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जोहानिसबर्ग टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने सधी हुई बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक लगाया।
शतक लगाने के बाद दर्शकों का अभिवादन करते चेतेश्वर पुजारा।
पहली पारी में चेतेश्वर पुजारा भले ही बड़ी पारी खेलने से रह गए थे लेकिन दूसरी पारी में वह अपने मकसद में कामयाब रहे और शतक ठोक दिया।
चेतेश्वर पुजारा ने शतक लगाने के बाद ऊपरवाले का धन्यवाद करना नहीं भूले।
चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली ने अफ्रीकी गेंदबाजों का डटकर सामना किया और बेजोड़ साझेदारी की।
| जोहानिसबर्ग टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने सधी हुई बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक लगाया। शतक लगाने के बाद दर्शकों का अभिवादन करते चेतेश्वर पुजारा। पहली पारी में चेतेश्वर पुजारा भले ही बड़ी पारी खेलने से रह गए थे लेकिन दूसरी पारी में वह अपने मकसद में कामयाब रहे और शतक ठोक दिया। चेतेश्वर पुजारा ने शतक लगाने के बाद ऊपरवाले का धन्यवाद करना नहीं भूले। चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली ने अफ्रीकी गेंदबाजों का डटकर सामना किया और बेजोड़ साझेदारी की। |
भारत ही नहीं दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक कपिल देव का जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़, पंजाब में हुआ था। कपिल देव की बायोग्राफी की बात करें तो उनका जन्म चंडीगढ़, पंजाब में हुआ था। कपिल देव का करियर बहुत ही मुश्किलों भरा रहा, लेकिन भारत को पहले वर्ल्ड कप दिलाने का श्रय भी कपिल देव को जाता है, 1983 में कपिल देव की कप्तानी में ही भारत ने पहला वर्ल्ड कप जीता था। इस जीत के बाद भारत में कपिल देव और क्रिकेट सबकी जुबान पर आ गया। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि कपिल देव अक्टूबर 1999 से अगस्त 2000 तक भारतीय क्रिकेट टीम के कोच भी रह चुके हैं। साल 1994 में जब कपिल देव ने क्रिकेट को अलविदा कहा तब तक कई यादगार रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो चुके थे। आगे जानें महान भारतीय खिलाड़ी कपिल देव के जिंदगी से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
कपिल देव का जन्म जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़, पंजाब में हुआ था। उनका पूरा नाम कपिल देव राम लाल निखंज है। कपिल देव के पिता के नाम राम लाल निखंज और माता का नाम राज कुमारी है। उनकी मां का जन्म पाकपट्टन में सूफी संत बाबा फरीद के शहर में हुआ था। उनके पिता दीपालपुर के थे वे शाह याका में रहते थे जो अब ओकारा जिले पाकिस्तान में है। उनकी चार बहनें विभाजन से पहले पैदा हुई थीं और उनके दो भाई फाजिल्का (भारत) में थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। उनके पिता ने फाजिल्का में विभाजन के बाद अपना प्रारंभिक जीवन बिताया। फिर वो चंडीगढ़ आ गए। कपिल देव ने डी. ए. वी. स्कूल और 1971 में देश प्रेम आजाद से पढाई की है।
कपिल देव ने नवंबर 1975 में हरियाणा के लिए पंजाब के खिलाफ 06 विकेट लेकर पंजाब को महज 63 रनों पर रोक दिया और हरियाणा को जीत में मदद की। उन्होंने 30 मैचों में 121 विकेट के साथ सीजन को पूरा किया। उन्होंने सर्विसेज के खिलाफ पहली पारी में 8/38 के गेंदबाजी आंकडें के साथ 1977-78 का सीजन शुरू किया। दूसरी पारी में 3 विकेटों के साथ उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना पहला 10 विकेट लिया, इस उपलब्धि को उन्होंने बाद में टेस्ट क्रिकेट में दो बार हासिल की।
4 मैचों में 23 विकेट के साथ उन्हें ईरानी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और विल्स ट्रॉफी मैचों के लिए चुना गया। 1979-80 के सीजन में कपिल देव ने दिल्ली के खिलाफ पहली शतक के साथ अपनी बल्लेबाजी की प्रतिभा दिखाई, जब उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ 193 रन बनाया। प्री-क्वार्टर फ़ाइनल मैच में उन्होंने उत्तर प्रदेश के खिलाफ पहली बार हरियाणा की कप्तानी की।
कपिल देव ने 16 अक्टूबर 1978 को पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। हालांकि उनका पहला मैच कुछ खास नहीं रहा था। पाकिस्तान के खिलाफ नेशनल स्टेडियम, कराची में तीसरे टेस्ट मैच के दौरान 33 गेंदों पर भारत की ओर से सबसे तेज टेस्ट अर्धशतक लगाकर कपिल देव ने अपने हरफनमौला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कपिल देव ने खुद को भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज के रूप में स्थापित किया जब उन्होंने दो 5 विकेट लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 28 विकेट के साथ घरेलू श्रृंखला समाप्त की और 212 रन भी बनाए जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल था। कपिल देव ने वनडे क्रिकेट में डेब्यू 1 अक्टूबर 1978 को पाकिस्तान के खिलाफ किया था।
कपिल देव ने 1982-83 सीजन में भारत के कप्तान के रूप में श्रीलंका (पाकिस्तान दौरे से पहले) में डेब्यू किया था जब सुनील गावस्कर को आराम दिया गया था। नियमित कप्तान के रूप में उन्होंने सबसे पहले वेस्टइंडीज का दौरा था, जहां सबसे बड़ी उपलब्धि एकदिवसीय जीत थी। कपिल देव (72) और सुनील गावस्कर (90) ने भारत को विशाल स्कोर तक पहुँचाया - 47 ओवरों में 282/5 और कपिल देव के 2 विकेटों ने वेस्टइंडीज को 255 रनों पर रोक दिया था. कुल मिलाकर कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज में एक अच्छी श्रृंखला थी क्योंकि उन्होंने एक शतक बनाने के साथ ही 17 विकेट भी लिए थे।
कपिल देवने 1980 में रोमी भाटिया से शादी की और उनकी एक बेटी अमिया देव है जिसका जन्म 16 जनवरी 1996 को हुआ। उन्होंने तीन ऑटोबायोग्राफी लिखी हैं। 1985 में गॉडस डिक्री (God's Decree), 1987 में क्रिकेट माई स्टाइल (Cricket My Style) और साल 2004 में स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट (Straight from the Heart) नामक ऑटोबायोग्राफी लिखी। कपिल देव ने फिल्म दिल्लगी, ये दिल्लगी, इकबाल, चैन खुली की मेन खुली और मुझसे शादी करोगी जैसे फिल्मों में कैमियो भी किया है।
कपिल देव ने भारत की ओर से 131 टेस्ट मैचों में 31. 05 के औसत से 5,248 रन बनाए हैं। जिसमें 8 शतक और 27 अर्धशतक शामिल है। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 163 रन रहा है। जबकि गेंदबाजी में उन्होंने 434 विकेट लिए हैं। इस दौरान उन्होंने टेस्ट में एक पारी में 5 विकेट 23 बार और मैच में दस विकेट दो बार लिए हैं। इस दौरान उनका बेस्ट बोलिंग 83 रन देकर 9 विकेट रहा है। कपिल देव ने 225 वनडे मैचों में 23. 79 की औसत से 3,783 रन बनाए हैं। जिसमें एक शतक और 14 अर्धशतक शामिल है। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 175 रन रहा है। जबकि गेंदबाजी में उन्होंने 253 विकेट लिए हैं।
जन्मः 6 जनवरी 1959 (आयु 59)
भारत (1978-1994)
घरेलू टीम की जानकारी (Kapil Dev Biography)
| भारत ही नहीं दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक कपिल देव का जन्म छः जनवरी एक हज़ार नौ सौ उनसठ को चंडीगढ़, पंजाब में हुआ था। कपिल देव की बायोग्राफी की बात करें तो उनका जन्म चंडीगढ़, पंजाब में हुआ था। कपिल देव का करियर बहुत ही मुश्किलों भरा रहा, लेकिन भारत को पहले वर्ल्ड कप दिलाने का श्रय भी कपिल देव को जाता है, एक हज़ार नौ सौ तिरासी में कपिल देव की कप्तानी में ही भारत ने पहला वर्ल्ड कप जीता था। इस जीत के बाद भारत में कपिल देव और क्रिकेट सबकी जुबान पर आ गया। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि कपिल देव अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे से अगस्त दो हज़ार तक भारतीय क्रिकेट टीम के कोच भी रह चुके हैं। साल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में जब कपिल देव ने क्रिकेट को अलविदा कहा तब तक कई यादगार रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो चुके थे। आगे जानें महान भारतीय खिलाड़ी कपिल देव के जिंदगी से जुड़ी कुछ रोचक बातें। कपिल देव का जन्म जन्म छः जनवरी एक हज़ार नौ सौ उनसठ को चंडीगढ़, पंजाब में हुआ था। उनका पूरा नाम कपिल देव राम लाल निखंज है। कपिल देव के पिता के नाम राम लाल निखंज और माता का नाम राज कुमारी है। उनकी मां का जन्म पाकपट्टन में सूफी संत बाबा फरीद के शहर में हुआ था। उनके पिता दीपालपुर के थे वे शाह याका में रहते थे जो अब ओकारा जिले पाकिस्तान में है। उनकी चार बहनें विभाजन से पहले पैदा हुई थीं और उनके दो भाई फाजिल्का में थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। उनके पिता ने फाजिल्का में विभाजन के बाद अपना प्रारंभिक जीवन बिताया। फिर वो चंडीगढ़ आ गए। कपिल देव ने डी. ए. वी. स्कूल और एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में देश प्रेम आजाद से पढाई की है। कपिल देव ने नवंबर एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में हरियाणा के लिए पंजाब के खिलाफ छः विकेट लेकर पंजाब को महज तिरेसठ रनों पर रोक दिया और हरियाणा को जीत में मदद की। उन्होंने तीस मैचों में एक सौ इक्कीस विकेट के साथ सीजन को पूरा किया। उन्होंने सर्विसेज के खिलाफ पहली पारी में आठ/अड़तीस के गेंदबाजी आंकडें के साथ एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर-अठहत्तर का सीजन शुरू किया। दूसरी पारी में तीन विकेटों के साथ उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना पहला दस विकेट लिया, इस उपलब्धि को उन्होंने बाद में टेस्ट क्रिकेट में दो बार हासिल की। चार मैचों में तेईस विकेट के साथ उन्हें ईरानी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और विल्स ट्रॉफी मैचों के लिए चुना गया। एक हज़ार नौ सौ उन्यासी-अस्सी के सीजन में कपिल देव ने दिल्ली के खिलाफ पहली शतक के साथ अपनी बल्लेबाजी की प्रतिभा दिखाई, जब उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ एक सौ तिरानवे रन बनाया। प्री-क्वार्टर फ़ाइनल मैच में उन्होंने उत्तर प्रदेश के खिलाफ पहली बार हरियाणा की कप्तानी की। कपिल देव ने सोलह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। हालांकि उनका पहला मैच कुछ खास नहीं रहा था। पाकिस्तान के खिलाफ नेशनल स्टेडियम, कराची में तीसरे टेस्ट मैच के दौरान तैंतीस गेंदों पर भारत की ओर से सबसे तेज टेस्ट अर्धशतक लगाकर कपिल देव ने अपने हरफनमौला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कपिल देव ने खुद को भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज के रूप में स्थापित किया जब उन्होंने दो पाँच विकेट लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अट्ठाईस विकेट के साथ घरेलू श्रृंखला समाप्त की और दो सौ बारह रन भी बनाए जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल था। कपिल देव ने वनडे क्रिकेट में डेब्यू एक अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को पाकिस्तान के खिलाफ किया था। कपिल देव ने एक हज़ार नौ सौ बयासी-तिरासी सीजन में भारत के कप्तान के रूप में श्रीलंका में डेब्यू किया था जब सुनील गावस्कर को आराम दिया गया था। नियमित कप्तान के रूप में उन्होंने सबसे पहले वेस्टइंडीज का दौरा था, जहां सबसे बड़ी उपलब्धि एकदिवसीय जीत थी। कपिल देव और सुनील गावस्कर ने भारत को विशाल स्कोर तक पहुँचाया - सैंतालीस ओवरों में दो सौ बयासी/पाँच और कपिल देव के दो विकेटों ने वेस्टइंडीज को दो सौ पचपन रनों पर रोक दिया था. कुल मिलाकर कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज में एक अच्छी श्रृंखला थी क्योंकि उन्होंने एक शतक बनाने के साथ ही सत्रह विकेट भी लिए थे। कपिल देवने एक हज़ार नौ सौ अस्सी में रोमी भाटिया से शादी की और उनकी एक बेटी अमिया देव है जिसका जन्म सोलह जनवरी एक हज़ार नौ सौ छियानवे को हुआ। उन्होंने तीन ऑटोबायोग्राफी लिखी हैं। एक हज़ार नौ सौ पचासी में गॉडस डिक्री , एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में क्रिकेट माई स्टाइल और साल दो हज़ार चार में स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट नामक ऑटोबायोग्राफी लिखी। कपिल देव ने फिल्म दिल्लगी, ये दिल्लगी, इकबाल, चैन खुली की मेन खुली और मुझसे शादी करोगी जैसे फिल्मों में कैमियो भी किया है। कपिल देव ने भारत की ओर से एक सौ इकतीस टेस्ट मैचों में इकतीस. पाँच के औसत से पाँच,दो सौ अड़तालीस रन बनाए हैं। जिसमें आठ शतक और सत्ताईस अर्धशतक शामिल है। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर एक सौ तिरेसठ रन रहा है। जबकि गेंदबाजी में उन्होंने चार सौ चौंतीस विकेट लिए हैं। इस दौरान उन्होंने टेस्ट में एक पारी में पाँच विकेट तेईस बार और मैच में दस विकेट दो बार लिए हैं। इस दौरान उनका बेस्ट बोलिंग तिरासी रन देकर नौ विकेट रहा है। कपिल देव ने दो सौ पच्चीस वनडे मैचों में तेईस. उन्यासी की औसत से तीन,सात सौ तिरासी रन बनाए हैं। जिसमें एक शतक और चौदह अर्धशतक शामिल है। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर नाबाद एक सौ पचहत्तर रन रहा है। जबकि गेंदबाजी में उन्होंने दो सौ तिरेपन विकेट लिए हैं। जन्मः छः जनवरी एक हज़ार नौ सौ उनसठ भारत घरेलू टीम की जानकारी |
ओला का तीसरा स्कूटर 22 अक्टूबर को लॉन्च होने जा रहा है. (फोटो साभार ओला)
नई दिल्ली. इलेक्ट्रिक स्कूटर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी ओला का लंबे समय से चर्चा में चल रहा बजट ई स्कूटर आखिर कल लॉन्च होने जा रहा है. कंपनी ने इस बात की पुष्टि की है कि स्कूटर को दिवाली से पहले 22 अक्टूबर को लॉन्च कर दिया जाएगा. स्कूटर की कीमत 80 हजार रुपये के अंदर रहने की बात कही जा रही है. गौरतलब ह कि इस संबंध में कुछ समय पहले ही ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि ओला का सस्ता ई स्कूटर 22 अक्टूबर को इंडियन मार्केट में लॉन्च कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया था कि इस स्कूटर में एस 1 वेरिएंट के जैसे फीचर्स के साथ ही कुछ ऐड ऑन होंगे.
उल्लेखनीय है कि फिलहाल ओला के ई स्कूटर्स के बाजार में दो वेरिएंट एस 1 और एस 1 प्रो उपलब्ध हैं. इन दोनों ही वेरिएंट को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं. दशहरे पर कंपनी ने बताया था कि सामान्य से 10 गुना ज्यादा सेल रिकॉर्ड की गई है.
आपको बता दें कि ओला इलेक्ट्रिक कार पर भी काम कर रही है. भाविश पहले ही इस कार का खुलासा ओला फ्यूचर फैक्ट्री में एक इवेंट के दौरान कर चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया था कि ओला की पहली इलेक्ट्रिक कार साल 2023 में लॉन्च की जाएगी.
ओला अब आने वाले समय में इलेक्ट्रिक लीथियम आयन बैटरी की भी मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने जा रही है. आने वाले समय में कंपनी भारत में ईवी सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा सकती है. इसमें 100 प्रतिशत 'स्टेट ऑफ द आर्ट' तकनीक से बैटरी का निर्माण किया जाएगा. मौजूदा समय में भारत में बिकने वाले अधिकतर इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बाहर से आयत की जाती है.
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| ओला का तीसरा स्कूटर बाईस अक्टूबर को लॉन्च होने जा रहा है. नई दिल्ली. इलेक्ट्रिक स्कूटर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी ओला का लंबे समय से चर्चा में चल रहा बजट ई स्कूटर आखिर कल लॉन्च होने जा रहा है. कंपनी ने इस बात की पुष्टि की है कि स्कूटर को दिवाली से पहले बाईस अक्टूबर को लॉन्च कर दिया जाएगा. स्कूटर की कीमत अस्सी हजार रुपये के अंदर रहने की बात कही जा रही है. गौरतलब ह कि इस संबंध में कुछ समय पहले ही ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि ओला का सस्ता ई स्कूटर बाईस अक्टूबर को इंडियन मार्केट में लॉन्च कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया था कि इस स्कूटर में एस एक वेरिएंट के जैसे फीचर्स के साथ ही कुछ ऐड ऑन होंगे. उल्लेखनीय है कि फिलहाल ओला के ई स्कूटर्स के बाजार में दो वेरिएंट एस एक और एस एक प्रो उपलब्ध हैं. इन दोनों ही वेरिएंट को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं. दशहरे पर कंपनी ने बताया था कि सामान्य से दस गुना ज्यादा सेल रिकॉर्ड की गई है. आपको बता दें कि ओला इलेक्ट्रिक कार पर भी काम कर रही है. भाविश पहले ही इस कार का खुलासा ओला फ्यूचर फैक्ट्री में एक इवेंट के दौरान कर चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया था कि ओला की पहली इलेक्ट्रिक कार साल दो हज़ार तेईस में लॉन्च की जाएगी. ओला अब आने वाले समय में इलेक्ट्रिक लीथियम आयन बैटरी की भी मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने जा रही है. आने वाले समय में कंपनी भारत में ईवी सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा सकती है. इसमें एक सौ प्रतिशत 'स्टेट ऑफ द आर्ट' तकनीक से बैटरी का निर्माण किया जाएगा. मौजूदा समय में भारत में बिकने वाले अधिकतर इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बाहर से आयत की जाती है. . |
कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में देर रात पड़े एनआईए (NIA) के छापे में अब तक कुल 6 लोगों को हिरासत में लिया है। जिसमें से एक मामूर भी शामिल है। बताया जा रहा है कि मामूर के घर में एनआईए की टीम रात को 10. 15 बजे दबिश दी और पूछताछ करने के बाद मामूर को गिरफ्तार किया गया था। मामूर परिवार में सबसे छोटा लड़का है जो शारीरिक रूप से विकलांग भी है। एनआईए की कार्रवाई जारी है।
जानकारी के अनुसार जबलपुर में एनआईए ने रात सवा 10 बजे मामूर के घर में दबिश दी थी। एनआईए मामूर से आईएसआईएस (ISIS) से कड़ी जोड़कर पूछताछ कर रही है। मामूर परिवार का सबसे छोटा लड़का और शारीरिक रूप से विकलांग है। उनका परिवार फी सबिलिल्हा ग्रुप से जुड़ा है। पूरे भारत भर के लोग इस ग्रुप से जुड़े है। सैय्यद मामूर भी इस ग्रुप से जुड़ा था। ग्रुप में पाकिस्तान के लोग भी जुड़े है, इसलिए एनआईए ने छापेमार कार्रवाई की है। एनआईए ने अब तक 6 लोगों को उठाया है और कार्रवाई जारी है।
| कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में देर रात पड़े एनआईए के छापे में अब तक कुल छः लोगों को हिरासत में लिया है। जिसमें से एक मामूर भी शामिल है। बताया जा रहा है कि मामूर के घर में एनआईए की टीम रात को दस. पंद्रह बजे दबिश दी और पूछताछ करने के बाद मामूर को गिरफ्तार किया गया था। मामूर परिवार में सबसे छोटा लड़का है जो शारीरिक रूप से विकलांग भी है। एनआईए की कार्रवाई जारी है। जानकारी के अनुसार जबलपुर में एनआईए ने रात सवा दस बजे मामूर के घर में दबिश दी थी। एनआईए मामूर से आईएसआईएस से कड़ी जोड़कर पूछताछ कर रही है। मामूर परिवार का सबसे छोटा लड़का और शारीरिक रूप से विकलांग है। उनका परिवार फी सबिलिल्हा ग्रुप से जुड़ा है। पूरे भारत भर के लोग इस ग्रुप से जुड़े है। सैय्यद मामूर भी इस ग्रुप से जुड़ा था। ग्रुप में पाकिस्तान के लोग भी जुड़े है, इसलिए एनआईए ने छापेमार कार्रवाई की है। एनआईए ने अब तक छः लोगों को उठाया है और कार्रवाई जारी है। |
(१७२) प्रद्युम्न के वचनों को सुनकर राजा सन्तुष्ट हुआ तथा मदनकुमार पर कृपा की। जब यमसंबर ने उसे बीड़ा दिया तो हाथ फैलाकर प्रथम्न ने उसे ले लिया ।
प्रद्युम्न का युद्ध भूमि के लिए प्रस्थान
(१७३) आशा मिली और प्रद्युम्न चतुरंगिनी सेना को सजा कर रवाना हो गया । बहुत से नगारे, भेरी और तुरही बजने लगे । कोलाहल मच गया एवं उचलकूद होने लगी तथा ऐसा लगने लगा कि मानों मेघ ही असमय में खूब गर्जना कर रहा हो। रथ सजा लिये गये। हाथी और घोड़ों पर हौदे तथा काठियां रख दी गयीं। जब तैयार होकर प्रद्युम्न चला तो आकाश में सूर्य भी नहीं दिख रहा था ।
(१७४) अब प्रद्युम्न के चरित्र को ध्यान पूर्वक सुनिये कि जिस प्रकार उसने राजा सिंहरथ को जीता।
(१७५) कुमार प्रद्युम्न ने जब प्रयाण किया तो सारे जगत ने जान लिया। आकाश में रेत उचलने लगी। सजे हुये रथों के साथ जो बाजे बज रहे थे वे ऐसे लग रहे थे कि मानों भादों के मेघ ही गर्ज रहे हो । उसके प्रवल शत्रुओं के समूह को नष्ट करने वाले अनगिनत योद्धा चले। वे सब बीर एकत्र होकर समराङ्गरण में जा पहुँचे।
( १७६ ) कुमार प्रद्युम्न को आता हुआ देखकर सिंहरथ कहने लगा यह बालक कौन है ? इस बालक को रण में किसने भेज दिया है? मुझे इसके साथ युद्ध करने में लज्जा आती है।
(१७७) बार बार में मुड़ २ कर राजा ने कहा कि वह इस बालक पर किस प्रकार प्रहार करे । उसको देखकर उसके हृदय में ममता उत्पन्न हुई और कहा कि हे कुमार ! तुम वापिस घर चले जावो ।
प्रद्युम्न एवं सिंहस्थ में युद्ध
(१७८) राजा के वचन सुनकर प्रद्युम्न क्रोधित हुआ और कहने लगा को दीन बचन कहने वाले तुम कौन हो ? बालक कहने से कोई लाभ नहीं है अब मैं अच्छी तरह से तुम्हारा नाश करूंगा।
(१७६) तब राजा ने तलवार निकाली। मेघ के समान निरन्तर वाणों की वर्षा होने लगी। सुभट आपस में हाथ में तलवार लेकर भिड गये । रथ नष्ट हो गये और हाथी लड़ने लगे ।
(१८०) हाथियों से हाथी भिड गये तथा घोड़ों से घोड़े जा भिड़े । इस प्रकार उनको युद्ध करते हुये पांच दिन व्यतीत हो गये। वह युद्ध क्षेत्र श्मशान बन गया और वहां गृद्ध उड़ने लगे ।
(१८१) जब सेना युद्ध करती हुई थक गयी तब दोनों वीर रण में भिड़ गये। दोनों ही वीर सावधान होकर खड़े हो गये। दोनों ही सिंह के समान जम कर लड़ने लगे ।
(१९८२) वे दोनों ही वीर मल्लयुद्ध करने लगे तथा दोनों वीरों ने उस स्थान को अखाड़ा बना दिया । अन्त में सिंहस्थ बिल्कुल हार गया और प्रद्युम्न ने उसके गले में पैर डालकर बांध लिया ।
( १८३) जब प्रद्यम्नकुमार ने विजय प्राप्त की तो उस समय देवता गरण ऊपर से देख रहे थे। सिंहस्थ को बांध कर जब कुमार रवाना हुआ तो (यमसंबर ने) गुणवान कामदेव को तुरन्त ही बुलवाया जिससे सज्जन लोग आनंदित हुये । राजा भी देखकर आनंदित हुआ और कहने लगा कि तुमने इस अवसर पर बड़ी कृपा की है। मेरे जो पांच सौ पुत्र हैं उनके ऊपर तुम राजा हो ।
(१८४) ऐसे कामदेव के चरित्र को जिसे सोलह लाभ प्राप्त हुये हैं सब कोई सुनो । विद्याधर ने कृपा कर बंधे हुये सिंड्ररथ राजा को छोड दिया और उससे पट ( दुपट्टा) देकर गले मिला तथा सिंहरथ भी भेंट देकर घर चला गया।
( १८५) कुमारों के मन में दुःख हुआ कि हमारे जीते हुये ही यह हमारा राजा हो गया। राजा को इतना मान नहीं देना चाहिये कि दत्तक पुत्र को हम पर प्रधान बना दे।
(१८६) तब कुमारों ने मिलकर सोचा कि अब इसको समाप्त करना चाहिये। अब इसको सोलह गुफओं को दिखाना चाहिये जिससे हमारा राज्य निष्कंटक हो जावे ।
कुमारों द्वारा प्रद्युम्न को १६ गुफाओं को दिखाना (१८७) इस युक्ति को कोई प्रकट न करे। प्रद्युम्नकुमार को सब कुमारों ने मिलकर सलाह की और खेलने के बहाने से वनफ्रीडा को चले।
(१८८८) कुमारों ने प्रथम्न से कहा कि हे प्रथम्न सुनो बिजयागिरि के ऊपर जिन मन्दिर है जो मनुष्य उनकी पूजा करता है उसको पुण्य की प्राप्ति होती है।
(१८६) प्रद्युम्न यह वचन सुनकर प्रसन्न हुआ और पहाड़ पर चढ़कर जिनमन्दिर को देखने लगा। परकोटे पर चढ़कर बीर प्रद्युम्न ने देखा तो एक भयंकर नाग फुंकारते हुये मिला ।
(१६०) ललकार कर प्रद्युम्न नाग से भिड गया तथा पूंछ पकड़ कर उसका सिर उलटा कर दिया। उस पराक्रमी प्रथम्न को देखकर वह आश्चर्म चकित हो गया तथा यक्ष का रूप धारण कर खड़ा हो गया ।
(१६१) वह दोनों हाथ जोड़कर कर सत्य भाव से कहने लगा कि तुम पहिले कनकराल थे। जब तुम (कनकराज) राज्य त्याग कर तप करने चले तो मुझे अपनी सोलह विद्यान दे गये थे ।
(१६२) (और कहा कि ) कृष्ण के घर उसका अवतार होगा। तुम प्रभुम्न को देख लेना । उस राजा की यह धरोहर है। इसलिये अपनी विद्यायें सम्भाल लो ।
१६ विद्याओं के नाम
(१६३ - १६६) १. हृदयावलोकनी २. मोहिनी ३. जलशोषिणी ४. रत्नदर्शिणी ५. आकाशगामिनी ६. वायुगामिनी ७. पातालगामिनी ८. शुभदर्शिनी ६. सुधाकारिणी १०. अग्निस्थंभिणी ११. विद्यातारणी १२. बहुरूपिणी १३. जलबंधिरणी १४. गुटका १५. सिद्धिप्रकाशिका (जिसे सब कोई जानते हैं) १६. धार बांधने वाली धारा बंधिणी ये सोलह विद्यायें प्राप्त को तथा उसने अपूर्व रत्न जटित मनोहर मुकुट लाकर दिया। मुकुट सौंप कर फिर प्रधुम के चरणों में गिर गया तथा प्रद्युम्न हंसकर वहां से आगे बढा। वह प्रद्युम्न वहां पहुँचा जहां पांच सौ भाई हंस रहे थे।
(१६७) उन कुमारों के पास जब प्रद्युम्न गया तो मन में उनको आश्चर्य हुआ। वे ऊपर से प्रेम प्रकट करने लगे तथा उसे लेजाकर दूसरी गुफा दिखाई।
(१९८) उस गुफा का नाम काल गुफा था। कालासुर दैत्य वहां रहता था। पूर्व जन्म की बात को कौन मेट सकता है प्रयुक्न उससे भी जाकर भिड़ गया। | प्रद्युम्न के वचनों को सुनकर राजा सन्तुष्ट हुआ तथा मदनकुमार पर कृपा की। जब यमसंबर ने उसे बीड़ा दिया तो हाथ फैलाकर प्रथम्न ने उसे ले लिया । प्रद्युम्न का युद्ध भूमि के लिए प्रस्थान आशा मिली और प्रद्युम्न चतुरंगिनी सेना को सजा कर रवाना हो गया । बहुत से नगारे, भेरी और तुरही बजने लगे । कोलाहल मच गया एवं उचलकूद होने लगी तथा ऐसा लगने लगा कि मानों मेघ ही असमय में खूब गर्जना कर रहा हो। रथ सजा लिये गये। हाथी और घोड़ों पर हौदे तथा काठियां रख दी गयीं। जब तैयार होकर प्रद्युम्न चला तो आकाश में सूर्य भी नहीं दिख रहा था । अब प्रद्युम्न के चरित्र को ध्यान पूर्वक सुनिये कि जिस प्रकार उसने राजा सिंहरथ को जीता। कुमार प्रद्युम्न ने जब प्रयाण किया तो सारे जगत ने जान लिया। आकाश में रेत उचलने लगी। सजे हुये रथों के साथ जो बाजे बज रहे थे वे ऐसे लग रहे थे कि मानों भादों के मेघ ही गर्ज रहे हो । उसके प्रवल शत्रुओं के समूह को नष्ट करने वाले अनगिनत योद्धा चले। वे सब बीर एकत्र होकर समराङ्गरण में जा पहुँचे। कुमार प्रद्युम्न को आता हुआ देखकर सिंहरथ कहने लगा यह बालक कौन है ? इस बालक को रण में किसने भेज दिया है? मुझे इसके साथ युद्ध करने में लज्जा आती है। बार बार में मुड़ दो कर राजा ने कहा कि वह इस बालक पर किस प्रकार प्रहार करे । उसको देखकर उसके हृदय में ममता उत्पन्न हुई और कहा कि हे कुमार ! तुम वापिस घर चले जावो । प्रद्युम्न एवं सिंहस्थ में युद्ध राजा के वचन सुनकर प्रद्युम्न क्रोधित हुआ और कहने लगा को दीन बचन कहने वाले तुम कौन हो ? बालक कहने से कोई लाभ नहीं है अब मैं अच्छी तरह से तुम्हारा नाश करूंगा। तब राजा ने तलवार निकाली। मेघ के समान निरन्तर वाणों की वर्षा होने लगी। सुभट आपस में हाथ में तलवार लेकर भिड गये । रथ नष्ट हो गये और हाथी लड़ने लगे । हाथियों से हाथी भिड गये तथा घोड़ों से घोड़े जा भिड़े । इस प्रकार उनको युद्ध करते हुये पांच दिन व्यतीत हो गये। वह युद्ध क्षेत्र श्मशान बन गया और वहां गृद्ध उड़ने लगे । जब सेना युद्ध करती हुई थक गयी तब दोनों वीर रण में भिड़ गये। दोनों ही वीर सावधान होकर खड़े हो गये। दोनों ही सिंह के समान जम कर लड़ने लगे । वे दोनों ही वीर मल्लयुद्ध करने लगे तथा दोनों वीरों ने उस स्थान को अखाड़ा बना दिया । अन्त में सिंहस्थ बिल्कुल हार गया और प्रद्युम्न ने उसके गले में पैर डालकर बांध लिया । जब प्रद्यम्नकुमार ने विजय प्राप्त की तो उस समय देवता गरण ऊपर से देख रहे थे। सिंहस्थ को बांध कर जब कुमार रवाना हुआ तो गुणवान कामदेव को तुरन्त ही बुलवाया जिससे सज्जन लोग आनंदित हुये । राजा भी देखकर आनंदित हुआ और कहने लगा कि तुमने इस अवसर पर बड़ी कृपा की है। मेरे जो पांच सौ पुत्र हैं उनके ऊपर तुम राजा हो । ऐसे कामदेव के चरित्र को जिसे सोलह लाभ प्राप्त हुये हैं सब कोई सुनो । विद्याधर ने कृपा कर बंधे हुये सिंड्ररथ राजा को छोड दिया और उससे पट देकर गले मिला तथा सिंहरथ भी भेंट देकर घर चला गया। कुमारों के मन में दुःख हुआ कि हमारे जीते हुये ही यह हमारा राजा हो गया। राजा को इतना मान नहीं देना चाहिये कि दत्तक पुत्र को हम पर प्रधान बना दे। तब कुमारों ने मिलकर सोचा कि अब इसको समाप्त करना चाहिये। अब इसको सोलह गुफओं को दिखाना चाहिये जिससे हमारा राज्य निष्कंटक हो जावे । कुमारों द्वारा प्रद्युम्न को सोलह गुफाओं को दिखाना इस युक्ति को कोई प्रकट न करे। प्रद्युम्नकुमार को सब कुमारों ने मिलकर सलाह की और खेलने के बहाने से वनफ्रीडा को चले। कुमारों ने प्रथम्न से कहा कि हे प्रथम्न सुनो बिजयागिरि के ऊपर जिन मन्दिर है जो मनुष्य उनकी पूजा करता है उसको पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रद्युम्न यह वचन सुनकर प्रसन्न हुआ और पहाड़ पर चढ़कर जिनमन्दिर को देखने लगा। परकोटे पर चढ़कर बीर प्रद्युम्न ने देखा तो एक भयंकर नाग फुंकारते हुये मिला । ललकार कर प्रद्युम्न नाग से भिड गया तथा पूंछ पकड़ कर उसका सिर उलटा कर दिया। उस पराक्रमी प्रथम्न को देखकर वह आश्चर्म चकित हो गया तथा यक्ष का रूप धारण कर खड़ा हो गया । वह दोनों हाथ जोड़कर कर सत्य भाव से कहने लगा कि तुम पहिले कनकराल थे। जब तुम राज्य त्याग कर तप करने चले तो मुझे अपनी सोलह विद्यान दे गये थे । कृष्ण के घर उसका अवतार होगा। तुम प्रभुम्न को देख लेना । उस राजा की यह धरोहर है। इसलिये अपनी विद्यायें सम्भाल लो । सोलह विद्याओं के नाम एक. हृदयावलोकनी दो. मोहिनी तीन. जलशोषिणी चार. रत्नदर्शिणी पाँच. आकाशगामिनी छः. वायुगामिनी सात. पातालगामिनी आठ. शुभदर्शिनी छः. सुधाकारिणी दस. अग्निस्थंभिणी ग्यारह. विद्यातारणी बारह. बहुरूपिणी तेरह. जलबंधिरणी चौदह. गुटका पंद्रह. सिद्धिप्रकाशिका सोलह. धार बांधने वाली धारा बंधिणी ये सोलह विद्यायें प्राप्त को तथा उसने अपूर्व रत्न जटित मनोहर मुकुट लाकर दिया। मुकुट सौंप कर फिर प्रधुम के चरणों में गिर गया तथा प्रद्युम्न हंसकर वहां से आगे बढा। वह प्रद्युम्न वहां पहुँचा जहां पांच सौ भाई हंस रहे थे। उन कुमारों के पास जब प्रद्युम्न गया तो मन में उनको आश्चर्य हुआ। वे ऊपर से प्रेम प्रकट करने लगे तथा उसे लेजाकर दूसरी गुफा दिखाई। उस गुफा का नाम काल गुफा था। कालासुर दैत्य वहां रहता था। पूर्व जन्म की बात को कौन मेट सकता है प्रयुक्न उससे भी जाकर भिड़ गया। |
Texas School Shooting: अमेरिका में टेक्सास राज्य के एलिमेंट्री स्कूल में मंगलवार को 18 साल के एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी करके 18 बच्चों समेत 21 लोगों की हत्या कर दी। साथ ही कई लोग गोलीबारी की इस घटना में घायल हुए हैं। बाद में पुलिस की कार्रवाई में हमलावर मारा गया। सैन एंटोनियो से 134 किलोमीटर दूर टेक्सास के उवाल्डे शहर के रॉब एलीमेंट्री स्कूल में मंगलवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे गोलियों की आवाज सुनाई दीं।
टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने बताया कि हमलावर की पहचान साल्वाडोर रामोस के रूप में हुई है, जो स्कूल के पास के एक इलाके का रहने वाला था। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला क्यों किया गया। मरने वाले बच्चे दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ते थे और उनकी आयु सात से 10 साल के बीच थी। घटना के बाद उवाल्डे में सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
क्वाड शिखर वार्ता में शामिल होने के बाद जापान से लौट रहे अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को गोलीबारी की इस घटना की जानकारी दी गई। बाइडेन ने इस गोलीबारी की घटना पर कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें पूछना होगा कि भगवान के नाम पर हम कब बंदूक की लॉबी के लिए खड़े होंगे और क्या कर सकते हैं? माता-पिता अपने बच्चों को फिर कभी नहीं देख पाएंगे। अब एक्शन लेने का समय है। हमें उन लोगों को बताने की जरूरत है, जो इस तरह कानून के खिलाफ जाकर बंदूक उठाते हैं, हम इसे माफ नहीं करेंगे। वहीं बाइडेन ने टेक्सास में मारे गए लोगों की याद में 28 मई को सूर्यास्त तक अमेरिकी ध्वज को आधा झुकाए रखने का आदेश दिया है।
वहीं उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें कार्रवाई करने और ऐसा दोबारा होने से रोकने का साहस होना चाहिए। हमारे देश के लिए गन लॉबी के सामने खड़े होने और उचित बंदूक सुरक्षा कानून पारित करने का लंबा समय हो गया है। उवाल्डे के लोगों के साथ हम शोक करते हैं। हम लोग आपके लिए प्रार्थना कर रहे हैं और हम आपके साथ खड़े हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि मिशेल और मैं उवाल्डे में परिवारों के साथ दुखी हैं, जो दर्द का अनुभव कर रहे हैं। सैंडी हुक के लगभग दस साल और बफेलो के दस दिन बाद हमारा देश डर से नहीं, बल्कि एक बंदूक लॉबी और एक राजनीतिक दल द्वारा पंगु बना हुआ है, जिसने किसी भी तरह से कार्य करने की कोई इच्छा नहीं दिखाई है, जो इन त्रासदियों को रोकने में मदद कर सके।
| Texas School Shooting: अमेरिका में टेक्सास राज्य के एलिमेंट्री स्कूल में मंगलवार को अट्ठारह साल के एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी करके अट्ठारह बच्चों समेत इक्कीस लोगों की हत्या कर दी। साथ ही कई लोग गोलीबारी की इस घटना में घायल हुए हैं। बाद में पुलिस की कार्रवाई में हमलावर मारा गया। सैन एंटोनियो से एक सौ चौंतीस किलोग्राममीटर दूर टेक्सास के उवाल्डे शहर के रॉब एलीमेंट्री स्कूल में मंगलवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे गोलियों की आवाज सुनाई दीं। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने बताया कि हमलावर की पहचान साल्वाडोर रामोस के रूप में हुई है, जो स्कूल के पास के एक इलाके का रहने वाला था। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला क्यों किया गया। मरने वाले बच्चे दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ते थे और उनकी आयु सात से दस साल के बीच थी। घटना के बाद उवाल्डे में सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। क्वाड शिखर वार्ता में शामिल होने के बाद जापान से लौट रहे अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को गोलीबारी की इस घटना की जानकारी दी गई। बाइडेन ने इस गोलीबारी की घटना पर कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें पूछना होगा कि भगवान के नाम पर हम कब बंदूक की लॉबी के लिए खड़े होंगे और क्या कर सकते हैं? माता-पिता अपने बच्चों को फिर कभी नहीं देख पाएंगे। अब एक्शन लेने का समय है। हमें उन लोगों को बताने की जरूरत है, जो इस तरह कानून के खिलाफ जाकर बंदूक उठाते हैं, हम इसे माफ नहीं करेंगे। वहीं बाइडेन ने टेक्सास में मारे गए लोगों की याद में अट्ठाईस मई को सूर्यास्त तक अमेरिकी ध्वज को आधा झुकाए रखने का आदेश दिया है। वहीं उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें कार्रवाई करने और ऐसा दोबारा होने से रोकने का साहस होना चाहिए। हमारे देश के लिए गन लॉबी के सामने खड़े होने और उचित बंदूक सुरक्षा कानून पारित करने का लंबा समय हो गया है। उवाल्डे के लोगों के साथ हम शोक करते हैं। हम लोग आपके लिए प्रार्थना कर रहे हैं और हम आपके साथ खड़े हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि मिशेल और मैं उवाल्डे में परिवारों के साथ दुखी हैं, जो दर्द का अनुभव कर रहे हैं। सैंडी हुक के लगभग दस साल और बफेलो के दस दिन बाद हमारा देश डर से नहीं, बल्कि एक बंदूक लॉबी और एक राजनीतिक दल द्वारा पंगु बना हुआ है, जिसने किसी भी तरह से कार्य करने की कोई इच्छा नहीं दिखाई है, जो इन त्रासदियों को रोकने में मदद कर सके। |
Meerut: शायद ऐसा कोई दिन गुजरता हो जब अपने सिटी की सड़क पर खून ना बहता हो। कारण कई हैं, लेकिन कभी किसी ने इस पर ध्यान देने का प्रयास नहीं किया। तीन जून को दिल्ली में हुए रोड एक्सीडेंट में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मौत हो गई। इस घटना की वजह से पब्लिक के साथ सरकार का भी हादसों की बढ़ती संख्या और उसके कारण पर भी ध्यान गया। एक्सीडेंट रोकने के लिए सुधार के साथ जागरुकता अभियान चलाने की बातें शुरू हुई। आई नेक्स्ट ने भी इस गंभीर मामले की पड़ताल खुद सड़क पर उतर कर की और रात क्ख् से सुबह आठ बजे तक रोड का लाइव ऑपरेशन किया।
शहर में भारी वाहनों की एंट्री रात दस बजे के बाद का नियम है, लेकिन सिटी की किसी भी रोड पर शायद ही कभी दस बजने की इंतजार होता हो, इसके अलावा ओवर लोड की रफ्तार के मानक भी तय है, लेकिन यहां रफ्तार पर कंट्रोल नहीं होता। इसके अलावा रात में वाहनों की चेकिंग और उन पर लगाम के लिए पुलिस को सख्त आदेश है,्र लेकिन जब रात में पुलिस ही सड़क से गायब हो तो, बेलगाम वाहनों को रोकना किसके बस में है। रात के समय सिटी की तमाम मुख्य चेक पोस्ट और पुलिस चौकी खाली ही दिखाई दी।
पिछले दिनों वेस्ट यूपी में हुए रोड एक्सीडेंट की घटनाओं को देखते तो अधिकांश दुर्घटनाओं का कारण रोड के किनारे खडे़ वाहन बने। तेज रफ्तार वाहन इन खडे़ वाहनों से टकराए और गंभीर हादसे हुए। शुक्रवार की रात भी सिटी रोड पर कई भारी वाहन रोड पर खराब हालत में खड़े दिखे। जबकि इन वाहनों के पास चेतावनी के नाम पर कुछ नहीं दिखा। उधर, रोड पर खड़ी इस मौत के प्रति पुलिस भी लापरवाही ही दिखी।
रात के समय ओवर लोड वाहनों की बाढ़ शहर की सड़क पर आ जाती है। रात में शास्त्रीनगर से लेकर बेगमपुल और दिल्ली रोड पर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर ये वाहन दौड़ते दिखे। दिल्ली रोड पर तो ऐसे कई वाहनों के बीच आगे निकलने के लिए रेस भी होती दिखी। जबकि जागरण चौराहे से बेगमपुल तक पुलिस की कई चौकी और चेक पोस्ट है। लेकिन रोड पर रेस लगा रहे ओवर लोडिंग वाहनों को रोकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
आई नेक्स्ट की टीम को सिटी की कई रोड पर रात में अंधेरा मिला। अंधेरे में टूटी सड़क हमेशा हादसों का कारण बनती है। इसके अलावा तेजगढ़ी चौराहे के पास रोड पर बिखरी बजरी भी हादसों को न्यौता दे रही थी। टीम के सामने ही दो बाइक सवार फिसल गए। जबकि कई बड़े वाहन भी तेज बे्रक लगाने से अनियंत्रित होते होते बचे।
रोड के किनारे सोते लोगों के वाहनों से कुचलने की खबर आए दिन सुनने को मिलती है। शहर में भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है। लेकिन इसके बाद भी पुलिस या प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार की रात भी दिल्ली रोड, बेगमपुल और शास्त्रीनगर की रोड पर कई जगह लोग रोड के किनारे सोते दिखे। सड़क के किनारे सोते लोगों को जगाने और उन्हें वहां से हटाया या इस तरह के जोखिम से आगाह करने के लिए कोई मौके पर नजर नहीं आया।
रोड पर होने वाली दुर्घटनाओं को और आपराधिक वारदातों को देखते हुए शासन ने रात में हाईवे से लेकर लिंक रोड तक पर गश्त के निर्देश जारी किए हुए है। पुलिस के आला अधिकारी भी इसे लेकर खूब बड़ी बड़ी बातें करते रहते हैं। लेकिन रात में शहर की तमाम रोड पर टीम घूमी और जायजा लिया। लेकिन कही पर पुलिस के गश्ती दल से सामना नहीं हुआ।
पीक आवर्स में शहर की अधिकांश रोड पर जाम रहता है, ऐसे में वाहनों की रफ्तार पर कम और नियंत्रण में होती है। दूसरी ओर, क्ख् से सुबह 8 बजे तक रोड पर ट्रैफिक काफी कम होता है। खाली रोड पर चालक भी वाहनों को बेलगाम होकर दौड़ाते है, नियम भी ताक पर होते है, नतीजा रोड एक्सीडेंट के रूप में सामने आता है।
अपने शहर में आए दिन होते रोड एक्सीडेंट की बात करें तो स्थिति काफी खराब है। इस साल मेरठ में क् जनवरी से फ्0 मई तक फ्ब्म् दुघर्टनाएं हो चुकी हैं। जिसमें ख्फ् लोगों की मौत और करीब फ्क्ख् लोग घायल हुए। जबकि भ्फ्ब् वाहन क्षतिग्रस्त हुए।
| Meerut: शायद ऐसा कोई दिन गुजरता हो जब अपने सिटी की सड़क पर खून ना बहता हो। कारण कई हैं, लेकिन कभी किसी ने इस पर ध्यान देने का प्रयास नहीं किया। तीन जून को दिल्ली में हुए रोड एक्सीडेंट में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मौत हो गई। इस घटना की वजह से पब्लिक के साथ सरकार का भी हादसों की बढ़ती संख्या और उसके कारण पर भी ध्यान गया। एक्सीडेंट रोकने के लिए सुधार के साथ जागरुकता अभियान चलाने की बातें शुरू हुई। आई नेक्स्ट ने भी इस गंभीर मामले की पड़ताल खुद सड़क पर उतर कर की और रात क्ख् से सुबह आठ बजे तक रोड का लाइव ऑपरेशन किया। शहर में भारी वाहनों की एंट्री रात दस बजे के बाद का नियम है, लेकिन सिटी की किसी भी रोड पर शायद ही कभी दस बजने की इंतजार होता हो, इसके अलावा ओवर लोड की रफ्तार के मानक भी तय है, लेकिन यहां रफ्तार पर कंट्रोल नहीं होता। इसके अलावा रात में वाहनों की चेकिंग और उन पर लगाम के लिए पुलिस को सख्त आदेश है,्र लेकिन जब रात में पुलिस ही सड़क से गायब हो तो, बेलगाम वाहनों को रोकना किसके बस में है। रात के समय सिटी की तमाम मुख्य चेक पोस्ट और पुलिस चौकी खाली ही दिखाई दी। पिछले दिनों वेस्ट यूपी में हुए रोड एक्सीडेंट की घटनाओं को देखते तो अधिकांश दुर्घटनाओं का कारण रोड के किनारे खडे़ वाहन बने। तेज रफ्तार वाहन इन खडे़ वाहनों से टकराए और गंभीर हादसे हुए। शुक्रवार की रात भी सिटी रोड पर कई भारी वाहन रोड पर खराब हालत में खड़े दिखे। जबकि इन वाहनों के पास चेतावनी के नाम पर कुछ नहीं दिखा। उधर, रोड पर खड़ी इस मौत के प्रति पुलिस भी लापरवाही ही दिखी। रात के समय ओवर लोड वाहनों की बाढ़ शहर की सड़क पर आ जाती है। रात में शास्त्रीनगर से लेकर बेगमपुल और दिल्ली रोड पर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर ये वाहन दौड़ते दिखे। दिल्ली रोड पर तो ऐसे कई वाहनों के बीच आगे निकलने के लिए रेस भी होती दिखी। जबकि जागरण चौराहे से बेगमपुल तक पुलिस की कई चौकी और चेक पोस्ट है। लेकिन रोड पर रेस लगा रहे ओवर लोडिंग वाहनों को रोकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। आई नेक्स्ट की टीम को सिटी की कई रोड पर रात में अंधेरा मिला। अंधेरे में टूटी सड़क हमेशा हादसों का कारण बनती है। इसके अलावा तेजगढ़ी चौराहे के पास रोड पर बिखरी बजरी भी हादसों को न्यौता दे रही थी। टीम के सामने ही दो बाइक सवार फिसल गए। जबकि कई बड़े वाहन भी तेज बे्रक लगाने से अनियंत्रित होते होते बचे। रोड के किनारे सोते लोगों के वाहनों से कुचलने की खबर आए दिन सुनने को मिलती है। शहर में भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है। लेकिन इसके बाद भी पुलिस या प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार की रात भी दिल्ली रोड, बेगमपुल और शास्त्रीनगर की रोड पर कई जगह लोग रोड के किनारे सोते दिखे। सड़क के किनारे सोते लोगों को जगाने और उन्हें वहां से हटाया या इस तरह के जोखिम से आगाह करने के लिए कोई मौके पर नजर नहीं आया। रोड पर होने वाली दुर्घटनाओं को और आपराधिक वारदातों को देखते हुए शासन ने रात में हाईवे से लेकर लिंक रोड तक पर गश्त के निर्देश जारी किए हुए है। पुलिस के आला अधिकारी भी इसे लेकर खूब बड़ी बड़ी बातें करते रहते हैं। लेकिन रात में शहर की तमाम रोड पर टीम घूमी और जायजा लिया। लेकिन कही पर पुलिस के गश्ती दल से सामना नहीं हुआ। पीक आवर्स में शहर की अधिकांश रोड पर जाम रहता है, ऐसे में वाहनों की रफ्तार पर कम और नियंत्रण में होती है। दूसरी ओर, क्ख् से सुबह आठ बजे तक रोड पर ट्रैफिक काफी कम होता है। खाली रोड पर चालक भी वाहनों को बेलगाम होकर दौड़ाते है, नियम भी ताक पर होते है, नतीजा रोड एक्सीडेंट के रूप में सामने आता है। अपने शहर में आए दिन होते रोड एक्सीडेंट की बात करें तो स्थिति काफी खराब है। इस साल मेरठ में क् जनवरी से फ्शून्य मई तक फ्ब्म् दुघर्टनाएं हो चुकी हैं। जिसमें ख्फ् लोगों की मौत और करीब फ्क्ख् लोग घायल हुए। जबकि भ्फ्ब् वाहन क्षतिग्रस्त हुए। |
आईबैरी ऑक्सस की सीरीज में एक और स्मार्टफोन जो यूजर के बजट एव स्मार्टफोन पर काफी तरह की टॉस्किंग को ध्यान में रखकर यूजर के लिये इजात किया गया है. आईबैरी ऑक्सस स्टनर स्मार्टफोन में यूजर के लिये 5 इंच का एचडी डिस्प्ले व 720x1280 पिक्सल के रिजोलुशन के साथ दिया हुआ है. जबकि प्रोसेसर की बात की जाये तो इस स्मार्टफोन में यूजर के लिये ओक्टा कोर प्रोसेसर दिया हुआ है.
यूजर के लिये बेहतर मल्टीटॉस्किंग स्मार्टफोन इसलिए कह सकते है क्योकि इनबिल्ट स्टोरेज क्षमता के साथ व स्मार्टफोन दी हुई 3 जीबी रैम स्मार्टफोन की परफॉर्मन्स को बेहतर को बेहतर बनातीं है. इसके अलावा स्मार्टफोन में पावर सपोर्ट के लिये भी 3000 mah बैटरी सपोर्ट दिया हुआ.
स्मार्टफोन को ज्यादातर लोग कैमरे की क्वालिटी को लेकर के ही ख़रीदे है. तो आपको बता दे इस स्मार्टफोन में 8 मेगापिक्सल का रियर एव 5 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया हुआ. मीडिया स्टोरेज के लिये कंपनी के द्वारा 16 जीबी का सपोर्ट दिया हुआ है. आईबैरी ऑक्सस स्टनर की ऑनलाइन कीमत 14990 रूपये है.
निचे दी हुई स्टोरी जरूर पढ़े और कमेंट बॉक्स में कमेंट कर प्रोत्साहित करे आगे बेहतर सूचनाओ के किये बने रहे व स्टोरी शेयर करे.
क्या है रैंजमवेयर साइबर अटैक ?
| आईबैरी ऑक्सस की सीरीज में एक और स्मार्टफोन जो यूजर के बजट एव स्मार्टफोन पर काफी तरह की टॉस्किंग को ध्यान में रखकर यूजर के लिये इजात किया गया है. आईबैरी ऑक्सस स्टनर स्मार्टफोन में यूजर के लिये पाँच इंच का एचडी डिस्प्ले व सात सौ बीसxएक हज़ार दो सौ अस्सी पिक्सल के रिजोलुशन के साथ दिया हुआ है. जबकि प्रोसेसर की बात की जाये तो इस स्मार्टफोन में यूजर के लिये ओक्टा कोर प्रोसेसर दिया हुआ है. यूजर के लिये बेहतर मल्टीटॉस्किंग स्मार्टफोन इसलिए कह सकते है क्योकि इनबिल्ट स्टोरेज क्षमता के साथ व स्मार्टफोन दी हुई तीन जीबी रैम स्मार्टफोन की परफॉर्मन्स को बेहतर को बेहतर बनातीं है. इसके अलावा स्मार्टफोन में पावर सपोर्ट के लिये भी तीन हज़ार mah बैटरी सपोर्ट दिया हुआ. स्मार्टफोन को ज्यादातर लोग कैमरे की क्वालिटी को लेकर के ही ख़रीदे है. तो आपको बता दे इस स्मार्टफोन में आठ मेगापिक्सल का रियर एव पाँच मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया हुआ. मीडिया स्टोरेज के लिये कंपनी के द्वारा सोलह जीबी का सपोर्ट दिया हुआ है. आईबैरी ऑक्सस स्टनर की ऑनलाइन कीमत चौदह हज़ार नौ सौ नब्बे रूपये है. निचे दी हुई स्टोरी जरूर पढ़े और कमेंट बॉक्स में कमेंट कर प्रोत्साहित करे आगे बेहतर सूचनाओ के किये बने रहे व स्टोरी शेयर करे. क्या है रैंजमवेयर साइबर अटैक ? |
. . तो अब ओलंपिक में भी होगी चौको-छक्कों की बरसात?
हैदराबाद टेस्ट : इन पांच कारणों से फिर होगी जीत हमारी!
सचिन तेंदुलकर : 141 गेंद, 19 चौके, 4 छक्के, 175 रन, लेकिन. .
जागरण. कॉम पोल : 63 फीसदी लोग प्रज्ञान के सपोर्ट में, आपकी क्या राय?
भारत-पाक थे आमने-सामने, सड़कें थीं सूनी, रोंगटे हो गए थे खड़े. .
वाटसन का बयान, चेन्नई टेस्ट में धौनी ने किया खूब प्रताडि़त!
हैदराबाद में बनी दो पिच, क्या कंगारुओं को फंसाने की है तैयारी?
हेडन ने बताई सचिन से जुड़ी रोचक घटना, रुक गया था खेल. .
जडेजा का हमला, ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को कहा घमंडी!
| . . तो अब ओलंपिक में भी होगी चौको-छक्कों की बरसात? हैदराबाद टेस्ट : इन पांच कारणों से फिर होगी जीत हमारी! सचिन तेंदुलकर : एक सौ इकतालीस गेंद, उन्नीस चौके, चार छक्के, एक सौ पचहत्तर रन, लेकिन. . जागरण. कॉम पोल : तिरेसठ फीसदी लोग प्रज्ञान के सपोर्ट में, आपकी क्या राय? भारत-पाक थे आमने-सामने, सड़कें थीं सूनी, रोंगटे हो गए थे खड़े. . वाटसन का बयान, चेन्नई टेस्ट में धौनी ने किया खूब प्रताडि़त! हैदराबाद में बनी दो पिच, क्या कंगारुओं को फंसाने की है तैयारी? हेडन ने बताई सचिन से जुड़ी रोचक घटना, रुक गया था खेल. . जडेजा का हमला, ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को कहा घमंडी! |
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में कोशी रिवर के पास स्थित गांव में एक परिवार को अपने बच्चे को दफनाने के लिए जगह नहीं मिली तो उसे कोशी नदी में बहा दिया।
बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 500 सकूली इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। दरअसल, बाढ़ के चलते अधिकतर लोग स्कूलों में शरण लिए हुए हैं, जहां इनके लिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बता दें, उत्तर भारत, दक्षिणी नेपाल और उत्तरी बांग्लादेश के इलाके में लाखों लोग हाल के सालों में आयी सबसे भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक हजार से भी अधिक लोगों की जान बाढ़ की आपदा के कारण चली गई है।
संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने कहा है कि भारत, बंगलादेश और नेपाल में लगभग एक करोड़ 60 लाख बच्चों को वहां आई "विनाशकारी" बाढ़ के कारण जीवन-रक्षक मदद की तत्काल जरूरत है।
| इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में कोशी रिवर के पास स्थित गांव में एक परिवार को अपने बच्चे को दफनाने के लिए जगह नहीं मिली तो उसे कोशी नदी में बहा दिया। बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम पाँच सौ सकूली इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। दरअसल, बाढ़ के चलते अधिकतर लोग स्कूलों में शरण लिए हुए हैं, जहां इनके लिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। बता दें, उत्तर भारत, दक्षिणी नेपाल और उत्तरी बांग्लादेश के इलाके में लाखों लोग हाल के सालों में आयी सबसे भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक हजार से भी अधिक लोगों की जान बाढ़ की आपदा के कारण चली गई है। संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने कहा है कि भारत, बंगलादेश और नेपाल में लगभग एक करोड़ साठ लाख बच्चों को वहां आई "विनाशकारी" बाढ़ के कारण जीवन-रक्षक मदद की तत्काल जरूरत है। |
पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने सिर्फ प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने पर ही विचार व्यक्त नहीं किए बल्कि उस व्यक्ति का भी महिमामंडन किया, जिसे हिंदू विरोधी 'बुद्धिजीवी' के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है।
दरअसल, तमिलनाडु में कोयंबटूर के सुंदरपुरम इलाके में ईवी रामासामी जिसे कि 'पेरियार' के नाम से जाना जाता है, की प्रतिमा शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को भगवा रंग में नजर आई। जिसके बाद डीएमके, आदि के कार्यकर्ताओं ने मौके पर प्रदर्शन किया।
कुछ लोगों द्वारा पेरियार की प्रतिमा पर भगवा रंग से पुताई कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, पेरियार समर्थकों ने दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर ऐसी घटनाएँ फिर से हुई तो वे अपना प्रदर्शन उग्र कर देंगे।
पेरियार की यह प्रतिमा वर्ष 1995 में इस शहर में स्थापित की गई 3 समाज सुधारकों की प्रतिमाओं में से एक है। इस मामले में कथित रूप से भारत सेना संगठन के सदस्य 21 वर्षीय अरुण कृष्णन ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया है।
यह ध्यान रखने वाली बात है कि दक्षिण भारत में पेरियारवादियों के समर्थन की बदौलत ही 2019 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी 50 सीटों को पार करने में सफल रही। इस तरह से देखा जाए तो हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने वाले पेरियार का महिमामंडन कर राहुल गाँधी सिर्फ पेरियार विचारधारा के समर्थकों का एहसान ही वापस कर रहे हैं।
सोनिया गाँधी के नेतृत्व तहत कॉन्ग्रेस पार्टी का लंबा इतिहास बताता है कि एक भी कोई ऐसा हिंदू-विरोधी कार्यकर्ता या 'बुद्धिजीवी' नहीं है, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी अपना समर्थन नहीं देती है। सत्ता में UPA के दौरान, सोनिया गाँधी ने अपनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को उन कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया, जिन्होंने विदेशों से फंड प्राप्त किया और विवादित हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया।
यह भी याद रखने की जरूरत है कि राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ हिंदू समुदाय के प्रति अनादर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है, जिसे सोनिया गाँधी ने भलीभाँती सींचने का काम किया।
उदाहरण के लिए, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी के कार्यकाल के दौरान, केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश में कहीं भी गोमांस प्रतिबंध के प्रति अपने विरोध प्रदर्शन में एक बछड़े की निर्मम हत्या की थी। ऐसी परिस्थितियों में, यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है कि राहुल गाँधी ने पेरियार का महिमामंडन किया।
पेरियार ने रामायण के बारे में कई भ्रम फैलाए। श्री राम पर जातिवादी होने का आरोप लगाने से लेकर यह तक दावा किया गया कि उन्होंने महिलाओं को मार डाला। पेरियार के अनुसार, हिंदू महाकाव्य रामायण और महाभारत को द्रविड़ पहचान को मिटाने के लिए 'चालाक आर्यों' द्वारा लिखा गया था। अगर पेरियार की मानें तो, राम, भरत को सिंहासन ना मिलने की साजिश का हिस्सा थे, जो पेरियार के अनुसार दशरथ के योग्य उत्तराधिकारी थे।
राम के प्रति अपनी घृणा के अलावा, पेरियार ने भगवान गणेश की मूर्तियों को भी खंडित किया था। उसने श्री राम के चित्र भी जलाए थे। उसकी मृत्यु के बाद, पेरियारवादियों ने दशहरा के साथ ही 'रावण लीला' को वार्षिक आयोजन बनाने का प्रयास किया।
आज इंदिरा गाँधी का पोता उन्हीं लोगों के साथ खड़ा है, जिन्होंने इंदिरा गाँधी का जीवन भर विरोध किया था। यह राहुल गाँधी और उनकी माँ, सोनिया गाँधी के तहत कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता में आए बदलाव को भी दर्शाता है, जहाँ पार्टी सक्रिय रूप से हर किसी को हिंदू देवी-देवताओं के बारे में बोलने के लिए प्रेरित करती है और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का हर प्रपंच करती है।
| पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने सिर्फ प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने पर ही विचार व्यक्त नहीं किए बल्कि उस व्यक्ति का भी महिमामंडन किया, जिसे हिंदू विरोधी 'बुद्धिजीवी' के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है। दरअसल, तमिलनाडु में कोयंबटूर के सुंदरपुरम इलाके में ईवी रामासामी जिसे कि 'पेरियार' के नाम से जाना जाता है, की प्रतिमा शुक्रवार को भगवा रंग में नजर आई। जिसके बाद डीएमके, आदि के कार्यकर्ताओं ने मौके पर प्रदर्शन किया। कुछ लोगों द्वारा पेरियार की प्रतिमा पर भगवा रंग से पुताई कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, पेरियार समर्थकों ने दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर ऐसी घटनाएँ फिर से हुई तो वे अपना प्रदर्शन उग्र कर देंगे। पेरियार की यह प्रतिमा वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे में इस शहर में स्थापित की गई तीन समाज सुधारकों की प्रतिमाओं में से एक है। इस मामले में कथित रूप से भारत सेना संगठन के सदस्य इक्कीस वर्षीय अरुण कृष्णन ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया है। यह ध्यान रखने वाली बात है कि दक्षिण भारत में पेरियारवादियों के समर्थन की बदौलत ही दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी पचास सीटों को पार करने में सफल रही। इस तरह से देखा जाए तो हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने वाले पेरियार का महिमामंडन कर राहुल गाँधी सिर्फ पेरियार विचारधारा के समर्थकों का एहसान ही वापस कर रहे हैं। सोनिया गाँधी के नेतृत्व तहत कॉन्ग्रेस पार्टी का लंबा इतिहास बताता है कि एक भी कोई ऐसा हिंदू-विरोधी कार्यकर्ता या 'बुद्धिजीवी' नहीं है, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी अपना समर्थन नहीं देती है। सत्ता में UPA के दौरान, सोनिया गाँधी ने अपनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को उन कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया, जिन्होंने विदेशों से फंड प्राप्त किया और विवादित हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया। यह भी याद रखने की जरूरत है कि राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ हिंदू समुदाय के प्रति अनादर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है, जिसे सोनिया गाँधी ने भलीभाँती सींचने का काम किया। उदाहरण के लिए, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी के कार्यकाल के दौरान, केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश में कहीं भी गोमांस प्रतिबंध के प्रति अपने विरोध प्रदर्शन में एक बछड़े की निर्मम हत्या की थी। ऐसी परिस्थितियों में, यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है कि राहुल गाँधी ने पेरियार का महिमामंडन किया। पेरियार ने रामायण के बारे में कई भ्रम फैलाए। श्री राम पर जातिवादी होने का आरोप लगाने से लेकर यह तक दावा किया गया कि उन्होंने महिलाओं को मार डाला। पेरियार के अनुसार, हिंदू महाकाव्य रामायण और महाभारत को द्रविड़ पहचान को मिटाने के लिए 'चालाक आर्यों' द्वारा लिखा गया था। अगर पेरियार की मानें तो, राम, भरत को सिंहासन ना मिलने की साजिश का हिस्सा थे, जो पेरियार के अनुसार दशरथ के योग्य उत्तराधिकारी थे। राम के प्रति अपनी घृणा के अलावा, पेरियार ने भगवान गणेश की मूर्तियों को भी खंडित किया था। उसने श्री राम के चित्र भी जलाए थे। उसकी मृत्यु के बाद, पेरियारवादियों ने दशहरा के साथ ही 'रावण लीला' को वार्षिक आयोजन बनाने का प्रयास किया। आज इंदिरा गाँधी का पोता उन्हीं लोगों के साथ खड़ा है, जिन्होंने इंदिरा गाँधी का जीवन भर विरोध किया था। यह राहुल गाँधी और उनकी माँ, सोनिया गाँधी के तहत कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता में आए बदलाव को भी दर्शाता है, जहाँ पार्टी सक्रिय रूप से हर किसी को हिंदू देवी-देवताओं के बारे में बोलने के लिए प्रेरित करती है और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का हर प्रपंच करती है। |
बहादुरगढ़ - - - - -एक हरियाली-अनेक खुशहाली उत्सव में बीसीसीआई बहादुरगढ़ ने भी कदमताल करते हुए ढाई लाख पौधों को रोपित करने में दस हजार पौधों की भागीदारी निभाने का विश्वास दिलाया। बुधवार को उपायुक्त अनिता यादव ने बीसीसीआई सभागार में उद्यमियों से बातचीत करते हुए उत्सव के उद्देश्यों से अवगत कराया जिसमें सभी ने इस सकारात्मक मुहिम मेें सहभागी बनते हुए जिले को हरा भरा बनाने की बात कही।
उपायुक्त अनिता यादव ने बताया कि झज्जर जिले को हरा-भरा बनाने की मुहिम में 8 अगस्त को एक हरियाली-अनेक खुशहाली उत्सव मनाया जा रहा है जिसमें सुबह 9 बजे से 11 बजे तक जिले में ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 6 अगस्त तक गड्ढे खोदे जा रहे हैं और एक साथ 8 अगस्त को दो घंटे में पौधरोपण कार्यक्रम होगा।
उपायुक्त ने उद्यमियों को इस मुहिम मेें सहभागी बनने की अपील करते हुए कहा कि न केवल पौधरोपण कार्य होगा बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेवारी भी सुनिश्चित की जाएगी। उद्यमियों ने बैठक में उपायुक्त को बताया कि बीसीसीआई की ओर से करीब 10 हजार पौधे जिले में रोपित किए जाएंगे और उनके संरक्षण का दायित्व भी वे ही संभालेंगे। उन्होंने बताया कि पौधरोपण कार्यक्रम में फलदार, फूलदार पौधे रोपित किए जाएंगे।
उपायुक्त ने बताया कि प्रातःकालीन सत्र में जिले के तीनों उपमंडल के शहरी व ग्र्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण होगा वहीं सांय कालीन सत्र में 3 बजे इसी दिन झज्जर स्थित राजकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर के ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें बालीवाड गायक गजेंद्र फौगाट सहित अन्य कलाकार प्रस्तुति देंगे। उन्होंने झज्जर जिले के लोगों को इस उत्सव में भागीदारी निभाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेवारी निभाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने उद्यमियों द्वारा रखी गई विभिन्न मांगों को सुनते हुए उनकी हर समस्या का समाधान करने की बात कही।
इसके उपरांत उपायुक्त श्रीमती यादव बहादुरगढ़ के नवनिर्मित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह पहुंची और पत्रकारों से रूबरू हुई। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी निगरानी बरती जा रही है और विभागीय स्तर पर अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि आमजन की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर हो। उन्होंने एक हरियाली-अनेक खुशहाली उत्सव के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
इस मौके पर एसडीएम बहादुरगढ़ मनीषा शर्मा, डीडीपीओ विशाल कुमार, डीआईपीआरओ नीरज कुमार, तहसीलदार मातूराम, बीडीपीओ रामफल सिंह संबंधित अधिकारीगण व बीसीसीआई के अध्यक्ष रामकिशन सिंघल,पूर्व अध्यक्ष विपीन बजाज, महासचिव सुभाष जग्गा, जे. के. अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी व उद्यमी मौजूद थे।
| बहादुरगढ़ - - - - -एक हरियाली-अनेक खुशहाली उत्सव में बीसीसीआई बहादुरगढ़ ने भी कदमताल करते हुए ढाई लाख पौधों को रोपित करने में दस हजार पौधों की भागीदारी निभाने का विश्वास दिलाया। बुधवार को उपायुक्त अनिता यादव ने बीसीसीआई सभागार में उद्यमियों से बातचीत करते हुए उत्सव के उद्देश्यों से अवगत कराया जिसमें सभी ने इस सकारात्मक मुहिम मेें सहभागी बनते हुए जिले को हरा भरा बनाने की बात कही। उपायुक्त अनिता यादव ने बताया कि झज्जर जिले को हरा-भरा बनाने की मुहिम में आठ अगस्त को एक हरियाली-अनेक खुशहाली उत्सव मनाया जा रहा है जिसमें सुबह नौ बजे से ग्यारह बजे तक जिले में ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में छः अगस्त तक गड्ढे खोदे जा रहे हैं और एक साथ आठ अगस्त को दो घंटे में पौधरोपण कार्यक्रम होगा। उपायुक्त ने उद्यमियों को इस मुहिम मेें सहभागी बनने की अपील करते हुए कहा कि न केवल पौधरोपण कार्य होगा बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेवारी भी सुनिश्चित की जाएगी। उद्यमियों ने बैठक में उपायुक्त को बताया कि बीसीसीआई की ओर से करीब दस हजार पौधे जिले में रोपित किए जाएंगे और उनके संरक्षण का दायित्व भी वे ही संभालेंगे। उन्होंने बताया कि पौधरोपण कार्यक्रम में फलदार, फूलदार पौधे रोपित किए जाएंगे। उपायुक्त ने बताया कि प्रातःकालीन सत्र में जिले के तीनों उपमंडल के शहरी व ग्र्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण होगा वहीं सांय कालीन सत्र में तीन बजे इसी दिन झज्जर स्थित राजकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर के ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें बालीवाड गायक गजेंद्र फौगाट सहित अन्य कलाकार प्रस्तुति देंगे। उन्होंने झज्जर जिले के लोगों को इस उत्सव में भागीदारी निभाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेवारी निभाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने उद्यमियों द्वारा रखी गई विभिन्न मांगों को सुनते हुए उनकी हर समस्या का समाधान करने की बात कही। इसके उपरांत उपायुक्त श्रीमती यादव बहादुरगढ़ के नवनिर्मित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह पहुंची और पत्रकारों से रूबरू हुई। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी निगरानी बरती जा रही है और विभागीय स्तर पर अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि आमजन की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर हो। उन्होंने एक हरियाली-अनेक खुशहाली उत्सव के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर एसडीएम बहादुरगढ़ मनीषा शर्मा, डीडीपीओ विशाल कुमार, डीआईपीआरओ नीरज कुमार, तहसीलदार मातूराम, बीडीपीओ रामफल सिंह संबंधित अधिकारीगण व बीसीसीआई के अध्यक्ष रामकिशन सिंघल,पूर्व अध्यक्ष विपीन बजाज, महासचिव सुभाष जग्गा, जे. के. अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी व उद्यमी मौजूद थे। |
DEHRADUN : लोकसभा इलेक्शन को देखते हुए गठित की गई सर्विलांस टीम ने चेकिंग के दौरान एक कार में लाई जा रही छह लाख ख्भ् हजार रुपए की नगदी बरामद की है। विवरण न दे पाने के कारण टीम ने धनराशि जब्त कर ली है। दरअसल, मंडे मॉर्निग को सर्विलांस टीम नंदा की चौकी के पास चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक कार में छह लाख ख्भ् हजार क्भ्0 रुपए की नगदी बरामद हुई। कार चालक हरिपुर सेलाकुई निवासी दिनेश क्षेत्री पैसों का विवरण टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाया। हालांकि उसने बताया कि उसका मसूरी डायवर्जन पर पेट्रोल पंप है और वह उक्त धनराशि को बैंक में जमा करवाने ले जा रहा था, लेकिन उचित विवरण न मिल पाने के कारण टीम ने धनराशि जब्त कर ली।
| DEHRADUN : लोकसभा इलेक्शन को देखते हुए गठित की गई सर्विलांस टीम ने चेकिंग के दौरान एक कार में लाई जा रही छह लाख ख्भ् हजार रुपए की नगदी बरामद की है। विवरण न दे पाने के कारण टीम ने धनराशि जब्त कर ली है। दरअसल, मंडे मॉर्निग को सर्विलांस टीम नंदा की चौकी के पास चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक कार में छह लाख ख्भ् हजार क्भ्शून्य रुपयापए की नगदी बरामद हुई। कार चालक हरिपुर सेलाकुई निवासी दिनेश क्षेत्री पैसों का विवरण टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाया। हालांकि उसने बताया कि उसका मसूरी डायवर्जन पर पेट्रोल पंप है और वह उक्त धनराशि को बैंक में जमा करवाने ले जा रहा था, लेकिन उचित विवरण न मिल पाने के कारण टीम ने धनराशि जब्त कर ली। |
शाहजहांपुर की पुवायां विधानसभा क्षेत्र से 5 बार विधायक रह चुके चेतराम के गृह ग्राम हंसपुर गांव विकास को लेकर काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन जिस गांव का बेटा कांग्रेस के समय में 4 बार और 2017 में बीजेपी से एक बार कुल मिलाकर 5 बार क्षेत्र से विधायक रह चुका है। जिसने 5 साल अपने मूल गांव का विकास नहीं कराया व क्षेत्र का विकास क्या करेगा ? यह बड़ा ही सोचनीय विषय है।
पुवायां क्षेत्र से विधायक चेतराम खुटार क्षेत्र गांव हंसपुर के मूल निवासी हैं, जोकि 4 बार कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं, और पिछली बार 2017 में 72 हजार वोटों से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी शकुंतला देवी को हराकर भाजपा से विधायक बने थे। तो लोगों में आस जगी थी कि शायद अब की बार विधायक चेतराम अपने मूल गांव हंसपुर का चौमुखी विकास करेंगे। लेकिन विधायक जी जीतने के बाद अपने मूल गांव के विकास को फिर से भूल गए और उनका गांव हंसपुर टकटकी लगाकर आज भी तक उनका इंतजार कर रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने अब एक बार फिर 14 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए भाजपा से चेतराम को दोबारा मैदान में उतारा है। दैनिक भास्कर की टीम ने विधायक के गांव हंसपुर का किया दौरा तो सामने आई हकीकत विधायक के गांव के विकास की हकीकत उस समय सामने आ गई। जब दैनिक भास्कर की टीम चेतराम के गृह गांव हंसपुर में चुनावी माहौल का जायजा लेने पहुंची। हंसपुर खुटार से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है।
खुटार मैलानी हाईवे से विधायक के गांव को जाने वाला मार्ग बेहद दयनीय स्थिति में है। रोड पर भारी भारी गड्ढे एवं जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सरकारी हैंडपंप के पास गंदे पानी की निकासी न होने के कारण सरकारी नल के पास गंदा पानी जमा है। गांव में जल निकास की सुविधा न होने के कारण सरकारी हैंडपंप के किनारे जलभराव की स्थिति है। हालांकि ग्रामीण किसी से भलाई बुराई न बने इसके चलते स्पष्ट कहने व कैमरे के सामने आने से बच रहे हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| शाहजहांपुर की पुवायां विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक रह चुके चेतराम के गृह ग्राम हंसपुर गांव विकास को लेकर काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन जिस गांव का बेटा कांग्रेस के समय में चार बार और दो हज़ार सत्रह में बीजेपी से एक बार कुल मिलाकर पाँच बार क्षेत्र से विधायक रह चुका है। जिसने पाँच साल अपने मूल गांव का विकास नहीं कराया व क्षेत्र का विकास क्या करेगा ? यह बड़ा ही सोचनीय विषय है। पुवायां क्षेत्र से विधायक चेतराम खुटार क्षेत्र गांव हंसपुर के मूल निवासी हैं, जोकि चार बार कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं, और पिछली बार दो हज़ार सत्रह में बहत्तर हजार वोटों से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी शकुंतला देवी को हराकर भाजपा से विधायक बने थे। तो लोगों में आस जगी थी कि शायद अब की बार विधायक चेतराम अपने मूल गांव हंसपुर का चौमुखी विकास करेंगे। लेकिन विधायक जी जीतने के बाद अपने मूल गांव के विकास को फिर से भूल गए और उनका गांव हंसपुर टकटकी लगाकर आज भी तक उनका इंतजार कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अब एक बार फिर चौदह फरवरी को होने वाले मतदान के लिए भाजपा से चेतराम को दोबारा मैदान में उतारा है। दैनिक भास्कर की टीम ने विधायक के गांव हंसपुर का किया दौरा तो सामने आई हकीकत विधायक के गांव के विकास की हकीकत उस समय सामने आ गई। जब दैनिक भास्कर की टीम चेतराम के गृह गांव हंसपुर में चुनावी माहौल का जायजा लेने पहुंची। हंसपुर खुटार से लगभग बीस किलोग्राममीटर की दूरी पर है। खुटार मैलानी हाईवे से विधायक के गांव को जाने वाला मार्ग बेहद दयनीय स्थिति में है। रोड पर भारी भारी गड्ढे एवं जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सरकारी हैंडपंप के पास गंदे पानी की निकासी न होने के कारण सरकारी नल के पास गंदा पानी जमा है। गांव में जल निकास की सुविधा न होने के कारण सरकारी हैंडपंप के किनारे जलभराव की स्थिति है। हालांकि ग्रामीण किसी से भलाई बुराई न बने इसके चलते स्पष्ट कहने व कैमरे के सामने आने से बच रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
कोझिकोड (केरल), 29 दिसंबर मलयालम फिल्मों में अपने संगीत के दम पर अलग पहचान बनाने वाले मशहूर संगीतकार कैथापरम विश्वनाथन नम्बूदिरी का बुधवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 58 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि संगीत निर्देशक नम्बूदिरी ने सीमित संख्या की अपनी फिल्मों के जरिए ही दिग्गज संगीतकारों में अलग जगह बनाई थी। वह मशहूर गीतकार-संगीतकार कैथापरम दामोदरन नम्बूदिरी के छोटे भाई थे।
विश्वनाथन नम्बूदिरी ने 20 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया था। फिल्म कन्नकी के लिए उन्हें वर्ष 2001 में केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया था। नम्बूदिरी अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं।
केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने नम्बूदिरी के निधन पर शोक जताया है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| कोझिकोड , उनतीस दिसंबर मलयालम फिल्मों में अपने संगीत के दम पर अलग पहचान बनाने वाले मशहूर संगीतकार कैथापरम विश्वनाथन नम्बूदिरी का बुधवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह अट्ठावन वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि संगीत निर्देशक नम्बूदिरी ने सीमित संख्या की अपनी फिल्मों के जरिए ही दिग्गज संगीतकारों में अलग जगह बनाई थी। वह मशहूर गीतकार-संगीतकार कैथापरम दामोदरन नम्बूदिरी के छोटे भाई थे। विश्वनाथन नम्बूदिरी ने बीस से अधिक फिल्मों में संगीत दिया था। फिल्म कन्नकी के लिए उन्हें वर्ष दो हज़ार एक में केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया था। नम्बूदिरी अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने नम्बूदिरी के निधन पर शोक जताया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
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ADULT साइट पर लीक हो गईं प्राइवेट तस्वीरें..एक्ट्रेस बोलीं- 'लोग मुझे न्यूड भी देख चुके हैं'
हाल ही में डेमी की कुछ बेहद बोल्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं। ये तस्वीरें एक एडल्ट साइट पर मिली हैं।
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हाल ही में डेमी की कुछ बेहद बोल्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं। ये तस्वीरें एक एडल्ट साइट पर मिली हैं। वहीं जब ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होकर अभिनेत्री डेमी के पास पहुंची तो वे इस पर हैरान नहीं हुईं।
ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची?
