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गन्दी भाषा बोलने के कारण अपने लोगों से भी खुमुकम संजीता चानू की दुश्मनी होने की संभावना है। इसलिये खुमुकम संजीता चानू को अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों के प्रति जिनसे खुमुकम संजीता चानू की घनिष्टता है। नहीं तो गलतफहमी हो जायेगी। पैसे रूपये की हानि होने की संभावना है। अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ खुमुकम संजीता चानू के निर्वाह में मुश्किलें पेश आयेंगी। इस अवधि में कोई नये उघम न शुरू करें। इसी माह में खुमुकम संजीता चानू के व्याधिग्रस्त होने की भी संभावना है। आत्मविश्वास की कमी खुमुकम संजीता चानू में स्पष्ट परिलक्षित होगी। यात्राओं का कोई व्यवहारिक अर्थ नहीं निकलेगा। साधारण तौर पर यह समय खुमुकम संजीता चानू के लिये अच्छा नहीं है क्योंकि आत्मीय जन भी काफीदूर हो जायेंगे।
उच्च पदस्थ लोगों से खुमुकम संजीता चानू सम्मान प्राप्त करेंगे और उनके कृपा भाजन रहेंगे। माता पिता और गुरूजनों से संबंध अति मधुर रहेंगे। इस अवधि के दौरान खुमुकम संजीता चानू सुदूर प्रदेशों की यात्रा करेंगे। पारिवारिक जीवन खुमुकम संजीता चानू के लिये सुखद एवम् अनुकूल रहेगा। खुमुकम संजीता चानू के थोड़े प्रयत्न करने पर भी खुमुकम संजीता चानू की आमदनी बढ जायेगी। इस अवधि के दौरान विपरीत परिस्थितियों से सही तौर पर निपटने की खुमुकम संजीता चानू की क्षमता का विकास होगा। अगर खुमुकम संजीता चानू की पदोन्नति होने ही वाली है तो जैसी चाहेंगे वैसी ही होगी। खुमुकम संजीता चानू का दिमाग धार्मिक क्रियाकलापों एवम् जीवन संबंधी उच्च दर्शन की ओर आकृष्ट रहेगा। हर लिहाज से यह समय अच्छा है।
इस अवधि में मिले जुले फल मिलेंगे। लम्बी यात्राएं सफल नहीं होंगी न सफलदायक ही सिद्ध होगी। उच्च पद प्रतिष्ठा प्राप्त लोगों से भेंट होगी और उनकी कृपा रहेगी। माता पिता बीमार रह सकते हैं। धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे। साख अच्छी रहने से काम भी खूब मिलेगा। रूपये पैसे के लिहाज से भी यह समय अच्छा है।
यह वह समय है जब खुमुकम संजीता चानू की योजनाएं सफलीभूत होंगी। अपनी सृजनात्मक बुद्धि के कारण खुमुकम संजीता चानू सफल होंगे। प्रणय एवम् प्रेम संबंधों के लिहाज से भी यह अच्छा समय है। खुमुकम संजीता चानू की सारी जरूरतें पूर्ण करने के लिये मित्र तत्पर रहेंगे। खुमुकम संजीता चानू के लेखन की लोग सराहना करेंगे।
बड़े बूढों से सहयोग प्राप्त करेंगे। सुदूर स्थलों तक की गई लम्बी यात्राएं सफलदायक सिद्ध होंगी। आमदनी बढ़ेगी और आय के नये स्त्रोत प्राप्त होंगे। यद्यापि खर्चे भी बढेंगे लेकिन आमदनी से अधिक नहीं होंगे। सट्टे के द्वारा आय होने की भी संभावना है। इस समय का पूरा सदुपयोग करें।
इस अवधि के दौरान दुर्घटनायें मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। प्रयासों में असफलता ही हाथ लगेगी। खुमुकम संजीता चानू के भ्रम भयकारी मनोविकृति बन सकते हैं। खुमुकम संजीता चानू की साथी का बर्ताव खुमुकम संजीता चानू को असहनीय मालूम पड़ेगा। धन्धे / व्यापार में भी काम अच्छा नहीं चलेगा। कुछ न कुछ परेशानियां खुमुकम संजीता चानू को सदैव घेरे रहेंगी। स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण खुमुकम संजीता चानू सही प्रकार से अपने वचन नहीं निभा पायेंगे। गूढ विज्ञान की ओर खुमुकम संजीता चानू की रूचि जागृत होगी और कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवधि में खुमुकम संजीता चानू वैवाहिक सुख भोगेंगे। व्यापार या नौकरी इत्यादि के विकासशील होने की अच्छी संभावनाएं रहेंगी। बहु प्रतीक्षित यात्रा करेंगे। परिवार का वातावरण भी सौमनस्यपूर्ण रहेगा। इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। खुमुकम संजीता चानू निडर रहेंगे और शत्रुगण सामने आने की हिम्मत नहीं करेंगे। दर्शन व साहित्य में रूचि जागृत होगी। विद्वानों से सम्पर्क बढें़गे। खुमुकम संजीता चानू अत्यधिक सम्मानप्रिय व्यक्ति समझे जायेंगे और विख्यात होंगे।
