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राति कविया की मौलिक देन । नायिका का यह कथन कि मैंने तुम्हें पत्नग ( सर्प ) की मणि की भाँति रखा और तुम अब हमें पत्की केंचुल करना चाहते हो, अपने आप में प्राचीन कवि प्रसिद्धियों का यह नितान्त नूतन प्रयोग और मौलिक उक्ति विधान है। प्रायः सर्प का मणि के प्रति गहरा गोह होता है और केचुल के प्रति सहज उदासीनता । यहाँ नायिका का उपालम्भ है कि है कृष्ण, हमने तुम्हें ग्रहण करने में सर्प की मणि को भाँति मोह एब आसक्ति प्रदर्शित की पर तुमने हमें छोड़ने में सर्प की केंचुल की भाँति अपनी सहज निष्ठुरता प्रकट की है । च - रंगों का प्रयोग रीति काव्य रंगों की प्रचुरता की दृष्टि से अन्य युगों की रचनाओं से पर्याप्त समृद्ध है । रंगों के प्रयोग का यह वैचित्य कहीं मीलित, कहीं तद्गुण और कहीं विरोधाभास जैसे अलंकारों द्वारा प्रकट किया गया है। जिस प्रकार हिन्दी का शृंगार काव्य कल्पना और उक्तियों के वैभव और सौन्दर्य से पूर्णतया मंडित है, उसी प्रकार उसमे नाना प्रकार के वर्षों की दीप्ति और विविधता का भी प्रभाव नहीं है। आपको ऐसेऐसे चित्रों की उपलब्धि होगी जो अपने वर्णों के अनूठे सौन्दर्य और कौशल के कारण परम प्रसिद्ध है । रीतिकाव्य के रंगों में कुछ तो सूक्ष्मभावाभिव्यक्ति में सहायक है और कुछ अनुभूतियों की व्यंजना में अन्यतम कहे जाते हैं । जिस प्रकार किसी चित्र की पूर्णता उन रेखाओं से व्यक्त होती है, जो चित्र की वास्तविक संवेदना को मुखरित करने में परम सहायक होती है । ठीक यही स्थिति काव्य में वर्णों ( Colours ) की होती है। वर्ण वस्तुतः अनुभूतियों और कल्पना के क्षीण कलेबर को पूर्ण स्फीतता प्रदान करते हैं। कभी-कभी इन रंगों के सहयोग से कवि भावनाओं की ऐसी प्रतिमा खड़ी कर देता है जो उनके अभाव में कथमपि सभव नहीं है। हम इस कथन की पुष्टि के लिए रीतिमुक्त कवि ठाकुर का एक छन्द प्रस्तुत कर रहे हैं -- अपने अपने निज गेहन में, चढ़े दोऊ सनेह की नाव पैरी । अंगनान में भीजत प्रेस भरे, समयो लखि मैं बलि जांव पैरी । कह ठाकुर दोउन की रुचि सो रंग द्वै उमड़े दोउ ठांव पैरी । सखी कारी घटा बरसै बरसाने पै गोरी घटा नंद गांव पैरी इस चित्र में राधा और कृष्ण के पारस्परिक प्रेम की तन्मयता की एक झांकी प्रस्तुत है । राधा कृष्ण की मनःस्थिति को प्राप्त है और कृष्ण राधा की मनःस्थिति को । कवि ने इस भाव की प्रकृत व्यंजना काली गोरी घटा द्वारा की है। यहाँ काली घटा से तात्पर्य कृष्ण से है और गोरी घटा राधा की ओर संकेत कर रही है । बरसाने 1 १. ठाकुर ठसक - सं० ला० भगवानदीन, छं० सं० ४१, पृ० १२
राति कविया की मौलिक देन । नायिका का यह कथन कि मैंने तुम्हें पत्नग की मणि की भाँति रखा और तुम अब हमें पत्की केंचुल करना चाहते हो, अपने आप में प्राचीन कवि प्रसिद्धियों का यह नितान्त नूतन प्रयोग और मौलिक उक्ति विधान है। प्रायः सर्प का मणि के प्रति गहरा गोह होता है और केचुल के प्रति सहज उदासीनता । यहाँ नायिका का उपालम्भ है कि है कृष्ण, हमने तुम्हें ग्रहण करने में सर्प की मणि को भाँति मोह एब आसक्ति प्रदर्शित की पर तुमने हमें छोड़ने में सर्प की केंचुल की भाँति अपनी सहज निष्ठुरता प्रकट की है । च - रंगों का प्रयोग रीति काव्य रंगों की प्रचुरता की दृष्टि से अन्य युगों की रचनाओं से पर्याप्त समृद्ध है । रंगों के प्रयोग का यह वैचित्य कहीं मीलित, कहीं तद्गुण और कहीं विरोधाभास जैसे अलंकारों द्वारा प्रकट किया गया है। जिस प्रकार हिन्दी का शृंगार काव्य कल्पना और उक्तियों के वैभव और सौन्दर्य से पूर्णतया मंडित है, उसी प्रकार उसमे नाना प्रकार के वर्षों की दीप्ति और विविधता का भी प्रभाव नहीं है। आपको ऐसेऐसे चित्रों की उपलब्धि होगी जो अपने वर्णों के अनूठे सौन्दर्य और कौशल के कारण परम प्रसिद्ध है । रीतिकाव्य के रंगों में कुछ तो सूक्ष्मभावाभिव्यक्ति में सहायक है और कुछ अनुभूतियों की व्यंजना में अन्यतम कहे जाते हैं । जिस प्रकार किसी चित्र की पूर्णता उन रेखाओं से व्यक्त होती है, जो चित्र की वास्तविक संवेदना को मुखरित करने में परम सहायक होती है । ठीक यही स्थिति काव्य में वर्णों की होती है। वर्ण वस्तुतः अनुभूतियों और कल्पना के क्षीण कलेबर को पूर्ण स्फीतता प्रदान करते हैं। कभी-कभी इन रंगों के सहयोग से कवि भावनाओं की ऐसी प्रतिमा खड़ी कर देता है जो उनके अभाव में कथमपि सभव नहीं है। हम इस कथन की पुष्टि के लिए रीतिमुक्त कवि ठाकुर का एक छन्द प्रस्तुत कर रहे हैं -- अपने अपने निज गेहन में, चढ़े दोऊ सनेह की नाव पैरी । अंगनान में भीजत प्रेस भरे, समयो लखि मैं बलि जांव पैरी । कह ठाकुर दोउन की रुचि सो रंग द्वै उमड़े दोउ ठांव पैरी । सखी कारी घटा बरसै बरसाने पै गोरी घटा नंद गांव पैरी इस चित्र में राधा और कृष्ण के पारस्परिक प्रेम की तन्मयता की एक झांकी प्रस्तुत है । राधा कृष्ण की मनःस्थिति को प्राप्त है और कृष्ण राधा की मनःस्थिति को । कवि ने इस भाव की प्रकृत व्यंजना काली गोरी घटा द्वारा की है। यहाँ काली घटा से तात्पर्य कृष्ण से है और गोरी घटा राधा की ओर संकेत कर रही है । बरसाने एक एक. ठाकुर ठसक - संशून्य लाशून्य भगवानदीन, छंशून्य संशून्य इकतालीस, पृशून्य बारह
बारिश के समय में गार्डन में लगे हुए पेड़-पौधों में अक्सर फंगस लगने की समस्या देखी जाती है, जिसके कारण हमारे पौधों की ग्रोथ पर भी असर दिखता है। गार्डनिंग एक्सपर्ट की मानें, तो समय पर ऑर्गेनिक फंजीसाइड के उपयोग से आप अपने पौधों को फंगस लगने से बचा सकते हैं। यूं तो मार्केट में कई तरह के कार्बनिक और रासायनिक फंजीसाइड उपलब्ध हैं, लेकिन पौधों से फंगस हटाने के लिए रासायनिक फंजीसाइड का उपयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके बजाय, हमें जैविक फंजीसाइड का उपयोग करना चाहिए, ताकि हमारे पौधे फफूंदी रोग से भी बच सकें और उन्हें कोई नुकसान भी न हो। बाजार के फंजीसाइड की तरह ही घर में बने जैविक फंजीसाइड भी काफी कारगर होते हैं। अंगुल (ओडिशा) की रहनेवाली स्वेता पांडा कहती हैं कि बारिश का मौसम हरियाली के साथ पौधों के कुछ रोग भी लेकर आता है, पौधों में फफूंदी लगना इसमें से एक आम समस्या है, जो गार्डनिंग करने वालों को परेशान करती है। लेकिन जैविक फंजीसाइड का इस्तेमाल हम आराम से इनडोर या आउटडोर दोनों गार्डन में लगे हुए पौधों में कर सकते हैं। पेड़-पौधों पर फंगस के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत फंजीसाइड का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि पौधों पर फफूंदी रोग लगने से पूरा पौधा ख़राब न हो जाए। कई लोग गौ मूत्र का उपयोग कीटनाशक के रूप में करते हैं, लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि दूध भी प्राकृतिक फंजीसाइड के रूप में काम करता है। इससे पत्तियों का पीएच बदल जाता है और फंगस की दिक्कत कम हो जाती है। इसका स्प्रे बनाने के लिये 9 भाग पानी और 1 भाग दूध को मिलाकर मिश्रण बनाएं और इसे स्प्रे बोतल में भरकर गार्डन के पौधों या इंडोर प्लांट्स पर छिड़काव करें। इसका छिड़काव आप शाम के समय करें। इससे पौधों पर स्प्रे रात भर असर करेगा। यूं तो गार्डनिंग करने वाले अक्सर गार्डनिंग की कई समस्याओं को दूर करने के लिए नीम के तेल का उपयोग करते ही हैं। इस तेल में कई प्रकार के प्राकृतिक गुण होते हैं, इसलिए इसे ऑर्गेनिक फंजीसाइड और कीटनाशक के रूप में पौधों की कई बीमारियों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। नीम के तेल से ऑर्गेनिक फंजीसाइड बनाने के लिए आप एक बर्तन में लगभग 2 लीटर पानी लें और उसमें 2 चम्मच नीम का तेल डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। अब तैयार मिश्रण को एक स्प्रे बोतल में भर लें और पौधों पर फंगस वाली जगह इसका छिड़काव करें। आप हर हफ्ते नीम के तेल का छिड़काव कर सकते हैं, इससे फंगस और कीड़े लगने का डर नहीं रहता। किचन में आसानी से मिलने वाला अदरक, मिर्च और लहसुन से बना 3 जी मिक्सचर, फंजीसाइड और पेस्टीसाइड दोनों का काम करता है। प्राकृतिक खेती करने वाले किसान भी इससे कीटनाशक बनाकर फसल पर छिड़कते हैं। आप सब्जी के लिए मिक्सर जार में मसाला बनाने के बाद इसका पानी भी पौधों पर इस्तेमाल कर सकते हैं। तक़रीबन हर घर की रसोई में इन तीनों चीजों का उपयोग हर रोज़ होता ही है। इससे पौधों का स्प्रे बनाने के लिए आप 50 ग्राम पेस्ट में पानी मिलाकर स्प्रे बोतल में भरें और पौधों पर स्प्रे करें। इससे पौधों में लगी फफूंदी आसानी से कम हो जाएगी। कई लोग वजन घटाने के लिए एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह विनेगर यानी सेब का सिरका एक ऑर्गेनिक फंजीसाइड के तौर पर भी काम करता है। इससे पौधों पर लगे काले-सफेद धब्बे भी दूर हो जाते हैं। इसे बनाने के लिये एक बड़ा चम्मच सेब के सिरके को 3-4 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे बोतल में भरें। फंगस या पौधों पर धब्बे या कीड़ों की समस्या दिखने पर इसका स्प्रे करें। हर घर की रसोई में पाई जाने वाली दालचीनी हमारे गार्डन के लिए भी काफी उपयोगी होती है। दालचीनी में कई औषधीय गुण होते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पौधों में फंगस और इंफेक्शन जैसी समस्या खत्म करने में मदद करते हैं। पौधों के लिए यह एक नेचुरल फंजीसाइड के रूप में भी काम करता है। दालचीनी से फंजीसाइड बनाने के लिए आप दालचीनी का पाउडर बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके पाउडर को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पौधे के आस-पास मिट्टी में छिड़क दें। इससे मिट्टी का पीएच लेवल भी कंट्रोल रहेगा और पौधे भी स्वस्थ रहेंगे। यानी मिट्टी से होने वाले फंगस का खतरा भी नहीं होगा। तो अब पौधों पर फंगस लगने से परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, आप इन नुस्खों का इस्तेमाल करके बारिश में भी पौधों को हरा भरा रख सकते हैं। हैप्पी गार्डनिंग! We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
बारिश के समय में गार्डन में लगे हुए पेड़-पौधों में अक्सर फंगस लगने की समस्या देखी जाती है, जिसके कारण हमारे पौधों की ग्रोथ पर भी असर दिखता है। गार्डनिंग एक्सपर्ट की मानें, तो समय पर ऑर्गेनिक फंजीसाइड के उपयोग से आप अपने पौधों को फंगस लगने से बचा सकते हैं। यूं तो मार्केट में कई तरह के कार्बनिक और रासायनिक फंजीसाइड उपलब्ध हैं, लेकिन पौधों से फंगस हटाने के लिए रासायनिक फंजीसाइड का उपयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके बजाय, हमें जैविक फंजीसाइड का उपयोग करना चाहिए, ताकि हमारे पौधे फफूंदी रोग से भी बच सकें और उन्हें कोई नुकसान भी न हो। बाजार के फंजीसाइड की तरह ही घर में बने जैविक फंजीसाइड भी काफी कारगर होते हैं। अंगुल की रहनेवाली स्वेता पांडा कहती हैं कि बारिश का मौसम हरियाली के साथ पौधों के कुछ रोग भी लेकर आता है, पौधों में फफूंदी लगना इसमें से एक आम समस्या है, जो गार्डनिंग करने वालों को परेशान करती है। लेकिन जैविक फंजीसाइड का इस्तेमाल हम आराम से इनडोर या आउटडोर दोनों गार्डन में लगे हुए पौधों में कर सकते हैं। पेड़-पौधों पर फंगस के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत फंजीसाइड का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि पौधों पर फफूंदी रोग लगने से पूरा पौधा ख़राब न हो जाए। कई लोग गौ मूत्र का उपयोग कीटनाशक के रूप में करते हैं, लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि दूध भी प्राकृतिक फंजीसाइड के रूप में काम करता है। इससे पत्तियों का पीएच बदल जाता है और फंगस की दिक्कत कम हो जाती है। इसका स्प्रे बनाने के लिये नौ भाग पानी और एक भाग दूध को मिलाकर मिश्रण बनाएं और इसे स्प्रे बोतल में भरकर गार्डन के पौधों या इंडोर प्लांट्स पर छिड़काव करें। इसका छिड़काव आप शाम के समय करें। इससे पौधों पर स्प्रे रात भर असर करेगा। यूं तो गार्डनिंग करने वाले अक्सर गार्डनिंग की कई समस्याओं को दूर करने के लिए नीम के तेल का उपयोग करते ही हैं। इस तेल में कई प्रकार के प्राकृतिक गुण होते हैं, इसलिए इसे ऑर्गेनिक फंजीसाइड और कीटनाशक के रूप में पौधों की कई बीमारियों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। नीम के तेल से ऑर्गेनिक फंजीसाइड बनाने के लिए आप एक बर्तन में लगभग दो लीटरटर पानी लें और उसमें दो चम्मच नीम का तेल डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। अब तैयार मिश्रण को एक स्प्रे बोतल में भर लें और पौधों पर फंगस वाली जगह इसका छिड़काव करें। आप हर हफ्ते नीम के तेल का छिड़काव कर सकते हैं, इससे फंगस और कीड़े लगने का डर नहीं रहता। किचन में आसानी से मिलने वाला अदरक, मिर्च और लहसुन से बना तीन जी मिक्सचर, फंजीसाइड और पेस्टीसाइड दोनों का काम करता है। प्राकृतिक खेती करने वाले किसान भी इससे कीटनाशक बनाकर फसल पर छिड़कते हैं। आप सब्जी के लिए मिक्सर जार में मसाला बनाने के बाद इसका पानी भी पौधों पर इस्तेमाल कर सकते हैं। तक़रीबन हर घर की रसोई में इन तीनों चीजों का उपयोग हर रोज़ होता ही है। इससे पौधों का स्प्रे बनाने के लिए आप पचास ग्राम पेस्ट में पानी मिलाकर स्प्रे बोतल में भरें और पौधों पर स्प्रे करें। इससे पौधों में लगी फफूंदी आसानी से कम हो जाएगी। कई लोग वजन घटाने के लिए एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह विनेगर यानी सेब का सिरका एक ऑर्गेनिक फंजीसाइड के तौर पर भी काम करता है। इससे पौधों पर लगे काले-सफेद धब्बे भी दूर हो जाते हैं। इसे बनाने के लिये एक बड़ा चम्मच सेब के सिरके को तीन-चार लीटरटर पानी में मिलाकर स्प्रे बोतल में भरें। फंगस या पौधों पर धब्बे या कीड़ों की समस्या दिखने पर इसका स्प्रे करें। हर घर की रसोई में पाई जाने वाली दालचीनी हमारे गार्डन के लिए भी काफी उपयोगी होती है। दालचीनी में कई औषधीय गुण होते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पौधों में फंगस और इंफेक्शन जैसी समस्या खत्म करने में मदद करते हैं। पौधों के लिए यह एक नेचुरल फंजीसाइड के रूप में भी काम करता है। दालचीनी से फंजीसाइड बनाने के लिए आप दालचीनी का पाउडर बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके पाउडर को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पौधे के आस-पास मिट्टी में छिड़क दें। इससे मिट्टी का पीएच लेवल भी कंट्रोल रहेगा और पौधे भी स्वस्थ रहेंगे। यानी मिट्टी से होने वाले फंगस का खतरा भी नहीं होगा। तो अब पौधों पर फंगस लगने से परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, आप इन नुस्खों का इस्तेमाल करके बारिश में भी पौधों को हरा भरा रख सकते हैं। हैप्पी गार्डनिंग! We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
टीम इंडिया के फैंस पिछले काफी समय से जिस एक खिलाड़ी की फिटनेस की अपडेट का लगातार इंतजार कर रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह हैं। अब बुमराह ने खुद ही अपनी वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट शेयर कर अब तक का सबसे बड़ा अपडेट दे दिया है। जसप्रीत बुमराह पिछले साल सितंबर के महीने से लगातार मैदान से बैक स्ट्रेस की समस्या के कारण भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। जसप्रीत बुमराह ने अपनी चोट को ठीक करने के लिए सर्जरी कराने का फैसला किया था। आपको बता दें कि इस वक़्त वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में रिहैब की प्रक्रिया से गुज़र रहे हैं। पिछले काफी समय से बुमराह की वापसी को लेकर लगातार यह संभावना जताई जा रही है कि एशिया कप से वह दोबारा भारतीय टीम का हिस्सा बन सकते हैं। अब जसप्रीत बुमराह ने ख़ुद ही अपनी वापसी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने इंस्टाग्राम पर जो वीडियो शेयर किया है, उसमें उनकी कई तस्वीरें हैं, जिनमें वह गेंदबाजी करते हुए नज़र आ रहे हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा है कि वह घर वापस आ रहे हैं। इसके ज़रिए यह साफ तौर पर समझा जा सकता है कि आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया की तरफ से खेलते हुए देखे जा सकते हैं। आयरलैंड के खिलाफ अगर बुमराह मैदान पर वापसी करते हैं तो इसके बाद एशिया कप के दौरान टीम मैनेजमेंट को उनकी फिटनेस को आंकने का अच्छा मौक़ा मिल सकता है। ऐसे में अगर वह एशिया कप में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वनडे विश्व कप से पहले टीम इंडिया को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। इससे टीम के तेज गेंदबाज़ी विभाग को ज़बरदस्त मजबूती मिलेगी, जिसमें मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे स्टार खिलाड़ी पहले से ही शामिल हैं।
टीम इंडिया के फैंस पिछले काफी समय से जिस एक खिलाड़ी की फिटनेस की अपडेट का लगातार इंतजार कर रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह हैं। अब बुमराह ने खुद ही अपनी वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट शेयर कर अब तक का सबसे बड़ा अपडेट दे दिया है। जसप्रीत बुमराह पिछले साल सितंबर के महीने से लगातार मैदान से बैक स्ट्रेस की समस्या के कारण भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। जसप्रीत बुमराह ने अपनी चोट को ठीक करने के लिए सर्जरी कराने का फैसला किया था। आपको बता दें कि इस वक़्त वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी में रिहैब की प्रक्रिया से गुज़र रहे हैं। पिछले काफी समय से बुमराह की वापसी को लेकर लगातार यह संभावना जताई जा रही है कि एशिया कप से वह दोबारा भारतीय टीम का हिस्सा बन सकते हैं। अब जसप्रीत बुमराह ने ख़ुद ही अपनी वापसी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने इंस्टाग्राम पर जो वीडियो शेयर किया है, उसमें उनकी कई तस्वीरें हैं, जिनमें वह गेंदबाजी करते हुए नज़र आ रहे हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा है कि वह घर वापस आ रहे हैं। इसके ज़रिए यह साफ तौर पर समझा जा सकता है कि आयरलैंड के खिलाफ टीबीस सीरीज़ में जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया की तरफ से खेलते हुए देखे जा सकते हैं। आयरलैंड के खिलाफ अगर बुमराह मैदान पर वापसी करते हैं तो इसके बाद एशिया कप के दौरान टीम मैनेजमेंट को उनकी फिटनेस को आंकने का अच्छा मौक़ा मिल सकता है। ऐसे में अगर वह एशिया कप में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वनडे विश्व कप से पहले टीम इंडिया को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। इससे टीम के तेज गेंदबाज़ी विभाग को ज़बरदस्त मजबूती मिलेगी, जिसमें मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे स्टार खिलाड़ी पहले से ही शामिल हैं।
प्रत्येक साल 8 मार्च को पूरी दुनिया में 'अंतर्राष्ट्रीय स्त्री दिवस' सेलिब्रेट किया जाता है। हर वर्ष यह दिवस एक खास थीम को ध्यान में रखकर मनाया जाता है। साल 2023 की थीम 'एम्ब्रेसइक्विटी' (Embrace Equity) रखी गई है। 8 मार्च 1975 को युनाइटेड नेशंस द्वारा 'इंटरनेशनल वुमेंस डे' को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी। घर-परिवार, समाज आदि में स्त्रियों की भागीदारी, उपस्थिति, सहयोग और उनकी ताकत को सराहने, उत्सव मनाने का दिन है स्त्री दिवस। स्त्री दिवस पर आप अपनी जीवन में उपस्थित हर एक स्पेशल लेडी को खास गिफ्ट देकर ये जता सकते हैं कि आपकी लाइफ में उनका कितना महत्व है। डालें कुछ बहुत बढ़िया गिफ्ट्स आइटम पर एक नजर। किताबें- कई महिलाएं पुस्तकों की बहुत शौकीन होती हैं। उन्हें अच्छी-अच्छी बुक्स पढ़ने का शौक होता है। यदि आपके घर में आपकी मां, बहन, मौसी, चाची या फिर दोस्त को किताबें पढ़ने का शौक है, उन्हें सहेजना, इकट्ठा करने की हॉबी है तो फिर बुक्स से बेहतर उनके लिए कोई दूसरा सामान नहीं हो सकता है। यह एक ऐसा तोहफा है, जो सालों आपके साथ रहता है। आप चाहें तो फिक्शन-नॉन फिक्शन, कॉमेडी, कविता, उपन्यास, कला और साहित्य जगत से संबंधित कोई भी पुस्तक गिफ्ट कर सकते हैं। आप उनकी फेवरेट राइटर की पुस्तक देंगे तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट जरूर आ जाएगी। इसे भी पढ़ेंः हरे-भरे पौधे करें गिफ्ट- आजकल गिफ्ट्स में एक-दूसरे को तरह-तरह के प्लांट्स देने का ट्रेंड भी काफी बढ़ गया है। यह एक बेहतरीन गिफ्ट आइडिया इसलिए भी है, क्योंकि इसे देखते ही सामने वाले का मूड फ्रेश हो जाएगा। घर में हरियाली होने से पॉजिटिव सोच और एनर्जी भी मिलती है। घर का वातावरण फ्रेश बना रहता है। यदि आपके घर में किसी भी लेडी को प्लांट लगाने और इंडोर पौधे रखने का शौक है तो ये गिफ्ट उन्हें जरूर दें। साथ ही आप फूलों का गुलदस्ता भी दे सकते हैं। गिफ्ट हैंपर दें- आजकल हैंपर देने का भी ट्रेंड खूब है। लोग अपनों को उनके फेवरेट आइटम्स को एक साथ पैक करा कर हैंपर तैयार कराते हैं और स्पेशल ओकेजन पर बतौर तोहफा प्रजेंट करते हैं। आप भी हैंपर में मेकअप आइटम, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट्स आदि चीजें मिक्स-मैच करके डलवाएं और अपनी फेवरेट लेडी को वुमेंस डे पर गिफ्ट करते हुए इस दिन की ढेरों शुभकामना दें। घड़ी, मोबाइल करें गिफ्ट- यदि आपकी बहन, मां या फिर दोस्त को घड़ी या मोबाइल की आवश्यकता है तो उन्हें ये गिफ्ट देकर उन्हें सरप्राइज कर सकते हैं। हो सकता है आपकी बहन या मम्मा का मोबाइल ठीक से चल ना रहो हो और उन्हें नया खरीदना हो। यह नेक काम आप भी कर सकते हैं। आए दिन तरह-तरह के स्मार्ट फोन, स्मार्ट वॉच लॉन्च होते हैं। अपने बजट के मुताबिक ये गिफ्ट खरीदने का सोच सकते हैं। इयरबड्स भी देना है बेस्ट आइडिया- आजकल इयरबड्स का उपयोग भी लोग खूब करते हैं। यह लाभकारी भी है, क्योंकि ड्राइव करते समय कान में इसे लगाकर आप किसी से भी टेलीफोन पर आराम से बात कर सकते हैं। गाने सुन सकते हैं। गिफ्ट में टेक की चीजें पाकर कोई भी खुश हो जाएगा। साथ ही इन्हें सेलेक्ट करने में भी पसंद-नापसंद वाली परेशानी नहीं आती है। हां, बजट जितना हो, उसी के अंदर आप टेक आइटम खरीद कर गिफ्ट करें। हैंडबैग दें- स्त्रियों के पास जितनी वेरायटी के हैंडबैग हों, उतना ही उनके लिए कम होता है। तो क्यों ना आप उनके कलेक्शन में एक और स्टाइलिश डिजाइन का हैंडबैग शामिल कर दें। शॉपिंग मॉल में ढेरों ब्रांडेड बैग्स उचित दामों में मौजूद होते हैं। आप चाहें तो औनलाइन भी शॉपिंग कर सकते हैं।
प्रत्येक साल आठ मार्च को पूरी दुनिया में 'अंतर्राष्ट्रीय स्त्री दिवस' सेलिब्रेट किया जाता है। हर वर्ष यह दिवस एक खास थीम को ध्यान में रखकर मनाया जाता है। साल दो हज़ार तेईस की थीम 'एम्ब्रेसइक्विटी' रखी गई है। आठ मार्च एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को युनाइटेड नेशंस द्वारा 'इंटरनेशनल वुमेंस डे' को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी। घर-परिवार, समाज आदि में स्त्रियों की भागीदारी, उपस्थिति, सहयोग और उनकी ताकत को सराहने, उत्सव मनाने का दिन है स्त्री दिवस। स्त्री दिवस पर आप अपनी जीवन में उपस्थित हर एक स्पेशल लेडी को खास गिफ्ट देकर ये जता सकते हैं कि आपकी लाइफ में उनका कितना महत्व है। डालें कुछ बहुत बढ़िया गिफ्ट्स आइटम पर एक नजर। किताबें- कई महिलाएं पुस्तकों की बहुत शौकीन होती हैं। उन्हें अच्छी-अच्छी बुक्स पढ़ने का शौक होता है। यदि आपके घर में आपकी मां, बहन, मौसी, चाची या फिर दोस्त को किताबें पढ़ने का शौक है, उन्हें सहेजना, इकट्ठा करने की हॉबी है तो फिर बुक्स से बेहतर उनके लिए कोई दूसरा सामान नहीं हो सकता है। यह एक ऐसा तोहफा है, जो सालों आपके साथ रहता है। आप चाहें तो फिक्शन-नॉन फिक्शन, कॉमेडी, कविता, उपन्यास, कला और साहित्य जगत से संबंधित कोई भी पुस्तक गिफ्ट कर सकते हैं। आप उनकी फेवरेट राइटर की पुस्तक देंगे तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट जरूर आ जाएगी। इसे भी पढ़ेंः हरे-भरे पौधे करें गिफ्ट- आजकल गिफ्ट्स में एक-दूसरे को तरह-तरह के प्लांट्स देने का ट्रेंड भी काफी बढ़ गया है। यह एक बेहतरीन गिफ्ट आइडिया इसलिए भी है, क्योंकि इसे देखते ही सामने वाले का मूड फ्रेश हो जाएगा। घर में हरियाली होने से पॉजिटिव सोच और एनर्जी भी मिलती है। घर का वातावरण फ्रेश बना रहता है। यदि आपके घर में किसी भी लेडी को प्लांट लगाने और इंडोर पौधे रखने का शौक है तो ये गिफ्ट उन्हें जरूर दें। साथ ही आप फूलों का गुलदस्ता भी दे सकते हैं। गिफ्ट हैंपर दें- आजकल हैंपर देने का भी ट्रेंड खूब है। लोग अपनों को उनके फेवरेट आइटम्स को एक साथ पैक करा कर हैंपर तैयार कराते हैं और स्पेशल ओकेजन पर बतौर तोहफा प्रजेंट करते हैं। आप भी हैंपर में मेकअप आइटम, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट्स आदि चीजें मिक्स-मैच करके डलवाएं और अपनी फेवरेट लेडी को वुमेंस डे पर गिफ्ट करते हुए इस दिन की ढेरों शुभकामना दें। घड़ी, मोबाइल करें गिफ्ट- यदि आपकी बहन, मां या फिर दोस्त को घड़ी या मोबाइल की आवश्यकता है तो उन्हें ये गिफ्ट देकर उन्हें सरप्राइज कर सकते हैं। हो सकता है आपकी बहन या मम्मा का मोबाइल ठीक से चल ना रहो हो और उन्हें नया खरीदना हो। यह नेक काम आप भी कर सकते हैं। आए दिन तरह-तरह के स्मार्ट फोन, स्मार्ट वॉच लॉन्च होते हैं। अपने बजट के मुताबिक ये गिफ्ट खरीदने का सोच सकते हैं। इयरबड्स भी देना है बेस्ट आइडिया- आजकल इयरबड्स का उपयोग भी लोग खूब करते हैं। यह लाभकारी भी है, क्योंकि ड्राइव करते समय कान में इसे लगाकर आप किसी से भी टेलीफोन पर आराम से बात कर सकते हैं। गाने सुन सकते हैं। गिफ्ट में टेक की चीजें पाकर कोई भी खुश हो जाएगा। साथ ही इन्हें सेलेक्ट करने में भी पसंद-नापसंद वाली परेशानी नहीं आती है। हां, बजट जितना हो, उसी के अंदर आप टेक आइटम खरीद कर गिफ्ट करें। हैंडबैग दें- स्त्रियों के पास जितनी वेरायटी के हैंडबैग हों, उतना ही उनके लिए कम होता है। तो क्यों ना आप उनके कलेक्शन में एक और स्टाइलिश डिजाइन का हैंडबैग शामिल कर दें। शॉपिंग मॉल में ढेरों ब्रांडेड बैग्स उचित दामों में मौजूद होते हैं। आप चाहें तो औनलाइन भी शॉपिंग कर सकते हैं।
पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ का बेटा इस समय चर्चा में है। चर्चा किसी और काम की वजह से नहीं बल्कि क्रिकेट में धमाल मचाने की वजह से है। RCB की टीम में होगा बड़ा बदलाव, इन दो दिग्गजों की हुई IPL फ्रेंचाइजी से छुट्टी! एशियन गेम्स में कैसा रहा है क्रिकेट का इतिहास, जानें इन खेलों में क्या रही टीम इंडिया की कहानी? Rishabh Pant की गैरमौजूदगी में DC ने लांच की नई जर्सी, अब नए चैलेंज और नए कप्तान से जीतेंगे ट्रॉफी? पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ का बेटा इस समय चर्चा में है। चर्चा किसी और काम की वजह से नहीं बल्कि क्रिकेट में धमाल मचाने की वजह से है। कोहली का पिछला इंग्लैंड दौरा (2014) बेहद ही निराशाजनक रहा था जहां उन्होंने पांच टेस्ट मैचों में 13. 50 की औसत से 1, 8, 25, 0, 39, 28, 0,7, 6 और 20 रन की पारी खेली थी। स्मृति मंधाना ने महिला टी20 लीग में इतिहास रचा। भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह फिलहाल चोटिल हैं। एशिया कप में पहला मैच बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच खेला जान है। दक्षिण अफ्रीका को टेस्ट सीरीज में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन टीम ने वनडे में शानदार वापसी की। इमरान खान ने पाकिस्तान को साल 1992 में पहली बार विश्व कप जिताया था। 4 साल पहले विराट कोहली इंग्लैंड दौरे पर बुरी तरह फ्लॉप रहे थे और संघर्ष करते नजर आए थे। भारतीय टीम को अगर टेस्ट सीरीज में जीत हासिल करनी है तो तेज गेंदबाजों को जलवा दिखाना होगा। इंग्लैंड के कई खिलाड़ी आईपीएल में भारतीय खिलाड़ियों की कप्तानी में खेल चुके हैं। बांग्लादेश की तरफ से तमीम इकबाल ने 3 में से 2 वनडे मैचों में शतक लगाए। पहले टेस्ट में जगह बनाने को लेकर आर अश्विन और कुलदीप यादव में कड़ी टक्कर मानी जा रही है। विराट कोहली ने वनडे सीरीज में 2 अर्धशतक लगाए थे और इसके बाद उन्होंने एसेक्स के खिलाफ प्रैक्टिस मैच में भी अर्धशतकीय पारी खेली थी। श्रीलंका का इरादा टेस्ट की तरह वनडे सीरीज भी जीतने का होगा। भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, 1 अगस्त से खेला जाएगा पहला मैच। इंडिया टीवी से खास बातचीत में भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि इस बार विराट कोहली के बल्ले से शतक देखने को मिल सकता है। भारतीय टीम को विश्व कप में बने रहने के लिए अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में हर हाल में जीत हासिल करनी होगी। आदिल राशिद ने काउंटी क्रिकेट खेलना छोड़ दिया था, इसके बावजूद उन्हें टेस्ट टीम में चुना गया है। भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टेस्ट सीरीज 1 अगस्त से खेली जाएगी। भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच 1 अगस्त से खेलना है।
पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ का बेटा इस समय चर्चा में है। चर्चा किसी और काम की वजह से नहीं बल्कि क्रिकेट में धमाल मचाने की वजह से है। RCB की टीम में होगा बड़ा बदलाव, इन दो दिग्गजों की हुई IPL फ्रेंचाइजी से छुट्टी! एशियन गेम्स में कैसा रहा है क्रिकेट का इतिहास, जानें इन खेलों में क्या रही टीम इंडिया की कहानी? Rishabh Pant की गैरमौजूदगी में DC ने लांच की नई जर्सी, अब नए चैलेंज और नए कप्तान से जीतेंगे ट्रॉफी? पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ का बेटा इस समय चर्चा में है। चर्चा किसी और काम की वजह से नहीं बल्कि क्रिकेट में धमाल मचाने की वजह से है। कोहली का पिछला इंग्लैंड दौरा बेहद ही निराशाजनक रहा था जहां उन्होंने पांच टेस्ट मैचों में तेरह. पचास की औसत से एक, आठ, पच्चीस, शून्य, उनतालीस, अट्ठाईस, शून्य,सात, छः और बीस रन की पारी खेली थी। स्मृति मंधाना ने महिला टीबीस लीटरग में इतिहास रचा। भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह फिलहाल चोटिल हैं। एशिया कप में पहला मैच बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच खेला जान है। दक्षिण अफ्रीका को टेस्ट सीरीज में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन टीम ने वनडे में शानदार वापसी की। इमरान खान ने पाकिस्तान को साल एक हज़ार नौ सौ बानवे में पहली बार विश्व कप जिताया था। चार साल पहले विराट कोहली इंग्लैंड दौरे पर बुरी तरह फ्लॉप रहे थे और संघर्ष करते नजर आए थे। भारतीय टीम को अगर टेस्ट सीरीज में जीत हासिल करनी है तो तेज गेंदबाजों को जलवा दिखाना होगा। इंग्लैंड के कई खिलाड़ी आईपीएल में भारतीय खिलाड़ियों की कप्तानी में खेल चुके हैं। बांग्लादेश की तरफ से तमीम इकबाल ने तीन में से दो वनडे मैचों में शतक लगाए। पहले टेस्ट में जगह बनाने को लेकर आर अश्विन और कुलदीप यादव में कड़ी टक्कर मानी जा रही है। विराट कोहली ने वनडे सीरीज में दो अर्धशतक लगाए थे और इसके बाद उन्होंने एसेक्स के खिलाफ प्रैक्टिस मैच में भी अर्धशतकीय पारी खेली थी। श्रीलंका का इरादा टेस्ट की तरह वनडे सीरीज भी जीतने का होगा। भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ पाँच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, एक अगस्त से खेला जाएगा पहला मैच। इंडिया टीवी से खास बातचीत में भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि इस बार विराट कोहली के बल्ले से शतक देखने को मिल सकता है। भारतीय टीम को विश्व कप में बने रहने के लिए अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में हर हाल में जीत हासिल करनी होगी। आदिल राशिद ने काउंटी क्रिकेट खेलना छोड़ दिया था, इसके बावजूद उन्हें टेस्ट टीम में चुना गया है। भारत और इंग्लैंड के बीच पाँच मैचों की टेस्ट सीरीज एक अगस्त से खेली जाएगी। भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच एक अगस्त से खेलना है।
बिहार में प्रचंड गर्मी के बाद अब मानसून की बारिश ने लोगों को राहत दी है. जमुई के लोगों को बारिश का बेसब्री से इंतजार था. बुधवार को मानसून की पहली बारिश हुई. देर तक हुई जोरदार बारिश ने लोगों को गर्मी से तो राहत जरूर दी लेकिन ठनके की चपेट में आकर दो लोगों की मौत भी हो गयी. जिससे दोनों घरों में मातम पसरा हुआ है. कई दिनों के इंतजार के बाद अंततः मानसून ने जमुई में दस्तक दे दी. बुधवार को मानसून की पहली जोरदार बारिश हुई. देर तक हुए तेज बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली. हालांकि तेज बारिश के बीच लगातार बादल गरजने की आवाज से लोग सहमे रहे. लोगों को लग रहा था कि आसपास ही कहीं ठनका गिरा हो. देर शाम शुरू हुई बारिश देर तक रफ्तार पकड़े रही. सड़कों पर बरसात के पानी बहने लगे. सूखे खेतों में पानी दिखने लगा. तापमान में गिरावट से लोगों ने राहत की सांस ली. वहीं बारिश से किसानों के चेहरे पर भी चमक आयी. बुधवार को आम दिनों की तरह ही भीषण गर्मी थी, लेकिन शाम होते ही अचानक बादल घिर आये और देखते ही देखते गरजते बादल के बीच तेज बारिश होने लगी. जिले के अलग-अलग जगहों पर बुधवार की शाम बारिश के साथ हुए वज्रपात से दो लोगों की मौत हो गयी है. मृतकों में गिद्धौर थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी अशोक पांडेय उर्फ घोलट पांडेय व सदर थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव निवासी भुट्टू मांझी के पुत्र भुखन मांझी उर्फ सुमन शामिल हैं. बताया जाता है कि अशोक पांडेय मवेशी लाने बहियार गये थे. इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई. बारिश के साथ हुए वज्रपात की चपेट में आने से वो झुलस गये. स्थानीय लोगों और परिजनों की सहायता से इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सक के द्वारा जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. दूसरी घटना सदर थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव निवासी भुखन मांझी उर्फ सुमन अपने घर के बगल स्थित खेत में काम कर रहा था. इसी दौरान वज्रपात के चपेट में आकर झुलस गया. परिजन द्वारा इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. शहर में बुधवार की दोपहर बाद तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिश से मौसम सुहाना हो गया. साथ ही शहरवासियों को बीते एक पखवारे से चल रहे हीट वेव से राहत मिली है. हालांकि दिनभर पूरबा हवा व आसमान में बादल छाये रहने से वातावरण में नमी बनी थी. बताते चलें कि बीते मंगलवार की शाम से ही आसमान में बादल छाने के साथ बूंदा-बांदी हुई थी. 15 जून से ही मानसूनी बारिश होने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जतायी गयी थी. पर, मानसून आने में देरी से लोगों को भीषण गर्मी ने परेशान कर रखा है. इधर गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले 24 जून तक जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में बच्चों की शैक्षणिक गतिविधि बंद कर दी है.
बिहार में प्रचंड गर्मी के बाद अब मानसून की बारिश ने लोगों को राहत दी है. जमुई के लोगों को बारिश का बेसब्री से इंतजार था. बुधवार को मानसून की पहली बारिश हुई. देर तक हुई जोरदार बारिश ने लोगों को गर्मी से तो राहत जरूर दी लेकिन ठनके की चपेट में आकर दो लोगों की मौत भी हो गयी. जिससे दोनों घरों में मातम पसरा हुआ है. कई दिनों के इंतजार के बाद अंततः मानसून ने जमुई में दस्तक दे दी. बुधवार को मानसून की पहली जोरदार बारिश हुई. देर तक हुए तेज बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली. हालांकि तेज बारिश के बीच लगातार बादल गरजने की आवाज से लोग सहमे रहे. लोगों को लग रहा था कि आसपास ही कहीं ठनका गिरा हो. देर शाम शुरू हुई बारिश देर तक रफ्तार पकड़े रही. सड़कों पर बरसात के पानी बहने लगे. सूखे खेतों में पानी दिखने लगा. तापमान में गिरावट से लोगों ने राहत की सांस ली. वहीं बारिश से किसानों के चेहरे पर भी चमक आयी. बुधवार को आम दिनों की तरह ही भीषण गर्मी थी, लेकिन शाम होते ही अचानक बादल घिर आये और देखते ही देखते गरजते बादल के बीच तेज बारिश होने लगी. जिले के अलग-अलग जगहों पर बुधवार की शाम बारिश के साथ हुए वज्रपात से दो लोगों की मौत हो गयी है. मृतकों में गिद्धौर थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी अशोक पांडेय उर्फ घोलट पांडेय व सदर थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव निवासी भुट्टू मांझी के पुत्र भुखन मांझी उर्फ सुमन शामिल हैं. बताया जाता है कि अशोक पांडेय मवेशी लाने बहियार गये थे. इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई. बारिश के साथ हुए वज्रपात की चपेट में आने से वो झुलस गये. स्थानीय लोगों और परिजनों की सहायता से इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सक के द्वारा जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. दूसरी घटना सदर थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव निवासी भुखन मांझी उर्फ सुमन अपने घर के बगल स्थित खेत में काम कर रहा था. इसी दौरान वज्रपात के चपेट में आकर झुलस गया. परिजन द्वारा इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. शहर में बुधवार की दोपहर बाद तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिश से मौसम सुहाना हो गया. साथ ही शहरवासियों को बीते एक पखवारे से चल रहे हीट वेव से राहत मिली है. हालांकि दिनभर पूरबा हवा व आसमान में बादल छाये रहने से वातावरण में नमी बनी थी. बताते चलें कि बीते मंगलवार की शाम से ही आसमान में बादल छाने के साथ बूंदा-बांदी हुई थी. पंद्रह जून से ही मानसूनी बारिश होने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जतायी गयी थी. पर, मानसून आने में देरी से लोगों को भीषण गर्मी ने परेशान कर रखा है. इधर गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले चौबीस जून तक जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में बच्चों की शैक्षणिक गतिविधि बंद कर दी है.
महाराष्ट्र के पुणे में एक दिल दहलाने वाला वीडियो सामने आया है। यहां कोयता (हंसिया-sickle) गिरोह के सदस्यों ने गुरुवार(28 दिसंबर) की रात लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। बदमाशों ने लोगों को दौड़ाया। रास्ते में जो दिखा, उसे घायल करते गए। 1. बदमाशों ने पुणे में भारती विद्यापीठ पुलिस थाना क्षेत्र के तहत सिंहगढ़ लॉ कॉलेज परिसर क्षेत्र के सामने लोगों को निशाना बनाया। 2. वीडियो में बदमाशों को दुकानों में घुसते और भागने की कोशिश कर रहे लोगों पर हमला करते देखा जा सकता है। संदिग्धों ने एक नागरिक को गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। 3. कोयता गिरोह की हरकतों ने बाद में पुलिस एक्शन में आई और दो बदमाशों का पीछा करके दबोच लिया। 4. पुणे शहर में बदमाशों द्वारा दहशत फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। कथित तौर पर कुख्यात 'कोयटा गैंग' के दो लोगों ने पुणे में हाथ में चाकू लेकर लोगों को आतंकित किया। 5. बदमाश इलाके की दुकानों में भी गए और अपने हथियारों से कई लोगों पर वार किए। इससे इलाके में अफरातफरी मच गई। 6. बदमाशों ने लोगों को चाकू दिखाकर डराया-धमकाया। गली में जो भी नजर आया, उसे डराकर आगे बढ़ते गए। इससे सड़क पर चलने वाले राहगीर सहम गए। 7. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बदमाशों को दबोच लिया। बदमाशों ने पुलिस पर भी हमला करने की कोशिश की, लेकिन उनकी जमकर पिटाई कर दी गई। 8. पुलिस ने पीछा कर उनमें से एक बदमाश को पकड़ लिया, जब वह हाथ में चाकू लेकर भाग रहा था। 9. पुलिस ने चाकूबाजी में घायल युवक को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सिंहगढ़ कॉलेज क्षेत्र के छात्रों और निवासियों ने बीती रात की बेहद भयानक स्थिति को याद किया करते हुए कहा कि भारती विद्यापीठ पुलिस ऐसी घटनाओं की अनदेखी कर रही है। 10. विपक्ष के नेता अजीत पवार ने गुरुवार को 'कोयटा गैंग' के कारण हुए आतंक का जिक्र किया, खासकर पुणे, बारामती, आलंदी और आसपास के उपनगरों में। पवार ने कहा, "कोयता गैंग" के नाम से कुछ गैंगस्टर आतंक के बल पर इस क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रहे हैं। " 11. पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा-"कोयटा गिरोह ने कॉलेज परिसर, दुकानों और होटलों में भी घुसकर आतंक मचाया है। वे गाड़ियों के शीशे तोड़ते हैं, सड़कों पर लोगों पर अचानक हमले करते हैं, औद्योगिक ठेकेदारों, सब्जी विक्रेताओं, नगर निगम परिसर में दुकानों से जबरन वसूली करते हैं। " पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा। 12. अजीत पवार ने कहा-"मैं मांग करता हूं कि एक विशेष पुलिस दल का गठन किया जाए और राज्य में फल-फूल रहे इस कोयटा गिरोह से तुरंत निपटा जाए।
महाराष्ट्र के पुणे में एक दिल दहलाने वाला वीडियो सामने आया है। यहां कोयता गिरोह के सदस्यों ने गुरुवार की रात लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। बदमाशों ने लोगों को दौड़ाया। रास्ते में जो दिखा, उसे घायल करते गए। एक. बदमाशों ने पुणे में भारती विद्यापीठ पुलिस थाना क्षेत्र के तहत सिंहगढ़ लॉ कॉलेज परिसर क्षेत्र के सामने लोगों को निशाना बनाया। दो. वीडियो में बदमाशों को दुकानों में घुसते और भागने की कोशिश कर रहे लोगों पर हमला करते देखा जा सकता है। संदिग्धों ने एक नागरिक को गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। तीन. कोयता गिरोह की हरकतों ने बाद में पुलिस एक्शन में आई और दो बदमाशों का पीछा करके दबोच लिया। चार. पुणे शहर में बदमाशों द्वारा दहशत फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। कथित तौर पर कुख्यात 'कोयटा गैंग' के दो लोगों ने पुणे में हाथ में चाकू लेकर लोगों को आतंकित किया। पाँच. बदमाश इलाके की दुकानों में भी गए और अपने हथियारों से कई लोगों पर वार किए। इससे इलाके में अफरातफरी मच गई। छः. बदमाशों ने लोगों को चाकू दिखाकर डराया-धमकाया। गली में जो भी नजर आया, उसे डराकर आगे बढ़ते गए। इससे सड़क पर चलने वाले राहगीर सहम गए। सात. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बदमाशों को दबोच लिया। बदमाशों ने पुलिस पर भी हमला करने की कोशिश की, लेकिन उनकी जमकर पिटाई कर दी गई। आठ. पुलिस ने पीछा कर उनमें से एक बदमाश को पकड़ लिया, जब वह हाथ में चाकू लेकर भाग रहा था। नौ. पुलिस ने चाकूबाजी में घायल युवक को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सिंहगढ़ कॉलेज क्षेत्र के छात्रों और निवासियों ने बीती रात की बेहद भयानक स्थिति को याद किया करते हुए कहा कि भारती विद्यापीठ पुलिस ऐसी घटनाओं की अनदेखी कर रही है। दस. विपक्ष के नेता अजीत पवार ने गुरुवार को 'कोयटा गैंग' के कारण हुए आतंक का जिक्र किया, खासकर पुणे, बारामती, आलंदी और आसपास के उपनगरों में। पवार ने कहा, "कोयता गैंग" के नाम से कुछ गैंगस्टर आतंक के बल पर इस क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रहे हैं। " ग्यारह. पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा-"कोयटा गिरोह ने कॉलेज परिसर, दुकानों और होटलों में भी घुसकर आतंक मचाया है। वे गाड़ियों के शीशे तोड़ते हैं, सड़कों पर लोगों पर अचानक हमले करते हैं, औद्योगिक ठेकेदारों, सब्जी विक्रेताओं, नगर निगम परिसर में दुकानों से जबरन वसूली करते हैं। " पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा। बारह. अजीत पवार ने कहा-"मैं मांग करता हूं कि एक विशेष पुलिस दल का गठन किया जाए और राज्य में फल-फूल रहे इस कोयटा गिरोह से तुरंत निपटा जाए।
Ganesh Chaturthi 2022 Date Muhurta: ज्योतिषचार्यों के अनुसार बुधवार के दिन गणेश चतुर्थी का होना इस व्रत के महत्व को और भी कई गुणा ज्यादा बढा रहा है क्योंकि गणेशजी को स्वयं बुधवार के देवता माना जाता हैं। Ganesh Chaturthi 2022 Date Muhurta: प्रत्येक साल के भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है । आमतौर पर गणेश चतुर्थी को सिद्धि विनायक व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी बुधवार 31 अगस्त से शुरू हो रही है। देश के विभिन्न भागों में इस दिन गणेशजी की प्रतिमा को बैठाकर लोग श्रद्धा भाव से पूजा -अर्चना करते हैं। ज्योतिषचार्यों के अनुसार बुधवार के दिन गणेश चतुर्थी का होना इस व्रत के महत्व को और भी कई गुणा ज्यादा बढा रहा है क्योंकि गणेशजी को स्वयं बुधवार के देवता माना जाता हैं। क्या है गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त? गणेश चतुर्थी यानी भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ मंगलवार 30 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 34 मिनट पर हो जाएगा। जबकि भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का समापन बुधवार 31 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक़ इस साल गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता गणेशजी अपने साथ शुभ रवि योग भी लेकर आ रहे हैं। जिसके बारे में कहा जाता है कि इस योग में सभी अशुभ योगों के प्रभाव को नष्ट करने की अदभुत क्षमता होती है। मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष शुभ योग में विघ्नहर्ता गणेशजी तमाम विघ्नों को दूर करके अपने भक्तों का कल्याण करने आ रहे हैं। गणेश चतुर्थी यानी भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी शुभ दिन मंगलमूर्ति, विघ्नहर्ता, गजानन गणेशजी का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी को गणेश जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक़ गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की मूर्ति की स्थापना करने से लेकर कई भक्त 10 दिनों तक इनकी पूजा -अर्चना करते हैं। जबकि कुछ भक्त एक दिन, तीन दिन, सात दिन, के लिए भी गणेश जी की प्रतिमा को अपने घर बैठाते हैं। मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की प्रतिमा को अपने घर में बैठाकर इनकी श्रद्धा भाव से पूजा करने से भगवान् गणेश उनके तमाम संकटों को हर लेते हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार गणेशजी को मोदक अतिप्रिय हैं। इसलिए उनकी पूजा में मोदक का भोग लगाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा मोतीचूर के लड्डू और बेसन के लड्डू भी गणपति जी को बेहद प्रिय माने जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार गणेश उत्सव के पांचवें और छठे दिन मखाने की खीर का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
Ganesh Chaturthi दो हज़ार बाईस Date Muhurta: ज्योतिषचार्यों के अनुसार बुधवार के दिन गणेश चतुर्थी का होना इस व्रत के महत्व को और भी कई गुणा ज्यादा बढा रहा है क्योंकि गणेशजी को स्वयं बुधवार के देवता माना जाता हैं। Ganesh Chaturthi दो हज़ार बाईस Date Muhurta: प्रत्येक साल के भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है । आमतौर पर गणेश चतुर्थी को सिद्धि विनायक व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी बुधवार इकतीस अगस्त से शुरू हो रही है। देश के विभिन्न भागों में इस दिन गणेशजी की प्रतिमा को बैठाकर लोग श्रद्धा भाव से पूजा -अर्चना करते हैं। ज्योतिषचार्यों के अनुसार बुधवार के दिन गणेश चतुर्थी का होना इस व्रत के महत्व को और भी कई गुणा ज्यादा बढा रहा है क्योंकि गणेशजी को स्वयं बुधवार के देवता माना जाता हैं। क्या है गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त? गणेश चतुर्थी यानी भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ मंगलवार तीस अगस्त को दोपहर तीन बजकर चौंतीस मिनट पर हो जाएगा। जबकि भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का समापन बुधवार इकतीस अगस्त को दोपहर तीन बजकर तेईस मिनट पर होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक़ इस साल गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता गणेशजी अपने साथ शुभ रवि योग भी लेकर आ रहे हैं। जिसके बारे में कहा जाता है कि इस योग में सभी अशुभ योगों के प्रभाव को नष्ट करने की अदभुत क्षमता होती है। मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष शुभ योग में विघ्नहर्ता गणेशजी तमाम विघ्नों को दूर करके अपने भक्तों का कल्याण करने आ रहे हैं। गणेश चतुर्थी यानी भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी शुभ दिन मंगलमूर्ति, विघ्नहर्ता, गजानन गणेशजी का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी को गणेश जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक़ गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की मूर्ति की स्थापना करने से लेकर कई भक्त दस दिनों तक इनकी पूजा -अर्चना करते हैं। जबकि कुछ भक्त एक दिन, तीन दिन, सात दिन, के लिए भी गणेश जी की प्रतिमा को अपने घर बैठाते हैं। मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की प्रतिमा को अपने घर में बैठाकर इनकी श्रद्धा भाव से पूजा करने से भगवान् गणेश उनके तमाम संकटों को हर लेते हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार गणेशजी को मोदक अतिप्रिय हैं। इसलिए उनकी पूजा में मोदक का भोग लगाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा मोतीचूर के लड्डू और बेसन के लड्डू भी गणपति जी को बेहद प्रिय माने जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार गणेश उत्सव के पांचवें और छठे दिन मखाने की खीर का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
बॉलिवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर (Actor rishi kapoor died) अब सिर्फ यादों में हैं। मध्यप्रदेश में वह आखिरी बार 2017 में होशंगाबाद (rishi kapoor in hoshangabad) आए थे। वहां एक होटल के उद्घाटन के बाद उन्होंने नर्मदा नदी किनारे कोरी घाट पर उन्होंने स्टेज शो (rishi kapoor stage show) किया था। ऋषि कपूर ने इस दौरान अपनी फिल्मों (Rishi kapoor film song) के गाने गाए थे, जिस पर लोगों को झूमने को मजबूर कर दिया था। देखिए मध्यप्रदेश में ऋषि कपूर के स्टेज परफॉर्मेंस का वीडियो।
बॉलिवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर अब सिर्फ यादों में हैं। मध्यप्रदेश में वह आखिरी बार दो हज़ार सत्रह में होशंगाबाद आए थे। वहां एक होटल के उद्घाटन के बाद उन्होंने नर्मदा नदी किनारे कोरी घाट पर उन्होंने स्टेज शो किया था। ऋषि कपूर ने इस दौरान अपनी फिल्मों के गाने गाए थे, जिस पर लोगों को झूमने को मजबूर कर दिया था। देखिए मध्यप्रदेश में ऋषि कपूर के स्टेज परफॉर्मेंस का वीडियो।
Kharmas 2023: अगर आप चाहते हैं कि किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अशुभ माने जाने वाले खरमास में आपकी खुशियों को ग्रहण न लगे और हर समय सौभाग्य बरसता रहे तो आपको इन नियमों की भूलकर भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए. Kharmas 2023:ज्योतिष के अनुसार खरमास एक साल में दो बार तब लगता है, जब प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले सूर्य देवता देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में जाते हैं. पंचांग के अनुसार इस साल खरमास महीने की शुरुआत 15 मार्च 2023, बुधवार से होगी और यह 14 अप्रैल तक रहेगा. खरमास के लगते ही जहां शादी, ब्याह और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य रुक जाते हैं तो वहीं इस महीने अशुभ फलों से बचने और शुभ फलों को पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है. खरमास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं और क्या है इसमें की जाने वाली पूजा का उपाय, आइए इसे विस्तार से जानते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य जब अपना एक चक्कर लगाकार दोबारा अपने घोड़ों के पास पहुंचते हैं तो एक बार फिर से वे गधों को हटाकार अपने घोड़ों को रथ से जोड़ लेते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार एक साल में दो बार ऐसी स्थिति आती है जब सूर्य देव के घोड़े आराम करते हैं और खर यानि गधे उनका रथ खींचते हैं. इन्हीं दो महीनों को खरमास कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रत्यक्ष देवता सूर्य अपने सातों घोड़ों पर सवार होकर बगैर कहीं रुके लगातार ब्रह्मांड का चक्कर लगाते रहते हैं. मान्यता है कि एक बार जब भगवान सूर्य ने चक्कर लगाते समय अपने घोड़ों को थका और प्यासा पाया तो उन्होंने उन्हें आराम करने के लिए एक तालाब के पास ले जाकर छोड़ दिया और उनकी जगह दो खर यानि गधे को बांधकर अपना रथ खींचने लगे. घोड़ों के मुकाबले गधों को रथ खींचने में बहुत मुश्किल हुई, जिससे सूर्य देवता के रथ की गति धीमी हो गई. - खरमास में शादी, विवाह, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. - खरमास में भूलकर भी न करें किसी नए कारोबार की शुरुआत. - भूमि-भवन और वाहन का क्रय-विक्रय नहीं करना चाहिए. - सुख-सौभाग्य की कामना रखने वालों को खरमास में बहूू-बेटियोंकी विदाई नहीं करना चाहिए. - बैडलक से बचने के लिए भूलकर भी न करें नए मकान के निर्माण की शुरुआत. - खरमास के दौरान तामसिक चीजों का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए. - पिता या उनके समान व्यक्ति और दरवाजे पर आए व्यक्ति का गलती से न करें अपमान. - हिंदू मान्यता के अनुसार खरमास में अपनी खुशियों को कायम रखने और सुख-सौभाग्य को पाने के लिए इस पूरे महीने अपना समय अधिक से अधिक समय धर्म-अध्यात्म में लगाना चाहिए. - खरमास में सूर्य देवता की साधना अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है. ऐसे में खरमास में हर दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान-ध्यान करके उगते हुए सूर्य देवता को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना चाहिए. - खरमास में अपनी पूजा में सूर्य की शुभता पाने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र और भगवार श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. - खरमास में अपने पिता, गुरु और गोमाता की खूब सेवा करना चाहिए. - खरमास में प्रतिदिन तुलसी जी की सेवा और पूजा करनी चाहिए. - खरमास में भगवान सूर्य और गुरु ग्रह के मंत्रों को अधिक से अधिक जप करना चाहिए. (यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
Kharmas दो हज़ार तेईस: अगर आप चाहते हैं कि किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अशुभ माने जाने वाले खरमास में आपकी खुशियों को ग्रहण न लगे और हर समय सौभाग्य बरसता रहे तो आपको इन नियमों की भूलकर भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए. Kharmas दो हज़ार तेईस:ज्योतिष के अनुसार खरमास एक साल में दो बार तब लगता है, जब प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले सूर्य देवता देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में जाते हैं. पंचांग के अनुसार इस साल खरमास महीने की शुरुआत पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस, बुधवार से होगी और यह चौदह अप्रैल तक रहेगा. खरमास के लगते ही जहां शादी, ब्याह और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य रुक जाते हैं तो वहीं इस महीने अशुभ फलों से बचने और शुभ फलों को पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है. खरमास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं और क्या है इसमें की जाने वाली पूजा का उपाय, आइए इसे विस्तार से जानते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य जब अपना एक चक्कर लगाकार दोबारा अपने घोड़ों के पास पहुंचते हैं तो एक बार फिर से वे गधों को हटाकार अपने घोड़ों को रथ से जोड़ लेते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार एक साल में दो बार ऐसी स्थिति आती है जब सूर्य देव के घोड़े आराम करते हैं और खर यानि गधे उनका रथ खींचते हैं. इन्हीं दो महीनों को खरमास कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रत्यक्ष देवता सूर्य अपने सातों घोड़ों पर सवार होकर बगैर कहीं रुके लगातार ब्रह्मांड का चक्कर लगाते रहते हैं. मान्यता है कि एक बार जब भगवान सूर्य ने चक्कर लगाते समय अपने घोड़ों को थका और प्यासा पाया तो उन्होंने उन्हें आराम करने के लिए एक तालाब के पास ले जाकर छोड़ दिया और उनकी जगह दो खर यानि गधे को बांधकर अपना रथ खींचने लगे. घोड़ों के मुकाबले गधों को रथ खींचने में बहुत मुश्किल हुई, जिससे सूर्य देवता के रथ की गति धीमी हो गई. - खरमास में शादी, विवाह, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. - खरमास में भूलकर भी न करें किसी नए कारोबार की शुरुआत. - भूमि-भवन और वाहन का क्रय-विक्रय नहीं करना चाहिए. - सुख-सौभाग्य की कामना रखने वालों को खरमास में बहूू-बेटियोंकी विदाई नहीं करना चाहिए. - बैडलक से बचने के लिए भूलकर भी न करें नए मकान के निर्माण की शुरुआत. - खरमास के दौरान तामसिक चीजों का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए. - पिता या उनके समान व्यक्ति और दरवाजे पर आए व्यक्ति का गलती से न करें अपमान. - हिंदू मान्यता के अनुसार खरमास में अपनी खुशियों को कायम रखने और सुख-सौभाग्य को पाने के लिए इस पूरे महीने अपना समय अधिक से अधिक समय धर्म-अध्यात्म में लगाना चाहिए. - खरमास में सूर्य देवता की साधना अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है. ऐसे में खरमास में हर दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान-ध्यान करके उगते हुए सूर्य देवता को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना चाहिए. - खरमास में अपनी पूजा में सूर्य की शुभता पाने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र और भगवार श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. - खरमास में अपने पिता, गुरु और गोमाता की खूब सेवा करना चाहिए. - खरमास में प्रतिदिन तुलसी जी की सेवा और पूजा करनी चाहिए. - खरमास में भगवान सूर्य और गुरु ग्रह के मंत्रों को अधिक से अधिक जप करना चाहिए.
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी में मेडिकल स्टोर संचालक ने सर्दी-बुखार पीड़ित 2 साल की मासूम को इलाज करने के नाम पर 2 इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची के मुंह व नाक से खून बहने लगा। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी में मेडिकल स्टोर संचालक ने सर्दी-बुखार पीड़ित 2 साल की मासूम को इलाज करने के नाम पर 2 इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची के मुंह व नाक से खून बहने लगा। गंभीर स्थिति में बच्ची को परिजनों के साथ निजी वाहन से अंबिकापुर भेज दिया, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई। सरगुजा पुलिस ने मामले में मंगलवार को केस दर्ज किया है। बच्ची के शव का पोस्टमॉर्टम भी कराया गया है। पुलिस ने मामला दूसरे जिले का होने के कारण डायरी बलरामपुर भेजने की बात कही है। जानकारी के अनुसार कुसमी ब्लॉक के नीलकंठपुर निवासी मनोहर राम की 2 वर्षीय पुत्री सिमरन 14 अक्टूबर से सर्दी-खांसी से पीड़ित थी। परिजन उसे 17 अक्टूबर की दोपहर इलाज के लिए कुसमी स्थित बाबा केजीएन मेडिकल स्टोर ले गए थे। वहां मेडिकल स्टोर में झोला छाप डॉक्टर सेराज ने मासूम को उपचार के नाम पर 2 इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची की हालत बिगड़ने लगी। उसके नाक व मुंह से खून निकलने लगा। इससे घबराए मेडिकल स्टोर के संचालक ने परिजनों को अंबिकापुर जाकर बच्ची का उपचार कराने को कहा और स्वयं निजी वाहन की व्यवस्था भी करा दी। बच्ची को अंबिकापुर लाते समय राजपुर के पास उसकी मौत हो गई। शाम को मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डाक्टरों ने सिमरन को मृत घोषित कर दिया। उसके शव को मरच्युरी में रखवा दिया गया। मंगलवार को शव का पीएम कराया गया। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ लखन सिंह ने बताया कि बच्ची को जब तक अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी मौत हो गई थी। ऐसे में उसकी मौत कैसे हुई, इसका पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने पर ही पता चल सकेगा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल चौकी में परिजनों के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन के कारण उनकी बच्ची की जान गई है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सीएमएचओ डॉ. बसंत कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। मेरे द्वारा कुसमी बीएमओ को जांच कर कार्रवाई के लिए कहा गया है। समय-समय पर झोलाछाप डाक्टरों की जांच की जाती है। वहीं कुसमी बीएमओ डॉ. राकेश ठाकुर ने कहा कि मेडिकल स्टोर संचालक को इंजेक्शन लगाने का अधिकार है या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। जांच के बाद कार्रवाई होगी। गलत इंजेक्शन लगाए जाने से मौत का संभाग में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 4 अगस्त को जशपुर जिला अस्पताल में 22 वर्षीय महिला की मौत हो गई थी। मार्च के महीने में सरगुजा के ग्राम लखनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक 7 साल की बच्ची की मौत हो गई थी। उसके परिजनों ने भी नर्स पर गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाया था।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी में मेडिकल स्टोर संचालक ने सर्दी-बुखार पीड़ित दो साल की मासूम को इलाज करने के नाम पर दो इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची के मुंह व नाक से खून बहने लगा। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी में मेडिकल स्टोर संचालक ने सर्दी-बुखार पीड़ित दो साल की मासूम को इलाज करने के नाम पर दो इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची के मुंह व नाक से खून बहने लगा। गंभीर स्थिति में बच्ची को परिजनों के साथ निजी वाहन से अंबिकापुर भेज दिया, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई। सरगुजा पुलिस ने मामले में मंगलवार को केस दर्ज किया है। बच्ची के शव का पोस्टमॉर्टम भी कराया गया है। पुलिस ने मामला दूसरे जिले का होने के कारण डायरी बलरामपुर भेजने की बात कही है। जानकारी के अनुसार कुसमी ब्लॉक के नीलकंठपुर निवासी मनोहर राम की दो वर्षीय पुत्री सिमरन चौदह अक्टूबर से सर्दी-खांसी से पीड़ित थी। परिजन उसे सत्रह अक्टूबर की दोपहर इलाज के लिए कुसमी स्थित बाबा केजीएन मेडिकल स्टोर ले गए थे। वहां मेडिकल स्टोर में झोला छाप डॉक्टर सेराज ने मासूम को उपचार के नाम पर दो इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची की हालत बिगड़ने लगी। उसके नाक व मुंह से खून निकलने लगा। इससे घबराए मेडिकल स्टोर के संचालक ने परिजनों को अंबिकापुर जाकर बच्ची का उपचार कराने को कहा और स्वयं निजी वाहन की व्यवस्था भी करा दी। बच्ची को अंबिकापुर लाते समय राजपुर के पास उसकी मौत हो गई। शाम को मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डाक्टरों ने सिमरन को मृत घोषित कर दिया। उसके शव को मरच्युरी में रखवा दिया गया। मंगलवार को शव का पीएम कराया गया। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ लखन सिंह ने बताया कि बच्ची को जब तक अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी मौत हो गई थी। ऐसे में उसकी मौत कैसे हुई, इसका पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने पर ही पता चल सकेगा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल चौकी में परिजनों के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन के कारण उनकी बच्ची की जान गई है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सीएमएचओ डॉ. बसंत कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। मेरे द्वारा कुसमी बीएमओ को जांच कर कार्रवाई के लिए कहा गया है। समय-समय पर झोलाछाप डाक्टरों की जांच की जाती है। वहीं कुसमी बीएमओ डॉ. राकेश ठाकुर ने कहा कि मेडिकल स्टोर संचालक को इंजेक्शन लगाने का अधिकार है या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। जांच के बाद कार्रवाई होगी। गलत इंजेक्शन लगाए जाने से मौत का संभाग में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले चार अगस्त को जशपुर जिला अस्पताल में बाईस वर्षीय महिला की मौत हो गई थी। मार्च के महीने में सरगुजा के ग्राम लखनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक सात साल की बच्ची की मौत हो गई थी। उसके परिजनों ने भी नर्स पर गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाया था।
बेंगुलुरू में भी कोरोना वायरस की जांच करने गई एक महिला आशा कर्मी पर 50 से ज़्यादा लोगों ने हमला कर दिया। यह घटना उत्तर-पूर्व बेंगुलुरू के सादिक़ नगर में हुई। 14 आशा स्वास्थ्य कर्मियों के एक दल को इस इलाक़े में सर्वे करने भेजा गया था। इस दल में पीड़ित स्वास्थ्य कर्मी कृष्णावेणी भी थीं। इसके पास के सराईपाल्या इलाक़े में कोरोना टेस्ट का एक पॉजिटिव मामला सामने आने के बाद सादिक़ नगर में सर्वे कराया गया था। इससे पहले इंदौर में जांच करने पहुंचे डॉक्टर्स को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया था। घटना के बाद कृष्णावेणी के घर राज्य के उपमुख्यमंत्री सी. एन. अश्वथ नारायण पहुंचे। कृष्णावेणी ने उन्हें बताया कि एक धार्मिक स्थल के प्रार्थना हाल से इस बात की घोषणा की गई कि आशा कर्मियों को कोई जानकारी न दी जाए क्योंकि सरकार इसके जरिये एनआरसी के लिये जानकारी जुटा रही है। कृष्णावेणी ने उपमुख्यमंत्री को बताया, 'इसके तुरंत बाद भीड़ ने मुझे और अन्य आशा कर्मियों को घेर लिया और मुझे धक्का दिया और घसीटा। ' उपमुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जायेगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बी. श्रीरामुलु ने ट्वीट कर कहा कि नर्स और आशा कर्मियों पर हमला करना कायराना कृत्य है और ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि यह घटना तब हुई जब आशा कर्मी इस बात की जांच करने गई थीं कि इलाक़े का कोई व्यक्ति तब्लीग़ी जमात के लोगों के संपर्क में तो नहीं आया है। एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी विजय ने कहा कि हम लोग उनसे परिवार के मुखिया का नाम, उम्र, परिवार के सदस्यों और क्या उन्हें खांसी, बुखार या कोई और दिक्कत है, इस बारे में पूछ रहे थे लेकिन न जाने क्यों उन्होंने हम पर हमला कर दिया। ऐसे समय में जब पूरा भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ने में जुटा हुआ है, कई जगहों से डॉक्टर्स, स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता की ख़बरें आ रही हैं। इंदौर के अलावा ग़ाज़ियाबाद और दिल्ली के क्वरेंटीन सेंटर में रखे गये तब्लीग़ी जमात के सदस्यों के बारे में शिकायत दर्ज कराई गई है कि वे लोग डॉक्टर्स पर थूक रहे हैं, उनसे अभद्रता कर रहे हैं। ऐसे में कैसे स्वास्थ्य कर्मी अपना काम करेंगे और वे ही अगर काम नहीं कर पायेंगे तो इस लड़ाई से जीतना बेहद मुश्किल हो जायेगा।
बेंगुलुरू में भी कोरोना वायरस की जांच करने गई एक महिला आशा कर्मी पर पचास से ज़्यादा लोगों ने हमला कर दिया। यह घटना उत्तर-पूर्व बेंगुलुरू के सादिक़ नगर में हुई। चौदह आशा स्वास्थ्य कर्मियों के एक दल को इस इलाक़े में सर्वे करने भेजा गया था। इस दल में पीड़ित स्वास्थ्य कर्मी कृष्णावेणी भी थीं। इसके पास के सराईपाल्या इलाक़े में कोरोना टेस्ट का एक पॉजिटिव मामला सामने आने के बाद सादिक़ नगर में सर्वे कराया गया था। इससे पहले इंदौर में जांच करने पहुंचे डॉक्टर्स को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया था। घटना के बाद कृष्णावेणी के घर राज्य के उपमुख्यमंत्री सी. एन. अश्वथ नारायण पहुंचे। कृष्णावेणी ने उन्हें बताया कि एक धार्मिक स्थल के प्रार्थना हाल से इस बात की घोषणा की गई कि आशा कर्मियों को कोई जानकारी न दी जाए क्योंकि सरकार इसके जरिये एनआरसी के लिये जानकारी जुटा रही है। कृष्णावेणी ने उपमुख्यमंत्री को बताया, 'इसके तुरंत बाद भीड़ ने मुझे और अन्य आशा कर्मियों को घेर लिया और मुझे धक्का दिया और घसीटा। ' उपमुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जायेगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बी. श्रीरामुलु ने ट्वीट कर कहा कि नर्स और आशा कर्मियों पर हमला करना कायराना कृत्य है और ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि यह घटना तब हुई जब आशा कर्मी इस बात की जांच करने गई थीं कि इलाक़े का कोई व्यक्ति तब्लीग़ी जमात के लोगों के संपर्क में तो नहीं आया है। एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी विजय ने कहा कि हम लोग उनसे परिवार के मुखिया का नाम, उम्र, परिवार के सदस्यों और क्या उन्हें खांसी, बुखार या कोई और दिक्कत है, इस बारे में पूछ रहे थे लेकिन न जाने क्यों उन्होंने हम पर हमला कर दिया। ऐसे समय में जब पूरा भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ने में जुटा हुआ है, कई जगहों से डॉक्टर्स, स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता की ख़बरें आ रही हैं। इंदौर के अलावा ग़ाज़ियाबाद और दिल्ली के क्वरेंटीन सेंटर में रखे गये तब्लीग़ी जमात के सदस्यों के बारे में शिकायत दर्ज कराई गई है कि वे लोग डॉक्टर्स पर थूक रहे हैं, उनसे अभद्रता कर रहे हैं। ऐसे में कैसे स्वास्थ्य कर्मी अपना काम करेंगे और वे ही अगर काम नहीं कर पायेंगे तो इस लड़ाई से जीतना बेहद मुश्किल हो जायेगा।
RANCHI: अधिकतर रोड एक्सीडेंट में लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है। ट्रैफिक पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद खासकर युवा अपनी बुरी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कभी बैनर-पोस्टर दिखाकर, फूल देकर तो कभी फ्रेंडशिप बैंड बांध कर रोड सेफ्टी के लिए पिछले 5 सालों से लोगों को अवेयर करने 33 वर्षीय ऋषभ आनंद निकल पड़े हैं। राइजअप नामक संस्थान के जरिए 45 लोगों की टीम सिटी की सड़कों पर लोगों को ट्रैफिक रूल्स के प्रति अवेयर करती कहीं न कहीं नजर आ ही जाती है। ऋषभ आनंद बताते हैं कि वह स्कूल और कॉलेज जाकर भी बच्चों को अवेयर करते हैं। उन्हें पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से शॉर्ट वीडियो दिखाकर सड़क सुरक्षा की जानकारी देते हैं। साथ ही ट्रैफिक नियमों के बारे में भी बताते हैं। अबतक लगभग 250 स्कूलों में विजिट कर चुके हैं। साथ ही कॉलेज और प्राइवेट इंस्टीट्यूट में भी जाकर वे लगातार अवेयर करने का काम करते रहते हैं। उनका मानना है कि अधिकतर सड़क दुर्घटना मानवीय भूल के कारण होती हैं। यदि लोग जागरूक हो जायें तो इन्हें रोका जा सकता है। वह बताते हैं कि रोड सेफ्टी के प्रति स्कूल और कॉलेज के बच्चे भी सड़क पर उतर कर लोगों को अवेयर करते हैं। ये बच्चे सड़कों पर उतर कर लोगों को समझाने का काम कर रहे है। कभी पोस्टर, कभी फूल, कभी फ्रेंडशिप बैंड बांधकर तो कभी दूसरे माध्यम से रोड सेफ्टी और यातायात नियमों की जानकारी देते हैं। रांची के कोकर में रहने वाले ऋषभ आनंद ने बेंग्लुरु से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है। रोड सेफ्टी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा सम्मानित भी किये जा चुके हैं। ऋषभ का मानना है कि यदि पहले से सर्तक रहें तो दुर्घटना की संभावना काफी कम हो सकती है। इसी सोच के साथ लोगों को जागरूक करने का काम शुरू किया। स्टार्टिग में थोड़ी दिक्कतें आई थीं, लेकिन धीरे-धीरे इसे लोगों का साथ मिलता गया। अब इसमें सरकार भी सहयोग कर रही है। नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग भी रोड सेफ्टी के लिए सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया भी एक बड़ा प्लेटफार्म है, यहां भी हमारी टीम लोगों को अवेयर करती रहती है। ऋषभ आनंद अपनी टीम के बैनर तले नुक्कड़ नाटक, क्विज की मदद से युवाओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते हैं। इसके अलावा एक्सीडेंटल वीडियो, प्रॉब्लम स्टेटमेंट, डाटा फैक्ट, पर्व-त्योहार में सड़क पर उतर कर भी लोगों को अवेयर करते हैं।
RANCHI: अधिकतर रोड एक्सीडेंट में लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है। ट्रैफिक पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद खासकर युवा अपनी बुरी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कभी बैनर-पोस्टर दिखाकर, फूल देकर तो कभी फ्रेंडशिप बैंड बांध कर रोड सेफ्टी के लिए पिछले पाँच सालों से लोगों को अवेयर करने तैंतीस वर्षीय ऋषभ आनंद निकल पड़े हैं। राइजअप नामक संस्थान के जरिए पैंतालीस लोगों की टीम सिटी की सड़कों पर लोगों को ट्रैफिक रूल्स के प्रति अवेयर करती कहीं न कहीं नजर आ ही जाती है। ऋषभ आनंद बताते हैं कि वह स्कूल और कॉलेज जाकर भी बच्चों को अवेयर करते हैं। उन्हें पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से शॉर्ट वीडियो दिखाकर सड़क सुरक्षा की जानकारी देते हैं। साथ ही ट्रैफिक नियमों के बारे में भी बताते हैं। अबतक लगभग दो सौ पचास स्कूलों में विजिट कर चुके हैं। साथ ही कॉलेज और प्राइवेट इंस्टीट्यूट में भी जाकर वे लगातार अवेयर करने का काम करते रहते हैं। उनका मानना है कि अधिकतर सड़क दुर्घटना मानवीय भूल के कारण होती हैं। यदि लोग जागरूक हो जायें तो इन्हें रोका जा सकता है। वह बताते हैं कि रोड सेफ्टी के प्रति स्कूल और कॉलेज के बच्चे भी सड़क पर उतर कर लोगों को अवेयर करते हैं। ये बच्चे सड़कों पर उतर कर लोगों को समझाने का काम कर रहे है। कभी पोस्टर, कभी फूल, कभी फ्रेंडशिप बैंड बांधकर तो कभी दूसरे माध्यम से रोड सेफ्टी और यातायात नियमों की जानकारी देते हैं। रांची के कोकर में रहने वाले ऋषभ आनंद ने बेंग्लुरु से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है। रोड सेफ्टी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा सम्मानित भी किये जा चुके हैं। ऋषभ का मानना है कि यदि पहले से सर्तक रहें तो दुर्घटना की संभावना काफी कम हो सकती है। इसी सोच के साथ लोगों को जागरूक करने का काम शुरू किया। स्टार्टिग में थोड़ी दिक्कतें आई थीं, लेकिन धीरे-धीरे इसे लोगों का साथ मिलता गया। अब इसमें सरकार भी सहयोग कर रही है। नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग भी रोड सेफ्टी के लिए सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया भी एक बड़ा प्लेटफार्म है, यहां भी हमारी टीम लोगों को अवेयर करती रहती है। ऋषभ आनंद अपनी टीम के बैनर तले नुक्कड़ नाटक, क्विज की मदद से युवाओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते हैं। इसके अलावा एक्सीडेंटल वीडियो, प्रॉब्लम स्टेटमेंट, डाटा फैक्ट, पर्व-त्योहार में सड़क पर उतर कर भी लोगों को अवेयर करते हैं।
- एसएससी सीएचएसएल टियर 1 रिजल्ट जारी कर दिया गया है। कर्मचारी चयन आयोग ने Combined Higher Secondary (10+2) Level, SSC CHSL Tier 1 Result 2021 के साथ साथ कटऑफ भी जारी कर दिया है। इन कटऑफ को श्रेणीवार जारी किया गया है। रही बात आंसर की, तो बता दें, कि एसएससी सीएचएसएल आंसर की 2021 पहले ही जारी की जा चुकी है। अब एसएससी सीएचएसएल टियर 2 परीक्षा का आयोजन होना है, जिसकी तिथि भी जारी कर दी गई है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, कर्मचारी चयन आयोग 18 सितंबर, 2022 को सीएचएसएल टियर 2 परीक्षा का आयोजन करेगा। इसके लिए सितंबर के पहले हफ्ते में एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। इसमें वहीं उम्मीदवार बैठ सकेंगे, जिन्होंने एसएससी सीएचएसएल टियर 1 परीक्षा पास कर ली हो। एसएससी सीएचएसएल टियर 2 परीक्षा वर्णनात्मक प्रकार की परीक्षा होगी। - उम्मीदवार यहां बताई गई आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। - अब पीडीएफ रूप में नया पेज खुलेगा। - इसे चेक व डाउनलोड किया जा सकता है। कर्मचारी चयन आयोग ने देश भर के विभिन्न केंद्रों पर 24. 05. 2022 से 10. 06. 2022 तक कंबाइंड हायर सेकेंडरी (10+2) स्तर की परीक्षा, 2021 (टियर- I) आयोजित की थी।
- एसएससी सीएचएसएल टियर एक रिजल्ट जारी कर दिया गया है। कर्मचारी चयन आयोग ने Combined Higher Secondary Level, SSC CHSL Tier एक Result दो हज़ार इक्कीस के साथ साथ कटऑफ भी जारी कर दिया है। इन कटऑफ को श्रेणीवार जारी किया गया है। रही बात आंसर की, तो बता दें, कि एसएससी सीएचएसएल आंसर की दो हज़ार इक्कीस पहले ही जारी की जा चुकी है। अब एसएससी सीएचएसएल टियर दो परीक्षा का आयोजन होना है, जिसकी तिथि भी जारी कर दी गई है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, कर्मचारी चयन आयोग अट्ठारह सितंबर, दो हज़ार बाईस को सीएचएसएल टियर दो परीक्षा का आयोजन करेगा। इसके लिए सितंबर के पहले हफ्ते में एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। इसमें वहीं उम्मीदवार बैठ सकेंगे, जिन्होंने एसएससी सीएचएसएल टियर एक परीक्षा पास कर ली हो। एसएससी सीएचएसएल टियर दो परीक्षा वर्णनात्मक प्रकार की परीक्षा होगी। - उम्मीदवार यहां बताई गई आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। - अब पीडीएफ रूप में नया पेज खुलेगा। - इसे चेक व डाउनलोड किया जा सकता है। कर्मचारी चयन आयोग ने देश भर के विभिन्न केंद्रों पर चौबीस. पाँच. दो हज़ार बाईस से दस. छः. दो हज़ार बाईस तक कंबाइंड हायर सेकेंडरी स्तर की परीक्षा, दो हज़ार इक्कीस आयोजित की थी।
अक्सर देखने को मिलता है जब कई सेलिब्रिटीज ट्रोल हो जाते हैं लेकिन कई ऐसे सेलिब्रिटीज भी होते हैं जो ट्रोल करने वालो को मुंह तोड़ जवाब देते हैं और यही बात WWE के रेस्लरो पर भी लागू होती है. अब खबर आ रही है कि मौजूदा समय के रेस्लर ने एक फैन को उसी की भाषा में जमकर क्लास लगाई है. हर जगह की तरह WWE को भी ट्रोल किया जाता है और खासकर रेस्लरो को. कई ऐसे रेस्लर्स हैं जो आये दिन ट्रोल करने वालो के निशाने पर आ जाते हैं, फैन्स तरह तरह की शिकायते लेकर ट्रोल करना शुरू कर देते हैं. कभी किसी रेस्लर का वजन, तो कभी किसी रेस्लर की पर्सनालिटी को लेकर बातें शुरू हो जाती हैं. अधिकतर रेस्लर इन सब बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते लेकिन कुछ ऐसे रेस्लर्स भी है जो सोशल मीडिया साइट्स पर फैन्स को चुप करा देते हैं. रैंडी ऑर्टन और केविन ओवन्स इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं. One of the many podcasts that talk about your lack of wrestling ability, weird stomach and hair line? बैरन कोर्बिन ही वो रेस्लर हैं जिन्हें एक फैन ने यह कहकर ट्रोल किया कि उनके पास रेस्लिंग टैलेंट नहीं है, उनकी बॉडी अजीब तरीके की है और उनके बाल भी बेहद खराब हैं. आपको बता दे कि इससे पहले भी बैरन कोर्बिन फैन्स के निशाने पर आते रहे हैं और हर बार की तरह उन्होंने इस बात भी इस ट्वीट कर करारा जवाब दिया है. Even with all of that i still just bought a million dollar house. What's your excuse for being a nobody hiding in the crowd. बैरन ने यह कहकर मुंह बंद कराया कि इतना सब बुरा होने के वाबजूद उनके पास मिलियन डॉलर का घर है और वे भीड़ में छुपकर किसी पर वार नहीं करते.
