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Akanksha Dubey - Pawan Singh Last Song: भोजपुरी इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस में शुमार आकांक्षा दुबे (Akanksha Dubey) ने वाराणसी के होटल में आत्महत्या कर ली है। खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने पंखे से लटकर अपनी जान दी है। वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल में रुकी हुई थीं। आकांक्षा काफी खुशमिजाज एक्ट्रेस थी। एक्ट्रेस अपनी खूबसूरती और एक्टिंग के लिए जानी जाती थी। भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के साथ कई गानों में भी नजर आ चुकी थी। आज ही उनका एक नया गाना रिलीज हुआ है। पवन सिंह का गाना 'ये अराह कभी हारा नहीं' (Ye Arrah Kabhi Hara Nahi Hai) इस समय यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है। गाने में एक्ट्रेस का काफी बिंदास अंदाज देखने को मिल रहा है। गाने में आकांक्षा दुबे भोजपुरी के सुपरस्टार पवन सिंह के साथ ठुमके लगाती हुईं नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस रेड आउटफिट में बेहद ही खूसबूरत भी नजर आ रही हैं। इस गाने को आकांक्षा दुबे और पवन सिंह पर फिल्माया गया है। आकांक्षा दुबे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। आकांक्षा वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल में मृत पाई गई हैं। आकांक्षा दुबे (Akanksha Dubey) की मौत की खबर सुनने के बाद दर्शकों के लिए विश्वास करना मुश्किल हो गया है। उनके बिंदास अंदाज को देखकर लोगों का यही कहना है कि वो अपनी खुद की जान नहीं ले सकती हैं। पवन सिंह के गाने 'ये आरा कभी हारा नहीं' रिलीज होने के बाद ही धमाल मचाना शुरू कर दिया है। गाने को महज 9 घंटे में 1,000,338 से अधिक बार देखा जा चुका है। इस गाने को पवन सिंह और शिल्पी राज ने आवाज दी है। गाने के बोल Jahid Akhtar, Imamuddin ने लिखा है, जबकि गाने को म्यूजिक Priyanshu Singh ने दिया है। गाने को Music Tone नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है।
Akanksha Dubey - Pawan Singh Last Song: भोजपुरी इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस में शुमार आकांक्षा दुबे ने वाराणसी के होटल में आत्महत्या कर ली है। खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने पंखे से लटकर अपनी जान दी है। वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल में रुकी हुई थीं। आकांक्षा काफी खुशमिजाज एक्ट्रेस थी। एक्ट्रेस अपनी खूबसूरती और एक्टिंग के लिए जानी जाती थी। भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के साथ कई गानों में भी नजर आ चुकी थी। आज ही उनका एक नया गाना रिलीज हुआ है। पवन सिंह का गाना 'ये अराह कभी हारा नहीं' इस समय यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है। गाने में एक्ट्रेस का काफी बिंदास अंदाज देखने को मिल रहा है। गाने में आकांक्षा दुबे भोजपुरी के सुपरस्टार पवन सिंह के साथ ठुमके लगाती हुईं नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस रेड आउटफिट में बेहद ही खूसबूरत भी नजर आ रही हैं। इस गाने को आकांक्षा दुबे और पवन सिंह पर फिल्माया गया है। आकांक्षा दुबे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। आकांक्षा वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल में मृत पाई गई हैं। आकांक्षा दुबे की मौत की खबर सुनने के बाद दर्शकों के लिए विश्वास करना मुश्किल हो गया है। उनके बिंदास अंदाज को देखकर लोगों का यही कहना है कि वो अपनी खुद की जान नहीं ले सकती हैं। पवन सिंह के गाने 'ये आरा कभी हारा नहीं' रिलीज होने के बाद ही धमाल मचाना शुरू कर दिया है। गाने को महज नौ घंटाटे में एक,शून्य,तीन सौ अड़तीस से अधिक बार देखा जा चुका है। इस गाने को पवन सिंह और शिल्पी राज ने आवाज दी है। गाने के बोल Jahid Akhtar, Imamuddin ने लिखा है, जबकि गाने को म्यूजिक Priyanshu Singh ने दिया है। गाने को Music Tone नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है।
कोरोना के प्रारंभिक लक्षण लगने पर डॉक्टरों के परामर्श पर कराई गई कोविड-19 की जाँच में मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। आप से मेरा निवेदन है कि पिछले कुछ दिनों में जो भी मेरे सम्पर्क में आएं हैं, वो सभी निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर अपनी जाँच करवायें एवं कोविड नियमों का पालन करें। मेरी आरटीपीसीआर रिर्पोट पॉजिटिव आई है, मेरे शुभचिंतक चिंतित न हों मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और कोरोना के लक्षण भी महसूस नहीं कर रहा हूं। मुझसे संपर्क में आए सभी लोगों से मेरा आग्रह है कि आप कोरोना नियमों का पालन करें और अपनी जांच अवश्य करवा लें। शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने अपना कोविड टेस्ट करवाया,मेरी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है डॉक्टर्स की सलाह पर मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया है।
कोरोना के प्रारंभिक लक्षण लगने पर डॉक्टरों के परामर्श पर कराई गई कोविड-उन्नीस की जाँच में मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। आप से मेरा निवेदन है कि पिछले कुछ दिनों में जो भी मेरे सम्पर्क में आएं हैं, वो सभी निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर अपनी जाँच करवायें एवं कोविड नियमों का पालन करें। मेरी आरटीपीसीआर रिर्पोट पॉजिटिव आई है, मेरे शुभचिंतक चिंतित न हों मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और कोरोना के लक्षण भी महसूस नहीं कर रहा हूं। मुझसे संपर्क में आए सभी लोगों से मेरा आग्रह है कि आप कोरोना नियमों का पालन करें और अपनी जांच अवश्य करवा लें। शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने अपना कोविड टेस्ट करवाया,मेरी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है डॉक्टर्स की सलाह पर मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया है।
हलाकू (बायें), खलीफा अल-मुस्तसिम को भूख से मारने के लिये उसके खजाने में कैद करते हुए मांगके खान की मृत्यु के समय (१२५९ ई में) मंगोल साम्राज्य मंगोल साम्राज्य 13 वीं और 14 वीं शताब्दियों के दौरान एक विशाल साम्राज्य था। इस साम्राज्य का आरम्भ चंगेज खान द्वारा मंगोलिया के घूमन्तू जनजातियों के एकीकरण से हुआ। मध्य एशिया में शुरू यह राज्य अंततः पूर्व में यूरोप से लेकर पश्चिम में जापान के सागर तक और उत्तर में साइबेरिया से लेकर दक्षिण में भारतीय उपमहाद्वीप तक फैल गया। आमतौर पर इसे दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा सन्निहित साम्राज्य माना जाना जाता है। अपने शीर्ष पर यह 6000 मील (9700 किमी) तक फैला था और 33,000,000 वर्ग कि॰मी॰ (12,741,000 वर्ग मील) के क्षेत्र को कवर करता था। इस समय पृथ्वी के कुल भू क्षेत्रफल का 22% हिस्सा इसके कब्ज़े में था और इसकी आबादी 100 करोड़ थी। मंगोल शासक पहले बौद्ध थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे तुर्कों के सम्पर्क में आकर उन्होंने इस्लाम को अपना लिया। . 28 संबंधोंः चग़ताई ख़ानत, चंगेज़ ख़ान, चीनी भाषा, तुर्क, तुर्की भाषा परिवार, बगदाद का युद्ध (१२५८), बौद्ध धर्म, भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य एशिया, मंगोल, मंगोल भाषा, मंगोलिया, मुग़ल साम्राज्य, मोंगके ख़ान, युआन राजवंश, यूरोप, साम्राज्य, साइबेरिया, जापान सागर, ईरानी भाषा परिवार, ईसाई धर्म, ख़ान (उपाधि), गुयुक ख़ान, ओगताई ख़ान, इस्लाम, कुबलई ख़ान, अब्बासी ख़िलाफ़त, उस्मानी साम्राज्य। चंगेज़ खान १२२७ में चंगेज खान का साम्राज्य चंगेज खान का मंदिर चंगेज़ ख़ान (मंगोलियाईः Чингис Хаан, चिंगिस खान, सन् 1162 - 18 अगस्त, 1227) एक मंगोल ख़ान (शासक) था जिसने मंगोल साम्राज्य के विस्तार में एक अहम भूमिका निभाई। वह अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता तथा साम्राज्य विस्तार के लिए प्रसिद्ध हुआ। इससे पहले किसी भी यायावर जाति (यायावर जाति के लोग भेड़ बकरियां पालते जिन्हें गड़रिया कहा जाता है।) के व्यक्ति ने इतनी विजय यात्रा नहीं की थी। वह पूर्वोत्तर एशिया के कई घुमंतू जनजातियों को एकजुट करके सत्ता में आया। साम्राज्य की स्थापना के बाद और "चंगेज खान" की घोषणा करने के बाद, मंगोल आक्रमणों को शुरू किया गया, जिसने अधिकांश यूरेशिया पर विजय प्राप्त की। अपने जीवनकाल में शुरू किए गए अभियान क़रा खितई, काकेशस और ख्वारज़्मियान, पश्चिमी ज़िया और जीन राजवंशों के खिलाफ, शामिल हैं। मंगोल साम्राज्य ने मध्य एशिया और चीन के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर कब्जा कर लिया। चंगेज खान की मृत्यु से पहले, उसने ओगदेई खान को अपन उत्तराधिकारी बनाया और अपने बेटों और पोते के बीच अपने साम्राज्य को खानतों में बांट दिया। पश्चिमी जिया को हराने के बाद 1227 में उसका निधन हो गया। वह मंगोलिया में किसी न किसी कब्र में दफनाया गया था।उसके वंशजो ने आधुनिक युग में चीन, कोरिया, काकेशस, मध्य एशिया, और पूर्वी यूरोप और दक्षिण पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण हिस्से में विजय प्राप्त करने वाले राज्यों को जीतने या बनाने के लिए अधिकांश यूरेशिया में मंगोल साम्राज्य का विस्तार किया। इन आक्रमणों में से कई स्थानों पर स्थानीय आबादी के बड़े पैमाने पर लगातार हत्यायेँ की। नतीजतन, चंगेज खान और उसके साम्राज्य का स्थानीय इतिहास में एक भयावय प्रतिष्ठा है। अपनी सैन्य उपलब्धियों से परे, चंगेज खान ने मंगोल साम्राज्य को अन्य तरीकों से भी उन्नत किया। उसने मंगोल साम्राज्य की लेखन प्रणाली के रूप में उईघुर लिपि को अपनाने की घोषणा की। उसने मंगोल साम्राज्य में धार्मिक सहिष्णुता को प्रोत्साहित किया, और पूर्वोत्तर एशिया की अन्य जनजातियों को एकजुट किया। वर्तमान मंगोलियाई लोग उसे मंगोलिया के 'संस्थापक पिता' के रूप में जानते हैं। यद्यपि अपने अभियानों की क्रूरता के लिए चंगेज़ खान को जाना जाता है और कई लोगों द्वारा एक नरसंहार शासक होने के लिए माना जाता है परंतु चंगेज खान को सिल्क रोड को एक एकत्रीय राजनीतिक वातावरण के रूप में लाने का श्रेय दिया जाता रहा है। यह रेशम मार्ग पूर्वोत्तर एशिया से मुस्लिम दक्षिण पश्चिम एशिया और ईसाई यूरोप में संचार और व्यापार लायी, इस तरह सभी तीन सांस्कृतिक क्षेत्रों के क्षितिज का विस्तार हुआ। . चीनी भाषा (अंग्रेजीः Chinese; 汉语/漢語, पिनयिनः Hànyǔ; 华语/華語, Huáyǔ; या 中文 हुआ-यू, Zhōngwén श़ोंग-वॅन) चीन देश की मुख्य भाषा और राजभाषा है। यह संसार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह चीन एवं पूर्वी एशिया के कुछ देशों में बोली जाती है। चीनी भाषा चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार में आती है और वास्तव में कई भाषाओं और बोलियों का समूह है। मानकीकृत चीनी असल में एक 'मन्दारिन' नामक भाषा है। इसमें एकाक्षरी शब्द या शब्द भाग ही होते हैं और ये चीनी भावचित्र में लिखी जाती है (परम्परागत चीनी लिपि या सरलीकृत चीनी लिपि में)। चीनी एक सुरभेदी भाषा है। . तुर्क का अर्थ इनमें से कुछ हो सकता है -. विश्व के देश (गाढ़े नीले रंग में) और प्रदेश (हलके नीले रंग में) जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है सन् 735 के लगभग तराशे गए एक ओरख़ोन शिलालेख का हिस्सा यूरेशिया में तुर्की भाषाओँ का फैलाव तुर्की भाषाएँ पैंतीस से भी अधिक भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। तुर्की भाषाएँ पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर से लेकर साईबेरिया और पश्चिमी चीन तक बोली जाती हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें अल्ताई भाषा परिवार की एक शाखा मानते हैं। विश्व में लगभग 16.5 से 18 करोड़ लोग तुर्की भाषाएँ अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और अगर सभी तुर्की भाषाओँ को बोल सकने वालों की गणना की जाए तो क़रीब 25 करोड़ लोग इन्हें बोल सकते हैं। सब से अधिक बोली जाने वाली तुर्की भाषा का नाम भी तुर्की है, हालाँकि कभी-कभी इसे अनातोल्वी भी कहा जाता है (क्योंकि यह अनातोलिया में बोली जाती है)। . बगदाद का युद्ध (१२५८) हलाकु ख़ान के नायकत्व में मंगोल सेनाओं ने २९ जनवरी से १० फरवरी तक अब्बासी ख़िलाफ़त की राजधानी बगदाद को घेरे रखा और अन्ततः इस पर अधिकार करके खलीफा की हत्या कर दी। मंगोल फ़ौज ने पिछले 13 दिन से बग़दाद को घेरे में ले रखा था. बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण 483 ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का ७वाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल 18 देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। . भारतीय उपमहाद्वीप का भौगोलिक मानचित्र भारतीय उपमहाद्वीप, एशिया के दक्षिणी भाग में स्थित एक उपमहाद्वीप है। इस उपमहाद्वीप को दक्षिण एशिया भी कहा जाता है भूवैज्ञानिक दृष्टि से भारतीय उपमहाद्वीप का अधिकांश भाग भारतीय प्रस्तर (या भारतीय प्लेट) पर स्थित है, हालाँकि इस के कुछ भाग इस प्रस्तर से हटकर यूरेशियाई प्रस्तर पर भी स्थित हैं। . मध्य एशिया एशिया के महाद्वीप का मध्य भाग है। यह पूर्व में चीन से पश्चिम में कैस्पियन सागर तक और उत्तर में रूस से दक्षिण में अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तृत है। भूवैज्ञानिकों द्वारा मध्य एशिया की हर परिभाषा में भूतपूर्व सोवियत संघ के पाँच देश हमेशा गिने जाते हैं - काज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान। इसके अलावा मंगोलिया, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, भारत के लद्दाख़ प्रदेश, चीन के शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्रों और रूस के साइबेरिया क्षेत्र के दक्षिणी भाग को भी अक्सर मध्य एशिया का हिस्सा समझा जाता है। इतिहास में मध्य एशिया रेशम मार्ग के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। चीन, भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच लोग, माल, सेनाएँ और विचार मध्य एशिया से गुज़रकर ही आते-जाते थे। इस इलाक़े का बड़ा भाग एक स्तेपी वाला घास से ढका मैदान है हालाँकि तियान शान जैसी पर्वत शृंखलाएँ, काराकुम जैसे रेगिस्तान और अरल सागर जैसी बड़ी झीलें भी इस भूभाग में आती हैं। ऐतिहासिक रूप मध्य एशिया में ख़ानाबदोश जातियों का ज़ोर रहा है। पहले इसपर पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलने वाली स्किथी, बैक्ट्रियाई और सोग़दाई लोगों का बोलबाला था लेकिन समय के साथ-साथ काज़ाख़, उज़बेक, किरगिज़ और उईग़ुर जैसी तुर्की जातियाँ अधिक शक्तिशाली बन गई।Encyclopædia Iranica, "CENTRAL ASIA: The Islamic period up to the Mongols", C. Edmund Bosworth: "In early Islamic times Persians tended to identify all the lands to the northeast of Khorasan and lying beyond the Oxus with the region of Turan, which in the Shahnama of Ferdowsi is regarded as the land allotted to Fereydun's son Tur. चंगेज़ ख़ान एक पारम्परिक मंगोल घर, जिसे यर्त कहते हैं मंगोल मध्य एशिया और पूर्वी एशिया में रहने वाली एक जाति है, जिसका विश्व इतिहास पर गहरा प्रभाव रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में इस जाति को मुग़ल के नाम से जाना जाता था, जिस से मुग़ल राजवंश का नाम भी पड़ा। आधुनिक युग में मंगोल लोग मंगोलिया, चीन और रूस में वास करते हैं। विश्व भर में लगभग १ करोड़ मंगोल लोग हैं। शुरु-शुरु में यह जाति अर्गुन नदी के पूर्व के इलाकों में रहा करती थी, बाद में वह वाह्य ख़िन्गन पर्वत शृंखला और अल्ताई पर्वत शृंखला के बीच स्थित मंगोलिया पठार के आर-पार फैल गई। मंगोल जाति के लोग ख़ानाबदोशों का जीवन व्यतीत करते थे और शिकार, तीरंदाजी व घुड़सवारी में बहुत कुशल थे। १२वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इसके मुखिया तेमूचीन ने तमाम मंगोल कबीलों को एक किया। . मंगोल भाषा बोलने वाले क्षेत्र मंगोल भाषा अलताइक भाषाकुल की तथा योगात्मक बनावट की भाषा है। यह मुख्यतः अनतंत्र मंगोल, भीतरी मंगोल के स्वतंत्र प्रदेश, बुरयात (Buriyad) मंगोल राज्य में बोली जाती है। इन क्षेत्रों के अरिरिक्त इसके बोलनेवाले मंचूरिया, चीन के कुछ क्षेत्र और तिब्बत तथा अफगानिस्तान आदि में भी पाए जाते हैं। अनुमान है कि इन सब क्षेत्रों में मंगोल भाषा बोलनेवालों की संख्या कोई 40 लाख होगी। इन विशाल क्षेत्रों में रहनेवाले मंगोल जाति के सब लोगों के द्वारा स्वीकृत कोई एक आदर्श भाषा नहीं है। परंतु तथाकथित मंगोलिया के अंदर जनतंत्र मंगोल की हलहा (Khalkha) बोली धीरे-धीरे आदर्श भाषा का पद ग्रहण कर रही है। स्वयं मंगोलिया के लोग भी इस हलहा बोली को परिष्कृत बोली मानते हैं और इसी बोली के निकट भविष्य में आदर्श भाषा बनने की संभावना है। प्राचीन काल में मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली साहित्यिक मंगोल पढ़े-लिखे लोगों में आदर्श भाषा मानी जाती थी। परंतु अब यह मंगोल लिपि जनतंत्र मंगोलिया द्वारा त्याग दी गई है और इसकी जगह रूसी लिपि से बनाई गई नई मंगोल लिपि स्वीकार की गई है। इस प्रकार अब मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली साहित्यिक भाषा कम और नव मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली हलहा बोली अधिक मान्य समझी जाने लगी है। . मंगोलिया (मंगोलियनः Монгол улс) पूर्व और मध्य एशिया में एक भूमि से घिरा (लेंडलॉक) देश है। इसकी सीमाएं उत्तर में रूस, दक्षिण, पूर्वी और पश्चिमी में चीन से मिलती हैं। हालांकि, मंगोलिया की सीमा कज़ाख़िस्तान से नहीं मिलती, लेकिन इसकी सबसे पश्चिमी छोर कज़ाख़िस्तान के पूर्वी सिरे से केवल 24 मील (38 किमी) दूर है। देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर उलान बाटोर है, जहां देश की लगभग 38% जनसंख्या निवास करती है। मंगोलिया में संसदीय गणतंत्र है। . मुग़ल साम्राज्य (फ़ारसीः, मुग़ल सलतनत-ए-हिंद; तुर्कीः बाबर इम्परातोरलुग़ु), एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। 1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था। 1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। 1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। . यूरोप पृथ्वी पर स्थित सात महाद्वीपों में से एक महाद्वीप है। यूरोप, एशिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। यूरोप और एशिया वस्तुतः यूरेशिया के खण्ड हैं और यूरोप यूरेशिया का सबसे पश्चिमी प्रायद्वीपीय खंड है। एशिया से यूरोप का विभाजन इसके पूर्व में स्थित यूराल पर्वत के जल विभाजक जैसे यूराल नदी, कैस्पियन सागर, कॉकस पर्वत शृंखला और दक्षिण पश्चिम में स्थित काले सागर के द्वारा होता है। यूरोप के उत्तर में आर्कटिक महासागर और अन्य जल निकाय, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्य सागर और दक्षिण पश्चिम में काला सागर और इससे जुड़े जलमार्ग स्थित हैं। इस सबके बावजूद यूरोप की सीमायें बहुत हद तक काल्पनिक हैं और इसे एक महाद्वीप की संज्ञा देना भौगोलिक आधार पर कम, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर अधिक है। ब्रिटेन, आयरलैंड और आइसलैंड जैसे देश एक द्वीप होते हुए भी यूरोप का हिस्सा हैं, पर ग्रीनलैंड उत्तरी अमरीका का हिस्सा है। रूस सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यूरोप में ही माना जाता है, हालाँकि इसका सारा साइबेरियाई इलाका एशिया का हिस्सा है। आज ज़्यादातर यूरोपीय देशों के लोग दुनिया के सबसे ऊँचे जीवनस्तर का आनन्द लेते हैं। यूरोप पृष्ठ क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का दूसरा सबसे छोटा महाद्वीप है, इसका क्षेत्रफल के १०,१८०,००० वर्ग किलोमीटर (३,९३०,००० वर्ग मील) है जो पृथ्वी की सतह का २% और इसके भूमि क्षेत्र का लगभग ६.८% है। यूरोप के ५० देशों में, रूस क्षेत्रफल और आबादी दोनों में ही सबसे बड़ा है, जबकि वैटिकन नगर सबसे छोटा देश है। जनसंख्या के हिसाब से यूरोप एशिया और अफ्रीका के बाद तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है, ७३.१ करोड़ की जनसंख्या के साथ यह विश्व की जनसंख्या में लगभग ११% का योगदान करता है, तथापि, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार (मध्यम अनुमान), २०५० तक विश्व जनसंख्या में यूरोप का योगदान घटकर ७% पर आ सकता है। १९०० में, विश्व की जनसंख्या में यूरोप का हिस्सा लगभग 25% था। पुरातन काल में यूरोप, विशेष रूप से यूनान पश्चिमी संस्कृति का जन्मस्थान है। मध्य काल में इसी ने ईसाईयत का पोषण किया है। यूरोप ने १६ वीं सदी के बाद से वैश्विक मामलों में एक प्रमुख भूमिका अदा की है, विशेष रूप से उपनिवेशवाद की शुरुआत के बाद. राज्य जहां कई जातियां रहती हैं, जो क्षेत्र में विशाल है और जहां सम्राट के पास समस्त अधिकार हैं, साम्राज्य कहलाता है। यह एक राजनैतिक क्षेत्र है जो किसी एक राजा (जैसे मुग़ल साम्राज्य) अथवा कुछ मुख्य-पतियों (जैसे मराठा साम्राज्य) द्वारा साझेदारी में संभाला जाता है। साम्राज्य छोटे समय के अंतराल में भी हो सकता है परन्तु अधिकाँश वह पीढ़ी दर पीढ़ी कई दशकों या सदियों तक चलता है। भारत का सबसे बडा साम्राज्य सम्राट अशोक का मौर्य साम्राज्य था, जिसकी सिमा 50,00,000 वर्ग किमी में श्रेत्र था। इसे देखिए - भारत में सबसे बडे साम्राज्यों की सूची . साइबेरिया का नक़्शा (गाढ़े लाल रंग में साइबेरिया नाम का संघी राज्य है, लेकिन लाल और नारंगी रंग वाले सारे इलाक़े साइबेरिया का हिस्सा माने जाते हैं गर्मी के मौसम में दक्षिणी साइबेरिया में जगह-जगह पर झीलें और हरियाली नज़र आती है याकुत्स्क शहर में 17वी शताब्दी में बना एक रूसी सैनिक-गृह साइबेरिया (रूसीः Сибирь, सिबिर) एक विशाल और विस्तृत भूक्षेत्र है जिसमें लगभग समूचा उत्तर एशिया समाया हुआ है। यह रूस का मध्य और पूर्वी भाग है। सन् 1991 तक यह सोवियत संघ का भाग हुआ करता था। साइबेरिया का क्षेत्रफल 131 लाख वर्ग किमी है। तुलना के लिए पूरे भारत का क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किमी है, यानि साइबेरिया भारत से क़रीब चार गुना है। फिर भी साइबेरिया का मौसम और भूस्थिति इतनी सख़्त है के यहाँ केवल 4 करोड़ लोग रहते हैं, जो 2011 में केवल उड़ीसा राज्य की आबादी थी। यूरेशिया का अधिकतर स्टॅप (मैदानी घासवाला) इलाक़ा साइबेरिया में आता है। साइबेरिया पश्चिम में यूराल पहाड़ों से शुरू होकर पूर्व में प्रशांत महासागर तक और उत्तर में उत्तरध्रुवीय महासागर (आर्कटिक महासागर) तक फैला हुआ है। दक्षिण में इसकी सीमाएँ क़ाज़ाक़स्तान, मंगोलिया और चीन से लगती हैं। . जापान सागर जापान सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक समुद्री अंश है। यह समुद्र जापान के द्वीपसमूह, रूस के साख़ालिन द्वीप और एशिया के महाद्वीप के मुख्य भूभाग के बीच स्थित है। इसके इर्द-गिर्द जापान, रूस, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया आते हैं। क्योंकि कुछ स्थानों को छोड़कर यह क़रीब-क़रीब पूरी तरह ज़मीन से घिरा हुआ है, इसलिए इसमें भी भूमध्य सागर की तरह महासागर के ज्वार-भाटा की बड़ी लहरें नहीं आती। अन्य सागरों की तुलना में जापान सागर के पानी में मिश्रित ऑक्सिजन की तादाद अधिक है जिस से यहाँ मछलियों की भरमार है।, Great Soviet Encyclopedia (in Russian) जापान सागर का क्षेत्रफल ९,७८,००० वर्ग किमी है और इसकी सब से अधिक गहराई सतह से ३,७४२ मीटर (१२,२७६ फ़ुट) नीचे तक पहुँचती है। इसके इर्द गिर्द ७,६०० किमी के तट हैं, जिसमें से लगभग आधा रूस की धरती पर पड़ता है। नीचे समुद्र के फ़र्श पर तीन बड़ी द्रोणियाँ हैंः उत्तर में "जापान द्रोणी", दक्षिण-पश्चिम में "त्सुशिमा द्रोणी" और दक्षिण-पूर्व में "यामातो द्रोणी"। जापान द्रोणी सबसे गहरा क्षेत्र है और यहाँ का फ़र्श प्राचीन ज्वालामुखीय पत्थर से बना हुआ है। माना जाता है कि पिछले हिमयुग की चरम स्थिति में जब समुद्र की सतह वर्तमान युग से नीचे थी तो जापान एशिया के मुख्य भाग से धरती द्वारा जुड़ा हुआ था। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय जापान सागर आधुनिक कैस्पियन सागर की भाँती एक ज़मीन से घिरा हुआ बंद समुद्र था। . ईरानी भाषाओँ का वृक्ष, जिसमें उसकी उपशाखाएँ दिखाई गई हैं आधुनिक ईरानी भाषाओँ का फैलाव ईरानी भाषाएँ हिन्द-ईरानी भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। ध्यान रहे कि हिन्द-ईरानी भाषाएँ स्वयं हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। आधुनिक युग में विश्व में लगभग १५-२० करोड़ लोग किसी ईरानी भाषा को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और ऍथ़नॉलॉग भाषाकोष में सन् २०११ तक ८७ ईरानी भाषाएँ दर्ज थीं।, Gernot Windfuhr, Routledge, 2009, ISBN 978-0-7007-1131-4, Raymond Gordon, Jr. "'ईद्भास/क्रॉस"' - यह ईसाई धर्म का निशान है ईसाई धर्म (अन्य प्रचलित नामःमसीही धर्म व क्रिश्चियन धर्म) एक इब्राहीमीChristianity's status as monotheistic is affirmed in, amongst other sources, the Catholic Encyclopedia (article ""); William F. Albright, From the Stone Age to Christianity; H. Richard Niebuhr; About.com,; Kirsch, God Against the Gods; Woodhead, An Introduction to Christianity; The Columbia Electronic Encyclopedia; The New Dictionary of Cultural Literacy,; New Dictionary of Theology,, pp. ख़ान (उपाधि) ओगदाई ख़ान, चंग़ेज़ ख़ान का तीसरा पुत्र ख़ान या ख़ाँ (मंगोलः хан, फ़ारसीः, तुर्कीः Kağan) मूल रूप से एक अल्ताई उपाधि है तो शासकों और अत्यंत शक्तिशाली सिपहसालारों को दी जाती थी। यह समय के साथ तुर्की-मंगोल क़बीलों द्वारा पूरे मध्य एशिया में इस्तेमाल होने लगी। जब इस क्षेत्र के सैन्य बलों ने भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य बनाने शुरू किये तो इसका प्रयोग इन क्षेत्रों की कई भाषाओँ में आ गया, जैसे कि हिन्दी-उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, इत्यादि। इसका एक और रूप 'ख़ागान' है जिसका अर्थ है 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना', जो भारत में कभी प्रचलित नहीं हुआ। इसके बराबरी की स्त्रियों की उपाधियाँ ख़ानम और ख़ातून हैं।, Elena Vladimirovna Boĭkova, R. B. Rybakov, Otto Harrassowitz Verlag, 2006, ISBN 978-3-447-05416-4 . इस्लाम (अरबीः الإسلام) एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के 25% हिस्से, यानी लगभग 1.6 से 1.8 अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से (स्रोतों के अनुसार) लगभग 20 से 30 करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। . अपने चरम पर अब्बासियों का क्षेत्र (हरे रंग में, गाढ़े हरे रंग वाले क्षेत्र उनके द्वारा जल्दी ही खोए गए) अब्बासी (अरबीः, अल-अब्बासियून; अंग्रेज़ीः Abbasids) वंश के शासक इस्लाम के ख़लीफ़ा थे जो सन् 750 के बाद से 1257 तक इस्लाम के धार्मिक प्रमुख और इस्लामी साम्राज्य के शासक रहे। इनके पूर्वज मुहम्मद से संबंधित थे इसलिए इनको सुन्नियों के साथ साथ शिया विचारधारा के मुसलमानों का भी बहुत सहयोग मिला जिसमें ईरान तथा ख़ोरासान तथा शाम की जनता शामिल थी। इस जनसहयोग की बदौलत उन्होंने उमय्यदों को हरा दिया और ख़लीफ़ा बनाए गए। उन्होंने उमय्यदों के विपरीत साम्राज्य में ईरानी तत्वों को समावेश किया और उनके काल में इस्लामी विज्ञान, कला तथा ज्योतिष में काफ़ी नए विकास हुए। सन् 762 में उन्होंने बग़दाद की स्थापना की जहाँ ईरानी सासानी निर्माण कला तथा अरबी संस्कृति से मिश्रित एक राजधानी का विकास हुआ। यद्यपि 10वीं सदी में उनकी वंशानुगत शासन की परम्परा टूट गई पर ख़िलाफ़त बनी रही। इस परंपरा टूटने के कारण शिया इस्लाम में इस्माइली तथा बारहवारी सम्प्रदायों का जन्म हुआ जो इस्लाम के उत्तराधिकारी के रूप में मुहम्मद साहब के विभिन्न वंशजों का समर्थन करते थे। उनके काल में इस्लाम भारत में भी फैल गया लेकिन 1257 में उस समय अमुस्लिम रहे मंगोलों के आक्रमण से बग़दाद नष्ट हो गया। . उस्मानी सलतनत (१२९९ - १९२३) (या उस्मानी साम्राज्य या तुर्क साम्राज्य, उर्दू में सल्तनत-ए-उस्मानिया, उस्मानी तुर्कीयाईःدَوْلَتِ عَلِيّهٔ عُثمَانِیّه देव्लेत-इ-आलीय्ये-इ-ऑस्मानिय्ये) १२९९ में पश्चिमोत्तर अनातोलिया में स्थापित एक तुर्क राज्य था। महमद द्वितीय द्वारा १४९३ में क़ुस्तुंतुनिया जीतने के बाद यह एक साम्राज्य में बदल गया। प्रथम विश्वयुद्ध में १९१९ में पराजित होने पर इसका विभाजन करके इस पर अधिकार कर लिया गया। स्वतंत्रता के लिये संघर्ष के बाद २९ अक्तुबर सन् १९२३ में तुर्की गणराज्य की स्थापना पर इसे समाप्त माना जाता है। उस्मानी साम्राज्य सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में अपने चरम शक्ति पर था। अपनी शक्ति के चरमोत्कर्ष के समय यह एशिया, यूरोप तथा उत्तरी अफ़्रीका के हिस्सों में फैला हुआ था। यह साम्राज्य पश्चिमी तथा पूर्वी सभ्यताओं के लिए विचारों के आदान प्रदान के लिए एक सेतु की तरह था। इसने १४५३ में क़ुस्तुन्तुनिया (आधुनिक इस्ताम्बुल) को जीतकर बीज़ान्टिन साम्राज्य का अन्त कर दिया। इस्ताम्बुल बाद में इनकी राजधानी बनी रही। इस्ताम्बुल पर इसकी जीत ने यूरोप में पुनर्जागरण को प्रोत्साहित किया था। .
हलाकू , खलीफा अल-मुस्तसिम को भूख से मारने के लिये उसके खजाने में कैद करते हुए मांगके खान की मृत्यु के समय मंगोल साम्राज्य मंगोल साम्राज्य तेरह वीं और चौदह वीं शताब्दियों के दौरान एक विशाल साम्राज्य था। इस साम्राज्य का आरम्भ चंगेज खान द्वारा मंगोलिया के घूमन्तू जनजातियों के एकीकरण से हुआ। मध्य एशिया में शुरू यह राज्य अंततः पूर्व में यूरोप से लेकर पश्चिम में जापान के सागर तक और उत्तर में साइबेरिया से लेकर दक्षिण में भारतीय उपमहाद्वीप तक फैल गया। आमतौर पर इसे दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा सन्निहित साम्राज्य माना जाना जाता है। अपने शीर्ष पर यह छः हज़ार मील तक फैला था और तैंतीस,शून्य,शून्य वर्ग कि॰मी॰ के क्षेत्र को कवर करता था। इस समय पृथ्वी के कुल भू क्षेत्रफल का बाईस% हिस्सा इसके कब्ज़े में था और इसकी आबादी एक सौ करोड़ थी। मंगोल शासक पहले बौद्ध थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे तुर्कों के सम्पर्क में आकर उन्होंने इस्लाम को अपना लिया। . अट्ठाईस संबंधोंः चग़ताई ख़ानत, चंगेज़ ख़ान, चीनी भाषा, तुर्क, तुर्की भाषा परिवार, बगदाद का युद्ध , बौद्ध धर्म, भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य एशिया, मंगोल, मंगोल भाषा, मंगोलिया, मुग़ल साम्राज्य, मोंगके ख़ान, युआन राजवंश, यूरोप, साम्राज्य, साइबेरिया, जापान सागर, ईरानी भाषा परिवार, ईसाई धर्म, ख़ान , गुयुक ख़ान, ओगताई ख़ान, इस्लाम, कुबलई ख़ान, अब्बासी ख़िलाफ़त, उस्मानी साम्राज्य। चंगेज़ खान एक हज़ार दो सौ सत्ताईस में चंगेज खान का साम्राज्य चंगेज खान का मंदिर चंगेज़ ख़ान एक मंगोल ख़ान था जिसने मंगोल साम्राज्य के विस्तार में एक अहम भूमिका निभाई। वह अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता तथा साम्राज्य विस्तार के लिए प्रसिद्ध हुआ। इससे पहले किसी भी यायावर जाति के व्यक्ति ने इतनी विजय यात्रा नहीं की थी। वह पूर्वोत्तर एशिया के कई घुमंतू जनजातियों को एकजुट करके सत्ता में आया। साम्राज्य की स्थापना के बाद और "चंगेज खान" की घोषणा करने के बाद, मंगोल आक्रमणों को शुरू किया गया, जिसने अधिकांश यूरेशिया पर विजय प्राप्त की। अपने जीवनकाल में शुरू किए गए अभियान क़रा खितई, काकेशस और ख्वारज़्मियान, पश्चिमी ज़िया और जीन राजवंशों के खिलाफ, शामिल हैं। मंगोल साम्राज्य ने मध्य एशिया और चीन के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर कब्जा कर लिया। चंगेज खान की मृत्यु से पहले, उसने ओगदेई खान को अपन उत्तराधिकारी बनाया और अपने बेटों और पोते के बीच अपने साम्राज्य को खानतों में बांट दिया। पश्चिमी जिया को हराने के बाद एक हज़ार दो सौ सत्ताईस में उसका निधन हो गया। वह मंगोलिया में किसी न किसी कब्र में दफनाया गया था।उसके वंशजो ने आधुनिक युग में चीन, कोरिया, काकेशस, मध्य एशिया, और पूर्वी यूरोप और दक्षिण पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण हिस्से में विजय प्राप्त करने वाले राज्यों को जीतने या बनाने के लिए अधिकांश यूरेशिया में मंगोल साम्राज्य का विस्तार किया। इन आक्रमणों में से कई स्थानों पर स्थानीय आबादी के बड़े पैमाने पर लगातार हत्यायेँ की। नतीजतन, चंगेज खान और उसके साम्राज्य का स्थानीय इतिहास में एक भयावय प्रतिष्ठा है। अपनी सैन्य उपलब्धियों से परे, चंगेज खान ने मंगोल साम्राज्य को अन्य तरीकों से भी उन्नत किया। उसने मंगोल साम्राज्य की लेखन प्रणाली के रूप में उईघुर लिपि को अपनाने की घोषणा की। उसने मंगोल साम्राज्य में धार्मिक सहिष्णुता को प्रोत्साहित किया, और पूर्वोत्तर एशिया की अन्य जनजातियों को एकजुट किया। वर्तमान मंगोलियाई लोग उसे मंगोलिया के 'संस्थापक पिता' के रूप में जानते हैं। यद्यपि अपने अभियानों की क्रूरता के लिए चंगेज़ खान को जाना जाता है और कई लोगों द्वारा एक नरसंहार शासक होने के लिए माना जाता है परंतु चंगेज खान को सिल्क रोड को एक एकत्रीय राजनीतिक वातावरण के रूप में लाने का श्रेय दिया जाता रहा है। यह रेशम मार्ग पूर्वोत्तर एशिया से मुस्लिम दक्षिण पश्चिम एशिया और ईसाई यूरोप में संचार और व्यापार लायी, इस तरह सभी तीन सांस्कृतिक क्षेत्रों के क्षितिज का विस्तार हुआ। . चीनी भाषा चीन देश की मुख्य भाषा और राजभाषा है। यह संसार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह चीन एवं पूर्वी एशिया के कुछ देशों में बोली जाती है। चीनी भाषा चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार में आती है और वास्तव में कई भाषाओं और बोलियों का समूह है। मानकीकृत चीनी असल में एक 'मन्दारिन' नामक भाषा है। इसमें एकाक्षरी शब्द या शब्द भाग ही होते हैं और ये चीनी भावचित्र में लिखी जाती है । चीनी एक सुरभेदी भाषा है। . तुर्क का अर्थ इनमें से कुछ हो सकता है -. विश्व के देश और प्रदेश जहाँ तुर्की भाषाओँ को सरकारी मान्यता प्राप्त है सन् सात सौ पैंतीस के लगभग तराशे गए एक ओरख़ोन शिलालेख का हिस्सा यूरेशिया में तुर्की भाषाओँ का फैलाव तुर्की भाषाएँ पैंतीस से भी अधिक भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। तुर्की भाषाएँ पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर से लेकर साईबेरिया और पश्चिमी चीन तक बोली जाती हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें अल्ताई भाषा परिवार की एक शाखा मानते हैं। विश्व में लगभग सोलह.पाँच से अट्ठारह करोड़ लोग तुर्की भाषाएँ अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और अगर सभी तुर्की भाषाओँ को बोल सकने वालों की गणना की जाए तो क़रीब पच्चीस करोड़ लोग इन्हें बोल सकते हैं। सब से अधिक बोली जाने वाली तुर्की भाषा का नाम भी तुर्की है, हालाँकि कभी-कभी इसे अनातोल्वी भी कहा जाता है । . बगदाद का युद्ध हलाकु ख़ान के नायकत्व में मंगोल सेनाओं ने उनतीस जनवरी से दस फरवरी तक अब्बासी ख़िलाफ़त की राजधानी बगदाद को घेरे रखा और अन्ततः इस पर अधिकार करके खलीफा की हत्या कर दी। मंगोल फ़ौज ने पिछले तेरह दिन से बग़दाद को घेरे में ले रखा था. बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व छः वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म पाँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण चार सौ तिरासी ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग चौवन करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का सातवाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल अट्ठारह देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। . भारतीय उपमहाद्वीप का भौगोलिक मानचित्र भारतीय उपमहाद्वीप, एशिया के दक्षिणी भाग में स्थित एक उपमहाद्वीप है। इस उपमहाद्वीप को दक्षिण एशिया भी कहा जाता है भूवैज्ञानिक दृष्टि से भारतीय उपमहाद्वीप का अधिकांश भाग भारतीय प्रस्तर पर स्थित है, हालाँकि इस के कुछ भाग इस प्रस्तर से हटकर यूरेशियाई प्रस्तर पर भी स्थित हैं। . मध्य एशिया एशिया के महाद्वीप का मध्य भाग है। यह पूर्व में चीन से पश्चिम में कैस्पियन सागर तक और उत्तर में रूस से दक्षिण में अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तृत है। भूवैज्ञानिकों द्वारा मध्य एशिया की हर परिभाषा में भूतपूर्व सोवियत संघ के पाँच देश हमेशा गिने जाते हैं - काज़ाख़स्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान। इसके अलावा मंगोलिया, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तरी पाकिस्तान, भारत के लद्दाख़ प्रदेश, चीन के शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्रों और रूस के साइबेरिया क्षेत्र के दक्षिणी भाग को भी अक्सर मध्य एशिया का हिस्सा समझा जाता है। इतिहास में मध्य एशिया रेशम मार्ग के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। चीन, भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच लोग, माल, सेनाएँ और विचार मध्य एशिया से गुज़रकर ही आते-जाते थे। इस इलाक़े का बड़ा भाग एक स्तेपी वाला घास से ढका मैदान है हालाँकि तियान शान जैसी पर्वत शृंखलाएँ, काराकुम जैसे रेगिस्तान और अरल सागर जैसी बड़ी झीलें भी इस भूभाग में आती हैं। ऐतिहासिक रूप मध्य एशिया में ख़ानाबदोश जातियों का ज़ोर रहा है। पहले इसपर पूर्वी ईरानी भाषाएँ बोलने वाली स्किथी, बैक्ट्रियाई और सोग़दाई लोगों का बोलबाला था लेकिन समय के साथ-साथ काज़ाख़, उज़बेक, किरगिज़ और उईग़ुर जैसी तुर्की जातियाँ अधिक शक्तिशाली बन गई।Encyclopædia Iranica, "CENTRAL ASIA: The Islamic period up to the Mongols", C. Edmund Bosworth: "In early Islamic times Persians tended to identify all the lands to the northeast of Khorasan and lying beyond the Oxus with the region of Turan, which in the Shahnama of Ferdowsi is regarded as the land allotted to Fereydun's son Tur. चंगेज़ ख़ान एक पारम्परिक मंगोल घर, जिसे यर्त कहते हैं मंगोल मध्य एशिया और पूर्वी एशिया में रहने वाली एक जाति है, जिसका विश्व इतिहास पर गहरा प्रभाव रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में इस जाति को मुग़ल के नाम से जाना जाता था, जिस से मुग़ल राजवंश का नाम भी पड़ा। आधुनिक युग में मंगोल लोग मंगोलिया, चीन और रूस में वास करते हैं। विश्व भर में लगभग एक करोड़ मंगोल लोग हैं। शुरु-शुरु में यह जाति अर्गुन नदी के पूर्व के इलाकों में रहा करती थी, बाद में वह वाह्य ख़िन्गन पर्वत शृंखला और अल्ताई पर्वत शृंखला के बीच स्थित मंगोलिया पठार के आर-पार फैल गई। मंगोल जाति के लोग ख़ानाबदोशों का जीवन व्यतीत करते थे और शिकार, तीरंदाजी व घुड़सवारी में बहुत कुशल थे। बारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इसके मुखिया तेमूचीन ने तमाम मंगोल कबीलों को एक किया। . मंगोल भाषा बोलने वाले क्षेत्र मंगोल भाषा अलताइक भाषाकुल की तथा योगात्मक बनावट की भाषा है। यह मुख्यतः अनतंत्र मंगोल, भीतरी मंगोल के स्वतंत्र प्रदेश, बुरयात मंगोल राज्य में बोली जाती है। इन क्षेत्रों के अरिरिक्त इसके बोलनेवाले मंचूरिया, चीन के कुछ क्षेत्र और तिब्बत तथा अफगानिस्तान आदि में भी पाए जाते हैं। अनुमान है कि इन सब क्षेत्रों में मंगोल भाषा बोलनेवालों की संख्या कोई चालीस लाख होगी। इन विशाल क्षेत्रों में रहनेवाले मंगोल जाति के सब लोगों के द्वारा स्वीकृत कोई एक आदर्श भाषा नहीं है। परंतु तथाकथित मंगोलिया के अंदर जनतंत्र मंगोल की हलहा बोली धीरे-धीरे आदर्श भाषा का पद ग्रहण कर रही है। स्वयं मंगोलिया के लोग भी इस हलहा बोली को परिष्कृत बोली मानते हैं और इसी बोली के निकट भविष्य में आदर्श भाषा बनने की संभावना है। प्राचीन काल में मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली साहित्यिक मंगोल पढ़े-लिखे लोगों में आदर्श भाषा मानी जाती थी। परंतु अब यह मंगोल लिपि जनतंत्र मंगोलिया द्वारा त्याग दी गई है और इसकी जगह रूसी लिपि से बनाई गई नई मंगोल लिपि स्वीकार की गई है। इस प्रकार अब मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली साहित्यिक भाषा कम और नव मंगोल लिपि में लिखी जानेवाली हलहा बोली अधिक मान्य समझी जाने लगी है। . मंगोलिया पूर्व और मध्य एशिया में एक भूमि से घिरा देश है। इसकी सीमाएं उत्तर में रूस, दक्षिण, पूर्वी और पश्चिमी में चीन से मिलती हैं। हालांकि, मंगोलिया की सीमा कज़ाख़िस्तान से नहीं मिलती, लेकिन इसकी सबसे पश्चिमी छोर कज़ाख़िस्तान के पूर्वी सिरे से केवल चौबीस मील दूर है। देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर उलान बाटोर है, जहां देश की लगभग अड़तीस% जनसंख्या निवास करती है। मंगोलिया में संसदीय गणतंत्र है। . मुग़ल साम्राज्य , एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में शुरू हुआ, जिसने सत्रह वीं शताब्दी के आखिर में और अट्ठारह वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और उन्नीस वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। एक हज़ार सात सौ के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय चालीस लाख किमी² के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान ग्यारह और तेरह करोड़ के बीच लगाया गया था। एक हज़ार सात सौ पच्चीस के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। एक हज़ार पाँच सौ छप्पन में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और एक सौ पचास साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। . यूरोप पृथ्वी पर स्थित सात महाद्वीपों में से एक महाद्वीप है। यूरोप, एशिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। यूरोप और एशिया वस्तुतः यूरेशिया के खण्ड हैं और यूरोप यूरेशिया का सबसे पश्चिमी प्रायद्वीपीय खंड है। एशिया से यूरोप का विभाजन इसके पूर्व में स्थित यूराल पर्वत के जल विभाजक जैसे यूराल नदी, कैस्पियन सागर, कॉकस पर्वत शृंखला और दक्षिण पश्चिम में स्थित काले सागर के द्वारा होता है। यूरोप के उत्तर में आर्कटिक महासागर और अन्य जल निकाय, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्य सागर और दक्षिण पश्चिम में काला सागर और इससे जुड़े जलमार्ग स्थित हैं। इस सबके बावजूद यूरोप की सीमायें बहुत हद तक काल्पनिक हैं और इसे एक महाद्वीप की संज्ञा देना भौगोलिक आधार पर कम, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर अधिक है। ब्रिटेन, आयरलैंड और आइसलैंड जैसे देश एक द्वीप होते हुए भी यूरोप का हिस्सा हैं, पर ग्रीनलैंड उत्तरी अमरीका का हिस्सा है। रूस सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यूरोप में ही माना जाता है, हालाँकि इसका सारा साइबेरियाई इलाका एशिया का हिस्सा है। आज ज़्यादातर यूरोपीय देशों के लोग दुनिया के सबसे ऊँचे जीवनस्तर का आनन्द लेते हैं। यूरोप पृष्ठ क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का दूसरा सबसे छोटा महाद्वीप है, इसका क्षेत्रफल के दस,एक सौ अस्सी,शून्य वर्ग किलोमीटर है जो पृथ्वी की सतह का दो% और इसके भूमि क्षेत्र का लगभग छः.आठ% है। यूरोप के पचास देशों में, रूस क्षेत्रफल और आबादी दोनों में ही सबसे बड़ा है, जबकि वैटिकन नगर सबसे छोटा देश है। जनसंख्या के हिसाब से यूरोप एशिया और अफ्रीका के बाद तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है, तिहत्तर.एक करोड़ की जनसंख्या के साथ यह विश्व की जनसंख्या में लगभग ग्यारह% का योगदान करता है, तथापि, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार , दो हज़ार पचास तक विश्व जनसंख्या में यूरोप का योगदान घटकर सात% पर आ सकता है। एक हज़ार नौ सौ में, विश्व की जनसंख्या में यूरोप का हिस्सा लगभग पच्चीस% था। पुरातन काल में यूरोप, विशेष रूप से यूनान पश्चिमी संस्कृति का जन्मस्थान है। मध्य काल में इसी ने ईसाईयत का पोषण किया है। यूरोप ने सोलह वीं सदी के बाद से वैश्विक मामलों में एक प्रमुख भूमिका अदा की है, विशेष रूप से उपनिवेशवाद की शुरुआत के बाद. राज्य जहां कई जातियां रहती हैं, जो क्षेत्र में विशाल है और जहां सम्राट के पास समस्त अधिकार हैं, साम्राज्य कहलाता है। यह एक राजनैतिक क्षेत्र है जो किसी एक राजा अथवा कुछ मुख्य-पतियों द्वारा साझेदारी में संभाला जाता है। साम्राज्य छोटे समय के अंतराल में भी हो सकता है परन्तु अधिकाँश वह पीढ़ी दर पीढ़ी कई दशकों या सदियों तक चलता है। भारत का सबसे बडा साम्राज्य सम्राट अशोक का मौर्य साम्राज्य था, जिसकी सिमा पचास,शून्य,शून्य वर्ग किमी में श्रेत्र था। इसे देखिए - भारत में सबसे बडे साम्राज्यों की सूची . साइबेरिया का नक़्शा एक विशाल और विस्तृत भूक्षेत्र है जिसमें लगभग समूचा उत्तर एशिया समाया हुआ है। यह रूस का मध्य और पूर्वी भाग है। सन् एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे तक यह सोवियत संघ का भाग हुआ करता था। साइबेरिया का क्षेत्रफल एक सौ इकतीस लाख वर्ग किमी है। तुलना के लिए पूरे भारत का क्षेत्रफल बत्तीस.आठ लाख वर्ग किमी है, यानि साइबेरिया भारत से क़रीब चार गुना है। फिर भी साइबेरिया का मौसम और भूस्थिति इतनी सख़्त है के यहाँ केवल चार करोड़ लोग रहते हैं, जो दो हज़ार ग्यारह में केवल उड़ीसा राज्य की आबादी थी। यूरेशिया का अधिकतर स्टॅप इलाक़ा साइबेरिया में आता है। साइबेरिया पश्चिम में यूराल पहाड़ों से शुरू होकर पूर्व में प्रशांत महासागर तक और उत्तर में उत्तरध्रुवीय महासागर तक फैला हुआ है। दक्षिण में इसकी सीमाएँ क़ाज़ाक़स्तान, मंगोलिया और चीन से लगती हैं। . जापान सागर जापान सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक समुद्री अंश है। यह समुद्र जापान के द्वीपसमूह, रूस के साख़ालिन द्वीप और एशिया के महाद्वीप के मुख्य भूभाग के बीच स्थित है। इसके इर्द-गिर्द जापान, रूस, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया आते हैं। क्योंकि कुछ स्थानों को छोड़कर यह क़रीब-क़रीब पूरी तरह ज़मीन से घिरा हुआ है, इसलिए इसमें भी भूमध्य सागर की तरह महासागर के ज्वार-भाटा की बड़ी लहरें नहीं आती। अन्य सागरों की तुलना में जापान सागर के पानी में मिश्रित ऑक्सिजन की तादाद अधिक है जिस से यहाँ मछलियों की भरमार है।, Great Soviet Encyclopedia जापान सागर का क्षेत्रफल नौ,अठहत्तर,शून्य वर्ग किमी है और इसकी सब से अधिक गहराई सतह से तीन,सात सौ बयालीस मीटर नीचे तक पहुँचती है। इसके इर्द गिर्द सात,छः सौ किमी के तट हैं, जिसमें से लगभग आधा रूस की धरती पर पड़ता है। नीचे समुद्र के फ़र्श पर तीन बड़ी द्रोणियाँ हैंः उत्तर में "जापान द्रोणी", दक्षिण-पश्चिम में "त्सुशिमा द्रोणी" और दक्षिण-पूर्व में "यामातो द्रोणी"। जापान द्रोणी सबसे गहरा क्षेत्र है और यहाँ का फ़र्श प्राचीन ज्वालामुखीय पत्थर से बना हुआ है। माना जाता है कि पिछले हिमयुग की चरम स्थिति में जब समुद्र की सतह वर्तमान युग से नीचे थी तो जापान एशिया के मुख्य भाग से धरती द्वारा जुड़ा हुआ था। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय जापान सागर आधुनिक कैस्पियन सागर की भाँती एक ज़मीन से घिरा हुआ बंद समुद्र था। . ईरानी भाषाओँ का वृक्ष, जिसमें उसकी उपशाखाएँ दिखाई गई हैं आधुनिक ईरानी भाषाओँ का फैलाव ईरानी भाषाएँ हिन्द-ईरानी भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। ध्यान रहे कि हिन्द-ईरानी भाषाएँ स्वयं हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की एक उपशाखा हैं। आधुनिक युग में विश्व में लगभग पंद्रह-बीस करोड़ लोग किसी ईरानी भाषा को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और ऍथ़नॉलॉग भाषाकोष में सन् दो हज़ार ग्यारह तक सत्तासी ईरानी भाषाएँ दर्ज थीं।, Gernot Windfuhr, Routledge, दो हज़ार नौ, ISBN नौअठहत्तर शून्य सात हज़ार सात-एक हज़ार एक सौ इकतीस-चार, Raymond Gordon, Jr. "'ईद्भास/क्रॉस"' - यह ईसाई धर्म का निशान है ईसाई धर्म एक इब्राहीमीChristianity's status as monotheistic is affirmed in, amongst other sources, the Catholic Encyclopedia ; William F. Albright, From the Stone Age to Christianity; H. Richard Niebuhr; About.com,; Kirsch, God Against the Gods; Woodhead, An Introduction to Christianity; The Columbia Electronic Encyclopedia; The New Dictionary of Cultural Literacy,; New Dictionary of Theology,, pp. ख़ान ओगदाई ख़ान, चंग़ेज़ ख़ान का तीसरा पुत्र ख़ान या ख़ाँ मूल रूप से एक अल्ताई उपाधि है तो शासकों और अत्यंत शक्तिशाली सिपहसालारों को दी जाती थी। यह समय के साथ तुर्की-मंगोल क़बीलों द्वारा पूरे मध्य एशिया में इस्तेमाल होने लगी। जब इस क्षेत्र के सैन्य बलों ने भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर के अपने साम्राज्य बनाने शुरू किये तो इसका प्रयोग इन क्षेत्रों की कई भाषाओँ में आ गया, जैसे कि हिन्दी-उर्दू, फ़ारसी, पश्तो, इत्यादि। इसका एक और रूप 'ख़ागान' है जिसका अर्थ है 'ख़ानों का ख़ान' या 'ख़ान-ए-ख़ाना', जो भारत में कभी प्रचलित नहीं हुआ। इसके बराबरी की स्त्रियों की उपाधियाँ ख़ानम और ख़ातून हैं।, Elena Vladimirovna Boĭkova, R. B. Rybakov, Otto Harrassowitz Verlag, दो हज़ार छः, ISBN नौअठहत्तर मार्च चार सौ सैंतालीस-पाँच हज़ार चार सौ सोलह-चार . इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के पच्चीस% हिस्से, यानी लगभग एक.छः से एक.आठ अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से लगभग बीस से तीस करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। . अपने चरम पर अब्बासियों का क्षेत्र अब्बासी वंश के शासक इस्लाम के ख़लीफ़ा थे जो सन् सात सौ पचास के बाद से एक हज़ार दो सौ सत्तावन तक इस्लाम के धार्मिक प्रमुख और इस्लामी साम्राज्य के शासक रहे। इनके पूर्वज मुहम्मद से संबंधित थे इसलिए इनको सुन्नियों के साथ साथ शिया विचारधारा के मुसलमानों का भी बहुत सहयोग मिला जिसमें ईरान तथा ख़ोरासान तथा शाम की जनता शामिल थी। इस जनसहयोग की बदौलत उन्होंने उमय्यदों को हरा दिया और ख़लीफ़ा बनाए गए। उन्होंने उमय्यदों के विपरीत साम्राज्य में ईरानी तत्वों को समावेश किया और उनके काल में इस्लामी विज्ञान, कला तथा ज्योतिष में काफ़ी नए विकास हुए। सन् सात सौ बासठ में उन्होंने बग़दाद की स्थापना की जहाँ ईरानी सासानी निर्माण कला तथा अरबी संस्कृति से मिश्रित एक राजधानी का विकास हुआ। यद्यपि दसवीं सदी में उनकी वंशानुगत शासन की परम्परा टूट गई पर ख़िलाफ़त बनी रही। इस परंपरा टूटने के कारण शिया इस्लाम में इस्माइली तथा बारहवारी सम्प्रदायों का जन्म हुआ जो इस्लाम के उत्तराधिकारी के रूप में मुहम्मद साहब के विभिन्न वंशजों का समर्थन करते थे। उनके काल में इस्लाम भारत में भी फैल गया लेकिन एक हज़ार दो सौ सत्तावन में उस समय अमुस्लिम रहे मंगोलों के आक्रमण से बग़दाद नष्ट हो गया। . उस्मानी सलतनत एक हज़ार दो सौ निन्यानवे में पश्चिमोत्तर अनातोलिया में स्थापित एक तुर्क राज्य था। महमद द्वितीय द्वारा एक हज़ार चार सौ तिरानवे में क़ुस्तुंतुनिया जीतने के बाद यह एक साम्राज्य में बदल गया। प्रथम विश्वयुद्ध में एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में पराजित होने पर इसका विभाजन करके इस पर अधिकार कर लिया गया। स्वतंत्रता के लिये संघर्ष के बाद उनतीस अक्तुबर सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस में तुर्की गणराज्य की स्थापना पर इसे समाप्त माना जाता है। उस्मानी साम्राज्य सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में अपने चरम शक्ति पर था। अपनी शक्ति के चरमोत्कर्ष के समय यह एशिया, यूरोप तथा उत्तरी अफ़्रीका के हिस्सों में फैला हुआ था। यह साम्राज्य पश्चिमी तथा पूर्वी सभ्यताओं के लिए विचारों के आदान प्रदान के लिए एक सेतु की तरह था। इसने एक हज़ार चार सौ तिरेपन में क़ुस्तुन्तुनिया को जीतकर बीज़ान्टिन साम्राज्य का अन्त कर दिया। इस्ताम्बुल बाद में इनकी राजधानी बनी रही। इस्ताम्बुल पर इसकी जीत ने यूरोप में पुनर्जागरण को प्रोत्साहित किया था। .
Bihar Crime: बिहार के हाजीपुर जिले (Bihar Hajipur District) में बुधवार को बैंक लूटने आए तीन हथियारबंद लुटेरों से दो महिला सिपाही भिड़ गईं। जिसके चलते लुटेरे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना सदर थाना क्षेत्र के सेंदुआरी चौक (Senduari Chowk in Sadar police station) की है। जब तीन हथियारबंद लुटेरों ने बैंक में घुसने की कोशिश की तो बैंक की सुरक्षा में तैनात महिला कांस्टेबलों ने बिना किसी हिचकिचाहट के उनसे मुकाबला करने का फैसला किया। सीसीटीवी फुटेज में दो कांस्टेबल जूही कुमारी और शांति को बैंक की सुरक्षा करते हुए दिखाया गया है, जब तीन हथियारबंद लुटेरों ने बैंक में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। नकाबपोश लुटरे बैंक पहुंचे तो गार्ड ने उनसे दस्तावेज दिखाने को कहा, तभी उनमें से एक ने पिस्टल निकाल ली, लेकिन सिपाही जूही और शांति दोनों ने लुटेरों को चुनौती दी और उनसे भिड़ गईं। अपराधियों ने महिला पुलिस की राइफलें छीनने की कोशिश की, लेकिन लुटेरे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। अंततः लुटेरों को भागना पड़ा। वहीं हाथापाई में घायल हुई सिपाही जूही कुमारी ने भाग रहे चोरों को गोली मारने की कोशिश की और डकैती के प्रयास को नाकाम कर दिया। घायल सिपाही जूही ने कहा, 'मैंने उनसे पूछा कि क्या तीनों बैंक में काम करते हैं, तो उन्होंने हां में जवाब दिया। इसके बाद मैंने उनसे पासबुक दिखाने को कहा और तभी उन्होंने बंदूक निकाल ली। " जूही ने इंडिया टुडे से बात करते हुए बताया कि हमने उन्हें बंदूक दिखाई और उन्होंने मेरी बंदूक छीनने की कोशिश की। इस झड़प में मेरे दांत टूट गए और मेरा हाथ भी जख्मी हो गया। हम लड़ते रहे और आखिरकार वे सभी भाग गए। सिपाही शांति ने बताया, 'लुटेरों ने हम पर हावी होने और हमारी बंदूकें छीनने की कोशिश की, लेकिन हमने फैसला किया था कि हम उन्हें बैंक लूटने नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। ' वहीं इस घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। मौके पर पुलिस के आलाधिकारी पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ओम ने कहा, "तीन लोगों ने सेंदुआरी में सुबह करीब 11 बजे बैंक लूटने की कोशिश की। हमारी महिला कांस्टेबलों ने असाधारण साहस परिचय दिया और उन्हें भगाने में कामयाब रहीं। उन्होंने कहा कि कोई गोलीबारी नहीं हुई। दोनों महिला सिपाही को सम्मानित किया जाएगा।
Bihar Crime: बिहार के हाजीपुर जिले में बुधवार को बैंक लूटने आए तीन हथियारबंद लुटेरों से दो महिला सिपाही भिड़ गईं। जिसके चलते लुटेरे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना सदर थाना क्षेत्र के सेंदुआरी चौक की है। जब तीन हथियारबंद लुटेरों ने बैंक में घुसने की कोशिश की तो बैंक की सुरक्षा में तैनात महिला कांस्टेबलों ने बिना किसी हिचकिचाहट के उनसे मुकाबला करने का फैसला किया। सीसीटीवी फुटेज में दो कांस्टेबल जूही कुमारी और शांति को बैंक की सुरक्षा करते हुए दिखाया गया है, जब तीन हथियारबंद लुटेरों ने बैंक में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। नकाबपोश लुटरे बैंक पहुंचे तो गार्ड ने उनसे दस्तावेज दिखाने को कहा, तभी उनमें से एक ने पिस्टल निकाल ली, लेकिन सिपाही जूही और शांति दोनों ने लुटेरों को चुनौती दी और उनसे भिड़ गईं। अपराधियों ने महिला पुलिस की राइफलें छीनने की कोशिश की, लेकिन लुटेरे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। अंततः लुटेरों को भागना पड़ा। वहीं हाथापाई में घायल हुई सिपाही जूही कुमारी ने भाग रहे चोरों को गोली मारने की कोशिश की और डकैती के प्रयास को नाकाम कर दिया। घायल सिपाही जूही ने कहा, 'मैंने उनसे पूछा कि क्या तीनों बैंक में काम करते हैं, तो उन्होंने हां में जवाब दिया। इसके बाद मैंने उनसे पासबुक दिखाने को कहा और तभी उन्होंने बंदूक निकाल ली। " जूही ने इंडिया टुडे से बात करते हुए बताया कि हमने उन्हें बंदूक दिखाई और उन्होंने मेरी बंदूक छीनने की कोशिश की। इस झड़प में मेरे दांत टूट गए और मेरा हाथ भी जख्मी हो गया। हम लड़ते रहे और आखिरकार वे सभी भाग गए। सिपाही शांति ने बताया, 'लुटेरों ने हम पर हावी होने और हमारी बंदूकें छीनने की कोशिश की, लेकिन हमने फैसला किया था कि हम उन्हें बैंक लूटने नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। ' वहीं इस घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। मौके पर पुलिस के आलाधिकारी पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ओम ने कहा, "तीन लोगों ने सेंदुआरी में सुबह करीब ग्यारह बजे बैंक लूटने की कोशिश की। हमारी महिला कांस्टेबलों ने असाधारण साहस परिचय दिया और उन्हें भगाने में कामयाब रहीं। उन्होंने कहा कि कोई गोलीबारी नहीं हुई। दोनों महिला सिपाही को सम्मानित किया जाएगा।
नई दिल्ली (भाषा)। भारतीय रेल देश में दूसरी श्रेणी के शहरों में स्थित अपने कम से कम 20 स्टेशनों का कायाकल्प करने के लिये मलेशिया के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रही है। देशभर में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य में निजी क्षेत्र से करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किये जाने की योजना है। स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य के तहत प्लेटफार्म को आधुनिक बनाने के साथ साथ उनके आसपास के इलाके का कायाकल्प करना शामिल है। पुनर्विकास कार्य में स्टेशनों में उपलब्ध स्थानों पर होटल, रेस्त्रां, मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग मॉल और कार्यालय परिसर आदि विकसित किये जायेंगे। ये परिसर डेवलपर्स को 45 साल के इस्तेमाल के लिये दिये जायेंगे। देश के दूसरी श्रेणी के इन शहरों को विकसित करने के लिये केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों की तरफ से काफी समर्थन दिया जा रहा है। वह चाहते हैं कि इन शहरों को देश के सबसे तेजी से वृद्धि करने वाले शहरों में बदला जाये और व्यावसाय के लिये उपयुक्त स्थान बनाया जाये। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा सरकार के स्तर पर मलेशिया के साथ एक दीर्घकालिक भागीदारी स्थापित की जायेगी और उसके आधार पर इस दक्षिण पूर्वी एशिया स्थित देश को 20 स्टेशनों के कायाकल्प की पेशकश की जायेगी। रेलवे पहले ही इस महत्वकांक्षी परियोजना को शुरू कर चुका है जिसमें उसने एक लाख करोड़ रुपये के निवेश से देशभर में कुल मिलाकर 400 स्टेशनों को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत विकसित करने की योजना बनाई है। रेलवे ने जो लिस्ट तैयार की है उसमें जिन स्टेशनों का कायाकल्प होगा उनमें पुणे, थाने, विशाखापट्टनम, कामाख्या, जम्मू तवी, उदयपुर सिटी, सिकंद्राबाद, विजयवाड़ा, रांची, कोजिकोड, यशवंतपुर, बंगलुरू कैंट, भोपाल जंक्शन, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली और इंदौर शामिल है। भोपाल में मौजूद हबीबगंज रेलवे स्टेशन को पहले ही पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए प्राइवेट कंपनी को दिया जा चुका है। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
नई दिल्ली । भारतीय रेल देश में दूसरी श्रेणी के शहरों में स्थित अपने कम से कम बीस स्टेशनों का कायाकल्प करने के लिये मलेशिया के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रही है। देशभर में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य में निजी क्षेत्र से करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किये जाने की योजना है। स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य के तहत प्लेटफार्म को आधुनिक बनाने के साथ साथ उनके आसपास के इलाके का कायाकल्प करना शामिल है। पुनर्विकास कार्य में स्टेशनों में उपलब्ध स्थानों पर होटल, रेस्त्रां, मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग मॉल और कार्यालय परिसर आदि विकसित किये जायेंगे। ये परिसर डेवलपर्स को पैंतालीस साल के इस्तेमाल के लिये दिये जायेंगे। देश के दूसरी श्रेणी के इन शहरों को विकसित करने के लिये केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों की तरफ से काफी समर्थन दिया जा रहा है। वह चाहते हैं कि इन शहरों को देश के सबसे तेजी से वृद्धि करने वाले शहरों में बदला जाये और व्यावसाय के लिये उपयुक्त स्थान बनाया जाये। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा सरकार के स्तर पर मलेशिया के साथ एक दीर्घकालिक भागीदारी स्थापित की जायेगी और उसके आधार पर इस दक्षिण पूर्वी एशिया स्थित देश को बीस स्टेशनों के कायाकल्प की पेशकश की जायेगी। रेलवे पहले ही इस महत्वकांक्षी परियोजना को शुरू कर चुका है जिसमें उसने एक लाख करोड़ रुपये के निवेश से देशभर में कुल मिलाकर चार सौ स्टेशनों को सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत विकसित करने की योजना बनाई है। रेलवे ने जो लिस्ट तैयार की है उसमें जिन स्टेशनों का कायाकल्प होगा उनमें पुणे, थाने, विशाखापट्टनम, कामाख्या, जम्मू तवी, उदयपुर सिटी, सिकंद्राबाद, विजयवाड़ा, रांची, कोजिकोड, यशवंतपुर, बंगलुरू कैंट, भोपाल जंक्शन, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली और इंदौर शामिल है। भोपाल में मौजूद हबीबगंज रेलवे स्टेशन को पहले ही पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए प्राइवेट कंपनी को दिया जा चुका है। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती के लिए आवेदन करें 2023 ऑनलाइन/ऑफ़लाइन 30/05/2023 से पहले। वे उम्मीदवार जिन्हें Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies रिक्तियों के लिए चुना गया है, उन्हें District Health and Family Welfare Society Kaithal, Kaithal में Rs. 100,000 - Rs. 150,000 Per Month के वेतनमान के साथ रखा जाएगा। District Health and Family Welfare Society Kaithal के स्थान, नौकरी का शीर्षक, रिक्तियों की संख्या, नियत तिथि, आधिकारिक लिंक आदि के बारे में विवरण निम्नलिखित हैं। District Health and Family Welfare Society Kaithal Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की योग्यता MBBS, Diploma, MS/MD है। योग्यता आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी रिक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और 30/05/2023 से पहले ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती 2023 रिक्ति कुल 14 है। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती 2023 के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें District Health and Family Welfare Society Kaithal में Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies के रूप में रखा जाएगा। Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies के लिए District Health and Family Welfare Society Kaithal 2023 पर नौकरी रिक्ति Kaithal पर उपलब्ध है। उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर District Health and Family Welfare Society Kaithal Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती 2023 वॉकिन के लिए प्रक्रिया नीचे दी गई है और वॉकिन तिथि 30/05/2023 है। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती 2023 के लिए वॉकिन साक्षात्कार 30/05/2023 पर आयोजित किया जाएगा। उम्मीदवार नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना से District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती 2023 के लिए विस्तृत वॉकिन प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं।
District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती के लिए आवेदन करें दो हज़ार तेईस ऑनलाइन/ऑफ़लाइन तीस मई दो हज़ार तेईस से पहले। वे उम्मीदवार जिन्हें Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies रिक्तियों के लिए चुना गया है, उन्हें District Health and Family Welfare Society Kaithal, Kaithal में Rs. एक सौ,शून्य - Rs. एक सौ पचास,शून्य Per Month के वेतनमान के साथ रखा जाएगा। District Health and Family Welfare Society Kaithal के स्थान, नौकरी का शीर्षक, रिक्तियों की संख्या, नियत तिथि, आधिकारिक लिंक आदि के बारे में विवरण निम्नलिखित हैं। District Health and Family Welfare Society Kaithal Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की योग्यता MBBS, Diploma, MS/MD है। योग्यता आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी रिक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और तीस मई दो हज़ार तेईस से पहले ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती दो हज़ार तेईस रिक्ति कुल चौदह है। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती दो हज़ार तेईस के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें District Health and Family Welfare Society Kaithal में Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies के रूप में रखा जाएगा। Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies के लिए District Health and Family Welfare Society Kaithal दो हज़ार तेईस पर नौकरी रिक्ति Kaithal पर उपलब्ध है। उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर District Health and Family Welfare Society Kaithal Gynaecologist, Anaesthetist, More Vacancies भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती दो हज़ार तेईस वॉकिन के लिए प्रक्रिया नीचे दी गई है और वॉकिन तिथि तीस मई दो हज़ार तेईस है। District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए वॉकिन साक्षात्कार तीस मई दो हज़ार तेईस पर आयोजित किया जाएगा। उम्मीदवार नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना से District Health and Family Welfare Society Kaithal भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए विस्तृत वॉकिन प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं।
लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच भारत में कई ऑटोमोबाइल डीलरशिप इस समय बिना बिके हुए BS4 वाहनों की इन्वेंट्री से जूझ रहे हैं. इनमें से कुछ डीलरशिप ने बची हुई BS4 गाड़ियों को बेचने का अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है. कई डीलरशिप ने अपनी गाड़ियों को प्री-ओन्ड सेगमेंट में बेचने के लिए छद्म नामों पर रजिस्टर कराने का रास्ता अख्तियार किया है. इस मामले को लेकर लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई डीलरशिप ने अपने बिना बिके बीएस4 वाहनों को पंजीकृत किया है और अब वे पूर्व-स्वामित्व (सेकंड हैंड) सेगमेंट में बिक्री पर नजर गड़ाए हुए हैं. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कई डीलरशिप के अधिकारियों ने बताया कि खास तौर पर दोपहिया वाहनों के मामले में ऐसा किया जा रहा है क्योंकि इस श्रेणी में बीएस4 वाहनों का स्टॉक कारों और कमर्शियल गाड़ियों की तुलना में बहुत ज्यादा है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी बीएस4 वाहनों की बिक्री के लिए 1 अप्रैल की समय सीमा तय की थी. मार्च में कुछ राहत मिली जब शीर्ष अदालत ने देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद डीलरों को अपने बीएस4 स्टॉक का 10 फीसदी बेचने की अनुमति दी. लेकिन लाइवमिंट की रिपोर्ट का दावा है कि कई डीलर अनिश्चित्ता के भरोसे बैठे रहने को तैयार नहीं हैं. क्या Bentley कार निर्माण में सेफ्टी नियमों का कर रही पालन ?
लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच भारत में कई ऑटोमोबाइल डीलरशिप इस समय बिना बिके हुए BSचार वाहनों की इन्वेंट्री से जूझ रहे हैं. इनमें से कुछ डीलरशिप ने बची हुई BSचार गाड़ियों को बेचने का अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है. कई डीलरशिप ने अपनी गाड़ियों को प्री-ओन्ड सेगमेंट में बेचने के लिए छद्म नामों पर रजिस्टर कराने का रास्ता अख्तियार किया है. इस मामले को लेकर लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई डीलरशिप ने अपने बिना बिके बीएसचार वाहनों को पंजीकृत किया है और अब वे पूर्व-स्वामित्व सेगमेंट में बिक्री पर नजर गड़ाए हुए हैं. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कई डीलरशिप के अधिकारियों ने बताया कि खास तौर पर दोपहिया वाहनों के मामले में ऐसा किया जा रहा है क्योंकि इस श्रेणी में बीएसचार वाहनों का स्टॉक कारों और कमर्शियल गाड़ियों की तुलना में बहुत ज्यादा है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी बीएसचार वाहनों की बिक्री के लिए एक अप्रैल की समय सीमा तय की थी. मार्च में कुछ राहत मिली जब शीर्ष अदालत ने देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद डीलरों को अपने बीएसचार स्टॉक का दस फीसदी बेचने की अनुमति दी. लेकिन लाइवमिंट की रिपोर्ट का दावा है कि कई डीलर अनिश्चित्ता के भरोसे बैठे रहने को तैयार नहीं हैं. क्या Bentley कार निर्माण में सेफ्टी नियमों का कर रही पालन ?