इस अवधि में खुमुकम संजीता चानू की सारी इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति होगी। खुमुकम संजीता चानू नए उद्यम शुरू करेंगे। मित्रों और हितैषियों से खूब मदद मिलेगी। इस अवधि में व्यापार द्वारा खुमुकम संजीता चानू को अच्छा खासा लाभ होना चाहिए। निकट संबंधी के बारे में कोई अच्छी खबर मिल सकती है। सुदूर प्रदेशों के निवासियों से खुमुकम संजीता चानू के अच्छे संबंध कायम होंगे। भ्रमण उपयोगी रहेगा। प्रणय संबंधों के लिए भी यह समय अच्छा है। परिवारजनों का व्यवहार खुमुकम संजीता चानू के प्रति बहुत अच्छा रहेगा।
प्रभावशाली वाणी होने के कारण लोगों से खुमुकम संजीता चानू अपनी बात मनवा लेते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के खुमुकम संजीता चानू सम्पर्क में आयेंगे। खुमुकम संजीता चानू की ख्याति और प्रतिष्ठा सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी बुद्धिमत्ता के कारण खुमुकम संजीता चानू प्रचुर लाभ पायेंगे। अपने व्यवसाय में खुमुकम संजीता चानू अच्छा काम करेंगे। यात्रा से निश्चित लाभ प्राप्त करेंगे।
| गन्दी भाषा बोलने के कारण अपने लोगों से भी खुमुकम संजीता चानू की दुश्मनी होने की संभावना है। इसलिये खुमुकम संजीता चानू को अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों के प्रति जिनसे खुमुकम संजीता चानू की घनिष्टता है। नहीं तो गलतफहमी हो जायेगी। पैसे रूपये की हानि होने की संभावना है। अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ खुमुकम संजीता चानू के निर्वाह में मुश्किलें पेश आयेंगी। इस अवधि में कोई नये उघम न शुरू करें। इसी माह में खुमुकम संजीता चानू के व्याधिग्रस्त होने की भी संभावना है। आत्मविश्वास की कमी खुमुकम संजीता चानू में स्पष्ट परिलक्षित होगी। यात्राओं का कोई व्यवहारिक अर्थ नहीं निकलेगा। साधारण तौर पर यह समय खुमुकम संजीता चानू के लिये अच्छा नहीं है क्योंकि आत्मीय जन भी काफीदूर हो जायेंगे। उच्च पदस्थ लोगों से खुमुकम संजीता चानू सम्मान प्राप्त करेंगे और उनके कृपा भाजन रहेंगे। माता पिता और गुरूजनों से संबंध अति मधुर रहेंगे। इस अवधि के दौरान खुमुकम संजीता चानू सुदूर प्रदेशों की यात्रा करेंगे। पारिवारिक जीवन खुमुकम संजीता चानू के लिये सुखद एवम् अनुकूल रहेगा। खुमुकम संजीता चानू के थोड़े प्रयत्न करने पर भी खुमुकम संजीता चानू की आमदनी बढ जायेगी। इस अवधि के दौरान विपरीत परिस्थितियों से सही तौर पर निपटने की खुमुकम संजीता चानू की क्षमता का विकास होगा। अगर खुमुकम संजीता चानू की पदोन्नति होने ही वाली है तो जैसी चाहेंगे वैसी ही होगी। खुमुकम संजीता चानू का दिमाग धार्मिक क्रियाकलापों एवम् जीवन संबंधी उच्च दर्शन की ओर आकृष्ट रहेगा। हर लिहाज से यह समय अच्छा है। इस अवधि में मिले जुले फल मिलेंगे। लम्बी यात्राएं सफल नहीं होंगी न सफलदायक ही सिद्ध होगी। उच्च पद प्रतिष्ठा प्राप्त लोगों से भेंट होगी और उनकी कृपा रहेगी। माता पिता बीमार रह सकते हैं। धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे। साख अच्छी रहने से काम भी खूब मिलेगा। रूपये पैसे के लिहाज से भी यह समय अच्छा है। यह वह समय है जब खुमुकम संजीता चानू की योजनाएं सफलीभूत होंगी। अपनी सृजनात्मक बुद्धि के कारण खुमुकम संजीता चानू सफल होंगे। प्रणय एवम् प्रेम संबंधों के लिहाज से भी यह अच्छा समय है। खुमुकम संजीता चानू की सारी जरूरतें पूर्ण करने के लिये