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देश के 2 अलग-अलग हिस्सों से लव जिहाद (Love Jihad) के 2 मामले सामने आए हैं। पहला मामला राजधानी दिल्ली से है, जबकि दूसरा मामला उत्तराखंड से जुड़ा है। दोनों ही मामलों में मुस्लिम युवक हिंदू युवतियों से नाम बदलकर मिले और शादी के बाद उनके साथ धर्मांतरण (Religious Conversion) का दबाव बनाते हुए मारपीट की। दिल्ली में एक महिला ने अबू हसन ज़ैदी के खिलाफ मारपीट और धर्मान्तरण के लिए दबाव देने का आरोप लगाया है। वह पीड़िता को श्रद्धा वालकर जैसी हाल की धमकी दे रहा है। वहीं, उत्तराखंड के हरिद्वार से आए दूसरे मामले में अज़हर नाम के व्यक्ति पर हिन्दू नाम से महिला से शादी करने और बाद में उसको धर्मान्तरण का दबाव डालने का आरोप लगा है। पहला मामला दिल्ली के जामिया नगर थाना क्षेत्र का है। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जनवरी 2023 को प्रीति (बदला हुआ नाम) नाम की एक महिला ने पुलिस में अपने पति अबू हसन ज़ैदी के खिलाफ शिकायत FIR दर्ज करवाई है। प्रीति ने जैदी पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि साल 2013 में एक बीमा कम्पनी में काम करने के दौरान उसकी मुलाक़ात अबू हसन से हुई थी। तब अबू ने खुद को आदित्य सिंह बताया था। कुछ समय बाद जैदी ने प्यार और फिर शादी की इच्छा जताई। प्रीति के घर वाले इस रिश्ते से नाखुश थे। इसके बाद भी प्रीति घर वालों की मर्जी के खिलाफ जैदी के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी। प्रीति का आरोप है कि लिव इन में रहने के दौरान अबू हसन जैदी ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस दौरान पीड़िता से जबरन मांस पकवाए गए और रोज़े रखने के लिए मजबूर किया। जैदी ने को जबरन इस्लाम कबूल करवाकर सिमरन अली बना दिया। इतना ही नहीं, उसके कमाए पैसे भी वह छीन लेता था। पीड़िता का कहना है कि जब उसने जैदी पर शादी का दबाव बनाया, तब उसने 7 साल बाद अक्टूबर 2020 में अमरोहा में निकाह करने का नाटक किया। इस निकाह को भी बाद में वह मानने से इंकार कर दिया। प्रीति के अनुसार इस दौरान अबू हसन जैदी उसकी पिटाई भी करता था। पीड़िता का आरोप है कि जब उसने प्रताड़ना की शिकायत दिल्ली पुलिस से की तो आरोपित ने उलटे उसी पर ब्लैकमेलिंग और पैसे माँगने का आरोप लगा दिया। प्रीति के मुताबिक, जैदी ने उसका हाल श्रद्धा जैसा करने की धमकी दी है। पीड़िता का कहना है कि 13 जनवरी को2023 FIR दर्ज करवाने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने आरोपित को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। दूसरी घटना उत्तराखंड के हरिद्वार की है। लव जिहाद इस मामले में कनखल की रहने वाली एक लड़की ने अजहर नाम के युवक पर शादी के बाद धर्मांतरण का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि कासगंज निवासी अज़हर ने राहुल नाम से उस से 9 साल पहले दोस्ती की थी। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली थी। महिला का कहना है कि अजहर से शादी के बाद उसे 2 बच्चे भी हैं। पीड़िता का कहना है कि शादी के बाद अजहर उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। जब वह इससे इनकार करती थी, तो वह उससे मारपीट करता था। पुलिस ने महिला की शिकायत पर अज़हर को गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजहर के पास से 2 आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। इनमें से एक आधार कार्ड पर उसका नाम राहुल है। हरिद्वार के संत लोकेश दास ने इस मामले को लव जिहाद बताया है और कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
देश के दो अलग-अलग हिस्सों से लव जिहाद के दो मामले सामने आए हैं। पहला मामला राजधानी दिल्ली से है, जबकि दूसरा मामला उत्तराखंड से जुड़ा है। दोनों ही मामलों में मुस्लिम युवक हिंदू युवतियों से नाम बदलकर मिले और शादी के बाद उनके साथ धर्मांतरण का दबाव बनाते हुए मारपीट की। दिल्ली में एक महिला ने अबू हसन ज़ैदी के खिलाफ मारपीट और धर्मान्तरण के लिए दबाव देने का आरोप लगाया है। वह पीड़िता को श्रद्धा वालकर जैसी हाल की धमकी दे रहा है। वहीं, उत्तराखंड के हरिद्वार से आए दूसरे मामले में अज़हर नाम के व्यक्ति पर हिन्दू नाम से महिला से शादी करने और बाद में उसको धर्मान्तरण का दबाव डालने का आरोप लगा है। पहला मामला दिल्ली के जामिया नगर थाना क्षेत्र का है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन जनवरी दो हज़ार तेईस को प्रीति नाम की एक महिला ने पुलिस में अपने पति अबू हसन ज़ैदी के खिलाफ शिकायत FIR दर्ज करवाई है। प्रीति ने जैदी पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि साल दो हज़ार तेरह में एक बीमा कम्पनी में काम करने के दौरान उसकी मुलाक़ात अबू हसन से हुई थी। तब अबू ने खुद को आदित्य सिंह बताया था। कुछ समय बाद जैदी ने प्यार और फिर शादी की इच्छा जताई। प्रीति के घर वाले इस रिश्ते से नाखुश थे। इसके बाद भी प्रीति घर वालों की मर्जी के खिलाफ जैदी के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी। प्रीति का आरोप है कि लिव इन में रहने के दौरान अबू हसन जैदी ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस दौरान पीड़िता से जबरन मांस पकवाए गए और रोज़े रखने के लिए मजबूर किया। जैदी ने को जबरन इस्लाम कबूल करवाकर सिमरन अली बना दिया। इतना ही नहीं, उसके कमाए पैसे भी वह छीन लेता था। पीड़िता का कहना है कि जब उसने जैदी पर शादी का दबाव बनाया, तब उसने सात साल बाद अक्टूबर दो हज़ार बीस में अमरोहा में निकाह करने का नाटक किया। इस निकाह को भी बाद में वह मानने से इंकार कर दिया। प्रीति के अनुसार इस दौरान अबू हसन जैदी उसकी पिटाई भी करता था। पीड़िता का आरोप है कि जब उसने प्रताड़ना की शिकायत दिल्ली पुलिस से की तो आरोपित ने उलटे उसी पर ब्लैकमेलिंग और पैसे माँगने का आरोप लगा दिया। प्रीति के मुताबिक, जैदी ने उसका हाल श्रद्धा जैसा करने की धमकी दी है। पीड़िता का कहना है कि तेरह जनवरी कोदो हज़ार तेईस FIR दर्ज करवाने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने आरोपित को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। दूसरी घटना उत्तराखंड के हरिद्वार की है। लव जिहाद इस मामले में कनखल की रहने वाली एक लड़की ने अजहर नाम के युवक पर शादी के बाद धर्मांतरण का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि कासगंज निवासी अज़हर ने राहुल नाम से उस से नौ साल पहले दोस्ती की थी। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली थी। महिला का कहना है कि अजहर से शादी के बाद उसे दो बच्चे भी हैं। पीड़िता का कहना है कि शादी के बाद अजहर उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। जब वह इससे इनकार करती थी, तो वह उससे मारपीट करता था। पुलिस ने महिला की शिकायत पर अज़हर को गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजहर के पास से दो आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। इनमें से एक आधार कार्ड पर उसका नाम राहुल है। हरिद्वार के संत लोकेश दास ने इस मामले को लव जिहाद बताया है और कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इंडिया गेट पर धरना दिया। वो छात्रों के समर्थन में दो घंटे के धरने पर बैठी थीं। धरने की तस्वीरों में प्रियंका को इंडिया गेट के सामने बैठे हुए देखा जा सकता है। उनके साथ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल भी बैठे हुए थे। कांग्रेस के 300 से अधिक कार्यकर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया। धरना शुरू होने से चंद मिनटों पहले समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए प्रियंका ने कहा, "सरकार ने संविधान और छात्रों पर हमला किया है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में घुसकर छात्रों पर हमला किया। हम संविधान के लिए लड़ेंगे। हम इस सरकार के खिलाफ लड़ेंगे। " उनके इस धरने में अहमद पटेल के अलावा केसी वेणुगोपाल, एके एंटनी, पीएल पुनिया और अंबिका सोनी समेत कई अहम कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। "युवा देश की आत्मा, सरकार ने देश की आत्मा पर हमला बोला" वहीं धरना खत्म होने के बाद प्रियंका ने फिर से सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "सरकार ने संविधान पर हमला बोला है। ये देश की आत्मा पर हमला है, युवा देश की आत्मा हैं। प्रदर्शन करना उनका अधिका है। मैं भी एक मां हूं। आप उनकी लाइब्रेरी में घुसे, उनके बाहर घसीटा और उनकी पिटाई की। ये तानाशाही है। कांग्रेस का हर व्यक्ति इस तानाशाही के खिलाफ लड़ेगा और छात्रों के साथ खड़ा होगा। " 'कायर है ये सरकार' इससे पहले रविवार रात जामिया के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद भी प्रियंका ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा था, 'देश के विश्वविद्यालयों में घुस-घुसकर विद्यार्थियों को पीटा जा रहा है। जिस समय सरकार को आगे बढ़कर लोगों की बात सुननी चाहिए, उस समय भाजपा सरकार उत्तर पूर्व, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में विद्यार्थियों और पत्रकारों पर दमन के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। यह सरकार कायर है। ' बता दें कि रविवार को जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छात्रों के अलावा बाहरी लोग भी शामिल थे। इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया, जिसके बाद कुछ अज्ञात लोगों ने DTC की तीन बसों को आग के हवाले कर दिया। छात्रों का कहना है कि ये हिंसा बाहर से आए लोगों ने की थी और पुलिस के लाठीचार्ज के बाद हालात और खराब हुए। रात को प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बहाने दिल्ली पुलिस जामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में घुस गई और 100 से अधिक छात्रों को हिंसा में शामिल होने के लिए गिरफ्तार कर किया। छात्रों ने पुलिस पर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी और लड़कियों के हॉस्टल तक में घुसने का आरोप लगाया है। पुलिस के आंसू गैस के गोले छोड़ने की बात भी कही जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया और उन्होंने छिपकर अपनी जान बचाई।
नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इंडिया गेट पर धरना दिया। वो छात्रों के समर्थन में दो घंटे के धरने पर बैठी थीं। धरने की तस्वीरों में प्रियंका को इंडिया गेट के सामने बैठे हुए देखा जा सकता है। उनके साथ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल भी बैठे हुए थे। कांग्रेस के तीन सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया। धरना शुरू होने से चंद मिनटों पहले समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए प्रियंका ने कहा, "सरकार ने संविधान और छात्रों पर हमला किया है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में घुसकर छात्रों पर हमला किया। हम संविधान के लिए लड़ेंगे। हम इस सरकार के खिलाफ लड़ेंगे। " उनके इस धरने में अहमद पटेल के अलावा केसी वेणुगोपाल, एके एंटनी, पीएल पुनिया और अंबिका सोनी समेत कई अहम कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। "युवा देश की आत्मा, सरकार ने देश की आत्मा पर हमला बोला" वहीं धरना खत्म होने के बाद प्रियंका ने फिर से सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "सरकार ने संविधान पर हमला बोला है। ये देश की आत्मा पर हमला है, युवा देश की आत्मा हैं। प्रदर्शन करना उनका अधिका है। मैं भी एक मां हूं। आप उनकी लाइब्रेरी में घुसे, उनके बाहर घसीटा और उनकी पिटाई की। ये तानाशाही है। कांग्रेस का हर व्यक्ति इस तानाशाही के खिलाफ लड़ेगा और छात्रों के साथ खड़ा होगा। " 'कायर है ये सरकार' इससे पहले रविवार रात जामिया के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद भी प्रियंका ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा था, 'देश के विश्वविद्यालयों में घुस-घुसकर विद्यार्थियों को पीटा जा रहा है। जिस समय सरकार को आगे बढ़कर लोगों की बात सुननी चाहिए, उस समय भाजपा सरकार उत्तर पूर्व, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में विद्यार्थियों और पत्रकारों पर दमन के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। यह सरकार कायर है। ' बता दें कि रविवार को जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छात्रों के अलावा बाहरी लोग भी शामिल थे। इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया, जिसके बाद कुछ अज्ञात लोगों ने DTC की तीन बसों को आग के हवाले कर दिया। छात्रों का कहना है कि ये हिंसा बाहर से आए लोगों ने की थी और पुलिस के लाठीचार्ज के बाद हालात और खराब हुए। रात को प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बहाने दिल्ली पुलिस जामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में घुस गई और एक सौ से अधिक छात्रों को हिंसा में शामिल होने के लिए गिरफ्तार कर किया। छात्रों ने पुलिस पर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी और लड़कियों के हॉस्टल तक में घुसने का आरोप लगाया है। पुलिस के आंसू गैस के गोले छोड़ने की बात भी कही जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया और उन्होंने छिपकर अपनी जान बचाई।
रयाबकोव के अनुसार, वाशिंगटन ने उच्चतम स्तर पर द्विपक्षीय राजनयिक चैनलों पर प्रासंगिक जानकारी की पुष्टि करते हुए, संधि संधि से हटने की घोषणा की। उसी समय, संयुक्त राज्य ने तुरंत स्पष्ट कर दिया कि घोषित कदम आगे की बातचीत का निमंत्रण नहीं है, और निर्णय परिस्थितियों के आधार पर किया गया था और अंतिम है। उसी समय, वाशिंगटन की दलीलें कि रूस को संधि से अमेरिका की वापसी के लिए दोषी ठहराना है, दिवालिया हैं, मॉस्को ने संधि संधि का उल्लंघन नहीं किया, इसलिए संधि वैध बनी हुई है, रैबकोव ने कहा। व्यवहार में, इसका मतलब है कि अनुबंध के निलंबन की अवधि के लिए, इसके प्रावधान दोनों पक्षों पर बाध्यकारी रहेंगे। इस बीच, मॉस्को पर संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए, वाशिंगटन ने अभी भी यह नहीं बताया है कि यूएसए में किस जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि 9M729 रॉकेट का परीक्षण इंफी द्वारा निषिद्ध सीमा के लिए किया गया था, उप मंत्री ने जोर दिया। लंबे समय तक, उन्होंने रूस पर रॉकेट के प्रकार का नामकरण न करके संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, और केवल एक साल पहले उन्होंने बताया कि यह एक 9M729 मिसाइल थी। हालाँकि, उन्होंने अभी भी यह नहीं बताया कि इस मिसाइल के साथ अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए कौन सी जानकारी का निर्णय लिया गया था। याद करें कि संयुक्त राज्य अमेरिका पहली संधि को छोड़ने वाला था, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले अक्टूबर में कहा, रूस पर संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। वाशिंगटन ने बाद में मास्को को दो महीने का समय दिया "संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए," 9M729 मिसाइल और इसके लिए लांचरों के विनाश पर जोर दिया। रूस ने सभी अमेरिकी सबूतों को गढ़ा और स्पष्ट रूप से रॉकेट को नष्ट करने से इनकार कर दिया, बदले में संयुक्त राज्य अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
रयाबकोव के अनुसार, वाशिंगटन ने उच्चतम स्तर पर द्विपक्षीय राजनयिक चैनलों पर प्रासंगिक जानकारी की पुष्टि करते हुए, संधि संधि से हटने की घोषणा की। उसी समय, संयुक्त राज्य ने तुरंत स्पष्ट कर दिया कि घोषित कदम आगे की बातचीत का निमंत्रण नहीं है, और निर्णय परिस्थितियों के आधार पर किया गया था और अंतिम है। उसी समय, वाशिंगटन की दलीलें कि रूस को संधि से अमेरिका की वापसी के लिए दोषी ठहराना है, दिवालिया हैं, मॉस्को ने संधि संधि का उल्लंघन नहीं किया, इसलिए संधि वैध बनी हुई है, रैबकोव ने कहा। व्यवहार में, इसका मतलब है कि अनुबंध के निलंबन की अवधि के लिए, इसके प्रावधान दोनों पक्षों पर बाध्यकारी रहेंगे। इस बीच, मॉस्को पर संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए, वाशिंगटन ने अभी भी यह नहीं बताया है कि यूएसए में किस जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि नौMसात सौ उनतीस रॉकेट का परीक्षण इंफी द्वारा निषिद्ध सीमा के लिए किया गया था, उप मंत्री ने जोर दिया। लंबे समय तक, उन्होंने रूस पर रॉकेट के प्रकार का नामकरण न करके संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, और केवल एक साल पहले उन्होंने बताया कि यह एक नौMसात सौ उनतीस मिसाइल थी। हालाँकि, उन्होंने अभी भी यह नहीं बताया कि इस मिसाइल के साथ अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए कौन सी जानकारी का निर्णय लिया गया था। याद करें कि संयुक्त राज्य अमेरिका पहली संधि को छोड़ने वाला था, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले अक्टूबर में कहा, रूस पर संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। वाशिंगटन ने बाद में मास्को को दो महीने का समय दिया "संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए," नौMसात सौ उनतीस मिसाइल और इसके लिए लांचरों के विनाश पर जोर दिया। रूस ने सभी अमेरिकी सबूतों को गढ़ा और स्पष्ट रूप से रॉकेट को नष्ट करने से इनकार कर दिया, बदले में संयुक्त राज्य अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
सैन फ्रांसिस्को, 29 नवंबर (आईएएनएस)। फेसबुक के एक पूर्व कर्मी द्वारा कंपनी के 'ब्लैक पीपुल प्रोब्लम' के लिए उसकी आलोचना करने के अगले दिन कंपनी ने पिछले अल्पसंख्यकों और महिलाओं में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा देने के लिए कोडपाथ डॉट ओआरजी में एक अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। कोडपाथ डॉट ओआरजी एक अमेरिकी गैरलाभकारी संस्था है जो दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में अल्पसंख्यकों और महिलाओं को कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा उपलब्ध कराती है। इससे पहले, फेसबुक में ग्लोबल इंफ्लूएंसर्स के लिए पूर्व रणनीतिक साझेदार मार्क लकी ने फेसबुक पर अश्वेत लोगों से साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि फेसबुक अपने अश्वेत कर्मियों और उपयोगकर्ताओं का पर्याप्त समर्थन करने में नाकाम रहा है।
सैन फ्रांसिस्को, उनतीस नवंबर । फेसबुक के एक पूर्व कर्मी द्वारा कंपनी के 'ब्लैक पीपुल प्रोब्लम' के लिए उसकी आलोचना करने के अगले दिन कंपनी ने पिछले अल्पसंख्यकों और महिलाओं में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा देने के लिए कोडपाथ डॉट ओआरजी में एक अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। कोडपाथ डॉट ओआरजी एक अमेरिकी गैरलाभकारी संस्था है जो दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में अल्पसंख्यकों और महिलाओं को कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा उपलब्ध कराती है। इससे पहले, फेसबुक में ग्लोबल इंफ्लूएंसर्स के लिए पूर्व रणनीतिक साझेदार मार्क लकी ने फेसबुक पर अश्वेत लोगों से साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि फेसबुक अपने अश्वेत कर्मियों और उपयोगकर्ताओं का पर्याप्त समर्थन करने में नाकाम रहा है।
तालिबान की क्रूरताःअफगानिस्तान में शादी के दौरान म्यूजिक बजाने की सजा, अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान की क्रूरता कम नहीं हो रही है। तालिबान के लड़ाकों ने एक शादी में म्यूजिक बजाने पर 13 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। ताजा मामला नेंगरहार प्रांत का है। अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। तालिबान का दोस्त पाकिस्तान भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने गुपचुप तरीके से तालिबान के लिए दूतावास खोल दिए हैं। पाकिस्तान ने तालिबान की ओर से नियुक्त राजनयिकों को अपने यहां काम करने की चुपचाप अनुमति दे दी है। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इसके लिए तालिबानी राजनयिकों को को वीजा भी जारी किया है। इससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने तालिबान का विरोध करने वाले पंजशीर के लड़ाकों को कमजोर करने के लिए गुपचुप तरीके से सैन्य मदद पहुंचाई थी। पाकिस्तान के इस स्टैंड का अफगानिस्तान समेत दुनियाभर में विरोध हुआ था। हालांकि पाकिस्तान ने तालिबान को अभी आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है। ऐसे में उनके राजनयिकों को काम करने की अनुमति देना उसके इरादों पर सवाल खड़े करता है।
तालिबान की क्रूरताःअफगानिस्तान में शादी के दौरान म्यूजिक बजाने की सजा, अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान की क्रूरता कम नहीं हो रही है। तालिबान के लड़ाकों ने एक शादी में म्यूजिक बजाने पर तेरह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। ताजा मामला नेंगरहार प्रांत का है। अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। तालिबान का दोस्त पाकिस्तान भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने गुपचुप तरीके से तालिबान के लिए दूतावास खोल दिए हैं। पाकिस्तान ने तालिबान की ओर से नियुक्त राजनयिकों को अपने यहां काम करने की चुपचाप अनुमति दे दी है। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इसके लिए तालिबानी राजनयिकों को को वीजा भी जारी किया है। इससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने तालिबान का विरोध करने वाले पंजशीर के लड़ाकों को कमजोर करने के लिए गुपचुप तरीके से सैन्य मदद पहुंचाई थी। पाकिस्तान के इस स्टैंड का अफगानिस्तान समेत दुनियाभर में विरोध हुआ था। हालांकि पाकिस्तान ने तालिबान को अभी आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है। ऐसे में उनके राजनयिकों को काम करने की अनुमति देना उसके इरादों पर सवाल खड़े करता है।
छ्वन्रूस्॥ श्वष्ठक्कक्त्रः बंगाली महिलाओं ने मंगलवार को देवी दुर्गा के रूप मां विपततारिणी की पूजा धूमधाम से की। इसे लेकर काली व दुर्गा मंदिरों में सुबह से दोपहर तक महिलाओं की भीड़ रही। बेल्डीह काली बाड़ी, साकची कालीबाड़ी, जमशेदपुर दुर्गाबाड़ी, बिष्टुपुर कालीबाड़ी, साकची शीतला मंदिर, रंकिणी मंदिर कदमा, टिनप्लेट काली मंदिर, बारीडीह में भूषण कालोनी के काली मंदिर में दोपहर बाद तक महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। मां को दूब घास के साथ अनानास व आम सहित मौसमी फल चढ़ाए गए, तो इसके बाद परिवार के सदस्यों ने प्रसाद ग्रहण करने से पहले 13 गांठ वाला धागा बांह में बांधा। मान्यता है कि मां विपततारिणी के प्रसन्न रहने से घर में सुख-शांति रहती है। मां विपततारिणी की पूजा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से नवमी के बीच मंगलवार व शनिवार को होती है। इस पूजा का विधान रथयात्रा के बाद पड़ने वाले मंगलवार या शनिवार को होता है, लेकिन घुरती रथ (भगवान जगन्नाथ के मौसी बाड़ी से लौटने के पहले)। परसुडीह के प्रमथनगर स्थित दयामयी काली मंदिर में मंगलवार को महिलाओं ने विपततारणी पूजा की। देवी दुर्गा के दूसरे रूप की पूजा करने सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पहुंचीं। मां दुर्गा के चरणों में 13 किस्म के फल-फूल चढ़ाए गए। मंदिर कमेटी के सुजीत मजूमदार ने बताया कि महिलाएं यह पूजा अपने पति की लंबी आयु व घर में सुख-शांति के लिए करती हैं। पूजा के बाद महिला व पुरुष हाथ में तेरह लड़ी व गांठ का रक्षासूत्र बांधते हैं। पूजा को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के अरुप घोष, ताबू, बुंबा, पार्थो, स्वपन मजुमदार, निरंजन पात्रो, तापस चटर्जी, अल्पना पाल, भारती, नीलिमा हो, रंजन आदि सक्रिय रहे। टेल्को के घोड़ाबांधा स्थित सार्वजनिक काली मंदिर में मंगलवार को मां विपततारिणी की पूजा-अर्चना पूरे भक्ति भाव से की गई। संकट और विपत्ति से सुरक्षित रहने तथा परिवार में मंगल के लिए यह पूजा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में होती है। लोगों में आस्था है कि विपततारणी मां की पूजा से हर प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। परिवार के सदस्यों को सभी प्रकार की विपत्तियों से मुक्ति मिलती है। यहां सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। मंदिर में मेले सा नजारा बना रहा। पूजा में पुरोहित पंडित बिद्युत मिश्र, पंडित अक्षय गोस्वामी एवं पंडित आशीष चटर्जी ने मंत्रोच्चार किया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से मां विपततारणी की कथा भी पुरोहित से सुनी। पुरोहित ने मंत्रोच्चाण के साथ लाल धागे में दूब बांधकर व्रती के हाथों में बांधा। बताया जाता है कि इस लाल धागे से परिवार के सदस्यों को सभी प्रकार की विपत्ति से मुक्ति मिलती है।
छ्वन्रूस्॥ श्वष्ठक्कक्त्रः बंगाली महिलाओं ने मंगलवार को देवी दुर्गा के रूप मां विपततारिणी की पूजा धूमधाम से की। इसे लेकर काली व दुर्गा मंदिरों में सुबह से दोपहर तक महिलाओं की भीड़ रही। बेल्डीह काली बाड़ी, साकची कालीबाड़ी, जमशेदपुर दुर्गाबाड़ी, बिष्टुपुर कालीबाड़ी, साकची शीतला मंदिर, रंकिणी मंदिर कदमा, टिनप्लेट काली मंदिर, बारीडीह में भूषण कालोनी के काली मंदिर में दोपहर बाद तक महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। मां को दूब घास के साथ अनानास व आम सहित मौसमी फल चढ़ाए गए, तो इसके बाद परिवार के सदस्यों ने प्रसाद ग्रहण करने से पहले तेरह गांठ वाला धागा बांह में बांधा। मान्यता है कि मां विपततारिणी के प्रसन्न रहने से घर में सुख-शांति रहती है। मां विपततारिणी की पूजा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से नवमी के बीच मंगलवार व शनिवार को होती है। इस पूजा का विधान रथयात्रा के बाद पड़ने वाले मंगलवार या शनिवार को होता है, लेकिन घुरती रथ । परसुडीह के प्रमथनगर स्थित दयामयी काली मंदिर में मंगलवार को महिलाओं ने विपततारणी पूजा की। देवी दुर्गा के दूसरे रूप की पूजा करने सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पहुंचीं। मां दुर्गा के चरणों में तेरह किस्म के फल-फूल चढ़ाए गए। मंदिर कमेटी के सुजीत मजूमदार ने बताया कि महिलाएं यह पूजा अपने पति की लंबी आयु व घर में सुख-शांति के लिए करती हैं। पूजा के बाद महिला व पुरुष हाथ में तेरह लड़ी व गांठ का रक्षासूत्र बांधते हैं। पूजा को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के अरुप घोष, ताबू, बुंबा, पार्थो, स्वपन मजुमदार, निरंजन पात्रो, तापस चटर्जी, अल्पना पाल, भारती, नीलिमा हो, रंजन आदि सक्रिय रहे। टेल्को के घोड़ाबांधा स्थित सार्वजनिक काली मंदिर में मंगलवार को मां विपततारिणी की पूजा-अर्चना पूरे भक्ति भाव से की गई। संकट और विपत्ति से सुरक्षित रहने तथा परिवार में मंगल के लिए यह पूजा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में होती है। लोगों में आस्था है कि विपततारणी मां की पूजा से हर प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। परिवार के सदस्यों को सभी प्रकार की विपत्तियों से मुक्ति मिलती है। यहां सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। मंदिर में मेले सा नजारा बना रहा। पूजा में पुरोहित पंडित बिद्युत मिश्र, पंडित अक्षय गोस्वामी एवं पंडित आशीष चटर्जी ने मंत्रोच्चार किया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से मां विपततारणी की कथा भी पुरोहित से सुनी। पुरोहित ने मंत्रोच्चाण के साथ लाल धागे में दूब बांधकर व्रती के हाथों में बांधा। बताया जाता है कि इस लाल धागे से परिवार के सदस्यों को सभी प्रकार की विपत्ति से मुक्ति मिलती है।
ग्वालियर,न. सं. । चुनावी वर्ष में मंगलवार को नगर निगम की महापौर डॉ शोभा सिकरवार ने शहर वासियों को सब्जबाग दिखाने वाला बजट पेश किया है। करीब आधी सदी बाद नगर निगम में बनी कांग्रेस की महापौर द्वारा पेश किए गए बजट में एक बार फिर नागरिकों की गाढ़ी कमाई को खर्च करने के लिए अमृत योजना फेस टू पर 917 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान बजट में दिखाया गया है । इसके अलावा शहर की खस्ताहाल सडक़ों को बनाने और उनकी मरम्मत के लिए 181 करोड़ रुपए इस बजट में खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। वैसे नगर निगम की पहले से चल रही अमृत योजना ने शहर को जो जख्म दिए हैं वह आज तक नहीं भर पाए हैं । इसके बाद अमृत. 02 योजना में एक बार फिर 917 करोड़, तो सडक़े बनाने व मरम्मत के लिए 181 करोड़ खर्च करने की तैयारी है। इसके अलावा स्वास्थ्य क्लीनिक बनाने व सुधार पर 70 करोड़, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 30 करोड़, पार्कों के उन्नयन के 16 करोड़ खर्च करना प्रावधानित किया गया है। महापौर डॉ. शोभा सिकरवार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट प्रस्तुत किया गया है। जिसमें बताया गया कि निगमायुक्त किशोर कान्याल ने 16. 53 अरब आय बताकर 16. 32 अरब व्यय का प्रस्ताव में 7. 14 लाख का लाभ दिखाते हुए मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) के सामने प्रस्ताव भेजा था, जिसके बाद एमआईसी ने नगर निगम के सभी विभागों के वित्तीय आय- व्यय की स्थिति का आकंलन कर चालू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए कुल बजट पूंजीगत तथा राजस्व मद में कुल 21,28,08,31,000/-(इक्कीस अरब अठ्ठाइस करोड़ आठ लाख इक्तीस हजार)आय पर 21,07,45,27,000 (इक्कीस अरब सात करोड़ पैंतालीस लाख सत्ताइस हजार) व्यय का प्रस्ताव तैयार किया। जिसमें स्वयं के स्त्रोतों से आय का 5 प्रतिशत 20,60,02,850 (बीस करोड़ साठ लाख दो हाजर आठ सौ पचास रूपये ) संचित निधि में रखने का प्रावधान कर शुद्ध लाभ 3,01,150/- (तीन लाख एक हजार एक सौ पचार रूपये) आधिक्य (लाख) का बजट प्रस्तुत किया गया। महापौर द्वारा प्रस्तुत बजट प्रस्ताव में आर्धिक रियायतें महापौर-पार्षद व मनोनीत पार्षदों को स्वैच्छिक अधिकार हेतु राशि 2. 78 (दो करोड़ अठहत्तर लाख) का प्रावधान रखा है, लेकिन इसमें परिषद के सभापति को रियायतें देने वाले नाम का उल्लेख नहीं किया गया है। जिसके चलते संशोधन सत्र में बहस तय मानी जा रही है। निगम परिषद में बजट प्रस्तुत होने के बाद सभापति मनोज तोमर द्वारा सभी पार्षदों को बजट प्रति पढऩे के बाद 25 मार्च तक संशोधन पत्र परिषद के सचिव को देने की तिथि निर्धारित की गई है। इसके बाद 28 को बजट संशोधनों पर बहस के लिए परिषद की बैठक होगी। हालांकि संशोधनों में एक प्रस्ताव निगम वित्त विभाग की ओर से भी प्रस्तुत होगा। -150 करोड़ संपत्तिकर, होर्डिंग के माध्यम से 10 करोड़, जलकर से 45 करोड़ और निगम की जमीन को लीज पर देने, बाजर हाथ-ठेले,कंपाउडिंग,अवैध कॉलोनी को वैध करने और बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने सहित अन्य मध्यमों से राजस्व आय का अनुमान 300 करोड़ रखा गया है। जबकि मार्क हॉस्पिटल गौशालो को लालटिपारा शिफ्टिंग करने व सीएनजी पंप से 07 करोड़ व प्रधानमंत्री आवास योजना के पूर्ण होने पर लगभग 100 करोड़ की आय होने का अनुमान बताया गया है। -महापौर-अध्यक्ष-पार्षदों की मौलिक निधि के रूप में 54 करोड़,
ग्वालियर,न. सं. । चुनावी वर्ष में मंगलवार को नगर निगम की महापौर डॉ शोभा सिकरवार ने शहर वासियों को सब्जबाग दिखाने वाला बजट पेश किया है। करीब आधी सदी बाद नगर निगम में बनी कांग्रेस की महापौर द्वारा पेश किए गए बजट में एक बार फिर नागरिकों की गाढ़ी कमाई को खर्च करने के लिए अमृत योजना फेस टू पर नौ सौ सत्रह करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान बजट में दिखाया गया है । इसके अलावा शहर की खस्ताहाल सडक़ों को बनाने और उनकी मरम्मत के लिए एक सौ इक्यासी करोड़ रुपए इस बजट में खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। वैसे नगर निगम की पहले से चल रही अमृत योजना ने शहर को जो जख्म दिए हैं वह आज तक नहीं भर पाए हैं । इसके बाद अमृत. दो योजना में एक बार फिर नौ सौ सत्रह करोड़, तो सडक़े बनाने व मरम्मत के लिए एक सौ इक्यासी करोड़ खर्च करने की तैयारी है। इसके अलावा स्वास्थ्य क्लीनिक बनाने व सुधार पर सत्तर करोड़, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए तीस करोड़, पार्कों के उन्नयन के सोलह करोड़ खर्च करना प्रावधानित किया गया है। महापौर डॉ. शोभा सिकरवार द्वारा वित्तीय वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के लिए बजट प्रस्तुत किया गया है। जिसमें बताया गया कि निगमायुक्त किशोर कान्याल ने सोलह. तिरेपन अरब आय बताकर सोलह. बत्तीस अरब व्यय का प्रस्ताव में सात. चौदह लाख का लाभ दिखाते हुए मेयर इन काउंसिल के सामने प्रस्ताव भेजा था, जिसके बाद एमआईसी ने नगर निगम के सभी विभागों के वित्तीय आय- व्यय की स्थिति का आकंलन कर चालू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए कुल बजट पूंजीगत तथा राजस्व मद में कुल इक्कीस,अट्ठाईस,आठ,इकतीस,शून्य/-आय पर इक्कीस,सात,पैंतालीस,सत्ताईस,शून्य व्यय का प्रस्ताव तैयार किया। जिसमें स्वयं के स्त्रोतों से आय का पाँच प्रतिशत बीस,साठ,दो,आठ सौ पचास संचित निधि में रखने का प्रावधान कर शुद्ध लाभ तीन,एक,एक सौ पचास/- आधिक्य का बजट प्रस्तुत किया गया। महापौर द्वारा प्रस्तुत बजट प्रस्ताव में आर्धिक रियायतें महापौर-पार्षद व मनोनीत पार्षदों को स्वैच्छिक अधिकार हेतु राशि दो. अठहत्तर का प्रावधान रखा है, लेकिन इसमें परिषद के सभापति को रियायतें देने वाले नाम का उल्लेख नहीं किया गया है। जिसके चलते संशोधन सत्र में बहस तय मानी जा रही है। निगम परिषद में बजट प्रस्तुत होने के बाद सभापति मनोज तोमर द्वारा सभी पार्षदों को बजट प्रति पढऩे के बाद पच्चीस मार्च तक संशोधन पत्र परिषद के सचिव को देने की तिथि निर्धारित की गई है। इसके बाद अट्ठाईस को बजट संशोधनों पर बहस के लिए परिषद की बैठक होगी। हालांकि संशोधनों में एक प्रस्ताव निगम वित्त विभाग की ओर से भी प्रस्तुत होगा। -एक सौ पचास करोड़ संपत्तिकर, होर्डिंग के माध्यम से दस करोड़, जलकर से पैंतालीस करोड़ और निगम की जमीन को लीज पर देने, बाजर हाथ-ठेले,कंपाउडिंग,अवैध कॉलोनी को वैध करने और बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने सहित अन्य मध्यमों से राजस्व आय का अनुमान तीन सौ करोड़ रखा गया है। जबकि मार्क हॉस्पिटल गौशालो को लालटिपारा शिफ्टिंग करने व सीएनजी पंप से सात करोड़ व प्रधानमंत्री आवास योजना के पूर्ण होने पर लगभग एक सौ करोड़ की आय होने का अनुमान बताया गया है। -महापौर-अध्यक्ष-पार्षदों की मौलिक निधि के रूप में चौवन करोड़,
सीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट ctet.nic.in पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षा में देश भर से लाखों उम्मीदवार भाग लेंगे. केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के लिए नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जा सकता है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जल्द सीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन (CTET 2021 Notification) ऑफिशियल वेबसाइट ctet.nic.in पर जारी कर सकता है. हर साल सरकारी शिक्षक की नौकरी का सपना देखने वाले लाखों उम्मीदवार सीटेट परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं. अब तक इस परीक्षा की तारीख नहीं आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही सीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन आ सकता है. हालांकि इसको लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है. पिछले साल यह परीक्षा जुलाई में होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इस परीक्षा को स्थगित कर दिया गया था. सीटेट परीक्षा का आयोजन 31 जनवरी 2021 को हुआ था. पूरे देश भर के 135 शहरों में परीक्षा आयोजित की गई थी. CTET की परीक्षा में पेपर-1 4,14,798 उम्मीदवारों और पेपर-2 2,39,501 उम्मीदवारों ने क्वालीफाई किया था. पेपर-1 की परीक्षा के लिए 16,11,423 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जिसमें से 12,47,217 उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया था. वहीं, पेपर-2 के लिए 14,47,551 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जिसमें से 11,04,454 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे. CTET परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाती है. इसमें पहला पेपर प्राइमरी स्टेज के लिए होता है. वहीं, दूसरे पेपर में एलिमेंट्री स्टेज के प्रश्न पूछे जाते हैं. पेपर 1 कक्षा 1 से 5 और पेपर 2 कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए आयोजित किया जाता है. अगर आप दोनों के लिए योग्यता चाहते हैं तो आपको 2 पेपर के लिए आवेदन करना होता है. सीटेट परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार के अधीन आने वाले स्कूलों में पढ़ाने के लिए योग्य हो जाते हैं. सीटेट पास उम्मीदवार केंद्रीय विद्यालयों (Kendriya Vidyalaya), नवोदय विद्यालय समिति (Navodaya Vidyalaya Samiti), केंद्रीय तिबेतन स्कूलों और अन्य सरकारी स्कूलों में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं.
सीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट ctet.nic.in पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षा में देश भर से लाखों उम्मीदवार भाग लेंगे. केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जा सकता है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जल्द सीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट ctet.nic.in पर जारी कर सकता है. हर साल सरकारी शिक्षक की नौकरी का सपना देखने वाले लाखों उम्मीदवार सीटेट परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं. अब तक इस परीक्षा की तारीख नहीं आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही सीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन आ सकता है. हालांकि इसको लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है. पिछले साल यह परीक्षा जुलाई में होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इस परीक्षा को स्थगित कर दिया गया था. सीटेट परीक्षा का आयोजन इकतीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को हुआ था. पूरे देश भर के एक सौ पैंतीस शहरों में परीक्षा आयोजित की गई थी. CTET की परीक्षा में पेपर-एक चार,चौदह,सात सौ अट्ठानवे उम्मीदवारों और पेपर-दो दो,उनतालीस,पाँच सौ एक उम्मीदवारों ने क्वालीफाई किया था. पेपर-एक की परीक्षा के लिए सोलह,ग्यारह,चार सौ तेईस उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जिसमें से बारह,सैंतालीस,दो सौ सत्रह उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया था. वहीं, पेपर-दो के लिए चौदह,सैंतालीस,पाँच सौ इक्यावन उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जिसमें से ग्यारह,चार,चार सौ चौवन उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे. CTET परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाती है. इसमें पहला पेपर प्राइमरी स्टेज के लिए होता है. वहीं, दूसरे पेपर में एलिमेंट्री स्टेज के प्रश्न पूछे जाते हैं. पेपर एक कक्षा एक से पाँच और पेपर दो कक्षा छः से आठ तक पढ़ाने के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए आयोजित किया जाता है. अगर आप दोनों के लिए योग्यता चाहते हैं तो आपको दो पेपर के लिए आवेदन करना होता है. सीटेट परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार के अधीन आने वाले स्कूलों में पढ़ाने के लिए योग्य हो जाते हैं. सीटेट पास उम्मीदवार केंद्रीय विद्यालयों , नवोदय विद्यालय समिति , केंद्रीय तिबेतन स्कूलों और अन्य सरकारी स्कूलों में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं.
कतर रविवार रात मैक्सिकन टीम पर 1-0 से जीत के साथ CONCACAF गोल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया, जिसने पहले ही प्रगति हासिल कर ली थी। हाज़ेम शेहाता ने 27वें मिनट में मुसाब खिदिर के क्रॉस पर 10-यार्ड हेडर पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल किया, जो कतर का मैच का एकमात्र शॉट था। कतर पिछले साल इक्वाडोर, सेनेगल और नीदरलैंड से हारकर विश्व कप में 0-3 से पिछड़ने वाला पहला मेजबान बन गया था। नंबर 14 मेक्सिको, जिसने अंतरिम कोच जैमे लोज़ानो के तहत होंडुरास और हैती पर जीत के साथ शुरुआत की, ग्रुप बी जीता और अगले शनिवार को कोस्टा रिका, पनामा, अल साल्वाडोर या मार्टीनिक के खिलाफ आर्लिंगटन, टेक्सास में क्वार्टर फाइनल खेलेगा। आमंत्रित खोज के रूप में गोल्ड कप में 58वें नंबर का कतर, गोल अंतर पर होंडुरास से आगे, चार अंकों के साथ समाप्त हुआ, और क्वार्टर फाइनल डबलहेडर के हिस्से के रूप में उन चार देशों में से एक से भी खेलेगा। कतरियों को कार्लोस क्विरोज़ द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है, जिन्होंने पिछले साल विश्व कप में ईरान का नेतृत्व किया था। कतर, जो हैती से हार गया था और होंडुरास से बराबरी पर था, को मदद मिली जब हैती उत्तरी कैरोलिना के चार्लोट में कैट्राचोस से 2-1 से हार गया और तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। फ्रांत्ज़डी पिय्रोट ने 21वें मिनट में अपने 18वें अंतरराष्ट्रीय गोल के साथ 87वीं रैंकिंग वाले हैती को आगे कर दिया, एड्रिक मेनजीवर द्वारा डकेंस नाज़ोन के शॉट को अपने रास्ते में रोकने के बाद रिबाउंड में धमाका किया। जेरी बेंग्टसन, 36 वर्ष की उम्र में कैट्राचोस के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। 42वें में अपने 23वें गोल के साथ स्कोर बराबर किया, जो मेयलर नुनेज़ के क्रॉस से 8-यार्ड हेडर था। जोस पिंटो ने 81वें होंडुरास को आगे कर दिया जब उन्होंने 59वें में अलेक्जेंड्रे पियरे के पास गेंद फेंकी, जब जॉर्ज अल्वारेज़ ने डिफेंस के पीछे गेंद फेंकी।
कतर रविवार रात मैक्सिकन टीम पर एक-शून्य से जीत के साथ CONCACAF गोल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया, जिसने पहले ही प्रगति हासिल कर ली थी। हाज़ेम शेहाता ने सत्ताईसवें मिनट में मुसाब खिदिर के क्रॉस पर दस-यार्ड हेडर पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल किया, जो कतर का मैच का एकमात्र शॉट था। कतर पिछले साल इक्वाडोर, सेनेगल और नीदरलैंड से हारकर विश्व कप में शून्य-तीन से पिछड़ने वाला पहला मेजबान बन गया था। नंबर चौदह मेक्सिको, जिसने अंतरिम कोच जैमे लोज़ानो के तहत होंडुरास और हैती पर जीत के साथ शुरुआत की, ग्रुप बी जीता और अगले शनिवार को कोस्टा रिका, पनामा, अल साल्वाडोर या मार्टीनिक के खिलाफ आर्लिंगटन, टेक्सास में क्वार्टर फाइनल खेलेगा। आमंत्रित खोज के रूप में गोल्ड कप में अट्ठावनवें नंबर का कतर, गोल अंतर पर होंडुरास से आगे, चार अंकों के साथ समाप्त हुआ, और क्वार्टर फाइनल डबलहेडर के हिस्से के रूप में उन चार देशों में से एक से भी खेलेगा। कतरियों को कार्लोस क्विरोज़ द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है, जिन्होंने पिछले साल विश्व कप में ईरान का नेतृत्व किया था। कतर, जो हैती से हार गया था और होंडुरास से बराबरी पर था, को मदद मिली जब हैती उत्तरी कैरोलिना के चार्लोट में कैट्राचोस से दो-एक से हार गया और तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। फ्रांत्ज़डी पिय्रोट ने इक्कीसवें मिनट में अपने अट्ठारहवें अंतरराष्ट्रीय गोल के साथ सत्तासीवीं रैंकिंग वाले हैती को आगे कर दिया, एड्रिक मेनजीवर द्वारा डकेंस नाज़ोन के शॉट को अपने रास्ते में रोकने के बाद रिबाउंड में धमाका किया। जेरी बेंग्टसन, छत्तीस वर्ष की उम्र में कैट्राचोस के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। बयालीसवें में अपने तेईसवें गोल के साथ स्कोर बराबर किया, जो मेयलर नुनेज़ के क्रॉस से आठ-यार्ड हेडर था। जोस पिंटो ने इक्यासीवें होंडुरास को आगे कर दिया जब उन्होंने उनसठवें में अलेक्जेंड्रे पियरे के पास गेंद फेंकी, जब जॉर्ज अल्वारेज़ ने डिफेंस के पीछे गेंद फेंकी।
बारामूला में पुलिस ने देवी लक्ष्मी की एक पुरानी मूर्ति पुरातत्व विभाग को सौंप दी है। जनता से रिश्ता वेबडेस्क। बारामूला में पुलिस ने देवी लक्ष्मी की एक पुरानी मूर्ति पुरातत्व विभाग को सौंप दी है। कुछ दिन पहले, शीरी गांव के स्थानीय लोगों ने पुलिस घटक बारामूला को सूचित किया कि उन्हें जमीन की खुदाई के दौरान कुछ मूर्ति मिली है। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस घटक बारामूला का एक पुलिस दल मौके पर पहुंचा और मूर्ति को अपने कब्जे में ले लिया। बरामद मूर्ति की जांच के लिए पुरालेख, पुरातत्व और संग्रहालय की टीम को बुलाया गया, जिसने जिला पुलिस मुख्यालय बारामूला में रिपोर्ट की और मूर्ति की पूरी तरह से जांच करने के बाद यह स्थापित किया कि बरामद मूर्ति देवी लक्ष्मी की है।
बारामूला में पुलिस ने देवी लक्ष्मी की एक पुरानी मूर्ति पुरातत्व विभाग को सौंप दी है। जनता से रिश्ता वेबडेस्क। बारामूला में पुलिस ने देवी लक्ष्मी की एक पुरानी मूर्ति पुरातत्व विभाग को सौंप दी है। कुछ दिन पहले, शीरी गांव के स्थानीय लोगों ने पुलिस घटक बारामूला को सूचित किया कि उन्हें जमीन की खुदाई के दौरान कुछ मूर्ति मिली है। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस घटक बारामूला का एक पुलिस दल मौके पर पहुंचा और मूर्ति को अपने कब्जे में ले लिया। बरामद मूर्ति की जांच के लिए पुरालेख, पुरातत्व और संग्रहालय की टीम को बुलाया गया, जिसने जिला पुलिस मुख्यालय बारामूला में रिपोर्ट की और मूर्ति की पूरी तरह से जांच करने के बाद यह स्थापित किया कि बरामद मूर्ति देवी लक्ष्मी की है।
हैदराबाद के एक बच्चे ने पबजी गेम के चक्कर में कुछ ऐसा काम कर दिया जिसको सुन कर हर कोई हैरान हो गया है। दरअसल हैदराबाद के लड़का जो 10वीं कक्षा का है उसे उसके घरवालों ने पबजी खेलने से मना किया तो उसने आत्महत्या कर ली। बीते बुधवार यानी 3 अप्रैल को पुलिस ने इस मामले में बताया कि इस 16 साल के छात्र को पबजी ऑनलाइन गेम की लत पढ़ गई थी जिसकी वजह से उसके माता-पिता बहुत परेशान रहते थे। यह लड़का अपने माता-पिता के फोन पर पूरा दिन गेम खेलता रहता था। मल्कानगिरी थाने के पुलिस अधिकारी के संजीव रेड्डी ने बताया कि छात्र की 10वीं की परीक्षा चल रही थी। ऐसे में उस लड़के की मां ने 1 अप्रैल को पबजी गेम खेलने पर उसे डांट दिया था। उसके बाद क्या था वह लड़का कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया फिर उसने तौलिया लिया और पंखे से लटाकर फांसी लगा ली। इस मामले में उन्होंने बताया कि जब दरवाजा बहुत देर तक खटखटाने के बाद भी नहीं खुला तो छात्र के घरवालों ने दरवाजा ही तोड़ दिया। जैसे ही दरवाजा तोड़ कर देखा तो उन्होंने देखा की छात्र पंखे से लटका हुआ है। उसके बाद छात्र केघरवालों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल लेकर चले गए जहां पर डॉक्टरों ने छात्र को मृत घोषित कर दिया। उसके बाद उस छात्र के पिता ने पुलिस में शिकायत कर दी। अभी भी इस मामले की जांच हो रही है। कुछ समय पहले ही पबजी गेम खेलने वाले लोगों पर इसका बहुत गलत असर पड़ रहा था जिसके बाद गुजरात में इसे बैन कर दिया गया था। वहीं गुजरात में बैन के बाद भी जो लोग पबजी खेलते हुए पकड़े जा रहे थे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इससे पहले भी देश में पबजी गेम को बैन करने की मांग हुई है। पबजी एक ऑनलाइन वीडियो गेम है जो दक्षिण कोरिया की कंपनी ब्लू होल ने बनाया है। इस गेम के बाद लोगों के बीच में हिंसा बहुत बढ़ गई है।
हैदराबाद के एक बच्चे ने पबजी गेम के चक्कर में कुछ ऐसा काम कर दिया जिसको सुन कर हर कोई हैरान हो गया है। दरअसल हैदराबाद के लड़का जो दसवीं कक्षा का है उसे उसके घरवालों ने पबजी खेलने से मना किया तो उसने आत्महत्या कर ली। बीते बुधवार यानी तीन अप्रैल को पुलिस ने इस मामले में बताया कि इस सोलह साल के छात्र को पबजी ऑनलाइन गेम की लत पढ़ गई थी जिसकी वजह से उसके माता-पिता बहुत परेशान रहते थे। यह लड़का अपने माता-पिता के फोन पर पूरा दिन गेम खेलता रहता था। मल्कानगिरी थाने के पुलिस अधिकारी के संजीव रेड्डी ने बताया कि छात्र की दसवीं की परीक्षा चल रही थी। ऐसे में उस लड़के की मां ने एक अप्रैल को पबजी गेम खेलने पर उसे डांट दिया था। उसके बाद क्या था वह लड़का कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया फिर उसने तौलिया लिया और पंखे से लटाकर फांसी लगा ली। इस मामले में उन्होंने बताया कि जब दरवाजा बहुत देर तक खटखटाने के बाद भी नहीं खुला तो छात्र के घरवालों ने दरवाजा ही तोड़ दिया। जैसे ही दरवाजा तोड़ कर देखा तो उन्होंने देखा की छात्र पंखे से लटका हुआ है। उसके बाद छात्र केघरवालों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल लेकर चले गए जहां पर डॉक्टरों ने छात्र को मृत घोषित कर दिया। उसके बाद उस छात्र के पिता ने पुलिस में शिकायत कर दी। अभी भी इस मामले की जांच हो रही है। कुछ समय पहले ही पबजी गेम खेलने वाले लोगों पर इसका बहुत गलत असर पड़ रहा था जिसके बाद गुजरात में इसे बैन कर दिया गया था। वहीं गुजरात में बैन के बाद भी जो लोग पबजी खेलते हुए पकड़े जा रहे थे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इससे पहले भी देश में पबजी गेम को बैन करने की मांग हुई है। पबजी एक ऑनलाइन वीडियो गेम है जो दक्षिण कोरिया की कंपनी ब्लू होल ने बनाया है। इस गेम के बाद लोगों के बीच में हिंसा बहुत बढ़ गई है।
सूर्योदय - ६ः२२ बजे, सूर्यास्त - ६ः३१ बजे। राहु काल १ः३० से ३ः०० बजे तक अपराह्न काल। ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ।। अर्थात् - वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींच कर मोह में डाल देती हैं । दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त , बता रहे हैं अशोकानंद जी महाराज योगीराज बिसरख धाम(पीठाधीश्वर)
सूर्योदय - छःःबाईस बजे, सूर्यास्त - छःःइकतीस बजे। राहु काल एकःतीस से तीनःशून्य बजे तक अपराह्न काल। ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ।। अर्थात् - वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींच कर मोह में डाल देती हैं । दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त , बता रहे हैं अशोकानंद जी महाराज योगीराज बिसरख धाम
Jamshedpur : बाबा बैजनाथ सेवा संघ ने बिना आयुष्मान कार्ड वाले मोतियाबिंद के 11 मरीजों का तीसरे चरण में सफल ऑपरेशन संजीव नेत्रालय में कराया. इस दौरान भाजपा नेता विकास सिंह ने संजीव नेत्रालय पहुंचे और फल, बिस्कुट एवं ब्रेड देकर अस्पताल से सभी मरीजों को घर भेजवा दिया. भाजपा नेता विकास सिंह ने बताया कि ये मोतियाबिंद के ऐसे मरीज हैं जिनके पास किसी तरह का स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान कार्ड नहीं है और ये आर्थिक रूप से कमजोर हैं. भाजपा नेता विकास सिंह अस्पताल में सभी ऑपरेशन किए हुए मरीजों का कुशल क्षेम जाना. मौके पर अरुण शर्मा, डॉक्टर अनिल सिंह, पंकज सुमन शर्मा, राम सिंह कुशवाहा, शिव साहू, हरिओम साहू, प्यारेलाल साह, अजय लोहार, मनोज ओझा, शशि भूषण शर्मा आदि मौजूद थे.
Jamshedpur : बाबा बैजनाथ सेवा संघ ने बिना आयुष्मान कार्ड वाले मोतियाबिंद के ग्यारह मरीजों का तीसरे चरण में सफल ऑपरेशन संजीव नेत्रालय में कराया. इस दौरान भाजपा नेता विकास सिंह ने संजीव नेत्रालय पहुंचे और फल, बिस्कुट एवं ब्रेड देकर अस्पताल से सभी मरीजों को घर भेजवा दिया. भाजपा नेता विकास सिंह ने बताया कि ये मोतियाबिंद के ऐसे मरीज हैं जिनके पास किसी तरह का स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान कार्ड नहीं है और ये आर्थिक रूप से कमजोर हैं. भाजपा नेता विकास सिंह अस्पताल में सभी ऑपरेशन किए हुए मरीजों का कुशल क्षेम जाना. मौके पर अरुण शर्मा, डॉक्टर अनिल सिंह, पंकज सुमन शर्मा, राम सिंह कुशवाहा, शिव साहू, हरिओम साहू, प्यारेलाल साह, अजय लोहार, मनोज ओझा, शशि भूषण शर्मा आदि मौजूद थे.