दालचीनी की चाय का सेवन सेहत को काफी लाभ पहुंचाता है। क्योंकि दालचीनी की चाय औषधीय गुणों से भरपूर होती है। दालचीनी की चाय का सेवन वैसे तो किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन दालचीनी की चाय का सेवन अगर आप खाली पेट करते हैं, तो यह सेहत के लिए ज्यादा गुणकारी होते हैं। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करने से वजन से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक कंट्रोल होता है, साथ ही इसके सेवन से स्वास्थ्य से जुड़ी कई अन्य समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है। क्योंकि दालचीनी एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुणों के साथ-साथ थाइमीन, फॉस्फोरस, प्रोटीन, सोडियम, विटामिन, कैल्शियम, मैंग्नीज, पोटेशियम जैसे तत्वों से भरपूर होती है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। तो आइए जानते हैं खाली पेट दालचीनी का चाय पीने के क्या-क्या फायदे होते हैं। अगर आप रोज सुबह खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करते हैं, तो इससे वजन कम (Weight loss) करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है, जो वजन को कम करने में सहायक होता है। दालचीनी की चाय एंटी डायबिटिक गुणों से भरपूर होती है, जो डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। अगर आप खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करते हैं, तो इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। अगर आप खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुण इम्यूनिटी को बूस्ट (Boost Immunity) करने में मदद करते हैं, जिससे आपका वायरल संक्रमण से बचाव होता है। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन त्वचा (Skin) को काफी लाभ पहुंचाता है। क्योंकि दालचीनी की चाय एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है, जो त्वचा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन हार्ट (Heart) हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट गुण कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारी का खतरा कम होता है। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है। जी हां अगर महिलाएं दालचीनी की चाय का सेवन करती हैं, तो इससे पीरियड्स (Periods) के समय होने वाले दर्द और ऐंठन से छुटकारा मिलता है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
दालचीनी की चाय का सेवन सेहत को काफी लाभ पहुंचाता है। क्योंकि दालचीनी की चाय औषधीय गुणों से भरपूर होती है। दालचीनी की चाय का सेवन वैसे तो किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन दालचीनी की चाय का सेवन अगर आप खाली पेट करते हैं, तो यह सेहत के लिए ज्यादा गुणकारी होते हैं। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करने से वजन से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक कंट्रोल होता है, साथ ही इसके सेवन से स्वास्थ्य से जुड़ी कई अन्य समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है। क्योंकि दालचीनी एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुणों के साथ-साथ थाइमीन, फॉस्फोरस, प्रोटीन, सोडियम, विटामिन, कैल्शियम, मैंग्नीज, पोटेशियम जैसे तत्वों से भरपूर होती है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। तो आइए जानते हैं खाली पेट दालचीनी का चाय पीने के क्या-क्या फायदे होते हैं। अगर आप रोज सुबह खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करते हैं, तो इससे वजन कम करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है, जो वजन को कम करने में सहायक होता है। दालचीनी की चाय एंटी डायबिटिक गुणों से भरपूर होती है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। अगर आप खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करते हैं, तो इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। अगर आप खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुण इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करते हैं, जिससे आपका वायरल संक्रमण से बचाव होता है। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन त्वचा को काफी लाभ पहुंचाता है। क्योंकि दालचीनी की चाय एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है, जो त्वचा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट गुण कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारी का खतरा कम होता है। खाली पेट दालचीनी की चाय का सेवन महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है। जी हां अगर महिलाएं दालचीनी की चाय का सेवन करती हैं, तो इससे पीरियड्स के समय होने वाले दर्द और ऐंठन से छुटकारा मिलता है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
नई दिल्लीः मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी 13 जून को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होंगे। इस दिन कांग्रेस अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है कांग्रेस अपनी ताकत दिखाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को अपना राजनीतिक संदेश देने के लिए एक बड़े आयोजन की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक उस दिन की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिवों, राज्य प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) प्रमुखों की बैठक बुलाई गई है। इसके अलावा, कांग्रेस सांसदों और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्यों को भी उस दिन दिल्ली में मौजूद रहने के लिए कहा गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि सभी संसद सदस्यों को 13 जून को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के लिए कहा गया है, और वे भी राहुल गांधी के साथ ईडी कार्यालय की ओर मार्च करेंगे। बैठक को चर्चा के लिए बुलाया गया है और इस पर अंतिम निर्णय लेने के लिए देश भर के नेताओं की राय लेंगे क्योंकि एक और विचार है कि दिल्ली के साथ-साथ, प्रदेश कांग्रेस कमेटियों द्वारा हर राज्य की राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया जाना चाहिए। राहुल गांधी को 13 जून को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया गया है। उन्हें पहले जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था लेकिन वह देश से बाहर थे और बाद में उन्हें जांच में शामिल होने के लिए 13 जून की नई तारीख दी गई। इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह एक राजनीतिक प्रतिशोध है और मामले की जांच का कोई आधार नहीं है। ईडी ने इस साल अप्रैल में नई दिल्ली में कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष पवन बंसल से भी नेशनल हेराल्ड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में पूछताछ की थी। इसके बाद एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दोनों कांग्रेस नेताओं के बयान दर्ज किए। नेशनल हेराल्ड एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएल) के स्वामित्व में है। खड़गे जहां वाईआईएल के सीईओ हैं, वहीं बंसल एजेएल के प्रबंध निदेशक हैं। ईडी वर्तमान में एजेएल और वाईआईएल के कामकाज में शेयरधारिता पैटर्न और वित्तीय लेनदेन के साथ-साथ पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है। वाईआईएल के प्रमोटरों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हैं। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि गांधी परिवार ने धोखाधड़ी की और धन का दुरुपयोग किया, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने केवल 50 लाख रुपये का भुगतान करके 90. 25 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार प्राप्त किया। उन्होंने इससे पहले दिल्ली की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। स्वामी की याचिका पर वाईआईएल के खिलाफ आयकर विभाग की जांच का संज्ञान लेने के बाद, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत एक नया मामला भी दर्ज किया।
नई दिल्लीः मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी तेरह जून को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होंगे। इस दिन कांग्रेस अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है कांग्रेस अपनी ताकत दिखाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को अपना राजनीतिक संदेश देने के लिए एक बड़े आयोजन की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक उस दिन की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिवों, राज्य प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुखों की बैठक बुलाई गई है। इसके अलावा, कांग्रेस सांसदों और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्यों को भी उस दिन दिल्ली में मौजूद रहने के लिए कहा गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि सभी संसद सदस्यों को तेरह जून को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के लिए कहा गया है, और वे भी राहुल गांधी के साथ ईडी कार्यालय की ओर मार्च करेंगे। बैठक को चर्चा के लिए बुलाया गया है और इस पर अंतिम निर्णय लेने के लिए देश भर के नेताओं की राय लेंगे क्योंकि एक और विचार है कि दिल्ली के साथ-साथ, प्रदेश कांग्रेस कमेटियों द्वारा हर राज्य की राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया जाना चाहिए। राहुल गांधी को तेरह जून को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया गया है। उन्हें पहले जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था लेकिन वह देश से बाहर थे और बाद में उन्हें जांच में शामिल होने के लिए तेरह जून की नई तारीख दी गई। इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह एक राजनीतिक प्रतिशोध है और मामले की जांच का कोई आधार नहीं है। ईडी ने इस साल अप्रैल में नई दिल्ली में कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष पवन बंसल से भी नेशनल हेराल्ड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में पूछताछ की थी। इसके बाद एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दोनों कांग्रेस नेताओं के बयान दर्ज किए। नेशनल हेराल्ड एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में है। खड़गे जहां वाईआईएल के सीईओ हैं, वहीं बंसल एजेएल के प्रबंध निदेशक हैं। ईडी वर्तमान में एजेएल और वाईआईएल के कामकाज में शेयरधारिता पैटर्न और वित्तीय लेनदेन के साथ-साथ पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है। वाईआईएल के प्रमोटरों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हैं। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि गांधी परिवार ने धोखाधड़ी की और धन का दुरुपयोग किया, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने केवल पचास लाख रुपये का भुगतान करके नब्बे. पच्चीस करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार प्राप्त किया। उन्होंने इससे पहले दिल्ली की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। स्वामी की याचिका पर वाईआईएल के खिलाफ आयकर विभाग की जांच का संज्ञान लेने के बाद, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत एक नया मामला भी दर्ज किया।
नामक अध्ययन में कपिल मुनिने केवल ज्ञानी होकर चोरोंको समझाने के लिए जो उपदेश दिया उसका संकलन है। नौवें नमि प्रव्रज्या नामक अध्ययनमे नमि नामक प्रत्येक बुद्ध राजा की दीक्षाका वर्णन है । मिथिलाका राजा नमि कामभोगोंसे विरक्त होकर जिन दीक्षा लेता है और इन्द्र ब्राह्मणका रूप बनाकर उससे प्रश्न करता है। अन्तमें राजाके वैराग्य पूर्ण उत्तरोंसे सन्तुष्ट होकर इन्द्र नमस्कार करके चला जाता है । मिथिलाका राजा नमि ऐतिहासिक व्यक्ति है। इसके विषयमें पहले लिख आये हैं । यह भगवान पार्श्वनाथ के काल में हुआ था। दसवें द्रुम पत्रक नामक अध्ययनमे महावीर स्वामी गौतम गणधरसे कहते हैं कि 'जैसे वृक्षका पत्ता पीला होकर झड़ जाता है वैसा ही मानव जीवन है । अतः गौतम एक क्षणके लिये भो प्रमाद मत कर' । छत्तीस पद्योंमे से प्रत्येकका अन्तिम चरण 'समयं गोयम ! मा पमायए' है । सभी पद्य सुन्दर उपदेशप्रद हैं । ग्यारहवें बहुश्रुत नामक अध्ययन के प्रारम्भिक पद्यमें कहा गया है कि 'सयोगसे मुक्त अनगार भिक्षुके आचारका कथन करूँगा उसे सुनो । बारहवें हरिकेशीय नामक अध्ययन में हरिकेशी मुनिकी कथा है । हरिकेशी मुनि जन्ममे चाण्डाल था । एक दिन भिक्षा के लिए वह एक यज्ञ मण्डप में चला गया। वहाँ ब्राह्मणों से उसका वार्तालाप हुआ । ब्राह्मणोंने उसे वहाँसे चला जानेके लिए कहा । वह नहीं गया तो कुछ तरुण विद्यार्थियोने उसे मारा । तव यक्षोंने उन कुमारोको पाटा । पीछे हरिकेशीसे क्षमा याचना करने पर छोड़ा। चित्रसम्भूतीय नामक तेरहवें अध्ययन चित्र और सम्भूति नामक मुनियोंका वृत्तान्त है। चौदहवें इपुकारीय अध्ययन में बतलाया है कि एक ही विमानसे च्युत होकर है जीवोंने अपने २ कर्म के अनुसार इपुकार नामक नगरमे जन्म लिया और जिनेन्द्र के मार्गको अपनाया । संभिक्षु नामक पन्द्रहवें अध्ययनमे भिक्षुका स्वरूप बतलाया है। प्रत्येक पद्यके अन्तमे 'स भिक्खू' । वह भिन्नु है ) पद आता है। इसी से इस अध्ययनका नाम सभिक्षु है । सोलहवें ब्रह्मचर्य समाधि नामक अध्ययन में ब्रह्मचर्य के दस समाधि स्थानोंका कथन है । इ. का आरम्भ भी 'सुयं में उस' आदि वाक्यसे होता है । दस सूत्रोंके द्वारा दस समाधियोंका कथन है। तत्पश्चात् श्लोकोंके द्वारा उन्हींका प्रतिपादन है । सतरहवें पापश्रमण नामक अध्ययन मे पापाचारी श्रमणोंका स्वरूप बतलाया है । अठारहवें संयतीय अध्ययन सजय राजाको कथा है । उन्नीसवें भृगापुत्रीय अध्ययन मृगापुत्रकी कथा है । बीसवें महा निर्ग्रन्थीय अध्ययन में एक मुनिकी कथा है । इक्कीसवें समुद्रपालीय अध्ययन में समुद्र पालकी कथा है। बाईसवें रथनेमीय अध्ययन में रथनेमिकी कथा है। रथनेमि नेमिनाथका छोटा भाई था । वह प्रव्रजित होगया था। एक दिन साध्वी राजुल वर्षांसे त्रस्त होकर एक गुफामे चली गई और वस्त्र उतार कर सुखाने लगी। उसी गुफा में रथनेमि तपस्या करता था वह राजुलको देखकर उसपर आसक्त हो गया। राजुलने उसे सम्बोधकर सुमार्गमें लगाया । तेईसवें केशिगौतमीय नामक अध्ययन में पार्श्वनाथ परम्परा के केशी और गौतम गणधरके संवादका वर्णन है। पार्श्वनाथकी ऐतिहासिकता के प्रकरणमे इसकी चर्चा चुकी है। प्रवचनमाता नामक चौबीसवें अध्ययन में पांच समिति और तीन गुप्तियोंका कथन है इनको प्रवचनकी माता कहा गया है। पञ्चीसने यज्ञीय अध्ययन में जयघोपकी कथा है । विजयघोष नामक ब्राह्मण यज्ञ करता था । जयघोष मुनि भिक्षाके लिए पहुॅचे। उसने भिक्षा नहीं दी। दोनोंका सवाद हुआ । जयघोषने कहा कि यज्ञोपवीत धारण करनेसे ही कोई ब्राह्मण नहीं होजाता और न वल्कल पहिननेसे तपस्वी ही होजाता है। सामाचारी नामक छब्बीसवें अध्ययन में साधुओकी सामाचारीका कथन है । खलुकीय नामक सत्ताईसवें अध्ययन गर्ग नामक मुनिकी कथा है। उसमें खलुक -गलिया वैलका दृष्टान्त दिया है। अट्ठाईस मोक्षमार्ग नामक अध्ययन में मोक्षके मार्ग ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप का वर्णन है । उनतीसवें सम्यकत्व पराक्रम नामक अध्ययन में सवेग, निर्वेद, धर्म श्रद्धा आदि तिहत्तर द्वारोंका कथन है । इसका आरंभ 'सुय में उस आदि वाक्यसे होता है । यह सूत्ररूप है। है कि भगवान महावीरने इसका कथन किया है। तीसवें तपोमार्ग नामक अध्ययन मे तपका वर्णन है। चरण विधि नामक इकतीस अध्ययन चारित्रकी विधिका कथन बत्तीसवें अध्ययन में प्रमादका कथन है तथा राग द्वेष और मोह को दूर करने के उपाय बतलाये हैं। कर्म प्रकृति नामक तेतीसवें अध्ययनमें कर्मोंके भेद प्रभेद तथा उनकी स्थिति बतलाई है । चौतीसवें' लेश्या नामक अध्ययन स्वरूप बतलाया है । पैंतीसवे अगर मार्ग नामक अध्ययनम सक्षेपमें मुनिका मार्ग बतलाया है। छत्तीसवें जीवाजीवविभक्ति नामक अध्ययन में जीव और जीव द्रव्यों का कथन है । इस तरहसे वर्तमान उत्तराध्ययन सूत्र विविध प्रकरणों का एक सग्रह जैसा है। न तो यह प्रश्नोत्तररूप ही है और न
नामक अध्ययन में कपिल मुनिने केवल ज्ञानी होकर चोरोंको समझाने के लिए जो उपदेश दिया उसका संकलन है। नौवें नमि प्रव्रज्या नामक अध्ययनमे नमि नामक प्रत्येक बुद्ध राजा की दीक्षाका वर्णन है । मिथिलाका राजा नमि कामभोगोंसे विरक्त होकर जिन दीक्षा लेता है और इन्द्र ब्राह्मणका रूप बनाकर उससे प्रश्न करता है। अन्तमें राजाके वैराग्य पूर्ण उत्तरोंसे सन्तुष्ट होकर इन्द्र नमस्कार करके चला जाता है । मिथिलाका राजा नमि ऐतिहासिक व्यक्ति है। इसके विषयमें पहले लिख आये हैं । यह भगवान पार्श्वनाथ के काल में हुआ था। दसवें द्रुम पत्रक नामक अध्ययनमे महावीर स्वामी गौतम गणधरसे कहते हैं कि 'जैसे वृक्षका पत्ता पीला होकर झड़ जाता है वैसा ही मानव जीवन है । अतः गौतम एक क्षणके लिये भो प्रमाद मत कर' । छत्तीस पद्योंमे से प्रत्येकका अन्तिम चरण 'समयं गोयम ! मा पमायए' है । सभी पद्य सुन्दर उपदेशप्रद हैं । ग्यारहवें बहुश्रुत नामक अध्ययन के प्रारम्भिक पद्यमें कहा गया है कि 'सयोगसे मुक्त अनगार भिक्षुके आचारका कथन करूँगा उसे सुनो । बारहवें हरिकेशीय नामक अध्ययन में हरिकेशी मुनिकी कथा है । हरिकेशी मुनि जन्ममे चाण्डाल था । एक दिन भिक्षा के लिए वह एक यज्ञ मण्डप में चला गया। वहाँ ब्राह्मणों से उसका वार्तालाप हुआ । ब्राह्मणोंने उसे वहाँसे चला जानेके लिए कहा । वह नहीं गया तो कुछ तरुण विद्यार्थियोने उसे मारा । तव यक्षोंने उन कुमारोको पाटा । पीछे हरिकेशीसे क्षमा याचना करने पर छोड़ा। चित्रसम्भूतीय नामक तेरहवें अध्ययन चित्र और सम्भूति नामक मुनियोंका वृत्तान्त है। चौदहवें इपुकारीय अध्ययन में बतलाया है कि एक ही विमानसे च्युत होकर है जीवोंने अपने दो कर्म के अनुसार इपुकार नामक नगरमे जन्म लिया और जिनेन्द्र के मार्गको अपनाया । संभिक्षु नामक पन्द्रहवें अध्ययनमे भिक्षुका स्वरूप बतलाया है। प्रत्येक पद्यके अन्तमे 'स भिक्खू' । वह भिन्नु है ) पद आता है। इसी से इस अध्ययनका नाम सभिक्षु है । सोलहवें ब्रह्मचर्य समाधि नामक अध्ययन में ब्रह्मचर्य के दस समाधि स्थानोंका कथन है । इ. का आरम्भ भी 'सुयं में उस' आदि वाक्यसे होता है । दस सूत्रोंके द्वारा दस समाधियोंका कथन है। तत्पश्चात् श्लोकोंके द्वारा उन्हींका प्रतिपादन है । सतरहवें पापश्रमण नामक अध्ययन मे पापाचारी श्रमणोंका स्वरूप बतलाया है । अठारहवें संयतीय अध्ययन सजय राजाको कथा है । उन्नीसवें भृगापुत्रीय अध्ययन मृगापुत्रकी कथा है । बीसवें महा निर्ग्रन्थीय अध्ययन में एक मुनिकी कथा है । इक्कीसवें समुद्रपालीय अध्ययन में समुद्र पालकी कथा है। बाईसवें रथनेमीय अध्ययन में रथनेमिकी कथा है। रथनेमि नेमिनाथका छोटा भाई था । वह प्रव्रजित होगया था। एक दिन साध्वी राजुल वर्षांसे त्रस्त होकर एक गुफामे चली गई और वस्त्र उतार कर सुखाने लगी। उसी गुफा में रथनेमि तपस्या करता था वह राजुलको देखकर उसपर आसक्त हो गया। राजुलने उसे सम्बोधकर सुमार्गमें लगाया । तेईसवें केशिगौतमीय नामक अध्ययन में पार्श्वनाथ परम्परा के केशी और गौतम गणधरके संवादका वर्णन है। पार्श्वनाथकी ऐतिहासिकता के प्रकरणमे इसकी चर्चा चुकी है। प्रवचनमाता नामक चौबीसवें अध्ययन में पांच समिति और तीन गुप्तियोंका कथन है इनको प्रवचनकी माता कहा गया है। पञ्चीसने यज्ञीय अध्ययन में जयघोपकी कथा है । विजयघोष नामक ब्राह्मण यज्ञ करता था । जयघोष मुनि भिक्षाके लिए पहुॅचे। उसने भिक्षा नहीं दी। दोनोंका सवाद हुआ । जयघोषने कहा कि यज्ञोपवीत धारण करनेसे ही कोई ब्राह्मण नहीं होजाता और न वल्कल पहिननेसे तपस्वी ही होजाता है। सामाचारी नामक छब्बीसवें अध्ययन में साधुओकी सामाचारीका कथन है । खलुकीय नामक सत्ताईसवें अध्ययन गर्ग नामक मुनिकी कथा है। उसमें खलुक -गलिया वैलका दृष्टान्त दिया है। अट्ठाईस मोक्षमार्ग नामक अध्ययन में मोक्षके मार्ग ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप का वर्णन है । उनतीसवें सम्यकत्व पराक्रम नामक अध्ययन में सवेग, निर्वेद, धर्म श्रद्धा आदि तिहत्तर द्वारोंका कथन है । इसका आरंभ 'सुय में उस आदि वाक्यसे होता है । यह सूत्ररूप है। है कि भगवान महावीरने इसका कथन किया है। तीसवें तपोमार्ग नामक अध्ययन मे तपका वर्णन है। चरण विधि नामक इकतीस अध्ययन चारित्रकी विधिका कथन बत्तीसवें अध्ययन में प्रमादका कथन है तथा राग द्वेष और मोह को दूर करने के उपाय बतलाये हैं। कर्म प्रकृति नामक तेतीसवें अध्ययनमें कर्मोंके भेद प्रभेद तथा उनकी स्थिति बतलाई है । चौतीसवें' लेश्या नामक अध्ययन स्वरूप बतलाया है । पैंतीसवे अगर मार्ग नामक अध्ययनम सक्षेपमें मुनिका मार्ग बतलाया है। छत्तीसवें जीवाजीवविभक्ति नामक अध्ययन में जीव और जीव द्रव्यों का कथन है । इस तरहसे वर्तमान उत्तराध्ययन सूत्र विविध प्रकरणों का एक सग्रह जैसा है। न तो यह प्रश्नोत्तररूप ही है और न
जबलपुर में फुटबाल का इंटरनेशनल स्टेडियम बनेगा। इसमें फुटबाल फेसेलिटी सेंटर भी होगा, जिसमें युवा प्रतिभाओं को निखारा जाएगा। फुटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी यह स्टेडियम बनाने कुछ साल पहले अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने जबलपुर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यहां पर लोकप्रिय खेल फुटबाल का इंटरनेशनल स्टेडियम बनाने स्वीकृति दे दी है। वह जल्द ही मुख्यमंत्री कमलनाथ से जबलपुर में इंटरनेशनल स्टेडियम की स्थापना को लेकर चर्चा करेंगे। शनिवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह जानकारी राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने दी। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक महत्व वाले जबलपुर ने फुटबाल खेल को एक मुकाम तक पहुंचाया है। इस ऐतिहासिक शहर में युवा-बुजुर्ग फुटबाल खेलने के प्रेमी हैं। कैंट क्षेत्र का शिवाजी ग्राउंड पुराने समय से फुटबाल खेल का सबूत है। इस मैदान में आज भी फुटबाल खेलने युवा पहुंचते हैं। फुटबाल मैच शुरू होते ही सड़क से निकलते लोग उसे देखने के लिए रुक जाते हैं। राजज्यसभा सदस्य ने कहा कि केन्द्र सरकार ने एक दिन पहले अंतरिम बजट पेश किया है। इस बजट में पूरे एक साल के प्रावधान किए गए हैं। जबकि केन्द्र की इस सत्तासीन सरकार का कार्यकाल सिर्फ दो माह बाद पूरा हो जाएगा। यानी केन्द्र की सत्तासीन सरकार ने नई सरकार के लिए एक साल का पूरा बजट बनाया है, जो कि व्यवस्थागत गलत है। केन्द्र ने आयुध निर्माणियों का काम छीनकर उसे निजी क्षेत्र की पूंजीपति कंपनियों के हवाले कर दिया है। इससे सेना को शासकीय संस्थानों में उत्पादित गुणवत्तायुक्त माल अब नहीं मिलता। तो आयुध निर्माणियों की हालत खराब हो रही है। इनके कर्मचारी भविष्य का संकट झेल रहे हैं। शहर की आयुध निर्माणियों में पहले एक लाख कर्मचारी काम करते थे। अब निर्माणियों में भर्तियां बंद होने से इनके कर्मचारी कुछ हजार ही बचे हैं। तन्खा निवास पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता विक्रम सिंह ठाकुर, दुर्गेश पटेल, पंकज पाण्डे, प्रशांत मिश्रा, जगत बहादुर सिंह अन्नू, जबलपुर चेम्बर के चेयरमैन प्रेम दुबे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमांशु खरे आदि मौजूद रहे। जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल स्टेडियम बनेगा। इसमें एक समय में लगभग 45 हजार दर्शक बैठ सकेंगे और वह फुटबाल मैच का आनंद उठाएंगे। फुटबॉल स्टेडियम बनने से जबलपुर खेल के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित होगा। इससे जबलपुर व महाकोशल में खेल का वातावरण भी बनेगा। खेल से पर्यटन भी जुड़ा है। जबलपुर में राष्ट्रीय-अंतर राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल मैच होने पर बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन होगा, जिससे अनेक व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
जबलपुर में फुटबाल का इंटरनेशनल स्टेडियम बनेगा। इसमें फुटबाल फेसेलिटी सेंटर भी होगा, जिसमें युवा प्रतिभाओं को निखारा जाएगा। फुटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी यह स्टेडियम बनाने कुछ साल पहले अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने जबलपुर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यहां पर लोकप्रिय खेल फुटबाल का इंटरनेशनल स्टेडियम बनाने स्वीकृति दे दी है। वह जल्द ही मुख्यमंत्री कमलनाथ से जबलपुर में इंटरनेशनल स्टेडियम की स्थापना को लेकर चर्चा करेंगे। शनिवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह जानकारी राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने दी। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक महत्व वाले जबलपुर ने फुटबाल खेल को एक मुकाम तक पहुंचाया है। इस ऐतिहासिक शहर में युवा-बुजुर्ग फुटबाल खेलने के प्रेमी हैं। कैंट क्षेत्र का शिवाजी ग्राउंड पुराने समय से फुटबाल खेल का सबूत है। इस मैदान में आज भी फुटबाल खेलने युवा पहुंचते हैं। फुटबाल मैच शुरू होते ही सड़क से निकलते लोग उसे देखने के लिए रुक जाते हैं। राजज्यसभा सदस्य ने कहा कि केन्द्र सरकार ने एक दिन पहले अंतरिम बजट पेश किया है। इस बजट में पूरे एक साल के प्रावधान किए गए हैं। जबकि केन्द्र की इस सत्तासीन सरकार का कार्यकाल सिर्फ दो माह बाद पूरा हो जाएगा। यानी केन्द्र की सत्तासीन सरकार ने नई सरकार के लिए एक साल का पूरा बजट बनाया है, जो कि व्यवस्थागत गलत है। केन्द्र ने आयुध निर्माणियों का काम छीनकर उसे निजी क्षेत्र की पूंजीपति कंपनियों के हवाले कर दिया है। इससे सेना को शासकीय संस्थानों में उत्पादित गुणवत्तायुक्त माल अब नहीं मिलता। तो आयुध निर्माणियों की हालत खराब हो रही है। इनके कर्मचारी भविष्य का संकट झेल रहे हैं। शहर की आयुध निर्माणियों में पहले एक लाख कर्मचारी काम करते थे। अब निर्माणियों में भर्तियां बंद होने से इनके कर्मचारी कुछ हजार ही बचे हैं। तन्खा निवास पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता विक्रम सिंह ठाकुर, दुर्गेश पटेल, पंकज पाण्डे, प्रशांत मिश्रा, जगत बहादुर सिंह अन्नू, जबलपुर चेम्बर के चेयरमैन प्रेम दुबे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमांशु खरे आदि मौजूद रहे। जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल स्टेडियम बनेगा। इसमें एक समय में लगभग पैंतालीस हजार दर्शक बैठ सकेंगे और वह फुटबाल मैच का आनंद उठाएंगे। फुटबॉल स्टेडियम बनने से जबलपुर खेल के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित होगा। इससे जबलपुर व महाकोशल में खेल का वातावरण भी बनेगा। खेल से पर्यटन भी जुड़ा है। जबलपुर में राष्ट्रीय-अंतर राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल मैच होने पर बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन होगा, जिससे अनेक व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
=दुआ । व्यक्ति अल्लाह को कहता है कि, "Do Allah" इसे ही, "दुआ" कहते हैं। इस Dual को ही ब्रह्म॑षि पाताञ्जली ने, "योग" कहा है। योग यानी परमात्मा से जुड़ाव । ब्रह्मषि पाताञ्जली भी अपने दोनों हाथों की हथेलियों को, जोड़कर परमात्मा में ध्यान लगाते थे । इसलिए उनका नाम "पाताञ्जली" है। क्योंकि दोनों हाथों की जुड़ी हुई, हथेलियों को "अंजुली" बोला जाता है। क्योंकि ब्रह्मषि पाताञ्जली ने, अपने अंजुली को ही "पात्र" बना लिया था । तो पात्र अंजुली से यह पाताञ्जली शब्द बना । पात्र + अंजुली = पाताञ्जली । यह "पाताञ्जली" ही आगे चलकर, "करपात्री" शब्द बन गया। क्योंकि कर को पात्र बनाया गया । कर+पात्री करपात्री । किन्तु कर एक हाथ को कहा जाता है। इसलिए जो केवल एक हाथ में, कुछ लेता है, वह "करपात्री" कहलाता है। 184 दंग + गल = दंगल - दंग हो जाना किसी गल पर, दंगल कहलाता है। दंग+गल-दंगल । दंगल में आदमी तभी जाता है, जब व्यक्ति किसी गल पर, दंग रह जाता है । 185. दूर + Shit = दूषितदूर बैठकर करना चाहिए Shit, नहीं तो स्थान दूषित हो जाएगा। 186.Delete=दलितजिस प्रकार से साहित्यिक रचना में से, अशुद्धियां को Delete कर दिया जाता है। उसी प्रकार से दल में से, अशुद्ध लोगों को Delete कर दिया जाता है, इन Delete लोगों को ही, दलित कहा जाता है। Delete= दलित । दल में से जिसे इत कर दिया गया है, उसे दलित कहा जाता है । दल + इत = दलित । "इत" को प्रयोग किसी को लोप करने के लिए किया जाता है। जैसे कि अंग्रेजी में "It" का प्रयोग निर्जीव वस्तुओं के लिए किया जाता है, उसी प्रकार से इत का प्रयोग उनके लिए किया जाता है, जो हैं तो पर दिखते नहीं है। इत=It. 187.ढक+कोष+ला = ढकोसला. ढक कर कोष को लाया जाता है, उसे ढकोसला कहते हैं । ढक + कोष + ला ढकोसला । पहले जमाने में, जब कोष को लेकर चलते थे, तब उस कोष को इस तरह से, ढककर चलते थे कि, किसी को मालूम नहीं पड़े की, कोष को लेकर जा रहे हैं। इसे ही ढकोसला कहते थे । 188. दीवार + आला = दीवालजिस दीवार में आला होता है, उस दीवार को "दीवाल" कहते हैं। दीवार + आला दीवाल। आला में दीपक रखा जाता है, दीपक से आले में दिव्यता आती है, दिव्यता जब आले में आती है, तब उसे "दिव्यआले" कहा जाता है, दिव्य आले से दिव्याले बना है, और दिव्याले से कालांतर में, "देवालय" शब्द बन गया। दिव्य + आले देवालय । क्योंकि जब लालटेन आ गई, तब आले में दीपक रखना, बंद कर दिया गया । तब आले में किसी ने कुछ रखा, और किसी ने कुछ रखना, शुरु कर दिया । इसी दीवाल के आला में, लोगों ने अपनी धन-सम्पत्ति भी, रखनी शुरु कर दी । तो कभी किसी के आला में, कोई सेंध लगाकर धन ले जाता था, तो लोग कहते थे कि, "मेरा तो दीवाला ही निकल गया"। दीवाल + आला = दीवाला । किन्तु लोगों ने वर्ष में एक दिन, दीपक जलाना जारी रखा। जिसे लोगों ने "दीवाली" नाम दिया। दीवाल के आला में तो सामान रखा था, तो लोगो ने दीवाल में एक छोटी सी आली बनाई और, उस आली में दीपक को प्रज्वलित किया । इसलिए उसे नाम दिया "दीवाली" । दीवाल + आली = दीवाली । और किसी-किसी ने आले में, देवता की मूर्ति रखनी शुरु कर दी। और ऊपर से कपड़े से ढक दिया, या किवड़ियां उस पर लगा दीं। लेकिन उसको अभी भी देवालय, नाम से ही पुकारते रहे । किन्तु बाद में दीवारों में, आले बनने भी बंद हो गए, तब कालांतर में यही मूर्तियां, जब देवालय से निकालकर, एक बड़े भवन में स्थापित की गईं। तब उस बड़े स्थान को, भी देवालय कहा गया और, उस स्थान पर भी लोग, दीपक प्रज्वलित करने लगे। इस तरह से दीवाल का आला, देवालय बन गया । दीवाल से ही नाम पड़ा "Wall", The + Wall = Wall. इसमें The को Silent कर दिया गया । 189.दाह + रूह = दारू - व्यक्ति ने दारू पी तो ली, यह सुनकर कि, "दारू पीने से देह में दुःख नहीं होता है" । किन्तु उसे यह नहीं बताया गया कि, "दारू पीने से, उसकी मति काम नहीं करेगी" । इसी तरह से यह भी सुनाया जाता था कि, किसी व्यक्ति को दुःख देना है तो, प्रभु का नाम लेकर, उस व्यक्ति के पानी में, खाने में, चुपके से दारू मिला दो । उस व्यक्ति को पता भी नहीं चलेगा कि, उस व्यक्ति ने दारू पिया हुआ है । वह व्यक्ति अपने आपको सामान्य ही समझेगा । तब दारू को पीने के बाद, उस व्यक्ति का दिमाग जम जाएगा, जिससे उस व्यक्ति की बुद्धि काम नहीं करेगी, और वह कार्यों में गलती करेगा। उस व्यक्ति की गई गलतियों के कारण, उस व्यक्ति को आत्म ग्लानि होगी, और उस व्यक्ति को दुःख होगा। और वह व्यक्ति अपने आपको कोसेगा कि, "ऐसा मैंने क्यों किया" । तब उस व्यक्ति को कहो कि, "देखो यह दारू है, इस दारू को पीने से तुम्हारी, देह में दुःख नहीं होगा"। तब वह व्यक्ति दारू पीकर अपने, दुःख को दूर करने की कोशिश करेगा । क्योंकि उसको समझाया गया है कि, "दारू पीने से देह में दुःख नहीं आता है " । किन्तु उसे यह नहीं पता कि, "दारू पीने से मति खराब हो जाती है, जबकि वह व्यक्ति अपने दुःख का कारण, प्रभु को मान लेता है। और अपने दुःख के लिए, प्रभु को दोषी मानता है तथा, जिसने उसके खाने-पीने की वस्तुओं में, दारू मिलाकर पिला दिया था, उसे अभी तक पहचान भी नहीं पाया है। दाह करती जो रूह का उसे दारू कहते हैं। दाह + रूह = दारू । जिस प्रकार से बम के भीतर छिपी बारूद, विस्फोट होकर शरीर को दाह करती है। उसी प्रकार से शरीर के भीतर गई दारू, व्यक्ति को क्रोध दिलाकर, व्यक्ति की रूह को दाह करती है। दाह = जला । जिस प्रकार से बम के विस्फोट से, सबकुछ नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार से शरीर के भीतर गई दारू से, हुए क्रोध में सबकुछ नष्ट हो जाता है। क्योंकि शरीर के भीतर गई दारू, व्यक्ति के Blood Pressure को, High से भी High कर देती है और, व्यक्ति Hypertension का शिकार हो जाता है। जबकि उसे कुछ पता ही नहीं, यह क्यों हो रहा है। और व्यक्ति अपने आपको, आत्मग्लानि में झोक देता है । तथा इस किए गए पाप का स्वयं को, दोषी मान लेता है। जबकि उसे कुछ पता ही नहीं है। इसलिए भारत देश में, किसी के यहां का पानी एवं भोजन करने को मना किया गया है । क्योंकि कई लोग व्यक्ति को, भ्रमित करने के लिए, उस व्यक्ति के पानी एवं खाने में, Rum को भर देते हैं, जिससे व्यक्ति भ्रमित हो जाता है । भर + Rum = भ्रम । क्योंकि व्यक्ति को हराने से पहले, व्यक्ति की मति हर ली जाती है। और इसका दोषी प्रभु को बना दिया जाता है । जबकि उसकी मति तो उसको, चुपके से दारू पिलाने से हर ली गई है। क्योंकि उसको दोस्त बनकर हराना जो है, इसलिए दोस्त दारू को पहले, चुपके से मिलाकर पिलाते हैं और, फिर बाद में उसके बारे में, बदनामी फैलाते हैं कि, "वह तो दारू पीता है"। उसे तो पता ही नहीं होता है कि, उसके शरीर में दारू जा रही है। क्या प्रभु भी षडयंत्र करते हैं, और षडयंत्र के तहत पहले दारू पिलाकर, उस व्यक्ति की मति हर लेते हैं, और तब उस व्यक्ति को दुःख देते हैं। जबकि प्रभु तो सभी को सुख देते हैं। और प्रभु सबको आनंद देते हैं। आखिर प्रभु क्यों किसी की, मति को पहले दारू पिलाकर, हर लेते हैं, फिर दुःख को मिटाने के लिए, दारू पीने को देते हैं कि, "दारू पीने से दुःख नहीं होता है देह में"। यानी ऐसा समझा जाए है कि, प्रभु के द्वारा दुःख को दूर नहीं किया जाता है, और दुःख को दूर करने के लिए, दारू को पिया जाता है । तो इसलिए व्यक्ति इसी बात को मानकर, प्रभु के स्थान में नहीं जाता है, वह व्यक्ति दारू के मिलनेवाले स्थान पर जाता है। इस तरह व्यक्ति अपनी करनी को, प्रभु पर डाल देता है, और सबको समझाता है कि, "प्रभु के द्वारा व्यक्ति को, किसी पाप का दुःख दिया जाता है"। जबकि जिसको दुःख मिल रहा है, उसने कोई पाप या गलती की ही नहीं है। 190. डर + Ream = Dream - अपने डर को लिखने के लिए, पूरा Ream चाहिए । डर + Ream =Dream. सफेद कागज़ की Ream पर, अपने भीतर के Dark को, काली पक्तियों में लिखने के लिए, पूरी Ream लग जाती है, इसे ही Dream कहते हैं। यानी Dream को Ream पर उतारा जाता है। 191.धन+दो+लात - धन-दौलतजब कोई यह कहता है कि, "भले ही कोई मुझे दो लात मार ले, पर मुझे धन दे दे" । तब इसे ही"धन-दौलत" कहते हैं। धन+दो+लात=धन-दौलत। 192. धार + रण = धारण - धार वाली वस्तु, रण में धारण करके ले जाना ।
=दुआ । व्यक्ति अल्लाह को कहता है कि, "Do Allah" इसे ही, "दुआ" कहते हैं। इस Dual को ही ब्रह्म॑षि पाताञ्जली ने, "योग" कहा है। योग यानी परमात्मा से जुड़ाव । ब्रह्मषि पाताञ्जली भी अपने दोनों हाथों की हथेलियों को, जोड़कर परमात्मा में ध्यान लगाते थे । इसलिए उनका नाम "पाताञ्जली" है। क्योंकि दोनों हाथों की जुड़ी हुई, हथेलियों को "अंजुली" बोला जाता है। क्योंकि ब्रह्मषि पाताञ्जली ने, अपने अंजुली को ही "पात्र" बना लिया था । तो पात्र अंजुली से यह पाताञ्जली शब्द बना । पात्र + अंजुली = पाताञ्जली । यह "पाताञ्जली" ही आगे चलकर, "करपात्री" शब्द बन गया। क्योंकि कर को पात्र बनाया गया । कर+पात्री करपात्री । किन्तु कर एक हाथ को कहा जाता है। इसलिए जो केवल एक हाथ में, कुछ लेता है, वह "करपात्री" कहलाता है। एक सौ चौरासी दंग + गल = दंगल - दंग हो जाना किसी गल पर, दंगल कहलाता है। दंग+गल-दंगल । दंगल में आदमी तभी जाता है, जब व्यक्ति किसी गल पर, दंग रह जाता है । एक सौ पचासी. दूर + Shit = दूषितदूर बैठकर करना चाहिए Shit, नहीं तो स्थान दूषित हो जाएगा। एक सौ छियासी.Delete=दलितजिस प्रकार से साहित्यिक रचना में से, अशुद्धियां को Delete कर दिया जाता है। उसी प्रकार से दल में से, अशुद्ध लोगों को Delete कर दिया जाता है, इन Delete लोगों को ही, दलित कहा जाता है। Delete= दलित । दल में से जिसे इत कर दिया गया है, उसे दलित कहा जाता है । दल + इत = दलित । "इत" को प्रयोग किसी को लोप करने के लिए किया जाता है। जैसे कि अंग्रेजी में "It" का प्रयोग निर्जीव वस्तुओं के लिए किया जाता है, उसी प्रकार से इत का प्रयोग उनके लिए किया जाता है, जो हैं तो पर दिखते नहीं है। इत=It. एक सौ सत्तासी.ढक+कोष+ला = ढकोसला. ढक कर कोष को लाया जाता है, उसे ढकोसला कहते हैं । ढक + कोष + ला ढकोसला । पहले जमाने में, जब कोष को लेकर चलते थे, तब उस कोष को इस तरह से, ढककर चलते थे कि, किसी को मालूम नहीं पड़े की, कोष को लेकर जा रहे हैं। इसे ही ढकोसला कहते थे । एक सौ अठासी. दीवार + आला = दीवालजिस दीवार में आला होता है, उस दीवार को "दीवाल" कहते हैं। दीवार + आला दीवाल। आला में दीपक रखा जाता है, दीपक से आले में दिव्यता आती है, दिव्यता जब आले में आती है, तब उसे "दिव्यआले" कहा जाता है, दिव्य आले से दिव्याले बना है, और दिव्याले से कालांतर में, "देवालय" शब्द बन गया। दिव्य + आले देवालय । क्योंकि जब लालटेन आ गई, तब आले में दीपक रखना, बंद कर दिया गया । तब आले में किसी ने कुछ रखा, और किसी ने कुछ रखना, शुरु कर दिया । इसी दीवाल के आला में, लोगों ने अपनी धन-सम्पत्ति भी, रखनी शुरु कर दी । तो कभी किसी के आला में, कोई सेंध लगाकर धन ले जाता था, तो लोग कहते थे कि, "मेरा तो दीवाला ही निकल गया"। दीवाल + आला = दीवाला । किन्तु लोगों ने वर्ष में एक दिन, दीपक जलाना जारी रखा। जिसे लोगों ने "दीवाली" नाम दिया। दीवाल के आला में तो सामान रखा था, तो लोगो ने दीवाल में एक छोटी सी आली बनाई और, उस आली में दीपक को प्रज्वलित किया । इसलिए उसे नाम दिया "दीवाली" । दीवाल + आली = दीवाली । और किसी-किसी ने आले में, देवता की मूर्ति रखनी शुरु कर दी। और ऊपर से कपड़े से ढक दिया, या किवड़ियां उस पर लगा दीं। लेकिन उसको अभी भी देवालय, नाम से ही पुकारते रहे । किन्तु बाद में दीवारों में, आले बनने भी बंद हो गए, तब कालांतर में यही मूर्तियां, जब देवालय से निकालकर, एक बड़े भवन में स्थापित की गईं। तब उस बड़े स्थान को, भी देवालय कहा गया और, उस स्थान पर भी लोग, दीपक प्रज्वलित करने लगे। इस तरह से दीवाल का आला, देवालय बन गया । दीवाल से ही नाम पड़ा "Wall", The + Wall = Wall. इसमें The को Silent कर दिया गया । एक सौ नवासी.दाह + रूह = दारू - व्यक्ति ने दारू पी तो ली, यह सुनकर कि, "दारू पीने से देह में दुःख नहीं होता है" । किन्तु उसे यह नहीं बताया गया कि, "दारू पीने से, उसकी मति काम नहीं करेगी" । इसी तरह से यह भी सुनाया जाता था कि, किसी व्यक्ति को दुःख देना है तो, प्रभु का नाम लेकर, उस व्यक्ति के पानी में, खाने में, चुपके से दारू मिला दो । उस व्यक्ति को पता भी नहीं चलेगा कि, उस व्यक्ति ने दारू पिया हुआ है । वह व्यक्ति अपने आपको सामान्य ही समझेगा । तब दारू को पीने के बाद, उस व्यक्ति का दिमाग जम जाएगा, जिससे उस व्यक्ति की बुद्धि काम नहीं करेगी, और वह कार्यों में गलती करेगा। उस व्यक्ति की गई गलतियों के कारण, उस व्यक्ति को आत्म ग्लानि होगी, और उस व्यक्ति को दुःख होगा। और वह व्यक्ति अपने आपको कोसेगा कि, "ऐसा मैंने क्यों किया" । तब उस व्यक्ति को कहो कि, "देखो यह दारू है, इस दारू को पीने से तुम्हारी, देह में दुःख नहीं होगा"। तब वह व्यक्ति दारू पीकर अपने, दुःख को दूर करने की कोशिश करेगा । क्योंकि उसको समझाया गया है कि, "दारू पीने से देह में दुःख नहीं आता है " । किन्तु उसे यह नहीं पता कि, "दारू पीने से मति खराब हो जाती है, जबकि वह व्यक्ति अपने दुःख का कारण, प्रभु को मान लेता है। और अपने दुःख के लिए, प्रभु को दोषी मानता है तथा, जिसने उसके खाने-पीने की वस्तुओं में, दारू मिलाकर पिला दिया था, उसे अभी तक पहचान भी नहीं पाया है। दाह करती जो रूह का उसे दारू कहते हैं। दाह + रूह = दारू । जिस प्रकार से बम के भीतर छिपी बारूद, विस्फोट होकर शरीर को दाह करती है। उसी प्रकार से शरीर के भीतर गई दारू, व्यक्ति को क्रोध दिलाकर, व्यक्ति की रूह को दाह करती है। दाह = जला । जिस प्रकार से बम के विस्फोट से, सबकुछ नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार से शरीर के भीतर गई दारू से, हुए क्रोध में सबकुछ नष्ट हो जाता है। क्योंकि शरीर के भीतर गई दारू, व्यक्ति के Blood Pressure को, High से भी High कर देती है और, व्यक्ति Hypertension का शिकार हो जाता है। जबकि उसे कुछ पता ही नहीं, यह क्यों हो रहा है। और व्यक्ति अपने आपको, आत्मग्लानि में झोक देता है । तथा इस किए गए पाप का स्वयं को, दोषी मान लेता है। जबकि उसे कुछ पता ही नहीं है। इसलिए भारत देश में, किसी के यहां का पानी एवं भोजन करने को मना किया गया है । क्योंकि कई लोग व्यक्ति को, भ्रमित करने के लिए, उस व्यक्ति के पानी एवं खाने में, Rum को भर देते हैं, जिससे व्यक्ति भ्रमित हो जाता है । भर + Rum = भ्रम । क्योंकि व्यक्ति को हराने से पहले, व्यक्ति की मति हर ली जाती है। और इसका दोषी प्रभु को बना दिया जाता है । जबकि उसकी मति तो उसको, चुपके से दारू पिलाने से हर ली गई है। क्योंकि उसको दोस्त बनकर हराना जो है, इसलिए दोस्त दारू को पहले, चुपके से मिलाकर पिलाते हैं और, फिर बाद में उसके बारे में, बदनामी फैलाते हैं कि, "वह तो दारू पीता है"। उसे तो पता ही नहीं होता है कि, उसके शरीर में दारू जा रही है। क्या प्रभु भी षडयंत्र करते हैं, और षडयंत्र के तहत पहले दारू पिलाकर, उस व्यक्ति की मति हर लेते हैं, और तब उस व्यक्ति को दुःख देते हैं। जबकि प्रभु तो सभी को सुख देते हैं। और प्रभु सबको आनंद देते हैं। आखिर प्रभु क्यों किसी की, मति को पहले दारू पिलाकर, हर लेते हैं, फिर दुःख को मिटाने के लिए, दारू पीने को देते हैं कि, "दारू पीने से दुःख नहीं होता है देह में"। यानी ऐसा समझा जाए है कि, प्रभु के द्वारा दुःख को दूर नहीं किया जाता है, और दुःख को दूर करने के लिए, दारू को पिया जाता है । तो इसलिए व्यक्ति इसी बात को मानकर, प्रभु के स्थान में नहीं जाता है, वह व्यक्ति दारू के मिलनेवाले स्थान पर जाता है। इस तरह व्यक्ति अपनी करनी को, प्रभु पर डाल देता है, और सबको समझाता है कि, "प्रभु के द्वारा व्यक्ति को, किसी पाप का दुःख दिया जाता है"। जबकि जिसको दुःख मिल रहा है, उसने कोई पाप या गलती की ही नहीं है। एक सौ नब्बे. डर + Ream = Dream - अपने डर को लिखने के लिए, पूरा Ream चाहिए । डर + Ream =Dream. सफेद कागज़ की Ream पर, अपने भीतर के Dark को, काली पक्तियों में लिखने के लिए, पूरी Ream लग जाती है, इसे ही Dream कहते हैं। यानी Dream को Ream पर उतारा जाता है। एक सौ इक्यानवे.धन+दो+लात - धन-दौलतजब कोई यह कहता है कि, "भले ही कोई मुझे दो लात मार ले, पर मुझे धन दे दे" । तब इसे ही"धन-दौलत" कहते हैं। धन+दो+लात=धन-दौलत। एक सौ बानवे. धार + रण = धारण - धार वाली वस्तु, रण में धारण करके ले जाना ।
मुंबईः टीवी एक्ट्रेस मौनी रॉय सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपनी ग्लैमरस तस्वीरों और किलर अदाओं से फैंस का दिल चुराती रहती हैं। एक बार फिर ग्रीन लॉन्ग ड्रेस में अपनी फोटोज सोशल मीडिया पर अपलोड कर मौनी रॉय सुर्खियों में हैं। इन तस्वीरों में मौनी लॉन्ग ग्रीन ड्रेस में एक पेड़ के साथ तस्वीर खिंचवाती नजर आ रही हैं, जिन्हें उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। आपको बता दें कि मौनी रॉय ने कई टीवी सीरियल्स में काम किया है। मौनी अपने स्टाइल और ड्रेसिंग सेंस के लिए काफी फेमस हैं। मौनी के इस लुक की फैंस काफी तारीफें कर रहे हैं और उनकी तस्वीरों पर जमकर कमेंट और लाइक कर रहे हैं। मौनी सोशल मीडिया पर कभी अपने ट्रेडिशनल लुक, कभी ग्लैमरस अंदाज तो कभी बोल्ड अवतार से तहलका मचाती रहती हैं।
मुंबईः टीवी एक्ट्रेस मौनी रॉय सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपनी ग्लैमरस तस्वीरों और किलर अदाओं से फैंस का दिल चुराती रहती हैं। एक बार फिर ग्रीन लॉन्ग ड्रेस में अपनी फोटोज सोशल मीडिया पर अपलोड कर मौनी रॉय सुर्खियों में हैं। इन तस्वीरों में मौनी लॉन्ग ग्रीन ड्रेस में एक पेड़ के साथ तस्वीर खिंचवाती नजर आ रही हैं, जिन्हें उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। आपको बता दें कि मौनी रॉय ने कई टीवी सीरियल्स में काम किया है। मौनी अपने स्टाइल और ड्रेसिंग सेंस के लिए काफी फेमस हैं। मौनी के इस लुक की फैंस काफी तारीफें कर रहे हैं और उनकी तस्वीरों पर जमकर कमेंट और लाइक कर रहे हैं। मौनी सोशल मीडिया पर कभी अपने ट्रेडिशनल लुक, कभी ग्लैमरस अंदाज तो कभी बोल्ड अवतार से तहलका मचाती रहती हैं।
112 / एक औरत की ज़िन्दगी फैला दो, फिर कमरे मे भाकर ध्यानमग्न हो गई। दो घंटे लगाए ध्यानपूजन में उसने सभी देवी देवताओं को याद किया जो सकट मे उसकी मदद के लिए प्रा सकते थे उसके मन में किसी प्रभात भय का खामोश एहसास कही घर करने लगा था । शाम का नौकर आया। घर का काम विधिवत चलने लगा । अपने मुशी मवक्किलो से घिरे वकील साहब ग्राए, देर तक उनके ग्राफिस से बातचीत की श्रावाज़ आती रही । रात का खाना रत्ती ने अपने कमरे मे हो मगा लिया। वकील साहब ने आकर उसका हाल चाल पूछा रात का श्रधेरा दिन-भर की हलचल अपने दामन में समेटे बढने लगा । रत्ती पूरी तरह सुरक्षित थी । वकील साहब के घर मे उसके होने की खबर किसीको भी नहीं हो सकती थी, वकील साहब की मार से पूरी सुरक्षा का आश्वासन उमे मिल चुका था। कमरा भी प्रदर से उसने बद कर लिया था। किसी भी तरह के भय की कोई गजाइश कही नही थी फिर भी रती की खुली भार्से न जाने किन किन खतरो को प्रजाम देती रही, उसका मन जाने कैसे-कैसे एहसासो पर पीपल के पत्तो की तरह कापता रहा । सारी रात प्राखो मे बस यूही क्ट गइ । दोपहर ढलने लगी थी । प्रपलक घाखा से खुली हुइ किताब देखतेदेखत रत्ती उघने लगी थी। सहन के पिछने दरवाजे की कुडी खडकी । गायद माली, हो सहन के पौधा म पानी देन माया हो वकील साहब ने उसे समझा दिया था वह उनको खास मेहमान की तरह रह सकती है नौकर-चाकर वो हुक्म दे सकती है । दस्तक दोहराई गई तो रत्ती ने जार दरवाजा खोल दिया। बदहवास रघु को देखकर वह एकदम पीछे हट गई। रघु ने जल्दी स प्रदर भार दरवाजा व द कर लिया । एक पल रत्ती के धुले चेहरे को देखता रहा फिर उम अपनी वाहा म समट लिया, 'पता नही कोश्लि वच्चा पड़ रहा है रत्तो तुम्हारे जौनपुर वाले भाई तुमम मिलना चाहते हैं तुम्हार यहा हान की बात उह मालूम हो गई है। मैं समझता हू अव छिपन से फायदा नही, जो होगा देख लेंग। रत्ती उसकी हा में इस तरह सिमट प्राई थी जसे दुनिया को कोई नजर भव उसे दख नही सक्ती ।
एक सौ बारह / एक औरत की ज़िन्दगी फैला दो, फिर कमरे मे भाकर ध्यानमग्न हो गई। दो घंटे लगाए ध्यानपूजन में उसने सभी देवी देवताओं को याद किया जो सकट मे उसकी मदद के लिए प्रा सकते थे उसके मन में किसी प्रभात भय का खामोश एहसास कही घर करने लगा था । शाम का नौकर आया। घर का काम विधिवत चलने लगा । अपने मुशी मवक्किलो से घिरे वकील साहब ग्राए, देर तक उनके ग्राफिस से बातचीत की श्रावाज़ आती रही । रात का खाना रत्ती ने अपने कमरे मे हो मगा लिया। वकील साहब ने आकर उसका हाल चाल पूछा रात का श्रधेरा दिन-भर की हलचल अपने दामन में समेटे बढने लगा । रत्ती पूरी तरह सुरक्षित थी । वकील साहब के घर मे उसके होने की खबर किसीको भी नहीं हो सकती थी, वकील साहब की मार से पूरी सुरक्षा का आश्वासन उमे मिल चुका था। कमरा भी प्रदर से उसने बद कर लिया था। किसी भी तरह के भय की कोई गजाइश कही नही थी फिर भी रती की खुली भार्से न जाने किन किन खतरो को प्रजाम देती रही, उसका मन जाने कैसे-कैसे एहसासो पर पीपल के पत्तो की तरह कापता रहा । सारी रात प्राखो मे बस यूही क्ट गइ । दोपहर ढलने लगी थी । प्रपलक घाखा से खुली हुइ किताब देखतेदेखत रत्ती उघने लगी थी। सहन के पिछने दरवाजे की कुडी खडकी । गायद माली, हो सहन के पौधा म पानी देन माया हो वकील साहब ने उसे समझा दिया था वह उनको खास मेहमान की तरह रह सकती है नौकर-चाकर वो हुक्म दे सकती है । दस्तक दोहराई गई तो रत्ती ने जार दरवाजा खोल दिया। बदहवास रघु को देखकर वह एकदम पीछे हट गई। रघु ने जल्दी स प्रदर भार दरवाजा व द कर लिया । एक पल रत्ती के धुले चेहरे को देखता रहा फिर उम अपनी वाहा म समट लिया, 'पता नही कोश्लि वच्चा पड़ रहा है रत्तो तुम्हारे जौनपुर वाले भाई तुमम मिलना चाहते हैं तुम्हार यहा हान की बात उह मालूम हो गई है। मैं समझता हू अव छिपन से फायदा नही, जो होगा देख लेंग। रत्ती उसकी हा में इस तरह सिमट प्राई थी जसे दुनिया को कोई नजर भव उसे दख नही सक्ती ।
मुंबईः मलाइका अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर अपने एक हालिया पोस्ट में 'सेल्फ लव' पर बात की। उन्होंने कहा कि वह अपनी त्वचा को लेकर बेहद सहज हैं। मलाइका ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में एक बूमरैंग वीडियो साझा किया। क्लिप में मलाइका को कैमरे की ओर पोज देते हुए देखा जा सकता है। इसमें उनका लुक बेहद नैचुअल है। अपने इस पोस्ट को कैप्शन देते हुए मलाइका ने लिखा, "अपनी स्किन में कम्फर्टेबल हूं। " अभी कुछ दिनों पहले ही मलाइका ने अपना 47वां जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर उनके कथित बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर ने इंस्टाग्राम पर उन्हें बेहद ही मजेदार ढंग से बर्थडे विश किया। अर्जुन ने मलाइका की एक तस्वीर साझा की, जिसमें ट्रैकसूट पहनकर अभिनेत्री पाउट करती हुईंअपने डॉगी के बगल में खड़ी पोज देती नजर आ रही हैं। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, "हैप्पी बर्थडे माय फूल। " अर्जुन और मलाइका ने अपने रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की है, लेकिन दोनों अक्सर विभिन्न समारोहों में साथ में नजर आते हैं।
मुंबईः मलाइका अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर अपने एक हालिया पोस्ट में 'सेल्फ लव' पर बात की। उन्होंने कहा कि वह अपनी त्वचा को लेकर बेहद सहज हैं। मलाइका ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में एक बूमरैंग वीडियो साझा किया। क्लिप में मलाइका को कैमरे की ओर पोज देते हुए देखा जा सकता है। इसमें उनका लुक बेहद नैचुअल है। अपने इस पोस्ट को कैप्शन देते हुए मलाइका ने लिखा, "अपनी स्किन में कम्फर्टेबल हूं। " अभी कुछ दिनों पहले ही मलाइका ने अपना सैंतालीसवां जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर उनके कथित बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर ने इंस्टाग्राम पर उन्हें बेहद ही मजेदार ढंग से बर्थडे विश किया। अर्जुन ने मलाइका की एक तस्वीर साझा की, जिसमें ट्रैकसूट पहनकर अभिनेत्री पाउट करती हुईंअपने डॉगी के बगल में खड़ी पोज देती नजर आ रही हैं। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, "हैप्पी बर्थडे माय फूल। " अर्जुन और मलाइका ने अपने रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की है, लेकिन दोनों अक्सर विभिन्न समारोहों में साथ में नजर आते हैं।
सुख-सौभाग्य के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति के उदय होते ही आखिर किसे मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी और किसे बैंड-बाजा बजने के लिए थोड़ा अभी और करना होगा इंतजार, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. ज्योतिष में सुख-सौभाग्य के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति मेष राशि में 27 अप्रैल 2023 की सुबह 02:27 मिनट पर उदय हो चुके हैं. गुरु के उदय होती ही अब शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्य बगैर किसी बाधा के संभव हो सकेंगे. ज्योतिष में जहां दांपत्य सुख के लिए शुक्र ग्रह का विचार किया जाता है तो वहीं लड़कियों के विवाह के लिए गुरु ग्रह का बड़ा रोल माना गया है. ऐसे में देवगुरु बृहस्पति के उदय होने के बाद आखिर किन राशियों से जुड़े जातकों की निकलेगी बारात और किन लोगों को शादी के लिए अभी करना होगा थोड़ा और इंतजार, आइए इसे जाने-माने ज्योतिषविद् पं. कृष्ण गोपाल मिश्र के माध्यम से विस्तार से जानते हैं. ज्योतिष में काल पुरुष में सप्तम भाव का स्वामी शुक्र होने कारण विवाह, गृहस्थ जीवन एवं संभोग आदि सुखों का मुख्य कारक ग्रह शुक्र को माना गया है. शुक्र की स्थिति से इन बातों पर विचार किया जाता है. साथ ही साथ बृहस्पति नामक ग्रह उपरोक्त आदि सभी सुखों के लिए स्त्रियों की जन्मपत्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि काल पुरुष में लग्न से सप्तम में शुक्र का स्वामित्व होता है. शुक्र का विपरीत और पूरक बृहस्पति को माना गया है. इस प्रकार कन्याओं के विवाह का कारक ग्रह गुरु को माना गया है. अतः शुक्र एवं बृहस्पति दोनों ही ग्रहों का गोचर में अच्छे स्थान में होना एवं उदित रहना आदि स्थिति के साथ ही विवाह के मुहूर्त का विचार किया जाता है. मेष राशि पर बृहस्पति का गोचर होना तथा मई में शुक्र का दूसरे-तीसरे भाव में होना तथा नवंबर में बृहस्पति और सूर्य का आमने-सामने होना तथा शुक्र का पंचम एवं षष्ठ भाव में होना आदि मेष राशि वालों के लिए विवाह संबंधी प्रस्ताव या विवाह संबंधी गतिविधियों के लिए उत्तम समय कहा जाएगा. शुक्र का मई के महीने में राशि में स्थिति तथा द्वितीय भाव में स्थित तथा तृतीय भाव में जून में स्थिति और अधिकांश समय सप्तमेश मंगल के साथ तथा जून में शुक्र की स्थिति तृतीय भाव में, इन सभी को देखते हुए कहा जा सकता है कि वृषभ राशि वालों के लिए विवाह या फिर कहें विवाह प्रक्रिया तथा विवाह कराने के लिए उत्तम रहेगा. सप्तमेश बृहस्पति का इस वर्ष एकादश भाव में राहु के साथ होना, विवाह एवं शुभ कार्यों में अवरोधक होता है, परंतु मई के महीने में राशि पर स्थित शुक्र एवं नवंबर के महीने में तृतीय भाव का शुक्र बृहस्पति के खराब प्रभाव को कम कर, विवाह एवं शुभ कार्यों में सहायक बनेगा. कर्क राशि के लिए यह वर्ष विवाह एवं शुभ कार्यों की दृष्टि से खराब कहा जाएगा क्योंकि एक तरफ राशि पर शनि की ढैय्या चली रही है तो वहीं दूसरी तरफ वर्तमान में मई के महीने में द्वादश भाव का शुक्र एवं नवंबर के महीने में द्वितीय भाव का शुक्र शनि का दृष्टि पाकर विवाह एवं शुभ कार्य के लिए खराब कहा जाएगा. सिंह राशि वालों के लिए सप्तम भाव में शनि की स्थिति थोड़ा सा विवाह एवं शुभ कार्यों के लिए खराब तो है, परंतु भाग्य स्थान में गुरु की स्थिति बहुत हद तक सहायक होगी. इस राशि के जातकों के लिए मई के महीने और नवंबर के महीने में थोड़ी स्थितियां सामान्य होंगी. कन्या राशि वालों के लिए मई और जून दोनों में शुक्र की स्थिति विवाह की दृष्टि से काफी सहायक है राशि से दशम और एकादश भाव में शुक्र की स्थिति काफी अच्छी कही जाएगी, जो कि अष्टम स्थान में सप्तमेश गुरु की स्थिति को नियंत्रित करने में सहायक होगा और शुभ कार्यों में लाभकारी होगा. विशेष रुप से नवंबर-दिसंबर के महीने में राहु और गुरु की अलग-अलग स्थिति के कारण सर्वाधिक अच्छा कहा जाएगा. तुला राशि वालों के लिए मई-जून एवं जुलाई काफी अच्छा कहा जाएगा घर परिवार में मांगलिक आयोजन के आसार हैं परंतु सप्तम भाव में गुरु और राहु की युति वैवाहिक कार्यों में अवरोधक बनी हुई है. इस अशुभता से बचने के लिए तुला राशि के जातकों को गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं, फल आदि का दान करना चाहिए. साथ ही साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ लाभदायक रहेगा. वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि की ढैय्या, मई एवं जून के महीने में अष्टम-नवम् में स्थित शुक्र की स्थिति निश्चित तौर पर विवाह एवं वैवाहिक आयोजन के दृष्टिकोण से खराब समय होगा उपरोक्त समय में विवाह संबंधित मांगलिक कार्यों से बचने की चेष्टा करनी चाहिए. नवंबर एवं दिसंबर के महीने में अच्छा संयोग बन रहा है. उस समय विवाह संबंधी कार्य को लेकर प्रयास सफल होंगे. धनु राशि के लिए मई एवं जून के महीने में सप्तम एवं अष्टम भाव का शुक्र थोड़ा सा विवाह संबंधी कार्यों में अवरोधक होगा, परंतु नवंबर-दिसंबर का समय विवाह के दृष्टिकोण से शुभ कहा जाएगा. यह समय विवाह संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दृष्टि से बहुत अच्छा कहा जाएगा. मकर राशि के लिए मई, जून और जुलाई विवाह एवं विवाह संबंधित प्रक्रिया के लिए काफी अच्छा समय कहा जाएगा. इस दौरान अविवाहित लोगों का विवाह होगा. घर का वातावरण भी पूर्ववत समय के अपेक्षा अच्छा कहा जाएगा. हालांकि नवंबर-दिसंबर का समय भी वैवाहिक दृष्टिकोण से अच्छा कहा जाएगा, लेकिन मई और जून का महीना सर्वाधिक अच्छा कहा जाएगा. कुंभ राशि वालों के लिए वर्तमान समय थोड़ी सी कठिनाईयों भरा चल रहा है. पारिवारिक चिंताएं बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं. ऐसी स्थिति में वैवाहिक कार्यों में अड़चनें आएंगी लेकिन मई का महीना एवं नवंबर का महीना विवाह संबंधी कार्यों के लिए अच्छा कहा जाएगा. मीन राशि वालों के लिए यह वर्ष अच्छा कहा जाएगा. विशेष रूप से मई और नवंबर-दिसंबर का महीना अविवाहितों के लिए काफी शुभ संकेत दे रहा है. इस दौरान अच्छे प्रस्ताव मिलने के आसार बन रहे हैं. चतुर्थ भाव का शुक्र एवं द्वितीय भाव में बृहस्पति काफी लाभकारी होगा. (यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
सुख-सौभाग्य के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति के उदय होते ही आखिर किसे मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी और किसे बैंड-बाजा बजने के लिए थोड़ा अभी और करना होगा इंतजार, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. ज्योतिष में सुख-सौभाग्य के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति मेष राशि में सत्ताईस अप्रैल दो हज़ार तेईस की सुबह दो:सत्ताईस मिनट पर उदय हो चुके हैं. गुरु के उदय होती ही अब शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्य बगैर किसी बाधा के संभव हो सकेंगे. ज्योतिष में जहां दांपत्य सुख के लिए शुक्र ग्रह का विचार किया जाता है तो वहीं लड़कियों के विवाह के लिए गुरु ग्रह का बड़ा रोल माना गया है. ऐसे में देवगुरु बृहस्पति के उदय होने के बाद आखिर किन राशियों से जुड़े जातकों की निकलेगी बारात और किन लोगों को शादी के लिए अभी करना होगा थोड़ा और इंतजार, आइए इसे जाने-माने ज्योतिषविद् पं. कृष्ण गोपाल मिश्र के माध्यम से विस्तार से जानते हैं. ज्योतिष में काल पुरुष में सप्तम भाव का स्वामी शुक्र होने कारण विवाह, गृहस्थ जीवन एवं संभोग आदि सुखों का मुख्य कारक ग्रह शुक्र को माना गया है. शुक्र की स्थिति से इन बातों पर विचार किया जाता है. साथ ही साथ बृहस्पति नामक ग्रह उपरोक्त आदि सभी सुखों के लिए स्त्रियों की जन्मपत्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि काल पुरुष में लग्न से सप्तम में शुक्र का स्वामित्व होता है. शुक्र का विपरीत और पूरक बृहस्पति को माना गया है. इस प्रकार कन्याओं के विवाह का कारक ग्रह गुरु को माना गया है. अतः शुक्र एवं बृहस्पति दोनों ही ग्रहों का गोचर में अच्छे स्थान में होना एवं उदित रहना आदि स्थिति के साथ ही विवाह के मुहूर्त का विचार किया जाता है. मेष राशि पर बृहस्पति का गोचर होना तथा मई में शुक्र का दूसरे-तीसरे भाव में होना तथा नवंबर में बृहस्पति और सूर्य का आमने-सामने होना तथा शुक्र का पंचम एवं षष्ठ भाव में होना आदि मेष राशि वालों के लिए विवाह संबंधी प्रस्ताव या विवाह संबंधी गतिविधियों के लिए उत्तम समय कहा जाएगा. शुक्र का मई के महीने में राशि में स्थिति तथा द्वितीय भाव में स्थित तथा तृतीय भाव में जून में स्थिति और अधिकांश समय सप्तमेश मंगल के साथ तथा जून में शुक्र की स्थिति तृतीय भाव में, इन सभी को देखते हुए कहा जा सकता है कि वृषभ राशि वालों के लिए विवाह या फिर कहें विवाह प्रक्रिया तथा विवाह कराने के लिए उत्तम रहेगा. सप्तमेश बृहस्पति का इस वर्ष एकादश भाव में राहु के साथ होना, विवाह एवं शुभ कार्यों में अवरोधक होता है, परंतु मई के महीने में राशि पर स्थित शुक्र एवं नवंबर के महीने में तृतीय भाव का शुक्र बृहस्पति के खराब प्रभाव को कम कर, विवाह एवं शुभ कार्यों में सहायक बनेगा. कर्क राशि के लिए यह वर्ष विवाह एवं शुभ कार्यों की दृष्टि से खराब कहा जाएगा क्योंकि एक तरफ राशि पर शनि की ढैय्या चली रही है तो वहीं दूसरी तरफ वर्तमान में मई के महीने में द्वादश भाव का शुक्र एवं नवंबर के महीने में द्वितीय भाव का शुक्र शनि का दृष्टि पाकर विवाह एवं शुभ कार्य के लिए खराब कहा जाएगा. सिंह राशि वालों के लिए सप्तम भाव में शनि की स्थिति थोड़ा सा विवाह एवं शुभ कार्यों के लिए खराब तो है, परंतु भाग्य स्थान में गुरु की स्थिति बहुत हद तक सहायक होगी. इस राशि के जातकों के लिए मई के महीने और नवंबर के महीने में थोड़ी स्थितियां सामान्य होंगी. कन्या राशि वालों के लिए मई और जून दोनों में शुक्र की स्थिति विवाह की दृष्टि से काफी सहायक है राशि से दशम और एकादश भाव में शुक्र की स्थिति काफी अच्छी कही जाएगी, जो कि अष्टम स्थान में सप्तमेश गुरु की स्थिति को नियंत्रित करने में सहायक होगा और शुभ कार्यों में लाभकारी होगा. विशेष रुप से नवंबर-दिसंबर के महीने में राहु और गुरु की अलग-अलग स्थिति के कारण सर्वाधिक अच्छा कहा जाएगा. तुला राशि वालों के लिए मई-जून एवं जुलाई काफी अच्छा कहा जाएगा घर परिवार में मांगलिक आयोजन के आसार हैं परंतु सप्तम भाव में गुरु और राहु की युति वैवाहिक कार्यों में अवरोधक बनी हुई है. इस अशुभता से बचने के लिए तुला राशि के जातकों को गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं, फल आदि का दान करना चाहिए. साथ ही साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ लाभदायक रहेगा. वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि की ढैय्या, मई एवं जून के महीने में अष्टम-नवम् में स्थित शुक्र की स्थिति निश्चित तौर पर विवाह एवं वैवाहिक आयोजन के दृष्टिकोण से खराब समय होगा उपरोक्त समय में विवाह संबंधित मांगलिक कार्यों से बचने की चेष्टा करनी चाहिए. नवंबर एवं दिसंबर के महीने में अच्छा संयोग बन रहा है. उस समय विवाह संबंधी कार्य को लेकर प्रयास सफल होंगे. धनु राशि के लिए मई एवं जून के महीने में सप्तम एवं अष्टम भाव का शुक्र थोड़ा सा विवाह संबंधी कार्यों में अवरोधक होगा, परंतु नवंबर-दिसंबर का समय विवाह के दृष्टिकोण से शुभ कहा जाएगा. यह समय विवाह संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दृष्टि से बहुत अच्छा कहा जाएगा. मकर राशि के लिए मई, जून और जुलाई विवाह एवं विवाह संबंधित प्रक्रिया के लिए काफी अच्छा समय कहा जाएगा. इस दौरान अविवाहित लोगों का विवाह होगा. घर का वातावरण भी पूर्ववत समय के अपेक्षा अच्छा कहा जाएगा. हालांकि नवंबर-दिसंबर का समय भी वैवाहिक दृष्टिकोण से अच्छा कहा जाएगा, लेकिन मई और जून का महीना सर्वाधिक अच्छा कहा जाएगा. कुंभ राशि वालों के लिए वर्तमान समय थोड़ी सी कठिनाईयों भरा चल रहा है. पारिवारिक चिंताएं बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं. ऐसी स्थिति में वैवाहिक कार्यों में अड़चनें आएंगी लेकिन मई का महीना एवं नवंबर का महीना विवाह संबंधी कार्यों के लिए अच्छा कहा जाएगा. मीन राशि वालों के लिए यह वर्ष अच्छा कहा जाएगा. विशेष रूप से मई और नवंबर-दिसंबर का महीना अविवाहितों के लिए काफी शुभ संकेत दे रहा है. इस दौरान अच्छे प्रस्ताव मिलने के आसार बन रहे हैं. चतुर्थ भाव का शुक्र एवं द्वितीय भाव में बृहस्पति काफी लाभकारी होगा.
Don't Miss! ALERT: 'सुल्तान' में अनुष्का शर्मा.. अब इस 'स्पेशल लिस्ट' में हो गईं शामिल! [गपशप] 'सुल्तान' के लिए जब से अनुष्का शर्मा का नाम फाइनल किया गया है, सब आश्चर्य में ही हैं। आखिर इतनी एक्ट्रेसस के बीच अनुष्का को फाइनल किया गया है। याद दिला दें, फिल्म के साथ प्रियंका चोपड़ा, परिणीति चोपड़ा, कृति सैनन, दीपिका पादुकोण.. सभी का नाम जोड़ा गया था। खैर, फिल्म आई अनुष्का के हाथों। फिल्म से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, सुल्तान में अनुष्का का किरदार काफी अहम होने वाला है। सुल्तान में अनुष्का भी पहलवान की भूमिका में दिखेंगी। यानि की बिना मेकअप, नॉन ग्लैमरस और पूरी ट्रेनिंग के साथ। अली अब्बास जफर ने अनुष्का को सुल्तान के लिए 'राइट च्वॉइस' कहा है। सुल्तान में अनुष्का पहली बार अपनी उम्र से ज्यादा की नजर आएंगी। निर्देशक ने कहा कि, अनुष्का की सबसे अच्छी बात है कि वह एथलीट हैं, लिहाजा उन्हें ज्यादा कुछ सीखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अनुष्का बॉडी लैंग्वेंज, किरदार की डिमांड को अच्छी तरह समझ पाएंगी। बहरहाल, खास बात यह भी है कि इससे पहले हमने अनुष्का को शाहरूख खान और आमिर खान के साथ देखा है। और अब बारी है सलमान खान की ।
Don't Miss! ALERT: 'सुल्तान' में अनुष्का शर्मा.. अब इस 'स्पेशल लिस्ट' में हो गईं शामिल! [गपशप] 'सुल्तान' के लिए जब से अनुष्का शर्मा का नाम फाइनल किया गया है, सब आश्चर्य में ही हैं। आखिर इतनी एक्ट्रेसस के बीच अनुष्का को फाइनल किया गया है। याद दिला दें, फिल्म के साथ प्रियंका चोपड़ा, परिणीति चोपड़ा, कृति सैनन, दीपिका पादुकोण.. सभी का नाम जोड़ा गया था। खैर, फिल्म आई अनुष्का के हाथों। फिल्म से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, सुल्तान में अनुष्का का किरदार काफी अहम होने वाला है। सुल्तान में अनुष्का भी पहलवान की भूमिका में दिखेंगी। यानि की बिना मेकअप, नॉन ग्लैमरस और पूरी ट्रेनिंग के साथ। अली अब्बास जफर ने अनुष्का को सुल्तान के लिए 'राइट च्वॉइस' कहा है। सुल्तान में अनुष्का पहली बार अपनी उम्र से ज्यादा की नजर आएंगी। निर्देशक ने कहा कि, अनुष्का की सबसे अच्छी बात है कि वह एथलीट हैं, लिहाजा उन्हें ज्यादा कुछ सीखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अनुष्का बॉडी लैंग्वेंज, किरदार की डिमांड को अच्छी तरह समझ पाएंगी। बहरहाल, खास बात यह भी है कि इससे पहले हमने अनुष्का को शाहरूख खान और आमिर खान के साथ देखा है। और अब बारी है सलमान खान की ।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मुरादाबाद। स्पोर्ट्स कारोबारी कुशांक गुप्ता के विवादों की लिस्ट इतनी लंबी है। जिसमें हत्याकांड की तफ्तीश उलझ गई। पुलिस एक मामले की जांच पूरी करती है तो दूसरे झगड़े की परतें खुल जाती हैं। जिस कारण हत्याकांड की कड़ियां जोड़ने में पुलिस को सफलता नहीं मिल पा रही। कारोबारी कुशांक के पिता अशोक गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे के कई लोगों से झगड़े चल रहे थे। उन्होंने एक के बाद एक कई लोगों के नाम पुलिस को बताए हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि शहर के एक बिल्डर से भी बेटे का विवाद हुआ था। बिल्डर ने शहर में एक सोसाइटी बनाई है। उनका दावा है कि गलत तरीके से बनाई इस सोसाइटी के बारे में कुशांक ने फेसबुक पर पोस्ट किया था। जिसका बिल्डर और उनके लोगों को काफी बुरा लगा था। बिल्डर ने कुछ लोगों के जरिये कुशांक को धमकियां भी दिलाई थीं। इसके अलावा कुशांक गुप्ता का दूध डेयरी संचालक से भी विवाद हुआ था। तब कुशांक के साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में भी पुलिस के पास शिकायत पहुंची थी। पिता ने पुलिस को आगे ये भी बताया कि जिस अपार्टमेंट में हमारा परिवार रहता है। यहां रहने वाले भी एक व्यक्ति से कुशांक का झगड़ा हुआ था। जिसमें पुलिस ने दोनों के खिलाफ शांति भंग में कार्रवाई की थी। कुशांक का विवाद सैलून संचालक से भी दुकान खाली कराने को लेकर हुआ था। इस विवाद में सैलून संचालक की ओर से भाजपा नेता आ गए थे। इस मामले में भी मारपीट हुई थी और मामला थाने तक पहुंचा था। बिजनौर निवासी युवक से भी दुकान खाली कराने को लेकर विवाद हुआ था। इन विवादों में हत्याकांड की तफ्तीश उलझ गई है। पुलिस एक मामले की जांच पूरी करती है तो दूसरा विवाद सामने आ जाता है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी आरपी सिंह ने बताया कि हर पहलू की जांच की जा रही है। हत्याकांड का सच सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुरादाबाद। स्पोर्ट्स कारोबारी कुशांक गुप्ता के विवादों की लिस्ट इतनी लंबी है। जिसमें हत्याकांड की तफ्तीश उलझ गई। पुलिस एक मामले की जांच पूरी करती है तो दूसरे झगड़े की परतें खुल जाती हैं। जिस कारण हत्याकांड की कड़ियां जोड़ने में पुलिस को सफलता नहीं मिल पा रही। कारोबारी कुशांक के पिता अशोक गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे के कई लोगों से झगड़े चल रहे थे। उन्होंने एक के बाद एक कई लोगों के नाम पुलिस को बताए हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि शहर के एक बिल्डर से भी बेटे का विवाद हुआ था। बिल्डर ने शहर में एक सोसाइटी बनाई है। उनका दावा है कि गलत तरीके से बनाई इस सोसाइटी के बारे में कुशांक ने फेसबुक पर पोस्ट किया था। जिसका बिल्डर और उनके लोगों को काफी बुरा लगा था। बिल्डर ने कुछ लोगों के जरिये कुशांक को धमकियां भी दिलाई थीं। इसके अलावा कुशांक गुप्ता का दूध डेयरी संचालक से भी विवाद हुआ था। तब कुशांक के साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में भी पुलिस के पास शिकायत पहुंची थी। पिता ने पुलिस को आगे ये भी बताया कि जिस अपार्टमेंट में हमारा परिवार रहता है। यहां रहने वाले भी एक व्यक्ति से कुशांक का झगड़ा हुआ था। जिसमें पुलिस ने दोनों के खिलाफ शांति भंग में कार्रवाई की थी। कुशांक का विवाद सैलून संचालक से भी दुकान खाली कराने को लेकर हुआ था। इस विवाद में सैलून संचालक की ओर से भाजपा नेता आ गए थे। इस मामले में भी मारपीट हुई थी और मामला थाने तक पहुंचा था। बिजनौर निवासी युवक से भी दुकान खाली कराने को लेकर विवाद हुआ था। इन विवादों में हत्याकांड की तफ्तीश उलझ गई है। पुलिस एक मामले की जांच पूरी करती है तो दूसरा विवाद सामने आ जाता है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी आरपी सिंह ने बताया कि हर पहलू की जांच की जा रही है। हत्याकांड का सच सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
Publish Date: Mon, 28 Mar 2016 14:22:05 (IST) कर्नाटक की राजधानी बेंगलूर में रफ्तार के कहर ने एक व्यक्ति की जान ले ली, जबकि तीन लोग घायल हो गए। CCTV में कैद हुए इस हादसे में मर्सिडीज कार में सवार नशे में धुत कथित डॉक्टर ने ओवरटेक करने के चक्कर में दो कारों को टक्कर मारने के अलावा कई लोगों को रौंद डाला और बिना रुके कार लेकर फरार हो गया। इस घटना में एक व्यक्ित की मौत हो गई जबकि 3 घायलों का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उनका इलाज चल रहा है। .
Publish Date: Mon, अट्ठाईस मार्च दो हज़ार सोलह चौदह:बाईस:पाँच कर्नाटक की राजधानी बेंगलूर में रफ्तार के कहर ने एक व्यक्ति की जान ले ली, जबकि तीन लोग घायल हो गए। CCTV में कैद हुए इस हादसे में मर्सिडीज कार में सवार नशे में धुत कथित डॉक्टर ने ओवरटेक करने के चक्कर में दो कारों को टक्कर मारने के अलावा कई लोगों को रौंद डाला और बिना रुके कार लेकर फरार हो गया। इस घटना में एक व्यक्ित की मौत हो गई जबकि तीन घायलों का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उनका इलाज चल रहा है। .