मित्र तत्पर रहेंगे। खुमुकम संजीता चानू के लेखन की लोग सराहना करेंगे। बड़े बूढों से सहयोग प्राप्त करेंगे। सुदूर स्थलों तक की गई लम्बी यात्राएं सफलदायक सिद्ध होंगी। आमदनी बढ़ेगी और आय के नये स्त्रोत प्राप्त होंगे। यद्यापि खर्चे भी बढेंगे लेकिन आमदनी से अधिक नहीं होंगे। सट्टे के द्वारा आय होने की भी संभावना है। इस समय का पूरा सदुपयोग करें। इस अवधि के दौरान दुर्घटनायें मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। प्रयासों में असफलता ही हाथ लगेगी। खुमुकम संजीता चानू के भ्रम भयकारी मनोविकृति बन सकते हैं। खुमुकम संजीता चानू की साथी का बर्ताव खुमुकम संजीता चानू को असहनीय मालूम पड़ेगा। धन्धे / व्यापार में भी काम अच्छा नहीं चलेगा। कुछ न कुछ परेशानियां खुमुकम संजीता चानू को सदैव घेरे रहेंगी। स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण खुमुकम संजीता चानू सही प्रकार से अपने वचन नहीं निभा पायेंगे। गूढ विज्ञान की ओर खुमुकम संजीता चानू की रूचि जागृत होगी और कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। इस अवधि में खुमुकम संजीता चानू वैवाहिक सुख भोगेंगे। व्यापार या नौकरी इत्यादि के विकासशील होने की अच्छी संभावनाएं रहेंगी। बहु प्रतीक्षित यात्रा करेंगे। परिवार का वातावरण भी सौमनस्यपूर्ण रहेगा। इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। खुमुकम संजीता चानू निडर रहेंगे और शत्रुगण सामने आने की हिम्मत नहीं करेंगे। दर्शन व साहित्य में रूचि जागृत होगी। विद्वानों से सम्पर्क बढें़गे। खुमुकम संजीता चानू अत्यधिक सम्मानप्रिय व्यक्ति समझे जायेंगे और विख्यात होंगे। इस अवधि में खुमुकम संजीता चानू की सारी इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति होगी। खुमुकम संजीता चानू नए उद्यम शुरू करेंगे। मित्रों और हितैषियों से खूब मदद मिलेगी। इस अवधि में व्यापार द्वारा खुमुकम संजीता चानू को अच्छा खासा लाभ होना चाहिए। निकट संबंधी के बारे में कोई अच्छी खबर मिल सकती है। सुदूर प्रदेशों के निवासियों से खुमुकम संजीता चानू के अच्छे संबंध कायम होंगे। भ्रमण उपयोगी रहेगा। प्रणय संबंधों के लिए भी यह समय अच्छा है। परिवारजनों का व्यवहार खुमुकम संजीता चानू के प्रति बहुत अच्छा रहेगा। प्रभावशाली वाणी होने के कारण लोगों से खुमुकम संजीता चानू अपनी बात मनवा लेते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के खुमुकम संजीता चानू सम्पर्क में आयेंगे। खुमुकम संजीता चानू की ख्याति और प्रतिष्ठा सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी बुद्धिमत्ता के कारण खुमुकम संजीता चानू प्रचुर लाभ पायेंगे। अपने व्यवसाय में खुमुकम संजीता चानू अच्छा काम करेंगे। यात्रा से निश्चित लाभ प्राप्त करेंगे। |
जयपुर - जिला कलक्टर श्री कृष्ण कुणाल ने जिले में डोडापोस्त का नशा करने वाले व्यसनियों का आव्हान किया है कि वे राज्य सरकार द्वारा Óनया सवेराÓ नामक कार्य योजना के तहत आयोजित किये जाने वाले नशा मुक्त शिविरों में भाग लेकर नशा मुक्त किये जाने के सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं।
जिला कलक्टर सोमवार को कलक्ट्रेट में राज्य सरकार की डोडा पोस्त व्यसनियों को नशा मुक्त करने हेतु आयोजित किये जाने वाले शिविरों की व्यवस्थाओं के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने जिला आबकारी अधिकारी शहर एवं ग्रामीण को निर्देशित किया कि वे जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में पंजीकृत एवं अपंजीकृत डोडापोस्त के व्यसनियों को नशा मुक्त करने हेतु आयोजित किये जाने वाले कैम्पो में आने के लिए प्रेरित करें ताकि ऐसे सभी व्यसनियों को नशा मुक्त किया जा सके।