आईपीएल सीजन-11 में 22वां मुकाबला आज दिल्ली डेयरडेविल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में खेला जाएगा। डेयरडेविल्स के घर में अपने विजय रथ को आगे बढ़ाने की चुनौती किंग्स इलेवन पंजाब के सामने होगी। आर अश्विन के नेतृत्व वाली किंग्स इलेवन पंजाब पांच में से चार मैच जीतकर अंक तालिका में दूसरे पायदान पर है। वहीं इस सीजन में भी दिल्ली डेयरडेविल्स की हार का सिलसिला बदस्तूर जारी है। दिल्ली डेयरडेविल्स एक जीत के साथ प्वॉइंट्स टेबल में आखिरी स्थान पर है। दिल्ल डेयडेविल्स के कप्तान गौतम गंभीर जेसन रॉय के साथ मिलकर पारी का आगाज कर सकते हैं। हालांकि आरसीबी के खिलाफ दोनों ही खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत स्कोर को दोहरे अंको में भी तब्दील नहीं कर पाए थे, लेकिन घरेलू मैदान पर खेलने की वजह से ओपनर्स अच्छी शुरुआत दिला सकते हैं। ओपनिंग जोड़ी के बाद श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत और ग्लेन मैक्स मिडल ऑर्डर की बल्लेबाजी को मजबूत करने का काम करेंगे। हालांकि ऋषभ पंत के अलावा अब तक कोई भी बल्लेबाज खुद को बहुत ज्यादा साबित नहीं कर पाया है। आरसीबी के खिलाफ श्रेयस अय्यर ने एक अच्छी पारी खेली थी। दिल्ली के पास राहुल तेवतिया, वियज शंकर और क्रिस मॉरिस के रूप में कुछ अच्छे ऑलराउंडर्स खिलाड़ी हैं। हालांकि राहुल तेवतिया के अलावा अब तक कोई भी ऑलराउंडर बहुत प्रभावित नहीं कर पाया है। दिल्ली डेयरडेविल्स के स्पिन डिपार्टमेंट की कमान शाहबाज नदीम के हाथों में होगी। इस डिपार्टमेंट नदीम को राहुल तेवतिया का साथ मिल सकता है। इसके अलावा ग्लेन मैक्सवेल भी गेंदबाजी करते नजर आ सकते हैं।
आईपीएल सीजन-ग्यारह में बाईसवां मुकाबला आज दिल्ली डेयरडेविल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में खेला जाएगा। डेयरडेविल्स के घर में अपने विजय रथ को आगे बढ़ाने की चुनौती किंग्स इलेवन पंजाब के सामने होगी। आर अश्विन के नेतृत्व वाली किंग्स इलेवन पंजाब पांच में से चार मैच जीतकर अंक तालिका में दूसरे पायदान पर है। वहीं इस सीजन में भी दिल्ली डेयरडेविल्स की हार का सिलसिला बदस्तूर जारी है। दिल्ली डेयरडेविल्स एक जीत के साथ प्वॉइंट्स टेबल में आखिरी स्थान पर है। दिल्ल डेयडेविल्स के कप्तान गौतम गंभीर जेसन रॉय के साथ मिलकर पारी का आगाज कर सकते हैं। हालांकि आरसीबी के खिलाफ दोनों ही खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत स्कोर को दोहरे अंको में भी तब्दील नहीं कर पाए थे, लेकिन घरेलू मैदान पर खेलने की वजह से ओपनर्स अच्छी शुरुआत दिला सकते हैं। ओपनिंग जोड़ी के बाद श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत और ग्लेन मैक्स मिडल ऑर्डर की बल्लेबाजी को मजबूत करने का काम करेंगे। हालांकि ऋषभ पंत के अलावा अब तक कोई भी बल्लेबाज खुद को बहुत ज्यादा साबित नहीं कर पाया है। आरसीबी के खिलाफ श्रेयस अय्यर ने एक अच्छी पारी खेली थी। दिल्ली के पास राहुल तेवतिया, वियज शंकर और क्रिस मॉरिस के रूप में कुछ अच्छे ऑलराउंडर्स खिलाड़ी हैं। हालांकि राहुल तेवतिया के अलावा अब तक कोई भी ऑलराउंडर बहुत प्रभावित नहीं कर पाया है। दिल्ली डेयरडेविल्स के स्पिन डिपार्टमेंट की कमान शाहबाज नदीम के हाथों में होगी। इस डिपार्टमेंट नदीम को राहुल तेवतिया का साथ मिल सकता है। इसके अलावा ग्लेन मैक्सवेल भी गेंदबाजी करते नजर आ सकते हैं।
लखनऊ के विवेक तिवारी हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करना कई पुलिस कर्मियों को भारी पड़ा है। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट. . लखनऊः विवेक तिवारी हत्याकांड में आरोपियों के पक्ष में संगठन बनाने वालों पर यूपी पुलिस की सख्त कार्रवाई की है। काली पट्टी बांधकर आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करने के आरोप में 3 पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गयी, जबकि 3 थानाध्यक्षों को डीजीपी ऑफिस द्वारा हटा दिया गया है। यूपी पुलिस ने लखनऊ के तीन थानों- नाका, गुडंबा और अलीगंज के थानाध्यक्षों को हटाते हुए और इन्ही तीनों थाने से एक-एक सिपाही के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गयी है। विवेक तिवारी हत्याकांड मामले में आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी पर की गयी कड़ी कार्यवाही के विरोध में शुक्रवार को कथित तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ पुलिस कर्मियों द्वारा रोष जताया गया था और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सांकेतिक विरोध किया गया था। लखनऊ समेत दूसरे जिलों के कुछ पुलिस कर्मियों ने भी अपने बाहों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताने वाली फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। सोशल मीडिया के माध्यम से जब इसकी भनक डीजीपी ऑफिस को हुई तो आनन-फानन में पुलिस कर्मियों की शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू की गई और उसके बाद कड़ी कार्रवाई की गयी। मामले की जानकारी देते हुए डीआईजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार ने कहा कि पुलिस बल एक अनुशासित बल है और प्रदेश भर के ढाई लाख की तादाद वाले पुलिस कर्मियों में से कुछ पुलिस कर्मियों ने ही इस तरह के सांकेतिक विरोध में भागीदारी की थी, जिसकी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं कुछ ऐसे भी लोगों के नाम पड़ताल में सामने आए हैं, जो फर्जी आईडी के माध्यम से पुलिस कर्मियों को विरोध करने के लिए उकसाने में लगे थे। इस पर कार्रवाई करते हुए ऐसे सभी लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। डीआईजी ने कहा कि पुलिस को इस तरह की कार्रवाई के विरोध में संगठन बनाने का अधिकार नहीं है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
लखनऊ के विवेक तिवारी हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करना कई पुलिस कर्मियों को भारी पड़ा है। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट. . लखनऊः विवेक तिवारी हत्याकांड में आरोपियों के पक्ष में संगठन बनाने वालों पर यूपी पुलिस की सख्त कार्रवाई की है। काली पट्टी बांधकर आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करने के आरोप में तीन पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गयी, जबकि तीन थानाध्यक्षों को डीजीपी ऑफिस द्वारा हटा दिया गया है। यूपी पुलिस ने लखनऊ के तीन थानों- नाका, गुडंबा और अलीगंज के थानाध्यक्षों को हटाते हुए और इन्ही तीनों थाने से एक-एक सिपाही के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गयी है। विवेक तिवारी हत्याकांड मामले में आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी पर की गयी कड़ी कार्यवाही के विरोध में शुक्रवार को कथित तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ पुलिस कर्मियों द्वारा रोष जताया गया था और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सांकेतिक विरोध किया गया था। लखनऊ समेत दूसरे जिलों के कुछ पुलिस कर्मियों ने भी अपने बाहों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताने वाली फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। सोशल मीडिया के माध्यम से जब इसकी भनक डीजीपी ऑफिस को हुई तो आनन-फानन में पुलिस कर्मियों की शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू की गई और उसके बाद कड़ी कार्रवाई की गयी। मामले की जानकारी देते हुए डीआईजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार ने कहा कि पुलिस बल एक अनुशासित बल है और प्रदेश भर के ढाई लाख की तादाद वाले पुलिस कर्मियों में से कुछ पुलिस कर्मियों ने ही इस तरह के सांकेतिक विरोध में भागीदारी की थी, जिसकी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं कुछ ऐसे भी लोगों के नाम पड़ताल में सामने आए हैं, जो फर्जी आईडी के माध्यम से पुलिस कर्मियों को विरोध करने के लिए उकसाने में लगे थे। इस पर कार्रवाई करते हुए ऐसे सभी लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। डीआईजी ने कहा कि पुलिस को इस तरह की कार्रवाई के विरोध में संगठन बनाने का अधिकार नहीं है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
द्रव्यानुभव-रत्ता कर ] संसारी जीव मात्र में क्षुधाका अर्थात् खानेका स्वभाव होता है, अजीव में नहीं। इसलिये क्षुधाका स्वभाव सो हो स्वभाव जानना । तीसरा निमित कहता जो २ कारण रसोई जीमने की धाली, पत्तल, अथवा हाथ आदि पर रखकर खाना, उसका नाम नियत अर्थात् निमित कारण विदून कार्य की सिद्धि नहीं होती हैं। इसलिए तीसरा नियत समयाय हुआ। अन चौधा पूर्वकृत समवाय कहते हैं कि, पूर्व नाम पहिले जन्मम जो जोवने भोगादि बाधा है उसके अनुसार उस को प्राप्ति होगा क्योंकि देखो जो पूर्व जन्ममे उसदिन उसी समय में उसके मानेका संयोग न होगा तो उस वक्त अनेक तरहके विघ्न आफर सटे होंगे अर्थात् कोई न कोई ऐसा कारण होगा कि उस चक्तमें वह न जीम सकेगा। इसलिये पूर्वकृत समवाय हुआ। अब पाचवां पुरुरार्ध अर्थात् उद्यम करना, क्योंकि जब तक हाथसे कौर ( ग्राम ) मोटे मुख ) में न देगा और मुखसे अथवा दांतोंसे विगद कर गलेसे न उतारे तब तक वह भीतर न जायगा, इत्यादि क्रियाका करना सो हो पुरुषाधं है । इसरीतिसे यह पांच समवाय हुए । इस जगह दुःख गभित, मोह गर्भित वैराग्य वाले जिन आगमके रहस्य के अजान नोसरे नियत समवायके ऊपर ऐसी तर्क करेंगे कि नियन नाम निश्चयका अर्थात् भवितव्यताका है ऐसा शास्त्रोंमें लेख है। फिर तुम नियतको निमित कारणमें क्यों मिलाते हो ? नव उनसे कहना चाहिये कि है भोले भाइयो, कुछ गुरुकुल वासका सेवन करो जिससे तुमको शास्त्रका रहस्य मालूम हो, क्योंकि देखो जब नियत कहता निश्चयको अङ्गीकार करें, तव तो सर्वज्ञ देवका कहा हुआ पूर्वरन और पुरुषाकार व्यर्थ होजायगा। क्योंकि निश्चय जो वस्तु होने वाली होती तो पूर्वकृत और पुरुषाक रको कदापि सर्वज्ञ देव न कहते। इसलिए गुरूके बिना जिनआगमका रहस्य नहीं मालूम होना । यदि स्वतः प्राप्त होता तो जिनधर्ममें इतना कदाग्रह कदापि न चलता और जुदै २ गच्छ आमना बांधकर अपनी २ जुदी २ कल्पना न करते । इसलिये नियत कहनेसे निमित्त कारण ही मानना ठीक हैं। इसका कथन विशेष आवश्यक, अथवा स्याद्वाद रत्नाकर, वा नयचक्र आदि ग्रन्थों में है सो वहाँसे देखो, और इसी अपेक्षासे श्री देवचन्द्रजीने आगमसारमें पाँच समवायका वर्णन किया है । उस जगह नियतमें निश्चयको छोड़कर समकितको अङ्गीकार किया है सो ही दिखाते हैं, कि प्रथमकाल कहकर चौथा आरा लिया, फिर अभव्यको टालनेके वास्ते स्वभाव लिया, सब भव्योंको मोक्ष न जानेके वास्ते नियत करके समकित नहीं पाया। फिर श्रीकृष्ण और श्रोणिकके वास्ते मोक्ष न जानेमें पुरुषार्थ अङ्गीकार किया, फिर सालभद्रको पुरुषार्थसे मोक्ष न हुआ तव पूर्वकृत अङ्गीकार किया । इस रीतिले उस आगमसारमें पाँच समवायका वर्णन है । इसलिये जो आत्मार्थी भव्य प्राणी हो तो वह बाद विवादको छोड़कर अपनी आत्माका कल्याण करे, और सर्वशके वचनको अङ्गीकार करे, संसारसे डरे, झगड़ों में न पड़, मुक्ति पदको जायवरे गुरुके वचन हृदयमे घरे, कुगुरुओंका संग परिहरे । अब गर्भाधानके ऊपर पांच समवायोको उतारकर दिखाते है कि, काल कहता जो त्रो ऋतु धर्मपर आकर पांच सात दिन तक गर्भ रहनेका शास्त्रोंमें कहा है । अथवा जिस काल जिस वक्तमें गर्भ रहे सो काल लेना । दूसरा समवाय कहते हैं कि जिस स्त्रोके गर्भ धारणका स्वभाव होगा वही गर्भ धारण करेगी। क्योंकि ऋतु कालतो वन्ध्याके भी होता है। परन्तु उसमें गर्भ धारण करनेका स्वभाव नही हैं । इसलिये वह गर्भवतो कदापि न होगी । ३ नियत कहता निमित्त स्त्रोको पुरुषका होना चाहिये । जबतक पुरुषका निमित्त न होगा तब तक भी गर्भाधान न रहेगा। चौथा पूर्वकृत जिसने पूर्व सतान होनेका कर्म उपार्जन किया होगा उसीके संतान अर्थात् गर्भ रहेगा । क्योंकि पुरुषका निमित्ततो वन्ध्याको भी मिलता है परन्तु गर्भ धारण नहीं होता । इसलिये पूर्वकृत चौथा समवाय हुआ । पांचवा पुरुषाकार अर्थात् उद्यम जो २ स्त्रियोंके गर्भ रहेके बाद यत्न कहे हैं सो २ यतन करना उमीका नाम पुरुषाकार हैं । अब खेतीके ऊपर पाच समवायोंको उतार कर दिखाते हैं, कि कालतो वह है कि जिस कालमें जो चीज बोई है, और ऋऋतुमें होती है, जैसे मोठ, बाजरा, मूंग, जेठ आषाढ़ में चोये जाते हैं, और जौ, गेहूं, चना आदि आसोजकार्तिकमें बोये जाते हैं, इसलिये उनको उन्ही कालमें चोये जाय तो ये चीजें उगती हैं, कदाचित् जेठ आगदमें जौ, गेहूं वीया जायतो ऋतुके बिना यथावत न होय, तैसे ही सर्व वस्तु जिस २ कालमे बोयेसे उगे और यथावत हों उसका घही फाल है। अब दूसरा स्वभाव सम्बाय कहते हैं कि जिस जमीन और जिस बीजमें उगनेका स्वभाव होगा वही वस्तु उगेगी, इसलिये वीजका और जमीनका स्वभाव लेनेसे स्वभाव सम्वाय वनेगा, क्योंकि जो ऊपर भूमि आदिक होय उसमें चीज गिरे तो कदापि न ऊगेगा, और जो बीज यथावत अर्थात् सडा व पुराना अथवा घुना हुआ स्वभाव जिनमें ऊगनेका नहीं है उनको खेतमें गेरनेसे कदापि न ऊरोगा, इस रीनिसे जमीन और बीजमें स्वभाव सम्वाय हुआ । अव 2 नियत कहता निमित्त कारण पानी, मेंह आदि या वायुका यथावत निमित्त जमीन और वीजको मिले तो वो वीज उसमें उगे, इसलिये तीसरा नियत समचाय हुआ । चौथा पूर्वकृत कहते हैं कि पूर्व नाम पेश्तर जमीनको सरकार किया होगा क्योंकि जब तक पेश्तर जमीनको हलादिसे जोतकर साफ अर्थात् खातादि संस्कार यथावत न करेगा तो उसमें वन्तु यथावत न होगी, इसलिये पूर्वकृत अवश्य होनी चाहिये। दूसरी पूर्वकृत इस रीतिसे भी कोई घटावे तो घट सक्ती है कि, जो खेती आदिक करने वाले जीव अर्थात् किसानने पूर्व जन्ममें अच्छा कर्म उपार्जन किया होगा तभी उसके पुण्यसे अन्नादि होगा, इस रीतिसे भी कोई घटावे तो घट सक्ता है, परन्तु पहली रीति पूर्वकृतमें यथावत घटती है अव 1 पाचवा पुरुषाकार सम्वाय कहते हैं कि उद्यम करना अर्थात् मेह आदि न वरसे तो कुआ आदिकका पानी देना, अथवा जब वीज उगता है तो उसके साथ में घासादि ऊगता है उसको उखाड़ना, इत्यादि नाना प्रकारका उसमें उद्यम करना वही पुरुषाकर है, इस रीतिसे खेनीके ऊपर पांच सम्बाय कहें । अब विद्या पढ़नेके ऊपर भी पाँच सम्वायोंको उतारते हैं कि, कालतो बुद्धिमानोंको इस जगह ऐसा लेना चाहिये कि जिस वक्त लड़का पढ़ाने के लायक अर्थात् पाँच सात-दस वरयका होजाय, अथवा जिस काल में जो विद्या पढ़नेका आरम्भ करे उसको काल सम्वाय कहेंगे। अब दूसरा स्वभाव सम्वाय कहते हैं मनुष्य जातिमे ही पढ़नेका स्वभाव है और पशु आदिकोंमें नहीं. इसलिये विद्यामें मनुष्यका ही स्वभाव गिना जायगा । ३ नियत सम्वाय कहते हैं कि नियत कहता निमित्त कारण विद्या अध्ययन करानेवाला गुरू आदि जिस विद्यामें यथावत निपुण होगा उस विद्याको यथावत पढ़ावेगा । अब चौथा पूर्वकृत कहते हैं, जिस जीवने पूर्वजन्ममें विद्याके संस्कार उपार्जन किये होंगे उसी जीवको विद्याध्ययन होगा, क्योंकि देखो सैकड़ो भीलादि ग्रामीण लोग हजारों, लाखों बिना विद्याके ही रह जाते हैं, क्योंकि उनके पूर्वकृत नहीं हैं, इस रीतिले पूर्वकृत सम्वाय हुआ। अब पांचचा पुरुषाकार सम्वाय कहते हैं कि, जो मनुष्य पुरुषाकार अर्थात् उद्यम विशेष करके पठन पाटन वाँचना पूछना परावर्तना आदि वारम्वार करते हैं उनको यथावत विद्या प्राप्त होती है, इस रीतिसे विद्या पढ़नेमें पाँच सम्वाय कहे । अब इस जगह ग्रन्थ बढ़जानेके भयसे किंचित् प्रक्रिया दिखाय दीनी है, पन्तु जो इन बातोंके जाननेवाले गुरू हैं वे लोग जिज्ञासुको हर एक चीज पर उतारनेके वास्ते पाँच सम्वायका बोध कराय देते हैं, सो वो यथावत वोध होना गुरुकी कृपा और जिज्ञासुकी बुद्धि और पुरुषार्थसे आप ही होजाता है। कदाचित् पुस्तकोंमें विस्तार भी लिखदें और गुरु यथावत समझाने वाला न मिले तो भी जिन्नासुको यथावत वोध न होगा, इसलिये जो गुरु यथावत जिन आगमके रहस्यके जानकार हैं वे लोग जिज्ञासुकी परीक्षा करके आपहो यथावत बताते हैं, क्योंकि जब तक वे लोग जिज्ञासुको ग्लानी और रुचि न दरसावें, तब तक उसको यथावत बोध न होगा, इस हेतुसे वे सतपुरुष पेस्तर पदार्थ अर्थात् हर एक चीजमें ग्लानी और रुचि दिखाय कर यथावत बोध कराते हैं, सो इस जगह ग्लानी और रुचिका द्वष्टान्त लिखकर दिखाते हैं क्योंकि द्वष्टान्तसे द्रा टान्त यथावत सममे आजाता है, इसलिये प्रथम दृष्टान्त कहते हैं । एक साहुकार था उसका लड़का वेश्या गमनमें पड़ गया अर्थात् वेश्या गमन करता था ( उसके बापने अनेक उपाय किये और जो उस लड़केके पासमें बैठने वाले अथवा और अड़ोसो पड़ोसी सगे सम्वन्धियोंकी मार्फत उसको समझवाया, परन्तु वो लड़का किसीका समझाया नहीं समझता था, हजारों लाखों रुपया बर्बाद करता था, तब उसके चापने अपने दिलमें विचारा कि यह मेरा पुत्र इस रीतिसे तो न समझेगा, परन्तु इसको वेश्याकी सुहबतमें ग्लानी और इसकी स्त्रीमें इसको रुचि होय तो इसका यह व्यसन छूटे, जब तक इसको वेश्याके सग ग्लानी और अपनी स्त्रीके संग रुचि न होगी तब तक वेश्याका संग कदापि न छूटेगा, ऐसा विचार कर अपने पुत्रसे कहने लगा कि हे पुत्र तू चार छः घड़ी दिन रहा करे उस वक्त सैर करनेको वैशक जाया कर और दुवका चोरी जानेमें लोग बीचवाले धन बहुत खाजाते हैं, इसलिये तेरेको जो शौक अच्छा लगे उस शौकको उजागर करो और किसी तरहकी चिन्ता मत करो, जो तुम्हारेको रुपया खर्चको चाहिये सो रोकड़ियासे ले जाया करो, अपने घरमें रुपया बहुत है और इसीके वास्ते इन्सान धन पैदा करता है, कि खाना पोना ऐश मोज करना । सो तुम सब चिन्ताको छोड़कर अपनी इच्छा मूजिब ऐश मौज करो । इत्यादि अपने पुत्रको समझाय कर और आप उसको ग्लानी उपजानेके उद्यममें लगा । इस रीतिकी बातें पुत्रने सुनकर गुप्तपनेसे जो वेश्याओंके यहां जाता था सो उजानगर जाने लंगा, और कोई तरहकी चिन्ता न रही, और जब शामका [ द्रव्यानुभव - रत्नाकर । वक्त होय तब उसका पिता कह दिया करे कि अब तुम्हारा सैर रीतिसे कुछ रोज करनेका वक्त होगया सो तुम जाओ, इस बीतनेके बाद एक दिन साहूकार अपने लड़केसे कहने लगा कि हे पुत्र ! कुछ भाज दुकान पर काम है सो इसके बदले में प्रातःकाल सैर कर आना, आज इस वक्त न जायतो अच्छी बात है, इतना वचन अपने पिताका सुनकर वो कहने लगा आज इस वक्त नही जाऊगा शुबह चला जाऊंगा । फिर वह दूकानका काम काज करता रहा, जिस वक्त में प्रातःकाल दो घड़ीका तड़का रहा उस समय उसके पिताने उसे जगाकर कहा कि, हे पुत्र ! कल तू शामके वक्त नही गया था सो इस वक्त जाकर अपना शौक पूराकर, तब वो लड़का घर से वेश्याके यहां गया । इधर उस साहूकारने उस लड़केकी स्त्रीसे कहा कि, तू अपना शृङ्गार करके अपने घरमें अच्छी तरहसे चैठ जा और तेरा पती बाहरसे आवें उस वक्तमें तू उसका अच्छी तरहसे सत्कार आदि विनय पूर्वक बात चीत करना । इस रीतिसे समझा कर साहूकार तो अपने और धन्धे लगा। उधरमें जो साहकारका पूत्र वेश्याओंके घर गया तो उस समय वेश्याओंको पलङ्गके ऊपर सोती हुई देखीतो कैसा उनका ढड्स हो रहा था उसीका वर्णन करते हैं कि, शिरके केश तो विखरे ( फैले ) हुये थे, आंखोंसे गीड़ आय रही थी, कज्जल आँखोंमें लगा हुआ ढलका था, उससे मुंह काला हो गया था, होठ पर पान खानेसे फेफडी जमी हुई थी, दांत पीले खराव लगते थे, इस रीतिका उन वेश्याओंका रूप देखकर डांकिनके समान चित्तमें ग्लानी उत्पन्न होगई और विचारने लगा कि छी २ छो हाय, हाय कैसा मैंने लोगोंमें अपना नाम वदनाम कराया और हजारों लाखों रुपया वर्बाद ( नष्ट ) करे, परन्तु मेरेको आज मालूम हुआ कि इनका रूप ऐसावुरा भयङ्कर है, केवल शामके वक्त में ऊपरका लिफाफा वनायकर मेरा माल ठगतो थी, ऐसा विचारता हुआ वहांसे चलकर अपने घरमे आया, उस वक्त उसकी स्त्री सामने खड़ी हुई, नजर आई, उस वक्त उस लड़केने अपनी स्त्रीके स्वरूपको देखकर चिचमें आनन्दको प्राप्त. हुआ और कहने लगा कि देखो मैंने ऐसी स्वरूपवान् स्त्रीको छोड़कर उन डांकिनोके पीछे अपने हजारों लखों रुपये बर्बाद ( नष्ट ) कर दिये और कुछ भागे पीछेका विचार न किया, खैर हुआ सो हुआ अचमैं कदापि उनके घर पर न जाउ गा, अपने घरमें जो स्त्री है उसीसे दिल लगाऊंगा, नाहक लोगोंकी बदनामी न उठाऊंगा, अपना रुपया नाहक न गमाऊंगा, पिताकी आज्ञा सिरपर उठाऊंगा । इत्यादि नाना प्रकारके विचार करता हुआ अपने दुकानदारीके कार व्यवहार करता रहा । फिर जब शामका वक्त हुआ, तो उसका पिता कहने लगा कि हे पुत्र तेरा सैर करनेका वक्त हो गया अव तू जा । तव वह लड़का इस वचनको सुनकर चुप होगया ओर कुछ न बोला, थोड़ीसी देरके बाद फिर उस साहूकारने कहा तवभी वो लड़का न वोला, फिर थोड़ी देरके बाद तिसरी बार फिर भी उस साहूकारने अपने पुत्रसे कहा, तब वो लड़का कहने लगा कि है पिताजी आप मेरेसे वार २ कहतेहो मेरेको शरम आती है श्योंकि उस जगहसे मेरेको ग्लानी उत्पन्न होगयी, इसलिये उस जगह जानेका मेरा चित्त कदापि न होगा, मैं उस जगह कदापि न जऊंगा, अपनो स्वस्त्रोसे ऐस मौज उड़ाऊंगा । इस रोतिसे उस साहूकारके लड़केका वेश्यागमन छूट गया, और अपने घरके रोजगार हाल धन्धेमें निपुण होकर अपने घरका कार व्यवहार करने लगा, इसरीतिसे यह दृष्टान्त हुवा । अव द्राष्टान्त कहते हैं कि जैसे उस साहूकारके लडके को पेश्तरतो सच लोगोंने वेश्याके यहाँ जानेको मना किया परन्तु किसीका कहना उस लड़केने न माना, तब उसके पिताने विचार कर उसको मना न किया, और वेश्वाओं की बुराई दिखानेका उपाय किया था, और जब उस लड़केको उन वेवाओंकी बुराई बैठकर ग्लानी उत्पन्न होगई तब उसके पिताने उसको जानेकी आज्ञा भी दी परन्तु तो भी वेश्वाओंके यहाँ फिर न गया । इसीरीतिसे जो वर्तमान कालमें यथावत जैन आगमका रहस्य नही जानने वाले पदार्थ की ग्लानी विदुन त्याग पचखान कराते हैं वे लोग जिज्ञासुओं को विश्वास होन करके त्याग पवखानोसे उलटा भ्रष्ट कर देते हैं, परन्तु जो जिनआगमके रहस्यके जानकार आत्मार्थी सत्पुरुष हैं वे लोग जैसे उस साहूकारने अपने पुत्रको वेश्याओं को बुराई देखाकर उसका वेश्यागमनपना छुड़ा दिया, तैसेही जो सत्पुरुष उपदेश देने वाले हैं, वे भी जिज्ञासुओंको पदार्थकी बुराई दिखायकर उन पदार्थोका त्याग कराते हैं, तब वे जिज्ञासु पदार्थ की बुराई जानकर यथावत त्याग पत्रखानोंको विश्वास सहित पालते हैं, और जिन धर्मके रहस्य को पायकर अपनी आत्माका कल्याण करते हैं । पदार्थोंका वर्णन । अब इस ग्रन्थमें पेश्तर पदार्थोका निरूपण करते हैं कि, जगत्मे कितने पदार्थ हैं और कौन २ पदार्थ में जिज्ञासु रुचि करे और कौनमें ग्लानी करे, इस हेतुसे प्रथम सामान्य स्वभाव जो कि श्री सर्वज्ञ देव वीतरागने कहे हैं उसीके अनुसार निरूपण करते हैं । सो सामान्य स्वभाव छ. हैं उन्हींका नाम कहते हैं । १ अस्तित्वं, २ वस्तुत्वं, ३ दृष्यत्व, ४ प्रमेयत्वं, ५ सत्यत्वं, ६ अगुरु लघुत्व । यह सामान्य स्वभाव हैं । इनको सामान्य स्वभाव इसलिए कहा है कि यह छवों स्वभाव सर्व जगह अर्थात् जगत्मे जो पदार्थ वा द्रव्य है उन सर्वो में यह छओं स्वभाव पाये जावें । ऐसी वस्तु जगतमें कोई नहीं है कि जिसमें यह छऔं न मिलें अर्थात् मिलेही । इसलिये इनको सामान्य स्वभाव कहा । दूसरा इस सामान्यके कहनेसे विशेष की कांक्षा रहती है, इस कांक्षाके भी जताने के वास्ते इनको सामान्य स्वभाव कहा । ( शका ) इन छों लामान्य स्वभावमें पेश्तर अस्तित्वं क्यों कहा पेश्तर वस्तुत्वं अथवा द्वव्यत्व ऐसाही नाम क्य न कहा । ( समाधान ) पेश्तर अस्तित्वं कहनेसे जिज्ञासुको कांछा होती हैं कि इसको अस्तित्व क्यों कहा, इस हेतुसे द्रव्यानुभव-चलाकर । पेश्तर अस्तित्व कहा. दूसरा इस अस्तित्व' कहनेसे सर्वज्ञ देवका यही अभिप्राय है कि नास्तिक मतका निराकरन होगया इस हेतुसे पेश्तर अस्तित्वं शद कहा। दूसरा वस्तुत्वं कहनेसे वस्तुका प्रतिपादन किया, जय वस्तु कहनेसे जिज्ञासुको काक्षा हुई कि वस्तु क्या चीज हैं, जिस के वास्ते हव्यत्व शब्द, कहा । द्रव्यत्व को स्वनह सिद्ध न होनेसे प्रमेययत्व कहा । प्रमेयत्व के कहनेसे प्रमाण की काक्षा होगई जब प्रमाणसे प्रमेय सिद्ध हुआ तो फिर जो जगतको मिथ्या मानने वाले निराकरन करनेके वास्ते और जगतकी सत्यता ठहरानेके वास्ते सत्यत्व' कहा । इस सत्पत्वमे जो हमेंशा उत्पाद, वय होता है इस लिये अगुरु लघुत्व' अर्थात् पद्गुण हानि वृद्धि उत्पाद वय रूप अगुरु लघुत्व' कहा, इसरीतिसे यह छ. सामान्य स्वभाव कहे । अब अस्तित्व रूपजो जगत उसको क्रमसे प्रतिपादन करते हैं । १ अस्तित्वं । प्रथम अस्तित्व शब्दका अर्थ करते हैं कि, जो जगतू अर्थात् लोकाकाशमें जितने पदार्थ वा द्रव्य है ( जिनके नाम हम आगे कहेंगे ) सो पदार्थ अस्ति रूप हैं अर्थात् कभी उनका नाश न होय, क्योंकि देखो इस जगत्में जितने पदार्थ हैं वो कब उत्पन्न हुवे ऐसा कभी नहीं कह सत, अथवा कभी नए हो जायगे सो भी नहीं कह सक्त, इसलिये जो जगतमें पदार्थ हैं वे सदाकाल जैसेके तैसेहो चने रहेंगे, इसलिये सर्वज्ञ देव वीतरागने उन पदार्थोंको अस्तिरूप कथन किया, इस अस्तिपने से नास्तिक मतका निराकरन होगया । २ वस्तुत्वं । दूसरा वस्तुत्व स्वभावका अर्थ करते हैं कि, जो जगतमें पदार्थ हैं वो एक जगह इकट्ठे अर्थात् आपसमें अनादि संयोग सम्बन्धसे मिले हुये इसलोकमें है ( जिनके नाम हम आगे कहेंगे ), वो पदार्थ अपने गुण, पर्याय, प्रदेश आदिकोंकी सत्ता लिये हुये अपने स्वभावमें रहते हैं, दूसरे पदार्थमें मिले नहीं, इसलिये उसमें वस्तुत्वपना हुआ । जो आपस में माहु माही मिलकर एक होजाय उसको जुदा नहीं कह सक्त, इस लिये इस जगत्में उन पदार्थोंकी जुदी २ सत्ता और स्वभाव अथवा क्रिया और लक्षण जुदा २ होनेसे वो आपसमें सब जुदे ही हैं, इसलिये उनको वस्तुत्व कहा। क्योंकि देखो लौकिकमें भी जिस वस्तुका गुण, स्वभाव जुदा २ देखते है उन २ वस्तुओंको जुदा २ ही कहते हैं, इस लिए सर्वशदेच वीतरागने भी जुदा २ गुण स्वभाव देखकर जुदी २ वस्तु कहनेके वास्ते 'वस्तुत्व', इस शब्द को कहा । ३ द्रव्यत्वं । अव तीसरा द्वव्यत्व शब्दका अर्थ और पदार्थों का नाम, लक्षण, प्रमाण आदि युक्तिसे शास्त्र अनुसार किश्चित दिखाते हैं, सो प्रथम द्वव्यत्वका अर्थ करते हैं कि द्रव्य कितने हैं और द्वव्यका लक्षण क्या है, सो पेश्तर लक्षण कहकर द्रव्योंके नाम कहेंगे । इस जगह प्रश्न, उत्तरसे पाठकगण समझे ( प्रश्न ) या शङ्का वादीकी तरफसे और ( उत्तर ) या समाधान शिद्धांती की तरफसे जान लेना । ( प्रश्न ) आप द्रव्यका लक्षण कहते हो फिर उस लक्षणका भी लक्षण कहना पड़ेगा और फिर उस लक्षणका भी लक्षण पूछेगा तो फिर इस रीतिसे पूछते २ आवस्ता दोष होजायगा, इसलिये लक्षण ही नहीं बनता तो फिर लक्ष कहांसे बनेगा । ( उत्तर ) भो देवानुप्रिय अभी तुम्हारेको पदार्थोंके कहनेचाले गुरूका संग नहीं हुआ दीखे, इसलिये तुम्हारेको ऐसा अनावस्था दोषका सन्देह हो रहा है, इस तुम्हारे सन्देह दूर करनेके वास्ते लक्षणका स्वरूप कहते हैं कि जो आचार्य लक्षण करते हैं उस लक्षणका क्षलण अर्थात् निकृष्ट रहस्य यह है कि, आचार्य प्रथम ही अति व्याप्ति, अथवा अव्याप्ति वा, असभ्भवादि यह तीन दूषण करके रहित जो लक्षण उसको यथावत लक्षण कहते हैं, इसलिये फिर जिज्ञासुको लक्षणका लक्षण पूछने की कांक्षा ही नहीं रहती। इसलिये अब तुम्हारेको तीनों दूषणोंका स्वरूप दिखाते हैं, कि अति व्याप्ति इत्यानुभव-रखाकर । ] उसको कहते हैं कि, किसी चीजका लक्षण कहा और वो लक्षण लक्षको छोड़कर अन्य चीजमें चला जाय, उसको अति व्याप्ति कहते है। और अयाप्ति उसको कहते है कि जिसका लक्षण कहे उस लक्षको सम्पूर्णको न समेटे अर्थात् इकट्टा न करे, एक देश रहकर अपने मजानी लक्षको छोड देय, उसका नाम अव्याप्ति है। तीसरा अस उसको कहते है कि किसोका लक्षण किया उस लक्षणका अन्श किंचित भी न जाया, लक्षण कह दिया और लक्षका पता भी नहीं, इसलिए इसको असम्भव दूषण कहा । अब इन तीनों दूषपाहृष्टान्त भी देकर दिखाते हैं, कि जैसे गऊ (गाय) का लक्षण फिमोने किया कि सींग वाली गऊ होती है जिसके सींग होगा वो गाय है । इस लक्षणसे अति व्याप्ति हो गई, क्योंकि देखो सींग भैसके भी होता है, और बकरीफे भी होता और सींग हिरनके भी होता हैं, जो सोग वाले पशु है उन सबमें लक्षण चला गया, केवल गायमे न रहा, इसलिये इसको अति व्याप्ति दूषण कहा । दूसरा किसीने गऊका लक्षण कहा कि "नीलत्व गोत्व" नील रङ्गकी गाय होती है, जय इस लक्षणसे अव्याप्ति होती है, क्योंकि देखो गाय सफेद भी होती है, गाय पीली भी होती है और गाय लाल भी होती है, तो थो भी लक्षण गायफा सर्व गऊरूप लक्षको न वताय सका, इसलिये एक देश होनेसे अध्याप्ति रूप दूषण होगया। अब असम्भव दूषण इस रीतिसे होता है, कि किसी चीजका लक्षण किया और उस लक्षणका एक अश भी लक्षमें न पहूचा' क्योंकि देखो किसीने कहा कि ( एक सापत्वं गोत्व ) अर्थात् एक खुरवाली गऊ होती है, तो देखो एक खुर गधा था घोड़ाके होता है, गायके तो एक पगमें दो खुरी होती है, इस लिये गायमें लक्षणका संभव न हुआ, इसलिये इसलक्षणको असम्भव कहा। इन तीनों दूरणोंसे रहित गायका क्या लक्षण होता है सो ही दिखाते हैं कि, लक्षणका कहने वालावुद्धिमान पुरुष गायका लक्षण इस रीतिसे कहेगा कि ( सासनादि मत्वे सतीसिगत्व लांगत्व गोस्वं ) अर्थात् सासन अर्थात् गलेका चमड़ा लटके और सींग जिसके होय और
द्रव्यानुभव-रत्ता कर ] संसारी जीव मात्र में क्षुधाका अर्थात् खानेका स्वभाव होता है, अजीव में नहीं। इसलिये क्षुधाका स्वभाव सो हो स्वभाव जानना । तीसरा निमित कहता जो दो कारण रसोई जीमने की धाली, पत्तल, अथवा हाथ आदि पर रखकर खाना, उसका नाम नियत अर्थात् निमित कारण विदून कार्य की सिद्धि नहीं होती हैं। इसलिए तीसरा नियत समयाय हुआ। अन चौधा पूर्वकृत समवाय कहते हैं कि, पूर्व नाम पहिले जन्मम जो जोवने भोगादि बाधा है उसके अनुसार उस को प्राप्ति होगा क्योंकि देखो जो पूर्व जन्ममे उसदिन उसी समय में उसके मानेका संयोग न होगा तो उस वक्त अनेक तरहके विघ्न आफर सटे होंगे अर्थात् कोई न कोई ऐसा कारण होगा कि उस चक्तमें वह न जीम सकेगा। इसलिये पूर्वकृत समवाय हुआ। अब पाचवां पुरुरार्ध अर्थात् उद्यम करना, क्योंकि जब तक हाथसे कौर मोटे मुख ) में न देगा और मुखसे अथवा दांतोंसे विगद कर गलेसे न उतारे तब तक वह भीतर न जायगा, इत्यादि क्रियाका करना सो हो पुरुषाधं है । इसरीतिसे यह पांच समवाय हुए । इस जगह दुःख गभित, मोह गर्भित वैराग्य वाले जिन आगमके रहस्य के अजान नोसरे नियत समवायके ऊपर ऐसी तर्क करेंगे कि नियन नाम निश्चयका अर्थात् भवितव्यताका है ऐसा शास्त्रोंमें लेख है। फिर तुम नियतको निमित कारणमें क्यों मिलाते हो ? नव उनसे कहना चाहिये कि है भोले भाइयो, कुछ गुरुकुल वासका सेवन करो जिससे तुमको शास्त्रका रहस्य मालूम हो, क्योंकि देखो जब नियत कहता निश्चयको अङ्गीकार करें, तव तो सर्वज्ञ देवका कहा हुआ पूर्वरन और पुरुषाकार व्यर्थ होजायगा। क्योंकि निश्चय जो वस्तु होने वाली होती तो पूर्वकृत और पुरुषाक रको कदापि सर्वज्ञ देव न कहते। इसलिए गुरूके बिना जिनआगमका रहस्य नहीं मालूम होना । यदि स्वतः प्राप्त होता तो जिनधर्ममें इतना कदाग्रह कदापि न चलता और जुदै दो गच्छ आमना बांधकर अपनी दो जुदी दो कल्पना न करते । इसलिये नियत कहनेसे निमित्त कारण ही मानना ठीक हैं। इसका कथन विशेष आवश्यक, अथवा स्याद्वाद रत्नाकर, वा नयचक्र आदि ग्रन्थों में है सो वहाँसे देखो, और इसी अपेक्षासे श्री देवचन्द्रजीने आगमसारमें पाँच समवायका वर्णन किया है । उस जगह नियतमें निश्चयको छोड़कर समकितको अङ्गीकार किया है सो ही दिखाते हैं, कि प्रथमकाल कहकर चौथा आरा लिया, फिर अभव्यको टालनेके वास्ते स्वभाव लिया, सब भव्योंको मोक्ष न जानेके वास्ते नियत करके समकित नहीं पाया। फिर श्रीकृष्ण और श्रोणिकके वास्ते मोक्ष न जानेमें पुरुषार्थ अङ्गीकार किया, फिर सालभद्रको पुरुषार्थसे मोक्ष न हुआ तव पूर्वकृत अङ्गीकार किया । इस रीतिले उस आगमसारमें पाँच समवायका वर्णन है । इसलिये जो आत्मार्थी भव्य प्राणी हो तो वह बाद विवादको छोड़कर अपनी आत्माका कल्याण करे, और सर्वशके वचनको अङ्गीकार करे, संसारसे डरे, झगड़ों में न पड़, मुक्ति पदको जायवरे गुरुके वचन हृदयमे घरे, कुगुरुओंका संग परिहरे । अब गर्भाधानके ऊपर पांच समवायोको उतारकर दिखाते है कि, काल कहता जो त्रो ऋतु धर्मपर आकर पांच सात दिन तक गर्भ रहनेका शास्त्रोंमें कहा है । अथवा जिस काल जिस वक्तमें गर्भ रहे सो काल लेना । दूसरा समवाय कहते हैं कि जिस स्त्रोके गर्भ धारणका स्वभाव होगा वही गर्भ धारण करेगी। क्योंकि ऋतु कालतो वन्ध्याके भी होता है। परन्तु उसमें गर्भ धारण करनेका स्वभाव नही हैं । इसलिये वह गर्भवतो कदापि न होगी । तीन नियत कहता निमित्त स्त्रोको पुरुषका होना चाहिये । जबतक पुरुषका निमित्त न होगा तब तक भी गर्भाधान न रहेगा। चौथा पूर्वकृत जिसने पूर्व सतान होनेका कर्म उपार्जन किया होगा उसीके संतान अर्थात् गर्भ रहेगा । क्योंकि पुरुषका निमित्ततो वन्ध्याको भी मिलता है परन्तु गर्भ धारण नहीं होता । इसलिये पूर्वकृत चौथा समवाय हुआ । पांचवा पुरुषाकार अर्थात् उद्यम जो दो स्त्रियोंके गर्भ रहेके बाद यत्न कहे हैं सो दो यतन करना उमीका नाम पुरुषाकार हैं । अब खेतीके ऊपर पाच समवायोंको उतार कर दिखाते हैं, कि कालतो वह है कि जिस कालमें जो चीज बोई है, और ऋऋतुमें होती है, जैसे मोठ, बाजरा, मूंग, जेठ आषाढ़ में चोये जाते हैं, और जौ, गेहूं, चना आदि आसोजकार्तिकमें बोये जाते हैं, इसलिये उनको उन्ही कालमें चोये जाय तो ये चीजें उगती हैं, कदाचित् जेठ आगदमें जौ, गेहूं वीया जायतो ऋतुके बिना यथावत न होय, तैसे ही सर्व वस्तु जिस दो कालमे बोयेसे उगे और यथावत हों उसका घही फाल है। अब दूसरा स्वभाव सम्बाय कहते हैं कि जिस जमीन और जिस बीजमें उगनेका स्वभाव होगा वही वस्तु उगेगी, इसलिये वीजका और जमीनका स्वभाव लेनेसे स्वभाव सम्वाय वनेगा, क्योंकि जो ऊपर भूमि आदिक होय उसमें चीज गिरे तो कदापि न ऊगेगा, और जो बीज यथावत अर्थात् सडा व पुराना अथवा घुना हुआ स्वभाव जिनमें ऊगनेका नहीं है उनको खेतमें गेरनेसे कदापि न ऊरोगा, इस रीनिसे जमीन और बीजमें स्वभाव सम्वाय हुआ । अव दो नियत कहता निमित्त कारण पानी, मेंह आदि या वायुका यथावत निमित्त जमीन और वीजको मिले तो वो वीज उसमें उगे, इसलिये तीसरा नियत समचाय हुआ । चौथा पूर्वकृत कहते हैं कि पूर्व नाम पेश्तर जमीनको सरकार किया होगा क्योंकि जब तक पेश्तर जमीनको हलादिसे जोतकर साफ अर्थात् खातादि संस्कार यथावत न करेगा तो उसमें वन्तु यथावत न होगी, इसलिये पूर्वकृत अवश्य होनी चाहिये। दूसरी पूर्वकृत इस रीतिसे भी कोई घटावे तो घट सक्ती है कि, जो खेती आदिक करने वाले जीव अर्थात् किसानने पूर्व जन्ममें अच्छा कर्म उपार्जन किया होगा तभी उसके पुण्यसे अन्नादि होगा, इस रीतिसे भी कोई घटावे तो घट सक्ता है, परन्तु पहली रीति पूर्वकृतमें यथावत घटती है अव एक पाचवा पुरुषाकार सम्वाय कहते हैं कि उद्यम करना अर्थात् मेह आदि न वरसे तो कुआ आदिकका पानी देना, अथवा जब वीज उगता है तो उसके साथ में घासादि ऊगता है उसको उखाड़ना, इत्यादि नाना प्रकारका उसमें उद्यम करना वही पुरुषाकर है, इस रीतिसे खेनीके ऊपर पांच सम्बाय कहें । अब विद्या पढ़नेके ऊपर भी पाँच सम्वायोंको उतारते हैं कि, कालतो बुद्धिमानोंको इस जगह ऐसा लेना चाहिये कि जिस वक्त लड़का पढ़ाने के लायक अर्थात् पाँच सात-दस वरयका होजाय, अथवा जिस काल में जो विद्या पढ़नेका आरम्भ करे उसको काल सम्वाय कहेंगे। अब दूसरा स्वभाव सम्वाय कहते हैं मनुष्य जातिमे ही पढ़नेका स्वभाव है और पशु आदिकोंमें नहीं. इसलिये विद्यामें मनुष्यका ही स्वभाव गिना जायगा । तीन नियत सम्वाय कहते हैं कि नियत कहता निमित्त कारण विद्या अध्ययन करानेवाला गुरू आदि जिस विद्यामें यथावत निपुण होगा उस विद्याको यथावत पढ़ावेगा । अब चौथा पूर्वकृत कहते हैं, जिस जीवने पूर्वजन्ममें विद्याके संस्कार उपार्जन किये होंगे उसी जीवको विद्याध्ययन होगा, क्योंकि देखो सैकड़ो भीलादि ग्रामीण लोग हजारों, लाखों बिना विद्याके ही रह जाते हैं, क्योंकि उनके पूर्वकृत नहीं हैं, इस रीतिले पूर्वकृत सम्वाय हुआ। अब पांचचा पुरुषाकार सम्वाय कहते हैं कि, जो मनुष्य पुरुषाकार अर्थात् उद्यम विशेष करके पठन पाटन वाँचना पूछना परावर्तना आदि वारम्वार करते हैं उनको यथावत विद्या प्राप्त होती है, इस रीतिसे विद्या पढ़नेमें पाँच सम्वाय कहे । अब इस जगह ग्रन्थ बढ़जानेके भयसे किंचित् प्रक्रिया दिखाय दीनी है, पन्तु जो इन बातोंके जाननेवाले गुरू हैं वे लोग जिज्ञासुको हर एक चीज पर उतारनेके वास्ते पाँच सम्वायका बोध कराय देते हैं, सो वो यथावत वोध होना गुरुकी कृपा और जिज्ञासुकी बुद्धि और पुरुषार्थसे आप ही होजाता है। कदाचित् पुस्तकोंमें विस्तार भी लिखदें और गुरु यथावत समझाने वाला न मिले तो भी जिन्नासुको यथावत वोध न होगा, इसलिये जो गुरु यथावत जिन आगमके रहस्यके जानकार हैं वे लोग जिज्ञासुकी परीक्षा करके आपहो यथावत बताते हैं, क्योंकि जब तक वे लोग जिज्ञासुको ग्लानी और रुचि न दरसावें, तब तक उसको यथावत बोध न होगा, इस हेतुसे वे सतपुरुष पेस्तर पदार्थ अर्थात् हर एक चीजमें ग्लानी और रुचि दिखाय कर यथावत बोध कराते हैं, सो इस जगह ग्लानी और रुचिका द्वष्टान्त लिखकर दिखाते हैं क्योंकि द्वष्टान्तसे द्रा टान्त यथावत सममे आजाता है, इसलिये प्रथम दृष्टान्त कहते हैं । एक साहुकार था उसका लड़का वेश्या गमनमें पड़ गया अर्थात् वेश्या गमन करता था हुये थे, आंखोंसे गीड़ आय रही थी, कज्जल आँखोंमें लगा हुआ ढलका था, उससे मुंह काला हो गया था, होठ पर पान खानेसे फेफडी जमी हुई थी, दांत पीले खराव लगते थे, इस रीतिका उन वेश्याओंका रूप देखकर डांकिनके समान चित्तमें ग्लानी उत्पन्न होगई और विचारने लगा कि छी दो छो हाय, हाय कैसा मैंने लोगोंमें अपना नाम वदनाम कराया और हजारों लाखों रुपया वर्बाद करे, परन्तु मेरेको आज मालूम हुआ कि इनका रूप ऐसावुरा भयङ्कर है, केवल शामके वक्त में ऊपरका लिफाफा वनायकर मेरा माल ठगतो थी, ऐसा विचारता हुआ वहांसे चलकर अपने घरमे आया, उस वक्त उसकी स्त्री सामने खड़ी हुई, नजर आई, उस वक्त उस लड़केने अपनी स्त्रीके स्वरूपको देखकर चिचमें आनन्दको प्राप्त. हुआ और कहने लगा कि देखो मैंने ऐसी स्वरूपवान् स्त्रीको छोड़कर उन डांकिनोके पीछे अपने हजारों लखों रुपये बर्बाद कर दिये और कुछ भागे पीछेका विचार न किया, खैर हुआ सो हुआ अचमैं कदापि उनके घर पर न जाउ गा, अपने घरमें जो स्त्री है उसीसे दिल लगाऊंगा, नाहक लोगोंकी बदनामी न उठाऊंगा, अपना रुपया नाहक न गमाऊंगा, पिताकी आज्ञा सिरपर उठाऊंगा । इत्यादि नाना प्रकारके विचार करता हुआ अपने दुकानदारीके कार व्यवहार करता रहा । फिर जब शामका वक्त हुआ, तो उसका पिता कहने लगा कि हे पुत्र तेरा सैर करनेका वक्त हो गया अव तू जा । तव वह लड़का इस वचनको सुनकर चुप होगया ओर कुछ न बोला, थोड़ीसी देरके बाद फिर उस साहूकारने कहा तवभी वो लड़का न वोला, फिर थोड़ी देरके बाद तिसरी बार फिर भी उस साहूकारने अपने पुत्रसे कहा, तब वो लड़का कहने लगा कि है पिताजी आप मेरेसे वार दो कहतेहो मेरेको शरम आती है श्योंकि उस जगहसे मेरेको ग्लानी उत्पन्न होगयी, इसलिये उस जगह जानेका मेरा चित्त कदापि न होगा, मैं उस जगह कदापि न जऊंगा, अपनो स्वस्त्रोसे ऐस मौज उड़ाऊंगा । इस रोतिसे उस साहूकारके लड़केका वेश्यागमन छूट गया, और अपने घरके रोजगार हाल धन्धेमें निपुण होकर अपने घरका कार व्यवहार करने लगा, इसरीतिसे यह दृष्टान्त हुवा । अव द्राष्टान्त कहते हैं कि जैसे उस साहूकारके लडके को पेश्तरतो सच लोगोंने वेश्याके यहाँ जानेको मना किया परन्तु किसीका कहना उस लड़केने न माना, तब उसके पिताने विचार कर उसको मना न किया, और वेश्वाओं की बुराई दिखानेका उपाय किया था, और जब उस लड़केको उन वेवाओंकी बुराई बैठकर ग्लानी उत्पन्न होगई तब उसके पिताने उसको जानेकी आज्ञा भी दी परन्तु तो भी वेश्वाओंके यहाँ फिर न गया । इसीरीतिसे जो वर्तमान कालमें यथावत जैन आगमका रहस्य नही जानने वाले पदार्थ की ग्लानी विदुन त्याग पचखान कराते हैं वे लोग जिज्ञासुओं को विश्वास होन करके त्याग पवखानोसे उलटा भ्रष्ट कर देते हैं, परन्तु जो जिनआगमके रहस्यके जानकार आत्मार्थी सत्पुरुष हैं वे लोग जैसे उस साहूकारने अपने पुत्रको वेश्याओं को बुराई देखाकर उसका वेश्यागमनपना छुड़ा दिया, तैसेही जो सत्पुरुष उपदेश देने वाले हैं, वे भी जिज्ञासुओंको पदार्थकी बुराई दिखायकर उन पदार्थोका त्याग कराते हैं, तब वे जिज्ञासु पदार्थ की बुराई जानकर यथावत त्याग पत्रखानोंको विश्वास सहित पालते हैं, और जिन धर्मके रहस्य को पायकर अपनी आत्माका कल्याण करते हैं । पदार्थोंका वर्णन । अब इस ग्रन्थमें पेश्तर पदार्थोका निरूपण करते हैं कि, जगत्मे कितने पदार्थ हैं और कौन दो पदार्थ में जिज्ञासु रुचि करे और कौनमें ग्लानी करे, इस हेतुसे प्रथम सामान्य स्वभाव जो कि श्री सर्वज्ञ देव वीतरागने कहे हैं उसीके अनुसार निरूपण करते हैं । सो सामान्य स्वभाव छ. हैं उन्हींका नाम कहते हैं । एक अस्तित्वं, दो वस्तुत्वं, तीन दृष्यत्व, चार प्रमेयत्वं, पाँच सत्यत्वं, छः अगुरु लघुत्व । यह सामान्य स्वभाव हैं । इनको सामान्य स्वभाव इसलिए कहा है कि यह छवों स्वभाव सर्व जगह अर्थात् जगत्मे जो पदार्थ वा द्रव्य है उन सर्वो में यह छओं स्वभाव पाये जावें । ऐसी वस्तु जगतमें कोई नहीं है कि जिसमें यह छऔं न मिलें अर्थात् मिलेही । इसलिये इनको सामान्य स्वभाव कहा । दूसरा इस सामान्यके कहनेसे विशेष की कांक्षा रहती है, इस कांक्षाके भी जताने के वास्ते इनको सामान्य स्वभाव कहा । इन छों लामान्य स्वभावमें पेश्तर अस्तित्वं क्यों कहा पेश्तर वस्तुत्वं अथवा द्वव्यत्व ऐसाही नाम क्य न कहा । पेश्तर अस्तित्वं कहनेसे जिज्ञासुको कांछा होती हैं कि इसको अस्तित्व क्यों कहा, इस हेतुसे द्रव्यानुभव-चलाकर । पेश्तर अस्तित्व कहा. दूसरा इस अस्तित्व' कहनेसे सर्वज्ञ देवका यही अभिप्राय है कि नास्तिक मतका निराकरन होगया इस हेतुसे पेश्तर अस्तित्वं शद कहा। दूसरा वस्तुत्वं कहनेसे वस्तुका प्रतिपादन किया, जय वस्तु कहनेसे जिज्ञासुको काक्षा हुई कि वस्तु क्या चीज हैं, जिस के वास्ते हव्यत्व शब्द, कहा । द्रव्यत्व को स्वनह सिद्ध न होनेसे प्रमेययत्व कहा । प्रमेयत्व के कहनेसे प्रमाण की काक्षा होगई जब प्रमाणसे प्रमेय सिद्ध हुआ तो फिर जो जगतको मिथ्या मानने वाले निराकरन करनेके वास्ते और जगतकी सत्यता ठहरानेके वास्ते सत्यत्व' कहा । इस सत्पत्वमे जो हमेंशा उत्पाद, वय होता है इस लिये अगुरु लघुत्व' अर्थात् पद्गुण हानि वृद्धि उत्पाद वय रूप अगुरु लघुत्व' कहा, इसरीतिसे यह छ. सामान्य स्वभाव कहे । अब अस्तित्व रूपजो जगत उसको क्रमसे प्रतिपादन करते हैं । एक अस्तित्वं । प्रथम अस्तित्व शब्दका अर्थ करते हैं कि, जो जगतू अर्थात् लोकाकाशमें जितने पदार्थ वा द्रव्य है सो पदार्थ अस्ति रूप हैं अर्थात् कभी उनका नाश न होय, क्योंकि देखो इस जगत्में जितने पदार्थ हैं वो कब उत्पन्न हुवे ऐसा कभी नहीं कह सत, अथवा कभी नए हो जायगे सो भी नहीं कह सक्त, इसलिये जो जगतमें पदार्थ हैं वे सदाकाल जैसेके तैसेहो चने रहेंगे, इसलिये सर्वज्ञ देव वीतरागने उन पदार्थोंको अस्तिरूप कथन किया, इस अस्तिपने से नास्तिक मतका निराकरन होगया । दो वस्तुत्वं । दूसरा वस्तुत्व स्वभावका अर्थ करते हैं कि, जो जगतमें पदार्थ हैं वो एक जगह इकट्ठे अर्थात् आपसमें अनादि संयोग सम्बन्धसे मिले हुये इसलोकमें है , वो पदार्थ अपने गुण, पर्याय, प्रदेश आदिकोंकी सत्ता लिये हुये अपने स्वभावमें रहते हैं, दूसरे पदार्थमें मिले नहीं, इसलिये उसमें वस्तुत्वपना हुआ । जो आपस में माहु माही मिलकर एक होजाय उसको जुदा नहीं कह सक्त, इस लिये इस जगत्में उन पदार्थोंकी जुदी दो सत्ता और स्वभाव अथवा क्रिया और लक्षण जुदा दो होनेसे वो आपसमें सब जुदे ही हैं, इसलिये उनको वस्तुत्व कहा। क्योंकि देखो लौकिकमें भी जिस वस्तुका गुण, स्वभाव जुदा दो देखते है उन दो वस्तुओंको जुदा दो ही कहते हैं, इस लिए सर्वशदेच वीतरागने भी जुदा दो गुण स्वभाव देखकर जुदी दो वस्तु कहनेके वास्ते 'वस्तुत्व', इस शब्द को कहा । तीन द्रव्यत्वं । अव तीसरा द्वव्यत्व शब्दका अर्थ और पदार्थों का नाम, लक्षण, प्रमाण आदि युक्तिसे शास्त्र अनुसार किश्चित दिखाते हैं, सो प्रथम द्वव्यत्वका अर्थ करते हैं कि द्रव्य कितने हैं और द्वव्यका लक्षण क्या है, सो पेश्तर लक्षण कहकर द्रव्योंके नाम कहेंगे । इस जगह प्रश्न, उत्तरसे पाठकगण समझे या शङ्का वादीकी तरफसे और या समाधान शिद्धांती की तरफसे जान लेना । आप द्रव्यका लक्षण कहते हो फिर उस लक्षणका भी लक्षण कहना पड़ेगा और फिर उस लक्षणका भी लक्षण पूछेगा तो फिर इस रीतिसे पूछते दो आवस्ता दोष होजायगा, इसलिये लक्षण ही नहीं बनता तो फिर लक्ष कहांसे बनेगा । भो देवानुप्रिय अभी तुम्हारेको पदार्थोंके कहनेचाले गुरूका संग नहीं हुआ दीखे, इसलिये तुम्हारेको ऐसा अनावस्था दोषका सन्देह हो रहा है, इस तुम्हारे सन्देह दूर करनेके वास्ते लक्षणका स्वरूप कहते हैं कि जो आचार्य लक्षण करते हैं उस लक्षणका क्षलण अर्थात् निकृष्ट रहस्य यह है कि, आचार्य प्रथम ही अति व्याप्ति, अथवा अव्याप्ति वा, असभ्भवादि यह तीन दूषण करके रहित जो लक्षण उसको यथावत लक्षण कहते हैं, इसलिये फिर जिज्ञासुको लक्षणका लक्षण पूछने की कांक्षा ही नहीं रहती। इसलिये अब तुम्हारेको तीनों दूषणोंका स्वरूप दिखाते हैं, कि अति व्याप्ति इत्यानुभव-रखाकर । ] उसको कहते हैं कि, किसी चीजका लक्षण कहा और वो लक्षण लक्षको छोड़कर अन्य चीजमें चला जाय, उसको अति व्याप्ति कहते है। और अयाप्ति उसको कहते है कि जिसका लक्षण कहे उस लक्षको सम्पूर्णको न समेटे अर्थात् इकट्टा न करे, एक देश रहकर अपने मजानी लक्षको छोड देय, उसका नाम अव्याप्ति है। तीसरा अस उसको कहते है कि किसोका लक्षण किया उस लक्षणका अन्श किंचित भी न जाया, लक्षण कह दिया और लक्षका पता भी नहीं, इसलिए इसको असम्भव दूषण कहा । अब इन तीनों दूषपाहृष्टान्त भी देकर दिखाते हैं, कि जैसे गऊ का लक्षण फिमोने किया कि सींग वाली गऊ होती है जिसके सींग होगा वो गाय है । इस लक्षणसे अति व्याप्ति हो गई, क्योंकि देखो सींग भैसके भी होता है, और बकरीफे भी होता और सींग हिरनके भी होता हैं, जो सोग वाले पशु है उन सबमें लक्षण चला गया, केवल गायमे न रहा, इसलिये इसको अति व्याप्ति दूषण कहा । दूसरा किसीने गऊका लक्षण कहा कि "नीलत्व गोत्व" नील रङ्गकी गाय होती है, जय इस लक्षणसे अव्याप्ति होती है, क्योंकि देखो गाय सफेद भी होती है, गाय पीली भी होती है और गाय लाल भी होती है, तो थो भी लक्षण गायफा सर्व गऊरूप लक्षको न वताय सका, इसलिये एक देश होनेसे अध्याप्ति रूप दूषण होगया। अब असम्भव दूषण इस रीतिसे होता है, कि किसी चीजका लक्षण किया और उस लक्षणका एक अश भी लक्षमें न पहूचा' क्योंकि देखो किसीने कहा कि अर्थात् एक खुरवाली गऊ होती है, तो देखो एक खुर गधा था घोड़ाके होता है, गायके तो एक पगमें दो खुरी होती है, इस लिये गायमें लक्षणका संभव न हुआ, इसलिये इसलक्षणको असम्भव कहा। इन तीनों दूरणोंसे रहित गायका क्या लक्षण होता है सो ही दिखाते हैं कि, लक्षणका कहने वालावुद्धिमान पुरुष गायका लक्षण इस रीतिसे कहेगा कि अर्थात् सासन अर्थात् गलेका चमड़ा लटके और सींग जिसके होय और
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि इस प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का लाइव प्रसारण होगा। 15 अगस्त 2021 को होने वाले इस समारोह को लोग वीआर (वर्चुअल रियलिटी) गजट के साथ और इसके बिना भी देख सकते हैं । इसमें कहा गया है कि आसानी से लोगों की पहुंच इस प्लेटफॉर्म पर हो सकेगी और स्वतंत्रता दिवस समारोह (आईडीसी) से संबंधित सभी गतिविधि एवं सूचना को यहां उपलब्ध कराया जायेगा । बयान में कहा गया है कि इस प्लेटफॉर्म पर विशेष आईडीसी रेडियो और एक गैलरी के अलावा वीरता के कृत्यों एवं 1971 में हुये भारत पाकिस्तान के बीच लड़ाई में जीत की 50 वीं वर्षगांठ पर ई-बुक, स्वतंत्रता संग्राम पर ब्लॉग्स आदि उपलब्ध होंगे । इसमें कहा गया है कि आईडीसी 2021 से संबंधित मोबाइल ऐप की शुरूआत आने वाले दिनों में होगी।
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि इस प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का लाइव प्रसारण होगा। पंद्रह अगस्त दो हज़ार इक्कीस को होने वाले इस समारोह को लोग वीआर गजट के साथ और इसके बिना भी देख सकते हैं । इसमें कहा गया है कि आसानी से लोगों की पहुंच इस प्लेटफॉर्म पर हो सकेगी और स्वतंत्रता दिवस समारोह से संबंधित सभी गतिविधि एवं सूचना को यहां उपलब्ध कराया जायेगा । बयान में कहा गया है कि इस प्लेटफॉर्म पर विशेष आईडीसी रेडियो और एक गैलरी के अलावा वीरता के कृत्यों एवं एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में हुये भारत पाकिस्तान के बीच लड़ाई में जीत की पचास वीं वर्षगांठ पर ई-बुक, स्वतंत्रता संग्राम पर ब्लॉग्स आदि उपलब्ध होंगे । इसमें कहा गया है कि आईडीसी दो हज़ार इक्कीस से संबंधित मोबाइल ऐप की शुरूआत आने वाले दिनों में होगी।
अगर आपका मन भी कुछ ऐसा क्रिएटिव करने का है जिससे आपको इनकम भी हो तो आपके लिए सुनहरा मौका आया है. देश में 'वंदे भारत एक्सप्रेस' को चलाने के बाद मोदी सरकार बुलेट ट्रेन पर तेजी से काम कर रही है. लेकिन सरकार 'वंदे भारत एक्सप्रेस' की तरह ही इसे भी अलग नाम और पहचान देना चाहती है. अगर आप भी बुलेट ट्रेन को नया नाम देने के लिए तैयार हैं तो नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) की तरफ से आयोजित किए गए कॉम्पटीशन में हिस्सा ले सकते हैं. एनएचएसआरसीएल की तरफ से मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है. इसमें आपको बुलेट ट्रेन का नाम बताना होगा और एक मैस्कॉट डिजायन करना होगा. विजेता प्रतिभागी को सरकार की तरफ से 1 लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा. यदि आप भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं तो 25 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं. प्रतियोगिता के बारे में एनएचएसआरसीएल की तरफ से जानकारी दी गई 'मैस्कॉट अच्छी तरह डिजाइन किया हुआ कैरेक्टर होना चाहिए, जो NHSRCL के वैल्यू सिस्टम में इजाफा कर सके और लोगों तक अपनी बात पहुंचा सके. मैस्कॉट डिजायन प्रतियोगिता के विजेता को सरकार की तरफ से 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. इस प्रतियोगिता में इसके अलावा 5 सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे. प्रत्येक सांत्वना पुरस्कार के लिए 10 हजार रुपये की राशि निर्धारित है. वहीं ट्रेन के नाम के विजेता प्रतिभागी को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा. इसके अलावा इस प्रतियोगिता में 5-5 हजार रुपये के पांच सात्वना पुरस्कार दिए जाएंगे.
अगर आपका मन भी कुछ ऐसा क्रिएटिव करने का है जिससे आपको इनकम भी हो तो आपके लिए सुनहरा मौका आया है. देश में 'वंदे भारत एक्सप्रेस' को चलाने के बाद मोदी सरकार बुलेट ट्रेन पर तेजी से काम कर रही है. लेकिन सरकार 'वंदे भारत एक्सप्रेस' की तरह ही इसे भी अलग नाम और पहचान देना चाहती है. अगर आप भी बुलेट ट्रेन को नया नाम देने के लिए तैयार हैं तो नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन की तरफ से आयोजित किए गए कॉम्पटीशन में हिस्सा ले सकते हैं. एनएचएसआरसीएल की तरफ से मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है. इसमें आपको बुलेट ट्रेन का नाम बताना होगा और एक मैस्कॉट डिजायन करना होगा. विजेता प्रतिभागी को सरकार की तरफ से एक लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा. यदि आप भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं तो पच्चीस मार्च तक आवेदन कर सकते हैं. प्रतियोगिता के बारे में एनएचएसआरसीएल की तरफ से जानकारी दी गई 'मैस्कॉट अच्छी तरह डिजाइन किया हुआ कैरेक्टर होना चाहिए, जो NHSRCL के वैल्यू सिस्टम में इजाफा कर सके और लोगों तक अपनी बात पहुंचा सके. मैस्कॉट डिजायन प्रतियोगिता के विजेता को सरकार की तरफ से एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. इस प्रतियोगिता में इसके अलावा पाँच सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे. प्रत्येक सांत्वना पुरस्कार के लिए दस हजार रुपये की राशि निर्धारित है. वहीं ट्रेन के नाम के विजेता प्रतिभागी को पचास हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा. इसके अलावा इस प्रतियोगिता में पाँच-पाँच हजार रुपये के पांच सात्वना पुरस्कार दिए जाएंगे.
नयी दिल्ली 23 अगस्त (वार्ता)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (D R d o) तथा नौसेना ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल (missile) का मंगलवार को ओडिशा की एकीकृत परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया। मिसाइल की वर्टिकल लॉन्च क्षमता का पता लगाने के लिए यह परीक्षण नौसेना के एक पोत से किया गया और इसने एक ड्रोन (drone) पर हवा में सटीक निशाना साधा। इस मिसाइल को डीआरडीओ ने डिजाइन तथा विकसित किया है। मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी मानदंडों को पूरा करते हुए लक्ष्य पर निशाना साधा। डीआरडीओ तथा अन्य संबंधित प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों ने मिसाइल पर परीक्षण के दौरान करीब से नजर रखी और इसकी गतिविधियों को रखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने डीआरडीओ नौसेना तथा इस परीक्षण से जुड़ीअन्य टीमों को बधाई दी है और कहा है कि इससे नौसेना की क्षमता बढ़ेगी। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भी सफल परीक्षण के लिए बधाई देते हुए कहा है कि इससे नौसेना की हवा में मार करने की क्षमता बढ़ेगी।
नयी दिल्ली तेईस अगस्त । रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन तथा नौसेना ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का मंगलवार को ओडिशा की एकीकृत परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया। मिसाइल की वर्टिकल लॉन्च क्षमता का पता लगाने के लिए यह परीक्षण नौसेना के एक पोत से किया गया और इसने एक ड्रोन पर हवा में सटीक निशाना साधा। इस मिसाइल को डीआरडीओ ने डिजाइन तथा विकसित किया है। मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी मानदंडों को पूरा करते हुए लक्ष्य पर निशाना साधा। डीआरडीओ तथा अन्य संबंधित प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों ने मिसाइल पर परीक्षण के दौरान करीब से नजर रखी और इसकी गतिविधियों को रखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ नौसेना तथा इस परीक्षण से जुड़ीअन्य टीमों को बधाई दी है और कहा है कि इससे नौसेना की क्षमता बढ़ेगी। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भी सफल परीक्षण के लिए बधाई देते हुए कहा है कि इससे नौसेना की हवा में मार करने की क्षमता बढ़ेगी।
Multi-Member Travel Insurance : लगभग दो साल की महामारी के कारण प्रतिबंधों और लाखों कैंसल यात्राओं के बाद, दुनिया भर में कई परिवार आखिरकार अपनी रुके हुए ट्रेवल प्लान्स को पूरा कर रहे हैं। ट्रेवल की मांग में जोरदार वृद्धि भी हुई है, जैसा कि खचाखच भरी एयरलाइनों और होटलों से पता चलता है। वास्तव में कोविड-19 लॉकडाउन और प्रतिबंधों की एक सीरीज के बाद दुनिया अब सामान्य हो गई है। वैसे तो सिंगल और मल्टीपल ट्रेवल्स के लिए अलग-अलग प्लान्स हैं, उन लोगों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई बहु-सदस्यीय (मल्टी-मेंबर्स) प्लान्स भी हैं जो अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, बहु-सदस्यीय यात्रा बीमा, जिसे अक्सर पारिवारिक यात्रा बीमा भी कहा जाता है, एक ऐसी पॉलिसी है जो पूरे परिवार को ट्रेवल के दौरान कवर करती है। फिर चाहे वे विदेशी यात्रा पर हों या घरेलू। ऐसी पॉलिसियां छोटे बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग नागरिकों वाले परिवार को कवर करने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं। जब आप अपने परिवार के साथ यात्रा करते हैं तो इस योजना को खरीदना बेहतर होगा। यात्रा के दौरान पैदा होने वाली कोई भी मेडिकल इमरजेंसी यात्रा बीमा पॉलिसी से कवर की जाती है। इसमें परिवार के सदस्यों को कोई बीमारी या कोई दुर्घटना भी शामिल है। अधिकांश यात्रा बीमा योजनाएँ दुर्घटना और बीमारी कवर को अस्पताल में भर्ती होने की तारीख से 30-60 दिनों तक के लिए बढ़ा देती हैं, जब यह यात्रा के दौरान शुरू होती है। परिवार के साथ यात्रा करना हमेशा कुछ अनिश्चितताओं भरा रहता है। चिकित्सकीय आपात स्थिति के कारण यात्रा को रद्द या छोटा करना पड़ सकता है। उड़ान में देरी के कारण आपको होटल में ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ सकती है क्योंकि आप अपने परिवार के साथ हवाई अड्डे पर रात नहीं बिताना चाहेंगे। ऐसी घटनाओं के कारण पैदा होने वाली लागत एक पारिवारिक यात्रा बीमा पॉलिसी द्वारा कवर की जाती है। पारिवारिक यात्रा बीमा पॉलिसी आपको चेक-इन किए गए सामान के नुकसान से बचाती है। इसलिए यदि आप अपने गंतव्य पर पहुँचते हैं और आपका सामान गुम हो जाता है, तो आपको नए कपड़े और पर्सनल केयर की वस्तुएँ खरीदनी होंगी जो शायद खो गई हों। ऐसे खर्चों को कवर करने के लिए बीमा पॉलिसी आपको एकमुश्त राशि का भुगतान करेगी। यदि सामान किसी कारण से लेट हो जाता है, तो आप उसके लिए भी भुगतान किया जाएगा। इंडिविजुअल ट्रेवल इंश्योरेंस की तरह कई बीमाकर्ता मल्टी-ट्रिप या सिंगल-ट्रिप परिवार यात्रा बीमा का विकल्प पेश करते हैं। इसलिए, जो परिवार साल में कई बार यात्रा करना पसंद करते हैं, उन्हें हर बार पॉलिसी खरीदने की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। मल्टी ट्रिप बीमा न केवल सुविधाजनक होता है, बल्कि यह हर यात्रा के लिए पॉलिसी खरीदने की तुलना में अधिक किफायती भी होता है। इसके अलावा, जैसा कि पहले ही समझाया जा चुका है, एक मल्टी-मेंबर पॉलिसी हमेशा परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए एक इंडिविजुअल पॉलिसी खरीदने की तुलना में अधिक किफायती होगी।
Multi-Member Travel Insurance : लगभग दो साल की महामारी के कारण प्रतिबंधों और लाखों कैंसल यात्राओं के बाद, दुनिया भर में कई परिवार आखिरकार अपनी रुके हुए ट्रेवल प्लान्स को पूरा कर रहे हैं। ट्रेवल की मांग में जोरदार वृद्धि भी हुई है, जैसा कि खचाखच भरी एयरलाइनों और होटलों से पता चलता है। वास्तव में कोविड-उन्नीस लॉकडाउन और प्रतिबंधों की एक सीरीज के बाद दुनिया अब सामान्य हो गई है। वैसे तो सिंगल और मल्टीपल ट्रेवल्स के लिए अलग-अलग प्लान्स हैं, उन लोगों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई बहु-सदस्यीय प्लान्स भी हैं जो अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, बहु-सदस्यीय यात्रा बीमा, जिसे अक्सर पारिवारिक यात्रा बीमा भी कहा जाता है, एक ऐसी पॉलिसी है जो पूरे परिवार को ट्रेवल के दौरान कवर करती है। फिर चाहे वे विदेशी यात्रा पर हों या घरेलू। ऐसी पॉलिसियां छोटे बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग नागरिकों वाले परिवार को कवर करने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं। जब आप अपने परिवार के साथ यात्रा करते हैं तो इस योजना को खरीदना बेहतर होगा। यात्रा के दौरान पैदा होने वाली कोई भी मेडिकल इमरजेंसी यात्रा बीमा पॉलिसी से कवर की जाती है। इसमें परिवार के सदस्यों को कोई बीमारी या कोई दुर्घटना भी शामिल है। अधिकांश यात्रा बीमा योजनाएँ दुर्घटना और बीमारी कवर को अस्पताल में भर्ती होने की तारीख से तीस-साठ दिनों तक के लिए बढ़ा देती हैं, जब यह यात्रा के दौरान शुरू होती है। परिवार के साथ यात्रा करना हमेशा कुछ अनिश्चितताओं भरा रहता है। चिकित्सकीय आपात स्थिति के कारण यात्रा को रद्द या छोटा करना पड़ सकता है। उड़ान में देरी के कारण आपको होटल में ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ सकती है क्योंकि आप अपने परिवार के साथ हवाई अड्डे पर रात नहीं बिताना चाहेंगे। ऐसी घटनाओं के कारण पैदा होने वाली लागत एक पारिवारिक यात्रा बीमा पॉलिसी द्वारा कवर की जाती है। पारिवारिक यात्रा बीमा पॉलिसी आपको चेक-इन किए गए सामान के नुकसान से बचाती है। इसलिए यदि आप अपने गंतव्य पर पहुँचते हैं और आपका सामान गुम हो जाता है, तो आपको नए कपड़े और पर्सनल केयर की वस्तुएँ खरीदनी होंगी जो शायद खो गई हों। ऐसे खर्चों को कवर करने के लिए बीमा पॉलिसी आपको एकमुश्त राशि का भुगतान करेगी। यदि सामान किसी कारण से लेट हो जाता है, तो आप उसके लिए भी भुगतान किया जाएगा। इंडिविजुअल ट्रेवल इंश्योरेंस की तरह कई बीमाकर्ता मल्टी-ट्रिप या सिंगल-ट्रिप परिवार यात्रा बीमा का विकल्प पेश करते हैं। इसलिए, जो परिवार साल में कई बार यात्रा करना पसंद करते हैं, उन्हें हर बार पॉलिसी खरीदने की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। मल्टी ट्रिप बीमा न केवल सुविधाजनक होता है, बल्कि यह हर यात्रा के लिए पॉलिसी खरीदने की तुलना में अधिक किफायती भी होता है। इसके अलावा, जैसा कि पहले ही समझाया जा चुका है, एक मल्टी-मेंबर पॉलिसी हमेशा परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए एक इंडिविजुअल पॉलिसी खरीदने की तुलना में अधिक किफायती होगी।
स्थानीय चस्मा व्यवसायी अरुण टंडन कहते हैं कि सर्वाधिक सस्ते मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकें -ग्रंथ प्रकाशित कर गीताप्रेस ने अप्रत्यक्षरूप से बाजार में धार्मिक पुस्तकों की मनमानी मूल्यवृद्धि पर भी नियंत्रण लगा रखा है। दूसरे प्रकाशक गीताप्रेस से प्रकाशित किताबों के ज्यादा दाम नहीं रख पाते। सांस्कृतिक पत्रकारिता के पुरोधा हनुमान प्रसाद पोद्दार का विश्व में सनातन धर्म के मूल्यों-सिद्धांतों की अलख जगाने में अप्रतिम योगदान है। राष्ट्रीय धरोहर बन चुके इस संस्थान ने इस वर्ष भी किताबों की रिकार्ड बिक्री की है। न गला काट बाजारू प्रतिस्पर्धा की चुनौती, न मंदी की चिंता। बीते 31 मार्च तक यह संस्थान 53 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकें व ग्रंथ बेच चुका है। इनमें से लगभग ढाई करोड़ किताबें पिछले एक वर्ष में बिकीं। इनमें श्रीमद्भागवतगीता, श्रीरामचरितमानस, तुलसी साहित्य, पुराण, उपनिषद ,महाभारत आदि ग्रंथ, स्वामी रामसुख दासजी का साहित्य , महिलाओं एवं बालकोपयोगी, भक्तचरित, भजनमाला आदि हैं। न्यासी बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य के अनुसार संस्थान ने इस साल करीब 45 करोड़ रुपये की बिक्री की है। इनमें लगभग 41 करोड़ की पुस्तकें और साढ़े तीन-चार करोड़ की कल्याण आदि पत्र-पत्रिकाएं हैं। गीता प्रेस की पचास-साठ हजार पुस्तकें रोजाना बिकती हैं। वह कहते हैं - मांग इतनी ज्यादा है कि वह पूरी नहीं हो पाती। वेदों का प्रकाशन हमने नहीं किया। अब भी इसके लिए हमारी क्षमता नहीं है। गीता -मानस ही मांग के अनुरूप नहीं दे पा रहे हैं। आजकल जब पढऩे का चलन कम होता जा रहा है, क्या इसका असर गीता प्रेस पर नहीं पड़ रहा? इस सवाल पर संस्थान के प्रबंधक लाल मणि तिवारी कहते हैं, नहीं, पहले की अपेक्षा मांग और बिक्री बढ़ती जा रही है। सर्वाधिक मांग रामचरित मानस की और इसके बाद गीता की होती है। मांग के अनुरूप हम नहीं दे पा रहे, इसलिए कभी कभी तो प्रमुख पुस्तकें भी अनुपलब्ध हो जाती हैं। किसी पुस्तक को एकदम से न छापने का निर्णय नहीं लेते। ऐसा नहीं कि कम बिकने वाली पुस्तक को न छापें। यह जरूर है कि अधिक बिकने वाली को अधिक और कम बिकने वाली पुस्तकों को कम मात्रा में छापा जाता है। श्री तिवारी बताते हैं कि अधिक से अधिक दूसरी भारतीय भाषाओं में गीता प्रेस की पुस्तकें, खास कर आर्ष ग्रंथों को, सस्ते मूल्य पर उपलब्ध कराने की योजना है। अभी वाल्मीकि रामायण तमिल में पांच खंडों में छापी है। तेलगू में शिव पुराण शीघ्र छापने जा रहे हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की पुस्तकें भी, जो गीता प्रेस में नहीं हैं, प्रकाशित कर रहे हैं। बांग्ला में कृत्तिवासी रामायण और उडिय़ा में जगन्नाथी भागवत छापा है। अपनी शाखाओं और रेलवे के बुक स्टालों के जरिए गीता प्रेस की पुस्तकें बिकती हैं। इसके अलावा लगभग ढाई हजार पुस्तक विक्रेता भी हम से किताबें लेते हैं। प्रेस की कोई निजी एजेंसी वगैरह नहीं है। एक खास बात और। गीता प्रेस में विदेशी मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता। सभी देशी मशीनें लगी हैं और उन्हीं पर सारा आधुनिकीकरण होता है। जीव हिंसा से जुड़ी चीजों के उपयोग से भी बचता है गीता प्रेस। गीता प्रेस में कार्यरत लगभग दो सौ कर्मचारी सादगी, समर्पण और सेवाभाव की मिसाल हैं। औद्योगिक अशांति से दो-चार होने वाले प्रतिष्ठान यहां के कार्य-माहौल से सीख ले सकते हैं। सब चुपचाप अपने काम में सन्नद्ध दिखते हैं। इनकी शुरुआत सुबह सामूहिक प्रार्थना से होती है। कल्याण में अब कैसी सामग्री रहती है, क्या बदलाव आया है ? जवाब में ऋषिकेश से आए ट्स्ट के जनरल सेकेटी् अपना नाम न बताने के अनुरोध के साथ कहते हैं - हम एक एवरेज स्टैण्डर्ड लेकर चलते हैं। हम आर्थोडाक्स रहना चाहते हैं। कल्याण हो, या गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकें, हम समय के साथ उतना ही न्यूनतम परिवर्तन स्वीकार करते हैं जो प्रकाशन को सुंदर बनाने में सहायक हो। वैसे, परिवर्तन का बहुत दबाव रहता है। यह लोगों की संस्था है। हमने मूल बात को मूल रूप में कहने का प्रयास किया है,। इधर उधर मुडे नहीं । इसी लिए जनता ने हमें स्वीकार किया है। गीता प्रेस अच्छे कागज पर त्रुटिहीन छपाई और प्रामाणिक सामग्री के साथ सर्वाधिक सस्ती दर पर पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है। एक रुपये में हनुमान चालीसा, शिव चालीसा और दुर्गा चालीसा तो तीन रुपये में गीता। सर्वाधिक साढ़े चार सौ रुपये कीमत की एक रामायण है। इतनी सस्ती पुस्तकें कैसे दे पाते हैं? जवाब में ट्रस्ट बोर्ड के जनरल सेकेट्री कहते हैं, हम मुनाफा किसी पुस्तक में नहीं लेते। यह एक विशुद्ध आध्यात्मिक संस्था है। रामायण-गीता सस्ती हों तो गरीब भी घर में रख लेगा। ट्रस्ट चेष्टा करता है कि अपने अन्य संसाधनों से जो पैसा जुटा सके, वह सारा पैसा गीता प्रेस को दे दे। नीतिगत रूप से जिस प्रकाशन से लोगों का सर्वाधिक लाभ हो, उसे हम न्यूनतम या लागत मूल्य पर देने का प्रयास करते हैं। संस्थान न कोई विज्ञापन लेता है और न कोई चंदा या दान-अनुदान स्वीकार करता है। गीता प्रेस अपनी पुस्तकों और कल्याण आदि पत्र-पत्रिकाओं में कोई विज्ञापन क्यों नहीं लेता? इस पर ट्रस्ट बोर्ड के जनरल सेकेट्री कहते हैं, जिससे हमारी संस्था की स्वतंत्रता, प्रकाशन की स्वतंत्रता प्रभावित हो, वह लाभ हम नहीं लेना चाहते। गांधी जी का कहना था कि दाता अपनी बात मनवाए बिना मानेगा नहीं। बहुत दबाव रहता है, यह छापने , वह छापने का। संस्था कोई लाभ लेने लगती तो गीता -रामायण में ही इतने क्षेपक जुड़ जाते कि मूल रूप में चीजें नहीं मिल पातीं। ऐसे में भारतीय संस्कृति की रक्षा नहीं हो सकती। बताते हैं कि कल्याण के प्रथम अंक में महात्मा गांधी का लेख छपा था। कल्याण की प्रति लेकर संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार और सेठ जमुना लाल बजाज आदि गांधी जी के पास गए थे तो उन्होंने विज्ञापन न छापने की सलाह दी थी। गांधी जी की ही सलाह पर कल्याण में किसी पुस्तक की समीक्षा भी नहीं प्रकाशित की जाती। गीता प्रेस की स्थापना मई 1923 में गीता उपदेशक सेठ जय दयाल गोयंदका ने की थी। हनुमान प्रसाद पोद्दार 'भाई जी' इसकी मासिक पत्रिकाओं कल्याण और कल्याण कल्पतरु के संस्थापक संपादक बने थे। उद्देश्य था गीता-रामायण आदि के प्रकाशन के जरिए सनातन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करना। शुद्ध पाठ और सही अर्थ देने के संकल्प के साथ गोरखपुर में दस रुपये किराये के छोटे से मकान में शुरू हुआ यह प्रेस अपनी सुदीर्घ यात्रा में हिंदू धर्म और संस्कृति का सबसे बड़ा और निर्विवाद संवाहक-संरक्षक बन चुका है। संस्थान ने वर्ष 1927 में कल्याण और अंग्रेजी में कल्याण कल्पतरु का प्रकाशन शुरू किया था। 1600 की प्रसार संख्या से शुरू हुए कल्याण मासिक की अब करीब सवा दो लाख प्रतियां छपती हैं। गीता प्रेस गोविंद भवन कार्यालय, कोलकाता की एक इकाई है। गीता सूती वस्त्र विभाग और आयुर्वेदिक दवाएं आदि इसकी अन्य इकाइयां हैं। मांग के अनुरूप क्यों नहीं पुस्तकें छाप पा रहे और प्रेस की क्षमता विस्तार क्यों नहीं हो रहा? इस सवाल के जवाब में प्रबंधक लाल मणि तिवारीकहते हैं - संसाधनों की कमी है, न। जितना बढ़ाते जा रहे हैं, उतनी मांग बढ़ती जा रही है। सीमित संसाधनों के कारण जितनी आवश्यकता है, नहीं दे पा रहे। क्या ट्रस्टियों के कम रुचि लेने के कारण ऐसा है? जवाब में श्री तिवारी कहते हैं कि ट्रस्टियों के अधिक इन्टे्रस्ट के कारण ही इतना अच्छा चल रहा है। कल्याण के संपादक राधेश्याम खेमका हों, ट्रस्टी बैज नाथ अग्रवाल हों या जनरल सेकेट्री, किसी का अपना व्यवसाय नहीं है। सभी लोग सेवा - निष्ठा भाव से लगे हैं और पूरी तरह से केवल गीता प्रेस के उन्नयन को समर्पित रहते हैं। हनुमान प्रसाद पोद्दार प्रकाशन सामग्री का चयन और संपादन स्वयं करते थे। वह स्तरीय, प्रेरक और प्रामाणिक सामग्री ही देने के पक्षधर थे। वह संपादन और प्रूफ रीडिंग में 17-18 घंटे तक लगे रहते। वह देश भर के संत महात्माओं और लेखकों को पत्र लिख कर और व्यक्तिगत रूप से उनसे मिल कर धर्म -अध्यात्म पर स्तरीय सामग्री देने का आग्रह करते। उन्होंने 'कल्याण' के लिए श्रीकृष्ण, श्रीराम, शिव, गणेश, दुर्गा, हनुमान, तथा विभिन्न देवी देवताओं के शास्त्रीय आधार पर रंगीन और आकर्षक चित्र बनवाए और कल्याण पत्रिका में देना शुरू किया। इन दुर्लभ चित्रों से कल्याण की मांग तेजी से बढ़ी। भाईजी गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकें और पत्र पत्रिकाएं समय समय पर विदेशों में रहने वाले हिंदुओ, वहां के मंदिरों और पुस्तकालयों को भी भेजते रहते थे। वह प्रवासी प्रवासी भारतीयों में हिंदी, और भारत के प्रति आस्था बनाए रखने के लिए इसे जरूरी मानते थे।
स्थानीय चस्मा व्यवसायी अरुण टंडन कहते हैं कि सर्वाधिक सस्ते मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकें -ग्रंथ प्रकाशित कर गीताप्रेस ने अप्रत्यक्षरूप से बाजार में धार्मिक पुस्तकों की मनमानी मूल्यवृद्धि पर भी नियंत्रण लगा रखा है। दूसरे प्रकाशक गीताप्रेस से प्रकाशित किताबों के ज्यादा दाम नहीं रख पाते। सांस्कृतिक पत्रकारिता के पुरोधा हनुमान प्रसाद पोद्दार का विश्व में सनातन धर्म के मूल्यों-सिद्धांतों की अलख जगाने में अप्रतिम योगदान है। राष्ट्रीय धरोहर बन चुके इस संस्थान ने इस वर्ष भी किताबों की रिकार्ड बिक्री की है। न गला काट बाजारू प्रतिस्पर्धा की चुनौती, न मंदी की चिंता। बीते इकतीस मार्च तक यह संस्थान तिरेपन करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकें व ग्रंथ बेच चुका है। इनमें से लगभग ढाई करोड़ किताबें पिछले एक वर्ष में बिकीं। इनमें श्रीमद्भागवतगीता, श्रीरामचरितमानस, तुलसी साहित्य, पुराण, उपनिषद ,महाभारत आदि ग्रंथ, स्वामी रामसुख दासजी का साहित्य , महिलाओं एवं बालकोपयोगी, भक्तचरित, भजनमाला आदि हैं। न्यासी बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य के अनुसार संस्थान ने इस साल करीब पैंतालीस करोड़ रुपये की बिक्री की है। इनमें लगभग इकतालीस करोड़ की पुस्तकें और साढ़े तीन-चार करोड़ की कल्याण आदि पत्र-पत्रिकाएं हैं। गीता प्रेस की पचास-साठ हजार पुस्तकें रोजाना बिकती हैं। वह कहते हैं - मांग इतनी ज्यादा है कि वह पूरी नहीं हो पाती। वेदों का प्रकाशन हमने नहीं किया। अब भी इसके लिए हमारी क्षमता नहीं है। गीता -मानस ही मांग के अनुरूप नहीं दे पा रहे हैं। आजकल जब पढऩे का चलन कम होता जा रहा है, क्या इसका असर गीता प्रेस पर नहीं पड़ रहा? इस सवाल पर संस्थान के प्रबंधक लाल मणि तिवारी कहते हैं, नहीं, पहले की अपेक्षा मांग और बिक्री बढ़ती जा रही है। सर्वाधिक मांग रामचरित मानस की और इसके बाद गीता की होती है। मांग के अनुरूप हम नहीं दे पा रहे, इसलिए कभी कभी तो प्रमुख पुस्तकें भी अनुपलब्ध हो जाती हैं। किसी पुस्तक को एकदम से न छापने का निर्णय नहीं लेते। ऐसा नहीं कि कम बिकने वाली पुस्तक को न छापें। यह जरूर है कि अधिक बिकने वाली को अधिक और कम बिकने वाली पुस्तकों को कम मात्रा में छापा जाता है। श्री तिवारी बताते हैं कि अधिक से अधिक दूसरी भारतीय भाषाओं में गीता प्रेस की पुस्तकें, खास कर आर्ष ग्रंथों को, सस्ते मूल्य पर उपलब्ध कराने की योजना है। अभी वाल्मीकि रामायण तमिल में पांच खंडों में छापी है। तेलगू में शिव पुराण शीघ्र छापने जा रहे हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की पुस्तकें भी, जो गीता प्रेस में नहीं हैं, प्रकाशित कर रहे हैं। बांग्ला में कृत्तिवासी रामायण और उडिय़ा में जगन्नाथी भागवत छापा है। अपनी शाखाओं और रेलवे के बुक स्टालों के जरिए गीता प्रेस की पुस्तकें बिकती हैं। इसके अलावा लगभग ढाई हजार पुस्तक विक्रेता भी हम से किताबें लेते हैं। प्रेस की कोई निजी एजेंसी वगैरह नहीं है। एक खास बात और। गीता प्रेस में विदेशी मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता। सभी देशी मशीनें लगी हैं और उन्हीं पर सारा आधुनिकीकरण होता है। जीव हिंसा से जुड़ी चीजों के उपयोग से भी बचता है गीता प्रेस। गीता प्रेस में कार्यरत लगभग दो सौ कर्मचारी सादगी, समर्पण और सेवाभाव की मिसाल हैं। औद्योगिक अशांति से दो-चार होने वाले प्रतिष्ठान यहां के कार्य-माहौल से सीख ले सकते हैं। सब चुपचाप अपने काम में सन्नद्ध दिखते हैं। इनकी शुरुआत सुबह सामूहिक प्रार्थना से होती है। कल्याण में अब कैसी सामग्री रहती है, क्या बदलाव आया है ? जवाब में ऋषिकेश से आए ट्स्ट के जनरल सेकेटी् अपना नाम न बताने के अनुरोध के साथ कहते हैं - हम एक एवरेज स्टैण्डर्ड लेकर चलते हैं। हम आर्थोडाक्स रहना चाहते हैं। कल्याण हो, या गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकें, हम समय के साथ उतना ही न्यूनतम परिवर्तन स्वीकार करते हैं जो प्रकाशन को सुंदर बनाने में सहायक हो। वैसे, परिवर्तन का बहुत दबाव रहता है। यह लोगों की संस्था है। हमने मूल बात को मूल रूप में कहने का प्रयास किया है,। इधर उधर मुडे नहीं । इसी लिए जनता ने हमें स्वीकार किया है। गीता प्रेस अच्छे कागज पर त्रुटिहीन छपाई और प्रामाणिक सामग्री के साथ सर्वाधिक सस्ती दर पर पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है। एक रुपये में हनुमान चालीसा, शिव चालीसा और दुर्गा चालीसा तो तीन रुपये में गीता। सर्वाधिक साढ़े चार सौ रुपये कीमत की एक रामायण है। इतनी सस्ती पुस्तकें कैसे दे पाते हैं? जवाब में ट्रस्ट बोर्ड के जनरल सेकेट्री कहते हैं, हम मुनाफा किसी पुस्तक में नहीं लेते। यह एक विशुद्ध आध्यात्मिक संस्था है। रामायण-गीता सस्ती हों तो गरीब भी घर में रख लेगा। ट्रस्ट चेष्टा करता है कि अपने अन्य संसाधनों से जो पैसा जुटा सके, वह सारा पैसा गीता प्रेस को दे दे। नीतिगत रूप से जिस प्रकाशन से लोगों का सर्वाधिक लाभ हो, उसे हम न्यूनतम या लागत मूल्य पर देने का प्रयास करते हैं। संस्थान न कोई विज्ञापन लेता है और न कोई चंदा या दान-अनुदान स्वीकार करता है। गीता प्रेस अपनी पुस्तकों और कल्याण आदि पत्र-पत्रिकाओं में कोई विज्ञापन क्यों नहीं लेता? इस पर ट्रस्ट बोर्ड के जनरल सेकेट्री कहते हैं, जिससे हमारी संस्था की स्वतंत्रता, प्रकाशन की स्वतंत्रता प्रभावित हो, वह लाभ हम नहीं लेना चाहते। गांधी जी का कहना था कि दाता अपनी बात मनवाए बिना मानेगा नहीं। बहुत दबाव रहता है, यह छापने , वह छापने का। संस्था कोई लाभ लेने लगती तो गीता -रामायण में ही इतने क्षेपक जुड़ जाते कि मूल रूप में चीजें नहीं मिल पातीं। ऐसे में भारतीय संस्कृति की रक्षा नहीं हो सकती। बताते हैं कि कल्याण के प्रथम अंक में महात्मा गांधी का लेख छपा था। कल्याण की प्रति लेकर संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार और सेठ जमुना लाल बजाज आदि गांधी जी के पास गए थे तो उन्होंने विज्ञापन न छापने की सलाह दी थी। गांधी जी की ही सलाह पर कल्याण में किसी पुस्तक की समीक्षा भी नहीं प्रकाशित की जाती। गीता प्रेस की स्थापना मई एक हज़ार नौ सौ तेईस में गीता उपदेशक सेठ जय दयाल गोयंदका ने की थी। हनुमान प्रसाद पोद्दार 'भाई जी' इसकी मासिक पत्रिकाओं कल्याण और कल्याण कल्पतरु के संस्थापक संपादक बने थे। उद्देश्य था गीता-रामायण आदि के प्रकाशन के जरिए सनातन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करना। शुद्ध पाठ और सही अर्थ देने के संकल्प के साथ गोरखपुर में दस रुपये किराये के छोटे से मकान में शुरू हुआ यह प्रेस अपनी सुदीर्घ यात्रा में हिंदू धर्म और संस्कृति का सबसे बड़ा और निर्विवाद संवाहक-संरक्षक बन चुका है। संस्थान ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में कल्याण और अंग्रेजी में कल्याण कल्पतरु का प्रकाशन शुरू किया था। एक हज़ार छः सौ की प्रसार संख्या से शुरू हुए कल्याण मासिक की अब करीब सवा दो लाख प्रतियां छपती हैं। गीता प्रेस गोविंद भवन कार्यालय, कोलकाता की एक इकाई है। गीता सूती वस्त्र विभाग और आयुर्वेदिक दवाएं आदि इसकी अन्य इकाइयां हैं। मांग के अनुरूप क्यों नहीं पुस्तकें छाप पा रहे और प्रेस की क्षमता विस्तार क्यों नहीं हो रहा? इस सवाल के जवाब में प्रबंधक लाल मणि तिवारीकहते हैं - संसाधनों की कमी है, न। जितना बढ़ाते जा रहे हैं, उतनी मांग बढ़ती जा रही है। सीमित संसाधनों के कारण जितनी आवश्यकता है, नहीं दे पा रहे। क्या ट्रस्टियों के कम रुचि लेने के कारण ऐसा है? जवाब में श्री तिवारी कहते हैं कि ट्रस्टियों के अधिक इन्टे्रस्ट के कारण ही इतना अच्छा चल रहा है। कल्याण के संपादक राधेश्याम खेमका हों, ट्रस्टी बैज नाथ अग्रवाल हों या जनरल सेकेट्री, किसी का अपना व्यवसाय नहीं है। सभी लोग सेवा - निष्ठा भाव से लगे हैं और पूरी तरह से केवल गीता प्रेस के उन्नयन को समर्पित रहते हैं। हनुमान प्रसाद पोद्दार प्रकाशन सामग्री का चयन और संपादन स्वयं करते थे। वह स्तरीय, प्रेरक और प्रामाणिक सामग्री ही देने के पक्षधर थे। वह संपादन और प्रूफ रीडिंग में सत्रह-अट्ठारह घंटाटे तक लगे रहते। वह देश भर के संत महात्माओं और लेखकों को पत्र लिख कर और व्यक्तिगत रूप से उनसे मिल कर धर्म -अध्यात्म पर स्तरीय सामग्री देने का आग्रह करते। उन्होंने 'कल्याण' के लिए श्रीकृष्ण, श्रीराम, शिव, गणेश, दुर्गा, हनुमान, तथा विभिन्न देवी देवताओं के शास्त्रीय आधार पर रंगीन और आकर्षक चित्र बनवाए और कल्याण पत्रिका में देना शुरू किया। इन दुर्लभ चित्रों से कल्याण की मांग तेजी से बढ़ी। भाईजी गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकें और पत्र पत्रिकाएं समय समय पर विदेशों में रहने वाले हिंदुओ, वहां के मंदिरों और पुस्तकालयों को भी भेजते रहते थे। वह प्रवासी प्रवासी भारतीयों में हिंदी, और भारत के प्रति आस्था बनाए रखने के लिए इसे जरूरी मानते थे।
Ramiz Raja Sacked: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (Pakistan Cricket Board) के अध्यक्ष रमीज राजा को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है. रमीज राजा लगातार अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे थे, इस बीच उनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है. रमीज राजा की जगह अब नजम सेठी को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का नया अध्यक्ष बनाया गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है. (SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं. )
Ramiz Raja Sacked: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज राजा को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है. रमीज राजा लगातार अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे थे, इस बीच उनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है. रमीज राजा की जगह अब नजम सेठी को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का नया अध्यक्ष बनाया गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है.