अक्सर देखने को मिलता है जब कई सेलिब्रिटीज ट्रोल हो जाते हैं लेकिन कई ऐसे सेलिब्रिटीज भी होते हैं जो ट्रोल करने वालो को मुंह तोड़ जवाब देते हैं और यही बात WWE के रेस्लरो पर भी लागू होती है. अब खबर आ रही है कि मौजूदा समय के रेस्लर ने एक फैन को उसी की भाषा में जमकर क्लास लगाई है. हर जगह की तरह WWE को भी ट्रोल किया जाता है और खासकर रेस्लरो को. कई ऐसे रेस्लर्स हैं जो आये दिन ट्रोल करने वालो के निशाने पर आ जाते हैं, फैन्स तरह तरह की शिकायते लेकर ट्रोल करना शुरू कर देते हैं. कभी किसी रेस्लर का वजन, तो कभी किसी रेस्लर की पर्सनालिटी को लेकर बातें शुरू हो जाती हैं. अधिकतर रेस्लर इन सब बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते लेकिन कुछ ऐसे रेस्लर्स भी है जो सोशल मीडिया साइट्स पर फैन्स को चुप करा देते हैं. रैंडी ऑर्टन और केविन ओवन्स इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं. One of the many podcasts that talk about your lack of wrestling ability, weird stomach and hair line? बैरन कोर्बिन ही वो रेस्लर हैं जिन्हें एक फैन ने यह कहकर ट्रोल किया कि उनके पास रेस्लिंग टैलेंट नहीं है, उनकी बॉडी अजीब तरीके की है और उनके बाल भी बेहद खराब हैं. आपको बता दे कि इससे पहले भी बैरन कोर्बिन फैन्स के निशाने पर आते रहे हैं और हर बार की तरह उन्होंने इस बात भी इस ट्वीट कर करारा जवाब दिया है. Even with all of that i still just bought a million dollar house. What's your excuse for being a nobody hiding in the crowd. बैरन ने यह कहकर मुंह बंद कराया कि इतना सब बुरा होने के वाबजूद उनके पास मिलियन डॉलर का घर है और वे भीड़ में छुपकर किसी पर वार नहीं करते.
Ranchi : झारखंड में 1 सितंबर से पुरानी पेंशन योजना लागू कर दी गई है. सीएम हेमंत सोरेन ने इसकी घोषणा हाल में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में की थी. जिसके बाद से झारखंड सरकार के कर्मी लगातार सीएम हेमंत सोरेन का आभार जता रहे हैं. जिस दिन पुरानी पेंशन योजना मंत्री परिषद में लाई गई थी उसी दिन झारखंड सचिवालय के सेवा कर्मियों ने धूमधाम से इस निर्णय का स्वागत किया था. इसके बाद विधानसभा सत्र के दौरान भी सरकार के कर्मियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ सीएम हेमंत सोरेन का आभार जताया. झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अब सीएम हेमंत सोरेन का आभार जताने के लिए प्रोजेक्ट भवन में एक आयोजन करने का निर्णय लिया है, झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले यह आभार जताया जाएगा. झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने अपने सभी अधिकारियों को प्रोजेक्ट भवन में 12 बजे मौजूद रहने का निर्देश दिया है. कहा गया है कि करीब 2 बजे सीएम कार्यालय में सभी पदाधिकारी मिलकर सीएम हेमंत सोरेन का आभार जतायाएंगे. इसके लिए वह 12 बजे तक प्रोजेक्ट भवन में आ जाएं.
Ranchi : झारखंड में एक सितंबर से पुरानी पेंशन योजना लागू कर दी गई है. सीएम हेमंत सोरेन ने इसकी घोषणा हाल में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में की थी. जिसके बाद से झारखंड सरकार के कर्मी लगातार सीएम हेमंत सोरेन का आभार जता रहे हैं. जिस दिन पुरानी पेंशन योजना मंत्री परिषद में लाई गई थी उसी दिन झारखंड सचिवालय के सेवा कर्मियों ने धूमधाम से इस निर्णय का स्वागत किया था. इसके बाद विधानसभा सत्र के दौरान भी सरकार के कर्मियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ सीएम हेमंत सोरेन का आभार जताया. झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अब सीएम हेमंत सोरेन का आभार जताने के लिए प्रोजेक्ट भवन में एक आयोजन करने का निर्णय लिया है, झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले यह आभार जताया जाएगा. झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने अपने सभी अधिकारियों को प्रोजेक्ट भवन में बारह बजे मौजूद रहने का निर्देश दिया है. कहा गया है कि करीब दो बजे सीएम कार्यालय में सभी पदाधिकारी मिलकर सीएम हेमंत सोरेन का आभार जतायाएंगे. इसके लिए वह बारह बजे तक प्रोजेक्ट भवन में आ जाएं.
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं? छत्तीसगढ़ राज्य को लॉजिस्टिक्स एवं वेयर हाउसिंग हब के रूप में विकसित करने छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स नीति 2022 को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह भूपेश कैबिनेट ने टाटा टेक्नोलॉजीस लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था उन्नयन योजना का अनुमोदन किया है। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 36 आईटीआई के विकास पर कुल 1216. 80 करोड़ रूपए व्यय किए जाएंगे। इससे आईटीआई संस्थाओं में मैकेनिक, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बेसिक डिजाइनर एवं वर्चुअल वेरीफायर (मेकेनिकल), मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस कंट्रोल एण्ड आटोमेशन, एडंवास्ड सीएनसी मशीनिंग, इंडस्ट्रीयल रोबोटिक्स एंड डिजीटल मैन्युफैक्चरिंग एवं आर्टिजन यूजिंग एडवांस्ड टूल्स सहित अन्य शार्ट टर्म कोर्सेस भी संचालित होंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में नवा रायपुर अटल नगर में विभिन्न भू-उपयोग अंतर्गत आबंटित भूमि/बिल्टअप स्पेस पर आबंटियों से शेष प्रीमियम अदायगी पर अधिरोपित ब्याज एवं सरचार्ज में छूट देने हेतु वन टाईम सेटलमेंट स्कीम लागू करने पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई है। वहीं औद्योगिक नीति 2019-24 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में बंद एवं बीमार उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन नीति लागू करने का निर्णय भी भूपेश कैबिनेट ने लिया है। यह एक नवंबर 2019 के पश्चात् बंद एवं बीमार हुए उद्योगों पर लागू होगी। यह नीति केवल विनिर्माण उद्योगों पर लागू होगी।
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं? छत्तीसगढ़ राज्य को लॉजिस्टिक्स एवं वेयर हाउसिंग हब के रूप में विकसित करने छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स नीति दो हज़ार बाईस को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह भूपेश कैबिनेट ने टाटा टेक्नोलॉजीस लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था उन्नयन योजना का अनुमोदन किया है। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के छत्तीस आईटीआई के विकास पर कुल एक हज़ार दो सौ सोलह. अस्सी करोड़ रूपए व्यय किए जाएंगे। इससे आईटीआई संस्थाओं में मैकेनिक, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बेसिक डिजाइनर एवं वर्चुअल वेरीफायर , मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस कंट्रोल एण्ड आटोमेशन, एडंवास्ड सीएनसी मशीनिंग, इंडस्ट्रीयल रोबोटिक्स एंड डिजीटल मैन्युफैक्चरिंग एवं आर्टिजन यूजिंग एडवांस्ड टूल्स सहित अन्य शार्ट टर्म कोर्सेस भी संचालित होंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में नवा रायपुर अटल नगर में विभिन्न भू-उपयोग अंतर्गत आबंटित भूमि/बिल्टअप स्पेस पर आबंटियों से शेष प्रीमियम अदायगी पर अधिरोपित ब्याज एवं सरचार्ज में छूट देने हेतु वन टाईम सेटलमेंट स्कीम लागू करने पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई है। वहीं औद्योगिक नीति दो हज़ार उन्नीस-चौबीस के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में बंद एवं बीमार उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन नीति लागू करने का निर्णय भी भूपेश कैबिनेट ने लिया है। यह एक नवंबर दो हज़ार उन्नीस के पश्चात् बंद एवं बीमार हुए उद्योगों पर लागू होगी। यह नीति केवल विनिर्माण उद्योगों पर लागू होगी।
मरने के बाद मृतक के लिए कुछ क्रियाएं की जाती हैं। अंतिम संस्कार, पिंड दान, 12हवीं, उठावना, गंगा प्रसादी, पानी ढाल, डंगड़ी रात, जागरण, हवन, इत्यादि सामान्य क्रियाओं के बावजूद कुछ परिजनों को एक विचित्र सी अपूर्णता घेरे रहती है और तब एक अत्यंत उपेक्षित विषय पर पूछताछ होती है, जिसे पंथ में होना या #शंखढालइत्यादि नाम दिया जाता है। आज इसी उपेक्षित गुप्त विषय की चर्चा करना आवश्यक हो गया है। ये सभी पंथ सृष्टि आरम्भ से ही, अथवा वैदिक काल से ही हमारे साथ चल रही हैं। कालान्तर में इनमें बहुत सारी शाखाएं बनीं जिनके संस्कार हमारे डीएनए में गहराई तक शामिल हो चुके हैं। यह केवल भारत में ही है ऐसा नहीं है। इनका #विश्वव्यापीप्रसार था। यदि मृतक किसी पंथ या सम्प्रदाय में था तो उपरोक्त अंतिम क्रियाएं निष्फल हो जाती हैं और तब उसी पंथ के किसी जानकार से एक विशेष अनुष्ठान करवाया जाता है और उसके बाद सब कुछ सामान्य और शान्त हो जाता है। वर्तमान में इस विषय की सर्वाधिक उपेक्षा हो रही है जिसके कई कारण है। जानकारी के अभाव में इन क्रियाओं का गलत तत्व भी फायदा उठाते होंगे, कुछ स्वयम्भू पुरोहित जो इन रहस्यों से अपरिचित हैं वे भ्रामक मनमानी व्याख्या भी करते होंगे, फिल्मों और ठग ओझाओं का भी प्रभाव है. इतना ही नहीं और भी बहुत सारी बातें हैं जिनका उल्लेख यहां किया जा सकता है।
मरने के बाद मृतक के लिए कुछ क्रियाएं की जाती हैं। अंतिम संस्कार, पिंड दान, बारहहवीं, उठावना, गंगा प्रसादी, पानी ढाल, डंगड़ी रात, जागरण, हवन, इत्यादि सामान्य क्रियाओं के बावजूद कुछ परिजनों को एक विचित्र सी अपूर्णता घेरे रहती है और तब एक अत्यंत उपेक्षित विषय पर पूछताछ होती है, जिसे पंथ में होना या #शंखढालइत्यादि नाम दिया जाता है। आज इसी उपेक्षित गुप्त विषय की चर्चा करना आवश्यक हो गया है। ये सभी पंथ सृष्टि आरम्भ से ही, अथवा वैदिक काल से ही हमारे साथ चल रही हैं। कालान्तर में इनमें बहुत सारी शाखाएं बनीं जिनके संस्कार हमारे डीएनए में गहराई तक शामिल हो चुके हैं। यह केवल भारत में ही है ऐसा नहीं है। इनका #विश्वव्यापीप्रसार था। यदि मृतक किसी पंथ या सम्प्रदाय में था तो उपरोक्त अंतिम क्रियाएं निष्फल हो जाती हैं और तब उसी पंथ के किसी जानकार से एक विशेष अनुष्ठान करवाया जाता है और उसके बाद सब कुछ सामान्य और शान्त हो जाता है। वर्तमान में इस विषय की सर्वाधिक उपेक्षा हो रही है जिसके कई कारण है। जानकारी के अभाव में इन क्रियाओं का गलत तत्व भी फायदा उठाते होंगे, कुछ स्वयम्भू पुरोहित जो इन रहस्यों से अपरिचित हैं वे भ्रामक मनमानी व्याख्या भी करते होंगे, फिल्मों और ठग ओझाओं का भी प्रभाव है. इतना ही नहीं और भी बहुत सारी बातें हैं जिनका उल्लेख यहां किया जा सकता है।
आजकल आने वाले अपराध के किस्से सभी के लिए हैरानीभरे बने हुए हैं. ऐसे में जो मामला हाल ही में सामने आया है वह दुमका का है. इस मामले में जिले के जामा थाना क्षेत्र के कदमपुर गांव में बीते शनिवार की देर शाम दहेज के लिए नवविवाहिता 19 वर्षीया महिला की दहेज के लालचियों ने जहर देकर जान ले ली है. इस मामले में मौत के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे ससुराल वालों को मायके के लोगों ने रोक लिया और पुलिस ने उसी समय कार्रवाई करते हुए पति को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में मिली जानकारी के तहत देवघर जिले के पालोजोरी थाना क्षेत्र के लुसिया गांव के पंडित की बेटी की शादी इसी साल मई में कदमपुर गांव के युवक के साथ हुई थी. शादी के बाद ससुराल वाले बेटी से 50 हजार की मांग करते थे और दहेज की मांग पूरी करने के लिए उसे प्रताड़ित किया जाता था. इस मामले में आगे बताया गया कि पैसे को लेकर कई बार विवाद भी हुआ और एक महीने पहले पिता बेटी को विदा करवाकर मायके ले आये. वहीं बताया गया है कि मौत से चार दिन पहले ही दामाद ससुराल ले गया था और पिता को शनिवार को गांव के लोगों से पता चला कि बेटी की हत्या कर दी गई है. इस मामले में पिता ने सच्चाई जानने के लिए दामाद को फोन किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और शक होने पर पिता बेटी के ससुराल आया तो देखा कि "घर के लोग बेटी के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे हैं. बेटी का शव देखकर पिता स्तब्ध रह गये और ससुराल वालों को रास्ते में रोककर पुलिस को घटना की जानकारी दी. " इस मामले में सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव कब्जे में ले लिया और अब थाना प्रभारी पिंकू यादव का कहना था कि, "महिला की जहर देकर हत्या की गई है. दहेज हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया है. "
आजकल आने वाले अपराध के किस्से सभी के लिए हैरानीभरे बने हुए हैं. ऐसे में जो मामला हाल ही में सामने आया है वह दुमका का है. इस मामले में जिले के जामा थाना क्षेत्र के कदमपुर गांव में बीते शनिवार की देर शाम दहेज के लिए नवविवाहिता उन्नीस वर्षीया महिला की दहेज के लालचियों ने जहर देकर जान ले ली है. इस मामले में मौत के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे ससुराल वालों को मायके के लोगों ने रोक लिया और पुलिस ने उसी समय कार्रवाई करते हुए पति को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में मिली जानकारी के तहत देवघर जिले के पालोजोरी थाना क्षेत्र के लुसिया गांव के पंडित की बेटी की शादी इसी साल मई में कदमपुर गांव के युवक के साथ हुई थी. शादी के बाद ससुराल वाले बेटी से पचास हजार की मांग करते थे और दहेज की मांग पूरी करने के लिए उसे प्रताड़ित किया जाता था. इस मामले में आगे बताया गया कि पैसे को लेकर कई बार विवाद भी हुआ और एक महीने पहले पिता बेटी को विदा करवाकर मायके ले आये. वहीं बताया गया है कि मौत से चार दिन पहले ही दामाद ससुराल ले गया था और पिता को शनिवार को गांव के लोगों से पता चला कि बेटी की हत्या कर दी गई है. इस मामले में पिता ने सच्चाई जानने के लिए दामाद को फोन किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और शक होने पर पिता बेटी के ससुराल आया तो देखा कि "घर के लोग बेटी के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे हैं. बेटी का शव देखकर पिता स्तब्ध रह गये और ससुराल वालों को रास्ते में रोककर पुलिस को घटना की जानकारी दी. " इस मामले में सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव कब्जे में ले लिया और अब थाना प्रभारी पिंकू यादव का कहना था कि, "महिला की जहर देकर हत्या की गई है. दहेज हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया है. "
नई दिल्ली (भाषा)। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीआरपीएफ के काफिले पर घातक हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा करने और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का जायजा लेने कल से राज्य का दो दिन का दौरा करेंगे। सिंह जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, शीर्ष असैनिक, पुलिस एवं सैनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होंगे और राज्य में मौजूद हालात, खास कर शनिवार को पुलवामा जिले में आतंकवादी हमले के बाद पैदा हालात का जायजा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय गृहमंत्री को उग्रवाद और साथ ही सरहद पार से घुसपैठ से निबटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की ओर से किए जा रहे विभिन्न उपायों से अवगत कराया जाएगा। गृहमंत्री की ओर से गठित तीन लोगों की एक टीम अभी राज्य का दौरा कर रही है और यह पता लगा रही है कि कहीं पुलवामा की घटना में कोई चूक तो नहीं हुई है। सिंह की बैठक में जम्मू-कश्मीर में अर्धसैनिक बलों के आवागमन के दौरान अपनाए जा रहे तौर-तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी। केंद्रीय गृहमंत्री दो जुलाई से शुरु होने वाली अमरनाथ यात्रा के दो मार्गों पर किए गए सुरक्षा प्रबंधों का भी जायजा लेंगे।
नई दिल्ली । केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीआरपीएफ के काफिले पर घातक हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा करने और अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का जायजा लेने कल से राज्य का दो दिन का दौरा करेंगे। सिंह जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, शीर्ष असैनिक, पुलिस एवं सैनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होंगे और राज्य में मौजूद हालात, खास कर शनिवार को पुलवामा जिले में आतंकवादी हमले के बाद पैदा हालात का जायजा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय गृहमंत्री को उग्रवाद और साथ ही सरहद पार से घुसपैठ से निबटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की ओर से किए जा रहे विभिन्न उपायों से अवगत कराया जाएगा। गृहमंत्री की ओर से गठित तीन लोगों की एक टीम अभी राज्य का दौरा कर रही है और यह पता लगा रही है कि कहीं पुलवामा की घटना में कोई चूक तो नहीं हुई है। सिंह की बैठक में जम्मू-कश्मीर में अर्धसैनिक बलों के आवागमन के दौरान अपनाए जा रहे तौर-तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी। केंद्रीय गृहमंत्री दो जुलाई से शुरु होने वाली अमरनाथ यात्रा के दो मार्गों पर किए गए सुरक्षा प्रबंधों का भी जायजा लेंगे।
- रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप (Reliance Future Deal) के बीच हुई 24 हजार करोड़ की डील को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ा झटका लगा है और इसके खिलाफ याचिका दायर करने वाली अमेजन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फिलहाल, इस डील पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के 24 हज़ार करोड़ के विलय सौदे पर रोक लगा दी है साथ ही सिंगापुर में आया इमरजेंसी आर्बिट्रेशन फैसला भारत में लागू होगा। जानकारी के लिए बता दें कि कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि सिंगापुर में जो इमरजेंसी आर्बिट्रेशन का फैसला लागू हुआ है, वह भारत में भी जारी रहेगा। क्योंकि सिंगापुर में रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के इस फैसले के खिलाफ रोक लगा दी गई थी। इसके खिलाफ अमेजन ने इस डील को लेकर याचिका कोर्ट में दायर की थी। इससे पहले अमेजन ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस डील के खिलाफ याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
- रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई चौबीस हजार करोड़ की डील को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है और इसके खिलाफ याचिका दायर करने वाली अमेजन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फिलहाल, इस डील पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के चौबीस हज़ार करोड़ के विलय सौदे पर रोक लगा दी है साथ ही सिंगापुर में आया इमरजेंसी आर्बिट्रेशन फैसला भारत में लागू होगा। जानकारी के लिए बता दें कि कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि सिंगापुर में जो इमरजेंसी आर्बिट्रेशन का फैसला लागू हुआ है, वह भारत में भी जारी रहेगा। क्योंकि सिंगापुर में रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के इस फैसले के खिलाफ रोक लगा दी गई थी। इसके खिलाफ अमेजन ने इस डील को लेकर याचिका कोर्ट में दायर की थी। इससे पहले अमेजन ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस डील के खिलाफ याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
देश फिर से कोरोना की चपेट में आता दिख रहा है। एक दिन में कोरोना संक्रमण के 35 हज़ार 871 मामले आए हैं। दिसंबर के शुरुआती दिनों के बाद पहली बार इतने ज़्यादा संक्रमण के मामले आए हैं। 4-5 दिसंबर को इससे ज़्यादा मामले आए थे। देश में अब जो ये संक्रमण के मामले आए हैं उनमें 23 हज़ार से ज़्यादा तो अकेले महाराष्ट्र के हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में कहा था कि महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गई है। देश में इतनी तेज़ी से संक्रमण शुरू हो गया है तो क्या देश में दूसरी लहर नहीं आई है? एक दिन पहले ही बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 'उभरते कोरोना की सेकंड पीक' को रोकना ही होगा। कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे स्तर पर कंटेनमेंट ज़ोन बनाने, प्रतिबंधों को लागू करने जैसे क़दमों को उठाने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि यदि महामारी को अभी नहीं रोका गया तो यह पूरे देश में फिर से फैल जाएगा। प्रधानमंत्री ने जब यह कहा था तब बुधवार को 28 हज़ार 903 कोरोना संक्रमण के मामले आए थे। अब गुरुवार को रिपोर्ट आई है कि एक दिन में संक्रमण का मामला 36 हज़ार के क़रीब पहुँच गया। एक दिन में 172 लोगों की मौत हुई है। देश में अब तक 1 करोड़ 14 लाख 74 हज़ार से ज़्यादा संक्रमण के मामले आ चुके हैं। मौजूदा समय में 2 लाख 52 हज़ार से ज़्यादा संक्रमित लोग हैं। अब तक देश भर में 1 लाख 59 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना की चिंताएँ कितनी अधिक हैं इससे ही समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की ऑनलाइन बैठक में एक प्रस्तुति के दौरान कहा गया है कि 70 ज़िलों में कोरोना के मामलों में 150% की वृद्धि हुई। सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में 60 फ़ीसदी सक्रिय कोरोनो के मामले हैं। बीते कुछ दिनों में महाराष्ट्र के अलावा पंजाब, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं। हालाँकि, संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद देश के कई ज़िलों में सख़्त क़दम भी उठाए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने बीते कुछ दिनों में कई इलाक़ों में फिर से लॉकडाउन लगाया है और कुछ जगहों पर प्रतिबंध बढ़ाए हैं। इन शहरों में नागपुर, पुणे, यवतमाम, अकोला आदि शामिल हैं। नागपुर में 21 मार्च तक लॉकडाउन है जबकि पुणे में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है।
देश फिर से कोरोना की चपेट में आता दिख रहा है। एक दिन में कोरोना संक्रमण के पैंतीस हज़ार आठ सौ इकहत्तर मामले आए हैं। दिसंबर के शुरुआती दिनों के बाद पहली बार इतने ज़्यादा संक्रमण के मामले आए हैं। चार-पाँच दिसंबर को इससे ज़्यादा मामले आए थे। देश में अब जो ये संक्रमण के मामले आए हैं उनमें तेईस हज़ार से ज़्यादा तो अकेले महाराष्ट्र के हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में कहा था कि महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गई है। देश में इतनी तेज़ी से संक्रमण शुरू हो गया है तो क्या देश में दूसरी लहर नहीं आई है? एक दिन पहले ही बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 'उभरते कोरोना की सेकंड पीक' को रोकना ही होगा। कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे स्तर पर कंटेनमेंट ज़ोन बनाने, प्रतिबंधों को लागू करने जैसे क़दमों को उठाने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि यदि महामारी को अभी नहीं रोका गया तो यह पूरे देश में फिर से फैल जाएगा। प्रधानमंत्री ने जब यह कहा था तब बुधवार को अट्ठाईस हज़ार नौ सौ तीन कोरोना संक्रमण के मामले आए थे। अब गुरुवार को रिपोर्ट आई है कि एक दिन में संक्रमण का मामला छत्तीस हज़ार के क़रीब पहुँच गया। एक दिन में एक सौ बहत्तर लोगों की मौत हुई है। देश में अब तक एक करोड़ चौदह लाख चौहत्तर हज़ार से ज़्यादा संक्रमण के मामले आ चुके हैं। मौजूदा समय में दो लाख बावन हज़ार से ज़्यादा संक्रमित लोग हैं। अब तक देश भर में एक लाख उनसठ हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना की चिंताएँ कितनी अधिक हैं इससे ही समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की ऑनलाइन बैठक में एक प्रस्तुति के दौरान कहा गया है कि सत्तर ज़िलों में कोरोना के मामलों में एक सौ पचास% की वृद्धि हुई। सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में साठ फ़ीसदी सक्रिय कोरोनो के मामले हैं। बीते कुछ दिनों में महाराष्ट्र के अलावा पंजाब, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं। हालाँकि, संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद देश के कई ज़िलों में सख़्त क़दम भी उठाए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने बीते कुछ दिनों में कई इलाक़ों में फिर से लॉकडाउन लगाया है और कुछ जगहों पर प्रतिबंध बढ़ाए हैं। इन शहरों में नागपुर, पुणे, यवतमाम, अकोला आदि शामिल हैं। नागपुर में इक्कीस मार्च तक लॉकडाउन है जबकि पुणे में रात ग्यारह बजे से सुबह छः बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है।
'मेरा सिर शर्म से झुक गया', HC के चीफ जस्टिस ने DDA के इस रवैये पर की टिप्पणी. . घटना उस वक्त हुई थी जब सफाईकर्मी सीवर में उतरे थे और बेहोश हो गये थे। इसके बाद सुरक्षा गार्ड उन्हें बचाने के लिए सीवर में गए थे और वो भी बेसुध हो गये थे, बाद में दोनों की मौत हो गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, 'मेरा सिर शर्म से झुक गया'. . . चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी डीडीए के एक बेहद ही शर्मनाक रवैये को लेकर की है। इस साल सीवर की सफाई के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी लेकिन उनके आश्रितों को मुआवजा देने में जिस तरह का रवैया दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने अपनाया उसे अदालत ने पूरी तरह से असहानुभूतिपूर्ण रवैया कहा। अदालत ने 6 अक्टूबर को अपने एक आदेश में कहा था कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को 10-10 लाख रुपये दिये जाए। लेकिन इस आदेश की अवहेलना पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी को यह कहा गया था कि पीड़ितों के परिजनों को पैसे दिये जाएं क्योंकि इन्होंने घर में कमाने वाले सदस्य को खो दिया है। बता दें कि 9 सितंबर को दिल्ली के मुंडका में सफाई करने के लिए सीवर में उतरे एक सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड की जहरीली गैस की वजह से मौत हो गई थी। घटना उस वक्त हुई थी जब सफाईकर्मी सीवर में उतरे थे और बेहोश हो गये थे। इसके बाद सुरक्षा गार्ड उन्हें बचाने के लिए सीवर में गए थे और वो भी बेसुध हो गये थे, बाद में दोनों की मौत हो गई थी। अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। घटना को लेकर न्यूज रिपोर्ट के आधार पर अदालत के प्रयास से ही यह पीआईएल दाखिल की गई थी। अदालत ने डीडीए को पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये देने का आदेश दिया था लेकिन अदालत ने डीडीए के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि अथॉरिटी ने एक पैसा भी नहीं दिया था। हालांकि, दिल्ली सरकार ने दोनों परिवारों को 1-1 लाख रुपये दिये हैं और 9 लाख रुपये 15 दिनों के अंदर दिये जाने की बात कही है। अदालत में चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने कहा, 'हम ऐसे लोग की बात कर रहे हैं जो हम सभी के लिए काम करते हैं ताकि हमारी जिंदगी आरामदेह बनी रहे। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि अथॉरिटी ऐसे लोगों इस तरह डील कर करती है। चीफ जस्टिस ने आगे कहा, 'मेरा सिर शर्म से झुक गया। ' बेंच ने कहा, 6 अक्टूबर से अब 15 अक्टूबर है। जब कोर्ट ने डीडीए को पैसे देने के आदेश दिये थे तो फिर क्यों नहीं ऐसा किया गया? सवाल यह है। अदालत में डीडीए की तरफ से मौजूद वकील ने कहा कि पैसे देने की ड्यूटी दिल्ली सरकार की थी। बेंच ने कहा कि जिम्मेदवारी का जो सवाल है उसे बाद में भी तय किया जा सकता था लेकिन पीड़ित परिवार को कुछ दिया जाना पहले जरूरी था। बेंच ने जब पूछा कि डीडीए का सालाना बजट कितना है तब डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया था कि यह 3,000 करोड़ का है। अदालत की बेंच ने कहा, 'आपके पास 3,000 करोड़ का बजय है और हमने आपसे आग्रह किया कि आप 10 लाख रुपये तुरंत राहत के तौर पर दें तो आप सभी तरह के बहाने लेकर आ गए। बाद में हम जिम्मेदारियां तय कर लेते। हमने आपसे कहा था कि आप उन्हें कुछ आर्थिक मदद दें ताकि उस परिवार को कुछ सहानुभूति मिले जिसने अपने घर के कमाने वाले सदस्य को खोया है। ' अदालत ने अब डीडीए को 15 दिनों के अंदर पीड़ित परिवार को पैसे देने के लिए कहा है।
'मेरा सिर शर्म से झुक गया', HC के चीफ जस्टिस ने DDA के इस रवैये पर की टिप्पणी. . घटना उस वक्त हुई थी जब सफाईकर्मी सीवर में उतरे थे और बेहोश हो गये थे। इसके बाद सुरक्षा गार्ड उन्हें बचाने के लिए सीवर में गए थे और वो भी बेसुध हो गये थे, बाद में दोनों की मौत हो गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, 'मेरा सिर शर्म से झुक गया'. . . चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी डीडीए के एक बेहद ही शर्मनाक रवैये को लेकर की है। इस साल सीवर की सफाई के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी लेकिन उनके आश्रितों को मुआवजा देने में जिस तरह का रवैया दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने अपनाया उसे अदालत ने पूरी तरह से असहानुभूतिपूर्ण रवैया कहा। अदालत ने छः अक्टूबर को अपने एक आदेश में कहा था कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को दस-दस लाख रुपये दिये जाए। लेकिन इस आदेश की अवहेलना पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी को यह कहा गया था कि पीड़ितों के परिजनों को पैसे दिये जाएं क्योंकि इन्होंने घर में कमाने वाले सदस्य को खो दिया है। बता दें कि नौ सितंबर को दिल्ली के मुंडका में सफाई करने के लिए सीवर में उतरे एक सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड की जहरीली गैस की वजह से मौत हो गई थी। घटना उस वक्त हुई थी जब सफाईकर्मी सीवर में उतरे थे और बेहोश हो गये थे। इसके बाद सुरक्षा गार्ड उन्हें बचाने के लिए सीवर में गए थे और वो भी बेसुध हो गये थे, बाद में दोनों की मौत हो गई थी। अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। घटना को लेकर न्यूज रिपोर्ट के आधार पर अदालत के प्रयास से ही यह पीआईएल दाखिल की गई थी। अदालत ने डीडीए को पीड़ितों को दस-दस लाख रुपये देने का आदेश दिया था लेकिन अदालत ने डीडीए के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि अथॉरिटी ने एक पैसा भी नहीं दिया था। हालांकि, दिल्ली सरकार ने दोनों परिवारों को एक-एक लाख रुपये दिये हैं और नौ लाख पंद्रह रुपया दिनों के अंदर दिये जाने की बात कही है। अदालत में चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने कहा, 'हम ऐसे लोग की बात कर रहे हैं जो हम सभी के लिए काम करते हैं ताकि हमारी जिंदगी आरामदेह बनी रहे। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि अथॉरिटी ऐसे लोगों इस तरह डील कर करती है। चीफ जस्टिस ने आगे कहा, 'मेरा सिर शर्म से झुक गया। ' बेंच ने कहा, छः अक्टूबर से अब पंद्रह अक्टूबर है। जब कोर्ट ने डीडीए को पैसे देने के आदेश दिये थे तो फिर क्यों नहीं ऐसा किया गया? सवाल यह है। अदालत में डीडीए की तरफ से मौजूद वकील ने कहा कि पैसे देने की ड्यूटी दिल्ली सरकार की थी। बेंच ने कहा कि जिम्मेदवारी का जो सवाल है उसे बाद में भी तय किया जा सकता था लेकिन पीड़ित परिवार को कुछ दिया जाना पहले जरूरी था। बेंच ने जब पूछा कि डीडीए का सालाना बजट कितना है तब डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया था कि यह तीन,शून्य करोड़ का है। अदालत की बेंच ने कहा, 'आपके पास तीन,शून्य करोड़ का बजय है और हमने आपसे आग्रह किया कि आप दस लाख रुपये तुरंत राहत के तौर पर दें तो आप सभी तरह के बहाने लेकर आ गए। बाद में हम जिम्मेदारियां तय कर लेते। हमने आपसे कहा था कि आप उन्हें कुछ आर्थिक मदद दें ताकि उस परिवार को कुछ सहानुभूति मिले जिसने अपने घर के कमाने वाले सदस्य को खोया है। ' अदालत ने अब डीडीए को पंद्रह दिनों के अंदर पीड़ित परिवार को पैसे देने के लिए कहा है।
कमिंस ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "चुनौती यही थी कि डटकर सामना किया जाये और सक्रिय रहा जाये। अगले कुछ दिनों में इसी पर बातचीत होगी। हमने काफी मुश्किल गेंदबाजों का सामना किया। " कमिंस इस बात को लेकर काफी स्पष्ट थे कि उनकी टीम का रक्षात्मक खेल भारतीय पिचों में उन्हें कहीं नहीं ले जा पायेगा।
कमिंस ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "चुनौती यही थी कि डटकर सामना किया जाये और सक्रिय रहा जाये। अगले कुछ दिनों में इसी पर बातचीत होगी। हमने काफी मुश्किल गेंदबाजों का सामना किया। " कमिंस इस बात को लेकर काफी स्पष्ट थे कि उनकी टीम का रक्षात्मक खेल भारतीय पिचों में उन्हें कहीं नहीं ले जा पायेगा।
मनसुख हिरेन की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है. पुलिस को जांच में पता चला है कि मनसुख का फोन उनकी मृत्यु के बाद भी ऑन हुआ था. इस फोन लोकेशन के जरिए पुलिस को गुमराह किया गया. मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली विस्फोटक से भरी कार (Ambani security scare) के मालिक माने जा रहे मनसुख हिरेन की मौत (Mansukh Hiren Death) का रहस्य और गहरा गया है. अब तक क्राइम ब्रांच की टीम इसे आत्महत्या समझ रही थी अब एटीएस ने मनसुख की पत्नी विमला हिरेन की मांग पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है. पत्नी विमला के अनुसार आखिरी बार 4 मार्च की रात मनसुख हिरेन को कांदिवली पुलिस स्टेशन से किसी तावड़े का फोन आया. साढ़े दस बजे वे कांदिवली के लिए निकले. लेकिन 5 मार्च को मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी से बरामद हुआ. इस बीच मनसुख के मोबाइल ट्रेस करने पर उनका आखिरी लोकेशन मुंबई से सटे वसई गांव में मिला. सवाल यह कि कांदिवली के लिए निकले मनसुख वसई कैसे पहुंचे? इसके बाद उनकी लाश मुंब्रा से बरामद हुई. यानी मनसुख की हत्या करके कहीं जानबूझ कर तो मोबाइल वसई में जाकर ऑन नहीं किया गया? मनसुख हिरेन का मोबाइल अब तक नहीं मिला है. लेकिन जो जानकारी सामने आ रही है वो यह कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताई गई मौत की टाइमिंग के बाद मोबाइल ऑन रखा गया था. मोबाइल रात साढ़े ग्यारह बजे तक ऑन रहा. यानी इस बात की आशंका है कि खाड़ी में फेकने से पहले हिरेन की हत्या की गई और पुलिस को भ्रमित करने के लिए जानबूझ कर मोबाइल को ऑन रखा गया. पुलिस का मानना है कि ये मोबाइल कातिल ने जानबूझकर ऑन रखा था जिससे पुलिस को भटकाया जा सके. गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आज मनसुख हिरेन की मौत पर आज जानकारी देते हुए कहा, 'मनसुख हिरेन का शव 5 मार्च को मुंब्रा के रेतीबंदर इलाके से पाया गया. उनकी पत्नी विमला हिरेन की मांग पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी 302, 201, 34 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. एटीएस ने अब तक जांच के सभी कागजात मुंब्रा पुलिस से हासिल कर लिए हैं. एटीएस जांच को सही दिशा में ले जा रही है. जो भी दोषी पाएगा उस पर कार्रवाई होगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि मनसुख की बॉडी दस घंटे तक पानी में रही थी. साथ ही मनसुख के चेहरे, आंख और पीठ पर जख्मों के निशान थे. मनसुख हिरेन की मौत की जांच को लेकर एटीएस पूरे एक्शन में आ गई है. एटीएस यह भी जांच करेगी कि मनसुख के मुंह के अंदर 6-7 रुमाल कैसे गए. क्या वो आवाज नहीं कर सकें इसलिए उनके मुंह में रुमाल डाला गया? आज इस विषय पर विधानसभा में गृहमंत्री अनिल देशमुख जवाब दे सकते हैं. क्या है पूरा मामला? प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर 25 फरवरी की रात एक बजे विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियों कार खड़ी पाई गई. इस घटना के पीछे जैश-उल-हिंद नाम के आतंकी संगठन का नाम आया. लेकिन जैश-उल-हिंद ने इस प्रकरण से किसी भी तरह का संबंध होने की बात से इंकार किया. इस बीच देवेंद्र फडणवीस ने सचिन वजे नाम के जांच अधिकारी के कार्यों पर संदेह जताया. गृहमंत्री अनिल देशमुख ने फिर केस को क्राइम ब्रांच से लेकर एटीएस को सौंप दिया. इसी दौरान कार मालिक मनसुख हिरेन ने बताया था कि उनकी कार चोरी हो गई थी जिसकी उन्होंने शिकायत भी दर्ज करवाई थी. यानी विस्फोटक वाली कार चोरी की थी. फिर कार मालिक मनसुख हिरेन का शव 5 मार्च को मुंबई के मुंब्रा इलाके की खाड़ी में बरामद हुआ. इससे इस प्रकरण में रहस्य गहराता गया. ये भी पढ़ेंः
मनसुख हिरेन की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है. पुलिस को जांच में पता चला है कि मनसुख का फोन उनकी मृत्यु के बाद भी ऑन हुआ था. इस फोन लोकेशन के जरिए पुलिस को गुमराह किया गया. मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली विस्फोटक से भरी कार के मालिक माने जा रहे मनसुख हिरेन की मौत का रहस्य और गहरा गया है. अब तक क्राइम ब्रांच की टीम इसे आत्महत्या समझ रही थी अब एटीएस ने मनसुख की पत्नी विमला हिरेन की मांग पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है. पत्नी विमला के अनुसार आखिरी बार चार मार्च की रात मनसुख हिरेन को कांदिवली पुलिस स्टेशन से किसी तावड़े का फोन आया. साढ़े दस बजे वे कांदिवली के लिए निकले. लेकिन पाँच मार्च को मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी से बरामद हुआ. इस बीच मनसुख के मोबाइल ट्रेस करने पर उनका आखिरी लोकेशन मुंबई से सटे वसई गांव में मिला. सवाल यह कि कांदिवली के लिए निकले मनसुख वसई कैसे पहुंचे? इसके बाद उनकी लाश मुंब्रा से बरामद हुई. यानी मनसुख की हत्या करके कहीं जानबूझ कर तो मोबाइल वसई में जाकर ऑन नहीं किया गया? मनसुख हिरेन का मोबाइल अब तक नहीं मिला है. लेकिन जो जानकारी सामने आ रही है वो यह कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताई गई मौत की टाइमिंग के बाद मोबाइल ऑन रखा गया था. मोबाइल रात साढ़े ग्यारह बजे तक ऑन रहा. यानी इस बात की आशंका है कि खाड़ी में फेकने से पहले हिरेन की हत्या की गई और पुलिस को भ्रमित करने के लिए जानबूझ कर मोबाइल को ऑन रखा गया. पुलिस का मानना है कि ये मोबाइल कातिल ने जानबूझकर ऑन रखा था जिससे पुलिस को भटकाया जा सके. गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आज मनसुख हिरेन की मौत पर आज जानकारी देते हुए कहा, 'मनसुख हिरेन का शव पाँच मार्च को मुंब्रा के रेतीबंदर इलाके से पाया गया. उनकी पत्नी विमला हिरेन की मांग पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी तीन सौ दो, दो सौ एक, चौंतीस के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. एटीएस ने अब तक जांच के सभी कागजात मुंब्रा पुलिस से हासिल कर लिए हैं. एटीएस जांच को सही दिशा में ले जा रही है. जो भी दोषी पाएगा उस पर कार्रवाई होगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि मनसुख की बॉडी दस घंटे तक पानी में रही थी. साथ ही मनसुख के चेहरे, आंख और पीठ पर जख्मों के निशान थे. मनसुख हिरेन की मौत की जांच को लेकर एटीएस पूरे एक्शन में आ गई है. एटीएस यह भी जांच करेगी कि मनसुख के मुंह के अंदर छः-सात रुपयामाल कैसे गए. क्या वो आवाज नहीं कर सकें इसलिए उनके मुंह में रुमाल डाला गया? आज इस विषय पर विधानसभा में गृहमंत्री अनिल देशमुख जवाब दे सकते हैं. क्या है पूरा मामला? प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर पच्चीस फरवरी की रात एक बजे विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियों कार खड़ी पाई गई. इस घटना के पीछे जैश-उल-हिंद नाम के आतंकी संगठन का नाम आया. लेकिन जैश-उल-हिंद ने इस प्रकरण से किसी भी तरह का संबंध होने की बात से इंकार किया. इस बीच देवेंद्र फडणवीस ने सचिन वजे नाम के जांच अधिकारी के कार्यों पर संदेह जताया. गृहमंत्री अनिल देशमुख ने फिर केस को क्राइम ब्रांच से लेकर एटीएस को सौंप दिया. इसी दौरान कार मालिक मनसुख हिरेन ने बताया था कि उनकी कार चोरी हो गई थी जिसकी उन्होंने शिकायत भी दर्ज करवाई थी. यानी विस्फोटक वाली कार चोरी की थी. फिर कार मालिक मनसुख हिरेन का शव पाँच मार्च को मुंबई के मुंब्रा इलाके की खाड़ी में बरामद हुआ. इससे इस प्रकरण में रहस्य गहराता गया. ये भी पढ़ेंः
इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर देश का तीसरा ऐसा शहर बन गया है, जहां बीते दो वर्षो में अंगदान में बढ़ोत्तरी हुई है। सोसाइटी फार आर्गनडोनेशन की संभागायुक्त संजय दुबे की उपस्थिति में रविवार को हुई संभागीय कार्यशाला में बताया गया कि मुम्बई और नई दिल्ली के बाद इंदौर देश का तीसरा शहर है, जहां पर सर्वाधिक अंगदान हुआ है। पिछले दो साल में इंदौर के 26 लोगों ने अंगदान किया है जिससे 80 से अधिक लोगों की जान बची है। इसी वर्ष नवम्बर से इंदौर के एमवाय अस्पताल में बोनमैरो ट्रांसप्लान्ट की प्रक्रिया शुरू होगी। दान में मिलने वाला शरीर यहां पर चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रों के अध्ययन में काम आएगा। कार्यशाला में बताया गया कि भारत में हर वर्ष दो लाख किडनी की आवश्यकता रहती है लेकिन मात्र 25 प्रतिशत ही मिल पाती है। अंगदान के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम स्पेन में चल रहा है। कार्यशाला में संभागायुक्त दुबे ने बताया कि इंदौर में अंगदान के क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। अंगदान करने वाले और दान लेने वाले की आनलाइन पंजीयन की व्यवस्था है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर अंगदान दिए जाने की व्यवस्था है। अंगदाता परिवार की सहमति के बाद मृत व्यक्ति का 24 घंटे में पोस्टमार्टम किया जाता है। उस समय सरकारी डाक्टर मौजूद रहता है। अंगदाता परिवार के दो सदस्यों को आजीवन स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाता है। इसके साथ परिवार के दो सदस्यों का आजीवन मुफ्त इलाज होता है। दान किए गए अंगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल या हवाई अड्डे तक ले जाने के लिए ग्रीन कॉरीडोर बनाया जाता है, इसका आशय है कि उस दौरान संबंधित सड़क पर एंबुलेंस के अलावा अन्य सभी वाहनों का परिवहन बंद रहता है। पुलिस महानिदेशक अजय कुमार शर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्ष में इंदौर में 26 बार ग्रीन करीडोर बनाया गया जिसमें इंदौर ट्रफिक पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डा़ रचना दुबे ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसे कैंसर, डायबिटिज जैसी घातक बीमारी नहीं है, वह अंगदान कर सकता है। अभी पिछले माह केरल में एक तीन वर्षीय बच्ची का अंगदान हुआ। अंगदान से किडनी, लीवर, त्वचा, छोटी आंत पुनः काम में ली जाती है। भारत में किडनी की सर्वाधिक मांग है।
इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर देश का तीसरा ऐसा शहर बन गया है, जहां बीते दो वर्षो में अंगदान में बढ़ोत्तरी हुई है। सोसाइटी फार आर्गनडोनेशन की संभागायुक्त संजय दुबे की उपस्थिति में रविवार को हुई संभागीय कार्यशाला में बताया गया कि मुम्बई और नई दिल्ली के बाद इंदौर देश का तीसरा शहर है, जहां पर सर्वाधिक अंगदान हुआ है। पिछले दो साल में इंदौर के छब्बीस लोगों ने अंगदान किया है जिससे अस्सी से अधिक लोगों की जान बची है। इसी वर्ष नवम्बर से इंदौर के एमवाय अस्पताल में बोनमैरो ट्रांसप्लान्ट की प्रक्रिया शुरू होगी। दान में मिलने वाला शरीर यहां पर चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रों के अध्ययन में काम आएगा। कार्यशाला में बताया गया कि भारत में हर वर्ष दो लाख किडनी की आवश्यकता रहती है लेकिन मात्र पच्चीस प्रतिशत ही मिल पाती है। अंगदान के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम स्पेन में चल रहा है। कार्यशाला में संभागायुक्त दुबे ने बताया कि इंदौर में अंगदान के क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। अंगदान करने वाले और दान लेने वाले की आनलाइन पंजीयन की व्यवस्था है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर अंगदान दिए जाने की व्यवस्था है। अंगदाता परिवार की सहमति के बाद मृत व्यक्ति का चौबीस घंटाटे में पोस्टमार्टम किया जाता है। उस समय सरकारी डाक्टर मौजूद रहता है। अंगदाता परिवार के दो सदस्यों को आजीवन स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाता है। इसके साथ परिवार के दो सदस्यों का आजीवन मुफ्त इलाज होता है। दान किए गए अंगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल या हवाई अड्डे तक ले जाने के लिए ग्रीन कॉरीडोर बनाया जाता है, इसका आशय है कि उस दौरान संबंधित सड़क पर एंबुलेंस के अलावा अन्य सभी वाहनों का परिवहन बंद रहता है। पुलिस महानिदेशक अजय कुमार शर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्ष में इंदौर में छब्बीस बार ग्रीन करीडोर बनाया गया जिसमें इंदौर ट्रफिक पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डा़ रचना दुबे ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसे कैंसर, डायबिटिज जैसी घातक बीमारी नहीं है, वह अंगदान कर सकता है। अभी पिछले माह केरल में एक तीन वर्षीय बच्ची का अंगदान हुआ। अंगदान से किडनी, लीवर, त्वचा, छोटी आंत पुनः काम में ली जाती है। भारत में किडनी की सर्वाधिक मांग है।
कोलकाता, एक दिसंबर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि प्रधानमंत्री के नागरिक सहायता और आपात राहत कोष (पीएम केयर्स) का पैसा कहां गया। बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की भाजपा नीत सरकार की इच्छा से काम नहीं करेगी। चुनाव नजदीक होने की वजह से पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति देश के अन्य कई राज्यों से बेहतर है। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने हैं। उत्तर भारत में चल रहे किसान आंदोलन के बारे में बनर्जी ने दावा किया कि कृषि कानूनों पर किसी भी पार्टी ने भाजपा का साथ नहीं दिया लेकिन वह अड़ी हुई है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कोलकाता, एक दिसंबर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि प्रधानमंत्री के नागरिक सहायता और आपात राहत कोष का पैसा कहां गया। बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की भाजपा नीत सरकार की इच्छा से काम नहीं करेगी। चुनाव नजदीक होने की वजह से पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति देश के अन्य कई राज्यों से बेहतर है। पश्चिम बंगाल की दो सौ चौरानवे विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने हैं। उत्तर भारत में चल रहे किसान आंदोलन के बारे में बनर्जी ने दावा किया कि कृषि कानूनों पर किसी भी पार्टी ने भाजपा का साथ नहीं दिया लेकिन वह अड़ी हुई है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर आंद्रे रसेल (Andre Russell) इन दिनों अबू धाबी टी10 लीग 2022 (Abu Dhabi T10 League 2022) में खेल रहे हैं। इस बीच उनकी एक मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वीडियो को देख उनके फैंस की हंसी नहीं रुक रही है। दरअसल, रसेल ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा की है। इस वीडियो में उन्हें एयरपोर्ट पर देखा जा सकता है। एयरपोर्ट पर अपने पसंदीदा खिलाड़ी को देख सभी फैंस उनके पास आने लगे और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश करने लगे। तभी रसेल कुछ फैंस के साथ तस्वीर खिंचवाकर जल्दी से वहां से मजेदार अंदाज में निकल लेते हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने अपने फैंस से माफी भी मांगी और बताया कि ऐसा जल्दी में होने की वजह से हुआ। वीडियो शेयर करते हुए रसेल ने लिखा, फैंस से प्यार करता हूं लेकिन मैं जल्दी में था। रसेल की इस वीडियो पर इंग्लैंड के खिलाड़ी सैम बिलिंग्स ने भी कमेंट किया है। उन्होंने कमेंट में हंसने वाली इमोजी बनाई है। वहीं फैंस भी इस वीडियो को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। फैंस रसेल की इस वीडियो पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि रसेल काफी मजाकिया क्रिकेटर हैं और उन्हें इस अंदाज में देखकर फैंस को अच्छा लग रहा है। इसके साथ ही उनका कहना है कि वो अपने पसंदीदा क्रिकेटर को आईपीएल 2023 में केकेआर की तरफ से खेलते हुए देखने के लिए काफी उत्साहित हैं। बता दें, आईपीएल 2023 के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स ने आंद्रे रसेल को रिटेन किया है। हालिया टी20 वर्ल्ड कप में आंद्रे रसेल वेस्टइंडीज की टीम में शामिल नहीं थे और यह टीम सुपर 12 के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। अपने खाली समय में उन्होंने अपनी फिटनेस में काफी काम किया है। उनकी हाल ही में कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई थीं जिसमें वो काफी फिट नजर आ रहे थे।
वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर आंद्रे रसेल इन दिनों अबू धाबी टीदस लीटरग दो हज़ार बाईस में खेल रहे हैं। इस बीच उनकी एक मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वीडियो को देख उनके फैंस की हंसी नहीं रुक रही है। दरअसल, रसेल ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा की है। इस वीडियो में उन्हें एयरपोर्ट पर देखा जा सकता है। एयरपोर्ट पर अपने पसंदीदा खिलाड़ी को देख सभी फैंस उनके पास आने लगे और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश करने लगे। तभी रसेल कुछ फैंस के साथ तस्वीर खिंचवाकर जल्दी से वहां से मजेदार अंदाज में निकल लेते हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने अपने फैंस से माफी भी मांगी और बताया कि ऐसा जल्दी में होने की वजह से हुआ। वीडियो शेयर करते हुए रसेल ने लिखा, फैंस से प्यार करता हूं लेकिन मैं जल्दी में था। रसेल की इस वीडियो पर इंग्लैंड के खिलाड़ी सैम बिलिंग्स ने भी कमेंट किया है। उन्होंने कमेंट में हंसने वाली इमोजी बनाई है। वहीं फैंस भी इस वीडियो को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। फैंस रसेल की इस वीडियो पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि रसेल काफी मजाकिया क्रिकेटर हैं और उन्हें इस अंदाज में देखकर फैंस को अच्छा लग रहा है। इसके साथ ही उनका कहना है कि वो अपने पसंदीदा क्रिकेटर को आईपीएल दो हज़ार तेईस में केकेआर की तरफ से खेलते हुए देखने के लिए काफी उत्साहित हैं। बता दें, आईपीएल दो हज़ार तेईस के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स ने आंद्रे रसेल को रिटेन किया है। हालिया टीबीस वर्ल्ड कप में आंद्रे रसेल वेस्टइंडीज की टीम में शामिल नहीं थे और यह टीम सुपर बारह के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। अपने खाली समय में उन्होंने अपनी फिटनेस में काफी काम किया है। उनकी हाल ही में कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई थीं जिसमें वो काफी फिट नजर आ रहे थे।
त्रिपुरा विश्वविद्यालय ज्यादा से ज्यादा विदेशी छात्रों को लुभाने के लिए कई कदम उठा रहा है. कुलपति अंजन कुमार घोष ने मंगलवार शाम कहा, "बांग्लादेश से बड़ी संख्या में छात्र त्रिपुरा विश्वविद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं. हम ज्यादा से ज्यादा बांग्लादेशी छात्रों को लुभाने के लिए एक बड़ी पहल करेंगे. " उन्होंने कहा कि वर्तमान में 13 बांग्लादेशी छात्र त्रिपुरा विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश के 20 और छात्र जल्द ही यहां प्रवेश लेंगे. हम इसके अलावा म्यांमार, नेपाल और भूटान के छात्रों को भी प्रवेश देने की कोशिश कर रहे हैं. " घोष ने कहा कि आदिवासी भाषाओं की मानक और लोकप्रियता में सुधार के लिए विश्वविद्यालय ने इन भाषाओं में पोस्ट ग्रेजुएट, डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें कोकबोरोक, मिजो और गारो भाषाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि त्रिपुरा विश्वविद्यालय में साल 2013 के बाद से ही कुलाधिपति की अनुपस्थिति के कारण दीक्षांत समारोह का आयोजन नहीं किया जा सका है. इस दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 10 केंद्रीय विश्वविद्यालयों का विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया है, जिसमें त्रिपुरा विश्वविद्यालय भी शामिल है. इसमें वित्तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक मामलों की जांच की जाएगी.
त्रिपुरा विश्वविद्यालय ज्यादा से ज्यादा विदेशी छात्रों को लुभाने के लिए कई कदम उठा रहा है. कुलपति अंजन कुमार घोष ने मंगलवार शाम कहा, "बांग्लादेश से बड़ी संख्या में छात्र त्रिपुरा विश्वविद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं. हम ज्यादा से ज्यादा बांग्लादेशी छात्रों को लुभाने के लिए एक बड़ी पहल करेंगे. " उन्होंने कहा कि वर्तमान में तेरह बांग्लादेशी छात्र त्रिपुरा विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश के बीस और छात्र जल्द ही यहां प्रवेश लेंगे. हम इसके अलावा म्यांमार, नेपाल और भूटान के छात्रों को भी प्रवेश देने की कोशिश कर रहे हैं. " घोष ने कहा कि आदिवासी भाषाओं की मानक और लोकप्रियता में सुधार के लिए विश्वविद्यालय ने इन भाषाओं में पोस्ट ग्रेजुएट, डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें कोकबोरोक, मिजो और गारो भाषाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि त्रिपुरा विश्वविद्यालय में साल दो हज़ार तेरह के बाद से ही कुलाधिपति की अनुपस्थिति के कारण दीक्षांत समारोह का आयोजन नहीं किया जा सका है. इस दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने दस केंद्रीय विश्वविद्यालयों का विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया है, जिसमें त्रिपुरा विश्वविद्यालय भी शामिल है. इसमें वित्तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक मामलों की जांच की जाएगी.
नई दिल्लीः अपने बेहतरीन कॉमेडी से लोगों को लॉफ्टर का डोज देने कपिल शर्मा अक्सर कुछ ऐसा करते हैं जिसे देखकर लोगों की हंसी छूट पड़ती है. द कपिल शर्मा शो की पॉपुलैरिटी में जबरदस्त इजाफा हुआ है. एक के बाद एक करके उनके शो में कई सेलेब्स गेस्ट बनकर आ चुके हैं. इस बार उनके शो में मेहमान बनकर टीवी की क्वीन एकता कपूर अपने आने वाले हॉरर-कॉमेडी वेब सीरीज को प्रमोट करने आईं. खास बात ये है कि कपिल के इस शो में एकता के साथ कीकू शारदा, कृष्णा अभिषेक भी आए. लेकिन अपने स्वभाव के अनुसार कपिल अपने इन पुराने साथियों के साथ भी जमकर मस्ती की और उनके टांग खिंचते हुए नजर आए. कृष्णा और कीकू का इंटरव्यू लेने के दौरान बातों ही बातों में कपिल दोनों से पूछते हैंकि आप दोनों इतने बड़े शो का हिस्सा थे और काम कर रहे थे. ऐसे में इसे छोड़कर दूसरी जगह काम करने की क्या जरुरत थी. इस सवाल को पूछने के बाद कपिल हाथों में तलवार लेकर दोनों के पीछे दौड़ पड़ते हैं. जिसके बाद सभी की हंसी छूट पड़ती है. बता दें कि कपिल ने हाल ही में अपने शो The Kapil Sharma Show पर अपनी शादी के बारे में एक रोमांचक बड़ा खुलासा शेयर किया था. कपिल ने कहा कि उनकी शादी में लगभग 5000 मेहमान आए थे, लेकिन वे मुश्किल से 40-50 लोगों को ही जानते थे.
नई दिल्लीः अपने बेहतरीन कॉमेडी से लोगों को लॉफ्टर का डोज देने कपिल शर्मा अक्सर कुछ ऐसा करते हैं जिसे देखकर लोगों की हंसी छूट पड़ती है. द कपिल शर्मा शो की पॉपुलैरिटी में जबरदस्त इजाफा हुआ है. एक के बाद एक करके उनके शो में कई सेलेब्स गेस्ट बनकर आ चुके हैं. इस बार उनके शो में मेहमान बनकर टीवी की क्वीन एकता कपूर अपने आने वाले हॉरर-कॉमेडी वेब सीरीज को प्रमोट करने आईं. खास बात ये है कि कपिल के इस शो में एकता के साथ कीकू शारदा, कृष्णा अभिषेक भी आए. लेकिन अपने स्वभाव के अनुसार कपिल अपने इन पुराने साथियों के साथ भी जमकर मस्ती की और उनके टांग खिंचते हुए नजर आए. कृष्णा और कीकू का इंटरव्यू लेने के दौरान बातों ही बातों में कपिल दोनों से पूछते हैंकि आप दोनों इतने बड़े शो का हिस्सा थे और काम कर रहे थे. ऐसे में इसे छोड़कर दूसरी जगह काम करने की क्या जरुरत थी. इस सवाल को पूछने के बाद कपिल हाथों में तलवार लेकर दोनों के पीछे दौड़ पड़ते हैं. जिसके बाद सभी की हंसी छूट पड़ती है. बता दें कि कपिल ने हाल ही में अपने शो The Kapil Sharma Show पर अपनी शादी के बारे में एक रोमांचक बड़ा खुलासा शेयर किया था. कपिल ने कहा कि उनकी शादी में लगभग पाँच हज़ार मेहमान आए थे, लेकिन वे मुश्किल से चालीस-पचास लोगों को ही जानते थे.
- 1 min ago Jawan- 50 करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी! - 2 min ago मशहूर एक्ट्रेस का हैरान करने वाला खुलासा- 'अगर मैं उनके साथ सोती तो 30 फिल्म कर चुकी होती' Don't Miss! बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों और फिल्मेकरों में शुमार पूजा भट्ट इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है। दरअसल आपको बता दें कि इन दिनों वह Bigg Boss OTT 2 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रही है। इतना ही नहीं उन्हें दर्शक और सभी घरवालों से काफी ज्यादा प्यार मिल रहा है। इस शो के दौरान उन्होंने अपनी टूटी हुई शादी और बच्चों के बारे में भी बात की है। साथ ही साथ उन्होंने अपने पिता मशहूर फिल्ममेकर महेश भट्ट से लेकर अपने शराब की लत के बारे में भी काफी कुछ बताया। दरअसल आपको बता दें कि पूजा भट्ट ने रेस्टोरेंट के मालिक और वीडियो जॉकी मनीष मखीजा के साथ में शादी रचाई थी। लेकिन महज 11 साल में दोनों की शादी टूट गई। उन्होंने इस पर बात करते हुए कहा कि "मेरी शादी को तकरीबन 11 साल हो चुके थे। लेकिन कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। जिंदगी में सिर्फ एक ही मौका मिल पाता है। वह भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक अहम हिस्सा थे। साथ ही वह बहुत अच्छे इंसान भी हैं और हमारे बीच काफी अच्छी बनी भी थी। " जानकारी के लिए आपको बता दें कि पूजा भट्ट ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर बेबीका धुर्वे के साथ में काफी कुछ बातचीत की है। जब बेबीका ने उनसे पूछा कि उन्होंने कभी बच्चों के बारे में क्यों नहीं सोचा? तो इस पर पूजा भट्ट ने जवाब देते हुए कहा कि "मनीषा से अच्छा पिता कोई हो ही नहीं सकता है। उस समय में बच्चों के लिए रेडी नहीं थी। मुझे बच्चों से प्यार है और मुझे बच्चे चाहिए भी। लेकिन उस वक्त मैं बच्चे करने के लिए तैयार नहीं थी। मैं झूठ नहीं बोल सकती हूं। " पूजा भट्ट ने इसी पर आगे यह भी कहा कि जब हम झूठ बोलना शुरू कर देते हैं तो उसके बाद में ब्लेम गेम भी शुरू हो जाता है। लेकिन मैं यह सब नहीं करना चाहती हूं। जो भी था, जब तक था बहुत अच्छा था। जब तक हमने गरिमा थी तब तक हम साथ रहे। लेकिन एक अच्छे नोट पर हम अलग हो गए थे। जानकारी के लिए आपको बता दें कि पूजा भट्ट और मनीष मखीजा ने 2014 में तलाक ले लिया था। पूरी इंडस्ट्री इस बात से वाकिफ है कि पूजा भट्ट अल्कोहल एडिक्ट हो गई थी। लेकिन काफी सालों पहले उन्होंने शराब को एकदम सही जिंदगी से निकाल दिया। बिग बॉस शो में इसी पर बात करते हुए पूजा भट्ट ने बताया कि "ये सब मेरे लिए काफी आसान रहा। मुझे एक दिन मेरे पापा ने मैसेज किया और कहा 'आई लव यू किड'। जिस पर मैंने भी रिप्लाई किया और कहा 'आई लव यू पॉप्स'। जिसके बाद पापा का रिप्लाई आया कि अगर तुम सच में मुझसे इतना प्यार करती हो तो सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखना होगा. ऐसा इसीलिए क्योंकि मैं तुम्हारे अंदर ही जीता हूं। यह मेरे लिए एक वेकअप कॉल थी और उसके बाद में मैंने शराब को हाथ तक नहीं लगाया। "
- एक मिनट ago Jawan- पचास करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी! - दो मिनट ago मशहूर एक्ट्रेस का हैरान करने वाला खुलासा- 'अगर मैं उनके साथ सोती तो तीस फिल्म कर चुकी होती' Don't Miss! बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों और फिल्मेकरों में शुमार पूजा भट्ट इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है। दरअसल आपको बता दें कि इन दिनों वह Bigg Boss OTT दो में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रही है। इतना ही नहीं उन्हें दर्शक और सभी घरवालों से काफी ज्यादा प्यार मिल रहा है। इस शो के दौरान उन्होंने अपनी टूटी हुई शादी और बच्चों के बारे में भी बात की है। साथ ही साथ उन्होंने अपने पिता मशहूर फिल्ममेकर महेश भट्ट से लेकर अपने शराब की लत के बारे में भी काफी कुछ बताया। दरअसल आपको बता दें कि पूजा भट्ट ने रेस्टोरेंट के मालिक और वीडियो जॉकी मनीष मखीजा के साथ में शादी रचाई थी। लेकिन महज ग्यारह साल में दोनों की शादी टूट गई। उन्होंने इस पर बात करते हुए कहा कि "मेरी शादी को तकरीबन ग्यारह साल हो चुके थे। लेकिन कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। जिंदगी में सिर्फ एक ही मौका मिल पाता है। वह भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक अहम हिस्सा थे। साथ ही वह बहुत अच्छे इंसान भी हैं और हमारे बीच काफी अच्छी बनी भी थी। " जानकारी के लिए आपको बता दें कि पूजा भट्ट ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर बेबीका धुर्वे के साथ में काफी कुछ बातचीत की है। जब बेबीका ने उनसे पूछा कि उन्होंने कभी बच्चों के बारे में क्यों नहीं सोचा? तो इस पर पूजा भट्ट ने जवाब देते हुए कहा कि "मनीषा से अच्छा पिता कोई हो ही नहीं सकता है। उस समय में बच्चों के लिए रेडी नहीं थी। मुझे बच्चों से प्यार है और मुझे बच्चे चाहिए भी। लेकिन उस वक्त मैं बच्चे करने के लिए तैयार नहीं थी। मैं झूठ नहीं बोल सकती हूं। " पूजा भट्ट ने इसी पर आगे यह भी कहा कि जब हम झूठ बोलना शुरू कर देते हैं तो उसके बाद में ब्लेम गेम भी शुरू हो जाता है। लेकिन मैं यह सब नहीं करना चाहती हूं। जो भी था, जब तक था बहुत अच्छा था। जब तक हमने गरिमा थी तब तक हम साथ रहे। लेकिन एक अच्छे नोट पर हम अलग हो गए थे। जानकारी के लिए आपको बता दें कि पूजा भट्ट और मनीष मखीजा ने दो हज़ार चौदह में तलाक ले लिया था। पूरी इंडस्ट्री इस बात से वाकिफ है कि पूजा भट्ट अल्कोहल एडिक्ट हो गई थी। लेकिन काफी सालों पहले उन्होंने शराब को एकदम सही जिंदगी से निकाल दिया। बिग बॉस शो में इसी पर बात करते हुए पूजा भट्ट ने बताया कि "ये सब मेरे लिए काफी आसान रहा। मुझे एक दिन मेरे पापा ने मैसेज किया और कहा 'आई लव यू किड'। जिस पर मैंने भी रिप्लाई किया और कहा 'आई लव यू पॉप्स'। जिसके बाद पापा का रिप्लाई आया कि अगर तुम सच में मुझसे इतना प्यार करती हो तो सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखना होगा. ऐसा इसीलिए क्योंकि मैं तुम्हारे अंदर ही जीता हूं। यह मेरे लिए एक वेकअप कॉल थी और उसके बाद में मैंने शराब को हाथ तक नहीं लगाया। "
खरगोन लोकसभा क्षेत्र में 19 मई को मतदान है. कांग्रेस बीजेपी दोनों ही प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत यहां झोंक दी है. आज पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश में आख़िरी सभा कर माहौल बीजेपी के पक्ष में करने की कोशिश की है. क्षेत्र से 7 उम्मीदवार आपना भाग्य आजमा रहे हैं लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस के गोविन्द मुजाल्दा और भाजपा के गजेन्द्र सिंह पटेल के बीच है. हाल ही में करीब 5 माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में बडवानी को छोड़कर सभी विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस का कब्जा हो गया. लेकिन भाजपा की गठन क्षमता और मोदी फैक्टर के कारण चुनाव में कांटे की टक्कर हो रही है. हार जीत किस पार्टी की होगी इसका अभी अनुमान लगाना मुश्किल लग रहा है. कोई कसर नहीं छोड़ी. खरगोन लोकसभा क्षेत्र में कुल - 1834012 मतदाता हैं. इनमें से पुरुष मतदाता - 92878 औऱ महिला मतदाता -909212 हैं. 19 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. संसदीय क्षेत्र में फस्ट टाइम वोटर की तादाद - 70141 है, इस बार पूरे संसदीय क्षेत्र में कुल 2350 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. खरगोन संसदीय क्षेत्र में खरगोन ज़िले की चार खरगोन, कसरावद, भगवानपुरा और महेश्वर और बड़वानी ज़िले की बड़वानी, राजपुर , सेंधवा और पानसेमल विधानसभा शामिल हैं. तीन साल पहले जिला अस्पताल से वीआरएस लेकर डाँ गोविन्द मुजाल्दा हाल ही में कांग्रेस से जुड़े और टिकट लाकर सबको चौका दिया था. लेकिन सामाजिक क्षेत्र का बड़ा नाम होने के कारण डाँ मुजाल्दा को अच्छा खासा समर्थन मिल रहा है. कमलनाथ सरकार में इस क्षेत्र से तीन मंत्री डॉ विजयलक्ष्मी साधौ, सचिन याद और बाला बच्चन हैं. जिले के प्रभारी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा हैं. डॉ गोविन्द मुजाल्दा के समर्थन में राहुल गांधी सभा कर चुके हैं. उसके बाद वो अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं. मुजाल्दा का कहना है कांग्रेस के घोषणा पत्र में जो वादे किए गए हैं उनके आधार पर जीत तय है. मोदी लहर में वर्ष 2014 में करीब 2 लाख 58 हजार मतो से जीतने वाले भाजपा के सांसद सुभाष पटेल का टिकट काटकर इस बार पार्टी ने प्रदेश भाजपा आदिवासी मोर्चा अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह पटेल को टिकट दिया है. भाजपा को उम्मीद है की विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद गजेन्द्र पटेल कांग्रेस से कड़ा मुकाबला करने में कामयाब रहेंगे. .
खरगोन लोकसभा क्षेत्र में उन्नीस मई को मतदान है. कांग्रेस बीजेपी दोनों ही प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत यहां झोंक दी है. आज पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश में आख़िरी सभा कर माहौल बीजेपी के पक्ष में करने की कोशिश की है. क्षेत्र से सात उम्मीदवार आपना भाग्य आजमा रहे हैं लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस के गोविन्द मुजाल्दा और भाजपा के गजेन्द्र सिंह पटेल के बीच है. हाल ही में करीब पाँच माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में बडवानी को छोड़कर सभी विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस का कब्जा हो गया. लेकिन भाजपा की गठन क्षमता और मोदी फैक्टर के कारण चुनाव में कांटे की टक्कर हो रही है. हार जीत किस पार्टी की होगी इसका अभी अनुमान लगाना मुश्किल लग रहा है. कोई कसर नहीं छोड़ी. खरगोन लोकसभा क्षेत्र में कुल - अट्ठारह लाख चौंतीस हज़ार बारह मतदाता हैं. इनमें से पुरुष मतदाता - बानवे हज़ार आठ सौ अठहत्तर औऱ महिला मतदाता -नौ लाख नौ हज़ार दो सौ बारह हैं. उन्नीस थर्ड जेंडर मतदाता हैं. संसदीय क्षेत्र में फस्ट टाइम वोटर की तादाद - सत्तर हज़ार एक सौ इकतालीस है, इस बार पूरे संसदीय क्षेत्र में कुल दो हज़ार तीन सौ पचास मतदान केंद्र बनाए गए हैं. खरगोन संसदीय क्षेत्र में खरगोन ज़िले की चार खरगोन, कसरावद, भगवानपुरा और महेश्वर और बड़वानी ज़िले की बड़वानी, राजपुर , सेंधवा और पानसेमल विधानसभा शामिल हैं. तीन साल पहले जिला अस्पताल से वीआरएस लेकर डाँ गोविन्द मुजाल्दा हाल ही में कांग्रेस से जुड़े और टिकट लाकर सबको चौका दिया था. लेकिन सामाजिक क्षेत्र का बड़ा नाम होने के कारण डाँ मुजाल्दा को अच्छा खासा समर्थन मिल रहा है. कमलनाथ सरकार में इस क्षेत्र से तीन मंत्री डॉ विजयलक्ष्मी साधौ, सचिन याद और बाला बच्चन हैं. जिले के प्रभारी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा हैं. डॉ गोविन्द मुजाल्दा के समर्थन में राहुल गांधी सभा कर चुके हैं. उसके बाद वो अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं. मुजाल्दा का कहना है कांग्रेस के घोषणा पत्र में जो वादे किए गए हैं उनके आधार पर जीत तय है. मोदी लहर में वर्ष दो हज़ार चौदह में करीब दो लाख अट्ठावन हजार मतो से जीतने वाले भाजपा के सांसद सुभाष पटेल का टिकट काटकर इस बार पार्टी ने प्रदेश भाजपा आदिवासी मोर्चा अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह पटेल को टिकट दिया है. भाजपा को उम्मीद है की विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद गजेन्द्र पटेल कांग्रेस से कड़ा मुकाबला करने में कामयाब रहेंगे. .