उन्होंने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देशित किया कि डोडापोस्त व्यसनियों के लिए नशा मुक्त कैम्प आयोजित करने से पूर्व प्री-कैम्प आयोजित किये जायें ताकि ऐसे व्यसनियों को नशा मुक्त शिविरों में आने के लिए प्रेरित किया जा सके।
उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उप निदेशक को निर्देश दिए कि वे राज्य सरकार की 'नया सवेरा' कार्य योजना के तहत डोडापोस्त नशा मुक्त करने वाले व्यसनियों को नशा मुक्ति शिविरों में लाने और उन्हें नशा मुक्त करने हेतु प्रेरित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने इन अधिकारियों को डोडापोस्त व्यसनियों को विभाग की विभिन्न योजनाओं से जोडने एवं उनकी रूचि के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिलाकर समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के प्रयास करने के निर्देश दिए है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. ओ. पी. थाकन ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों डोडापोस्त व्यसनियों को नशा मुक्त करने हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शाहपुरा में 23 फरवरी 2015 को नशा मुक्त शिविर आयोजित किया जायेगा। इसी प्रकार बीडीएम चिकित्सालय कोटपूतली में 3 मार्च, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र विराटनगर में 11 मार्च, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगानेर में 13 फरवरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चाकस में 20 जनवरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फुलेरा में 28 जनवरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फागी में 15 फरवरी से नशा मुक्त कैम्प आयोजित किये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि शहर के राजकीय हरिबक्श कांवटिया अस्पताल में 19 मार्च, मनोचिकित्सालय सेठी कॉलोनी में 24 मार्च एवं एस. एम. एस. मेडिकल कॉलेज में 31 मार्च 2015 से नशा मुक्त शिविर आयोजित किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में मनोचिकित्सक सहित 4 चिकित्सक एवं 6 पैरा मेडिकल स्टाफ नियुक्त किया जायेगा तथा 30 से 35 व्यसनियोंको रखा जायेगा। शिविर में भोजन इत्यादि की निःशुल्क व्यवस्था भी की जायेगी।
डोडापोस्त नशा मुक्ति डी-एडिक्शन कैम्प आयोजित किये जाने के संबंध में जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है जिसमें जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को उपाध्यक्ष एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को नोडल अधिकारी, जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को एवं जिला आबकारी अधिकारियों को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री स्वरूप सिंह पवार, अतिरिक्त जिला कलक्टर चतुर्थ श्री कैलाश यादव सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
| जयपुर - जिला कलक्टर श्री कृष्ण कुणाल ने जिले में डोडापोस्त का नशा करने वाले व्यसनियों का आव्हान किया है कि वे राज्य सरकार द्वारा Óनया सवेराÓ नामक कार्य योजना के तहत आयोजित किये जाने वाले नशा मुक्त शिविरों में भाग लेकर नशा मुक्त किये जाने के सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं। जिला कलक्टर सोमवार को कलक्ट्रेट में राज्य सरकार की डोडा पोस्त व्यसनियों को नशा मुक्त करने हेतु आयोजित किये जाने वाले शिविरों की व्यवस्थाओं के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने जिला आबकारी अधिकारी शहर एवं ग्रामीण को निर्देशित किया कि वे जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में पंजीकृत एवं अपंजीकृत डोडापोस्त के व्यसनियों को नशा मुक्त करने हेतु आयोजित