OnePlus Nord CE 2 5G को भारत में 17 फरवरी को लॉन्च किया जाएगा। इसकी घोषणा कंपनी ने गुरुवार को की। कंपनी ने इस अपकमिंग मिड-रेंज स्मार्टफोन का टीजर भी जारी किया है। जहां फोन का डिजाइन देखा जा सकता है। इस अपकमिंग फोन की कुछ जानकारियां पहले भी लीक्स के जरिए सामने आ चुकी हैं। कंपनी ने ट्विटर पर ये जानकारी दी है कि OnePlus Nord CE 2 5G को भारत में 17 फरवरी को लॉन्च किया जाएगा। साथ ही कंपनी ने एक अपकमिंग फोन के लिए एक शॉर्ट वीडियो भी पोस्ट किया है। इसमें फोन का डिजाइन देखा जा सकता है। फोन का रियर कैमरा मॉड्यूल वैसा ही है जैसा कि पहले लीक्स में देखा गया था। टीजर में देखा जा सकता है कि पावर बटन फोन के राइट साइड में है और वॉल्यूम रॉकर लेफ्ट साइड में। टीजर वीडियो से ऐसा भी लग रहा है कि फोन में शायद अलर्ट स्लाइडर नहीं होगा। कंपनी ने Amazon पर एक डेडिटकेटेड पेज भी इस अपकमिंग फोन के लिए बनाया है। यहां बताया गया है कि फोन 65W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा। पुराने लीक्स से ये पता चला था कि OnePlus Nord CE 2 5G में 90Hz रिफ्रेश रेट के साथ 6. 4-इंच फुल-HD+ AMOLED डिस्प्ले, और MediaTek Dimensity 900 प्रोसेसर मिलेगा। वहीं, इस फोन की कुछ पुरानी तस्वीरें भी लीक हुईं थीं। इनसे पता चला था कि फोन के रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा। वहीं, मिली जानकारी के मुताबिक, इसके रियर में 64MP प्राइमरी कैमरा, 8MP सेकेंडरी कैमरा और 2MP टर्शरी कैमरा होगा। साथ ही सेल्फी के लिए इसके फ्रंट में 16MP का कैमरा होगा।
OnePlus Nord CE दो पाँचG को भारत में सत्रह फरवरी को लॉन्च किया जाएगा। इसकी घोषणा कंपनी ने गुरुवार को की। कंपनी ने इस अपकमिंग मिड-रेंज स्मार्टफोन का टीजर भी जारी किया है। जहां फोन का डिजाइन देखा जा सकता है। इस अपकमिंग फोन की कुछ जानकारियां पहले भी लीक्स के जरिए सामने आ चुकी हैं। कंपनी ने ट्विटर पर ये जानकारी दी है कि OnePlus Nord CE दो पाँचG को भारत में सत्रह फरवरी को लॉन्च किया जाएगा। साथ ही कंपनी ने एक अपकमिंग फोन के लिए एक शॉर्ट वीडियो भी पोस्ट किया है। इसमें फोन का डिजाइन देखा जा सकता है। फोन का रियर कैमरा मॉड्यूल वैसा ही है जैसा कि पहले लीक्स में देखा गया था। टीजर में देखा जा सकता है कि पावर बटन फोन के राइट साइड में है और वॉल्यूम रॉकर लेफ्ट साइड में। टीजर वीडियो से ऐसा भी लग रहा है कि फोन में शायद अलर्ट स्लाइडर नहीं होगा। कंपनी ने Amazon पर एक डेडिटकेटेड पेज भी इस अपकमिंग फोन के लिए बनाया है। यहां बताया गया है कि फोन पैंसठ वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा। पुराने लीक्स से ये पता चला था कि OnePlus Nord CE दो पाँचG में नब्बे हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ छः. चार-इंच फुल-HD+ AMOLED डिस्प्ले, और MediaTek Dimensity नौ सौ प्रोसेसर मिलेगा। वहीं, इस फोन की कुछ पुरानी तस्वीरें भी लीक हुईं थीं। इनसे पता चला था कि फोन के रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा। वहीं, मिली जानकारी के मुताबिक, इसके रियर में चौंसठMP प्राइमरी कैमरा, आठMP सेकेंडरी कैमरा और दोMP टर्शरी कैमरा होगा। साथ ही सेल्फी के लिए इसके फ्रंट में सोलहMP का कैमरा होगा।
सरकार ने चालू वर्ष में नाबालिगों द्वारा आत्महत्या के आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। मंत्री ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने 'मनोदर्पण' नाम से एक सक्रिय पहल की है, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के लिए कोविड के प्रकोप और उसके बाद के दौरान मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए गतिविधियों की एक विस्तृत सीरीज शामिल है। तमिलनाडु से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद टी. आर. परिवेंद्र ने अपने सवाल में सरकार से पूछा था कि क्या पिछले तीन वर्षों में बाल आत्महत्या के मामलों में कोई वृद्धि हुई है। मंत्री मिश्रा ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर 'मनोदर्पण' के लिए एक वेबपेज बनाया गया है, जिसमें मनोसामाजिक समर्थन के लिए परामर्श, व्यावहारिक सुझाव, पोस्टर, वीडियो, क्या करें और क्या न करें, एफएक्यू और ऑनलाइन क्वेरी सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने देश भर के स्कूली छात्रों को उनकी चिंताओं को साझा करने में मदद करने के लिए अप्रैल, 2020 में 'स्कूली बच्चों के लिए एनसीईआरटी परामर्श सेवाएं' शुरू की हैं। सरकार ने कहा कि यह सेवा देश के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 270 परामर्शदाताओं द्वारा निःशुल्क प्रदान की जाती है। मंत्री ने आगे कहा कि आयुष्मान भारत-एचडब्ल्यूसी योजना के तहत व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के तहत सेवाओं के पैकेज में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी जोड़ा गया है। आयुष्मान भारत के दायरे में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में मानसिक, न्यूरोलॉजिकल और पदार्थ उपयोग विकारों पर परिचालन दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। मिश्रा ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने निमहंस के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत निमहंस, बैंगलोर में बाल संरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक देखभाल के लिए एक राष्ट्रीय पहल और एकीकृत संसाधन केंद्र ने 'संवाद' की स्थापना की गई है।
सरकार ने चालू वर्ष में नाबालिगों द्वारा आत्महत्या के आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। मंत्री ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने 'मनोदर्पण' नाम से एक सक्रिय पहल की है, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के लिए कोविड के प्रकोप और उसके बाद के दौरान मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए गतिविधियों की एक विस्तृत सीरीज शामिल है। तमिलनाडु से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के सांसद टी. आर. परिवेंद्र ने अपने सवाल में सरकार से पूछा था कि क्या पिछले तीन वर्षों में बाल आत्महत्या के मामलों में कोई वृद्धि हुई है। मंत्री मिश्रा ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर 'मनोदर्पण' के लिए एक वेबपेज बनाया गया है, जिसमें मनोसामाजिक समर्थन के लिए परामर्श, व्यावहारिक सुझाव, पोस्टर, वीडियो, क्या करें और क्या न करें, एफएक्यू और ऑनलाइन क्वेरी सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने देश भर के स्कूली छात्रों को उनकी चिंताओं को साझा करने में मदद करने के लिए अप्रैल, दो हज़ार बीस में 'स्कूली बच्चों के लिए एनसीईआरटी परामर्श सेवाएं' शुरू की हैं। सरकार ने कहा कि यह सेवा देश के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग दो सौ सत्तर परामर्शदाताओं द्वारा निःशुल्क प्रदान की जाती है। मंत्री ने आगे कहा कि आयुष्मान भारत-एचडब्ल्यूसी योजना के तहत व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के तहत सेवाओं के पैकेज में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी जोड़ा गया है। आयुष्मान भारत के दायरे में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में मानसिक, न्यूरोलॉजिकल और पदार्थ उपयोग विकारों पर परिचालन दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। मिश्रा ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने निमहंस के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत निमहंस, बैंगलोर में बाल संरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक देखभाल के लिए एक राष्ट्रीय पहल और एकीकृत संसाधन केंद्र ने 'संवाद' की स्थापना की गई है।
(www. arya-tv. com) दिल्ली की तिहाड़ जेल में 2 मई को गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया के मर्डर का नया CCTV फुटेज सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि 9 पुलिसवालों के सामने ही कैदी ताजपुरिया पर नुकीले हथियार से हमला कर रहे हैं। शुरुआत में तो कुछ पुलिसकर्मियों ने कैदियों को रोका, लेकिन कुछ देर बाद पीछे हट गए। तिहाड़ के अफसरों ने बताया कि हत्या जितेंद्र गोगी गैंग के योगेश टुंडा, दीपक, राजेश और रियाज खान ने की। टिल्लू हाई सिक्योरिटी वार्ड में बंद था, जहां उस पर नुकीले हथियार से 100 से ज्यादा बार हमला किया गया। टिल्लू रोहिणी कोर्ट में 24 सितंबर 2021 को हुए शूटआउट मामले में आरोपी था। उसके गैंग के 2 लोगों ने जितेंद्र गोगी की कोर्ट में हत्या कर दी थी। वे वकील की पोशाक में कोर्ट आए थे। दोनों शूटर्स को पुलिस ने कोर्ट में ही मार गिराया था। 49 सेकेंड के वीडियो में देखा जा सकता है कि खून से लथपथ टिल्लू को पुलिसवाले घसीटकर बैरक से बाहर लाते हैं। दूसरी सेल के अंदर से दीपक तीतर कुछ कहता हुआ दिख रहा है। जैसे ही टिल्लू को पुलिसवाले बाहर लाते हैं, वैसे ही लाल रंग की पैंट पहने दीपक तीतर बाहर निकलकर टिल्लू को लात से मारने लगता है। इस दौरान एक पुलिसवाला उसे बचाने की कोशिश करता है, लेकिन तीतर खून से लथपथ पड़े टिल्लू को नुकीला हथियार मारने लगता है। ताजपुरिया की हत्या से जुड़ा 2 मिनट 50 सेकेंड का एक वीडियो गुरुवार को सामने आया था। ताजपुरिया अपनी बैरक के अंदर जाता है। तभी पहले से घात लगाए बैठे हमलावर उसके कमरे की ओर दौड़ते हैं। इन सबसे अनजान टिल्लू कुछ समझ पाता, इससे पहले ही उस पर नुकीले हथियार से हमले शुरू हो जाते हैं। वह दौड़कर एक हॉल में आता है, जहां उस पर 100 से ज्यादा बार हमला किया जाता है। जेल अधिकारी ने बताया कि योगेश टुंडा तिहाड़ में जेल नंबर 8 में बंद था। ये जेल फर्स्ट फ्लोर पर है। टिल्लू ताजपुरिया ग्राउंड फ्लोर पर जेल नंबर 9 में बंद था। गोगी गैंग के योगेश टुंडा और दूसरे मेंबर्स 2 मई की सुबह 6:15 बजे अपने वार्ड की सिक्योरिटी ग्रिल काटकर बाहर आए। इसके बाद बेडशीट का इस्तेमाल करते हुए ग्राउंड फ्लोर पर कूद गए। यहां पर टिल्लू को हाई-सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया था। गोगी गैंग के सदस्य टिल्लू के वार्ड में लगी ग्रिल को काटकर अंदर घुसे। गोगी गैंग के गुर्गों ने नुकीले हथियार से टिल्लू पर कई बार हमला किया। वह घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना में घायल एक अन्य रोहित का इलाज चल रहा है। फिलहाल वह खतरे से बाहर है। गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र था और श्रद्धानंद कॉलेज से पास आउट था। कॉलेज के दिनों में उसकी और जितेंद्र गोगी की दोस्ती मशहूर थी। दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव में सीधे कभी नहीं उतरे, पर दोनों अपने उम्मीदवार खड़े करते थे। टिल्लू ताजपुरिया 24 सितंबर 2021 को दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में हुए शूटआउट का मास्टरमाइंड था। कोर्ट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या के लिए टिल्लू ने ही दोनों शूटरों को ट्रेनिंग दिलाई थी। वकीलों जैसा दिखने, उनके जैसा प्रोफेशनल व्यवहार करने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। कोर्ट में हुए शूटऑउट के दौरान ही पुलिस की फायरिंग में दोनों शूटर भी मारे गए थे। इस मामले में पुलिस की तरफ से 111 पेज की चार्जशीट पेश की गई थी।
दिल्ली की तिहाड़ जेल में दो मई को गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया के मर्डर का नया CCTV फुटेज सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि नौ पुलिसवालों के सामने ही कैदी ताजपुरिया पर नुकीले हथियार से हमला कर रहे हैं। शुरुआत में तो कुछ पुलिसकर्मियों ने कैदियों को रोका, लेकिन कुछ देर बाद पीछे हट गए। तिहाड़ के अफसरों ने बताया कि हत्या जितेंद्र गोगी गैंग के योगेश टुंडा, दीपक, राजेश और रियाज खान ने की। टिल्लू हाई सिक्योरिटी वार्ड में बंद था, जहां उस पर नुकीले हथियार से एक सौ से ज्यादा बार हमला किया गया। टिल्लू रोहिणी कोर्ट में चौबीस सितंबर दो हज़ार इक्कीस को हुए शूटआउट मामले में आरोपी था। उसके गैंग के दो लोगों ने जितेंद्र गोगी की कोर्ट में हत्या कर दी थी। वे वकील की पोशाक में कोर्ट आए थे। दोनों शूटर्स को पुलिस ने कोर्ट में ही मार गिराया था। उनचास सेकेंड के वीडियो में देखा जा सकता है कि खून से लथपथ टिल्लू को पुलिसवाले घसीटकर बैरक से बाहर लाते हैं। दूसरी सेल के अंदर से दीपक तीतर कुछ कहता हुआ दिख रहा है। जैसे ही टिल्लू को पुलिसवाले बाहर लाते हैं, वैसे ही लाल रंग की पैंट पहने दीपक तीतर बाहर निकलकर टिल्लू को लात से मारने लगता है। इस दौरान एक पुलिसवाला उसे बचाने की कोशिश करता है, लेकिन तीतर खून से लथपथ पड़े टिल्लू को नुकीला हथियार मारने लगता है। ताजपुरिया की हत्या से जुड़ा दो मिनट पचास सेकेंड का एक वीडियो गुरुवार को सामने आया था। ताजपुरिया अपनी बैरक के अंदर जाता है। तभी पहले से घात लगाए बैठे हमलावर उसके कमरे की ओर दौड़ते हैं। इन सबसे अनजान टिल्लू कुछ समझ पाता, इससे पहले ही उस पर नुकीले हथियार से हमले शुरू हो जाते हैं। वह दौड़कर एक हॉल में आता है, जहां उस पर एक सौ से ज्यादा बार हमला किया जाता है। जेल अधिकारी ने बताया कि योगेश टुंडा तिहाड़ में जेल नंबर आठ में बंद था। ये जेल फर्स्ट फ्लोर पर है। टिल्लू ताजपुरिया ग्राउंड फ्लोर पर जेल नंबर नौ में बंद था। गोगी गैंग के योगेश टुंडा और दूसरे मेंबर्स दो मई की सुबह छः:पंद्रह बजे अपने वार्ड की सिक्योरिटी ग्रिल काटकर बाहर आए। इसके बाद बेडशीट का इस्तेमाल करते हुए ग्राउंड फ्लोर पर कूद गए। यहां पर टिल्लू को हाई-सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया था। गोगी गैंग के सदस्य टिल्लू के वार्ड में लगी ग्रिल को काटकर अंदर घुसे। गोगी गैंग के गुर्गों ने नुकीले हथियार से टिल्लू पर कई बार हमला किया। वह घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना में घायल एक अन्य रोहित का इलाज चल रहा है। फिलहाल वह खतरे से बाहर है। गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र था और श्रद्धानंद कॉलेज से पास आउट था। कॉलेज के दिनों में उसकी और जितेंद्र गोगी की दोस्ती मशहूर थी। दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव में सीधे कभी नहीं उतरे, पर दोनों अपने उम्मीदवार खड़े करते थे। टिल्लू ताजपुरिया चौबीस सितंबर दो हज़ार इक्कीस को दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में हुए शूटआउट का मास्टरमाइंड था। कोर्ट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या के लिए टिल्लू ने ही दोनों शूटरों को ट्रेनिंग दिलाई थी। वकीलों जैसा दिखने, उनके जैसा प्रोफेशनल व्यवहार करने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। कोर्ट में हुए शूटऑउट के दौरान ही पुलिस की फायरिंग में दोनों शूटर भी मारे गए थे। इस मामले में पुलिस की तरफ से एक सौ ग्यारह पेज की चार्जशीट पेश की गई थी।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपहरण और फिरौती के मामले एक बार फिर बढ़ने शुरू हो गए हैं। बागपत के बाद आप मेरठ में ट्रांसपोर्टर के बेटे के अपहरण का मामला सामने आया है। दिनदहाड़े बदमाशों ने ट्रांसपोर्टर के बेटे का अपहरण कर लिया और अब 50 लाख की रंगदारी की मांग की है । हालांकि पुलिस इस मामले में कई एंगल पर जांच कर रही है। मामला मेरठ के थाना नौचंदी क्षेत्र के शास्त्री नगर सेक्टर 12 का है । जहां ट्रांसपोर्ट व्यवसाय आसिफ का बेटा और बेटी आज घर में अकेले थे । बेटी कमरे में बैठकर अपनी ऑनलाइन क्लास कर रही थी आरोप है कि तभी बदमाश आए और आसिफ के बेटे आरिफ का अपहरण कर लिया। जिसके बाद बेटी के मोबाइल पर अपहरणकर्ताओं का मैसेज भी आया । जिसमें 50 लाख की रंगदारी की मांग की गई थी । जिसके बाद से मेरठ पुलिस के आला अधिकारी अपहरण कांड मामले की जांच में जुटे हैं। एसपी सिटी समेत कई टीमें मौके पर काम कर रही हैं। लेकिन अभी तक ना तो अपहृत बच्चे का और ना ही अपहरणकर्ताओं का कोई सुराग पुलिस नहीं जुटा पाई है। हालांकि पुलिस अधिकारियों की माने तो युवक के अपहरण की घटना को किसी ने नहीं देखा साथी जिस नोटपैड के कागज पर रंगदारी मांगी गई है वह नोटपैड घर की अलमारी से बरामद हो गया है हालांकि अभी तक बच्चे का कोई अता पता नहीं चल सका है।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपहरण और फिरौती के मामले एक बार फिर बढ़ने शुरू हो गए हैं। बागपत के बाद आप मेरठ में ट्रांसपोर्टर के बेटे के अपहरण का मामला सामने आया है। दिनदहाड़े बदमाशों ने ट्रांसपोर्टर के बेटे का अपहरण कर लिया और अब पचास लाख की रंगदारी की मांग की है । हालांकि पुलिस इस मामले में कई एंगल पर जांच कर रही है। मामला मेरठ के थाना नौचंदी क्षेत्र के शास्त्री नगर सेक्टर बारह का है । जहां ट्रांसपोर्ट व्यवसाय आसिफ का बेटा और बेटी आज घर में अकेले थे । बेटी कमरे में बैठकर अपनी ऑनलाइन क्लास कर रही थी आरोप है कि तभी बदमाश आए और आसिफ के बेटे आरिफ का अपहरण कर लिया। जिसके बाद बेटी के मोबाइल पर अपहरणकर्ताओं का मैसेज भी आया । जिसमें पचास लाख की रंगदारी की मांग की गई थी । जिसके बाद से मेरठ पुलिस के आला अधिकारी अपहरण कांड मामले की जांच में जुटे हैं। एसपी सिटी समेत कई टीमें मौके पर काम कर रही हैं। लेकिन अभी तक ना तो अपहृत बच्चे का और ना ही अपहरणकर्ताओं का कोई सुराग पुलिस नहीं जुटा पाई है। हालांकि पुलिस अधिकारियों की माने तो युवक के अपहरण की घटना को किसी ने नहीं देखा साथी जिस नोटपैड के कागज पर रंगदारी मांगी गई है वह नोटपैड घर की अलमारी से बरामद हो गया है हालांकि अभी तक बच्चे का कोई अता पता नहीं चल सका है।
KYMCO, दुनिया में मोटरसाइकिल और ATV वर्ग के सबसे बड़े प्रतिनिधियों में से एक, ने तुर्की के बाज़ार में एकदम नया ATV मॉडल MXU 700 EX पेश किया। विशाल ब्रांड, जो वैश्विक स्तर पर सालाना 1 मिलियन से अधिक स्कूटर, मोटरसाइकिल और एटीवी का उत्पादन करता है, साहसिक प्रेमियों को एमएक्सयू 700 ईएक्स मॉडल प्रदान करता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो आराम का त्याग किए बिना उच्चतम स्तर पर रोमांच का आनंद लेना चाहते हैं। क्षेत्र में सुरक्षा, 284.900 TL की बिक्री मूल्य के साथ। KYMCO, मोटरसाइकिल की दुनिया के स्कूटर वर्ग में सबसे बड़े नामों में से एक है और तुर्की में दोगान ट्रेंड ऑटोमोटिव द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है, न केवल अपनी मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के साथ, बल्कि अपने 4-व्हील मॉडल के साथ भी प्रभावित करना जारी रखता है। KYMCO ने बिल्कुल नया ATV मॉडल MXU 700 EX को तुर्की की सड़कों पर उतारा। अपने ईपीएस (इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग) सिस्टम के साथ, केवाईएमसीओ एटीवी एमएक्सयू 44 ईएक्स में कई अलग-अलग विशेषताएं हैं जैसे इलेक्ट्रॉनिक समर्थन जो हैंडलबार को अधिक आसानी से चालू करता है, 4 एचपी पावर, 2×4 और 4×700 ट्रैक्शन विकल्प, डिजिटल एलईडी डिस्प्ले पैनल , स्वचालित चरखी। इसे 284.900 TL पर बिक्री के लिए पेश किया गया था। मजबूत डिजाइन और व्यावहारिकता के संयोजन से, नया एमएक्सयू 700 ईएक्स केवाईएमसीओ एमएक्सयू परिवार के डीएनए को संरक्षित करना जारी रखता है। नया एमएक्सयू 700 ईएक्स न केवल दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि अवकाश और शौक के उपयोग का भी समर्थन करता है। उच्च प्रदर्शन वाली हेडलाइट्स रात में शक्तिशाली रोशनी प्रदान करती हैं। एलईडी टेल लाइट्स बेहतर पहचान प्रदान करती हैं। एलईडी टर्न सिग्नल दृश्यता का समर्थन करते हैं और मोड़ते समय सुरक्षा बढ़ाते हैं। दिन के समय चलने वाली लाइटें T3b नियमों को पूरा करती हैं। यह मॉडल, जो 44 एचपी की शक्ति का उत्पादन कर सकता है, 54 एनएम के अपने उच्च टोक़ के साथ इलाके की स्थिति को अपने घुटनों पर लाता है। यह शक्तिशाली मॉडल, जिसका वजन 372 किलोग्राम है, से पता चलता है कि इसकी संरचना है जो अपने बड़े 19-लीटर टैंक के साथ क्षेत्र में सबसे लंबी सवारी को भी संभाल सकती है। KYMCO, जो अपनी 4-पहिया मोटरसाइकिलों के साथ अतीत से वर्तमान तक एक अंतर बनाने में कामयाब रही है, अपने नए मॉडल MXU 700 EX में दो अलग-अलग ट्रैक्शन सिस्टम प्रदान करती है, जिसे उसने तुर्की की सड़कों पर लॉन्च किया है। 4×2 संस्करण के अलावा, जो पीछे के पहियों तक बिजली पहुंचाता है, एमएक्सयू 700 ईएक्स एक 4×4 ट्रैक्शन सिस्टम से लैस है जो सबसे चुनौतीपूर्ण इलाके की स्थितियों को भी पार कर सकता है। यह मॉडल अपने 4-स्ट्रोक, सिंगल-सिलेंडर 695 सीसी इंजन ब्लॉक के साथ 57 किमी/घंटा की अधिकतम गति तक पहुंच सकता है। इन सभी सुविधाओं के अलावा, KYMCO MXU 700 EX अपने डिजिटल एलईडी इंस्ट्रूमेंट पैनल, एलईडी सिग्नल, मानक के रूप में पेश किए गए यूएसबी सॉकेट, रियर बैकरेस्ट और स्वचालित चरखी के साथ उच्चतम स्तर पर आराम और सुविधा प्रदान करता है। ऑफ-रोड परिस्थितियों में उच्चतम स्तर की हैंडलिंग की पेशकश करते हुए, एमएक्सयू 700 ईएक्स आसानी से बाधाओं को दूर करता है, इसके लॉक डिफरेंशियल फीचर के लिए धन्यवाद। मॉडल, जिसमें आगे की ओर 52 किलोग्राम और पीछे की ओर 95 किलोग्राम की वहन क्षमता है, बिना किसी समस्या के आपकी सवारी के दौरान आवश्यक सभी उपकरणों के परिवहन को सक्षम बनाता है। इनके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट है जो ईपीएस (इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग) सिस्टम के साथ स्टीयरिंग व्हील को अधिक आसानी से चालू करने में सक्षम बनाता है। अगस्त में, KYMCO अपने उपयोगकर्ताओं को न केवल अपने नए मॉडल, MXU 700 EX, बल्कि अपने सभी मॉडलों के साथ खुश करना जारी रखता है। लाभप्रद अभियान अवसरों की पेशकश करते हुए, ब्रांड अगस्त में मोटरसाइकिल प्रेमियों के साथ क्रेडिट कार्ड पर 60.000 टीएल तक की 12 किस्तों के साथ मिलता है, साथ ही 60.000 महीने के लिए 12 महीने की 1% ब्याज दर या 24 टीएल तक 1.45 महीनों के लिए XNUMX% ब्याज देता है।
KYMCO, दुनिया में मोटरसाइकिल और ATV वर्ग के सबसे बड़े प्रतिनिधियों में से एक, ने तुर्की के बाज़ार में एकदम नया ATV मॉडल MXU सात सौ EX पेश किया। विशाल ब्रांड, जो वैश्विक स्तर पर सालाना एक मिलियन से अधिक स्कूटर, मोटरसाइकिल और एटीवी का उत्पादन करता है, साहसिक प्रेमियों को एमएक्सयू सात सौ ईएक्स मॉडल प्रदान करता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो आराम का त्याग किए बिना उच्चतम स्तर पर रोमांच का आनंद लेना चाहते हैं। क्षेत्र में सुरक्षा, दो सौ चौरासी.नौ सौ TL की बिक्री मूल्य के साथ। KYMCO, मोटरसाइकिल की दुनिया के स्कूटर वर्ग में सबसे बड़े नामों में से एक है और तुर्की में दोगान ट्रेंड ऑटोमोटिव द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है, न केवल अपनी मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के साथ, बल्कि अपने चार-व्हील मॉडल के साथ भी प्रभावित करना जारी रखता है। KYMCO ने बिल्कुल नया ATV मॉडल MXU सात सौ EX को तुर्की की सड़कों पर उतारा। अपने ईपीएस सिस्टम के साथ, केवाईएमसीओ एटीवी एमएक्सयू चौंतालीस ईएक्स में कई अलग-अलग विशेषताएं हैं जैसे इलेक्ट्रॉनिक समर्थन जो हैंडलबार को अधिक आसानी से चालू करता है, चार एचपी पावर, दो×चार और चार×सात सौ ट्रैक्शन विकल्प, डिजिटल एलईडी डिस्प्ले पैनल , स्वचालित चरखी। इसे दो सौ चौरासी.नौ सौ TL पर बिक्री के लिए पेश किया गया था। मजबूत डिजाइन और व्यावहारिकता के संयोजन से, नया एमएक्सयू सात सौ ईएक्स केवाईएमसीओ एमएक्सयू परिवार के डीएनए को संरक्षित करना जारी रखता है। नया एमएक्सयू सात सौ ईएक्स न केवल दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि अवकाश और शौक के उपयोग का भी समर्थन करता है। उच्च प्रदर्शन वाली हेडलाइट्स रात में शक्तिशाली रोशनी प्रदान करती हैं। एलईडी टेल लाइट्स बेहतर पहचान प्रदान करती हैं। एलईडी टर्न सिग्नल दृश्यता का समर्थन करते हैं और मोड़ते समय सुरक्षा बढ़ाते हैं। दिन के समय चलने वाली लाइटें Tतीनb नियमों को पूरा करती हैं। यह मॉडल, जो चौंतालीस एचपी की शक्ति का उत्पादन कर सकता है, चौवन एनएम के अपने उच्च टोक़ के साथ इलाके की स्थिति को अपने घुटनों पर लाता है। यह शक्तिशाली मॉडल, जिसका वजन तीन सौ बहत्तर किलोग्रामग्राम है, से पता चलता है कि इसकी संरचना है जो अपने बड़े उन्नीस-लीटर टैंक के साथ क्षेत्र में सबसे लंबी सवारी को भी संभाल सकती है। KYMCO, जो अपनी चार-पहिया मोटरसाइकिलों के साथ अतीत से वर्तमान तक एक अंतर बनाने में कामयाब रही है, अपने नए मॉडल MXU सात सौ EX में दो अलग-अलग ट्रैक्शन सिस्टम प्रदान करती है, जिसे उसने तुर्की की सड़कों पर लॉन्च किया है। चार×दो संस्करण के अलावा, जो पीछे के पहियों तक बिजली पहुंचाता है, एमएक्सयू सात सौ ईएक्स एक चार×चार ट्रैक्शन सिस्टम से लैस है जो सबसे चुनौतीपूर्ण इलाके की स्थितियों को भी पार कर सकता है। यह मॉडल अपने चार-स्ट्रोक, सिंगल-सिलेंडर छः सौ पचानवे सीसी इंजन ब्लॉक के साथ सत्तावन किमी/घंटा की अधिकतम गति तक पहुंच सकता है। इन सभी सुविधाओं के अलावा, KYMCO MXU सात सौ EX अपने डिजिटल एलईडी इंस्ट्रूमेंट पैनल, एलईडी सिग्नल, मानक के रूप में पेश किए गए यूएसबी सॉकेट, रियर बैकरेस्ट और स्वचालित चरखी के साथ उच्चतम स्तर पर आराम और सुविधा प्रदान करता है। ऑफ-रोड परिस्थितियों में उच्चतम स्तर की हैंडलिंग की पेशकश करते हुए, एमएक्सयू सात सौ ईएक्स आसानी से बाधाओं को दूर करता है, इसके लॉक डिफरेंशियल फीचर के लिए धन्यवाद। मॉडल, जिसमें आगे की ओर बावन किलोग्रामग्राम और पीछे की ओर पचानवे किलोग्रामग्राम की वहन क्षमता है, बिना किसी समस्या के आपकी सवारी के दौरान आवश्यक सभी उपकरणों के परिवहन को सक्षम बनाता है। इनके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट है जो ईपीएस सिस्टम के साथ स्टीयरिंग व्हील को अधिक आसानी से चालू करने में सक्षम बनाता है। अगस्त में, KYMCO अपने उपयोगकर्ताओं को न केवल अपने नए मॉडल, MXU सात सौ EX, बल्कि अपने सभी मॉडलों के साथ खुश करना जारी रखता है। लाभप्रद अभियान अवसरों की पेशकश करते हुए, ब्रांड अगस्त में मोटरसाइकिल प्रेमियों के साथ क्रेडिट कार्ड पर साठ.शून्य टीएल तक की बारह किस्तों के साथ मिलता है, साथ ही साठ.शून्य महीने के लिए बारह महीने की एक% ब्याज दर या चौबीस टीएल तक एक.पैंतालीस महीनों के लिए XNUMX% ब्याज देता है।
Noida Crime News: दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा में पुलिस ने वाहन चोरों के गैंग का भंडाफोड़ करते हुए तीन वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है। इन चोरों में वो चोर वाहिद भी शामिल है, जिसे गाड़ियों के डॉक्टर के नाम से भी जाना जाता है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 चोरी की कार और अन्य सामान भी बरामद किया है। इनमें कारों में 10 कार थी। वहीं आरोपियों के पास कार खोलने की 13 चाबियां और कार का लॉक खोलने के लिए लोहे का हुक भी बरामद किया गया है। पुलिस के आलाधिकरियों का कहना है कि, वाहिद जिसे गाडियों का डाक्टर भी कहा जाता है। वाहिद काफी ज्यादा शातिर किस्म का वाहन चोर है। वाहिद पर दिल्ली, नोएडा के करीब 50 से अधिक वाहन चोरी के मामले दर्ज है। आरोपी वाहिद एनसीआर में वाहन चोरी की घटनाएं करता है। चोरी करने के बाद आरोपी डोंगल नेट चलाकर व्हाट्सएप पर अपने साथियों से कॉल पर बात करता है। बड़ी बात है कि, वाहिद ने जुर्म की दुनिया में इतना पैसा कमा लिया है कि, यह हापुड़ जिले की गढ़मुक्तेश्वर तहसील इलाके में अपना आलीशान मकान भी बना रखा है। आरोपी वाहिद ही एक तरह से गैंग का सरगना भी है जो अपने साथियों के साथ मिलकर गाड़ियों की चोरी खुद भी करता है और करवाता भी है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 10 कार बरामद की है। चार दिन पहले इसके तीन साथी भूरवा उर्फ भूरा, असलम, विनीत थाना परीक्षित गढ जिला मेरठ से गिरफ्तार किए गए हैं। इनके कब्जे से चोरी की 4 गाडियां बरामद हुई थी। साथ ही इस गैंग के साथी रविंद्र व अमन भी गिरफ्तार हुए हैं। अभियुक्त रविंद्र उपरोक्त के घर से थाना सेक्टर 20 व थाना सेक्टर 113 की दो कार बरामद की गई हैं।
Noida Crime News: दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा में पुलिस ने वाहन चोरों के गैंग का भंडाफोड़ करते हुए तीन वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है। इन चोरों में वो चोर वाहिद भी शामिल है, जिसे गाड़ियों के डॉक्टर के नाम से भी जाना जाता है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दस चोरी की कार और अन्य सामान भी बरामद किया है। इनमें कारों में दस कार थी। वहीं आरोपियों के पास कार खोलने की तेरह चाबियां और कार का लॉक खोलने के लिए लोहे का हुक भी बरामद किया गया है। पुलिस के आलाधिकरियों का कहना है कि, वाहिद जिसे गाडियों का डाक्टर भी कहा जाता है। वाहिद काफी ज्यादा शातिर किस्म का वाहन चोर है। वाहिद पर दिल्ली, नोएडा के करीब पचास से अधिक वाहन चोरी के मामले दर्ज है। आरोपी वाहिद एनसीआर में वाहन चोरी की घटनाएं करता है। चोरी करने के बाद आरोपी डोंगल नेट चलाकर व्हाट्सएप पर अपने साथियों से कॉल पर बात करता है। बड़ी बात है कि, वाहिद ने जुर्म की दुनिया में इतना पैसा कमा लिया है कि, यह हापुड़ जिले की गढ़मुक्तेश्वर तहसील इलाके में अपना आलीशान मकान भी बना रखा है। आरोपी वाहिद ही एक तरह से गैंग का सरगना भी है जो अपने साथियों के साथ मिलकर गाड़ियों की चोरी खुद भी करता है और करवाता भी है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से दस कार बरामद की है। चार दिन पहले इसके तीन साथी भूरवा उर्फ भूरा, असलम, विनीत थाना परीक्षित गढ जिला मेरठ से गिरफ्तार किए गए हैं। इनके कब्जे से चोरी की चार गाडियां बरामद हुई थी। साथ ही इस गैंग के साथी रविंद्र व अमन भी गिरफ्तार हुए हैं। अभियुक्त रविंद्र उपरोक्त के घर से थाना सेक्टर बीस व थाना सेक्टर एक सौ तेरह की दो कार बरामद की गई हैं।
चंडीगढ़। सीबीआई की विशेेष अदालत में चल रहे आईटी पार्क की एक निजी कंपनी में फर्जी छापेमारी और प्रबंधक का अपहरण कर फिरौती मांगने के मामले में आरोपी सुमित गुप्ता, अंकुर कुमार, प्रदीप राणा ने जमानत याचिका दायर की है। ये सभी आरोपी दिल्ली सीबीआई में उपनिरीक्षक थे। इस मामले में आरोपी आकाश अहलावत को अदालत ने पहले जमानत दे दी है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी। बता दें कि आईटी पार्क स्थित एक कंपनी के प्रबंधक और पार्टनर से एक करोड़ की फिरौती मांगने का मामला सामने आया था। इसमें दिल्ली सीबीआई के चार उपनिरीक्षक आकाश अहलावत, सुमित गुप्ता, अंकुर कुमार, प्रदीप राणा उस कंपनी में फर्जी छापेमारी करने पहुंचे थे। इन पर आरोप है कि इन्होंने कंपनी के प्रबंधक के साथ पहले तो मारपीट की फिर उसे कार में बिठा कर सडकों पर घूमते रहे। रात में उसे छोड़ने के एवज में एक करोड़ की मांग की। हालांकि वे चंडीगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ गए और बाद में उन्हें चंडीगढ़ सीबीआई के हवाले कर दिया गया।
चंडीगढ़। सीबीआई की विशेेष अदालत में चल रहे आईटी पार्क की एक निजी कंपनी में फर्जी छापेमारी और प्रबंधक का अपहरण कर फिरौती मांगने के मामले में आरोपी सुमित गुप्ता, अंकुर कुमार, प्रदीप राणा ने जमानत याचिका दायर की है। ये सभी आरोपी दिल्ली सीबीआई में उपनिरीक्षक थे। इस मामले में आरोपी आकाश अहलावत को अदालत ने पहले जमानत दे दी है। इस याचिका पर अगली सुनवाई सोलह अगस्त को होगी। बता दें कि आईटी पार्क स्थित एक कंपनी के प्रबंधक और पार्टनर से एक करोड़ की फिरौती मांगने का मामला सामने आया था। इसमें दिल्ली सीबीआई के चार उपनिरीक्षक आकाश अहलावत, सुमित गुप्ता, अंकुर कुमार, प्रदीप राणा उस कंपनी में फर्जी छापेमारी करने पहुंचे थे। इन पर आरोप है कि इन्होंने कंपनी के प्रबंधक के साथ पहले तो मारपीट की फिर उसे कार में बिठा कर सडकों पर घूमते रहे। रात में उसे छोड़ने के एवज में एक करोड़ की मांग की। हालांकि वे चंडीगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ गए और बाद में उन्हें चंडीगढ़ सीबीआई के हवाले कर दिया गया।
बीबीएन - लोकतंत्र के पावन पर्व में नालागढ़ विस के मतदाताओं ने पूरे उत्साह के साथ शिरकत की और नालागढ़ में रिकार्ड मतदान की ओर कदम बढ़ाया, लेकिन इस बार 84. 27 मतदान दर्ज किया गया, जो कि विगत विधानसभा चुनाव में हुए मतदान के मुकाबले करीब दो फीसदी कम है। मतदान के दिन पहली बार वोट करने वाले युवा हो या फिर पुरुष, महिलाएं या फिर बुजुर्ग सभी अपने मतधिकार का इस्तेमाल करने घरों से निकले। प्रशासन ने भी मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करवाने के लिए तैयारियों में कोई कमनी नहीं रखी थी। हलके में कुछेक मामले ईवीएम व वीवीपैट के गड़बड़ी के सामने आए, जिन्हें प्रशासन ने सूचना मिलने के तुंरत बाद बदल दिया। नालागढ़ के वार्ड नंबर सात व काईडी मतदान केंद्र में ईवीएम में खराबी की वजह से मतदान रूका था , लेकिन बाद में मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही। नालागढ़ में शाम पांच बजे तक 82 फीसदी मतदान हो चुका था, जबकि करीब दर्जन बूथों पर पांच बजे के बाद भी मतदाता कतारों में खड़े थे। नालागढ़ के100 बूथों में से कई बूथों पर 90 फीसदी से ज्यादा मतदान की सूचना है। बतातें चलें कि नालागढ़ हल्के में इस बार पांच प्रत्याशी अपनी किस्मत विधानसभा चुनावों में आजमा रहे है, जिनमें भाजपा विधायक केएल ठाकुर, पूर्व विधायक एवं कांग्रेस प्रतयाशी लखविंद्र राणा, आजाद प्रत्याशी हरदीप बावा, हरप्रीत सैणी व गुरनाम चंदेल शामिल है। इन पांच में से चार प्रत्याशियों ने वोटरों को मतदान बूथों तक पंहुचाने में जमकर दौड़ भाग की। मगर अंतिम समय तक वोटरों की चुप्पी ने प्रत्याशियों की धड़कने तेज कर दी है। कैंडीडेंटस के समर्थकों ने वोटरों को बूथों तक लाने में जी जान लगा दी लेकिन वे वोटरों की चुप्पी नहीं तुड़वा सके। दोनों हल्कों में भारी वोटिंग व मतदाताओं की चुप्पी ने मैदान में उतरे प्रत्याशियों धड़कने तेज कर दी है। दून व नालागढ़ के प्रत्याशियों ने यहां डाले वोट-दून हलके से कांग्रेसी प्रत्याशी एवं वर्तमान विधायक चौधरी रामकुमार ने दून के अपने गृह गांव संडौली के बूथ पर पत्नी कुलदीप कौर संग वोट डाला। नालागढ़ से भाजपा प्रत्याशी केएल ठाकुर ने अपना वोट अपनी गृह पंचायत के कश्मीरपुर बूथ पर धर्मपत्नी संग मतदान किया और जीत का दावा किया, जबकि कांग्रेस के लखविंद्र राणा ने जोघों के अपने बूथ पर वोट डाला। आजाद प्रत्याशी हरदीप बावा ने अपनी धर्मपत्नी परमिंद्र बावा संग ढाणा के अपने बूथ पर वोट डाला, अन्य आजाद प्रत्याशियों हरप्रीत सैणी से राजपुरा व गुरनाम सिंह ने चुहूवाल में वोट डाला। नालागढ़ में हुई रिकार्ड वोटिंग-नालागढ़ के कुल 82064 मतदाताओं में से 67292 ने शाम पांच बजे तक अपने वोट का इस्तेमाल कर लिया था। नालागढ़ के कई बूथों पर मतदान 90 फीसदी को पार कर गया, जिनमें से मडयारपुर में 96 फीसदी मतदान रहा व इस बूथ पर महिला वोटरों का आकंड़ा 99 फीसदी रहा। इसके अलावा संलैहडां बूथ पर 95 फीसदी, ढाणा 94 फीसदी, गोलजमाला में 93 फीसदी, भिफड़ में 92 व झांडियां बूथ पर 92 फीसदी मतदान रिकार्ड किया गया। इसके अलावा अनेका बूथों पर 85 व 90 फीसदी के बीच भी मतदान दर्ज किया गया।
बीबीएन - लोकतंत्र के पावन पर्व में नालागढ़ विस के मतदाताओं ने पूरे उत्साह के साथ शिरकत की और नालागढ़ में रिकार्ड मतदान की ओर कदम बढ़ाया, लेकिन इस बार चौरासी. सत्ताईस मतदान दर्ज किया गया, जो कि विगत विधानसभा चुनाव में हुए मतदान के मुकाबले करीब दो फीसदी कम है। मतदान के दिन पहली बार वोट करने वाले युवा हो या फिर पुरुष, महिलाएं या फिर बुजुर्ग सभी अपने मतधिकार का इस्तेमाल करने घरों से निकले। प्रशासन ने भी मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करवाने के लिए तैयारियों में कोई कमनी नहीं रखी थी। हलके में कुछेक मामले ईवीएम व वीवीपैट के गड़बड़ी के सामने आए, जिन्हें प्रशासन ने सूचना मिलने के तुंरत बाद बदल दिया। नालागढ़ के वार्ड नंबर सात व काईडी मतदान केंद्र में ईवीएम में खराबी की वजह से मतदान रूका था , लेकिन बाद में मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही। नालागढ़ में शाम पांच बजे तक बयासी फीसदी मतदान हो चुका था, जबकि करीब दर्जन बूथों पर पांच बजे के बाद भी मतदाता कतारों में खड़े थे। नालागढ़ केएक सौ बूथों में से कई बूथों पर नब्बे फीसदी से ज्यादा मतदान की सूचना है। बतातें चलें कि नालागढ़ हल्के में इस बार पांच प्रत्याशी अपनी किस्मत विधानसभा चुनावों में आजमा रहे है, जिनमें भाजपा विधायक केएल ठाकुर, पूर्व विधायक एवं कांग्रेस प्रतयाशी लखविंद्र राणा, आजाद प्रत्याशी हरदीप बावा, हरप्रीत सैणी व गुरनाम चंदेल शामिल है। इन पांच में से चार प्रत्याशियों ने वोटरों को मतदान बूथों तक पंहुचाने में जमकर दौड़ भाग की। मगर अंतिम समय तक वोटरों की चुप्पी ने प्रत्याशियों की धड़कने तेज कर दी है। कैंडीडेंटस के समर्थकों ने वोटरों को बूथों तक लाने में जी जान लगा दी लेकिन वे वोटरों की चुप्पी नहीं तुड़वा सके। दोनों हल्कों में भारी वोटिंग व मतदाताओं की चुप्पी ने मैदान में उतरे प्रत्याशियों धड़कने तेज कर दी है। दून व नालागढ़ के प्रत्याशियों ने यहां डाले वोट-दून हलके से कांग्रेसी प्रत्याशी एवं वर्तमान विधायक चौधरी रामकुमार ने दून के अपने गृह गांव संडौली के बूथ पर पत्नी कुलदीप कौर संग वोट डाला। नालागढ़ से भाजपा प्रत्याशी केएल ठाकुर ने अपना वोट अपनी गृह पंचायत के कश्मीरपुर बूथ पर धर्मपत्नी संग मतदान किया और जीत का दावा किया, जबकि कांग्रेस के लखविंद्र राणा ने जोघों के अपने बूथ पर वोट डाला। आजाद प्रत्याशी हरदीप बावा ने अपनी धर्मपत्नी परमिंद्र बावा संग ढाणा के अपने बूथ पर वोट डाला, अन्य आजाद प्रत्याशियों हरप्रीत सैणी से राजपुरा व गुरनाम सिंह ने चुहूवाल में वोट डाला। नालागढ़ में हुई रिकार्ड वोटिंग-नालागढ़ के कुल बयासी हज़ार चौंसठ मतदाताओं में से सरसठ हज़ार दो सौ बानवे ने शाम पांच बजे तक अपने वोट का इस्तेमाल कर लिया था। नालागढ़ के कई बूथों पर मतदान नब्बे फीसदी को पार कर गया, जिनमें से मडयारपुर में छियानवे फीसदी मतदान रहा व इस बूथ पर महिला वोटरों का आकंड़ा निन्यानवे फीसदी रहा। इसके अलावा संलैहडां बूथ पर पचानवे फीसदी, ढाणा चौरानवे फीसदी, गोलजमाला में तिरानवे फीसदी, भिफड़ में बानवे व झांडियां बूथ पर बानवे फीसदी मतदान रिकार्ड किया गया। इसके अलावा अनेका बूथों पर पचासी व नब्बे फीसदी के बीच भी मतदान दर्ज किया गया।
'प्रश्न करना' और 'मजाक उड़ाना' दो ऐसी क्रियाएँ हैं जिनमें वैपरीत्य है-ठीक ऐसे ही जैसे 'तर्क करना' और 'कुतर्क करना' विविध आयामों से विरोधी संक्रियाएँ हैं। प्रश्न करना और तर्क करना आधुनिकता-सूचक है, अग्रगामिता है, ज्ञान-पिपासा है, ज्ञान का संधान है। इसके विपरीत 'मजाक उड़ाना' और 'कुतर्क करना' पश्चगामिता है, बौद्धिक विकलांगता है, मानवीय संस्कृति की विकास यात्रा में पीछे छूटने का परिचायक है। प्रश्न कोई भी कर सकता है। उसका स्वागत हो, न कि विरोध। जो समाज जितना बन्द होता है, वहाँ प्रश्न और तर्क करने की उतनी ही कम छूट होती है। भरतीय संस्कृति तो शास्त्रार्थ की संस्कृति रही है। किसी विश्वास में, मत में या किसी ग्रंथ में सब अच्छा ही है, यह सनातन की सोच नहीं है। नोट करें कि ग्रंथ का अक्षर-अक्षर पवित्र और दोषमुक्त हो...यह हिन्दू धर्म की भावना है ही नहीं। यहाँ तो वैभिन्न के सम्मान की परम्परा है। मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना कुंडे-कुंडे नवं पय, जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे। अर्थात् जितने मनुष्य हैं, उतने ही विचार हैं। एक ही स्थान के अलग-अलग कुँओं के पानी का स्वाद अलग-अलग होता है। एक ही संस्कार के लिए अलग-अलग जातियों में अलग-अलग रिवाज होता है तथा एक ही घटना का वर्णन हर व्यक्ति अपने ढंग से अलग-अलग करता है। स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति में आप तर्क कर सकते हैं, विरोध कर सकते हैं। त्याग को पकड़िए, भोग को पकड़िए... स्वतंत्रता है। लेकिन जो भी करें, गहराई में उतरकर करें, उथले न बनें। कुछ लोग गहराई में उतरकर अध्ययन नहीं करते, बस कुछ वैचारिक वमन करने, कुछ उद्धृत करने (Quote) के लिए 2-4 पंक्ति पढ़ लेते हैं, या गूगल कर लेते हैं। उन्हें उद्धृत करने (Quote) , पढ़ने (read) , अध्ययन करने (study) और मनन करने (contemplate) के क्रम और अंतर को समझने की भी आवश्यकता है। छिछला ज्ञान कभी-कभी बड़ा शोर करता है, तभी तो हिन्दी में मुहावरा बना-"थोथा चना बाजे घना।" माना जाता है कि योग्य व्यक्ति से प्रश्न करना उत्तम मानसिक स्वास्थ्य का संकेतक है। ऐसे में, प्रश्नकर्ता को भी चाहिए कि सही व्यक्ति से सही समय पर और सही रीति से प्रश्न करे। धर्म और अध्यात्म से सम्बंधित प्रश्न को किसी से भी पूछ देना ऐसा ही है जैसे भौतिकी का प्रश्न किसी गड़ेरिए से करना। कुछ बातें प्रतीकात्मक हैं, कुछ गूढ़ दार्शनिक, कुछ मिथकीय, कुछ विभिन्न साधना पद्धतियों से सम्बद्ध, कुछ जन-श्रुतियाँ तो कुछ प्रक्षिप्त। ऐसे में अत्यधिक सावधानी और समझदारी की अपेक्षा कि जानी चाहिए। अज्ञानता कि भट्ठी में जब तर्क पकता है, तो यह या तो फूहड़ होता है या विषैला। जब पहले से ही कुछ उत्तर सोच लिया गया हो या उद्देश्य ही किसी को तंग करना हो, तब प्रबल संभावना है कि बुद्धि की भट्ठी से विषैला धुँआ ही निकलेगा। दिक़्क़त यह भी है कि ऐसे तर्क देने वाले को इसका अंदाज़ा नहीं होता कि उसने क्या एकांगी, घटिया, अधकचरा या कचरा सोचा या उगला है। उसे तो लगता है कि उसने कोई तोप का गोला दाग दिया है। एक तथ्य यह भी है कि धार्मिक ही नहीं किसी भी विषय की मीमांसा अध्यवसाय, वैचारिकी और तार्किकता का एक न्यूनतम स्तर और गाम्भीर्य की अपेक्षा रखती है। क्या 9वीं कक्षा कि भौतिकी में प्रकाश के अध्याय (light chapter) में अर्जित ज्ञान के स्तर पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा सकता है? (स्मरण रहे वहाँ भी इसकी चंद पंक्तियों में चर्चा और निदान है, जिसे आगे कोई नेत्र रोग विशेषज्ञ (opthalmologist) अपने MBBS के वर्षों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद 2-3 वर्ष और देकर सीखता है। यही बात सामाजिक विज्ञान में है, भाषा-विज्ञान में है और अध्यात्म तथा धर्म के परिक्षेत्र में भी है। मन्तव्य यह कि वैचारिकी के जगत् में आगे बढ़ने के लिए अध्ययन की ही सीढ़ियों से ही गुजरना होता है। अध्यवसाय को व्रत बनाना होता है। इनमें बाधक तत्त्व जैसे-काम, लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, हीनभावना आदि अज्ञान से ही उपजते हैं, जिनसे मुक्ति के लिए ज्ञान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं। "न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।" आपको संशय है या आप किसी बात से असहमत हैं-अच्छी बात है, लेकिन असहमति दिखाने में अपना और दूसरों का समय नष्ट मत कीजिए। बकवास बातें जो मिलावट आपको दिखती हैं, उनपर पढ़िए, उनकी कमी निकालने, उसे छिन्न-भिन्न करने, तार-तार करने के लिए ही पढ़िए लेकिन ख़ूब पढ़िए। सोचिए कि और लोगों को भी आपसे पहले यह लगा होगा, आप अकेले इतने तार्किक पैदा नहीं हुए हैं। जो महान् तार्किक आपसे पहले हुए, उन्होंने भी पढ़कर ही इसे जाना या प्रमाण सहित इसका विरोध किया; फेसबुक या व्हाट्सअप पर ओछे वाग्विलास से नहीं। तो ढूँढिए! उनमें कुछ ठीक होंगी और कुछ सच ही बकवास होंगी। आप कुछ नया ढूँढ पाएँ या नहीं, पर यह तय मानिए कि आप स्वयं संशय में नहीं रहेंगे और आँख बंद कर हवा में तीर नहीं मारेंगे। आपका मन दर्पण की तरह साफ हो जाएगा। इति शुभम्!
'प्रश्न करना' और 'मजाक उड़ाना' दो ऐसी क्रियाएँ हैं जिनमें वैपरीत्य है-ठीक ऐसे ही जैसे 'तर्क करना' और 'कुतर्क करना' विविध आयामों से विरोधी संक्रियाएँ हैं। प्रश्न करना और तर्क करना आधुनिकता-सूचक है, अग्रगामिता है, ज्ञान-पिपासा है, ज्ञान का संधान है। इसके विपरीत 'मजाक उड़ाना' और 'कुतर्क करना' पश्चगामिता है, बौद्धिक विकलांगता है, मानवीय संस्कृति की विकास यात्रा में पीछे छूटने का परिचायक है। प्रश्न कोई भी कर सकता है। उसका स्वागत हो, न कि विरोध। जो समाज जितना बन्द होता है, वहाँ प्रश्न और तर्क करने की उतनी ही कम छूट होती है। भरतीय संस्कृति तो शास्त्रार्थ की संस्कृति रही है। किसी विश्वास में, मत में या किसी ग्रंथ में सब अच्छा ही है, यह सनातन की सोच नहीं है। नोट करें कि ग्रंथ का अक्षर-अक्षर पवित्र और दोषमुक्त हो...यह हिन्दू धर्म की भावना है ही नहीं। यहाँ तो वैभिन्न के सम्मान की परम्परा है। मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना कुंडे-कुंडे नवं पय, जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे। अर्थात् जितने मनुष्य हैं, उतने ही विचार हैं। एक ही स्थान के अलग-अलग कुँओं के पानी का स्वाद अलग-अलग होता है। एक ही संस्कार के लिए अलग-अलग जातियों में अलग-अलग रिवाज होता है तथा एक ही घटना का वर्णन हर व्यक्ति अपने ढंग से अलग-अलग करता है। स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति में आप तर्क कर सकते हैं, विरोध कर सकते हैं। त्याग को पकड़िए, भोग को पकड़िए... स्वतंत्रता है। लेकिन जो भी करें, गहराई में उतरकर करें, उथले न बनें। कुछ लोग गहराई में उतरकर अध्ययन नहीं करते, बस कुछ वैचारिक वमन करने, कुछ उद्धृत करने के लिए दो-चार पंक्ति पढ़ लेते हैं, या गूगल कर लेते हैं। उन्हें उद्धृत करने , पढ़ने , अध्ययन करने और मनन करने के क्रम और अंतर को समझने की भी आवश्यकता है। छिछला ज्ञान कभी-कभी बड़ा शोर करता है, तभी तो हिन्दी में मुहावरा बना-"थोथा चना बाजे घना।" माना जाता है कि योग्य व्यक्ति से प्रश्न करना उत्तम मानसिक स्वास्थ्य का संकेतक है। ऐसे में, प्रश्नकर्ता को भी चाहिए कि सही व्यक्ति से सही समय पर और सही रीति से प्रश्न करे। धर्म और अध्यात्म से सम्बंधित प्रश्न को किसी से भी पूछ देना ऐसा ही है जैसे भौतिकी का प्रश्न किसी गड़ेरिए से करना। कुछ बातें प्रतीकात्मक हैं, कुछ गूढ़ दार्शनिक, कुछ मिथकीय, कुछ विभिन्न साधना पद्धतियों से सम्बद्ध, कुछ जन-श्रुतियाँ तो कुछ प्रक्षिप्त। ऐसे में अत्यधिक सावधानी और समझदारी की अपेक्षा कि जानी चाहिए। अज्ञानता कि भट्ठी में जब तर्क पकता है, तो यह या तो फूहड़ होता है या विषैला। जब पहले से ही कुछ उत्तर सोच लिया गया हो या उद्देश्य ही किसी को तंग करना हो, तब प्रबल संभावना है कि बुद्धि की भट्ठी से विषैला धुँआ ही निकलेगा। दिक़्क़त यह भी है कि ऐसे तर्क देने वाले को इसका अंदाज़ा नहीं होता कि उसने क्या एकांगी, घटिया, अधकचरा या कचरा सोचा या उगला है। उसे तो लगता है कि उसने कोई तोप का गोला दाग दिया है। एक तथ्य यह भी है कि धार्मिक ही नहीं किसी भी विषय की मीमांसा अध्यवसाय, वैचारिकी और तार्किकता का एक न्यूनतम स्तर और गाम्भीर्य की अपेक्षा रखती है। क्या नौवीं कक्षा कि भौतिकी में प्रकाश के अध्याय में अर्जित ज्ञान के स्तर पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा सकता है? अपने MBBS के वर्षों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद दो-तीन वर्ष और देकर सीखता है। यही बात सामाजिक विज्ञान में है, भाषा-विज्ञान में है और अध्यात्म तथा धर्म के परिक्षेत्र में भी है। मन्तव्य यह कि वैचारिकी के जगत् में आगे बढ़ने के लिए अध्ययन की ही सीढ़ियों से ही गुजरना होता है। अध्यवसाय को व्रत बनाना होता है। इनमें बाधक तत्त्व जैसे-काम, लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, हीनभावना आदि अज्ञान से ही उपजते हैं, जिनसे मुक्ति के लिए ज्ञान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं। "न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।" आपको संशय है या आप किसी बात से असहमत हैं-अच्छी बात है, लेकिन असहमति दिखाने में अपना और दूसरों का समय नष्ट मत कीजिए। बकवास बातें जो मिलावट आपको दिखती हैं, उनपर पढ़िए, उनकी कमी निकालने, उसे छिन्न-भिन्न करने, तार-तार करने के लिए ही पढ़िए लेकिन ख़ूब पढ़िए। सोचिए कि और लोगों को भी आपसे पहले यह लगा होगा, आप अकेले इतने तार्किक पैदा नहीं हुए हैं। जो महान् तार्किक आपसे पहले हुए, उन्होंने भी पढ़कर ही इसे जाना या प्रमाण सहित इसका विरोध किया; फेसबुक या व्हाट्सअप पर ओछे वाग्विलास से नहीं। तो ढूँढिए! उनमें कुछ ठीक होंगी और कुछ सच ही बकवास होंगी। आप कुछ नया ढूँढ पाएँ या नहीं, पर यह तय मानिए कि आप स्वयं संशय में नहीं रहेंगे और आँख बंद कर हवा में तीर नहीं मारेंगे। आपका मन दर्पण की तरह साफ हो जाएगा। इति शुभम्!
केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने आज लोकसभा में वर्ष 2016-17 का आम बजट प्रस्तुत करते हुए जून 2016 से मार्च 2019 तक अनुमोदित किए जाने वाले और अनुमोदन के तीन वर्ष के भीतर चार मेट्रो शहरों में निर्मित किए जाने वाले 30 वर्ग मीटर के फ्लैटों और अन्य शहरों में 60 वर्गमीटर तक के फ्लैटों हेतु आवास निर्माण परियोना शुरू करने वाले उपक्रमों को लाभों से सौ प्रतिशत कटौती देने का प्रस्ताव किया। हालांकि इन उपक्रमों पर न्यूनतम एकांतर कर लागू होगा। उन्होंने प्रस्ताव किया कि स्थावर संपदा निवेश न्यास और विशेष शेयरधारिता वाले आईएनवीआईटी की विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) की आय से किए जाने वाले किसी वितरण के लाभांश वितरण कर के अध्यधीन नहीं होंगे। पहली बार मकान खरीदने वालों के लिए वित्त मंत्री ने अगले वित्त वर्ष के दौरान स्वीकृत 35 लाख रुपये तक के ऋणों हेतु 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष के अतिरिक्त ब्याज के लिए कटौती देने का प्रस्ताव किया, बशर्ते मकान की कीमत रुपये से ज्यादा न हो। श्री जेटली ने सरकारी-निजी भागीदारी वाली स्कीमों सहित केंद्रीय या राज्य सरकार की किसी भी स्कीम के तहत 60 वर्गमीटर तक के क्षेत्र में सस्ते मकानों के निर्माण को सेवाकर से छूट देने का प्रस्ताव किया। इसके अलावा उन्होंने निर्माण कार्य में उपयोग के लिए निर्माण स्थल पर विनिर्मित कंक्रीट मिश्रण के लिए समय पर उपलब्ध उत्पाद शुल्क छूट को तैयार मिश्रित कंक्रीट के लिए भी दिए जाने का प्रस्ताव किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने आज लोकसभा में वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह का आम बजट प्रस्तुत करते हुए जून दो हज़ार सोलह से मार्च दो हज़ार उन्नीस तक अनुमोदित किए जाने वाले और अनुमोदन के तीन वर्ष के भीतर चार मेट्रो शहरों में निर्मित किए जाने वाले तीस वर्ग मीटर के फ्लैटों और अन्य शहरों में साठ वर्गमीटर तक के फ्लैटों हेतु आवास निर्माण परियोना शुरू करने वाले उपक्रमों को लाभों से सौ प्रतिशत कटौती देने का प्रस्ताव किया। हालांकि इन उपक्रमों पर न्यूनतम एकांतर कर लागू होगा। उन्होंने प्रस्ताव किया कि स्थावर संपदा निवेश न्यास और विशेष शेयरधारिता वाले आईएनवीआईटी की विशेष प्रयोजन साधन की आय से किए जाने वाले किसी वितरण के लाभांश वितरण कर के अध्यधीन नहीं होंगे। पहली बार मकान खरीदने वालों के लिए वित्त मंत्री ने अगले वित्त वर्ष के दौरान स्वीकृत पैंतीस लाख रुपये तक के ऋणों हेतु पचास हजार रुपये प्रतिवर्ष के अतिरिक्त ब्याज के लिए कटौती देने का प्रस्ताव किया, बशर्ते मकान की कीमत रुपये से ज्यादा न हो। श्री जेटली ने सरकारी-निजी भागीदारी वाली स्कीमों सहित केंद्रीय या राज्य सरकार की किसी भी स्कीम के तहत साठ वर्गमीटर तक के क्षेत्र में सस्ते मकानों के निर्माण को सेवाकर से छूट देने का प्रस्ताव किया। इसके अलावा उन्होंने निर्माण कार्य में उपयोग के लिए निर्माण स्थल पर विनिर्मित कंक्रीट मिश्रण के लिए समय पर उपलब्ध उत्पाद शुल्क छूट को तैयार मिश्रित कंक्रीट के लिए भी दिए जाने का प्रस्ताव किया।
रेलवे ट्रैक किनारे बसीं झुग्गियों को तीन माह में हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल खुद दिल्ली सरकार से बातचीत कर माकूल समाधान निकालने में जुटे हैं। इस मसले पर शुक्रवार को रेल मंत्री ने दिल्ली सरकार से बातचीत की। जबकि शनिवार को दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन के साथ उत्तर रेलवे के उच्च अधिकारी महाप्रबंधक, दिल्ली मंडल प्रबंधक और दिल्ली एमसीडी के अधिकारियों की बीच बैठक हुई। इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाए इस पर एक्शन प्लान तैयार करने पर सहमति बनी। हालांकि बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बैठक के बाद रेलवे बोर्ड के सीईओ विनोद कुमार यादव ने बताया कि एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के साथ मिलकर तय समय सीमा में एक्शन प्लान बना लिया जाएगा। पुनर्वास कैसे किया जाए इस पर भी प्लान तैयार किया जाएगा। तीन महीने का समय है, इसमें निदान निकाल लिया जाएगा। हालांकि, अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि स्थानीय निकाय, दिल्ली सरकार और रेलवे अधिकारियों ने ठोस कदम उठाने की बात कही है, लेकिन 48 हजार झुग्गियों में रहने वालों का पुनर्वास कैसे किया जाए, इस पर कोई नीति नहीं बन पाई है। तीन माह में रेलवे ट्रैक के किनारे बसी झुग्गियों को हटाने और इनका पुनर्वास करने की दोहरी चुनौती पर अधिकारी गहन मंथन कर रहे है। आला अधिकारी इसकी विस्तृत कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। वर्षों से रेलवे ट्रैक के किनारे लगातार बढ़तीं झुग्गियां अब न केवल रेलवे के लिए बल्कि दिल्ली सरकार और एमसीडी के लिए भी बड़ी समस्या है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
रेलवे ट्रैक किनारे बसीं झुग्गियों को तीन माह में हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल खुद दिल्ली सरकार से बातचीत कर माकूल समाधान निकालने में जुटे हैं। इस मसले पर शुक्रवार को रेल मंत्री ने दिल्ली सरकार से बातचीत की। जबकि शनिवार को दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन के साथ उत्तर रेलवे के उच्च अधिकारी महाप्रबंधक, दिल्ली मंडल प्रबंधक और दिल्ली एमसीडी के अधिकारियों की बीच बैठक हुई। इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाए इस पर एक्शन प्लान तैयार करने पर सहमति बनी। हालांकि बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बैठक के बाद रेलवे बोर्ड के सीईओ विनोद कुमार यादव ने बताया कि एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के साथ मिलकर तय समय सीमा में एक्शन प्लान बना लिया जाएगा। पुनर्वास कैसे किया जाए इस पर भी प्लान तैयार किया जाएगा। तीन महीने का समय है, इसमें निदान निकाल लिया जाएगा। हालांकि, अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि स्थानीय निकाय, दिल्ली सरकार और रेलवे अधिकारियों ने ठोस कदम उठाने की बात कही है, लेकिन अड़तालीस हजार झुग्गियों में रहने वालों का पुनर्वास कैसे किया जाए, इस पर कोई नीति नहीं बन पाई है। तीन माह में रेलवे ट्रैक के किनारे बसी झुग्गियों को हटाने और इनका पुनर्वास करने की दोहरी चुनौती पर अधिकारी गहन मंथन कर रहे है। आला अधिकारी इसकी विस्तृत कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। वर्षों से रेलवे ट्रैक के किनारे लगातार बढ़तीं झुग्गियां अब न केवल रेलवे के लिए बल्कि दिल्ली सरकार और एमसीडी के लिए भी बड़ी समस्या है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
DIY Pregnancy Test: शादी के बाद जल्द से जल्द मां बनना हर लड़की का सपना होता है। हालांकि आजकल की महिलाएं वर्किंग हैं और वो शादी करते ही जल्द बच्चा नहीं चाहती। लेकिन जब भी वो प्लान करती हैं अगर उस वक्त वो गर्भवती हो जाएं तो भला इससे अच्छी खबर और क्या हो सकती है? प्रेगनेंट होने का सबसे पहला संकेत होता है पीरियड्स न आना। हालांकि इससे पहले भी बॉडी में कई तरह से बदलाव होते हैं लेकिन वो बॉडी टू बॉडी अलग हो सकते हैं। अगर आप पीरियड होने तक का इंतजार नहीं करना चाहती हैं तो आप घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। इसके लिए आपको न ही प्रेगनेंसी किट खरीदने की जरूरत होगी और न ही कोई और महंगा सामान। आज हम आपको किचन में मौजूद चीजों से प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका बता रहे हैं जिसमें से एक विनेगर यानि कि सफेद सिरका भी है। एक बात याद रखिए कि जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके शरीर में 'ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रापिन' (एचसीजी) हॉर्मोन (HCG Hormones) बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन महिला के पेशाब या खून में आसानी से देखा जा सकता है। इसलिए प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए पेशाब या खून टेस्ट किया जाता है। - प्रेगनेंसी में HCG लेवल की अहमियत क्या है और लो या हाई एचसीजी लेवल किस तरह के संकेत देते हैं? आप ब्लीच से भी प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं, यह भी एक प्रेगनेंसी को चेक करने का बेस्ट DIY (DIY Pregnancy Test)है। इसके लिए एक कटोरी में थोड़ी सी ब्लीच लें और इसमें कुछ बूंदे पेशाब की मिलाएं। अगर इसमें झाग बनता है या बुलबुले उठते हैं तो आपकी प्रेगनेंसी कंफर्म हो सकती है लेकिन अगर कोई रिएक्शन नहीं होता है तो इसका मतलब आप प्रेगनेंट नहीं है। इस प्रयोग को खुली जगह पर जैसे कि बालकनी या छत पर करें। क्योंकि इससे गैस बनने का डर रहता है। कई महिलाएं बेकिंग सोडा के साथ भी प्रेगनेंसी का आजमाती हैं। बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट करना बहुत आसान है। इसके लिए भी आपको सेम प्रोसेस फॉलो करना है। एक कटोरी में थोड़ा सा बेकिंग सोडा लेने के बाद उसमें पेशाब की कुछ बूंदे डालें। अगर बेकिंग सोडा पेशाब के साथ कोई रिएक्शन करता है तो यह गर्भवती हो सकती हैं। Total Wellness is now just a click away.