तथा प्रौढ़ अभिव्यक्ति दिखाई देती है। काव्य और दर्शन अब अलग-अलग नही रह जाते और न कवि किसी विचार को भावना पर आरोपित कर उसे बांझिल ही करता है । काव्य और दर्शन का समन्वय 'लहर' के गीतों की विशेषता है। जीवन के अनेक अनुभवों को अपने अध्ययन के साथ कवि प्रस्तुत करता है। अब भी उसके हृदय में स्मृतियाँ हैं किन्तु प्रेमी उनमें उलझकर नहीं रह जाता, वरन् जीवन-पथ पर अग्रसर होता है। अपनी आत्मकथा के विषय में कहते हुए भी वह संयत है और व्यर्थ ही अतीत की भूलभुलइयों में नहीं पड़ता। अपनी आन्तरिक भावना से इस विशाल विश्व की माप करते हुए कवि एक ऐसी भावभूमि पर पहुँची प्रतीत होता है जहाँ समस्त वमुन्धरा ही उसका क्षेत्र बन जाती है। आख्यानक कविताओं में निहित विचारधारा एक चिन्तनशीन कवि का ही कार्य हो सकती है। 'अशोक की चिन्ता में बौद्ध दर्शन की छाया है, किन्तु करुणा को अधिक महत्त्व दिया गया। 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय उसका मूल स्वर है। 'प्रलय की छाया प्रसाद की सर्वोत्तम कविताओं में है । नारी का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण उसके भावों में पल-पन्न परिवर्तित रूप को लेकर अत्यन्त सजीव है । कवि एक चित्रकार की भाँति दिखाई ढंत है, जो भाषा के माध्यम से मनोभावना का अंकन करना चाहता है । कवि ने कमला में 'पराजित मौन्दर्य की रानी' की प्राण प्रतिष्ठा कर दी। सम्पूर्ण चित्र तूलिका के वर्णो से जित है। आरम्भ से अन्त तक कवि एक मादक वातावरण जीवित रखता है और उमी के भीतर से सौन्दर्य और नारी - जीवन की विडम्वना झाँकती है। क्षण-क्षण में परिवर्तित चचना सुन्दरी के मनोभावो को सजग कन्नाकार ने अंकित किया है । 'लडर' का गीतकार अधिकांश रूपो में सफल है। 'बीती विभावरी जाग री', 'मेरी आँखा की पुतली में तू बनकर प्राण समा जा रे', 'ले चल वहाँ भुलावा देकर मेरे नाविक धीरे-धीर' आदि गीत हिन्दी के प्रतिनिधि गीतों के रूप मे रक्खे जा सकते है । नाटककार के रूप में प्रसाद का व्यक्तित्व विशिष्ट है, किन्तु इस अवसर पर व कवि हृदय की ही अभिव्यक्ति करते हैं। भावुक पात्रो की योजना के अतिरिक्त गीतों में भी भावनामयता का प्राधान्य है। गीत पात्रों की मनोदशा का परिचय देते है. यद्यपि कथानक के क्रमिक विकास में उनका अधिक सम्बन्ध नहीं रहता । इनमें विभिन्न प्रकार की भावनाओं का समावेश हुआ, किन्तु अधिकांश प्रणय गीत हैं और उनका उद्देश्य पात्रों के अन्तरतम का प्रकाशन है। 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' आदि कतिपय राष्ट्रीय भावना से अनुप्राणित गीतों के अतिरिक्त अन्य गीतों में व्यक्तिगत अनुभूतियाँ ही प्राप्त होती हैं। देवसेना, मानविका के साथ मातृगुप्त आदि को भी गीतों से प्रेम है और वे भाव-विभोर होकर गाते है । शैली की दृष्टि से इन गीतों में संगीतमयता है और इन्हें शास्त्रीय स्वर-लिपि में बाँधा जा सकता है। नाटकों में प्रसाद ने गीतिकाव्य के कई प्रयोग किये और कई गीतों को उनकी प्रतिनिधि रचनाओं के अन्तर्गत रक्खा जा सकता है। 'हे लाज भर सौन्दर्य बता दो', 'आह वेदना 334 / प्रसाद का काव्य मिनी विढाई' आदि गीत कवि की सुन्दर सृष्टि है। नाटको म प्रयागो के कारण प्रसाद 'कामायनी' का भी गीति-तत्त्व में भर सकं । उनकं गीतो मे इतनी शक्ति है कि वे कंवल भावोच्छ्वाम बनकर नही रह जाते, उनमे चिन्तन का भी समावश हा जाता है। 'कामायनी' प्रमाद के सम्पूर्ण व्यक्तित्व से निर्मित है। उसमें कवि की कन्ना का चरमोत्कर्ष है और वह समग्र जीवन चिन्तन से अनुप्राणित है। इस महाकाव्य की दार्शनिक रेखाएँ आरम्भ से ही प्राप्त होती हैं और कवि ने इन्ही को विकसित किया । 'चित्राधार' में शिव के प्रति भक्ति-भावना का परिचय प्राप्त होता है । 'प्रेम पथिक' मे भी 'शिव समष्टि' की चर्चा है। कुलगत शैव भावना को क्रमशः प्रसाद ने एक जीवन दर्शन में परिणत किया । 'कामायनी' में इच्छा, ज्ञान, क्रिया का समन्वय प्रत्यभिज्ञा दर्शन से प्रेरित है। समरसता तथा आनन्द की कल्पना कवि को यही मे प्राप्त हुई और उसने उन्हें अधिकाधिक व्यावहारिक रूप मे प्रस्तुत किया । 'कामायनी' का मनावैज्ञानिक विश्लपण 'कामना' नाटक में भी दिखाई देता है। पात्र एक विशेष मनोविकार का प्रतिनिधित्व करते है और अन्त मे आनन्द की प्रतिष्ठा होती है । मानवीय भावनाओं के प्रति प्रमाद प्रारम्भ से ही मजग रहे और उन्होंने भावना का अकन करने में सफलता प्राप्त की। 'कामायनी' का कवि मानव मन की व्याख्या करता है और अन्त में उनम आनन्द की प्रतिष्ठा कराता है । उममं कृतिकार का एक समन्वयवादी दृष्टिकोण रहा है और हृदय - बुद्धि, नारी-पुरुष आदि का मिलाना चाहता है है । ममरसता अथवा समन्वय से आनन्द का सृजन होना है। इस आनन्द को मानवता के कल्याण में नियोजित करना रचनाकार का मुख्य उद्देश्य है। प्रसाद एक मानववादी क रूप मे 'कामायनी' म आते है जो जीवन को सर्वाग सम्पूर्ण तथा मानवता को मुखी बनाने में प्रयत्नशील है । समरमा समस्याओं का उत्तर देती है। व्यक्तिगत अनुभूतियो से ऊपर उठकर 'कामायनी' के कवि ने विचार किया । जीवन की प्रहेलिका पर उन्होन अपना मन्तव्य दिया । भावना क्षेत्र मे कामायनीकार व्यापक दृष्टिकोण लंकर प्रस्तुत हुआ । कला की दृष्टि में 'कामायनी' का 5वि प्रौढ है। उसकी भाग्ग और कल्पना भावना को वहन कर ले जाती है। वह एक सजग कन्नाकार की भाँति विश्वास कं साथ आगे बढ़ता है। काव्य बिम्ब के प्रति प्रसादजी की रुचि आरम्भ में ही थी 'कामायनी' मे उसका विशद रूप है। मनु, श्रद्धा, इटा के चित्र प्रस्तुत करन में रूप, गुग, भाव का अकन कवि कर देता है। प्रकृति और मन की विभिन्न अवस्था को चित्रित करने में भी वह कशल है। काव्य और चिन्तन के मयोग से निर्मित 'कामायनी' प्रसाद के महान् कृतित्व का प्रतिनिधित्व करती है । प्रमाद निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर रहं । आरम्भ की वैयक्तिक चेष्टाओ का क्रमशः उन्होने उदात्तीकरण किया और अन्त में उनका अधिक निर्वैयक्तिक पक्ष सम्मुख आया । महान् कलाकार की भाँति उन्होंने अपनी व्यक्तिगत भावनाओ पर विजय प्राप्त प्रमाउ काव्य की मूल चंतना / 335 की और उनका स्वर जगत से एकाकार हुआ । अपनी विकासशील प्रवृत्तियों के कारण प्रमाद सम्पूर्ण सामग्री का उपयोग करते गये । प्रारम्भ में उनमे भावना का आवेग अधिक था; धीरे-धीरे चिन्तन-मनन के द्वारा बौद्धिकता आई। गेटे के विषय मे भी हेनरी थॉमस ने लिखा है : "वीमर मे आकर उसके यौवन का ताप कम हो गया । अब वह ऐसा विद्रोही न रहा जो ससार को नष्ट कर देना चाहता हो। वह एक दार्शनिक हो गया, जो उसे समझने का प्रयत्न कर रहा है ।" 'सारांज आफ वर्थर' से लेकर 'फाउस्ट' तक उसके जीवन की एक महान् साधना छिपी हुई है। प्रमाद के आरम्भिक और अन्तिम चरण के मध्य अनेक प्रयोग होते है जिनके द्वारा वे 'कामायनी' की महानता तक आ सक । भावना की दृष्टि से उनका क्षेत्र अधिकाधिक विस्तीर्ण होता गया और कला क्रमशः प्रौढ हांती गयी । प्रसाद ने अपने जीवनानुभव तथा अध्ययन को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया । कल्पना और अनुभूति कं योग से उन्होंने जिन आदर्शो का निर्माण किया उनमे जीवन दर्शन को सन्निहित करने का प्रयत्न है । नारी का सर्वोत्कृष्ट स्वरूप श्रद्धा है। मनु उन्धान पतन से भरा प्राणी है जिसकी आकाक्षा ऊपर उठने की रहती है। प्रमाद ने 'ऑसू' में व्यक्तिगत प्रेम-भावना को एक व्यापक धरातल पर प्रस्तुत किया और उनकी कल्पना समार की करुणा को भी अपनाती गयी । 'लहर' के 'बौद्ध दर्शन' से प्रभावित गीतो मे उनका अधिक स्पष्ट स्वरूप सम्मुख आता हे । प्रमाद के जीवन दर्शन की पृष्ठभूमि सास्कृतिक अवश्य है किन्तु वह युग की चेतना का साथ लेकर चलती हे । समग्मता, आनन्द्रवाद, श्रद्धामय नारी आदि का नवीन रूप उन्होंने प्रस्तुत किया । प्रमाद कार भानावास अथवा भावुकता पर जीवित रहनेवालं कवि नहीं है। उनका काव्य जीवन से प्रेरणा लेकर उसी के लिए कार्य करता है । जीवन का उन्होंने दृढता के साथ अपनी भावना से समन्वित किया और कतिपय समस्याआ पर अपना मन्तव्य देते गये । जीवन के प्रति उनकी गहरी आस्था है और वे उसका उपभाग आवश्यक समझते है । प्रसाद का जीवन दर्शन मानवता के कल्याण मे नियोजित होता है । प्रसाद का काव्य अपने युग की चेतना से प्रभावित है। आधुनिक समय की बौद्धिकता, भौतिकवाद तथा विज्ञानवाद के अतिवाद से त्रस्त मानवता के लिए उन्होंने 'कामायनी' मे श्रद्धाजन्य विश्वास और सहृदयता को सम्मुख रखा । 'इडा' सर्ग मे काम कं मुख मे कवि ने ससार की विषमता का वर्णन कराया है। सारस्वत प्रदेश विश्व का प्रतीक-सा बन जाता है। गाधी-युग के प्रसाद सत्य, अहिंसा के साथ व्यावहारिक समरसता और आनन्दवाद को भी उपस्थित करते है । आधुनिक युग का सघर्ष केवल दो राष्ट्रो अथवा शक्तियों के मध्य नही है। कवि ने इस समस्या के मूल मे जाकर विचार किया । वास्तव मे मानव की प्रवृत्तियाँ ही आपस मे मघर्ष कर रही है। उसके मन मस्तिष्क मे निरन्तर युद्ध चल रहा है ( इडा सर्ग ) । नारी-पुरुष, आदर्श यथार्थ, मन-मस्तिष्क में समन्वय स्थापित करके प्रसाद ने आनन्द को प्रतिष्ठित किया। 336 / प्रसाद का काव्य भौतिकवाद मे पनी हुई सारस्वत प्रदेश की प्रजा ने स्वयं अपने नियामक मनु के विरुद्ध विद्रोह किया था । अन्त में श्रद्धा द्वारा स्थिति में सुधार होता है। श्रद्धा वह कल्याणकारिणी शक्ति है जिसमे कवि ने आधुनिक युग की अधिकाश समस्याओ का उत्तर दिया । राजनीति में होनेवाला राजा प्रजा का सघर्ष भी कामायनी में होता है। इस अवसर पर दोनो मे समन्वय पर प्रसाद ने अधिक जोर दिया । युग की चतना को ज्यो- ज्यो वे पहचानते गये उनका स्वर अधिक बौद्धिक होता गया और उन्होंने अपने मानवीय दृष्टिकोण को सामने रखा । प्रसाद इतिहास को पृष्ठभूमि में रखकर आगे बढ़ते है। देश की संस्कृति और परम्परा के आधार पर व नव-निर्माण मे सन्नग्न होते है । नाटको को उन्होने इस ऐतिहासिक सास्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रमुख विषय बनाया । प्रसादजी अपने साहित्य के द्वारा एक ओर यदि युग की चेतना को प्रस्तुत करना चाहते है तो साथ ही वे एक सास्कृतिक पुनरुत्थान की भी कामना करते है । प्रसाद-काव्य का अवलांकन करने पर अनेक बिखरे हुए सूत्र प्राप्त होते हैं जिनमे कवि की विचारधारा सन्निहित है। करुणा के महत्त्व को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने 'करुणालय' की रचना की । करुणा दर्शन की मूल प्रेरणा कवि को बौद्ध दर्शन से प्राप्त हुई । ससार के प्रत्येक प्राणी पर करुणा करने का सन्देश वे देते है। देश का स्वाभाविक गर्व होते हुए भी प्रसाद मे सहिष्णुता की व्यापक भावना है जो उन्हे मानवीयता कं विस्तृत धरातल पर प्रतिष्ठित करती है। 'चन्द्रगुप्त' की कार्नेलिया 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' का गान गाती है । 'स्कन्दगुप्त' का मातृगुप्त आर्यजाति के गौरव का गान करता है। देश के प्रति कवि का अनुराग है किन्तु वह सम्पूर्ण मानव जाति की कल्पना एक कुटुम्ब के रूप में करता है । जगत जीवन के विषय मे कवि ने सन्देश दिये है जिनके मूल में एक दार्शनिक कवि का चिन्तन बोलता है । व्यापक भावना के साथ प्रसाद मे कलात्मक परिपक्वता है । वे प्रवन्धकार तथा गीतकार दोनो रूपो मे सम्मुख आते है । आख्यानक कविताओ मे प्रवन्धकाव्य कं प्रति उनकी अभिरुचि दिखाई देती है, किन्तु 'कामायनी' मे आकर उनकी सम्पूर्ण प्रतिभा मुखर हुई । गीतो म प्रणय, देश प्रेम, दर्शन आदि की भावनाओ को उन्होंने सन्निहित किया । भावना प्रकाशन मे विविध प्रकार के छन्दो का उन्होन प्रयोग किया और इसके लिए उन्हे स्वतन्त्र योजना भी करनी पडी। अतुकान्त कविताओं में उन्होने सफलतापूर्वक कार्य किया । प्रसाद का शब्द-भाण्डार प्रचुर है और संस्कृत के तत्सम शब्द भी उसमे मिलते है। उनकी भाषा एक क्लासिक कलाकार की-सी है जिसमे शब्दो का चरमोत्कर्ष प्राप्त होता है। भाषा के द्वारा कवि ने भावनाओ का परिष्कार किया और वह समस्त अकन सफलतापूर्वक कर गया । उपमा तथा विम्ब-प्रतीक-योजना मे प्रसाद की भौतिक उद्भावनाऍ है। अपनी कल्पना के द्वारा उन्होने नूतन चित्र निर्मित किए और मनोविकारो को भी वे अपनी लेखनी से चित्रित कर सके । प्रसाद प्रायः सकेत से काम लेते है, उन्हे अधिक व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और प्रसाद-काव्य की मूल चेतना / 337 न वे बहुत विस्तार में ही जाते हैं। वे किसी वस्तु के अन्तरान में प्रवेश कर उसके मूल तत्त्व को जानने का प्रयत्न करते हैं। भावना पर जोर देने के कारण वे अलंकरण का अधिक आग्रह नहीं करते । यद्यपि उनकी अभिव्यंजना को सरल नहीं कहा जा सकता, किन्तु उसमे कवि का दृष्टिकोण भावाभिव्यंजक है। उनमें लक्षणा का प्राधान्य है। सास्कृतिक धरातल पर कार्य करने के कारण प्रसाद का साहित्य सामान्य पाठक के लिए किचित कठिन प्रतीत होता है, किन्तु विश्व के महान् कवि होमर, दान्ते, मिल्टन, गेटे, कालिदास के विषय में भी यही कहा जा सकता है। प्रसाद का व्यक्तित्व बहुमुखी है। कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास, निबन्ध आदि क्षेत्रों में उन्होंने कार्य किया । अल्प आयु में ही उन्होंने अनेक रचनाएँ प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसमे सन्देह नहीं कि सम्पूर्ण साहित्य में उनका कवि रूप प्रधानता प्राप्त करता है। नाटको के भावुक पात्र, अनेक गीत, स्वगत भाषण सभी में भावनावान कवि के दर्शन होते हैं । ऐतिहासिक पात्रो को उन्होंने कल्पना के द्वारा नवजीवन प्रदान किया और वे प्राचीन होकर भी इस युग के प्रतीत होते हैं । मातृगुप्त, देवसेना आदि चरित्रां की कल्पना प्रसाद के कवि हृदय द्वारा ही सम्भव थी । कहानियों में भी कल्पना का अश अधिक है और उन्हें गीतात्मक कहानियाँ कहना अधिक उपयुक्त होगा । यथार्थ को प्रस्तुत करने में भी प्रसाद अपने आदर्श का ध्यान रखते है । 'तितली' तथा 'कंकाल' उपन्यामो मे उन्होने समाज की वर्ण-व्यवस्था, धर्म, राजनीति, ग्राम आदि सामयिक समस्याओं पर विचार किया। अधूरा उपन्यास 'इरावती' अपने इस अपूर्ण स्वरूप मे भी साहित्य का गौरव है और उसका आरम्भ ही अत्यन्त काव्यात्मक है, "उसकी आँखे आशाविहीन सन्ध्या और उल्लासविहीन उपा की तरह काली और रतनारी थीं." प्रसाद का बहुमुखी व्यक्तित्व एक चिन्तक और कवि के योग से निर्मित है । प्रसाद के सम्पूर्ण कृतित्व पर एक विहंगम दृष्टि डालने के पश्चात उन्हें विश्व के शीर्ष कवियो के निकट स्थान देना पड़ता है । प्रमाद का साहित्य एक सांस्कृतिक सीमा के अन्तर्गत आता है और उसके प्रसार की भी एक सीमा स्वीकार करनी पड़ती है, किन्तु उसकी मूल चेतना का क्षेत्र व्यापक है। प्रसाद अपने कृतित्व में महान् हैं और श्रेष्ठ रचनाकारों का-सा उनका व्यक्तित्व है। 1. काव्य और कला, पृ 22 2. इगवती, पृ. 2 3. थॉम्पसन मासिज्म एंड पोयट्री, पृ. 58 4. प्रेमशंकर हिन्दी स्वच्छन्दतावादी काव्य, पृ. 203 338 / प्रसाद का काव्य कामायनी : आज के संदर्भ में मुझ जैसे व्यक्ति के लिए जो विद्यार्थीकाल से ही कामायनी का जिज्ञासु पाठक रहा है और जिसने बीस-बाईस वर्ष की अवस्था में उसके विषय में अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की थीं, कामायनी पर नये सिरे से विचार करना एक प्रकार से आत्मपरीक्षा का क्षण है। हर गतिशील वस्तु विकास की प्रक्रिया से गुजरती है और ऐसी स्थिति में यदि कामायनी आचार्य शुक्ल, आचार्य वाजपेयी और नगेन्द्र से होकर अनेकानेक शोधप्रबन्धों से गुजरती हुई मुक्तिबोध, इन्द्रनाथ मदान, नामवरमिंह, रमेश कुन्तल मेघ और रामस्वरूप चतुर्वेदी तक को ललकारती रही है तो यह उसकी गत्यात्मकता का एक प्रमाण है । आधुनिक परिवेश में, नयी कविता के युग में बैठकर, कामायनी पर एक दृष्टि दौड़ाने के पूर्व हमें संक्षप में समीक्षा के उस इतिवृत्त को भी देख जाना चाहिए जो इस काव्य के इर्द-गिर्द उठता-गिरता रहा है। कामायनी का लेखन बीसवीं शती के द्वितीय शतक के उत्तरार्ध में कभी आरम्भ हुआ होगा, क्योंकि मम्पूर्ण चिन्ता मर्ग 'सुधा', अक्तूवर 1928 में प्रकाशित हुआ। 1935 मे इसका लेखन कार्य समाप्त हुआ और लगभग उसी समय इसका प्रकाशन । कामायनी को अपने आरम्भिक क्षणों में आचार्य शुक्ल जैसे प्रतिष्ठित आलोचक की सम्पूर्ण ममता नहीं मिली। साहित्य के इतिहास में कामायनी के कथानक ने कई पृष्ठ ले लिए हैं, जहाँ समीक्षक की वचनबद्धता ले नही मिलती । आचार्य शुक्ल मानते हैं कि यह काव्य बड़ी विशद कल्पनाओं और मार्मिक उक्तियो से पूर्ण है पर वे इड़ा की तुलना में श्रद्धा का पक्ष लेने से इन्कार कर देते हैं । वे कामायनी में मधुचर्या का अतिरेक और रहस्य की प्रवृत्ति को मानवता की पूर्णतया सुव्यवस्थित योजना में बाधक मानते हैं (हिन्दी साहित्य का इतिहास : पृ. 604 ) । कामायनी पर उनका सबसे बड़ा आक्षेप है कि इस विशद काव्य में कोई अन्तर्योजना तथा कोई समन्वित प्रभाव नहीं है । आचार्य शुक्ल छायावाद से जिस आक्रामक मुद्रा में मिले थे और तुलसी को सर्वोपरि स्वीकारने के बाद आधुनिक रूमानी काव्य से संवाद स्थापित करने में उन्हें जो कठिनाई मालूम हुई थी, उसे देखते हुए कामायनी के संबंध में उनका विवेचन एक प्रकार से मध्यमार्ग की तलाश अथवा कामायनीः आज के संदर्भ में / 339 समझौते की कोशिश है । आचार्य शुक्ल जैसा समीक्षक यकायक अपने कदम पीछे नहीं हटा सकता था, पर कामायनी के जीवन दर्शन से अपनी असहमति व्यक्त करते हुए भी उन्होंने सभावनाओ के द्वार खोलनेवाली कृति का गौरव दिया, यह साधारण प्रशंसापत्र नहीं है । कामायनी को एक अन्तराल का लाभ भी मिला और उस पर होनेवाले आक्रमण काफी 'फ्यूज़' हो गये क्योकि हर समर्थ रचना पाठकों को सीधे सम्बोधित कर सकने की सामर्थ्य भी रखती है। जैसा कि छायावाद-संबंधी काव्य-विवेचन से स्पष्ट है, आचार्य शुक्ल को पहली गम्भीर चुनौती उनके शिष्य आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने दी । इस बीच प्रसाद की और भी विवेचनाएँ देखने में आईं पर इन प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करनेवाले आलोचक कामायनी से इतना अभिभूत थे कि उनकी बात प्रभाववादी आलोचना का संस्करण बनकर रह गई । आचार्य वाजपेयी ने कामायनी को छायावाद युग की स्थापना के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहा इसलिए स्वभाव से आधुनिकता के समर्थक और जड़ शास्त्रीय नियमों के विरोधी होते हुए भी उन्होने उसे केवल महत् काव्य ही नहीं प्रमाणित किया; वरन् वे उसे महाकाव्य घोषित करने के लिए काव्यशास्त्र का भी सहारा अनजाने मे ले बैठे । शायद वे शास्त्रियों को उन्हीं के अखाड़े में पछाड़ना चाहते थे, अन्यथा आचार्य वाजपेयी का मुख्य प्रवेय कामायनी को एक महत् काव्य के रूप में व्याख्यायित करना और उसके जीवन दर्शन तथा काव्य-सौन्दर्य को सही परिप्रेक्ष्य में देखना-समझना है। 'जयशंकर प्रसाद' नामक उनकी पुस्तक यों तो प्रसाद-संबंधी उनके समीक्षा - निबन्धों का संकलन है और अनेक स्थलो पर उसमें कामायनी का उल्लेख हुआ है; पर भूमिका अंश, प्रौढ़तर प्रयोग और कामायनी - विवेचन के निबन्ध इस दिशा में विशेष रूप से विचारणीय हैं। कामायनी की व्याख्या में आचार्य वाजपेयी सर्वप्रथम उसके मानवीय जीवनदर्शन का महत्त्व प्रतिपादित करते हैं, क्योंकि वे उसमे 'साहित्यिक प्रगतिशीलता' देखते हैं । वे यह भी मानते हैं कि यदि प्रसादजी में रहस्यवाद है भी, तो वह और उनकी आध्यात्मिक अनुभूति मानव जीवन व्यापार की नींव पर खड़ी है (जयशंकर प्रसादः भूमिका : पृ. 5 ) । मानवीयता की छानबीन करते हुए आचार्य वाजपेयी ने कामायनी को जीवन के गहरे और बहुमुखी घात- प्रतिघातों और विस्तृत जीवनदशाओ में पद-पद पर आनेवाले उद्वेलनों को चित्रित करनेवाला, उन्हें सँभालनेवाला और कला में उन सबको सजीव करनेवाला काव्य माना है। उन्होंने प्रसादजी की शैली, वस्तु संघटन, कथा- निर्माण आदि की भी उत्कृष्टता प्रमाणित की है। आचार्य वाजपेयी ने कामायनी को भीतर-बाहर दोनों ओर से पकड़ने की चेष्टा की। बाहरी पकड़ के लिए शास्त्र तक का सहारा लिया और काव्य की भीतरी पकड़ तो उनकी मूल प्रवृत्ति ही है जिसके परिणाम से वे श्रेष्ठ स्वच्छन्दतावादी समीक्षक स्वीकारे जाते हैं। कामायनी को उसके आरम्भ काल से ही सर्वांग में समझने और उसे स्थापित करने में आचार्यजी ने 340 / प्रसाद का काव्य ऐतिहासिक कार्य किया । डा नगेन्द्र के ममीक्षाग्रन्थ 'कामायनी के अध्ययन की ममग्याएँ' में कामायनी से सम्बद्ध पाँच निबन्ध सकलित हैं। कामायनी को परखने के लिए डा नगेन्द्र ने टो मुख्य अस्त्री का उपयोग किया : काव्यशास्त्र और मनोविज्ञान । कामायनी का महाकाव्यत्व विवचित करते हुए वे भारतीय साहित्यशास्त्र और पाश्चात्य विचारक एबरक्राम्बी दानो का आश्रय लेते हैं। वे उसे 'मानव चेतना का महाकाव्य' कहकर सम्बोधित करना चाहते हैं (कामायनी के अध्ययन की समस्याएँ : पृ 23 ) और लाजाइनम के ढंग पर उसके उदात्त तत्त्व की विशेष सराहना करते है । कामायनी के अगीरम का प्रश्न काव्यशास्त्रीय है और समीक्षक की रसवादी दृष्टि का परिचायक । अन्यथा आज यह प्रश्न गौण माना जाता है कि काव्य का मुख्य रम क्या है। कामायनी म रूपक तत्व का सधान करत हुए, डा नगेन्द्र ने मनोविज्ञान, विशेषतया फ्रायड के असामान्य मनोविज्ञान का सहारा लिया और उसने भारतीय दर्शन का भी प्रवेश कराना चाहा निसका पूर्ण प्रतिप न उनके निबन्ध 'कामायनी की दार्शनिक पृष्ठभूमि मे हुआ है। इस प्रकार डा नगेन्द्र न कामायनी के कुछ पक्षो को उद्घाटित करने की मफल चष्टा की है। छायावाद की विवेचना क क्रम मे अनेक समीक्षको ने कामायनी पर टिप्पणियाँ की और प्रमाद काव्य का अनुशीलन करनेवालो न तो इसका विस्तृत विवेचन भी किया । इनम विश्वविद्यालयो द्वारा प्रस्तुत हानेवाले शोधग्रन्थों की एक लम्बी सूची है । इसमे सन्देह नहीं कि इन प्रगत्नी से कामायनी के पिपंतन कलेवर में वृद्धि हुई और उसका समझने की दिशा में प्रगति हुई। पर आज भी कामायनी के बारे मे अतिम शब्द कह देने का दावा काई ममीक्षक नही कर सकता । अब भी वह चुनोनी बनकर हमारे सामन है, जो उसकी शक्ति का प्रमाण है । जब प्रस्तुत पतिया का लखक प्रमाद क काव्य में गुजर रहा था, तब प्रमाउजी पर कोई शोधग्रन्थ उपनब्ध नहीं था और सभवन शांध की दिशा में वह प्रथम प्रयन्न था । मैन उम समय कामायनी को 'प्रसाद का काव्य म तीन अन्याय दिये थे कामायनी का कथा चक्र जो मनत. शोधपरक है। कामायनी के चिन्तन पर विचार व्यक्त करते हुए उसे मनाविज्ञान, दर्शन, समाजशास्त्र की दृष्टि में देखा गया है । अन्त मे काव्य समार क अन्तर्गत काव्य रूप मे उसकी परीक्षा है। आचार्य वाजपयी की छाया में निर्मित इस शोधप्रबन्ध में मैन कामायनी को उसके सर्वाग में समझना चाहा और काशिश की कि उसे भीतर-बाहर से पहचान सकूँ । कामायनी के पुनर्मूल्याकन की शुरूआत मुकिबोध ने की जब उन्होंने 194546 के 'हम' मे कामायनी पर नयी दृष्टि डालन का यन्न किया । 'कामायनी : एक, पुनर्विचार का पुस्तकाकार प्रकाशन 1961 मे हुआ जिसमे प्रथमतः और अतत के अतिरिक्त तेरह अध्याय है। मुक्तिबांध कामायनी को समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखते कामायनी आज के सदर्भ मे / 341 है और इसे मार्क्सवादी सौन्दर्यशास्त्र के आधार पर प्रस्तुत व्यावहारिक समीक्षा कहा जा सकता है। उनके दो समीक्षाग्रन्थो 'नयी कविता का आत्म-सघर्ष' तथा 'नए साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र' के अतिरिक्त 'एक साहित्यिक की डायरी मे भी मुक्तिबोध की समाजशास्त्रीय चेतना सक्रिय दिखाई देती है। इतिहास की भौतिकवादी दृष्टि के साथ-साथ मनोविज्ञान को लेकर चलने का प्रयत्न मुक्तिबोध मे देखा जा सकता है और आगे चलकर रमेश कुन्तल मेघ ने मिथक और स्वप्न की कामायनी की मनस्मौन्दर्य सामाजिक भूमिका बताकर इसी पथ को प्रशस्त किया । मुक्तिबोध कामायनी को एक 'फैटेमी' मानते हैं अर्थात उसमे केवल कल्पना-भूमि है, यथार्थ नही । वे मनु के चरित्र को प्रसाद से एकाकार करने का हठ करते है । पर कोई भी कवि इस सीमा तक खुद को पात्र के रूप में घटित नही कर देता कि दोनो मे पार्थक्य ही न रहे । तब तो काव्य का उन्नयन पक्ष ही समाप्त हो जायेगा । प्रसाद के जीवन सूत्रो के सहारे मनु का चरित्र खालने की कोशिश मनोविश्लेषण के साथ भी ज्यादती है। पर मुक्तिबोध जब श्रद्धा और इडा मे बुद्धिवादी इटा का पक्ष लेते है तब उनके यथार्थवादी जीवनाग्रह स्पष्ट हो जाते है । यहाँ वे आचार्य शुक्ल के निकट है । इसमे सन्देह नहीं कि कामायनी के पुनर्मूल्याकन म मुक्तिबांध काफी गहराई तक गए हैं और उन्होने इम काव्य के इर्द-गिर्द वननेवाले प्रशसा-व्यूह को छिन्न भिन्न करके उसके समाजशास्त्रीय मूल्याकन की दिशा में एक साहसपूर्ण कदम उठाया । मुनिबोध का यथार्थवादी रख उसकी रहस्यवादिता मे रुष्ट है और वे इमे पलायनवृत्ति मानत है और इमीलिए श्रद्धावाद का विरोध करते है । पर मेरा विचार है कि कामायनी मे प्रसादजी अनास्था को आधुनिक युग का एक अभिशाप मानते है और श्रद्धा अथवा आस्था के द्वारा वे एक जटिल प्रश्न का उत्तर पाना चाहते है । यहाँ उनका आशय अन्य श्रद्धा अथवा मध्यकालीन धार्मिक भक्तिभावना से नहीं है, यह जरूर है कि उनका रुख आदर्शवाडी है, रूमानी है । कामायनी स समाजशास्त्रीय अभ्ययन की जो शुरूआत मुक्तिबाध ने की, उममे नामवर मिह, रमेश कुन्तल मय आदि ने योग दिया । कामायनी का ही नहीं, किसी भी कृति का समाजशास्त्रीय विवेचन एक उपादेय अध्ययन बन सकता है, बशर्ते किसी शास्त्र का उस पर अतिरिक्त आरोपित न कर दिया जाय । मुक्तिबोध की समीक्षा कई स्थलो पर बहुत नकारात्मक हो गई है, इसमें लाभ उठाकर कुन्तल मेघ ने समाजशास्त्र और मनोविज्ञान की दुहरी पगडडियो पर साथ-साथ चलने की कोशिश की और मिथकीय अध्ययन किया । उनका कार्य काफी अकादमिक भी है और वे कई दृष्टियो से कामायनी को देखना- परखना चाहते हैं । काव्य रूप मे इसे महान मानते हुए भी वे शिकायत करते है कि इसम इतिहास को विकृत कर दिया गया है और मिश्रक एक स्वप्नजगत अथवा कल्पना-भूमि मे पर्यवमित हो जाते है । जाहिर है कि ममीक्षक एक प्रतिबद्ध सामाजिकता की माँग कामायनी से करता है जो रूमानी कवि के लिए 342 / प्रसाद का काव्य सम्भव न थी । नामवर मिह और कुन्तल मेघ मुक्तिबोध की तुलना में कामायनी के प्रति अधिक सहिष्णु है। इन सभी की इस शिकायत में समानता है कि प्रमाद आधुनिक सघर्ष से बचकर निकल गए है। मै समझता हूँ कि कामायनी के एक अधिक तटस्थ समाजशास्त्रीय विवेचन की गुजायश अब भी बनी हुई है । कामायनी के पुनर्मूल्याकन की कडी मे दो नाम मुख्य रूप स और लेकर, उस पर नये सिरे से कुछ कहना चाहूँगा । वे दो प्रयत्न है. इन्द्रनाथ मदान और रामस्वरूप चतुर्वेदी । डा. मदान कामायनी को एक असफल कृति कहते है । वे एक ओर तो यह मानते है कि कामायनी के आमुख्य मे कवि ने जो कुछ कह दिया था, उसे प्रमाण मानकर चलने के कारण समीक्षा मे कई पूर्वाग्रह उभरे है, दूसरी ओर वे स्वय सबसे पहले 'आमुख' की दस महत्त्वपूर्ण बातो का लेकर चर्चा आरम्भ करते हैं । वे मनु के व्यक्तित्व के विकास से बहुत सतुष्ट नही प्रतीत होत और उसकी भावुकता पर एतराज करते हैं । डा. मदान का आरोप है कि कामायनी को कवि सँभाल नहीं पाया है, उसमे एक लडखडाहट है जिसके कारण सृजन प्रक्रिया अनेक स्थलो पर अवरुद्ध हुई है। उन्होने एक महत्वपूर्ण सकेत किया है कि कामायनी की अब तक की समीक्षाओं मे समीक्षको ने खुद को आरोपित भी करना चाहा है जिससे उसकी ठीक पहचान नही हो सकी । वे आन्तरिक मरचना के अभाव में इमे एक असफल कृति घोषित करते है यद्यपि वे उस अमाधारणत्व भी देते है, जा उसके महत्त्व की सहज स्वीकृति है। रामस्वरूप चतुर्वेदी कामायनी के पुनर्मूल्याकन को एक अनिवार्य प्रक्रिया मानत है । डा चतुर्वेदी का आग्रह है कि किसी कृति को खण्ड-खण्ड करक देखने की तरकीब ठीक नहीं होती ओर उसे उसकी ममग्रता मे पकड़ना चाहिए । व कामायनी को सश्लिष्ट काव्य विधान का काव्य मानते है ओर उसे महाकाव्य के रूप में परीक्षित करना आवश्यक नहीं समझते ( कामायनी का पुनर्मूल्याकन पृ 19 ) । वे उसक अर्थवार, बिम्वविधान, सास्कृतिक सकट, जीवन-बोध और भाषा-मरचना आदि पर विचार करते हे ओर कामायनी के प्रति हमारी समझ को बढाते है । आज जब हम नयी कविता के दोर के बीच कामायनी स माझान करना चाहते है तो बढने हुए परिवेश मे उससे पूर्ण महानुभूति प्रकट करना कठिन हो जाना है। कामायनी छायावाद युग की कृति है जिसमे हिन्दी स्वच्छन्दतावाद की दो प्रमुख मुद्राएं देखी जा सकती है, सास्कृतिक और रूमानी । यह स्वीकारते हुए भी कि छायावाद मध्यवर्गीय मनोवृत्ति के उदय का काल है, हम मानना होगा कि उन्नीमवी शताब्दी के नवजागरण से उस जाडना अधिक उचित है । इस सास्कृतिक नवजागरण में सामाजिक सुधार की भावना केवन्न उसका वाह्य पक्ष है जो राष्ट्रीयता से भी गहरे ढग मे जुडी है । पर इस सास्कृतिक अभियान का अधिक सूक्ष्म म्वम्प भी है जब भारतीय मनीषा ने अपने इतिहास, धर्म, संस्कृति, साहित्य, कन्ना को नए ढंग से पहिचानने की कोशिश की। कामायनी मे कवि की यह सास्कृतिक दृष्टि निराला के कामायनीः आज के मदर्भ में / 343 समान विद्रोही न होकर किसी मीमा तक परम्परा के पुनर्मूल्याकन पर आधारित है। प्रसाद एक नितान्त प्राचीन कथानक उठाते हैं, जिसके पात्र मनु, श्रद्धा, इडा का उल्लेख ऋग्वेद तक में प्राप्त होता है । मनु मे वैदिक ऋषि के साथ-साथ मनुस्मृतिकार का रूप भी समाया है । विशेषतया जब वे सारस्वत प्रदेश का नियमन करना चाहते है । इसी प्रकार कामायनी की कथा पुराणो तथा शतपथ ब्राह्मण का भी सहारा लेती है। पर कामायनीकार के सामने बराबर यह प्रश्न था कि इस प्राचीन कथा का आधुनिक परिप्रेक्ष्य मे कैसे प्रस्तुत किया जाय । इसके लिए उन्होने सर्वप्रथम मानवीय आधार पर कार्य करना आरम्भ किया और प्राचीन काव्यों की उम प्रचलित परम्परा का निषेध किया जिसमे समस्त चरित्रो को पुण्य-पाप, शुभ-अशुभ, देव दानव के आधार पर विभक्त कर दिया जाता था और मघर्ष के अन्त मे देव पक्ष विजयी माना जाता था । यहाँ तक कि वर्ग-सघर्ष को लेकर चलनवाली समाजवादी कृतियों में भी इमी परम्परा का निर्वाह दूसरे ढंग स किया जाता है, जिसमे सर्वहारा की विजय घोषित करने की अनिवार्यता है । कामायनी देव दानव संघर्ष का साकेतिक चित्रण तो करती है पर दोनो को अपूर्ण मस्कृति मानती है । आरम्भ मे देवताओ की विलासी संस्कृति का चित्रण यद्यपि पुराणो मे वर्णित देव-मस्कृति का भी महारा लेता है पर प्रमाद उसके भयावह परिणाम की अपनी व्याग्या करते है। जो लोग आक्षेप करते है कि यह मामन्तवादी चित्रण है, उन्हें जान लेना चाहिए कि स्थिति की भयावहता दिखाने के लिए यह आवश्यक हे । कामायनी मे देव विलाम के चित्रण के अतिरिक्त शृगारी पक्ष उभारे गए है और चिन्ता मर्ग में सुरभित अचल से जीवन क मधुमय निश्वाम चलने का वर्णन है तथा अभिसार तक के चित्र है अब न कपोलो पर छाया सी पडती मुख की सुरभित भाप मे शिथिल वमन की व्यस्त न होती है अब माप । कामायनी देवताओ को 'विकल वामना का प्रतिनिधि' कहती है और यहाँ हम प्रमाद को, प्रलय को उसके पोराणिक अर्थ से हटाकर उसे एक नयी व्याख्या देने का प्रयत्न करते देख सकते है। प्रलय नियति अथवा प्रारब्ध मात्र नही था । देव-सस्कृति का विलाम उम मीमा तक पहुँच गया था जहाँ उसका विनाश एक अनिवार्य परिणति है। कामायनीकार मानता है कि देव-सस्कृति अपने ही विलास-भार और अहकार मे समाप्त हो गई जैमे बडी मछलियॉ छांटी मछलियों को सजातीय होते हुए भी निगल जाती है : 'भक्षक या रक्षक जो समझो केवल अपने मीन कामायनी देव संस्कृति के विलाम का विस्तृत चित्रण करके उसका पराभव 344 ' प्रसाद का काव्य दिखाने में एक नाटकीय स्थिति उत्पन्न करना चाहती है। अजर अमर तथा स्वयं को चिरन्तन युवा माननेवाली देव-संस्कृति कामधेनु, कल्पवृक्ष, उर्वशी, रम्भा आदि के जगत में स्वयं को परिपूर्ण मानती थी और प्रसादजी की व्याख्या में उसकी अहंवादी प्रवृत्ति का यही मूल कारण था । मनु प्रलय के अनन्तर मानव-संस्कृति का पिता बनकर भी अपने अहं से मुक्त नहीं हो पाता, वह उसके अवचेतन पर छाया है और बराबर उसका पीछा करता है। देव-संस्कृति का विलास और अहंकार दोनों मनु को कई बार भटकाते हैं। वह किलात-आकुलि के साथ हिंसा, आखेट और सोमपान में प्रवाहित होता है। 'ईर्ष्या' सर्ग में गर्भवती श्रद्धा पर भी वह वासनाभरी दृष्टि डालता है। इतना ही नहीं, इसी सर्ग में उसे अपने भावी शिशु से ईर्ष्या होती है। वह इसे 'द्वैत, द्विविधा अथवा प्रेम बाँटने का प्रकार' मानता है और 'पंचभूत की रचना में एक तत्व बनकर' रमण करना चाहता है। 'मन की परवशता को महादुख' कहता हुआ वह अपने ही अहंकार में बंदी है और गर्भवती श्रद्धा को छोड़कर चला जाता है। मनु के अहं- परिचालित व्यक्तित्व की मनोवैज्ञानिक व्याख्या सरलता से की जा सकती है जो एक ओर उसके पुराने देवत्व संस्कार के कारण है, दूसरी ओर प्रसाद उसके माध्यम से आधुनिक मानव को भी बिम्वित करना चाहते हैं। देवत्व-दानवत्व कां कामायनी में दो संस्कृतियों और जीवन दृष्टियों के रूप में चित्रित किया गया है। प्रसाद दोनों को अपूर्ण संस्कृति मानते हैं और मेरा विचार है कि इडा सर्ग में इसके संघर्ष का चित्रण इस आशय से भी किया गया है कि सारस्वत प्रदेश में जो नयी सभ्यता पनपं, वह इतिहास से शिक्षा लेती हुई इन दोनों अतिवादों से मुक्त रहे । प्रसाद ने देव-दानव की अपूर्णता के विषय में संक्षिप्त, पर सार्थक पंक्तियाँ लिखी हैं : दूसरा अपूर्ण अहता में अपने को समझ रहा प्रवीण दांनों का हठ था दुर्निवार, दोनों ही थे विश्वासहीन । यदि दानव-संस्कृति शरीर को अन्तिम सत्य मानकर 'प्राणों की पूजा' में लगी हुई थी तो देवता खुद को 'स्वयंसम्पूर्ण' समझकर उच्छृंखल हो गये थे । देव-संस्कृति की अपूर्णता दिखाकर उसकी नयी व्याख्या करना कामायनी की एक मौलिक और साहसपूर्ण उद्भावना है जो उसे आधुनिकता देती है। प्रसाद की यह मानवीय दृष्टि आदर्शवादी है, रूमानी है, पर अवौद्धिक और नैतिकतावादी नहीं । इसे न जाननेवाले समीक्षकों से कई भूनें हो जाया करती हैं। कामायनी की दृष्टि यथार्थवादी नहीं है, इसका सबूत यह कि जब प्रसाद सारस्वत प्रदेश के माध्यम से नयी औद्योगिक सभ्यता का चित्रण करना चाहते हैं तब उसके विस्तार में कम जाते हैं। वे बुद्धिवाद और भौतिकवाद को उसकी मूल प्रवृत्ति बताते हैं। हमें स्वीकार करना होगा कि आधुनिक कामायनी : आज के संदर्भ में / 345 सभ्यता की जटिलताओ मे प्रवेश करने मे कामायनी को सफलता नहीं मिली और वह साकेतिक दृश्य मात्र प्रस्तुत कर सकी है। काम का शाप आधुनिक मानव के जटिल परिवेश को पूरी तरह उजागर नही कर पाता और केवल कुछ इशारे-भर कर जाता है। इसी प्रकार 'रवप्न' मर्ग मे श्रद्धा सारस्वत प्रदेश का जो जीवन देखती है वह भी वस्तुपरक नही है। इसी सर्ग के अन्त मे और आगामी 'सघर्ष' सर्ग मे मनु और उसकी प्रजा का सघर्ष हल्के हाथो हुआ है, इसमे शक नही । कहने का तात्पर्य यह कि देव-दानव के स्थान पर मानव को प्रतिष्ठित करने का साहसिक यत्न तो कामायनी मे है, पर आधुनिक मानत्र को उसके सश्लिष्ट व्यक्तित्व में प्रस्तुत कर सकने मे अधिक यथार्थवादी दृष्टि अपेक्षित थी, जा कवि की रूमानी दृष्टि के कारण सभव नही । समाजशास्त्र, विशेषतया समाजवादी यथार्थवाद के आग्रही समीक्षक कामायनी में प्रसाद के पक्षपातपूर्ण रवैये पर आर्पान करते हुए कहते है कि श्रद्धा को अतिरिक्त महत्त्व मिला है । काव्य का नामकरण कामायनी के आधार पर होने से श्रद्धा नायिका है ओर वह महत्वपूर्ण स्थान पर है। पर इस संबंध में यह ध्यान देने योग्य हे कि श्रद्धा स्वयं के जीवन दर्शन की पूर्णता का दावा नहीं करती और अपन पुत्र मानन को इडा के पास इसलिए छोड जाती है कि उसका एक सतुलित समन्वत व्यक्तित्व निर्मित हो सक । 'दर्शन' मर्ग मे वह मानव स कहती है, 'यह तर्कमयी तू श्रद्धामय । जाहिर है कि प्रमाद एक समन्त्रित जीवन दृष्टि का आग्रह करत है जिम व 'ममरमता' द्वारा व्यक्त करना चाहते है । यह अलग बात है कि इस प्रकार का समन्वय कितना मार्थक है पर जिम समय कामायनी रची गयी थी वह भारतीय राजनीति की एक प्रभावशाली धारा के रूप म माजूद था, इमम इन्कार नहीं किया जा सकता । वारनविक स्थिति यह ह कि कामायनी यद्यपि क्या को लकर रचा गया काव्य है पर कथा कहना उसका मुख्य आशय नही है। उसके लम्व लम्बे एकालाप स्वय इसका प्रमाण है । 'सवर्प' मर्ग के बाद अन्तिम चार सर्गों मे तो कथा का ऐसा ठहराव आ गया है कि यदि मनु के आध्यात्मीकरण की जरूरत न होती तो काव्य मे उनके विना भी काम चल सकता था । कामायनी इतिहास के प्रमाणीकरण को लेकर नही चलती, इसलिए उसका इतिहासबोध सबन्न नही हो पाया। अनक ऐसे अवसर थे जब एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति में प्रवेश करते समय कामायनी इतिहास के कोण उभार सकती थी, जैसे कि कुछ कहानियो म मामूली कोशिश भा हुई है । पर प्रसाद के मूल व्यक्तित्व की कठिनाई यह कि वे प्रायः चीजो को रूमानी नजरिये से देखने के अभ्यस्त है इमलिए 'आकाशदीप' और 'पुरस्कार' जैमी कहानियो म प्रेम-द्वन्द्व बाजी मार ले जाता है तथा इतिहास पिछड जाता है। 'चन्द्रगुप्त' नाटक तक मे कार्नेलिया यवन-भारत संस्कृतियों के संघर्ष को पूरा उभरने नही देती जबकि उसके लिए अवसर था । अधूरा उपन्याम 'इरावती' दृश्य को स्वच्छन्दतावादी दृष्टि 346 / प्रसाद का काव्य से प्रस्तुत करतं हुए आरम्भ होता है जबकि कथानक सांस्कृतिक संघर्ष का है । यह इतिहास के प्रति रूमानी दृष्टि के कारण है, जिसने यथार्थ को पीछे छोड़ दिया है और अनेक स्थलों पर उसका स्थान एक मनोरम कल्पना और आदर्शवाद को मिल गया है। कामायनी के अन्तिम चार सर्ग काव्य की दृष्टि से उत्कर्षपूर्ण नहीं कहे जा सकते, पर प्रश्न है कि तब उनकी रचना क्यों हुई ? प्रत्यभिज्ञा दर्शन को शास्त्रीय पद्धति से प्रस्तुत करना अथवा दार्शनिक मुद्राएँ दिखाना मात्र उनका अभीष्ट नहीं था । ऐसा होता तो काव्य वक्तत्व बहुल हो जाता है । 'त्रिपुरारहस्य' में इच्छा, ज्ञान, कर्म का त्रिकोण प्रसाद की समन्वयवादिनी दृष्टि के निकट था, इसलिए उन्होंने इसका प्रतीकात्मक उपयोग किया । वे श्रद्धा को तत्व रूप में ढालकर उसे आध्यात्मिक गुरु जैसा बनाना चाहते हैं । और अत में मनु का भी रूपान्तरण करना चाहते हैं कि वह कुछ-कुछ ऋषित्व पा जाय । अन्तिम अशों में आध्यात्मीकरण के कई प्रसंग हैं जिन पर आपनि तक की जा सकती है क्योकि वे आधुनिक स्थिति में बहुत प्रासंगिक नहीं प्रतीत होते । 'दर्शन' सर्ग में नटराज का नृत्य प्राचीन महाकाव्यों अथवा महानाटकों के दैवी तत्व (सुपरनेचुरल) की तरह दिखाई देता है पर कामायनी में इसका मूल प्रयोजन आध्यात्मिक रंग भरना है। कामायनी की यह आध्यात्मिकता प्रसाद की आदर्शवादिता से सम्बद्ध है, वह मध्ययुगीन रहस्यवाद का सम्करण नहीं है और जीवन-सापेक्ष है । यही कामायनी के मानवीय पक्ष की शक्ति है और सीमा भी । यहाँ मूल्य-चिन्ताएँ हैं, पर रूमानी ढंग से । कामायनी के विन्यारा मे प्रसाद की वैयक्तिक अनुभूतियाँ भी सक्रिय रही हैं, यद्यपि उन्हें खोज लंना आसान नहीं है । वे निराला के समान निर्वैयक्तिक व्यक्तित्व के कवि नही है। उनकी निजी अनुभूतियाँ कहानियों को रूमानी बनाती है और नाटकों में गीतों और प्रेमिकाओं की योजना होती है । प्रायः कह दिया जाता है कि प्रसाद के नाटको की नारी सृष्टि तथा प्रेम-संबंधी अन्तर्द्वन्द्व पाश्चात्य चरित्र चित्रण के समान हैं, पर वास्तव में यह प्रसाद के मूल रूमानी व्यक्तित्व कं कारण है । कामायनी इसीलिए कथाप्रधान और वर्णनात्मक नहीं हो पाती । कार्नेलिया अरुण यह मधुमय देश हमारा' भारत-वन्दना गीत गात गाते अन्त मे हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती दुलकाती सुख मेरे / मदिर ऊँघते रहते जब जगकर रजनी भर तारा' की रूमानी पंक्तियों से गीत का समापन करती है। कामायनी का 'लज्जा' सर्ग कुछ समीक्षकों को कथा-विन्यास की दृष्टि से असंगत प्रतीत होता है क्योंकि इससे कथा-क्रम में कोई अन्तर नहीं आता । एक प्रकार से वह कथा - विहीन सर्ग है । पर मात्र काव्य और वह भी गीतात्मकता की दृष्टि से यह कामायनी का सर्वोत्कृष्ट प्रसंग है। इसका कारण यही है कि यहाँ प्रसाद को अपनी स्वच्छन्दतावादी वृत्तियों के प्रकाशन की पूरी छूट थी और इसलिए वे अपनी सर्वोत्कृष्ट उड़ान पर पहुँच गए । इतना ही नहीं, सर्ग के अन्त मे वही आदर्शवादी समन्वयमार्गी रुख अपनाकर मनु- श्रद्धा मे एकतरफा-जैसा समझौता करा कामायनीः आज के संदर्भ में / 347 दिया गया है। श्रद्धा हो अथवा इड़ा, प्रसाद की रूमानी मुद्राएँ सक्रिय रहती है पर आदर्शवादिता को किसी हद तक साथ लेकर । मनु के रूमानी, स्वच्छन्दतावादी व्यक्तित्व का आध्यात्मीकरण प्रसाद को इसीलिए करना पड़ा, ताकि वह नायक होने योग्य बन सके और प्रसादजी का भी आदर्शवादी रुख सुरक्षित रह सके । यदि मनोवैज्ञानिक स्तर पर सोचा जाय तो प्रसाद काव्य-संयोजन अथवा चरित्र-सृष्टि के अवसर पर भी 'कामायनी' में इतना तटस्थ नही हो पाए हैं कि उन्हे पूर्णतया आत्ममुक्त कहा जा सके। इसी कारण कामायनी मे एक गीतात्मकता आदि से अन्त तक काव्य पर आच्छादित रहती है। ऐसा लगता है कि कामायनी में 'आँसू' की प्रिया कवि का पीछा कर रही है, और अवचेतन पर उसका प्रभाव है। गीतात्मकता के सबब से कामायनी के कुछ अंश खण्ड-खण्ड रूप में बहुत उत्कर्षपूर्ण प्रतीत होते है । वहाँ कवि अपनी सम्पूर्ण सर्जनात्मकता के साथ आया है, पर जब काव्य के समन्वित प्रभाव की स्थिति आती है तब कामायनी के बड़े से बड़े प्रशसक को स्वीकारना पड़ता है कि काव्य-सघटन मे शिथिलता है। इसीलिए उमे महाकाव्य प्रमाणित करने की चेष्टा जबरन नही की जानी चाहिए, क्योंकि आधुनिक युग मे महाकाव्य महान् काव्य का पर्याय नहीं रह गया हे । 'कामायनी' की महत्ता की तलाश ही पर्याप्त है और वह बडप्पन तो उसमं है ही। कामायनी का रचनाकार उस वैविध्य का दावा नही कर सकता जो संबोधन प्रायः निराला के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पत का काव्य भी दिशाएँ बदलता रहा है । इम दृष्टि से प्रसाद और महादेवी एकरम कवि भी कहं जा सकते हैं, जिनके अनुभूति - जगत और भाषा में एक ही स्तर का निर्वाह प्रायः हुआ है । कामायनी का वैशिष्ट्य यदि प्रसाद के सम्पूर्ण व्यक्तित्व से सम्बद्ध करके देखा जाय तो सभव है उसके लिए एक नये समक्षानिकष की आवश्यकता पड़े. पर इससे उस कृति के साथ अधिक न्याय हो सकेगा। सच्चाई ता यह है कि कामायनी एक प्रकार से प्रसाद के सम्पूर्ण व्यक्तित्व के प्रतिफल की चंप्टा है; यह बात दूसरी है कि उनके एकीकरण मे कही कोई कमी रह गई हो। हर महत्त्वपूर्ण कृति जिसमे रचनाकार अपने समग्र व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति देना चाहता है और यदि सयोगवश वह व्यक्तित्व सश्लिष्ट अथवा विराट हुआ तो कृति बार-बार हमे ललकारती है, एक चुनौती बनकर हमारे सामने आती है। इसीलिए कामायनी कथा-प्रसंगो मे जब अपना सम्पूर्ण अर्थ उजागर नही कर पाती, तब उमे केवन्न शिश्रिल अभिव्यक्ति कहकर छोड देने से काम नही चलेगा । यह रचनाकार का भीतरी उलझाव भी है जिसे व्यक्त करने के लिए वह बार-बार दुहरे तिहरे बिम्बों का सहारा लेता है, फिर भी गाँठ पूरी नहीं खुल पाती । कामायनी एक प्रकार से छायावाद युग का समापनग्रन्थ और निराला की आख्यान रचनाओ के अतिरिक्त छायावाद का एकमात्र महत्त्वपूर्ण कथाकाय है । सन् '35 मे कामायनी को अन्तिम रूप देकर जब प्रसादजी प्रेमचन्द के निधन के कुछ ही समय 348 / प्रसाद का काव्य बाद चल बसे, उमी के आस-पास स्वयं छायावादी काव्य का जगत बदलने लगा था । पत युगान्त, युगवाणी, ग्राम्या के दौर में थे (1936-1940) और निराला अपनी इकलौती बेटी सरोज को खो देने के बाद आक्रोशभरी मुद्रा में आ गए थे। 1938 में प्रकाशित द्वितीय अनामिका में 'सरोज स्मृति' जैसा शोकगीत है जिसमें करुणा के साथ निराला ने सामाजिक विद्रोह को भी अभिव्यक्ति दी है । सन् '37 में ही 'तोड़ती पत्थर' जैसी सामाजिक यथार्थ की कविता रची गई जिससे प्रगतिवाद को शक्ति मिली । इस प्रकार 35-36 के आस-पास हिन्दी का स्वच्छन्दतावादी काव्य भी रूमानी परिवेश से हटकर यथार्थ की नयी भूमिका में प्रवेश करने लगा था । कहा नहीं जा सकता कि यदि इस दौरान प्रसाद जैसे एकरस कवि जीवित होते तो वे इस नयी धारा से कहाँ तक अप्रभावित रहते । पर जब हम कामायनी को छायावाद का समापन काव्य कहते हैं तो हमारा आशय यही है कि इसके बाद उसकी रूमानी वृत्तियों ने नयी दिशाएँ ग्रहण कीं । इसी कारण कामायनी काव्य की सीमाओं का जिक्र करते हुए हमें यह समझ भी होनी चाहिए कि हम जान लें कि वे प्रकारान्तर से छायावाद की भी सीमाएँ हैं। इनमें से कुछ को तोड़कर आगे जाने की चेष्टा उन्होंने की, मसलन कथा-काव्यों से की दिशा में नए प्रयोग अथवा 'प्रलय की छाया' जैसे दीर्घ प्रगीतों की सृष्टि । पर कामायनी स्वच्छन्दतावादी काव्य की सारी चौहद्दी नहीं तोड़ पाती, यही उसकी सीमा है। रचना में अतिक्रमण सरल भी नहीं होता । कामायनी का अनुभव क्षेत्र सीमित है, इसमे सन्देह नहीं, पर यह बात तो प्रसाद के सम्पूर्ण काव्य के लिए कही जा सकती है। अनुभव की जो विविधता और विस्तार महाकाव्यो के लिए अनिवार्य स्वीकारे गए हैं उसकी पूँजी कामायनी के पास नहीं है, पर प्रसाद एक तल्लीन कवि हैं इसलिए वे विस्तार की क्षतिपूर्ति गहनता से करना चाहते है । इस क्रम में वे अनुभव विस्तार की जगह अपनी अनुभूति को गहराकर है - काम निकालना चाहते हैं । कुछ तो अभिव्यक्ति की छायावादी सीमाओं के कारण तथा कुछ प्रसाद की अनुभूति की संश्लिष्टता और गहराई के कारण 'कामायनी में दुरूहता की शिकायत की जाती है क्योंकि उसमें अर्थ ऊपर रखे हुए नहीं है। वहाँ कई प्रसंगों में अनुभूति क्षण और वह भी सश्लिष्ट अनुभूति क्षण हैं जिसे प्रसाद ने प्रतीक बिम्बों मे बाँधना चाहा है। 'काम' सर्ग में मनु एक जिज्ञासु की तरह नीले आकाश को देखता है और उस रहस्य - भरे आवरण को चीरना चाहता है । यह समस्त प्रसंग आसानी से पाठक की पकड़ में नहीं आता, पर इसीलिए उस पर आक्षेप कर देना, कामायनी के साथ ज्यादती होगी । कहीं-कहीं तो ऐसी स्थिति आई है कि प्रसाद में कई अनुभूति खण्ड एक-दूसरे में समा गए हैं और वे उन्हें अलग-अलग नहीं करना चाहते क्योंकि इससे उसकी संश्लिष्टता का क्षरण होता है। ऐसे अवसर भी जल्दी पकड़े नहीं जा सकते और हमें ठहरने को बाध्य करते हैं। पर यह स्वीकारना होगा कि अनेक स्थलो पर कामायनी इन्द्रजाल-सा रच देती है और हम उसमें प्रवाहित होते कामायनीः आज के संदर्भ में / 349 हैं। ऐसे ही अवसरों के लिए कॉडवेल ने 'हिप्नाटिज़्म' की बात स्वच्छन्दतावाद के प्रसंग में कही है। कामायनी की भाषा स्वच्छन्दतावाटी काव्य को उसके शीर्ष पर ले जाने का प्रमाण है, यह भी विचारणीय है। कम शब्दों में बहुतेरी बातें कहने अथवा एक बड़े दृश्य को बाँधने की कोशिश में कामायनी की भाषा प्रसाद की सहायता करती है। पर वे जब अमूर्त का मूर्तीकरण करना चाहते हैं, तब भी उनकी रागात्मकता अमूर्तता से बँधी रहती है और व्यक्तित्व के इस द्वन्द्व के कारण चित्र पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाते । श्रद्धा का रूप वर्णन इसका एक उदाहरण है जहाँ कवि प्रायः अमूर्त विधान का सहारा लेता है। ऐसे अवसरों पर अनुभूति के साथ कवि का अध्ययन भी सम्मिलित दिखाई देता है और वह कल्पना का अधिकाधिक सहारा लेता है : उषा की पहली लेखा कांत माधुरी से भीगी भर मोद जैसे उठे सलज्ज कुसुम कानन अंचल में मद पवन प्रेरित रचित परमाणु पराग शरीर सौरभ साकार खड़ा हो ले मधु का आधार । कामायनी कालजयी कृतियों में है और इसमें सन्देह नहीं कि हर युग में उसके कुछ पाठक अवश्य होगे। उसे रामचरितमानस जैसे जनकाव्य के रूप में देखना भूल है क्योंकि इस प्रतियोगिता मे तो कालिदास भी भाग नहीं लेना चाहेगे । युग के बदलते सामाजिक परिवेश और उसके परिणामस्वरूप जनमनेवाले आस्वाद और समीक्षा प्रतिमानों के आधार पर कामायनी बराबर नये विवेचन की माँग करती रहेगी। हिन्दी स्वच्छन्दतावाद, छायावाद के समापन काव्य के रूप में तो वह स्मरणीय रहेगी ही, पर उसमें कवि ने आधुनिक मूल्यों को पाने की सराहनीय चेष्टा भी की है और उसकी अपनी उपलब्धियाँ तथा सीमाएँ है। अपनी नयी पुस्तक 'हिन्दी स्वच्छन्दतावादी काव्य' में मैंने इसकी विस्तृत चर्चा की है। 350 / प्रसाद का काव्य
तथा प्रौढ़ अभिव्यक्ति दिखाई देती है। काव्य और दर्शन अब अलग-अलग नही रह जाते और न कवि किसी विचार को भावना पर आरोपित कर उसे बांझिल ही करता है । काव्य और दर्शन का समन्वय 'लहर' के गीतों की विशेषता है। जीवन के अनेक अनुभवों को अपने अध्ययन के साथ कवि प्रस्तुत करता है। अब भी उसके हृदय में स्मृतियाँ हैं किन्तु प्रेमी उनमें उलझकर नहीं रह जाता, वरन् जीवन-पथ पर अग्रसर होता है। अपनी आत्मकथा के विषय में कहते हुए भी वह संयत है और व्यर्थ ही अतीत की भूलभुलइयों में नहीं पड़ता। अपनी आन्तरिक भावना से इस विशाल विश्व की माप करते हुए कवि एक ऐसी भावभूमि पर पहुँची प्रतीत होता है जहाँ समस्त वमुन्धरा ही उसका क्षेत्र बन जाती है। आख्यानक कविताओं में निहित विचारधारा एक चिन्तनशीन कवि का ही कार्य हो सकती है। 'अशोक की चिन्ता में बौद्ध दर्शन की छाया है, किन्तु करुणा को अधिक महत्त्व दिया गया। 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय उसका मूल स्वर है। 'प्रलय की छाया प्रसाद की सर्वोत्तम कविताओं में है । नारी का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण उसके भावों में पल-पन्न परिवर्तित रूप को लेकर अत्यन्त सजीव है । कवि एक चित्रकार की भाँति दिखाई ढंत है, जो भाषा के माध्यम से मनोभावना का अंकन करना चाहता है । कवि ने कमला में 'पराजित मौन्दर्य की रानी' की प्राण प्रतिष्ठा कर दी। सम्पूर्ण चित्र तूलिका के वर्णो से जित है। आरम्भ से अन्त तक कवि एक मादक वातावरण जीवित रखता है और उमी के भीतर से सौन्दर्य और नारी - जीवन की विडम्वना झाँकती है। क्षण-क्षण में परिवर्तित चचना सुन्दरी के मनोभावो को सजग कन्नाकार ने अंकित किया है । 'लडर' का गीतकार अधिकांश रूपो में सफल है। 'बीती विभावरी जाग री', 'मेरी आँखा की पुतली में तू बनकर प्राण समा जा रे', 'ले चल वहाँ भुलावा देकर मेरे नाविक धीरे-धीर' आदि गीत हिन्दी के प्रतिनिधि गीतों के रूप मे रक्खे जा सकते है । नाटककार के रूप में प्रसाद का व्यक्तित्व विशिष्ट है, किन्तु इस अवसर पर व कवि हृदय की ही अभिव्यक्ति करते हैं। भावुक पात्रो की योजना के अतिरिक्त गीतों में भी भावनामयता का प्राधान्य है। गीत पात्रों की मनोदशा का परिचय देते है. यद्यपि कथानक के क्रमिक विकास में उनका अधिक सम्बन्ध नहीं रहता । इनमें विभिन्न प्रकार की भावनाओं का समावेश हुआ, किन्तु अधिकांश प्रणय गीत हैं और उनका उद्देश्य पात्रों के अन्तरतम का प्रकाशन है। 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' आदि कतिपय राष्ट्रीय भावना से अनुप्राणित गीतों के अतिरिक्त अन्य गीतों में व्यक्तिगत अनुभूतियाँ ही प्राप्त होती हैं। देवसेना, मानविका के साथ मातृगुप्त आदि को भी गीतों से प्रेम है और वे भाव-विभोर होकर गाते है । शैली की दृष्टि से इन गीतों में संगीतमयता है और इन्हें शास्त्रीय स्वर-लिपि में बाँधा जा सकता है। नाटकों में प्रसाद ने गीतिकाव्य के कई प्रयोग किये और कई गीतों को उनकी प्रतिनिधि रचनाओं के अन्तर्गत रक्खा जा सकता है। 'हे लाज भर सौन्दर्य बता दो', 'आह वेदना तीन सौ चौंतीस / प्रसाद का काव्य मिनी विढाई' आदि गीत कवि की सुन्दर सृष्टि है। नाटको म प्रयागो के कारण प्रसाद 'कामायनी' का भी गीति-तत्त्व में भर सकं । उनकं गीतो मे इतनी शक्ति है कि वे कंवल भावोच्छ्वाम बनकर नही रह जाते, उनमे चिन्तन का भी समावश हा जाता है। 'कामायनी' प्रमाद के सम्पूर्ण व्यक्तित्व से निर्मित है। उसमें कवि की कन्ना का चरमोत्कर्ष है और वह समग्र जीवन चिन्तन से अनुप्राणित है। इस महाकाव्य की दार्शनिक रेखाएँ आरम्भ से ही प्राप्त होती हैं और कवि ने इन्ही को विकसित किया । 'चित्राधार' में शिव के प्रति भक्ति-भावना का परिचय प्राप्त होता है । 'प्रेम पथिक' मे भी 'शिव समष्टि' की चर्चा है। कुलगत शैव भावना को क्रमशः प्रसाद ने एक जीवन दर्शन में परिणत किया । 'कामायनी' में इच्छा, ज्ञान, क्रिया का समन्वय प्रत्यभिज्ञा दर्शन से प्रेरित है। समरसता तथा आनन्द की कल्पना कवि को यही मे प्राप्त हुई और उसने उन्हें अधिकाधिक व्यावहारिक रूप मे प्रस्तुत किया । 'कामायनी' का मनावैज्ञानिक विश्लपण 'कामना' नाटक में भी दिखाई देता है। पात्र एक विशेष मनोविकार का प्रतिनिधित्व करते है और अन्त मे आनन्द की प्रतिष्ठा होती है । मानवीय भावनाओं के प्रति प्रमाद प्रारम्भ से ही मजग रहे और उन्होंने भावना का अकन करने में सफलता प्राप्त की। 'कामायनी' का कवि मानव मन की व्याख्या करता है और अन्त में उनम आनन्द की प्रतिष्ठा कराता है । उममं कृतिकार का एक समन्वयवादी दृष्टिकोण रहा है और हृदय - बुद्धि, नारी-पुरुष आदि का मिलाना चाहता है है । ममरसता अथवा समन्वय से आनन्द का सृजन होना है। इस आनन्द को मानवता के कल्याण में नियोजित करना रचनाकार का मुख्य उद्देश्य है। प्रसाद एक मानववादी क रूप मे 'कामायनी' म आते है जो जीवन को सर्वाग सम्पूर्ण तथा मानवता को मुखी बनाने में प्रयत्नशील है । समरमा समस्याओं का उत्तर देती है। व्यक्तिगत अनुभूतियो से ऊपर उठकर 'कामायनी' के कवि ने विचार किया । जीवन की प्रहेलिका पर उन्होन अपना मन्तव्य दिया । भावना क्षेत्र मे कामायनीकार व्यापक दृष्टिकोण लंकर प्रस्तुत हुआ । कला की दृष्टि में 'कामायनी' का पाँचवि प्रौढ है। उसकी भाग्ग और कल्पना भावना को वहन कर ले जाती है। वह एक सजग कन्नाकार की भाँति विश्वास कं साथ आगे बढ़ता है। काव्य बिम्ब के प्रति प्रसादजी की रुचि आरम्भ में ही थी 'कामायनी' मे उसका विशद रूप है। मनु, श्रद्धा, इटा के चित्र प्रस्तुत करन में रूप, गुग, भाव का अकन कवि कर देता है। प्रकृति और मन की विभिन्न अवस्था को चित्रित करने में भी वह कशल है। काव्य और चिन्तन के मयोग से निर्मित 'कामायनी' प्रसाद के महान् कृतित्व का प्रतिनिधित्व करती है । प्रमाद निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर रहं । आरम्भ की वैयक्तिक चेष्टाओ का क्रमशः उन्होने उदात्तीकरण किया और अन्त में उनका अधिक निर्वैयक्तिक पक्ष सम्मुख आया । महान् कलाकार की भाँति उन्होंने अपनी व्यक्तिगत भावनाओ पर विजय प्राप्त प्रमाउ काव्य की मूल चंतना / तीन सौ पैंतीस की और उनका स्वर जगत से एकाकार हुआ । अपनी विकासशील प्रवृत्तियों के कारण प्रमाद सम्पूर्ण सामग्री का उपयोग करते गये । प्रारम्भ में उनमे भावना का आवेग अधिक था; धीरे-धीरे चिन्तन-मनन के द्वारा बौद्धिकता आई। गेटे के विषय मे भी हेनरी थॉमस ने लिखा है : "वीमर मे आकर उसके यौवन का ताप कम हो गया । अब वह ऐसा विद्रोही न रहा जो ससार को नष्ट कर देना चाहता हो। वह एक दार्शनिक हो गया, जो उसे समझने का प्रयत्न कर रहा है ।" 'सारांज आफ वर्थर' से लेकर 'फाउस्ट' तक उसके जीवन की एक महान् साधना छिपी हुई है। प्रमाद के आरम्भिक और अन्तिम चरण के मध्य अनेक प्रयोग होते है जिनके द्वारा वे 'कामायनी' की महानता तक आ सक । भावना की दृष्टि से उनका क्षेत्र अधिकाधिक विस्तीर्ण होता गया और कला क्रमशः प्रौढ हांती गयी । प्रसाद ने अपने जीवनानुभव तथा अध्ययन को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया । कल्पना और अनुभूति कं योग से उन्होंने जिन आदर्शो का निर्माण किया उनमे जीवन दर्शन को सन्निहित करने का प्रयत्न है । नारी का सर्वोत्कृष्ट स्वरूप श्रद्धा है। मनु उन्धान पतन से भरा प्राणी है जिसकी आकाक्षा ऊपर उठने की रहती है। प्रमाद ने 'ऑसू' में व्यक्तिगत प्रेम-भावना को एक व्यापक धरातल पर प्रस्तुत किया और उनकी कल्पना समार की करुणा को भी अपनाती गयी । 'लहर' के 'बौद्ध दर्शन' से प्रभावित गीतो मे उनका अधिक स्पष्ट स्वरूप सम्मुख आता हे । प्रमाद के जीवन दर्शन की पृष्ठभूमि सास्कृतिक अवश्य है किन्तु वह युग की चेतना का साथ लेकर चलती हे । समग्मता, आनन्द्रवाद, श्रद्धामय नारी आदि का नवीन रूप उन्होंने प्रस्तुत किया । प्रमाद कार भानावास अथवा भावुकता पर जीवित रहनेवालं कवि नहीं है। उनका काव्य जीवन से प्रेरणा लेकर उसी के लिए कार्य करता है । जीवन का उन्होंने दृढता के साथ अपनी भावना से समन्वित किया और कतिपय समस्याआ पर अपना मन्तव्य देते गये । जीवन के प्रति उनकी गहरी आस्था है और वे उसका उपभाग आवश्यक समझते है । प्रसाद का जीवन दर्शन मानवता के कल्याण मे नियोजित होता है । प्रसाद का काव्य अपने युग की चेतना से प्रभावित है। आधुनिक समय की बौद्धिकता, भौतिकवाद तथा विज्ञानवाद के अतिवाद से त्रस्त मानवता के लिए उन्होंने 'कामायनी' मे श्रद्धाजन्य विश्वास और सहृदयता को सम्मुख रखा । 'इडा' सर्ग मे काम कं मुख मे कवि ने ससार की विषमता का वर्णन कराया है। सारस्वत प्रदेश विश्व का प्रतीक-सा बन जाता है। गाधी-युग के प्रसाद सत्य, अहिंसा के साथ व्यावहारिक समरसता और आनन्दवाद को भी उपस्थित करते है । आधुनिक युग का सघर्ष केवल दो राष्ट्रो अथवा शक्तियों के मध्य नही है। कवि ने इस समस्या के मूल मे जाकर विचार किया । वास्तव मे मानव की प्रवृत्तियाँ ही आपस मे मघर्ष कर रही है। उसके मन मस्तिष्क मे निरन्तर युद्ध चल रहा है । नारी-पुरुष, आदर्श यथार्थ, मन-मस्तिष्क में समन्वय स्थापित करके प्रसाद ने आनन्द को प्रतिष्ठित किया। तीन सौ छत्तीस / प्रसाद का काव्य भौतिकवाद मे पनी हुई सारस्वत प्रदेश की प्रजा ने स्वयं अपने नियामक मनु के विरुद्ध विद्रोह किया था । अन्त में श्रद्धा द्वारा स्थिति में सुधार होता है। श्रद्धा वह कल्याणकारिणी शक्ति है जिसमे कवि ने आधुनिक युग की अधिकाश समस्याओ का उत्तर दिया । राजनीति में होनेवाला राजा प्रजा का सघर्ष भी कामायनी में होता है। इस अवसर पर दोनो मे समन्वय पर प्रसाद ने अधिक जोर दिया । युग की चतना को ज्यो- ज्यो वे पहचानते गये उनका स्वर अधिक बौद्धिक होता गया और उन्होंने अपने मानवीय दृष्टिकोण को सामने रखा । प्रसाद इतिहास को पृष्ठभूमि में रखकर आगे बढ़ते है। देश की संस्कृति और परम्परा के आधार पर व नव-निर्माण मे सन्नग्न होते है । नाटको को उन्होने इस ऐतिहासिक सास्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रमुख विषय बनाया । प्रसादजी अपने साहित्य के द्वारा एक ओर यदि युग की चेतना को प्रस्तुत करना चाहते है तो साथ ही वे एक सास्कृतिक पुनरुत्थान की भी कामना करते है । प्रसाद-काव्य का अवलांकन करने पर अनेक बिखरे हुए सूत्र प्राप्त होते हैं जिनमे कवि की विचारधारा सन्निहित है। करुणा के महत्त्व को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने 'करुणालय' की रचना की । करुणा दर्शन की मूल प्रेरणा कवि को बौद्ध दर्शन से प्राप्त हुई । ससार के प्रत्येक प्राणी पर करुणा करने का सन्देश वे देते है। देश का स्वाभाविक गर्व होते हुए भी प्रसाद मे सहिष्णुता की व्यापक भावना है जो उन्हे मानवीयता कं विस्तृत धरातल पर प्रतिष्ठित करती है। 'चन्द्रगुप्त' की कार्नेलिया 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' का गान गाती है । 'स्कन्दगुप्त' का मातृगुप्त आर्यजाति के गौरव का गान करता है। देश के प्रति कवि का अनुराग है किन्तु वह सम्पूर्ण मानव जाति की कल्पना एक कुटुम्ब के रूप में करता है । जगत जीवन के विषय मे कवि ने सन्देश दिये है जिनके मूल में एक दार्शनिक कवि का चिन्तन बोलता है । व्यापक भावना के साथ प्रसाद मे कलात्मक परिपक्वता है । वे प्रवन्धकार तथा गीतकार दोनो रूपो मे सम्मुख आते है । आख्यानक कविताओ मे प्रवन्धकाव्य कं प्रति उनकी अभिरुचि दिखाई देती है, किन्तु 'कामायनी' मे आकर उनकी सम्पूर्ण प्रतिभा मुखर हुई । गीतो म प्रणय, देश प्रेम, दर्शन आदि की भावनाओ को उन्होंने सन्निहित किया । भावना प्रकाशन मे विविध प्रकार के छन्दो का उन्होन प्रयोग किया और इसके लिए उन्हे स्वतन्त्र योजना भी करनी पडी। अतुकान्त कविताओं में उन्होने सफलतापूर्वक कार्य किया । प्रसाद का शब्द-भाण्डार प्रचुर है और संस्कृत के तत्सम शब्द भी उसमे मिलते है। उनकी भाषा एक क्लासिक कलाकार की-सी है जिसमे शब्दो का चरमोत्कर्ष प्राप्त होता है। भाषा के द्वारा कवि ने भावनाओ का परिष्कार किया और वह समस्त अकन सफलतापूर्वक कर गया । उपमा तथा विम्ब-प्रतीक-योजना मे प्रसाद की भौतिक उद्भावनाऍ है। अपनी कल्पना के द्वारा उन्होने नूतन चित्र निर्मित किए और मनोविकारो को भी वे अपनी लेखनी से चित्रित कर सके । प्रसाद प्रायः सकेत से काम लेते है, उन्हे अधिक व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और प्रसाद-काव्य की मूल चेतना / तीन सौ सैंतीस न वे बहुत विस्तार में ही जाते हैं। वे किसी वस्तु के अन्तरान में प्रवेश कर उसके मूल तत्त्व को जानने का प्रयत्न करते हैं। भावना पर जोर देने के कारण वे अलंकरण का अधिक आग्रह नहीं करते । यद्यपि उनकी अभिव्यंजना को सरल नहीं कहा जा सकता, किन्तु उसमे कवि का दृष्टिकोण भावाभिव्यंजक है। उनमें लक्षणा का प्राधान्य है। सास्कृतिक धरातल पर कार्य करने के कारण प्रसाद का साहित्य सामान्य पाठक के लिए किचित कठिन प्रतीत होता है, किन्तु विश्व के महान् कवि होमर, दान्ते, मिल्टन, गेटे, कालिदास के विषय में भी यही कहा जा सकता है। प्रसाद का व्यक्तित्व बहुमुखी है। कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास, निबन्ध आदि क्षेत्रों में उन्होंने कार्य किया । अल्प आयु में ही उन्होंने अनेक रचनाएँ प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसमे सन्देह नहीं कि सम्पूर्ण साहित्य में उनका कवि रूप प्रधानता प्राप्त करता है। नाटको के भावुक पात्र, अनेक गीत, स्वगत भाषण सभी में भावनावान कवि के दर्शन होते हैं । ऐतिहासिक पात्रो को उन्होंने कल्पना के द्वारा नवजीवन प्रदान किया और वे प्राचीन होकर भी इस युग के प्रतीत होते हैं । मातृगुप्त, देवसेना आदि चरित्रां की कल्पना प्रसाद के कवि हृदय द्वारा ही सम्भव थी । कहानियों में भी कल्पना का अश अधिक है और उन्हें गीतात्मक कहानियाँ कहना अधिक उपयुक्त होगा । यथार्थ को प्रस्तुत करने में भी प्रसाद अपने आदर्श का ध्यान रखते है । 'तितली' तथा 'कंकाल' उपन्यामो मे उन्होने समाज की वर्ण-व्यवस्था, धर्म, राजनीति, ग्राम आदि सामयिक समस्याओं पर विचार किया। अधूरा उपन्यास 'इरावती' अपने इस अपूर्ण स्वरूप मे भी साहित्य का गौरव है और उसका आरम्भ ही अत्यन्त काव्यात्मक है, "उसकी आँखे आशाविहीन सन्ध्या और उल्लासविहीन उपा की तरह काली और रतनारी थीं." प्रसाद का बहुमुखी व्यक्तित्व एक चिन्तक और कवि के योग से निर्मित है । प्रसाद के सम्पूर्ण कृतित्व पर एक विहंगम दृष्टि डालने के पश्चात उन्हें विश्व के शीर्ष कवियो के निकट स्थान देना पड़ता है । प्रमाद का साहित्य एक सांस्कृतिक सीमा के अन्तर्गत आता है और उसके प्रसार की भी एक सीमा स्वीकार करनी पड़ती है, किन्तु उसकी मूल चेतना का क्षेत्र व्यापक है। प्रसाद अपने कृतित्व में महान् हैं और श्रेष्ठ रचनाकारों का-सा उनका व्यक्तित्व है। एक. काव्य और कला, पृ बाईस दो. इगवती, पृ. दो तीन. थॉम्पसन मासिज्म एंड पोयट्री, पृ. अट्ठावन चार. प्रेमशंकर हिन्दी स्वच्छन्दतावादी काव्य, पृ. दो सौ तीन तीन सौ अड़तीस / प्रसाद का काव्य कामायनी : आज के संदर्भ में मुझ जैसे व्यक्ति के लिए जो विद्यार्थीकाल से ही कामायनी का जिज्ञासु पाठक रहा है और जिसने बीस-बाईस वर्ष की अवस्था में उसके विषय में अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की थीं, कामायनी पर नये सिरे से विचार करना एक प्रकार से आत्मपरीक्षा का क्षण है। हर गतिशील वस्तु विकास की प्रक्रिया से गुजरती है और ऐसी स्थिति में यदि कामायनी आचार्य शुक्ल, आचार्य वाजपेयी और नगेन्द्र से होकर अनेकानेक शोधप्रबन्धों से गुजरती हुई मुक्तिबोध, इन्द्रनाथ मदान, नामवरमिंह, रमेश कुन्तल मेघ और रामस्वरूप चतुर्वेदी तक को ललकारती रही है तो यह उसकी गत्यात्मकता का एक प्रमाण है । आधुनिक परिवेश में, नयी कविता के युग में बैठकर, कामायनी पर एक दृष्टि दौड़ाने के पूर्व हमें संक्षप में समीक्षा के उस इतिवृत्त को भी देख जाना चाहिए जो इस काव्य के इर्द-गिर्द उठता-गिरता रहा है। कामायनी का लेखन बीसवीं शती के द्वितीय शतक के उत्तरार्ध में कभी आरम्भ हुआ होगा, क्योंकि मम्पूर्ण चिन्ता मर्ग 'सुधा', अक्तूवर एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में प्रकाशित हुआ। एक हज़ार नौ सौ पैंतीस मे इसका लेखन कार्य समाप्त हुआ और लगभग उसी समय इसका प्रकाशन । कामायनी को अपने आरम्भिक क्षणों में आचार्य शुक्ल जैसे प्रतिष्ठित आलोचक की सम्पूर्ण ममता नहीं मिली। साहित्य के इतिहास में कामायनी के कथानक ने कई पृष्ठ ले लिए हैं, जहाँ समीक्षक की वचनबद्धता ले नही मिलती । आचार्य शुक्ल मानते हैं कि यह काव्य बड़ी विशद कल्पनाओं और मार्मिक उक्तियो से पूर्ण है पर वे इड़ा की तुलना में श्रद्धा का पक्ष लेने से इन्कार कर देते हैं । वे कामायनी में मधुचर्या का अतिरेक और रहस्य की प्रवृत्ति को मानवता की पूर्णतया सुव्यवस्थित योजना में बाधक मानते हैं । कामायनी पर उनका सबसे बड़ा आक्षेप है कि इस विशद काव्य में कोई अन्तर्योजना तथा कोई समन्वित प्रभाव नहीं है । आचार्य शुक्ल छायावाद से जिस आक्रामक मुद्रा में मिले थे और तुलसी को सर्वोपरि स्वीकारने के बाद आधुनिक रूमानी काव्य से संवाद स्थापित करने में उन्हें जो कठिनाई मालूम हुई थी, उसे देखते हुए कामायनी के संबंध में उनका विवेचन एक प्रकार से मध्यमार्ग की तलाश अथवा कामायनीः आज के संदर्भ में / तीन सौ उनतालीस समझौते की कोशिश है । आचार्य शुक्ल जैसा समीक्षक यकायक अपने कदम पीछे नहीं हटा सकता था, पर कामायनी के जीवन दर्शन से अपनी असहमति व्यक्त करते हुए भी उन्होंने सभावनाओ के द्वार खोलनेवाली कृति का गौरव दिया, यह साधारण प्रशंसापत्र नहीं है । कामायनी को एक अन्तराल का लाभ भी मिला और उस पर होनेवाले आक्रमण काफी 'फ्यूज़' हो गये क्योकि हर समर्थ रचना पाठकों को सीधे सम्बोधित कर सकने की सामर्थ्य भी रखती है। जैसा कि छायावाद-संबंधी काव्य-विवेचन से स्पष्ट है, आचार्य शुक्ल को पहली गम्भीर चुनौती उनके शिष्य आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने दी । इस बीच प्रसाद की और भी विवेचनाएँ देखने में आईं पर इन प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करनेवाले आलोचक कामायनी से इतना अभिभूत थे कि उनकी बात प्रभाववादी आलोचना का संस्करण बनकर रह गई । आचार्य वाजपेयी ने कामायनी को छायावाद युग की स्थापना के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहा इसलिए स्वभाव से आधुनिकता के समर्थक और जड़ शास्त्रीय नियमों के विरोधी होते हुए भी उन्होने उसे केवल महत् काव्य ही नहीं प्रमाणित किया; वरन् वे उसे महाकाव्य घोषित करने के लिए काव्यशास्त्र का भी सहारा अनजाने मे ले बैठे । शायद वे शास्त्रियों को उन्हीं के अखाड़े में पछाड़ना चाहते थे, अन्यथा आचार्य वाजपेयी का मुख्य प्रवेय कामायनी को एक महत् काव्य के रूप में व्याख्यायित करना और उसके जीवन दर्शन तथा काव्य-सौन्दर्य को सही परिप्रेक्ष्य में देखना-समझना है। 'जयशंकर प्रसाद' नामक उनकी पुस्तक यों तो प्रसाद-संबंधी उनके समीक्षा - निबन्धों का संकलन है और अनेक स्थलो पर उसमें कामायनी का उल्लेख हुआ है; पर भूमिका अंश, प्रौढ़तर प्रयोग और कामायनी - विवेचन के निबन्ध इस दिशा में विशेष रूप से विचारणीय हैं। कामायनी की व्याख्या में आचार्य वाजपेयी सर्वप्रथम उसके मानवीय जीवनदर्शन का महत्त्व प्रतिपादित करते हैं, क्योंकि वे उसमे 'साहित्यिक प्रगतिशीलता' देखते हैं । वे यह भी मानते हैं कि यदि प्रसादजी में रहस्यवाद है भी, तो वह और उनकी आध्यात्मिक अनुभूति मानव जीवन व्यापार की नींव पर खड़ी है । मानवीयता की छानबीन करते हुए आचार्य वाजपेयी ने कामायनी को जीवन के गहरे और बहुमुखी घात- प्रतिघातों और विस्तृत जीवनदशाओ में पद-पद पर आनेवाले उद्वेलनों को चित्रित करनेवाला, उन्हें सँभालनेवाला और कला में उन सबको सजीव करनेवाला काव्य माना है। उन्होंने प्रसादजी की शैली, वस्तु संघटन, कथा- निर्माण आदि की भी उत्कृष्टता प्रमाणित की है। आचार्य वाजपेयी ने कामायनी को भीतर-बाहर दोनों ओर से पकड़ने की चेष्टा की। बाहरी पकड़ के लिए शास्त्र तक का सहारा लिया और काव्य की भीतरी पकड़ तो उनकी मूल प्रवृत्ति ही है जिसके परिणाम से वे श्रेष्ठ स्वच्छन्दतावादी समीक्षक स्वीकारे जाते हैं। कामायनी को उसके आरम्भ काल से ही सर्वांग में समझने और उसे स्थापित करने में आचार्यजी ने तीन सौ चालीस / प्रसाद का काव्य ऐतिहासिक कार्य किया । डा नगेन्द्र के ममीक्षाग्रन्थ 'कामायनी के अध्ययन की ममग्याएँ' में कामायनी से सम्बद्ध पाँच निबन्ध सकलित हैं। कामायनी को परखने के लिए डा नगेन्द्र ने टो मुख्य अस्त्री का उपयोग किया : काव्यशास्त्र और मनोविज्ञान । कामायनी का महाकाव्यत्व विवचित करते हुए वे भारतीय साहित्यशास्त्र और पाश्चात्य विचारक एबरक्राम्बी दानो का आश्रय लेते हैं। वे उसे 'मानव चेतना का महाकाव्य' कहकर सम्बोधित करना चाहते हैं और लाजाइनम के ढंग पर उसके उदात्त तत्त्व की विशेष सराहना करते है । कामायनी के अगीरम का प्रश्न काव्यशास्त्रीय है और समीक्षक की रसवादी दृष्टि का परिचायक । अन्यथा आज यह प्रश्न गौण माना जाता है कि काव्य का मुख्य रम क्या है। कामायनी म रूपक तत्व का सधान करत हुए, डा नगेन्द्र ने मनोविज्ञान, विशेषतया फ्रायड के असामान्य मनोविज्ञान का सहारा लिया और उसने भारतीय दर्शन का भी प्रवेश कराना चाहा निसका पूर्ण प्रतिप न उनके निबन्ध 'कामायनी की दार्शनिक पृष्ठभूमि मे हुआ है। इस प्रकार डा नगेन्द्र न कामायनी के कुछ पक्षो को उद्घाटित करने की मफल चष्टा की है। छायावाद की विवेचना क क्रम मे अनेक समीक्षको ने कामायनी पर टिप्पणियाँ की और प्रमाद काव्य का अनुशीलन करनेवालो न तो इसका विस्तृत विवेचन भी किया । इनम विश्वविद्यालयो द्वारा प्रस्तुत हानेवाले शोधग्रन्थों की एक लम्बी सूची है । इसमे सन्देह नहीं कि इन प्रगत्नी से कामायनी के पिपंतन कलेवर में वृद्धि हुई और उसका समझने की दिशा में प्रगति हुई। पर आज भी कामायनी के बारे मे अतिम शब्द कह देने का दावा काई ममीक्षक नही कर सकता । अब भी वह चुनोनी बनकर हमारे सामन है, जो उसकी शक्ति का प्रमाण है । जब प्रस्तुत पतिया का लखक प्रमाद क काव्य में गुजर रहा था, तब प्रमाउजी पर कोई शोधग्रन्थ उपनब्ध नहीं था और सभवन शांध की दिशा में वह प्रथम प्रयन्न था । मैन उम समय कामायनी को 'प्रसाद का काव्य म तीन अन्याय दिये थे कामायनी का कथा चक्र जो मनत. शोधपरक है। कामायनी के चिन्तन पर विचार व्यक्त करते हुए उसे मनाविज्ञान, दर्शन, समाजशास्त्र की दृष्टि में देखा गया है । अन्त मे काव्य समार क अन्तर्गत काव्य रूप मे उसकी परीक्षा है। आचार्य वाजपयी की छाया में निर्मित इस शोधप्रबन्ध में मैन कामायनी को उसके सर्वाग में समझना चाहा और काशिश की कि उसे भीतर-बाहर से पहचान सकूँ । कामायनी के पुनर्मूल्याकन की शुरूआत मुकिबोध ने की जब उन्होंने एक लाख चौरानवे हज़ार पाँच सौ छियालीस के 'हम' मे कामायनी पर नयी दृष्टि डालन का यन्न किया । 