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Muzaffarnagar :मुजफ्फरनगर। लगातार ठंड से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। हालांकि रविवार को धूप काफी तेज थी लेकिन इसके बावजूद भी ठंड भी कम नहीं थी और सुबह शाम तो ठंड ने अपना पूरा असर दिखाया। शीतलहर से जिला कांप उठा। बढ़ती ठंड के चलते चहुंओर अलाव व अंगीठी जलनी शुरू हो गई।
धूप खिलने के बाद भी दिन के तापमान में भारी गिरावट रही हालांकि धूप में बैठकर लेगों ने राहत की सास ली। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी व चल रही शीतलहर की चपेट में जिला भी आ गया है। तीन दिन से शीतलहर का प्रकोप जारी है। शीतलहर के चलते जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ठंडी हवाओं ने लोगों को ठिठुरा दिया।
पूरे दिन ठंडी हवा चलती रही। ठंड के चलते सड़कों पर आवागमन अन्य दिनों की अपेक्षा कम रहा। सुबह देर से बाजार खुले और शाम को अन्य दिनों की अपेक्षा जल्द बंद हो गए। ठंड बढ़ने से हीटर व वार्मर शुरू हो गए। जगह-जगह अलाव भी शुरू हो गए। गली-मोहल्लों व घरों पर लकड़ी व कोयले की अंगीठियां भी जलनी शुरू हो गई।
देहात क्षेत्र में पत्ती, पराली, उपले, लकड़ी आदि जलाकर लोग सर्दी से बचाव का प्रयास कर रहे हैं। तेज सर्द हवाओं ने लोगो को ठिठुरने पर विवश कर दिया। शीतलहर से बढ़ी सर्दी से ठिठुरते लोग अलाव जलाने को मजबूर हो गए। भीषण ठंड के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को भी सर्दी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्कूलों में बच्चे ठिठुरते हुए पहुंचे। तीन दिन से लगातार सर्दी बढ रही है। सर्दी बढ़ जाने से लोगों की जीवन अस्त व्यस्त हो गया। दिन भर ठंडी हवाएं चलती रहीं। ठिठुरन के चलते लोगों ने घर से निकलने में कोताही बरती। धूप भी ठंडी हवाओं से राहत कुछ ही राहत मिली। हालांकि धूप अच्छी खासी गर्म थी लेकिन हवाएं भी कम नहीं थी।
कड़ी सर्दी के चलते लोग गर्म व ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आए। बाजार में गर्म कपड़ों के अलावा ऊनी टोपियों और मफलर, इनर आदि की बिक्री ने जोर पकड़ लिया। हालांकि देर शाम छह बजे से ही ठंड के कारण बाजार भी बंद होने लगते है दुकानदार भी अपने घर की ओर ठंड के चलते समय से ही जाना उचित समझ रहे है।
| Muzaffarnagar :मुजफ्फरनगर। लगातार ठंड से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। हालांकि रविवार को धूप काफी तेज थी लेकिन इसके बावजूद भी ठंड भी कम नहीं थी और सुबह शाम तो ठंड ने अपना पूरा असर दिखाया। शीतलहर से जिला कांप उठा। बढ़ती ठंड के चलते चहुंओर अलाव व अंगीठी जलनी शुरू हो गई। धूप खिलने के बाद भी दिन के तापमान में भारी गिरावट रही हालांकि धूप में बैठकर लेगों ने राहत की सास ली। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी व चल रही शीतलहर की चपेट में जिला भी आ गया है। तीन दिन से शीतलहर का प्रकोप जारी है। शीतलहर के चलते जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ठंडी हवाओं ने लोगों को ठिठुरा दिया। पूरे दिन ठंडी हवा चलती रही। ठंड के चलते सड़कों पर आवागमन अन्य दिनों की अपेक्षा कम रहा। सुबह देर से बाजार खुले और शाम को अन्य दिनों की अपेक्षा जल्द बंद हो गए। ठंड बढ़ने से हीटर व वार्मर शुरू हो गए। जगह-जगह अलाव भी शुरू हो गए। गली-मोहल्लों व घरों पर लकड़ी व कोयले की अंगीठियां भी जलनी शुरू हो गई। देहात क्षेत्र में पत्ती, पराली, उपले, लकड़ी आदि जलाकर लोग सर्दी से बचाव का प्रयास कर रहे हैं। तेज सर्द हवाओं ने लोगो को ठिठुरने पर विवश कर दिया। शीतलहर से बढ़ी सर्दी से ठिठुरते लोग अलाव जलाने को मजबूर हो गए। भीषण ठंड के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को भी सर्दी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। स्कूलों में बच्चे ठिठुरते हुए पहुंचे। तीन दिन से लगातार सर्दी बढ रही है। सर्दी बढ़ जाने से लोगों की जीवन अस्त व्यस्त हो गया। दिन भर ठंडी हवाएं चलती रहीं। ठिठुरन के चलते लोगों ने घर से निकलने में कोताही बरती। धूप भी ठंडी हवाओं से राहत कुछ ही राहत मिली। हालांकि धूप अच्छी खासी गर्म थी लेकिन हवाएं भी कम नहीं थी। कड़ी सर्दी के चलते लोग गर्म व ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आए। बाजार में गर्म कपड़ों के अलावा ऊनी टोपियों और मफलर, इनर आदि की बिक्री ने जोर पकड़ लिया। हालांकि देर शाम छह बजे से ही ठंड के कारण बाजार भी बंद होने लगते है दुकानदार भी अपने घर की ओर ठंड के चलते समय से ही जाना उचित समझ रहे है। |
नई दिल्ली . पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक (PMC Bank) पर लगाई पाबंदियों और निर्देशों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 3 महीने और बढ़ा दिया है. अब यह प्रतिबंध 31 मार्च 2022 तक लगे रहेंगे. पहले यह बंदिशें 1 जनवरी 2022 तक के लिए लगाई गई थीं.
इससे पहले RBI ने 22 नवबंर 2021 को एक ड्राफ्ट समाधान रखा था, जिसके तहत यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को PMC बैंक का अधिग्रहण करना था. RBI ने इस मसौदे पर दोनों बैंकों के सदस्यों, डिपॉजिटर्स और अन्य लेनदारों से सुझाव और आपत्तियां मंगाई थी, जिसे जमा करने की आखिरी तारीख 10 दिसंबर 2021 थी.
योजना की मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. RBI ने कहा, "इसलिए, उपरोक्त निर्देशों और पांबदियों की अवधि का विस्तार करना आवश्यक बन जाता है. इसलिए इसे 31 मार्च 2022 तक बढ़ाया जाता है. बता दें कि PMC बैंक में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का पता चलने के बाद RBI ने सितंबर 2019 में बैंक का बोर्ड भंग कर इसे अपने हाथ में ले लिया था.
RBI ने PMC बैंक को यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (USFB) के साथ मिलाने का जो ड्राफ्ट स्कीम पेश किया था, उसके तहत PMC Bank की एसेट्स और लायबिलिटीज USFB के ऊपर आ जाएंगी. इसमें PMC Bank के ग्राहकों का पैसा लौटाना भी शामिल है. USFB के साथ विलय की डील में इन शर्तों को शामिल किया गया है ताकि ग्राहकों की रकम सुरक्षित रह सके.
PMC Bank में जिन ग्राहकों का पैसा फंसा है उन्हें अगले तीन से 10 साल के भीतर पूरा पैसा वापस मिल जाएगा. RBI के ड्राफ्ट स्कीम के मुताबिक, USFB 5 लाख रुपए की गारंटीड रकम डिपॉजिटर्स को देगी. बाकी बचे रकम की बात करें तो बैंक अब तक जो पैसा दे चुका है उसके बाद अगले दो साल में 50,000 रुपए और देगी. तीन साल के अंत में और 1 लाख रुपए का भुगतान करेगी. 4 साल के अंत में 3 लाख रुपए और 5 साल के अंत में 5. 5 लाख रुपए देगी. वहीं 10 साल के अंत में बाकी बची पूरी रकम PMC Bank के ग्राहकों को दे देगी.
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| नई दिल्ली . पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक पर लगाई पाबंदियों और निर्देशों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने तीन महीने और बढ़ा दिया है. अब यह प्रतिबंध इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक लगे रहेंगे. पहले यह बंदिशें एक जनवरी दो हज़ार बाईस तक के लिए लगाई गई थीं. इससे पहले RBI ने बाईस नवबंर दो हज़ार इक्कीस को एक ड्राफ्ट समाधान रखा था, जिसके तहत यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को PMC बैंक का अधिग्रहण करना था. RBI ने इस मसौदे पर दोनों बैंकों के सदस्यों, डिपॉजिटर्स और अन्य लेनदारों से सुझाव और आपत्तियां मंगाई थी, जिसे जमा करने की आखिरी तारीख दस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस थी. योजना की मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. RBI ने कहा, "इसलिए, उपरोक्त निर्देशों और पांबदियों की अवधि का विस्तार करना आवश्यक बन जाता है. इसलिए इसे इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक बढ़ाया जाता है. बता दें कि PMC बैंक में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का पता चलने के बाद RBI ने सितंबर दो हज़ार उन्नीस में बैंक का बोर्ड भंग कर इसे अपने हाथ में ले लिया था. RBI ने PMC बैंक को यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ मिलाने का जो ड्राफ्ट स्कीम पेश किया था, उसके तहत PMC Bank की एसेट्स और लायबिलिटीज USFB के ऊपर आ जाएंगी. इसमें PMC Bank के ग्राहकों का पैसा लौटाना भी शामिल है. USFB के साथ विलय की डील में इन शर्तों को शामिल किया गया है ताकि ग्राहकों की रकम सुरक्षित रह सके. PMC Bank में जिन ग्राहकों का पैसा फंसा है उन्हें अगले तीन से दस साल के भीतर पूरा पैसा वापस मिल जाएगा. RBI के ड्राफ्ट स्कीम के मुताबिक, USFB पाँच लाख रुपए की गारंटीड रकम डिपॉजिटर्स को देगी. बाकी बचे रकम की बात करें तो बैंक अब तक जो पैसा दे चुका है उसके बाद अगले दो साल में पचास,शून्य रुपयापए और देगी. तीन साल के अंत में और एक लाख रुपए का भुगतान करेगी. चार साल के अंत में तीन लाख रुपए और पाँच साल के अंत में पाँच. पाँच लाख रुपए देगी. वहीं दस साल के अंत में बाकी बची पूरी रकम PMC Bank के ग्राहकों को दे देगी. . |
Faridabad/Alive News : निशुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर सभी के लिए उपयोगी है और इन शिविरो में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेकर अपने स्वास्थ्य का निरीक्षण कराए यह उदगार बच्चे की सर्जन (पीडियाट्रीक सर्जन) डाक्टर स्वेता मल्होत्रा ने आज एनएच-5 स्थित तक्ष हेल्थ केयर सेन्टर में आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर को सम्बोधित करते हुए कहे। इस अवसर पर स्वेता मल्होत्रा ने कहा कि स्वास्थ्य हमारे लिए सबसे अधिक जरूरी है और इसको ठीक रखना हम सभी के लिए जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आज प्रदूषण सहित अन्य कई मिलावटी चीजों से हमारा शरीर पूरी तरह से खराब होता जा रहा है और इस शरीर को बचाने के लिए हमें समय समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवानी चाहिए। हरीश चंद मल्होत्रा ने बताया कि गर्मी व सर्दी दोनो ही मौसम में हमे अपने शरीर का पूरा पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज इस शिविर में लगभग 200 लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच करवायी एवं उन्हें बीमारियों से बचने के परामर्श भी दिये गये। इस अवसर पर मरीजो की जांच डा. आशीष, डा. प्रियल स्त्री रोग विशेषज्ञ, डा. संदीप मल्होत्रा, डा. कमल राजपूत ने मरीजों को परामर्श दिये।
| Faridabad/Alive News : निशुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर सभी के लिए उपयोगी है और इन शिविरो में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेकर अपने स्वास्थ्य का निरीक्षण कराए यह उदगार बच्चे की सर्जन डाक्टर स्वेता मल्होत्रा ने आज एनएच-पाँच स्थित तक्ष हेल्थ केयर सेन्टर में आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर को सम्बोधित करते हुए कहे। इस अवसर पर स्वेता मल्होत्रा ने कहा कि स्वास्थ्य हमारे लिए सबसे अधिक जरूरी है और इसको ठीक रखना हम सभी के लिए जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज प्रदूषण सहित अन्य कई मिलावटी चीजों से हमारा शरीर पूरी तरह से खराब होता जा रहा है और इस शरीर को बचाने के लिए हमें समय समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवानी चाहिए। हरीश चंद मल्होत्रा ने बताया कि गर्मी व सर्दी दोनो ही मौसम में हमे अपने शरीर का पूरा पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज इस शिविर में लगभग दो सौ लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच करवायी एवं उन्हें बीमारियों से बचने के परामर्श भी दिये गये। इस अवसर पर मरीजो की जांच डा. आशीष, डा. प्रियल स्त्री रोग विशेषज्ञ, डा. संदीप मल्होत्रा, डा. कमल राजपूत ने मरीजों को परामर्श दिये। |
19 октября 1941 года Государственный Комитет Обороны принял постановление о введении в Москве осадного положения. Около десятка бомб упало на территорию передающего радиоцентра узла связи Генерального штаба в Сокольниках. Особую опасность налеты авиации противника представляли для воздушных линий связи. Необходимо было срочно приступить к созданию запасного узла связи Генштаба, получившего название объект «Виктория». Район для строительства обозначил лично Сталин: город Арзамас - место Ставки Ивана Грозного.
सितंबर में वापस, संचार के पीपुल्स कमिसार, संचार के लिए रक्षा के उप-कमांडर और लाल सेना के संचार निदेशालय (GUSKA) के प्रमुख के प्रमुख कर्नल आई। टी। पेरिसेपिनक ने सोवियत संघ के जनरल मार्शल बी। मुख्य। संचार केंद्र। जनरल स्टाफ के प्रमुख ने इस मुद्दे को सुप्रीम हाई कमान के मुख्यालय में जमा नहीं किया, लेकिन मुख्यालय के उपकरणों और गोर्की में मुख्यालय के संचार केंद्र के लिए प्रारंभिक कार्य को तैनात करने के लिए उपाय किए। काम जनरल स्टाफ और GUSKA के परिचालन प्रबंधन द्वारा किया गया था।
उसी समय, जैसा कि पेरिसिपकिन द्वारा निर्देशित किया गया था, पीपुल्स कमिश्रिएट ऑफ कम्युनिकेशंस और GUSKA ने वोल्गा के पूर्व में कई संचार केंद्रों को लैस करने के लिए कई उपाय किएः कज़ान, कुइबेशेव, सेवोकोव जिलों में, साथ ही वोल्गा के पूर्वी तट के साथ एक चट्टानी संचार लाइन का निर्माण करने के लिए। मास्को जंक्शन को उतारने के लिए यह आवश्यक था।
सितंबर के अंत में, पेरिसिपकिन ने फिर से जनरल स्टाफ के प्रमुख से मुख्यालय के रिजर्व मुख्यालय के लिए निर्माण स्थल की पसंद के बारे में पूछा और दूसरी बार सकारात्मक जवाब नहीं मिला। यह समझते हुए कि केवल स्टालिन "अच्छा" दे सकता है, पेरीसिपकिन ने सुप्रीम से एक रिसेप्शन लेने का फैसला किया।
पीपुल्स कमिसार ने उन्हें 19. 00 से 19. 50 14 पर अक्टूबर में प्राप्त किया, जिसमें Shaposhnikov और Vasilevsky मौजूद थे। "स्टालिन की ओर मुड़ते हुए", पेरीसेकिन ने याद किया, "मैंने उनसे सर्वोच्च उच्च कमान मुख्यालय के एक आरक्षित कमांड पोस्ट की पसंद पर विचार करने और इस मामले पर मेरे विचारों को सुनने के लिए कहा . . . कॉमरेड। स्टालिन उस दीवार पर गया जिस पर यूएसएसआर के यूरोपीय हिस्से का सबसे आम भौगोलिक मानचित्र लटका हुआ था, इसे हटा दिया और कार्यालय में लंबी मेज पर रखा, जो आमतौर पर बैठकें आयोजित करता था, और पूछाः "आप क्या सुझाव देते हैं? " मैंने उत्तर दिया कि संचार के आयोजन की सुविधा के साथ-साथ संचार केंद्र को लैस करने और मोर्चों के साथ संचार स्थापित करने के लिए प्रयास, धन और समय की कम लागत के साथ, मुख्यालय के लिए आपातकालीन नियंत्रण केंद्र के आयोजन के लिए कुइबिशेव जिला सबसे उपयुक्त है। वह इस प्रस्ताव से तुरंत सहमत नहीं हुए और कुछ देर सोचने के बाद कहा कि अब कुइबिशेव में और विशेष रूप से विदेशियों में बहुत सारे लोग हैं।
"और इस उद्देश्य के लिए कौन सा बिंदु उपयुक्त है? " उन्होंने फिर से पूछा। इस बार मैंने कज़ान को फोन किया, हालांकि मैंने एक आरक्षण दिया कि यह संचार के बारे में कुएबीशेव से बहुत खराब होगा, क्योंकि मोर्चों के साथ संचार को व्यवस्थित और बनाए रखना बहुत अधिक कठिन होगा, और इसके लिए बहुत अधिक समय और प्रयास की आवश्यकता होगी।
स्टालिन ने ध्यान से नक्शे को फिर से देखा, सोचा और कहाः "चलो आरज़ामस! एक बार इवान द हेडक्वार्टर का मुख्यालय था (कज़ान के कब्जे से पहले। - वी. के. )।
प्रारंभिक गणना से पता चला है कि कार्य को पूरा होने में कम से कम कई सप्ताह लगेंगे। स्टालिन ने पीपुल्स कमिसार के औचित्य को सुनने के बाद कहाः "हमें छह से सात दिनों की समय सीमा को पूरा करना चाहिए। "
उस शाम, स्टालिन ने एक यूनिट की तैनाती पर सभी काम का नेतृत्व करने के आदेश के साथ पेर्सिपकिन को फोन किया। "संचार केंद्र के कथित स्थान के क्षेत्र में तुरंत ध्यान केंद्रित करने के लिए सभी आवश्यक आदेश दिए गए हैं," पेर्सिपकिन लिखते हैं, "हम, जी ए ओमेलचेंको और जनरल ए एम। स्ट्रेलकोव के साथ मिलकर पीपुल्स कमिश्रैट और हमारे साथ मुख्य संचार विभाग के कई कर्मचारियों को लेट कर रहे हैं, देर हो रही है। रात को अपने गंतव्य के लिए रवाना। एक दिन बाद, हम पहले से ही जगह में थे और काम करना शुरू कर दिया।
पहले से मॉस्को से पूर्व की ओर निकाले गए पीपुल्स कमिश्नरी ऑफ़ डिफेंस एंड पीपुल्स कमिश्रिएट ऑफ़ कम्युनिकेशंस से जुड़ी दो ट्रेनें, मुख्यालय रिज़र्वेशन कम्युनिकेशन सेंटर के लिए आधार के रूप में काम करती हैं। हम उन्हें रास्ते में अवरोधन करने में कामयाब रहे . . . लापता टेलीग्राफ और टेलीफोन उपकरण, रेडियो स्टेशन, स्थापना और रैखिक सामग्री जल्दबाजी में मास्को के गोदामों और पड़ोसी क्षेत्रों से भेजे गए थे। "दोनों संचार गाड़ियों के कर्मी, मरम्मत और बहाली संचार बटालियनों में से एक है जो गलती से इस क्षेत्र में समाप्त हो गए थे, और संचार केंद्र पर स्थानीय संचार कार्यालय के कर्मचारी स्थापना और रैखिक काम में शामिल थे। "
टेलीग्राम ने मॉस्को से पड़ोसी अरज़मास के विस्फोटों के लिए उड़ान भरी, जो टेलीफोन और टेलीग्राफ उपकरण, रेडियो स्टेशन, इंस्टॉलेशन और रैखिक सामग्रियों के शिपमेंट और निर्माण और स्थापना कार्यों के लिए मरम्मत और बहाली इकाइयों के आवंटन का संकेत देते थे। Peresypkin ने मास्को से 13 वैगनों वाली ट्रेन में एक अतिरिक्त टेलीग्राफ स्टेशन को तत्काल भेजने का निर्देश दिया। ट्रेन बेलोरुस्काया मेट्रो स्टेशन के एक मृत छोर पर खड़ी थी। अरज़ामास में, उपकरण इसे से हटा दिया गया था और एक स्थिर संचार केंद्र पर स्थापित किया गया था।
संचार के पीपुल्स कमिसार ने लाल सेना के मुख्य संचार विभाग के सैन्य प्रतिनिधियों को गोर्की, व्लादिमीर, रियाज़ान, पेन्ज़ा और कुयबीशेव क्षेत्रीय संचार और मोर्दोविया गणराज्य के संचार विभागों में भेजा। उनका कार्य इन क्षेत्रों के संचार केंद्रों को पीपुल्स कमिसार द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार सैन्य-संचालन संबंध सुनिश्चित करने के लिए तैयार करना था। इस योजना की सामग्री को केवल GUSCA के सैन्य प्रतिनिधि द्वारा विभाग के प्रमुख को सूचित किया गया था।
कई दिनों तक शहर में दसियों किलोमीटर टेलीफोन केबल बिछाए गए और जमीन में दफन कर दिया गया। कोसोनमावोव सड़क पर क्षेत्रीय संचार केंद्र के निर्माण में, 2 घर, दूसरी मंजिल पर, मैन्युअल स्विच के साथ 300 संख्याओं पर टेलीफोन एक्सचेंज लगे हैं। जंगल में सोलोवेयका जंक्शन पर, एक रेलवे डेड एंड बनाया गया था, जिसमें एक सैन्य संचार ट्रेन थी। ट्रेन से मुख्यालय के मुख्यालय तक और स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज के लिए एक भूमिगत केबल बिछाई गई थी, जिसके माध्यम से स्पेयर यूनिट को लाल सेना के मोर्चों के साथ जोड़ा जाना था।
यूनिट के वायर्ड हिस्से से दूर, विशेषज्ञों ने एक छोटे रेडियो नोड को माउंट किया, जिसमें स्थिर रेडियो के साथ एक रेडियो ब्यूरो भी शामिल था। कारों में रेडियो ट्रांसमीटर लगे हुए थे। कुल में, नोड में शामिल हैंः
20 रेडियो स्टेशन और विभिन्न प्रकार के व्यक्तिगत रेडियो ट्रांसमीटर (DRK-15, DRK-1, PAT, RAF, RSB);
20 रेडियो से अधिक;
सैन्य टेलीग्राफ स्टेशन - 26 बोडो उपकरण, 32 - ST-35 और 24 - मोर्स;
उच्च आवृत्ति संचार स्टेशन;
1000 नंबर (PBX - 400, RTS सेंट्रल बैंक - 600 पर) के साथ केंद्रीय शहर टेलीफोन एक्सचेंज;
शक्तिशाली डीजल पावर स्टेशन।
20 रेडियो से अधिक;
सैन्य टेलीग्राफ स्टेशन - 26 बोडो उपकरण, 32 - ST-35 और 24 - मोर्स;
उच्च आवृत्ति संचार स्टेशन;
1000 नंबर (PBX - 400, RTS सेंट्रल बैंक - 600 पर) के साथ केंद्रीय शहर टेलीफोन एक्सचेंज;
शक्तिशाली डीजल पावर स्टेशन।
निलंबित तारों की कुल लंबाई के साथ एक गोलाकार वायु रेखा 33,5 किलोमीटर लंबी थी, जिसे शहर के चारों ओर बनाया गया थाः स्टील - 189 किलोमीटर और तांबा - 13,5 किलोमीटर। इसके साथ ही, इंस्टॉलेशन कार्य के साथ, रेलवे स्टेशन के आसपास के संचार केंद्र में एक विशेष पांच किलोमीटर रेलवे लाइन खींची गई थी, जिस पर संचार ट्रेनों और लाल सेना के सामान्य कर्मचारियों के परिचालन समूह की एक विशेष ट्रेन (वस्तु "वन") स्थापित की गई थी। सब कुछ तीव्रता से संरक्षित था। दोनों ट्रकों और कारों ने छलावरण नेट के तहत कारों से सीधे संपर्क किया।
एक 8,5 किलोमीटर स्टील लाइन के 96 किलोमीटर और तांबे के तार के 17 किलोमीटर और तार और केबल तार के एक केबल (केबल) के साथ कनेक्टिंग लाइन 0,5 स्टील और एक के आठ किलोमीटर के निलंबन के साथ 1,4 किलोमीटर लंबी तांबे के तारों का किलोमीटर। सुविधा में, 12,6 किलोमीटर की लंबाई के साथ 2,8 किलोमीटर स्टील के तारों और तांबे के XNUMX किलोमीटर के निलंबन के साथ एक स्तंभ लाइन का निर्माण किया गया था।
एमटीएस को अरज़मास स्टेशन के साथ जोड़ने वाली लाइनों के लिए, ट्रैवर्स (लकड़ी के खंभे पर हुक के साथ लोहे के क्रॉसबार) को सीवन किया जाता है। उन पर जुड़ने वाली लाइनों के पांच जोड़े 56 किलोमीटर स्टील और 14 किलोमीटर तांबे के तारों को निलंबित कर दिया गया था। स्टालिन के लिए, उन्होंने दो मंजिला घर चुना, जिसकी पहली मंजिल एचएफ स्टेशन के लिए दी गई थी। स्थापना के दौरान, उन्होंने मॉस्को को दरकिनार करते हुए, सामने के कनेक्शन की संभावना के लिए प्रदान किया। सबसे कठिन काम मोर्चों और सैन्य जिलों के सभी मुख्यालयों के साथ सीधा वायर्ड कनेक्शन स्थापित करना था। वह बिंदु जहां संचार केंद्र स्थित था, राजमार्ग से बाहर नहीं निकलता था।
शीर्ष सिग्नल सुविधा के निर्माण में भाग लेने वाले सभी सिग्नलमैन, इंजीनियरों और बिल्डरों का निस्वार्थ काम एक घंटे तक नहीं रुका, घड़ी भर में काम हो गया। इसलिए, कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप, सभी मोर्चों के साथ संचार प्रदान करने के लिए एक शक्तिशाली केंद्र बनाया गया था और इस तरह के एक अपर्याप्त स्थान से देश के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उस समय Arzamas था।
अक्टूबर 21 पर, वीजीके के मुख्यालय के लिए एक अतिरिक्त संचार केंद्र की स्थापना पूरी हो गई थी। अक्टूबर 31 पर, संचार जी. ए. ओमेलचेंको के उप-कमिश्नर ने अर्ज़ामा में टेलीफोन और टेलीग्राफ नोड्स और टेलीफोन एक्सचेंजों की स्थापना पर किए गए काम की मात्रा निर्धारित करने और ऑपरेशन के लिए नोड्स की तत्परता को सत्यापित करने के लिए एक कमीशन नियुक्त किया। नवंबर 2 पर एक अधिनियम तैयार किया गया था। यह शहर के टेलीफोन नेटवर्क, इंटर-सिटी सर्किट, आदि के केबल बिछाने पर स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज में किए गए और अधूरे काम की मात्रा को दर्शाता है।
मोर्चों, व्यक्तिगत सेनाओं, सैन्य जिलों और रणनीतिक सुविधाओं के सभी मुख्यालयों के साथ स्थिर टेलीग्राफिक और टेलीफोन संचार के लिए, देश के मुख्य ट्रंक लाइनों के साथ अरज़मा में जंक्शन को जोड़ने वाले चट्टानी लाइनों के निर्माण पर कम से कम समय में बड़ी मात्रा में काम किया जाना था।
यूनिट के संचालन के दौरान ये काम किए गए थे। नवंबर 3 पर, GUSKA के 1 गवर्निंग डिपार्टमेंट के प्रमुख, मेजर जनरल ए। एम। स्ट्रेलकोव ने मांग की कि साइट के प्रमुख ने Aribamas-Ardatov सेक्शन को नुकसान होने के कारण Kuibyshev की दिशा में 4 घंटे 10 मिनट के लिए संचार में ब्रेक की सूचना दी। उन्होंने ड्यूटी अधिकारी पर भी आरोप लगायाः एक्सएनयूएमएक्स के लिए दैनिक रूप से, ड्यूटी ऑफिसर से अरज़ामस नोड, वायु सेना संचार केंद्र और स्थानीय कार्यालय का एक संचार सारांश प्राप्त करें और एक्सयूएनएमएक्स के लिए मास्को के डिप्टी पीपुल्स कमिश्नर ऑफ डिफेंस पेरीसेपिन के लिए पंजीकरण और हस्तांतरण के लिए एक कूरियर के रूप में एक्सयूयूएमएक्स विभाग को अग्रेषित करें। लेकिन दुश्मन ने अभी भी मास्को के माध्यम से तोड़ने का प्रयास किया, हमारे सैनिकों का एक पलटवार तैयार किया जा रहा था, अन्य मोर्चों पर भयंकर लड़ाई और अंतर्देशीय संचार उद्यमों की निकासी जारी रही।
नवंबर 12 पर, 22. 00 में, Peresypkin ने जनरल Strelkov के साथ टेलीग्राफ किया और उन्हें Arzamas के दक्षिण में स्थित नोड्स और लाइनें विकसित करने का कार्य निर्धारित कियाः Arzamas - Ardatov, Ardatov - Diveevo, Krasnoslobodsk - Saransk, Kochkurovo - Vyass, Mokshan - Tsokhan।
नवंबर 14 पर, विभाग के प्रमुख, मेजर जनरल स्ट्रेलकोव, और रेजिमेंटल कमिसार, स्टेपानोव के कमिश्नर, ने अर्जुनदास, सरांस्क, पेन्ज़ा के वर्गों में तारों के लिए उपलब्ध तारों का एक आरेख प्रस्तुत किया और डिजाइन किया। विभाग के प्रमुख ने आश्वासन दिया कि यदि क्षेत्र में जनशक्ति और रैखिक सामग्री है, तो 10 कार्य दिवसों में Arzamas - Krasnoslobodsk अनुभाग पर कार्य किया जाएगा, Krasnoslobodsk - ज़ेनक्सएक्स दिनों में Saransk, 7 दिनों में Saransk - Lunino, पेनज़ा - 10 दिनों में मोक्षन , रुज़ायेवका - इस्सा - एक्सएनयूएमएक्स कार्य दिवसों में।
नवंबर 15 पर, उप Commissar ने योजना और रैखिक सामग्रियों की गणना को मंजूरी दी।
स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में स्थानीय जंगलों में लाइनों को बदलने और मजबूत करने के लिए आवश्यक टेलीग्राफ पोल की कटाई की गई। केबलों को शामिल करने के संबंध में फंसी स्टील की चेन को हटा दिया गया और अन्य क्षेत्रों में लाइनों को जोड़ने के लिए उपयोग किया गया। इस तरह के ट्रंक लाइनों के निर्माण के पैमाने केवल अरज़मा के दक्षिण में हैं।
इस रहस्यमय नोड के कार्य क्या थे? मास्को, GUSKA में रेडियो केंद्र की विफलता के मामले में, कुबिस्शेव, गोर्की और अर्ज़मास में संचार केंद्रों के माध्यम से मोर्चों, सेनाओं और सैन्य जिलों के मुख्यालय के साथ रेड आर्मी जनरल स्टाफ की रेडियो संचार योजना का एक प्रकार विकसित किया गया था। इस विकल्प के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण रेडियो संचार के रूप में मोर्चों और व्यक्तिगत सेनाओं के मुख्यालय के साथ जनरल स्टाफ रेडियो संचार को अलग नेटवर्क नंबर 1, 2 और 3 में जोड़ा जाता है, जो मुख्य मुख्यालय के साथ सीधे रेडियो संचार प्रदान करता है। यदि सामान्य कर्मचारी Arzamas में स्थित है, तो नेटवर्क संख्या 1, 2 और 3 में कार्य इस उद्देश्य के लिए Arzamas और Gorky के बीच स्थापित कई सिस्टम के टेलीग्राफ चैनलों का उपयोग करके, Gorky में संचार केंद्र के ट्रांसमीटरों के रिमोट कंट्रोल द्वारा सीधे Arzamas के संचार केंद्र से होता है। इन नेटवर्क के ट्रांसमीटरों को सीधे Arzamas में प्राप्त किया जाता है।
यदि जनरल स्टाफ गोर्की में स्थित है, तो नेटवर्क नंबर 1, 2 और 3 में काम सीधे गोर्की से किया जाता है। यदि सामान्य कर्मचारी कुयिशेव में स्थित है, तो नेटवर्क नं। 1, 2 और 3 कुयिबेसेव संचार केंद्र में स्थानांतरित हो जाते हैं। इन सभी मामलों में, मोर्चों और व्यक्तिगत सेनाओं के मुख्य मुख्यालय के साथ अंतरिक्ष यान के जनरल स्टाफ का प्रत्यक्ष संचार प्रदान किया गया था, आवश्यक दक्षता बनाए रखी गई थी, और रेडियो संदेश प्राप्त करने की आवश्यकता समाप्त हो गई थी। दो महीने के लिए "विक्टोरिया" कॉल साइन "विक्टोरिया" के साथ सर्वोच्च कमान मुख्यालय का आरक्षित संचार केंद्र था। "सौभाग्य से, उसे कभी भी ज़रूरत नहीं थी," पेरिसेपिन लिखते हैं। - स्थिति को मॉस्को छोड़ने के लिए मुख्यालय की आवश्यकता नहीं थी। सोवियत सैनिकों ने हमारे देश की राजधानी का बचाव किया और नाज़ी भीड़ को अपने दृष्टिकोण से हराया।
| उन्नीस октября एक हज़ार नौ सौ इकतालीस года Государственный Комитет Обороны принял постановление о введении в Москве осадного положения. Около десятка бомб упало на территорию передающего радиоцентра узла связи Генерального штаба в Сокольниках. Особую опасность налеты авиации противника представляли для воздушных линий связи. Необходимо было срочно приступить к созданию запасного узла связи Генштаба, получившего название объект «Виктория». Район для строительства обозначил лично Сталин: город Арзамас - место Ставки Ивана Грозного. सितंबर में वापस, संचार के पीपुल्स कमिसार, संचार के लिए रक्षा के उप-कमांडर और लाल सेना के संचार निदेशालय के प्रमुख के प्रमुख कर्नल आई। टी। पेरिसेपिनक ने सोवियत संघ के जनरल मार्शल बी। मुख्य। संचार केंद्र। जनरल स्टाफ के प्रमुख ने इस मुद्दे को सुप्रीम हाई कमान के मुख्यालय में जमा नहीं किया, लेकिन मुख्यालय के उपकरणों और गोर्की में मुख्यालय के संचार केंद्र के लिए प्रारंभिक कार्य को तैनात करने के लिए उपाय किए। काम जनरल स्टाफ और GUSKA के परिचालन प्रबंधन द्वारा किया गया था। उसी समय, जैसा कि पेरिसिपकिन द्वारा निर्देशित किया गया था, पीपुल्स कमिश्रिएट ऑफ कम्युनिकेशंस और GUSKA ने वोल्गा के पूर्व में कई संचार केंद्रों को लैस करने के लिए कई उपाय किएः कज़ान, कुइबेशेव, सेवोकोव जिलों में, साथ ही वोल्गा के पूर्वी तट के साथ एक चट्टानी संचार लाइन का निर्माण करने के लिए। मास्को जंक्शन को उतारने के लिए यह आवश्यक था। सितंबर के अंत में, पेरिसिपकिन ने फिर से जनरल स्टाफ के प्रमुख से मुख्यालय के रिजर्व मुख्यालय के लिए निर्माण स्थल की पसंद के बारे में पूछा और दूसरी बार सकारात्मक जवाब नहीं मिला। यह समझते हुए कि केवल स्टालिन "अच्छा" दे सकता है, पेरीसिपकिन ने सुप्रीम से एक रिसेप्शन लेने का फैसला किया। पीपुल्स कमिसार ने उन्हें उन्नीस. शून्य से उन्नीस. पचास चौदह पर अक्टूबर में प्राप्त किया, जिसमें Shaposhnikov और Vasilevsky मौजूद थे। "स्टालिन की ओर मुड़ते हुए", पेरीसेकिन ने याद किया, "मैंने उनसे सर्वोच्च उच्च कमान मुख्यालय के एक आरक्षित कमांड पोस्ट की पसंद पर विचार करने और इस मामले पर मेरे विचारों को सुनने के लिए कहा . . . कॉमरेड। स्टालिन उस दीवार पर गया जिस पर यूएसएसआर के यूरोपीय हिस्से का सबसे आम भौगोलिक मानचित्र लटका हुआ था, इसे हटा दिया और कार्यालय में लंबी मेज पर रखा, जो आमतौर पर बैठकें आयोजित करता था, और पूछाः "आप क्या सुझाव देते हैं? " मैंने उत्तर दिया कि संचार के आयोजन की सुविधा के साथ-साथ संचार केंद्र को लैस करने और मोर्चों के साथ संचार स्थापित करने के लिए प्रयास, धन और समय की कम लागत के साथ, मुख्यालय के लिए आपातकालीन नियंत्रण केंद्र के आयोजन के लिए कुइबिशेव जिला सबसे उपयुक्त है। वह इस प्रस्ताव से तुरंत सहमत नहीं हुए और कुछ देर सोचने के बाद कहा कि अब कुइबिशेव में और विशेष रूप से विदेशियों में बहुत सारे लोग हैं। "और इस उद्देश्य के लिए कौन सा बिंदु उपयुक्त है? " उन्होंने फिर से पूछा। इस बार मैंने कज़ान को फोन किया, हालांकि मैंने एक आरक्षण दिया कि यह संचार के बारे में कुएबीशेव से बहुत खराब होगा, क्योंकि मोर्चों के साथ संचार को व्यवस्थित और बनाए रखना बहुत अधिक कठिन होगा, और इसके लिए बहुत अधिक समय और प्रयास की आवश्यकता होगी। स्टालिन ने ध्यान से नक्शे को फिर से देखा, सोचा और कहाः "चलो आरज़ामस! एक बार इवान द हेडक्वार्टर का मुख्यालय था । प्रारंभिक गणना से पता चला है कि कार्य को पूरा होने में कम से कम कई सप्ताह लगेंगे। स्टालिन ने पीपुल्स कमिसार के औचित्य को सुनने के बाद कहाः "हमें छह से सात दिनों की समय सीमा को पूरा करना चाहिए। " उस शाम, स्टालिन ने एक यूनिट की तैनाती पर सभी काम का नेतृत्व करने के आदेश के साथ पेर्सिपकिन को फोन किया। "संचार केंद्र के कथित स्थान के क्षेत्र में तुरंत ध्यान केंद्रित करने के लिए सभी आवश्यक आदेश दिए गए हैं," पेर्सिपकिन लिखते हैं, "हम, जी ए ओमेलचेंको और जनरल ए एम। स्ट्रेलकोव के साथ मिलकर पीपुल्स कमिश्रैट और हमारे साथ मुख्य संचार विभाग के कई कर्मचारियों को लेट कर रहे हैं, देर हो रही है। रात को अपने गंतव्य के लिए रवाना। एक दिन बाद, हम पहले से ही जगह में थे और काम करना शुरू कर दिया। पहले से मॉस्को से पूर्व की ओर निकाले गए पीपुल्स कमिश्नरी ऑफ़ डिफेंस एंड पीपुल्स कमिश्रिएट ऑफ़ कम्युनिकेशंस से जुड़ी दो ट्रेनें, मुख्यालय रिज़र्वेशन कम्युनिकेशन सेंटर के लिए आधार के रूप में काम करती हैं। हम उन्हें रास्ते में अवरोधन करने में कामयाब रहे . . . लापता टेलीग्राफ और टेलीफोन उपकरण, रेडियो स्टेशन, स्थापना और रैखिक सामग्री जल्दबाजी में मास्को के गोदामों और पड़ोसी क्षेत्रों से भेजे गए थे। "दोनों संचार गाड़ियों के कर्मी, मरम्मत और बहाली संचार बटालियनों में से एक है जो गलती से इस क्षेत्र में समाप्त हो गए थे, और संचार केंद्र पर स्थानीय संचार कार्यालय के कर्मचारी स्थापना और रैखिक काम में शामिल थे। " टेलीग्राम ने मॉस्को से पड़ोसी अरज़मास के विस्फोटों के लिए उड़ान भरी, जो टेलीफोन और टेलीग्राफ उपकरण, रेडियो स्टेशन, इंस्टॉलेशन और रैखिक सामग्रियों के शिपमेंट और निर्माण और स्थापना कार्यों के लिए मरम्मत और बहाली इकाइयों के आवंटन का संकेत देते थे। Peresypkin ने मास्को से तेरह वैगनों वाली ट्रेन में एक अतिरिक्त टेलीग्राफ स्टेशन को तत्काल भेजने का निर्देश दिया। ट्रेन बेलोरुस्काया मेट्रो स्टेशन के एक मृत छोर पर खड़ी थी। अरज़ामास में, उपकरण इसे से हटा दिया गया था और एक स्थिर संचार केंद्र पर स्थापित किया गया था। संचार के पीपुल्स कमिसार ने लाल सेना के मुख्य संचार विभाग के सैन्य प्रतिनिधियों को गोर्की, व्लादिमीर, रियाज़ान, पेन्ज़ा और कुयबीशेव क्षेत्रीय संचार और मोर्दोविया गणराज्य के संचार विभागों में भेजा। उनका कार्य इन क्षेत्रों के संचार केंद्रों को पीपुल्स कमिसार द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार सैन्य-संचालन संबंध सुनिश्चित करने के लिए तैयार करना था। इस योजना की सामग्री को केवल GUSCA के सैन्य प्रतिनिधि द्वारा विभाग के प्रमुख को सूचित किया गया था। कई दिनों तक शहर में दसियों किलोमीटर टेलीफोन केबल बिछाए गए और जमीन में दफन कर दिया गया। कोसोनमावोव सड़क पर क्षेत्रीय संचार केंद्र के निर्माण में, दो घर, दूसरी मंजिल पर, मैन्युअल स्विच के साथ तीन सौ संख्याओं पर टेलीफोन एक्सचेंज लगे हैं। जंगल में सोलोवेयका जंक्शन पर, एक रेलवे डेड एंड बनाया गया था, जिसमें एक सैन्य संचार ट्रेन थी। ट्रेन से मुख्यालय के मुख्यालय तक और स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज के लिए एक भूमिगत केबल बिछाई गई थी, जिसके माध्यम से स्पेयर यूनिट को लाल सेना के मोर्चों के साथ जोड़ा जाना था। यूनिट के वायर्ड हिस्से से दूर, विशेषज्ञों ने एक छोटे रेडियो नोड को माउंट किया, जिसमें स्थिर रेडियो के साथ एक रेडियो ब्यूरो भी शामिल था। कारों में रेडियो ट्रांसमीटर लगे हुए थे। कुल में, नोड में शामिल हैंः बीस रेडियो स्टेशन और विभिन्न प्रकार के व्यक्तिगत रेडियो ट्रांसमीटर ; बीस रेडियो से अधिक; सैन्य टेलीग्राफ स्टेशन - छब्बीस बोडो उपकरण, बत्तीस - ST-पैंतीस और चौबीस - मोर्स; उच्च आवृत्ति संचार स्टेशन; एक हज़ार नंबर के साथ केंद्रीय शहर टेलीफोन एक्सचेंज; शक्तिशाली डीजल पावर स्टेशन। बीस रेडियो से अधिक; सैन्य टेलीग्राफ स्टेशन - छब्बीस बोडो उपकरण, बत्तीस - ST-पैंतीस और चौबीस - मोर्स; उच्च आवृत्ति संचार स्टेशन; एक हज़ार नंबर के साथ केंद्रीय शहर टेलीफोन एक्सचेंज; शक्तिशाली डीजल पावर स्टेशन। निलंबित तारों की कुल लंबाई के साथ एक गोलाकार वायु रेखा तैंतीस,पाँच किलोग्राममीटर लंबी थी, जिसे शहर के चारों ओर बनाया गया थाः स्टील - एक सौ नवासी किलोग्राममीटर और तांबा - तेरह,पाँच किलोग्राममीटर। इसके साथ ही, इंस्टॉलेशन कार्य के साथ, रेलवे स्टेशन के आसपास के संचार केंद्र में एक विशेष पांच किलोमीटर रेलवे लाइन खींची गई थी, जिस पर संचार ट्रेनों और लाल सेना के सामान्य कर्मचारियों के परिचालन समूह की एक विशेष ट्रेन स्थापित की गई थी। सब कुछ तीव्रता से संरक्षित था। दोनों ट्रकों और कारों ने छलावरण नेट के तहत कारों से सीधे संपर्क किया। एक आठ,पाँच किलोग्राममीटर स्टील लाइन के छियानवे किलोग्राममीटर और तांबे के तार के सत्रह किलोग्राममीटर और तार और केबल तार के एक केबल के साथ कनेक्टिंग लाइन शून्य,पाँच स्टील और एक के आठ किलोमीटर के निलंबन के साथ एक,चार किलोग्राममीटर लंबी तांबे के तारों का किलोमीटर। सुविधा में, बारह,छः किलोग्राममीटर की लंबाई के साथ दो,आठ किलोग्राममीटर स्टील के तारों और तांबे के XNUMX किलोमीटर के निलंबन के साथ एक स्तंभ लाइन का निर्माण किया गया था। एमटीएस को अरज़मास स्टेशन के साथ जोड़ने वाली लाइनों के लिए, ट्रैवर्स को सीवन किया जाता है। उन पर जुड़ने वाली लाइनों के पांच जोड़े छप्पन किलोग्राममीटर स्टील और चौदह किलोग्राममीटर तांबे के तारों को निलंबित कर दिया गया था। स्टालिन के लिए, उन्होंने दो मंजिला घर चुना, जिसकी पहली मंजिल एचएफ स्टेशन के लिए दी गई थी। स्थापना के दौरान, उन्होंने मॉस्को को दरकिनार करते हुए, सामने के कनेक्शन की संभावना के लिए प्रदान किया। सबसे कठिन काम मोर्चों और सैन्य जिलों के सभी मुख्यालयों के साथ सीधा वायर्ड कनेक्शन स्थापित करना था। वह बिंदु जहां संचार केंद्र स्थित था, राजमार्ग से बाहर नहीं निकलता था। शीर्ष सिग्नल सुविधा के निर्माण में भाग लेने वाले सभी सिग्नलमैन, इंजीनियरों और बिल्डरों का निस्वार्थ काम एक घंटे तक नहीं रुका, घड़ी भर में काम हो गया। इसलिए, कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप, सभी मोर्चों के साथ संचार प्रदान करने के लिए एक शक्तिशाली केंद्र बनाया गया था और इस तरह के एक अपर्याप्त स्थान से देश के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उस समय Arzamas था। अक्टूबर इक्कीस पर, वीजीके के मुख्यालय के लिए एक अतिरिक्त संचार केंद्र की स्थापना पूरी हो गई थी। अक्टूबर इकतीस पर, संचार जी. ए. ओमेलचेंको के उप-कमिश्नर ने अर्ज़ामा में टेलीफोन और टेलीग्राफ नोड्स और टेलीफोन एक्सचेंजों की स्थापना पर किए गए काम की मात्रा निर्धारित करने और ऑपरेशन के लिए नोड्स की तत्परता को सत्यापित करने के लिए एक कमीशन नियुक्त किया। नवंबर दो पर एक अधिनियम तैयार किया गया था। यह शहर के टेलीफोन नेटवर्क, इंटर-सिटी सर्किट, आदि के केबल बिछाने पर स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज में किए गए और अधूरे काम की मात्रा को दर्शाता है। मोर्चों, व्यक्तिगत सेनाओं, सैन्य जिलों और रणनीतिक सुविधाओं के सभी मुख्यालयों के साथ स्थिर टेलीग्राफिक और टेलीफोन संचार के लिए, देश के मुख्य ट्रंक लाइनों के साथ अरज़मा में जंक्शन को जोड़ने वाले चट्टानी लाइनों के निर्माण पर कम से कम समय में बड़ी मात्रा में काम किया जाना था। यूनिट के संचालन के दौरान ये काम किए गए थे। नवंबर तीन पर, GUSKA के एक गवर्निंग डिपार्टमेंट के प्रमुख, मेजर जनरल ए। एम। स्ट्रेलकोव ने मांग की कि साइट के प्रमुख ने Aribamas-Ardatov सेक्शन को नुकसान होने के कारण Kuibyshev की दिशा में चार घंटाटे दस मिनट के लिए संचार में ब्रेक की सूचना दी। उन्होंने ड्यूटी अधिकारी पर भी आरोप लगायाः एक्सएनयूएमएक्स के लिए दैनिक रूप से, ड्यूटी ऑफिसर से अरज़ामस नोड, वायु सेना संचार केंद्र और स्थानीय कार्यालय का एक संचार सारांश प्राप्त करें और एक्सयूएनएमएक्स के लिए मास्को के डिप्टी पीपुल्स कमिश्नर ऑफ डिफेंस पेरीसेपिन के लिए पंजीकरण और हस्तांतरण के लिए एक कूरियर के रूप में एक्सयूयूएमएक्स विभाग को अग्रेषित करें। लेकिन दुश्मन ने अभी भी मास्को के माध्यम से तोड़ने का प्रयास किया, हमारे सैनिकों का एक पलटवार तैयार किया जा रहा था, अन्य मोर्चों पर भयंकर लड़ाई और अंतर्देशीय संचार उद्यमों की निकासी जारी रही। नवंबर बारह पर, बाईस. शून्य में, Peresypkin ने जनरल Strelkov के साथ टेलीग्राफ किया और उन्हें Arzamas के दक्षिण में स्थित नोड्स और लाइनें विकसित करने का कार्य निर्धारित कियाः Arzamas - Ardatov, Ardatov - Diveevo, Krasnoslobodsk - Saransk, Kochkurovo - Vyass, Mokshan - Tsokhan। नवंबर चौदह पर, विभाग के प्रमुख, मेजर जनरल स्ट्रेलकोव, और रेजिमेंटल कमिसार, स्टेपानोव के कमिश्नर, ने अर्जुनदास, सरांस्क, पेन्ज़ा के वर्गों में तारों के लिए उपलब्ध तारों का एक आरेख प्रस्तुत किया और डिजाइन किया। विभाग के प्रमुख ने आश्वासन दिया कि यदि क्षेत्र में जनशक्ति और रैखिक सामग्री है, तो दस कार्य दिवसों में Arzamas - Krasnoslobodsk अनुभाग पर कार्य किया जाएगा, Krasnoslobodsk - ज़ेनक्सएक्स दिनों में Saransk, सात दिनों में Saransk - Lunino, पेनज़ा - दस दिनों में मोक्षन , रुज़ायेवका - इस्सा - एक्सएनयूएमएक्स कार्य दिवसों में। नवंबर पंद्रह पर, उप Commissar ने योजना और रैखिक सामग्रियों की गणना को मंजूरी दी। स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में स्थानीय जंगलों में लाइनों को बदलने और मजबूत करने के लिए आवश्यक टेलीग्राफ पोल की कटाई की गई। केबलों को शामिल करने के संबंध में फंसी स्टील की चेन को हटा दिया गया और अन्य क्षेत्रों में लाइनों को जोड़ने के लिए उपयोग किया गया। इस तरह के ट्रंक लाइनों के निर्माण के पैमाने केवल अरज़मा के दक्षिण में हैं। इस रहस्यमय नोड के कार्य क्या थे? मास्को, GUSKA में रेडियो केंद्र की विफलता के मामले में, कुबिस्शेव, गोर्की और अर्ज़मास में संचार केंद्रों के माध्यम से मोर्चों, सेनाओं और सैन्य जिलों के मुख्यालय के साथ रेड आर्मी जनरल स्टाफ की रेडियो संचार योजना का एक प्रकार विकसित किया गया था। इस विकल्प के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण रेडियो संचार के रूप में मोर्चों और व्यक्तिगत सेनाओं के मुख्यालय के साथ जनरल स्टाफ रेडियो संचार को अलग नेटवर्क नंबर एक, दो और तीन में जोड़ा जाता है, जो मुख्य मुख्यालय के साथ सीधे रेडियो संचार प्रदान करता है। यदि सामान्य कर्मचारी Arzamas में स्थित है, तो नेटवर्क संख्या एक, दो और तीन में कार्य इस उद्देश्य के लिए Arzamas और Gorky के बीच स्थापित कई सिस्टम के टेलीग्राफ चैनलों का उपयोग करके, Gorky में संचार केंद्र के ट्रांसमीटरों के रिमोट कंट्रोल द्वारा सीधे Arzamas के संचार केंद्र से होता है। इन नेटवर्क के ट्रांसमीटरों को सीधे Arzamas में प्राप्त किया जाता है। यदि जनरल स्टाफ गोर्की में स्थित है, तो नेटवर्क नंबर एक, दो और तीन में काम सीधे गोर्की से किया जाता है। यदि सामान्य कर्मचारी कुयिशेव में स्थित है, तो नेटवर्क नं। एक, दो और तीन कुयिबेसेव संचार केंद्र में स्थानांतरित हो जाते हैं। इन सभी मामलों में, मोर्चों और व्यक्तिगत सेनाओं के मुख्य मुख्यालय के साथ अंतरिक्ष यान के जनरल स्टाफ का प्रत्यक्ष संचार प्रदान किया गया था, आवश्यक दक्षता बनाए रखी गई थी, और रेडियो संदेश प्राप्त करने की आवश्यकता समाप्त हो गई थी। दो महीने के लिए "विक्टोरिया" कॉल साइन "विक्टोरिया" के साथ सर्वोच्च कमान मुख्यालय का आरक्षित संचार केंद्र था। "सौभाग्य से, उसे कभी भी ज़रूरत नहीं थी," पेरिसेपिन लिखते हैं। - स्थिति को मॉस्को छोड़ने के लिए मुख्यालय की आवश्यकता नहीं थी। सोवियत सैनिकों ने हमारे देश की राजधानी का बचाव किया और नाज़ी भीड़ को अपने दृष्टिकोण से हराया। |
नागरिकता कानून के नियम तैयार करने की समय सीमा जुलाई तक बढ़ी (Photo Credit: न्यूज नेशन )
नई दिल्लीः
नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) को संचालित करने के लिए नियम तैयार करने का काम जारी है. यह जानकारी गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने दी है. दरअसल, सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में बताया कि कानून समिति की सहमति से सीएए से जुड़े कानून को तैयार करने के लिए 9 जुलाई का वक्त और बढ़ा दिया है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत नियमों को तैयार किया जा रहा है.
मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सीएए-19 को 12 दिसंबर, 2019 को अधिसूचित किया गया था और 20 जनवरी, 2020 से यह अमल में आया. उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, संशोधित नागरिकता कानून-2019 के तहत नियमों तैयार किया जा रहा है. लोकसभा एवं राज्यसभा की अधीनस्थ विधान संबंधी समितियों के लिए अवधि भी बढ़ाकर क्रमशः नौ अप्रैल और नौ जुलाई कर दी गई है ताकि सीएए के तहत नियमों को तैयार किया जा सके.
बता दें कि 2019 दिसंबर में केंद्र सरकार ने विवादित सीएए को संसद से मंजूरी दी थी. इस कानून के तहत मुस्लिम को छोड़कर बाकी अल्पसंख्यकों को नागरिकता में सहूलियत देने का प्रावधान था. इसके बाद सरकार ने संकेत दिया था कि पूरे देश में एनआरसी भी लागू होगा. लेकिन संसद से कानून पास होने के बाद पूरे देश में बहुत हिंसक आंदोलन हुआ.
दिल्ली में अब तक का सबसे बड़ा दंगा हुआ. अंतरराष्ट्रीय सवाल भी उठे. खासकर बांग्लादेश ने इसपर आपत्ति जतायी. इनके बीच सरकार ने संसद से कानून पास होने के बाद भी उसका ड्रफ्ट बनाया. सूत्रों के अनुसार अब सरकार इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है और पर्याप्त विचार के बाद इसक ड्राफ्ट लाना चाहती है.