DIY Pregnancy Test: शादी के बाद जल्द से जल्द मां बनना हर लड़की का सपना होता है। हालांकि आजकल की महिलाएं वर्किंग हैं और वो शादी करते ही जल्द बच्चा नहीं चाहती। लेकिन जब भी वो प्लान करती हैं अगर उस वक्त वो गर्भवती हो जाएं तो भला इससे अच्छी खबर और क्या हो सकती है? प्रेगनेंट होने का सबसे पहला संकेत होता है पीरियड्स न आना। हालांकि इससे पहले भी बॉडी में कई तरह से बदलाव होते हैं लेकिन वो बॉडी टू बॉडी अलग हो सकते हैं। अगर आप पीरियड होने तक का इंतजार नहीं करना चाहती हैं तो आप घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। इसके लिए आपको न ही प्रेगनेंसी किट खरीदने की जरूरत होगी और न ही कोई और महंगा सामान। आज हम आपको किचन में मौजूद चीजों से प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका बता रहे हैं जिसमें से एक विनेगर यानि कि सफेद सिरका भी है। एक बात याद रखिए कि जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके शरीर में 'ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रापिन' हॉर्मोन बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन महिला के पेशाब या खून में आसानी से देखा जा सकता है। इसलिए प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए पेशाब या खून टेस्ट किया जाता है। - प्रेगनेंसी में HCG लेवल की अहमियत क्या है और लो या हाई एचसीजी लेवल किस तरह के संकेत देते हैं? आप ब्लीच से भी प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं, यह भी एक प्रेगनेंसी को चेक करने का बेस्ट DIY है। इसके लिए एक कटोरी में थोड़ी सी ब्लीच लें और इसमें कुछ बूंदे पेशाब की मिलाएं। अगर इसमें झाग बनता है या बुलबुले उठते हैं तो आपकी प्रेगनेंसी कंफर्म हो सकती है लेकिन अगर कोई रिएक्शन नहीं होता है तो इसका मतलब आप प्रेगनेंट नहीं है। इस प्रयोग को खुली जगह पर जैसे कि बालकनी या छत पर करें। क्योंकि इससे गैस बनने का डर रहता है। कई महिलाएं बेकिंग सोडा के साथ भी प्रेगनेंसी का आजमाती हैं। बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट करना बहुत आसान है। इसके लिए भी आपको सेम प्रोसेस फॉलो करना है। एक कटोरी में थोड़ा सा बेकिंग सोडा लेने के बाद उसमें पेशाब की कुछ बूंदे डालें। अगर बेकिंग सोडा पेशाब के साथ कोई रिएक्शन करता है तो यह गर्भवती हो सकती हैं। Total Wellness is now just a click away.
Inflation: कोरोना महामारी के बाद से भारत के साथ दुनिया भर के लोग महंगाई से परेशान हैं। हाल के दिनों में रिकॉर्ड महंगाई बढ़ाने में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की भी अहम भूमिका है। इस युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिसने महंगाई को तेजी से बढ़ाने का काम किया है। वैसे तो महंगाई एक अकेला शब्द ही काफी है लेकिन इसके कई कंम्पोनेंट हैं जो हम सभी पर असर डालते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि कितने तरह की महंगाई हम सब को संकट में डालने का काम कर रहा है। 1. ईंधन की महंगाईः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद देश में पेट्रोल, डीजल, पीएनजी, सीएनजी और रसोई गैस के दाम तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली में रसोई सिलेंड 1000 रुपये के पार पहुंच गया है। देश के अधिकांश शहरों में पेट्रोल 100 के पार है। वहीं, मुंबई में पावर पेट्रोल 124. 80 रुपये मिल रहा है। ईंधन की महंगाई ने ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ी है। यह आम आदमी के बजट पर बड़ा बोझ बढ़ाने का काम किया है। 2. खाने-पीने की महंगाईः अनाज, सब्जियों, खाद्य तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से खुदरा महंगाई दर अप्रैल में 7. 79 फीसदी पर पहुंच गई है। थोक महंगाई भी रिकॉर्ड हाई पर है। इसके चलते खाने के तेल, ब्रेड, बिस्कुट से लेकर सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। मौजूदा दौर में खाने-पीने की महंगाई वह दूसरा घटक है जिसने आम आदमी को परेशान कर रखा है। 3. मेडिकल इन्फ्लेशनः कोरोना के बाद इलाज का खर्च काफी तेजी से बढ़ा है। अगर देश में मेडिकल इन्फ्लेशन को देंखे तो यह दुनिया के कई विकसित देशों से काफी अधिक है। इससे लोगों की परेशानी काफी बढ़ी है। कोरोना के बाद से दवा से लेकर अस्पताल का खर्च काफी बढ़ा है। 4. हाउहोल्ड इन्फ्लेशनः कोरोना से राहत के बाद लोगों की जिंदगी में बड़े बदलाव आए हैं। लोगों का रहन-सहन अब बदल गया है। लोग अब घूमने-फिरने, शॉपिंग, सिनेमा देखने आदि पर खर्च करने लगे हैं। हालांकि, कपड़े से लेकर जूते और सिनेमा हॉल में टिकटों के दाम पहले मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। यह भी परेशानी बढ़ाने का काम कर रहा है। 5. एजुकेशनल इंफ्लेशनः हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे स्कूल और कॉलेज में पढ़ाना चाहता है। हालांकि, स्कूल और कॉलेज के फीस में असमान बढ़ोतरी ने गार्जियन की चिंता बढ़ा दी है। बीते एक साल में एजुकेशन इन्फ्लेशन 10 से 20 फीसदी पहुंच चुकी है, जो हाउसहोल्ड इंफ्लेशन से दोगुना है। ऐसे में अपने बच्चे तो बेहतर शिक्षा देने में माता-पिता की हालत पतली हो गई है।
Inflation: कोरोना महामारी के बाद से भारत के साथ दुनिया भर के लोग महंगाई से परेशान हैं। हाल के दिनों में रिकॉर्ड महंगाई बढ़ाने में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की भी अहम भूमिका है। इस युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिसने महंगाई को तेजी से बढ़ाने का काम किया है। वैसे तो महंगाई एक अकेला शब्द ही काफी है लेकिन इसके कई कंम्पोनेंट हैं जो हम सभी पर असर डालते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि कितने तरह की महंगाई हम सब को संकट में डालने का काम कर रहा है। एक. ईंधन की महंगाईः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद देश में पेट्रोल, डीजल, पीएनजी, सीएनजी और रसोई गैस के दाम तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली में रसोई सिलेंड एक हज़ार रुपयापये के पार पहुंच गया है। देश के अधिकांश शहरों में पेट्रोल एक सौ के पार है। वहीं, मुंबई में पावर पेट्रोल एक सौ चौबीस. अस्सी रुपयापये मिल रहा है। ईंधन की महंगाई ने ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ी है। यह आम आदमी के बजट पर बड़ा बोझ बढ़ाने का काम किया है। दो. खाने-पीने की महंगाईः अनाज, सब्जियों, खाद्य तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से खुदरा महंगाई दर अप्रैल में सात. उन्यासी फीसदी पर पहुंच गई है। थोक महंगाई भी रिकॉर्ड हाई पर है। इसके चलते खाने के तेल, ब्रेड, बिस्कुट से लेकर सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। मौजूदा दौर में खाने-पीने की महंगाई वह दूसरा घटक है जिसने आम आदमी को परेशान कर रखा है। तीन. मेडिकल इन्फ्लेशनः कोरोना के बाद इलाज का खर्च काफी तेजी से बढ़ा है। अगर देश में मेडिकल इन्फ्लेशन को देंखे तो यह दुनिया के कई विकसित देशों से काफी अधिक है। इससे लोगों की परेशानी काफी बढ़ी है। कोरोना के बाद से दवा से लेकर अस्पताल का खर्च काफी बढ़ा है। चार. हाउहोल्ड इन्फ्लेशनः कोरोना से राहत के बाद लोगों की जिंदगी में बड़े बदलाव आए हैं। लोगों का रहन-सहन अब बदल गया है। लोग अब घूमने-फिरने, शॉपिंग, सिनेमा देखने आदि पर खर्च करने लगे हैं। हालांकि, कपड़े से लेकर जूते और सिनेमा हॉल में टिकटों के दाम पहले मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। यह भी परेशानी बढ़ाने का काम कर रहा है। पाँच. एजुकेशनल इंफ्लेशनः हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे स्कूल और कॉलेज में पढ़ाना चाहता है। हालांकि, स्कूल और कॉलेज के फीस में असमान बढ़ोतरी ने गार्जियन की चिंता बढ़ा दी है। बीते एक साल में एजुकेशन इन्फ्लेशन दस से बीस फीसदी पहुंच चुकी है, जो हाउसहोल्ड इंफ्लेशन से दोगुना है। ऐसे में अपने बच्चे तो बेहतर शिक्षा देने में माता-पिता की हालत पतली हो गई है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
आज (4 जून, शनिवार) को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। शनिवार को सूर्योदय पुष्य नक्षत्र में होगा, जो पूरे दिन रहेगा। शनिवार को पुष्य नक्षत्र होने से मित्र नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। शनि-पुष्य का योग ज्योतिष शास्त्र में बहुत ही शुभ बताया गया है। इस शुभ योग में शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय किए जा सकते हैं। मेष राशिफल (Aries Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि अपनी एनर्जी और उत्साह को सही दिशा में लगाने से आपके कार्य पूरे होंगे। इसका आपके जीवन पर भी पॉजिटिव असर पड़ेगा। अपने व्यस्त कार्यक्रम में से कुछ समय परिवार और दोस्तों के लिए भी निकालें। किसी भी विपरीत परिस्थिति में भावुक न हों। ठंडे दिमाग से सोच-समझकर फैसला लें, नहीं तो लक्ष्य नजरों से ओझल हो सकता है। सामान्य तौर पर, किसी करीबी के साथ संघर्ष संभव है। कार्यक्षेत्र में की गई मेहनत के अनुसार आपको सही परिणाम मिलेगा। पारिवारिक माहौल खुशनुमा हो सकता है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। वृषभ राशिफल (Taurus Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि कुछ पुराने मतभेदों और समस्याओं से आपको छुटकारा मिल सकता है। छात्रों के लिए नौकरी या साक्षात्कार में सफलता की संभावना है। थकान और तनाव आपकी दिनचर्या को डिस्टर्ब कर सकता है। इस समय अपना मनोबल मजबूत रखें और तनाव लेने की बजाय समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करें। यदि आप कोई नया बिजनेस शुरू करने जा रहे हैं उसके लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। कपल एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करेंगे। सर्दी-खांसी की समस्या बढ़ सकती है। मिथुन राशिफल (Gemini Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि करियर में नए अवसर मिलने से युवाओं को राहत मिल सकती है। जिम्मेदारियों के चलते आप व्यस्त हो सकते हैं। तनाव और थकान को अपने ऊपर हावी न होने दें। बच्चों पर पढ़ाई का दबाव रहेगा। अपने बच्चों को मजबूत रखना माता-पिता की जिम्मेदारी है। नौकरी चाहने वालों के लिए वर्तमान समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बिजनेस में बिजी होने के कारण आप पारिवारिक समारोहा का आनंद नहीं उठा पाएंगे। बासी और मसालेदार भोजन से परहेज करें। कर्क राशिफल (Cancer Daily horoscope) गणेश कहते हैं कि पिछले कुछ समय से चली आ रही चिंता और परेशानी का समाधान आज हो सकता है। काम का बोझ ज्यादा होने के बाद भी रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए भी समय निकालने में सफल रहेंगे। अति आत्मविश्वास आपको नुकसान पहुंचा सकता है। कोई भी काम जल्दबाजी में न करें। पैसा उधार लेने की बाद पर किसी से विवाद हो सकता है। हालाँकि, आप इस हालात से निपटने में सफल रहेंगे। आपको बिजनेस में मनचाहा परिणाम मिलने की उम्मीद है। घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। सिंह राशिफल (Leo Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि यह आपके सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का समय है। उचित ऊर्जा और पॉजिटिविटी बनाए रखें। साथ ही किसी बुजुर्ग व्यक्ति का मार्गदर्शन और सलाह आपके काम आएगी। बुरी आदतों वाले लोगों से दूर रहें, नहीं तो यह आपको परेशानी में डाल सकता है। पैसों पर ज्यादा भरोसा न करें और सारे फैसले खुद लें। यदि आपके पास व्यापार के लिए नई योजनाएं हैं, तो उन्हें लागू करने का समय आ गया है। प्रेम संबंधों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य के प्रति भी सचेत रहें। कन्या राशिफल (Virgo Daily horoscope) गणेशजी कहते हैं कि पिछले कुछ दिनों से चल रही व्यस्त दिनचर्या से आज आपको राहत मिल सकती है। कड़वे अनुभवों से सीख लेकर अपनी जीवनशैली में बदलाव करना आपके लिए अच्छा रहेगा। ईर्ष्या के कारण कुछ लोग आपके लिए निगेटिव स्थितियाँ पैदा कर सकते हैं। इन सब बातों पर ध्यान दिए बिना अपने काम में व्यस्त रहें। जल्दबाजी में निर्णय न लें। व्यापार की स्थिति अनुकूल रहेगी। पारिवारिक माहौल खुशनुमा रहेगा। गर्मी से दहशत का माहौल रहेगा। तुला राशिफल(Libra Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि परिवार में किसी विवाह योग्य सदस्य की बात पक्की हो सकती है। इस दौरान किसी भी तरह की यात्रा से बचें। जैसे-जैसे नुकसान की स्थिति बढ़ती जा रही है। कभी-कभी आपका संशयवादी स्वभाव कुछ रिश्तों को बर्बाद कर सकता है। साथ ही समय के साथ अपना व्यवहार बदलें। खर्च के साथ आमदनी की स्थिति बनी रह सकती है। घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वृश्चिक राशिफल (Scorpio Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि आज पैसा आने से खर्च की स्थिति भी जस की तस बनी रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जाने का कार्यक्रम होगा। कोई दुखद समाचार मिलने से मन थोड़ा निराश हो सकता है। अपने मूड पर नियंत्रण रखना जरूरी है। भाइयों से किसी विवाद की स्थिति में धैर्य और संयम से मामले को सुलझाने का प्रयास करें। घर का माहौल पॉजिटिव और अनुशासित रहेगा। पैरों में दर्द हो सकता है। धनु राशिफल (Sagittarius Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि काम के बावजूद अपने परिवार और रिश्तों के साथ कुछ समय बिताएं, यह आपको उत्साहित महसूस कराएगा। किसी करीबी से विवाद होने की संभावना है। अपने व्यवहार में लचीला रहें, क्योंकि जिद आपके काम को भ्रमित कर सकती है। जोखिम गतिविधि के परिणामस्वरूप कार्य की हानि हो सकती है। बिजनेस से जुड़े जरूरी काम दिन की शुरुआत में ही पूरे करने की कोशिश करें। कपल्स के रिश्तों में मधुरता आएगी। अत्यधिक परिश्रम से थकान और खराब स्वास्थ्य हो सकता है। मकर राशिफल (Capricorn Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि कोई भी विशेष कार्य करने से पहले अच्छी तरह से जांच कर लें। इससे आपको अनुकूल परिणाम मिलेंगे। आपके विनम्र स्वभाव के कारण लोग स्वाभाविक रूप से आपकी ओर आकर्षित होंगे। कोई करीबी ही आप पर आरोप लगा सकता है, जिससे आप पर निगेटिव असर हो सकता है। आध्यात्मिक गतिविधियों में कुछ समय व्यतीत करने से आप पॉजिटिविटी का अनुभव करेंगे। बिजनेस से जुड़े मामलों मे कुछ फेरबदल हो सकता है। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। सेहत अच्छी रह सकती है। कुंभ राशिफल (Aquarius Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि घर में कोई शुभ कार्य की योजना बनेगी। अतिथियों के सत्कार में समय व्यतीत होगा। समय अनुकूल है। अपनी पॉजिटिव और संतुलित सोच से आप हर काम को पूरा कर सकते हैं। फिजूलखर्ची न करें, नहीं तो बजट खराब होने पर आपको पछताना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों और कर्मचारियों का पूरा सहयोग मिलेगा। छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच गलतफहमी पैदा हो सकती है। मौजूदा माहौल कुछ निराशा पैदा कर सकता है। मीन राशिफल (Pisces Daily Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि काम बहुत ज्यादा हो सकता है, लेकिन सफलता पाने के उत्साह में आप थकान को भूल जाएंगे। युवाओं को उनकी मेहनत का अनुकूल परिणाम मिलेगा। सामाजिक संस्थाओं में भी आपका उचित योगदान रहेगा। रिश्तों को बनाए रखने के लिए धैर्य और समझ की जरूरत होती है। इस समय आपको कुछ आर्थिक समस्या हो सकती है। तनाव लेने के बजाय समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश करें। परिवार में किसी व्यक्ति की मौजूदगी से घर में खुशियों का माहौल बनेगा। स्वास्थ्य अच्छा रह सकता है। चिराग दारूवाला भारत में ज्योतिषियों के बीच प्रसिद्ध हैं। उनके पास 12+ से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह करियर, स्वास्थ्य, वित्त, व्यवसाय और स्वास्थ्य से संबंधित ज्योतिषीय सलाह देते हैं। उन्हें ज्योतिष जगत के हर क्षेत्र का गहरा ज्ञान है। उन्होंने कुंडली और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों में जबरदस्त महारत हासिल की है। चिराग दारूवाला वैदिक और पश्चिमी ज्योतिष, आई-चिंग, टैरो, अंकशास्त्र और यहां तक कि हस्तरेखा विज्ञान के सिद्धांतों को मिलाने के लिए जाने जाते हैं। इन सिद्धांतों का सही संयोजन उन्हें अत्यधिक सटीक और प्रासंगिक भविष्यवाणियां करने में सक्षम बनाता है।
आज को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। शनिवार को सूर्योदय पुष्य नक्षत्र में होगा, जो पूरे दिन रहेगा। शनिवार को पुष्य नक्षत्र होने से मित्र नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। शनि-पुष्य का योग ज्योतिष शास्त्र में बहुत ही शुभ बताया गया है। इस शुभ योग में शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय किए जा सकते हैं। मेष राशिफल गणेशजी कहते हैं कि अपनी एनर्जी और उत्साह को सही दिशा में लगाने से आपके कार्य पूरे होंगे। इसका आपके जीवन पर भी पॉजिटिव असर पड़ेगा। अपने व्यस्त कार्यक्रम में से कुछ समय परिवार और दोस्तों के लिए भी निकालें। किसी भी विपरीत परिस्थिति में भावुक न हों। ठंडे दिमाग से सोच-समझकर फैसला लें, नहीं तो लक्ष्य नजरों से ओझल हो सकता है। सामान्य तौर पर, किसी करीबी के साथ संघर्ष संभव है। कार्यक्षेत्र में की गई मेहनत के अनुसार आपको सही परिणाम मिलेगा। पारिवारिक माहौल खुशनुमा हो सकता है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। वृषभ राशिफल गणेशजी कहते हैं कि कुछ पुराने मतभेदों और समस्याओं से आपको छुटकारा मिल सकता है। छात्रों के लिए नौकरी या साक्षात्कार में सफलता की संभावना है। थकान और तनाव आपकी दिनचर्या को डिस्टर्ब कर सकता है। इस समय अपना मनोबल मजबूत रखें और तनाव लेने की बजाय समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करें। यदि आप कोई नया बिजनेस शुरू करने जा रहे हैं उसके लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। कपल एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करेंगे। सर्दी-खांसी की समस्या बढ़ सकती है। मिथुन राशिफल गणेशजी कहते हैं कि करियर में नए अवसर मिलने से युवाओं को राहत मिल सकती है। जिम्मेदारियों के चलते आप व्यस्त हो सकते हैं। तनाव और थकान को अपने ऊपर हावी न होने दें। बच्चों पर पढ़ाई का दबाव रहेगा। अपने बच्चों को मजबूत रखना माता-पिता की जिम्मेदारी है। नौकरी चाहने वालों के लिए वर्तमान समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बिजनेस में बिजी होने के कारण आप पारिवारिक समारोहा का आनंद नहीं उठा पाएंगे। बासी और मसालेदार भोजन से परहेज करें। कर्क राशिफल गणेश कहते हैं कि पिछले कुछ समय से चली आ रही चिंता और परेशानी का समाधान आज हो सकता है। काम का बोझ ज्यादा होने के बाद भी रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए भी समय निकालने में सफल रहेंगे। अति आत्मविश्वास आपको नुकसान पहुंचा सकता है। कोई भी काम जल्दबाजी में न करें। पैसा उधार लेने की बाद पर किसी से विवाद हो सकता है। हालाँकि, आप इस हालात से निपटने में सफल रहेंगे। आपको बिजनेस में मनचाहा परिणाम मिलने की उम्मीद है। घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। सिंह राशिफल गणेशजी कहते हैं कि यह आपके सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का समय है। उचित ऊर्जा और पॉजिटिविटी बनाए रखें। साथ ही किसी बुजुर्ग व्यक्ति का मार्गदर्शन और सलाह आपके काम आएगी। बुरी आदतों वाले लोगों से दूर रहें, नहीं तो यह आपको परेशानी में डाल सकता है। पैसों पर ज्यादा भरोसा न करें और सारे फैसले खुद लें। यदि आपके पास व्यापार के लिए नई योजनाएं हैं, तो उन्हें लागू करने का समय आ गया है। प्रेम संबंधों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य के प्रति भी सचेत रहें। कन्या राशिफल गणेशजी कहते हैं कि पिछले कुछ दिनों से चल रही व्यस्त दिनचर्या से आज आपको राहत मिल सकती है। कड़वे अनुभवों से सीख लेकर अपनी जीवनशैली में बदलाव करना आपके लिए अच्छा रहेगा। ईर्ष्या के कारण कुछ लोग आपके लिए निगेटिव स्थितियाँ पैदा कर सकते हैं। इन सब बातों पर ध्यान दिए बिना अपने काम में व्यस्त रहें। जल्दबाजी में निर्णय न लें। व्यापार की स्थिति अनुकूल रहेगी। पारिवारिक माहौल खुशनुमा रहेगा। गर्मी से दहशत का माहौल रहेगा। तुला राशिफल गणेशजी कहते हैं कि परिवार में किसी विवाह योग्य सदस्य की बात पक्की हो सकती है। इस दौरान किसी भी तरह की यात्रा से बचें। जैसे-जैसे नुकसान की स्थिति बढ़ती जा रही है। कभी-कभी आपका संशयवादी स्वभाव कुछ रिश्तों को बर्बाद कर सकता है। साथ ही समय के साथ अपना व्यवहार बदलें। खर्च के साथ आमदनी की स्थिति बनी रह सकती है। घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वृश्चिक राशिफल गणेशजी कहते हैं कि आज पैसा आने से खर्च की स्थिति भी जस की तस बनी रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जाने का कार्यक्रम होगा। कोई दुखद समाचार मिलने से मन थोड़ा निराश हो सकता है। अपने मूड पर नियंत्रण रखना जरूरी है। भाइयों से किसी विवाद की स्थिति में धैर्य और संयम से मामले को सुलझाने का प्रयास करें। घर का माहौल पॉजिटिव और अनुशासित रहेगा। पैरों में दर्द हो सकता है। धनु राशिफल गणेशजी कहते हैं कि काम के बावजूद अपने परिवार और रिश्तों के साथ कुछ समय बिताएं, यह आपको उत्साहित महसूस कराएगा। किसी करीबी से विवाद होने की संभावना है। अपने व्यवहार में लचीला रहें, क्योंकि जिद आपके काम को भ्रमित कर सकती है। जोखिम गतिविधि के परिणामस्वरूप कार्य की हानि हो सकती है। बिजनेस से जुड़े जरूरी काम दिन की शुरुआत में ही पूरे करने की कोशिश करें। कपल्स के रिश्तों में मधुरता आएगी। अत्यधिक परिश्रम से थकान और खराब स्वास्थ्य हो सकता है। मकर राशिफल गणेशजी कहते हैं कि कोई भी विशेष कार्य करने से पहले अच्छी तरह से जांच कर लें। इससे आपको अनुकूल परिणाम मिलेंगे। आपके विनम्र स्वभाव के कारण लोग स्वाभाविक रूप से आपकी ओर आकर्षित होंगे। कोई करीबी ही आप पर आरोप लगा सकता है, जिससे आप पर निगेटिव असर हो सकता है। आध्यात्मिक गतिविधियों में कुछ समय व्यतीत करने से आप पॉजिटिविटी का अनुभव करेंगे। बिजनेस से जुड़े मामलों मे कुछ फेरबदल हो सकता है। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। सेहत अच्छी रह सकती है। कुंभ राशिफल गणेशजी कहते हैं कि घर में कोई शुभ कार्य की योजना बनेगी। अतिथियों के सत्कार में समय व्यतीत होगा। समय अनुकूल है। अपनी पॉजिटिव और संतुलित सोच से आप हर काम को पूरा कर सकते हैं। फिजूलखर्ची न करें, नहीं तो बजट खराब होने पर आपको पछताना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों और कर्मचारियों का पूरा सहयोग मिलेगा। छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच गलतफहमी पैदा हो सकती है। मौजूदा माहौल कुछ निराशा पैदा कर सकता है। मीन राशिफल गणेशजी कहते हैं कि काम बहुत ज्यादा हो सकता है, लेकिन सफलता पाने के उत्साह में आप थकान को भूल जाएंगे। युवाओं को उनकी मेहनत का अनुकूल परिणाम मिलेगा। सामाजिक संस्थाओं में भी आपका उचित योगदान रहेगा। रिश्तों को बनाए रखने के लिए धैर्य और समझ की जरूरत होती है। इस समय आपको कुछ आर्थिक समस्या हो सकती है। तनाव लेने के बजाय समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश करें। परिवार में किसी व्यक्ति की मौजूदगी से घर में खुशियों का माहौल बनेगा। स्वास्थ्य अच्छा रह सकता है। चिराग दारूवाला भारत में ज्योतिषियों के बीच प्रसिद्ध हैं। उनके पास बारह+ से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह करियर, स्वास्थ्य, वित्त, व्यवसाय और स्वास्थ्य से संबंधित ज्योतिषीय सलाह देते हैं। उन्हें ज्योतिष जगत के हर क्षेत्र का गहरा ज्ञान है। उन्होंने कुंडली और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों में जबरदस्त महारत हासिल की है। चिराग दारूवाला वैदिक और पश्चिमी ज्योतिष, आई-चिंग, टैरो, अंकशास्त्र और यहां तक कि हस्तरेखा विज्ञान के सिद्धांतों को मिलाने के लिए जाने जाते हैं। इन सिद्धांतों का सही संयोजन उन्हें अत्यधिक सटीक और प्रासंगिक भविष्यवाणियां करने में सक्षम बनाता है।
IPS Navjot Simi (Photo Courtesy- Instagram) डॉक्टर नवजोत सिमी एक मशहूर आईपीएस ऑफिसर हैं। वह अपनी खूबसूरती को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं। उन्होंने डॉक्टरी छोड़ आईपीएस की राह चुनी। उनके पास बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की डिग्री है। यूपीएससी की परीक्षा में दूसरी बार में उन्हें सफलता हासिल हुई। साल 2017 में उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा पास की थी। नवजोत सिमी ने 735वीं रैंक हासिल की थी। आईपीएस बनने के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला। सोशल मीडिया पर भी नवजोत काफी पॉपुलर हैं। वह अक्सर अपनी तस्वीरें व वीडियो पोस्ट करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उन्हें करीब 12 लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।
IPS Navjot Simi डॉक्टर नवजोत सिमी एक मशहूर आईपीएस ऑफिसर हैं। वह अपनी खूबसूरती को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं। उन्होंने डॉक्टरी छोड़ आईपीएस की राह चुनी। उनके पास बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की डिग्री है। यूपीएससी की परीक्षा में दूसरी बार में उन्हें सफलता हासिल हुई। साल दो हज़ार सत्रह में उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा पास की थी। नवजोत सिमी ने सात सौ पैंतीसवीं रैंक हासिल की थी। आईपीएस बनने के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला। सोशल मीडिया पर भी नवजोत काफी पॉपुलर हैं। वह अक्सर अपनी तस्वीरें व वीडियो पोस्ट करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उन्हें करीब बारह लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।
पच्ची करें हम मोतियों के हार चांदनी में रोव करें बाग़ में भैया के जायें है वह कुसुमों से भरा बन्धु - नेह से उर भरें चान्दनी में रोव करें तात के उद्यान जायें है वहां मखमल बिछा मधुर गीतों को वरें चान्दनी में रोव करें नाव में डल झील जायें देख लें बाग़- निशात शा' र' में प्याले भरें चान्दनी में रोव करें । गान तथा एक विशेष प्रकार के नृत्य का संयुक्त रूप । रोव प्रायः महिलायें ही करती हैं। शा'र : शालिमार का संक्षिप्त रूप ।
पच्ची करें हम मोतियों के हार चांदनी में रोव करें बाग़ में भैया के जायें है वह कुसुमों से भरा बन्धु - नेह से उर भरें चान्दनी में रोव करें तात के उद्यान जायें है वहां मखमल बिछा मधुर गीतों को वरें चान्दनी में रोव करें नाव में डल झील जायें देख लें बाग़- निशात शा' र' में प्याले भरें चान्दनी में रोव करें । गान तथा एक विशेष प्रकार के नृत्य का संयुक्त रूप । रोव प्रायः महिलायें ही करती हैं। शा'र : शालिमार का संक्षिप्त रूप ।
भोपाल, 12 सितंबर मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पिटाई और फिर एक वाहन के पीछे बांधकर घसीटे जाने से 40 वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति की मौत की एक पखवाड़े पहले हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवार की हरसंभव सहायता करेगी। उन्होंने कहा कि कन्हैयालाल के दो भाइयों के मकान बनवाने का फैसला भी सरकार ने लिया है और इसके अतिरिक्त उन्हें दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि भी दी जाएगी। चौहान ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पहले ही सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
भोपाल, बारह सितंबर मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पिटाई और फिर एक वाहन के पीछे बांधकर घसीटे जाने से चालीस वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति की मौत की एक पखवाड़े पहले हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवार की हरसंभव सहायता करेगी। उन्होंने कहा कि कन्हैयालाल के दो भाइयों के मकान बनवाने का फैसला भी सरकार ने लिया है और इसके अतिरिक्त उन्हें दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि भी दी जाएगी। चौहान ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पहले ही सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
Posted On: पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी पावरग्रिड जबलपुर ट्रांसमिशन लिमिटेड ने विंध्याचल पूलिंग स्टेशन- जबलपुर पूलिंग स्टेशन 765 किलोवाट की डबल सर्किट पारेषण लाइन को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह परियोजना 'विंध्याचल-v से संबंधित पारेषण प्रणाली सुदृढ़ीकरण' का एक हिस्सा है और इसे बनाओ, अपनाओ, चलाओ एवं रखरखाव करो (बूम) के आधार पर स्थापित किया गया है। पारेषण प्रणाली का वाणिज्यिक परिचालन 1 जनवरी, 2019 से ही जारी है। 765 केवी की डायरेक्ट करेंट पारेषण लाइन दरअसल सबसे लम्बी पारेषण लाइनों में से एक है जो 750 सर्किट किलोमीटर से भी अधिक लम्बी है। यह पारेषण लाइन मध्य प्रदेश के 7 जिलों से होकर गुजरती है। निर्माण के दौरान किसी विशिष्ट मार्ग से गुजरने के अधिकार में अड़चनें आने सहित उपद्रवियों द्वारा तरह-तरह की बाधाएं खड़ी करने के बावजूद प्रशासन की ओर से मिले सहयोग सहित समस्त हितधारकों द्वारा समुचित तालमेल स्थापित करने की बदौलत इस पारेषण लाइन को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया। इस परियोजना की समीक्षा 'प्रगति' के तहत माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई और इसके बाद इसे चालू करने के लिए पीएमजी/प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और विद्युत मंत्रालय द्वारा नियमित रूप से इसकी निगरानी की गई। पारेषण प्रणाली से विश्वसनीयता एवं सुरक्षा के साथ विद्युत आपूर्ति सुलभ कराई जाती है। पारेषण लाइन के चालू होने पर 2500 मेगावाट से भी अधिक विद्युत प्रवाह दर्ज किया गया है। जबलपुर पूलिंग स्टेशन से परे विद्युत वितरण अंतर-राज्य पारेषण प्रणाली के तहत मौजूदा/नियोजित पारेषण नेटवर्क के जरिये किया जाता है।
Posted On: पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी पावरग्रिड जबलपुर ट्रांसमिशन लिमिटेड ने विंध्याचल पूलिंग स्टेशन- जबलपुर पूलिंग स्टेशन सात सौ पैंसठ किलोग्रामवाट की डबल सर्किट पारेषण लाइन को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह परियोजना 'विंध्याचल-v से संबंधित पारेषण प्रणाली सुदृढ़ीकरण' का एक हिस्सा है और इसे बनाओ, अपनाओ, चलाओ एवं रखरखाव करो के आधार पर स्थापित किया गया है। पारेषण प्रणाली का वाणिज्यिक परिचालन एक जनवरी, दो हज़ार उन्नीस से ही जारी है। सात सौ पैंसठ केवी की डायरेक्ट करेंट पारेषण लाइन दरअसल सबसे लम्बी पारेषण लाइनों में से एक है जो सात सौ पचास सर्किट किलोमीटर से भी अधिक लम्बी है। यह पारेषण लाइन मध्य प्रदेश के सात जिलों से होकर गुजरती है। निर्माण के दौरान किसी विशिष्ट मार्ग से गुजरने के अधिकार में अड़चनें आने सहित उपद्रवियों द्वारा तरह-तरह की बाधाएं खड़ी करने के बावजूद प्रशासन की ओर से मिले सहयोग सहित समस्त हितधारकों द्वारा समुचित तालमेल स्थापित करने की बदौलत इस पारेषण लाइन को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया। इस परियोजना की समीक्षा 'प्रगति' के तहत माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई और इसके बाद इसे चालू करने के लिए पीएमजी/प्रधानमंत्री कार्यालय और विद्युत मंत्रालय द्वारा नियमित रूप से इसकी निगरानी की गई। पारेषण प्रणाली से विश्वसनीयता एवं सुरक्षा के साथ विद्युत आपूर्ति सुलभ कराई जाती है। पारेषण लाइन के चालू होने पर दो हज़ार पाँच सौ मेगावाट से भी अधिक विद्युत प्रवाह दर्ज किया गया है। जबलपुर पूलिंग स्टेशन से परे विद्युत वितरण अंतर-राज्य पारेषण प्रणाली के तहत मौजूदा/नियोजित पारेषण नेटवर्क के जरिये किया जाता है।
आगरा। बारिश और ओलावृष्टी प्रभावित किसानों को सरकार द्वारा दिये जाने वाले मुआवजा के फार्म जमा न किये जाने से आक्रोशित किसानों ने उप निदेशक कृषि कार्यालय पर जमकर हंगामा काटा और अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए नारेबाजी की। किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही किसान नेता मोहन सिंह चाहर मौके पर पहुँच गए। विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों के फॉर्म ना लिए जाने पर उन्होंने उच्च अधिकारियों से फोन पर वार्ता की और अपनी नाराजगी जाहिर की। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कार्यालय के अंदर बैठे कृषि अधिकारियों ने किसानों के फॉर्म जमा किए गए। उप निदेशक कृषि कार्यालय पर हंगामा कर रहे किसानों का कहना था कि सभी कर्मचारी बाहर से विभाग के गेट पर ताला डाल कर अंदर बैठे हुए थे। किसानों ने जब बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित खेती के मुआवजे के फॉर्म जमा करने की बात कही तो उन्होंने साफ मना कर दिया। इसी कारण आक्रोशित होकर किसानों ने विभाग के बाहर जमकर हंगामा काटा। किसानों का कहना था कि सभी पीड़ित किसान बाह, पिनाहट, फतेहाबाद, खेरागढ़, एत्मादपुर, अकोला से आये है। बारिश और ओलावृष्टी से इन किसानों की फसल बर्बाद होने से सभी दुखी हैं लेकिन उप निदेशक कृषि कार्यालय पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी कोई सुनवाई ना कर उनके जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। मौके पर पहुँचे भारतीय किसान संघ प्रान्त अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने फसल बर्बादी से दुखी किसानों की मदद न करने पर उप निदेशक कृषि महेंद्र सिंह और जिला कृषि अधिकारी डॉ रामप्रवेश वर्मा से फोन पर वार्ता कर नाराजगी व्यक्त की। कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों ने किसानों के फॉर्म जमा किये। किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने मांग की कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिया जाय।
आगरा। बारिश और ओलावृष्टी प्रभावित किसानों को सरकार द्वारा दिये जाने वाले मुआवजा के फार्म जमा न किये जाने से आक्रोशित किसानों ने उप निदेशक कृषि कार्यालय पर जमकर हंगामा काटा और अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए नारेबाजी की। किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही किसान नेता मोहन सिंह चाहर मौके पर पहुँच गए। विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों के फॉर्म ना लिए जाने पर उन्होंने उच्च अधिकारियों से फोन पर वार्ता की और अपनी नाराजगी जाहिर की। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कार्यालय के अंदर बैठे कृषि अधिकारियों ने किसानों के फॉर्म जमा किए गए। उप निदेशक कृषि कार्यालय पर हंगामा कर रहे किसानों का कहना था कि सभी कर्मचारी बाहर से विभाग के गेट पर ताला डाल कर अंदर बैठे हुए थे। किसानों ने जब बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित खेती के मुआवजे के फॉर्म जमा करने की बात कही तो उन्होंने साफ मना कर दिया। इसी कारण आक्रोशित होकर किसानों ने विभाग के बाहर जमकर हंगामा काटा। किसानों का कहना था कि सभी पीड़ित किसान बाह, पिनाहट, फतेहाबाद, खेरागढ़, एत्मादपुर, अकोला से आये है। बारिश और ओलावृष्टी से इन किसानों की फसल बर्बाद होने से सभी दुखी हैं लेकिन उप निदेशक कृषि कार्यालय पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी कोई सुनवाई ना कर उनके जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। मौके पर पहुँचे भारतीय किसान संघ प्रान्त अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने फसल बर्बादी से दुखी किसानों की मदद न करने पर उप निदेशक कृषि महेंद्र सिंह और जिला कृषि अधिकारी डॉ रामप्रवेश वर्मा से फोन पर वार्ता कर नाराजगी व्यक्त की। कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों ने किसानों के फॉर्म जमा किये। किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने मांग की कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिया जाय।
पर रखने के लिये मशीन को इशारा करते जाना है। गरमी में भोम की तरह मुलायम लोहे के टुकड़ों के सांचों में सट जाने पर कई-कई हजार मन के भारी हथौड़े इस गरम लोहे पर गिर कर उसे वांछित वस्तु का रूप दे देते हैं। इन भारी-भारी मशीनों और सांचों की सहायता से स्त्रियां भी मोटरों के पुरजों को कुछ पलों में बनाकर संडारियों से ऐमें उछाल-उछाल कर फेंक रही थीं मानों खौलते घी की कढ़ाई में से पूरियां तल कर परात में डालती जा रही हों। तेल की तरह पिघले हुये लोहे को भट्ठी से सांचे तक ले जाने का काम मशीनें कर रही थीं। कारखानों में लगातार तैयार होते हुये भाग जंजीरों की पैड़ों ( बैल्ट पर कारीगरों के सामने से गुजरते जाते हैं। प्रत्येक कारीगर उन पर अपनाअपना काम करता जाता है । कुमारप्पा और कुछ दूसरे साथी योरुप और अमरीका के और भी ऐसे कारसाने देख चुके थे। उनका कहना था कि सोवियत के कारखानों में पैड़ की चाल अपेक्षाकृत धीमी है । इस से कारीगर को जल्बी घकान तो अनुभव नहीं होती परन्तु इसे कौशल की कमी भी समझा जा सकता है। इस से पैदावार में कुछ कमी भी रह सकती है । सोवियत मैनेजर का विचार है कि पेड़ की तेजी से पूंजीवादी कारखानेदार को तो लाभ होता है क्योंकि वह नियमित समय में अधिक पैदावार कर सकता है। अति परिश्रम से मजदूर के बीमार हो जाने पर पूंजीपति पर कोई जिम्मेवारी नहीं होती। इस कारखाने पर तो सब जिम्मेवारियां हैं। पैड़ की चाल कितनी होनी चाहिये, यह निर्णय पूँजीवादी कारखाने में मजदूर नही करते सोवियत में मजदूर स्वयं इसका निश्चय करते हैं । कारखने के मजदूरों में आतंक और दहशत का भाव नहीं जान पड़ता था। उनके चेहरे निश्चित और प्रसन्न थे बल्कि यही देखकर आश्चर्य हुआ कि स्त्री-पुरुष मजदूरों की एक अच्छी-खासी टोली कौतुहल में हम लोगों के साथ साथ चल रही थी। वे लोग हमारे दुभाषिये की मारफत हमसे अनेक प्रश्न पूछ रहे थे। उन्होंने वियाना शान्ति कांग्रेस के बारे में प्रश्न किये। एक युवति कारीगर ने विश्व शान्ति के लिये अपील के रूप में हमें एक व्याख्यान भी दे डाला । कारखाने के प्रत्येक विभाग में अच्छे और सस्ते भोजन की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त हाथ मुंह धोने और दूसरी हाजितें रफ़ा करने के लिये भी सुविधा है, गर्म और ठंडा पानी चालू रहता है। यह स्थान स्फटिक की भांति चमचमाते तो नहीं दिखाई दिये परन्तु दुर्गन्ध नहीं थी। प्रत्येक विभाग में
पर रखने के लिये मशीन को इशारा करते जाना है। गरमी में भोम की तरह मुलायम लोहे के टुकड़ों के सांचों में सट जाने पर कई-कई हजार मन के भारी हथौड़े इस गरम लोहे पर गिर कर उसे वांछित वस्तु का रूप दे देते हैं। इन भारी-भारी मशीनों और सांचों की सहायता से स्त्रियां भी मोटरों के पुरजों को कुछ पलों में बनाकर संडारियों से ऐमें उछाल-उछाल कर फेंक रही थीं मानों खौलते घी की कढ़ाई में से पूरियां तल कर परात में डालती जा रही हों। तेल की तरह पिघले हुये लोहे को भट्ठी से सांचे तक ले जाने का काम मशीनें कर रही थीं। कारखानों में लगातार तैयार होते हुये भाग जंजीरों की पैड़ों ( बैल्ट पर कारीगरों के सामने से गुजरते जाते हैं। प्रत्येक कारीगर उन पर अपनाअपना काम करता जाता है । कुमारप्पा और कुछ दूसरे साथी योरुप और अमरीका के और भी ऐसे कारसाने देख चुके थे। उनका कहना था कि सोवियत के कारखानों में पैड़ की चाल अपेक्षाकृत धीमी है । इस से कारीगर को जल्बी घकान तो अनुभव नहीं होती परन्तु इसे कौशल की कमी भी समझा जा सकता है। इस से पैदावार में कुछ कमी भी रह सकती है । सोवियत मैनेजर का विचार है कि पेड़ की तेजी से पूंजीवादी कारखानेदार को तो लाभ होता है क्योंकि वह नियमित समय में अधिक पैदावार कर सकता है। अति परिश्रम से मजदूर के बीमार हो जाने पर पूंजीपति पर कोई जिम्मेवारी नहीं होती। इस कारखाने पर तो सब जिम्मेवारियां हैं। पैड़ की चाल कितनी होनी चाहिये, यह निर्णय पूँजीवादी कारखाने में मजदूर नही करते सोवियत में मजदूर स्वयं इसका निश्चय करते हैं । कारखने के मजदूरों में आतंक और दहशत का भाव नहीं जान पड़ता था। उनके चेहरे निश्चित और प्रसन्न थे बल्कि यही देखकर आश्चर्य हुआ कि स्त्री-पुरुष मजदूरों की एक अच्छी-खासी टोली कौतुहल में हम लोगों के साथ साथ चल रही थी। वे लोग हमारे दुभाषिये की मारफत हमसे अनेक प्रश्न पूछ रहे थे। उन्होंने वियाना शान्ति कांग्रेस के बारे में प्रश्न किये। एक युवति कारीगर ने विश्व शान्ति के लिये अपील के रूप में हमें एक व्याख्यान भी दे डाला । कारखाने के प्रत्येक विभाग में अच्छे और सस्ते भोजन की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त हाथ मुंह धोने और दूसरी हाजितें रफ़ा करने के लिये भी सुविधा है, गर्म और ठंडा पानी चालू रहता है। यह स्थान स्फटिक की भांति चमचमाते तो नहीं दिखाई दिये परन्तु दुर्गन्ध नहीं थी। प्रत्येक विभाग में
इसके बाद ट्रंप ने थेरेसा मे से भी फोन पर बात की। सीरिया के डौमा में सात अप्रैल को कथित तौर पर सीरियाई सुरक्षाबलों ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था और यह कार्रवाई उसी का नतीजा है। इससे पहले ट्रंप ने ट्वीट कर सीरिया के ठिकानों पर सुनियोजित हमले की सराहना भी की थी। उन्होंने इस संयुक्त कार्रवाई के लिए ब्रिटेन और फ्रांस का आभार भी जताया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शनिवार को अमेरिका के नेतृत्व में सीरिया में हवाई हमलों पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करने का आह्वान किया था।
इसके बाद ट्रंप ने थेरेसा मे से भी फोन पर बात की। सीरिया के डौमा में सात अप्रैल को कथित तौर पर सीरियाई सुरक्षाबलों ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था और यह कार्रवाई उसी का नतीजा है। इससे पहले ट्रंप ने ट्वीट कर सीरिया के ठिकानों पर सुनियोजित हमले की सराहना भी की थी। उन्होंने इस संयुक्त कार्रवाई के लिए ब्रिटेन और फ्रांस का आभार भी जताया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शनिवार को अमेरिका के नेतृत्व में सीरिया में हवाई हमलों पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करने का आह्वान किया था।
1077 करोड़ के 48 निवेश प्रस्तावों को मिली मंजूरी : राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद ने सूबे में 1077 करोड़ के 48 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पिछले दिनों विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। पर्षद की 40वीं बैठक में 20 मई की बैठक को संपुष्ट किया गया। लंबे अंतराल के बाद हुई इस बैठक में उद्योग विभाग के प्रधान सचिव और उद्योग निदेशक भी मौजूद थे। पर्षद की बैठक में जिन 48 प्रस्तावों को पहले स्टेज की सहमति दी गई, उनमें मुजफ्फरपुर और गोपालगंज में इथेनॉल प्रोजेक्ट शामिल हैं। मुजफ्फरपुर में अनाज आधारित प्रोजेक्ट में 141. 60 करोड़ जबकि गोपालगंज में 136 करोड़ का निवेश होगा। बियाडा मुजफ्फरपुर में 85 करोड़ से बिस्किट फैक्ट्री, 74 करोड़ की लागत से न्यूट्रिशन पाउडर और 87 करोड़ की लागत से टोमैटो कैचअप कारखाना लगाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिली। इसके अलावा 12 करोड़ की लागत से दरभंगा में 70 बेड का अस्पताल स्थापित होगा। इसी तरह गया में 12 करोड़ और भागलपुर में 7. 78 करोड़ की लागत से बनने वाले होटल को भी मंजूरी मिली। स्वीकृत योजनाओं में समस्तीपुर में 5 करोड़ और सीतामढ़ी में 3. 19 करोड़ की मखान प्रोसेसिंग यूनिट भी इस प्रस्ताव में शामिल है। पर्षद ने चावल मिल, पेट्रोलियम कोक, सर्जिकल बैंडेज, पीवीसी पाइप, आटा-चावल मिल, इलेक्ट्रिक रेसिस्टेंस वेल्डेड ट्यूब्स, मखान, वोवेन फैब्रिक सिरप-टैबलेट, नूडल्स, बिस्किट, ब्रेड-कूकिज-केक-पेस्ट्री-रस्क ब्रेड-बन्स की फैक्ट्री प्रस्तावों पर भी सहमति दी। स्नैक्स, मस्टर्ड ऑयल, प्लास्टर ऑफ पेरिस, साल्टेड नमकीन, जूट बैग, स्वीट्स-नमकीन, नोटबुक, यूरिन बैग, वर्मिसेल के प्रस्ताव मंजूर हुए।
एक हज़ार सतहत्तर करोड़ के अड़तालीस निवेश प्रस्तावों को मिली मंजूरी : राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद ने सूबे में एक हज़ार सतहत्तर करोड़ के अड़तालीस निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पिछले दिनों विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। पर्षद की चालीसवीं बैठक में बीस मई की बैठक को संपुष्ट किया गया। लंबे अंतराल के बाद हुई इस बैठक में उद्योग विभाग के प्रधान सचिव और उद्योग निदेशक भी मौजूद थे। पर्षद की बैठक में जिन अड़तालीस प्रस्तावों को पहले स्टेज की सहमति दी गई, उनमें मुजफ्फरपुर और गोपालगंज में इथेनॉल प्रोजेक्ट शामिल हैं। मुजफ्फरपुर में अनाज आधारित प्रोजेक्ट में एक सौ इकतालीस. साठ करोड़ जबकि गोपालगंज में एक सौ छत्तीस करोड़ का निवेश होगा। बियाडा मुजफ्फरपुर में पचासी करोड़ से बिस्किट फैक्ट्री, चौहत्तर करोड़ की लागत से न्यूट्रिशन पाउडर और सत्तासी करोड़ की लागत से टोमैटो कैचअप कारखाना लगाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिली। इसके अलावा बारह करोड़ की लागत से दरभंगा में सत्तर बेड का अस्पताल स्थापित होगा। इसी तरह गया में बारह करोड़ और भागलपुर में सात. अठहत्तर करोड़ की लागत से बनने वाले होटल को भी मंजूरी मिली। स्वीकृत योजनाओं में समस्तीपुर में पाँच करोड़ और सीतामढ़ी में तीन. उन्नीस करोड़ की मखान प्रोसेसिंग यूनिट भी इस प्रस्ताव में शामिल है। पर्षद ने चावल मिल, पेट्रोलियम कोक, सर्जिकल बैंडेज, पीवीसी पाइप, आटा-चावल मिल, इलेक्ट्रिक रेसिस्टेंस वेल्डेड ट्यूब्स, मखान, वोवेन फैब्रिक सिरप-टैबलेट, नूडल्स, बिस्किट, ब्रेड-कूकिज-केक-पेस्ट्री-रस्क ब्रेड-बन्स की फैक्ट्री प्रस्तावों पर भी सहमति दी। स्नैक्स, मस्टर्ड ऑयल, प्लास्टर ऑफ पेरिस, साल्टेड नमकीन, जूट बैग, स्वीट्स-नमकीन, नोटबुक, यूरिन बैग, वर्मिसेल के प्रस्ताव मंजूर हुए।
इसे काव्य तो नहीं कह सकते, एक प्रहेलिकामय रचना है। अनुपान तथा पथ्यापथ्य आयुर्वेदीय चिकित्सा में अनुपान तथा पथ्यापथ्य का विशेष महत्व है । अतः इन पदों पर भी वाङ्मय की रचना समय-समय पर हुई है । अनुपान के विषय में निम्नांकित ग्रन्थ उल्लेखनीय हैं१. अनुपानमन्जरी - विश्रामकृत यह ग्रन्थ १९७२ में सम्पादित होकर गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय से प्रकाशित हुआ है। आचार्य विश्राम कच्छप्रदेश ( गुजरात ) के अंजार नामक नगर के निवासी थे । इनके दो ग्रंथ प्रसिद्ध हैं अनुपानमंजरी और व्याधिनिग्रह । ये दोनों ग्रन्थ १८वीं शती के अन्तिम चरण में लिखे गये । यह ग्रन्थ पांच समुद्देशों में बिभक्त है। इसमें अहिफेन, दन्तीबीज, भंगा, यशद आदि के साथ प्लेग का भी उल्लेख है। इसमें सामान्य अनुपान का विवरण न होकर धातु-उपधातु तथा विषों के विकारों की शान्ति के लिए सामान्य प्रयोग बतलाये गये हैं । इन अनुपानों का यदि सेवन कराया जाय तो ये विकार उत्पन्न नहीं होंगे और यदि उत्पन्न हुये हैं तो शान्त हो जायेंगे । २. अनुपानतरंगिणी - रघुनाथप्रसाद ३. अनुपान विधि - श्यामसुन्दराचार्य वैश्य ( श्यामसुन्दर रसायनशाला, वाराणसी द्वारा प्रकाशित ) ४. अनुपानकल्पतरु - जगन्नाथप्रसाद शुक्ल ५. अनुपानदर्पण पथ्यापथ्य के सम्बन्ध में निम्नांकित ग्रन्थ प्रमुख हैं१. पथ्यापथ्य द्विवेदिकेशवप्रसाद शर्मा विरचित पथ्यापथ्य भाषाटीकासहित खेमराज श्रीकृष्णदास, बम्बई से सं० १९५३ में प्रकाशित हुआ है । ग्रन्थ या पुष्पिका में कहीं लेखक का नाम नहीं है । का० हि० वि०, ( सं० २७११ ) पाण्डुलिपि में लेखक का नाम शिवदास दिया है - ' इति श्रीशिवदासविरचिते सर्वरोगे पथ्यापथ्याधिकारः ।' इसका लिपिकाल सं० १९१९ है । यहीं की पाण्डुलिपि सं० ३७०८ तथा ३७५३ का लिपिकाल क्रमशः सं० १८७२ और सं० १८७१ है । ये दोनों राजस्थान ( रनथंभौर ) के निकट माधवपुर में लिखित हैं । १ अनुपानमंजरी सं० १८२४ में तथा व्याधिनिग्रह सं० १८३९ में लिखा गया । २. धातुस्तथोपधातुश्च विषं स्थावरजंगमम् । तद्विकारस्य शान्त्यर्थ बच्येऽनुपानमञ्जरीम् ॥ १॥
इसे काव्य तो नहीं कह सकते, एक प्रहेलिकामय रचना है। अनुपान तथा पथ्यापथ्य आयुर्वेदीय चिकित्सा में अनुपान तथा पथ्यापथ्य का विशेष महत्व है । अतः इन पदों पर भी वाङ्मय की रचना समय-समय पर हुई है । अनुपान के विषय में निम्नांकित ग्रन्थ उल्लेखनीय हैंएक. अनुपानमन्जरी - विश्रामकृत यह ग्रन्थ एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में सम्पादित होकर गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय से प्रकाशित हुआ है। आचार्य विश्राम कच्छप्रदेश के अंजार नामक नगर के निवासी थे । इनके दो ग्रंथ प्रसिद्ध हैं अनुपानमंजरी और व्याधिनिग्रह । ये दोनों ग्रन्थ अट्ठारहवीं शती के अन्तिम चरण में लिखे गये । यह ग्रन्थ पांच समुद्देशों में बिभक्त है। इसमें अहिफेन, दन्तीबीज, भंगा, यशद आदि के साथ प्लेग का भी उल्लेख है। इसमें सामान्य अनुपान का विवरण न होकर धातु-उपधातु तथा विषों के विकारों की शान्ति के लिए सामान्य प्रयोग बतलाये गये हैं । इन अनुपानों का यदि सेवन कराया जाय तो ये विकार उत्पन्न नहीं होंगे और यदि उत्पन्न हुये हैं तो शान्त हो जायेंगे । दो. अनुपानतरंगिणी - रघुनाथप्रसाद तीन. अनुपान विधि - श्यामसुन्दराचार्य वैश्य चार. अनुपानकल्पतरु - जगन्नाथप्रसाद शुक्ल पाँच. अनुपानदर्पण पथ्यापथ्य के सम्बन्ध में निम्नांकित ग्रन्थ प्रमुख हैंएक. पथ्यापथ्य द्विवेदिकेशवप्रसाद शर्मा विरचित पथ्यापथ्य भाषाटीकासहित खेमराज श्रीकृष्णदास, बम्बई से संशून्य एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में प्रकाशित हुआ है । ग्रन्थ या पुष्पिका में कहीं लेखक का नाम नहीं है । काशून्य हिशून्य विशून्य, पाण्डुलिपि में लेखक का नाम शिवदास दिया है - ' इति श्रीशिवदासविरचिते सर्वरोगे पथ्यापथ्याधिकारः ।' इसका लिपिकाल संशून्य एक हज़ार नौ सौ उन्नीस है । यहीं की पाण्डुलिपि संशून्य तीन हज़ार सात सौ आठ तथा तीन हज़ार सात सौ तिरेपन का लिपिकाल क्रमशः संशून्य एक हज़ार आठ सौ बहत्तर और संशून्य एक हज़ार आठ सौ इकहत्तर है । ये दोनों राजस्थान के निकट माधवपुर में लिखित हैं । एक अनुपानमंजरी संशून्य एक हज़ार आठ सौ चौबीस में तथा व्याधिनिग्रह संशून्य एक हज़ार आठ सौ उनतालीस में लिखा गया । दो. धातुस्तथोपधातुश्च विषं स्थावरजंगमम् । तद्विकारस्य शान्त्यर्थ बच्येऽनुपानमञ्जरीम् ॥ एक॥
झारखण्ड विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका, दिसम्बर 2016 फरवरी 2017 झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल नियामक प्राधिकार विधेयक, 2016 झारखण्ड राज्य के अंतर्गत नगरों में निवास करने वाले आमजनों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु उपलब्ध भू-गर्भीय जल संसाधनों के स्रोतों का संरक्षण, भूमि के उपरी सतह पर (सतही) जल के स्तर को (Rain water harvesting, upgrade / recharge and conservation of Surface water) उपर उठाने हेतु वर्षा के जल का संरक्षण, जल स्रोतों का उन्नयन (Water recharge) तथा जल के विनियमन, जल के पीने और इससे संबंधित या अनुषांगिक अन्य प्रयोजनों के लिए सतत् और वैज्ञानिक जल प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु तथा इसके प्रभावी एवं समुचित उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल आपूर्ति प्राधिकार की स्थापना के उपबंध करने हेतु विधेयक by भारत गणतंत्र के 67वें वर्ष में झारखण्ड राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो - Home अध्याय - । प्रारम्भिक 1.0 संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भः1.1 यह विधेयक "झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल नियामक प्राधिकार विधेयक, 2016" कहलायेगा। 1.2 इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा। 2.0 परिभाषाएं :TOTE 2.1 जबतक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो 2.1.1 'कार्य क्षेत्र' से अभिप्रेत है, झारखण्ड का वर्त्तमान एवं भविष्य में बनने वाले सभी सम्पूर्ण शहरी भौगोलिक क्षेत्र, जहाँ जल का प्रबंधन, वितरण एवं उपयोग सार्वजनिक या निजी संस्थानों द्वारा किया जाता हो अथवा जो वे सभी क्षेत्र जहाँ से जलस्रोत अथवा जल प्रबंधन करने से आमजनों को शुद्ध पेयजल प्राप्त करने में आसानी हो । 2. 2 उपयोग की श्रेणी से अभिप्रेत है, विभिन्न प्रयोजनों हेतु जल का प्रयोग यथा- घरेलू, उद्योगों, औद्योगिक या वाणिज्यिक, पर्यावरण संबंधी, उर्जा उत्पादन आदि । 2.3 'अध्यक्ष' से अभिप्रेत है प्राधिकार का अध्यक्ष । 2.4 'विभाग' से अभिप्रेत है नगर विकास एवं "आवास विभाग, झारखण्ड सरकार । 2.5 'प्राधिकार' से अभिप्रेत है धारा 3 के तहत स्थापित झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल नियामक प्राधिकार । 2.6 'सरकार' या 'राज्य सरकार से अभिप्रेत है J झारखण्ड सरकार । 2.7 'सदस्य' का अभिप्रेत है, प्राधिकार का सदस्य जिसमें अध्यक्ष भी शामिल है। 2.8 'विहित' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन या इसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित, 2.9 'खोज' समिति से अभिप्रेत है, इस अधिनियम की धारा-06 के अधीन गठित चयन समिति, 2.10 'नियम' से अभिप्रेत है, सरकार के द्वारा इस अधिनियम के तहत बनने वाले नियम, 2.11 अधिसूचना' से अभिप्रेत है, सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत बनाये जानेवाले नियम की अधिसूचना । 2.12 'वर्णित' से अभिप्रेत है, सरकार द्वारा वर्णित ।
झारखण्ड विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका, दिसम्बर दो हज़ार सोलह फरवरी दो हज़ार सत्रह झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल नियामक प्राधिकार विधेयक, दो हज़ार सोलह झारखण्ड राज्य के अंतर्गत नगरों में निवास करने वाले आमजनों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु उपलब्ध भू-गर्भीय जल संसाधनों के स्रोतों का संरक्षण, भूमि के उपरी सतह पर जल के स्तर को उपर उठाने हेतु वर्षा के जल का संरक्षण, जल स्रोतों का उन्नयन तथा जल के विनियमन, जल के पीने और इससे संबंधित या अनुषांगिक अन्य प्रयोजनों के लिए सतत् और वैज्ञानिक जल प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु तथा इसके प्रभावी एवं समुचित उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल आपूर्ति प्राधिकार की स्थापना के उपबंध करने हेतु विधेयक by भारत गणतंत्र के सरसठवें वर्ष में झारखण्ड राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो - Home अध्याय - । प्रारम्भिक एक.शून्य संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भःएक.एक यह विधेयक "झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल नियामक प्राधिकार विधेयक, दो हज़ार सोलह" कहलायेगा। एक.दो इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा। दो.शून्य परिभाषाएं :TOTE दो.एक जबतक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो दो.एक.एक 'कार्य क्षेत्र' से अभिप्रेत है, झारखण्ड का वर्त्तमान एवं भविष्य में बनने वाले सभी सम्पूर्ण शहरी भौगोलिक क्षेत्र, जहाँ जल का प्रबंधन, वितरण एवं उपयोग सार्वजनिक या निजी संस्थानों द्वारा किया जाता हो अथवा जो वे सभी क्षेत्र जहाँ से जलस्रोत अथवा जल प्रबंधन करने से आमजनों को शुद्ध पेयजल प्राप्त करने में आसानी हो । दो. दो उपयोग की श्रेणी से अभिप्रेत है, विभिन्न प्रयोजनों हेतु जल का प्रयोग यथा- घरेलू, उद्योगों, औद्योगिक या वाणिज्यिक, पर्यावरण संबंधी, उर्जा उत्पादन आदि । दो.तीन 'अध्यक्ष' से अभिप्रेत है प्राधिकार का अध्यक्ष । दो.चार 'विभाग' से अभिप्रेत है नगर विकास एवं "आवास विभाग, झारखण्ड सरकार । दो.पाँच 'प्राधिकार' से अभिप्रेत है धारा तीन के तहत स्थापित झारखण्ड नगरीय जल संरक्षण एवं पेयजल नियामक प्राधिकार । दो.छः 'सरकार' या 'राज्य सरकार से अभिप्रेत है J झारखण्ड सरकार । दो.सात 'सदस्य' का अभिप्रेत है, प्राधिकार का सदस्य जिसमें अध्यक्ष भी शामिल है। दो.आठ 'विहित' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन या इसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित, दो.नौ 'खोज' समिति से अभिप्रेत है, इस अधिनियम की धारा-छः के अधीन गठित चयन समिति, दो.दस 'नियम' से अभिप्रेत है, सरकार के द्वारा इस अधिनियम के तहत बनने वाले नियम, दो.ग्यारह अधिसूचना' से अभिप्रेत है, सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत बनाये जानेवाले नियम की अधिसूचना । दो.बारह 'वर्णित' से अभिप्रेत है, सरकार द्वारा वर्णित ।
पुडुचेरी के राज्यपाल श्री वीरेन्द्र कटारिया ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. के. चिरंजीवी से मुलाकात की। उपराज्यपाल ने पुडुचेरी में विभिन्न आधारभूत पर्यटन परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय वित्तीय सहायता जारी करने में तेजी लाने का अनुरोध किया। 11वीं पंचवर्षीय योजना में पुडुचेरी से जुड़ी पर्यटन परियोजनाओं के संबंध में पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। विभिन्न परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के बारे में कार्य-योजना तैयारी की गई। पर्यटन मंत्री ने मंत्रालय के अधिकारियों से प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
पुडुचेरी के राज्यपाल श्री वीरेन्द्र कटारिया ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. के. चिरंजीवी से मुलाकात की। उपराज्यपाल ने पुडुचेरी में विभिन्न आधारभूत पर्यटन परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय वित्तीय सहायता जारी करने में तेजी लाने का अनुरोध किया। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में पुडुचेरी से जुड़ी पर्यटन परियोजनाओं के संबंध में पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। विभिन्न परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के बारे में कार्य-योजना तैयारी की गई। पर्यटन मंत्री ने मंत्रालय के अधिकारियों से प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
Prevention of Money Laundering Act: ईडी की लगातार कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में PMLA यानी प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एमएण सुंदरेश की पीठ ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए इसे अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के सामान्य कामकाज को बाधित करने, डराने और परेशान करने के लिए केन्द्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रकरण में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ओर से पेश हुए थे। छत्तीसगढ़ शासन ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत कानून को चुनौती देते हुए मूल वाद दाखिल किया था। अनुच्छेद 131 किसी राज्य को केंद्र या अन्य किसी राज्य के साथ विवाद के मामलों में सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का हक प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है ,जिसने प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम और इसके प्रावधानों को चुनौती दी है। इससे पूर्व निजी क्षेत्र के लोगों और पक्षों ने अलग-अलग आधार पर कानून को चुनौती दी थी, लेकिन बीते साल शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने इसकी वैधता को बरकरार रखा था। छत्तीसगढ़ शासन की तरफ से PMLA कानून के कुछ धाराओं की वैधता को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और समीर सौंढी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में शीघ्र सुनवाई की गुहार भी लगाई थी। छत्तीसगढ़ शासन ने अपने कोर्ट को बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को प्रदेश के अधिकारियों और निवासियों की तरफ से कई शिकायतें मिल रही हैं कि जांच करने की आड़ में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें 'प्रताड़ित करने के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है'। इसमें बताया गया है कि अधिकारों के इस तरह दुरुपयोग की बजह से छत्तीसगढ़ को अदालत में आने को मजबूर होना पड़ रहा है।
Prevention of Money Laundering Act: ईडी की लगातार कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में PMLA यानी प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एमएण सुंदरेश की पीठ ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए इसे अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के सामान्य कामकाज को बाधित करने, डराने और परेशान करने के लिए केन्द्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रकरण में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ओर से पेश हुए थे। छत्तीसगढ़ शासन ने संविधान के अनुच्छेद एक सौ इकतीस के तहत कानून को चुनौती देते हुए मूल वाद दाखिल किया था। अनुच्छेद एक सौ इकतीस किसी राज्य को केंद्र या अन्य किसी राज्य के साथ विवाद के मामलों में सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का हक प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है ,जिसने प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम और इसके प्रावधानों को चुनौती दी है। इससे पूर्व निजी क्षेत्र के लोगों और पक्षों ने अलग-अलग आधार पर कानून को चुनौती दी थी, लेकिन बीते साल शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने इसकी वैधता को बरकरार रखा था। छत्तीसगढ़ शासन की तरफ से PMLA कानून के कुछ धाराओं की वैधता को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और समीर सौंढी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में शीघ्र सुनवाई की गुहार भी लगाई थी। छत्तीसगढ़ शासन ने अपने कोर्ट को बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को प्रदेश के अधिकारियों और निवासियों की तरफ से कई शिकायतें मिल रही हैं कि जांच करने की आड़ में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें 'प्रताड़ित करने के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है'। इसमें बताया गया है कि अधिकारों के इस तरह दुरुपयोग की बजह से छत्तीसगढ़ को अदालत में आने को मजबूर होना पड़ रहा है।
आँनर किलींग अथार्त सम्मान,इज्जत के लिए हत्या। यह चर्चा आज चाय की चुस्की-यो के साथ गाँव की चौपाल से लेकर न्याय पालिका की उच्च कुर्सी तक होने वाली विषयों में प्रमुखता से शामिल है। इस मुद्दे पर समाज की परम्पराओं, सोच की गहराई, आर्थिक विषमता को लेकर मत भिन्नता हो सकती है। किंतु इस आँनर किलींग का एक स्याह पक्ष यह भी है की आँनर के लिए सिर्फ हत्या ही नही की जाती है, आत्म-हत्या भी होती है। सम्मान-इज्जत के लिए हत्या और आत्म हत्या। एक सच के दो पहलू है। किंतु पहले पक्ष को चर्चा मिलती है और दूसरे पक्ष को गुम नामी। ऐसा क्यों। इस बाबत हालिया मेरे परिचित के साथ हुई घटना से मुझे जवाव मिला। जब किसी नये उम्र के अपरिपक्व युवक और युवती द्वारा समाज, धर्म, परम्पराओं, जाति, एवं समूहों दावरा कायम नियमों के विरुद कोई कार्य किया जाता है और इनकी हत्या कर दी जाती है तो मामला तुल पकड़ लेता है, वही जब किसी नये उम्र के अपरिपक्व युवक और युवती द्वारा समाज, धर्म, परम्पराओं, जाति, एवं समूहों दावरा कायम नियमों के विरुद कोई कार्य किया जाता है और इस शर्मिदगी के कारण माता-पिता अगर आत्म-हत्या करते है तो मामला शांत हो जाता है, यह कहकर कि अमुक लड़का या लड़की के करनी का फल मिला है और फिर उस युवक और युवती के कृत्य को लोगों की मौन स्वीकृति मिल जाती है चाहे वह सहानुभूति के रुप में हो या परिणाम के असर के कारण हो। अंततः मौत के बाद ही लोग चुप हो जाते है। अर्थात हत्या या आत्म-हत्या के बाद लोगों की चुप्पी का एक ही मकसद द्रिष्टिगोचर् होता है की ऐसी वारदातों के बाद उन्हें खुन बहते हुये दिखना चाहिये चाहे वह जिस रुप में दिखे। क्या यह एक सभ्य समाज का लक्षण है। कदापि नहीं। किंतु इस पर चर्चा क्यों नहीं? मेरे एक बुजुर्ग मित्र ने गत दिनों आत्म-हत्या कर ली। बुजुर्ग मित्र कहने का अभिप्राय यह है कि मेरे पेशा में हर तरह और हर उम्र के लोगों से सम्बन्ध रखना पड़ता है । नाम और जगह मैं नहीं लिख सकता हुँ, क्योंकि हमारा मानना है कि मरने वाला दुनिया के समस्त सांसारिक सम्बन्धों से मुक्त हो जाता है और उनके नाम की चर्चा उचित नहीं है। प्रसंग यह है कि उनकी लड़की भी उपर्युक्त कथित समाज विरोधी कार्य कर रही थी। इसकी जानकारी जब उनके परिजनों को मिली तो उन्होंने उसे मान-मर्यादा का हवाला देते हुये ऐसा करने से मना किया। फलतः अपने मनोनुकल कार्य न होता जान लड़की ने जहर खाकर आत्म-हत्या की कोशिश की। अभिभावको ने संतान मोह के कारण किसी प्रकार उसकी जान बचा ली। इसके बाद भी लड़की अपने जिद पर अडिग और परिजन लोक-लज्जा के कारण उसे उसकी मनमानी की छुट नहीं दे रहे थे। ऐसे में आम परिवार की तरह उस पर तमाम तरह की पाबंदी लाद दी गई। पर उसके विचार में कोई परिवर्तन नहीं आया। परिणाम मेरे मित्र ने सभी परिस्थितियों के आगे अपने को वे वश पाते हुये आत्म-हत्या कर ली। अब समाज में इसकी चर्चा भी बंद हो गई और लड़की भी शांत हो गई।