'कामायनी : एक, पुनर्विचार का पुस्तकाकार प्रकाशन एक हज़ार नौ सौ इकसठ मे हुआ जिसमे प्रथमतः और अतत के अतिरिक्त तेरह अध्याय है। मुक्तिबांध कामायनी को समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखते कामायनी आज के सदर्भ मे / तीन सौ इकतालीस है और इसे मार्क्सवादी सौन्दर्यशास्त्र के आधार पर प्रस्तुत व्यावहारिक समीक्षा कहा जा सकता है। उनके दो समीक्षाग्रन्थो 'नयी कविता का आत्म-सघर्ष' तथा 'नए साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र' के अतिरिक्त 'एक साहित्यिक की डायरी मे भी मुक्तिबोध की समाजशास्त्रीय चेतना सक्रिय दिखाई देती है। इतिहास की भौतिकवादी दृष्टि के साथ-साथ मनोविज्ञान को लेकर चलने का प्रयत्न मुक्तिबोध मे देखा जा सकता है और आगे चलकर रमेश कुन्तल मेघ ने मिथक और स्वप्न की कामायनी की मनस्मौन्दर्य सामाजिक भूमिका बताकर इसी पथ को प्रशस्त किया । मुक्तिबोध कामायनी को एक 'फैटेमी' मानते हैं अर्थात उसमे केवल कल्पना-भूमि है, यथार्थ नही । वे मनु के चरित्र को प्रसाद से एकाकार करने का हठ करते है । पर कोई भी कवि इस सीमा तक खुद को पात्र के रूप में घटित नही कर देता कि दोनो मे पार्थक्य ही न रहे । तब तो काव्य का उन्नयन पक्ष ही समाप्त हो जायेगा । प्रसाद के जीवन सूत्रो के सहारे मनु का चरित्र खालने की कोशिश मनोविश्लेषण के साथ भी ज्यादती है। पर मुक्तिबोध जब श्रद्धा और इडा मे बुद्धिवादी इटा का पक्ष लेते है तब उनके यथार्थवादी जीवनाग्रह स्पष्ट हो जाते है । यहाँ वे आचार्य शुक्ल के निकट है । इसमे सन्देह नहीं कि कामायनी के पुनर्मूल्याकन म मुक्तिबांध काफी गहराई तक गए हैं और उन्होने इम काव्य के इर्द-गिर्द वननेवाले प्रशसा-व्यूह को छिन्न भिन्न करके उसके समाजशास्त्रीय मूल्याकन की दिशा में एक साहसपूर्ण कदम उठाया । मुनिबोध का यथार्थवादी रख उसकी रहस्यवादिता मे रुष्ट है और वे इमे पलायनवृत्ति मानत है और इमीलिए श्रद्धावाद का विरोध करते है । पर मेरा विचार है कि कामायनी मे प्रसादजी अनास्था को आधुनिक युग का एक अभिशाप मानते है और श्रद्धा अथवा आस्था के द्वारा वे एक जटिल प्रश्न का उत्तर पाना चाहते है । यहाँ उनका आशय अन्य श्रद्धा अथवा मध्यकालीन धार्मिक भक्तिभावना से नहीं है, यह जरूर है कि उनका रुख आदर्शवाडी है, रूमानी है । कामायनी स समाजशास्त्रीय अभ्ययन की जो शुरूआत मुक्तिबाध ने की, उममे नामवर मिह, रमेश कुन्तल मय आदि ने योग दिया । कामायनी का ही नहीं, किसी भी कृति का समाजशास्त्रीय विवेचन एक उपादेय अध्ययन बन सकता है, बशर्ते किसी शास्त्र का उस पर अतिरिक्त आरोपित न कर दिया जाय । मुक्तिबोध की समीक्षा कई स्थलो पर बहुत नकारात्मक हो गई है, इसमें लाभ उठाकर कुन्तल मेघ ने समाजशास्त्र और मनोविज्ञान की दुहरी पगडडियो पर साथ-साथ चलने की कोशिश की और मिथकीय अध्ययन किया । उनका कार्य काफी अकादमिक भी है और वे कई दृष्टियो से कामायनी को देखना- परखना चाहते हैं । काव्य रूप मे इसे महान मानते हुए भी वे शिकायत करते है कि इसम इतिहास को विकृत कर दिया गया है और मिश्रक एक स्वप्नजगत अथवा कल्पना-भूमि मे पर्यवमित हो जाते है । जाहिर है कि ममीक्षक एक प्रतिबद्ध सामाजिकता की माँग कामायनी से करता है जो रूमानी कवि के लिए तीन सौ बयालीस / प्रसाद का काव्य सम्भव न थी । नामवर मिह और कुन्तल मेघ मुक्तिबोध की तुलना में कामायनी के प्रति अधिक सहिष्णु है। इन सभी की इस शिकायत में समानता है कि प्रमाद आधुनिक सघर्ष से बचकर निकल गए है। मै समझता हूँ कि कामायनी के एक अधिक तटस्थ समाजशास्त्रीय विवेचन की गुजायश अब भी बनी हुई है । कामायनी के पुनर्मूल्याकन की कडी मे दो नाम मुख्य रूप स और लेकर, उस पर नये सिरे से कुछ कहना चाहूँगा । वे दो प्रयत्न है. इन्द्रनाथ मदान और रामस्वरूप चतुर्वेदी । डा. मदान कामायनी को एक असफल कृति कहते है । वे एक ओर तो यह मानते है कि कामायनी के आमुख्य मे कवि ने जो कुछ कह दिया था, उसे प्रमाण मानकर चलने के कारण समीक्षा मे कई पूर्वाग्रह उभरे है, दूसरी ओर वे स्वय सबसे पहले 'आमुख' की दस महत्त्वपूर्ण बातो का लेकर चर्चा आरम्भ करते हैं । वे मनु के व्यक्तित्व के विकास से बहुत सतुष्ट नही प्रतीत होत और उसकी भावुकता पर एतराज करते हैं । डा. मदान का आरोप है कि कामायनी को कवि सँभाल नहीं पाया है, उसमे एक लडखडाहट है जिसके कारण सृजन प्रक्रिया अनेक स्थलो पर अवरुद्ध हुई है। उन्होने एक महत्वपूर्ण सकेत किया है कि कामायनी की अब तक की समीक्षाओं मे समीक्षको ने खुद को आरोपित भी करना चाहा है जिससे उसकी ठीक पहचान नही हो सकी । वे आन्तरिक मरचना के अभाव में इमे एक असफल कृति घोषित करते है यद्यपि वे उस अमाधारणत्व भी देते है, जा उसके महत्त्व की सहज स्वीकृति है। रामस्वरूप चतुर्वेदी कामायनी के पुनर्मूल्याकन को एक अनिवार्य प्रक्रिया मानत है । डा चतुर्वेदी का आग्रह है कि किसी कृति को खण्ड-खण्ड करक देखने की तरकीब ठीक नहीं होती ओर उसे उसकी ममग्रता मे पकड़ना चाहिए । व कामायनी को सश्लिष्ट काव्य विधान का काव्य मानते है ओर उसे महाकाव्य के रूप में परीक्षित करना आवश्यक नहीं समझते । वे उसक अर्थवार, बिम्वविधान, सास्कृतिक सकट, जीवन-बोध और भाषा-मरचना आदि पर विचार करते हे ओर कामायनी के प्रति हमारी समझ को बढाते है । आज जब हम नयी कविता के दोर के बीच कामायनी स माझान करना चाहते है तो बढने हुए परिवेश मे उससे पूर्ण महानुभूति प्रकट करना कठिन हो जाना है। कामायनी छायावाद युग की कृति है जिसमे हिन्दी स्वच्छन्दतावाद की दो प्रमुख मुद्राएं देखी जा सकती है, सास्कृतिक और रूमानी । यह स्वीकारते हुए भी कि छायावाद मध्यवर्गीय मनोवृत्ति के उदय का काल है, हम मानना होगा कि उन्नीमवी शताब्दी के नवजागरण से उस जाडना अधिक उचित है । इस सास्कृतिक नवजागरण में सामाजिक सुधार की भावना केवन्न उसका वाह्य पक्ष है जो राष्ट्रीयता से भी गहरे ढग मे जुडी है । पर इस सास्कृतिक अभियान का अधिक सूक्ष्म म्वम्प भी है जब भारतीय मनीषा ने अपने इतिहास, धर्म, संस्कृति, साहित्य, कन्ना को नए ढंग से पहिचानने की कोशिश की। कामायनी मे कवि की यह सास्कृतिक दृष्टि निराला के कामायनीः आज के मदर्भ में / तीन सौ तैंतालीस समान विद्रोही न होकर किसी मीमा तक परम्परा के पुनर्मूल्याकन पर आधारित है। प्रसाद एक नितान्त प्राचीन कथानक उठाते हैं, जिसके पात्र मनु, श्रद्धा, इडा का उल्लेख ऋग्वेद तक में प्राप्त होता है । मनु मे वैदिक ऋषि के साथ-साथ मनुस्मृतिकार का रूप भी समाया है । विशेषतया जब वे सारस्वत प्रदेश का नियमन करना चाहते है । इसी प्रकार कामायनी की कथा पुराणो तथा शतपथ ब्राह्मण का भी सहारा लेती है। पर कामायनीकार के सामने बराबर यह प्रश्न था कि इस प्राचीन कथा का आधुनिक परिप्रेक्ष्य मे कैसे प्रस्तुत किया जाय । इसके लिए उन्होने सर्वप्रथम मानवीय आधार पर कार्य करना आरम्भ किया और प्राचीन काव्यों की उम प्रचलित परम्परा का निषेध किया जिसमे समस्त चरित्रो को पुण्य-पाप, शुभ-अशुभ, देव दानव के आधार पर विभक्त कर दिया जाता था और मघर्ष के अन्त मे देव पक्ष विजयी माना जाता था । यहाँ तक कि वर्ग-सघर्ष को लेकर चलनवाली समाजवादी कृतियों में भी इमी परम्परा का निर्वाह दूसरे ढंग स किया जाता है, जिसमे सर्वहारा की विजय घोषित करने की अनिवार्यता है । कामायनी देव दानव संघर्ष का साकेतिक चित्रण तो करती है पर दोनो को अपूर्ण मस्कृति मानती है । आरम्भ मे देवताओ की विलासी संस्कृति का चित्रण यद्यपि पुराणो मे वर्णित देव-मस्कृति का भी महारा लेता है पर प्रमाद उसके भयावह परिणाम की अपनी व्याग्या करते है। जो लोग आक्षेप करते है कि यह मामन्तवादी चित्रण है, उन्हें जान लेना चाहिए कि स्थिति की भयावहता दिखाने के लिए यह आवश्यक हे । कामायनी मे देव विलाम के चित्रण के अतिरिक्त शृगारी पक्ष उभारे गए है और चिन्ता मर्ग में सुरभित अचल से जीवन क मधुमय निश्वाम चलने का वर्णन है तथा अभिसार तक के चित्र है अब न कपोलो पर छाया सी पडती मुख की सुरभित भाप मे शिथिल वमन की व्यस्त न होती है अब माप । कामायनी देवताओ को 'विकल वामना का प्रतिनिधि' कहती है और यहाँ हम प्रमाद को, प्रलय को उसके पोराणिक अर्थ से हटाकर उसे एक नयी व्याख्या देने का प्रयत्न करते देख सकते है। प्रलय नियति अथवा प्रारब्ध मात्र नही था । देव-सस्कृति का विलाम उम मीमा तक पहुँच गया था जहाँ उसका विनाश एक अनिवार्य परिणति है। कामायनीकार मानता है कि देव-सस्कृति अपने ही विलास-भार और अहकार मे समाप्त हो गई जैमे बडी मछलियॉ छांटी मछलियों को सजातीय होते हुए भी निगल जाती है : 'भक्षक या रक्षक जो समझो केवल अपने मीन कामायनी देव संस्कृति के विलाम का विस्तृत चित्रण करके उसका पराभव तीन सौ चौंतालीस ' प्रसाद का काव्य दिखाने में एक नाटकीय स्थिति उत्पन्न करना चाहती है। अजर अमर तथा स्वयं को चिरन्तन युवा माननेवाली देव-संस्कृति कामधेनु, कल्पवृक्ष, उर्वशी, रम्भा आदि के जगत में स्वयं को परिपूर्ण मानती थी और प्रसादजी की व्याख्या में उसकी अहंवादी प्रवृत्ति का यही मूल कारण था । मनु प्रलय के अनन्तर मानव-संस्कृति का पिता बनकर भी अपने अहं से मुक्त नहीं हो पाता, वह उसके अवचेतन पर छाया है और बराबर उसका पीछा करता है। देव-संस्कृति का विलास और अहंकार दोनों मनु को कई बार भटकाते हैं। वह किलात-आकुलि के साथ हिंसा, आखेट और सोमपान में प्रवाहित होता है। 'ईर्ष्या' सर्ग में गर्भवती श्रद्धा पर भी वह वासनाभरी दृष्टि डालता है। इतना ही नहीं, इसी सर्ग में उसे अपने भावी शिशु से ईर्ष्या होती है। वह इसे 'द्वैत, द्विविधा अथवा प्रेम बाँटने का प्रकार' मानता है और 'पंचभूत की रचना में एक तत्व बनकर' रमण करना चाहता है। 'मन की परवशता को महादुख' कहता हुआ वह अपने ही अहंकार में बंदी है और गर्भवती श्रद्धा को छोड़कर चला जाता है। मनु के अहं- परिचालित व्यक्तित्व की मनोवैज्ञानिक व्याख्या सरलता से की जा सकती है जो एक ओर उसके पुराने देवत्व संस्कार के कारण है, दूसरी ओर प्रसाद उसके माध्यम से आधुनिक मानव को भी बिम्वित करना चाहते हैं। देवत्व-दानवत्व कां कामायनी में दो संस्कृतियों और जीवन दृष्टियों के रूप में चित्रित किया गया है। प्रसाद दोनों को अपूर्ण संस्कृति मानते हैं और मेरा विचार है कि इडा सर्ग में इसके संघर्ष का चित्रण इस आशय से भी किया गया है कि सारस्वत प्रदेश में जो नयी सभ्यता पनपं, वह इतिहास से शिक्षा लेती हुई इन दोनों अतिवादों से मुक्त रहे । प्रसाद ने देव-दानव की अपूर्णता के विषय में संक्षिप्त, पर सार्थक पंक्तियाँ लिखी हैं : दूसरा अपूर्ण अहता में अपने को समझ रहा प्रवीण दांनों का हठ था दुर्निवार, दोनों ही थे विश्वासहीन । यदि दानव-संस्कृति शरीर को अन्तिम सत्य मानकर 'प्राणों की पूजा' में लगी हुई थी तो देवता खुद को 'स्वयंसम्पूर्ण' समझकर उच्छृंखल हो गये थे । देव-संस्कृति की अपूर्णता दिखाकर उसकी नयी व्याख्या करना कामायनी की एक मौलिक और साहसपूर्ण उद्भावना है जो उसे आधुनिकता देती है। प्रसाद की यह मानवीय दृष्टि आदर्शवादी है, रूमानी है, पर अवौद्धिक और नैतिकतावादी नहीं । इसे न जाननेवाले समीक्षकों से कई भूनें हो जाया करती हैं। कामायनी की दृष्टि यथार्थवादी नहीं है, इसका सबूत यह कि जब प्रसाद सारस्वत प्रदेश के माध्यम से नयी औद्योगिक सभ्यता का चित्रण करना चाहते हैं तब उसके विस्तार में कम जाते हैं। वे बुद्धिवाद और भौतिकवाद को उसकी मूल प्रवृत्ति बताते हैं। हमें स्वीकार करना होगा कि आधुनिक कामायनी : आज के संदर्भ में / तीन सौ पैंतालीस सभ्यता की जटिलताओ मे प्रवेश करने मे कामायनी को सफलता नहीं मिली और वह साकेतिक दृश्य मात्र प्रस्तुत कर सकी है। काम का शाप आधुनिक मानव के जटिल परिवेश को पूरी तरह उजागर नही कर पाता और केवल कुछ इशारे-भर कर जाता है। इसी प्रकार 'रवप्न' मर्ग मे श्रद्धा सारस्वत प्रदेश का जो जीवन देखती है वह भी वस्तुपरक नही है। इसी सर्ग के अन्त मे और आगामी 'सघर्ष' सर्ग मे मनु और उसकी प्रजा का सघर्ष हल्के हाथो हुआ है, इसमे शक नही । कहने का तात्पर्य यह कि देव-दानव के स्थान पर मानव को प्रतिष्ठित करने का साहसिक यत्न तो कामायनी मे है, पर आधुनिक मानत्र को उसके सश्लिष्ट व्यक्तित्व में प्रस्तुत कर सकने मे अधिक यथार्थवादी दृष्टि अपेक्षित थी, जा कवि की रूमानी दृष्टि के कारण सभव नही । समाजशास्त्र, विशेषतया समाजवादी यथार्थवाद के आग्रही समीक्षक कामायनी में प्रसाद के पक्षपातपूर्ण रवैये पर आर्पान करते हुए कहते है कि श्रद्धा को अतिरिक्त महत्त्व मिला है । काव्य का नामकरण कामायनी के आधार पर होने से श्रद्धा नायिका है ओर वह महत्वपूर्ण स्थान पर है। पर इस संबंध में यह ध्यान देने योग्य हे कि श्रद्धा स्वयं के जीवन दर्शन की पूर्णता का दावा नहीं करती और अपन पुत्र मानन को इडा के पास इसलिए छोड जाती है कि उसका एक सतुलित समन्वत व्यक्तित्व निर्मित हो सक । 'दर्शन' मर्ग मे वह मानव स कहती है, 'यह तर्कमयी तू श्रद्धामय । जाहिर है कि प्रमाद एक समन्त्रित जीवन दृष्टि का आग्रह करत है जिम व 'ममरमता' द्वारा व्यक्त करना चाहते है । यह अलग बात है कि इस प्रकार का समन्वय कितना मार्थक है पर जिम समय कामायनी रची गयी थी वह भारतीय राजनीति की एक प्रभावशाली धारा के रूप म माजूद था, इमम इन्कार नहीं किया जा सकता । वारनविक स्थिति यह ह कि कामायनी यद्यपि क्या को लकर रचा गया काव्य है पर कथा कहना उसका मुख्य आशय नही है। उसके लम्व लम्बे एकालाप स्वय इसका प्रमाण है । 'सवर्प' मर्ग के बाद अन्तिम चार सर्गों मे तो कथा का ऐसा ठहराव आ गया है कि यदि मनु के आध्यात्मीकरण की जरूरत न होती तो काव्य मे उनके विना भी काम चल सकता था । कामायनी इतिहास के प्रमाणीकरण को लेकर नही चलती, इसलिए उसका इतिहासबोध सबन्न नही हो पाया। अनक ऐसे अवसर थे जब एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति में प्रवेश करते समय कामायनी इतिहास के कोण उभार सकती थी, जैसे कि कुछ कहानियो म मामूली कोशिश भा हुई है । पर प्रसाद के मूल व्यक्तित्व की कठिनाई यह कि वे प्रायः चीजो को रूमानी नजरिये से देखने के अभ्यस्त है इमलिए 'आकाशदीप' और 'पुरस्कार' जैमी कहानियो म प्रेम-द्वन्द्व बाजी मार ले जाता है तथा इतिहास पिछड जाता है। 'चन्द्रगुप्त' नाटक तक मे कार्नेलिया यवन-भारत संस्कृतियों के संघर्ष को पूरा उभरने नही देती जबकि उसके लिए अवसर था । अधूरा उपन्याम 'इरावती' दृश्य को स्वच्छन्दतावादी दृष्टि तीन सौ छियालीस / प्रसाद का काव्य से प्रस्तुत करतं हुए आरम्भ होता है जबकि कथानक सांस्कृतिक संघर्ष का है । यह इतिहास के प्रति रूमानी दृष्टि के कारण है, जिसने यथार्थ को पीछे छोड़ दिया है और अनेक स्थलों पर उसका स्थान एक मनोरम कल्पना और आदर्शवाद को मिल गया है। कामायनी के अन्तिम चार सर्ग काव्य की दृष्टि से उत्कर्षपूर्ण नहीं कहे जा सकते, पर प्रश्न है कि तब उनकी रचना क्यों हुई ? प्रत्यभिज्ञा दर्शन को शास्त्रीय पद्धति से प्रस्तुत करना अथवा दार्शनिक मुद्राएँ दिखाना मात्र उनका अभीष्ट नहीं था । ऐसा होता तो काव्य वक्तत्व बहुल हो जाता है । 'त्रिपुरारहस्य' में इच्छा, ज्ञान, कर्म का त्रिकोण प्रसाद की समन्वयवादिनी दृष्टि के निकट था, इसलिए उन्होंने इसका प्रतीकात्मक उपयोग किया । वे श्रद्धा को तत्व रूप में ढालकर उसे आध्यात्मिक गुरु जैसा बनाना चाहते हैं । और अत में मनु का भी रूपान्तरण करना चाहते हैं कि वह कुछ-कुछ ऋषित्व पा जाय । अन्तिम अशों में आध्यात्मीकरण के कई प्रसंग हैं जिन पर आपनि तक की जा सकती है क्योकि वे आधुनिक स्थिति में बहुत प्रासंगिक नहीं प्रतीत होते । 'दर्शन' सर्ग में नटराज का नृत्य प्राचीन महाकाव्यों अथवा महानाटकों के दैवी तत्व की तरह दिखाई देता है पर कामायनी में इसका मूल प्रयोजन आध्यात्मिक रंग भरना है। कामायनी की यह आध्यात्मिकता प्रसाद की आदर्शवादिता से सम्बद्ध है, वह मध्ययुगीन रहस्यवाद का सम्करण नहीं है और जीवन-सापेक्ष है । यही कामायनी के मानवीय पक्ष की शक्ति है और सीमा भी । यहाँ मूल्य-चिन्ताएँ हैं, पर रूमानी ढंग से । कामायनी के विन्यारा मे प्रसाद की वैयक्तिक अनुभूतियाँ भी सक्रिय रही हैं, यद्यपि उन्हें खोज लंना आसान नहीं है । वे निराला के समान निर्वैयक्तिक व्यक्तित्व के कवि नही है। उनकी निजी अनुभूतियाँ कहानियों को रूमानी बनाती है और नाटकों में गीतों और प्रेमिकाओं की योजना होती है । प्रायः कह दिया जाता है कि प्रसाद के नाटको की नारी सृष्टि तथा प्रेम-संबंधी अन्तर्द्वन्द्व पाश्चात्य चरित्र चित्रण के समान हैं, पर वास्तव में यह प्रसाद के मूल रूमानी व्यक्तित्व कं कारण है । कामायनी इसीलिए कथाप्रधान और वर्णनात्मक नहीं हो पाती । कार्नेलिया अरुण यह मधुमय देश हमारा' भारत-वन्दना गीत गात गाते अन्त मे हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती दुलकाती सुख मेरे / मदिर ऊँघते रहते जब जगकर रजनी भर तारा' की रूमानी पंक्तियों से गीत का समापन करती है। कामायनी का 'लज्जा' सर्ग कुछ समीक्षकों को कथा-विन्यास की दृष्टि से असंगत प्रतीत होता है क्योंकि इससे कथा-क्रम में कोई अन्तर नहीं आता । एक प्रकार से वह कथा - विहीन सर्ग है । पर मात्र काव्य और वह भी गीतात्मकता की दृष्टि से यह कामायनी का सर्वोत्कृष्ट प्रसंग है। इसका कारण यही है कि यहाँ प्रसाद को अपनी स्वच्छन्दतावादी वृत्तियों के प्रकाशन की पूरी छूट थी और इसलिए वे अपनी सर्वोत्कृष्ट उड़ान पर पहुँच गए । इतना ही नहीं, सर्ग के अन्त मे वही आदर्शवादी समन्वयमार्गी रुख अपनाकर मनु- श्रद्धा मे एकतरफा-जैसा समझौता करा कामायनीः आज के संदर्भ में / तीन सौ सैंतालीस दिया गया है। श्रद्धा हो अथवा इड़ा, प्रसाद की रूमानी मुद्राएँ सक्रिय रहती है पर आदर्शवादिता को किसी हद तक साथ लेकर । मनु के रूमानी, स्वच्छन्दतावादी व्यक्तित्व का आध्यात्मीकरण प्रसाद को इसीलिए करना पड़ा, ताकि वह नायक होने योग्य बन सके और प्रसादजी का भी आदर्शवादी रुख सुरक्षित रह सके । यदि मनोवैज्ञानिक स्तर पर सोचा जाय तो प्रसाद काव्य-संयोजन अथवा चरित्र-सृष्टि के अवसर पर भी 'कामायनी' में इतना तटस्थ नही हो पाए हैं कि उन्हे पूर्णतया आत्ममुक्त कहा जा सके। इसी कारण कामायनी मे एक गीतात्मकता आदि से अन्त तक काव्य पर आच्छादित रहती है। ऐसा लगता है कि कामायनी में 'आँसू' की प्रिया कवि का पीछा कर रही है, और अवचेतन पर उसका प्रभाव है। गीतात्मकता के सबब से कामायनी के कुछ अंश खण्ड-खण्ड रूप में बहुत उत्कर्षपूर्ण प्रतीत होते है । वहाँ कवि अपनी सम्पूर्ण सर्जनात्मकता के साथ आया है, पर जब काव्य के समन्वित प्रभाव की स्थिति आती है तब कामायनी के बड़े से बड़े प्रशसक को स्वीकारना पड़ता है कि काव्य-सघटन मे शिथिलता है। इसीलिए उमे महाकाव्य प्रमाणित करने की चेष्टा जबरन नही की जानी चाहिए, क्योंकि आधुनिक युग मे महाकाव्य महान् काव्य का पर्याय नहीं रह गया हे । 'कामायनी' की महत्ता की तलाश ही पर्याप्त है और वह बडप्पन तो उसमं है ही। कामायनी का रचनाकार उस वैविध्य का दावा नही कर सकता जो संबोधन प्रायः निराला के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पत का काव्य भी दिशाएँ बदलता रहा है । इम दृष्टि से प्रसाद और महादेवी एकरम कवि भी कहं जा सकते हैं, जिनके अनुभूति - जगत और भाषा में एक ही स्तर का निर्वाह प्रायः हुआ है । कामायनी का वैशिष्ट्य यदि प्रसाद के सम्पूर्ण व्यक्तित्व से सम्बद्ध करके देखा जाय तो सभव है उसके लिए एक नये समक्षानिकष की आवश्यकता पड़े. पर इससे उस कृति के साथ अधिक न्याय हो सकेगा। सच्चाई ता यह है कि कामायनी एक प्रकार से प्रसाद के सम्पूर्ण व्यक्तित्व के प्रतिफल की चंप्टा है; यह बात दूसरी है कि उनके एकीकरण मे कही कोई कमी रह गई हो। हर महत्त्वपूर्ण कृति जिसमे रचनाकार अपने समग्र व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति देना चाहता है और यदि सयोगवश वह व्यक्तित्व सश्लिष्ट अथवा विराट हुआ तो कृति बार-बार हमे ललकारती है, एक चुनौती बनकर हमारे सामने आती है। इसीलिए कामायनी कथा-प्रसंगो मे जब अपना सम्पूर्ण अर्थ उजागर नही कर पाती, तब उमे केवन्न शिश्रिल अभिव्यक्ति कहकर छोड देने से काम नही चलेगा । यह रचनाकार का भीतरी उलझाव भी है जिसे व्यक्त करने के लिए वह बार-बार दुहरे तिहरे बिम्बों का सहारा लेता है, फिर भी गाँठ पूरी नहीं खुल पाती । कामायनी एक प्रकार से छायावाद युग का समापनग्रन्थ और निराला की आख्यान रचनाओ के अतिरिक्त छायावाद का एकमात्र महत्त्वपूर्ण कथाकाय है । सन् 'पैंतीस मे कामायनी को अन्तिम रूप देकर जब प्रसादजी प्रेमचन्द के निधन के कुछ ही समय तीन सौ अड़तालीस / प्रसाद का काव्य बाद चल बसे, उमी के आस-पास स्वयं छायावादी काव्य का जगत बदलने लगा था । पत युगान्त, युगवाणी, ग्राम्या के दौर में थे और निराला अपनी इकलौती बेटी सरोज को खो देने के बाद आक्रोशभरी मुद्रा में आ गए थे। एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में प्रकाशित द्वितीय अनामिका में 'सरोज स्मृति' जैसा शोकगीत है जिसमें करुणा के साथ निराला ने सामाजिक विद्रोह को भी अभिव्यक्ति दी है । सन् 'सैंतीस में ही 'तोड़ती पत्थर' जैसी सामाजिक यथार्थ की कविता रची गई जिससे प्रगतिवाद को शक्ति मिली । इस प्रकार पैंतीस-छत्तीस के आस-पास हिन्दी का स्वच्छन्दतावादी काव्य भी रूमानी परिवेश से हटकर यथार्थ की नयी भूमिका में प्रवेश करने लगा था । कहा नहीं जा सकता कि यदि इस दौरान प्रसाद जैसे एकरस कवि जीवित होते तो वे इस नयी धारा से कहाँ तक अप्रभावित रहते । पर जब हम कामायनी को छायावाद का समापन काव्य कहते हैं तो हमारा आशय यही है कि इसके बाद उसकी रूमानी वृत्तियों ने नयी दिशाएँ ग्रहण कीं । इसी कारण कामायनी काव्य की सीमाओं का जिक्र करते हुए हमें यह समझ भी होनी चाहिए कि हम जान लें कि वे प्रकारान्तर से छायावाद की भी सीमाएँ हैं। इनमें से कुछ को तोड़कर आगे जाने की चेष्टा उन्होंने की, मसलन कथा-काव्यों से की दिशा में नए प्रयोग अथवा 'प्रलय की छाया' जैसे दीर्घ प्रगीतों की सृष्टि । पर कामायनी स्वच्छन्दतावादी काव्य की सारी चौहद्दी नहीं तोड़ पाती, यही उसकी सीमा है। रचना में अतिक्रमण सरल भी नहीं होता । कामायनी का अनुभव क्षेत्र सीमित है, इसमे सन्देह नहीं, पर यह बात तो प्रसाद के सम्पूर्ण काव्य के लिए कही जा सकती है। अनुभव की जो विविधता और विस्तार महाकाव्यो के लिए अनिवार्य स्वीकारे गए हैं उसकी पूँजी कामायनी के पास नहीं है, पर प्रसाद एक तल्लीन कवि हैं इसलिए वे विस्तार की क्षतिपूर्ति गहनता से करना चाहते है । इस क्रम में वे अनुभव विस्तार की जगह अपनी अनुभूति को गहराकर है - काम निकालना चाहते हैं । कुछ तो अभिव्यक्ति की छायावादी सीमाओं के कारण तथा कुछ प्रसाद की अनुभूति की संश्लिष्टता और गहराई के कारण 'कामायनी में दुरूहता की शिकायत की जाती है क्योंकि उसमें अर्थ ऊपर रखे हुए नहीं है। वहाँ कई प्रसंगों में अनुभूति क्षण और वह भी सश्लिष्ट अनुभूति क्षण हैं जिसे प्रसाद ने प्रतीक बिम्बों मे बाँधना चाहा है। 'काम' सर्ग में मनु एक जिज्ञासु की तरह नीले आकाश को देखता है और उस रहस्य - भरे आवरण को चीरना चाहता है । यह समस्त प्रसंग आसानी से पाठक की पकड़ में नहीं आता, पर इसीलिए उस पर आक्षेप कर देना, कामायनी के साथ ज्यादती होगी । कहीं-कहीं तो ऐसी स्थिति आई है कि प्रसाद में कई अनुभूति खण्ड एक-दूसरे में समा गए हैं और वे उन्हें अलग-अलग नहीं करना चाहते क्योंकि इससे उसकी संश्लिष्टता का क्षरण होता है। ऐसे अवसर भी जल्दी पकड़े नहीं जा सकते और हमें ठहरने को बाध्य करते हैं। पर यह स्वीकारना होगा कि अनेक स्थलो पर कामायनी इन्द्रजाल-सा रच देती है और हम उसमें प्रवाहित होते कामायनीः आज के संदर्भ में / तीन सौ उनचास हैं। ऐसे ही अवसरों के लिए कॉडवेल ने 'हिप्नाटिज़्म' की बात स्वच्छन्दतावाद के प्रसंग में कही है। कामायनी की भाषा स्वच्छन्दतावाटी काव्य को उसके शीर्ष पर ले जाने का प्रमाण है, यह भी विचारणीय है। कम शब्दों में बहुतेरी बातें कहने अथवा एक बड़े दृश्य को बाँधने की कोशिश में कामायनी की भाषा प्रसाद की सहायता करती है। पर वे जब अमूर्त का मूर्तीकरण करना चाहते हैं, तब भी उनकी रागात्मकता अमूर्तता से बँधी रहती है और व्यक्तित्व के इस द्वन्द्व के कारण चित्र पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाते । श्रद्धा का रूप वर्णन इसका एक उदाहरण है जहाँ कवि प्रायः अमूर्त विधान का सहारा लेता है। ऐसे अवसरों पर अनुभूति के साथ कवि का अध्ययन भी सम्मिलित दिखाई देता है और वह कल्पना का अधिकाधिक सहारा लेता है : उषा की पहली लेखा कांत माधुरी से भीगी भर मोद जैसे उठे सलज्ज कुसुम कानन अंचल में मद पवन प्रेरित रचित परमाणु पराग शरीर सौरभ साकार खड़ा हो ले मधु का आधार । कामायनी कालजयी कृतियों में है और इसमें सन्देह नहीं कि हर युग में उसके कुछ पाठक अवश्य होगे। उसे रामचरितमानस जैसे जनकाव्य के रूप में देखना भूल है क्योंकि इस प्रतियोगिता मे तो कालिदास भी भाग नहीं लेना चाहेगे । युग के बदलते सामाजिक परिवेश और उसके परिणामस्वरूप जनमनेवाले आस्वाद और समीक्षा प्रतिमानों के आधार पर कामायनी बराबर नये विवेचन की माँग करती रहेगी। हिन्दी स्वच्छन्दतावाद, छायावाद के समापन काव्य के रूप में तो वह स्मरणीय रहेगी ही, पर उसमें कवि ने आधुनिक मूल्यों को पाने की सराहनीय चेष्टा भी की है और उसकी अपनी उपलब्धियाँ तथा सीमाएँ है। अपनी नयी पुस्तक 'हिन्दी स्वच्छन्दतावादी काव्य' में मैंने इसकी विस्तृत चर्चा की है। तीन सौ पचास / प्रसाद का काव्य
प्राचीन परम्पराओं की तुलना में विवेकशीलता का अधिक महत्वपूर्ण तरीके से प्रतिपादन करने वाले यूनानी दार्शनिक सुकरात को वहां के कानून के अनुसार मृत्युदंड की सजा दी गई। Inspirational Story: प्राचीन परम्पराओं की तुलना में विवेकशीलता का अधिक महत्वपूर्ण तरीके से प्रतिपादन करने वाले यूनानी दार्शनिक सुकरात को वहां के कानून के अनुसार मृत्युदंड की सजा दी गई। सुकरात के शिष्य अपने गुरु के प्राण बचाना चाहते थे। उन्होंने गुरु के जेल से भाग निकलने के लिए एक सुनियोजित योजना बनाई और उसके लिए सारा प्रबंध ठीक कर लिया। प्रसन्नता भरा समाचार देने और योजना को समझाने के लिए उनका एक शिष्य जेल में पहुंचा और सारी बात बताई। शिष्य को आशा थी कि प्राण रक्षा का प्रबंध देखकर उनके गुरु प्रसन्नता का अनुभव करेंगे।
प्राचीन परम्पराओं की तुलना में विवेकशीलता का अधिक महत्वपूर्ण तरीके से प्रतिपादन करने वाले यूनानी दार्शनिक सुकरात को वहां के कानून के अनुसार मृत्युदंड की सजा दी गई। Inspirational Story: प्राचीन परम्पराओं की तुलना में विवेकशीलता का अधिक महत्वपूर्ण तरीके से प्रतिपादन करने वाले यूनानी दार्शनिक सुकरात को वहां के कानून के अनुसार मृत्युदंड की सजा दी गई। सुकरात के शिष्य अपने गुरु के प्राण बचाना चाहते थे। उन्होंने गुरु के जेल से भाग निकलने के लिए एक सुनियोजित योजना बनाई और उसके लिए सारा प्रबंध ठीक कर लिया। प्रसन्नता भरा समाचार देने और योजना को समझाने के लिए उनका एक शिष्य जेल में पहुंचा और सारी बात बताई। शिष्य को आशा थी कि प्राण रक्षा का प्रबंध देखकर उनके गुरु प्रसन्नता का अनुभव करेंगे।
है। जनता से झूठे वादे करके प्रदेश की सत्ता में आई कांग्रेस को हमें लोकसभा चुनाव में सबक सिखाना होगा। उन्होंने कहा यह चुनाव अच्छाई और बुराई के बीच एक जंग है, जिसमें अच्छाई की विजय होगी और नरेन्द्र मोदी जी ही पुनः प्रधानमंत्री बनेंगे। इस जंग के लिए सभी कार्यकर्ता समर्पण भाव और कर्तव्यनिष्ठा से तैयार है। इस अवसर पर सभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मोदी की सत्ता में वापसी का संकल्प लिया।
है। जनता से झूठे वादे करके प्रदेश की सत्ता में आई कांग्रेस को हमें लोकसभा चुनाव में सबक सिखाना होगा। उन्होंने कहा यह चुनाव अच्छाई और बुराई के बीच एक जंग है, जिसमें अच्छाई की विजय होगी और नरेन्द्र मोदी जी ही पुनः प्रधानमंत्री बनेंगे। इस जंग के लिए सभी कार्यकर्ता समर्पण भाव और कर्तव्यनिष्ठा से तैयार है। इस अवसर पर सभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मोदी की सत्ता में वापसी का संकल्प लिया।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के नगला माया गांव के 50 युवाओं ने अपने गांव में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए धन जुटाने के लिए खुद को नीलाम करने का फैसला किया है। नगला माया के निवासी अपने गांव में पीने के पानी की भारी कमी से गुजर रहे हैं और दावा करते हैं कि वे विभिन्न अधिकारियों से मिले हैं और गांव में पानी की कमी के मुद्दे को उठाया है। पीने के पानी की खराब गुणवत्ता से तंग आकर युवाओं ने एक यूथ पब्लिक वेलफेयर का गठन किया है और कहा है कि वे अपने गांव में पानी की विकट स्थिति से निपटने के लिए खुद की नीलामी करेंगे। प्रदर्शनकारियों में से एक ने यह भी दावा किया कि पीने के पानी की कमी से लाखों निवासियों वाले क्षेत्र के 60 गांवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के नगला माया गांव के पचास युवाओं ने अपने गांव में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए धन जुटाने के लिए खुद को नीलाम करने का फैसला किया है। नगला माया के निवासी अपने गांव में पीने के पानी की भारी कमी से गुजर रहे हैं और दावा करते हैं कि वे विभिन्न अधिकारियों से मिले हैं और गांव में पानी की कमी के मुद्दे को उठाया है। पीने के पानी की खराब गुणवत्ता से तंग आकर युवाओं ने एक यूथ पब्लिक वेलफेयर का गठन किया है और कहा है कि वे अपने गांव में पानी की विकट स्थिति से निपटने के लिए खुद की नीलामी करेंगे। प्रदर्शनकारियों में से एक ने यह भी दावा किया कि पीने के पानी की कमी से लाखों निवासियों वाले क्षेत्र के साठ गांवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
राजन की किराना की दुकान में लॉक डाउन का ऐलान होते ही सन्नाटा पसर गया। मण में सोंचा, एक दम नकारा हो गया? ' पापा, मेरे स्कूल में बोला गया है कि अब ऑनलाइन क्लास चलेगी।' ' लेकिन उसके लिए एंड्रॉयड मोबाइल चाहिए पापा' ' क्यूं, वो किस लिए?' ' उफ़, पापा आपका मोबाइल तो साधारण ही है, उसमे नेट कहां चलता है?' ' ओह, फिर रहने दो। चुपचाप खुद से ही पढ़ो, ये सब स्कूल वालों के चोंचले है।' बुलबुल सहमी सी चुप रह गई। लेकिन इससे सुकून नहीं मिला। दूसरे ही दिन से स्कूल से फोन आने शुरू हो गए। ' राजन साहब, बच्ची का कोर्स पिछड़ रहा है। प्लीज़ ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए कोशिश करें।' ' देखिए मैडम, मेरे पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है न मै खरीद सकता हूं। आप माफ करें।' ' देखिए, समय के इस संकट को समझिए और बच्चे की पढ़ाई का इंतजाम कीजिए वरना उसका प्रोमोशन रुक जाएगा। उसे आगे की क्लास नहीं मिलेगी। उसके भविष्य से मत खेलिए' ' लेकिन.. ' वह कुछ कहना चाहता था कि फोन उधर से काट दिया गया। वह चुका सा खड़ा रह गया। पास खड़ी पत्नी ने पूछा...' क्या हुआ! ' सही तो कह रहे हैं, अब लॉकडॉउन जाने कब खत्म हो। बच्ची घर पे कैसे पढ़े। उसकी किताबें हमारी तुम्हारी समझ में तो आती नहीं है। हम तोह पढ़ा नहीं सकते! फिर तो घर बैठे-बैठे सब भूल जाएगी।' ' तुम भी क्या बात करती हो। तो क्या चोरी करने जाऊं?' बीबी झल्ल से उठी और कमरे में गई। वापस आ कर राजन की हथेली पर कुछ पैसे रख दिए.. ' लो, पूरे साढ़े तीन हजार हैं। घर की छत बनवाने के लिए इकट्ठे किए थे, लेकिन बच्चे की पढ़ाई से जादा जरूरी नहीं है वो' वह उन पैसों को देखता रहा फिर रख लिया। बाज़ार तो अब सुबह ही खुलेगी ' कहते हुए। दूसरे दिन वो एक दोस्त सुरेश के साथ मोबाइल की दुकान पे पहुंचा। वहां काफी भीड़ थी। लोग मस्क लगाए मार्केट में घूम रहे थे। मोबाइल वाले ने किस्म-किस्म के मोबाइल दिखाने शुरू किए। ' देखिए भाई साहब, इनकी कीमत दस हजार से शुरू होती है, आगे इससे ज्यादा ज्यादा दाम के भी मिलेंगे। उसके पांव के नीचे से ज़मीन निकल गई। थोड़ा झेंप भी गया और तुरंत बाहर की ओर मुड़ लिया। पीछे पीछे सुरेश आया.. ' क्या हुआ? क्या बात हो गई?' ' अरे भाई इतना बजट नहीं है अपना ' ' ओह तो ऐसे कहो, कितने तक का चाहिए?' ' ऐसा करो, सेकंड हैंड ले लो वो इतने का ही मिल जाएगा ' उसकी आंखों की चमक लौट आई.. ' अच्छा? ' ' लेकिन मेरे पास तो 5000 भी नहीं है।' ' कोई बात नहीं, पहले चल कर मोबाइल देख लो फिर समझ आए तो के लेना बाकी पैसे बाद में देते रहना। बिटिया की पढ़ाई तो न रुकेगी,' वह सुरेश कर साथ उसके घर पहुंचा। मोबाइल देखा परखा, पसंद आ गया। सुरेश का बेटा बोला.. ' चाचा, इसमें जिओ का सिम भी लगा हुआ है। डाटा भी पड़ा हुआ है। उसके पैसे हम नहीं ले रहे। क्यूंकि हम वैसे भी बिना मोबाइल का सिम करेंगे क्या?' ' बहुत बहुत धन्यवाद बेटा ' ' किते का कर दूं? 300 का, 250 वाला या 199 वाला?' वह फिर सोंच्च में पड़ गया। पूछा.. ' इससे कम में नहीं आता है?' ' नहीं भाई, ये सबसे कम वाला है ' उसने बड़े सहमते हुए 100 रुपए निकाले.. ' भाई, 199 वाला कर दो, 100 रुपए रख लो, बाकी कल आ के दूंगा, तुम तो जानते ही हो देश की हालत। मुश्किल से खाना ही मिल जाता है। मगर बच्चे कि पढ़ाई भी ज़रूरी है, आज कल मोबाइल प्र ही पढ़ाई हो रही है..सुना होगा?' ' हां, सुना है मेरा बेटा भी ऑनलाइन ही पढ़ता है। पढ़ता क्या है, पढ़ता कम गढ़ता ज्यादा है, पढ़ाई का बहाना करके गेम खेलता रहता है बस भाई साब, बाजारवाद हावी होता जा रहा है हर तरफ' दोनों की मिली जुली हंसी। फिर वो चला आया। बुलबुल फिर से ऑनलाइन पढ़ने लगी थी। लेकिन अब वो क्लास के अलावा भी मोबाइल लिए बैठी रहती। गेम में लगी रहती। और जब मां पुकारती.. ' बुलबुल, जा के फ्रिज से सब्जी निकाल लाओ ' जवाब आता मै होमवर्क कर रही हूं मां ' अब बस मोबाइल था कि वो थी। महीना बीता। बुलबुल की आंखो से अब पानी बहने लगा था, मगर वो बचपना, वो आंखे मल के पानी सुखाती और फिर शुरू हो जाती। राजन कई दिनों से इस बात पे गौर कर रहा था मगर बच्ची मान नहीं रही थी। एक दिन सुबह उसने बुलबुल को पुकारा.. ' बुलबुल, चलो मेरे साथ, ' वह चल दी। दोनों आंख के डॉक्टर के यहां पहुंचे। डॉक्टर ने आंख की जांच की और बोला हल्के पॉवर का चश्मा लगेगा। उसने मरे मन से कहा.. ' बना दीजिए ' ' ओके, कौन सा बनवाएंगे?' ' मतलब ' ' अरे भाई साहब, एक चश्मा नॉर्मल बनता है, उसे लगा के बच्चे कोई भी काम करें। पढ़ाई लिखाई भी कर सकते हैं। एक चश्मा अभी हाल ही में लॉन्च हुआ है लोगों की जरूरत को देखते हुए। क्यूंकि सारे ऑफिस स्कूल, कॉलेज सब बंद हैं। लौकडाउन चल रहा है, कोई पता नहीं कब खुलेगा। इसलिए रोज़ी नामक कंपनी ने एक अलग किस्म का चश्मा बनाया है जिससे सिर्फ ऑनलाइन ही काम किए जाते हैं। इससे आंखे सुरक्षित रहती हैं और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं। हां, थोड़ा मंहगा ज़रूर पड़ेगा क्यूंकि इसके ग्लास फ्रेम की क्वालिटी ही अलग होती है आम चश्मों की बनिस्बत ' राजन का मन फिर डूबने लगा। 500 डॉक्टर की फीस पहले ही भर चुका है। अब क्या बतायेगा ये डॉक्टर। उसने डरते डरते पूछा.. ' वैसे कितने का पड़ेगा?' ' ढाई हजार का भाई साहब, लेकिन बिल्कुल सेफ है ' उसने बुलबुल को इशारा किया चलने का और डॉक्टर से बोला ' कल आता हूं, जो होगा बताऊंगा ' वह रास्ते भर सोचता गया.. ' आमदनी तो कुछ होती नहीं। इन लोगों ने लूट मचा रखी है, बाज़ार इस कदर हावी हो रहा है। कुछ दिनों में कफ़न भी ब्रांडेड आने लगेंगे। लेकिन बच्ची की पढ़ाई और सेहत दोनों ज़रूरी है। फिर पैसे का जुगाड कैसे हो? ' ' भाई, बहुत ज़रूरी काम आम पड़ा है, ढाई हजार का इंतजाम कर दो कहीं ' ' तुझे नहीं पता देश की हालत क्या हुई है। लोग भूखे मर रहे हैं। हमे खाना मिल रहा है यही शुक्र मनाओ, मेरा भी काम बंद पड़ा है। जो थोड़ा कुछ बचा रखा था वहीं खा रहे हैं, माफ करना मेरे भाई ' ' कोई बात नहीं धीरज, मै समझ रहा हूं,' वो थके क़दमों से बाहर आ गया। शर्ट की जेब में थोड़े से पैसे थे निकाले, उन्हें मायूसी से देखता रहा फिर वापस रख लिया। शाम काफी घिर आयी थी। अंधेरा सा हो रहा था। मां बेटी घबरा रही थीं। बुलबुल भी मोबाइल छोड़ कर बार-बार दरवाज़े की तरफ देख रही थी, पत्नी बार-बार बाहर झांक आती और मन ही मन बड़बड़ाती.. ' हे भगवान, कहां चले गए ऐसे खतरनाक माहौल में। कहीं बीमारी ले के न घर लौटे! गए तो थे इसका चश्मा बनवाने?' अभी वो वापस किचेन में लौटी ही थी कि बाहर से ही राजन की आवाज आई.. ' रेखा.. ओ रेखा..कहां हो भाई। ये देखो सरकार ने सारा टेंशन ही खत्म कर दिया।, वो लगभाग दौड़ती हुई उसके नजदीक आई.. ' आ.. अच्छा.. सच्ची?' लेकिन राजन का चेहरा देख सहम सी गई। चेहरे पे उड़ती हवाइयां, सुर्ख आंखें..काले पड़े हुए होंठ, लरजते पांव.. ' हां..ये देखो..' कहते हुए राजन ने एक शराब की बोतल आगे कर दी.. ' देखो, अब कोई भी भूख से नहीं मरेगा, कोई प्यास नहीं सताएगी ' बुलबुल पिता के चेहरे को एकटक देख रही थी और पत्नी डबडबाई आंखें लिए किचेन कि तरफ लौट गई थी।
राजन की किराना की दुकान में लॉक डाउन का ऐलान होते ही सन्नाटा पसर गया। मण में सोंचा, एक दम नकारा हो गया? ' पापा, मेरे स्कूल में बोला गया है कि अब ऑनलाइन क्लास चलेगी।' ' लेकिन उसके लिए एंड्रॉयड मोबाइल चाहिए पापा' ' क्यूं, वो किस लिए?' ' उफ़, पापा आपका मोबाइल तो साधारण ही है, उसमे नेट कहां चलता है?' ' ओह, फिर रहने दो। चुपचाप खुद से ही पढ़ो, ये सब स्कूल वालों के चोंचले है।' बुलबुल सहमी सी चुप रह गई। लेकिन इससे सुकून नहीं मिला। दूसरे ही दिन से स्कूल से फोन आने शुरू हो गए। ' राजन साहब, बच्ची का कोर्स पिछड़ रहा है। प्लीज़ ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए कोशिश करें।' ' देखिए मैडम, मेरे पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है न मै खरीद सकता हूं। आप माफ करें।' ' देखिए, समय के इस संकट को समझिए और बच्चे की पढ़ाई का इंतजाम कीजिए वरना उसका प्रोमोशन रुक जाएगा। उसे आगे की क्लास नहीं मिलेगी। उसके भविष्य से मत खेलिए' ' लेकिन.. ' वह कुछ कहना चाहता था कि फोन उधर से काट दिया गया। वह चुका सा खड़ा रह गया। पास खड़ी पत्नी ने पूछा...' क्या हुआ! ' सही तो कह रहे हैं, अब लॉकडॉउन जाने कब खत्म हो। बच्ची घर पे कैसे पढ़े। उसकी किताबें हमारी तुम्हारी समझ में तो आती नहीं है। हम तोह पढ़ा नहीं सकते! फिर तो घर बैठे-बैठे सब भूल जाएगी।' ' तुम भी क्या बात करती हो। तो क्या चोरी करने जाऊं?' बीबी झल्ल से उठी और कमरे में गई। वापस आ कर राजन की हथेली पर कुछ पैसे रख दिए.. ' लो, पूरे साढ़े तीन हजार हैं। घर की छत बनवाने के लिए इकट्ठे किए थे, लेकिन बच्चे की पढ़ाई से जादा जरूरी नहीं है वो' वह उन पैसों को देखता रहा फिर रख लिया। बाज़ार तो अब सुबह ही खुलेगी ' कहते हुए। दूसरे दिन वो एक दोस्त सुरेश के साथ मोबाइल की दुकान पे पहुंचा। वहां काफी भीड़ थी। लोग मस्क लगाए मार्केट में घूम रहे थे। मोबाइल वाले ने किस्म-किस्म के मोबाइल दिखाने शुरू किए। ' देखिए भाई साहब, इनकी कीमत दस हजार से शुरू होती है, आगे इससे ज्यादा ज्यादा दाम के भी मिलेंगे। उसके पांव के नीचे से ज़मीन निकल गई। थोड़ा झेंप भी गया और तुरंत बाहर की ओर मुड़ लिया। पीछे पीछे सुरेश आया.. ' क्या हुआ? क्या बात हो गई?' ' अरे भाई इतना बजट नहीं है अपना ' ' ओह तो ऐसे कहो, कितने तक का चाहिए?' ' ऐसा करो, सेकंड हैंड ले लो वो इतने का ही मिल जाएगा ' उसकी आंखों की चमक लौट आई.. ' अच्छा? ' ' लेकिन मेरे पास तो पाँच हज़ार भी नहीं है।' ' कोई बात नहीं, पहले चल कर मोबाइल देख लो फिर समझ आए तो के लेना बाकी पैसे बाद में देते रहना। बिटिया की पढ़ाई तो न रुकेगी,' वह सुरेश कर साथ उसके घर पहुंचा। मोबाइल देखा परखा, पसंद आ गया। सुरेश का बेटा बोला.. ' चाचा, इसमें जिओ का सिम भी लगा हुआ है। डाटा भी पड़ा हुआ है। उसके पैसे हम नहीं ले रहे। क्यूंकि हम वैसे भी बिना मोबाइल का सिम करेंगे क्या?' ' बहुत बहुत धन्यवाद बेटा ' ' किते का कर दूं? तीन सौ का, दो सौ पचास वाला या एक सौ निन्यानवे वाला?' वह फिर सोंच्च में पड़ गया। पूछा.. ' इससे कम में नहीं आता है?' ' नहीं भाई, ये सबसे कम वाला है ' उसने बड़े सहमते हुए एक सौ रुपयापए निकाले.. ' भाई, एक सौ निन्यानवे वाला कर दो, एक सौ रुपयापए रख लो, बाकी कल आ के दूंगा, तुम तो जानते ही हो देश की हालत। मुश्किल से खाना ही मिल जाता है। मगर बच्चे कि पढ़ाई भी ज़रूरी है, आज कल मोबाइल प्र ही पढ़ाई हो रही है..सुना होगा?' ' हां, सुना है मेरा बेटा भी ऑनलाइन ही पढ़ता है। पढ़ता क्या है, पढ़ता कम गढ़ता ज्यादा है, पढ़ाई का बहाना करके गेम खेलता रहता है बस भाई साब, बाजारवाद हावी होता जा रहा है हर तरफ' दोनों की मिली जुली हंसी। फिर वो चला आया। बुलबुल फिर से ऑनलाइन पढ़ने लगी थी। लेकिन अब वो क्लास के अलावा भी मोबाइल लिए बैठी रहती। गेम में लगी रहती। और जब मां पुकारती.. ' बुलबुल, जा के फ्रिज से सब्जी निकाल लाओ ' जवाब आता मै होमवर्क कर रही हूं मां ' अब बस मोबाइल था कि वो थी। महीना बीता। बुलबुल की आंखो से अब पानी बहने लगा था, मगर वो बचपना, वो आंखे मल के पानी सुखाती और फिर शुरू हो जाती। राजन कई दिनों से इस बात पे गौर कर रहा था मगर बच्ची मान नहीं रही थी। एक दिन सुबह उसने बुलबुल को पुकारा.. ' बुलबुल, चलो मेरे साथ, ' वह चल दी। दोनों आंख के डॉक्टर के यहां पहुंचे। डॉक्टर ने आंख की जांच की और बोला हल्के पॉवर का चश्मा लगेगा। उसने मरे मन से कहा.. ' बना दीजिए ' ' ओके, कौन सा बनवाएंगे?' ' मतलब ' ' अरे भाई साहब, एक चश्मा नॉर्मल बनता है, उसे लगा के बच्चे कोई भी काम करें। पढ़ाई लिखाई भी कर सकते हैं। एक चश्मा अभी हाल ही में लॉन्च हुआ है लोगों की जरूरत को देखते हुए। क्यूंकि सारे ऑफिस स्कूल, कॉलेज सब बंद हैं। लौकडाउन चल रहा है, कोई पता नहीं कब खुलेगा। इसलिए रोज़ी नामक कंपनी ने एक अलग किस्म का चश्मा बनाया है जिससे सिर्फ ऑनलाइन ही काम किए जाते हैं। इससे आंखे सुरक्षित रहती हैं और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं। हां, थोड़ा मंहगा ज़रूर पड़ेगा क्यूंकि इसके ग्लास फ्रेम की क्वालिटी ही अलग होती है आम चश्मों की बनिस्बत ' राजन का मन फिर डूबने लगा। पाँच सौ डॉक्टर की फीस पहले ही भर चुका है। अब क्या बतायेगा ये डॉक्टर। उसने डरते डरते पूछा.. ' वैसे कितने का पड़ेगा?' ' ढाई हजार का भाई साहब, लेकिन बिल्कुल सेफ है ' उसने बुलबुल को इशारा किया चलने का और डॉक्टर से बोला ' कल आता हूं, जो होगा बताऊंगा ' वह रास्ते भर सोचता गया.. ' आमदनी तो कुछ होती नहीं। इन लोगों ने लूट मचा रखी है, बाज़ार इस कदर हावी हो रहा है। कुछ दिनों में कफ़न भी ब्रांडेड आने लगेंगे। लेकिन बच्ची की पढ़ाई और सेहत दोनों ज़रूरी है। फिर पैसे का जुगाड कैसे हो? ' ' भाई, बहुत ज़रूरी काम आम पड़ा है, ढाई हजार का इंतजाम कर दो कहीं ' ' तुझे नहीं पता देश की हालत क्या हुई है। लोग भूखे मर रहे हैं। हमे खाना मिल रहा है यही शुक्र मनाओ, मेरा भी काम बंद पड़ा है। जो थोड़ा कुछ बचा रखा था वहीं खा रहे हैं, माफ करना मेरे भाई ' ' कोई बात नहीं धीरज, मै समझ रहा हूं,' वो थके क़दमों से बाहर आ गया। शर्ट की जेब में थोड़े से पैसे थे निकाले, उन्हें मायूसी से देखता रहा फिर वापस रख लिया। शाम काफी घिर आयी थी। अंधेरा सा हो रहा था। मां बेटी घबरा रही थीं। बुलबुल भी मोबाइल छोड़ कर बार-बार दरवाज़े की तरफ देख रही थी, पत्नी बार-बार बाहर झांक आती और मन ही मन बड़बड़ाती.. ' हे भगवान, कहां चले गए ऐसे खतरनाक माहौल में। कहीं बीमारी ले के न घर लौटे! गए तो थे इसका चश्मा बनवाने?' अभी वो वापस किचेन में लौटी ही थी कि बाहर से ही राजन की आवाज आई.. ' रेखा.. ओ रेखा..कहां हो भाई। ये देखो सरकार ने सारा टेंशन ही खत्म कर दिया।, वो लगभाग दौड़ती हुई उसके नजदीक आई.. ' आ.. अच्छा.. सच्ची?' लेकिन राजन का चेहरा देख सहम सी गई। चेहरे पे उड़ती हवाइयां, सुर्ख आंखें..काले पड़े हुए होंठ, लरजते पांव.. ' हां..ये देखो..' कहते हुए राजन ने एक शराब की बोतल आगे कर दी.. ' देखो, अब कोई भी भूख से नहीं मरेगा, कोई प्यास नहीं सताएगी ' बुलबुल पिता के चेहरे को एकटक देख रही थी और पत्नी डबडबाई आंखें लिए किचेन कि तरफ लौट गई थी।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश कौशिक के शाही ईदगाह मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा के बाद मथुरा में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के दुर्गा पूजा के पंडाल में महात्मा गांधी को महिषासुर के तौर पर दिखाए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले यति नरसिंहानंद ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। हाल ही में भोपाल में अपनी पत्नी से तलाक मिलने का जश्न मनाने के लिए आयोजित किए जाने वाले 'तलाक समारोह' का निमंत्रण पत्र काफी वायरल हुआ था, लेकिन अब यह आयोजित होने से पहले ही निरस्त हो गया है। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में BA प्रथम वर्ष की राजनीतिक विज्ञान की परीक्षा के पेपर में हिंदुत्व, फांसीवाद और नाजीवाद पर सवाल पूछने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को सुबह की सैर पर निकले अखिल भारतीय हिंदू महासभा की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख रणजीत बच्चन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 72वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 1948 में नाथूराम गोडसे ने दिल्ली के बिरला भवन में तीन गोली मारकर गांधी की हत्या कर दी थी। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ हिंदू महासभा पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। नेताजी सुभाष चंद्र की पड़नातिन और हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्षा राज्यश्री चौधरी ने मंगलवार को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे की आरती उतारी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कमलेश तिवारी की हत्या के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर 32 मामले दर्ज किए हैं। मंगलवार रात को हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मुख्य आरोपियों शेख अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन पठान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को हुए कमलेश तिवारी हत्याकांड को सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने कहा कि इस हत्याकांड की साजिश सूरत में रची गई। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हिंदू महासभा के पूर्व नेता और हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी की गला रेतकर हत्या कर दी गई है। अयोध्या जमीन विवाद में हिंदू और मुस्लिम पक्ष के कुछ याचिकाकर्ताओं के एक समझौते पर तैयार होने का मध्यस्थता समिति का प्रस्ताव विवादों के केंद्र में आ गया है। अयोध्या जमीन विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई खत्म हो गई और मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट आज बुधवार को अपनी सुनवाई में यह तय करेगा कि अयोध्या जमीन विवाद में किसी मध्यस्थता की संभावना है या नहीं। 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुतले को गोली मारने वाली पूजा शकुन पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया है।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश कौशिक के शाही ईदगाह मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा के बाद मथुरा में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के दुर्गा पूजा के पंडाल में महात्मा गांधी को महिषासुर के तौर पर दिखाए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले यति नरसिंहानंद ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। हाल ही में भोपाल में अपनी पत्नी से तलाक मिलने का जश्न मनाने के लिए आयोजित किए जाने वाले 'तलाक समारोह' का निमंत्रण पत्र काफी वायरल हुआ था, लेकिन अब यह आयोजित होने से पहले ही निरस्त हो गया है। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में BA प्रथम वर्ष की राजनीतिक विज्ञान की परीक्षा के पेपर में हिंदुत्व, फांसीवाद और नाजीवाद पर सवाल पूछने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को सुबह की सैर पर निकले अखिल भारतीय हिंदू महासभा की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख रणजीत बच्चन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बहत्तरवीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में नाथूराम गोडसे ने दिल्ली के बिरला भवन में तीन गोली मारकर गांधी की हत्या कर दी थी। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ हिंदू महासभा पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। नेताजी सुभाष चंद्र की पड़नातिन और हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्षा राज्यश्री चौधरी ने मंगलवार को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे की आरती उतारी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कमलेश तिवारी की हत्या के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर बत्तीस मामले दर्ज किए हैं। मंगलवार रात को हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मुख्य आरोपियों शेख अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन पठान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को हुए कमलेश तिवारी हत्याकांड को सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने कहा कि इस हत्याकांड की साजिश सूरत में रची गई। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हिंदू महासभा के पूर्व नेता और हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी की गला रेतकर हत्या कर दी गई है। अयोध्या जमीन विवाद में हिंदू और मुस्लिम पक्ष के कुछ याचिकाकर्ताओं के एक समझौते पर तैयार होने का मध्यस्थता समिति का प्रस्ताव विवादों के केंद्र में आ गया है। अयोध्या जमीन विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई खत्म हो गई और मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट आज बुधवार को अपनी सुनवाई में यह तय करेगा कि अयोध्या जमीन विवाद में किसी मध्यस्थता की संभावना है या नहीं। तीस जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुतले को गोली मारने वाली पूजा शकुन पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया है।
देहरादून । मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोदरियाल `निशंक' ने पख्यात साहित्यकार डॉ. दिनेश चमोला `शैलेश' को उनकी उत्वृफष्ट साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया है। एनेक्सी स्थित मुख्यमंत्रााr आवास पर आयोजित एक सादे समारोह में मुख्यमंत्रााr डॉ. निशंक ने सात्यिकार डॉ. चमोला की राष्ट्रव्यापी साहित्य सेवा का उ8sद करते हुए कहा कि डॉ. चमोला ने विभिन्न विधओं में छः दर्जन से अध्कि पुस्तके लिदने के साथ बाल साहित्य के क्षेत्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस अवसर पर डॉ. चमोला ने मुख्यमंत्रााr डॉ. निशंक को अपनी 7 उत्वृफष्ट वृफतियों को भेंट किया। जिनमें `गाये गीत ज्ञान विज्ञान के, पयोजन मूलक पशासनिक हिंदी, स्मृतियों का पहाड़, कान्हा की बांसुरी, एक सौ एक बाल गीत, विदाई मिस्टर एम डैन व अन्य कहानियां तथा बौगूलौ माटू तौ. . आदि भेंट की। इस मौके पर भाजपा के पदेश अध्यक्ष विशन सिंह चुपफाल आदि उपस्थित थे।
देहरादून । मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोदरियाल `निशंक' ने पख्यात साहित्यकार डॉ. दिनेश चमोला `शैलेश' को उनकी उत्वृफष्ट साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया है। एनेक्सी स्थित मुख्यमंत्रााr आवास पर आयोजित एक सादे समारोह में मुख्यमंत्रााr डॉ. निशंक ने सात्यिकार डॉ. चमोला की राष्ट्रव्यापी साहित्य सेवा का उआठsद करते हुए कहा कि डॉ. चमोला ने विभिन्न विधओं में छः दर्जन से अध्कि पुस्तके लिदने के साथ बाल साहित्य के क्षेत्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस अवसर पर डॉ. चमोला ने मुख्यमंत्रााr डॉ. निशंक को अपनी सात उत्वृफष्ट वृफतियों को भेंट किया। जिनमें `गाये गीत ज्ञान विज्ञान के, पयोजन मूलक पशासनिक हिंदी, स्मृतियों का पहाड़, कान्हा की बांसुरी, एक सौ एक बाल गीत, विदाई मिस्टर एम डैन व अन्य कहानियां तथा बौगूलौ माटू तौ. . आदि भेंट की। इस मौके पर भाजपा के पदेश अध्यक्ष विशन सिंह चुपफाल आदि उपस्थित थे।
अपने घर को सजाना किसे पसंद नहीं, वहीं अगर घर में पौधे लगे हों, तो घर की सुंदरता में चार चाँद लग जाते हैं। पौधे न सिर्फ दिखने में अच्छे लगते हैं, बल्कि यह घर के माहौल को भी खुशनुमा बना देते हैं। साथ ही रिसर्च ये भी कहती है कि इंडोर प्लांट्स हमारे घर की हवा को भी शुद्ध बनाते हैं। लेकिन घर पर पौधे लगाना और इसकी देखभाल करना भी एक आर्ट है। ऐसी कई छोटी-छोटी चीजे होती हैं, जिसे ध्यान में रखकर आप अपने घर के अंदर भी हरियाली ला सकते हैं, जैसे घर में मनी प्लांट लगाकर। अंकिता हमेशा से ही, घर सजाने और आर्ट एंड क्राफ्ट की शौक़ीन रही हैं। वह बताती हैं, "बचपन में घर में कौन से कुशन कवर लगेंगे, ये भी मैं ही तय किया करती थी। " उन्होंने शादी के बाद तकरीबन छह सालों तक हैंडमेड ज्वेलरी का बिज़नेस भी किया था। लेकिन, 2017 में अपने बेटे मिरांश के जन्म के बाद गार्डनिंग के प्रति उनकी रूचि काफी बढ़ गई। उन्होंने बताया कि मिरांश के पहले जन्मदिन पर आए मेहमानों को, हमने तोहफे के तौर पर पौधे दिए थे। इसके लिए उन्होंने तक़रीबन 100 गमले खुद ही तैयार किए थे। इसके अलावा, उन्हें फिलॉडेंड्रॉन, सिंगोनियम, मॉन्स्टेरा जैसे पौधे लगाना भी पसंद है। इंस्टाग्राम में धीरे-धीरे कई लोग इनसे जुड़ने लगे। सिर्फ एक साल बाद ही, उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म Myntra के प्रोडक्ट की कैंपेनिंग करने का मौका मिला। इसके बाद, उन्होंने Pepperfry, Amazon, Flipkart जैसे कई बड़े-बड़े ब्रांड के प्रोडक्ट्स की कैंपेनिंग की है। अंकिता कहती हैं, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे इस शौक के लिए मुझे पैसे भी मिलेंगे। " वह अब ऑनलाइन वर्कशॉप भी करती हैं, जहां वह लोगों को प्लांट्स के रख-रखाव के बारे में बताती हैं। आप घर में ऐसी जगह पौधे रखे, जहां कम से कम पांच से छह घंटे सूरज की रोशनी आती हो। इसके लिए खिड़कियों के पास और सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधों में पानी डालने का कोई सटीक समय नहीं होता, आप पौधों की जरूरत के अनुसार ही पानी डालें। जब मिट्टी सूखी हो, तभी पानी डालें। ज्यादा पानी से पौधे मर जाते हैं। पौधों के सही विकास के लिए 50% कोको पिट, 50% मिट्टी के साथ आर्गेनिक कम्पोस्ट की पॉटिंग मिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं इस बात का भी ध्यान रखें कि गमले में मिट्टी में एयर स्पेस हो, साथ ही स्थानीय मिट्टी का ही प्रयोग करें। फ़र्न जैसे कुछ पौधे, झरना, नदी या तालाब जैसी नमी वाली जगह में उगते हैं। ऐसे पौधों को नमी की ज्यादा जरूरत होती है। इसके लिए आप पानी की स्प्रे बोतल का इस्तेमाल कर सकते हैं, और दिन में एक दो बार इससे पानी का छिड़काव करें, जिससे पौधों के पत्तों को नमी मिलेगी। ध्यान रखें पानी मिट्टी तक न पहुंचे। पौधों को खरीदते समय जान लें कि कौन से पौधे को कितनी सूरज की रोशनी की जरूरत होगी, फिर उसी हिसाब से पौधे लगाएं। तो अब देर किस बात की, आप भी अपने होम डेकॉर में कुछ पौधों को शामिल करें और देखें आपके घर का लुक कैसे बदल जाता है। आप अंकिता के इंडोर प्लांट और होम डेकॉर टिप्स के लिए, उनके इंस्टाग्राम पेज पर उनसे सम्पर्क कर सकते हैं। यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia. com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
अपने घर को सजाना किसे पसंद नहीं, वहीं अगर घर में पौधे लगे हों, तो घर की सुंदरता में चार चाँद लग जाते हैं। पौधे न सिर्फ दिखने में अच्छे लगते हैं, बल्कि यह घर के माहौल को भी खुशनुमा बना देते हैं। साथ ही रिसर्च ये भी कहती है कि इंडोर प्लांट्स हमारे घर की हवा को भी शुद्ध बनाते हैं। लेकिन घर पर पौधे लगाना और इसकी देखभाल करना भी एक आर्ट है। ऐसी कई छोटी-छोटी चीजे होती हैं, जिसे ध्यान में रखकर आप अपने घर के अंदर भी हरियाली ला सकते हैं, जैसे घर में मनी प्लांट लगाकर। अंकिता हमेशा से ही, घर सजाने और आर्ट एंड क्राफ्ट की शौक़ीन रही हैं। वह बताती हैं, "बचपन में घर में कौन से कुशन कवर लगेंगे, ये भी मैं ही तय किया करती थी। " उन्होंने शादी के बाद तकरीबन छह सालों तक हैंडमेड ज्वेलरी का बिज़नेस भी किया था। लेकिन, दो हज़ार सत्रह में अपने बेटे मिरांश के जन्म के बाद गार्डनिंग के प्रति उनकी रूचि काफी बढ़ गई। उन्होंने बताया कि मिरांश के पहले जन्मदिन पर आए मेहमानों को, हमने तोहफे के तौर पर पौधे दिए थे। इसके लिए उन्होंने तक़रीबन एक सौ गमले खुद ही तैयार किए थे। इसके अलावा, उन्हें फिलॉडेंड्रॉन, सिंगोनियम, मॉन्स्टेरा जैसे पौधे लगाना भी पसंद है। इंस्टाग्राम में धीरे-धीरे कई लोग इनसे जुड़ने लगे। सिर्फ एक साल बाद ही, उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म Myntra के प्रोडक्ट की कैंपेनिंग करने का मौका मिला। इसके बाद, उन्होंने Pepperfry, Amazon, Flipkart जैसे कई बड़े-बड़े ब्रांड के प्रोडक्ट्स की कैंपेनिंग की है। अंकिता कहती हैं, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे इस शौक के लिए मुझे पैसे भी मिलेंगे। " वह अब ऑनलाइन वर्कशॉप भी करती हैं, जहां वह लोगों को प्लांट्स के रख-रखाव के बारे में बताती हैं। आप घर में ऐसी जगह पौधे रखे, जहां कम से कम पांच से छह घंटे सूरज की रोशनी आती हो। इसके लिए खिड़कियों के पास और सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधों में पानी डालने का कोई सटीक समय नहीं होता, आप पौधों की जरूरत के अनुसार ही पानी डालें। जब मिट्टी सूखी हो, तभी पानी डालें। ज्यादा पानी से पौधे मर जाते हैं। पौधों के सही विकास के लिए पचास% कोको पिट, पचास% मिट्टी के साथ आर्गेनिक कम्पोस्ट की पॉटिंग मिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं इस बात का भी ध्यान रखें कि गमले में मिट्टी में एयर स्पेस हो, साथ ही स्थानीय मिट्टी का ही प्रयोग करें। फ़र्न जैसे कुछ पौधे, झरना, नदी या तालाब जैसी नमी वाली जगह में उगते हैं। ऐसे पौधों को नमी की ज्यादा जरूरत होती है। इसके लिए आप पानी की स्प्रे बोतल का इस्तेमाल कर सकते हैं, और दिन में एक दो बार इससे पानी का छिड़काव करें, जिससे पौधों के पत्तों को नमी मिलेगी। ध्यान रखें पानी मिट्टी तक न पहुंचे। पौधों को खरीदते समय जान लें कि कौन से पौधे को कितनी सूरज की रोशनी की जरूरत होगी, फिर उसी हिसाब से पौधे लगाएं। तो अब देर किस बात की, आप भी अपने होम डेकॉर में कुछ पौधों को शामिल करें और देखें आपके घर का लुक कैसे बदल जाता है। आप अंकिता के इंडोर प्लांट और होम डेकॉर टिप्स के लिए, उनके इंस्टाग्राम पेज पर उनसे सम्पर्क कर सकते हैं। यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia. com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
ग्वालियर, न. सं. । विप्रा ब्राह्मण महिला मंच की ओर से गत दिवस गणेश उत्सव का आयोजन किया गया। सभी विप्रा बहनों ने अपने-अपने घरों में सुंदर झांकियां सजार्इं। सभी संगनीयों ने ऑनलाइन गणेश उत्सव का आयोजन किया जिसमें सभी बहनों ने गणपति जी के दर्शन किए। गणेश जी की वंदना श्रीमती तनुजा शुक्ला के द्वारा की गई। गणेश जी की स्थापना का महत्व नीलम शुक्ला द्वारा बताया गया। गणेश जी के मधुर भजन अर्चना शर्मा और शालिनी चतुर्वेदी के द्वारा सुनाए गए। घर में ही विसर्जन का महत्व डॉ. राजरानी शर्मा द्वारा बताया गया। इसी क्रम में डॉ. सुलोचना शर्मा, ऊषा चतुर्वेदी, डॉ. मंदाकिनी आदि ने गणेश उत्सव का महत्व बताया। संचालन श्रीमती ज्योति शर्मा एवं आभार नीतू उपमन्यु द्वारा व्यक्त किया गया।
ग्वालियर, न. सं. । विप्रा ब्राह्मण महिला मंच की ओर से गत दिवस गणेश उत्सव का आयोजन किया गया। सभी विप्रा बहनों ने अपने-अपने घरों में सुंदर झांकियां सजार्इं। सभी संगनीयों ने ऑनलाइन गणेश उत्सव का आयोजन किया जिसमें सभी बहनों ने गणपति जी के दर्शन किए। गणेश जी की वंदना श्रीमती तनुजा शुक्ला के द्वारा की गई। गणेश जी की स्थापना का महत्व नीलम शुक्ला द्वारा बताया गया। गणेश जी के मधुर भजन अर्चना शर्मा और शालिनी चतुर्वेदी के द्वारा सुनाए गए। घर में ही विसर्जन का महत्व डॉ. राजरानी शर्मा द्वारा बताया गया। इसी क्रम में डॉ. सुलोचना शर्मा, ऊषा चतुर्वेदी, डॉ. मंदाकिनी आदि ने गणेश उत्सव का महत्व बताया। संचालन श्रीमती ज्योति शर्मा एवं आभार नीतू उपमन्यु द्वारा व्यक्त किया गया।
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) यूनिट्स को भविष्य निधि (पीएफ) खातों में डालने के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी है। इस नए फैसले के तहत अब आपके प्रॉविडेंट फंड के दो अकाउंट होंगे. एक कैश अकाउंट और दूसरा ईटीएफ अकाउंट होगा. कैश अकाउंट में आपके पीएफ की 85 फीसदी रकम होगी. साथ ही, ईटीएफ अकाउंट में 15 फीसदी रकम होगी जो शेयर बाजार में निवेश की जाती है यह रकम आपके अकाउंट में यूनिट के तौर पर दिखेगी. पीएफ विद्ड्रॉअल के समय आपकी यूनिट के नेट असेट वैल्यू के हिसाब से पेमेंट मिल जाएगा। मार्च अंत खातों में ट्रांसफर होगी रकम- यह पूछे जाने पर ईपीएफओ कब से ईटीएफ यूनिट्स को उसके अंशधारकों के खातों में कब से डालना शुरू करेगा. ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने कहा कि यह इस वित्त वर्ष के अंत तक संभव हो सकेगा। कोई भी पीएफ अकाउंट होल्डर ईटीएफ अकाउंट में यह देख सकेगा कि उसकी यूनिट की इस समय कितनी कीमत है. यूनिट यानी एनएवी की वैल्यू रोज अपडेट होगी. इससे पीएफ मेंबर्स को यह भी पता चलता रहेगा कि आपके निवेश पर रिटर्न पॉजिटिव मिला या निगेटिव. मौजूदा समय में शेयर बाजार अपने निवेश लायक कुल फंड का 15 फीसदी तक शेयर बाजार में इन्वेस्ट करता है।
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यूनिट्स को भविष्य निधि खातों में डालने के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी है। इस नए फैसले के तहत अब आपके प्रॉविडेंट फंड के दो अकाउंट होंगे. एक कैश अकाउंट और दूसरा ईटीएफ अकाउंट होगा. कैश अकाउंट में आपके पीएफ की पचासी फीसदी रकम होगी. साथ ही, ईटीएफ अकाउंट में पंद्रह फीसदी रकम होगी जो शेयर बाजार में निवेश की जाती है यह रकम आपके अकाउंट में यूनिट के तौर पर दिखेगी. पीएफ विद्ड्रॉअल के समय आपकी यूनिट के नेट असेट वैल्यू के हिसाब से पेमेंट मिल जाएगा। मार्च अंत खातों में ट्रांसफर होगी रकम- यह पूछे जाने पर ईपीएफओ कब से ईटीएफ यूनिट्स को उसके अंशधारकों के खातों में कब से डालना शुरू करेगा. ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने कहा कि यह इस वित्त वर्ष के अंत तक संभव हो सकेगा। कोई भी पीएफ अकाउंट होल्डर ईटीएफ अकाउंट में यह देख सकेगा कि उसकी यूनिट की इस समय कितनी कीमत है. यूनिट यानी एनएवी की वैल्यू रोज अपडेट होगी. इससे पीएफ मेंबर्स को यह भी पता चलता रहेगा कि आपके निवेश पर रिटर्न पॉजिटिव मिला या निगेटिव. मौजूदा समय में शेयर बाजार अपने निवेश लायक कुल फंड का पंद्रह फीसदी तक शेयर बाजार में इन्वेस्ट करता है।
दरअसल, 1978 में दिल्ली में आई भीषण बाढ़ में यमुना का स्तर 207. 49 मीटर तक पहुंचा था। उस दौर में दिल्ली की सड़कें और कई इलाके पूरी तरह से डूब गए थे। अभी यमुना का जलस्तर 207. 55 मीटर पहुंच चुका है। निचले इलाके पूरी तरह डूब चुके हैं। राज्य के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री की चिट्ठी लिखकर हथिनीकुंड बैराज के लिए अपील कर डाली है। मतलब मामला केंद्र बनाम राज्य का होते जा रहा है। कुछ दिन पहले दिल्ली में लगातार चार दिन हुई बारिश के दौरान उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि नाले और सीवर की सही तरीके से सफाई नहीं होने के कारण आज दिल्ली में जगह-जगह जलजमाव हुए हैं। उन्होंने राजधानी में जलजमाव का ठीकरा दिल्ली सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि खराब सीवर व्यवस्था के कारण दिल्ली का ये हाल हुआ है। यमुना में बढ़ते जलस्तर के बीच अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने शाह से मांग की कि हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की वजह से यमुना में पानी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बैराज से पानी को एक सीमित गति से छोड़ा जाए ताकि दिल्ली में यमुना का स्तर और न बढ़े। 'हिमाचल-हरियाणा के पानी से मुश्किल में दिल्ली' केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर 207. 71 मीटर तक पहुंच चुका है जो एक रेकॉर्ड है। दिल्ली में पिछले 2-3 दिनों से बारिश नहीं हो रही है। दिल्ली में पानी हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से आ रहा है। मैंने इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है और उनसे आग्रह किया है कि दिल्ली आने वाले पानी का स्तर कम किया जाए। मैं निचले इलाके में रह रहे सभी लोगों से घर खाली करने का आग्रह कर रहा हूं। यमुना नदी के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में लोग प्रभावित होंगे। दिल्ली में आई बाढ़ पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर राज्य के लोगों को खतरे में डाला है। दिल्ली की वर्तमान सरकार कुछ नहीं कर रही है। लोग मुश्किल में हैं। इसका नियमित उपाय होना चाहिए। हम अनाज खाना, दवाई सबुकछ प्रभावित लोगों को बांट रहे हैं। केजरीवाल ने अपनी चिट्ठी में राजधानी में होने वाले जी-20 शिखर वार्ता का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। देश की राजधानी में बाढ़ की खबर से दुनिया में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। दरअसल, अपनी चिट्ठी में केजरीवाल ने यमुना के बढ़ते जलस्तर का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि अभी तक अधिकर स्तर 1978 में पहुंचा था जो 207. 49 मीटर था। उस वक्त दिल्ली में बाढ़ आ गई थी और काफी गंभीर स्थिति हो गई थी। अभी यमुना का स्तर 207. 56 मीटर तक पहुंच गया है और अब कभी भी बाढ़ आ सकती है।
दरअसल, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में दिल्ली में आई भीषण बाढ़ में यमुना का स्तर दो सौ सात. उनचास मीटर तक पहुंचा था। उस दौर में दिल्ली की सड़कें और कई इलाके पूरी तरह से डूब गए थे। अभी यमुना का जलस्तर दो सौ सात. पचपन मीटर पहुंच चुका है। निचले इलाके पूरी तरह डूब चुके हैं। राज्य के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री की चिट्ठी लिखकर हथिनीकुंड बैराज के लिए अपील कर डाली है। मतलब मामला केंद्र बनाम राज्य का होते जा रहा है। कुछ दिन पहले दिल्ली में लगातार चार दिन हुई बारिश के दौरान उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि नाले और सीवर की सही तरीके से सफाई नहीं होने के कारण आज दिल्ली में जगह-जगह जलजमाव हुए हैं। उन्होंने राजधानी में जलजमाव का ठीकरा दिल्ली सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि खराब सीवर व्यवस्था के कारण दिल्ली का ये हाल हुआ है। यमुना में बढ़ते जलस्तर के बीच अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने शाह से मांग की कि हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की वजह से यमुना में पानी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बैराज से पानी को एक सीमित गति से छोड़ा जाए ताकि दिल्ली में यमुना का स्तर और न बढ़े। 'हिमाचल-हरियाणा के पानी से मुश्किल में दिल्ली' केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर दो सौ सात. इकहत्तर मीटर तक पहुंच चुका है जो एक रेकॉर्ड है। दिल्ली में पिछले दो-तीन दिनों से बारिश नहीं हो रही है। दिल्ली में पानी हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से आ रहा है। मैंने इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है और उनसे आग्रह किया है कि दिल्ली आने वाले पानी का स्तर कम किया जाए। मैं निचले इलाके में रह रहे सभी लोगों से घर खाली करने का आग्रह कर रहा हूं। यमुना नदी के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में लोग प्रभावित होंगे। दिल्ली में आई बाढ़ पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर राज्य के लोगों को खतरे में डाला है। दिल्ली की वर्तमान सरकार कुछ नहीं कर रही है। लोग मुश्किल में हैं। इसका नियमित उपाय होना चाहिए। हम अनाज खाना, दवाई सबुकछ प्रभावित लोगों को बांट रहे हैं। केजरीवाल ने अपनी चिट्ठी में राजधानी में होने वाले जी-बीस शिखर वार्ता का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। देश की राजधानी में बाढ़ की खबर से दुनिया में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। दरअसल, अपनी चिट्ठी में केजरीवाल ने यमुना के बढ़ते जलस्तर का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि अभी तक अधिकर स्तर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में पहुंचा था जो दो सौ सात. उनचास मीटर था। उस वक्त दिल्ली में बाढ़ आ गई थी और काफी गंभीर स्थिति हो गई थी। अभी यमुना का स्तर दो सौ सात. छप्पन मीटर तक पहुंच गया है और अब कभी भी बाढ़ आ सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल (Covid Protocol) का पालन करने के लिए लिखे गए पत्र पर कांग्रेस ने राजनीति शुरू कर दी। कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री के पत्र को लेकर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 'यात्रा से डर' गई है। दरअसल स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को पत्र लिखकर उनकी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल (Covid Protocol) का पालन करने के लिए कहा है। पत्र को लेकर शुरू हुई सियासत पर जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते यह सुनिश्चित करना मेरा दायित्व है कि देश में कोरोना ना फैले। कांग्रेस के हमलों का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, "कल मुझे राजस्थान के 3 सांसदों ने पत्र लिखा था कि राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा में गए हुए कई लोगों को कोविड पॉजिटिव पाया गया है। हिमाचल CM भी भारत जोड़ो यात्रा में गए थे, उसमें कोविड पॉजिटिव पाए गए।" स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा, "मैंने राहुल गांधी और अशोक गहलोत को पत्र लिखकर इस बारे में बताया। भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते यह मेरा दायित्व है कि देश में कोरोना ना फैले।" स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के पत्र के बाद से कांग्रेस इसे लेकर हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य मंत्री के पत्र को लेकर कहा कि इस पत्र को देखकर यह साफ है कि भाजपा का उद्देश्य बढ़ते जनसमर्थन से घबराकर भारत जोड़ो यात्रा को डिस्टर्ब करने का है। मीडिया से बात करते हुए अशोक गहलोत ने कहा, "मैंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का पत्र पढ़ा। आप उनकी बौखलाहट देख सकते हैं। पाली सांसद पी.पी. चौधरी और गंगानगर सांसद निहालचंद ने उनको कल पत्र लिखा कि राहुल गांधी की यात्रा चल रही है और कोविड फैल रहा है। आप सोच सकते हो कि केंद्र सरकार कितनी घबराई हुई है।" जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, चीन, अमेरिका जैसे देशों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बड़ी बैठक बुलाई। दिल्ली में मनसुख मंडाविया स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों के साथ वार्ता की। बैठक के बाद नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा, "अगर आप भीड़भाड़ वाली जगह, घर के अंदर या बाहर हैं तो मास्क का इस्तेमाल करें। यह कॉमरेडिटी वाले या अधिक आयु वाले लोगों के लिए और भी महत्वपूर्ण है।"
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए लिखे गए पत्र पर कांग्रेस ने राजनीति शुरू कर दी। कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री के पत्र को लेकर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 'यात्रा से डर' गई है। दरअसल स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनकी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा है। पत्र को लेकर शुरू हुई सियासत पर जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते यह सुनिश्चित करना मेरा दायित्व है कि देश में कोरोना ना फैले। कांग्रेस के हमलों का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, "कल मुझे राजस्थान के तीन सांसदों ने पत्र लिखा था कि राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा में गए हुए कई लोगों को कोविड पॉजिटिव पाया गया है। हिमाचल CM भी भारत जोड़ो यात्रा में गए थे, उसमें कोविड पॉजिटिव पाए गए।" स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा, "मैंने राहुल गांधी और अशोक गहलोत को पत्र लिखकर इस बारे में बताया। भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते यह मेरा दायित्व है कि देश में कोरोना ना फैले।" स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के पत्र के बाद से कांग्रेस इसे लेकर हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य मंत्री के पत्र को लेकर कहा कि इस पत्र को देखकर यह साफ है कि भाजपा का उद्देश्य बढ़ते जनसमर्थन से घबराकर भारत जोड़ो यात्रा को डिस्टर्ब करने का है। मीडिया से बात करते हुए अशोक गहलोत ने कहा, "मैंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का पत्र पढ़ा। आप उनकी बौखलाहट देख सकते हैं। पाली सांसद पी.पी. चौधरी और गंगानगर सांसद निहालचंद ने उनको कल पत्र लिखा कि राहुल गांधी की यात्रा चल रही है और कोविड फैल रहा है। आप सोच सकते हो कि केंद्र सरकार कितनी घबराई हुई है।" जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, चीन, अमेरिका जैसे देशों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बड़ी बैठक बुलाई। दिल्ली में मनसुख मंडाविया स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों के साथ वार्ता की। बैठक के बाद नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा, "अगर आप भीड़भाड़ वाली जगह, घर के अंदर या बाहर हैं तो मास्क का इस्तेमाल करें। यह कॉमरेडिटी वाले या अधिक आयु वाले लोगों के लिए और भी महत्वपूर्ण है।"
