इस तरह कह रहा है -
यकी पैदा कर ऐ बन्दे, यकी से हाथ आती है । वह दरवेशी कि जिसके सामने झुकती है मगवूरी ॥ फकीरी का पाक जामा पूज्य गुरुदेव ने सच्चे दिल से पहना था । इसी से ता उम्र श्रापने उसे तहे दिल से निभाया भी, और खूव
पूज्य गुरव स्मृति म
शानदार डग से निभाया । तभी तो भाग दुनिया उन्हें पपमा रहबर मानती है उनको खुशी से सिजवा करती है सर झुकाती है और उमका माम मेना माइसेफ समझती है।
-यह प्रकार जिसकी शाम के सामने धानेकिम्बरी भी कोई चीज नहीं है। यह फकर जिसके मुकाबले में ततो-ठाग सशकरो-सिपाह मासोन्मर दुनिया की सब मेमतें हेच ठहरती हैं। जिस फार का मालिक धाहों का शाह है और वादशाहों का बाद साह । यह फ्कर यद्धय पूज्य गुरुदेव की जिन्दगी में साइन्विद्दा मौजूद था। यही फकर जिसकी तारीफ में शायर कह रहा हैमिलाई फकर के सामने माने सिकन्दरी क्या है ? विराब की जो बदा हो वह कैंसरी क्या है ?
फकर के हैं मौजबात तसाच-सरफर पर व सिपाह फकर है मीरों का मीर फकर है धाका बा ।। नवा मे है मस्करी करो सिपाह में है बोबास मर्थ मन्दर की मारनामे है ॥ - स्म का मकसूद है पाकिए मतो- बि । का मकसूद है- मिगाइ ।
* तूफानों से खेलने वाले
मजा चलने का चलने वालों से पूछ क्या? बाड़ों से पूछो।
इस न होने किताबों के सवाल
हेम में पसने बालों से पूछो।
[सय पूज्य गुरुग मी तूफानों में पलने वाले और तूफानों से लेमने बासे राहे-हकीकत के एक मुसाफिर से तूफानों और प्राधियों से टक्कर लेने में पुलों पर कार पाने में उन्हें एक तरह | के पैगम्बर जिन्दगी में बहुत ज्यादा तादाद मे मौजूद थी । पूज्य गुरुदेव तो सरापा रूहानियत ही थे । वह रूहानियत जिसकी तारीफ मे उर्दू शायर कलम तोडते हुए कह रहा है - रूहानियत का अर्श से आगे मुकाम है, रूहानियत कमाले-हकीकत का नाम है । रूहानियत शराये- मुहब्बत का जाम है रूहानियत में श्रमनो - सुकू का पयाम है ।। रूहानियत वह एक ही जामे सुरूर है, वहदत का आईना है मुसर्रत का नूर है । इसकी तजल्लियो में झलकती है जिन्दगी, इसकी लताफतो से महकती है जिन्दगी ।। रूहानियत की खुशबू से महकते हुए, जिन्दगी के रास्ते पर श्रद्धेय पूज्य गुरुदेव अपनी सिर्फ छः बरस की तिफ्लाना उम्र मे ही चल पडे थे । पूज्य गुरुदेव श्री ऋषिराज जी महाराज की महरबानी से इल्म के भरपूर खजाने के मालिक वे बन बैठे थे । इल्म की रूहानी दौलत को पाकर पूज्य गुरुदेव ने सोलह बरस की उम्र मे जवानी की शुरूआत में ही, बा अमल फकीरी की राह पकड ली थी और मुश्तैद कदमों से वे अपनी रूहानी मजिल की जानिब बढ़ चले थे । सोलह बरस की उम्र से ही, सच्ची दरवेशी तो, पूज्य गुरुदेव की रूहानी जिन्दगी का एक जुज ही बनकर रह गई थी । वह सच्ची फकीरी, जिसके सामने दुनियावी ऐशो-इशरत कुछ भी औकात नही रखते, पूज्य गुरुदेव ने सच्चे यकीन के साथ हासिल की थी । उर्दू शायर भी इसी बात को, इस तरह कह रहा है - यकी पैदा कर ऐ बन्दे, यकी से हाथ आती है । वह दरवेशी कि जिसके सामने झुकती है मगवूरी ॥ फकीरी का पाक जामा पूज्य गुरुदेव ने सच्चे दिल से पहना था । इसी से ता उम्र श्रापने उसे तहे दिल से निभाया भी, और खूव पूज्य गुरव स्मृति म शानदार डग से निभाया । तभी तो भाग दुनिया उन्हें पपमा रहबर मानती है उनको खुशी से सिजवा करती है सर झुकाती है और उमका माम मेना माइसेफ समझती है। -यह प्रकार जिसकी शाम के सामने धानेकिम्बरी भी कोई चीज नहीं है। यह फकर जिसके मुकाबले में ततो-ठाग सशकरो-सिपाह मासोन्मर दुनिया की सब मेमतें हेच ठहरती हैं। जिस फार का मालिक धाहों का शाह है और वादशाहों का बाद साह । यह फ्कर यद्धय पूज्य गुरुदेव की जिन्दगी में साइन्विद्दा मौजूद था। यही फकर जिसकी तारीफ में शायर कह रहा हैमिलाई फकर के सामने माने सिकन्दरी क्या है ? विराब की जो बदा हो वह कैंसरी क्या है ? फकर के हैं मौजबात तसाच-सरफर पर व सिपाह फकर है मीरों का मीर फकर है धाका बा ।। नवा मे है मस्करी करो सिपाह में है बोबास मर्थ मन्दर की मारनामे है ॥ - स्म का मकसूद है पाकिए मतो- बि । का मकसूद है- मिगाइ । * तूफानों से खेलने वाले मजा चलने का चलने वालों से पूछ क्या? बाड़ों से पूछो। इस न होने किताबों के सवाल हेम में पसने बालों से पूछो। [सय पूज्य गुरुग मी तूफानों में पलने वाले और तूफानों से लेमने बासे राहे-हकीकत के एक मुसाफिर से तूफानों और प्राधियों से टक्कर लेने में पुलों पर कार पाने में उन्हें एक तरह |
गाजीपुर मंडी में मिले बम के मामले की जांच में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल एक महीने के भीतर खरीदे गए सिम कार्ड व मोबाइल फोन डाटा की जांच कर रही है। दरअसल पुलिस को यह शक है कि बम प्लांट करने की साजिश सीमापार में रची गई थी और वहीं से स्लीपर सेल के सदस्यों को निर्देश भी दिए गए हैं।
ऐसे में अगर इन संदिग्ध नंबरों तक पुलिस पहुंचती है तो आरोपियों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस बात के मद्देनजर गाजीपुर मंडी के आसपास और मंडी से सटे गाजियाबाद के इलाके में जितनी भी मोबाइल की दुकानें है उसने पिछले 1 महीने का डेटा इकट्ठा कर रही है दुकानदारों से पिछले एक महीने का मोबाइल बिक्री और सिम कार्ड का को खरीदने वालों की डिटेल्स ली जा रही है।
स्पेशल सेल की टीम ने गाज़ीपुर मंडी और उसके आसपास के मोबाइल टावर से डंप डाटा भी लिया है। ये डंप डाटा पुलिस को कॉल मिलने से 2 घंटे पहले और 2 घंटे बाद का लिया गया है गाज़ीपुर मंडी के एक किलोमीटर के दायरे में उस समय जितने भी नंबर एक्टिव थे उन सभी नंबरो की बारीकी से जांच की जा रही है। इन सभी नंबरों को फिल्टर करके पुलिस संदिग्धों की पहचान में जुटी है।
स्पेशल सेल के सूत्रों की मानें तो ये साजिश पाकिस्तान ने रची और इसमें खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तान की आईएसआई के हाथ होने का शक है। स्पेशल सेल को यह भी शक है कि स्लीपर सेल ने ही बम को गाजीपुर मंडी के गेट पर प्लांट किया होगा। इतना ही नहीं सेल के सूत्रों का ये भी कहना है कि इसके तार पंजाब से भी जुड़े हो सकते हैं।
दरअसल स्पेशल सेल ये बात इसलिए कह रही है क्योंकि दिल्ली में जो आइईडी बरामद की गई है, उसमें और पंजाब में मिल रही आईईडी में काफी समानता है। ये वो आइईडी हैं जो पिछले 6 महीनों से पंजाब में मिल रही हैं। दरअसल पिछले साल पाकिस्तान की सीमा से सटे पंजाब के अलग-अलग इलाकों में 40 के करीब ड्रोन आए थे इन सभी ड्रोनों में हथियार, गोला बारूद और विस्फोटक था। इन सभी ड्रोनों से जो विस्फोटक गिराए गए थे वो बरामद कर लिए गए थे। लेकिन एजेंसियों को ऐसा लगता है कि कुछ जरूर होंगे जो आतंकियों के हाथ लगे।
| गाजीपुर मंडी में मिले बम के मामले की जांच में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल एक महीने के भीतर खरीदे गए सिम कार्ड व मोबाइल फोन डाटा की जांच कर रही है। दरअसल पुलिस को यह शक है कि बम प्लांट करने की साजिश सीमापार में रची गई थी और वहीं से स्लीपर सेल के सदस्यों को निर्देश भी दिए गए हैं। ऐसे में अगर इन संदिग्ध नंबरों तक पुलिस पहुंचती है तो आरोपियों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस बात के मद्देनजर गाजीपुर मंडी के आसपास और मंडी से सटे गाजियाबाद के इलाके में जितनी भी मोबाइल की दुकानें है उसने पिछले एक महीने का डेटा इकट्ठा कर रही है दुकानदारों से पिछले एक महीने का मोबाइल बिक्री और सिम कार्ड का को खरीदने वालों की डिटेल्स ली जा रही है। स्पेशल सेल की टीम ने गाज़ीपुर मंडी और उसके आसपास के मोबाइल टावर से डंप डाटा भी लिया है। ये डंप डाटा पुलिस को कॉल मिलने से दो घंटाटे पहले और दो घंटाटे बाद का लिया गया है गाज़ीपुर मंडी के एक किलोमीटर के दायरे में उस समय जितने भी नंबर एक्टिव थे उन सभी नंबरो की बारीकी से जांच की जा रही है। इन सभी नंबरों को फिल्टर करके पुलिस संदिग्धों की पहचान में जुटी है। स्पेशल सेल के सूत्रों की मानें तो ये साजिश पाकिस्तान ने रची और इसमें खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तान की आईएसआई के हाथ होने का शक है। स्पेशल सेल को यह भी शक है कि स्लीपर सेल ने ही बम को गाजीपुर मंडी के गेट पर प्लांट किया होगा। इतना ही नहीं सेल के सूत्रों का ये भी कहना है कि इसके तार पंजाब से भी जुड़े हो सकते हैं। दरअसल स्पेशल सेल ये बात इसलिए कह रही है क्योंकि दिल्ली में जो आइईडी बरामद की गई है, उसमें और पंजाब में मिल रही आईईडी में काफी समानता है। ये वो आइईडी हैं जो पिछले छः महीनों से पंजाब में मिल रही हैं। दरअसल पिछले साल पाकिस्तान की सीमा से सटे पंजाब के अलग-अलग इलाकों में चालीस के करीब ड्रोन आए थे इन सभी ड्रोनों में हथियार, गोला बारूद और विस्फोटक था। इन सभी ड्रोनों से जो विस्फोटक गिराए गए थे वो बरामद कर लिए गए थे। लेकिन एजेंसियों को ऐसा लगता है कि कुछ जरूर होंगे जो आतंकियों के हाथ लगे। |
क्योंकि उस टूटे हुए शीशे के जादू ने वही असर पैदा किया है जो प्याज का रस तीर की लोहे की नोक पर करता है जिससे उससे बने घाव लाइलाज हो जाते हैं । केवल एक ही चीज़ है जो उसकी ज़िन्दगी बचा सकती है । पर यह बात तुम मुझसे बताने के लिये नहीं कहना क्योंकि यह बहुत ही खास चीज़ है ।
ओगरे की पत्नी उस पर चिल्ला कर बोली - "ओ लम्वे दाँत वाले तुम मुझे बताओ न । अगर तुम मुझे मरता नहीं देखना चाहते तो तुम मुझे बताओ न ।
ओगरे यह धमकी सुन कर बोला "ठीक है ठीक है मैं तुम्हें बताता हूँ अगर तुम इस बात का वायदा करो तो कि तुम इसको किसी भी ज़िन्दा आदमी को नहीं बताओगी। क्योंकि अगर तुम ऐसा करोगी तो यकीनन तुम हमारी ज़िन्दगी ले लोगी और साथ में हमारा घर भी बर्बाद करोगी ।
94 A Mole is a big large rat type animal. See its picture above.
ओगरे की पत्नी बोली " नहीं नहीं । डरो नहीं । मेरे प्यारे प्यारे पति । क्योंकि तुम अभी थोड़ी ही देर में सींग वाले सूअर, पूँछ वाले बन्दर और आँखों वाले मोल तो देख सकते हो पर मेरे होठों से एक शब्द भी बाहर जाते नहीं सुनोगे ।
ऐसा कह कर उसने एक हाथ दूसरे हाथ पर रख कर कसम खायी । ओगरे बोला - "तब तुम सुनो । ऐसी कोई चीज़ न तो
आसमान के नीचे है और न जमीन के ऊपर है जो राजकुमार को मौत के फन्दे से बचा सके सिवाय हमारी चर्बी के । अगर उसके घावों पर यह लगा दिया जाये तो वह उसकी आत्मा को कैद कर सकता है जो अब किसी भी समय अपना घर छोड़ने वाली है ।
नैला जिसने ये सब बातें सुन ली थीं उनको अपनी बातें खत्म करने का समय दिया । फिर वह पेड़ पर से उतरी और अपना दिल पक्का कर के ओगरे के घर का दरवाजा खटखटाया।
वह चिल्लायी "ओ मेरे अच्छे लोगों । मुझे कुछ भीख दीजिये कुछ दया चाहिये । एक गरीब अभागिन पर दया कीजिये जो अपने ही देश से अपनी बदकिस्मती की वजह से बाहर निकाल दी गयी है। मुझे कोई सहायता करने वाला भी नहीं है । मुझे यहाँ इस जंगल में रात हो गयी है। मैं ठंड और भूख से मरी जा रही हूँ । '
इस तरह से चिल्लाती चिल्लाती वह ओगरे के मकान का दरवाजा खटखटाती रही खटखटाती रही । बहरा बना देने वाली यह आवाज सुन कर ओगरे की पत्नी उसको आधी डबल रोटी फेंक कर भगाने जा रही थी
पर ओगरे जो आदमी के मॉस खाने का बहुत ज्यादा लालची था - यानी जैसे गिलहरी गिरी खाने की, भालू शहद खाने का, विल्ली मछली खाने की, भेड़ नमक खाने की, गधा भूसा खाने का, उनसे भी ज़्यादा, सो उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह उस बेचारी
को अन्दर आने दे । क्योंकि अगर वह बाहर सोयी तो क्या पता उसे कोई भेड़िया ही खा जाये ।
थोड़े में कहो तो उसने अपनी पत्नी को इस बारे में इतना कहा कि आखिर उसकी पत्नी ने उस लड़की के लिये अपने घर के दरवाजे खोल ही दिये ।
उसके लिये सारे दानों का वायदा करते हुए वह उसकी तरफ भूखी आँखों से देखता रहा । ओगरे और उसकी पत्नी ने इतनी पी ली थी कि वे लोग काफी बेहोश हो चुके थे सो वे सोने चले गये । जब वे खूब गहरी नींद में सोये हुए थे तो नैला उठी और आलमारी से एक चाकू निकाल कर उसने उनका मॉस काट लिया । फिर उसने उसकी चर्बी एक छोटी शीशी में भरी और सीधी राजा के दरबार में चली गयी ।
वहाँ जा कर उसने राजा से कहा कि वह राजकुमार का इलाज कर सकती है। राजा तो यह सुन कर बहुत खुश हो गया । वह उसको अपने बेटे के कमरे में ले गया।
जैसे ही उसने उसके घावों पर वह चर्बी लगायी तो वे घाव तो वैसे ही भरते ही चले गये जैसे पानी आग पर डालने से आग बुझती चली जाती है । और वह मछली जैसा तन्दुरुस्त हो गया ।
राजा ने जब यह देखा तो उसने अपने बेटे से कहा कि "यह भली लड़की तो उस इनाम के काबिल है जो हमने फरमान में निकलवाया था । अब तुम्हें इससे शादी कर लेनी चाहिये । | क्योंकि उस टूटे हुए शीशे के जादू ने वही असर पैदा किया है जो प्याज का रस तीर की लोहे की नोक पर करता है जिससे उससे बने घाव लाइलाज हो जाते हैं । केवल एक ही चीज़ है जो उसकी ज़िन्दगी बचा सकती है । पर यह बात तुम मुझसे बताने के लिये नहीं कहना क्योंकि यह बहुत ही खास चीज़ है । ओगरे की पत्नी उस पर चिल्ला कर बोली - "ओ लम्वे दाँत वाले तुम मुझे बताओ न । अगर तुम मुझे मरता नहीं देखना चाहते तो तुम मुझे बताओ न । ओगरे यह धमकी सुन कर बोला "ठीक है ठीक है मैं तुम्हें बताता हूँ अगर तुम इस बात का वायदा करो तो कि तुम इसको किसी भी ज़िन्दा आदमी को नहीं बताओगी। क्योंकि अगर तुम ऐसा करोगी तो यकीनन तुम हमारी ज़िन्दगी ले लोगी और साथ में हमारा घर भी बर्बाद करोगी । चौरानवे एम्पीयर Mole is a big large rat type animal. See its picture above. ओगरे की पत्नी बोली " नहीं नहीं । डरो नहीं । मेरे प्यारे प्यारे पति । क्योंकि तुम अभी थोड़ी ही देर में सींग वाले सूअर, पूँछ वाले बन्दर और आँखों वाले मोल तो देख सकते हो पर मेरे होठों से एक शब्द भी बाहर जाते नहीं सुनोगे । ऐसा कह कर उसने एक हाथ दूसरे हाथ पर रख कर कसम खायी । ओगरे बोला - "तब तुम सुनो । ऐसी कोई चीज़ न तो आसमान के नीचे है और न जमीन के ऊपर है जो राजकुमार को मौत के फन्दे से बचा सके सिवाय हमारी चर्बी के । अगर उसके घावों पर यह लगा दिया जाये तो वह उसकी आत्मा को कैद कर सकता है जो अब किसी भी समय अपना घर छोड़ने वाली है । नैला जिसने ये सब बातें सुन ली थीं उनको अपनी बातें खत्म करने का समय दिया । फिर वह पेड़ पर से उतरी और अपना दिल पक्का कर के ओगरे के घर का दरवाजा खटखटाया। वह चिल्लायी "ओ मेरे अच्छे लोगों । मुझे कुछ भीख दीजिये कुछ दया चाहिये । एक गरीब अभागिन पर दया कीजिये जो अपने ही देश से अपनी बदकिस्मती की वजह से बाहर निकाल दी गयी है। मुझे कोई सहायता करने वाला भी नहीं है । मुझे यहाँ इस जंगल में रात हो गयी है। मैं ठंड और भूख से मरी जा रही हूँ । ' इस तरह से चिल्लाती चिल्लाती वह ओगरे के मकान का दरवाजा खटखटाती रही खटखटाती रही । बहरा बना देने वाली यह आवाज सुन कर ओगरे की पत्नी उसको आधी डबल रोटी फेंक कर भगाने जा रही थी पर ओगरे जो आदमी के मॉस खाने का बहुत ज्यादा लालची था - यानी जैसे गिलहरी गिरी खाने की, भालू शहद खाने का, विल्ली मछली खाने की, भेड़ नमक खाने की, गधा भूसा खाने का, उनसे भी ज़्यादा, सो उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह उस बेचारी को अन्दर आने दे । क्योंकि अगर वह बाहर सोयी तो क्या पता उसे कोई भेड़िया ही खा जाये । थोड़े में कहो तो उसने अपनी पत्नी को इस बारे में इतना कहा कि आखिर उसकी पत्नी ने उस लड़की के लिये अपने घर के दरवाजे खोल ही दिये । उसके लिये सारे दानों का वायदा करते हुए वह उसकी तरफ भूखी आँखों से देखता रहा । ओगरे और उसकी पत्नी ने इतनी पी ली थी कि वे लोग काफी बेहोश हो चुके थे सो वे सोने चले गये । जब वे खूब गहरी नींद में सोये हुए थे तो नैला उठी और आलमारी से एक चाकू निकाल कर उसने उनका मॉस काट लिया । फिर उसने उसकी चर्बी एक छोटी शीशी में भरी और सीधी राजा के दरबार में चली गयी । वहाँ जा कर उसने राजा से कहा कि वह राजकुमार का इलाज कर सकती है। राजा तो यह सुन कर बहुत खुश हो गया । वह उसको अपने बेटे के कमरे में ले गया। जैसे ही उसने उसके घावों पर वह चर्बी लगायी तो वे घाव तो वैसे ही भरते ही चले गये जैसे पानी आग पर डालने से आग बुझती चली जाती है । और वह मछली जैसा तन्दुरुस्त हो गया । राजा ने जब यह देखा तो उसने अपने बेटे से कहा कि "यह भली लड़की तो उस इनाम के काबिल है जो हमने फरमान में निकलवाया था । अब तुम्हें इससे शादी कर लेनी चाहिये । |
बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी ने इस बार एनडीए से अलग रास्ता चुना है. चिराग पासवान की अगुवाई में पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी. इस बीच बीजेपी ने लोक जनशक्ति पार्टी पर तीखा हमला बोला है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि चिराग पासवान ने बिहार में एक अलग रास्ता चुना है, वह बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि LJP का बिहार में कोई असर नहीं है. बिहार चुनाव में LJP एक वोट कटवा पार्टी बनेगी. देखें वीडियो.