आँनर किलींग अथार्त सम्मान,इज्जत के लिए हत्या। यह चर्चा आज चाय की चुस्की-यो के साथ गाँव की चौपाल से लेकर न्याय पालिका की उच्च कुर्सी तक होने वाली विषयों में प्रमुखता से शामिल है। इस मुद्दे पर समाज की परम्पराओं, सोच की गहराई, आर्थिक विषमता को लेकर मत भिन्नता हो सकती है। किंतु इस आँनर किलींग का एक स्याह पक्ष यह भी है की आँनर के लिए सिर्फ हत्या ही नही की जाती है, आत्म-हत्या भी होती है। सम्मान-इज्जत के लिए हत्या और आत्म हत्या। एक सच के दो पहलू है। किंतु पहले पक्ष को चर्चा मिलती है और दूसरे पक्ष को गुम नामी। ऐसा क्यों। इस बाबत हालिया मेरे परिचित के साथ हुई घटना से मुझे जवाव मिला। जब किसी नये उम्र के अपरिपक्व युवक और युवती द्वारा समाज, धर्म, परम्पराओं, जाति, एवं समूहों दावरा कायम नियमों के विरुद कोई कार्य किया जाता है और इनकी हत्या कर दी जाती है तो मामला तुल पकड़ लेता है, वही जब किसी नये उम्र के अपरिपक्व युवक और युवती द्वारा समाज, धर्म, परम्पराओं, जाति, एवं समूहों दावरा कायम नियमों के विरुद कोई कार्य किया जाता है और इस शर्मिदगी के कारण माता-पिता अगर आत्म-हत्या करते है तो मामला शांत हो जाता है, यह कहकर कि अमुक लड़का या लड़की के करनी का फल मिला है और फिर उस युवक और युवती के कृत्य को लोगों की मौन स्वीकृति मिल जाती है चाहे वह सहानुभूति के रुप में हो या परिणाम के असर के कारण हो। अंततः मौत के बाद ही लोग चुप हो जाते है। अर्थात हत्या या आत्म-हत्या के बाद लोगों की चुप्पी का एक ही मकसद द्रिष्टिगोचर् होता है की ऐसी वारदातों के बाद उन्हें खुन बहते हुये दिखना चाहिये चाहे वह जिस रुप में दिखे। क्या यह एक सभ्य समाज का लक्षण है। कदापि नहीं। किंतु इस पर चर्चा क्यों नहीं? मेरे एक बुजुर्ग मित्र ने गत दिनों आत्म-हत्या कर ली। बुजुर्ग मित्र कहने का अभिप्राय यह है कि मेरे पेशा में हर तरह और हर उम्र के लोगों से सम्बन्ध रखना पड़ता है । नाम और जगह मैं नहीं लिख सकता हुँ, क्योंकि हमारा मानना है कि मरने वाला दुनिया के समस्त सांसारिक सम्बन्धों से मुक्त हो जाता है और उनके नाम की चर्चा उचित नहीं है। प्रसंग यह है कि उनकी लड़की भी उपर्युक्त कथित समाज विरोधी कार्य कर रही थी। इसकी जानकारी जब उनके परिजनों को मिली तो उन्होंने उसे मान-मर्यादा का हवाला देते हुये ऐसा करने से मना किया। फलतः अपने मनोनुकल कार्य न होता जान लड़की ने जहर खाकर आत्म-हत्या की कोशिश की। अभिभावको ने संतान मोह के कारण किसी प्रकार उसकी जान बचा ली। इसके बाद भी लड़की अपने जिद पर अडिग और परिजन लोक-लज्जा के कारण उसे उसकी मनमानी की छुट नहीं दे रहे थे। ऐसे में आम परिवार की तरह उस पर तमाम तरह की पाबंदी लाद दी गई। पर उसके विचार में कोई परिवर्तन नहीं आया। परिणाम मेरे मित्र ने सभी परिस्थितियों के आगे अपने को वे वश पाते हुये आत्म-हत्या कर ली। अब समाज में इसकी चर्चा भी बंद हो गई और लड़की भी शांत हो गई।
Tejashwi Yadav: भारत में राजनीति और क्रिकेट ऐसे क्षेत्र हैं जो हमेशा सुर्खियां बनते और बनाते रहते हैं। जब राजनीति और क्रिकेट एक साथ आ जाएं तो लोग इसपर प्रतिक्रिया देने से कैसे पीछे हट सकते हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव के अपने घर के गार्डन में क्रिकेट खेलते हुए एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया। बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तरह-तरह के कमेंट करने शुरू कर दिए। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेजस्वी को दी गई वजन कम करने की सलाह का असर है। टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने तेजस्वी वीडियो में गेंदबाजी और बल्लेबाजी में संतुलन बनाते दिख रहे हैं। वह राजनीति में आने से पहले एक क्रिकेटर थे, जिन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के साथ आईपीएल सीजन जीता था। ऐसे में खेल के दौरान उनकी दक्षता हौरान करने वाली नहीं थी, पर कुछ लोगों का मानना है कि आरजेडी नेता पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री के दौरे के बाद से कैलोरी बर्न करने की कोशिश कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मीडिया में आयी खबरों के अनुसार 12 जुलाई को बिहार विधानसभा परिसर भवन के शताब्दी समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने तेजस्वी को वजन कम करने की सलाह दी थी। दरअसल, बिहार विधानसभा शताब्दी समापन समारोह कार्यक्रम के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लिखा हुआ भाषण पढ़ रहे थे। अपने भाषण के दौरान तेजस्वी यादव बार-बार अटक रहे थे। साथ ही, जब कार्यक्रम का समापन हुआ और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत मंच पर मौजूद अन्य नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदा करने के लिए उनके साथ आ रहे थे तो उसी दौरान पीएम ने तेजस्वी यादव को वजन कम करने की सलाह दी थी।
Tejashwi Yadav: भारत में राजनीति और क्रिकेट ऐसे क्षेत्र हैं जो हमेशा सुर्खियां बनते और बनाते रहते हैं। जब राजनीति और क्रिकेट एक साथ आ जाएं तो लोग इसपर प्रतिक्रिया देने से कैसे पीछे हट सकते हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव के अपने घर के गार्डन में क्रिकेट खेलते हुए एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया। बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तरह-तरह के कमेंट करने शुरू कर दिए। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेजस्वी को दी गई वजन कम करने की सलाह का असर है। टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने तेजस्वी वीडियो में गेंदबाजी और बल्लेबाजी में संतुलन बनाते दिख रहे हैं। वह राजनीति में आने से पहले एक क्रिकेटर थे, जिन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के साथ आईपीएल सीजन जीता था। ऐसे में खेल के दौरान उनकी दक्षता हौरान करने वाली नहीं थी, पर कुछ लोगों का मानना है कि आरजेडी नेता पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री के दौरे के बाद से कैलोरी बर्न करने की कोशिश कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मीडिया में आयी खबरों के अनुसार बारह जुलाई को बिहार विधानसभा परिसर भवन के शताब्दी समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने तेजस्वी को वजन कम करने की सलाह दी थी। दरअसल, बिहार विधानसभा शताब्दी समापन समारोह कार्यक्रम के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लिखा हुआ भाषण पढ़ रहे थे। अपने भाषण के दौरान तेजस्वी यादव बार-बार अटक रहे थे। साथ ही, जब कार्यक्रम का समापन हुआ और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत मंच पर मौजूद अन्य नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदा करने के लिए उनके साथ आ रहे थे तो उसी दौरान पीएम ने तेजस्वी यादव को वजन कम करने की सलाह दी थी।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और भारत सरकार ने असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में स्थित ग्रामीण सड़कों की बेहतरी का काम जारी रखने के लिए यहां 273 मिलियन डॉलर के एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह ऋण तीसरी किस्त के रूप में है, जो ग्रामीण संपर्क निवेश कार्यक्रम के तहत 800 मिलियन डॉलर की वित्त पोषण सुविधा के अंतर्गत अंतिम किस्त भी है। इस ऋण से उपर्युक्त पांचों राज्यों में 6,000 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी और हर मौसम में उपयुक्त रहने वाली ग्रामीण सड़कों के निर्माण में मदद मिलेगी, जिससे तकरीबन 4200 ग्रामीण बस्तियां लाभान्वित होंगी। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में संयुक्त सचिव (द्विपक्षीय सहयोग) श्री एस. सेल्वाकुमार ने भारत सरकार की तरफ से और कंट्री निदेशक सुश्री टेरेसा खो ने एडीबी की तरफ से इस ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर संयुक्त सचिव (द्विपक्षीय सहयोग) श्री एस. सेल्वाकुमार ने कहा कि संबंधित कार्यक्रम ने इन पांचों राज्यों के चुनिंदा ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में उपयुक्त रहने वाला सड़क संपर्क उपलब्ध कराते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत सरकारी लक्ष्यों को आवश्यक सहारा प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी की बदौलत गांवों में रहने वाले लोग बाजारों, जिला मुख्यालयों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा केंद्रों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि के अन्य केन्द्रों तक काफी आसानी से आना-जाना कर सकेंगे। एडीबी की कंट्री निदेशक सुश्री टेरेसा खो ने कहा कि पिछली दो परियोजनाओं की भांति तीसरी परियोजना के भी इन पांचों राज्यों के ग्रामीण समुदायों के लिए लाभप्रद साबित होने की उम्मीद है। इन पांचों राज्यों के चुनिंदा ग्रामीण समुदायों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसकी निरंतरता भी इसके लाभों में शामिल है। ग्रामीण विकास मंत्रालय केंद्रीय स्तर पर इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी है, जबकि असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सरकारों को अपने-अपने राज्यों के स्तर पर इस परियोजना के समग्र क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। तीसरी किस्त के दिसंबर, 2017 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। संबंधित राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियां ही राज्य स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसियां होंगी।
एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में स्थित ग्रामीण सड़कों की बेहतरी का काम जारी रखने के लिए यहां दो सौ तिहत्तर मिलियन डॉलर के एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह ऋण तीसरी किस्त के रूप में है, जो ग्रामीण संपर्क निवेश कार्यक्रम के तहत आठ सौ मिलियन डॉलर की वित्त पोषण सुविधा के अंतर्गत अंतिम किस्त भी है। इस ऋण से उपर्युक्त पांचों राज्यों में छः,शून्य किलोग्राममीटर से भी ज्यादा लंबी और हर मौसम में उपयुक्त रहने वाली ग्रामीण सड़कों के निर्माण में मदद मिलेगी, जिससे तकरीबन चार हज़ार दो सौ ग्रामीण बस्तियां लाभान्वित होंगी। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में संयुक्त सचिव श्री एस. सेल्वाकुमार ने भारत सरकार की तरफ से और कंट्री निदेशक सुश्री टेरेसा खो ने एडीबी की तरफ से इस ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर संयुक्त सचिव श्री एस. सेल्वाकुमार ने कहा कि संबंधित कार्यक्रम ने इन पांचों राज्यों के चुनिंदा ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में उपयुक्त रहने वाला सड़क संपर्क उपलब्ध कराते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सरकारी लक्ष्यों को आवश्यक सहारा प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी की बदौलत गांवों में रहने वाले लोग बाजारों, जिला मुख्यालयों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा केंद्रों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि के अन्य केन्द्रों तक काफी आसानी से आना-जाना कर सकेंगे। एडीबी की कंट्री निदेशक सुश्री टेरेसा खो ने कहा कि पिछली दो परियोजनाओं की भांति तीसरी परियोजना के भी इन पांचों राज्यों के ग्रामीण समुदायों के लिए लाभप्रद साबित होने की उम्मीद है। इन पांचों राज्यों के चुनिंदा ग्रामीण समुदायों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसकी निरंतरता भी इसके लाभों में शामिल है। ग्रामीण विकास मंत्रालय केंद्रीय स्तर पर इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी है, जबकि असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सरकारों को अपने-अपने राज्यों के स्तर पर इस परियोजना के समग्र क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। तीसरी किस्त के दिसंबर, दो हज़ार सत्रह तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। संबंधित राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियां ही राज्य स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसियां होंगी।
ओपल के सबसे लोकप्रिय मॉडलों में से एक, एस्ट्रा की नई पीढ़ी, जो इस साल दुनिया और हमारे देश में सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हो रही है, पहले से ही ऑटोमोबाइल उत्साही लोगों के बीच बहुत उत्साह पैदा करने में कामयाब रही है। नई ओपल एस्ट्रा, जो अपने बोल्ड और सरल डिजाइन के साथ भावनाओं को जगाती है, को तीन साल में 25 लोगों की एक कोर टीम द्वारा विकसित किया गया था। यह तथ्य कि टीम की आधी सदस्य महिलाएं हैं, छठी पीढ़ी के एस्ट्रा की पूर्णता के सबसे बड़े कारण के रूप में ध्यान आकर्षित करती है। सबसे समकालीन डिजाइनों के साथ अपनी श्रेष्ठ जर्मन तकनीक को एक साथ लाते हुए, ओपल अपने लोकप्रिय मॉडल, एस्ट्रा की छठी पीढ़ी को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। नई ओपल एस्ट्रा, जो अपने बोल्ड और सरल डिजाइन के साथ भावनाओं को जगाती है, को तीन साल में 25 लोगों की एक कोर टीम द्वारा विकसित किया गया था। तथ्य यह है कि 25-व्यक्ति टीम में से आधी महिलाएं हैं, नई पीढ़ी की एस्ट्रा की पूर्णता का रहस्य है। नई पीढ़ी के एस्ट्रा को एक निर्दोष मॉडल बनाने के लिए महिलाओं के पास बहुत काम है जो अपने वर्ग में फर्क करता है। जबकि नए एस्ट्रा के निर्माण के दौरान ज़ुज़ाना मेजरोवा द्वारा गुणवत्ता मानदंड का प्रबंधन किया गया था, हैयान यू ने पूरी तरह से डिजिटल प्योर पैनल कॉकपिट के विकास का नेतृत्व किया। आंतरिक रंगों और सामग्रियों का डिज़ाइन काफी हद तक इल्का होबरमैन और उनकी टीम द्वारा निर्धारित किया गया था। मुख्य अभियंता मारिएल वोगलर द्वारा प्रबंधित वाहन विकास प्रक्रियाओं में गुणवत्ता की धारणा को महत्व दिया गया था। नई एस्ट्रा को पिछले ओपल मॉडल से अलग तरीके से विकसित किया गया है। गुणवत्ता के अलावा, एक कार जो भावनाओं को अधिक आकर्षित करती है उसे विकास के चरण के दौरान डिजाइन किया गया था। चाहे वह दृश्य, श्रवण या स्पर्श उत्तेजना हो, नया एस्ट्रा सभी भावनाओं को सक्रिय करता है, जिससे मोटर चालक अधिकतम ड्राइविंग आनंद का अनुभव कर सकते हैं। मुख्य अभियंता मारिएल वोगलर, जिन्होंने "एक अंतरराष्ट्रीय टीम एक साथ आई और अत्यधिक पारदर्शी और सामंजस्यपूर्ण प्रक्रिया के साथ अगली पीढ़ी के एस्ट्रा लक्ष्य को महसूस किया" शब्दों के साथ अपना मूल्यांकन शुरू किया, ने कहा, "आप ऐसी कार नहीं बना सकते हैं जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के साथ सकारात्मक भावनाओं को पैदा कर सके। . "परिणाम महिला कारक नहीं है, बल्कि सहयोग, बातचीत, और इसलिए विभिन्न कौशल और क्षमताएं हैं जो अंतिम उत्पाद को बेहतर बनाती हैं।" छठी पीढ़ी के एस्ट्रा की उत्पादन प्रक्रिया में लागू प्रतिमान बदलाव भी विकास प्रक्रिया से निकटता से संबंधित है जिसे ब्रांड ने 2018 में शुरू किया था। डिजाइन, मार्केटिंग और इंजीनियरिंग के क्षेत्र के विशेषज्ञ ओपेल के जर्मन मूल्यों को इसकी डिजाइन भाषा, प्रौद्योगिकी और वाहन सामग्री के साथ सुलभ और रोमांचक होने के संयोजन की प्रक्रिया में शामिल थे। इस सफल टीम के काम के परिणामस्वरूप, बोल्ड और सरल ओपल डिजाइन दर्शन का जन्म हुआ। इस तरह एक बेहद खास किरदार वाले एस्ट्रा का निर्माण हुआ। जो चीज नए एस्ट्रा को इतना आकर्षक बनाती है, वह न केवल इसकी प्रोफाइल में स्पष्ट रेखाएं हैं, बल्कि इन पंक्तियों के साथ दूसरी तरफ आत्मविश्वास की भावना भी पैदा करता है। मारिएल वोगलर विश्वास के मुद्दे को यह कहकर समझाते हैं, "एक माता-पिता के रूप में, जब आप अपने बच्चे को सीट पर बिठाते हैं और दरवाजा बंद करते हैं, तो आप जानना चाहते हैं कि आप और आपका परिवार सुरक्षित है।" पांच दरवाजों वाले एस्ट्रा के सामने की तरह, पिछला भी पूर्णता का एक और उदाहरण है। जबकि नई एस्ट्रा विकसित करने वाली टीम ओपल लोगो में ट्रंक ओपनिंग मैकेनिज्म को एकीकृत करती है, बलों के संघ को "लाइटनिंग" लोगो द्वारा ट्रिगर किया जाता है, जिसे ट्रंक को खोलने के लिए छुआ जाता है। एस्ट्रा सी-पिलर पर अपने "गिल" डिज़ाइन विवरण के साथ, ब्रांड के प्रसिद्ध मॉडल, ओपल कैडेट का भी संदर्भ देता है। नई पीढ़ी के एस्ट्रा के इंटीरियर में अनुभव किए गए समय में छलांग 'गुणवत्ता की धारणा' से संबंधित है। पहिए के पीछे जाने पर ड्राइवर को अच्छा लगता है। आराम की यह भावना इंटीरियर को अनिवार्य रूप से कम करके प्राप्त की जाती है। विकास दल इस स्थिति को "विजुअल डिटॉक्स" के रूप में वर्णित करता है। एनालॉग डिस्प्ले अब अतीत की बात हो गई है, ऑल-डिजिटल प्योर पैनल के लिए धन्यवाद, और इसे एक नए मानव-मशीन इंटरफ़ेस द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। इस तकनीकी क्रांति के अलावा, यह तथ्य कि कुछ फ़ंक्शन बटनों के साथ प्रदान किए जाते हैं, एस्ट्रा के उपयोग में आसानी के पहलू का भी समर्थन करते हैं। जब ड्राइवर को ताजी हवा की आवश्यकता होती है, तो वह बस "मैक्स एसी" बटन दबाता है, जिससे एयर कंडीशनर तुरंत अधिकतम शक्ति पर चल सकता है। नेक्स्ट-जेनरेशन एस्ट्रा को विकसित करने वाली टीम ने नए एस्ट्रा में उतनी ही विशिष्ट आवाजें जोड़ीं, जितनी सुरक्षा सुविधाओं की अनुमति थी, एक समग्र सुखद वातावरण बनाने के लिए। आंतरिक ध्वनियाँ जैसे कि लयबद्ध ध्वनि जब संकेत दिया जाता है या सीट बेल्ट चेतावनी पूरी तरह से नवीनीकृत की जाती है। टीम ने महसूस किया कि पूर्व-निर्मित ध्वनियाँ पर्याप्त रूप से व्यक्तिगत नहीं थीं, इसलिए एक संगीतकार ने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में स्ट्रिंग और पर्क्यूशन उपकरणों के साथ ध्वनि अनुक्रम रिकॉर्ड किए। इस प्रकार, नए एस्ट्रा की आंतरिक ध्वनियों को खरोंच से डिजाइन किया गया था। जबकि ओपल के सभी मॉडलों में गुणवत्ता और स्थायित्व की धारणा सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है, नए एस्ट्रा में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालाँकि, जब इस धारणा को मजबूत किया गया था, जर्मन ब्रांड की विशिष्ट गतिशील ड्राइविंग विशेषताओं को पृष्ठभूमि में नहीं लिया गया था। मारिएल वोग्लर ने कहाः "ओपल लंबे समय से एक विश्वसनीय ब्रांड के रूप में जाना जाता है। हर नए ओपल मॉडल की तरह, नए एस्ट्रा को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए स्वीकृत होने से पहले भीषण परीक्षण मैराथन पूरा करना था। आर्कटिक में ठंडे तापमान में विभिन्न शीतकालीन परीक्षण, डुडेनहोफेन टेस्ट सेंटर में कई दौरे और जलवायु पवन सुरंग, ईएमसी प्रयोगशाला (विद्युत चुम्बकीय संगतता) में व्यापक परीक्षण किए गए। सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पास करने के बाद, नए मॉडल को उत्पादन की मंजूरी मिली," उन्होंने समझाया। Intelli-Lux LED® Pixel Headlight और AGR प्रमाणित फ्रंट सीटों का सबसे अद्यतित संस्करण इन उन्नत तकनीक और आराम प्रणालियों के उदाहरण हैं। "हम चाहते हैं कि एस्ट्रा के उत्साही लोग विकास टीम में सभी के उत्साह को महसूस करें," मुख्य अभियंता ने टीम की ओर से बोलते हुए कहा, जिसे उनके द्वारा बनाई गई उत्कृष्ट कार पर गर्व था।
ओपल के सबसे लोकप्रिय मॉडलों में से एक, एस्ट्रा की नई पीढ़ी, जो इस साल दुनिया और हमारे देश में सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हो रही है, पहले से ही ऑटोमोबाइल उत्साही लोगों के बीच बहुत उत्साह पैदा करने में कामयाब रही है। नई ओपल एस्ट्रा, जो अपने बोल्ड और सरल डिजाइन के साथ भावनाओं को जगाती है, को तीन साल में पच्चीस लोगों की एक कोर टीम द्वारा विकसित किया गया था। यह तथ्य कि टीम की आधी सदस्य महिलाएं हैं, छठी पीढ़ी के एस्ट्रा की पूर्णता के सबसे बड़े कारण के रूप में ध्यान आकर्षित करती है। सबसे समकालीन डिजाइनों के साथ अपनी श्रेष्ठ जर्मन तकनीक को एक साथ लाते हुए, ओपल अपने लोकप्रिय मॉडल, एस्ट्रा की छठी पीढ़ी को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। नई ओपल एस्ट्रा, जो अपने बोल्ड और सरल डिजाइन के साथ भावनाओं को जगाती है, को तीन साल में पच्चीस लोगों की एक कोर टीम द्वारा विकसित किया गया था। तथ्य यह है कि पच्चीस-व्यक्ति टीम में से आधी महिलाएं हैं, नई पीढ़ी की एस्ट्रा की पूर्णता का रहस्य है। नई पीढ़ी के एस्ट्रा को एक निर्दोष मॉडल बनाने के लिए महिलाओं के पास बहुत काम है जो अपने वर्ग में फर्क करता है। जबकि नए एस्ट्रा के निर्माण के दौरान ज़ुज़ाना मेजरोवा द्वारा गुणवत्ता मानदंड का प्रबंधन किया गया था, हैयान यू ने पूरी तरह से डिजिटल प्योर पैनल कॉकपिट के विकास का नेतृत्व किया। आंतरिक रंगों और सामग्रियों का डिज़ाइन काफी हद तक इल्का होबरमैन और उनकी टीम द्वारा निर्धारित किया गया था। मुख्य अभियंता मारिएल वोगलर द्वारा प्रबंधित वाहन विकास प्रक्रियाओं में गुणवत्ता की धारणा को महत्व दिया गया था। नई एस्ट्रा को पिछले ओपल मॉडल से अलग तरीके से विकसित किया गया है। गुणवत्ता के अलावा, एक कार जो भावनाओं को अधिक आकर्षित करती है उसे विकास के चरण के दौरान डिजाइन किया गया था। चाहे वह दृश्य, श्रवण या स्पर्श उत्तेजना हो, नया एस्ट्रा सभी भावनाओं को सक्रिय करता है, जिससे मोटर चालक अधिकतम ड्राइविंग आनंद का अनुभव कर सकते हैं। मुख्य अभियंता मारिएल वोगलर, जिन्होंने "एक अंतरराष्ट्रीय टीम एक साथ आई और अत्यधिक पारदर्शी और सामंजस्यपूर्ण प्रक्रिया के साथ अगली पीढ़ी के एस्ट्रा लक्ष्य को महसूस किया" शब्दों के साथ अपना मूल्यांकन शुरू किया, ने कहा, "आप ऐसी कार नहीं बना सकते हैं जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के साथ सकारात्मक भावनाओं को पैदा कर सके। . "परिणाम महिला कारक नहीं है, बल्कि सहयोग, बातचीत, और इसलिए विभिन्न कौशल और क्षमताएं हैं जो अंतिम उत्पाद को बेहतर बनाती हैं।" छठी पीढ़ी के एस्ट्रा की उत्पादन प्रक्रिया में लागू प्रतिमान बदलाव भी विकास प्रक्रिया से निकटता से संबंधित है जिसे ब्रांड ने दो हज़ार अट्ठारह में शुरू किया था। डिजाइन, मार्केटिंग और इंजीनियरिंग के क्षेत्र के विशेषज्ञ ओपेल के जर्मन मूल्यों को इसकी डिजाइन भाषा, प्रौद्योगिकी और वाहन सामग्री के साथ सुलभ और रोमांचक होने के संयोजन की प्रक्रिया में शामिल थे। इस सफल टीम के काम के परिणामस्वरूप, बोल्ड और सरल ओपल डिजाइन दर्शन का जन्म हुआ। इस तरह एक बेहद खास किरदार वाले एस्ट्रा का निर्माण हुआ। जो चीज नए एस्ट्रा को इतना आकर्षक बनाती है, वह न केवल इसकी प्रोफाइल में स्पष्ट रेखाएं हैं, बल्कि इन पंक्तियों के साथ दूसरी तरफ आत्मविश्वास की भावना भी पैदा करता है। मारिएल वोगलर विश्वास के मुद्दे को यह कहकर समझाते हैं, "एक माता-पिता के रूप में, जब आप अपने बच्चे को सीट पर बिठाते हैं और दरवाजा बंद करते हैं, तो आप जानना चाहते हैं कि आप और आपका परिवार सुरक्षित है।" पांच दरवाजों वाले एस्ट्रा के सामने की तरह, पिछला भी पूर्णता का एक और उदाहरण है। जबकि नई एस्ट्रा विकसित करने वाली टीम ओपल लोगो में ट्रंक ओपनिंग मैकेनिज्म को एकीकृत करती है, बलों के संघ को "लाइटनिंग" लोगो द्वारा ट्रिगर किया जाता है, जिसे ट्रंक को खोलने के लिए छुआ जाता है। एस्ट्रा सी-पिलर पर अपने "गिल" डिज़ाइन विवरण के साथ, ब्रांड के प्रसिद्ध मॉडल, ओपल कैडेट का भी संदर्भ देता है। नई पीढ़ी के एस्ट्रा के इंटीरियर में अनुभव किए गए समय में छलांग 'गुणवत्ता की धारणा' से संबंधित है। पहिए के पीछे जाने पर ड्राइवर को अच्छा लगता है। आराम की यह भावना इंटीरियर को अनिवार्य रूप से कम करके प्राप्त की जाती है। विकास दल इस स्थिति को "विजुअल डिटॉक्स" के रूप में वर्णित करता है। एनालॉग डिस्प्ले अब अतीत की बात हो गई है, ऑल-डिजिटल प्योर पैनल के लिए धन्यवाद, और इसे एक नए मानव-मशीन इंटरफ़ेस द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। इस तकनीकी क्रांति के अलावा, यह तथ्य कि कुछ फ़ंक्शन बटनों के साथ प्रदान किए जाते हैं, एस्ट्रा के उपयोग में आसानी के पहलू का भी समर्थन करते हैं। जब ड्राइवर को ताजी हवा की आवश्यकता होती है, तो वह बस "मैक्स एसी" बटन दबाता है, जिससे एयर कंडीशनर तुरंत अधिकतम शक्ति पर चल सकता है। नेक्स्ट-जेनरेशन एस्ट्रा को विकसित करने वाली टीम ने नए एस्ट्रा में उतनी ही विशिष्ट आवाजें जोड़ीं, जितनी सुरक्षा सुविधाओं की अनुमति थी, एक समग्र सुखद वातावरण बनाने के लिए। आंतरिक ध्वनियाँ जैसे कि लयबद्ध ध्वनि जब संकेत दिया जाता है या सीट बेल्ट चेतावनी पूरी तरह से नवीनीकृत की जाती है। टीम ने महसूस किया कि पूर्व-निर्मित ध्वनियाँ पर्याप्त रूप से व्यक्तिगत नहीं थीं, इसलिए एक संगीतकार ने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में स्ट्रिंग और पर्क्यूशन उपकरणों के साथ ध्वनि अनुक्रम रिकॉर्ड किए। इस प्रकार, नए एस्ट्रा की आंतरिक ध्वनियों को खरोंच से डिजाइन किया गया था। जबकि ओपल के सभी मॉडलों में गुणवत्ता और स्थायित्व की धारणा सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है, नए एस्ट्रा में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालाँकि, जब इस धारणा को मजबूत किया गया था, जर्मन ब्रांड की विशिष्ट गतिशील ड्राइविंग विशेषताओं को पृष्ठभूमि में नहीं लिया गया था। मारिएल वोग्लर ने कहाः "ओपल लंबे समय से एक विश्वसनीय ब्रांड के रूप में जाना जाता है। हर नए ओपल मॉडल की तरह, नए एस्ट्रा को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए स्वीकृत होने से पहले भीषण परीक्षण मैराथन पूरा करना था। आर्कटिक में ठंडे तापमान में विभिन्न शीतकालीन परीक्षण, डुडेनहोफेन टेस्ट सेंटर में कई दौरे और जलवायु पवन सुरंग, ईएमसी प्रयोगशाला में व्यापक परीक्षण किए गए। सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पास करने के बाद, नए मॉडल को उत्पादन की मंजूरी मिली," उन्होंने समझाया। Intelli-Lux LED® Pixel Headlight और AGR प्रमाणित फ्रंट सीटों का सबसे अद्यतित संस्करण इन उन्नत तकनीक और आराम प्रणालियों के उदाहरण हैं। "हम चाहते हैं कि एस्ट्रा के उत्साही लोग विकास टीम में सभी के उत्साह को महसूस करें," मुख्य अभियंता ने टीम की ओर से बोलते हुए कहा, जिसे उनके द्वारा बनाई गई उत्कृष्ट कार पर गर्व था।
श्रीकामाङ्क शतीदण - शुद्ध मुकुटैः पूर्णेन्दु-सन्मण्डलैः लिष्टाऽन्योन्य मिलद्दलावलि शिरःपञ्चाद्विभागे कचित् । अब्जे चेद्रभविष्यतां विकसित श्यामाम्बुजान्तर्गते श्रीपाख्योरुपमा कक्योऽदास्यन्नमूभ्यां हरेः ।।७।। वृषभ ककुद निन्दि- स्कन्धयोस्तुतां सत् पुरुषवतयैवैत्याहुरेके वकारेः । मम तु मतमिदं श्रीराधिका-दोसृ णालीसतत-मिलन-मोटारफुल्लतैवात्र हेतुः ॥७३॥ अब दो असम्भव कमलों के द्वारा हस्तकमल का बर्णन करते हैंः - श्रीकृष्ण के हस्त का बाहरी भाग श्यामवर्ण का और भीतरी भाग ( हथेली ) रक्तवर्ण का है, उस पर अंगुलियाँ और गुलियों के भाग पर नख है। अब इनके लिए असम्भव उपमा की कल्पना करते हैं कि एक रक्त-कमल (हथेली ) ऐसा हो कि जिसके दल ( अंगुलियाँ) एक पूर्ण चन्द्रमण्डल ( नलचन्द्रावली ) द्वारा परस्पर मिले हुए हों और जिसकी छोरी ( सिरों ) का पिछला भाग जुड़ा हुआ हो। ऐसे कमलदल रूपी शोभायुक्त कामांकुशों के तीदा शृङ्गरूप मुकुट होवे ( दल गुलियाँ नख = कुश; नखान भाग = =भृंग) । इस प्रकार का रक्तकमल फिर कहीं एक खिले हुए नीलकमल ( = हस्त का बाहरी भाग ) के मध्य में होवे तब कदाचित इन दो कंमलों के द्वारा कविजन श्रीकृष्ण के करकमलों की उपमा दे सकें ।।७।। बृषभ के ककुद ( कूबँ, डील ) के उठे हुए माँसपिण्ड को भी तुच्छ करने बाले श्रीकृष्ण के स्कन्ध को कोई कोई महापुरुष
श्रीकामाङ्क शतीदण - शुद्ध मुकुटैः पूर्णेन्दु-सन्मण्डलैः लिष्टाऽन्योन्य मिलद्दलावलि शिरःपञ्चाद्विभागे कचित् । अब्जे चेद्रभविष्यतां विकसित श्यामाम्बुजान्तर्गते श्रीपाख्योरुपमा कक्योऽदास्यन्नमूभ्यां हरेः ।।सात।। वृषभ ककुद निन्दि- स्कन्धयोस्तुतां सत् पुरुषवतयैवैत्याहुरेके वकारेः । मम तु मतमिदं श्रीराधिका-दोसृ णालीसतत-मिलन-मोटारफुल्लतैवात्र हेतुः ॥तिहत्तर॥ अब दो असम्भव कमलों के द्वारा हस्तकमल का बर्णन करते हैंः - श्रीकृष्ण के हस्त का बाहरी भाग श्यामवर्ण का और भीतरी भाग रक्तवर्ण का है, उस पर अंगुलियाँ और गुलियों के भाग पर नख है। अब इनके लिए असम्भव उपमा की कल्पना करते हैं कि एक रक्त-कमल ऐसा हो कि जिसके दल एक पूर्ण चन्द्रमण्डल द्वारा परस्पर मिले हुए हों और जिसकी छोरी का पिछला भाग जुड़ा हुआ हो। ऐसे कमलदल रूपी शोभायुक्त कामांकुशों के तीदा शृङ्गरूप मुकुट होवे । इस प्रकार का रक्तकमल फिर कहीं एक खिले हुए नीलकमल के मध्य में होवे तब कदाचित इन दो कंमलों के द्वारा कविजन श्रीकृष्ण के करकमलों की उपमा दे सकें ।।सात।। बृषभ के ककुद के उठे हुए माँसपिण्ड को भी तुच्छ करने बाले श्रीकृष्ण के स्कन्ध को कोई कोई महापुरुष
Memory Card Error Solution: यदि आपका एसडी कार्ड काम नहीं कर रहा है. तो इसे फेंकने की जगह आप कई उपायों से ठीक कर सकते है. कई बार कार्ड स्लॉट को साफ करने, फार्मेट करने जैसे तरीकों से इसे सुधारा जा सकता है. आइये जानते हैं पूरा प्रोसेस. . इन तरीकों से ठीक कर सकते हैं अपना मेमोरी कार्ड (Memory Card) मेमोरी कार्ड में Unable To Read का आ रहा मैसेज तो आप इसे स्लॉट से निकाल कर दोबारा डाल दें. ऐसा करने से आपका मेमोरी कार्ड ठीक हो सकता है. यदि फिर भी न काम करें तो डिवाइस को थोड़ी देर के लिए बंद कर सकते हैं. कई केस में देखा गया है कि ऐसा करने से वापस मेमोरी कार्ड काम करने लगता है. अगर एक बार बंद करने पर भी नहीं हो रहा है तो ऐसा 4-5 बार करें. इसके अलावा आप अपना मेमोरी कार्ड स्लॉट को साफ करके भी देख सकते हैं. कई बार ऐसा करने से भी वापस कार्ड रीड करने लग जाता है. दरअसल, स्लॉट में धूल फंसने से यह कार्य करना बंद कर देता है. अगर इन उपायों से भी आपका मेमोरी कार्ड एरर का मैसेज दे रहा है तो इसे अलग डिवाइस में लगा कर देखें. कई बार डिवाइस के स्लॉट में आए प्रॉब्लम के कारण भी यह काम नहीं कर पाता. जिसे दूसरे डिवाइस में डाल कर चेक करने से करने लगता है. सभी उपायों को करने के बाद भी आपका मेमोरी कार्ड ठीक नहीं हुआ है तो यह जरूर डैमेज हो चुका होगा या फिर इसमें स्क्रैच लग होगा. ऐसे में इसे आपको बदल देना ही ठीक रहेगा नहीं तो डिवाइस के स्लॉट में भी प्रॉब्लम आ सकता है. आप फिर भी नहीं बदलना चाहते तो एक अंतिम उपाय अपनाएं, फौरन टेक्निकल सपोर्ट लें.
Memory Card Error Solution: यदि आपका एसडी कार्ड काम नहीं कर रहा है. तो इसे फेंकने की जगह आप कई उपायों से ठीक कर सकते है. कई बार कार्ड स्लॉट को साफ करने, फार्मेट करने जैसे तरीकों से इसे सुधारा जा सकता है. आइये जानते हैं पूरा प्रोसेस. . इन तरीकों से ठीक कर सकते हैं अपना मेमोरी कार्ड मेमोरी कार्ड में Unable To Read का आ रहा मैसेज तो आप इसे स्लॉट से निकाल कर दोबारा डाल दें. ऐसा करने से आपका मेमोरी कार्ड ठीक हो सकता है. यदि फिर भी न काम करें तो डिवाइस को थोड़ी देर के लिए बंद कर सकते हैं. कई केस में देखा गया है कि ऐसा करने से वापस मेमोरी कार्ड काम करने लगता है. अगर एक बार बंद करने पर भी नहीं हो रहा है तो ऐसा चार-पाँच बार करें. इसके अलावा आप अपना मेमोरी कार्ड स्लॉट को साफ करके भी देख सकते हैं. कई बार ऐसा करने से भी वापस कार्ड रीड करने लग जाता है. दरअसल, स्लॉट में धूल फंसने से यह कार्य करना बंद कर देता है. अगर इन उपायों से भी आपका मेमोरी कार्ड एरर का मैसेज दे रहा है तो इसे अलग डिवाइस में लगा कर देखें. कई बार डिवाइस के स्लॉट में आए प्रॉब्लम के कारण भी यह काम नहीं कर पाता. जिसे दूसरे डिवाइस में डाल कर चेक करने से करने लगता है. सभी उपायों को करने के बाद भी आपका मेमोरी कार्ड ठीक नहीं हुआ है तो यह जरूर डैमेज हो चुका होगा या फिर इसमें स्क्रैच लग होगा. ऐसे में इसे आपको बदल देना ही ठीक रहेगा नहीं तो डिवाइस के स्लॉट में भी प्रॉब्लम आ सकता है. आप फिर भी नहीं बदलना चाहते तो एक अंतिम उपाय अपनाएं, फौरन टेक्निकल सपोर्ट लें.
बजट 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फैसला किया कि जो लोग अपनी संपत्ति बेचकर उस पैसे को नया घर खरीदने में लगाना चाहते हैं, उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी। इसका मतलब यह है कि उन्हें अपनी पुरानी संपत्ति बेचने से मिलने वाली एक निश्चित राशि पर कर नहीं देना होगा। उन्हें यह कर कटौती अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक मिल सकती है। यह नियम आयकर अधिनियम की धारा 54 और 54F पर लागू होता है। इसके पहले, कोई अधिकतम लिमिट नहीं थी। 1 अप्रैल, 2024 से, अब लोगों द्वारा अपनी पुरानी संपत्ति बेचने और नई संपत्ति खरीदने पर लगने वाले टैक्स को लेकर नई सीमा निर्धारित कर दी गई है। यह नियम साल 2024-25 से शुरू होकर आने वाले सालों के लिए लागू होगा। सरकार ने यह सीमा निर्धारित करने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उन्होंने देखा कि कुछ अमीर लोग करों का भुगतान करने से बचने के लिए बहुत महंगे घर खरीद रहे थे। कैपिटल गेन वह धन होता है जो आप किसी संपत्ति को बेचने पर कमाते हैं। कैपिटल गेन अकाउंट सिस्टम के तहत लोग अपने कैपिटल गेन को इस खाते में तब तक रख सकते हैं जब तक कि उन्हें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54 और 54F में लिस्टेड संपत्तियों में फिर से निवेश नहीं कर दिया जाता, इस तरह उनका लंबे समय वाला कैपिटल गेन बना रहता है और उस पर कोई टैक्स नहीं लगता। क्लियरटैक्स के संस्थापक अर्चित गुप्ता बताते हैं कि जब आप घर या संपत्ति बेचते हैं और लाभ कमाते हैं, तो इसे पूंजीगत लाभ कहा जाता है। लेकिन आपको उन लाभों पर कर चुकाना पड़ सकता है। करों पर पैसा बचाने के लिए, कुछ विशेष नियम हैं जो आपको छूट या कटौती प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। ये नियम आपको अपना ज्यादा मुनाफा रखने और करों में कम भुगतान करने की सुविधा देते हैं। ज्यादा मुनाफा प्राप्त करने और कानून के अनुसार पैसे बचाने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाना और इन नियमों का लाभ उठाना जरूरी है। इस तरह की कटौतियां किन्हें मिल सकती हैं, कितनी कटौतियां मिल सकती हैं, कौन सी संपत्ति बेचने की जरूरत है, कौन सी संपत्ति खरीदने की जरूरत है और कितने समय में, जैसे सवालों के जवाब नीचे दिए गए हैंः फिर से निवेश करनाः भारतीय आयकर अधिनियम की धारा 54 के अनुसार, अगर आप एक आवासीय संपत्ति बेचते हैं और एक तय अवधि के भीतर (2 साल के भीतर खरीद, या 3 साल के भीतर एक नई प्रॉपर्टी का कंस्ट्रक्शन कराते हैं) किसी अन्य आवासीय संपत्ति को खरीदने में कैपिटल गेन को लगाते हैं, तो शुरुआत में जिस प्रॉपर्टी को बेचकर आपने कैपिटल गेन कमाया था उस पर लगने वाले कर से आपको छूट दी जा सकती है। जब आपने घर खरीदा था तो उसकी कीमत रु. 20 लाख थी, और आप इसे 42 लाख रुपये में बेच रहे हैं। इस मामले में, आपको 22 लाख रुपये का लाभ होता है। आपको इस मुनाफे की रकम पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। नियमों के मुताबिक आपको करीब 3 फीसदी सरचार्ज और सेस के अलावा 20 फीसदी LTCG टैक्स भी देना होगा। हालांकि, अगर आप पुरानी संपत्ति की बिक्री से कमाए पैसे से कोई अन्य आवासीय संपत्ति खरीदते हैं तो आपको इस कर का भुगतान करने से छूट मिलेगी। वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन के अनुसार, अगर आप अपना टैक्स दाखिल करने के समय तक घर बेचने से मिले पैसे का उपयोग नया घर खरीदने के लिए नहीं करते हैं, तो आप उस पैसे को कैपिटल गेन्स खाता योजना (CGAS) नाम के एक विशेष खाते में डाल सकते हैं। लेकिन फिर भी आपको उस पैसे का उपयोग 2 साल (यदि आप खरीद रहे हैं) या 3 साल (यदि आप निर्माण कर रहे हैं) के भीतर एक नया घर खरीदने के लिए करना होगा। आपको अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले इसे खोलना होगा। याद रखें, आप इस खाते के पैसे का उपयोग केवल घर खरीदने के लिए कर सकते हैं, किसी और चीज़ के लिए नहीं। यदि आप समय सीमा के भीतर घर खरीदने के लिए पैसे का उपयोग नहीं करते हैं, तो आपको पहला घर बेचने से हुए लाभ पर टैक्स देना होगा। इसलिए नियमों का पालन करना और समय पर नया घर खरीदने के लिए पैसे का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। BankBazaar इस मामले में अपवादों के बारे में बताता हैः 1. आपको केवल 1 घर खरीदने पर ही छूट मिल सकती है। अगर आप कैपिटल गेन का उपयोग 1 से ज्यादा घर खरीदने के लिए कर रहे हैं, तो आप केवल 1 घर की लागत पर छूट का दावा कर पाएंगे। 2. धारा 54 के तहत छूट आपको तभी मिल सकती है जब आप भारत में घर खरीद रहे हों। देश के बाहर खरीदी गई किसी भी आवासीय संपत्ति पर आपको एलटीसीजी टैक्स चुकाने से कोई छूट नहीं मिलेगी। 3. आप पुराने घर की बिक्री से प्राप्त मुनाफे से खरीदे गए नए घर को खरीदने या निर्माण पूरा होने के 3 साल बाद तक नहीं बेच सकते। इसका मतलब यह है कि अगर आप नया घर खरीदने/निर्माण के 3 साल पूरा होने से पहले बेचते हैं, तो धारा 54 के तहत आपको प्राप्त लाभ रद्द कर दिया जाएगा और आपको एलटीसीजी टैक्स देना होगा। कृषि भूमि की बिक्रीः आयकर अधिनियम की धारा 54B कृषि भूमि की बिक्री से होने वाले कैपिटल गेन पर भी छूट देती है। यहां करदाता को पुरानी भूमि के ट्रांसफर की तारीख से दो साल की अवधि के भीतर दूसरी कृषि भूमि खरीदनी अनिवार्य है। अपने स्टॉक बेचें, घर खरीदेंः जब आप जमीन, बिल्डिंग, स्टॉक, सिक्योरिटी, बॉन्ड, वाहन, पेटेंट, ट्रेडमार्क, ज्वैलरी, या मशीनरी जैसी चीजें बेचते हैं, और आप बिक्री से मुनाफा कमाते हैं, तो यह भी कैपिटल गेन के अंतर्गत आता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 15 लाख रुपये के स्टॉक खरीदे। और बाद में उन्हें 23 लाख रुपये में बेच दिया। इस तरह आपने आपने 8 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। अगर आप स्टॉक बेचने से प्राप्त लाभ लेते हैं और इसका उपयोग नया घर खरीदने या बनाने में करते हैं, तो आप उस 8 लाख के मुनाफे पर कर बचा सकते हैं। इसका मतलब है कि आपको उस रकम पर टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स लॉस हार्वेस्टिंगः टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग बेचने से प्राप्त धन पर भुगतान की जाने वाली कर की मात्रा को कम करने का एक तरीका है। अगर किसी का कोई निवेश है, जैसे स्टॉक या म्यूचुअल फंड, जिसकी वैल्यू कम हो गई है, तो वे उस नुकसान की "भरपाई" करने के लिए इसे बेच सकते हैं। फिर जो नुकसान हुआ है, उसको आप अन्य निवेशों को बेचने से मिले लाभ पर भुगतान की जाने वाली कर की राशि को कम करने के लिए कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति एक साल से ज्यादा समय तक शेयर या म्यूचुअल फंड रखता है, तो उससे होने वाले लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। उन्हें इस लाभ से अर्जित पहले 1 लाख रुपये (1,00,000) पर कर नहीं देना पड़ता है। लेकिन अगर उनका लाभ 1 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उन्हें इससे ऊपर की राशि पर 10% टैक्स देना होगा। दूसरी ओर, अगर कोई एक साल के भीतर अपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचता है, तो जो भी लाभ होता है उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। शॉर्ट टर्म लाभ के लिए, उन्हें 15% कर का भुगतान करना होगा, चाहे वे कितना भी पैसा कमाएं। इसलिए, टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग से लोगों को कुछ निवेशों से होने वाले नुकसान का उपयोग अन्य निवेशों से होने वाले लाभ की भरपाई के लिए अपने करों को कम करने में मदद मिलती है। यह अपने निवेश को चतुराई से प्रबंधित करके करों पर पैसा बचाने का एक तरीका है। टैक्स हार्वेस्टिंग से निवेशकों को लॉन्गटर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) पर कर कम करने में मदद मिल सकती है। मान लीजिए कि एक निवेशक ने 1 मार्च, 2023 को इक्विटी म्यूचुअल फंड में 5 लाख रुपये लगाए। 5 मार्च, 2024 तक, निवेश बढ़कर 5. 50 लाख रुपये हो गया, जो एलटीसीजी के तहत कर के अधीन है। चूंकि लाभ 1 लाख रुपये से कम है, इसलिए कोई कर नहीं देना होगा। अब, निवेशक 5 मार्च, 2024 को यूनिट बेच सकता है, और उसी दिन यूनिट खरीदने के लिए सभी पैसे का उपयोग कर सकता है। नया खरीद प्राइस शुरुआती निवेश बन जाता है। 6 मार्च 2025 को अगर निवेश बढ़कर 6. 2 लाख रुपये हो जाता है तो वित्त वर्ष 2026 के लिए LTCG सिर्फ 70,000 रुपये होगा। ऐसे में LTCG पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। टैक्स हार्वेस्टिंग के बिना, 5 लाख रुपये का शुरुआती निवेश दो साल में 6. 2 लाख रुपये हो जाता। 1. 2 लाख रुपये के एलटीसीजी का मतलब 20,000 रुपये का टैक्सेबल गेन होगा। वहीं अगर आप टैक्स हार्वेस्टिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो 10% हिसाब से आप अतिरिक्त 2000 का टैक्स बचा सकते हैं। खास बॉन्ड में निवेशः जब आप कोई प्रॉपर्टी या अन्य चीज़ बेचते हैं, तो आपको आमतौर पर बिक्री से प्राप्त धन पर कर का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन इस कर को बचाने का एक तरीका है। नया घर खरीदने के बजाय, आप बेचने से प्राप्त धन को सरकार द्वारा प्रस्तावित विशेष बॉन्डों में निवेश कर सकते हैं। ये बॉन्ड सरकार के लिए ऋण की तरह हैं, और वे आपको 6% की ब्याज दर का भुगतान करते हैं। हालांकि, इन बॉन्डों पर आप जो ब्याज कमाते हैं उस पर भी कर देना होता है। वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा, जब आप इन बॉन्डों में निवेश करते हैं, तो आपको एक निश्चित अवधि के लिए पैसे को लॉक करके रखने पड़ते हैं, जिसका अर्थ है कि आप इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं या बॉन्ड बेच नहीं सकते हैं। विशिष्ट बांड के आधार पर यह अवधि 3 या 5 वर्ष है। साथ ही, टैक्स छूट का दावा करने के लिए आप एक साल में केवल 50 लाख रुपये तक ही निवेश कर सकते हैं। विंट वेल्थ ने बताया, यदि आप लॉक-इन अवधि समाप्त होने से पहले बॉन्ड बेचते हैं, तो आपके द्वारा पहले दावा की गई कर छूट उलट जाएगी, और आपको बॉन्ड बेचने से प्राप्त धन पर कर का भुगतान करना होगा। इसलिए, कर छूट बनाए रखने के लिए बॉन्ड बेचने या रिडीम करने से पहले लॉक-इन अवधि पूरी होने तक इंतजार करना जरूरी है। स्टार्ट-अप छूटः सीए महिमा वछराजानी ने कहा, सरकार लोगों को स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। इसलिए, उन्होंने वित्त अधिनियम 2021 में धारा 54GB नाम का एक नियम बनाया। यह नियम कहता है कि यदि आप लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को इन स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश करते हैं, तो आपको उस पैसे पर टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन कुछ नियम हैं जिनका आपको पालन करना होगा। प्रॉपर्टी या अन्य चीज जिसको बेचकर आपने लाभ कमाया है, उसे बेचने के छह महीने के भीतर स्टार्ट-अप कंपनियों में पैसा निवेश करना होगा। और कुछ अन्य चीजें हैं जिन्हें आपको जांचना होगा, जैसे कि आपके पास स्टार्ट-अप कंपनी की कितनी हिस्सेदारी है और आपको अपना निवेश कितने समय तक रखना है। इन नियमों का पालन करके, आप करों पर पैसा बचा सकते हैं और साथ ही नए व्यवसायों को समर्थन देने में मदद कर सकते हैं! कमियांः आयकर अधिनियम, 1961 द्वारा दी गई विभिन्न छूटों के अलावा, शशांक अग्रवाल, अधिवक्ता, दिल्ली एचसी, कुछ कमियां बताते हैं जो किसी व्यक्ति को निम्नलिखित दो मामलों में कैपिटल पर कर से बचने में मदद कर सकती हैंः i. कर कानून की धारा 47 कहती है कि कुछ प्रकार के लेनदेन को "ट्रांसफर" नहीं माना जाता है और इसलिए आपको कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि आप अपनी कोई मूल्यवान वस्तु किसी को उपहार के रूप में, वसीयत के माध्यम से, या किसी ट्रस्ट में को देते हैं या हस्तांतरित करते हैं, तो आपको उस पर कर नहीं देना होगा। ii. कर कानून कहता है कि अगर आप कोई संपत्ति खरीदते हैं या उसकी मरम्मत करवाते हैं, तो आपको "इंडेक्सेशन" नाम का लाभ मिल सकता है। यह लाभ आपको संपत्ति खरीदने या मरम्मत करवाने में आए खर्च को इस आधार पर शामिल करने में मदद करता है कि यह कितने समय पहले हुआ था। यह जितना पहले होगा, आपको उतना अधिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे सुधारों या मरम्मतों के लिए नकली बिल और चालान दिखाकर इसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। वे ज्यादा टैक्स लाभ पाने के लिए ऐसा करते हैं, भले ही उन्होंने संपत्ति पर कोई पैसा खर्च न किया हो।
बजट दो हज़ार तेईस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फैसला किया कि जो लोग अपनी संपत्ति बेचकर उस पैसे को नया घर खरीदने में लगाना चाहते हैं, उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी। इसका मतलब यह है कि उन्हें अपनी पुरानी संपत्ति बेचने से मिलने वाली एक निश्चित राशि पर कर नहीं देना होगा। उन्हें यह कर कटौती अधिकतम दस करोड़ रुपये तक मिल सकती है। यह नियम आयकर अधिनियम की धारा चौवन और चौवनF पर लागू होता है। इसके पहले, कोई अधिकतम लिमिट नहीं थी। एक अप्रैल, दो हज़ार चौबीस से, अब लोगों द्वारा अपनी पुरानी संपत्ति बेचने और नई संपत्ति खरीदने पर लगने वाले टैक्स को लेकर नई सीमा निर्धारित कर दी गई है। यह नियम साल दो हज़ार चौबीस-पच्चीस से शुरू होकर आने वाले सालों के लिए लागू होगा। सरकार ने यह सीमा निर्धारित करने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उन्होंने देखा कि कुछ अमीर लोग करों का भुगतान करने से बचने के लिए बहुत महंगे घर खरीद रहे थे। कैपिटल गेन वह धन होता है जो आप किसी संपत्ति को बेचने पर कमाते हैं। कैपिटल गेन अकाउंट सिस्टम के तहत लोग अपने कैपिटल गेन को इस खाते में तब तक रख सकते हैं जब तक कि उन्हें आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा चौवन और चौवनF में लिस्टेड संपत्तियों में फिर से निवेश नहीं कर दिया जाता, इस तरह उनका लंबे समय वाला कैपिटल गेन बना रहता है और उस पर कोई टैक्स नहीं लगता। क्लियरटैक्स के संस्थापक अर्चित गुप्ता बताते हैं कि जब आप घर या संपत्ति बेचते हैं और लाभ कमाते हैं, तो इसे पूंजीगत लाभ कहा जाता है। लेकिन आपको उन लाभों पर कर चुकाना पड़ सकता है। करों पर पैसा बचाने के लिए, कुछ विशेष नियम हैं जो आपको छूट या कटौती प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। ये नियम आपको अपना ज्यादा मुनाफा रखने और करों में कम भुगतान करने की सुविधा देते हैं। ज्यादा मुनाफा प्राप्त करने और कानून के अनुसार पैसे बचाने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाना और इन नियमों का लाभ उठाना जरूरी है। इस तरह की कटौतियां किन्हें मिल सकती हैं, कितनी कटौतियां मिल सकती हैं, कौन सी संपत्ति बेचने की जरूरत है, कौन सी संपत्ति खरीदने की जरूरत है और कितने समय में, जैसे सवालों के जवाब नीचे दिए गए हैंः फिर से निवेश करनाः भारतीय आयकर अधिनियम की धारा चौवन के अनुसार, अगर आप एक आवासीय संपत्ति बेचते हैं और एक तय अवधि के भीतर किसी अन्य आवासीय संपत्ति को खरीदने में कैपिटल गेन को लगाते हैं, तो शुरुआत में जिस प्रॉपर्टी को बेचकर आपने कैपिटल गेन कमाया था उस पर लगने वाले कर से आपको छूट दी जा सकती है। जब आपने घर खरीदा था तो उसकी कीमत रु. बीस लाख थी, और आप इसे बयालीस लाख रुपये में बेच रहे हैं। इस मामले में, आपको बाईस लाख रुपये का लाभ होता है। आपको इस मुनाफे की रकम पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। नियमों के मुताबिक आपको करीब तीन फीसदी सरचार्ज और सेस के अलावा बीस फीसदी LTCG टैक्स भी देना होगा। हालांकि, अगर आप पुरानी संपत्ति की बिक्री से कमाए पैसे से कोई अन्य आवासीय संपत्ति खरीदते हैं तो आपको इस कर का भुगतान करने से छूट मिलेगी। वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन के अनुसार, अगर आप अपना टैक्स दाखिल करने के समय तक घर बेचने से मिले पैसे का उपयोग नया घर खरीदने के लिए नहीं करते हैं, तो आप उस पैसे को कैपिटल गेन्स खाता योजना नाम के एक विशेष खाते में डाल सकते हैं। लेकिन फिर भी आपको उस पैसे का उपयोग दो साल या तीन साल के भीतर एक नया घर खरीदने के लिए करना होगा। आपको अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले इसे खोलना होगा। याद रखें, आप इस खाते के पैसे का उपयोग केवल घर खरीदने के लिए कर सकते हैं, किसी और चीज़ के लिए नहीं। यदि आप समय सीमा के भीतर घर खरीदने के लिए पैसे का उपयोग नहीं करते हैं, तो आपको पहला घर बेचने से हुए लाभ पर टैक्स देना होगा। इसलिए नियमों का पालन करना और समय पर नया घर खरीदने के लिए पैसे का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। BankBazaar इस मामले में अपवादों के बारे में बताता हैः एक. आपको केवल एक घर खरीदने पर ही छूट मिल सकती है। अगर आप कैपिटल गेन का उपयोग एक से ज्यादा घर खरीदने के लिए कर रहे हैं, तो आप केवल एक घर की लागत पर छूट का दावा कर पाएंगे। दो. धारा चौवन के तहत छूट आपको तभी मिल सकती है जब आप भारत में घर खरीद रहे हों। देश के बाहर खरीदी गई किसी भी आवासीय संपत्ति पर आपको एलटीसीजी टैक्स चुकाने से कोई छूट नहीं मिलेगी। तीन. आप पुराने घर की बिक्री से प्राप्त मुनाफे से खरीदे गए नए घर को खरीदने या निर्माण पूरा होने के तीन साल बाद तक नहीं बेच सकते। इसका मतलब यह है कि अगर आप नया घर खरीदने/निर्माण के तीन साल पूरा होने से पहले बेचते हैं, तो धारा चौवन के तहत आपको प्राप्त लाभ रद्द कर दिया जाएगा और आपको एलटीसीजी टैक्स देना होगा। कृषि भूमि की बिक्रीः आयकर अधिनियम की धारा चौवनB कृषि भूमि की बिक्री से होने वाले कैपिटल गेन पर भी छूट देती है। यहां करदाता को पुरानी भूमि के ट्रांसफर की तारीख से दो साल की अवधि के भीतर दूसरी कृषि भूमि खरीदनी अनिवार्य है। अपने स्टॉक बेचें, घर खरीदेंः जब आप जमीन, बिल्डिंग, स्टॉक, सिक्योरिटी, बॉन्ड, वाहन, पेटेंट, ट्रेडमार्क, ज्वैलरी, या मशीनरी जैसी चीजें बेचते हैं, और आप बिक्री से मुनाफा कमाते हैं, तो यह भी कैपिटल गेन के अंतर्गत आता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने पंद्रह लाख रुपये के स्टॉक खरीदे। और बाद में उन्हें तेईस लाख रुपये में बेच दिया। इस तरह आपने आपने आठ लाख रुपये का मुनाफा कमाया। अगर आप स्टॉक बेचने से प्राप्त लाभ लेते हैं और इसका उपयोग नया घर खरीदने या बनाने में करते हैं, तो आप उस आठ लाख के मुनाफे पर कर बचा सकते हैं। इसका मतलब है कि आपको उस रकम पर टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स लॉस हार्वेस्टिंगः टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग बेचने से प्राप्त धन पर भुगतान की जाने वाली कर की मात्रा को कम करने का एक तरीका है। अगर किसी का कोई निवेश है, जैसे स्टॉक या म्यूचुअल फंड, जिसकी वैल्यू कम हो गई है, तो वे उस नुकसान की "भरपाई" करने के लिए इसे बेच सकते हैं। फिर जो नुकसान हुआ है, उसको आप अन्य निवेशों को बेचने से मिले लाभ पर भुगतान की जाने वाली कर की राशि को कम करने के लिए कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति एक साल से ज्यादा समय तक शेयर या म्यूचुअल फंड रखता है, तो उससे होने वाले लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। उन्हें इस लाभ से अर्जित पहले एक लाख रुपये पर कर नहीं देना पड़ता है। लेकिन अगर उनका लाभ एक लाख रुपये से ज्यादा है, तो उन्हें इससे ऊपर की राशि पर दस% टैक्स देना होगा। दूसरी ओर, अगर कोई एक साल के भीतर अपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचता है, तो जो भी लाभ होता है उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। शॉर्ट टर्म लाभ के लिए, उन्हें पंद्रह% कर का भुगतान करना होगा, चाहे वे कितना भी पैसा कमाएं। इसलिए, टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग से लोगों को कुछ निवेशों से होने वाले नुकसान का उपयोग अन्य निवेशों से होने वाले लाभ की भरपाई के लिए अपने करों को कम करने में मदद मिलती है। यह अपने निवेश को चतुराई से प्रबंधित करके करों पर पैसा बचाने का एक तरीका है। टैक्स हार्वेस्टिंग से निवेशकों को लॉन्गटर्म कैपिटल गेन पर कर कम करने में मदद मिल सकती है। मान लीजिए कि एक निवेशक ने एक मार्च, दो हज़ार तेईस को इक्विटी म्यूचुअल फंड में पाँच लाख रुपये लगाए। पाँच मार्च, दो हज़ार चौबीस तक, निवेश बढ़कर पाँच. पचास लाख रुपये हो गया, जो एलटीसीजी के तहत कर के अधीन है। चूंकि लाभ एक लाख रुपये से कम है, इसलिए कोई कर नहीं देना होगा। अब, निवेशक पाँच मार्च, दो हज़ार चौबीस को यूनिट बेच सकता है, और उसी दिन यूनिट खरीदने के लिए सभी पैसे का उपयोग कर सकता है। नया खरीद प्राइस शुरुआती निवेश बन जाता है। छः मार्च दो हज़ार पच्चीस को अगर निवेश बढ़कर छः. दो लाख रुपये हो जाता है तो वित्त वर्ष दो हज़ार छब्बीस के लिए LTCG सिर्फ सत्तर,शून्य रुपयापये होगा। ऐसे में LTCG पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। टैक्स हार्वेस्टिंग के बिना, पाँच लाख रुपये का शुरुआती निवेश दो साल में छः. दो लाख रुपये हो जाता। एक. दो लाख रुपये के एलटीसीजी का मतलब बीस,शून्य रुपयापये का टैक्सेबल गेन होगा। वहीं अगर आप टैक्स हार्वेस्टिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो दस% हिसाब से आप अतिरिक्त दो हज़ार का टैक्स बचा सकते हैं। खास बॉन्ड में निवेशः जब आप कोई प्रॉपर्टी या अन्य चीज़ बेचते हैं, तो आपको आमतौर पर बिक्री से प्राप्त धन पर कर का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन इस कर को बचाने का एक तरीका है। नया घर खरीदने के बजाय, आप बेचने से प्राप्त धन को सरकार द्वारा प्रस्तावित विशेष बॉन्डों में निवेश कर सकते हैं। ये बॉन्ड सरकार के लिए ऋण की तरह हैं, और वे आपको छः% की ब्याज दर का भुगतान करते हैं। हालांकि, इन बॉन्डों पर आप जो ब्याज कमाते हैं उस पर भी कर देना होता है। वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा, जब आप इन बॉन्डों में निवेश करते हैं, तो आपको एक निश्चित अवधि के लिए पैसे को लॉक करके रखने पड़ते हैं, जिसका अर्थ है कि आप इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं या बॉन्ड बेच नहीं सकते हैं। विशिष्ट बांड के आधार पर यह अवधि तीन या पाँच वर्ष है। साथ ही, टैक्स छूट का दावा करने के लिए आप एक साल में केवल पचास लाख रुपये तक ही निवेश कर सकते हैं। विंट वेल्थ ने बताया, यदि आप लॉक-इन अवधि समाप्त होने से पहले बॉन्ड बेचते हैं, तो आपके द्वारा पहले दावा की गई कर छूट उलट जाएगी, और आपको बॉन्ड बेचने से प्राप्त धन पर कर का भुगतान करना होगा। इसलिए, कर छूट बनाए रखने के लिए बॉन्ड बेचने या रिडीम करने से पहले लॉक-इन अवधि पूरी होने तक इंतजार करना जरूरी है। स्टार्ट-अप छूटः सीए महिमा वछराजानी ने कहा, सरकार लोगों को स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। इसलिए, उन्होंने वित्त अधिनियम दो हज़ार इक्कीस में धारा चौवनGB नाम का एक नियम बनाया। यह नियम कहता है कि यदि आप लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को इन स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश करते हैं, तो आपको उस पैसे पर टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन कुछ नियम हैं जिनका आपको पालन करना होगा। प्रॉपर्टी या अन्य चीज जिसको बेचकर आपने लाभ कमाया है, उसे बेचने के छह महीने के भीतर स्टार्ट-अप कंपनियों में पैसा निवेश करना होगा। और कुछ अन्य चीजें हैं जिन्हें आपको जांचना होगा, जैसे कि आपके पास स्टार्ट-अप कंपनी की कितनी हिस्सेदारी है और आपको अपना निवेश कितने समय तक रखना है। इन नियमों का पालन करके, आप करों पर पैसा बचा सकते हैं और साथ ही नए व्यवसायों को समर्थन देने में मदद कर सकते हैं! कमियांः आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ द्वारा दी गई विभिन्न छूटों के अलावा, शशांक अग्रवाल, अधिवक्ता, दिल्ली एचसी, कुछ कमियां बताते हैं जो किसी व्यक्ति को निम्नलिखित दो मामलों में कैपिटल पर कर से बचने में मदद कर सकती हैंः i. कर कानून की धारा सैंतालीस कहती है कि कुछ प्रकार के लेनदेन को "ट्रांसफर" नहीं माना जाता है और इसलिए आपको कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि आप अपनी कोई मूल्यवान वस्तु किसी को उपहार के रूप में, वसीयत के माध्यम से, या किसी ट्रस्ट में को देते हैं या हस्तांतरित करते हैं, तो आपको उस पर कर नहीं देना होगा। ii. कर कानून कहता है कि अगर आप कोई संपत्ति खरीदते हैं या उसकी मरम्मत करवाते हैं, तो आपको "इंडेक्सेशन" नाम का लाभ मिल सकता है। यह लाभ आपको संपत्ति खरीदने या मरम्मत करवाने में आए खर्च को इस आधार पर शामिल करने में मदद करता है कि यह कितने समय पहले हुआ था। यह जितना पहले होगा, आपको उतना अधिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे सुधारों या मरम्मतों के लिए नकली बिल और चालान दिखाकर इसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। वे ज्यादा टैक्स लाभ पाने के लिए ऐसा करते हैं, भले ही उन्होंने संपत्ति पर कोई पैसा खर्च न किया हो।
मुंबई, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन के बीच पॉप स्टार यो-यो हनी सिंह अपने वजन और मासपेशियों पर काम कर इस लॉकडाउन का सबसे अधिक लाभ उठा रहे हैं, जिसका परिणाम काफी अच्छा दिख रहा है। रैपर ने इंस्टाग्राम पर अपनी नए टोंड शरीर की तस्वीरें शेयर की हैं। उनका नया लुक प्रशंसकों को बहुत पसंद आ रहा है। रैपर अपने हालिया गीत 'लोका' में भी काफी मोटा दिखाई दिए थे, लेकिन उनकी लॉकडाउन पोस्ट से ऐसा लगता है कि हनी सिंह अब उस छवि को बदलने के लिए तैयार हैं। शेयर हुई टोंड शरीर की तस्वीर देखते ही उनके प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। एक अन्य प्रशंसक ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा, आप हमेशा एक विजेता हैं!
मुंबई, सोलह अप्रैल । कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन के बीच पॉप स्टार यो-यो हनी सिंह अपने वजन और मासपेशियों पर काम कर इस लॉकडाउन का सबसे अधिक लाभ उठा रहे हैं, जिसका परिणाम काफी अच्छा दिख रहा है। रैपर ने इंस्टाग्राम पर अपनी नए टोंड शरीर की तस्वीरें शेयर की हैं। उनका नया लुक प्रशंसकों को बहुत पसंद आ रहा है। रैपर अपने हालिया गीत 'लोका' में भी काफी मोटा दिखाई दिए थे, लेकिन उनकी लॉकडाउन पोस्ट से ऐसा लगता है कि हनी सिंह अब उस छवि को बदलने के लिए तैयार हैं। शेयर हुई टोंड शरीर की तस्वीर देखते ही उनके प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। एक अन्य प्रशंसक ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा, आप हमेशा एक विजेता हैं!
जीवाजीवाधिकार : गाथा ६३ से ६४ ही स्त्रय जीव है, उसके अतिरिक्त दूसरा कोई जीव नहीं है । इसलिये यह भाव सत्य नहीं है । ससार अवस्था में वर्ण, गध, रस, और स्पर्श यदि जीवके हों तो जीव रूपी कहलायगा, क्योंकि वर्णादिक रूपी हैं, और रूपीपन पुद्गल द्रव्यका असाधारण लक्षण है, इसलिये जीव भी पुद्गल सिद्ध हुआ क्योंकि दोनोका लक्षण एक ही है, और दोनोंका लक्षण एक होनेसे लक्ष भी एक ही सिद्ध होगा । इसप्रकार पुद्गल ही जीव सिद्ध हुआ इसलिये जीव पदार्थ ही नहीं रहा । और वर्गादि युक्त जीव ही मुक्त हुआ क्योकि जीव और पुद्गल दोनों में लक्षणभेद न होनेसे पुद्गल ही मुक्तिको प्राप्त होता है यह सिद्ध हुआ । इसप्रकार पुद्गलके अतिरिक्त अन्य किसी भी जीव पदार्थ के अस्तित्वका अभाव सिद्ध होता है । शरीर, मन, वाणी और आत्मा त्रिकालमें प्रतिक्षण मिन्न हैं । शरीर और भात्मामें मात्र निमित्त नैमित्तिक सम्बन्ध है वह जानने योग्य है । गुरुदेव कहते हैं कि रूपित्र तो जड़का लक्षण है, इसलिये वह तेरे आत्माका लक्षण नहीं है । अजीवमें जीव और जीवमें अजीव नहीं है, यह नास्तिस्वभावकी अपेक्षा कथन है, और अस्तिकी अपेक्षा से सबके स्वचतुष्टय सबमें हैं । परमाणु और आत्मा स्वचतुष्टय द्रव्य, क्षेत्र, काल भाव सब सबके अपने अपने कारण से हैं, आत्माकी अवस्था जड़के आधीन नहीं है, और जड़की आत्माके आधीन नहीं है। यदि शरीर, वाणी और मन मात्माके रखे रहते हों तो जड़की अवस्था तेरे अधीन हुई कहलाई, तब फिर पृथक्त्वकी अवस्था कहाँसे होगी और मुक्त दशा कहाँसे होगी । मुक्तका अर्थ आत्मासे अलग होना नहीं किन्तु परसे अलग होना है, विकारादिसे अलग होना है। पृथक्त्वकी श्रद्धा और ज्ञानके विना मुक्तावस्था प्रगट नहीं होगी। जो यहाँ ससार में जड़की अवस्थाको मानता है, उसके हिसाब से तो मोक्षमें भी वह अवस्था साथ ही जायेगी, क्योंकि जो अपना होता है, वह त्रिकाल अपने साथ ही रहता है । इसलिये यदि यहाँ ससारमें मी शरीर, मन और वाणी की अवस्थाको अपने कारण से होना माने तो मोक्ष में मी पुद्गल द्रव्य स्वय जीव सिद्ध होता है, किन्तु ऐसा नहीं है ।
जीवाजीवाधिकार : गाथा तिरेसठ से चौंसठ ही स्त्रय जीव है, उसके अतिरिक्त दूसरा कोई जीव नहीं है । इसलिये यह भाव सत्य नहीं है । ससार अवस्था में वर्ण, गध, रस, और स्पर्श यदि जीवके हों तो जीव रूपी कहलायगा, क्योंकि वर्णादिक रूपी हैं, और रूपीपन पुद्गल द्रव्यका असाधारण लक्षण है, इसलिये जीव भी पुद्गल सिद्ध हुआ क्योंकि दोनोका लक्षण एक ही है, और दोनोंका लक्षण एक होनेसे लक्ष भी एक ही सिद्ध होगा । इसप्रकार पुद्गल ही जीव सिद्ध हुआ इसलिये जीव पदार्थ ही नहीं रहा । और वर्गादि युक्त जीव ही मुक्त हुआ क्योकि जीव और पुद्गल दोनों में लक्षणभेद न होनेसे पुद्गल ही मुक्तिको प्राप्त होता है यह सिद्ध हुआ । इसप्रकार पुद्गलके अतिरिक्त अन्य किसी भी जीव पदार्थ के अस्तित्वका अभाव सिद्ध होता है । शरीर, मन, वाणी और आत्मा त्रिकालमें प्रतिक्षण मिन्न हैं । शरीर और भात्मामें मात्र निमित्त नैमित्तिक सम्बन्ध है वह जानने योग्य है । गुरुदेव कहते हैं कि रूपित्र तो जड़का लक्षण है, इसलिये वह तेरे आत्माका लक्षण नहीं है । अजीवमें जीव और जीवमें अजीव नहीं है, यह नास्तिस्वभावकी अपेक्षा कथन है, और अस्तिकी अपेक्षा से सबके स्वचतुष्टय सबमें हैं । परमाणु और आत्मा स्वचतुष्टय द्रव्य, क्षेत्र, काल भाव सब सबके अपने अपने कारण से हैं, आत्माकी अवस्था जड़के आधीन नहीं है, और जड़की आत्माके आधीन नहीं है। यदि शरीर, वाणी और मन मात्माके रखे रहते हों तो जड़की अवस्था तेरे अधीन हुई कहलाई, तब फिर पृथक्त्वकी अवस्था कहाँसे होगी और मुक्त दशा कहाँसे होगी । मुक्तका अर्थ आत्मासे अलग होना नहीं किन्तु परसे अलग होना है, विकारादिसे अलग होना है। पृथक्त्वकी श्रद्धा और ज्ञानके विना मुक्तावस्था प्रगट नहीं होगी। जो यहाँ ससार में जड़की अवस्थाको मानता है, उसके हिसाब से तो मोक्षमें भी वह अवस्था साथ ही जायेगी, क्योंकि जो अपना होता है, वह त्रिकाल अपने साथ ही रहता है । इसलिये यदि यहाँ ससारमें मी शरीर, मन और वाणी की अवस्थाको अपने कारण से होना माने तो मोक्ष में मी पुद्गल द्रव्य स्वय जीव सिद्ध होता है, किन्तु ऐसा नहीं है ।
ग्वालियर । लोकसेवा गारंटी कानून एवं सीएम हैल्पलाइन इत्यादि से संबंधित आवेदनों को गंभीरता से न लेना तीन वरिष्ठ अधिकारियों को भारी पड़ा है। कलेक्टर भरत यादव ने इन तीनों अधिकारियों को तीन - तीन दिवस का अवैतनिक अर्थात वेतन काटने के आदेश जारी किए हैं। कलेक्ट्रेट की लोक सेवा प्रबंधन शाखा से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार गुप्ता, नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री अरविंद शर्मा को तीन - तीन दिवस का अवैतनिक किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. गुप्ता और सहायक यंत्री पीएचई अरविंद शर्मा द्वारा सीएम हैल्पलाइन के तहत प्राप्त हुई शिकायतों का अपने स्तर पर निराकरण नहीं किया, जिससे शिकायतें उच्च स्तर पर अंतरित हुईं। इसी तरह नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल द्वारा सीवेज से संबंधित शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद निराकरण नहीं किया गया। यह लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर श्री यादव ने इन तीनों अधिकारियों को अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगे गए। सिविल सर्जन विनोद कुमार गुप्ता ने कारण बताओ नोटिस का जवाब समय-सीमा में नहीं पेश किया। जबकि क्षेत्रीय अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल व सहायक यंत्री अरविंद शर्मा के स्पष्टीकरण समाधानकारक नहीं पाए गए। कलेक्टर ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम के तहत यह कार्रवाई करने के साथ-साथ उन्हें सचेत भी किया है कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो। अन्यथा और भी सख्त कार्रवाई की जायेगी।
ग्वालियर । लोकसेवा गारंटी कानून एवं सीएम हैल्पलाइन इत्यादि से संबंधित आवेदनों को गंभीरता से न लेना तीन वरिष्ठ अधिकारियों को भारी पड़ा है। कलेक्टर भरत यादव ने इन तीनों अधिकारियों को तीन - तीन दिवस का अवैतनिक अर्थात वेतन काटने के आदेश जारी किए हैं। कलेक्ट्रेट की लोक सेवा प्रबंधन शाखा से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार गुप्ता, नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री अरविंद शर्मा को तीन - तीन दिवस का अवैतनिक किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. गुप्ता और सहायक यंत्री पीएचई अरविंद शर्मा द्वारा सीएम हैल्पलाइन के तहत प्राप्त हुई शिकायतों का अपने स्तर पर निराकरण नहीं किया, जिससे शिकायतें उच्च स्तर पर अंतरित हुईं। इसी तरह नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल द्वारा सीवेज से संबंधित शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद निराकरण नहीं किया गया। यह लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर श्री यादव ने इन तीनों अधिकारियों को अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगे गए। सिविल सर्जन विनोद कुमार गुप्ता ने कारण बताओ नोटिस का जवाब समय-सीमा में नहीं पेश किया। जबकि क्षेत्रीय अधिकारी महेन्द्र अग्रवाल व सहायक यंत्री अरविंद शर्मा के स्पष्टीकरण समाधानकारक नहीं पाए गए। कलेक्टर ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम के तहत यह कार्रवाई करने के साथ-साथ उन्हें सचेत भी किया है कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो। अन्यथा और भी सख्त कार्रवाई की जायेगी।
सिम्बा के मालिक का दावा है कि, यह सबसे लंबे कान वाली बकरी (Simba Goat Longest Ears) है. उन्होंने कहा कि, इस बकरी का जन्म पिछले महीने कराची (Karachi) में हुआ था. वह इसे बडे लाड़-प्यार से पाल रहे हैं. सिम्बा के कान की लंबाई 54 सेमी (21 इंच) तक पहुंच गई है. सिम्बा के बारे में बात करते हुए, मालिक, मोहम्मद हसन नरेजो ने कहा "यह बकरी पिछले जून में पैदा हुई थी, जिसके बाद वह मीडिया की नजरों में आ गई. इसके बाद से वह दुनिया भर में अपनी लम्बे कानों की वजह से सुर्खियां बटोर रही है. ऐसे में इस अनोखी बकरी का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) में दर्ज होने की तैयारी की जा रही है. (SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं. )
सिम्बा के मालिक का दावा है कि, यह सबसे लंबे कान वाली बकरी है. उन्होंने कहा कि, इस बकरी का जन्म पिछले महीने कराची में हुआ था. वह इसे बडे लाड़-प्यार से पाल रहे हैं. सिम्बा के कान की लंबाई चौवन सेमी तक पहुंच गई है. सिम्बा के बारे में बात करते हुए, मालिक, मोहम्मद हसन नरेजो ने कहा "यह बकरी पिछले जून में पैदा हुई थी, जिसके बाद वह मीडिया की नजरों में आ गई. इसके बाद से वह दुनिया भर में अपनी लम्बे कानों की वजह से सुर्खियां बटोर रही है. ऐसे में इस अनोखी बकरी का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने की तैयारी की जा रही है.