| नागरिकता कानून के नियम तैयार करने की समय सीमा जुलाई तक बढ़ी नई दिल्लीः नागरिकता कानून को संचालित करने के लिए नियम तैयार करने का काम जारी है. यह जानकारी गृह मंत्रालय ने दी है. दरअसल, सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में बताया कि कानून समिति की सहमति से सीएए से जुड़े कानून को तैयार करने के लिए नौ जुलाई का वक्त और बढ़ा दिया है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि संशोधित नागरिकता कानून के तहत नियमों को तैयार किया जा रहा है. मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सीएए-उन्नीस को बारह दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को अधिसूचित किया गया था और बीस जनवरी, दो हज़ार बीस से यह अमल में आया. उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, संशोधित नागरिकता कानून-दो हज़ार उन्नीस के तहत नियमों तैयार किया जा रहा है. लोकसभा एवं राज्यसभा की अधीनस्थ विधान संबंधी समितियों के लिए अवधि भी बढ़ाकर क्रमशः नौ अप्रैल और नौ जुलाई कर दी गई है ताकि सीएए के तहत नियमों को तैयार किया जा सके. बता दें कि दो हज़ार उन्नीस दिसंबर में केंद्र सरकार ने विवादित सीएए को संसद से मंजूरी दी थी. इस कानून के तहत मुस्लिम को छोड़कर बाकी अल्पसंख्यकों को नागरिकता में सहूलियत देने का प्रावधान था. इसके बाद सरकार ने संकेत दिया था कि पूरे देश में एनआरसी भी लागू होगा. लेकिन संसद से कानून पास होने के बाद पूरे देश में बहुत हिंसक आंदोलन हुआ. दिल्ली में अब तक का सबसे बड़ा दंगा हुआ. अंतरराष्ट्रीय सवाल भी उठे. खासकर बांग्लादेश ने इसपर आपत्ति जतायी. इनके बीच सरकार ने संसद से कानून पास होने के बाद भी उसका ड्रफ्ट बनाया. सूत्रों के अनुसार अब सरकार इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है और पर्याप्त विचार के बाद इसक ड्राफ्ट लाना चाहती है. |
चरखी दादरी में सोमवार को एक युवक की हत्या कर दिए जाने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि करीब 8 महीने पुरानी मामूली कहासुनी की रंजिश में रविवार देर रात 5-6 युवकों ने एक युवक को घेर लिया और पीट-पीटकर मार डाला। उस पर डंडे और चाकू से हमला किया गया है। पता चलने पर माैके पर पहुंचकर बीच-बचाव की कोशिश की तो उसका भाई भी घायल हो गया। इस संबंध में पुलिस ने 3 को नामजद करते हुए कुल 6 के खिलाफ केस दर्ज किया है।
घटना शहर के चंपापुरी इलाके में स्थित जलघर की है। तीन भाइयों में मंझला विकास (22) रविवार देर शाम जलघर परिसर में गया था। उसी दौरान छह युवक वहां पहुंच गए। इनमें से एक के साथ विकास की करीब आठ माह पहले किसी बात पर कहासुनी हुई थी। युवकों को आता देख विकास ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन कुछ दूरी पर आरोपियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद विकास के पैरों पर चाकू से कई वार किए गए। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पाकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, हालांकि इस दौरान बीच-बचाव में उसका एक भाई भी घायल हो गया। आनन-फानन में परिजन विकास को भिवानी लेकर गए। वहां से उसे हिसार रेफर कर दिया गया, लेकिन बीच रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
इस बारे में सूचना पाकर पुलिस ने भी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। साथ ही मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल स्थित मोर्चरी में भिजवा दिया है। पुलिस को दिए बयान में मृतक युवक के भाई ने बताया कि बीच-बचाव की कोशिश में हमलावरों ने उसे भी घायल कर दिया। वहीं थाना सिटी के SI अनिल कुमार ने बताया कि 3 युवकों को नामजद करते हुए पुलिस ने 6 के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच जारी है।
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| चरखी दादरी में सोमवार को एक युवक की हत्या कर दिए जाने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि करीब आठ महीने पुरानी मामूली कहासुनी की रंजिश में रविवार देर रात पाँच-छः युवकों ने एक युवक को घेर लिया और पीट-पीटकर मार डाला। उस पर डंडे और चाकू से हमला किया गया है। पता चलने पर माैके पर पहुंचकर बीच-बचाव की कोशिश की तो उसका भाई भी घायल हो गया। इस संबंध में पुलिस ने तीन को नामजद करते हुए कुल छः के खिलाफ केस दर्ज किया है। घटना शहर के चंपापुरी इलाके में स्थित जलघर की है। तीन भाइयों में मंझला विकास रविवार देर शाम जलघर परिसर में गया था। उसी दौरान छह युवक वहां पहुंच गए। इनमें से एक के साथ विकास की करीब आठ माह पहले किसी बात पर कहासुनी हुई थी। युवकों को आता देख विकास ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन कुछ दूरी पर आरोपियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद विकास के पैरों पर चाकू से कई वार किए गए। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पाकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, हालांकि इस दौरान बीच-बचाव में उसका एक भाई भी घायल हो गया। आनन-फानन में परिजन विकास को भिवानी लेकर गए। वहां से उसे हिसार रेफर कर दिया गया, लेकिन बीच रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस बारे में सूचना पाकर पुलिस ने भी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। साथ ही मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल स्थित मोर्चरी में भिजवा दिया है। पुलिस को दिए बयान में मृतक युवक के भाई ने बताया कि बीच-बचाव की कोशिश में हमलावरों ने उसे भी घायल कर दिया। वहीं थाना सिटी के SI अनिल कुमार ने बताया कि तीन युवकों को नामजद करते हुए पुलिस ने छः के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच जारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
डिजिटल भारत न्यूज 24×7 LIVE- संवाददाता- दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)
सोनभद्र जनपद सोनभद्र के सीमावर्ती राज्यों में नक्सली संचरण को दृष्टिगत रखते हुए आज पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव द्वारा सोनभद्र से सटे सिमा चन्दौली व बिहार के बॉर्डर पर संघन काम्बिंग अभियान चलाया गया। थाना राबर्ट्सगंज क्षेत्रान्तर्गत नागनार हरैया के जंगलों में नक्सल आपरेशनल कार्यक्रम के तहत क्षेत्राधिकारी नगर घोरावल,थाना प्रभारी करमा,शाहगंज,पन्नूगंज, रावर्ट्सगंज के पर्याप्त पुलिस बल एवं पी0ए0सी0 बल के साथ सघन काम्बिंग किया गया।
इससे पुर्व पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र द्वारा समस्त फोर्स को ब्रीफ करते हुये आवश्यक निर्देश दिया गया। इसके उपरान्त पुलिस अधीक्षक,सोनभद्र द्वारा प्राथमिक विद्यालय नागनार हरैया पर जनचौपाल के माध्यम से स्थानीय लोगों से वार्ता किया गया तथा उनकी मूलभूत समस्याओं के बारे में जानकारी करते हुए उनका हरसम्भव निराकरण कराये जाने का भरोसा दिलाया गया व लोगों से भयमुक्त होकर किसी के बहकावे में न आते हुए पुलिस का सहयोग करने तथा स्थानीय पुलिस को भी जनता से मृदुल व्यवहार करते हुए उनकी समस्याओं का त्वरित एवं विधिक निस्तारण कराये जाने हेतु सम्बन्धित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। वही पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के सीमावर्ती इलाकों से सटे चन्दौली व बिहार बार्डर पर जंगलो में नक्सलियों के टोह में संघन काम्बिंग किया जा रहा है। वही नक्सल प्रभावित गांवों में जनचौपाल लगाकर लोगो के समस्याओं को मेरे द्वारा सुना गया और हर सम्भव शिकायतों को दूर करने का काम किया गया।
| डिजिटल भारत न्यूज चौबीस×सात LIVE- संवाददाता- दिनेश उपाध्याय- सोनभद्र जनपद सोनभद्र के सीमावर्ती राज्यों में नक्सली संचरण को दृष्टिगत रखते हुए आज पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव द्वारा सोनभद्र से सटे सिमा चन्दौली व बिहार के बॉर्डर पर संघन काम्बिंग अभियान चलाया गया। थाना राबर्ट्सगंज क्षेत्रान्तर्गत नागनार हरैया के जंगलों में नक्सल आपरेशनल कार्यक्रम के तहत क्षेत्राधिकारी नगर घोरावल,थाना प्रभारी करमा,शाहगंज,पन्नूगंज, रावर्ट्सगंज के पर्याप्त पुलिस बल एवं पीशून्यएशून्यसीशून्य बल के साथ सघन काम्बिंग किया गया। इससे पुर्व पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र द्वारा समस्त फोर्स को ब्रीफ करते हुये आवश्यक निर्देश दिया गया। इसके उपरान्त पुलिस अधीक्षक,सोनभद्र द्वारा प्राथमिक विद्यालय नागनार हरैया पर जनचौपाल के माध्यम से स्थानीय लोगों से वार्ता किया गया तथा उनकी मूलभूत समस्याओं के बारे में जानकारी करते हुए उनका हरसम्भव निराकरण कराये जाने का भरोसा दिलाया गया व लोगों से भयमुक्त होकर किसी के बहकावे में न आते हुए पुलिस का सहयोग करने तथा स्थानीय पुलिस को भी जनता से मृदुल व्यवहार करते हुए उनकी समस्याओं का त्वरित एवं विधिक निस्तारण कराये जाने हेतु सम्बन्धित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। वही पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के सीमावर्ती इलाकों से सटे चन्दौली व बिहार बार्डर पर जंगलो में नक्सलियों के टोह में संघन काम्बिंग किया जा रहा है। वही नक्सल प्रभावित गांवों में जनचौपाल लगाकर लोगो के समस्याओं को मेरे द्वारा सुना गया और हर सम्भव शिकायतों को दूर करने का काम किया गया। |
श्रेयस अय्यर पिछले महीने शानदार फॉर्म में थे और उन्होंने वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम की बड़ी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रीलंका के खिलाफ टी 20 सीरीज में भारत ने खिलाड़ियों को आराम देने का विकल्प चुना था।
झूलन ने मैच से पहले कहा, "विश्व कप से ठीक पहले, हमें इन परिस्थितियों, विकेटों के साथ तालमेल बिठाना था। हमें इस विश्व कप में नए सिरे से अपने खेल को जारी रखना है। कल का मैच पूरी तरह से एक अलग मैच होगा। "
रवींद्र जडेजा ने वेस्टइंडीज के जेसन होल्डर (Jason Holder) को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया। होल्डर अब दूसरे स्थान पर हैं जबकि जडेजा के साथी खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं।
लतीफ ने रोहित के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "अश्विन को कप्तान रोहित से काफी प्रशंसा मिली, जिन्होंने उन्हें सर्वकालिक महान करार दिया। मैं रोहित के बयान से सहमत नहीं हूं। लोगों के अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं लेकिन जहां से मैं देखता हूं, वह मेरे लिए सर्वकालिक महान नहीं हैं। "
क्रिकेट के नियमों में कुछ बड़े और अहम बदलाव किए गए हैं। क्रिकेट के नियमों का संचालन करने वाली संस्था मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब (Marylebone Cricket Club) ने नए नियमों की लिस्ट जारी की है। नए नियम के मुताबिक अब गेंदबाज गेंद पर थूक नहीं लगा सकेंगे। ऐसा करने पर इसे नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।
भारत के युवा शटलर लक्ष्य सेन भी थाईलैंड की कांटाफोन वांगचारोएन के खिलाफ जीत दर्ज करने के बाद दूसरे दौर में पहुंच गए हैं। लक्ष्य ने वांगचारोएन से सीधे सेटों में 21-6, 22-20 से हराकर अपनी शानदार फॉर्म का प्रदर्शन किया। लक्ष्य को इस मुकाबले को जीतने के लिए ज्यादा पसीना नहीं बहाना पड़ा और केवल 36 मिनट में मैच अपने पक्ष में कर लिया।
दीपक चाहर वर्तमान में बैंगलोर में स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी में आठ सप्ताह के रिहेबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजर रहे हैं। हालांकि चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल को लेकर तैयार शुरू कर दी है। टीम का कैंप सूरत में चल रहा है। उम्मीद है कि टीम का ये तेज गेंदबाज अगले कुछ हफ्तों में सूरत में टीम के साथ कैंप में जुड़ जाएगा।
गुरबाज एक सलामी बल्लेबाज के रूप में 150 से अधिक करियर टी20 स्ट्राइक रेट रखने के अलावा एक शानदार विकेटकीपर भी हैं, जो उन्हें एक उपयोगी खिलाड़ी बनाता है।
पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच दिवसीय हाई स्कोरिंग मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। पाक ने अपनी पहली पारी 4 विकेट पर 476 रन बनाकर घोषित की।
52 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर की शुक्रवार को संदिग्ध हालत में दिल का दौरा पड़ने से थाईलैंड के कोह समुई द्वीप पर निधन हो गया था। वार्न के एक सहयोगी ने एम्बुलेंस आने से लगभग 20 मिनट पहले पूर्व क्रिकेटर को होश में लाने के लिए कोशिश की थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।
| श्रेयस अय्यर पिछले महीने शानदार फॉर्म में थे और उन्होंने वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम की बड़ी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रीलंका के खिलाफ टी बीस सीरीज में भारत ने खिलाड़ियों को आराम देने का विकल्प चुना था। झूलन ने मैच से पहले कहा, "विश्व कप से ठीक पहले, हमें इन परिस्थितियों, विकेटों के साथ तालमेल बिठाना था। हमें इस विश्व कप में नए सिरे से अपने खेल को जारी रखना है। कल का मैच पूरी तरह से एक अलग मैच होगा। " रवींद्र जडेजा ने वेस्टइंडीज के जेसन होल्डर को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया। होल्डर अब दूसरे स्थान पर हैं जबकि जडेजा के साथी खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं। लतीफ ने रोहित के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "अश्विन को कप्तान रोहित से काफी प्रशंसा मिली, जिन्होंने उन्हें सर्वकालिक महान करार दिया। मैं रोहित के बयान से सहमत नहीं हूं। लोगों के अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं लेकिन जहां से मैं देखता हूं, वह मेरे लिए सर्वकालिक महान नहीं हैं। " क्रिकेट के नियमों में कुछ बड़े और अहम बदलाव किए गए हैं। क्रिकेट के नियमों का संचालन करने वाली संस्था मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब ने नए नियमों की लिस्ट जारी की है। नए नियम के मुताबिक अब गेंदबाज गेंद पर थूक नहीं लगा सकेंगे। ऐसा करने पर इसे नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। भारत के युवा शटलर लक्ष्य सेन भी थाईलैंड की कांटाफोन वांगचारोएन के खिलाफ जीत दर्ज करने के बाद दूसरे दौर में पहुंच गए हैं। लक्ष्य ने वांगचारोएन से सीधे सेटों में इक्कीस-छः, बाईस-बीस से हराकर अपनी शानदार फॉर्म का प्रदर्शन किया। लक्ष्य को इस मुकाबले को जीतने के लिए ज्यादा पसीना नहीं बहाना पड़ा और केवल छत्तीस मिनट में मैच अपने पक्ष में कर लिया। दीपक चाहर वर्तमान में बैंगलोर में स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी में आठ सप्ताह के रिहेबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजर रहे हैं। हालांकि चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल को लेकर तैयार शुरू कर दी है। टीम का कैंप सूरत में चल रहा है। उम्मीद है कि टीम का ये तेज गेंदबाज अगले कुछ हफ्तों में सूरत में टीम के साथ कैंप में जुड़ जाएगा। गुरबाज एक सलामी बल्लेबाज के रूप में एक सौ पचास से अधिक करियर टीबीस स्ट्राइक रेट रखने के अलावा एक शानदार विकेटकीपर भी हैं, जो उन्हें एक उपयोगी खिलाड़ी बनाता है। पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच दिवसीय हाई स्कोरिंग मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। पाक ने अपनी पहली पारी चार विकेट पर चार सौ छिहत्तर रन बनाकर घोषित की। बावन वर्षीय पूर्व क्रिकेटर की शुक्रवार को संदिग्ध हालत में दिल का दौरा पड़ने से थाईलैंड के कोह समुई द्वीप पर निधन हो गया था। वार्न के एक सहयोगी ने एम्बुलेंस आने से लगभग बीस मिनट पहले पूर्व क्रिकेटर को होश में लाने के लिए कोशिश की थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। |
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत व सनातन दल के संरक्षक डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि काशी के मंदिरों में साईं की मूर्ति नहीं होनी चाहिए। मंदिर के महंत और सेवईतों से अनुरोध है कि मंदिर परिसर से साईं की मूर्ति को स्वयं ससम्मान बाहर कर दें। सनातन धर्म के वैदिक विधान इसकी आज्ञा बिल्कुल नहीं देते हैं। सोमवार को साईं की मूर्ति को मंदिर से ससम्मान बाहर करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
| स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत व सनातन दल के संरक्षक डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि काशी के मंदिरों में साईं की मूर्ति नहीं होनी चाहिए। मंदिर के महंत और सेवईतों से अनुरोध है कि मंदिर परिसर से साईं की मूर्ति को स्वयं ससम्मान बाहर कर दें। सनातन धर्म के वैदिक विधान इसकी आज्ञा बिल्कुल नहीं देते हैं। सोमवार को साईं की मूर्ति को मंदिर से ससम्मान बाहर करने का प्रस्ताव पारित किया गया। |
(ई) इसके अतिरिक्त मनुष्य में बुद्धितत्व है, इसलिये उसे अरूप (abstract) से भी भय है । इसके अन्तर्गत भूतप्रेत आदि आते हैं ।
इन भयों के कारण उसने अपने को अकेला देखकर सदैव भय का अनुभव किया है। इसलिये वह समाज बनाकर रहता है। समाज अपने लिये नियम बनाता है, उन नियमों का पालन ही अनुशासन है।
(२) मनुष्य सहज ही अभिव्यक्तिशील प्राणी है इसलिये वह एक दूसरे से सम्बन्ध स्थापित करता है। परन्तु सम्बन्ध की एक मर्यादा आवश्यक है। उस मर्यादा से ही अनुशासन चलता है। गुरु शिष्य, पिता पुत्र, भाई बहिन, माँ बेटा, सब हो सम्बन्ध समाज में नियत रहते हैं। प्रत्येक घर में एक विशेष समुदाय मे, एक सा ही व्यवहार मिलता है और समाज के सदस्य प्रायः समान रूप से ही पारस्परिक व्यवहार करते है ।
(३) हम सिनेमा जाते हैं। टिकिट खरीदने को भीड़ खड़ी रहती है। धक्कम धक्का से टिकिट खरीदना कठिन हो जाता है। जब प्रत्येक व्यक्ति यह सोचता है कि टिकिट पहले मै ले लू, आगे जाने मिले या न मिले, तब एक बुरी भावना हृदय में जन्म लेती है और उसके कारण कुत्सित प्रतिद्वन्द्विता प्रगट होती है । इसलिये हम वहाँ क्यू लगा कर खड़े होते हैं और सरलता से एक के बाद एक कम समय में ही अपने टिकिट पा जाता है। मनपसन्द तरीके से जीवन यापन करने के लिये ही मनुष्य नियमो मे बधा है । मनपसद तरीके से जीवन बिताने मे समाज में दो प्रकार के आघात पड़ते हैं
(अ) जब एक समाज मजबूर होकर दूसरे समाज के नियमों के आधीन होकर अपने तरीके को नहीं अपना पाता ।
(आ) जब एक ही समाज मे वर्गों या वर्णों या व्यवस्था के कारण एक व्यक्ति दूसरे पर हावी हो जाता है ।
(४) मनुष्य की जीवित रहने की लालसा प्रवृत्तिपरक ( Instinctive ) है । यह भावना प्राणीमात्र मे पायी जाती है और प्रत्येक जीव अपने को दूसरे से कम महत्त्वपूर्ण नही समझता, यद्यपि कोई भी अपने जस्तित्त्व को चरम (ultimate) सायंकता नही जानता । परन्तु खाना, पीना, सोना और जगना, जो जीवित रहने के लिये आवश्यक हैं, मनुष्य उनमे ही सीमित नहीं हो जाता । वह बुद्धि का प्रयोग करता है। इसीलिये वह जोवित तो रहना चाहता ही है, सुख भी पाना जाना चाहता है। उसकी सभ्यता और सस्कृति का विकास वस्तुत इसी की पूर्ति के प्रयास में हुआ है। इसके लिये | इसके अतिरिक्त मनुष्य में बुद्धितत्व है, इसलिये उसे अरूप से भी भय है । इसके अन्तर्गत भूतप्रेत आदि आते हैं । इन भयों के कारण उसने अपने को अकेला देखकर सदैव भय का अनुभव किया है। इसलिये वह समाज बनाकर रहता है। समाज अपने लिये नियम बनाता है, उन नियमों का पालन ही अनुशासन है। मनुष्य सहज ही अभिव्यक्तिशील प्राणी है इसलिये वह एक दूसरे से सम्बन्ध स्थापित करता है। परन्तु सम्बन्ध की एक मर्यादा आवश्यक है। उस मर्यादा से ही अनुशासन चलता है। गुरु शिष्य, पिता पुत्र, भाई बहिन, माँ बेटा, सब हो सम्बन्ध समाज में नियत रहते हैं। प्रत्येक घर में एक विशेष समुदाय मे, एक सा ही व्यवहार मिलता है और समाज के सदस्य प्रायः समान रूप से ही पारस्परिक व्यवहार करते है । हम सिनेमा जाते हैं। टिकिट खरीदने को भीड़ खड़ी रहती है। धक्कम धक्का से टिकिट खरीदना कठिन हो जाता है। जब प्रत्येक व्यक्ति यह सोचता है कि टिकिट पहले मै ले लू, आगे जाने मिले या न मिले, तब एक बुरी भावना हृदय में जन्म लेती है और उसके कारण कुत्सित प्रतिद्वन्द्विता प्रगट होती है । इसलिये हम वहाँ क्यू लगा कर खड़े होते हैं और सरलता से एक के बाद एक कम समय में ही अपने टिकिट पा जाता है। मनपसन्द तरीके से जीवन यापन करने के लिये ही मनुष्य नियमो मे बधा है । मनपसद तरीके से जीवन बिताने मे समाज में दो प्रकार के आघात पड़ते हैं जब एक समाज मजबूर होकर दूसरे समाज के नियमों के आधीन होकर अपने तरीके को नहीं अपना पाता । जब एक ही समाज मे वर्गों या वर्णों या व्यवस्था के कारण एक व्यक्ति दूसरे पर हावी हो जाता है । मनुष्य की जीवित रहने की लालसा प्रवृत्तिपरक है । यह भावना प्राणीमात्र मे पायी जाती है और प्रत्येक जीव अपने को दूसरे से कम महत्त्वपूर्ण नही समझता, यद्यपि कोई भी अपने जस्तित्त्व को चरम सायंकता नही जानता । परन्तु खाना, पीना, सोना और जगना, जो जीवित रहने के लिये आवश्यक हैं, मनुष्य उनमे ही सीमित नहीं हो जाता । वह बुद्धि का प्रयोग करता है। इसीलिये वह जोवित तो रहना चाहता ही है, सुख भी पाना जाना चाहता है। उसकी सभ्यता और सस्कृति का विकास वस्तुत इसी की पूर्ति के प्रयास में हुआ है। इसके लिये |
हाल ही में माधुरी दीक्षित ने सोशल मीडिया पर अपनी डांस वीडियो शेयर की है। वीडियो में माधुरी ए आर रहमान के तमिल गाने ओट्टागथाई कट्टीको पर साड़ी पहनकर डांस करती नजर आ रही हैं। इस गाने की बीट्स के साथ माधुरी अपने एक्सप्रेशंस को सिंक करते हुए ठुमके लगा रही हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए माधुरी ने लिखा कि उन्होंने बाहर जाने से पहले छोटा सा डांस ब्रेक लिया है। वीडियो में माधुरी ने ब्लैक साड़ी को बीज कलर के ब्लाउज के साथ पेयर किया है। उन्होंने अपने बाल खुले रखे हैं और सिंपल मेकअप किया है। उन्होंने साड़ी के साथ एक बेल्ट भी लगाया हुआ है। इस लुक में माधुरी काफी एलिगेंट लग रही हैं।
उनके इस वीडियो पर उनके फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं।
वीडियो पर एक अफ्रीकन यूजर ने लिखा- आप बहुत सुंदर मां होने के साथ-साथ अब तक इतनी अच्छी डांसर भी हैं। वहीं एक यूजर ने लिखा- उम्र वाकई में सिर्फ एक नंबर ही है।
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| हाल ही में माधुरी दीक्षित ने सोशल मीडिया पर अपनी डांस वीडियो शेयर की है। वीडियो में माधुरी ए आर रहमान के तमिल गाने ओट्टागथाई कट्टीको पर साड़ी पहनकर डांस करती नजर आ रही हैं। इस गाने की बीट्स के साथ माधुरी अपने एक्सप्रेशंस को सिंक करते हुए ठुमके लगा रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए माधुरी ने लिखा कि उन्होंने बाहर जाने से पहले छोटा सा डांस ब्रेक लिया है। वीडियो में माधुरी ने ब्लैक साड़ी को बीज कलर के ब्लाउज के साथ पेयर किया है। उन्होंने अपने बाल खुले रखे हैं और सिंपल मेकअप किया है। उन्होंने साड़ी के साथ एक बेल्ट भी लगाया हुआ है। इस लुक में माधुरी काफी एलिगेंट लग रही हैं। उनके इस वीडियो पर उनके फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं। वीडियो पर एक अफ्रीकन यूजर ने लिखा- आप बहुत सुंदर मां होने के साथ-साथ अब तक इतनी अच्छी डांसर भी हैं। वहीं एक यूजर ने लिखा- उम्र वाकई में सिर्फ एक नंबर ही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
भोजपुरः पुलिस ने अलग-अलग जगहों से विभिन्न मामले में संलिप्त चार आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल । थानाध्यक्ष मोहन कुमार ने बताया कि थाना क्षेत्र के पकड़ी निवासी राजकुमार एवं मंटू साह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । श्री कुमार ने कहा कि दोनों आरोपियों के विरुद्ध स्थानीय थाना में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज था । तो वहीं दूसरी ओर पुलिस ने थाना क्षेत्र के बरना निवासी सुनील साह को गिरफ्तार कर लिया । उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध कोर्ट से इश्तेहार वारंट निर्गत था । वहीं पुलिस ने शराब के नशे में धुत हो-हल्ला करते हुए थाना क्षेत्र के बरना-डिहरी निवासी हिरामन सिंह को थाना लाकर मेडिकल जांच कराया गया । मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार शराबी के ब्लड में अल्कोहल के मात्रा की पुष्टि हुई । उन्होंने बताया कि गिरफ्तार शराबी के विरुद्ध विधि-सम्मत कानूनी कार्रवाई करते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया ।
| भोजपुरः पुलिस ने अलग-अलग जगहों से विभिन्न मामले में संलिप्त चार आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल । थानाध्यक्ष मोहन कुमार ने बताया कि थाना क्षेत्र के पकड़ी निवासी राजकुमार एवं मंटू साह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । श्री कुमार ने कहा कि दोनों आरोपियों के विरुद्ध स्थानीय थाना में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज था । तो वहीं दूसरी ओर पुलिस ने थाना क्षेत्र के बरना निवासी सुनील साह को गिरफ्तार कर लिया । उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध कोर्ट से इश्तेहार वारंट निर्गत था । वहीं पुलिस ने शराब के नशे में धुत हो-हल्ला करते हुए थाना क्षेत्र के बरना-डिहरी निवासी हिरामन सिंह को थाना लाकर मेडिकल जांच कराया गया । मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार शराबी के ब्लड में अल्कोहल के मात्रा की पुष्टि हुई । उन्होंने बताया कि गिरफ्तार शराबी के विरुद्ध विधि-सम्मत कानूनी कार्रवाई करते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया । |
Gramin Seva Van accident (Photo Credit: File Photo)
दिल्ली :
दक्षिण दिल्ली के संगम विहार इलाके में आज शाम एक ग्रामीण सेवा कैब पलटने से एक यात्री की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हो गए हैं. जांच में पता चला है की ग्रामीण सेवा का चालक नशे में धुत होकर गाड़ी चला रहा था. पुलिस के मुताबिक शाम करीब 6:30 बजे एक ग्रामीण सेवा कैब इंदिरा कल्याण विहार से देवली गांव जाने वाले रास्ते पर 8 से 10 यात्रियों को लेकर जा रही थी. यह कैब थाना संगम विहार के क्षेत्र के एमबी रोड के हमदर्द चौक पर अचानक पलट गई.
कैब में सवार सभी घायल यात्रियों को मजीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक घायल यात्री को मृत घोषित कर दिया गया. इस घटना की शुरुआती जांच में पता चला है कि कैब का ड्राइवर मोहन सिंह शराब के नशे में था. वहीं गाड़ी का मालिक पंकज गुप्ता भी घायल है. हालांकि, पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. घायल यात्रियों का नाम दीपक (25वर्ष), दिनेश (32 वर्ष), राधिका ( 28 वर्ष), श्री ज्ञान चंद (38 वर्ष), हैं. वहीं मृतक का नाम विनोद (45 वर्ष) है.
वहीं इस घटना पर स्थानीय लोगों ने गुस्सा जाहिर किया है. उनका कहना है कि कई ग्रामीण सेवा के चालक नशे के हालत में रफ्तार में गाड़ी चलाते हैं, खटारा वाहनों में सवारियां ठूंसकर चलते हैं. ट्रैफिक नियमों का भी पालन नहीं करते हैं और ट्रैफिक पुलिस भी उनपर ठोस कार्रवाई नहीं करती है. इनकी मिलीभगत और मनमानी रफ्तार के चलते आम लोगों की जाम पर बनी रहती है.
| Gramin Seva Van accident दिल्ली : दक्षिण दिल्ली के संगम विहार इलाके में आज शाम एक ग्रामीण सेवा कैब पलटने से एक यात्री की मौत हो गई, जबकि पाँच लोग घायल हो गए हैं. जांच में पता चला है की ग्रामीण सेवा का चालक नशे में धुत होकर गाड़ी चला रहा था. पुलिस के मुताबिक शाम करीब छः:तीस बजे एक ग्रामीण सेवा कैब इंदिरा कल्याण विहार से देवली गांव जाने वाले रास्ते पर आठ से दस यात्रियों को लेकर जा रही थी. यह कैब थाना संगम विहार के क्षेत्र के एमबी रोड के हमदर्द चौक पर अचानक पलट गई. कैब में सवार सभी घायल यात्रियों को मजीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक घायल यात्री को मृत घोषित कर दिया गया. इस घटना की शुरुआती जांच में पता चला है कि कैब का ड्राइवर मोहन सिंह शराब के नशे में था. वहीं गाड़ी का मालिक पंकज गुप्ता भी घायल है. हालांकि, पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. घायल यात्रियों का नाम दीपक , दिनेश , राधिका , श्री ज्ञान चंद , हैं. वहीं मृतक का नाम विनोद है. वहीं इस घटना पर स्थानीय लोगों ने गुस्सा जाहिर किया है. उनका कहना है कि कई ग्रामीण सेवा के चालक नशे के हालत में रफ्तार में गाड़ी चलाते हैं, खटारा वाहनों में सवारियां ठूंसकर चलते हैं. ट्रैफिक नियमों का भी पालन नहीं करते हैं और ट्रैफिक पुलिस भी उनपर ठोस कार्रवाई नहीं करती है. इनकी मिलीभगत और मनमानी रफ्तार के चलते आम लोगों की जाम पर बनी रहती है. |
नहीं है कि बहुत शब्द "आक्रमण" कुछ, शत्रुतापूर्ण हिंसक है, इसी श्रृंखला में "हस्तक्षेप", "संक्रमण"। तो यह है - इस अवधि के विभिन्न परजीवी, साथ ही रोगों की वजह से उन्हें का जीव में प्रवेश कहा जाता है। ठीक है, विशेष रूप से कीड़े किसी परिचय का मोहताज - सभी उन्हें जानता है और यह संभावना नहीं है किसी को उनके पते में एक अच्छा शब्द कहेगा। दुनिया में सबसे आम बीमारियों में से एक - और, दुर्भाग्य से, उनके प्रति हमारे दृष्टिकोण की परवाह किए बिना, वे पूरे इतिहास में मानव जाति के निरंतर साथी, और कीड़ा संक्रमण है।
बेशक, इस धारणा है कि संक्रमण अपने सार में गरीब व्यक्तिगत स्वच्छता की वजह से, उचित और सही है। लेकिन, दुर्भाग्य से, न केवल sluts और गंदगी पीड़ित हैं। यह दुश्मन, चालाक चालाक और साधन संपन्न है, वह एक ट्रिमर और एक विध्वंसकारी, यहां तक कि मजबूत पर काबू पाने की क्षमता थी गढ़। आप वास्तव में कभी पता नहीं जब यह आपके शरीर में मिल गया, क्योंकि वह तुरंत उसके आयोजित की और जल्द ही स्पष्ट नजर नहीं। एक कीड़ा संक्रमणः और एक अच्छा दिन डॉक्टर के पास बीमारी की वजह से बदल नहीं, तो आप निदान को सुनने के लिए आश्चर्य कर रहे हैं। लक्षण काफी विविध हैं - क्यों हर चिकित्सक से तुरंत स्टील यह इन छोटी critters है की अपनी खराब स्थिति का कारण निर्धारित नहीं कर सकते - तापमान में वृद्धि और पेट दर्द और कमजोरी के एक खाँसी से।
हालांकि, उस छोटे नहीं हैं! आप हमारे लिए जाना जाता है, तो बचपन से pinworms 1 सेंटीमीटर की लंबाई से अधिक नहीं है, roundworm "उसके पकने लंबे हो" पहले से ही 25 सेंटीमीटर है। लेकिन यह अभी भी कुछ भी नहीं है, लेकिन है फीता कृमि दस मीटर की दूरी पर है - यह दिल वालों के लिए नहीं है। कीड़े के रस ऊतक और रक्त, पोषक तत्वों पीने - और इस तरह के एक राक्षस मालूम होता है उनकी उपस्थिति धोखा, लेकिन मेजबान के अंदर "को कम", शाब्दिक अर्थ में इसे से बाहर सब रस चूसने के बिना मानव शरीर के अंदर रह सकते हैं क्योंकि,। ऐसा लगता है कि खुद को संक्रमित खाने इसके परजीवी फ़ीड, और वह बहुमूल्य खनिजों खो देता है। लेकिन कीड़ा संक्रमण न केवल कि खतरनाक है। सभी जीवित प्राणियों की तरह, जीवन की प्रक्रिया में कीड़े कुछ पदार्थों है कि मनुष्यों और विषाक्त को विषाक्त कर रहे उत्पादन। लेकिन वे रक्त में अवशोषित कर रहे हैं और उसके बाद, सभी अंगों में फैल क्योंकि इन रोग के विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं।
भूख, की कमी के कारण उल्टी, पेट में दर्द, अपनी कुर्सी परेशान - यह enterobiosis pinworm, एस्कारियासिस या "provocateurs" जो राउंडवॉर्म हैं की वजह से हो सकता है। बुखार, मांसपेशियों में दर्द, एलर्जी - ट्रिचिनोसिस की तरह - एक खतरनाक बीमारी है, भी इसके प्रवर्तक के "सम्मान में" कहा जाता है। कुल थकावट, रक्ताल्पता, विक्षिप्त प्रतिक्रियाओं, पाचन संबंधी विकार - यह संभावना है कि "काम" फीता कृमि में से एक। कीड़ा संक्रमण - ये और अनेक अन्य सभी घटनाओं एक समूह, एक बीमारी, जिसका नाम में संयुक्त रहे हैं। उपचार, जैसे ही रोग का पता चला है देरी के बिना शुरू करना चाहिए देरी बार खतरनाक जटिलताओं से भरा के बाद से, कुछ मामलों में - यहां तक कि मृत्यु।
साथ ही कीड़ा संक्रमण का इलाज किया? बेशक, लक्षण काम करेंगे नहीं, क्योंकि जीव रोगी के अंदर बैठता है, लगातार अपने विनाशकारी गतिविधियों का विस्तार किया। इसलिए, यह घुसपैठिया दूर ड्राइव करने के लिए आवश्यक है! एक नियम के रूप में, जटिल उपचार नियुक्त किया है। प्रारंभ में रोगी वनस्पति तेल, योगों Allohol, enterosorbent से कीड़े खत्म करने के लिए तैयार किया जाता है। फिर, एक प्रत्यक्ष "ऑपरेशन जारी करने के लिए" अलग कृमिनाशक एजेंटों, दोनों प्राकृतिक और दवा मूल का उपयोग कर। और तीसरा कदम है, जिसके बाद एक परजीवी संक्रमण पहले से ही पूरी तरह से पराजित किया जाना चाहिए, प्रभावित अंगों की दवा वसूली भी शामिल है। शरीर detoxifies, चयापचय को सामान्य, प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित - दूसरे शब्दों में, सबसे वास्तविक है "हस्तक्षेप प्रदेशों के खिलाफ युद्ध के दौरान नष्ट में शांति निर्माण। "
| नहीं है कि बहुत शब्द "आक्रमण" कुछ, शत्रुतापूर्ण हिंसक है, इसी श्रृंखला में "हस्तक्षेप", "संक्रमण"। तो यह है - इस अवधि के विभिन्न परजीवी, साथ ही रोगों की वजह से उन्हें का जीव में प्रवेश कहा जाता है। ठीक है, विशेष रूप से कीड़े किसी परिचय का मोहताज - सभी उन्हें जानता है और यह संभावना नहीं है किसी को उनके पते में एक अच्छा शब्द कहेगा। दुनिया में सबसे आम बीमारियों में से एक - और, दुर्भाग्य से, उनके प्रति हमारे दृष्टिकोण की परवाह किए बिना, वे पूरे इतिहास में मानव जाति के निरंतर साथी, और कीड़ा संक्रमण है। बेशक, इस धारणा है कि संक्रमण अपने सार में गरीब व्यक्तिगत स्वच्छता की वजह से, उचित और सही है। लेकिन, दुर्भाग्य से, न केवल sluts और गंदगी पीड़ित हैं। यह दुश्मन, चालाक चालाक और साधन संपन्न है, वह एक ट्रिमर और एक विध्वंसकारी, यहां तक कि मजबूत पर काबू पाने की क्षमता थी गढ़। आप वास्तव में कभी पता नहीं जब यह आपके शरीर में मिल गया, क्योंकि वह तुरंत उसके आयोजित की और जल्द ही स्पष्ट नजर नहीं। एक कीड़ा संक्रमणः और एक अच्छा दिन डॉक्टर के पास बीमारी की वजह से बदल नहीं, तो आप निदान को सुनने के लिए आश्चर्य कर रहे हैं। लक्षण काफी विविध हैं - क्यों हर चिकित्सक से तुरंत स्टील यह इन छोटी critters है की अपनी खराब स्थिति का कारण निर्धारित नहीं कर सकते - तापमान में वृद्धि और पेट दर्द और कमजोरी के एक खाँसी से। हालांकि, उस छोटे नहीं हैं! आप हमारे लिए जाना जाता है, तो बचपन से pinworms एक सेंटीमीटर की लंबाई से अधिक नहीं है, roundworm "उसके पकने लंबे हो" पहले से ही पच्चीस सेंटीमीटर है। लेकिन यह अभी भी कुछ भी नहीं है, लेकिन है फीता कृमि दस मीटर की दूरी पर है - यह दिल वालों के लिए नहीं है। कीड़े के रस ऊतक और रक्त, पोषक तत्वों पीने - और इस तरह के एक राक्षस मालूम होता है उनकी उपस्थिति धोखा, लेकिन मेजबान के अंदर "को कम", शाब्दिक अर्थ में इसे से बाहर सब रस चूसने के बिना मानव शरीर के अंदर रह सकते हैं क्योंकि,। ऐसा लगता है कि खुद को संक्रमित खाने इसके परजीवी फ़ीड, और वह बहुमूल्य खनिजों खो देता है। लेकिन कीड़ा संक्रमण न केवल कि खतरनाक है। सभी जीवित प्राणियों की तरह, जीवन की प्रक्रिया में कीड़े कुछ पदार्थों है कि मनुष्यों और विषाक्त को विषाक्त कर रहे उत्पादन। लेकिन वे रक्त में अवशोषित कर रहे हैं और उसके बाद, सभी अंगों में फैल क्योंकि इन रोग के विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। भूख, की कमी के कारण उल्टी, पेट में दर्द, अपनी कुर्सी परेशान - यह enterobiosis pinworm, एस्कारियासिस या "provocateurs" जो राउंडवॉर्म हैं की वजह से हो सकता है। बुखार, मांसपेशियों में दर्द, एलर्जी - ट्रिचिनोसिस की तरह - एक खतरनाक बीमारी है, भी इसके प्रवर्तक के "सम्मान में" कहा जाता है। कुल थकावट, रक्ताल्पता, विक्षिप्त प्रतिक्रियाओं, पाचन संबंधी विकार - यह संभावना है कि "काम" फीता कृमि में से एक। कीड़ा संक्रमण - ये और अनेक अन्य सभी घटनाओं एक समूह, एक बीमारी, जिसका नाम में संयुक्त रहे हैं। उपचार, जैसे ही रोग का पता चला है देरी के बिना शुरू करना चाहिए देरी बार खतरनाक जटिलताओं से भरा के बाद से, कुछ मामलों में - यहां तक कि मृत्यु। साथ ही कीड़ा संक्रमण का इलाज किया? बेशक, लक्षण काम करेंगे नहीं, क्योंकि जीव रोगी के अंदर बैठता है, लगातार अपने विनाशकारी गतिविधियों का विस्तार किया। इसलिए, यह घुसपैठिया दूर ड्राइव करने के लिए आवश्यक है! एक नियम के रूप में, जटिल उपचार नियुक्त किया है। प्रारंभ में रोगी वनस्पति तेल, योगों Allohol, enterosorbent से कीड़े खत्म करने के लिए तैयार किया जाता है। फिर, एक प्रत्यक्ष "ऑपरेशन जारी करने के लिए" अलग कृमिनाशक एजेंटों, दोनों प्राकृतिक और दवा मूल का उपयोग कर। और तीसरा कदम है, जिसके बाद एक परजीवी संक्रमण पहले से ही पूरी तरह से पराजित किया जाना चाहिए, प्रभावित अंगों की दवा वसूली भी शामिल है। शरीर detoxifies, चयापचय को सामान्य, प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित - दूसरे शब्दों में, सबसे वास्तविक है "हस्तक्षेप प्रदेशों के खिलाफ युद्ध के दौरान नष्ट में शांति निर्माण। " |
इंदौर में कड़ावघाट गणगौर घाट के पास नदी किनारे दबे मंदिर को निकालने के लिए मिट्टी हटाने का काम शुरू हो गया है। खुदाई से मंदिर का स्वरूप दिखाई देने लगा है। नगर निगम कमिश्नर को कुछ दिन पहले हिंदू संगठन के कुछ लोगों ने ऐसे मंदिरों को लेकर चर्चा की थी, जो ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ अपना अस्तित्व खो रहे हैं। इसे लेकर कमिश्ननर ने जल्द काम की बात कही थी।
आयुक्त प्रतिभा पाल ने कड़ावघाट गणगौर घाट के पास नदी के किनारे कई साल से दबे हुए मंदिर की मिट्टी हटाने का कार्य शुरू कराया। इस मंदिर में कई वर्षों से मिट्टी के चलते गुंबद ही ऊपर से दिखाई ही नहीं देता था। इसमें स्थानीय नागरिकों के साथ हिंदूवादी संगठनों ने जीर्णोद्धार की मांग की थी। आयुक्त ने सावधानी से मिट्टी हटाकर मंदिर को निकालने के निर्देश दिए थे। मंदिर नदी किनारे होने के साथ ही आसपास घाट होने व बावड़ी होने की भी जानकारी थी।
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| इंदौर में कड़ावघाट गणगौर घाट के पास नदी किनारे दबे मंदिर को निकालने के लिए मिट्टी हटाने का काम शुरू हो गया है। खुदाई से मंदिर का स्वरूप दिखाई देने लगा है। नगर निगम कमिश्नर को कुछ दिन पहले हिंदू संगठन के कुछ लोगों ने ऐसे मंदिरों को लेकर चर्चा की थी, जो ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ अपना अस्तित्व खो रहे हैं। इसे लेकर कमिश्ननर ने जल्द काम की बात कही थी। आयुक्त प्रतिभा पाल ने कड़ावघाट गणगौर घाट के पास नदी के किनारे कई साल से दबे हुए मंदिर की मिट्टी हटाने का कार्य शुरू कराया। इस मंदिर में कई वर्षों से मिट्टी के चलते गुंबद ही ऊपर से दिखाई ही नहीं देता था। इसमें स्थानीय नागरिकों के साथ हिंदूवादी संगठनों ने जीर्णोद्धार की मांग की थी। आयुक्त ने सावधानी से मिट्टी हटाकर मंदिर को निकालने के निर्देश दिए थे। मंदिर नदी किनारे होने के साथ ही आसपास घाट होने व बावड़ी होने की भी जानकारी थी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
शैलेन्द्र पाठक, बिलासपुर। अम्बिकापुर पुलिस की हिरासत में आदिवासी युवक पंकज बेक की मौत के मामले में निलंबित टीआई विनीत दुबे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दुबे को अग्रिम जमानत दे दी है.
आपको बता दें पिछले साल आदिवासी युवक पंकज बेक और उसके एक साथी को अंबिकापुर पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उसका शव साइबर थाना के पास स्थित एक हॉस्पिटल में लगे कूलर के नीचे फांसी के फंदे पर झूलता मिला था. मामले में परिजनों ने पुलिस के ऊपर पंकज बेग के साथ मारपीट करने और उसकी हत्या का आरोप लगाया था. परिजनों के मुताबिक पंकज बेग के शव में मारपीट और चोंट के निशान थे.
मीडिया में खबर आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और तत्कालीन आईजी ने टीआई सहित 5 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था. मामले की जांच के बाद सभी निलंबित पुलिस कर्मियों के खिलाफ धारा 306 के तहत अपराध दर्ज किया गया था. एफआईआर के बाद निलंबित टीआई ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी.
| शैलेन्द्र पाठक, बिलासपुर। अम्बिकापुर पुलिस की हिरासत में आदिवासी युवक पंकज बेक की मौत के मामले में निलंबित टीआई विनीत दुबे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दुबे को अग्रिम जमानत दे दी है. आपको बता दें पिछले साल आदिवासी युवक पंकज बेक और उसके एक साथी को अंबिकापुर पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उसका शव साइबर थाना के पास स्थित एक हॉस्पिटल में लगे कूलर के नीचे फांसी के फंदे पर झूलता मिला था. मामले में परिजनों ने पुलिस के ऊपर पंकज बेग के साथ मारपीट करने और उसकी हत्या का आरोप लगाया था. परिजनों के मुताबिक पंकज बेग के शव में मारपीट और चोंट के निशान थे. मीडिया में खबर आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और तत्कालीन आईजी ने टीआई सहित पाँच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था. मामले की जांच के बाद सभी निलंबित पुलिस कर्मियों के खिलाफ धारा तीन सौ छः के तहत अपराध दर्ज किया गया था. एफआईआर के बाद निलंबित टीआई ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी. |
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिलकिस बानो की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने गुजरात सरकार पर अपने मामले के ग्यारह दोषियों को समय से पहले रिहा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दोषियों को रिहा किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने 11 दोषियों को उनकी कैद की अवधि के दौरान दी गई पैरोल पर सवाल उठाया और कहा कि अपराध की गंभीरता पर राज्य द्वारा विचार किया जा सकता था।
इसमें कहा गया है, "एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और कई लोग मारे गए। आप पीड़ित के मामले की तुलना मानक धारा 302 (हत्या) के मामलों से नहीं कर सकते। जैसे आप सेब की तुलना संतरे से नहीं कर सकते, उसी तरह नरसंहार की तुलना एकल हत्या से नहीं की जा सकती। अपराध हैं आम तौर पर समाज और समुदाय के खिलाफ प्रतिबद्ध है। असमानों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता है। "
पीठ ने कहा, "सवाल यह है कि क्या सरकार ने अपना दिमाग लगाया और छूट देने के अपने फैसले के आधार पर क्या सामग्री बनाई," आज यह बिलकिस के साथ हुआ, कल किसी के साथ भी हो सकता है। यदि आप छूट देने के अपने कारण नहीं बताते हैं, तो हम अपने निष्कर्ष निकालेंगे। "
पीठ ने बिलकिस बानो मामले में दोषियों को राहत देने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 2 मई दोपहर 2 बजे के लिए पोस्ट कर दिया और उन सभी दोषियों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा जिन्हें नोटिस नहीं दिया गया है।
इसने केंद्र और राज्य से समीक्षा याचिका दाखिल करने के बारे में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
27 मार्च को, गोधरा दंगों के दौरान 2002 के गोधरा दंगों के दौरान बिल्किस बानो के सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या को एक "भयानक" कृत्य करार देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा था कि क्या हत्या के अन्य मामलों में समान मानकों का पालन किया गया था? मामले में 11 दोषियों को छूट देते हुए आवेदन किया था।
इसने बिल्किस बानो द्वारा दायर याचिका पर केंद्र, गुजरात सरकार और अन्य से जवाब मांगा था, जिसके साथ 2002 के गोधरा दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
| सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिलकिस बानो की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने गुजरात सरकार पर अपने मामले के ग्यारह दोषियों को समय से पहले रिहा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दोषियों को रिहा किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने ग्यारह दोषियों को उनकी कैद की अवधि के दौरान दी गई पैरोल पर सवाल उठाया और कहा कि अपराध की गंभीरता पर राज्य द्वारा विचार किया जा सकता था। इसमें कहा गया है, "एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और कई लोग मारे गए। आप पीड़ित के मामले की तुलना मानक धारा तीन सौ दो के मामलों से नहीं कर सकते। जैसे आप सेब की तुलना संतरे से नहीं कर सकते, उसी तरह नरसंहार की तुलना एकल हत्या से नहीं की जा सकती। अपराध हैं आम तौर पर समाज और समुदाय के खिलाफ प्रतिबद्ध है। असमानों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता है। " पीठ ने कहा, "सवाल यह है कि क्या सरकार ने अपना दिमाग लगाया और छूट देने के अपने फैसले के आधार पर क्या सामग्री बनाई," आज यह बिलकिस के साथ हुआ, कल किसी के साथ भी हो सकता है। यदि आप छूट देने के अपने कारण नहीं बताते हैं, तो हम अपने निष्कर्ष निकालेंगे। " पीठ ने बिलकिस बानो मामले में दोषियों को राहत देने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को दो मई दोपहर दो बजे के लिए पोस्ट कर दिया और उन सभी दोषियों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा जिन्हें नोटिस नहीं दिया गया है। इसने केंद्र और राज्य से समीक्षा याचिका दाखिल करने के बारे में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। सत्ताईस मार्च को, गोधरा दंगों के दौरान दो हज़ार दो के गोधरा दंगों के दौरान बिल्किस बानो के सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या को एक "भयानक" कृत्य करार देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा था कि क्या हत्या के अन्य मामलों में समान मानकों का पालन किया गया था? मामले में ग्यारह दोषियों को छूट देते हुए आवेदन किया था। इसने बिल्किस बानो द्वारा दायर याचिका पर केंद्र, गुजरात सरकार और अन्य से जवाब मांगा था, जिसके साथ दो हज़ार दो के गोधरा दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। |
दुनियाभर में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा अभी भी एक सवाल बना हुआ है। अपनी रिपोर्ट के चलते कई बार पत्रकारों को जेल की हवा तक खानी पड़ती है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की दिल्ली जोन मीडिया विंग की ओर से आयोजित बैठक में आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि समाज को सूचित, शिक्षित और प्रेरित करना पत्रकारिता का धर्म है।
त्रिपुरा में पत्रकारों और मीडिया पर हो रहे हमलों को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने राज्य सरकार पर नराजगी व्यक्त की है।
'द इकनॉमिक टाइम्स' (The Economic Times) के मोहित जैन को 'इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी' (INS) का प्रेजिडेंट चुना गया है।
प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में नौकरी के नाम पर फर्जी वादा करने वाले ऑनलाइन स्कैमर्स ने भारतीय मीडिया की प्रख्यात महिला शख्सियतों को अपना निशाना बनाया है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में बुधवार को पत्रकारों को गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी द्वारा कथित रूप से धमकाने व अपशब्द कहने का मामला सामने आया है।
श्वेता हर जगह प्राइम टाइम फेस रही हैं। मीडिया में करीब 11 साल की अपनी पारी में श्वेता भट्टाचार्य ने कई डिबेट शो व आउटडोर शूट किए हैं।
कोरोना के मामलों में एक बार फिर इजाफा होने लगा है। कोरोना के नए वैरिएंट 'ओमिक्रॉन' ने भारत समेत कई देशों की चिंताए बढ़ा दी है।
'इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर 2020' अवॉर्ड समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इस मौके पर उनका भाषण छोटा मगर काफी सारगर्भित और प्रभावशाली था।
कोविड के नाम पर संसद भवन परिसर में पत्रकारों की गतिविधियों को सीमित करने को लेकर गुरुवार को तमाम पत्रकार राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उतर आए।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है। दरअसल, झारखंड में कार्यरत मीडियाकर्मियों को स्वास्थ्य बीमा योजना से जोड़ने की घोषणा की गयी है।
'इंडियन फेडरेशन ऑफ मीडिया' से संबद्ध 'एम. पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन' ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकार भवन के निर्माण की मांग की है।
श्वेता हर जगह प्राइम टाइम फेस रही हैं। मीडिया में करीब 11 साल की अपनी पारी में श्वेता भट्टाचार्य ने कई डिबेट शो व आउटडोर शूट किए हैं।
महामारी के बुरे दौर का सामना करते हुए लोगों को बेहतर कंटेंट देने वाले मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर लक्ष्मी जी की विशेष कृपा रही है।
'भारतीय जनसंचार संस्थान' के सत्रारंभ समारोह में राज्यसभा के उपसभापति ने कहा-एक पत्रकार को समाज से जुड़े प्रत्येक विषय की जानकारी होनी चाहिए।
| दुनियाभर में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा अभी भी एक सवाल बना हुआ है। अपनी रिपोर्ट के चलते कई बार पत्रकारों को जेल की हवा तक खानी पड़ती है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की दिल्ली जोन मीडिया विंग की ओर से आयोजित बैठक में आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि समाज को सूचित, शिक्षित और प्रेरित करना पत्रकारिता का धर्म है। त्रिपुरा में पत्रकारों और मीडिया पर हो रहे हमलों को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने राज्य सरकार पर नराजगी व्यक्त की है। 'द इकनॉमिक टाइम्स' के मोहित जैन को 'इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी' का प्रेजिडेंट चुना गया है। प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में नौकरी के नाम पर फर्जी वादा करने वाले ऑनलाइन स्कैमर्स ने भारतीय मीडिया की प्रख्यात महिला शख्सियतों को अपना निशाना बनाया है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में बुधवार को पत्रकारों को गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी द्वारा कथित रूप से धमकाने व अपशब्द कहने का मामला सामने आया है। श्वेता हर जगह प्राइम टाइम फेस रही हैं। मीडिया में करीब ग्यारह साल की अपनी पारी में श्वेता भट्टाचार्य ने कई डिबेट शो व आउटडोर शूट किए हैं। कोरोना के मामलों में एक बार फिर इजाफा होने लगा है। कोरोना के नए वैरिएंट 'ओमिक्रॉन' ने भारत समेत कई देशों की चिंताए बढ़ा दी है। 'इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर दो हज़ार बीस' अवॉर्ड समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इस मौके पर उनका भाषण छोटा मगर काफी सारगर्भित और प्रभावशाली था। कोविड के नाम पर संसद भवन परिसर में पत्रकारों की गतिविधियों को सीमित करने को लेकर गुरुवार को तमाम पत्रकार राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उतर आए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है। दरअसल, झारखंड में कार्यरत मीडियाकर्मियों को स्वास्थ्य बीमा योजना से जोड़ने की घोषणा की गयी है। 'इंडियन फेडरेशन ऑफ मीडिया' से संबद्ध 'एम. पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन' ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकार भवन के निर्माण की मांग की है। श्वेता हर जगह प्राइम टाइम फेस रही हैं। मीडिया में करीब ग्यारह साल की अपनी पारी में श्वेता भट्टाचार्य ने कई डिबेट शो व आउटडोर शूट किए हैं। महामारी के बुरे दौर का सामना करते हुए लोगों को बेहतर कंटेंट देने वाले मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर लक्ष्मी जी की विशेष कृपा रही है। 'भारतीय जनसंचार संस्थान' के सत्रारंभ समारोह में राज्यसभा के उपसभापति ने कहा-एक पत्रकार को समाज से जुड़े प्रत्येक विषय की जानकारी होनी चाहिए। |
सिवान : इस वक्त की बड़ी खबर बिहार के सिवान जिले से सामने आ रही है। यहां बदमाशों ने पुलिस दल पर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में एक सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया।
जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, सिपाही के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ऐसा बताया जा रहा है कि बदमाशों ने इस घटना को उस वक्त अंजाम दिया, जब पुलिसकर्मी शराब माफिया के यहां छापेमारी कर वापस लौट रहे थे।
| सिवान : इस वक्त की बड़ी खबर बिहार के सिवान जिले से सामने आ रही है। यहां बदमाशों ने पुलिस दल पर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में एक सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, सिपाही के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ऐसा बताया जा रहा है कि बदमाशों ने इस घटना को उस वक्त अंजाम दिया, जब पुलिसकर्मी शराब माफिया के यहां छापेमारी कर वापस लौट रहे थे। |
एनसीपी प्रमुख ने कहा कि मैंने एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह को टेलीविजन पर देखा। वह (राज्यपाल) उन्हें पेड़ा खिला रहे थे और गुलदस्ता भेंट कर रहे थे। ऐसा लगता है कि उनमें कुछ गुणात्मक बदलाव आया है। वर्ष 2019 में महा विकास अघाडी के नेताओं के शपथ ग्रहण समारोह को याद करते हुए पवार ने कहा कि मैं वहां मौजूद था। कोश्यारी ने कुछ भावी मंत्रियों द्वारा कुछ हस्तियों का नाम लेकर शपथ लेने पर आपत्ति जताई थी। यहां तक उन्होंने उस समय मुझे देखकर केवल प्रारूप के तहत ही शपथ लेने को कहा था।
उन्होंने कहा कि अगर एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को दिवंगत बालासाहेब ठाकरे और दिवंगत आनंद दिघे का उल्लेख किया, लेकिन कोश्यारी ने उस समय कोई आपत्ति नहीं की। वयोवृद्ध नेता ने राज्यपाल और उनके कार्यालय के राज्य सरकार से संबंध पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला हमेशा राज्यपाल के लिए बाध्यकारी होता है।
उन्होंने कहा कि एमवीए सरकार ने राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में नामित करने के लिए 12 लोगों की सूची दी थी, जिसे कभी मंजूरी नहीं दी गई। यह कहा गया कि राज्य में बनी नयी सरकार के साथ वह जल्द फैसला लेंगे। पवार ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से पदभार ग्रहण करने के दौरान उनके द्वारा लिए गए फैसले के विपरीत था। राज्यपाल को विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के साथ व्यवहार करने में तटस्थ होना चाहिए।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| एनसीपी प्रमुख ने कहा कि मैंने एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह को टेलीविजन पर देखा। वह उन्हें पेड़ा खिला रहे थे और गुलदस्ता भेंट कर रहे थे। ऐसा लगता है कि उनमें कुछ गुणात्मक बदलाव आया है। वर्ष दो हज़ार उन्नीस में महा विकास अघाडी के नेताओं के शपथ ग्रहण समारोह को याद करते हुए पवार ने कहा कि मैं वहां मौजूद था। कोश्यारी ने कुछ भावी मंत्रियों द्वारा कुछ हस्तियों का नाम लेकर शपथ लेने पर आपत्ति जताई थी। यहां तक उन्होंने उस समय मुझे देखकर केवल प्रारूप के तहत ही शपथ लेने को कहा था। उन्होंने कहा कि अगर एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को दिवंगत बालासाहेब ठाकरे और दिवंगत आनंद दिघे का उल्लेख किया, लेकिन कोश्यारी ने उस समय कोई आपत्ति नहीं की। वयोवृद्ध नेता ने राज्यपाल और उनके कार्यालय के राज्य सरकार से संबंध पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला हमेशा राज्यपाल के लिए बाध्यकारी होता है। उन्होंने कहा कि एमवीए सरकार ने राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में नामित करने के लिए बारह लोगों की सूची दी थी, जिसे कभी मंजूरी नहीं दी गई। यह कहा गया कि राज्य में बनी नयी सरकार के साथ वह जल्द फैसला लेंगे। पवार ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से पदभार ग्रहण करने के दौरान उनके द्वारा लिए गए फैसले के विपरीत था। राज्यपाल को विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के साथ व्यवहार करने में तटस्थ होना चाहिए। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
उत्तर बिहार में गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाेने से जिले की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। वहीं पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके में दो नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ से कई गांव प्रभावित हुए हैं।
भारी बारिश के बाद नेपाल ने पानी छोड़ा है। जिसके बाद उत्तर बिहार में गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाेने से जिले की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। वहीं पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके में दो नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ से कई गांव प्रभावित हुए हैं। एक व्यक्ति ने सोमवार को कहा कि प्रशासन ने हमें अब तक कोई राहत नहीं दी है। उन्हें यहां के ग्रामीणों के लिए राहत शिविर स्थापित करने चाहिए।
बगहा एसडीएम शेखर आनंद ने पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित रामनगर इलाके का दौरा किया। इस दौरान नदी तटबंध तक पहुंचने के लिए उन्हें बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा।
दूसरी ओर बेतिया अनुमंडल क्षेत्र में बाढ़ के कारण रेल यातायात ठप हो गया है। बेतिया-मुज्जफ्फरपुर रेलखंड के ट्रैक पर पानी चढ़ जाने से ट्रेनों का आवागमन ठप हो गया है। इस रेलखंड पर चलने वाली कई ट्रेनों का जहां रूट बदल दिया गया है, तो वहीं कई ट्रेनो को रद्द कर दिया गया है। इससे यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।
वहीं मौसम विभाग की चेतावनी से लोगों में डर का माहौल है। पहले से ही बाढ़ से जूझ रहे लोगों को मौसम विज्ञान की चेतावनी से दहशत में है। मौसम विभाग ने 9 जुलाई तक के लिए राज्य में येलो अलर्ट जारी कर दिया है। केंद्र की ओर से राज्य के समस्तीपुर, मधुबनी, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहारहार, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिले में बारिश, वज्रपात और तेज हवाएं चलने का अनुमान जारी किया गया है।
| उत्तर बिहार में गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाेने से जिले की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। वहीं पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके में दो नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ से कई गांव प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश के बाद नेपाल ने पानी छोड़ा है। जिसके बाद उत्तर बिहार में गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाेने से जिले की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। वहीं पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके में दो नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ से कई गांव प्रभावित हुए हैं। एक व्यक्ति ने सोमवार को कहा कि प्रशासन ने हमें अब तक कोई राहत नहीं दी है। उन्हें यहां के ग्रामीणों के लिए राहत शिविर स्थापित करने चाहिए। बगहा एसडीएम शेखर आनंद ने पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित रामनगर इलाके का दौरा किया। इस दौरान नदी तटबंध तक पहुंचने के लिए उन्हें बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा। दूसरी ओर बेतिया अनुमंडल क्षेत्र में बाढ़ के कारण रेल यातायात ठप हो गया है। बेतिया-मुज्जफ्फरपुर रेलखंड के ट्रैक पर पानी चढ़ जाने से ट्रेनों का आवागमन ठप हो गया है। इस रेलखंड पर चलने वाली कई ट्रेनों का जहां रूट बदल दिया गया है, तो वहीं कई ट्रेनो को रद्द कर दिया गया है। इससे यात्रियों को भी परेशानी हो रही है। वहीं मौसम विभाग की चेतावनी से लोगों में डर का माहौल है। पहले से ही बाढ़ से जूझ रहे लोगों को मौसम विज्ञान की चेतावनी से दहशत में है। मौसम विभाग ने नौ जुलाई तक के लिए राज्य में येलो अलर्ट जारी कर दिया है। केंद्र की ओर से राज्य के समस्तीपुर, मधुबनी, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहारहार, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिले में बारिश, वज्रपात और तेज हवाएं चलने का अनुमान जारी किया गया है। |
देश के दूरसंचार क्षेत्र (Telecom Sector) में चार साल पहले जब रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने कदम रखा तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह कंपनी कुछ ही सालों में इस क्षेत्र में डेटा बदलाव बनेगी तथा इसके आगमन से डेटा की कीमतें 40 गुना तक कम (Data Prices Down to 40 Times) हो जाएंगी।
इन कंपनियों को रजिस्ट्रेशन से पहले इन कम्पनियों को रक्षा मंत्रालय (Defance Ministry), विदेश मंत्रालय से राजनीतिक सहमति और गृह मंत्रालय (Home Ministry) से सुरक्षा संबंधी अनुमति लेनी होगी।
बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने शिवसेना सांसद संजय राउत (Shiv Sena MP Sanjay Raut) को ट्वीट (Tweet) के जरिए करारा जवाब दिया है। चैलेंज करते हुए कहा कि 9 सितंबर को मुंबई जाऊंगी, किसी में हिम्मत हो तो रोक ले।
पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) को बड़ा झटका लगा है। दरअसल इमरान खान के करीबी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) असीम सलीम बाजवा (Asim Saleem Bajwa) ने पीएम के सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया है।
विदेशी बाजारों (Foreign Markets) से मिले निराशाजनक संकेतों से घरेलू शेयर बाजार (Share Market) में शुक्रवार को आरंभिक कारोबार के दौरान कोहराम का आलम रहा। सेंसेक्स (Sensex) करीब 700 अंक टूटा और निफ्टी (Nifty) भी करीब 200 अंक लुढ़का।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को 1984 सिख दंगे (Anti-Sikh Riots) के एक मामले में कांग्रेस (Congress) के पूर्व नेता सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को जमानत देने से इनकार कर दिया।
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति(Gayatri Prasad Prajpati) ने हाईकोर्ट की लखनऊ(High court) बेंच में अंतरिम बेल की अर्जी डाली थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पांच लाख के पर्सनल बांड और दो जमानतदारों की शर्त के साथ गायत्री को जमानत दी है।
दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर जारी है। ऐसे में इस महामारी के दौरान शारीरिक संबंध (Physical Relationship) बनाने पर कनाडा के एक्सपर्ट ने एडवाइजरी (Advisory) जारी की है।
भारत (India) में बैन होने के एक दिन बाद ही लोकप्रिय मोबाइल गेम -पबजी (PUBG) के मोबाइल वर्जन और लाइट वर्जन को गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) तथा एप्पल ऐप स्टोर्स (Apple App Store) से हटा दिया गया है।
तमिलनाडु (Tamil Nadu) के कुड्डालोर (Cuddalore) जिले में पटाखा बनाने की एक फैक्ट्री में भीषण धमाका हो गया जिसमें सात लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
| देश के दूरसंचार क्षेत्र में चार साल पहले जब रिलायंस जियो ने कदम रखा तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह कंपनी कुछ ही सालों में इस क्षेत्र में डेटा बदलाव बनेगी तथा इसके आगमन से डेटा की कीमतें चालीस गुना तक कम हो जाएंगी। इन कंपनियों को रजिस्ट्रेशन से पहले इन कम्पनियों को रक्षा मंत्रालय , विदेश मंत्रालय से राजनीतिक सहमति और गृह मंत्रालय से सुरक्षा संबंधी अनुमति लेनी होगी। बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत ने शिवसेना सांसद संजय राउत को ट्वीट के जरिए करारा जवाब दिया है। चैलेंज करते हुए कहा कि नौ सितंबर को मुंबई जाऊंगी, किसी में हिम्मत हो तो रोक ले। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को बड़ा झटका लगा है। दरअसल इमरान खान के करीबी लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा ने पीएम के सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया है। विदेशी बाजारों से मिले निराशाजनक संकेतों से घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को आरंभिक कारोबार के दौरान कोहराम का आलम रहा। सेंसेक्स करीब सात सौ अंक टूटा और निफ्टी भी करीब दो सौ अंक लुढ़का। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक हज़ार नौ सौ चौरासी सिख दंगे के एक मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया। पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अंतरिम बेल की अर्जी डाली थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पांच लाख के पर्सनल बांड और दो जमानतदारों की शर्त के साथ गायत्री को जमानत दी है। दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। ऐसे में इस महामारी के दौरान शारीरिक संबंध बनाने पर कनाडा के एक्सपर्ट ने एडवाइजरी जारी की है। भारत में बैन होने के एक दिन बाद ही लोकप्रिय मोबाइल गेम -पबजी के मोबाइल वर्जन और लाइट वर्जन को गूगल प्ले स्टोर तथा एप्पल ऐप स्टोर्स से हटा दिया गया है। तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में पटाखा बनाने की एक फैक्ट्री में भीषण धमाका हो गया जिसमें सात लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। |
#Gurugram: एक-एक करके ये दोनों शख्स कई गमलों को उठाते हैं और फिर गाड़ी लेकर रफू चक्कर हो जाते हैं। सड़क पर सजाए गए गमलों को चुराने का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने भी एक्शन में आते हैं गाड़ी सवार युवकों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने गमला चुराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इस वक्त गमला चोरी करने वाले दो युवकों का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वायरल हो रहे वीडियो को गुरुग्राम का बताया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि दो शख्स लग्जरी गाड़ी में आते हैं और फिर फूलों के गमलों के पास गाड़ी को खड़ी करते हैं। एक-एक करके ये दोनों शख्स कई गमलों को उठाते हैं और फिर गाड़ी लेकर रफू चक्कर हो जाते हैं। सड़क पर सजाए गए गमलों को चुराने का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने भी एक्शन में आते हैं गाड़ी सवार युवकों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने गमला चुराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है।
पुलिस ने वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनमोहन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों दिल्ली से गुरुग्राम की तरफ लौट रहे थे तभी उनकी नजर सड़क किनारे सजाए गए गमलों पर पड़ी तो इन्होंने गमलों के पास ही अपनी गाड़ी रोक ली। इसके बाद इन दोनों कार सवार युवकों ने कई गमलों को अपनी गाड़ी में डाला और चलते बने। पुलिस ने आरोपी मोहनलाल की गिरफ्तारी गाड़ी के नंबर के आधार पर की है। जांच में पुलिस को पता चला कि गाड़ी हरियाणा के हिसार की है और ये गाड़ी मोहनलाल की पत्नी के नाम पर है। फिलहाल पुलिस ने मोहनलाल को गिरफ्तार कर दूसरे युवक की तलाश शुरू कर दी है।
आपको बता दें कि आज 1 मार्च से गुरुग्राम में जी 20 मीट शुरू हो गया है। इसे लेकर ही गुरूग्राम में मनमोहक सजावट की गई थी। हालांकि इन दोनों कार सवार द्वारा मीट के लिए सजाए गए गमलों को चुराया गया। इधर इस मामले में फेमस यूट्यूबर का नाम भी सामने आया था।
जानकारी के लिए बता दें कि पहले कहा गया कि जिस गाड़ी में ये गमला चोर आए थे वो फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव की है। इसके बाद से ही एल्विश यादव को काफी ट्रोल भी किया गया। हालांकि सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल होने के बाद एल्विश यादव ने सामने आकर बताया कि ये गाड़ी उनकी नहीं है और उनपर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। एल्विश यादव ने ये भी कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ वो मामला दर्ज कराएंगे।
| #Gurugram: एक-एक करके ये दोनों शख्स कई गमलों को उठाते हैं और फिर गाड़ी लेकर रफू चक्कर हो जाते हैं। सड़क पर सजाए गए गमलों को चुराने का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने भी एक्शन में आते हैं गाड़ी सवार युवकों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने गमला चुराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है। नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इस वक्त गमला चोरी करने वाले दो युवकों का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वायरल हो रहे वीडियो को गुरुग्राम का बताया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि दो शख्स लग्जरी गाड़ी में आते हैं और फिर फूलों के गमलों के पास गाड़ी को खड़ी करते हैं। एक-एक करके ये दोनों शख्स कई गमलों को उठाते हैं और फिर गाड़ी लेकर रफू चक्कर हो जाते हैं। सड़क पर सजाए गए गमलों को चुराने का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने भी एक्शन में आते हैं गाड़ी सवार युवकों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने गमला चुराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस ने वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनमोहन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों दिल्ली से गुरुग्राम की तरफ लौट रहे थे तभी उनकी नजर सड़क किनारे सजाए गए गमलों पर पड़ी तो इन्होंने गमलों के पास ही अपनी गाड़ी रोक ली। इसके बाद इन दोनों कार सवार युवकों ने कई गमलों को अपनी गाड़ी में डाला और चलते बने। पुलिस ने आरोपी मोहनलाल की गिरफ्तारी गाड़ी के नंबर के आधार पर की है। जांच में पुलिस को पता चला कि गाड़ी हरियाणा के हिसार की है और ये गाड़ी मोहनलाल की पत्नी के नाम पर है। फिलहाल पुलिस ने मोहनलाल को गिरफ्तार कर दूसरे युवक की तलाश शुरू कर दी है। आपको बता दें कि आज एक मार्च से गुरुग्राम में जी बीस मीट शुरू हो गया है। इसे लेकर ही गुरूग्राम में मनमोहक सजावट की गई थी। हालांकि इन दोनों कार सवार द्वारा मीट के लिए सजाए गए गमलों को चुराया गया। इधर इस मामले में फेमस यूट्यूबर का नाम भी सामने आया था। जानकारी के लिए बता दें कि पहले कहा गया कि जिस गाड़ी में ये गमला चोर आए थे वो फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव की है। इसके बाद से ही एल्विश यादव को काफी ट्रोल भी किया गया। हालांकि सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल होने के बाद एल्विश यादव ने सामने आकर बताया कि ये गाड़ी उनकी नहीं है और उनपर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। एल्विश यादव ने ये भी कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ वो मामला दर्ज कराएंगे। |
Jamshedpur : जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना अंतर्गत धातकीडीह गैरेज लाइन में बुधवार की रात चोरों ने सोहेल अहमद के गैरेज का ताला काटकर छोटी-छोटी मशीनें चोरी कर लीं. गैरेज लाइन में गाड़ी की मरम्मत और सर्विसिंग का काम होता है. गैरेज लाइन में लगातार चोरी हो रही है. इसकी शिकायत कई बार दुकानदारों ने बिष्टुपुर थाना में दर्ज कराई है. इसके बावजूद आए दिन दुकानों का ताला तोड़कर चोरी कर ली जा रही है. दुकानदार ने कहा कि गैरेज से छोटी-छोटी मशीन की चोरी कर ली गई है. इसकी कीमत 40 से 50 हजार रुपए है.
दूसरी ओर, बर्मामाइंस थाना अंतर्गत ट्यूब गेट के समीप पंजाब होटल में चोरों ने चोरी का प्रयास किया. हालांकि चोर चोरी नहीं कर पाया. चोर दुकान का ताला तोड़कर भीतर जरूर घुसा लेकिन सामान नहीं ले जा पाया. दुकान मालिक तजिंदर सिंह उर्फ बिट्टू के अनुसार उन्हें किसी ने दुकान का ताला टूटे होने की जानकारी दी. पहुंचने पर देखा दुकान के अंदर रखे सभी सामान सुरक्षित हैं. इसकी जानकारी बर्मामाइंस थाना को दे दी गई है.
| Jamshedpur : जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना अंतर्गत धातकीडीह गैरेज लाइन में बुधवार की रात चोरों ने सोहेल अहमद के गैरेज का ताला काटकर छोटी-छोटी मशीनें चोरी कर लीं. गैरेज लाइन में गाड़ी की मरम्मत और सर्विसिंग का काम होता है. गैरेज लाइन में लगातार चोरी हो रही है. इसकी शिकायत कई बार दुकानदारों ने बिष्टुपुर थाना में दर्ज कराई है. इसके बावजूद आए दिन दुकानों का ताला तोड़कर चोरी कर ली जा रही है. दुकानदार ने कहा कि गैरेज से छोटी-छोटी मशीन की चोरी कर ली गई है. इसकी कीमत चालीस से पचास हजार रुपए है. दूसरी ओर, बर्मामाइंस थाना अंतर्गत ट्यूब गेट के समीप पंजाब होटल में चोरों ने चोरी का प्रयास किया. हालांकि चोर चोरी नहीं कर पाया. चोर दुकान का ताला तोड़कर भीतर जरूर घुसा लेकिन सामान नहीं ले जा पाया. दुकान मालिक तजिंदर सिंह उर्फ बिट्टू के अनुसार उन्हें किसी ने दुकान का ताला टूटे होने की जानकारी दी. पहुंचने पर देखा दुकान के अंदर रखे सभी सामान सुरक्षित हैं. इसकी जानकारी बर्मामाइंस थाना को दे दी गई है. |
भारतीय और योरोपीय शिक्षाका इतिहास २८७
जोड़ दिया कि वर्णपद्धति ( एल्फ़ बेटिक मेथड ) से न पढ़कर शब्दबोधपद्धति या 'देखो और कहो पद्धति' ( वर्ड- फ़ौम मेथड या लुक ऐंड से मेथड ) से पढ़ाया जाय । जहाँ एक श्रोर बालककी रुचि और समर्थताको ध्यान में रखकर उसका शिक्षा क्रम निर्णय करनेकी बात कही जाती हो वहीं उसके साथ यह भी कहना कि भिन्न प्रकृति, भिन्न रुचि, भिन्न समर्थता, भिन्न प्रकृति तथा भिन्न प्रवृत्तिवाले बालक और बालिकाओं को एक ढंगकी शिक्षा दी जाय, कितना असंगत और अव्यवहार्य है । संसारका कोई भी विचारशील व्यक्ति यह कभी माननेको उद्यत नहीं होगा कि बालक-बालिका दोनोंके लिये समान पाठ्यक्रम निर्धारित करनेकी भूल की जाय।
इसी प्रकार अक्षर पद्धतिले भाषा सिखानेके बदले शब्द-बोध-पद्धतिसे भाषा सिखानेसे सबसे बड़ी हानि यह होगी कि शब्दके अक्षरोंका विलग परिचय न होनेसे शब्दोंके शुद्ध रूप बालकको कभी नहीं श्रा सकते । हौरेस मानने यदि ये दो बातें न कही होतीं तो उसके शिक्षा सम्बन्धी सिद्धान्त निश्चित रूपसे इस युगके लिये सर्वमान्य हो जाते । | भारतीय और योरोपीय शिक्षाका इतिहास दो सौ सत्तासी जोड़ दिया कि वर्णपद्धति से न पढ़कर शब्दबोधपद्धति या 'देखो और कहो पद्धति' से पढ़ाया जाय । जहाँ एक श्रोर बालककी रुचि और समर्थताको ध्यान में रखकर उसका शिक्षा क्रम निर्णय करनेकी बात कही जाती हो वहीं उसके साथ यह भी कहना कि भिन्न प्रकृति, भिन्न रुचि, भिन्न समर्थता, भिन्न प्रकृति तथा भिन्न प्रवृत्तिवाले बालक और बालिकाओं को एक ढंगकी शिक्षा दी जाय, कितना असंगत और अव्यवहार्य है । संसारका कोई भी विचारशील व्यक्ति यह कभी माननेको उद्यत नहीं होगा कि बालक-बालिका दोनोंके लिये समान पाठ्यक्रम निर्धारित करनेकी भूल की जाय। इसी प्रकार अक्षर पद्धतिले भाषा सिखानेके बदले शब्द-बोध-पद्धतिसे भाषा सिखानेसे सबसे बड़ी हानि यह होगी कि शब्दके अक्षरोंका विलग परिचय न होनेसे शब्दोंके शुद्ध रूप बालकको कभी नहीं श्रा सकते । हौरेस मानने यदि ये दो बातें न कही होतीं तो उसके शिक्षा सम्बन्धी सिद्धान्त निश्चित रूपसे इस युगके लिये सर्वमान्य हो जाते । |
Pilibhit News: रेप की घटना माधोटांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की बताई जा रही है। गांव के रहने वाले दो युवकों पर आरोप है कि 7 सितंबर को जब 17 वर्षीय किशोरी घर पर अकेली थी, तभी दोनों आरोपी घर में घुस आए। गांव के ही राजवीर नाम के एक आरोपी ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया।
दुष्कर्म करने में नाकाम होने पर आरोपी ने किशोरी पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया। नाबालिग पीड़िता का वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रकाश में आया। वही वीडियो के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
दलित किशोरी के साथ दुष्कर्म करने में नाकाम हुए आरोपी ने उसे जिंदा जला दिया। घटना के 3 दिन बाद किशोरी के बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जब वायरल हुआ तो पुलिस हरकत में आई। आनन-फानन में तमाम पुलिस अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच में जुट गए। फिलहाल गंभीर हालत में पीड़िता का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
घटना माधोटांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की बताई जा रही है। गांव के रहने वाले दो युवकों पर आरोप है कि 7 सितंबर को जब 17 वर्षीय किशोरी घर पर अकेली थी, तभी दोनो आरोपी घर में घुस आए। राजवीर नाम के एक आरोपी ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया।
दुष्कर्म करने में नाकाम होने पर आरोपी ने किशोरी पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन किशोरी को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए, जहां किशोरी की हालत गंभीर बनी हुई है। गंभीर अवस्था में उसका इलाज जारी है।
| Pilibhit News: रेप की घटना माधोटांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की बताई जा रही है। गांव के रहने वाले दो युवकों पर आरोप है कि सात सितंबर को जब सत्रह वर्षीय किशोरी घर पर अकेली थी, तभी दोनों आरोपी घर में घुस आए। गांव के ही राजवीर नाम के एक आरोपी ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। दुष्कर्म करने में नाकाम होने पर आरोपी ने किशोरी पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया। नाबालिग पीड़िता का वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रकाश में आया। वही वीडियो के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। दलित किशोरी के साथ दुष्कर्म करने में नाकाम हुए आरोपी ने उसे जिंदा जला दिया। घटना के तीन दिन बाद किशोरी के बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जब वायरल हुआ तो पुलिस हरकत में आई। आनन-फानन में तमाम पुलिस अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच में जुट गए। फिलहाल गंभीर हालत में पीड़िता का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। घटना माधोटांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की बताई जा रही है। गांव के रहने वाले दो युवकों पर आरोप है कि सात सितंबर को जब सत्रह वर्षीय किशोरी घर पर अकेली थी, तभी दोनो आरोपी घर में घुस आए। राजवीर नाम के एक आरोपी ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। दुष्कर्म करने में नाकाम होने पर आरोपी ने किशोरी पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन किशोरी को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए, जहां किशोरी की हालत गंभीर बनी हुई है। गंभीर अवस्था में उसका इलाज जारी है। |
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियम अधिनियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथा लागू) की धारा 46(4) के साथ पठित धारा 47ए(1)(बी) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए डॉ. पंजाबराव देशमुख अर्बन को-ओप बैंक लि. अमरावती पर अपने ग्राहको को जानिए (केवाईसी) मानदण्डों का उल्लंघन करने के लिए ₹ 5.00 लाख (पाँच लाख रुपये सिर्फ) का मौद्रिक दंड लगाया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिसके संबंध में बैंक ने लिखित उत्तर प्रस्तुत किया। मामले के तथ्यों तथा बैंक से प्राप्त उत्तर पर विचार करने के पश्चात रिज़र्व बैंक इस नतीजे पर पहुंचा कि उल्लंघन सिध्द हुए हैं और दंड लगाना आवश्यक है।
इंटरनेट एक्सप्लोरर 5 और उससे अधिक के 1024 X 768 रिजोल्यूशन में अच्छी प्रकार देखा जा सकता है।
| भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियम अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा छियालीस के साथ पठित धारा सैंतालीसए के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए डॉ. पंजाबराव देशमुख अर्बन को-ओप बैंक लि. अमरावती पर अपने ग्राहको को जानिए मानदण्डों का उल्लंघन करने के लिए पाँच दशमलव शून्य रुपया लाख का मौद्रिक दंड लगाया है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिसके संबंध में बैंक ने लिखित उत्तर प्रस्तुत किया। मामले के तथ्यों तथा बैंक से प्राप्त उत्तर पर विचार करने के पश्चात रिज़र्व बैंक इस नतीजे पर पहुंचा कि उल्लंघन सिध्द हुए हैं और दंड लगाना आवश्यक है। इंटरनेट एक्सप्लोरर पाँच और उससे अधिक के एक हज़ार चौबीस X सात सौ अड़सठ रिजोल्यूशन में अच्छी प्रकार देखा जा सकता है। |
ICC World Cup 2019 India Vs Pakistan भारत-पाकिस्तान के मैच में भारतीय खिलाड़ियों ने 8 नए रिकॉर्ड बनाए हैं।
भारत-पाकिस्तान के इस मैच में रोहित शर्मा सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित ने 358 छक्के मार दिए हैं और इससे पहले यह रिकॉर्ड भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के नाम था। धौनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 355 छक्के मार चुके हैं। वहीं इसके बाद सचिन तेंदुलकर का नाम है, जिन्होंने 664 मैचों में 264 छक्के लगाए थे।
वर्ल्डकप में पाकिस्तानी टीम को हराने का रिकॉर्ड भारतीय टीम ने बरकरार रखा। वर्ल्ड कप में भारत ने पाकिस्तान को सातवीं बार हरा दिया। बता दें कि वर्ल्ड कप में भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक बार भी नहीं हारा है।
वर्ल्ड कप 2019 में भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा स्कोर इसी मैच में बना। भारत ने पाकिस्तान को सबसे ज्यादा का टारगेट देने का रिकॉर्ड बना लिया है। इससे पहले भारत ने 2015 वर्ल्डकप में पाकिस्तान के खिलाफ 300 रन बनाए थे.