As Bihar Assembly elections are approaching closer, BJP has once again clarified that LJP in Bihar is trying to mislead the voters by taking BJP leadership name. Prakash Javadekar further said that LJP will not make any impact in Bihar poll. He also added that LJP will remain a vote-katwa party in Bihar. Watch the video.
| बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी ने इस बार एनडीए से अलग रास्ता चुना है. चिराग पासवान की अगुवाई में पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी. इस बीच बीजेपी ने लोक जनशक्ति पार्टी पर तीखा हमला बोला है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि चिराग पासवान ने बिहार में एक अलग रास्ता चुना है, वह बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि LJP का बिहार में कोई असर नहीं है. बिहार चुनाव में LJP एक वोट कटवा पार्टी बनेगी. देखें वीडियो. As Bihar Assembly elections are approaching closer, BJP has once again clarified that LJP in Bihar is trying to mislead the voters by taking BJP leadership name. Prakash Javadekar further said that LJP will not make any impact in Bihar poll. He also added that LJP will remain a vote-katwa party in Bihar. Watch the video. |
प्रदेशोनुं एक समुदायीपणे काय प्रवर्त्तन नथी, भिन्न भिन्न प्रदेशे भिन्न कार्य होई शके छे. जेम धर्मास्तिकाय कोई प्रदेश वडे अमुक पुद्गलने चलनसहायी श्वाय छे अने तेथी बीजा प्रदेशे बीजा पुद्गलने चलनसहायी थाय के एम भिन्न प्रदेशे भिन्न वृत्ति होवाने लीघे जड द्रव्यमां कर्त्तापणुं ठरी शकतु नथी,
पण हे भगवंत ! जीव द्रव्यनो सहज स्वभाव एदो छे के तेना ज्ञान दर्शनादि सर्वे गुणोना अविभाग पर्याय दरेक प्रदेशे छे, ते सर्वे प्रदेशना गुणाविभाग एक समुदाये आवर्भावे थई कार्य करे अर्थात् एक कार्ये परिणमवामां सर्वे प्रदेशना गुणाविभाग सामर्थ्य पणे परिणमे कोइ पण प्रदेशमा गुणविभाग ते कार्यमां जोडाया शिवाय रहे नहीं, एम जीव द्रव्यना सर्वे प्रदेश मली एक समुदायि पणे एक कार्ये परिणमे छे. ॥ ३ ॥
शंकर सहकारी हो, के सहने गुण वरते ॥ द्रव्यादिक परिणति हो, के भाव अनुसरते ॥ दानादिक लब्धि हो, के न हुवे सहाय विना ॥ सहकार अंकंपे हो, के गुणनी वृति घना ॥ ४ ॥
अर्थः- एम दरेक सर्वे प्रदेशना गुणाविभागो एकत्र एक बीजाने सहकारीपणे सदा परिणमे, चली द्रव्य क्षेत्र कालनी प्रवृत्ति ते द्रव्यमा परम भावने अनुसारै वर्से छे. जेम जीव द्रव्यनो भाव चैतन्यता के माटे चैतन्य गुण पर्यायनो एक पिंड ते जीव द्रव्य छे, अने चैतन्य गुणने रहेवानुं श्र संख्यात प्रदेशमय स्थानक ते जीव द्रव्यनुं क्षेत्र के भने चैनन्ध गुण पर्यापनी प्रवृत्ति ते जीव द्रव्यनो काल छे ययुक्तं - " गुणा समुदाओ दव्वं, खित्तं ओगाह वहणा कालो ।। गुण पज्जाय पवत्ति, भावो नियवत्थु धम्मो सो ॥ " दान लाभ भोगादि लब्धीओ ते वीर्य गुणनी सहाय विना यत शके नहीं पण हे भगवंत ! आपनुं वीर्य क्षायिकपणे होवाथी गुए वृत्तिना समूहने अकंपपणे सहकारी थई शके छे तेथी आप हमेशां अबंध तथा परमोत्कृष्ट अवस्थामां वर्त्ती छो, कारण के चलइ स फंदई " ॥ ४ ॥
। पर्याय अनंता हो, के जे एक कार्यपणे ।। वरते तेहने हो, के जिनवर गुण पभणे ॥
ज्ञानादिक गुणनी हो, के वर्त्तना जीव प्रते ॥ धर्मादिक द्रव्यने हो, के सहकारे करते ॥५॥ अर्थः- त्रिलोक पूज्य श्री जिनेश्वर देव एम कहे के के एक कार्य पणे परिणमारा अनंता छती पर्यायनो समुदाय ते गुण छे. जेस जाणवारूप सामर्थ्य छे जेमां एवा अविभागी पर्यायनो समुदाय ते ज्ञान गुण, देखवारूप सामर्थ्य के जेमां एवा अविभाग पर्यायनो समुदाय ते दर्शन गुण, परिगामालंबन रूप कार्य सामर्थ्य के जेमां एवा अविभागी पर्यायनो समुदाय ते वीर्यगुण, विगेरे एम दरेक द्रव्यमा प्रति प्रदेशे पोतपोतानु एक कार्य करवानुं सामर्थ्य धरनारा अनंता अविभागरूप पर्याधनो समुदाय ते गुण छे. जोवद्रव्यमा दरेक प्रदेशे जाणवा रूप कार्य करवानुं सामर्थ्य धरनारा अनंत अविभाग पर्याय छे तेनो समुदाय ते ज्ञान मुण. एम ज्ञानादि अनंत गुणनी वर्त्तना जीव द्रव्यमां छे. ययुक्तं - नय चक्र सारे - " तत्रैकस्मिन् द्रव्ये प्रति प्रदेशे स्त्र स्व एक कार्य करण सामर्थ्य रूपा अनंता अविभाग रूप पर्याया स्तेषां समुदायो गुणः भिन्न कार्य क
रणे सामर्थ्यरूपा भिन्न गुणस्य पर्यायाः एवं गुणा अप्यनंताः प्रतिगुणं प्रतिदेशं पर्याया अविभाग रूपाः अनंता स्तुल्याः प्रायीइति ते चारित रूपाः प्रति वस्तुनि अनंता स्ततोनंत गुणाः सामर्थ्य पर्यायाः " अने धर्मादिक जड द्रव्यमां ज्ञान गुणधी अतिरिक्त चलनसहकारादि गुणो वर्चे छे ॥ ५ ॥
ग्राहक व्यापकता हो, के प्रभु तुम धर्म रमी ॥ आतम अनुभवथी हो, के परिणति अन्य वमी । तुजं शक्ति अनंती हो, के गांतांने ध्यातां ॥ मुज शक्ति विकासन हो, के थाये गुण रमतां । ६ ॥
अर्थः-हे प्रभु ! भेदविज्ञाननी पूर्णता वडे आप निरंतर ज्ञानादिक शुद्धात्म गुणना ग्राहक छो. तेथी अतिरिक्त विषय कषायने ग्रहण करवाथी आप मुक्त थया छो, तेमज आपनी व्यापकता पण ज्ञानादिक शुद्धात्म गुणमांज निरंतर व्यापे छे पण विषय कषायमां कदापि काले व्यापे नहि तेथी आप सदा
परभावथी अव्यास छो तथा नित्य शाश्वत स्वाधीन ने एकांतिक सहज सुख पिंड शुद्धात्म द्रव्यनी अनुभूलेरा तथा लेमांज विलासी थइ पौद्गलीक विभूतीनुं कलपणुं भोक्तापणुं तथा रमणपणुं वमननी पेठे सर्वथा प्रकारे तजी दीधुं कारणके शुद्धात्म अनुभवरूप अमृतपानमां मग्न पुरुष, पौद्गलीक विषय कषायरूप हालाहल विष पीवाने केम इच्छे ? हे प्रभु ! " अजडत्वात्मिका चितिशक्तिः; अनाकारोपयोगमयी दृशिशक्तिः; साकारोपयोगमयी ज्ञानशक्तिः, अना कुलत्त्र लक्षणा सुखशक्तिः, स्वरूप निर्वर्तन सामर्थ्यरूपा वीर्यशक्तिः, अखण्डित प्रताप स्वातंत्र्य शालिवलक्षणा प्रभुत्वशक्तिः, क्रमाक्रमवृत्ति वृत्तलक्षणोत्पादं व्यय ध्रुवत्वशक्तिः" तथा कर्तृत्वशक्ति, भोक्तृत्वशक्ति, परिणामशक्ति, स्वधर्म ग्राहकत्वशक्ति, स्वधर्म व्यापकत्वशक्ति, तत्त्वशक्ति, एकत्वशक्ति, अनेकत्वशक्ति, कारणशक्ति, संप्रदानशक्ति, अपादानशक्ति, करणशक्ति, संबंधशक्ति, ए आदि अनंतशक्ति
आपम, समवाय संबंधे रहेली छे ते शक्तिओनुं
स्मरण तथा ध्यान करतां तथा शुद्धास्मगुषमां रण करतां सत्तागते रहेली समान बाहरी सर्वे
शक्तियो प्रथा, सहज शिवलदेमोनी प्राति थाय ।। ६ ।।
इम निजगुण भोगी हो, के स्वामी भुजंग सुदा ॥ जे नित वंदे हो, के ते नर धन्य सदा ।। देवचंद्र प्रभुनी हो, के पुण्येसक्ति सधे ॥ आतम अनुभवनी हो, के नित नित शक्ति वचे ॥ ७ ॥
अर्थः- एम शुद्धात्म गुण पर्यायने निरंतर भोगवनारा परमानंद समूह हे श्री भुजंग स्वामी ! पवित्र भाव वडे जे आप नित्यवदन स्मरणादि करे छे तेज पुरुषो आ जगत्त्रयमां धन्य छे ! तेज पुरुषो स्तुति पात्र छे, तेज पुरुषो कृतार्थ छे, हे देवाधिदेव ! आपनी भक्ति महत्पुण्यना योगेज साधी शकाय हे वली आपनीज भक्तिना पसाये बीजना चंद्रमानी पेठे श्रात्म अनुभवनी शक्ति | प्रदेशोनुं एक समुदायीपणे काय प्रवर्त्तन नथी, भिन्न भिन्न प्रदेशे भिन्न कार्य होई शके छे. जेम धर्मास्तिकाय कोई प्रदेश वडे अमुक पुद्गलने चलनसहायी श्वाय छे अने तेथी बीजा प्रदेशे बीजा पुद्गलने चलनसहायी थाय के एम भिन्न प्रदेशे भिन्न वृत्ति होवाने लीघे जड द्रव्यमां कर्त्तापणुं ठरी शकतु नथी, पण हे भगवंत ! जीव द्रव्यनो सहज स्वभाव एदो छे के तेना ज्ञान दर्शनादि सर्वे गुणोना अविभाग पर्याय दरेक प्रदेशे छे, ते सर्वे प्रदेशना गुणाविभाग एक समुदाये आवर्भावे थई कार्य करे अर्थात् एक कार्ये परिणमवामां सर्वे प्रदेशना गुणाविभाग सामर्थ्य पणे परिणमे कोइ पण प्रदेशमा गुणविभाग ते कार्यमां जोडाया शिवाय रहे नहीं, एम जीव द्रव्यना सर्वे प्रदेश मली एक समुदायि पणे एक कार्ये परिणमे छे. ॥ तीन ॥ शंकर सहकारी हो, के सहने गुण वरते ॥ द्रव्यादिक परिणति हो, के भाव अनुसरते ॥ दानादिक लब्धि हो, के न हुवे सहाय विना ॥ सहकार अंकंपे हो, के गुणनी वृति घना ॥ चार ॥ अर्थः- एम दरेक सर्वे प्रदेशना गुणाविभागो एकत्र एक बीजाने सहकारीपणे सदा परिणमे, चली द्रव्य क्षेत्र कालनी प्रवृत्ति ते द्रव्यमा परम भावने अनुसारै वर्से छे. जेम जीव द्रव्यनो भाव चैतन्यता के माटे चैतन्य गुण पर्यायनो एक पिंड ते जीव द्रव्य छे, अने चैतन्य गुणने रहेवानुं श्र संख्यात प्रदेशमय स्थानक ते जीव द्रव्यनुं क्षेत्र के भने चैनन्ध गुण पर्यापनी प्रवृत्ति ते जीव द्रव्यनो काल छे ययुक्तं - " गुणा समुदाओ दव्वं, खित्तं ओगाह वहणा कालो ।। गुण पज्जाय पवत्ति, भावो नियवत्थु धम्मो सो ॥ " दान लाभ भोगादि लब्धीओ ते वीर्य गुणनी सहाय विना यत शके नहीं पण हे भगवंत ! आपनुं वीर्य क्षायिकपणे होवाथी गुए वृत्तिना समूहने अकंपपणे सहकारी थई शके छे तेथी आप हमेशां अबंध तथा परमोत्कृष्ट अवस्थामां वर्त्ती छो, कारण के चलइ स फंदई " ॥ चार ॥ । पर्याय अनंता हो, के जे एक कार्यपणे ।। वरते तेहने हो, के जिनवर गुण पभणे ॥ ज्ञानादिक गुणनी हो, के वर्त्तना जीव प्रते ॥ धर्मादिक द्रव्यने हो, के सहकारे करते ॥पाँच॥ अर्थः- त्रिलोक पूज्य श्री जिनेश्वर देव एम कहे के के एक कार्य पणे परिणमारा अनंता छती पर्यायनो समुदाय ते गुण छे. जेस जाणवारूप सामर्थ्य छे जेमां एवा अविभागी पर्यायनो समुदाय ते ज्ञान गुण, देखवारूप सामर्थ्य के जेमां एवा अविभाग पर्यायनो समुदाय ते दर्शन गुण, परिगामालंबन रूप कार्य सामर्थ्य के जेमां एवा अविभागी पर्यायनो समुदाय ते वीर्यगुण, विगेरे एम दरेक द्रव्यमा प्रति प्रदेशे पोतपोतानु एक कार्य करवानुं सामर्थ्य धरनारा अनंता अविभागरूप पर्याधनो समुदाय ते गुण छे. जोवद्रव्यमा दरेक प्रदेशे जाणवा रूप कार्य करवानुं सामर्थ्य धरनारा अनंत अविभाग पर्याय छे तेनो समुदाय ते ज्ञान मुण. एम ज्ञानादि अनंत गुणनी वर्त्तना जीव द्रव्यमां छे. ययुक्तं - नय चक्र सारे - " तत्रैकस्मिन् द्रव्ये प्रति प्रदेशे स्त्र स्व एक कार्य करण सामर्थ्य रूपा अनंता अविभाग रूप पर्याया स्तेषां समुदायो गुणः भिन्न कार्य क रणे सामर्थ्यरूपा भिन्न गुणस्य पर्यायाः एवं गुणा अप्यनंताः प्रतिगुणं प्रतिदेशं पर्याया अविभाग रूपाः अनंता स्तुल्याः प्रायीइति ते चारित रूपाः प्रति वस्तुनि अनंता स्ततोनंत गुणाः सामर्थ्य पर्यायाः " अने धर्मादिक जड द्रव्यमां ज्ञान गुणधी अतिरिक्त चलनसहकारादि गुणो वर्चे छे ॥ पाँच ॥ ग्राहक व्यापकता हो, के प्रभु तुम धर्म रमी ॥ आतम अनुभवथी हो, के परिणति अन्य वमी । तुजं शक्ति अनंती हो, के गांतांने ध्यातां ॥ मुज शक्ति विकासन हो, के थाये गुण रमतां । छः ॥ अर्थः-हे प्रभु ! भेदविज्ञाननी पूर्णता वडे आप निरंतर ज्ञानादिक शुद्धात्म गुणना ग्राहक छो. तेथी अतिरिक्त विषय कषायने ग्रहण करवाथी आप मुक्त थया छो, तेमज आपनी व्यापकता पण ज्ञानादिक शुद्धात्म गुणमांज निरंतर व्यापे छे पण विषय कषायमां कदापि काले व्यापे नहि तेथी आप सदा परभावथी अव्यास छो तथा नित्य शाश्वत स्वाधीन ने एकांतिक सहज सुख पिंड शुद्धात्म द्रव्यनी अनुभूलेरा तथा लेमांज विलासी थइ पौद्गलीक विभूतीनुं कलपणुं भोक्तापणुं तथा रमणपणुं वमननी पेठे सर्वथा प्रकारे तजी दीधुं कारणके शुद्धात्म अनुभवरूप अमृतपानमां मग्न पुरुष, पौद्गलीक विषय कषायरूप हालाहल विष पीवाने केम इच्छे ? हे प्रभु ! " अजडत्वात्मिका चितिशक्तिः; अनाकारोपयोगमयी दृशिशक्तिः; साकारोपयोगमयी ज्ञानशक्तिः, अना कुलत्त्र लक्षणा सुखशक्तिः, स्वरूप निर्वर्तन सामर्थ्यरूपा वीर्यशक्तिः, अखण्डित प्रताप स्वातंत्र्य शालिवलक्षणा प्रभुत्वशक्तिः, क्रमाक्रमवृत्ति वृत्तलक्षणोत्पादं व्यय ध्रुवत्वशक्तिः" तथा कर्तृत्वशक्ति, भोक्तृत्वशक्ति, परिणामशक्ति, स्वधर्म ग्राहकत्वशक्ति, स्वधर्म व्यापकत्वशक्ति, तत्त्वशक्ति, एकत्वशक्ति, अनेकत्वशक्ति, कारणशक्ति, संप्रदानशक्ति, अपादानशक्ति, करणशक्ति, संबंधशक्ति, ए आदि अनंतशक्ति आपम, समवाय संबंधे रहेली छे ते शक्तिओनुं स्मरण तथा ध्यान करतां तथा शुद्धास्मगुषमां रण करतां सत्तागते रहेली समान बाहरी सर्वे शक्तियो प्रथा, सहज शिवलदेमोनी प्राति थाय ।। छः ।। इम निजगुण भोगी हो, के स्वामी भुजंग सुदा ॥ जे नित वंदे हो, के ते नर धन्य सदा ।। देवचंद्र प्रभुनी हो, के पुण्येसक्ति सधे ॥ आतम अनुभवनी हो, के नित नित शक्ति वचे ॥ सात ॥ अर्थः- एम शुद्धात्म गुण पर्यायने निरंतर भोगवनारा परमानंद समूह हे श्री भुजंग स्वामी ! पवित्र भाव वडे जे आप नित्यवदन स्मरणादि करे छे तेज पुरुषो आ जगत्त्रयमां धन्य छे ! तेज पुरुषो स्तुति पात्र छे, तेज पुरुषो कृतार्थ छे, हे देवाधिदेव ! आपनी भक्ति महत्पुण्यना योगेज साधी शकाय हे वली आपनीज भक्तिना पसाये बीजना चंद्रमानी पेठे श्रात्म अनुभवनी शक्ति |
पिछले दिनों एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार ने प्रदेश भाजपा के सबसे बड़े नेता और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ जुबानी जंग में कहा था कि उन्होंने 2019 में गुगली फेंकी थी। पवार ने कहा था कि भाजपा के साथ तालमेल की बात करके उन्होंने गुगली फेंकी थी, जिसमें भाजपा फंस गई थी। इसके बाद भाजपा ने कहा था कि पवार की गुगली निकल गई, अब वे फड़नवीस के बाउंसर का इंतजार करें। यह पिछले हफ्ते की बात है। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि फड़नवीस की बाउंसर बॉल इतनी जल्दी आएगी। हालांकि अभी इस पूरे मामले का सच बाहर नहीं आया है। कई लोग यह भी मान रहे हैं कि यह पवार का मिला-जुला खेल है।
बहरहाल, बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी कुछ दिन से चल रही थी और पिछले दिनों मंत्रिमंडल में विस्तार की बातचीत के बहाने जब एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस दिल्ली दौरे पर आए थे तब उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करके इस योजना को अंतिम रूप दिया था। उसके बाद सही समय का इंतजार हो रहा था। अगर शरद पवार की गुगली के जवाब में सचमुच यह फड़नवीस का बाउंसर है, जिसका मकसद पवार को आउट करना या घायल करना है तब तो खेल दिलचस्प है। क्योंकि तब पवार गुगली या बाउंसर नहीं यॉर्कर गेंद फेंकेंगे। जो, हो अभी महाराष्ट्र का खेल खत्म नहीं हुआ है, बल्कि ज्यादा दिलचस्प हो गया है। इस खेल की परतें धीरे धीरे खुलेंगी।
| पिछले दिनों एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार ने प्रदेश भाजपा के सबसे बड़े नेता और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ जुबानी जंग में कहा था कि उन्होंने दो हज़ार उन्नीस में गुगली फेंकी थी। पवार ने कहा था कि भाजपा के साथ तालमेल की बात करके उन्होंने गुगली फेंकी थी, जिसमें भाजपा फंस गई थी। इसके बाद भाजपा ने कहा था कि पवार की गुगली निकल गई, अब वे फड़नवीस के बाउंसर का इंतजार करें। यह पिछले हफ्ते की बात है। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि फड़नवीस की बाउंसर बॉल इतनी जल्दी आएगी। हालांकि अभी इस पूरे मामले का सच बाहर नहीं आया है। कई लोग यह भी मान रहे हैं कि यह पवार का मिला-जुला खेल है। बहरहाल, बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी कुछ दिन से चल रही थी और पिछले दिनों मंत्रिमंडल में विस्तार की बातचीत के बहाने जब एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस दिल्ली दौरे पर आए थे तब उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करके इस योजना को अंतिम रूप दिया था। उसके बाद सही समय का इंतजार हो रहा था। अगर शरद पवार की गुगली के जवाब में सचमुच यह फड़नवीस का बाउंसर है, जिसका मकसद पवार को आउट करना या घायल करना है तब तो खेल दिलचस्प है। क्योंकि तब पवार गुगली या बाउंसर नहीं यॉर्कर गेंद फेंकेंगे। जो, हो अभी महाराष्ट्र का खेल खत्म नहीं हुआ है, बल्कि ज्यादा दिलचस्प हो गया है। इस खेल की परतें धीरे धीरे खुलेंगी। |
चर्चा में क्यों?