किये जाने वाले कैम्पो में आने के लिए प्रेरित करें ताकि ऐसे सभी व्यसनियों को नशा मुक्त किया जा सके। उन्होंने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देशित किया कि डोडापोस्त व्यसनियों के लिए नशा मुक्त कैम्प आयोजित करने से पूर्व प्री-कैम्प आयोजित किये जायें ताकि ऐसे व्यसनियों को नशा मुक्त शिविरों में आने के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उप निदेशक को निर्देश दिए कि वे राज्य सरकार की 'नया सवेरा' कार्य योजना के तहत डोडापोस्त नशा मुक्त करने वाले व्यसनियों को नशा मुक्ति शिविरों में लाने और उन्हें नशा मुक्त करने हेतु प्रेरित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने इन अधिकारियों को डोडापोस्त व्यसनियों को विभाग की विभिन्न योजनाओं से जोडने एवं उनकी रूचि के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिलाकर समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के प्रयास करने के निर्देश दिए है। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. ओ. पी. थाकन ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों डोडापोस्त व्यसनियों को नशा मुक्त करने हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शाहपुरा में तेईस फरवरी दो हज़ार पंद्रह को नशा मुक्त शिविर आयोजित किया जायेगा। इसी प्रकार बीडीएम चिकित्सालय कोटपूतली में तीन मार्च, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र विराटनगर में ग्यारह मार्च, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगानेर में तेरह फरवरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चाकस में बीस जनवरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फुलेरा में अट्ठाईस जनवरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फागी में पंद्रह फरवरी से नशा मुक्त कैम्प आयोजित किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि शहर के राजकीय हरिबक्श कांवटिया अस्पताल में उन्नीस मार्च, मनोचिकित्सालय सेठी कॉलोनी में चौबीस मार्च एवं एस. एम. एस. मेडिकल कॉलेज में इकतीस मार्च दो हज़ार पंद्रह से नशा मुक्त शिविर आयोजित किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में मनोचिकित्सक सहित चार चिकित्सक एवं छः पैरा मेडिकल स्टाफ नियुक्त किया जायेगा तथा तीस से पैंतीस व्यसनियोंको रखा जायेगा। शिविर में भोजन इत्यादि की निःशुल्क व्यवस्था भी की जायेगी। डोडापोस्त नशा मुक्ति डी-एडिक्शन कैम्प आयोजित किये जाने के संबंध में जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है जिसमें जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को उपाध्यक्ष एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को नोडल अधिकारी, जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को एवं जिला आबकारी अधिकारियों को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री स्वरूप सिंह पवार, अतिरिक्त जिला कलक्टर चतुर्थ श्री कैलाश यादव सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। |
UPSC CSE Final Result 2022 @upsc. gov. in: UPSC CSE Final Result 2022 @upsc. gov. in: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सर्विस एग्जाम (UPSC CSE 2022) का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है. इशिता किशोर ने CSE 2022 में टॉप किया है. दूसरे स्थान पर गरिमा लोहिया और तीसेर स्थान पर उमा हरति एन रहे. चौथा स्थान मयूर हजारिका और पांचवां गहना नव्या जेम्स ने हासिल किया. IAS परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार UPSC की आधिकारिक वेबसाइट www. upsc. gov. in पर फाइनल रिजल्ट चेक कर सकते हैं.