Original with; Punjab Vidhan Sabha Djaitized hee Panjab Digital Library PUNJAB VIDHAN SABHA [4TH MARCH, [ मुख्य मन्त्री । और इस के बारे में इन्फर्मेशन इकट्ठी की जा रही है । इस का गुजरात के साथ मुकाबला करना ठीक नहीं । वह पंजाब से अक्सैल नहीं करते इस सारे काम में । श्री राम किशन : क्या गवर्नमेंट के नोटिस में है कि यह एक सीरियस प्रोबलम है और इसके बारे में डिटेल्ड स्कीम तैयार की जानी चाहिए और क्या वह स्कीम तैयार करके हाउस के सामने पेश की जाएगी ? मुख्य मन्त्री : मैं हाउस के सामने इसे पेश करने से गुरेज नहीं करूंगा लेकिन इस चीज़ को देखना ज़रूरी है कि कितने भाई इस में काम करते थे । चांदी के काम में कितने हैं । मोती और जवाहरात के काम में कितने लगे हुए हैं। हमें कोई इलम नहीं, इस बात को एगज़ मिन कर रहे हैं और जो कोई भी बेकार हो जाए स्टेट का काम है कि उसके लिए कोई रास्ता निकाले । श्री राम किशनः क्या चीफ मिनिस्टर साहिब कैटागोरेकली बताने को तैयार हैं कि स्टेटमैन्ट वह हाउस में देंगे कि सारी डिटेल्ज़ क्या हैं और क्या स्कीम है ? मुख्य मन्त्री : मैंने कहा है कि वह आप स्कीम बनाएंगे तो हम उन्हें इमदाद देंगे, कर्जा देंगे और अगर हम न दे सके तो डिसाई साहिब ने एलान किया था कि स्टेट्स अगर न दे सकी तो वह देंगे । हम सही इन्फर्मेशन इकट्ठी कर रहे हैं । ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ ਢਿਲੋਂ : ਸਪੀਕਰ ਸਾਹਿਬ, ਲਾਊਡਸਪੀਕਰ ਵਿਚ ਕੋਈ ਨੁਕਸ ਹੈ, ਮੈਂ ਜੋ ਸਵਾਲ ਕਰਨ ਲਗਾ ਹਾਂ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਜਵਾਬ ਦੇ ਦਿਤਾ ਹੋਵੇ। ਕੀ ਚੀਫ ਮਨਿਸਟਰ ਸਾਹਿਬ ਇਹ ਦਸਣਗੇ ਕਿ ਸੁਨਿਆਰਿਆਂ ਦੇ ਹੋਰ ਕਈ ਮੁਤਾਲਬਾਤ ਹਨ ਤਾਂ ਘਟੋ ਘਟ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੀ ਮੁ ਤਾਲਬਾ ਹੈ ਤੇ ਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਦਾ ਹੱਲ ਸੋਚ ਕੇ ਦਸਣਾ ਹੈ ਜਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਈ ਗੱਲ ਸੋਚ ਕੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਹੈ ? ਦੂਜਾ ਇਹ ਕਿ ਕੀ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਇਹ ਵਿਚਾਰ ਹੈ ਕਿ ਸੁਨਿਆਰਿਆਂ ਨੂੰ ਲੁਹਾਰ ਬਣਾ ਦਿਤਾ ਜਾਵੇ ? (गमा) ਚੀਫ ਮਨਿਸਟਰ : ਜੇਕਰ ਉਹ ਮਸ਼ੀਨ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਉਹ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੋਈ ਕੰਮ ਕਰ ਲੈਣ ਤਾਂ ਕਈ ਵੇਰ ਕਿਸਮਤ ਹੀ ਪਲਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। श्री बलरामजी दास टंडनः जैसा कि होम मिनिस्टर साहिब ने कहा है कि दूसरी स्टेट्स में स्टैप्स लिए गए हैं तो यहां पर कितनी देर के बाद यह फैसला किया जाएगा और स्टैप्स लिए जाएंगे । मुख्य मन्त्री : यह तो उनके अपने ऊपर है कि वह स्कीम बना कर दें कि किस तरह की इमदाद सरकार से चाहते हैं । कामरेड राम प्यारा : क्या चीफ मिनिस्टर साहिब बताएंगे कि सरकार ने कोई डैटा कुलैक्ट करना शुरू किया है कि कितने सुनार बेकार हो गए हैं ? मुख्य मन्त्री : एक दिन में कैसे पता लग सकता है कि श्री डिसाई साहिब को इन्होंने कहा कि सारे देश में 14 करोड़ गोल्ड समिथस हैं वह कहने लगे कि कुल आबादी के पीछे इतने गोसड समिथस नहीं हो सकते । उन्होंने कहा कि 33 लाख आबादी 1957 में थी और 1961 में 5 लाख हो गई होगी इससे ऊपर नहीं । तो ऐसी बातें हैं जिन्हें वर्क आऊट करने की ज़रूरत है ।
Original with; Punjab Vidhan Sabha Djaitized hee Panjab Digital Library PUNJAB VIDHAN SABHA [चारTH MARCH, [ मुख्य मन्त्री । और इस के बारे में इन्फर्मेशन इकट्ठी की जा रही है । इस का गुजरात के साथ मुकाबला करना ठीक नहीं । वह पंजाब से अक्सैल नहीं करते इस सारे काम में । श्री राम किशन : क्या गवर्नमेंट के नोटिस में है कि यह एक सीरियस प्रोबलम है और इसके बारे में डिटेल्ड स्कीम तैयार की जानी चाहिए और क्या वह स्कीम तैयार करके हाउस के सामने पेश की जाएगी ? मुख्य मन्त्री : मैं हाउस के सामने इसे पेश करने से गुरेज नहीं करूंगा लेकिन इस चीज़ को देखना ज़रूरी है कि कितने भाई इस में काम करते थे । चांदी के काम में कितने हैं । मोती और जवाहरात के काम में कितने लगे हुए हैं। हमें कोई इलम नहीं, इस बात को एगज़ मिन कर रहे हैं और जो कोई भी बेकार हो जाए स्टेट का काम है कि उसके लिए कोई रास्ता निकाले । श्री राम किशनः क्या चीफ मिनिस्टर साहिब कैटागोरेकली बताने को तैयार हैं कि स्टेटमैन्ट वह हाउस में देंगे कि सारी डिटेल्ज़ क्या हैं और क्या स्कीम है ? मुख्य मन्त्री : मैंने कहा है कि वह आप स्कीम बनाएंगे तो हम उन्हें इमदाद देंगे, कर्जा देंगे और अगर हम न दे सके तो डिसाई साहिब ने एलान किया था कि स्टेट्स अगर न दे सकी तो वह देंगे । हम सही इन्फर्मेशन इकट्ठी कर रहे हैं । ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ ਢਿਲੋਂ : ਸਪੀਕਰ ਸਾਹਿਬ, ਲਾਊਡਸਪੀਕਰ ਵਿਚ ਕੋਈ ਨੁਕਸ ਹੈ, ਮੈਂ ਜੋ ਸਵਾਲ ਕਰਨ ਲਗਾ ਹਾਂ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਜਵਾਬ ਦੇ ਦਿਤਾ ਹੋਵੇ। ਕੀ ਚੀਫ ਮਨਿਸਟਰ ਸਾਹਿਬ ਇਹ ਦਸਣਗੇ ਕਿ ਸੁਨਿਆਰਿਆਂ ਦੇ ਹੋਰ ਕਈ ਮੁਤਾਲਬਾਤ ਹਨ ਤਾਂ ਘਟੋ ਘਟ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੀ ਮੁ ਤਾਲਬਾ ਹੈ ਤੇ ਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਦਾ ਹੱਲ ਸੋਚ ਕੇ ਦਸਣਾ ਹੈ ਜਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਈ ਗੱਲ ਸੋਚ ਕੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਹੈ ? ਦੂਜਾ ਇਹ ਕਿ ਕੀ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਇਹ ਵਿਚਾਰ ਹੈ ਕਿ ਸੁਨਿਆਰਿਆਂ ਨੂੰ ਲੁਹਾਰ ਬਣਾ ਦਿਤਾ ਜਾਵੇ ? ਚੀਫ ਮਨਿਸਟਰ : ਜੇਕਰ ਉਹ ਮਸ਼ੀਨ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਉਹ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੋਈ ਕੰਮ ਕਰ ਲੈਣ ਤਾਂ ਕਈ ਵੇਰ ਕਿਸਮਤ ਹੀ ਪਲਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। श्री बलरामजी दास टंडनः जैसा कि होम मिनिस्टर साहिब ने कहा है कि दूसरी स्टेट्स में स्टैप्स लिए गए हैं तो यहां पर कितनी देर के बाद यह फैसला किया जाएगा और स्टैप्स लिए जाएंगे । मुख्य मन्त्री : यह तो उनके अपने ऊपर है कि वह स्कीम बना कर दें कि किस तरह की इमदाद सरकार से चाहते हैं । कामरेड राम प्यारा : क्या चीफ मिनिस्टर साहिब बताएंगे कि सरकार ने कोई डैटा कुलैक्ट करना शुरू किया है कि कितने सुनार बेकार हो गए हैं ? मुख्य मन्त्री : एक दिन में कैसे पता लग सकता है कि श्री डिसाई साहिब को इन्होंने कहा कि सारे देश में चौदह करोड़ गोल्ड समिथस हैं वह कहने लगे कि कुल आबादी के पीछे इतने गोसड समिथस नहीं हो सकते । उन्होंने कहा कि तैंतीस लाख आबादी एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में थी और एक हज़ार नौ सौ इकसठ में पाँच लाख हो गई होगी इससे ऊपर नहीं । तो ऐसी बातें हैं जिन्हें वर्क आऊट करने की ज़रूरत है ।
नयी दिल्ली, 10 जुलाई भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर का मानना है कि जन्मजात हृदय रोग के साथ पैदा हुए बच्चों के लिए स्वस्थ जीवन का दूसरा मौका मिलने से बड़ा कोई और आशीर्वाद नहीं हो सकता है और उन्होंने शनिवार को आपने 72वें जन्मदिन पर छोटे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रण किया। गावस्कर का 'हार्ट टू हार्ट' फाउंडेशन पिछले कुछ वर्षों से श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पतालों के साथ इससे जुड़ा काम कर रहा है। इसके जरिये '99 प्रतिशत की सफलता दर' के साथ लगभग 16,000 बच्चों की मुफ्त सर्जरी की गयी हैं। उन्होंने अपने क्रिकेट के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिंदगी के लिए दूसरा मौका मिलना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा, " मेरे जन्मदिन पर मेरी इच्छा है कि अधिक से अधिक लोग इसमें मदद करें और बच्चों के जीवन को बचाने में शामिल हों। लोग चाहे तो ऑनलाइन तरीके से श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन अस्पतालों में, 'केवल दिल है, कोई बिल (खर्च) नहीं है'। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, दस जुलाई भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर का मानना है कि जन्मजात हृदय रोग के साथ पैदा हुए बच्चों के लिए स्वस्थ जीवन का दूसरा मौका मिलने से बड़ा कोई और आशीर्वाद नहीं हो सकता है और उन्होंने शनिवार को आपने बहत्तरवें जन्मदिन पर छोटे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रण किया। गावस्कर का 'हार्ट टू हार्ट' फाउंडेशन पिछले कुछ वर्षों से श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पतालों के साथ इससे जुड़ा काम कर रहा है। इसके जरिये 'निन्यानवे प्रतिशत की सफलता दर' के साथ लगभग सोलह,शून्य बच्चों की मुफ्त सर्जरी की गयी हैं। उन्होंने अपने क्रिकेट के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिंदगी के लिए दूसरा मौका मिलना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा, " मेरे जन्मदिन पर मेरी इच्छा है कि अधिक से अधिक लोग इसमें मदद करें और बच्चों के जीवन को बचाने में शामिल हों। लोग चाहे तो ऑनलाइन तरीके से श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन अस्पतालों में, 'केवल दिल है, कोई बिल नहीं है'। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
"ये लो किताबें" पुरानी लाइब्रेरी में एक बूढ़े आदमी ने कहा ....मुझे बचपन से ही पुस्तकें पढ़ने का शौक़ रहा है,मेरे मम्मी पापा अच्छी तरह से जानते थे इसको पैसे दे दो, किताबें ज़रूर लेकर आएगा.मेरे पास क़रीब २५००-३००० पुस्तकों का संग्रह हैं.मेरे पापा सरकारी नौकरी में हैं, समय-समय पर नौकरी के लिए हस्तांतरण होता रहता था, और मैं लाइब्रेरी ही ढूँढता यह और मुझे मिल भी जाती थी.आजकल बड़ा ही दुख होता हैं मोबाइल ने आने वाली पीढ़ियों को न सिर्फ़ पुस्तकों से दूर किया हैं बल्कि अपनों से भी.जहां मैं रहता था, आज से २०-२५ साल पहले मैं लाइब्रेरी में जाया करता था, वहाँ पर किताबों के साथ साथ आपको नए लोग भी मिलते थे, वहाँ पर अक्सर एक ४५ साल के एक व्यक्ति भी आया करते थे सरकारी नौकरी में थे, बहुत देर बैठ कर पुस्तकें पढ़ा करते थे और जब भी उनसे बात करता था बड़ा ही अच्छा लगता था हर विषय पर उनसे बात की जा सकती थी. समय अपनी रफ़्तार से चलता हैं, मैं यांत्रिक अभियंता हो गया और नौकरी के लिए किसी और शहर चला गया, लेकिन लाइब्रेरी की यादें ताजा हो जाया करती थी, मेरी पहली नौकरी Gr Noida,फिर पिलखुवा चला गया, एक दिन अचानक पता चला कि मेरी नौकरी सोनीपत में एक अच्छी कंपनी में लग गई,पुस्तकों से प्रेम अभी भी था, अक्सर दिल्ली पुस्तक मेले में पुस्तकें लेने ही जाया करता था, कई बार ऐसा भी हुआ हैं पैसे के अभाव में पुस्तकें ख़रीद नहीं पाया.एक दिन रविवार के दिन सोनीपत के बाज़ार में घूम रहा था,दूर कहीं मुझे एक लाइब्रेरी दिखाई दी, मैं तुरंत सब काम छोड़ लाइब्रेरी जा पहुँचा, लाइब्रेरी में अंदर घुसतें ही "एक लो किताबें" एक बूढ़े आदमी ने कहा, तुम्हारे मतलब की हैं. अरे कमाल हो गया आप तो वो ही हैं जब हम साथ-साथ ३०-३५ साल पहले लाइब्रेरी में पढ़ते थे, और कई विषयों पर बातें भी करते थे.हाँ-हाँ मैं वो ही हूँ यहीं का रहने वाला था वहाँ तो नौकरी में था देखो क्या कमाल हुआ हैं पुस्तकों को प्रेम करने वाले फिर मिल गये,तभी तो तुमको देखते ही बोला "ये लो किताबें" तुम्हारे मतलब की क्योंकि मुझे पता हैं, आप किस तरह की पुस्तकें पढ़ते हैं, बातों बातों में पता चला ये पुस्तकालय उन्हीं का हैं, और इसके बाद मैंने ये decide किया कि मैं आपको अपने पुस्तक संग्रह से २०० पुस्तकें आपकी लाइब्रेरी को दूँ. शीघ्र ही देने जा रहा हूँ. लेखक परिचयः मैं माता रविकांता गोयल ब पिता डॉ देवेंद्र कुमार गोयल के यहाँ १०.०२.१९६७ को पैदा हुआ, एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ यांत्रिक अभियंता, दर्पण छवि लेखक, कार्टूनिस्ट, क्रिकेट अंपायर, दुनियाँ की पहली पुस्तक सुई से लिखने वाला और गणित के ३ पेपर इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित,पीयूष गोयल दर्पण छवि के लेखक,पीयूष गोयल 1७ पुस्तकें दर्पण छवि में लिख चुके हैं,सबसे पहली पुस्तक( ग्रन्थ) "श्री भगवद्गीता"के सभी 18 अध्याय 700 श्लोक हिंदी व् इंग्लिश दोनों भाषाओं में लिखा हैं इसके अलावा पीयूष ने हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा लिखित पुस्तक "मधुशाला"को सुई से लिखा हैं ,और ये दुनिया की पहली पुस्तक हैं जो सुई से व् दर्पण छवि में लिखी गई हैं इसके बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की पुस्तक "गीतांजलि"( जिसके लिए रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को सन 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था) को मेहंदी कोन से लिखा हैं. पीयूष ने विष्णु शर्मा जी की पुस्तक "पंचतंत्र"को कार्बन पेपर से लिखा .अटल जी की पुस्तक "मेरी इक्यावन कवितायेँ"को मैजिक शीट पर लकड़ी के पैन से लिखा और अपनी लिखित पुस्तक "पीयूष वाणी" को फैब्रिक कोन लाइनर से लिखा हैं सं 2003 से 2022 तक 17 पुस्तके लिख चुके हैं.
"ये लो किताबें" पुरानी लाइब्रेरी में एक बूढ़े आदमी ने कहा ....मुझे बचपन से ही पुस्तकें पढ़ने का शौक़ रहा है,मेरे मम्मी पापा अच्छी तरह से जानते थे इसको पैसे दे दो, किताबें ज़रूर लेकर आएगा.मेरे पास क़रीब दो हज़ार पाँच सौ-तीन हज़ार पुस्तकों का संग्रह हैं.मेरे पापा सरकारी नौकरी में हैं, समय-समय पर नौकरी के लिए हस्तांतरण होता रहता था, और मैं लाइब्रेरी ही ढूँढता यह और मुझे मिल भी जाती थी.आजकल बड़ा ही दुख होता हैं मोबाइल ने आने वाली पीढ़ियों को न सिर्फ़ पुस्तकों से दूर किया हैं बल्कि अपनों से भी.जहां मैं रहता था, आज से बीस-पच्चीस साल पहले मैं लाइब्रेरी में जाया करता था, वहाँ पर किताबों के साथ साथ आपको नए लोग भी मिलते थे, वहाँ पर अक्सर एक पैंतालीस साल के एक व्यक्ति भी आया करते थे सरकारी नौकरी में थे, बहुत देर बैठ कर पुस्तकें पढ़ा करते थे और जब भी उनसे बात करता था बड़ा ही अच्छा लगता था हर विषय पर उनसे बात की जा सकती थी. समय अपनी रफ़्तार से चलता हैं, मैं यांत्रिक अभियंता हो गया और नौकरी के लिए किसी और शहर चला गया, लेकिन लाइब्रेरी की यादें ताजा हो जाया करती थी, मेरी पहली नौकरी Gr Noida,फिर पिलखुवा चला गया, एक दिन अचानक पता चला कि मेरी नौकरी सोनीपत में एक अच्छी कंपनी में लग गई,पुस्तकों से प्रेम अभी भी था, अक्सर दिल्ली पुस्तक मेले में पुस्तकें लेने ही जाया करता था, कई बार ऐसा भी हुआ हैं पैसे के अभाव में पुस्तकें ख़रीद नहीं पाया.एक दिन रविवार के दिन सोनीपत के बाज़ार में घूम रहा था,दूर कहीं मुझे एक लाइब्रेरी दिखाई दी, मैं तुरंत सब काम छोड़ लाइब्रेरी जा पहुँचा, लाइब्रेरी में अंदर घुसतें ही "एक लो किताबें" एक बूढ़े आदमी ने कहा, तुम्हारे मतलब की हैं. अरे कमाल हो गया आप तो वो ही हैं जब हम साथ-साथ तीस-पैंतीस साल पहले लाइब्रेरी में पढ़ते थे, और कई विषयों पर बातें भी करते थे.हाँ-हाँ मैं वो ही हूँ यहीं का रहने वाला था वहाँ तो नौकरी में था देखो क्या कमाल हुआ हैं पुस्तकों को प्रेम करने वाले फिर मिल गये,तभी तो तुमको देखते ही बोला "ये लो किताबें" तुम्हारे मतलब की क्योंकि मुझे पता हैं, आप किस तरह की पुस्तकें पढ़ते हैं, बातों बातों में पता चला ये पुस्तकालय उन्हीं का हैं, और इसके बाद मैंने ये decide किया कि मैं आपको अपने पुस्तक संग्रह से दो सौ पुस्तकें आपकी लाइब्रेरी को दूँ. शीघ्र ही देने जा रहा हूँ. लेखक परिचयः मैं माता रविकांता गोयल ब पिता डॉ देवेंद्र कुमार गोयल के यहाँ दस.दो.एक हज़ार नौ सौ सरसठ को पैदा हुआ, एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ यांत्रिक अभियंता, दर्पण छवि लेखक, कार्टूनिस्ट, क्रिकेट अंपायर, दुनियाँ की पहली पुस्तक सुई से लिखने वाला और गणित के तीन पेपर इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित,पीयूष गोयल दर्पण छवि के लेखक,पीयूष गोयल सत्रह पुस्तकें दर्पण छवि में लिख चुके हैं,सबसे पहली पुस्तक "श्री भगवद्गीता"के सभी अट्ठारह अध्याय सात सौ श्लोक हिंदी व् इंग्लिश दोनों भाषाओं में लिखा हैं इसके अलावा पीयूष ने हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा लिखित पुस्तक "मधुशाला"को सुई से लिखा हैं ,और ये दुनिया की पहली पुस्तक हैं जो सुई से व् दर्पण छवि में लिखी गई हैं इसके बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की पुस्तक "गीतांजलि" को मेहंदी कोन से लिखा हैं. पीयूष ने विष्णु शर्मा जी की पुस्तक "पंचतंत्र"को कार्बन पेपर से लिखा .अटल जी की पुस्तक "मेरी इक्यावन कवितायेँ"को मैजिक शीट पर लकड़ी के पैन से लिखा और अपनी लिखित पुस्तक "पीयूष वाणी" को फैब्रिक कोन लाइनर से लिखा हैं सं दो हज़ार तीन से दो हज़ार बाईस तक सत्रह पुस्तके लिख चुके हैं.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
पांच दिन के दिल्ली दौरे पर आईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेगासस जासूसी मामले को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर जोरदार प्रहार किया है। बुधवार को उन्होंने जासूसी मुद्दे को इमरजेंसी से भी गंभीर करार दिया। ममता ने कहा कि मेरा फोन पहले ही टैप हो चुका है। अगर मेरे भतीजे अभिषेक मुखर्जी का फोन टैप हो जाता है, और मैं उससे बात कर रही हूं, तो मेरा फोन भी अपने आप टैप हो जाता है। पेगासस ने सभी की जान खतरे में डाल दी है। एक दिन पहले मंगलवार को ममता ने पीएम नरेंद्र मोदी से मिलकर पेगासस जासूसी मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। विपक्ष का चेहरा बनाए जाने संबंधी सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा-'मैं राजनीतिक ज्योतिषी नहीं हूं। यह स्थितियों पर निर्भर करता है। अगर कोई और नेतृत्व करता है तो उससे कोई समस्या नहीं है। संसद सत्र के बाद सभी विपक्षी दलों को आपस में मुलाकात करनी चाहिए। ' ममता ने कहा कि पूरे देश में खेला होगा। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। वर्ष 2024 में जब आम चुनाव आएंगे तो यह मोदी बनाम देश होगा। ममता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बहुत स्वस्थ पार्टी है। विपक्ष मजबूत होगा तो इतिहास रचेगा। 2024 चुनावों के लिए यही हमारी उम्मीद है। 'राजनीतिक आंधी कोई रोक नहीं पाएगा' सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि वह एक साधारण कार्यकर्ता हैं और एक कार्यकर्ता ही बनी रहना चाहती हैं। मेरे सभी विपक्षी नेताओं से अच्छे संबंध हैं और देश में अगर राजनीतिक आंधी आई तो उसे कोई रोक नहीं सकेगा। अगर विपक्षी दल सीरियस होकर इस पर काम करें तो छह महीने में नतीजे दिख सकते हैं। ममता ने कहा कि हमने अपने कुछ लोगों को त्रिपुरा भेजा, जहां उन्हें नजरबंद कर दिया गया है।
पांच दिन के दिल्ली दौरे पर आईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेगासस जासूसी मामले को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर जोरदार प्रहार किया है। बुधवार को उन्होंने जासूसी मुद्दे को इमरजेंसी से भी गंभीर करार दिया। ममता ने कहा कि मेरा फोन पहले ही टैप हो चुका है। अगर मेरे भतीजे अभिषेक मुखर्जी का फोन टैप हो जाता है, और मैं उससे बात कर रही हूं, तो मेरा फोन भी अपने आप टैप हो जाता है। पेगासस ने सभी की जान खतरे में डाल दी है। एक दिन पहले मंगलवार को ममता ने पीएम नरेंद्र मोदी से मिलकर पेगासस जासूसी मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। विपक्ष का चेहरा बनाए जाने संबंधी सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा-'मैं राजनीतिक ज्योतिषी नहीं हूं। यह स्थितियों पर निर्भर करता है। अगर कोई और नेतृत्व करता है तो उससे कोई समस्या नहीं है। संसद सत्र के बाद सभी विपक्षी दलों को आपस में मुलाकात करनी चाहिए। ' ममता ने कहा कि पूरे देश में खेला होगा। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। वर्ष दो हज़ार चौबीस में जब आम चुनाव आएंगे तो यह मोदी बनाम देश होगा। ममता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बहुत स्वस्थ पार्टी है। विपक्ष मजबूत होगा तो इतिहास रचेगा। दो हज़ार चौबीस चुनावों के लिए यही हमारी उम्मीद है। 'राजनीतिक आंधी कोई रोक नहीं पाएगा' सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि वह एक साधारण कार्यकर्ता हैं और एक कार्यकर्ता ही बनी रहना चाहती हैं। मेरे सभी विपक्षी नेताओं से अच्छे संबंध हैं और देश में अगर राजनीतिक आंधी आई तो उसे कोई रोक नहीं सकेगा। अगर विपक्षी दल सीरियस होकर इस पर काम करें तो छह महीने में नतीजे दिख सकते हैं। ममता ने कहा कि हमने अपने कुछ लोगों को त्रिपुरा भेजा, जहां उन्हें नजरबंद कर दिया गया है।
शिमला -खबरदार। त्यौहारी सीज़न मंे मिठाइयां खाएं तो ज़रा ध्यान से। इसमंे कई जरूरत से ज्यादा रंंग डला हो सकता है जो आपके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। ऐसे मंे शिमला की मिठाइयांे की दुकानांे मंे छापेमारी की गई है। त्यौहारी सीजन को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की टीम ने पुराना बस स्टैंड, लोअर बाजार और गंज बाजार में औचक निरीक्षण किया। टीम की अध्यक्षता सहायक आयुक्त डा. विजया की अगवाई में की गई। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रिया नेगी और चरण दास शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान त्यौहारी सीजन में रंग-बिरंगी मिठाइयों में अधिक रंग के प्रयोग को देखते हुए इनकी मात्रा कम करने के निर्देश दिए गए। पुराने बस स्टैंड की 6 दुकानों का निरीक्षण किया गया। इनमें से दो को हाईजीनिक कंडीशन में न रखने के लिए नोटिस जारी किए गए तथा 2 किलोग्राम के करीब बासी मिठाई को नष्ट किया गया। लोअर बाजार की 5 दुकानों का निरीक्षण किया गया। इनमें खुले में बनाई जा रही जलेबियों को नष्ट करवाया गया और खुले में न बनाने के निर्देश दिए गए। गंज बाजार में किराना दुकानों का निरीक्षण किया गया जहां मिलावटी देगी मिर्च को निकलवाया गया। लाल रंग देने के लिए देगी मिर्च में मिलावट की गई थी तथा दुकानदार को नोटिस जारी किया गया। अधिकारियांे ने लोगों से खुले में रखी मिठाइयां न खरीदने की भी अपील की है।
शिमला -खबरदार। त्यौहारी सीज़न मंे मिठाइयां खाएं तो ज़रा ध्यान से। इसमंे कई जरूरत से ज्यादा रंंग डला हो सकता है जो आपके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। ऐसे मंे शिमला की मिठाइयांे की दुकानांे मंे छापेमारी की गई है। त्यौहारी सीजन को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की टीम ने पुराना बस स्टैंड, लोअर बाजार और गंज बाजार में औचक निरीक्षण किया। टीम की अध्यक्षता सहायक आयुक्त डा. विजया की अगवाई में की गई। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रिया नेगी और चरण दास शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान त्यौहारी सीजन में रंग-बिरंगी मिठाइयों में अधिक रंग के प्रयोग को देखते हुए इनकी मात्रा कम करने के निर्देश दिए गए। पुराने बस स्टैंड की छः दुकानों का निरीक्षण किया गया। इनमें से दो को हाईजीनिक कंडीशन में न रखने के लिए नोटिस जारी किए गए तथा दो किलोग्रामग्राम के करीब बासी मिठाई को नष्ट किया गया। लोअर बाजार की पाँच दुकानों का निरीक्षण किया गया। इनमें खुले में बनाई जा रही जलेबियों को नष्ट करवाया गया और खुले में न बनाने के निर्देश दिए गए। गंज बाजार में किराना दुकानों का निरीक्षण किया गया जहां मिलावटी देगी मिर्च को निकलवाया गया। लाल रंग देने के लिए देगी मिर्च में मिलावट की गई थी तथा दुकानदार को नोटिस जारी किया गया। अधिकारियांे ने लोगों से खुले में रखी मिठाइयां न खरीदने की भी अपील की है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्ली। अगर आप खुद का घर बनवाने या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं तो अब इंतजार मत कीजिए। यह आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है। दरअसल, घर बनाने में इस्तेमाल होने वाला सीमेंट, छड़, ईंट, टाइल्स आदि की कीमत काफी बढ़ गई है। इससे घर की निर्माण लगात में 20%-30% की वृद्धि हो गई है। रॉ-मैटेरियल की कीमत बढ़ने से मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट की लागत भी बढ़ी है। इसके चलते बिल्डर फ्लैट के दाम लगातार बढ़ा रहे हैं। बीते एक साल में नोएडा एक्सटेंशन में किफायती आवास करीब 3000 प्रति स्क्वायर फीट की दर पर मिल रहा था, वह अब बढ़कर आसैतन 4000 प्रति स्क्वायर फीट पहुंच गया है। इसके साथ ही नए प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं होने और मांग बढ़ने से अनसोल्ड इन्वेंट्री तेजी से कम हुई है। यह भी कीमत को ऊपर ले जाने में मदद कर रही है। निर्माण सामग्रियों की बढ़ी कीमतों ने लोगों के अपने आशियाने के इस सपने पर ग्रहण लगा दिया है। घर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लोहे का सरिया, सीमेंट, बालू व गिट्टी से लेकर दीवार पर लगने वाले पेंट की कीमतों में लगभग 30%-45% की बढ़ोतरी हुई है। पानी की फिटिंग में प्रयोग होने वाले पौन इंच दस फुट के पाइप का भाव 195 रुपये से बढ़कर 213 रुपये हो गया है। इसके अलावा पानी की टंकी का 4300 रुपये वाला प्लास्टिक टैंक अब छह हजार का हो गया है। डेढ़ महीने में सीमेंट का भाव 395 रुपये से बढ़कर 430 रुपये प्रति बोरी हो गया है। दिसम्बर से अब तक लोहे के दाम में 20 हजार रुपय टन की बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2021 की तुलना अप्रैल 2022 से करें तो सीमेंट की कीमत में करीब 70%, छड़ में 75%, ईंट में 40%, गिट्टी में 60%, कांच में 100% की वृद्धि दर्ज की गई है। 'प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं कर पाएंगे' रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई के अनुसार रॉ-मैटेरियल के दाम बढ़ने से घरों की कीमतों में 5-8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसमें 5-7 प्रतिशत बढ़ोतरी और होने का अनुमान है। क्रेडाई की रिपोर्ट के मुताबिक, 39 प्रतिशत बिल्डरों ने कहा है कि अगर सीमेंट, छड़, बालू आदि की बढ़ी कीमतों से राहत देने के लिए सरकार द्वारा तत्काल कोई उपाय नहीं किया गया, तो वे परियोजना को समय पर पूरा नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर 76 प्रतिशत डेवलपर ने कहा कि अगर कच्चे माल के दाम वर्तमान स्तर से कम नहीं हुए तो वे अपनी परियोजनाओं को छह महीने तक ही जारी रख पाएंगे। कोरोना महामारी के बाद घरों की मांग तेजी से बढ़ने और नए प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं होने से पिछले दो वर्षों में बिना बिकी इन्वेंट्री में 21% की तेज गिरावट आई है। एनारॉक के अनुसार, शीर्ष सात शहरों में कुल बिना बिके फ्लैट में, किफायती आवास सूची में सबसे महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है। इस बीच, 2. 5 करोड़ रुपये से अधिक की कीमत वाले अल्ट्रा-लक्जरी घरों के अनबिके स्टॉक में इसी अवधि में 5% की गिरावट देखी गई है। इससे भी घरों की कीमत तेजी से बढ़ रही है।
नई दिल्ली। अगर आप खुद का घर बनवाने या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं तो अब इंतजार मत कीजिए। यह आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है। दरअसल, घर बनाने में इस्तेमाल होने वाला सीमेंट, छड़, ईंट, टाइल्स आदि की कीमत काफी बढ़ गई है। इससे घर की निर्माण लगात में बीस%-तीस% की वृद्धि हो गई है। रॉ-मैटेरियल की कीमत बढ़ने से मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट की लागत भी बढ़ी है। इसके चलते बिल्डर फ्लैट के दाम लगातार बढ़ा रहे हैं। बीते एक साल में नोएडा एक्सटेंशन में किफायती आवास करीब तीन हज़ार प्रति स्क्वायर फीट की दर पर मिल रहा था, वह अब बढ़कर आसैतन चार हज़ार प्रति स्क्वायर फीट पहुंच गया है। इसके साथ ही नए प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं होने और मांग बढ़ने से अनसोल्ड इन्वेंट्री तेजी से कम हुई है। यह भी कीमत को ऊपर ले जाने में मदद कर रही है। निर्माण सामग्रियों की बढ़ी कीमतों ने लोगों के अपने आशियाने के इस सपने पर ग्रहण लगा दिया है। घर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लोहे का सरिया, सीमेंट, बालू व गिट्टी से लेकर दीवार पर लगने वाले पेंट की कीमतों में लगभग तीस%-पैंतालीस% की बढ़ोतरी हुई है। पानी की फिटिंग में प्रयोग होने वाले पौन इंच दस फुट के पाइप का भाव एक सौ पचानवे रुपयापये से बढ़कर दो सौ तेरह रुपयापये हो गया है। इसके अलावा पानी की टंकी का चार हज़ार तीन सौ रुपयापये वाला प्लास्टिक टैंक अब छह हजार का हो गया है। डेढ़ महीने में सीमेंट का भाव तीन सौ पचानवे रुपयापये से बढ़कर चार सौ तीस रुपयापये प्रति बोरी हो गया है। दिसम्बर से अब तक लोहे के दाम में बीस हजार रुपय टन की बढ़ोतरी हुई है। मार्च दो हज़ार इक्कीस की तुलना अप्रैल दो हज़ार बाईस से करें तो सीमेंट की कीमत में करीब सत्तर%, छड़ में पचहत्तर%, ईंट में चालीस%, गिट्टी में साठ%, कांच में एक सौ% की वृद्धि दर्ज की गई है। 'प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं कर पाएंगे' रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई के अनुसार रॉ-मैटेरियल के दाम बढ़ने से घरों की कीमतों में पाँच-आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसमें पाँच-सात प्रतिशत बढ़ोतरी और होने का अनुमान है। क्रेडाई की रिपोर्ट के मुताबिक, उनतालीस प्रतिशत बिल्डरों ने कहा है कि अगर सीमेंट, छड़, बालू आदि की बढ़ी कीमतों से राहत देने के लिए सरकार द्वारा तत्काल कोई उपाय नहीं किया गया, तो वे परियोजना को समय पर पूरा नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर छिहत्तर प्रतिशत डेवलपर ने कहा कि अगर कच्चे माल के दाम वर्तमान स्तर से कम नहीं हुए तो वे अपनी परियोजनाओं को छह महीने तक ही जारी रख पाएंगे। कोरोना महामारी के बाद घरों की मांग तेजी से बढ़ने और नए प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं होने से पिछले दो वर्षों में बिना बिकी इन्वेंट्री में इक्कीस% की तेज गिरावट आई है। एनारॉक के अनुसार, शीर्ष सात शहरों में कुल बिना बिके फ्लैट में, किफायती आवास सूची में सबसे महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है। इस बीच, दो. पाँच करोड़ रुपये से अधिक की कीमत वाले अल्ट्रा-लक्जरी घरों के अनबिके स्टॉक में इसी अवधि में पाँच% की गिरावट देखी गई है। इससे भी घरों की कीमत तेजी से बढ़ रही है।
नई दिल्ली (भाषा)। स्वामी हरिदास-तानसेन-संगीत-नृत्य महोत्सव गुरुवार से शुरू होगा। बॉलीवुड गानों की धुनों पर थिरकते हुए वर्ष 2016 से विदा लेने वाली राजधानी दिल्ली में अब 'स्वामी हरिदास-तानसेन-संगीत-नृत्य महोत्सव' की मेजबानी के लिए तैयार है। इस महोत्सव में संगीत प्रेमियों को सर्वश्रेष्ठ शास्त्रीय संगीत और नृत्य का अद्भुत समागम देखने को मिलेगा। चार दिन तक चलने वाला नृत्य एवं संगीत महोत्सव कल शुरू हो रहा है। इसमें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और नृत्य के दिग्गज एक ही छत के नीचे जुटेंगे। इस महोत्सव में जो दिग्गज कलाकार प्रस्तुति देने वाले हैं, उनमें बांसुरीवादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, गायिका शुभा मुदगल और अश्विनी भीडे देशपांडे शामिल हैं। इस महोत्सव का विचार लेकर आने वाली प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना उमा शर्मा भी इसमें प्रस्तुति देंगी। इस वार्षिक महोत्सव में दिग्गज कवियों एवं संगीतकारों- स्वामी हरिदास और मियां तानसेन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। समारोह का समापन उस्ताद शुजात खान और उस्ताद अमजद अली खान की प्रस्तुति के साथ होगा। महोत्सव का उद्घाटन पूर्व क्रिकेटर कपिल देव करेंगे। अतिथियों के रूप में शिव नाडार, मुरलीधर भंडारे, शुभलक्ष्मी खान, अमन अली खान आदि मौजूद होंगे। भारतीय संगीत सदन द्वारा आयोजित यह समारोह मॉडर्न स्कूल के शंकर लाल हॉल में होगा।
नई दिल्ली । स्वामी हरिदास-तानसेन-संगीत-नृत्य महोत्सव गुरुवार से शुरू होगा। बॉलीवुड गानों की धुनों पर थिरकते हुए वर्ष दो हज़ार सोलह से विदा लेने वाली राजधानी दिल्ली में अब 'स्वामी हरिदास-तानसेन-संगीत-नृत्य महोत्सव' की मेजबानी के लिए तैयार है। इस महोत्सव में संगीत प्रेमियों को सर्वश्रेष्ठ शास्त्रीय संगीत और नृत्य का अद्भुत समागम देखने को मिलेगा। चार दिन तक चलने वाला नृत्य एवं संगीत महोत्सव कल शुरू हो रहा है। इसमें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और नृत्य के दिग्गज एक ही छत के नीचे जुटेंगे। इस महोत्सव में जो दिग्गज कलाकार प्रस्तुति देने वाले हैं, उनमें बांसुरीवादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, गायिका शुभा मुदगल और अश्विनी भीडे देशपांडे शामिल हैं। इस महोत्सव का विचार लेकर आने वाली प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना उमा शर्मा भी इसमें प्रस्तुति देंगी। इस वार्षिक महोत्सव में दिग्गज कवियों एवं संगीतकारों- स्वामी हरिदास और मियां तानसेन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। समारोह का समापन उस्ताद शुजात खान और उस्ताद अमजद अली खान की प्रस्तुति के साथ होगा। महोत्सव का उद्घाटन पूर्व क्रिकेटर कपिल देव करेंगे। अतिथियों के रूप में शिव नाडार, मुरलीधर भंडारे, शुभलक्ष्मी खान, अमन अली खान आदि मौजूद होंगे। भारतीय संगीत सदन द्वारा आयोजित यह समारोह मॉडर्न स्कूल के शंकर लाल हॉल में होगा।
नए साल की छुट्टियों के आगमन के साथ, पूर्व संध्या परक्रिसमस, एक हरे रंग का चमत्कार खिड़की के शीशे पर फूल होता है - विचित्र फूलों वाला जंगल कैक्टस, जो स्लमबरगर की लैटिन भाषा में नामित है। इस इनडोर प्लांट के लिए घर पर देखभाल बहुत भारी नहीं है, इसलिए फूल कई शौकिया फूलों के उत्पादकों का ध्यान आकर्षित करता है। लोगों में, धूम्रपान करने वाले को एक डेसिमब्रिस्ट या क्रिसमस का पेड़ कहा जाता है, क्योंकि इसकी फूलों की अवधि क्रिसमस पर है हालांकि कभी-कभी यह जनवरी में नियमों और खिलता से, और यहां तक कि फरवरी में भी जारी होती है। बर्तन एक चौड़ा चुनना बेहतर है, लेकिन गहरा नहीं है,क्योंकि फूल की एक सतही जड़ प्रणाली है। निचले हिस्से में जल निकासी की एक सभ्य परत रखना जरूरी है, क्योंकि पानी की स्थिरता को नींददार नहीं पसंद है। देखभाल का मतलब नियमित पानी के साथ नियमित रूप से होता है। पौधे भरें, क्योंकि वे जड़ें सड़ने लगते हैं, क्योंकि मिट्टी के सूखने की भी कीमत नहीं है, इसलिए आपको पानी की ज़रूरत होती है जब मिट्टी की ऊपरी परत थोड़ी सूखी होती है। सितंबर में, पानी को कम करना आवश्यक है, क्योंकिइनडोर फूल बढ़ने के लिए समाप्त हो रहा है। यह इस अवधि के दौरान है कि यह लॉर्बेबरर के फूल के लिए तैयार करने के लिए शुरू होता है। घर पर देखभाल करने के लिए रात के तापमान की आवश्यकता होती है + 17 डिग्री सेल्सियस कम होती है, क्योंकि केवल ऐसी परिस्थितियों में, फूलों की कलियों को रखा जाएगा। जैसे ही पौधों पर कूड़े दिखाई देते हैं, नियमित नियमित पानी फिर शुरू होता है। आप इनडोर फूलों को खूबसूरती से फूलने के लिए खनिज उर्वरकों के रूप में भी निषेचन दे सकते हैं। नवोदित और फूल के दौरान पॉट को मुड़ और पुनः व्यवस्थित नहीं किया जाना चाहिए, इस स्थिति का अनुपालन बहुत महत्वपूर्ण है।
नए साल की छुट्टियों के आगमन के साथ, पूर्व संध्या परक्रिसमस, एक हरे रंग का चमत्कार खिड़की के शीशे पर फूल होता है - विचित्र फूलों वाला जंगल कैक्टस, जो स्लमबरगर की लैटिन भाषा में नामित है। इस इनडोर प्लांट के लिए घर पर देखभाल बहुत भारी नहीं है, इसलिए फूल कई शौकिया फूलों के उत्पादकों का ध्यान आकर्षित करता है। लोगों में, धूम्रपान करने वाले को एक डेसिमब्रिस्ट या क्रिसमस का पेड़ कहा जाता है, क्योंकि इसकी फूलों की अवधि क्रिसमस पर है हालांकि कभी-कभी यह जनवरी में नियमों और खिलता से, और यहां तक कि फरवरी में भी जारी होती है। बर्तन एक चौड़ा चुनना बेहतर है, लेकिन गहरा नहीं है,क्योंकि फूल की एक सतही जड़ प्रणाली है। निचले हिस्से में जल निकासी की एक सभ्य परत रखना जरूरी है, क्योंकि पानी की स्थिरता को नींददार नहीं पसंद है। देखभाल का मतलब नियमित पानी के साथ नियमित रूप से होता है। पौधे भरें, क्योंकि वे जड़ें सड़ने लगते हैं, क्योंकि मिट्टी के सूखने की भी कीमत नहीं है, इसलिए आपको पानी की ज़रूरत होती है जब मिट्टी की ऊपरी परत थोड़ी सूखी होती है। सितंबर में, पानी को कम करना आवश्यक है, क्योंकिइनडोर फूल बढ़ने के लिए समाप्त हो रहा है। यह इस अवधि के दौरान है कि यह लॉर्बेबरर के फूल के लिए तैयार करने के लिए शुरू होता है। घर पर देखभाल करने के लिए रात के तापमान की आवश्यकता होती है + सत्रह डिग्री सेल्सियस कम होती है, क्योंकि केवल ऐसी परिस्थितियों में, फूलों की कलियों को रखा जाएगा। जैसे ही पौधों पर कूड़े दिखाई देते हैं, नियमित नियमित पानी फिर शुरू होता है। आप इनडोर फूलों को खूबसूरती से फूलने के लिए खनिज उर्वरकों के रूप में भी निषेचन दे सकते हैं। नवोदित और फूल के दौरान पॉट को मुड़ और पुनः व्यवस्थित नहीं किया जाना चाहिए, इस स्थिति का अनुपालन बहुत महत्वपूर्ण है।
दिलेर समाचार, नई दिल्ली। करीब छह दशकों तक अभिनय जगत में सक्रिय रहीं दिग्गज चरित्र अभिनेत्री नरगिस रबादी, जो मनोरंजन उद्योग में 'शम्मी आंटी' के नाम से लोकप्रिय हैं, उनका निधन सोमवार देर शाम मुंबई में हुआ. अशोक शेखर के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं. उन्होंने अपने जुहू सर्कल स्थित घर में अंतिम सांस ली. मंगलवार को ओशिवारा कब्रिस्तान में शम्मी आंटी का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें आशा पारेख, फरीदा जलाल, बोमन ईरानी, फराह खान, अनु कपूर, सुशांत सिंह, प्रिया दत्त, डिजाइनर संदीप खोसला पहुंचे. फ्यूनरल में बड़े स्टार्स नजर नहीं आए.
दिलेर समाचार, नई दिल्ली। करीब छह दशकों तक अभिनय जगत में सक्रिय रहीं दिग्गज चरित्र अभिनेत्री नरगिस रबादी, जो मनोरंजन उद्योग में 'शम्मी आंटी' के नाम से लोकप्रिय हैं, उनका निधन सोमवार देर शाम मुंबई में हुआ. अशोक शेखर के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं. उन्होंने अपने जुहू सर्कल स्थित घर में अंतिम सांस ली. मंगलवार को ओशिवारा कब्रिस्तान में शम्मी आंटी का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें आशा पारेख, फरीदा जलाल, बोमन ईरानी, फराह खान, अनु कपूर, सुशांत सिंह, प्रिया दत्त, डिजाइनर संदीप खोसला पहुंचे. फ्यूनरल में बड़े स्टार्स नजर नहीं आए.
सबसे छोटा या संक्षिप्त उपहार भारतवर्ष का ही है। भारत की सरकार की ओर से तो स्तालिन के जन्म दिवस की सत्तरवीं वर्षगांठ पर कोई उपहार भेजना आवश्यक नहीं समझा गया। ब्रिटिश कौमनवैल्थ की ओर से ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधान मन्त्री चचिन ने एक तलवार भेंट की थी। पंडित नेहरू उस में अपना भी प्रतिनिधित्व रामझ कर संतुष्ट हो गये। अलबत्ता कानपुर मजदूरसभा ने एक खद्दर का लाल झन्डा अवश्य भेजा था। दूसरी वस्तु दक्षिण, सम्भवतः आन्ध्र से किसी व्यक्ति द्वारा भेजा गया एक चावल का दाना है जिस पर स्तालिन की सत्तरवीं वर्षगांठ के अवसर पर बधाई का सन्देश लिखा हुआ है । यह दोनों ही वस्तुएं बड़े यत्न से कांच-मढ़ी हुई अलमारी में सुरक्षित हैं । स्तालिन की वर्षगांठ पर भेजे जाने वाले उपहारों की चर्चा समय-समय पर संसार के अनेक पत्रों में होती रही है । उस चर्चा को पढ़ कर कुछ लोगों की यही धारणा रही है कि इन उपहारों से स्तालिन बहुत अमीर आदमी बन गये हैं। इस संग्रहालय का प्रबन्ध स्तालिन के रिश्तेदार अथवा मित्रों के हाथ में नहीं सोवियत सरकार द्वारा नियत एक डाइरेक्टर के हाथ में है । जैसे दूसरे संग्रहालयों; तालस्ताय स्मृति संग्रहालय आदि के लिये डाइरेक्टर नियत हैं; वैसे ही यहां भी हैं । डाइरेक्टर से बातचीत में हम लोग पूछ बैठे--"क्या कामरेड स्तालिन इन सब उपहारों को देख चुके हैं ?" डाइरेक्टर के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई -- "कैसे सम्भव हो सकता है ? यह उपहार तो भावना के प्रतीक हैं । कामरेड स्तालिन ने उन्हें सीधा यहीं भेज देने का आदेश दे दिया है। यहीं उन का हिसाब किताब रखा जाता है।" संग्रहालय में एक रजिस्टर भी है जिस में दर्शक संग्रहालय को देखने के बाद कुछ लिख आते हैं। हम लोगों ने भी यह पंक्तियाँ हिन्दी में ही लिख दीं- "वियाना विश्व शान्ति कांग्रेस में भाग लेने वाले हम भारतीय प्रतिनिधि इस संग्रहालय को देख कर बहुत सन्तुष्ट और उत्साहित हुये हैं। यह संग्रहालय कामरेड स्तालिन के प्रति सोवियत राष्ट्रसंघ की जनता और संसार के दूसरे देशों की जनता के आदर और प्रेम का जवलन्त प्रतीक है। हम लोग भी कामरेड स्तालिन के महान व्यक्तित्व और उनके जीवन के महान उद्देश्य के प्रति अपने देश की जनता की श्रद्धा और आदर समर्पित करते हैं। इस संग्रहालय में बिताया हुआ समय हमारे जीवन की चिरस्थाई स्मृति रहेगा। हम इस संस्था के संचालकों के प्रति आभारी हैं। हम कामरेड स्तालिन के व्यक्तित्व के प्रति अपना आदर और सोवियत जनता के प्रति अपना भातृभाव प्रकट
सबसे छोटा या संक्षिप्त उपहार भारतवर्ष का ही है। भारत की सरकार की ओर से तो स्तालिन के जन्म दिवस की सत्तरवीं वर्षगांठ पर कोई उपहार भेजना आवश्यक नहीं समझा गया। ब्रिटिश कौमनवैल्थ की ओर से ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधान मन्त्री चचिन ने एक तलवार भेंट की थी। पंडित नेहरू उस में अपना भी प्रतिनिधित्व रामझ कर संतुष्ट हो गये। अलबत्ता कानपुर मजदूरसभा ने एक खद्दर का लाल झन्डा अवश्य भेजा था। दूसरी वस्तु दक्षिण, सम्भवतः आन्ध्र से किसी व्यक्ति द्वारा भेजा गया एक चावल का दाना है जिस पर स्तालिन की सत्तरवीं वर्षगांठ के अवसर पर बधाई का सन्देश लिखा हुआ है । यह दोनों ही वस्तुएं बड़े यत्न से कांच-मढ़ी हुई अलमारी में सुरक्षित हैं । स्तालिन की वर्षगांठ पर भेजे जाने वाले उपहारों की चर्चा समय-समय पर संसार के अनेक पत्रों में होती रही है । उस चर्चा को पढ़ कर कुछ लोगों की यही धारणा रही है कि इन उपहारों से स्तालिन बहुत अमीर आदमी बन गये हैं। इस संग्रहालय का प्रबन्ध स्तालिन के रिश्तेदार अथवा मित्रों के हाथ में नहीं सोवियत सरकार द्वारा नियत एक डाइरेक्टर के हाथ में है । जैसे दूसरे संग्रहालयों; तालस्ताय स्मृति संग्रहालय आदि के लिये डाइरेक्टर नियत हैं; वैसे ही यहां भी हैं । डाइरेक्टर से बातचीत में हम लोग पूछ बैठे--"क्या कामरेड स्तालिन इन सब उपहारों को देख चुके हैं ?" डाइरेक्टर के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई -- "कैसे सम्भव हो सकता है ? यह उपहार तो भावना के प्रतीक हैं । कामरेड स्तालिन ने उन्हें सीधा यहीं भेज देने का आदेश दे दिया है। यहीं उन का हिसाब किताब रखा जाता है।" संग्रहालय में एक रजिस्टर भी है जिस में दर्शक संग्रहालय को देखने के बाद कुछ लिख आते हैं। हम लोगों ने भी यह पंक्तियाँ हिन्दी में ही लिख दीं- "वियाना विश्व शान्ति कांग्रेस में भाग लेने वाले हम भारतीय प्रतिनिधि इस संग्रहालय को देख कर बहुत सन्तुष्ट और उत्साहित हुये हैं। यह संग्रहालय कामरेड स्तालिन के प्रति सोवियत राष्ट्रसंघ की जनता और संसार के दूसरे देशों की जनता के आदर और प्रेम का जवलन्त प्रतीक है। हम लोग भी कामरेड स्तालिन के महान व्यक्तित्व और उनके जीवन के महान उद्देश्य के प्रति अपने देश की जनता की श्रद्धा और आदर समर्पित करते हैं। इस संग्रहालय में बिताया हुआ समय हमारे जीवन की चिरस्थाई स्मृति रहेगा। हम इस संस्था के संचालकों के प्रति आभारी हैं। हम कामरेड स्तालिन के व्यक्तित्व के प्रति अपना आदर और सोवियत जनता के प्रति अपना भातृभाव प्रकट
टौणीदेवी - ग्राम पंचायत चबूतरा के जंगल में लगभग डेढ़ सप्ताह पहले संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की मौत को लेकर अभी रहस्य बना हुआ है। मृतक की माता व अन्य परिजनों ने हत्या का संदेह जताया है। पुलिस ने प्रथम दृष्टया में इसे आत्महत्या का मामला माना है। अभी पुलिस बिसरा रिपोर्ट आने का इंजतार कर रही है। उसके बाद मामले का पूरी तरह से खुलासा हो पाएगा। मृतक के परिजन मामले की तह तक जाने की मांग कर रहे हैं तथा आगामी दिनों में पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों से गुहार लगाने वाले हैं। गौरतलब है कि कोट पंचायत के जुल्लीं गांव के अजय कुमार पुत्र कश्मीर सिंह का शव संदिग्ध परिस्थितियांे में चबूतरा के जंगल में बीती नौ जुलाई को मिला था। शव के पास ही उसकी बाइक पड़ी हुई थी। बाइक के साथ ही एक जहर की बोतल भी मिली थी। इस संदर्भ में पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर का कहना है कि मृतक का बिसरा जांच के लिए मंडी भेजा गया है। इसके साथ ही मृतक के पास मिली कीटनाशक दवाई की शीशी व मिट्टी भी जांच के लिए भेजी गई है। बिसरा रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी कारवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि परिजनों को कोई संदेह है, तो इसकी जांच भी की जाएगी।
टौणीदेवी - ग्राम पंचायत चबूतरा के जंगल में लगभग डेढ़ सप्ताह पहले संदिग्ध परिस्थितियों में युवक की मौत को लेकर अभी रहस्य बना हुआ है। मृतक की माता व अन्य परिजनों ने हत्या का संदेह जताया है। पुलिस ने प्रथम दृष्टया में इसे आत्महत्या का मामला माना है। अभी पुलिस बिसरा रिपोर्ट आने का इंजतार कर रही है। उसके बाद मामले का पूरी तरह से खुलासा हो पाएगा। मृतक के परिजन मामले की तह तक जाने की मांग कर रहे हैं तथा आगामी दिनों में पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों से गुहार लगाने वाले हैं। गौरतलब है कि कोट पंचायत के जुल्लीं गांव के अजय कुमार पुत्र कश्मीर सिंह का शव संदिग्ध परिस्थितियांे में चबूतरा के जंगल में बीती नौ जुलाई को मिला था। शव के पास ही उसकी बाइक पड़ी हुई थी। बाइक के साथ ही एक जहर की बोतल भी मिली थी। इस संदर्भ में पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर का कहना है कि मृतक का बिसरा जांच के लिए मंडी भेजा गया है। इसके साथ ही मृतक के पास मिली कीटनाशक दवाई की शीशी व मिट्टी भी जांच के लिए भेजी गई है। बिसरा रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी कारवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि परिजनों को कोई संदेह है, तो इसकी जांच भी की जाएगी।
नई दिल्लीः गर्मियों के दिनों में तरबूज खाना हर किसी को पसंद होता है लेकिन क्या आपने सोचा है इसे खाते वक्त हम कई गलतियां कर देते हैं। जी हां ये बात जानकर आपको थोड़ी सी अटपटी लगे लेकिन यह बात ध्यान देने वाली बात है कि तरबूज खाते वक्त हम कई ऐसी गलतियां कर देते हैं जिसकी वजह से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है। आपको बता दें एक दिन में 400-500 ग्राम तरबूज का सेवन करना ठीक रहता है। इससे अधिक मात्रा में इसका सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं इसके अधिक सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में। तरबूज में पानी के साथ-साथ काफी मात्रा में डाइटरी फाइबर भी पाया जाता है। इसके ज्यादा सेवन करने से पेट से संबंधित जैसे गैस, पेट फूलना और डायरिया जैसे कई समस्या हो सकती है। तरबूज में पानी की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसके ज्यादा सेवन से शरीर में पानी की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है जो ज्यादा परेशानी भी खड़ी कर सकता है, क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि शरीर में पानी के बढ़े हुए स्तर के कारण पानी बाहर नहीं निकल पाता, जिस वजह से शरीर में ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है। जिस वजह से आपको पैरों में सूजन और थकान जैसी कई परेशानियां हो सकती है।
नई दिल्लीः गर्मियों के दिनों में तरबूज खाना हर किसी को पसंद होता है लेकिन क्या आपने सोचा है इसे खाते वक्त हम कई गलतियां कर देते हैं। जी हां ये बात जानकर आपको थोड़ी सी अटपटी लगे लेकिन यह बात ध्यान देने वाली बात है कि तरबूज खाते वक्त हम कई ऐसी गलतियां कर देते हैं जिसकी वजह से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है। आपको बता दें एक दिन में चार सौ-पाँच सौ ग्राम तरबूज का सेवन करना ठीक रहता है। इससे अधिक मात्रा में इसका सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं इसके अधिक सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में। तरबूज में पानी के साथ-साथ काफी मात्रा में डाइटरी फाइबर भी पाया जाता है। इसके ज्यादा सेवन करने से पेट से संबंधित जैसे गैस, पेट फूलना और डायरिया जैसे कई समस्या हो सकती है। तरबूज में पानी की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसके ज्यादा सेवन से शरीर में पानी की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है जो ज्यादा परेशानी भी खड़ी कर सकता है, क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि शरीर में पानी के बढ़े हुए स्तर के कारण पानी बाहर नहीं निकल पाता, जिस वजह से शरीर में ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है। जिस वजह से आपको पैरों में सूजन और थकान जैसी कई परेशानियां हो सकती है।
LUCKNOW: यूपी के 12 शहरों को स्मार्टसिटी के रूप में डेवलप करने की कवायद शुरू हो गयी है। शुक्रवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्मार्टसिटी का सपना साकार करने के लिए संबंधित शहरों द्वारा प्रपोजल प्रस्तुत किए गये। तय हुआ कि सबसे पहले जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज तथा ई गर्वनेंस से जुड़े काम कराये जाएंगे। एक बार इसे विकसित करने के बाद यह फॉर्मूला बाकी शहरों में भी लागू किया जाएगा। मुख्य सचिव ने स्मार्टसिटी से जुड़ी केन्द्रीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए जल्द प्रपोजल भेजने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने सभी 12 शहरों के प्रपोजल पर सहमति जताई है। 12 शहरों के स्मार्टसिटी प्रपोजल बनाने को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा इम्पैनल्ड कन्सल्टेन्ट का चयन किया गया है। भारत सरकार द्वारा स्मार्टसिटी प्रपोजल के मूल्यांकन के लिए विभिन्न पैरामीटर्स का निर्धारण किया गया है। स्मार्टसिटी बनने वाले शहरों के रहनेवालों से उनकी जरूरत के मुताबिक सुझाव मांगने के बाद यह प्रपोजल तैयार किया गया है। नगर आयुक्त लखनऊ ने बताया कि कैसरबाग एवं उसके आस-पास के 719 एकड़ क्षेत्र को चिन्हित किया जा चुका है। साथ ही स्मार्ट सिटी नेटवर्क विद फोकस ऑन स्मार्ट मोबिलिटी से संबंधित कार्य इस प्रस्ताव में सम्मिलित है। आगरा के नगर आयुक्त ने बताया कि प्रपोजल में ताजमहल के समीप ताजगंज एवं फतेहाबाद रोड के मध्य विकास कार्य किए जाने हैं। अलीगढ़ के नगर आयुक्त ने बताया कि अचल ताल, जामा मस्जिद, नगर निगम और कलेक्ट्रेट का क्षेत्र चुना गया है। नगर निगम अलीगढ़ की भूमि भी चिन्हित की गयी है जिस पर पार्किंग के साथ-साथ उनका व्यावसायिक उपयोग भी प्रस्तावित है। इलाहाबाद के अधिकारियों ने बताया कि मम्फोर्डगंज, कटरा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, चंद्रशेखर आजाद पार्क तथा हाथी पार्क का चयन किया गया है। साथ ही, कुंभ मेले की जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है। नगर आयुक्त बरेली ने बताया कि प्रस्ताव में बरेली द्वारा ग्रीनफील्ड क्षेत्र का चयन किया गया है जो बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा रामगंगा आवास योजना के अन्तर्गत अधिकृत की गयी थी। वहीं पैन सिटी के लिए आईसीटी बेस्ड स्ट्रीट लाईट एवं सीसीटीवी के कार्य लिये गये हैं। नगर आयुक्त गाजियाबाद ने बताया कि राजनगर एवं उसके निकटवर्ती क्षेत्र को योजना के तहत चुना गया है। साथ ही, ट्रैफिक मैनजमेंट सिस्टम, इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम एवं स्मार्ट पार्किंग के कार्य कराने का प्रस्ताव है। नगर आयुक्त झांसी ने बताया कि प्रपोजल के तहत झांसी रेलवे स्टेशन के पास के व्यावसायिक आवासीय क्षेत्र में इन्टेलीजेन्ट ट्रैफि क मैनेजमेंट विद स्मार्ट पार्किंग के विभिन्न कार्य कराये जाएंगे। नगर आयुक्त कानपुर ने बताया कि कानपुर का घंटाघर क्षेत्र तथा इसके निकटवर्ती 11 वार्डो को सम्मिलित करते हुए इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, पब्लिक एड्रेस, स्मार्ट पार्किंग से संबंधित कार्य प्रस्ताव में हैं। नगर आयुक्त मुरादाबाद ने बताया कि शहर के मध्य सम्भल स्क्वायर एवं बुद्ध बाजार के समीपवर्ती क्षेत्र तथा पुनर्विकास के लिए रामगंगा के किनारे नदी के सौंदर्यीकरण से संबंधित विभिन्न कार्य प्रस्तावित हैं। सीडीओ रामपुर ने बताया कि रामपुर उत्तराखण्ड एवं जिम कार्बेट नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार है तथा रामपुर नगर को पर्यटन कीे दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। वाराणसी नगर निगम के चीफ इंजीनियर ने बताया कि शहर के पुराने क्षेत्र सिगरा, गदौलिया, मैदागिन, लोहरावीर, भेलूपुर में चार लाख की आबादी रहती है। योजना के तहत यहां सभी कोर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम प्रस्तावित किया गया है। साथ ही इन्टेलीजेन्ट ट्रैफिक मैनेजमेन्ट विद सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, स्मार्ट पार्किंग इत्यादि कार्य भी प्रपोजल में शामिल किये गये हैं। नगर आयुक्त सहारनपुर ने बताया कि अम्बाला-सहारनपुर रोड, थम्मोला रिवर तथा आईसीटी मिल तथा ओल्ड म्युनिसिपल बाउंड्री के आस-पास के इलाकों को विकसित किया जाना है। रेट्रोफिटिंग क्षेत्र में एक मुख्य मार्ग को पूरी तरह पैदल मार्ग के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
LUCKNOW: यूपी के बारह शहरों को स्मार्टसिटी के रूप में डेवलप करने की कवायद शुरू हो गयी है। शुक्रवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्मार्टसिटी का सपना साकार करने के लिए संबंधित शहरों द्वारा प्रपोजल प्रस्तुत किए गये। तय हुआ कि सबसे पहले जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज तथा ई गर्वनेंस से जुड़े काम कराये जाएंगे। एक बार इसे विकसित करने के बाद यह फॉर्मूला बाकी शहरों में भी लागू किया जाएगा। मुख्य सचिव ने स्मार्टसिटी से जुड़ी केन्द्रीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए जल्द प्रपोजल भेजने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने सभी बारह शहरों के प्रपोजल पर सहमति जताई है। बारह शहरों के स्मार्टसिटी प्रपोजल बनाने को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा इम्पैनल्ड कन्सल्टेन्ट का चयन किया गया है। भारत सरकार द्वारा स्मार्टसिटी प्रपोजल के मूल्यांकन के लिए विभिन्न पैरामीटर्स का निर्धारण किया गया है। स्मार्टसिटी बनने वाले शहरों के रहनेवालों से उनकी जरूरत के मुताबिक सुझाव मांगने के बाद यह प्रपोजल तैयार किया गया है। नगर आयुक्त लखनऊ ने बताया कि कैसरबाग एवं उसके आस-पास के सात सौ उन्नीस एकड़ क्षेत्र को चिन्हित किया जा चुका है। साथ ही स्मार्ट सिटी नेटवर्क विद फोकस ऑन स्मार्ट मोबिलिटी से संबंधित कार्य इस प्रस्ताव में सम्मिलित है। आगरा के नगर आयुक्त ने बताया कि प्रपोजल में ताजमहल के समीप ताजगंज एवं फतेहाबाद रोड के मध्य विकास कार्य किए जाने हैं। अलीगढ़ के नगर आयुक्त ने बताया कि अचल ताल, जामा मस्जिद, नगर निगम और कलेक्ट्रेट का क्षेत्र चुना गया है। नगर निगम अलीगढ़ की भूमि भी चिन्हित की गयी है जिस पर पार्किंग के साथ-साथ उनका व्यावसायिक उपयोग भी प्रस्तावित है। इलाहाबाद के अधिकारियों ने बताया कि मम्फोर्डगंज, कटरा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, चंद्रशेखर आजाद पार्क तथा हाथी पार्क का चयन किया गया है। साथ ही, कुंभ मेले की जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है। नगर आयुक्त बरेली ने बताया कि प्रस्ताव में बरेली द्वारा ग्रीनफील्ड क्षेत्र का चयन किया गया है जो बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा रामगंगा आवास योजना के अन्तर्गत अधिकृत की गयी थी। वहीं पैन सिटी के लिए आईसीटी बेस्ड स्ट्रीट लाईट एवं सीसीटीवी के कार्य लिये गये हैं। नगर आयुक्त गाजियाबाद ने बताया कि राजनगर एवं उसके निकटवर्ती क्षेत्र को योजना के तहत चुना गया है। साथ ही, ट्रैफिक मैनजमेंट सिस्टम, इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम एवं स्मार्ट पार्किंग के कार्य कराने का प्रस्ताव है। नगर आयुक्त झांसी ने बताया कि प्रपोजल के तहत झांसी रेलवे स्टेशन के पास के व्यावसायिक आवासीय क्षेत्र में इन्टेलीजेन्ट ट्रैफि क मैनेजमेंट विद स्मार्ट पार्किंग के विभिन्न कार्य कराये जाएंगे। नगर आयुक्त कानपुर ने बताया कि कानपुर का घंटाघर क्षेत्र तथा इसके निकटवर्ती ग्यारह वार्डो को सम्मिलित करते हुए इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, पब्लिक एड्रेस, स्मार्ट पार्किंग से संबंधित कार्य प्रस्ताव में हैं। नगर आयुक्त मुरादाबाद ने बताया कि शहर के मध्य सम्भल स्क्वायर एवं बुद्ध बाजार के समीपवर्ती क्षेत्र तथा पुनर्विकास के लिए रामगंगा के किनारे नदी के सौंदर्यीकरण से संबंधित विभिन्न कार्य प्रस्तावित हैं। सीडीओ रामपुर ने बताया कि रामपुर उत्तराखण्ड एवं जिम कार्बेट नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार है तथा रामपुर नगर को पर्यटन कीे दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। वाराणसी नगर निगम के चीफ इंजीनियर ने बताया कि शहर के पुराने क्षेत्र सिगरा, गदौलिया, मैदागिन, लोहरावीर, भेलूपुर में चार लाख की आबादी रहती है। योजना के तहत यहां सभी कोर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम प्रस्तावित किया गया है। साथ ही इन्टेलीजेन्ट ट्रैफिक मैनेजमेन्ट विद सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, स्मार्ट पार्किंग इत्यादि कार्य भी प्रपोजल में शामिल किये गये हैं। नगर आयुक्त सहारनपुर ने बताया कि अम्बाला-सहारनपुर रोड, थम्मोला रिवर तथा आईसीटी मिल तथा ओल्ड म्युनिसिपल बाउंड्री के आस-पास के इलाकों को विकसित किया जाना है। रेट्रोफिटिंग क्षेत्र में एक मुख्य मार्ग को पूरी तरह पैदल मार्ग के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देशभर में बवाल हुआ था। दिल्ली सहित कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन चले थे। 28 मई को मोदी सरकार (गृह मंत्रालय) ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नोटिफिकेशन से अफगानिस्तान, पाक और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रदेश के चार सहित देश के 13 जिलों के लिए खिड़की खोली है। अब इनके कलेक्टरों को भी नागरिकता प्रमाण-पत्र देने का अधिकार दिया गया है। बाड़मेर में रह रहे इन पाक विस्थापित गैर मुस्लिम लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। यहां बसे लोग एक-दूसरे को गुड़ खिलाकर खुशी जाहिर कर रहे हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना की जानकारी शरणार्थियों को मिलते ही उनके चेहरे से खुशी झलक पड़ी। बाड़मेर में रह रहे पाक से आए काफी लोगों को नागरिकता मिली चुकी है। सैकड़ों लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन कर रखें हैं। इस अधिसूचना के बाद सबके चेहरे खिल उठे। पाक विस्थापित संघ अध्यक्ष नरपत सिंह धारा का कहना है कि बाड़मेर में करीब 206 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है। 206 ऐसे आवेदक हैं, जिन्होंने 6-10 साल पहले गुहाल लगाई थी। फिर भी नागरिकता नहीं मिली है। बकौल नरपत सिंह, पहले हमें आवेदन करने के बाद जयपुर, दिल्ली तक जाना पड़ता था। इस अधिसूचना से ऑनलाइन आवेदन करने के बाद हमें जयपुर, जोधपुर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कलेक्टर द्वारा जांच कर कोई गलती या कमी होने पर इसके बारे में बताया जाएगा। भारत की नागरिकता मिलने के बाद इनको मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी। चेतनराम बताते हैं कि मुझे बाड़मेर आए 30-35 साल हो गए हैं। मुझे नागरिकता मिल गई है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है। पाक से अपनी बहन-बेटियों की इज्जत बचाकर अल्पसंख्यक हिन्दू यहां आते हैं। अब सरकार ने जो अधिसूचना जारी की इससे पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर आए लोगों में बहुत खुशी है कि इन लोगों को जल्द भारत की नागरिकता मिल जाएगी। आम लोगों के जैसे इनको भी मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में नागरिकता अधिनियम 1955 और 2009 के तहत बनाए गए नियमों के तत्काल पालन करने की बात कही है। हालांकि नए नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नियमों को अभी तैयार नहीं किया गया है। गौरतलब है कि सरकार सीएए को नवंबर 2019 मेंं संसद में पास कराया था। यह जनवरी 2020 से प्रभावी है। तब इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 28 मई को केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की अधिसूचना के मुताबिक राजस्थान के जालोर, उदयपुर, पाली, बाड़मेर, सिरोही, गुजरात के मोरबी, राजकोट, पाटण, और वड़ोदरा, छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बालौदा बाजार, हरियाणा के फरीदाबाद, पंजाब के जालंधर में नागरिकता आवेदन स्वीकार करने का अधिकार अब जिला कलेक्टरों को भी दे दिया गया हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देशभर में बवाल हुआ था। दिल्ली सहित कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन चले थे। अट्ठाईस मई को मोदी सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नोटिफिकेशन से अफगानिस्तान, पाक और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रदेश के चार सहित देश के तेरह जिलों के लिए खिड़की खोली है। अब इनके कलेक्टरों को भी नागरिकता प्रमाण-पत्र देने का अधिकार दिया गया है। बाड़मेर में रह रहे इन पाक विस्थापित गैर मुस्लिम लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। यहां बसे लोग एक-दूसरे को गुड़ खिलाकर खुशी जाहिर कर रहे हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना की जानकारी शरणार्थियों को मिलते ही उनके चेहरे से खुशी झलक पड़ी। बाड़मेर में रह रहे पाक से आए काफी लोगों को नागरिकता मिली चुकी है। सैकड़ों लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन कर रखें हैं। इस अधिसूचना के बाद सबके चेहरे खिल उठे। पाक विस्थापित संघ अध्यक्ष नरपत सिंह धारा का कहना है कि बाड़मेर में करीब दो सौ छः लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है। दो सौ छः ऐसे आवेदक हैं, जिन्होंने छः-दस साल पहले गुहाल लगाई थी। फिर भी नागरिकता नहीं मिली है। बकौल नरपत सिंह, पहले हमें आवेदन करने के बाद जयपुर, दिल्ली तक जाना पड़ता था। इस अधिसूचना से ऑनलाइन आवेदन करने के बाद हमें जयपुर, जोधपुर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कलेक्टर द्वारा जांच कर कोई गलती या कमी होने पर इसके बारे में बताया जाएगा। भारत की नागरिकता मिलने के बाद इनको मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी। चेतनराम बताते हैं कि मुझे बाड़मेर आए तीस-पैंतीस साल हो गए हैं। मुझे नागरिकता मिल गई है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है। पाक से अपनी बहन-बेटियों की इज्जत बचाकर अल्पसंख्यक हिन्दू यहां आते हैं। अब सरकार ने जो अधिसूचना जारी की इससे पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर आए लोगों में बहुत खुशी है कि इन लोगों को जल्द भारत की नागरिकता मिल जाएगी। आम लोगों के जैसे इनको भी मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में नागरिकता अधिनियम एक हज़ार नौ सौ पचपन और दो हज़ार नौ के तहत बनाए गए नियमों के तत्काल पालन करने की बात कही है। हालांकि नए नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नियमों को अभी तैयार नहीं किया गया है। गौरतलब है कि सरकार सीएए को नवंबर दो हज़ार उन्नीस मेंं संसद में पास कराया था। यह जनवरी दो हज़ार बीस से प्रभावी है। तब इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। अट्ठाईस मई को केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की अधिसूचना के मुताबिक राजस्थान के जालोर, उदयपुर, पाली, बाड़मेर, सिरोही, गुजरात के मोरबी, राजकोट, पाटण, और वड़ोदरा, छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बालौदा बाजार, हरियाणा के फरीदाबाद, पंजाब के जालंधर में नागरिकता आवेदन स्वीकार करने का अधिकार अब जिला कलेक्टरों को भी दे दिया गया हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सलमान खान जल्द ही टाइगर जिंदा है में नजर आएंगे जिसमें एक्शन के साथ उनका रोमांटिक अवतार भी नजर आएगा। हाल में मीडिया बातचीत करते हुए सलमान खान ने कहा कि "रोमांस करना हमेशा अच्छा होता है। फाइट करना सही नहीं होता है लेकिन रोमांस करना हमेशा सही होता है। " फिल्म में सलमान खान और कैटरीना कैफ की जोड़ी सालों बाद पर्दे पर नजर आएगी। हाल में बिग बॉस 11 के वीकेंड के बार में सलमान कान "दिल दिया गल्ला" लॉन्च किया जो लोगों को काफी ज्यादा पसंद आ रहा है। सलमान खान ने कहा कि जल्द ही टाइगर जिंदा है के बारे में भी पता चल जाएगा कि लोग फिल्म को पसंद करते हैं या नहीं। सलमान खान ने कहा कि जल्द ही टाइगर जिंदा है के बारे में भी पता चल जाएगा कि लोग फिल्म को पसंद करते हैं या नहीं। फिल्म के दो गाने स्वैग से स्वागत और दिल दिया गल्ला' रिलीज हो चुकी है और दर्शकों ने दोनों ही गानों को काफी पसंद कर रहे हैं। दिल दिया गल्ला गाने में रोमांटिक अवतार दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। सलमान खान और कैटरीना कैफ लगभग 5 सालों बाद एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आ रहे हैं और फैन्स बेसब्री से फिल्म का इंतजार कर रहे हैं।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सलमान खान जल्द ही टाइगर जिंदा है में नजर आएंगे जिसमें एक्शन के साथ उनका रोमांटिक अवतार भी नजर आएगा। हाल में मीडिया बातचीत करते हुए सलमान खान ने कहा कि "रोमांस करना हमेशा अच्छा होता है। फाइट करना सही नहीं होता है लेकिन रोमांस करना हमेशा सही होता है। " फिल्म में सलमान खान और कैटरीना कैफ की जोड़ी सालों बाद पर्दे पर नजर आएगी। हाल में बिग बॉस ग्यारह के वीकेंड के बार में सलमान कान "दिल दिया गल्ला" लॉन्च किया जो लोगों को काफी ज्यादा पसंद आ रहा है। सलमान खान ने कहा कि जल्द ही टाइगर जिंदा है के बारे में भी पता चल जाएगा कि लोग फिल्म को पसंद करते हैं या नहीं। सलमान खान ने कहा कि जल्द ही टाइगर जिंदा है के बारे में भी पता चल जाएगा कि लोग फिल्म को पसंद करते हैं या नहीं। फिल्म के दो गाने स्वैग से स्वागत और दिल दिया गल्ला' रिलीज हो चुकी है और दर्शकों ने दोनों ही गानों को काफी पसंद कर रहे हैं। दिल दिया गल्ला गाने में रोमांटिक अवतार दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। सलमान खान और कैटरीना कैफ लगभग पाँच सालों बाद एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आ रहे हैं और फैन्स बेसब्री से फिल्म का इंतजार कर रहे हैं।