हाल ही में 12वें 'गृह' (Green Rating for Integrated Habitat Assessment- GRIHA) शिखर सम्मेलन का वर्चुअल आयोजन किया गया।
12वें 'गृह' शिखर सम्मेलन के विषय में :
- विषय-वस्तु/थीमः 'कायाकल्प करने वाली लचीली आदतें' (Rejuvenating Resilient Habitats)।
- उद्देश्यः नवीन प्रौद्योगिकियों और समाधानों पर विचार-विमर्श करने के लिये एक मंच के रूप में काम करना। इस प्रकार यह पूरे समुदाय के लाभ हेतु स्थायी एवं अनुकूल समाधान विकसित करने के लिये एक मज़बूत तंत्र के निर्माण में मदद करेगा।
- उद्घाटन समारोहः उपराष्ट्रपति ने इस आयोजन के दौरान 'शाश्वत' नामक एक पत्रिका और '30 स्टोरीज़ बियॉन्ड बिल्डिंग्स' नामक पुस्तक का विमोचन किया।
एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिये ग्रीन रेटिंग (गृह):
- यह किसी भी संपूर्ण भवन निर्माण के लिये भारत की राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली है।
- परिकल्पना एवं विकासः इसकी परिकल्पना ऊर्जा और संसाधन संस्थान (The Energy and Resources Institute-TERI) द्वारा की गई थी तथा इसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया गया था।
(The Energy and Resources Institute-TERI)
- ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI) एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थान है, जो भारत और वैश्विक दक्षिण के लिये ऊर्जा, पर्यावरण और सतत् विकास के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करता है।
- 1974 में स्थापित इस संस्थान को पूर्व में टाटा ऊर्जा अनुसंधान संस्थान के नाम से जाना जाता था तथा वर्ष 2003 में इसका नाम परिवर्तित कर ऊर्जा और संसाधन संस्थान कर दिया गया।
- उद्देश्यः ग्रीन बिल्डिंग्स के लिये डिज़ाइन तैयार करने तथा इमारतों के 'ग्रीननेस' का मूल्यांकन करने में मदद करना।
- प्रणालीः
- इस प्रणाली को 'नई इमारतों (जो अभी स्थापना के चरण में हैं) के डिज़ाइन में सहायता करने तथा उनके मूल्यांकन के लिये विकसित किया गया है। एक इमारत का मूल्यांकन उसके पूरे जीवन चक्र के पूर्वानुमानित प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
- प्रयुक्त मानकः
- लाभः
- यह प्रणाली, विभिन्न गतिविधियों एवं प्रक्रियाओं के माध्यम से GHGs (ग्रीनहाउस गैस) उत्सर्जन को कम करने, ऊर्जा की खपत में कमी तथा प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर पर्यावरण में सुधार के साथ ही समुदायों को लाभान्वित करती है।
अन्य संबंधित पहलेंः
- ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज (GHTC)
- उद्देश्यः आवास निर्माण के क्षेत्र को बदलते प्रतिमानों के अनुसार सक्षम बनाने हेतु सर्वोत्तम उपलब्ध और सिद्ध निर्माण तकनीकों जो कि टिकाऊ, हरित एवं आपदा- रोधी हों, की पहचान करना तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना।
- अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया (ASHA- India)
- इस पहल के माध्यम से संसाधन-कुशल, लचीले और टिकाऊ निर्माण के लिये नवीन सामग्रियों, प्रक्रियाओं एवं प्रौद्योगिकी की पहचान हेतु पाँच इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किये गए हैं।
- स्मार्ट सिटीज़ मिशनः
- यह स्थानीय विकास को सक्षमता और प्रौद्योगिकी की मदद से नागरिकों के लिये बेहतर परिणामों के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने तथा आर्थिक विकास को गति देने हेतु भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक अभिनव पहल है।
| चर्चा में क्यों? हाल ही में बारहवें 'गृह' शिखर सम्मेलन का वर्चुअल आयोजन किया गया। बारहवें 'गृह' शिखर सम्मेलन के विषय में : - विषय-वस्तु/थीमः 'कायाकल्प करने वाली लचीली आदतें' । - उद्देश्यः नवीन प्रौद्योगिकियों और समाधानों पर विचार-विमर्श करने के लिये एक मंच के रूप में काम करना। इस प्रकार यह पूरे समुदाय के लाभ हेतु स्थायी एवं अनुकूल समाधान विकसित करने के लिये एक मज़बूत तंत्र के निर्माण में मदद करेगा। - उद्घाटन समारोहः उपराष्ट्रपति ने इस आयोजन के दौरान 'शाश्वत' नामक एक पत्रिका और 'तीस स्टोरीज़ बियॉन्ड बिल्डिंग्स' नामक पुस्तक का विमोचन किया। एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिये ग्रीन रेटिंग : - यह किसी भी संपूर्ण भवन निर्माण के लिये भारत की राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली है। - परिकल्पना एवं विकासः इसकी परिकल्पना ऊर्जा और संसाधन संस्थान द्वारा की गई थी तथा इसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया गया था। - ऊर्जा और संसाधन संस्थान एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थान है, जो भारत और वैश्विक दक्षिण के लिये ऊर्जा, पर्यावरण और सतत् विकास के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करता है। - एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में स्थापित इस संस्थान को पूर्व में टाटा ऊर्जा अनुसंधान संस्थान के नाम से जाना जाता था तथा वर्ष दो हज़ार तीन में इसका नाम परिवर्तित कर ऊर्जा और संसाधन संस्थान कर दिया गया। - उद्देश्यः ग्रीन बिल्डिंग्स के लिये डिज़ाइन तैयार करने तथा इमारतों के 'ग्रीननेस' का मूल्यांकन करने में मदद करना। - प्रणालीः - इस प्रणाली को 'नई इमारतों के डिज़ाइन में सहायता करने तथा उनके मूल्यांकन के लिये विकसित किया गया है। एक इमारत का मूल्यांकन उसके पूरे जीवन चक्र के पूर्वानुमानित प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है। - प्रयुक्त मानकः - लाभः - यह प्रणाली, विभिन्न गतिविधियों एवं प्रक्रियाओं के माध्यम से GHGs उत्सर्जन को कम करने, ऊर्जा की खपत में कमी तथा प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर पर्यावरण में सुधार के साथ ही समुदायों को लाभान्वित करती है। अन्य संबंधित पहलेंः - ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज - उद्देश्यः आवास निर्माण के क्षेत्र को बदलते प्रतिमानों के अनुसार सक्षम बनाने हेतु सर्वोत्तम उपलब्ध और सिद्ध निर्माण तकनीकों जो कि टिकाऊ, हरित एवं आपदा- रोधी हों, की पहचान करना तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना। - अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया - इस पहल के माध्यम से संसाधन-कुशल, लचीले और टिकाऊ निर्माण के लिये नवीन सामग्रियों, प्रक्रियाओं एवं प्रौद्योगिकी की पहचान हेतु पाँच इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किये गए हैं। - स्मार्ट सिटीज़ मिशनः - यह स्थानीय विकास को सक्षमता और प्रौद्योगिकी की मदद से नागरिकों के लिये बेहतर परिणामों के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने तथा आर्थिक विकास को गति देने हेतु भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक अभिनव पहल है। |
कांग्रेस के पूर्व नेता और एक जमाने में गांधी परिवार के करीबी रह चुके गुलाम नबी आजाद के आरोपों को गंभीर बताते हुए भाजपा ने राहुल गांधी से सवाल पूछा है कि अपने विदेश दौरे पर वे किन 'अवांछित व्यापारियों' से मिलते हैं और इन मुलाकातों का एजेंडा क्या होता है?
सूरत कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर खतरे में पड़ती दिख रही है। कहा जा रहा है कि अगर उनकी सजा पर रोक नहीं लगाई, तो वह अगले 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
गुरुवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के कामों के बारे में बताया. अपने भाषण के बाद, उन्हें देश के ऊपरी सदन राज्यसभा में कुछ टिप्पणी करनी थी।
भारतीय जनता पार्टी ने बोफोर्स घोटाले (Bofors scandal) का मुद्दा उठाते हुए एक बार फिर से कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस की सरकार ने सेना के लिए तोपों की खरीद में भी घोटाला किया था।
| कांग्रेस के पूर्व नेता और एक जमाने में गांधी परिवार के करीबी रह चुके गुलाम नबी आजाद के आरोपों को गंभीर बताते हुए भाजपा ने राहुल गांधी से सवाल पूछा है कि अपने विदेश दौरे पर वे किन 'अवांछित व्यापारियों' से मिलते हैं और इन मुलाकातों का एजेंडा क्या होता है? सूरत कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर खतरे में पड़ती दिख रही है। कहा जा रहा है कि अगर उनकी सजा पर रोक नहीं लगाई, तो वह अगले छः सालों तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। गुरुवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के कामों के बारे में बताया. अपने भाषण के बाद, उन्हें देश के ऊपरी सदन राज्यसभा में कुछ टिप्पणी करनी थी। भारतीय जनता पार्टी ने बोफोर्स घोटाले का मुद्दा उठाते हुए एक बार फिर से कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस की सरकार ने सेना के लिए तोपों की खरीद में भी घोटाला किया था। |
हजारों सालों से, लोगों ने धूप के रूप में सुगंधित फूल, पौधे और जड़ी बूटियों का उपयोग किया है। देवताओं को प्रार्थना भेजने के लिए धूम्रपान का उपयोग समारोह के सबसे पुराने ज्ञात रूपों में से एक है। कैथोलिक चर्च के सेंसर से पैगन बोनफायर अनुष्ठानों तक , धूप आपके इरादे को जाने का एक शक्तिशाली तरीका है। जड़ी बूटियों, फूलों, लकड़ी की छाल, रेजिन और जामुन के मिश्रण का उपयोग करके आप अपना खुद का आसानी से बना सकते हैं।
इनमें से अधिकतर आइटम हैं जो आप स्वयं को बढ़ा सकते हैं, जंगल में पा सकते हैं, या खरीददारी से खरीद सकते हैं।
धूप क्यों?
धूप - और तेल और इत्र जैसे अन्य सुगंधित सामान - कुछ अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं। पहला आपके मनोदशा पर प्रभाव है - एक निश्चित सुगंध एक विशेष भावना को ट्रिगर करेगी। अरोमाथेरेपिस्ट वर्षों से जानते हैं कि गंध इंद्रियों के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करती है। दूसरा, एक सुगंध में विभिन्न संगठन हो सकते हैं। आप एक दुकान से घूम सकते हैं, चान्तिली की चपेट में आ सकते हैं, और अचानक अपनी दादी की याद दिलाई जा सकती है, जब आप कॉलेज में दूर थे। किसी विशेष भोजन की गंध कैंप में बिताए गए गर्मियों की यादें पैदा कर सकती है।
अंत में, हम एक कंपन स्तर पर सुगंध का अनुभव करते हैं। प्रत्येक जीवित ऊर्जा में ऊर्जा होती है, और अपनी कंपन उत्सर्जित करती है - पौधे अलग नहीं होते हैं। जब आप उन्हें धूप में मिलाते हैं, तो ये कंपन आपके इरादे के अनुसार बदल जाती हैं।
यही कारण है कि, जादू में, धूप बहुत लोकप्रिय है - आपके अनुष्ठान की जगह को गंध करने के अलावा, आप वायुमंडल में कंपन को बदलने में सक्षम हैं, ब्रह्मांड में परिवर्तन को प्रभावित करते हैं।
अपना खुद का क्यों बनाओ?
आप वाणिज्यिक रूप से उत्पादित धूप की छड़ें और शंकु लगभग कहीं भी खरीद सकते हैं, और वे महंगे नहीं हैं।
हालांकि, वे आम तौर पर कृत्रिम अवयवों से बने होते हैं, और इसलिए कोई जादुई मूल्य नहीं होता है। जबकि वे जलने के लिए अच्छे हैं, और निश्चित रूप से सुंदर गंध करते हैं, वे एक अनुष्ठान सेटिंग में थोड़ा उद्देश्य प्रदान करते हैं।
लूज धूप, जो इन पृष्ठों पर व्यंजनों के लिए है, को चारकोल डिस्क पर जला दिया जाता है या आग में फेंक दिया जाता है। चारकोल डिस्क अधिकांश आध्यात्मिक आपूर्ति दुकानों के साथ-साथ चर्च सप्लाई स्टोर्स द्वारा संकुल में बेचे जाते हैं (यदि आपके पास एक हिस्पैनिक मार्केट है , तो यह भी देखने के लिए एक अच्छी जगह है)। डिस्क पर एक मैच लागू करें, और आपको पता चलेगा कि जब यह चमकती है और लाल चमकती है तो यह जलाया जाता है। चमकने के बाद, शीर्ष पर अपनी ढीली धूप का एक चुटकी रखें - और सुनिश्चित करें कि आपको इसे फायरप्रूफ सतह पर मिला है। यदि आप अपने समारोह को बड़ी आग से बाहर रखते हैं, तो बस आग में मुट्ठी भरें।
कोई भी अच्छा पकवान जानता है कि पहला कदम हमेशा अपनी गुड्स को इकट्ठा करना है। अपने अवयवों, अपने मिश्रण और मापने वाले चम्मच, जार और ढक्कन, लेबल (साथ लिखने के लिए एक पेन को मत भूलना), और अपने मोर्टार और मुर्गी को इकट्ठा करें।
प्रत्येक धूप नुस्खा "भागों" में प्रस्तुत किया जाता है। इसका मतलब है कि आप जिस माप का उपयोग कर रहे हैं वह एक इकाई - एक कप, एक चम्मच, एक मुट्ठी भर - एक हिस्सा है।
यदि एक नुस्खा दो भागों के लिए कॉल करता है, तो जो भी आपने चुना है उसका दो उपयोग करें। यदि आप एक चम्मच का उपयोग कर रहे हैं तो एक आधे भाग आधा कप है, यदि आप मापने के लिए एक कप का उपयोग कर रहे हैं, या आधे चम्मच का उपयोग कर रहे हैं।
अपनी खुद की धूप बनाते समय, यदि आप रेजिन या आवश्यक तेलों का उपयोग कर रहे हैं, तो इन्हें पहले संयोजित करें। किसी भी छाल या जामुन जोड़ने से पहले, जब तक उन्हें थोड़ी गमी नहीं मिल जाती, तब तक इन्हें मैश करने के लिए अपने मोर्टार और मुर्गी का प्रयोग करें। सूखे जड़ी बूटियों, फूलों, या पाउडर वस्तुओं को आखिरी बार जाना चाहिए।
बहुत से लोग धूप धुएं के लिए एलर्जी प्रतिक्रियाओं से पीड़ित हैं। कई मामलों में, यह वाणिज्यिक रूप से उत्पादित धूप में सिंथेटिक सामग्री की प्रतिक्रिया के कारण होता है। कुछ लोगों को लगता है कि अगर वे प्राकृतिक सामग्री से बने धूप का उपयोग करते हैं तो उनके पास कम प्रतिक्रिया होती है। हालांकि, अगर आपके पास एलर्जी या कुछ अन्य हालत है जो धूप धुआं या सुगंध से ट्रिगर की जा सकती है, तो आपको किसी भी धूप का उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, चाहे वह व्यावसायिक रूप से खरीदा गया हो या घर से बना और कार्बनिक हो।
आप पाते हैं कि आपके लिए सबसे अच्छा समाधान सिर्फ धूप के उपयोग से बचने के लिए है।
शुरू करने के लिए तैयार हैं?
| हजारों सालों से, लोगों ने धूप के रूप में सुगंधित फूल, पौधे और जड़ी बूटियों का उपयोग किया है। देवताओं को प्रार्थना भेजने के लिए धूम्रपान का उपयोग समारोह के सबसे पुराने ज्ञात रूपों में से एक है। कैथोलिक चर्च के सेंसर से पैगन बोनफायर अनुष्ठानों तक , धूप आपके इरादे को जाने का एक शक्तिशाली तरीका है। जड़ी बूटियों, फूलों, लकड़ी की छाल, रेजिन और जामुन के मिश्रण का उपयोग करके आप अपना खुद का आसानी से बना सकते हैं। इनमें से अधिकतर आइटम हैं जो आप स्वयं को बढ़ा सकते हैं, जंगल में पा सकते हैं, या खरीददारी से खरीद सकते हैं। धूप क्यों? धूप - और तेल और इत्र जैसे अन्य सुगंधित सामान - कुछ अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं। पहला आपके मनोदशा पर प्रभाव है - एक निश्चित सुगंध एक विशेष भावना को ट्रिगर करेगी। अरोमाथेरेपिस्ट वर्षों से जानते हैं कि गंध इंद्रियों के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करती है। दूसरा, एक सुगंध में विभिन्न संगठन हो सकते हैं। आप एक दुकान से घूम सकते हैं, चान्तिली की चपेट में आ सकते हैं, और अचानक अपनी दादी की याद दिलाई जा सकती है, जब आप कॉलेज में दूर थे। किसी विशेष भोजन की गंध कैंप में बिताए गए गर्मियों की यादें पैदा कर सकती है। अंत में, हम एक कंपन स्तर पर सुगंध का अनुभव करते हैं। प्रत्येक जीवित ऊर्जा में ऊर्जा होती है, और अपनी कंपन उत्सर्जित करती है - पौधे अलग नहीं होते हैं। जब आप उन्हें धूप में मिलाते हैं, तो ये कंपन आपके इरादे के अनुसार बदल जाती हैं। यही कारण है कि, जादू में, धूप बहुत लोकप्रिय है - आपके अनुष्ठान की जगह को गंध करने के अलावा, आप वायुमंडल में कंपन को बदलने में सक्षम हैं, ब्रह्मांड में परिवर्तन को प्रभावित करते हैं। अपना खुद का क्यों बनाओ? आप वाणिज्यिक रूप से उत्पादित धूप की छड़ें और शंकु लगभग कहीं भी खरीद सकते हैं, और वे महंगे नहीं हैं। हालांकि, वे आम तौर पर कृत्रिम अवयवों से बने होते हैं, और इसलिए कोई जादुई मूल्य नहीं होता है। जबकि वे जलने के लिए अच्छे हैं, और निश्चित रूप से सुंदर गंध करते हैं, वे एक अनुष्ठान सेटिंग में थोड़ा उद्देश्य प्रदान करते हैं। लूज धूप, जो इन पृष्ठों पर व्यंजनों के लिए है, को चारकोल डिस्क पर जला दिया जाता है या आग में फेंक दिया जाता है। चारकोल डिस्क अधिकांश आध्यात्मिक आपूर्ति दुकानों के साथ-साथ चर्च सप्लाई स्टोर्स द्वारा संकुल में बेचे जाते हैं । डिस्क पर एक मैच लागू करें, और आपको पता चलेगा कि जब यह चमकती है और लाल चमकती है तो यह जलाया जाता है। चमकने के बाद, शीर्ष पर अपनी ढीली धूप का एक चुटकी रखें - और सुनिश्चित करें कि आपको इसे फायरप्रूफ सतह पर मिला है। यदि आप अपने समारोह को बड़ी आग से बाहर रखते हैं, तो बस आग में मुट्ठी भरें। कोई भी अच्छा पकवान जानता है कि पहला कदम हमेशा अपनी गुड्स को इकट्ठा करना है। अपने अवयवों, अपने मिश्रण और मापने वाले चम्मच, जार और ढक्कन, लेबल , और अपने मोर्टार और मुर्गी को इकट्ठा करें। प्रत्येक धूप नुस्खा "भागों" में प्रस्तुत किया जाता है। इसका मतलब है कि आप जिस माप का उपयोग कर रहे हैं वह एक इकाई - एक कप, एक चम्मच, एक मुट्ठी भर - एक हिस्सा है। यदि एक नुस्खा दो भागों के लिए कॉल करता है, तो जो भी आपने चुना है उसका दो उपयोग करें। यदि आप एक चम्मच का उपयोग कर रहे हैं तो एक आधे भाग आधा कप है, यदि आप मापने के लिए एक कप का उपयोग कर रहे हैं, या आधे चम्मच का उपयोग कर रहे हैं। अपनी खुद की धूप बनाते समय, यदि आप रेजिन या आवश्यक तेलों का उपयोग कर रहे हैं, तो इन्हें पहले संयोजित करें। किसी भी छाल या जामुन जोड़ने से पहले, जब तक उन्हें थोड़ी गमी नहीं मिल जाती, तब तक इन्हें मैश करने के लिए अपने मोर्टार और मुर्गी का प्रयोग करें। सूखे जड़ी बूटियों, फूलों, या पाउडर वस्तुओं को आखिरी बार जाना चाहिए। बहुत से लोग धूप धुएं के लिए एलर्जी प्रतिक्रियाओं से पीड़ित हैं। कई मामलों में, यह वाणिज्यिक रूप से उत्पादित धूप में सिंथेटिक सामग्री की प्रतिक्रिया के कारण होता है। कुछ लोगों को लगता है कि अगर वे प्राकृतिक सामग्री से बने धूप का उपयोग करते हैं तो उनके पास कम प्रतिक्रिया होती है। हालांकि, अगर आपके पास एलर्जी या कुछ अन्य हालत है जो धूप धुआं या सुगंध से ट्रिगर की जा सकती है, तो आपको किसी भी धूप का उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, चाहे वह व्यावसायिक रूप से खरीदा गया हो या घर से बना और कार्बनिक हो। आप पाते हैं कि आपके लिए सबसे अच्छा समाधान सिर्फ धूप के उपयोग से बचने के लिए है। शुरू करने के लिए तैयार हैं? |
मुजफ्फरनगर। जनपद की दो होनहार छात्राओं अंजुम ईदरीसी पुत्री अय्यूब ईदरीसी, निवासी निरमाना व वर्षा वालिया पुत्री राजेंद्र कुमार ने यूजीसी नेट की परीक्षा विज़ुअल आर्ट विषय के साथ उत्तीर्ण कर जनपद का गौरव बढ़ाया है।
अंजुम, चित्रकला विभाग डीएवी कॉलेज मुज़फ़्फ़रनगर से एमए उत्तीर्ण हैं व वर्षा एमए चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा है। दोनों ही छात्राओं नें अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों व माता-पिता को दिया है।
| मुजफ्फरनगर। जनपद की दो होनहार छात्राओं अंजुम ईदरीसी पुत्री अय्यूब ईदरीसी, निवासी निरमाना व वर्षा वालिया पुत्री राजेंद्र कुमार ने यूजीसी नेट की परीक्षा विज़ुअल आर्ट विषय के साथ उत्तीर्ण कर जनपद का गौरव बढ़ाया है। अंजुम, चित्रकला विभाग डीएवी कॉलेज मुज़फ़्फ़रनगर से एमए उत्तीर्ण हैं व वर्षा एमए चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा है। दोनों ही छात्राओं नें अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों व माता-पिता को दिया है। |
नई दिल्लीः टाटा मोटर्स भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। वर्तमान में यह देश में नंबर 1 इलेक्ट्रिक कार बेचने वाली कंपनी है। Tata Nexon EV को बड़ी सफलता मिली है। इसने देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक एसयूवी बनने का मुकाम हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। Tata अपनी Tiago और Tigor को इलेक्ट्रिक वर्जन में बेच रही है। लेकिन कंपनी का ध्यान अपनी ईवी रेंज को और बढ़ाने पर है। कंपनी की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार जल्द आने वाली है।