इस मैच में वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड भी बन गया। रोहित शर्मा और के एल राहुल की साझेदारी ने 136 रन बनाए, जो वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ सबसे बड़ी साझेदारी है।
इस मैच में विजय शंकर ने वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया है। दरअसल विजय शंकर को भुवनेश्वर का ओवर पूरा करने के लिए गेंदबाजी का मौका दिया गया था। भुवनेश्वर चोट लगने की वजह से अपना ओवर पूरा नहीं कर पाया था।
भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने वनडे क्रिकेट में 11 हजार रन पूरे कर लिए हैं। कोहली कम मैचों में यह कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी हैं। कोहली ने 11 हजार रनों का आंकड़ा 222 पारी में पार कर लिया था, जबकि सचिन को यह कारनामा करने में 276 पारी खेलनी पड़ी थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार रोहित शर्मा ने सबसे ज्यादा छक्के मारने के साथ ही इंग्लैंड में सबसे जल्दी 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। उन्होंने यहां 18 मैच खेले हैं।
विराट कोहली वर्ल्ड कप में लगातार तीन मैच जीतने वाले पहले कप्तान बन गए हैं, जो पहली बार किसी टीम का वर्ल्ड कप में नेतृत्व कर रहे हो।
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| ICC World Cup दो हज़ार उन्नीस India Vs Pakistan भारत-पाकिस्तान के मैच में भारतीय खिलाड़ियों ने आठ नए रिकॉर्ड बनाए हैं। भारत-पाकिस्तान के इस मैच में रोहित शर्मा सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित ने तीन सौ अट्ठावन छक्के मार दिए हैं और इससे पहले यह रिकॉर्ड भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के नाम था। धौनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीन सौ पचपन छक्के मार चुके हैं। वहीं इसके बाद सचिन तेंदुलकर का नाम है, जिन्होंने छः सौ चौंसठ मैचों में दो सौ चौंसठ छक्के लगाए थे। वर्ल्डकप में पाकिस्तानी टीम को हराने का रिकॉर्ड भारतीय टीम ने बरकरार रखा। वर्ल्ड कप में भारत ने पाकिस्तान को सातवीं बार हरा दिया। बता दें कि वर्ल्ड कप में भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक बार भी नहीं हारा है। वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस में भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा स्कोर इसी मैच में बना। भारत ने पाकिस्तान को सबसे ज्यादा का टारगेट देने का रिकॉर्ड बना लिया है। इससे पहले भारत ने दो हज़ार पंद्रह वर्ल्डकप में पाकिस्तान के खिलाफ तीन सौ रन बनाए थे. इस मैच में वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड भी बन गया। रोहित शर्मा और के एल राहुल की साझेदारी ने एक सौ छत्तीस रन बनाए, जो वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ सबसे बड़ी साझेदारी है। इस मैच में विजय शंकर ने वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया है। दरअसल विजय शंकर को भुवनेश्वर का ओवर पूरा करने के लिए गेंदबाजी का मौका दिया गया था। भुवनेश्वर चोट लगने की वजह से अपना ओवर पूरा नहीं कर पाया था। भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने वनडे क्रिकेट में ग्यारह हजार रन पूरे कर लिए हैं। कोहली कम मैचों में यह कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी हैं। कोहली ने ग्यारह हजार रनों का आंकड़ा दो सौ बाईस पारी में पार कर लिया था, जबकि सचिन को यह कारनामा करने में दो सौ छिहत्तर पारी खेलनी पड़ी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार रोहित शर्मा ने सबसे ज्यादा छक्के मारने के साथ ही इंग्लैंड में सबसे जल्दी एक हज़ार रन बनाने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। उन्होंने यहां अट्ठारह मैच खेले हैं। विराट कोहली वर्ल्ड कप में लगातार तीन मैच जीतने वाले पहले कप्तान बन गए हैं, जो पहली बार किसी टीम का वर्ल्ड कप में नेतृत्व कर रहे हो। इसके अलावा आप वर्ल्ड कप से जुड़े लाइव अपडेट और रोचक खबरें dainikjagran. com पर पढ़ सकते हैं। शुरू हो गया है क्रिकेट क्विज कॉन्टेस्ट जागरण ऐप पर। रोज जीत सकते हैं स्मार्ट फोन। आज से ही हिस्सा लें। डाउनलोड करें जागरण ऐप। Andrioid फोन पर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। Iphone पर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। |
96 : सिंधु सभ्यता
मोहेजोदडो और हडप्पा से कई ताम्र-पट्ट ( copper tablets ) ( आ० 9, 4-5; 10, 7) मिले है जिनका, मैके का कहना है, प्रयोग ताबीज की तरह किया जाता था। ये आकार मे तीन प्रकार के है ~ ( 1 ) लम्बे और कम चोडे, ( 2 ) वर्गाकार या लगभग वर्गाकार और ( 3 ) आयताकार । शायद लोग उन्हें शरीर पर ताबीज की तरह बाघते थे । जहा मुद्राओं के अभिलेख मुद्रा स्वामियों के नाम; पद आदि के द्योतक है वहा ताम्र-पट्टों के लेख पशुओ से संबंधित लगते हैं क्योंकि कई ताम्र-पट्टों पर एक तरह के पशु के साथ एक ही तरह के लेख मिलने के उदाहरण मिले है। कई ताम्र-पट्टों पर छोर रहित गांठ के डिजाइन हैं। यह डिजाइन मिस्र में पवित्र चिह्न समझा जाता था ।
मुद्राओ ( Dies ) के विपरीत ताम्र फलको मे सभी पशु दाहिनी ओर मुंह किये है । चूकि ये ताम्र फलकों पर खुदे हुए अक्षर और अभिप्राय इतने उथले खुदे है कि इनसे छाप लिये जाने की कोई संभावना नहीं लगती, अत यही मानना ठीक होगा कि इन पर पशु जिस दिशा में दिखाया गया है उसे उसी दिशा में दिखाना अभिप्रेत था ।
ऐसा लगता है कि दूकानदार ताम्र-पट्टो को काट कर रखता था और ग्राहक की इच्छानुसार उस पर अभिप्राय और लेख खोद देता था। मैके ने कुछ पर आरी से काटने और कुछ पर सीधे पैन औजार से काटने के निशान पाये ।
इन ताम्र-पट्टो को ताबे के सिक्के नहीं माना जा सकता, यद्यपि कुछ विद्वानों ने इग तरह का सुझाव दिया है। सिधु सभ्यता के बाट अपनी तौल मे सही होन के लिए विख्यात है और आशा यहीं की जाती है कि यदि वे लोग सिक्को का निर्माण किये होते तो उनके सिक्के भी निर्धारित नाप-तौल के ही होते। एक ही आकार प्रकार के ताम्र फलको को तौलने पर पाया गया है कि
वे किसी खास तोल प्रणाली पर अथवा तील प्रणालियो पर आधारित नहीं है । इन्हे ताबे की मिल ( ingots ) भी नहीं माना जा सकता क्योकि इनमें से कोई भी ऐसा नहीं जिसे हम सिधु सभ्यता में प्राप्त किसी और वस्तु के बनाने के लिए उपयुक्त आकार वाला मान सकें ।
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सिंधु सभ्यता में मृद्भाण्ड-निर्माण और मुद्रा निर्माण के समान ही मनकों का - निर्माण भी एक विकसित उद्योग था। सिंधु सभ्यता के सभी स्थलो से मनके मिले है किंतु हडप्पा, मोहेजोदड़ो, चन्हुदड़ो और लोथल से तो ये सहस्रों की संख्या में पाये गये है ( आo 11 ) 1 लोग इन मनको को लड़ियों में गूथ कर कई लड़ियो वाला हार बनाते थे । मृणमूर्तियों का साक्ष्य इस बात का द्योतक है कि नारिया मनको की माला की बनी मेखला भी पहनती थी । सिधु सभ्यता के मनको के निर्माण के लिए सेलखड़ी, गोमेद, कार्नीलियन, जैस्पर इत्यादि पत्थरों का प्रयोग हुआ । धातुओ मे सोना, चादी और ताबे का प्रयोग मनके निर्माण के लिए विशेष रूप से हुआ । काचली मिट्टी, मिट्टी शख, हाथीदात आदि के भी मनके बने । सिंधु सभ्यता के मनको के आकार प्रकार में पर्याप्त विविधता है । आकार प्रकार की दृष्टि से मनको का निम्नलिखित वर्गीकरण किया गया हैबेलनाकार मनके - इस तरह के मनके अत्यंत लोकप्रिय थे । ये काचली मिट्टी, सेलखड़ी, शख, मिट्टी और कैल्साइट पत्थर के है । सेलखड़ी के कुछ वर्तुलाकार मनको पर सोने की टोपी लगी है ।
दतचक्र प्रकार के मनके- - इस तरह के पर ओप ( glazing ) भी है । इस तरह के पोटामिया मे ऐसे मनको का अभाव है ।
मनके पेस्ट के बने है और इन मनके साचे से बने है । मेसोछोटे ढोलाकार मनके - ये मनके कासा, ताबा, सोना, चादी, स्फटिक, शख, जेड, सेलखड़ी और चूना-स्थर के है । स्फटिक और हरिताश्म के मनके बहुत कम है ।
लम्बे ढोलाकार मनके - यद्यपि यह अनेक पदार्थों के बने है किंतु काचली मिट्टी, मुलायम पत्थर और चूना पत्थर के बने मनके सबसे अधिक है। मोहेजोदड़ो से इस प्रकार का एक गोमेद का भी मनका मिला है । इन मनकों की काट अण्डाकार है । ऐसे आकार के मनके सोने और चादी के भी मिले है । एक शंख का ऐसा मनका एक ओर चपटा है और दूसरी ओर अर्ध-गोलाकार । इस प्रकार के मनके जेम्देत नत्र के उत्खनन मे पाये गये है। दक्षिणी नाल ( बलूचिस्तान ) के प्रारंभिक मुद्भाण्डों के साथ भी इस तरह के मनके उपलब्ध है । हड़प्पा से कार्नी7
98: सिंधु सभ्यता
लियन के ऐसे मनके मिले है जिनकी तुलना उर, किश और तेल अज्मर के मनकों से की जा सकती है ।
हुछ ४
आरेख 11
मनके : 99
अण्डाकार या अर्धवृत्त काट वाले आयताकार मनके-कुछ आयताकार मनके अण्डाकार या अर्धवृत्ताकार काट वाले बनाये गये हैं । इनमे अण्डाकार काट वाले मनके विशेष लोकप्रिय रहे । यह सेलखड़ी, गोमेद, और हरी काचली मिट्टी के बने है ।
खाड़ेदार तिर्यक ( fluted tapered ) मनके fluted tapered ) मनके - ये पेस्ट के है और साचे से बने है । संभवत ऐसे मनके लटकन की तरह प्रयुक्त होते रहे होंगे । लम्बे ढोलाकार जैसे मनके ( long barrel cylinder ) - ये मनके बडे आकर्षक है और या तो लाल का कर्नीलियन या मिट्टी के है । मिट्टी के मनके आकार में कर्नीलियन मनको की प्रतिलिपि है और इन्हें समाज के आर्थिक दृष्टि से निम्न वर्ग के लोग पहनते रहे होंगे । इस प्रकार के मनके मेसोपोटामिया में मिले है पर वहा उनकी संख्या अधिक नही, जबकि हड़प्पा ओर मोहेंजोदड़ो मे ये भारी संख्या में उपलब्ध हुए है। कुछ विद्वानों के विचार से इनका निर्माण सिंधु सभ्यता में हुआ और वहा से ये मेसोपोटामिया पहुचे ।
बिम्ब ( disc ) मनके ( आ० 11, 1, 10 ) इस तरह के मनके काचली मिट्टी, मिट्टी और शख के है और इनकी सख्या अपेक्षाकृत कम है ।
गोल ( globular ) मनके - ऐसे मनके छोटे तथा बडे दोनों आकार के मिले है । छोटे मनके कई पदार्थों से निर्मित है। कुछ ऐसे छोटे-छोटे सोने के मनके मोहेजोदड़ो के दो आभूषण निधानों में भी पाये गये । बडे मनके विभिन्न धातुओं के बने है । इन्हे साचे से या पीट कर बनाया गया है । ऐसे एक ओपदार मनके का विश्लेषण भी डा० हामिद ने किया है। उनके अनुसार इस तरह के मनको मे उन्हें चमकाने के लिए किसी पदार्थ को अलग से मिलाया नही गया । ओप के लिए पालिश ही काफी थी ।
रेखाकित मनके ( आo 11, 1-3 ) ऐसे मनके उर, किश और तेल अज्मर से मिले है । लेकिन चन्द्रुदडो तथा मोहेजोदड़ो के जो उदाहरण है वे अधिक सुधरे लगते है । हड़प्पा से एक हृदयाकार मनका मिला है। मोहेजोदड़ो के रेखाकित मनके तीन तरह के है । कुछ मे लाल भूमि पर सफेद, कुछ में सफेद भूमि पर काली और कुछ पर लाल भूमि पर काली डिजाइन है । चन्द्रुदड़ो से पहले दो प्रकार के मनके मिले हैं ।
खण्डशः विभक्त ( segmented ) मनकं ( आ० 11, 8 ) इस तरह के मनको का निर्माण केवल कांचली मिट्टी से हुआ है। इन पर किसी तरह ओप के चिह्न नही हैं । मेसोपोटामिया मे प्राग् सारगन काल तथा मिस्र में बाद के काल मे ऐसे मनके बहुत लोकप्रिय थे । वहा के इस तरह के मनकों पर तरह100: सिंधु सभ्यता
तरह के रंगों की परत पत्थर के इस तरह के तरह के काचली मिट्टी
प्रारंभिक मिनिओन II में अनुसार मोहेजोदड़ो में इस
चढाकर चमकाया गया था।
मनके बनते थे । मार्शल के
के बने मनके अन्तिम प्रकाल मे पाये गये हैं ।
काचली मिट्टी के खंडशः विभक्त मनके टेलनाक ( उत्तरी सीरिया ) में ( जमदेत नत्र काल ( लगभग 3000 ई पू. ) मे मिले हैं । क्रीट मे ये मध्य मिनिओन तृतीय और मिस्र के अठारहह्वी राजवंश के काल तक पाये गये है । पी डी. रिशी ( Ritchie ) ने एक हडप्पा और एक वनौसोस के मनके का वर्णक्रमलेखी ( spectrographic ) विश्लेषण से पता किया कि इन दोनो के निर्माण पदार्थ मे पूर्ण समानता है। कुछ विद्वानों का कहना है कि ये लगभग 1600 ई. पू. मे एक ही स्थल में निर्मित हुए किंतु यह तिथि सिधु सभ्यता की हड़प्पा स्थल की तिथि से मेल नहीं खाती । यह भी निश्चय करना कठिन है कि निर्माण स्थल कौन था ।
उपर्युक्त प्रकारो के अतिरिक्त कुछ और आकार प्रकार के मनके भी मिले है । उदाहरणार्थ हडप्पा में सेलखड़ी के दात की शक्ल के कुछ सीढ़ीनुमा, कुछ सलीबनुमा मनके भी मिले है ।
चन्हुदडो और लोथल मे मनका बनाने वालो के कार्यस्थल ( फैक्ट्री ) उद्घाटित हुए है। इन स्थानो पर कई अधूर बने मनके मिले। इनका अध्ययन कर साधारण पत्थर के टुकडे से लेकर पूरी तरह बने मनके तक के विभिन्न चरणो का ज्ञान हुआ। लम्बे कार्नीलियन के मनके के बनाने की विधि निम्नलिखित थी - पहले पत्थर की लगभग 7.62 सेमी लबी वर्गाकार तीलिया बनाते थे । इस तरह की आकृति देने के लिए पत्थर को काटने में ताबे की आरी और क्वार्ट्ज पत्थर के चूरे का प्रयोग किया गया होगा। फिर इन टुकड़ों को तराश कर इच्छित आकार दिया जाता था और उसे पत्थर पर घिस कर सपाट कर दिया जाता था और उस चमका भी दिया जाता था। इन मनको पर तागे डालने के लिए छेद दोनो ओर से किया जाता था। कुछ मनको मे यह छेद साधा नहीं हो पाया और इसलिए दोनो ओर से मध्य की ओर उकेर कर दोनो तरफ से किये छेदो को मिला दिया जाता था। छेद करने के बाद छेद वाले भाग को पालिश भी कर दिया जाता था। छेद करने के लिए पत्थर या ताबे की बंधनी का प्रयोग किया गया । पत्थर की वैधनी की नोक पर छोटा ध्यालानुभा बना था जिसमे अपघर्षक और पानो अटक सके । निश्चय ही अपघर्षक की सहायता से छेद करने मे आसानी रही होगी । चन्हुदडो में इस तरह के पत्थर की वेधनिया मिली हैं । पिगट के अनुसार परीक्षणों से ज्ञात होता है कि कार्नीलियन के एक 765 सेमी के मनके पर छेद करने मे मनके बनाने वाले को लगभग 24 घंटे लग जाते रहे
होंगे और स्वाभाविक है कि ऐसे मनके काफी कीमती होंगे । लोथल के समीप ही स्थित कैम्बे में आज भी मनके बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर होता है । शि रंगनाथ राव का मत है कि वहा पर मनके बनाने की परंपरा सिंधु काल से अक्षुण्ण चली आ रही है और उस समय के लोगो की मनका बनाने की तकनीक आजकल की तकनीक से अधिक भिन्न नही रही होगी ।
सेलखडी के मनके सिंधु सभ्यता मे जितने मिले है उतने विश्व की किसी भी संस्कृति में नहीं मिले। मनको के निर्माण के लिए सेलखड़ी का प्रयोग दो तरह से किया गया है - या तो सेलखड़ी पत्थर से सीधे ही मनके बनाये गये है या फिर उसके चूरे से पेस्ट बना कर । सेलखड़ी के पेस्ट से बने अत्यंत छोटे मनकों को तो कासे को नली से उस पर दबाव डाल कर बनाया गया है। सेलखड़ी के पेस्ट से बने मनको में से कुछ ढोलाकार या उत्तल द्विकोण ( कन्वेक्स बाइकोन ) मनको पर तिपतिया अलकरण है। पहले यह अलंकरण काट कर बनाया गया, फिर बाकी पृष्ठभूमि को भी काट दिया गया और इस तरह गहरे किये गये स्थान में लाल या काला रंग भर दिया गया। इस तरह तिपतिया डिजाइन लाल या सफेद रंग की पृष्ठभूमि में उभर आता है और रेखांकित कार्नीलियन के मनकों पर अकित डिजाइन की तरह दिखता है। कुछ मनकों पर लाल रग बिना पृष्ठभूमि को काटे भी लगाया गया है ।
कार्नीलियन के रेखाकित मनके तीन तरह के हैंतीन तरह के हैं-लाल पृष्ठभूमि पर सफेद रंग के डिजाइन वाले और सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग के डिजाइन वाले और लाल पृष्ठभूमि पर काले डिजाइन वाले । प्रथम प्रकार के मनको पर डिजा इन तेजाब ( एच. सी बैंक के अनुसार सोडा कार्बोनेट ) से अकित किया जाता था और फिर मनके को काफी ताप पर गरम किया जाता था जिससे तेजाब ठीक तरह कार्नीलियन के भीतर पैठ जाता था और स्थायी रूप से सफेद रेखाएं अंकित हो जाती थी । इस प्रकार आख की डिजाइन वाले मनके, अंग्रेजी के '8' अंक के समान डिजाइन वाले मनके और ऋजुरेखीय हीराकार मनके उर, किश, टेल अज्मर ( सारगान काल ) मे प्राप्त मनको के समान है और एक हो स्रोत से इन स्थलों मे लाये गये लगते है । दूसरे प्रकार के मनकों में पहले सारे मनके पर तेजाब लगाया जाता था जिसमे सफेद सतह बन जाती थी। इस सफेद सतह पर काले रग से डिजाइन बनाया जाता था। इस तरह के मनके मेसोपोटामिया मे भी मिले हैं। रेखाकित कार्नीलियन के मनके मोहेजोदड़ो मे कम प्राप्त हुए। हड़प्पा मे मोहेजोदड़ो की अपेक्षा अधिक संख्या में मिले है । राव के अनुसार लोथल की खोदाइयो मे ऐसे मनके काफी संख्या में मिले है। एच. सी. बेक के मतानुसार ऐसे मनके बनाने की तकनीक इतनी क्लिष्ट है कि दोनों संस्कृतियो मे इनके
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स्वतंत्र रूप से बनाये जाने की संभावना नहीं दिखती। राव तो ऐसे मनकों का स्रोत लोथल मानते हैं। राव का मत कि रेखाकित मनके सबसे पहले लोथल में बने और अन्यत्र लोगों ने इस तरह के मनके बनाने का ज्ञान लोथल से ही प्राप्त किया सही नहीं लगता, मोहेजोदड़ो मे प्रारंभिक चरण से ही इस तरह के मनके मिलते है और इनकी तिथि लोथल से बाद की नही मानी जा सकती ।
रेखाकित मनके लम्बे ढोलाकार कार्नीलियन के मनके, सेलखड़ी के पकाए गए छोटे मनके, सीढ़ीदार मनके, और मनको पर तिपतिया डिजाइन सिंधु सभ्यता और मेसोपोटामिया की संस्कृतियों के बीच सपर्क के द्योतक लगते है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ( 1 ) सेलखड़ी के मनके सिंधु सभ्यता मे तो पर्याप्त सख्या मे मिलते है किंतु मेसोपोटामिया मे अत्यल्प संख्या मे, ( 2 ) सेलखड़ी के मनको पर चित्रण सिंधु सभ्यता में मिलता है पर मेसोपटामिया के मनकों पर नही, ( 3 ) कुछ आकार-प्रकार सिधु सभ्यता में मिलते है, मेसोपोटामिया मे नही और कुछ मेसोपोटामिया के प्रकार सिंधु सभ्यता में नहीं मिलते।
अध्याय 8
सिंधु सभ्यता के मृद्भाण्ड अपनी विशिष्टता लिए है और इसके भाण्डो के कई मुख्य प्रकार अन्यत्र संस्कृतियो मे अनुपलब्ध है। ये व्यावसायिक पैमाने पर उपयोगितावाद के दृष्टिकोण से निर्मित किये गये थे । उस सभ्यता के बर्तन अधिकतर चाक पर ही बने है । चाक लकड़ी के रहे होगे जो नष्ट से हो गये है । हाथ से बनाये बर्तन भी मिले है, किंतु चाक पर निर्मित बर्तनो की अपेक्षा इनकी संख्या बहुत कम है और ये मुख्य रूप से निम्न स्तरो से उपलब्ध हुए है । बर्तनों के निर्माण में अतिम चरण में ह्रास के लक्षण दिखते है । आजकल की प्रथा को ध्यान में रखते हुए ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि बर्तन पुरुषों ने बनाये होगे और उन पर चित्रण आदि स्त्रियो ने किया होगा। मृद्भाण्डो के निर्माण के लिए मिट्टी नदी से लायी गयी थी । उसमें अभ्रक और बालू भी मिली है । भाण्डो से को भट्टो मे भलीभाति पकाया गया था ।
मोहेजोदडो के अन्तिम चरण में, जब सभ्यता ह्रासोन्मुखी थी, नगर मे भट्टे भी पाये गये है । विकसित युग मे भट्ठे नगर से बाहर रहे होगे । ये उपलब्ध भट्ठे वृत्ताकार है और इनका व्यास 18 मीटर से 274 मीटर है। इनमे नीचे कोयला रखने के लिए गड्ढा था और उसके ऊपर बर्तन रखने के लिए गुम्बद की तरह आकार बना था। इस तरह के भट्ठे पश्चिमी एशिया की प्राचीन संस्कृतियों में भी मिले है । बर्तनों का ठीक तरह पका होना इस बात का द्योतक है कि आच भली-भाति नियंत्रित थी । लेकिन आजकल की भाति बिना भट्ठे के भी खुले मे भाण्ड पकाए जाते रहे होगे ।
कुल्हड के पेंदें गोल और कुछ नुकीले है और उनके नीचे का भाग ऊपरी भाग की अपेक्षा कम सावधानी से बना है। बड़े घड़े दो तीन भागो मे बनाये गए थे और गीले मे ही उन्हें काफी सफाई से जोड़ दिया गया था और साधारण जोड नही दिखते है । सामान्य रूप से कहा जा सकता है कि सिंधु सभ्यता के बर्तनो में गोलाई अधिक है और सोधे कोने कम ।
साधारणत. सिंधु सभ्यता के मृद्भाण्ड भली भाति तैयार की गई मिट्टी से बने है । अधिकाश मृद्भाण्ड बिना चित्रण वाले है। उन पर हलका दूधिया रग का लेप मिलता है, कुछ उदाहरणो में, लेप का रंग पीलापन लिए या सफेदी
104: सिंधु सभ्यता
लिए है, और अत्यल्प उदाहरण गुलाबी लेप के भी हैं । चित्रित बर्तनों ( फ० XIX, 1, 2, 4, 3, XX, 1, 3 ) की संख्या अपेक्षाकृत कम है और इनमें से अधिकाश खंडित मिले है । चित्रित बर्तनो की संख्या निचले स्तरों में ऊपरी स्तरों की अपेक्षा अधिक है । चित्रित तथा सादे दोनों ही मृद्भाण्ड एक ही तरह की मिट्टी से बने है । यह रोचक तथ्य है कि सर लियोनार्ड वूली ने मोहेजोदड़ो मे पुनरुत्खनन न किये जाने की सलाह मुख्यत इस आधार पर दी कि यहा पर मेसोपोटामिया की तरह विशाल संख्या में चित्रित मृद्भाण्ड नही मिलते । साधारणतया चित्रित बर्तनो पर लाल लेप लगा है । लेप लगाने का उद्देश्य सुन्दरता के अतिरिक्त बर्तन को जलाभेद्य बनाना भी था । कहीं पर तो लेप से बर्तन इतना चिकना बना दिया गया कि एक विद्वान् का सुझाव है कि इसमें चूहों से भी सुरक्षा हो सकती थी, क्योकि चूहे ऐसे भाण्डो पर फिसल जाते रहे होगे और उसके मुंह तक नहीं पहुंच पाते रहे होंगे । दुधिया, गुलाबी और लाल सभी रंगो के लेप के लिए रंगीन प्राकृतिक मिट्टी ही प्रयुक्त लगती है । लेप को विशेषत गाढे लाल रंग को, पालिश कर चमकाया गया है। अक्सर गाढा लेप पूरे बर्तन पर नहीं लगाया गया और लेप वाले भाग पर ही चित्रकारी की गई है, बाकी भाग सादा छोड़ दिया गया है ।
चित्रण साधारणतया काले रग से किया जाता था जो मेग्निफेरस हाइमेटाइट से तैयार किया जाता था । लाल लेप पर काले रग से चित्रण की विद्या की दृष्टि से उत्तरी बलूचिस्तान के रानाघुंडई - तृतीय चरण से प्रेरित लगते है किंतु जहा तक अभिप्रायो और डिजाइनो का प्रश्न है इनमें उत्तरी बलूचिस्तान का प्रभाव नगण्य है । कुछ अर्थो मे दक्षिणी वलूचिस्तान की कुल्ली शैली का भी कुछ प्रभाव दिखता है। आकार प्रकार के समान चित्रण विद्या में भी सिंधु सभ्यता भाण्डो की अपनी अलग विशिष्टता है ।
चित्रित बर्तनो के ऐसे बहुत कम उदाहरण ( फ० XIX, 1 ) है जिनका सम्पूर्ण वाह्य भाग चित्रित किया गया हो । साधारणतया चित्रित मृद्भाण्ड के लगभग तीन चौथाई या उससे भी कम हिस्सो पर चित्रकारी की गई है। छोटे आकार के मुद्भाण्डो के मध्य मे काले रंग से केवल धारी या धारिया बना दी गई है। अधिकाश मृद्भाण्डो मे चित्रण काले रंग से किया गया है। चित्रित अभि प्रायो मे विविधता है और अधिकाश डिजाइन परंपरागत शैली मे है । काले रग की आड़ी धारिया सबसे अधिक मिलती है ( आ० 12, 17 ) कुछ धारियां ) मोटी और कुछ पतली है । साधारणतया चित्रण के लिए बर्तन को कुछ खण्डों में बाट लेते थे और फिर उन्हें खड़े और पड़े खण्डों में विभाजित करते थे । अभिप्रायों में प्रतिच्छेदी वृत्त विशेष उल्लेखनीय है । यह अभिप्राय एलम ओर सुमेर | छियानवे : सिंधु सभ्यता मोहेजोदडो और हडप्पा से कई ताम्र-पट्ट मिले है जिनका, मैके का कहना है, प्रयोग ताबीज की तरह किया जाता था। ये आकार मे तीन प्रकार के है ~ लम्बे और कम चोडे, वर्गाकार या लगभग वर्गाकार और आयताकार । शायद लोग उन्हें शरीर पर ताबीज की तरह बाघते थे । जहा मुद्राओं के अभिलेख मुद्रा स्वामियों के नाम; पद आदि के द्योतक है वहा ताम्र-पट्टों के लेख पशुओ से संबंधित लगते हैं क्योंकि कई ताम्र-पट्टों पर एक तरह के पशु के साथ एक ही तरह के लेख मिलने के उदाहरण मिले है। कई ताम्र-पट्टों पर छोर रहित गांठ के डिजाइन हैं। यह डिजाइन मिस्र में पवित्र चिह्न समझा जाता था । मुद्राओ के विपरीत ताम्र फलको मे सभी पशु दाहिनी ओर मुंह किये है । चूकि ये ताम्र फलकों पर खुदे हुए अक्षर और अभिप्राय इतने उथले खुदे है कि इनसे छाप लिये जाने की कोई संभावना नहीं लगती, अत यही मानना ठीक होगा कि इन पर पशु जिस दिशा में दिखाया गया है उसे उसी दिशा में दिखाना अभिप्रेत था । ऐसा लगता है कि दूकानदार ताम्र-पट्टो को काट कर रखता था और ग्राहक की इच्छानुसार उस पर अभिप्राय और लेख खोद देता था। मैके ने कुछ पर आरी से काटने और कुछ पर सीधे पैन औजार से काटने के निशान पाये । इन ताम्र-पट्टो को ताबे के सिक्के नहीं माना जा सकता, यद्यपि कुछ विद्वानों ने इग तरह का सुझाव दिया है। सिधु सभ्यता के बाट अपनी तौल मे सही होन के लिए विख्यात है और आशा यहीं की जाती है कि यदि वे लोग सिक्को का निर्माण किये होते तो उनके सिक्के भी निर्धारित नाप-तौल के ही होते। एक ही आकार प्रकार के ताम्र फलको को तौलने पर पाया गया है कि वे किसी खास तोल प्रणाली पर अथवा तील प्रणालियो पर आधारित नहीं है । इन्हे ताबे की मिल भी नहीं माना जा सकता क्योकि इनमें से कोई भी ऐसा नहीं जिसे हम सिधु सभ्यता में प्राप्त किसी और वस्तु के बनाने के लिए उपयुक्त आकार वाला मान सकें । अध्याय सात सिंधु सभ्यता में मृद्भाण्ड-निर्माण और मुद्रा निर्माण के समान ही मनकों का - निर्माण भी एक विकसित उद्योग था। सिंधु सभ्यता के सभी स्थलो से मनके मिले है किंतु हडप्पा, मोहेजोदड़ो, चन्हुदड़ो और लोथल से तो ये सहस्रों की संख्या में पाये गये है एक लोग इन मनको को लड़ियों में गूथ कर कई लड़ियो वाला हार बनाते थे । मृणमूर्तियों का साक्ष्य इस बात का द्योतक है कि नारिया मनको की माला की बनी मेखला भी पहनती थी । सिधु सभ्यता के मनको के निर्माण के लिए सेलखड़ी, गोमेद, कार्नीलियन, जैस्पर इत्यादि पत्थरों का प्रयोग हुआ । धातुओ मे सोना, चादी और ताबे का प्रयोग मनके निर्माण के लिए विशेष रूप से हुआ । काचली मिट्टी, मिट्टी शख, हाथीदात आदि के भी मनके बने । सिंधु सभ्यता के मनको के आकार प्रकार में पर्याप्त विविधता है । आकार प्रकार की दृष्टि से मनको का निम्नलिखित वर्गीकरण किया गया हैबेलनाकार मनके - इस तरह के मनके अत्यंत लोकप्रिय थे । ये काचली मिट्टी, सेलखड़ी, शख, मिट्टी और कैल्साइट पत्थर के है । सेलखड़ी के कुछ वर्तुलाकार मनको पर सोने की टोपी लगी है । दतचक्र प्रकार के मनके- - इस तरह के पर ओप भी है । इस तरह के पोटामिया मे ऐसे मनको का अभाव है । मनके पेस्ट के बने है और इन मनके साचे से बने है । मेसोछोटे ढोलाकार मनके - ये मनके कासा, ताबा, सोना, चादी, स्फटिक, शख, जेड, सेलखड़ी और चूना-स्थर के है । स्फटिक और हरिताश्म के मनके बहुत कम है । लम्बे ढोलाकार मनके - यद्यपि यह अनेक पदार्थों के बने है किंतु काचली मिट्टी, मुलायम पत्थर और चूना पत्थर के बने मनके सबसे अधिक है। मोहेजोदड़ो से इस प्रकार का एक गोमेद का भी मनका मिला है । इन मनकों की काट अण्डाकार है । ऐसे आकार के मनके सोने और चादी के भी मिले है । एक शंख का ऐसा मनका एक ओर चपटा है और दूसरी ओर अर्ध-गोलाकार । इस प्रकार के मनके जेम्देत नत्र के उत्खनन मे पाये गये है। दक्षिणी नाल के प्रारंभिक मुद्भाण्डों के साथ भी इस तरह के मनके उपलब्ध है । हड़प्पा से कार्नीसात अट्ठानवे: सिंधु सभ्यता लियन के ऐसे मनके मिले है जिनकी तुलना उर, किश और तेल अज्मर के मनकों से की जा सकती है । हुछ चार आरेख ग्यारह मनके : निन्यानवे अण्डाकार या अर्धवृत्त काट वाले आयताकार मनके-कुछ आयताकार मनके अण्डाकार या अर्धवृत्ताकार काट वाले बनाये गये हैं । इनमे अण्डाकार काट वाले मनके विशेष लोकप्रिय रहे । यह सेलखड़ी, गोमेद, और हरी काचली मिट्टी के बने है । खाड़ेदार तिर्यक मनके fluted tapered ) मनके - ये पेस्ट के है और साचे से बने है । संभवत ऐसे मनके लटकन की तरह प्रयुक्त होते रहे होंगे । लम्बे ढोलाकार जैसे मनके - ये मनके बडे आकर्षक है और या तो लाल का कर्नीलियन या मिट्टी के है । मिट्टी के मनके आकार में कर्नीलियन मनको की प्रतिलिपि है और इन्हें समाज के आर्थिक दृष्टि से निम्न वर्ग के लोग पहनते रहे होंगे । इस प्रकार के मनके मेसोपोटामिया में मिले है पर वहा उनकी संख्या अधिक नही, जबकि हड़प्पा ओर मोहेंजोदड़ो मे ये भारी संख्या में उपलब्ध हुए है। कुछ विद्वानों के विचार से इनका निर्माण सिंधु सभ्यता में हुआ और वहा से ये मेसोपोटामिया पहुचे । बिम्ब मनके इस तरह के मनके काचली मिट्टी, मिट्टी और शख के है और इनकी सख्या अपेक्षाकृत कम है । गोल मनके - ऐसे मनके छोटे तथा बडे दोनों आकार के मिले है । छोटे मनके कई पदार्थों से निर्मित है। कुछ ऐसे छोटे-छोटे सोने के मनके मोहेजोदड़ो के दो आभूषण निधानों में भी पाये गये । बडे मनके विभिन्न धातुओं के बने है । इन्हे साचे से या पीट कर बनाया गया है । ऐसे एक ओपदार मनके का विश्लेषण भी डाशून्य हामिद ने किया है। उनके अनुसार इस तरह के मनको मे उन्हें चमकाने के लिए किसी पदार्थ को अलग से मिलाया नही गया । ओप के लिए पालिश ही काफी थी । रेखाकित मनके ऐसे मनके उर, किश और तेल अज्मर से मिले है । लेकिन चन्द्रुदडो तथा मोहेजोदड़ो के जो उदाहरण है वे अधिक सुधरे लगते है । हड़प्पा से एक हृदयाकार मनका मिला है। मोहेजोदड़ो के रेखाकित मनके तीन तरह के है । कुछ मे लाल भूमि पर सफेद, कुछ में सफेद भूमि पर काली और कुछ पर लाल भूमि पर काली डिजाइन है । चन्द्रुदड़ो से पहले दो प्रकार के मनके मिले हैं । खण्डशः विभक्त मनकं इस तरह के मनको का निर्माण केवल कांचली मिट्टी से हुआ है। इन पर किसी तरह ओप के चिह्न नही हैं । मेसोपोटामिया मे प्राग् सारगन काल तथा मिस्र में बाद के काल मे ऐसे मनके बहुत लोकप्रिय थे । वहा के इस तरह के मनकों पर तरहएक सौ: सिंधु सभ्यता तरह के रंगों की परत पत्थर के इस तरह के तरह के काचली मिट्टी प्रारंभिक मिनिओन II में अनुसार मोहेजोदड़ो में इस चढाकर चमकाया गया था। मनके बनते थे । मार्शल के के बने मनके अन्तिम प्रकाल मे पाये गये हैं । काचली मिट्टी के खंडशः विभक्त मनके टेलनाक में मे मिले हैं । क्रीट मे ये मध्य मिनिओन तृतीय और मिस्र के अठारहह्वी राजवंश के काल तक पाये गये है । पी डी. रिशी ने एक हडप्पा और एक वनौसोस के मनके का वर्णक्रमलेखी विश्लेषण से पता किया कि इन दोनो के निर्माण पदार्थ मे पूर्ण समानता है। कुछ विद्वानों का कहना है कि ये लगभग एक हज़ार छः सौ ई. पू. मे एक ही स्थल में निर्मित हुए किंतु यह तिथि सिधु सभ्यता की हड़प्पा स्थल की तिथि से मेल नहीं खाती । यह भी निश्चय करना कठिन है कि निर्माण स्थल कौन था । उपर्युक्त प्रकारो के अतिरिक्त कुछ और आकार प्रकार के मनके भी मिले है । उदाहरणार्थ हडप्पा में सेलखड़ी के दात की शक्ल के कुछ सीढ़ीनुमा, कुछ सलीबनुमा मनके भी मिले है । चन्हुदडो और लोथल मे मनका बनाने वालो के कार्यस्थल उद्घाटित हुए है। इन स्थानो पर कई अधूर बने मनके मिले। इनका अध्ययन कर साधारण पत्थर के टुकडे से लेकर पूरी तरह बने मनके तक के विभिन्न चरणो का ज्ञान हुआ। लम्बे कार्नीलियन के मनके के बनाने की विधि निम्नलिखित थी - पहले पत्थर की लगभग सात.बासठ सेमी लबी वर्गाकार तीलिया बनाते थे । इस तरह की आकृति देने के लिए पत्थर को काटने में ताबे की आरी और क्वार्ट्ज पत्थर के चूरे का प्रयोग किया गया होगा। फिर इन टुकड़ों को तराश कर इच्छित आकार दिया जाता था और उसे पत्थर पर घिस कर सपाट कर दिया जाता था और उस चमका भी दिया जाता था। इन मनको पर तागे डालने के लिए छेद दोनो ओर से किया जाता था। कुछ मनको मे यह छेद साधा नहीं हो पाया और इसलिए दोनो ओर से मध्य की ओर उकेर कर दोनो तरफ से किये छेदो को मिला दिया जाता था। छेद करने के बाद छेद वाले भाग को पालिश भी कर दिया जाता था। छेद करने के लिए पत्थर या ताबे की बंधनी का प्रयोग किया गया । पत्थर की वैधनी की नोक पर छोटा ध्यालानुभा बना था जिसमे अपघर्षक और पानो अटक सके । निश्चय ही अपघर्षक की सहायता से छेद करने मे आसानी रही होगी । चन्हुदडो में इस तरह के पत्थर की वेधनिया मिली हैं । पिगट के अनुसार परीक्षणों से ज्ञात होता है कि कार्नीलियन के एक सात सौ पैंसठ सेमी के मनके पर छेद करने मे मनके बनाने वाले को लगभग चौबीस घंटाटे लग जाते रहे होंगे और स्वाभाविक है कि ऐसे मनके काफी कीमती होंगे । लोथल के समीप ही स्थित कैम्बे में आज भी मनके बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर होता है । शि रंगनाथ राव का मत है कि वहा पर मनके बनाने की परंपरा सिंधु काल से अक्षुण्ण चली आ रही है और उस समय के लोगो की मनका बनाने की तकनीक आजकल की तकनीक से अधिक भिन्न नही रही होगी । सेलखडी के मनके सिंधु सभ्यता मे जितने मिले है उतने विश्व की किसी भी संस्कृति में नहीं मिले। मनको के निर्माण के लिए सेलखड़ी का प्रयोग दो तरह से किया गया है - या तो सेलखड़ी पत्थर से सीधे ही मनके बनाये गये है या फिर उसके चूरे से पेस्ट बना कर । सेलखड़ी के पेस्ट से बने अत्यंत छोटे मनकों को तो कासे को नली से उस पर दबाव डाल कर बनाया गया है। सेलखड़ी के पेस्ट से बने मनको में से कुछ ढोलाकार या उत्तल द्विकोण मनको पर तिपतिया अलकरण है। पहले यह अलंकरण काट कर बनाया गया, फिर बाकी पृष्ठभूमि को भी काट दिया गया और इस तरह गहरे किये गये स्थान में लाल या काला रंग भर दिया गया। इस तरह तिपतिया डिजाइन लाल या सफेद रंग की पृष्ठभूमि में उभर आता है और रेखांकित कार्नीलियन के मनकों पर अकित डिजाइन की तरह दिखता है। कुछ मनकों पर लाल रग बिना पृष्ठभूमि को काटे भी लगाया गया है । कार्नीलियन के रेखाकित मनके तीन तरह के हैंतीन तरह के हैं-लाल पृष्ठभूमि पर सफेद रंग के डिजाइन वाले और सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग के डिजाइन वाले और लाल पृष्ठभूमि पर काले डिजाइन वाले । प्रथम प्रकार के मनको पर डिजा इन तेजाब से अकित किया जाता था और फिर मनके को काफी ताप पर गरम किया जाता था जिससे तेजाब ठीक तरह कार्नीलियन के भीतर पैठ जाता था और स्थायी रूप से सफेद रेखाएं अंकित हो जाती थी । इस प्रकार आख की डिजाइन वाले मनके, अंग्रेजी के 'आठ' अंक के समान डिजाइन वाले मनके और ऋजुरेखीय हीराकार मनके उर, किश, टेल अज्मर मे प्राप्त मनको के समान है और एक हो स्रोत से इन स्थलों मे लाये गये लगते है । दूसरे प्रकार के मनकों में पहले सारे मनके पर तेजाब लगाया जाता था जिसमे सफेद सतह बन जाती थी। इस सफेद सतह पर काले रग से डिजाइन बनाया जाता था। इस तरह के मनके मेसोपोटामिया मे भी मिले हैं। रेखाकित कार्नीलियन के मनके मोहेजोदड़ो मे कम प्राप्त हुए। हड़प्पा मे मोहेजोदड़ो की अपेक्षा अधिक संख्या में मिले है । राव के अनुसार लोथल की खोदाइयो मे ऐसे मनके काफी संख्या में मिले है। एच. सी. बेक के मतानुसार ऐसे मनके बनाने की तकनीक इतनी क्लिष्ट है कि दोनों संस्कृतियो मे इनके एक सौ दो : सिंधु सभ्यता स्वतंत्र रूप से बनाये जाने की संभावना नहीं दिखती। राव तो ऐसे मनकों का स्रोत लोथल मानते हैं। राव का मत कि रेखाकित मनके सबसे पहले लोथल में बने और अन्यत्र लोगों ने इस तरह के मनके बनाने का ज्ञान लोथल से ही प्राप्त किया सही नहीं लगता, मोहेजोदड़ो मे प्रारंभिक चरण से ही इस तरह के मनके मिलते है और इनकी तिथि लोथल से बाद की नही मानी जा सकती । रेखाकित मनके लम्बे ढोलाकार कार्नीलियन के मनके, सेलखड़ी के पकाए गए छोटे मनके, सीढ़ीदार मनके, और मनको पर तिपतिया डिजाइन सिंधु सभ्यता और मेसोपोटामिया की संस्कृतियों के बीच सपर्क के द्योतक लगते है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सेलखड़ी के मनके सिंधु सभ्यता मे तो पर्याप्त सख्या मे मिलते है किंतु मेसोपोटामिया मे अत्यल्प संख्या मे, सेलखड़ी के मनको पर चित्रण सिंधु सभ्यता में मिलता है पर मेसोपटामिया के मनकों पर नही, कुछ आकार-प्रकार सिधु सभ्यता में मिलते है, मेसोपोटामिया मे नही और कुछ मेसोपोटामिया के प्रकार सिंधु सभ्यता में नहीं मिलते। अध्याय आठ सिंधु सभ्यता के मृद्भाण्ड अपनी विशिष्टता लिए है और इसके भाण्डो के कई मुख्य प्रकार अन्यत्र संस्कृतियो मे अनुपलब्ध है। ये व्यावसायिक पैमाने पर उपयोगितावाद के दृष्टिकोण से निर्मित किये गये थे । उस सभ्यता के बर्तन अधिकतर चाक पर ही बने है । चाक लकड़ी के रहे होगे जो नष्ट से हो गये है । हाथ से बनाये बर्तन भी मिले है, किंतु चाक पर निर्मित बर्तनो की अपेक्षा इनकी संख्या बहुत कम है और ये मुख्य रूप से निम्न स्तरो से उपलब्ध हुए है । बर्तनों के निर्माण में अतिम चरण में ह्रास के लक्षण दिखते है । आजकल की प्रथा को ध्यान में रखते हुए ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि बर्तन पुरुषों ने बनाये होगे और उन पर चित्रण आदि स्त्रियो ने किया होगा। मृद्भाण्डो के निर्माण के लिए मिट्टी नदी से लायी गयी थी । उसमें अभ्रक और बालू भी मिली है । भाण्डो से को भट्टो मे भलीभाति पकाया गया था । मोहेजोदडो के अन्तिम चरण में, जब सभ्यता ह्रासोन्मुखी थी, नगर मे भट्टे भी पाये गये है । विकसित युग मे भट्ठे नगर से बाहर रहे होगे । ये उपलब्ध भट्ठे वृत्ताकार है और इनका व्यास अट्ठारह मीटर से दो सौ चौहत्तर मीटर है। इनमे नीचे कोयला रखने के लिए गड्ढा था और उसके ऊपर बर्तन रखने के लिए गुम्बद की तरह आकार बना था। इस तरह के भट्ठे पश्चिमी एशिया की प्राचीन संस्कृतियों में भी मिले है । बर्तनों का ठीक तरह पका होना इस बात का द्योतक है कि आच भली-भाति नियंत्रित थी । लेकिन आजकल की भाति बिना भट्ठे के भी खुले मे भाण्ड पकाए जाते रहे होगे । कुल्हड के पेंदें गोल और कुछ नुकीले है और उनके नीचे का भाग ऊपरी भाग की अपेक्षा कम सावधानी से बना है। बड़े घड़े दो तीन भागो मे बनाये गए थे और गीले मे ही उन्हें काफी सफाई से जोड़ दिया गया था और साधारण जोड नही दिखते है । सामान्य रूप से कहा जा सकता है कि सिंधु सभ्यता के बर्तनो में गोलाई अधिक है और सोधे कोने कम । साधारणत. सिंधु सभ्यता के मृद्भाण्ड भली भाति तैयार की गई मिट्टी से बने है । अधिकाश मृद्भाण्ड बिना चित्रण वाले है। उन पर हलका दूधिया रग का लेप मिलता है, कुछ उदाहरणो में, लेप का रंग पीलापन लिए या सफेदी एक सौ चार: सिंधु सभ्यता लिए है, और अत्यल्प उदाहरण गुलाबी लेप के भी हैं । चित्रित बर्तनों की संख्या अपेक्षाकृत कम है और इनमें से अधिकाश खंडित मिले है । चित्रित बर्तनो की संख्या निचले स्तरों में ऊपरी स्तरों की अपेक्षा अधिक है । चित्रित तथा सादे दोनों ही मृद्भाण्ड एक ही तरह की मिट्टी से बने है । यह रोचक तथ्य है कि सर लियोनार्ड वूली ने मोहेजोदड़ो मे पुनरुत्खनन न किये जाने की सलाह मुख्यत इस आधार पर दी कि यहा पर मेसोपोटामिया की तरह विशाल संख्या में चित्रित मृद्भाण्ड नही मिलते । साधारणतया चित्रित बर्तनो पर लाल लेप लगा है । लेप लगाने का उद्देश्य सुन्दरता के अतिरिक्त बर्तन को जलाभेद्य बनाना भी था । कहीं पर तो लेप से बर्तन इतना चिकना बना दिया गया कि एक विद्वान् का सुझाव है कि इसमें चूहों से भी सुरक्षा हो सकती थी, क्योकि चूहे ऐसे भाण्डो पर फिसल जाते रहे होगे और उसके मुंह तक नहीं पहुंच पाते रहे होंगे । दुधिया, गुलाबी और लाल सभी रंगो के लेप के लिए रंगीन प्राकृतिक मिट्टी ही प्रयुक्त लगती है । लेप को विशेषत गाढे लाल रंग को, पालिश कर चमकाया गया है। अक्सर गाढा लेप पूरे बर्तन पर नहीं लगाया गया और लेप वाले भाग पर ही चित्रकारी की गई है, बाकी भाग सादा छोड़ दिया गया है । चित्रण साधारणतया काले रग से किया जाता था जो मेग्निफेरस हाइमेटाइट से तैयार किया जाता था । लाल लेप पर काले रग से चित्रण की विद्या की दृष्टि से उत्तरी बलूचिस्तान के रानाघुंडई - तृतीय चरण से प्रेरित लगते है किंतु जहा तक अभिप्रायो और डिजाइनो का प्रश्न है इनमें उत्तरी बलूचिस्तान का प्रभाव नगण्य है । कुछ अर्थो मे दक्षिणी वलूचिस्तान की कुल्ली शैली का भी कुछ प्रभाव दिखता है। आकार प्रकार के समान चित्रण विद्या में भी सिंधु सभ्यता भाण्डो की अपनी अलग विशिष्टता है । चित्रित बर्तनो के ऐसे बहुत कम उदाहरण है जिनका सम्पूर्ण वाह्य भाग चित्रित किया गया हो । साधारणतया चित्रित मृद्भाण्ड के लगभग तीन चौथाई या उससे भी कम हिस्सो पर चित्रकारी की गई है। छोटे आकार के मुद्भाण्डो के मध्य मे काले रंग से केवल धारी या धारिया बना दी गई है। अधिकाश मृद्भाण्डो मे चित्रण काले रंग से किया गया है। चित्रित अभि प्रायो मे विविधता है और अधिकाश डिजाइन परंपरागत शैली मे है । काले रग की आड़ी धारिया सबसे अधिक मिलती है कुछ धारियां ) मोटी और कुछ पतली है । साधारणतया चित्रण के लिए बर्तन को कुछ खण्डों में बाट लेते थे और फिर उन्हें खड़े और पड़े खण्डों में विभाजित करते थे । अभिप्रायों में प्रतिच्छेदी वृत्त विशेष उल्लेखनीय है । यह अभिप्राय एलम ओर सुमेर |
आदर्श शिष्य
नानाविधानि कार्याणि कर्त्ता-कारयिता च यः । सब धर्म विधिशश्च स श्राचार्य उच्यते ॥ नाना प्रकार के वैदिक कर्मों को करने और करानेवाला और सब प्रकार के यज्ञ-धम की विधि जाननेवाला आचाय कहलाता है। श्राचार्यत्वस्य यां जाति, विधवद्वेद पारगः । उत्पादयति सावित्र्या सा सत्या साऽजर ऽमरा ॥ साङ्गोपाङ्ग वेद का ज्ञाता आचाय जिस जाति का गायत्रीमन्त्र टेकर उत्पन्न करता है, वह सत्य तथा अजर-अमर होती है।
१२ - आदर्श शिष्य
"को वा गुरुर्यस्तु हितोपदेष्टा ।
शिष्यस्तु को यो गुरु-भक्त एव ॥ "
इकराराच र्य )
गुरु कौन है ? जो हित का उपदेश करे । और शिष्य कौन है ? जो गुरु की आज्ञा माने ।
"गुरु-शुश्रूषया विद्या ।"
सेवा से विद्यार्थी को ज्ञान प्राप्त होता है ।
गुरु-शिष्य का सम्बन्ध बड़ा घनिष्ट होता है। पिता-पुत्र की उपमा भी इसके लिये कुछ अंशों में चरितार्थ हा सकती है। जो गुरु हित का उपदेशक नहीं है, उससे विद्यार्थी का वास्तविक लाभ कभी नहीं हो सकता। और उसी प्रकार जो शिष्य आबाकारी नहीं है, उसे त्रिकाल में ज्ञान नहीं मिल सकता। इस बात की सत्यता नीचे के उदाहरण से प्रकट हा जायगीःब्रह्मचर्य-विज्ञान
एक आचार्य के यहाँ एक ऋषिकुमार पढ़ता था। उसका नाम आरुणि था । एक दिन धान का खेत देखने के लिये उसके गुरु ने भेजा था । वहाँ डाँड़ कट जाने के कारण पानी बाहर बह रहा था। वहाँ से उसके घर लौटने भर में खेत का सारा पानी निकल जाता और धान सूख जाता। यह विचार कर आरुणि स्वयं उसी में पड़ गया और इस प्रकार पानी रोके उसे दिन वहीं बीत गया ।। सन्ध्या समय गुरु को ध्यान आया कि क्या कारण कि आरुरिण अभी तक घर नहीं लौटा। अतएव वे अपने दूसरे शिष्यों को लेकर उसे देखने गये । नाम लेकर पुकारने पर वह बोला कि गुरुजी मैं यहाँ पानी रोक कर पड़ा हूँ । जब सब लोग उसके पास पहुँच गये, तब उसने सारा समाचार कह सुनाया। लोगों ने मिल कर मेड़ बाँध दिया, तथा आरुणि के गुरु उससे अत्यन्त प्रसन्न हुये । गुरु की इस कृपा और आशीर्वाद से आरुणि थोड़े ही दिनों में प्रकाण्ड पण्डित हुआ ।
एकलव्य नाम का एक वनचर था । उसके मन में अभिलाषा हुई कि द्रोणाचार्य से बाग - विद्या सीखें, पर आचार्य ने उसे नीच समझ कर विमुख फेर दिया। इस पर वह वन में जाकर द्रोणाचार्य की एक प्रस्तर की मूर्ति खड़ी कर, उसके सम्मुख बारण चलाता था । इस श्रद्धा और विश्वास से थोड़े ही दिनों में वह बालक बड़ा निपुण धनुर्धर निकल गया ।
एक दिन वीरवर अर्जुन उस वन में गये। वहाँ इसकी बाणविद्या के कौशल को देखकर उनके मन में बड़ा द्वेष उत्पन्न हुआ । उनके पूछने पर उसने अपने को द्रोणाचार्य का शिष्य बतलाया । यह बात जानकर अर्जुन को बड़ा दुःख हुआ और उन्होंने आचार्य
से जाकर कहा कि जो बाण-विद्या आपने एकलव्य को सिखलाई है, वह मैं नहीं जानता। यह कैसी बात ?
अर्जुन का यह उपालम्भ द्रोणाचार्य के हृदय में लगा और इस बात की परीक्षा के लिये एकलव्य के पास गये । उससे इन्हें सब समाचार ज्ञात हुआ। इस पर आचाय ने गुरु-दक्षिरण माँगी कि तुम अपने दाहिने हाथ का अँगूठा हमें दे दो। इस पर उसने अपने को धन्य समझ कर सहर्ष अँगूठा काट कर तत्काल प्रदान किया और आचार्य उसे आशीर्वाद देकर बिदा हुये ।
ऐसे ही सच्चे शिष्यों पर विद्या देवी की कृपा
रहती है ।
इसी प्रकार के गुरुभक्त शिष्यों से देश, जाति और समाज का दुःख दूर हो सकता है।
१३ - ब्रह्मचर्य के तीन प्रकार
"न किञ्चिद्भयमाप्नोति, ब्रह्मचर्यव्रते स्थितः । " ( सूकि)
ब्रह्मचर्य व्रत में स्थित रहने से तनिक भी भय नहीं रहता। "ब्रह्मचर्य तपोत्तमम् ।"
ब्रह्मचर्य ही परम तप है ।
छान्दोग्योपनिषद् में ब्रह्मचर्य का बहुत ही उत्तम उल्लेख है । उसमें ब्रह्मचर्य के तीन प्रकार बतलाये गये हैं। कनिष्ठ, मध्यम और उत्तम । प्रत्येक प्रकार के लिये आयुष्य का एक नियमित काल निर्धारित किया गया है और उन्हीं मन्त्रों में उनसे होने वाले
लाभों का भी उच्च वर्णन है। अतएव हम उन आवश्यक मत्रों को उनके अभिप्रायार्थ के साथ यहाँ उद्धृत करते हैं ।
पुरुषो वाव यशस्तस्य यानि चतुर्विंशति वर्ष णि तत्प्रात सवनं, चतुर्विंशत्यक्षरा गायत्री गायत्रं प्रातः सवनंतदस्य वसवोऽन्वायत्ताः प्राणा वाव वसव पते हीद सर्व वासयन्ति ।
तश्चेदेतस्मिन् वयसि किञ्चिदुपतपेत्स ब्रूयात्प्राणा वसव इदं मे प्रातः सवनं माध्यन्दिनं सवनमनु सन्तनुतेति माहं प्राणानां वसूनां मध्ये यशो विलोप्सीयेत्युद्ध व तत एत्यगदो छ भवति ।
यह पुरुष अन्नरसमय देह और जीवात्मा के योग से बना है । यह स्वयं यज्ञ रूप है। इसका सत्कर्त्तव्य है कि जैसे २४ अक्षरों की गायत्री होती है और उस से कल्याण साधन होता है, उसी प्रकार यह भी २४ वर्ष पर्यन्त जितेन्द्रियत्व को धारण करे । इतने काल तक ब्रह्मचर्यपूर्वक वेदों का अभ्यास करे। उसके इस कार्य से उस के प्राण बलवान हो कर, सब दिव्य गुणों से युक्त हो जाते हैं । ब्रह्मचारी के आचार्य को चाहिये कि उसे इस पथ पर चलने का हितोपदेश करता रहे । ब्रह्मचारी भी अपने मन में यह धारणा करे कि इस व्रत के पालन से उसका आत्मा वीर्यवान और शरीर शक्तिमान हो जायगा और उसके अन्तःकरण में सद्गुणों का विकास होगा । हे मनुष्यो ! तुम सब सुखों के प्रकाश करने वाले ब्रह्मचय का लोप न होने दो ।
"अथयानिचतुश्चत्वारिंशम वर्षाणितन्माध्यन्दिनं सवनंचतुश्च त्वारिंशदक्षरा त्रिष्टुप् त्रैष्टुभं माध्यन्दिनं सवनं तदस्य रुद्रा अन्वायत्ताः प्राणाः वाव रुद्रा एते हीदं सर्व रोदयन्ति ।"
"तं चेदस्मिन्वयसि किश्चिदुपत पेत्स ब्रूयात्प्राणा रुद्रा इदमे माध्यन्दिनं सवनं तृतीय सवनमनुसन्तनुतेति माहंप्राणानां रुद्राणां मध्ये यज्ञो विलोप्सीयेत्युद्धेष तत एत्यगदोह भवति ।"
० - मध्यम ब्रह्मचर्य - जैसे ४४ अक्षरों का त्रिष्टुप् छन्द होता है, वैसे ही जो पुरुष ४४ वर्षों तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है, उसके प्राण और सर्वाङ्ग बलवान् होकर दुर्गुणों का नाश करते हैं । यदि हम प्रथम वय में इस कहे हुए ब्रह्मचर्य का विधिवत् पालन करेंगे, तो हमारे प्राण रुद्र-रूप होकर, सज्जनों का कल्याण करेंगे । हे ब्रह्मचारियो ! जैसे हम इस ब्रह्मचर्य व्रत का अनुष्ठान कर सुख स्वरूप और जनता के सेवक बनते हैं, ऐसे तुम भी बनो !
"अथ यान्यष्टाचत्वारिंशद् वर्षाणि तत्तृतीयसवनमष्टाचत्वारिंशदक्षरा जगती जागतं तृतीयसवनं तदस्यादित्यान्वायत्ताः प्राणा वावादित्या पतेहीद ५ सर्वमाददते ।"
"तं चेदेतस्मिन्त्रयसि किञ्चिदुपतपेत्स ब्रूयात्प्राणा आदित्या इंद मे तृतीयसवनमायुरनुसन्तनुतेति माहं प्राणानामादित्यानां मध्येयशो विलोप्सीयेत्युद्धैव तत एत्यगदो हैव भवति ।"
३ - और उत्तम ब्रह्मचर्य-जैसे ४८ अक्षरों का जगती छन्द
होता है, वैसे ही जो पुरुष इस प्रकार के ब्रह्मचर्य व्रत का नियमपूर्वक साधन करता है, उसके प्राण आदित्य रूप होकर सद्गुणों का प्रकाश करते हैं ।
यदि हम प्रथम वय में इस कहे हुए ब्रह्मचर्य का यथोचित पालन करेंगे, तो हमारे प्राण आदित्य रूप होकर शरीर में ज्ञान का प्रकाश करेंगे । अतः हे ब्रह्मचारियो ! जिस प्रकार हम ब्रह्मचर्य
से रह कर दीर्घजीवी हो, संसार में विद्या की वृद्धि करते हैं, उसी प्रकार तुम भी करो ।
१४ - मरुत् और साध्यपदब्रह्मचारी
अथ यच्चतुर्थममृतं तन्मरुत उपजीवन्ति सोमेन मुखेन । न देवा श्रश्नन्ति न पिबन्त्येतदेवामृतं दृष्ट्वा तृप्यन्ति ।
जो पुरुष ४८ वर्ष से ऊपर के ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं, और चौथे वेद (अथर्व ) का अध्ययन करते हैं, उन्हें 'मरुत् ब्रह्मचारी' कहते हैं । ऐसे ब्रह्मचारी का मुख चन्द्रमा की भाँति शोभित होता है और वे जो कुछ खाते या पीते हैं, उसमें कामना नहीं रखते । वे केवल अमृत स्वरूप ब्रह्म ( परमात्मा ) का साक्षात्कार कर तृप्त रहते है।
त एतदेवरूपमभिसंविशन्त्येतस्माद्रूपादुद्यन्ति ।
वे मरुत् नाम के ब्रह्मचारी इसी ब्रह्म का चारो ओर अनुभव करते और इसी की कृपा से सर्वत्र कामचारी होते हैं ।
अथ पञ्चमममृतं तत्साध्या उपजीवन्ति ब्रह्मणा मुखेन । न व देवा अश्नन्ति न पिबन्त्येतदेवामृतं दृष्ट्वा तृप्यन्ति ॥ (छान्दोग्योपनिषत् ) जो पुरुष जीवन भर ब्रह्मचर्या में लीन रहते हैं, और साङ्गोपाङ्ग चारों (ऋग्यजुसाम और अथर्व ) वेदों का अध्ययन करते हैं, 'साध्य-पद-प्राप्त ब्रह्मचारी' कहलाते हैं । ऐसे ब्रह्मचारी का मुख१७१
ब्रह्मचारी की भिक्षा
मण्डल ब्रह्म के समान तेजस्वी होता है और वे न तो कुछ खाते हैं, न पीते हैं, वरन् अमृतमय ब्रह्म में ही लीन होकर तृप्त होते हैं । त एतदेवरूपमभिसंविशन्त्येितस्माद्रूपादुद्यन्ति । साध्यपद प्राप्त ब्रह्मचारी इसी ब्रह्म ( परमात्मा ) का सर्वत्र अनुभव करते हुये ज्ञान के प्रभाव से प्रकाशित होते हैं ।
१५ - ब्रह्मचारी की भिक्षा
"सायं प्रातश्चरेभैक्षं, भोज्याथं संयतेन्द्रियः ।"
( महामान्य हारीत ) ब्रह्मचारी अपने भोजन के लिये सन्तोषपूर्वक सायं और प्रातःकाल भिक्षा माँगे ।
* इमां भूमिं पृथिवीं ब्रह्मचारी भिक्षामा जभार प्रथमो दिवञ्च ।" ( अथर्ववेद )
पहले पहल ब्रह्मचारी ने विस्तृत भौतिक ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान की भिक्षा माँगी ।
गुरुकुल में रहने की अवस्था में ब्रह्मचारी अपने आचार्य का अन्न नहीं ग्रहण करता । वह स्वयं अपने पुरुषार्थ से अन्य स्थानों से भिक्षा माँग लाता है । इस भिक्षा का बड़ा महत्व है । इसे वह पहले पहल लाकर अपने आचार्य को समर्पित करता है। उसका आचार्य उसमें से जो कुछ दे देता है, उसे खाकर प्रसन्नतापूर्वक वह अपना जीवन व्यतीत करता है ।
प्रचीन काल में प्रायः सब के पुत्र गुरुकुलों में पढ़ने जाते थे, में और भिन्न-भिन्न घरों से भिक्षा माँगते थे । इस लिये सब घरों | आदर्श शिष्य नानाविधानि कार्याणि कर्त्ता-कारयिता च यः । सब धर्म विधिशश्च स श्राचार्य उच्यते ॥ नाना प्रकार के वैदिक कर्मों को करने और करानेवाला और सब प्रकार के यज्ञ-धम की विधि जाननेवाला आचाय कहलाता है। श्राचार्यत्वस्य यां जाति, विधवद्वेद पारगः । उत्पादयति सावित्र्या सा सत्या साऽजर ऽमरा ॥ साङ्गोपाङ्ग वेद का ज्ञाता आचाय जिस जाति का गायत्रीमन्त्र टेकर उत्पन्न करता है, वह सत्य तथा अजर-अमर होती है। बारह - आदर्श शिष्य "को वा गुरुर्यस्तु हितोपदेष्टा । शिष्यस्तु को यो गुरु-भक्त एव ॥ " इकराराच र्य ) गुरु कौन है ? जो हित का उपदेश करे । और शिष्य कौन है ? जो गुरु की आज्ञा माने । "गुरु-शुश्रूषया विद्या ।" सेवा से विद्यार्थी को ज्ञान प्राप्त होता है । गुरु-शिष्य का सम्बन्ध बड़ा घनिष्ट होता है। पिता-पुत्र की उपमा भी इसके लिये कुछ अंशों में चरितार्थ हा सकती है। जो गुरु हित का उपदेशक नहीं है, उससे विद्यार्थी का वास्तविक लाभ कभी नहीं हो सकता। और उसी प्रकार जो शिष्य आबाकारी नहीं है, उसे त्रिकाल में ज्ञान नहीं मिल सकता। इस बात की सत्यता नीचे के उदाहरण से प्रकट हा जायगीःब्रह्मचर्य-विज्ञान एक आचार्य के यहाँ एक ऋषिकुमार पढ़ता था। उसका नाम आरुणि था । एक दिन धान का खेत देखने के लिये उसके गुरु ने भेजा था । वहाँ डाँड़ कट जाने के कारण पानी बाहर बह रहा था। वहाँ से उसके घर लौटने भर में खेत का सारा पानी निकल जाता और धान सूख जाता। यह विचार कर आरुणि स्वयं उसी में पड़ गया और इस प्रकार पानी रोके उसे दिन वहीं बीत गया ।। सन्ध्या समय गुरु को ध्यान आया कि क्या कारण कि आरुरिण अभी तक घर नहीं लौटा। अतएव वे अपने दूसरे शिष्यों को लेकर उसे देखने गये । नाम लेकर पुकारने पर वह बोला कि गुरुजी मैं यहाँ पानी रोक कर पड़ा हूँ । जब सब लोग उसके पास पहुँच गये, तब उसने सारा समाचार कह सुनाया। लोगों ने मिल कर मेड़ बाँध दिया, तथा आरुणि के गुरु उससे अत्यन्त प्रसन्न हुये । गुरु की इस कृपा और आशीर्वाद से आरुणि थोड़े ही दिनों में प्रकाण्ड पण्डित हुआ । एकलव्य नाम का एक वनचर था । उसके मन में अभिलाषा हुई कि द्रोणाचार्य से बाग - विद्या सीखें, पर आचार्य ने उसे नीच समझ कर विमुख फेर दिया। इस पर वह वन में जाकर द्रोणाचार्य की एक प्रस्तर की मूर्ति खड़ी कर, उसके सम्मुख बारण चलाता था । इस श्रद्धा और विश्वास से थोड़े ही दिनों में वह बालक बड़ा निपुण धनुर्धर निकल गया । एक दिन वीरवर अर्जुन उस वन में गये। वहाँ इसकी बाणविद्या के कौशल को देखकर उनके मन में बड़ा द्वेष उत्पन्न हुआ । उनके पूछने पर उसने अपने को द्रोणाचार्य का शिष्य बतलाया । यह बात जानकर अर्जुन को बड़ा दुःख हुआ और उन्होंने आचार्य से जाकर कहा कि जो बाण-विद्या आपने एकलव्य को सिखलाई है, वह मैं नहीं जानता। यह कैसी बात ? अर्जुन का यह उपालम्भ द्रोणाचार्य के हृदय में लगा और इस बात की परीक्षा के लिये एकलव्य के पास गये । उससे इन्हें सब समाचार ज्ञात हुआ। इस पर आचाय ने गुरु-दक्षिरण माँगी कि तुम अपने दाहिने हाथ का अँगूठा हमें दे दो। इस पर उसने अपने को धन्य समझ कर सहर्ष अँगूठा काट कर तत्काल प्रदान किया और आचार्य उसे आशीर्वाद देकर बिदा हुये । ऐसे ही सच्चे शिष्यों पर विद्या देवी की कृपा रहती है । इसी प्रकार के गुरुभक्त शिष्यों से देश, जाति और समाज का दुःख दूर हो सकता है। तेरह - ब्रह्मचर्य के तीन प्रकार "न किञ्चिद्भयमाप्नोति, ब्रह्मचर्यव्रते स्थितः । " ब्रह्मचर्य व्रत में स्थित रहने से तनिक भी भय नहीं रहता। "ब्रह्मचर्य तपोत्तमम् ।" ब्रह्मचर्य ही परम तप है । छान्दोग्योपनिषद् में ब्रह्मचर्य का बहुत ही उत्तम उल्लेख है । उसमें ब्रह्मचर्य के तीन प्रकार बतलाये गये हैं। कनिष्ठ, मध्यम और उत्तम । प्रत्येक प्रकार के लिये आयुष्य का एक नियमित काल निर्धारित किया गया है और उन्हीं मन्त्रों में उनसे होने वाले लाभों का भी उच्च वर्णन है। अतएव हम उन आवश्यक मत्रों को उनके अभिप्रायार्थ के साथ यहाँ उद्धृत करते हैं । पुरुषो वाव यशस्तस्य यानि चतुर्विंशति वर्ष णि तत्प्रात सवनं, चतुर्विंशत्यक्षरा गायत्री गायत्रं प्रातः सवनंतदस्य वसवोऽन्वायत्ताः प्राणा वाव वसव पते हीद सर्व वासयन्ति । तश्चेदेतस्मिन् वयसि किञ्चिदुपतपेत्स ब्रूयात्प्राणा वसव इदं मे प्रातः सवनं माध्यन्दिनं सवनमनु सन्तनुतेति माहं प्राणानां वसूनां मध्ये यशो विलोप्सीयेत्युद्ध व तत एत्यगदो छ भवति । यह पुरुष अन्नरसमय देह और जीवात्मा के योग से बना है । यह स्वयं यज्ञ रूप है। इसका सत्कर्त्तव्य है कि जैसे चौबीस अक्षरों की गायत्री होती है और उस से कल्याण साधन होता है, उसी प्रकार यह भी चौबीस वर्ष पर्यन्त जितेन्द्रियत्व को धारण करे । इतने काल तक ब्रह्मचर्यपूर्वक वेदों का अभ्यास करे। उसके इस कार्य से उस के प्राण बलवान हो कर, सब दिव्य गुणों से युक्त हो जाते हैं । ब्रह्मचारी के आचार्य को चाहिये कि उसे इस पथ पर चलने का हितोपदेश करता रहे । ब्रह्मचारी भी अपने मन में यह धारणा करे कि इस व्रत के पालन से उसका आत्मा वीर्यवान और शरीर शक्तिमान हो जायगा और उसके अन्तःकरण में सद्गुणों का विकास होगा । हे मनुष्यो ! तुम सब सुखों के प्रकाश करने वाले ब्रह्मचय का लोप न होने दो । "अथयानिचतुश्चत्वारिंशम वर्षाणितन्माध्यन्दिनं सवनंचतुश्च त्वारिंशदक्षरा त्रिष्टुप् त्रैष्टुभं माध्यन्दिनं सवनं तदस्य रुद्रा अन्वायत्ताः प्राणाः वाव रुद्रा एते हीदं सर्व रोदयन्ति ।" "तं चेदस्मिन्वयसि किश्चिदुपत पेत्स ब्रूयात्प्राणा रुद्रा इदमे माध्यन्दिनं सवनं तृतीय सवनमनुसन्तनुतेति माहंप्राणानां रुद्राणां मध्ये यज्ञो विलोप्सीयेत्युद्धेष तत एत्यगदोह भवति ।" शून्य - मध्यम ब्रह्मचर्य - जैसे चौंतालीस अक्षरों का त्रिष्टुप् छन्द होता है, वैसे ही जो पुरुष चौंतालीस वर्षों तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है, उसके प्राण और सर्वाङ्ग बलवान् होकर दुर्गुणों का नाश करते हैं । यदि हम प्रथम वय में इस कहे हुए ब्रह्मचर्य का विधिवत् पालन करेंगे, तो हमारे प्राण रुद्र-रूप होकर, सज्जनों का कल्याण करेंगे । हे ब्रह्मचारियो ! जैसे हम इस ब्रह्मचर्य व्रत का अनुष्ठान कर सुख स्वरूप और जनता के सेवक बनते हैं, ऐसे तुम भी बनो ! "अथ यान्यष्टाचत्वारिंशद् वर्षाणि तत्तृतीयसवनमष्टाचत्वारिंशदक्षरा जगती जागतं तृतीयसवनं तदस्यादित्यान्वायत्ताः प्राणा वावादित्या पतेहीद पाँच सर्वमाददते ।" "तं चेदेतस्मिन्त्रयसि किञ्चिदुपतपेत्स ब्रूयात्प्राणा आदित्या इंद मे तृतीयसवनमायुरनुसन्तनुतेति माहं प्राणानामादित्यानां मध्येयशो विलोप्सीयेत्युद्धैव तत एत्यगदो हैव भवति ।" तीन - और उत्तम ब्रह्मचर्य-जैसे अड़तालीस अक्षरों का जगती छन्द होता है, वैसे ही जो पुरुष इस प्रकार के ब्रह्मचर्य व्रत का नियमपूर्वक साधन करता है, उसके प्राण आदित्य रूप होकर सद्गुणों का प्रकाश करते हैं । यदि हम प्रथम वय में इस कहे हुए ब्रह्मचर्य का यथोचित पालन करेंगे, तो हमारे प्राण आदित्य रूप होकर शरीर में ज्ञान का प्रकाश करेंगे । अतः हे ब्रह्मचारियो ! जिस प्रकार हम ब्रह्मचर्य से रह कर दीर्घजीवी हो, संसार में विद्या की वृद्धि करते हैं, उसी प्रकार तुम भी करो । चौदह - मरुत् और साध्यपदब्रह्मचारी अथ यच्चतुर्थममृतं तन्मरुत उपजीवन्ति सोमेन मुखेन । न देवा श्रश्नन्ति न पिबन्त्येतदेवामृतं दृष्ट्वा तृप्यन्ति । जो पुरुष अड़तालीस वर्ष से ऊपर के ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं, और चौथे वेद का अध्ययन करते हैं, उन्हें 'मरुत् ब्रह्मचारी' कहते हैं । ऐसे ब्रह्मचारी का मुख चन्द्रमा की भाँति शोभित होता है और वे जो कुछ खाते या पीते हैं, उसमें कामना नहीं रखते । वे केवल अमृत स्वरूप ब्रह्म का साक्षात्कार कर तृप्त रहते है। त एतदेवरूपमभिसंविशन्त्येतस्माद्रूपादुद्यन्ति । वे मरुत् नाम के ब्रह्मचारी इसी ब्रह्म का चारो ओर अनुभव करते और इसी की कृपा से सर्वत्र कामचारी होते हैं । अथ पञ्चमममृतं तत्साध्या उपजीवन्ति ब्रह्मणा मुखेन । न व देवा अश्नन्ति न पिबन्त्येतदेवामृतं दृष्ट्वा तृप्यन्ति ॥ जो पुरुष जीवन भर ब्रह्मचर्या में लीन रहते हैं, और साङ्गोपाङ्ग चारों वेदों का अध्ययन करते हैं, 'साध्य-पद-प्राप्त ब्रह्मचारी' कहलाते हैं । ऐसे ब्रह्मचारी का मुखएक सौ इकहत्तर ब्रह्मचारी की भिक्षा मण्डल ब्रह्म के समान तेजस्वी होता है और वे न तो कुछ खाते हैं, न पीते हैं, वरन् अमृतमय ब्रह्म में ही लीन होकर तृप्त होते हैं । त एतदेवरूपमभिसंविशन्त्येितस्माद्रूपादुद्यन्ति । साध्यपद प्राप्त ब्रह्मचारी इसी ब्रह्म का सर्वत्र अनुभव करते हुये ज्ञान के प्रभाव से प्रकाशित होते हैं । पंद्रह - ब्रह्मचारी की भिक्षा "सायं प्रातश्चरेभैक्षं, भोज्याथं संयतेन्द्रियः ।" ब्रह्मचारी अपने भोजन के लिये सन्तोषपूर्वक सायं और प्रातःकाल भिक्षा माँगे । * इमां भूमिं पृथिवीं ब्रह्मचारी भिक्षामा जभार प्रथमो दिवञ्च ।" पहले पहल ब्रह्मचारी ने विस्तृत भौतिक ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान की भिक्षा माँगी । गुरुकुल में रहने की अवस्था में ब्रह्मचारी अपने आचार्य का अन्न नहीं ग्रहण करता । वह स्वयं अपने पुरुषार्थ से अन्य स्थानों से भिक्षा माँग लाता है । इस भिक्षा का बड़ा महत्व है । इसे वह पहले पहल लाकर अपने आचार्य को समर्पित करता है। उसका आचार्य उसमें से जो कुछ दे देता है, उसे खाकर प्रसन्नतापूर्वक वह अपना जीवन व्यतीत करता है । प्रचीन काल में प्रायः सब के पुत्र गुरुकुलों में पढ़ने जाते थे, में और भिन्न-भिन्न घरों से भिक्षा माँगते थे । इस लिये सब घरों |
- #Uttar-pradeshकिसका पद बड़ा, एसडीएम ज्योति मौर्य या जिला कमांडेंट होमगार्ड मनीष दुबे का?