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Posted On: भारतीय शोधकर्ताओं ने कॉस्मिक डॉन (ब्रह्माण्ड का उद्भव) से एक रेडियो तरंग सिग्नल की खोज के हालिया दावे का निर्णायक रूप से खंडन किया है। कॉस्मिक डॉन का समय हमारे ब्रह्मांड की शुरुआती अवस्था का था, जब पहली बार तारे और आकाशगंगाएं अस्तित्व में आई थीं। 2018 में अमेरिका में एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) और एमआईटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने ईडीजीईएस रेडियो टेलीस्कोप (दूरबीन) से डेटा का उपयोग करके प्रारंभिक ब्रह्मांड में उभरते तारों से एक सिग्नल का पता लगाया था। नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन से पूरे विश्व के खगोल वैज्ञानिकों के बीच काफी उत्साह पैदा किया था। एएसयू/एमआईटी टीम ने पहले तारों के जन्म का संकेत देने वाली रेडियो तरंग की खोज का दावा किया था। इसे हार्वर्ड के तारा-खगोल वैज्ञानिक एवी लोएब ने भी दो नोबेल पुरस्कारों के योग्य माना था। हालांकि विश्व को स्वतंत्र शोधकर्ताओं से इसकी पुष्टि का इंतजार था। रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) के शोधकर्ताओं ने स्वदेशी रूप से आविष्कार की गई और निर्मित सारस 3 रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करते हुए इस दावे का खंडन किया है। यह भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। आरआरआई में खगोलविदों द्वारा आविष्कार की गई और निर्मित सारस 3 रेडियो टेलीस्कोप जरूरी सूक्ष्मग्राहिता तक पहुंचने वाला विश्व का पहला टेलीस्कोप है। एएसयू/एमआईटी टीम द्वारा जिस सिग्नल का पता लगाने का दावा किया गया था, उसे अनोखे और गैर-मानक भौतिकी की जरूरत थी और इसने पूरे विश्व के खगोल वैज्ञानिकों को नए सिद्धांतों का आविष्कार करने के लिए प्रेरित किया था, जो अब यह सब व्यर्थ है। रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट का यह शोध ब्रह्मांड के प्रचलित ब्रह्माण्ड संबंधी मॉडल को फिर से स्थापित करते हुए विकसित ब्रह्मांड की हमारी समझ में विश्वास को बहाल करता है। आरआरआई के इस निष्कर्ष को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित किया गया है। सारस, आरआरआई की ओर से शुरू किया गया एक आला उच्च जोखिम वाला उच्च-लाभ प्रायोगिक प्रयास है। इसका नेतृत्व प्रोफेसर एन. उदय शंकर के साथ प्रोफेसर रवि सुब्रह्मण्यन ने किया है। यह हमारे "कॉस्मिक डॉन", जब शुरुआती ब्रह्मांड में पहली बार तारे और आकाशगंगाएं बनी थीं, के समय से अत्यंत धीमी रेडियो तरंग संकेतों का पता लगाने के लिए भारत में एक सटीक रेडियो टेलीस्कोप को डिजाइन, निर्माण और तैनात करने का एक साहसी प्रयास था। आरआरआई में सीएमबी डिस्टॉर्शन (विरूपीकरण) प्रयोगशाला ने अत्याधुनिक रेडियो दूरबीनों के विकास की जिम्मेदारी उठाई है, जिन्हें ब्रह्माण्ड संबंधी धीमे सिग्नल, विशेष रूप से ब्रह्मांड की गहराई से उत्पन्न होने वाले 21-सेंटीमीटर तरंग दैर्ध्य (1.4 गीगाहर्ट्ज़) पर हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित विकिरण, का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। कॉस्मिक डॉन से सिग्नल के पृथ्वी पर आने की उम्मीद है जो तरंगदैर्ध्य में कई मीटर तक फैला हुआ है और रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड 50-200 मेगाहर्ट्ज में स्थित ब्रह्मांड के विस्तार से आवृत्ति में कमी आई है। ब्रह्मांड की इतनी शुरुआती अवधि से एक धीमे सिग्नल का पता लगाना काफी मुश्किल है। खगोलीय सिग्नल असाधारण रूप से मंद हैं - ये आकाश रेडियो तरंगों में दबे हुए हैं, जो हमारी अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे में गैस से हमारे पास आती हैं, जो 10 लाख गुना चमकदार हैं। इसके अलावा यह ब्रह्मांडीय सिग्नल कई स्थलीय संचार उपकरणों और टीवी व एफएम रेडियो स्टेशनों द्वारा उपयोग किए जाने वाले रेडियो तरंगदैर्ध्य बैंड में मौजूद है, जो एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल सिग्नल का पता लगाना बेहद मुश्किल बना देता है। हालांकि, आरआरआई के वैज्ञानिक और इंजीनियर इस चुनौती के लिए तैयार हो गए और कॉस्मिक डॉन से प्राप्त संकेतों को समझने के लिए सारस रेडियो टेलीस्कोप को डिजाइन कर इसमें शोधन किया। वर्तमान में यह अनुसंधान इस क्षेत्र में विश्व के सबसे सूक्ष्मग्राही उपकरणों में से एक है। हाल ही में आरआरआई खगोल वैज्ञानिकों ने रेडियो टेलीस्कोप को जल के ऊपर एक बेड़े पर तैराने का विचार दिया। यह एक बुद्धिमत्तापूर्ण डिजाइन था, जिसने दूरबीन के प्रदर्शन में काफी बढ़ोतरी की और विश्व में कभी भी इसकी कल्पना नहीं की गई थी। यह एंटीना के नीचे हाई डिइलेक्ट्रिक स्थिरांक का एक समरूप माध्यम प्रदान करने में सहायता करता है, जिससे सूक्ष्मग्राहिता में सुधार होता है और रेडियो दूरबीनों के नीचे जमीन से उत्सर्जित भ्रामक रेडियो तरंगों को कम किया जाता है। 2020 में रेडियो टेलीस्कोप को उत्तरी कर्नाटक की झीलों में दांडीगनहल्ली झील और शरवती बैकवाटर पर लगाया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता और पद्म श्री पुरस्कार विजेता अनीता रेड्डी के अलग-अलग ग्रामीण डीआरआईके विवेक परिसर में रहते हुए आआरई के खगोलविदों ने अब तक का सबसे सटीक माप प्राप्त किया है। इस परिनियोजन का केंद्रित लक्ष्य एएसयू/एमआईटी ईडीजीईएस प्रयोग द्वारा 21-सेंटीमीटर सिग्नल के दावा किए गए डिटेक्शन का फिर से सत्यापन करना था। सैद्धांतिक भविष्यवाणियों की तुलना में कॉस्मिक डॉन से रिपोर्ट किए गए सिग्नल की मजबूती वास्तव में अनोखी थी। यह देखते हुए कि इनका माप कठिन था, ऐसे दावे की फिर से पुष्टि एक तत्काल प्राथमिकता बन गई थी, क्योंकि उपकरण मापांकन में गलतियों के परिणामस्वरूप भ्रामक कटौती हो सकती है। आरआरआई के एक शोध वैज्ञानिक डॉ. सौरभ सिंह के नेतृत्व में एक ठोस सांख्यिकीय विश्लेषण के बाद सारस 3 को ईडीजीईएस के प्रयोग के माध्यम से दावा किए गए सिग्नल का कोई प्रमाण नहीं मिला है। मापन की अनिश्चितताओं के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद सिग्नल की उपस्थिति को निर्णायक रूप से खारिज किया जाता है। इसे देखते हुए इस निष्कर्ष का तात्पर्य यह निकलता है कि ईडीजीईएस की खोज का मापन गलत हो सकता है और इसमें अंतरिक्ष व समय की गहराई से कोई सिग्नल नहीं था। वास्तव में सारस 3 जरूरी सूक्ष्मग्राहिता तक पहुंचने और सिग्नल का पता लगाने के दावे को क्रॉस-सत्यापित करने वाला पहला प्रयोग था। हालांकि खगोल वैज्ञानिकों को अब तक यह नहीं पता है कि वास्तविक सिग्नल कैसा दिखता है। एएसयू/एमआईटी के इस दावे को खारिज करने के बाद सारस प्रयोग कॉस्मिक डॉन की वास्तविक प्रकृति की खोज के लिए तैयार है। आरआरआई में सारस 3 टीम भारत में सुदूर झीलों पर और अधिक अवलोकन की योजना बना रही है। इस तरह की खोज के माध्यम से यह टीम कॉस्मिक डॉन से 21-सेंटीमीटर सिग्नल का पता लगाने और हमारे ब्रह्मांड के इतिहास में इस अंतिम बाकी अंतर को सामने ला पाएगी। अधिक जानकारी के लिए डॉ. सौरभ सिंह (saurabhs@rri।res।in) से संपर्क किया जा सकता है।
Posted On: भारतीय शोधकर्ताओं ने कॉस्मिक डॉन से एक रेडियो तरंग सिग्नल की खोज के हालिया दावे का निर्णायक रूप से खंडन किया है। कॉस्मिक डॉन का समय हमारे ब्रह्मांड की शुरुआती अवस्था का था, जब पहली बार तारे और आकाशगंगाएं अस्तित्व में आई थीं। दो हज़ार अट्ठारह में अमेरिका में एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और एमआईटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने ईडीजीईएस रेडियो टेलीस्कोप से डेटा का उपयोग करके प्रारंभिक ब्रह्मांड में उभरते तारों से एक सिग्नल का पता लगाया था। नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन से पूरे विश्व के खगोल वैज्ञानिकों के बीच काफी उत्साह पैदा किया था। एएसयू/एमआईटी टीम ने पहले तारों के जन्म का संकेत देने वाली रेडियो तरंग की खोज का दावा किया था। इसे हार्वर्ड के तारा-खगोल वैज्ञानिक एवी लोएब ने भी दो नोबेल पुरस्कारों के योग्य माना था। हालांकि विश्व को स्वतंत्र शोधकर्ताओं से इसकी पुष्टि का इंतजार था। रमन अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने स्वदेशी रूप से आविष्कार की गई और निर्मित सारस तीन रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करते हुए इस दावे का खंडन किया है। यह भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। आरआरआई में खगोलविदों द्वारा आविष्कार की गई और निर्मित सारस तीन रेडियो टेलीस्कोप जरूरी सूक्ष्मग्राहिता तक पहुंचने वाला विश्व का पहला टेलीस्कोप है। एएसयू/एमआईटी टीम द्वारा जिस सिग्नल का पता लगाने का दावा किया गया था, उसे अनोखे और गैर-मानक भौतिकी की जरूरत थी और इसने पूरे विश्व के खगोल वैज्ञानिकों को नए सिद्धांतों का आविष्कार करने के लिए प्रेरित किया था, जो अब यह सब व्यर्थ है। रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट का यह शोध ब्रह्मांड के प्रचलित ब्रह्माण्ड संबंधी मॉडल को फिर से स्थापित करते हुए विकसित ब्रह्मांड की हमारी समझ में विश्वास को बहाल करता है। आरआरआई के इस निष्कर्ष को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित किया गया है। सारस, आरआरआई की ओर से शुरू किया गया एक आला उच्च जोखिम वाला उच्च-लाभ प्रायोगिक प्रयास है। इसका नेतृत्व प्रोफेसर एन. उदय शंकर के साथ प्रोफेसर रवि सुब्रह्मण्यन ने किया है। यह हमारे "कॉस्मिक डॉन", जब शुरुआती ब्रह्मांड में पहली बार तारे और आकाशगंगाएं बनी थीं, के समय से अत्यंत धीमी रेडियो तरंग संकेतों का पता लगाने के लिए भारत में एक सटीक रेडियो टेलीस्कोप को डिजाइन, निर्माण और तैनात करने का एक साहसी प्रयास था। आरआरआई में सीएमबी डिस्टॉर्शन प्रयोगशाला ने अत्याधुनिक रेडियो दूरबीनों के विकास की जिम्मेदारी उठाई है, जिन्हें ब्रह्माण्ड संबंधी धीमे सिग्नल, विशेष रूप से ब्रह्मांड की गहराई से उत्पन्न होने वाले इक्कीस-सेंटीमीटर तरंग दैर्ध्य पर हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित विकिरण, का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। कॉस्मिक डॉन से सिग्नल के पृथ्वी पर आने की उम्मीद है जो तरंगदैर्ध्य में कई मीटर तक फैला हुआ है और रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड पचास-दो सौ मेगाहर्ट्ज में स्थित ब्रह्मांड के विस्तार से आवृत्ति में कमी आई है। ब्रह्मांड की इतनी शुरुआती अवधि से एक धीमे सिग्नल का पता लगाना काफी मुश्किल है। खगोलीय सिग्नल असाधारण रूप से मंद हैं - ये आकाश रेडियो तरंगों में दबे हुए हैं, जो हमारी अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे में गैस से हमारे पास आती हैं, जो दस लाख गुना चमकदार हैं। इसके अलावा यह ब्रह्मांडीय सिग्नल कई स्थलीय संचार उपकरणों और टीवी व एफएम रेडियो स्टेशनों द्वारा उपयोग किए जाने वाले रेडियो तरंगदैर्ध्य बैंड में मौजूद है, जो एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल सिग्नल का पता लगाना बेहद मुश्किल बना देता है। हालांकि, आरआरआई के वैज्ञानिक और इंजीनियर इस चुनौती के लिए तैयार हो गए और कॉस्मिक डॉन से प्राप्त संकेतों को समझने के लिए सारस रेडियो टेलीस्कोप को डिजाइन कर इसमें शोधन किया। वर्तमान में यह अनुसंधान इस क्षेत्र में विश्व के सबसे सूक्ष्मग्राही उपकरणों में से एक है। हाल ही में आरआरआई खगोल वैज्ञानिकों ने रेडियो टेलीस्कोप को जल के ऊपर एक बेड़े पर तैराने का विचार दिया। यह एक बुद्धिमत्तापूर्ण डिजाइन था, जिसने दूरबीन के प्रदर्शन में काफी बढ़ोतरी की और विश्व में कभी भी इसकी कल्पना नहीं की गई थी। यह एंटीना के नीचे हाई डिइलेक्ट्रिक स्थिरांक का एक समरूप माध्यम प्रदान करने में सहायता करता है, जिससे सूक्ष्मग्राहिता में सुधार होता है और रेडियो दूरबीनों के नीचे जमीन से उत्सर्जित भ्रामक रेडियो तरंगों को कम किया जाता है। दो हज़ार बीस में रेडियो टेलीस्कोप को उत्तरी कर्नाटक की झीलों में दांडीगनहल्ली झील और शरवती बैकवाटर पर लगाया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता और पद्म श्री पुरस्कार विजेता अनीता रेड्डी के अलग-अलग ग्रामीण डीआरआईके विवेक परिसर में रहते हुए आआरई के खगोलविदों ने अब तक का सबसे सटीक माप प्राप्त किया है। इस परिनियोजन का केंद्रित लक्ष्य एएसयू/एमआईटी ईडीजीईएस प्रयोग द्वारा इक्कीस-सेंटीमीटर सिग्नल के दावा किए गए डिटेक्शन का फिर से सत्यापन करना था। सैद्धांतिक भविष्यवाणियों की तुलना में कॉस्मिक डॉन से रिपोर्ट किए गए सिग्नल की मजबूती वास्तव में अनोखी थी। यह देखते हुए कि इनका माप कठिन था, ऐसे दावे की फिर से पुष्टि एक तत्काल प्राथमिकता बन गई थी, क्योंकि उपकरण मापांकन में गलतियों के परिणामस्वरूप भ्रामक कटौती हो सकती है। आरआरआई के एक शोध वैज्ञानिक डॉ. सौरभ सिंह के नेतृत्व में एक ठोस सांख्यिकीय विश्लेषण के बाद सारस तीन को ईडीजीईएस के प्रयोग के माध्यम से दावा किए गए सिग्नल का कोई प्रमाण नहीं मिला है। मापन की अनिश्चितताओं के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद सिग्नल की उपस्थिति को निर्णायक रूप से खारिज किया जाता है। इसे देखते हुए इस निष्कर्ष का तात्पर्य यह निकलता है कि ईडीजीईएस की खोज का मापन गलत हो सकता है और इसमें अंतरिक्ष व समय की गहराई से कोई सिग्नल नहीं था। वास्तव में सारस तीन जरूरी सूक्ष्मग्राहिता तक पहुंचने और सिग्नल का पता लगाने के दावे को क्रॉस-सत्यापित करने वाला पहला प्रयोग था। हालांकि खगोल वैज्ञानिकों को अब तक यह नहीं पता है कि वास्तविक सिग्नल कैसा दिखता है। एएसयू/एमआईटी के इस दावे को खारिज करने के बाद सारस प्रयोग कॉस्मिक डॉन की वास्तविक प्रकृति की खोज के लिए तैयार है। आरआरआई में सारस तीन टीम भारत में सुदूर झीलों पर और अधिक अवलोकन की योजना बना रही है। इस तरह की खोज के माध्यम से यह टीम कॉस्मिक डॉन से इक्कीस-सेंटीमीटर सिग्नल का पता लगाने और हमारे ब्रह्मांड के इतिहास में इस अंतिम बाकी अंतर को सामने ला पाएगी। अधिक जानकारी के लिए डॉ. सौरभ सिंह से संपर्क किया जा सकता है।
मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को बड़े ही धूम धाम से राजा राम सरकार का विवाहोत्सव मनाया जाता है। यह महोत्सव विशेष रूप से मिथलांचल में बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। त्रेता युग में पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार अपनी चरम सीमा पर था। उस समय मुनि विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा करने के उद्देश्य से अयोध्या के महाराज दशरथ से उनके पुत्रों राम एवं लक्ष्मण जी को माँग कर ले गए। यज्ञ की समाप्ति के पश्चात विश्वामित्र जी जनक पुरी के रास्ते से वापसी आने के समय राजा जनक के सीता स्वयंवर की उद्घोषणा की जानकारी मिली। मुनि विश्वामित्र ने राम एवं लक्ष्मण जी को साथ लेकर सीता के स्वयंवर में पधारें। सीता स्वयंवर में राजा जनक जी ने उद्घोषणा की जो भी शिव जी के धनुष को भंग कर देगा उसके साथ सीता के विवाह का संकल्प कर लिया। स्वयंवर में बहुत राजा महाराजाओं ने अपने वीरता का परिचय दिया परन्तु विफल रहे। इधर जनक जी चिंतित होकर घोषणा की लगता है यह पृथ्वी वीरों से विहीन हो गयी है, तभी मुनि मुनि विश्वामित्र ने राम ने राम को शिव धनुष भंग करने का आदेश दिया। राम जी ने मुनि विश्वामित्र जी की आज्ञा मानकर शिव जी की मन ही मन स्तुति कर शिव धनुष को एक ही बार में भंग कर दिया। उसके उपरान्त राजा जनक ने सीता का विवाह बड़े उत्साह एवं धूम धाम के साथ राम जी से कर दिया। साथ ही दशरथ के तीन पुत्रों भरत के साथ माध्वी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला एवं शत्रुघ्न जी के साथ सुतकीर्ति का विवाह भी बड़े हर्ष एवं धूम धाम के साथ कर दिया।. 0 संबंधों।
मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को बड़े ही धूम धाम से राजा राम सरकार का विवाहोत्सव मनाया जाता है। यह महोत्सव विशेष रूप से मिथलांचल में बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। त्रेता युग में पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार अपनी चरम सीमा पर था। उस समय मुनि विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा करने के उद्देश्य से अयोध्या के महाराज दशरथ से उनके पुत्रों राम एवं लक्ष्मण जी को माँग कर ले गए। यज्ञ की समाप्ति के पश्चात विश्वामित्र जी जनक पुरी के रास्ते से वापसी आने के समय राजा जनक के सीता स्वयंवर की उद्घोषणा की जानकारी मिली। मुनि विश्वामित्र ने राम एवं लक्ष्मण जी को साथ लेकर सीता के स्वयंवर में पधारें। सीता स्वयंवर में राजा जनक जी ने उद्घोषणा की जो भी शिव जी के धनुष को भंग कर देगा उसके साथ सीता के विवाह का संकल्प कर लिया। स्वयंवर में बहुत राजा महाराजाओं ने अपने वीरता का परिचय दिया परन्तु विफल रहे। इधर जनक जी चिंतित होकर घोषणा की लगता है यह पृथ्वी वीरों से विहीन हो गयी है, तभी मुनि मुनि विश्वामित्र ने राम ने राम को शिव धनुष भंग करने का आदेश दिया। राम जी ने मुनि विश्वामित्र जी की आज्ञा मानकर शिव जी की मन ही मन स्तुति कर शिव धनुष को एक ही बार में भंग कर दिया। उसके उपरान्त राजा जनक ने सीता का विवाह बड़े उत्साह एवं धूम धाम के साथ राम जी से कर दिया। साथ ही दशरथ के तीन पुत्रों भरत के साथ माध्वी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला एवं शत्रुघ्न जी के साथ सुतकीर्ति का विवाह भी बड़े हर्ष एवं धूम धाम के साथ कर दिया।. शून्य संबंधों।
आगरा। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने शुक्रवार को कमलानगर में एक बैठक आहूत की, जिसमें शहर की सड़कों की दुर्दशा को लेकर चर्चा की गई। साथ ही जिम्मेदारी विभागों की अनदेखी और मनमानी को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया। इसमें शहर के कई क्षेत्रों गढ्डे और जलभराव की समस्या पर चर्चा की गई। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला अध्यक्ष मुरारी लाल गोयल का कहना है कि हाल ही के जलभराव, सड़कों में गड्ढे और फिर उनके कारण हुए हादसों की जो तस्वीरे सामने आई है। उन्होंने सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि विकास के नाम पर जो टैक्स स्थानीय, प्रदेश व केंद्र सरकार वसूलती है उसका पैसा कहा खर्च होता है। जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
आगरा। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने शुक्रवार को कमलानगर में एक बैठक आहूत की, जिसमें शहर की सड़कों की दुर्दशा को लेकर चर्चा की गई। साथ ही जिम्मेदारी विभागों की अनदेखी और मनमानी को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया। इसमें शहर के कई क्षेत्रों गढ्डे और जलभराव की समस्या पर चर्चा की गई। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला अध्यक्ष मुरारी लाल गोयल का कहना है कि हाल ही के जलभराव, सड़कों में गड्ढे और फिर उनके कारण हुए हादसों की जो तस्वीरे सामने आई है। उन्होंने सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि विकास के नाम पर जो टैक्स स्थानीय, प्रदेश व केंद्र सरकार वसूलती है उसका पैसा कहा खर्च होता है। जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का फाइनल मुकाबला रविवार को ब्रेबोर्न स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेला गया। फाइनल मैच में मुंबई इंडियंस ने दिल्ली कैपिटल्स को 7 विकेट से हरा दिया। मुंबई इंडियंस ने पहली विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का खिताब जीत लिया है। टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी दिल्ली ने 20 ओवर में 9 विकेट पर 131 रन बनाए। जवाब में मुंबई ने 19. 3 ओवर में टारगेट हासिल कर लिया। एक तरफ जहां मुंबई इंडियंस की इस जीत की चर्चा हर जगह हो रही है तो वहीं सोशल मीडिया पर लगातार बधाइयों का तांता लगा हुआ है। मुंबई की इस जीत पर सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, चेतेश्वर पुजारा और हरभजन सिंह ने भी मुंबई इंडियंस को ट्वीट करके बधाई दी है। आगे स्टोरी में हम मुंबई की जीत पर खिलाड़ियों के सोशल मीडिया रिएक्शन को देखेंगे। सचिन तेंदुलकर ने लिखा, WPL में मुंबई महिला टीम का शानदार कारनामा, पहले सीजन में छाई! बधाई मुंबई इंडियंस। हरभजन सिंह ने लिखा, आली रे एक और ट्रॉफी। मुंबई इंडियंस को हार्दिक बधाई। पूर्व भारतीय खिलाड़ी युवराज सिंह ने ट्वीट किया, मुंबई इंडियंस को TataWPL जीतने पर बधाई। ओह बल्ले ओह तेरे कप्तान हरमनप्रीत कौर। बहुत शानदार नैटली सीवर। WPL महिला क्रिकेट के लिए अवसर खोलेगा! भविष्य के लिए उत्साहित हूं। चेतेश्वर पुजाराने लिखा, बधाई हो! शानदार जीत। इरफान पठान ने ट्वीट किया, मुंबई को पहली बार WPL जीतने पर बधाई हो। महिला क्रिकेट के लिए क्या सफर शुरू हुआ है। आर पी सिंह ने लिखा, मुंबई को WPL का पहला संस्करण जीतते देखना वास्तव में एक मनोरम दृश्य! मु्ंबई की इस जीत में नैटली सीवर ने अहम भूमिका निभाई। वह 60 रन बनाकर नाबाद रहीं और प्लेयर ऑफ द मैच बनीं। एलिमिनेटर मुकाबले में यूपी वॉरियर्ज के खिलाफ उन्होंने 72 रन की नाबाद पारी खेली थी। उन्हें नॉकआउट स्टेज में कोई आउट ही नहीं कर सकीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
विमेंस प्रीमियर लीग का फाइनल मुकाबला रविवार को ब्रेबोर्न स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेला गया। फाइनल मैच में मुंबई इंडियंस ने दिल्ली कैपिटल्स को सात विकेट से हरा दिया। मुंबई इंडियंस ने पहली विमेंस प्रीमियर लीग का खिताब जीत लिया है। टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी दिल्ली ने बीस ओवर में नौ विकेट पर एक सौ इकतीस रन बनाए। जवाब में मुंबई ने उन्नीस. तीन ओवर में टारगेट हासिल कर लिया। एक तरफ जहां मुंबई इंडियंस की इस जीत की चर्चा हर जगह हो रही है तो वहीं सोशल मीडिया पर लगातार बधाइयों का तांता लगा हुआ है। मुंबई की इस जीत पर सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, चेतेश्वर पुजारा और हरभजन सिंह ने भी मुंबई इंडियंस को ट्वीट करके बधाई दी है। आगे स्टोरी में हम मुंबई की जीत पर खिलाड़ियों के सोशल मीडिया रिएक्शन को देखेंगे। सचिन तेंदुलकर ने लिखा, WPL में मुंबई महिला टीम का शानदार कारनामा, पहले सीजन में छाई! बधाई मुंबई इंडियंस। हरभजन सिंह ने लिखा, आली रे एक और ट्रॉफी। मुंबई इंडियंस को हार्दिक बधाई। पूर्व भारतीय खिलाड़ी युवराज सिंह ने ट्वीट किया, मुंबई इंडियंस को TataWPL जीतने पर बधाई। ओह बल्ले ओह तेरे कप्तान हरमनप्रीत कौर। बहुत शानदार नैटली सीवर। WPL महिला क्रिकेट के लिए अवसर खोलेगा! भविष्य के लिए उत्साहित हूं। चेतेश्वर पुजाराने लिखा, बधाई हो! शानदार जीत। इरफान पठान ने ट्वीट किया, मुंबई को पहली बार WPL जीतने पर बधाई हो। महिला क्रिकेट के लिए क्या सफर शुरू हुआ है। आर पी सिंह ने लिखा, मुंबई को WPL का पहला संस्करण जीतते देखना वास्तव में एक मनोरम दृश्य! मु्ंबई की इस जीत में नैटली सीवर ने अहम भूमिका निभाई। वह साठ रन बनाकर नाबाद रहीं और प्लेयर ऑफ द मैच बनीं। एलिमिनेटर मुकाबले में यूपी वॉरियर्ज के खिलाफ उन्होंने बहत्तर रन की नाबाद पारी खेली थी। उन्हें नॉकआउट स्टेज में कोई आउट ही नहीं कर सकीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आगरा. इस समय आगरा कमिश्नरेट की पुलिस पूरे एक्शन में चल रही है. अपराध होने के कुछ ही घंटों के अंदर उसका खुलासा हो रहा है. मकसद है तो सिर्फ एक, उत्तर प्रदेश और आगरा की साख पर कोई बट्टा न लगे. यही वजह है कि पुलिस के द्वारा अपराधियों पर लगातार एक्शन हो रहा है. गैंगस्टर और गुंडा एक्ट तक की कार्रवाई की जा रही है. ताजा मामला बुधवार का ही है. बुधवार की सुबह जब लोहामंडी क्षेत्र में एक युवती मंदिर पूजा करने जा रही थी तो समुदाय विशेष के युवक के द्वारा उस पर अभद्र टिप्पणी की गई. जिसके बाद मामला गरमाया, और लोगों ने बाजार बंद कर थाने का घेराव कर दिया था. लेकिन आगरा पुलिस पर शहर की इज्जत बचाने का जिम्मा था तो पुलिस ने 24 घंटे के अंदर आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन देकर मामला शांत कराया. 24 घंटे भी पूरे नही हुए थे कि पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया. ऐसा पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी पुलिस के द्वारा अपराधियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई है. शहर में हो रही छोटी घटना हो या फिर बड़ी, सभी पर पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रतिन्दिर सिंह बारीकी से नजर बनाए हुए दिखाई दिए. अवैध खनन से लेकर मोबाइल खोने तक की घटनाओं में पुलिस के द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. आपने देखा होगा कि मोबाइल अगर खो जाता है या फिर गिर जाता है तो लोग परेशान दिखाई देते हैं. लेकिन आगरा पुलिस ऐसे लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का काम करती हुई दिखाई दे रही है. आगरा जिले में पुलिस के द्वारा एक अप्रैल 2022 से 30 अप्रैल 2023 तक लगभग 530 मोबाइल फोनों को खोज निकाला गया है. जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रुपए है. यह वह मोबाइल है जो गिर जाते है, या फिर चोरी हुए हैं. जब लोगों को उनका खोया या फिर चोरी हुआ मोबाइल पुलिस के द्वारा दिया जाता है तो उनके चेहरे पर मुस्कान अलग ही देखते बनती है. आगरा में अवैध खनन का बड़ा काला कारोबार होता है. इसको लेकर पुलिस ने अभियान भी छेड़ रखा है. खनन माफियाओं पर पुलिस कहर बन कर टूट रही है. आलम यह है कि अवैध खनन का काला कारोबार करने वाले खनन माफिया जिला छोड़ने पर मजबूर हो रहे है. हाल ही में खेरागढ़ में एसीपी महेश कुमार और इंस्पेक्टर राजीव सोलंकी के द्वारा खनन माफियाओं पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई. अवैध खनन से भरे ट्रक और खनन माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. अगर पूरे वर्ष की बात की जाए तो अप्रैल 2022 से जून 2023 तक पुलिस के द्वारा जिले में लगभग 186 मुकदमें खनन माफियाओं के खिलाफ दर्ज किए गए, जिसमे 339 खनन माफियाओं पर कार्रवाई की गई. गुंडा एक्ट से लेकर गैंगस्टर तक की कार्रवाई खनन माफियाओं पर हुई. बच्चे परिवार की रौनक होते है. अगर बच्चे घर में न हो तो परिवार सुना और अधूरा लगता है. लेकिन ऐसे परिवारों में भी आगरा पुलिस ने खुशियां लौटाने का काम किया. एक साल में पुलिस के द्वारा 815 ऐसे बच्चें खोजे गए जो अपने परिवार से बिछड़ गए थे. जिसमे कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जो कई सालों से अपने परिवार से बिछड़े हुए थे. जब परिवार के लोगों ने बच्चों को देखा तो उनकी नजर में आगरा पुलिस किसी भगवान से कम न दिखाई दी. पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिंदर सिंह का कहना है कि आगरा मोहब्बत की नगरी है. यहां पर प्रतिदिन हजारों पर्यटक ताजमहल के साथ अन्य इमारत देखने आते है. जब इसी शहर में क्राइम बढ़ेगा तो कोई पर्यटक नहीं आयेगा. खास तौर से विदेशी पर्यटक. इससे प्रदेश और देश की इज्जत खराब होने का खतरा रहता है. यही वजह है कि हमारी पुलिस लगातार एक्शन में रहती है. आगरा में चाहे छोटी वारदात हो या फिर बड़ी, पुलिस का मकसद सिर्फ एक होता है, आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई. यहीं हम कर रहे है. आगरा में दोषियों को किसी भी कीमत पर बक्शा नही जायेगा. अगर कोई व्यक्ति क्राइम करता है, या फिर देश, प्रदेश और शहर की इज्जत को धूमिल करने की कोशिश करता है, उस पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है, और आगे भी इसी तरह होती रहेगी. . YouTube से मालामाल बनने के लिए बस कुछ बातें हैं जरूरी, अगर नोट कर लिए ये टिप्स. . . तो आप भी खेलेंगे लाखों में!
आगरा. इस समय आगरा कमिश्नरेट की पुलिस पूरे एक्शन में चल रही है. अपराध होने के कुछ ही घंटों के अंदर उसका खुलासा हो रहा है. मकसद है तो सिर्फ एक, उत्तर प्रदेश और आगरा की साख पर कोई बट्टा न लगे. यही वजह है कि पुलिस के द्वारा अपराधियों पर लगातार एक्शन हो रहा है. गैंगस्टर और गुंडा एक्ट तक की कार्रवाई की जा रही है. ताजा मामला बुधवार का ही है. बुधवार की सुबह जब लोहामंडी क्षेत्र में एक युवती मंदिर पूजा करने जा रही थी तो समुदाय विशेष के युवक के द्वारा उस पर अभद्र टिप्पणी की गई. जिसके बाद मामला गरमाया, और लोगों ने बाजार बंद कर थाने का घेराव कर दिया था. लेकिन आगरा पुलिस पर शहर की इज्जत बचाने का जिम्मा था तो पुलिस ने चौबीस घंटाटे के अंदर आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन देकर मामला शांत कराया. चौबीस घंटाटे भी पूरे नही हुए थे कि पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया. ऐसा पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी पुलिस के द्वारा अपराधियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई है. शहर में हो रही छोटी घटना हो या फिर बड़ी, सभी पर पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रतिन्दिर सिंह बारीकी से नजर बनाए हुए दिखाई दिए. अवैध खनन से लेकर मोबाइल खोने तक की घटनाओं में पुलिस के द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. आपने देखा होगा कि मोबाइल अगर खो जाता है या फिर गिर जाता है तो लोग परेशान दिखाई देते हैं. लेकिन आगरा पुलिस ऐसे लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का काम करती हुई दिखाई दे रही है. आगरा जिले में पुलिस के द्वारा एक अप्रैल दो हज़ार बाईस से तीस अप्रैल दो हज़ार तेईस तक लगभग पाँच सौ तीस मोबाइल फोनों को खोज निकाला गया है. जिनकी अनुमानित कीमत लगभग पंद्रह लाख रुपए है. यह वह मोबाइल है जो गिर जाते है, या फिर चोरी हुए हैं. जब लोगों को उनका खोया या फिर चोरी हुआ मोबाइल पुलिस के द्वारा दिया जाता है तो उनके चेहरे पर मुस्कान अलग ही देखते बनती है. आगरा में अवैध खनन का बड़ा काला कारोबार होता है. इसको लेकर पुलिस ने अभियान भी छेड़ रखा है. खनन माफियाओं पर पुलिस कहर बन कर टूट रही है. आलम यह है कि अवैध खनन का काला कारोबार करने वाले खनन माफिया जिला छोड़ने पर मजबूर हो रहे है. हाल ही में खेरागढ़ में एसीपी महेश कुमार और इंस्पेक्टर राजीव सोलंकी के द्वारा खनन माफियाओं पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई. अवैध खनन से भरे ट्रक और खनन माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. अगर पूरे वर्ष की बात की जाए तो अप्रैल दो हज़ार बाईस से जून दो हज़ार तेईस तक पुलिस के द्वारा जिले में लगभग एक सौ छियासी मुकदमें खनन माफियाओं के खिलाफ दर्ज किए गए, जिसमे तीन सौ उनतालीस खनन माफियाओं पर कार्रवाई की गई. गुंडा एक्ट से लेकर गैंगस्टर तक की कार्रवाई खनन माफियाओं पर हुई. बच्चे परिवार की रौनक होते है. अगर बच्चे घर में न हो तो परिवार सुना और अधूरा लगता है. लेकिन ऐसे परिवारों में भी आगरा पुलिस ने खुशियां लौटाने का काम किया. एक साल में पुलिस के द्वारा आठ सौ पंद्रह ऐसे बच्चें खोजे गए जो अपने परिवार से बिछड़ गए थे. जिसमे कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जो कई सालों से अपने परिवार से बिछड़े हुए थे. जब परिवार के लोगों ने बच्चों को देखा तो उनकी नजर में आगरा पुलिस किसी भगवान से कम न दिखाई दी. पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिंदर सिंह का कहना है कि आगरा मोहब्बत की नगरी है. यहां पर प्रतिदिन हजारों पर्यटक ताजमहल के साथ अन्य इमारत देखने आते है. जब इसी शहर में क्राइम बढ़ेगा तो कोई पर्यटक नहीं आयेगा. खास तौर से विदेशी पर्यटक. इससे प्रदेश और देश की इज्जत खराब होने का खतरा रहता है. यही वजह है कि हमारी पुलिस लगातार एक्शन में रहती है. आगरा में चाहे छोटी वारदात हो या फिर बड़ी, पुलिस का मकसद सिर्फ एक होता है, आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई. यहीं हम कर रहे है. आगरा में दोषियों को किसी भी कीमत पर बक्शा नही जायेगा. अगर कोई व्यक्ति क्राइम करता है, या फिर देश, प्रदेश और शहर की इज्जत को धूमिल करने की कोशिश करता है, उस पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है, और आगे भी इसी तरह होती रहेगी. . YouTube से मालामाल बनने के लिए बस कुछ बातें हैं जरूरी, अगर नोट कर लिए ये टिप्स. . . तो आप भी खेलेंगे लाखों में!
पिछले सालों से चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं का भारतीय जनता पार्टी में आना शुरू हो जाता है। अभी तक भाजपा केवल विपक्षी नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाती थी। अब पार्टी ने अपने सहयोगी दलों के विधायकों को भी तोड़ना शुरू कर दिया है। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले कालांवाली सीट से शिरोमणि अकाली दल (SAD) के विधायक भाजपा में शामिल हुए। इसे लेकर SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भाजपा पर हमला बोला है। गुरुवार को कालांवाली से विधायक बलकौर सिंह भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की राज्य में ईमानदार सरकार चलाने के लिए प्रशंसा की। हालांकि, उनका यह कदम उनकी पार्टी को पसंद नहीं आया। बादल ने कहा कि हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है। SAD के मौजूदा विधायक को भाजपा में शामिल करना गठबंधन की मर्यादा का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन दिल्ली और पंजाब में है। हरियाणा में पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। बादल ने कहा कि भाजपा ने SAD विधायक को तोड़कर जो किया है वह अनैतिक और मर्यादा का उल्लंघन करने वाला काम है। जब उनसे पूछा कि क्या भाजपा के इस कदम का उनके गठबंधन पर असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि हरियाणा में उनकी पार्टी और भाजपा का गठबंधन नहीं है, लेकिन पुराने सहयोगी होने के नाते एक कमिटमेंट रहता है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है और वो इसकी निंदा करते हैं। हरियाणा में 21 अक्तूबर को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होगा। 24 अक्तूबर को चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव होंगे। शिरोमणि अकाली दल ने आरोप लगाया कि भाजपा हरियाणा विधानसभा चुनाव में उसका साथ देने की बात से मुकर गई है। पार्टी ने कहा कि उसने 2019 लोकसभा चुनावों में हरियाणा में भाजपा का साथ दिया था। अब जब भाजपा के पास SAD की मदद करने का मौका था, तब उसने अपने कदम वापस खींच लिए। SAD ने कहा कि हरियाणा की 30 सीटों पर उसका प्रभाव है और वह कई सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
पिछले सालों से चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं का भारतीय जनता पार्टी में आना शुरू हो जाता है। अभी तक भाजपा केवल विपक्षी नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाती थी। अब पार्टी ने अपने सहयोगी दलों के विधायकों को भी तोड़ना शुरू कर दिया है। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले कालांवाली सीट से शिरोमणि अकाली दल के विधायक भाजपा में शामिल हुए। इसे लेकर SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भाजपा पर हमला बोला है। गुरुवार को कालांवाली से विधायक बलकौर सिंह भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की राज्य में ईमानदार सरकार चलाने के लिए प्रशंसा की। हालांकि, उनका यह कदम उनकी पार्टी को पसंद नहीं आया। बादल ने कहा कि हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है। SAD के मौजूदा विधायक को भाजपा में शामिल करना गठबंधन की मर्यादा का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन दिल्ली और पंजाब में है। हरियाणा में पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। बादल ने कहा कि भाजपा ने SAD विधायक को तोड़कर जो किया है वह अनैतिक और मर्यादा का उल्लंघन करने वाला काम है। जब उनसे पूछा कि क्या भाजपा के इस कदम का उनके गठबंधन पर असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि हरियाणा में उनकी पार्टी और भाजपा का गठबंधन नहीं है, लेकिन पुराने सहयोगी होने के नाते एक कमिटमेंट रहता है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है और वो इसकी निंदा करते हैं। हरियाणा में इक्कीस अक्तूबर को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होगा। चौबीस अक्तूबर को चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव होंगे। शिरोमणि अकाली दल ने आरोप लगाया कि भाजपा हरियाणा विधानसभा चुनाव में उसका साथ देने की बात से मुकर गई है। पार्टी ने कहा कि उसने दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनावों में हरियाणा में भाजपा का साथ दिया था। अब जब भाजपा के पास SAD की मदद करने का मौका था, तब उसने अपने कदम वापस खींच लिए। SAD ने कहा कि हरियाणा की तीस सीटों पर उसका प्रभाव है और वह कई सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
उन्होने यह कर चुकाने से इसलिए इनकार किया था कि सरकार मेक्सिकोयुद्ध के खर्च मे सरकारी पैसे का उपयोग कर रही थी । थोरो से मिलने के लिए कवि एमरसन जेल की कोठरी पर पहुॅचे और विनोद मे बोले : "कहो हेनरी, जेल की कोठरी के अन्दर बैठे क्या कर रहे हो ?" हेनरी ने कहा : "साथी एमरसन, तुम जेल की कोठरी के बाहर खड़े क्या कर रहे हो ?" इस प्रश्न मे एक उत्तर भी था और एक जबर्दस्त चुनौती भी । जेल की कोठरी के बाहर खड़े रहकर अन्याय को सहन करने की पीड़ा से अन्याय का प्रतिकार करते हुए जेल की कोठरी के अन्दर रहने की पीड़ा कहीं कम होती है । उक्त सवाद ने मेरे मन को और अधिक झकझोर डाला । बहुत खोजने पर मुझे थोरो का एक निवन्ध पढ़ने को मिला- 'सिविल डिस्ओबीडिएन्स' ~ सविनय अवज्ञा । इस निबन्ध ने मुझे एक नयी रोशनी दी । थोरो ने लिखा था कि दुनिया का कोई भी कानून व्यक्ति की आत्म-चेतना से ऊपर नहीं है। यदि किसी कानून के कारण आत्मचेतना पर आघात होता है, तो उस कानून को चुनौती देना या उस कानून को अस्वीकार कर देना व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है । गाधी को इसी विचार से प्रेरणा मिली और उन्होने अंग्रेजों द्वारा लादे हुए नमक कानून को अस्वीकार किया । मार्टिन लूथर किंग को भी थोरो से प्रेरणा मिली और उन्होने रंगभेद कानून को अस्वीकार किया । बर्ट्रेण्ड रसेल को भी थोरो से प्रेरणा मिली और उन्होने आणविक अस्त्रों के खिलाफ प्रदर्शन करने की पावन्दी तोडकर जेल जाना पसन्द किया । हम अपनी शाति-यात्रा के दौरान में जब अमेरिका का पर्यटन कर रहे थे, तो हमारे मन मे थोरो की कुटिया पर जाकर अपनी श्रद्धाजलि अर्पित करने की कामना अत्यन्त प्रबल थी । अमेरिका के पूर्वी किनारे पर बसे हुए बोस्टन शहर से करीब ४० मील दूर वाल्डेन पोड की वनवीथी में धोरो ने अपने हाथ से एक छोटी-सी कुटिया बनायी थी । विना किसी मजदूर के पूरी कुटिया का उन्होने स्वय निर्माण किया था । स्वावलम्बी और श्रमिक जीवन का आदर्श उन्हें बहुत प्यारा था । पैसे का व्यवहार वे कम-से-कम करना चाहते थे । धन और सत्ता को उन्होने मानव-जीवन की प्राकृतिक सरलता और सादगी के लिए बाधक माना था । जेल से छूटने के बाद उन्होने इसी पहाड़ी पर अपने दोस्तो को ढावत दी । अपने मित्रों के बीच अनुपम स्वतन्त्रता का अनुभव करते हुए कहा : "स्टेट वाज नो ह्वेयर टु वी सीन" । "राज्य कही भी तो दिखलायी नही पड़ता !" इस एक ही वाक्य से थोरो के शासन मुक्ति के विचार समझे जा सकते है । जब हम वाल्डेन पोण्ड पहुॅचे, तो सूर्यास्त की वेला थी । लाल क्षितिज की पृष्ठभूमि में वाल्डेन पोण्ड के ऊँचे-ऊँचे पेड खूबसूरत लग रहे थे । बर्फ से सफेद धरती पर काला अन्धेरा बिछता जा रहा था । इस सुहावने जगल के अन्दर सड़क पर हमने अपनी कार छोड दी । हमारे दो अमेरिकन मित्र अॅधेरी पगडण्डी पर आगे-आगे चलते हुए रास्ता बता रहे थे । हम उनके पीछे-पीछे चल रहे थे । फरवरी का ठडा महीना । तेज हवा । कभी-कभी ऐसी तूफानी हवा मुझे बड़ी अच्छी लगती । ओवरकोट, फरोवाली गरम टोपी और हाथ के दस्तानो के कारण यह कडकड़ाती सर्दी हम पर ज्यादा असर नही कर सकती थी । दो-तीन घाटियाँ पार करके हम अपने लक्ष्य-स्थल पर पहुॅचे । इस समय कुटिया पर कुछ नही है । टूटा खंडहर मात्र है। सरकार ने एक शिलालेख गाड़ रखा है, जिससे पता चलता है कि यहाँ थोरो रहते थे। यह स्थान सर्वथा उपेक्षित है । फिर भी चारों ओर का प्राकृतिक वातावरण अत्यन्त सुरम्य है । यदि इस स्थान की ओर थोडा भी ध्यान दिया जाय, तो पर्यटकों के लिए यह एक उत्तम आकर्षण केन्द्र बन सकता है । एक-एक पत्थर और एक-एक लकड़ी चुन-चुनकर थोरो ने जब इस कुटी का निर्माण किया होगा, तो उनके मस्तिष्क में कितना ऊँचा आदर्श रहा होगा। सादगी के जीवन का आदर्श ! थोरो का यह छोटा-सा समार कितना लुभावना रहा होगा ! वे प्रकृति की गोद मे रहते थे । प्रकृति के पुजारी थे । प्रकृति का प्यार उन्हें यहाॅ खीच लाया था । हमने थोरो को अपनी श्रद्धाजलि अर्पित की । कितना पावन था यह तीर्थ । काली चमड़ी, पिस्तौल का निशाना गोरी चमड़ी का अभिमान भी कैसा भयकर अभिमान है। मै सुना करता था कि दक्षिण अफ्रीका और अमरिका के गोरी चमड़ीवाले लोग अपने-आपको काली चमडीवालो से ऊँचा समझते है और काली चमडी से घृणा करते हैं । लेकिन उस समय मैं ऐसा समझता था कि पहले भले ऐसा रहा होगा, पर अब धीरे-धीरे मिट गया होगा। लेकिन अमेरिका की यात्रा के दौरान मे मैं जब दक्षिणी राज्यों में गया, तब वहाँ के नीग्रो लोगो की हालत देखकर मैं चकित रह गया । इस बीसवी शताब्दी मे भी केवल काली चमडी के कारण ऐसा व्यवहार होगा, यह कल्पना से बाहर की बात है। काली चमडीवाले नीग्रो दूसरी श्रेणी के नागरिक माने जाते हैं । काली चमड़ी का होना एक भयकर अभिशाप है । केवल इतना ही नही कि काली चमडीवाला नीग्रो हन्गी गोरी चमडीवालों के होटलो, सिनेमाओं आदि सार्वजनिक स्थानो मे नही जा सकता, बल्कि यह भी है कि गोरी चमडी की उत्कृष्टता के दावेदार नीग्रो लोगो को भयकर रूप से सताते हैं । उन्हे वक्त-वक्त मारते-पीटते है । उनके घर जला डालते हैं । जोर्जिया अल्यामा, मिसीसिपी आदि दक्षिणी राज्यों में नीग्रो- समाज की जो दुरवस्था है तथा उन पर जो अन्याय होता है, उस पर विश्वास करना भी कठिन है। विशयो का क्रन्दन सुनकर कान बहरे हो जाते हैं। ये लोग गन्दी बस्तियों में रहते है । फटे-पुराने कपडे पहनते हैं । गरीबी का जीवन बिताते है । उन्हें सरकारी दफ्तरों मे या निजी व्यापार संस्थानों में आसानी से काम नही मिलता । बेकारी की समस्या उनके जीवन की प्रमुख समस्या है ।
उन्होने यह कर चुकाने से इसलिए इनकार किया था कि सरकार मेक्सिकोयुद्ध के खर्च मे सरकारी पैसे का उपयोग कर रही थी । थोरो से मिलने के लिए कवि एमरसन जेल की कोठरी पर पहुॅचे और विनोद मे बोले : "कहो हेनरी, जेल की कोठरी के अन्दर बैठे क्या कर रहे हो ?" हेनरी ने कहा : "साथी एमरसन, तुम जेल की कोठरी के बाहर खड़े क्या कर रहे हो ?" इस प्रश्न मे एक उत्तर भी था और एक जबर्दस्त चुनौती भी । जेल की कोठरी के बाहर खड़े रहकर अन्याय को सहन करने की पीड़ा से अन्याय का प्रतिकार करते हुए जेल की कोठरी के अन्दर रहने की पीड़ा कहीं कम होती है । उक्त सवाद ने मेरे मन को और अधिक झकझोर डाला । बहुत खोजने पर मुझे थोरो का एक निवन्ध पढ़ने को मिला- 'सिविल डिस्ओबीडिएन्स' ~ सविनय अवज्ञा । इस निबन्ध ने मुझे एक नयी रोशनी दी । थोरो ने लिखा था कि दुनिया का कोई भी कानून व्यक्ति की आत्म-चेतना से ऊपर नहीं है। यदि किसी कानून के कारण आत्मचेतना पर आघात होता है, तो उस कानून को चुनौती देना या उस कानून को अस्वीकार कर देना व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है । गाधी को इसी विचार से प्रेरणा मिली और उन्होने अंग्रेजों द्वारा लादे हुए नमक कानून को अस्वीकार किया । मार्टिन लूथर किंग को भी थोरो से प्रेरणा मिली और उन्होने रंगभेद कानून को अस्वीकार किया । बर्ट्रेण्ड रसेल को भी थोरो से प्रेरणा मिली और उन्होने आणविक अस्त्रों के खिलाफ प्रदर्शन करने की पावन्दी तोडकर जेल जाना पसन्द किया । हम अपनी शाति-यात्रा के दौरान में जब अमेरिका का पर्यटन कर रहे थे, तो हमारे मन मे थोरो की कुटिया पर जाकर अपनी श्रद्धाजलि अर्पित करने की कामना अत्यन्त प्रबल थी । अमेरिका के पूर्वी किनारे पर बसे हुए बोस्टन शहर से करीब चालीस मील दूर वाल्डेन पोड की वनवीथी में धोरो ने अपने हाथ से एक छोटी-सी कुटिया बनायी थी । विना किसी मजदूर के पूरी कुटिया का उन्होने स्वय निर्माण किया था । स्वावलम्बी और श्रमिक जीवन का आदर्श उन्हें बहुत प्यारा था । पैसे का व्यवहार वे कम-से-कम करना चाहते थे । धन और सत्ता को उन्होने मानव-जीवन की प्राकृतिक सरलता और सादगी के लिए बाधक माना था । जेल से छूटने के बाद उन्होने इसी पहाड़ी पर अपने दोस्तो को ढावत दी । अपने मित्रों के बीच अनुपम स्वतन्त्रता का अनुभव करते हुए कहा : "स्टेट वाज नो ह्वेयर टु वी सीन" । "राज्य कही भी तो दिखलायी नही पड़ता !" इस एक ही वाक्य से थोरो के शासन मुक्ति के विचार समझे जा सकते है । जब हम वाल्डेन पोण्ड पहुॅचे, तो सूर्यास्त की वेला थी । लाल क्षितिज की पृष्ठभूमि में वाल्डेन पोण्ड के ऊँचे-ऊँचे पेड खूबसूरत लग रहे थे । बर्फ से सफेद धरती पर काला अन्धेरा बिछता जा रहा था । इस सुहावने जगल के अन्दर सड़क पर हमने अपनी कार छोड दी । हमारे दो अमेरिकन मित्र अॅधेरी पगडण्डी पर आगे-आगे चलते हुए रास्ता बता रहे थे । हम उनके पीछे-पीछे चल रहे थे । फरवरी का ठडा महीना । तेज हवा । कभी-कभी ऐसी तूफानी हवा मुझे बड़ी अच्छी लगती । ओवरकोट, फरोवाली गरम टोपी और हाथ के दस्तानो के कारण यह कडकड़ाती सर्दी हम पर ज्यादा असर नही कर सकती थी । दो-तीन घाटियाँ पार करके हम अपने लक्ष्य-स्थल पर पहुॅचे । इस समय कुटिया पर कुछ नही है । टूटा खंडहर मात्र है। सरकार ने एक शिलालेख गाड़ रखा है, जिससे पता चलता है कि यहाँ थोरो रहते थे। यह स्थान सर्वथा उपेक्षित है । फिर भी चारों ओर का प्राकृतिक वातावरण अत्यन्त सुरम्य है । यदि इस स्थान की ओर थोडा भी ध्यान दिया जाय, तो पर्यटकों के लिए यह एक उत्तम आकर्षण केन्द्र बन सकता है । एक-एक पत्थर और एक-एक लकड़ी चुन-चुनकर थोरो ने जब इस कुटी का निर्माण किया होगा, तो उनके मस्तिष्क में कितना ऊँचा आदर्श रहा होगा। सादगी के जीवन का आदर्श ! थोरो का यह छोटा-सा समार कितना लुभावना रहा होगा ! वे प्रकृति की गोद मे रहते थे । प्रकृति के पुजारी थे । प्रकृति का प्यार उन्हें यहाॅ खीच लाया था । हमने थोरो को अपनी श्रद्धाजलि अर्पित की । कितना पावन था यह तीर्थ । काली चमड़ी, पिस्तौल का निशाना गोरी चमड़ी का अभिमान भी कैसा भयकर अभिमान है। मै सुना करता था कि दक्षिण अफ्रीका और अमरिका के गोरी चमड़ीवाले लोग अपने-आपको काली चमडीवालो से ऊँचा समझते है और काली चमडी से घृणा करते हैं । लेकिन उस समय मैं ऐसा समझता था कि पहले भले ऐसा रहा होगा, पर अब धीरे-धीरे मिट गया होगा। लेकिन अमेरिका की यात्रा के दौरान मे मैं जब दक्षिणी राज्यों में गया, तब वहाँ के नीग्रो लोगो की हालत देखकर मैं चकित रह गया । इस बीसवी शताब्दी मे भी केवल काली चमडी के कारण ऐसा व्यवहार होगा, यह कल्पना से बाहर की बात है। काली चमडीवाले नीग्रो दूसरी श्रेणी के नागरिक माने जाते हैं । काली चमड़ी का होना एक भयकर अभिशाप है । केवल इतना ही नही कि काली चमडीवाला नीग्रो हन्गी गोरी चमडीवालों के होटलो, सिनेमाओं आदि सार्वजनिक स्थानो मे नही जा सकता, बल्कि यह भी है कि गोरी चमडी की उत्कृष्टता के दावेदार नीग्रो लोगो को भयकर रूप से सताते हैं । उन्हे वक्त-वक्त मारते-पीटते है । उनके घर जला डालते हैं । जोर्जिया अल्यामा, मिसीसिपी आदि दक्षिणी राज्यों में नीग्रो- समाज की जो दुरवस्था है तथा उन पर जो अन्याय होता है, उस पर विश्वास करना भी कठिन है। विशयो का क्रन्दन सुनकर कान बहरे हो जाते हैं। ये लोग गन्दी बस्तियों में रहते है । फटे-पुराने कपडे पहनते हैं । गरीबी का जीवन बिताते है । उन्हें सरकारी दफ्तरों मे या निजी व्यापार संस्थानों में आसानी से काम नही मिलता । बेकारी की समस्या उनके जीवन की प्रमुख समस्या है ।
नई दिल्लीः स्वतंत्र राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को भारत के लिए एक "ऑल्टरनेटिव विजन" प्रदान करने के उद्देश्य से 'इंसाफ' नाम के एक नागरिक मंच की घोषणा की. सिब्बल ने स्पष्ट किया कि 'इंसाफ' एक मंच होगा न कि एक राजनीतिक दल, और नागरिकों, गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं से समर्थन की अपील की. पूर्व कांग्रेस नेता ने अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 11 मार्च को जंतर-मंतर पर एक जनसभा में प्लेटफॉर्म का विजन और उद्देश्य बताया जाएगा. सिब्बल ने वकीलों से देश भर में हो रहे अन्याय को ठीक करने के लिए इस समूह में सबसे आगे रहने की अपील की. 'इंसाफ' के पीछे के विचार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एक "राष्ट्रीय स्तर का मंच" होगा जिसमें वकील सबसे आगे होंगे. "जहां भी अन्याय होगा, आम लोग, सिविल सोसायटी और वकील इसके खिलाफ लड़ने के लिए एक साथ आएंगे. मैंने सोचा कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की शाखाएं हर जगह हैं और वे इन शाखाओं का उपयोग अपनी विचारधारा का प्रचार के लिए करते हैं. इस विचारधारा के कारण बहुत अन्याय होता है. हम चाहते हैं कि इंसाफ के सिपाही (न्याय के सिपाही) इस देश के हर मोहल्ले, ब्लॉक, गांव और शहर में खड़े हों और इस अन्याय से लड़ें. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस संदर्भ में, सिब्बल ने संविधान की दसवीं अनुसूची की भी बात की, इसे "दलबदलुओं का स्वर्ग" कहा. दसवीं अनुसूची दल-बदल के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की अयोग्यता वाले प्रावधानों से संबंधित है. इसके बाद उन्होंने आर्थिक अन्याय के बारे में बात करते हुए कहा कि "देश के सौ सबसे अमीर लोगों के पास संयुक्त रूप से 54 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है". केंद्रीय एजेंसियों द्वारा विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के संदर्भ में, उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को केंद्र सरकार के "वेलेंटाइन" के रूप में भी संदर्भित किया. उन्होंने कहा, 'आज स्थिति ऐसी है कि यह सरकार बनाम जनता है. हम जनता के लिए सरकार चाहते हैं. जब तक देश की जनता इस अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए नहीं उठती, तब तक हम बहुत कठिन समय में हैं. यह लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने और उन्हें हमारे इंसाफ के सिपाही बनने के लिए कहने का समय है. ॉसिब्बल ने बताया कि आंदोलन में शामिल होने के इच्छुक लोगों को सक्षम करने के लिए एक वेबसाइट बनाई गई है और एक राष्ट्रीय टेलीफोन हेल्पलाइन स्थापित की जा रही है. (अनुवाद एवं संपादनः शिव पाण्डेय) (इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
नई दिल्लीः स्वतंत्र राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को भारत के लिए एक "ऑल्टरनेटिव विजन" प्रदान करने के उद्देश्य से 'इंसाफ' नाम के एक नागरिक मंच की घोषणा की. सिब्बल ने स्पष्ट किया कि 'इंसाफ' एक मंच होगा न कि एक राजनीतिक दल, और नागरिकों, गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं से समर्थन की अपील की. पूर्व कांग्रेस नेता ने अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ग्यारह मार्च को जंतर-मंतर पर एक जनसभा में प्लेटफॉर्म का विजन और उद्देश्य बताया जाएगा. सिब्बल ने वकीलों से देश भर में हो रहे अन्याय को ठीक करने के लिए इस समूह में सबसे आगे रहने की अपील की. 'इंसाफ' के पीछे के विचार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एक "राष्ट्रीय स्तर का मंच" होगा जिसमें वकील सबसे आगे होंगे. "जहां भी अन्याय होगा, आम लोग, सिविल सोसायटी और वकील इसके खिलाफ लड़ने के लिए एक साथ आएंगे. मैंने सोचा कि आरएसएस की शाखाएं हर जगह हैं और वे इन शाखाओं का उपयोग अपनी विचारधारा का प्रचार के लिए करते हैं. इस विचारधारा के कारण बहुत अन्याय होता है. हम चाहते हैं कि इंसाफ के सिपाही इस देश के हर मोहल्ले, ब्लॉक, गांव और शहर में खड़े हों और इस अन्याय से लड़ें. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस संदर्भ में, सिब्बल ने संविधान की दसवीं अनुसूची की भी बात की, इसे "दलबदलुओं का स्वर्ग" कहा. दसवीं अनुसूची दल-बदल के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की अयोग्यता वाले प्रावधानों से संबंधित है. इसके बाद उन्होंने आर्थिक अन्याय के बारे में बात करते हुए कहा कि "देश के सौ सबसे अमीर लोगों के पास संयुक्त रूप से चौवन लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है". केंद्रीय एजेंसियों द्वारा विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के संदर्भ में, उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय को केंद्र सरकार के "वेलेंटाइन" के रूप में भी संदर्भित किया. उन्होंने कहा, 'आज स्थिति ऐसी है कि यह सरकार बनाम जनता है. हम जनता के लिए सरकार चाहते हैं. जब तक देश की जनता इस अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए नहीं उठती, तब तक हम बहुत कठिन समय में हैं. यह लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने और उन्हें हमारे इंसाफ के सिपाही बनने के लिए कहने का समय है. ॉसिब्बल ने बताया कि आंदोलन में शामिल होने के इच्छुक लोगों को सक्षम करने के लिए एक वेबसाइट बनाई गई है और एक राष्ट्रीय टेलीफोन हेल्पलाइन स्थापित की जा रही है.
बिहार भारतीय जनता पार्टी विधानमंडल दल के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मिट्टी-मॉल घोटाले की कड़ी को आगे बढ़ाते हुये आज नया खुलासा किया और कहा कि शराब कारखाना लगवाने में मदद देने के एवज में राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार को राजधानी पटना में करोड़ो रुपये मूल्य की जमीन मिली है। श्री मोदी ने पटना में जनता दरबार के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री यादव की पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल (2000-05) के दौरान उद्योगपति ओमप्रकाश कात्याल एवं अमित कात्याल की कंपनी आइसबर्ग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड से पटना जिले के बिहटा में शराब कारखाना लगवाने में मदद देने के एवज में राजद अध्यक्ष के परिवार को पटना शहर में करोड़ो रुपये मूल्य की जमीन प्राप्त हुई है। भाजपा नेता ने राजद अध्यक्ष पर जमीन के बदले काम में मदद करने का आरोप लगाते हुये कहा कि 28 सितंबर 2006 को ए. के. इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी गठित हुई, जिसमें अमित कात्याल और उनके भाई राजेश कात्याल एवं अन्य निदेशक थे। जून 2014 में श्री यादव के दोनों पुत्रों तेजप्रताप यादव (पर्यावरण एवं वन मंत्री), तेजस्वी प्रसाद यादव (उप मुख्यमंत्री) तथा दो पुत्रियां चंदा यादव और रागिनी लालू को निदेशक बनाया गया।
बिहार भारतीय जनता पार्टी विधानमंडल दल के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मिट्टी-मॉल घोटाले की कड़ी को आगे बढ़ाते हुये आज नया खुलासा किया और कहा कि शराब कारखाना लगवाने में मदद देने के एवज में राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार को राजधानी पटना में करोड़ो रुपये मूल्य की जमीन मिली है। श्री मोदी ने पटना में जनता दरबार के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री यादव की पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल के दौरान उद्योगपति ओमप्रकाश कात्याल एवं अमित कात्याल की कंपनी आइसबर्ग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड से पटना जिले के बिहटा में शराब कारखाना लगवाने में मदद देने के एवज में राजद अध्यक्ष के परिवार को पटना शहर में करोड़ो रुपये मूल्य की जमीन प्राप्त हुई है। भाजपा नेता ने राजद अध्यक्ष पर जमीन के बदले काम में मदद करने का आरोप लगाते हुये कहा कि अट्ठाईस सितंबर दो हज़ार छः को ए. के. इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी गठित हुई, जिसमें अमित कात्याल और उनके भाई राजेश कात्याल एवं अन्य निदेशक थे। जून दो हज़ार चौदह में श्री यादव के दोनों पुत्रों तेजप्रताप यादव , तेजस्वी प्रसाद यादव तथा दो पुत्रियां चंदा यादव और रागिनी लालू को निदेशक बनाया गया।
ऑस्ट्रेलियन पेस बैटरी के अगुआ मिशेल स्टार्क के बारे में जब पूछा गया तो विराट ने उनकी भी खूब तारीफ की। भारतीय कप्तान ने कहा, 'वह एक शानदार बोलर है। मैंने उसे आईपीएल में और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खेला था। लेकिन तब से अब तक उसकी बोलिंग में काफी बदलाव आया है। उसने कड़ी मेहनत की है और वह एक वर्ल्ड क्लास बोलर है। ' बता दें कि स्टार्क और कोहली दोनों ही अपने आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं। क्रिकेट प्रेमी भी इन दो बड़े खिलाड़ियों का आमना-सामना होने को लेकर रोमांचित हैं। स्टार्क कोहली की कप्तानी वाली आईपीएल टीम बेंगलुरु में भी खेलते हैं। हालांकि, इस साल स्टार्क ने आईपीएल में नहीं खेलने का फैसला किया है।
ऑस्ट्रेलियन पेस बैटरी के अगुआ मिशेल स्टार्क के बारे में जब पूछा गया तो विराट ने उनकी भी खूब तारीफ की। भारतीय कप्तान ने कहा, 'वह एक शानदार बोलर है। मैंने उसे आईपीएल में और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खेला था। लेकिन तब से अब तक उसकी बोलिंग में काफी बदलाव आया है। उसने कड़ी मेहनत की है और वह एक वर्ल्ड क्लास बोलर है। ' बता दें कि स्टार्क और कोहली दोनों ही अपने आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं। क्रिकेट प्रेमी भी इन दो बड़े खिलाड़ियों का आमना-सामना होने को लेकर रोमांचित हैं। स्टार्क कोहली की कप्तानी वाली आईपीएल टीम बेंगलुरु में भी खेलते हैं। हालांकि, इस साल स्टार्क ने आईपीएल में नहीं खेलने का फैसला किया है।
Indian American Healthcare Workers Capitol: अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के स्वास्थ्यकर्मियों ने अमेरिकी संसद कैपिटल के बाहर प्रदर्शन किया है। इन भारतीय पेशेवरों ने बाइडेन प्रशासन से ग्रीन कार्ड जारी करने की मांग की है। वॉशिंगटन जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय का सब्र जवाब दे गया। अमेरिका में वैध स्थायी निवास के लिए प्रति देश कोटा को खत्म करने की मांग को लेकर भारतीय मूल के अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों ने कैपिटल (संसद भवन) में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। ग्रीन कार्ड को आधिकारिक रूप से स्थायी निवास कार्ड कहा जाता है। यह दस्तावेज अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को जारी किया जाता है जो इस बात का सबूत है कि कार्ड धारक को देश में स्थायी रूप से रहने का अधिकार है। भारतीय-अमेरिकी चिकित्सकों ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीन कार्ड देने के लंबित मामले निपटने की वर्तमान व्यवस्था से उन्हें ग्रीन कार्ड पाने में 150 से अधिक वर्ष लग जाएंगे। नियम के तहत किसी भी देश के सात प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड देने की अनुमति नहीं है। भारतीय आईटी पेशेवर इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने सांसद जो लोफग्रेन से इस संबंध में एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश करने की अपील की जिससे कि दक्ष पेशेवरों की परेशानी का हल हो। बाल एवं किशोर मनोचिकित्सक डॉ. नमिता धीमान ने कहा, 'ग्रीन कार्ड के लिए लंबे इंतजार से अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों एवं उनके परिवारों पर असर पड़ा है। वे दहशत और डर में जी रहे हैं। ' उन्होंने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति को यूएससीआईएस (यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) की इजाजत देकर अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पिछले कई साल से नहीं भरी गयी ग्रीन कार्ड की सूची को पूरा करना चाहिए। ' उन्होंने कहा कि कोविड-19 से और अधिक बुरा प्रभाव पड़ा है।
Indian American Healthcare Workers Capitol: अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के स्वास्थ्यकर्मियों ने अमेरिकी संसद कैपिटल के बाहर प्रदर्शन किया है। इन भारतीय पेशेवरों ने बाइडेन प्रशासन से ग्रीन कार्ड जारी करने की मांग की है। वॉशिंगटन जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय का सब्र जवाब दे गया। अमेरिका में वैध स्थायी निवास के लिए प्रति देश कोटा को खत्म करने की मांग को लेकर भारतीय मूल के अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों ने कैपिटल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। ग्रीन कार्ड को आधिकारिक रूप से स्थायी निवास कार्ड कहा जाता है। यह दस्तावेज अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को जारी किया जाता है जो इस बात का सबूत है कि कार्ड धारक को देश में स्थायी रूप से रहने का अधिकार है। भारतीय-अमेरिकी चिकित्सकों ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीन कार्ड देने के लंबित मामले निपटने की वर्तमान व्यवस्था से उन्हें ग्रीन कार्ड पाने में एक सौ पचास से अधिक वर्ष लग जाएंगे। नियम के तहत किसी भी देश के सात प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड देने की अनुमति नहीं है। भारतीय आईटी पेशेवर इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने सांसद जो लोफग्रेन से इस संबंध में एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश करने की अपील की जिससे कि दक्ष पेशेवरों की परेशानी का हल हो। बाल एवं किशोर मनोचिकित्सक डॉ. नमिता धीमान ने कहा, 'ग्रीन कार्ड के लिए लंबे इंतजार से अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों एवं उनके परिवारों पर असर पड़ा है। वे दहशत और डर में जी रहे हैं। ' उन्होंने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति को यूएससीआईएस की इजाजत देकर अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पिछले कई साल से नहीं भरी गयी ग्रीन कार्ड की सूची को पूरा करना चाहिए। ' उन्होंने कहा कि कोविड-उन्नीस से और अधिक बुरा प्रभाव पड़ा है।
देवघरः जिले में साइबर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है। साइबर अपराधी आए दिन लोगों को अपना ठगी का शिकार बनाने का काम कर रहे हैं। लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए साइबर अपराधियों द्वारा तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं। साइबर अपराधी लोगों के साथ ठगी करने के लिए अलग-अलग तरीके ईजाद कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को भी अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा एक व्यक्ति से रुपयों की ठगी करने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर पीड़ित नगर थाना क्षेत्र के पुरनदाहा निवासी आनंद राज ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध साइबर थाना में शिकायत देकर कार्रवाई करने की मांग की है। दिए गए शिकायत में जिक्र किया गया है कि उनके पास कुछ पुराने सिक्के मौजूद हैं। उन सिक्कों को बेचने के लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया। गूगल पर सर्च करने के दौरान उसके संपर्क में एक व्यक्ति आया। अज्ञात आरोपी ने उनसे सिक्के की फोटो भेजने की बात कही व एक व्हाट्सएप नंबर दिया। जिसपर सिक्के की फोटो भेजने की बात कही। उसके बाद उन्होंने आरोपी द्वारा दिए गए नंबर पर सिक्के की फोटो भेज दी। सिक्के की फोटो भेजने के बाद आरोपी ने उक्त सिक्कों को खरीदने की बात कही। आरोपी ने उन्हें उन सिक्कों की कीमत 2 लाख रुपए देने की बात कही। जिसके बाद दोनों के बीच सौदा तय हो गया। उसके बाद आरोपी ने उनसे सिक्का बेचने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराने को कहा। आरोपी द्वारा रजिस्ट्रेशन चार्ज के नाम पर उनसे 1,250 रुपए की मांग की।
देवघरः जिले में साइबर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है। साइबर अपराधी आए दिन लोगों को अपना ठगी का शिकार बनाने का काम कर रहे हैं। लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए साइबर अपराधियों द्वारा तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं। साइबर अपराधी लोगों के साथ ठगी करने के लिए अलग-अलग तरीके ईजाद कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को भी अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा एक व्यक्ति से रुपयों की ठगी करने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर पीड़ित नगर थाना क्षेत्र के पुरनदाहा निवासी आनंद राज ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध साइबर थाना में शिकायत देकर कार्रवाई करने की मांग की है। दिए गए शिकायत में जिक्र किया गया है कि उनके पास कुछ पुराने सिक्के मौजूद हैं। उन सिक्कों को बेचने के लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया। गूगल पर सर्च करने के दौरान उसके संपर्क में एक व्यक्ति आया। अज्ञात आरोपी ने उनसे सिक्के की फोटो भेजने की बात कही व एक व्हाट्सएप नंबर दिया। जिसपर सिक्के की फोटो भेजने की बात कही। उसके बाद उन्होंने आरोपी द्वारा दिए गए नंबर पर सिक्के की फोटो भेज दी। सिक्के की फोटो भेजने के बाद आरोपी ने उक्त सिक्कों को खरीदने की बात कही। आरोपी ने उन्हें उन सिक्कों की कीमत दो लाख रुपए देने की बात कही। जिसके बाद दोनों के बीच सौदा तय हो गया। उसके बाद आरोपी ने उनसे सिक्का बेचने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराने को कहा। आरोपी द्वारा रजिस्ट्रेशन चार्ज के नाम पर उनसे एक,दो सौ पचास रुपयापए की मांग की।
पुरञ्जन है, अतः इसी को शुक्र कह दिया गया है। यह वेदतत्व आत्मक्षर की सर्वप्रधाना एवं सर्व प्रथम प्राणकला का विकार है, दूसरे शब्दों में वेदतत्त्र की उपादानभूमि आत्मक्षर है, एवं 'वाचारम्भणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेसेव सयम के अनुसार कार्यरूप वेद कारणरूप आत्मक्षर से अभिन्न है। ऐसी स्थिति में शुक्ररूप वेद को आत्मक्षर कहा जासकता है। आत्मक्षर प्रकृति का मर्त्यभाग है, अमृतभाग है। अक्षर और आत्मक्षर दोनों एक ही अमृतमृत्युमूर्ति प्रजापति के दो अवयत्र हैं, दोनों मिलकर एक वस्तु है । ऐसी दशा में यदि विकारक्षररूप वेदाभिन्न आत्मक्षर शुक्र है तो आत्मक्षराभिन्न अक्षर भी अवश्य ही शुक्र है । साथ ही में बिना अव्ययालम्बन के अक्षर क्षर भी बीजावस्था में परिणत नहीं होसकते, अतः अक्षर-क्षरवत् स्वयं अव्यय भी शुक्रकोटि में निविष्ट होजाता है। तभी तो - "वही अमृत है, वही ब्रह्म है, वही शुक्र है" यह कहने का साहस किया जाता है । यही अक्षर बनता है, वही क्षर बनता है, वही वेदरूप में परिणत होता है। अक्षरतत्व अव्यय के विद्याभाग का विकास है, क्षरतत्व उसी के कर्मभाग का विकास है । वही अपने विद्या-कर्म भाग से वेदरूप से प्रकट होता है । वेद का यत् - (गतितत्व) भाव उसके कर्मभाग का विकास है, जू - ( स्थितितत्व ) भाव उसी के विद्याभाग का विकास है । कहीं विद्यारूप (अक्षररूप ) से, कहीं कर्मरूप (क्षररूप) से, कहीं उभयरून (वेदरूप) से वही सर्वत्र व्याप्त होरहा है। उससे शून्य कुछ नहीं है, सबकुछ वही है, सब कुछ उसी में है । उपर्युक्त कथन से यह कहने में कोई आपत्ति नहीं की जासकती कि यजुर्ब्रह्मावच्छिन्न षोडषी पुरुष ही शुक्र है । विश्वसृट् - पञ्चजन - पुरञ्जन आदि बहिरङ्ग अव्यक्त प्रकृति षोडषी के बिना नहीं रह सकती। अव्ययावच्छिन्न अक्षर क्षर ही तो यजुरूप में परिणत होकर बहिरङ्गप्रकृतिरूप में परिणत होते हैं। इस परमार्थदृष्टि से विचार करने पर - "सृष्टिसाक्षी अव्यययुक्त, अतएव सृष्ट्युन्मुख बीजावस्थापन्न अक्षरक्षर शुक्र है" "एजत् अनेजत् तत्व शुक्र है" इन दोनों वाक्यों में कोई विरोधी नहीं रहता। यही अक्षरावच्छिन्न यजुरूप शुक्र मातरिश्वा द्वारा होने वाले आप के आधान से विश्वरूप में परिणत होता है । विश्वावस्थापन वही शऋतत्व "अश्वत्य"
पुरञ्जन है, अतः इसी को शुक्र कह दिया गया है। यह वेदतत्व आत्मक्षर की सर्वप्रधाना एवं सर्व प्रथम प्राणकला का विकार है, दूसरे शब्दों में वेदतत्त्र की उपादानभूमि आत्मक्षर है, एवं 'वाचारम्भणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेसेव सयम के अनुसार कार्यरूप वेद कारणरूप आत्मक्षर से अभिन्न है। ऐसी स्थिति में शुक्ररूप वेद को आत्मक्षर कहा जासकता है। आत्मक्षर प्रकृति का मर्त्यभाग है, अमृतभाग है। अक्षर और आत्मक्षर दोनों एक ही अमृतमृत्युमूर्ति प्रजापति के दो अवयत्र हैं, दोनों मिलकर एक वस्तु है । ऐसी दशा में यदि विकारक्षररूप वेदाभिन्न आत्मक्षर शुक्र है तो आत्मक्षराभिन्न अक्षर भी अवश्य ही शुक्र है । साथ ही में बिना अव्ययालम्बन के अक्षर क्षर भी बीजावस्था में परिणत नहीं होसकते, अतः अक्षर-क्षरवत् स्वयं अव्यय भी शुक्रकोटि में निविष्ट होजाता है। तभी तो - "वही अमृत है, वही ब्रह्म है, वही शुक्र है" यह कहने का साहस किया जाता है । यही अक्षर बनता है, वही क्षर बनता है, वही वेदरूप में परिणत होता है। अक्षरतत्व अव्यय के विद्याभाग का विकास है, क्षरतत्व उसी के कर्मभाग का विकास है । वही अपने विद्या-कर्म भाग से वेदरूप से प्रकट होता है । वेद का यत् - भाव उसके कर्मभाग का विकास है, जू - भाव उसी के विद्याभाग का विकास है । कहीं विद्यारूप से, कहीं कर्मरूप से, कहीं उभयरून से वही सर्वत्र व्याप्त होरहा है। उससे शून्य कुछ नहीं है, सबकुछ वही है, सब कुछ उसी में है । उपर्युक्त कथन से यह कहने में कोई आपत्ति नहीं की जासकती कि यजुर्ब्रह्मावच्छिन्न षोडषी पुरुष ही शुक्र है । विश्वसृट् - पञ्चजन - पुरञ्जन आदि बहिरङ्ग अव्यक्त प्रकृति षोडषी के बिना नहीं रह सकती। अव्ययावच्छिन्न अक्षर क्षर ही तो यजुरूप में परिणत होकर बहिरङ्गप्रकृतिरूप में परिणत होते हैं। इस परमार्थदृष्टि से विचार करने पर - "सृष्टिसाक्षी अव्यययुक्त, अतएव सृष्ट्युन्मुख बीजावस्थापन्न अक्षरक्षर शुक्र है" "एजत् अनेजत् तत्व शुक्र है" इन दोनों वाक्यों में कोई विरोधी नहीं रहता। यही अक्षरावच्छिन्न यजुरूप शुक्र मातरिश्वा द्वारा होने वाले आप के आधान से विश्वरूप में परिणत होता है । विश्वावस्थापन वही शऋतत्व "अश्वत्य"
नियम भी प्रत्येक समाज मे पाये जाते हे। कही किसी दिये हुए क्षेत्र की सीमाओ के अन्दर ही विवाह करने का नियम है और कही उसे क्षेत्र से बाहर विवाह करने का नियम है। उपरोक्त तत्त्वो की विविधता के कारण परिवार के भी विविध रूप है। चूँकि सभी संस्कृतियो मे जीवन साथी के चुनाव वश गणना और विवाह सम्बन्ध के रूपो मे साम्य नही है अत परिवार के रूप भी एक सस्कृति में दूसरी सस्कृति से भिन्न होते है। परिवार की परिवर्तनशीलता को ही लक्ष्य कर आगबर्न और निमकाफ ने परिवार के ढॉचे के स्थिर न होने की बात कही है। परिवार की परिभाषा (De finition of Family) पारिवारिक सगठनो के बदलते हुए रूपों के कारण परिवार की सार्वभौम परिभाषा करना कठिन है। यहाँ तक कि एक ही समाज में कई पारिवारिक स्थितियाँ मिलती है - जैसे (1) विवाह सूत्र मे बधे केवल स्त्री पुरुष, (2) स्त्री-पुरुष और उनके बच्चे (3) अपने बच्चो सहित विधवा स्त्री और (4) बच्चो सहित विधुर पुरुष । उपरोक्त चार रूप ( Individual family) मे ही मिलते है। इण्डिवीजुअवल फैमिली को हम ऐसे परिवार के रूप में परिभाषित नहीं कर सकते है जिसमे स्त्री-पुरुष और उनके बच्चो का ही समावेश हो । वैयक्तिक परिवार की परिभाषा ऐसी होनी चाहिए जिसमे कम से कम उपरोक्त चारो रूपो का समावेश हो । आगबर्न और निमकाफ ने वर्तमान परिवार ( माडर्न फैमिली ) अथवा Individual Family की परिभाषा देने मे उपरोक्त तत्त्वो को ध्यान मे रखा है। इसलिये यहाॅ पर उनकी परिभाषा का उल्लेख करना अधिक लाभप्रद होगा"When we think of a family, we picture it as a more or less durable association of husband and wife with or without children, or of a man or woman alone, with children भैकाइवर और पेज परिवार के बनने में विवाह का अभूतपूर्व योग मानते है इसलिये वे परिवार को परिभाषित करने मे यौन सम्बन्धो और उनसे जनित सन्तान के पालन-पोषण को ध्यान में रखते हैं। आपके मत से परिवार एक ऐसे समूह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो यौन सम्बन्धो द्वारा परिभाषित हो और इतना छोटा तथा स्थायी हो कि उसमें जन्म लेने वाले बच्चो की देखभाल सुगमता से हो सकें। इन विद्वानो की परिभाषा पर गौर से विचार करने पर यह प्रतीत होता है कि ये मानव शिशु के दीर्घ शैशवकाल से सुपरिचित
नियम भी प्रत्येक समाज मे पाये जाते हे। कही किसी दिये हुए क्षेत्र की सीमाओ के अन्दर ही विवाह करने का नियम है और कही उसे क्षेत्र से बाहर विवाह करने का नियम है। उपरोक्त तत्त्वो की विविधता के कारण परिवार के भी विविध रूप है। चूँकि सभी संस्कृतियो मे जीवन साथी के चुनाव वश गणना और विवाह सम्बन्ध के रूपो मे साम्य नही है अत परिवार के रूप भी एक सस्कृति में दूसरी सस्कृति से भिन्न होते है। परिवार की परिवर्तनशीलता को ही लक्ष्य कर आगबर्न और निमकाफ ने परिवार के ढॉचे के स्थिर न होने की बात कही है। परिवार की परिभाषा पारिवारिक सगठनो के बदलते हुए रूपों के कारण परिवार की सार्वभौम परिभाषा करना कठिन है। यहाँ तक कि एक ही समाज में कई पारिवारिक स्थितियाँ मिलती है - जैसे विवाह सूत्र मे बधे केवल स्त्री पुरुष, स्त्री-पुरुष और उनके बच्चे अपने बच्चो सहित विधवा स्त्री और बच्चो सहित विधुर पुरुष । उपरोक्त चार रूप मे ही मिलते है। इण्डिवीजुअवल फैमिली को हम ऐसे परिवार के रूप में परिभाषित नहीं कर सकते है जिसमे स्त्री-पुरुष और उनके बच्चो का ही समावेश हो । वैयक्तिक परिवार की परिभाषा ऐसी होनी चाहिए जिसमे कम से कम उपरोक्त चारो रूपो का समावेश हो । आगबर्न और निमकाफ ने वर्तमान परिवार अथवा Individual Family की परिभाषा देने मे उपरोक्त तत्त्वो को ध्यान मे रखा है। इसलिये यहाॅ पर उनकी परिभाषा का उल्लेख करना अधिक लाभप्रद होगा"When we think of a family, we picture it as a more or less durable association of husband and wife with or without children, or of a man or woman alone, with children भैकाइवर और पेज परिवार के बनने में विवाह का अभूतपूर्व योग मानते है इसलिये वे परिवार को परिभाषित करने मे यौन सम्बन्धो और उनसे जनित सन्तान के पालन-पोषण को ध्यान में रखते हैं। आपके मत से परिवार एक ऐसे समूह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो यौन सम्बन्धो द्वारा परिभाषित हो और इतना छोटा तथा स्थायी हो कि उसमें जन्म लेने वाले बच्चो की देखभाल सुगमता से हो सकें। इन विद्वानो की परिभाषा पर गौर से विचार करने पर यह प्रतीत होता है कि ये मानव शिशु के दीर्घ शैशवकाल से सुपरिचित
रूस की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयरोफ्लॉट ने कहा कि तकनीकी कारणों से विमान को एयरपोर्ट पर वापस लाना पड़ा था. फिलहाल इस हादसे के बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी है. रूस की राजधानी मॉस्को स्थित शेरेमेट्येवो हवाईअड्डे पर आपातकालीन लेंडिंग कर रहे एक रूसी विमान में आग लग गई, जिसके कारण प्लेन में मौजूद 41 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. विमान सुखोई सुपरजेट-100 शेरेमेट्येवो हवाईअड्डे से शाम 6.02 बजे मुर्मास्क के लिए रवाना हुआ था. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस हादसे का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि यात्री कैसे जलते हुए एयरोफ्लॉट विमान से बचकर निकलने के लिए आपातकालीन द्वार से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं. रूस की मीडिया के अनुसार, इस हादसे में मरने वालों में दो बच्चे और एक फ्लाइट अटेंडेंट भी है. इस हादसे पर बात करते हुए एक चश्मदीद ने कहा कि 78 यात्रियों और पांच विमान दल के सदस्यों को ले जा रहे विमान में से किसी का भी बचकर निकलना चमत्कार ही है. वहीं, रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्तसोवा ने एक बयान में कहा कि छह घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है. रूस की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयरोफ्लॉट ने कहा कि तकनीकी कारणों से विमान को एयरपोर्ट पर वापस लाना पड़ा था. फिलहाल इस हादसे के बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी है.