Faridabad/Alive News : शिक्षा व खेल प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है इसीलिए इन दोनो का प्रशिक्षण लेने में पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दे यह उदगार आर. के. चिलाना ने संजय गांधी मैमोरियल नगर स्थित शक्तिपीठ पब्लिक स्कूल में आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर कहे। चिलाना ने कहा कि खेलों से जहां मानसिक एवं स्वास्थ्य दोनों स्वस्थ रहते है वही शिक्षा में आप आगे बढ़ सकते है। क्योकि शिक्षा एक ब्लैंक चैक है जिसे आप देश विदेश के किसी भी कौने में भुना सकते है। उन्होंने बच्चो से अपील की कि वह शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद दोनो में ध्यान दे। उन्होंने कहा कि खेलकूद प्रगति का घौतक है। इस कार्यक्रम में बच्चो ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर खिलाडियो का उत्साहवर्घन करने के लिए विद्यालय के प्रबंधक सत्यभूषण आर्य एडवोकेट, प्रि. ज्योति आर्या, आरपी हंस, सुरेश गुलाटी, सत्यपाल शास्त्री, मुकेश शास्त्री, नटवर लाल मिश्रा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए चिंलाना ने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जो ईमानदार है, सच्चा है और मेहनती है वह सफलता के सर्वोच्च शिखर को छू लेता है। सत्यभूषण आर्य ने विद्यार्थियों को बताया कि आर के चिलाना एवं उनके परिवार ने अंगदान का संकल्प लेकर समाज के सामने स्वयं को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है। विद्यार्थियों ने कबड्डी, खो खो, बैडमिंटन, बाधा दौड़, रस्सा कसी आदि खेलों का प्रदर्शन किया। जिसमें विजेताओ को चिलाना ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
Faridabad/Alive News : शिक्षा व खेल प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है इसीलिए इन दोनो का प्रशिक्षण लेने में पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दे यह उदगार आर. के. चिलाना ने संजय गांधी मैमोरियल नगर स्थित शक्तिपीठ पब्लिक स्कूल में आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर कहे। चिलाना ने कहा कि खेलों से जहां मानसिक एवं स्वास्थ्य दोनों स्वस्थ रहते है वही शिक्षा में आप आगे बढ़ सकते है। क्योकि शिक्षा एक ब्लैंक चैक है जिसे आप देश विदेश के किसी भी कौने में भुना सकते है। उन्होंने बच्चो से अपील की कि वह शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद दोनो में ध्यान दे। उन्होंने कहा कि खेलकूद प्रगति का घौतक है। इस कार्यक्रम में बच्चो ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर खिलाडियो का उत्साहवर्घन करने के लिए विद्यालय के प्रबंधक सत्यभूषण आर्य एडवोकेट, प्रि. ज्योति आर्या, आरपी हंस, सुरेश गुलाटी, सत्यपाल शास्त्री, मुकेश शास्त्री, नटवर लाल मिश्रा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए चिंलाना ने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जो ईमानदार है, सच्चा है और मेहनती है वह सफलता के सर्वोच्च शिखर को छू लेता है। सत्यभूषण आर्य ने विद्यार्थियों को बताया कि आर के चिलाना एवं उनके परिवार ने अंगदान का संकल्प लेकर समाज के सामने स्वयं को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है। विद्यार्थियों ने कबड्डी, खो खो, बैडमिंटन, बाधा दौड़, रस्सा कसी आदि खेलों का प्रदर्शन किया। जिसमें विजेताओ को चिलाना ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
MOTA MOT नियंत्रण और कॉल सेंटर को सेवा में रखा गया थाः नियंत्रण केंद्र की स्थापना माल्टा मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका MOTA network द्वारा की गई थी ताकि उड़ानों पर वाहनों और ड्राइवरों की निगरानी करने और तुरंत लाइनों में हस्तक्षेप करने के लिए, विस्तार सेवा नेटवर्क को नियंत्रण में रखा जा सके। एमओटीएएस के महाप्रबंधक अनवर सादात तामगासी, जिन्होंने नियंत्रण केंद्र के बारे में जानकारी प्रदान की है, जो प्रति घंटे के आधार पर काम करेगा, ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन ले जाने वाले वाहनों के आंदोलनों को केंद्र से मॉनिटर किया जाएगा और प्रारंभ और चेक बिंदुओं पर ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। Tamgac; इसके अलावा, जब हम जीएसएम रेडियो बुनियादी ढांचे के माध्यम से अपने वाहनों के साथ संवाद करते हैं, तो हमारे वाहनों में एलईडी सूचना स्क्रीन को नवीनीकृत किया जाता है और अंतिम-मिनट के घटनाक्रम और आपातकालीन सूचनाएं इन स्क्रीन के माध्यम से बनाई जा सकती हैं। हमने कंट्रोल सेंटर के भीतर अपना कॉल सेंटर भी स्थापित किया। हमारे नागरिक अब हमारे कॉल सेंटर के 0 422 502 2 502 पर हमारी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बारे में अपनी इच्छाओं, इच्छाओं और शिकायतों को व्यक्त कर सकते हैं। इसके अलावा, 0 552 502 2 502 वाट्सएप लाइन हमें तक पहुंचने में सक्षम होगी, Ayrıca उन्होंने कहा। माल्टा मेट्रोपॉलिटन म्यूनिसिपैलिटी के मेयर अहमत saidakır ने कहा कि MOTA Center कंट्रोल एंड कॉल सेंटर के लॉन्च के बाद, वे उन वाहनों और ड्राइवरों का पालन कर सकते थे जो मैदान में सेवा कर रहे थे और वे कम समय में अपने अनुरोधों और शिकायतों को समाप्त कर सकेंगे। काकीर ने कहा, "मुख्य रोक बिंदुओं के माध्यम से नियंत्रण केंद्र के भीतर मेट्रोपॉलिटन म्युनिसिपैलिटी मोटास ट्राम्ब्स मेंटेनेंस सेंटर कंट्रोल सेंटर को गलती से रिकॉर्ड बनाने के लिए वाहनों और उपकरणों के अनुसार ड्राइवरों से मिली जानकारी के अनुसार, निर्देशन के लिए प्रदान किया जाएगा। MOTA C कॉल सेंटर के साथ काकीर, हरेकेट की भी पेशकश की गई, नागरिकों को किसी भी प्रश्न का निकटतम उत्तर दिया जा सकता है और निकटतम बस से अपेक्षित स्टॉप, ट्रैक की जानकारी, प्रस्थान के घंटे, आदि। फोन कॉल बीर द्वारा जानकारी की जा सकती है। सिस्टम में वाहन के केंद्र के लिए काकीर, ılarak ड्राइवर की त्रुटियां और संभावित नकारात्मकताएं तुरंत कनेक्ट की जा सकती हैं। इस प्रकार, त्रुटियों के लिए प्रतिक्रिया समय अधिकतम हो जाएगा और सेवा की गुणवत्ता बढ़ जाएगी। इन सभी अध्ययनों से हम जो दक्षता चाहते हैं, उसे प्राप्त करने के लिए, हम चाहेंगे कि हमारे यात्री अपनी राय, सुझाव, अनुरोध और शिकायतें हमें दें। इस मुद्दे पर हमारे नागरिकों की सूचनाएं हमारे संस्थान का मार्गदर्शन करेंगी। यह अधिकतम दक्षता के लिए आवश्यक है आज़मी।
MOTA MOT नियंत्रण और कॉल सेंटर को सेवा में रखा गया थाः नियंत्रण केंद्र की स्थापना माल्टा मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका MOTA network द्वारा की गई थी ताकि उड़ानों पर वाहनों और ड्राइवरों की निगरानी करने और तुरंत लाइनों में हस्तक्षेप करने के लिए, विस्तार सेवा नेटवर्क को नियंत्रण में रखा जा सके। एमओटीएएस के महाप्रबंधक अनवर सादात तामगासी, जिन्होंने नियंत्रण केंद्र के बारे में जानकारी प्रदान की है, जो प्रति घंटे के आधार पर काम करेगा, ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन ले जाने वाले वाहनों के आंदोलनों को केंद्र से मॉनिटर किया जाएगा और प्रारंभ और चेक बिंदुओं पर ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। Tamgac; इसके अलावा, जब हम जीएसएम रेडियो बुनियादी ढांचे के माध्यम से अपने वाहनों के साथ संवाद करते हैं, तो हमारे वाहनों में एलईडी सूचना स्क्रीन को नवीनीकृत किया जाता है और अंतिम-मिनट के घटनाक्रम और आपातकालीन सूचनाएं इन स्क्रीन के माध्यम से बनाई जा सकती हैं। हमने कंट्रोल सेंटर के भीतर अपना कॉल सेंटर भी स्थापित किया। हमारे नागरिक अब हमारे कॉल सेंटर के शून्य चार सौ बाईस पाँच सौ दो दो पाँच सौ दो पर हमारी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बारे में अपनी इच्छाओं, इच्छाओं और शिकायतों को व्यक्त कर सकते हैं। इसके अलावा, शून्य पाँच सौ बावन पाँच सौ दो दो पाँच सौ दो वाट्सएप लाइन हमें तक पहुंचने में सक्षम होगी, Ayrıca उन्होंने कहा। माल्टा मेट्रोपॉलिटन म्यूनिसिपैलिटी के मेयर अहमत saidakır ने कहा कि MOTA Center कंट्रोल एंड कॉल सेंटर के लॉन्च के बाद, वे उन वाहनों और ड्राइवरों का पालन कर सकते थे जो मैदान में सेवा कर रहे थे और वे कम समय में अपने अनुरोधों और शिकायतों को समाप्त कर सकेंगे। काकीर ने कहा, "मुख्य रोक बिंदुओं के माध्यम से नियंत्रण केंद्र के भीतर मेट्रोपॉलिटन म्युनिसिपैलिटी मोटास ट्राम्ब्स मेंटेनेंस सेंटर कंट्रोल सेंटर को गलती से रिकॉर्ड बनाने के लिए वाहनों और उपकरणों के अनुसार ड्राइवरों से मिली जानकारी के अनुसार, निर्देशन के लिए प्रदान किया जाएगा। MOTA C कॉल सेंटर के साथ काकीर, हरेकेट की भी पेशकश की गई, नागरिकों को किसी भी प्रश्न का निकटतम उत्तर दिया जा सकता है और निकटतम बस से अपेक्षित स्टॉप, ट्रैक की जानकारी, प्रस्थान के घंटे, आदि। फोन कॉल बीर द्वारा जानकारी की जा सकती है। सिस्टम में वाहन के केंद्र के लिए काकीर, ılarak ड्राइवर की त्रुटियां और संभावित नकारात्मकताएं तुरंत कनेक्ट की जा सकती हैं। इस प्रकार, त्रुटियों के लिए प्रतिक्रिया समय अधिकतम हो जाएगा और सेवा की गुणवत्ता बढ़ जाएगी। इन सभी अध्ययनों से हम जो दक्षता चाहते हैं, उसे प्राप्त करने के लिए, हम चाहेंगे कि हमारे यात्री अपनी राय, सुझाव, अनुरोध और शिकायतें हमें दें। इस मुद्दे पर हमारे नागरिकों की सूचनाएं हमारे संस्थान का मार्गदर्शन करेंगी। यह अधिकतम दक्षता के लिए आवश्यक है आज़मी।
नई दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार देश के अर्थव्यवस्था में आई मंदी से उबरने के लिए हर तरह के विकल्पों पर विचार कर रही है। देश के कई राज्य सरकारों ने अपने राज्य में किसानों का लोन माफ किया है। अब सरकार की नजर छोटे कर्जदारों पर है। सरकार ने दिवालिया कानून के अंतर्गत 'छोटे परेशान कर्जदारों' को राहत देने की योजना बनाई है। एक सीनियर अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रस्तावित छूट दिवालिया और धन शोधन संहिता (आईबीसी) के अंतर्गत 'नई शुरुआत' प्रावधान के तहत इस सुविधा की पेशकश की जाएगी। कंपनी मामलों के सचिव इंजेति श्रीनिवास ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके (ईडब्ल्यूएस) के छोटे परेशान कर्जदारों को प्रस्तावित राहत देने के मानदंड तैयार करने के लिए माइक्रोफाइनेंस उद्योग के साथ विचार-विमर्श हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत दिवालियापन के तहत ईडब्ल्यूएस वर्ग में सबसे अधिक परेशान लोगों को राहत दी जाएगी। श्रीनिवास ने कहा, 'अगर आपने एक बार नई शुरुआत का लाभ उठा लिया तो आपको पांच साल के लिए इसका लाभ नहीं मिल सकता है। हमने माइक्रोफाइनेंस उद्योग की संतुष्टि के लिए सभी शर्तों पर काम कर लिया है। ' श्रीनिवास ने एक साक्षात्कार में कहा, 'यह हेयरकट लेने के समान होगा। राष्ट्रीय स्तर पर तीन से साल की अवधि के लिए यह 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। ' सचिव ने कहा, 'हमारी माइक्रोफाइनेंस उद्योग के साथ चर्चा हुई थी और उनकी चिंताओं पर भी गौर किया जा रहा है। हमारा माइक्रोफाइनेंस उद्योग को तबाह करने का इरादा नहीं है। ' श्रीनिवास ने कहा, 'इसके तहत छोटे परेशान कर्जदारों को मानदंडों के आधार पर कर्ज प्रतिबद्धताओं से राहत देना है। मानदंडों को लेकर माइक्रोफाइनेंस उद्योग के साथ चर्चा की जा चुकी है। ' सचिव ने बताया कि व्यक्तिगत गारंटर से कॉरपोरेट कर्जदारों से जुड़े आईबीसी के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएंगे।
नई दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार देश के अर्थव्यवस्था में आई मंदी से उबरने के लिए हर तरह के विकल्पों पर विचार कर रही है। देश के कई राज्य सरकारों ने अपने राज्य में किसानों का लोन माफ किया है। अब सरकार की नजर छोटे कर्जदारों पर है। सरकार ने दिवालिया कानून के अंतर्गत 'छोटे परेशान कर्जदारों' को राहत देने की योजना बनाई है। एक सीनियर अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रस्तावित छूट दिवालिया और धन शोधन संहिता के अंतर्गत 'नई शुरुआत' प्रावधान के तहत इस सुविधा की पेशकश की जाएगी। कंपनी मामलों के सचिव इंजेति श्रीनिवास ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके के छोटे परेशान कर्जदारों को प्रस्तावित राहत देने के मानदंड तैयार करने के लिए माइक्रोफाइनेंस उद्योग के साथ विचार-विमर्श हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्तिगत दिवालियापन के तहत ईडब्ल्यूएस वर्ग में सबसे अधिक परेशान लोगों को राहत दी जाएगी। श्रीनिवास ने कहा, 'अगर आपने एक बार नई शुरुआत का लाभ उठा लिया तो आपको पांच साल के लिए इसका लाभ नहीं मिल सकता है। हमने माइक्रोफाइनेंस उद्योग की संतुष्टि के लिए सभी शर्तों पर काम कर लिया है। ' श्रीनिवास ने एक साक्षात्कार में कहा, 'यह हेयरकट लेने के समान होगा। राष्ट्रीय स्तर पर तीन से साल की अवधि के लिए यह दस हजार करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। ' सचिव ने कहा, 'हमारी माइक्रोफाइनेंस उद्योग के साथ चर्चा हुई थी और उनकी चिंताओं पर भी गौर किया जा रहा है। हमारा माइक्रोफाइनेंस उद्योग को तबाह करने का इरादा नहीं है। ' श्रीनिवास ने कहा, 'इसके तहत छोटे परेशान कर्जदारों को मानदंडों के आधार पर कर्ज प्रतिबद्धताओं से राहत देना है। मानदंडों को लेकर माइक्रोफाइनेंस उद्योग के साथ चर्चा की जा चुकी है। ' सचिव ने बताया कि व्यक्तिगत गारंटर से कॉरपोरेट कर्जदारों से जुड़े आईबीसी के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएंगे।
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में कुछ ही दिन बचे रह गए हैं, लेकिन हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. शनिवार देर रात दक्षिण 24 परगना में पंचायत चुनाव को लेकर ही एक टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. वह फायरिंग के बाद बसंती इलाके फुल मलंचा गांव के पास गंभीर अवस्था में पाया गया था. जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान जियारुल मोल्ला (42) के रूप में हुई है. वह बसंती थाना क्षेत्र के फुल मलंचा गांव में एक सड़क के किनारे गोली से घायल अवस्था में पड़ा हुआ पाया गया. इसी हालत में उठाकर उसे कैनिंग सब-डिवीजन अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिवार का दावा है कि जियारुल युवा तृणमूल कांग्रेस का सदस्य था, यही वजह है कि उसे अक्सर धमकी दी जाती थी. उनका दावा है कि राजनीतिक दुश्मनी के चलते जियारुल की हत्या की गई है. एसडीपीओ दीपांकर दास ने कहा कि शनिवार रात करीब 10 बजे जियारुल मोल्ला नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमने उसे उठाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसमें मामले में आगे की जांच की जाएगी. जब राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों की घोषणा की, उसके अगले ही दिन यानी 9 जून को मुर्शिदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई. कांग्रेस कार्यकर्ता का नाम फूलचांद शेख था. वह केरल में माइग्रेंट मजदूर था और 10 दिन पहले ही अपने गांव आया था. शाम के वक्त फूलचांद अपने दो दोस्तों के साथ ताश के पत्ते खेल रहा था. इस दौरान अज्ञात हमलावारों ने उस पर फायरिंग कर दी, जिसमें फूलचांद की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि दो कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस घटना के बाद कूचबिहार में भी टीएमसी कार्यकर्ता गोली मारी गई. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया. बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं के दो गुटों में झड़प हो गई थी. इस दौरान चली गोली लिपटन हक नाम का कार्यकर्ता को लग गई. साउथ 24 परगना के कैनिंग में टीएमसी के दो गुट नामांकन को लेकर भिड़ गए. ब्लॉक अध्यक्ष सैबल लाहिड़ी के नेतृत्व में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कैनिंग बस स्टैंड के पास सड़क जाम कर दिया. उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के दूसरे गुट ने उन्हें तब रोका जब वे कैनिंग में बीडीओ कार्यालय में नामांकन दाखिल करने जा रहे थे. दूसरा गुट टीएमसी विधायक परेश राम का करीबी माना जाता है. इससे पहले दक्षिण 24 परगना के भांगर इलाके में इंडियन सेक्युलर फ्रंट और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी. आईएसएफ की ओर से आरोप लगाया गया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके उम्मीदवारों को नामांकन करने से रोक दिया था. बता दें कि बंगाल में 8 जून को पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ था. इसके बाद से ही राज्य में हिंसक घटनाएं तेजी से बढ़ने से लगीं. अगली आठ जुलाई को ही पंचायत चुनाव होने हैं और 11 जुलाई को चुनाव के नतीजे आएंगे, लेकिन चुनाव से पहले हिंसा पर राज्यपाल, कोलकाता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ने अपनी चिंता जताई है.
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में कुछ ही दिन बचे रह गए हैं, लेकिन हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. शनिवार देर रात दक्षिण चौबीस परगना में पंचायत चुनाव को लेकर ही एक टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. वह फायरिंग के बाद बसंती इलाके फुल मलंचा गांव के पास गंभीर अवस्था में पाया गया था. जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान जियारुल मोल्ला के रूप में हुई है. वह बसंती थाना क्षेत्र के फुल मलंचा गांव में एक सड़क के किनारे गोली से घायल अवस्था में पड़ा हुआ पाया गया. इसी हालत में उठाकर उसे कैनिंग सब-डिवीजन अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिवार का दावा है कि जियारुल युवा तृणमूल कांग्रेस का सदस्य था, यही वजह है कि उसे अक्सर धमकी दी जाती थी. उनका दावा है कि राजनीतिक दुश्मनी के चलते जियारुल की हत्या की गई है. एसडीपीओ दीपांकर दास ने कहा कि शनिवार रात करीब दस बजे जियारुल मोल्ला नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमने उसे उठाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसमें मामले में आगे की जांच की जाएगी. जब राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों की घोषणा की, उसके अगले ही दिन यानी नौ जून को मुर्शिदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई. कांग्रेस कार्यकर्ता का नाम फूलचांद शेख था. वह केरल में माइग्रेंट मजदूर था और दस दिन पहले ही अपने गांव आया था. शाम के वक्त फूलचांद अपने दो दोस्तों के साथ ताश के पत्ते खेल रहा था. इस दौरान अज्ञात हमलावारों ने उस पर फायरिंग कर दी, जिसमें फूलचांद की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि दो कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस घटना के बाद कूचबिहार में भी टीएमसी कार्यकर्ता गोली मारी गई. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया. बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं के दो गुटों में झड़प हो गई थी. इस दौरान चली गोली लिपटन हक नाम का कार्यकर्ता को लग गई. साउथ चौबीस परगना के कैनिंग में टीएमसी के दो गुट नामांकन को लेकर भिड़ गए. ब्लॉक अध्यक्ष सैबल लाहिड़ी के नेतृत्व में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कैनिंग बस स्टैंड के पास सड़क जाम कर दिया. उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के दूसरे गुट ने उन्हें तब रोका जब वे कैनिंग में बीडीओ कार्यालय में नामांकन दाखिल करने जा रहे थे. दूसरा गुट टीएमसी विधायक परेश राम का करीबी माना जाता है. इससे पहले दक्षिण चौबीस परगना के भांगर इलाके में इंडियन सेक्युलर फ्रंट और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी. आईएसएफ की ओर से आरोप लगाया गया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके उम्मीदवारों को नामांकन करने से रोक दिया था. बता दें कि बंगाल में आठ जून को पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ था. इसके बाद से ही राज्य में हिंसक घटनाएं तेजी से बढ़ने से लगीं. अगली आठ जुलाई को ही पंचायत चुनाव होने हैं और ग्यारह जुलाई को चुनाव के नतीजे आएंगे, लेकिन चुनाव से पहले हिंसा पर राज्यपाल, कोलकाता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ने अपनी चिंता जताई है.
नई दिल्लीः विदेशों से दिल्ली लौटे चार यात्रियों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। चारों लोग लंदन और एम्स्टर्डम से लौटे हैं। बुधवार को चारों की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनके साथ ही बीते दो दिनों में विदेशों से दिल्ली लौटने के बाद संक्रमित पाए जाने वालों की संख्या पांच हो गई है। सभी के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि यह लोग कौन से वेरिएंट से संक्रमित हैं। सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि एम्सटर्डम और लंदन से चार उड़ानें 1,013 यात्रियों को लेकर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच उतरीं। इन यात्रियों में से चार ने कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आए हैं। सभी चार भारतीय नागरिक हैं। बता दें कि दुनिया भर में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के खतरे बीच ज्यादा सावधानियां बरती जा रही हैं। विदेशों से आने वाली सभी यात्रियां का एयरपोर्ट पर ही टेस्ट कराया जा रहा है।
नई दिल्लीः विदेशों से दिल्ली लौटे चार यात्रियों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। चारों लोग लंदन और एम्स्टर्डम से लौटे हैं। बुधवार को चारों की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनके साथ ही बीते दो दिनों में विदेशों से दिल्ली लौटने के बाद संक्रमित पाए जाने वालों की संख्या पांच हो गई है। सभी के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि यह लोग कौन से वेरिएंट से संक्रमित हैं। सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि एम्सटर्डम और लंदन से चार उड़ानें एक,तेरह यात्रियों को लेकर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रात बारह बजे से सुबह छः बजे के बीच उतरीं। इन यात्रियों में से चार ने कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आए हैं। सभी चार भारतीय नागरिक हैं। बता दें कि दुनिया भर में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के खतरे बीच ज्यादा सावधानियां बरती जा रही हैं। विदेशों से आने वाली सभी यात्रियां का एयरपोर्ट पर ही टेस्ट कराया जा रहा है।
शाहजहांपुर। जिला अस्पताल में शायद ही कोई चिकित्सक को जो अपने आवास पर मरीजों को न देखता है परन्तु जो ओपीडी के समय रंगेहाथों पकड़ा जाए वहीं दोषी और वेतन के साथ एनपीए भी ले रहे हैं। कई शिकायतों को लेकर जिला अस्पताल में नगर मजिस्ट्रेट बीएस दुबे के निरीक्षण के दौरान अचानक जिला अस्पताल परिसर में स्थित आवासीय कालोनी में डॉ. अनिल राज, एमबीबीएस अपने आवास पर करीब एक बजकर 25 मिनट पर मरीज देखते धरे गए। वहां पर नगर मजिस्ट्रेट ने खुद देखा कि डॉ. अनिल राज अपने आवास में बैठकर ड्यूटी के समय मरीजों को देख रहे हैं। पूछने पर डॉ. अनिल राज बताते हैं, "जो मरीज आ जाते हैं उन्हीं को देखते हैं बाकी नहीं।" दरअसल, अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों ने यह भी कहा, "आप अभी इसी वक्त उनके आवास को चेक कर सकते हैं। इस पर वह टीम के लोगों के साथ डॉक्टर राज के आवास पर पहुंचे तो वह आवास के अंदर मरीजों से घिरे हुए थे। मेज पर दवाइयों का गठ्ठर लगा था। कई मरीज आवास में लेटे ग्लूकोज की बोतल चढ़वा रहे थे। यह सब देखकर वह भी हैरत में पड़ गए। उन्होंने अपने अधीनस्थ से डॉक्टर अनिल राज के आवास पर चल रही क्लीनिक की वीडियो बनवाई और कहा कि इस मामले की शिकायत डीएम से लेकर शासन स्तर तक की जाएगी।
शाहजहांपुर। जिला अस्पताल में शायद ही कोई चिकित्सक को जो अपने आवास पर मरीजों को न देखता है परन्तु जो ओपीडी के समय रंगेहाथों पकड़ा जाए वहीं दोषी और वेतन के साथ एनपीए भी ले रहे हैं। कई शिकायतों को लेकर जिला अस्पताल में नगर मजिस्ट्रेट बीएस दुबे के निरीक्षण के दौरान अचानक जिला अस्पताल परिसर में स्थित आवासीय कालोनी में डॉ. अनिल राज, एमबीबीएस अपने आवास पर करीब एक बजकर पच्चीस मिनट पर मरीज देखते धरे गए। वहां पर नगर मजिस्ट्रेट ने खुद देखा कि डॉ. अनिल राज अपने आवास में बैठकर ड्यूटी के समय मरीजों को देख रहे हैं। पूछने पर डॉ. अनिल राज बताते हैं, "जो मरीज आ जाते हैं उन्हीं को देखते हैं बाकी नहीं।" दरअसल, अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों ने यह भी कहा, "आप अभी इसी वक्त उनके आवास को चेक कर सकते हैं। इस पर वह टीम के लोगों के साथ डॉक्टर राज के आवास पर पहुंचे तो वह आवास के अंदर मरीजों से घिरे हुए थे। मेज पर दवाइयों का गठ्ठर लगा था। कई मरीज आवास में लेटे ग्लूकोज की बोतल चढ़वा रहे थे। यह सब देखकर वह भी हैरत में पड़ गए। उन्होंने अपने अधीनस्थ से डॉक्टर अनिल राज के आवास पर चल रही क्लीनिक की वीडियो बनवाई और कहा कि इस मामले की शिकायत डीएम से लेकर शासन स्तर तक की जाएगी।
अशुभ सूचक बातें बचा बचा कर गोलमोल शब्दों में प्रकट की जाती है। वैधव्य को चूड़ी फूटना कहते हैं, मर जाने को स्वर्गवास होना या पंचल के प्राप्त होना कहा जाता है। गमी में जो बाल भडाने होते हैं उन्हें चाल बनवाना कहते हैं और साधारण को हजामत । उर्दू बालने वाले सग्य समाज में वह चीमार हैं यह न कह कर उनके दुश्मनों की तबीयत नासाज है कहा जाता है क्योंकि यह कहा भी नहीं जा सकता कि बीमारी ऐसी अशुभ चीज उनके पास फटकी । लाश को मिट्टी, दैनिक क्रिया विशेष को पासाना, दिशा, जंगल अथवा इंगलैंड ग्रादि, सांप को कीडा, रस्सी इत्यादि उनियों में भी अशुभ, लज्जा-जनक या घृणाम्पद वालों की गोल गोल शब्दों द्वारा प्रकट करने की मनोवृत्ति है । इस विषय में भाग पर स्त्रियों का विशेष प्रभाव पड़ता है, उनके मुँह से अशुभ और ग्रमभ्य बात बहुधा नहीं निकलती । लज्जाशील भारतीय ललना ही नहीं, विदेशी ललना भी अपने पति का नाम नहीं लेती, लल्ला के लाला, बच्ची के वाबू, पंडित जी श्रादि शब्दों से यदि सर्वनामो से ही उनका उल्लेख करती है । गर्भिणी को प्रत्यक्ष ऐसा न कह कर इसका पांव -भारी है ऐसा कहा जाता है। शिष्टाचार में भी सीधे शब्द नहीं बोले जाते । अन्धे को अन्न क कर सूरदास कहो तभी ठीक होगा और चमार को रयदास, तथा दर्जी को ख़लीफ़ा । मेहतर शब्द ही शिष्टाचार का हे पर जमादार कहना ज्यादा ठीक समझा जाता है । मुंसिफ को जब जज साहब कहा जाता है तब वह गद्गद् हो जाता है । बहुधा देखा गया है कि प्राचीन भाषाओं के तत्सम शब्दों में अधिक गौरव समझा जाता है और अपेक्षा की दृष्टि से तद्भव शब्दों में कम । गर्भिणी (मानुपी) गाभिन (गाय आदि), ब्राह्मण (शिक्षित) वाम्हन ( पढ़ा लिखा), स्तन (स्त्री के ) थन (गाय के), राजा राव, राजपुत्र राउत, कुक्षि कारख दिन्द्रों में भेट स्पष्ट है । रुपये का लेन देन करने वाले अमीर लोग अच्छे और सज्जन समझे जाते हैं । हिन्दी के महाजन, सेठ ( श्रेष्ठ, श्रेष्ठी ), साह (साधु) ग्रादि -शब्द इसी परिणाम पर पहुँचाते हैं। देशवाचक और कालवाचक शब्द बहुधा समानार्थक होते हैं । संस्कृत का अध्वन् शब्द 'समय' और 'फासला' दोनों का बोध कराता है। अरसा शब्द फासले का द्योतक था पर व उर्दू में समय के फासले को बताता है, देश के फ़ाराले को नहीं । हिन्दी बोलियों के वार, वेर ( < वेला ), दॉई ' (<दामन्) शब्द भी देश औौर काल की अभिन्नता बताने है । शक्ति और दूसरों को हेरान परेशान करना इन दोनों बातों का साहचर्य सा है। ओजस्वी और प्रतापी शब्द उदाहरण हैं। दूसरी ओर स्वाभाव की सिधाई, मूर्खता और कमजोरी साथ साथ चलती दिखाई देती है । ऋजुकः अस्याः पतिः इस वाक्य में उस स्त्री के पति की सिधाई का ही अभिप्राय नहीं है, वह इतना -मूर्ख है कि अपनी पत्नी की धूर्तता नहीं समझा पाता, उस बात का भी संकेत है । हिन्दी के सूधा, सीधा शब्दों से भी यही संकेत है । ग्रेजी का सिम्प्ल (Simple) शब्द भी इसी प्रकार सिधाई और मूर्खता का द्योतक है । कोमलता और सज्जनता भी साथ-साथ चलती है और स्वभाव की दुष्टता और टेढापन । बडा टेढा आदमी है और तिर्थयानि उदाहरण स्पष्ट हैं । मनुष्य को कभी-कभी सीधी बात करने से यहाँ तक असंतोष होता है कि वह ठीक उल्टी बात कह कर अपना अभिप्राय प्रकट करता है। आप बड़े कलमन्द हैं, आप बड़े विद्वान है यदि प्रयोगों में अक्ल और विद्वत्ता के प्रभाव की ही सूचना मिलती है। बच्चे को प्यार में जब हम शैतान, बदमाश, दुष्ट ग्रादि शब्दों से संबोधन करते हैं तब उसके नटखटपने से खुश होकर ही । मित्रों में आपस में एक दूसरे को गदहा, सुअर, बदमाश श्रादि शब्दों से संयो धन करने की प्रथा दिखाई पड़ती है जिसके मूल में है स्नेहातिशय न कि गाली गलौज । जैसा ऊपर कहा जा चुका है किसी शब्द का अर्थ पूरी तौर से निश्चित नहीं है, उसका वास्तविक अर्थ प्रकरण से और ना की मुखाकृति आदि ने देखने से ही जान पत्राता है। संस्कृत में विषं भुङन का उदाहरण बहुधा दिया जाता है। यदि प्रकरण से उसको अलग कर दें तो अर्थ का अर्थ हो जाय। यदि कोई शब्द किमी एक ही प्रकरण में सीमित हो जाय तो जाता है। सर्प, रदन यादि शब्दों का इसी प्रकार अर्थसंकोच हुआ होगा। फ़ारनी का बू शब्द और संस्कृत का गन्ध दोनो अब दुर्गन्ध के वर्ग में आने है यद्यपि एनका वास्तविक अर्थ गंध मात्र था और उन भाषाओं में समान रू से दुर्गन्ध और सुगंध के लिए श्राता है। इसी प्रकार यदि एक ही शब्द ि एक प्रकरण में सीमित न रहकरने लगा तो
अशुभ सूचक बातें बचा बचा कर गोलमोल शब्दों में प्रकट की जाती है। वैधव्य को चूड़ी फूटना कहते हैं, मर जाने को स्वर्गवास होना या पंचल के प्राप्त होना कहा जाता है। गमी में जो बाल भडाने होते हैं उन्हें चाल बनवाना कहते हैं और साधारण को हजामत । उर्दू बालने वाले सग्य समाज में वह चीमार हैं यह न कह कर उनके दुश्मनों की तबीयत नासाज है कहा जाता है क्योंकि यह कहा भी नहीं जा सकता कि बीमारी ऐसी अशुभ चीज उनके पास फटकी । लाश को मिट्टी, दैनिक क्रिया विशेष को पासाना, दिशा, जंगल अथवा इंगलैंड ग्रादि, सांप को कीडा, रस्सी इत्यादि उनियों में भी अशुभ, लज्जा-जनक या घृणाम्पद वालों की गोल गोल शब्दों द्वारा प्रकट करने की मनोवृत्ति है । इस विषय में भाग पर स्त्रियों का विशेष प्रभाव पड़ता है, उनके मुँह से अशुभ और ग्रमभ्य बात बहुधा नहीं निकलती । लज्जाशील भारतीय ललना ही नहीं, विदेशी ललना भी अपने पति का नाम नहीं लेती, लल्ला के लाला, बच्ची के वाबू, पंडित जी श्रादि शब्दों से यदि सर्वनामो से ही उनका उल्लेख करती है । गर्भिणी को प्रत्यक्ष ऐसा न कह कर इसका पांव -भारी है ऐसा कहा जाता है। शिष्टाचार में भी सीधे शब्द नहीं बोले जाते । अन्धे को अन्न क कर सूरदास कहो तभी ठीक होगा और चमार को रयदास, तथा दर्जी को ख़लीफ़ा । मेहतर शब्द ही शिष्टाचार का हे पर जमादार कहना ज्यादा ठीक समझा जाता है । मुंसिफ को जब जज साहब कहा जाता है तब वह गद्गद् हो जाता है । बहुधा देखा गया है कि प्राचीन भाषाओं के तत्सम शब्दों में अधिक गौरव समझा जाता है और अपेक्षा की दृष्टि से तद्भव शब्दों में कम । गर्भिणी गाभिन , ब्राह्मण वाम्हन , स्तन थन , राजा राव, राजपुत्र राउत, कुक्षि कारख दिन्द्रों में भेट स्पष्ट है । रुपये का लेन देन करने वाले अमीर लोग अच्छे और सज्जन समझे जाते हैं । हिन्दी के महाजन, सेठ , साह ग्रादि -शब्द इसी परिणाम पर पहुँचाते हैं। देशवाचक और कालवाचक शब्द बहुधा समानार्थक होते हैं । संस्कृत का अध्वन् शब्द 'समय' और 'फासला' दोनों का बोध कराता है। अरसा शब्द फासले का द्योतक था पर व उर्दू में समय के फासले को बताता है, देश के फ़ाराले को नहीं । हिन्दी बोलियों के वार, वेर , दॉई ' शब्द भी देश औौर काल की अभिन्नता बताने है । शक्ति और दूसरों को हेरान परेशान करना इन दोनों बातों का साहचर्य सा है। ओजस्वी और प्रतापी शब्द उदाहरण हैं। दूसरी ओर स्वाभाव की सिधाई, मूर्खता और कमजोरी साथ साथ चलती दिखाई देती है । ऋजुकः अस्याः पतिः इस वाक्य में उस स्त्री के पति की सिधाई का ही अभिप्राय नहीं है, वह इतना -मूर्ख है कि अपनी पत्नी की धूर्तता नहीं समझा पाता, उस बात का भी संकेत है । हिन्दी के सूधा, सीधा शब्दों से भी यही संकेत है । ग्रेजी का सिम्प्ल शब्द भी इसी प्रकार सिधाई और मूर्खता का द्योतक है । कोमलता और सज्जनता भी साथ-साथ चलती है और स्वभाव की दुष्टता और टेढापन । बडा टेढा आदमी है और तिर्थयानि उदाहरण स्पष्ट हैं । मनुष्य को कभी-कभी सीधी बात करने से यहाँ तक असंतोष होता है कि वह ठीक उल्टी बात कह कर अपना अभिप्राय प्रकट करता है। आप बड़े कलमन्द हैं, आप बड़े विद्वान है यदि प्रयोगों में अक्ल और विद्वत्ता के प्रभाव की ही सूचना मिलती है। बच्चे को प्यार में जब हम शैतान, बदमाश, दुष्ट ग्रादि शब्दों से संबोधन करते हैं तब उसके नटखटपने से खुश होकर ही । मित्रों में आपस में एक दूसरे को गदहा, सुअर, बदमाश श्रादि शब्दों से संयो धन करने की प्रथा दिखाई पड़ती है जिसके मूल में है स्नेहातिशय न कि गाली गलौज । जैसा ऊपर कहा जा चुका है किसी शब्द का अर्थ पूरी तौर से निश्चित नहीं है, उसका वास्तविक अर्थ प्रकरण से और ना की मुखाकृति आदि ने देखने से ही जान पत्राता है। संस्कृत में विषं भुङन का उदाहरण बहुधा दिया जाता है। यदि प्रकरण से उसको अलग कर दें तो अर्थ का अर्थ हो जाय। यदि कोई शब्द किमी एक ही प्रकरण में सीमित हो जाय तो जाता है। सर्प, रदन यादि शब्दों का इसी प्रकार अर्थसंकोच हुआ होगा। फ़ारनी का बू शब्द और संस्कृत का गन्ध दोनो अब दुर्गन्ध के वर्ग में आने है यद्यपि एनका वास्तविक अर्थ गंध मात्र था और उन भाषाओं में समान रू से दुर्गन्ध और सुगंध के लिए श्राता है। इसी प्रकार यदि एक ही शब्द ि एक प्रकरण में सीमित न रहकरने लगा तो
जिला बाराबंकी, ब्लाक हैदरगढ़, गाँव रसूलपुर मा नोट्बंदी कै असर अब तक देखात बाय। काहे से वहि समय खेत मा खाद पानी दिये कै समय रहै। जवन किसान नाय दे पाये उनके फसल कै पैदावार कम भए। जेसे उनका उचित दाम नाय मिल पावत बाय। खेत मजदूर अजय कुमारी कै कहब बाय कि खेती ज्यादा नाय बाय दुसरे के खेत मा काम करीथी। महीना दुई महीना भरका खाय का मिल जाथै। वकरे बाद फिर से खरीदे का पराथै। खेत मा ज्यादा लगाय दिये से कुछ महीना बाद सूख जाथै तब अच्छी नाय लागत। जगदीश खेत मजदूर कै कहब बाय कि बिगहा भर मा पन्द्रह कुंतल आलू निकरा थै। हमरे खेत नाय बाय दुसरे के खेत मा मजदूरी करीथी। आलू खेत मा लगायके खाद पानी समय समय पै दीन जाथै। जब पौधा थोड़ा बडा होय जाय तौ सेल्ही चढ़ाय जाथै वक्रे बाद तीन महीना मा आलू तैयार होय जाथै। जेकरे पास ज्यादा रहा थै बीस पचीस दिन बाद स्टोर मा जमा कै दियाथै। जेसे आलू सड़त नाय।
जिला बाराबंकी, ब्लाक हैदरगढ़, गाँव रसूलपुर मा नोट्बंदी कै असर अब तक देखात बाय। काहे से वहि समय खेत मा खाद पानी दिये कै समय रहै। जवन किसान नाय दे पाये उनके फसल कै पैदावार कम भए। जेसे उनका उचित दाम नाय मिल पावत बाय। खेत मजदूर अजय कुमारी कै कहब बाय कि खेती ज्यादा नाय बाय दुसरे के खेत मा काम करीथी। महीना दुई महीना भरका खाय का मिल जाथै। वकरे बाद फिर से खरीदे का पराथै। खेत मा ज्यादा लगाय दिये से कुछ महीना बाद सूख जाथै तब अच्छी नाय लागत। जगदीश खेत मजदूर कै कहब बाय कि बिगहा भर मा पन्द्रह कुंतल आलू निकरा थै। हमरे खेत नाय बाय दुसरे के खेत मा मजदूरी करीथी। आलू खेत मा लगायके खाद पानी समय समय पै दीन जाथै। जब पौधा थोड़ा बडा होय जाय तौ सेल्ही चढ़ाय जाथै वक्रे बाद तीन महीना मा आलू तैयार होय जाथै। जेकरे पास ज्यादा रहा थै बीस पचीस दिन बाद स्टोर मा जमा कै दियाथै। जेसे आलू सड़त नाय।
। किसी मनुष्यको बन्धन करना' 'कर्तव्य' कहलाता है। साथ ही शास्त्र व राजनीति उस आज्ञाभङ्गके परिणाममें किसी प्रकार के प्रत्यवाय, प्रायश्चित तथा दण्ड आदि भी उस आज्ञाके साथ-साथ विधान करते है जिससे वह व्यवहार आती रहे। परन्तु जिस आज्ञा के साथ किसी प्रकारके प्रत्यवाय आदिका विधान नहीं उसके व्यवहारमे की सम्भावना भी नहीं और तब वह 'कर्तव्य' भी नहीं कही जा सकती। तिलक महोदयने ज्ञानी के लिये मृत्युपर्यन्त लोकसंग्रह के निमित्त कर्मकी कर्तव्यता तो बनाई है, किन्तु उसके साथ ही कर्तव्यच्युतिके प्रतिकारमे किसी प्रमाणसे प्रत्यवाय व प्रायश्चितका विधान नहीं किया । ऐसे विधानके बिना न वह कार्यकारी ही हो सकती है और न 'कर्तव्य' ही रहती है, क्योकिं वह अपने पातनके लिये कर्ताको किसी प्रकार बन्धन नही करती। तिलक महोदयने अपने ग्रन्थ में मोक्षका कोई स्पष्ट स्वरूप वर्णन नहीं किया और न ज्ञानी का कोई स्पष्ट लेक्षण ही किया है, जिससे यह स्पष्ट होता कि ज्ञानी मोक्षमार्गमे ज्ञान प्राप्त करके किस सोगन पर है और इस कर्तव्यद्वारा उसको किस त्रुटिको पूरा करना क्योंकि बिना ही किसी उद्देश्यके तो आँखें धन्द किये अन्धेवाली लकड़ी हाँके जाना कोई बुद्धिमत्ता नहीं हो सकती। यह बातें तो निर्विवाद है कि कर्ता बिता कर्तव्य नहीं हो सकता, अर्थात् 'मैं कर्मका कर्ता हूँ' प्रथम यह भाव जब कर्ताकी बुद्धिमें दृढ़, हो तब उसके उपरान्त ही 'यह मुझ पर कर्तव्य हैं और यह कर्तव्य नहीं' इस रूपसे विधि व निषेध दोनो उसकी गर्दन पर सवार होते हैं। दूसरे, लोकसेवा कर्तव्य तभी हो सकती है, जबकि 'संसारके प्रति सत्यत्व व स्थिरत्वबुद्धि दृढ़ हो ।' रज्जु-भुजङ्गके समान संसारके प्रति कल्पित बुद्धि धार कर तो कर्तव्य बुद्धि [ आत्मविलास चन ही कैसे सकती है ? और जब कर्ता- बुद्धि सत्य है, कर्तव्य सत्य है, विधि-निषेध सत्य है, ससार सत्य है, तब फिर इस 'मोक्ष' को 'बन्ध' और इस 'ज्ञानी' को 'ज्ञ' क्यों न कहा जाय ? मोक्ष किससे जाना है ? संसार से अथवा परमात्मा से ? परमात्मासे तो मुक्ति किसीको भी स्वीकार नहीं, छूटना संसार से ही है। यदि यह कहा जाय कि जन्म-मरणसे मुक्त होना है तो जन्म-मरण संसारके सम्बन्धसे ही है, संसारको सत्य रूपसे ग्रहण करके जब इसके साथ अहन्ता ममता इस जीवात्माने बाँधी, तब कर्तृत्व-भोक्तृत्वद्वारा ही यह जन्म-मरणके प्रवाहमें बहने लगा । ऐसी अवस्था में जब कि ससारके साथ इस ज्ञानी की इस प्रकार कर्तव्य बुद्धि बनी हुई है, तब इसके लिये अभी मोक्ष कैसा ? इससे हमारा यह प्रयोजन नहीं कि इस प्रकार का निष्काम कर्तव्य मनुष्य के लिये पाप है। नही ! नहीं !! यह तो परम पवित्र है और इसके द्वारा तुच्छ स्वार्थ से छूटकर ज्ञानका अधिकार प्राप्त होता है, परन्तु यहाँ प्रसंग ज्ञानीका है। कर्ता चुद्धि व कर्तव्य बुद्धिका परस्पर सम्बन्ध है, अर्थात् 'कर्ता' विना 'कर्तव्य' नहीं रह सकता और 'कर्तव्य' से मुक्त होने पर 'कर्ता' भी लय हो जाता है। कर्ता- बुद्धिसे किये गये कर्म चाहे फलाशारहित ही क्यों न हों, परन्तु फल अवश्य रखते हैं और अपना फल भुगानेके लिये कर्ताको जन्म-मरणके बन्धन में डालते हैं। चाहे उनका फल उत्तम है, परन्तु है अवश्य । यह विषय इसी लेख में 'कर्म-अकर्मका रहस्य' शीर्षकसे पीछे स्पष्ट किया जा चुका है। पाठक इससे यह न समझ ले कि लोकसेवा हमारे मतसे निन्दित है। नही ! लोकसेवा एक पवित्र साधन है और सेवा धर्म तो अपने स्वरूपसे ही सर्वोत्तम है तथा अपने व्यक्तिगत
। किसी मनुष्यको बन्धन करना' 'कर्तव्य' कहलाता है। साथ ही शास्त्र व राजनीति उस आज्ञाभङ्गके परिणाममें किसी प्रकार के प्रत्यवाय, प्रायश्चित तथा दण्ड आदि भी उस आज्ञाके साथ-साथ विधान करते है जिससे वह व्यवहार आती रहे। परन्तु जिस आज्ञा के साथ किसी प्रकारके प्रत्यवाय आदिका विधान नहीं उसके व्यवहारमे की सम्भावना भी नहीं और तब वह 'कर्तव्य' भी नहीं कही जा सकती। तिलक महोदयने ज्ञानी के लिये मृत्युपर्यन्त लोकसंग्रह के निमित्त कर्मकी कर्तव्यता तो बनाई है, किन्तु उसके साथ ही कर्तव्यच्युतिके प्रतिकारमे किसी प्रमाणसे प्रत्यवाय व प्रायश्चितका विधान नहीं किया । ऐसे विधानके बिना न वह कार्यकारी ही हो सकती है और न 'कर्तव्य' ही रहती है, क्योकिं वह अपने पातनके लिये कर्ताको किसी प्रकार बन्धन नही करती। तिलक महोदयने अपने ग्रन्थ में मोक्षका कोई स्पष्ट स्वरूप वर्णन नहीं किया और न ज्ञानी का कोई स्पष्ट लेक्षण ही किया है, जिससे यह स्पष्ट होता कि ज्ञानी मोक्षमार्गमे ज्ञान प्राप्त करके किस सोगन पर है और इस कर्तव्यद्वारा उसको किस त्रुटिको पूरा करना क्योंकि बिना ही किसी उद्देश्यके तो आँखें धन्द किये अन्धेवाली लकड़ी हाँके जाना कोई बुद्धिमत्ता नहीं हो सकती। यह बातें तो निर्विवाद है कि कर्ता बिता कर्तव्य नहीं हो सकता, अर्थात् 'मैं कर्मका कर्ता हूँ' प्रथम यह भाव जब कर्ताकी बुद्धिमें दृढ़, हो तब उसके उपरान्त ही 'यह मुझ पर कर्तव्य हैं और यह कर्तव्य नहीं' इस रूपसे विधि व निषेध दोनो उसकी गर्दन पर सवार होते हैं। दूसरे, लोकसेवा कर्तव्य तभी हो सकती है, जबकि 'संसारके प्रति सत्यत्व व स्थिरत्वबुद्धि दृढ़ हो ।' रज्जु-भुजङ्गके समान संसारके प्रति कल्पित बुद्धि धार कर तो कर्तव्य बुद्धि [ आत्मविलास चन ही कैसे सकती है ? और जब कर्ता- बुद्धि सत्य है, कर्तव्य सत्य है, विधि-निषेध सत्य है, ससार सत्य है, तब फिर इस 'मोक्ष' को 'बन्ध' और इस 'ज्ञानी' को 'ज्ञ' क्यों न कहा जाय ? मोक्ष किससे जाना है ? संसार से अथवा परमात्मा से ? परमात्मासे तो मुक्ति किसीको भी स्वीकार नहीं, छूटना संसार से ही है। यदि यह कहा जाय कि जन्म-मरणसे मुक्त होना है तो जन्म-मरण संसारके सम्बन्धसे ही है, संसारको सत्य रूपसे ग्रहण करके जब इसके साथ अहन्ता ममता इस जीवात्माने बाँधी, तब कर्तृत्व-भोक्तृत्वद्वारा ही यह जन्म-मरणके प्रवाहमें बहने लगा । ऐसी अवस्था में जब कि ससारके साथ इस ज्ञानी की इस प्रकार कर्तव्य बुद्धि बनी हुई है, तब इसके लिये अभी मोक्ष कैसा ? इससे हमारा यह प्रयोजन नहीं कि इस प्रकार का निष्काम कर्तव्य मनुष्य के लिये पाप है। नही ! नहीं !! यह तो परम पवित्र है और इसके द्वारा तुच्छ स्वार्थ से छूटकर ज्ञानका अधिकार प्राप्त होता है, परन्तु यहाँ प्रसंग ज्ञानीका है। कर्ता चुद्धि व कर्तव्य बुद्धिका परस्पर सम्बन्ध है, अर्थात् 'कर्ता' विना 'कर्तव्य' नहीं रह सकता और 'कर्तव्य' से मुक्त होने पर 'कर्ता' भी लय हो जाता है। कर्ता- बुद्धिसे किये गये कर्म चाहे फलाशारहित ही क्यों न हों, परन्तु फल अवश्य रखते हैं और अपना फल भुगानेके लिये कर्ताको जन्म-मरणके बन्धन में डालते हैं। चाहे उनका फल उत्तम है, परन्तु है अवश्य । यह विषय इसी लेख में 'कर्म-अकर्मका रहस्य' शीर्षकसे पीछे स्पष्ट किया जा चुका है। पाठक इससे यह न समझ ले कि लोकसेवा हमारे मतसे निन्दित है। नही ! लोकसेवा एक पवित्र साधन है और सेवा धर्म तो अपने स्वरूपसे ही सर्वोत्तम है तथा अपने व्यक्तिगत
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंट किस्स के वॉर्नर पार्क में खेले जा रहे तीसरे टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। पांच मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है। भारतीय टीम में एक बदलाव हुआ है। रविंद्र जडेजा को आराम दिया गया है और उनकी जगह दीपक हुड्डा को मौका मिला है। वहीं वेस्टइंडीज टीम में ओडेन स्मिथ की जगह डोमिनिक ड्रेक्स को शामिल किया गया है। भारत (प्लेइंग इलेवन): रोहित शर्मा (कप्तान), सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, दिनेश कार्तिक, रविचंद्रन अश्विन, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह, आवेश खान, दीपक हुड्डा।
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंट किस्स के वॉर्नर पार्क में खेले जा रहे तीसरे टी-बीस इंटरनेशनल मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। पांच मैचों की सीरीज फिलहाल एक-एक की बराबरी पर है। भारतीय टीम में एक बदलाव हुआ है। रविंद्र जडेजा को आराम दिया गया है और उनकी जगह दीपक हुड्डा को मौका मिला है। वहीं वेस्टइंडीज टीम में ओडेन स्मिथ की जगह डोमिनिक ड्रेक्स को शामिल किया गया है। भारत : रोहित शर्मा , सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत , हार्दिक पांड्या, दिनेश कार्तिक, रविचंद्रन अश्विन, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह, आवेश खान, दीपक हुड्डा।
प्रदेश में विभिन्न जगहों पर हो रहे प्रदर्शन एवं विधानसभा घेराव की सुरक्षा में सबसे आगे पुलिस कर्मी मार खा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर कभी पत्थर बरसाए जा रहे हैं तो कभी लात-घूंसे, इसके बाद भी पुलिस कर्मियों की अनदेखी की जा रही है। सीएम की घोषणा के बाद भी अभी तक पुलिस पे-बैंड की अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है। घोषणा के बाद करीब 50 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस पे-बैंड की फाइल अभी तक विभागों में ही घूम रही है। पुलिस पे बैंड की अधिसूचना जारी न होने से पुलिस जवानों में रोष पनप रहा है। बुधवार को सवर्ण समाज के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में एएसपी सहित चार पुलिस जवान बुरी तरह से लहुलूहान हुए हैं। पुलिस जवानों का कहना है कि उन्हें क्या लोगों की मार खाने के लिए रखा है। पुलिस जवानों का कहना है कि सरकार की ओर से उनके लिए घोषणाएं बहुत की जाती हैं, लेकिन उनको अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। सीएम की घोषणा के बाद 50 दिन हो गए हैं, लेकिन नोटिफिकेशन अभी तक नहीं हुई। पुलिस जवानों का कहना है कि सरकार उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है और न ही देना चाहती है।
प्रदेश में विभिन्न जगहों पर हो रहे प्रदर्शन एवं विधानसभा घेराव की सुरक्षा में सबसे आगे पुलिस कर्मी मार खा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर कभी पत्थर बरसाए जा रहे हैं तो कभी लात-घूंसे, इसके बाद भी पुलिस कर्मियों की अनदेखी की जा रही है। सीएम की घोषणा के बाद भी अभी तक पुलिस पे-बैंड की अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है। घोषणा के बाद करीब पचास दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस पे-बैंड की फाइल अभी तक विभागों में ही घूम रही है। पुलिस पे बैंड की अधिसूचना जारी न होने से पुलिस जवानों में रोष पनप रहा है। बुधवार को सवर्ण समाज के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में एएसपी सहित चार पुलिस जवान बुरी तरह से लहुलूहान हुए हैं। पुलिस जवानों का कहना है कि उन्हें क्या लोगों की मार खाने के लिए रखा है। पुलिस जवानों का कहना है कि सरकार की ओर से उनके लिए घोषणाएं बहुत की जाती हैं, लेकिन उनको अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। सीएम की घोषणा के बाद पचास दिन हो गए हैं, लेकिन नोटिफिकेशन अभी तक नहीं हुई। पुलिस जवानों का कहना है कि सरकार उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है और न ही देना चाहती है।
बाहरी सदस्यों के रूप में डॉ. अशिमा गोयल, प्रो. जयंत आर. वर्मा और डॉ. शशांका भिडे के साथ नव नियुक्त मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) 7, 8 और 9 अक्टूबर 2020 को मिले जो उनकी पहली बैठक और मौद्रिक नीति ढांचे जिसे जून 2016 में स्थापित किया गया था, के तहत 25 वीं थीं। मैं नए सदस्यों का स्वागत करता हूं और भारत में मौद्रिक नीति की स्थापना और संचालन में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। मैं इस अवसर पर भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) में हमारी टीमों को उनकी विश्लेषणात्मक सहायता और लोजिस्टिक सहायता के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। 2. एमपीसी ने घरेलू और वैश्विक समष्टि आर्थिक और वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन किया और सर्वसम्मति से 4% पर पॉलिसी रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के लिए वोट किया। यह सुनिश्चित करते हुए कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर बनी रहे, एमपीसी ने एक टिकाऊ आधार पर विकास को पुनर्जीवित करने और अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के प्रभाव को कम करने के लिए जब तक आवश्यक हो - कम से कम चालू वित्त वर्ष के दौरान और अगले वित्त वर्ष में निभावकारी रुख बनाए रखने का निर्णय लिया। सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी जाएं। प्रतिवर्ती रेपो दर 3.35 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी जाए। 3. मैं इस अवसर पर अर्थव्यवस्था की स्थिति और इसकी संभावनाओं की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत करना चाहूंगा। मैंने हमेशा एक आशावादी होने की हिम्मत रखी है, और महामारी को दूर करने की मानव जाति की क्षमता पर दृढ़ता से विश्वास करता हूँ। जब बीते महीनों में, दुनिया भर में रोष में COVID-19 ने अफरातफरी मचा दी, तो हमारी उम्मीदें साहसिक दिखाई पड़ीं, जैसे कोई तूफान के बीच अस्थिर ज्योति । आज, हवा में एक मोड़ है, जो बताता है कि कल के सबसे धूमिल समय में भी एक उज्जवल सपने देखना अविवेकपूर्ण नहीं है। जैसाकि डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम, हमारे दूरदर्शी पूर्व राष्ट्र पति ने कहाः "आपको अपने सपने सच होने से पहले सपने देखने होंगे ... सपना वह नहीं है जो आप सोते समय देखते हैं, यह एक ऐसी चीज है जो आपको सोने नहीं देती है।" 4. 2020 की दूसरी तिमाही में जिस वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई थी, वैश्विक आर्थिक गतिविधि तीसरी तिमाही में क्रमिक रूप से पलट कर प्रकट हुई है, लेकिन अर्थव्यवस्थाओं में और उसके भीतर असमान रूप से हुई है । विनिर्माण, श्रम बाजार और खुदरा बिक्री में सुधार ने कुछ देशों में मजबूत बहाली की है; जबकि अन्य में, नए संक्रमणों में वृद्धि से अनलॉक की गति धीमी करने या प्रतिबंध पुनः लगाने को प्रेरित किया, जिसके फलस्वरूप वृद्धि रुक गयी। आम तौर पर, निवेश कम रहा जबकि खपत और निर्यात में सुधार होने लगा है। सभी देशों में बड़े पैमाने पर नीतिगत समर्थन ने अधिक गिरावट को रोका है और रोजगार, घरेलू आय और व्यवसायों को एक आधार प्रदान किया है। वित्तीय स्थिति सौम्य बनी हुई है। 5. भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है। पूर्व-कोविड स्तरों के सापेक्ष, कई उच्च-आवृत्ति संकेतक अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में संकुचन को आसान बनाने और वृद्धि के आवेगों के उभरने की ओर इशारा कर रहे हैं। उनकी गणना करने के बजाय, मैंने इस वक्तव्य के अनुबंध के रूप में रखा है। सभी संकेतों से, क्यू1: 2020-21 के गहरे संकुचन हमारे पीछे हैं; देश भर में सक्रिय केसलोड वक्र के समतल में आशा की किरण दिखाई दे रही है । एक दूसरी लहर को रोकते हुए, भारत वायरस की घातक पकड़ को कम करने और अपने पूर्व-कोविड विकास प्रक्षेपवक्र के साथ अपने प्रयास को नवीनीकृत करने के लिए तैयार है। 6. इस माहौल में, फोकस को अब नियंत्रण से पुनरुद्धार में बदलना चाहिए। महामारी से अडिग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था लचीली प्रतीत हो रही है। खरीफ की बुआई पिछले साल की बुवाई के साथ-साथ सामान्य बुआई वाले क्षेत्र से भी आगे निकल गई है। स्वस्थ जलाशय स्तरों के साथ मिट्टी की नमी की स्थिति में सुधार, ने रबी मौसम के लिए दृष्टिकोण को उज्ज्वल किया है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि खाद्यान्न उत्पादन 2020-21 में एक और रिकॉर्ड को पार करने के लिए तैयार है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार सृजन ने ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार प्रदान किया है। इस बीच, प्रवासी श्रमिक शहरी क्षेत्रों में काम करने के लिए लौट रहे हैं, और कारखानों और निर्माण गतिविधि पुनः स्थापित हो रही हैं। यह ऊर्जा की खपत और जनसंख्या की गतिशीलता के बढ़ते स्तर में भी परिलक्षित हो रहा है। शहरों में, यातायात की तीव्रता तेजी से बढ़ रही है; ऑनलाइन वाणिज्य फलफूल रहा है; और लोग कार्यालयों में वापस आ रहे हैं। राष्ट्र का मूड भय और निराशा से आत्मविश्वास और आशा की ओर बढ़ गया है। 7. इसमें से कुछ आशावाद लोगों की उम्मीदों में परिलक्षित किया जा रहा है। आरबीआई के सर्वेक्षण के सितंबर 2020 के दौर में, परिवारों में मुद्रास्फीति अगले तीन महीनों में मामूली गिरावट की उम्मीद करती है, इस उम्मीद का संकेत है कि आपूर्ति श्रृंखला में सुधार हो रहा है। हमारे अनुमानों से संकेत मिलता है कि मुद्रास्फीति क्यू4: 2020-21 तक लक्ष्य के करीब हो जाएगी। सितंबर में किए गए हमारे अन्य सर्वेक्षणों से यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता का विश्वास एक साल से अधिक समय पहले सामान्य आर्थिक स्थिति, रोजगार और आय पर निर्भर है। जबकि समग्र व्यावसायिक स्थिति का वर्तमान मूल्यांकन क्यू2 में संकुचन में रहता है, यह क्यू1 में कम से ऊपर चला गया है। दूरंदेशी व्यापार की उम्मीदें समग्र व्यावसायिक स्थिति, उत्पादन, ऑर्डर बुक, रोजगार, निर्यात और क्षमता उपयोग पर आशावादी हैं। 8. सितंबर 2020 के लिए विनिर्माण क्रय प्रबंधक का सूचकांक (पीएमआई) नए आदेशों और उत्पादन में तेजी के कारण जनवरी 2012 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंचकर 56.8 तक पहुंच गया। सितंबर में 49.8 के लिए पीएमआई की सेवाएं संकुचन में बनी रहीं, लेकिन अगस्त में 41.8 से बढ़ी हैं। ये उम्मीदें हमारे वृद्धि अनुमानों में भी परिलक्षित होती हैं जो सुझाव देती हैं कि जीडीपी वृद्धि संकुचन से बाहर हो सकती है और क्यू 4 में सकारात्मक हो सकती है। 9. वर्तमान में रिकवरी के आकार के बारे में एक एनिमेटेड बहस है। क्या यह V, U, L या W होगा? अभी हाल ही में, K-आकार की रिकवरी के बारे में भी बात हुई है। मेरे विचार में, इसमें मुख्य रूप से एक थ्री-स्पीड रिकवरी की संभावना है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्र अलग-अलग गति दिखा रहे हैं, जो क्षेत्र-विशिष्ट वास्तविकताओं पर निर्भर करता है। वे क्षेत्र जो अपने खातों को जल्द से जल्द खोलेंगे, वे ऐसे क्षेत्र होने की संभावना है, जिन्होंने महामारी के सामने लचीलापन दिखाया और श्रम-गहन भी हैं। कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ; तीव्र गति वाले उपभोक्ता सामान; दो पहिया वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टर; दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स; और बिजली उत्पादन, विशेष रूप से नवीकरणीय, इस श्रेणी के कुछ क्षेत्र हैं। इनमें से कई क्षेत्रों में, कृषि विपणन और मूल्य श्रृंखलाओं जैसे सुधार, जिसमें कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और प्रसंस्करण; श्रम कानूनों में बदलाव; और टीकों के उत्पादन और वितरण के लिए क्षमता निर्माण शामिल है, ने पहले ही कदम बढ़ाने के लिए नवीन निवेश हेतु नए रास्ते खोल दिए हैं। 10. क्षेत्रों की दूसरी श्रेणी 'स्ट्राइक फॉर्म' है, जिसमें ऐसे क्षेत्र शामिल होंगे जहाँ गतिविधि धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। तीसरी श्रेणी के क्षेत्रों में 'स्लॉग ओवर' का सामना करने वाले शामिल होंगे, लेकिन वे पारी को बचा सकते हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो सोशल डिस्टेन्सिंग से सबसे अधिक प्रभावित हैं और संपर्क-गहन हैं। 11. सितंबर 2020 में विभिन्न उच्च आवृत्ति संकेतकों में मामूली रिकवरी आर्थिक गतिविधि में बढ़ते अनलॉकिंग के साथ 2020-21 की दूसरी छमाही में और मजबूत हो सकती है। ग्रामीण मांग को बढ़ावा देकर कृषि और संबद्ध गतिविधियां पुनरूद्धार का नेतृत्व कर सकती हैं। विनिर्माण फर्मों को क्यू3: 2020-21 में क्षमता उपयोग के रिकवर होने और क्यू3 से आगे गतिविधि के कुछ जोर पकड़ने की उम्मीद है। निजी निवेश और निर्यात दोनों ही कम होने की संभावना है, विशेष रूप से बाहरी मांग अभी भी कम है। वर्ष 2020-21 के लिए समग्र रूप से, इसलिए, वास्तविक जीडीपी में 9.5 प्रतिशत की गिरावट की संभावना है,जो नीचे की ओर झुके जोखिमों के साथ है। यदि, हालांकि, अपटर्न लाभ स्थिति की वर्तमान में गति आती है तो एक तेज और मजबूत पलटाव उत्कृष्ट रूप में संभव है। 12. पिछले कुछ हफ़्तों से, एक ओर रिज़र्व बैंक के ऋण प्रबंधन और दूसरी ओर मौद्रिक परिचालन, और बाज़ार में प्रत्याशा, के बीच अंतर्निहित तर्क को अलग किया गया है। मैंने सोचा कि मुझे इन मुद्दों को वर्गवार संबोधित करने का अवसर लेना चाहिए ताकि बाजार सहभागियों और रिज़र्व बैंक प्रत्याशा को एक समान साझा करें, जो बदले में, बाजार की स्थितियों को क्रमबद्ध रूप से बढ़ा सके। 13. वित्तीय बाजारों के विकास और विनियमन और लोक ऋण के प्रबंधन के लिए जिम्मेदारियों के साथ मौद्रिक नीति प्राधिकार के रूप में, रिज़र्व बैंक ने बाजारों और वित्तीय संस्थानों के क्रमबद्ध कार्य, वित्तपोषण की शर्तों में ढील और पर्याप्त प्रणाली-स्तर के साथ-साथ लक्षित चलनिधि के प्रावधान को प्राथमिकता दी है। यह मौद्रिक नीति आवेगों के सुचारू और निर्बाध संचरण के साथ-साथ केंद्र और राज्यों के बाजार उधार कार्यक्रमों के गैर-विघटनकारी तरीके से पूरा होने के साथ प्रतिफल वक्र के सामान्य विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। फरवरी 2020 से रिज़र्व बैंक ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। रिज़र्व बैंक चलनिधि और आसान वित्तपोषण स्थितियों तक बाजार सहभागियों की पहुंच को आश्वस्त करने के लिए आवश्यक उपाय करने के लिए तैयार है। 14. 2020-21 के लिए एक संवर्धित बाजार उधार कार्यक्रम के बावजूद, केंद्र और राज्यों दोनों के लिए वर्ष की पहली छमाही के लिए निर्गम निर्बाध रूप से प्रबंधित किए गए। 2020-21 की पहली छमाही के दौरान केंद्र सरकार द्वारा उधार की भारित औसत लागत 5.82 प्रतिशत थी जो पिछले 16 वर्षों में सबसे कम है। केंद्र के बकाया स्टॉक की भारित औसत परिपक्वता भी अब तक की सबसे अधिक है। रिज़र्व बैंक ने आश्वासन दिलाया है कि केंद्र और राज्यों के 2020-21 के उधार कार्यक्रम को मूल्य और वित्तीय स्थिरता के साथ समझौता किए बिना गैर-विघटनकारी तरीके से पूरा किया जाएगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए, केंद्र के लिए अर्थोपाय अग्रिम (डब्ल्यूएमए) की सीमा पिछले वर्ष के दूसरी छमाही में ₹35,000 करोड़ की तुलना में ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक रखी गई है। इसी तरह, 2020-21 की पहली छमाही में राज्यों के लिए डब्ल्यूएमए सीमा में 60 प्रतिशत की वृद्धि को 31 मार्च 2021 तक आगे 6 माह की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है। 15. बाजार सहभागियों को आश्वासन दिया जाना चाहिए कि आज घोषित मौद्रिक नीति रुख को ध्यान में रखते हुए, रिज़र्व बैंक सुलभ चलनिधि स्थिति बनाए रखेगा और बाजार के परिचालन को एकमुश्त और विशेष खुला बाजार परिचालन के रूप में संचालित करेगा। बाजार सहभागियों से प्रतिक्रिया के उत्तर में, इन नीलामियों का परिमाण बढ़ाकर ₹20,000 करोड़ किया जाएगा। अपेक्षा है कि बाजार के सहभागी इस पहल का सकारात्मक जवाब देंगे। 16. प्राथमिक और द्वितीयक दोनों खंडों में, सरकारी प्रतिभूति (जी-सेक) बाजार में प्रतिफल को सुलभ चलनिधि स्थिति के साथ संरेखित कर विकसित करने की आवश्यकता है। यह वित्तीय बाजारों के उन खंडों के लिए महत्वपूर्ण है जो वित्तीय लिखतों के मूल्य निर्धारण के बेंचमार्क के रूप में जी-सेक प्रतिफल वक्र पर भरोसा करते हैं ताकि रिज़र्व बैंक के नीतिगत उपायों और परिचालनों द्वारा प्रदान की गई आसान वित्तपोषण स्थितियों से लाभान्वित हो सकें। 17. वित्तीय बाजार स्थिरता और प्रतिफल वक्र का क्रमिक विकास सार्वजनिक सेवा हैं और दोनों बाजार सहभागी है और रिज़र्व बैंक की इस संबंध में साझा जिम्मेदारी है। राजकोषीय प्रोत्साहन के रूप में और कर राजस्व की हानि के कारण महामारी द्वारा अधिरोपित मजबूरियों के कारण 2020-21 के लिए संवर्धित उधार कार्यक्रम आवश्यक हो गया है। हालांकि, इसने पेपर की अधिक आपूर्ति के रूप में बाजार पर दबाव डाला है, रिज़र्व बैंक इन दबावों को स्वीकार करने के लिए, वित्तीय बाजारों में किसी भी तरह के भ्रम को दूर करने और बाजार की स्थितियों को बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के साधनों के माध्यम से बाजार परिचालन करने के लिए तैयार है। बाजार सहभागियों को अपनी ओर से व्यापक समय परिप्रेक्ष्य लेने और बोली गतिविधि को प्रदर्शित करने की आवश्यकता है जो मौद्रिक नीति और ऋण प्रबंधन के संचालन में रिज़र्व बैंक से संकेतों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। हम वर्ष की दूसरी छमाही के लिए उधार कार्यक्रम के लिए सहयोगी समाधानों की आशा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बाजार बनाने के लिए कम से कम दो बार मत लेना पड़ता है, लेकिन ये मत जुझारू हुए बिना प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं। 18. इस संदर्भ में, यह उचित है कि मैंने अंतर्निहित मुद्रास्फीति की गतिशीलता और संभावना के बारे में हमारा आकलन किया। अप्रैल-मई 2020 की अवधि से अलग, जब आरोपण ने सीपीआई मुद्रास्फीति श्रृंखला में विराम लगाया, तो हेडलाइन मुद्रास्फीति मार्च 2020 के स्तर से ऊपर चली गई है और लक्ष्य की सहनशीलता बैंड के ऊपर बनी हुई है। हमारा आकलन है कि यह सितंबर के प्रिंट में ऊंचा रहेगी, लेकिन क्यू3 और क्यू4 पर लक्ष्य की ओर धीरे-धीरे नरम होगी। हमारा विश्लेषण बताता है कि मुद्रास्फीति को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक आपूर्ति व्यवधान और संबंधित मार्जिन/मार्क-अप हैं। जैसे ही आपूर्ति श्रृंखलाओं को बहाल किया जाएगा, इन दरारों को नष्ट होना चाहिए। इस बीच, कुल मांग कम होती जा रही है और यहां संसाधन के काफी कम होने के प्रमाण हैं। बड़ी अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन को चिह्नित करता है, और कृषि के लिए संभावना उज्ज्वल है। क्रूड की कीमतें रेंज सीमा में हैं। एमपीसी ने इसलिए वर्तमान मुद्रास्फीति उभार को क्षणिक रूप में देखने और विकास को पुनर्जीवित करने की तत्काल आवश्यकता और COVID-19 के प्रभाव को कम करने का निर्णय लिया है। इसने एमपीसी संकल्प में दर्शाए गए अनुसार आगे के मार्गदर्शन के साथ निभावकारी रुख को जारी रखने के लिए समय प्रदान किया है। 19. इस पृष्ठभूमि में और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में गति प्रदान करने के लिए, आज कुछ अतिरिक्त उपायों की घोषणा की जा रही है। इन उपायों का उद्देश्य (i) वित्तीय बाजारों के लिए चलनिधि समर्थन में वृद्धि करना; (ii) विनियामक समर्थन ताकि ऋण अनुशासन के मानदंडो के अनुसार लक्षित क्षेत्रों में ऋण प्रवाह में सुधार हो सके ; (iii) निर्यात को बढ़ावा देना; (iv) वित्तीय समावेशन को व्यापक बनाना तथा भुगतान प्रणाली सेवाओं को उन्नत करके कारोबार को आसानी से करने की सुविधा प्रदान करना। 20. रिज़र्व बैंक द्वारा चलनिधि उपायों पर ध्यान केंद्रित करने में अब विशिष्ट क्षेत्रों में गतिविधि का पुनरुद्धार शामिल है, जिनका पिछले और आगे दोनों से जुड़ाव हैं, तथा वृद्धि पर बहुस्तरीय प्रभाव पड़ता हैं। तदनुसार, यह निर्णय किया गया है कि पॉलिसी रेपो दर से सहलग्न अस्थायी दर पर कुल ₹1,00,000 करोड़ तक की राशि के लिए तीन वर्षों तक के टीएलटीआरओ को मांग पर संचालित किया जाए। योजना 31 मार्च 2021 तक लचीलेपन के साथ उपलब्ध होगी और इस योजना को प्राप्त प्रतिक्रिया के पश्चात राशि और अवधि बढ़ाने की समीक्षा की जाएगी। इस योजना के तहत बैंकों द्वारा प्राप्त चलनिधि को संस्था द्वारा विशिष्ट क्षेत्रों के लिए जारी कॉरपोरेट बॉन्ड, वाणिज्यिक पेपर और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में अपने निवेश के उत्कृष्ट स्तर पर और 30 सितंबर 2020 तक अपने निवेश के बकाया स्तर पर नियोजित किया जाना है। इस योजना के तहत मिलने वाली चलनिधि का उपयोग इन क्षेत्रों के बैंक ऋणों और अग्रिमों को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा, जिन बैंकों ने लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (टीएलटीआरओ और टीएलटीआरओ 2.0) के तहत पहले निधि का लाभ उठाया था, उनके पास परिपक्वता से पहले इन लेनदेन को रिवर्स करने का विकल्प है। 2020-21 की दूसरी छमाही में केंद्र और राज्यों की उधार आवश्यकताओं को देखते हुए और जैसे ही रिकवरी मजबूत होने की स्थिति में आने लगेगी ऋण की मांग में संभावित पिक-अप होगा, मांग पर टीएलटीआरओ का उद्देश्य चलनिधि के संघर्ष से रुके बिना बैंकों को अपने कार्यों को सुचारू और निर्बाध रूप से संचालित करने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रणाली में चलनिधि सुलभ बनी रहे। 21. 1 सितंबर 2020 को रिज़र्व बैंक ने 1 सितंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक या उसके बाद अर्जित एसएलआर प्रतिभूतियों के संबंध में अनुमत निवेश को एनडीटीएल के 19.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर दिया है, जिसे परिपक्वता तक धारित (एचटीएम) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। बैंकों को अपने निवेश के संबंध में निश्चितता प्रदान करने के लिए और अनुकूल वित्तपोषण की लागत को सुनिश्चित करते हुए व्यवस्थित बाजार की स्थितियों को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि 1 सितंबर 2020 से 31 मार्च 2020 तक अर्जित प्रतिभूतियों के लिए 22 प्रतिशत की बढ़ी हुई एचटीएम सीमा की व्यवस्था को 31 मार्च 2022 तक बढ़ा दिया जाए। यह उम्मीद की जाती है कि बैंक एसएलआर प्रतिभूतियों में अपने निवेश को इष्टतम तरीके से करने में सक्षम होंगे। (ग) राज्य विकास ऋणों (एसडीएल) में खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) 22. एसडीएल को चलनिधि प्रदान करने और इस प्रकार कुशल मूल्य निर्धारण की सुविधा के लिए, एसडीएल में वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान एक विशेष मामले के रूप में खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) के आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। यह द्वितीयक बाजार गतिविधि में सुधार करेगा और तुलनीय परिपक्वताओं वाले केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों पर एसडीएल के प्रसार को युक्तिसंगत बनाएगा। मार्च 2022 तक एचटीएम के विस्तार के साथ-साथ यह उपाय, वर्तमान वर्ष में कुल सरकारी उधारी के लिए चलनिधि और अवशोषण क्षमता से संबंधित चिंताओं को कम करना चाहिए। 23. बाह्य मांग में महामारी से संबंधित संकुचन से निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस माहौल में, निर्यात संबंधी आय की प्राप्ति में निर्यातकों को लचीलापन प्रदान करना और विदेशी खरीददारों के साथ बेहतर शर्तों पर बातचीत करने के लिए उन्हें सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। उक्त को सुविधाजनक बनाने के लिए और सतर्कता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को निर्यातक के अनुकूल और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रणाली-आधारित स्वचालित सतर्कता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को बंद करने का निर्णय लिया गया है। रिज़र्व बैंक, प्राधिकृत व्यापारी (एडी) बैंकों के मामले-विशिष्ट अनुशंसाओं के आधार पर सतर्कता सूची में शामिल करने का कार्य करेगा। 24. वर्तमान समय में, विकासशील आर्थिक पुनरुद्धार का नेतृत्व करने में वित्तीय क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में रिज़र्व बैंक, अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में संवर्धित ऋण प्रवाह को उत्प्रेरित करने के उद्देश्य से कुछ उपायों की घोषणा कर रहा है। 25. मौजूदा ढांचे के तहत, एक प्रतिपक्ष के लिए अधिकतम सकल खुदरा एक्सपोजर ₹5 करोड़ की पूर्ण सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। इस खंड में उच्च ऋण प्रवाह की सुविधा के उद्देश्य से, जिसमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत और छोटे व्यवसाय (अर्थात् ₹50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले) शामिल हैं, और बासल दिशानिर्देशों के अनुरूप सभी नए और साथ ही वृद्धिशील अर्हता वाले एक्सपोजरों के संबंध में इस सीमा को बढ़ाकर ₹7.5 करोड़ करने का निर्णय लिया गया है। इस उपाय से छोटे व्यवसायों के लिए ऋण प्रवाह का विस्तार होने की उम्मीद है। 26. मौजूदा विनियमों के तहत, विभेदक जोखिम भार अलग-अलग आवास ऋणों पर लागू होते हैं, जो ऋण के आकार के साथ-साथ मूल्य के तुलना में ऋण अनुपात (एलटीवी) पर भी आधारित होते हैं। रोजगार और आर्थिक गतिविधि पैदा करने में स्थावर संपदा क्षेत्र की भूमिका को स्वीकारते हुए, जोखिम भार को युक्तिसंगत बनाने और केवल 31 मार्च 2022 तक स्वीकृत सभी नए आवास ऋणों के लिए उन्हें एलटीवी अनुपात से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस उपाय से स्थावर संपदा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की संभावना है। 27. रिज़र्व बैंक ने 2018 में, कुछ शर्तों के अधीन प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को ऋण देने के लिए बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफ़सी) की एक श्रेणी के द्वारा ऋण की सह-उत्पत्ति के लिए एक रूपरेखा तैयार की थी। हितधारकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि सभी पात्र प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र ऋणों के संबंध में इस योजना को एचएफ़सी सहित सभी एनबीएफ़सी के लिए लागू किया जाए। इस "सह-उधार मॉडल" से अपेक्षा की जाती है कि वे सहयोगात्मक प्रयास में बैंकों और एनबीएफसी के तुलनात्मक लाभों का लाभ उठाएँ और अर्थव्यवस्था के सेवा रहित और अल्प सेवा प्राप्त क्षेत्रों में ऋण के प्रवाह में सुधार करें। 28. दिसंबर 2019 में, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि (एनईएफ़टी) प्रणाली 24x7x365 आधार पर उपलब्ध कराई गई थी और तब से यह प्रणाली सुचारू रूप से चल रही है। घरेलू व्यवसायों और संस्थानों के लिए तत्काल समय में तीव्र और निर्बाध भुगतान की सुविधा के लिए, दिसंबर 2020 से हर रोज आरटीजीएस प्रणाली को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। भारत 24x7x365 बड़े मूल्य के तत्काल भुगतान प्रणाली वाले विश्व स्तर पर बहुत कम देशों में से एक होगा। यह बड़े मूल्य के भुगतान वाले पारिस्थिति के तंत्र में नवाचारों की सुविधा प्रदान करेगा और व्यापार करने में सरलता को बढ़ावा देगा। 29. वर्तमान में रिज़र्व बैंक, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत भुगतान प्रणाली परिचालकों (पीएसओएस) को पांच वर्षों के सीमित अवधि के लिए "मांग पर' प्राधिकरण जारी करता है। पीएसओ के लिए लाइसेंस प्रदान करने और व्यावसायिक अनिश्चितता को कम करने के लिए, कुछ शर्तों के अधीन, सभी पीएसओ (नए आवेदकों के साथ-साथ मौजूदा पीएसओ) के लिए स्थायी आधार पर प्राधिकरण देने का निर्णय लिया गया है। यह अनुपालन लागतों को कम करेगा और निवेश गतिविधियों, रोजगार में वृद्धि और मूल्य श्रृंखलाओं में नई प्रतिभाओं और प्रौद्योगिकियों के सम्मिश्रण के लिए अनुकूल माहौल बनाएगा। 30. COVID-19 ने हमारे संसाधनों और हमारे धीरज का परीक्षण और गंभीर रूप से उसका विस्तार किया है। हमारी पीड़ा अभी खत्म नहीं हुई हैं और संक्रमणों के नए सिरे से वृद्धि एक गंभीर जोखिम बनी हुई है। हालांकि, हम आत्म-विश्वास और आशा के साहस के साथ, यात्रा रहित सड़क पर बहुत दूर आ चुके हैं। आगे COVID-19 से उत्पन्न होने वाली भयावह चुनौतियों से उबरने के लिए हम अपने धैर्य और आंतरिक क्षमता की गहनता को पहचानेंगे। यदि हम में विजयी पाने तक दृढ़ रहने का संकल्प है, तो मुझे विश्वास है कि हम महामारी पर विजय पाने के लिए आवश्यक बल जुटा पाएंगे। यहाँ मैं महात्मा गांधी के शब्दों को उद्धृत करना चाहूँगा"... अगर मुझे में विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूं, तो मैं निश्चित रूप से इसे करने की क्षमता अर्जित कर लूंगा ..."1 । सभी बाधाओं के खिलाफ, हम प्रयास करेंगे और पुनरुत्थान करेंगे। धन्यवाद। सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहें। नमस्कार।