बेरोजगारी के मुद्दे पर Varun Gandhi ने अपनी ही सरकार को घेरा, पूछा- कौन है जिम्मेदार?
लखनऊ, 28 जुलाईः भारतीय जनता पार्टी के नेता और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी अपनी ही सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते। वरुण अक्सर अपनी सरकार के फैसलों को लेकर आए दिन अपनी नाराजगी जाहिर करते रहते हैं। अब एक बार फिर वरुण गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा है। साथ ही, वरुण गांधी ने ट्वीट कर सवाल भी पूछा है।
पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर 28 जुलाई को अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया। ट्वीट करते हुए वरुण गांधी ने लिखा,
ससंद में सरकार द्वारा दिए गए यह आँकड़े बेरोजगारी का आलम बयां कर रहे हैं। विगत 8 वर्षों में 22 करोड़ युवाओं ने केंद्रीय विभागों में नौकरी के लिए आवेदन दिया जिसमें से मात्र 7 लाख को रोजगार मिल सका है। जब देश में लगभग एक करोड़ स्वीकृत पद खाली हैं, तब इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है?
ससंद में सरकार द्वारा दिए गए यह आँकड़े बेरोजगारी का आलम बयां कर रहे हैं।
विगत 8 वर्षों में 22 करोड़ युवाओं ने केंद्रीय विभागों में नौकरी के लिए आवेदन दिया जिसमें से मात्र 7 लाख को रोजगार मिल सका है।
इससे पहले वरुण गांधी ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए कहा कि, 'किसानों को MSP की कानूनी गारंटी के लिए मैंने लोकसभा में निजी विधेयक रखा था। इसे निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने सदन में बहस के लिए अनुशंसा दी। मैं उनका बहुत बहुत धन्यवाद करता हूं। किसानों के हित में इस विधेयक पर संसद में चर्चा होगी ऐसी आशा है। '
वरुण गांधी ने एक वीडियो ट्वीट कर नमामि गंगे पर भी सवाल उठाया था। वरुण गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'गंगा हमारे लिए सिर्फ नदी नहीं, 'मां' है। करोड़ों देशवासियों के जीवन, धर्म और अस्तित्व का आधार है मां गंगा। इसलिए नमामि गंगे पर 20,000 करोड़ का बजट बना। 11,000 करोड़ खर्च के बावजूद प्रदूषण क्यों? गंगा तो जीवनदायिनी है, फिर गंदे पानी के कारण मछलियों की मौत क्यों? जवाबदेही किसकी? '
| - #Uttar-pradeshकिसका पद बड़ा, एसडीएम ज्योति मौर्य या जिला कमांडेंट होमगार्ड मनीष दुबे का? बेरोजगारी के मुद्दे पर Varun Gandhi ने अपनी ही सरकार को घेरा, पूछा- कौन है जिम्मेदार? लखनऊ, अट्ठाईस जुलाईः भारतीय जनता पार्टी के नेता और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी अपनी ही सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते। वरुण अक्सर अपनी सरकार के फैसलों को लेकर आए दिन अपनी नाराजगी जाहिर करते रहते हैं। अब एक बार फिर वरुण गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा है। साथ ही, वरुण गांधी ने ट्वीट कर सवाल भी पूछा है। पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर अट्ठाईस जुलाई को अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया। ट्वीट करते हुए वरुण गांधी ने लिखा, ससंद में सरकार द्वारा दिए गए यह आँकड़े बेरोजगारी का आलम बयां कर रहे हैं। विगत आठ वर्षों में बाईस करोड़ युवाओं ने केंद्रीय विभागों में नौकरी के लिए आवेदन दिया जिसमें से मात्र सात लाख को रोजगार मिल सका है। जब देश में लगभग एक करोड़ स्वीकृत पद खाली हैं, तब इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है? ससंद में सरकार द्वारा दिए गए यह आँकड़े बेरोजगारी का आलम बयां कर रहे हैं। विगत आठ वर्षों में बाईस करोड़ युवाओं ने केंद्रीय विभागों में नौकरी के लिए आवेदन दिया जिसमें से मात्र सात लाख को रोजगार मिल सका है। इससे पहले वरुण गांधी ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए कहा कि, 'किसानों को MSP की कानूनी गारंटी के लिए मैंने लोकसभा में निजी विधेयक रखा था। इसे निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने सदन में बहस के लिए अनुशंसा दी। मैं उनका बहुत बहुत धन्यवाद करता हूं। किसानों के हित में इस विधेयक पर संसद में चर्चा होगी ऐसी आशा है। ' वरुण गांधी ने एक वीडियो ट्वीट कर नमामि गंगे पर भी सवाल उठाया था। वरुण गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'गंगा हमारे लिए सिर्फ नदी नहीं, 'मां' है। करोड़ों देशवासियों के जीवन, धर्म और अस्तित्व का आधार है मां गंगा। इसलिए नमामि गंगे पर बीस,शून्य करोड़ का बजट बना। ग्यारह,शून्य करोड़ खर्च के बावजूद प्रदूषण क्यों? गंगा तो जीवनदायिनी है, फिर गंदे पानी के कारण मछलियों की मौत क्यों? जवाबदेही किसकी? ' |
"इतनी शेखी मत बघार । सवेरे सर्दी हो जाएगी और तू जुलाहे के जमाई की तरह ठिठुरकर मर जाएगा ।" छिब्बू हँसा ।
"ठंड लगी तो मैं नीचे आ जाऊँगा ।" सुबह की सर्दी उसे हड्डियों में अभी से महसूस होने लगी थी।
वह दूर तक फैली हुई आबादियों को देखने लगा जो गलियों और सड़कों की मैली रोशनी में धूमिल- सी नजर आ रही थीं । रेलवे स्टेशन के इलाके में अधिक रोशनी थी और इंजनों की सीटी, मालगाड़ी के डिब्बों की शंटिंग की खटाखट और मुसाफिरों, कुलियों और ताँगों का शोर वातावरण पर छाया हुआ था ।
काली को रात बहुत भली और सुहानी प्रतीत हो रही थी और वह नथुने फुला-फुलाकर खुली हवा को फेफड़ों में समेट रहा था। वह शहर की जगमग करती और चमचमाती रात का गाँव की अँधेरी और सुनसान रात से मुकाबला करने लगा । उसने अंदाजा लगाया कि अगर वह गाँव में होता तो उसकी कम-से-कम एक चौथाई नींद पूरी हो चुकी होती । और यहाँ शहर में न केवल वह जाग रहा है बल्कि फिलहाल उसे जल्दी नींद आने की संभावना भी नहीं है ।
तड़के मौसम सर्द होते ही काली की आँख खुल गई । उसने चादर को अपने शरीर के चारों ओर अच्छी तरह लपेट लिया और उसके छोरों को पाँव, सिर और धड़ के नीचे पूरी तरह दबाया लेकिन सर्दी के विरुद्ध काली की यह किलेबंदी नाकाफी साबित हुई । उसने खाट से दरी उठा उसकी जगह चादर बिछा दी और दरी अपने ऊपर तान ली । लेकिन इस युक्ति से भी सर्दी का मुकाबला नहीं किया जा सका। अब सर्दी का हमला ऊपर से हटकर नीचे से होने लगा था क्योंकि पतली चादर ठंडी हवा की घुसपैठ को रोकने में नाकाम थी ।
कालू की वापसी का ख्याल आते ही काली के अंदर सर्दी का एहसास और भी बढ़ गया । यह सोच उसकी चिंता कुछ कम हुई कि छिब्बू और उसके साथी शायद उसे यहाँ रहने से मना नहीं करेंगे क्योंकि वह अपने हिस्से का किराया दे ही रहा है। लेकिन काम का क्या बनेगा । रेढ़े पर चौथे आदमी की गुंजाइश नहीं है । इनके पास ठेला होता तो शायद दो आदमियों की अलग जोत बनाई जा सकती।
काली इन्हीं चिंताओं में खो गया कि उसे सर्दी के एहसास से मुक्ति मिल गई । वह छत पर टहलने लगा । उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था और रह-रहकर उसके मन में हौल उठ रहा था । उसे उम्मीद की एक छोटी-सी किरण नजर आती थी कि छिब्बू और उसके दोनों साथियों ने उसे स्वीकार कर लिया है और वे उसके बारे में अवश्य चिंतित होंगे। छिब्बू को तो इस बात का पूरा एहसास है। इसीलिए तो उसने कालू की वापसी की बात की थी ।
कमरे के बाहर छोटे-से आँगन में छिब्बू की आवाज सुन काली नीचे उतर आया ।
116 / नरककुंड में बास | "इतनी शेखी मत बघार । सवेरे सर्दी हो जाएगी और तू जुलाहे के जमाई की तरह ठिठुरकर मर जाएगा ।" छिब्बू हँसा । "ठंड लगी तो मैं नीचे आ जाऊँगा ।" सुबह की सर्दी उसे हड्डियों में अभी से महसूस होने लगी थी। वह दूर तक फैली हुई आबादियों को देखने लगा जो गलियों और सड़कों की मैली रोशनी में धूमिल- सी नजर आ रही थीं । रेलवे स्टेशन के इलाके में अधिक रोशनी थी और इंजनों की सीटी, मालगाड़ी के डिब्बों की शंटिंग की खटाखट और मुसाफिरों, कुलियों और ताँगों का शोर वातावरण पर छाया हुआ था । काली को रात बहुत भली और सुहानी प्रतीत हो रही थी और वह नथुने फुला-फुलाकर खुली हवा को फेफड़ों में समेट रहा था। वह शहर की जगमग करती और चमचमाती रात का गाँव की अँधेरी और सुनसान रात से मुकाबला करने लगा । उसने अंदाजा लगाया कि अगर वह गाँव में होता तो उसकी कम-से-कम एक चौथाई नींद पूरी हो चुकी होती । और यहाँ शहर में न केवल वह जाग रहा है बल्कि फिलहाल उसे जल्दी नींद आने की संभावना भी नहीं है । तड़के मौसम सर्द होते ही काली की आँख खुल गई । उसने चादर को अपने शरीर के चारों ओर अच्छी तरह लपेट लिया और उसके छोरों को पाँव, सिर और धड़ के नीचे पूरी तरह दबाया लेकिन सर्दी के विरुद्ध काली की यह किलेबंदी नाकाफी साबित हुई । उसने खाट से दरी उठा उसकी जगह चादर बिछा दी और दरी अपने ऊपर तान ली । लेकिन इस युक्ति से भी सर्दी का मुकाबला नहीं किया जा सका। अब सर्दी का हमला ऊपर से हटकर नीचे से होने लगा था क्योंकि पतली चादर ठंडी हवा की घुसपैठ को रोकने में नाकाम थी । कालू की वापसी का ख्याल आते ही काली के अंदर सर्दी का एहसास और भी बढ़ गया । यह सोच उसकी चिंता कुछ कम हुई कि छिब्बू और उसके साथी शायद उसे यहाँ रहने से मना नहीं करेंगे क्योंकि वह अपने हिस्से का किराया दे ही रहा है। लेकिन काम का क्या बनेगा । रेढ़े पर चौथे आदमी की गुंजाइश नहीं है । इनके पास ठेला होता तो शायद दो आदमियों की अलग जोत बनाई जा सकती। काली इन्हीं चिंताओं में खो गया कि उसे सर्दी के एहसास से मुक्ति मिल गई । वह छत पर टहलने लगा । उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था और रह-रहकर उसके मन में हौल उठ रहा था । उसे उम्मीद की एक छोटी-सी किरण नजर आती थी कि छिब्बू और उसके दोनों साथियों ने उसे स्वीकार कर लिया है और वे उसके बारे में अवश्य चिंतित होंगे। छिब्बू को तो इस बात का पूरा एहसास है। इसीलिए तो उसने कालू की वापसी की बात की थी । कमरे के बाहर छोटे-से आँगन में छिब्बू की आवाज सुन काली नीचे उतर आया । एक सौ सोलह / नरककुंड में बास |
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में संस्कृत टीचर फिरोज खान का मामला मंगलवार को ही शांत हुआ और अब एक दलित शिक्षक उपद्रवी छात्रों के निशाने पर आ गए. छात्रों ने दलित शिक्षक को मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान का समर्थक मानकर पीटा. दलित शिक्षक की पिटाई का वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ दिखा है कि आगे-आगे प्रोफेसर जान बचाकर भाग रहे हैं, और उपद्रवी छात्रों का हुजूम, अपशब्दों की बौछार और ईट पत्थर के साथ प्रोफेसर के पीछे पड़ा है. स्टाफ के ही एक शख्स की मदद से प्रोफेसर शांतिलाल सालवी ने जैसे तैसे जान बचाई और बिल्डिंग के अंदर पहुंच गए तब सांस आई. वीडियो देखें.
| बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में संस्कृत टीचर फिरोज खान का मामला मंगलवार को ही शांत हुआ और अब एक दलित शिक्षक उपद्रवी छात्रों के निशाने पर आ गए. छात्रों ने दलित शिक्षक को मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान का समर्थक मानकर पीटा. दलित शिक्षक की पिटाई का वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ दिखा है कि आगे-आगे प्रोफेसर जान बचाकर भाग रहे हैं, और उपद्रवी छात्रों का हुजूम, अपशब्दों की बौछार और ईट पत्थर के साथ प्रोफेसर के पीछे पड़ा है. स्टाफ के ही एक शख्स की मदद से प्रोफेसर शांतिलाल सालवी ने जैसे तैसे जान बचाई और बिल्डिंग के अंदर पहुंच गए तब सांस आई. वीडियो देखें. |
काशी के बाद अब एक और पौराणिक शहर में डबल डेकर क्रूज चलेगा. यह शहर भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या है, जहां श्रद्धालु सरयू भ्रमण के दौरान क्रूज में श्री राम के मानवीय जीवन पथ से जुड़े दृश्य भी देख सकेंगे. इसके साथ ही श्री राम के भजन भी सुनने का मौका मिलेगा.
जनवरी 2024 में रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के पहले अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को योगी सरकार का यह सबसे बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर रही है. अयोध्या में डबल डेकर क्रूज निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है.
इसके लिए गुप्तार घाट पर सरयू किनारे वर्कशाप बन रही है. केरल से क्रूज के पार्ट्स अयोध्या की इसी वर्कशॉप में पहुंचेंगे और फिर उनको असेंबल करके क्रूज का निर्माण होगा. यह क्रूज डबल डेकर होगा और इसकी लंबाई 26 मीटर और चौड़ाई 8. 3 मीटर होगी.
यह क्रूज ईंधन से चलने के बजाय सोलर पैनल से संचालित होगा. सोलर पैनल से एनर्जी स्टोर करने के लिए बैटरी का एक बड़ा पैनल भी इसमें लगा होगा. इसके प्रथम तल पर 72 से 100 लोगों के बैठने की जगह होगी. वहीं, ऊपर का तल पूरी तरह खाली होगा, जहां श्रद्धालु खड़े होकर सरयू बिहार का आनंद ले सकते हैं. इसके साथ ही ऊपर के तल पर कार्यक्रम का आयोजन भी होगा.
प्रोजेक्ट इंजीनियर जान मैथ्यू ने बताया कि क्रूज को बनाने के लिए रॉ मैटेरियल और मोल्ड सहित पूरा सामान केरल से लाना पड़ेगा. इसमें100 लोगों के बैठने की क्षमता होगी. क्रूज में बेडरूम के अलावा टॉयलेट की भी व्यवस्था होगी.
काम पूरा होने की एक्चुअल डेट अभी नहीं बता सकते है. मगर, हम इसी साल दीपोत्सव से पहले काम खत्म करने की पूरी कोशिश करेंगे. मुझे इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा होने पर गर्व भी है. हम उत्तर भारत में भी प्रोजेक्ट का विस्तार करेंगे.
डीएम अयोध्या नितीश कुमार ने बताया कि यह सौर ऊर्जा संचालित क्रूज होगा, जिसे ग्रीन एनर्जी कंपनी चलाएगी. दीपोत्सव से पहले इसे शुरू करने का टारगेट रखा है. श्रद्धालुओं के लिए भी नया घाट से गुप्तार घाट तक जाने के लिए एक सुगम मार्ग मिलेगा और वे घाटों को देख सकेंगे. इस प्रयास से टूरिज्म भी बढ़ेगा.
इस डबल डेकर क्रूज में कैंटीन समेत सारी सुख-सुविधाएं होगी. श्री राम के जीवन वृतांत को चलचित्रों के जरिए दिखाया जाएगा, तो भजन भी सुनाए जाएंगे. जनवरी 2024 में जब रामलला अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान हो, तब यहां आने वाले श्रद्धालु और गणमान्य व्यक्ति क्रूज से सरयू बिहार का आनंद ले सकेंगे.
| काशी के बाद अब एक और पौराणिक शहर में डबल डेकर क्रूज चलेगा. यह शहर भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या है, जहां श्रद्धालु सरयू भ्रमण के दौरान क्रूज में श्री राम के मानवीय जीवन पथ से जुड़े दृश्य भी देख सकेंगे. इसके साथ ही श्री राम के भजन भी सुनने का मौका मिलेगा. जनवरी दो हज़ार चौबीस में रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के पहले अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को योगी सरकार का यह सबसे बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर रही है. अयोध्या में डबल डेकर क्रूज निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके लिए गुप्तार घाट पर सरयू किनारे वर्कशाप बन रही है. केरल से क्रूज के पार्ट्स अयोध्या की इसी वर्कशॉप में पहुंचेंगे और फिर उनको असेंबल करके क्रूज का निर्माण होगा. यह क्रूज डबल डेकर होगा और इसकी लंबाई छब्बीस मीटर और चौड़ाई आठ. तीन मीटर होगी. यह क्रूज ईंधन से चलने के बजाय सोलर पैनल से संचालित होगा. सोलर पैनल से एनर्जी स्टोर करने के लिए बैटरी का एक बड़ा पैनल भी इसमें लगा होगा. इसके प्रथम तल पर बहत्तर से एक सौ लोगों के बैठने की जगह होगी. वहीं, ऊपर का तल पूरी तरह खाली होगा, जहां श्रद्धालु खड़े होकर सरयू बिहार का आनंद ले सकते हैं. इसके साथ ही ऊपर के तल पर कार्यक्रम का आयोजन भी होगा. प्रोजेक्ट इंजीनियर जान मैथ्यू ने बताया कि क्रूज को बनाने के लिए रॉ मैटेरियल और मोल्ड सहित पूरा सामान केरल से लाना पड़ेगा. इसमेंएक सौ लोगों के बैठने की क्षमता होगी. क्रूज में बेडरूम के अलावा टॉयलेट की भी व्यवस्था होगी. काम पूरा होने की एक्चुअल डेट अभी नहीं बता सकते है. मगर, हम इसी साल दीपोत्सव से पहले काम खत्म करने की पूरी कोशिश करेंगे. मुझे इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा होने पर गर्व भी है. हम उत्तर भारत में भी प्रोजेक्ट का विस्तार करेंगे. डीएम अयोध्या नितीश कुमार ने बताया कि यह सौर ऊर्जा संचालित क्रूज होगा, जिसे ग्रीन एनर्जी कंपनी चलाएगी. दीपोत्सव से पहले इसे शुरू करने का टारगेट रखा है. श्रद्धालुओं के लिए भी नया घाट से गुप्तार घाट तक जाने के लिए एक सुगम मार्ग मिलेगा और वे घाटों को देख सकेंगे. इस प्रयास से टूरिज्म भी बढ़ेगा. इस डबल डेकर क्रूज में कैंटीन समेत सारी सुख-सुविधाएं होगी. श्री राम के जीवन वृतांत को चलचित्रों के जरिए दिखाया जाएगा, तो भजन भी सुनाए जाएंगे. जनवरी दो हज़ार चौबीस में जब रामलला अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान हो, तब यहां आने वाले श्रद्धालु और गणमान्य व्यक्ति क्रूज से सरयू बिहार का आनंद ले सकेंगे. |
कास्त्रो बोलेः 'ईसाइयत की ओर लौटूंगा'
क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो का कहना है कि वे वेटिकन में पोप फ्रांसिस से मिलकर इतने प्रभावित हुए हैं कि दोबारा ईसाइयत की ओर लौट सकते हैं.
पोप की तारीफ़ करते हुए कास्त्रो ने कहा, "यदि पोप ऐसे ही रहे तो मैं प्रार्थना करना शुरू कर दूंगा और चर्च की ओर लौट आउंगा. "
उन्होंने अमरीका और क्यूबा के बीच वार्ता कराने के लिए पोप का शुक्रिया भी किया.
मॉस्को में रूस की दूसरे विश्व युद्ध में विजय की याद में मनाए गए समारोह से लौटते हुए वे वेटिकन में रुक गए थे.
क्यूबा में 1959 की क्रांति के बाद से कैथोलिक चर्च और क्यूबा के बीच संबंध बरक़रार हैं.
सितंबर में पोप फ़्रांसिस क्यूबा होते हुए ही अमरीका जाएंगे.
रोम में बीबीसी संवाददाता डेविड विली का कहना है कि अमरीका और क्यूबा के बीच वेटिकन में हुई गुप्त वार्ता के ज़रिए दोनों देशों के बीच संबंध बहाल कराना पोप के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है.
क्यूबा की क्रांति के बाद से ही अमरीका ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे.
पिछले साल से अमरीका ने इन प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू की है.
रविवार को पोप के साथ क़रीब पचास मिनट की निजी मुलाक़ात के बाद कास्त्रों ने पत्रकारों से कहा, "पोप ईसा के समुदाय से हैं. एक तरीके से मैं भी हूँ क्योंकि मैं भी ईसाई स्कूल में पढ़ा हूँ. "
राउल कास्त्रो और उनके भाई फिदेल कास्त्रो दोनों ही जन्म से ईसाई हैं लेकिन क्रांति के बाद से क्यूबा में चर्च की अधिकतर धार्मिक गतिविधियों को दबाया गया है.
फ़्रांसिस तीसरे पोप होंगे जो क्यूबा की यात्रा करेंगे. इससे पहले जोन पॉल द्वितीय 1998 में और पोप बेनेडिक्ट 2012 में क्यूबा की यात्रा कर चुके हैं.
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| कास्त्रो बोलेः 'ईसाइयत की ओर लौटूंगा' क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो का कहना है कि वे वेटिकन में पोप फ्रांसिस से मिलकर इतने प्रभावित हुए हैं कि दोबारा ईसाइयत की ओर लौट सकते हैं. पोप की तारीफ़ करते हुए कास्त्रो ने कहा, "यदि पोप ऐसे ही रहे तो मैं प्रार्थना करना शुरू कर दूंगा और चर्च की ओर लौट आउंगा. " उन्होंने अमरीका और क्यूबा के बीच वार्ता कराने के लिए पोप का शुक्रिया भी किया. मॉस्को में रूस की दूसरे विश्व युद्ध में विजय की याद में मनाए गए समारोह से लौटते हुए वे वेटिकन में रुक गए थे. क्यूबा में एक हज़ार नौ सौ उनसठ की क्रांति के बाद से कैथोलिक चर्च और क्यूबा के बीच संबंध बरक़रार हैं. सितंबर में पोप फ़्रांसिस क्यूबा होते हुए ही अमरीका जाएंगे. रोम में बीबीसी संवाददाता डेविड विली का कहना है कि अमरीका और क्यूबा के बीच वेटिकन में हुई गुप्त वार्ता के ज़रिए दोनों देशों के बीच संबंध बहाल कराना पोप के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है. क्यूबा की क्रांति के बाद से ही अमरीका ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. पिछले साल से अमरीका ने इन प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू की है. रविवार को पोप के साथ क़रीब पचास मिनट की निजी मुलाक़ात के बाद कास्त्रों ने पत्रकारों से कहा, "पोप ईसा के समुदाय से हैं. एक तरीके से मैं भी हूँ क्योंकि मैं भी ईसाई स्कूल में पढ़ा हूँ. " राउल कास्त्रो और उनके भाई फिदेल कास्त्रो दोनों ही जन्म से ईसाई हैं लेकिन क्रांति के बाद से क्यूबा में चर्च की अधिकतर धार्मिक गतिविधियों को दबाया गया है. फ़्रांसिस तीसरे पोप होंगे जो क्यूबा की यात्रा करेंगे. इससे पहले जोन पॉल द्वितीय एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में और पोप बेनेडिक्ट दो हज़ार बारह में क्यूबा की यात्रा कर चुके हैं. |
भोपाल : मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने को सिलसिला लगातार जारी है. मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बंगाल के आस-पास ऊपरी हवा का चक्रवात बन गया है. उसके प्रभाव से सोमवार से बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है.
इस बारें में मौसम विज्ञानी एसएन साहू ने बताया कि वर्तमान में उत्तर-पूर्वी मप्र से मराठवाड़ा तक एक द्रोणिका लाइन (ट्रफ) बनी हुई है. इससे अरब सागर से नमी आ रही है. इसके अलावा प्रदेश के विभिन्ना स्थानों पर रुक-रुक कर बौछारें पड़ने के वजह से वातावरण में भी काफी नमी आ गई है. इस वजह से तापमान बढ़ते ही शाम के समय बारिश होने लगती है. बंगाल के आस-पास एक ऊपरी हवा का चक्रवात बन गया है. इसके प्रभाव से सोमवार से प्रदेश में बरसात की गतिविधियों में तेजी आएगी. विशेषकर उत्तरी मप्र में कहीं-कहीं अच्छी बरसात की भी संभावना जताई जा रही है.
वहीं उज्जैन में मानसून की अच्छी आमद दर्ज की गई है. अब तक करीब सात इंच पानी गिर चूका है. वहीं नागदा क्षेत्र में अच्छी वर्षा से चंबल डैम जून में ही ओवरफ्लो हो गया है. इससे शनिवार रात चंबल नदी का पानी समीप तट पर स्थिति चामुंडा माता मंदिर परिसर में पहुंच गया. रविवार सुबह तक मंदिर परिसर और माता की मूर्ति जलमग्न हो गई थी. हालांकि कुछ देर बाद पानी उतरने भी लगा था. यहां के लोगों ने कहा कि इस साल चंबल ने जून में ही माता चामुंडा के चरण पखार दिए. अमूमन ऐसा दृश्य जुलाई-अगस्त में नजर आता है.
| भोपाल : मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने को सिलसिला लगातार जारी है. मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बंगाल के आस-पास ऊपरी हवा का चक्रवात बन गया है. उसके प्रभाव से सोमवार से बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है. इस बारें में मौसम विज्ञानी एसएन साहू ने बताया कि वर्तमान में उत्तर-पूर्वी मप्र से मराठवाड़ा तक एक द्रोणिका लाइन बनी हुई है. इससे अरब सागर से नमी आ रही है. इसके अलावा प्रदेश के विभिन्ना स्थानों पर रुक-रुक कर बौछारें पड़ने के वजह से वातावरण में भी काफी नमी आ गई है. इस वजह से तापमान बढ़ते ही शाम के समय बारिश होने लगती है. बंगाल के आस-पास एक ऊपरी हवा का चक्रवात बन गया है. इसके प्रभाव से सोमवार से प्रदेश में बरसात की गतिविधियों में तेजी आएगी. विशेषकर उत्तरी मप्र में कहीं-कहीं अच्छी बरसात की भी संभावना जताई जा रही है. वहीं उज्जैन में मानसून की अच्छी आमद दर्ज की गई है. अब तक करीब सात इंच पानी गिर चूका है. वहीं नागदा क्षेत्र में अच्छी वर्षा से चंबल डैम जून में ही ओवरफ्लो हो गया है. इससे शनिवार रात चंबल नदी का पानी समीप तट पर स्थिति चामुंडा माता मंदिर परिसर में पहुंच गया. रविवार सुबह तक मंदिर परिसर और माता की मूर्ति जलमग्न हो गई थी. हालांकि कुछ देर बाद पानी उतरने भी लगा था. यहां के लोगों ने कहा कि इस साल चंबल ने जून में ही माता चामुंडा के चरण पखार दिए. अमूमन ऐसा दृश्य जुलाई-अगस्त में नजर आता है. |
बात ), 'प्राच्य और पाश्चात्य ' आदि ग्रन्थों ने उनकी भविष्यवाणी को सत्य प्रमाणित कर दिया ।
पुत्र की विकासोन्मुख बुद्धि व प्रतिभा को भलीभाँति जानने के कारण विश्वनाथ ने नरेन्द्र की शिक्षा पद्धति में थोड़ा बहुत परिवर्तन कर दिया । किताबी विद्या के भार से पुत्र की प्रखर स्मृति शक्ति को क्लान्त न कर वे पुत्र को साथै "अनेकानेक विषयों पर तर्क किया करते थे और नरेन्द्र को स्वाधीन भाव से अपना मत प्रकट करने का अवसर देते थे। इधर नरेन्द्रनाथ भी पिता के ज्ञान की गम्भीरता से मुग्ध हो जाते। संसार में हमेशा से ही श्रद्धावान व्यक्ति वांछित वस्तु को प्राप्त करते हैं। विशालहृदय दयालु विश्वनाथ दूसरों के दुःखों को सहन करने में असमर्थ होकर अपनी धन-दौलत खुले हाथ से दान कर गये। साथ ही कष्ट से उपार्जित ज्ञानरूपी दौलत को हजार धाराओं से योग्य पुत्र को अर्पित कर वे कृतार्थ हुए थे । नरेन्द्रनाथ ने दो वर्ष तक पिता के पास रहकर केवल ज्ञानलाभ ही न किया, बल्कि उनके किशोर चरित्र पर पिता की महानता की गम्भीर छाप भी पड़ी । तेजस्विता, दूसरों को दुःखी देखकर विकल होना, विपत्ति में धैर्य को न छोड़ते हुए निर्विकार चित्त से अपना कर्तव्य करते जाना नरेन्द्र ने अपने पिता से ही सीखा था । शिक्षा के साथ ही नरेन्द्र ने पिता के चरित्र की विशिष्टताओं को भी अपना लिया था। विश्वनाथ मितव्ययी न थे, इसलिए वे धन बटोर न सकते थे । इस समय नरेन्द्र की जो उम्र थी उसमें भविष्य की बात उनके मन में उदित होना सम्भव नहीं था । सम्भव है, किसी आत्मीय या स्वजन के लिखने पर ही नरेन्द्र ने पिता से पूछा था, " पिताजी, आप हमारे लिए क्या छोड़ रहे हैं ?" इस प्रश्न को सुनते ही विश्वनाथ ने दीवार पर लटकते हुए आइने की ओर उंगली से इशारा करते हुए कहा, "जा, इस आइने में अपना चेहरा देख, तभी समझेगा कि मैंने तुझे क्या दिया है ।" बुद्धिमान किशोर चालक ने बात समझ ली-1 पुत्रों को शिक्षा देने के लिए, उनमें आत्मविश्वास
उत्पन्न करने के लिए विश्वनाथ कभी उन्हें बुरा नहीं कहते थे, कभी गाली न देते थे । उदाहरण के रूप में एक और घटना कही जा सकती है । एक दिन बालकोचित चंचलता के वशीभूत होकर नरेन्द्र ने अपनी माता के प्रति बुरे शब्दों का प्रयोग किया था । इसके लिए पुत्र को बुरी तरह धमकाने के बदले जिस कमरे में नरेन्द्र अपने सहपाठी तथा मित्रों के साथ वार्तालाप या लिखाई-पढ़ाई करते थे उस कमरे की दीवार पर विश्वनाथ ने कोयले से बड़े बड़े अक्षरों में लिख दिया, "नरेन्द्र बाबू ने आज अपनी माता के प्रति इन दुर्वचनों का प्रयोग किया है।" इससे नरेन्द्रनाथ को जो लज्जा तथा पश्चात्ताप हुआ था उसका उन्हें आजीवनं स्मरण रहा । हमने पहले ही कहा है कि दत्तभवन में अनेक दूर के रिश्तेदारों, आत्मीय अथवा अनात्मीय व्यक्तियों ने स्थायी रूप से डेरा डोल रखा था। इनमें ऐसे भी कई व्यक्ति थे जिनके नियमित नशा व्यसन
• का खर्च भी विश्वनाथ को ही देना पड़ता था । निकम्मों तथा नशाखोरों को इस तरह आश्रय देने के विरुद्ध पिता के निकट एक दिन नरेन्द्रनाथ ने शिकायत की थी। विश्वनाथ ने स्नेह के साथ पुत्र को गोद में लेकर गद्गद् कण्ठ से कहा, "जीवन में कितने दुःख हैं, तुम क्या समझोगे बेटा ! बड़े होकर देखोगे कि किस गम्भीर दुःख के पंजे से, जीवन की शून्यमय व्यर्थता की ग्लानि के पंजे से क्षणिक छुटकारे के लिए वे लोग नशा करते हैं। जब इस बात को * जानोगे तब तुम्हारी भी उन पर दया ही होगी।
इस तरह की शिक्षा द्वारा नरेन्द्र के हृदय में पिता के प्रति गम्भीर श्रद्धा उत्पन्न हुई थी। कभी कभी वे अपने मित्रों के पास पिता के गुणों का वर्णन कर गौरव अनुभव करते थे। 'मैं एक महान् व्यक्ति का पुत्र हूँ ' इस बात की घोषणा वे बड़े अभिमान के साथ करते थे और इसीलिए एक प्रबल आत्माभिमान उनके प्रत्येक वाक्य तथा आचरण में स्पष्ट हो उठता था । अगर कोई बालक समझकर उनकी लापरवाही करता तो वे क्रुद्ध हो जाते थे। उनके औद्धत्य तथा अहंकार में ईर्ष्या-द्वेष नहीं था - धनी दरिद्र, उच्च-नीच सभी श्रेणियों के
पड़ोसी उनके लिए एक सदृश प्रेम तथा सम्मान के पात्र थे। सच बोलना और सचाई का व्यवहार करना उनके जीवन का मूल मंत्र था । - वे निडर होकर लोगों के मुँह पर ही निष्कपट भाव से अप्रिय सत्य कह डालते थे। इसलिए कभी कभी दण्ड भी अवश्य पाते थे, परन्तु फिर भी सत्य को छिपा न सकते थे ।
किशोरावस्था में उनके प्रत्येक कार्य में उनकी शक्तिमत्ता तथा बुद्धि का परिचय मिलता था । यदि कोई उनकी युक्तिपूर्ण बातों को बालकोचित धृष्टता समझकर उनकी उपेक्षा करता तो नरेन्द्रनाथ क्रोध के मारे आपे से बाहर हो जाते थे, उस समय उन्हें छोटे-बड़े का भी ख्याल न रहता था । यहाँ तक कि, अवज्ञा करने पर बालक की कठोर समालोचना से उनके पिता के मित्रगण तक छुटकारा न पाते थे । समझदार तथा उम्र में बड़ों को अपमानित कर आत्मगौरव प्राप्त करने की नीचता तो उनमें न थी । गहरी चोट न पाते तक वे कभी आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अग्रसर न होते थे। उनके इस औद्धत्य के लिए विश्वनाथ उन्हें कभी क्षमा न करते थे, बल्कि उचित दण्ड दे उन्हें भविष्य के लिए सावधान कर देते थे । परन्तु साथ ही पुत्र की इस आत्मनिष्ठा को देखते हुए मन ही मन आनन्दित भी होते थे ।
थोड़े ही महीनों में नरेन्द्र को पूर्व स्वास्थ्य प्राप्त हो गया । सोलह वर्ष की उम्र में उनके दीर्घ और बलिष्ठ शरीर को देखकर कई लोग उनकी उम्र का अनुमान बीस वर्ष का लगाते थे । नियमित रूप से शरीर के अंगप्रत्यंगों की पुष्टि के लिए कुश्ती का वे बचपन से ही अभ्यास करते थे। उस समय के ' हिन्दू मेला' के प्रवर्तक नवगोपाल मित्र महाशय ने शिमला मुहल्ले में कार्नवालिस स्ट्रीट के ऊपर एक व्यायामशाला की स्थापना की थी । नरेन्द्रनाथ इस अखाड़े में नियमित रूप से व्यायाम करते थे । यौवन के प्रारम्भ में बाक्सिंग खेल में सर्वप्रथम होकर एक बार उन्हें चांदी की बनी हुई एक तितली इनाम में मिली थी। उस समय के छात्र समाज में क्रिकेट के उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में भी उन्होंने काफी नाम कमाया था । | बात ), 'प्राच्य और पाश्चात्य ' आदि ग्रन्थों ने उनकी भविष्यवाणी को सत्य प्रमाणित कर दिया । पुत्र की विकासोन्मुख बुद्धि व प्रतिभा को भलीभाँति जानने के कारण विश्वनाथ ने नरेन्द्र की शिक्षा पद्धति में थोड़ा बहुत परिवर्तन कर दिया । किताबी विद्या के भार से पुत्र की प्रखर स्मृति शक्ति को क्लान्त न कर वे पुत्र को साथै "अनेकानेक विषयों पर तर्क किया करते थे और नरेन्द्र को स्वाधीन भाव से अपना मत प्रकट करने का अवसर देते थे। इधर नरेन्द्रनाथ भी पिता के ज्ञान की गम्भीरता से मुग्ध हो जाते। संसार में हमेशा से ही श्रद्धावान व्यक्ति वांछित वस्तु को प्राप्त करते हैं। विशालहृदय दयालु विश्वनाथ दूसरों के दुःखों को सहन करने में असमर्थ होकर अपनी धन-दौलत खुले हाथ से दान कर गये। साथ ही कष्ट से उपार्जित ज्ञानरूपी दौलत को हजार धाराओं से योग्य पुत्र को अर्पित कर वे कृतार्थ हुए थे । नरेन्द्रनाथ ने दो वर्ष तक पिता के पास रहकर केवल ज्ञानलाभ ही न किया, बल्कि उनके किशोर चरित्र पर पिता की महानता की गम्भीर छाप भी पड़ी । तेजस्विता, दूसरों को दुःखी देखकर विकल होना, विपत्ति में धैर्य को न छोड़ते हुए निर्विकार चित्त से अपना कर्तव्य करते जाना नरेन्द्र ने अपने पिता से ही सीखा था । शिक्षा के साथ ही नरेन्द्र ने पिता के चरित्र की विशिष्टताओं को भी अपना लिया था। विश्वनाथ मितव्ययी न थे, इसलिए वे धन बटोर न सकते थे । इस समय नरेन्द्र की जो उम्र थी उसमें भविष्य की बात उनके मन में उदित होना सम्भव नहीं था । सम्भव है, किसी आत्मीय या स्वजन के लिखने पर ही नरेन्द्र ने पिता से पूछा था, " पिताजी, आप हमारे लिए क्या छोड़ रहे हैं ?" इस प्रश्न को सुनते ही विश्वनाथ ने दीवार पर लटकते हुए आइने की ओर उंगली से इशारा करते हुए कहा, "जा, इस आइने में अपना चेहरा देख, तभी समझेगा कि मैंने तुझे क्या दिया है ।" बुद्धिमान किशोर चालक ने बात समझ ली-एक पुत्रों को शिक्षा देने के लिए, उनमें आत्मविश्वास उत्पन्न करने के लिए विश्वनाथ कभी उन्हें बुरा नहीं कहते थे, कभी गाली न देते थे । उदाहरण के रूप में एक और घटना कही जा सकती है । एक दिन बालकोचित चंचलता के वशीभूत होकर नरेन्द्र ने अपनी माता के प्रति बुरे शब्दों का प्रयोग किया था । इसके लिए पुत्र को बुरी तरह धमकाने के बदले जिस कमरे में नरेन्द्र अपने सहपाठी तथा मित्रों के साथ वार्तालाप या लिखाई-पढ़ाई करते थे उस कमरे की दीवार पर विश्वनाथ ने कोयले से बड़े बड़े अक्षरों में लिख दिया, "नरेन्द्र बाबू ने आज अपनी माता के प्रति इन दुर्वचनों का प्रयोग किया है।" इससे नरेन्द्रनाथ को जो लज्जा तथा पश्चात्ताप हुआ था उसका उन्हें आजीवनं स्मरण रहा । हमने पहले ही कहा है कि दत्तभवन में अनेक दूर के रिश्तेदारों, आत्मीय अथवा अनात्मीय व्यक्तियों ने स्थायी रूप से डेरा डोल रखा था। इनमें ऐसे भी कई व्यक्ति थे जिनके नियमित नशा व्यसन • का खर्च भी विश्वनाथ को ही देना पड़ता था । निकम्मों तथा नशाखोरों को इस तरह आश्रय देने के विरुद्ध पिता के निकट एक दिन नरेन्द्रनाथ ने शिकायत की थी। विश्वनाथ ने स्नेह के साथ पुत्र को गोद में लेकर गद्गद् कण्ठ से कहा, "जीवन में कितने दुःख हैं, तुम क्या समझोगे बेटा ! बड़े होकर देखोगे कि किस गम्भीर दुःख के पंजे से, जीवन की शून्यमय व्यर्थता की ग्लानि के पंजे से क्षणिक छुटकारे के लिए वे लोग नशा करते हैं। जब इस बात को * जानोगे तब तुम्हारी भी उन पर दया ही होगी। इस तरह की शिक्षा द्वारा नरेन्द्र के हृदय में पिता के प्रति गम्भीर श्रद्धा उत्पन्न हुई थी। कभी कभी वे अपने मित्रों के पास पिता के गुणों का वर्णन कर गौरव अनुभव करते थे। 'मैं एक महान् व्यक्ति का पुत्र हूँ ' इस बात की घोषणा वे बड़े अभिमान के साथ करते थे और इसीलिए एक प्रबल आत्माभिमान उनके प्रत्येक वाक्य तथा आचरण में स्पष्ट हो उठता था । अगर कोई बालक समझकर उनकी लापरवाही करता तो वे क्रुद्ध हो जाते थे। उनके औद्धत्य तथा अहंकार में ईर्ष्या-द्वेष नहीं था - धनी दरिद्र, उच्च-नीच सभी श्रेणियों के पड़ोसी उनके लिए एक सदृश प्रेम तथा सम्मान के पात्र थे। सच बोलना और सचाई का व्यवहार करना उनके जीवन का मूल मंत्र था । - वे निडर होकर लोगों के मुँह पर ही निष्कपट भाव से अप्रिय सत्य कह डालते थे। इसलिए कभी कभी दण्ड भी अवश्य पाते थे, परन्तु फिर भी सत्य को छिपा न सकते थे । किशोरावस्था में उनके प्रत्येक कार्य में उनकी शक्तिमत्ता तथा बुद्धि का परिचय मिलता था । यदि कोई उनकी युक्तिपूर्ण बातों को बालकोचित धृष्टता समझकर उनकी उपेक्षा करता तो नरेन्द्रनाथ क्रोध के मारे आपे से बाहर हो जाते थे, उस समय उन्हें छोटे-बड़े का भी ख्याल न रहता था । यहाँ तक कि, अवज्ञा करने पर बालक की कठोर समालोचना से उनके पिता के मित्रगण तक छुटकारा न पाते थे । समझदार तथा उम्र में बड़ों को अपमानित कर आत्मगौरव प्राप्त करने की नीचता तो उनमें न थी । गहरी चोट न पाते तक वे कभी आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अग्रसर न होते थे। उनके इस औद्धत्य के लिए विश्वनाथ उन्हें कभी क्षमा न करते थे, बल्कि उचित दण्ड दे उन्हें भविष्य के लिए सावधान कर देते थे । परन्तु साथ ही पुत्र की इस आत्मनिष्ठा को देखते हुए मन ही मन आनन्दित भी होते थे । थोड़े ही महीनों में नरेन्द्र को पूर्व स्वास्थ्य प्राप्त हो गया । सोलह वर्ष की उम्र में उनके दीर्घ और बलिष्ठ शरीर को देखकर कई लोग उनकी उम्र का अनुमान बीस वर्ष का लगाते थे । नियमित रूप से शरीर के अंगप्रत्यंगों की पुष्टि के लिए कुश्ती का वे बचपन से ही अभ्यास करते थे। उस समय के ' हिन्दू मेला' के प्रवर्तक नवगोपाल मित्र महाशय ने शिमला मुहल्ले में कार्नवालिस स्ट्रीट के ऊपर एक व्यायामशाला की स्थापना की थी । नरेन्द्रनाथ इस अखाड़े में नियमित रूप से व्यायाम करते थे । यौवन के प्रारम्भ में बाक्सिंग खेल में सर्वप्रथम होकर एक बार उन्हें चांदी की बनी हुई एक तितली इनाम में मिली थी। उस समय के छात्र समाज में क्रिकेट के उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में भी उन्होंने काफी नाम कमाया था । |
धनबादः गिरिडीह जिले के धनवार थाने के एएसआई शंभू कुमार सिंह को एसीबी धनबाद की टीम ने गुरुवार को 3500 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया.धनवार थाना के निकट स्थित वी टू मॉल से एसीबी ने उसे दबोचा है. गिरफ्तार करने के बाद एसीबी की टीम उसे अपने साथ धनबाद ले गई है. यहां उससे पूछताछ की जाएगी.
बता दें कि धनवार थाना में दर्ज एक आपराधिक मामले में केस डायरी भेजने के लिए एएसई ने पांच हजार रुपये एवं देसी मुर्गा की मांग भतुआटांड़ निवासी छक्कन मियां से की थी. इस दौरान छक्कन मियां ने 15 सौ रुपये नगद एवं देसी मुर्गा दे भी चुका था. बाद में छक्कन ने इसकी लिखित शिकायत एसीबी धनबाद से की थी.
| धनबादः गिरिडीह जिले के धनवार थाने के एएसआई शंभू कुमार सिंह को एसीबी धनबाद की टीम ने गुरुवार को तीन हज़ार पाँच सौ रुपयापये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया.धनवार थाना के निकट स्थित वी टू मॉल से एसीबी ने उसे दबोचा है. गिरफ्तार करने के बाद एसीबी की टीम उसे अपने साथ धनबाद ले गई है. यहां उससे पूछताछ की जाएगी. बता दें कि धनवार थाना में दर्ज एक आपराधिक मामले में केस डायरी भेजने के लिए एएसई ने पांच हजार रुपये एवं देसी मुर्गा की मांग भतुआटांड़ निवासी छक्कन मियां से की थी. इस दौरान छक्कन मियां ने पंद्रह सौ रुपये नगद एवं देसी मुर्गा दे भी चुका था. बाद में छक्कन ने इसकी लिखित शिकायत एसीबी धनबाद से की थी. |
वोरोनिश के पास तैनात S-300ПММ-2 "पसंदीदा" एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम को Su-34 फ्रंट-लाइन बॉम्बर्स की मदद से चेक किया गया था। यह पश्चिमी सैन्य जिले की प्रेस सेवा द्वारा सूचित किया गया था।
Su-34 बमवर्षक के क्रू ने रेडियो सिस्टम और संचार के संचालन को अवरुद्ध करने के साथ हस्तक्षेप करते हुए गहराई से आधुनिक S-300ПМ-2 पसंदीदा वायु रक्षा प्रणाली के मोबाइल नियंत्रण प्रणाली का परीक्षण किया। बदले में, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम की गणना को रेडियो हस्तक्षेप की स्थितियों में लक्ष्यीकरण और ट्रैकिंग में प्रशिक्षित किया गया था। इसके अलावा, वायु रक्षा प्रणाली की सेटिंग्स और मित्र-या-दुश्मन पहचान प्रणाली के संचालन की जांच की गई। टेस्ट सफल माने गए।
इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशर्स की शर्तों में, फेवरिट ने कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया और दावा की गई विशेषताओं की पुष्टि की।
- एक बयान में कहा।
प्रेस सेवा ने कहा कि कॉम्प्लेक्स की टेस्टिंग तब तक जारी रहेगी, जब तक कि यह कॉम्बैट ड्यूटी में प्रवेश न कर जाए, जो इस साल दिसंबर 1 के लिए निर्धारित है।
इससे पहले यह बताया गया था कि लेनिनग्राद आर्मी एयरफोर्स और एयर डिफेंस की एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल रेजिमेंट ने S-300ПММ-2 फेवरिट एयर डिफेंस सिस्टम पर रीयरमेन्ट पूरा किया। वोरोनिश के पास स्थित, यह एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र, दो सैन्य हवाई क्षेत्र, दो नागरिक हवाई अड्डों और क्षेत्र के औद्योगिक उद्यमों को कवर करता है।
| वोरोनिश के पास तैनात S-तीन सौПММ-दो "पसंदीदा" एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम को Su-चौंतीस फ्रंट-लाइन बॉम्बर्स की मदद से चेक किया गया था। यह पश्चिमी सैन्य जिले की प्रेस सेवा द्वारा सूचित किया गया था। Su-चौंतीस बमवर्षक के क्रू ने रेडियो सिस्टम और संचार के संचालन को अवरुद्ध करने के साथ हस्तक्षेप करते हुए गहराई से आधुनिक S-तीन सौПМ-दो पसंदीदा वायु रक्षा प्रणाली के मोबाइल नियंत्रण प्रणाली का परीक्षण किया। बदले में, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम की गणना को रेडियो हस्तक्षेप की स्थितियों में लक्ष्यीकरण और ट्रैकिंग में प्रशिक्षित किया गया था। इसके अलावा, वायु रक्षा प्रणाली की सेटिंग्स और मित्र-या-दुश्मन पहचान प्रणाली के संचालन की जांच की गई। टेस्ट सफल माने गए। इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशर्स की शर्तों में, फेवरिट ने कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया और दावा की गई विशेषताओं की पुष्टि की। - एक बयान में कहा। प्रेस सेवा ने कहा कि कॉम्प्लेक्स की टेस्टिंग तब तक जारी रहेगी, जब तक कि यह कॉम्बैट ड्यूटी में प्रवेश न कर जाए, जो इस साल दिसंबर एक के लिए निर्धारित है। इससे पहले यह बताया गया था कि लेनिनग्राद आर्मी एयरफोर्स और एयर डिफेंस की एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल रेजिमेंट ने S-तीन सौПММ-दो फेवरिट एयर डिफेंस सिस्टम पर रीयरमेन्ट पूरा किया। वोरोनिश के पास स्थित, यह एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र, दो सैन्य हवाई क्षेत्र, दो नागरिक हवाई अड्डों और क्षेत्र के औद्योगिक उद्यमों को कवर करता है। |
सप्तविंशतिसंख्यातास्तत्पश्चान्मोहनाभिषात् । कूटात्सिद्धपदं प्राप्ता मुनयो दिव्यचक्षुषः ॥६६॥ कूटं चानन्दमाहात्म्यं मोहनाध्यं मनोहरम् । यात्रायां योऽभिवन्देत भवाब्धि स तरेद्ध वम् ॥ ७० ॥ प्रोषधव्रतकोटघ त फलं तद्वन्दनाल्लमेत् । सर्वकटाभिवन्दारो फलं वक्तुं न शक्यते ॥७१॥ पूर्व सुप्रभभूपालः कूटं तं प्रारणमन्मुवा । संक्षेपतः कथां तस्य वक्ष्ये शृणुत साधवः ॥७२॥ जम्बूनाम्नि शुभे द्वोपे भारते क्षेत्र उत्तमे । बंगदेशे प्रभाकर्या नगर्या सुप्रभोऽभवत् ॥७३॥
फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी के दिन एक हजार मुनियों के साथ प्रभु ने योग धारण कर मोक्ष प्राप्त किया। सायंकाल में सिद्धयोग से प्रभु ने मोक्ष प्राप्त किया व प्रखण्ड प्रानन्द सुधारस का भास्वाद लेने लगे। इस मोहन-कूट पर से नब्बे कोटि चौरासी लाख ब्यालीस हजार सात सौ सत्ताइस मुनिराजों ने दिव्य-चक्षुकेवलज्ञान प्राप्त की है। यह मोहनकूट अनन्त माहात्म्य से युक्त है । जो भी इस कूट की वंदना करता है, वह निश्चय से संसारसमुद्र से पार होता है। इस कूट की वंदना का फल एक कोटि प्रोषधोपवास के फल के बराबर कहा गया है, तब फिर सर्व कूटों की वन्दना करने वाले को प्राप्त होने वाले फल का वर्णन कौन कर सकता है ? अर्थात् कोई नहीं। पहले सुप्रभ राजा ने इस कूट की उल्लासपूर्वक वन्दना की थी - उसकी कथा संक्षेप में ऐसी है कि जम्बू नामक शुभ द्वीप में उत्तम भरत क्षेत्र है । उस क्षेत्र के बंग देश की प्रभाकर नामक नगरी में सुप्रभ नाम का राजा हुआ ।।६६-७३।
तस्य प्रिया सुषेणाल्या सुन्दरी शीलशालिनी । गुरगाढचा लक्षरणाढचा व सत्याख्या सम्बभूव सा ॥७४॥ एकदा सुप्रभो भूपः परिवारसमन्वितः । स्वेच्छया हर्षसंयुक्तः क्रीडायै गतवान्वनम् ॥ ७५॥ अपश्यच्चाररणमुनि त्रिःपरिक्रम्य तं ततः । प्राह भूपश्चारणद्धिः कुतः प्राप्ता तव प्रभो ॥७६॥ मुनिनोक्तं महीपाल सम्मेवाचलवन्दनात् । चाररणद्धिः मया प्राप्ता श्रुत्वाहं नृपतिः पुनः ॥७७॥ मुने सम्मेदयात्रायै मन्मनोऽस्ति समुत्सुकम् । मुनिस्तं प्राह भूमोश तब यात्रा भविष्यति ॥७८॥ तदा मुवा समागत्य गृहं यात्रोन्मुखोऽभवत् । संघसम्मानकृद्राजा कोट्य तमनुजैः सह ॥७६॥ गायकान्वादकांस्तद्वत् नतंक्यो नर्तकांस्तदा । सार्थकान्संविधायाथ दुन्दुभीश्चाभिनादयन् ।।८० ॥ उत्तुङ्गध्वज शोभाढ्यो महोत्सवसमन्वितः । सम्मेदयात्रामकरोत् दिनैः कतिपयैर्नृपः ॥८१॥ सम्प्राप्तं सर्वतः प्रेम कूटं तं मोहनाभिधम् । अभिवन्द्याष्टधा पूजां विस्तार्य विधिवत्तदा ॥८२॥
सुप्रभ राजा की पत्नी सुषेरगा थी । वह बहुत सुन्दर थी व सद्गुरणी स्त्रियों के सर्व लक्षरणों से युक्त थी। वह सत्यवादिनी थी। एक बार राजा सुप्रभ स्वच्छंदता से हर्षपूर्वक क्रीडा करने के लिए सपरिवार वन में गया। वहाँ पर उसने एक चारण मुनि को देखा। राजा ने उन्हें तीन प्रदक्षिणा देकर पूछास्वामिन् ! भापको यह चारण-ऋद्धि किस कारण से प्राप्त हुई
है, सो कहो। तब मुनिराज कहने लगे- राजन् ! मुझे यह सिद्धि सम्मेदगिरि की वंदना करने से प्राप्त हुई है। तब राजा कहने लगा - हे महाराज ! सम्मेदगिरि यात्रा करने के लिए मेरा मन उत्सुक हुआ है, मेरा संकल्प पूरा होगा या नहीं ? तब मुनिराज कहने लगे - राजन् ! तुम्हारी यात्रा अवश्य पूरी होगी । राजा यह सुनकर मानन्द से घर वापस प्राया और यात्रा करने के लिए तैयारी करने लगा। चतुर्विध संघ का सम्मान करके राजा कोटि मनुष्यों के संघ सहित यात्रा के लिए निकला । उसके साथ में गायक, वादक, नर्तक और नर्तकियाँ भी थीं । किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्त कराने में समर्थ, लोगों को यात्रोन्मुख करने के लिए दुन्दुभि बाजे बजवाकर सूचना दी । राजा ने उत्कृष्ट ध्वजाओंों की शोभा से सहित महोत्सव - पूर्वक कितने ही दिनों तक सम्मेदयात्रा की। मोहन नाम के कूट पर पहुँचकर उसने विधिपूर्वक अष्टविध पूजा विस्तार से की ॥७४-८२॥
विरक्तो रतिषेरगाय राज्यं दत्वा च तद्वने । मुनिव्रतं स जग्राह तत्रैव दृढभावभाकु ॥८३॥ चतुर्युक्ताशीतिलक्षः मुनिभिः स तपोबलात् । घातिनां घातनं कृत्वा निर्वारगमगमत्तदा ॥८४॥ एवं प्रभाव कूटोऽसौ मोहनाख्यः प्रवरिणतः । भव्याः प्रयत्नतो जोबा इष्ट्वा तं प्ररणमन्तु ये ॥६५॥
यो मोहनाभिधमिदं गिरिवर्यकूटम् । भावात्समोक्य परिपूज्य नमेच्च भक्त्या ।॥ स्व-स्वाभिलाषपरिलब्धिसुखान्वितोऽस्मात् । मुक्तो भवेत् कठिनसंसृतिपाशबन्धात् ॥८६॥
उसके बाद राजा विरक्त हुआ। सम्मेदगिरि विषयक दृढ़ भक्ति युक्त उस राजा ने रतिषेरण नामक अपने पुत्र को राज्य देकर इसी वन में दीक्षा लेकर मुनी हो गया। चौरासी लाख मुनियों के साथ तप करके, उसकी शक्ति से घाति-प्रघाति कर्मों को नष्ट कर उन्होंने मुक्ति प्राप्त की। इस प्रकार के प्रभाव से युक्त होने के कारण इस कूट का नाम मोहनकूट पड़ा । भव्य जीव इस कूट को प्ररणाम करते हैं। गिरिराज की मोहनकूट को जो भक्ति से देखकर पूजन-नमस्कार करता है, उसकी अभिलाषा की पूर्ति हो जाती है और वह इस संसार के बन्धनों से मुक्त हो जाता है ॥८३-८६॥
इति वीक्षितदेवदत्तकृते सम्मेदशिखरमाहात्म्ये मोहनकूटवर्णनंनाम षष्ठोऽध्यायः समाप्तः ।।
इस प्रकार दीक्षित देवदत्तकृत सम्मेदशिखर माहात्म्य ग्रन्थ में मोहनकूट का वर्णन करने वाला छठवां अध्याय समाप्त हुभ्रा ।
जिस प्रकार एक पंख से पक्षी नहीं उड़ सकता अथवा एक पहिये से रथ नहीं चल सकता, उसी प्रकार सम्यक् चरित्र बिना सम्यक् दर्शन तथा सम्यक् ज्ञान का रथ नहीं चल सकता।
अथ सप्तमोऽध्यायः
श्रीमत्प्रभासकूटे यो निःश्रेयसपदं गतः । तस्मै सुपार्श्वनाथाय देवदत्तनमस्कृतिः ॥ १॥ तत्प्रसादात्कथां तस्य चतुर्वर्गफलप्रदाम् । सङ् ग्रहेण प्रवक्ष्येहं भव्याः शृणुत सादरम् ॥२॥ प्रसिद्ध धातकीखण्डे पूर्वस्मिन् ह्लादिनी शुभा । सीता तदुत्तरे भागे कच्छवेशश्च धार्मिकः ॥ ३॥ तत्र क्षेमपुरं भास्वत्तस्य राजा सुपुण्यकृत् । नन्विषेरगोऽभवद् भूप शीर्वाचितपदद्वयः ॥४॥ नन्विषेरणा तस्य राज्ञी तथा सह मुमोद सः । महाप्रतापदहनज्वालादग्धारिमूरुहः
पुत्रानिव प्रजाः स्वीया ररक्ष सततं नृपः । परोपकारी सम्यक्त्व - संयुतः परमोदयः ॥ ६॥ भक्तः श्रीवीतरागस्य गुरगविक्रमसागरः । बुद्धिमान् साहसी वीरः सहितो बन्धुभिः स्वर्कः ॥ ७॥ राज्यं बुभोज धर्मेण धर्मतः पालयन्महीम् । पोषयन्नथिकेदारानखण्डवनवारिभिः
शोभायुक्त प्रथवा बाह्याभ्यंतर लक्ष्मी की उपलब्धि में कारणभूत प्रभास कूट पर जिन्होंने मोक्षपद प्राप्त किया है, उन सुपार्श्वनाथ भगवान को मैं देवदत्त कवि वंदना करता हूँ । श्री सुपार्श्वनाथ भगवंत के प्रसाद से धर्म, अर्थ, काम व मोक्षये चारों हो फलों को देने वाली मेरी इस कथा को, हे भव्यो ! मादरपूर्वक सुनो। प्रसिद्ध पूर्व-धातकी खण्ड में सीता
नामक नदी के उत्तर भाग में धार्मिक-वृत्ति का कच्छ देश है । उस देश में कान्तियुक्त क्षेमपुर नामक नगर है। वहाँ का राजा नंदिषेण उत्तम पुण्य कार्य करने वाला था । अन्य राजा मस्तक से जिसके पाद-युगल की वंदना करते हैं, तथा जिसने अपने प्रताप रूपी प्रग्नि की ज्वाला से शत्रु रूपी वृक्ष नष्ट कर दिये हैं, उस नदिषंण राजा की रानी का नाम नन्दिषेरणा था। राजा उसके साथ मानन्द से रहता हुआ प्रजा का पुत्रवत् पालन करता था। पुनः, वह राजा परोपकारी, सम्यग्दृष्टि और परम ऐश्वर्यशाली था तथा वह वीतराग जिनेश्वर का भक्त, पराक्रम व गुणों का सागर, बुद्धिमान, साहसी व वीर था। वह अपने बंधुनों के साथ प्रेम से रहता हुआ, धर्म-पूर्वक राज्य का उपभोग करता था। वह धर्म से पृथ्वी का, एवं प्रखण्ड धन का दान करने वाले हाथों से याचकरूपी खेतों का रक्षरण करता था ॥१-८॥
एकदा सौघगो भूपः सुखासीनो वियत्पथे । विचित्ररङ्गजोमूतान् दृष्ट्वा मोदमवाप सः ।।६।। दृष्टा एव विनष्टास्त एतदद्भुतमवेक्ष्य सः । बुद्ध्वाऽसारं हि संसारं विरक्तोऽभून्महीपतिः ॥१०॥ सुखेनात्मसुतायाथ राज्यं दत्वा तदैव हि । निर्वारगोधमसंयुक्तः तत्क्षरगं स वनं ययौ ॥११॥ तत्रार्हन्नन्दनमुनि नत्वा तन्निकटादसौ । दीक्षां जग्राह जैनेन्द्रीं दर्शकाङ्गधरो मुनिः ॥ १२॥ सम्भाव्य कारणान्युः षोडशोक्तानि धैर्यतः । तोमं बभूवायं परमं तप भाचरतु ॥१३॥ ॥,
अन्ते संन्यासरीत्या स प्रारणान् त्यक्त्वा सुखेन हि प्रवेयके सुभद्राख्ये विमाने चाहमिन्द्रताम् ॥ १४॥ सम्प्राप्य सप्तविंशत्या सागरस्यायुषा युतः । सार्षद्विहस्तकायोऽसौ बभूव तपसोज्ज्वलः ॥ १५॥
एक बार महल के भांगन में सुखासीन राजा ने प्राकाश मार्ग में विचित्र रंगों के मेघों को देखा। उन्हें देखकर वह प्रसन्न हुआ, किन्तु वे मेघ क्षरण में ही मष्ट हो गये । इस प्राश्चर्य को देखकर राजा ने यह जाना कि यह संसार कितना क्षणिक व असार है । वह विरक्त हो गया। उसने अपने पुत्र का राज्य देकर, मोक्ष प्राप्ति के लिए उद्यत होकर, मानन्द से वन की प्रोर प्रस्थान किया वहाँ उसने श्रर्हन्नन्द मुनि से दीक्षा ग्रहरण करली तथा प्राचाराङ्ग मादि मङ्गों का ज्ञान प्राप्त किया । उन्होंने धैर्यपूर्वक तप करके तथा सोलह भावनाओं को भाकर तीर्थंकर नामकर्म नामक महापुण्य प्रकृति का बध किया। उग्र तपश्चरण कर उन नन्दिषेण मुनि ने अंत में समाधि-मरण कर सुख से प्रारण त्याग किये तथा सुभद्र नामक गैवेयक विमान में महमिन्द्र हुए। वहाँ पर उनकी भ्रायु २७ सागरोपम वर्ष की थी, तथा उनका शरीर ढ़ाई हाथ ऊँचा था ॥६-१५॥
सप्तविंशतिसहस्रवर्षोपरि स मानसम् । माहारमग्रहोत्तद्वत् सप्तविंशतिपक्षकैः ॥१६॥
गर्तनिश्वासिकोच्छ्वासो तस्माच्च नरकावधिः । स्वेच्छा प्रमाणॠदयं किञ्चिन्न कुरुते स्म सः ।।१७॥ ध्यायन सिद्धान् सबा सिद्धबिम्बान् सम्पूजयन्नमन् । वण्मासकावशिष्टापुमेहासुलभुगप्यभूत्
वह महमिन्द्र देव २७ हजार वर्ष व्यतीत होने के बाद मानसाहार ग्रहण करता था भौर २७ पक्ष बाद उच्छ्वास लेता था। वह प्रवधिज्ञान से छठवें नरक तक के विषय को जानता था । अपनी इच्छा से कार्य करता हुआ वह किञ्चित् मात्र भी क्रोधादि कषाय-भाव नहीं करता था। इस प्रकार सिद्धों का ध्यान करते हुए तथा सिद्ध-बिम्बों की पूजा-वंदना करते हुए वह महासुखों का अनुभव करने वाला था। इस प्रकार उसकी छह माह कम, सत्ताइस सागरोपम श्रायु समाप्त हो गई ।।१६-१८।।
जम्बूनाम्नि तदा द्वोपे भरते चार्यखण्डके । काशी देशे सुनगरी वाराणस्याभिषा स्मृता ॥१६॥ स्वविभूत्या हसन्तीव भूमिगापि सुरालयम् । तस्यामिक्ष्याकुवंशे च गोत्रकाश्यप उत्तमे ॥२०॥ सुप्रतिष्ठोऽभवद्राजा तेजस्वी भव्यसागरः । तद्राज्ञी पृथिवोषेरणा सती सा धर्मशालिनी ।॥२१॥ तस्याश्शुभाङ्गणे श्रीमद्देवागमबुधन हि । प्राज्ञप्ती देवराजेन धनेशोऽम्बरमध्यगः ।।२२।।
मेघवद बहुदा रत्न-वृष्टि घाण्मासिकों तदा । प्रसन्नमनसा चक्रे यक्षवृन्यसमन्वितः ॥ २३ ॥ वैशाखशुक्लषष्ठ्यां स विशाखायां सुवेश्मनि । रात्रौ सुप्ता प्रभाते तान् स्वप्नान् षोडश चैत ।।२४।। स्वप्नान्ते स्वमुखाम्भोजे प्रविष्टं मत्तवारणम् । हृष्टा देवी प्रबुद्धेयं महाविस्मयमाययौ ॥२५॥ तदैव सान्तिकं भर्तुः गता भर्तानुमोबिता । तस्मै तानावितः स्वप्नान् भावयामास हर्षिता ॥ २६ ॥ | सप्तविंशतिसंख्यातास्तत्पश्चान्मोहनाभिषात् । कूटात्सिद्धपदं प्राप्ता मुनयो दिव्यचक्षुषः ॥छयासठ॥ कूटं चानन्दमाहात्म्यं मोहनाध्यं मनोहरम् । यात्रायां योऽभिवन्देत भवाब्धि स तरेद्ध वम् ॥ सत्तर ॥ प्रोषधव्रतकोटघ त फलं तद्वन्दनाल्लमेत् । सर्वकटाभिवन्दारो फलं वक्तुं न शक्यते ॥इकहत्तर॥ पूर्व सुप्रभभूपालः कूटं तं प्रारणमन्मुवा । संक्षेपतः कथां तस्य वक्ष्ये शृणुत साधवः ॥बहत्तर॥ जम्बूनाम्नि शुभे द्वोपे भारते क्षेत्र उत्तमे । बंगदेशे प्रभाकर्या नगर्या सुप्रभोऽभवत् ॥तिहत्तर॥ फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी के दिन एक हजार मुनियों के साथ प्रभु ने योग धारण कर मोक्ष प्राप्त किया। सायंकाल में सिद्धयोग से प्रभु ने मोक्ष प्राप्त किया व प्रखण्ड प्रानन्द सुधारस का भास्वाद लेने लगे। इस मोहन-कूट पर से नब्बे कोटि चौरासी लाख ब्यालीस हजार सात सौ सत्ताइस मुनिराजों ने दिव्य-चक्षुकेवलज्ञान प्राप्त की है। यह मोहनकूट अनन्त माहात्म्य से युक्त है । जो भी इस कूट की वंदना करता है, वह निश्चय से संसारसमुद्र से पार होता है। इस कूट की वंदना का फल एक कोटि प्रोषधोपवास के फल के बराबर कहा गया है, तब फिर सर्व कूटों की वन्दना करने वाले को प्राप्त होने वाले फल का वर्णन कौन कर सकता है ? अर्थात् कोई नहीं। पहले सुप्रभ राजा ने इस कूट की उल्लासपूर्वक वन्दना की थी - उसकी कथा संक्षेप में ऐसी है कि जम्बू नामक शुभ द्वीप में उत्तम भरत क्षेत्र है । उस क्षेत्र के बंग देश की प्रभाकर नामक नगरी में सुप्रभ नाम का राजा हुआ ।।छयासठ-तिहत्तर। तस्य प्रिया सुषेणाल्या सुन्दरी शीलशालिनी । गुरगाढचा लक्षरणाढचा व सत्याख्या सम्बभूव सा ॥चौहत्तर॥ एकदा सुप्रभो भूपः परिवारसमन्वितः । स्वेच्छया हर्षसंयुक्तः क्रीडायै गतवान्वनम् ॥ पचहत्तर॥ अपश्यच्चाररणमुनि त्रिःपरिक्रम्य तं ततः । प्राह भूपश्चारणद्धिः कुतः प्राप्ता तव प्रभो ॥छिहत्तर॥ मुनिनोक्तं महीपाल सम्मेवाचलवन्दनात् । चाररणद्धिः मया प्राप्ता श्रुत्वाहं नृपतिः पुनः ॥सतहत्तर॥ मुने सम्मेदयात्रायै मन्मनोऽस्ति समुत्सुकम् । मुनिस्तं प्राह भूमोश तब यात्रा भविष्यति ॥अठहत्तर॥ तदा मुवा समागत्य गृहं यात्रोन्मुखोऽभवत् । संघसम्मानकृद्राजा कोट्य तमनुजैः सह ॥छिहत्तर॥ गायकान्वादकांस्तद्वत् नतंक्यो नर्तकांस्तदा । सार्थकान्संविधायाथ दुन्दुभीश्चाभिनादयन् ।।अस्सी ॥ उत्तुङ्गध्वज शोभाढ्यो महोत्सवसमन्वितः । सम्मेदयात्रामकरोत् दिनैः कतिपयैर्नृपः ॥इक्यासी॥ सम्प्राप्तं सर्वतः प्रेम कूटं तं मोहनाभिधम् । अभिवन्द्याष्टधा पूजां विस्तार्य विधिवत्तदा ॥बयासी॥ सुप्रभ राजा की पत्नी सुषेरगा थी । वह बहुत सुन्दर थी व सद्गुरणी स्त्रियों के सर्व लक्षरणों से युक्त थी। वह सत्यवादिनी थी। एक बार राजा सुप्रभ स्वच्छंदता से हर्षपूर्वक क्रीडा करने के लिए सपरिवार वन में गया। वहाँ पर उसने एक चारण मुनि को देखा। राजा ने उन्हें तीन प्रदक्षिणा देकर पूछास्वामिन् ! भापको यह चारण-ऋद्धि किस कारण से प्राप्त हुई है, सो कहो। तब मुनिराज कहने लगे- राजन् ! मुझे यह सिद्धि सम्मेदगिरि की वंदना करने से प्राप्त हुई है। तब राजा कहने लगा - हे महाराज ! सम्मेदगिरि यात्रा करने के लिए मेरा मन उत्सुक हुआ है, मेरा संकल्प पूरा होगा या नहीं ? तब मुनिराज कहने लगे - राजन् ! तुम्हारी यात्रा अवश्य पूरी होगी । राजा यह सुनकर मानन्द से घर वापस प्राया और यात्रा करने के लिए तैयारी करने लगा। चतुर्विध संघ का सम्मान करके राजा कोटि मनुष्यों के संघ सहित यात्रा के लिए निकला । उसके साथ में गायक, वादक, नर्तक और नर्तकियाँ भी थीं । किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्त कराने में समर्थ, लोगों को यात्रोन्मुख करने के लिए दुन्दुभि बाजे बजवाकर सूचना दी । राजा ने उत्कृष्ट ध्वजाओंों की शोभा से सहित महोत्सव - पूर्वक कितने ही दिनों तक सम्मेदयात्रा की। मोहन नाम के कूट पर पहुँचकर उसने विधिपूर्वक अष्टविध पूजा विस्तार से की ॥चौहत्तर-बयासी॥ विरक्तो रतिषेरगाय राज्यं दत्वा च तद्वने । मुनिव्रतं स जग्राह तत्रैव दृढभावभाकु ॥तिरासी॥ चतुर्युक्ताशीतिलक्षः मुनिभिः स तपोबलात् । घातिनां घातनं कृत्वा निर्वारगमगमत्तदा ॥चौरासी॥ एवं प्रभाव कूटोऽसौ मोहनाख्यः प्रवरिणतः । भव्याः प्रयत्नतो जोबा इष्ट्वा तं प्ररणमन्तु ये ॥पैंसठ॥ यो मोहनाभिधमिदं गिरिवर्यकूटम् । भावात्समोक्य परिपूज्य नमेच्च भक्त्या ।॥ स्व-स्वाभिलाषपरिलब्धिसुखान्वितोऽस्मात् । मुक्तो भवेत् कठिनसंसृतिपाशबन्धात् ॥छियासी॥ उसके बाद राजा विरक्त हुआ। सम्मेदगिरि विषयक दृढ़ भक्ति युक्त उस राजा ने रतिषेरण नामक अपने पुत्र को राज्य देकर इसी वन में दीक्षा लेकर मुनी हो गया। चौरासी लाख मुनियों के साथ तप करके, उसकी शक्ति से घाति-प्रघाति कर्मों को नष्ट कर उन्होंने मुक्ति प्राप्त की। इस प्रकार के प्रभाव से युक्त होने के कारण इस कूट का नाम मोहनकूट पड़ा । भव्य जीव इस कूट को प्ररणाम करते हैं। गिरिराज की मोहनकूट को जो भक्ति से देखकर पूजन-नमस्कार करता है, उसकी अभिलाषा की पूर्ति हो जाती है और वह इस संसार के बन्धनों से मुक्त हो जाता है ॥तिरासी-छियासी॥ इति वीक्षितदेवदत्तकृते सम्मेदशिखरमाहात्म्ये मोहनकूटवर्णनंनाम षष्ठोऽध्यायः समाप्तः ।। इस प्रकार दीक्षित देवदत्तकृत सम्मेदशिखर माहात्म्य ग्रन्थ में मोहनकूट का वर्णन करने वाला छठवां अध्याय समाप्त हुभ्रा । जिस प्रकार एक पंख से पक्षी नहीं उड़ सकता अथवा एक पहिये से रथ नहीं चल सकता, उसी प्रकार सम्यक् चरित्र बिना सम्यक् दर्शन तथा सम्यक् ज्ञान का रथ नहीं चल सकता। अथ सप्तमोऽध्यायः श्रीमत्प्रभासकूटे यो निःश्रेयसपदं गतः । तस्मै सुपार्श्वनाथाय देवदत्तनमस्कृतिः ॥ एक॥ तत्प्रसादात्कथां तस्य चतुर्वर्गफलप्रदाम् । सङ् ग्रहेण प्रवक्ष्येहं भव्याः शृणुत सादरम् ॥दो॥ प्रसिद्ध धातकीखण्डे पूर्वस्मिन् ह्लादिनी शुभा । सीता तदुत्तरे भागे कच्छवेशश्च धार्मिकः ॥ तीन॥ तत्र क्षेमपुरं भास्वत्तस्य राजा सुपुण्यकृत् । नन्विषेरगोऽभवद् भूप शीर्वाचितपदद्वयः ॥चार॥ नन्विषेरणा तस्य राज्ञी तथा सह मुमोद सः । महाप्रतापदहनज्वालादग्धारिमूरुहः पुत्रानिव प्रजाः स्वीया ररक्ष सततं नृपः । परोपकारी सम्यक्त्व - संयुतः परमोदयः ॥ छः॥ भक्तः श्रीवीतरागस्य गुरगविक्रमसागरः । बुद्धिमान् साहसी वीरः सहितो बन्धुभिः स्वर्कः ॥ सात॥ राज्यं बुभोज धर्मेण धर्मतः पालयन्महीम् । पोषयन्नथिकेदारानखण्डवनवारिभिः शोभायुक्त प्रथवा बाह्याभ्यंतर लक्ष्मी की उपलब्धि में कारणभूत प्रभास कूट पर जिन्होंने मोक्षपद प्राप्त किया है, उन सुपार्श्वनाथ भगवान को मैं देवदत्त कवि वंदना करता हूँ । श्री सुपार्श्वनाथ भगवंत के प्रसाद से धर्म, अर्थ, काम व मोक्षये चारों हो फलों को देने वाली मेरी इस कथा को, हे भव्यो ! मादरपूर्वक सुनो। प्रसिद्ध पूर्व-धातकी खण्ड में सीता नामक नदी के उत्तर भाग में धार्मिक-वृत्ति का कच्छ देश है । उस देश में कान्तियुक्त क्षेमपुर नामक नगर है। वहाँ का राजा नंदिषेण उत्तम पुण्य कार्य करने वाला था । अन्य राजा मस्तक से जिसके पाद-युगल की वंदना करते हैं, तथा जिसने अपने प्रताप रूपी प्रग्नि की ज्वाला से शत्रु रूपी वृक्ष नष्ट कर दिये हैं, उस नदिषंण राजा की रानी का नाम नन्दिषेरणा था। राजा उसके साथ मानन्द से रहता हुआ प्रजा का पुत्रवत् पालन करता था। पुनः, वह राजा परोपकारी, सम्यग्दृष्टि और परम ऐश्वर्यशाली था तथा वह वीतराग जिनेश्वर का भक्त, पराक्रम व गुणों का सागर, बुद्धिमान, साहसी व वीर था। वह अपने बंधुनों के साथ प्रेम से रहता हुआ, धर्म-पूर्वक राज्य का उपभोग करता था। वह धर्म से पृथ्वी का, एवं प्रखण्ड धन का दान करने वाले हाथों से याचकरूपी खेतों का रक्षरण करता था ॥एक-आठ॥ एकदा सौघगो भूपः सुखासीनो वियत्पथे । विचित्ररङ्गजोमूतान् दृष्ट्वा मोदमवाप सः ।।छः।। दृष्टा एव विनष्टास्त एतदद्भुतमवेक्ष्य सः । बुद्ध्वाऽसारं हि संसारं विरक्तोऽभून्महीपतिः ॥दस॥ सुखेनात्मसुतायाथ राज्यं दत्वा तदैव हि । निर्वारगोधमसंयुक्तः तत्क्षरगं स वनं ययौ ॥ग्यारह॥ तत्रार्हन्नन्दनमुनि नत्वा तन्निकटादसौ । दीक्षां जग्राह जैनेन्द्रीं दर्शकाङ्गधरो मुनिः ॥ बारह॥ सम्भाव्य कारणान्युः षोडशोक्तानि धैर्यतः । तोमं बभूवायं परमं तप भाचरतु ॥तेरह॥ ॥, अन्ते संन्यासरीत्या स प्रारणान् त्यक्त्वा सुखेन हि प्रवेयके सुभद्राख्ये विमाने चाहमिन्द्रताम् ॥ चौदह॥ सम्प्राप्य सप्तविंशत्या सागरस्यायुषा युतः । सार्षद्विहस्तकायोऽसौ बभूव तपसोज्ज्वलः ॥ पंद्रह॥ एक बार महल के भांगन में सुखासीन राजा ने प्राकाश मार्ग में विचित्र रंगों के मेघों को देखा। उन्हें देखकर वह प्रसन्न हुआ, किन्तु वे मेघ क्षरण में ही मष्ट हो गये । इस प्राश्चर्य को देखकर राजा ने यह जाना कि यह संसार कितना क्षणिक व असार है । वह विरक्त हो गया। उसने अपने पुत्र का राज्य देकर, मोक्ष प्राप्ति के लिए उद्यत होकर, मानन्द से वन की प्रोर प्रस्थान किया वहाँ उसने श्रर्हन्नन्द मुनि से दीक्षा ग्रहरण करली तथा प्राचाराङ्ग मादि मङ्गों का ज्ञान प्राप्त किया । उन्होंने धैर्यपूर्वक तप करके तथा सोलह भावनाओं को भाकर तीर्थंकर नामकर्म नामक महापुण्य प्रकृति का बध किया। उग्र तपश्चरण कर उन नन्दिषेण मुनि ने अंत में समाधि-मरण कर सुख से प्रारण त्याग किये तथा सुभद्र नामक गैवेयक विमान में महमिन्द्र हुए। वहाँ पर उनकी भ्रायु सत्ताईस सागरोपम वर्ष की थी, तथा उनका शरीर ढ़ाई हाथ ऊँचा था ॥छः-पंद्रह॥ सप्तविंशतिसहस्रवर्षोपरि स मानसम् । माहारमग्रहोत्तद्वत् सप्तविंशतिपक्षकैः ॥सोलह॥ गर्तनिश्वासिकोच्छ्वासो तस्माच्च नरकावधिः । स्वेच्छा प्रमाणॠदयं किञ्चिन्न कुरुते स्म सः ।।सत्रह॥ ध्यायन सिद्धान् सबा सिद्धबिम्बान् सम्पूजयन्नमन् । वण्मासकावशिष्टापुमेहासुलभुगप्यभूत् वह महमिन्द्र देव सत्ताईस हजार वर्ष व्यतीत होने के बाद मानसाहार ग्रहण करता था भौर सत्ताईस पक्ष बाद उच्छ्वास लेता था। वह प्रवधिज्ञान से छठवें नरक तक के विषय को जानता था । अपनी इच्छा से कार्य करता हुआ वह किञ्चित् मात्र भी क्रोधादि कषाय-भाव नहीं करता था। इस प्रकार सिद्धों का ध्यान करते हुए तथा सिद्ध-बिम्बों की पूजा-वंदना करते हुए वह महासुखों का अनुभव करने वाला था। इस प्रकार उसकी छह माह कम, सत्ताइस सागरोपम श्रायु समाप्त हो गई ।।सोलह-अट्ठारह।। जम्बूनाम्नि तदा द्वोपे भरते चार्यखण्डके । काशी देशे सुनगरी वाराणस्याभिषा स्मृता ॥सोलह॥ स्वविभूत्या हसन्तीव भूमिगापि सुरालयम् । तस्यामिक्ष्याकुवंशे च गोत्रकाश्यप उत्तमे ॥बीस॥ सुप्रतिष्ठोऽभवद्राजा तेजस्वी भव्यसागरः । तद्राज्ञी पृथिवोषेरणा सती सा धर्मशालिनी ।॥इक्कीस॥ तस्याश्शुभाङ्गणे श्रीमद्देवागमबुधन हि । प्राज्ञप्ती देवराजेन धनेशोऽम्बरमध्यगः ।।बाईस।। मेघवद बहुदा रत्न-वृष्टि घाण्मासिकों तदा । प्रसन्नमनसा चक्रे यक्षवृन्यसमन्वितः ॥ तेईस ॥ वैशाखशुक्लषष्ठ्यां स विशाखायां सुवेश्मनि । रात्रौ सुप्ता प्रभाते तान् स्वप्नान् षोडश चैत ।।चौबीस।। स्वप्नान्ते स्वमुखाम्भोजे प्रविष्टं मत्तवारणम् । हृष्टा देवी प्रबुद्धेयं महाविस्मयमाययौ ॥पच्चीस॥ तदैव सान्तिकं भर्तुः गता भर्तानुमोबिता । तस्मै तानावितः स्वप्नान् भावयामास हर्षिता ॥ छब्बीस ॥ |
मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में प्रदेश पंचायत सचिव संघ के प्रांतीय आह्वान पर अंबागढ़ चौकी पंचायत सचिव संघ लगातार 14 दिनों से अपने एक सूत्रीय मांग, परिवीक्षा अवधि के बाद शासकीयकरण के लिए अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं।
इस अनिश्चित कालीन हड़ताल में सभी पंचायत सचिव एक साथ लामबंद होते हुए धरना स्थल पर डटे हुए हैं। सचिव संघ अपने एक सूत्रीय मांग को लेकर 16 मार्च से हड़ताल पर हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री की सद्बुद्धि के लिए बकायदा कोमल साहू ने मंत्रोपचार से हवन पूजन करवाया और सचिवों की मांगों का उचित निराकरण करने के लिए ईश्वर से मातहतों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।
| मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में प्रदेश पंचायत सचिव संघ के प्रांतीय आह्वान पर अंबागढ़ चौकी पंचायत सचिव संघ लगातार चौदह दिनों से अपने एक सूत्रीय मांग, परिवीक्षा अवधि के बाद शासकीयकरण के लिए अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। इस अनिश्चित कालीन हड़ताल में सभी पंचायत सचिव एक साथ लामबंद होते हुए धरना स्थल पर डटे हुए हैं। सचिव संघ अपने एक सूत्रीय मांग को लेकर सोलह मार्च से हड़ताल पर हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री की सद्बुद्धि के लिए बकायदा कोमल साहू ने मंत्रोपचार से हवन पूजन करवाया और सचिवों की मांगों का उचित निराकरण करने के लिए ईश्वर से मातहतों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। |
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 21 दिनों के लिए बंद कर दिया था। लॉकडाउन के बाद भी कोरोना का प्रकोप कम नहीं हुआ जिसके चलते लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। लॉकडाउन की वजह से लोगों और देश की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंच रही है। ऐसे में सरकार ने 20 अप्रैल से चुनिंदा आवश्यक गतिविधियों को अनुमति दी है। जिसके चलते 45% आर्थिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी और अर्थव्यवस्था को कुछ मदद मिलेगी।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देश 20 अप्रैल से कई सेक्टर्स में फिर से काम शुरू हो जाएगा जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था में 45% गतिविधियां शूर हो जाएंगी। 24 मार्च से 14 अप्रैल तक किए गए पहले लॉकडाउन के दौरान सिर्फ 25% आर्थिक गतिविधियां चालू थीं।
जिन क्षेत्रों में काम फिर से शुरू होगा, उनमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही लोगों की रोजमर्रा की जरूरत के सामान वाले क्षेत्रों में भी काम से अर्थव्यवस्था में सुधार बढ़ेगा। हालांकि 20 अप्रैल से कुछ ही क्षेत्रों में काम शुरू होगा ना कि सब क्षेत्रों में।
परिवहन और निर्माण कार्य से जुड़े काम इस दौरान रुके ही रहेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में काम शुरू होने को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे लॉकडाउन में खेती और इससे जुड़ी सेवाएं शुरू करने से 50 फीसदी लोगों को काम मिलेगा क्योंकि आधी आबादी कृषि पर निर्भर है।
इसके अलावा कोरोना से संक्रमित 170 जिलों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया है। इन जिलों में कोई आर्थिक गतिविधियां नहीं होंगी जो जीडीपी में 37 फीसदी से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक 20 अप्रैल से कृषि, लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढांचे, ई-कॉमर्स और शहरी सीमाओं के बाहर स्थित कारखानों सहित अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्सों का संचालन फिर से शुरू होगा। यानी ये वो इलाके होंगे जहां ग्रीन जोन घोषित किया गया है और संक्रमण फैलने का कोई खतरा नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक 20 अप्रैल से सरकार फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस सर्विस, मछलियों का खाना, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, कॉमर्शियल एक्वेरियम, मत्स्य उत्पाद, फिश सीड, चाय, कॉफी, रबर, काजू की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, दूध का कलेक्शन, प्रोसेसिंग, मक्का की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रिब्यूशन का काम शुरू करने की अनुमति दे सकती है। देश की कुल जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान 34. 64 फीसदी है।
| कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को इक्कीस दिनों के लिए बंद कर दिया था। लॉकडाउन के बाद भी कोरोना का प्रकोप कम नहीं हुआ जिसके चलते लॉकडाउन को तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। लॉकडाउन की वजह से लोगों और देश की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंच रही है। ऐसे में सरकार ने बीस अप्रैल से चुनिंदा आवश्यक गतिविधियों को अनुमति दी है। जिसके चलते पैंतालीस% आर्थिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी और अर्थव्यवस्था को कुछ मदद मिलेगी। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देश बीस अप्रैल से कई सेक्टर्स में फिर से काम शुरू हो जाएगा जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था में पैंतालीस% गतिविधियां शूर हो जाएंगी। चौबीस मार्च से चौदह अप्रैल तक किए गए पहले लॉकडाउन के दौरान सिर्फ पच्चीस% आर्थिक गतिविधियां चालू थीं। जिन क्षेत्रों में काम फिर से शुरू होगा, उनमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही लोगों की रोजमर्रा की जरूरत के सामान वाले क्षेत्रों में भी काम से अर्थव्यवस्था में सुधार बढ़ेगा। हालांकि बीस अप्रैल से कुछ ही क्षेत्रों में काम शुरू होगा ना कि सब क्षेत्रों में। परिवहन और निर्माण कार्य से जुड़े काम इस दौरान रुके ही रहेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में काम शुरू होने को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे लॉकडाउन में खेती और इससे जुड़ी सेवाएं शुरू करने से पचास फीसदी लोगों को काम मिलेगा क्योंकि आधी आबादी कृषि पर निर्भर है। इसके अलावा कोरोना से संक्रमित एक सौ सत्तर जिलों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया है। इन जिलों में कोई आर्थिक गतिविधियां नहीं होंगी जो जीडीपी में सैंतीस फीसदी से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक बीस अप्रैल से कृषि, लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढांचे, ई-कॉमर्स और शहरी सीमाओं के बाहर स्थित कारखानों सहित अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्सों का संचालन फिर से शुरू होगा। यानी ये वो इलाके होंगे जहां ग्रीन जोन घोषित किया गया है और संक्रमण फैलने का कोई खतरा नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक बीस अप्रैल से सरकार फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस सर्विस, मछलियों का खाना, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, कॉमर्शियल एक्वेरियम, मत्स्य उत्पाद, फिश सीड, चाय, कॉफी, रबर, काजू की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, दूध का कलेक्शन, प्रोसेसिंग, मक्का की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रिब्यूशन का काम शुरू करने की अनुमति दे सकती है। देश की कुल जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान चौंतीस. चौंसठ फीसदी है। |
संदर्भ (स.)