कभी- कभी सभी लोग इस तरह की चर्चा करते थे कि इंसान का पहनावा कैसा हो। वैसे तो ये सवाल लाखों जवाबों वाला ही है। जितने लोग उतने जवाब। बचपन में इंसान वो पहनता है जो उसके पालक उसे पहना दें। थोड़ा सा बड़ा होते ही वो किसी न किसी तरह अपनी पसंद और नापसंद जाहिर करता हुआ भी वही पहनता है जो आप उसे लाकर दें। किशोर होने पर वो अपने संगी - साथियों से प्रभावित होता है और जैसा देखता है उसी का आग्रह करने लगता है। युवा होने पर उसका ध्यान दौर के फ़ैशन पर जाता है। और वयस्क होने के बाद प्रौढ़ता की ओर बढ़ते हुए उसकी अपनी आमदनी ये फ़ैसला लेने लगती है कि वो क्या धारण करे। कई बार ये सब घर के बजट का प्रश्न भी होता है। ये तो साधारण सी बात है, इस पर क्या चर्चा करना? लेकिन मैंने ये बात एक ख़ास प्रयोजन से यहां छेड़ी है। मुझे बहुत बचपन से ही इस बात पर ध्यान देने की आदत थी कि हम अंतर्वस्त्र या अंदरुनी कपड़े कैसे पहनते हैं। मैं थोड़ी सी समझ विकसित होने के साथ ही इस बात पर ध्यान देने लगा था कि कोई व्यक्ति कैसे अंडर गारमेंट्स पसंद करता है या पहनता है। मेरे दिमाग़ में इस आधार पर भी किसी व्यक्ति की छवि बन जाती थी। कभी- कभी किसी बेहद सम्मानित और विद्वान व्यक्ति का भाषण सुनते हुए भी जब सारा आलम उसके विचारों में खोया हुआ होता था तब मैं सोचता था कि इसने कैसी चड्डी पहन रखी होगी? इस बारे में बहुत छोटी अवस्था से ही लिए गए अपने कुछ प्रेक्षण आपको बताता हूं। मैं देखता था कि कुछ लोगों के साथ कई दिनों तक रहते हुए भी आप ये जान नहीं पाते थे कि वो कैसे अधोवस्त्र पहनते हैं। लेकिन कुछ लोग पूरी तरह दबे- ढके होते हुए भी तुरंत किसी न किसी तरह ये जता देते थे कि भीतर वो क्या पहने हुए हैं। ये बात मेरे साथ उनका परिचय होने, साथ रहने, मित्रता देर तक चलने या न चलने में बड़ी भूमिका निभाती थी। मुझे महसूस होता था कि अंदर के कपड़े हमेशा हमारे तन को छूते हुए होते हैं और ये हमारे अपने मन के निर्णय से हमारे चुने हुए होते हैं तो यही हमारी असली पहचान हैं। क्योंकि बाहरी कपड़े तो हम अपने काम, व्यवसाय, नौकरी,अवसर के हिसाब से पहनते हैं और ये दिखावटी- सजावटी होते हैं। आप इसे मेरी कोई मानसिक बीमारी कह लीजिए कि मुझे आज भी पांच- छः दशक पहले के अपने परिचितों, परिजनों, मित्रों के अंतर्वस्त्र याद हैं। और अगर आपको किसी के बनियान- चड्डी याद हैं तो उसका बदन तो याद होगा ही। सच बताऊं, लोग अपने बचपन के दोस्तों से वर्षों बाद मिलकर बेहद खुश होते हैं, उन्हें आलिंगन में भर लेते हैं, पर मैं उनसे मिलकर ये सोचता रह जाता हूं कि - अरे, ये ऐसा हो गया? फ़िर मुझे लगता है कि वो भी मेरे लिए ऐसा ही सोच रहा होगा। इसीलिए मैं किसी पुराने परिचित या मित्र से मिलने में कतराता हूं। लोग सोचते हैं कि मैं बदल गया, मुझमें वो पहले वाली सी बात नहीं रही, और मैं नए नए लोगों के संपर्क में आता जाता हूं। जब मैं बाज़ार में, किसी स्टोर पर, किसी मॉल में अपने लिए कपड़े खरीदने जाता हूं तो वो लोग मुझे केवल इसी आधार पर अब भी याद आ जाते हैं। मैं मन में अपने से इसी तरह बात करता हूं कि नहीं, मुझे उसका जैसा नहीं, उसका वाला कलर चाहिए। वो डिज़ाइन चाहिए जो उसने तब पहना था। ये बे - सिरपैर की बात है, मैं कुछ भी ऊटपटांग बोले जा रहा हूं, पर क्या करूं, जो हुआ, होता रहा, वो तो बताऊं न आपको? अब आप ही देखिए कि इंसान का स्वभाव कैसे बनता है। चरित्र कैसे बनता है, सोच कैसे बनती है। तो मैं या मेरे पात्र चरित्र, व्यवहार या स्वभाव को लेकर इतने परंपरावादी और दकियानूसी कैसे हो सकते हैं? मुझे साहित्य के मौजूदा विमर्श, फ़ैशन या चलन से क्या? मैं अपनी ज़िन्दगी लिख रहा हूं कोई लीपापोती नहीं कर रहा। काग़ज़ रंगने का ज़ुनून नहीं है मुझे। अख़बार या किसी पत्रिका में अपना नाम छपा देखने के लिए मेरा जी नहीं कलपता। मुझे किसी विचार, पार्टी या दल की नमक हलाली नहीं करनी। कुछ समय बाद अपने शरीर की अवस्था के अनुसार जीकर हम सब ही मर जाएंगे...तो किस बात पर अड़ना? क्या जो बातें कभी थीं, वो अब भी हैं? क्या नई नस्ल भविष्य में उसी विचार की पूंछ पकड़ कर अागे बढ़ेगी जो हम निर्धारित कर जाएंगे? ये सब मेरे लेखन को माइल्ड करता है। यही मेरे जीवन को समायोजन-कारी भी बनाता है। यही बात हम सबको अवसाद से भी बचा सकती है। जाने दीजिए, सब अवसाद में होते भी कहां हैं। और क्यों हों? स्वस्थ हों, संपन्न हों, ख़ुश हों। जीवन में ऐसे कई अवसर आए जब मैंने परिजनों या मित्रों के वैवाहिक रिश्ते होते देखे। विवाह के विज्ञापन भी देखे। ये एक सहज साधारण सी बात थी। सभी घरों में ऐसा होता ही रहता है। मैं एक बात हमेशा सुनता और देखता था कि विवाह के प्रत्याशियों को खूब गोरा बताया जाता था, और इस पर गर्व किया जाता था। पूछा जाता कि लड़की का रंग गोरा है या नहीं? लड़का देखने में कैसा है, ज़्यादा काला रंग तो नहीं...ऐसी बातें अक्सर चर्चा के दौरान सुनने में आती थीं। मैं ऐसी बातों के समय उकता जाता था। मैं उठकर रेडियो की आवाज़ ही तेज़ कर देता। कोई और विषय बदलने की कोशिश करता। मुझे गोरा रंग कभी पसंद नहीं रहा। मुझे लड़कियों का सांवला रंग अच्छा लगता था। और लड़कों का तो गहरा सांवला या काला रंग मुझे आकर्षित करता था। मेरे भाई बहन और मित्र जानते हैं कि मैं बचपन में धूप में कभी छाता नहीं लगाता था। मैंने सुना था कि धूप में घूमने से रंग काला हो जाता है। शायद इसका कारण यही हो कि मेरा रंग थोड़ा गोरा ही है। अपने सभी भाइयों में मैं सबसे गोरा हूं। बाल भी नहीं रंगता। भवों तक के बाल हटाता रहता हूं ताकि वो अब चेहरे को और सफ़ेद न बनाएं। उम्र के उस दौर में हूं कि अब वहां सफ़ेद बाल आते हैं। मेरे पास शुरू से ही साहित्यिक किताबें बहुत आती रही हैं किन्तु मेरा मानना है कि ये किसी लेखक की स्टडी या कक्ष में रखी रहने से सीमित उपयोग की हो जाती हैं। समीक्षक इन्हें संदर्भ के लिए रखें, किन्तु किसी क्रिएटिव राइटर के कमरे में इनका जमा होना दिखावटी ही है। हां, देखने वालों के लिए लेखक की गरिमा में इनसे ज़रूर इज़ाफ़ा होता है। मुझे याद है कि अपने करियर के आरंभिक दिनों में मैं मुंबई या दिल्ली में जब कई बड़े लेखकों का साक्षात्कार पत्र- पत्रिकाओं के लिए लेने जाता था तो वे फ़ोटो सेशन के समय कुछ महत्वपूर्ण किताबों का प्रदर्शन सायास कैमरे की सीमा में किया करते थे। कहते हैं कि आपका व्यक्तित्व किताबों से बनता है। लेकिन मैं इसमें केवल इतना सा जोड़ना चाहूंगा कि "किताबों को पढ़ने से" बनता है। ओह, अगर मैं हर बात में ऐसे ही कहता रहूंगा कि सभी लेखक ऐसा करते थे, पर मैं ऐसा नहीं करता था, तो अनजाने में ही मैं न जाने क्या सिद्ध कर दूंगा! शायद डॉ धर्मवीर भारती की मज़ाक में ही कही गई वो बात, कि तुम लेखक हो ही नहीं! उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम न तो शराब पीते, न ही तुमने इतनी देर में कोई सिगरेट सुलगाई, तुम कैसे लेखक हो? अब आपको तो बता देता हूं कि उनके सामने लिहाज़, संकोच,आदर आदि जैसे कई सवाल थे। बाक़ी हिंदी के ढेर सारे ऐसे लेखक भी हैं जिनके पास मेरे साथ बैठ कर शराब पीने के फोटो होंगे। मेरे पास भी तो हैं। सिगरेट भी मैंने काफ़ी दिन तक पी। पर सिगरेट केवल लिखते समय,और शराब केवल दोस्तों के साथ। न तो मुझे शौक़ और न ज़रूरत! बल्कि कई बार तो केवल ये देखने के लिए, कि इसमें है क्या? क्या मिलता है इनसे? न स्वाद न सेहत! बाल साहित्य की मेरी कृति "मंगल ग्रह के जुगनू" पिछले कई साल से लगातार निकल रही थी। अब इसका एक निश्चित पैटर्न ही बन गया था। इसमें हर साल मंगल ग्रह से धरती पर आने वाले दो जुगनुओं का कथानक रहता था जिसमें पृथ्वी के कुछ छोटे जीव जंतु, यथा कबूतर, गिलहरी, झींगुर, कोकरोच,मेंढक आदि उन जुगनुओं के मित्र बन गए थे और उनके यहां आने पर वो उनका ख़्याल रखने और उन्हें घुमाने - फिराने का काम करते थे। उनके वापस जाते समय धरती के कुछ प्राणी उनके साथ मंगल ग्रह पर जाने का सपना देखते और फिर मंगल और धरती की तुलना करते हुए यहीं रह जाने का फ़ैसला करते। जुगनू वापस चले जाते। कथानक का ये भाग एक लम्बी कविता के रूप में रहता। इसी के साथ वो स्थान जहां जुगनू प्रतिवर्ष आया करते थे, दो बच्चों के घर के नज़दीक दिखाया जाता था और इस बहाने बच्चों की भी कई गतिविधियां इस कहानी में शामिल रहती थीं। ये श्रृंखला भी दिनों दिन लोकप्रिय होती जा रही थी और कई पत्र- पत्रिकाएं इस पर समीक्षा और टिप्पणियां छापने लगी थीं। मुझे कभी- कभी एक बात विचलित करती थी कि दुनिया में इंसान का भाग्य किस तरह की भूमिका का निर्वाह करता है। मेरा मन करता था कि इस बात को कहने के लिए मैं किसी की जीवनी लिखूं। मैं चाहता था कि जीवनी किसी ऐसे व्यक्ति की लिखी जाए जिसने जीवन में कोई अलग तरह का संघर्ष किया हो। वैसे तो संघर्ष सभी करते हैं। पैदा होने के बाद पेट भरने का संघर्ष भी कोई कम नहीं होता। पेट भर जाने पर अपनी छवि का संघर्ष भी दिलचस्प होता है। दुनिया में किसी भी किस्म के स्थायित्व के लिए भी लोग जद्दोजहद करते हैं। कोई अपनी मिल्कियत के सहारे अपना नाम अपने बाद की दुनिया के लिए छोड़ना चाहता है, कोई अपनी कला या साहित्य के सहारे तो कोई अपनी संतान के सहारे। मुझे अपनी मंशा ज़ाहिर करने पर तरह - तरह के सुझाव मिलते थे। कोई मुझे सलाह देता कि मैं राजस्थान के एक शाही परिवार से जुड़ी राजनेता व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कहानी लिखूं। कोई कहता कि मुझे राजस्थान में निजी क्षेत्र का विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनस्थली विद्यापीठ संचालित करने वाले शिक्षाविद प्रो शास्त्री पर लिखना चाहिए। किसी मित्र की सलाह होती कि मैं फ़िल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के पिता बैडमिंटन स्टार प्रकाश पादुकोण के संघर्षों की कहानी लिखूं। राजस्थान के जिस ज़िले से मैं अधिकांश समय तक जुड़ा रहा वहां से उभर कर अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल करने वाले अभिनेता इरफ़ान खान का संघर्ष भी मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता था। इस बीच मेरा अमेरिका जाना हुआ तो वहां समय निकाल कर मैंने चंद्रमा पर पहला क़दम रखने वाले अमरीकी नील आर्मस्ट्रॉन्ग के जीवन के बारे में भी बहुत सारी जानकारी जुटाई। अमरीका के प्रख्यात उद्योगपति और न्यूयॉर्क शहर के मेयर रहे माइकल ब्लूमबर्ग की जीवन यात्रा ने भी मुझे काफ़ी प्रभावित किया। लेकिन फिर मैंने दुनिया को खंगालने की बनिस्बत अपनी पोटली ही खोल कर देखी और अपनी मां के जीवन संघर्ष को ही लिखने का फ़ैसला किया। मैं जानता था,और इस बात की पुष्टि बाद में प्रकाशक ने भी की, कि मेरी मां की कहानी में एक आम पाठक की थोड़ी बहुत दिलचस्पी केवल तभी बनेगी जब मैं इसे किसी जीवनी की तरह न लिख कर एक उपन्यास के रूप में ही लिखूं। मैंने अपना ये फिक्शन "राय साहब की चौथी बेटी" के रूप में लिख डाला। ख़ुद को जन्म देने वाली मां की कहानी उन्हें एक सामान्य पात्र मान कर कह देना आसान नहीं होता। लेकिन मैं क्या अब तक आसान कामों में ही पड़ा रहता? हम छः भाई- बहन हैं। इस तरह मां पर मेरा हक़ केवल एक बटा छः हिस्से के रूप में ही था। सबकी शादी हो जाने के बाद तो अब दावेदार बारह हो गए थे। चार बहुएं और दो दामाद भी आ गए थे। फ़िर सबके दो- दो बच्चे। यानी नाती- पोतों के रूप में अम्मा के ढेर सारे वारिस। लोग तो एक मकान के बंटवारे तक में लहूलुहान हो जाते हैं। भाई बहनों में मन मुटाव और उम्र भर के अबोले हो जाते हैं। फ़िर पूरी मां पर अकेले लिख लेना टेढ़ी खीर थी। भाई, बहन, भतीजे,भांजे अदालत में घसीट सकते थे। किताब की रॉयल्टी में हिस्सा मांग सकते थे। पर थैंक गॉड! हिंदी में रॉयल्टी, हिस्से, मुनाफे जैसे झंझट कहां होते हैं? मेरी किताब "राय साहब की चौथी बेटी" लोगों ने खूब पढ़ी और पसंद की! इसके बारे में कुछ भी और बता कर मैं किताब के संभावित पाठक कम नहीं करूंगा। एक समय ऐसा था कि मैं तकनीक से बहुत घबराता था। चिढ़ता भी था। कंप्यूटर के आ जाने के बाद तो मेरी पीढ़ी के लोगों को ऐसा लगता है कि हमने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा तो अकारण गंवा दिया। हम तन मन धन से वो बातें सीखते रहे जो कंप्यूटर पलक झपकते ही कर देता है। इन्हें सीखने की जरूरत ही नहीं। हम बचपन में जो पहाड़े रट कर अपने को बहुत कुशल और पढ़ा लिखा समझते थे वो तो ये ऐसे बताता है कि जैसे कुछ हो ही नहीं। जो स्पेलिंग रटने में हमने अध्यापकों का क्रोध अपनी हथेलियों पर झेला वो तो ये ऐसे ठीक करके दे देता है जैसे केला छील रहा हो।
कभी- कभी सभी लोग इस तरह की चर्चा करते थे कि इंसान का पहनावा कैसा हो। वैसे तो ये सवाल लाखों जवाबों वाला ही है। जितने लोग उतने जवाब। बचपन में इंसान वो पहनता है जो उसके पालक उसे पहना दें। थोड़ा सा बड़ा होते ही वो किसी न किसी तरह अपनी पसंद और नापसंद जाहिर करता हुआ भी वही पहनता है जो आप उसे लाकर दें। किशोर होने पर वो अपने संगी - साथियों से प्रभावित होता है और जैसा देखता है उसी का आग्रह करने लगता है। युवा होने पर उसका ध्यान दौर के फ़ैशन पर जाता है। और वयस्क होने के बाद प्रौढ़ता की ओर बढ़ते हुए उसकी अपनी आमदनी ये फ़ैसला लेने लगती है कि वो क्या धारण करे। कई बार ये सब घर के बजट का प्रश्न भी होता है। ये तो साधारण सी बात है, इस पर क्या चर्चा करना? लेकिन मैंने ये बात एक ख़ास प्रयोजन से यहां छेड़ी है। मुझे बहुत बचपन से ही इस बात पर ध्यान देने की आदत थी कि हम अंतर्वस्त्र या अंदरुनी कपड़े कैसे पहनते हैं। मैं थोड़ी सी समझ विकसित होने के साथ ही इस बात पर ध्यान देने लगा था कि कोई व्यक्ति कैसे अंडर गारमेंट्स पसंद करता है या पहनता है। मेरे दिमाग़ में इस आधार पर भी किसी व्यक्ति की छवि बन जाती थी। कभी- कभी किसी बेहद सम्मानित और विद्वान व्यक्ति का भाषण सुनते हुए भी जब सारा आलम उसके विचारों में खोया हुआ होता था तब मैं सोचता था कि इसने कैसी चड्डी पहन रखी होगी? इस बारे में बहुत छोटी अवस्था से ही लिए गए अपने कुछ प्रेक्षण आपको बताता हूं। मैं देखता था कि कुछ लोगों के साथ कई दिनों तक रहते हुए भी आप ये जान नहीं पाते थे कि वो कैसे अधोवस्त्र पहनते हैं। लेकिन कुछ लोग पूरी तरह दबे- ढके होते हुए भी तुरंत किसी न किसी तरह ये जता देते थे कि भीतर वो क्या पहने हुए हैं। ये बात मेरे साथ उनका परिचय होने, साथ रहने, मित्रता देर तक चलने या न चलने में बड़ी भूमिका निभाती थी। मुझे महसूस होता था कि अंदर के कपड़े हमेशा हमारे तन को छूते हुए होते हैं और ये हमारे अपने मन के निर्णय से हमारे चुने हुए होते हैं तो यही हमारी असली पहचान हैं। क्योंकि बाहरी कपड़े तो हम अपने काम, व्यवसाय, नौकरी,अवसर के हिसाब से पहनते हैं और ये दिखावटी- सजावटी होते हैं। आप इसे मेरी कोई मानसिक बीमारी कह लीजिए कि मुझे आज भी पांच- छः दशक पहले के अपने परिचितों, परिजनों, मित्रों के अंतर्वस्त्र याद हैं। और अगर आपको किसी के बनियान- चड्डी याद हैं तो उसका बदन तो याद होगा ही। सच बताऊं, लोग अपने बचपन के दोस्तों से वर्षों बाद मिलकर बेहद खुश होते हैं, उन्हें आलिंगन में भर लेते हैं, पर मैं उनसे मिलकर ये सोचता रह जाता हूं कि - अरे, ये ऐसा हो गया? फ़िर मुझे लगता है कि वो भी मेरे लिए ऐसा ही सोच रहा होगा। इसीलिए मैं किसी पुराने परिचित या मित्र से मिलने में कतराता हूं। लोग सोचते हैं कि मैं बदल गया, मुझमें वो पहले वाली सी बात नहीं रही, और मैं नए नए लोगों के संपर्क में आता जाता हूं। जब मैं बाज़ार में, किसी स्टोर पर, किसी मॉल में अपने लिए कपड़े खरीदने जाता हूं तो वो लोग मुझे केवल इसी आधार पर अब भी याद आ जाते हैं। मैं मन में अपने से इसी तरह बात करता हूं कि नहीं, मुझे उसका जैसा नहीं, उसका वाला कलर चाहिए। वो डिज़ाइन चाहिए जो उसने तब पहना था। ये बे - सिरपैर की बात है, मैं कुछ भी ऊटपटांग बोले जा रहा हूं, पर क्या करूं, जो हुआ, होता रहा, वो तो बताऊं न आपको? अब आप ही देखिए कि इंसान का स्वभाव कैसे बनता है। चरित्र कैसे बनता है, सोच कैसे बनती है। तो मैं या मेरे पात्र चरित्र, व्यवहार या स्वभाव को लेकर इतने परंपरावादी और दकियानूसी कैसे हो सकते हैं? मुझे साहित्य के मौजूदा विमर्श, फ़ैशन या चलन से क्या? मैं अपनी ज़िन्दगी लिख रहा हूं कोई लीपापोती नहीं कर रहा। काग़ज़ रंगने का ज़ुनून नहीं है मुझे। अख़बार या किसी पत्रिका में अपना नाम छपा देखने के लिए मेरा जी नहीं कलपता। मुझे किसी विचार, पार्टी या दल की नमक हलाली नहीं करनी। कुछ समय बाद अपने शरीर की अवस्था के अनुसार जीकर हम सब ही मर जाएंगे...तो किस बात पर अड़ना? क्या जो बातें कभी थीं, वो अब भी हैं? क्या नई नस्ल भविष्य में उसी विचार की पूंछ पकड़ कर अागे बढ़ेगी जो हम निर्धारित कर जाएंगे? ये सब मेरे लेखन को माइल्ड करता है। यही मेरे जीवन को समायोजन-कारी भी बनाता है। यही बात हम सबको अवसाद से भी बचा सकती है। जाने दीजिए, सब अवसाद में होते भी कहां हैं। और क्यों हों? स्वस्थ हों, संपन्न हों, ख़ुश हों। जीवन में ऐसे कई अवसर आए जब मैंने परिजनों या मित्रों के वैवाहिक रिश्ते होते देखे। विवाह के विज्ञापन भी देखे। ये एक सहज साधारण सी बात थी। सभी घरों में ऐसा होता ही रहता है। मैं एक बात हमेशा सुनता और देखता था कि विवाह के प्रत्याशियों को खूब गोरा बताया जाता था, और इस पर गर्व किया जाता था। पूछा जाता कि लड़की का रंग गोरा है या नहीं? लड़का देखने में कैसा है, ज़्यादा काला रंग तो नहीं...ऐसी बातें अक्सर चर्चा के दौरान सुनने में आती थीं। मैं ऐसी बातों के समय उकता जाता था। मैं उठकर रेडियो की आवाज़ ही तेज़ कर देता। कोई और विषय बदलने की कोशिश करता। मुझे गोरा रंग कभी पसंद नहीं रहा। मुझे लड़कियों का सांवला रंग अच्छा लगता था। और लड़कों का तो गहरा सांवला या काला रंग मुझे आकर्षित करता था। मेरे भाई बहन और मित्र जानते हैं कि मैं बचपन में धूप में कभी छाता नहीं लगाता था। मैंने सुना था कि धूप में घूमने से रंग काला हो जाता है। शायद इसका कारण यही हो कि मेरा रंग थोड़ा गोरा ही है। अपने सभी भाइयों में मैं सबसे गोरा हूं। बाल भी नहीं रंगता। भवों तक के बाल हटाता रहता हूं ताकि वो अब चेहरे को और सफ़ेद न बनाएं। उम्र के उस दौर में हूं कि अब वहां सफ़ेद बाल आते हैं। मेरे पास शुरू से ही साहित्यिक किताबें बहुत आती रही हैं किन्तु मेरा मानना है कि ये किसी लेखक की स्टडी या कक्ष में रखी रहने से सीमित उपयोग की हो जाती हैं। समीक्षक इन्हें संदर्भ के लिए रखें, किन्तु किसी क्रिएटिव राइटर के कमरे में इनका जमा होना दिखावटी ही है। हां, देखने वालों के लिए लेखक की गरिमा में इनसे ज़रूर इज़ाफ़ा होता है। मुझे याद है कि अपने करियर के आरंभिक दिनों में मैं मुंबई या दिल्ली में जब कई बड़े लेखकों का साक्षात्कार पत्र- पत्रिकाओं के लिए लेने जाता था तो वे फ़ोटो सेशन के समय कुछ महत्वपूर्ण किताबों का प्रदर्शन सायास कैमरे की सीमा में किया करते थे। कहते हैं कि आपका व्यक्तित्व किताबों से बनता है। लेकिन मैं इसमें केवल इतना सा जोड़ना चाहूंगा कि "किताबों को पढ़ने से" बनता है। ओह, अगर मैं हर बात में ऐसे ही कहता रहूंगा कि सभी लेखक ऐसा करते थे, पर मैं ऐसा नहीं करता था, तो अनजाने में ही मैं न जाने क्या सिद्ध कर दूंगा! शायद डॉ धर्मवीर भारती की मज़ाक में ही कही गई वो बात, कि तुम लेखक हो ही नहीं! उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम न तो शराब पीते, न ही तुमने इतनी देर में कोई सिगरेट सुलगाई, तुम कैसे लेखक हो? अब आपको तो बता देता हूं कि उनके सामने लिहाज़, संकोच,आदर आदि जैसे कई सवाल थे। बाक़ी हिंदी के ढेर सारे ऐसे लेखक भी हैं जिनके पास मेरे साथ बैठ कर शराब पीने के फोटो होंगे। मेरे पास भी तो हैं। सिगरेट भी मैंने काफ़ी दिन तक पी। पर सिगरेट केवल लिखते समय,और शराब केवल दोस्तों के साथ। न तो मुझे शौक़ और न ज़रूरत! बल्कि कई बार तो केवल ये देखने के लिए, कि इसमें है क्या? क्या मिलता है इनसे? न स्वाद न सेहत! बाल साहित्य की मेरी कृति "मंगल ग्रह के जुगनू" पिछले कई साल से लगातार निकल रही थी। अब इसका एक निश्चित पैटर्न ही बन गया था। इसमें हर साल मंगल ग्रह से धरती पर आने वाले दो जुगनुओं का कथानक रहता था जिसमें पृथ्वी के कुछ छोटे जीव जंतु, यथा कबूतर, गिलहरी, झींगुर, कोकरोच,मेंढक आदि उन जुगनुओं के मित्र बन गए थे और उनके यहां आने पर वो उनका ख़्याल रखने और उन्हें घुमाने - फिराने का काम करते थे। उनके वापस जाते समय धरती के कुछ प्राणी उनके साथ मंगल ग्रह पर जाने का सपना देखते और फिर मंगल और धरती की तुलना करते हुए यहीं रह जाने का फ़ैसला करते। जुगनू वापस चले जाते। कथानक का ये भाग एक लम्बी कविता के रूप में रहता। इसी के साथ वो स्थान जहां जुगनू प्रतिवर्ष आया करते थे, दो बच्चों के घर के नज़दीक दिखाया जाता था और इस बहाने बच्चों की भी कई गतिविधियां इस कहानी में शामिल रहती थीं। ये श्रृंखला भी दिनों दिन लोकप्रिय होती जा रही थी और कई पत्र- पत्रिकाएं इस पर समीक्षा और टिप्पणियां छापने लगी थीं। मुझे कभी- कभी एक बात विचलित करती थी कि दुनिया में इंसान का भाग्य किस तरह की भूमिका का निर्वाह करता है। मेरा मन करता था कि इस बात को कहने के लिए मैं किसी की जीवनी लिखूं। मैं चाहता था कि जीवनी किसी ऐसे व्यक्ति की लिखी जाए जिसने जीवन में कोई अलग तरह का संघर्ष किया हो। वैसे तो संघर्ष सभी करते हैं। पैदा होने के बाद पेट भरने का संघर्ष भी कोई कम नहीं होता। पेट भर जाने पर अपनी छवि का संघर्ष भी दिलचस्प होता है। दुनिया में किसी भी किस्म के स्थायित्व के लिए भी लोग जद्दोजहद करते हैं। कोई अपनी मिल्कियत के सहारे अपना नाम अपने बाद की दुनिया के लिए छोड़ना चाहता है, कोई अपनी कला या साहित्य के सहारे तो कोई अपनी संतान के सहारे। मुझे अपनी मंशा ज़ाहिर करने पर तरह - तरह के सुझाव मिलते थे। कोई मुझे सलाह देता कि मैं राजस्थान के एक शाही परिवार से जुड़ी राजनेता व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कहानी लिखूं। कोई कहता कि मुझे राजस्थान में निजी क्षेत्र का विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनस्थली विद्यापीठ संचालित करने वाले शिक्षाविद प्रो शास्त्री पर लिखना चाहिए। किसी मित्र की सलाह होती कि मैं फ़िल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के पिता बैडमिंटन स्टार प्रकाश पादुकोण के संघर्षों की कहानी लिखूं। राजस्थान के जिस ज़िले से मैं अधिकांश समय तक जुड़ा रहा वहां से उभर कर अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल करने वाले अभिनेता इरफ़ान खान का संघर्ष भी मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता था। इस बीच मेरा अमेरिका जाना हुआ तो वहां समय निकाल कर मैंने चंद्रमा पर पहला क़दम रखने वाले अमरीकी नील आर्मस्ट्रॉन्ग के जीवन के बारे में भी बहुत सारी जानकारी जुटाई। अमरीका के प्रख्यात उद्योगपति और न्यूयॉर्क शहर के मेयर रहे माइकल ब्लूमबर्ग की जीवन यात्रा ने भी मुझे काफ़ी प्रभावित किया। लेकिन फिर मैंने दुनिया को खंगालने की बनिस्बत अपनी पोटली ही खोल कर देखी और अपनी मां के जीवन संघर्ष को ही लिखने का फ़ैसला किया। मैं जानता था,और इस बात की पुष्टि बाद में प्रकाशक ने भी की, कि मेरी मां की कहानी में एक आम पाठक की थोड़ी बहुत दिलचस्पी केवल तभी बनेगी जब मैं इसे किसी जीवनी की तरह न लिख कर एक उपन्यास के रूप में ही लिखूं। मैंने अपना ये फिक्शन "राय साहब की चौथी बेटी" के रूप में लिख डाला। ख़ुद को जन्म देने वाली मां की कहानी उन्हें एक सामान्य पात्र मान कर कह देना आसान नहीं होता। लेकिन मैं क्या अब तक आसान कामों में ही पड़ा रहता? हम छः भाई- बहन हैं। इस तरह मां पर मेरा हक़ केवल एक बटा छः हिस्से के रूप में ही था। सबकी शादी हो जाने के बाद तो अब दावेदार बारह हो गए थे। चार बहुएं और दो दामाद भी आ गए थे। फ़िर सबके दो- दो बच्चे। यानी नाती- पोतों के रूप में अम्मा के ढेर सारे वारिस। लोग तो एक मकान के बंटवारे तक में लहूलुहान हो जाते हैं। भाई बहनों में मन मुटाव और उम्र भर के अबोले हो जाते हैं। फ़िर पूरी मां पर अकेले लिख लेना टेढ़ी खीर थी। भाई, बहन, भतीजे,भांजे अदालत में घसीट सकते थे। किताब की रॉयल्टी में हिस्सा मांग सकते थे। पर थैंक गॉड! हिंदी में रॉयल्टी, हिस्से, मुनाफे जैसे झंझट कहां होते हैं? मेरी किताब "राय साहब की चौथी बेटी" लोगों ने खूब पढ़ी और पसंद की! इसके बारे में कुछ भी और बता कर मैं किताब के संभावित पाठक कम नहीं करूंगा। एक समय ऐसा था कि मैं तकनीक से बहुत घबराता था। चिढ़ता भी था। कंप्यूटर के आ जाने के बाद तो मेरी पीढ़ी के लोगों को ऐसा लगता है कि हमने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा तो अकारण गंवा दिया। हम तन मन धन से वो बातें सीखते रहे जो कंप्यूटर पलक झपकते ही कर देता है। इन्हें सीखने की जरूरत ही नहीं। हम बचपन में जो पहाड़े रट कर अपने को बहुत कुशल और पढ़ा लिखा समझते थे वो तो ये ऐसे बताता है कि जैसे कुछ हो ही नहीं। जो स्पेलिंग रटने में हमने अध्यापकों का क्रोध अपनी हथेलियों पर झेला वो तो ये ऐसे ठीक करके दे देता है जैसे केला छील रहा हो।
सभी अपने घर का सपना देखते हैं और होम लोन हर किसी की जिंदगी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिस पर सावधानीपूर्वक विचार करना जरूरी है। कई बार आप महंगा घर खरीदने की चाहत रखते हैं, लेकिन बैंक से लोन की भारी राशि प्राप्त करने योग्य नहीं होते। ऐसे में ज्वाइंट होम लोन का विकल्प अपनाना बेहतर होता है। लेकिन माता-पिता या जीवनसाथी के साथ मिलकर ज्वाइंट लोन लेने से पहले आपको इस लोन की जटिलताओं को समझना आवश्यक है। ज्वाइंट लोन बेहतर एवं उच्च लोन योग्यता के लिए आवेदक के अलावा सह-आवेदक की आय को अनुपूरक बनाकर योग्यता मानदंड को पूरा किया जाता है। आप अपने माता-पिता अथवा अपने जीवनसाथी के साथ ज्वाइंट लोन लेने का विकल्प अपना सकते हैं, क्योंकि यह अधिक मूल्य के लोन के लिए अधिक सुविधाजनक रूप से आपकी योग्यता पूरी करता है। साथ ही यह लोन आपकी जिम्मेदारी को संयुक्त रूप से प्रबंधित भी करता है। ज्वाइंट होम लोन आपकी योग्यता को बढ़ाता है, लेकिन यह भुगतान की जिम्मेदारी भी वितरित करता है और दोनों कर्जदारों के क्रेडिट इतिहास और क्रेडिट स्कोर को भी प्रभावित करता है। एक ज्वाइंट लोन में सह-आवेदक का तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जो लोन के लिए प्राथमिक आवेदक के साथ आवेदन करता है, ताकि सह-आवेदक की आय को कर्जदार की आय के साथ अनुपूरक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके और उसकी योग्यता अथवा ऋण सीमा में वृद्धि की जा सके। यदि प्राथमिक आवेदक डिफॉल्टर होता है या किन्हीं परिस्थितियों में लोन का पुनर्भुगतान करने में समर्थ नहीं होता तो सारी जिम्मेदारी सह-आवेदक पर आ जाती है। इसलिए लोन आवेदन पर फैसला करने से पहले लेंडर्स द्वारा सह-आवेदक का सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर और रिपोर्ट भी जांची जाती है। यदि सह-आवेदक का सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर कम है, तो लोन आवेदन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। करना आवश्यक है। - ज्वाइंट लोन में दोनों आवेदकों को नो योर कस्टमर (केवाईसी) दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, रोजगार प्रमाणपत्र, और आइटी रिटर्न प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। सुनिश्चित करें कि आपके पास इन दस्तावेजों की प्रतियां मौजूद हैं। - दोनों अपने क्रेडिट इतिहास को समझने के लिए सिबिल रिपोर्ट और सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर को अवश्य जांच लें। यदि आपकी क्रेडिट रिपोर्ट असंगति और डिफॉल्ट दर्शाती है और आपका क्रेडिट स्कोर कम है, तो लोन के लिए आवेदन करने से पूर्व इसे सुधारने का प्रयास करें। इससे आपका लोन खारिज नहीं होगा। - यदि आपने पहले ही ज्वाइंट लोन ले रखा है तो अपने सभी पुनर्भुगतान का रिकॉर्ड रखें और लोन के नियम एवं शर्तों में किये जाने वाले परिवर्तन के मामले में अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक रहें। - मासिक किश्तों को अदा करने में डिफॉल्टर न बनें क्योंकि इससे दोनों कर्जदारों के क्रेडिट इतिहास पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। - अपने क्रेडिट स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए अपनी सिबिल रिपोर्ट और सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर की नियमित रूप से समीक्षा करते रहें। (लेखिका सिबिल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट- कंज्यूमर सर्विसेज एवं कम्युनिकेशंस हैं। )
सभी अपने घर का सपना देखते हैं और होम लोन हर किसी की जिंदगी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिस पर सावधानीपूर्वक विचार करना जरूरी है। कई बार आप महंगा घर खरीदने की चाहत रखते हैं, लेकिन बैंक से लोन की भारी राशि प्राप्त करने योग्य नहीं होते। ऐसे में ज्वाइंट होम लोन का विकल्प अपनाना बेहतर होता है। लेकिन माता-पिता या जीवनसाथी के साथ मिलकर ज्वाइंट लोन लेने से पहले आपको इस लोन की जटिलताओं को समझना आवश्यक है। ज्वाइंट लोन बेहतर एवं उच्च लोन योग्यता के लिए आवेदक के अलावा सह-आवेदक की आय को अनुपूरक बनाकर योग्यता मानदंड को पूरा किया जाता है। आप अपने माता-पिता अथवा अपने जीवनसाथी के साथ ज्वाइंट लोन लेने का विकल्प अपना सकते हैं, क्योंकि यह अधिक मूल्य के लोन के लिए अधिक सुविधाजनक रूप से आपकी योग्यता पूरी करता है। साथ ही यह लोन आपकी जिम्मेदारी को संयुक्त रूप से प्रबंधित भी करता है। ज्वाइंट होम लोन आपकी योग्यता को बढ़ाता है, लेकिन यह भुगतान की जिम्मेदारी भी वितरित करता है और दोनों कर्जदारों के क्रेडिट इतिहास और क्रेडिट स्कोर को भी प्रभावित करता है। एक ज्वाइंट लोन में सह-आवेदक का तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जो लोन के लिए प्राथमिक आवेदक के साथ आवेदन करता है, ताकि सह-आवेदक की आय को कर्जदार की आय के साथ अनुपूरक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके और उसकी योग्यता अथवा ऋण सीमा में वृद्धि की जा सके। यदि प्राथमिक आवेदक डिफॉल्टर होता है या किन्हीं परिस्थितियों में लोन का पुनर्भुगतान करने में समर्थ नहीं होता तो सारी जिम्मेदारी सह-आवेदक पर आ जाती है। इसलिए लोन आवेदन पर फैसला करने से पहले लेंडर्स द्वारा सह-आवेदक का सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर और रिपोर्ट भी जांची जाती है। यदि सह-आवेदक का सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर कम है, तो लोन आवेदन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। करना आवश्यक है। - ज्वाइंट लोन में दोनों आवेदकों को नो योर कस्टमर दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, रोजगार प्रमाणपत्र, और आइटी रिटर्न प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। सुनिश्चित करें कि आपके पास इन दस्तावेजों की प्रतियां मौजूद हैं। - दोनों अपने क्रेडिट इतिहास को समझने के लिए सिबिल रिपोर्ट और सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर को अवश्य जांच लें। यदि आपकी क्रेडिट रिपोर्ट असंगति और डिफॉल्ट दर्शाती है और आपका क्रेडिट स्कोर कम है, तो लोन के लिए आवेदन करने से पूर्व इसे सुधारने का प्रयास करें। इससे आपका लोन खारिज नहीं होगा। - यदि आपने पहले ही ज्वाइंट लोन ले रखा है तो अपने सभी पुनर्भुगतान का रिकॉर्ड रखें और लोन के नियम एवं शर्तों में किये जाने वाले परिवर्तन के मामले में अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक रहें। - मासिक किश्तों को अदा करने में डिफॉल्टर न बनें क्योंकि इससे दोनों कर्जदारों के क्रेडिट इतिहास पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। - अपने क्रेडिट स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए अपनी सिबिल रिपोर्ट और सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर की नियमित रूप से समीक्षा करते रहें।
हमीरपुर - मनरेगा के तहत पंचायतों में बनाए जा रहे वाटर सेफ्टी टैंक लोगों की सिरदर्दी का कारण बन गए हैं। घर के आंगन में खोदे गए गड्ढों में तीन माह के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों के मकान को भी खतरा पैदा हो गया है। बारिश होते ही गड्ढे पानी से भर रहे हैं। बता दें कि सराकड़ पंचायत में आठ वाटर सेफ्टी टैंकों की खुदवाई हो चुकी है, लेकिन संबंधित टैकों के लिए आज तक सीमेंट का प्रावधान नहीं हो पाया है। ऐसे में लोग काफी परेशान हैं। सराकड़ पंचायत के बलोगणी गांव के कर्म चंद ने बताया कि उन्होंने अपने घर के साथ लगते आंगन में वाटर सेफ्टी टैंक नवंबर माह में मनरेगा के तहत खुदवाया था, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी पंचायत में सीमेंट न मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है। यही नहीं भारी बारिश के कारण टैंक में पानी भर जाता है और मकान के लिए लगाये डंगे मंे सेफ्टी टेंक के लिए खोदे गड्ढे के कारण दरारंे आ गई हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत द्वारा खुदवाए गड्ढे से मकान को खतरा हो गया है और खोदी हुई मिट्टी पानी के बहाव से दोबारा गड्ढे में गिर गई है। गड्ढे के साथ में बाथरूम है, जिसे भी खतरा पैदा हो गया है। इसके लिए कई बार पंचायत प्रधान को कहा गया है, लेकिन उनका एक ही जवाब है कि अभी तक सीमेंट नहीं पहुंचा है। वहीं पंचायत प्रधान दलजीत का कहना है कि ब्लॉक को कई बार लिखित में कहा गया है। सीमेंट की सप्लाई पीछे से ही नहीं आ रही है। जैसे ही सीमेंट का स्टॉक आएगा, उसे पेडिंग काम के लिए भेज दिया जाएगा।
हमीरपुर - मनरेगा के तहत पंचायतों में बनाए जा रहे वाटर सेफ्टी टैंक लोगों की सिरदर्दी का कारण बन गए हैं। घर के आंगन में खोदे गए गड्ढों में तीन माह के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों के मकान को भी खतरा पैदा हो गया है। बारिश होते ही गड्ढे पानी से भर रहे हैं। बता दें कि सराकड़ पंचायत में आठ वाटर सेफ्टी टैंकों की खुदवाई हो चुकी है, लेकिन संबंधित टैकों के लिए आज तक सीमेंट का प्रावधान नहीं हो पाया है। ऐसे में लोग काफी परेशान हैं। सराकड़ पंचायत के बलोगणी गांव के कर्म चंद ने बताया कि उन्होंने अपने घर के साथ लगते आंगन में वाटर सेफ्टी टैंक नवंबर माह में मनरेगा के तहत खुदवाया था, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी पंचायत में सीमेंट न मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है। यही नहीं भारी बारिश के कारण टैंक में पानी भर जाता है और मकान के लिए लगाये डंगे मंे सेफ्टी टेंक के लिए खोदे गड्ढे के कारण दरारंे आ गई हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत द्वारा खुदवाए गड्ढे से मकान को खतरा हो गया है और खोदी हुई मिट्टी पानी के बहाव से दोबारा गड्ढे में गिर गई है। गड्ढे के साथ में बाथरूम है, जिसे भी खतरा पैदा हो गया है। इसके लिए कई बार पंचायत प्रधान को कहा गया है, लेकिन उनका एक ही जवाब है कि अभी तक सीमेंट नहीं पहुंचा है। वहीं पंचायत प्रधान दलजीत का कहना है कि ब्लॉक को कई बार लिखित में कहा गया है। सीमेंट की सप्लाई पीछे से ही नहीं आ रही है। जैसे ही सीमेंट का स्टॉक आएगा, उसे पेडिंग काम के लिए भेज दिया जाएगा।
धिप -> पुरुषोत्तम - > गंगाधर - > रामेश्वर - > द्वारानंद -> देवानंद - > श्रीयानंद -> हरियानंद - > राघवानंद -> रामानंद इस सच्ची परंपरा के अनुसार श्री रामानुज के १४ वीं पीढ़ी में रामानंदजी का आविर्भाव हुआ। यदि एक पीढ़ी के लिए २५ वर्ष का समय माना जाय तो दोनों के बीच में साढ़े तीन सौ वर्ष का अंतर मानना उचित होगा। श्रीरामानुज का तिरोधान ११३६ ई० में माना जाता है । तदनुसार रामानंद जी का तिरोधान १४८६ ई० अर्थात् १५ वीं शती का अंतिम भाग में मानना कथमपि अन्याय न होगा । रामानंद जी की यही गुरुपरंपरा सर्वथा मान्य तथा प्रामाणिक है। इसके अनुशीलन से स्पष्ट प्रतीत होता है कि नाभा जी दास के द्वारा निर्दिष्ट परंपरा ( जिसके अनुसार रामानंद श्रीरामानुज की पाँचवी पीढ़ी में विद्यमान बतलाये जाते हैं ) एकदम अधूरी है। इसमें कतिपय मान्य आचार्यों के ही नाम निर्दिष्ट किये गये हैं। नाभा जी का वह छप्पय पीछे निर्दिष्ट है । इसमें देवाचार्य - > हरियानंद - > राघवानंद - > रामानंद छोर तो प्रायः ठीक सी है, परंतु रामानुज तथा देवाचार्य के बीच में आचार्यों के अस्तित्व का वर्णन इसमे नहीं है । अतः उन लोगों का मत जो रामानंद तथा रामानुज के बीच में केवल सौ-सवा सौ वर्षों का व्यवधान मानते हैं ( जो ५ पीढ़ी के लिए उचित है ), रामानंद जी के स्वतः उल्लेख से एक-दम प्रमाणहीन प्रतीत होता है ।
धिप -> पुरुषोत्तम - > गंगाधर - > रामेश्वर - > द्वारानंद -> देवानंद - > श्रीयानंद -> हरियानंद - > राघवानंद -> रामानंद इस सच्ची परंपरा के अनुसार श्री रामानुज के चौदह वीं पीढ़ी में रामानंदजी का आविर्भाव हुआ। यदि एक पीढ़ी के लिए पच्चीस वर्ष का समय माना जाय तो दोनों के बीच में साढ़े तीन सौ वर्ष का अंतर मानना उचित होगा। श्रीरामानुज का तिरोधान एक हज़ार एक सौ छत्तीस ईशून्य में माना जाता है । तदनुसार रामानंद जी का तिरोधान एक हज़ार चार सौ छियासी ईशून्य अर्थात् पंद्रह वीं शती का अंतिम भाग में मानना कथमपि अन्याय न होगा । रामानंद जी की यही गुरुपरंपरा सर्वथा मान्य तथा प्रामाणिक है। इसके अनुशीलन से स्पष्ट प्रतीत होता है कि नाभा जी दास के द्वारा निर्दिष्ट परंपरा एकदम अधूरी है। इसमें कतिपय मान्य आचार्यों के ही नाम निर्दिष्ट किये गये हैं। नाभा जी का वह छप्पय पीछे निर्दिष्ट है । इसमें देवाचार्य - > हरियानंद - > राघवानंद - > रामानंद छोर तो प्रायः ठीक सी है, परंतु रामानुज तथा देवाचार्य के बीच में आचार्यों के अस्तित्व का वर्णन इसमे नहीं है । अतः उन लोगों का मत जो रामानंद तथा रामानुज के बीच में केवल सौ-सवा सौ वर्षों का व्यवधान मानते हैं , रामानंद जी के स्वतः उल्लेख से एक-दम प्रमाणहीन प्रतीत होता है ।
लखनऊ, पांच अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को कांस्य पदक जीतने पर बृहस्पतिवार को बधाई देते हुए कहा कि चार दशक के बाद वह स्वर्णिम पल आया है जब हमारे युवाओं ने पुराने गौरव को फिर से हासिल करने की ओर बहुत बड़ा कदम बढ़ाया है। मोदी 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' के लाभार्थियों से संवाद के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने ओलंपिक में कामयाबी के बाद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह, मुख्य कोच ग्राहम रीड और सहायक कोच पीयूष दुबे से बात की और उन्हें इस अविस्मरणीय सफलता के लिए बधाई दी। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान मोदी ने कहा कि आज सिंह की दहाड़ और बुलंद हो गई है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान ने लगातार हौसला अफजाई के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया। गौरतलब है कि भारत की पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक में पदक का 41 साल पुराना सूखा समाप्त करते हुए बृहस्पतिवार को जर्मनी को चार के मुकाबले पांच गोल से हराकर कांस्य पदक हासिल कर लिया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
लखनऊ, पांच अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को कांस्य पदक जीतने पर बृहस्पतिवार को बधाई देते हुए कहा कि चार दशक के बाद वह स्वर्णिम पल आया है जब हमारे युवाओं ने पुराने गौरव को फिर से हासिल करने की ओर बहुत बड़ा कदम बढ़ाया है। मोदी 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' के लाभार्थियों से संवाद के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने ओलंपिक में कामयाबी के बाद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह, मुख्य कोच ग्राहम रीड और सहायक कोच पीयूष दुबे से बात की और उन्हें इस अविस्मरणीय सफलता के लिए बधाई दी। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान मोदी ने कहा कि आज सिंह की दहाड़ और बुलंद हो गई है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान ने लगातार हौसला अफजाई के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया। गौरतलब है कि भारत की पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक में पदक का इकतालीस साल पुराना सूखा समाप्त करते हुए बृहस्पतिवार को जर्मनी को चार के मुकाबले पांच गोल से हराकर कांस्य पदक हासिल कर लिया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
४६. इंग्लैंड और रूस एक तुलना श्री स्क्राइनने ७ जुलाई, १९०३ को इम्पीरियल इन्स्टिट्यूटमें "इंग्लैंड और रूस द्वारा एशियाइयोंपर शासन " विषयपर एक मनोरंजक भाषण दिया था, जिसे ईस्ट ऐंड वेस्टने अपने अक्टूवरके अंकमें छापा है। इस विषयमें हम दक्षिण आफ्रिकाके लोगोंको वौद्धिक ही नहीं, बल्कि उससे कुछ अधिक दिलचस्पी है । अनन्त एशिया और उसकी हजारों जातियोंपर, जिनमें बहुत-सी वातोंमें जमीन-आसमानका अन्तर होते हुए भी, कुछ ऐसी समानता है, जिसकी व्याख्या नहीं हो सकती, इन दोनोंमें से किसी एकके शासनकी सफलता या असफलताके वारेमें अन्तिम निर्णय देना राष्ट्रोंके इतिहासमें अभी बहुत जल्दी करना होगा। वक्ताने कहा था : रूसी सम्राट् - जार के कई करोड़ बौद्ध और मूर्ति पूजक प्रजाजन हैं और २०,७०,००,००० हिन्दू भारत-सम्राट्को सत्ता स्वीकार करते हैं, किन्तु पूर्वमें केवल इस्लाम इन दोनोंके अधिकारियोंके सम्मुख एक जैसी समस्याएँ प्रस्तुत करता है। • • • • ब्रिटिश भारतमें नबोके कमसे कम ५,३८,०४,००० अंनुयायी हैं । सन् १८९७ की जनगणनाके अनुसार, रूसके महान्, गौर वर्णीय जारके शासनाधीन मुसलमानोंकी संख्या १,८७,०७,००० इसके विपरीत, मैं कह दूँ कि, तुर्कीमें खलीफाके प्रजाजन, जो उनका धर्म मानते हैं, १,८५,००,००० से कम t इस प्रकार यह प्रत्यक्ष है कि श्री स्क्राइनने अपनी तुलनाको सुनिश्चित मर्यादाएँ बना ली हैं, इसलिए यद्यपि उनके भाषणका व्यापक अर्थ लगानेकी गुंजाइश नहीं है, फिर भी वह पठनीय है। भारतीय शासनको कहीं " उदार निरंकुशता " का नाम दिया गया है । यद्यपि इन शब्दोंमें परस्पर विरोधाभास है; किन्तु कदाचित् वे भारतमें अंग्रेजी राजकी अवस्थाको बहुत कुछ यथार्थ रूपमें व्यक्त करते हैं। जबतक अंग्रेजी राजकी प्रभुतामें हस्तक्षेप नहीं होता, तबतक भारतके लोगोंके प्राचीन कालसे चले आते हुए रीति-रिवाजोंका लिहाज किया जाता है और उन्हें अछूता रहने दिया जाता है। उनको अपने देशके मामलोंमें न्यूनाधिक मोटे तरीकेका स्वशासन प्राप्त है । सन् १८५७' की ऐतिहासिक घोषणा और उसके बाद एकके बाद दूसरे वाइसरायोंकी घोषणाएँ बताती हैं कि उनके पीछे जाति, रंग और धर्मके सव भेदभावोंको समाप्त करने और साम्राज्यके समस्त प्रजाजनोंको समान अधिकार देनेका इरादा है। इसलिए यदि स्वयं भारतमें इन घोषणाओंपर पूरा अमल नहीं हो पाता तो इसका कारण यह नहीं कि अधिकारी उन्हें पूरा करना नहीं चाहते, बल्कि यह है कि व्यवहारमें ब्रिटिश शासनकी सर्वोच्चताके सम्बन्ध में अनुचित भय या शासितोंके सम्बन्धमें अनिश्चित सन्देहसे उनके हाथ रुकते हैं। इसलिए अस्थायी स्खलनोके बावजूद यह आशा करनेके लिए पर्याप्त आधार है कि ज्यों-ज्यों लोगोंकी स्वाभाविक राजभक्तिको परीक्षाके अवसर आते जायेंगे त्यों-त्यों सन्देह या भय धीरे-धीरे विलुप्त होते जायेंगे और उनका स्थान विश्वास लेता जायेगा। दक्षिण आफ्रिकाकी अभी हालकी लड़ाई और चीनके अभियानसे भारतीय शासकोंके मनपर आश्चर्यजनक प्रभाव पड़ा है और भारतीय दृष्टिकोणसे १. प्रत्यक्षतः १८५८ के बजाय भूलते लिखित । " ईस्ट रैड एक्सप्रेस" और हम ट्रान्सवालमे ब्रिटिश भारतीयांको स्थितिके बारेमे हमारे विनारोकी तरफ हमारा सहयोगी बराबर ध्यान देता रहता है । इसे हम अपना सम्मान ही समझते है । हम यह भी मानते है कि भारतीयोंकी बहुत-सी कठिनाइयोंकी जडमे गलतफहमियाँ है और सयमके साथ विचार-मीनिमगमे गलतफहमियाँ दूर भी हो सकती है। इसलिए हमारे सहयोगीने गत १४ नारीगके आमें जो लिखा है उसका जवाब देते हुए हम उस प्रग्नपर फिर वापस आते है। सहयोगीने लिखा है कि पीटर्सवर्ग शहरमे लडाईसे पहलेकी अपेक्षा भारतीय परवानेदारोकी गंग्या अन कुछ बढ़ गई है। हम इसे स्वीकार करते है, परन्तु जहांतक स्पेलोनकेन जिलेगे सम्बन्ध है, हम अत्यन्त निश्चयपूर्वक कहते है कि वहाँ परवानोकी गरयामे बहुत ही कम वृद्धि हुई है। उस जिलेमें जो भी भारतीय दूकानदार इस समय व्यापार कर रहे है वे अपनी अपनी जगहों में दस-दस, बल्कि इससे भी अधिक, वर्पोसे व्यवसाय करते है । सहयोगीको हम यह भी बता दें कि उन्हें अपने परवानोंको नये करवानेके लिए बहुत अधिक जद्दोजहद करनी पड़ी है। परन्तु ये तो उसके दुनके मामले है और व्यापक रूपसे फैली हुई बीमारीके लक्षण मान है । एक्सप्रेसके इन शब्दोमे गारा मर्म आ जाता है : साफ-साफ बात कहना अच्छा होता है, इसलिए हम स्वीकार करते है कि सम्भव हो सके तो ट्रान्सवाल अपनी सीमाके अन्दर स्वतन्त्र एशियाइयोंको नहीं चाहता। उसका कारण, जैसा कि कुछ हलकोंमें सयाल मालूम होता है, यह नहीं है कि हम पढ़े-लिखे भारतीयोंको हीन मानते है; बल्कि यह है कि कानून सम्मत शर्तोंपर गोरोंके लिए उनके सम्मुख होड़में टिकना असम्भव है। व्यापारियोंकी हेसियतसे नेटालमें सारे व्यापारपर उनका तेजीसे एकाधिपत्य होता जा रहा है। वे फुशल व्यापारी तो है हो; परन्तु इसके साथ अत्यन्त मितव्ययी भी है । इस कारण अपने तमाम प्रतिस्पधियोंके मुकाबलेमें वे हर चीज कम कीमतमें बेच सकते है। अगर कहीं उनके पैर यहाँ जम गये तो यहां भी वही हाल होगा । इसीलिए हम ईस्ट रंडवासी लोग एशियाइयोंको व्यापारिक या सामाजिक दर्जा देनेके इतने विरोधी हैं। हमें तो सिर्फ एक प्रकारके एशियाईकी जरूरत है, और वह है अकुशल गिरमिटिया मजदूर । आत्मरक्षा प्रकृतिका पहला कानून हे । उसका तकाजा है कि यहाँ अन्य सभी लोग वजित निवासी हों, भले ही यह कठोरता दिखाई दे । जिन लोगोंके अधिकार फिलहाल यहाँ है उनके अधिकारोंकी यथासम्भव रक्षा की जाती रहेगी, परन्तु यहाँ रियायतें तो बन्द होनी ही चाहिए । भारतीयोके प्रति उपनिवेशमें जो दुर्भाव है, उसका असली कारण इसमें आ जाता है। इसके जवाबमे बहुत कुछ कहा जा सकता है; परन्तु उसे हम थोड़ेसे-थोड़े शब्दोंमें कहनेकी कोशिश करेगे । ऊपरके कथनमे नेटालका उदाहरण दिया गया है; परन्तु अगर जरा भी गहराईसे उसकी जाँच की जायेगी तो उससे यह प्रकट हो जायेगा कि इससे तो उलटी ही बात सिद्ध होती है । नेटालमें भारतीय व्यापारी बड़ी संख्यामें जरूर है; परन्तु व्यापारका सर्वोत्तम भाग तो यूरोपीयोके ही हाथोमे है और आगे भी रहेगा । भारतीय व्यापारी जहाँ अपने गुजर-बसरके लिए नेटालमें अच्छी कमाई कर सके है, वहां उनमें से एकको भी अभी वह दर्जा प्राप्त नहीं हो सका "ईस्ट रैंड एक्सप्रेस" और हम है, जो हारवे, ग्रीनेकर ऐंड कम्पनी अथवा एस० वूचर ऐंड सन्सको, अथवा अन्य बड़े व्यापारी संस्थानोंको प्राप्त है, यद्यपि कुछ भारतीय व्यापारियोंने भी अपने व्यापारका प्रारम्भ उन्हीं दिनों किया था, जिन दिनों इन पेढ़ियोंने । वस्तुतः हम खुद एक भारतीय व्यापारीका उदाहरण जानते हैं, जो अपने साथ पूंजी लेकर आया था । यहाँ उसने एक अव्यवसायी यूरोपीयको अपना साझीदार बना लिया। दोनों गहरे दोस्त बन गये, और आज भी दोनोंके आपसी सम्बन्ध बहुत सन्तोपजनक हैं। फिर भी व्यापार शुरू करते समय जिस यूरोपीयके पास अपनी पूंजी भी नहीं थी, वह दौड़में अपने पुराने साझीको बहुत पीछे छोड़ गया है और अब उपनिवेशमें उसकी स्थिति प्रथम श्रेणीकी है। किन्तु इस घटनाकी व्याख्या बिलकुल स्पष्ट है। भारतीय व्यापारीकी आदतें यूरोपीयके मुकावले कम खर्चीली हैं; परन्तु उसमें यूरोपीय व्यापारीकी संगठनशक्ति, अंग्रेजी भाषाकी जानकारी और उसके यूरोपीय सम्बन्धोंसे प्राप्त व्यापारिक लाभकी कमी सहज है। हमारी रायमें भारतीय व्यापारीकी तरह किफायतशारी न होनेकी कमी यूरोपीय व्यापारी इन गुणोंसे पूरी ही नहीं कर लेता, वल्कि उसको इनका और भी अधिक लाभ मिलता है। खुद भारतमें बड़े-बड़े भारतीय व्यापारी संस्थान हैं; परन्तु वहाँ बड़ी-बड़ी यूरोपीय पेढ़ियाँ इन गुणोंसे ही उनका मुकाबला कर रही हैं। आज भी सबसे अधिक कमाई देनेवाले व्यापार ज्यादातर यूरोपीयोंके ही हाथोंमें हैं; यद्यपि भारतीयोंकी योग्यता तथा साहसिकताको वहाँ पूरा-पूरा अवकाश प्राप्त है। इसलिए, चाहे दक्षिण आफ्रिका हो या अन्य कोई देश, भारतीय व्यापारियोंने तो मव्यस्य या आढ़तियोंका ही काम किया है। हम यह स्वीकार करनेके लिए स्वतन्त्र हैं कि अपवाद रूपमें वे छोटे यूरोपीय दूकानदारोंके मुकाबलेमें कहीं कहीं सफलता प्राप्त कर सकते हैं; परन्तु वहाँ भी, जैसा कि सर जेम्स हलेटने कहा है, कुल मिलाकर यूरोपीय व्यापारी ही नफेमें रहते हैं; क्योंकि दूसरे क्षेत्रोंमें उनकी साहसिकताके लिए खूब अवकाश रहता है । यदि भारतीय नेटालमें न आये होते तो जो यूरोपीय व्यापारी काफिरोंके वीच व्यापार करनेवाले छोटे-छोटे दूकानदार बने रहते वे ही आज या तो थोकके बड़े व्यापारी हैं, जिनके मातहत पचासों आदमी काम कर रहे हैं, या खुद ऐसे थोक व्यापारके संस्थानोंमें लगे हुए हैं। आज यहाँ उनकी अपनी करमुक्त जायदादें हैं, और वे वेरिया [ उर्वनमें वनीमानी और शौकीन लोगोंके मुहल्ले ] में अपेक्षाकृत सुख-चैनकी जिन्दगी बिता रहे हैं। इसलिए हमारा खयाल तो यह है कि भारतीयों की सादगी और किफायतगारीका जरूरत से ज्यादा तूल बांधा गया है । परन्तु क्या इस विषयमें साम्राज्यको दृष्टिसे कुछ भी कहनेको नहीं रह जाता ? भलेके लिए हो या बुरेके, और भारतीय कितने ही छोटे क्यों न हों; परन्तु वे आखिर साम्राज्यके हिस्सेदार तो हैं ही । ऐसी सूरतमें उनकी योग्यता या मिहनत उन्हें जितनेका अधिकारी ठहराये, उतना मुनासिव हिस्सा क्या उन्हें देनेसे इनकार करना उचित है ? हमारा सहयोगी चाहता है कि ट्रान्सवालमें भारतीय केवल गिरमिटिया मजदूरोंको हैसियतसे ही आयें, उससे ज्यादा अन्य किसी हैसियतसे नहीं । आत्मरक्षा अवश्य प्रकृतिका पहला कानून हो सकता है; परन्तु हम नहीं मानते कि प्रकृति किसीको यह भी सिखाती है कि जिसकी सहायतासे वह ऊपर चढ़ा हो उसको हस्तीको ही मिटा दे। शुद्ध स्वार्थकी दृष्टिसे यह क्षम्य हो सकता है कि आप एक सम्पूर्ण प्रजातिके लिए उपनिवेशके दरवाजे बन्द कर दें। परन्तु प्रकृतिके किसी भी कानूनके साथ इस व्यवहारका मेल बैठाना बहुत मुश्किल मालूम होता है कि एक आदमीका दूसरेके स्वार्थके लिए उपयोग कर लिया जाये और जव उसकी जरूरत समाप्त हो जाये तब उस गरीबको ठोकर मारकर हटा दिया जाये । परन्तु दक्षिण आफ्रिकाका वर्तमान संघर्प उन लोगोंके अधिकारोंकी पूरी रखाके लिए है, जो दक्षिण आफिका पहलेले ही बसे हुए हैं। इस बातको हमारा सहयोगी स्वीकार करता है; परन्तु साथ ही "यथागम्भव" जेगा सुरक्षित तथा संदिग्ध मन्द जोड़ देता है; पर उस वापर निर्भर करेगा कि इस प्रश्नको किन दृष्टिगे देखा जाता है और यह गगासम्भव" शन्द भारतीय गमाजकी उचित आवश्यकताओं की पूर्ति की हुक्तक जाता है या नही । हमारा रागाल है, पत्रकारको हैसियतसे हमारी भांति हमारे सहयोगीका भी कर्तव्य है कि हम लोकमतको ग तरह शिक्षित करें, जिससे इस कठिनाईको पार करनेका उत्तम मार्ग निकल गये । [ अंग्रेजी से ] श्री क्रेसवेल अभी कुछ पहलेतक 'विलेज मेन रीफ गोल्ड माइनिंग कम्पनी लिमिटेड' के प्रवन्धक थे, जिससे उन्होंने अब इस्तीफा दे दिया है और वह मजूर कर लिया गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा देते हुए कम्पनीके सेक्रेटरी श्री बिलबोको जो लम्बा पत्र लिखा था वह जोहानिंगवर्गके पत्रोंमें भी प्रकाशनार्थ भेजा है । जोहानिसबर्ग में बतनी श्रम-आयोगके सामने अपना चौंका देनेवाला बयान देते हुए उन्होंने जो खयाल पैदा किया था उगीकी पुष्टि उस लम्बे पनगे होती है। इस बयान में उन्होंने अत्यन्त निश्चयात्मक बताया था कि उग बडे साननिगमकी खानोंकी खुदाईके लिए खुदाईके लिए गिरमिटिया एशियाई मजदूर लानेका प्रयत्न आर्थिक आवश्यकताकी अपेक्षा एक राजनीतिक चाल अधिक है। पाठकोंको याद होगा कि उस समय श्री केसवेलने अपने कथनकी पुष्टिमें अपने नाम लिखा गया श्री टार्बटका एक पत्र पेश किया था, जिसमें बताया गया था कि इन दिनों गोरे मजदूरांगे काम लेनेका जो प्रयोग चल रहा है उसे अधिकांश खान कम्पनियाँ पसन्द नहीं करती। यह पत्र पेश करनेके कारण ही श्री फ्रेगवेलगे जवाब तलब किया गया था । श्री विलन्नो लिखते है : आपके द्वारा श्री टारवटके २३ जुलाई १९०२ के व्यक्तिगत पत्रका प्रकाशन संचालकों की दृष्टिमें अक्षम्य है। " श्री क्रेमवेलके लिए यह सम्भव न था कि वे यह डंक सहकर चुप बैठ जाते । कम्पनीको लिखा वह लम्बा पत्र उसीका परिणाम था । श्री क्रेसवेलके प्रति किसीको भी सहानुभूति हुए बगैर नहीं रह सकती। सब कठिनाइयाँ सहकर भी उन्होंने अपनी खानोंपर गोरे मजदूरोंसे काम लेनेका प्रयोग सफलतापूर्वक किया है । वे इसे पूरे दिलसे पसन्द भी करते थे; परन्तु वे वस्तुतः अकेले पड़ गये । अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफेकी जोरदार माँग पूरी करनेमें वे पिछड़ गये । जैसा कि हम इन कालमोंमें पहले अनेक बार लिख चुके हैं, हम तो यही कह सकते है कि इस विषय में श्री क्रेसवेलने जो रुस ग्रहण किया है, आनेवाली पुश्तोंका लाभ उसीमें है । समय ही बताएगा कि उपनिवेशमें खान-उद्योगके तथाकथित विकास के लिए अगर एशियासे कभी गिरमिटिया मजदूर लाये गये तो यह एक गलत कदम होगा, जिससे आनेवाली पुश्तें दुःखी होंगी और इस योजनाके बनानेवालोंकी वेझिझक निन्दा करेंगी। श्री क्रेसवेलका त्यागपत्र तो एक छोटी और व्यक्तिगत बात है। इससे उन्हें आर्थिक कष्ट हो सकता है, या शायद न भी हो । परन्तु वहाँसे उनके हट जानेसे सुधारकोंका काम और भी कठिन हो जाता है । इस दृष्टिसे उनके हट जाने से उन लोगोंकी बड़ी हानि हुई है, जो न केवल वर्तमान पीढ़ी के कल्याण के लिए चिन्तित हैं, बल्कि भावी पीढ़ियोंके हितोंका भी उतना ही खयाल रखते हैं । ४९. क्लार्क्सडॉर्पका एशियाई "बाजार कुछ दिन पहले हमने क्लार्क्सडॉर्पकी एशियाई वस्तीके वारेमें लिखा था। उसके जवाबमें हमारे सहयोगी क्लार्क्सडॉर्प माइनिंग रेकर्डने जो बहुत ही संयत लेख लिखा है उसे हम हर्षके साथ अन्यत्र दे रहे हैं। इसमें निकायका यह आश्वासन है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंके साथ असमानता और अन्यायका व्यवहार करनेकी उसकी इच्छा नहीं है। हम उसके लिए निकायके कृतज्ञ हैं । परन्तु हम यह कहनेको अनुमति चाहते हैं कि सहयोगीने अपने लेखमें कुछ बातें खुद स्वीकार की हैं, जिनसे प्रकट है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंकी स्थिति कितनी कठिन है और प्रस्तावित नये स्थानके बारेमें उनका मन्तव्य कितना उचित है। यह भी साफ तौरपर स्वीकार किया गया है कि प्रस्तावित स्थानके कमसे कम कुछ हिस्सेको तो जिला-सर्जनके प्रतिवेदनमें भी बुरा वताया गया है । उस आपत्तिका यह कोई जवाब नहीं कि सारे स्थानकी एक साथ जरूरत नहीं होगी। अगर उसकी जरूरत नहीं है तो वह नक्शेमें शामिल ही क्यों किया गया था ? अगर आवासी मजिस्ट्रेट ही कुछ नीची भूमिवाले वाड़े अर्जदारोंको दे देते तो उन्हें कौन रोकनेवाला था ? सरकारने तो इन वाड़ोंके बँटवारेके सम्बन्धमें बहुत अधिक सत्ता अपने हाथोंमें रख छोड़ी है । वह आग्रह कर सकती थी कि सबसे पहले निचले हिस्सोंको ही निपटायेगी । अब भी हमारा खयाल यही है कि निकायके लिए ऐसा रुख अख्तियार करना और यह कहना ठीक नहीं कि एक बार स्थानका निश्चय हो जानेके बाद उसके हाथों में कुछ नहीं रह जाता। आखिर स्थानोंका चुनाव करनेमें उसका भी तो हाथ था ही । इसलिए हमें यह खयाल अवश्य होता है कि अगर जिला-सर्जनके प्रतिवेदनको पानेके बाद वह निचले हिस्सोंको बाजारकी जमीनमें शामिल करनेका विरोध करता तो यह उसके लिए बहुत शोभाजनक होता । सहयोगी आगे लिखता हैः उल्लिखित स्थान शहरमें उपलब्ध एकमात्र स्थान है। अब केवल तीस वाड़े बचे हैं, जिनको अभी कब्जेमें नहीं लिया गया है; परन्तु किसी भी हालत में एशियाई वस्तीके तौरपर उनका उपयोग नहीं किया जा सकता । वर्तमान बस्तीके पास शहरके उत्तर और पश्चिममें कुछ बाड़े जोड़े जा सकते थे; किन्तु उससे लगे हुए बाड़ोंके मालिक स्वभावतः इस कार्रवाईका विरोध करेंगे । अब, यह स्पष्ट रूपसे लाचारीकी स्वीकृति है और साथ ही इस बातकी भी कि निश्चित किया गया स्यान शहरसे बड़ी दूरीपर है। ब्रिटिश भारतीयोंके लिए कोई स्थायी स्थान निश्चित करनेके सिद्धान्तको थोड़ी देरके लिए अगर अलग रख दिया जाये, तो हमारा खयाल है कि अगर निकाय कोई ऐसा उपयुक्त स्थान प्राप्त नहीं कर सकता, जहाँ ब्रिटिश भारतीय उतनी ही सुविधासे व्यापार कर सकें जितनी सुविधासे वे शहरमें अवतक कर रहे थे, तो वह उनको जहाँ अभी वे है वहीं पड़े रहने दे । परन्तु एक बार उन्हें अलग रखनेका सिद्धान्त स्वीकार कर लेनेके बाद अपने पड़ोसमें ब्रिटिश भारतीयोंको रखनेपर आपत्ति करनेवाले लोग मिल ही जाया करेंगे। तब क्या शहरी निकाय इसी तरह अपनी लाचारी बताकर ब्रिटिश भारतीयोंको शहरोंसे इतनी दूर फेंक देना चाहते हैं, जहां व्यापार करना उनके लिए असम्भव हो जाये ? अंग्रेज स्वभावतः निहित स्वार्थीको छेड़ना पसन्द नहीं करते, और अपने विरोवीके साथ भी न्यायका व्यवहार साथ ही "यथासम्भव " जेगा सुरक्षित तथा संदिग्ध गन्द जोड़ देता है; पर यह तो उस वानपर् निर्भर करेगा कि इस प्रश्नको किन दृष्टि से देखा जाता है और यह "गयागम्भा" शन्द भारतीय समाजकी उचित आवश्यकताओकी पूर्ति की हदतक जाता है या नही । हमारा गंगाल है, पत्रकारको हैसियतसे हमारी भांति हमारे सहयोगीका भी कर्तव्य है कि हम लोकमतको उग तरह शिक्षित करें, जिससे इस कठिनाईको पार करनेका उत्तम मार्ग निकल गो । श्री क्रेसवेल अभी कुछ पहलेतक विलेज मेन रीफ गोल्ड माइनिंग कम्पनी लिमिटेड' के प्रवन्धक थे, जिससे उन्होंने अब इस्तीफा दे दिया है और वह मजूर कर लिया गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा देते हुए कम्पनीके सेक्रेटरी श्री बिलबोको जो लम्बा पन लिगा था वह जोहानिग वर्गके पत्रोंमें भी प्रकाशनार्थ भेजा है । जोहानिसबर्ग में बतनी श्रम आयोगके सामने अपना चौका देनेवाला बयान देते हुए उन्होंने जो सयाल पैदा किया था उगीकी पुष्टि इस लम्बे पनगे होती है। इस वयानमे उन्होंने अत्यन्त निश्नयात्मक बताया था कि उस बडे गाननिगमकी खानोंकी खुदाईके लिए गिरमिटिया एशियाई मजदूर लानेका प्रयत्न आर्थिक आवश्यकताको अपेक्षा एक राजनीतिक चाल अधिक है। पाठकोंको याद होगा कि उग गमय श्री क्रेसवेलने अपने कथनकी पुष्टिमं अपने नाम लिगा गया श्री टार्बटका एक पत्र पेश किया था, जिसमें बताया गया था कि इन दिनो गोरे मजदूरोगे काम लेनेका जो प्रयोग नल रहा है उसे अधिकांश खान - कम्पनियाँ पसन्द नहीं करती। यह पत्र पेश करनेके कारण ही श्री केसवेलमे जवाव तलब किया गया था। श्री बिलनो लिखते हैः "आपके द्वारा श्री टारवटके २३ जुलाई १९०२ के व्यक्तिगत पत्रका प्रकाशन सचालकोकी दृष्टिमें अक्षम्य है।" श्री क्रेमवेलके लिए यह सम्भव न था कि वे यह डंक सहकर चुप बैठ जाते । कम्पनीको लिखा वह लम्बा पत्र उसीका परिणाम था । श्री केसवेलके प्रति किसीको भी सहानुभूति हुए वगैर नहीं रह सकती । सव कठिनाइयाँ सहकर भी उन्होंने अपनी खानोंपर गोरे मजदूरोसे काम लेनेका प्रयोग सफलतापूर्वक किया है । वे इसे पूरे दिलसे पसन्द भी करते थे; परन्तु वे वस्तुतः अकेले पड़ गये । अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफेकी जोरदार माँग पूरी करनेमें वे पिछड़ गये । जैसा कि हम इन कालमोंमें पहले अनेक बार लिख चुके है, हम तो यही कह सकते है कि इस विषयमें श्री क्रेसवेलने जो रुख ग्रहण किया है, आनेवाली पुश्तोंका लाभ उसीमें है। समय ही बताएगा कि उपनिवेशमें खान-उद्योगके तथाकथित विकास के लिए अगर एशियासे कभी गिरमिटिया मजदूर लाये गये तो यह एक गलत कदम होगा, जिससे आनेवाली पुश्तें दुःखी होंगी और इस योजनाके बनानेवालोंकी वेझिझक निन्दा करेंगी । श्री क्रेसवेलका त्यागपत्र तो एक छोटी और व्यक्तिगत बात है। इससे उन्हें आर्थिक कष्ट हो सकता है, या शायद न भी हो । परन्तु वहाँसे उनके हट जानेसे सुधारकोंका काम और भी कठिन हो जाता है । इस दृष्टिसे उनके हट जानेसे उन लोगोंकी बड़ी हानि हुई है, जो न केवल वर्तमान पीढ़ी के कल्याण के लिए चिन्तित हैं, बल्कि भावी पीढ़ियोंके हितोंका भी उतना ही खयाल रखते हैं । ४९. क्लार्क्सडॉर्पका एशियाई कुछ दिन पहले हमने क्लार्क्सडॉर्पकी एशियाई बस्तीके वारेमें लिखा था । उसके जवावमें हमारे सहयोगी क्लार्क्सडॉर्प माइनिंग रेकर्डने जो बहुत ही संयत लेख लिखा है उसे हम हर्षके साथ अन्यत्र दे रहे हैं। इसमें निकायका यह आश्वासन है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंके साथ असमानता और अन्यायका व्यवहार करनेकी उसकी इच्छा नहीं है। हम उसके लिए निकायके कृतज्ञ हैं । परन्तु हम यह कहनेकी अनुमति चाहते हैं कि सहयोगीने अपने लेखमें कुछ बातें खुद स्वीकार की हैं, जिनसे प्रकट है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंकी स्थिति कितनी कठिन है और प्रस्तावित नये स्थानके बारेमें उनका मन्तव्य कितना उचित है । यह भी साफ तौरपर स्वीकार किया गया है कि प्रस्तावित स्थानके कमसे कम कुछ हिस्सेको तो जिला-सर्जनके प्रतिवेदनमें भी बुरा बताया गया है। उस आपत्तिका यह कोई जवाब नहीं कि सारे स्थानकी एक साथ जरूरत नहीं होगी। अगर उसकी जरूरत नहीं है तो वह नक्शेमें शामिल ही क्यों किया गया था ? अगर आवासी मजिस्ट्रेट ही कुछ नीची भूमिवाले बाड़े अर्जदारोंको दे देते तो उन्हें कौन रोकनेवाला था ? सरकारने तो इन वाड़ोंके बँटवारेके सम्बन्धमें बहुत अधिक सत्ता अपने हाथोंमें रख छोड़ी है। वह आग्रह कर सकती थी कि सबसे पहले निचले हिस्सोंको ही निपटायेगी । अब भी हमारा खयाल यही है कि निकायके लिए ऐसा रुख अख्तियार करना और यह कहना ठीक नहीं कि एक बार स्थानका निश्चय हो जानेके बाद उसके हाथों में कुछ नहीं रह जाता। आखिर स्थानोंका चुनाव करनेमें उसका भी तो हाथ था ही । इसलिए हमें यह खयाल अवश्य होता है कि अगर जिला सर्जनके प्रतिवेदनको पाने के बाद वह निचले हिस्सोंको बाजारकी जमीनमें शामिल करनेका विरोध करता तो यह उसके लिए बहुत शोभाजनक होता । सहयोगी आगे लिखता हैः उल्लिखित स्थान शहरमें उपलब्ध एकमात्र स्थान है। अब केवल तीस बाड़े बचे हैं, जिनको अभी कब्जेमें नहीं लिया गया है; परन्तु किसी भी हालत में एशियाई वस्तीके तौरपर उनका उपयोग नहीं किया जा सकता। वर्तमान बस्तीके पास शहरके उत्तर और पश्चिममें कुछ बाड़े जोड़े जा सकते थे; किन्तु उससे लगे हुए वाड़ोंके मालिक स्वभावतः इस कार्रवाईका विरोध करेंगे । अब, यह स्पष्ट रूपसे लाचारीकी स्वीकृति है और साथ ही इस बातकी भी कि निश्चित किया गया स्थान शहरसे बड़ी दूरीपर है। ब्रिटिश भारतीयोंके लिए कोई स्थायी स्थान निश्चित करनेके सिद्धान्तको थोड़ी देरके लिए अगर अलग रख दिया जाये, तो हमारा खयाल है कि अगर निकाय कोई ऐसा उपयुक्त स्थान प्राप्त नहीं कर सकता, जहाँ ब्रिटिश भारतीय उतनी ही सुविधासे व्यापार कर सकें जितनी सुविधासे वे शहरमें अवतक कर रहे थे, तो वह उनको जहाँ अभी वे हैं वहीं पड़े रहने दे। परन्तु एक बार उन्हें अलग रखनेका सिद्धान्त स्वीकार कर लेनेके बाद अपने पड़ोसमें ब्रिटिश भारतीयोंको रखनेपर आपत्ति करनेवाले लोग मिल ही जाया करेंगे। तब क्या शहरी निकाय इसी तरह अपनी लाचारी बताकर ब्रिटिश भारतीयोंको शहरोंसे इतनी दूर फेंक देना चाहते हैं, जहां व्यापार करना उनके लिए असम्भव हो जाये ? अंग्रेज स्वभावतः निहित स्वार्योको छेड़ना पसन्द नहीं करते, और अपने विरोधीके साथ भी न्यायका व्यवहार
छियालीस. इंग्लैंड और रूस एक तुलना श्री स्क्राइनने सात जुलाई, एक हज़ार नौ सौ तीन को इम्पीरियल इन्स्टिट्यूटमें "इंग्लैंड और रूस द्वारा एशियाइयोंपर शासन " विषयपर एक मनोरंजक भाषण दिया था, जिसे ईस्ट ऐंड वेस्टने अपने अक्टूवरके अंकमें छापा है। इस विषयमें हम दक्षिण आफ्रिकाके लोगोंको वौद्धिक ही नहीं, बल्कि उससे कुछ अधिक दिलचस्पी है । अनन्त एशिया और उसकी हजारों जातियोंपर, जिनमें बहुत-सी वातोंमें जमीन-आसमानका अन्तर होते हुए भी, कुछ ऐसी समानता है, जिसकी व्याख्या नहीं हो सकती, इन दोनोंमें से किसी एकके शासनकी सफलता या असफलताके वारेमें अन्तिम निर्णय देना राष्ट्रोंके इतिहासमें अभी बहुत जल्दी करना होगा। वक्ताने कहा था : रूसी सम्राट् - जार के कई करोड़ बौद्ध और मूर्ति पूजक प्रजाजन हैं और बीस,सत्तर,शून्य,शून्य हिन्दू भारत-सम्राट्को सत्ता स्वीकार करते हैं, किन्तु पूर्वमें केवल इस्लाम इन दोनोंके अधिकारियोंके सम्मुख एक जैसी समस्याएँ प्रस्तुत करता है। • • • • ब्रिटिश भारतमें नबोके कमसे कम पाँच,अड़तीस,चार,शून्य अंनुयायी हैं । सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे की जनगणनाके अनुसार, रूसके महान्, गौर वर्णीय जारके शासनाधीन मुसलमानोंकी संख्या एक,सत्तासी,सात,शून्य इसके विपरीत, मैं कह दूँ कि, तुर्कीमें खलीफाके प्रजाजन, जो उनका धर्म मानते हैं, एक,पचासी,शून्य,शून्य से कम t इस प्रकार यह प्रत्यक्ष है कि श्री स्क्राइनने अपनी तुलनाको सुनिश्चित मर्यादाएँ बना ली हैं, इसलिए यद्यपि उनके भाषणका व्यापक अर्थ लगानेकी गुंजाइश नहीं है, फिर भी वह पठनीय है। भारतीय शासनको कहीं " उदार निरंकुशता " का नाम दिया गया है । यद्यपि इन शब्दोंमें परस्पर विरोधाभास है; किन्तु कदाचित् वे भारतमें अंग्रेजी राजकी अवस्थाको बहुत कुछ यथार्थ रूपमें व्यक्त करते हैं। जबतक अंग्रेजी राजकी प्रभुतामें हस्तक्षेप नहीं होता, तबतक भारतके लोगोंके प्राचीन कालसे चले आते हुए रीति-रिवाजोंका लिहाज किया जाता है और उन्हें अछूता रहने दिया जाता है। उनको अपने देशके मामलोंमें न्यूनाधिक मोटे तरीकेका स्वशासन प्राप्त है । सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तावन' की ऐतिहासिक घोषणा और उसके बाद एकके बाद दूसरे वाइसरायोंकी घोषणाएँ बताती हैं कि उनके पीछे जाति, रंग और धर्मके सव भेदभावोंको समाप्त करने और साम्राज्यके समस्त प्रजाजनोंको समान अधिकार देनेका इरादा है। इसलिए यदि स्वयं भारतमें इन घोषणाओंपर पूरा अमल नहीं हो पाता तो इसका कारण यह नहीं कि अधिकारी उन्हें पूरा करना नहीं चाहते, बल्कि यह है कि व्यवहारमें ब्रिटिश शासनकी सर्वोच्चताके सम्बन्ध में अनुचित भय या शासितोंके सम्बन्धमें अनिश्चित सन्देहसे उनके हाथ रुकते हैं। इसलिए अस्थायी स्खलनोके बावजूद यह आशा करनेके लिए पर्याप्त आधार है कि ज्यों-ज्यों लोगोंकी स्वाभाविक राजभक्तिको परीक्षाके अवसर आते जायेंगे त्यों-त्यों सन्देह या भय धीरे-धीरे विलुप्त होते जायेंगे और उनका स्थान विश्वास लेता जायेगा। दक्षिण आफ्रिकाकी अभी हालकी लड़ाई और चीनके अभियानसे भारतीय शासकोंके मनपर आश्चर्यजनक प्रभाव पड़ा है और भारतीय दृष्टिकोणसे एक. प्रत्यक्षतः एक हज़ार आठ सौ अट्ठावन के बजाय भूलते लिखित । " ईस्ट रैड एक्सप्रेस" और हम ट्रान्सवालमे ब्रिटिश भारतीयांको स्थितिके बारेमे हमारे विनारोकी तरफ हमारा सहयोगी बराबर ध्यान देता रहता है । इसे हम अपना सम्मान ही समझते है । हम यह भी मानते है कि भारतीयोंकी बहुत-सी कठिनाइयोंकी जडमे गलतफहमियाँ है और सयमके साथ विचार-मीनिमगमे गलतफहमियाँ दूर भी हो सकती है। इसलिए हमारे सहयोगीने गत चौदह नारीगके आमें जो लिखा है उसका जवाब देते हुए हम उस प्रग्नपर फिर वापस आते है। सहयोगीने लिखा है कि पीटर्सवर्ग शहरमे लडाईसे पहलेकी अपेक्षा भारतीय परवानेदारोकी गंग्या अन कुछ बढ़ गई है। हम इसे स्वीकार करते है, परन्तु जहांतक स्पेलोनकेन जिलेगे सम्बन्ध है, हम अत्यन्त निश्चयपूर्वक कहते है कि वहाँ परवानोकी गरयामे बहुत ही कम वृद्धि हुई है। उस जिलेमें जो भी भारतीय दूकानदार इस समय व्यापार कर रहे है वे अपनी अपनी जगहों में दस-दस, बल्कि इससे भी अधिक, वर्पोसे व्यवसाय करते है । सहयोगीको हम यह भी बता दें कि उन्हें अपने परवानोंको नये करवानेके लिए बहुत अधिक जद्दोजहद करनी पड़ी है। परन्तु ये तो उसके दुनके मामले है और व्यापक रूपसे फैली हुई बीमारीके लक्षण मान है । एक्सप्रेसके इन शब्दोमे गारा मर्म आ जाता है : साफ-साफ बात कहना अच्छा होता है, इसलिए हम स्वीकार करते है कि सम्भव हो सके तो ट्रान्सवाल अपनी सीमाके अन्दर स्वतन्त्र एशियाइयोंको नहीं चाहता। उसका कारण, जैसा कि कुछ हलकोंमें सयाल मालूम होता है, यह नहीं है कि हम पढ़े-लिखे भारतीयोंको हीन मानते है; बल्कि यह है कि कानून सम्मत शर्तोंपर गोरोंके लिए उनके सम्मुख होड़में टिकना असम्भव है। व्यापारियोंकी हेसियतसे नेटालमें सारे व्यापारपर उनका तेजीसे एकाधिपत्य होता जा रहा है। वे फुशल व्यापारी तो है हो; परन्तु इसके साथ अत्यन्त मितव्ययी भी है । इस कारण अपने तमाम प्रतिस्पधियोंके मुकाबलेमें वे हर चीज कम कीमतमें बेच सकते है। अगर कहीं उनके पैर यहाँ जम गये तो यहां भी वही हाल होगा । इसीलिए हम ईस्ट रंडवासी लोग एशियाइयोंको व्यापारिक या सामाजिक दर्जा देनेके इतने विरोधी हैं। हमें तो सिर्फ एक प्रकारके एशियाईकी जरूरत है, और वह है अकुशल गिरमिटिया मजदूर । आत्मरक्षा प्रकृतिका पहला कानून हे । उसका तकाजा है कि यहाँ अन्य सभी लोग वजित निवासी हों, भले ही यह कठोरता दिखाई दे । जिन लोगोंके अधिकार फिलहाल यहाँ है उनके अधिकारोंकी यथासम्भव रक्षा की जाती रहेगी, परन्तु यहाँ रियायतें तो बन्द होनी ही चाहिए । भारतीयोके प्रति उपनिवेशमें जो दुर्भाव है, उसका असली कारण इसमें आ जाता है। इसके जवाबमे बहुत कुछ कहा जा सकता है; परन्तु उसे हम थोड़ेसे-थोड़े शब्दोंमें कहनेकी कोशिश करेगे । ऊपरके कथनमे नेटालका उदाहरण दिया गया है; परन्तु अगर जरा भी गहराईसे उसकी जाँच की जायेगी तो उससे यह प्रकट हो जायेगा कि इससे तो उलटी ही बात सिद्ध होती है । नेटालमें भारतीय व्यापारी बड़ी संख्यामें जरूर है; परन्तु व्यापारका सर्वोत्तम भाग तो यूरोपीयोके ही हाथोमे है और आगे भी रहेगा । भारतीय व्यापारी जहाँ अपने गुजर-बसरके लिए नेटालमें अच्छी कमाई कर सके है, वहां उनमें से एकको भी अभी वह दर्जा प्राप्त नहीं हो सका "ईस्ट रैंड एक्सप्रेस" और हम है, जो हारवे, ग्रीनेकर ऐंड कम्पनी अथवा एसशून्य वूचर ऐंड सन्सको, अथवा अन्य बड़े व्यापारी संस्थानोंको प्राप्त है, यद्यपि कुछ भारतीय व्यापारियोंने भी अपने व्यापारका प्रारम्भ उन्हीं दिनों किया था, जिन दिनों इन पेढ़ियोंने । वस्तुतः हम खुद एक भारतीय व्यापारीका उदाहरण जानते हैं, जो अपने साथ पूंजी लेकर आया था । यहाँ उसने एक अव्यवसायी यूरोपीयको अपना साझीदार बना लिया। दोनों गहरे दोस्त बन गये, और आज भी दोनोंके आपसी सम्बन्ध बहुत सन्तोपजनक हैं। फिर भी व्यापार शुरू करते समय जिस यूरोपीयके पास अपनी पूंजी भी नहीं थी, वह दौड़में अपने पुराने साझीको बहुत पीछे छोड़ गया है और अब उपनिवेशमें उसकी स्थिति प्रथम श्रेणीकी है। किन्तु इस घटनाकी व्याख्या बिलकुल स्पष्ट है। भारतीय व्यापारीकी आदतें यूरोपीयके मुकावले कम खर्चीली हैं; परन्तु उसमें यूरोपीय व्यापारीकी संगठनशक्ति, अंग्रेजी भाषाकी जानकारी और उसके यूरोपीय सम्बन्धोंसे प्राप्त व्यापारिक लाभकी कमी सहज है। हमारी रायमें भारतीय व्यापारीकी तरह किफायतशारी न होनेकी कमी यूरोपीय व्यापारी इन गुणोंसे पूरी ही नहीं कर लेता, वल्कि उसको इनका और भी अधिक लाभ मिलता है। खुद भारतमें बड़े-बड़े भारतीय व्यापारी संस्थान हैं; परन्तु वहाँ बड़ी-बड़ी यूरोपीय पेढ़ियाँ इन गुणोंसे ही उनका मुकाबला कर रही हैं। आज भी सबसे अधिक कमाई देनेवाले व्यापार ज्यादातर यूरोपीयोंके ही हाथोंमें हैं; यद्यपि भारतीयोंकी योग्यता तथा साहसिकताको वहाँ पूरा-पूरा अवकाश प्राप्त है। इसलिए, चाहे दक्षिण आफ्रिका हो या अन्य कोई देश, भारतीय व्यापारियोंने तो मव्यस्य या आढ़तियोंका ही काम किया है। हम यह स्वीकार करनेके लिए स्वतन्त्र हैं कि अपवाद रूपमें वे छोटे यूरोपीय दूकानदारोंके मुकाबलेमें कहीं कहीं सफलता प्राप्त कर सकते हैं; परन्तु वहाँ भी, जैसा कि सर जेम्स हलेटने कहा है, कुल मिलाकर यूरोपीय व्यापारी ही नफेमें रहते हैं; क्योंकि दूसरे क्षेत्रोंमें उनकी साहसिकताके लिए खूब अवकाश रहता है । यदि भारतीय नेटालमें न आये होते तो जो यूरोपीय व्यापारी काफिरोंके वीच व्यापार करनेवाले छोटे-छोटे दूकानदार बने रहते वे ही आज या तो थोकके बड़े व्यापारी हैं, जिनके मातहत पचासों आदमी काम कर रहे हैं, या खुद ऐसे थोक व्यापारके संस्थानोंमें लगे हुए हैं। आज यहाँ उनकी अपनी करमुक्त जायदादें हैं, और वे वेरिया [ उर्वनमें वनीमानी और शौकीन लोगोंके मुहल्ले ] में अपेक्षाकृत सुख-चैनकी जिन्दगी बिता रहे हैं। इसलिए हमारा खयाल तो यह है कि भारतीयों की सादगी और किफायतगारीका जरूरत से ज्यादा तूल बांधा गया है । परन्तु क्या इस विषयमें साम्राज्यको दृष्टिसे कुछ भी कहनेको नहीं रह जाता ? भलेके लिए हो या बुरेके, और भारतीय कितने ही छोटे क्यों न हों; परन्तु वे आखिर साम्राज्यके हिस्सेदार तो हैं ही । ऐसी सूरतमें उनकी योग्यता या मिहनत उन्हें जितनेका अधिकारी ठहराये, उतना मुनासिव हिस्सा क्या उन्हें देनेसे इनकार करना उचित है ? हमारा सहयोगी चाहता है कि ट्रान्सवालमें भारतीय केवल गिरमिटिया मजदूरोंको हैसियतसे ही आयें, उससे ज्यादा अन्य किसी हैसियतसे नहीं । आत्मरक्षा अवश्य प्रकृतिका पहला कानून हो सकता है; परन्तु हम नहीं मानते कि प्रकृति किसीको यह भी सिखाती है कि जिसकी सहायतासे वह ऊपर चढ़ा हो उसको हस्तीको ही मिटा दे। शुद्ध स्वार्थकी दृष्टिसे यह क्षम्य हो सकता है कि आप एक सम्पूर्ण प्रजातिके लिए उपनिवेशके दरवाजे बन्द कर दें। परन्तु प्रकृतिके किसी भी कानूनके साथ इस व्यवहारका मेल बैठाना बहुत मुश्किल मालूम होता है कि एक आदमीका दूसरेके स्वार्थके लिए उपयोग कर लिया जाये और जव उसकी जरूरत समाप्त हो जाये तब उस गरीबको ठोकर मारकर हटा दिया जाये । परन्तु दक्षिण आफ्रिकाका वर्तमान संघर्प उन लोगोंके अधिकारोंकी पूरी रखाके लिए है, जो दक्षिण आफिका पहलेले ही बसे हुए हैं। इस बातको हमारा सहयोगी स्वीकार करता है; परन्तु साथ ही "यथागम्भव" जेगा सुरक्षित तथा संदिग्ध मन्द जोड़ देता है; पर उस वापर निर्भर करेगा कि इस प्रश्नको किन दृष्टिगे देखा जाता है और यह गगासम्भव" शन्द भारतीय गमाजकी उचित आवश्यकताओं की पूर्ति की हुक्तक जाता है या नही । हमारा रागाल है, पत्रकारको हैसियतसे हमारी भांति हमारे सहयोगीका भी कर्तव्य है कि हम लोकमतको ग तरह शिक्षित करें, जिससे इस कठिनाईको पार करनेका उत्तम मार्ग निकल गये । [ अंग्रेजी से ] श्री क्रेसवेल अभी कुछ पहलेतक 'विलेज मेन रीफ गोल्ड माइनिंग कम्पनी लिमिटेड' के प्रवन्धक थे, जिससे उन्होंने अब इस्तीफा दे दिया है और वह मजूर कर लिया गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा देते हुए कम्पनीके सेक्रेटरी श्री बिलबोको जो लम्बा पत्र लिखा था वह जोहानिंगवर्गके पत्रोंमें भी प्रकाशनार्थ भेजा है । जोहानिसबर्ग में बतनी श्रम-आयोगके सामने अपना चौंका देनेवाला बयान देते हुए उन्होंने जो खयाल पैदा किया था उगीकी पुष्टि उस लम्बे पनगे होती है। इस बयान में उन्होंने अत्यन्त निश्चयात्मक बताया था कि उग बडे साननिगमकी खानोंकी खुदाईके लिए खुदाईके लिए गिरमिटिया एशियाई मजदूर लानेका प्रयत्न आर्थिक आवश्यकताकी अपेक्षा एक राजनीतिक चाल अधिक है। पाठकोंको याद होगा कि उस समय श्री केसवेलने अपने कथनकी पुष्टिमें अपने नाम लिखा गया श्री टार्बटका एक पत्र पेश किया था, जिसमें बताया गया था कि इन दिनों गोरे मजदूरांगे काम लेनेका जो प्रयोग चल रहा है उसे अधिकांश खान कम्पनियाँ पसन्द नहीं करती। यह पत्र पेश करनेके कारण ही श्री फ्रेगवेलगे जवाब तलब किया गया था । श्री विलन्नो लिखते है : आपके द्वारा श्री टारवटके तेईस जुलाई एक हज़ार नौ सौ दो के व्यक्तिगत पत्रका प्रकाशन संचालकों की दृष्टिमें अक्षम्य है। " श्री क्रेमवेलके लिए यह सम्भव न था कि वे यह डंक सहकर चुप बैठ जाते । कम्पनीको लिखा वह लम्बा पत्र उसीका परिणाम था । श्री क्रेसवेलके प्रति किसीको भी सहानुभूति हुए बगैर नहीं रह सकती। सब कठिनाइयाँ सहकर भी उन्होंने अपनी खानोंपर गोरे मजदूरोंसे काम लेनेका प्रयोग सफलतापूर्वक किया है । वे इसे पूरे दिलसे पसन्द भी करते थे; परन्तु वे वस्तुतः अकेले पड़ गये । अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफेकी जोरदार माँग पूरी करनेमें वे पिछड़ गये । जैसा कि हम इन कालमोंमें पहले अनेक बार लिख चुके हैं, हम तो यही कह सकते है कि इस विषय में श्री क्रेसवेलने जो रुस ग्रहण किया है, आनेवाली पुश्तोंका लाभ उसीमें है । समय ही बताएगा कि उपनिवेशमें खान-उद्योगके तथाकथित विकास के लिए अगर एशियासे कभी गिरमिटिया मजदूर लाये गये तो यह एक गलत कदम होगा, जिससे आनेवाली पुश्तें दुःखी होंगी और इस योजनाके बनानेवालोंकी वेझिझक निन्दा करेंगी। श्री क्रेसवेलका त्यागपत्र तो एक छोटी और व्यक्तिगत बात है। इससे उन्हें आर्थिक कष्ट हो सकता है, या शायद न भी हो । परन्तु वहाँसे उनके हट जानेसे सुधारकोंका काम और भी कठिन हो जाता है । इस दृष्टिसे उनके हट जाने से उन लोगोंकी बड़ी हानि हुई है, जो न केवल वर्तमान पीढ़ी के कल्याण के लिए चिन्तित हैं, बल्कि भावी पीढ़ियोंके हितोंका भी उतना ही खयाल रखते हैं । उनचास. क्लार्क्सडॉर्पका एशियाई "बाजार कुछ दिन पहले हमने क्लार्क्सडॉर्पकी एशियाई वस्तीके वारेमें लिखा था। उसके जवाबमें हमारे सहयोगी क्लार्क्सडॉर्प माइनिंग रेकर्डने जो बहुत ही संयत लेख लिखा है उसे हम हर्षके साथ अन्यत्र दे रहे हैं। इसमें निकायका यह आश्वासन है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंके साथ असमानता और अन्यायका व्यवहार करनेकी उसकी इच्छा नहीं है। हम उसके लिए निकायके कृतज्ञ हैं । परन्तु हम यह कहनेको अनुमति चाहते हैं कि सहयोगीने अपने लेखमें कुछ बातें खुद स्वीकार की हैं, जिनसे प्रकट है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंकी स्थिति कितनी कठिन है और प्रस्तावित नये स्थानके बारेमें उनका मन्तव्य कितना उचित है। यह भी साफ तौरपर स्वीकार किया गया है कि प्रस्तावित स्थानके कमसे कम कुछ हिस्सेको तो जिला-सर्जनके प्रतिवेदनमें भी बुरा वताया गया है । उस आपत्तिका यह कोई जवाब नहीं कि सारे स्थानकी एक साथ जरूरत नहीं होगी। अगर उसकी जरूरत नहीं है तो वह नक्शेमें शामिल ही क्यों किया गया था ? अगर आवासी मजिस्ट्रेट ही कुछ नीची भूमिवाले वाड़े अर्जदारोंको दे देते तो उन्हें कौन रोकनेवाला था ? सरकारने तो इन वाड़ोंके बँटवारेके सम्बन्धमें बहुत अधिक सत्ता अपने हाथोंमें रख छोड़ी है । वह आग्रह कर सकती थी कि सबसे पहले निचले हिस्सोंको ही निपटायेगी । अब भी हमारा खयाल यही है कि निकायके लिए ऐसा रुख अख्तियार करना और यह कहना ठीक नहीं कि एक बार स्थानका निश्चय हो जानेके बाद उसके हाथों में कुछ नहीं रह जाता। आखिर स्थानोंका चुनाव करनेमें उसका भी तो हाथ था ही । इसलिए हमें यह खयाल अवश्य होता है कि अगर जिला-सर्जनके प्रतिवेदनको पानेके बाद वह निचले हिस्सोंको बाजारकी जमीनमें शामिल करनेका विरोध करता तो यह उसके लिए बहुत शोभाजनक होता । सहयोगी आगे लिखता हैः उल्लिखित स्थान शहरमें उपलब्ध एकमात्र स्थान है। अब केवल तीस वाड़े बचे हैं, जिनको अभी कब्जेमें नहीं लिया गया है; परन्तु किसी भी हालत में एशियाई वस्तीके तौरपर उनका उपयोग नहीं किया जा सकता । वर्तमान बस्तीके पास शहरके उत्तर और पश्चिममें कुछ बाड़े जोड़े जा सकते थे; किन्तु उससे लगे हुए बाड़ोंके मालिक स्वभावतः इस कार्रवाईका विरोध करेंगे । अब, यह स्पष्ट रूपसे लाचारीकी स्वीकृति है और साथ ही इस बातकी भी कि निश्चित किया गया स्यान शहरसे बड़ी दूरीपर है। ब्रिटिश भारतीयोंके लिए कोई स्थायी स्थान निश्चित करनेके सिद्धान्तको थोड़ी देरके लिए अगर अलग रख दिया जाये, तो हमारा खयाल है कि अगर निकाय कोई ऐसा उपयुक्त स्थान प्राप्त नहीं कर सकता, जहाँ ब्रिटिश भारतीय उतनी ही सुविधासे व्यापार कर सकें जितनी सुविधासे वे शहरमें अवतक कर रहे थे, तो वह उनको जहाँ अभी वे है वहीं पड़े रहने दे । परन्तु एक बार उन्हें अलग रखनेका सिद्धान्त स्वीकार कर लेनेके बाद अपने पड़ोसमें ब्रिटिश भारतीयोंको रखनेपर आपत्ति करनेवाले लोग मिल ही जाया करेंगे। तब क्या शहरी निकाय इसी तरह अपनी लाचारी बताकर ब्रिटिश भारतीयोंको शहरोंसे इतनी दूर फेंक देना चाहते हैं, जहां व्यापार करना उनके लिए असम्भव हो जाये ? अंग्रेज स्वभावतः निहित स्वार्थीको छेड़ना पसन्द नहीं करते, और अपने विरोवीके साथ भी न्यायका व्यवहार साथ ही "यथासम्भव " जेगा सुरक्षित तथा संदिग्ध गन्द जोड़ देता है; पर यह तो उस वानपर् निर्भर करेगा कि इस प्रश्नको किन दृष्टि से देखा जाता है और यह "गयागम्भा" शन्द भारतीय समाजकी उचित आवश्यकताओकी पूर्ति की हदतक जाता है या नही । हमारा गंगाल है, पत्रकारको हैसियतसे हमारी भांति हमारे सहयोगीका भी कर्तव्य है कि हम लोकमतको उग तरह शिक्षित करें, जिससे इस कठिनाईको पार करनेका उत्तम मार्ग निकल गो । श्री क्रेसवेल अभी कुछ पहलेतक विलेज मेन रीफ गोल्ड माइनिंग कम्पनी लिमिटेड' के प्रवन्धक थे, जिससे उन्होंने अब इस्तीफा दे दिया है और वह मजूर कर लिया गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा देते हुए कम्पनीके सेक्रेटरी श्री बिलबोको जो लम्बा पन लिगा था वह जोहानिग वर्गके पत्रोंमें भी प्रकाशनार्थ भेजा है । जोहानिसबर्ग में बतनी श्रम आयोगके सामने अपना चौका देनेवाला बयान देते हुए उन्होंने जो सयाल पैदा किया था उगीकी पुष्टि इस लम्बे पनगे होती है। इस वयानमे उन्होंने अत्यन्त निश्नयात्मक बताया था कि उस बडे गाननिगमकी खानोंकी खुदाईके लिए गिरमिटिया एशियाई मजदूर लानेका प्रयत्न आर्थिक आवश्यकताको अपेक्षा एक राजनीतिक चाल अधिक है। पाठकोंको याद होगा कि उग गमय श्री क्रेसवेलने अपने कथनकी पुष्टिमं अपने नाम लिगा गया श्री टार्बटका एक पत्र पेश किया था, जिसमें बताया गया था कि इन दिनो गोरे मजदूरोगे काम लेनेका जो प्रयोग नल रहा है उसे अधिकांश खान - कम्पनियाँ पसन्द नहीं करती। यह पत्र पेश करनेके कारण ही श्री केसवेलमे जवाव तलब किया गया था। श्री बिलनो लिखते हैः "आपके द्वारा श्री टारवटके तेईस जुलाई एक हज़ार नौ सौ दो के व्यक्तिगत पत्रका प्रकाशन सचालकोकी दृष्टिमें अक्षम्य है।" श्री क्रेमवेलके लिए यह सम्भव न था कि वे यह डंक सहकर चुप बैठ जाते । कम्पनीको लिखा वह लम्बा पत्र उसीका परिणाम था । श्री केसवेलके प्रति किसीको भी सहानुभूति हुए वगैर नहीं रह सकती । सव कठिनाइयाँ सहकर भी उन्होंने अपनी खानोंपर गोरे मजदूरोसे काम लेनेका प्रयोग सफलतापूर्वक किया है । वे इसे पूरे दिलसे पसन्द भी करते थे; परन्तु वे वस्तुतः अकेले पड़ गये । अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफेकी जोरदार माँग पूरी करनेमें वे पिछड़ गये । जैसा कि हम इन कालमोंमें पहले अनेक बार लिख चुके है, हम तो यही कह सकते है कि इस विषयमें श्री क्रेसवेलने जो रुख ग्रहण किया है, आनेवाली पुश्तोंका लाभ उसीमें है। समय ही बताएगा कि उपनिवेशमें खान-उद्योगके तथाकथित विकास के लिए अगर एशियासे कभी गिरमिटिया मजदूर लाये गये तो यह एक गलत कदम होगा, जिससे आनेवाली पुश्तें दुःखी होंगी और इस योजनाके बनानेवालोंकी वेझिझक निन्दा करेंगी । श्री क्रेसवेलका त्यागपत्र तो एक छोटी और व्यक्तिगत बात है। इससे उन्हें आर्थिक कष्ट हो सकता है, या शायद न भी हो । परन्तु वहाँसे उनके हट जानेसे सुधारकोंका काम और भी कठिन हो जाता है । इस दृष्टिसे उनके हट जानेसे उन लोगोंकी बड़ी हानि हुई है, जो न केवल वर्तमान पीढ़ी के कल्याण के लिए चिन्तित हैं, बल्कि भावी पीढ़ियोंके हितोंका भी उतना ही खयाल रखते हैं । उनचास. क्लार्क्सडॉर्पका एशियाई कुछ दिन पहले हमने क्लार्क्सडॉर्पकी एशियाई बस्तीके वारेमें लिखा था । उसके जवावमें हमारे सहयोगी क्लार्क्सडॉर्प माइनिंग रेकर्डने जो बहुत ही संयत लेख लिखा है उसे हम हर्षके साथ अन्यत्र दे रहे हैं। इसमें निकायका यह आश्वासन है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंके साथ असमानता और अन्यायका व्यवहार करनेकी उसकी इच्छा नहीं है। हम उसके लिए निकायके कृतज्ञ हैं । परन्तु हम यह कहनेकी अनुमति चाहते हैं कि सहयोगीने अपने लेखमें कुछ बातें खुद स्वीकार की हैं, जिनसे प्रकट है कि क्लार्क्सडॉर्पके ब्रिटिश भारतीयोंकी स्थिति कितनी कठिन है और प्रस्तावित नये स्थानके बारेमें उनका मन्तव्य कितना उचित है । यह भी साफ तौरपर स्वीकार किया गया है कि प्रस्तावित स्थानके कमसे कम कुछ हिस्सेको तो जिला-सर्जनके प्रतिवेदनमें भी बुरा बताया गया है। उस आपत्तिका यह कोई जवाब नहीं कि सारे स्थानकी एक साथ जरूरत नहीं होगी। अगर उसकी जरूरत नहीं है तो वह नक्शेमें शामिल ही क्यों किया गया था ? अगर आवासी मजिस्ट्रेट ही कुछ नीची भूमिवाले बाड़े अर्जदारोंको दे देते तो उन्हें कौन रोकनेवाला था ? सरकारने तो इन वाड़ोंके बँटवारेके सम्बन्धमें बहुत अधिक सत्ता अपने हाथोंमें रख छोड़ी है। वह आग्रह कर सकती थी कि सबसे पहले निचले हिस्सोंको ही निपटायेगी । अब भी हमारा खयाल यही है कि निकायके लिए ऐसा रुख अख्तियार करना और यह कहना ठीक नहीं कि एक बार स्थानका निश्चय हो जानेके बाद उसके हाथों में कुछ नहीं रह जाता। आखिर स्थानोंका चुनाव करनेमें उसका भी तो हाथ था ही । इसलिए हमें यह खयाल अवश्य होता है कि अगर जिला सर्जनके प्रतिवेदनको पाने के बाद वह निचले हिस्सोंको बाजारकी जमीनमें शामिल करनेका विरोध करता तो यह उसके लिए बहुत शोभाजनक होता । सहयोगी आगे लिखता हैः उल्लिखित स्थान शहरमें उपलब्ध एकमात्र स्थान है। अब केवल तीस बाड़े बचे हैं, जिनको अभी कब्जेमें नहीं लिया गया है; परन्तु किसी भी हालत में एशियाई वस्तीके तौरपर उनका उपयोग नहीं किया जा सकता। वर्तमान बस्तीके पास शहरके उत्तर और पश्चिममें कुछ बाड़े जोड़े जा सकते थे; किन्तु उससे लगे हुए वाड़ोंके मालिक स्वभावतः इस कार्रवाईका विरोध करेंगे । अब, यह स्पष्ट रूपसे लाचारीकी स्वीकृति है और साथ ही इस बातकी भी कि निश्चित किया गया स्थान शहरसे बड़ी दूरीपर है। ब्रिटिश भारतीयोंके लिए कोई स्थायी स्थान निश्चित करनेके सिद्धान्तको थोड़ी देरके लिए अगर अलग रख दिया जाये, तो हमारा खयाल है कि अगर निकाय कोई ऐसा उपयुक्त स्थान प्राप्त नहीं कर सकता, जहाँ ब्रिटिश भारतीय उतनी ही सुविधासे व्यापार कर सकें जितनी सुविधासे वे शहरमें अवतक कर रहे थे, तो वह उनको जहाँ अभी वे हैं वहीं पड़े रहने दे। परन्तु एक बार उन्हें अलग रखनेका सिद्धान्त स्वीकार कर लेनेके बाद अपने पड़ोसमें ब्रिटिश भारतीयोंको रखनेपर आपत्ति करनेवाले लोग मिल ही जाया करेंगे। तब क्या शहरी निकाय इसी तरह अपनी लाचारी बताकर ब्रिटिश भारतीयोंको शहरोंसे इतनी दूर फेंक देना चाहते हैं, जहां व्यापार करना उनके लिए असम्भव हो जाये ? अंग्रेज स्वभावतः निहित स्वार्योको छेड़ना पसन्द नहीं करते, और अपने विरोधीके साथ भी न्यायका व्यवहार
बूंदी जिले में कुछ दिन राहत के बाद एक बार फिर ठंड बढ़ गई है। क्षेत्र में चल रही ठंडी हवा से तापमान में गिरावट आई है। पिछले 3 दिन में न्यूनतम तापमान में 7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रात में सर्दी महसूस होने लगी है। सोमवार को सुबह से ठंडी हवा चलने के कारण लोगों को धूप में भी सर्दी से राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार एक बार फिर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री गिरावट होने की संभावना बनी हुई है। इसके बाद 18 फरवरी तक मौसम एक बार फिर बदल जाएगा और पारा बढ़ेगा। सोमवार को जिले में न्यूनतम तापमान 9. 8 डिग्री और अधिकतम तापमान 28. 2 डिग्री दर्ज किया गया है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण लोगों को कभी गर्मी, तो कभी सर्दी का अहसास हो रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। मौसम में बदलाव से अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी-जुकाम, बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। पिछले 5 दिनों का न्यूनतम और अधिकतम तापमान-: This website follows the DNPA Code of Ethics.