रूस की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयरोफ्लॉट ने कहा कि तकनीकी कारणों से विमान को एयरपोर्ट पर वापस लाना पड़ा था. फिलहाल इस हादसे के बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी है. रूस की राजधानी मॉस्को स्थित शेरेमेट्येवो हवाईअड्डे पर आपातकालीन लेंडिंग कर रहे एक रूसी विमान में आग लग गई, जिसके कारण प्लेन में मौजूद इकतालीस लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. विमान सुखोई सुपरजेट-एक सौ शेरेमेट्येवो हवाईअड्डे से शाम छः.दो बजे मुर्मास्क के लिए रवाना हुआ था. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस हादसे का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि यात्री कैसे जलते हुए एयरोफ्लॉट विमान से बचकर निकलने के लिए आपातकालीन द्वार से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं. रूस की मीडिया के अनुसार, इस हादसे में मरने वालों में दो बच्चे और एक फ्लाइट अटेंडेंट भी है. इस हादसे पर बात करते हुए एक चश्मदीद ने कहा कि अठहत्तर यात्रियों और पांच विमान दल के सदस्यों को ले जा रहे विमान में से किसी का भी बचकर निकलना चमत्कार ही है. वहीं, रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्तसोवा ने एक बयान में कहा कि छह घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है. रूस की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयरोफ्लॉट ने कहा कि तकनीकी कारणों से विमान को एयरपोर्ट पर वापस लाना पड़ा था. फिलहाल इस हादसे के बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी है.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फ़ारुख़ शेख़ (२५ मार्च १९४८ - २७ दिसम्बर २०१३) एक भारतीय अभिनेता, समाज-सेवी और एक टेलीविजन प्रस्तोता थे। उन्हें ७० और ८० के दशक की फ़िल्मों में अभिनय के कारण प्रसिद्धि मिली। वो सामान्यतः एक कला सिनेमा में अपने कार्य के लिए प्रसिद्ध थे जिसे समानांतर सिनेमा भी कहा जाता है। उन्होंने सत्यजित राय और ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में भी काम किया। . मिड-डे भारत में प्रकाशित होने वाला अंग्रेजी भाषा का एक समाचार पत्र (अखबार) है। यह मुंबई में प्रकाशित होता है। . फ़ारुख़ शेख़ और मिड-डे आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। फ़ारुख़ शेख़ 32 संबंध है और मिड-डे 3 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (32 + 3)। यह लेख फ़ारुख़ शेख़ और मिड-डे के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फ़ारुख़ शेख़ एक भारतीय अभिनेता, समाज-सेवी और एक टेलीविजन प्रस्तोता थे। उन्हें सत्तर और अस्सी के दशक की फ़िल्मों में अभिनय के कारण प्रसिद्धि मिली। वो सामान्यतः एक कला सिनेमा में अपने कार्य के लिए प्रसिद्ध थे जिसे समानांतर सिनेमा भी कहा जाता है। उन्होंने सत्यजित राय और ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में भी काम किया। . मिड-डे भारत में प्रकाशित होने वाला अंग्रेजी भाषा का एक समाचार पत्र है। यह मुंबई में प्रकाशित होता है। . फ़ारुख़ शेख़ और मिड-डे आम में शून्य बातें हैं । फ़ारुख़ शेख़ बत्तीस संबंध है और मिड-डे तीन है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख फ़ारुख़ शेख़ और मिड-डे के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
पहला लिफाफा खोलते ही उसमे से पत्र के साथ निकले फोटो को देखकर अनुराग खुशी से उछल पड़ा। "क्या हुआ बेटा?" अनुराग की आवाज सुनकर उसकी मां कमरे में चली आयी। "मिल गई।माँ मिल गई।" "अरे कौन मिल गई?"माँ की समझ मे बेटे की बात नही आई थी। "माँ तेरी वो मिल गई।" "मिल गई।मिल गई ही करता रहेगा या आगे भी कुछ बतायेगा।"माँ नाराज होते हुए बोली। "माँ तेरी बहु मिल गई।" "कहाँ है?कौन है?"माँ ने उत्सुकता से पूछा था।। ",यह देख"।अनुराग ने लिफाफे मे निकला फोटो माँ के हाथ मे पकड़ा दिया। "हां माँ।मुझे यह लड़की पसंद है।"अनुराग बोला था। "फिर देर कुस बात की है।आज ही तू पत्र का जवाब भेज दे।"माँ मन ही मन मे ईश्वर को धन्यवाद देते हुए बोली,"शुक्र है आखिर तुझे कोई लड़की पसंद तो आयी।" माँ ने सही कहा था।वह पिछले कई वर्षों से अनुराग पर शादी कर लेने का दबाव डाल रही थी।जब अनुराग कॉलेज में पढ़ रहा था।तभी उसकी मां चाहती थी कि उसका बेटा शादी कर ले।लेकिन अनुराग ने अपनी मां से साफ शब्दों में कह दिया था,"माँ जब तक पढ़ाई पूरी करके मैं अपने पैरों पर खड़ा नही हो जाता।तब तक मैं शादी हरगिज नही करूँगा।" और समय गुज़रा।अनुराग की पढ़ाई पूरी हो गई।और उसकी नौकरी भी लग गई।उसकी नौकरी लगते ही माँ की शादी की रट फिर से चालू हो गई।माँ आये दिन किसी ने किसी लड़की का जिक्र अपने बेटे से करने लगी। अनुराग चाहे जिस लड़की के पल्लू से बंध जाने के लिए तैयार नही था।वह शादी करना चाहता था।लेकिन अपनी मन पसंद लड़की से।मा ने ढेरो फोटो उसे दिखाए थे।लेकिन उसे कोई भी उन मे से पसंद नही आई।तब माँ कहने लगी।न जाने कैसी लडक़ी वह चाहता है।और जैसी लड़की वह चाहता था।वैसी इत्तफाक से उसे एक दिन मिल ही गई थी। अनुराग ने उस लडक़ी को पहली बार देखा तब चिल्ला जाड़ा पड़ रहा था।सर्दियों के मौसम में दिन छोटे जबकि रात लम्बी होती है।दिन देर से निकलता है।पर शाम जल्दी ढल जाती है।इन दिनों में रात होते ही कोहरा छाने लगता है।जो सुबह सूरज निकलने के बाद ही पिघलना शुरू होता है । ऐसे मौसम में भी अनुराग घूमने के लिए जरूर जाता।स्कूल के दिनों में सुबह घूमने की आदत लगी थी।जो अब उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी।इस आदत को वह नही तोड़ता था ।साल के बारह महीने।तीन सौ पेंशट दिन वह घूमने के लिए ज़रूर जाता।वह अपने घर से सिकन्दरा तक घूमने के लिए जाता।कभी दौड़ता।कभी धीरे चलता।वहां जाकर वह कुछ देर के लिए हरी घास पर बैठता।और फिर घर आता। एक दिन वह घर लौट रहा था।रास्ते मे उसकी नज़र एक रिक्शे पर पड़ी।इस रिक्शे मे तीन लड़कियां बैठी थी।बीच मे बैठी लड़की ने उसका ध्यान आकर्षित किया था। वह लड़की गोरे रंग,छरहरे बदन और तीखे नेंन नक्श की सुंदर लडक़ी थी।उस सूंदर बाला की जिस चीज ने उसे सब से ज्यादा आकर्षित किया ।वह थी ।उसकी आंखें।बड़ी बड़ी बोलती आंखे।ऐसा लगता था,उसकी आंखें बुला रही हो।आमंत्रित कर रही हो।निमंत्रण दे रही हो।जादुई आंखों की वजह से पहली बार देखते ही वह लड़की अनुराग को पसंद आ गयी थी।
पहला लिफाफा खोलते ही उसमे से पत्र के साथ निकले फोटो को देखकर अनुराग खुशी से उछल पड़ा। "क्या हुआ बेटा?" अनुराग की आवाज सुनकर उसकी मां कमरे में चली आयी। "मिल गई।माँ मिल गई।" "अरे कौन मिल गई?"माँ की समझ मे बेटे की बात नही आई थी। "माँ तेरी वो मिल गई।" "मिल गई।मिल गई ही करता रहेगा या आगे भी कुछ बतायेगा।"माँ नाराज होते हुए बोली। "माँ तेरी बहु मिल गई।" "कहाँ है?कौन है?"माँ ने उत्सुकता से पूछा था।। ",यह देख"।अनुराग ने लिफाफे मे निकला फोटो माँ के हाथ मे पकड़ा दिया। "हां माँ।मुझे यह लड़की पसंद है।"अनुराग बोला था। "फिर देर कुस बात की है।आज ही तू पत्र का जवाब भेज दे।"माँ मन ही मन मे ईश्वर को धन्यवाद देते हुए बोली,"शुक्र है आखिर तुझे कोई लड़की पसंद तो आयी।" माँ ने सही कहा था।वह पिछले कई वर्षों से अनुराग पर शादी कर लेने का दबाव डाल रही थी।जब अनुराग कॉलेज में पढ़ रहा था।तभी उसकी मां चाहती थी कि उसका बेटा शादी कर ले।लेकिन अनुराग ने अपनी मां से साफ शब्दों में कह दिया था,"माँ जब तक पढ़ाई पूरी करके मैं अपने पैरों पर खड़ा नही हो जाता।तब तक मैं शादी हरगिज नही करूँगा।" और समय गुज़रा।अनुराग की पढ़ाई पूरी हो गई।और उसकी नौकरी भी लग गई।उसकी नौकरी लगते ही माँ की शादी की रट फिर से चालू हो गई।माँ आये दिन किसी ने किसी लड़की का जिक्र अपने बेटे से करने लगी। अनुराग चाहे जिस लड़की के पल्लू से बंध जाने के लिए तैयार नही था।वह शादी करना चाहता था।लेकिन अपनी मन पसंद लड़की से।मा ने ढेरो फोटो उसे दिखाए थे।लेकिन उसे कोई भी उन मे से पसंद नही आई।तब माँ कहने लगी।न जाने कैसी लडक़ी वह चाहता है।और जैसी लड़की वह चाहता था।वैसी इत्तफाक से उसे एक दिन मिल ही गई थी। अनुराग ने उस लडक़ी को पहली बार देखा तब चिल्ला जाड़ा पड़ रहा था।सर्दियों के मौसम में दिन छोटे जबकि रात लम्बी होती है।दिन देर से निकलता है।पर शाम जल्दी ढल जाती है।इन दिनों में रात होते ही कोहरा छाने लगता है।जो सुबह सूरज निकलने के बाद ही पिघलना शुरू होता है । ऐसे मौसम में भी अनुराग घूमने के लिए जरूर जाता।स्कूल के दिनों में सुबह घूमने की आदत लगी थी।जो अब उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी।इस आदत को वह नही तोड़ता था ।साल के बारह महीने।तीन सौ पेंशट दिन वह घूमने के लिए ज़रूर जाता।वह अपने घर से सिकन्दरा तक घूमने के लिए जाता।कभी दौड़ता।कभी धीरे चलता।वहां जाकर वह कुछ देर के लिए हरी घास पर बैठता।और फिर घर आता। एक दिन वह घर लौट रहा था।रास्ते मे उसकी नज़र एक रिक्शे पर पड़ी।इस रिक्शे मे तीन लड़कियां बैठी थी।बीच मे बैठी लड़की ने उसका ध्यान आकर्षित किया था। वह लड़की गोरे रंग,छरहरे बदन और तीखे नेंन नक्श की सुंदर लडक़ी थी।उस सूंदर बाला की जिस चीज ने उसे सब से ज्यादा आकर्षित किया ।वह थी ।उसकी आंखें।बड़ी बड़ी बोलती आंखे।ऐसा लगता था,उसकी आंखें बुला रही हो।आमंत्रित कर रही हो।निमंत्रण दे रही हो।जादुई आंखों की वजह से पहली बार देखते ही वह लड़की अनुराग को पसंद आ गयी थी।
-२- संविधानको 'हिन्दी' प्रादेशिक हिन्दीही है । [ श्री. सुनोतिकुमार चतर्जी भाषा-विज्ञानके आन्तर राष्ट्रीय कीर्तिप्राप्त विद्वान् है। डॉ. सुनीतिकुमारजीके वचनोका आधार लेकर बम्बओ-ममितिने अपना सिद्धान्त स्पष्ट करनेकी कोशिश की है। श्री. चतर्जीका कहना है कि उनके विचारोको समिति ठीक तरह से नहीं समझ सकी । भाषाके दो रूपोका सिद्धान्त भी अन्हें मान्य नहीं है । अन्होने जिसके सम्बन्धमें अंग्रेजीमें बग-राष्ट्र-भाषा-प्रचार समिति के पास जो पन लिखा था असका अनुवाद यहाँ दिया है।] बाजारू हिन्दी क्या है ? बम्बओ-सरकारके द्वारा नियुक्त हिन्दी पाठक्रम समितिको रिपोर्ट मैने पढ़ो । अिस समितिने हिन्दीको प्रकृति अंम् स्वरूपके बारेमे मेरे द्वारा प्रकाशित कुछ पुस्तकोंके मतोंको लेकर मुझे सम्मानित किया है। किन्तु अंसा प्रतीत होता है कि मेरे मतोको समझने में तथा अिस समस्याको विशद रूपसे अधिक लम्बी चर्चा करते हुअंभो समितिके सदस्य कओ स्थानोंपर अपने कथनमें स्पष्ट नहीं हो सके है। अदा हरणार्थ, यद्यपि मैंने "बाजारू हिन्दीके" स्वरूपको बतलाने की चेष्टा को है ( या जिसे मैंने चालू या, "चलतू-हिन्दी" या "लघु हिन्दी" या "बेसिक हिन्दी " कहा है।) और जिसको राष्ट्रभाषा माना है। मुझे यह कहना पड़ता है कि हिन्दो-चपेत्र के बहुसंख्यक लोग असका अस रूप में स्वीकार नहीं करते तथा हिन्दीतर-भाषी लोग ( जब किसी भाषाको अन्हें सोनाही है तो । ) अंसो अव्याकरणीय बाजारू भाषाके बदले व्याकरणशुद्ध हिन्दीकाही अध्ययन करना पसंद करते है । प्रादेशिक हिन्दी और संघभाषा हिन्दी या राष्ट्रभाषा हिन्दोको भिन्न बताते हुअ बॅम्बओ-समितिने असकी भिन्नता पर प्रकाश नहीं डाला है, और वह केवल "शब्द-संग्रह " की ओर ध्यान देती-सी जान पड़ती है। वैसे हम बाजारू हिन्दी (पूर्वी भारतको, बगालसहित ) में अंकवचन या अनेकवचनका फर्क नहीं करते है, तथा कर्मणि प्रयोगका झुपयोग नहीं करते हैं; या भूतकालके वाक्योमें सकर्मक कर्मणिका प्रयोग नहीं करते हैं । जैसे :- हम पहते हूँ कि 'हन राजा देखा', 'मैंने रानो देखो' या रानोको देखा। हम, "मैंने राजा देखा, " मैंने रानी देखो' अंसा प्रयोग नहीं करते हैं। समितिने अिस मूलभूत व्याकरण के फर्केपर या आसानीपर कोओ विचार प्रकट नहीं किया है। जब व्याकरण भिन्न नहीं, तो भाषा भिन्न कैसे ? प्रचलित परिस्थितिमें, और जबतक सरकार या कोओ अधिकृत संस्था 'राष्ट्रभाषा हिन्दो " का - जिसे मिस समितिने 'प्रादेशिक हिन्दीसे' विभिन्न यहा है, मुसका व्याकरण निश्चित नहीं करती तबतक मेरी दृष्टिसे दोनों हिन्दी भाषाओं व्यवहारमें भेकहो है । क्योकि समान ध्याकरण, समान शब्द, पारिभाषिक शब्दा
-दो- संविधानको 'हिन्दी' प्रादेशिक हिन्दीही है । [ श्री. सुनोतिकुमार चतर्जी भाषा-विज्ञानके आन्तर राष्ट्रीय कीर्तिप्राप्त विद्वान् है। डॉ. सुनीतिकुमारजीके वचनोका आधार लेकर बम्बओ-ममितिने अपना सिद्धान्त स्पष्ट करनेकी कोशिश की है। श्री. चतर्जीका कहना है कि उनके विचारोको समिति ठीक तरह से नहीं समझ सकी । भाषाके दो रूपोका सिद्धान्त भी अन्हें मान्य नहीं है । अन्होने जिसके सम्बन्धमें अंग्रेजीमें बग-राष्ट्र-भाषा-प्रचार समिति के पास जो पन लिखा था असका अनुवाद यहाँ दिया है।] बाजारू हिन्दी क्या है ? बम्बओ-सरकारके द्वारा नियुक्त हिन्दी पाठक्रम समितिको रिपोर्ट मैने पढ़ो । अिस समितिने हिन्दीको प्रकृति अंम् स्वरूपके बारेमे मेरे द्वारा प्रकाशित कुछ पुस्तकोंके मतोंको लेकर मुझे सम्मानित किया है। किन्तु अंसा प्रतीत होता है कि मेरे मतोको समझने में तथा अिस समस्याको विशद रूपसे अधिक लम्बी चर्चा करते हुअंभो समितिके सदस्य कओ स्थानोंपर अपने कथनमें स्पष्ट नहीं हो सके है। अदा हरणार्थ, यद्यपि मैंने "बाजारू हिन्दीके" स्वरूपको बतलाने की चेष्टा को है और जिसको राष्ट्रभाषा माना है। मुझे यह कहना पड़ता है कि हिन्दो-चपेत्र के बहुसंख्यक लोग असका अस रूप में स्वीकार नहीं करते तथा हिन्दीतर-भाषी लोग अंसो अव्याकरणीय बाजारू भाषाके बदले व्याकरणशुद्ध हिन्दीकाही अध्ययन करना पसंद करते है । प्रादेशिक हिन्दी और संघभाषा हिन्दी या राष्ट्रभाषा हिन्दोको भिन्न बताते हुअ बॅम्बओ-समितिने असकी भिन्नता पर प्रकाश नहीं डाला है, और वह केवल "शब्द-संग्रह " की ओर ध्यान देती-सी जान पड़ती है। वैसे हम बाजारू हिन्दी में अंकवचन या अनेकवचनका फर्क नहीं करते है, तथा कर्मणि प्रयोगका झुपयोग नहीं करते हैं; या भूतकालके वाक्योमें सकर्मक कर्मणिका प्रयोग नहीं करते हैं । जैसे :- हम पहते हूँ कि 'हन राजा देखा', 'मैंने रानो देखो' या रानोको देखा। हम, "मैंने राजा देखा, " मैंने रानी देखो' अंसा प्रयोग नहीं करते हैं। समितिने अिस मूलभूत व्याकरण के फर्केपर या आसानीपर कोओ विचार प्रकट नहीं किया है। जब व्याकरण भिन्न नहीं, तो भाषा भिन्न कैसे ? प्रचलित परिस्थितिमें, और जबतक सरकार या कोओ अधिकृत संस्था 'राष्ट्रभाषा हिन्दो " का - जिसे मिस समितिने 'प्रादेशिक हिन्दीसे' विभिन्न यहा है, मुसका व्याकरण निश्चित नहीं करती तबतक मेरी दृष्टिसे दोनों हिन्दी भाषाओं व्यवहारमें भेकहो है । क्योकि समान ध्याकरण, समान शब्द, पारिभाषिक शब्दा
Murder in Hajipur: बिहार के वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र में अज्ञात अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक की पहचान बाग दुल्हन निवासी युसूफ कौशल उर्फ हनी राज के रूप में की गई है. हाजीपुरः Murder in Hajipur: बिहार के वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र में अज्ञात अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक की पहचान बाग दुल्हन निवासी युसूफ कौशल उर्फ हनी राज के रूप में की गई है. मृतक हाजीपुर में सोना लूटकांड का आरोपी था और कुछ ही महीने पहले जेल से बाहर आया था. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि युसूफ रविवार की रात हाजीपुर नगर थाना के आरएन कॉलेज के पास सड़क पर खड़ा था, तभी बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी. युवक को इलाज के लिए निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. इस घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है. पुलिस के मुताबिक मृतक यूसुफ पर वैशाली नगर थाना में वर्ष 2019 में मुथुट फाइनेन्स, हाजीपुर सोना लूट की घटना में शामिल होने का आरोप था. इससे संबंधित एक मामले में वह जेल जा चुका था. कुछ माह पहले ही जेल से बाहर आया था. इस घटना में करीब 50 करोड़ रुपए सोने की लूट हुई थी. पुलिस उपाधीक्षक ओम प्रकाश ने बताया कि मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की पहचान की जा रही है. पुलिस इस घटना को अपराधिक गिरोह के संघर्ष से भी जोड़ कर देख रही है. यह भी पढ़ें- Best Budget Smartphone: 5 हजार रुपये से कम में खरीदना चाहते है स्मार्टफोन, इन 6 फोनों ने बाजार में मचाई तबाही!
Murder in Hajipur: बिहार के वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र में अज्ञात अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक की पहचान बाग दुल्हन निवासी युसूफ कौशल उर्फ हनी राज के रूप में की गई है. हाजीपुरः Murder in Hajipur: बिहार के वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र में अज्ञात अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक की पहचान बाग दुल्हन निवासी युसूफ कौशल उर्फ हनी राज के रूप में की गई है. मृतक हाजीपुर में सोना लूटकांड का आरोपी था और कुछ ही महीने पहले जेल से बाहर आया था. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि युसूफ रविवार की रात हाजीपुर नगर थाना के आरएन कॉलेज के पास सड़क पर खड़ा था, तभी बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी. युवक को इलाज के लिए निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. इस घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है. पुलिस के मुताबिक मृतक यूसुफ पर वैशाली नगर थाना में वर्ष दो हज़ार उन्नीस में मुथुट फाइनेन्स, हाजीपुर सोना लूट की घटना में शामिल होने का आरोप था. इससे संबंधित एक मामले में वह जेल जा चुका था. कुछ माह पहले ही जेल से बाहर आया था. इस घटना में करीब पचास करोड़ रुपए सोने की लूट हुई थी. पुलिस उपाधीक्षक ओम प्रकाश ने बताया कि मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की पहचान की जा रही है. पुलिस इस घटना को अपराधिक गिरोह के संघर्ष से भी जोड़ कर देख रही है. यह भी पढ़ें- Best Budget Smartphone: पाँच हजार रुपये से कम में खरीदना चाहते है स्मार्टफोन, इन छः फोनों ने बाजार में मचाई तबाही!
Ghaziabad News: गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी सोसाइटी में बाइक खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में खूनी खेल में बदल गया। इस विवाद में एक व्यक्ति ने अपने पड़ोसी पर चाकू से हमला बोल दिया और पेट में चाकू से ताबड़तोड़ कई वार कर हत्या कर दी। इस दौरान पति को बचाने आई मृतक की पत्नी पर भी आरोपी ईंट-पत्थर बरसाने लगा। ईंट लगने से महिला भी बुरी तरह से घायल हो गई, हालांकि महिला ने वहां से भाग कर किसी तरह अपनी जान बचाई और इसकी जानकारी पुलिस को दी। वहीं वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया, पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटी हैं। गाजियाबाद पुलिस के अनुसार ये घटनाक्रम इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अभयखंड-चार स्थित एक निजी सोसायटी का है। यहां पर बुधवार रात करीब 11 बजे अपार्टमेंट में रहने वाले केके पांडे और पड़ोसी परमिंदर कुमार के बीच बाइक को खड़ी करने को लेकर झगड़ा शुरू हुआ। जिसके बाद केके पांडे ने परमिंदर को चाकू मारकर हत्या कर दी। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि, आरोपी केके पांडे के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। वो फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगा दिया गया। इधर, मृतक का शव पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक परमिंदर की पत्नी ने पुलिस को बताया कि, रात को खाना खाने के बाद मेरे पति सोसायटी में नीचे बैठे हुए थे, तभी वहां पर केके पांडे आया और दोनों में बाइक को खड़ी करने को लेकर बहस होने लगी। मेरे पति ने केके पांडे को कुर्सी पर बैठाया और तसल्ली से बात करने के लिए कहा। लेकिन वो लगातार गालियां और धमकी देता रहा। इससे मेरे पति को भी गुस्सा आ गया और हाथ में कुर्सी उठाकर मारने के लिए धमकाया। इस दौरान शोर शराबा सुनकर मैं नीचे आई और पति को पकड़ कर ले जाने लगी। तभी केके पांडे ने मेरे सिर में ईंट मार अपने फ्लैट की तरफ भागने लगा। मेरे सिर में खून निकलता देख पति उसे पकड़ने के लिए पीछे भागे। केके पांडे अपने घर से चाकू जैसी चीज लेकर आया और मेरे पति के पेट में तीन से चार बार वार किया। जब मैं पति को बचाने भागी तो आरोपी ने मुझपर भी हमला कर दिया।
Ghaziabad News: गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी सोसाइटी में बाइक खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में खूनी खेल में बदल गया। इस विवाद में एक व्यक्ति ने अपने पड़ोसी पर चाकू से हमला बोल दिया और पेट में चाकू से ताबड़तोड़ कई वार कर हत्या कर दी। इस दौरान पति को बचाने आई मृतक की पत्नी पर भी आरोपी ईंट-पत्थर बरसाने लगा। ईंट लगने से महिला भी बुरी तरह से घायल हो गई, हालांकि महिला ने वहां से भाग कर किसी तरह अपनी जान बचाई और इसकी जानकारी पुलिस को दी। वहीं वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया, पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटी हैं। गाजियाबाद पुलिस के अनुसार ये घटनाक्रम इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अभयखंड-चार स्थित एक निजी सोसायटी का है। यहां पर बुधवार रात करीब ग्यारह बजे अपार्टमेंट में रहने वाले केके पांडे और पड़ोसी परमिंदर कुमार के बीच बाइक को खड़ी करने को लेकर झगड़ा शुरू हुआ। जिसके बाद केके पांडे ने परमिंदर को चाकू मारकर हत्या कर दी। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि, आरोपी केके पांडे के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। वो फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगा दिया गया। इधर, मृतक का शव पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक परमिंदर की पत्नी ने पुलिस को बताया कि, रात को खाना खाने के बाद मेरे पति सोसायटी में नीचे बैठे हुए थे, तभी वहां पर केके पांडे आया और दोनों में बाइक को खड़ी करने को लेकर बहस होने लगी। मेरे पति ने केके पांडे को कुर्सी पर बैठाया और तसल्ली से बात करने के लिए कहा। लेकिन वो लगातार गालियां और धमकी देता रहा। इससे मेरे पति को भी गुस्सा आ गया और हाथ में कुर्सी उठाकर मारने के लिए धमकाया। इस दौरान शोर शराबा सुनकर मैं नीचे आई और पति को पकड़ कर ले जाने लगी। तभी केके पांडे ने मेरे सिर में ईंट मार अपने फ्लैट की तरफ भागने लगा। मेरे सिर में खून निकलता देख पति उसे पकड़ने के लिए पीछे भागे। केके पांडे अपने घर से चाकू जैसी चीज लेकर आया और मेरे पति के पेट में तीन से चार बार वार किया। जब मैं पति को बचाने भागी तो आरोपी ने मुझपर भी हमला कर दिया।
तोक्योः क्या आपने कभी सोचा है कि कोई मछली किंग कोबरा से भी ज्यादा जहरीली हो सकती है? जी हां, सामान्य तौर पर जापान, चीन, फिलीपींस और मेक्सिको में पाई जाने वाली 'पफरफिश' के जहर का कोई तोड़ नहीं। किंग कोबरा के जहर से इंसान एक बार बच भी जाए, लेकिन पफरफिश के जहर से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यूं तो पफरफिश देखने में काफी सुंदर होती है, लेकिन इस मछली के अंदर साइनाइड से भी खतरनाक जहर होता है। पफरफिश को 'ब्लोफिश' के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि लगभग सारी पफरफिश में टेट्रोडॉटोक्सिन नाम का खतरनाक जहर होता है। यह जहर सायनाइड से भी 1,200 गुना ज्यादा खतरनाक होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक छोटी सी पफरफिश में भी इतना जहर होता है जिससे 30 वयस्क मनुष्यों की जान चली जाए। और हां, आज तक इसके जहर की काट नहीं खोजी जा सकी है। . . . लेकिन इंसान इसे खाते भी हैंपफरफिश के साथ एक और खास बात जुड़ी है। कहा जाता है कि इस जहरीली मछली को सिर्फ 2 ही प्राणी खा सकते हैं, एक तो शार्क, और दूसरा है इंसान। जी हां, जापान में पाई जाने वाली फुगु नाम की पफरफिश का मांस बेहद स्वादिष्ट समझा जाता है। लेकिन इसे बनाने के लिए लाइसेंसधारी शेफ की जरूरत पड़ती है, क्योंकि इसको बनाने में जरा सी गलती हुई नहीं कि ग्राहक अपनी जान से हाथ धो बैठेगा। और हर साल इस मछली को खाने से जानें जाती भी हैं। पूरी दुनिया में पफरफिश की 120 प्रजातियां हैं। पफरफिश की लंबाई 1 इंच से लेकर 2 फीट तक हो सकती है। ये मछलियां आमतौर पर फंफूंद खाती हैं, लेकिन कई मछलियां मरे हुए जीवों का मांस भी खाती हैं। समझा जाता है कि मरे हुए जीवों का मांस खाने से जो बैक्टिरिया इन मछलियों के अंदर आते हैं वे इसके जहर का स्त्रोत हैं।
तोक्योः क्या आपने कभी सोचा है कि कोई मछली किंग कोबरा से भी ज्यादा जहरीली हो सकती है? जी हां, सामान्य तौर पर जापान, चीन, फिलीपींस और मेक्सिको में पाई जाने वाली 'पफरफिश' के जहर का कोई तोड़ नहीं। किंग कोबरा के जहर से इंसान एक बार बच भी जाए, लेकिन पफरफिश के जहर से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यूं तो पफरफिश देखने में काफी सुंदर होती है, लेकिन इस मछली के अंदर साइनाइड से भी खतरनाक जहर होता है। पफरफिश को 'ब्लोफिश' के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि लगभग सारी पफरफिश में टेट्रोडॉटोक्सिन नाम का खतरनाक जहर होता है। यह जहर सायनाइड से भी एक,दो सौ गुना ज्यादा खतरनाक होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक छोटी सी पफरफिश में भी इतना जहर होता है जिससे तीस वयस्क मनुष्यों की जान चली जाए। और हां, आज तक इसके जहर की काट नहीं खोजी जा सकी है। . . . लेकिन इंसान इसे खाते भी हैंपफरफिश के साथ एक और खास बात जुड़ी है। कहा जाता है कि इस जहरीली मछली को सिर्फ दो ही प्राणी खा सकते हैं, एक तो शार्क, और दूसरा है इंसान। जी हां, जापान में पाई जाने वाली फुगु नाम की पफरफिश का मांस बेहद स्वादिष्ट समझा जाता है। लेकिन इसे बनाने के लिए लाइसेंसधारी शेफ की जरूरत पड़ती है, क्योंकि इसको बनाने में जरा सी गलती हुई नहीं कि ग्राहक अपनी जान से हाथ धो बैठेगा। और हर साल इस मछली को खाने से जानें जाती भी हैं। पूरी दुनिया में पफरफिश की एक सौ बीस प्रजातियां हैं। पफरफिश की लंबाई एक इंच से लेकर दो फीट तक हो सकती है। ये मछलियां आमतौर पर फंफूंद खाती हैं, लेकिन कई मछलियां मरे हुए जीवों का मांस भी खाती हैं। समझा जाता है कि मरे हुए जीवों का मांस खाने से जो बैक्टिरिया इन मछलियों के अंदर आते हैं वे इसके जहर का स्त्रोत हैं।
Domestic Workers Strike Pune History: 16 जून 2011 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के "कन्वेंशन 189" पारित हुआ था और उसी आधार पर इस दिन को अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. लेकिन इस अधिवेशन के 11 साल गुजर जाने के बाद भी भारत में राष्ट्रीय स्तर पर घरेलू कामगारों को लेकर कोई कानून नहीं बना है. आज भी घरेलू कामगार सम्मानजनक कार्य स्थिति एवं ट्रेड-यूनियन अधिकार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे है. इस अवसर पर आज हम महाराष्ट्र के पुणे शहर की घरेलू कामगार बहनों की कहानी आपके साथ साँझा करना चाहते है, जिन्होंने 1980 में न सिर्फ अपने अधिकारों को लेकर हड़ताल की, बल्कि संगठित संघर्ष के जरिये उन्होंने वहां, कई जगह, घरेलु कामगारों के लिए सवेतनिक छुट्टी, वेतन मे वृद्धि, बोनस और ग्रेजुटी के अधिकारों को भी हासिल किया. 1980 में पुणे शहर (महाराष्ट्र) में घरेलू कामगारों की एक हड़ताल हुई। इसमें शमिल होने वालों में अधिकांश महिलाएं थीं। बीमार होने की स्थिति में सवेतनिक छुट्टी, और वेतन मे वृद्धि की मांग के साथ यह आन्दोलन शुरू हुआ और यहीं से "पुणे शहर मोलकर्णी (घरेलू कामगार) संगठन" का गठन हुआ। इसके बाद नियोक्ताओं के साथ लंबी बातचीत हुई जिसके परिणामस्वरूप शहर में इस संघ की महत्वपूर्ण जीत हुई और व्यक्तिकेन्द्रित कार्यसंबंधों को पेशेवर, संविदात्मक कार्यसंबंधों में बदल दिया गया। यह शायद देश में पहली बार हुआ था, जब घरेलू कामगारों ने हड़ताल कर दी थी और एक शहर-व्यापी संगठन बनाया था। सन 1980, फरवरी महीने का एक दिन। खंडारेबाई नाम की एक घरेलू कामगार,, जो पुणे शहर की करवे रोड पर एक घर में काम करती थी, अचानक बीमार पड़ गई और छुट्टी पर चली गई। जब वह काम पर वापस आई, तो उसे पता चला कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। जब उसने इस बारे में पूछताछ की तो उसे मालकिन ने बताया कि उसने चार दिन की छुट्टी बोलकर वो छह दिन तक काम पर नहीं आई थी। इसलिए उन्होंने उसकी जगह किसी अन्य घरेलू कामगार को काम पर रख लिया। खंडारेबाई ने इस बारे में अन्य घरेलू कामगारों, जैसे पद्माताई सुतार और सुभद्राताई कंडारे से बातचीत की। तीनों ने फैसला लिया कि वें इस बारें में इलाके की सभी घरेलू कामगारों से चर्चा करेंगे। खंडारेबाई के साथ हुए बर्ताव को देखकर अन्य घरेलू कामगारों को काफी गुस्सा आया, क्योंकि उनका अनुभव भी खंडारेबाई जैसा ही रहा था। मजदूरों के समूह ने सबसे पहले उस महिला को घेरा, जिसने खंडारेबाई की जगह ली थी और सभी ने उसे काफी खरी-खोटी सुनाई। वे उसे दुसरों के दुखों का फ़ायदा उठाने वाली के रूप में देख रहे थे। इस समूह की एकमात्र जीवित महिला "कंदारे" घटना को याद करते हुए बताती हैंः पड़ोस में एक मोलकर्णी [खंडारेबाई] काम करती थी। अगले घर की एक और मोलकर्णी ने उसका काम ले लिया। फिर हमने उससे पूछा, "तुमने उसका काम क्यों ले लिया?" उसने बड़ी रुखाई से जवाब देते हुए कहा कि, "इससे तुम्हें क्या दिक्कत है?" उसके इस वर्ताव पर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उससे कहा कि वह अभद्र भाषा का प्रयोग न करे। मैंने कहा, "तुमने उसका काम लिया, अब उसे उसका काम वापस दे दो और वह घर छोड़ दो।" पर उसने कहा कि वह घर नहीं छोड़ेगी और वहीं काम करती रहेगी। फिर हम उससे लड़े। मैंने उसे एक हाथ से पकड़ा और काफी मारा। उसके बाद हम बाहर आए और वाड़ा के गेट पर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। वहां एक व्यक्ति ने कहा कि घटना घर के अंदर हुई और इसलिए कोई शिकायत दर्ज नहीं की जायगी। इसके बाद हम सभी परिसर से बाहर आ गए। एक तरफ कई अन्य मोलकर्णियां खड़ी थीं, उन्होंने हमसे पूछा, "क्या हुआ?" हमने उन्हें बताया कि एक दूसरी मोलकर्णी ने हमारी सहेली का काम ले लिया है और हमारा उससे झगड़ा हुआ। तभी हमने विरोध में एक जुलूस निकालने का फैसला लिया, और हमारे साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल हो गए। फिर हम चर्चा करने लगे कि आगे क्या करना है? हम सभी फिर वहां गए जहां खंडारेबाई काम करती थी। घर की मालकिन से हमने खंडारेबाई को नौकरी वापस देने की अपील की। लेकिन जब हमारी अपील को नही सुना गया, तो हम सब वहां से बाहर निकल आए और रास्ते में मिलने वाली सभी घरेलू कामगारों को घटना के बारे में बताया। यह भी बताया कि हम सब हड़ताल पर हैं। देखते ही देखते एक घंटे के भीतर करवे रोड की तक़रीबन 150 महिलाओं ने अचानक काम बंद कर दिया। यह काम से बर्खास्तगी के खिलाफ एक स्वतःस्फूर्त हड़ताल थी। पुणे शहर में घरेलू कामगारों की हड़ताल और संगठन के बारे में बताने वाली यह महिला - कंदारे अब तक़रीबन 60 साल की हो गई है और अभी भी घरेलू कामगार के रुप में काम करती हैं। कंदारे जी पुणे शहर मोलकर्णी संगठन के सबसे पुराने स्थायी सदस्यों में से एक है। इस संगठन को इसी हड़ताल के परिणामस्वरूप बनाया गया था। इस बीच, खंडारेबाई का निधन हो गया। पहली नजर में ऐसा लगता है कि बर्खास्तगी की एक ही घटना के जवाब में महिलाएं हड़ताल पर चली गईं थी। लेकिन अगर इसको ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि घरेलू कामगारों का यह क्षेत्र लम्बे समय से उपेक्षित रहा है। किरण मोगे, जो अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ (एडवा) से संबंधित एक नारीवादी कार्यकर्त्ता एवं पुणे के घरेलू कामगारों के अधिकारों को लेकर मुखर रही हैं, उन्होंने हड़ताल के सामाजिक और आर्थिक संदर्भ पर चर्चा करते हुए बताया हैं किः "मुझे लगता है कि इस "स्वतःस्फूर्त हड़ताल" को उस समय के आर्थिक संकट के सन्दर्भों में देखा जाना चाहिए । वे (घरेलू कामगार) खुद को बहुत शोषित महसूस कर रहीं थीं, और हालांकि उन्होंने इस मुद्दे को सीधे कम वेतन से नहीं जोड़ा, लेकिन उन्हें लगने लगा था कि उनकी मजदूरी उनके अपने जीवन को चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है ... उसी से यह चेतना पैदा हुआ।" बढ़ती महंगाई के बावजूद वर्षों से मजदूरी में खास वृद्धि नहीं हुई थी और श्रमिकों को सवेतनिक छुट्टी का कोई अधिकार नहीं था। मजदूरों ने महसूस किया कि उनके साथ बहुत अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। इसके बावजूद कि इन महिलाओं को राजनीतिक संगठन का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, उन्होंने खुद की ताकत को पहचाना और हड़ताल करने का फैसला किया। उस समय पुणे के औद्योगिक कर्मचारियों ने भी ऐसी हड़ताल कई बार की हुई थी, उनको देखते हुए इन महिलाओं को पता था कि हड़ताल के परिणामस्वरूप वेतन में वृद्धि हो सकती है। लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि आंदोलन कैसे करना है या हड़ताल के तौर पर आगे कैसे बढ़ना है? इसे कब तक जारी रखना होगा, एवं इसके क्या परिणाम होंगे ? वे जानती थीं कि न केवल कारखाने के कर्मचारी बल्कि डॉक्टर, नर्स, अधिकारी और अन्य भी अपनी मांगों को मनवाने के लिए हड़ताल करते हैं, जुलूस निकलतें हैं. जब उनका जुलूस लक्ष्यहीन रूप से आगे बढ़ रहा था, तब वे महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ अन्य हिस्सों में सक्रिय लाल निशान पार्टी से जुड़े एक यूनियन कार्यकर्ता भालचंद्र केरकर से मिलीं। कंदारे के शब्दों में, "हम चलते रहे और फिर हम केरकर से मिले। उन्होंने हमको रोका और पूछा कि क्या हुआ? हमने उन्हें घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हम चिंता न करें और काम पर वापस न जाएं। फिर हमारा ग्रुप प्रभात रोड, और फिर कर्वे रोड गया, और फिर हमने एक बैठक की। कुछ समय बाद भोसलेताई और उनके दोस्त भी हमारे साथ हो गए। इसके बाद, हमने हर दिन अपना विरोध और जुलूस शुरू किया ... इस तरह यह सब शुरू हुआ।" पुणे शहर मोलकर्णी संगठन और श्रमिक महिला मोर्चा की वर्तमान महासचिव एवं वकील मेधा थत्ते ने याद करते हुए बताया - कैसे हड़ताली घरेलू कामगारों को एक संगठन की आवश्यकता महसूस हुई। "पहली हड़ताल के बाद हमने इसपर चर्चा की और महसूस किया कि ऐसे तो यह आंदोलन नहीं चलेगा, हमें पहले कुछ ठोस मांगें रखनी पड़ेगी। हड़ताल इसलिए हुई क्योंकि खंडारेबाई को काम से निकाल दिया गया था, मजदूरी बहुत कम थीः यह सब आंदोलन के लिए पर्याप्त कारण है। लेकिन सवाल यह था कि नियोक्ताओं तक कैसे पहुंचा जाए? हमने महसूस किया कि हमें यह तय करने के लिए नियमित रूप से मिलना चाहिए और चर्चा करनी चाहिए कि हम क्या चाहतें है, हमारी मांगें क्या हैं? और हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं? बात यह भी थी कि अगर हम नियमित रूप से मिलते हैं, तो इसका मतलब हैं कि हम एक संगठन के रुप में हैं। जब हमने खुद से पूछा कि क्या हमें खुद को संगठित करना चाहिए, तो हम सभी लोग सहमत हो गए। लाल निशान पार्टी की भागीदारी के साथ, स्थानीय निर्वाचित प्रशासक के घर पर हर शाम सैकड़ों घरेलू कामगारों की बैठकें आयोजित होती थीं। मजदूर बहनों ने शारीरिक श्रम के तनाव, अपर्याप्त मजदूरी, काम से निकाले जाने, अवैतनिक मजदूरी के कष्ट, जीवन यापन की बढ़ती लागत से उत्पन्न होने वाली परेशानी और घरेलू कठिनाइया आदि के बारें में अपने अनुभवों को साझा करना शुरू कर दिया। ऐसी ही एक कहानी एक घरेलू कामगार की थी जो लगभग पच्चीस वर्षों से एक वकील के परिवार में काम कर रही थी। वकील एक छात्र से एक विवाहित व्यक्ति, फिर एक पिता और अंत में दादा बन गया। लेकिन इस पूरी अवधि में घरेलू कामगार महिला का वेतन 10 रुपये से 12 रुपये प्रति माह ही रहा। इन बैठकों में भाग लेने वाले कई महिलाएं बहुत बूढी थीं और लम्बें समय से दूसरों के घरों में काम कर रही थी और उनके पास जीवन में और कोई विकल्प नहीं था और वे बहुत कम वेतन के बावजूद अपनी नौकरी पर लम्बे समय से बनीं ही थीं। कईयों ने बासी भोजन दिए जाने की बात बताई, मानों मकान मालिक ऐहसान कर रहा हैं। साथ ही नियमित रूप से मिलने वाले अपमान के बारें में भी बात होतीं थीं। कई घरेलू कामगार महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसी -किसी घर में काम करते वक्त अगर एक भी शीशे का ग्लास टूट जाता है तो उन्हें बहुत बुरे तरीके से डांटा और प्रताड़ित किया जाता था। मजदूरों को छुट्टी कर लेनें पर उस दिन के लिए भुगतान नहीं मिलता था। यानी कोई बीमारी की हालत में या किसी इमरजेंसी की हालत में काम पर नहीं जा पाए तो उस दिन की तनख्वाह महीने में काट के दी जाती थी। बहुत सी महिलाये जो घरेलु कामगार के रूप में काम करती थी, या तो विधवा थी या फिर ऐसी महिलाये थी जिनके पति उन्हें अपने हाल पर छोड़ गए थे। कुछ महिलाये ऐसी भी थी जिनके वेतन से पूरा परिवार चल रहा था और उनके पति भी उनके वेतन पर निर्भर थे। यह महिलाये झोपड़पट्टी में रह रही थी, जहाँ न तो बिजली थी और न ही पानी। इन महिलाओं को अपने घर के भीतर और बाहर, दोनों जगह काम करना पड़ता था। ऐसे में बहुत सी महिलाओ की बेटियां भी उनके साथ काम पर आने लगी। गरीबी की हालत में होने का मतलब यह भी था कि अगर घरेलु कामगार अपनी मांगो के लिए किसी हड़ताल पर जाते भी है, तो वह हड़ताल छोटी और सफल होनी चाहिए, क्यूंकि आस पास के माहौल से यह स्पष्ट था कि उनकी जगह अन्य कामगार रखने में मालिक/ मालकिन को ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा । कुछ इलाके ऐसे भी थे जहाँ महिलाओ ने २० दिन तक जोश में हड़ताल करी, जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं करी गयी। आखिर में इन महिलाओ को काम पर दुबारा बुलाया गया और इनकी नयी और ज़्यादा वेतन की मांग को पूरा किया गया। यह अद्द्भुत था क्यूंकि भारत में मालिक/ मालकिन और कामगार के बीच का रिश्ता इस प्रकार है कि मालिक/ मालकिन झुकने को तैयार नहीं होते। उनकी दृष्टि से देखा जाए तो घरेलु काम ऐसा काम है जो मालिक/ मालकिन खुद नहीं करना चाहते और न ही इस काम को इज़्ज़तदार मानते है। मालिक -मालकिन खुद बाहर काम करने जाते है और उनके बच्चे स्कूल जाते है। इस संघर्ष की पीड़ा और परेशानी के दौरान मजदूरों के गीत भी पैदा हुएं, जो आक्रोश और विद्रोह की भावना से भरे हुए थे। ऐसे ही एक गीत थाः आओ रे हीरा, आओ रे मीरा। जवाब दो हमारे सवालों का, ओ इंदिरा की सरकार। ओ वेणुबाई, क्यों हो तुम इतनी परेशान? आओ हमारे साथ, उठाये मिलकर हम आवाज़! इस संघर्ष और विरोध की खबर पुणे और मुंबई के सकाळ , केसरी और प्रभात जैसे मशहूर अखबारों में भी देखने को मिली । इन खबरों के बारें में बात करते हुए किरण मोगे ने कहा, " घरेलु कामगार समाज का वो हिस्सा है जिन पर आम तौर पर मीडिया का ध्यान नहीं जाता । इसलिए जब महिलाएं सार्वजनीक रूप से हड़ताल पर चली गयी, तो मीडिया में भी एक उत्सुकता पैदा हुईं। अचानक ही वो महिलाये जिनको कभी कामगार माना ही नहीं जाता था, सड़को पर आ गयी और अपने काम, अधिकारों और हक़ की बात करने लगी।" इन् महिलाओ ने खुद को "मोलकर्णी" बोलना शुरू कर दिया। पुणे शहर के अन्य इलाको के घरेलु कामगार - जैसे की मीरा सोसाइटी , नारायण पेठ , सहकारनगर , शिवाजीनगर और गुलटेकडी के कामगार, उन्होंने भी तय किया कि वें भी हड़ताल पर जाएंगी। किसी ने उन्हें हड़ताल करने के लिए नहीं कहा था, करवे रोड पर हुई हड़ताल और संघर्ष के बारे में सुनकर उन्होंने खुद ही यह तय किया था। इस दौरान केवल दो मांगे थी, बीमार पड़ने पर छुट्टी और वेतन में वृद्धि । लेकिन जब पुणे शहर मोलकर्णी संघठन बना तो रोज़ाना चर्चा और विचार विमर्श करने से महिला कामगारों की समझ भी बढ़ती गयी। इस हड़ताल के बाद उनको अंदाजा लग गया कि श्रम क़ानून नहीं होने से उन्हें मालिक के दया पर ही निर्भर होना पड़ेगा। इसलिए उन्होंने मांगों की एक सूची और एक वेतन का ढांचा भी प्रस्तावित किया। वेतन का ढांचा प्रस्तुत करते समय गौर किया गया कि वेतन हर घर से एक समान नहीं मिलता। हर घर की आर्थिक स्थिति, घर में कितने लोग रहते है, काम का बोझ कितना रहता है , इनको भी हिसाब में लिया गया और इन सबके मद्देनजर एक वेतन का ढांचा बनाया गया। संगठन की तरफ से समय-समय पर जो मांगे रखी गयी, वें थी : वेतन में तुरंत वृद्धि, दिवाली का बोनस -जो कि एक महीने के वेतन के बराबर होगा, हर महीने में वेतन का 15 फीसदी भविष्य निधि (प्रोविडेंट फण्ड ) के लियें योगदान देना, सवेतन बीमारी की छुट्टी देना, महीने में दो छुट्टी देना और अगर मालिक-मालकिन शहर से बाहर है तो कामगार का वेतन न काटना। इस प्रस्ताव को पर्ची के रूप में छापा गया और सभी घरों में बांटा गया। मालिकों ने वेतन वृद्धि की मांग को माना, लेकिन उसके बदले ज़्यादा काम की मांग की। लेकिन घरेलु कामगार भी पीछे नहीं हटें, और उन्होंने कहा कि अब अतिरिक्त काम करवाने पर पैसा भी एक्स्ट्रा लगेगा। 1980 की हड़ताल और पुणे शहर मोलकर्णी संगठन की स्थापना के बाद, पुणे में दो और घरेलू कामगार संगठनों की स्थापना की गई। एक अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ द्वारा बनाई गई और इसे पुणे जिला घरमगार संगठन कहा जाता था, जबकि दूसरे को बाबा आढाव ने बनाया जिसे मोलकर्णी पंचायत कहा जाता था। इन वर्षों में तीनों संगठनों ने कई मौकों पर अलग अलग मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम किया है। इस हड़ताल के बाद 1984 से 1996 तक शहर के विभिन्न इलाकों में कई और हड़तालें हुईं, जिनमें से ज्यादातर वेतन वृद्धि के लिए थीं। 1995 के आंदोलन में पुणे के नए हिस्सों जैसे दपड़ी, औंध, पिंपरी, कोथरुड, सालुंके विहार, खड़की, की घरेलु कामगार भी शामिल थी। इन सामूहिक कार्रवाइयों के माध्यम से कई सुधार हासिल किये गए। महिला कामगारों ने अपने वेतन और कार्य-शर्तों पर बातचीत की। सवेतन साप्ताहिक अवकाश का मिलना एक महत्वपूर्ण जीत थी। वेतन संशोधन एक रेट कार्ड के माध्यम से लागू किया गया । इस रेट कार्ड के जरिये बर्तन साफ करने, फर्श पर झाडू लगाने, कपड़े धोने आदि अलग अलग कामों के लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित किया गया । रेट निर्धारित करते समय मालिक परिवार का आकार, सदस्यों का संख्या, घर कितना बड़ा हैं - इत्यादि पहलुओं को भी हिसाब में लिया गया। इन दरों को अब हर चार साल में संशोधित किया जाता है। वार्षिक बोनस, सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी आदि अन्य लाभ भी निर्धारित किए जाते हैं और संगठनों के माध्यम से स्थानीय बैंकों में "भविष्य निधि" एकत्र की जाती है। पुणे में घरेलू कामगार अब प्रति माह दो सवेतन अवकाश लेने के हकदार हैं। नियोक्ताओं से भी अपेक्षा की जाती है कि वे अगर कभी बदली मजदुर को काम पर लगाते हैं तो उन्हें भुगतान भी अलग से करना होगा। चोरी के झूठे आरोप, बर्तन टूटने पर मजदूरी काटना - ये सब चीजें भी कम हो गई है। कामगार संगठनों के कार्यवाही एवं महिला कामगारों की हिस्सेदारी से ही यह सब मुमकिन हुआ हैं। लेकिन इस संघर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि थी - मजदूरों में एकता की भावना विकसित कर पाना । मजदूर बहनों ने महसूस किया कि एक-दूसरे के काम छीनने की कोशिश करना सभी कामगार साथियों के लिए हानिकारक है। अब जब मालिक किसी नयी घरेलु कामगार को काम में लगाता हैं तो वो नयी कामगार पहली वाली कामगार से ज्यादा वेतन की मांग करती है। पिछली कामगार से बातचीत किये बिना कोई कामगार किसी भी घर में काम स्वीकार नहीं करती है। नियोक्ता नए घरेलू कामगारों को नियुक्त करने का प्रयास जारी रखते हैं, लेकिन संगठित घरेलू कामगारों के एकता ने इन कोशिशों को निरस्त किया है। अक्सर राजनीतिक कार्यकर्त्ता ही इन घरेलू कामगार संगठनों का नेतृत्व प्रदान करती हैं। लेकिन फिर भी यह एकदम स्पष्ट है कि घरेलू कामगार बहनों के सक्रिय समर्थन ने ही इन संगठनों को जीवित रखा हुआ हैं । संगठन के स्थानीय नेतृत्वकारी सदस्य स्वयं ही घरेलू कामगार हैं और वें अलग अलग घरों में अपना काम पूरा करने के बाद स्वेच्छा से संगठन में काम करती हैं। अधिकांश शाम उन्हें संगठन के कार्यालयों में देखा जा सकता हैं । ये स्थानीय नेता बैठकें आयोजित करती हैं, सहकर्मियों के साथ मांगों पर चर्चा करती हैं, संगठन के निर्णयों के बारे में अन्य सदस्यों को सूचित करती हैं, सदस्यों की राय पूछती हैं, अन्य इलाकों में बैठकों में भाग लेती हैं। वे व्यक्तिगत मामलों में सदस्यों का मार्गदर्शन भी करती हैं और उनके बीच वाली प्रतिद्वंद्विता को सुलझाती हैं। वे सदस्यों के साथ पुलिस स्टेशन जाती हैं और नियोक्ताओं द्वारा शारीरिक हमले के मामलों की रिपोर्ट करती हैं और अपने संगठन के सदस्यों की ओर से नियोक्ताओं के साथ बातचीत भी करती हैं। स्वयं घरेलू कामगार होने के कारण, उन्हें उन समस्याओं का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है, जो उन्हें संभालने में बहुत प्रभावी साबित होती हैं। यह लेख, लोकेश द्वारा लिखित "मेकिंग द पर्सनल पॉलिटिकलः द फर्स्ट डोमेस्टिक वर्कर्स स्ट्राइक इन पुणे, महाराष्ट्र" शीर्षक निबंध का संक्षिप्त एवं अनुवादित रूप हैं। मूल लेख "टुवर्ड्स ए ग्लोबल हिस्ट्री ऑफ डोमेस्टिक एंड केयर गिविंग वर्कर्स" शीर्षक पुस्तक में प्रकाशित हुई थी।
Domestic Workers Strike Pune History: सोलह जून दो हज़ार ग्यारह को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के "कन्वेंशन एक सौ नवासी" पारित हुआ था और उसी आधार पर इस दिन को अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. लेकिन इस अधिवेशन के ग्यारह साल गुजर जाने के बाद भी भारत में राष्ट्रीय स्तर पर घरेलू कामगारों को लेकर कोई कानून नहीं बना है. आज भी घरेलू कामगार सम्मानजनक कार्य स्थिति एवं ट्रेड-यूनियन अधिकार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे है. इस अवसर पर आज हम महाराष्ट्र के पुणे शहर की घरेलू कामगार बहनों की कहानी आपके साथ साँझा करना चाहते है, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ अस्सी में न सिर्फ अपने अधिकारों को लेकर हड़ताल की, बल्कि संगठित संघर्ष के जरिये उन्होंने वहां, कई जगह, घरेलु कामगारों के लिए सवेतनिक छुट्टी, वेतन मे वृद्धि, बोनस और ग्रेजुटी के अधिकारों को भी हासिल किया. एक हज़ार नौ सौ अस्सी में पुणे शहर में घरेलू कामगारों की एक हड़ताल हुई। इसमें शमिल होने वालों में अधिकांश महिलाएं थीं। बीमार होने की स्थिति में सवेतनिक छुट्टी, और वेतन मे वृद्धि की मांग के साथ यह आन्दोलन शुरू हुआ और यहीं से "पुणे शहर मोलकर्णी संगठन" का गठन हुआ। इसके बाद नियोक्ताओं के साथ लंबी बातचीत हुई जिसके परिणामस्वरूप शहर में इस संघ की महत्वपूर्ण जीत हुई और व्यक्तिकेन्द्रित कार्यसंबंधों को पेशेवर, संविदात्मक कार्यसंबंधों में बदल दिया गया। यह शायद देश में पहली बार हुआ था, जब घरेलू कामगारों ने हड़ताल कर दी थी और एक शहर-व्यापी संगठन बनाया था। सन एक हज़ार नौ सौ अस्सी, फरवरी महीने का एक दिन। खंडारेबाई नाम की एक घरेलू कामगार,, जो पुणे शहर की करवे रोड पर एक घर में काम करती थी, अचानक बीमार पड़ गई और छुट्टी पर चली गई। जब वह काम पर वापस आई, तो उसे पता चला कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। जब उसने इस बारे में पूछताछ की तो उसे मालकिन ने बताया कि उसने चार दिन की छुट्टी बोलकर वो छह दिन तक काम पर नहीं आई थी। इसलिए उन्होंने उसकी जगह किसी अन्य घरेलू कामगार को काम पर रख लिया। खंडारेबाई ने इस बारे में अन्य घरेलू कामगारों, जैसे पद्माताई सुतार और सुभद्राताई कंडारे से बातचीत की। तीनों ने फैसला लिया कि वें इस बारें में इलाके की सभी घरेलू कामगारों से चर्चा करेंगे। खंडारेबाई के साथ हुए बर्ताव को देखकर अन्य घरेलू कामगारों को काफी गुस्सा आया, क्योंकि उनका अनुभव भी खंडारेबाई जैसा ही रहा था। मजदूरों के समूह ने सबसे पहले उस महिला को घेरा, जिसने खंडारेबाई की जगह ली थी और सभी ने उसे काफी खरी-खोटी सुनाई। वे उसे दुसरों के दुखों का फ़ायदा उठाने वाली के रूप में देख रहे थे। इस समूह की एकमात्र जीवित महिला "कंदारे" घटना को याद करते हुए बताती हैंः पड़ोस में एक मोलकर्णी [खंडारेबाई] काम करती थी। अगले घर की एक और मोलकर्णी ने उसका काम ले लिया। फिर हमने उससे पूछा, "तुमने उसका काम क्यों ले लिया?" उसने बड़ी रुखाई से जवाब देते हुए कहा कि, "इससे तुम्हें क्या दिक्कत है?" उसके इस वर्ताव पर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उससे कहा कि वह अभद्र भाषा का प्रयोग न करे। मैंने कहा, "तुमने उसका काम लिया, अब उसे उसका काम वापस दे दो और वह घर छोड़ दो।" पर उसने कहा कि वह घर नहीं छोड़ेगी और वहीं काम करती रहेगी। फिर हम उससे लड़े। मैंने उसे एक हाथ से पकड़ा और काफी मारा। उसके बाद हम बाहर आए और वाड़ा के गेट पर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। वहां एक व्यक्ति ने कहा कि घटना घर के अंदर हुई और इसलिए कोई शिकायत दर्ज नहीं की जायगी। इसके बाद हम सभी परिसर से बाहर आ गए। एक तरफ कई अन्य मोलकर्णियां खड़ी थीं, उन्होंने हमसे पूछा, "क्या हुआ?" हमने उन्हें बताया कि एक दूसरी मोलकर्णी ने हमारी सहेली का काम ले लिया है और हमारा उससे झगड़ा हुआ। तभी हमने विरोध में एक जुलूस निकालने का फैसला लिया, और हमारे साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल हो गए। फिर हम चर्चा करने लगे कि आगे क्या करना है? हम सभी फिर वहां गए जहां खंडारेबाई काम करती थी। घर की मालकिन से हमने खंडारेबाई को नौकरी वापस देने की अपील की। लेकिन जब हमारी अपील को नही सुना गया, तो हम सब वहां से बाहर निकल आए और रास्ते में मिलने वाली सभी घरेलू कामगारों को घटना के बारे में बताया। यह भी बताया कि हम सब हड़ताल पर हैं। देखते ही देखते एक घंटे के भीतर करवे रोड की तक़रीबन एक सौ पचास महिलाओं ने अचानक काम बंद कर दिया। यह काम से बर्खास्तगी के खिलाफ एक स्वतःस्फूर्त हड़ताल थी। पुणे शहर में घरेलू कामगारों की हड़ताल और संगठन के बारे में बताने वाली यह महिला - कंदारे अब तक़रीबन साठ साल की हो गई है और अभी भी घरेलू कामगार के रुप में काम करती हैं। कंदारे जी पुणे शहर मोलकर्णी संगठन के सबसे पुराने स्थायी सदस्यों में से एक है। इस संगठन को इसी हड़ताल के परिणामस्वरूप बनाया गया था। इस बीच, खंडारेबाई का निधन हो गया। पहली नजर में ऐसा लगता है कि बर्खास्तगी की एक ही घटना के जवाब में महिलाएं हड़ताल पर चली गईं थी। लेकिन अगर इसको ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि घरेलू कामगारों का यह क्षेत्र लम्बे समय से उपेक्षित रहा है। किरण मोगे, जो अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ से संबंधित एक नारीवादी कार्यकर्त्ता एवं पुणे के घरेलू कामगारों के अधिकारों को लेकर मुखर रही हैं, उन्होंने हड़ताल के सामाजिक और आर्थिक संदर्भ पर चर्चा करते हुए बताया हैं किः "मुझे लगता है कि इस "स्वतःस्फूर्त हड़ताल" को उस समय के आर्थिक संकट के सन्दर्भों में देखा जाना चाहिए । वे खुद को बहुत शोषित महसूस कर रहीं थीं, और हालांकि उन्होंने इस मुद्दे को सीधे कम वेतन से नहीं जोड़ा, लेकिन उन्हें लगने लगा था कि उनकी मजदूरी उनके अपने जीवन को चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है ... उसी से यह चेतना पैदा हुआ।" बढ़ती महंगाई के बावजूद वर्षों से मजदूरी में खास वृद्धि नहीं हुई थी और श्रमिकों को सवेतनिक छुट्टी का कोई अधिकार नहीं था। मजदूरों ने महसूस किया कि उनके साथ बहुत अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। इसके बावजूद कि इन महिलाओं को राजनीतिक संगठन का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, उन्होंने खुद की ताकत को पहचाना और हड़ताल करने का फैसला किया। उस समय पुणे के औद्योगिक कर्मचारियों ने भी ऐसी हड़ताल कई बार की हुई थी, उनको देखते हुए इन महिलाओं को पता था कि हड़ताल के परिणामस्वरूप वेतन में वृद्धि हो सकती है। लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि आंदोलन कैसे करना है या हड़ताल के तौर पर आगे कैसे बढ़ना है? इसे कब तक जारी रखना होगा, एवं इसके क्या परिणाम होंगे ? वे जानती थीं कि न केवल कारखाने के कर्मचारी बल्कि डॉक्टर, नर्स, अधिकारी और अन्य भी अपनी मांगों को मनवाने के लिए हड़ताल करते हैं, जुलूस निकलतें हैं. जब उनका जुलूस लक्ष्यहीन रूप से आगे बढ़ रहा था, तब वे महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ अन्य हिस्सों में सक्रिय लाल निशान पार्टी से जुड़े एक यूनियन कार्यकर्ता भालचंद्र केरकर से मिलीं। कंदारे के शब्दों में, "हम चलते रहे और फिर हम केरकर से मिले। उन्होंने हमको रोका और पूछा कि क्या हुआ? हमने उन्हें घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हम चिंता न करें और काम पर वापस न जाएं। फिर हमारा ग्रुप प्रभात रोड, और फिर कर्वे रोड गया, और फिर हमने एक बैठक की। कुछ समय बाद भोसलेताई और उनके दोस्त भी हमारे साथ हो गए। इसके बाद, हमने हर दिन अपना विरोध और जुलूस शुरू किया ... इस तरह यह सब शुरू हुआ।" पुणे शहर मोलकर्णी संगठन और श्रमिक महिला मोर्चा की वर्तमान महासचिव एवं वकील मेधा थत्ते ने याद करते हुए बताया - कैसे हड़ताली घरेलू कामगारों को एक संगठन की आवश्यकता महसूस हुई। "पहली हड़ताल के बाद हमने इसपर चर्चा की और महसूस किया कि ऐसे तो यह आंदोलन नहीं चलेगा, हमें पहले कुछ ठोस मांगें रखनी पड़ेगी। हड़ताल इसलिए हुई क्योंकि खंडारेबाई को काम से निकाल दिया गया था, मजदूरी बहुत कम थीः यह सब आंदोलन के लिए पर्याप्त कारण है। लेकिन सवाल यह था कि नियोक्ताओं तक कैसे पहुंचा जाए? हमने महसूस किया कि हमें यह तय करने के लिए नियमित रूप से मिलना चाहिए और चर्चा करनी चाहिए कि हम क्या चाहतें है, हमारी मांगें क्या हैं? और हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं? बात यह भी थी कि अगर हम नियमित रूप से मिलते हैं, तो इसका मतलब हैं कि हम एक संगठन के रुप में हैं। जब हमने खुद से पूछा कि क्या हमें खुद को संगठित करना चाहिए, तो हम सभी लोग सहमत हो गए। लाल निशान पार्टी की भागीदारी के साथ, स्थानीय निर्वाचित प्रशासक के घर पर हर शाम सैकड़ों घरेलू कामगारों की बैठकें आयोजित होती थीं। मजदूर बहनों ने शारीरिक श्रम के तनाव, अपर्याप्त मजदूरी, काम से निकाले जाने, अवैतनिक मजदूरी के कष्ट, जीवन यापन की बढ़ती लागत से उत्पन्न होने वाली परेशानी और घरेलू कठिनाइया आदि के बारें में अपने अनुभवों को साझा करना शुरू कर दिया। ऐसी ही एक कहानी एक घरेलू कामगार की थी जो लगभग पच्चीस वर्षों से एक वकील के परिवार में काम कर रही थी। वकील एक छात्र से एक विवाहित व्यक्ति, फिर एक पिता और अंत में दादा बन गया। लेकिन इस पूरी अवधि में घरेलू कामगार महिला का वेतन दस रुपयापये से बारह रुपयापये प्रति माह ही रहा। इन बैठकों में भाग लेने वाले कई महिलाएं बहुत बूढी थीं और लम्बें समय से दूसरों के घरों में काम कर रही थी और उनके पास जीवन में और कोई विकल्प नहीं था और वे बहुत कम वेतन के बावजूद अपनी नौकरी पर लम्बे समय से बनीं ही थीं। कईयों ने बासी भोजन दिए जाने की बात बताई, मानों मकान मालिक ऐहसान कर रहा हैं। साथ ही नियमित रूप से मिलने वाले अपमान के बारें में भी बात होतीं थीं। कई घरेलू कामगार महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसी -किसी घर में काम करते वक्त अगर एक भी शीशे का ग्लास टूट जाता है तो उन्हें बहुत बुरे तरीके से डांटा और प्रताड़ित किया जाता था। मजदूरों को छुट्टी कर लेनें पर उस दिन के लिए भुगतान नहीं मिलता था। यानी कोई बीमारी की हालत में या किसी इमरजेंसी की हालत में काम पर नहीं जा पाए तो उस दिन की तनख्वाह महीने में काट के दी जाती थी। बहुत सी महिलाये जो घरेलु कामगार के रूप में काम करती थी, या तो विधवा थी या फिर ऐसी महिलाये थी जिनके पति उन्हें अपने हाल पर छोड़ गए थे। कुछ महिलाये ऐसी भी थी जिनके वेतन से पूरा परिवार चल रहा था और उनके पति भी उनके वेतन पर निर्भर थे। यह महिलाये झोपड़पट्टी में रह रही थी, जहाँ न तो बिजली थी और न ही पानी। इन महिलाओं को अपने घर के भीतर और बाहर, दोनों जगह काम करना पड़ता था। ऐसे में बहुत सी महिलाओ की बेटियां भी उनके साथ काम पर आने लगी। गरीबी की हालत में होने का मतलब यह भी था कि अगर घरेलु कामगार अपनी मांगो के लिए किसी हड़ताल पर जाते भी है, तो वह हड़ताल छोटी और सफल होनी चाहिए, क्यूंकि आस पास के माहौल से यह स्पष्ट था कि उनकी जगह अन्य कामगार रखने में मालिक/ मालकिन को ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा । कुछ इलाके ऐसे भी थे जहाँ महिलाओ ने बीस दिन तक जोश में हड़ताल करी, जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं करी गयी। आखिर में इन महिलाओ को काम पर दुबारा बुलाया गया और इनकी नयी और ज़्यादा वेतन की मांग को पूरा किया गया। यह अद्द्भुत था क्यूंकि भारत में मालिक/ मालकिन और कामगार के बीच का रिश्ता इस प्रकार है कि मालिक/ मालकिन झुकने को तैयार नहीं होते। उनकी दृष्टि से देखा जाए तो घरेलु काम ऐसा काम है जो मालिक/ मालकिन खुद नहीं करना चाहते और न ही इस काम को इज़्ज़तदार मानते है। मालिक -मालकिन खुद बाहर काम करने जाते है और उनके बच्चे स्कूल जाते है। इस संघर्ष की पीड़ा और परेशानी के दौरान मजदूरों के गीत भी पैदा हुएं, जो आक्रोश और विद्रोह की भावना से भरे हुए थे। ऐसे ही एक गीत थाः आओ रे हीरा, आओ रे मीरा। जवाब दो हमारे सवालों का, ओ इंदिरा की सरकार। ओ वेणुबाई, क्यों हो तुम इतनी परेशान? आओ हमारे साथ, उठाये मिलकर हम आवाज़! इस संघर्ष और विरोध की खबर पुणे और मुंबई के सकाळ , केसरी और प्रभात जैसे मशहूर अखबारों में भी देखने को मिली । इन खबरों के बारें में बात करते हुए किरण मोगे ने कहा, " घरेलु कामगार समाज का वो हिस्सा है जिन पर आम तौर पर मीडिया का ध्यान नहीं जाता । इसलिए जब महिलाएं सार्वजनीक रूप से हड़ताल पर चली गयी, तो मीडिया में भी एक उत्सुकता पैदा हुईं। अचानक ही वो महिलाये जिनको कभी कामगार माना ही नहीं जाता था, सड़को पर आ गयी और अपने काम, अधिकारों और हक़ की बात करने लगी।" इन् महिलाओ ने खुद को "मोलकर्णी" बोलना शुरू कर दिया। पुणे शहर के अन्य इलाको के घरेलु कामगार - जैसे की मीरा सोसाइटी , नारायण पेठ , सहकारनगर , शिवाजीनगर और गुलटेकडी के कामगार, उन्होंने भी तय किया कि वें भी हड़ताल पर जाएंगी। किसी ने उन्हें हड़ताल करने के लिए नहीं कहा था, करवे रोड पर हुई हड़ताल और संघर्ष के बारे में सुनकर उन्होंने खुद ही यह तय किया था। इस दौरान केवल दो मांगे थी, बीमार पड़ने पर छुट्टी और वेतन में वृद्धि । लेकिन जब पुणे शहर मोलकर्णी संघठन बना तो रोज़ाना चर्चा और विचार विमर्श करने से महिला कामगारों की समझ भी बढ़ती गयी। इस हड़ताल के बाद उनको अंदाजा लग गया कि श्रम क़ानून नहीं होने से उन्हें मालिक के दया पर ही निर्भर होना पड़ेगा। इसलिए उन्होंने मांगों की एक सूची और एक वेतन का ढांचा भी प्रस्तावित किया। वेतन का ढांचा प्रस्तुत करते समय गौर किया गया कि वेतन हर घर से एक समान नहीं मिलता। हर घर की आर्थिक स्थिति, घर में कितने लोग रहते है, काम का बोझ कितना रहता है , इनको भी हिसाब में लिया गया और इन सबके मद्देनजर एक वेतन का ढांचा बनाया गया। संगठन की तरफ से समय-समय पर जो मांगे रखी गयी, वें थी : वेतन में तुरंत वृद्धि, दिवाली का बोनस -जो कि एक महीने के वेतन के बराबर होगा, हर महीने में वेतन का पंद्रह फीसदी भविष्य निधि के लियें योगदान देना, सवेतन बीमारी की छुट्टी देना, महीने में दो छुट्टी देना और अगर मालिक-मालकिन शहर से बाहर है तो कामगार का वेतन न काटना। इस प्रस्ताव को पर्ची के रूप में छापा गया और सभी घरों में बांटा गया। मालिकों ने वेतन वृद्धि की मांग को माना, लेकिन उसके बदले ज़्यादा काम की मांग की। लेकिन घरेलु कामगार भी पीछे नहीं हटें, और उन्होंने कहा कि अब अतिरिक्त काम करवाने पर पैसा भी एक्स्ट्रा लगेगा। एक हज़ार नौ सौ अस्सी की हड़ताल और पुणे शहर मोलकर्णी संगठन की स्थापना के बाद, पुणे में दो और घरेलू कामगार संगठनों की स्थापना की गई। एक अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ द्वारा बनाई गई और इसे पुणे जिला घरमगार संगठन कहा जाता था, जबकि दूसरे को बाबा आढाव ने बनाया जिसे मोलकर्णी पंचायत कहा जाता था। इन वर्षों में तीनों संगठनों ने कई मौकों पर अलग अलग मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम किया है। इस हड़ताल के बाद एक हज़ार नौ सौ चौरासी से एक हज़ार नौ सौ छियानवे तक शहर के विभिन्न इलाकों में कई और हड़तालें हुईं, जिनमें से ज्यादातर वेतन वृद्धि के लिए थीं। एक हज़ार नौ सौ पचानवे के आंदोलन में पुणे के नए हिस्सों जैसे दपड़ी, औंध, पिंपरी, कोथरुड, सालुंके विहार, खड़की, की घरेलु कामगार भी शामिल थी। इन सामूहिक कार्रवाइयों के माध्यम से कई सुधार हासिल किये गए। महिला कामगारों ने अपने वेतन और कार्य-शर्तों पर बातचीत की। सवेतन साप्ताहिक अवकाश का मिलना एक महत्वपूर्ण जीत थी। वेतन संशोधन एक रेट कार्ड के माध्यम से लागू किया गया । इस रेट कार्ड के जरिये बर्तन साफ करने, फर्श पर झाडू लगाने, कपड़े धोने आदि अलग अलग कामों के लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित किया गया । रेट निर्धारित करते समय मालिक परिवार का आकार, सदस्यों का संख्या, घर कितना बड़ा हैं - इत्यादि पहलुओं को भी हिसाब में लिया गया। इन दरों को अब हर चार साल में संशोधित किया जाता है। वार्षिक बोनस, सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी आदि अन्य लाभ भी निर्धारित किए जाते हैं और संगठनों के माध्यम से स्थानीय बैंकों में "भविष्य निधि" एकत्र की जाती है। पुणे में घरेलू कामगार अब प्रति माह दो सवेतन अवकाश लेने के हकदार हैं। नियोक्ताओं से भी अपेक्षा की जाती है कि वे अगर कभी बदली मजदुर को काम पर लगाते हैं तो उन्हें भुगतान भी अलग से करना होगा। चोरी के झूठे आरोप, बर्तन टूटने पर मजदूरी काटना - ये सब चीजें भी कम हो गई है। कामगार संगठनों के कार्यवाही एवं महिला कामगारों की हिस्सेदारी से ही यह सब मुमकिन हुआ हैं। लेकिन इस संघर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि थी - मजदूरों में एकता की भावना विकसित कर पाना । मजदूर बहनों ने महसूस किया कि एक-दूसरे के काम छीनने की कोशिश करना सभी कामगार साथियों के लिए हानिकारक है। अब जब मालिक किसी नयी घरेलु कामगार को काम में लगाता हैं तो वो नयी कामगार पहली वाली कामगार से ज्यादा वेतन की मांग करती है। पिछली कामगार से बातचीत किये बिना कोई कामगार किसी भी घर में काम स्वीकार नहीं करती है। नियोक्ता नए घरेलू कामगारों को नियुक्त करने का प्रयास जारी रखते हैं, लेकिन संगठित घरेलू कामगारों के एकता ने इन कोशिशों को निरस्त किया है। अक्सर राजनीतिक कार्यकर्त्ता ही इन घरेलू कामगार संगठनों का नेतृत्व प्रदान करती हैं। लेकिन फिर भी यह एकदम स्पष्ट है कि घरेलू कामगार बहनों के सक्रिय समर्थन ने ही इन संगठनों को जीवित रखा हुआ हैं । संगठन के स्थानीय नेतृत्वकारी सदस्य स्वयं ही घरेलू कामगार हैं और वें अलग अलग घरों में अपना काम पूरा करने के बाद स्वेच्छा से संगठन में काम करती हैं। अधिकांश शाम उन्हें संगठन के कार्यालयों में देखा जा सकता हैं । ये स्थानीय नेता बैठकें आयोजित करती हैं, सहकर्मियों के साथ मांगों पर चर्चा करती हैं, संगठन के निर्णयों के बारे में अन्य सदस्यों को सूचित करती हैं, सदस्यों की राय पूछती हैं, अन्य इलाकों में बैठकों में भाग लेती हैं। वे व्यक्तिगत मामलों में सदस्यों का मार्गदर्शन भी करती हैं और उनके बीच वाली प्रतिद्वंद्विता को सुलझाती हैं। वे सदस्यों के साथ पुलिस स्टेशन जाती हैं और नियोक्ताओं द्वारा शारीरिक हमले के मामलों की रिपोर्ट करती हैं और अपने संगठन के सदस्यों की ओर से नियोक्ताओं के साथ बातचीत भी करती हैं। स्वयं घरेलू कामगार होने के कारण, उन्हें उन समस्याओं का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है, जो उन्हें संभालने में बहुत प्रभावी साबित होती हैं। यह लेख, लोकेश द्वारा लिखित "मेकिंग द पर्सनल पॉलिटिकलः द फर्स्ट डोमेस्टिक वर्कर्स स्ट्राइक इन पुणे, महाराष्ट्र" शीर्षक निबंध का संक्षिप्त एवं अनुवादित रूप हैं। मूल लेख "टुवर्ड्स ए ग्लोबल हिस्ट्री ऑफ डोमेस्टिक एंड केयर गिविंग वर्कर्स" शीर्षक पुस्तक में प्रकाशित हुई थी।
GHKKPM ने पूरा किया 800 एपिसोड का सफर, जानिए क्या बोले 'डीसीपी विराट चव्हाण'? Ghum Hain Kisikey Pyaar Meiin: टीवी शो 'गुम है किसी के प्यार में' की पॉपुलैरिटी तेजी से बढ़ती जा रही है। शो में आने वाले उतार चढ़ाव लगातार दर्शकों का इसमें इंट्रेस्ट बनाए रखते हैं। टीआरपी लिस्ट में कमाल कर रहे धारावाहिक 'गुम है किसी के प्यार में' (Ghum Hain Kisikey Pyaar Meiin) ने दर्शकों का एंटरटेनमेंट करते हुए 800 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर शो की कास्ट ने केक कटिंग सेरेमनी रखी और इस यादगार लम्हे को सेलिब्रेट किया। शो में डीसीपी विराट और पाखी का किरदार निभाने वाले एक्टर नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा को एक वायरल पोस्ट में केक कटिंग करते देखा जा सकता है। इस फोटो में उनके साथ शो के अन्य सितारे भी नजर आ रहे हैं। शो के इस सफर को याद करते हुए एक्टर नील भट्ट ने कहा, "हमारे शो के 800 एपिसोड के पड़ाव पहुंचने को लेकर मैं बहुत गौरवान्वित और खुश महसूस कर रहा हूं। यह कड़ी मेहनत का सेलिब्रेशन है। अभी बहुत लंबा सफर यह करना है और यह सब हमारे लिए बहुत उत्साहवर्धक है। " नील भट्ट ने कहा कि इसके बाद वह और उनकी टीम और भी कड़ी मेहनत करेगी ताकि वह इस तरह के और भी माइलस्टोन अचीव कर सकें। बात करें धारावाहिक की तो यह शो अभी कई बड़े ट्विस्ट और टर्न्स से गुजर रहा है। शो की स्टार कास्ट की बात करें तो एक्ट्रेश आएशा सिंह इस धारावाहिक में सई जोशी का किरदार निभाती हैं। ऐश्वर्या पाखी का रोल कर रही हैं और नील विराट का रोल करते हैं। शो की कहानी में आने वाले उतार-चढ़ाव दर्शकों का इसमें इंट्रेस्ट बनाए रखते हैं। हाल ही में शो में एक्टर हर्षद अरोड़ा की एंट्री हुई है। हर्षद इस शो में सत्य अधिकारी का रोल प्ले करते नजर आएंगे। कहानी की बात करें तो सत्य अधिकारी को सई के साथ जोड़ते दिखाया गया है और अब देखना होगा कि सई की जिंदगी में सत्य अधिकारी की एंट्री होने के बाद चीजें किस तरह बदलेंगी।
GHKKPM ने पूरा किया आठ सौ एपिसोड का सफर, जानिए क्या बोले 'डीसीपी विराट चव्हाण'? Ghum Hain Kisikey Pyaar Meiin: टीवी शो 'गुम है किसी के प्यार में' की पॉपुलैरिटी तेजी से बढ़ती जा रही है। शो में आने वाले उतार चढ़ाव लगातार दर्शकों का इसमें इंट्रेस्ट बनाए रखते हैं। टीआरपी लिस्ट में कमाल कर रहे धारावाहिक 'गुम है किसी के प्यार में' ने दर्शकों का एंटरटेनमेंट करते हुए आठ सौ एपिसोड पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर शो की कास्ट ने केक कटिंग सेरेमनी रखी और इस यादगार लम्हे को सेलिब्रेट किया। शो में डीसीपी विराट और पाखी का किरदार निभाने वाले एक्टर नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा को एक वायरल पोस्ट में केक कटिंग करते देखा जा सकता है। इस फोटो में उनके साथ शो के अन्य सितारे भी नजर आ रहे हैं। शो के इस सफर को याद करते हुए एक्टर नील भट्ट ने कहा, "हमारे शो के आठ सौ एपिसोड के पड़ाव पहुंचने को लेकर मैं बहुत गौरवान्वित और खुश महसूस कर रहा हूं। यह कड़ी मेहनत का सेलिब्रेशन है। अभी बहुत लंबा सफर यह करना है और यह सब हमारे लिए बहुत उत्साहवर्धक है। " नील भट्ट ने कहा कि इसके बाद वह और उनकी टीम और भी कड़ी मेहनत करेगी ताकि वह इस तरह के और भी माइलस्टोन अचीव कर सकें। बात करें धारावाहिक की तो यह शो अभी कई बड़े ट्विस्ट और टर्न्स से गुजर रहा है। शो की स्टार कास्ट की बात करें तो एक्ट्रेश आएशा सिंह इस धारावाहिक में सई जोशी का किरदार निभाती हैं। ऐश्वर्या पाखी का रोल कर रही हैं और नील विराट का रोल करते हैं। शो की कहानी में आने वाले उतार-चढ़ाव दर्शकों का इसमें इंट्रेस्ट बनाए रखते हैं। हाल ही में शो में एक्टर हर्षद अरोड़ा की एंट्री हुई है। हर्षद इस शो में सत्य अधिकारी का रोल प्ले करते नजर आएंगे। कहानी की बात करें तो सत्य अधिकारी को सई के साथ जोड़ते दिखाया गया है और अब देखना होगा कि सई की जिंदगी में सत्य अधिकारी की एंट्री होने के बाद चीजें किस तरह बदलेंगी।
इस्लामाबादः पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव कराने को लेकर देश के राजनीतिक नेतृत्व के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर कोई भी वार्ता 'धमकी देकर' यानि बंदूक के बल पर की जाती है तो वह व्यर्थ होगी। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष की यह टिप्पणी देश के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल के उस अनुरोध के बाद आई है जिसमें उन्होंने विभिन्न नेताओं को मिल-बैठकर चुनाव के मसले पर बातचीत करने को कहा था। प्रधान न्यायाधीश ने यह टिप्पणी पूर्वाह्न में उस वक्त की थी जब न्यायालय ने आम चुनाव और प्रांतीय विधानसभा चुनाव एक साथ कराने संबंधी याचिका पर फिर से सुनवाई शुरू की थी। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार ने बताया कि न्यायमूर्ति बंदियाल ने कहा कि बातचीत में कोई हठ नहीं हो सकता है और द्विपक्षीय वार्ता के जरिये आम सहमति बनाई जा सकती है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से ईद के बाद के बजाय बृहस्पतिवार को ही बैठक करने को कहा। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि जुलाई में चुनाव हो सकते हैं। न्यायमूर्ति बंदियाल के अनुरोध के बावजूद, अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीतिक दलों के बीच कोई संवाद नहीं हो सका। बाद में, पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर अवान और PPP के वकील फारूक एच. नाइक ने न्यायमूर्ति बंदियाल से उनके कक्ष में मुलाकात की और विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के साथ बातचीत करने के लिए और समय मांगा, जिसके बाद सुनवाई 27 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई। बिलावल ने कहा, "हमने अतीत में (चुनावों पर) राजनीतिक नेतृत्व को एकजुट करने के प्रयास किए थे और फिर से ऐसा करने को तैयार हैं, लेकिन आपके दबाव से बातचीत नहीं हो सकती है क्योंकि तब कोई भी सहमत नहीं होगा। " उन्होंने कहा कि पीपीपी एक ही दिन चुनाव कराने का समर्थन करती है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी से भी बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा, "हमारे प्रयासों का उद्देश्य लोकतंत्र को बचाना है, जो इस समय खतरे में है। " बिलावल ने आशा व्यक्त की कि न्यायमूर्ति बंदियाल अपना पद छोड़ने से पहले शीर्ष अदालत के भीतर आम सहमति स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार का दावा है कि उसके पास चुनावों में देरी करने और अगस्त के बाद उन्हें आयोजित करने की शक्ति है। हालांकि, खान की पार्टी समय से पहले चुनाव कराने पर जोर दे रही थी और मांग कर रही थी कि पंजाब चुनाव में देरी करने के बजाय, नेशनल असेंबली को भंग कर दिया जाना चाहिए और देश में आम चुनाव कराये जाने चाहिए।
इस्लामाबादः पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव कराने को लेकर देश के राजनीतिक नेतृत्व के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर कोई भी वार्ता 'धमकी देकर' यानि बंदूक के बल पर की जाती है तो वह व्यर्थ होगी। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष की यह टिप्पणी देश के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल के उस अनुरोध के बाद आई है जिसमें उन्होंने विभिन्न नेताओं को मिल-बैठकर चुनाव के मसले पर बातचीत करने को कहा था। प्रधान न्यायाधीश ने यह टिप्पणी पूर्वाह्न में उस वक्त की थी जब न्यायालय ने आम चुनाव और प्रांतीय विधानसभा चुनाव एक साथ कराने संबंधी याचिका पर फिर से सुनवाई शुरू की थी। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार ने बताया कि न्यायमूर्ति बंदियाल ने कहा कि बातचीत में कोई हठ नहीं हो सकता है और द्विपक्षीय वार्ता के जरिये आम सहमति बनाई जा सकती है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से ईद के बाद के बजाय बृहस्पतिवार को ही बैठक करने को कहा। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि जुलाई में चुनाव हो सकते हैं। न्यायमूर्ति बंदियाल के अनुरोध के बावजूद, अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीतिक दलों के बीच कोई संवाद नहीं हो सका। बाद में, पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर अवान और PPP के वकील फारूक एच. नाइक ने न्यायमूर्ति बंदियाल से उनके कक्ष में मुलाकात की और विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के साथ बातचीत करने के लिए और समय मांगा, जिसके बाद सुनवाई सत्ताईस अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई। बिलावल ने कहा, "हमने अतीत में राजनीतिक नेतृत्व को एकजुट करने के प्रयास किए थे और फिर से ऐसा करने को तैयार हैं, लेकिन आपके दबाव से बातचीत नहीं हो सकती है क्योंकि तब कोई भी सहमत नहीं होगा। " उन्होंने कहा कि पीपीपी एक ही दिन चुनाव कराने का समर्थन करती है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी से भी बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा, "हमारे प्रयासों का उद्देश्य लोकतंत्र को बचाना है, जो इस समय खतरे में है। " बिलावल ने आशा व्यक्त की कि न्यायमूर्ति बंदियाल अपना पद छोड़ने से पहले शीर्ष अदालत के भीतर आम सहमति स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार का दावा है कि उसके पास चुनावों में देरी करने और अगस्त के बाद उन्हें आयोजित करने की शक्ति है। हालांकि, खान की पार्टी समय से पहले चुनाव कराने पर जोर दे रही थी और मांग कर रही थी कि पंजाब चुनाव में देरी करने के बजाय, नेशनल असेंबली को भंग कर दिया जाना चाहिए और देश में आम चुनाव कराये जाने चाहिए।
कर्नाटक में दो दिन की बीजेपी की सरकार गिरने के बाद अब जेडीएस और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में आज शाम 4:30 बजे कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, वहीं विपक्ष में देश की बड़ी पार्टियों के मुख्य लीडर आज एक साथ मंच साझा करेंगे, वहीं इस शपथ ग्रहण के बाद कर्नाटक में शुक्रवार (25 मई) को फ्लोर टेस्ट होना. बता दें, विपक्ष के सभी नेताओं और क्षेत्रीय नेताओं के एक साथ मंच साझा करने के बाद जेडीएस के कुमारस्वामी को शुक्रवार को सदन में फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा, फ्लोर टेस्ट में कुमारस्वामी को बहुमत साबित करना होगा, वहीं हाल ही मिल रही एक खबर के अनुसार कर्नाटक में कांग्रेस के विधायक शपथ से पहले तक रिसोर्ट में ही रुके रहे थे. फ्लोर टेस्टः इससे पहले येदियुरप्पा ने शपथ ग्रहण के बाद ढाई दिन के अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार बीजेपी को फ्लोर पर बहुमत साबित करना था जिसमें बीजेपी नाकाम रही, अब यही काम कांग्रेस और जेडीएस को करना है. हालाँकि जेडीएस और कांग्रेस के पास 78+38 मिलकर जरुरी बहुमत का जादुई आकड़ा है जिससे दोनों पार्टियों को कोई मुश्किल नहीं आने वाली.