टाटा मोटर्स ने 2023 ऑटो एक्सपो में अपनी हैरियर एसयूवी का ईवी वर्जन पेश किया है । इसके जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। Tata के पोर्टफोलियो में Harrier EV को Nexon EV से ऊपर पोजिशन किया जाएगा। Tata Motors एक और इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा पंच माइक्रो एसयूवी का इलेक्ट्रिक वर्जन ला सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Tata Motors की योजना 2023 के अंत तक दमदार माइक्रो SUV लॉन्च करने की है। यह वाहन Gen 2 (सिग्मा) प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जो टाटा अल्ट्रोज़ में प्रयुक्त ALFA आर्किटेक्चर का एक संशोधित संस्करण है। पंच ईवी के 2 बैटरी पैक विकल्पों के साथ आने की उम्मीद है। 1 बैटरी पैक Tiago EV की तरह 26kWh का हो सकता है और दूसरा Nexon EV की तरह 30. 2kWh का बैटरी पैक हो सकता है।
पंच ईवी के बारे में टाटा मोटर्स की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है । लेकिन अगर लॉन्च किया जाता है, तो यह भारत की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक एसयूवी होगी, जिसकी अनुमानित कीमत 10 से 14 लाख रुपये के बीच होगी। बताया जा रहा है कि होगा।
| नई दिल्लीः टाटा मोटर्स भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। वर्तमान में यह देश में नंबर एक इलेक्ट्रिक कार बेचने वाली कंपनी है। Tata Nexon EV को बड़ी सफलता मिली है। इसने देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक एसयूवी बनने का मुकाम हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। Tata अपनी Tiago और Tigor को इलेक्ट्रिक वर्जन में बेच रही है। लेकिन कंपनी का ध्यान अपनी ईवी रेंज को और बढ़ाने पर है। कंपनी की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार जल्द आने वाली है। टाटा मोटर्स ने दो हज़ार तेईस ऑटो एक्सपो में अपनी हैरियर एसयूवी का ईवी वर्जन पेश किया है । इसके जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। Tata के पोर्टफोलियो में Harrier EV को Nexon EV से ऊपर पोजिशन किया जाएगा। Tata Motors एक और इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा पंच माइक्रो एसयूवी का इलेक्ट्रिक वर्जन ला सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Tata Motors की योजना दो हज़ार तेईस के अंत तक दमदार माइक्रो SUV लॉन्च करने की है। यह वाहन Gen दो प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जो टाटा अल्ट्रोज़ में प्रयुक्त ALFA आर्किटेक्चर का एक संशोधित संस्करण है। पंच ईवी के दो बैटरी पैक विकल्पों के साथ आने की उम्मीद है। एक बैटरी पैक Tiago EV की तरह छब्बीस किलोवाट-घंटा का हो सकता है और दूसरा Nexon EV की तरह तीस. दो किलोवाट-घंटा का बैटरी पैक हो सकता है। पंच ईवी के बारे में टाटा मोटर्स की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है । लेकिन अगर लॉन्च किया जाता है, तो यह भारत की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक एसयूवी होगी, जिसकी अनुमानित कीमत दस से चौदह लाख रुपये के बीच होगी। बताया जा रहा है कि होगा। |
दक्षिण अमेरिका हमारे लोगों के लिए, ऑस्ट्रेलिया के रूप में ही रूप में के रूप में रहस्यमय वास्तव में बस के रूप में अप्राप्य, समझ से बाहर और रहस्यमय है। इस पर साहसिक पुस्तकों के एक बहुत कुछ लिखा गया है और एक ही राशि कम नहीं साहसिक फिल्में हटा दिया है। जंगल, बंदर, घड़ियाल, पिरान्हा - यह सब जरूरी है एक अच्छा एक्शन फिल्म में मौजूद होना चाहिए, और यह सभी दक्षिण अमेरिका के लिए पूरी तरह से विशेषता है।
लेकिन इस तरह के टकसाली बातों तक ही सीमित नहीं महाद्वीप पर मौजूद हैं। सबसे दिलचस्प भौगोलिक विशेषताओं में से एक दक्षिण अमेरिका के पहाड़ हैं। वे एक शब्द में वर्णित किया जा सकताः "सबसे अच्छा। " क्योंकि लगभग सभी विशेषताओं वे दुनिया के अन्य पर्वत श्रृंखला "जीत"। तो, दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों - सबसे लंबी चेन। उनकी कुल लंबाई लगभग नौ हजार किलोमीटर तक पहुँचता है। एक ही समय वे देशों की अधिकतम संख्या के माध्यम से जाने से कम - सात राज्यों में स्थित हैं।
केवल पहाड़ की ऊंचाई दक्षिण अमेरिका सिस्टम में दूसरे स्थान पर कब्जाः वे हिमालय से आगे हैं। वे ग्रह पर उच्चतम बिंदु निर्धारित करने के लिए विजेता रहे हैं। हालांकि, हम ध्यान दें, है सबसे ऊंची पर्वत Aconcagua - - दक्षिण अमेरिका में फिर से तुरंत एवरेस्ट इस प्रकार है, लेकिन एक ही समय में भी पूरे गोलार्द्ध के सर्वोच्च शिखर है। और Aconcagua - पहाड़ जीत के सभी बाकी की ऊंचाई के लिए प्रतियोगिता में एक विलुप्त ज्वालामुखी, के बाद से दुनिया में उच्च ज्वालामुखी कोई और अधिक है। यह दक्षिण अमेरिका में सबसे बड़ा पहाड़ अर्जेंटीना के क्षेत्र में स्थित है और लगभग सात किलोमीटर (6960 मीटर) की ऊंचाई है।
इसका नाम - एंडीज - दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों, हम कह सकते हैं, प्राप्त हुआ है प्राचीन Incas से। शब्द "अंता" उनकी भाषा में मतलब "पहाड़ तांबे"। जाहिर है, Incas इस धातु मूल्यवान, यदि ऐसा है तो उनके पहाड़ों नामित अन्य खनिजों से अधिक है। इतना ही नहीं तांबा दक्षिण अमेरिका की समृद्ध एंडीज पर्वत। वहाँ विकसित और अन्य धातुओं रहे हैं। उनमें से, सीसा, जस्ता, टिन और यहां तक कि वैनेडियम। प्लेटिनम और सोने का खनन कर रहे हैं और उच्च गुणवत्ता वाले पन्ने - और कीमती धातुओं की समृद्ध जमा पाया।
एंडीज की तलहटी में, हालांकि वे इराक या सऊदी अरब में के रूप में इतना महत्वपूर्ण नहीं हैं तेल और गैस क्षेत्रों (मुख्य रूप से वेनेजुएला में) कर रहे हैं।
दक्षिण अमेरिकी पर्वत श्रृंखला पश्चिम और उत्तर से पूरे महाद्वीप चारों ओर से घेरे। "केवल" तीन सौ किलोमीटर की दूरी पर - इसकी चौड़ाई लंबाई के साथ तुलना में बहुत बड़ी नहीं है। लेकिन एंडीज की अपनी विशाल लंबाई की वजह से - दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों - कई भागों, जो भी कहा जाता है में वितरित करने का निर्णय "समूहों। " भूगोलवेत्ता चार तरह के "खंड" कर रहे हैं।
पहले भाग - उत्तरी एंडीज। सबसे उत्तरी दक्षिण अमेरिका (प्लस त्रिनिदाद के द्वीप) - यह एक अपेक्षाकृत कम पहाड़ों तट के साथ चलने के लिए है। उन्होंने यह भी उच्च सरणी कॉर्डिलेरा डे मेरिडा, जो पश्चिम में स्थित है, और सिएरा नेवादा डी सांता मार्ता की एक अलग प्रणाली, प्रशांत तट पर पहले से ही स्थित शामिल हैं। एंडीज के इस हिस्से में दक्षिण अमेरिका में उच्चतम पर्वत - क्रिस्टोबल कोलोन (5744 किमी)।
पश्चिमी एंडीज, केंद्रीय के समानांतर भी, सागर के किनारे, इक्वाडोर में पहले से ही एक रीढ़ की हड्डी में मिल जाती हैं। दोनों विलुप्त और सक्रिय - उन दोनों के बीच वहाँ ज्वालामुखी हैं। उनमें से - दक्षिण अमेरिका का दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत (चिम्बोरज़ो)। यह भी एक ज्वालामुखी, Aconcagua तरह है, लेकिन 700 मीटर नीचे। यहाँ वहाँ भी अब उच्चतम सक्रिय ज्वालामुखी है - कोटोपैक्सी। लेकिन ऊंचाई प्राप्त कर ली और छह किलोमीटर है।
पूर्वी एंडीज भी सक्रिय ज्वालामुखी चिह्नित किया गया। यहाँ वे काफी अधिक है, लेकिन अभी भी कोटोपैक्सी नीचे हैं। हालांकि औसत दक्षिणी कॉर्डिलेरा के उच्चतम हिस्सा है भी दक्षिण अमेरिका में पहाड़ कहा जाता है।
चिली-अर्जेंटीना भाग - एंडीज में सबसे संकीर्ण। कुछ स्थानों यह एक एकल के लिए कम हो जाता है में रिज, मुख्य कॉर्डिलेरा कहा जाता है। यह जहां Aconcagua है। आधे से भी कम क्लस्टर के शिखर नहीं - सक्रिय ज्वालामुखियों में आज।
और अंत में, दक्षिणी एंडीज। सिर्फ साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर - मुख्य भूमि पहाड़ों फिर से छोड़ने के इस हिस्से, और सबसे प्रमुख शिखर में।
दक्षिणी कॉर्डिलेरा की औसत ऊंचाई, भूगोल गणना में - चार किलोमीटर है। पहाड़ों काफी युवा हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर पहले से ही गठन पूरा कर लिया है। अब वहाँ एक धीमी गति से उनके विनाश है। यह पास के प्रशांत महासागर है, जो लगभग परीक्षा है पहाड़ों की उपस्थिति के द्वारा त्वरित किया गया है। दक्षिण अमेरिका के नक्शे पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कैसे पास फिट पानी। सागर अंतरिक्ष और आर्द्र हवा से हवाओं विनाश की प्रक्रिया में तेजी लाने, और इसलिए पहाड़ों एक साल ऊंचाई में लगभग एक सेंटीमीटर खो रहे हैं।
हालांकि, एक योगदान दिया, और ज्वालामुखी, जो, के रूप में कहा गया है, एंडीज में कई, और उनमें से एक महत्वपूर्ण संख्या अभी भी सक्रिय। धन्यवाद करने के लिए उन्हें कुछ चोटियों अभी भी "बढ़ने" कर सकते हैं, ताकि प्रणाली की औसत ऊंचाई ही रहता है।
एंडीज के विभिन्न स्थानों में बहुत अलग और इलाके और स्थलाकृति, और वनस्पति है। यह सच है कि पहाड़ की तह भागों विभिन्न भूवैज्ञानिक अवधियों में पर्वतमाला की वजह से है, सबसे पहले। और दूसरी, तथ्य यह है कि दक्षिणी कॉर्डिलेरा बहुत लंबा है और कई प्राकृतिक क्षेत्रों से पार कर जाता।
ठंड से एंडीज के मध्य भाग पेरू वर्तमान बहुत अच्छा क्षेत्र हो जाता है। एक पठार Puna कहा जाता है पर तापमान 10 से अधिक है और कभी कभी चला जाता है और -25 डिग्री वृद्धि नहीं करता है। यहाँ वहाँ भी दुनिया अटाकामा रेगिस्तान में सबसे शुष्क है।
दक्षिणी एंडीज - उपोष्णकटिबंधीय है। गीला बर्फ या बारिश की बहुतायत - और हालांकि में हवा का सबसे गर्म माह 15 से ऊपर गर्म नहीं मिलता है, यह बहुत नम और बारिश की एक बहुत कुछ है।
इसलिए, यदि आप दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों के एक छोर से यात्रा की, तो आप सबसे अधिक जलवायु क्षेत्रों गवाह कर सकते हैं।
दक्षिणी कॉर्डिलेरा, उसकी ऊंचाई और असामान्य, पर्वतारोहियों के लिए बहुत ही दिलचस्प के लिए धन्यवाद। यहाँ दुनिया भर से आते हैं, सहित रूस से, और पूर्व सोवियत संघ के अन्य भागों से।
सबसे लोकप्रिय चढ़ाई दो "वस्तु": दक्षिण अमेरिका में उच्चतम पर्वत, जो है, Aconcagua, और Alpamayo शिखर। सूची में पहले से उबरने के लिए काफी सरल माना जाता है। गोरा आकर्षक, बल्कि इसलिए हुआ क्योंकि उस की अपनी ऊंचाई और विचारों। हालांकि, Aconcagua चढ़ाई की विजय के लिए एक अच्छा अनुभव, धीरज और के विश्वसनीय पोर्टेबिलिटी की आवश्यकता है हवा। खोजकर्ता के लिए खतरा ज्यादातर Aconcagua क्षेत्र में अस्थिर मौसम है। उसे अचानक परिवर्तन और इस तरह के एक खतरनाक पहाड़ हैं।
एक और बात - Alpamayo। यह दक्षिण अमेरिका के और पहाड़ों की दस प्रमुख वैश्विक "समस्या" के बीच सबसे अभेद्य माना जाता है। "दीवारों" और जमीन Alpamayo के बीच कोण 60 डिग्री तक पहुँचता है। यहां तक कि अच्छी तरह से सुसज्जित पर्वतारोहियों अक्सर पहाड़ के आधे नहीं मिलता है। हम शीर्ष इकाई के लिए आया था। और पहली बार के लिए Alpamayo बेल्जियम-फ्रांसीसी अभियान से 1951 में वश में किया गया था, दो पर्वतारोहियों।
शुरुआती के बीच पर्वतारोहियों कोटोपैक्सी के लिए दिलचस्प चढ़ाई पर विचार किया। ज्वालामुखी हालांकि वैध है, लेकिन अब सोता है। कई अन्य चोटियों की तरह, वह दूर नहीं पहली बार द्वारा मोहित हो गया था। 19 वीं सदी में, दो पर्वतारोहियों शीर्ष पर चढ़ाई करने के लिए कोशिश की और नहीं कर सके। यह सिद्धांत रूप में, यह आश्चर्य की बात है, लेकिन निराशाजनक है कि वे नहीं किया है केवल पिछले 300 मीटर की दूरी पर काबू पाने के लिए सक्षम किया गया नहीं है,।
मार्ग की मुश्किल क्षणों के बावजूद, अब उपलब्ध कोटोपैक्सी भी एक नवागंतुक तैयार किया। मुख्य बात - दिल से पोशाक के लिए, शीर्ष पर की तापमान शायद ही कभी -10 से ऊपर उठकर मत भूलना।
एक दिलचस्प विस्तार एक रात में यात्रा के लिए की जरूरत हैः हम पगडंडी से पिघल बर्फ से पहले शिविर में लौटने चाहिए।
ताकि दक्षिण अमेरिकी पहाड़ों बहुत अलग अलग दिशाओं में दिलचस्प हैं, और यदि आप, वहां जा सकते हैं आप निश्चित रूप से करना चाहिए।
| दक्षिण अमेरिका हमारे लोगों के लिए, ऑस्ट्रेलिया के रूप में ही रूप में के रूप में रहस्यमय वास्तव में बस के रूप में अप्राप्य, समझ से बाहर और रहस्यमय है। इस पर साहसिक पुस्तकों के एक बहुत कुछ लिखा गया है और एक ही राशि कम नहीं साहसिक फिल्में हटा दिया है। जंगल, बंदर, घड़ियाल, पिरान्हा - यह सब जरूरी है एक अच्छा एक्शन फिल्म में मौजूद होना चाहिए, और यह सभी दक्षिण अमेरिका के लिए पूरी तरह से विशेषता है। लेकिन इस तरह के टकसाली बातों तक ही सीमित नहीं महाद्वीप पर मौजूद हैं। सबसे दिलचस्प भौगोलिक विशेषताओं में से एक दक्षिण अमेरिका के पहाड़ हैं। वे एक शब्द में वर्णित किया जा सकताः "सबसे अच्छा। " क्योंकि लगभग सभी विशेषताओं वे दुनिया के अन्य पर्वत श्रृंखला "जीत"। तो, दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों - सबसे लंबी चेन। उनकी कुल लंबाई लगभग नौ हजार किलोमीटर तक पहुँचता है। एक ही समय वे देशों की अधिकतम संख्या के माध्यम से जाने से कम - सात राज्यों में स्थित हैं। केवल पहाड़ की ऊंचाई दक्षिण अमेरिका सिस्टम में दूसरे स्थान पर कब्जाः वे हिमालय से आगे हैं। वे ग्रह पर उच्चतम बिंदु निर्धारित करने के लिए विजेता रहे हैं। हालांकि, हम ध्यान दें, है सबसे ऊंची पर्वत Aconcagua - - दक्षिण अमेरिका में फिर से तुरंत एवरेस्ट इस प्रकार है, लेकिन एक ही समय में भी पूरे गोलार्द्ध के सर्वोच्च शिखर है। और Aconcagua - पहाड़ जीत के सभी बाकी की ऊंचाई के लिए प्रतियोगिता में एक विलुप्त ज्वालामुखी, के बाद से दुनिया में उच्च ज्वालामुखी कोई और अधिक है। यह दक्षिण अमेरिका में सबसे बड़ा पहाड़ अर्जेंटीना के क्षेत्र में स्थित है और लगभग सात किलोमीटर की ऊंचाई है। इसका नाम - एंडीज - दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों, हम कह सकते हैं, प्राप्त हुआ है प्राचीन Incas से। शब्द "अंता" उनकी भाषा में मतलब "पहाड़ तांबे"। जाहिर है, Incas इस धातु मूल्यवान, यदि ऐसा है तो उनके पहाड़ों नामित अन्य खनिजों से अधिक है। इतना ही नहीं तांबा दक्षिण अमेरिका की समृद्ध एंडीज पर्वत। वहाँ विकसित और अन्य धातुओं रहे हैं। उनमें से, सीसा, जस्ता, टिन और यहां तक कि वैनेडियम। प्लेटिनम और सोने का खनन कर रहे हैं और उच्च गुणवत्ता वाले पन्ने - और कीमती धातुओं की समृद्ध जमा पाया। एंडीज की तलहटी में, हालांकि वे इराक या सऊदी अरब में के रूप में इतना महत्वपूर्ण नहीं हैं तेल और गैस क्षेत्रों कर रहे हैं। दक्षिण अमेरिकी पर्वत श्रृंखला पश्चिम और उत्तर से पूरे महाद्वीप चारों ओर से घेरे। "केवल" तीन सौ किलोमीटर की दूरी पर - इसकी चौड़ाई लंबाई के साथ तुलना में बहुत बड़ी नहीं है। लेकिन एंडीज की अपनी विशाल लंबाई की वजह से - दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों - कई भागों, जो भी कहा जाता है में वितरित करने का निर्णय "समूहों। " भूगोलवेत्ता चार तरह के "खंड" कर रहे हैं। पहले भाग - उत्तरी एंडीज। सबसे उत्तरी दक्षिण अमेरिका - यह एक अपेक्षाकृत कम पहाड़ों तट के साथ चलने के लिए है। उन्होंने यह भी उच्च सरणी कॉर्डिलेरा डे मेरिडा, जो पश्चिम में स्थित है, और सिएरा नेवादा डी सांता मार्ता की एक अलग प्रणाली, प्रशांत तट पर पहले से ही स्थित शामिल हैं। एंडीज के इस हिस्से में दक्षिण अमेरिका में उच्चतम पर्वत - क्रिस्टोबल कोलोन । पश्चिमी एंडीज, केंद्रीय के समानांतर भी, सागर के किनारे, इक्वाडोर में पहले से ही एक रीढ़ की हड्डी में मिल जाती हैं। दोनों विलुप्त और सक्रिय - उन दोनों के बीच वहाँ ज्वालामुखी हैं। उनमें से - दक्षिण अमेरिका का दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत । यह भी एक ज्वालामुखी, Aconcagua तरह है, लेकिन सात सौ मीटर नीचे। यहाँ वहाँ भी अब उच्चतम सक्रिय ज्वालामुखी है - कोटोपैक्सी। लेकिन ऊंचाई प्राप्त कर ली और छह किलोमीटर है। पूर्वी एंडीज भी सक्रिय ज्वालामुखी चिह्नित किया गया। यहाँ वे काफी अधिक है, लेकिन अभी भी कोटोपैक्सी नीचे हैं। हालांकि औसत दक्षिणी कॉर्डिलेरा के उच्चतम हिस्सा है भी दक्षिण अमेरिका में पहाड़ कहा जाता है। चिली-अर्जेंटीना भाग - एंडीज में सबसे संकीर्ण। कुछ स्थानों यह एक एकल के लिए कम हो जाता है में रिज, मुख्य कॉर्डिलेरा कहा जाता है। यह जहां Aconcagua है। आधे से भी कम क्लस्टर के शिखर नहीं - सक्रिय ज्वालामुखियों में आज। और अंत में, दक्षिणी एंडीज। सिर्फ साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर - मुख्य भूमि पहाड़ों फिर से छोड़ने के इस हिस्से, और सबसे प्रमुख शिखर में। दक्षिणी कॉर्डिलेरा की औसत ऊंचाई, भूगोल गणना में - चार किलोमीटर है। पहाड़ों काफी युवा हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर पहले से ही गठन पूरा कर लिया है। अब वहाँ एक धीमी गति से उनके विनाश है। यह पास के प्रशांत महासागर है, जो लगभग परीक्षा है पहाड़ों की उपस्थिति के द्वारा त्वरित किया गया है। दक्षिण अमेरिका के नक्शे पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कैसे पास फिट पानी। सागर अंतरिक्ष और आर्द्र हवा से हवाओं विनाश की प्रक्रिया में तेजी लाने, और इसलिए पहाड़ों एक साल ऊंचाई में लगभग एक सेंटीमीटर खो रहे हैं। हालांकि, एक योगदान दिया, और ज्वालामुखी, जो, के रूप में कहा गया है, एंडीज में कई, और उनमें से एक महत्वपूर्ण संख्या अभी भी सक्रिय। धन्यवाद करने के लिए उन्हें कुछ चोटियों अभी भी "बढ़ने" कर सकते हैं, ताकि प्रणाली की औसत ऊंचाई ही रहता है। एंडीज के विभिन्न स्थानों में बहुत अलग और इलाके और स्थलाकृति, और वनस्पति है। यह सच है कि पहाड़ की तह भागों विभिन्न भूवैज्ञानिक अवधियों में पर्वतमाला की वजह से है, सबसे पहले। और दूसरी, तथ्य यह है कि दक्षिणी कॉर्डिलेरा बहुत लंबा है और कई प्राकृतिक क्षेत्रों से पार कर जाता। ठंड से एंडीज के मध्य भाग पेरू वर्तमान बहुत अच्छा क्षेत्र हो जाता है। एक पठार Puna कहा जाता है पर तापमान दस से अधिक है और कभी कभी चला जाता है और -पच्चीस डिग्री वृद्धि नहीं करता है। यहाँ वहाँ भी दुनिया अटाकामा रेगिस्तान में सबसे शुष्क है। दक्षिणी एंडीज - उपोष्णकटिबंधीय है। गीला बर्फ या बारिश की बहुतायत - और हालांकि में हवा का सबसे गर्म माह पंद्रह से ऊपर गर्म नहीं मिलता है, यह बहुत नम और बारिश की एक बहुत कुछ है। इसलिए, यदि आप दक्षिण अमेरिका के पहाड़ों के एक छोर से यात्रा की, तो आप सबसे अधिक जलवायु क्षेत्रों गवाह कर सकते हैं। दक्षिणी कॉर्डिलेरा, उसकी ऊंचाई और असामान्य, पर्वतारोहियों के लिए बहुत ही दिलचस्प के लिए धन्यवाद। यहाँ दुनिया भर से आते हैं, सहित रूस से, और पूर्व सोवियत संघ के अन्य भागों से। सबसे लोकप्रिय चढ़ाई दो "वस्तु": दक्षिण अमेरिका में उच्चतम पर्वत, जो है, Aconcagua, और Alpamayo शिखर। सूची में पहले से उबरने के लिए काफी सरल माना जाता है। गोरा आकर्षक, बल्कि इसलिए हुआ क्योंकि उस की अपनी ऊंचाई और विचारों। हालांकि, Aconcagua चढ़ाई की विजय के लिए एक अच्छा अनुभव, धीरज और के विश्वसनीय पोर्टेबिलिटी की आवश्यकता है हवा। खोजकर्ता के लिए खतरा ज्यादातर Aconcagua क्षेत्र में अस्थिर मौसम है। उसे अचानक परिवर्तन और इस तरह के एक खतरनाक पहाड़ हैं। एक और बात - Alpamayo। यह दक्षिण अमेरिका के और पहाड़ों की दस प्रमुख वैश्विक "समस्या" के बीच सबसे अभेद्य माना जाता है। "दीवारों" और जमीन Alpamayo के बीच कोण साठ डिग्री तक पहुँचता है। यहां तक कि अच्छी तरह से सुसज्जित पर्वतारोहियों अक्सर पहाड़ के आधे नहीं मिलता है। हम शीर्ष इकाई के लिए आया था। और पहली बार के लिए Alpamayo बेल्जियम-फ्रांसीसी अभियान से एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में वश में किया गया था, दो पर्वतारोहियों। शुरुआती के बीच पर्वतारोहियों कोटोपैक्सी के लिए दिलचस्प चढ़ाई पर विचार किया। ज्वालामुखी हालांकि वैध है, लेकिन अब सोता है। कई अन्य चोटियों की तरह, वह दूर नहीं पहली बार द्वारा मोहित हो गया था। उन्नीस वीं सदी में, दो पर्वतारोहियों शीर्ष पर चढ़ाई करने के लिए कोशिश की और नहीं कर सके। यह सिद्धांत रूप में, यह आश्चर्य की बात है, लेकिन निराशाजनक है कि वे नहीं किया है केवल पिछले तीन सौ मीटर की दूरी पर काबू पाने के लिए सक्षम किया गया नहीं है,। मार्ग की मुश्किल क्षणों के बावजूद, अब उपलब्ध कोटोपैक्सी भी एक नवागंतुक तैयार किया। मुख्य बात - दिल से पोशाक के लिए, शीर्ष पर की तापमान शायद ही कभी -दस से ऊपर उठकर मत भूलना। एक दिलचस्प विस्तार एक रात में यात्रा के लिए की जरूरत हैः हम पगडंडी से पिघल बर्फ से पहले शिविर में लौटने चाहिए। ताकि दक्षिण अमेरिकी पहाड़ों बहुत अलग अलग दिशाओं में दिलचस्प हैं, और यदि आप, वहां जा सकते हैं आप निश्चित रूप से करना चाहिए। |