बूंदी जिले में कुछ दिन राहत के बाद एक बार फिर ठंड बढ़ गई है। क्षेत्र में चल रही ठंडी हवा से तापमान में गिरावट आई है। पिछले तीन दिन में न्यूनतम तापमान में सात डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रात में सर्दी महसूस होने लगी है। सोमवार को सुबह से ठंडी हवा चलने के कारण लोगों को धूप में भी सर्दी से राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार एक बार फिर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे तापमान में तीन से पाँच डिग्री गिरावट होने की संभावना बनी हुई है। इसके बाद अट्ठारह फरवरी तक मौसम एक बार फिर बदल जाएगा और पारा बढ़ेगा। सोमवार को जिले में न्यूनतम तापमान नौ. आठ डिग्री और अधिकतम तापमान अट्ठाईस. दो डिग्री दर्ज किया गया है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण लोगों को कभी गर्मी, तो कभी सर्दी का अहसास हो रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। मौसम में बदलाव से अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी-जुकाम, बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। पिछले पाँच दिनों का न्यूनतम और अधिकतम तापमान-: This website follows the DNPA Code of Ethics.
MP Weather Update: जनवरी के महीने में तापमान में बहुत उतार-चढ़ाव हो रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान अनुसार 25 जनवरी से पश्चिमी विभोक्ष के आगे बढ़ने से तापमान में गिरावट देखने को मिली है और प्रदेश में एक बार फिर से ठंड बढ़ गई है। राजधानी में आज सुबह से ही मौसम में परिवर्तन देखा गया, सुबह घने कोहरे के साथ ही ठंडक भी महसूस हुई। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के साथ ही पंजाब और उसके आसपास बना प्रेरित चक्रवात भी समाप्त हो गया है। इससे हवाओं का रुख उत्तरी होने लगा है। हाल ही में उत्तर भारत के पहाड़ों पर अच्छी बर्फबारी हुई है। पंजाब में बारिश भी हुई है। इस वजह से उत्तर भारत की तरफ से आ रही सर्द हवाओं ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में सिहरन बढ़ानी शुरू कर दी है। इसके चलते अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट होने लगी है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अभी तीन-चार दिन तक तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा। इस दौरान प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र में पारा पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे भी जा सकता है।
MP Weather Update: जनवरी के महीने में तापमान में बहुत उतार-चढ़ाव हो रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान अनुसार पच्चीस जनवरी से पश्चिमी विभोक्ष के आगे बढ़ने से तापमान में गिरावट देखने को मिली है और प्रदेश में एक बार फिर से ठंड बढ़ गई है। राजधानी में आज सुबह से ही मौसम में परिवर्तन देखा गया, सुबह घने कोहरे के साथ ही ठंडक भी महसूस हुई। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के साथ ही पंजाब और उसके आसपास बना प्रेरित चक्रवात भी समाप्त हो गया है। इससे हवाओं का रुख उत्तरी होने लगा है। हाल ही में उत्तर भारत के पहाड़ों पर अच्छी बर्फबारी हुई है। पंजाब में बारिश भी हुई है। इस वजह से उत्तर भारत की तरफ से आ रही सर्द हवाओं ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में सिहरन बढ़ानी शुरू कर दी है। इसके चलते अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट होने लगी है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अभी तीन-चार दिन तक तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा। इस दौरान प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र में पारा पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे भी जा सकता है।
तेल कारोबारी के जुड़वां बच्चों की अपहरण के बाद हत्या के चर्चित मामले में मध्यप्रदेश की उच्च सुरक्षा वाली सतना सेंट्रल जेल में बंद एक आरोपी ने मंगलवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश देते हुए एक सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित की। बंदी के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को तीन डॉक्टरों का पैनल करेगा। रामकेश यादव चित्रकूट के आयुर्वेदिक तेल कारोबारी ब्रजेश रावत के जुड़वा बेटो प्रियांश और श्रेयांश को अगवा कर हत्या के बाद लाशों को नदी में फेंकने का आरोपी था। ज्ञात हो कि चित्रकूट में 12 फरवरी को रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुड़वा पुत्र प्रियांश व श्रेयांश को जानकी कुंड सद्गुरु स्कूल परिसर से अपहरण कर बीस लाख की फिरौती ली गई फिर दस दिन बाद दोनों की हत्या कर बबेरू बांदा में नदी किनारे फेंक दिया गया था। बताते चलें कि चित्रकूट के जानकीकुंड परिसर से दिनदहाड़े जुड़वा मासूम भाइयों को अगवा करने की साजिश इंजीनियरिंग के छात्रों ने पैसों के लिए रची थी। पुलिस की पूछताछ के दौरान शातिरों ने पूरे घटनाक्रम को कुबूल किया था। पहचान के भय से उन लोगों ने मासूमों को मौत के घाट उतार दिया। यह छात्र इतने शातिर निकले कि परिजनों से फिरौती की रकम मांगने के लिए खुद के बजाए राह चलते लोगों के फोन का इस्तेमाल किया। चित्रकूट में आईजी रींवा चंचल शेखर ने मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया था। कहा कि जुड़वा भाइयों को अगवा करने के बाद से डीआईजी रींवा की अगुवाई में एक एसआईटी गठित की गई थी। जिसमें सतना एसपी संतोष सिंह गौर समेत कई टीमें शामिल रहीं। प्रत्येक पहलू पर टीमों ने जांच की। आईजी ने शातिरों से की गई पूछताछ के बाद घटनाक्रम का सिलसिलेवार खुलासा किया। इस वारदात का मास्टर माइंड विश्वविद्यालय में बीआईटी का छात्र पद्म शुक्ला जानकीकुंड रघुवीर मंदिर के सामने का रहने वाला निकला।
तेल कारोबारी के जुड़वां बच्चों की अपहरण के बाद हत्या के चर्चित मामले में मध्यप्रदेश की उच्च सुरक्षा वाली सतना सेंट्रल जेल में बंद एक आरोपी ने मंगलवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश देते हुए एक सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित की। बंदी के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को तीन डॉक्टरों का पैनल करेगा। रामकेश यादव चित्रकूट के आयुर्वेदिक तेल कारोबारी ब्रजेश रावत के जुड़वा बेटो प्रियांश और श्रेयांश को अगवा कर हत्या के बाद लाशों को नदी में फेंकने का आरोपी था। ज्ञात हो कि चित्रकूट में बारह फरवरी को रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुड़वा पुत्र प्रियांश व श्रेयांश को जानकी कुंड सद्गुरु स्कूल परिसर से अपहरण कर बीस लाख की फिरौती ली गई फिर दस दिन बाद दोनों की हत्या कर बबेरू बांदा में नदी किनारे फेंक दिया गया था। बताते चलें कि चित्रकूट के जानकीकुंड परिसर से दिनदहाड़े जुड़वा मासूम भाइयों को अगवा करने की साजिश इंजीनियरिंग के छात्रों ने पैसों के लिए रची थी। पुलिस की पूछताछ के दौरान शातिरों ने पूरे घटनाक्रम को कुबूल किया था। पहचान के भय से उन लोगों ने मासूमों को मौत के घाट उतार दिया। यह छात्र इतने शातिर निकले कि परिजनों से फिरौती की रकम मांगने के लिए खुद के बजाए राह चलते लोगों के फोन का इस्तेमाल किया। चित्रकूट में आईजी रींवा चंचल शेखर ने मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया था। कहा कि जुड़वा भाइयों को अगवा करने के बाद से डीआईजी रींवा की अगुवाई में एक एसआईटी गठित की गई थी। जिसमें सतना एसपी संतोष सिंह गौर समेत कई टीमें शामिल रहीं। प्रत्येक पहलू पर टीमों ने जांच की। आईजी ने शातिरों से की गई पूछताछ के बाद घटनाक्रम का सिलसिलेवार खुलासा किया। इस वारदात का मास्टर माइंड विश्वविद्यालय में बीआईटी का छात्र पद्म शुक्ला जानकीकुंड रघुवीर मंदिर के सामने का रहने वाला निकला।
Ranchi: ऑनलाइन कैब की तर्ज पर अब झारखंड में भी 108 एंबुलेंस सेवा की सुविधा ली जा सकती है, सोमवार को एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जिकितजा हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड जीवन दूत एप लॉन्च करेगा. इसके बाद लोग इस एप के सहारे राज्य के 24 जिलों में एंबुलेंस सेवा का लाभ ले सकते हैं. जिकितजा के सेंटर हेड मिल्टन सिंह ने बताया कि जीवन दूत एप को एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म से मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा. सोमवार से सेवा का लाभ राज्य के लोग उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि वैसे व्यक्ति जो इस एप के जरिए एंबुलेंस की बुकिंग करेंगे, उन्हें एंबुलेंस का रियल टाइम लोकेशन भी प्राप्त होगा. साथ ही एंबुलेंस के ड्राइवर की भी जानकारी इसके जरिए मिलेगी. गौरतलब है कि राज्य में जिकितजा हेल्थ केयर के द्वारा 337 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है. इनमें एडवांस लाइफ सेविंग (एएलएस) और बेसिक लाइफ सेविंग (बीएलएस) एंबुलेंस हैं. जरूरतमंद एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने के लिए पहले 108 पर कॉल करते थे, लेकिन सोमवार से एप की मदद से एंबुलेंस सेवा की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे. वहीं जरूरतमंदों तक एंबुलेंस पहुंचने के बाद मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के बीच की एंबुलेंस को कॉल सेंटर के द्वारा ट्रैक किया जाएगा. झारखंड पहला राज्य होगा जहां मोबाइल एप के जरिए एंबुलेंस की बुकिंग की जाएगी. वही रिम्स कार्डियोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रशांत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की शुरूआत होने से मरीजों को ज्यादा फायदा मिलेगा. खासकर हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और सड़क हादसे में घायल मरीज जल्दी अस्पताल तक पहुंचेंगे. ऐसी घड़ी को गोल्डन ऑवर कहते हैं. किसी भी मरीज की जान बचाने के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है.
Ranchi: ऑनलाइन कैब की तर्ज पर अब झारखंड में भी एक सौ आठ एंबुलेंस सेवा की सुविधा ली जा सकती है, सोमवार को एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जिकितजा हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड जीवन दूत एप लॉन्च करेगा. इसके बाद लोग इस एप के सहारे राज्य के चौबीस जिलों में एंबुलेंस सेवा का लाभ ले सकते हैं. जिकितजा के सेंटर हेड मिल्टन सिंह ने बताया कि जीवन दूत एप को एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म से मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा. सोमवार से सेवा का लाभ राज्य के लोग उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि वैसे व्यक्ति जो इस एप के जरिए एंबुलेंस की बुकिंग करेंगे, उन्हें एंबुलेंस का रियल टाइम लोकेशन भी प्राप्त होगा. साथ ही एंबुलेंस के ड्राइवर की भी जानकारी इसके जरिए मिलेगी. गौरतलब है कि राज्य में जिकितजा हेल्थ केयर के द्वारा तीन सौ सैंतीस एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है. इनमें एडवांस लाइफ सेविंग और बेसिक लाइफ सेविंग एंबुलेंस हैं. जरूरतमंद एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने के लिए पहले एक सौ आठ पर कॉल करते थे, लेकिन सोमवार से एप की मदद से एंबुलेंस सेवा की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे. वहीं जरूरतमंदों तक एंबुलेंस पहुंचने के बाद मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के बीच की एंबुलेंस को कॉल सेंटर के द्वारा ट्रैक किया जाएगा. झारखंड पहला राज्य होगा जहां मोबाइल एप के जरिए एंबुलेंस की बुकिंग की जाएगी. वही रिम्स कार्डियोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रशांत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की शुरूआत होने से मरीजों को ज्यादा फायदा मिलेगा. खासकर हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और सड़क हादसे में घायल मरीज जल्दी अस्पताल तक पहुंचेंगे. ऐसी घड़ी को गोल्डन ऑवर कहते हैं. किसी भी मरीज की जान बचाने के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है.
बच्चों के मानसिक विकास व स्वास्थ्य के लिए हरी सब्जियां किसी वरदान से कम नहीं हैं। हरी सब्जियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो स्वस्थ शारीरिक व मानसिक विकास में जरूरी किरदार निभाता है। आयरन की कमी से परफॉरमेंस पर पड़ता है प्रभावः शोध में यह पता चला कि जिन लोगों के दिमाग में आयरन की कमी पायी गई थी वो अन्य लोगों की तुलना में कई तरह के कामों अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। विशेष तौर पर, तार्किक व जगह संबंधी कार्यों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। पहले किए जा चुके शोधों के अनुसार, दिमाग में उपस्थित कोशिकाओं को कार्य करने के लिए आयरन की जरूरत होती है। आयरन दिमाग के विकास व शारीरिक कार्यों को सुचारू रूप से करने के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ये सब्जियां हैं आयरन का अच्छा स्त्रोतः हरे रंग की पत्तेदार सब्जियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है . ब्रोकली, हरी मटर, पालक, बथुआ, सोया मेथी, सरसों का साग में आयरन की बहुत ज्यादा मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा दालों, मेवों, बीन्स व कई प्रकार के बीजों में भी आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है। इस सिलसिले में चिकित्सक बार्ट लारसन ने बोला है कि इस शोध में जो परिणाम सामने आये हैं उनसे पता चलता है कि 24 से 25 वर्ष की आयु तक सभी बच्चों को आयरनयुक्त हरी सब्जियों या आयरन के अन्य सप्लीमेंट का सेवन आवश्यक रूप से करना चाहिये। बता दें कि दुनिया में, दो ख़रब लोग आयरन की कमी का शिकार हैं। आयरन से बनती हैं रेड ब्लड सेल्सः आयरन की कमी से बच्चों में बहुत ज्यादा थकान, स्कीन में पीलापन, सीने में दर्द व सिरदर्द की कठिनाई हो सकती है। शरीर में रेड ब्लड सेल्स का निर्माण होते रहने के लिए आयरन बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। रेड ब्लड सेल्स ही पूरी बॉडी में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए जिम्मेदार होती हैं।
बच्चों के मानसिक विकास व स्वास्थ्य के लिए हरी सब्जियां किसी वरदान से कम नहीं हैं। हरी सब्जियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो स्वस्थ शारीरिक व मानसिक विकास में जरूरी किरदार निभाता है। आयरन की कमी से परफॉरमेंस पर पड़ता है प्रभावः शोध में यह पता चला कि जिन लोगों के दिमाग में आयरन की कमी पायी गई थी वो अन्य लोगों की तुलना में कई तरह के कामों अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। विशेष तौर पर, तार्किक व जगह संबंधी कार्यों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। पहले किए जा चुके शोधों के अनुसार, दिमाग में उपस्थित कोशिकाओं को कार्य करने के लिए आयरन की जरूरत होती है। आयरन दिमाग के विकास व शारीरिक कार्यों को सुचारू रूप से करने के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ये सब्जियां हैं आयरन का अच्छा स्त्रोतः हरे रंग की पत्तेदार सब्जियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है . ब्रोकली, हरी मटर, पालक, बथुआ, सोया मेथी, सरसों का साग में आयरन की बहुत ज्यादा मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा दालों, मेवों, बीन्स व कई प्रकार के बीजों में भी आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है। इस सिलसिले में चिकित्सक बार्ट लारसन ने बोला है कि इस शोध में जो परिणाम सामने आये हैं उनसे पता चलता है कि चौबीस से पच्चीस वर्ष की आयु तक सभी बच्चों को आयरनयुक्त हरी सब्जियों या आयरन के अन्य सप्लीमेंट का सेवन आवश्यक रूप से करना चाहिये। बता दें कि दुनिया में, दो ख़रब लोग आयरन की कमी का शिकार हैं। आयरन से बनती हैं रेड ब्लड सेल्सः आयरन की कमी से बच्चों में बहुत ज्यादा थकान, स्कीन में पीलापन, सीने में दर्द व सिरदर्द की कठिनाई हो सकती है। शरीर में रेड ब्लड सेल्स का निर्माण होते रहने के लिए आयरन बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। रेड ब्लड सेल्स ही पूरी बॉडी में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए जिम्मेदार होती हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी के सिराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत छत्तरी में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंडित सुखराम ने जल्दबाजी में गलत निर्णय लिया है। उनके निर्णय से उनके बेटे अनिल शर्मा का राजनीतिक भविष्य खराब हुआ, वहीं, मंडीवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि पंडित सुखराम ने अपने पोते के लिए भाजपा से टिकट मांगी थी जो संभव नहीं था। जब पार्टी ने टिकट के लिए इंकार किया तो सुखराम ने कांग्रेस कार्यालय में डेरा डाल दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान पंडित सुखराम के पोते को टिकट दिया जा सकता था, लेकिन सुखराम और उनके पोते ने धीरज नहीं रखा। सुखराम जनहित नहीं, परिवारवाद की राजनीति करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी एक परिवार नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के प्रति सोचती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिला मंडी को सम्मान प्राप्त हुआ है लेकिन पंडित सुखराम ने इस सम्मान को नजरअंदाज कर केवल अपने परिवार के बारे में ही सोचा। इससे मंडी की जनता को ठेस पहुंची है, लेकिन अब जनता ने तय कर लिया है कि सुखराम के परिवार को लोकसभा चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि इन दिनों विपक्ष के नेता सिराज के प्रति अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं, जो बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सिराज अपना हक ले रहा है, जिस पर विपक्ष के नेता का कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश बीजेपी सरकार प्रदेश का चहुंमुखी विकास करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दृष्टि से सभी विधानसभा क्षेत्रों को करोड़ों की सौगातें दी गई है। प्रदेश सरकार ने अब तक के कार्यकाल के दौरान जनता की आशा एवं आकांक्षाओं के मद्देनजर विकासात्मक कार्य किए हैं। प्रदेश के विकास और बीजेपी को मिल रहे भारी जन-समर्थन से कांग्रेस के नेता बौखलाहट में हैं। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं जो पूरा नहीं हो सकेगा। राहुल आलू से सोना निकालने की बात करते हैं, जो समझ से बाहर है। देश को अनुभवी एवं मजबूत नेतृत्व देने वाले प्रधानमंत्री की आवश्यकता है और ऐसा नेतृत्व केवल नरेंद्र मोदी ने ही दिया है। उन्होंने स्थानीय जनता से आग्रह किया कि नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाने के लिए मंडी संसदीय क्षेत्र के बीजेपी प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा को छत्तरी से ऐतिहासिक बढ़त दिलाएं। लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश सरकार छत्तरी के विकास को और गति प्रदान करेगी। छत्तरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के 285 परिवारों ने बीजेपी सरकार की नीतियों एवं विकासात्मक कार्यों से प्रभावित होकर कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थामा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी के सिराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत छत्तरी में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंडित सुखराम ने जल्दबाजी में गलत निर्णय लिया है। उनके निर्णय से उनके बेटे अनिल शर्मा का राजनीतिक भविष्य खराब हुआ, वहीं, मंडीवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि पंडित सुखराम ने अपने पोते के लिए भाजपा से टिकट मांगी थी जो संभव नहीं था। जब पार्टी ने टिकट के लिए इंकार किया तो सुखराम ने कांग्रेस कार्यालय में डेरा डाल दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान पंडित सुखराम के पोते को टिकट दिया जा सकता था, लेकिन सुखराम और उनके पोते ने धीरज नहीं रखा। सुखराम जनहित नहीं, परिवारवाद की राजनीति करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी एक परिवार नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के प्रति सोचती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिला मंडी को सम्मान प्राप्त हुआ है लेकिन पंडित सुखराम ने इस सम्मान को नजरअंदाज कर केवल अपने परिवार के बारे में ही सोचा। इससे मंडी की जनता को ठेस पहुंची है, लेकिन अब जनता ने तय कर लिया है कि सुखराम के परिवार को लोकसभा चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि इन दिनों विपक्ष के नेता सिराज के प्रति अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं, जो बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सिराज अपना हक ले रहा है, जिस पर विपक्ष के नेता का कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश बीजेपी सरकार प्रदेश का चहुंमुखी विकास करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दृष्टि से सभी विधानसभा क्षेत्रों को करोड़ों की सौगातें दी गई है। प्रदेश सरकार ने अब तक के कार्यकाल के दौरान जनता की आशा एवं आकांक्षाओं के मद्देनजर विकासात्मक कार्य किए हैं। प्रदेश के विकास और बीजेपी को मिल रहे भारी जन-समर्थन से कांग्रेस के नेता बौखलाहट में हैं। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं जो पूरा नहीं हो सकेगा। राहुल आलू से सोना निकालने की बात करते हैं, जो समझ से बाहर है। देश को अनुभवी एवं मजबूत नेतृत्व देने वाले प्रधानमंत्री की आवश्यकता है और ऐसा नेतृत्व केवल नरेंद्र मोदी ने ही दिया है। उन्होंने स्थानीय जनता से आग्रह किया कि नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाने के लिए मंडी संसदीय क्षेत्र के बीजेपी प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा को छत्तरी से ऐतिहासिक बढ़त दिलाएं। लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश सरकार छत्तरी के विकास को और गति प्रदान करेगी। छत्तरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के दो सौ पचासी परिवारों ने बीजेपी सरकार की नीतियों एवं विकासात्मक कार्यों से प्रभावित होकर कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थामा।
मीन-अक्टूबर के शुरुआती महीने में ग्रहों का राशि परिवर्तन आपके मन में काफी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस महीने की शुरुआत आपके लिए काफी दुखद रहेगी। आपके कार्य आपके अनुसार नहीं बनेंगे। बरसों से चल रही आपकी मेहनत इस माह में आपको नकारात्मक फल देगी। इसलिए आपको मेहनत का अच्छा नतीजा नहीं मिलेगा। इस दौरान आपको मानसिक रूप से मजबूत रहना है क्योंकि मानसिक परेशानियां देखने को मिल सकती है इसीलिए आपका आत्मविश्वास टूट सकता है।
मीन-अक्टूबर के शुरुआती महीने में ग्रहों का राशि परिवर्तन आपके मन में काफी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस महीने की शुरुआत आपके लिए काफी दुखद रहेगी। आपके कार्य आपके अनुसार नहीं बनेंगे। बरसों से चल रही आपकी मेहनत इस माह में आपको नकारात्मक फल देगी। इसलिए आपको मेहनत का अच्छा नतीजा नहीं मिलेगा। इस दौरान आपको मानसिक रूप से मजबूत रहना है क्योंकि मानसिक परेशानियां देखने को मिल सकती है इसीलिए आपका आत्मविश्वास टूट सकता है।
नेमिर्ना तिनिशे कूपत्रिकाचक्रान्तयोः स्त्रियाम् ।। मोदिनी को० ॥ इन प्रमाणों से "पद्मनेमिम् पद का अर्थ यह होता है किस्वकरस्थ कमल से आश्रितों के अनिष्ट को दूरकर इष्टवस्तु को अपने समोप में लाकर अपने चरणाविन्द में प्राप्त कराती हुई । अथवा कमल के मध्य में स्थित रहनेवाली । उस सब वेदों में प्रसिद्ध श्री देवी को रक्षक । अब यहाँ पर यह संदेह होता है कि "शरणम्" पद का अर्थ रक्षक कैसे होता है ? इसका उत्तर यह लिखा है किमुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये ॥ श्वेताश्वत० अध्या० ६ मं० १८।। मैं मुमुक्षु निश्चय करके रक्षक को प्राप्त करता हूँ ॥१८॥ मामेकं शरणं व्रज ।। भ० गी० अध्या०] १८ श्लो०६६ ॥ एक मुझको रक्षक प्राप्त करो ॥६६॥ और भी लिखा है किशरणं गृहरक्षित्रोः ।।अमर० कां० ३ व० ३ श्लो० ५२ ॥ शरण, गृह और रक्षक को कहते हैं । ५२ ।। इन श्र ति स्मृति और कोश के प्रमाणों से "शरणम्" पदका अर्थ रक्षक होता है 'शरणम्' यहाँ पर । अतोऽम् ।।७।१।२४।। इस सूत्र से अमू होता है। प्राप्त करता हूँ। "प्रपद्ये " यहाँ पर दिवादिपठित 'पद गतौ' धातु से ।। दिवादिभ्यः श्यन् ।।२।१।६६ । इस सूत्र से श्यन् होता है। जिससे हे लक्ष्मी मेरी दरिद्रता नष्ट हो जाय "नश्यताम्" यहाँ पर दिवादिपठित 'एश अदर्शने' इस धातु से पचमी ऋक् गो नः ।।६।१।।६५ ।। इस सूत्र से नकार और सार्वधातुके यक ।। ३।९।६७।। इस सूत्र से यक् प्रत्यय होता है। ऐ मा मैं तुझको "स्वाम्" यहाँ पर ।।स्त्रमावेकत्रचने ।।७।२।१७।। इस सूत्र से त्व और ॥ द्वितीयायां च ।।७।२।७।। इस सूत्र से प्रकार होता है चरण करता हूँ। 'वृणे" यहाँ पर कथादिपठित "वृञ् वरणे" इस धातु से ।। क्यादिभ्यः श्ना ।।३।१।३१।। इस सूत्र से श्ना प्रत्यय और । श्नाभ्यस्तयोरातः ।।६।४।११२। इस सूत्र । से आकार का लोप होता है। अब इस ऋचा में "देवजुष्टाम्" पद की व्याख्या पर यह प्रश्न होता है कि देवयोनि मनुष्ययोनि स पृथक् नहीं है। इस प्रश्न का उत्तर है कि जो लोग शास्त्र से अनभिज्ञ हैं वे चाहें सो कहें परन्तु शास्त्र के जानने वाले यह जानते हैं कि देवयोनि मनुष्ययोनि से अलग है । इस विषय में यह प्रमाण लिखा है किअग्नि देवता वातो देवता सूर्यो देवता चन्द्रमा देवता वसवो देवता रुद्रा देवतादित्या देवता मरुतो देवता विश्वेदेदेवा देवता बृहस्पतिर्देवतेन्द्रो देवता वरुणो देवता ।। यजुर्वे० अध्या० १४ मं० २० ॥ श्रग्नि देवता, वायु देवता, सूर्यदेवता, चन्द्रमा देवता, वसु देवता, रुद्र देवता, आदित्य देवता, मरुत देवता, विश्वेदेव देवता, बृहस्पति देवता, इन्द्रदेवता, वरुण देवता ।।२०।। इस मंत्र में देवताओं के अग्नि आदिक अलग अलग नाम आये हैं इससे देवयोनि मनुष्य
नेमिर्ना तिनिशे कूपत्रिकाचक्रान्तयोः स्त्रियाम् ।। मोदिनी कोशून्य ॥ इन प्रमाणों से "पद्मनेमिम् पद का अर्थ यह होता है किस्वकरस्थ कमल से आश्रितों के अनिष्ट को दूरकर इष्टवस्तु को अपने समोप में लाकर अपने चरणाविन्द में प्राप्त कराती हुई । अथवा कमल के मध्य में स्थित रहनेवाली । उस सब वेदों में प्रसिद्ध श्री देवी को रक्षक । अब यहाँ पर यह संदेह होता है कि "शरणम्" पद का अर्थ रक्षक कैसे होता है ? इसका उत्तर यह लिखा है किमुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये ॥ श्वेताश्वतशून्य अध्याशून्य छः मंशून्य अट्ठारह।। मैं मुमुक्षु निश्चय करके रक्षक को प्राप्त करता हूँ ॥अट्ठारह॥ मामेकं शरणं व्रज ।। भशून्य गीशून्य अध्याशून्य] अट्ठारह श्लोछयासठ ॥ एक मुझको रक्षक प्राप्त करो ॥छयासठ॥ और भी लिखा है किशरणं गृहरक्षित्रोः ।।अमरशून्य कांशून्य तीन वशून्य तीन श्लोशून्य बावन ॥ शरण, गृह और रक्षक को कहते हैं । बावन ।। इन श्र ति स्मृति और कोश के प्रमाणों से "शरणम्" पदका अर्थ रक्षक होता है 'शरणम्' यहाँ पर । अतोऽम् ।।सात।एक।चौबीस।। इस सूत्र से अमू होता है। प्राप्त करता हूँ। "प्रपद्ये " यहाँ पर दिवादिपठित 'पद गतौ' धातु से ।। दिवादिभ्यः श्यन् ।।दो।एक।छयासठ । इस सूत्र से श्यन् होता है। जिससे हे लक्ष्मी मेरी दरिद्रता नष्ट हो जाय "नश्यताम्" यहाँ पर दिवादिपठित 'एश अदर्शने' इस धातु से पचमी ऋक् गो नः ।।छः।एक।।पैंसठ ।। इस सूत्र से नकार और सार्वधातुके यक ।। तीन।नौ।सरसठ।। इस सूत्र से यक् प्रत्यय होता है। ऐ मा मैं तुझको "स्वाम्" यहाँ पर ।।स्त्रमावेकत्रचने ।।सात।दो।सत्रह।। इस सूत्र से त्व और ॥ द्वितीयायां च ।।सात।दो।सात।। इस सूत्र से प्रकार होता है चरण करता हूँ। 'वृणे" यहाँ पर कथादिपठित "वृञ् वरणे" इस धातु से ।। क्यादिभ्यः श्ना ।।तीन।एक।इकतीस।। इस सूत्र से श्ना प्रत्यय और । श्नाभ्यस्तयोरातः ।।छः।चार।एक सौ बारह। इस सूत्र । से आकार का लोप होता है। अब इस ऋचा में "देवजुष्टाम्" पद की व्याख्या पर यह प्रश्न होता है कि देवयोनि मनुष्ययोनि स पृथक् नहीं है। इस प्रश्न का उत्तर है कि जो लोग शास्त्र से अनभिज्ञ हैं वे चाहें सो कहें परन्तु शास्त्र के जानने वाले यह जानते हैं कि देवयोनि मनुष्ययोनि से अलग है । इस विषय में यह प्रमाण लिखा है किअग्नि देवता वातो देवता सूर्यो देवता चन्द्रमा देवता वसवो देवता रुद्रा देवतादित्या देवता मरुतो देवता विश्वेदेदेवा देवता बृहस्पतिर्देवतेन्द्रो देवता वरुणो देवता ।। यजुर्वेशून्य अध्याशून्य चौदह मंशून्य बीस ॥ श्रग्नि देवता, वायु देवता, सूर्यदेवता, चन्द्रमा देवता, वसु देवता, रुद्र देवता, आदित्य देवता, मरुत देवता, विश्वेदेव देवता, बृहस्पति देवता, इन्द्रदेवता, वरुण देवता ।।बीस।। इस मंत्र में देवताओं के अग्नि आदिक अलग अलग नाम आये हैं इससे देवयोनि मनुष्य
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शनिवार को कहा कि भारत अर्थव्यवस्था और आपदा जोखिम प्रबंधन (डीआरएम) के संदर्भ में भविष्य के वैश्विक राजनीतिक ढांचे में अग्रणी भूमिका निभाएगा। भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रतिभा पर विश्वास व्यक्त करते हुए, राय ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का मकसद अंतिम मील कनेक्टिविटी प्रदान करना और देश के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने डीआरएम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध 10 सूत्री एजेंडे का उदाहरण दिया। इसके साथ ही गृह राज्य मंत्री ने एजेंडा के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर जोर दिया, जिसमें आपदा से संबंधित मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करना शामिल है। उन्होंने जलवायु जोखिम प्रबंधन पर भी जोर दिया। मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। राय ने कहा कि सम्मेलन के परिणामों और सिफारिशों को आने वाले समय में वास्तविकता का आकार दिया जाना चाहिए। सदस्य एनडीएमए, कमल किशोर ने अपनी टिप्पणी में प्रभावी परिणामों के लिए अनुसंधान डोमेन के विभिन्न आयामों के समन्वय की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। इस कार्यक्रम में संपूर्ण भारत के विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रकाशकों, नीति नियोजकों आदि ने भाग लिया और इसके साथ ही इस कार्यक्रम से 10 से अधिक देशों के लोग जुड़े।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शनिवार को कहा कि भारत अर्थव्यवस्था और आपदा जोखिम प्रबंधन के संदर्भ में भविष्य के वैश्विक राजनीतिक ढांचे में अग्रणी भूमिका निभाएगा। भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रतिभा पर विश्वास व्यक्त करते हुए, राय ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का मकसद अंतिम मील कनेक्टिविटी प्रदान करना और देश के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने डीआरएम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध दस सूत्री एजेंडे का उदाहरण दिया। इसके साथ ही गृह राज्य मंत्री ने एजेंडा के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर जोर दिया, जिसमें आपदा से संबंधित मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करना शामिल है। उन्होंने जलवायु जोखिम प्रबंधन पर भी जोर दिया। मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। राय ने कहा कि सम्मेलन के परिणामों और सिफारिशों को आने वाले समय में वास्तविकता का आकार दिया जाना चाहिए। सदस्य एनडीएमए, कमल किशोर ने अपनी टिप्पणी में प्रभावी परिणामों के लिए अनुसंधान डोमेन के विभिन्न आयामों के समन्वय की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। इस कार्यक्रम में संपूर्ण भारत के विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रकाशकों, नीति नियोजकों आदि ने भाग लिया और इसके साथ ही इस कार्यक्रम से दस से अधिक देशों के लोग जुड़े।
RANCHI : पिठोरिया के कारोबारी शिवव्रत साहू पर हुए फायरिंग मामले के दूसरे आरोपी नीतेश उर्फ लालू गोप की तलाश में रांची पुलिस ने रविवार को भी कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस ने उसके घर को भी खंगाला, पर वह फरार था। अब नीतेश की नगड़ी में रहने वाली गर्ल फ्रेंड पुलिस के रडार पर है। उससे पूछताछ की तैयारी पुलिस कर रही है, ताकि नीतेश का सुराग मिल सके। पिठोरिया थाना प्रभारी चुनुवा उरांव के मुताबिक नीतेश दो दिनों के भीतर नहीं पकड़ा जाता तो पुलिस उसके घर कुर्की जब्ती करेगी। इस कार्रवाई के लिए पुलिस की अर्जी पर कोर्ट ने कुर्की जब्ती वारंट जारी कर दिया है। पुलिस कुर्की की तैयारी में जुटी है। पिछले साल 31 को पंकज कुमार साहू और नीतेश उर्फ लालू ने शिवव्रत साहू पर उस वक्त गोली चलाई थी,जब वे अपनी दुकान में थे। फायरिंग करने के बाद दोनों फरार हो गए थे। 23 जनवरी को पुलिस ने आरोपी पंकज के घर कुर्की जब्ती की थी। इसके बाद पंकज ने शिवव्रत और उनकी पत्नी बसंती देवी को मारने की नीयत से फिर गोली चलाई थी, जिसमें दोनों घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस दबिश बढ़ने पर पंकज ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पुलिस पंकज साहू को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में आज आवेदन देगी। पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, ताकि शिवव्रत साहू पर हुए फायरिंग की वजहों को जाना जा सके। शिव व्रत साहू पर पहली बार हुए हमला के बाद सीसीटीवी कैमरे से पंकज के अलावा नीतेश उर्फ लालू की पहचान हुई थी। हमला के बाद से पंकज के अलावा नीतेश भी फरार चल रहा है। ऐसे में दोनों की तलाश में पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, पर वे पकड़े नहीं जा सके थे। हालांकि, पंकज ने बाद में कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जबकि नीतेश अभी भी फरार है।
RANCHI : पिठोरिया के कारोबारी शिवव्रत साहू पर हुए फायरिंग मामले के दूसरे आरोपी नीतेश उर्फ लालू गोप की तलाश में रांची पुलिस ने रविवार को भी कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस ने उसके घर को भी खंगाला, पर वह फरार था। अब नीतेश की नगड़ी में रहने वाली गर्ल फ्रेंड पुलिस के रडार पर है। उससे पूछताछ की तैयारी पुलिस कर रही है, ताकि नीतेश का सुराग मिल सके। पिठोरिया थाना प्रभारी चुनुवा उरांव के मुताबिक नीतेश दो दिनों के भीतर नहीं पकड़ा जाता तो पुलिस उसके घर कुर्की जब्ती करेगी। इस कार्रवाई के लिए पुलिस की अर्जी पर कोर्ट ने कुर्की जब्ती वारंट जारी कर दिया है। पुलिस कुर्की की तैयारी में जुटी है। पिछले साल इकतीस को पंकज कुमार साहू और नीतेश उर्फ लालू ने शिवव्रत साहू पर उस वक्त गोली चलाई थी,जब वे अपनी दुकान में थे। फायरिंग करने के बाद दोनों फरार हो गए थे। तेईस जनवरी को पुलिस ने आरोपी पंकज के घर कुर्की जब्ती की थी। इसके बाद पंकज ने शिवव्रत और उनकी पत्नी बसंती देवी को मारने की नीयत से फिर गोली चलाई थी, जिसमें दोनों घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस दबिश बढ़ने पर पंकज ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पुलिस पंकज साहू को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में आज आवेदन देगी। पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, ताकि शिवव्रत साहू पर हुए फायरिंग की वजहों को जाना जा सके। शिव व्रत साहू पर पहली बार हुए हमला के बाद सीसीटीवी कैमरे से पंकज के अलावा नीतेश उर्फ लालू की पहचान हुई थी। हमला के बाद से पंकज के अलावा नीतेश भी फरार चल रहा है। ऐसे में दोनों की तलाश में पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, पर वे पकड़े नहीं जा सके थे। हालांकि, पंकज ने बाद में कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जबकि नीतेश अभी भी फरार है।
कपिल शर्मा इस फिल्म में एक फूड डिलेवरी बॉय बने हैं. Zwigato First Look: कपिल शर्मा (Kapil Sharma) को हमने सालों तक लोगों को हंसाते हुए देखा है, लेकिन जल्द ही निर्देशक नंदिता दास (Nandita Das) की फिल्म में 'कॉमेडी के किंग' कपिल सीरियस अवतार में नजर आने वाले हैं. कपिल शर्मा की नई फिल्म 'ज्विगाटो' (Zwigato) का पहला पोस्टर आज रिलीज हुआ है. इस पोस्टर में कपिल एक फूड डिलेवरी बॉय के रूप में नजर आ रहे हैं. इस फिल्म में एक्ट्रेस शहाना गोस्वामी कपिल की पत्नी बनी नजर आ रही हैं. पोस्टर काफी मजेदार लग रहे हैं. वहीं कपिल के फैंस के लिए बड़ी खबर ये है कि एक्टर की ये फिल्म 47वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आधिकारिक एंट्री बन गई है. वहीं TIFF ने भी इस फिल्म का एक क्लिप शेयर करते हुए बताया है कि ये फिल्म जल्द ही फेस्टिवल में दिखाई जाएगी. इस क्लिप में कपिल और शहाना पति-पत्नी बने नजर आ रहे हैं. पत्नी बनीं शहाना अपने पति से बाहर जाकर काम करने की बात कर रही है, जबकि कपिल अपनी माली हालत नाजुक होने के बाद भी पत्नी के काम करने पर राजी नहीं हैं. आप भी देखें ये वीडियो. बता दें कि कपिल शर्मा सालों से टीवी पर 'द कपिल शर्मा शो' के जरिए दर्शकों को हंसाते हुए नजर आ रहे हैं. इन दिनों ये शो बंद है. जल्द ही ये शो फिर से टीवी पर आ सकता है. इसी बीच कपिल कॉमेडी के साथ ही अब एक्टिंग में भी हाथ आजमा चुके हैं. वह 'किस किस को प्यार करूं' और 'फिरंगी' नाम की दो फिल्मों में नजर आ चुके हैं. .
कपिल शर्मा इस फिल्म में एक फूड डिलेवरी बॉय बने हैं. Zwigato First Look: कपिल शर्मा को हमने सालों तक लोगों को हंसाते हुए देखा है, लेकिन जल्द ही निर्देशक नंदिता दास की फिल्म में 'कॉमेडी के किंग' कपिल सीरियस अवतार में नजर आने वाले हैं. कपिल शर्मा की नई फिल्म 'ज्विगाटो' का पहला पोस्टर आज रिलीज हुआ है. इस पोस्टर में कपिल एक फूड डिलेवरी बॉय के रूप में नजर आ रहे हैं. इस फिल्म में एक्ट्रेस शहाना गोस्वामी कपिल की पत्नी बनी नजर आ रही हैं. पोस्टर काफी मजेदार लग रहे हैं. वहीं कपिल के फैंस के लिए बड़ी खबर ये है कि एक्टर की ये फिल्म सैंतालीसवें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आधिकारिक एंट्री बन गई है. वहीं TIFF ने भी इस फिल्म का एक क्लिप शेयर करते हुए बताया है कि ये फिल्म जल्द ही फेस्टिवल में दिखाई जाएगी. इस क्लिप में कपिल और शहाना पति-पत्नी बने नजर आ रहे हैं. पत्नी बनीं शहाना अपने पति से बाहर जाकर काम करने की बात कर रही है, जबकि कपिल अपनी माली हालत नाजुक होने के बाद भी पत्नी के काम करने पर राजी नहीं हैं. आप भी देखें ये वीडियो. बता दें कि कपिल शर्मा सालों से टीवी पर 'द कपिल शर्मा शो' के जरिए दर्शकों को हंसाते हुए नजर आ रहे हैं. इन दिनों ये शो बंद है. जल्द ही ये शो फिर से टीवी पर आ सकता है. इसी बीच कपिल कॉमेडी के साथ ही अब एक्टिंग में भी हाथ आजमा चुके हैं. वह 'किस किस को प्यार करूं' और 'फिरंगी' नाम की दो फिल्मों में नजर आ चुके हैं. .
सिद्धू मूसेवाला की हत्या में इस्तेमाल हथियार को लेकर बड़ी जानकारी मिल रही है. . मूसेवाला मर्डर केस में इस्तेमाल हथियार यूपी और पूर्वोत्तर के राज्यों से आए थे. . सूत्रों के मुताबिक शूटर्स को ये हथियार नॉर्थ ईस्ट के राज्यों और यूपी से मिले थे. . . मूसेवाला मर्डर केस में पुलिस ने जिस मनप्रीत को सबसे पहले गिरफ्तार किया था उसपर शूटर को हथियार मुहैया करवाने का आरोप है. .
सिद्धू मूसेवाला की हत्या में इस्तेमाल हथियार को लेकर बड़ी जानकारी मिल रही है. . मूसेवाला मर्डर केस में इस्तेमाल हथियार यूपी और पूर्वोत्तर के राज्यों से आए थे. . सूत्रों के मुताबिक शूटर्स को ये हथियार नॉर्थ ईस्ट के राज्यों और यूपी से मिले थे. . . मूसेवाला मर्डर केस में पुलिस ने जिस मनप्रीत को सबसे पहले गिरफ्तार किया था उसपर शूटर को हथियार मुहैया करवाने का आरोप है. .
भिंडः मध्य प्रदेश के भिंड जिले की गिनती देश के सबसे गंदे शहरों में होने लगी है, और इससे यहां के बच्चे तक दुखी हैं। यही कारण है कि500 से ज्यादा स्कूली छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर पूछा है कि 'आखिर हमारा शहर गंदा क्यों है। ' पिछले दिनों केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा 476 शहरों की सफाई को लेकर कराए गए सर्वेक्षण में भिंड शहर देश के सबसे गंदे शहरों में दूसरे नंबर का शहर है। भिंड को गंदे शहरों की सूची में आने पर किशोरी पब्लिक विद्यालय के करीब 500 छात्र-छात्राएं आहत हैं। इन छात्र-छात्राओं ने अपने इस दर्द को जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चौहान को पत्र लिखकर पूछा है कि आप ही बताएं कि हमारा शहर आखिर गंदा क्यों है। छात्र-छात्राओं द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है,"आपके आह्वान पर देश के अन्य शहरों की तरह भिंड में भी साफ-सफाई अभियान चल रहाहै, मगर सफाई कहीं भी नजर नहीं आती है, आखिर ऐसा क्यों है, वे नहीं जान पा रहे है। " स्कूल प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं की ओर से पत्र खिले जाने की पुष्टि की है। बताया गया है कि छात्र-छात्राओं ने पत्र में लिखा है कि "भिंड से सांसद भाजपा के हैं, शहर के विधायक भाजपा और नगर पालिका अध्यक्ष व उपाध्यक्ष भी भाजपा के हैं, तो फिर शहर गंदा क्यों है। " साथ ही प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से शहर को साफ सुथरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील भी की गई है।
भिंडः मध्य प्रदेश के भिंड जिले की गिनती देश के सबसे गंदे शहरों में होने लगी है, और इससे यहां के बच्चे तक दुखी हैं। यही कारण है किपाँच सौ से ज्यादा स्कूली छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर पूछा है कि 'आखिर हमारा शहर गंदा क्यों है। ' पिछले दिनों केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा चार सौ छिहत्तर शहरों की सफाई को लेकर कराए गए सर्वेक्षण में भिंड शहर देश के सबसे गंदे शहरों में दूसरे नंबर का शहर है। भिंड को गंदे शहरों की सूची में आने पर किशोरी पब्लिक विद्यालय के करीब पाँच सौ छात्र-छात्राएं आहत हैं। इन छात्र-छात्राओं ने अपने इस दर्द को जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चौहान को पत्र लिखकर पूछा है कि आप ही बताएं कि हमारा शहर आखिर गंदा क्यों है। छात्र-छात्राओं द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है,"आपके आह्वान पर देश के अन्य शहरों की तरह भिंड में भी साफ-सफाई अभियान चल रहाहै, मगर सफाई कहीं भी नजर नहीं आती है, आखिर ऐसा क्यों है, वे नहीं जान पा रहे है। " स्कूल प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं की ओर से पत्र खिले जाने की पुष्टि की है। बताया गया है कि छात्र-छात्राओं ने पत्र में लिखा है कि "भिंड से सांसद भाजपा के हैं, शहर के विधायक भाजपा और नगर पालिका अध्यक्ष व उपाध्यक्ष भी भाजपा के हैं, तो फिर शहर गंदा क्यों है। " साथ ही प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से शहर को साफ सुथरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील भी की गई है।
उसी परिपुष्ट अनुभूति एव नवागत आनन्द को लेकर मेरे मन मे तब महत्त्वाकाक्षाओं का ज्वार भी जागा है। अपने ही स्वार्थों को पूरा करने हेतु दूसरो को कुचल डालने की दुष्कल्पनाएँ भी मैने की थी तथा सासारिक 'ऊँचापन' पाने की घृणित लालसाओं ने मेरे मन, वचन एव कर्म को भी भटकाव की राह पर धकेला था, किन्तु यह मेरी चेतना के आह्वान तथा 'मै' पन की आनन्दानुभूति का ही सुफल था कि मैं उन अंधेरी गलियों से कुछ बाहर निकल सका, जहाँ से मुझे थोड़ा खुला आकाश और खुली रोशनी दिखाई देने लगी । तब मै अधकार से ज्योति की ओर बढ़ने लगा । इस प्रकार मै अपने वर्तमान जीवन मे ही सोया हॅू, गिरा हूँ, भटका हूँ। तब मेरी चेतना का प्रवाह अदृश्य भले हो गया हो किन्तु विलुप्त कभी नही हुआ। तभी तो वह पुन पुन प्रकट होता रहा है। मेरी चेतना पुन पुन जागती रही है और अपनी निरन्तरता का आभास देती रही है। सतत रूप से सतर्क रखने वाली ऐसी निरन्तर जागृति ही मुझे अपने सासारिक स्वार्थों मे फसने से दूर खीचती रही है और सबके हितो को सवारने की नवानन्दमय प्रेरणा देती रही है। इसी जागृति ने मेरे अन्त करण को सद्विवेक के ऐसे साचे मे ढाला है कि वह सबके हित में ही अपने हित को जाने-परखने लगा है। यह सच है कि यदि ऐसी सर्वप्राणहिताकाक्षा मेरे मन मे बलवती बन जाय एव क्रियाशील हो जाय तो मेरा अटल विश्वास है कि मेरी आत्म विकास की लम्बी यात्रा भाव-सरणियो मे ऊपर से ऊपर उत्थान पाती हुई अल्प समय मे भी सम्पन्नता एव पूर्णता को प्राप्त हो सकती है। यह भटकाव अनादिकालीन है वर्तमान जीवन मे मेरी आत्मा जो सासारिकता मे इधर उधर भटकती रहती है, वह भटकाव मात्र इसी जीवन का नहीं है, अपितु अनादिकालीन है। यह 'मै' वह मात्र ही नही हूँ, जो अभी बाहर से दिखाई दे रहा हूँ। बाह्य दृष्टि से वह तो मेरा वर्तमान शरीर मात्र है। अनादिकाल से मेरी आत्मा इस ससार मे अनेकानेक शरीर धारण करती रही है एव भव-भवान्तर में भ्रमण करती रही है । यह मानव शरीर मेरी आत्मा का वर्तमान निवास है । यह शरीर-निवास ही मेरी आत्मा की वास्तविकता का प्रतीक है। आत्म-विकास का चरम स्थल मोक्ष होता है अत जब तक मेरी आत्मा अपने चरम को नही पा लेती है तब तक आगे भी ससार में परिभ्रमण करती रहेगी। ससार का यह परिभ्रमण ही मेरी आत्मा का भटकाव है जो अनादिकाल से चल रहा है और मोक्ष प्राप्ति तक चलता रहेगा। जिस दिन मेरी आत्मा अपने समस्त कर्म बधनो को सम्पूर्णत विनष्ट कर लेगी और अपनी चेतना के प्रवाह को महासागर मे एकीभूति करने की दिशा मे तीव्र गति से मोड़ देगी, तव वह सिद्ध, बुद्ध और मुक्त वन जायगी। फिर न रहेगा बास और न बजेगी बासुरी। न भटकाव रहेगा, न जन्म-जन्मान्तर और न ससार- परिभ्रमण । मेरी आत्मा तब अनन्त ज्योतिर्मय रूप से अनन्त ज्ञान, दर्शन, वीर्य एव सुख अजर-अमर हो जायगी। इस चरम लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अग्रगामी बनने के लिये मुझे इस सासारिक भटकाव को गहराई से समझना होगा ताकि कारणो के सम्यक ज्ञान के द्वारा उनका निदान कर मै अपना समाधान पा सकू। अनादिकाल से अन्य सभी सांसारिक आत्माओं की तरह मेरी आत्मा भी ससार की चार गतियो एव चौरासी लाख योनियो मे चक्कर लगाती हुई भटक रही है। मैंने इन सब गतियो तथा योनियो मे बारम्बार जन्म लिये हैं, वहाँ की यातनाएँ तथा मूर्छाए भोगी है तथा कई बार चेतना जागृति के फलस्वरूप आत्म विकास की ऊँचाइयाँ भी साधी है। 'मै' ने यानि कि मेरी आत्मा ने वर्तमान जीवन से पहले नारकीय जीवन की लोमहर्षक यातनाएँ झेली है, तिर्यंच जीवन के क्रूर कष्टो को सहा है तो देवलोको के ऐश्वर्यमय जीवन के आनन्द भी उठाये है। किन्तु मै अपने लिये सन्तोष का विषय यही मानता हूँ कि इस ऊँचे-नीचे परिभ्रमण के दौरान मेरी चेतना का दीपक बराबर जलता रहा जो घटाटोप अधकार के समय मे भी मुझे रोशनी की राह दिखाता रहा । मै अपनी स्मृति को पीछे लौटाता हू तो देखता हू कि मैने बहतु प्राणियों की हिसा हो इस प्रकार तीव्र परिणामो से कपायपूर्वक महारभ की प्रवृत्ति की वस्तुओं पर अत्यन्त मूर्छा रखकर महापरिग्रह सेवन किया, पचेन्द्रिय प्राणियों की हिसा करते हुए पचेन्द्रिय वध किया तथा मासाहार करने मे रस लिया, जिसके कुफल मे मुझे नरकायु का बध हुआ। ऐसा बध कई बार हुआ और मैंने धम्मा, बशा, सीला, अजना, रिट्ठा मघा और माघवई - इन सातो नरको की भीषण यातनाएँ सहन की। मेरा रोम रोम आज भी खड़ा हो जाता है जब मुझे अपने अज्ञानतायुक्त नारकीय जीवन मे मिले अपार कष्ट याद आते हैं। हम नारकीयो का वैक्रिय शरीर होता था जो भीषण प्रहारो का दुख तो महसूस करता था किन्तु फिर से यथावत् हो जाता था। अधिकाशत हम नारकी के जीव ही भयकर रूप बना कर एक दूसरे को त्रास देते थे -- गदा, मुद्गर वगैरह शस्त्र बना कर एक दूसरे पर आक्रमण करते थे। बिच्छू, साप आदि बन कर एक दूसरे को काटते थे और नुकीले कीड़े बनकर एक दूसरे के शरीर मे घुस कर उसे क्षत-विक्षत कर डालते थे । अत्यन्त ऊष्ण अथवा अत्यन्त शीत होने के कारण क्षेत्रजन्य वेदना अलग होती थी तो पहली तीन नरको मे परमाधार्मिक देवता भी कठिन यातनाएँ देते थे । नारकीय यातनाओं का वर्णन करते हुए मेरी वाचा मे प्रकम्पन पैदा होता है। क्षेत्रजन्य ऊष्णता एव शीतलता की वेदना क्रमश एक से आगे की नरको मे तीव्र, तीव्रतर और तीव्रतम होती जाती थी। मध्य लोक मे ग्रीष्म ऋतु मे मध्याह्न के समय जब आकाश मे कोई बादल न हो, मे वायु बिल्कुल बन्द हो और सूर्य प्रचड रूप से तप रहा हो, उस समय पित्त प्रकृति वाला व्यक्ति जैसी ऊष्ण वेदना का अनुभव करता है, ऊष्ण वेदना वाले नरको मे उससे भी अनन्तगुणी वेदना होती थी उस वेदना की महसूसगिरी यह है कि अगर मुझे नरक से निकाल कर मर्त्यलोक मे बड़ी तेजी से जलते हुए खैर की लकड़ी के अगारो मे डाल दिया जाता तो मै शीतल जल से स्नान करने के समान अत्यन्त ही सुख का अनुभव करता और उन अगारो पर मुझे नीद भी आ जाती । इसी प्रकार शीत के प्रकोप की महसूसगिरी भी ऐसी थी कि जैसे मध्य लोक मे पौष या माघ की मध्यरात्रि मे आकाश के मेघशून्य होने पर जिस समय शरीर को बुरी तरह से कम्पायमान करने वाली शीत वायु चल रही हो, हिमालय गिरि के वर्फीले शिखर पर बैठा हुआ अग्नि, मकान और वस्त्रादि शीत निवारण के सभी साधनो से हीन व्यक्ति जैसी भीषण शीत वेदना का अनुभव करता है उससे भी जारी अपनी आत्मा के इस परिभ्रमण को समाप्त कर देने के लक्ष्य को सामने रख कर मै इस जीवन मे क्या-क्या करू ? अनेकानेक भव-भवान्तरों के प्रत्यक्ष अनुभव से मेरी चैतन्य शक्ति ने ससार के वास्तविक स्वरूप को जाना है तथा अनेक ज्ञानी आत्माओं के कथन से उसे पहिचाना भी है। किन्तु यह ज्ञान और पहिचान कभी सजग भी रही तो कभी विस्मृति के गर्त मे डूबती भी रही । अपने विकास की पूर्णता पर न पहुँच पाने तक चेतना के साथ ऐसा ही परिवर्तन होता रहता है और यही वस्तुत. सासारिकता है। द्रव्य संसार (लोक) का स्वरूप क्या ? छोटी-सी परिभाषा है द्रव्यो का समूह रूप है । फिर प्रश्न होगा कि द्रव्य क्या ? जो गुण और पर्याय पर आधारित हो वह द्रव्य । गुणपर्यायवद् द्रव्यम्तत्त्वार्थ सूत्र ५/३७। गुण जो सदा एक सा रहे तथा पर्याय वह जो सदा बदलती रहे । यो द्रव्य छ होते है किंतु मुख्य है जीव और अजीव । अजीव मे शेष पाच द्रव्यो का समावेश हो जाता है। जीव का दूसरा नाम आत्मा है और आत्मा के सिवाय सभी अजीव है। जैसे मै हूँ। यह मै जो हूँ, वह आत्मा है किन्तु मेरी आत्मा मुक्त नही है, शरीरधारी है । अत. यह शरीर जो है, वह जड़ पुद्गलो से निर्मित है। इस प्रकार मेरे वर्तमान जीवन का अस्तित्व है मेरी आत्मा एव मेरे शरीर के सयोग से है । यह आत्मा एव शरीर का सयोग ही ससार है। इसके सिवाय भी जितनी दृश्यावलियाँ हैं, वे सब जड़ रूप हैं । यो कह सकते है कि इन चर्मचक्षुओं से जो कुछ भी दिखाई देता है, वे सब जड़ पदार्थ है। मुख्यत आत्माओं एव शरीरो का सयोग ही ससार की सारी हलचलो का मूल है । इन सारी हलचलो से ससरित होता हुआ ही यह संसार है । अत मेरी आत्मा और मेरी देह का सयोग ही मेरा ससार है। दोनो के सयुक्त होने से सम्पूर्ण क्रियाए संचालित होती हैं, इन्हीं क्रियाओं की शुभता एव अशुभता के आधार पर पुण्य एव पाप कर्मों का बधन होता है तथा इसी कर्मबधन के फलस्वरूप जन्म-मरण का क्रम चलता है । मै इसी सासारिकता के चक्र मे भव-भवान्तर में भ्रमण कर रहा हूँ तथा इसी प्रकार समस्त ससारी जीव भी ससार- परिभ्रमण कर रहे है । जब समग्र कर्म-बधनो को समाप्त कर लेने पर मेरी आत्मा सूक्ष्म स्थूल देह के बधन से मुक्त हो जायगी तब वह सिद्ध हो जायेगी और सदा-सदा के लिये सिद्ध ही रहेगी। वह पुन' कभी भी संसार मे अवतरित नही होगी। आत्मा का अपने मुक्त एव शुद्ध स्वरूप मे पहुँच जाना ही उसका मोक्ष होता है। आत्मा एव शरीर सयुक्त है तब तक ही ससार है। ससार मे रहते हुए मेरी आत्मा एव मेरी देह के सयोग को गति, स्थिति, अवकाश एव व्यतीति के सम्वल की आवश्यकता होती है। जीव एव अजीव पुद्गल द्रव्यो के सिवाय शेष चार द्रव्य-धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, आकाशास्तिकाय एव काल ये चारों उपरोक्त सम्वल उपलब्ध कराते है। मै गति करता हूँ तो उसमे धर्मास्तिकाय का सम्बल मिलता है, अधर्मास्ति काय के योग से ठहरने की स्थिति बनती है। इस अवकाश मे समस्त क्रियाएँ आकाशास्तिकाय की सहायता से चलती हैं एव काल द्रव्य व्यतीत करने का कार्य करता है । यो सभी द्रव्यो मे जीव प्रमुख है जो जड़ कर्मों से सलग्न बनकर ससार मे विविध प्रकार की रचनाओं का निर्माता बनता है। कर्मों की सलग्रता से जीव विभिन्न प्रकार के शरीरो को धारण करने वाला बनाता है और शरीर दस प्रकार के प्राणो के बल पर टिके रहते है। इसलिये जीव को प्राणधारी या प्राणी भी कहते है । मै प्राणधारी हूँ इसलिये अपने दस प्राणो की सहायता से अनुभव कर सकता हूँ कि मै प्राणधारी क्यो कहलाता हूँ ? सीधी सी बात है कि प्राणो को धारण करने से मै प्राणधारी हूँ। तो प्रश्न उठता है कि ये प्राण कितने है और कौनसे हैं? मुझ द्वारा धारण किये गये द्रव्य प्राणो की संख्या दस है। और भाव प्राण मेरी आन्तरिक शक्ति रूप ज्ञान, दर्शन, सुख और सत्ता रूप होते है। मैं सुनता हूँ, यह मेरा श्रोतेन्द्रिय प्राण है। इसी प्रकार मै देखता हूँ, मैं सूघता हूँ, मै चखता हूँ और मै स्पर्शानुभव करता हू जो क्रमश चक्षुरीन्द्रिय प्राण, घ्राणेन्द्रिय प्राण, रसनेन्द्रिय प्राण तथा स्पर्शेन्द्रिय प्राण कहलाते हैं। फिर मेरे मन, वचन एवं काया रूप तीन प्राण श्वासोश्वास एवं आयुष्य बल रूप दो प्राण और होते हैं। चैतन्य लक्षण से युक्त जीव तथा नाशवान स्वभावी अजीव के ससारी संयोग की ये प्राण ही कड़ियाँ हैं, जिनसे ऐसा चेतन, इस ससार मे चित्र विचित्र दृश्यो का चितेरा, विविध प्रकार के निर्माणो का निर्माता तथा ज्ञान-विज्ञान के गहन अनुसंधानो का अध्येता बनता है। यह ससार एक रगमच है और मैं तथा मेरे जैसे अन्य जीव इस रगमच के कलाकार हैं। कर्म से प्रेरित होकर विविधजन्मो मे नाना प्रकार के शरीर धारण करता हूँ। मैं ही कभी पिता होता हूँ, तो कभी भाई, पुत्र और पौत्र भी हो जाता हूँ। कभी माता बनकर स्त्री और पुत्री भी हो जाता हूँ। यह ससार की विचित्रता है कि स्वामी दास बन जाता है और दास स्वामी। एक ही जन्म मे राजा से रंक और रक से राजा बन जाता हूँ। मैं ससार के सभी क्षेत्रो मे रहा हूँ, सभी जातियो, कुलो व योनियो मे मैंने जन्म लिया है और प्रत्येक जीव के साथ किसी न किसी रूप मे एव कभी न कभी नाता जोड़ा है किन्तु अनन्त काल व्यतीत हो जाने पर भी मुझे इस ससार मे विश्राम नहीं मिला है। मैंने इस ससार मे कर्मवश परिभ्रमण करते हुए लोकाकाश के एक-एक प्रदेश को अनन्ती बार व्याप्त किया किन्तु उसका अन्त नहीं आया। नरक गति मे जाकर मैने वहाँ होने वाली शीत, ऊष्ण एव अन्य प्रकार की वेदनाएँ सहन कीं, तिर्यञ्चगति मे भूख, प्यास, रोग, वध, बधन, ताड़न, भारारोपण आदि दु ख प्रत्यक्ष देखे तथा विविध सुखो की सामग्री होते हुए भी देव जन्म में मैं शोक, भय, ईर्ष्या आदि दुखो से दुखित रहा। मनुष्य गति मे तो मै वर्तमान में हूँ ही । गर्भ से लेकर वृद्धावस्था एव मृत्यु तक कितने दुख भोगने पड़ते हैं - यह मै स्वय अनुभव करता हूँ, समझता हूँ और देखता हूँ। चारो ओर दृष्टि फैलाता हूँ तो मुझे दिखाई देता है कि कोई रोग पीड़ित है, कोई धन, जन के अभाव में चिन्तित है, कोई स्त्री पुत्र के विरह से सतप्त है और कोई दारिद्र्य दु ख से दबा हुआ है। मै चारो ओर दुख ही दुख देखता हूँ कि कही युद्ध चल रहा है तो कहीं साम्प्रदायिक या जातिवादी संघर्ष हो रहा है। कहीं अनावृष्टि से अकाल का हाहाकार है तो कहीं अतिवृष्टि से जल प्लावन की त्राहि-त्राहि मची हुई है। घर-घर कलह का अखाड़ा बना हुआ है, स्वार्थवश भाई अपने ही भाई का खून पी रहा है और माता-पिता व सन्तान के बीच मे भी कटुता चल रही है। सारा संसार दु ख और द्वन्द्वो से भरा हुआ है, कहीं भी शान्ति के दर्शन नहीं होते। ससार के इन्हीं दुख द्वन्दो के बीच जब मैं गहराई से चिन्तन करता हूं तो मुझे लगता है कि सामाजिक प्राणी होने के नाते अभावो, पीड़ाओं और विषमताओं से त्रस्त अपने साथियो एव समस्त प्राणियों के प्रति भी मेरे कुछ कर्त्तव्य हैं। मैं अपना आत्म योग देकर भी दूसरो के अभावो, पीड़ाओं, विषमताओं को कम कर सकू तो उस दिशा मे मुझे नि स्वार्थ भाव से कार्य करना चाहिये । यह परोपकार की निष्ठा और क्रिया ही मुझे मेरे आत्म-विकास से जोड़ने वाली बनती है क्योंकि स्वार्थ छूटता है तभी परोपकार हो सकता है और परोपकार की वृत्ति बनती है तो अपनी आन्तरिकता में एक अनूठे जागरण का आनन्द फूटता है । यही आनन्द जब बढ़ता जाता है तो मुझे परमानन्द से साक्षात्कार करने की ओर आगे बढ़ा सकता है । संसार के संसरण में 'मै' यो देखे तो इस ससार को बनाने वाला 'मै' हूँ और मेरे जैसी आत्माएँ है। किन्तु मेरे तथा सभी संसारी आत्माओं के कर्मों की विडम्बना यह है कि हम इस ससार से बध गये है। ये आत्माएँ ही कर्मों से लिप्त होकर संसारी बनी हुई हैं जिनके विविध रूप दृष्टिगोचर होते है । समस्त ससारी आत्माओं को इन दो-दो विभागो मे विभक्त कर सकते है त्रस और स्थावर सूक्ष्म और बादर, पर्याप्त और अपर्याप्त, सज्ञी और असज्ञी, अल्प संसारी और अनन्त ससारी, सुलभ बोधि और दुर्लभ बोधि, कृष्ण पक्षी और शुक्लपक्षी, भवसिद्धिक और अभवसिद्धिक एव आहारक और अनाहारक। वैसे ससारी जीवो की चार श्रेणियाँ मानी गई है - (१) प्राणी - विकलेन्द्रिय याने दो, तीन व चार इन्द्रियो वाले जीव (२) भूत - वनस्पति काया के जीव (३) जीव-पचेन्द्रिय प्राणी तथा ( ४ ) सत्त्व - पृथ्वी, पानी, अग्नि और वायु के स्थावर जीव । इस ज्ञान के कारण जीव को विज्ञ, तो सुख दुख की सवेदना के कारण उसे वेद भी कहते है। ये ससारी आत्माएँ विभिन्न श्रेणियों के रूपो मे ढलती, बनती, बिगड़ती, उठती, गिरती नित नूतन रचनाएँ करती रहती हैं और इस ससार को अपने ससरण से संसार बनाती रहती है । मै आज ससारी जीव हॅू और सासारिकता से जुड़ा हुआ हूँ। किन्तु जब अपनी साधना के बल पर मै इस ससार से मुक्त हो जाऊँगा तब सिद्ध बन जाऊंगा । तो समस्त जीवो के मोटे तौर पर दो वर्ग मान लीजिये - ससारी और सिद्ध । सिद्ध होने का अर्थ है ससार से मुक्त हो जाना - संसार की ससरण प्रक्रिया से सर्वथा सदा के लिये विलग हो जाना । आत्मा मुक्त होती है ससार से, इस ससार से जो चेतन जड़ सयोग पर टिका हुआ है । अत मुक्ति का मतलब है- चेतन का जड़ से सभी प्रकार के सम्बन्धो को सदा-सदा के लिये तोड़ देना । जब तक चेतन जड़ के साथ सम्बन्धित रहता है तब तक ही उसके लिये यह ससार है और उस दिशा में किये जाने वाले कर्मों के फलाफल के अनुसार उसे इस संसार में भ्रमण करना ही होता है। मै चैतन्य देव हूँ। मेरी आत्मा अनन्त चेतना शक्ति की धारक है किन्तु जड़ तत्त्वो के साथ बधी हुई है - शरीर में स्थित है। जड़-चेतन सगम स्वरूप यह शरीर अपने मन, वचन, काया के जिस प्रकार के यौगिक व्यापार में विचरता है तथा जिस प्रकार तज्जन्य विचार और आचार से सक्रिय होता है, उसी सक्रियता के परिणामस्वरूप शुभ अथवा अशुभ कर्मों से यह आत्मा वद्ध होती है। आत्मा का शरीर मृत्यु के उपरान्त वदल जाता है किन्तु बिना अपना फलभोग दिये निकाचित कर्म नहीं बदलते। वे कर्म आत्मा से जुड़े रहकर इसके शरीर की अवस्था मे भी याने कि भावी जीवन मे भी अपना शुभ अथवा अशुभ फल देते है। कर्म और फल का चक्र चलता रहता है जब तक कि कार्य-कारण रूप इन दोनो को पूर्णत समाप्त नही कर दिया जाता । अत कर्म के चक्र मे मै ससार बनाता हूँ। कर्म चक्र की समाप्ति के साथ ही जड़ चेतन सयोग टूट जायगा तथा 'मै' ससार से भी नाता तोड़ दूगा । तब 'मै' शुद्ध स्वरूपी सिद्ध बन जाऊगा । इसलिये 'मैं' ही ससार हूँ और जब मै ही अपने आत्म पुरुषार्थ की उच्चतम सफलता साध लूंगा तो समझिये कि 'मै' ही सिद्ध हो जाऊँगा । इस प्रकार इस ससार के ससरण में सारी लीला फैली हुई है मेरी बद्ध आत्मा की तथा उन अनन्त बद्ध आत्माओं की जो जब तक मुक्त नहीं हो जाती, इस ससार मे भटकती रहने को विवश हैं। ससार के ससरण का इस रूप में अनन्त अनन्त आत्माओं के साथ 'मै' भी एक कारण भूत हू । क्योंकि 'भै' अपने मूल स्वरूप की विकृति के साथ सासारिक जड़ता से ग्रस्त हॅू एक मैल पुते आईने की तरह निष्प्रभ होकर । मेरी स्व-चेतना की प्रभा कभी किन्हीं गुरु की कृपा से उभरी भी तो मूल पर चढ़ी विकृति की परतो को जानकर भी स्वच्छ कर लेने में मैं विफल रहा। यह अवश्य है कि इस विफलता ने मेरी आत्मा को कौचा है और प्रेरणा दी है कि वह और अधिक पराक्रम दिखावे, अधिक पुरुषार्थ करे और अधिक तीव्र गति से मुक्ति की ओर आगे बढ़े। इसी प्रेरणा ने मेरे 'भै' को जमाया है यह जानने के लिए कि वास्तव मे वह है कौन ? उसका मूल स्वरूप क्या है और उसका वर्तमान धूलि धूसरित अपरूप क्यो बन गया है ? ससार के संसरण मे यह 'मै' कितना विवश बन गया है और क्यो ? किन्तु यदि यह 'मै' सचेतन होकर जाग उठे तो वह किस प्रकार अनन्त ज्ञान, अनन्त दर्शन एवं अनन्त शक्ति का वाहक बन सकता है ? तब उसका मूल स्वरूप कितना परमोज्ज्वल भव्य एव जाज्वल्यमान हो उठेगा ? मेरा 'मै' ही अपना वास्तविक परिचय अपने को दू और उसे पूर्ण गहनता से हृदयगम करू - यह परमावश्यक है। मै अभी ससारी हॅू, कर्मों से लिप्त हूँ, वरन् मै भी 'सिद्धो जैसा जीव' हूँ - यह जानता हूँ तथा अपनी क्षमता को पहिचानता हूँ कि 'जीव सोई सिद्ध होय ।' मूल मे मेरा आत्म स्वरूप परम विशुद्ध है किन्तु मेरा अनन्त ज्ञान, अनन्त दर्शन, अनन्त वीर्य एव अनन्त सुख कर्म रूपी काले बादलो से ढका हुआ है। अभी मेरी ये आत्म शक्तियाँ भले ढकी हुई है किन्तु यह सुनिश्चित है कि इनके अस्तित्व का लोप नही है। जब भी मेरा सत्पुरुषार्थ पूर्णत प्रतिफलित हो जायगा । ये सम्पूर्ण शक्तियाँ अपनी पूरी प्रभा के साथ मेरे आत्म-स्वरूप में प्रकाशमान हो उठेगी। वैसे वर्तमान मे 'मैं' द्रव्य रूप हूँ क्योंकि गुण और पर्याय का धारक हूँ, कषाय रूप हूँ क्योकि काषायिक वृत्तियों से ग्रस्त होता रहता हूँ। योग रूप हूँ क्योकि मन, वचन तथा काया के योगो का व्यापार मेरे साथ निरन्तर चलता रहता है । 'मै' उपयोग रूप हूँ, क्योकि उपयोग मे मेरा मूल लक्षण है। 'मैं' ज्ञान रूप हूँ, दर्शन रूप हूँ, चारित्र्य रूप हूँ एव वीर्य रूप हूँ क्योंकि अपने ज्ञान, दर्शन एव चारित्र्य की उच्च कोटि की साधना को सफल बनाकर मै अनन्त वीर्य का धारक हो सकता हूँ। मेरी आत्मा के ये आठो प्रकार उसके मूल एव वर्तमान स्वरूप को स्पष्ट करते है। सभी ससारी आत्माओं की तरह द्रव्य, वीर्य, ज्ञान, दर्शन और उपयोग प्रत्येक समय मे मेरे भीतर विद्यमान रहते है। कषाय तब विद्यमान रहती है, जब मेरी आत्मा सकषायी होती है और योग भी तब जब वह सयोगी होती है। आत्मा को सम्यक्-दृष्टि प्राप्त होने पर ज्ञान की सुलभता होती है तो सर्वविरति मुनियो को चारित्र्य की प्राप्ति । समुच्चय मे कहा जा सकता है कि मेरी ही तरह सभी ससारी आत्माओं मे ये आठ प्रकार देखे जा सकते है । ससार के ससरण एव सचरण मे अपनी इतनी सारी प्रछन्न शक्तियों के बावजूद मेरा 'मै' अत्यन्त विचित्र है क्योकि वह अपने आप से उतना ही विस्मृत भी है। 'मै' जब स्व-तत्त्व को भूलकर आत्म विस्मृत बन जाता है, तब उसका यही अर्थ लगाया जा सकता है कि पर तत्त्वो की गहरी उलझन मेरे आत्म स्वरूप पर छाई हुई है जो उसके गुण-विकास को अवरुद्ध कर देती है। मैं है अपने चारो ओर दृश्य पदार्थों को देखता हूँ और उनमे अपने सुख को खोजता हूँ तो मुझे भ्रमपूर्ण यही विश्वास होता है कि उन पदार्थों मे ही मेरा सर्व सुख समाया हुआ है। मै तब अपने साथियो की व्यथा तथा सर्वहित को विसार कर अपने ही स्वार्थों के तग घेरो मे बद हो जाता हू। राग और द्वेष के उतार चढ़ाव मेरे भीतर की शुभता को ढक देते है। उन वृत्तियो और प्रवृत्तियो से घिर कर मै राक्षस बन जाता हू, समस्त सुखदायी पदार्थों को अपने और अपनो ही के लिये सचित करना चाहता हूँ। उन पदार्थों को दूसरो से छीनता हॅू और सबको अपने नियंत्रण मे बद करके दूसरो के कष्टदायक अभावो पर अट्टहास करता हू। किन्तु मै देखता हूँ कि मै ही नहीं, अन्य कई मनुष्य भी मेरी ही तरह ऐसी राक्षसी वृत्ति में उलझ रहे हैं। और इस तरह कटु संघर्ष चलता रहता है - पारस्परिक सम्बन्धो मे घोर तनाव फैलता रहता है । पदार्थों की प्राप्ति के लिये उभरती और बढ़ती हुई यह आपाधापी आपसी अन्याय और अत्याचार मे जब बदल जाती है तब परिस्थितियाँ असह्य हो उठती है। दमन और शोषण के तले चारो ओर हाहाकार मच जाता है। इस तरह होता है एक ओर कुछ ससारी आत्माओं के क्रूर पक्ष का फैलाव तो दूसरी ओर अनेकानेक आत्माओं के शोषण, दमन तथा उत्पीड़न का कारुणिक दृश्य । किन्तु यही क्रूर व्यवहार, यही शोषण और दमन प्रुबद्ध आत्माओं में नया विचार जगाता है । तब मनुष्य और मनुष्य के बीच मे समानता, स्वतन्त्रता एव भ्रातृत्व का नारा खड़ा होता है और मनुष्य जाति की वैचारिकता का एक नया आयाम सामने आता है, नया चिन्तन उभरता है और विकास की नई मंजिले कायम की जाती है। वाद, प्रतिवाद तथा समन्वय के इस चक्र मे चैतन्य तत्त्व का ही जागना, सोना, बगावत करना तथा बुराइयो को फेक कर अच्छाइयो से अपनी झोली को भर लेना दिखाई देता है । 'मै' ही इस वाद, प्रतिवाद तथा समन्वय के चक्र का प्रवर्तक होता हॅू किन्तु विडम्बना यही घटती है कि हर बार मै विकास को अधूरा ही छोड़ देता हूँ, उसे उन्नति की सर्वोच्च ऊँचाई तक ले जाने में असमर्थ ही रह जाता हूँ। मैं सफलता और विफलता के हिडोले मे ही झूलता रहता हूँ -- सफलता मे सर्वोच्च शिखर तक पहुँच नहीं पाता - इसी कारण ससार का ससरण निरन्तर चलता रहता है क्योकि अनेकानेक संसारी आत्माओं के साथ 'मै' उसमे ससरण करता रहता हूँ - उससे ऊपर उठकर ससार-मुक्त हो जाने मे हर बार विफल हो जाता हूँ। मूल्यात्मक चेतना की अभिव्यक्ति 'मै' जब सामाजिक अन्याय का प्रतिरोध करता हू, विकृति के विरुद्ध विद्रोह जगाता अथवा प्रतिवाद को हटा कर पुन वाद को प्रतिष्ठित करना चाहता हूँ तो मेरा यह सघर्ष मूल्यो के लिये लड़ा जाने वाला सघर्ष हो जाता है। मेरी चेतना मे मानवीयता के जो मूल्य सस्थापित होते हैं, उनकी प्रतिष्ठा मेरा कर्त्तव्य हो जाता है क्योंकि उन मूल्यों की पुन पुन प्रतिष्ठा मे ही मुझे सदाशयता का प्रसार दिखाई देता है वह सदाशयता जो एक से दूसरे की बाह थमवाकर सबको आत्म विकास की महायात्रा मे अग्रसर हो जाने की उत्प्रेरणा देती है। यही मेरी मूल्यात्मक चेतना की अभिव्यक्ति होती है ।