बाहरी सदस्यों के रूप में डॉ. अशिमा गोयल, प्रो. जयंत आर. वर्मा और डॉ. शशांका भिडे के साथ नव नियुक्त मौद्रिक नीति समिति सात, आठ और नौ अक्टूबर दो हज़ार बीस को मिले जो उनकी पहली बैठक और मौद्रिक नीति ढांचे जिसे जून दो हज़ार सोलह में स्थापित किया गया था, के तहत पच्चीस वीं थीं। मैं नए सदस्यों का स्वागत करता हूं और भारत में मौद्रिक नीति की स्थापना और संचालन में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। मैं इस अवसर पर भारतीय रिज़र्व बैंक में हमारी टीमों को उनकी विश्लेषणात्मक सहायता और लोजिस्टिक सहायता के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। दो. एमपीसी ने घरेलू और वैश्विक समष्टि आर्थिक और वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन किया और सर्वसम्मति से चार% पर पॉलिसी रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के लिए वोट किया। यह सुनिश्चित करते हुए कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर बनी रहे, एमपीसी ने एक टिकाऊ आधार पर विकास को पुनर्जीवित करने और अर्थव्यवस्था पर COVID-उन्नीस के प्रभाव को कम करने के लिए जब तक आवश्यक हो - कम से कम चालू वित्त वर्ष के दौरान और अगले वित्त वर्ष में निभावकारी रुख बनाए रखने का निर्णय लिया। सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर चार.पच्चीस प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी जाएं। प्रतिवर्ती रेपो दर तीन.पैंतीस प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी जाए। तीन. मैं इस अवसर पर अर्थव्यवस्था की स्थिति और इसकी संभावनाओं की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत करना चाहूंगा। मैंने हमेशा एक आशावादी होने की हिम्मत रखी है, और महामारी को दूर करने की मानव जाति की क्षमता पर दृढ़ता से विश्वास करता हूँ। जब बीते महीनों में, दुनिया भर में रोष में COVID-उन्नीस ने अफरातफरी मचा दी, तो हमारी उम्मीदें साहसिक दिखाई पड़ीं, जैसे कोई तूफान के बीच अस्थिर ज्योति । आज, हवा में एक मोड़ है, जो बताता है कि कल के सबसे धूमिल समय में भी एक उज्जवल सपने देखना अविवेकपूर्ण नहीं है। जैसाकि डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम, हमारे दूरदर्शी पूर्व राष्ट्र पति ने कहाः "आपको अपने सपने सच होने से पहले सपने देखने होंगे ... सपना वह नहीं है जो आप सोते समय देखते हैं, यह एक ऐसी चीज है जो आपको सोने नहीं देती है।" चार. दो हज़ार बीस की दूसरी तिमाही में जिस वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई थी, वैश्विक आर्थिक गतिविधि तीसरी तिमाही में क्रमिक रूप से पलट कर प्रकट हुई है, लेकिन अर्थव्यवस्थाओं में और उसके भीतर असमान रूप से हुई है । विनिर्माण, श्रम बाजार और खुदरा बिक्री में सुधार ने कुछ देशों में मजबूत बहाली की है; जबकि अन्य में, नए संक्रमणों में वृद्धि से अनलॉक की गति धीमी करने या प्रतिबंध पुनः लगाने को प्रेरित किया, जिसके फलस्वरूप वृद्धि रुक गयी। आम तौर पर, निवेश कम रहा जबकि खपत और निर्यात में सुधार होने लगा है। सभी देशों में बड़े पैमाने पर नीतिगत समर्थन ने अधिक गिरावट को रोका है और रोजगार, घरेलू आय और व्यवसायों को एक आधार प्रदान किया है। वित्तीय स्थिति सौम्य बनी हुई है। पाँच. भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है। पूर्व-कोविड स्तरों के सापेक्ष, कई उच्च-आवृत्ति संकेतक अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में संकुचन को आसान बनाने और वृद्धि के आवेगों के उभरने की ओर इशारा कर रहे हैं। उनकी गणना करने के बजाय, मैंने इस वक्तव्य के अनुबंध के रूप में रखा है। सभी संकेतों से, क्यूएक: दो हज़ार बीस-इक्कीस के गहरे संकुचन हमारे पीछे हैं; देश भर में सक्रिय केसलोड वक्र के समतल में आशा की किरण दिखाई दे रही है । एक दूसरी लहर को रोकते हुए, भारत वायरस की घातक पकड़ को कम करने और अपने पूर्व-कोविड विकास प्रक्षेपवक्र के साथ अपने प्रयास को नवीनीकृत करने के लिए तैयार है। छः. इस माहौल में, फोकस को अब नियंत्रण से पुनरुद्धार में बदलना चाहिए। महामारी से अडिग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था लचीली प्रतीत हो रही है। खरीफ की बुआई पिछले साल की बुवाई के साथ-साथ सामान्य बुआई वाले क्षेत्र से भी आगे निकल गई है। स्वस्थ जलाशय स्तरों के साथ मिट्टी की नमी की स्थिति में सुधार, ने रबी मौसम के लिए दृष्टिकोण को उज्ज्वल किया है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि खाद्यान्न उत्पादन दो हज़ार बीस-इक्कीस में एक और रिकॉर्ड को पार करने के लिए तैयार है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत रोजगार सृजन ने ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार प्रदान किया है। इस बीच, प्रवासी श्रमिक शहरी क्षेत्रों में काम करने के लिए लौट रहे हैं, और कारखानों और निर्माण गतिविधि पुनः स्थापित हो रही हैं। यह ऊर्जा की खपत और जनसंख्या की गतिशीलता के बढ़ते स्तर में भी परिलक्षित हो रहा है। शहरों में, यातायात की तीव्रता तेजी से बढ़ रही है; ऑनलाइन वाणिज्य फलफूल रहा है; और लोग कार्यालयों में वापस आ रहे हैं। राष्ट्र का मूड भय और निराशा से आत्मविश्वास और आशा की ओर बढ़ गया है। सात. इसमें से कुछ आशावाद लोगों की उम्मीदों में परिलक्षित किया जा रहा है। आरबीआई के सर्वेक्षण के सितंबर दो हज़ार बीस के दौर में, परिवारों में मुद्रास्फीति अगले तीन महीनों में मामूली गिरावट की उम्मीद करती है, इस उम्मीद का संकेत है कि आपूर्ति श्रृंखला में सुधार हो रहा है। हमारे अनुमानों से संकेत मिलता है कि मुद्रास्फीति क्यूचार: दो हज़ार बीस-इक्कीस तक लक्ष्य के करीब हो जाएगी। सितंबर में किए गए हमारे अन्य सर्वेक्षणों से यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता का विश्वास एक साल से अधिक समय पहले सामान्य आर्थिक स्थिति, रोजगार और आय पर निर्भर है। जबकि समग्र व्यावसायिक स्थिति का वर्तमान मूल्यांकन क्यूदो में संकुचन में रहता है, यह क्यूएक में कम से ऊपर चला गया है। दूरंदेशी व्यापार की उम्मीदें समग्र व्यावसायिक स्थिति, उत्पादन, ऑर्डर बुक, रोजगार, निर्यात और क्षमता उपयोग पर आशावादी हैं। आठ. सितंबर दो हज़ार बीस के लिए विनिर्माण क्रय प्रबंधक का सूचकांक नए आदेशों और उत्पादन में तेजी के कारण जनवरी दो हज़ार बारह के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंचकर छप्पन.आठ तक पहुंच गया। सितंबर में उनचास.आठ के लिए पीएमआई की सेवाएं संकुचन में बनी रहीं, लेकिन अगस्त में इकतालीस.आठ से बढ़ी हैं। ये उम्मीदें हमारे वृद्धि अनुमानों में भी परिलक्षित होती हैं जो सुझाव देती हैं कि जीडीपी वृद्धि संकुचन से बाहर हो सकती है और क्यू चार में सकारात्मक हो सकती है। नौ. वर्तमान में रिकवरी के आकार के बारे में एक एनिमेटेड बहस है। क्या यह V, U, L या W होगा? अभी हाल ही में, K-आकार की रिकवरी के बारे में भी बात हुई है। मेरे विचार में, इसमें मुख्य रूप से एक थ्री-स्पीड रिकवरी की संभावना है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्र अलग-अलग गति दिखा रहे हैं, जो क्षेत्र-विशिष्ट वास्तविकताओं पर निर्भर करता है। वे क्षेत्र जो अपने खातों को जल्द से जल्द खोलेंगे, वे ऐसे क्षेत्र होने की संभावना है, जिन्होंने महामारी के सामने लचीलापन दिखाया और श्रम-गहन भी हैं। कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ; तीव्र गति वाले उपभोक्ता सामान; दो पहिया वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टर; दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स; और बिजली उत्पादन, विशेष रूप से नवीकरणीय, इस श्रेणी के कुछ क्षेत्र हैं। इनमें से कई क्षेत्रों में, कृषि विपणन और मूल्य श्रृंखलाओं जैसे सुधार, जिसमें कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और प्रसंस्करण; श्रम कानूनों में बदलाव; और टीकों के उत्पादन और वितरण के लिए क्षमता निर्माण शामिल है, ने पहले ही कदम बढ़ाने के लिए नवीन निवेश हेतु नए रास्ते खोल दिए हैं। दस. क्षेत्रों की दूसरी श्रेणी 'स्ट्राइक फॉर्म' है, जिसमें ऐसे क्षेत्र शामिल होंगे जहाँ गतिविधि धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। तीसरी श्रेणी के क्षेत्रों में 'स्लॉग ओवर' का सामना करने वाले शामिल होंगे, लेकिन वे पारी को बचा सकते हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो सोशल डिस्टेन्सिंग से सबसे अधिक प्रभावित हैं और संपर्क-गहन हैं। ग्यारह. सितंबर दो हज़ार बीस में विभिन्न उच्च आवृत्ति संकेतकों में मामूली रिकवरी आर्थिक गतिविधि में बढ़ते अनलॉकिंग के साथ दो हज़ार बीस-इक्कीस की दूसरी छमाही में और मजबूत हो सकती है। ग्रामीण मांग को बढ़ावा देकर कृषि और संबद्ध गतिविधियां पुनरूद्धार का नेतृत्व कर सकती हैं। विनिर्माण फर्मों को क्यूतीन: दो हज़ार बीस-इक्कीस में क्षमता उपयोग के रिकवर होने और क्यूतीन से आगे गतिविधि के कुछ जोर पकड़ने की उम्मीद है। निजी निवेश और निर्यात दोनों ही कम होने की संभावना है, विशेष रूप से बाहरी मांग अभी भी कम है। वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए समग्र रूप से, इसलिए, वास्तविक जीडीपी में नौ.पाँच प्रतिशत की गिरावट की संभावना है,जो नीचे की ओर झुके जोखिमों के साथ है। यदि, हालांकि, अपटर्न लाभ स्थिति की वर्तमान में गति आती है तो एक तेज और मजबूत पलटाव उत्कृष्ट रूप में संभव है। बारह. पिछले कुछ हफ़्तों से, एक ओर रिज़र्व बैंक के ऋण प्रबंधन और दूसरी ओर मौद्रिक परिचालन, और बाज़ार में प्रत्याशा, के बीच अंतर्निहित तर्क को अलग किया गया है। मैंने सोचा कि मुझे इन मुद्दों को वर्गवार संबोधित करने का अवसर लेना चाहिए ताकि बाजार सहभागियों और रिज़र्व बैंक प्रत्याशा को एक समान साझा करें, जो बदले में, बाजार की स्थितियों को क्रमबद्ध रूप से बढ़ा सके। तेरह. वित्तीय बाजारों के विकास और विनियमन और लोक ऋण के प्रबंधन के लिए जिम्मेदारियों के साथ मौद्रिक नीति प्राधिकार के रूप में, रिज़र्व बैंक ने बाजारों और वित्तीय संस्थानों के क्रमबद्ध कार्य, वित्तपोषण की शर्तों में ढील और पर्याप्त प्रणाली-स्तर के साथ-साथ लक्षित चलनिधि के प्रावधान को प्राथमिकता दी है। यह मौद्रिक नीति आवेगों के सुचारू और निर्बाध संचरण के साथ-साथ केंद्र और राज्यों के बाजार उधार कार्यक्रमों के गैर-विघटनकारी तरीके से पूरा होने के साथ प्रतिफल वक्र के सामान्य विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। फरवरी दो हज़ार बीस से रिज़र्व बैंक ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। रिज़र्व बैंक चलनिधि और आसान वित्तपोषण स्थितियों तक बाजार सहभागियों की पहुंच को आश्वस्त करने के लिए आवश्यक उपाय करने के लिए तैयार है। चौदह. दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए एक संवर्धित बाजार उधार कार्यक्रम के बावजूद, केंद्र और राज्यों दोनों के लिए वर्ष की पहली छमाही के लिए निर्गम निर्बाध रूप से प्रबंधित किए गए। दो हज़ार बीस-इक्कीस की पहली छमाही के दौरान केंद्र सरकार द्वारा उधार की भारित औसत लागत पाँच.बयासी प्रतिशत थी जो पिछले सोलह वर्षों में सबसे कम है। केंद्र के बकाया स्टॉक की भारित औसत परिपक्वता भी अब तक की सबसे अधिक है। रिज़र्व बैंक ने आश्वासन दिलाया है कि केंद्र और राज्यों के दो हज़ार बीस-इक्कीस के उधार कार्यक्रम को मूल्य और वित्तीय स्थिरता के साथ समझौता किए बिना गैर-विघटनकारी तरीके से पूरा किया जाएगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए, केंद्र के लिए अर्थोपाय अग्रिम की सीमा पिछले वर्ष के दूसरी छमाही में पैंतीस रुपया,शून्य करोड़ की तुलना में एक दशमलव पच्चीस रुपया लाख करोड़ से अधिक रखी गई है। इसी तरह, दो हज़ार बीस-इक्कीस की पहली छमाही में राज्यों के लिए डब्ल्यूएमए सीमा में साठ प्रतिशत की वृद्धि को इकतीस मार्च दो हज़ार इक्कीस तक आगे छः माह की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है। पंद्रह. बाजार सहभागियों को आश्वासन दिया जाना चाहिए कि आज घोषित मौद्रिक नीति रुख को ध्यान में रखते हुए, रिज़र्व बैंक सुलभ चलनिधि स्थिति बनाए रखेगा और बाजार के परिचालन को एकमुश्त और विशेष खुला बाजार परिचालन के रूप में संचालित करेगा। बाजार सहभागियों से प्रतिक्रिया के उत्तर में, इन नीलामियों का परिमाण बढ़ाकर बीस रुपया,शून्य करोड़ किया जाएगा। अपेक्षा है कि बाजार के सहभागी इस पहल का सकारात्मक जवाब देंगे। सोलह. प्राथमिक और द्वितीयक दोनों खंडों में, सरकारी प्रतिभूति बाजार में प्रतिफल को सुलभ चलनिधि स्थिति के साथ संरेखित कर विकसित करने की आवश्यकता है। यह वित्तीय बाजारों के उन खंडों के लिए महत्वपूर्ण है जो वित्तीय लिखतों के मूल्य निर्धारण के बेंचमार्क के रूप में जी-सेक प्रतिफल वक्र पर भरोसा करते हैं ताकि रिज़र्व बैंक के नीतिगत उपायों और परिचालनों द्वारा प्रदान की गई आसान वित्तपोषण स्थितियों से लाभान्वित हो सकें। सत्रह. वित्तीय बाजार स्थिरता और प्रतिफल वक्र का क्रमिक विकास सार्वजनिक सेवा हैं और दोनों बाजार सहभागी है और रिज़र्व बैंक की इस संबंध में साझा जिम्मेदारी है। राजकोषीय प्रोत्साहन के रूप में और कर राजस्व की हानि के कारण महामारी द्वारा अधिरोपित मजबूरियों के कारण दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए संवर्धित उधार कार्यक्रम आवश्यक हो गया है। हालांकि, इसने पेपर की अधिक आपूर्ति के रूप में बाजार पर दबाव डाला है, रिज़र्व बैंक इन दबावों को स्वीकार करने के लिए, वित्तीय बाजारों में किसी भी तरह के भ्रम को दूर करने और बाजार की स्थितियों को बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के साधनों के माध्यम से बाजार परिचालन करने के लिए तैयार है। बाजार सहभागियों को अपनी ओर से व्यापक समय परिप्रेक्ष्य लेने और बोली गतिविधि को प्रदर्शित करने की आवश्यकता है जो मौद्रिक नीति और ऋण प्रबंधन के संचालन में रिज़र्व बैंक से संकेतों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। हम वर्ष की दूसरी छमाही के लिए उधार कार्यक्रम के लिए सहयोगी समाधानों की आशा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बाजार बनाने के लिए कम से कम दो बार मत लेना पड़ता है, लेकिन ये मत जुझारू हुए बिना प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं। अट्ठारह. इस संदर्भ में, यह उचित है कि मैंने अंतर्निहित मुद्रास्फीति की गतिशीलता और संभावना के बारे में हमारा आकलन किया। अप्रैल-मई दो हज़ार बीस की अवधि से अलग, जब आरोपण ने सीपीआई मुद्रास्फीति श्रृंखला में विराम लगाया, तो हेडलाइन मुद्रास्फीति मार्च दो हज़ार बीस के स्तर से ऊपर चली गई है और लक्ष्य की सहनशीलता बैंड के ऊपर बनी हुई है। हमारा आकलन है कि यह सितंबर के प्रिंट में ऊंचा रहेगी, लेकिन क्यूतीन और क्यूचार पर लक्ष्य की ओर धीरे-धीरे नरम होगी। हमारा विश्लेषण बताता है कि मुद्रास्फीति को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक आपूर्ति व्यवधान और संबंधित मार्जिन/मार्क-अप हैं। जैसे ही आपूर्ति श्रृंखलाओं को बहाल किया जाएगा, इन दरारों को नष्ट होना चाहिए। इस बीच, कुल मांग कम होती जा रही है और यहां संसाधन के काफी कम होने के प्रमाण हैं। बड़ी अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन को चिह्नित करता है, और कृषि के लिए संभावना उज्ज्वल है। क्रूड की कीमतें रेंज सीमा में हैं। एमपीसी ने इसलिए वर्तमान मुद्रास्फीति उभार को क्षणिक रूप में देखने और विकास को पुनर्जीवित करने की तत्काल आवश्यकता और COVID-उन्नीस के प्रभाव को कम करने का निर्णय लिया है। इसने एमपीसी संकल्प में दर्शाए गए अनुसार आगे के मार्गदर्शन के साथ निभावकारी रुख को जारी रखने के लिए समय प्रदान किया है। उन्नीस. इस पृष्ठभूमि में और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में गति प्रदान करने के लिए, आज कुछ अतिरिक्त उपायों की घोषणा की जा रही है। इन उपायों का उद्देश्य वित्तीय बाजारों के लिए चलनिधि समर्थन में वृद्धि करना; विनियामक समर्थन ताकि ऋण अनुशासन के मानदंडो के अनुसार लक्षित क्षेत्रों में ऋण प्रवाह में सुधार हो सके ; निर्यात को बढ़ावा देना; वित्तीय समावेशन को व्यापक बनाना तथा भुगतान प्रणाली सेवाओं को उन्नत करके कारोबार को आसानी से करने की सुविधा प्रदान करना। बीस. रिज़र्व बैंक द्वारा चलनिधि उपायों पर ध्यान केंद्रित करने में अब विशिष्ट क्षेत्रों में गतिविधि का पुनरुद्धार शामिल है, जिनका पिछले और आगे दोनों से जुड़ाव हैं, तथा वृद्धि पर बहुस्तरीय प्रभाव पड़ता हैं। तदनुसार, यह निर्णय किया गया है कि पॉलिसी रेपो दर से सहलग्न अस्थायी दर पर कुल एक रुपया,शून्य,शून्य करोड़ तक की राशि के लिए तीन वर्षों तक के टीएलटीआरओ को मांग पर संचालित किया जाए। योजना इकतीस मार्च दो हज़ार इक्कीस तक लचीलेपन के साथ उपलब्ध होगी और इस योजना को प्राप्त प्रतिक्रिया के पश्चात राशि और अवधि बढ़ाने की समीक्षा की जाएगी। इस योजना के तहत बैंकों द्वारा प्राप्त चलनिधि को संस्था द्वारा विशिष्ट क्षेत्रों के लिए जारी कॉरपोरेट बॉन्ड, वाणिज्यिक पेपर और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में अपने निवेश के उत्कृष्ट स्तर पर और तीस सितंबर दो हज़ार बीस तक अपने निवेश के बकाया स्तर पर नियोजित किया जाना है। इस योजना के तहत मिलने वाली चलनिधि का उपयोग इन क्षेत्रों के बैंक ऋणों और अग्रिमों को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा, जिन बैंकों ने लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन के तहत पहले निधि का लाभ उठाया था, उनके पास परिपक्वता से पहले इन लेनदेन को रिवर्स करने का विकल्प है। दो हज़ार बीस-इक्कीस की दूसरी छमाही में केंद्र और राज्यों की उधार आवश्यकताओं को देखते हुए और जैसे ही रिकवरी मजबूत होने की स्थिति में आने लगेगी ऋण की मांग में संभावित पिक-अप होगा, मांग पर टीएलटीआरओ का उद्देश्य चलनिधि के संघर्ष से रुके बिना बैंकों को अपने कार्यों को सुचारू और निर्बाध रूप से संचालित करने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रणाली में चलनिधि सुलभ बनी रहे। इक्कीस. एक सितंबर दो हज़ार बीस को रिज़र्व बैंक ने एक सितंबर दो हज़ार बीस से इकतीस मार्च दो हज़ार इक्कीस तक या उसके बाद अर्जित एसएलआर प्रतिभूतियों के संबंध में अनुमत निवेश को एनडीटीएल के उन्नीस.पाँच प्रतिशत से बढ़ाकर बाईस प्रतिशत कर दिया है, जिसे परिपक्वता तक धारित के रूप में वर्गीकृत किया गया है। बैंकों को अपने निवेश के संबंध में निश्चितता प्रदान करने के लिए और अनुकूल वित्तपोषण की लागत को सुनिश्चित करते हुए व्यवस्थित बाजार की स्थितियों को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि एक सितंबर दो हज़ार बीस से इकतीस मार्च दो हज़ार बीस तक अर्जित प्रतिभूतियों के लिए बाईस प्रतिशत की बढ़ी हुई एचटीएम सीमा की व्यवस्था को इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक बढ़ा दिया जाए। यह उम्मीद की जाती है कि बैंक एसएलआर प्रतिभूतियों में अपने निवेश को इष्टतम तरीके से करने में सक्षम होंगे। राज्य विकास ऋणों में खुला बाजार परिचालन बाईस. एसडीएल को चलनिधि प्रदान करने और इस प्रकार कुशल मूल्य निर्धारण की सुविधा के लिए, एसडीएल में वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान एक विशेष मामले के रूप में खुला बाजार परिचालन के आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। यह द्वितीयक बाजार गतिविधि में सुधार करेगा और तुलनीय परिपक्वताओं वाले केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों पर एसडीएल के प्रसार को युक्तिसंगत बनाएगा। मार्च दो हज़ार बाईस तक एचटीएम के विस्तार के साथ-साथ यह उपाय, वर्तमान वर्ष में कुल सरकारी उधारी के लिए चलनिधि और अवशोषण क्षमता से संबंधित चिंताओं को कम करना चाहिए। तेईस. बाह्य मांग में महामारी से संबंधित संकुचन से निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस माहौल में, निर्यात संबंधी आय की प्राप्ति में निर्यातकों को लचीलापन प्रदान करना और विदेशी खरीददारों के साथ बेहतर शर्तों पर बातचीत करने के लिए उन्हें सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। उक्त को सुविधाजनक बनाने के लिए और सतर्कता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को निर्यातक के अनुकूल और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रणाली-आधारित स्वचालित सतर्कता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को बंद करने का निर्णय लिया गया है। रिज़र्व बैंक, प्राधिकृत व्यापारी बैंकों के मामले-विशिष्ट अनुशंसाओं के आधार पर सतर्कता सूची में शामिल करने का कार्य करेगा। चौबीस. वर्तमान समय में, विकासशील आर्थिक पुनरुद्धार का नेतृत्व करने में वित्तीय क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में रिज़र्व बैंक, अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में संवर्धित ऋण प्रवाह को उत्प्रेरित करने के उद्देश्य से कुछ उपायों की घोषणा कर रहा है। पच्चीस. मौजूदा ढांचे के तहत, एक प्रतिपक्ष के लिए अधिकतम सकल खुदरा एक्सपोजर पाँच रुपया करोड़ की पूर्ण सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। इस खंड में उच्च ऋण प्रवाह की सुविधा के उद्देश्य से, जिसमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत और छोटे व्यवसाय शामिल हैं, और बासल दिशानिर्देशों के अनुरूप सभी नए और साथ ही वृद्धिशील अर्हता वाले एक्सपोजरों के संबंध में इस सीमा को बढ़ाकर सात दशमलव पाँच रुपया करोड़ करने का निर्णय लिया गया है। इस उपाय से छोटे व्यवसायों के लिए ऋण प्रवाह का विस्तार होने की उम्मीद है। छब्बीस. मौजूदा विनियमों के तहत, विभेदक जोखिम भार अलग-अलग आवास ऋणों पर लागू होते हैं, जो ऋण के आकार के साथ-साथ मूल्य के तुलना में ऋण अनुपात पर भी आधारित होते हैं। रोजगार और आर्थिक गतिविधि पैदा करने में स्थावर संपदा क्षेत्र की भूमिका को स्वीकारते हुए, जोखिम भार को युक्तिसंगत बनाने और केवल इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक स्वीकृत सभी नए आवास ऋणों के लिए उन्हें एलटीवी अनुपात से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस उपाय से स्थावर संपदा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की संभावना है। सत्ताईस. रिज़र्व बैंक ने दो हज़ार अट्ठारह में, कुछ शर्तों के अधीन प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को ऋण देने के लिए बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की एक श्रेणी के द्वारा ऋण की सह-उत्पत्ति के लिए एक रूपरेखा तैयार की थी। हितधारकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि सभी पात्र प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र ऋणों के संबंध में इस योजना को एचएफ़सी सहित सभी एनबीएफ़सी के लिए लागू किया जाए। इस "सह-उधार मॉडल" से अपेक्षा की जाती है कि वे सहयोगात्मक प्रयास में बैंकों और एनबीएफसी के तुलनात्मक लाभों का लाभ उठाएँ और अर्थव्यवस्था के सेवा रहित और अल्प सेवा प्राप्त क्षेत्रों में ऋण के प्रवाह में सुधार करें। अट्ठाईस. दिसंबर दो हज़ार उन्नीस में, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि प्रणाली चौबीसxसातxतीन सौ पैंसठ आधार पर उपलब्ध कराई गई थी और तब से यह प्रणाली सुचारू रूप से चल रही है। घरेलू व्यवसायों और संस्थानों के लिए तत्काल समय में तीव्र और निर्बाध भुगतान की सुविधा के लिए, दिसंबर दो हज़ार बीस से हर रोज आरटीजीएस प्रणाली को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। भारत चौबीसxसातxतीन सौ पैंसठ बड़े मूल्य के तत्काल भुगतान प्रणाली वाले विश्व स्तर पर बहुत कम देशों में से एक होगा। यह बड़े मूल्य के भुगतान वाले पारिस्थिति के तंत्र में नवाचारों की सुविधा प्रदान करेगा और व्यापार करने में सरलता को बढ़ावा देगा। उनतीस. वर्तमान में रिज़र्व बैंक, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, दो हज़ार सात के तहत भुगतान प्रणाली परिचालकों को पांच वर्षों के सीमित अवधि के लिए "मांग पर' प्राधिकरण जारी करता है। पीएसओ के लिए लाइसेंस प्रदान करने और व्यावसायिक अनिश्चितता को कम करने के लिए, कुछ शर्तों के अधीन, सभी पीएसओ के लिए स्थायी आधार पर प्राधिकरण देने का निर्णय लिया गया है। यह अनुपालन लागतों को कम करेगा और निवेश गतिविधियों, रोजगार में वृद्धि और मूल्य श्रृंखलाओं में नई प्रतिभाओं और प्रौद्योगिकियों के सम्मिश्रण के लिए अनुकूल माहौल बनाएगा। तीस. COVID-उन्नीस ने हमारे संसाधनों और हमारे धीरज का परीक्षण और गंभीर रूप से उसका विस्तार किया है। हमारी पीड़ा अभी खत्म नहीं हुई हैं और संक्रमणों के नए सिरे से वृद्धि एक गंभीर जोखिम बनी हुई है। हालांकि, हम आत्म-विश्वास और आशा के साहस के साथ, यात्रा रहित सड़क पर बहुत दूर आ चुके हैं। आगे COVID-उन्नीस से उत्पन्न होने वाली भयावह चुनौतियों से उबरने के लिए हम अपने धैर्य और आंतरिक क्षमता की गहनता को पहचानेंगे। यदि हम में विजयी पाने तक दृढ़ रहने का संकल्प है, तो मुझे विश्वास है कि हम महामारी पर विजय पाने के लिए आवश्यक बल जुटा पाएंगे। यहाँ मैं महात्मा गांधी के शब्दों को उद्धृत करना चाहूँगा"... अगर मुझे में विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूं, तो मैं निश्चित रूप से इसे करने की क्षमता अर्जित कर लूंगा ..."एक । सभी बाधाओं के खिलाफ, हम प्रयास करेंगे और पुनरुत्थान करेंगे। धन्यवाद। सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहें। नमस्कार।
रायपुरः राजधानी के राजेंद्र नगर क्षेत्र में मंगलवार को बदमाशों ने एक मुंशी की आखों में मिर्च पाउडर डालकर नकदी लूट लिए थे। पीड़ित काफी देर तक अपनी आंखों की जलन मिटाने में लगा रहा और बदमाश भाग निकले। बैग में 27 हजार रुपये थे रखे, जिन्हें बदमाशों ने पार कर दिए। राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने लूट के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। 3 दिन पहले राजेंद्र नगर थाने में पीडी इंटस्ट्रीज प्रा। लि। के मुंशी मन्नू भाई पटेल ने लूट की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। मन्नू ने बताया था कि आफिस से काम खत्म होने के बाद वह स्कूटी से अपने घर श्री राम विहार कालोनी निकले थे। पुरैना रोड मुक्तिधाम घाट के सामने पीछे से एक बाइक पर दो युवक आए और आंख में मिर्च पाउडर डाल दिए। मिर्च पाउडर आंख में पड़ते ही मुंंशी ने गाड़ी साइड में रोक दी। इसी दौरान दूसरी गाड़ी में दो बदमाश आए और धक्का देकर बैग को छीन कर भाग गए। बैग में आफिस की चाबी, कैश बुक का पन्नाा, बैंक पास बुक और नकदी 27 हजार रुपये थे।
रायपुरः राजधानी के राजेंद्र नगर क्षेत्र में मंगलवार को बदमाशों ने एक मुंशी की आखों में मिर्च पाउडर डालकर नकदी लूट लिए थे। पीड़ित काफी देर तक अपनी आंखों की जलन मिटाने में लगा रहा और बदमाश भाग निकले। बैग में सत्ताईस हजार रुपये थे रखे, जिन्हें बदमाशों ने पार कर दिए। राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने लूट के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। तीन दिन पहले राजेंद्र नगर थाने में पीडी इंटस्ट्रीज प्रा। लि। के मुंशी मन्नू भाई पटेल ने लूट की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। मन्नू ने बताया था कि आफिस से काम खत्म होने के बाद वह स्कूटी से अपने घर श्री राम विहार कालोनी निकले थे। पुरैना रोड मुक्तिधाम घाट के सामने पीछे से एक बाइक पर दो युवक आए और आंख में मिर्च पाउडर डाल दिए। मिर्च पाउडर आंख में पड़ते ही मुंंशी ने गाड़ी साइड में रोक दी। इसी दौरान दूसरी गाड़ी में दो बदमाश आए और धक्का देकर बैग को छीन कर भाग गए। बैग में आफिस की चाबी, कैश बुक का पन्नाा, बैंक पास बुक और नकदी सत्ताईस हजार रुपये थे।
हरिदेवपुर, 07 सितंबर (हि.स.)। हरिदेवपुर में गुरुवार को एक युवक ने एक सिविक वोलेंटियर और एक ट्रैफिक सर्जेंट की पिटाई कर डाली। इस घटना में ट्रैफिक सर्जेंट के नाक में चोट लगी है। आरोपित का नाम विक्की चक्रवर्ती था। आरोपित को हरिदेवपुर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। घायल पुलिस अधिकारी को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह विक्की स्कूटर से चिकन लेकर दुकान पर जा रहा था। इसी दौरान एक सिविक वोलेंटियर उसका रास्ता रोका। विक्की नियंत्रण खो बैठा और स्कूटी समेत गिर गया। इसके बाद वह उठा और बिना कुछ कहे सिविक वालंटियर को पीटना शुरू कर दिया। विक्की को रोकने के लिए ऑन-ड्यूटी ट्रैफिक सर्जेंट अनिरुद्ध विश्वास आगे आए। उसने अनिरुद्ध को मुक्का मारा और उनकी नाक तोड़ दी। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद हरिदेवपुर थाने से पुलिस बल इलाके में आ गयी। उन्होंने विक्की चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया।
हरिदेवपुर, सात सितंबर । हरिदेवपुर में गुरुवार को एक युवक ने एक सिविक वोलेंटियर और एक ट्रैफिक सर्जेंट की पिटाई कर डाली। इस घटना में ट्रैफिक सर्जेंट के नाक में चोट लगी है। आरोपित का नाम विक्की चक्रवर्ती था। आरोपित को हरिदेवपुर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। घायल पुलिस अधिकारी को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह विक्की स्कूटर से चिकन लेकर दुकान पर जा रहा था। इसी दौरान एक सिविक वोलेंटियर उसका रास्ता रोका। विक्की नियंत्रण खो बैठा और स्कूटी समेत गिर गया। इसके बाद वह उठा और बिना कुछ कहे सिविक वालंटियर को पीटना शुरू कर दिया। विक्की को रोकने के लिए ऑन-ड्यूटी ट्रैफिक सर्जेंट अनिरुद्ध विश्वास आगे आए। उसने अनिरुद्ध को मुक्का मारा और उनकी नाक तोड़ दी। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद हरिदेवपुर थाने से पुलिस बल इलाके में आ गयी। उन्होंने विक्की चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया।
मंदसौर : Brown sugar seized : जिले से नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां पुलिस ने भारी मात्रा में ब्राउन शुगर जब्त की है। पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। Brown sugar seized :मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने एक ट्रक ड्राइवर के पास से 20 किलो ब्रॉउन शुगर बरामद की है। पुलिस द्वारा जब्त की गई ब्राउन शुगर की कीमत लगभग 20 करोड़ रुपए आंकी गई है। पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ आरोपी ट्रक चालाक को भी गिरफ्तार किया है। फ़िलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि पूछ्ताछा में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मंदसौर : Brown sugar seized : जिले से नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां पुलिस ने भारी मात्रा में ब्राउन शुगर जब्त की है। पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। Brown sugar seized :मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने एक ट्रक ड्राइवर के पास से बीस किलो ब्रॉउन शुगर बरामद की है। पुलिस द्वारा जब्त की गई ब्राउन शुगर की कीमत लगभग बीस करोड़ रुपए आंकी गई है। पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ आरोपी ट्रक चालाक को भी गिरफ्तार किया है। फ़िलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि पूछ्ताछा में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
बहुत से लोगों को खाना खाना खाने के तुरंत बाद शौच जाने की आदत होती है, क्या आप भी उनमें से एक हैं? 20-30 की उम्र के युवा खाना खाने के बाद सोना या मूवी देखना पसंद करते हैं तो 40 से 45 पार के व्यस्क खाना खाने के बाद टहलना पसंद करते हैं। ये आदतें अलग-अलग उम्र में अलग-अलग होती हैं। आप पहले भी कई बार ये सुन चुके होंगे कि खाना खाने के बाद क्या नहीं करना चाहिए लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि खाना खाने के तुरंत बाद किन चीजों पर ध्यान देना हमारी सेहत के लिए ज्यादा जरूरी है। इस लेख में हम आपको ये बता रहे हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद हमें किन चीजों का विशेष ध्यान देना चाहिए। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम खाना कब खा रहे है, सुबह, दोपहर या फिर शाम। हमें हमेशा घर में खाना खाने के बाद कुछ देर आराम करना चाहिए और फिर काम पर लौट जाना चाहिए। वहीं जब बात शाम की हो तो खाना खाने के बाद 30 से 40 मिनट की सैर जरूर करें। खाना खाने के बाद सैर करें उसके बाद बेड पर जाएं। ऐसा करने से पाचन तंत्र सही रहेगा। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद बैठ जाते हैं तो दिक्कत होना लाजमी है। अगर आपको बैठना ही है तो वज्रासन अवस्था में बैठें। ऐसा करने से खाना भी पच जाता है, जितनी देर आप किस अवस्था में बैठेंगे आपको उतना ही फायदा होगा। आपको हमेशा खाना खाने के 20 से 30 मिनट पहले ही पानी पी लेना चाहिए। खाना खाने के बाद हमें नियमित रूप से 30 से 40 मिनट बाद हल्का गुनगुना पानी 1 :1 सीप करके पीना चाहिए। ऐसा करने से पेट में गैस नहीं बनती और आप नियमित रूप से फिट रहते हैं। खाना खाने के बाद पाचन को दुरुस्त बनाने के लिए आपको हमेशा जीरा, अजवाइन खा लेनी चाहिए। ऐसा करने से हमारी पाचन क्रिया सही रहती है। इसके अलावा आप खाने के कुछ समय बाद कम से कम 100 कदम चलें, जिससे काफी फायदा होता है। आपको खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी कोई फल नहीं खाना चाहिए। हां, आप खाना खाने से एक-दो घंटे पहले फल खा सकते हैं। इसके अलावा आपको खाना खाते समय भी फल का सेवन नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं खाना खाने के बाद कैफिन चाय ,कॉफी का इस्तेमाल न करें और न ही नहाना नहीं चाहिए। Total Wellness is now just a click away.
बहुत से लोगों को खाना खाना खाने के तुरंत बाद शौच जाने की आदत होती है, क्या आप भी उनमें से एक हैं? बीस-तीस की उम्र के युवा खाना खाने के बाद सोना या मूवी देखना पसंद करते हैं तो चालीस से पैंतालीस पार के व्यस्क खाना खाने के बाद टहलना पसंद करते हैं। ये आदतें अलग-अलग उम्र में अलग-अलग होती हैं। आप पहले भी कई बार ये सुन चुके होंगे कि खाना खाने के बाद क्या नहीं करना चाहिए लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि खाना खाने के तुरंत बाद किन चीजों पर ध्यान देना हमारी सेहत के लिए ज्यादा जरूरी है। इस लेख में हम आपको ये बता रहे हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद हमें किन चीजों का विशेष ध्यान देना चाहिए। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम खाना कब खा रहे है, सुबह, दोपहर या फिर शाम। हमें हमेशा घर में खाना खाने के बाद कुछ देर आराम करना चाहिए और फिर काम पर लौट जाना चाहिए। वहीं जब बात शाम की हो तो खाना खाने के बाद तीस से चालीस मिनट की सैर जरूर करें। खाना खाने के बाद सैर करें उसके बाद बेड पर जाएं। ऐसा करने से पाचन तंत्र सही रहेगा। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद बैठ जाते हैं तो दिक्कत होना लाजमी है। अगर आपको बैठना ही है तो वज्रासन अवस्था में बैठें। ऐसा करने से खाना भी पच जाता है, जितनी देर आप किस अवस्था में बैठेंगे आपको उतना ही फायदा होगा। आपको हमेशा खाना खाने के बीस से तीस मिनट पहले ही पानी पी लेना चाहिए। खाना खाने के बाद हमें नियमित रूप से तीस से चालीस मिनट बाद हल्का गुनगुना पानी एक :एक सीप करके पीना चाहिए। ऐसा करने से पेट में गैस नहीं बनती और आप नियमित रूप से फिट रहते हैं। खाना खाने के बाद पाचन को दुरुस्त बनाने के लिए आपको हमेशा जीरा, अजवाइन खा लेनी चाहिए। ऐसा करने से हमारी पाचन क्रिया सही रहती है। इसके अलावा आप खाने के कुछ समय बाद कम से कम एक सौ कदम चलें, जिससे काफी फायदा होता है। आपको खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी कोई फल नहीं खाना चाहिए। हां, आप खाना खाने से एक-दो घंटे पहले फल खा सकते हैं। इसके अलावा आपको खाना खाते समय भी फल का सेवन नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं खाना खाने के बाद कैफिन चाय ,कॉफी का इस्तेमाल न करें और न ही नहाना नहीं चाहिए। Total Wellness is now just a click away.
TMC Manifesto Bengal Elections 2021: बंगाल विधानसभा चुनाव में आठ चरणों में वोटिंग के बाद 2 मई को रिजल्ट निकलने वाला है. वहीं, बुधवार को टीएमसी ने मेनिफेस्टो जारी कर दिया. टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य में टीएमसी की सरकार बनने पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 10 लाख सेल्फ हेल्फ ग्रुप तैयार किया जाएगा. गांव और शहर की महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप (स्वयं सहायता समूह) से जोड़कर उनको सशक्त बनाया जाएगा. महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जाएगा. टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की महिलाओं को आगे बढ़ाने की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी और योजनाएं बनाई जाएगी. विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें तो टीएमसी का मेनिफेस्टो आधी आबादी को अपने पाले में करने की कोशिश दिखती है. मेनिफेस्टो से इतर टीएमसी ने 49 कैंडिडेट्स को भी मैदान में उतारा है. कैंडिडेट्स के नामों के एलान के समय भी ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि टीएमसी की सरकार में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में उन्हें सत्ता में ज्यादा भागीदारी देने का फैसला लिया गया है. दूसरी तरफ बीजेपी समेत दूसरे दलों ने सभी चरणों के लिए कैंडिडेट्स के नामों का एलान नहीं किया है. खास बात यह है बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में आधी आबादी के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है. बंगाल विधानसभा चुनाव में महिलाओं को गेमचेंजर माना जा रहा है. सियासी गणित को समझने वालों के मुताबिक बंगाल विधानसभा चुनाव में महिला वोट बैंक 'असली करामात' कर सकती है. चुनाव आयोग के हिसाब से देखें तो इस बार राज्य में करीब 7. 18 करोड़ मतदाता वोट डालने वाले हैं. इसमें महिलाओं की संख्या 3. 15 करोड़ (49 प्रतिशत) है. इस हिसाब से देखें तो पश्चिम बंगाल में महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच महज दो फीसदी का अंतर है. अगर महिलाओं के बड़े धड़े ने किसी पार्टी को समर्थन दिया तो उसकी जीत पक्की है. इस कारण हर पार्टी महिला वोट बैंक पर कब्जा करने की फिराक में है. टीएमसी सुप्रीमो और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी खुद महिला हैं. दूसरी तरफ बीजेपी भी महिला नेताओं को फ्रंटलाइन पर लाकर महिला वोटबैंक पर निशाना साधने में जुटी हुई है. दूसरे राज्यों की तुलना में बंगाल की महिलाओं को राजनीति के क्षेत्र में ज्यादा जागरूक माना जाता है. वो पुरुषों के कहे और सुने की जगह अपने हिसाब से वोट करती हैं. जबकि, राज्य में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का अनुपात 961 (प्रति हजार) हो चुका है. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. यही कारण है 2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 45 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 42 सीटों पर 17 महिलाओं (41 फीसदी) को टिकट दिया था. अब, मेनिफेस्टो से टीएमसी ने महिलाओं को साधने की एक कोशिश और की है.
TMC Manifesto Bengal Elections दो हज़ार इक्कीस: बंगाल विधानसभा चुनाव में आठ चरणों में वोटिंग के बाद दो मई को रिजल्ट निकलने वाला है. वहीं, बुधवार को टीएमसी ने मेनिफेस्टो जारी कर दिया. टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य में टीएमसी की सरकार बनने पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए दस लाख सेल्फ हेल्फ ग्रुप तैयार किया जाएगा. गांव और शहर की महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप से जोड़कर उनको सशक्त बनाया जाएगा. महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जाएगा. टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की महिलाओं को आगे बढ़ाने की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी और योजनाएं बनाई जाएगी. विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें तो टीएमसी का मेनिफेस्टो आधी आबादी को अपने पाले में करने की कोशिश दिखती है. मेनिफेस्टो से इतर टीएमसी ने उनचास कैंडिडेट्स को भी मैदान में उतारा है. कैंडिडेट्स के नामों के एलान के समय भी ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि टीएमसी की सरकार में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में उन्हें सत्ता में ज्यादा भागीदारी देने का फैसला लिया गया है. दूसरी तरफ बीजेपी समेत दूसरे दलों ने सभी चरणों के लिए कैंडिडेट्स के नामों का एलान नहीं किया है. खास बात यह है बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में आधी आबादी के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है. बंगाल विधानसभा चुनाव में महिलाओं को गेमचेंजर माना जा रहा है. सियासी गणित को समझने वालों के मुताबिक बंगाल विधानसभा चुनाव में महिला वोट बैंक 'असली करामात' कर सकती है. चुनाव आयोग के हिसाब से देखें तो इस बार राज्य में करीब सात. अट्ठारह करोड़ मतदाता वोट डालने वाले हैं. इसमें महिलाओं की संख्या तीन. पंद्रह करोड़ है. इस हिसाब से देखें तो पश्चिम बंगाल में महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच महज दो फीसदी का अंतर है. अगर महिलाओं के बड़े धड़े ने किसी पार्टी को समर्थन दिया तो उसकी जीत पक्की है. इस कारण हर पार्टी महिला वोट बैंक पर कब्जा करने की फिराक में है. टीएमसी सुप्रीमो और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी खुद महिला हैं. दूसरी तरफ बीजेपी भी महिला नेताओं को फ्रंटलाइन पर लाकर महिला वोटबैंक पर निशाना साधने में जुटी हुई है. दूसरे राज्यों की तुलना में बंगाल की महिलाओं को राजनीति के क्षेत्र में ज्यादा जागरूक माना जाता है. वो पुरुषों के कहे और सुने की जगह अपने हिसाब से वोट करती हैं. जबकि, राज्य में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का अनुपात नौ सौ इकसठ हो चुका है. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. यही कारण है दो हज़ार सोलह के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने पैंतालीस और दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में कुल बयालीस सीटों पर सत्रह महिलाओं को टिकट दिया था. अब, मेनिफेस्टो से टीएमसी ने महिलाओं को साधने की एक कोशिश और की है.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के लिए हुए मतदान की आज मतगणना हो रही है। आज मतदाताओं की कसौटी पर हुई राजनीतिक दलों की परीक्षा का नतीजा आने वाला है। सभी राजनीतिक पार्टियों की धड़कने बड़ी हुई है। आज पता चलेगा कि कौन इस परीक्षा में पास होगा, किन शहरों में किन सियासी दलों की पकड़ है। यह चुनाव परिणाम न सिर्फ शहरी सत्ता में राजनीतिक दलों की भागीदारी तय करेगा बल्कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का भी माहौल बनाएंगा। बता दें कि, प्रदेश में 17 नगर निगम, 199 नगर पालिका परिषद और 544 नगर पंचायतों सहित 760 नगरीय निकाय चुनावों में दो चरणों में मतदान हुए थे। इनमें भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस जैसे बड़े दलों के साथ अपना दल (एस), रालोद, एआईएमआईएम, निषाद पार्टी सहित तमाम दलों ने भी किस्मत आजमाई है। इन सभी दलों ने मतदाताओं की कसौटी पर खरे उतरने के लिए अपनी परीक्षा दी थी, जिसका आज परिणाम आने वाला है। सभी राजनीतिक दलों को इस परिणाम का इंतजार है। सभी इस नतीजों को लेकर चिता में है। वहीं, भाजपा छह नगर निगम को लेकर चिंतित दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास माना है। चुनाव में छोटे कस्बों से लेकर महानगरों के तक मतदाताओं ने मतदान किया है। करीब 110 नगर पंचायतें नई होने के कारण वहां की आबादी अभी भी ग्रामीण परिवेश से बाहर नहीं है। लिहाजा कुछ हद तक चुनाव के नतीजे ग्रामीणों का रुझान भी बताएंगे। चुनाव के नतीजे बताएंगे कि शहरी जनता सत्तारूढ़ दल की केंद्र व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, दावों और वादों से संतुष्ट है या विपक्ष सत्तारूढ़ दल पर लगाए आरोपों को जनता की अदालत में साबित करने में सफल रहा है। नतीजे बताएंगे कि शहरी क्षेत्रों में किस राजनीतिक दल की कितनी पकड़ है।
लखनऊः उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के लिए हुए मतदान की आज मतगणना हो रही है। आज मतदाताओं की कसौटी पर हुई राजनीतिक दलों की परीक्षा का नतीजा आने वाला है। सभी राजनीतिक पार्टियों की धड़कने बड़ी हुई है। आज पता चलेगा कि कौन इस परीक्षा में पास होगा, किन शहरों में किन सियासी दलों की पकड़ है। यह चुनाव परिणाम न सिर्फ शहरी सत्ता में राजनीतिक दलों की भागीदारी तय करेगा बल्कि दो हज़ार चौबीस में होने वाले लोकसभा चुनाव का भी माहौल बनाएंगा। बता दें कि, प्रदेश में सत्रह नगर निगम, एक सौ निन्यानवे नगर पालिका परिषद और पाँच सौ चौंतालीस नगर पंचायतों सहित सात सौ साठ नगरीय निकाय चुनावों में दो चरणों में मतदान हुए थे। इनमें भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस जैसे बड़े दलों के साथ अपना दल , रालोद, एआईएमआईएम, निषाद पार्टी सहित तमाम दलों ने भी किस्मत आजमाई है। इन सभी दलों ने मतदाताओं की कसौटी पर खरे उतरने के लिए अपनी परीक्षा दी थी, जिसका आज परिणाम आने वाला है। सभी राजनीतिक दलों को इस परिणाम का इंतजार है। सभी इस नतीजों को लेकर चिता में है। वहीं, भाजपा छह नगर निगम को लेकर चिंतित दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास माना है। चुनाव में छोटे कस्बों से लेकर महानगरों के तक मतदाताओं ने मतदान किया है। करीब एक सौ दस नगर पंचायतें नई होने के कारण वहां की आबादी अभी भी ग्रामीण परिवेश से बाहर नहीं है। लिहाजा कुछ हद तक चुनाव के नतीजे ग्रामीणों का रुझान भी बताएंगे। चुनाव के नतीजे बताएंगे कि शहरी जनता सत्तारूढ़ दल की केंद्र व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, दावों और वादों से संतुष्ट है या विपक्ष सत्तारूढ़ दल पर लगाए आरोपों को जनता की अदालत में साबित करने में सफल रहा है। नतीजे बताएंगे कि शहरी क्षेत्रों में किस राजनीतिक दल की कितनी पकड़ है।
Jewelery worth lakhs stolen: अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के जिले अंबिकापुर से एक विधायक के दामाद के घर से चोरी होने की खबर सामने आई है। घर से लाखों रुपए के साथ जेवरात की भी चोरी हुई है। घर में कैमरे लगे होने के बावजुद चोरी के वारदात को अंजाम दिया गया। फिलहाल चोरी की घटना की जांच पुलिस टीम कर रही है। Jewelery worth lakhs stolen: आपको बता दें कि यह मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। विधायक चिंतामणि महराज के दामाद के घर चोरी हुई। घर से जेवरात समेत लाखों की चोरी हुई। यही नहीं घर में 12 कैमरे लगे लेकिन चोर DVR भी साथ ले गए। CSP इस मामले की जांच कर रहे हैं।
Jewelery worth lakhs stolen: अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के जिले अंबिकापुर से एक विधायक के दामाद के घर से चोरी होने की खबर सामने आई है। घर से लाखों रुपए के साथ जेवरात की भी चोरी हुई है। घर में कैमरे लगे होने के बावजुद चोरी के वारदात को अंजाम दिया गया। फिलहाल चोरी की घटना की जांच पुलिस टीम कर रही है। Jewelery worth lakhs stolen: आपको बता दें कि यह मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। विधायक चिंतामणि महराज के दामाद के घर चोरी हुई। घर से जेवरात समेत लाखों की चोरी हुई। यही नहीं घर में बारह कैमरे लगे लेकिन चोर DVR भी साथ ले गए। CSP इस मामले की जांच कर रहे हैं।
UP 67 Schools recognition to be Canceled: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी यूपीएसईबी की ओर से 67 स्कूलों की मान्यता को वापस लिए जाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा रहा है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान यहां पर फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा देते हुए पकड़े गए थे। यूपी बोर्ड के सचिव ने इस संबंध में बयान जारी किया है। Milk Benefits: सिर्फ कैल्शियम ही नहीं इन पोषक तत्वों का भी खजाना है दूध, एक्सपर्ट से जानिए क्या कच्चा दूध पीना चाहिए ?
UP सरसठ Schools recognition to be Canceled: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी यूपीएसईबी की ओर से सरसठ स्कूलों की मान्यता को वापस लिए जाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा रहा है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान यहां पर फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा देते हुए पकड़े गए थे। यूपी बोर्ड के सचिव ने इस संबंध में बयान जारी किया है। Milk Benefits: सिर्फ कैल्शियम ही नहीं इन पोषक तत्वों का भी खजाना है दूध, एक्सपर्ट से जानिए क्या कच्चा दूध पीना चाहिए ?
चंडीगढ़, रोहतक में आयोजित राज्य स्तरीय संत कबीर दास जयंती समारोह के दौरान हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कई बड़ी घोषणाएं की है. जहां बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सीएम मनोहर लाल ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में केंद्र की तरह कैडर के हिसाब से आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा. इस बीच सीएम खट्टर ने हरियाणा के सभी शिक्षण संस्थान और धर्मशालाओं को ना केवल अनुसूचित जाति बल्कि पिछड़े समाज का भी बताया. लेकिन इस बीच जो सबसे बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री ने की वह उनके आवास के नाम की थी. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि चंडीगढ़ स्थित हरियाणा के मुख्यमंत्री के आवास का नाम अब से संत कबीर कुटीर के नाम पर रखा जाएगा. अब से हरियाणा के सीएम के आवास स्थल संत कबीर कुटीर के नाम से कहलाया जाएगा. इस कार्यक्रम के दौरान मनोहर लाल ने केवल अनुसूचित जाति बल्कि पिछड़े समाज की धर्मशालाओं में 5 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने की घोषणा की. इस योजना के लिए सभी धर्मशालाओं को 75 प्रतिशत की सब्सिडी भी दी जाएगी. इसके अलावा हरियाणा सीएम ने एनआईटी और आईआईटी में आरक्षण की व्यवस्था के लिए केंद्र से बात करने की भी बात कही. इसके अलावा समाज की साढ़े पांच एकड़ जमीन में शिक्षण संस्थान की मांग पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की, इस जमीन पर वह सभी प्रोजेक्ट्स जो 51 लाख रुपए तक बनाए जाएंगे, उसे सरकार द्वारा बनाया जाएगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने संत कबीर जयंती पर संत कबीर के जन्मस्थान बनारस से जुड़ी बड़ी घोषणा भी की. जहां उन्होंने कहा कि जो भी कोई संत कबीर के जन्मस्थान बनारस की यात्रा करना चाहता हों उसके लिए रेलवे का किराया दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में किसी एक संस्थान का नाम संत कबीर के नाम पर किया जाएगा. बहरहाल अब हरियाणा के मुख्यमंत्री के सरकार आवास का नाम भी संत कबीर पर रखा गया है.
चंडीगढ़, रोहतक में आयोजित राज्य स्तरीय संत कबीर दास जयंती समारोह के दौरान हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कई बड़ी घोषणाएं की है. जहां बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सीएम मनोहर लाल ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में केंद्र की तरह कैडर के हिसाब से आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा. इस बीच सीएम खट्टर ने हरियाणा के सभी शिक्षण संस्थान और धर्मशालाओं को ना केवल अनुसूचित जाति बल्कि पिछड़े समाज का भी बताया. लेकिन इस बीच जो सबसे बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री ने की वह उनके आवास के नाम की थी. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि चंडीगढ़ स्थित हरियाणा के मुख्यमंत्री के आवास का नाम अब से संत कबीर कुटीर के नाम पर रखा जाएगा. अब से हरियाणा के सीएम के आवास स्थल संत कबीर कुटीर के नाम से कहलाया जाएगा. इस कार्यक्रम के दौरान मनोहर लाल ने केवल अनुसूचित जाति बल्कि पिछड़े समाज की धर्मशालाओं में पाँच किलोग्रामवाट का सोलर प्लांट लगाने की घोषणा की. इस योजना के लिए सभी धर्मशालाओं को पचहत्तर प्रतिशत की सब्सिडी भी दी जाएगी. इसके अलावा हरियाणा सीएम ने एनआईटी और आईआईटी में आरक्षण की व्यवस्था के लिए केंद्र से बात करने की भी बात कही. इसके अलावा समाज की साढ़े पांच एकड़ जमीन में शिक्षण संस्थान की मांग पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की, इस जमीन पर वह सभी प्रोजेक्ट्स जो इक्यावन लाख रुपए तक बनाए जाएंगे, उसे सरकार द्वारा बनाया जाएगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने संत कबीर जयंती पर संत कबीर के जन्मस्थान बनारस से जुड़ी बड़ी घोषणा भी की. जहां उन्होंने कहा कि जो भी कोई संत कबीर के जन्मस्थान बनारस की यात्रा करना चाहता हों उसके लिए रेलवे का किराया दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में किसी एक संस्थान का नाम संत कबीर के नाम पर किया जाएगा. बहरहाल अब हरियाणा के मुख्यमंत्री के सरकार आवास का नाम भी संत कबीर पर रखा गया है.
ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में बीते दिनों दंगे हुए थे जिसमें पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के समर्थकों ने देश की संसद में घुसकर उपद्रव मचाया था। अब उस मामले की जांच में ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति को भी शामिल करने की मंजूरी दे दी है। ब्रासीलिया, एएनआई। ब्राजील में दंगा भड़काने के आरोप में पूर्व न्याय मंत्री एंडरसन टोरेस को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। एंडरसन की गिरफ्तारी अमेरिका से लौटने के बाद हुई। टोरेस पर जानबूझकर दंगा भड़काने का आरोप लग रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दंगे भड़कने से पहले उन्होंने देश छोड़ दिया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के करीबी टोरेस को पिछले साल अक्टूबर में वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने हराया था। वह ब्रासीलिया की सार्वजनिक सुरक्षा के प्रभारी थे जब आठ जनवरी के दंगों के दौरान कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भवन पर हमला किया गया था। ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में बीते दिनों दंगे हुए थे, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के समर्थकों ने देश की संसद में घुसकर उपद्रव मचाया था। अब उस मामले की जांच में ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति को भी शामिल करने की मंजूरी दे दी है। दरअसल, इस मामले में अभियोजक ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि जेयर बोल्सोनारो को भी जांच के घेरे में लिया जाए, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति ने 10 जनवरी को अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें मतदान में धांधली के आरोप लगाए गए थे। हालांकि कुछ घंटे बाद ही जेयर बोल्सनारो ने यह वीडियो हटा लिया। गौरतलब है कि सरकारी वकीलों ने दंगों के चलते संघीय ऑडिट कोर्ट से बोल्सोनारो की संपत्ति को जब्त करने के की मांग की थी। पूर्व राष्ट्रपति ने दंगों की निंदा की थी, लेकिन अक्टूबर 2022 में हुए चुनाव में अपनी हार नहीं मानी है। वो अपने प्रतिद्वंद्वी लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के खिलाफ चुनाव हार गए थे और एक जनवरी को लूला को सत्ता सौंपने से पहले ही फ्लोरिडा के लिए निकल गए थे।
ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में बीते दिनों दंगे हुए थे जिसमें पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के समर्थकों ने देश की संसद में घुसकर उपद्रव मचाया था। अब उस मामले की जांच में ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति को भी शामिल करने की मंजूरी दे दी है। ब्रासीलिया, एएनआई। ब्राजील में दंगा भड़काने के आरोप में पूर्व न्याय मंत्री एंडरसन टोरेस को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। एंडरसन की गिरफ्तारी अमेरिका से लौटने के बाद हुई। टोरेस पर जानबूझकर दंगा भड़काने का आरोप लग रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दंगे भड़कने से पहले उन्होंने देश छोड़ दिया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के करीबी टोरेस को पिछले साल अक्टूबर में वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने हराया था। वह ब्रासीलिया की सार्वजनिक सुरक्षा के प्रभारी थे जब आठ जनवरी के दंगों के दौरान कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भवन पर हमला किया गया था। ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में बीते दिनों दंगे हुए थे, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के समर्थकों ने देश की संसद में घुसकर उपद्रव मचाया था। अब उस मामले की जांच में ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति को भी शामिल करने की मंजूरी दे दी है। दरअसल, इस मामले में अभियोजक ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि जेयर बोल्सोनारो को भी जांच के घेरे में लिया जाए, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति ने दस जनवरी को अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें मतदान में धांधली के आरोप लगाए गए थे। हालांकि कुछ घंटे बाद ही जेयर बोल्सनारो ने यह वीडियो हटा लिया। गौरतलब है कि सरकारी वकीलों ने दंगों के चलते संघीय ऑडिट कोर्ट से बोल्सोनारो की संपत्ति को जब्त करने के की मांग की थी। पूर्व राष्ट्रपति ने दंगों की निंदा की थी, लेकिन अक्टूबर दो हज़ार बाईस में हुए चुनाव में अपनी हार नहीं मानी है। वो अपने प्रतिद्वंद्वी लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के खिलाफ चुनाव हार गए थे और एक जनवरी को लूला को सत्ता सौंपने से पहले ही फ्लोरिडा के लिए निकल गए थे।
- 10 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? क्रिकेट के भगवान इन दिनों अलग ही रूप में नजर आ रहे हैं। वहीं उनके साथ दिखाई दे रहे हैं सुरों के महारथी सोनू निगम भी। दोनों के इस तरह एक साथ दिखाई देने के पीछे कारण क्या है यही सबको हैरानी में डाले हुए हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों दोनों का एक पोस्टर वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में दोनों पीठ की ओर से दिख रहे हैं और सचिन ने हाथ में माइक ले रखा है तो सोनू ने अपने हाथ में क्रिकेट बैट लिया है। इस पोस्टर को सचिन ने अपने सोशल एकाउंट पर शोयर भी किया है।
- दस hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? क्रिकेट के भगवान इन दिनों अलग ही रूप में नजर आ रहे हैं। वहीं उनके साथ दिखाई दे रहे हैं सुरों के महारथी सोनू निगम भी। दोनों के इस तरह एक साथ दिखाई देने के पीछे कारण क्या है यही सबको हैरानी में डाले हुए हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों दोनों का एक पोस्टर वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में दोनों पीठ की ओर से दिख रहे हैं और सचिन ने हाथ में माइक ले रखा है तो सोनू ने अपने हाथ में क्रिकेट बैट लिया है। इस पोस्टर को सचिन ने अपने सोशल एकाउंट पर शोयर भी किया है।