6 से 12 वर्ष उत्तर बाल्यावस्था है। संज्ञानात्मक विकास के कारण इस आयु के बालक सांकेतिक व मानसिक गतिविधियां करने लगते हैं, पर उनका तर्क मूर्त अनुभवों तक ही सीमित रहता है। इस अवस्था में तार्किक चिंतन का विकास, संज्ञानान्तम विकास का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। तार्किक चिंतन के महत्वपूर्ण अवयव-संरक्षण, वर्गीकरण, क्रमबद्धता, इसी अवस्था में विकसित होते हैं। समाजीकृत भाषा का विकास भी इस अवस्था में होता है, इसके कारण बालकों को अच्छे सामाजिक संबंध बनाने तथा अंतःक्रिया के कौशलों को सीखने में सहायता मिलती है । McCarthy ( 1937 ) & Lindworsky (1939) ने कहा है कि धनात्मक अभिप्रेरणा का बाल्यावस्था के नैतिक विकास में अत्यंत महत्व है ।
शाला के प्रभाव से बालकों के व्यवहार प्रतिमानों में परिपक्वता आती है। इसके सकारात्मक-नकारात्मक दोनों पहलू हैं। अभिभावक बालकों को समाज-अनुकूल व्यवहार विकसित करने हेतु उचित मार्गदर्शन और सहायता देते हैं ।
उत्तर बाल्यावस्था सम्पूर्ण जीवन की सर्वाधिक संवेदनशील अवस्था है । बाल्यावस्था में बालक सबसे अधिक व तीव्र गति से सीखता है। अतः इसे जीवन की शिक्षणावस्था (Period of Learning) भी कहा जाता है। इस सम्बन्ध में मनोवैज्ञानिकों ने कहा है कि गत्यात्मकता बाल्यावस्था की मुख्य विशेषता है। यह अवस्था सतत् परिवर्तनशीलता की होती है।
नैतिक विकास की दृष्टि से बाल्यावस्था का अत्यंत महत्व है। इस अवधि में अंर्तवैयक्तिक संबंधों का बालक के सीखने की क्रिया पर प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में वाटसन (1959 ) ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुये कहा है कि आगे चलकर बालक कैसा बनेगा, यह उसकी बाल्यावस्था पर निर्भर करता है। विल्सन (1968) ने कहा कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक के नैतिक विकास में अंर्तविवेक (आतंरिक प्रतिमान), युक्तिसंगतता, परहितवाद एवं नैतिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण होते है ।
हरलॉक (1974) ने कहा है कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक सीखे गये नैतिक मूल्यों का सामान्यीकरण करने लगता है। इस अवस्था में उसमें नैतिक प्रत्ययों का विकास भी होता है ।
मुरे (1924) एवं ओराइसन (1959) ने अपने अध्ययनों में ज्ञात किया कि बालक में इस अवस्था में भले-बुरे (Conscience) की भावना का विकास होता है जो बालक को नैतिक व्यवहार करने की प्रेरणा देती है और उसे दंड से बचाती है। लर्नर (1937) ने कहा कि 8-12 वर्ष आयु में नैतिक निर्णय में बालक दंड के साथ अपने माँ के साथ संबंधों से भी प्रभावित होता है । मार्गन (1956) ने बताया कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक की न्याय व औचित्य बुद्धि विकसित हो चुकी रहती है, अतः अनुचित दंड मिलने पर वह शिकायत एवं रोष प्रदर्शित करता है।
गैसेल (1956) का विचार है कि नैतिक शर्म, नैतिक व्यवहार के विकास के लिये महत्वपूर्ण कारक है। इस आयु के अंत तक लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में नैतिक विकास शीघ्र और अधिक मात्रा में होता है ।
अन्य मनोवैज्ञानिकों Connel & Gibbs (1991); Bennet (1992); Kromrey (1993); Kahne (1994); Shields & Bredmeier (1995); Zagzebski (1996), Battistich (1997); Haste (1998); Bertowitz (1998) आदि ने भी नैतिक विकास संबंधी अध्ययन किये ।
उत्तर बाल्यावस्था का बालक यथार्थवादी बनता जाता है। 8-9 वर्ष में बालक काल्पनिक संसार में रहता है, और साहसी कहानियों में स्वयं को नायक मानता है। 10-12 वर्ष में 'वीर पूजा' की भावना होती है। समवयस्कों के क्रियाकलापों में रूचि रहती है, इसे 'टोली की अवस्था' भी कहा जाता है। इस समय नैतिक लज्जा, नैतिक विकास में बड़ा कारक है। बालक में इस समय आत्मविश्वास एवं महत्व की भावना उत्पन्न हो जाती है ।
जोन्स (1954) ने कहा कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक के नये नैतिक मानकों का निर्माण होता है और माता-पिता के मानकों से विरोध होता है। बालक की नैतिक नियमावली समूह
की नैतिक नियमावली द्वारा निर्धारित होती है। उसके संप्रत्ययों का सामान्यीकरण हो जाता है, ईमानदारी के आदर्श उच्च हो जाते हैं व बालक की नैतिक नियमावली प्रौढ़ के समान हो जाती है ।
इस आयु में परिवेश के माध्यम से जो मूल्य बालक ग्रहण करता है, आयु वृद्धि के साथ वे दृढ़ होते जाते हैं। इस अवस्था में बालक में उत्तरदायित्व का बोध होता है। हाफमेन (1968) ने कहा कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक के नैतिक विकास में अधिक स्थिरता, संगतशीलता तथा सामान्यीकरण आता है। केटल (1970) के अनुसार आयु विचलन के साथ नैतिक विकास का संरूप परिवर्तित होता रहता है। रूबिन एवं सुचिन्दर (1973) तथा ली वोई (1974) ने भी नैतिक निर्णय व नैतिक व्यवहार के मध्य धनात्मक सहसंबंध पाया ।
अभिभावक बालकों से जिस प्रकार व्यवहार करते हैं, उनकी अभिवृत्तियां व व्यवहार का तरीका आदि, वे बालक में नैतिक विकास का प्रत्यय विकसित करते हैं। परिवार का मनोवैज्ञानिक वातावरण, पारिवारिक परिवेश बालक में नैतिक विकास को प्रभावित करते हैं ।
वर्तमान बदलते हुये संदर्भ में नैतिकता व अनैतिकता के मध्य क्षीण पड़ती रेखा, बालक को एक स्पष्ट पृष्ठभूमि देने में असमर्थ है। फलस्वरूप बालक स्वयं को असमंजस की स्थिति में पाता है। मानव मूल्यों की क्षीण व धूमिल होती चेतना से समाज में नैतिक संकट उत्पन्न हो गया है, मानव अपनी समृद्ध नैतिक परंपरा से दूर हो गया है। नैतिक शिक्षा की प्रथम पाठशाला है, परिवार फिर समाज । नैतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के लिये, नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना होगा, उन्हें आचरण में उतारना होगा और इसकी आधारशिला की नीव है - बालक की उत्तर बाल्यावस्था ।
अपने इसी चिंतन को एक दिशा प्रदान करने हेतु शोधार्थी ने शोध का विषय "बालक के
नैतिक विकास पर मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन एवं सामाजिक-आर्थिक स्तर के प्रभाव का अध्ययन- उत्तर बाल्यावस्था के विशेष संदर्भ में " का चयन किया है । नैतिकता
'नैतिक' शब्द का विकास नीति से हुआ है जिसका अर्थ है- 'व्यवहार का मान्य नियम । '
'नीति' शब्द का अभिप्राय है - ले जाने की क्रिया, चाल-चलन, शील, आचार और व्यवहार । यह शब्द नी + त्तिन से बना है ।
'नीति' में 'इक' प्रत्यय लगने से नैतिक बना है। 'नैतिक' 'शब्द' 'मोरल' (अंग्रेजी का
पर्याय) का विकास, लेटिन शब्द 'मोरेस' से व्युत्पन्न है, जिसका तात्पर्य है- आचरण, रीति-रिवाज आदि ।
'नैतिकता' एक ऐसा शब्द है जो किसी समाज में, व्यवहार के सामान्यतः स्वीकृत सामाजिक नियम, आंतरिक नैतिक नियंत्रण, नैतिक स्वतंत्रता और नैतिक रचनात्मकता से संबंधित है। समाज को व्यवस्थित बनाये रखने के लिये प्रत्येक समाज अपने सदस्यों के मार्गदर्शन हेतु कुछ ऐसे सिद्धांत व नियम बना देता है, जिसके अनुसार व्यवहार करने पर अपना तथा दूसरों का कल्याण हो, किसी को हानि न पहुंचे और सामाजिक व्यवस्थाएँ बनी रहें। इन रीतियों एवं नियमों के अनुसार व्यवहार करने का गुण ही 'नैतिकता' कहलाता है।
नैतिक व्यवहार एक ऐसा आचरण है, जो अंदर से अनुशासित होता है। नैतिकता का सामाजिक व्यवस्थाओं से अटूट सम्बन्ध होता है। बालक अपने विवेक, ज्ञान, अन्र्त्तात्मा के आधार पर आंतरिक नैतिकता अपनाता है। नैतिकता के निर्माण के लिये बालक के मूल प्रवृयात्मक संवेग जितने सुसंगठित तथा नैतिक गुणों के स्थायी भाव जितने अधिक होंगे, उसका नैतिक चरित्र उतना ही सुदृढ़ होगा।
इस क्षेत्र में हार्टशोर्न और मे (1930) ने कई हजार बालकों का व्यापक अध्ययन किया और देखा कि नैतिकता प्रत्येक स्थिति को देखते हुये अपना एक विशिष्ट एवं स्पष्ट स्वरूप प्राप्त कर लेती है ।
प्रो० डेविड (1982) के शब्दों में - "नैतिकता कर्त्तव्य की वह आंतरिक भावना है जिसमें उचित-अनुचित का विवरण निहित हो । '
मैकाइवर एवं पेज (1989) के अनुसार "वास्तविक रूप में नैतिकता, नियमों का वह समूह है जिसके द्वारा व्यक्ति का अंतःकरण सत्य-असत्य का ज्ञान कराता है । "
इस संबंध में अन्य मनोवैज्ञानिकों Higgius (1991), Bentlea (1992), Etzioni (1993), Noddings (1994), Baxter (1995), Lapsley (1996), Solomon (1997) आदि ने भी बालक के नैतिक विकास संबंधी अध्ययन किये ।
नैतिकता के नियम सामाजिकता के संदर्भ में ही कियान्वित होते है । नैतिकता एक ऐसा शब्द है, जिसका प्रयोग एक श्रेष्ठ जीवन-यापन का बोध कराने के लिये किया जाता है। पहली स्थिति में यह स्वीकृत सामाजिक नियमों की ओर संकेत करता है और दूसरी स्थिति में इससे व्यक्तिगत, नैतिक नियंत्रण, नैतिक स्वतंत्रता और नैतिक रचनात्मकता के उद्भव का संकेत मिलता है। इससे नैतिक व्यवहार के दो स्तर भी स्पष्ट होते हैं। सामाजिक नियम संहिता का अनुगमन और समर्थन बाहा नैतिकता है और श्रेष्ठ जीवन का परिपालन आंतरिक नैतिकता है। भारतीय विचारकों के अनुसार :- भारतीय नीतिशास्त्र में 'श्रीमद्भागवत गीता' ने एक सर्वांगपूर्ण नैतिक सिद्धांत उपस्थित किया है।
प्रो० बैजनाथ शर्मा ने कहा है कि "नैतिकता' की परिभाषा यह हो सकती है कि परहित की भावना से की गई सभी क्रियायें एवं कार्य नैतिक कहे जा सकते हैं । "
भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ० एस० राधाकृष्णन (1966) के शब्दों में - "नैतिकता को व्यक्ति -
के बौद्धिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के विकास का आधार माना है। नैतिकता सदगुणों का समन्वय मात्र ही नहीं, वरन् एक व्यापक गुण है तथा इसका प्रभाव मनुष्य के समस्त क्रियाकलापों पर होता है और साथ में व्यक्ति का व्यक्तित्व भी प्रभावित होता है। "
महामना मदनमोहन मालवीय के अनुसार - "नैतिकता, मनुष्य की उन्नति का आधार है । चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य के शब्दों में - "बालकों का चरित्र निर्माण नैतिक शिक्षा से ही
संभव है और उसी के आधार पर राष्ट्र का विकास निर्माण हो सकता है।
पाश्चात्य विचारकों के अनुसार :- डॉ० रिकमेन (1912) ने अपनी पुस्तक 'ईयर बुक ऑफ एजुकेशन' में "नैतिकता व्यवहार के किसी स्तर के अनुसार व्यवहार करना नहीं है। यह हमारे मस्तिष्क में स्थापित अच्छे संबंधों की, जिन्हें हम सभी के व्यवहारों तथा कार्यों में देखते हैं, इस सब की अभिव्यक्ति है ।
कोहेलबर्ग (1968) ने "Child is moral philosopher" कहा है।
मनोवैज्ञानिक रस्किनरस ने माना है कि नैतिकता स्वतः मूल्यवान होती है। साथ ही कॉन्ट (1790) ने कहा कि शास्त्र नियमों के पालन में ही नैतिकता विद्यमान है और नैतिक प्रशिक्षण द्वारा पाश्विक स्वभाव को मानवीय स्वभाव में परिवर्तित कर अनुशासित करना नैतिकता है ।
नैतिकता बालक के सर्वांगीण विकास का आधार होती है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिये समाज एवं बालक का विकास तथा अस्तित्व अन्योन्याश्रित है। बालक का विकास समाज के बिना नहीं हो सकता और समाज के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं । बालक समाजिक तभी बन सकता है, जब उसमें नैतिकता हो उसका व्यवहार नैतिक हो । नैतिकता का विकास समाजीकरण द्वारा होता है। जब बालक के कार्य व व्यवहार नैतिकता से जुड़ जाते हैं, तो उसकी समझ में प्रखरता तथा विश्वास में दृढ़ता आती है जिससे बालक को दिशा-निर्देश प्राप्त होता है और वह अपने जीवन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त करता है।
अन्य मनोवैज्ञानिकों Shwelder (1990), Likana (1991) Sommers (1992), Noam (1993), Speicher (1994), Aksan (1995), Schaffer (1996), Murray (1997) आदि ने भी बालक के नैतिक विकास संबंधी अध्ययन किये ।
बालक की नैतिकता का व्यवहार किसी स्तर विशेष पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ये तो
बालक की बाल्यावस्था में डाले गये संस्कारों पर निर्भर करता है, जो उसकी क्रिया, व्यक्तित्व और व्यवहार करने से स्पष्ट होते हैं। ये व्यवहार और अभिव्यक्ति बालक के नैतिक स्रोतों पर निर्भर होती है। नैतिकता का प्रादुर्भाव सद्गुणों के अपार भण्डार में हुआ है तथा संस्कृति नैतिक मूल्यों का दर्पण है।
नैतिक विकास
नैतिक विकास से ताप्तर्य उस विकास से है, जिन्हें मानवीय व्यवहारों से संबंधित करने पर जीवन उज्जवल तथा उच्च बनता है एवं इन व्यवहारों को उस स्तर का बनाना जिस स्तर को संस्कृति ने मान्य किया है या जो हमारी सांस्कृतिक मान्यताओं, परम्पराओं और आदर्शों के अनुकूल हों । जेम्स हेस्टिंग्स के अनुसार :- "नैतिक दर्शन की विषय वस्तु मानव आचरण एवं चरित्र है तथा मानव आचरण व चरित्र के निर्धारक तत्व नैतिक विकास है। " नैतिक विकास एक ऐसी आचरण संहिता या सद्गुण समूह है, जिसे बालक अपनी संस्कृति एवं समाज द्वारा प्राप्त संस्कारों एवं पर्यावरण के माध्यम से ग्रहण करता है और अपने उद्देश्यों, लक्ष्यों एवं स्तर की प्राप्ति हेतु जीवन पद्धति का निर्माण करता है तथा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है। इसमें विचार, विश्वास, आस्था और मनोवृत्ति आदि समाहित होते हैं। नैतिक विकास एक ओर बालक के अंतःकरण द्वारा नियंत्रित होते हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी संस्कृति, समाज, परंपराओं द्वारा परिपोषित व सिंचित होते हैं ।
इस संबंध में अनेक मनोवैज्ञानिकों एवं शोध अध्ययनकर्त्ताओं Bryk (1988), Battistich (1989), Soloman (1990), Hoffman (1991), Madden (1992), Blasi (1993), Splicher (1994), Laupa & Turiel (1995), Spario (1996), Marvin (1997), Nancy Willard (1997) आदि ने भी अध्ययन किये हैं ।
बालक में नैतिक विकास होने पर ही वह अपनी 'आत्म-चेतना' द्वारा भलाई- बुराई,
सत्य-असत्य, न्याय-अन्याय, उचित-अनुचित में अंतर करने लगता है। नैतिक विकास बालक की संकल्पनात्मक क्रियाओं के मापदंड को निर्धारित करते हैं। बालक का नैतिक विकास उसके सामाजिक जीवन से संबंधित होता है। उसकी नैतिकता के लिये व्यवहारिक समरूपता का होना आवश्यक है, इसी के द्वारा उसके व्यक्तित्व एवं चरित्र का विकास हो सकता है। सामाजिक एवं सामुदायिक भिन्नता और भिन्न मापदंडों के बाद भी मूल्यगत विशेषताएं बालक को नियंत्रित करती हैं। ये विशेषताएं नैतिक व्यवहार को विकसित करने से ही विकसित होती है ।
नैतिक विकास प्रासंगिक रहते हैं, उनका औचित्य हमेशा बना रहता है । नैतिक मूल्य शाश्वत्, सर्वदेशिक, सर्वकालिक हैं । नैतिक विकास उचित व अनुचित का प्रमाण हैं, जो व्यक्ति के लिये उस संस्कृति द्वारा निर्धारित किये जाते हैं, जिसमें वह रहता है। नैतिक विकास वास्तव में हमारी संस्कृति और संस्कारों की चेतना है ।
नैतिक विकास जो हमारे लक्ष्य हैं, इन्हें पाने के लिये बालक सामान्य मापदण्डों के अनुरूप व्यवहार करे, यह उसका नैतिक आचरण है। बालक में नैतिक विकास को विकसित करना, अस्तित्व और बोध को बचाने की प्रक्रिया है। अस्तित्व और नैतिक विकास के बोध का परिणाम समाज है । हैगर्टी, मैरो, कारमाईकेल, हौलिंगवर्थ, ब्रेकर, बर्गसन, ब्रमेल्ड, हेनरी ब्राउडे, पीटर्स, बैगले, बाउडी, डुयूई, हार्न, नारमन कारेस्टर, बेविट, राबर्ट एच. हचिन्स आदि ने भी नैतिक मूल्यों के संबंध में अपने पृथक-पृथक दृष्टिकोण प्रस्तुत किये हैं।
नैतिक विकास आत्मगत है। नैतिकता और उसका विकास व्यक्ति के जागृत विवेक की सीमा पर निर्भर रहता है। इस संबंध में मनोवैज्ञानिक रूथ महोदय ने कहा है कि "नैतिक विकास का वर्गीकरण एक जटिल प्रक्रिया है तथा साधारण रूप से जिसे हम उचित-अनुचित, सही-गलत, सत्य-असत्य में वर्गीकृत करते हैं, यह उतनी सहजता से वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है।"
नैतिक विकास शाश्वत् नियमों की स्वीकारोक्ति, संस्कार, शैली, सामाजिकता,
आध्यात्मिकता आदि से निर्धारित होते हैं । नैतिक विकास के आधार में मानवीयता, दयालुता, आत्मपवित्रता, क्षमा एवं सत्यता जैसे महान आदर्शवादी गुण सम्मिलित हैं। नैतिक विकास सीमाओं में रहकर एक साथ विकास का प्रकाश पुँज बनाते हैं। नैतिक विकास बालक के सम्पूर्ण आचरण के निर्धारक माने जाते हैं और इनका बालक के समायोजन एवं व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है। थॉमसन (1949) के अनुसार :- 'बालक के अंदर सामाजिक व नैतिक विकास होने के कारण, उसकी समझ में प्रखरता और विश्वास में दृढ़ता आ जाती है। नैतिक मूल्य बालक को सदैव सुन्दर आचरण के लिये प्रेरित करते हैं और लक्ष्य प्राप्ति हेतु व्यवहार का निर्धारण करते हैं । पूर्ण विकसित नैतिक धारणाएं बालक में सुरक्षा का भाव विकसित करती है। प्रायः सभी बालक अपने परिवार एवं समाज के नैतिक मूल्यों को ग्रहण कर उनके द्वारा निर्दिष्ट आचरण करते हैं । "
• इन विचारों की पुष्टि Killen (1990), Higgins (1991), Solomon (1992), Bersott & Miller (1993), Etzioni (1994), Berkowitz (1995), Watson, Battistich & Schaps (1996) आदि अध्ययनकर्त्ताओं ने भी की है ।
नैतिकता स्वः प्रेरित होती है। बौद्धिक क्षमताओं के विकास के साथ - साथ नैतिक मूल्यों के प्रति निष्ठा विकसित होती जाती है। नैतिकता के निर्धारक तत्वों का निर्धारण दो तत्वों- प्रथम, बौद्धिक पक्ष- उचित एवं अनुचित का ज्ञान तथा द्वितीय, भावात्मक पक्ष - जीवन में सही का अनुपालन करना, से होता है।
नैतिक मूल्यों का विकास
नैतिक विकास न तो जैविक है और ना ही आर्थिक, बल्कि इस विकास की कसौटी मानव आनंद है। विवेक और नैतिक मूल्यों का विकास समाजीकरण की प्रक्रिया में तत्काल ही प्रारंभ हो जाता है। समाज के नैतिक आदर्श, सामाजिक संस्थाएं और परंपरायें इन तीनों का सामंजस्य करना ही
नैतिक जगत् नैतिक विकास है। बहुत से मनोवैज्ञानिकों का विश्वास है कि प्रतिरूपण की प्रक्रिया से पुरूस्कार और दंड का बोध होता है और बालकों को सही-गलत का बोध कराते हैं । यह प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है ।
मैक्स वेबर (1982 ) के अनुसार 'व्यक्ति के द्वारा की जाने वाली क्रिया का विकास अविवेकशील से विवेकशीलता की ओर हुआ है।'
अभिभावक और समाज बाहा नैतिकता बालक को देते हैं और परिपक्वता प्राप्त करने के लिये बालक को मूल्यों का एक व्यवस्थित संकलन बनाने के लिये इन सिद्धातों को विश्लेषित कर स्वीकार करना पड़ता है। नैतिक विकास बालक के सर्वांगीण सृजनात्मक व्यक्तित्व का प्रतिफलन होते हैं ।
बालक में आत्मशक्ति, मानसिक दृढ़ता, कर्त्तव्यपरायणता तथा धर्मपरायणता, ज्ञान वृद्धि, अभ्यास, नैतिक उपदेश, अनुकरण, निर्देश, दण्ड और पुरस्कार, प्रशंसा और निंदा, आदर्श प्रोत्साहन, रूचियों का विकास, स्नेह आदि के द्वारा नैतिक विकास सतत् रूप से अनवरत चलता रहता है।