जहां तक डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 जैसे लोगों का प्रश्न है, आध्यात्मिक प्रेम का कोई अस्तित्व नहीं है। डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 प्रेम में अत्यधिक व्यग्र होते हैं। यदि डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 ने एकबार व्यक्त कर दिया, तो डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 अपने लगाव से विमुख नहीं होते हैं। यद्यपि, विरोधी की भूमिका में जो कोई भी हो, डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 उससे बलपूर्वक निपटते हैं।
स्वास्थ्य के मामले में डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 भाग्यवान हैं। डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 बेहतरीन शारीरिक-संरचना के स्वामी हैं। स्वास्थ्य सदैव डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 का साथ देगा । परंतु सर्दी जुकाम जैसी छोटी-छोटी परेशानियां कर सकती हैं । जैसे-जैसे आयु में वृद्धि होगी वैसे वैसे डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 अपने को हिस्ट -पुष्ट व ताकतवर समझेंगे । तनाव से बचें। बिना डॉक्टरी परामर्श दवाओं का डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 के ऊपर खासा खराब प्रभाव हो सकता है । डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 को दीर्घायु व उपयोगी जीवन की प्राप्ति होगी।
समय व्यतीत करने के ऊर्जावान तरीके डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 को आकर्षित करते हैं और वो डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 का सर्वाधिक भला भी करते हैं। तीव्र खेल जैसे फुटबाॅल और टेनिस इत्यादि डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 की ऊर्जा के उपयोग के लिये बेहतरीन खेल हैं और डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 इसके पूर्णतः अनुकूल हैं। डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 मध्य आयु में सैर करना पसन्द करेंगे, लेकिन डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 चार की जगह चैदह मील की सोचेंगे। अवकाश काल में डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 हाथ में समाचार पत्र लिये बैंच पर बैठकर सिर्फ भोजन की प्रतीक्षा नहीं कर सकते। सबसे दूरस्थ पहाडि़यां डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 को आकर्षित करती हैं और डोनाल्ड ब्रैडमैन -1 यह जानना चाहते हैं कि वे पास से कैसी दिखती हैं।
| संदर्भ जहां तक डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक जैसे लोगों का प्रश्न है, आध्यात्मिक प्रेम का कोई अस्तित्व नहीं है। डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक प्रेम में अत्यधिक व्यग्र होते हैं। यदि डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक ने एकबार व्यक्त कर दिया, तो डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक अपने लगाव से विमुख नहीं होते हैं। यद्यपि, विरोधी की भूमिका में जो कोई भी हो, डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक उससे बलपूर्वक निपटते हैं। स्वास्थ्य के मामले में डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक भाग्यवान हैं। डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक बेहतरीन शारीरिक-संरचना के स्वामी हैं। स्वास्थ्य सदैव डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक का साथ देगा । परंतु सर्दी जुकाम जैसी छोटी-छोटी परेशानियां कर सकती हैं । जैसे-जैसे आयु में वृद्धि होगी वैसे वैसे डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक अपने को हिस्ट -पुष्ट व ताकतवर समझेंगे । तनाव से बचें। बिना डॉक्टरी परामर्श दवाओं का डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक के ऊपर खासा खराब प्रभाव हो सकता है । डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक को दीर्घायु व उपयोगी जीवन की प्राप्ति होगी। समय व्यतीत करने के ऊर्जावान तरीके डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक को आकर्षित करते हैं और वो डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक का सर्वाधिक भला भी करते हैं। तीव्र खेल जैसे फुटबाॅल और टेनिस इत्यादि डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक की ऊर्जा के उपयोग के लिये बेहतरीन खेल हैं और डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक इसके पूर्णतः अनुकूल हैं। डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक मध्य आयु में सैर करना पसन्द करेंगे, लेकिन डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक चार की जगह चैदह मील की सोचेंगे। अवकाश काल में डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक हाथ में समाचार पत्र लिये बैंच पर बैठकर सिर्फ भोजन की प्रतीक्षा नहीं कर सकते। सबसे दूरस्थ पहाडि़यां डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक को आकर्षित करती हैं और डोनाल्ड ब्रैडमैन -एक यह जानना चाहते हैं कि वे पास से कैसी दिखती हैं। |
नरगिस. . एक ऐसी अदाकारा जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे मिटाया नहीं जा सकता. आज नरगिस की 93वीं जयंती है और इस खास मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ खास तथ्य बताने जा रहे हैं जो शायद आप नहीं जानते.
नरगिस दत्त का असली नाम फातिमा राशिद था. उन्होंने 1935 में फिल्म 'तलाश-ए-हक' से एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय की शुरुआत की. इसे उनकी मां जद्दनबाई ने प्रोड्यूस किया था. यह तब था जब फिल्म क्रेडिट में उनका नाम बेबी नरगिस रखा गया था और फिर ये हमेशा के लिए रह गया.
नरगिस केवल 28 वर्ष की थीं जब उन्होंने अकादमी-पुरस्कार नामांकित फिल्म 'मदर इंडिया' में राधा के रूप में शानदार प्रदर्शन किया. यह प्रतिष्ठित सम्मान के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी.
1958 में, उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता. कथित तौर पर, सुनील दत्त के साथ उनका रिश्ता तब शुरू हुआ जब उनकी 'मदर इंडिया' के सह-कलाकार ने उन्हें फिल्म के सेट पर एक आग दुर्घटना से बचाया.
नरगिस स्पास्टिक्स सोसाइटी ऑफ इंडिया की पहली संरक्षक थीं. उन्हें स्पास्टिक्स के बच्चों के लिए उनके काम और संगठन के लिए उनके सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए पहचान मिली.
नरगिस दत्त को राज कपूर फिल्म्स के प्रतीक चिन्ह में अमर कर दिया गया है. प्रतीक में राज कपूर और नरगिस दत्त की फिल्म 'बरसात' का प्रतिष्ठित दृश्य है, जहां अभिनेता एक हाथ में नरगिस और दूसरे में वायलिन पकड़े हुए दिखाई देते हैं. नरगिस दत्त ने अपने पति सुनील दत्त के साथ अजंता कला सांस्कृतिक मंडली का गठन किया, जिसमें उस समय के कई प्रमुख अभिनेता और गायक शामिल थे, जिन्होंने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्टेज शो किए.
नरगिस दत्त ने अपने पति सुनील दत्त के साथ अजंता कला सांस्कृतिक मंडली का गठन किया, जिसमें उस समय के कई प्रमुख अभिनेता और गायक शामिल थे, जिन्होंने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्टेज शो किए.
नरगिस को चैटिंग बहुत पसंद थी और वह एक इंसान थीं. एक रिपोर्ट में, उनकी बेटी नम्रता ने कहा कि जब नरगिस मालिश के लिए लेट जाएगी, तो फोन उनके पास लाया जाएगा. उन्होंने आगे खुलासा किया कि उनके पिता सुनील दत्त उनके निधन के बाद भी मजाक करेंगे कि अगर उनके पास मोबाइल फोन होता, तो वे टूट जाते.
सुनील दत्त से शादी के बाद, नरगिस ने अपने करियर के चरम पर अभिनय छोड़ दिया और एक गृहिणी और अपने तीन बच्चों के लिए एक प्यारी मां के रूप में अपनी नई भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया. सफेद साड़ियों को पसंद करने के कारण नरगिस को लेडी इन व्हाइट कहा जाता था.
अभिनेत्री को अग्नाशय के कैंसर का पता चला था और उन्होंने न्यूयॉर्क में इसका इलाज कराया था. जब वह भारत लौटीं, तो उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह कोमा में चली गईं. एक दिन बाद 3 मई 1981 को नरगिस का निधन हो गया. संजय दत्त की डेब्यू फिल्म 'रॉकी' की रिलीज से कुछ दिन पहले नरगिस का निधन हो गया. फिल्म के प्रीमियर पर नरगिस की एक सीट कथित तौर पर खाली रखी गई थी.
| नरगिस. . एक ऐसी अदाकारा जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे मिटाया नहीं जा सकता. आज नरगिस की तिरानवेवीं जयंती है और इस खास मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ खास तथ्य बताने जा रहे हैं जो शायद आप नहीं जानते. नरगिस दत्त का असली नाम फातिमा राशिद था. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में फिल्म 'तलाश-ए-हक' से एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय की शुरुआत की. इसे उनकी मां जद्दनबाई ने प्रोड्यूस किया था. यह तब था जब फिल्म क्रेडिट में उनका नाम बेबी नरगिस रखा गया था और फिर ये हमेशा के लिए रह गया. नरगिस केवल अट्ठाईस वर्ष की थीं जब उन्होंने अकादमी-पुरस्कार नामांकित फिल्म 'मदर इंडिया' में राधा के रूप में शानदार प्रदर्शन किया. यह प्रतिष्ठित सम्मान के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी. एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में, उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता. कथित तौर पर, सुनील दत्त के साथ उनका रिश्ता तब शुरू हुआ जब उनकी 'मदर इंडिया' के सह-कलाकार ने उन्हें फिल्म के सेट पर एक आग दुर्घटना से बचाया. नरगिस स्पास्टिक्स सोसाइटी ऑफ इंडिया की पहली संरक्षक थीं. उन्हें स्पास्टिक्स के बच्चों के लिए उनके काम और संगठन के लिए उनके सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए पहचान मिली. नरगिस दत्त को राज कपूर फिल्म्स के प्रतीक चिन्ह में अमर कर दिया गया है. प्रतीक में राज कपूर और नरगिस दत्त की फिल्म 'बरसात' का प्रतिष्ठित दृश्य है, जहां अभिनेता एक हाथ में नरगिस और दूसरे में वायलिन पकड़े हुए दिखाई देते हैं. नरगिस दत्त ने अपने पति सुनील दत्त के साथ अजंता कला सांस्कृतिक मंडली का गठन किया, जिसमें उस समय के कई प्रमुख अभिनेता और गायक शामिल थे, जिन्होंने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्टेज शो किए. नरगिस दत्त ने अपने पति सुनील दत्त के साथ अजंता कला सांस्कृतिक मंडली का गठन किया, जिसमें उस समय के कई प्रमुख अभिनेता और गायक शामिल थे, जिन्होंने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्टेज शो किए. नरगिस को चैटिंग बहुत पसंद थी और वह एक इंसान थीं. एक रिपोर्ट में, उनकी बेटी नम्रता ने कहा कि जब नरगिस मालिश के लिए लेट जाएगी, तो फोन उनके पास लाया जाएगा. उन्होंने आगे खुलासा किया कि उनके पिता सुनील दत्त उनके निधन के बाद भी मजाक करेंगे कि अगर उनके पास मोबाइल फोन होता, तो वे टूट जाते. सुनील दत्त से शादी के बाद, नरगिस ने अपने करियर के चरम पर अभिनय छोड़ दिया और एक गृहिणी और अपने तीन बच्चों के लिए एक प्यारी मां के रूप में अपनी नई भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया. सफेद साड़ियों को पसंद करने के कारण नरगिस को लेडी इन व्हाइट कहा जाता था. अभिनेत्री को अग्नाशय के कैंसर का पता चला था और उन्होंने न्यूयॉर्क में इसका इलाज कराया था. जब वह भारत लौटीं, तो उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह कोमा में चली गईं. एक दिन बाद तीन मई एक हज़ार नौ सौ इक्यासी को नरगिस का निधन हो गया. संजय दत्त की डेब्यू फिल्म 'रॉकी' की रिलीज से कुछ दिन पहले नरगिस का निधन हो गया. फिल्म के प्रीमियर पर नरगिस की एक सीट कथित तौर पर खाली रखी गई थी. |
नई दिल्ली॥ भारत की राजधानी दिल्ली में हिसा थमने का नाम नहीं ले रही है। कई क्षेत्रों में दंगाईयों ने जमकर उत्पात मचाया है। दिल्ली में हिन्सा का निरंतर चौथा दिन है। इस बीच जो बड़ी खबर आ रही है वो ये कि सीएम केजरीवाल ट्वीट के जरिए दिल्ली के हालातों पर काबू करने के लिए आर्मी मंगाने की बात कही है।
सीएम केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में हिंसक घटनाएं लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अब इन घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सेना बुलाई जाए। दिल्ली मुख्यमंत्री ने बुधवार सुबह दिल्ली में हिंसक घटनाओं को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा... मैं पूरी रात कई लोगों के साथ था, इस दौरान कई क्षेत्रों में भी गया जहां हालात बहुत खराब हैं।
पुलिस हालातों पर काबू करने में नाकाम हो रही है, ऐसे में आवश्यकता है कि दिल्ली में सेना बुलाई जाए। जिन क्षेत्रों में हालात बहुत खराब हैं वहां कर्फ्यू लगाया जाए। इस संबंध में मैं गृहमंत्रालय को एक लेटर भी लिख रहा हूं। इससे पहले सीएम केजरीवाल के आवास का दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने मंगलवार देर रात घेराव कर लिया। 30 छात्रों को सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया। दरअसल ये लोग दिल्ली हिन्सा में सख्त कार्रवाई और शांति बहाली की मांग कर रहे थे।
| नई दिल्ली॥ भारत की राजधानी दिल्ली में हिसा थमने का नाम नहीं ले रही है। कई क्षेत्रों में दंगाईयों ने जमकर उत्पात मचाया है। दिल्ली में हिन्सा का निरंतर चौथा दिन है। इस बीच जो बड़ी खबर आ रही है वो ये कि सीएम केजरीवाल ट्वीट के जरिए दिल्ली के हालातों पर काबू करने के लिए आर्मी मंगाने की बात कही है। सीएम केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में हिंसक घटनाएं लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अब इन घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सेना बुलाई जाए। दिल्ली मुख्यमंत्री ने बुधवार सुबह दिल्ली में हिंसक घटनाओं को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा... मैं पूरी रात कई लोगों के साथ था, इस दौरान कई क्षेत्रों में भी गया जहां हालात बहुत खराब हैं। पुलिस हालातों पर काबू करने में नाकाम हो रही है, ऐसे में आवश्यकता है कि दिल्ली में सेना बुलाई जाए। जिन क्षेत्रों में हालात बहुत खराब हैं वहां कर्फ्यू लगाया जाए। इस संबंध में मैं गृहमंत्रालय को एक लेटर भी लिख रहा हूं। इससे पहले सीएम केजरीवाल के आवास का दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने मंगलवार देर रात घेराव कर लिया। तीस छात्रों को सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया। दरअसल ये लोग दिल्ली हिन्सा में सख्त कार्रवाई और शांति बहाली की मांग कर रहे थे। |
बीसीसीआई (BCCI) ने हाल ही में पूर्व भारतीय (India Cricket Team) ऑलराउंडर अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) को प्रमुख चयनकर्ता के पद पर नियुक्त किया। अगरकर ने चेतन शर्मा (Chetan Sharma) की जगह ली, जिन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन में फंसने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था। चेतन शर्मा के बाद चार महीने तक यह पद खाली रहा, जिसके बाद अगरकर की नियुक्ति हुई।
अजीत अगरकर इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स के सपोर्ट स्टाफ से जुड़े हुए थे। अगरकर ने दिल्ली कैपिटल्स फ्रेंचाइजी में अपने पद से इस्तीफा दिया और चयनकर्ताओं के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली। अगरकर ने वेस्टइंडीज दौरे पर भारतीय टी20 टीम की घोषणा करके अपना पहला काम पूरा किया। इस दौरान भारतीय टीम ने नियमित कप्तान रोहित शर्मा और अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली को आराम दिया जबकि दो युवाओं यशस्वी जायसवाल व तिलक वर्मा को शामिल किया।
भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने अजीत अगरकर से रहने वाली उम्मीदें साझा की। चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'आप जो नतीजे देंगे, उसके लिए याद रखे जाएंगे। जैसे कि आपकी कोचिंग नतीजे के आधार पर जज होती है, उसी प्रकार जब आप चयनकर्ता का पद संभालेंगे तो आपकी टीम किस तरह प्रदर्शन कर रही है? क्या आप बदलाव को आराम से होने दे रहे हैं? क्या आप नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं? क्या आपने टीम को ट्रॉफी जीतने का सर्वश्रेष्ठ मौका दिया? यह सवाल अगरकर से पूछे जाएंगे। '
बता दें कि अगरकर पर बड़ी जिम्मेदारी टीम के आईसीसी खिताबी सूखा समाप्त करने की होगी। भारत ने 2013 के बाद से आईसीसी का कोई खिताब नहीं जीता है। इसके अलावा भारतीय टीम को रोहित शर्मा और विराट कोहली से आगे देखने की जरुरत पड़ेगी, अगरकर के लिए इन जगहों को भरना आसान नहीं होगा। उनके लिए ऐसे दिग्गजों की भरपाई करने की मुश्किल चुनौती रहने वाली है।
आकाश चोपड़ा ने इस दौरान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में रविचंद्रन अश्विन को बाहर बैठाए जाने से संबंधित बात भी कही। चोपड़ा ने कहा कि अगरकर के पास भारत की प्लेइंग 11 के बारे में सवाल करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रमुख चयनकर्ता के पास सवाल पूछने का अधिकार है कि रविचंद्रन अश्विन को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की प्लेइंग 11 से क्यों बाहर रखा गया था।
आकाश चोपड़ा ने कहा, 'अजीत अगरकर रोहित शर्मा से सवाल कर सकते हैं कि रविचंद्रन अश्विन को क्यों नहीं खिलाया था? इसके पीछे की सोच क्या थी? अगरकर प्लेइंग 11 का फैसला नहीं कर सकते हैं, लेकिन उनके पास सवाल करने का अधिकार है क्योंकि वो चयनकर्ताओं के चेयरमैन हैं। '
| बीसीसीआई ने हाल ही में पूर्व भारतीय ऑलराउंडर अजीत अगरकर को प्रमुख चयनकर्ता के पद पर नियुक्त किया। अगरकर ने चेतन शर्मा की जगह ली, जिन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन में फंसने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था। चेतन शर्मा के बाद चार महीने तक यह पद खाली रहा, जिसके बाद अगरकर की नियुक्ति हुई। अजीत अगरकर इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स के सपोर्ट स्टाफ से जुड़े हुए थे। अगरकर ने दिल्ली कैपिटल्स फ्रेंचाइजी में अपने पद से इस्तीफा दिया और चयनकर्ताओं के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली। अगरकर ने वेस्टइंडीज दौरे पर भारतीय टीबीस टीम की घोषणा करके अपना पहला काम पूरा किया। इस दौरान भारतीय टीम ने नियमित कप्तान रोहित शर्मा और अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली को आराम दिया जबकि दो युवाओं यशस्वी जायसवाल व तिलक वर्मा को शामिल किया। भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने अजीत अगरकर से रहने वाली उम्मीदें साझा की। चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'आप जो नतीजे देंगे, उसके लिए याद रखे जाएंगे। जैसे कि आपकी कोचिंग नतीजे के आधार पर जज होती है, उसी प्रकार जब आप चयनकर्ता का पद संभालेंगे तो आपकी टीम किस तरह प्रदर्शन कर रही है? क्या आप बदलाव को आराम से होने दे रहे हैं? क्या आप नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं? क्या आपने टीम को ट्रॉफी जीतने का सर्वश्रेष्ठ मौका दिया? यह सवाल अगरकर से पूछे जाएंगे। ' बता दें कि अगरकर पर बड़ी जिम्मेदारी टीम के आईसीसी खिताबी सूखा समाप्त करने की होगी। भारत ने दो हज़ार तेरह के बाद से आईसीसी का कोई खिताब नहीं जीता है। इसके अलावा भारतीय टीम को रोहित शर्मा और विराट कोहली से आगे देखने की जरुरत पड़ेगी, अगरकर के लिए इन जगहों को भरना आसान नहीं होगा। उनके लिए ऐसे दिग्गजों की भरपाई करने की मुश्किल चुनौती रहने वाली है। आकाश चोपड़ा ने इस दौरान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में रविचंद्रन अश्विन को बाहर बैठाए जाने से संबंधित बात भी कही। चोपड़ा ने कहा कि अगरकर के पास भारत की प्लेइंग ग्यारह के बारे में सवाल करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रमुख चयनकर्ता के पास सवाल पूछने का अधिकार है कि रविचंद्रन अश्विन को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की प्लेइंग ग्यारह से क्यों बाहर रखा गया था। आकाश चोपड़ा ने कहा, 'अजीत अगरकर रोहित शर्मा से सवाल कर सकते हैं कि रविचंद्रन अश्विन को क्यों नहीं खिलाया था? इसके पीछे की सोच क्या थी? अगरकर प्लेइंग ग्यारह का फैसला नहीं कर सकते हैं, लेकिन उनके पास सवाल करने का अधिकार है क्योंकि वो चयनकर्ताओं के चेयरमैन हैं। ' |
Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�..
अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान!
| Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल? कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�.. अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान! |
Ranchi: भगवान जगन्नाथ के भक्त इस साल भी निराश होंगे. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर राज्य सरकार ने इस साल भी रथयात्रा नहीं निकाले जाने का फैसला लिया है. मंदिर समिति को इसी सूचना दे दी गई है. मालूम हो कि आज भगवान जगन्नथ नेत्रदान अनुष्ठान होगा, इसमें भी भक्तों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है. मालूम हो कि कोविड की वजह से पिछले साल भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा नहीं निकली थी.
मालूम हो कि जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति धुर्वा के कार्यकारी अध्यक्ष रामकुमार कटारिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका देकर रथयात्रा निकालने की अनुमति मांगी थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि मौजूदा स्थिति में राज्य सरकार खुद निर्णय लें. साथ ही कहा था कि यदि सरकार रथयात्रा निकालने की अनुमति देती है तो सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा.
मंदिर समिति के अनुसार रथयात्रा की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब पिछले साल की ही तरह कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए विधि-विधान अपनाया जाएगा. 12 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा मौसीबाड़ी नहीं जाएगी. भगवान को मंदिर के बाहर लाकर विराजमान किया जाएगा. पूजा-अर्चना के बाद 108 बार आरती होगी. फूल-प्रसाद वितरण के बाद भगवान को फिर मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा. हालांकि, आज मंदिर समिति की बैठक है, जिसमें इन बातों के साथ ही अन्य मामलों पर चर्चा होगी.
| Ranchi: भगवान जगन्नाथ के भक्त इस साल भी निराश होंगे. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर राज्य सरकार ने इस साल भी रथयात्रा नहीं निकाले जाने का फैसला लिया है. मंदिर समिति को इसी सूचना दे दी गई है. मालूम हो कि आज भगवान जगन्नथ नेत्रदान अनुष्ठान होगा, इसमें भी भक्तों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है. मालूम हो कि कोविड की वजह से पिछले साल भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा नहीं निकली थी. मालूम हो कि जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति धुर्वा के कार्यकारी अध्यक्ष रामकुमार कटारिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका देकर रथयात्रा निकालने की अनुमति मांगी थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि मौजूदा स्थिति में राज्य सरकार खुद निर्णय लें. साथ ही कहा था कि यदि सरकार रथयात्रा निकालने की अनुमति देती है तो सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा. मंदिर समिति के अनुसार रथयात्रा की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब पिछले साल की ही तरह कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए विधि-विधान अपनाया जाएगा. बारह जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा मौसीबाड़ी नहीं जाएगी. भगवान को मंदिर के बाहर लाकर विराजमान किया जाएगा. पूजा-अर्चना के बाद एक सौ आठ बार आरती होगी. फूल-प्रसाद वितरण के बाद भगवान को फिर मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा. हालांकि, आज मंदिर समिति की बैठक है, जिसमें इन बातों के साथ ही अन्य मामलों पर चर्चा होगी. |
ऊना - नौ नवंबर को होने जा रहे प्रदेश विधानसभा चुनाव-2017 को लेकर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए स्वीप कार्यक्रम के अंतर्गत ऊना में उपमंडल स्तरीय मतदाता जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली में स्कूलों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सिलाई अध्यापिकाओं, नेहरू युवा केंद्र, युवक व महिला मंडलों तथा स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने भाग लिया। उपायुक्त ऊना विकास लाबरू ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जबकि एसडीएम ऊना पृथीपाल सिंह, एनवाईके से राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवी रूपिंद्र सिंह व अंजु भी मौजूद थे। जागरूकता रैली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल ऊना के परिसर से लेकर बाजार होते हुए नगर परिषद पार्क तक गई। रैली में प्रतिभागियों ने लोगों से 90 प्रतिशत मतदान करवाना है ऊना को शिखर पर लाना है। छोड़ों अपने सारे काम चलो करें मतदान आदि नारों द्वारा अधिक से अधिक संख्या में लोगों से मतदान केंद्र में पहुंच कर अपना वोट जरूर डालने का आह्वान किया गया। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ऊना विकास लाबरू ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जिला का प्रत्येक मतदाता अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने कहा कि 2012 विधानसभा चुनाव में जिला की मत प्रतिशतता 73. 74 प्रतिशत रही है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी लगभग 78 तथा पुरुषों की भागीदारी 69 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में जिला में 90 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसकी पूर्ति के लिए जिला के सभी मतदाताओं से अपने संवैधानिक अधिकार का जरूर इस्तेमाल करने का आग्रह किया। जिला में महिलाएं बड़ी संख्या में वोट डालने आगे आती रही हैं तथा इस बार भी महिला मतदाता जिला में रिकॉर्ड मतदान कर पूरे प्रदेश में एक उदाहरण प्रस्तुत करेंगी। साथ कहा कि पुरुष मतदाता भी पीछे न रहे। उन्होंने कहा कि मतदान की तमाम प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष व गोपनीय रहती हैं।
शिक्षा एचआर गुलेरिया, बीडीओ ऊना अश्मिता ठाकुर, एपीआरओ राजेश जसवाल, ऊना स्वीप टीम के सदस्य केएल शर्मा, आनंद शर्मा, पंचायत निरीक्षक रविदत्त, आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाएं, अंजु, शकुंतला, पूजा, राजन, राहुल, धीरज, सौरभ सहित अन्य उपस्थित थे।
| ऊना - नौ नवंबर को होने जा रहे प्रदेश विधानसभा चुनाव-दो हज़ार सत्रह को लेकर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए स्वीप कार्यक्रम के अंतर्गत ऊना में उपमंडल स्तरीय मतदाता जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली में स्कूलों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सिलाई अध्यापिकाओं, नेहरू युवा केंद्र, युवक व महिला मंडलों तथा स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने भाग लिया। उपायुक्त ऊना विकास लाबरू ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जबकि एसडीएम ऊना पृथीपाल सिंह, एनवाईके से राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवी रूपिंद्र सिंह व अंजु भी मौजूद थे। जागरूकता रैली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल ऊना के परिसर से लेकर बाजार होते हुए नगर परिषद पार्क तक गई। रैली में प्रतिभागियों ने लोगों से नब्बे प्रतिशत मतदान करवाना है ऊना को शिखर पर लाना है। छोड़ों अपने सारे काम चलो करें मतदान आदि नारों द्वारा अधिक से अधिक संख्या में लोगों से मतदान केंद्र में पहुंच कर अपना वोट जरूर डालने का आह्वान किया गया। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ऊना विकास लाबरू ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जिला का प्रत्येक मतदाता अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने कहा कि दो हज़ार बारह विधानसभा चुनाव में जिला की मत प्रतिशतता तिहत्तर. चौहत्तर प्रतिशत रही है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी लगभग अठहत्तर तथा पुरुषों की भागीदारी उनहत्तर प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में जिला में नब्बे प्रतिशत मतदान का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसकी पूर्ति के लिए जिला के सभी मतदाताओं से अपने संवैधानिक अधिकार का जरूर इस्तेमाल करने का आग्रह किया। जिला में महिलाएं बड़ी संख्या में वोट डालने आगे आती रही हैं तथा इस बार भी महिला मतदाता जिला में रिकॉर्ड मतदान कर पूरे प्रदेश में एक उदाहरण प्रस्तुत करेंगी। साथ कहा कि पुरुष मतदाता भी पीछे न रहे। उन्होंने कहा कि मतदान की तमाम प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष व गोपनीय रहती हैं। शिक्षा एचआर गुलेरिया, बीडीओ ऊना अश्मिता ठाकुर, एपीआरओ राजेश जसवाल, ऊना स्वीप टीम के सदस्य केएल शर्मा, आनंद शर्मा, पंचायत निरीक्षक रविदत्त, आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाएं, अंजु, शकुंतला, पूजा, राजन, राहुल, धीरज, सौरभ सहित अन्य उपस्थित थे। |
तीन वनडे मैचों की सीरीज की आखिरी मैच में एक नया रिकॉर्ड बना। दक्षिण अफ्रीका की ओर एक ही पारी में दो शतक बने। डेविड मिलर व फाफ डु प्लेसिस के शतकों व दोनों के बीच 252 रन की भागीदारी से दक्षिण अफ्रीका ने पांच विकेट पर 320 रन बनाए। यह जोड़ी 16वें ओवर में तब मैदान में उतरी जब टीम का स्कोर तीन विकेट पर 55 रन हो गया था। मिलर ने 139 रन की पारी खेलकर वनडे में पांचवां शतक जड़ा जबकि डु प्लेसिस का यह 10वां सैकड़ा था, उन्होंने 125 रन बनाए।
दोनों खिलाड़ियों ने पारी के दौरान मिले जीवनदान का पूरा लाभ उठाया। डु प्लेसिस ने 11 चौके व एक छक्के की मदद से 105 गेंद में अपना शतक बनाया। वहीं मिलर ने 95 गेंद में आठ चौके व दो छक्के से 100 रन पूरे किए। डु प्लेसिस जब 29 रन पर थे, उनका कैच छूट गया था जबकि मिलर जब 41 रन पर थे तब पगबाधा का निर्णय रिव्यू में बदल दिया गया।
इससे पहले अब तक 13 जोड़ियां ऑस्ट्रेलिया वनडे में शतक लगा चुकी हैं। इनमें कार्ल हूपर-ब्रायन लारा, माइकल बेवन-स्टीव वॉ, गिलक्रिस्ट-रिकी पोंटिंग, जसूर्या-अट्टापट्टू, वीवीएस लक्षमण-युवराज सिंह, हेडन-पोंटिंग, वार्नर-क्लार्क, स्टीव स्मिथ-जार्ज बेली, शिखर धवन-विराट कोहली, डेविड वार्नर-हेड, डु प्लेसिस-मिलर शामिल हैं।
ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों में मिशेल स्टार्क की गेंदबाजी अच्छी रही जिन्होंने 57 रन देकर दो विकेट चटकाए। अभी दोनों टीमें सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं। दक्षिण अफ्रीका ने शुरूआती वनडे छह विकेट से जीता था जबकि ऑस्ट्रेलिया ने सात मैच में पराजय की लय को तोड़ते हुए दूसरा वनडे सात रन से अपने नाम किया था।
दक्षिण अफ्रीका की टीम 2009 के बाद से ऑस्ट्रेलिया में पहली वनडे सीरीज अपने नाम करने की प्रयास में जुटी है जबकि घरेलू टीम हिंदुस्तान के पूर्ण दौरे पर आने से पहले लय हासिल करने का कोशिश कर रही है।
| तीन वनडे मैचों की सीरीज की आखिरी मैच में एक नया रिकॉर्ड बना। दक्षिण अफ्रीका की ओर एक ही पारी में दो शतक बने। डेविड मिलर व फाफ डु प्लेसिस के शतकों व दोनों के बीच दो सौ बावन रन की भागीदारी से दक्षिण अफ्रीका ने पांच विकेट पर तीन सौ बीस रन बनाए। यह जोड़ी सोलहवें ओवर में तब मैदान में उतरी जब टीम का स्कोर तीन विकेट पर पचपन रन हो गया था। मिलर ने एक सौ उनतालीस रन की पारी खेलकर वनडे में पांचवां शतक जड़ा जबकि डु प्लेसिस का यह दसवां सैकड़ा था, उन्होंने एक सौ पच्चीस रन बनाए। दोनों खिलाड़ियों ने पारी के दौरान मिले जीवनदान का पूरा लाभ उठाया। डु प्लेसिस ने ग्यारह चौके व एक छक्के की मदद से एक सौ पाँच गेंद में अपना शतक बनाया। वहीं मिलर ने पचानवे गेंद में आठ चौके व दो छक्के से एक सौ रन पूरे किए। डु प्लेसिस जब उनतीस रन पर थे, उनका कैच छूट गया था जबकि मिलर जब इकतालीस रन पर थे तब पगबाधा का निर्णय रिव्यू में बदल दिया गया। इससे पहले अब तक तेरह जोड़ियां ऑस्ट्रेलिया वनडे में शतक लगा चुकी हैं। इनमें कार्ल हूपर-ब्रायन लारा, माइकल बेवन-स्टीव वॉ, गिलक्रिस्ट-रिकी पोंटिंग, जसूर्या-अट्टापट्टू, वीवीएस लक्षमण-युवराज सिंह, हेडन-पोंटिंग, वार्नर-क्लार्क, स्टीव स्मिथ-जार्ज बेली, शिखर धवन-विराट कोहली, डेविड वार्नर-हेड, डु प्लेसिस-मिलर शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों में मिशेल स्टार्क की गेंदबाजी अच्छी रही जिन्होंने सत्तावन रन देकर दो विकेट चटकाए। अभी दोनों टीमें सीरीज में एक-एक की बराबरी पर हैं। दक्षिण अफ्रीका ने शुरूआती वनडे छह विकेट से जीता था जबकि ऑस्ट्रेलिया ने सात मैच में पराजय की लय को तोड़ते हुए दूसरा वनडे सात रन से अपने नाम किया था। दक्षिण अफ्रीका की टीम दो हज़ार नौ के बाद से ऑस्ट्रेलिया में पहली वनडे सीरीज अपने नाम करने की प्रयास में जुटी है जबकि घरेलू टीम हिंदुस्तान के पूर्ण दौरे पर आने से पहले लय हासिल करने का कोशिश कर रही है। |
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि नवचयनित हरियाणा सिविल सेवा-2020 के अधिकारी जनहित को सामने रखकर काम करें। उन्होंने इन अधिकारियों को तीन आई अर्थात इंटीग्रिटी, इन्वोल्वमेंट तथा इन्नोवेशन का मंत्र देते हुए कहा कि उनकी भर्ती 'बिना पर्ची, बिना खर्ची' से हुई है इसलिए उनसे शुद्धता की अपेक्षा की जाती है।
वे सोमवार को गुरूग्राम के हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) में हरियाणा सिविल सेवा 2020 के चयनित अधिकारियों के ज्वाइंट फाउंडेशन कोर्स के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। हिपा में एचसीएस के चयनित अधिकारियों का यह पहला ज्वाइंट फाउंडेशन कोर्स आयोजित किया गया था, जिसमें 136 अधिकारी शामिल हैं। इनमें 45 एचसीएस एग्जीक्यूटिव, 7 डीएसपी, 12 ईटीओ, 34 एईटीओ, 19 तहसीलदार, 4 एआरसीएस, 8 बीडीपीओ, 2 ट्रैफिक मैनेजर, 5 डीएफएसओ शामिल हैं। इनका यह कोर्स 27 जनवरी को शुरू हुआ था जिसका सोमवार को समापन हुआ।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों से कहा कि पहले भर्तियों में भ्रष्टाचार हुआ करता था लेकिन अब मैरिट के आधार पर 'बिना पर्ची-बिना खर्ची' आपकी भर्ती हुई है । उन्होंने कहा कि आप इंटीग्रिटी अर्थात सच्चे मन से जनता के लिए ईमानदारी से काम करें और इन्वोल्वमेंट अर्थात टीम को शामिल करते हुए कार्य करें।
टीम का अर्थ समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने कार्यालय के कार्यों की लिस्ट बनाकर टीम में बांट दें और जहां कमजोरी दिखाई देती हो वहां पर स्वयं लीड लें। इससे कार्यालय के कर्मचारियों में उनके प्रति विश्वास बढ़ेगा कि हमारा ऑफिसर हमारा ध्यान रखता है। तीसरा मंत्र इन्नोवेशन का देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नए नए विषय जैसे आईटी का प्रयोग आदि इन दिनों आ रहे हैं, उनका प्रयोग करते हुए जनता की बेहतर ढंग से सेवा करें।
उन्होंने कहा कि अधिकारी के तौर पर सेवा करते हुए उनके सामने कई प्रकार की परिस्थितियां आएंगी, परंतु उन परिस्थितियों में अपने आप पर कंट्रोल रखते हुए नियम और नीतियों के तहत काम करें। आप शुद्धता व स्वच्छ प्रशासन में आगेे बढ़े। जन आंकाक्षाओं को पूरा करने के लिए नियम और नीतियों का पालन करते हुए रास्ता निकालने की कोशिश करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कहीं नियम या कानून में सुधार अथवा संशोधन करके राहत पहुंचाई जा सकती है तो निडर होकर इसके बारे में अपने उच्च अधिकारियों को सुझाव भी दें। उन्होंने यह भी कहा कि आप सिस्टम में मजबूती के साथ जाएंगे तो कठिनाई नहीं आएगी, आप में दृढ़ संकल्प व इच्छा शक्ति होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने स्वंय का उदाहरण देते हुए नवनियुक्त अधिकारियों को बताया कि नया करने वालों को लोग लंबे समय तक याद रखते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे जीवन में भी आंकाक्षा थी, मन में संकल्प था कि जीवन में लोगों के लिए कुछ करना है और इसी आकांक्षा के कारण आज यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपने टैलेंट से आगे बढऩे की आकांक्षा को तलाशते रहना चाहिए। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल के कथन की याद दिलाते हुए कहा कि सरदार पटेल ने एक बार कहा था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा राज्य सिविल सेवा सिस्टम का स्टील फ्रेम होता है, इसलिए जनहित को सामने रखकर चलोगेे तो आगे बढ़ोगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार का एजेंडा -पारदर्शिता, बिना भेदभाव काम करने तथा भ्रष्टाचारमुक्त शासन देने का है। इसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि पारदर्शिता का मतलब है हर काम जो करेंगे वो जनता को बताएंगे, बिना किसी भेदभाव के साथ काम करेंगे अर्थात पूरे हरियाणा को एक इकाई मानकर काम करेंगे और भ्रष्टाचार को सहन नही करेंगे। उन्होंने कहा कि जो डिजर्व नहीं करता उसको लाभ पहुंचाना भी भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि अब तक जो आपकी परीक्षा हुई उससे बड़ी और असली परीक्षा अभी होनी है जिसमें आप कितना खरा उतरते हैं यह समय बताएगा। इस परीक्षा का मूल्यांकन आप स्वयं करेंगे और इसका कार्यकाल आपकी 58 वर्ष तक की आयु रहेगा। आपका टारगेट ऐसा होना चाहिए कि आप यह सोचे कि प्रशासनिक तौर पर काम करते हुए अपनी शैली से ऐसा रास्ता बनाएं जिस पर सभी लोग चल सकें। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो हर कोई काम करता है लेकिन याद उसी को रखा जाता है जो लोगों के लिए काम करे।
इससे पहले हिपा की महानिदेशक सुरीना राजन ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि हिपा द्वारा सभी नवचयनित अधिकारियों को प्रशिक्षण देने तथा हर तीन वर्ष में पुनः प्रशिक्षण देने और ट्रैनिंग व कैपेसिटी बिल्डिंग करने का कार्यक्रम बनाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी समितियों तथा पंचायती राज संस्थाओं का भी प्रशिक्षण और विचार विमर्श करने की योजना तैयार की गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देश पर नॉलेज नेटवर्क भी शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इन चयनित अधिकारियों में 15 अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग में अपीयर हो रहे हैं और इनमें से एक लोकेश भारद्वाज का भारतीय वन सेवा में चयन हो गया है।
हिपा के अतिरिक्त निदेशक तथा कोर्स डायरेक्टर एम डी सिन्हा ने कोर्स की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि संयुक्त प्रशिक्षण से अधिकारियों में अच्छा तालमेल रहता है। उन्होंने बताया कि कोर्स में 6 सप्ताह में 78 क्लास रूम सेशन आयोजित किए गए और एक सप्ताह भारत दर्शन के तहत दूसरे राज्यो की बैस्ट प्रैक्टेसिज जानने के लिए अलग-अलग ग्रुपों में उन्हें आसाम , तेलंगाना, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल में भेजा गया।
मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने चंडीगढ़ से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से तथा अन्य जिला अधिकारियों ने भी अपने अपने जिला से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम की कार्यवाही को देखा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्य, भाजपा जिला अध्यक्ष भूपेन्द्र चौहान, गुरूग्राम के पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकिल, मंडलायुक्त अशोक सांगवान, नगर निगम आयुक्त विनय प्रताप सिंह, उपायुक्त अमित खत्री, हिपा की अतिरिक्त निदेशक रेखा दहिया सहित कई अधिकारीगण उपस्थित थे।
| चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि नवचयनित हरियाणा सिविल सेवा-दो हज़ार बीस के अधिकारी जनहित को सामने रखकर काम करें। उन्होंने इन अधिकारियों को तीन आई अर्थात इंटीग्रिटी, इन्वोल्वमेंट तथा इन्नोवेशन का मंत्र देते हुए कहा कि उनकी भर्ती 'बिना पर्ची, बिना खर्ची' से हुई है इसलिए उनसे शुद्धता की अपेक्षा की जाती है। वे सोमवार को गुरूग्राम के हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान में हरियाणा सिविल सेवा दो हज़ार बीस के चयनित अधिकारियों के ज्वाइंट फाउंडेशन कोर्स के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। हिपा में एचसीएस के चयनित अधिकारियों का यह पहला ज्वाइंट फाउंडेशन कोर्स आयोजित किया गया था, जिसमें एक सौ छत्तीस अधिकारी शामिल हैं। इनमें पैंतालीस एचसीएस एग्जीक्यूटिव, सात डीएसपी, बारह ईटीओ, चौंतीस एईटीओ, उन्नीस तहसीलदार, चार एआरसीएस, आठ बीडीपीओ, दो ट्रैफिक मैनेजर, पाँच डीएफएसओ शामिल हैं। इनका यह कोर्स सत्ताईस जनवरी को शुरू हुआ था जिसका सोमवार को समापन हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों से कहा कि पहले भर्तियों में भ्रष्टाचार हुआ करता था लेकिन अब मैरिट के आधार पर 'बिना पर्ची-बिना खर्ची' आपकी भर्ती हुई है । उन्होंने कहा कि आप इंटीग्रिटी अर्थात सच्चे मन से जनता के लिए ईमानदारी से काम करें और इन्वोल्वमेंट अर्थात टीम को शामिल करते हुए कार्य करें। टीम का अर्थ समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने कार्यालय के कार्यों की लिस्ट बनाकर टीम में बांट दें और जहां कमजोरी दिखाई देती हो वहां पर स्वयं लीड लें। इससे कार्यालय के कर्मचारियों में उनके प्रति विश्वास बढ़ेगा कि हमारा ऑफिसर हमारा ध्यान रखता है। तीसरा मंत्र इन्नोवेशन का देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नए नए विषय जैसे आईटी का प्रयोग आदि इन दिनों आ रहे हैं, उनका प्रयोग करते हुए जनता की बेहतर ढंग से सेवा करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी के तौर पर सेवा करते हुए उनके सामने कई प्रकार की परिस्थितियां आएंगी, परंतु उन परिस्थितियों में अपने आप पर कंट्रोल रखते हुए नियम और नीतियों के तहत काम करें। आप शुद्धता व स्वच्छ प्रशासन में आगेे बढ़े। जन आंकाक्षाओं को पूरा करने के लिए नियम और नीतियों का पालन करते हुए रास्ता निकालने की कोशिश करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कहीं नियम या कानून में सुधार अथवा संशोधन करके राहत पहुंचाई जा सकती है तो निडर होकर इसके बारे में अपने उच्च अधिकारियों को सुझाव भी दें। उन्होंने यह भी कहा कि आप सिस्टम में मजबूती के साथ जाएंगे तो कठिनाई नहीं आएगी, आप में दृढ़ संकल्प व इच्छा शक्ति होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्वंय का उदाहरण देते हुए नवनियुक्त अधिकारियों को बताया कि नया करने वालों को लोग लंबे समय तक याद रखते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे जीवन में भी आंकाक्षा थी, मन में संकल्प था कि जीवन में लोगों के लिए कुछ करना है और इसी आकांक्षा के कारण आज यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपने टैलेंट से आगे बढऩे की आकांक्षा को तलाशते रहना चाहिए। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल के कथन की याद दिलाते हुए कहा कि सरदार पटेल ने एक बार कहा था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा राज्य सिविल सेवा सिस्टम का स्टील फ्रेम होता है, इसलिए जनहित को सामने रखकर चलोगेे तो आगे बढ़ोगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार का एजेंडा -पारदर्शिता, बिना भेदभाव काम करने तथा भ्रष्टाचारमुक्त शासन देने का है। इसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि पारदर्शिता का मतलब है हर काम जो करेंगे वो जनता को बताएंगे, बिना किसी भेदभाव के साथ काम करेंगे अर्थात पूरे हरियाणा को एक इकाई मानकर काम करेंगे और भ्रष्टाचार को सहन नही करेंगे। उन्होंने कहा कि जो डिजर्व नहीं करता उसको लाभ पहुंचाना भी भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि अब तक जो आपकी परीक्षा हुई उससे बड़ी और असली परीक्षा अभी होनी है जिसमें आप कितना खरा उतरते हैं यह समय बताएगा। इस परीक्षा का मूल्यांकन आप स्वयं करेंगे और इसका कार्यकाल आपकी अट्ठावन वर्ष तक की आयु रहेगा। आपका टारगेट ऐसा होना चाहिए कि आप यह सोचे कि प्रशासनिक तौर पर काम करते हुए अपनी शैली से ऐसा रास्ता बनाएं जिस पर सभी लोग चल सकें। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो हर कोई काम करता है लेकिन याद उसी को रखा जाता है जो लोगों के लिए काम करे। इससे पहले हिपा की महानिदेशक सुरीना राजन ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि हिपा द्वारा सभी नवचयनित अधिकारियों को प्रशिक्षण देने तथा हर तीन वर्ष में पुनः प्रशिक्षण देने और ट्रैनिंग व कैपेसिटी बिल्डिंग करने का कार्यक्रम बनाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी समितियों तथा पंचायती राज संस्थाओं का भी प्रशिक्षण और विचार विमर्श करने की योजना तैयार की गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देश पर नॉलेज नेटवर्क भी शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इन चयनित अधिकारियों में पंद्रह अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग में अपीयर हो रहे हैं और इनमें से एक लोकेश भारद्वाज का भारतीय वन सेवा में चयन हो गया है। हिपा के अतिरिक्त निदेशक तथा कोर्स डायरेक्टर एम डी सिन्हा ने कोर्स की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि संयुक्त प्रशिक्षण से अधिकारियों में अच्छा तालमेल रहता है। उन्होंने बताया कि कोर्स में छः सप्ताह में अठहत्तर क्लास रूम सेशन आयोजित किए गए और एक सप्ताह भारत दर्शन के तहत दूसरे राज्यो की बैस्ट प्रैक्टेसिज जानने के लिए अलग-अलग ग्रुपों में उन्हें आसाम , तेलंगाना, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल में भेजा गया। मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने चंडीगढ़ से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से तथा अन्य जिला अधिकारियों ने भी अपने अपने जिला से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम की कार्यवाही को देखा। इस मौके पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्य, भाजपा जिला अध्यक्ष भूपेन्द्र चौहान, गुरूग्राम के पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकिल, मंडलायुक्त अशोक सांगवान, नगर निगम आयुक्त विनय प्रताप सिंह, उपायुक्त अमित खत्री, हिपा की अतिरिक्त निदेशक रेखा दहिया सहित कई अधिकारीगण उपस्थित थे। |
17वें भोजपुरी फिल्म अवार्ड में दिनेश लाल यादव निरहुआ और प्रदीप पांउेय चिंटू को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया गया है। फिल्म ट्रेडिंग और आईटी कंपनी आई ईव एरा एवं अशोक प्रसाद अभिषेक के द्वारा प्रस्तुत और ए बी 5 मल्टीमीडिया द्वारा आयोजित 17वां भोजपुरी फिल्म अवार्ड 2023 संपन्न हो गया।
17 सालों से विनोद गुप्ता द्वारा आयोजित हो रहे जूरी बेस्ट इस अवार्ड समारोह में दिनेश लाल यादव निरहुआ को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला, वहीं इस समारोह में प्रदीप पांडेय चिंटू, आम्रपाली दुबे, अभय सिन्हा, देव सिंह, प्रमोद शास्त्री, रजनीश मिश्रा जैसे दिग्गजों के काम को भी सराहा गया.
वहीं इस समारोह में प्रदीप पांडेय चिंटू, आम्रपाली दुबे, अभय सिन्हा, देव सिंह, प्रमोद शास्त्री, रजनीश मिश्रा जैसे दिग्गजों के काम को भी सराहा गया। दिनेश लाल यादव निरहुआ को यह अवॉर्ड 2019 में आई उनकी फिल्म शेर ए हिंदुस्तान के लिए मिला है। वहीं प्रदीप पांडेय चिंटू को उनकी फिल्म 'यह कहानी है लैला मजनू की' के लिए यह अवॉर्ड मिला।
वहीं, बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड यूट्यूब क्वीन आम्रपाली दुबे को 2020 में आई उनकी फिल्म लागल रहा बताशा के लिए दिया गया, देव सिंह को फिल्म कसम पैदा करने वाले की 2 के लिए बेस्ट नेगेटिव एक्टर का अवॉर्ड दिया गया।
इसके अलावा 2019 में छलिया के लिए प्रमोद शास्त्री को और 2020 -21 में दुल्हन वही जो पिया मन भाए के लिए रजनीश मिश्रा को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला। निर्माता अभय सिन्हा की को 'दुल्हिन वही जो पिया मन भाए' के लिए बेस्ट पॉपुलर फिल्म का अवॉर्ड मिला, जबकि रत्नाकर कुमार को बाबुल के लिए बेस्ट फिल्म सोशल इशू का अवॉर्ड मिला।
मालूम हो कि इस बार भोजपुरी फिल्म अवॉर्ड में दो साल यानी 2019 और 2020 -21 में आई फिल्मों को शामिल किया गया, क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से एक साल इस आयोजन को आगे बढ़ा दिया गया था। लेकिन इस बार जब यह आयोजित किया गया, तब इसमें खूब उत्साह और उमंग देखने को मिला। इस दौरान एक से बढ़ कर एक भोजपुरी और बॉलीवुड गानों पर सितारों के थिरकते पाँव ने भोजपुरी सिने अवॉर्ड को हसीन और यादगार बना दिया। इन सब के बीच साल 2019 और 2020 -21 की फिल्मों और कलाकारों के साथ अन्य लोगों को सम्मानित भी किया गया।
| सत्रहवें भोजपुरी फिल्म अवार्ड में दिनेश लाल यादव निरहुआ और प्रदीप पांउेय चिंटू को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया गया है। फिल्म ट्रेडिंग और आईटी कंपनी आई ईव एरा एवं अशोक प्रसाद अभिषेक के द्वारा प्रस्तुत और ए बी पाँच मल्टीमीडिया द्वारा आयोजित सत्रहवां भोजपुरी फिल्म अवार्ड दो हज़ार तेईस संपन्न हो गया। सत्रह सालों से विनोद गुप्ता द्वारा आयोजित हो रहे जूरी बेस्ट इस अवार्ड समारोह में दिनेश लाल यादव निरहुआ को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला, वहीं इस समारोह में प्रदीप पांडेय चिंटू, आम्रपाली दुबे, अभय सिन्हा, देव सिंह, प्रमोद शास्त्री, रजनीश मिश्रा जैसे दिग्गजों के काम को भी सराहा गया. वहीं इस समारोह में प्रदीप पांडेय चिंटू, आम्रपाली दुबे, अभय सिन्हा, देव सिंह, प्रमोद शास्त्री, रजनीश मिश्रा जैसे दिग्गजों के काम को भी सराहा गया। दिनेश लाल यादव निरहुआ को यह अवॉर्ड दो हज़ार उन्नीस में आई उनकी फिल्म शेर ए हिंदुस्तान के लिए मिला है। वहीं प्रदीप पांडेय चिंटू को उनकी फिल्म 'यह कहानी है लैला मजनू की' के लिए यह अवॉर्ड मिला। वहीं, बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड यूट्यूब क्वीन आम्रपाली दुबे को दो हज़ार बीस में आई उनकी फिल्म लागल रहा बताशा के लिए दिया गया, देव सिंह को फिल्म कसम पैदा करने वाले की दो के लिए बेस्ट नेगेटिव एक्टर का अवॉर्ड दिया गया। इसके अलावा दो हज़ार उन्नीस में छलिया के लिए प्रमोद शास्त्री को और दो हज़ार बीस -इक्कीस में दुल्हन वही जो पिया मन भाए के लिए रजनीश मिश्रा को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला। निर्माता अभय सिन्हा की को 'दुल्हिन वही जो पिया मन भाए' के लिए बेस्ट पॉपुलर फिल्म का अवॉर्ड मिला, जबकि रत्नाकर कुमार को बाबुल के लिए बेस्ट फिल्म सोशल इशू का अवॉर्ड मिला। मालूम हो कि इस बार भोजपुरी फिल्म अवॉर्ड में दो साल यानी दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस -इक्कीस में आई फिल्मों को शामिल किया गया, क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से एक साल इस आयोजन को आगे बढ़ा दिया गया था। लेकिन इस बार जब यह आयोजित किया गया, तब इसमें खूब उत्साह और उमंग देखने को मिला। इस दौरान एक से बढ़ कर एक भोजपुरी और बॉलीवुड गानों पर सितारों के थिरकते पाँव ने भोजपुरी सिने अवॉर्ड को हसीन और यादगार बना दिया। इन सब के बीच साल दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस -इक्कीस की फिल्मों और कलाकारों के साथ अन्य लोगों को सम्मानित भी किया गया। |
चीन किस फेर में है? ऐसा क्यों है कि वह 3,488 किमी लंबी एलएसी पर उथल-पुथल पैदा करके भारतीय सैनिकों और जनमत को उकसा रहा है लेकिन तनाव को आपस में गोलीबारी की हद तक पहुंचने से रोकता रहा है? वह क्या संदेश देना चाहता है और उसका लक्ष्य क्या है? और आखिरी सवाल यह कि हम उसे क्या जवाब दे रहे हैं? अगर चीन जमीन कब्जाने के फेर में होता तो उसकी सेना ने तोप-गोली के इस्तेमाल से परहेज न किया होता।
उसने मौतों को न्यूनतम रखते हुए जमीन कब्जाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दूर से मार करने वाले हथियारों का इस्तेमाल करने की कोशिश की होती। क्या उसने ऐसा केवल इसलिए किया होता ताकि एलएसी के इर्द-गिर्द जमीन के स्वरूप और 'बफर जोन' के निर्माण को- जो लद्दाख में किया गया है- 'तार्किक' साबित किया जा सके?