उसी परिपुष्ट अनुभूति एव नवागत आनन्द को लेकर मेरे मन मे तब महत्त्वाकाक्षाओं का ज्वार भी जागा है। अपने ही स्वार्थों को पूरा करने हेतु दूसरो को कुचल डालने की दुष्कल्पनाएँ भी मैने की थी तथा सासारिक 'ऊँचापन' पाने की घृणित लालसाओं ने मेरे मन, वचन एव कर्म को भी भटकाव की राह पर धकेला था, किन्तु यह मेरी चेतना के आह्वान तथा 'मै' पन की आनन्दानुभूति का ही सुफल था कि मैं उन अंधेरी गलियों से कुछ बाहर निकल सका, जहाँ से मुझे थोड़ा खुला आकाश और खुली रोशनी दिखाई देने लगी । तब मै अधकार से ज्योति की ओर बढ़ने लगा । इस प्रकार मै अपने वर्तमान जीवन मे ही सोया हॅू, गिरा हूँ, भटका हूँ। तब मेरी चेतना का प्रवाह अदृश्य भले हो गया हो किन्तु विलुप्त कभी नही हुआ। तभी तो वह पुन पुन प्रकट होता रहा है। मेरी चेतना पुन पुन जागती रही है और अपनी निरन्तरता का आभास देती रही है। सतत रूप से सतर्क रखने वाली ऐसी निरन्तर जागृति ही मुझे अपने सासारिक स्वार्थों मे फसने से दूर खीचती रही है और सबके हितो को सवारने की नवानन्दमय प्रेरणा देती रही है। इसी जागृति ने मेरे अन्त करण को सद्विवेक के ऐसे साचे मे ढाला है कि वह सबके हित में ही अपने हित को जाने-परखने लगा है। यह सच है कि यदि ऐसी सर्वप्राणहिताकाक्षा मेरे मन मे बलवती बन जाय एव क्रियाशील हो जाय तो मेरा अटल विश्वास है कि मेरी आत्म विकास की लम्बी यात्रा भाव-सरणियो मे ऊपर से ऊपर उत्थान पाती हुई अल्प समय मे भी सम्पन्नता एव पूर्णता को प्राप्त हो सकती है। यह भटकाव अनादिकालीन है वर्तमान जीवन मे मेरी आत्मा जो सासारिकता मे इधर उधर भटकती रहती है, वह भटकाव मात्र इसी जीवन का नहीं है, अपितु अनादिकालीन है। यह 'मै' वह मात्र ही नही हूँ, जो अभी बाहर से दिखाई दे रहा हूँ। बाह्य दृष्टि से वह तो मेरा वर्तमान शरीर मात्र है। अनादिकाल से मेरी आत्मा इस ससार मे अनेकानेक शरीर धारण करती रही है एव भव-भवान्तर में भ्रमण करती रही है । यह मानव शरीर मेरी आत्मा का वर्तमान निवास है । यह शरीर-निवास ही मेरी आत्मा की वास्तविकता का प्रतीक है। आत्म-विकास का चरम स्थल मोक्ष होता है अत जब तक मेरी आत्मा अपने चरम को नही पा लेती है तब तक आगे भी ससार में परिभ्रमण करती रहेगी। ससार का यह परिभ्रमण ही मेरी आत्मा का भटकाव है जो अनादिकाल से चल रहा है और मोक्ष प्राप्ति तक चलता रहेगा। जिस दिन मेरी आत्मा अपने समस्त कर्म बधनो को सम्पूर्णत विनष्ट कर लेगी और अपनी चेतना के प्रवाह को महासागर मे एकीभूति करने की दिशा मे तीव्र गति से मोड़ देगी, तव वह सिद्ध, बुद्ध और मुक्त वन जायगी। फिर न रहेगा बास और न बजेगी बासुरी। न भटकाव रहेगा, न जन्म-जन्मान्तर और न ससार- परिभ्रमण । मेरी आत्मा तब अनन्त ज्योतिर्मय रूप से अनन्त ज्ञान, दर्शन, वीर्य एव सुख अजर-अमर हो जायगी। इस चरम लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अग्रगामी बनने के लिये मुझे इस सासारिक भटकाव को गहराई से समझना होगा ताकि कारणो के सम्यक ज्ञान के द्वारा उनका निदान कर मै अपना समाधान पा सकू। अनादिकाल से अन्य सभी सांसारिक आत्माओं की तरह मेरी आत्मा भी ससार की चार गतियो एव चौरासी लाख योनियो मे चक्कर लगाती हुई भटक रही है। मैंने इन सब गतियो तथा योनियो मे बारम्बार जन्म लिये हैं, वहाँ की यातनाएँ तथा मूर्छाए भोगी है तथा कई बार चेतना जागृति के फलस्वरूप आत्म विकास की ऊँचाइयाँ भी साधी है। 'मै' ने यानि कि मेरी आत्मा ने वर्तमान जीवन से पहले नारकीय जीवन की लोमहर्षक यातनाएँ झेली है, तिर्यंच जीवन के क्रूर कष्टो को सहा है तो देवलोको के ऐश्वर्यमय जीवन के आनन्द भी उठाये है। किन्तु मै अपने लिये सन्तोष का विषय यही मानता हूँ कि इस ऊँचे-नीचे परिभ्रमण के दौरान मेरी चेतना का दीपक बराबर जलता रहा जो घटाटोप अधकार के समय मे भी मुझे रोशनी की राह दिखाता रहा । मै अपनी स्मृति को पीछे लौटाता हू तो देखता हू कि मैने बहतु प्राणियों की हिसा हो इस प्रकार तीव्र परिणामो से कपायपूर्वक महारभ की प्रवृत्ति की वस्तुओं पर अत्यन्त मूर्छा रखकर महापरिग्रह सेवन किया, पचेन्द्रिय प्राणियों की हिसा करते हुए पचेन्द्रिय वध किया तथा मासाहार करने मे रस लिया, जिसके कुफल मे मुझे नरकायु का बध हुआ। ऐसा बध कई बार हुआ और मैंने धम्मा, बशा, सीला, अजना, रिट्ठा मघा और माघवई - इन सातो नरको की भीषण यातनाएँ सहन की। मेरा रोम रोम आज भी खड़ा हो जाता है जब मुझे अपने अज्ञानतायुक्त नारकीय जीवन मे मिले अपार कष्ट याद आते हैं। हम नारकीयो का वैक्रिय शरीर होता था जो भीषण प्रहारो का दुख तो महसूस करता था किन्तु फिर से यथावत् हो जाता था। अधिकाशत हम नारकी के जीव ही भयकर रूप बना कर एक दूसरे को त्रास देते थे -- गदा, मुद्गर वगैरह शस्त्र बना कर एक दूसरे पर आक्रमण करते थे। बिच्छू, साप आदि बन कर एक दूसरे को काटते थे और नुकीले कीड़े बनकर एक दूसरे के शरीर मे घुस कर उसे क्षत-विक्षत कर डालते थे । अत्यन्त ऊष्ण अथवा अत्यन्त शीत होने के कारण क्षेत्रजन्य वेदना अलग होती थी तो पहली तीन नरको मे परमाधार्मिक देवता भी कठिन यातनाएँ देते थे । नारकीय यातनाओं का वर्णन करते हुए मेरी वाचा मे प्रकम्पन पैदा होता है। क्षेत्रजन्य ऊष्णता एव शीतलता की वेदना क्रमश एक से आगे की नरको मे तीव्र, तीव्रतर और तीव्रतम होती जाती थी। मध्य लोक मे ग्रीष्म ऋतु मे मध्याह्न के समय जब आकाश मे कोई बादल न हो, मे वायु बिल्कुल बन्द हो और सूर्य प्रचड रूप से तप रहा हो, उस समय पित्त प्रकृति वाला व्यक्ति जैसी ऊष्ण वेदना का अनुभव करता है, ऊष्ण वेदना वाले नरको मे उससे भी अनन्तगुणी वेदना होती थी उस वेदना की महसूसगिरी यह है कि अगर मुझे नरक से निकाल कर मर्त्यलोक मे बड़ी तेजी से जलते हुए खैर की लकड़ी के अगारो मे डाल दिया जाता तो मै शीतल जल से स्नान करने के समान अत्यन्त ही सुख का अनुभव करता और उन अगारो पर मुझे नीद भी आ जाती । इसी प्रकार शीत के प्रकोप की महसूसगिरी भी ऐसी थी कि जैसे मध्य लोक मे पौष या माघ की मध्यरात्रि मे आकाश के मेघशून्य होने पर जिस समय शरीर को बुरी तरह से कम्पायमान करने वाली शीत वायु चल रही हो, हिमालय गिरि के वर्फीले शिखर पर बैठा हुआ अग्नि, मकान और वस्त्रादि शीत निवारण के सभी साधनो से हीन व्यक्ति जैसी भीषण शीत वेदना का अनुभव करता है उससे भी जारी अपनी आत्मा के इस परिभ्रमण को समाप्त कर देने के लक्ष्य को सामने रख कर मै इस जीवन मे क्या-क्या करू ? अनेकानेक भव-भवान्तरों के प्रत्यक्ष अनुभव से मेरी चैतन्य शक्ति ने ससार के वास्तविक स्वरूप को जाना है तथा अनेक ज्ञानी आत्माओं के कथन से उसे पहिचाना भी है। किन्तु यह ज्ञान और पहिचान कभी सजग भी रही तो कभी विस्मृति के गर्त मे डूबती भी रही । अपने विकास की पूर्णता पर न पहुँच पाने तक चेतना के साथ ऐसा ही परिवर्तन होता रहता है और यही वस्तुत. सासारिकता है। द्रव्य संसार का स्वरूप क्या ? छोटी-सी परिभाषा है द्रव्यो का समूह रूप है । फिर प्रश्न होगा कि द्रव्य क्या ? जो गुण और पर्याय पर आधारित हो वह द्रव्य । गुणपर्यायवद् द्रव्यम्तत्त्वार्थ सूत्र पाँच/सैंतीस। गुण जो सदा एक सा रहे तथा पर्याय वह जो सदा बदलती रहे । यो द्रव्य छ होते है किंतु मुख्य है जीव और अजीव । अजीव मे शेष पाच द्रव्यो का समावेश हो जाता है। जीव का दूसरा नाम आत्मा है और आत्मा के सिवाय सभी अजीव है। जैसे मै हूँ। यह मै जो हूँ, वह आत्मा है किन्तु मेरी आत्मा मुक्त नही है, शरीरधारी है । अत. यह शरीर जो है, वह जड़ पुद्गलो से निर्मित है। इस प्रकार मेरे वर्तमान जीवन का अस्तित्व है मेरी आत्मा एव मेरे शरीर के सयोग से है । यह आत्मा एव शरीर का सयोग ही ससार है। इसके सिवाय भी जितनी दृश्यावलियाँ हैं, वे सब जड़ रूप हैं । यो कह सकते है कि इन चर्मचक्षुओं से जो कुछ भी दिखाई देता है, वे सब जड़ पदार्थ है। मुख्यत आत्माओं एव शरीरो का सयोग ही ससार की सारी हलचलो का मूल है । इन सारी हलचलो से ससरित होता हुआ ही यह संसार है । अत मेरी आत्मा और मेरी देह का सयोग ही मेरा ससार है। दोनो के सयुक्त होने से सम्पूर्ण क्रियाए संचालित होती हैं, इन्हीं क्रियाओं की शुभता एव अशुभता के आधार पर पुण्य एव पाप कर्मों का बधन होता है तथा इसी कर्मबधन के फलस्वरूप जन्म-मरण का क्रम चलता है । मै इसी सासारिकता के चक्र मे भव-भवान्तर में भ्रमण कर रहा हूँ तथा इसी प्रकार समस्त ससारी जीव भी ससार- परिभ्रमण कर रहे है । जब समग्र कर्म-बधनो को समाप्त कर लेने पर मेरी आत्मा सूक्ष्म स्थूल देह के बधन से मुक्त हो जायगी तब वह सिद्ध हो जायेगी और सदा-सदा के लिये सिद्ध ही रहेगी। वह पुन' कभी भी संसार मे अवतरित नही होगी। आत्मा का अपने मुक्त एव शुद्ध स्वरूप मे पहुँच जाना ही उसका मोक्ष होता है। आत्मा एव शरीर सयुक्त है तब तक ही ससार है। ससार मे रहते हुए मेरी आत्मा एव मेरी देह के सयोग को गति, स्थिति, अवकाश एव व्यतीति के सम्वल की आवश्यकता होती है। जीव एव अजीव पुद्गल द्रव्यो के सिवाय शेष चार द्रव्य-धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, आकाशास्तिकाय एव काल ये चारों उपरोक्त सम्वल उपलब्ध कराते है। मै गति करता हूँ तो उसमे धर्मास्तिकाय का सम्बल मिलता है, अधर्मास्ति काय के योग से ठहरने की स्थिति बनती है। इस अवकाश मे समस्त क्रियाएँ आकाशास्तिकाय की सहायता से चलती हैं एव काल द्रव्य व्यतीत करने का कार्य करता है । यो सभी द्रव्यो मे जीव प्रमुख है जो जड़ कर्मों से सलग्न बनकर ससार मे विविध प्रकार की रचनाओं का निर्माता बनता है। कर्मों की सलग्रता से जीव विभिन्न प्रकार के शरीरो को धारण करने वाला बनाता है और शरीर दस प्रकार के प्राणो के बल पर टिके रहते है। इसलिये जीव को प्राणधारी या प्राणी भी कहते है । मै प्राणधारी हूँ इसलिये अपने दस प्राणो की सहायता से अनुभव कर सकता हूँ कि मै प्राणधारी क्यो कहलाता हूँ ? सीधी सी बात है कि प्राणो को धारण करने से मै प्राणधारी हूँ। तो प्रश्न उठता है कि ये प्राण कितने है और कौनसे हैं? मुझ द्वारा धारण किये गये द्रव्य प्राणो की संख्या दस है। और भाव प्राण मेरी आन्तरिक शक्ति रूप ज्ञान, दर्शन, सुख और सत्ता रूप होते है। मैं सुनता हूँ, यह मेरा श्रोतेन्द्रिय प्राण है। इसी प्रकार मै देखता हूँ, मैं सूघता हूँ, मै चखता हूँ और मै स्पर्शानुभव करता हू जो क्रमश चक्षुरीन्द्रिय प्राण, घ्राणेन्द्रिय प्राण, रसनेन्द्रिय प्राण तथा स्पर्शेन्द्रिय प्राण कहलाते हैं। फिर मेरे मन, वचन एवं काया रूप तीन प्राण श्वासोश्वास एवं आयुष्य बल रूप दो प्राण और होते हैं। चैतन्य लक्षण से युक्त जीव तथा नाशवान स्वभावी अजीव के ससारी संयोग की ये प्राण ही कड़ियाँ हैं, जिनसे ऐसा चेतन, इस ससार मे चित्र विचित्र दृश्यो का चितेरा, विविध प्रकार के निर्माणो का निर्माता तथा ज्ञान-विज्ञान के गहन अनुसंधानो का अध्येता बनता है। यह ससार एक रगमच है और मैं तथा मेरे जैसे अन्य जीव इस रगमच के कलाकार हैं। कर्म से प्रेरित होकर विविधजन्मो मे नाना प्रकार के शरीर धारण करता हूँ। मैं ही कभी पिता होता हूँ, तो कभी भाई, पुत्र और पौत्र भी हो जाता हूँ। कभी माता बनकर स्त्री और पुत्री भी हो जाता हूँ। यह ससार की विचित्रता है कि स्वामी दास बन जाता है और दास स्वामी। एक ही जन्म मे राजा से रंक और रक से राजा बन जाता हूँ। मैं ससार के सभी क्षेत्रो मे रहा हूँ, सभी जातियो, कुलो व योनियो मे मैंने जन्म लिया है और प्रत्येक जीव के साथ किसी न किसी रूप मे एव कभी न कभी नाता जोड़ा है किन्तु अनन्त काल व्यतीत हो जाने पर भी मुझे इस ससार मे विश्राम नहीं मिला है। मैंने इस ससार मे कर्मवश परिभ्रमण करते हुए लोकाकाश के एक-एक प्रदेश को अनन्ती बार व्याप्त किया किन्तु उसका अन्त नहीं आया। नरक गति मे जाकर मैने वहाँ होने वाली शीत, ऊष्ण एव अन्य प्रकार की वेदनाएँ सहन कीं, तिर्यञ्चगति मे भूख, प्यास, रोग, वध, बधन, ताड़न, भारारोपण आदि दु ख प्रत्यक्ष देखे तथा विविध सुखो की सामग्री होते हुए भी देव जन्म में मैं शोक, भय, ईर्ष्या आदि दुखो से दुखित रहा। मनुष्य गति मे तो मै वर्तमान में हूँ ही । गर्भ से लेकर वृद्धावस्था एव मृत्यु तक कितने दुख भोगने पड़ते हैं - यह मै स्वय अनुभव करता हूँ, समझता हूँ और देखता हूँ। चारो ओर दृष्टि फैलाता हूँ तो मुझे दिखाई देता है कि कोई रोग पीड़ित है, कोई धन, जन के अभाव में चिन्तित है, कोई स्त्री पुत्र के विरह से सतप्त है और कोई दारिद्र्य दु ख से दबा हुआ है। मै चारो ओर दुख ही दुख देखता हूँ कि कही युद्ध चल रहा है तो कहीं साम्प्रदायिक या जातिवादी संघर्ष हो रहा है। कहीं अनावृष्टि से अकाल का हाहाकार है तो कहीं अतिवृष्टि से जल प्लावन की त्राहि-त्राहि मची हुई है। घर-घर कलह का अखाड़ा बना हुआ है, स्वार्थवश भाई अपने ही भाई का खून पी रहा है और माता-पिता व सन्तान के बीच मे भी कटुता चल रही है। सारा संसार दु ख और द्वन्द्वो से भरा हुआ है, कहीं भी शान्ति के दर्शन नहीं होते। ससार के इन्हीं दुख द्वन्दो के बीच जब मैं गहराई से चिन्तन करता हूं तो मुझे लगता है कि सामाजिक प्राणी होने के नाते अभावो, पीड़ाओं और विषमताओं से त्रस्त अपने साथियो एव समस्त प्राणियों के प्रति भी मेरे कुछ कर्त्तव्य हैं। मैं अपना आत्म योग देकर भी दूसरो के अभावो, पीड़ाओं, विषमताओं को कम कर सकू तो उस दिशा मे मुझे नि स्वार्थ भाव से कार्य करना चाहिये । यह परोपकार की निष्ठा और क्रिया ही मुझे मेरे आत्म-विकास से जोड़ने वाली बनती है क्योंकि स्वार्थ छूटता है तभी परोपकार हो सकता है और परोपकार की वृत्ति बनती है तो अपनी आन्तरिकता में एक अनूठे जागरण का आनन्द फूटता है । यही आनन्द जब बढ़ता जाता है तो मुझे परमानन्द से साक्षात्कार करने की ओर आगे बढ़ा सकता है । संसार के संसरण में 'मै' यो देखे तो इस ससार को बनाने वाला 'मै' हूँ और मेरे जैसी आत्माएँ है। किन्तु मेरे तथा सभी संसारी आत्माओं के कर्मों की विडम्बना यह है कि हम इस ससार से बध गये है। ये आत्माएँ ही कर्मों से लिप्त होकर संसारी बनी हुई हैं जिनके विविध रूप दृष्टिगोचर होते है । समस्त ससारी आत्माओं को इन दो-दो विभागो मे विभक्त कर सकते है त्रस और स्थावर सूक्ष्म और बादर, पर्याप्त और अपर्याप्त, सज्ञी और असज्ञी, अल्प संसारी और अनन्त ससारी, सुलभ बोधि और दुर्लभ बोधि, कृष्ण पक्षी और शुक्लपक्षी, भवसिद्धिक और अभवसिद्धिक एव आहारक और अनाहारक। वैसे ससारी जीवो की चार श्रेणियाँ मानी गई है - प्राणी - विकलेन्द्रिय याने दो, तीन व चार इन्द्रियो वाले जीव भूत - वनस्पति काया के जीव जीव-पचेन्द्रिय प्राणी तथा सत्त्व - पृथ्वी, पानी, अग्नि और वायु के स्थावर जीव । इस ज्ञान के कारण जीव को विज्ञ, तो सुख दुख की सवेदना के कारण उसे वेद भी कहते है। ये ससारी आत्माएँ विभिन्न श्रेणियों के रूपो मे ढलती, बनती, बिगड़ती, उठती, गिरती नित नूतन रचनाएँ करती रहती हैं और इस ससार को अपने ससरण से संसार बनाती रहती है । मै आज ससारी जीव हॅू और सासारिकता से जुड़ा हुआ हूँ। किन्तु जब अपनी साधना के बल पर मै इस ससार से मुक्त हो जाऊँगा तब सिद्ध बन जाऊंगा । तो समस्त जीवो के मोटे तौर पर दो वर्ग मान लीजिये - ससारी और सिद्ध । सिद्ध होने का अर्थ है ससार से मुक्त हो जाना - संसार की ससरण प्रक्रिया से सर्वथा सदा के लिये विलग हो जाना । आत्मा मुक्त होती है ससार से, इस ससार से जो चेतन जड़ सयोग पर टिका हुआ है । अत मुक्ति का मतलब है- चेतन का जड़ से सभी प्रकार के सम्बन्धो को सदा-सदा के लिये तोड़ देना । जब तक चेतन जड़ के साथ सम्बन्धित रहता है तब तक ही उसके लिये यह ससार है और उस दिशा में किये जाने वाले कर्मों के फलाफल के अनुसार उसे इस संसार में भ्रमण करना ही होता है। मै चैतन्य देव हूँ। मेरी आत्मा अनन्त चेतना शक्ति की धारक है किन्तु जड़ तत्त्वो के साथ बधी हुई है - शरीर में स्थित है। जड़-चेतन सगम स्वरूप यह शरीर अपने मन, वचन, काया के जिस प्रकार के यौगिक व्यापार में विचरता है तथा जिस प्रकार तज्जन्य विचार और आचार से सक्रिय होता है, उसी सक्रियता के परिणामस्वरूप शुभ अथवा अशुभ कर्मों से यह आत्मा वद्ध होती है। आत्मा का शरीर मृत्यु के उपरान्त वदल जाता है किन्तु बिना अपना फलभोग दिये निकाचित कर्म नहीं बदलते। वे कर्म आत्मा से जुड़े रहकर इसके शरीर की अवस्था मे भी याने कि भावी जीवन मे भी अपना शुभ अथवा अशुभ फल देते है। कर्म और फल का चक्र चलता रहता है जब तक कि कार्य-कारण रूप इन दोनो को पूर्णत समाप्त नही कर दिया जाता । अत कर्म के चक्र मे मै ससार बनाता हूँ। कर्म चक्र की समाप्ति के साथ ही जड़ चेतन सयोग टूट जायगा तथा 'मै' ससार से भी नाता तोड़ दूगा । तब 'मै' शुद्ध स्वरूपी सिद्ध बन जाऊगा । इसलिये 'मैं' ही ससार हूँ और जब मै ही अपने आत्म पुरुषार्थ की उच्चतम सफलता साध लूंगा तो समझिये कि 'मै' ही सिद्ध हो जाऊँगा । इस प्रकार इस ससार के ससरण में सारी लीला फैली हुई है मेरी बद्ध आत्मा की तथा उन अनन्त बद्ध आत्माओं की जो जब तक मुक्त नहीं हो जाती, इस ससार मे भटकती रहने को विवश हैं। ससार के ससरण का इस रूप में अनन्त अनन्त आत्माओं के साथ 'मै' भी एक कारण भूत हू । क्योंकि 'भै' अपने मूल स्वरूप की विकृति के साथ सासारिक जड़ता से ग्रस्त हॅू एक मैल पुते आईने की तरह निष्प्रभ होकर । मेरी स्व-चेतना की प्रभा कभी किन्हीं गुरु की कृपा से उभरी भी तो मूल पर चढ़ी विकृति की परतो को जानकर भी स्वच्छ कर लेने में मैं विफल रहा। यह अवश्य है कि इस विफलता ने मेरी आत्मा को कौचा है और प्रेरणा दी है कि वह और अधिक पराक्रम दिखावे, अधिक पुरुषार्थ करे और अधिक तीव्र गति से मुक्ति की ओर आगे बढ़े। इसी प्रेरणा ने मेरे 'भै' को जमाया है यह जानने के लिए कि वास्तव मे वह है कौन ? उसका मूल स्वरूप क्या है और उसका वर्तमान धूलि धूसरित अपरूप क्यो बन गया है ? ससार के संसरण मे यह 'मै' कितना विवश बन गया है और क्यो ? किन्तु यदि यह 'मै' सचेतन होकर जाग उठे तो वह किस प्रकार अनन्त ज्ञान, अनन्त दर्शन एवं अनन्त शक्ति का वाहक बन सकता है ? तब उसका मूल स्वरूप कितना परमोज्ज्वल भव्य एव जाज्वल्यमान हो उठेगा ? मेरा 'मै' ही अपना वास्तविक परिचय अपने को दू और उसे पूर्ण गहनता से हृदयगम करू - यह परमावश्यक है। मै अभी ससारी हॅू, कर्मों से लिप्त हूँ, वरन् मै भी 'सिद्धो जैसा जीव' हूँ - यह जानता हूँ तथा अपनी क्षमता को पहिचानता हूँ कि 'जीव सोई सिद्ध होय ।' मूल मे मेरा आत्म स्वरूप परम विशुद्ध है किन्तु मेरा अनन्त ज्ञान, अनन्त दर्शन, अनन्त वीर्य एव अनन्त सुख कर्म रूपी काले बादलो से ढका हुआ है। अभी मेरी ये आत्म शक्तियाँ भले ढकी हुई है किन्तु यह सुनिश्चित है कि इनके अस्तित्व का लोप नही है। जब भी मेरा सत्पुरुषार्थ पूर्णत प्रतिफलित हो जायगा । ये सम्पूर्ण शक्तियाँ अपनी पूरी प्रभा के साथ मेरे आत्म-स्वरूप में प्रकाशमान हो उठेगी। वैसे वर्तमान मे 'मैं' द्रव्य रूप हूँ क्योंकि गुण और पर्याय का धारक हूँ, कषाय रूप हूँ क्योकि काषायिक वृत्तियों से ग्रस्त होता रहता हूँ। योग रूप हूँ क्योकि मन, वचन तथा काया के योगो का व्यापार मेरे साथ निरन्तर चलता रहता है । 'मै' उपयोग रूप हूँ, क्योकि उपयोग मे मेरा मूल लक्षण है। 'मैं' ज्ञान रूप हूँ, दर्शन रूप हूँ, चारित्र्य रूप हूँ एव वीर्य रूप हूँ क्योंकि अपने ज्ञान, दर्शन एव चारित्र्य की उच्च कोटि की साधना को सफल बनाकर मै अनन्त वीर्य का धारक हो सकता हूँ। मेरी आत्मा के ये आठो प्रकार उसके मूल एव वर्तमान स्वरूप को स्पष्ट करते है। सभी ससारी आत्माओं की तरह द्रव्य, वीर्य, ज्ञान, दर्शन और उपयोग प्रत्येक समय मे मेरे भीतर विद्यमान रहते है। कषाय तब विद्यमान रहती है, जब मेरी आत्मा सकषायी होती है और योग भी तब जब वह सयोगी होती है। आत्मा को सम्यक्-दृष्टि प्राप्त होने पर ज्ञान की सुलभता होती है तो सर्वविरति मुनियो को चारित्र्य की प्राप्ति । समुच्चय मे कहा जा सकता है कि मेरी ही तरह सभी ससारी आत्माओं मे ये आठ प्रकार देखे जा सकते है । ससार के ससरण एव सचरण मे अपनी इतनी सारी प्रछन्न शक्तियों के बावजूद मेरा 'मै' अत्यन्त विचित्र है क्योकि वह अपने आप से उतना ही विस्मृत भी है। 'मै' जब स्व-तत्त्व को भूलकर आत्म विस्मृत बन जाता है, तब उसका यही अर्थ लगाया जा सकता है कि पर तत्त्वो की गहरी उलझन मेरे आत्म स्वरूप पर छाई हुई है जो उसके गुण-विकास को अवरुद्ध कर देती है। मैं है अपने चारो ओर दृश्य पदार्थों को देखता हूँ और उनमे अपने सुख को खोजता हूँ तो मुझे भ्रमपूर्ण यही विश्वास होता है कि उन पदार्थों मे ही मेरा सर्व सुख समाया हुआ है। मै तब अपने साथियो की व्यथा तथा सर्वहित को विसार कर अपने ही स्वार्थों के तग घेरो मे बद हो जाता हू। राग और द्वेष के उतार चढ़ाव मेरे भीतर की शुभता को ढक देते है। उन वृत्तियो और प्रवृत्तियो से घिर कर मै राक्षस बन जाता हू, समस्त सुखदायी पदार्थों को अपने और अपनो ही के लिये सचित करना चाहता हूँ। उन पदार्थों को दूसरो से छीनता हॅू और सबको अपने नियंत्रण मे बद करके दूसरो के कष्टदायक अभावो पर अट्टहास करता हू। किन्तु मै देखता हूँ कि मै ही नहीं, अन्य कई मनुष्य भी मेरी ही तरह ऐसी राक्षसी वृत्ति में उलझ रहे हैं। और इस तरह कटु संघर्ष चलता रहता है - पारस्परिक सम्बन्धो मे घोर तनाव फैलता रहता है । पदार्थों की प्राप्ति के लिये उभरती और बढ़ती हुई यह आपाधापी आपसी अन्याय और अत्याचार मे जब बदल जाती है तब परिस्थितियाँ असह्य हो उठती है। दमन और शोषण के तले चारो ओर हाहाकार मच जाता है। इस तरह होता है एक ओर कुछ ससारी आत्माओं के क्रूर पक्ष का फैलाव तो दूसरी ओर अनेकानेक आत्माओं के शोषण, दमन तथा उत्पीड़न का कारुणिक दृश्य । किन्तु यही क्रूर व्यवहार, यही शोषण और दमन प्रुबद्ध आत्माओं में नया विचार जगाता है । तब मनुष्य और मनुष्य के बीच मे समानता, स्वतन्त्रता एव भ्रातृत्व का नारा खड़ा होता है और मनुष्य जाति की वैचारिकता का एक नया आयाम सामने आता है, नया चिन्तन उभरता है और विकास की नई मंजिले कायम की जाती है। वाद, प्रतिवाद तथा समन्वय के इस चक्र मे चैतन्य तत्त्व का ही जागना, सोना, बगावत करना तथा बुराइयो को फेक कर अच्छाइयो से अपनी झोली को भर लेना दिखाई देता है । 'मै' ही इस वाद, प्रतिवाद तथा समन्वय के चक्र का प्रवर्तक होता हॅू किन्तु विडम्बना यही घटती है कि हर बार मै विकास को अधूरा ही छोड़ देता हूँ, उसे उन्नति की सर्वोच्च ऊँचाई तक ले जाने में असमर्थ ही रह जाता हूँ। मैं सफलता और विफलता के हिडोले मे ही झूलता रहता हूँ -- सफलता मे सर्वोच्च शिखर तक पहुँच नहीं पाता - इसी कारण ससार का ससरण निरन्तर चलता रहता है क्योकि अनेकानेक संसारी आत्माओं के साथ 'मै' उसमे ससरण करता रहता हूँ - उससे ऊपर उठकर ससार-मुक्त हो जाने मे हर बार विफल हो जाता हूँ। मूल्यात्मक चेतना की अभिव्यक्ति 'मै' जब सामाजिक अन्याय का प्रतिरोध करता हू, विकृति के विरुद्ध विद्रोह जगाता अथवा प्रतिवाद को हटा कर पुन वाद को प्रतिष्ठित करना चाहता हूँ तो मेरा यह सघर्ष मूल्यो के लिये लड़ा जाने वाला सघर्ष हो जाता है। मेरी चेतना मे मानवीयता के जो मूल्य सस्थापित होते हैं, उनकी प्रतिष्ठा मेरा कर्त्तव्य हो जाता है क्योंकि उन मूल्यों की पुन पुन प्रतिष्ठा मे ही मुझे सदाशयता का प्रसार दिखाई देता है वह सदाशयता जो एक से दूसरे की बाह थमवाकर सबको आत्म विकास की महायात्रा मे अग्रसर हो जाने की उत्प्रेरणा देती है। यही मेरी मूल्यात्मक चेतना की अभिव्यक्ति होती है ।
एक साथ एक लाख रुपये देने वाला नहीं मिला होगा । इस तरह अपना अहंकार प्रदर्शित करके उसने प्रकारान्तर से ब्राह्मण को होन और नीचा बताने का भाव दिखाया, तो भिक्षकवृत्ति का न होने से स्वाभिमानी ब्राह्मण ने भी जेब से एक रुपया निकाल कर उस चबूतरे पर डाला और बोला- 'तुम्हारे सरीखे दाता तो बहुत से मिल जाएँगे, - लेकिन मेरे सरीसे एक लाख को ठोकर मारकर कुछ अपनी ओर से मिलाकर चल देने वाले विरले ही मिलेगे ।' यों कहते हुए वह चल दिया । इसी प्रकार किसी को व्यंग्य वचन कहकर अनादृत करना भी दान का दूषण है । कई लोग दान देते समय बहुत बक्षक करते हैं । वे लेने वाले से कहते हैं- 'यों रोज-रोज चले जाते हो ! यहाँ तुम्हारा कुछ रखा हुआ है, जिसे लेने के लिए आ जाते हो । लो, इतना ही मिलेगा; लेना हो तो ले जाओ, नहीं तो रास्ता नापो । अधिक कहाँ से दे दूंगा । यों में सबको दान देने लगूं तो मेरा तो दीवाला निकल जाय । एक अश्रद्धालु दानदाता ने याचकों के प्रति दान के प्रति अश्रद्धा और दान लेने वालों के प्रति बेरुखी बताई थी, उसका एक नीतिज्ञ ने कितना सुन्दर उत्तर दिया है देखिए- 'इस भूतल पर में अकेला हो राजा (दाता) हूँ, और याचक एवं मिक्षुक तो लाखों है । मे किसको और क्या-क्या दे सकूँगा ? इस प्रकार की चिन्ता करना व्यर्थ है। क्या इस संसार में प्रत्येक याचक को देने के लिए एक-एक कल्पवृक्ष है ? क्या प्रत्येक कमल को खिलाने के लिए एक-एक सूर्य है ? अथवा प्रत्येक चातक को पानी पिलाने के लिए वथवा प्रत्येक लता और पोधे को सोंचने के लिए एक-एक बादल है ? निश्चित है कि संसार में ऐसा कुछ नहीं है। प्रत्युत एक ही कल्पवृक्ष अनेक याचकों की चिन्ता मिटाकर यथेष्ट वरतु दे देता है। एक ही सूर्य लाखों कमलों को अकेला विकसित कर देता है और एक ही मेघ अनेक चातकों की पिपासा मिटा देता है तथा अनेक बेलो एवं पौधों को अपना पानी देकर उन्हें समृद्ध बना देता है ।' एसलिए दान देने वाले के मन में यह चिन्ता भी व्यर्थ है, कि में अकेला कैसे इतने याचको को दे सकता हूँ ? इस कारण उनका तिरस्कार करना या उन्हें अपमानित करके रो-रोकर दान देना दान का बहुत बड़ा कलंक है । गाचार्य वृहस्पति ने भारतीय संस्कृति का स्वर मुखरित करते हुए दाता को सुन्दर परामर्श दिया है. १ एकोऽयं पृमिवीपतिः क्षितितले, लक्षाधिका भिक्षुकाः । कि कस्मै वितरिष्यतीति किमहो एतद्दृथा चिन्त्यते ।। वास्ते कि प्रतियाचकं सुरतरुः प्रत्यम्बुजं कि रविः ? कि वाइस्ति प्रतिचातकं, प्रतिलतागुल्मञ्च धाराधरः ? २ स्तोकादपि च दातव्यमदीनेनान्तरात्मना । अहन्यहनि यत्किञ्चित्कार्पण्यं न तत्स्मृतम् ॥
एक साथ एक लाख रुपये देने वाला नहीं मिला होगा । इस तरह अपना अहंकार प्रदर्शित करके उसने प्रकारान्तर से ब्राह्मण को होन और नीचा बताने का भाव दिखाया, तो भिक्षकवृत्ति का न होने से स्वाभिमानी ब्राह्मण ने भी जेब से एक रुपया निकाल कर उस चबूतरे पर डाला और बोला- 'तुम्हारे सरीखे दाता तो बहुत से मिल जाएँगे, - लेकिन मेरे सरीसे एक लाख को ठोकर मारकर कुछ अपनी ओर से मिलाकर चल देने वाले विरले ही मिलेगे ।' यों कहते हुए वह चल दिया । इसी प्रकार किसी को व्यंग्य वचन कहकर अनादृत करना भी दान का दूषण है । कई लोग दान देते समय बहुत बक्षक करते हैं । वे लेने वाले से कहते हैं- 'यों रोज-रोज चले जाते हो ! यहाँ तुम्हारा कुछ रखा हुआ है, जिसे लेने के लिए आ जाते हो । लो, इतना ही मिलेगा; लेना हो तो ले जाओ, नहीं तो रास्ता नापो । अधिक कहाँ से दे दूंगा । यों में सबको दान देने लगूं तो मेरा तो दीवाला निकल जाय । एक अश्रद्धालु दानदाता ने याचकों के प्रति दान के प्रति अश्रद्धा और दान लेने वालों के प्रति बेरुखी बताई थी, उसका एक नीतिज्ञ ने कितना सुन्दर उत्तर दिया है देखिए- 'इस भूतल पर में अकेला हो राजा हूँ, और याचक एवं मिक्षुक तो लाखों है । मे किसको और क्या-क्या दे सकूँगा ? इस प्रकार की चिन्ता करना व्यर्थ है। क्या इस संसार में प्रत्येक याचक को देने के लिए एक-एक कल्पवृक्ष है ? क्या प्रत्येक कमल को खिलाने के लिए एक-एक सूर्य है ? अथवा प्रत्येक चातक को पानी पिलाने के लिए वथवा प्रत्येक लता और पोधे को सोंचने के लिए एक-एक बादल है ? निश्चित है कि संसार में ऐसा कुछ नहीं है। प्रत्युत एक ही कल्पवृक्ष अनेक याचकों की चिन्ता मिटाकर यथेष्ट वरतु दे देता है। एक ही सूर्य लाखों कमलों को अकेला विकसित कर देता है और एक ही मेघ अनेक चातकों की पिपासा मिटा देता है तथा अनेक बेलो एवं पौधों को अपना पानी देकर उन्हें समृद्ध बना देता है ।' एसलिए दान देने वाले के मन में यह चिन्ता भी व्यर्थ है, कि में अकेला कैसे इतने याचको को दे सकता हूँ ? इस कारण उनका तिरस्कार करना या उन्हें अपमानित करके रो-रोकर दान देना दान का बहुत बड़ा कलंक है । गाचार्य वृहस्पति ने भारतीय संस्कृति का स्वर मुखरित करते हुए दाता को सुन्दर परामर्श दिया है. एक एकोऽयं पृमिवीपतिः क्षितितले, लक्षाधिका भिक्षुकाः । कि कस्मै वितरिष्यतीति किमहो एतद्दृथा चिन्त्यते ।। वास्ते कि प्रतियाचकं सुरतरुः प्रत्यम्बुजं कि रविः ? कि वाइस्ति प्रतिचातकं, प्रतिलतागुल्मञ्च धाराधरः ? दो स्तोकादपि च दातव्यमदीनेनान्तरात्मना । अहन्यहनि यत्किञ्चित्कार्पण्यं न तत्स्मृतम् ॥
नई दिल्ली। आरबीआई की तरफ से नोटबंदी के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने के बाद अब इनकम टैक्स विभाग का कहना है कि करीब 10 लाख लोगों पर उसकी नजर है। नोटबंदी के बाद इन लोगों के खाते में अधिक मात्रा में पैसे जमा कराए गए। इसकी जांच इनकम टैक्स विभाग की तरफ से की जा रही है। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कुल 9. 72 लाख लोगों ने कुल 13. 33 लाख खातों में 2. 89 लाख करोड़ रुपए जमा किए थे। इनकम टैक्स विभाग की इन 9. 72 लाख लोगों पर नजर है और इन्हें बताए बिना ही विभाग इस बात की जांच भी कर रहा है कि आखिर इतने पैसों का स्रोत क्या है। भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से नोटबंदी के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने के बाद अब आयकर विभाग ने अहम बयान दिया है। आयकर विभाग ने कहा है कि करीब 10 लाख लोगों पर उसकी नजर है। ये लोग नोटबंदी के दौरान संदिग्ध लोगों की श्रेणी में आ गए, क्योंकि इनके द्वारा खातों में अधिक मात्रा में पैसे जमा किए गए। इसकी जांच भी आयकर विभाग की तरफ से की जा रही है। यह सारे पैसे सिर्फ 3-4 सप्ताह के भीतर ही इन खातों में जमा करा दिए गए थे। वहीं दूसरी ओर, वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि नोटबंदी से काफी फायदा हुआ है। नोटबंदी के चलते लोगों को तरफ से फाइल किए जाने वाले टैक्स रिटर्न में कुल 5. 43 अधिक रिटर्न फाइल हुए हैं। कुल करदाताओं में 1. 26 करोड़ नए करदाता भी जुड़े हैं। आपको बता दें कि बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटबंदी का डेटा जारी किया था, जिसके अनुसार करीब 99 फीसदी नोट सिस्टम में वापस आ चुके हैं। RBI के आंकड़ों के अनुसार कुल 15. 44 लाख करोड़ रुपए में से 15. 28 लाख करोड़ रुपए RBI में वापस आ गए।
नई दिल्ली। आरबीआई की तरफ से नोटबंदी के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने के बाद अब इनकम टैक्स विभाग का कहना है कि करीब दस लाख लोगों पर उसकी नजर है। नोटबंदी के बाद इन लोगों के खाते में अधिक मात्रा में पैसे जमा कराए गए। इसकी जांच इनकम टैक्स विभाग की तरफ से की जा रही है। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कुल नौ. बहत्तर लाख लोगों ने कुल तेरह. तैंतीस लाख खातों में दो. नवासी लाख करोड़ रुपए जमा किए थे। इनकम टैक्स विभाग की इन नौ. बहत्तर लाख लोगों पर नजर है और इन्हें बताए बिना ही विभाग इस बात की जांच भी कर रहा है कि आखिर इतने पैसों का स्रोत क्या है। भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से नोटबंदी के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने के बाद अब आयकर विभाग ने अहम बयान दिया है। आयकर विभाग ने कहा है कि करीब दस लाख लोगों पर उसकी नजर है। ये लोग नोटबंदी के दौरान संदिग्ध लोगों की श्रेणी में आ गए, क्योंकि इनके द्वारा खातों में अधिक मात्रा में पैसे जमा किए गए। इसकी जांच भी आयकर विभाग की तरफ से की जा रही है। यह सारे पैसे सिर्फ तीन-चार सप्ताह के भीतर ही इन खातों में जमा करा दिए गए थे। वहीं दूसरी ओर, वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि नोटबंदी से काफी फायदा हुआ है। नोटबंदी के चलते लोगों को तरफ से फाइल किए जाने वाले टैक्स रिटर्न में कुल पाँच. तैंतालीस अधिक रिटर्न फाइल हुए हैं। कुल करदाताओं में एक. छब्बीस करोड़ नए करदाता भी जुड़े हैं। आपको बता दें कि बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटबंदी का डेटा जारी किया था, जिसके अनुसार करीब निन्यानवे फीसदी नोट सिस्टम में वापस आ चुके हैं। RBI के आंकड़ों के अनुसार कुल पंद्रह. चौंतालीस लाख करोड़ रुपए में से पंद्रह. अट्ठाईस लाख करोड़ रुपए RBI में वापस आ गए।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। महाराज चित्रगुप्त के परिवार में भटनागरों का स्थान भटनागर उत्तर भारत में प्रयुक्त होने वाला एक जातिनाम है, जो कि हिन्दुओं की कायस्थ जाति में आते है। इनका प्रादुर्भाव यमराज, मृत्यु के देवता, के पप पुण्य के अभिलेखक, श्री चित्रगुप्त जी की प्रथम पत्नी दक्षिणा नंदिनी के द्वितीय पुत्र विभानु के वंश से हुआ है। विभानु को चित्राक्ष नाम से भी जाना जाता है। महाराज चित्रगुप्त ने इन्हें भट्ट देश में मालवा क्षेत्र में भट नदी के पास भेजा था। इन्होंने वहां चित्तौर और चित्रकूट बसाये। ये वहीं बस गये और इनका वंश भटनागर कहलाया। . यमराज हिन्दू धर्म के अनुसार मृत्यु के देवता हैं। इनका उल्लेख वेद में भी आता है। इनकी जुड़वां बहन यमुना (यमी) है। यमराज, महिषवाहन (भैंसे पर सवार) दण्डधर हैं। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। वे परम भागवत, बारह भागवताचार्यों में हैं। यमराज दक्षिण दिशा के दिक् पाल कहे जाते हैं और आजकल मृत्यु के देवता माने जाते हैं। दक्षिण दिशा के इन लोकपाल की संयमनीपुरी समस्त प्राणियों के लिये, जो अशुभकर्मा हैं, बड़ी भयप्रद है। यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुभ्बर, दघ्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त - इन चौदह नामों से यमराज की आराधना होती है। इन्हीं नामों से इनका तर्पण किया जाता है। विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से भगवान सूर्य के पुत्र यमराज, श्राद्धदेव मनु और यमुना उत्पन्न हुईं। . भटनागर और यमराज आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): चित्रगुप्त। चित्रगुप्त एक प्रमुख हिन्दू देवता हैं। मिथकों और पुराणों के अनुसार धर्मराज चित्रगुप्त अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर के न्याय करने वाले बताए गये हैं। मान्यताओं के अनुसार कायस्थों को चित्रगुप्त का वंशज बताया जाता है। . भटनागर 24 संबंध है और यमराज 21 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 2.22% है = 1 / (24 + 21)। यह लेख भटनागर और यमराज के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। महाराज चित्रगुप्त के परिवार में भटनागरों का स्थान भटनागर उत्तर भारत में प्रयुक्त होने वाला एक जातिनाम है, जो कि हिन्दुओं की कायस्थ जाति में आते है। इनका प्रादुर्भाव यमराज, मृत्यु के देवता, के पप पुण्य के अभिलेखक, श्री चित्रगुप्त जी की प्रथम पत्नी दक्षिणा नंदिनी के द्वितीय पुत्र विभानु के वंश से हुआ है। विभानु को चित्राक्ष नाम से भी जाना जाता है। महाराज चित्रगुप्त ने इन्हें भट्ट देश में मालवा क्षेत्र में भट नदी के पास भेजा था। इन्होंने वहां चित्तौर और चित्रकूट बसाये। ये वहीं बस गये और इनका वंश भटनागर कहलाया। . यमराज हिन्दू धर्म के अनुसार मृत्यु के देवता हैं। इनका उल्लेख वेद में भी आता है। इनकी जुड़वां बहन यमुना है। यमराज, महिषवाहन दण्डधर हैं। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। वे परम भागवत, बारह भागवताचार्यों में हैं। यमराज दक्षिण दिशा के दिक् पाल कहे जाते हैं और आजकल मृत्यु के देवता माने जाते हैं। दक्षिण दिशा के इन लोकपाल की संयमनीपुरी समस्त प्राणियों के लिये, जो अशुभकर्मा हैं, बड़ी भयप्रद है। यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुभ्बर, दघ्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त - इन चौदह नामों से यमराज की आराधना होती है। इन्हीं नामों से इनका तर्पण किया जाता है। विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से भगवान सूर्य के पुत्र यमराज, श्राद्धदेव मनु और यमुना उत्पन्न हुईं। . भटनागर और यमराज आम में एक बात है : चित्रगुप्त। चित्रगुप्त एक प्रमुख हिन्दू देवता हैं। मिथकों और पुराणों के अनुसार धर्मराज चित्रगुप्त अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर के न्याय करने वाले बताए गये हैं। मान्यताओं के अनुसार कायस्थों को चित्रगुप्त का वंशज बताया जाता है। . भटनागर चौबीस संबंध है और यमराज इक्कीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक दो.बाईस% है = एक / । यह लेख भटनागर और यमराज के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
रोज़ाना स्पोक्समैन ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है। असली तस्वीर में सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर नहीं थी। Mohali, 11 November (Team RSFC)- सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में उन्हें पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर का फ्रेम पकड़े देखा जा सकता है। इस तस्वीर को यूज़र असली समझ कर वायरल कर रहे हैं। रोज़ाना स्पोक्समैन ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है। असली तस्वीर में सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर नहीं थी। ट्विटर यूज़र "kaur" ने वायरल तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ""No doubt. . . he is the king of Panjabi music industry. . . hun ta ene v man lya. . but still" इस पोस्ट को नीचे क्लिक कर देखा जा सकता है। पड़ताल की शुरुआत करते हुए हमने इस तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज टूल में अपलोड कर सर्च किया। हमें वायरल तस्वीर NDTV की 5 नवंबर 2015 की खबर में अपलोड मिला। खबर के अनुसार यह तस्वीर PM मोदी द्वारा सोने के सिक्के जिनमें अशोक चक्र चिन्हित है एंव सोने सबंधी स्कीमों लागु करने के दौरान की हैं। इस तस्वीर में PM के साथ स्वः मंत्री अरुण जेटली और देश की वित् मंत्री निर्मला सीतारमन को भी देखा जा सकता है। बता दें कि असली तस्वीर नरेंद्र मोदी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी 5 नवंबर 2015 को शेयर की गई थी। असल तस्वीर और वायरल तस्वीर के कोलाज को आप नीचे देख सकते हैं। नतीजा- रोज़ाना स्पोक्समैन ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है। असली तस्वीर में सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर नहीं थी।
रोज़ाना स्पोक्समैन ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है। असली तस्वीर में सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर नहीं थी। Mohali, ग्यारह नवंबरember - सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में उन्हें पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर का फ्रेम पकड़े देखा जा सकता है। इस तस्वीर को यूज़र असली समझ कर वायरल कर रहे हैं। रोज़ाना स्पोक्समैन ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है। असली तस्वीर में सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर नहीं थी। ट्विटर यूज़र "kaur" ने वायरल तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ""No doubt. . . he is the king of Panjabi music industry. . . hun ta ene v man lya. . but still" इस पोस्ट को नीचे क्लिक कर देखा जा सकता है। पड़ताल की शुरुआत करते हुए हमने इस तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज टूल में अपलोड कर सर्च किया। हमें वायरल तस्वीर NDTV की पाँच नवंबर दो हज़ार पंद्रह की खबर में अपलोड मिला। खबर के अनुसार यह तस्वीर PM मोदी द्वारा सोने के सिक्के जिनमें अशोक चक्र चिन्हित है एंव सोने सबंधी स्कीमों लागु करने के दौरान की हैं। इस तस्वीर में PM के साथ स्वः मंत्री अरुण जेटली और देश की वित् मंत्री निर्मला सीतारमन को भी देखा जा सकता है। बता दें कि असली तस्वीर नरेंद्र मोदी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी पाँच नवंबर दो हज़ार पंद्रह को शेयर की गई थी। असल तस्वीर और वायरल तस्वीर के कोलाज को आप नीचे देख सकते हैं। नतीजा- रोज़ाना स्पोक्समैन ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड है। असली तस्वीर में सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर नहीं थी।
NEET UG 2022: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। NEET UG 2022: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। नीट 2022 परीक्षा 17 जुलाई को आयोजित की जाएगी। इस संबंध में जारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन वेबसाइट neet. nic. in पर उपलब्ध है। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। यह परीक्षा देश भर में 13 भाषाओं में आयोजित की जाएगी। नीट 2022 परीक्षा ने इस वर्ष आयु वर्ग की श्रेणी में कुछ बदलाव किए हैं, जिसमें आवेदन करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। पहले 25 साल से कम उम्र के उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते थे। हालाँकि, मानदंड बदल गया है। एनटीए ने कहा कि ओपन स्कूल से या निजी उम्मीदवारों के रूप में कक्षा 12 पास करने वाले उम्मीदवार 'राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा' के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं होंगे। कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवार पात्र होंगे। हालांकि, अगर वे बोर्ड परीक्षा को पास करने में विफल रहते हैं, तो उन पर विचार नहीं किया जाएगा। सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 1,600 रुपये है, जबकि सामान्य-ईडब्ल्यूएस, ओबीसी-एनसीएल के लिए यह 1,500 रुपये है। एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी/थर्ड जेंडर के उम्मीदवारों को 900 रुपये हैं। एनआरआई उम्मीदवारों के लिए शुल्क 8,500 रुपये है।
NEET UG दो हज़ार बाईस: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। NEET UG दो हज़ार बाईस: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। नीट दो हज़ार बाईस परीक्षा सत्रह जुलाई को आयोजित की जाएगी। इस संबंध में जारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन वेबसाइट neet. nic. in पर उपलब्ध है। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। यह परीक्षा देश भर में तेरह भाषाओं में आयोजित की जाएगी। नीट दो हज़ार बाईस परीक्षा ने इस वर्ष आयु वर्ग की श्रेणी में कुछ बदलाव किए हैं, जिसमें आवेदन करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। पहले पच्चीस साल से कम उम्र के उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते थे। हालाँकि, मानदंड बदल गया है। एनटीए ने कहा कि ओपन स्कूल से या निजी उम्मीदवारों के रूप में कक्षा बारह पास करने वाले उम्मीदवार 'राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा' के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं होंगे। कक्षा दस की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवार पात्र होंगे। हालांकि, अगर वे बोर्ड परीक्षा को पास करने में विफल रहते हैं, तो उन पर विचार नहीं किया जाएगा। सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क एक,छः सौ रुपयापये है, जबकि सामान्य-ईडब्ल्यूएस, ओबीसी-एनसीएल के लिए यह एक,पाँच सौ रुपयापये है। एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी/थर्ड जेंडर के उम्मीदवारों को नौ सौ रुपयापये हैं। एनआरआई उम्मीदवारों के लिए शुल्क आठ,पाँच सौ रुपयापये है।
बिहार में तापमान में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही है। जिले में अगले दो दिनों तक लू चलने की संभावना है। इसको देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का आदेश दिया है। पटना। बिहार में तापमान में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही है। जिले में अगले दो दिनों तक लू चलने की संभावना है। इसको देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का आदेश दिया है। डीएम चंद्रशेखर की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, पटना में अब सुबह 10:45 बजे तक ही सभी स्कूल खुले रहेंगे। धारा 144 के तहत प्रातः 10:45 बजे के बाद सभी प्री-स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों सहित सभी शैक्षणिक गतिविधियों और सभी कक्षाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन आदेश के अनुरूप शैक्षणिक गतिविधियों की टाइमिंग में बदलाव करेंगे। डीएम की तरफ से जारी यह आदेश 19 अप्रैल से लागू होगा। पटना में लगातार बढ़ रहे तापमान की वजह से यह आदेश जारी किया गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पटना में 18 अप्रैल को शाम 5:30 बजे तक अधिकतम तापमान 44. 1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। जबकि अन्य 12 जिलों में हीट वेव रिकार्ड किया गया। इस पूरे सप्ताह बिहार में हीट वेव की आशंका जताई जा रही है। उधर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) पहले ही अगले दो दिनों के लिए लिए कई जिलों के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट जारी कर चुका है। उन जिलों में पटना, नवादा, बांका, जमुई, सुपौल, औरंगाबाद आदि जिले शामिल हैं। सोमवार को शेखपुरा, खगड़िया, पटना, डेहरी और गया में पारा 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। पटना में बढ़ती हुई गर्मी और लू बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का यह निर्णय लिया है। डीएम चंद्रशेखर की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, पटना के सभी निजी और सरकारी स्कूल सुबह 10:45 तक ही चल सकेंगे। पूर्व में यह समय 11:45 तक था। अब स्कूलों के खुलने की टाइमिंग एक घंटे और कम की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को राज्य के कई जगहों पर पारा 42 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। इनमें सबसे ज्यादा तापमान बांका (42. 9) में रिकार्ड किया गया। जमुई (42. 7), नालंदा (42. 7), भोजपुर (42. 6) व सीवान (42. 6) में भी बढ़ते हुए तापमान ने लोगों को परेशान कर रखा है। लोगों को गर्मी के प्रकोप से बचने की सलाह दी जा रही है।
बिहार में तापमान में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही है। जिले में अगले दो दिनों तक लू चलने की संभावना है। इसको देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का आदेश दिया है। पटना। बिहार में तापमान में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही है। जिले में अगले दो दिनों तक लू चलने की संभावना है। इसको देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का आदेश दिया है। डीएम चंद्रशेखर की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, पटना में अब सुबह दस:पैंतालीस बजे तक ही सभी स्कूल खुले रहेंगे। धारा एक सौ चौंतालीस के तहत प्रातः दस:पैंतालीस बजे के बाद सभी प्री-स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों सहित सभी शैक्षणिक गतिविधियों और सभी कक्षाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन आदेश के अनुरूप शैक्षणिक गतिविधियों की टाइमिंग में बदलाव करेंगे। डीएम की तरफ से जारी यह आदेश उन्नीस अप्रैल से लागू होगा। पटना में लगातार बढ़ रहे तापमान की वजह से यह आदेश जारी किया गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पटना में अट्ठारह अप्रैल को शाम पाँच:तीस बजे तक अधिकतम तापमान चौंतालीस. एक डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। जबकि अन्य बारह जिलों में हीट वेव रिकार्ड किया गया। इस पूरे सप्ताह बिहार में हीट वेव की आशंका जताई जा रही है। उधर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग पहले ही अगले दो दिनों के लिए लिए कई जिलों के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट जारी कर चुका है। उन जिलों में पटना, नवादा, बांका, जमुई, सुपौल, औरंगाबाद आदि जिले शामिल हैं। सोमवार को शेखपुरा, खगड़िया, पटना, डेहरी और गया में पारा तैंतालीस डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। पटना में बढ़ती हुई गर्मी और लू बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का यह निर्णय लिया है। डीएम चंद्रशेखर की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, पटना के सभी निजी और सरकारी स्कूल सुबह दस:पैंतालीस तक ही चल सकेंगे। पूर्व में यह समय ग्यारह:पैंतालीस तक था। अब स्कूलों के खुलने की टाइमिंग एक घंटे और कम की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को राज्य के कई जगहों पर पारा बयालीस डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। इनमें सबसे ज्यादा तापमान बांका में रिकार्ड किया गया। जमुई , नालंदा , भोजपुर व सीवान में भी बढ़ते हुए तापमान ने लोगों को परेशान कर रखा है। लोगों को गर्मी के प्रकोप से बचने की सलाह दी जा रही है।
सांपों की सैकड़ों प्रजातियों में ऐसे सांप भी पाए जाते हैं जो भूख लगने पर खुद को ही खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस वीडियो में एक सांप दूसरे सांप को खाने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है. जिसे देखकर हर कोई हैरान है. दुनिया में सांप सबसे ज्यादा खतरनाक जीवों में से एक है. सांप का नाम सुनकर भी इंसान खौफ में आ जाता है. इसी तरह सांप एक बड़ा और शानदार शिकारी भी कहा जाता है. हालांकि, जंगल के नियम के अनुसार शिकारी कब शिकार बन जाए, इसका कुछ कहा नहीं जा सकता है. यूं तो दुनिया में पूरे विश्व में सांपों (Snakes) की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई प्रजाति के सांप इतने ज्यादा जहरीले (Venomous Snakes) होते हैं कि उनके काटने से पीड़ित का जीवित रहना लगभग नामुमकिन होता है, लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा खतरनाक होता है किंग कोबरा, जिसका खौफ ऐसा कि इंसान तो इंसान जंगल का राजा शेर भी इससे उचित दूरी बनाकर ही चलता है. लेकिन क्या जब एक सांप दूसरे को सांप निगल जाए. इन दिनों एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है. जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. वीडियो में देख सकते हैं कि एक किंग कोबरा शिकार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा होता है, इसी दौरान उसे बिल में एक सांप नजर आता है विशालकाय सांप शिकार की तलाश में यहां वहां भटक रहा है कि तभी उसे एक बिल नजर आ जाता है. जिसे देखकर वह समझ जाता है कि उसे उसका शिकार यही मिलेगा. इसके लिए वह बिल में बेखौफ अंदाज में घुस जाता है. सांप का विशालकाय शरीर देखकर बिल में बैठा सांप आत्मसमर्पण कर देता है. अपने शिकार को दबोचने के लिए वह विशालकाय सांप गोल-गोल घूमना शुरू कर देता है जिससे उसका शिकार उसके कंट्रोल में आ जाए. जैसे ही सांप बिल के बाहर आता है वह उसे निगलना शुरू कर देता है.हालांकि देखते ही देखते नागराज दूसरे सांप को पूरा निगल जाता है और वहां से निकल जाता है.. कोबरा का शिकार करने का ये स्टाइल देखकर हर कोई हैरान है. दरअसल, सांपों की सैकड़ों प्रजातियों में ऐसे सांप भी पाए जाते हैं जो भूख लगने पर खुद को ही खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस वीडियो में एक सांप दूसरे सांप को खाने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है. इस सांप के इस हैरतअंगेज वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर snake._.world नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है.
सांपों की सैकड़ों प्रजातियों में ऐसे सांप भी पाए जाते हैं जो भूख लगने पर खुद को ही खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस वीडियो में एक सांप दूसरे सांप को खाने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है. जिसे देखकर हर कोई हैरान है. दुनिया में सांप सबसे ज्यादा खतरनाक जीवों में से एक है. सांप का नाम सुनकर भी इंसान खौफ में आ जाता है. इसी तरह सांप एक बड़ा और शानदार शिकारी भी कहा जाता है. हालांकि, जंगल के नियम के अनुसार शिकारी कब शिकार बन जाए, इसका कुछ कहा नहीं जा सकता है. यूं तो दुनिया में पूरे विश्व में सांपों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई प्रजाति के सांप इतने ज्यादा जहरीले होते हैं कि उनके काटने से पीड़ित का जीवित रहना लगभग नामुमकिन होता है, लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा खतरनाक होता है किंग कोबरा, जिसका खौफ ऐसा कि इंसान तो इंसान जंगल का राजा शेर भी इससे उचित दूरी बनाकर ही चलता है. लेकिन क्या जब एक सांप दूसरे को सांप निगल जाए. इन दिनों एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है. जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. वीडियो में देख सकते हैं कि एक किंग कोबरा शिकार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा होता है, इसी दौरान उसे बिल में एक सांप नजर आता है विशालकाय सांप शिकार की तलाश में यहां वहां भटक रहा है कि तभी उसे एक बिल नजर आ जाता है. जिसे देखकर वह समझ जाता है कि उसे उसका शिकार यही मिलेगा. इसके लिए वह बिल में बेखौफ अंदाज में घुस जाता है. सांप का विशालकाय शरीर देखकर बिल में बैठा सांप आत्मसमर्पण कर देता है. अपने शिकार को दबोचने के लिए वह विशालकाय सांप गोल-गोल घूमना शुरू कर देता है जिससे उसका शिकार उसके कंट्रोल में आ जाए. जैसे ही सांप बिल के बाहर आता है वह उसे निगलना शुरू कर देता है.हालांकि देखते ही देखते नागराज दूसरे सांप को पूरा निगल जाता है और वहां से निकल जाता है.. कोबरा का शिकार करने का ये स्टाइल देखकर हर कोई हैरान है. दरअसल, सांपों की सैकड़ों प्रजातियों में ऐसे सांप भी पाए जाते हैं जो भूख लगने पर खुद को ही खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस वीडियो में एक सांप दूसरे सांप को खाने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है. इस सांप के इस हैरतअंगेज वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर snake._.world नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है.
से बौद्धमत व नियतिवाद विशेष उल्लेखनीय हैं। इन दोनों के प्रवर्तक भगवान् महावीर के समकालोन थे । सांख्यसम्मत आत्मा के अकतुत्व का निरसन करते हुए सूत्रकार कहते हैं : जे ते उ वाइणो एवं लोगे तेसिं कओ सिया ? तमाओ तं तमं जंति मंदा आरंभनिस्सिआ । अर्थात् इन वादियों के मतानुसार संसार की जो व्यवस्था प्रत्यक्ष दिखाई देती है उसकी संगति कैसे होगी ? ये अंधकार से अंधकार में जाते हैं, मंद हैं, आरंभ-समारंभ में डूबे हुए हैं। उपर्युक्त गाथा के शब्दों से ऐसा मालूम होता है कि भगवान् महावीर के समय में अथवा सूत्रयोजक के युग में सांस्यमतानुयायी अहिंसाप्रधान अथवा अपरिग्रहप्रधान नहीं दिखाई देते थे । अज्ञानवाद : प्रस्तुत सूत्र के प्रथम अध्ययन के द्वितीय उद्देशक की छठी गाथा से जिस वाद की चर्चा प्रारंभ होती है व चौदहवों गाथा से जिसका खण्डन शुरू होता है उसे चूर्णिकार तथा वृत्तिकार ने 'अज्ञानवाद' नाम दिया है। नियुक्तिकार ने कहा है कि नियतिवाद के बाद क्रमशः अज्ञानवाद, ज्ञानवाद एवं बुद्ध के कमंचय को चर्चा आती है। नियुक्तिकारनिर्दिष्ट ज्ञानवाद की चर्चा चूरिंग अथवा वृत्ति में कहीं भी दिखाई नहीं देती । समवसरण नामक बारहवें अध्ययन में जिन मुख्य चार वादों का उल्लेख है उनमें अज्ञानवाद का भी समावेश है । स्वरूप वृत्तिकार ने इस प्रकार बताया है कि 'अज्ञानमेव श्रेय : मर्थात् अज्ञान ही कल्याणरूप है। अतः कुछ भी जानने की आवश्यकता नहीं है । ज्ञान प्राप्त करने से उलटी हानि होती है। ज्ञान न होने पर बहुत कम हानि होती है। उदाहरणार्थ जानकर अपराध किये जाने पर अधिक दण्ड मिलता है जब कि प्रज्ञानवश अपराध होने की स्थिति में दण्ड बहुत कम मिलता है प्रथवा बिलकुल नहीं मिलता। वृत्तिकार शीलांकाचार्यनिर्दिष्ट प्रज्ञानवाद का यह स्वरूप मूल गाथा में दृष्टिगोचर नहीं होता । यह गाथा इस प्रकार है : माहणा समणा एगे सव्वे नाणं सयं वए । सव्वलोगे वि जे पाणा न ते जाणंति किंचण ।। 'मर्थात् कई एक ब्राह्मण कहते हैं कि वे स्वयं ज्ञान को प्रतिपादित करते हैं, इस समस्त संसार में उनके अतिरिक्त कोई कुछ भी नहीं जानता । इस गाया का तात्पर्य यह है कि कुछ ब्राह्मणों एवं श्रमणों की दृष्टि से उनके प्रतिरिक्त सारा जगत् प्रज्ञानी है। यही अज्ञानवाद की भूमिका है। इसमें से 'अज्ञानमेव श्रेयः' का सिद्धान्त वृत्तिकार ने कैसे निकाला ? भगवान् महावीर के के समकालीन छ तीर्थंकरों में से संजय बेलद्विपुत्त नामक एक तीर्थंकर अज्ञानवादी था । संभवतः उसी के मत को ध्यान में रखते हुए उक्त गाया की रचना हुई हो । उसके मतानुसार तत्त्वविषयक अज्ञेयता अथवा अनिश्चयता ही अज्ञानवाद की प्राधारशिला है । यह मत पाश्चात्यदर्शन के अज्ञेयवाद अथवा संशयवाद से मिलता-जुलता है। कर्मचयवाद : द्वितीय उद्देशक के अन्त में भिक्षुसमय अर्थात् बोद्धमत के कर्मचयवाद की चर्चा है। यहाँ बौद्धदर्शन को सूत्रकार, चूर्णिकार तथा वृत्तिकार ने क्रियावादी अर्थात् कर्मवादी कहा है। सूत्रकार कहते हैं कि इस दर्शन की कर्मविषयक मान्यता दुःखस्कन्धे को बढ़ाने वाली है : अधावरं पुरक्खायं किरियावादिरिसणं । कम्मचिंताप गट्टाणं दुक्खक्खंधविवद्धणं ।।२४।। चूर्णिकार ने 'दुक्खक्संध' का अर्थ 'कमसमूह' किया है एवं वृत्तिकार ने 'सातोदयपरम्परा' अर्थात् 'दुःखपरम्परा' । दोनो की व्याख्या में कोई तात्त्विक भेद नहीं है क्योंकि दुःखपरम्परा कमँसमूहजन्य हो होती है। इस प्रसंग पर सूत्रकार ने बौद्धमतपरक एक गाथा इस आशय की भी दी है कि अमुक प्रकार की आपत्ति में फँसा हुआ असंयमी पिता यदि लाचारीवश अपने पुत्र को मार कर खा जाय तो भी वह कर्म से लिप्त नहीं होता। इस प्रकार के मांस- सेवन से मेघावी अर्थात् संयमी साधु भी कर्मलिप्त नहीं होता। गाथा इस प्रकार है : पुत्तं पिता समारंभ आहारटुमसंजते । भुंजमाणो वि मेधावी कम्मुणा णोवलिप्तं ॥ २८ ॥ १ बौद्धसम्मत चार आर्यसत्यों में से एक. २ चूर्णिकारसम्मत पाठ.
से बौद्धमत व नियतिवाद विशेष उल्लेखनीय हैं। इन दोनों के प्रवर्तक भगवान् महावीर के समकालोन थे । सांख्यसम्मत आत्मा के अकतुत्व का निरसन करते हुए सूत्रकार कहते हैं : जे ते उ वाइणो एवं लोगे तेसिं कओ सिया ? तमाओ तं तमं जंति मंदा आरंभनिस्सिआ । अर्थात् इन वादियों के मतानुसार संसार की जो व्यवस्था प्रत्यक्ष दिखाई देती है उसकी संगति कैसे होगी ? ये अंधकार से अंधकार में जाते हैं, मंद हैं, आरंभ-समारंभ में डूबे हुए हैं। उपर्युक्त गाथा के शब्दों से ऐसा मालूम होता है कि भगवान् महावीर के समय में अथवा सूत्रयोजक के युग में सांस्यमतानुयायी अहिंसाप्रधान अथवा अपरिग्रहप्रधान नहीं दिखाई देते थे । अज्ञानवाद : प्रस्तुत सूत्र के प्रथम अध्ययन के द्वितीय उद्देशक की छठी गाथा से जिस वाद की चर्चा प्रारंभ होती है व चौदहवों गाथा से जिसका खण्डन शुरू होता है उसे चूर्णिकार तथा वृत्तिकार ने 'अज्ञानवाद' नाम दिया है। नियुक्तिकार ने कहा है कि नियतिवाद के बाद क्रमशः अज्ञानवाद, ज्ञानवाद एवं बुद्ध के कमंचय को चर्चा आती है। नियुक्तिकारनिर्दिष्ट ज्ञानवाद की चर्चा चूरिंग अथवा वृत्ति में कहीं भी दिखाई नहीं देती । समवसरण नामक बारहवें अध्ययन में जिन मुख्य चार वादों का उल्लेख है उनमें अज्ञानवाद का भी समावेश है । स्वरूप वृत्तिकार ने इस प्रकार बताया है कि 'अज्ञानमेव श्रेय : मर्थात् अज्ञान ही कल्याणरूप है। अतः कुछ भी जानने की आवश्यकता नहीं है । ज्ञान प्राप्त करने से उलटी हानि होती है। ज्ञान न होने पर बहुत कम हानि होती है। उदाहरणार्थ जानकर अपराध किये जाने पर अधिक दण्ड मिलता है जब कि प्रज्ञानवश अपराध होने की स्थिति में दण्ड बहुत कम मिलता है प्रथवा बिलकुल नहीं मिलता। वृत्तिकार शीलांकाचार्यनिर्दिष्ट प्रज्ञानवाद का यह स्वरूप मूल गाथा में दृष्टिगोचर नहीं होता । यह गाथा इस प्रकार है : माहणा समणा एगे सव्वे नाणं सयं वए । सव्वलोगे वि जे पाणा न ते जाणंति किंचण ।। 'मर्थात् कई एक ब्राह्मण कहते हैं कि वे स्वयं ज्ञान को प्रतिपादित करते हैं, इस समस्त संसार में उनके अतिरिक्त कोई कुछ भी नहीं जानता । इस गाया का तात्पर्य यह है कि कुछ ब्राह्मणों एवं श्रमणों की दृष्टि से उनके प्रतिरिक्त सारा जगत् प्रज्ञानी है। यही अज्ञानवाद की भूमिका है। इसमें से 'अज्ञानमेव श्रेयः' का सिद्धान्त वृत्तिकार ने कैसे निकाला ? भगवान् महावीर के के समकालीन छ तीर्थंकरों में से संजय बेलद्विपुत्त नामक एक तीर्थंकर अज्ञानवादी था । संभवतः उसी के मत को ध्यान में रखते हुए उक्त गाया की रचना हुई हो । उसके मतानुसार तत्त्वविषयक अज्ञेयता अथवा अनिश्चयता ही अज्ञानवाद की प्राधारशिला है । यह मत पाश्चात्यदर्शन के अज्ञेयवाद अथवा संशयवाद से मिलता-जुलता है। कर्मचयवाद : द्वितीय उद्देशक के अन्त में भिक्षुसमय अर्थात् बोद्धमत के कर्मचयवाद की चर्चा है। यहाँ बौद्धदर्शन को सूत्रकार, चूर्णिकार तथा वृत्तिकार ने क्रियावादी अर्थात् कर्मवादी कहा है। सूत्रकार कहते हैं कि इस दर्शन की कर्मविषयक मान्यता दुःखस्कन्धे को बढ़ाने वाली है : अधावरं पुरक्खायं किरियावादिरिसणं । कम्मचिंताप गट्टाणं दुक्खक्खंधविवद्धणं ।।चौबीस।। चूर्णिकार ने 'दुक्खक्संध' का अर्थ 'कमसमूह' किया है एवं वृत्तिकार ने 'सातोदयपरम्परा' अर्थात् 'दुःखपरम्परा' । दोनो की व्याख्या में कोई तात्त्विक भेद नहीं है क्योंकि दुःखपरम्परा कमँसमूहजन्य हो होती है। इस प्रसंग पर सूत्रकार ने बौद्धमतपरक एक गाथा इस आशय की भी दी है कि अमुक प्रकार की आपत्ति में फँसा हुआ असंयमी पिता यदि लाचारीवश अपने पुत्र को मार कर खा जाय तो भी वह कर्म से लिप्त नहीं होता। इस प्रकार के मांस- सेवन से मेघावी अर्थात् संयमी साधु भी कर्मलिप्त नहीं होता। गाथा इस प्रकार है : पुत्तं पिता समारंभ आहारटुमसंजते । भुंजमाणो वि मेधावी कम्मुणा णोवलिप्तं ॥ अट्ठाईस ॥ एक बौद्धसम्मत चार आर्यसत्यों में से एक. दो चूर्णिकारसम्मत पाठ.