बालक में नैतिक विकास नैतिक ज्ञान, नैतिक सम्बोध, नैतिक तर्क एवं नैतिक व्यवहार की परस्पर अंर्तक्रिया द्वारा होता रहता है। नैतिक ज्ञान और नैतिक सम्बोध का विकास बालक के भीतर आयु और परिपक्वता के साथ होता है। इसके अभाव में बालक प्रयत्न व भूल द्वारा नैतिक व्यवहार संपादित करता है। बालक में नैतिक निर्णय व नैतिक व्यवहार में धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है। रूबिन एवं रचनीडर (1973 ) एवं लोवोई (1974), गॉडमैन, मेटलैंड एवं नॉटर्न (1978) तथा यॉट् एवं आर्बथनॉट (1978) ने अपने अध्ययनों में देखा कि उच्च स्तरीय नैतिक विकास बालक में उच्च नैतिक व्यवहार को प्रदर्शित करता है ।
हेलेन (1981) के अनुसार- "बालक के नैतिक विकास हेतु नैतिक व्यवहार (सामाजिक आचरण), नैतिक भावना (विवेक) ओर नैतिक निर्णय (संज्ञानात्मक तत्व) इन तीन पक्षों का उल्लेख
किया है। " साथ ही अनेकों मनोवैज्ञानिक स्किनर (1948), मावस्र (1960), सीयर्स (1957 ) , बण्डूरा एवं वॉल्टर्स (1963) ने बालक के नैतिक विकास की पृथक-पृथक दृष्टिकोण से व्याख्या की है। इसी प्रकार पेस्टार्लोजी, जॉन हेनरी, जोहान, क्रेयडिक हरबार्ट आदि ने भी बालक के नैतिक विकास एवं निर्माण को परिष्कृत स्पष्ट और उन्मुख करना आवश्यक माना है। नैतिक विकास से संबंधित अवधारणाएँ
नैतिकता तथा इसका विकास, जो कि शताब्दियों से एक दार्शनिक विचार बना हुआ है, मनोवैज्ञानिकों द्वारा लगभग पचास वर्षों से अध्ययन किये जाते रहे हैं। नैतिक विकास का संबंध उस प्रक्रिया से है, जिसके द्वारा बालक उचित और अनुचित, अच्छे या बुरे सिद्धांतों में अंतर करने में समर्थ होते हैं। शोध का नैतिक मूल्यों के विकास में अधिकतर ध्यान नैतिक विवेक एवं नैतिक चरित्र के विकास में रहता है। वे सिद्धांत जिनसे बालक किस प्रकार सीखता है, नैतिक परिणाम, हावभाव, चालढाल बनते हैं और कैसे उसके स्तर को अपनाता है, यह सब नैतिक विवेक के अंतर्गत आते हैं। नैतिक चरित्र, परिस्थितिजन्य आवश्यकता, नीतिशास्त्र संबंधी गतिविधियों में वास्तविक व्यवहार दर्शाता है। प्रथम ज्ञान एवं विवेक संबंधी निर्णय प्रक्रिया को अपनाता है जबकि दूसरा असामान्य या विशिष्ट सामाजिक परिस्थितियों में व्यवहार को प्रदर्शित करता है ।
(1) आचरण पर बल देने वाली अवधारणा :- यह धारणा मनोवैज्ञानिक हल (1985) के सिद्धांतों से प्रभावित है। इनके अनुसार नैतिक विकास अधिगम की अनुकूलन प्रक्रिया के माध्यम से होता है। दण्ड और पुरस्कार के माध्यम से निर्मित अंतःकरण उन सभी परिस्थितियों में भी क्रियाशील होगा, जहां दंड व पुरस्कार की संभावना नहीं है, परन्तु हार्टशोर्न तथा मे ( 1927 ), सीयर्स ( 1957), राव, आलपोर्ट (1966) आदि के अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि अधि गम के अनुकूलन सिद्धांत के आधार पर बालक के नैतिक आचरण के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, हालांकि नैतिक मूल्य अधिमग द्वारा अर्जित किये जाते हैं ।
(2) कर्त्तव्य अधिगम सिद्धांत पर आधारित अवधारणा :- कर्तव्य उन आदर्शों व मूल्यों के संस्थान को कहते हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करके दिशा प्रदान करते हैं । बालक उन व्यक्तियों से तादात्म्य स्थापित करता है जिन्हें वह प्यार करता है, आदर्श व महत्वपूर्ण समझता है, इन आदर्शों और नैतिक मूल्यों को बालक आत्मसात् करता है और उसका अंतःकरण दृढ़ होता है। हैविंग्हर्स्ट (1960) नैतिकता को व्यक्तित्व के विशेष गुणों के रूप में लेते हैं, जैसे नैतिक स्थायित्व, अहम् शक्ति, पराहम् शक्ति, स्वतः प्रवृति, मित्रता, शत्रुता, दोषभाव ग्रंथि आदि । हरलॉक (1972) ने नैतिक व्यवहार के अधिगम पर बल दिया है। साथ ही मेहता (1984) ने ज्ञात किया कि बालक नैतिक मूल्यों को सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण द्वारा सीख सकता है।
मनोविश्लेषण सिद्धांत पर आधारित अवधारणा :- इस धारणा के अनुसार चरित्र व नैतिक व्यवहार का विकास माता-पिता से तादात्म्य व आज्ञाओं के आंतरीकरण के माध् यम से उत्पन्न परम् अहम व विवेक के विकास के कारण होता है । इस धारणा के प्रतिपादक फॉयड (1923) हैं। मनोवैज्ञानिकों ने नैतिकता और मनोविज्ञान के संबंधों को गहराई से विश्लेषण करने के लिये एक और मानव मन की प्रक्रियाओं का गहराई से विशलेषण किया, वहीं दूसरी ओर मानसिक प्रक्रियाओं की दृष्टि से नैतिक अवस्थाओं को स्पष्ट किया ।
विकासात्मक उपागम पर आधारित बौद्धिक या निर्णयात्मक अवधारणा (संज्ञान विकासात्मक सिद्धांत)
प्याजे (1965) द्वारा प्रतिपादित नैतिक विकास का सिद्धांत
प्याजे (1965) ने नैतिकता को बालकों के सामाजिक नियम, समानता एवं लोगों
के प्रति न्याय की भावना के रूप में देखा। इन्होंने पाया कि बालक जिस सामाजिक वातावरण में रहता है, उसके नैतिक नियमों को वह अपने नैतिक अनुभवों पर लागू करता है। इस प्रक्रिया के
माध्यम से बालक में बाहा समाजिक नियम, आंतरिक सिद्धांतों के रूप में परिणित होते हैं ।
यह नैतिकता के दो स्वरूप 'परंपरागत' एवं तार्किक को मानते हैं। इनके अनुसार बालक अपने नैतिक विकास में चार अवस्थाओं से गुजरता हैअनोमी - जन्म से 4 वर्ष : जहां नैतिक विकास की आधारशिला का निर्माण होता है । परायत्तता : अधिकार - 4 से 8 वर्ष : अपरिपक्व नैतिकता जिसमें बालक बाहा सत्ता से नियंत्रित होता है और उसमें आदर, आज्ञाकारिता, कर्त्तव्य संबंधी नैतिकता का विकास होता है ।
परायत्तता : अन्योन्यता 9 से 13 वर्ष : जिसमें बालक में पारस्परिक सहयोग, आदर भावना, न्यायप्रियता, ईमानदारी की नैतिकता का विकास होता है। यह आयु नैतिक विकास व नैतिक निर्णय के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बालक में विवेक का उद्गम होता है। बालक पुरस्कार और दंड से ऊपर उठकर सामाजिक स्वीकृति ओर अस्वीकृति के स्तर पर पहुंच जाता है। बालक इस विश्वास की प्रेरणा से व्यवहार करता है कि व्यक्ति का आचरण इस प्रकार नियंत्रित होना चाहिये जिसमें न्याय एक पक्षीय न होकर पारस्परिक हो । समूह के साथ अनुरूपता अब अनिवार्यता का स्वरूप ग्रहण कर लेती है क्योंकि बालक को सामाजिक अकेलेपन का भय सताने लगता है।
(द) स्वायत्तता - किशोरवय 13 से 18 वर्ष : इसमें नैतिकता आत्म निर्धारित होती है। उत्तर बाल्यावस्था का बालक अमूर्त चिंतन करने लगता है, जो उसे नैतिकता के सिद्धांतों को समझने में सहायता करता है, परन्तु उसकी नैतिकता का चुनाव व नैतिक संस्थान का विकास वयस्कों की अपेक्षा भिन्न होता है, उसकी नैतिकता विषय संबंधित होती है।
लॉरेन्स कोलबर्ग (1974) ने नैतिकता के तर्क को प्याजे (1965 ) के संज्ञानात्मक सिद्धांत से जोडने का प्रयास किया है, क्योंकि बौद्धिक क्षमता ही उसे नैतिक मुद्दों पर सतत् विचार
करने की योग्यता प्रदान करती हैं तथा नैतिकता की उच्च अवस्था में पहुंचने के लिये अमूर्त चिंतन क्षमता की आवश्यकता होती है ।
कोलबर्ग (1974) का नैतिक विकास का चरण सिद्धांत
कॉलबर्ग लॉरेन्स (1974) ने नैतिक विकास की अवस्थाओं से अधिक विकसित सिद्धांत का प्रतिपादन किया। उन्होंने प्याजे (1965 ) द्वारा बताई गई अवस्थाओं को और आगे बढाया तथा उनका विकास किया । इनके द्वारा बालकों को प्रस्तुत नैतिक उलझनों के उत्तरों द्वारा की गई जांच के परिणाम, नैतिक विकास की संपूर्ण अवस्था की व्यवस्थापन के रूप में लाया गया। कोलबर्ग अपने नैतिक विकास के तीन स्तर मानते हैंः2.
(अ) प्रथम स्तर- 'पूर्व परंपरागत और पूर्व नैतिक स्तर ' : इस स्तर में बालक अपने मूल्यों का आंतरीकरण नहीं करता है। इसकी नैतिकता पूरूस्कार या दंड या वातावरण से निर्मित होती है। प्रथम चरण - 'आज्ञाकारिता और दण्डोन्मुखता अथवा विषम नैतिकता': इस अवस्था में किसी कार्य की शारीरिक प्रतिक्रिया अच्छाईयाँ बुराईयों को निर्धारित करती है ।
ख. द्वितीय चरण - 'निश्छल अहम् भावना (अहंकारी स्तर) : इसमें बालक स्व को सब कुछ मानते हुये भी स्वीकार करता है कि दूसरों के भी अधिकार हैं। इसमें बालक मानता है कि जो उसकी आवश्यकता की पूर्ति करे वही नैतिकता है।
(ब) द्वितीय स्तर- 'परंपरागत स्तर ( भूमिका पुष्टिकरण) : इसमें बालक नैतिक मूल्यों का आंतरीकरण पूरी तरह नहीं करता । वह व्यवस्था (माता-पिता, समाज की) को स्वीकार करता है ।
तृतीय चरण - 'अंतर्वैयक्तिक संबंधः अच्छे बालक-बालिका अभिकेन्द्रण यह नैतिकता का स्वर्ण अवसर है। बालक ठीक व्यवहार कर अनुमोदन प्राप्त करता है, तथा दूसरों के दृष्टिकोण प्राप्त कर नैतिक व्यवहार करता है ।
चतुर्थ चरण - 'सामाजिक अवस्था और अंतःकरण : इसमें बालक में व्यवस्था के प्रति
श्रद्धा उत्पन्न होती है। वह समाज के सही और गलत का पता लगता है। वह कानून और व्यवस्था को नैतिकता का सार मानता है।
(स) तृतीय स्तर 'उत्तर परंपरा स्तर (स्वस्वीकृत नैतिक सिद्धांत) : इसमें बालक पूरी तरह नैतिकता का आंतरीकरण कर देता है। उसके स्व द्वारा चयनित सिद्धांत और मूल्य होते हैं ।
पाँचवा चरण- 'सामाजिक चरण-सामाजिक संविदा, उपयोगिता और वैयक्तिक अधिकार । षष्ठ् चरण - 'सार्वभौम नैतिक सिद्धांत': इसमें बालक का अंतःकरण पूर्णतः जाग्रत हो जाता है।
इसी प्रकार कोहेलबर्ग (1968) ने माना है कि नैतिक व्यवस्था का आधार 'न्याय का सिद्धांत' है ।
सामाजिक अधिगम सिद्धांत :- बंडूरा एवं वाल्टर्स (1963) के अनुसार- 'सामाजिक क्रियाओं, समाजीकरण तथा व्यक्तिगत सिद्धांतों के विकास हेतु 'सामाजिक व्यवहार उपागम' प्रतिपादित किया । इन्होंने बताया कि सामाजिक 'एजेन्ट्स' के प्रदर्शन से नैतिक विकास तथा निर्णय स्पष्टतः समझा जा सकता है। इनके अनुसार अनुकूल नमूना भिन्न-भिन्न स्थितियों में नैतिक व्यवहार में अनुकूलता प्रदर्शित करता है । " अनेकों मनोवैज्ञानिकों स्किनर ( 1933 ), सीयर्स ( 1957 ), मावरर (1960), वाल्टर्स (1963) आदि के सिद्धांत सामाजिक अधिगम सिद्धांत हैं ।
मार्टिन हाफमैन (1968) का नैतिक विकास का धारा सिद्धांत (परहितवाद का सिद्धांत) के अंतर्गत बाल्यावस्था में नैतिक मूल्यों के विकास में अधिकाधिक स्थिरता, संगतशीलता तथा सामान्यीकरण आता है।
मनोवैज्ञानिक बोरापस स्मिथ की पुस्तक 'ग्रोइंग माइन्ड्स' में नैतिक विकास की प्रथम अवस्था - विनयशीलता व आज्ञाकारिता की है। द्वितीय अवस्था मानवीय आचरण नियंत्रण के नैतिकता संबंधी नियम एवं तीसरी अवस्था व्यक्तिगत समायोजन है। | छः से बारह वर्ष उत्तर बाल्यावस्था है। संज्ञानात्मक विकास के कारण इस आयु के बालक सांकेतिक व मानसिक गतिविधियां करने लगते हैं, पर उनका तर्क मूर्त अनुभवों तक ही सीमित रहता है। इस अवस्था में तार्किक चिंतन का विकास, संज्ञानान्तम विकास का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। तार्किक चिंतन के महत्वपूर्ण अवयव-संरक्षण, वर्गीकरण, क्रमबद्धता, इसी अवस्था में विकसित होते हैं। समाजीकृत भाषा का विकास भी इस अवस्था में होता है, इसके कारण बालकों को अच्छे सामाजिक संबंध बनाने तथा अंतःक्रिया के कौशलों को सीखने में सहायता मिलती है । McCarthy & Lindworsky ने कहा है कि धनात्मक अभिप्रेरणा का बाल्यावस्था के नैतिक विकास में अत्यंत महत्व है । शाला के प्रभाव से बालकों के व्यवहार प्रतिमानों में परिपक्वता आती है। इसके सकारात्मक-नकारात्मक दोनों पहलू हैं। अभिभावक बालकों को समाज-अनुकूल व्यवहार विकसित करने हेतु उचित मार्गदर्शन और सहायता देते हैं । उत्तर बाल्यावस्था सम्पूर्ण जीवन की सर्वाधिक संवेदनशील अवस्था है । बाल्यावस्था में बालक सबसे अधिक व तीव्र गति से सीखता है। अतः इसे जीवन की शिक्षणावस्था भी कहा जाता है। इस सम्बन्ध में मनोवैज्ञानिकों ने कहा है कि गत्यात्मकता बाल्यावस्था की मुख्य विशेषता है। यह अवस्था सतत् परिवर्तनशीलता की होती है। नैतिक विकास की दृष्टि से बाल्यावस्था का अत्यंत महत्व है। इस अवधि में अंर्तवैयक्तिक संबंधों का बालक के सीखने की क्रिया पर प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में वाटसन ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुये कहा है कि आगे चलकर बालक कैसा बनेगा, यह उसकी बाल्यावस्था पर निर्भर करता है। विल्सन ने कहा कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक के नैतिक विकास में अंर्तविवेक , युक्तिसंगतता, परहितवाद एवं नैतिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण होते है । हरलॉक ने कहा है कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक सीखे गये नैतिक मूल्यों का सामान्यीकरण करने लगता है। इस अवस्था में उसमें नैतिक प्रत्ययों का विकास भी होता है । मुरे एवं ओराइसन ने अपने अध्ययनों में ज्ञात किया कि बालक में इस अवस्था में भले-बुरे की भावना का विकास होता है जो बालक को नैतिक व्यवहार करने की प्रेरणा देती है और उसे दंड से बचाती है। लर्नर ने कहा कि आठ-बारह वर्ष आयु में नैतिक निर्णय में बालक दंड के साथ अपने माँ के साथ संबंधों से भी प्रभावित होता है । मार्गन ने बताया कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक की न्याय व औचित्य बुद्धि विकसित हो चुकी रहती है, अतः अनुचित दंड मिलने पर वह शिकायत एवं रोष प्रदर्शित करता है। गैसेल का विचार है कि नैतिक शर्म, नैतिक व्यवहार के विकास के लिये महत्वपूर्ण कारक है। इस आयु के अंत तक लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में नैतिक विकास शीघ्र और अधिक मात्रा में होता है । अन्य मनोवैज्ञानिकों Connel & Gibbs ; Bennet ; Kromrey ; Kahne ; Shields & Bredmeier ; Zagzebski , Battistich ; Haste ; Bertowitz आदि ने भी नैतिक विकास संबंधी अध्ययन किये । उत्तर बाल्यावस्था का बालक यथार्थवादी बनता जाता है। आठ-नौ वर्ष में बालक काल्पनिक संसार में रहता है, और साहसी कहानियों में स्वयं को नायक मानता है। दस-बारह वर्ष में 'वीर पूजा' की भावना होती है। समवयस्कों के क्रियाकलापों में रूचि रहती है, इसे 'टोली की अवस्था' भी कहा जाता है। इस समय नैतिक लज्जा, नैतिक विकास में बड़ा कारक है। बालक में इस समय आत्मविश्वास एवं महत्व की भावना उत्पन्न हो जाती है । जोन्स ने कहा कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक के नये नैतिक मानकों का निर्माण होता है और माता-पिता के मानकों से विरोध होता है। बालक की नैतिक नियमावली समूह की नैतिक नियमावली द्वारा निर्धारित होती है। उसके संप्रत्ययों का सामान्यीकरण हो जाता है, ईमानदारी के आदर्श उच्च हो जाते हैं व बालक की नैतिक नियमावली प्रौढ़ के समान हो जाती है । इस आयु में परिवेश के माध्यम से जो मूल्य बालक ग्रहण करता है, आयु वृद्धि के साथ वे दृढ़ होते जाते हैं। इस अवस्था में बालक में उत्तरदायित्व का बोध होता है। हाफमेन ने कहा कि उत्तर बाल्यावस्था में बालक के नैतिक विकास में अधिक स्थिरता, संगतशीलता तथा सामान्यीकरण आता है। केटल के अनुसार आयु विचलन के साथ नैतिक विकास का संरूप परिवर्तित होता रहता है। रूबिन एवं सुचिन्दर तथा ली वोई ने भी नैतिक निर्णय व नैतिक व्यवहार के मध्य धनात्मक सहसंबंध पाया । अभिभावक बालकों से जिस प्रकार व्यवहार करते हैं, उनकी अभिवृत्तियां व व्यवहार का तरीका आदि, वे बालक में नैतिक विकास का प्रत्यय विकसित करते हैं। परिवार का मनोवैज्ञानिक वातावरण, पारिवारिक परिवेश बालक में नैतिक विकास को प्रभावित करते हैं । वर्तमान बदलते हुये संदर्भ में नैतिकता व अनैतिकता के मध्य क्षीण पड़ती रेखा, बालक को एक स्पष्ट पृष्ठभूमि देने में असमर्थ है। फलस्वरूप बालक स्वयं को असमंजस की स्थिति में पाता है। मानव मूल्यों की क्षीण व धूमिल होती चेतना से समाज में नैतिक संकट उत्पन्न हो गया है, मानव अपनी समृद्ध नैतिक परंपरा से दूर हो गया है। नैतिक शिक्षा की प्रथम पाठशाला है, परिवार फिर समाज । नैतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के लिये, नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना होगा, उन्हें आचरण में उतारना होगा और इसकी आधारशिला की नीव है - बालक की उत्तर बाल्यावस्था । अपने इसी चिंतन को एक दिशा प्रदान करने हेतु शोधार्थी ने शोध का विषय "बालक के नैतिक विकास पर मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन एवं सामाजिक-आर्थिक स्तर के प्रभाव का अध्ययन- उत्तर बाल्यावस्था के विशेष संदर्भ में " का चयन किया है । नैतिकता 'नैतिक' शब्द का विकास नीति से हुआ है जिसका अर्थ है- 'व्यवहार का मान्य नियम । ' 'नीति' शब्द का अभिप्राय है - ले जाने की क्रिया, चाल-चलन, शील, आचार और व्यवहार । यह शब्द नी + त्तिन से बना है । 'नीति' में 'इक' प्रत्यय लगने से नैतिक बना है। 'नैतिक' 'शब्द' 'मोरल' का विकास, लेटिन शब्द 'मोरेस' से व्युत्पन्न है, जिसका तात्पर्य है- आचरण, रीति-रिवाज आदि । 'नैतिकता' एक ऐसा शब्द है जो किसी समाज में, व्यवहार के सामान्यतः स्वीकृत सामाजिक नियम, आंतरिक नैतिक नियंत्रण, नैतिक स्वतंत्रता और नैतिक रचनात्मकता से संबंधित है। समाज को व्यवस्थित बनाये रखने के लिये प्रत्येक समाज अपने सदस्यों के मार्गदर्शन हेतु कुछ ऐसे सिद्धांत व नियम बना देता है, जिसके अनुसार व्यवहार करने पर अपना तथा दूसरों का कल्याण हो, किसी को हानि न पहुंचे और सामाजिक व्यवस्थाएँ बनी रहें। इन रीतियों एवं नियमों के अनुसार व्यवहार करने का गुण ही 'नैतिकता' कहलाता है। नैतिक व्यवहार एक ऐसा आचरण है, जो अंदर से अनुशासित होता है। नैतिकता का सामाजिक व्यवस्थाओं से अटूट सम्बन्ध होता है। बालक अपने विवेक, ज्ञान, अन्र्त्तात्मा के आधार पर आंतरिक नैतिकता अपनाता है। नैतिकता के निर्माण के लिये बालक के मूल प्रवृयात्मक संवेग जितने सुसंगठित तथा नैतिक गुणों के स्थायी भाव जितने अधिक होंगे, उसका नैतिक चरित्र उतना ही सुदृढ़ होगा। इस क्षेत्र में हार्टशोर्न और मे ने कई हजार बालकों का व्यापक अध्ययन किया और देखा कि नैतिकता प्रत्येक स्थिति को देखते हुये अपना एक विशिष्ट एवं स्पष्ट स्वरूप प्राप्त कर लेती है । प्रोशून्य डेविड के शब्दों में - "नैतिकता कर्त्तव्य की वह आंतरिक भावना है जिसमें उचित-अनुचित का विवरण निहित हो । ' मैकाइवर एवं पेज के अनुसार "वास्तविक रूप में नैतिकता, नियमों का वह समूह है जिसके द्वारा व्यक्ति का अंतःकरण सत्य-असत्य का ज्ञान कराता है । " इस संबंध में अन्य मनोवैज्ञानिकों Higgius , Bentlea , Etzioni , Noddings , Baxter , Lapsley , Solomon आदि ने भी बालक के नैतिक विकास संबंधी अध्ययन किये । नैतिकता के नियम सामाजिकता के संदर्भ में ही कियान्वित होते है । नैतिकता एक ऐसा शब्द है, जिसका प्रयोग एक श्रेष्ठ जीवन-यापन का बोध कराने के लिये किया जाता है। पहली स्थिति में यह स्वीकृत सामाजिक नियमों की ओर संकेत करता है और दूसरी स्थिति में इससे व्यक्तिगत, नैतिक नियंत्रण, नैतिक स्वतंत्रता और नैतिक रचनात्मकता के उद्भव का संकेत मिलता है। इससे नैतिक व्यवहार के दो स्तर भी स्पष्ट होते हैं। सामाजिक नियम संहिता का अनुगमन और समर्थन बाहा नैतिकता है और श्रेष्ठ जीवन का परिपालन आंतरिक नैतिकता है। भारतीय विचारकों के अनुसार :- भारतीय नीतिशास्त्र में 'श्रीमद्भागवत गीता' ने एक सर्वांगपूर्ण नैतिक सिद्धांत उपस्थित किया है। प्रोशून्य बैजनाथ शर्मा ने कहा है कि "नैतिकता' की परिभाषा यह हो सकती है कि परहित की भावना से की गई सभी क्रियायें एवं कार्य नैतिक कहे जा सकते हैं । " भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉशून्य एसशून्य राधाकृष्णन के शब्दों में - "नैतिकता को व्यक्ति - के बौद्धिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के विकास का आधार माना है। नैतिकता सदगुणों का समन्वय मात्र ही नहीं, वरन् एक व्यापक गुण है तथा इसका प्रभाव मनुष्य के समस्त क्रियाकलापों पर होता है और साथ में व्यक्ति का व्यक्तित्व भी प्रभावित होता है। " महामना मदनमोहन मालवीय के अनुसार - "नैतिकता, मनुष्य की उन्नति का आधार है । चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य के शब्दों में - "बालकों का चरित्र निर्माण नैतिक शिक्षा से ही संभव है और उसी के आधार पर राष्ट्र का विकास निर्माण हो सकता