वह इतना नादान नहीं है कि सिर्फ इसके लिए करीब तीन डिवीजन सेना और भारी साजो-सामान को 15 हजार फीट की बेहद दुर्गम ऊंचाई पर तैनात करे। इससे उसकी सुरक्षा में इजाफा नहीं होने वाला है, न ही संसाधनों तक पहुंच बढ़ने वाली है, और न लड़ाई की नौबत में वह कमजोर पड़ने वाला है। इसके बावजूद, चीन की गतिविधियों पर भारत में अब तक जो बहस होती रही है, वह जमीन के कब्जे पर केंद्रित रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन का नाम तक न लेने की पूरी सावधानी बरतते हैं। इस मसले पर उन्होंने केवल एक बार 2020 में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 'कोई नहीं आया...' (कोई भी सीमा के अंदर नहीं आया , कोई भी हमारी जमीन पर कब्जा करके नहीं बैठा है, हमारी किसी चौकी पर कब्जा नहीं किया गया है)। उनके इस बयान का खूब हवाला दिया गया है। रणनीतिकार, और विपक्ष भी जमीन के कब्जे को लेकर ही आलोचना करते रहे हैं।
राहुल गांधी कह रहे हैं कि चीन 'हमारी जमीन पर कब्जा' कर रहा है और प्रधानमंत्री खामोश हैं। तृणमूल कांग्रेस से लेकर ओवैसी की एआईएमआईएम तक तमाम दूसरे विपक्षी दल भी जमीन की ही बात कर रहे हैं। जबकि चीन भारत को विविध, पेचीदा रणनीतिक और राजनीतिक संदेश दे रहा है। इसके बदले हम जमीन और सैन्य व सामरिक मसलों पर ही जोर देकर अपना भला नहीं कर रहे हैं।
यह हमारी राजनीतिक तथा रणनीतिक संस्कृति की बुरी छवि प्रस्तुत करता है। जो पक्ष युद्ध हारता है, वह उसी युद्ध को पीढ़ियों तक बार-बार लड़ता रहता है। हम अपनी सामूहिक सोच में 1962 के युद्ध को बार-बार लड़ते रहते हैं, मानो खुद को आश्वस्त करना चाहते हैं कि अब हम बेहतर तरीके से युद्ध लड़ेंगे। कड़वी सच्चाई यह है कि वह युद्ध 60 साल पहले हुआ था। उसके बाद दुनिया में कई उथलपुथल हुए।
भू-राजनीति बदल गई और भारत भी बदल गया है। सैन्य मामलों में भी कई परिवर्तन हुए हैं- यंत्रों के बूते सामूहिक कार्रवाई से लेकर साइबर युद्ध और फिर ड्रोन-रोबो के इस्तेमाल तक सैनिकों के बीच सीधी टक्कर को न्यूनतम करने तक। अगर हमारी सामूहिक सोच अभी भी सीमा पर अपनी चौकियों की रक्षा करने तक सिमटी हुई है, जैसा 1962 में था, तब मैं यह भी कहना चाहूंगा कि यही सोच हमारे रणनीतिक जगत में भी हावी है।
इसीलिए विपक्ष ने सिर्फ 'अपनी जमीन गंवाने' या गश्त करने का अधिकार गंवाने को लेकर सरकार पर हमला शुरू कर दिया है। और इसी पुरातन सोच के कारण सरकार भी इस मामले पर संसद में बहस की इजाजत नहीं दे रही है। अगर मसला जमीन के टुकड़ों या गश्त करने के अधिकार का है तो घरेलू राजनीति में इसे तब तक निश्चित रूप से निपटाया नहीं जा सकता, जब तक आप यह खुलासा करने को राजी न हों कि आप पहले कहां थे और अब कहां हैं।
ये दोनों बातें समस्या पैदा कर सकती हैं और इनका उल्टा नतीजा हासिल हो सकता है। यही वजह है कि मैं इस मसले को नहीं छुऊंगा। विचार तो व्यापक राजनीतिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक पहलुओं पर किया जाना चाहिए, जिसके लिए मौजूदा राजनीतिक माहौल तैयार नहीं है। भाजपा दो कारणों से आंख चुरा रही है। एक कारण तो राजनीतिक है। वह नहीं चाहती कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया जाए या उस पर सार्वजनिक चर्चा की जाए।
आखिर उसे वोट दिलाने वाली एक वही तो है। आजाद भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा पर सबसे मजबूत पहल ही मोदी की सबसे महत्वपूर्ण विशिष्टता बताई जाती है। शी जिनपिंग ने इस पर चोट करते रहने का फैसला कर लिया है। दूसरा कारण भी राजनीतिक है, हालांकि वह उतना दलगत नहीं है। वैश्विक सत्ता के पुनर्संतुलन के लिए जो बारीकियां चाहिए, भारत जो चाल चल रहा है, इन सबके साथ जो भावनाएं जुड़ी हैं उन सबका तकाजा पूरा करने के लिए जिस स्तर की बहस चाहिए, उसकी उम्मीद ही नहीं की जा सकती।
ऐसा नहीं है कि हमारी राजनीतिक जमात में प्रौढ़ता की कमी है। हमारे अधिकतर विपक्षी नेताओं में वह क्षमता है और वे राष्ट्रीय सुरक्षा और तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों को समझते हैं। असली बात यह है कि उनके और शासक दल के बीच विश्वास की कमी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से बनी सरकार ने अपने अब तक के साढ़े आठ साल में राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मसले पर विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया।
यह विभाजित राजनीति भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बन गई है। भारत की रक्षा पंक्ति में इस खाई को ही चीन निशाना बना रहा है। 1962 की एक सीख यह भी है कि हमें कहीं बेहतर, प्रौढ़ और भरोसे वाली राजनीति करने की जरूरत है।
चीन की किसी कार्रवाई से यह संकेत नहीं मिलता कि वह जमीन कब्जा करने के फेर में है। दरअसल वह जिस जमीन कर कब्जा करना चाहता है, वह है हमारी सोच की जमीन। वास्तव में वह भारत को असंतुलित करने के फेर में है। यह कोशिश वह अमेरिका के साथ भारत की परमाणु संधि के बाद से कर रहा है और नरेंद्र मोदी के पदार्पण के बाद से यह कोशिश तेज हो गई है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं। )
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| चीन किस फेर में है? ऐसा क्यों है कि वह तीन,चार सौ अठासी किमी लंबी एलएसी पर उथल-पुथल पैदा करके भारतीय सैनिकों और जनमत को उकसा रहा है लेकिन तनाव को आपस में गोलीबारी की हद तक पहुंचने से रोकता रहा है? वह क्या संदेश देना चाहता है और उसका लक्ष्य क्या है? और आखिरी सवाल यह कि हम उसे क्या जवाब दे रहे हैं? अगर चीन जमीन कब्जाने के फेर में होता तो उसकी सेना ने तोप-गोली के इस्तेमाल से परहेज न किया होता। उसने मौतों को न्यूनतम रखते हुए जमीन कब्जाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दूर से मार करने वाले हथियारों का इस्तेमाल करने की कोशिश की होती। क्या उसने ऐसा केवल इसलिए किया होता ताकि एलएसी के इर्द-गिर्द जमीन के स्वरूप और 'बफर जोन' के निर्माण को- जो लद्दाख में किया गया है- 'तार्किक' साबित किया जा सके? वह इतना नादान नहीं है कि सिर्फ इसके लिए करीब तीन डिवीजन सेना और भारी साजो-सामान को पंद्रह हजार फीट की बेहद दुर्गम ऊंचाई पर तैनात करे। इससे उसकी सुरक्षा में इजाफा नहीं होने वाला है, न ही संसाधनों तक पहुंच बढ़ने वाली है, और न लड़ाई की नौबत में वह कमजोर पड़ने वाला है। इसके बावजूद, चीन की गतिविधियों पर भारत में अब तक जो बहस होती रही है, वह जमीन के कब्जे पर केंद्रित रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन का नाम तक न लेने की पूरी सावधानी बरतते हैं। इस मसले पर उन्होंने केवल एक बार दो हज़ार बीस में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 'कोई नहीं आया...' । उनके इस बयान का खूब हवाला दिया गया है। रणनीतिकार, और विपक्ष भी जमीन के कब्जे को लेकर ही आलोचना करते रहे हैं। राहुल गांधी कह रहे हैं कि चीन 'हमारी जमीन पर कब्जा' कर रहा है और प्रधानमंत्री खामोश हैं। तृणमूल कांग्रेस से लेकर ओवैसी की एआईएमआईएम तक तमाम दूसरे विपक्षी दल भी जमीन की ही बात कर रहे हैं। जबकि चीन भारत को विविध, पेचीदा रणनीतिक और राजनीतिक संदेश दे रहा है। इसके बदले हम जमीन और सैन्य व सामरिक मसलों पर ही जोर देकर अपना भला नहीं कर रहे हैं। यह हमारी राजनीतिक तथा रणनीतिक संस्कृति की बुरी छवि प्रस्तुत करता है। जो पक्ष युद्ध हारता है, वह उसी युद्ध को पीढ़ियों तक बार-बार लड़ता रहता है। हम अपनी सामूहिक सोच में एक हज़ार नौ सौ बासठ के युद्ध को बार-बार लड़ते रहते हैं, मानो खुद को आश्वस्त करना चाहते हैं कि अब हम बेहतर तरीके से युद्ध लड़ेंगे। कड़वी सच्चाई यह है कि वह युद्ध साठ साल पहले हुआ था। उसके बाद दुनिया में कई उथलपुथल हुए। भू-राजनीति बदल गई और भारत भी बदल गया है। सैन्य मामलों में भी कई परिवर्तन हुए हैं- यंत्रों के बूते सामूहिक कार्रवाई से लेकर साइबर युद्ध और फिर ड्रोन-रोबो के इस्तेमाल तक सैनिकों के बीच सीधी टक्कर को न्यूनतम करने तक। अगर हमारी सामूहिक सोच अभी भी सीमा पर अपनी चौकियों की रक्षा करने तक सिमटी हुई है, जैसा एक हज़ार नौ सौ बासठ में था, तब मैं यह भी कहना चाहूंगा कि यही सोच हमारे रणनीतिक जगत में भी हावी है। इसीलिए विपक्ष ने सिर्फ 'अपनी जमीन गंवाने' या गश्त करने का अधिकार गंवाने को लेकर सरकार पर हमला शुरू कर दिया है। और इसी पुरातन सोच के कारण सरकार भी इस मामले पर संसद में बहस की इजाजत नहीं दे रही है। अगर मसला जमीन के टुकड़ों या गश्त करने के अधिकार का है तो घरेलू राजनीति में इसे तब तक निश्चित रूप से निपटाया नहीं जा सकता, जब तक आप यह खुलासा करने को राजी न हों कि आप पहले कहां थे और अब कहां हैं। ये दोनों बातें समस्या पैदा कर सकती हैं और इनका उल्टा नतीजा हासिल हो सकता है। यही वजह है कि मैं इस मसले को नहीं छुऊंगा। विचार तो व्यापक राजनीतिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक पहलुओं पर किया जाना चाहिए, जिसके लिए मौजूदा राजनीतिक माहौल तैयार नहीं है। भाजपा दो कारणों से आंख चुरा रही है। एक कारण तो राजनीतिक है। वह नहीं चाहती कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया जाए या उस पर सार्वजनिक चर्चा की जाए। आखिर उसे वोट दिलाने वाली एक वही तो है। आजाद भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा पर सबसे मजबूत पहल ही मोदी की सबसे महत्वपूर्ण विशिष्टता बताई जाती है। शी जिनपिंग ने इस पर चोट करते रहने का फैसला कर लिया है। दूसरा कारण भी राजनीतिक है, हालांकि वह उतना दलगत नहीं है। वैश्विक सत्ता के पुनर्संतुलन के लिए जो बारीकियां चाहिए, भारत जो चाल चल रहा है, इन सबके साथ जो भावनाएं जुड़ी हैं उन सबका तकाजा पूरा करने के लिए जिस स्तर की बहस चाहिए, उसकी उम्मीद ही नहीं की जा सकती। ऐसा नहीं है कि हमारी राजनीतिक जमात में प्रौढ़ता की कमी है। हमारे अधिकतर विपक्षी नेताओं में वह क्षमता है और वे राष्ट्रीय सुरक्षा और तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों को समझते हैं। असली बात यह है कि उनके और शासक दल के बीच विश्वास की कमी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से बनी सरकार ने अपने अब तक के साढ़े आठ साल में राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मसले पर विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया। यह विभाजित राजनीति भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बन गई है। भारत की रक्षा पंक्ति में इस खाई को ही चीन निशाना बना रहा है। एक हज़ार नौ सौ बासठ की एक सीख यह भी है कि हमें कहीं बेहतर, प्रौढ़ और भरोसे वाली राजनीति करने की जरूरत है। चीन की किसी कार्रवाई से यह संकेत नहीं मिलता कि वह जमीन कब्जा करने के फेर में है। दरअसल वह जिस जमीन कर कब्जा करना चाहता है, वह है हमारी सोच की जमीन। वास्तव में वह भारत को असंतुलित करने के फेर में है। यह कोशिश वह अमेरिका के साथ भारत की परमाणु संधि के बाद से कर रहा है और नरेंद्र मोदी के पदार्पण के बाद से यह कोशिश तेज हो गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पहला बड़ा संकुचन है। वैश्विक संकट के बीच अमेरिका के लिए यह बहुत बड़ा झटका है।
वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। पहली तिमाही में अमेरिका की अर्थव्यवस्था 1. 4 फीसदी वार्षिक दर से सिकुड़ गई है। आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो के वाणिज्य विभाग ने यह जानकारी दी है। कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पहला बड़ा संकुचन है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहली बार पिछली तिमाही में सिकुड़ गई है क्योंकि दो साल पहले महामारी से मंदी आई थी। हालांकि उपभोक्ताओं और व्यवसायों ने लचीलेपन के संकेत में खर्च करना जारी रखा है। कमजोर प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि आने वाले महीनों में मंदी की संभावना है। ज्यादातर अर्थशास्त्री अप्रैल-जून तिमाही में रिबाउंड की उम्मीद कर रहे हैं।
घरों और कंपनियों द्वारा स्थिर खर्च से पता चलता है कि इस साल अर्थव्यवस्था का विस्तार जारी रहेगा, भले ही फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति की वृद्धि से लड़ने के लिए आक्रामक तरीके से दरें बढ़ाने की योजना बनाई है। पहली तिमाही की वृद्धि मुख्य रूप से दुकानों और गोदामों में माल की धीमी निकासी और निर्यात में तेज गिरावट से बाधित हुई है।
वाणिज्य विभाग का अनुमान गुरुवार को पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद देश की वस्तुओं और सेवाओं का कुल उत्पादन 2021 की चौथी तिमाही में 6. 9% वार्षिक वृद्धि से काफी नीचे गिर गया। समग्र रूप से 2021 के लिए अर्थव्यवस्था में 5. 7% की वृद्धि हुई है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई तरह के दबावों का सामना कर रही है। इसने इसकी मजबूती के बारे में चिंताओं को बढ़ा दिया है और अगले साल संभावित मंदी के बारे में चिंता जताई जा रही है। मुद्रास्फीति लोगों पर भारी पड़ रही है क्योंकि गैस और खाद्य कीमतों में वृद्धि हुई है, उधार लेने की लागत बढ़ रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस के यूक्रेन पर आक्रमण और चीन के कोविड-19 लॉकडाउन से प्रभावित है।
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| कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पहला बड़ा संकुचन है। वैश्विक संकट के बीच अमेरिका के लिए यह बहुत बड़ा झटका है। वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। पहली तिमाही में अमेरिका की अर्थव्यवस्था एक. चार फीसदी वार्षिक दर से सिकुड़ गई है। आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो के वाणिज्य विभाग ने यह जानकारी दी है। कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पहला बड़ा संकुचन है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहली बार पिछली तिमाही में सिकुड़ गई है क्योंकि दो साल पहले महामारी से मंदी आई थी। हालांकि उपभोक्ताओं और व्यवसायों ने लचीलेपन के संकेत में खर्च करना जारी रखा है। कमजोर प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि आने वाले महीनों में मंदी की संभावना है। ज्यादातर अर्थशास्त्री अप्रैल-जून तिमाही में रिबाउंड की उम्मीद कर रहे हैं। घरों और कंपनियों द्वारा स्थिर खर्च से पता चलता है कि इस साल अर्थव्यवस्था का विस्तार जारी रहेगा, भले ही फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति की वृद्धि से लड़ने के लिए आक्रामक तरीके से दरें बढ़ाने की योजना बनाई है। पहली तिमाही की वृद्धि मुख्य रूप से दुकानों और गोदामों में माल की धीमी निकासी और निर्यात में तेज गिरावट से बाधित हुई है। वाणिज्य विभाग का अनुमान गुरुवार को पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद देश की वस्तुओं और सेवाओं का कुल उत्पादन दो हज़ार इक्कीस की चौथी तिमाही में छः. नौ% वार्षिक वृद्धि से काफी नीचे गिर गया। समग्र रूप से दो हज़ार इक्कीस के लिए अर्थव्यवस्था में पाँच. सात% की वृद्धि हुई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई तरह के दबावों का सामना कर रही है। इसने इसकी मजबूती के बारे में चिंताओं को बढ़ा दिया है और अगले साल संभावित मंदी के बारे में चिंता जताई जा रही है। मुद्रास्फीति लोगों पर भारी पड़ रही है क्योंकि गैस और खाद्य कीमतों में वृद्धि हुई है, उधार लेने की लागत बढ़ रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस के यूक्रेन पर आक्रमण और चीन के कोविड-उन्नीस लॉकडाउन से प्रभावित है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
लखनऊ, दो मार्च इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने प्रयागराज में जीएसटी अपीलीय अधिकरण की स्थापना संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अपर सॉलिसिटर जनरल तथा स्थायी अधिवक्ता को केंद्र एवं राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए मंगलवार को 24 घंटे का समय दिया।
मामले की तात्कालिकता को देखते हुए न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी तथा न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख चार मार्च तय की।
अदालत ने यह आदेश अवध बार एसोसिएशन द्वारा मंगलवार को दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।
एसोसिएशन की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं एलपी मिश्रा, जे एन माथुर तथा एसोसिएशन के अध्यक्ष एचजीएस परिहार ने दलील दी कि 21 फरवरी 2019 को जीएसटी काउंसिल ने प्रदेश की राजधानी में जीएसटी अधिकरण स्थापित करने का फैसला किया था, लेकिन बाद में काउंसिल ने बिना कोई कारण बताए अवैध और मनमाने तरीके से प्रयागराज में इस अधिकरण की स्थापना का निर्णय ले लिया।
इन अधिवक्ताओं ने कहा कि चूंकि लखनऊ प्रदेश के सभी नगरों से रेल मार्ग, सड़क मार्ग तथा विमान सेवाओं से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। इसकी वजह से लोगों को अपने-अपने मामलों की पैरवी करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
इस बीच, अवध बार एसोसिएशन ने बुधवार को भी न्यायिक कार्यो से विरत रहने का फैसला किया है। एसोसिएशन विभिन्न अधिकरणों को राजधानी लखनऊ में स्थापित किए जाने की मांग को लेकर 24 फरवरी से हड़ताल पर है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| लखनऊ, दो मार्च इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने प्रयागराज में जीएसटी अपीलीय अधिकरण की स्थापना संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अपर सॉलिसिटर जनरल तथा स्थायी अधिवक्ता को केंद्र एवं राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए मंगलवार को चौबीस घंटाटे का समय दिया। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी तथा न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख चार मार्च तय की। अदालत ने यह आदेश अवध बार एसोसिएशन द्वारा मंगलवार को दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। एसोसिएशन की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं एलपी मिश्रा, जे एन माथुर तथा एसोसिएशन के अध्यक्ष एचजीएस परिहार ने दलील दी कि इक्कीस फरवरी दो हज़ार उन्नीस को जीएसटी काउंसिल ने प्रदेश की राजधानी में जीएसटी अधिकरण स्थापित करने का फैसला किया था, लेकिन बाद में काउंसिल ने बिना कोई कारण बताए अवैध और मनमाने तरीके से प्रयागराज में इस अधिकरण की स्थापना का निर्णय ले लिया। इन अधिवक्ताओं ने कहा कि चूंकि लखनऊ प्रदेश के सभी नगरों से रेल मार्ग, सड़क मार्ग तथा विमान सेवाओं से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। इसकी वजह से लोगों को अपने-अपने मामलों की पैरवी करने में कोई परेशानी नहीं होगी। इस बीच, अवध बार एसोसिएशन ने बुधवार को भी न्यायिक कार्यो से विरत रहने का फैसला किया है। एसोसिएशन विभिन्न अधिकरणों को राजधानी लखनऊ में स्थापित किए जाने की मांग को लेकर चौबीस फरवरी से हड़ताल पर है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
स्पोर्ट्स डेस्क : पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ इस महीने के अंत में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक हारिस अपनी पूर्व क्लासमेट से शादी करने वाले हैं। 29 वर्षीय पहले से ही उत्सव के लिए इस्लामाबाद में अपने परिवार में शामिल हो गए हैं जो कि 24-28 दिसंबर के बीच होने वाला है। शादी की खबरों की आधिकारिक पुष्टि के साथ ही दुल्हन के नाम का खुलासा होना बाकी है।
तेज गेंदबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में डेब्यू किया था लेकिन वह चोटिल होने के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा। रावलपिंडी में आयोजित पहले टेस्ट मैच में राष्ट्रीय टीम के साथ अपनी शुरुआत की जिसके दौरान उन्हें जांघ में चोट लग गई। हारिस ने रेड-बॉल प्रतियोगिता के पहले दिन क्षेत्ररक्षण करते हुए अपने दाहिने क्वाड में ग्रेड टू स्ट्रेन का सामना करने के बाद मैदान से बाहर हो गए।
उन्होंने घर जाने से पहले आगामी सीजन के लिए पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) के मसौदे में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तेज गेंदबाज आगामी संस्करण में लाहौर कलंदर्स के साथ रहेंगे। थ्री लायंस और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच के बारे में बात करें तो तीसरे और अंतिम मैच में इंग्लैंड ने जीत दर्ज करते हुए पाकिस्तान को 3-0 से क्लीन स्वीप किया। कराची के नेशनल स्टेडियम में खेले मैच मैच में पाकिस्तान को 15 साल बाद हार का सामना करना पड़ा जबकि इस मैदान पर पाकिस्तान की कुल तीसरी हार थी।
| स्पोर्ट्स डेस्क : पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ इस महीने के अंत में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक हारिस अपनी पूर्व क्लासमेट से शादी करने वाले हैं। उनतीस वर्षीय पहले से ही उत्सव के लिए इस्लामाबाद में अपने परिवार में शामिल हो गए हैं जो कि चौबीस-अट्ठाईस दिसंबर के बीच होने वाला है। शादी की खबरों की आधिकारिक पुष्टि के साथ ही दुल्हन के नाम का खुलासा होना बाकी है। तेज गेंदबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में डेब्यू किया था लेकिन वह चोटिल होने के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा। रावलपिंडी में आयोजित पहले टेस्ट मैच में राष्ट्रीय टीम के साथ अपनी शुरुआत की जिसके दौरान उन्हें जांघ में चोट लग गई। हारिस ने रेड-बॉल प्रतियोगिता के पहले दिन क्षेत्ररक्षण करते हुए अपने दाहिने क्वाड में ग्रेड टू स्ट्रेन का सामना करने के बाद मैदान से बाहर हो गए। उन्होंने घर जाने से पहले आगामी सीजन के लिए पाकिस्तान सुपर लीग के मसौदे में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तेज गेंदबाज आगामी संस्करण में लाहौर कलंदर्स के साथ रहेंगे। थ्री लायंस और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच के बारे में बात करें तो तीसरे और अंतिम मैच में इंग्लैंड ने जीत दर्ज करते हुए पाकिस्तान को तीन-शून्य से क्लीन स्वीप किया। कराची के नेशनल स्टेडियम में खेले मैच मैच में पाकिस्तान को पंद्रह साल बाद हार का सामना करना पड़ा जबकि इस मैदान पर पाकिस्तान की कुल तीसरी हार थी। |
नेस्टफ़ील्ड - ( बेपरवाही से ) जब तक मैं जीता हूँ तब तक बार एसोसिएशन की प्रेसीडेंटशिप और पब्लिक प्रॉसीक्यूटरशिप कोई ले सकता है ?
थेरिजा - इनसे बड़ा इन्फ्लूएँस रहता है, क्यों, अंकिल ?
नेस्टफ़ील्ड -- बहुत बड़ा; और फिर इन दो बड़े खानदानों के लीगल एडवाइज़र होने से भी बड़ा भारी इन्फ्लूएँस है। चाहे मेरा लीगल नॉलेज कैसा ही क्यों न हो, मामूली दर्जे के क्लॉइन्ट्स और जजों तक पर इन बातों का बड़ा असर पड़ता है ।
थेरिजा - हाँ, सिर्फ़ आरगूमेंट ही नहीं, लेकिन इन्फ़्लूस भी आजकल के इन्साफ़ के पलड़े में वज़न डाले बिना नहीं रहता । (और सोडा पी, ग्लास खाली कर टेबिल पर रख देती है।)
नेस्टफ़ील्ड - - इसमें क्या शक़ है । ( वह भी सोडा पीकर, ग्लास खाली कर, टेबिल पर रख देता है और जेब में से सिगार-केस तथा माचिस निकाल सिगार जलाता है। कुछ ठहरकर ) अच्छा, तो अब कचहरी का वक्त हो रहा है ।
थेरिजा - हाँ, अंकिल, ( हाथ की घड़ी देखकर ) ग्यारह बजने में पाँच मिनिट हैं ।
नेस्टफ़ील्ड - (आश्चर्य से) ग्यारह ?
थेरिजा -- बात करने में वक्त बहुत जल्दी निकल जाता है, अंकिल । नेस्टफ़ील्ड - ( चलते हुए ) आज मेरी ज़रूरी अपील भी है । थेरिजा ग्यारह बजकर कुछ मिनिटों पर पहुँच जाओगे । नेस्टफ़ील्ड - (चलते-चलते कुछ बेपरवाही से ) उँह, कुछ देर से | नेस्टफ़ील्ड - जब तक मैं जीता हूँ तब तक बार एसोसिएशन की प्रेसीडेंटशिप और पब्लिक प्रॉसीक्यूटरशिप कोई ले सकता है ? थेरिजा - इनसे बड़ा इन्फ्लूएँस रहता है, क्यों, अंकिल ? नेस्टफ़ील्ड -- बहुत बड़ा; और फिर इन दो बड़े खानदानों के लीगल एडवाइज़र होने से भी बड़ा भारी इन्फ्लूएँस है। चाहे मेरा लीगल नॉलेज कैसा ही क्यों न हो, मामूली दर्जे के क्लॉइन्ट्स और जजों तक पर इन बातों का बड़ा असर पड़ता है । थेरिजा - हाँ, सिर्फ़ आरगूमेंट ही नहीं, लेकिन इन्फ़्लूस भी आजकल के इन्साफ़ के पलड़े में वज़न डाले बिना नहीं रहता । नेस्टफ़ील्ड - - इसमें क्या शक़ है । अच्छा, तो अब कचहरी का वक्त हो रहा है । थेरिजा - हाँ, अंकिल, ग्यारह बजने में पाँच मिनिट हैं । नेस्टफ़ील्ड - ग्यारह ? थेरिजा -- बात करने में वक्त बहुत जल्दी निकल जाता है, अंकिल । नेस्टफ़ील्ड - आज मेरी ज़रूरी अपील भी है । थेरिजा ग्यारह बजकर कुछ मिनिटों पर पहुँच जाओगे । नेस्टफ़ील्ड - उँह, कुछ देर से |
नयी दिल्ली, सात दिसंबर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि केंद्र के नये कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा आठ दिसंबर को किये गये 'भारत बंद' के आह्वान के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं। पुलिस ने चेतावनी दी कि जो भी लोगों की आवाजाही बाधित करने या दुकानों को 'जबरन' बंद कराने का प्रयास करेगा, उसके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शनकारी किसानों ने आठ दिसंबर को 'भारत बंद' का आह्वान किया है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे और राष्ट्रीय राजधानी को पहुंचने वाली सड़कें बंद कर देंगे।
दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ईश सिंघल ने कहा कि मंगलवार को भारत बंद के दौरान सड़कों पर लोगों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पर्याप्त इंतजाम किये हैं।
दिल्ली पुलिस ने हर व्यक्ति से आम नागरिकों एवं दिल्ली के बाशिंदों का जीवन बाधित नहीं करने की अपील भी की।
दिल्ली यातायात पुलिस ने ट्वीट किया कि सिंघू, औचंदी, पियाओ मनियारी, मंगेश, टीकरी और झड़ौदा बॉर्डर बंद हैं।
उसने कहा कि नोएडा की ओर जाने वालों को डीएनडी लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि नोएडा लिंक रोड पर चिल्ला बॉर्डर बंद कर दिया गया है।
एनएच 24 पर गाजीपुर बॉर्डर भी गाजियाबाद से दिल्ली के यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।
उसने कहा कि हालांकि बादुसराय बॉर्डर कार और दोहिया वाहनों जैसी छोटी गाड़ियों के लिए ही खुला है और झटीकरा बॉर्डर बस दोपहिया वाहनों के लिए खुला है।
उसने कहा कि हरियाणा जाने वाले ढांसा, दौराला, कापसहेड़ा, राजोकरी एनएच-8, बिजवासन या बाजघेरा, पालम विमान या डौंडाहेरा बॉर्डर का रास्ता ले सकते हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, सात दिसंबर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि केंद्र के नये कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा आठ दिसंबर को किये गये 'भारत बंद' के आह्वान के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं। पुलिस ने चेतावनी दी कि जो भी लोगों की आवाजाही बाधित करने या दुकानों को 'जबरन' बंद कराने का प्रयास करेगा, उसके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शनकारी किसानों ने आठ दिसंबर को 'भारत बंद' का आह्वान किया है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे और राष्ट्रीय राजधानी को पहुंचने वाली सड़कें बंद कर देंगे। दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ईश सिंघल ने कहा कि मंगलवार को भारत बंद के दौरान सड़कों पर लोगों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पर्याप्त इंतजाम किये हैं। दिल्ली पुलिस ने हर व्यक्ति से आम नागरिकों एवं दिल्ली के बाशिंदों का जीवन बाधित नहीं करने की अपील भी की। दिल्ली यातायात पुलिस ने ट्वीट किया कि सिंघू, औचंदी, पियाओ मनियारी, मंगेश, टीकरी और झड़ौदा बॉर्डर बंद हैं। उसने कहा कि नोएडा की ओर जाने वालों को डीएनडी लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि नोएडा लिंक रोड पर चिल्ला बॉर्डर बंद कर दिया गया है। एनएच चौबीस पर गाजीपुर बॉर्डर भी गाजियाबाद से दिल्ली के यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। उसने कहा कि हालांकि बादुसराय बॉर्डर कार और दोहिया वाहनों जैसी छोटी गाड़ियों के लिए ही खुला है और झटीकरा बॉर्डर बस दोपहिया वाहनों के लिए खुला है। उसने कहा कि हरियाणा जाने वाले ढांसा, दौराला, कापसहेड़ा, राजोकरी एनएच-आठ, बिजवासन या बाजघेरा, पालम विमान या डौंडाहेरा बॉर्डर का रास्ता ले सकते हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
जो समुद्र के किनारे या समुद्र के किनारे से जुड़ा हुआ है, जो लिट्टोरल के रूप में योग्य है। यह शब्द लैटिन भाषा के लिटोरालिस से आया है ।
विस्तार से इसे एक क्षेत्र के तट पर या यहां तक कि एक देश के रूप में जाना जाता है । इसके अलावा, अर्जेंटीना और उरुग्वे में, एक नदी के किनारों पर स्थित स्थलीय पट्टी को लिटोरल भी कहा जाता है।
उदाहरण के लिएः "इस राष्ट्र का तट बहुत सुंदर है", "मेरे दादाजी तट पर बड़े हुए और राजधानी में बस गए जब उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की", "इस नदी का तट प्रदूषण के परिणामों से ग्रस्त है । "
भूगोल के क्षेत्र में, स्थलीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के बीच के संक्रमणकालीन क्षेत्र को लिटोरल कहा जाता है। इस क्षेत्र को एक बड़ी ऊर्जा और पदार्थ विनिमय के साथ पारिस्थितिक सीमा के रूप में समझा जाता है।
अवसादन और कटाव की प्रक्रिया एक समुद्र तट परिवर्तन की विशेषताएं बनाती हैं। तो कुछ संभावनाओं का उल्लेख करने के लिए समुद्र तटों, चट्टानों या रेतीले क्षेत्रों को ढूंढना संभव है।
अर्जेंटीना में, लिटोरल एक क्षेत्र है जो एंटेर रियोस, कोरिएंटेस और मेन्सेस के प्रांतों और सांता फ़े, चाको और फॉर्मोसा के क्षेत्रों से बना है जो पैराग्वे और पराना नदियों के पास विकसित होते हैं। Iguazú फॉल्स, मोकोना फॉल्स, एस्टेरोस डेल इबेरा और एल पालमार नेशनल पार्क, लिटोरल के कुछ मुख्य पर्यटक आकर्षण हैं।
अंत में, अर्जेंटीना के एक और Corrientes के एक और सांता फ़े के एक अखबार, दोनों को एल लिटोरल कहा जाता है। जहां पहले ही इतिहास के पांच दशक से अधिक हो चुके हैं, वहीं दूसरा 2018 में 20 वीं सदी में पहुंच गया है।
| जो समुद्र के किनारे या समुद्र के किनारे से जुड़ा हुआ है, जो लिट्टोरल के रूप में योग्य है। यह शब्द लैटिन भाषा के लिटोरालिस से आया है । विस्तार से इसे एक क्षेत्र के तट पर या यहां तक कि एक देश के रूप में जाना जाता है । इसके अलावा, अर्जेंटीना और उरुग्वे में, एक नदी के किनारों पर स्थित स्थलीय पट्टी को लिटोरल भी कहा जाता है। उदाहरण के लिएः "इस राष्ट्र का तट बहुत सुंदर है", "मेरे दादाजी तट पर बड़े हुए और राजधानी में बस गए जब उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की", "इस नदी का तट प्रदूषण के परिणामों से ग्रस्त है । " भूगोल के क्षेत्र में, स्थलीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के बीच के संक्रमणकालीन क्षेत्र को लिटोरल कहा जाता है। इस क्षेत्र को एक बड़ी ऊर्जा और पदार्थ विनिमय के साथ पारिस्थितिक सीमा के रूप में समझा जाता है। अवसादन और कटाव की प्रक्रिया एक समुद्र तट परिवर्तन की विशेषताएं बनाती हैं। तो कुछ संभावनाओं का उल्लेख करने के लिए समुद्र तटों, चट्टानों या रेतीले क्षेत्रों को ढूंढना संभव है। अर्जेंटीना में, लिटोरल एक क्षेत्र है जो एंटेर रियोस, कोरिएंटेस और मेन्सेस के प्रांतों और सांता फ़े, चाको और फॉर्मोसा के क्षेत्रों से बना है जो पैराग्वे और पराना नदियों के पास विकसित होते हैं। Iguazú फॉल्स, मोकोना फॉल्स, एस्टेरोस डेल इबेरा और एल पालमार नेशनल पार्क, लिटोरल के कुछ मुख्य पर्यटक आकर्षण हैं। अंत में, अर्जेंटीना के एक और Corrientes के एक और सांता फ़े के एक अखबार, दोनों को एल लिटोरल कहा जाता है। जहां पहले ही इतिहास के पांच दशक से अधिक हो चुके हैं, वहीं दूसरा दो हज़ार अट्ठारह में बीस वीं सदी में पहुंच गया है। |
नई दिल्ली। इस महीने की शुरुआत में 5G स्पेक्ट्रम नीलामी (5G Spectrum Auction) के सफल समापन के साथ, भारत इसकी सर्विस के शुरू होने का इंतजार कर रहा है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि 12 अक्टूबर तक 5G सेवाएं (5G Service) शुरू की जाएंगी। इस बीच प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने देश के लिए 6G योजनाओं पर बड़ा अपडेट दिया है।
भारत को 5जी सर्विस शुरू होने में एक महीने से ज्यादा का समय होने के बावजूद, पीएम मोदी ने गुरुवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार देश में 6जी सेवाएं (6G service) शुरू करने के लिए कमर कस रही है। पीएम मोदी ने स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2022 (Smart India Hackathon 2022) के ग्रैंड फिनाले को संबोधित करते हुए शेयर किया कि 6जी का काम इस दशक के अंत तक किया जा सकता है।
5G In India: इन शहरों में सबसे पहले आएगा 5G, देखें क्या आपका शहर है लिस्ट में?
कब शुरू होगी 6G सर्विस?
आगे प्रधान मंत्री ने कहा कि, 'हम इस दशक के अंत तक 6G लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। हम गेमिंग और मनोरंजन में भारतीय समाधानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। भारत सरकार जिस तरह से टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है, उसका हर युवा को फायदा उठाना चाहिए। ' पीएम ने आगे युवाओं से कहा कि वे हर गांव में ऑप्टिकल फाइबर का पूरा लाभ उठाएं, 5जी सेवाएं शुरू करें और गेमिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा दें।
पीएम ने कहा कि, 'भारत पिछले 7 से 8 सालों में एक के बाद एक क्रांति के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज यहां डिजिटल और प्रतिभा क्रांति हो रही है। आकांक्षाएं और चुनौतियां देश में युवा इनोवेटर्स के लिए कई अवसर लेकर आएंगी। '
| नई दिल्ली। इस महीने की शुरुआत में पाँचG स्पेक्ट्रम नीलामी के सफल समापन के साथ, भारत इसकी सर्विस के शुरू होने का इंतजार कर रहा है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि बारह अक्टूबर तक पाँचG सेवाएं शुरू की जाएंगी। इस बीच प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लिए छःG योजनाओं पर बड़ा अपडेट दिया है। भारत को पाँचजी सर्विस शुरू होने में एक महीने से ज्यादा का समय होने के बावजूद, पीएम मोदी ने गुरुवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार देश में छःजी सेवाएं शुरू करने के लिए कमर कस रही है। पीएम मोदी ने स्मार्ट इंडिया हैकथॉन दो हज़ार बाईस के ग्रैंड फिनाले को संबोधित करते हुए शेयर किया कि छःजी का काम इस दशक के अंत तक किया जा सकता है। पाँचG In India: इन शहरों में सबसे पहले आएगा पाँचG, देखें क्या आपका शहर है लिस्ट में? कब शुरू होगी छःG सर्विस? आगे प्रधान मंत्री ने कहा कि, 'हम इस दशक के अंत तक छःG लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। हम गेमिंग और मनोरंजन में भारतीय समाधानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। भारत सरकार जिस तरह से टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है, उसका हर युवा को फायदा उठाना चाहिए। ' पीएम ने आगे युवाओं से कहा कि वे हर गांव में ऑप्टिकल फाइबर का पूरा लाभ उठाएं, पाँचजी सेवाएं शुरू करें और गेमिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा दें। पीएम ने कहा कि, 'भारत पिछले सात से आठ सालों में एक के बाद एक क्रांति के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज यहां डिजिटल और प्रतिभा क्रांति हो रही है। आकांक्षाएं और चुनौतियां देश में युवा इनोवेटर्स के लिए कई अवसर लेकर आएंगी। ' |
बर्लिन, 21 जनवरी; जर्मनी के फुटबाल क्लब फ्रेंकफर्ट ने आक्रामक मिडफील्डर मारिजान कवार के साथ करार किया है। कवार को रिनजिस्की मोस्तार से फ्रेंकफर्ट क्लब में शामिल किया गया है। क्लब ने आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, कवार के साथ करार कर फ्रेंकफर्ट ने अपनी मिडफील्ड को मजबूत किया है। इस करार के तहत वह जून, 2021 तक क्लब में बने रहेंगे।
कवार ने मोस्तार क्लब के लिए मई, 2017 में शामिल होने के बाद से लेकर अब तक कुल 16 मैच खेले।
वर्तमान में फ्रेंकफर्ट क्लब जर्मन लीग सूची में 19वें स्थान पर है।
| बर्लिन, इक्कीस जनवरी; जर्मनी के फुटबाल क्लब फ्रेंकफर्ट ने आक्रामक मिडफील्डर मारिजान कवार के साथ करार किया है। कवार को रिनजिस्की मोस्तार से फ्रेंकफर्ट क्लब में शामिल किया गया है। क्लब ने आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, कवार के साथ करार कर फ्रेंकफर्ट ने अपनी मिडफील्ड को मजबूत किया है। इस करार के तहत वह जून, दो हज़ार इक्कीस तक क्लब में बने रहेंगे। कवार ने मोस्तार क्लब के लिए मई, दो हज़ार सत्रह में शामिल होने के बाद से लेकर अब तक कुल सोलह मैच खेले। वर्तमान में फ्रेंकफर्ट क्लब जर्मन लीग सूची में उन्नीसवें स्थान पर है। |
धामनोद (नईदुनिया न्यूज)। रेस्क्यू टीम थैंक्यू नेचर वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने शुक्रवार व शनिवार को क्षेत्र में दो विषैले सांप पकड़े हैं। इनमें से एक सांप तो क्षेत्र में पहली बार मिला है।
शनिवार रात करीब 11 बजे गुलझरा क्षेत्र में राजपुरोहित परिवार के यहां से तीन फीट लंबा कामन करैत सांप पकड़ा। यह अत्यंत ही विषैला होता है। समीप के ग्राम झाकरुड़ में करीब 15 दिन पहले इस प्रकार के सांप के काटने से एक महिला की मौत भी हो चुकी है। रेस्क्यू टीम में शामिल रोहित पाटीदार ने बताया कि यह भारत का अत्यंत विषैला सांप है। भारत के सबसे खतरनाक चार सांपों में यह पहले नंबर पर आता है। कामन करैत सांप ज्यादातर रात में ही निकलते हैं। रात के समय जब लोग सो रहे होते हैं, तो ये बिस्तर में घुसकर चुपके से काट लेते हैं। इनके दांत इतने पतले होते हैं कि सोते हुए हमें पता भी नहीं चलता। जब तक पता चलता है व्यक्ति की मौत हो जाती है।
शुक्रवार को बैगंदा रोड स्थित अंकित पाटीदार के खेत से सुबह के समय सांप निकलने की सूचना टीम को मिली थी। टीम ने पाया कि सांप कामन कैट स्नैक प्रजाति का है। यह सांप क्षेत्र में पहली बार मिला है। कामन कैट स्नैक विषैला सांप होता है। इसकी लंबाई साढ़े तीन से चार फीट तक होती है। आमतौर पर रहवासी क्षेत्र के आसपास ही यह पाया जाता है।
टीम के रोहित पाटीदार, शुभम पाटीदार व राज मंडलोई ने बताया कि अब तक 15 सौ से अधिक सांपों को पकड़ चुके हैं। बारिश के दिनों में प्रतिदिन 10 से 12 सांप निकलने की सूचना मिल रही है। इस रेस्क्यू के समय कई प्रजाति के सांपों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। टीम का उद्देश्य सिर्फ यही है कि जिस क्षेत्र में भी विषैले या अन्य किसी प्रकार के सांप देखें, तो इसकी तुरंत सूचना टीम को भेजें। टीम निशुल्क सेवा दे रही है।
| धामनोद । रेस्क्यू टीम थैंक्यू नेचर वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने शुक्रवार व शनिवार को क्षेत्र में दो विषैले सांप पकड़े हैं। इनमें से एक सांप तो क्षेत्र में पहली बार मिला है। शनिवार रात करीब ग्यारह बजे गुलझरा क्षेत्र में राजपुरोहित परिवार के यहां से तीन फीट लंबा कामन करैत सांप पकड़ा। यह अत्यंत ही विषैला होता है। समीप के ग्राम झाकरुड़ में करीब पंद्रह दिन पहले इस प्रकार के सांप के काटने से एक महिला की मौत भी हो चुकी है। रेस्क्यू टीम में शामिल रोहित पाटीदार ने बताया कि यह भारत का अत्यंत विषैला सांप है। भारत के सबसे खतरनाक चार सांपों में यह पहले नंबर पर आता है। कामन करैत सांप ज्यादातर रात में ही निकलते हैं। रात के समय जब लोग सो रहे होते हैं, तो ये बिस्तर में घुसकर चुपके से काट लेते हैं। इनके दांत इतने पतले होते हैं कि सोते हुए हमें पता भी नहीं चलता। जब तक पता चलता है व्यक्ति की मौत हो जाती है। शुक्रवार को बैगंदा रोड स्थित अंकित पाटीदार के खेत से सुबह के समय सांप निकलने की सूचना टीम को मिली थी। टीम ने पाया कि सांप कामन कैट स्नैक प्रजाति का है। यह सांप क्षेत्र में पहली बार मिला है। कामन कैट स्नैक विषैला सांप होता है। इसकी लंबाई साढ़े तीन से चार फीट तक होती है। आमतौर पर रहवासी क्षेत्र के आसपास ही यह पाया जाता है। टीम के रोहित पाटीदार, शुभम पाटीदार व राज मंडलोई ने बताया कि अब तक पंद्रह सौ से अधिक सांपों को पकड़ चुके हैं। बारिश के दिनों में प्रतिदिन दस से बारह सांप निकलने की सूचना मिल रही है। इस रेस्क्यू के समय कई प्रजाति के सांपों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। टीम का उद्देश्य सिर्फ यही है कि जिस क्षेत्र में भी विषैले या अन्य किसी प्रकार के सांप देखें, तो इसकी तुरंत सूचना टीम को भेजें। टीम निशुल्क सेवा दे रही है। |
लखनऊ। आरएसएस की लक्ष्मण शाखा विशाल खंड 3 गोमती नगर में वार्षिक उत्सव, बसंत पंचमी पूजन,और गणतंत्र दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रमों और सहभोज का आयोजन किया गया।
सेवा भारती के देवेन्द्र स्वरूप ने कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होने संघ के संबंध में विस्तार से बताया। कहा कि संघ को समझने के लिए नियमित लगने वाली शाखा में पहुँचना आवश्यक है। इसके बिना संघ के विषय में किसी प्रकार की धारणा बनाना निरर्थक है।
कैलाश चंद्र शर्मा और मनीराम ने देशभक्ति के गीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर नगर कार्यवाह राजीव, सह नगर कार्यवाह गौरव शाखा कार्यवाह रामजनम, मुख्य शिक्षक हेमन्त, बीएल तिवारी नगीना प्रसाद,अखिलेश अशोक, नरेश, हरीश, सुरेंद्र, सौरभ सुरेंद्र, रमाकांत सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
| लखनऊ। आरएसएस की लक्ष्मण शाखा विशाल खंड तीन गोमती नगर में वार्षिक उत्सव, बसंत पंचमी पूजन,और गणतंत्र दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रमों और सहभोज का आयोजन किया गया। सेवा भारती के देवेन्द्र स्वरूप ने कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होने संघ के संबंध में विस्तार से बताया। कहा कि संघ को समझने के लिए नियमित लगने वाली शाखा में पहुँचना आवश्यक है। इसके बिना संघ के विषय में किसी प्रकार की धारणा बनाना निरर्थक है। कैलाश चंद्र शर्मा और मनीराम ने देशभक्ति के गीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर नगर कार्यवाह राजीव, सह नगर कार्यवाह गौरव शाखा कार्यवाह रामजनम, मुख्य शिक्षक हेमन्त, बीएल तिवारी नगीना प्रसाद,अखिलेश अशोक, नरेश, हरीश, सुरेंद्र, सौरभ सुरेंद्र, रमाकांत सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे। |
बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में हैं जो हॉलीवुड की या फिर साउथ फिल्मों की रीमेक हैं। आज हम आपको वो फिल्में बताएंगे जो कोरियन फिल्मों की रिमेक है।
इलियाना, प्रियंका और रणबीर कपूर की फिल्म बर्फी को लोगों ने बहुत प्यार दिया। ये फिल्म कोरियन फिल्म Lover's Concerto की रीमेक है।
कटरीना कैफ, सलमान खान की ये फिल्म कोरियन फिल्म Ode to My Father की रीमेक है, हालांकि भारत बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई।
फिल्म आवारापन की कहानी को लोगों ने बहुत पसंद किया था। बता दें कि ये फिल्म कोरियन फिल्म A Bittersweet Life की रीमेक है।
श्रद्धा कपूर, रितेश देशमुख और सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म एक विलेन की कहानी भी कोरियन फिल्म I Saw the Devil से मिलती जुलती है।
फिल्म दो लफ्जों की कहानी भी कोरियन फिल्म Always की रीमेक है। दर्शकों ने इस फिल्म को काफी प्यार दिया था।
कार्तिक आर्यन की फिल्म धमाका की कहानी भी कोरियन फिल्म से ली गई थी, जिसका नाम The Terror Live था।
सलमान खान की फिल्म राधे को लोगों ने कुछ ज्यादा खास प्यार नहीं दिया लेकिन क्या आप जानते हैं एक्टर की ये फिल्म The Outlaws की रीमेक है।
| बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में हैं जो हॉलीवुड की या फिर साउथ फिल्मों की रीमेक हैं। आज हम आपको वो फिल्में बताएंगे जो कोरियन फिल्मों की रिमेक है। इलियाना, प्रियंका और रणबीर कपूर की फिल्म बर्फी को लोगों ने बहुत प्यार दिया। ये फिल्म कोरियन फिल्म Lover's Concerto की रीमेक है। कटरीना कैफ, सलमान खान की ये फिल्म कोरियन फिल्म Ode to My Father की रीमेक है, हालांकि भारत बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। फिल्म आवारापन की कहानी को लोगों ने बहुत पसंद किया था। बता दें कि ये फिल्म कोरियन फिल्म A Bittersweet Life की रीमेक है। श्रद्धा कपूर, रितेश देशमुख और सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म एक विलेन की कहानी भी कोरियन फिल्म I Saw the Devil से मिलती जुलती है। फिल्म दो लफ्जों की कहानी भी कोरियन फिल्म Always की रीमेक है। दर्शकों ने इस फिल्म को काफी प्यार दिया था। कार्तिक आर्यन की फिल्म धमाका की कहानी भी कोरियन फिल्म से ली गई थी, जिसका नाम The Terror Live था। सलमान खान की फिल्म राधे को लोगों ने कुछ ज्यादा खास प्यार नहीं दिया लेकिन क्या आप जानते हैं एक्टर की ये फिल्म The Outlaws की रीमेक है। |
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))
लंदनः
विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल जीतने के लिए अच्छी स्थिति में पहुंची ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 270/8 पर अपनी पारी घोषित की और भारत को 444 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य दिया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।
विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट एक्शन के एक और दिन में नाबाद 71 रनों की साझेदारी की और भारत को चौथे दिन स्टंप्स तक 164/3 पर ले गए, जिससे भारत को फाइनल में 280 रनों की जरूरत है। फाइनल मैच रविवार को होगा।
कोहली केवल 60 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाकर शानदार स्थिति में थे। दूसरी ओर, रहाणे 20 पर नाबाद रहे। दोनों मैच को रोमांचक अंत की ओर ले गए, जबकि ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य है भारत को जल्दी आउट करना।
चेतेश्वर पुजारा ने अंतिम सत्र की शुरुआत स्कॉट बोलैंड के प्वॉइंट ऑफ चार रन पर एक तेज कट बनाकर की, जबकि भीतरी किनारा लेते हुए एक और चौका लगाया। रोहित शर्मा ने बेहतरीन टच जारी रखा, मिचेल स्टार्क की गेंद को खूबसूरती से खींचकर ड्राइव करके उन्होंने भारत का अर्धशतक सिर्फ नौ ओवर में पूरा किया।
पुजारा ने स्टार्क के खिलाफ बाउंड्री के लिए धीरे से क्लिपिंग और ड्राइव किया। इसके बाद कमिंस को फ्लिक करके एक और चौका लगाया। रोहित ने स्टार्क की गेंद पर कट शॉट और ग्रीन के खिलाफ पुल करके चौके लगाकर अर्धशतक पूरा किया।
लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने जल्दी-जल्दी इन दोनों को आउट कर दिया। रोहित ने विकेट के चारों ओर से नाथन लियोन के खिलाफ स्वीप करने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले के नीचे से निकलकर एलबीडब्ल्यू हो गई। इस बीच, पुजारा ने कमिंस के खिलाफ अपर-कट करने की कोशिश की, लेकिन विकेटकीपर एलेक्स केरी ने सतर्कता दिखाई।
कोहली ने शानदार ऑफ-ड्राइव के अलावा मिड-ऑन से बैकवर्ड स्क्वायर लेग पांच चौके लगाए। रहाणे दाहिनी तर्जनी में चोट के बावजूद खेल रहे थे। कोहली ने फिर से स्टार्क के खिलाफ चौके के लिए ऑफ-ड्राइव किया और लियोन ने एक और चौका लगाकर दिन का अंत किया।
संक्षिप्त स्कोर :
ऑस्ट्रेलिया 469 और 270/8 घोषित। 84. 3 ओवर में (एलेक्स केरी नाबाद 66, मिचेल स्टार्क 41, रवींद्र जडेजा 3-58, मोहम्मद शमी 2-39) भारत को 296 और 40 ओवर में 164/3 (विराट कोहली नाबाद 44, रोहित शर्मा 43, नाथन लियोन 1-32, स्कॉट बोलैंड 1-38) 280 रनों की जरूरत।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
| ) लंदनः विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल जीतने के लिए अच्छी स्थिति में पहुंची ऑस्ट्रेलिया की टीम ने दो सौ सत्तर/आठ पर अपनी पारी घोषित की और भारत को चार सौ चौंतालीस रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य दिया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट एक्शन के एक और दिन में नाबाद इकहत्तर रनों की साझेदारी की और भारत को चौथे दिन स्टंप्स तक एक सौ चौंसठ/तीन पर ले गए, जिससे भारत को फाइनल में दो सौ अस्सी रनों की जरूरत है। फाइनल मैच रविवार को होगा। कोहली केवल साठ गेंदों पर नाबाद चौंतालीस रन बनाकर शानदार स्थिति में थे। दूसरी ओर, रहाणे बीस पर नाबाद रहे। दोनों मैच को रोमांचक अंत की ओर ले गए, जबकि ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य है भारत को जल्दी आउट करना। चेतेश्वर पुजारा ने अंतिम सत्र की शुरुआत स्कॉट बोलैंड के प्वॉइंट ऑफ चार रन पर एक तेज कट बनाकर की, जबकि भीतरी किनारा लेते हुए एक और चौका लगाया। रोहित शर्मा ने बेहतरीन टच जारी रखा, मिचेल स्टार्क की गेंद को खूबसूरती से खींचकर ड्राइव करके उन्होंने भारत का अर्धशतक सिर्फ नौ ओवर में पूरा किया। पुजारा ने स्टार्क के खिलाफ बाउंड्री के लिए धीरे से क्लिपिंग और ड्राइव किया। इसके बाद कमिंस को फ्लिक करके एक और चौका लगाया। रोहित ने स्टार्क की गेंद पर कट शॉट और ग्रीन के खिलाफ पुल करके चौके लगाकर अर्धशतक पूरा किया। लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने जल्दी-जल्दी इन दोनों को आउट कर दिया। रोहित ने विकेट के चारों ओर से नाथन लियोन के खिलाफ स्वीप करने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले के नीचे से निकलकर एलबीडब्ल्यू हो गई। इस बीच, पुजारा ने कमिंस के खिलाफ अपर-कट करने की कोशिश की, लेकिन विकेटकीपर एलेक्स केरी ने सतर्कता दिखाई। कोहली ने शानदार ऑफ-ड्राइव के अलावा मिड-ऑन से बैकवर्ड स्क्वायर लेग पांच चौके लगाए। रहाणे दाहिनी तर्जनी में चोट के बावजूद खेल रहे थे। कोहली ने फिर से स्टार्क के खिलाफ चौके के लिए ऑफ-ड्राइव किया और लियोन ने एक और चौका लगाकर दिन का अंत किया। संक्षिप्त स्कोर : ऑस्ट्रेलिया चार सौ उनहत्तर और दो सौ सत्तर/आठ घोषित। चौरासी. तीन ओवर में भारत को दो सौ छियानवे और चालीस ओवर में एक सौ चौंसठ/तीन दो सौ अस्सी रनों की जरूरत। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी. |
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा एवं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान-अमेरिका परमाणु समझौता कार्यक्रम को लेकर विवाद पैदा हो गया है. अमेरिकी कांग्रेस में ऐतिहासिक संबोधन की पूर्व संध्या पर नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को कम करने के लिए किए जा रहे 'परमाणु समझौता कार्यक्रम' से इजरायल के अस्तित्व को खतरा हो सकता है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी अपने ईरानी समकक्ष मोहम्मद जावद जरीफ के साथ स्विटजरलैंड में मीटिंग कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इजरायली पीएम के बयान का करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के कथित खतरे को रोकने के लिए परमाणु समझौता किया जाना सबसे अच्छा तरीका है. उन्होंने कहा कि इस मामले में नेतन्याहू के पुरानी सोच ठीक नहीं थी. लेकिन दोनों नेताओं ने अमेरिका-इजरायल गठबंधन के मजबूत बने रहने की बात कही. वहीं यूएन में यूएस एंबेसडर सामांथा पावर ने नेतन्याहू के विरोध का जवाब देते हुए कहा, 'अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं देगा. '
नेतन्याहू ने कहा 'करता हुं ओबामा की इज्जत'
| अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा एवं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान-अमेरिका परमाणु समझौता कार्यक्रम को लेकर विवाद पैदा हो गया है. अमेरिकी कांग्रेस में ऐतिहासिक संबोधन की पूर्व संध्या पर नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को कम करने के लिए किए जा रहे 'परमाणु समझौता कार्यक्रम' से इजरायल के अस्तित्व को खतरा हो सकता है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी अपने ईरानी समकक्ष मोहम्मद जावद जरीफ के साथ स्विटजरलैंड में मीटिंग कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इजरायली पीएम के बयान का करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के कथित खतरे को रोकने के लिए परमाणु समझौता किया जाना सबसे अच्छा तरीका है. उन्होंने कहा कि इस मामले में नेतन्याहू के पुरानी सोच ठीक नहीं थी. लेकिन दोनों नेताओं ने अमेरिका-इजरायल गठबंधन के मजबूत बने रहने की बात कही. वहीं यूएन में यूएस एंबेसडर सामांथा पावर ने नेतन्याहू के विरोध का जवाब देते हुए कहा, 'अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं देगा. ' नेतन्याहू ने कहा 'करता हुं ओबामा की इज्जत' |
नई दिल्ली(एजेंसी): जियो प्लेटफॉर्म्स और फेसबुक डील के कुछ ही दिनों बाद जियो प्लेटफॉर्म्स ने एक और बड़ी डील का एलान किया है. अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म सिल्वरलेक ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 1 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी खरीदी है. इसके लिए सिल्वरलेक ने रिलायंस जियो में 5655. 75 करोड़ डॉलर यानी 5656 करोड़ डॉलर का निवेश किया है.
रिलायंस जियो की सिल्वरलेक के साथ ये डील जियो के फेसबुक सौदे के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम पर हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सिल्वरलेक डील के हिसाब से रिलायंस जियो की वैल्यू देखें तो ये 65 अरब डॉलर हो गई है. इस डील को फेसबुक डील के हिसाब से 12. 5 फीसदी प्रीमियम पर किया गया है. इस डील के बाद रिलायंस जियो में सिल्वरलेक की हिस्सेदारी 1. 15 फीसदी पर जा पहुंचेगी.
22 अप्रैल को फेसबुक ने रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में 9. 99 फीसदी हिस्सेदारी 43,574 करोड़ रुपये में खरीदी थी. इसके बाद रिलायंस जियो के प्लेटफॉर्म्स पर फेसबुक की सर्विसेज के लिए करार हुआ था. यह भारत में किसी कंपनी में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश था और भारत में ये सोशल मीडिया की सबसे बड़ी डील है.
सिल्वर लेक टेक्नोलॉजी अमेरिकी पीई इक्विटी फर्म है और ये प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों में निवेश करती है. ऐसे निवेश करने के मामले में यह दुनिया की टॉप मोस्ट कंपनियों में शामिल है. सिल्वर लेक का संयुक्त एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम 43 अरब डॉलर का है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पहले ही कहा था कि जियो के प्लेटफॉर्म्स में आगे चलकर और हिस्सेदारी बेची जाएगी. 30 अप्रैल को हुई कंपनी की बोर्ड बैठक में भी इस बात को दोहराया गया था. इस बैठक से पहले ही कंपनी का बयान आया था कि रिलायंस जियो में करीब 10 फीसदी और हिस्सा बेचने के लिए कंपनी आगे और सौदे करेगी. अब सिल्वरलेक के साथ हुए इस सौदे को इसी कड़ी में एक कदम माना जा रहा है.