प्रयागराज (ब्यूरो)। अलोपीबाग निवासी अखिलेश कुमार तिवारी के खाते से केवाईसी अपडेट के नाम पर शातिर ने कई बार में एक लाख पचीस हजार रुपये की चपत लगा दी है। पीडि़त ने दारागंज पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वह अपने कार्यालय मुख्यचिकित्साकारी एआरओ कार्यालय पर डयूटी पर था। इसी बीच एक अज्ञात नंबर से फोन आया उसने कहा कि वह भारतीय स्टेट बैंक की शाखा एमएनआईटी प्रयागराज से बोल रहा है। आपके खाते की केवाईसी नहीं जमा है आपका खता बंद हो जायेगा। पीडित झांसे में आकर शातिर को आधार कार्ड की जानकारी दे दी। फोन आने पर कार्यालय के लोगों से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि बैंक या कोई भी जानकारी फोन पर किसी को नहीं देनी चाहिए। इसकी पुष्टि के लिए बैंक से संपर्क किया गया तो पतपा चला की शातिर तीन बार ने एक लाख पचीस हजार रुपये की चपत लगा दी थी। म्योराबाद निवासी अधिवक्ता मुजीब अहमद सिद्दीकी ने साइबर थाने में तहरीर देकर बताया कि उनके खाते से आनलाइन ठगी कर शातिरों ने छह लाख रुपये का चूना लगा दिया है। साइबर थाने की पुलिस केस दर्ज कर नंबर के आधार पर आरोपितों की तलाश कर रही है।
प्रयागराज । अलोपीबाग निवासी अखिलेश कुमार तिवारी के खाते से केवाईसी अपडेट के नाम पर शातिर ने कई बार में एक लाख पचीस हजार रुपये की चपत लगा दी है। पीडि़त ने दारागंज पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वह अपने कार्यालय मुख्यचिकित्साकारी एआरओ कार्यालय पर डयूटी पर था। इसी बीच एक अज्ञात नंबर से फोन आया उसने कहा कि वह भारतीय स्टेट बैंक की शाखा एमएनआईटी प्रयागराज से बोल रहा है। आपके खाते की केवाईसी नहीं जमा है आपका खता बंद हो जायेगा। पीडित झांसे में आकर शातिर को आधार कार्ड की जानकारी दे दी। फोन आने पर कार्यालय के लोगों से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि बैंक या कोई भी जानकारी फोन पर किसी को नहीं देनी चाहिए। इसकी पुष्टि के लिए बैंक से संपर्क किया गया तो पतपा चला की शातिर तीन बार ने एक लाख पचीस हजार रुपये की चपत लगा दी थी। म्योराबाद निवासी अधिवक्ता मुजीब अहमद सिद्दीकी ने साइबर थाने में तहरीर देकर बताया कि उनके खाते से आनलाइन ठगी कर शातिरों ने छह लाख रुपये का चूना लगा दिया है। साइबर थाने की पुलिस केस दर्ज कर नंबर के आधार पर आरोपितों की तलाश कर रही है।
PATNA : बिहार में कुढ़नी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों द्वारा जोरदार तैयारी की जा रही है। इस चुनाव को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन और मुख्य विरोधी दल भाजपा के तरफ से अपने प्रत्याशी के नाम का एलान भी कर दिया है। वहीं, इस बार यह सीट महागठबंधन में जदयू के खाते में गई है। इस सीट पर जदयू के तरफ से मनोज कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया गया है। जिसके बाद अब इसको लेकर भाजपा नेता और बिहार विधान परिषद् के नेता विपक्षी दल सम्राट चौधरी ने जोरदार हमला बोला है। भाजपा नेता ने कहा कि, बिहार में कुढ़नी सीट पर होने वाला चुनाव में अपार बहुमत से जीत्त हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम लोगों ने 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को हराया था, ठीक उसी तरह इस बार भी महागठबंधन चुनाव हारेगी। उन्होंने कहा कि हमारे प्रत्याशी केदार गुप्ता बेहद नेक और ईमानदार छवि के नेता हैं वो जरूर मनोज कुशवाहा को मात देंगे। वहीं, नीतीश कुमार के कुढ़नी में चुनाव प्रचार में जाने को लेकर सम्राट ने कहा कि नीतीश कुमार लव - कुश समीकरण को साधने में लगे हुए हैं , इस कारण वो वहां जाएंगे। लेकिन, इसके बाद भी कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है, क्यूंकि अब नीतीश कुमार के पास कोई वोट बैंक नहीं है। इसके आगे सम्राट चौधरी ने कहा कि, नीतीश कुमार को मोकामा उपचुनाव में आए परिणाम के बाद यह मालूम हो गया कि उनके पास मात्र 1000 लोगों का ही वोट है, इस कारण अब वो वापस से लव - कुश समीकरण के तरफ ध्यान देने में लगे हैं, इसी कारण उन्होंने कुढ़नी में कुशवाहा समाज से अपना प्रत्याशी चुना। लेकिन, इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है क्यूंकि नीतीश कुमार के पास अब कुछ भी नहीं बचा है। इसके आलावा उन्होंने बीते रात मुकेश सहनी और ललन सिंह द्वारा भाजपा को लेकर दिए गए बयानों पर अपनी प्रतिकिरिया देते हुए कहा कि मुकेश सहनी को यह समझना चाहिए कि हमलोग संघ के विचारधारा से जरूर सहयोगी होते हैं, लेकिन जो बयान उनका आया है उससे यह साफ होता है कि वो महागठबंधन के लोगों के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, ललन सिंह को लेकर इन्होने कहा कि पहले वो जनता दल यूनाइटेड की ताकत तो दिखाएं फिर भाजपा को देश से हटाने की सोचें। यदि उनमें ताकत है तो गुजरात में क्यों नहीं चुनाव लड़ने जा रहे है। उनको भी वहां मालूम चल जाएगा कि भाजपा क्या है।
PATNA : बिहार में कुढ़नी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों द्वारा जोरदार तैयारी की जा रही है। इस चुनाव को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन और मुख्य विरोधी दल भाजपा के तरफ से अपने प्रत्याशी के नाम का एलान भी कर दिया है। वहीं, इस बार यह सीट महागठबंधन में जदयू के खाते में गई है। इस सीट पर जदयू के तरफ से मनोज कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया गया है। जिसके बाद अब इसको लेकर भाजपा नेता और बिहार विधान परिषद् के नेता विपक्षी दल सम्राट चौधरी ने जोरदार हमला बोला है। भाजपा नेता ने कहा कि, बिहार में कुढ़नी सीट पर होने वाला चुनाव में अपार बहुमत से जीत्त हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम लोगों ने दो हज़ार पंद्रह के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को हराया था, ठीक उसी तरह इस बार भी महागठबंधन चुनाव हारेगी। उन्होंने कहा कि हमारे प्रत्याशी केदार गुप्ता बेहद नेक और ईमानदार छवि के नेता हैं वो जरूर मनोज कुशवाहा को मात देंगे। वहीं, नीतीश कुमार के कुढ़नी में चुनाव प्रचार में जाने को लेकर सम्राट ने कहा कि नीतीश कुमार लव - कुश समीकरण को साधने में लगे हुए हैं , इस कारण वो वहां जाएंगे। लेकिन, इसके बाद भी कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है, क्यूंकि अब नीतीश कुमार के पास कोई वोट बैंक नहीं है। इसके आगे सम्राट चौधरी ने कहा कि, नीतीश कुमार को मोकामा उपचुनाव में आए परिणाम के बाद यह मालूम हो गया कि उनके पास मात्र एक हज़ार लोगों का ही वोट है, इस कारण अब वो वापस से लव - कुश समीकरण के तरफ ध्यान देने में लगे हैं, इसी कारण उन्होंने कुढ़नी में कुशवाहा समाज से अपना प्रत्याशी चुना। लेकिन, इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है क्यूंकि नीतीश कुमार के पास अब कुछ भी नहीं बचा है। इसके आलावा उन्होंने बीते रात मुकेश सहनी और ललन सिंह द्वारा भाजपा को लेकर दिए गए बयानों पर अपनी प्रतिकिरिया देते हुए कहा कि मुकेश सहनी को यह समझना चाहिए कि हमलोग संघ के विचारधारा से जरूर सहयोगी होते हैं, लेकिन जो बयान उनका आया है उससे यह साफ होता है कि वो महागठबंधन के लोगों के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, ललन सिंह को लेकर इन्होने कहा कि पहले वो जनता दल यूनाइटेड की ताकत तो दिखाएं फिर भाजपा को देश से हटाने की सोचें। यदि उनमें ताकत है तो गुजरात में क्यों नहीं चुनाव लड़ने जा रहे है। उनको भी वहां मालूम चल जाएगा कि भाजपा क्या है।
बद्दी - महलोग सभा की मासिक बैठक पट्टा कार्यालय में अध्यक्ष बीआर वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में अक्तूबर महीने में दीवाली से ठीक पहले मुख्यमंत्री की होने वाली प्रस्तावित रैली को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सभी सदस्यों ने एक सुर में कहा कि सीएम की रैली को लेकर पहाड़ के लोगों में भारी उत्साह व आशाएं हैं। सीएम बीबीएन उद्योग संघ के रजत जयंती कार्यक्रम में भाग लेने बद्दी आ रहे हैं। गौरतलब है कि धर्मशाला और पच्छाद के मध्यावधी चुनावों के तुरंत बाद मुखयमंत्री की दून विधानसभा क्षेत्र में विशाल जनसभा तथा अनेक उद्घाटन और शिलान्यास किए जाने प्रस्तावित हैं। पिछले वर्ष भी चंडी की जनसभा में मुख्यमंत्री के न पहुंच पाने के कारण लोगों में निराशा ही हाथ लगी थी। हालांकि सीएम ने गोयला में उनका हैलिकॉप्टर लैंड न होने की वजह से तुरंत शिमला की ओर रुख किया। वहां से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए जनसभा को संबोधित किया था, परंतु सामने से सीएम को सुनने वालों तथा अपने मांग पत्र लेकर आए लोगों को निराशा ही हाथ लगी थी। 1 मई 2018 को सीएम जयराम ठाकुर ने बद्दी में विशाल नशा विरोधी रैली को संबोधित किया था। प्रदेश से हर हाल में नशा मिटाने का दृढ संकल्प दोहराया था। लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में पहला अवसर है जब पहाड़ के लोगों को प्रदेश के युवा सीएम से रू-ब-रू होने तथा सामने से अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। महलोग सभा के अध्यक्ष बुद्धि राम वर्मा ने कहा कि जयराम के प्रस्तावित दौरे को लेकर पहाड़ के लोगों में भारी जोश है तथा पहाड क्षेत्र की बड़े लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा होने की आशा नजर आ रही है। पहाड़ की मुख्य मांगों में पहाड़ी क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कालेज, दून हल्के में कोई भी एसडीएम कार्यालय न होने की वजह से पट्टा महलोग में उपतहसील कार्यालय व एसडीएम कार्यालय खुलना समय के अनुसार सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने कहा कि पूरे हिमाचल में दो ही विस क्षेत्र कसौली तथा दून ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर अपना एसडीएम कार्यालय नहीं है। यदि पट्टा महलोग में एसडीएम व बीडीओ कार्यालय खुलता है तो दून हलके की डेढ़ दर्जन पंचायतों के साथ-साथ कसौली विधानसभा की आधा दर्जन से ज्यादा पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। क्योंकि अब तक इन पंचायत के लोगों को सैकड़ों किलोमीटर दूर नालागढ़ अथवा सोलन अपना कार्य करवाने के लिए जाना पड़ता है। इसके अलावा बरोटीवाला से सुबाथु स्टेट हाई-वे को पिछली केंद्र ने डबललेन करवाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक इस सड़क का कुछ नहीं हुआ।
बद्दी - महलोग सभा की मासिक बैठक पट्टा कार्यालय में अध्यक्ष बीआर वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में अक्तूबर महीने में दीवाली से ठीक पहले मुख्यमंत्री की होने वाली प्रस्तावित रैली को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सभी सदस्यों ने एक सुर में कहा कि सीएम की रैली को लेकर पहाड़ के लोगों में भारी उत्साह व आशाएं हैं। सीएम बीबीएन उद्योग संघ के रजत जयंती कार्यक्रम में भाग लेने बद्दी आ रहे हैं। गौरतलब है कि धर्मशाला और पच्छाद के मध्यावधी चुनावों के तुरंत बाद मुखयमंत्री की दून विधानसभा क्षेत्र में विशाल जनसभा तथा अनेक उद्घाटन और शिलान्यास किए जाने प्रस्तावित हैं। पिछले वर्ष भी चंडी की जनसभा में मुख्यमंत्री के न पहुंच पाने के कारण लोगों में निराशा ही हाथ लगी थी। हालांकि सीएम ने गोयला में उनका हैलिकॉप्टर लैंड न होने की वजह से तुरंत शिमला की ओर रुख किया। वहां से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए जनसभा को संबोधित किया था, परंतु सामने से सीएम को सुनने वालों तथा अपने मांग पत्र लेकर आए लोगों को निराशा ही हाथ लगी थी। एक मई दो हज़ार अट्ठारह को सीएम जयराम ठाकुर ने बद्दी में विशाल नशा विरोधी रैली को संबोधित किया था। प्रदेश से हर हाल में नशा मिटाने का दृढ संकल्प दोहराया था। लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में पहला अवसर है जब पहाड़ के लोगों को प्रदेश के युवा सीएम से रू-ब-रू होने तथा सामने से अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। महलोग सभा के अध्यक्ष बुद्धि राम वर्मा ने कहा कि जयराम के प्रस्तावित दौरे को लेकर पहाड़ के लोगों में भारी जोश है तथा पहाड क्षेत्र की बड़े लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा होने की आशा नजर आ रही है। पहाड़ की मुख्य मांगों में पहाड़ी क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कालेज, दून हल्के में कोई भी एसडीएम कार्यालय न होने की वजह से पट्टा महलोग में उपतहसील कार्यालय व एसडीएम कार्यालय खुलना समय के अनुसार सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने कहा कि पूरे हिमाचल में दो ही विस क्षेत्र कसौली तथा दून ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर अपना एसडीएम कार्यालय नहीं है। यदि पट्टा महलोग में एसडीएम व बीडीओ कार्यालय खुलता है तो दून हलके की डेढ़ दर्जन पंचायतों के साथ-साथ कसौली विधानसभा की आधा दर्जन से ज्यादा पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। क्योंकि अब तक इन पंचायत के लोगों को सैकड़ों किलोमीटर दूर नालागढ़ अथवा सोलन अपना कार्य करवाने के लिए जाना पड़ता है। इसके अलावा बरोटीवाला से सुबाथु स्टेट हाई-वे को पिछली केंद्र ने डबललेन करवाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक इस सड़क का कुछ नहीं हुआ।
ललितपुर। बहुत पुरानी बात नहीं हैं जब हर घर में गौरैया की फुदकर और चीं-चीं की आवाज सुनने को मिलती थी। अब वो गाँवों सहित शहरों में कम ही दिखती हैं। जमाना बदला तो छप्पर के स्थानों पर पक्की इमारतों, बढ़ते ध्वनि प्रदूषण व जंगलों की कमी से गौरैया की संख्या में कमी आई, जिससे गौरेया बचाने की जरूरत पड़ी। "पढ़ाई के दौरान झांसी में किराये के कमरे में रहा करता था। कमरे के रोशनदान में गौरैया ने एक-एक तिनका जोड़कर घोंसला बनाया कुछ दिन बाद मकान मालिक आया और गौरैया के घोंसले को हटाने लगा। मैंने उन्हें टोका और कहा घोंसले को मत हटाओ बल्कि इस घोसले का पचास रुपया अलग से किराया हमारे किराए में जोड़ दें। तब जाकर वह मानें और गौरैया का घर उजड़ने से बच गया। मुझे मालूम हुआ गौरैया की संख्या दिनों दिन कम हो रही है। उसे बचाने के लिए काम करना चाहिए।" ये बातें गौरैया बचाओ अभियान में साझीदार वन पर्यावरण बचाने के लिए जनपद ललितपुर में प्रयासरत गैर सरकारी संस्था मानव आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान ने बतायी। इस गौरैया से प्रेरणा लेकर पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान ने ललितपुर के दोस्तों से मिलकर पहली बार 2013 में गौरैया बचाने के लिए प्रदर्शनी लगाकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि गौरैया को बचाया जा सके। पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान आगे बताते हैं, "तभी से गौरैया बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। एक हजार से अधिक लकड़ी के गौरैया घरों को बनवाया, उन्हें शहर व गाँवों तक पहुंचाया। अब गौरैया वापिस लौटने लगी हैं। उसकी फुदकन और चीं चीं की आवाज सुनाई देनी चलगी है।" पक्की इमारतों का चलन एवं मोवाइल टावरों की बढ़ती संख्या से गौरैया पक्षी खतरे में हैं। गौरैया को बचाने के लिए लोगों को जन जागरूकता फैलाने एवं संरक्षित करने के उद्देश्य से 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस विश्व के कई देशों में मनाया जाता है। पर्यावरण में पक्षी प्रजातियों का होना जैव-विविधता का सूचक है। प्राकृतिक रूप से गौरैया भारत के अलावा यूरोप, अफ्रीका, म्यामांर, इण्डोनेशिया आदि देशों में पायी जाती हैं, जिनकी जिसकी संख्या में कमी आयी है। केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय भी मानता है कि देशभर में गौरेया की संख्या में कमी आ रही है। देश में मौजूद पक्षियों की 1200 प्रजातियों में से 87 संकटग्रस्त की सूची में शामिल हैं। दिल्ली सरकार ने गौरैया को बचाने के लिए गौरैया को राजपक्षी का दर्जा दे चुकी है। सेडो ग्रुप की सदस्या भाग्यश्री चतुर्वेदी ने बताया, " बढ़ते मोबाइल टावरों की किरणों से गौरैया में बांझपन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिस वजह से गौरैया की संख्यामें काफी कमी आयी है। गौरैया को घरों में वापस बुलाने के लिए पीने के लिए बर्तन में पानी और खाने को दाना देना चाहिए और घोसला बनाकर उनको बुलाने का काम करना चाहिए।" जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह का कहना है, "गौरैया बचपन की यादों से जुड़ी हुई हैं। बचपन से हम गौरैया को घर आंगन में देखते आये हैं, लेकिन गौरैया अब देखने को नहीं मिलती। हमने अपने घर में गौरैया के लिए कृतिम घर बनाया है, इस तरह के जागरूकता अभियानों से गौरैया देखने को मिलने लगी हैं।"
ललितपुर। बहुत पुरानी बात नहीं हैं जब हर घर में गौरैया की फुदकर और चीं-चीं की आवाज सुनने को मिलती थी। अब वो गाँवों सहित शहरों में कम ही दिखती हैं। जमाना बदला तो छप्पर के स्थानों पर पक्की इमारतों, बढ़ते ध्वनि प्रदूषण व जंगलों की कमी से गौरैया की संख्या में कमी आई, जिससे गौरेया बचाने की जरूरत पड़ी। "पढ़ाई के दौरान झांसी में किराये के कमरे में रहा करता था। कमरे के रोशनदान में गौरैया ने एक-एक तिनका जोड़कर घोंसला बनाया कुछ दिन बाद मकान मालिक आया और गौरैया के घोंसले को हटाने लगा। मैंने उन्हें टोका और कहा घोंसले को मत हटाओ बल्कि इस घोसले का पचास रुपया अलग से किराया हमारे किराए में जोड़ दें। तब जाकर वह मानें और गौरैया का घर उजड़ने से बच गया। मुझे मालूम हुआ गौरैया की संख्या दिनों दिन कम हो रही है। उसे बचाने के लिए काम करना चाहिए।" ये बातें गौरैया बचाओ अभियान में साझीदार वन पर्यावरण बचाने के लिए जनपद ललितपुर में प्रयासरत गैर सरकारी संस्था मानव आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान ने बतायी। इस गौरैया से प्रेरणा लेकर पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान ने ललितपुर के दोस्तों से मिलकर पहली बार दो हज़ार तेरह में गौरैया बचाने के लिए प्रदर्शनी लगाकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि गौरैया को बचाया जा सके। पुष्पेंन्द्र सिंह चौहान आगे बताते हैं, "तभी से गौरैया बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। एक हजार से अधिक लकड़ी के गौरैया घरों को बनवाया, उन्हें शहर व गाँवों तक पहुंचाया। अब गौरैया वापिस लौटने लगी हैं। उसकी फुदकन और चीं चीं की आवाज सुनाई देनी चलगी है।" पक्की इमारतों का चलन एवं मोवाइल टावरों की बढ़ती संख्या से गौरैया पक्षी खतरे में हैं। गौरैया को बचाने के लिए लोगों को जन जागरूकता फैलाने एवं संरक्षित करने के उद्देश्य से बीस मार्च को विश्व गौरैया दिवस विश्व के कई देशों में मनाया जाता है। पर्यावरण में पक्षी प्रजातियों का होना जैव-विविधता का सूचक है। प्राकृतिक रूप से गौरैया भारत के अलावा यूरोप, अफ्रीका, म्यामांर, इण्डोनेशिया आदि देशों में पायी जाती हैं, जिनकी जिसकी संख्या में कमी आयी है। केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय भी मानता है कि देशभर में गौरेया की संख्या में कमी आ रही है। देश में मौजूद पक्षियों की एक हज़ार दो सौ प्रजातियों में से सत्तासी संकटग्रस्त की सूची में शामिल हैं। दिल्ली सरकार ने गौरैया को बचाने के लिए गौरैया को राजपक्षी का दर्जा दे चुकी है। सेडो ग्रुप की सदस्या भाग्यश्री चतुर्वेदी ने बताया, " बढ़ते मोबाइल टावरों की किरणों से गौरैया में बांझपन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिस वजह से गौरैया की संख्यामें काफी कमी आयी है। गौरैया को घरों में वापस बुलाने के लिए पीने के लिए बर्तन में पानी और खाने को दाना देना चाहिए और घोसला बनाकर उनको बुलाने का काम करना चाहिए।" जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह का कहना है, "गौरैया बचपन की यादों से जुड़ी हुई हैं। बचपन से हम गौरैया को घर आंगन में देखते आये हैं, लेकिन गौरैया अब देखने को नहीं मिलती। हमने अपने घर में गौरैया के लिए कृतिम घर बनाया है, इस तरह के जागरूकता अभियानों से गौरैया देखने को मिलने लगी हैं।"
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने उम्मीद जताई है कि इस साल भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में द्विपक्षीय सीरीज खेल सकती है। पीसीबी के अध्यक्ष जका अशरफ ने कहा कि इस साल पाकिस्तान टीम अपनी सरजमीं पर भारत के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज खेल सकती है। इससे पहले बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा था कि अगर पाकिस्तान सरकार और पीसीबी सुरक्षा गारंटी लेती है तो भारतीय क्रिकेट टीम पाक दौरा कर सकती है। हालांकि शुक्ला ने किसी तटस्थ स्थान पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज कराने की संभावना को खारिज कर दिया था। पीसीबी अध्यक्ष ने कहा कि अगस्त में प्रस्तावित टूर्नामेंट से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पास कोई भी सीरीज खेलने के लिए पर्याप्त समय है। पाक टीम के स्वदेश वापसी के बाद अशरफ ने कहा कि यह मानना गलत है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ खेलने से इनकार कर दिया है। दिल्ली में कोई फैसला नहीं लिया गया। हमें पूरी उम्मीद है कि भारतीय टीम इस साल पाकिस्तान दौरा करेगी। भारत और पाकिस्तान के बीच पांच साल बाद हुए द्विपक्षीय सीरीज की पीसीबी अध्यक्ष ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत में संपन्न हुई सीरीज से दोनों देशों के बीच दोबारा क्रिकेट संबंध बहाल हुए हैं। इस शुरुआत को बनाए रखने के लिए पीसीबी अगले कुछ महीनों में बीसीसीआई के साथ बातचीत करेगी। अशरफ ने कहा कि पाकिस्तान की घरेलू सीरीज़ भारत में कराये जाने का भी एक प्रस्ताव था। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा प्रस्ताव भी रखा है लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सीरीज़ को लेकर दोनों देशों के अवाम के उत्साह से साबित होता है कि वे भारत पाकिस्तान क्रिकेट को किस कदर तरस रहे थे।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उम्मीद जताई है कि इस साल भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में द्विपक्षीय सीरीज खेल सकती है। पीसीबी के अध्यक्ष जका अशरफ ने कहा कि इस साल पाकिस्तान टीम अपनी सरजमीं पर भारत के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज खेल सकती है। इससे पहले बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा था कि अगर पाकिस्तान सरकार और पीसीबी सुरक्षा गारंटी लेती है तो भारतीय क्रिकेट टीम पाक दौरा कर सकती है। हालांकि शुक्ला ने किसी तटस्थ स्थान पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज कराने की संभावना को खारिज कर दिया था। पीसीबी अध्यक्ष ने कहा कि अगस्त में प्रस्तावित टूर्नामेंट से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पास कोई भी सीरीज खेलने के लिए पर्याप्त समय है। पाक टीम के स्वदेश वापसी के बाद अशरफ ने कहा कि यह मानना गलत है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ खेलने से इनकार कर दिया है। दिल्ली में कोई फैसला नहीं लिया गया। हमें पूरी उम्मीद है कि भारतीय टीम इस साल पाकिस्तान दौरा करेगी। भारत और पाकिस्तान के बीच पांच साल बाद हुए द्विपक्षीय सीरीज की पीसीबी अध्यक्ष ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत में संपन्न हुई सीरीज से दोनों देशों के बीच दोबारा क्रिकेट संबंध बहाल हुए हैं। इस शुरुआत को बनाए रखने के लिए पीसीबी अगले कुछ महीनों में बीसीसीआई के साथ बातचीत करेगी। अशरफ ने कहा कि पाकिस्तान की घरेलू सीरीज़ भारत में कराये जाने का भी एक प्रस्ताव था। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा प्रस्ताव भी रखा है लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सीरीज़ को लेकर दोनों देशों के अवाम के उत्साह से साबित होता है कि वे भारत पाकिस्तान क्रिकेट को किस कदर तरस रहे थे।
UP: प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सचिन सावंत के घर पर छापेमारी हुई है। ये छापेमारी ईडी की टीम ने की। इस छापेमारी के बाद सचिन सावंत को गिरफ्तार कर ईडी की टीम मुंबई ले गई है। जहां उन्हें मुंबई हाईकोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। Lucknow: योगी सरकार की कार्यशैली पर लगातार महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ से सामने आया है, जहां एक किशोरी का शव फंदे से लटकता हुआ मिला है। वहीं पुलिस मामले को संज्ञान में लेने के बाद जांच का सिलसिला शुरू कर चुकी है। उधर, किशोरी की मां ने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म होने की बात कही है। इस हत्याकांड के बाद योगी सरकार सवालों के घेरे में आ चुकी है। इस बीच मामले की जांच के लिए योगी सरकार की तरफ से तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें एडीजी टेक्निकल मोहित अग्रवाल, ज्वाइंट सीपी नीलाब्जा चौधरी और आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। ATS Raids: यूपी एटीएस ने रविवार प्रतिबंधित संगठन से जुड़े 30 ठिकानों पर छापेमारी की। जिसमें मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, आजमगढ़, बहराइच, बाराबंकी, लखनऊ समेत कुछ अन्य शहर भी शामिल हैं। एटीएस ने यह कार्रवाई कट्टरता फैलाने क आरोप में इन संगठनों के खिलाफ यह शिकंजा कसा है। Ayodhay News: मामला इस तरह से प्रकाश में आया, जब चेयरमैन प्रसन्ना ने खतौनी 1388 से 1391 फसली के खेवट खाता संख्या 79 गाटा संख्या में 5. 312 हेक्टेयर को अपने नाम दर्ज किए जाने का वाद सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) अयोध्या के न्यायालय में दायर किया, तो इस हेरफेर के बारे में जानकारी सामने आई। UP: इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और यूपी STF तलाशी ले रही है और लोगों को भी आगाह कर रही है कि आरोपी से जुड़ी जानकारी पुलिस को दे और आरोपी का साथ देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। UP Board Result 2023: दिब्यकांत शुक्ल ने ये भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप इस वर्ष बोर्ड ने नकल विहीन परीक्षा कराने में सफलता प्राप्त की थी। 30 वर्षों में यह पहला अवसर रहा जब कोई पेपर न तो वायरल हुआ, न ही रांग ओपनिंग हुई,न ही कोई परीक्षा रद की गई और न ही सामूहिक नकल हुई। UP: मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल की। इसके बावजूद उन्हें उन विकृतियों और सामाजिक कुरीतियों का सामना करना पड़ा, जो भारतीय समाज को सदैव कमजोर करती रही। मगर उनकी परवाह ना करते हुए वंचितों की आवाज बनकर तथा उन्हें अपनी आवाज की धार देकर उनकी लड़ाई को लड़ने का कार्य किया। अतीक के खिलाफ 100 से भी अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें रंगदारी, गैंगस्टर, फिरौती शामिल है। हालांकि, अब उसे कई मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन अभी-भी कई ऐसे मामले में शामिल हैं, जिसमें उसे सजा सुनाया जाना बाकी है। अब ऐसे में आगामी दिनों में अतीक के खिलाफ क्या कुछ कार्रवाई होती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
UP: प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सचिन सावंत के घर पर छापेमारी हुई है। ये छापेमारी ईडी की टीम ने की। इस छापेमारी के बाद सचिन सावंत को गिरफ्तार कर ईडी की टीम मुंबई ले गई है। जहां उन्हें मुंबई हाईकोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। Lucknow: योगी सरकार की कार्यशैली पर लगातार महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ से सामने आया है, जहां एक किशोरी का शव फंदे से लटकता हुआ मिला है। वहीं पुलिस मामले को संज्ञान में लेने के बाद जांच का सिलसिला शुरू कर चुकी है। उधर, किशोरी की मां ने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म होने की बात कही है। इस हत्याकांड के बाद योगी सरकार सवालों के घेरे में आ चुकी है। इस बीच मामले की जांच के लिए योगी सरकार की तरफ से तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है, जिसमें एडीजी टेक्निकल मोहित अग्रवाल, ज्वाइंट सीपी नीलाब्जा चौधरी और आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। ATS Raids: यूपी एटीएस ने रविवार प्रतिबंधित संगठन से जुड़े तीस ठिकानों पर छापेमारी की। जिसमें मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, आजमगढ़, बहराइच, बाराबंकी, लखनऊ समेत कुछ अन्य शहर भी शामिल हैं। एटीएस ने यह कार्रवाई कट्टरता फैलाने क आरोप में इन संगठनों के खिलाफ यह शिकंजा कसा है। Ayodhay News: मामला इस तरह से प्रकाश में आया, जब चेयरमैन प्रसन्ना ने खतौनी एक हज़ार तीन सौ अठासी से एक हज़ार तीन सौ इक्यानवे फसली के खेवट खाता संख्या उन्यासी गाटा संख्या में पाँच. तीन सौ बारह हेक्टेयर को अपने नाम दर्ज किए जाने का वाद सहायक अभिलेख अधिकारी अयोध्या के न्यायालय में दायर किया, तो इस हेरफेर के बारे में जानकारी सामने आई। UP: इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और यूपी STF तलाशी ले रही है और लोगों को भी आगाह कर रही है कि आरोपी से जुड़ी जानकारी पुलिस को दे और आरोपी का साथ देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। UP Board Result दो हज़ार तेईस: दिब्यकांत शुक्ल ने ये भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप इस वर्ष बोर्ड ने नकल विहीन परीक्षा कराने में सफलता प्राप्त की थी। तीस वर्षों में यह पहला अवसर रहा जब कोई पेपर न तो वायरल हुआ, न ही रांग ओपनिंग हुई,न ही कोई परीक्षा रद की गई और न ही सामूहिक नकल हुई। UP: मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल की। इसके बावजूद उन्हें उन विकृतियों और सामाजिक कुरीतियों का सामना करना पड़ा, जो भारतीय समाज को सदैव कमजोर करती रही। मगर उनकी परवाह ना करते हुए वंचितों की आवाज बनकर तथा उन्हें अपनी आवाज की धार देकर उनकी लड़ाई को लड़ने का कार्य किया। अतीक के खिलाफ एक सौ से भी अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें रंगदारी, गैंगस्टर, फिरौती शामिल है। हालांकि, अब उसे कई मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन अभी-भी कई ऐसे मामले में शामिल हैं, जिसमें उसे सजा सुनाया जाना बाकी है। अब ऐसे में आगामी दिनों में अतीक के खिलाफ क्या कुछ कार्रवाई होती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
प्रकार को फल विषयक समतायुक्त आसक्ति को या वृद्धि के आग्रह को 'फलाशा, 'सङ्ग' या ' काम ' नाम गोता में दिये गये हैं। यदि कोई मनुष्य फल पाने की इच्छा आग्रह या घृथा आसक्कि न रखे; तो उससे यह मतलब नहीं पाया जाता कि बह अपने प्राप्त कर्म को, केवल कर्त्तव्य समझ कर, करने की बुद्धि और उत्साह को भी, इस आग्रह के साथ ही साथ, नष्ट कर डाले। अपने फायदे के सिवा इस संसार में जिन्हें दूसरा कुछ नहीं देख पड़ता, और जो पुरुष केवल फल की इच्छा से ही कर्म करने में मस्त रहते हैं, उन्हें सचमुच फलाशा छोड़ कर कर्म करना शक्य म जँचेगा, परन्तु जिनकी बुद्धि ज्ञान से सम और विरक्त हो गई हैं, उनके लिये कुछ कठिन नही है। पहले तो यह समझ ही गलत है, कि हमें किसी काम का जो फल मिला करता है, वह केवल हमारे ही कर्म का फल है। यदि पानी की garm और अग्नि की उप्ता की सहायता न मिले तो मनुष्य कितना ही सिर क्यों न खपान, उसके प्रयत्न से पाक-सिद्धि कमी हो नहीं सकेगी-भोजन पकेगा ही नहीं आर आग्ने आदि में इन गुण-धर्मों को मौजूद रखना या न रखना कुछ मनुष्य के घस या उपाय की बात नहीं है। इसी से कर्म-सृष्टि के इन स्वयंसिद्ध विविध व्यापारों अथवा धर्मों का पहले यथाशक्ति ज्ञान प्राप्त कर मनुष्य को उसी ढंग से अपने व्यवहार करने पड़ते हैं, जिससे कि वे व्यापार अपने प्रयत्न के अनुकूल हाँ इससे कहना चाहिये, कि प्रयत्नों से मनुष्य को जो फल मिलता है, वह केवल उसके ही प्रयत्नों का फल नहीं है, बरन उसके कार्य और कर्मसृष्टि के तदनुकूल भनेक स्वयंसिद्ध धर्म - - इन दोनों के संयोग का फल है। परन्तु प्रयत्नों की सफलता के लिये प्रकार जिन नानाविध सृष्टि-व्यापारों की अनुकूलता आवश्यक है, कई बार उन सच का मनुष्य को यथार्थ ज्ञान नहीं रहता और कुछ स्थानों पर तो होना शक्य भी मही है, इसे ही 'दैव' कहते हैं। यदि फल-सिद्धि के लिये ऐसे सृष्टि-व्यापारों की सहायता अत्यंत आवश्यक है जो हमारे अधिकार में नहीं और जिन्हें हम जानते हैं, तो भागे कहना नहीं होगा कि ऐसा अभिमान करना मूर्खता है कि "केवल अपने प्रयत्न से ही में अमुक बात कर लूँगा" (गी. १८. १४ - १६ देखो) । क्योंकि, कर्म-सृष्टि के ज्ञात और अज्ञात व्यापारों का मानवी प्रयत्नों से संयोग होने पर जो फल होता है, वह केवल कर्म के नियमों से ही हुआ करता है; इसलिये हम फल की अभिलापा करें या न करें फल-सिद्धि में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता; हमारी फलाशा अलवत हमें दुःखकारक हो जाती है। परन्तु स्मरण रहे कि मनुष्य के लिये आवश्यक वात धकेले सृष्टि व्यापार स्वयं अपनी ओर से संघटित हो कर नहीं कर देते। चने की रोटी को स्वादिष्ट बनाने के लिये जिस प्रकार आटे में थोड़ा सा नमक भी मिलाना पड़ता है, उसी प्रकार कर्म-सृष्टि के इन स्वयंसिद्ध व्यापारों को मनुष्यों के उपयोगी होने के लिये उनमें मानवी प्रयत्न की थोड़ी सी मात्रा मिलानी पड़ती है। इसी से ज्ञानी और विवेकी पुरुष, सामान्य लोगों के समान, फल की आसक्ति अथवा अभिलाषा तो नही रखते; किन्तु वे लोग जगत् के व्यवहार की सिद्धि के लिये, प्रवाह-पतित कर्म का ( अर्थात् कर्म के अनादि प्रवाह में शास्त्र से प्राप्त ययाधिकार कर्म का ) जो छोटा-बड़ा भाग मिले उसे ही, शान्तिपूर्वक कर्तव्य समझ कर किया करते हैं। और, फल पाने के लिये, कर्म-संयोग पर ( अथवा भक्तिदृष्टि से परमेश्वर की इच्छा पर निर्भर हो कर निश्चिंत रहते हैं। "तेरा अधिकार केवल कर्म करने का है, फल होना तेरे अधिकार की चात महाँ" ( गो. २.४७ ) इत्यादि उपदेश जो अर्जुन को किया है, उसका रहस्य भी यही है। इस प्रकार फलाशा को त्याग कर कर्म करते रहने पर, आगे कुछ कारणों से कहाचिन कर्म निष्फल हो जायँः तो निष्फलता का दुःख मानने के लिये हमें कोई कारण ही नहीं रहता, क्योंकि इन तो अपने अधिकार का काम कर चुके । उदाहरगा लीजिये; वैद्यकशास्त्र का मत है. कि आयु की डोर ( शरीर की पोषण करनेवाली नैसर्गिक धातुओं की शक्ति ) सवल रहे विना निरी औषधियों से कभी फायदा नहीं होता; और इस ढोर की सवलता अनेक प्राकन अथवा पुश्तैनी संस्कारों का फल है । यह वात वैद्य के हाथ से होने योग्य नहीं, और उसे इसका निश्चयात्मक ज्ञान हो भी नहीं सकता। ऐसा होते हुए भी, हम प्रत्यक्ष देखते हैं, कि रोगो लोगों को आपधि देना अपना कर्तव्य समझ कर केवल परोपकार की बुद्धि से वैध अपनी बुद्धि के अनुसार हजारों रोगियों को दवाई दिया करते हैं। इस प्रकार निष्काम चुन्दि से काम करने पर, यदि कोई रोगीचंगानो तो उससे बह वैध उदिम नहीं होता; बल्कि बड़े शान्त चित्त से यह शास्त्रीय नियम ढूँढ़ निकालता है, कि अमुक रोग में अमुक ओषधि से फी सँकड़े इतने रोगियों को आराम होता है । परन्तु इसी वैद्य का लड़का जव बीमार पड़ता है, तब उसे ओपघि देते समय च आयुष्य को ढोरवाली बात भूल जाता है और इस ममतायुक्त फलाशा से उसका चित्त घवड़ा जाता है कि " मेरा लड़का अच्छा हो जाय । " इसी से उसे या तो दूसरा वैद्य बुलाना पढ़ता है, या दूसरे वैद्य को सलाह की आवश्यकता होती है! इस छोटे से उदाहरगा से ज्ञात होगा, कि कर्मफल में ममतारूप प्रासनि किसे कहना चाहिये और फलाशा न रहने पर भी गिरी कर्त्तव्य बुद्धि से कोई भी काम किस प्रकार किया जा सकता है। इस प्रकार फलाज्ञा को नष्ट करने के लिये यद्यपि ज्ञान की सहायता से मन में वैराग्य का भाव अटल होना चाहिये; परन्तु किसी कपड़े का रङ्ग (राग) दूर करने के लिये जिस प्रकार कोई कपड़े को फाड़ना उचित नहीं समझता, उसी प्रकार यह कहने से कि किसी कर्म में आसक्कि, काम, सङ्ग, रत्ग अथवा प्रीति न रखो उस कम को ही छोड़ देना ठीक नहीं। वैराग्य से कर्म करना ही यदि अशष हो, तो बात निराली है। परन्तु हम प्रत्यक्ष देखते हैं कि वैराग्य से भली भाँति कर्म किये जा सकते हैं। इतना ही क्यों, यह मी प्रगट है कि कर्म किसी से छूटते ही नहीं । इसी लिये अज्ञानी लोग जिन कमों को फलाशा से किया करते हैं, उन्हें ही ज्ञानी पुरुष ज्ञान प्राप्ति के बाद भी लाम-अलाभ तथा सुख दुःख को एक सा मान कर (गी. २.३८) धैर्य एवं उत्साह से, किन्तु शुद्ध-बुद्धि से, फल के विषय में विरक्त या उदासीन रद्द कर
प्रकार को फल विषयक समतायुक्त आसक्ति को या वृद्धि के आग्रह को 'फलाशा, 'सङ्ग' या ' काम ' नाम गोता में दिये गये हैं। यदि कोई मनुष्य फल पाने की इच्छा आग्रह या घृथा आसक्कि न रखे; तो उससे यह मतलब नहीं पाया जाता कि बह अपने प्राप्त कर्म को, केवल कर्त्तव्य समझ कर, करने की बुद्धि और उत्साह को भी, इस आग्रह के साथ ही साथ, नष्ट कर डाले। अपने फायदे के सिवा इस संसार में जिन्हें दूसरा कुछ नहीं देख पड़ता, और जो पुरुष केवल फल की इच्छा से ही कर्म करने में मस्त रहते हैं, उन्हें सचमुच फलाशा छोड़ कर कर्म करना शक्य म जँचेगा, परन्तु जिनकी बुद्धि ज्ञान से सम और विरक्त हो गई हैं, उनके लिये कुछ कठिन नही है। पहले तो यह समझ ही गलत है, कि हमें किसी काम का जो फल मिला करता है, वह केवल हमारे ही कर्म का फल है। यदि पानी की garm और अग्नि की उप्ता की सहायता न मिले तो मनुष्य कितना ही सिर क्यों न खपान, उसके प्रयत्न से पाक-सिद्धि कमी हो नहीं सकेगी-भोजन पकेगा ही नहीं आर आग्ने आदि में इन गुण-धर्मों को मौजूद रखना या न रखना कुछ मनुष्य के घस या उपाय की बात नहीं है। इसी से कर्म-सृष्टि के इन स्वयंसिद्ध विविध व्यापारों अथवा धर्मों का पहले यथाशक्ति ज्ञान प्राप्त कर मनुष्य को उसी ढंग से अपने व्यवहार करने पड़ते हैं, जिससे कि वे व्यापार अपने प्रयत्न के अनुकूल हाँ इससे कहना चाहिये, कि प्रयत्नों से मनुष्य को जो फल मिलता है, वह केवल उसके ही प्रयत्नों का फल नहीं है, बरन उसके कार्य और कर्मसृष्टि के तदनुकूल भनेक स्वयंसिद्ध धर्म - - इन दोनों के संयोग का फल है। परन्तु प्रयत्नों की सफलता के लिये प्रकार जिन नानाविध सृष्टि-व्यापारों की अनुकूलता आवश्यक है, कई बार उन सच का मनुष्य को यथार्थ ज्ञान नहीं रहता और कुछ स्थानों पर तो होना शक्य भी मही है, इसे ही 'दैव' कहते हैं। यदि फल-सिद्धि के लिये ऐसे सृष्टि-व्यापारों की सहायता अत्यंत आवश्यक है जो हमारे अधिकार में नहीं और जिन्हें हम जानते हैं, तो भागे कहना नहीं होगा कि ऐसा अभिमान करना मूर्खता है कि "केवल अपने प्रयत्न से ही में अमुक बात कर लूँगा" । क्योंकि, कर्म-सृष्टि के ज्ञात और अज्ञात व्यापारों का मानवी प्रयत्नों से संयोग होने पर जो फल होता है, वह केवल कर्म के नियमों से ही हुआ करता है; इसलिये हम फल की अभिलापा करें या न करें फल-सिद्धि में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता; हमारी फलाशा अलवत हमें दुःखकारक हो जाती है। परन्तु स्मरण रहे कि मनुष्य के लिये आवश्यक वात धकेले सृष्टि व्यापार स्वयं अपनी ओर से संघटित हो कर नहीं कर देते। चने की रोटी को स्वादिष्ट बनाने के लिये जिस प्रकार आटे में थोड़ा सा नमक भी मिलाना पड़ता है, उसी प्रकार कर्म-सृष्टि के इन स्वयंसिद्ध व्यापारों को मनुष्यों के उपयोगी होने के लिये उनमें मानवी प्रयत्न की थोड़ी सी मात्रा मिलानी पड़ती है। इसी से ज्ञानी और विवेकी पुरुष, सामान्य लोगों के समान, फल की आसक्ति अथवा अभिलाषा तो नही रखते; किन्तु वे लोग जगत् के व्यवहार की सिद्धि के लिये, प्रवाह-पतित कर्म का जो छोटा-बड़ा भाग मिले उसे ही, शान्तिपूर्वक कर्तव्य समझ कर किया करते हैं। और, फल पाने के लिये, कर्म-संयोग पर इत्यादि उपदेश जो अर्जुन को किया है, उसका रहस्य भी यही है। इस प्रकार फलाशा को त्याग कर कर्म करते रहने पर, आगे कुछ कारणों से कहाचिन कर्म निष्फल हो जायँः तो निष्फलता का दुःख मानने के लिये हमें कोई कारण ही नहीं रहता, क्योंकि इन तो अपने अधिकार का काम कर चुके । उदाहरगा लीजिये; वैद्यकशास्त्र का मत है. कि आयु की डोर सवल रहे विना निरी औषधियों से कभी फायदा नहीं होता; और इस ढोर की सवलता अनेक प्राकन अथवा पुश्तैनी संस्कारों का फल है । यह वात वैद्य के हाथ से होने योग्य नहीं, और उसे इसका निश्चयात्मक ज्ञान हो भी नहीं सकता। ऐसा होते हुए भी, हम प्रत्यक्ष देखते हैं, कि रोगो लोगों को आपधि देना अपना कर्तव्य समझ कर केवल परोपकार की बुद्धि से वैध अपनी बुद्धि के अनुसार हजारों रोगियों को दवाई दिया करते हैं। इस प्रकार निष्काम चुन्दि से काम करने पर, यदि कोई रोगीचंगानो तो उससे बह वैध उदिम नहीं होता; बल्कि बड़े शान्त चित्त से यह शास्त्रीय नियम ढूँढ़ निकालता है, कि अमुक रोग में अमुक ओषधि से फी सँकड़े इतने रोगियों को आराम होता है । परन्तु इसी वैद्य का लड़का जव बीमार पड़ता है, तब उसे ओपघि देते समय च आयुष्य को ढोरवाली बात भूल जाता है और इस ममतायुक्त फलाशा से उसका चित्त घवड़ा जाता है कि " मेरा लड़का अच्छा हो जाय । " इसी से उसे या तो दूसरा वैद्य बुलाना पढ़ता है, या दूसरे वैद्य को सलाह की आवश्यकता होती है! इस छोटे से उदाहरगा से ज्ञात होगा, कि कर्मफल में ममतारूप प्रासनि किसे कहना चाहिये और फलाशा न रहने पर भी गिरी कर्त्तव्य बुद्धि से कोई भी काम किस प्रकार किया जा सकता है। इस प्रकार फलाज्ञा को नष्ट करने के लिये यद्यपि ज्ञान की सहायता से मन में वैराग्य का भाव अटल होना चाहिये; परन्तु किसी कपड़े का रङ्ग दूर करने के लिये जिस प्रकार कोई कपड़े को फाड़ना उचित नहीं समझता, उसी प्रकार यह कहने से कि किसी कर्म में आसक्कि, काम, सङ्ग, रत्ग अथवा प्रीति न रखो उस कम को ही छोड़ देना ठीक नहीं। वैराग्य से कर्म करना ही यदि अशष हो, तो बात निराली है। परन्तु हम प्रत्यक्ष देखते हैं कि वैराग्य से भली भाँति कर्म किये जा सकते हैं। इतना ही क्यों, यह मी प्रगट है कि कर्म किसी से छूटते ही नहीं । इसी लिये अज्ञानी लोग जिन कमों को फलाशा से किया करते हैं, उन्हें ही ज्ञानी पुरुष ज्ञान प्राप्ति के बाद भी लाम-अलाभ तथा सुख दुःख को एक सा मान कर धैर्य एवं उत्साह से, किन्तु शुद्ध-बुद्धि से, फल के विषय में विरक्त या उदासीन रद्द कर
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 26 दिसंबर से मेलबर्न में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए बीसीसीआई ने प्लेइंग इलेवन का ऐलान कर दिया है। दूसरा टेस्ट गंवाने के बाद भारतीय टीम में तीन अहम बदलाव किए गए हैं। पहले दोनों टेस्ट में फेल होने वाले सलामी बल्लेबाजों को टीम में जगह नहीं दी गई है, इसके अलावा एक ऑलराउंडर की वापसी हुई है। तीसरे टेस्ट के लिए बीसीसीआई ने दोनों सलामी बल्लेबाज केएल राहुल और मुरली विजय को बाहर कर दिया है। इसके अलावा तीसरे टेस्ट में उमेश यादव को भी टीम में जगह नहीं दी गई है। राहुल और विजय की जगह भारतीय टीम में मयंक अग्रवाल और रोहित शर्मा को टीम में शामिल किया गया है, जबकि उमेश यादव की जगह रवींद्र जडेजा को प्लेइंग इलेवन जगह दी गई है। बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 की बराबरी पर चल रही है। भारतीय टीम ने ऐडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच मे ऑस्ट्रेलिया को 31 रनों से हराकर सीरीज में बढ़त हासिल की थी, लेकिन पर्थ टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 146 रनों से मात देकर सीरीज में बराबरी कर ली। तीसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम : विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे (उप-कप्तान), मयंक अग्रवाल, हनुमा विहारी, चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा और जसप्रीत बुमराह।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ छब्बीस दिसंबर से मेलबर्न में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए बीसीसीआई ने प्लेइंग इलेवन का ऐलान कर दिया है। दूसरा टेस्ट गंवाने के बाद भारतीय टीम में तीन अहम बदलाव किए गए हैं। पहले दोनों टेस्ट में फेल होने वाले सलामी बल्लेबाजों को टीम में जगह नहीं दी गई है, इसके अलावा एक ऑलराउंडर की वापसी हुई है। तीसरे टेस्ट के लिए बीसीसीआई ने दोनों सलामी बल्लेबाज केएल राहुल और मुरली विजय को बाहर कर दिया है। इसके अलावा तीसरे टेस्ट में उमेश यादव को भी टीम में जगह नहीं दी गई है। राहुल और विजय की जगह भारतीय टीम में मयंक अग्रवाल और रोहित शर्मा को टीम में शामिल किया गया है, जबकि उमेश यादव की जगह रवींद्र जडेजा को प्लेइंग इलेवन जगह दी गई है। बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज एक-एक की बराबरी पर चल रही है। भारतीय टीम ने ऐडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच मे ऑस्ट्रेलिया को इकतीस रनों से हराकर सीरीज में बढ़त हासिल की थी, लेकिन पर्थ टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को एक सौ छियालीस रनों से मात देकर सीरीज में बराबरी कर ली। तीसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम : विराट कोहली , अजिंक्य रहाणे , मयंक अग्रवाल, हनुमा विहारी, चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत , रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा और जसप्रीत बुमराह।
Mersin मेट्रोपॉलिटन मेयर Vahap Seçer TRT Çukurova रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम "भूमध्य से वृषभ तक" के लाइव प्रसारण अतिथि थे। कार्यक्रम में Seda Uslu Sarıoğlu के सवालों का जवाब देते हुए मेयर सीकर ने Mersin के यातायात को आसान बनाने के लिए मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। मेर्सिन मेट्रो के बारे में बात करते हुए, मेयर सीकर ने कहा, "हम 4 जिलों को जोड़ना चाहते हैं, अर्थात् थोड़े समय में लौह नेटवर्क के साथ XNUMX जिले, मेज़ितली, यानीसेहिर, टोरोसलर और भूमध्यसागरीय।" मेर्सिन मेट्रो एक 3-चरण का अध्ययन होगा, यह कहते हुए, मेयर सीकर ने कहा कि 30 हजार से अधिक यात्रियों की क्षमता वाले रेल सिस्टम को लाइट रेल सिस्टम के रूप में परिभाषित किया गया है। मार्ग के बारे में निम्नलिखित जानकारी दीः यह कहते हुए कि मेर्सिन मेट्रो यातायात, परिवहन और पर्यावरण स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान देगा, सीकर ने विभिन्न देशों में मेट्रो कार्यों का उदाहरण दिया। सीकर ने कहा, "मेर्सिन के लिए इस तरह के एक महत्वपूर्ण निवेश को उच्च लागत वाला निवेश माना जा सकता है। लेकिन हाल के इतिहास में, बहुत लंबे समय तक नहीं, आप 5 साल बाद देखेंगे कि मैं वास्तव में इसे एक परियोजना के रूप में मानता हूं जिसे हम 'शुक्र है' कह सकते हैं। अच्छी परियोजना, अच्छी परियोजना। आर्किटेक्चर वर्तमान में इंजीनियरिंग में एक महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने के बहुत करीब है। क्योंकि मेर्सिन मेट्रो प्रोजेक्ट तीन फाइनलिस्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस अर्थ में, हमें लगता है कि यह एक मूल्यवान परियोजना है और हमें लगता है कि यह मेर्सिन के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा। तथ्य यह है कि महत्वपूर्ण कंपनियां हमारे लिए लागू होती हैं, यह दर्शाता है कि उनका मेर्सिन पर सकारात्मक दृष्टिकोण है। याद दिलाते हुए कि 28 कंपनियों ने मेट्रो के प्री-क्वालिफिकेशन टेंडर के लिए आवेदन किया, सीकर ने कहा, "बेशक अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हैं। एक अमेरिकी कंपनी है, वहां रूस है, वहां चीन है, वहां स्पेनिश है, वहां अजेरी है। तुर्की के महत्वपूर्ण, इस संबंध में दावेदार, कुछ प्राधिकरण फर्म हैं। इससे हमें खुशी मिलती है। बेशक, यह इस तरह से दिखाता है कि मेर्सिन के प्रति उनका दृष्टिकोण सकारात्मक है। यह मेर्सिन मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के लिए एक दृष्टिकोण है या यह परियोजना एक उचित परियोजना है, एक वास्तविक परियोजना, एक अच्छी परियोजना, और महत्वपूर्ण कंपनियां हमारे लिए लागू होती हैं। आने वाले दिनों में, पहले प्री-क्वालिफिकेशन टेंडर को पूरा किया जाएगा और प्राइस ऑफर टेंडर आयोजित किया जाएगा। इसमें कुछ महीने लगेंगे। फिर, ज़ाहिर है, अगर कोई कानूनी समस्या नहीं है, अगर कोई आपत्ति नहीं है, तो निविदा कुछ महीनों के भीतर समाप्त हो जाती है और साइट को वितरित किया जाता है, ठेकेदार फर्म निर्माण शुरू करती है। हम इस पर काम करना जारी रखते हैं। हम कम समय में 4 जिलों को लोहे के जाल से जोड़ना चाहते हैं। यह कहते हुए कि वह मेट्रो प्रोजेक्ट में विश्वास करता है और इसे एक महत्वपूर्ण निवेश के रूप में देखता है, सीकर ने इस बात पर जोर दिया कि निर्माण की अवधि 4 वर्ष है और विकल्प की अवधि 2 वर्ष है। यह कहते हुए कि वे कुछ मार्गों पर ट्रैफिक को ऑन-ऑफ-ऑफ सिस्टम के साथ अवरुद्ध करेंगे, जबकि 13.4 किलोमीटर पहले चरण का काम जारी है, सीकर ने कहा कि ये अध्ययन योजनाबद्ध और निर्धारित तरीके से किए जाएंगे। सीकर ने कहा, "शायद जब ये काम चल रहे हों, तो हम 1nd स्टेज और 2rd स्टेज दोनों के कामों और कंस्ट्रक्शन टेंडर को पूरा करेंगे, जिसे हम ट्राम लाइन कहते हैं। "हम Mersin केंद्र, Mezitli, Yenişehir, Toroslar और Akdeniz के 3 जिलों को लोहे के नेटवर्क से जोड़ना चाहते हैं," उन्होंने कहा। सीकर ने कहा कि पहले चरण के पूरा होने के बाद, इस परियोजना का विस्तार अन्य पड़ोसी जिलों में किया जा सकता है। यह कहते हुए कि यानेसीहिर क्षेत्र में एक 4 डी रिंग रोड होगा, सीकर ने कहा, "यह यानीसेहर क्षेत्र में शुरू होगा। अब हम 1,5 किलोमीटर के पहले चरण में 4 रिंग रिंग रोड के काम में तेजी ला रहे हैं, जो मुफ्ता स्ट्रीम के यानीसेहिर जिले से शुरू होकर विश्वविद्यालय तक जारी है। सप्ताहांत के रूप में, 2-रिंग रोड पर एक बहु-मंजिला चौराहे का काम किया गया था, जिसे हम फ़ोरम जंक्शन कहते हैं, उस चौराहे पर, जो भारी यातायात वाला क्षेत्र है। यह वर्तमान में यातायात के लिए बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि फोरम इंटरचेंज को पूरा करने के बाद, हम जनवरी में इस निर्माण को पूरा करेंगे। उन्होंने सीकर, गोमेन, किपा और अन्य चौराहों पर किए जाने वाले योगदान चौराहे के बारे में भी बात की। हम एक नया राजमार्ग बनाने की कोशिश करेंगे, जो मेर्सिन और अदाना के बीच रेलवे लाइन के समानांतर मार्ग होगा। यह कहते हुए कि वे मेर्सिन और अडाना के बीच रेलवे लाइन के समानांतर मार्ग बनाने की कोशिश करेंगे, सीकर ने कहा, "फिर से, संगठित औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हमारे दोस्त, कारखाने के मालिक, नियोक्ता और श्रमिक हमसे गहन मांग कर रहे हैं, विशेष रूप से सुबह के घंटों में, वे अपने कार्यस्थलों में बहुत समय बिताते हैं। । टार्सस, मेर्सिन ऑर्गेनाइज़्ड इंडस्ट्रियल ज़ोन, जैसा कि आप जानते हैं, हुज़ुरकंट क्षेत्र में मर्सिडीज सेंटर की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। लेकिन जब आप इसे घंटों में देखते हैं, तो आप 60-70 किलोमीटर की अवधि में वहां पहुंच सकते हैं। सुबह के समय ट्रैफिक भारी होता है। वहां, जैसे ही अकडेनिज जिले के प्रथम चरण 2/1 पैमाने की योजना के अध्ययन का एहसास होता है, हम इस संबंध में बहुत प्रयास कर रहे हैं। कार्यान्वयन योजनाओं के साथ, हम एक नए राजमार्ग मर्सिन और अडाना के बीच रेलवे लाइन के समानांतर मार्ग बनाने का प्रयास करेंगे। "मुझे लगता है कि यह एक महत्वपूर्ण काम होगा जो मेर्सिन के यातायात को कम करेगा।"
Mersin मेट्रोपॉलिटन मेयर Vahap Seçer TRT Çukurova रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम "भूमध्य से वृषभ तक" के लाइव प्रसारण अतिथि थे। कार्यक्रम में Seda Uslu Sarıoğlu के सवालों का जवाब देते हुए मेयर सीकर ने Mersin के यातायात को आसान बनाने के लिए मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। मेर्सिन मेट्रो के बारे में बात करते हुए, मेयर सीकर ने कहा, "हम चार जिलों को जोड़ना चाहते हैं, अर्थात् थोड़े समय में लौह नेटवर्क के साथ XNUMX जिले, मेज़ितली, यानीसेहिर, टोरोसलर और भूमध्यसागरीय।" मेर्सिन मेट्रो एक तीन-चरण का अध्ययन होगा, यह कहते हुए, मेयर सीकर ने कहा कि तीस हजार से अधिक यात्रियों की क्षमता वाले रेल सिस्टम को लाइट रेल सिस्टम के रूप में परिभाषित किया गया है। मार्ग के बारे में निम्नलिखित जानकारी दीः यह कहते हुए कि मेर्सिन मेट्रो यातायात, परिवहन और पर्यावरण स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान देगा, सीकर ने विभिन्न देशों में मेट्रो कार्यों का उदाहरण दिया। सीकर ने कहा, "मेर्सिन के लिए इस तरह के एक महत्वपूर्ण निवेश को उच्च लागत वाला निवेश माना जा सकता है। लेकिन हाल के इतिहास में, बहुत लंबे समय तक नहीं, आप पाँच साल बाद देखेंगे कि मैं वास्तव में इसे एक परियोजना के रूप में मानता हूं जिसे हम 'शुक्र है' कह सकते हैं। अच्छी परियोजना, अच्छी परियोजना। आर्किटेक्चर वर्तमान में इंजीनियरिंग में एक महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने के बहुत करीब है। क्योंकि मेर्सिन मेट्रो प्रोजेक्ट तीन फाइनलिस्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस अर्थ में, हमें लगता है कि यह एक मूल्यवान परियोजना है और हमें लगता है कि यह मेर्सिन के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा। तथ्य यह है कि महत्वपूर्ण कंपनियां हमारे लिए लागू होती हैं, यह दर्शाता है कि उनका मेर्सिन पर सकारात्मक दृष्टिकोण है। याद दिलाते हुए कि अट्ठाईस कंपनियों ने मेट्रो के प्री-क्वालिफिकेशन टेंडर के लिए आवेदन किया, सीकर ने कहा, "बेशक अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हैं। एक अमेरिकी कंपनी है, वहां रूस है, वहां चीन है, वहां स्पेनिश है, वहां अजेरी है। तुर्की के महत्वपूर्ण, इस संबंध में दावेदार, कुछ प्राधिकरण फर्म हैं। इससे हमें खुशी मिलती है। बेशक, यह इस तरह से दिखाता है कि मेर्सिन के प्रति उनका दृष्टिकोण सकारात्मक है। यह मेर्सिन मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के लिए एक दृष्टिकोण है या यह परियोजना एक उचित परियोजना है, एक वास्तविक परियोजना, एक अच्छी परियोजना, और महत्वपूर्ण कंपनियां हमारे लिए लागू होती हैं। आने वाले दिनों में, पहले प्री-क्वालिफिकेशन टेंडर को पूरा किया जाएगा और प्राइस ऑफर टेंडर आयोजित किया जाएगा। इसमें कुछ महीने लगेंगे। फिर, ज़ाहिर है, अगर कोई कानूनी समस्या नहीं है, अगर कोई आपत्ति नहीं है, तो निविदा कुछ महीनों के भीतर समाप्त हो जाती है और साइट को वितरित किया जाता है, ठेकेदार फर्म निर्माण शुरू करती है। हम इस पर काम करना जारी रखते हैं। हम कम समय में चार जिलों को लोहे के जाल से जोड़ना चाहते हैं। यह कहते हुए कि वह मेट्रो प्रोजेक्ट में विश्वास करता है और इसे एक महत्वपूर्ण निवेश के रूप में देखता है, सीकर ने इस बात पर जोर दिया कि निर्माण की अवधि चार वर्ष है और विकल्प की अवधि दो वर्ष है। यह कहते हुए कि वे कुछ मार्गों पर ट्रैफिक को ऑन-ऑफ-ऑफ सिस्टम के साथ अवरुद्ध करेंगे, जबकि तेरह दशमलव चार किलोग्राममीटर पहले चरण का काम जारी है, सीकर ने कहा कि ये अध्ययन योजनाबद्ध और निर्धारित तरीके से किए जाएंगे। सीकर ने कहा, "शायद जब ये काम चल रहे हों, तो हम एकnd स्टेज और दोrd स्टेज दोनों के कामों और कंस्ट्रक्शन टेंडर को पूरा करेंगे, जिसे हम ट्राम लाइन कहते हैं। "हम Mersin केंद्र, Mezitli, Yenişehir, Toroslar और Akdeniz के तीन जिलों को लोहे के नेटवर्क से जोड़ना चाहते हैं," उन्होंने कहा। सीकर ने कहा कि पहले चरण के पूरा होने के बाद, इस परियोजना का विस्तार अन्य पड़ोसी जिलों में किया जा सकता है। यह कहते हुए कि यानेसीहिर क्षेत्र में एक चार डी रिंग रोड होगा, सीकर ने कहा, "यह यानीसेहर क्षेत्र में शुरू होगा। अब हम एक,पाँच किलोग्राममीटर के पहले चरण में चार रिंग रिंग रोड के काम में तेजी ला रहे हैं, जो मुफ्ता स्ट्रीम के यानीसेहिर जिले से शुरू होकर विश्वविद्यालय तक जारी है। सप्ताहांत के रूप में, दो-रिंग रोड पर एक बहु-मंजिला चौराहे का काम किया गया था, जिसे हम फ़ोरम जंक्शन कहते हैं, उस चौराहे पर, जो भारी यातायात वाला क्षेत्र है। यह वर्तमान में यातायात के लिए बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि फोरम इंटरचेंज को पूरा करने के बाद, हम जनवरी में इस निर्माण को पूरा करेंगे। उन्होंने सीकर, गोमेन, किपा और अन्य चौराहों पर किए जाने वाले योगदान चौराहे के बारे में भी बात की। हम एक नया राजमार्ग बनाने की कोशिश करेंगे, जो मेर्सिन और अदाना के बीच रेलवे लाइन के समानांतर मार्ग होगा। यह कहते हुए कि वे मेर्सिन और अडाना के बीच रेलवे लाइन के समानांतर मार्ग बनाने की कोशिश करेंगे, सीकर ने कहा, "फिर से, संगठित औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हमारे दोस्त, कारखाने के मालिक, नियोक्ता और श्रमिक हमसे गहन मांग कर रहे हैं, विशेष रूप से सुबह के घंटों में, वे अपने कार्यस्थलों में बहुत समय बिताते हैं। । टार्सस, मेर्सिन ऑर्गेनाइज़्ड इंडस्ट्रियल ज़ोन, जैसा कि आप जानते हैं, हुज़ुरकंट क्षेत्र में मर्सिडीज सेंटर की दूरी लगभग पंद्रह किलोग्राममीटर है। लेकिन जब आप इसे घंटों में देखते हैं, तो आप साठ-सत्तर किलोग्राममीटर की अवधि में वहां पहुंच सकते हैं। सुबह के समय ट्रैफिक भारी होता है। वहां, जैसे ही अकडेनिज जिले के प्रथम चरण दो/एक पैमाने की योजना के अध्ययन का एहसास होता है, हम इस संबंध में बहुत प्रयास कर रहे हैं। कार्यान्वयन योजनाओं के साथ, हम एक नए राजमार्ग मर्सिन और अडाना के बीच रेलवे लाइन के समानांतर मार्ग बनाने का प्रयास करेंगे। "मुझे लगता है कि यह एक महत्वपूर्ण काम होगा जो मेर्सिन के यातायात को कम करेगा।"
है । आत्म-समाहित अवस्था में वह शाश्वत एवं अक्षर स्वरूपानंदका स्वामी है, बल्कि वह स्वयं वही आनंद है; सक्रिय और सृजनात्मक रूपमें वह सत्ताको क्रीड़ाके आनंदका, चेतनाकी क्रीड़ाके आनन्दका, शक्ति और इच्छाकी लीलाके आनन्दका स्वामी होता है, बल्कि वह स्वयं ही वह आनंद हो जाता है । वह लीला ही विश्व है और वह आनंद ही एकमात्र कारण, प्रवर्तक और उद्देश्य है । भागवत चेतना अक्षर रूपसे उस लीला तथा आनंदकी स्वामिनी होती है; हमारी सार सत्ता, हमारा यथार्थ आत्मा जो मिथ्या आत्मा या मनोमय अहंके द्वारा प्रच्छन्न है, वह भी उस लीला और उस आनंदका भोग शाश्वत और अविच्छेद्य रूपसे करता है और चूँकि उसकी सत्ता भागवत चेतनाके साथ एक है, इसलिये इससे भिन्न कुछ वह कर भी नहीं सकता । अतः, यदि हम दिव्य जीवनकी अभीप्सा करते हैं तो उसको प्राप्तिका मार्ग इससे भिन्न नहीं हो सकता कि हम अपने अंदर आवृत इस आत्माको अनावृत करें . मिथ्या आत्मा या मनोमय अहंगत अपनी वर्तमान स्थितिसे ऊपर उठकर सच्चे आत्माकी उच्चतर स्थिति प्रवेश करें, भागवत चेतनाके संग एकत्वमें प्रवेश करें जिसका भोग हमारे अंदर कोई अतिचेतन वस्तु सदैव करती है, - अन्यथा हमारा अस्तित्व ही नहीं रह सकता था, - किंतु जिससे हमारी सचेतन मानसताने अपने आपको वंचित कर रखा है । किंतु हम जब इस भाँति एक ओर सच्चिदानंदके इस एकत्वका, और दूसरी ओर, इस विभाजित मानसताका प्रतिपादन करते हैं तो हम दो विरोधी सत्ताएँ स्थापित करते हैं, जिनमेंसे एक सत्य मानी जाय तो दूसरी अवश्य ही असत्य होगी, जिनमें से एकका भोग करना हो तो दूसरीको अवश्य विनष्ट करना होगा। तथापि, पृथ्वीपर हमारा अस्तित्व मनमें और उसके प्राण तथा शरीर रूपमें ही होता है, और यदि उस अखंड सत्, चित् और आनंदतक पहुँचने के लिए हमें मन, प्राण और शरीरकी चेतनाको अवश्यमेव विनष्ट करना होता हो, तो पृथ्वीपर दिव्य जीवनका होना असंभव हो जाता है । तव पुनः तुरीय हो जानेके लिए या उसका भोग करनेके लिए हमें विश्व - जीवनको भ्रम कहकर उसका पूर्ण परित्याग कर देना होगा । इस समाधानसे तव तक नहीं बचा जा सकता जबतक कि इन दोनोंके वीच कोई ऐसी मध्यवर्ती कड़ी न मिल जाय जो दोनोंको एक-दूसरेका विवरण दे और उनके बीच ऐसा संबंध स्थापित कर दे जो हमारे लिए मन, प्राण और शरीरके सांचेमें उस एक सत्, चित् और आनंदको उपलव्ध करना संभव वना दे । अतिमानसको त्रिपुटी और, मध्यवर्ती कड़ी है भी । हम इसे अतिमानस या ऋत-चित् कहते हैं, क्योंकि वह मनसे श्रेष्ठतर तत्त्व है और वह मनकी भाँति वस्तुओंके प्रतीयमान रूपों और प्रातिभासिक विभाजनोंमें नहीं, प्रत्युत वस्तुओंके मूलगत सत्य और एकत्वमें रहता, कार्य करता और आगे बढ़ता है । हमने जिस आधारसे आरंभ किया है, अतिमानसका अस्तित्व उससे सीधे - उद्गत होनेवाला युक्तियुक्त अनिवार्य परिणाम है। क्योंकि, सच्चिदानंद अपने स्वरूपमें अवश्य ही चिन्मय अस्तित्वका वह देश - कालातीत निविशेष होगा जो कि आनंद है, किन्तु इसके विपरीत, जगत् तो काल और देशमें -एक विस्तरण है, काल और देशमें कारणताके द्वारा संबंधों और संभावनाओंकी गति, चरितार्थता और विकास है, या यूं कहें कि हमें ऐसा प्रतीत होता है। इस कारणताका सच्चा नाम है ॠत या दिव्य विधान और उस विधानका सार है वस्तुके सत्यका एक अनिवार्य आत्म-विकास, जो सत्य कि, जो कुछ भी विकसित हुआ है, उसके स्वयं सारतत्त्वमें भाव-रूपसे विद्यमान है, यह अनंत संभावनाके उपादानमेंसे रचित सापेक्षिक गतियोंका पूर्व - निश्चित निर्धारण है । निखिल वस्तुओंका इस प्रकार विकास करना अवश्य ही ज्ञानात्मिका इच्छा या चित्-शक्तिका काम होना चाहिये, क्योंकि विश्वकी सारी अभिव्यक्ति चित्-शक्तिकी एक लीला है जो सत्ताका स्व-भाव है। किंतु जो ज्ञानात्मिका इच्छा विकसित हो रही है वह मानसिक नहीं हो सकती, क्योंकि मन इस विधानको न तो जानता है, न मन उसका स्वामी या शासक है, प्रत्युत वह उसके द्वारा शासित होता है, उसके परिणामोंमेंसे एक परिणाम होता है, आत्मविकासके प्रतिभासमें घूमता रहता है, किंतु उसके मूल तक नहीं जाता, वह विकासके परिणामोंको विभाजित वस्तुओंके रूपमें -देखता और उनके मूल तथा सत्यता तक पहुँचनेका व्यर्थ उद्योग करता है । तथापि, इस ज्ञानात्मिका इच्छाको, जो सबका विकास करती है, अवश्य ही इन वस्तुओंके एकत्वपर अधिकार होगा और वह उसीमेंसे वस्तुओंके बहुत्वको अभिव्यक्त करती होगी; किंतु यह एकत्व मनके अधिकारमें नहीं होता, मनको तो बहुत्वके किसी अंगपर एक अपूर्ण अधिकार ही प्राप्त होता है । अतः मनसे श्रेष्ठतर कोई तत्त्व अवश्य होना चाहिये जो वे शर्तें पूरी करता हो जिनमें मन असफल हो जाता है । निस्संदेह, स्वयं सच्चिदानंद ही यह तत्त्व है, किन्तु वह सच्चिदानंद नहीं जो अपनी शुद्ध अनंत अपरिवर्तनशील चेतनामें अवस्थित है, वरन् वह सच्चिदानंद, जो इस आद्या स्थितिसे चलकर, बल्कि उसीको आधार बनाकर उसपर, और आधेय वनकर उसमें, ऐसी गतिके अंदर आ जाता है जो उसकी ऊर्जाका रूप और विश्व-सृष्टिका उपकरण होती है । चेतना और शक्ति सत्ताके शुद्ध वीर्यके युगल स्वरूपभूत पक्ष हैं, अतः ज्ञान और इच्छा अवश्य ही वह रूप होंगे जिसे वह वीर्य काल और देशके विस्तारमें संबंधोंके जगत्की सृष्टि करते हुए धारण करता है । यह ज्ञान और यह इच्छा अवश्य ही अद्वय, अनंत, सर्वालिंगनकारी, सर्व-अधिगतकारी, सर्व-रूपायणकारी होनी चाहिये, वह अपने अंदर उस तत्त्वको शाश्वत रूपसे धारण किये होगी जिसे वह गति और रूपमें ढालती है । तो, अतिमानस एक निर्धारक आत्म-ज्ञानमें निर्गत होनेवाला सत्- पुरुष है, जो अपने कुछ सत्योंको देखता है और उन्हें अपनी ही कालातीत और देशातीत सत्ताके कालगत और देशगत विस्तारोंमें चरितार्थ करनेकी इच्छा करता है । जो कुछ भी उसकी अपनी सत्तामें है वह आत्मज्ञानका, ऋत-चित्का, सत्-भावका रूप लेता है, और चूंकि वह आत्म-ज्ञान आत्म-शक्ति भी है, अतएव वह अनिवार्य रूपसे अपने आपको काल और देशमें निष्पन्न या चरितार्थ करता है । यही दिव्य चेतनाके स्वरूपका परिचय है । वह चेतना सारी वस्तुओंका सर्जन अपनी चित्-शक्तिकी क्रिया के द्वारा अपने अन्दर करती है । विकासको वह चेतना शासित करती है आत्म-विवर्तनके द्वारा, सत्ताके सत्यमें अन्तर्निहित ज्ञानात्मिका इच्छा या सत्-भावसे, जिसने कि उन वस्तुओंको रचा है । जो सत् इस भाँति सचेतन है उसे हम ईश्वर कहते हैं और यह स्पष्ट है कि उस ईश्वरको सर्वव्यापक, सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान होना चाहिये। सर्वव्यापक, क्योंकि सभी रूप उसीकी चित्-सत्ताके रूप हैं जिन्हें उसीकी गतिकी शक्तिने देश और काल-रूपमें विस्तीर्ण होते हुए सृष्ट किया है; सर्वज्ञ, क्योंकि सारी वस्तुएँ उसकी चित्-सत्ताके अंदर विद्यमान हैं, उसके द्वारा रूपायित होती हैं और उसीके अधीन रहती हैं; सर्वशक्तिमान्, क्योंकि यह सर्वाधिपति चेतना एक सर्वाधिपति शक्ति भी है और सबके अन्दर प्रवहमान इच्छा भी । और, इस इच्छा तथा ज्ञानमें आपसमें विरोध भी नहीं है जैसे कि हमारी इच्छा और ज्ञान आपसमें लड़नेमें समर्थ रहते हैं, क्योंकि वे भिन्न-भिन्न नहीं हैं, वरन् उसी सत्ताकी अभिन्न गति हैं । न ही उनका प्रतिवाद अन्दर या बाहरकी किसी अन्य इच्छा, शक्ति या चेतनाके द्वारा हो सकता है; क्योंकि उस एकमेवाद्वितीयके बाहर कोई चेतना या शक्ति नहीं है, और अन्दरकी सारी ऊर्जाएँ और ज्ञानकी रचनाएँ उससे भिन्न नहीं हैं, बल्कि उस एक सर्व निर्धारिका इच्छा और उस एक सर्व-सामंजस्यकारी ज्ञानकी लीला मात्र हैं। हम जिसे इच्छा और
है । आत्म-समाहित अवस्था में वह शाश्वत एवं अक्षर स्वरूपानंदका स्वामी है, बल्कि वह स्वयं वही आनंद है; सक्रिय और सृजनात्मक रूपमें वह सत्ताको क्रीड़ाके आनंदका, चेतनाकी क्रीड़ाके आनन्दका, शक्ति और इच्छाकी लीलाके आनन्दका स्वामी होता है, बल्कि वह स्वयं ही वह आनंद हो जाता है । वह लीला ही विश्व है और वह आनंद ही एकमात्र कारण, प्रवर्तक और उद्देश्य है । भागवत चेतना अक्षर रूपसे उस लीला तथा आनंदकी स्वामिनी होती है; हमारी सार सत्ता, हमारा यथार्थ आत्मा जो मिथ्या आत्मा या मनोमय अहंके द्वारा प्रच्छन्न है, वह भी उस लीला और उस आनंदका भोग शाश्वत और अविच्छेद्य रूपसे करता है और चूँकि उसकी सत्ता भागवत चेतनाके साथ एक है, इसलिये इससे भिन्न कुछ वह कर भी नहीं सकता । अतः, यदि हम दिव्य जीवनकी अभीप्सा करते हैं तो उसको प्राप्तिका मार्ग इससे भिन्न नहीं हो सकता कि हम अपने अंदर आवृत इस आत्माको अनावृत करें . मिथ्या आत्मा या मनोमय अहंगत अपनी वर्तमान स्थितिसे ऊपर उठकर सच्चे आत्माकी उच्चतर स्थिति प्रवेश करें, भागवत चेतनाके संग एकत्वमें प्रवेश करें जिसका भोग हमारे अंदर कोई अतिचेतन वस्तु सदैव करती है, - अन्यथा हमारा अस्तित्व ही नहीं रह सकता था, - किंतु जिससे हमारी सचेतन मानसताने अपने आपको वंचित कर रखा है । किंतु हम जब इस भाँति एक ओर सच्चिदानंदके इस एकत्वका, और दूसरी ओर, इस विभाजित मानसताका प्रतिपादन करते हैं तो हम दो विरोधी सत्ताएँ स्थापित करते हैं, जिनमेंसे एक सत्य मानी जाय तो दूसरी अवश्य ही असत्य होगी, जिनमें से एकका भोग करना हो तो दूसरीको अवश्य विनष्ट करना होगा। तथापि, पृथ्वीपर हमारा अस्तित्व मनमें और उसके प्राण तथा शरीर रूपमें ही होता है, और यदि उस अखंड सत्, चित् और आनंदतक पहुँचने के लिए हमें मन, प्राण और शरीरकी चेतनाको अवश्यमेव विनष्ट करना होता हो, तो पृथ्वीपर दिव्य जीवनका होना असंभव हो जाता है । तव पुनः तुरीय हो जानेके लिए या उसका भोग करनेके लिए हमें विश्व - जीवनको भ्रम कहकर उसका पूर्ण परित्याग कर देना होगा । इस समाधानसे तव तक नहीं बचा जा सकता जबतक कि इन दोनोंके वीच कोई ऐसी मध्यवर्ती कड़ी न मिल जाय जो दोनोंको एक-दूसरेका विवरण दे और उनके बीच ऐसा संबंध स्थापित कर दे जो हमारे लिए मन, प्राण और शरीरके सांचेमें उस एक सत्, चित् और आनंदको उपलव्ध करना संभव वना दे । अतिमानसको त्रिपुटी और, मध्यवर्ती कड़ी है भी । हम इसे अतिमानस या ऋत-चित् कहते हैं, क्योंकि वह मनसे श्रेष्ठतर तत्त्व है और वह मनकी भाँति वस्तुओंके प्रतीयमान रूपों और प्रातिभासिक विभाजनोंमें नहीं, प्रत्युत वस्तुओंके मूलगत सत्य और एकत्वमें रहता, कार्य करता और आगे बढ़ता है । हमने जिस आधारसे आरंभ किया है, अतिमानसका अस्तित्व उससे सीधे - उद्गत होनेवाला युक्तियुक्त अनिवार्य परिणाम है। क्योंकि, सच्चिदानंद अपने स्वरूपमें अवश्य ही चिन्मय अस्तित्वका वह देश - कालातीत निविशेष होगा जो कि आनंद है, किन्तु इसके विपरीत, जगत् तो काल और देशमें -एक विस्तरण है, काल और देशमें कारणताके द्वारा संबंधों और संभावनाओंकी गति, चरितार्थता और विकास है, या यूं कहें कि हमें ऐसा प्रतीत होता है। इस कारणताका सच्चा नाम है ॠत या दिव्य विधान और उस विधानका सार है वस्तुके सत्यका एक अनिवार्य आत्म-विकास, जो सत्य कि, जो कुछ भी विकसित हुआ है, उसके स्वयं सारतत्त्वमें भाव-रूपसे विद्यमान है, यह अनंत संभावनाके उपादानमेंसे रचित सापेक्षिक गतियोंका पूर्व - निश्चित निर्धारण है । निखिल वस्तुओंका इस प्रकार विकास करना अवश्य ही ज्ञानात्मिका इच्छा या चित्-शक्तिका काम होना चाहिये, क्योंकि विश्वकी सारी अभिव्यक्ति चित्-शक्तिकी एक लीला है जो सत्ताका स्व-भाव है। किंतु जो ज्ञानात्मिका इच्छा विकसित हो रही है वह मानसिक नहीं हो सकती, क्योंकि मन इस विधानको न तो जानता है, न मन उसका स्वामी या शासक है, प्रत्युत वह उसके द्वारा शासित होता है, उसके परिणामोंमेंसे एक परिणाम होता है, आत्मविकासके प्रतिभासमें घूमता रहता है, किंतु उसके मूल तक नहीं जाता, वह विकासके परिणामोंको विभाजित वस्तुओंके रूपमें -देखता और उनके मूल तथा सत्यता तक पहुँचनेका व्यर्थ उद्योग करता है । तथापि, इस ज्ञानात्मिका इच्छाको, जो सबका विकास करती है, अवश्य ही इन वस्तुओंके एकत्वपर अधिकार होगा और वह उसीमेंसे वस्तुओंके बहुत्वको अभिव्यक्त करती होगी; किंतु यह एकत्व मनके अधिकारमें नहीं होता, मनको तो बहुत्वके किसी अंगपर एक अपूर्ण अधिकार ही प्राप्त होता है । अतः मनसे श्रेष्ठतर कोई तत्त्व अवश्य होना चाहिये जो वे शर्तें पूरी करता हो जिनमें मन असफल हो जाता है । निस्संदेह, स्वयं सच्चिदानंद ही यह तत्त्व है, किन्तु वह सच्चिदानंद नहीं जो अपनी शुद्ध अनंत अपरिवर्तनशील चेतनामें अवस्थित है, वरन् वह सच्चिदानंद, जो इस आद्या स्थितिसे चलकर, बल्कि उसीको आधार बनाकर उसपर, और आधेय वनकर उसमें, ऐसी गतिके अंदर आ जाता है जो उसकी ऊर्जाका रूप और विश्व-सृष्टिका उपकरण होती है । चेतना और शक्ति सत्ताके शुद्ध वीर्यके युगल स्वरूपभूत पक्ष हैं, अतः ज्ञान और इच्छा अवश्य ही वह रूप होंगे जिसे वह वीर्य काल और देशके विस्तारमें संबंधोंके जगत्की सृष्टि करते हुए धारण करता है । यह ज्ञान और यह इच्छा अवश्य ही अद्वय, अनंत, सर्वालिंगनकारी, सर्व-अधिगतकारी, सर्व-रूपायणकारी होनी चाहिये, वह अपने अंदर उस तत्त्वको शाश्वत रूपसे धारण किये होगी जिसे वह गति और रूपमें ढालती है । तो, अतिमानस एक निर्धारक आत्म-ज्ञानमें निर्गत होनेवाला सत्- पुरुष है, जो अपने कुछ सत्योंको देखता है और उन्हें अपनी ही कालातीत और देशातीत सत्ताके कालगत और देशगत विस्तारोंमें चरितार्थ करनेकी इच्छा करता है । जो कुछ भी उसकी अपनी सत्तामें है वह आत्मज्ञानका, ऋत-चित्का, सत्-भावका रूप लेता है, और चूंकि वह आत्म-ज्ञान आत्म-शक्ति भी है, अतएव वह अनिवार्य रूपसे अपने आपको काल और देशमें निष्पन्न या चरितार्थ करता है । यही दिव्य चेतनाके स्वरूपका परिचय है । वह चेतना सारी वस्तुओंका सर्जन अपनी चित्-शक्तिकी क्रिया के द्वारा अपने अन्दर करती है । विकासको वह चेतना शासित करती है आत्म-विवर्तनके द्वारा, सत्ताके सत्यमें अन्तर्निहित ज्ञानात्मिका इच्छा या सत्-भावसे, जिसने कि उन वस्तुओंको रचा है । जो सत् इस भाँति सचेतन है उसे हम ईश्वर कहते हैं और यह स्पष्ट है कि उस ईश्वरको सर्वव्यापक, सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान होना चाहिये। सर्वव्यापक, क्योंकि सभी रूप उसीकी चित्-सत्ताके रूप हैं जिन्हें उसीकी गतिकी शक्तिने देश और काल-रूपमें विस्तीर्ण होते हुए सृष्ट किया है; सर्वज्ञ, क्योंकि सारी वस्तुएँ उसकी चित्-सत्ताके अंदर विद्यमान हैं, उसके द्वारा रूपायित होती हैं और उसीके अधीन रहती हैं; सर्वशक्तिमान्, क्योंकि यह सर्वाधिपति चेतना एक सर्वाधिपति शक्ति भी है और सबके अन्दर प्रवहमान इच्छा भी । और, इस इच्छा तथा ज्ञानमें आपसमें विरोध भी नहीं है जैसे कि हमारी इच्छा और ज्ञान आपसमें लड़नेमें समर्थ रहते हैं, क्योंकि वे भिन्न-भिन्न नहीं हैं, वरन् उसी सत्ताकी अभिन्न गति हैं । न ही उनका प्रतिवाद अन्दर या बाहरकी किसी अन्य इच्छा, शक्ति या चेतनाके द्वारा हो सकता है; क्योंकि उस एकमेवाद्वितीयके बाहर कोई चेतना या शक्ति नहीं है, और अन्दरकी सारी ऊर्जाएँ और ज्ञानकी रचनाएँ उससे भिन्न नहीं हैं, बल्कि उस एक सर्व निर्धारिका इच्छा और उस एक सर्व-सामंजस्यकारी ज्ञानकी लीला मात्र हैं। हम जिसे इच्छा और
नई दिल्लीः दिल्ली में कोरोना की स्पीड फिर तेज हो गई है. पिछले 24 घंटे में हजार से ज्यादा मामले दर्ज कर लिए गए हैं. राजधानी में कोरोना के 1118 केस सामने आए हैं, दो लोगों की मौत भी हुई है. संक्रमण दर भी अभी 6. 50% चल रहा है. कल दिल्ली में कोरोना के 614 मामले सामने आए थे, ऐसे में आज बड़ा उछाल देखने को मिल गया है. मामले डबल के करीब बढ़ गए हैं. संक्रमण दर में जरूर मामूली गिरावट देखने को मिली है, लेकिन आंकड़े ये भी चिंता में डालने वाले हैं. कुछ दिन पहले तक राजधानी में स्थिति कंट्रोल में आती दिख रही थी, लेकिन अब अचानक से फिर मामलों में उछाल आया है.
नई दिल्लीः दिल्ली में कोरोना की स्पीड फिर तेज हो गई है. पिछले चौबीस घंटाटे में हजार से ज्यादा मामले दर्ज कर लिए गए हैं. राजधानी में कोरोना के एक हज़ार एक सौ अट्ठारह केस सामने आए हैं, दो लोगों की मौत भी हुई है. संक्रमण दर भी अभी छः. पचास% चल रहा है. कल दिल्ली में कोरोना के छः सौ चौदह मामले सामने आए थे, ऐसे में आज बड़ा उछाल देखने को मिल गया है. मामले डबल के करीब बढ़ गए हैं. संक्रमण दर में जरूर मामूली गिरावट देखने को मिली है, लेकिन आंकड़े ये भी चिंता में डालने वाले हैं. कुछ दिन पहले तक राजधानी में स्थिति कंट्रोल में आती दिख रही थी, लेकिन अब अचानक से फिर मामलों में उछाल आया है.
Original with; Punjab Vidhan Sabha Digitized by; Panjab Digi THE PUNJAB SECURITY OF LAND TENURES (AMENDMENT) BILL कि वह उन्हें भर नहीं सकते थे। मैं इनसे पूछता हूं कि वह यह सारो information मैं लोगों से क्यों मांगते फिरते हैं? क्या इन का अपना record कोई नहीं और क्या यह सारी information इन के अपने record में मौजूद नहीं ? यह पटवारी किस लिये हैं और यह गवर्नमेंट दया उन से यह सारो इस्ट नहीं करवा सकती ? क्या पटवारी ढालबाश नहीं मिलाते ? क्या गवर्तनैण्ट को यह पता नहीं है कि किस के पास 30 एकड़ ज़मीन है और किस के पास 30 एकड़ से ज्यादा है ? मुझे आप बताएं कि गवर्ननेंट के पास जब सारा record मौजूद है तो फिर यह जनींदारों से क्यों पूछते फिरते हैं, इस लिए कि उनकी नाक में दम किया जाए? मैं अर्ज करूंगा कि इस declaration की कोई जरूरत नहीं है । यह propaganda तो इत का साहमवाह का चलाया हुआ है और असल बात यह है कि यह सब जनींदारों के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं । ( हंसी) आज तक शायद किसी करोड़पति से गवर्नमेंट ने इस तरीका से 5 रुपए तक नहीं लिए हैं और किसी शहरो से 5 गज जमीन नहीं तो है । लेकिन जिन लोगों से, छोटे छोटे गरीब ज़मीदारों से पहले ही लाखों एकड़ जमीन होले बहाने लगा कर लूडी है उन को अब फिर डंडे से लूटना चाहते हैं। फिर साथ साथ यह शोर भी मचाया जाता है कि साहिब land reforms बड़े ढोले तरीके से हो रहे हैं और जब अपने पर टैक्स लगने लगा था यानी एक टैक्स मकानों पर लगने लगा था तो ऊंत्री एड़ियां कर के चिल्ला-चिल्ला कर बोलते थे और जहां तक वात्रेला मचाया कि उसे postpone करा कर छोड़ा और ज तक फिर वह इस हाउस में नहीं आया और शायद न आएगा ही । आज जो यह लोग दस्तखत करवाते फिरते हैं और मैं फिर challenge से कहता हूं कि दस्तखत करवाने वाले वह हैं जिन के पास एक विसवा जमीन भी नहीं है और (Interruptions and noise ) ( आवावें बिल्कुल गल्त है) गल्त नहीं, ठीक है । मैं कहता हूं कि हम से ज्यादा मुज़ारों का हमदर्द कौन है जो एक ही गांव में आबाद हैं और घर के साथ घर है । उन में कोई हमारा चाचा है, कोई भतीजा है और कोई भाई है । कहते हैं कि अगर कोई पड़ोसन किसी बच्चे से मां से ज्यादा प्यार करती है तो समझ लो कि या तो वह डायण है और या उसे भगाना चाहती है ( हंसी ) । मैं अर्ज करता हूं कि मुज़ारे वह् हैं जिन्हें नवाव ममदौर और नवाब पटौदो छोड़ कर गए हैं। अगर यह गुज़ारों के हमदर्द होते तो उन मुज़ारों को बेदखल न किया जाता । यह बेचारे मारे मारे फिरते हैं और यह उन के हमदर्द मगरमच्छ के झांसू बहा रहे हैं। जब हम ने कहा तो कह दिया कि साहिब हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि मुसलमानों की जनीन है और यह बात Government of India के हाथ में है। मैं कहता हूं कि घसली मुज़ारों का मसला तो उन लोगों का है पहले उसे तो हल करो । आविर मुज़ारे है कोन? कभी में मुजारा हूं और कभी मेरा भतीजा मेरा मुज़ारा है । अगर मैं शहर में बरतन साफ करने चला गया (हंज़ी) तो उस ने मेरी ज़मीन जोत ली और मेरा मुज़ारा दन गया और कभी वह कशमीर की लड़ाई पर चला गया तो मैं उसका मुज़ारा घन गया । आखिर यही लम्बी चौड़ी बहस किस चीज़ पर हो रही है । आप इस बिल में अपील का right दीजिए और यह जो सारी । information है इसे पटवारियों के जिम्में लगाएं। पटवारी इसे दस दिन में दे
Original with; Punjab Vidhan Sabha Digitized by; Panjab Digi THE PUNJAB SECURITY OF LAND TENURES BILL कि वह उन्हें भर नहीं सकते थे। मैं इनसे पूछता हूं कि वह यह सारो information मैं लोगों से क्यों मांगते फिरते हैं? क्या इन का अपना record कोई नहीं और क्या यह सारी information इन के अपने record में मौजूद नहीं ? यह पटवारी किस लिये हैं और यह गवर्नमेंट दया उन से यह सारो इस्ट नहीं करवा सकती ? क्या पटवारी ढालबाश नहीं मिलाते ? क्या गवर्तनैण्ट को यह पता नहीं है कि किस के पास तीस एकड़ ज़मीन है और किस के पास तीस एकड़ से ज्यादा है ? मुझे आप बताएं कि गवर्ननेंट के पास जब सारा record मौजूद है तो फिर यह जनींदारों से क्यों पूछते फिरते हैं, इस लिए कि उनकी नाक में दम किया जाए? मैं अर्ज करूंगा कि इस declaration की कोई जरूरत नहीं है । यह propaganda तो इत का साहमवाह का चलाया हुआ है और असल बात यह है कि यह सब जनींदारों के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं । आज तक शायद किसी करोड़पति से गवर्नमेंट ने इस तरीका से पाँच रुपयापए तक नहीं लिए हैं और किसी शहरो से पाँच गज जमीन नहीं तो है । लेकिन जिन लोगों से, छोटे छोटे गरीब ज़मीदारों से पहले ही लाखों एकड़ जमीन होले बहाने लगा कर लूडी है उन को अब फिर डंडे से लूटना चाहते हैं। फिर साथ साथ यह शोर भी मचाया जाता है कि साहिब land reforms बड़े ढोले तरीके से हो रहे हैं और जब अपने पर टैक्स लगने लगा था यानी एक टैक्स मकानों पर लगने लगा था तो ऊंत्री एड़ियां कर के चिल्ला-चिल्ला कर बोलते थे और जहां तक वात्रेला मचाया कि उसे postpone करा कर छोड़ा और ज तक फिर वह इस हाउस में नहीं आया और शायद न आएगा ही । आज जो यह लोग दस्तखत करवाते फिरते हैं और मैं फिर challenge से कहता हूं कि दस्तखत करवाने वाले वह हैं जिन के पास एक विसवा जमीन भी नहीं है और गल्त नहीं, ठीक है । मैं कहता हूं कि हम से ज्यादा मुज़ारों का हमदर्द कौन है जो एक ही गांव में आबाद हैं और घर के साथ घर है । उन में कोई हमारा चाचा है, कोई भतीजा है और कोई भाई है । कहते हैं कि अगर कोई पड़ोसन किसी बच्चे से मां से ज्यादा प्यार करती है तो समझ लो कि या तो वह डायण है और या उसे भगाना चाहती है । मैं अर्ज करता हूं कि मुज़ारे वह् हैं जिन्हें नवाव ममदौर और नवाब पटौदो छोड़ कर गए हैं। अगर यह गुज़ारों के हमदर्द होते तो उन मुज़ारों को बेदखल न किया जाता । यह बेचारे मारे मारे फिरते हैं और यह उन के हमदर्द मगरमच्छ के झांसू बहा रहे हैं। जब हम ने कहा तो कह दिया कि साहिब हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि मुसलमानों की जनीन है और यह बात Government of India के हाथ में है। मैं कहता हूं कि घसली मुज़ारों का मसला तो उन लोगों का है पहले उसे तो हल करो । आविर मुज़ारे है कोन? कभी में मुजारा हूं और कभी मेरा भतीजा मेरा मुज़ारा है । अगर मैं शहर में बरतन साफ करने चला गया तो उस ने मेरी ज़मीन जोत ली और मेरा मुज़ारा दन गया और कभी वह कशमीर की लड़ाई पर चला गया तो मैं उसका मुज़ारा घन गया । आखिर यही लम्बी चौड़ी बहस किस चीज़ पर हो रही है । आप इस बिल में अपील का right दीजिए और यह जो सारी । information है इसे पटवारियों के जिम्में लगाएं। पटवारी इसे दस दिन में दे
संगठन का कहना है कि हड़ताल के पहले उन्होंने बातचीत का रास्ता भी अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं की गई तो निराश होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं. इसी कड़ी में अब राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन भी प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं. राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने राजस्थान सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर की गई अप्रत्याशित वैट वृद्धि के विरोध में शनिवार यानी 10 अप्रैल को एक दिन की हड़ताल करने की घोषणा की है. एसोसिएशन ने बयान जारी कर हड़ताल की घोषणा की है. राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के बयान के मुताबिक संगठन ने शनिवार को एक दिन और 25 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय किया है. उनका कहना है कि शनिवार को सुबह छह बजे से रात 12 बजे तक प्रदेश भर के पेट्रोल पंप किसी भी प्रकार की खरीद और बिक्री नहीं करेंगे. एसोसिएशन का कहना है कि इस दौरान राज्य के लगभग 7000 पेट्रोल पंप बंद रहेंगे. संगठन का कहना है कि इस हड़ताल के कारण लगभग तीन करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बिक्री प्रभावित होगी, जिसका असर सरकार के राजस्व पर पड़ेगा. एसोसिएशन के मुताबिक उनकी हड़ताल के सरकार को रोड सेस समेत लगभग 34 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा. संगठन का कहना है कि हड़ताल के पहले उन्होंने बातचीत का रास्ता भी अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं की गई तो निराश होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. एसोसिएशन द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि एसोसिएशन ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री समेत सभी संबंधित अधिकारियों को इसके संबंध में ज्ञापन देकर राजस्थान में वैट, पंजाब के समान करने की मांगी की थी और बातचीत के लिए समय भी मांगा था. लेकिन न तो हमें समय मिला और न ही सरकार द्वारा इसके संबंध में कोई भी सकारात्मक कदम उठाया गया. (एजेंसी इनपुट के साथ) ये भी पढ़ेंः
संगठन का कहना है कि हड़ताल के पहले उन्होंने बातचीत का रास्ता भी अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं की गई तो निराश होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं. इसी कड़ी में अब राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन भी प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं. राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने राजस्थान सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर की गई अप्रत्याशित वैट वृद्धि के विरोध में शनिवार यानी दस अप्रैल को एक दिन की हड़ताल करने की घोषणा की है. एसोसिएशन ने बयान जारी कर हड़ताल की घोषणा की है. राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के बयान के मुताबिक संगठन ने शनिवार को एक दिन और पच्चीस अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय किया है. उनका कहना है कि शनिवार को सुबह छह बजे से रात बारह बजे तक प्रदेश भर के पेट्रोल पंप किसी भी प्रकार की खरीद और बिक्री नहीं करेंगे. एसोसिएशन का कहना है कि इस दौरान राज्य के लगभग सात हज़ार पेट्रोल पंप बंद रहेंगे. संगठन का कहना है कि इस हड़ताल के कारण लगभग तीन करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बिक्री प्रभावित होगी, जिसका असर सरकार के राजस्व पर पड़ेगा. एसोसिएशन के मुताबिक उनकी हड़ताल के सरकार को रोड सेस समेत लगभग चौंतीस करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा. संगठन का कहना है कि हड़ताल के पहले उन्होंने बातचीत का रास्ता भी अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं की गई तो निराश होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. एसोसिएशन द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि एसोसिएशन ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री समेत सभी संबंधित अधिकारियों को इसके संबंध में ज्ञापन देकर राजस्थान में वैट, पंजाब के समान करने की मांगी की थी और बातचीत के लिए समय भी मांगा था. लेकिन न तो हमें समय मिला और न ही सरकार द्वारा इसके संबंध में कोई भी सकारात्मक कदम उठाया गया. ये भी पढ़ेंः
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए राज्यों में भटकना होगा? उन्होंने कहा कि क्लब के चुनाव में भी ऐसा नहीं होता! इन्हीं उठ रहे सवालों के साथ अध्यक्ष चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। मालूम हो कि रविवार को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में अध्यक्ष के चुनाव से संबंधित कार्यक्रम तय किए गए। इस दौरान मिस्त्री ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में 9,000 से अधिक पीसीसी प्रतिनिधि (डेलीगेट्स) मतदान करेंगे और सभी सूचियां सत्यापित हो चुकी हैं और इन पर निर्वाचन अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए राज्यों में भटकना होगा? उन्होंने कहा कि क्लब के चुनाव में भी ऐसा नहीं होता! इन्हीं उठ रहे सवालों के साथ अध्यक्ष चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। मालूम हो कि रविवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में अध्यक्ष के चुनाव से संबंधित कार्यक्रम तय किए गए। इस दौरान मिस्त्री ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में नौ,शून्य से अधिक पीसीसी प्रतिनिधि मतदान करेंगे और सभी सूचियां सत्यापित हो चुकी हैं और इन पर निर्वाचन अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
अगर छोटी सी लागत में अपना कोई धंधा शुरू करना चाहते हैं, तो कतला मछली पालन का काम शुरू कर सकते हैं. इस धंधे के लिए सरकार न सिर्फ आपको अनुदान देती है, बल्कि कृषि विज्ञान केंद्रों से जाकर आप प्रशिक्षण भी ले सकते हैं. इस मछली को भारत के अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रियों भाषाओं के अनुसार विभिन्न नामों से जाना जाता है, लेकिन लोकप्रिय रूप से इसे कतला या भाकुरा ही कहा जाता है. चलिए इस मछली के बारे में विस्तार से आपको बताते हैं. कतला मछली विशेष रूप से बांग्लादेश में प्रसिद्ध है, लेकिन भारत में भी इसका सेवन खूब किया जाता है. इसकी मांग विवाह-शादियों या सामूहिक भोजन के अवसरों पर भी ज्यादा होती है. तटीय बंगाल और उड़ीसा क्षेत्रों में तो ये लोगों के भोजन का मुख्य हिस्सा है. कतला मछली का शरीर चौड़ा होता है, जबिक इसके सिर का आकार लंबा होता है. किनारों की बॉडी का रंग चांदी की तरह चमकदार होता है. इसके निचले होंठ समतल और मोटे होते हैं. इसके पंख भी होते हैं, जो गहरे काले रंग के होते हैं. भोजन के लिए आमतौर पर ये पानी की ऊपरी सतह पर आती है और वहां जमे घास, पौधों और वनस्पतियों को खाती है. कम पानी में भी ये आसानी से जीवन यापन कर लेती है. इस मछली को पालने के लिए भव्य जल भंडार की जरूरत नहीं पड़ती. आप बहुत आसानी से इसे किसी गहरे पानी या टैंक में पाल सकते हैं. अगर आपके यहां कोई तालाब है, तो वहां भी इसका पालन किया जा सकता है. बस इतना ध्यान रखना है कि इसे रहने के लिए साफ और स्वच्छ पानी चाहिए होता है. अधिक ठंडे और बर्फिले वातावरण में इनका रहना मुश्किल है. इन्हें पानी में 25 से 32 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान चाहिए होता है. हालांकि गर्मियों के दिनों में इन्हें आमतौर पर किसी तरह की परेशानी नहीं होती है. अगर एक स्वस्थ कतला मछली को उठाकर देखें, तो वो 2. 0 किलो के लगभग होती है. फिश फार्म खोलने के लिए आपको जो भूमि चाहिए वो रेतीली दामोट या दामोट होनी चाहिए. अगर भूमि किसी और तरह की है, तो सीमेंट वाले टैंक का निर्माण कर मछलियों को पाल सकते हैं. युवाओं को बड़ी राहत प्रदान करने एवं उन्हें काम-काज से जोड़ने के लिए सरकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना चला रही है, जिसके तहत कतला मछली पालन के लिए आप 10 लाख तक की सहायता प्राप्त कर सकते हैं. मुद्रा लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृषि जागरण के इस लिंक पर जाएं.
अगर छोटी सी लागत में अपना कोई धंधा शुरू करना चाहते हैं, तो कतला मछली पालन का काम शुरू कर सकते हैं. इस धंधे के लिए सरकार न सिर्फ आपको अनुदान देती है, बल्कि कृषि विज्ञान केंद्रों से जाकर आप प्रशिक्षण भी ले सकते हैं. इस मछली को भारत के अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रियों भाषाओं के अनुसार विभिन्न नामों से जाना जाता है, लेकिन लोकप्रिय रूप से इसे कतला या भाकुरा ही कहा जाता है. चलिए इस मछली के बारे में विस्तार से आपको बताते हैं. कतला मछली विशेष रूप से बांग्लादेश में प्रसिद्ध है, लेकिन भारत में भी इसका सेवन खूब किया जाता है. इसकी मांग विवाह-शादियों या सामूहिक भोजन के अवसरों पर भी ज्यादा होती है. तटीय बंगाल और उड़ीसा क्षेत्रों में तो ये लोगों के भोजन का मुख्य हिस्सा है. कतला मछली का शरीर चौड़ा होता है, जबिक इसके सिर का आकार लंबा होता है. किनारों की बॉडी का रंग चांदी की तरह चमकदार होता है. इसके निचले होंठ समतल और मोटे होते हैं. इसके पंख भी होते हैं, जो गहरे काले रंग के होते हैं. भोजन के लिए आमतौर पर ये पानी की ऊपरी सतह पर आती है और वहां जमे घास, पौधों और वनस्पतियों को खाती है. कम पानी में भी ये आसानी से जीवन यापन कर लेती है. इस मछली को पालने के लिए भव्य जल भंडार की जरूरत नहीं पड़ती. आप बहुत आसानी से इसे किसी गहरे पानी या टैंक में पाल सकते हैं. अगर आपके यहां कोई तालाब है, तो वहां भी इसका पालन किया जा सकता है. बस इतना ध्यान रखना है कि इसे रहने के लिए साफ और स्वच्छ पानी चाहिए होता है. अधिक ठंडे और बर्फिले वातावरण में इनका रहना मुश्किल है. इन्हें पानी में पच्चीस से बत्तीस डिग्री सेल्सियस तक का तापमान चाहिए होता है. हालांकि गर्मियों के दिनों में इन्हें आमतौर पर किसी तरह की परेशानी नहीं होती है. अगर एक स्वस्थ कतला मछली को उठाकर देखें, तो वो दो. शून्य किलो के लगभग होती है. फिश फार्म खोलने के लिए आपको जो भूमि चाहिए वो रेतीली दामोट या दामोट होनी चाहिए. अगर भूमि किसी और तरह की है, तो सीमेंट वाले टैंक का निर्माण कर मछलियों को पाल सकते हैं. युवाओं को बड़ी राहत प्रदान करने एवं उन्हें काम-काज से जोड़ने के लिए सरकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना चला रही है, जिसके तहत कतला मछली पालन के लिए आप दस लाख तक की सहायता प्राप्त कर सकते हैं. मुद्रा लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृषि जागरण के इस लिंक पर जाएं.