कर्नाटक में दो दिन की बीजेपी की सरकार गिरने के बाद अब जेडीएस और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में आज शाम चार:तीस बजे कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, वहीं विपक्ष में देश की बड़ी पार्टियों के मुख्य लीडर आज एक साथ मंच साझा करेंगे, वहीं इस शपथ ग्रहण के बाद कर्नाटक में शुक्रवार को फ्लोर टेस्ट होना. बता दें, विपक्ष के सभी नेताओं और क्षेत्रीय नेताओं के एक साथ मंच साझा करने के बाद जेडीएस के कुमारस्वामी को शुक्रवार को सदन में फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा, फ्लोर टेस्ट में कुमारस्वामी को बहुमत साबित करना होगा, वहीं हाल ही मिल रही एक खबर के अनुसार कर्नाटक में कांग्रेस के विधायक शपथ से पहले तक रिसोर्ट में ही रुके रहे थे. फ्लोर टेस्टः इससे पहले येदियुरप्पा ने शपथ ग्रहण के बाद ढाई दिन के अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार बीजेपी को फ्लोर पर बहुमत साबित करना था जिसमें बीजेपी नाकाम रही, अब यही काम कांग्रेस और जेडीएस को करना है. हालाँकि जेडीएस और कांग्रेस के पास अठहत्तर+अड़तीस मिलकर जरुरी बहुमत का जादुई आकड़ा है जिससे दोनों पार्टियों को कोई मुश्किल नहीं आने वाली.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसके लिए हमें रणनीति बनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सरकार की ओर पक्ष रखने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि केंद्र ने इस पर क्या कदम उठाए हैं और क्या योजना बनाई है। भारत में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इसी जारी कहर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः ऑक्सीजन के गहराते संकट, बेड की कमी, वैक्सीन की किल्लत को देखते हुए संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस महामारी का राष्ट्रीय आपदा कहा है। एसी का कहना है कि इसमें मूकदर्शक बने नहीं रह सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसके लिए हमें रणनीति बनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सरकार की ओर पक्ष रखने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि केंद्र ने इस पर क्या कदम उठाए हैं और क्या योजना बनाई है। इन सबके बारे में विस्तार से जानकारी दीजिए। केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दे दिया गया है। सरकार की तरफ से राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई पर लेटर भेजा गया है। कोर्ट ने कहा है कि इस सुनवाई का मतलब हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को रोकना नहीं है, हाई कोर्ट स्थानीय हालात को बेहतर समझ सकते हैं। राष्ट्रीय मुद्दे पर हमारा दखल देना जरूरी था. हम राज्यों के बीच समन्वय बैठाने का काम करेंगे. अदालत में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोरोना की पहली लहर 2019-20 में आई, लेकिन दूसरी लहर का किसी ने अंदाजा नहीं लगाया था। हमने इसको लेकर भी कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार राष्ट्रीय लेवल पर हालात को मॉनिटर कर रही है, खुद पीएम भी मीटिंग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभी उन्होंने केंद्र द्वारा दाखिल प्लान नहीं देखा है। उम्मीद है कि राज्यों से भी इसका फायदा होगा, हम इसे देखेंगे। जानकारी के लिए आपको बता दें कि बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना को राष्ट्रीय आपातकाल करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय योजना पेश करने को कहा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसके लिए हमें रणनीति बनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सरकार की ओर पक्ष रखने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि केंद्र ने इस पर क्या कदम उठाए हैं और क्या योजना बनाई है। भारत में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इसी जारी कहर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः ऑक्सीजन के गहराते संकट, बेड की कमी, वैक्सीन की किल्लत को देखते हुए संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस महामारी का राष्ट्रीय आपदा कहा है। एसी का कहना है कि इसमें मूकदर्शक बने नहीं रह सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसके लिए हमें रणनीति बनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सरकार की ओर पक्ष रखने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि केंद्र ने इस पर क्या कदम उठाए हैं और क्या योजना बनाई है। इन सबके बारे में विस्तार से जानकारी दीजिए। केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दे दिया गया है। सरकार की तरफ से राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई पर लेटर भेजा गया है। कोर्ट ने कहा है कि इस सुनवाई का मतलब हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को रोकना नहीं है, हाई कोर्ट स्थानीय हालात को बेहतर समझ सकते हैं। राष्ट्रीय मुद्दे पर हमारा दखल देना जरूरी था. हम राज्यों के बीच समन्वय बैठाने का काम करेंगे. अदालत में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोरोना की पहली लहर दो हज़ार उन्नीस-बीस में आई, लेकिन दूसरी लहर का किसी ने अंदाजा नहीं लगाया था। हमने इसको लेकर भी कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार राष्ट्रीय लेवल पर हालात को मॉनिटर कर रही है, खुद पीएम भी मीटिंग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभी उन्होंने केंद्र द्वारा दाखिल प्लान नहीं देखा है। उम्मीद है कि राज्यों से भी इसका फायदा होगा, हम इसे देखेंगे। जानकारी के लिए आपको बता दें कि बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना को राष्ट्रीय आपातकाल करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय योजना पेश करने को कहा था।
नई दिल्ली। भारत और चीन (China) के बीच सबसे बड़े सैनिक तनाव को हल करने की जिम्मेदारी शनिवार की सुबह 2 जनरलों पर रहेगी. लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और सेना की उत्तरी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ये जिम्मेदारी संभालेंगे. इस तनाव के समय पूरी भारतीय सेना में सबसे उपयुक्त अफसर ले. जनरल जोशी ही हो सकते थे. जनरल जोशी न केवल चीनी भाषा के जानकार हैं, बल्कि उन्होंने अपनी लगभग हर कमांड को लद्दाख में ही किया है. जनरल जोशी को कारगिल युद्ध के समय वीर चक्र मिला, इस समय वो 13 वीं जम्मू-कश्मीर राइफल्स को कमांड कर रहे थे. तब के कर्नल जोशी की भूमिका एलओसी कारगिल फिल्म में संजय दत्त ने निभाई थी. इस यूनिट के कैप्टन बिक्रम बत्रा और राइफल मैन संजय कुमार ने इस युद्ध में परमवीर चक्र पाया था. इसके बाद ब्रिगेडियर बनने पर जनरल जोशी ने तांगसे स्थित ब्रिगेड कमांड की थी. इसी ब्रिगेड की जिम्मेदारी पेंगांग झील सहित उस सारे इलाके की होती है, जहां आज सैनिक आमने-सामने हैं. इसके बाद 2005 से लेकर 2007 तक वो चीन में भारत के डिफेंस अताशे रहे और इसी दौरान दोनों देशों के बीच साझा सैनिक अभ्यास हैंड-इन-हैंड की शुरुआत हुई थी. मेजर जनरल बनने के बाद जनरल जोशी फिर लद्दाख लौटे और त्रिशूल डिवीज़न को कमान किया जिसके जिम्मे सारा पूर्वी लद्दाख है. भारत-चीन के बीच हमेशा इसी इलाके में तनाव होता है. यहां के बाद जनरल जोशी सेना मुख्यालय गए, जहां मिलिट्री ऑपरेशंस में पोस्टिंग के बाद डीजी इफेंट्री बने. 31 अगस्त 2018 में जनरल जोशी फिर लद्दाख लौटे और लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर बने, जहां वो 9 अक्टूबर 2019 तक रहे. इसके बाद उन्हें सेना की उत्तरी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ और बाद में सेना कमांडर बनाया गया. लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भी सेना मैडल से सम्मानित हैं जो उन्हें तब मिला था जब उन्होंने कैप्टन के पद पर रहते हुए पीओके में अकेले 24 घंटे तक रहकर एक पाकिस्तानी चौकी की टोह ली थी, जिसे बाद में भारतीय सेना ने गोलाबारी करके तबाह किया था. लेह में कोर कमांडर का पद संभालने से पहले जनरल सिंह ने डायरेक्टर जनरल मिलिटरी इंटेलीजेंस पद पर काम किया जिस दौरान उन्होंने चीन के हर पैंतरे को बहुत अच्छे से समझा.
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सबसे बड़े सैनिक तनाव को हल करने की जिम्मेदारी शनिवार की सुबह दो जनरलों पर रहेगी. लेह स्थित चौदहवीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और सेना की उत्तरी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ये जिम्मेदारी संभालेंगे. इस तनाव के समय पूरी भारतीय सेना में सबसे उपयुक्त अफसर ले. जनरल जोशी ही हो सकते थे. जनरल जोशी न केवल चीनी भाषा के जानकार हैं, बल्कि उन्होंने अपनी लगभग हर कमांड को लद्दाख में ही किया है. जनरल जोशी को कारगिल युद्ध के समय वीर चक्र मिला, इस समय वो तेरह वीं जम्मू-कश्मीर राइफल्स को कमांड कर रहे थे. तब के कर्नल जोशी की भूमिका एलओसी कारगिल फिल्म में संजय दत्त ने निभाई थी. इस यूनिट के कैप्टन बिक्रम बत्रा और राइफल मैन संजय कुमार ने इस युद्ध में परमवीर चक्र पाया था. इसके बाद ब्रिगेडियर बनने पर जनरल जोशी ने तांगसे स्थित ब्रिगेड कमांड की थी. इसी ब्रिगेड की जिम्मेदारी पेंगांग झील सहित उस सारे इलाके की होती है, जहां आज सैनिक आमने-सामने हैं. इसके बाद दो हज़ार पाँच से लेकर दो हज़ार सात तक वो चीन में भारत के डिफेंस अताशे रहे और इसी दौरान दोनों देशों के बीच साझा सैनिक अभ्यास हैंड-इन-हैंड की शुरुआत हुई थी. मेजर जनरल बनने के बाद जनरल जोशी फिर लद्दाख लौटे और त्रिशूल डिवीज़न को कमान किया जिसके जिम्मे सारा पूर्वी लद्दाख है. भारत-चीन के बीच हमेशा इसी इलाके में तनाव होता है. यहां के बाद जनरल जोशी सेना मुख्यालय गए, जहां मिलिट्री ऑपरेशंस में पोस्टिंग के बाद डीजी इफेंट्री बने. इकतीस अगस्त दो हज़ार अट्ठारह में जनरल जोशी फिर लद्दाख लौटे और लेह स्थित चौदहवीं कोर के कमांडर बने, जहां वो नौ अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस तक रहे. इसके बाद उन्हें सेना की उत्तरी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ और बाद में सेना कमांडर बनाया गया. लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भी सेना मैडल से सम्मानित हैं जो उन्हें तब मिला था जब उन्होंने कैप्टन के पद पर रहते हुए पीओके में अकेले चौबीस घंटाटे तक रहकर एक पाकिस्तानी चौकी की टोह ली थी, जिसे बाद में भारतीय सेना ने गोलाबारी करके तबाह किया था. लेह में कोर कमांडर का पद संभालने से पहले जनरल सिंह ने डायरेक्टर जनरल मिलिटरी इंटेलीजेंस पद पर काम किया जिस दौरान उन्होंने चीन के हर पैंतरे को बहुत अच्छे से समझा.
केरल के पठानमथिट्टा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां तिरुवल्ला इलाके में एक शख्स ने पत्नी से तलाक में देरी के चलते जज के साथ ऐसी बदसलूकी की, जिसे देखकर लोग दंग रह गए. इस मामले में पुलिस ने आरोपी आरोपी को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस की पूछताछ के दौरान उसने जो वजह बताई, उसकी काफी चर्चा हो रही है. दरअसल, 55 साल के जयप्रकाश का उसकी पत्नी के साथ तलाक का मामला चल रहा है. इसकी कार्यवाही से नाखुश जयप्रकाश ने तिरुवल्ला में फैमिली कोर्ट परिसर के अंदर खड़ी जज की कार में जमकर तोड़फोड़ की. घटना बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे की है. कोर्ट से बाहर आने के बाद जयप्रकाश पास के बाजार गया, जहां से एक गैंती खरीदकर लाया और कार की खिड़कियां तोड़ डाली. उसका गुस्सा यहीं नहीं थमा. इसके बाद उसने नंबर प्लेट के बीच में गैंती घुसा दी. फिर कार के आसपास घूमा और जज से भी अभद्रता की. इस मामले की शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ अदालती काम में बाधा डालने, धमकी देने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है, जिसने पुलिस को बयान दिया है कि पत्नी से जल्द तलाक न मिलने के कारण उसने इस घटना को अंजाम दिया. (रिपोर्ट- शिबी)
केरल के पठानमथिट्टा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां तिरुवल्ला इलाके में एक शख्स ने पत्नी से तलाक में देरी के चलते जज के साथ ऐसी बदसलूकी की, जिसे देखकर लोग दंग रह गए. इस मामले में पुलिस ने आरोपी आरोपी को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस की पूछताछ के दौरान उसने जो वजह बताई, उसकी काफी चर्चा हो रही है. दरअसल, पचपन साल के जयप्रकाश का उसकी पत्नी के साथ तलाक का मामला चल रहा है. इसकी कार्यवाही से नाखुश जयप्रकाश ने तिरुवल्ला में फैमिली कोर्ट परिसर के अंदर खड़ी जज की कार में जमकर तोड़फोड़ की. घटना बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे की है. कोर्ट से बाहर आने के बाद जयप्रकाश पास के बाजार गया, जहां से एक गैंती खरीदकर लाया और कार की खिड़कियां तोड़ डाली. उसका गुस्सा यहीं नहीं थमा. इसके बाद उसने नंबर प्लेट के बीच में गैंती घुसा दी. फिर कार के आसपास घूमा और जज से भी अभद्रता की. इस मामले की शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ अदालती काम में बाधा डालने, धमकी देने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है, जिसने पुलिस को बयान दिया है कि पत्नी से जल्द तलाक न मिलने के कारण उसने इस घटना को अंजाम दिया.
Dhanbad : झारखंड में लॉटरी टिकटों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा हुआ है इसके बावजूद धनबाद में धड़ल्ले से भूटान और सिक्किम के लॉटरी टिकट बिक रहे हैं. बंगाल के रास्ते यह लॉटरी टिकट धनबाद पहुंच रहे हैं. धनबाद के विभिन्न जगहों पर चाय और पान दुकानों पर इन टिकटों की बिक्री की जाती है. काफी संख्या में लोग करोड़पति बनने के चक्कर में कंगाल बन रहे हैं. इस धंधे में संलिप्त लोगों का कहना है कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता क्योंकि वो मोटी रकम पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंचाते हैं. शॉर्टकट तरीके से करोड़पति बनने की चाह रखने वाले लोग इसकी चपेट में आसानी से आ जाते हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जो करोड़पति बनने के ख्वाब संजोये बिल्कुल कंगाल हो गये. उनके घर बिक गये. कई ने तो अपनी जमीन तक बेच दी. धनबाद शहर से लेकर सुदूर देहातों तक लॉटरी टिकट की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. सामान्य रूप से लॉटरी टिकट बेचने वाले लोग टिकट को झोला में रखते हैं ताकि किसी को संदेह न हो. टिकट बेचने वाले आम लोगों को टिकट खरीदने के लिए तरह-तरह के खाब दिखाते हैं उन्हें बहुत जल्दी करोड़पति बना देने का भरोसा दिलाते हैं. और अगर एक बार इस का चस्का लग गया तो आदमी अपनी जमीन-जायदाद तक बेच देता है. धनबाद स्टेशन रोड से लेकर झरिया, उपरकुल्ही, स्टेशन रोड झरिया, बाटा मोड़ झरिया, जामाडोबा, सुदामडीह, भागा सिनेमाहॉल, सिंदरी सिनेमा हॉल के समीप, निरसा और चिरकुंडा में लॉटरी का यह अवैध कारोबार खूब फल-फूल रहा है. इसकी लत स्कूल-कॉलेज के छात्रों को भी पड़ गयी है. हैरत की बात तो यह है कि कई जगहों पर थानों के करीब लॉटरी का यह खेल चलता है. इसके बारे में न्यूज विंग को लगातार जानकारी मिल रही थी. न्यूज विंग की टीम ने जिले के कई जगहों पर जानकारी इकट्ठा की. किस तरह स्टेशन रोड से लेकर झरिया और सिंदरी तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है. झरिया के तो हर इलाके में लॉटरी के धंधेबाज सक्रिय हैं. वहां से लेकर सिंदरी तक मुख्य सड़क के किनारे जगह-जगह लॉटरी का धंधा चल रहा है. सुदामडीह थाना क्षेत्र के बिरसा पुल के रास्ते बंगाल के संथालडीह से लॉटरी लेकर आते हैं. बिरसा पुल के रास्ते झारखंड की सीमा प्रवेश करना काफी आसान है. लॉटरी टिकट बेचने वाले धंधेबाजों को टिकट के एवज में कमीशन दिया जाता है. अगर एक लॉटरी टिकट की कीमत 6 रुपये है तो उसे 2 रुपये कमीशन दिये जायेंगे. इतना ही नहीं, अगर किसी टिकट में कोई पुरस्कार फंसता है तो उस पर उसे अलग से कमीशन दिया जाता है. आमतौर पर जिसे लॉटरी का चस्का लग चुका है एक दिन में कम से कम 15 से 20 टिकटों की खरीदारी करता है. इस तरह इस धंधे में संलिप्त लोगों को मोटी कमाई हो जाती है. आमतौर पर यह धंधेबाज पश्चिम बंगाल के आसनसोल, वर्धमान और कोलकाता से लॉटरी टिकट मंगवाते हैं. पश्चिम बंगाल में लॉटरी टिकटों की बिक्री वैध है. जिसका यह धंधेबाज पूरा फायदा उठाते हैं. पहले पुरस्कृत लॉटरी टिकटों के नंबर अखबारों में जारी किये जाते थे लेकिन अब इसके नंबर वेबसाइटों पर जारी किये जाते हैं. हर दिन सुबह लोग इन वेबसाइटों को खोलकर अपनी किस्मत आजमाते हैं और फिर दूसरे दिन फिर से टिकट खरीदने की तैयारी में जुट जाते हैं. आखिर धनबाद में प्रतिबंधित लॉटरी टिकटों का बाजार क्यों सज रहा है? इस संबंध में जानकारी लेने के लिए हमने सिंदरी के एसडीपीओ से संपर्क करने की कोशिश की. बार-बार उनको फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
Dhanbad : झारखंड में लॉटरी टिकटों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा हुआ है इसके बावजूद धनबाद में धड़ल्ले से भूटान और सिक्किम के लॉटरी टिकट बिक रहे हैं. बंगाल के रास्ते यह लॉटरी टिकट धनबाद पहुंच रहे हैं. धनबाद के विभिन्न जगहों पर चाय और पान दुकानों पर इन टिकटों की बिक्री की जाती है. काफी संख्या में लोग करोड़पति बनने के चक्कर में कंगाल बन रहे हैं. इस धंधे में संलिप्त लोगों का कहना है कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता क्योंकि वो मोटी रकम पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंचाते हैं. शॉर्टकट तरीके से करोड़पति बनने की चाह रखने वाले लोग इसकी चपेट में आसानी से आ जाते हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जो करोड़पति बनने के ख्वाब संजोये बिल्कुल कंगाल हो गये. उनके घर बिक गये. कई ने तो अपनी जमीन तक बेच दी. धनबाद शहर से लेकर सुदूर देहातों तक लॉटरी टिकट की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. सामान्य रूप से लॉटरी टिकट बेचने वाले लोग टिकट को झोला में रखते हैं ताकि किसी को संदेह न हो. टिकट बेचने वाले आम लोगों को टिकट खरीदने के लिए तरह-तरह के खाब दिखाते हैं उन्हें बहुत जल्दी करोड़पति बना देने का भरोसा दिलाते हैं. और अगर एक बार इस का चस्का लग गया तो आदमी अपनी जमीन-जायदाद तक बेच देता है. धनबाद स्टेशन रोड से लेकर झरिया, उपरकुल्ही, स्टेशन रोड झरिया, बाटा मोड़ झरिया, जामाडोबा, सुदामडीह, भागा सिनेमाहॉल, सिंदरी सिनेमा हॉल के समीप, निरसा और चिरकुंडा में लॉटरी का यह अवैध कारोबार खूब फल-फूल रहा है. इसकी लत स्कूल-कॉलेज के छात्रों को भी पड़ गयी है. हैरत की बात तो यह है कि कई जगहों पर थानों के करीब लॉटरी का यह खेल चलता है. इसके बारे में न्यूज विंग को लगातार जानकारी मिल रही थी. न्यूज विंग की टीम ने जिले के कई जगहों पर जानकारी इकट्ठा की. किस तरह स्टेशन रोड से लेकर झरिया और सिंदरी तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है. झरिया के तो हर इलाके में लॉटरी के धंधेबाज सक्रिय हैं. वहां से लेकर सिंदरी तक मुख्य सड़क के किनारे जगह-जगह लॉटरी का धंधा चल रहा है. सुदामडीह थाना क्षेत्र के बिरसा पुल के रास्ते बंगाल के संथालडीह से लॉटरी लेकर आते हैं. बिरसा पुल के रास्ते झारखंड की सीमा प्रवेश करना काफी आसान है. लॉटरी टिकट बेचने वाले धंधेबाजों को टिकट के एवज में कमीशन दिया जाता है. अगर एक लॉटरी टिकट की कीमत छः रुपयापये है तो उसे दो रुपयापये कमीशन दिये जायेंगे. इतना ही नहीं, अगर किसी टिकट में कोई पुरस्कार फंसता है तो उस पर उसे अलग से कमीशन दिया जाता है. आमतौर पर जिसे लॉटरी का चस्का लग चुका है एक दिन में कम से कम पंद्रह से बीस टिकटों की खरीदारी करता है. इस तरह इस धंधे में संलिप्त लोगों को मोटी कमाई हो जाती है. आमतौर पर यह धंधेबाज पश्चिम बंगाल के आसनसोल, वर्धमान और कोलकाता से लॉटरी टिकट मंगवाते हैं. पश्चिम बंगाल में लॉटरी टिकटों की बिक्री वैध है. जिसका यह धंधेबाज पूरा फायदा उठाते हैं. पहले पुरस्कृत लॉटरी टिकटों के नंबर अखबारों में जारी किये जाते थे लेकिन अब इसके नंबर वेबसाइटों पर जारी किये जाते हैं. हर दिन सुबह लोग इन वेबसाइटों को खोलकर अपनी किस्मत आजमाते हैं और फिर दूसरे दिन फिर से टिकट खरीदने की तैयारी में जुट जाते हैं. आखिर धनबाद में प्रतिबंधित लॉटरी टिकटों का बाजार क्यों सज रहा है? इस संबंध में जानकारी लेने के लिए हमने सिंदरी के एसडीपीओ से संपर्क करने की कोशिश की. बार-बार उनको फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
फिल्म 'लाइगर' 25 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. फिल्म में विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे के अलावा राम्या कृष्णन और बॉक्सर माइक टायसन भी नजर आएगे. विजय देवरकोंडा की फिल्म लाइगर का फैंस बेसब्र होकर इंतजार कर रहे हैं. इसी फिल्म से साउथ के दिग्गज स्टार विजय देवरकोंडा अपना बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं. पुरी जगन्नाथ के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म में अनन्या पांडे भी नजर आएंगी. अब तक रिलीज हुए फिल्म के गानों को दर्शकों की ओर से खूब प्यार दिया जा रहा है. बता दें कि अब लाइगर एंथम गाना सामने आयाहै, जो देखते ही देखते खूब वायरल हो रहा है. लाइगर एंथम को निखलेश कुमार ने गाया है. आपको बता दें कि निखलेश कुमार ने अपने ट्विटर पर लाइगर एंथम को सांझा किया है. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडर पर गाने को साझा करते हुए लिखा- 'लाइगर एंथम. हमारे लाइगर विजय देवरकोंडा, पुरी जगन्नाथ और पूरी लाइगर को ट्रिब्यूट.' वहीं, निखलेश कुमार को सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं. आपको बता दें कि हाल में इस फिल्म का गीत आफत रिलीज हुआ था. आफत एक रोमांटिक ट्रैक है, जो लाइगर के बाकि के गानों से बेहद अलग है. इस गानें को लेकर भई दर्शकों में खूब क्रेज देखने को मिला. गाने मेंफैंस ने विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे की प्रेजेंस को खूब एंजॉय किया. गौर हो कि ये फिल्म लाइगर 25 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. फिल्म में विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे के अलावा राम्या कृष्णन और बॉक्सर माइक टायसन भी नजर आएगे. इस फिल्म में एक्शन के साथ-साथ रोमांस भी देखने को मिलेगा. जिसको लेकर भी प्रशंसक इस फिल्म का इंतजार कर रहे हैं.
फिल्म 'लाइगर' पच्चीस अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. फिल्म में विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे के अलावा राम्या कृष्णन और बॉक्सर माइक टायसन भी नजर आएगे. विजय देवरकोंडा की फिल्म लाइगर का फैंस बेसब्र होकर इंतजार कर रहे हैं. इसी फिल्म से साउथ के दिग्गज स्टार विजय देवरकोंडा अपना बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं. पुरी जगन्नाथ के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म में अनन्या पांडे भी नजर आएंगी. अब तक रिलीज हुए फिल्म के गानों को दर्शकों की ओर से खूब प्यार दिया जा रहा है. बता दें कि अब लाइगर एंथम गाना सामने आयाहै, जो देखते ही देखते खूब वायरल हो रहा है. लाइगर एंथम को निखलेश कुमार ने गाया है. आपको बता दें कि निखलेश कुमार ने अपने ट्विटर पर लाइगर एंथम को सांझा किया है. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडर पर गाने को साझा करते हुए लिखा- 'लाइगर एंथम. हमारे लाइगर विजय देवरकोंडा, पुरी जगन्नाथ और पूरी लाइगर को ट्रिब्यूट.' वहीं, निखलेश कुमार को सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं. आपको बता दें कि हाल में इस फिल्म का गीत आफत रिलीज हुआ था. आफत एक रोमांटिक ट्रैक है, जो लाइगर के बाकि के गानों से बेहद अलग है. इस गानें को लेकर भई दर्शकों में खूब क्रेज देखने को मिला. गाने मेंफैंस ने विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे की प्रेजेंस को खूब एंजॉय किया. गौर हो कि ये फिल्म लाइगर पच्चीस अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. फिल्म में विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे के अलावा राम्या कृष्णन और बॉक्सर माइक टायसन भी नजर आएगे. इस फिल्म में एक्शन के साथ-साथ रोमांस भी देखने को मिलेगा. जिसको लेकर भी प्रशंसक इस फिल्म का इंतजार कर रहे हैं.
हमारें देश में ऐसे बहुत से मंदिर स्थित हैं जहां बेशुमार चढ़ावा आता हैं और उन मंदिरों के खजाने रुपये, सोना-चांदी और बेशकीमती उपहारों से भरे हुए हैं भले ही शिरडी का साईं मंदिर हो या तिरुपति बालाजी, पर क्या आप जानते हैं दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कौन सा हैं। अगर नहीं पता तो हम आपको बताते हैं, दुनिया का सबसे ज्यादा धन-दौलत वाला मंदिर भारत के दक्षिण में स्थित हैं। हम बात कर रहे हैं केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभ मंदिर की, ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं, ये मंदिर हिन्दू धर्म के प्रमुख मंदिरों में से एक हैं अभी हाल में ही इस मंदिर के स्वामित्व को लेकर विवाद छिड़ा हुआ था जिसके निपटारे के लिए स्वयं माननीय सुप्रीम कोर्ट को इसमें फैसला देना पड़ा। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि ऐसा क्या विवाद था मंदिर को लेकर और इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया। जानकारी के अनुसार फोर्ब्स के अनुसार इस मंदिर की कुल संपति लगभग 75 लाख करोड़ रुपये हैं जो इसे दुनिया का सबसे अमीर मंदिर बनाती हैं, 1947 तक इस मंदिर के रख-रखाव का जिम्मा त्रावणकोर के शाही खानदान के द्वारा किया जाता था लेकिन बाद में मंदिर के स्वामित्व को लेकर राज्य सरकार और शाही परिवार में विवाद छिड़ गया था। जिसके बाद मामला हाई कोर्ट में पहुंचा था, 2011 में कोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर का स्वामित्व सौंप दिया था जिसके बाद शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी और अभी हाल में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा ये निर्णय किया गया हैं कि मंदिर का स्वामित्व त्रावणकोर के शाही परिवार के पास ही रहेगा। बताया जाता हैं कि ये मंदिर छठी सदी से हैं, 1750 में त्रावणकोर के राजा ने अपने आप को भगवान विष्णु का सेवक घोषित किया और अपनी जिंदगी और सारी संपति भगवान को अर्पण कर दी हैं, इसके बाद उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। तब से ही मंदिर के रख-रखाव का जिम्मा राजा के शाही परिवार के पास था। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभ मंदिर में स्थित सभी तहखानों को खोलने का आदेश दिया, जब पहले 6 तहखाने खुले तो उसमें से लगभग 1 लाख करोड़ के हीरे-जवाहरात मिले, इसके अलावा सोने के हाथी, भगवान की मूर्तियां, सोने के नारियल भी मिले, जब सातवें तहखाने खोलने की बारी आई तो शाही परिवार के द्वारा बताया गया कि तहखाने को खोलने से विनाश हो सकता हैं, 1931 में एक बार कोशिश की गई थी लेकिन जब लगभग 1000 सांपो ने मंदिर को घेर लिया था। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने मंदिर के स्वामित्व को लेकर फैसला सुनाया हैं कि इस मंदिर के रख-रखाव का काम त्रावणकोर के शाही परिवार के पास ही रहेगा, इसके अलावा मंदिर से संबंधित सभी मामलें के लिए एक समिति बनाने का भी निर्देश जारी किया हैं जिसमें तिरुवनंतपुरम के जिला जज इस समिति के अध्यक्ष रहेंगे और इसके बाकी सदस्य हिंदू ही रहेंगे।
हमारें देश में ऐसे बहुत से मंदिर स्थित हैं जहां बेशुमार चढ़ावा आता हैं और उन मंदिरों के खजाने रुपये, सोना-चांदी और बेशकीमती उपहारों से भरे हुए हैं भले ही शिरडी का साईं मंदिर हो या तिरुपति बालाजी, पर क्या आप जानते हैं दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कौन सा हैं। अगर नहीं पता तो हम आपको बताते हैं, दुनिया का सबसे ज्यादा धन-दौलत वाला मंदिर भारत के दक्षिण में स्थित हैं। हम बात कर रहे हैं केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभ मंदिर की, ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं, ये मंदिर हिन्दू धर्म के प्रमुख मंदिरों में से एक हैं अभी हाल में ही इस मंदिर के स्वामित्व को लेकर विवाद छिड़ा हुआ था जिसके निपटारे के लिए स्वयं माननीय सुप्रीम कोर्ट को इसमें फैसला देना पड़ा। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि ऐसा क्या विवाद था मंदिर को लेकर और इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया। जानकारी के अनुसार फोर्ब्स के अनुसार इस मंदिर की कुल संपति लगभग पचहत्तर लाख करोड़ रुपये हैं जो इसे दुनिया का सबसे अमीर मंदिर बनाती हैं, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस तक इस मंदिर के रख-रखाव का जिम्मा त्रावणकोर के शाही खानदान के द्वारा किया जाता था लेकिन बाद में मंदिर के स्वामित्व को लेकर राज्य सरकार और शाही परिवार में विवाद छिड़ गया था। जिसके बाद मामला हाई कोर्ट में पहुंचा था, दो हज़ार ग्यारह में कोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर का स्वामित्व सौंप दिया था जिसके बाद शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी और अभी हाल में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा ये निर्णय किया गया हैं कि मंदिर का स्वामित्व त्रावणकोर के शाही परिवार के पास ही रहेगा। बताया जाता हैं कि ये मंदिर छठी सदी से हैं, एक हज़ार सात सौ पचास में त्रावणकोर के राजा ने अपने आप को भगवान विष्णु का सेवक घोषित किया और अपनी जिंदगी और सारी संपति भगवान को अर्पण कर दी हैं, इसके बाद उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। तब से ही मंदिर के रख-रखाव का जिम्मा राजा के शाही परिवार के पास था। दो हज़ार ग्यारह में सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभ मंदिर में स्थित सभी तहखानों को खोलने का आदेश दिया, जब पहले छः तहखाने खुले तो उसमें से लगभग एक लाख करोड़ के हीरे-जवाहरात मिले, इसके अलावा सोने के हाथी, भगवान की मूर्तियां, सोने के नारियल भी मिले, जब सातवें तहखाने खोलने की बारी आई तो शाही परिवार के द्वारा बताया गया कि तहखाने को खोलने से विनाश हो सकता हैं, एक हज़ार नौ सौ इकतीस में एक बार कोशिश की गई थी लेकिन जब लगभग एक हज़ार सांपो ने मंदिर को घेर लिया था। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने मंदिर के स्वामित्व को लेकर फैसला सुनाया हैं कि इस मंदिर के रख-रखाव का काम त्रावणकोर के शाही परिवार के पास ही रहेगा, इसके अलावा मंदिर से संबंधित सभी मामलें के लिए एक समिति बनाने का भी निर्देश जारी किया हैं जिसमें तिरुवनंतपुरम के जिला जज इस समिति के अध्यक्ष रहेंगे और इसके बाकी सदस्य हिंदू ही रहेंगे।
गिरिडीहः कोरोना पॉजिटिव मरीज अधिवक्ता की मौत के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार को घाट ले जाने का विरोध करने पर पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा. लाठीचार्ज सवेरा चौक के पास सोमवार को 12 बजे किया गया. इसके बाद मृतक के शव को घरवाले श्मशान घाट ले गए. मौके पर एसडीओ, बीडीओ और पुलिस मौजूद रही.
गिरिडीहः कोरोना पॉजिटिव मरीज अधिवक्ता की मौत के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार को घाट ले जाने का विरोध करने पर पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा. लाठीचार्ज सवेरा चौक के पास सोमवार को बारह बजे किया गया. इसके बाद मृतक के शव को घरवाले श्मशान घाट ले गए. मौके पर एसडीओ, बीडीओ और पुलिस मौजूद रही.
क्या Rajasthan में गिर सकती है कांग्रेस की सरकार? गुजरात, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के बाद भाजपा अब राजस्थान में विधायकों को तोड़ने की कोशिश में जुटी है। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस सरकार को गिराने की कवायद जारी है। राज्य के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा की इस कोशिश को नाकाम करने के लिए अपने किले को सुरक्षित कर लिया है। उन्होंने दावा किया की सभी विधायक एक जुट हैं और भाजपा की कोशिश को कांग्रेस सफल नहीं होने देगी। इस नए राजनैतिक संकट को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने रणदीप सुरजेवाला और महासचिव के सी वेणुगोपाल को जयपुर रवाना कर दिया है ताकि वे गहलोत के साथ विधायकों को एक जुट रखने में मदद कर सकें। कांग्रेस के सामने राज्य में दोहरी चुनौती है , एक तरफ गुजरात से आये 19 काँग्रेसी विधायकों को एकजुट रखना है तो दूसरी ओर राज्य के काँग्रेसी विधायकों को एक जुट रखने की चुनौती है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, मध्य प्रदेश वाला खेल ही यहां खेला जा रहा था, हमारे विधायक बहुत समझदार हैं। उनको खूब लालच-लोभ देने की कोशिश की गई। मुझे गर्व इस बात का है कि हमारे साथ BSP के 6 और 13 निर्दलीय विधायक आए हैं। हिन्दुस्तान के इतिहास में राजस्थान पहला ऐसा राज्य है जहां एक रुपये का सौदा नहीं हुआ है।
क्या Rajasthan में गिर सकती है कांग्रेस की सरकार? गुजरात, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के बाद भाजपा अब राजस्थान में विधायकों को तोड़ने की कोशिश में जुटी है। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस सरकार को गिराने की कवायद जारी है। राज्य के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा की इस कोशिश को नाकाम करने के लिए अपने किले को सुरक्षित कर लिया है। उन्होंने दावा किया की सभी विधायक एक जुट हैं और भाजपा की कोशिश को कांग्रेस सफल नहीं होने देगी। इस नए राजनैतिक संकट को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने रणदीप सुरजेवाला और महासचिव के सी वेणुगोपाल को जयपुर रवाना कर दिया है ताकि वे गहलोत के साथ विधायकों को एक जुट रखने में मदद कर सकें। कांग्रेस के सामने राज्य में दोहरी चुनौती है , एक तरफ गुजरात से आये उन्नीस काँग्रेसी विधायकों को एकजुट रखना है तो दूसरी ओर राज्य के काँग्रेसी विधायकों को एक जुट रखने की चुनौती है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, मध्य प्रदेश वाला खेल ही यहां खेला जा रहा था, हमारे विधायक बहुत समझदार हैं। उनको खूब लालच-लोभ देने की कोशिश की गई। मुझे गर्व इस बात का है कि हमारे साथ BSP के छः और तेरह निर्दलीय विधायक आए हैं। हिन्दुस्तान के इतिहास में राजस्थान पहला ऐसा राज्य है जहां एक रुपये का सौदा नहीं हुआ है।
अम्बाला। संवेदनशील आर्मी यूनिट में घुसा संदिग्ध मंदबुद्धि बालक बताया जा रहा है। आर्मी ने पूछताछ के बाद इसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। जिसके बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दी और उन्हें मौके पर बुलाया है। पुलिस के अनुसार आर्मी एक्शन ग्रुप की गश्त टुकड़ी ने कंटीली तारों के पास से भीम सिंह पटेल को पकड़ा था। जांच में बालक के पास से एक कनेक्टिंग वायर, मोबाइल और पासपोर्ट भी मिला है। पुलिस चैकी में खड़े भीम सिंह ने बताया कि कुछ लोगों ने उसे जबरन गाड़ी पर चढ़ा दिया और वो अंबाला पहुंच गया था।
अम्बाला। संवेदनशील आर्मी यूनिट में घुसा संदिग्ध मंदबुद्धि बालक बताया जा रहा है। आर्मी ने पूछताछ के बाद इसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। जिसके बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दी और उन्हें मौके पर बुलाया है। पुलिस के अनुसार आर्मी एक्शन ग्रुप की गश्त टुकड़ी ने कंटीली तारों के पास से भीम सिंह पटेल को पकड़ा था। जांच में बालक के पास से एक कनेक्टिंग वायर, मोबाइल और पासपोर्ट भी मिला है। पुलिस चैकी में खड़े भीम सिंह ने बताया कि कुछ लोगों ने उसे जबरन गाड़ी पर चढ़ा दिया और वो अंबाला पहुंच गया था।
राजस्थान के जयपुर में एक व्यक्ति कोरोना से संक्रमित पाया गया है। वह उसी अस्पताल में भर्ती है, जिसमें इटली से आया एक दंपति है, जो कोरोना वायरस से प्रभावित है। इस जोड़े के संपर्क में आकर 235 लोग संक्रमित हो चुके हैं। विजयन ने की सबरीमला न जाने की अपीलकेरल सरकार ने 31 मार्च तक के लिए राज्य के सभी शैक्षणि संस्थानों में छुट्टी का एलान कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसा कोई आयोजन न करें, जिसमें अधिक लोगों के आने की संभावना हो। पी विजयन ने लोगों से यह अपील भी की है कि सबरीमला मंदिर के कपाट 13 मार्च को खुलने पर मंदिर जाने से बचें। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा ने कहा है कि इस समय यात्रा से जुड़ी कोई जानकारी को छुपाना अपराध माना जाएगा। पुणे के आईटी हब में अफरातफरीमहाराष्ट्र के पुणे में नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद शनिवार तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। राज्य के शिक्षा आयुक्त विशाल सोलंकी ने इसकी पुष्टि की है कि शिक्षा मंत्री विशाल गायकवाड़ ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने के सख़्त निर्देश दिए हैं। पुणे के मगरपट्टा आईटी पार्क में संक्रमण की बात फैलने के बाद टॉवर 7 को खाली कराया गया। विदेश से आए 537 लोगों की जाँच की गई है। पूरे महाराष्ट्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है। दुबई से पुणे आए एक जोड़े, उनके साथ आए एक आदमी और उन्हें एअरपोर्ट से लाने वाले ओला ड्राइवर को भी जाँच में संक्रमण से प्रभावित पाया गया है। दुनिया में तेज़ी से फैल रहे कोरोना वाइरस संक्रमण के रोकथाम के लिए क़तर ने एहतियात के तौर पर 14 देशों के लोगों के वहाँ जाने पर रोक लगा दी है। इनमें भारत भी है। मध्य-पूर्व के इस देश ने चीन, मिस्र, ईरान, इराक़, लेबनान, बांग्लदेश, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपीन्स, दक्षिण कोरिया, श्री लंका, सीरिया और थाईलैंड के नागरिकों के भी प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।
राजस्थान के जयपुर में एक व्यक्ति कोरोना से संक्रमित पाया गया है। वह उसी अस्पताल में भर्ती है, जिसमें इटली से आया एक दंपति है, जो कोरोना वायरस से प्रभावित है। इस जोड़े के संपर्क में आकर दो सौ पैंतीस लोग संक्रमित हो चुके हैं। विजयन ने की सबरीमला न जाने की अपीलकेरल सरकार ने इकतीस मार्च तक के लिए राज्य के सभी शैक्षणि संस्थानों में छुट्टी का एलान कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसा कोई आयोजन न करें, जिसमें अधिक लोगों के आने की संभावना हो। पी विजयन ने लोगों से यह अपील भी की है कि सबरीमला मंदिर के कपाट तेरह मार्च को खुलने पर मंदिर जाने से बचें। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा ने कहा है कि इस समय यात्रा से जुड़ी कोई जानकारी को छुपाना अपराध माना जाएगा। पुणे के आईटी हब में अफरातफरीमहाराष्ट्र के पुणे में नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद शनिवार तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। राज्य के शिक्षा आयुक्त विशाल सोलंकी ने इसकी पुष्टि की है कि शिक्षा मंत्री विशाल गायकवाड़ ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने के सख़्त निर्देश दिए हैं। पुणे के मगरपट्टा आईटी पार्क में संक्रमण की बात फैलने के बाद टॉवर सात को खाली कराया गया। विदेश से आए पाँच सौ सैंतीस लोगों की जाँच की गई है। पूरे महाराष्ट्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है। दुबई से पुणे आए एक जोड़े, उनके साथ आए एक आदमी और उन्हें एअरपोर्ट से लाने वाले ओला ड्राइवर को भी जाँच में संक्रमण से प्रभावित पाया गया है। दुनिया में तेज़ी से फैल रहे कोरोना वाइरस संक्रमण के रोकथाम के लिए क़तर ने एहतियात के तौर पर चौदह देशों के लोगों के वहाँ जाने पर रोक लगा दी है। इनमें भारत भी है। मध्य-पूर्व के इस देश ने चीन, मिस्र, ईरान, इराक़, लेबनान, बांग्लदेश, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपीन्स, दक्षिण कोरिया, श्री लंका, सीरिया और थाईलैंड के नागरिकों के भी प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव डालने वाले जहीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर का शुरुआती जीवन इतना ही मुश्किलों भरा रहा है. उसने अपनी आत्मकथा में लिखा है- मेरा ही देश मेरे हाथ में नहीं था. न वापस मिलने की उम्मीद थी. नौकरों ने भी साथ छोड़ दिया था. अपनी असफलताओं पर बाबर ने आत्मकथा में लिखा है- ताशकंद में रहने के दौरन मैं बेहद दुःखी था. मेरा ही देश मेरे हाथ में नहीं था. न उसे वापस मिलने की उम्मीद थी. नौकरों ने भी साथ छोड़ दिया था. जो साथ थे वो गरीबी के कारण मेरे संग घूम भी नहीं सकते थे. बेघर होने के बाद भटकते-भटकते थक गया हूं. चाहता हूं कहीं ऐसी जगह छिप जाऊं जहां लोग मुझे देख न सकें. बेइज्जत होने से बेहतर है इतना दूर चला जाऊं कि लोग पहचान ही न सकें. भारत में मुगल साम्राज्य की नींव डालने वाले जहीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर का शुरुआती जीवन इतना ही मुश्किलों भरा रहा है. मशहूर उपन्यासकार ईएम फोस्टर के मुताबिक, अपने संघर्षों को पार करके अंततः बाबर विजेता बना. भले ही उसे लुटेरा, अत्याचारी और दमनकारी कहा जाता था लेकिन उसने जिस तरह मुगल साम्राज्य की स्थापना की वो एक नजीर है. जिसकी शुरुआत 1526 में पानीपत की लड़ाई से की. जंग में इब्राहिम लोधी को हराकर भारत में नई सल्तनत की स्थापना की. ऐसी सल्तनत जिसमें दुनिया की दौलत का एक चौथाई हिस्सा था. बीबीसी की एक रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई इस्लाम के फेलो मुईन अहमद निजामी का कहना है कि फरगना की राजधानी अंदजान में जन्मेबाबर को उसके पिता उमर शेख से फरगना नाम की छोटी की रियासत मिली थी. इसके आसपास के हिस्सों में उसके रिश्तेदारों का कब्जा था. एक समय ऐसा भी आया जब वो रिसासत भी गंवानी पड़ती. एक के बाद उसकी कोशिशें नाकाम होती गईं. संघर्ष बढ़ता गया और एक दिन उसने भारत की ओर रुख किया. बाबर के मन में भारत आने का ख्याल कैसे आया, इसको लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. हालांकि ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि आर्थिक तंगी वो सबसे बड़ी वजह थी. काबुल में रहते हुए उसे धन की जरूरत थी. यही वजह थी कि कई बार सिंधु नदी को पार करे पश्चिमी हिस्से पर आक्रमण किया और धन लूटकर काबुल ले गया. नतीजा, उसकी जरूरत ही उसे खींचकर भारत ले आई. हालांकि, कहा यह भी जाता है कि उस दौर में भारत में इब्राहिम लोदी ने आतंक मचा रखा था. जिससे निपटने के लिए मेवाड़ के राणा सांगा ने बाबर को भारत आने के लिए आमंत्रित किया था. बाबर भारत आया और 1526 में पानीपत का प्रथम युद्ध लड़ा गया. जंग में बाबर ने इब्राहिम लोदी को शिकस्त दी. इसके बाद मुगल साम्राज्य की नींव रखी और अपना वर्चस्व कायम किया. जंग जीतने के ठीक एक साल बाद उसने खानवा के युद्ध में राणा सांगा को भी हरा दिया. पानीपत की जंग के बाद बाबर को जो कुछ धन हाथ लगा वो उसने रिश्तेदारों और अपने पदाधिकारियों को दे दिया. बाबर के व्यक्तित्व की एक खास बात यह भी रही कि उसने महिलाओं को अपने हर फैसलों में शामिल किया. उसके फैसलों और सलाह में मां और नानी तक शामिल रहती थीं. यही वजह है कि बाबरनामा में जितनी महिलाओं का जिक्र बाबर के कार्यकाल में किया गया है उतना मुगल साम्राज्य के किसी भी सम्राट के समय में नहीं हुआ. बाबर ने अपने बेटे हुमायूं के लिए जो वसीयतनामा तैयार किया था, उसमें कई बातें साफतौर पर लिखी थीं. बाबर ने लिखा- मेरे बेटे, धर्म के नाम पर कभी राजनीति मत करना. अपने दिल में धार्मिक नफरत को जगह न देना. लोगों की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखना. सबके साथ पूरा न्याय करना.
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव डालने वाले जहीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर का शुरुआती जीवन इतना ही मुश्किलों भरा रहा है. उसने अपनी आत्मकथा में लिखा है- मेरा ही देश मेरे हाथ में नहीं था. न वापस मिलने की उम्मीद थी. नौकरों ने भी साथ छोड़ दिया था. अपनी असफलताओं पर बाबर ने आत्मकथा में लिखा है- ताशकंद में रहने के दौरन मैं बेहद दुःखी था. मेरा ही देश मेरे हाथ में नहीं था. न उसे वापस मिलने की उम्मीद थी. नौकरों ने भी साथ छोड़ दिया था. जो साथ थे वो गरीबी के कारण मेरे संग घूम भी नहीं सकते थे. बेघर होने के बाद भटकते-भटकते थक गया हूं. चाहता हूं कहीं ऐसी जगह छिप जाऊं जहां लोग मुझे देख न सकें. बेइज्जत होने से बेहतर है इतना दूर चला जाऊं कि लोग पहचान ही न सकें. भारत में मुगल साम्राज्य की नींव डालने वाले जहीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर का शुरुआती जीवन इतना ही मुश्किलों भरा रहा है. मशहूर उपन्यासकार ईएम फोस्टर के मुताबिक, अपने संघर्षों को पार करके अंततः बाबर विजेता बना. भले ही उसे लुटेरा, अत्याचारी और दमनकारी कहा जाता था लेकिन उसने जिस तरह मुगल साम्राज्य की स्थापना की वो एक नजीर है. जिसकी शुरुआत एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में पानीपत की लड़ाई से की. जंग में इब्राहिम लोधी को हराकर भारत में नई सल्तनत की स्थापना की. ऐसी सल्तनत जिसमें दुनिया की दौलत का एक चौथाई हिस्सा था. बीबीसी की एक रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई इस्लाम के फेलो मुईन अहमद निजामी का कहना है कि फरगना की राजधानी अंदजान में जन्मेबाबर को उसके पिता उमर शेख से फरगना नाम की छोटी की रियासत मिली थी. इसके आसपास के हिस्सों में उसके रिश्तेदारों का कब्जा था. एक समय ऐसा भी आया जब वो रिसासत भी गंवानी पड़ती. एक के बाद उसकी कोशिशें नाकाम होती गईं. संघर्ष बढ़ता गया और एक दिन उसने भारत की ओर रुख किया. बाबर के मन में भारत आने का ख्याल कैसे आया, इसको लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. हालांकि ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि आर्थिक तंगी वो सबसे बड़ी वजह थी. काबुल में रहते हुए उसे धन की जरूरत थी. यही वजह थी कि कई बार सिंधु नदी को पार करे पश्चिमी हिस्से पर आक्रमण किया और धन लूटकर काबुल ले गया. नतीजा, उसकी जरूरत ही उसे खींचकर भारत ले आई. हालांकि, कहा यह भी जाता है कि उस दौर में भारत में इब्राहिम लोदी ने आतंक मचा रखा था. जिससे निपटने के लिए मेवाड़ के राणा सांगा ने बाबर को भारत आने के लिए आमंत्रित किया था. बाबर भारत आया और एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में पानीपत का प्रथम युद्ध लड़ा गया. जंग में बाबर ने इब्राहिम लोदी को शिकस्त दी. इसके बाद मुगल साम्राज्य की नींव रखी और अपना वर्चस्व कायम किया. जंग जीतने के ठीक एक साल बाद उसने खानवा के युद्ध में राणा सांगा को भी हरा दिया. पानीपत की जंग के बाद बाबर को जो कुछ धन हाथ लगा वो उसने रिश्तेदारों और अपने पदाधिकारियों को दे दिया. बाबर के व्यक्तित्व की एक खास बात यह भी रही कि उसने महिलाओं को अपने हर फैसलों में शामिल किया. उसके फैसलों और सलाह में मां और नानी तक शामिल रहती थीं. यही वजह है कि बाबरनामा में जितनी महिलाओं का जिक्र बाबर के कार्यकाल में किया गया है उतना मुगल साम्राज्य के किसी भी सम्राट के समय में नहीं हुआ. बाबर ने अपने बेटे हुमायूं के लिए जो वसीयतनामा तैयार किया था, उसमें कई बातें साफतौर पर लिखी थीं. बाबर ने लिखा- मेरे बेटे, धर्म के नाम पर कभी राजनीति मत करना. अपने दिल में धार्मिक नफरत को जगह न देना. लोगों की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखना. सबके साथ पूरा न्याय करना.
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल एक बार फिर कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की प्रशंसा कर उन्हें अपने पाले में खींचने की कोशिश की। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करते हुए कहा कि वे झूठी बातों का सहारा लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू जनता के लिए लगातार आवाजें उठा रहे हैं। वह अपने सिद्धांतों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में उन्हें ठीक से काम नहीं करने दिया जा रहा है। सीएम केजरीवाल ने संवाददाताओं को बताया कि दरअसल चन्नी सोमवार को एक सभा में मंच पर कह रहे थे कि "मैंने राज्य में रेत माफियाओं को खत्म कर दिया है और रेत की कीमतें 5 रुपये प्रति किलो तक कम कर दी हैं। इस पर तुरंत सिद्धू ने कहा, 'नहीं ... यह झूठ है। दर अभी भी 20 रुपये' है। " कहा कि उनकी बहादुरी को सलाम करता हूं। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा था कि पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर आम आदमी पार्टी (आप) सत्ता में आती है, तो राज्य में हर महिला के खाते में एक हजार रुपए प्रति माह भेजे जाएंगे। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को "नकली केजरीवाल" करार दिया। केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर उनके एजेंडे को लागू किए बिना नकल करने का भी आरोप लगाया। चन्नी का नाम लिए बिना आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि पंजाब में एक 'नकली केजरीवाल' घूम रहा है। केजरीवाल ने कहा, "मैं पंजाब में जो भी वादा करता हूं, वह भी दो दिनों के बाद उसी बात की घोषणा करते हैं। वह इसे लागू नहीं करते हैं क्योंकि वह नकली हैं। " मोगा से अपने दो दिवसीय पंजाब दौरे की शुरुआत करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह लोगों के लिए शून्य बिजली बिल सुनिश्चित कर सकते हैं।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल एक बार फिर कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की प्रशंसा कर उन्हें अपने पाले में खींचने की कोशिश की। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करते हुए कहा कि वे झूठी बातों का सहारा लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू जनता के लिए लगातार आवाजें उठा रहे हैं। वह अपने सिद्धांतों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में उन्हें ठीक से काम नहीं करने दिया जा रहा है। सीएम केजरीवाल ने संवाददाताओं को बताया कि दरअसल चन्नी सोमवार को एक सभा में मंच पर कह रहे थे कि "मैंने राज्य में रेत माफियाओं को खत्म कर दिया है और रेत की कीमतें पाँच रुपयापये प्रति किलो तक कम कर दी हैं। इस पर तुरंत सिद्धू ने कहा, 'नहीं ... यह झूठ है। दर अभी भी बीस रुपयापये' है। " कहा कि उनकी बहादुरी को सलाम करता हूं। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा था कि पंजाब में दो हज़ार बाईस में होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आती है, तो राज्य में हर महिला के खाते में एक हजार रुपए प्रति माह भेजे जाएंगे। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को "नकली केजरीवाल" करार दिया। केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर उनके एजेंडे को लागू किए बिना नकल करने का भी आरोप लगाया। चन्नी का नाम लिए बिना आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि पंजाब में एक 'नकली केजरीवाल' घूम रहा है। केजरीवाल ने कहा, "मैं पंजाब में जो भी वादा करता हूं, वह भी दो दिनों के बाद उसी बात की घोषणा करते हैं। वह इसे लागू नहीं करते हैं क्योंकि वह नकली हैं। " मोगा से अपने दो दिवसीय पंजाब दौरे की शुरुआत करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह लोगों के लिए शून्य बिजली बिल सुनिश्चित कर सकते हैं।
मुख्यालय में बेलगाम और तेज रफ्तार में भागते डंपरों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है। इससे कब कौन सा हादसा हो जाए, कहा नहीं जा सकता। बीते कुछ समय में डंपरों की तेज रफ्तार का कहर सड़क पर चलते जिंदगी पर टूटा है, लेकिन फिर भी रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है, जो चिंतनीय है। रविवार को तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ रहे डंपर का एकाएक स्टेयरिंग फेल हो गया और एक पेड़ से जा टकराया। जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जिस घटना में चालक और परिचालक बाल-बाल बच गए। घटना भरवेली थाना क्षेत्र अंतर्गत आंवलाझरी की है, जहां सड़क पर दौड़ रहे एक डंपर का स्टेयरिंग फेल हो गया और वह पेड़ से जा टकराया। बताया जाता है कि डंपर बालाघाट से भरवेली की ओर जा रहा था। जिसका स्टेयरिंग फेल होने से वह सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराकर रूक गया। रविवार को हुई इस घटना में डंपर के सामने का भाग पेड़ से टकराने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। हालांकि डंपर चालक और परिचालक को मामुली चोटें आई है और वह घटना में बाल-बाल बच गए। बालाघाट निवासी शाने कुरैशी (25) डंपर चला रहा था। जबकि उसके साथ परिचालक अनियाज कुरैशी बैठा था। जो डंपर (सीजी 08 एजी 2317) लेकर रविवार की सुबह किसी काम से भरवेली की ओर जा रहे थे। इस दौरान एकाएक आंवलाझरी के पास डंपर का स्टेयरिंग फेल हो गया और डंपर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराया। जिसकी जानकारी के बाद भरवेली पुलिस ने डंपर को घटनास्थल से हटाकर यातायात की व्यवस्था को सुचारू किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुख्यालय में बेलगाम और तेज रफ्तार में भागते डंपरों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है। इससे कब कौन सा हादसा हो जाए, कहा नहीं जा सकता। बीते कुछ समय में डंपरों की तेज रफ्तार का कहर सड़क पर चलते जिंदगी पर टूटा है, लेकिन फिर भी रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है, जो चिंतनीय है। रविवार को तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ रहे डंपर का एकाएक स्टेयरिंग फेल हो गया और एक पेड़ से जा टकराया। जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जिस घटना में चालक और परिचालक बाल-बाल बच गए। घटना भरवेली थाना क्षेत्र अंतर्गत आंवलाझरी की है, जहां सड़क पर दौड़ रहे एक डंपर का स्टेयरिंग फेल हो गया और वह पेड़ से जा टकराया। बताया जाता है कि डंपर बालाघाट से भरवेली की ओर जा रहा था। जिसका स्टेयरिंग फेल होने से वह सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराकर रूक गया। रविवार को हुई इस घटना में डंपर के सामने का भाग पेड़ से टकराने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। हालांकि डंपर चालक और परिचालक को मामुली चोटें आई है और वह घटना में बाल-बाल बच गए। बालाघाट निवासी शाने कुरैशी डंपर चला रहा था। जबकि उसके साथ परिचालक अनियाज कुरैशी बैठा था। जो डंपर लेकर रविवार की सुबह किसी काम से भरवेली की ओर जा रहे थे। इस दौरान एकाएक आंवलाझरी के पास डंपर का स्टेयरिंग फेल हो गया और डंपर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराया। जिसकी जानकारी के बाद भरवेली पुलिस ने डंपर को घटनास्थल से हटाकर यातायात की व्यवस्था को सुचारू किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कपिल शर्मा कॉमेडी जगत का एक जाना - पहचाना नाम हैं। 2013 से शुरू हुए अपने शो 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' से कपिल ने कॉमेडी की दुनिया में अपना बहुत नाम कमाया। कलर्स टीवी का यह शो साल 2016 तक चला फिर उसी साल कपिल ने सोनी टीवी पर उसी तरह का एक और शो, 'द कपिल शर्मा शो' शुरू किया जो आज भी दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के एपिसोड्स अब भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। इस पर माधुरी कहती हैं, 'कॉमेडी नाइट्स है तो कॉमेडी करो न, गाना क्यों गा रहे हो बीच - बीच में। और तुमने देखा वो अपनी वाइफ को कैसे ट्रीट करते हैं। मुझे लगता है डंडे मारने चाहिए, दो - चार डंडे मारने चाहिए। ' इस पर जूही कहती हैं कि डंडे के अलावा और क्या हो सकता है? माधुरी का जवाब होता है, ' चाकू हो सकता है, सिकल (हंसिया) हो सकता है। ' इस पर कपिल शर्मा फोन उठाकर कहते हैं, 'हैलो! पुलिस स्टेशन, यहां पर दो खूबसूरत औरतें आईं हैं, वो हैं बड़ी खूबसूरत, इरादे बड़े गंदे हैं उनके। मारने की बातें कर रही हैं वो। ' कपिल शर्मा हंसी में कहते हैं कि मुझसे बड़ी गलती हो गई ये टॉपिक्स छेड़ कर।
कपिल शर्मा कॉमेडी जगत का एक जाना - पहचाना नाम हैं। दो हज़ार तेरह से शुरू हुए अपने शो 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' से कपिल ने कॉमेडी की दुनिया में अपना बहुत नाम कमाया। कलर्स टीवी का यह शो साल दो हज़ार सोलह तक चला फिर उसी साल कपिल ने सोनी टीवी पर उसी तरह का एक और शो, 'द कपिल शर्मा शो' शुरू किया जो आज भी दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के एपिसोड्स अब भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। इस पर माधुरी कहती हैं, 'कॉमेडी नाइट्स है तो कॉमेडी करो न, गाना क्यों गा रहे हो बीच - बीच में। और तुमने देखा वो अपनी वाइफ को कैसे ट्रीट करते हैं। मुझे लगता है डंडे मारने चाहिए, दो - चार डंडे मारने चाहिए। ' इस पर जूही कहती हैं कि डंडे के अलावा और क्या हो सकता है? माधुरी का जवाब होता है, ' चाकू हो सकता है, सिकल हो सकता है। ' इस पर कपिल शर्मा फोन उठाकर कहते हैं, 'हैलो! पुलिस स्टेशन, यहां पर दो खूबसूरत औरतें आईं हैं, वो हैं बड़ी खूबसूरत, इरादे बड़े गंदे हैं उनके। मारने की बातें कर रही हैं वो। ' कपिल शर्मा हंसी में कहते हैं कि मुझसे बड़ी गलती हो गई ये टॉपिक्स छेड़ कर।
नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चूहा काफी सुर्खियां बटोर रहा है वैसे आपने रियल लाइफ में चूहे तो देखे होंगे कि किस तरह घरों में उछल कूद करते हैं साथ ही उनके कारनामों की कहानियां भी सुनी होंगी हम आपको ऐसे चूहे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नाम गस है और उसके कारनामे बताएंगे तो हैरान हो जाएंगे गस नाम के इस चूहे ने अपने छोटे छोटे पैरों से खूबसूरत पेंटिंग बनाई है गस के द्वारा बनाई गई पेंटिंग दुनिया भर में अब तक हजारों रुपए में बेची जा चुकी है। द सन के अनुसार, गस ने पहली बार अपना रुख कला की ओर दिखाया था इस दौरान उनके मालिक जेस इंडसथ ने उसे अपनी कला के अनुसार ढील छोड़ दिया बीते दिनों मैनचेस्टर के 19 वर्षीय व्यक्ति ने इस चूहे को अपने पंजे पर कागज और पेंट के साथ कुछ कर दिखाने को कहा गस ने जैसे ही उस काम को कर दिखाया वह हैरान हो गया। बता दें जेस इंडसथ के पास चार ऐसे और भी चूहे है उन्होंने गस के इस कलाकारी को बाजार में ऑनलाइन बिक्री के लिए उतार दिया अब तक जेस इंडसथ को कई बुकिंग भी मिल चुके है ग्राहकों ने गस द्वारा बनाई गई पेंटिंग को खरीदने में काफी रुची भी दिखाई जेस इंडसथ को एक पेंटिंग के लिए करीब 20 पाउंड मिलते है। इन दिनों गस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें यह चूहा अपना काम करता हुआ दिखाई दे रहा है।
नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चूहा काफी सुर्खियां बटोर रहा है वैसे आपने रियल लाइफ में चूहे तो देखे होंगे कि किस तरह घरों में उछल कूद करते हैं साथ ही उनके कारनामों की कहानियां भी सुनी होंगी हम आपको ऐसे चूहे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नाम गस है और उसके कारनामे बताएंगे तो हैरान हो जाएंगे गस नाम के इस चूहे ने अपने छोटे छोटे पैरों से खूबसूरत पेंटिंग बनाई है गस के द्वारा बनाई गई पेंटिंग दुनिया भर में अब तक हजारों रुपए में बेची जा चुकी है। द सन के अनुसार, गस ने पहली बार अपना रुख कला की ओर दिखाया था इस दौरान उनके मालिक जेस इंडसथ ने उसे अपनी कला के अनुसार ढील छोड़ दिया बीते दिनों मैनचेस्टर के उन्नीस वर्षीय व्यक्ति ने इस चूहे को अपने पंजे पर कागज और पेंट के साथ कुछ कर दिखाने को कहा गस ने जैसे ही उस काम को कर दिखाया वह हैरान हो गया। बता दें जेस इंडसथ के पास चार ऐसे और भी चूहे है उन्होंने गस के इस कलाकारी को बाजार में ऑनलाइन बिक्री के लिए उतार दिया अब तक जेस इंडसथ को कई बुकिंग भी मिल चुके है ग्राहकों ने गस द्वारा बनाई गई पेंटिंग को खरीदने में काफी रुची भी दिखाई जेस इंडसथ को एक पेंटिंग के लिए करीब बीस पाउंड मिलते है। इन दिनों गस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें यह चूहा अपना काम करता हुआ दिखाई दे रहा है।
नालागढ़ - औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के खेत खूब सोने उगलेंगे और चारों ओर खूब हरियाली छाएगी, जिससे किसानों के खेतों के लिए पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। खासकर रेनफेड एरिया वाले किसानों को आईपीएच नालागढ़ मंडल द्वारा बीबीएन में स्थापित हो रहे 47 ट्यूबवेल का लाभ मिलेगा, जिसके तहत 44 ट्यूबवेलों के बोर का काम पूरा हो चुका है, जबकि तीन ट्यूबवेल बोर की ड्रिलिंग का कार्य युद्धस्तर पर चला हुआ है। बीबीएन में स्थापित हो रहे इन ट्यूबवेलों के बोर होने के उपरांत आईपीएच नालागढ़ ने कई ट्यूबवेलों के वर्किंग एस्टीमेट भी उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दिए है। नाबार्ड से स्वीकृत इन ट्यूबवेलों से बीबीएन क्षेत्र के किसानों की सिंचाई की पेश आ रही दिक्कत हल होगी। जानकारी के अनुसार नालागढ़ उपमंडल के तहत बीबीएन क्षेत्र में स्थापित हो रहे 47 ट्यूबवेल जमीनों को खूब पानी देंगे। रेनफेड एरिया की जमीनों के लिए यह ट्यूबवेल वरदान साबित होंगे, जिससे किसानों की फसलों की पैदावार बढ़ेगी। किसानों को खेती के लिए सिंचाई सुविधा प्रदान करने और किसानों के खेतों को फसलों को लहलहाने के दृष्टिगत आईपीएच विभाग नालागढ़ ने प्रोपोजल तैयार करके इसे स्वीकृति के लिए नाबार्ड भेजा था। यह ट्यूबवेल क्षेत्र की हजारों बीघा भूमि सिंचित करेंगे, जिससे प्यासी धरती को भरपूर पानी मिलेगा और खेतों में फसल लहलहाएंगी। सूत्रों के अनुसार सिंचाई सुविधा वाली 4861 हेक्टेयर भूमि के अंतर्गत मंझौली, राजपुरा, ढांग, जगातखाना, निहली ढांग, ढाणा, सनेड़, भाटियां, दभोटा, नवांग्राम, पंजैहरा, जोघों, जगतपुर, बैरछा, बघेरी, खिल्लियां, घोलोंवाल, करसौली, गुल्लरवाला, बरूणा आदि कई गांव आते हैं, जबकि रेनफेड एरिया में मित्तियां, मैथल, रतवाड़ी, बारियां, रामशहर, थयोड़ा आदि कई गांव आते है, जो बारिश पर निर्भर रहते हैं। आईपीएच नालागढ़ मंडल लोगों को पेयजल व सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयासरत है और जहां पेयजल की कई योजनाएं विभाग ने चलाई है, वहीं सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया करवाने के लिए ट्यूबवेल आदि स्थापित कर रहा है। नालागढ़ उपमंडल के कई ऐसे गांव है, जो बारिश पर निर्भर करते हैं और अन्य कोई स्त्रोत न होने के कारण किसानों को फसलों में नुकसान झेलना पड़ता है। किसानों को लाभ पहुंचाने और किसानों के खेतों में अच्छी पैदावार बढ़ाने के दृष्टिगत आईपीएच नालागढ़ मंडल नाबार्ड के माध्यम से 47 ट्यूबवेल स्थापित कर रहा है। आईपीएच नालागढ़ मंडल के एक्सईएन विजय ढटवालिया ने कहा कि नाबार्ड से आईपीएच नालागढ़ मंडल में स्वीकृत 47 ट्यूबवेलों में से 44 के बोर हो चुके है और तीन की ड्रिलिंग का कार्य जोरों पर चला हुआ है। उन्होंने कहा कि कई ट्यूबवेलों को वर्किंग एस्टीमेट में भी मंजूरी के लिए भेज दिए गए है।
नालागढ़ - औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के खेत खूब सोने उगलेंगे और चारों ओर खूब हरियाली छाएगी, जिससे किसानों के खेतों के लिए पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। खासकर रेनफेड एरिया वाले किसानों को आईपीएच नालागढ़ मंडल द्वारा बीबीएन में स्थापित हो रहे सैंतालीस ट्यूबवेल का लाभ मिलेगा, जिसके तहत चौंतालीस ट्यूबवेलों के बोर का काम पूरा हो चुका है, जबकि तीन ट्यूबवेल बोर की ड्रिलिंग का कार्य युद्धस्तर पर चला हुआ है। बीबीएन में स्थापित हो रहे इन ट्यूबवेलों के बोर होने के उपरांत आईपीएच नालागढ़ ने कई ट्यूबवेलों के वर्किंग एस्टीमेट भी उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दिए है। नाबार्ड से स्वीकृत इन ट्यूबवेलों से बीबीएन क्षेत्र के किसानों की सिंचाई की पेश आ रही दिक्कत हल होगी। जानकारी के अनुसार नालागढ़ उपमंडल के तहत बीबीएन क्षेत्र में स्थापित हो रहे सैंतालीस ट्यूबवेल जमीनों को खूब पानी देंगे। रेनफेड एरिया की जमीनों के लिए यह ट्यूबवेल वरदान साबित होंगे, जिससे किसानों की फसलों की पैदावार बढ़ेगी। किसानों को खेती के लिए सिंचाई सुविधा प्रदान करने और किसानों के खेतों को फसलों को लहलहाने के दृष्टिगत आईपीएच विभाग नालागढ़ ने प्रोपोजल तैयार करके इसे स्वीकृति के लिए नाबार्ड भेजा था। यह ट्यूबवेल क्षेत्र की हजारों बीघा भूमि सिंचित करेंगे, जिससे प्यासी धरती को भरपूर पानी मिलेगा और खेतों में फसल लहलहाएंगी। सूत्रों के अनुसार सिंचाई सुविधा वाली चार हज़ार आठ सौ इकसठ हेक्टेयर भूमि के अंतर्गत मंझौली, राजपुरा, ढांग, जगातखाना, निहली ढांग, ढाणा, सनेड़, भाटियां, दभोटा, नवांग्राम, पंजैहरा, जोघों, जगतपुर, बैरछा, बघेरी, खिल्लियां, घोलोंवाल, करसौली, गुल्लरवाला, बरूणा आदि कई गांव आते हैं, जबकि रेनफेड एरिया में मित्तियां, मैथल, रतवाड़ी, बारियां, रामशहर, थयोड़ा आदि कई गांव आते है, जो बारिश पर निर्भर रहते हैं। आईपीएच नालागढ़ मंडल लोगों को पेयजल व सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयासरत है और जहां पेयजल की कई योजनाएं विभाग ने चलाई है, वहीं सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया करवाने के लिए ट्यूबवेल आदि स्थापित कर रहा है। नालागढ़ उपमंडल के कई ऐसे गांव है, जो बारिश पर निर्भर करते हैं और अन्य कोई स्त्रोत न होने के कारण किसानों को फसलों में नुकसान झेलना पड़ता है। किसानों को लाभ पहुंचाने और किसानों के खेतों में अच्छी पैदावार बढ़ाने के दृष्टिगत आईपीएच नालागढ़ मंडल नाबार्ड के माध्यम से सैंतालीस ट्यूबवेल स्थापित कर रहा है। आईपीएच नालागढ़ मंडल के एक्सईएन विजय ढटवालिया ने कहा कि नाबार्ड से आईपीएच नालागढ़ मंडल में स्वीकृत सैंतालीस ट्यूबवेलों में से चौंतालीस के बोर हो चुके है और तीन की ड्रिलिंग का कार्य जोरों पर चला हुआ है। उन्होंने कहा कि कई ट्यूबवेलों को वर्किंग एस्टीमेट में भी मंजूरी के लिए भेज दिए गए है।
नार्थ-ईस्ट दिल्ली में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी की खबर है। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान इलाके में मार्च कर रहे हैं। शाहरुख ने सोमवार को मौजपुर-जाफराबाद सड़क पर ताबड़तोड़ कई राउंड फायर किए थे। उसने करीब 8 राउंड फायर किए। इस दौरान एक पुलिसवाले ने उसे रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं रूका और फायर करते रहा। CAA का विरोध करने वाली यह भीड़ इतनी 'शांतिप्रिय' है कि इसने आज पेट्रोल पम्प से लेकर बाइक, ऑटो, रिक्शा आदि को आग के हवाले कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया, जिसने 8 राउंड फायरिंग भी की। आज ही कई मेट्रो स्टेशंस के पास मुस्लिमों को अपने बोरिया-बिस्तरों के साथ इकट्ठा होते हुए भी देखा जा रहा है। पूछने पर पता चला कि किसी 'दुआ' के लिए सभी लोग इकट्ठे हो रहे हैं। जाफराबाद में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया। जानकारी के मुताबिक, उसने 8 राउंड फायरिंग भी की। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर ट्रैफिक जाम करने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की। महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई। अग्निश्मन दस्ते को मौके पर पहुॅंचने से रोका गया। फरीदाबाद सड़क खोलने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सरिता विहार जसोला आदि इलाके के लोगों का कहना है कि जब तक फरीदाबाद की सड़क नहीं खुलती, वो शाहीन बाग़ मेट्रो स्टेशन को जाने वाली सड़क बंद रखेंगे। वामपंथियों के पास मूर्खों को छोड़ कर और कोई होता भी नहीं। या और गहरे उतरें तो यह कहना भी शास्त्रोचित है कि वामपंथी मूर्ख ही होते हैं। ये बात और है कि उन्हें अंत काल तक अपने मूढ़मति होने का पता नहीं चल पाता। रविवार की सुबह बड़ी संख्या में मौके पर पहुँची महिलाओं ने सड़क को जाम कर दिया। इसी बीच स्थित तब तनावपूर्ण हो गई कि जब मौजपुर में सीएए के समर्थन में सड़कों पर पहुँचकर लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कुछ ही देर में दोनों और से पत्थरबाजी शुरू हो गई। अक्ल वितरण के कुछ दिन बाद अचानक 'इंटरनेट लिबरल्स' बिरियानी बाग़ में धरना देते देखे गए। जब पत्रकार उन तक पहुँचे तो लेफ्ट-लिबरल्स गिरोह ने कहा- "हमारा मकसद नागरिकता कानून नहीं, बल्कि कॉमन सेन्स और अक्ल वितरण में किया गया पक्षपात का विरोध है। " एक यूजर ने तो पूरे गैंग की ही पोल खोल दी और लिखा, "JNU वालों में ये ख़ास खूबी है कि ये जो चीज नहीं होती उसे भी देख लेते हैं, जैसे नकाब के पीछे ABVP 'गुंडे', बिना ड्राफ्ट के NRC. . . । "
नार्थ-ईस्ट दिल्ली में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी की खबर है। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान इलाके में मार्च कर रहे हैं। शाहरुख ने सोमवार को मौजपुर-जाफराबाद सड़क पर ताबड़तोड़ कई राउंड फायर किए थे। उसने करीब आठ राउंड फायर किए। इस दौरान एक पुलिसवाले ने उसे रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं रूका और फायर करते रहा। CAA का विरोध करने वाली यह भीड़ इतनी 'शांतिप्रिय' है कि इसने आज पेट्रोल पम्प से लेकर बाइक, ऑटो, रिक्शा आदि को आग के हवाले कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया, जिसने आठ राउंड फायरिंग भी की। आज ही कई मेट्रो स्टेशंस के पास मुस्लिमों को अपने बोरिया-बिस्तरों के साथ इकट्ठा होते हुए भी देखा जा रहा है। पूछने पर पता चला कि किसी 'दुआ' के लिए सभी लोग इकट्ठे हो रहे हैं। जाफराबाद में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया। जानकारी के मुताबिक, उसने आठ राउंड फायरिंग भी की। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर ट्रैफिक जाम करने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की। महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई। अग्निश्मन दस्ते को मौके पर पहुॅंचने से रोका गया। फरीदाबाद सड़क खोलने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सरिता विहार जसोला आदि इलाके के लोगों का कहना है कि जब तक फरीदाबाद की सड़क नहीं खुलती, वो शाहीन बाग़ मेट्रो स्टेशन को जाने वाली सड़क बंद रखेंगे। वामपंथियों के पास मूर्खों को छोड़ कर और कोई होता भी नहीं। या और गहरे उतरें तो यह कहना भी शास्त्रोचित है कि वामपंथी मूर्ख ही होते हैं। ये बात और है कि उन्हें अंत काल तक अपने मूढ़मति होने का पता नहीं चल पाता। रविवार की सुबह बड़ी संख्या में मौके पर पहुँची महिलाओं ने सड़क को जाम कर दिया। इसी बीच स्थित तब तनावपूर्ण हो गई कि जब मौजपुर में सीएए के समर्थन में सड़कों पर पहुँचकर लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कुछ ही देर में दोनों और से पत्थरबाजी शुरू हो गई। अक्ल वितरण के कुछ दिन बाद अचानक 'इंटरनेट लिबरल्स' बिरियानी बाग़ में धरना देते देखे गए। जब पत्रकार उन तक पहुँचे तो लेफ्ट-लिबरल्स गिरोह ने कहा- "हमारा मकसद नागरिकता कानून नहीं, बल्कि कॉमन सेन्स और अक्ल वितरण में किया गया पक्षपात का विरोध है। " एक यूजर ने तो पूरे गैंग की ही पोल खोल दी और लिखा, "JNU वालों में ये ख़ास खूबी है कि ये जो चीज नहीं होती उसे भी देख लेते हैं, जैसे नकाब के पीछे ABVP 'गुंडे', बिना ड्राफ्ट के NRC. . . । "
प्रिंस हैरी (Prince Harry) और मेगन मर्केल (Meghan Markel) के इंटरव्यू में जिस तरह के खुलासे हुए हैं. उसने शाही परिवार के भीतर होने वाली गतिविधियों को काफी हद तक दुनिया के सामने रखा है. ब्रिटेन के प्रिंस हैरी (Prince Harry) और मेगन मर्केल (Meghan Markel) के इंटरव्यू सामने आने के बाद हर जगह शाही परिवार (Royal Family) की चर्चा हो रही है. इस इंटरव्यू में कुछ बड़े खुलासे किए गए हैं, जिन्हें लेकर शाही परिवार घेरे में है. इसमें सबसे बड़ा खुलासा नस्लभेद (Racism) को लेकर किया गया है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक शाही परिवार क्या आज भी पुरातन ख्यालों को लेकर आगे बढ़ रहा है. दो घंटे लंबे इस इंटरव्यू को दुनियाभर में करोड़ों लोगों ने देखा. मेगन ने ओपरा विन्फ्रे (Oprah Winfrey) को दिए इंटरव्यू में बताया कि किस तरह शाही परिवार में आने के बाद उन्हें मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा. जब उन्होंने इसके लिए मदद मांगी तो उन्हें मना कर दिया गया. मेगन ने बताया कि उन्हें मीडिया से हमेशा बचते रहना पड़ा. दूसरी ओर इसमें सबसे बड़ा खुलासा अपने बेटे आर्ची के रंग को लेकर किया. मेगन का खुलासा और बकिंघम पैलेस का खुलासा किसी सास-बहू ड्रामा सीरियल से कम नहीं रहा है. जहां एक ओर मेगन ने शाही परिवार से अलग होने के बाद इंटरव्यू में जिस तरह के खुलासे किए उनसे ऐसा लगा कि मेगन को शाही परिवार में कितनी तकलीफों का सामना करना पड़ा है. दूसरी ओर, जब बकिंघम पैलेस ने इन आरोपों पर अपनी सफाई देना शुरू किया तो ये जान पड़ा कि एक सास अपना पक्ष रखी हो. ऐसे में आइए इस पूरे घटनाक्रम को समझा जाए. हैरी-मेगन ने क्या खुलासा किया? मेगन मर्केल ने खुलासा किया कि उनके पति प्रिंस हैरी ने उनसे कहा कि परिवार में हमारे होने वाले बेटे के रंग को लेकर चर्चा हो रही है. डचेस ऑफ ससेक्स ने बताया कि परिवार में इस बात को लेकर बात हुई कि बच्चे की त्वचा का रंग कैसा होगा. इंटरव्यू के दौरान मेगन के सबसे चौंकाने वाले खुलासों में से एक यह था कि उनके बिगड़ते मानसिक स्वास्थ के लिए मदद लेने के उनके अनुरोध को ठुकरा दिया गया. उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि शाही परिवार की छवि साफ-सुथरी बनी रहे. लेकिन इसके चलते मुझे आत्महत्या के ख्याल आने लगे. हैरी ने बताया कि जिस तरह ब्रिटिश मीडिया मेगन के पीछे पड़ी. उससे लगने लगा कि कहीं इतिहास फिर से न दोहराया जाए. उनका इशारा प्रिंसेस डायना की मौत से था. हैरी और मेगन ने बताया कि उन दोनों ने अपनी टेलिवाइज्ड शादी समारोह से तीन पहले ही एक निजी समारोह में शादी कर ली थी. ये शादी कैंटरबरी के आर्कबिशप ने करवाई थी. इसे बारे में किसी को नहीं मालूम था. हैरी ने बताया कि जब उन्होंने अपने पिता प्रिंस चार्ल्स (Prince Charles) को बताया कि वह और मेगन शाही परिवार से अलग होना चाहते हैं, तो उनके पिता ने इसके बाद से उनसे बात करना बंद कर दिया. हैरी ने खुलास किया कि शाही परिवार ने पिछले साल उन्हें मिलने वाले पैसों को देना बंद कर दिया. इसके बाद उन्हें अपनी दिवंगत मां प्रिंसेस डायना द्वारा दिए गए पैसों से गुजारा चलाना पड़ा. बकिंघम पैलेस ने खुलासों पर क्या कहा? पहले तो बकिंघम पैलेस ने इस इंटरव्यू पर चुप्पी साधे रखी. लेकिन इसके बाद कहा कि शाही परिवार इन खुलासों से खासा दुखी है. ऐसे में ये बातें साफ होने लगी कि शाही परिवार की चकाचौंध रोशनी के पीछे आज भी बहुत अंधेरा है. बयान जारी कर कहा गया कि पूरा परिवार यह जानकर दुखी है कि हैरी और मेगन के लिए पिछले कुछ वर्ष कितने चुनौतीपूर्ण रहे हैं. नस्लवाद संबंधी मुद्दे चौंकाने वाले हैं. हैरी, मेगन और आर्ची परिवार के प्रिय सदस्य हैं. वहीं, प्रिंस विलियम ने अपने भाई प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ने नस्लभेद के आरोपों पर कहा कि उनका परिवार नस्लवाद का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करता है. दूसरी ओर, प्रिंस चार्ल्स ने नस्लवाद को लेकर हो रही तीखी बहस के दौरान इस पर टिप्पणी नहीं की. इसके अलावा, महारानी एलिजाबेथ ने भी इस मुद्दे पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. शाही परिवार के बाकी सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है. हैरी और मेगन के बेटे आर्ची के रंग को लेकर हुए खुलासे के बाद ओपरा विन्फ्रे ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आर्ची की त्वचा के रंग के बारे में ना तो महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और ना ही उनके पति प्रिंस फिलिप ने चिंता जताई थी. विनफ्रे ने जोर देते हुए कहा है कि हैरी इस बारे में स्पष्ट थे कि वह ना तो उनकी दादी (महारानी) थी और ना ही उनके दादा (फिलिप) थे, जो आर्ची की मिश्रित नस्ल वाली टिप्पणियों के पीछे थे. ऐसे में ये स्पष्ट हो गया कि शाही परिवार के दो सबसे वरिष्ठ सदस्यों ने ऐसी टिप्पणी नहीं की. मेगन मर्केल द्वारा लगाए गए आरोप और उस पर जिस तरह से शाही परिवार की तरफ से प्रतिक्रिया दी गई. वो बिल्कुल एक सास-बहू ड्रामा सीरियल की तरह था. जहां मेगन ने सीरियल की एक प्रताड़ित बहू की तरह बताया कि उन्हें शाही परिवार ने तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. वहीं, बकिंघम पैलेस ने सास की तरह अपना बचाव करते हुए कहा कि वह बेहद दुखी है. इस पूरे घटनाक्रम में मिर्च-मसाले की कमी नहीं थी. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना बॉलीवुड की फिल्म कभी खुशी कभी गम से कर दी. जिस तरह फिल्म में मुख्य किरदार को अपनी पत्नी संग परिवार छोड़ना पड़ता है. वैसा ही हैरी के साथ हुआ जब उन्हें मेगन संग शाही परिवार छोड़कर अमेरिका में बसना पड़ा. हैरी ने बताया कि उनके पिता ने उनसे बात करना बंद कर दिया. ऐसा ही फिल्म में होता है जब मुख्य हीरो के पिता उससे बात नहीं करते हैं.