फाइनल रिजल्ट में कुल 933 कैंडिडेट्स नियुक्ति के लिए चयनित किए गए हैं. इनमें से 345 कैंडिडेट्स अनारक्षित, 99 EWS, 263 OBC, 154 SC तथा 72 ST कैटेगरी से हैं. 178 कैंडिडेट्स की रिज़र्व लिस्ट भी तैयार की गई है. IAS पदों पर चयन के लिए 180 कैंडिडेट्स शॉर्टलिस्ट हुए हैं.
इस वर्ष सिविल सर्विस परीक्षाओं में लड़कियों ने बाजी मारी है. टॉप 4 पोजिशंस पर लड़कियां काबिज़ हैं. टॉपर्स की पूरी लिस्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी रिजल्ट नोटिस में चेक कर सकते हैं.
परीक्षार्थियों के मार्क्स लगभग 15 दिन बाद जारी किए जाएंगे. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू 18 अप्रैल तक चले थे. इंटरव्यू राउंड की शुरुआत 30 जनवरी से हुई थी. मेन्स परीक्षा में सफल होने वाले लगभग 2,529 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2022 के तहत आईएएस, आईपीएस समेत सर्विसेज में 1011 पदों पर भर्ती निकाली थी.
| UPSC CSE Final Result दो हज़ार बाईस @upsc. gov. in: UPSC CSE Final Result दो हज़ार बाईस @upsc. gov. in: संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सर्विस एग्जाम का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है. इशिता किशोर ने CSE दो हज़ार बाईस में टॉप किया है. दूसरे स्थान पर गरिमा लोहिया और तीसेर स्थान पर उमा हरति एन रहे. चौथा स्थान मयूर हजारिका और पांचवां गहना नव्या जेम्स ने हासिल किया. IAS परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार UPSC की आधिकारिक वेबसाइट www. upsc. gov. in पर फाइनल रिजल्ट चेक कर सकते हैं. फाइनल रिजल्ट में कुल नौ सौ तैंतीस कैंडिडेट्स नियुक्ति के लिए चयनित किए गए हैं. इनमें से तीन सौ पैंतालीस कैंडिडेट्स अनारक्षित, निन्यानवे EWS, दो सौ तिरेसठ OBC, एक सौ चौवन SC तथा बहत्तर ST कैटेगरी से हैं. एक सौ अठहत्तर कैंडिडेट्स की रिज़र्व लिस्ट भी तैयार की गई है. IAS पदों पर चयन के लिए एक सौ अस्सी कैंडिडेट्स शॉर्टलिस्ट हुए हैं. इस वर्ष सिविल सर्विस परीक्षाओं में लड़कियों ने बाजी मारी है. टॉप चार पोजिशंस पर लड़कियां काबिज़ हैं. टॉपर्स की पूरी लिस्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी रिजल्ट नोटिस में चेक कर सकते हैं. परीक्षार्थियों के मार्क्स लगभग पंद्रह दिन बाद जारी किए जाएंगे. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू अट्ठारह अप्रैल तक चले थे. इंटरव्यू राउंड की शुरुआत तीस जनवरी से हुई थी. मेन्स परीक्षा में सफल होने वाले लगभग दो,पाँच सौ उनतीस उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा दो हज़ार बाईस के तहत आईएएस, आईपीएस समेत सर्विसेज में एक हज़ार ग्यारह पदों पर भर्ती निकाली थी. |
नगर पंचायत भोटा में अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई। इस मुहिम में नगर पंचायत प्रतिनिधियों, व्यापार मंडल के सदस्यों व पुलिस प्रशासन ने दुकानदारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अपना सामान सड़क व नालियों पर न सजाएं नहीं तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस बार पुलिस ने दुकानदारों को चेतावनी देकर छोड़ दिया, परंतु अगर फिर से दुकानदारों ने अपना सामान सड़क पर सजाया, तो दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सड़क पर रखे सामान को भी जब्त किया जाएगा।