पड़ गया । अन्त में भीष्म सत्यवती को अपने पिता के पास ले गये । सत्यवती का राजा शान्तनु ने यथाविधि पाणिग्रहण किया । भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य पालन किया । उन्होंने विवाह नहीं किया था फिर भी ब्रह्मचर्य के कारण वे जगत् में 'पितामह' के गौरवपूर्ण पद पर प्रतिष्ठित हुए । तुम भी ब्रह्मचर्य के आदर्श का अनुसरण करो । वृद्ध और युवक एक-दूसरे के साथ हिलमिल कर रहो । इसी में स्व-पर कल्यारण है ! तथास्तु । संतति नियमक समुद्र विजय-सुत श्रीनेमीश्वर, जादव कुल को टीको, रतन कुंख धरणी शिवादेवी, तेहनो नन्दन नीको । श्री जिन मोहनगारो छे, जीवन प्रारण हमारो छे ॥१॥ श्री अरिष्टनेमि भगवान् की यह प्रार्थना की गई है। आज मुझे जिस विषय पर बोलने के लिए कहा गया है, वह विषय भगवान् अरिष्टनेमि की प्रार्थना में ही प्रतिभासित हो रहा है । संसार की दशा सुधारने के लिए महापुरुषों ने जोर किया है और उन्होंने जिस पथ पर प्रयाण किया है, उस पथ का अनुसरण करने के लिए वे समस्त संसार को आह्वान कर गये हैं। उन्होंने कहा - ऐ जगत् के जीवो ! समय की विचित्रता विपरीतता के कारण कदाचित् तुम्हारे सामने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है जब तुम किंकर्तव्य-मूढ़ हो जाओ तुम्हें यह न सूझ पड़े कि ऐसी दशा में क्या करें, क्या न करें ? उस
पड़ गया । अन्त में भीष्म सत्यवती को अपने पिता के पास ले गये । सत्यवती का राजा शान्तनु ने यथाविधि पाणिग्रहण किया । भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य पालन किया । उन्होंने विवाह नहीं किया था फिर भी ब्रह्मचर्य के कारण वे जगत् में 'पितामह' के गौरवपूर्ण पद पर प्रतिष्ठित हुए । तुम भी ब्रह्मचर्य के आदर्श का अनुसरण करो । वृद्ध और युवक एक-दूसरे के साथ हिलमिल कर रहो । इसी में स्व-पर कल्यारण है ! तथास्तु । संतति नियमक समुद्र विजय-सुत श्रीनेमीश्वर, जादव कुल को टीको, रतन कुंख धरणी शिवादेवी, तेहनो नन्दन नीको । श्री जिन मोहनगारो छे, जीवन प्रारण हमारो छे ॥एक॥ श्री अरिष्टनेमि भगवान् की यह प्रार्थना की गई है। आज मुझे जिस विषय पर बोलने के लिए कहा गया है, वह विषय भगवान् अरिष्टनेमि की प्रार्थना में ही प्रतिभासित हो रहा है । संसार की दशा सुधारने के लिए महापुरुषों ने जोर किया है और उन्होंने जिस पथ पर प्रयाण किया है, उस पथ का अनुसरण करने के लिए वे समस्त संसार को आह्वान कर गये हैं। उन्होंने कहा - ऐ जगत् के जीवो ! समय की विचित्रता विपरीतता के कारण कदाचित् तुम्हारे सामने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है जब तुम किंकर्तव्य-मूढ़ हो जाओ तुम्हें यह न सूझ पड़े कि ऐसी दशा में क्या करें, क्या न करें ? उस
एक इंसान की मौत तीन तरीकों से हुई. . . यह सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन मध्यप्रदेश के गुना जिले की घटना कुछ इसी ओर इशारा कर रही है। पहली नजर में मामला एक्सीडेंट का दिख रहा है, जिसमें एक युवक का शव लोडिंग वाहन के नीचे दबा हुआ मिलता है। पुलिस FIR में भी युवक की मौत दबने से होना बताई गई है, लेकिन परिजन हत्या की बात कह रहे हैं। युवक के परिवारवालों का तर्क है कि बॉडी जली हुई है, इससे हत्या कर शव फेंकने की आशंका है। वहीं, शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में और भी चौंकाने वाली बात सामने आई है। पीएम रिपोर्ट में युवक की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई है। एक युवक की मौत की तीन वजह से जांच अधिकारी भी चकरा गए हैं। अब उसकी जान जाने की पुख्ता वजह जानने के लिए बिसरा ग्वालियर और शिवपुरी भेजा गया है। 11 जून को कैंट थाना पुलिस को सूचना मिली कि पुरापोसर गांव से गुजरी मुख्य सड़क पर लोडिंग वाहन पलट गया है, जिसके नीचे एक युवक दब गया है। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि युवक की मौत हो चुकी है। पड़ताल में पता चला कि अर्धनग्न हालत में दबे युवक के शरीर पर जलने के भी निशान हैं। जिला अस्पताल में पीएम के बाद शव को परिवारवालों को सौंप दिया गया। परिवारवालों ने कहा- युवक की हत्या की गई है। उनका कहना था कि जिस तरह का वाहन है, अगर वह पलटता है तो उसमें बैठे लोग दूर जाकर गिरेंगे, न कि उसके नीचे दब जाएंगे। उन्होंने कहा- मौके पर एक महिला की चप्पल भी मिली थी। ऐसे में जरूर उसके साथ कोई अनहोनी हुई होगी। हालांकि, पुलिस पहले दिन से ही इसे एक्सीडेंट मानकर जांच कर रही थी। अब घटना के 20 दिन बाद इसे हादसा मानते हुए गाड़ी के ड्राइवर पर पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। बमोरी थाना क्षेत्र में ग्राम चीम निवासी 19 वर्षीय लोकेंद्र शिर्के खुद का लोडिंग वाहन चलाता था। वह 10 जून को सुबह काम पर जाने का कहकर निकला था। देर शाम तक वह न तो घर लौटा और न ही कॉल किया। घरवालों को चिंता हुई। उन्होंने कॉल लगाया, लेकिन नहीं लगा। इसके बाद लोकेंद्र की तलाश शुरू हुई। 11 जून को एक परिचित ने कॉल कर बताया कि लोकेंद्र का पिकअप पुरापोसर जाने वाले मार्ग पर रमगढ़ा गांव में पलटा हुआ है। परिजन तत्काल मौके पर पहुंचे। वहां लोकेंद्र अर्धनग्न हालत में वाहन के नीचे दबा मिला। उसका सीना और पैर बुरी तरह से झुलसे हुए थे। इकलौते बेटे को खो चुके माता-पिता ने उसका अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन मौके पर जो कुछ मिला था, उस आधार पर बेटे की हत्या की आशंका जताई। इस घटना को पहले दिन से ही पुलिस एक्सीडेंट मानकर चल रही थी। उसने एफआईआर में भी वाहन के नीचे दबने से मौत होना दर्ज किया। उधर, परिवार और मराठा समाज के लोग इस मौत पर संदेह जताते रहे। 20 जून को समाजवालों ने जनसुनवाई में एक आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि शरीर पर पड़े फफोलों को देखकर लग रहा था, उसे एसिड डालकर जलाया गया है। मौके पर लेडीज चप्पल भी मिली थी। यह साजिश के तहत हत्या को एक्सीडेंट बनाने की कोशिश है। परिजन का आरोप है कि इतने साक्ष्य होने के बाद भी कैंट थाना पुलिस पहले दिन से ही इसे एक्सीडेंट बताकर जांच कर रही है। पुलिस की कहानी के अनुसार लोकेंद्र उस दिन अपने गांव से एक अनाड़ी ड्राइवर को साथ लेकर एक लड़की से मिलने गुना आया था। उसने साथी को गाड़ी चलाने के लिए दे दी और खुद लड़की के साथ पीछे जाकर बैठ गया। साथी को ड्राइविंग नहीं आती थी, इसलिए उसके हाथों गाड़ी पलट गई। लोकेंद्र वाहन के नीचे दब गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद लड़की डर गई और मौके से भाग गई। लोकेंद्र के परिजन का कहना है कि घटनास्थल के फोटोग्राफ से इस कहानी की विश्वसनीयता पर संदेह उठ रहा है। यदि गाड़ी पलटी तो सिर्फ लोकेंद्र की ही दबने से मौत हुई, जबकि लड़की भी उसके साथ ही बैठी हुई थी। गाड़ी चला रहे लोकेंद्र के साथी को भी चोट नहीं आई। समाज के लोगों का कहना था कि गाड़ी ने सिर्फ एक बार पलटी खाई है। गाड़ी की बॉडी इतनी ऊंची है कि साइड में गाड़ी पलटने पर उसमें पीछे बैठा व्यक्ति दूर गिरेगा, न कि पहले व्यक्ति गिरेगा फिर उसके ऊपर गाड़ी पलटेगी। गाड़ी के पिछले हिस्से की साइड में कोई खिड़की भी नहीं है, जिससे हादसे की दशा में अंदर बैठा व्यक्ति बाहर कूद जाए और गाड़ी पलटे तो वह उसकी चपेट में आ जाए। घटना के 20 दिन बाद पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है। ड्राइवर संतोष सहरिया के खिलाफ कैंट थाने में गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इन्वेस्टिगेशन कैंट थाने में पदस्थ ASI जसरथ दिवाकर ने की। FIR में उन्होंने बताया- जांच के दौरान लोकेंद्र के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली गई। उस रात दो नंबरों पर उसकी बात हुई थी। एक नंबर की जानकारी जुटाई तो वह बिनख्याई के किसी व्यक्ति का निकला। उसने बताया कि सिम तो उसके नाम पर है, लेकिन उपयोग उसकी बेटी सीमा (बदला हुआ नाम) करती है। पुलिस ने सीमा को बुलाकर उससे पूछताछ की। सीमा ने बताया कि वह लोकेंद्र को अच्छी तरह से जानती थी। दोनों का अफेयर चल रहा था। लोकेंद्र लोडिंग वाहन लेकर मजदूरों को लेने और छोड़ने गांव आया-जाया करता था। यहीं पर उनके बीच दोस्ती हुई, जो प्यार में बदल गई। 10 जून की रात सीमा बहन के साथ छत पर सो रही थी। करीब साढ़े 10 बजे लोकेंद्र का कॉल आया। लोकेंद्र ने कहा- मुझे 2000 रुपए की जरूरत है। मुझे रुपए चाहिए, मैं लेने आ रहा हूं। आधे घंटे बाद लोकेंद्र की गाड़ी घर के पास ही आकर रुकी। वह चुपचाप छत से उतरी और लोडिंग के पास पहुंची। गाड़ी में लोकेंद्र और उसका दोस्त संतोष सहरिया बैठे हुए थे। गाड़ी संतोष चला रहा था। सीमा लोकेंद्र के साथ पीछे बैठ गई। लोकेंद्र ने नशा कर रखा था। गाड़ी गांव से कुछ दूर निकली तो लोकेंद्र ने अपने कपड़े उतार दिए। सीमा ने कहा- संतोष गाड़ी बहुत तेज चला रहा है। लोकेंद्र ने कहा कि वह कॉल कर उसे गाड़ी धीरे चलाने काे बोल रहा है। लोकेंद्र ने नंबर डॉयल किया ही था कि गाड़ी पलटी खा गई। सीमा उछलकर दूर जा गिरी, जबकि लोकेंद्र गाड़ी के नीचे दब गया। हादसे में सीमा के पैर में चोट आई। उसने और संतोष ने लोकेंद्र को गाड़ी से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इसके बाद सीमा ने लोकेंद्र के मोबाइल से गोविंद जोगी निवासी धनोरिया को फोन लगाया और उसे बताया कि पुरापोसर के पास गाड़ी पलट गई है। लोकेंद्र गाड़ी के नीचे दब गया है। वह (गोविंद) फोन करके एम्बुलेंस बुला दे। कुछ देर तक इंतजार किया, लेकिन डर लग रहा था। इसके बाद सीमा घर चली गई जबकि संतोष गुना चला गया। घर पहुंचकर सीमा ने अपनी बहन को घटना के बारे में बताया। ड्राइवर संतोष सहरिया ने पुलिस को बताया कि 10 जून की रात मेरे पास लोकेंद्र का कॉल आया था। उसने कहा था कि गुना चलना है। इसके बाद दोनों लोडिंग वाहन से निकले। तालाब के पास बने ढाबे पर लोकेंद्र ने कहा- शराब ले आओ। यहां से हम गुना की तरफ निकले। ख्यावदा की घाटी के नीचे पहुंचकर शराब पी। साढ़े 10 बजे हम बिनख्याई पहुंचे, जहां से एक लड़की बैठी। मैं गाड़ी चला रहा था, जबकि लोकेंद्र लड़की के साथ पीछे बैठ गया। रात करीब 11:30 बजे पुरापोसर गांव के आगे गाड़ी पलटी खा गई। लोकेंद्र दब गया, जबकि लड़की दूर जाकर गिरी। हम दोनों ने लोकेंद्र को गाड़ी के नीचे से खींचने का प्रयास किया, लेकिन निकाल नहीं पाए। डर के कारण मैं गुना तरफ भाग आया और लड़की अपने गांव चली गई। पीएम रिपोर्ट में लोकेंद्र की मौत का कारण हार्ट अटैक आया है। हालांकि, मौत को लेकर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। इसका स्पष्ट कारण जानने के लिए बिसरा ग्वालियर और शिवपुरी जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है। पुलिस ने मोबाइल नंबरों की लोकेशन, लड़की और अन्य लोगों के बयान के आधार पर ड्राइवर संतोष के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
एक इंसान की मौत तीन तरीकों से हुई. . . यह सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन मध्यप्रदेश के गुना जिले की घटना कुछ इसी ओर इशारा कर रही है। पहली नजर में मामला एक्सीडेंट का दिख रहा है, जिसमें एक युवक का शव लोडिंग वाहन के नीचे दबा हुआ मिलता है। पुलिस FIR में भी युवक की मौत दबने से होना बताई गई है, लेकिन परिजन हत्या की बात कह रहे हैं। युवक के परिवारवालों का तर्क है कि बॉडी जली हुई है, इससे हत्या कर शव फेंकने की आशंका है। वहीं, शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में और भी चौंकाने वाली बात सामने आई है। पीएम रिपोर्ट में युवक की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई है। एक युवक की मौत की तीन वजह से जांच अधिकारी भी चकरा गए हैं। अब उसकी जान जाने की पुख्ता वजह जानने के लिए बिसरा ग्वालियर और शिवपुरी भेजा गया है। ग्यारह जून को कैंट थाना पुलिस को सूचना मिली कि पुरापोसर गांव से गुजरी मुख्य सड़क पर लोडिंग वाहन पलट गया है, जिसके नीचे एक युवक दब गया है। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि युवक की मौत हो चुकी है। पड़ताल में पता चला कि अर्धनग्न हालत में दबे युवक के शरीर पर जलने के भी निशान हैं। जिला अस्पताल में पीएम के बाद शव को परिवारवालों को सौंप दिया गया। परिवारवालों ने कहा- युवक की हत्या की गई है। उनका कहना था कि जिस तरह का वाहन है, अगर वह पलटता है तो उसमें बैठे लोग दूर जाकर गिरेंगे, न कि उसके नीचे दब जाएंगे। उन्होंने कहा- मौके पर एक महिला की चप्पल भी मिली थी। ऐसे में जरूर उसके साथ कोई अनहोनी हुई होगी। हालांकि, पुलिस पहले दिन से ही इसे एक्सीडेंट मानकर जांच कर रही थी। अब घटना के बीस दिन बाद इसे हादसा मानते हुए गाड़ी के ड्राइवर पर पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। बमोरी थाना क्षेत्र में ग्राम चीम निवासी उन्नीस वर्षीय लोकेंद्र शिर्के खुद का लोडिंग वाहन चलाता था। वह दस जून को सुबह काम पर जाने का कहकर निकला था। देर शाम तक वह न तो घर लौटा और न ही कॉल किया। घरवालों को चिंता हुई। उन्होंने कॉल लगाया, लेकिन नहीं लगा। इसके बाद लोकेंद्र की तलाश शुरू हुई। ग्यारह जून को एक परिचित ने कॉल कर बताया कि लोकेंद्र का पिकअप पुरापोसर जाने वाले मार्ग पर रमगढ़ा गांव में पलटा हुआ है। परिजन तत्काल मौके पर पहुंचे। वहां लोकेंद्र अर्धनग्न हालत में वाहन के नीचे दबा मिला। उसका सीना और पैर बुरी तरह से झुलसे हुए थे। इकलौते बेटे को खो चुके माता-पिता ने उसका अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन मौके पर जो कुछ मिला था, उस आधार पर बेटे की हत्या की आशंका जताई। इस घटना को पहले दिन से ही पुलिस एक्सीडेंट मानकर चल रही थी। उसने एफआईआर में भी वाहन के नीचे दबने से मौत होना दर्ज किया। उधर, परिवार और मराठा समाज के लोग इस मौत पर संदेह जताते रहे। बीस जून को समाजवालों ने जनसुनवाई में एक आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि शरीर पर पड़े फफोलों को देखकर लग रहा था, उसे एसिड डालकर जलाया गया है। मौके पर लेडीज चप्पल भी मिली थी। यह साजिश के तहत हत्या को एक्सीडेंट बनाने की कोशिश है। परिजन का आरोप है कि इतने साक्ष्य होने के बाद भी कैंट थाना पुलिस पहले दिन से ही इसे एक्सीडेंट बताकर जांच कर रही है। पुलिस की कहानी के अनुसार लोकेंद्र उस दिन अपने गांव से एक अनाड़ी ड्राइवर को साथ लेकर एक लड़की से मिलने गुना आया था। उसने साथी को गाड़ी चलाने के लिए दे दी और खुद लड़की के साथ पीछे जाकर बैठ गया। साथी को ड्राइविंग नहीं आती थी, इसलिए उसके हाथों गाड़ी पलट गई। लोकेंद्र वाहन के नीचे दब गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद लड़की डर गई और मौके से भाग गई। लोकेंद्र के परिजन का कहना है कि घटनास्थल के फोटोग्राफ से इस कहानी की विश्वसनीयता पर संदेह उठ रहा है। यदि गाड़ी पलटी तो सिर्फ लोकेंद्र की ही दबने से मौत हुई, जबकि लड़की भी उसके साथ ही बैठी हुई थी। गाड़ी चला रहे लोकेंद्र के साथी को भी चोट नहीं आई। समाज के लोगों का कहना था कि गाड़ी ने सिर्फ एक बार पलटी खाई है। गाड़ी की बॉडी इतनी ऊंची है कि साइड में गाड़ी पलटने पर उसमें पीछे बैठा व्यक्ति दूर गिरेगा, न कि पहले व्यक्ति गिरेगा फिर उसके ऊपर गाड़ी पलटेगी। गाड़ी के पिछले हिस्से की साइड में कोई खिड़की भी नहीं है, जिससे हादसे की दशा में अंदर बैठा व्यक्ति बाहर कूद जाए और गाड़ी पलटे तो वह उसकी चपेट में आ जाए। घटना के बीस दिन बाद पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है। ड्राइवर संतोष सहरिया के खिलाफ कैंट थाने में गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इन्वेस्टिगेशन कैंट थाने में पदस्थ ASI जसरथ दिवाकर ने की। FIR में उन्होंने बताया- जांच के दौरान लोकेंद्र के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली गई। उस रात दो नंबरों पर उसकी बात हुई थी। एक नंबर की जानकारी जुटाई तो वह बिनख्याई के किसी व्यक्ति का निकला। उसने 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गाड़ी के नीचे दब गया। हादसे में सीमा के पैर में चोट आई। उसने और संतोष ने लोकेंद्र को गाड़ी से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इसके बाद सीमा ने लोकेंद्र के मोबाइल से गोविंद जोगी निवासी धनोरिया को फोन लगाया और उसे बताया कि पुरापोसर के पास गाड़ी पलट गई है। लोकेंद्र गाड़ी के नीचे दब गया है। वह फोन करके एम्बुलेंस बुला दे। कुछ देर तक इंतजार किया, लेकिन डर लग रहा था। इसके बाद सीमा घर चली गई जबकि संतोष गुना चला गया। घर पहुंचकर सीमा ने अपनी बहन को घटना के बारे में बताया। ड्राइवर संतोष सहरिया ने पुलिस को बताया कि दस जून की रात मेरे पास लोकेंद्र का कॉल आया था। उसने कहा था कि गुना चलना है। इसके बाद दोनों लोडिंग वाहन से निकले। तालाब के पास बने ढाबे पर लोकेंद्र ने कहा- शराब ले आओ। यहां से हम गुना की तरफ निकले। ख्यावदा की घाटी के नीचे पहुंचकर शराब पी। साढ़े दस बजे हम बिनख्याई पहुंचे, जहां से एक लड़की बैठी। मैं गाड़ी चला रहा था, जबकि लोकेंद्र लड़की के साथ पीछे बैठ गया। रात करीब ग्यारह:तीस बजे पुरापोसर गांव के आगे गाड़ी पलटी खा गई। लोकेंद्र दब गया, जबकि लड़की दूर जाकर गिरी। हम दोनों ने लोकेंद्र को गाड़ी के नीचे से खींचने का प्रयास किया, लेकिन निकाल नहीं पाए। डर के कारण मैं गुना तरफ भाग आया और लड़की अपने गांव चली गई। पीएम रिपोर्ट में लोकेंद्र की मौत का कारण हार्ट अटैक आया है। हालांकि, मौत को लेकर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। इसका स्पष्ट कारण जानने के लिए बिसरा ग्वालियर और शिवपुरी जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है। पुलिस ने मोबाइल नंबरों की लोकेशन, लड़की और अन्य लोगों के बयान के आधार पर ड्राइवर संतोष के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
"Zdravitsa" - चिकित्सा केंद्र (नोवोसिबिर्स्क)शहर में सुविधाजनक स्थानों में चार क्लीनिक का नेटवर्क है। वयस्कों, बच्चों को चिकित्सा सेवाएं और सेवाएं प्रदान की जाती हैं, भविष्य की पीढ़ियों और माता-पिता के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसके लिए एक विशेष विभाग बनाया गया है। क्लिनिक "Zdravitsa" (नोवोसिबिर्स्क) - निजी2003 में स्थापित एक चिकित्सा संस्थान। संगठन का मुख्य लाभ गतिविधि का लक्ष्य क्षेत्र है। विशेषज्ञों का एक बड़ा कर्मचारी पारिवारिक दवा, मां और शिशु स्वास्थ्य से संबंधित है। बाल रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक, दंत चिकित्सक, निदान चिकित्सक दवाओं का अत्याधुनिक हैं, जो कई मुद्दों को हल करने में सक्षम हैं - निदान से चिकित्सा प्रक्रियाओं की पूरी श्रृंखला की नियुक्ति के लिए। एक संकीर्ण विशेषज्ञ और उसके लिए एक रेफरल प्राप्त करेंपरामर्श उपचार प्रक्रिया का आधा हिस्सा है, जो पूरी तरह से Zdravitsa (चिकित्सा केंद्र, नोवोसिबिर्स्क) द्वारा प्रदान किया जाता है। डॉक्टर रोगी की स्थिति को ट्रैक करते हैं और नियुक्तियों को समायोजित करते हैं क्योंकि वे सफलता प्राप्त करते हैं। आज, क्लीनिकों के नेटवर्क में चार केंद्र हैं,जहां उच्च स्तर के कौशल वाले कर्मचारी नियोजित होते हैं, आधुनिक उपकरण स्थापित होते हैं, 30 से अधिक प्रकार के विश्लेषण आयोजित किए जाते हैं, परामर्श और उपचार बच्चों और वयस्कों के लिए 10 चिकित्सा दिशाओं में किए जाते हैं, और प्रजनन और माता-पिता स्वास्थ्य विभाग काम करता है। चिकित्सा केंद्र "Zdravitsa" (नोवोसिबिर्स्क) निम्नलिखित निदान सेवाओं को प्रस्तुत करता हैः - विश्लेषण (सामान्य नैदानिक, जैव रसायन, हार्मोनल, पीसीआर, सेरोलॉजी, प्रतिरक्षा स्थिति, जीवाणुविज्ञान, हिस्टोलॉजी, आदि)। - ईसीजी। - Immunohels। - गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल (रेस्कोरोमनोस्कोपिया, वीडियोगैस्ट्रोस्कोपी, आदि)। - अल्ट्रासाउंड (न्यूरोसोनोग्राफी, स्त्री रोग, गुर्दे, पेट की गुहा, जोड़, थाइमस ग्रंथि, आदि)। कई रोगियों ने निदान का प्रयोग कियाZdravitsa (मेडिकल सेंटर, नोवोसिबिर्स्क) द्वारा प्रदान किए गए अवसर और शस्त्रागार। मरीजों की समीक्षा अच्छी परिस्थितियों के बारे में बताती है जिसमें डायग्नोस्टिक्स किए जाते हैं, परिणाम की तेज़ी से प्राप्ति होती है, इसके बाद विशेषज्ञ से पूर्ण व्याख्या होती है। कर्मचारियों को अधिकतम आराम और ध्यान देने के साथ रोगियों के मुताबिक जटिल नैदानिक प्रक्रियाएं प्रदान की गईं। नकारात्मक समीक्षा किसी भी प्रक्रिया की उच्च लागत के बारे में बताती है, कुछ रोगी डॉक्टरों के खराब प्रशिक्षण के बारे में शिकायत करते हैं। "Zdravica" मेडिकल सेंटर में वयस्क निम्नलिखित विशेषताओं के डॉक्टर हैंः - चिकित्सक, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, सर्जन, संधिविज्ञानी, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट। - न्यूरोसर्जन, ऑन्कोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, मैमोलॉजिस्ट, प्रोक्टोलॉजिस्ट। - Otorhinolangologist, फिजियोथेरेपिस्ट, त्वचा विशेषज्ञ, संक्रामक रोग विशेषज्ञ। - नेफ्रोलॉजिस्ट, एलर्जिस्ट-इम्यूनोलॉजिस्ट, फुफ्फुसीय विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ। - डाइटिटियन, मनोचिकित्सक, संवहनी सर्जन, आनुवंशिकीविद, और अन्य डॉक्टर। क्लिनिक टीकाकरण, हिरण चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, मालिश, और एक उपचार कक्ष के लिए सेवाएं प्रदान करता है। गंभीर परिस्थितियों में, घर पर एक विशेषज्ञ को कॉल करना संभव है। चिकित्सा का लाभ लेने वाले मरीजों की समीक्षापरामर्श, प्रभावी समस्याओं और सटीक निदान के बारे में, उनकी समस्याओं और स्थिति के प्रति चौकस दृष्टिकोण के बारे में बात करें। कई नए अधिग्रहित स्वास्थ्य और प्रक्रियाओं की श्रृंखला के लिए डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं जो Zdravitsa (चिकित्सा केंद्र, नोवोसिबिर्स्क) प्रदान करता है। नकारात्मक रेटिंग के साथ समीक्षा के बारे में बताओकि क्लिनिक के सभी डॉक्टर पर्याप्त पेशेवर नहीं हैं। इसके अलावा संदेह व्यक्त किए गए थे, चाहे नियुक्त विश्लेषण और प्रक्रियाएं उचित हों। बच्चों को विशेष ध्यान और स्वास्थ्य के साथ घनिष्ठ संबंध की आवश्यकता है। बच्चों के वार्ड में निरीक्षण, इलाज और परामर्श निम्नलिखित विशेषज्ञों से उपलब्ध हैः - बाल रोग विशेषज्ञ। - एक संकीर्ण विशेषज्ञता के साथ बच्चों के डॉक्टर - मूत्र विज्ञानी, सर्जन, त्वचा विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, दर्दनाक-ऑर्थोपेडिस्ट, संक्रामक रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, और अन्य। - Otorhinolaryngology (वीडियो अवलोकन, ईएनटी अंगों की एंडोस्कोपिक परीक्षाएं, tympanometry)। - ओप्थाल्मोलॉजी (आंख अल्ट्रासाउंड, कंप्यूटर परिधि, जटिल परीक्षा, आदि)। - घर सहित मालिश। - टीकाकरण। - घर पर एक विशेषज्ञ को बुलाओ। - ईसीजी अध्ययन। - उपचार कक्ष और फिजियोथेरेपी। सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला और विशेषज्ञों का चयनक्लिनिक "Zdravitsa" (चिकित्सा केंद्र, नोवोसिबिर्स्क) के लिए आगंतुकों को आकर्षित करें। बच्चों के विभाग के बारे में समीक्षा उपचार की गुणवत्ता के लिए कृतज्ञता के शब्दों से भरे हुए हैं और कहते हैं कि केवल यहां वे अपने बच्चों के लिए सटीक निदान और पर्याप्त उपचार प्राप्त करने में सक्षम थे। नकारात्मक प्रतिक्रियाएं अशिष्ट दृष्टिकोण के बारे में बताती हैं, यह उल्लेख किया गया है कि सभी बाल रोग विशेषज्ञ युवा बच्चों के साथ काम करने के विनिर्देशों का निदान और खराब समझने में सक्षम नहीं हैं। मां और बच्चे का स्वास्थ्य राज्य स्तर पर चिंता का विषय बन गया है, और प्रत्येक क्लिनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के कार्यक्रम विकसित करता है। Zdravice में, सेवा पैकेज निम्नानुसार हैः - स्त्री रोग।डॉक्टर-ऑन्कोलॉजिस्ट की परीक्षा, हार्डवेयर परीक्षाएं (कोलोस्कोपी, हिस्टोरोस्कोपी, ईसीएचओ-जीएएस, आदि), उपचार (गर्भाशय रक्तस्राव, गर्भाशय ग्रीवा के पथ आदि)। उपचार उपकरण के लिए "टर्मियस", "सर्किट्रॉन" का उपयोग किया जाता है। - गर्भावस्था के साथ। - प्रसूति-स्त्रीरोग विशेषज्ञ। - मूत्रविज्ञान। रिसेप्शन एक मूत्र विज्ञानी, अनुसंधान और प्रक्रियाओं द्वारा आयोजित किया जाता है। विशिष्ट बीमारियों और अंतरंगता के संबंध मेंउनकी प्रकृति, गतिविधि के इस क्षेत्र के बारे में राय बल्कि दुर्लभ हैं। कुछ रोगियों ने बताया कि उन्हें अधिकतम ध्यान, प्रक्रियाएं, उपचार का एक पूर्ण जटिलता प्राप्त हुई है और क्लिनिक "ज़ेड्रिविट्सा" (चिकित्सा केंद्र, नोवोसिबिर्स्क) पर आवेदन करने की सलाह दी गई है। नकारात्मक रेटिंग के साथ समीक्षा सकारात्मक के साथ ही मतलब है। मरीजों का तर्क है कि उपचार बहुत महंगा है और हमेशा खर्च किए गए पैसे को उचित नहीं ठहराता है। स्थापित टैरिफ के अनुसार सेवाएं प्रदान की जाती हैंदवा के केंद्र में "Zdravitsa" (नोवोसिबिर्स्क)। सामान्य नैदानिक परीक्षणों की कीमत 180 से 2,400 रूबल की सीमा में होती है, जो सामग्री की अवधि और लागत के आधार पर होती है। क्लिनिक दो दिशाओं में एक व्यापक परीक्षा प्रदान करता है, जिससे रोगी को 10,200 रूबल (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी) और 13,800 रूबल (कार्डियोलॉजी) खर्च होंगे।
"Zdravitsa" - चिकित्सा केंद्र शहर में सुविधाजनक स्थानों में चार क्लीनिक का नेटवर्क है। वयस्कों, बच्चों को चिकित्सा सेवाएं और सेवाएं प्रदान की जाती हैं, भविष्य की पीढ़ियों और माता-पिता के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसके लिए एक विशेष विभाग बनाया गया है। क्लिनिक "Zdravitsa" - निजीदो हज़ार तीन में स्थापित एक चिकित्सा संस्थान। संगठन का मुख्य लाभ गतिविधि का लक्ष्य क्षेत्र है। विशेषज्ञों का एक बड़ा कर्मचारी पारिवारिक दवा, मां और शिशु स्वास्थ्य से संबंधित है। बाल रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक, दंत चिकित्सक, निदान चिकित्सक दवाओं का अत्याधुनिक हैं, जो कई मुद्दों को हल करने में सक्षम हैं - निदान से चिकित्सा प्रक्रियाओं की पूरी श्रृंखला की नियुक्ति के लिए। एक संकीर्ण विशेषज्ञ और उसके लिए एक रेफरल प्राप्त करेंपरामर्श उपचार प्रक्रिया का आधा हिस्सा है, जो पूरी तरह से Zdravitsa द्वारा प्रदान किया जाता है। डॉक्टर रोगी की स्थिति को ट्रैक करते हैं और नियुक्तियों को समायोजित करते हैं क्योंकि वे सफलता प्राप्त करते हैं। आज, क्लीनिकों के नेटवर्क में चार केंद्र हैं,जहां उच्च स्तर के कौशल वाले कर्मचारी नियोजित होते हैं, आधुनिक उपकरण स्थापित होते हैं, तीस से अधिक प्रकार के विश्लेषण आयोजित किए जाते हैं, परामर्श और उपचार बच्चों और वयस्कों के लिए दस चिकित्सा दिशाओं में किए जाते हैं, और प्रजनन और माता-पिता स्वास्थ्य विभाग काम करता है। चिकित्सा केंद्र "Zdravitsa" निम्नलिखित निदान सेवाओं को प्रस्तुत करता हैः - विश्लेषण । - ईसीजी। - Immunohels। - गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल । - अल्ट्रासाउंड । कई रोगियों ने निदान का प्रयोग कियाZdravitsa द्वारा प्रदान किए गए अवसर और शस्त्रागार। मरीजों की समीक्षा अच्छी परिस्थितियों के बारे में बताती है जिसमें डायग्नोस्टिक्स किए जाते हैं, परिणाम की तेज़ी से प्राप्ति होती है, इसके बाद विशेषज्ञ से पूर्ण व्याख्या होती है। कर्मचारियों को अधिकतम आराम और ध्यान देने के साथ रोगियों के मुताबिक जटिल नैदानिक प्रक्रियाएं प्रदान की गईं। नकारात्मक समीक्षा किसी भी प्रक्रिया की उच्च लागत के बारे में बताती है, कुछ रोगी डॉक्टरों के खराब प्रशिक्षण के बारे में शिकायत करते हैं। "Zdravica" मेडिकल सेंटर में वयस्क निम्नलिखित विशेषताओं के डॉक्टर हैंः - चिकित्सक, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, सर्जन, संधिविज्ञानी, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट। - न्यूरोसर्जन, ऑन्कोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, मैमोलॉजिस्ट, प्रोक्टोलॉजिस्ट। - Otorhinolangologist, फिजियोथेरेपिस्ट, त्वचा विशेषज्ञ, संक्रामक रोग विशेषज्ञ। - नेफ्रोलॉजिस्ट, एलर्जिस्ट-इम्यूनोलॉजिस्ट, फुफ्फुसीय विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ। - डाइटिटियन, मनोचिकित्सक, संवहनी सर्जन, आनुवंशिकीविद, और अन्य डॉक्टर। क्लिनिक टीकाकरण, हिरण चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, मालिश, और एक उपचार कक्ष के लिए सेवाएं प्रदान करता है। गंभीर परिस्थितियों में, घर पर एक विशेषज्ञ को कॉल करना संभव है। चिकित्सा का लाभ लेने वाले मरीजों की समीक्षापरामर्श, प्रभावी समस्याओं और सटीक निदान के बारे में, उनकी समस्याओं और स्थिति के प्रति चौकस दृष्टिकोण के बारे में बात करें। कई नए अधिग्रहित स्वास्थ्य और प्रक्रियाओं की श्रृंखला के लिए डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं जो Zdravitsa प्रदान करता है। नकारात्मक रेटिंग के साथ समीक्षा के बारे में बताओकि क्लिनिक के सभी डॉक्टर पर्याप्त पेशेवर नहीं हैं। इसके अलावा संदेह व्यक्त किए गए थे, चाहे नियुक्त विश्लेषण और प्रक्रियाएं उचित हों। बच्चों को विशेष ध्यान और स्वास्थ्य के साथ घनिष्ठ संबंध की आवश्यकता है। बच्चों के वार्ड में निरीक्षण, इलाज और परामर्श निम्नलिखित विशेषज्ञों से उपलब्ध हैः - बाल रोग विशेषज्ञ। - एक संकीर्ण विशेषज्ञता के साथ बच्चों के डॉक्टर - मूत्र विज्ञानी, सर्जन, त्वचा विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, दर्दनाक-ऑर्थोपेडिस्ट, संक्रामक रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, और अन्य। - Otorhinolaryngology । - ओप्थाल्मोलॉजी । - घर सहित मालिश। - टीकाकरण। - घर पर एक विशेषज्ञ को बुलाओ। - ईसीजी अध्ययन। - उपचार कक्ष और फिजियोथेरेपी। सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला और विशेषज्ञों का चयनक्लिनिक "Zdravitsa" के लिए आगंतुकों को आकर्षित करें। बच्चों के विभाग के बारे में समीक्षा उपचार की गुणवत्ता के लिए कृतज्ञता के शब्दों से भरे हुए हैं और कहते हैं कि केवल यहां वे अपने बच्चों के लिए सटीक निदान और पर्याप्त उपचार प्राप्त करने में सक्षम थे। नकारात्मक प्रतिक्रियाएं अशिष्ट दृष्टिकोण के बारे में बताती हैं, यह उल्लेख किया गया है कि सभी बाल रोग विशेषज्ञ युवा बच्चों के साथ काम करने के विनिर्देशों का निदान और खराब समझने में सक्षम नहीं हैं। मां और बच्चे का स्वास्थ्य राज्य स्तर पर चिंता का विषय बन गया है, और प्रत्येक क्लिनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के कार्यक्रम विकसित करता है। Zdravice में, सेवा पैकेज निम्नानुसार हैः - स्त्री रोग।डॉक्टर-ऑन्कोलॉजिस्ट की परीक्षा, हार्डवेयर परीक्षाएं , उपचार । उपचार उपकरण के लिए "टर्मियस", "सर्किट्रॉन" का उपयोग किया जाता है। - गर्भावस्था के साथ। - प्रसूति-स्त्रीरोग विशेषज्ञ। - मूत्रविज्ञान। रिसेप्शन एक मूत्र विज्ञानी, अनुसंधान और प्रक्रियाओं द्वारा आयोजित किया जाता है। विशिष्ट बीमारियों और अंतरंगता के संबंध मेंउनकी प्रकृति, गतिविधि के इस क्षेत्र के बारे में राय बल्कि दुर्लभ हैं। कुछ रोगियों ने बताया कि उन्हें अधिकतम ध्यान, प्रक्रियाएं, उपचार का एक पूर्ण जटिलता प्राप्त हुई है और क्लिनिक "ज़ेड्रिविट्सा" पर आवेदन करने की सलाह दी गई है। नकारात्मक रेटिंग के साथ समीक्षा सकारात्मक के साथ ही मतलब है। मरीजों का तर्क है कि उपचार बहुत महंगा है और हमेशा खर्च किए गए पैसे को उचित नहीं ठहराता है। स्थापित टैरिफ के अनुसार सेवाएं प्रदान की जाती हैंदवा के केंद्र में "Zdravitsa" । सामान्य नैदानिक परीक्षणों की कीमत एक सौ अस्सी से दो,चार सौ रूबल की सीमा में होती है, जो सामग्री की अवधि और लागत के आधार पर होती है। क्लिनिक दो दिशाओं में एक व्यापक परीक्षा प्रदान करता है, जिससे रोगी को दस,दो सौ रूबल और तेरह,आठ सौ रूबल खर्च होंगे।
विश्व अल्ज़ाइमर दिवस 21 सितंबर को मनाया जाता है और सितंबर का महीना विश्व अल्जाइमर का महीना माना जाता है. विश्व अल्जाइमर का दिन डिमेंशिया के चेतावनी लक्षणों और जल्द से जल्द निदान लेने की आवश्यकता को हाइलाइट करने के लिए देखा जाता है. 2021 में विश्व अल्जाइमर के महीने का थीम 'अल्जाइमर जानें, अल्जाइमर जानें' है. कई स्वास्थ्य संगठन विश्व अल्ज़ाइमर दिवस पर अल्जाइमर के चलते हैं. विश्व भर के समुदायों में अल्ज़ाइमर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सेमिनार और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इस बीमारी का नाम जर्मन साइकिएट्रिस्ट और पैथोलॉजिस्ट एलोइस अल्ज़ाइमर के नाम पर दिया जाता है, जिन्होंने 1901 में 50 वर्षीय महिला में इस बीमारी का पता लगाया. अल्ज़ाइमर एक डीजनरेटिव ब्रेन डिसऑर्डर है. यह किसी व्यक्ति की मेमोरी और अन्य मस्तिष्क फंक्शन को धीरे-धीरे नष्ट करता है. अंत में, जब किसी के पास अल्ज़ाइमर होता है, तो वे सरल कार्य करने की क्षमता खो देते हैं. अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है. चिकित्सा विज्ञान को अभी तक इलाज नहीं मिला है, न ही बीमारी को रोकने का कोई तरीका है. इस बीमारी को प्रभावी रूप से इलाज करने में पहले पता लगाने से रोगी को लाभ मिलता है. इलाज की पद्धतियों में दवा, मनोवैज्ञानिक और देखभाल के पहलू शामिल हैं. फैमिली एंड सोशल सपोर्ट एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं. अल्ज़ाइमर की बीमारी अधिकतर बुजुर्गों को प्रभावित करती है. चूंकि भारत में बुजुर्गों की जनसंख्या बढ़ रही है, इसलिए यह अलार्म का कारण है. डिमेंशिया इंडिया रिपोर्ट 2010 के अनुसार अल्जाइमर्स एंड रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एआरडीएसआई) द्वारा, 2010 में लगभग 3. 7 मिलियन भारतीय थे जिनकी डिमेंशिया 2030 तक 7. 6 मिलियन हो गई थी. अल्ज़ाइमर की बीमारी के बारे में सामान्य जागरूकता देश भर में कम रहती है और ग्रामीण और अविकसित क्षेत्रों में भी कम रहती है. यह चीजों को भूलने से शुरू करता है और अल्प स्मृति हानि विकसित करता है जिसके परिणामस्वरूप हाल ही की घटनाओं को याद रखने में कठिनाई होती है, जिसके परिणामस्वरूप दैनिक गतिविधियों और बुनियादी आवश्यकताओं की देखभाल करने में अक्षमता होती है. अल्जाइमर का 7thदुनिया भर में सबसे गंभीर बीमारी है. यह स्थिति किसी अन्य बीमारी से अधिक विकलांगता और गरीब स्वास्थ्य का कारण बनती है. दुर्भाग्यवश, अल्जाइमर की बीमारी को वापस नहीं किया जा सकता है, हालांकि, अधिक जागरूकता के साथ, रोगी के परिवार के सदस्य इस स्थिति को प्रबंधित करना सीख सकते हैं. भारत जीरियाट्रिक रोगों की जागरूकता की कमी के कारण डिजेनरेटिव रोगों के बोझ से निपटने के लिए तैयार नहीं है. आइए डिमेंशिया के सामान्य लोगों और इसके लक्षणों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश करें ताकि इसका शुरुआती पता लगाया जा सके.
विश्व अल्ज़ाइमर दिवस इक्कीस सितंबर को मनाया जाता है और सितंबर का महीना विश्व अल्जाइमर का महीना माना जाता है. विश्व अल्जाइमर का दिन डिमेंशिया के चेतावनी लक्षणों और जल्द से जल्द निदान लेने की आवश्यकता को हाइलाइट करने के लिए देखा जाता है. दो हज़ार इक्कीस में विश्व अल्जाइमर के महीने का थीम 'अल्जाइमर जानें, अल्जाइमर जानें' है. कई स्वास्थ्य संगठन विश्व अल्ज़ाइमर दिवस पर अल्जाइमर के चलते हैं. विश्व भर के समुदायों में अल्ज़ाइमर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सेमिनार और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इस बीमारी का नाम जर्मन साइकिएट्रिस्ट और पैथोलॉजिस्ट एलोइस अल्ज़ाइमर के नाम पर दिया जाता है, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ एक में पचास वर्षीय महिला में इस बीमारी का पता लगाया. अल्ज़ाइमर एक डीजनरेटिव ब्रेन डिसऑर्डर है. यह किसी व्यक्ति की मेमोरी और अन्य मस्तिष्क फंक्शन को धीरे-धीरे नष्ट करता है. अंत में, जब किसी के पास अल्ज़ाइमर होता है, तो वे सरल कार्य करने की क्षमता खो देते हैं. अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है. चिकित्सा विज्ञान को अभी तक इलाज नहीं मिला है, न ही बीमारी को रोकने का कोई तरीका है. इस बीमारी को प्रभावी रूप से इलाज करने में पहले पता लगाने से रोगी को लाभ मिलता है. इलाज की पद्धतियों में दवा, मनोवैज्ञानिक और देखभाल के पहलू शामिल हैं. फैमिली एंड सोशल सपोर्ट एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं. अल्ज़ाइमर की बीमारी अधिकतर बुजुर्गों को प्रभावित करती है. चूंकि भारत में बुजुर्गों की जनसंख्या बढ़ रही है, इसलिए यह अलार्म का कारण है. डिमेंशिया इंडिया रिपोर्ट दो हज़ार दस के अनुसार अल्जाइमर्स एंड रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा, दो हज़ार दस में लगभग तीन. सात मिलियन भारतीय थे जिनकी डिमेंशिया दो हज़ार तीस तक सात. छः मिलियन हो गई थी. अल्ज़ाइमर की बीमारी के बारे में सामान्य जागरूकता देश भर में कम रहती है और ग्रामीण और अविकसित क्षेत्रों में भी कम रहती है. यह चीजों को भूलने से शुरू करता है और अल्प स्मृति हानि विकसित करता है जिसके परिणामस्वरूप हाल ही की घटनाओं को याद रखने में कठिनाई होती है, जिसके परिणामस्वरूप दैनिक गतिविधियों और बुनियादी आवश्यकताओं की देखभाल करने में अक्षमता होती है. अल्जाइमर का सातthदुनिया भर में सबसे गंभीर बीमारी है. यह स्थिति किसी अन्य बीमारी से अधिक विकलांगता और गरीब स्वास्थ्य का कारण बनती है. दुर्भाग्यवश, अल्जाइमर की बीमारी को वापस नहीं किया जा सकता है, हालांकि, अधिक जागरूकता के साथ, रोगी के परिवार के सदस्य इस स्थिति को प्रबंधित करना सीख सकते हैं. भारत जीरियाट्रिक रोगों की जागरूकता की कमी के कारण डिजेनरेटिव रोगों के बोझ से निपटने के लिए तैयार नहीं है. आइए डिमेंशिया के सामान्य लोगों और इसके लक्षणों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश करें ताकि इसका शुरुआती पता लगाया जा सके.
Def24 के पोलिश संस्करण ने रूसी मल्टीफ़ंक्शनल सेनानी Su-30SM के नए आधुनिकीकरण की सराहना की, जो अनुकूलन-सु R & D परियोजना के हिस्से के रूप में किया गया। पोलिश विशेषज्ञों के अनुसार, एक भारी मिसाइल प्राप्त करने के बाद, लड़ाकू अपनी शक्ति में काफी वृद्धि करेगा। प्रकाशन लिखता है कि चल रहे विकास कार्य के ढांचे के भीतर, Su-30SM सेनानियों को ख -32 तरल हाइपरसोनिक मिसाइल के आधार पर बनाई गई एक भारी वायु-से-सतह मिसाइल प्राप्त होगी। ऐसी मिसाइल को सेवा में अपनाने से लड़ाकू की सीमा में काफी वृद्धि होगी। इस प्रकार, Su-30SM टीयू -22 और एसयू -34 बमवर्षकों को पूरक कर सकता है, जिससे परिचालन और सामरिक दोनों स्तरों पर रूस की आक्रामक क्षमता बढ़ सकती है। - प्रकाशन का दावा करता है। डिफेंस 24 के मुताबिक, रूस अमेरिकी एजीएम -30 संयुक्त एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज (जेएएसएम-ईआर) मिसाइलों के जवाब में एक हाइपरसोनिक मिसाइल के साथ एसयू -158 एसएम का इस्तेमाल कर रहा है, जो यूरोप में तैनात अमेरिकी एफ -16 लड़ाकू विमानों से लैस है। पोलैंड के क्षेत्र में। यह तर्क दिया जाता है कि इस मिसाइल का उपयोग मिग -31 पर भी किया जाएगा, जो किन्जहल हाइपरसोनिक परिसर के अनुकूल होगा। इससे पहले रूसी मीडिया में Su-30SM सेनानियों के आधुनिकीकरण के बारे में जानकारी थी, जिसके दौरान यह एक नई भारी हाइपरसोनिक एयर-टू-सतह मिसाइल प्राप्त करेगा। वहीं, रॉकेट के नाम और उसके डेटा का खुलासा नहीं किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां हम सेनानियों पर उपयोग के लिए एक्स -32 हाइपरसोनिक मिसाइल को अपनाने के बारे में बात कर सकते हैं, हालांकि पूरी तरह से नया गोला बारूद बनाने का विकल्प संभव है।
Defचौबीस के पोलिश संस्करण ने रूसी मल्टीफ़ंक्शनल सेनानी Su-तीसSM के नए आधुनिकीकरण की सराहना की, जो अनुकूलन-सु R & D परियोजना के हिस्से के रूप में किया गया। पोलिश विशेषज्ञों के अनुसार, एक भारी मिसाइल प्राप्त करने के बाद, लड़ाकू अपनी शक्ति में काफी वृद्धि करेगा। प्रकाशन लिखता है कि चल रहे विकास कार्य के ढांचे के भीतर, Su-तीसSM सेनानियों को ख -बत्तीस तरल हाइपरसोनिक मिसाइल के आधार पर बनाई गई एक भारी वायु-से-सतह मिसाइल प्राप्त होगी। ऐसी मिसाइल को सेवा में अपनाने से लड़ाकू की सीमा में काफी वृद्धि होगी। इस प्रकार, Su-तीसSM टीयू -बाईस और एसयू -चौंतीस बमवर्षकों को पूरक कर सकता है, जिससे परिचालन और सामरिक दोनों स्तरों पर रूस की आक्रामक क्षमता बढ़ सकती है। - प्रकाशन का दावा करता है। डिफेंस चौबीस के मुताबिक, रूस अमेरिकी एजीएम -तीस संयुक्त एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलों के जवाब में एक हाइपरसोनिक मिसाइल के साथ एसयू -एक सौ अट्ठावन एसएम का इस्तेमाल कर रहा है, जो यूरोप में तैनात अमेरिकी एफ -सोलह लड़ाकू विमानों से लैस है। पोलैंड के क्षेत्र में। यह तर्क दिया जाता है कि इस मिसाइल का उपयोग मिग -इकतीस पर भी किया जाएगा, जो किन्जहल हाइपरसोनिक परिसर के अनुकूल होगा। इससे पहले रूसी मीडिया में Su-तीसSM सेनानियों के आधुनिकीकरण के बारे में जानकारी थी, जिसके दौरान यह एक नई भारी हाइपरसोनिक एयर-टू-सतह मिसाइल प्राप्त करेगा। वहीं, रॉकेट के नाम और उसके डेटा का खुलासा नहीं किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां हम सेनानियों पर उपयोग के लिए एक्स -बत्तीस हाइपरसोनिक मिसाइल को अपनाने के बारे में बात कर सकते हैं, हालांकि पूरी तरह से नया गोला बारूद बनाने का विकल्प संभव है।
पार्टी के जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने कहा कि जदयू के कार्यकर्ता भाजपा के आरक्षण विरोधी नीतियों से गांव गांव में लोगों को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा लोगों को उलझा कर आरक्षण के विरोध में काम कर रही है। मधेपुरा, जागरण संवाददाता। जनता दल यू की ओर से गुरुवार को शहर के कला भवन के समक्ष भाजपा के खिलाफ धरना दिया गया। धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता जदयू जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने की। वहीं धरना का संचालन जदयू नेता महेंद्र पटेल ने किया। धरना के मौके पर जदयू नेताओं ने कहा कि आरक्षण विरोधी भाजपा का पोल खोल धरना दिया जा रहा है। आलमनगर के विधायक सह पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि भाजपा की आरक्षण विरोधी नीतियों से जनता को अवगत कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2005 में सरकार बने के बाद 2006 में कैबिनेट द्वारा सबसे पहला निर्णय एवं सभी मुख्य विपक्षी दल के साथ मिलकर आरक्षण लागू किया गया था। अब भाजपा समर्थित लोगों के द्वारा न्यायालय में केस करा कर अति पिछड़ा आरक्षण को समाप्त कराने के पीछे लगी हुई है। जबकि चार बार पंचायत चुनाव आरक्षण के माध्यम से किया गया एवं नगर पंचायत एवं नगर निगम का चुनाव तीन बार आरक्षण के तहत हो चुका है। पार्टी के जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने कहा कि जदयू के कार्यकर्ता भाजपा के आरक्षण विरोधी नीतियों से गांव गांव में लोगों को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा लोगों को उलझा कर आरक्षण के विरोध में काम कर रही है। वहीं जिला मुख्य प्रवक्ता डा. नीरज कुमार ने कहा कि भाजपा आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रही है। इसे कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा। मौके पर जिला संगठन प्रभारी शिव कुमार यादव, अक्षय झा, भूपेंद्र नारायण मधेपुरी, विजेंद्र नारायण यादव, नरेश पासवान, आनंद रजक, बीबी प्रभाकर, सत्यजीत यादव, नीला कांत, यादव उमेश, रूपेश कुमार गुलटेन, अशोक चौधरी, अमरेंद्र चंद्रवंशी, शैलेश सिंह, प्रमोद यादव ,राणा राम कृष्ण, दीपक यादव, मनोज कुशवाहा, विनोद कांबली निषाद, इंजीनियर कौशल यादव, मनोज भटनागर, डाक्टर एमएस रहमान बाबुल आदि नेता उपस्थित थे।
पार्टी के जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने कहा कि जदयू के कार्यकर्ता भाजपा के आरक्षण विरोधी नीतियों से गांव गांव में लोगों को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा लोगों को उलझा कर आरक्षण के विरोध में काम कर रही है। मधेपुरा, जागरण संवाददाता। जनता दल यू की ओर से गुरुवार को शहर के कला भवन के समक्ष भाजपा के खिलाफ धरना दिया गया। धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता जदयू जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने की। वहीं धरना का संचालन जदयू नेता महेंद्र पटेल ने किया। धरना के मौके पर जदयू नेताओं ने कहा कि आरक्षण विरोधी भाजपा का पोल खोल धरना दिया जा रहा है। आलमनगर के विधायक सह पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि भाजपा की आरक्षण विरोधी नीतियों से जनता को अवगत कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दो हज़ार पाँच में सरकार बने के बाद दो हज़ार छः में कैबिनेट द्वारा सबसे पहला निर्णय एवं सभी मुख्य विपक्षी दल के साथ मिलकर आरक्षण लागू किया गया था। अब भाजपा समर्थित लोगों के द्वारा न्यायालय में केस करा कर अति पिछड़ा आरक्षण को समाप्त कराने के पीछे लगी हुई है। जबकि चार बार पंचायत चुनाव आरक्षण के माध्यम से किया गया एवं नगर पंचायत एवं नगर निगम का चुनाव तीन बार आरक्षण के तहत हो चुका है। पार्टी के जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने कहा कि जदयू के कार्यकर्ता भाजपा के आरक्षण विरोधी नीतियों से गांव गांव में लोगों को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा लोगों को उलझा कर आरक्षण के विरोध में काम कर रही है। वहीं जिला मुख्य प्रवक्ता डा. नीरज कुमार ने कहा कि भाजपा आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रही है। इसे कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा। मौके पर जिला संगठन प्रभारी शिव कुमार यादव, अक्षय झा, भूपेंद्र नारायण मधेपुरी, विजेंद्र नारायण यादव, नरेश पासवान, आनंद रजक, बीबी प्रभाकर, सत्यजीत यादव, नीला कांत, यादव उमेश, रूपेश कुमार गुलटेन, अशोक चौधरी, अमरेंद्र चंद्रवंशी, शैलेश सिंह, प्रमोद यादव ,राणा राम कृष्ण, दीपक यादव, मनोज कुशवाहा, विनोद कांबली निषाद, इंजीनियर कौशल यादव, मनोज भटनागर, डाक्टर एमएस रहमान बाबुल आदि नेता उपस्थित थे।
नई दिल्ली, 18 अगस्त (हि.स.) । विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा ने इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में लचर बल्लेबाजी करके खराब प्रदर्शन के कुछ नये रिकार्ड बना लिये। कोहली ने इस श्रृंखला की दस पारियों में 13.40 की औसत से केवल 134 रन बनाये, जो कि अतिरिक्त रन से भी कम थे। भारत के खाते में 177 अतिरिक्त रन जुड़े। कोहली की तरह शिखर धवन(122) और स्टुअर्ट बिन्नी(118) ने अतिरिक्त रनों से कम रन बनाये। बल्लेबाजी क्रम में चोटी के चार बल्लेबाजों जिन्होंने किसी टेस्ट श्रृंखला की दस या इससे अधिक पारियां खेली हों, उनके खराब प्रदर्शन की सूची में कोहली दूसरे नंबर पर है। संयोग से रिकार्ड भारत के ही चंदू सरवटे के नाम पर था जिन्होंने आस्ट्रेलिया के 1947-48 के दौरे में दस पारियों में केवल 100 रन बनाये थे। वहीं, पुजारा का नंबर तीन बल्लेबाज के रूप में इंग्लैंड में प्रदर्शन सबसे खराब रहा। पुजारा ने दस पारियों में 22-20 की औसत से 222 रन बनाये। इंग्लैंड में कम से कम पांच या इससे अधिक पारियां खेलने वाले भारत के नंबर तीन बल्लेबाज का यह सबसे खराब प्रदर्शन है। इससे पहले राहुल द्रविड़ ने 2007 में छह पारियों में 126 रन बनाये थे लेकिन उनका औसत पुजारा से थोड़ा बेहतर 25 . 20 था।
नई दिल्ली, अट्ठारह अगस्त । विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा ने इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में लचर बल्लेबाजी करके खराब प्रदर्शन के कुछ नये रिकार्ड बना लिये। कोहली ने इस श्रृंखला की दस पारियों में तेरह.चालीस की औसत से केवल एक सौ चौंतीस रन बनाये, जो कि अतिरिक्त रन से भी कम थे। भारत के खाते में एक सौ सतहत्तर अतिरिक्त रन जुड़े। कोहली की तरह शिखर धवन और स्टुअर्ट बिन्नी ने अतिरिक्त रनों से कम रन बनाये। बल्लेबाजी क्रम में चोटी के चार बल्लेबाजों जिन्होंने किसी टेस्ट श्रृंखला की दस या इससे अधिक पारियां खेली हों, उनके खराब प्रदर्शन की सूची में कोहली दूसरे नंबर पर है। संयोग से रिकार्ड भारत के ही चंदू सरवटे के नाम पर था जिन्होंने आस्ट्रेलिया के एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस-अड़तालीस के दौरे में दस पारियों में केवल एक सौ रन बनाये थे। वहीं, पुजारा का नंबर तीन बल्लेबाज के रूप में इंग्लैंड में प्रदर्शन सबसे खराब रहा। पुजारा ने दस पारियों में बाईस-बीस की औसत से दो सौ बाईस रन बनाये। इंग्लैंड में कम से कम पांच या इससे अधिक पारियां खेलने वाले भारत के नंबर तीन बल्लेबाज का यह सबसे खराब प्रदर्शन है। इससे पहले राहुल द्रविड़ ने दो हज़ार सात में छह पारियों में एक सौ छब्बीस रन बनाये थे लेकिन उनका औसत पुजारा से थोड़ा बेहतर पच्चीस . बीस था।
IND vs NZ T20 World Cup: आईसीसी टी20 विश्व कप में भारत और न्यूजीलैंड की टीमें 2 बार भिड़ी हैं। दोनों बार बाजी कीवी टीम के हाथ लगी है। नई दिल्ली विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम टी20 विश्व कप 2021 (ICC T20 World Cup 2021) सुपर 12 के ग्रुप 2 में अपने अभियान की शुरुआत हार से की है। टीम इंडिया को पहले ही मैच में पाकिस्तान से हार झेलनी पड़ी। अब भारत का अगला मुकाबला न्यूजीलैंड (India vs New Zealand T20 World Cup 2021) से है। दोनों टीमों के लिए यह मैच नॉकआउट की तरह है। भारत-न्यूजीलैंड 31 अक्टूबर को दुबई में होंगे आमने सामने दुबई में 31 अक्टूबर को खेले जाने वाले इस अहम मुकाबले में जो टीम जीतेगी उसके लिए सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता खुला रहेगा जबकि हारने वाली टीम अंतिम 4 की दौड़ से लगभग बाहर हो जाएगी। भारत की आसान नहीं राह हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की राह आसान नहीं रहने वाली है। क्योंकि भारत का आईसीसी टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ रेकॉर्ड बेहद खराब रहा है। 2007 में हुए पहले टी20 वर्ल्ड कप से लेकर इस साल इंग्लैंड में आयोजित हुए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (WTC Final) तक दोनों टीमें 7 बार आमने सामने हुई हैं। इस दौरान 6 मैचों में न्यूजीलैंड ने बाजी मारी है वहीं एक मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था। 18 साल से टीम इंडिया को कीवी टीम के खिलाफ है जीत का इंतजार भारतीय टीम 18 साल पहले आईसीसी टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ जीती थी। 2003 में आयोजित वनडे विश्व कप में भारत ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से मात दी थी। साल 2019 के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में कीवी टीम ने भारत को हराकर उसके फाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया था।
IND vs NZ Tबीस World Cup: आईसीसी टीबीस विश्व कप में भारत और न्यूजीलैंड की टीमें दो बार भिड़ी हैं। दोनों बार बाजी कीवी टीम के हाथ लगी है। नई दिल्ली विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम टीबीस विश्व कप दो हज़ार इक्कीस सुपर बारह के ग्रुप दो में अपने अभियान की शुरुआत हार से की है। टीम इंडिया को पहले ही मैच में पाकिस्तान से हार झेलनी पड़ी। अब भारत का अगला मुकाबला न्यूजीलैंड से है। दोनों टीमों के लिए यह मैच नॉकआउट की तरह है। भारत-न्यूजीलैंड इकतीस अक्टूबर को दुबई में होंगे आमने सामने दुबई में इकतीस अक्टूबर को खेले जाने वाले इस अहम मुकाबले में जो टीम जीतेगी उसके लिए सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता खुला रहेगा जबकि हारने वाली टीम अंतिम चार की दौड़ से लगभग बाहर हो जाएगी। भारत की आसान नहीं राह हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की राह आसान नहीं रहने वाली है। क्योंकि भारत का आईसीसी टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ रेकॉर्ड बेहद खराब रहा है। दो हज़ार सात में हुए पहले टीबीस वर्ल्ड कप से लेकर इस साल इंग्लैंड में आयोजित हुए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल तक दोनों टीमें सात बार आमने सामने हुई हैं। इस दौरान छः मैचों में न्यूजीलैंड ने बाजी मारी है वहीं एक मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था। अट्ठारह साल से टीम इंडिया को कीवी टीम के खिलाफ है जीत का इंतजार भारतीय टीम अट्ठारह साल पहले आईसीसी टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ जीती थी। दो हज़ार तीन में आयोजित वनडे विश्व कप में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से मात दी थी। साल दो हज़ार उन्नीस के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में कीवी टीम ने भारत को हराकर उसके फाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया था।
सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा को मुंबई में जस्टिन बीबर की सिक्योरिटी का जिम्मा मिला है। वर्ल्ड टूअर के लिए जस्टिन बीबर मुंबई आ रहे हैं। इतने बड़े ग्लोबल स्टार की सिक्योरिटी के लिए सलमान खान के सबसे भरोसेमंद बॉडीगार्ड को हायर किया गया है। बता दें कि शेरा पिछले 20 सालों से सलमान खान की सिक्योरिटी करते आ रहे हैं। जस्टिन बीबर आठ मई को मुंबई आएंगे और दस को मुंबई स्टेडियम में परफॉर्म करेंगे। बीबर को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए उनकी टीम ने भारी भरकम मांगों की लिस्ट थमाई है। इसमें हेलिकॉप्टर से स्टेडियम में उतरने से लेकर खाने, बेड, पानी सोफे, फ्रीज तक की लिस्ट सौंपी है। बता दें कि बीबर ने 24 घंटे जेड प्लस सिक्योरिटी टीम की डिमांड की है। उनके पास आठ प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी साथ में रहेंगे। बीबर के लिए कनाडा से सोफा आएगा। मुंबई में सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा को बीबर और उनकी टीम की सुरक्षा कि जिम्मेदारी दी गई है। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा को मुंबई में जस्टिन बीबर की सिक्योरिटी का जिम्मा मिला है। वर्ल्ड टूअर के लिए जस्टिन बीबर मुंबई आ रहे हैं। इतने बड़े ग्लोबल स्टार की सिक्योरिटी के लिए सलमान खान के सबसे भरोसेमंद बॉडीगार्ड को हायर किया गया है। बता दें कि शेरा पिछले बीस सालों से सलमान खान की सिक्योरिटी करते आ रहे हैं। जस्टिन बीबर आठ मई को मुंबई आएंगे और दस को मुंबई स्टेडियम में परफॉर्म करेंगे। बीबर को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए उनकी टीम ने भारी भरकम मांगों की लिस्ट थमाई है। इसमें हेलिकॉप्टर से स्टेडियम में उतरने से लेकर खाने, बेड, पानी सोफे, फ्रीज तक की लिस्ट सौंपी है। बता दें कि बीबर ने चौबीस घंटाटे जेड प्लस सिक्योरिटी टीम की डिमांड की है। उनके पास आठ प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी साथ में रहेंगे। बीबर के लिए कनाडा से सोफा आएगा। मुंबई में सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा को बीबर और उनकी टीम की सुरक्षा कि जिम्मेदारी दी गई है। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
देहरादून । उत्तराखंड में भूकंप के झटकों ने एक बार फिर लोगों की धड़कनों को बढ़ा दिया। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे आए भूकंप के झटके उत्तरकाशी से रुद्रप्रयाग तक महसूस किए गए। हालांकि, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.8 रही। जिसे बहुत कम तीव्रता का कंपन बताया जा रहा है। यही कारण है कि अभी तक जानमाल के नुकासान की कोई खबर नहीं मिली है। मिली जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी रहा। जबकि इसके हलके झटके रुद्रप्रयाग तक महसूस किए गए। नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद राज्य सरकार से अपील की है कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनहित याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एक्ट में यह प्रावधान है कि जिन अधिवक्ताओ की वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। कई राज्यों ने अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर फंड की व्यवस्था की है जिनमें केरल और पुडुचेरी मुख्य हैं।
देहरादून । उत्तराखंड में भूकंप के झटकों ने एक बार फिर लोगों की धड़कनों को बढ़ा दिया। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे आए भूकंप के झटके उत्तरकाशी से रुद्रप्रयाग तक महसूस किए गए। हालांकि, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता तीन.आठ रही। जिसे बहुत कम तीव्रता का कंपन बताया जा रहा है। यही कारण है कि अभी तक जानमाल के नुकासान की कोई खबर नहीं मिली है। मिली जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी रहा। जबकि इसके हलके झटके रुद्रप्रयाग तक महसूस किए गए। नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद राज्य सरकार से अपील की है कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनहित याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एक्ट में यह प्रावधान है कि जिन अधिवक्ताओ की वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। कई राज्यों ने अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर फंड की व्यवस्था की है जिनमें केरल और पुडुचेरी मुख्य हैं।
स्वस्थ और फिट रहने की कुंजी दुरुस्त पाचन क्षमता से जुड़ी है। मगर, भागदौड़ वाली जीवनशैली और अनियमित खान-पान के कारण आजकल बहुत से लोग पाचन समस्याओं से ग्रस्त रहते हैं। एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द, बदहजमी जैसी पाचन समस्याओं अगर नियमित रहने लग जाए तो शरीर को कई बीमारियों का खतरा रहता है। लंबे समय तक कब्ज के कारण बवासीर हो सकती है। ऐसे में पाचन क्रिया को दुरुस्त रखना बहुत जरूरी है। आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताएंगे, जिनका नियमित सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और बीमारियों से भी बचाता है। आयुर्वेद के अनुसार, आंवला जूस एसिडिटी और सीने में जलन से राहत दिलाने में काफी कारगर होता है। आंवले का रस 15-20 मिली लें। बराबर मात्रा में पानी डालें। इसे रोज सुबह खाली पेट लें। एक्सपर्ट के मुताबिक, इसमें बहुत सारा फाइबर होता है, जो पाचन में सुधार करता है। आप बेल का शरबत बनाकर पी सकते हैं या इसे रोजाना खा सकते हैं। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम और एसिड रिफ्लक्स वाले लोगों के लिए एलोवेरा जूस बेहद फायदेमंद होता है। एलोवेरा जूस 1/4 कप को 1/2 कप पानी के साथ रोजाना सुबह खाली पेट लें। गंभीर कब्ज, अपच या एसिडिटी के इलाज के लिए छाछ एक बेहतरीन आयुर्वेदिक इलाज है। सुबह खाली पेट या भोजन के बाद 1 गिलास छाछ पीने की आदत डालें। आप इसमें त्रिफला पाउडर भी मिला सकते हैं। . इसबगोल (पिस्सू के बीज) इसबगोल का इस्तेमाल कब्ज से राहत पाने के लिए किया जाता है। 1 गिलास गर्म दूध में 1 चम्मच इसबगोल मिलाकर रोज रात को सोने से पहले पिएं। त्रिफला 3 जड़ी बूटियों हरीताकी, आंवला और बेजदा का मिश्रण है, जो पाचन स्वास्थ्य में सुधार और कब्ज को रोकने के लिए बहुत अच्छा है।
स्वस्थ और फिट रहने की कुंजी दुरुस्त पाचन क्षमता से जुड़ी है। मगर, भागदौड़ वाली जीवनशैली और अनियमित खान-पान के कारण आजकल बहुत से लोग पाचन समस्याओं से ग्रस्त रहते हैं। एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द, बदहजमी जैसी पाचन समस्याओं अगर नियमित रहने लग जाए तो शरीर को कई बीमारियों का खतरा रहता है। लंबे समय तक कब्ज के कारण बवासीर हो सकती है। ऐसे में पाचन क्रिया को दुरुस्त रखना बहुत जरूरी है। आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताएंगे, जिनका नियमित सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और बीमारियों से भी बचाता है। आयुर्वेद के अनुसार, आंवला जूस एसिडिटी और सीने में जलन से राहत दिलाने में काफी कारगर होता है। आंवले का रस पंद्रह-बीस मिली लें। बराबर मात्रा में पानी डालें। इसे रोज सुबह खाली पेट लें। एक्सपर्ट के मुताबिक, इसमें बहुत सारा फाइबर होता है, जो पाचन में सुधार करता है। आप बेल का शरबत बनाकर पी सकते हैं या इसे रोजाना खा सकते हैं। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम और एसिड रिफ्लक्स वाले लोगों के लिए एलोवेरा जूस बेहद फायदेमंद होता है। एलोवेरा जूस एक/चार कप को एक/दो कप पानी के साथ रोजाना सुबह खाली पेट लें। गंभीर कब्ज, अपच या एसिडिटी के इलाज के लिए छाछ एक बेहतरीन आयुर्वेदिक इलाज है। सुबह खाली पेट या भोजन के बाद एक गिलास छाछ पीने की आदत डालें। आप इसमें त्रिफला पाउडर भी मिला सकते हैं। . इसबगोल इसबगोल का इस्तेमाल कब्ज से राहत पाने के लिए किया जाता है। एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच इसबगोल मिलाकर रोज रात को सोने से पहले पिएं। त्रिफला तीन जड़ी बूटियों हरीताकी, आंवला और बेजदा का मिश्रण है, जो पाचन स्वास्थ्य में सुधार और कब्ज को रोकने के लिए बहुत अच्छा है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा वनडे मैच आज सोमवार को माउंट मांग्लुई के बे ओवल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मैच में भारतीय टीम के लिए हार्दिक पांड्या भी खेल रहे हैं. निलंबन हटने के बाद पहली बार हार्दिक पांड्या को भारतीय टीम में चुना गया है. उन्हें विजय शंकर के स्थान पर टीम में रखा गया है. न्यूजीलैंड का पारी का 17वां ओवर भारतीय टीम के युवा स्पिनर युजवेंद्र चहल लेकर आ रहे थे. उनके इस ओवर की दूसरी गेंद पर स्ट्राइक में न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलयमसन थे. केन विलयमसन ने चहल की इस दूसरी गेंद पर फ्लिक करके एक रन लेना चाहा, लेकिन शार्ट मिडविकेट पर फील्डिंग कर रहे हार्दिक पांड्या ने एक शानदार डाईव लगाकर कैच को कर लिया. इस कैच को हार्दिक पांड्या ने सुपरमैन बनकर पकड़ा है. कैच को लेते वक्त उनके दोनों पैर पूरी तरह से हवा में थे. कैच पकड़ने के बाद हार्दिक पांड्या की प्रतिक्रिया देखने लायक थी. उन्होंने अपने कैच का जश्न सादगी के साथ मनाया. आमतौर पर वह इतना शानदार कैच करने के बाद काफी आक्रमक अंदाज में जश्न मनाते है, लेकिन हार्दिक पांड्या ने इस कैच का जश्न सादगी के साथ मनाते हुए सभी को हैरान कर दिया है. हार्दिक पांड्या को महिलाओं पर की अभद्र टिप्पणी के लिए निलंबित किया गया था. निलंबन से वापस आने के बाद उनकी जीवन शैली में काफी बदलाव नजर आ रहा है. आप इस वीडियो में साफ़ देख सकते है, कि कैसे भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने हवा में डाईव लगाकर एक शानदार कैच कर लिया है. अगर आपकों हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें. अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें. साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें. अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपकों जल्दी पहुंचा सकें.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा वनडे मैच आज सोमवार को माउंट मांग्लुई के बे ओवल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मैच में भारतीय टीम के लिए हार्दिक पांड्या भी खेल रहे हैं. निलंबन हटने के बाद पहली बार हार्दिक पांड्या को भारतीय टीम में चुना गया है. उन्हें विजय शंकर के स्थान पर टीम में रखा गया है. न्यूजीलैंड का पारी का सत्रहवां ओवर भारतीय टीम के युवा स्पिनर युजवेंद्र चहल लेकर आ रहे थे. उनके इस ओवर की दूसरी गेंद पर स्ट्राइक में न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलयमसन थे. केन विलयमसन ने चहल की इस दूसरी गेंद पर फ्लिक करके एक रन लेना चाहा, लेकिन शार्ट मिडविकेट पर फील्डिंग कर रहे हार्दिक पांड्या ने एक शानदार डाईव लगाकर कैच को कर लिया. इस कैच को हार्दिक पांड्या ने सुपरमैन बनकर पकड़ा है. कैच को लेते वक्त उनके दोनों पैर पूरी तरह से हवा में थे. कैच पकड़ने के बाद हार्दिक पांड्या की प्रतिक्रिया देखने लायक थी. उन्होंने अपने कैच का जश्न सादगी के साथ मनाया. आमतौर पर वह इतना शानदार कैच करने के बाद काफी आक्रमक अंदाज में जश्न मनाते है, लेकिन हार्दिक पांड्या ने इस कैच का जश्न सादगी के साथ मनाते हुए सभी को हैरान कर दिया है. हार्दिक पांड्या को महिलाओं पर की अभद्र टिप्पणी के लिए निलंबित किया गया था. निलंबन से वापस आने के बाद उनकी जीवन शैली में काफी बदलाव नजर आ रहा है. आप इस वीडियो में साफ़ देख सकते है, कि कैसे भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने हवा में डाईव लगाकर एक शानदार कैच कर लिया है. अगर आपकों हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें. अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें. साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें. अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपकों जल्दी पहुंचा सकें.
टी20 विश्व चैंपियन इंग्लैंड के इस सीरीज के पहले 119 रेटिंग अंक थे लेकिन तीन हार की वजह से इंग्लैंड ने 6 अंक गंवा दिए। अब उसके 113 रेटिंग अंक हो गए हैं। ऐसे में 114 रेटिंग अंक के साथ न्यूजीलैंड टॉप पर पहुंचा गया है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। तीन मैच की वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के हाथों में मिली 3-0 की हार से इंग्लैंड को ICC Ranking में नुकसान उठाना पड़ा है। बुधवार को जारी हुई आइसीसी वनडे रैंकिंग में इंग्लैंड ने अपनी नबंर वन की कुर्सी गंवा दी है। नतीजतन न्यूजीलैंड की टीम फिर से शीर्ष पर पहुंच गई है। इंग्लैंड ने इसी साल सितंबर में न्यूजीलैंड को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया था। वहीं पाकिस्तान को पछाड़कर ऑस्ट्रेलिया नंबर 4 पर पहुंच गया है। टी20 विश्व चैंपियन इंग्लैंड के इस सीरीज के पहले 119 रेटिंग अंक थे, लेकिन तीन हार की वजह से इंग्लैंड ने 6 अंक गंवा दिए। अब उसके 113 रेटिंग अंक हो गए हैं। ऐसे में 114 रेटिंग अंक के साथ न्यूजीलैंड टॉप पर पहुंचा गया है। वहीं भारत 112 रेटिंग अंक के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 112 रेटिंग अंक के साथ चौथे नबंर पर है। भारत का कुल अंक (3802) ऑस्ट्रेलिया के कुल अंक (3572) से ज्यादा है। गौरतलब हो कि न्यूजीलैंड और इंग्लैंड ने पिछले दो सालों से वनडे रैंकिंग में नंबर 1 की कुर्सी के लिए एक-दूसरे को पछाड़ा है। न्यूजीलैंड ने मई 2021 में इंग्लैंड को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया था और सितंबर 2022 तक इस स्थान पर बना रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से सीरीज हारने के बाद अपनी नबंर वन की कुर्सी गंवा दी थी। टी20 विश्व कप चैंंपियन बनने के तुरंत बाद इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने वनडे सीरीज में उतरी थी, लेकिन डेविड वॉर्नर, ट्रैविस हेड, स्टीव स्मिथ और ऐडम जैम्पा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम ने मेहमानों पर क्लीन स्वीप किया। इंग्लैंड अगले साल तीन मैचों की वनडे सीरीज साउथ अफ्रीका के साथ जनवरी में खेलेगा। ऑस्ट्रेलिया को भी साउथ अफ्रीका के खिलाफ जनवरी में तीन वनडे खेलने हैं, लेकिन यह सीरीज उनकी सरजमीं पर होगी।
टीबीस विश्व चैंपियन इंग्लैंड के इस सीरीज के पहले एक सौ उन्नीस रेटिंग अंक थे लेकिन तीन हार की वजह से इंग्लैंड ने छः अंक गंवा दिए। अब उसके एक सौ तेरह रेटिंग अंक हो गए हैं। ऐसे में एक सौ चौदह रेटिंग अंक के साथ न्यूजीलैंड टॉप पर पहुंचा गया है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। तीन मैच की वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के हाथों में मिली तीन-शून्य की हार से इंग्लैंड को ICC Ranking में नुकसान उठाना पड़ा है। बुधवार को जारी हुई आइसीसी वनडे रैंकिंग में इंग्लैंड ने अपनी नबंर वन की कुर्सी गंवा दी है। नतीजतन न्यूजीलैंड की टीम फिर से शीर्ष पर पहुंच गई है। इंग्लैंड ने इसी साल सितंबर में न्यूजीलैंड को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया था। वहीं पाकिस्तान को पछाड़कर ऑस्ट्रेलिया नंबर चार पर पहुंच गया है। टीबीस विश्व चैंपियन इंग्लैंड के इस सीरीज के पहले एक सौ उन्नीस रेटिंग अंक थे, लेकिन तीन हार की वजह से इंग्लैंड ने छः अंक गंवा दिए। अब उसके एक सौ तेरह रेटिंग अंक हो गए हैं। ऐसे में एक सौ चौदह रेटिंग अंक के साथ न्यूजीलैंड टॉप पर पहुंचा गया है। वहीं भारत एक सौ बारह रेटिंग अंक के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है, जबकि ऑस्ट्रेलिया एक सौ बारह रेटिंग अंक के साथ चौथे नबंर पर है। भारत का कुल अंक ऑस्ट्रेलिया के कुल अंक से ज्यादा है। गौरतलब हो कि न्यूजीलैंड और इंग्लैंड ने पिछले दो सालों से वनडे रैंकिंग में नंबर एक की कुर्सी के लिए एक-दूसरे को पछाड़ा है। न्यूजीलैंड ने मई दो हज़ार इक्कीस में इंग्लैंड को पछाड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया था और सितंबर दो हज़ार बाईस तक इस स्थान पर बना रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से सीरीज हारने के बाद अपनी नबंर वन की कुर्सी गंवा दी थी। टीबीस विश्व कप चैंंपियन बनने के तुरंत बाद इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने वनडे सीरीज में उतरी थी, लेकिन डेविड वॉर्नर, ट्रैविस हेड, स्टीव स्मिथ और ऐडम जैम्पा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम ने मेहमानों पर क्लीन स्वीप किया। इंग्लैंड अगले साल तीन मैचों की वनडे सीरीज साउथ अफ्रीका के साथ जनवरी में खेलेगा। ऑस्ट्रेलिया को भी साउथ अफ्रीका के खिलाफ जनवरी में तीन वनडे खेलने हैं, लेकिन यह सीरीज उनकी सरजमीं पर होगी।
Bihar News: बिहार (Bihar) में दिल्ली के कंझावला जैसी वारदात सामने आई है। यहां एक कार सवार ने 70 वर्षीय बुजुर्ग को टक्कर मार दी। इसके बाद बोनट में फंसे बुजुर्ग को कार सवार करीब 8 किमी तक घसीटते हुए ले गया। आखिर में बुजुर्ग की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। आरोपी चालक फरार है। जानकारी के मुताबिक घटना पूर्वी चंपारण जिले की है। यहां के बंगारा गांव निवासी 70 वर्षीय शंकर चौधरी अपनी साइकिल से NH-28 पर कोटवा के पास बंगारा रोड को पार कर रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार कार सवार ने उन्हें रौंद डाला। पिपराकोठी थाना प्रभारी अनुज कुमार सिंह ने बताया कि कार को जब्त कर लिया गया है। पुलिस जिला परिवहन कार्यालय से उसके मालिक का पता लगा रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि एसयूवी गाड़ी गोपालगंज की ओर से आ रही थी। बताया गया है कि टक्कर के बाद शंकर चौधरी काफी देर तक बोनट से चिपके रहे। घटना को देख इलाके में हड़कंप मच गया। बताया गया है कि करीब आठ किमी जाने के बाद गाड़ी चालक ने ब्रेक लगाए। इसके बाद शंकर गिर गए और गाड़ी उनके ऊपर से निकल गई। स्थानीय लोगों ने भी अपनी बाइकों से गाड़ी का पीछा किया और पुलिस को जानकारी दी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कार मोतिहारी के एक डॉक्टर की है। मोतिहारी एसडीपीओ अरूर कुमार गुप्ता ने बताया कि कोटवा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। चालक की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए सड़क पर जाम लगा दिया। क्षेत्राधिकारी निरंजन कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Bihar News: बिहार में दिल्ली के कंझावला जैसी वारदात सामने आई है। यहां एक कार सवार ने सत्तर वर्षीय बुजुर्ग को टक्कर मार दी। इसके बाद बोनट में फंसे बुजुर्ग को कार सवार करीब आठ किमी तक घसीटते हुए ले गया। आखिर में बुजुर्ग की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। आरोपी चालक फरार है। जानकारी के मुताबिक घटना पूर्वी चंपारण जिले की है। यहां के बंगारा गांव निवासी सत्तर वर्षीय शंकर चौधरी अपनी साइकिल से NH-अट्ठाईस पर कोटवा के पास बंगारा रोड को पार कर रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार कार सवार ने उन्हें रौंद डाला। पिपराकोठी थाना प्रभारी अनुज कुमार सिंह ने बताया कि कार को जब्त कर लिया गया है। पुलिस जिला परिवहन कार्यालय से उसके मालिक का पता लगा रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि एसयूवी गाड़ी गोपालगंज की ओर से आ रही थी। बताया गया है कि टक्कर के बाद शंकर चौधरी काफी देर तक बोनट से चिपके रहे। घटना को देख इलाके में हड़कंप मच गया। बताया गया है कि करीब आठ किमी जाने के बाद गाड़ी चालक ने ब्रेक लगाए। इसके बाद शंकर गिर गए और गाड़ी उनके ऊपर से निकल गई। स्थानीय लोगों ने भी अपनी बाइकों से गाड़ी का पीछा किया और पुलिस को जानकारी दी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कार मोतिहारी के एक डॉक्टर की है। मोतिहारी एसडीपीओ अरूर कुमार गुप्ता ने बताया कि कोटवा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। चालक की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए सड़क पर जाम लगा दिया। क्षेत्राधिकारी निरंजन कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
असम के हाजो में पुलिस स्टेशन के अंदर महिला से रेप के आरोप में एक पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण कुमार गोगोई ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषी पुलिस अधिकारी को कड़ी सजा देने की मांग की है। गोगोई ने कहा कि जिस व्यक्ति पर महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी है उसी का ऐसे गंभीर अपराध में शामिल होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से बहाली के दौरान पुलिस अधिकारियों की मानसिक हालत की भी जांच कराने को कहा है।
असम के हाजो में पुलिस स्टेशन के अंदर महिला से रेप के आरोप में एक पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण कुमार गोगोई ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषी पुलिस अधिकारी को कड़ी सजा देने की मांग की है। गोगोई ने कहा कि जिस व्यक्ति पर महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी है उसी का ऐसे गंभीर अपराध में शामिल होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से बहाली के दौरान पुलिस अधिकारियों की मानसिक हालत की भी जांच कराने को कहा है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Irrfan Khan Death Anniversary: बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और मंझे हुए अभिनेता इरफान खान 29 अप्रैल 2020 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। आज भी सिने प्रेमी इरफान खान के जाने के गम से नहीं उबर पाए हैं। कैंसर बीमारी से लंबे समय तक ग्रसित रहने के बाद महज 54 साल की उम्र में इरफान खान का निधन हो गया। शानदार एक्टिंग की वजह से इरफान खान का बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक में डंका बजा। मेकर्स आज भी इरफान खान को याद करते हैं तो नए कलाकार उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। इरफान खान ने अपने करियर में हर तरह की फिल्में की। उनके बारे में अक्सर कहा जाता है कि वो ऐसे अभिनेता थे जो आंखों से अभिनय कर लेते थे। गंभीर किरदारों के साथ-साथ हंसाने में इरफान खान माहिर थे। उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी। आप भी उन फिल्मों पर डालें एक नजर जिनमें इरफान खान ने दर्शकों को खूब हंसाया और ये फिल्में सिनेमाघरों में भी छा गई। 'पीकू' में इरफान खान के वन लाइनर्स खूब पसंद किए गए। उन्होंने फिल्म में अपनी एक्टिंग और डायलॉग से जान भर दी थी। अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ-साथ इरफान खान ने इस फिल्म में शानदार एक्टिंग की थी। 'करीब करीब सिंगल' एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी। इस फिल्म में इरफान खान ने कॉमेडी का जबरदस्त तड़का लगाया था। गंभीरता के साथ भी इरफान खान कॉमेडी सीन इस तरह से कर जाते थे कि दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती थी। इरफान खान इस फिल्म में बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए थे। 'कारवां' में इरफान खान के दुलकर सलमान भी नजर आए थे। इस फिल्म में रोमांच, कॉमेडी और मस्ती समेत सभी एलिमेंट मौजूद थे। फिल्म में इरफान खान को देखकर काफी मजा आता है। ब्लैकमेल में इरफान खान टॉयलेट पेपर बेचते हैं और कई सीन्स ऐसे हैं जो खूब हंसाती है। इस फिल्म में भी इरफान खान ने शानदार अभिनय की मिसाल पेश की थी। 'हिंदी मीडियम' एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म थी जिसे हल्के फुल्के अंदाज में बनाया गया था। इस फिल्म में कॉमेडी से भरे डायलॉग के साथ इरफान खान बेहद गहरी बातें और कटाक्ष करते नजर आए थे। 'हिंदी मीडियम' में उनके अपोजिट पाकिस्तानी अभिनेत्री सबा कमर थी।
- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Irrfan Khan Death Anniversary: बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और मंझे हुए अभिनेता इरफान खान उनतीस अप्रैल दो हज़ार बीस को इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। आज भी सिने प्रेमी इरफान खान के जाने के गम से नहीं उबर पाए हैं। कैंसर बीमारी से लंबे समय तक ग्रसित रहने के बाद महज चौवन साल की उम्र में इरफान खान का निधन हो गया। शानदार एक्टिंग की वजह से इरफान खान का बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक में डंका बजा। मेकर्स आज भी इरफान खान को याद करते हैं तो नए कलाकार उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। इरफान खान ने अपने करियर में हर तरह की फिल्में की। उनके बारे में अक्सर कहा जाता है कि वो ऐसे अभिनेता थे जो आंखों से अभिनय कर लेते थे। गंभीर किरदारों के साथ-साथ हंसाने में इरफान खान माहिर थे। उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी। आप भी उन फिल्मों पर डालें एक नजर जिनमें इरफान खान ने दर्शकों को खूब हंसाया और ये फिल्में सिनेमाघरों में भी छा गई। 'पीकू' में इरफान खान के वन लाइनर्स खूब पसंद किए गए। उन्होंने फिल्म में अपनी एक्टिंग और डायलॉग से जान भर दी थी। अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ-साथ इरफान खान ने इस फिल्म में शानदार एक्टिंग की थी। 'करीब करीब सिंगल' एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी। इस फिल्म में इरफान खान ने कॉमेडी का जबरदस्त तड़का लगाया था। गंभीरता के साथ भी इरफान खान कॉमेडी सीन इस तरह से कर जाते थे कि दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती थी। इरफान खान इस फिल्म में बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए थे। 'कारवां' में इरफान खान के दुलकर सलमान भी नजर आए थे। इस फिल्म में रोमांच, कॉमेडी और मस्ती समेत सभी एलिमेंट मौजूद थे। फिल्म में इरफान खान को देखकर काफी मजा आता है। ब्लैकमेल में इरफान खान टॉयलेट पेपर बेचते हैं और कई सीन्स ऐसे हैं जो खूब हंसाती है। इस फिल्म में भी इरफान खान ने शानदार अभिनय की मिसाल पेश की थी। 'हिंदी मीडियम' एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म थी जिसे हल्के फुल्के अंदाज में बनाया गया था। इस फिल्म में कॉमेडी से भरे डायलॉग के साथ इरफान खान बेहद गहरी बातें और कटाक्ष करते नजर आए थे। 'हिंदी मीडियम' में उनके अपोजिट पाकिस्तानी अभिनेत्री सबा कमर थी।
युवा खिलाड़ियों के साथ श्रीलंका दौरे पर गई टीम इंडिया 13 जुलाई से यहां वनडे सीरीज की शुरुआत करेगी. भारतीय टीम यहां पूर्व दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) की कोचिंग में पहुंची है. क्रिकेट पंडितों को राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में खेलने वाली इस टीम से बेहतर प्रदर्शन की आस है. द्रविड़ के साथी खिलाड़ी रहे पूर्व टेस्ट बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) ने इसे भारत के भविष्य के स्टार खिलाड़ी बनाने का मौका बताया है. वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि द्रविड़ का जिस तरह का व्यक्तित्व है उनके लिए श्रीलंका दौरे पर कोई दबाव नहीं होगा बल्कि बतौर कोच खुद को साबित करने के लिए उनके पास सुनहरा मौका (Opportunity for Rahul Dravid to create future stars.) है. लक्ष्मण पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान (Irfan Pathan) के साथ स्टार स्पोर्ट्स के शो गेम प्लान में बात कर रहे थे. पूर्व दिग्गज गेंदबाज इरफान पठान ने कहा, 'यह सहज होने की बात है, जब आपके साथ आपका कप्तान या कोच आपको सहज रखता है तो आपका प्रदर्शन निखरकर आता है. राहुल भाई की यही खासियत है. किसी को भी किसी भी मसले पर कोई शिकायत है तो वह खुलकर अपनी बात उनसे कह सकता है और द्रविड़ उनका समाधान निकालना जानते हैं.' इस मौके पर पठान ने बतौर खिलाड़ी राहुल द्रविड़ की कप्तानी में बिताए अपने अनुभवों को भी साझा किया.