है। पाश्चात्य विचारकों के अनुसार :- डॉशून्य रिकमेन ने अपनी पुस्तक 'ईयर बुक ऑफ एजुकेशन' में "नैतिकता व्यवहार के किसी स्तर के अनुसार व्यवहार करना नहीं है। यह हमारे मस्तिष्क में स्थापित अच्छे संबंधों की, जिन्हें हम सभी के व्यवहारों तथा कार्यों में देखते हैं, इस सब की अभिव्यक्ति है । कोहेलबर्ग ने "Child is moral philosopher" कहा है। मनोवैज्ञानिक रस्किनरस ने माना है कि नैतिकता स्वतः मूल्यवान होती है। साथ ही कॉन्ट ने कहा कि शास्त्र नियमों के पालन में ही नैतिकता विद्यमान है और नैतिक प्रशिक्षण द्वारा पाश्विक स्वभाव को मानवीय स्वभाव में परिवर्तित कर अनुशासित करना नैतिकता है । नैतिकता बालक के सर्वांगीण विकास का आधार होती है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिये समाज एवं बालक का विकास तथा अस्तित्व अन्योन्याश्रित है। बालक का विकास समाज के बिना नहीं हो सकता और समाज के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं । बालक समाजिक तभी बन सकता है, जब उसमें नैतिकता हो उसका व्यवहार नैतिक हो । नैतिकता का विकास समाजीकरण द्वारा होता है। जब बालक के कार्य व व्यवहार नैतिकता से जुड़ जाते हैं, तो उसकी समझ में प्रखरता तथा विश्वास में दृढ़ता आती है जिससे बालक को दिशा-निर्देश प्राप्त होता है और वह अपने जीवन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त करता है। अन्य मनोवैज्ञानिकों Shwelder , Likana Sommers , Noam , Speicher , Aksan , Schaffer , Murray आदि ने भी बालक के नैतिक विकास संबंधी अध्ययन किये । बालक की नैतिकता का व्यवहार किसी स्तर विशेष पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ये तो बालक की बाल्यावस्था में डाले गये संस्कारों पर निर्भर करता है, जो उसकी क्रिया, व्यक्तित्व और व्यवहार करने से स्पष्ट होते हैं। ये व्यवहार और अभिव्यक्ति बालक के नैतिक स्रोतों पर निर्भर होती है। नैतिकता का प्रादुर्भाव सद्गुणों के अपार भण्डार में हुआ है तथा संस्कृति नैतिक मूल्यों का दर्पण है। नैतिक विकास नैतिक विकास से ताप्तर्य उस विकास से है, जिन्हें मानवीय व्यवहारों से संबंधित करने पर जीवन उज्जवल तथा उच्च बनता है एवं इन व्यवहारों को उस स्तर का बनाना जिस स्तर को संस्कृति ने मान्य किया है या जो हमारी सांस्कृतिक मान्यताओं, परम्पराओं और आदर्शों के अनुकूल हों । जेम्स हेस्टिंग्स के अनुसार :- "नैतिक दर्शन की विषय वस्तु मानव आचरण एवं चरित्र है तथा मानव आचरण व चरित्र के निर्धारक तत्व नैतिक विकास है। " नैतिक विकास एक ऐसी आचरण संहिता या सद्गुण समूह है, जिसे बालक अपनी संस्कृति एवं समाज द्वारा प्राप्त संस्कारों एवं पर्यावरण के माध्यम से ग्रहण करता है और अपने उद्देश्यों, लक्ष्यों एवं स्तर की प्राप्ति हेतु जीवन पद्धति का निर्माण करता है तथा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है। इसमें विचार, विश्वास, आस्था और मनोवृत्ति आदि समाहित होते हैं। नैतिक विकास एक ओर बालक के अंतःकरण द्वारा नियंत्रित होते हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी संस्कृति, समाज, परंपराओं द्वारा परिपोषित व सिंचित होते हैं । इस संबंध में अनेक मनोवैज्ञानिकों एवं शोध अध्ययनकर्त्ताओं Bryk , Battistich , Soloman , Hoffman , Madden , Blasi , Splicher , Laupa & Turiel , Spario , Marvin , Nancy Willard आदि ने भी अध्ययन किये हैं । बालक में नैतिक विकास होने पर ही वह अपनी 'आत्म-चेतना' द्वारा भलाई- बुराई, सत्य-असत्य, न्याय-अन्याय, उचित-अनुचित में अंतर करने लगता है। नैतिक विकास बालक की संकल्पनात्मक क्रियाओं के मापदंड को निर्धारित करते हैं। बालक का नैतिक विकास उसके सामाजिक जीवन से संबंधित होता है। उसकी नैतिकता के लिये व्यवहारिक समरूपता का होना आवश्यक है, इसी के द्वारा उसके व्यक्तित्व एवं चरित्र का विकास हो सकता है। सामाजिक एवं सामुदायिक भिन्नता और भिन्न मापदंडों के बाद भी मूल्यगत विशेषताएं बालक को नियंत्रित करती हैं। ये विशेषताएं नैतिक व्यवहार को विकसित करने से ही विकसित होती है । नैतिक विकास प्रासंगिक रहते हैं, उनका औचित्य हमेशा बना रहता है । नैतिक मूल्य शाश्वत्, सर्वदेशिक, सर्वकालिक हैं । नैतिक विकास उचित व अनुचित का प्रमाण हैं, जो व्यक्ति के लिये उस संस्कृति द्वारा निर्धारित किये जाते हैं, जिसमें वह रहता है। नैतिक विकास वास्तव में हमारी संस्कृति और संस्कारों की चेतना है । नैतिक विकास जो हमारे लक्ष्य हैं, इन्हें पाने के लिये बालक सामान्य मापदण्डों के अनुरूप व्यवहार करे, यह उसका नैतिक आचरण है। बालक में नैतिक विकास को विकसित करना, अस्तित्व और बोध को बचाने की प्रक्रिया है। अस्तित्व और नैतिक विकास के बोध का परिणाम समाज है । हैगर्टी, मैरो, कारमाईकेल, हौलिंगवर्थ, ब्रेकर, बर्गसन, ब्रमेल्ड, हेनरी ब्राउडे, पीटर्स, बैगले, बाउडी, डुयूई, हार्न, नारमन कारेस्टर, बेविट, राबर्ट एच. हचिन्स आदि ने भी नैतिक मूल्यों के संबंध में अपने पृथक-पृथक दृष्टिकोण प्रस्तुत किये हैं। नैतिक विकास आत्मगत है। नैतिकता और उसका विकास व्यक्ति के जागृत विवेक की सीमा पर निर्भर रहता है। इस संबंध में मनोवैज्ञानिक रूथ महोदय ने कहा है कि "नैतिक विकास का वर्गीकरण एक जटिल प्रक्रिया है तथा साधारण रूप से जिसे हम उचित-अनुचित, सही-गलत, सत्य-असत्य में वर्गीकृत करते हैं, यह उतनी सहजता से वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है।" नैतिक विकास शाश्वत् नियमों की स्वीकारोक्ति, संस्कार, शैली, सामाजिकता, आध्यात्मिकता आदि से निर्धारित होते हैं । नैतिक विकास के आधार में मानवीयता, दयालुता, आत्मपवित्रता, क्षमा एवं सत्यता जैसे महान आदर्शवादी गुण सम्मिलित हैं। नैतिक विकास सीमाओं में रहकर एक साथ विकास का प्रकाश पुँज बनाते हैं। नैतिक विकास बालक के सम्पूर्ण आचरण के निर्धारक माने जाते हैं और इनका बालक के समायोजन एवं व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है। थॉमसन के अनुसार :- 'बालक के अंदर सामाजिक व नैतिक विकास होने के कारण, उसकी समझ में प्रखरता और विश्वास में दृढ़ता आ जाती है। नैतिक मूल्य बालक को सदैव सुन्दर आचरण के लिये प्रेरित करते हैं और लक्ष्य प्राप्ति हेतु व्यवहार का निर्धारण करते हैं । पूर्ण विकसित नैतिक धारणाएं बालक में सुरक्षा का भाव विकसित करती है। प्रायः सभी बालक अपने परिवार एवं समाज के नैतिक मूल्यों को ग्रहण कर उनके द्वारा निर्दिष्ट आचरण करते हैं । " • इन विचारों की पुष्टि Killen , Higgins , Solomon , Bersott & Miller , Etzioni , Berkowitz , Watson, Battistich & Schaps आदि अध्ययनकर्त्ताओं ने भी की है । नैतिकता स्वः प्रेरित होती है। बौद्धिक क्षमताओं के विकास के साथ - साथ नैतिक मूल्यों के प्रति निष्ठा विकसित होती जाती है। नैतिकता के निर्धारक तत्वों का निर्धारण दो तत्वों- प्रथम, बौद्धिक पक्ष- उचित एवं अनुचित का ज्ञान तथा द्वितीय, भावात्मक पक्ष - जीवन में सही का अनुपालन करना, से होता है। नैतिक मूल्यों का विकास नैतिक विकास न तो जैविक है और ना ही आर्थिक, बल्कि इस विकास की कसौटी मानव आनंद है। विवेक और नैतिक मूल्यों का विकास समाजीकरण की प्रक्रिया में तत्काल ही प्रारंभ हो जाता है। समाज के नैतिक आदर्श, सामाजिक संस्थाएं और परंपरायें इन तीनों का सामंजस्य करना ही नैतिक जगत् नैतिक विकास है। बहुत से मनोवैज्ञानिकों का विश्वास है कि प्रतिरूपण की प्रक्रिया से पुरूस्कार और दंड का बोध होता है और बालकों को सही-गलत का बोध कराते हैं । यह प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है । मैक्स वेबर के अनुसार 'व्यक्ति के द्वारा की जाने वाली क्रिया का विकास अविवेकशील से विवेकशीलता की ओर हुआ है।' अभिभावक और समाज बाहा नैतिकता बालक को देते हैं और परिपक्वता प्राप्त करने के लिये बालक को मूल्यों का एक व्यवस्थित संकलन बनाने के लिये इन सिद्धातों को विश्लेषित कर स्वीकार करना पड़ता है। नैतिक विकास बालक के सर्वांगीण सृजनात्मक व्यक्तित्व का प्रतिफलन होते हैं । बालक में आत्मशक्ति, मानसिक दृढ़ता, कर्त्तव्यपरायणता तथा धर्मपरायणता, ज्ञान वृद्धि, अभ्यास, नैतिक उपदेश, अनुकरण, निर्देश, दण्ड और पुरस्कार, प्रशंसा और निंदा, आदर्श प्रोत्साहन, रूचियों का विकास, स्नेह आदि के द्वारा नैतिक विकास सतत् रूप से अनवरत चलता रहता है। बालक में नैतिक विकास नैतिक ज्ञान, नैतिक सम्बोध, नैतिक तर्क एवं नैतिक व्यवहार की परस्पर अंर्तक्रिया द्वारा होता रहता है। नैतिक ज्ञान और नैतिक सम्बोध का विकास बालक के भीतर आयु और परिपक्वता के साथ होता है। इसके अभाव में बालक प्रयत्न व भूल द्वारा नैतिक व्यवहार संपादित करता है। बालक में नैतिक निर्णय व नैतिक व्यवहार में धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है। रूबिन एवं रचनीडर एवं लोवोई , गॉडमैन, मेटलैंड एवं नॉटर्न तथा यॉट् एवं आर्बथनॉट ने अपने अध्ययनों में देखा कि उच्च स्तरीय नैतिक विकास बालक में उच्च नैतिक व्यवहार को प्रदर्शित करता है । हेलेन के अनुसार- "बालक के नैतिक विकास हेतु नैतिक व्यवहार , नैतिक भावना ओर नैतिक निर्णय इन तीन पक्षों का उल्लेख किया है। " साथ ही अनेकों मनोवैज्ञानिक स्किनर , मावस्र , सीयर्स , बण्डूरा एवं वॉल्टर्स ने बालक के नैतिक विकास की पृथक-पृथक दृष्टिकोण से व्याख्या की है। इसी प्रकार पेस्टार्लोजी, जॉन हेनरी, जोहान, क्रेयडिक हरबार्ट आदि ने भी बालक के नैतिक विकास एवं निर्माण को परिष्कृत स्पष्ट और उन्मुख करना आवश्यक माना है। नैतिक विकास से संबंधित अवधारणाएँ नैतिकता तथा इसका विकास, जो कि शताब्दियों से एक दार्शनिक विचार बना हुआ है, मनोवैज्ञानिकों द्वारा लगभग पचास वर्षों से अध्ययन किये जाते रहे हैं। नैतिक विकास का संबंध उस प्रक्रिया से है, जिसके द्वारा बालक उचित और अनुचित, अच्छे या बुरे सिद्धांतों में अंतर करने में समर्थ होते हैं। शोध का नैतिक मूल्यों के विकास में अधिकतर ध्यान नैतिक विवेक एवं नैतिक चरित्र के विकास में रहता है। वे सिद्धांत जिनसे बालक किस प्रकार सीखता है, नैतिक परिणाम, हावभाव, चालढाल बनते हैं और कैसे उसके स्तर को अपनाता है, यह सब नैतिक विवेक के अंतर्गत आते हैं। नैतिक चरित्र, परिस्थितिजन्य आवश्यकता, नीतिशास्त्र संबंधी गतिविधियों में वास्तविक व्यवहार दर्शाता है। प्रथम ज्ञान एवं विवेक संबंधी निर्णय प्रक्रिया को अपनाता है जबकि दूसरा असामान्य या विशिष्ट सामाजिक परिस्थितियों में व्यवहार को प्रदर्शित करता है । आचरण पर बल देने वाली अवधारणा :- यह धारणा मनोवैज्ञानिक हल के सिद्धांतों से प्रभावित है। इनके अनुसार नैतिक विकास अधिगम की अनुकूलन प्रक्रिया के माध्यम से होता है। दण्ड और पुरस्कार के माध्यम से निर्मित अंतःकरण उन सभी परिस्थितियों में भी क्रियाशील होगा, जहां दंड व पुरस्कार की संभावना नहीं है, परन्तु हार्टशोर्न तथा मे , सीयर्स , राव, आलपोर्ट आदि के अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि अधि गम के अनुकूलन सिद्धांत के आधार पर बालक के नैतिक आचरण के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, हालांकि नैतिक मूल्य अधिमग द्वारा अर्जित किये जाते हैं । कर्त्तव्य अधिगम सिद्धांत पर आधारित अवधारणा :- कर्तव्य उन आदर्शों व मूल्यों के संस्थान को कहते हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करके दिशा प्रदान करते हैं । बालक उन व्यक्तियों से तादात्म्य स्थापित करता है जिन्हें वह प्यार करता है, आदर्श व महत्वपूर्ण समझता है, इन आदर्शों और नैतिक मूल्यों को बालक आत्मसात् करता है और उसका अंतःकरण दृढ़ होता है। हैविंग्हर्स्ट नैतिकता को व्यक्तित्व के विशेष गुणों के रूप में लेते हैं, जैसे नैतिक स्थायित्व, अहम् शक्ति, पराहम् शक्ति, स्वतः प्रवृति, मित्रता, शत्रुता, दोषभाव ग्रंथि आदि । हरलॉक ने नैतिक व्यवहार के अधिगम पर बल दिया है। साथ ही मेहता ने ज्ञात किया कि बालक नैतिक मूल्यों को सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण द्वारा सीख सकता है। मनोविश्लेषण सिद्धांत पर आधारित अवधारणा :- इस धारणा के अनुसार चरित्र व नैतिक व्यवहार का विकास माता-पिता से तादात्म्य व आज्ञाओं के आंतरीकरण के माध् यम से उत्पन्न परम् अहम व विवेक के विकास के कारण होता है । इस धारणा के प्रतिपादक फॉयड हैं। मनोवैज्ञानिकों ने नैतिकता और मनोविज्ञान के संबंधों को गहराई से विश्लेषण करने के लिये एक और मानव मन की प्रक्रियाओं का गहराई से विशलेषण किया, वहीं दूसरी ओर मानसिक प्रक्रियाओं की दृष्टि से नैतिक अवस्थाओं को स्पष्ट किया । विकासात्मक उपागम पर आधारित बौद्धिक या निर्णयात्मक अवधारणा प्याजे द्वारा प्रतिपादित नैतिक विकास का सिद्धांत प्याजे ने नैतिकता को बालकों के सामाजिक नियम, समानता एवं लोगों के प्रति न्याय की भावना के रूप में देखा। इन्होंने पाया कि बालक जिस सामाजिक वातावरण में रहता है, उसके नैतिक नियमों को वह अपने नैतिक अनुभवों पर लागू करता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से बालक में बाहा समाजिक नियम, आंतरिक सिद्धांतों के रूप में परिणित होते हैं । यह नैतिकता के दो स्वरूप 'परंपरागत' एवं तार्किक को मानते हैं। इनके अनुसार बालक अपने नैतिक विकास में चार अवस्थाओं से गुजरता हैअनोमी - जन्म से चार वर्ष : जहां नैतिक विकास की आधारशिला का निर्माण होता है । परायत्तता : अधिकार - चार से आठ वर्ष : अपरिपक्व नैतिकता जिसमें बालक बाहा सत्ता से नियंत्रित होता है और उसमें आदर, आज्ञाकारिता, कर्त्तव्य संबंधी नैतिकता का विकास होता है । परायत्तता : अन्योन्यता नौ से तेरह वर्ष : जिसमें बालक में पारस्परिक सहयोग, आदर भावना, न्यायप्रियता, ईमानदारी की नैतिकता का विकास होता है। यह आयु नैतिक विकास व नैतिक निर्णय के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बालक में विवेक का उद्गम होता है। बालक पुरस्कार और दंड से ऊपर उठकर सामाजिक स्वीकृति ओर अस्वीकृति के स्तर पर पहुंच जाता है। बालक इस विश्वास की प्रेरणा से व्यवहार करता है कि व्यक्ति का आचरण इस प्रकार नियंत्रित होना चाहिये जिसमें न्याय एक पक्षीय न होकर पारस्परिक हो । समूह के साथ अनुरूपता अब अनिवार्यता का स्वरूप ग्रहण कर लेती है क्योंकि बालक को सामाजिक अकेलेपन का भय सताने लगता है। स्वायत्तता - किशोरवय तेरह से अट्ठारह वर्ष : इसमें नैतिकता आत्म निर्धारित होती है। उत्तर बाल्यावस्था का बालक अमूर्त चिंतन करने लगता है, जो उसे नैतिकता के सिद्धांतों को समझने में सहायता करता है, परन्तु उसकी नैतिकता का चुनाव व नैतिक संस्थान का विकास वयस्कों की अपेक्षा भिन्न होता है, उसकी नैतिकता विषय संबंधित होती है। लॉरेन्स कोलबर्ग ने नैतिकता के तर्क को प्याजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत से जोडने का प्रयास किया है, क्योंकि बौद्धिक क्षमता ही उसे नैतिक मुद्दों पर सतत् विचार करने की योग्यता प्रदान करती हैं तथा नैतिकता की उच्च अवस्था में पहुंचने के लिये अमूर्त चिंतन क्षमता की आवश्यकता होती है । कोलबर्ग का नैतिक विकास का चरण सिद्धांत कॉलबर्ग लॉरेन्स ने नैतिक विकास की अवस्थाओं से अधिक विकसित सिद्धांत का प्रतिपादन किया। उन्होंने प्याजे द्वारा बताई गई अवस्थाओं को और आगे बढाया तथा उनका विकास किया । इनके द्वारा बालकों को प्रस्तुत नैतिक उलझनों के उत्तरों द्वारा की गई जांच के परिणाम, नैतिक विकास की संपूर्ण अवस्था की व्यवस्थापन के रूप में लाया गया। कोलबर्ग अपने नैतिक विकास के तीन स्तर मानते हैंःदो. प्रथम स्तर- 'पूर्व परंपरागत और पूर्व नैतिक स्तर ' : इस स्तर में बालक अपने मूल्यों का आंतरीकरण नहीं करता है। इसकी नैतिकता पूरूस्कार या दंड या वातावरण से निर्मित होती है। प्रथम चरण - 'आज्ञाकारिता और दण्डोन्मुखता अथवा विषम नैतिकता': इस अवस्था में किसी कार्य की शारीरिक प्रतिक्रिया अच्छाईयाँ बुराईयों को निर्धारित करती है । ख. द्वितीय चरण - 'निश्छल अहम् भावना : इसमें बालक स्व को सब कुछ मानते हुये भी स्वीकार करता है कि दूसरों के भी अधिकार हैं। इसमें बालक मानता है कि जो उसकी आवश्यकता की पूर्ति करे वही नैतिकता है। द्वितीय स्तर- 'परंपरागत स्तर : इसमें बालक नैतिक मूल्यों का आंतरीकरण पूरी तरह नहीं करता । वह व्यवस्था को स्वीकार करता है । तृतीय चरण - 'अंतर्वैयक्तिक संबंधः अच्छे बालक-बालिका अभिकेन्द्रण यह नैतिकता का स्वर्ण अवसर है। बालक ठीक व्यवहार कर अनुमोदन प्राप्त करता है, तथा दूसरों के दृष्टिकोण प्राप्त कर नैतिक व्यवहार करता है । चतुर्थ चरण - 'सामाजिक अवस्था और अंतःकरण : इसमें बालक में व्यवस्था के प्रति श्रद्धा उत्पन्न होती है। वह समाज के सही और गलत का पता लगता है। वह कानून और व्यवस्था को नैतिकता का सार मानता है। तृतीय स्तर 'उत्तर परंपरा स्तर : इसमें बालक पूरी तरह नैतिकता का आंतरीकरण कर देता है। उसके स्व द्वारा चयनित सिद्धांत और मूल्य होते हैं । पाँचवा चरण- 'सामाजिक चरण-सामाजिक संविदा, उपयोगिता और वैयक्तिक अधिकार । षष्ठ् चरण - 'सार्वभौम नैतिक सिद्धांत': इसमें बालक का अंतःकरण पूर्णतः जाग्रत हो जाता है। इसी प्रकार कोहेलबर्ग ने माना है कि नैतिक व्यवस्था का आधार 'न्याय का सिद्धांत' है । सामाजिक अधिगम सिद्धांत :- बंडूरा एवं वाल्टर्स के अनुसार- 'सामाजिक क्रियाओं, समाजीकरण तथा व्यक्तिगत सिद्धांतों के विकास हेतु 'सामाजिक व्यवहार उपागम' प्रतिपादित किया । इन्होंने बताया कि सामाजिक 'एजेन्ट्स' के प्रदर्शन से नैतिक विकास तथा निर्णय स्पष्टतः समझा जा सकता है। इनके अनुसार अनुकूल नमूना भिन्न-भिन्न स्थितियों में नैतिक व्यवहार में अनुकूलता प्रदर्शित करता है । " अनेकों मनोवैज्ञानिकों स्किनर , सीयर्स , मावरर , वाल्टर्स आदि के सिद्धांत सामाजिक अधिगम सिद्धांत हैं । मार्टिन हाफमैन का नैतिक विकास का धारा सिद्धांत के अंतर्गत बाल्यावस्था में नैतिक मूल्यों के विकास में अधिकाधिक स्थिरता, संगतशीलता तथा सामान्यीकरण आता है। मनोवैज्ञानिक बोरापस स्मिथ की पुस्तक 'ग्रोइंग माइन्ड्स' में नैतिक विकास की प्रथम अवस्था - विनयशीलता व आज्ञाकारिता की है। द्वितीय अवस्था मानवीय आचरण नियंत्रण के नैतिकता संबंधी नियम एवं तीसरी अवस्था व्यक्तिगत समायोजन है। |
तंत्र-मंत्र, जादू टोना और शैतानी ताकतों की पूजा करने में कुछ लोग विश्वास क्यों रखते हैं? इसके पीछे लोगों की सोच क्या होती है? किस-किस तरह के काम करवाने के लिए लोग ऐसी तरीकों का सहारा लेते हैं? क्या 21वीं सदी में हम उन दिनों के तरीकों को ही सटीक मानते हैं, जिन्हें विज्ञान कहीं स्थान नहीं देता।
आज जब समाज जगरुक हो रहा है और लोग पढ़े लिखे है, इसके वावजूद भी तंत्र-मंत्र, जादू टोना और शैतानी ताकतों की पूजा क्यों करते हैं। जब पहले की बात होती है तो हम उन दिनों की बात यह कह कर आगे बढ़ जाते हैं कि उस वक्त गरीब और अनपढ़ लोग ही इन चक्करों में पढ़ते थे। तंत्र-मंत्र, जादू-टोना क्या वास्तव में अपना असर दिखाते हैं? क्या इन शक्तियों का हकीकत में वजूद है? अगर नहीं है तो आज सभ्य समाज का रुझान क्यों इस तरफ जा रही है।
जादू-टोना, तंत्र-मंत्र और शैतानी ताकतों की पूजा, हमारी मानसिक स्थिति पर क्या असर डालती है और इसका अंजाम क्या होता है? आखिर ऐसी क्या वजह है, कि इंग्लैंड और मैक्सिको जैसे देशों के पढ़े-लिखे लोग काला जादू या शैतान की पूजा में विश्वास करने लगे हैं? आलम तो ये है कि वहां बकायदा शैतानों की पूजा होने लगी है। आज के दौर में भी मैक्सिको जैसे पढ़े-लिखे और एडवांस देश में भी मौत के देवता की मूर्ति के सामने लोगों का तांता लगा रहता है।
अगर काला जादू और शैतानों की पूजा करने से कुछ हासिल नहीं हो रहा है तो फिर लोग इंग्लैंड और मैक्सिकों जैसे देशों के लोग उनकी पूजा क्यों कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के और भी देश काला जादू और अन्य इस तरह की काई चीजों में अपना विश्वास दिखा रहा है। इन देशों में भी अब अंधविश्वास बढ़ता जा रहा है। लोग जादू-टोना और अन्य तरह के काला जादू पर ज्यादा विश्वास करने लगे हैं।