प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल के इंटरव्यू में जिस तरह के खुलासे हुए हैं. उसने शाही परिवार के भीतर होने वाली गतिविधियों को काफी हद तक दुनिया के सामने रखा है. ब्रिटेन के प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल के इंटरव्यू सामने आने के बाद हर जगह शाही परिवार की चर्चा हो रही है. इस इंटरव्यू में कुछ बड़े खुलासे किए गए हैं, जिन्हें लेकर शाही परिवार घेरे में है. इसमें सबसे बड़ा खुलासा नस्लभेद को लेकर किया गया है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक शाही परिवार क्या आज भी पुरातन ख्यालों को लेकर आगे बढ़ रहा है. दो घंटे लंबे इस इंटरव्यू को दुनियाभर में करोड़ों लोगों ने देखा. मेगन ने ओपरा विन्फ्रे को दिए इंटरव्यू में बताया कि किस तरह शाही परिवार में आने के बाद उन्हें मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा. जब उन्होंने इसके लिए मदद मांगी तो उन्हें मना कर दिया गया. मेगन ने बताया कि उन्हें मीडिया से हमेशा बचते रहना पड़ा. दूसरी ओर इसमें सबसे बड़ा खुलासा अपने बेटे आर्ची के रंग को लेकर किया. मेगन का खुलासा और बकिंघम पैलेस का खुलासा किसी सास-बहू ड्रामा सीरियल से कम नहीं रहा है. जहां एक ओर मेगन ने शाही परिवार से अलग होने के बाद इंटरव्यू में जिस तरह के खुलासे किए उनसे ऐसा लगा कि मेगन को शाही परिवार में कितनी तकलीफों का सामना करना पड़ा है. दूसरी ओर, जब बकिंघम पैलेस ने इन आरोपों पर अपनी सफाई देना शुरू किया तो ये जान पड़ा कि एक सास अपना पक्ष रखी हो. ऐसे में आइए इस पूरे घटनाक्रम को समझा जाए. हैरी-मेगन ने क्या खुलासा किया? मेगन मर्केल ने खुलासा किया कि उनके पति प्रिंस हैरी ने उनसे कहा कि परिवार में हमारे होने वाले बेटे के रंग को लेकर चर्चा हो रही है. डचेस ऑफ ससेक्स ने बताया कि परिवार में इस बात को लेकर बात हुई कि बच्चे की त्वचा का रंग कैसा होगा. इंटरव्यू के दौरान मेगन के सबसे चौंकाने वाले खुलासों में से एक यह था कि उनके बिगड़ते मानसिक स्वास्थ के लिए मदद लेने के उनके अनुरोध को ठुकरा दिया गया. उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि शाही परिवार की छवि साफ-सुथरी बनी रहे. लेकिन इसके चलते मुझे आत्महत्या के ख्याल आने लगे. हैरी ने बताया कि जिस तरह ब्रिटिश मीडिया मेगन के पीछे पड़ी. उससे लगने लगा कि कहीं इतिहास फिर से न दोहराया जाए. उनका इशारा प्रिंसेस डायना की मौत से था. हैरी और मेगन ने बताया कि उन दोनों ने अपनी टेलिवाइज्ड शादी समारोह से तीन पहले ही एक निजी समारोह में शादी कर ली थी. ये शादी कैंटरबरी के आर्कबिशप ने करवाई थी. इसे बारे में किसी को नहीं मालूम था. हैरी ने बताया कि जब उन्होंने अपने पिता प्रिंस चार्ल्स को बताया कि वह और मेगन शाही परिवार से अलग होना चाहते हैं, तो उनके पिता ने इसके बाद से उनसे बात करना बंद कर दिया. हैरी ने खुलास किया कि शाही परिवार ने पिछले साल उन्हें मिलने वाले पैसों को देना बंद कर दिया. इसके बाद उन्हें अपनी दिवंगत मां प्रिंसेस डायना द्वारा दिए गए पैसों से गुजारा चलाना पड़ा. बकिंघम पैलेस ने खुलासों पर क्या कहा? पहले तो बकिंघम पैलेस ने इस इंटरव्यू पर चुप्पी साधे रखी. लेकिन इसके बाद कहा कि शाही परिवार इन खुलासों से खासा दुखी है. ऐसे में ये बातें साफ होने लगी कि शाही परिवार की चकाचौंध रोशनी के पीछे आज भी बहुत अंधेरा है. बयान जारी कर कहा गया कि पूरा परिवार यह जानकर दुखी है कि हैरी और मेगन के लिए पिछले कुछ वर्ष कितने चुनौतीपूर्ण रहे हैं. नस्लवाद संबंधी मुद्दे चौंकाने वाले हैं. हैरी, मेगन और आर्ची परिवार के प्रिय सदस्य हैं. वहीं, प्रिंस विलियम ने अपने भाई प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ने नस्लभेद के आरोपों पर कहा कि उनका परिवार नस्लवाद का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करता है. दूसरी ओर, प्रिंस चार्ल्स ने नस्लवाद को लेकर हो रही तीखी बहस के दौरान इस पर टिप्पणी नहीं की. इसके अलावा, महारानी एलिजाबेथ ने भी इस मुद्दे पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. शाही परिवार के बाकी सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है. हैरी और मेगन के बेटे आर्ची के रंग को लेकर हुए खुलासे के बाद ओपरा विन्फ्रे ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आर्ची की त्वचा के रंग के बारे में ना तो महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और ना ही उनके पति प्रिंस फिलिप ने चिंता जताई थी. विनफ्रे ने जोर देते हुए कहा है कि हैरी इस बारे में स्पष्ट थे कि वह ना तो उनकी दादी थी और ना ही उनके दादा थे, जो आर्ची की मिश्रित नस्ल वाली टिप्पणियों के पीछे थे. ऐसे में ये स्पष्ट हो गया कि शाही परिवार के दो सबसे वरिष्ठ सदस्यों ने ऐसी टिप्पणी नहीं की. मेगन मर्केल द्वारा लगाए गए आरोप और उस पर जिस तरह से शाही परिवार की तरफ से प्रतिक्रिया दी गई. वो बिल्कुल एक सास-बहू ड्रामा सीरियल की तरह था. जहां मेगन ने सीरियल की एक प्रताड़ित बहू की तरह बताया कि उन्हें शाही परिवार ने तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. वहीं, बकिंघम पैलेस ने सास की तरह अपना बचाव करते हुए कहा कि वह बेहद दुखी है. इस पूरे घटनाक्रम में मिर्च-मसाले की कमी नहीं थी. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना बॉलीवुड की फिल्म कभी खुशी कभी गम से कर दी. जिस तरह फिल्म में मुख्य किरदार को अपनी पत्नी संग परिवार छोड़ना पड़ता है. वैसा ही हैरी के साथ हुआ जब उन्हें मेगन संग शाही परिवार छोड़कर अमेरिका में बसना पड़ा. हैरी ने बताया कि उनके पिता ने उनसे बात करना बंद कर दिया. ऐसा ही फिल्म में होता है जब मुख्य हीरो के पिता उससे बात नहीं करते हैं.
Female Fitness: कोरोना के आतंक को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन है। जिसके कारण सभी दुकानें, पार्लर और जिम भी बंद हैं। वहीं फिटनेस का ख्याल रखते हुए महिलाओं ने घर पर ही एक्सरसाइज शुरू कर ही है। जिनमें से कुछ महिलाओं के एक्सपीरियंस हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं। जिसकी मदद से आप भी घर पर जिम वाली फिलिंग फील कर सकती हैं। Female Fitness: लाइफ स्टाइल संबंधित बीमारी आने के बाद लोगों में फिटनेस को लेकर जागरुकता बढ़ी है। कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो महामारी के पहले से ही अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं। लेकिन कोरोना ने जिम पर भी ताले लगवा दिए हैं। इस कारण विगत लंबे समय से जिम जाकर कसरत करने वाली महिलाएं अपने घरों पर ही अपनी फिटनेस का ख्याल रख रही हैं। महिलाओं का कहना है कि हम जिम में जितना वक्त बिताते हैं उतना ही समय घर पर भी कसरत के लिए देते हैं। जिम जाने के वक्त हम अपने आप को मुश्किल से घरों पर रोक कर रखते हैं और उसी समय पर कसरत शुरू करते हैं। महिलाएं इन दिनों अपने जिम को बहुत ही मिस कर रही हैं और घर पर ही मौजूद विभिन्न उपकरणों और जुगाड़ के माध्यम से अपनी कसरत जारी रखे हुए हैं। शहर की पूजा रहेल जोशी बताती हैं मैं टीन एज से ही जिम जा रही हूं। लॉकडाउन के समय भले ही जिम जाकर कसरत नहीं कर पा रही हूं, लेकिन उतना ही समय घर पर ही कसरत करती हूं। जिम में सभी प्रकार के सामान रहते हैं लेकिन घर पर नहीं। बहुत सी चीजों से भी आसानी से अपनी कसरत की जा सकती है। पूजा बताती हैं मैं हमेशा की तरह डेढ़ घंटे का समय इसके लिए निकाल रही हूं। फर्श, सीढ़ी, रस्सी, स्ट्रेचिंग बैंड, दुपट्टे व अन्य चीजों से मैं अपनी कसरत पूरी कर रही हूं। जिम और घर में सिर्फ सामान का अंतर होता है। हमारा लक्ष्य शारीरिक गतिविधि होना चाहिए। अपने कसरत को लंबे समय के लिए ब्रेक करने से हम काफी पीछे हो जाते हैं। पूजा शहर में एक जिम का संचालन भी करती हैं। शीतल उपाध्याय बताती हैं कि मैं पिछले 10 सालों से लगातार जिम जा रही हूं। अभी जिम के बजाए घर पर ही एक्सरसाइज कर रही हूं। हालांकि जिम जाने के समय के दौरान मैं बहुत मुश्किल से अपने आप को घर पर रोक पाती हूं। सुबह 9. 30 बजे से 11. 30 बजे तक मैं जिम में ही अपना समय बिताया करती थी। अब भी उतना ही समय अपने घर पर कसरत कर रही हूं और अपने बेटे को भी करवा रही हूं। शीतल बताती हैं कि जिम में सामान ज्यादा होता है और वहां जाने से लोगों को देखकर मोटिवेट होते हैं। लेकिन घर में इसके लिए स्वतः मोटिवेट होना पड़ता है। इस दौरान मैं वेट ट्रेनिंग के लिए ईंट, स्कूल बैग जैसे चीजों का इस्तेमाल करती हूं। साथ ही स्ट्रैचिंग के लिए बैंड, रस्सी व अन्य चीजों का उपयोग करती हूं। घर पर जिमिंग करते हुए मैं पहले की तरह की रूटीन फॉलो कर रही हूं, जिसमें कॉर्डियो, बैक, चेस्ट व अन्य कई तरह की कसरत शामिल है। शीतल उपाध्याय जेसीआई वामा कैपिटल में पदाधिकारी भी हैं। पचपेड़ी नाका निवासी श्वेता देवांगन एमबीए स्टूडेंट हैं। वे बताती हैं कि मैं बहुत समय से जिम जा रही हूं, लेकिन लॉकडाउन के कारण घर पर ही अपने फिटनेस का ध्यान रख रही हूं। श्वेता बताती हैं पहले की तरह अब भी उतना ही समय अपने कसरत के लिए दे रही हूं, जितना जिम में देती थी। इस दौरान में कई एनर्जेटिक कसरतों के साथ स्ट्रैचिंग, चेस्ट, बैक, कॉर्डियो व अन्य सभी तरह के वर्कआउट कर रही हूं। इसके लिए घर पर ही रखे कुछ सामानों का उपयोग कर रही हूं, जिससे मैं एक्टिव रहूं। सड्डू निवासी ज्योति साहू एक योग एक्सपर्ट हैं और सामान्य समय में पार्क में जाकर सामूहिक तौर पर योग किया करती थीं। लॉकडाउन ने उनकी भी दिनचर्या को थोड़ा प्रभावित किया है, लेकिन उनके योग को अधिक प्रभावित नहीं कर पाया है। ज्योति अब अपने घर पर ही हर दिन की तरह योग करती हैं और घर के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करती हैं। वे बताती हैं कि मैं सुबह पार्क में अन्य लोगों के साथ योग किया करती थी। लेकिन अब घर पर ही कर रही हूं, साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी अपने परिचितों को योग सीखा रही हूं।
Female Fitness: कोरोना के आतंक को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन है। जिसके कारण सभी दुकानें, पार्लर और जिम भी बंद हैं। वहीं फिटनेस का ख्याल रखते हुए महिलाओं ने घर पर ही एक्सरसाइज शुरू कर ही है। जिनमें से कुछ महिलाओं के एक्सपीरियंस हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं। जिसकी मदद से आप भी घर पर जिम वाली फिलिंग फील कर सकती हैं। Female Fitness: लाइफ स्टाइल संबंधित बीमारी आने के बाद लोगों में फिटनेस को लेकर जागरुकता बढ़ी है। कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो महामारी के पहले से ही अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं। लेकिन कोरोना ने जिम पर भी ताले लगवा दिए हैं। इस कारण विगत लंबे समय से जिम जाकर कसरत करने वाली महिलाएं अपने घरों पर ही अपनी फिटनेस का ख्याल रख रही हैं। महिलाओं का कहना है कि हम जिम में जितना वक्त बिताते हैं उतना ही समय घर पर भी कसरत के लिए देते हैं। जिम जाने के वक्त हम अपने आप को मुश्किल से घरों पर रोक कर रखते हैं और उसी समय पर कसरत शुरू करते हैं। महिलाएं इन दिनों अपने जिम को बहुत ही मिस कर रही हैं और घर पर ही मौजूद विभिन्न उपकरणों और जुगाड़ के माध्यम से अपनी कसरत जारी रखे हुए हैं। शहर की पूजा रहेल जोशी बताती हैं मैं टीन एज से ही जिम जा रही हूं। लॉकडाउन के समय भले ही जिम जाकर कसरत नहीं कर पा रही हूं, लेकिन उतना ही समय घर पर ही कसरत करती हूं। जिम में सभी प्रकार के सामान रहते हैं लेकिन घर पर नहीं। बहुत सी चीजों से भी आसानी से अपनी कसरत की जा सकती है। पूजा बताती हैं मैं हमेशा की तरह डेढ़ घंटे का समय इसके लिए निकाल रही हूं। फर्श, सीढ़ी, रस्सी, स्ट्रेचिंग बैंड, दुपट्टे व अन्य चीजों से मैं अपनी कसरत पूरी कर रही हूं। जिम और घर में सिर्फ सामान का अंतर होता है। हमारा लक्ष्य शारीरिक गतिविधि होना चाहिए। अपने कसरत को लंबे समय के लिए ब्रेक करने से हम काफी पीछे हो जाते हैं। पूजा शहर में एक जिम का संचालन भी करती हैं। शीतल उपाध्याय बताती हैं कि मैं पिछले दस सालों से लगातार जिम जा रही हूं। अभी जिम के बजाए घर पर ही एक्सरसाइज कर रही हूं। हालांकि जिम जाने के समय के दौरान मैं बहुत मुश्किल से अपने आप को घर पर रोक पाती हूं। सुबह नौ. तीस बजे से ग्यारह. तीस बजे तक मैं जिम में ही अपना समय बिताया करती थी। अब भी उतना ही समय अपने घर पर कसरत कर रही हूं और अपने बेटे को भी करवा रही हूं। शीतल बताती हैं कि जिम में सामान ज्यादा होता है और वहां जाने से लोगों को देखकर मोटिवेट होते हैं। लेकिन घर में इसके लिए स्वतः मोटिवेट होना पड़ता है। इस दौरान मैं वेट ट्रेनिंग के लिए ईंट, स्कूल बैग जैसे चीजों का इस्तेमाल करती हूं। साथ ही स्ट्रैचिंग के लिए बैंड, रस्सी व अन्य चीजों का उपयोग करती हूं। घर पर जिमिंग करते हुए मैं पहले की तरह की रूटीन फॉलो कर रही हूं, जिसमें कॉर्डियो, बैक, चेस्ट व अन्य कई तरह की कसरत शामिल है। शीतल उपाध्याय जेसीआई वामा कैपिटल में पदाधिकारी भी हैं। पचपेड़ी नाका निवासी श्वेता देवांगन एमबीए स्टूडेंट हैं। वे बताती हैं कि मैं बहुत समय से जिम जा रही हूं, लेकिन लॉकडाउन के कारण घर पर ही अपने फिटनेस का ध्यान रख रही हूं। श्वेता बताती हैं पहले की तरह अब भी उतना ही समय अपने कसरत के लिए दे रही हूं, जितना जिम में देती थी। इस दौरान में कई एनर्जेटिक कसरतों के साथ स्ट्रैचिंग, चेस्ट, बैक, कॉर्डियो व अन्य सभी तरह के वर्कआउट कर रही हूं। इसके लिए घर पर ही रखे कुछ सामानों का उपयोग कर रही हूं, जिससे मैं एक्टिव रहूं। सड्डू निवासी ज्योति साहू एक योग एक्सपर्ट हैं और सामान्य समय में पार्क में जाकर सामूहिक तौर पर योग किया करती थीं। लॉकडाउन ने उनकी भी दिनचर्या को थोड़ा प्रभावित किया है, लेकिन उनके योग को अधिक प्रभावित नहीं कर पाया है। ज्योति अब अपने घर पर ही हर दिन की तरह योग करती हैं और घर के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करती हैं। वे बताती हैं कि मैं सुबह पार्क में अन्य लोगों के साथ योग किया करती थी। लेकिन अब घर पर ही कर रही हूं, साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी अपने परिचितों को योग सीखा रही हूं।
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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए कृषि कानून को लेकर किसान बीते दो महीने से ज्यादा समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एक ओर किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं सरकार भी जिद पर अड़ी है। दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, इस बीच आंदोलन पर इंटरनेशनल पॉप स्टार रिहाना ने प्रतिक्रिया दी है। रिहाना ने किसानों के समर्थन में ट्वीट किया है, जिसे लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रणौत नेे हमला किया है। रिहाना ने दिल्ली के बाहरी इलाकों में विरोध कर रहे किसानों को अपना समर्थन दिया है और आंदोलन को रोकने के लिए इंटरनेट बंद करने की निंदा की है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर किसान आंदोलन से जुड़ी एक रिपोर्ट साझा की है। इसमें किसानों के पुलिस के साथ टकराव के चलते इंटरनेट सेवा बंद होने का जिक्र है। इस रिपोर्ट के साथ उन्होंने लिखा, 'हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? ' इसपर कंगना रणौत ने रिहाना को जवाब देते हुए लिखा, 'कोई भी इसके बारे में बात नहीं कर रहा है क्योंकि वे किसान नहीं है बल्कि आतंकवादी हैं जो भारत को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि चीन हमारे टूटे हुए राष्ट्र पर कब्जा कर सके और इसे यूएसए की तरह एक चाइनीज कॉलोनी बना सके। तुम मूर्ख बनकर बैठो, हम अपने राष्ट्र को ऐसे नहीं बेच रहे हैं जैसे तुम डमी लोग करते हो। ' गौरतलब है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाली रिहाना पहली सेलिब्रिटी नहीं हैं। इससे पहले सोनम कपूर, प्रियंका चोपड़ा, दिलजीत दोसांज, स्वरा भास्कर सहित तमाम सिलेब्स ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को समर्थन दिया है। दूसरी ओर, कंगना शुरूआत से ही किसान आंदोलन का विरोध कर रही हैं। बता दें कि रिहाना एक इंटरनेशनल स्टार हैं। उनका भारत के किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया देना कोई छोटी बात नहीं है। उधर, किसान आंदोलन की बात करें तो किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और पिछले कुछ समय से बॉर्डर पर पुलिस की तैनाती और बढ़ा दी गई है।
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए कृषि कानून को लेकर किसान बीते दो महीने से ज्यादा समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एक ओर किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं सरकार भी जिद पर अड़ी है। दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, इस बीच आंदोलन पर इंटरनेशनल पॉप स्टार रिहाना ने प्रतिक्रिया दी है। रिहाना ने किसानों के समर्थन में ट्वीट किया है, जिसे लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रणौत नेे हमला किया है। रिहाना ने दिल्ली के बाहरी इलाकों में विरोध कर रहे किसानों को अपना समर्थन दिया है और आंदोलन को रोकने के लिए इंटरनेट बंद करने की निंदा की है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर किसान आंदोलन से जुड़ी एक रिपोर्ट साझा की है। इसमें किसानों के पुलिस के साथ टकराव के चलते इंटरनेट सेवा बंद होने का जिक्र है। इस रिपोर्ट के साथ उन्होंने लिखा, 'हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? ' इसपर कंगना रणौत ने रिहाना को जवाब देते हुए लिखा, 'कोई भी इसके बारे में बात नहीं कर रहा है क्योंकि वे किसान नहीं है बल्कि आतंकवादी हैं जो भारत को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि चीन हमारे टूटे हुए राष्ट्र पर कब्जा कर सके और इसे यूएसए की तरह एक चाइनीज कॉलोनी बना सके। तुम मूर्ख बनकर बैठो, हम अपने राष्ट्र को ऐसे नहीं बेच रहे हैं जैसे तुम डमी लोग करते हो। ' गौरतलब है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाली रिहाना पहली सेलिब्रिटी नहीं हैं। इससे पहले सोनम कपूर, प्रियंका चोपड़ा, दिलजीत दोसांज, स्वरा भास्कर सहित तमाम सिलेब्स ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को समर्थन दिया है। दूसरी ओर, कंगना शुरूआत से ही किसान आंदोलन का विरोध कर रही हैं। बता दें कि रिहाना एक इंटरनेशनल स्टार हैं। उनका भारत के किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया देना कोई छोटी बात नहीं है। उधर, किसान आंदोलन की बात करें तो किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और पिछले कुछ समय से बॉर्डर पर पुलिस की तैनाती और बढ़ा दी गई है।
कसौली - लगातार दो दिनों से हो रही भारी बारिश से कसौली वाया जंगेशु परवाणू सड़क पर भू-खलन होने के कारण सड़क मार्ग बंद हो गया है, जिसकी वजह से सैकड़ों गाडि़यां अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही है। जानकारी के मुताबिक सेक्टर चार परवाणू के समीप नरयाल गांव के साथ काफी दिनों से पहाड़ी दरकने से बार-बार बड़ी मात्रा में लैंड स्लाइड हो रहा है, जिसके कारण सडक बंद हो रही है। परवाणू उपमंडल लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता एचएस ठाकुर ने बताया कि वह सभी सड़कों को खोले रखने के हर संभव प्रयास जारी हैं, लेकिन कसौली के नरयाल गांव के पास पहाड़ी ही दरकने के बजह से सड़क अवरुद्ध हो रही है जिसको युद्धस्तर पर खोलने का कार्य जारी है। बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए सभी कर्मचारियों की छुट्टी को भी रद्द किया गया है। बहरहाल, भारी बरसात के तांडव ने कसौली लोक निर्माण विभाग अभी तक करोड़ों रुपए पर पानी फेर दिया है । जानकारों के मुताबिक कसौली मंडल के अंतर्गत लगभग 700 किलोमीटर सड़कों को दोबारा दुरुस्त करने के लिए समय के साथ करोड़ों रुपए की जरूरत है। मंडल कार्यालय से जानकारी के मुताबिक अभी तक सरकार की ओर से 30 लाख रुपए की धनराशि प्राकृतिक आपदा में सड़कों के सुधार के लिए प्राप्त हुई है । गौरतलब हो कि कसौली मंडल के अंतर्गत तीन उपमंडल आते हैं, जिनमें दो विधानसभा के क्षेत्र की सड़कें आती हैं । बरहाल भारी वर्षा जारी रहने से सड़कों का जगह-जगह अवरुद्ध होना जारी है वर्षा के जारी रहने के कारण लोक निर्माण विभाग केकर्मचारियों को सड़कें बहाल करने में बाधा बनी हुई हैं।
कसौली - लगातार दो दिनों से हो रही भारी बारिश से कसौली वाया जंगेशु परवाणू सड़क पर भू-खलन होने के कारण सड़क मार्ग बंद हो गया है, जिसकी वजह से सैकड़ों गाडि़यां अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही है। जानकारी के मुताबिक सेक्टर चार परवाणू के समीप नरयाल गांव के साथ काफी दिनों से पहाड़ी दरकने से बार-बार बड़ी मात्रा में लैंड स्लाइड हो रहा है, जिसके कारण सडक बंद हो रही है। परवाणू उपमंडल लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता एचएस ठाकुर ने बताया कि वह सभी सड़कों को खोले रखने के हर संभव प्रयास जारी हैं, लेकिन कसौली के नरयाल गांव के पास पहाड़ी ही दरकने के बजह से सड़क अवरुद्ध हो रही है जिसको युद्धस्तर पर खोलने का कार्य जारी है। बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए सभी कर्मचारियों की छुट्टी को भी रद्द किया गया है। बहरहाल, भारी बरसात के तांडव ने कसौली लोक निर्माण विभाग अभी तक करोड़ों रुपए पर पानी फेर दिया है । जानकारों के मुताबिक कसौली मंडल के अंतर्गत लगभग सात सौ किलोग्राममीटर सड़कों को दोबारा दुरुस्त करने के लिए समय के साथ करोड़ों रुपए की जरूरत है। मंडल कार्यालय से जानकारी के मुताबिक अभी तक सरकार की ओर से तीस लाख रुपए की धनराशि प्राकृतिक आपदा में सड़कों के सुधार के लिए प्राप्त हुई है । गौरतलब हो कि कसौली मंडल के अंतर्गत तीन उपमंडल आते हैं, जिनमें दो विधानसभा के क्षेत्र की सड़कें आती हैं । बरहाल भारी वर्षा जारी रहने से सड़कों का जगह-जगह अवरुद्ध होना जारी है वर्षा के जारी रहने के कारण लोक निर्माण विभाग केकर्मचारियों को सड़कें बहाल करने में बाधा बनी हुई हैं।
अपने विवादित ट्वीट और बेबाक बयानों के लिए मशहूर एक्टर, प्रोड्यूसर और राइटर कमाल राशिद खान एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं और उन्होंने फिल्म जजमेंटल है क्या की स्क्रिप्ट राइटर कनिका ढिल्लन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की हैं. केआरके का यह बयान सेक्सिस्ट था जिस वजह से कनिका काफी भड़क भी गई हैं. कनिका द्वारा बिना देर किए केआरके को मुंहतोड़ जवाब दिया गया है. कमाल खान द्वारा ट्वीट कर लिखा था कि- "मैं हमेशा से सोचता था कि क्यों एक कनिका जैसी खूबसूरत लड़की अपनी फिल्मों में सेक्स पर ही ज्यादा बातें करती है? क्योंकि मैंने उनकी खूबसूरत तस्वीर ही देखी थी. हालांकि जब मुझे उन्हें पर्सनली देखने का मौका मिला, तब मुझे पता चला कि उनके पास अपनी फ्रस्टेशन से निकलने का और कोई विकल्प नहीं है. " साथ ही कमाल द्वारा अपनी वेबसाइट पर कनिका के खिलाफ एक आर्टिकल भी पब्लिश किया गया था. जिसमें लिखा था कि कनिका ने अपने पति को धोखा दिया है. कनिका द्वारा ट्वीट में KRK को जवाब देते हुए लिखा कि- "कमाल लोगों को बुली करता है, महिलाओं पर हमला करता है, भद्दे सेक्सिस्ट कमेंट पास करता है, लोगों को बदनाम करने में भागीदार है और हम लोग उसे छोड़ देते हैं इससे वो और आपत्तिजनक बातें करने लगता है. हम पर अटैक करता है किसलिए? " आगे उन्होंने लिखा कि "इसलिए कि हम अपना काम करने की कोशिश कर रहे हैं, हां मैं एक महिला हूं, सेल्फ मेड हूं, खूबसूरत हूं और मेरी आवाज है. उम्मीद है एक दिन तुम इसके साथ डील करने में सक्षम हो जाओ. कमाल आर खान जल्द ठीक हो जाओ. " मोदी सरकार पर बरसे अनुराग कश्यप, कहा- वही बिल पास हो रहे हैं जिनमे. . . '
अपने विवादित ट्वीट और बेबाक बयानों के लिए मशहूर एक्टर, प्रोड्यूसर और राइटर कमाल राशिद खान एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं और उन्होंने फिल्म जजमेंटल है क्या की स्क्रिप्ट राइटर कनिका ढिल्लन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की हैं. केआरके का यह बयान सेक्सिस्ट था जिस वजह से कनिका काफी भड़क भी गई हैं. कनिका द्वारा बिना देर किए केआरके को मुंहतोड़ जवाब दिया गया है. कमाल खान द्वारा ट्वीट कर लिखा था कि- "मैं हमेशा से सोचता था कि क्यों एक कनिका जैसी खूबसूरत लड़की अपनी फिल्मों में सेक्स पर ही ज्यादा बातें करती है? क्योंकि मैंने उनकी खूबसूरत तस्वीर ही देखी थी. हालांकि जब मुझे उन्हें पर्सनली देखने का मौका मिला, तब मुझे पता चला कि उनके पास अपनी फ्रस्टेशन से निकलने का और कोई विकल्प नहीं है. " साथ ही कमाल द्वारा अपनी वेबसाइट पर कनिका के खिलाफ एक आर्टिकल भी पब्लिश किया गया था. जिसमें लिखा था कि कनिका ने अपने पति को धोखा दिया है. कनिका द्वारा ट्वीट में KRK को जवाब देते हुए लिखा कि- "कमाल लोगों को बुली करता है, महिलाओं पर हमला करता है, भद्दे सेक्सिस्ट कमेंट पास करता है, लोगों को बदनाम करने में भागीदार है और हम लोग उसे छोड़ देते हैं इससे वो और आपत्तिजनक बातें करने लगता है. हम पर अटैक करता है किसलिए? " आगे उन्होंने लिखा कि "इसलिए कि हम अपना काम करने की कोशिश कर रहे हैं, हां मैं एक महिला हूं, सेल्फ मेड हूं, खूबसूरत हूं और मेरी आवाज है. उम्मीद है एक दिन तुम इसके साथ डील करने में सक्षम हो जाओ. कमाल आर खान जल्द ठीक हो जाओ. " मोदी सरकार पर बरसे अनुराग कश्यप, कहा- वही बिल पास हो रहे हैं जिनमे. . . '
सिंघाड़े के आटे और आलू से बनाकर खाएं नर्म स्वादिष्ट पराठा। जिसको आप व्रत में बनाकर खाएं। ये व्रत के लिए बेस्ट पराठा रेसिपी के साथ आसान रेसिपी हैं। जिसको आप तुरंत से बनाकर खा सकते हैं। इस पराठे को बनाने के लिए इसमें सिंघाड़े के आटे और आलू को मिक्स करके पराठे के लिए डो बनाकर तैयार किया जाता हैं। सिंघाड़े के आटे और आलू से पराठा बनाने के लिए एक बाउल में सिंघाड़े का आटा, स्वाद अनुसार सेंधा नमक, आलू, हरी मिर्च, काली मिर्च का पाउडर और हरा धनिया डालकर पहले सब चीज़ो को हाथ से मिक्स कर ले। उसके बाद इसमें थोड़ा सा पानी डालकर आटा गूंथ ले। आपको ज़्यादा पानी डालने की ज़रूरत नही पड़ेगी। क्यूंकि आलू के मोइस्चर से ही आपका आटा गूंथने लगेगा। आटे को थोड़ा सा पानी डालकर थोड़ा सॉफ्ट नार्मल पराठो की तरह आटा गूंथकर तैयार कर ले। फिर आटे पर थोड़ा सा ऑइल डालकर इसको चिकना करके ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख दे। तय समय बाद आटे को देख ले और एक बार फिर से मसल ले। अब एक नॉन स्टिक तवे को गैस पर गर्म होने के लिए रख दे। तवे के गर्म होने तक आप पराठा बेलकर तैयार कर ले। अपने हाथ पर हल्का सा ऑइल लगाकर आटे से अपनी पसंद के पराठे के साइज़ की छोटी या बड़ी लोई लेकर बाकी आटे को ढककर रख दे। जिससे आटा सूखे नही। फिर लोई का पेड़ा बनाकर इसको हाथ से हल्का सा फ्लेट करके सूखे सिंघाड़े के आटे में लपेट ले और अब इसको चकले पर रखकर बेलन से गोल थोड़ा सा मोटा पराठा बेल ले। अगर आपका पराठा बेलते वक़्त चकले पर चिपकता हैं। तो आप इसको सूखे आटे में हल्का सा डस्ट करके पराठा बेल ले। तवे के गर्म हो जाने पर पराठे को तवे पर डालकर नीचे से हल्का सा सुनहरी चित्ती आने पर पराठे पर थोड़ा सा ऑइल लगाकर पराठे को पलट ले और सेक ले। इसी तरह से दूसरी साइड भी पराठे पर ऑइल लगाकर इसको इस साइड से भी सेक ले। पराठो को दोनों साइड से सेकने के बाद पराठे को प्लेट में निकाल ले। इसी तरह से बाकी के आटे से पराठे बेलकर सेक ले। आपके पराठे बनकर रेडी हैं।
सिंघाड़े के आटे और आलू से बनाकर खाएं नर्म स्वादिष्ट पराठा। जिसको आप व्रत में बनाकर खाएं। ये व्रत के लिए बेस्ट पराठा रेसिपी के साथ आसान रेसिपी हैं। जिसको आप तुरंत से बनाकर खा सकते हैं। इस पराठे को बनाने के लिए इसमें सिंघाड़े के आटे और आलू को मिक्स करके पराठे के लिए डो बनाकर तैयार किया जाता हैं। सिंघाड़े के आटे और आलू से पराठा बनाने के लिए एक बाउल में सिंघाड़े का आटा, स्वाद अनुसार सेंधा नमक, आलू, हरी मिर्च, काली मिर्च का पाउडर और हरा धनिया डालकर पहले सब चीज़ो को हाथ से मिक्स कर ले। उसके बाद इसमें थोड़ा सा पानी डालकर आटा गूंथ ले। आपको ज़्यादा पानी डालने की ज़रूरत नही पड़ेगी। क्यूंकि आलू के मोइस्चर से ही आपका आटा गूंथने लगेगा। आटे को थोड़ा सा पानी डालकर थोड़ा सॉफ्ट नार्मल पराठो की तरह आटा गूंथकर तैयार कर ले। फिर आटे पर थोड़ा सा ऑइल डालकर इसको चिकना करके ढककर दस से पंद्रह मिनट के लिए रख दे। तय समय बाद आटे को देख ले और एक बार फिर से मसल ले। अब एक नॉन स्टिक तवे को गैस पर गर्म होने के लिए रख दे। तवे के गर्म होने तक आप पराठा बेलकर तैयार कर ले। अपने हाथ पर हल्का सा ऑइल लगाकर आटे से अपनी पसंद के पराठे के साइज़ की छोटी या बड़ी लोई लेकर बाकी आटे को ढककर रख दे। जिससे आटा सूखे नही। फिर लोई का पेड़ा बनाकर इसको हाथ से हल्का सा फ्लेट करके सूखे सिंघाड़े के आटे में लपेट ले और अब इसको चकले पर रखकर बेलन से गोल थोड़ा सा मोटा पराठा बेल ले। अगर आपका पराठा बेलते वक़्त चकले पर चिपकता हैं। तो आप इसको सूखे आटे में हल्का सा डस्ट करके पराठा बेल ले। तवे के गर्म हो जाने पर पराठे को तवे पर डालकर नीचे से हल्का सा सुनहरी चित्ती आने पर पराठे पर थोड़ा सा ऑइल लगाकर पराठे को पलट ले और सेक ले। इसी तरह से दूसरी साइड भी पराठे पर ऑइल लगाकर इसको इस साइड से भी सेक ले। पराठो को दोनों साइड से सेकने के बाद पराठे को प्लेट में निकाल ले। इसी तरह से बाकी के आटे से पराठे बेलकर सेक ले। आपके पराठे बनकर रेडी हैं।
नरेंद्र मोदी के 'पपी' वाले बयान पर बवाल अभी थमा नहीं है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने बयान को गलत रूप में पेश किया और पार्टी के नेताओं को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए. बीजेपी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा, 'बयान को गलत रूप में पेश करने वालों को माफी मांगनी चाहिए. हम सह-अस्तित्व वाले समाज में रहते हैं. मोदी का मतलब था कि जब कुत्ते के एक बच्चे को चोट लगने से भी हमें दुख होता है, तो लोगों को आहत होते देखना कितना तकलीफदेह होगा. ' मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, 'उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्होंने ही बाटला हाउस एनकाउंटर, हेमंत करकरे और इशरत जहां मामले पर आईबी के इनपुट पर सवाल खड़े किए थे. यह वही नेता हैं जिन्होंने ओसामा बिन लादेन को 'ओसामा जी' कहा था. ' मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस पर धर्म के आधार पर लोगों को बांटने और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इसके लिए लोग कभी कांग्रेस को माफ नहीं करेंगे. मीडिया से बात करते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान के उस प्रस्ताव की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने मुसलमानों से संबंधित आतंकी घटनाओं की जांच के लिए एक अलग टास्क फोर्स बनाने की बात कही थी. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यह भी कांग्रेस की ध्रुवीकरण की नीति का उदाहरण है. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस यह धारणा बनाना चाहती है कि मुसलमानों को झूठे मामलों में फंसाया जाता है. कांग्रेस और उसके साथी दल मुसलमानों में असुरक्षा का झूठा भाव पैदा करना चाहते हैं और इसलिए सभी नागरिकों के मुख्य धारा में आने के खिलाफ काम कर रहे हैं. ' बीजेपी प्रवक्ता ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि के रहमान खान पर दक्षिण भारत में दो लाख करोड़ रुपये के अमरनाथ को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले का आरोप है.
नरेंद्र मोदी के 'पपी' वाले बयान पर बवाल अभी थमा नहीं है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने बयान को गलत रूप में पेश किया और पार्टी के नेताओं को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए. बीजेपी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा, 'बयान को गलत रूप में पेश करने वालों को माफी मांगनी चाहिए. हम सह-अस्तित्व वाले समाज में रहते हैं. मोदी का मतलब था कि जब कुत्ते के एक बच्चे को चोट लगने से भी हमें दुख होता है, तो लोगों को आहत होते देखना कितना तकलीफदेह होगा. ' मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, 'उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्होंने ही बाटला हाउस एनकाउंटर, हेमंत करकरे और इशरत जहां मामले पर आईबी के इनपुट पर सवाल खड़े किए थे. यह वही नेता हैं जिन्होंने ओसामा बिन लादेन को 'ओसामा जी' कहा था. ' मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस पर धर्म के आधार पर लोगों को बांटने और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इसके लिए लोग कभी कांग्रेस को माफ नहीं करेंगे. मीडिया से बात करते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान के उस प्रस्ताव की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने मुसलमानों से संबंधित आतंकी घटनाओं की जांच के लिए एक अलग टास्क फोर्स बनाने की बात कही थी. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यह भी कांग्रेस की ध्रुवीकरण की नीति का उदाहरण है. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस यह धारणा बनाना चाहती है कि मुसलमानों को झूठे मामलों में फंसाया जाता है. कांग्रेस और उसके साथी दल मुसलमानों में असुरक्षा का झूठा भाव पैदा करना चाहते हैं और इसलिए सभी नागरिकों के मुख्य धारा में आने के खिलाफ काम कर रहे हैं. ' बीजेपी प्रवक्ता ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि के रहमान खान पर दक्षिण भारत में दो लाख करोड़ रुपये के अमरनाथ को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले का आरोप है.
PATNA : भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं बिहार भाजपा प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रेस से बात करते समय बिहार के लोकप्रिय नेता दिवंगत रामविलास पासवान जी के खिलाफ हल्की भाषा का प्रयोग करने के लिए आड़े हाथों लेते हुए माफी की मांग की है। निखिल आनंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के खिलाफ टिप्पणी करने के दौरान बड़े ही शातिराना तरीके से उनके पिता रामविलास पासवान जी का चरित्रहनन करने की भी कोशिश की। निखिल आनंद ने कहा कि आदरणीय रामविलास पासवान जी की जिंदगी एक खुली किताब की तरह है और नीतीशजी की तरह वे कतई भी छुप्पा- चुप्पा- काईयां किस्म के आदमी नहीं थे। रामविलासजी पहली बार 1967 में सदन पहुंचे और नीतीशजी तो 1985 में पहली बार सदन में पहुंचे। फिर किस शुरुआती दौर में नीतीश जी ने रामविलास जी की मदद करने का दावा कर एहसान जताने की बात कर रहे हैं। निखिल ने कहा कि आश्चर्य होता है कि नीतीश कुमार जी खुद तेजस्वी के पिठईयां चढ़कर चिराग पासवान को बच्चा बता रहे हैं। रामविलास जी कभी भी नीतीश जी की तरह मजबूर नेता नहीं रहे और बड़े कद के मजबूत कद्दावर नेता थे। इस लिहाज से रामविलास जी के राजनीतिक कद के आगे नीतीश जी औने- पौने- बौने हैं। दुर्भाग्य यह है कि सबके पिठईयां-कन्हईया चढ़कर खुद को ऊंचा देखने या फिर दूसरों की गोद में बैठ खुद को सुरक्षित समझने वाले नीतीशजी मुगालते में ऐसी घटिया बयानबाजी पर उतर आए हैं। निखिल आनंद कहा कि बिहार के एक लोकप्रिय जननेता रहे शख्सियत के खिलाफ हल्की टिप्पणी कर चरित्र हनन की कोशिश के लिए नीतीश कुमार जी अविलंब रामविलासजी के परिवार, प्रशंसकों और समर्थकों से सार्वजनिक माफी मांगें।
PATNA : भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं बिहार भाजपा प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रेस से बात करते समय बिहार के लोकप्रिय नेता दिवंगत रामविलास पासवान जी के खिलाफ हल्की भाषा का प्रयोग करने के लिए आड़े हाथों लेते हुए माफी की मांग की है। निखिल आनंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के खिलाफ टिप्पणी करने के दौरान बड़े ही शातिराना तरीके से उनके पिता रामविलास पासवान जी का चरित्रहनन करने की भी कोशिश की। निखिल आनंद ने कहा कि आदरणीय रामविलास पासवान जी की जिंदगी एक खुली किताब की तरह है और नीतीशजी की तरह वे कतई भी छुप्पा- चुप्पा- काईयां किस्म के आदमी नहीं थे। रामविलासजी पहली बार एक हज़ार नौ सौ सरसठ में सदन पहुंचे और नीतीशजी तो एक हज़ार नौ सौ पचासी में पहली बार सदन में पहुंचे। फिर किस शुरुआती दौर में नीतीश जी ने रामविलास जी की मदद करने का दावा कर एहसान जताने की बात कर रहे हैं। निखिल ने कहा कि आश्चर्य होता है कि नीतीश कुमार जी खुद तेजस्वी के पिठईयां चढ़कर चिराग पासवान को बच्चा बता रहे हैं। रामविलास जी कभी भी नीतीश जी की तरह मजबूर नेता नहीं रहे और बड़े कद के मजबूत कद्दावर नेता थे। इस लिहाज से रामविलास जी के राजनीतिक कद के आगे नीतीश जी औने- पौने- बौने हैं। दुर्भाग्य यह है कि सबके पिठईयां-कन्हईया चढ़कर खुद को ऊंचा देखने या फिर दूसरों की गोद में बैठ खुद को सुरक्षित समझने वाले नीतीशजी मुगालते में ऐसी घटिया बयानबाजी पर उतर आए हैं। निखिल आनंद कहा कि बिहार के एक लोकप्रिय जननेता रहे शख्सियत के खिलाफ हल्की टिप्पणी कर चरित्र हनन की कोशिश के लिए नीतीश कुमार जी अविलंब रामविलासजी के परिवार, प्रशंसकों और समर्थकों से सार्वजनिक माफी मांगें।
नई दिल्लीः कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी नेतृत्व में परिवर्तन करने के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में से एक गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उनकी मंशा सिर्फ पार्टी को सशक्त करने की थी. उन्होंने कहा कि नियुक्त किए गए कांग्रेस अध्यक्ष को पार्टी में एक फीसद भी समर्थन नहीं है. आज़ाद ने आगे कहा कि यदि चुना हुआ निकाय पार्टी का नेतृत्व करता है, तो पार्टी पहले से बेहतर होगी अन्यथा कांग्रेस अगले 50 वर्षों तक निरंतर विपक्ष में ही बैठी रहेगी. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जो अधिकारी या राज्य इकाई के अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष हमारे प्रस्ताव की खिलाफत कर रहे हैं, उन्हें अपने पद को खोने का डर है. उल्लेखनीय है कि विगत सोमवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति की मीटिंग में यह पत्र विवाद का बड़ा कारण बना था. आजाद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मेरा इरादा केवल कांग्रेस को मजबूत करने का था. मैं बीते 34 वर्ष से कार्य समिति में हूं. उन्होंने कहा कि कोई भी कांग्रेसी जिसको कांग्रेस में जरा सी भी दिलचस्पी होती वो तो हमारे प्रस्तावों का स्वागत करता. किन्तु कुछ लोग हमारे प्रस्ताव का विरोध करते नज़र आए. हमने कहा था कि राज्य, जिला, ब्लॉक आदि के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए चुनाव होना चाहिए. कांग्रेस कार्य समिति में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए. आजाद ने कहा कि जब आप चुनाव लड़ते हैं तो कम से कम 51 फीसद लोग आपके साथ होते हैं और आप पार्टी के अंदर सिर्फ 2 से 3 लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं. 51 फीसद वोट पाने वाले व्यक्ति को चुना जाएगा. अन्य को 10 या 15 फीसदी मत प्राप्त होंगे. जो शख्स जीतता है, उसे पार्टी अध्यक्ष का प्रभार सौंपा जाएगा. इसका अर्थ है कि 51 फीसद लोग उसके साथ हैं. JEE-NEET एग्जाम विवाद पर बोले स्वामी- स्टूडेंट्स का हाल द्रौपदी जैसा, क्या CM बनेंगे कृष्ण ?
नई दिल्लीः कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी नेतृत्व में परिवर्तन करने के लिए पत्र लिखने वाले तेईस नेताओं में से एक गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उनकी मंशा सिर्फ पार्टी को सशक्त करने की थी. उन्होंने कहा कि नियुक्त किए गए कांग्रेस अध्यक्ष को पार्टी में एक फीसद भी समर्थन नहीं है. आज़ाद ने आगे कहा कि यदि चुना हुआ निकाय पार्टी का नेतृत्व करता है, तो पार्टी पहले से बेहतर होगी अन्यथा कांग्रेस अगले पचास वर्षों तक निरंतर विपक्ष में ही बैठी रहेगी. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जो अधिकारी या राज्य इकाई के अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष हमारे प्रस्ताव की खिलाफत कर रहे हैं, उन्हें अपने पद को खोने का डर है. उल्लेखनीय है कि विगत सोमवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति की मीटिंग में यह पत्र विवाद का बड़ा कारण बना था. आजाद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मेरा इरादा केवल कांग्रेस को मजबूत करने का था. मैं बीते चौंतीस वर्ष से कार्य समिति में हूं. उन्होंने कहा कि कोई भी कांग्रेसी जिसको कांग्रेस में जरा सी भी दिलचस्पी होती वो तो हमारे प्रस्तावों का स्वागत करता. किन्तु कुछ लोग हमारे प्रस्ताव का विरोध करते नज़र आए. हमने कहा था कि राज्य, जिला, ब्लॉक आदि के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए चुनाव होना चाहिए. कांग्रेस कार्य समिति में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए. आजाद ने कहा कि जब आप चुनाव लड़ते हैं तो कम से कम इक्यावन फीसद लोग आपके साथ होते हैं और आप पार्टी के अंदर सिर्फ दो से तीन लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं. इक्यावन फीसद वोट पाने वाले व्यक्ति को चुना जाएगा. अन्य को दस या पंद्रह फीसदी मत प्राप्त होंगे. जो शख्स जीतता है, उसे पार्टी अध्यक्ष का प्रभार सौंपा जाएगा. इसका अर्थ है कि इक्यावन फीसद लोग उसके साथ हैं. JEE-NEET एग्जाम विवाद पर बोले स्वामी- स्टूडेंट्स का हाल द्रौपदी जैसा, क्या CM बनेंगे कृष्ण ?
रांचीः बीजेपी विधायकों ने श्वेत पत्र को झूठ का पुलिंदा बताया है. हेमंत सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप भी लगाया. भाजपा विधायकों ने एकबार फिर बाबूलाल मरांडी को सदन का नेता-प्रतिपक्ष चुने जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. सदन के बाहर तख्तियां लेकर बीजेपी विधायकों ने प्रर्दशन किया. बीजेपी विधायक अमित मंडल ने सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र की कॉपी फाड़ कर विरोध जताया. उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र पूरी तरह से फर्जी है और झूठ का पुलिंदा है. बजट सत्र के तीसरे दिन भी कुर्सी पर बवाल जारी है. मंगलवार को भी बीजेपी विधायक सदन के बाहर धरना पर बैठ गये. बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठाने की मांग को लेकर लगातार सदन के अंदर और बाहर उनका विरोध जारी है. वहीं हेमंत सरकार सदन में अपना पहला बजट पेश करेगी. सरकार ने बजट को वास्तविकता के करीब रखने पर जोर दिया है. बजट का आकार लगभग 81 हजार करोड़ रुपये के करीब होने का अनुमान लगाया जा रहा है. वहीं अपने राजस्व के संसाधन बढ़ाने के उपायों पर फोकस किया जाएगा. फिलहाल, राज्य सरकार को अपने संसाधनों से महज 20 से 21 हजार करोड़ रुपये की ही आमद हो रही है.
रांचीः बीजेपी विधायकों ने श्वेत पत्र को झूठ का पुलिंदा बताया है. हेमंत सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप भी लगाया. भाजपा विधायकों ने एकबार फिर बाबूलाल मरांडी को सदन का नेता-प्रतिपक्ष चुने जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. सदन के बाहर तख्तियां लेकर बीजेपी विधायकों ने प्रर्दशन किया. बीजेपी विधायक अमित मंडल ने सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र की कॉपी फाड़ कर विरोध जताया. उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र पूरी तरह से फर्जी है और झूठ का पुलिंदा है. बजट सत्र के तीसरे दिन भी कुर्सी पर बवाल जारी है. मंगलवार को भी बीजेपी विधायक सदन के बाहर धरना पर बैठ गये. बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठाने की मांग को लेकर लगातार सदन के अंदर और बाहर उनका विरोध जारी है. वहीं हेमंत सरकार सदन में अपना पहला बजट पेश करेगी. सरकार ने बजट को वास्तविकता के करीब रखने पर जोर दिया है. बजट का आकार लगभग इक्यासी हजार करोड़ रुपये के करीब होने का अनुमान लगाया जा रहा है. वहीं अपने राजस्व के संसाधन बढ़ाने के उपायों पर फोकस किया जाएगा. फिलहाल, राज्य सरकार को अपने संसाधनों से महज बीस से इक्कीस हजार करोड़ रुपये की ही आमद हो रही है.
SAHARSA: इस वक्त की बड़ी खबर बिहार के सहरसा से है। जहाँ जिले के सलखुआ प्रखंड के कोपरिया में दूध का छाछ पिने से 14 बच्चे समेत 2 युवक की हालत खराब हो गई। परिजनों ने अपने अपने बच्चों को आनन फानन में सलखुआ अस्पताल भर्ती कराया। जहां उन सभी बच्चों का ईलाज चल रहा है। बीमार बच्चों में 4 वर्षीय पुत्र आयुष राज, 2 वर्षीय प्रीतम कुमार, 3 वर्षीय कृष्णा कुमार, 7 वर्षीय आयुष कुमार, 5 वर्षीय अखिलेश कुमार, 4 वर्षीय योगिता कुमारी, 5 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी, 7 वर्षीय निशु कुमारी, 12 वर्षीय रितेश कुमार, 23 वर्षीय अभिजीत राज, 24 वर्षीय रंजन कुमार, 5 वर्षीय प्रशांत कुमार, 6 वर्षीय सोनाली कुमारी, 3 वर्षीय अनु कुमारी, ढाई वर्षीय तेजप्रताप कुमार, 8 वर्षीय संगम कुमारी शामिल है। बताया जाता है कि गाँव में ही छाछ की दूध पीने से सभी हालत बिगड़ने लगी। बच्चों की स्थिति बिगड़ता देख सभी परिजन में अफरा-तफरी मच गई। घटना के सम्बंध में बताया जाता है कि गांव में ही भैस के बच्चा देने के उपरांत मन्नते के अनुसार बच्चों को छाछ की दूध पिलाया जाता है। इसी कड़ी में सलखुआ थाना के कोपरिया गांव में सोमवार को छाछ पीने को लेकर 14 बच्चे एवं 2 युवक की स्थिति खराब हो गयी। वहीं बच्चों के उल्टी दस्त नहीं रुकने से सभी बच्चों के परिजन परेशान हैं। आसपास के लोगों व परिजनों की मदद से सलखुआ अस्पताल लाया गया जहां सभी का ईलाज जारी है। चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं सभी का ईलाज जारी है। वहीं सूचना मिलते के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँच मामले की जाँच में जुट गई है।
SAHARSA: इस वक्त की बड़ी खबर बिहार के सहरसा से है। जहाँ जिले के सलखुआ प्रखंड के कोपरिया में दूध का छाछ पिने से चौदह बच्चे समेत दो युवक की हालत खराब हो गई। परिजनों ने अपने अपने बच्चों को आनन फानन में सलखुआ अस्पताल भर्ती कराया। जहां उन सभी बच्चों का ईलाज चल रहा है। बीमार बच्चों में चार वर्षीय पुत्र आयुष राज, दो वर्षीय प्रीतम कुमार, तीन वर्षीय कृष्णा कुमार, सात वर्षीय आयुष कुमार, पाँच वर्षीय अखिलेश कुमार, चार वर्षीय योगिता कुमारी, पाँच वर्षीय लक्ष्मी कुमारी, सात वर्षीय निशु कुमारी, बारह वर्षीय रितेश कुमार, तेईस वर्षीय अभिजीत राज, चौबीस वर्षीय रंजन कुमार, पाँच वर्षीय प्रशांत कुमार, छः वर्षीय सोनाली कुमारी, तीन वर्षीय अनु कुमारी, ढाई वर्षीय तेजप्रताप कुमार, आठ वर्षीय संगम कुमारी शामिल है। बताया जाता है कि गाँव में ही छाछ की दूध पीने से सभी हालत बिगड़ने लगी। बच्चों की स्थिति बिगड़ता देख सभी परिजन में अफरा-तफरी मच गई। घटना के सम्बंध में बताया जाता है कि गांव में ही भैस के बच्चा देने के उपरांत मन्नते के अनुसार बच्चों को छाछ की दूध पिलाया जाता है। इसी कड़ी में सलखुआ थाना के कोपरिया गांव में सोमवार को छाछ पीने को लेकर चौदह बच्चे एवं दो युवक की स्थिति खराब हो गयी। वहीं बच्चों के उल्टी दस्त नहीं रुकने से सभी बच्चों के परिजन परेशान हैं। आसपास के लोगों व परिजनों की मदद से सलखुआ अस्पताल लाया गया जहां सभी का ईलाज जारी है। चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं सभी का ईलाज जारी है। वहीं सूचना मिलते के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँच मामले की जाँच में जुट गई है।
पिछले साल अक्तूबर में रैंडम डार्कनेट शॉपर नाम के एक रोबोट ने ऑनलाइन ख़रीदारी शुरू की. लेकिन जब इसने प्रतिबंधित ड्रग एक्सटेसी ख़रीदी, तो पुलिस हरकत में आ गई. लेकिन रोबोट की ख़रीदारी के लिए ज़िम्मेदार किसे ठहराया जाए? दरअसल हर बुधवार को 100 डॉलर के बिटकॉइन से रैंडम डार्कनेट शॉपर रोबोट अगोरा मार्केट से एक एलगोरिदम के अनुसार चीज़ें ख़रीदा करता था. इन्हें फिर स्विट्ज़रलैंड में एक आर्ट्स ग्रुप मेडीएनग्रुप्पे बीटनीक के स्टूडियो में पहुंचा दिया जाता था. रोबोट निर्माता डोमागोज समोलजो और कारमेन वीसकॉफ़ इन सामानों को खोलते और सावधानी से लोगों के देखने के लिए रख देते थे. रोबोट ने कुल 12 चीज़ें ख़रीदी थीं, जिनमें एयर जॉर्डन के जूते, हंगेरियन पासपोर्ट की प्रति और नशीली ड्रग एक्सटेसी की 10 गोलियां थीं. यह सिलसिला आराम से इस साल जनवरी तक चलता रहा जब स्विस पुलिस ने रोबोट को गिरफ़्तार कर लिया. पुलिस ने कंप्यूटर और रोबोट का ख़रीदा सामान भी ज़ब्त कर लिया है. गिरफ़्तारी तब हुई जब डोमागोज समोलजो और कारमेन वीसकॉफ़ ने रोबोट की ख़रीदी चीज़ों की प्रदर्शनी लगाई. हालांकि अप्रैल में रोबोट को ज़ब्त किए गए समान के साथ (सिवाय प्रतिबंधित ड्रग्स के) रिहा कर दिया गया था. रोबोट बनाने वालों को भी किसी अपराध का दोषी नहीं पाया गया. मगर इस गिरफ्तारी ने इंसान और कंप्यूटर के अपराध को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. यह पहली बार नहीं था कि कोई रोबोट ऐसे ऑनलाइन ख़रीदारी कर रहा था पर इससे पहले ज़्यादातर रोबोट अमेज़न या ईबे जैसी मशहूर साइटों से ही ख़रीदारी करते थे. मेडीएनग्रुप्पे बीटनीक ग्रुप से किसी ने ब्लॉग पर लिखा, "ऐसा लगता है कि गिरफ़्तारी और सामान ज़ब्ती का मक़सद थर्ड पार्टी यानी इससे अलग किसी तीसरे इंसान को दिखाई गई ड्रग्स के संभावित नुक़सान से बचाना था. " वीसकॉफ़ कहती हैं कि उन्होंने दो कारणों से डार्कनेट शॉपर के साथ अलग प्रयोग किया. उन्होंने कहा, "हम इंटरनेट को अपनी कलात्मकता के लिए अहम मानते हैं. हम इंटरनेट की मदद से अपना काम करते हैं. " लेकिन इनकी दिलचस्पी यह जानने में भी थी कि सरकार कैसे इंटरनेट का इस्तेमाल लोगों पर नज़र रखने के लिए करती है. इसके बाद समोलजो और वीसकॉफ़ ने वेब की दुनिया के स्याह पहलुओं (डार्क नेट) की पड़ताल का फ़ैसला लिया. वीसकॉफ़ कहती हैं, "हमें यह जानने में दिलचस्पी थी कि कैसे लोग इंटरनेट पर अनजाने लोगों पर यक़ीन कर लेते हैं. हमने ऑनलाइन मार्केट के क्षेत्र में प्रयोग करने का फ़ैसला किया क्योंकि मार्केट के लिए विश्वसनीयता ज़रूरी है. आप यों ही किसी को सामान भेजकर पैसा पाने की उम्मीद नहीं कर सकते. " इसी मक़सद से डार्कनेट शॉपर को बनाया गया था. मौलिक रूप से रोबोट इंसान की रचना है. वो इंसान के दिए आदेशों का पालन करते हैं. इसलिए उनके किए कामों के लिए रोबोट बनाने वाला ज़िम्मेदार है. स्मार्ट रोबोट के मामले में यह थोड़ा जटिल है क्योंकि वो ऐसा कर सकते हैं जिसके बारे में उनको बनाने वाले ने भी न सोचा हो. लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के कंप्यूटेशनल लीगल थ्योरी के प्रोफ़ेसर बरखार्द शाफ़र के मुताबिक़ ऐसे में बनाने वाले को ही आमतौर पर ज़िम्मेदर माना जाएगा. उनका कहना है, "अगर आप अपने आसपास के माहौल में कोई ख़तरनाक चीज़ रखते हैं तो उसके लिए आप ही ज़िम्मेवार होंगे. " कुत्ता रखने वाले लोगों को पता होता है कि वे कुत्ते की सभी हरकतों पर नियंत्रण नहीं रख सकते. फिर भी अगर किसी के पास कोई ख़तरनाक कुत्ता है तो यह उसकी ज़िम्मेदारी होती है कि वो दूसरों को उससे बचाए. कुत्ते तो अब तक ईजाद किए गए किसी भी कंप्यूटर सिस्टम से ज़्यादा इंटेलिजेंट होते हैं. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. वीसकॉफ़ का कहना है कि रैंडम डार्कनेट शॉपर कंप्यूटर की मदद से चलने वाला एक आम रोबोट है लेकिन लोग उसे जीवित प्राणी के रूप में देखते हैं. बीटनीक के रोबोट बनाने वाले इस दल के पास ऐसी और परियोजनाएं हैं जो रोबोट और इंसान की ज़िंदगी के बीच इन पेचीदा सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगी. वे शॉपर को स्विट्ज़रलैंड के बाहर भी चलाकर देखना चाहते हैं कि परिणाम और प्रतिक्रिया पर क्या फ़र्क पड़ता है. अमरीका में पुलिस कितनी जल्दी इसे बंद करवाती है? भारत में इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है? वीसकॉफ़ का कहना है कि अलग-अलग न्यायिक क्षेत्र और कॉपीराइट से जुड़े सवालों का जवाब अलग-अलग देशों में अलग-अलग क़ानून के अंदर खोजना मुश्किल है. उनका कहना है कि उनकी दिलचस्पी रोबोट या सॉफ़्टवेयर की जवाबदेही में है लेकिन इससे अज्ञात लोगों की निगरानी का भी सवाल जुड़ा है. वह कहती हैं, "हम भविष्य में डिजिटल दुनिया को कैसा देखना चाहते हैं? हम उसके साथ क्या करना चाहते हैं? हम यह भी सोचते हैं कि आख़िर क्या संभव होना चाहिए? " अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
पिछले साल अक्तूबर में रैंडम डार्कनेट शॉपर नाम के एक रोबोट ने ऑनलाइन ख़रीदारी शुरू की. लेकिन जब इसने प्रतिबंधित ड्रग एक्सटेसी ख़रीदी, तो पुलिस हरकत में आ गई. लेकिन रोबोट की ख़रीदारी के लिए ज़िम्मेदार किसे ठहराया जाए? दरअसल हर बुधवार को एक सौ डॉलर के बिटकॉइन से रैंडम डार्कनेट शॉपर रोबोट अगोरा मार्केट से एक एलगोरिदम के अनुसार चीज़ें ख़रीदा करता था. इन्हें फिर स्विट्ज़रलैंड में एक आर्ट्स ग्रुप मेडीएनग्रुप्पे बीटनीक के स्टूडियो में पहुंचा दिया जाता था. रोबोट निर्माता डोमागोज समोलजो और कारमेन वीसकॉफ़ इन सामानों को खोलते और सावधानी से लोगों के देखने के लिए रख देते थे. रोबोट ने कुल बारह चीज़ें ख़रीदी थीं, जिनमें एयर जॉर्डन के जूते, हंगेरियन पासपोर्ट की प्रति और नशीली ड्रग एक्सटेसी की दस गोलियां थीं. यह सिलसिला आराम से इस साल जनवरी तक चलता रहा जब स्विस पुलिस ने रोबोट को गिरफ़्तार कर लिया. पुलिस ने कंप्यूटर और रोबोट का ख़रीदा सामान भी ज़ब्त कर लिया है. गिरफ़्तारी तब हुई जब डोमागोज समोलजो और कारमेन वीसकॉफ़ ने रोबोट की ख़रीदी चीज़ों की प्रदर्शनी लगाई. हालांकि अप्रैल में रोबोट को ज़ब्त किए गए समान के साथ रिहा कर दिया गया था. रोबोट बनाने वालों को भी किसी अपराध का दोषी नहीं पाया गया. मगर इस गिरफ्तारी ने इंसान और कंप्यूटर के अपराध को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. यह पहली बार नहीं था कि कोई रोबोट ऐसे ऑनलाइन ख़रीदारी कर रहा था पर इससे पहले ज़्यादातर रोबोट अमेज़न या ईबे जैसी मशहूर साइटों से ही ख़रीदारी करते थे. मेडीएनग्रुप्पे बीटनीक ग्रुप से किसी ने ब्लॉग पर लिखा, "ऐसा लगता है कि गिरफ़्तारी और सामान ज़ब्ती का मक़सद थर्ड पार्टी यानी इससे अलग किसी तीसरे इंसान को दिखाई गई ड्रग्स के संभावित नुक़सान से बचाना था. " वीसकॉफ़ कहती हैं कि उन्होंने दो कारणों से डार्कनेट शॉपर के साथ अलग प्रयोग किया. उन्होंने कहा, "हम इंटरनेट को अपनी कलात्मकता के लिए अहम मानते हैं. हम इंटरनेट की मदद से अपना काम करते हैं. " लेकिन इनकी दिलचस्पी यह जानने में भी थी कि सरकार कैसे इंटरनेट का इस्तेमाल लोगों पर नज़र रखने के लिए करती है. इसके बाद समोलजो और वीसकॉफ़ ने वेब की दुनिया के स्याह पहलुओं की पड़ताल का फ़ैसला लिया. वीसकॉफ़ कहती हैं, "हमें यह जानने में दिलचस्पी थी कि कैसे लोग इंटरनेट पर अनजाने लोगों पर यक़ीन कर लेते हैं. हमने ऑनलाइन मार्केट के क्षेत्र में प्रयोग करने का फ़ैसला किया क्योंकि मार्केट के लिए विश्वसनीयता ज़रूरी है. आप यों ही किसी को सामान भेजकर पैसा पाने की उम्मीद नहीं कर सकते. " इसी मक़सद से डार्कनेट शॉपर को बनाया गया था. मौलिक रूप से रोबोट इंसान की रचना है. वो इंसान के दिए आदेशों का पालन करते हैं. इसलिए उनके किए कामों के लिए रोबोट बनाने वाला ज़िम्मेदार है. स्मार्ट रोबोट के मामले में यह थोड़ा जटिल है क्योंकि वो ऐसा कर सकते हैं जिसके बारे में उनको बनाने वाले ने भी न सोचा हो. लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के कंप्यूटेशनल लीगल थ्योरी के प्रोफ़ेसर बरखार्द शाफ़र के मुताबिक़ ऐसे में बनाने वाले को ही आमतौर पर ज़िम्मेदर माना जाएगा. उनका कहना है, "अगर आप अपने आसपास के माहौल में कोई ख़तरनाक चीज़ रखते हैं तो उसके लिए आप ही ज़िम्मेवार होंगे. " कुत्ता रखने वाले लोगों को पता होता है कि वे कुत्ते की सभी हरकतों पर नियंत्रण नहीं रख सकते. फिर भी अगर किसी के पास कोई ख़तरनाक कुत्ता है तो यह उसकी ज़िम्मेदारी होती है कि वो दूसरों को उससे बचाए. कुत्ते तो अब तक ईजाद किए गए किसी भी कंप्यूटर सिस्टम से ज़्यादा इंटेलिजेंट होते हैं. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. वीसकॉफ़ का कहना है कि रैंडम डार्कनेट शॉपर कंप्यूटर की मदद से चलने वाला एक आम रोबोट है लेकिन लोग उसे जीवित प्राणी के रूप में देखते हैं. बीटनीक के रोबोट बनाने वाले इस दल के पास ऐसी और परियोजनाएं हैं जो रोबोट और इंसान की ज़िंदगी के बीच इन पेचीदा सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगी. वे शॉपर को स्विट्ज़रलैंड के बाहर भी चलाकर देखना चाहते हैं कि परिणाम और प्रतिक्रिया पर क्या फ़र्क पड़ता है. अमरीका में पुलिस कितनी जल्दी इसे बंद करवाती है? भारत में इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है? वीसकॉफ़ का कहना है कि अलग-अलग न्यायिक क्षेत्र और कॉपीराइट से जुड़े सवालों का जवाब अलग-अलग देशों में अलग-अलग क़ानून के अंदर खोजना मुश्किल है. उनका कहना है कि उनकी दिलचस्पी रोबोट या सॉफ़्टवेयर की जवाबदेही में है लेकिन इससे अज्ञात लोगों की निगरानी का भी सवाल जुड़ा है. वह कहती हैं, "हम भविष्य में डिजिटल दुनिया को कैसा देखना चाहते हैं? हम उसके साथ क्या करना चाहते हैं? हम यह भी सोचते हैं कि आख़िर क्या संभव होना चाहिए? " अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.