युवा खिलाड़ियों के साथ श्रीलंका दौरे पर गई टीम इंडिया तेरह जुलाई से यहां वनडे सीरीज की शुरुआत करेगी. भारतीय टीम यहां पूर्व दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ की कोचिंग में पहुंची है. क्रिकेट पंडितों को राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में खेलने वाली इस टीम से बेहतर प्रदर्शन की आस है. द्रविड़ के साथी खिलाड़ी रहे पूर्व टेस्ट बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने इसे भारत के भविष्य के स्टार खिलाड़ी बनाने का मौका बताया है. वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि द्रविड़ का जिस तरह का व्यक्तित्व है उनके लिए श्रीलंका दौरे पर कोई दबाव नहीं होगा बल्कि बतौर कोच खुद को साबित करने के लिए उनके पास सुनहरा मौका है. लक्ष्मण पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान के साथ स्टार स्पोर्ट्स के शो गेम प्लान में बात कर रहे थे. पूर्व दिग्गज गेंदबाज इरफान पठान ने कहा, 'यह सहज होने की बात है, जब आपके साथ आपका कप्तान या कोच आपको सहज रखता है तो आपका प्रदर्शन निखरकर आता है. राहुल भाई की यही खासियत है. किसी को भी किसी भी मसले पर कोई शिकायत है तो वह खुलकर अपनी बात उनसे कह सकता है और द्रविड़ उनका समाधान निकालना जानते हैं.' इस मौके पर पठान ने बतौर खिलाड़ी राहुल द्रविड़ की कप्तानी में बिताए अपने अनुभवों को भी साझा किया.
नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है जिसमें एक लड़की ऊंची है बिल्डिंग गाने पर जबरदस्त डांस करती हुई दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो को अब तक सात लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो को देखने वालों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। इस वीडियो को Kanishka Talent Hub नाम के एक यू-ट्यूब चैनल ने अपलोड किया है। आपको बता दें कि यह गाना इस साल रिलीज होने वाली वरुण धवन की फिल्म 'जुड़वा 2' का है। इस वीडियो को 12 सितंबर को अपलोड किया गया है और महज 6 दिनों में अब तक इस वीडियो को सात लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो देखने के बाद हर कोई लड़की के डांस की तारीफ कर रहा है।
नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है जिसमें एक लड़की ऊंची है बिल्डिंग गाने पर जबरदस्त डांस करती हुई दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो को अब तक सात लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो को देखने वालों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। इस वीडियो को Kanishka Talent Hub नाम के एक यू-ट्यूब चैनल ने अपलोड किया है। आपको बता दें कि यह गाना इस साल रिलीज होने वाली वरुण धवन की फिल्म 'जुड़वा दो' का है। इस वीडियो को बारह सितंबर को अपलोड किया गया है और महज छः दिनों में अब तक इस वीडियो को सात लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो देखने के बाद हर कोई लड़की के डांस की तारीफ कर रहा है।
बाड़मेर जिले मंे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थार महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पर्यटन विकास के लिए जन सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा पर्यटन स्थलांे का चिन्हीकरण करके सोशियल मीडिया समेत विभिन्न माध्यमांे के जरिए पर्यटन विकास की संभावनाएं तलाशी जाएगी। बाड़मेर जिला मुख्यालय पर कार्यवाहक जिला कलक्टर एम.एल.नेहरा की अध्यक्षता मंे हुई जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक मंे इसको लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक मंे थार महोत्सव के आयोजन की तिथियां तय करने, निजी संस्थाआंे की ओर से शहर मंे पर्यटक स्थलों संबंधित होर्डिग लगाने, प्रतिबंधित मुख्य पर्यटक स्थलांे पर पर्यटकांे की अनुमति के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखने, पेट्रो टयूरिज्म एवं पचपदरा मंे पिरामिड विकसित करने, लाइट एंड साउंड शो के लिए निजी संस्था की सहभागिता, शिल्प ग्राम को तैयार करने समेत विभिन्न मुददांे पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान कार्यवाहक जिला कलक्टर एम.एल.नेहरा ने कहा कि बाड़मेर में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं है। इस दिशा मंे समन्वित प्रयास किए जाने की जरूरत है। उन्हांेने कहा कि थार महोत्सव को प्रदेश के पर्यटन कैलेण्डर मंे जोड़ा जाए। ताकि बाड़मेर आने वाले पर्यटकांे की तादाद मंे इजाफा हो। सहायक निदेशक विकास पंडिया ने बाड़मेर मंे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पचपदरा मंे पिरामिड निर्माण के लिए प्रस्ताव भिजवाया गया है। उन्हांेने बाड़मेर जिला मुख्यालय पर विभिन्न गतिविधियांे के आयोजन के लिए कन्र्वेजशन संेटर बनाने का सुझाव दिया। इस दौरान उद्यमी पुरूषोतम खत्री ने कहा कि जिले मंे पर्यटन को बढावा देने के लिए थार फोरम का गठन किया जाए। उन्हांेने पर्यटन स्थलांे के चिन्हीकरण के साथ पर्यटन को विकसित करने के लिए स्थानीय कला,संस्कृति एवं हस्त शिल्प से जुड़े उत्पादांे को बढ़ावा देने की जरूरत जताई। उन्हांेने जुना पतरासर मंे भी पुराना शहर दबा होने की संभावना जताते हुए इसको कुलधरा की तर्ज पर विकसित करने की जरूरत जताई। इस दौरान उप वन संरक्षक लक्ष्मणलाल ने बताया कि जूना पतरासर मंे पुरासंपदा को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। इस बैठक मंे पुरातत्व विभाग एवं संग्रहालय जोधपुर के भीमराज, नेहरू युवा केन्द्र के राजेन्द्र पुरोहित, होटल यदुराज के भाखरसिंह गोरडि़या, जलदाय विभाग के लिच्छूराम चैधरी, जिला शिक्षा अधिकारी कैलाशचंद तिवाड़ी समेत कई लोग उपस्थित रहे। वीरातरा समेत कई स्थानांे पर जाने की अनुमति मिलेगीः विदेशी पर्यटकांे को वीरातरा मंदिर,वेर माता मंदिर,रण आफ कच्छ बाखासर बोर्डर, मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन पर जाने की अनुमति दिलाने के लिए गृह विभाग को पत्र लिखा गया है। पर्यटन विभाग के अधिकारियांे के मुताबिक इन स्थानांे पर जाने संबंधित प्रतिबंध हटने की संभावना है। इससे पर्यटन विकास को बढावा मिलेगा।
बाड़मेर जिले मंे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थार महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पर्यटन विकास के लिए जन सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा पर्यटन स्थलांे का चिन्हीकरण करके सोशियल मीडिया समेत विभिन्न माध्यमांे के जरिए पर्यटन विकास की संभावनाएं तलाशी जाएगी। बाड़मेर जिला मुख्यालय पर कार्यवाहक जिला कलक्टर एम.एल.नेहरा की अध्यक्षता मंे हुई जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक मंे इसको लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक मंे थार महोत्सव के आयोजन की तिथियां तय करने, निजी संस्थाआंे की ओर से शहर मंे पर्यटक स्थलों संबंधित होर्डिग लगाने, प्रतिबंधित मुख्य पर्यटक स्थलांे पर पर्यटकांे की अनुमति के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखने, पेट्रो टयूरिज्म एवं पचपदरा मंे पिरामिड विकसित करने, लाइट एंड साउंड शो के लिए निजी संस्था की सहभागिता, शिल्प ग्राम को तैयार करने समेत विभिन्न मुददांे पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान कार्यवाहक जिला कलक्टर एम.एल.नेहरा ने कहा कि बाड़मेर में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं है। इस दिशा मंे समन्वित प्रयास किए जाने की जरूरत है। उन्हांेने कहा कि थार महोत्सव को प्रदेश के पर्यटन कैलेण्डर मंे जोड़ा जाए। ताकि बाड़मेर आने वाले पर्यटकांे की तादाद मंे इजाफा हो। सहायक निदेशक विकास पंडिया ने बाड़मेर मंे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पचपदरा मंे पिरामिड निर्माण के लिए प्रस्ताव भिजवाया गया है। उन्हांेने बाड़मेर जिला मुख्यालय पर विभिन्न गतिविधियांे के आयोजन के लिए कन्र्वेजशन संेटर बनाने का सुझाव दिया। इस दौरान उद्यमी पुरूषोतम खत्री ने कहा कि जिले मंे पर्यटन को बढावा देने के लिए थार फोरम का गठन किया जाए। उन्हांेने पर्यटन स्थलांे के चिन्हीकरण के साथ पर्यटन को विकसित करने के लिए स्थानीय कला,संस्कृति एवं हस्त शिल्प से जुड़े उत्पादांे को बढ़ावा देने की जरूरत जताई। उन्हांेने जुना पतरासर मंे भी पुराना शहर दबा होने की संभावना जताते हुए इसको कुलधरा की तर्ज पर विकसित करने की जरूरत जताई। इस दौरान उप वन संरक्षक लक्ष्मणलाल ने बताया कि जूना पतरासर मंे पुरासंपदा को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। इस बैठक मंे पुरातत्व विभाग एवं संग्रहालय जोधपुर के भीमराज, नेहरू युवा केन्द्र के राजेन्द्र पुरोहित, होटल यदुराज के भाखरसिंह गोरडि़या, जलदाय विभाग के लिच्छूराम चैधरी, जिला शिक्षा अधिकारी कैलाशचंद तिवाड़ी समेत कई लोग उपस्थित रहे। वीरातरा समेत कई स्थानांे पर जाने की अनुमति मिलेगीः विदेशी पर्यटकांे को वीरातरा मंदिर,वेर माता मंदिर,रण आफ कच्छ बाखासर बोर्डर, मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन पर जाने की अनुमति दिलाने के लिए गृह विभाग को पत्र लिखा गया है। पर्यटन विभाग के अधिकारियांे के मुताबिक इन स्थानांे पर जाने संबंधित प्रतिबंध हटने की संभावना है। इससे पर्यटन विकास को बढावा मिलेगा।
महाभारत युद्ध पांडवों और कौरवों के बीच हुआ था. इस युद्ध में दोनों और से लाखों योद्धा वीरगति को प्राप्ति हुए थे. इस युद्ध के अंत में पांडवों से 15 और कौरवों से तीन योद्धा बचे थे. इस तरह इस युद्ध ने पूरे भारतवर्ष को लगभग योद्धा विहीन तक कर दिया था. कुरुक्षेत्र में भाग लेने वाले सभी योद्धा पुरुष थे, जिनकी मृत्यु के बाद विधवाएं और परिजन शोक में डूबे रहते थे, लेकिन इस महा युद्ध के 15 वर्ष बाद वह सभी एक रात के लिए जीवित हुए थे. इस दौरान उनकी मुलाकात न सिर्फ इनके परिवार से हुई. बल्कि कई विधवाएं अपने पतियों के साथ बैकुंठ जाने के लिए जल समाधि में चली गईं थी. महाभारत के आश्रमवासी पर्व के 33वें अध्याय में बताया गया है कि युद्ध के बाद युधिष्ठिर हस्तिनापुर के नरेश बने और पांचों भाइयों के साथ अपना राज़-काज चलाने लगे. उनके साथ में ज्येष्ठ पिता धृतराष्ट्र, माता गांधारी और कुंती भी रहती थी. पांडवों की सेवा से प्रसन्न धृतराष्ट्र-गांधारी करीब पंद्रह वर्ष में अपने पुत्रों के शोक से भी उबर गए थे. मगर इसी बीच एक दिन धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहा कि पुत्र हम बचा हुआ जीवन वन में बिताना चाहते है. इस बात से युधिष्ठिर दुखी तो हुए लेकिन विदुर के कहने पर मान गए. इसके बाद अगले ही दिन धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, विदुर और संजय सब त्याग कर वन चले गए. इसी बीच पांडवों की देखरेख से हस्तिनापुर की प्रजा काफी खुश रहने लगी थी. मगर युद्ध में विधवा हुईं स्त्रियां शोक मनाती रहती थी. लेकिन कुछ समय बाद एक दिन सहदेव को मां कुंती से मिलने की इच्छा हुई तो भीम, अर्जुन, नकुल और उनकी पत्नियां कुंती से मिलने के लिए उत्साहित हो उठी. इसके अगले दिन जब पांडव द्रौपदी के साथ वन के लिए निकले तो हस्तिनापुर निवासी भी उनके साथ चल दिए. इन लोगों में योद्धाओं की विधवा भी थीं. इसी दौरान एक दिन वहां महर्षि वेद व्यास पांडवों से मिलने आश्रम आए. इस दौरान पांडव सहित हस्तिनापुर के निवासियों को शोक में देखकर उन्होंने कहा कि आप लोग वीरगति को प्राप्त परिजनों के लिए शोक न करें. वह सभी स्वर्ग में सुखी है. व्यास की इन बातों पर लोगों ने विश्वास नहीं किया. इसके बाद व्यास ने कहा कि आज रात मैं आपको परिजनों से मिलवाऊंगा. इस बात पर धृतराष्ट्र और गांधारी ने युद्ध में मृत पुत्रों और कुंती ने कर्ण को देखने की अपनी इच्छा जाहिर की. बाकी सभी ने कहा कि वह भी अपने अपने परिजन को देखना चाहते है. इसके बाद महर्षि वेद व्यास सभी को गंगा के तट पर लाये और सूर्यास्त के बाद उन्होंने अपने तपोबल से महाभारत में मारे गए योद्धाओं का आवाहन किया. इस तरह सभी योद्धा एक-एक कर गंगा से निकलने लगे. कुछ देर बाद इनमे से भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन, दुःशासन, अभिमन्यु, धृतराष्ट्र के सभी पुत्र, घटोत्कच, द्रौपदी के पांचों पुत्र, राजा द्रुपद, धृष्टद्युम्न, शकुनि, शिखंडी आदि गंगा के पवित्र जल में से बाहर निकले. इन मृत परिजनों को अपने सामने खड़ा देख पांडव समेत हस्तिनापुर के सभी निवासी प्रसन्न हो गए थे. उन्हें उनसे बात करने के बाद विश्वास हुआ कि वह ठीक है. जैसे ही ये योद्धा जानें लगे इनकी विधवाओं ने भी जल में समाधी ले ली.
महाभारत युद्ध पांडवों और कौरवों के बीच हुआ था. इस युद्ध में दोनों और से लाखों योद्धा वीरगति को प्राप्ति हुए थे. इस युद्ध के अंत में पांडवों से पंद्रह और कौरवों से तीन योद्धा बचे थे. इस तरह इस युद्ध ने पूरे भारतवर्ष को लगभग योद्धा विहीन तक कर दिया था. कुरुक्षेत्र में भाग लेने वाले सभी योद्धा पुरुष थे, जिनकी मृत्यु के बाद विधवाएं और परिजन शोक में डूबे रहते थे, लेकिन इस महा युद्ध के पंद्रह वर्ष बाद वह सभी एक रात के लिए जीवित हुए थे. इस दौरान उनकी मुलाकात न सिर्फ इनके परिवार से हुई. बल्कि कई विधवाएं अपने पतियों के साथ बैकुंठ जाने के लिए जल समाधि में चली गईं थी. महाभारत के आश्रमवासी पर्व के तैंतीसवें अध्याय में बताया गया है कि युद्ध के बाद युधिष्ठिर हस्तिनापुर के नरेश बने और पांचों भाइयों के साथ अपना राज़-काज चलाने लगे. उनके साथ में ज्येष्ठ पिता धृतराष्ट्र, माता गांधारी और कुंती भी रहती थी. पांडवों की सेवा से प्रसन्न धृतराष्ट्र-गांधारी करीब पंद्रह वर्ष में अपने पुत्रों के शोक से भी उबर गए थे. मगर इसी बीच एक दिन धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहा कि पुत्र हम बचा हुआ जीवन वन में बिताना चाहते है. इस बात से युधिष्ठिर दुखी तो हुए लेकिन विदुर के कहने पर मान गए. इसके बाद अगले ही दिन धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, विदुर और संजय सब त्याग कर वन चले गए. इसी बीच पांडवों की देखरेख से हस्तिनापुर की प्रजा काफी खुश रहने लगी थी. मगर युद्ध में विधवा हुईं स्त्रियां शोक मनाती रहती थी. लेकिन कुछ समय बाद एक दिन सहदेव को मां कुंती से मिलने की इच्छा हुई तो भीम, अर्जुन, नकुल और उनकी पत्नियां कुंती से मिलने के लिए उत्साहित हो उठी. इसके अगले दिन जब पांडव द्रौपदी के साथ वन के लिए निकले तो हस्तिनापुर निवासी भी उनके साथ चल दिए. इन लोगों में योद्धाओं की विधवा भी थीं. इसी दौरान एक दिन वहां महर्षि वेद व्यास पांडवों से मिलने आश्रम आए. इस दौरान पांडव सहित हस्तिनापुर के निवासियों को शोक में देखकर उन्होंने कहा कि आप लोग वीरगति को प्राप्त परिजनों के लिए शोक न करें. वह सभी स्वर्ग में सुखी है. व्यास की इन बातों पर लोगों ने विश्वास नहीं किया. इसके बाद व्यास ने कहा कि आज रात मैं आपको परिजनों से मिलवाऊंगा. इस बात पर धृतराष्ट्र और गांधारी ने युद्ध में मृत पुत्रों और कुंती ने कर्ण को देखने की अपनी इच्छा जाहिर की. बाकी सभी ने कहा कि वह भी अपने अपने परिजन को देखना चाहते है. इसके बाद महर्षि वेद व्यास सभी को गंगा के तट पर लाये और सूर्यास्त के बाद उन्होंने अपने तपोबल से महाभारत में मारे गए योद्धाओं का आवाहन किया. इस तरह सभी योद्धा एक-एक कर गंगा से निकलने लगे. कुछ देर बाद इनमे से भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन, दुःशासन, अभिमन्यु, धृतराष्ट्र के सभी पुत्र, घटोत्कच, द्रौपदी के पांचों पुत्र, राजा द्रुपद, धृष्टद्युम्न, शकुनि, शिखंडी आदि गंगा के पवित्र जल में से बाहर निकले. इन मृत परिजनों को अपने सामने खड़ा देख पांडव समेत हस्तिनापुर के सभी निवासी प्रसन्न हो गए थे. उन्हें उनसे बात करने के बाद विश्वास हुआ कि वह ठीक है. जैसे ही ये योद्धा जानें लगे इनकी विधवाओं ने भी जल में समाधी ले ली.
ब्रांस्क सौंदर्य शरद ऋतु पकाने की अवधि का एक नाशपाती है, जो मैक्स रेड बार्टलेट और नए साल की किस्मों के परागण से प्राप्त चयन विज्ञान के दर्दनाक कार्यों का परिणाम है। ब्रांस्क सौंदर्य - एक नाशपाती, जिसका विवरणबागानियों का एक ईमानदार हित है, जो मध्यम ऊंचाई और एक संकीर्ण पिरामिड क्राउन द्वारा विशेषता है। पत्तियां चमकदार, चिकनी, गहरे हरे रंग के रंग से भरे हुए हैं। इस किस्म की एक विशिष्ट विशेषता युवा शाखाओं के ऊपरी पत्ते के बरगंडी-लाल रंग है, जो अपिकल कलियों को डालने की प्रक्रिया से पहले मौजूद है। उनकी उपस्थिति के साथ, पत्ते पूरे ताज की हरी रंग की विशेषता प्राप्त करते हैं। छाल में बरगंडी-लाल रंग होता है, विशेष रूप से विकास के शीर्ष पर उच्चारण किया जाता है। स्वाद विशेषताओंः लगभग 5 अंक! ब्रांस्क सौंदर्य के फल की विशेषता हैएक नियमित नाशपाती के आकार का रूप। प्रत्येक 250 ग्राम का औसत वजन। सबसे बड़े नमूनों का वजन 450 ग्राम तक पहुंच सकता है। नाशपाती बहुत आकर्षक लगते हैं। नाशपाती, जिसके स्वाद के बारे में समीक्षाउपभोक्ताओं के पक्ष सकारात्मक होते हैं, जो तेल के प्रकाश-क्रीम लुगदी, बहुत रसदार, केवल मुंह में पिघलने से विशेषता है। स्वाद मीठा और खट्टा है, एक बहुत ही सुखद पुष्प सुगंध के साथ। स्वाद विशेषताओं के अनुसार ब्रांस्क सौंदर्य - एक नाशपाती, जिनके फल 5 संभव से 4.8 अंक अनुमानित हैं। क्रेसेंट के दौरान ठंडा जगह में पके हुए नाशपाती की दुकान की सिफारिश की जाती है। रेफ्रिजरेटर में, बचत की अवधि में काफी वृद्धि हुई हैः ताजा फलों का स्वाद दिसंबर में भी आनंद लिया जा सकता है। नाशपाती, विवरण, जिसकी तस्वीर बागानियों को अपनी साइट पर इस तरह के नम्र पौधे को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है, इसकी सर्दियों की कठोरता से अलग है और तापमान ड्रॉप -38 को सहन करने में सक्षम हैके बारे मेंएस पेड़ की व्यवहार्यता के लिए बेहद प्रतिकूल प्रभावशाली तापमान परिवर्तनों से प्रतिबिंबित किया जा सकता है, जिसमें एक बड़ा आयाम होता है। विविधता बीमारियों और कीटों के लिए अत्यधिक प्रतिरोधी है। घोटाला गीले वर्षों में पौधे की पत्तियों को प्रभावित कर सकता है। मास्को और निज़नी नोवगोरोड क्षेत्रों में ऐसे मामलों को देखा गया था। रोपण के लिए रोपण की सिफारिश की जाती हैपोषक तत्वों, अच्छी तरह से जलाया और ड्राफ्ट से संरक्षित चुनते हैं। मिट्टी में पानी को स्थिर करने की अनुमति न दें, जिससे रूट सिस्टम का क्षय हो सकता है। पहली फ्रूटिंग नाशपाती विविधता में ब्रैंन्स्क सौंदर्य टीकाकरण के 3 साल बाद आता है, एक पूर्ण उपज 6 साल बाद प्राप्त की जा सकती है। अक्सर, फल अकेले बंधे होते हैं, जोड़ों और बंडलों में बहुत ही कम। पेड़ की फूलना काफी देर हो चुकी है, जिसे विविधता के फायदे के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता हैः यह बगीचे के पौधे को वसंत ऋतु में संभावित ठंढों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। अन्य किस्मों की तुलना में, ब्रांस्क सौंदर्य की वनस्पति कलियों कुछ हफ्ते बाद खिल रही हैं। फल सितंबर में ripens। प्रचुर मात्रा में फूलों के बावजूद इस प्रकार की बगीचे की फसलों की पैदावार कम है, स्व-निषेचित पेड़ पर परिपक्व फल कमजोर रूप से बनाए रखा जाता है। ब्रांस्क सौंदर्य के लाभः उच्च वस्तु और स्वाद विशेषताओं के साथ नियमित नाशपाती के आकार के सुंदर सजावटी फल। नुकसानः सूखी अवधि में, पके हुए नाशपाती मालोइड बन जाते हैं और कड़वा स्वाद प्राप्त करते हैं। ब्रांस्क सौंदर्य एक किस्म है जो एक किस्म को बढ़ाने के लिए है। वनस्पति कलियों के देर से विघटन के कारण, पौधे को बगीचे में बदलने, अन्य किस्मों को रोपण करने की सिफारिश नहीं की जाती है।
ब्रांस्क सौंदर्य शरद ऋतु पकाने की अवधि का एक नाशपाती है, जो मैक्स रेड बार्टलेट और नए साल की किस्मों के परागण से प्राप्त चयन विज्ञान के दर्दनाक कार्यों का परिणाम है। ब्रांस्क सौंदर्य - एक नाशपाती, जिसका विवरणबागानियों का एक ईमानदार हित है, जो मध्यम ऊंचाई और एक संकीर्ण पिरामिड क्राउन द्वारा विशेषता है। पत्तियां चमकदार, चिकनी, गहरे हरे रंग के रंग से भरे हुए हैं। इस किस्म की एक विशिष्ट विशेषता युवा शाखाओं के ऊपरी पत्ते के बरगंडी-लाल रंग है, जो अपिकल कलियों को डालने की प्रक्रिया से पहले मौजूद है। उनकी उपस्थिति के साथ, पत्ते पूरे ताज की हरी रंग की विशेषता प्राप्त करते हैं। छाल में बरगंडी-लाल रंग होता है, विशेष रूप से विकास के शीर्ष पर उच्चारण किया जाता है। स्वाद विशेषताओंः लगभग पाँच अंक! ब्रांस्क सौंदर्य के फल की विशेषता हैएक नियमित नाशपाती के आकार का रूप। प्रत्येक दो सौ पचास ग्राम का औसत वजन। सबसे बड़े नमूनों का वजन चार सौ पचास ग्राम तक पहुंच सकता है। नाशपाती बहुत आकर्षक लगते हैं। नाशपाती, जिसके स्वाद के बारे में समीक्षाउपभोक्ताओं के पक्ष सकारात्मक होते हैं, जो तेल के प्रकाश-क्रीम लुगदी, बहुत रसदार, केवल मुंह में पिघलने से विशेषता है। स्वाद मीठा और खट्टा है, एक बहुत ही सुखद पुष्प सुगंध के साथ। स्वाद विशेषताओं के अनुसार ब्रांस्क सौंदर्य - एक नाशपाती, जिनके फल पाँच संभव से चार.आठ अंक अनुमानित हैं। क्रेसेंट के दौरान ठंडा जगह में पके हुए नाशपाती की दुकान की सिफारिश की जाती है। रेफ्रिजरेटर में, बचत की अवधि में काफी वृद्धि हुई हैः ताजा फलों का स्वाद दिसंबर में भी आनंद लिया जा सकता है। नाशपाती, विवरण, जिसकी तस्वीर बागानियों को अपनी साइट पर इस तरह के नम्र पौधे को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है, इसकी सर्दियों की कठोरता से अलग है और तापमान ड्रॉप -अड़तीस को सहन करने में सक्षम हैके बारे मेंएस पेड़ की व्यवहार्यता के लिए बेहद प्रतिकूल प्रभावशाली तापमान परिवर्तनों से प्रतिबिंबित किया जा सकता है, जिसमें एक बड़ा आयाम होता है। विविधता बीमारियों और कीटों के लिए अत्यधिक प्रतिरोधी है। घोटाला गीले वर्षों में पौधे की पत्तियों को प्रभावित कर सकता है। मास्को और निज़नी नोवगोरोड क्षेत्रों में ऐसे मामलों को देखा गया था। रोपण के लिए रोपण की सिफारिश की जाती हैपोषक तत्वों, अच्छी तरह से जलाया और ड्राफ्ट से संरक्षित चुनते हैं। मिट्टी में पानी को स्थिर करने की अनुमति न दें, जिससे रूट सिस्टम का क्षय हो सकता है। पहली फ्रूटिंग नाशपाती विविधता में ब्रैंन्स्क सौंदर्य टीकाकरण के तीन साल बाद आता है, एक पूर्ण उपज छः साल बाद प्राप्त की जा सकती है। अक्सर, फल अकेले बंधे होते हैं, जोड़ों और बंडलों में बहुत ही कम। पेड़ की फूलना काफी देर हो चुकी है, जिसे विविधता के फायदे के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता हैः यह बगीचे के पौधे को वसंत ऋतु में संभावित ठंढों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। अन्य किस्मों की तुलना में, ब्रांस्क सौंदर्य की वनस्पति कलियों कुछ हफ्ते बाद खिल रही हैं। फल सितंबर में ripens। प्रचुर मात्रा में फूलों के बावजूद इस प्रकार की बगीचे की फसलों की पैदावार कम है, स्व-निषेचित पेड़ पर परिपक्व फल कमजोर रूप से बनाए रखा जाता है। ब्रांस्क सौंदर्य के लाभः उच्च वस्तु और स्वाद विशेषताओं के साथ नियमित नाशपाती के आकार के सुंदर सजावटी फल। नुकसानः सूखी अवधि में, पके हुए नाशपाती मालोइड बन जाते हैं और कड़वा स्वाद प्राप्त करते हैं। ब्रांस्क सौंदर्य एक किस्म है जो एक किस्म को बढ़ाने के लिए है। वनस्पति कलियों के देर से विघटन के कारण, पौधे को बगीचे में बदलने, अन्य किस्मों को रोपण करने की सिफारिश नहीं की जाती है।
मान लो । भग्त नरेश्वर को गज दानी समझो । फचन राशि देकर उन्हें सतुष्ट फगे । गजवटा और तीनगामी चनल पोडे उन्हें दो । ६२ --- प्राम, नगर, पुर र पाटण अर्पित कर दो। वद देशाधियों को स्थिर, स्तमिती स्थापित करनेवाला है। तुम उसे देव प्रौर प्रदेश देने में विमर्श न करो । समर्पण करने से किसी प्रकार का विनाश न होगा । ३- सिफो राजा सेवक नहीं जानता उन मानी को विशेष शेष के साथ मारता है, प्रतिमन ( शरागत ) का प्रतिपालन करता है। प्रार्थी को घड़ी भर भी टालता नहीं । ६४-- हे देव, उनसे ताड़ना न फीजिए। वे यदि मानते हैं तो उनसे श्रा नहीं चाहिए। हे सुजान, मै आपके हित के कारण ( यह ) कहता हूँ । हूँ तो मुझे भरतेश्वर की ग्रान है । ६५ -राक्षा (बाहुवली ) चोला - हे दूत । सुनो, विधाता जो कुछ भालतल पर लिस दता है वही मनुष्य इस लोक में पाता है । इस भाग्यरेखा फा निःसत्व, निर्गुण नर उत्तमाग और नामी जन ब्रह्मा, इद्र, नुर, सुर कोई भी उल्लघन नहीं कर सकता । भाग्य से अधिक या कम नहीं मिलता । फिर भरतेश्वर फौन होता है ? ६६ - निज देश, नर, मदिर, जल, स्थल, जगल, गिरि, गुहा, कदरा, दिशा दिशा, देश देश ( बाहरी देश ), द्वीपांतर, युग औौर चराचर में जो कुछ निषिद्ध या विहित भाग्य में लिखा है वह अवश्य मिलेगा । नेसि -नेट ( निषिद्ध ) निवेसि - निवेश्य ( विद्दित ) ६७ - अरे दूत ! सुनो, महिमडल में देवता, दानव वा मानव कोई भी भाग्यलेख का उल्लवन नहीं कर सकता । भाग्यलेख से अधिक या कम नहीं दे सकता । ६८ - वन, श्रन्न, कचन, नव निधियों, गजवटा, तेजस्वी, तरल (केकाणी ) घोडे, यहाँ तक कि अपना सिर और सर्वस्व भले ही चला जाय, तो भी निसत्वरणे ( दीन भाव ) से नमन नहीं करना चाहिए ।
मान लो । भग्त नरेश्वर को गज दानी समझो । फचन राशि देकर उन्हें सतुष्ट फगे । गजवटा और तीनगामी चनल पोडे उन्हें दो । बासठ --- प्राम, नगर, पुर र पाटण अर्पित कर दो। वद देशाधियों को स्थिर, स्तमिती स्थापित करनेवाला है। तुम उसे देव प्रौर प्रदेश देने में विमर्श न करो । समर्पण करने से किसी प्रकार का विनाश न होगा । तीन- सिफो राजा सेवक नहीं जानता उन मानी को विशेष शेष के साथ मारता है, प्रतिमन का प्रतिपालन करता है। प्रार्थी को घड़ी भर भी टालता नहीं । चौंसठ-- हे देव, उनसे ताड़ना न फीजिए। वे यदि मानते हैं तो उनसे श्रा नहीं चाहिए। हे सुजान, मै आपके हित के कारण कहता हूँ । हूँ तो मुझे भरतेश्वर की ग्रान है । पैंसठ -राक्षा चोला - हे दूत । सुनो, विधाता जो कुछ भालतल पर लिस दता है वही मनुष्य इस लोक में पाता है । इस भाग्यरेखा फा निःसत्व, निर्गुण नर उत्तमाग और नामी जन ब्रह्मा, इद्र, नुर, सुर कोई भी उल्लघन नहीं कर सकता । भाग्य से अधिक या कम नहीं मिलता । फिर भरतेश्वर फौन होता है ? छयासठ - निज देश, नर, मदिर, जल, स्थल, जगल, गिरि, गुहा, कदरा, दिशा दिशा, देश देश , द्वीपांतर, युग औौर चराचर में जो कुछ निषिद्ध या विहित भाग्य में लिखा है वह अवश्य मिलेगा । नेसि -नेट निवेसि - निवेश्य सरसठ - अरे दूत ! सुनो, महिमडल में देवता, दानव वा मानव कोई भी भाग्यलेख का उल्लवन नहीं कर सकता । भाग्यलेख से अधिक या कम नहीं दे सकता । अड़सठ - वन, श्रन्न, कचन, नव निधियों, गजवटा, तेजस्वी, तरल घोडे, यहाँ तक कि अपना सिर और सर्वस्व भले ही चला जाय, तो भी निसत्वरणे से नमन नहीं करना चाहिए ।
Meerut . भूसामंडी में गुरुवार को दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। एक पक्ष ने ब्लैड से वार करते हुए हंगामा कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। एएसपी भी मौके पर पहुंचे और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सदर बाजार एसओ विजय गुप्ता के मुताबिक आस्किन पुत्र यामीन निवासी भूसामंडी को चांद पुत्र हकीमुद्दीन ने पहले पिटाई की। जिसके बाद आस्किन के गर्दन पर कई बार ब्लैड से वार करके लहूलुहान कर दिया। चांद को सदर बाजार पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी पर मुकदमा कायम कर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
Meerut . भूसामंडी में गुरुवार को दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। एक पक्ष ने ब्लैड से वार करते हुए हंगामा कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। एएसपी भी मौके पर पहुंचे और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सदर बाजार एसओ विजय गुप्ता के मुताबिक आस्किन पुत्र यामीन निवासी भूसामंडी को चांद पुत्र हकीमुद्दीन ने पहले पिटाई की। जिसके बाद आस्किन के गर्दन पर कई बार ब्लैड से वार करके लहूलुहान कर दिया। चांद को सदर बाजार पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी पर मुकदमा कायम कर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
पाकिस्तान ने श्रीलंका के खिलाफ सुपर 4 राउंड में अपनी प्लेइंग XI में बदलाव करते हुए कुछ मुख्य खिलाड़ियों को आराम दिया था। तेज गेंदबाज नसीम शाह और ऑलराउंडर शादाब खान की जगह पाकिस्तान ने हसन अली और उस्मान कादीर को मौका दिया था। 19 साल के नसीम ने पूरे एशिया कप में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने गेंदबाजी मे छह विकेट लेने के साथ-साथ अफगानिस्तान के खिलाफ लगातार दो छक्के मारकर मैच भी जिताया था। वहीं शादाब भी पाकिस्तान के लिए लगातार ऑलराउंड प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में इन दोनों ही खिलाड़ियों की वापसी तय है। पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहनवाज दाहनी भी चोट से उबरकर टीम चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे लेकिन उनका खेलना तय नहीं है। श्रीलंका विजयी टीम पर करेगी भरोसा! श्रीलंकाई टीम ने भी पिछले मैच में दो बदलाव किए थे। श्रीलंका ने असिथा फर्नांडो की जगह दिलशान मधुशंका और चरिथ असलंका की जगह धनंजय डी सिल्वा को टीम में शामिल किया था। दोनों ने ही इस मैच में अहम योगदान दिया और मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि श्रीलंकाई टीम इन्हें बरकरार रखेगी या पुराने दोनों खिलाड़ियों को लाएगी। दोनों टीमों की संभावित एकादशः भारतः
पाकिस्तान ने श्रीलंका के खिलाफ सुपर चार राउंड में अपनी प्लेइंग XI में बदलाव करते हुए कुछ मुख्य खिलाड़ियों को आराम दिया था। तेज गेंदबाज नसीम शाह और ऑलराउंडर शादाब खान की जगह पाकिस्तान ने हसन अली और उस्मान कादीर को मौका दिया था। उन्नीस साल के नसीम ने पूरे एशिया कप में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने गेंदबाजी मे छह विकेट लेने के साथ-साथ अफगानिस्तान के खिलाफ लगातार दो छक्के मारकर मैच भी जिताया था। वहीं शादाब भी पाकिस्तान के लिए लगातार ऑलराउंड प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में इन दोनों ही खिलाड़ियों की वापसी तय है। पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहनवाज दाहनी भी चोट से उबरकर टीम चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे लेकिन उनका खेलना तय नहीं है। श्रीलंका विजयी टीम पर करेगी भरोसा! श्रीलंकाई टीम ने भी पिछले मैच में दो बदलाव किए थे। श्रीलंका ने असिथा फर्नांडो की जगह दिलशान मधुशंका और चरिथ असलंका की जगह धनंजय डी सिल्वा को टीम में शामिल किया था। दोनों ने ही इस मैच में अहम योगदान दिया और मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि श्रीलंकाई टीम इन्हें बरकरार रखेगी या पुराने दोनों खिलाड़ियों को लाएगी। दोनों टीमों की संभावित एकादशः भारतः
टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics ) में नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने देश को पहला गोल्ड मेडल दिला दिया. उनकी इस कामयाबी के बाद नेता से लेकर अभिनेता तक उनपर नाज करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में अब एक ऐसी खबर आ रही है जो फैंस की खुशी को दोगुना कर देगी. दरअसल बॉलीवुड हर मौके को भुनाने के लिए जाना जाता है. ऐसे में अब सवाल उठने लगे है कि क्या नीरज चोपड़ा की भी बायोपिक बन सकती हैं? अगर हां तो कौन बनायेगा? वेल अभी तक ये सारे सवाल ही है लेकिन फिल्ममेकर मिलाप जवेरी ने एक ऐसा हिंट दिया है जिसके बाद कयास लगने शुरू हो गए है कि नीरज चोपड़ा पर बायोपिक बन सकती है. दरअसल तमाम सेलेब्स की तरह नीरज चोपड़ा को मिलाप जवेरी ने भी विश किया. उन्होंने गोल्ड जीतने पर बधाई देते लिखा कि आपका लुक सिद्धार्थ मल्होत्रा जैसा दिखाई देता है आप ट्विन्स हो. बायोपिक हो जाए. वेल मिलाप ने अपने इस पोस्ट में नीरज को टैग भी किया है. जाहिर है नीरज की जीत के बाद हर कोई उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए बेताब है. इसे में मिलाप ने भी ये शानदार ऑफर नीरज के सामने रख दिया है. अब नीरज इसके लिए हामी भरते है या नहीं ये तो देखने वाली बात होगी.
टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने देश को पहला गोल्ड मेडल दिला दिया. उनकी इस कामयाबी के बाद नेता से लेकर अभिनेता तक उनपर नाज करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में अब एक ऐसी खबर आ रही है जो फैंस की खुशी को दोगुना कर देगी. दरअसल बॉलीवुड हर मौके को भुनाने के लिए जाना जाता है. ऐसे में अब सवाल उठने लगे है कि क्या नीरज चोपड़ा की भी बायोपिक बन सकती हैं? अगर हां तो कौन बनायेगा? वेल अभी तक ये सारे सवाल ही है लेकिन फिल्ममेकर मिलाप जवेरी ने एक ऐसा हिंट दिया है जिसके बाद कयास लगने शुरू हो गए है कि नीरज चोपड़ा पर बायोपिक बन सकती है. दरअसल तमाम सेलेब्स की तरह नीरज चोपड़ा को मिलाप जवेरी ने भी विश किया. उन्होंने गोल्ड जीतने पर बधाई देते लिखा कि आपका लुक सिद्धार्थ मल्होत्रा जैसा दिखाई देता है आप ट्विन्स हो. बायोपिक हो जाए. वेल मिलाप ने अपने इस पोस्ट में नीरज को टैग भी किया है. जाहिर है नीरज की जीत के बाद हर कोई उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए बेताब है. इसे में मिलाप ने भी ये शानदार ऑफर नीरज के सामने रख दिया है. अब नीरज इसके लिए हामी भरते है या नहीं ये तो देखने वाली बात होगी.
गुजरात के वडोदरा में खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बताने वाले मयंक तिवारी नामक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य के दौरान पालघर तहसील के खरडी गांव में 24 से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं। गुजरात में सोमवार रात को सांप्रदायिक झड़प और पत्थरबाजी की दो घटनाएं देखने को मिलीं जिनमें कई लोग घायल हुए। गुजरात के वडोदरा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुजरात के वडोदरा के मांडवी इलाके में गणेश शोभायात्रा के दौरान दो समुदायों के सदस्यों के बीच किसी बात पर झड़प हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों गुट एक-दूसरे पर पथराव करने लगे। गुजरात के वडोदरा की रहने वाली गरिमा मालवंकर के पालतू कुत्ते 'प्लूटो' का पिछले साल एक बीमारी के कारण निधन हो गया था, जिसके कारण वह तनाव से घिर गई और उसने किसी भी अन्य पालतू जानवर को प्लूटो की जगह नहीं दी। गुजरात के वडोदरा शहर में रहने वाली 24 वर्षीय क्षमा बिंदु 11 जून को बिना दूल्हे के पारंपरिक अनुष्ठानों से शादी करने जा रही हैं। गुजरात के वडोदरा में अब मांसाहार और अंडे खुले में नहीं बेचे जा सकेंगे और उन्हें ढक कर रखना होगा। इसके अलावा इनके ठेलों को मुख्य सड़कों से हटाने का निर्देश भी दिया गया है। गुजरात के वडोदरा के पास वाधोडिया में बुधवार सुबह ट्रेलर और मिनी ट्रक की भिड़ंत में मिनी ट्रक में सवार 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हो गए। गुजरात के वडोदरा के एक थाने में करीब नौ महीने पहले चोरी के मामले में संदिग्ध 65 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत होने के मामले में आरोपी छह पुलिसकर्मियों ने सोमवार को राज्य के अपराध जांच विभाग (CID) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। गुजरात के वडोदरा में कोरोना वायरस (COVID-19) अस्पताल में मंगलवार को 12 घंटे के लिए बिजली गुल रही थी। दूसरी शादी करके फंस गया यार अच्छा खासा था पहली पत्नी के साथ! हंसिए मत, यह कोई मजाक नहीं बल्कि उस व्यक्ति की परेशानी है जिसको हाल ही में अपनी दूसरी पत्नी से दिल दहलाने वाला धोखा मिला है। गुजरात के नर्मदा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। वडोदरा का पांच सदस्यीय परिवार गत रविवार की शाम केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने बाद रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया। कई जगहों पर कुछ समस्याओं के निवारण के लिए पैसों का ऑफर दिया जाता है। लिविंग रूम, गार्डन, किचन और बाथरूम में ख़तरनाक जीवों का मिलना ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों के लिए सामान्य बात है। गुजरात के कई शहरों में इन दिनों भारी बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। इंडियन प्रीमियर लीग में सट्टेबाज़ी के मामले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पूर्व कोच तुषार अरोठे को गिरफ्तार किया गया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन की अस्पताल में ज़िंदगी की जंग जारी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) अंतरिक्ष में मानव भेजने के मिशन 'गगनयान' को अंजाम देने में जुटा है।
गुजरात के वडोदरा में खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताने वाले मयंक तिवारी नामक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य के दौरान पालघर तहसील के खरडी गांव में चौबीस से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं। गुजरात में सोमवार रात को सांप्रदायिक झड़प और पत्थरबाजी की दो घटनाएं देखने को मिलीं जिनमें कई लोग घायल हुए। गुजरात के वडोदरा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुजरात के वडोदरा के मांडवी इलाके में गणेश शोभायात्रा के दौरान दो समुदायों के सदस्यों के बीच किसी बात पर झड़प हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों गुट एक-दूसरे पर पथराव करने लगे। गुजरात के वडोदरा की रहने वाली गरिमा मालवंकर के पालतू कुत्ते 'प्लूटो' का पिछले साल एक बीमारी के कारण निधन हो गया था, जिसके कारण वह तनाव से घिर गई और उसने किसी भी अन्य पालतू जानवर को प्लूटो की जगह नहीं दी। गुजरात के वडोदरा शहर में रहने वाली चौबीस वर्षीय क्षमा बिंदु ग्यारह जून को बिना दूल्हे के पारंपरिक अनुष्ठानों से शादी करने जा रही हैं। गुजरात के वडोदरा में अब मांसाहार और अंडे खुले में नहीं बेचे जा सकेंगे और उन्हें ढक कर रखना होगा। इसके अलावा इनके ठेलों को मुख्य सड़कों से हटाने का निर्देश भी दिया गया है। गुजरात के वडोदरा के पास वाधोडिया में बुधवार सुबह ट्रेलर और मिनी ट्रक की भिड़ंत में मिनी ट्रक में सवार दस लोगों की मौत हो गई, जबकि सोलह अन्य घायल हो गए। गुजरात के वडोदरा के एक थाने में करीब नौ महीने पहले चोरी के मामले में संदिग्ध पैंसठ वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत होने के मामले में आरोपी छह पुलिसकर्मियों ने सोमवार को राज्य के अपराध जांच विभाग के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। गुजरात के वडोदरा में कोरोना वायरस अस्पताल में मंगलवार को बारह घंटाटे के लिए बिजली गुल रही थी। दूसरी शादी करके फंस गया यार अच्छा खासा था पहली पत्नी के साथ! हंसिए मत, यह कोई मजाक नहीं बल्कि उस व्यक्ति की परेशानी है जिसको हाल ही में अपनी दूसरी पत्नी से दिल दहलाने वाला धोखा मिला है। गुजरात के नर्मदा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। वडोदरा का पांच सदस्यीय परिवार गत रविवार की शाम केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने बाद रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया। कई जगहों पर कुछ समस्याओं के निवारण के लिए पैसों का ऑफर दिया जाता है। लिविंग रूम, गार्डन, किचन और बाथरूम में ख़तरनाक जीवों का मिलना ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों के लिए सामान्य बात है। गुजरात के कई शहरों में इन दिनों भारी बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। इंडियन प्रीमियर लीग में सट्टेबाज़ी के मामले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पूर्व कोच तुषार अरोठे को गिरफ्तार किया गया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन की अस्पताल में ज़िंदगी की जंग जारी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान अंतरिक्ष में मानव भेजने के मिशन 'गगनयान' को अंजाम देने में जुटा है।
शाहतलाई - नगर पंचायत तलाई के वार्ड नंबर एक में सौर ऊर्जा की लगी हुई लाइट पिछले 14 महीनों से बंद पड़ी हुई है। ज्ञात रहे इस संबंध में प्रभावित परिवार के सदस्य प्रदीप कुमार ने 16 सितंबर 2016 को नगर पंचायत में बकायदा शिकायत भी दे रखी है। उसके बाद भी कई बार नगर पंचायत की बैठक में भी यह बात पूर्व में रहे मनोनीत पार्षद जगदीश भाटिया ने उठाई है, लेकिन आजतक नगर पंचायत द्वारा इस सौर ऊर्जा की लाइट को ठीक नहीं करवाया गया। नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान तो उठना स्वभाविक ही है कि किस प्रकार लोगों की समस्याओं को नजर अंदाज किया जा रहा है। इस समस्या के चलते जगदीश भाटिया व प्रदीप कुमार के परिवारों को पिछले कई माह से दिक्कत झेलनी पड़ रही है। लाइट मात्र सफेद हाथी बनकर रह गई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में 25 सोलर लाइट नगर पंचायत के उन वार्डों में लगाई गई थी। प्रभावित परिवारों ने कहना कि उस समय भी यह सोलर लाइट कंपनी के वारंटी पीरियड में भी ठीक हो सकती थी, लेकिन नगर पंचायत ने प्रभावित परिवारों की शिकायत के बाद भी इसे ठीक करवाना आज तक उचित नहीं समझा। जगदीश भाटिया का यह मानना है कि राजनीतिक तौर पर इस लाइट को नगर पंचायत ने इसे आज तक ठीक नहीं करवाया। उक्त परिवार के सदस्यों ने नगर पंचायत व उपायुक्त महोदय से गुहार लगाई है कि बंद पड़ी इस सोलर लाइट को शीघ्र ठीक करवाया जाए। उधर, नगर पंचायत तलाई के अध्यक्ष बलदेव स्याल ने बताया कि खराब सोलर लाइट को शीघ्र ही संबंधित कंपनी कार्यालय की ओर से पत्राचार कर आदेश दिए जाएंगे, ताकि लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
शाहतलाई - नगर पंचायत तलाई के वार्ड नंबर एक में सौर ऊर्जा की लगी हुई लाइट पिछले चौदह महीनों से बंद पड़ी हुई है। ज्ञात रहे इस संबंध में प्रभावित परिवार के सदस्य प्रदीप कुमार ने सोलह सितंबर दो हज़ार सोलह को नगर पंचायत में बकायदा शिकायत भी दे रखी है। उसके बाद भी कई बार नगर पंचायत की बैठक में भी यह बात पूर्व में रहे मनोनीत पार्षद जगदीश भाटिया ने उठाई है, लेकिन आजतक नगर पंचायत द्वारा इस सौर ऊर्जा की लाइट को ठीक नहीं करवाया गया। नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान तो उठना स्वभाविक ही है कि किस प्रकार लोगों की समस्याओं को नजर अंदाज किया जा रहा है। इस समस्या के चलते जगदीश भाटिया व प्रदीप कुमार के परिवारों को पिछले कई माह से दिक्कत झेलनी पड़ रही है। लाइट मात्र सफेद हाथी बनकर रह गई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में पच्चीस सोलर लाइट नगर पंचायत के उन वार्डों में लगाई गई थी। प्रभावित परिवारों ने कहना कि उस समय भी यह सोलर लाइट कंपनी के वारंटी पीरियड में भी ठीक हो सकती थी, लेकिन नगर पंचायत ने प्रभावित परिवारों की शिकायत के बाद भी इसे ठीक करवाना आज तक उचित नहीं समझा। जगदीश भाटिया का यह मानना है कि राजनीतिक तौर पर इस लाइट को नगर पंचायत ने इसे आज तक ठीक नहीं करवाया। उक्त परिवार के सदस्यों ने नगर पंचायत व उपायुक्त महोदय से गुहार लगाई है कि बंद पड़ी इस सोलर लाइट को शीघ्र ठीक करवाया जाए। उधर, नगर पंचायत तलाई के अध्यक्ष बलदेव स्याल ने बताया कि खराब सोलर लाइट को शीघ्र ही संबंधित कंपनी कार्यालय की ओर से पत्राचार कर आदेश दिए जाएंगे, ताकि लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
UP Chunav: सिराथू सीट पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा की पल्लवी पटेल सहित कुल 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे. कौशांबी. यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) के दौरान कौशांबी की हॉट सीट मानी जाने वाली सिराथू विधानसभा (Sirathu Seat) में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला. इस सीट पर भाजपा को बड़ा झटका लगा है. जहां यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) को हार का सामना करना पड़ा है. सपा की पल्लवी पटेल (Pallavi Patel) ने इस सीट पर 7337 वोट से जीत दर्ज की है. पल्लवी को 105559 वोट मिले है. जबकि बीजेपी के केशव मौर्य (98727) को हार मिली है. सिराथू सीट पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा की पल्लवी पटेल सहित कुल 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे. बता दें कि पल्लवी पटेल अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. कौशांबी की मंझनपुर विधानसभा के कोरीपुर में उनका ससुराल है. पल्लवी इन दिनों अपने परिवार के साथ कानपुर में रहती हैं. समाजवादी पार्टी से अपना दल (कमेरावादी) का गठबंधन हुआ तो पल्लवी पटेल को सिराथू सीट से केशव प्रसाद मौर्य के सामने मैदान में उतारा गया. पहले से ही माना जा रहा था कि इस सीट पर उनकी राह आसान नहीं होने वाली है लेकिन वो पूरी मजबूती के साथ लड़ीं. यही नहीं उन्होंने बीजेपी के कद्दावार नेता कहे जाने वाले मौर्य को हरा भी दिया. पल्लवी पटेल अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय सोनेलाल पटेल की बड़ी बेटी हैं. पिता के मरने के बाद उनकी बहन अनुप्रिया पटेल के बीच पारिवारिक विवाद हुआ तो पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. पल्लवी पटेल ने अपनी मां के साथ मिलकर अपना दल (कमेरावादी) का गठन किया. जबकि अनुप्रिया पटेल ने अपने पति के साथ मिलकर अपना दल (S) के नाम से पार्टी बना ली. अनुप्रिया पटेल ने भाजपा से गठबंधन कर 2017 में ही पार्टी को सीट जिताने में कामयाबी हासिल की थी. इस बार के चुनाव में भी अनुप्रिया भाजपा के साथ तो पल्लवी पटेल ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. वहीं इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान तमाम उतार-चढ़ाव के दौर भी देखने को मिले. कई गांव में सपा और भाजपा के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं. इन सब को दरकिनार कर आखिरकार पल्लवी पटेल ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को करारी शिकस्त दी. .
UP Chunav: सिराथू सीट पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा की पल्लवी पटेल सहित कुल अट्ठारह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे. कौशांबी. यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कौशांबी की हॉट सीट मानी जाने वाली सिराथू विधानसभा में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला. इस सीट पर भाजपा को बड़ा झटका लगा है. जहां यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हार का सामना करना पड़ा है. सपा की पल्लवी पटेल ने इस सीट पर सात हज़ार तीन सौ सैंतीस वोट से जीत दर्ज की है. पल्लवी को एक लाख पाँच हज़ार पाँच सौ उनसठ वोट मिले है. जबकि बीजेपी के केशव मौर्य को हार मिली है. सिराथू सीट पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा की पल्लवी पटेल सहित कुल अट्ठारह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे. बता दें कि पल्लवी पटेल अपना दल की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. कौशांबी की मंझनपुर विधानसभा के कोरीपुर में उनका ससुराल है. पल्लवी इन दिनों अपने परिवार के साथ कानपुर में रहती हैं. समाजवादी पार्टी से अपना दल का गठबंधन हुआ तो पल्लवी पटेल को सिराथू सीट से केशव प्रसाद मौर्य के सामने मैदान में उतारा गया. पहले से ही माना जा रहा था कि इस सीट पर उनकी राह आसान नहीं होने वाली है लेकिन वो पूरी मजबूती के साथ लड़ीं. यही नहीं उन्होंने बीजेपी के कद्दावार नेता कहे जाने वाले मौर्य को हरा भी दिया. पल्लवी पटेल अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय सोनेलाल पटेल की बड़ी बेटी हैं. पिता के मरने के बाद उनकी बहन अनुप्रिया पटेल के बीच पारिवारिक विवाद हुआ तो पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. पल्लवी पटेल ने अपनी मां के साथ मिलकर अपना दल का गठन किया. जबकि अनुप्रिया पटेल ने अपने पति के साथ मिलकर अपना दल के नाम से पार्टी बना ली. अनुप्रिया पटेल ने भाजपा से गठबंधन कर दो हज़ार सत्रह में ही पार्टी को सीट जिताने में कामयाबी हासिल की थी. इस बार के चुनाव में भी अनुप्रिया भाजपा के साथ तो पल्लवी पटेल ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. वहीं इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान तमाम उतार-चढ़ाव के दौर भी देखने को मिले. कई गांव में सपा और भाजपा के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं. इन सब को दरकिनार कर आखिरकार पल्लवी पटेल ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को करारी शिकस्त दी. .
लखनऊ। अयोध्या में कुंभ मेले से पहले अगर राममंदिर निर्माण पर फैसला नहीं हुआ तो नागा संन्यासी अयोध्या के लिए कूच करेंगे। यह ऐलान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत नरेन्द्र गिरी ने किया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में होने वाली विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की धर्म संसद में देश भर से जुटे साधु संत राम मंदिर के निर्माण पर विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी और एक फरवरी को होने वाली विहिप की धर्म संसद में नागा संन्यासियों के अयोध्या कूच की रणनीति भी तैयार हो जाएगी। महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अयोध्या विवाद के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ लगातार सम्पर्क में है। साथ ही सुलह समझौते से अयोध्या विवाद का हल निकलाने की कोशिश भी की जा रही है। महंत ने कहा कि भाजपा नेताओं को यह भ्रम है कि विकास के नाम पर देश की जनता ने उन्हें वोट दिया है। भाजपा को हिन्दुओं ने सिर्फ और सिर्फ राम मंदिर के नाम पर ही वोट दिया था। उन्होंने कहा कि भाजपा यदि राम मंदिर मुद्दे को उठा लेती है और निर्माण शुरू करा देती है तो देश में अगले पचास साल तक राज करेगी। लेकिन अगर मंदिर का निर्माण शुरू नहीं किया तो ये उसका आखिरी साल होगा। महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि सभी पक्षकारों के बीच सहमति न बनने पर दो ही रास्ते बचते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से या फिर संसद में कानून बनाकर मंदिर का निर्माण शुरू हो।
लखनऊ। अयोध्या में कुंभ मेले से पहले अगर राममंदिर निर्माण पर फैसला नहीं हुआ तो नागा संन्यासी अयोध्या के लिए कूच करेंगे। यह ऐलान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत नरेन्द्र गिरी ने किया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में होने वाली विश्व हिन्दू परिषद की धर्म संसद में देश भर से जुटे साधु संत राम मंदिर के निर्माण पर विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने कहा कि इकतीस जनवरी और एक फरवरी को होने वाली विहिप की धर्म संसद में नागा संन्यासियों के अयोध्या कूच की रणनीति भी तैयार हो जाएगी। महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अयोध्या विवाद के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ लगातार सम्पर्क में है। साथ ही सुलह समझौते से अयोध्या विवाद का हल निकलाने की कोशिश भी की जा रही है। महंत ने कहा कि भाजपा नेताओं को यह भ्रम है कि विकास के नाम पर देश की जनता ने उन्हें वोट दिया है। भाजपा को हिन्दुओं ने सिर्फ और सिर्फ राम मंदिर के नाम पर ही वोट दिया था। उन्होंने कहा कि भाजपा यदि राम मंदिर मुद्दे को उठा लेती है और निर्माण शुरू करा देती है तो देश में अगले पचास साल तक राज करेगी। लेकिन अगर मंदिर का निर्माण शुरू नहीं किया तो ये उसका आखिरी साल होगा। महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि सभी पक्षकारों के बीच सहमति न बनने पर दो ही रास्ते बचते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से या फिर संसद में कानून बनाकर मंदिर का निर्माण शुरू हो।
आम तौर पर मध्यम वर्ग के लोग कम बजट वाली कारों तलाश में रहते हैं। हालांकि, यहां भी माइलेज का गणित अक्सर उन्हें दुविधा में डाल देता है। ऐेसे में लोग ज्यादा तर सोचते हैं कि वे पेट्रोल गाड़ियां ही लें, जो कि उन्हें सस्ती भी पड़ जाती है और फिर उसमें CNG किट लगवा लें, ताकि आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिल सके। ऐसे में जो लोग मानते हैं कि डीजल गाड़ियां माइलेज के मामले में उन पेट्रोल वेरिएंट से कमतर होती हैं, जिनमें सीएनजी का भी इस्तेमाल होता है, तो उनके लिए यह खबर काफी काम की है। हम अपनी रिपोर्ट में उन 5 डीजल सेडान गाड़ियों की बात कर रहे हैं जो माइलेज के पहलू कई कंपनियों की CNG कारों पर भारी पड़ती हैं। Maruti Suzuki Dzire (डीजल) इस कार में 1. 3 लीटर मल्टीजेट डीजल इंजन लगा है। 2017 मारुति सुजुकी भारत की सबसे बेस्ट माइलेज कार के रूप में उभर कर सामने आई है। यह इंजन 55kW की पावर और 190Nm का अतिरिक्त टॉर्क जनरेट करता है। इंजन मैनुअल ट्रांसमिशन और 5 स्पीड AGS ट्रांसमिशन से लैस है। कार में लगा 1. 2 लीटर K12 पेट्रोल इंजन 22kmpl का माइलेज देता है। इस कार में 1. 3 लीटर DDiS200 डीजल इंजन लगा है जो कि माइल्ड हाइब्रिड टेक्नोलॉजी की मदद से चलता है। भारत में यह दूसरी सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली डीजल सेडान कार है। कार में लगा वेरिएबल जियोमेट्री टर्बोचार्जर लगा है जिसकी मदद से यह 66kW की पावर जनरेट करता है। सियाज पेट्रोल इंजन में भी उपलब्ध है, जो कि ट्रांसमिशन के हिसाब से 19. 12kmpl और 20. 73kmpl का माइलेज देती है। अतिरिक्त वजन के बावजूद फोर्ड ने दावा किया है कि उसकी एस्पायर काफी अच्छा माइलेज देती है। इसमें लगा 1. 5 लीटर TDCi डीजल इंजन 100PS की पावर और 215Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन 5 स्पीड ट्रांसमिशन से लैस है। भारत में सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली डीजल सेडान की सूची में यह चौथे स्थान पर आती है। होंडा ने इसमें 1. 5 लीटर i-DTEC डीजल इंजन दिया है। यह इंजन 100PS की पावर और 200Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन 5 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से लैस है। अप्रैल 2017 में लॉन्च होने के बाद इसके माइलेट में काफी सुधार आया है जिसकी वजह से यह भारत में सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली डीजल सेडान में पांचवे नंबर पर आती है। इसमें 1. 2 लीटर U2 CRDi डीजल इंजन दिया गया है। यह इंजन 79PS की पावर देता है। इंजन 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन से लैस है।
आम तौर पर मध्यम वर्ग के लोग कम बजट वाली कारों तलाश में रहते हैं। हालांकि, यहां भी माइलेज का गणित अक्सर उन्हें दुविधा में डाल देता है। ऐेसे में लोग ज्यादा तर सोचते हैं कि वे पेट्रोल गाड़ियां ही लें, जो कि उन्हें सस्ती भी पड़ जाती है और फिर उसमें CNG किट लगवा लें, ताकि आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिल सके। ऐसे में जो लोग मानते हैं कि डीजल गाड़ियां माइलेज के मामले में उन पेट्रोल वेरिएंट से कमतर होती हैं, जिनमें सीएनजी का भी इस्तेमाल होता है, तो उनके लिए यह खबर काफी काम की है। हम अपनी रिपोर्ट में उन पाँच डीजल सेडान गाड़ियों की बात कर रहे हैं जो माइलेज के पहलू कई कंपनियों की CNG कारों पर भारी पड़ती हैं। Maruti Suzuki Dzire इस कार में एक. तीन लीटरटर मल्टीजेट डीजल इंजन लगा है। दो हज़ार सत्रह मारुति सुजुकी भारत की सबसे बेस्ट माइलेज कार के रूप में उभर कर सामने आई है। यह इंजन पचपन किलोवाट की पावर और एक सौ नब्बेNm का अतिरिक्त टॉर्क जनरेट करता है। इंजन मैनुअल ट्रांसमिशन और पाँच स्पीड AGS ट्रांसमिशन से लैस है। कार में लगा एक. दो लीटरटर Kबारह पेट्रोल इंजन बाईसkmpl का माइलेज देता है। इस कार में एक. तीन लीटरटर DDiSदो सौ डीजल इंजन लगा है जो कि माइल्ड हाइब्रिड टेक्नोलॉजी की मदद से चलता है। भारत में यह दूसरी सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली डीजल सेडान कार है। कार में लगा वेरिएबल जियोमेट्री टर्बोचार्जर लगा है जिसकी मदद से यह छयासठ किलोवाट की पावर जनरेट करता है। सियाज पेट्रोल इंजन में भी उपलब्ध है, जो कि ट्रांसमिशन के हिसाब से उन्नीस. बारहkmpl और बीस. तिहत्तरkmpl का माइलेज देती है। अतिरिक्त वजन के बावजूद फोर्ड ने दावा किया है कि उसकी एस्पायर काफी अच्छा माइलेज देती है। इसमें लगा एक. पाँच लीटरटर TDCi डीजल इंजन एक सौPS की पावर और दो सौ पंद्रहNm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन पाँच स्पीड ट्रांसमिशन से लैस है। भारत में सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली डीजल सेडान की सूची में यह चौथे स्थान पर आती है। होंडा ने इसमें एक. पाँच लीटरटर i-DTEC डीजल इंजन दिया है। यह इंजन एक सौPS की पावर और दो सौNm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन पाँच स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से लैस है। अप्रैल दो हज़ार सत्रह में लॉन्च होने के बाद इसके माइलेट में काफी सुधार आया है जिसकी वजह से यह भारत में सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली डीजल सेडान में पांचवे नंबर पर आती है। इसमें एक. दो लीटरटर Uदो CRDi डीजल इंजन दिया गया है। यह इंजन उन्यासीPS की पावर देता है। इंजन पाँच स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन से लैस है।
GSY vs JER T20 Series, 2022 मैच डिटेल्सः GSY vs JER के बीच टी-20 श्रृंखला का पहला मैच 20 मई को College Field, St Peter Port, Guernsey में खेला जाएगा। यह मैच 08:30 PM(IST) बजे शुरू होगा इस मैच का सीधा प्रसारण व अपडेट Fancode app और cricketaddictor. com पर उपलब्ध रहेगा। GSY vs JER T20 Series, 2022 मैच प्रीव्यूः दूसरी ओर JER टीम ने अपने पिछले 5 मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज की है JER टीम ने अपना पिछला मुकाबला डेनमार्क के खिलाफ ICC Men's T20 World Cup Europe Region Qualifier 2021 के दौरान खेला था जिसमें उसने 4 विकेट से जीत दर्ज की थी दोनों टीमें इस पहले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बनाने के इरादे से मैदान में उतरेंगे अगर दोनों टीमें अपनी क्षमता अनुसार प्रदर्शन करती हैं तो एक अच्छा मुकाबला देखने को मिल सकता है। GSY vs JER T20 Series, 2022 मौसम रिपोर्टः आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे परंतु बारिश होने की संभावना नहीं है। तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। GSY vs JER T20 Series, 2022 पिच रिपोर्टः यह पिच गेंदबाजों अनुकूल है शुरुआत में इस पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद प्राप्त होती है। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना इस पिच पर सही निर्णय रहेगा। पहली पारी का औसत स्कोरः पहली पारी में बल्लेबाजी करना थोड़ा मुश्किल नजर आया है यहां पर पहली पारी का औसत स्कोर 113 रन है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः दूसरी पारी में बल्लेबाजी थोड़ी आसान नजर आई है। इसीलिए यहां पर लक्ष्य का पीछा करते हुए 60 प्रतिशत मुकाबले जीते गए हैं। संभावित एकादश GSY: संभावित एकादश JER: चार्ल्स पेर्चर्ड (कप्तान), डेनियल बिरेल, डोम ब्लैम्पिड, चार्ली ब्रेनन, हैरिसन कार्लियन, जेक डनफोर्ड, निक ग्रीनवुड, जोंटी जेनर, इलियट माइल्स, राइस पामर, जूलियस सुमेरॉयर, आसा ट्राइब (विकेटकीपर) GSY vs JER T20 Series, 2022 ड्रीम टीम टॉप पिक्सः मैथ्यू स्टोक्स; टीम के सबसे प्रमुख ऑलराउंडर है इन्होंने पिछले टी-20 श्रृंखला में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए 84 रन बनाए थे और 4 विकेट लिए थे इस मैच में यह ड्रीम टीम में कप्तान के तौर पर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। जोंटी जेनर; JER टीम के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं इन्होंने अपने पिछले मैच में 66 गेंदों में 96 रन की बेहतरीन पारी खेली थी यह अभी तक 23 टी20 मैचों में 530 रन बना चुके हैं इस मैच में भी यह बल्ले से अच्छा योगदान कर सकते हैं। हैरिसन कार्लियन; JER टीम के प्रमुख गेंदबाजों में से एक हैं इन्होंने अपने पिछले मुकाबले में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 2 विकेट लिए थे इस मैच में भी यह गेंदबाजी से ड्रीम टीम में अच्छे पॉइंट दिला सकते हैं। चार्ल्स पेर्चर्ड; यह काफी अनुभवी गेंदबाज है अभी तक अपने T20 करियर में 30 विकेट ले चुके हैं इस मैच में भी यह ड्रीम टीम में मुख्य गेंदबाज की भूमिका निभाएंगे। इसाक डैमरेल; यह काफी प्रतिभाशाली विकेटकीपर बल्लेबाज है इस मैच में यह बल्ले के साथ-साथ विकेटकीपिंग से भी ड्रीम टीम में अच्छे पॉइंट दिला सकते हैं इन्होंने अपने पिछले मुकाबले में 38 रन की शानदार पारी खेली थी इस मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। GSY vs JER T20 Series, 2022 कप्तान/उपकप्तान विकल्पः ड्रीम 11 टीम 1: ड्रीम 11 टीम 2: GSY vs JER T20 Series, 2022 विशेषज्ञ सलाहः इस मैच में JER टीम का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आता है अगर वह पहले बल्लेबाजी करने उतरी है तो बड़ा स्कोर बन सकता है ऐसे में एक अतिरिक्त बल्लेबाज का ड्रीम टीम में होना सही निर्णय रहेगा वही अगर पहले गेंदबाजी करती है तो विपक्षी टीम के ऑल आउट होने की संभावना ज्यादा है। GSY vs JER T20 Series, 2022 संभावित विजेताः JER के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। वह इस मैच में ज्यादा संतुलित और मजबूत टीम नजर आ रही है।
GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस मैच डिटेल्सः GSY vs JER के बीच टी-बीस श्रृंखला का पहला मैच बीस मई को College Field, St Peter Port, Guernsey में खेला जाएगा। यह मैच आठ:तीस PM बजे शुरू होगा इस मैच का सीधा प्रसारण व अपडेट Fancode app और cricketaddictor. com पर उपलब्ध रहेगा। GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस मैच प्रीव्यूः दूसरी ओर JER टीम ने अपने पिछले पाँच मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज की है JER टीम ने अपना पिछला मुकाबला डेनमार्क के खिलाफ ICC Men's Tबीस World Cup Europe Region Qualifier दो हज़ार इक्कीस के दौरान खेला था जिसमें उसने चार विकेट से जीत दर्ज की थी दोनों टीमें इस पहले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रृंखला में एक-शून्य की बढ़त बनाने के इरादे से मैदान में उतरेंगे अगर दोनों टीमें अपनी क्षमता अनुसार प्रदर्शन करती हैं तो एक अच्छा मुकाबला देखने को मिल सकता है। GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस मौसम रिपोर्टः आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे परंतु बारिश होने की संभावना नहीं है। तापमान चौदह डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस पिच रिपोर्टः यह पिच गेंदबाजों अनुकूल है शुरुआत में इस पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद प्राप्त होती है। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना इस पिच पर सही निर्णय रहेगा। पहली पारी का औसत स्कोरः पहली पारी में बल्लेबाजी करना थोड़ा मुश्किल नजर आया है यहां पर पहली पारी का औसत स्कोर एक सौ तेरह रन है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः दूसरी पारी में बल्लेबाजी थोड़ी आसान नजर आई है। इसीलिए यहां पर लक्ष्य का पीछा करते हुए साठ प्रतिशत मुकाबले जीते गए हैं। संभावित एकादश GSY: संभावित एकादश JER: चार्ल्स पेर्चर्ड , डेनियल बिरेल, डोम ब्लैम्पिड, चार्ली ब्रेनन, हैरिसन कार्लियन, जेक डनफोर्ड, निक ग्रीनवुड, जोंटी जेनर, इलियट माइल्स, राइस पामर, जूलियस सुमेरॉयर, आसा ट्राइब GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस ड्रीम टीम टॉप पिक्सः मैथ्यू स्टोक्स; टीम के सबसे प्रमुख ऑलराउंडर है इन्होंने पिछले टी-बीस श्रृंखला में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए चौरासी रन बनाए थे और चार विकेट लिए थे इस मैच में यह ड्रीम टीम में कप्तान के तौर पर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। जोंटी जेनर; JER टीम के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं इन्होंने अपने पिछले मैच में छयासठ गेंदों में छियानवे रन की बेहतरीन पारी खेली थी यह अभी तक तेईस टीबीस मैचों में पाँच सौ तीस रन बना चुके हैं इस मैच में भी यह बल्ले से अच्छा योगदान कर सकते हैं। हैरिसन कार्लियन; JER टीम के प्रमुख गेंदबाजों में से एक हैं इन्होंने अपने पिछले मुकाबले में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए दो विकेट लिए थे इस मैच में भी यह गेंदबाजी से ड्रीम टीम में अच्छे पॉइंट दिला सकते हैं। चार्ल्स पेर्चर्ड; यह काफी अनुभवी गेंदबाज है अभी तक अपने Tबीस करियर में तीस विकेट ले चुके हैं इस मैच में भी यह ड्रीम टीम में मुख्य गेंदबाज की भूमिका निभाएंगे। इसाक डैमरेल; यह काफी प्रतिभाशाली विकेटकीपर बल्लेबाज है इस मैच में यह बल्ले के साथ-साथ विकेटकीपिंग से भी ड्रीम टीम में अच्छे पॉइंट दिला सकते हैं इन्होंने अपने पिछले मुकाबले में अड़तीस रन की शानदार पारी खेली थी इस मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस कप्तान/उपकप्तान विकल्पः ड्रीम ग्यारह टीम एक: ड्रीम ग्यारह टीम दो: GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस विशेषज्ञ सलाहः इस मैच में JER टीम का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आता है अगर वह पहले बल्लेबाजी करने उतरी है तो बड़ा स्कोर बन सकता है ऐसे में एक अतिरिक्त बल्लेबाज का ड्रीम टीम में होना सही निर्णय रहेगा वही अगर पहले गेंदबाजी करती है तो विपक्षी टीम के ऑल आउट होने की संभावना ज्यादा है। GSY vs JER Tबीस Series, दो हज़ार बाईस संभावित विजेताः JER के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। वह इस मैच में ज्यादा संतुलित और मजबूत टीम नजर आ रही है।
इस नुस्ख़े को बनाने को बनाने के लिए आपको एक चम्मच दूध की मलाई,2-3 बूंद बादाम का तेल, आधा चम्मच वैसलीन लेना है. इस सब चीज़ों को अच्छे से मिक्स कर लें. इस पेस्ट को अपनी आंख के पास काले घेरे पर लगायें और मसाज़ करें. आप जब इस पेस्ट से आँखों के काले घेरे पर लगायेंगे तो आप देखेंगे कि ये पेस्ट आपकी त्वचा में चला जायेगा. इस पेस्ट को आप अपनी पूरी आंख पर लगा सकते हैं लेकिन ध्यान रहे आंख के अंदर न जाए.
इस नुस्ख़े को बनाने को बनाने के लिए आपको एक चम्मच दूध की मलाई,दो-तीन बूंद बादाम का तेल, आधा चम्मच वैसलीन लेना है. इस सब चीज़ों को अच्छे से मिक्स कर लें. इस पेस्ट को अपनी आंख के पास काले घेरे पर लगायें और मसाज़ करें. आप जब इस पेस्ट से आँखों के काले घेरे पर लगायेंगे तो आप देखेंगे कि ये पेस्ट आपकी त्वचा में चला जायेगा. इस पेस्ट को आप अपनी पूरी आंख पर लगा सकते हैं लेकिन ध्यान रहे आंख के अंदर न जाए.
धमपि प्रत्येकं त्रिविधम् । प्रसिद्धविषय्याधिक्यवर्णनेन तन्न्यूनत्ववर्णनेनानुभ योक्त्या चैवं रूपकं षड्विधम् । 'अयं हि' इत्यादिसार्ध श्लोके नाभेदरूपकाणि, 'अस्या मुखेन्दुना' इत्यादिसार्धश्लोकेन ताद्रूप्यरूपकाणि, आधिक्यन्यूनत्वानुभयोक्त्युद्देशक्रमप्रातिलोम्येनोदाहृतानि । ' येन दग्धा' इति विशेषणेन वर्णनीये राज्ञि प्रसिद्धशिवाभेदानुरञ्जनाच्छिवस्य पूर्वावस्थातो वर्णनीयराजभावावस्थायां न्यूनत्वाधिक्ययोरवर्णनाच्चानुभयाभेदरूपकमाद्यम् । तृतीयलोचनप्रहाणोक्त्या पूर्वावस्थातो न्यूनता प्रदर्शनान्न्यूनाभेदरूपकं द्वितीयम् । न्यूनत्ववर्णनमप्यभेददायिपादकत्वाच्चमत्कारि । विषमदृष्टित्वपरित्यागेन जगद्रक्षकत्वोक्त्या शिवस्य पूर्वावस्थातो वर्णनीयराजभावावस्थायामुत्कर्षविभावनाधिका भेदरूपकं तृतीयम् । एवमुत्तरेषु ताद्रूप्यरूपकोदाहरणेष्वपि क्रमेणानुभयन्यूनाधिकभावा उन्नेयाः । अनेनैव क्रमेणोदाहरणान्तराणि - चन्द्रज्योत्स्नाविशदपुलिने सैकस्मिन्छरवा वादद्यूतं चिरतरमभूत्सिद्धयूनोः कयोश्चित् । एको वक्ति प्रथमनिहतं कैटभं, कंसमन्यकर दिया जाता है । इस प्रकार सर्वप्रथम रूपक दो तरह का होता है - अभेदरूपक, तथा ताद्रूप्यरूपक । ये दोनों फिर तीन तीन तरह के होते हैं । कविपरंपरासिद्ध विषयी से विषय के आधिक्य वर्णन से, उसके न्यूनत्ववर्णन से, तथा अनुभयवर्णन से, इस प्रकार रूपक छः तरह का होता है । 'अयं हि ' इत्यादि डेढ़ श्लोक के द्वारा अभेदरूपक के तीनों भेद उदाहृत किये गये हैं । 'अस्या सुखेन्दुना' इत्यादि डेढ़ श्लोक के द्वारा ताद्रूप्यरूपक के तीनों भेदों के उदाहरण दिये गये हैं। इन उदाहरणों में प्रातिलोम्य (विपरीत क्रम ) से आधिक्य, न्यूनत्व तथा अनुभय उक्ति के उदाहरण दिये गये हैं, अर्थात् क्रम से पहले अनुभय उक्ति का, तदनन्तर न्यूनत्व उक्ति का, फिर आधिक्य उक्ति का उदाहरण है। 'अयं हि धूर्जटिः' इत्यादि श्लोकार्ध में 'येन दग्धाः" इस विशेषण के द्वारा वर्णनीय ( उपमेयभूत ) राजा में कविप्रसिद्ध शिव का अभेद स्थापित कर दिया गया है, ऐसा करने पर शिव की पूर्वावस्था (उपमानावस्था ) तथा वर्णनीय राजा बन जाने की अवस्था ( उपमेयावस्था ) में किसी न्यूनत्व या आधिक्य का वर्णन नहीं किया गया है, अतः यह अनुभय कोटि का अभेदरूपक है । दूसरे श्लोकाधं ( 'अयमास्ते विना आदि ) में शिव के तीसरे नेत्र की रहितता बताकर पहली अवस्था से इस उपमेयावस्था की न्यूनता बताई गई है, इसलिए यह न्यूनत्व उक्ति वाला अभेदरूपक है । यह न्यूनत्ववर्णन भी विषयी तथा विषय की अभिन्नता को दृढ करता है, अतः चमत्कारोत्पादक है। तीसरे श्लोकार्ध ( 'शम्भुविश्व' इत्यादि ) में शिव ने विषम दृष्टि छोड़ दी है तथा वे विश्व के रक्षक हैं इस उक्ति के द्वारा शिव की पूर्वावस्था से वर्णनीय राजा बन जाने की अवस्था में उत्कृष्टता बताई गई है, अतः यहाँ आधिक्य-उक्ति वाला अभेदरूपक है। इसी प्रकार बाकी तीन श्लोकार्यों में तादूप्यरूपक की अनुभय, न्यूनत्व तथा आधिक्य की उक्तियाँ क्रमशः देखी जा सकती हैं। इसी क्रम से और उदाहरण दिये जा रहे हैं । कोई कवि किसी राजा की प्रशंसा में उसे स्वयं भगवान् विष्णु का अवतार बताता कह रहा हैः - 'हे राजन्, सरयू नदी के चन्द्रमा की ज्योत्स्ना के समान श्वेत इस रेतीले तट पर किन्हीं दो युवक सिद्धों में बड़ी देर तक विवाद होता रहा। उनमें से एक कहता
धमपि प्रत्येकं त्रिविधम् । प्रसिद्धविषय्याधिक्यवर्णनेन तन्न्यूनत्ववर्णनेनानुभ योक्त्या चैवं रूपकं षड्विधम् । 'अयं हि' इत्यादिसार्ध श्लोके नाभेदरूपकाणि, 'अस्या मुखेन्दुना' इत्यादिसार्धश्लोकेन ताद्रूप्यरूपकाणि, आधिक्यन्यूनत्वानुभयोक्त्युद्देशक्रमप्रातिलोम्येनोदाहृतानि । ' येन दग्धा' इति विशेषणेन वर्णनीये राज्ञि प्रसिद्धशिवाभेदानुरञ्जनाच्छिवस्य पूर्वावस्थातो वर्णनीयराजभावावस्थायां न्यूनत्वाधिक्ययोरवर्णनाच्चानुभयाभेदरूपकमाद्यम् । तृतीयलोचनप्रहाणोक्त्या पूर्वावस्थातो न्यूनता प्रदर्शनान्न्यूनाभेदरूपकं द्वितीयम् । न्यूनत्ववर्णनमप्यभेददायिपादकत्वाच्चमत्कारि । विषमदृष्टित्वपरित्यागेन जगद्रक्षकत्वोक्त्या शिवस्य पूर्वावस्थातो वर्णनीयराजभावावस्थायामुत्कर्षविभावनाधिका भेदरूपकं तृतीयम् । एवमुत्तरेषु ताद्रूप्यरूपकोदाहरणेष्वपि क्रमेणानुभयन्यूनाधिकभावा उन्नेयाः । अनेनैव क्रमेणोदाहरणान्तराणि - चन्द्रज्योत्स्नाविशदपुलिने सैकस्मिन्छरवा वादद्यूतं चिरतरमभूत्सिद्धयूनोः कयोश्चित् । एको वक्ति प्रथमनिहतं कैटभं, कंसमन्यकर दिया जाता है । इस प्रकार सर्वप्रथम रूपक दो तरह का होता है - अभेदरूपक, तथा ताद्रूप्यरूपक । ये दोनों फिर तीन तीन तरह के होते हैं । कविपरंपरासिद्ध विषयी से विषय के आधिक्य वर्णन से, उसके न्यूनत्ववर्णन से, तथा अनुभयवर्णन से, इस प्रकार रूपक छः तरह का होता है । 'अयं हि ' इत्यादि डेढ़ श्लोक के द्वारा अभेदरूपक के तीनों भेद उदाहृत किये गये हैं । 'अस्या सुखेन्दुना' इत्यादि डेढ़ श्लोक के द्वारा ताद्रूप्यरूपक के तीनों भेदों के उदाहरण दिये गये हैं। इन उदाहरणों में प्रातिलोम्य से आधिक्य, न्यूनत्व तथा अनुभय उक्ति के उदाहरण दिये गये हैं, अर्थात् क्रम से पहले अनुभय उक्ति का, तदनन्तर न्यूनत्व उक्ति का, फिर आधिक्य उक्ति का उदाहरण है। 'अयं हि धूर्जटिः' इत्यादि श्लोकार्ध में 'येन दग्धाः" इस विशेषण के द्वारा वर्णनीय राजा में कविप्रसिद्ध शिव का अभेद स्थापित कर दिया गया है, ऐसा करने पर शिव की पूर्वावस्था तथा वर्णनीय राजा बन जाने की अवस्था में किसी न्यूनत्व या आधिक्य का वर्णन नहीं किया गया है, अतः यह अनुभय कोटि का अभेदरूपक है । दूसरे श्लोकाधं में शिव के तीसरे नेत्र की रहितता बताकर पहली अवस्था से इस उपमेयावस्था की न्यूनता बताई गई है, इसलिए यह न्यूनत्व उक्ति वाला अभेदरूपक है । यह न्यूनत्ववर्णन भी विषयी तथा विषय की अभिन्नता को दृढ करता है, अतः चमत्कारोत्पादक है। तीसरे श्लोकार्ध में शिव ने विषम दृष्टि छोड़ दी है तथा वे विश्व के रक्षक हैं इस उक्ति के द्वारा शिव की पूर्वावस्था से वर्णनीय राजा बन जाने की अवस्था में उत्कृष्टता बताई गई है, अतः यहाँ आधिक्य-उक्ति वाला अभेदरूपक है। इसी प्रकार बाकी तीन श्लोकार्यों में तादूप्यरूपक की अनुभय, न्यूनत्व तथा आधिक्य की उक्तियाँ क्रमशः देखी जा सकती हैं। इसी क्रम से और उदाहरण दिये जा रहे हैं । कोई कवि किसी राजा की प्रशंसा में उसे स्वयं भगवान् विष्णु का अवतार बताता कह रहा हैः - 'हे राजन्, सरयू नदी के चन्द्रमा की ज्योत्स्ना के समान श्वेत इस रेतीले तट पर किन्हीं दो युवक सिद्धों में बड़ी देर तक विवाद होता रहा। उनमें से एक कहता
जी हाँ आपको सुनने में जरूर थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन क्या आप जानते है इंदौर की एक 9 साल की बालिका का चयन अंडर 19 क्रिकेट टीम में हो गया है. जहाँ साथ की सहेलिया अभी खिलोने से खेल रही है वही इंदौर की अनादि इंदौर संभाग की अंडर-19 बालिका टीम की तरफ से खेलेगी. हाल ही में चौथी क्लास की इस हुनरमंद बच्ची का इंटरव्यू लिया गया जिसमे सबसे पहला सवाल ही यही था कि क्रिकेट में आपने दिलचस्पी कैसे दिखाई. तो अनादि ने बड़ा ही खूबसूरत जबाब दिया. अनादि कहती है कि जब में पांच साल की थी तब से ही क्रिकेट खेल रही हूँ. जब मोहल्ले के लड़के गली में क्रिकेट खेलते थे तो मेरा भी मन करता था. लेकिन वे अपने साथ मुझे नहीं खिलाते थे. तब में बड़े भाई के साथ ही क्रिकेट खेलती थी. जब थोड़ा सिख गयी तो पापा ने मुझे क्रिकेट सिखने के लिए अकादमी में भर्ती करा दिया. साथ ही जब उनसे यह पूछा गया कि उम्र में अपने से बड़ी लड़कियों के साथ क्रिकेट खेलने में आपको परेशानी नहीं होती. तो अनादि का कहना था कि मेरी सभी सह खिलाड़ी और कोच मेरा पूरा ध्यान रखते है सभी खूब सहयोग करते है.
जी हाँ आपको सुनने में जरूर थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन क्या आप जानते है इंदौर की एक नौ साल की बालिका का चयन अंडर उन्नीस क्रिकेट टीम में हो गया है. जहाँ साथ की सहेलिया अभी खिलोने से खेल रही है वही इंदौर की अनादि इंदौर संभाग की अंडर-उन्नीस बालिका टीम की तरफ से खेलेगी. हाल ही में चौथी क्लास की इस हुनरमंद बच्ची का इंटरव्यू लिया गया जिसमे सबसे पहला सवाल ही यही था कि क्रिकेट में आपने दिलचस्पी कैसे दिखाई. तो अनादि ने बड़ा ही खूबसूरत जबाब दिया. अनादि कहती है कि जब में पांच साल की थी तब से ही क्रिकेट खेल रही हूँ. जब मोहल्ले के लड़के गली में क्रिकेट खेलते थे तो मेरा भी मन करता था. लेकिन वे अपने साथ मुझे नहीं खिलाते थे. तब में बड़े भाई के साथ ही क्रिकेट खेलती थी. जब थोड़ा सिख गयी तो पापा ने मुझे क्रिकेट सिखने के लिए अकादमी में भर्ती करा दिया. साथ ही जब उनसे यह पूछा गया कि उम्र में अपने से बड़ी लड़कियों के साथ क्रिकेट खेलने में आपको परेशानी नहीं होती. तो अनादि का कहना था कि मेरी सभी सह खिलाड़ी और कोच मेरा पूरा ध्यान रखते है सभी खूब सहयोग करते है.
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आगामी मूवी 'रामसेतु' को लेकर चर्चा में हैं। इस मूवी में अक्षय कुमार के साथ अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडीज और नुसरत भरुचा भी मुख्य भूमिका में नजर आयेंगी। मूवी 'रामसेतु' की शूटिंग आज से शुरू हो गई है। मूवी में अक्षय कुमार एक पुरातत्वविद् की भूमिका में होंगे। मूवी 'रामसेतु' में अक्षय का किरदार कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पेशेवर पुरातत्वविदों से प्रेरित है। मूवी में जैकलीन और नुसरत का किरदार भी आत्मनिर्भर महिला का होगा, लेकिन मूवी में उनका रोल क्या होगा, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार हैं। मूवी 'रामसेतु' अरुणा भाटिया, लाइका प्रोडक्शंस और विक्रम मल्होत्रा द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित एवं अमेजन प्राइम वीडियो द्वारा सह निर्मित होगी। यह पहला मौका है, जब एक ओटीटी प्लेटफॉर्म बतौर निर्माता किसी मूवी से जुड़ा है। अमेजन ने इस मूवी के साथ भारत में मूवी निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। मूवी 'रामसेतु' पहले थियेटर में रिलीज होगी। इसके बाद मूवी को अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जायेगा। इस मूवी के निर्देशक अभिषेक शर्मा हैं।
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आगामी मूवी 'रामसेतु' को लेकर चर्चा में हैं। इस मूवी में अक्षय कुमार के साथ अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडीज और नुसरत भरुचा भी मुख्य भूमिका में नजर आयेंगी। मूवी 'रामसेतु' की शूटिंग आज से शुरू हो गई है। मूवी में अक्षय कुमार एक पुरातत्वविद् की भूमिका में होंगे। मूवी 'रामसेतु' में अक्षय का किरदार कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पेशेवर पुरातत्वविदों से प्रेरित है। मूवी में जैकलीन और नुसरत का किरदार भी आत्मनिर्भर महिला का होगा, लेकिन मूवी में उनका रोल क्या होगा, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार हैं। मूवी 'रामसेतु' अरुणा भाटिया, लाइका प्रोडक्शंस और विक्रम मल्होत्रा द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित एवं अमेजन प्राइम वीडियो द्वारा सह निर्मित होगी। यह पहला मौका है, जब एक ओटीटी प्लेटफॉर्म बतौर निर्माता किसी मूवी से जुड़ा है। अमेजन ने इस मूवी के साथ भारत में मूवी निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। मूवी 'रामसेतु' पहले थियेटर में रिलीज होगी। इसके बाद मूवी को अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जायेगा। इस मूवी के निर्देशक अभिषेक शर्मा हैं।