| तंत्र-मंत्र, जादू टोना और शैतानी ताकतों की पूजा करने में कुछ लोग विश्वास क्यों रखते हैं? इसके पीछे लोगों की सोच क्या होती है? किस-किस तरह के काम करवाने के लिए लोग ऐसी तरीकों का सहारा लेते हैं? क्या इक्कीसवीं सदी में हम उन दिनों के तरीकों को ही सटीक मानते हैं, जिन्हें विज्ञान कहीं स्थान नहीं देता। आज जब समाज जगरुक हो रहा है और लोग पढ़े लिखे है, इसके वावजूद भी तंत्र-मंत्र, जादू टोना और शैतानी ताकतों की पूजा क्यों करते हैं। जब पहले की बात होती है तो हम उन दिनों की बात यह कह कर आगे बढ़ जाते हैं कि उस वक्त गरीब और अनपढ़ लोग ही इन चक्करों में पढ़ते थे। तंत्र-मंत्र, जादू-टोना क्या वास्तव में अपना असर दिखाते हैं? क्या इन शक्तियों का हकीकत में वजूद है? अगर नहीं है तो आज सभ्य समाज का रुझान क्यों इस तरफ जा रही है। जादू-टोना, तंत्र-मंत्र और शैतानी ताकतों की पूजा, हमारी मानसिक स्थिति पर क्या असर डालती है और इसका अंजाम क्या होता है? आखिर ऐसी क्या वजह है, कि इंग्लैंड और मैक्सिको जैसे देशों के पढ़े-लिखे लोग काला जादू या शैतान की पूजा में विश्वास करने लगे हैं? आलम तो ये है कि वहां बकायदा शैतानों की पूजा होने लगी है। आज के दौर में भी मैक्सिको जैसे पढ़े-लिखे और एडवांस देश में भी मौत के देवता की मूर्ति के सामने लोगों का तांता लगा रहता है। अगर काला जादू और शैतानों की पूजा करने से कुछ हासिल नहीं हो रहा है तो फिर लोग इंग्लैंड और मैक्सिकों जैसे देशों के लोग उनकी पूजा क्यों कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के और भी देश काला जादू और अन्य इस तरह की काई चीजों में अपना विश्वास दिखा रहा है। इन देशों में भी अब अंधविश्वास बढ़ता जा रहा है। लोग जादू-टोना और अन्य तरह के काला जादू पर ज्यादा विश्वास करने लगे हैं। |
अगर आपके पास कोई भी हेल्थ कवर नहीं है, तो बोनस मिलने पर सबसे पहले परिवार के लिए हेल्थ कवर लें। हो सकता है कि आपने जो ग्रुप पॉलिसी पहले से ही ली हुई है, उसमें परिवार के लिए पर्याप्त कवरेज न मिल रहा हो। ऐसी स्थिति में बोनस आपके लिए वरदान है। इसके जरिए आप परिवार के लिए अस्थायी हेल्थ कवर ले सकते हैं, ताकि अस्पताल से लेकर दवाई और बाकी इलाज का खर्च निकल सके। 30 साल के लिए एक व्यक्तिगत हेल्थ कवर के लिए आपको सालाना 11,750 हजार रुपए चुकाने होते हैं, जबकि अस्थायी हेल्थ कवर के लिए (जिसमें सिर्फ पति-पत्नी शामिल हों) सालाना 17,624 हजार रुपए का भुगतान करना पड़ता है।
| अगर आपके पास कोई भी हेल्थ कवर नहीं है, तो बोनस मिलने पर सबसे पहले परिवार के लिए हेल्थ कवर लें। हो सकता है कि आपने जो ग्रुप पॉलिसी पहले से ही ली हुई है, उसमें परिवार के लिए पर्याप्त कवरेज न मिल रहा हो। ऐसी स्थिति में बोनस आपके लिए वरदान है। इसके जरिए आप परिवार के लिए अस्थायी हेल्थ कवर ले सकते हैं, ताकि अस्पताल से लेकर दवाई और बाकी इलाज का खर्च निकल सके। तीस साल के लिए एक व्यक्तिगत हेल्थ कवर के लिए आपको सालाना ग्यारह,सात सौ पचास हजार रुपए चुकाने होते हैं, जबकि अस्थायी हेल्थ कवर के लिए सालाना सत्रह,छः सौ चौबीस हजार रुपए का भुगतान करना पड़ता है। |
कृषि उत्पादन मंडी समिति में लगे गेहूं क्रय केंद्रों पर अब किसानों का गेहूं आना शुरू हो गया है। कई दिनों से सूने पड़े गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं की आवक अचानक बढ़ गई है।
बीसलपुर मंडी समिति में प्रशासन की ओर से चार गेहूं क्रय केंद्र एक अप्रैल से चालू किए गए, लेकिन गेहूं की कटाई न होने के कारण क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं आ रहा था। जिससे क्रय केंद्र प्रभारी खाली बैठे हुए थे, लेकिन अब किसानों के गेहूं की कटाई शुरू हो गई है और गुरुवार को अचानक क्रय केंद्रों पर किसान गेहूं लेकर पहुंच गए।
आरएफसी गेहूं क्रय केंद्र पर जिन किसानों का गेहूं लाया गया। उनका गेहूं खरीदा गया। क्रय केंद्र प्रभारी श्याम बहादुर दुबे ने बताया कि अब गेहूं की खरीद बढ़ने लगी है। क्रय केंद्र पर वारदाना मौजूद है। पैसे की भी कोई कमी नहीं है।
| कृषि उत्पादन मंडी समिति में लगे गेहूं क्रय केंद्रों पर अब किसानों का गेहूं आना शुरू हो गया है। कई दिनों से सूने पड़े गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं की आवक अचानक बढ़ गई है। बीसलपुर मंडी समिति में प्रशासन की ओर से चार गेहूं क्रय केंद्र एक अप्रैल से चालू किए गए, लेकिन गेहूं की कटाई न होने के कारण क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं आ रहा था। जिससे क्रय केंद्र प्रभारी खाली बैठे हुए थे, लेकिन अब किसानों के गेहूं की कटाई शुरू हो गई है और गुरुवार को अचानक क्रय केंद्रों पर किसान गेहूं लेकर पहुंच गए। आरएफसी गेहूं क्रय केंद्र पर जिन किसानों का गेहूं लाया गया। उनका गेहूं खरीदा गया। क्रय केंद्र प्रभारी श्याम बहादुर दुबे ने बताया कि अब गेहूं की खरीद बढ़ने लगी है। क्रय केंद्र पर वारदाना मौजूद है। पैसे की भी कोई कमी नहीं है। |
भोजपुरी इंडस्ट्री की आजकल खूब धूम है। ऐसे में भोजपुरी फिल्म के सुपरस्टार और गायक खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) का गाना 'जवानिया में घुन लग जाए' (Jawaniya Mein Ghoon Lag Jayi) इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वायरल गाने में खेसारी लाल के साथ एक्ट्रेस रितु सिंह (Ritu Singh) भी हैं। सोशल मीडिया पर रितु सिंह और खेसारी के डांस मूव्स से तहलका मचा दिया है।
भोजपुरी इंडस्ट्री की आजकल खूब धूम है। ऐसे में भोजपुरी फिल्म के सुपरस्टार और गायक खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) का गाना 'जवानिया में घुन लग जाए' (Jawaniya Mein Ghoon Lag Jayi) इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वायरल गाने में खेसारी लाल के साथ एक्ट्रेस रितु सिंह (Ritu Singh) भी हैं। सोशल मीडिया पर रितु सिंह और खेसारी के डांस मूव्स से तहलका मचा दिया है। इस पुराने गाने में एक्टर का कूल अंदाज और एक्ट्रेस के हॉट एंड बोल्ड सीन ने इस बार फैंस का मूड फ्रेश कर दिया है।
खेसारी लाल यादव भोजपुरी के एक ऐसे अभिनेता हैं, जिनके दीवाने बड़ी संख्या में हैं। खेसारी लाल यादव और रितु सिंह की जोड़ी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसके चलते यह गाना एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। गाने में खेसारी लाल और अभिनेत्री रितु सिंह की शानदार केमिस्ट्री को दिखाया गया है। दोनों का फुल रोमांस देखकर फैंस हैरान हैं।
यह गाना बागी (Baaghi) फिल्म का है। यह गाना 14 अक्टूबर 2019 को वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया था लेकिन यह गाना एक बार फिर वायरल हो रहा है। वीडियो को अब तक 95,051,921 से अधिक लोगों ने देखा है वहीं गाने को 328 k से अधिक लाइक्स भी मिल चुके हैं और यह लगातार बढ़ रहा है। खेसारी लाल यादव और रितु सिंह का यह रोमांटिक गाना के बोल आजाद सिंह ने लिखे हैं और इसका संगीत मधुकर आनंद ने तैयार है।
| भोजपुरी इंडस्ट्री की आजकल खूब धूम है। ऐसे में भोजपुरी फिल्म के सुपरस्टार और गायक खेसारी लाल यादव का गाना 'जवानिया में घुन लग जाए' इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वायरल गाने में खेसारी लाल के साथ एक्ट्रेस रितु सिंह भी हैं। सोशल मीडिया पर रितु सिंह और खेसारी के डांस मूव्स से तहलका मचा दिया है। भोजपुरी इंडस्ट्री की आजकल खूब धूम है। ऐसे में भोजपुरी फिल्म के सुपरस्टार और गायक खेसारी लाल यादव का गाना 'जवानिया में घुन लग जाए' इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वायरल गाने में खेसारी लाल के साथ एक्ट्रेस रितु सिंह भी हैं। सोशल मीडिया पर रितु सिंह और खेसारी के डांस मूव्स से तहलका मचा दिया है। इस पुराने गाने में एक्टर का कूल अंदाज और एक्ट्रेस के हॉट एंड बोल्ड सीन ने इस बार फैंस का मूड फ्रेश कर दिया है। खेसारी लाल यादव भोजपुरी के एक ऐसे अभिनेता हैं, जिनके दीवाने बड़ी संख्या में हैं। खेसारी लाल यादव और रितु सिंह की जोड़ी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसके चलते यह गाना एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। गाने में खेसारी लाल और अभिनेत्री रितु सिंह की शानदार केमिस्ट्री को दिखाया गया है। दोनों का फुल रोमांस देखकर फैंस हैरान हैं। यह गाना बागी फिल्म का है। यह गाना चौदह अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस को वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया था लेकिन यह गाना एक बार फिर वायरल हो रहा है। वीडियो को अब तक पचानवे,इक्यावन,नौ सौ इक्कीस से अधिक लोगों ने देखा है वहीं गाने को तीन सौ अट्ठाईस k से अधिक लाइक्स भी मिल चुके हैं और यह लगातार बढ़ रहा है। खेसारी लाल यादव और रितु सिंह का यह रोमांटिक गाना के बोल आजाद सिंह ने लिखे हैं और इसका संगीत मधुकर आनंद ने तैयार है। |
केंद्रीय मंत्री ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए सरकार द्वारा घोषित विभिन्न योजनाओं की गणना की। गरीबों और हाशिए पर रहने वालों की सेवा करना, किसान कल्याण सुनिश्चित करना, महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन, मध्यम वर्ग के लिए जीवनयापन में आसानी, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और सुरक्षा पर जोर, व्यापार करने में आसानी, भारत को एक वैश्विक शक्ति, पर्यावरण और स्थिरता बनाना और सीतारमण ने कहा कि देश पहले नीति मोदी सरकार के प्रदर्शन के कुछ प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण योजना के तहत कल्याणकारी योजनाओं की सूची लंबी थी, उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 के चुनाव घोषणापत्र में किए गए सभी वादे पूरे किए गए हैं।
उन्होंने कहा, "केंद्र ने दो साल के लिए 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न और दालें देकर दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना लागू की है। " योजना। उन्होंने कहा कि जेनेरिक दवाओं ने दवा पर होने वाले खर्च को कम कर दिया है। उन्होंने कहा, "केंद्र के बुनियादी ढांचे पर जोर देने से महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों को मदद मिली है। " "पिछले सात दशकों में, 74 हवाई अड्डे थे। नौ साल में 74 नए एयरपोर्ट बनाए गए। 111 अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाएं थीं। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग लाहौल स्पीति में बनाई गई है। केरल में पांच दशक पुराने कोल्लम बाईपास का काम पूरा हो गया।
सीतारमण ने यह भी कहा कि 2,000 रुपये के नोट को वापस लेने का निर्णय आरबीआई द्वारा लिया गया था और उन्होंने पी चिदंबरम की यह कहते हुए आलोचना की कि पूर्व वित्त मंत्री को "आकांक्षाएं डालना या त्वरित निर्णय लेना" शोभा नहीं देता था।
| केंद्रीय मंत्री ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए सरकार द्वारा घोषित विभिन्न योजनाओं की गणना की। गरीबों और हाशिए पर रहने वालों की सेवा करना, किसान कल्याण सुनिश्चित करना, महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन, मध्यम वर्ग के लिए जीवनयापन में आसानी, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और सुरक्षा पर जोर, व्यापार करने में आसानी, भारत को एक वैश्विक शक्ति, पर्यावरण और स्थिरता बनाना और सीतारमण ने कहा कि देश पहले नीति मोदी सरकार के प्रदर्शन के कुछ प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण योजना के तहत कल्याणकारी योजनाओं की सूची लंबी थी, उन्होंने कहा कि दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस के चुनाव घोषणापत्र में किए गए सभी वादे पूरे किए गए हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र ने दो साल के लिए अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न और दालें देकर दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना लागू की है। " योजना। उन्होंने कहा कि जेनेरिक दवाओं ने दवा पर होने वाले खर्च को कम कर दिया है। उन्होंने कहा, "केंद्र के बुनियादी ढांचे पर जोर देने से महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों को मदद मिली है। " "पिछले सात दशकों में, चौहत्तर हवाई अड्डे थे। नौ साल में चौहत्तर नए एयरपोर्ट बनाए गए। एक सौ ग्यारह अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाएं थीं। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग लाहौल स्पीति में बनाई गई है। केरल में पांच दशक पुराने कोल्लम बाईपास का काम पूरा हो गया। सीतारमण ने यह भी कहा कि दो,शून्य रुपयापये के नोट को वापस लेने का निर्णय आरबीआई द्वारा लिया गया था और उन्होंने पी चिदंबरम की यह कहते हुए आलोचना की कि पूर्व वित्त मंत्री को "आकांक्षाएं डालना या त्वरित निर्णय लेना" शोभा नहीं देता था। |
।दीप्ठीक्षा (Deepthiksha)
मीन राशि का स्वामी ग्रह गुरु होता है। भगवान विष्णु (सत्यनारायण भगवन) को मीन राशि का आराध्य देव माना जाता है। इन दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों में इम्यून सिस्टम कमज़ोर और पेट सम्बन्धी समस्याएं पायी जाती हैं। इन दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों को शराब की लत नहीं होनी चाहिए। इस राशि के दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियाँ पांव की उंगलियों के रोगों, गठिया, बलगम और ट्यूमर आदि से पीड़ित हो सकते हैं। इस राशि के दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियाँ स्वभाव में संवेदनशील होते हैं दूसरों के दुःख में अंदर से दुखी हो जाते हैं। इस दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों के स्वभाव में देखभाल करना और दयालुपन बचपन से ही देखने को मिलता है।
अगर आप अपने बच्चे का नाम दीप्ठीक्षा रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि दीप्ठीक्षा का मतलब प्रकाश की एक किरण होता है। प्रकाश की एक किरण होना बहुत अच्छा माना जाता है और इसकी झलक दीप्ठीक्षा नाम के लोगों में भी दिखती है। अगर आप अपने बच्चे को दीप्ठीक्षा नाम देते हैं तो जीवनभर के लिए उसका संबंध इस नाम के मतलब यानी प्रकाश की एक किरण से हो जाएगा। जैसा कि हमने बताया कि दीप्ठीक्षा का अर्थ प्रकाश की एक किरण होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप दीप्ठीक्षा नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। दीप्ठीक्षा नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी प्रकाश की एक किरण होते हैं। आगे पढ़ें दीप्ठीक्षा नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, दीप्ठीक्षा नाम के प्रकाश की एक किरण मतलब के बारे में विस्तार से जानें।
दीप्ठीक्षा नाम का स्वामी बृहस्पति ग्रह होता है। इस नाम का शुभ अंक 3 है। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां काफी लोकप्रिय होती हैं और लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से निभाती हैं। ये नियम और सिद्धांत के अनुकूल चलना पसंद करती हैं। अनुशासन में रहना दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों का बेहतरीन गुण है। जिनका शुभ अंक 3 होता है, वे दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां अक्सर किसी बात को लेकर जिद पकड़ लेती हैं इसलिए इनके दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा होते हैं। इस अंक वाली दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की सेहत वैसे तो अच्छी रहती है, लेकिन इनको डायबिटीज होने की आशंका होती है।
दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की राशि मीन है। अध्यात्म में रुचि होती है दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की। मीन राशि से जुडी दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां अपने आप को संतुष्ट रखने कोशिश करती रहती हैं। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की कोशिश रहती है कि वे बिना किसी उपद्रव के शांति से रह सकें। दीप्ठीक्षा नाम की महिलाएं लड़ाई-झगड़ों से दूर रहती हैं। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां मानती हैं, कि उनके विचारों का सम्मान जरूर किया जाना चाहिए।
| ।दीप्ठीक्षा मीन राशि का स्वामी ग्रह गुरु होता है। भगवान विष्णु को मीन राशि का आराध्य देव माना जाता है। इन दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों में इम्यून सिस्टम कमज़ोर और पेट सम्बन्धी समस्याएं पायी जाती हैं। इन दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों को शराब की लत नहीं होनी चाहिए। इस राशि के दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियाँ पांव की उंगलियों के रोगों, गठिया, बलगम और ट्यूमर आदि से पीड़ित हो सकते हैं। इस राशि के दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियाँ स्वभाव में संवेदनशील होते हैं दूसरों के दुःख में अंदर से दुखी हो जाते हैं। इस दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों के स्वभाव में देखभाल करना और दयालुपन बचपन से ही देखने को मिलता है। अगर आप अपने बच्चे का नाम दीप्ठीक्षा रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि दीप्ठीक्षा का मतलब प्रकाश की एक किरण होता है। प्रकाश की एक किरण होना बहुत अच्छा माना जाता है और इसकी झलक दीप्ठीक्षा नाम के लोगों में भी दिखती है। अगर आप अपने बच्चे को दीप्ठीक्षा नाम देते हैं तो जीवनभर के लिए उसका संबंध इस नाम के मतलब यानी प्रकाश की एक किरण से हो जाएगा। जैसा कि हमने बताया कि दीप्ठीक्षा का अर्थ प्रकाश की एक किरण होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप दीप्ठीक्षा नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। दीप्ठीक्षा नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी प्रकाश की एक किरण होते हैं। आगे पढ़ें दीप्ठीक्षा नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, दीप्ठीक्षा नाम के प्रकाश की एक किरण मतलब के बारे में विस्तार से जानें। दीप्ठीक्षा नाम का स्वामी बृहस्पति ग्रह होता है। इस नाम का शुभ अंक तीन है। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां काफी लोकप्रिय होती हैं और लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से निभाती हैं। ये नियम और सिद्धांत के अनुकूल चलना पसंद करती हैं। अनुशासन में रहना दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों का बेहतरीन गुण है। जिनका शुभ अंक तीन होता है, वे दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां अक्सर किसी बात को लेकर जिद पकड़ लेती हैं इसलिए इनके दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा होते हैं। इस अंक वाली दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की सेहत वैसे तो अच्छी रहती है, लेकिन इनको डायबिटीज होने की आशंका होती है। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की राशि मीन है। अध्यात्म में रुचि होती है दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की। मीन राशि से जुडी दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां अपने आप को संतुष्ट रखने कोशिश करती रहती हैं। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियों की कोशिश रहती है कि वे बिना किसी उपद्रव के शांति से रह सकें। दीप्ठीक्षा नाम की महिलाएं लड़ाई-झगड़ों से दूर रहती हैं। दीप्ठीक्षा नाम की लड़कियां मानती हैं, कि उनके विचारों का सम्मान जरूर किया जाना चाहिए। |
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