| नई दिल्ली: जियो प्लेटफॉर्म्स और फेसबुक डील के कुछ ही दिनों बाद जियो प्लेटफॉर्म्स ने एक और बड़ी डील का एलान किया है. अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म सिल्वरलेक ने जियो प्लेटफॉर्म्स में एक फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी खरीदी है. इसके लिए सिल्वरलेक ने रिलायंस जियो में पाँच हज़ार छः सौ पचपन. पचहत्तर करोड़ डॉलर यानी पाँच हज़ार छः सौ छप्पन करोड़ डॉलर का निवेश किया है. रिलायंस जियो की सिल्वरलेक के साथ ये डील जियो के फेसबुक सौदे के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम पर हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सिल्वरलेक डील के हिसाब से रिलायंस जियो की वैल्यू देखें तो ये पैंसठ अरब डॉलर हो गई है. इस डील को फेसबुक डील के हिसाब से बारह. पाँच फीसदी प्रीमियम पर किया गया है. इस डील के बाद रिलायंस जियो में सिल्वरलेक की हिस्सेदारी एक. पंद्रह फीसदी पर जा पहुंचेगी. बाईस अप्रैल को फेसबुक ने रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में नौ. निन्यानवे फीसदी हिस्सेदारी तैंतालीस,पाँच सौ चौहत्तर करोड़ रुपये में खरीदी थी. इसके बाद रिलायंस जियो के प्लेटफॉर्म्स पर फेसबुक की सर्विसेज के लिए करार हुआ था. यह भारत में किसी कंपनी में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश था और भारत में ये सोशल मीडिया की सबसे बड़ी डील है. सिल्वर लेक टेक्नोलॉजी अमेरिकी पीई इक्विटी फर्म है और ये प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों में निवेश करती है. ऐसे निवेश करने के मामले में यह दुनिया की टॉप मोस्ट कंपनियों में शामिल है. सिल्वर लेक का संयुक्त एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम तैंतालीस अरब डॉलर का है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पहले ही कहा था कि जियो के प्लेटफॉर्म्स में आगे चलकर और हिस्सेदारी बेची जाएगी. तीस अप्रैल को हुई कंपनी की बोर्ड बैठक में भी इस बात को दोहराया गया था. इस बैठक से पहले ही कंपनी का बयान आया था कि रिलायंस जियो में करीब दस फीसदी और हिस्सा बेचने के लिए कंपनी आगे और सौदे करेगी. अब सिल्वरलेक के साथ हुए इस सौदे को इसी कड़ी में एक कदम माना जा रहा है. |
कोई, शायद बास से ज्यादा आम मछली है। किसी भी तालाब या जंगल झील, नदी-nevelichka और विशेष रूप से बड़े जलाशय बड़े पैमाने पर Krasnopyorov इस शिकारी आबादी।
सर्दी के मौसम की शुरुआत में, यह मछली सक्रिय है, कईले जाता है। ठंड बसेरा में अक्सर एक शब्द है, जहां वे हाल ही में खुले पानी पर पकड़ा है में घास या नरकट के टापू के पास तटीय उथले पानी का शिकार करते हैं।
यहां इस धारीदार निवासियों के काटनेपानी के नीचे दुनिया उच्चतम स्तर पर अक्सर हो सकता है, - बर्फ की सतह पर। इन स्थानों में, यह "काम" करने के लिए आसान पैकिंग की योजना बना सबसे अच्छा है। हालांकि, गड्ढों मछुआरे के किनारे पर भारी चारा,, संतुलन की जरूरत है उदाहरण के लिए, के बारे में पांच या सात सेंटीमीटर लंबी और कठिन नीचे प्रजातियों, इस उत्पादन के लिए विशेष रूप से डिजाइन के साथ baubles।
पर्च एक स्कूली शिक्षा शिकारी है। इस मछली के लिए अपनी सक्रिय खिला भोजन के दौरान एक तलना है। जाहिर है, इसलिए संतुलन पर सर्दियों में बास मछली पकड़ने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। सब के बाद, यह चारा हर किसी की तुलना में बेहतर तलना नकल। इस मामले में, यह प्रासंगिक है केवल पानी में कोई गड़बड़ी या अन्तर्जलीय वनस्पति की झाड़ियों यदि। अन्यथा, हुक अपरिहार्य हैं।
सर्दियों में पेच पर, यह रिग विशेष रूप से प्रभावी है। इसका कारण यह है कि इसे "शोर" माना जाता है, और पर्याप्त शक्तिशाली उत्तेजना बनाने की इसकी क्षमता के लिए धन्यवाद। यह ऐसी परिस्थिति है जो शिकारी को आकर्षित करती है, जिसके लिए सर्दियों की तरह भोजन के मामले में ऐसा कठिन समय आता है।
स्पिनरों के बीच एक बैलेंसर पर एक पेच पकड़नाहर साल यह अधिक से अधिक लोकप्रिय हो जाता है। हालांकि, कुछ, और विशेष रूप से नौसिखिए anglers के लिए विश्वास है कि यह काफी जटिल है और विशेष कौशल रास्ते की आवश्यकता है। इसके अलावा, पारंपरिक ज्ञान लंबे रहा है कि bloodworms के साथ एक जिग से कम सर्दियों catchability में एक बसेरा पर संतुलन, और कहा कि गियर पैक "काम करता है" नग्न चारा की तुलना में बेहतर। लेकिन इस दृष्टिकोण गलत तुलना में अधिक है, खासकर जब मछली पकड़ने इस हिंसक कैदियों जलाशयों की गतिविधि के मौसम में जगह लेता है।
सर्दियों में बैलेंसर पर पर्च आपको चारा पकड़ने की जरूरत है,सामान्य आवश्यकताओं जो बहुत सरल हैं। यह विश्वसनीयता, कॉम्पैक्टनेस और, ज़ाहिर है, हल्कापन। इस उद्देश्य के लिए, एक neoprene या कॉर्क हैंडल के साथ एक रॉड सबसे अच्छा है। चाबुक के साथ गियर की कुल लंबाई लगभग तीस या चालीस सेंटीमीटर अधिकतम होनी चाहिए - सर्दियों जैसे मौसम के लिए इष्टतम आकार। घुमावदार पर एक पेच पकड़ने से बटन ब्रेक से लैस एक कॉइल की उपस्थिति होती है। टूलींग के इस घटक की प्रगति चिकनी और आसान होनी चाहिए। बैलेंस बार के वजन के नीचे मछली पकड़ने की रेखा देने में सक्षम होने के लिए आखिरी विशेषता की आवश्यकता है।
अलार्म, बदले में, आसानी से अनुमति दी जानी चाहिएऔर जल्दी से सभी जलवाही स्तर पकड़ा है, साथ ही, विश्वसनीय स्वीप प्रदर्शन करने के लिए और, ज़ाहिर है एक उत्पादक खेल चारा प्रदान करते हैं। पहले दो आवश्यकताओं मुख्य रूप से तार से जुड़े हुए हैं - अपने पाठ्यक्रम का व्यास चिकनाई, साथ ही ब्रेक, बाद की विश्वसनीयता के लिए - केवल एक सचेतक, जो न केवल मजबूत होना चाहिए, लेकिन मुश्किल के उपाय में, टॉस के बाद अवशिष्ट कंपन देने नहीं। अन्यथा, यह pokleve प्रभावित कर सकता है।
इस बारे में राय कि क्या बैलेंसर को सर्दियों में एक पेच की आवश्यकता हैएक नोड, विचलन की उपस्थिति। आप निश्चित रूप से इसके बिना कर सकते हैं, लेकिन यह अनजान काटने का कारण बन सकता है, जिसकी संख्या अनुभवी एंग्लर्स के मुताबिक काफी बड़ी होगी। इसलिए rigging का यह घटक अभी भी जरूरी है।
एक विस्तृत विविधता से एक नोड बनाया जा सकता हैसामग्री - एक कॉइल वसंत या एक मोटी लैवसन फिल्म से, निप्पल या चमकीले रंगों के सिलिकॉन की एक ट्यूब से। यह इस्तेमाल चारा के वजन से मेल खाता है। सर्दियों में बैलेंसर पेच पूरी तरह से "काम करता है" जो कि सही ढंग से काटने को दिखाता है और उस क्षण को ठीक करता है जब चारा नीचे पहुंचता है, हुक पर हो जाता है। इसके अलावा, स्थिरता में इस टूलींग में कम से कम प्रकोप तत्व होना चाहिए। शेष राशि को भरने पर ओवरलैपिंग लाइनों को बाहर करने के लिए यह आवश्यक है।
इस संबंध में, उन्होंने खुद को साबित कर दिया हैसिलिकॉन पांच से छह सेंटीमीटर की लंबाई के साथ nods। धातु विकल्पों के मुकाबले उनका अतिरिक्त लाभ यह तथ्य है कि वे न केवल जंग नहीं करते हैं, बल्कि खेल के दौरान अपने स्वयं के परिश्रम नहीं देते हैं।
सर्दियों में पेच पर, अनुभवी एंगलर्स का उपयोग करेंपांच सेमी तक की लंबाई वाले वेरिएंट और उथले पानी में मछली पकड़ने के लिए तीन-, और गहराई में (नौ मीटर तक) - पांच सेंटीमीटर उपयुक्त हैं। यह दिलचस्प है कि शरीर की एक अलग लंबाई या उत्कृष्ट आकार के साथ, बैलेंसर खेल लगभग हमेशा समान होता है।
फ़्लिप करते समय, चारा विचलित होना चाहिएएक साथ ऊपर और तरफ, और फिर, चारों ओर मोड़, प्रारंभिक स्थिति पर लौटें। हालांकि, व्यापक शरीर वाले प्रकार थोड़ी देर की योजना बना रहे हैं, इसके अतिरिक्त, उनके पास एक चिकना गेम है। इसलिए, वे, कई की राय में, सबसे आकर्षक बैलेंसर्स हैं। सर्दियों में पेच पर, कई लोगों द्वारा चारा की एक विशेषता को प्रासंगिक माना जाता है।
इस विशेषता के लिए, अक्सरअनुभवी एंग्लर शांत प्राकृतिक रंगों के साथ बाइट्स का उपयोग करते हैं। कुछ का मानना है कि पेच के लिए सबसे आकर्षक बैलेंसर्स रंगीन हैं, साथ ही साथ शिकार भी हैं। हालांकि, यह स्थापित किया गया है कि पांच से नौ मीटर की गहराई पर मछली पकड़ने पर, यह शिकारी "एसिड" - जहरीले पीले, हरे और अन्य समान रूप से उज्ज्वल रंगों के बेहतर बाइट लेता है।
इसलिए, एक एंग्लर अपने स्टॉक में होना चाहिएसाइट पर निर्धारित करने के लिए विभिन्न आकारों और रंगों में विविधताएं जो उपलब्ध हैं - एक विशेष तालाब के लिए प्रति चरखी बैलेंसर्स प्रति पेच।
कई एंग्लरों के मुताबिक, यह आवेदन करने लायक हैकेवल monophilous। अलग-अलग तार, यहां तक कि जिन पर एक नोट "आइस" है, इस तरह के मछली पकड़ने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। Wattles का मुख्य दोष यह है कि कुछ "winterers" कम तापमान पर ठंड लगने पर विचार करें, जो मछली पकड़ने के दौरान बहुत असहज है। जब बैलेंसर पर मछली पकड़ना पेच होता है, तो प्रस्तावित उत्पादन के द्रव्यमान के आधार पर लाइन का व्यास चुना जाना चाहिए।
किलोग्राम शिकारी पकड़ने के लिए, आप निश्चित रूप से कर सकते हैं,एक 0.20 मिमी व्यास के साथ एक उपकरण का प्रयोग करें। हालांकि, अधिकांश रूसी जलाशयों के लिए, यह पचास मीटर तक की रील पर 0.14 से 0.16 मिमी लंबी मछली पकड़ने की रेखा को हवा में लाने के लिए पर्याप्त होगा।
इस मामले में, बैलेंस बार को सुरक्षित करने के लिए,इसे बेहतर नहीं करना बेहतर है, लेकिन एक swivel के बिना एक छोटी बकसुआ का उपयोग करें। यह एक लूप के साथ बैलेंसर की पीसने को समाप्त करता है। यद्यपि अपेक्षाकृत मोटी "मोनोफिलामेंट" के साथ आप सीधे कॉर्ड को चारा बांध सकते हैं, और किसी भी गैर-कठोर गाँठ, उदाहरण के लिए, रैपाल्कोव्स्की। बैलेंस व्हील गेम को बाधित न करने के लिए यह आवश्यक है।
यह समझा जाना चाहिए कि यहां तक कि सर्वश्रेष्ठ बैलेंसर्स भीसर्दियों में पर्च उचित परिणाम नहीं लाएगा, अगर एंग्लर तकनीक को नहीं जानता है। इस चारा के खेल में पैडल के लगातार स्ट्रोक और उनके बीच मनाए गए विरामों के विकल्प शामिल हैं। उत्पादन गतिविधि क्या है और किसी दिए गए जलाशय में कौन सी स्थितियों के आधार पर तकनीक बहुत विविध हो सकती है।
सर्दी खेल संतुलन पहिया के लिए मूल रणनीतिअगलाः नीचे स्पर्श करें, फिर जमीन सेंटीमीटर पर दस से पंद्रह तक चारा उठाएं और गतिहीन रखें। उसके बाद हम बढ़ते त्वरण, कार्पल स्विंग के साथ चिकनी बनाते हैं। मछली पकड़ने की छड़ी के शीर्ष की उठाना तीन सौ मिलीमीटर होना चाहिए।
संतुलन पक्ष के लिए एक छलांग बनाता है, और फिर शीर्ष पर। फिर मछुआरे एक डंप बनाता है, और रॉड का शीर्ष जल्दी से अपनी मूल स्थिति पर लौटता है - जो कि वृद्धि से पहले था। एक मोड़ के लिए एक अनुकूल अनुकूल स्थितियों को बनाने के लिए यह पैंतरेबाज़ी आवश्यक है। फिर बैलेंसर चारों ओर घूमता है, इसकी मूल स्थिति में लौटता है। उसके बाद, एक नया स्विंग / लिफ्ट फिर से बनाया जाता है। शीतकालीन मछली पकड़ने प्रति पेच के दौरान युद्धाभ्यास के बीच रोकें - दो से पांच सेकंड तक।
यदि धारीदार शिकारी का काटने कमजोर होता है, तो इसकाआप कई सक्रिय कर सकते हैं, अगर सामान्य troynichka संतुलन लटका-संस्करण "नेत्र" के बजाय, उज्ज्वल प्लास्टिक से बना। इससे भी अधिक प्रभावी, अनुभवी anglers के अनुसार मक्खियों का प्रयोग करेंगे। इस प्रकार यह किसी भी हो सकता है, यहां तक कि एक हुक forend लाल या काले धागे घुमावदार के रूप में, गोंद छोटी बूंद तय की।
खेल की जो भी तकनीक मछुआरे का बैलेंसर हैपालन करने के लिए, उसे याद रखना होगा कि पेच को न केवल नीचे की मछली के लिए पानी की आदतों की परतों में, बल्कि मध्यम गहराई में, और कभी-कभी बर्फ के बहुत किनारे पर भी देखा जाना चाहिए। इसलिए, आपको पहले सभी क्षितिजों को पकड़ना होगा और उसके बाद ही अगले छेद पर जाना होगा।
| कोई, शायद बास से ज्यादा आम मछली है। किसी भी तालाब या जंगल झील, नदी-nevelichka और विशेष रूप से बड़े जलाशय बड़े पैमाने पर Krasnopyorov इस शिकारी आबादी। सर्दी के मौसम की शुरुआत में, यह मछली सक्रिय है, कईले जाता है। ठंड बसेरा में अक्सर एक शब्द है, जहां वे हाल ही में खुले पानी पर पकड़ा है में घास या नरकट के टापू के पास तटीय उथले पानी का शिकार करते हैं। यहां इस धारीदार निवासियों के काटनेपानी के नीचे दुनिया उच्चतम स्तर पर अक्सर हो सकता है, - बर्फ की सतह पर। इन स्थानों में, यह "काम" करने के लिए आसान पैकिंग की योजना बना सबसे अच्छा है। हालांकि, गड्ढों मछुआरे के किनारे पर भारी चारा,, संतुलन की जरूरत है उदाहरण के लिए, के बारे में पांच या सात सेंटीमीटर लंबी और कठिन नीचे प्रजातियों, इस उत्पादन के लिए विशेष रूप से डिजाइन के साथ baubles। पर्च एक स्कूली शिक्षा शिकारी है। इस मछली के लिए अपनी सक्रिय खिला भोजन के दौरान एक तलना है। जाहिर है, इसलिए संतुलन पर सर्दियों में बास मछली पकड़ने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। सब के बाद, यह चारा हर किसी की तुलना में बेहतर तलना नकल। इस मामले में, यह प्रासंगिक है केवल पानी में कोई गड़बड़ी या अन्तर्जलीय वनस्पति की झाड़ियों यदि। अन्यथा, हुक अपरिहार्य हैं। सर्दियों में पेच पर, यह रिग विशेष रूप से प्रभावी है। इसका कारण यह है कि इसे "शोर" माना जाता है, और पर्याप्त शक्तिशाली उत्तेजना बनाने की इसकी क्षमता के लिए धन्यवाद। यह ऐसी परिस्थिति है जो शिकारी को आकर्षित करती है, जिसके लिए सर्दियों की तरह भोजन के मामले में ऐसा कठिन समय आता है। स्पिनरों के बीच एक बैलेंसर पर एक पेच पकड़नाहर साल यह अधिक से अधिक लोकप्रिय हो जाता है। हालांकि, कुछ, और विशेष रूप से नौसिखिए anglers के लिए विश्वास है कि यह काफी जटिल है और विशेष कौशल रास्ते की आवश्यकता है। इसके अलावा, पारंपरिक ज्ञान लंबे रहा है कि bloodworms के साथ एक जिग से कम सर्दियों catchability में एक बसेरा पर संतुलन, और कहा कि गियर पैक "काम करता है" नग्न चारा की तुलना में बेहतर। लेकिन इस दृष्टिकोण गलत तुलना में अधिक है, खासकर जब मछली पकड़ने इस हिंसक कैदियों जलाशयों की गतिविधि के मौसम में जगह लेता है। सर्दियों में बैलेंसर पर पर्च आपको चारा पकड़ने की जरूरत है,सामान्य आवश्यकताओं जो बहुत सरल हैं। यह विश्वसनीयता, कॉम्पैक्टनेस और, ज़ाहिर है, हल्कापन। इस उद्देश्य के लिए, एक neoprene या कॉर्क हैंडल के साथ एक रॉड सबसे अच्छा है। चाबुक के साथ गियर की कुल लंबाई लगभग तीस या चालीस सेंटीमीटर अधिकतम होनी चाहिए - सर्दियों जैसे मौसम के लिए इष्टतम आकार। घुमावदार पर एक पेच पकड़ने से बटन ब्रेक से लैस एक कॉइल की उपस्थिति होती है। टूलींग के इस घटक की प्रगति चिकनी और आसान होनी चाहिए। बैलेंस बार के वजन के नीचे मछली पकड़ने की रेखा देने में सक्षम होने के लिए आखिरी विशेषता की आवश्यकता है। अलार्म, बदले में, आसानी से अनुमति दी जानी चाहिएऔर जल्दी से सभी जलवाही स्तर पकड़ा है, साथ ही, विश्वसनीय स्वीप प्रदर्शन करने के लिए और, ज़ाहिर है एक उत्पादक खेल चारा प्रदान करते हैं। पहले दो आवश्यकताओं मुख्य रूप से तार से जुड़े हुए हैं - अपने पाठ्यक्रम का व्यास चिकनाई, साथ ही ब्रेक, बाद की विश्वसनीयता के लिए - केवल एक सचेतक, जो न केवल मजबूत होना चाहिए, लेकिन मुश्किल के उपाय में, टॉस के बाद अवशिष्ट कंपन देने नहीं। अन्यथा, यह pokleve प्रभावित कर सकता है। इस बारे में राय कि क्या बैलेंसर को सर्दियों में एक पेच की आवश्यकता हैएक नोड, विचलन की उपस्थिति। आप निश्चित रूप से इसके बिना कर सकते हैं, लेकिन यह अनजान काटने का कारण बन सकता है, जिसकी संख्या अनुभवी एंग्लर्स के मुताबिक काफी बड़ी होगी। इसलिए rigging का यह घटक अभी भी जरूरी है। एक विस्तृत विविधता से एक नोड बनाया जा सकता हैसामग्री - एक कॉइल वसंत या एक मोटी लैवसन फिल्म से, निप्पल या चमकीले रंगों के सिलिकॉन की एक ट्यूब से। यह इस्तेमाल चारा के वजन से मेल खाता है। सर्दियों में बैलेंसर पेच पूरी तरह से "काम करता है" जो कि सही ढंग से काटने को दिखाता है और उस क्षण को ठीक करता है जब चारा नीचे पहुंचता है, हुक पर हो जाता है। इसके अलावा, स्थिरता में इस टूलींग में कम से कम प्रकोप तत्व होना चाहिए। शेष राशि को भरने पर ओवरलैपिंग लाइनों को बाहर करने के लिए यह आवश्यक है। इस संबंध में, उन्होंने खुद को साबित कर दिया हैसिलिकॉन पांच से छह सेंटीमीटर की लंबाई के साथ nods। धातु विकल्पों के मुकाबले उनका अतिरिक्त लाभ यह तथ्य है कि वे न केवल जंग नहीं करते हैं, बल्कि खेल के दौरान अपने स्वयं के परिश्रम नहीं देते हैं। सर्दियों में पेच पर, अनुभवी एंगलर्स का उपयोग करेंपांच सेमी तक की लंबाई वाले वेरिएंट और उथले पानी में मछली पकड़ने के लिए तीन-, और गहराई में - पांच सेंटीमीटर उपयुक्त हैं। यह दिलचस्प है कि शरीर की एक अलग लंबाई या उत्कृष्ट आकार के साथ, बैलेंसर खेल लगभग हमेशा समान होता है। फ़्लिप करते समय, चारा विचलित होना चाहिएएक साथ ऊपर और तरफ, और फिर, चारों ओर मोड़, प्रारंभिक स्थिति पर लौटें। हालांकि, व्यापक शरीर वाले प्रकार थोड़ी देर की योजना बना रहे हैं, इसके अतिरिक्त, उनके पास एक चिकना गेम है। इसलिए, वे, कई की राय में, सबसे आकर्षक बैलेंसर्स हैं। सर्दियों में पेच पर, कई लोगों द्वारा चारा की एक विशेषता को प्रासंगिक माना जाता है। इस विशेषता के लिए, अक्सरअनुभवी एंग्लर शांत प्राकृतिक रंगों के साथ बाइट्स का उपयोग करते हैं। कुछ का मानना है कि पेच के लिए सबसे आकर्षक बैलेंसर्स रंगीन हैं, साथ ही साथ शिकार भी हैं। हालांकि, यह स्थापित किया गया है कि पांच से नौ मीटर की गहराई पर मछली पकड़ने पर, यह शिकारी "एसिड" - जहरीले पीले, हरे और अन्य समान रूप से उज्ज्वल रंगों के बेहतर बाइट लेता है। इसलिए, एक एंग्लर अपने स्टॉक में होना चाहिएसाइट पर निर्धारित करने के लिए विभिन्न आकारों और रंगों में विविधताएं जो उपलब्ध हैं - एक विशेष तालाब के लिए प्रति चरखी बैलेंसर्स प्रति पेच। कई एंग्लरों के मुताबिक, यह आवेदन करने लायक हैकेवल monophilous। अलग-अलग तार, यहां तक कि जिन पर एक नोट "आइस" है, इस तरह के मछली पकड़ने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। Wattles का मुख्य दोष यह है कि कुछ "winterers" कम तापमान पर ठंड लगने पर विचार करें, जो मछली पकड़ने के दौरान बहुत असहज है। जब बैलेंसर पर मछली पकड़ना पेच होता है, तो प्रस्तावित उत्पादन के द्रव्यमान के आधार पर लाइन का व्यास चुना जाना चाहिए। किलोग्राम शिकारी पकड़ने के लिए, आप निश्चित रूप से कर सकते हैं,एक शून्य.बीस मिमी व्यास के साथ एक उपकरण का प्रयोग करें। हालांकि, अधिकांश रूसी जलाशयों के लिए, यह पचास मीटर तक की रील पर शून्य.चौदह से शून्य.सोलह मिमी लंबी मछली पकड़ने की रेखा को हवा में लाने के लिए पर्याप्त होगा। इस मामले में, बैलेंस बार को सुरक्षित करने के लिए,इसे बेहतर नहीं करना बेहतर है, लेकिन एक swivel के बिना एक छोटी बकसुआ का उपयोग करें। यह एक लूप के साथ बैलेंसर की पीसने को समाप्त करता है। यद्यपि अपेक्षाकृत मोटी "मोनोफिलामेंट" के साथ आप सीधे कॉर्ड को चारा बांध सकते हैं, और किसी भी गैर-कठोर गाँठ, उदाहरण के लिए, रैपाल्कोव्स्की। बैलेंस व्हील गेम को बाधित न करने के लिए यह आवश्यक है। यह समझा जाना चाहिए कि यहां तक कि सर्वश्रेष्ठ बैलेंसर्स भीसर्दियों में पर्च उचित परिणाम नहीं लाएगा, अगर एंग्लर तकनीक को नहीं जानता है। इस चारा के खेल में पैडल के लगातार स्ट्रोक और उनके बीच मनाए गए विरामों के विकल्प शामिल हैं। उत्पादन गतिविधि क्या है और किसी दिए गए जलाशय में कौन सी स्थितियों के आधार पर तकनीक बहुत विविध हो सकती है। सर्दी खेल संतुलन पहिया के लिए मूल रणनीतिअगलाः नीचे स्पर्श करें, फिर जमीन सेंटीमीटर पर दस से पंद्रह तक चारा उठाएं और गतिहीन रखें। उसके बाद हम बढ़ते त्वरण, कार्पल स्विंग के साथ चिकनी बनाते हैं। मछली पकड़ने की छड़ी के शीर्ष की उठाना तीन सौ मिलीमीटर होना चाहिए। संतुलन पक्ष के लिए एक छलांग बनाता है, और फिर शीर्ष पर। फिर मछुआरे एक डंप बनाता है, और रॉड का शीर्ष जल्दी से अपनी मूल स्थिति पर लौटता है - जो कि वृद्धि से पहले था। एक मोड़ के लिए एक अनुकूल अनुकूल स्थितियों को बनाने के लिए यह पैंतरेबाज़ी आवश्यक है। फिर बैलेंसर चारों ओर घूमता है, इसकी मूल स्थिति में लौटता है। उसके बाद, एक नया स्विंग / लिफ्ट फिर से बनाया जाता है। शीतकालीन मछली पकड़ने प्रति पेच के दौरान युद्धाभ्यास के बीच रोकें - दो से पांच सेकंड तक। यदि धारीदार शिकारी का काटने कमजोर होता है, तो इसकाआप कई सक्रिय कर सकते हैं, अगर सामान्य troynichka संतुलन लटका-संस्करण "नेत्र" के बजाय, उज्ज्वल प्लास्टिक से बना। इससे भी अधिक प्रभावी, अनुभवी anglers के अनुसार मक्खियों का प्रयोग करेंगे। इस प्रकार यह किसी भी हो सकता है, यहां तक कि एक हुक forend लाल या काले धागे घुमावदार के रूप में, गोंद छोटी बूंद तय की। खेल की जो भी तकनीक मछुआरे का बैलेंसर हैपालन करने के लिए, उसे याद रखना होगा कि पेच को न केवल नीचे की मछली के लिए पानी की आदतों की परतों में, बल्कि मध्यम गहराई में, और कभी-कभी बर्फ के बहुत किनारे पर भी देखा जाना चाहिए। इसलिए, आपको पहले सभी क्षितिजों को पकड़ना होगा और उसके बाद ही अगले छेद पर जाना होगा। |
केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों को मद्देनजर रखते हुए आगामी 16 मई तक बारामूला-बनिहाल रेल सेवा को बंद कर दिया गया है। जम्मू संभाग के बनिहाल से कश्मीर संभाग के बारामूला के बीच कल यानि मंगलवार 11 मई से 16 मई तक फिलहाल रेल सेवा को बंद करने का फैसला लिया गया है। फिरोजपुर रेल मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर द्वारा अनुरोध करने पर बनिहाल-बारामूला (कश्मीर घाटी) के बीच 7 ट्रेनों की सेवा 11 से 16 मई, 2021 के बीच पूर्ण रूप से रद्द की गई है।
पंजाब व हिमाचल प्रदेश में बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जिसे देखते हुए रेलवे की ओर से पठानकोट से जोगिन्द्र नगर को जाने वाली ट्रेनें 17 मई तक रद्द की गई है। फिरोजपुर मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि हिमाचल प्रदेश में कोरोना केस बढ़ने के कारण लोकल प्रशासन की ओर से ट्रेनों को बंद करने की मांग की गई है। जिसके तहत रेल मंडल की ओर से अब हिमाचल प्रदेश को जाने वाली ट्रेनें रद्द की गई हैं। ये आगामी आदेश तक रद्द रहेंगी।
गत वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 19 मार्च 2020 को कश्मीर घाटी में रेलवे सेवा को बंद कर दिया था। यहां यह भी बता दें कि 272 किलोमीटर लंबे रेलवे लाइन का निर्माण उत्तर रेलवे द्वारा 28 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर किया जा रहा है। पहला सेक्शन ऊधमपुर से कटड़ा को जोड़ता है और तीसरा सेक्शन बनिहाल को बारामूला से जोड़ता है। गत फरवरी महीने ऊधमपुर-बनिहाल रेल सेक्शन में जारी निर्माण कार्यों का नार्दन रेलवे के जनरल मैनेजर आशुतोष गंगल ने जायजा लिया था तथा उसके बाद ही 22 फरवरी को कश्मीर में 11 महीनों के लंबे अंतराल के उपरांत एक बार फिर से रेल सेवा शुरू हुई थी। इतने लंबे अंतराल के बाद फिर से रेल सेवा शुरू करने से पहले उत्तर रेलवे की ओर से बारामूला से बनिहाल क बीच 137 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर ड्राई रन किया गया था। इसके उपरांत ही बारामूला से बनिहाल के बीच रेल सेवा बहाल हो पाई थी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते कोरोना के केसों को देखते हुए रेल मंडल की ओर से केंद्र शासित प्रदेश में बारामूला-बनिहाल व बारामुल्ला-बडगाम के बीच चलने वाली सात ट्रेनों को 16 मई तक रद्द किया गया है। यह ट्रेनें नए आदेश जारी होने तक बंद रहेगी। जबकि पठानकोट से ऊधमपुर को जाने वाली ट्रेन अपने सही समय पर पठानकोट से ऊधमपुर रवाना की जा रही है।
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| केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों को मद्देनजर रखते हुए आगामी सोलह मई तक बारामूला-बनिहाल रेल सेवा को बंद कर दिया गया है। जम्मू संभाग के बनिहाल से कश्मीर संभाग के बारामूला के बीच कल यानि मंगलवार ग्यारह मई से सोलह मई तक फिलहाल रेल सेवा को बंद करने का फैसला लिया गया है। फिरोजपुर रेल मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर द्वारा अनुरोध करने पर बनिहाल-बारामूला के बीच सात ट्रेनों की सेवा ग्यारह से सोलह मई, दो हज़ार इक्कीस के बीच पूर्ण रूप से रद्द की गई है। पंजाब व हिमाचल प्रदेश में बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जिसे देखते हुए रेलवे की ओर से पठानकोट से जोगिन्द्र नगर को जाने वाली ट्रेनें सत्रह मई तक रद्द की गई है। फिरोजपुर मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि हिमाचल प्रदेश में कोरोना केस बढ़ने के कारण लोकल प्रशासन की ओर से ट्रेनों को बंद करने की मांग की गई है। जिसके तहत रेल मंडल की ओर से अब हिमाचल प्रदेश को जाने वाली ट्रेनें रद्द की गई हैं। ये आगामी आदेश तक रद्द रहेंगी। गत वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्नीस मार्च दो हज़ार बीस को कश्मीर घाटी में रेलवे सेवा को बंद कर दिया था। यहां यह भी बता दें कि दो सौ बहत्तर किलोग्राममीटर लंबे रेलवे लाइन का निर्माण उत्तर रेलवे द्वारा अट्ठाईस हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर किया जा रहा है। पहला सेक्शन ऊधमपुर से कटड़ा को जोड़ता है और तीसरा सेक्शन बनिहाल को बारामूला से जोड़ता है। गत फरवरी महीने ऊधमपुर-बनिहाल रेल सेक्शन में जारी निर्माण कार्यों का नार्दन रेलवे के जनरल मैनेजर आशुतोष गंगल ने जायजा लिया था तथा उसके बाद ही बाईस फरवरी को कश्मीर में ग्यारह महीनों के लंबे अंतराल के उपरांत एक बार फिर से रेल सेवा शुरू हुई थी। इतने लंबे अंतराल के बाद फिर से रेल सेवा शुरू करने से पहले उत्तर रेलवे की ओर से बारामूला से बनिहाल क बीच एक सौ सैंतीस किलोग्राममीटर लंबे ट्रैक पर ड्राई रन किया गया था। इसके उपरांत ही बारामूला से बनिहाल के बीच रेल सेवा बहाल हो पाई थी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते कोरोना के केसों को देखते हुए रेल मंडल की ओर से केंद्र शासित प्रदेश में बारामूला-बनिहाल व बारामुल्ला-बडगाम के बीच चलने वाली सात ट्रेनों को सोलह मई तक रद्द किया गया है। यह ट्रेनें नए आदेश जारी होने तक बंद रहेगी। जबकि पठानकोट से ऊधमपुर को जाने वाली ट्रेन अपने सही समय पर पठानकोट से ऊधमपुर रवाना की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
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अक्षय कुमार की फिल्म जॉली एलएलबी 2 अभी हिट हुई ही है कि उधर फिल्म के तीसरे पार्ट की घोषणा भी कर दी गई है। जॉली एलएलबी 2 के सक्सेस प्रेस कॉफ्रेंस में मौजूद फॉक्स स्टार के सीईओ ने कहा कि, जॉली एलएलबी 3 जरूर बनेगी।
हालांकि फिल्म में अक्षय कुमार या होंगे पार्ट वन के एक्टर अरशद वारसी, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन कोई शक नहीं बॉलीवुड फैंस इस खबर से बेहद खुश होंगे। क्योंकि जॉली एलएलबी और फिर जॉली एलएलबी 2 ने अपनी अलग कहानी के जरीए दर्शकों के दिलों में स्पेशल जगह बनाई है।
Fox Star CEO Vijay Singh has announced the third part of film Jolly LLB and said, "Yes, there will be Jolly LLB 3. "
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Jamshedpur: इंतजार खत्म हुआ. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर अपना बहुप्रतीक्षित टाटा न्यू सुपर ऐप लांच किया. यह सुपर ऐप टाटा के प्रत्येक ब्रांड को उसके प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा और न्यूकॉइन्स नामक एक इनाम की पेशकश करेगा. NeuCoins को इसके सभी ब्रांड्स के साथ-साथ फिजिकल स्टोर्स पर भी कमाया जा सकता है. टाटा न्यू के उपयोगकर्ता इस एक ऐप पर एयरएशिया इंडिया, बिगबास्केट, क्रोमा, टाटा क्लिक, आईएचसीएल, वेस्टसाइड और अधिक जैसे ब्रांडों का पता लगाने में सक्षम होंगे.
इस ऐप की "श्रेष्ठता" के बारे में विस्तार से बताते हुए टाटा संस के चेयरमैन ने बताया, "जैसा कि आज टाटा न्यू ऐप लाइव हो रहा है, मुझे हमारे कई भरोसेमंद और पसंदीदा ब्रांड एयर एशिया, बिगबास्केट, क्रोमा, आईएचसीएल, क्यूमिन को देखकर गर्व हो रहा है. Starbucks, Tata 1Mg, Tata CLiQ, Tata Play, Westside पहले से ही Tata Neu प्लेटफॉर्म पर हैं और विस्तारा, एयर इंडिया, टाइटन, तनिष्क, Tata Motors जल्द ही शामिल होंगे. चंद्रशेखरन के अलावा, टाटा डिजिटल के सीईओ प्रतीक पाल, टाटा डिजिटल के अध्यक्ष मुकेश बंसल, बिगबास्केट के सह-संस्थापक हरि मेनन, इस ऐप के विकास के पीछे कई प्रमुख व्यक्तित्व हैं.
टाटा न्यू ऐप किराने का सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्लाइट बुकिंग, फूड डिलीवरी, निवेश, होटल बुकिंग, और बहुत कुछ जैसी सेवाओं के साथ आता है, सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे रखी गई हैं. टाटा समूह की डिजिटल शाखा, टाटा डिजिटल, इस सुपर ऐप को लॉन्च करने के लिए महीनों से काम कर रही है - जिसे भारत का पहला कहा जा सकता है . भारत के 55 बिलियन डॉलर के ई-कॉमर्स में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए. इस ऐप के माध्यम से 154 वर्षीय समूह ने भुगतान, ऑनलाइन खाद्य वितरण, निवेश और कई अन्य क्षेत्रों में प्रवेश किया है.
| Jamshedpur: इंतजार खत्म हुआ. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर अपना बहुप्रतीक्षित टाटा न्यू सुपर ऐप लांच किया. यह सुपर ऐप टाटा के प्रत्येक ब्रांड को उसके प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा और न्यूकॉइन्स नामक एक इनाम की पेशकश करेगा. NeuCoins को इसके सभी ब्रांड्स के साथ-साथ फिजिकल स्टोर्स पर भी कमाया जा सकता है. टाटा न्यू के उपयोगकर्ता इस एक ऐप पर एयरएशिया इंडिया, बिगबास्केट, क्रोमा, टाटा क्लिक, आईएचसीएल, वेस्टसाइड और अधिक जैसे ब्रांडों का पता लगाने में सक्षम होंगे. इस ऐप की "श्रेष्ठता" के बारे में विस्तार से बताते हुए टाटा संस के चेयरमैन ने बताया, "जैसा कि आज टाटा न्यू ऐप लाइव हो रहा है, मुझे हमारे कई भरोसेमंद और पसंदीदा ब्रांड एयर एशिया, बिगबास्केट, क्रोमा, आईएचसीएल, क्यूमिन को देखकर गर्व हो रहा है. Starbucks, Tata एकMg, Tata CLiQ, Tata Play, Westside पहले से ही Tata Neu प्लेटफॉर्म पर हैं और विस्तारा, एयर इंडिया, टाइटन, तनिष्क, Tata Motors जल्द ही शामिल होंगे. चंद्रशेखरन के अलावा, टाटा डिजिटल के सीईओ प्रतीक पाल, टाटा डिजिटल के अध्यक्ष मुकेश बंसल, बिगबास्केट के सह-संस्थापक हरि मेनन, इस ऐप के विकास के पीछे कई प्रमुख व्यक्तित्व हैं. टाटा न्यू ऐप किराने का सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्लाइट बुकिंग, फूड डिलीवरी, निवेश, होटल बुकिंग, और बहुत कुछ जैसी सेवाओं के साथ आता है, सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे रखी गई हैं. टाटा समूह की डिजिटल शाखा, टाटा डिजिटल, इस सुपर ऐप को लॉन्च करने के लिए महीनों से काम कर रही है - जिसे भारत का पहला कहा जा सकता है . भारत के पचपन बिलियन डॉलर के ई-कॉमर्स में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए. इस ऐप के माध्यम से एक सौ चौवन वर्षीय समूह ने भुगतान, ऑनलाइन खाद्य वितरण, निवेश और कई अन्य क्षेत्रों में प्रवेश किया है. |
रतलाम रेल मंडल से चलने वाली 10 जोड़ी मेल एवं एक्सप्रेस गाडियों में 01 जुलाई से मासिक सीजन टिकट की सुविधा पुनः आरंभ की जा रही है। जिसस प्रतिदिन अप डाउन करने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा । मासिक सीजन टिकट धारकों को मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के अनारक्षित कोच में ही यात्रा करने की अनुमति रहेगी। इसके अतिरिक्त रतलाम मंडल पर परिचालित की जा रही पैसेंजर स्पेशल गाडि़यों जैसे पैसेंजर/डेमू/मेमू ट्रेन के अनारक्षित कोच में मासिक सीजन टिकट धारकों को यात्रा करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
- गाड़ी संख्या 12415/। 12416 इंदौर नई दिल्ली इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में इंदौर- नागदा के मध्य।
| रतलाम रेल मंडल से चलने वाली दस जोड़ी मेल एवं एक्सप्रेस गाडियों में एक जुलाई से मासिक सीजन टिकट की सुविधा पुनः आरंभ की जा रही है। जिसस प्रतिदिन अप डाउन करने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा । मासिक सीजन टिकट धारकों को मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के अनारक्षित कोच में ही यात्रा करने की अनुमति रहेगी। इसके अतिरिक्त रतलाम मंडल पर परिचालित की जा रही पैसेंजर स्पेशल गाडि़यों जैसे पैसेंजर/डेमू/मेमू ट्रेन के अनारक्षित कोच में मासिक सीजन टिकट धारकों को यात्रा करने की सुविधा भी उपलब्ध है। - गाड़ी संख्या बारह हज़ार चार सौ पंद्रह/। बारह हज़ार चार सौ सोलह इंदौर नई दिल्ली इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में इंदौर- नागदा के मध्य। |
WPL 2023: विमेंस प्रीमियर लीग 2023 में गुजरात जॉयंट्स टीम को बड़ा झटका लगा है। कप्तान बेथ मूनी चोट के चलते पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गई हैं। उन्हें पहले ही मुकाबले में चोट लगी थी, जिसके बाद से कोई भी मुकाबला नहीं खेलीं। चोट गंभीर है, इसलिए वह पूरा सीजन नहीं खेल पाएंगी। उन्हें ठीक होने में करीब 7 हफ्ते लगेंगे।
दरअसल, बेथ मूनी को गुजरात जायंट्स की कप्तानी मिली थी। वह मुंबई इंडियंस के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में घुटने में चोट लगा बैठी थीं। उनकी टीम 208 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी। मैच में 1 रन चुराने के दौरान मूनी का पैर मुड़ गया था। लिहाजा वह घुटने में चोट लगा बैठी थीं। फिर उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा था। गुजरात वह मुकाबला 143 रनों से हार गई थी।
महिला आईपीएल यानी विमेंस प्रीमियर लीग के पहले ही सीजन में मूनी को बड़ी रकम मिली थी। पिछले महीने डब्ल्यूपीएल नीलामी में उन्हें 2 करोड़ रुपये (लगभग 244,000 अमेरिकी डॉलर) में खरीदा गया था। उनसे टीम को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन चोट ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
आपको बता दें कि बेथ मूनी एक खतरनाक बल्लेबाज हैं। उन्होंने हाल में दक्षिण अफ्रीका में हुए टी20 विश्व कप फाइनल में 53 गेंदों में नाबाद 74 रन बनाए थे। उनकी इस पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया छठवीं बार टी20 विश्वकप जीतने वाली टीम बनी थी। इस शानदार प्रदर्शन के बाद नीलामी में उन पर जायंट्स ने 2 करोड़ की बोली लगाई थी।
| WPL दो हज़ार तेईस: विमेंस प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस में गुजरात जॉयंट्स टीम को बड़ा झटका लगा है। कप्तान बेथ मूनी चोट के चलते पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गई हैं। उन्हें पहले ही मुकाबले में चोट लगी थी, जिसके बाद से कोई भी मुकाबला नहीं खेलीं। चोट गंभीर है, इसलिए वह पूरा सीजन नहीं खेल पाएंगी। उन्हें ठीक होने में करीब सात हफ्ते लगेंगे। दरअसल, बेथ मूनी को गुजरात जायंट्स की कप्तानी मिली थी। वह मुंबई इंडियंस के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में घुटने में चोट लगा बैठी थीं। उनकी टीम दो सौ आठ रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी। मैच में एक रन चुराने के दौरान मूनी का पैर मुड़ गया था। लिहाजा वह घुटने में चोट लगा बैठी थीं। फिर उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा था। गुजरात वह मुकाबला एक सौ तैंतालीस रनों से हार गई थी। महिला आईपीएल यानी विमेंस प्रीमियर लीग के पहले ही सीजन में मूनी को बड़ी रकम मिली थी। पिछले महीने डब्ल्यूपीएल नीलामी में उन्हें दो करोड़ रुपये में खरीदा गया था। उनसे टीम को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन चोट ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। आपको बता दें कि बेथ मूनी एक खतरनाक बल्लेबाज हैं। उन्होंने हाल में दक्षिण अफ्रीका में हुए टीबीस विश्व कप फाइनल में तिरेपन गेंदों में नाबाद चौहत्तर रन बनाए थे। उनकी इस पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया छठवीं बार टीबीस विश्वकप जीतने वाली टीम बनी थी। इस शानदार प्रदर्शन के बाद नीलामी में उन पर जायंट्स ने दो करोड़ की बोली लगाई थी। |
सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है की केंद्रीय सरकार ने 18 फार्मा कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए है, और उन्हें मैन्युफैक्चरिंग बंद करने को भी कह दिया गया है। भारत से नकली दवाओं को विदेशों में बेचे जाने की खबरों के बीच फार्मा कंपनियों पर चल रही कार्रवाई के तहत यह आदेश आया है।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 76 दवा कंपनियों का निरीक्षण किया था। केंद्र और राज्य की टीमों ने औचक निरीक्षण किया और 20 राज्यों में कार्रवाई की गई। करीब 15 दिन से अभियान चल रहा है। कई देशों से भारतीय दवाओं से होने वाली मौतों और बीमारियों की खबरों के बीच ये छापे मारे गए हैं। पिछले महीने, गुजरात स्थित फार्मा कंपनी Zydus Lifesciences ने अमेरिकी बाजार से गाउट के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जेनेरिक दवा की 55,000 से अधिक बोतलें वापस मंगवाईं गई। दवा अशुद्धता विनिर्देशों में विफल रही थी।
नोएडा में, दिल्ली के पास, एक फार्मास्युटिकल फर्म के तीन कर्मचारियों को पिछले साल उज्बेकिस्तान में कथित तौर पर खांसी की दवाई के कारण 18 बच्चों की मौत के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर मिलावटी दवा बनाने और बेचने का आरोप था।
केंद्रीय और उत्तर प्रदेश दवा प्राधिकरणों ने मैरियन बायोटेक उत्पादों के नमूनों की जांच की और उनमें से 22 को "मानक गुणवत्ता के नहीं" (मिलावटी और नकली) पाया।
| सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है की केंद्रीय सरकार ने अट्ठारह फार्मा कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए है, और उन्हें मैन्युफैक्चरिंग बंद करने को भी कह दिया गया है। भारत से नकली दवाओं को विदेशों में बेचे जाने की खबरों के बीच फार्मा कंपनियों पर चल रही कार्रवाई के तहत यह आदेश आया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने छिहत्तर दवा कंपनियों का निरीक्षण किया था। केंद्र और राज्य की टीमों ने औचक निरीक्षण किया और बीस राज्यों में कार्रवाई की गई। करीब पंद्रह दिन से अभियान चल रहा है। कई देशों से भारतीय दवाओं से होने वाली मौतों और बीमारियों की खबरों के बीच ये छापे मारे गए हैं। पिछले महीने, गुजरात स्थित फार्मा कंपनी Zydus Lifesciences ने अमेरिकी बाजार से गाउट के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जेनेरिक दवा की पचपन,शून्य से अधिक बोतलें वापस मंगवाईं गई। दवा अशुद्धता विनिर्देशों में विफल रही थी। नोएडा में, दिल्ली के पास, एक फार्मास्युटिकल फर्म के तीन कर्मचारियों को पिछले साल उज्बेकिस्तान में कथित तौर पर खांसी की दवाई के कारण अट्ठारह बच्चों की मौत के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर मिलावटी दवा बनाने और बेचने का आरोप था। केंद्रीय और उत्तर प्रदेश दवा प्राधिकरणों ने मैरियन बायोटेक उत्पादों के नमूनों की जांच की और उनमें से बाईस को "मानक गुणवत्ता के नहीं" पाया। |
केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सबसे पुराना प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। प्रयोक्ता परिसर स्थान, प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, जनशक्ति, सर्दी में स्कूल, एनआईसीआरए परियोजनाओं और पुस्तकालय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। चल रही परियोजनाओं के विवरण प्रदान किए गए हैं।
पशुपालन डेयरी और मत्स्यपालन विभाग के लिए अनुदान मांग की जानकारी प्राप्त करें। उपयोगकर्ता अनुदान राशि और संबंधित खर्च विवरण के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं।
बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। विभाग की नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों और नवीन गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। पशु एवं मत्स्य पालन से संबंधित अधिनियम और नियम की जानकारी दी गई है। अधिकारियों की संपर्क विवरण भी उपलब्ध है।
गुजरात में निजी अंड उत्पत्तिशाला में प्रजनन कार्यक्रम का संचालन करने के लिए अनुमति प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रपत्र डाउनलोड किए जा सकते हैं। उपयोगकर्ता को नाम, पता, फोन नंबर, मछली प्रजनन कार्यक्रम, विपणन विवरण जैसी व्यक्तिगत और अन्य जानकारी प्रदान करनी होगी।
राष्ट्रीय मत्स्य पोस्ट हार्वेस्ट प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण संस्थान (एनआईएफपीएचएटीटी) के बारे में जानकारी प्राप्त करें। मछली पालन प्रौद्योगिकी, पूर्व पालन प्रौद्योगिकी, समुद्री इंजीनियरिंग, एकीकृत मत्स्य पालन परियोजना आदि के बारे में जानकारी दी गई है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित विवरण भी उपलब्ध हैं।
आप पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मत्स्य विभाग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। उपयोगकर्ता मत्स्य संसाधनों, निजी स्वामित्व, बील और बावर आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उपयोगकर्ता मछली बीज और मछली की मांग और उत्पादन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
त्रिपुरा के मत्स्य विभाग के प्रमुख अधिकारियों की संपर्क सूची के बारे में जानकारी दी गई है।
कृषि मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन (डीएएचडी) विभाग के आवेदन फॉर्म के बारे में जानकारी। प्रयोक्ता छुट्टी / अवकाश आयात / निजी खपत और व्यापार या विपणन के लिए पशुधन उत्पादों के निर्यात के विस्तार के लिए आवेदन पत्र के बारे में पता लगा सकते हैं। इसके अलावा, दूध एवं दुग्ध उत्पाद आदेश 1992 के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध है।
गुजरात में मत्स्य - नौका के पंजीकरण प्रमाण पत्र में दिए गये ब्यौरे में परिवर्तन करने के लिए प्रपत्र उपलब्ध कराए गए हैं। उपयोगकर्ता को आवेदन पत्र में व्यक्तिगत और अन्य जानकारी प्रदान करनी होगी।
गुजरात में मत्स्य - नौका के पंजीकरण के प्रमाण पत्र के लिए प्रारूप डाउनलोड किए जा सकते हैं। मालिक, लाइसेंस नंबर, पोत प्रकार, लंबाई आदि का विवरण प्रारूप में उपलब्ध कराया गया हैं। निर्गत प्राधिकारी को तारीख और कार्यालय की मोहर के साथ प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा।
गुजरात में नौका लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रपत्र प्राप्त किए जा सकते है। यह प्रपत्र गुजरात के कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा प्रदान किए गए हैं। उपयोगकर्ता को आवेदन पत्र में व्यक्तिगत और अन्य जानकारी देनी होगी।
गुजरात में पगड़िया लाइसेंस के अनुदान या नवीकरण के लिए आवेदन करने हेतु प्रपत्र डाउनलोड किए जा सकते हैं। यह प्रपत्र गुजरात के कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा प्रदान किए गए हैं। उपयोगकर्ता को आवेदन पत्र में व्यक्तिगत और अन्य जानकारी देनी होगी।
| केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सबसे पुराना प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। प्रयोक्ता परिसर स्थान, प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, जनशक्ति, सर्दी में स्कूल, एनआईसीआरए परियोजनाओं और पुस्तकालय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। चल रही परियोजनाओं के विवरण प्रदान किए गए हैं। पशुपालन डेयरी और मत्स्यपालन विभाग के लिए अनुदान मांग की जानकारी प्राप्त करें। उपयोगकर्ता अनुदान राशि और संबंधित खर्च विवरण के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। विभाग की नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों और नवीन गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। पशु एवं मत्स्य पालन से संबंधित अधिनियम और नियम की जानकारी दी गई है। अधिकारियों की संपर्क विवरण भी उपलब्ध है। गुजरात में निजी अंड उत्पत्तिशाला में प्रजनन कार्यक्रम का संचालन करने के लिए अनुमति प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रपत्र डाउनलोड किए जा सकते हैं। उपयोगकर्ता को नाम, पता, फोन नंबर, मछली प्रजनन कार्यक्रम, विपणन विवरण जैसी व्यक्तिगत और अन्य जानकारी प्रदान करनी होगी। राष्ट्रीय मत्स्य पोस्ट हार्वेस्ट प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण संस्थान के बारे में जानकारी प्राप्त करें। मछली पालन प्रौद्योगिकी, पूर्व पालन प्रौद्योगिकी, समुद्री इंजीनियरिंग, एकीकृत मत्स्य पालन परियोजना आदि के बारे में जानकारी दी गई है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित विवरण भी उपलब्ध हैं। आप पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मत्स्य विभाग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। उपयोगकर्ता मत्स्य संसाधनों, निजी स्वामित्व, बील और बावर आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उपयोगकर्ता मछली बीज और मछली की मांग और उत्पादन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। त्रिपुरा के मत्स्य विभाग के प्रमुख अधिकारियों की संपर्क सूची के बारे में जानकारी दी गई है। कृषि मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग के आवेदन फॉर्म के बारे में जानकारी। प्रयोक्ता छुट्टी / अवकाश आयात / निजी खपत और व्यापार या विपणन के लिए पशुधन उत्पादों के निर्यात के विस्तार के लिए आवेदन पत्र के बारे में पता लगा सकते हैं। इसके अलावा, दूध एवं दुग्ध उत्पाद आदेश एक हज़ार नौ सौ बानवे के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध है। गुजरात में मत्स्य - नौका के पंजीकरण प्रमाण पत्र में दिए गये ब्यौरे में परिवर्तन करने के लिए प्रपत्र उपलब्ध कराए गए हैं। उपयोगकर्ता को आवेदन पत्र में व्यक्तिगत और अन्य जानकारी प्रदान करनी होगी। गुजरात में मत्स्य - नौका के पंजीकरण के प्रमाण पत्र के लिए प्रारूप डाउनलोड किए जा सकते हैं। मालिक, लाइसेंस नंबर, पोत प्रकार, लंबाई आदि का विवरण प्रारूप में उपलब्ध कराया गया हैं। निर्गत प्राधिकारी को तारीख और कार्यालय की मोहर के साथ प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा। गुजरात में नौका लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रपत्र प्राप्त किए जा सकते है। यह प्रपत्र गुजरात के कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा प्रदान किए गए हैं। उपयोगकर्ता को आवेदन पत्र में व्यक्तिगत और अन्य जानकारी देनी होगी। गुजरात में पगड़िया लाइसेंस के अनुदान या नवीकरण के लिए आवेदन करने हेतु प्रपत्र डाउनलोड किए जा सकते हैं। यह प्रपत्र गुजरात के कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा प्रदान किए गए हैं। उपयोगकर्ता को आवेदन पत्र में व्यक्तिगत और अन्य जानकारी देनी होगी। |
तेल की बेतहाशा बढ़ी कीमतों का असर आम इस्तेमाल की चीज़ों के दामों पर दिखने लगा है। नतीजतन खुदरा महंगाई दर चार महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
खाने-पीने की चीजों और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मई में देश की खुदरा मुद्रा स्फीति दर बढ़कर पांच फीसदी के करीब पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों से मंगलवार को यह जानकारी मिली। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 4. 87 फीसदी रहा, जोकि साल 2017 के मई की तुलना में दोगुना है। पिछले साल इसी महीने में सीपीआई की दर 2. 18 फीसदी थी, जबकि इस साल अप्रैल में यह 4. 58 फीसदी थी।
उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) की दर मई में बढ़कर 3. 1 फीसदी हो गई, जोकि इसके पिछले महीने 2. 8 फीसदी थी।
| तेल की बेतहाशा बढ़ी कीमतों का असर आम इस्तेमाल की चीज़ों के दामों पर दिखने लगा है। नतीजतन खुदरा महंगाई दर चार महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजों और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मई में देश की खुदरा मुद्रा स्फीति दर बढ़कर पांच फीसदी के करीब पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों से मंगलवार को यह जानकारी मिली। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक चार. सत्तासी फीसदी रहा, जोकि साल दो हज़ार सत्रह के मई की तुलना में दोगुना है। पिछले साल इसी महीने में सीपीआई की दर दो. अट्ठारह फीसदी थी, जबकि इस साल अप्रैल में यह चार. अट्ठावन फीसदी थी। उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक की दर मई में बढ़कर तीन. एक फीसदी हो गई, जोकि इसके पिछले महीने दो. आठ फीसदी थी। |
बचपन में कुछ फिल्मों में उन्होंने डांस भी किया था. 1973 में सितारा देवी को पद्म श्री सम्मान मिला था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था. इन्होंने कहा कि क्या सरकार मेरे योगदान को नहीं जानती है. ये मेरे लिये सम्मान नहीं अपमान है. मैं भारत रत्न से कम नहीं लूंगी.
| बचपन में कुछ फिल्मों में उन्होंने डांस भी किया था. एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में सितारा देवी को पद्म श्री सम्मान मिला था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था. इन्होंने कहा कि क्या सरकार मेरे योगदान को नहीं जानती है. ये मेरे लिये सम्मान नहीं अपमान है. मैं भारत रत्न से कम नहीं लूंगी. |
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा आज जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 'बेहतरीन तरीके से विकसित बुनियादी ढांचा और जवाबदेह सरकार द्वारा संचालित बेहतरीन सेवाओं' की वजह से 2021 में भी गुजरात ने देश के अन्य राज्यों की तुलना में लॉजिस्टिक्स कुशलता में पहला स्थान बरकरार रखा है।
राज्य ने बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और उपलब्धता, सभी मंजूरियां आसानी से मिलने जैसे प्रमुख संकेतकों में पहला स्थान बरकरार रखा है, वहीं मुंद्रा बंदरगाह से मॉनसून के दौरान सड़क मार्ग से संपर्क की समस्या और मुंद्रा व हजीरा के बीच तटीय सड़क के संपर्क न होने की शिकायत भी सर्वे में शामिल लोगों ने किया है।
हरियाणा इस बार छठे से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। उसके बाद क्रमशः पंजाब, तमिलनाडु और महाराष्ट्र का स्थान है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा सोमवार को जारी लीड्स (लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स) 2021 रिपोर्ट, समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए नीतिगत प्रतिक्रिया तैयार करने में मदद करेगी। सूचकांक का उद्देश्य राज्यों में लॉजिस्टिक संबंधी प्रदर्शन में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना है जो देश के व्यापार में सुधार और लेनदेन लागत को कम करने के लिए जरूरी है। पूर्वाेत्तर राज्यों और हिमालयी केंद्र शासित क्षेत्रों की सूची में, जम्मू-कश्मीर सूची में सबसे ऊपर है। वहीं केंद्र शासित क्षेत्रों में दिल्ली को शीर्ष स्थान मिला है। पहली लॉजिस्टिक रिपोर्ट 2018 में जारी की गई थी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा आज जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 'बेहतरीन तरीके से विकसित बुनियादी ढांचा और जवाबदेह सरकार द्वारा संचालित बेहतरीन सेवाओं' की वजह से 2021 में भी गुजरात ने देश के अन्य राज्यों की तुलना में लॉजिस्टिक्स कुशलता में पहला स्थान बरकरार रखा है।
| वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा आज जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 'बेहतरीन तरीके से विकसित बुनियादी ढांचा और जवाबदेह सरकार द्वारा संचालित बेहतरीन सेवाओं' की वजह से दो हज़ार इक्कीस में भी गुजरात ने देश के अन्य राज्यों की तुलना में लॉजिस्टिक्स कुशलता में पहला स्थान बरकरार रखा है। राज्य ने बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और उपलब्धता, सभी मंजूरियां आसानी से मिलने जैसे प्रमुख संकेतकों में पहला स्थान बरकरार रखा है, वहीं मुंद्रा बंदरगाह से मॉनसून के दौरान सड़क मार्ग से संपर्क की समस्या और मुंद्रा व हजीरा के बीच तटीय सड़क के संपर्क न होने की शिकायत भी सर्वे में शामिल लोगों ने किया है। हरियाणा इस बार छठे से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। उसके बाद क्रमशः पंजाब, तमिलनाडु और महाराष्ट्र का स्थान है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा सोमवार को जारी लीड्स दो हज़ार इक्कीस रिपोर्ट, समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए नीतिगत प्रतिक्रिया तैयार करने में मदद करेगी। सूचकांक का उद्देश्य राज्यों में लॉजिस्टिक संबंधी प्रदर्शन में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना है जो देश के व्यापार में सुधार और लेनदेन लागत को कम करने के लिए जरूरी है। पूर्वाेत्तर राज्यों और हिमालयी केंद्र शासित क्षेत्रों की सूची में, जम्मू-कश्मीर सूची में सबसे ऊपर है। वहीं केंद्र शासित क्षेत्रों में दिल्ली को शीर्ष स्थान मिला है। पहली लॉजिस्टिक रिपोर्ट दो हज़ार अट्ठारह में जारी की गई थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा आज जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 'बेहतरीन तरीके से विकसित बुनियादी ढांचा और जवाबदेह सरकार द्वारा संचालित बेहतरीन सेवाओं' की वजह से दो हज़ार इक्कीस में भी गुजरात ने देश के अन्य राज्यों की तुलना में लॉजिस्टिक्स कुशलता में पहला स्थान बरकरार रखा है। |
चंदौली। जिलाधिकारी संजीव सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना सभी की जिम्मेदारी है इसके लिए प्रदेश सरकार कटिबद्ध है। बैठक में जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत संस्थागत प्रसव में नियामताबाद, चंदौली, मुगलसराय, जिला चिकित्सालय चंदौली व चकिया की स्थिति ठीक नहीं पाई गई। जिलाधिकारी ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए अपेक्षित प्रगति लाए जाने के निर्देश संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि एएनएम व आशा वाइज विस्तृत समीक्षा करते हुए लापरवाह आशा एवं एएनएम के खिलाफ कार्रवाई करें। उन्होंने इस कार्य में लापरवाही बरतने पर नियमताबाद एवं चंदौली के डीसीपीएम को कठोर चेतावनी के साथ ही अस्थाई रूप से वेतन वृद्धि रोकने का निर्देश दिया। उन्होंने इस कार्य के मानिटरिंग में शिथिलता पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी चंदौली को भी चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत निशुल्क भोजन उपलब्ध कराने हेतु स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी जोड़ा जाए। डिलीवरी स्थलों व केंद्रों पर भोजन का मेनू अवश्य चिपकाया जाए। परिवार नियोजन के अंतर्गत कराई गई नसबंदी का भुगतान लाभार्थियों को समय से कराने के निर्देश दिए। भुगतान में अनावश्यक विलंब न किया जाए अन्यथा विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। कहा कि 102 व 108 एंबुलेंस सेवा की निर्वाध एवं समय से सुलभता की स्थिति बनी रहे। सभी वाहनों की क्रियाशील रखने के साथ ही शत. प्रतिशत सूचनाओं पर निर्धारित समय पर पहुंचना सुनिश्चित करें। नगरीयप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पराहूपुर व महमूदपुर के प्रभारी चिकित्सक द्वारा बैठक में अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिये। कहा कि टीवी रोगियों को दी जाने वाली राशि का भुगतान भी समय से कराएं। जनपद में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का नियमित टीकाकरण शत प्रतिशत कराया जाय। इस मौके मुख्य विकास अधिकारी अजितेंद्र नारायण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० वीपी द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक उपस्थित रहे।
| चंदौली। जिलाधिकारी संजीव सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना सभी की जिम्मेदारी है इसके लिए प्रदेश सरकार कटिबद्ध है। बैठक में जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत संस्थागत प्रसव में नियामताबाद, चंदौली, मुगलसराय, जिला चिकित्सालय चंदौली व चकिया की स्थिति ठीक नहीं पाई गई। जिलाधिकारी ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए अपेक्षित प्रगति लाए जाने के निर्देश संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि एएनएम व आशा वाइज विस्तृत समीक्षा करते हुए लापरवाह आशा एवं एएनएम के खिलाफ कार्रवाई करें। उन्होंने इस कार्य में लापरवाही बरतने पर नियमताबाद एवं चंदौली के डीसीपीएम को कठोर चेतावनी के साथ ही अस्थाई रूप से वेतन वृद्धि रोकने का निर्देश दिया। उन्होंने इस कार्य के मानिटरिंग में शिथिलता पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी चंदौली को भी चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत निशुल्क भोजन उपलब्ध कराने हेतु स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी जोड़ा जाए। डिलीवरी स्थलों व केंद्रों पर भोजन का मेनू अवश्य चिपकाया जाए। परिवार नियोजन के अंतर्गत कराई गई नसबंदी का भुगतान लाभार्थियों को समय से कराने के निर्देश दिए। भुगतान में अनावश्यक विलंब न किया जाए अन्यथा विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। कहा कि एक सौ दो व एक सौ आठ एंबुलेंस सेवा की निर्वाध एवं समय से सुलभता की स्थिति बनी रहे। सभी वाहनों की क्रियाशील रखने के साथ ही शत. प्रतिशत सूचनाओं पर निर्धारित समय पर पहुंचना सुनिश्चित करें। नगरीयप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पराहूपुर व महमूदपुर के प्रभारी चिकित्सक द्वारा बैठक में अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिये। कहा कि टीवी रोगियों को दी जाने वाली राशि का भुगतान भी समय से कराएं। जनपद में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का नियमित टीकाकरण शत प्रतिशत कराया जाय। इस मौके मुख्य विकास अधिकारी अजितेंद्र नारायण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाशून्य वीपी द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक उपस्थित रहे। |
यूएई में इंडियन प्रीमियर लीग का 13वां एडिशन खेला जा रहा है। गुरुवार रात को दुबई में विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर और केएल राहुल की किंग्स इलेवन पंजाब के बीच इस टूर्नामेंट का छठा मैच खेला गया। पंजाब के खिलाफ इस मैच में कप्तान कोहली के लिए कुछ भी अच्छा नहीं रहा। कोहली ने पहले शतक जड़ने वाले केएल राहुल के दो कैच छोड़े और इसके बाद बल्ले से भी वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए। आईपीएल की कमेंट्री पैनल के सदस्य भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर इस मैच में कमेंट्री कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिसकी वजह से वो विवाद में फंस गए हैं।
कमेंट्री करते समय गावस्कर ने विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा के बारे में टिप्पणी की। गावस्कर की यह टिप्पणी बेंगलोर के कप्तान के फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आई। कुछ लोगों ने बीसीसीआई से गावस्कर को कमेंट्री पैनल से हटाने तक की बात कर दी। ऐसा पहली बार नहीं है जब विराट कोहली के प्रदर्शन को लेकर उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को निशाने पर लिया गया है।
यह कोहली के लिए एक ऐसा मैच था जिसे वो जल्दी ही भुलाना चाहेंगे। उन्होंने भी मैच के बाद माना था कि यह भुला देने वाला दिन रहा। कोहली ने केएल राहुल को दो मौके दिए। पहला 83 के निजी स्कोर पर और दूसरा 89 के के स्कोर पर। लगातार दो ओवरों में कोहली से ये कैच छूटे। राहुल ने इन मौकों का फायदा उठाया और 69 गेंद पर 132 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली। केएल राहुल ने अपनी इस धुआंधार पारी से आईपीएल के कई रिकॉर्ड तोड़ डाले।
इस मैच में 207 रनों का लक्ष्य पीछा करने उतरी आरसीबी की टीम की तरफ से कोई भी बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका। पहले मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले देवदत पड्डीकल इस मैच में केवल एक रन ही बना सके। टीम की तरफ से सबसे ज्यादा वाशिंगटन सुंदर ने 27 गेंदों पर 30 रन बनाए। एबी डिविलियर्स ने 28 और आरोन फिंच ने 20 रन की पारी खेली। पंजाब की तरफ से स्पिनर मुरुगन अश्विन और रवि बिश्नोई ने तीन-तीन विकेट लिए।
| यूएई में इंडियन प्रीमियर लीग का तेरहवां एडिशन खेला जा रहा है। गुरुवार रात को दुबई में विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर और केएल राहुल की किंग्स इलेवन पंजाब के बीच इस टूर्नामेंट का छठा मैच खेला गया। पंजाब के खिलाफ इस मैच में कप्तान कोहली के लिए कुछ भी अच्छा नहीं रहा। कोहली ने पहले शतक जड़ने वाले केएल राहुल के दो कैच छोड़े और इसके बाद बल्ले से भी वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए। आईपीएल की कमेंट्री पैनल के सदस्य भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर इस मैच में कमेंट्री कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिसकी वजह से वो विवाद में फंस गए हैं। कमेंट्री करते समय गावस्कर ने विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा के बारे में टिप्पणी की। गावस्कर की यह टिप्पणी बेंगलोर के कप्तान के फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आई। कुछ लोगों ने बीसीसीआई से गावस्कर को कमेंट्री पैनल से हटाने तक की बात कर दी। ऐसा पहली बार नहीं है जब विराट कोहली के प्रदर्शन को लेकर उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को निशाने पर लिया गया है। यह कोहली के लिए एक ऐसा मैच था जिसे वो जल्दी ही भुलाना चाहेंगे। उन्होंने भी मैच के बाद माना था कि यह भुला देने वाला दिन रहा। कोहली ने केएल राहुल को दो मौके दिए। पहला तिरासी के निजी स्कोर पर और दूसरा नवासी के के स्कोर पर। लगातार दो ओवरों में कोहली से ये कैच छूटे। राहुल ने इन मौकों का फायदा उठाया और उनहत्तर गेंद पर एक सौ बत्तीस रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली। केएल राहुल ने अपनी इस धुआंधार पारी से आईपीएल के कई रिकॉर्ड तोड़ डाले। इस मैच में दो सौ सात रनों का लक्ष्य पीछा करने उतरी आरसीबी की टीम की तरफ से कोई भी बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका। पहले मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले देवदत पड्डीकल इस मैच में केवल एक रन ही बना सके। टीम की तरफ से सबसे ज्यादा वाशिंगटन सुंदर ने सत्ताईस गेंदों पर तीस रन बनाए। एबी डिविलियर्स ने अट्ठाईस और आरोन फिंच ने बीस रन की पारी खेली। पंजाब की तरफ से स्पिनर मुरुगन अश्विन और रवि बिश्नोई ने तीन-तीन विकेट लिए। |
DRDO ने रुद्रम का विकास लगभग 8 साल पहले शुरू किया था. ये एक बेहद जटिल काम था, क्योंकि इस मिसाइल को लॉन्च करने वाले युद्धक विमान बड़ी ही जटिल और सूक्ष्म टेक्नोलॉजी पर आधारित होते हैं.
भारत ने अपनी पहली एंटी रेडिएशन मिसाइल बना ली है. इसका नाम रुद्रम है और इसकी मारक क्षमता को पिछले हफ्ते टेस्ट भी कर लिया गया. इस उपलब्धि के बाद भारत अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों के ग्रुप का सदस्य बन गया है जिनके पास पहले से एंटी रेडिएशन मिसाइल टेक्नोलॉजी है. ब्राजील और ईरान की सेनाओं के पास भी ऐसी मिसाइलें हैं.
रुद्रम को फिलहाल इस्तेमाल के लिए Sukhoi 30 MKI पर तैनात किया जाएगा. आप पूछेंगे एंटी रेडिएशन मिसाइल किस तरह की मिसाइल है और ये अन्य मिसाइल्स से कैसे अलग है. इसका जवाब है कि एंटी रेडिएशन मिसाइल का काम दुश्मन के रडार, अन्य रेडियो फ्रीक्वेंसी सोर्स और संचार उपकरणों की पहचान कर, उन्हें ट्रैक कर, नष्ट करना है.
ये सभी उपकरण दुश्मन द्वारा अपनी वायु सीमा को सुरक्षित रखने के लिए लगाए जाते हैं ताकि जैसे ही कोई अज्ञात या ज्ञात हवाई जहाज, बमवर्षक, हेलीकॉप्टर या मिसाइल उसकी वायु सीमा की तरफ आता दिखाई दे तो उसे पहचान कर, ट्रैक कर जल्दी से जल्दी बर्बाद किया जा सके.
एंटी रेडिएशन मिसाइल में कंप्यूटर से जुड़ा एक सिस्टम लगा होता है, जिसे इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (inertial navigation system) कहते हैं. ये हवा में मिसाइल की अपनी स्थिति को सैटेलाइट से नियंत्रित GPS (global positioning system) की मदद से लगातार बदलने की क्षमता रखता है.
आकाश में हवा को चीरते हुए आगे बढ़ने के लिए एंटी रेडिएशन मिसाइल की नोक पर एक पैसिव होमिंग डिवाइस लगा होता है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी से नियंत्रित सभी टारगेट, जैसे कि रडार और अन्य संचार उपकरणों को खोज कर, पहचान कर, उन्हें नष्ट कर देता है. रुद्रम के निर्माता, DRDO का कहना है कि एक बार जब रुद्रम अपने टारगेट पर लॉक हो जाता है, फिर अगर ये रेडिएशन सोर्स अपने आप को स्विच ऑफ भी कर ले तब भी रुद्रम उसे अचूक निशाने के साथ खत्म करने की क्षमता रखता है.
एक युद्धक विमान पर तैनात रुद्रम की लक्ष्य भेदने की क्षमता 100 किलोमीटर से ज्यादा है. इसका मतलब ये है कि ये विमान से लांच होने के बाद 100 किलोमीटर से ज्यादा दूर स्थित टारगेट को ध्वस्त कर सकता है. DRDO ने रुद्रम का विकास लगभग 8 साल पहले शुरू किया था. ये एक बेहद जटिल काम था, क्योंकि इस मिसाइल को लॉन्च करने वाले युद्धक विमान बड़ी ही जटिल और सूक्ष्म टेक्नोलॉजी पर आधारित होते हैं.
ये हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है. निर्माण के बाद रुद्रम को युद्धक विमानों के साथ समन्वित करने में भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. Sukhoi 30 MKI के साथ तो इसका टेस्ट हो ही चुका है, वायुसेना के अन्य बमवर्षकों से भी इसे लांच किया जा सकता है. भारतीय वायु सेना को दुश्मन की वायु प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट करने की क्षमता बेहतर करने के लिए रुद्रम की आवश्यकता थी.
युद्ध या प्रतिरक्षा की स्थिति में शुरुआत में या बाद में भी ही एंटी रेडिएशन मिसाइलों की मदद से दुश्मन की वायु प्रतिरक्षा प्रणाली यानि रडार, कमांड और कंट्रोल और निगरानी सिस्टम आदि को बर्बाद किया जाता है, ताकि अपने युद्धक विमान बिना रोकटोक और खतरे के, उसकी सीमा के भीतर जा कर उसके सैनिक ठिकानों, विमानभेदी और अन्य तोपों, टैंकों, मिसाइलों, हवाई पट्टियों और सामरिक महत्व की अन्य जगहों को नष्ट कर सकें और सकुशल वापस आ जाएं.
वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजिस्ट का कहना है कि अब भविष्य में होने वाले युद्धों में कंप्यूटर और डिजिटल नेटवर्क्स की प्रधानता होगी. इनमें हथियारों, तोपों, टैंकों, युद्धक विमानों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों आदि को पूरी तरह इन नेटवर्क्स से समन्वित किया जाएगा, ताकि दुश्मन और उसके आयुधों की पहचान, निगरानी और संचार सिस्टम्स पर पैनी नजर और अचूक निशाना रहे.
आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि रुद्रम ने सुखोई 30 MKI के साथ हुए टेस्ट में अपने टारगेट को पूरी सफलता के साथ ध्वस्त किया. DRDO का कहना है अभी रुद्रम की कुछ और टेस्ट उड़ानें होनी हैं, इसके बाद मिसाइल को वायुसेना में शामिल किया जाएगा. रुद्रम का सफल परीक्षण भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा करेगा.
| DRDO ने रुद्रम का विकास लगभग आठ साल पहले शुरू किया था. ये एक बेहद जटिल काम था, क्योंकि इस मिसाइल को लॉन्च करने वाले युद्धक विमान बड़ी ही जटिल और सूक्ष्म टेक्नोलॉजी पर आधारित होते हैं. भारत ने अपनी पहली एंटी रेडिएशन मिसाइल बना ली है. इसका नाम रुद्रम है और इसकी मारक क्षमता को पिछले हफ्ते टेस्ट भी कर लिया गया. इस उपलब्धि के बाद भारत अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों के ग्रुप का सदस्य बन गया है जिनके पास पहले से एंटी रेडिएशन मिसाइल टेक्नोलॉजी है. ब्राजील और ईरान की सेनाओं के पास भी ऐसी मिसाइलें हैं. रुद्रम को फिलहाल इस्तेमाल के लिए Sukhoi तीस MKI पर तैनात किया जाएगा. आप पूछेंगे एंटी रेडिएशन मिसाइल किस तरह की मिसाइल है और ये अन्य मिसाइल्स से कैसे अलग है. इसका जवाब है कि एंटी रेडिएशन मिसाइल का काम दुश्मन के रडार, अन्य रेडियो फ्रीक्वेंसी सोर्स और संचार उपकरणों की पहचान कर, उन्हें ट्रैक कर, नष्ट करना है. ये सभी उपकरण दुश्मन द्वारा अपनी वायु सीमा को सुरक्षित रखने के लिए लगाए जाते हैं ताकि जैसे ही कोई अज्ञात या ज्ञात हवाई जहाज, बमवर्षक, हेलीकॉप्टर या मिसाइल उसकी वायु सीमा की तरफ आता दिखाई दे तो उसे पहचान कर, ट्रैक कर जल्दी से जल्दी बर्बाद किया जा सके. एंटी रेडिएशन मिसाइल में कंप्यूटर से जुड़ा एक सिस्टम लगा होता है, जिसे इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम कहते हैं. ये हवा में मिसाइल की अपनी स्थिति को सैटेलाइट से नियंत्रित GPS की मदद से लगातार बदलने की क्षमता रखता है. आकाश में हवा को चीरते हुए आगे बढ़ने के लिए एंटी रेडिएशन मिसाइल की नोक पर एक पैसिव होमिंग डिवाइस लगा होता है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी से नियंत्रित सभी टारगेट, जैसे कि रडार और अन्य संचार उपकरणों को खोज कर, पहचान कर, उन्हें नष्ट कर देता है. रुद्रम के निर्माता, DRDO का कहना है कि एक बार जब रुद्रम अपने टारगेट पर लॉक हो जाता है, फिर अगर ये रेडिएशन सोर्स अपने आप को स्विच ऑफ भी कर ले तब भी रुद्रम उसे अचूक निशाने के साथ खत्म करने की क्षमता रखता है. एक युद्धक विमान पर तैनात रुद्रम की लक्ष्य भेदने की क्षमता एक सौ किलोग्राममीटर से ज्यादा है. इसका मतलब ये है कि ये विमान से लांच होने के बाद एक सौ किलोग्राममीटर से ज्यादा दूर स्थित टारगेट को ध्वस्त कर सकता है. DRDO ने रुद्रम का विकास लगभग आठ साल पहले शुरू किया था. ये एक बेहद जटिल काम था, क्योंकि इस मिसाइल को लॉन्च करने वाले युद्धक विमान बड़ी ही जटिल और सूक्ष्म टेक्नोलॉजी पर आधारित होते हैं. ये हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है. निर्माण के बाद रुद्रम को युद्धक विमानों के साथ समन्वित करने में भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. Sukhoi तीस MKI के साथ तो इसका टेस्ट हो ही चुका है, वायुसेना के अन्य बमवर्षकों से भी इसे लांच किया जा सकता है. भारतीय वायु सेना को दुश्मन की वायु प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट करने की क्षमता बेहतर करने के लिए रुद्रम की आवश्यकता थी. युद्ध या प्रतिरक्षा की स्थिति में शुरुआत में या बाद में भी ही एंटी रेडिएशन मिसाइलों की मदद से दुश्मन की वायु प्रतिरक्षा प्रणाली यानि रडार, कमांड और कंट्रोल और निगरानी सिस्टम आदि को बर्बाद किया जाता है, ताकि अपने युद्धक विमान बिना रोकटोक और खतरे के, उसकी सीमा के भीतर जा कर उसके सैनिक ठिकानों, विमानभेदी और अन्य तोपों, टैंकों, मिसाइलों, हवाई पट्टियों और सामरिक महत्व की अन्य जगहों को नष्ट कर सकें और सकुशल वापस आ जाएं. वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजिस्ट का कहना है कि अब भविष्य में होने वाले युद्धों में कंप्यूटर और डिजिटल नेटवर्क्स की प्रधानता होगी. इनमें हथियारों, तोपों, टैंकों, युद्धक विमानों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों आदि को पूरी तरह इन नेटवर्क्स से समन्वित किया जाएगा, ताकि दुश्मन और उसके आयुधों की पहचान, निगरानी और संचार सिस्टम्स पर पैनी नजर और अचूक निशाना रहे. आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि रुद्रम ने सुखोई तीस MKI के साथ हुए टेस्ट में अपने टारगेट को पूरी सफलता के साथ ध्वस्त किया. DRDO का कहना है अभी रुद्रम की कुछ और टेस्ट उड़ानें होनी हैं, इसके बाद मिसाइल को वायुसेना में शामिल किया जाएगा. रुद्रम का सफल परीक्षण भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा करेगा. |
कृत्वा षोडशगण्डूषान् शुद्धो भूत्वा सुखासनः, इसी मन्त्री पठन्नेव पाणिनोदरमालभेत् । ६१ । ● अगस्त्यं कुम्भकर्ण च शनिं च वडवानलम्, आहारपरिपाकार्थं स्मरेद्धीमं च पञ्चमम् १६२ । आतापी मारितो येन वातापो च निपातितः, समुद्रः शोषितो येन स मेऽगस्त्यः प्रसीदतु । ६३ । मा ततः श्रीकृष्णदेवस्य कुर्वीत स्मरणं सुदा, भूयोऽप्याचम्य कर्तव्यं ततस्ताम्बूलभक्षणम् ॥६४। य भुक्त्वोपविष्टः श्रीकृष्णं परं ब्रह्म विचारयेत्, सच्छास्त्रादिविनोदेन सन्मार्गाद्यविरोधिना । ६५ । मा ततश्चाध्यात्मविद्यायाः कुर्वीत श्रवणं सुधीः, सर्वथा वृत्तिहीनोऽपि मुहूर्त स्वस्थमानसः ॥६६ । म श्रुत्वा धर्म विजानाति श्रुत्वा पापं परित्यजेत् श्रुत्वा निवर्तते मोहः श्रुत्वा ज्ञानामृतं लभेत् ॥६७ । नीचोऽपि श्रवणेनाशु श्रेष्ठत्वं प्रतिपद्यते, श्रेष्ठोऽपि नीचतां याति रहितः श्रवणेन च ।६८ । व्यवहारं ततः कुर्यादबहिर्गत्वा यथासुखम् श्रीकृष्णं मनसा ध्यायेत् सर्वसिद्धिप्रदायकम् । ६९ तब इस से मन्त्रों की पड़ता हुआ उडर की स्पर्ण करे ॥६१ ॥ आस्त्यि कुम्भकर्णशनिबल और पञ्चम भोम को आहार के परियाक के लिये सण करने। जिसने आतापों को मारा और वातापी को मार डाला समुद्र का शोषण किया वह अगस्ता मेरे आ ऊपर प्रसन्न ३॥ दन्न श्रीकृष्णदेव का मस्या करे फिर आचमन कर ताम्बूल क्षण करे ॥६४ ॥ भोजन करके टकर कृष्ण का उत्तम मार्ग के विरोधी उत्तम शास्त्रों के विनोद से विचार करे॥६५॥ बाद बुद्धिमान् अध्यात्मविद्या वा का इवाण करे । नर्वथा लजीविका से होने ममुख्य भी एक मुहूर्त स्वस्थ मन होकर अवण करे ॥६६॥ श्रवण कर धर्म की उ है आकर पाप का करता है के बाद की वृद्धि होती है अवाकर जानरूपी अमृत को प्राप्त करता ।।६७।। नीच भो खवणा करने से लेष्ट हो जाता है और श्रेष्ठ भी सवा रोहत छीन से बीस हो जाता है ॥६८ ॥ फिर बाहर ज संधामुख स्वसहार आदि को और अवार्थ सिद्धि को देने वाले श्रीकृष्ण भगवान का मन से ध्यान करे ।।६९ ॥ सूर्य | कृत्वा षोडशगण्डूषान् शुद्धो भूत्वा सुखासनः, इसी मन्त्री पठन्नेव पाणिनोदरमालभेत् । इकसठ । ● अगस्त्यं कुम्भकर्ण च शनिं च वडवानलम्, आहारपरिपाकार्थं स्मरेद्धीमं च पञ्चमम् एक सौ बासठ । आतापी मारितो येन वातापो च निपातितः, समुद्रः शोषितो येन स मेऽगस्त्यः प्रसीदतु । तिरेसठ । मा ततः श्रीकृष्णदेवस्य कुर्वीत स्मरणं सुदा, भूयोऽप्याचम्य कर्तव्यं ततस्ताम्बूलभक्षणम् ॥चौंसठ। य भुक्त्वोपविष्टः श्रीकृष्णं परं ब्रह्म विचारयेत्, सच्छास्त्रादिविनोदेन सन्मार्गाद्यविरोधिना । पैंसठ । मा ततश्चाध्यात्मविद्यायाः कुर्वीत श्रवणं सुधीः, सर्वथा वृत्तिहीनोऽपि मुहूर्त स्वस्थमानसः ॥छयासठ । म श्रुत्वा धर्म विजानाति श्रुत्वा पापं परित्यजेत् श्रुत्वा निवर्तते मोहः श्रुत्वा ज्ञानामृतं लभेत् ॥सरसठ । नीचोऽपि श्रवणेनाशु श्रेष्ठत्वं प्रतिपद्यते, श्रेष्ठोऽपि नीचतां याति रहितः श्रवणेन च ।अड़सठ । व्यवहारं ततः कुर्यादबहिर्गत्वा यथासुखम् श्रीकृष्णं मनसा ध्यायेत् सर्वसिद्धिप्रदायकम् । उनहत्तर तब इस से मन्त्रों की पड़ता हुआ उडर की स्पर्ण करे ॥इकसठ ॥ आस्त्यि कुम्भकर्णशनिबल और पञ्चम भोम को आहार के परियाक के लिये सण करने। जिसने आतापों को मारा और वातापी को मार डाला समुद्र का शोषण किया वह अगस्ता मेरे आ ऊपर प्रसन्न तीन॥ दन्न श्रीकृष्णदेव का मस्या करे फिर आचमन कर ताम्बूल क्षण करे ॥चौंसठ ॥ भोजन करके टकर कृष्ण का उत्तम मार्ग के विरोधी उत्तम शास्त्रों के विनोद से विचार करे॥पैंसठ॥ बाद बुद्धिमान् अध्यात्मविद्या वा का इवाण करे । नर्वथा लजीविका से होने ममुख्य भी एक मुहूर्त स्वस्थ मन होकर अवण करे ॥छयासठ॥ श्रवण कर धर्म की उ है आकर पाप का करता है के बाद की वृद्धि होती है अवाकर जानरूपी अमृत को प्राप्त करता ।।सरसठ।। नीच भो खवणा करने से लेष्ट हो जाता है और श्रेष्ठ भी सवा रोहत छीन से बीस हो जाता है ॥अड़सठ ॥ फिर बाहर ज संधामुख स्वसहार आदि को और अवार्थ सिद्धि को देने वाले श्रीकृष्ण भगवान का मन से ध्यान करे ।।उनहत्तर ॥ सूर्य |
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (, Amitabh Bachchan) और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के फैंस पूरी दुनिया में हैं। खास बात ये है कि दोनों ही एक दूसरे के बड़े प्रशंसक भी हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब सचिन तेंदुलकर अपने बेटे अर्जुन तेंदुलकर (Arjun Tendulkar) की एक हरकत से अमिताभ बच्चन के सामने बेहद शर्मिंदा हो गए थे। यह बात खुद सचिन ने एक बार अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर 2017 में बताई थी। क्या था ये किस्सा आइए आपको बताएं।
| बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के फैंस पूरी दुनिया में हैं। खास बात ये है कि दोनों ही एक दूसरे के बड़े प्रशंसक भी हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब सचिन तेंदुलकर अपने बेटे अर्जुन तेंदुलकर की एक हरकत से अमिताभ बच्चन के सामने बेहद शर्मिंदा हो गए थे। यह बात खुद सचिन ने एक बार अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर दो हज़ार सत्रह में बताई थी। क्या था ये किस्सा आइए आपको बताएं। |
आईसीसी वर्ल्ड कप क्वालीफायर में शनिवार को दो मैच खेले गए। पापुआ न्यू गिनी ने वन-डे क्रिकेट इतिहास के 4000वें वन-डे में हांगकांग को 58 रन से हराकर 9वां स्थान प्राप्त किया। एक अन्य मुकाबले में नीदरलैंड्स ने नेपाल को 45 रन से हराकर सातवां स्थान हासिल किया। दोनों ही मैच कम स्कोर वाले रहे। वैसे इन दो मुकाबलों के साथ ही चार टीमों का टूर्नामेंट में अभियान भी समाप्त हुआ।
पापुआ न्यू गिनी ने हरारे स्पोर्ट्स क्लब पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पीएनजी ने बल्लेबाजों के उपयोगी प्रदर्शन की बदौलत 200 का आंकड़ा छुआ। पीएनजी 49वें ओवर में 200 रन पर ऑलआउट हो गई। हांगकांग की तरफ से किंचित शाह ने चार विकेट झटके। 201 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी हांगकांग की टीम 36वें ओवर में 142 रन पर ढेर हो गई। पापुआ न्यू गिनी ने वन-डे क्रिकेट इतिहास का 4,000वां वन-डे 58 रन से जीता।
वहीं क्वेक्वे स्टेडियम में नीदरलैंड्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। नीदरलैंड्स के बल्लेबाज निर्धारित 50 ओवर में 9 विकेट खोकर 189 रन का स्कोर बना सके। नेपाल की टीम 45वें ओवर में 144 रन पर ऑलआउट हो गई।
| आईसीसी वर्ल्ड कप क्वालीफायर में शनिवार को दो मैच खेले गए। पापुआ न्यू गिनी ने वन-डे क्रिकेट इतिहास के चार हज़ारवें वन-डे में हांगकांग को अट्ठावन रन से हराकर नौवां स्थान प्राप्त किया। एक अन्य मुकाबले में नीदरलैंड्स ने नेपाल को पैंतालीस रन से हराकर सातवां स्थान हासिल किया। दोनों ही मैच कम स्कोर वाले रहे। वैसे इन दो मुकाबलों के साथ ही चार टीमों का टूर्नामेंट में अभियान भी समाप्त हुआ। पापुआ न्यू गिनी ने हरारे स्पोर्ट्स क्लब पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पीएनजी ने बल्लेबाजों के उपयोगी प्रदर्शन की बदौलत दो सौ का आंकड़ा छुआ। पीएनजी उनचासवें ओवर में दो सौ रन पर ऑलआउट हो गई। हांगकांग की तरफ से किंचित शाह ने चार विकेट झटके। दो सौ एक रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी हांगकांग की टीम छत्तीसवें ओवर में एक सौ बयालीस रन पर ढेर हो गई। पापुआ न्यू गिनी ने वन-डे क्रिकेट इतिहास का चार,शून्यवां वन-डे अट्ठावन रन से जीता। वहीं क्वेक्वे स्टेडियम में नीदरलैंड्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। नीदरलैंड्स के बल्लेबाज निर्धारित पचास ओवर में नौ विकेट खोकर एक सौ नवासी रन का स्कोर बना सके। नेपाल की टीम पैंतालीसवें ओवर में एक सौ चौंतालीस रन पर ऑलआउट हो गई। |
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