यही नहीं दुकानदारों को मॉस्क लगाने की भी हिदायत दी गई। अधिकतर दुकानदारों ने मॉस्क नहीं लगाए हुए थे। वहीं नगर पंचायत के प्रतिनिधियों व व्यापार मंडल के सदस्यों ने कहा कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। इस अतिक्रमण मुहिम में व्यापार मंडल के प्रधान सन्नी शर्मा, राजेश कुमार, भोटा पुलिस कक्ष के प्रभारी सुरेश कुमार, हवलदार सुरजीत सिंह, नगर पंचायत भोटा की अध्यक्षा सपना सोनी, पार्षद, राजो देवी, वीना कुमारी, सुषमा, बलदेव धीमान, मनोनीत पार्षद दीप कुमार, विनोद कतना, पवन दत्याल आदि मौजूद रहे।
| नगर पंचायत भोटा में अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई। इस मुहिम में नगर पंचायत प्रतिनिधियों, व्यापार मंडल के सदस्यों व पुलिस प्रशासन ने दुकानदारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अपना सामान सड़क व नालियों पर न सजाएं नहीं तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस बार पुलिस ने दुकानदारों को चेतावनी देकर छोड़ दिया, परंतु अगर फिर से दुकानदारों ने अपना सामान सड़क पर सजाया, तो दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सड़क पर रखे सामान को भी जब्त किया जाएगा। यही नहीं दुकानदारों को मॉस्क लगाने की भी हिदायत दी गई। अधिकतर दुकानदारों ने मॉस्क नहीं लगाए हुए थे। वहीं नगर पंचायत के प्रतिनिधियों व व्यापार मंडल के सदस्यों ने कहा कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। इस अतिक्रमण मुहिम में व्यापार मंडल के प्रधान सन्नी शर्मा, राजेश कुमार, भोटा पुलिस कक्ष के प्रभारी सुरेश कुमार, हवलदार सुरजीत सिंह, नगर पंचायत भोटा की अध्यक्षा सपना सोनी, पार्षद, राजो देवी, वीना कुमारी, सुषमा, बलदेव धीमान, मनोनीत पार्षद दीप कुमार, विनोद कतना, पवन दत्याल आदि मौजूद रहे। |
UP 7th Phase Election 2022 Analysis इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा सीधे सीधे मुकाबला कर रही है। 7वें चरण के लिए 7 मार्च को मतदान होने वाला है। विधानसभा चुनाव के इस अंतिम चरण में पीएम मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है।
नई दिल्ली [अमिताभ तिवारी]। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का सातवां और आखिरी चरण 7 मार्च को होने वाला है। इस चरण में 9 जिलों की 54 सीटों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद होगा। इस चरण में आजमगढ़, मउ, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, मीरजापुर और सोनभद्र जिले की विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा।
इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी सीधे सीधे मुकाबला कर रही है। वहीं बहनजी की बहुजन समाज पार्टी ने भी देर से ही सही पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी भी अंतिम चरण के विधानसभा चुनाव में शामिल है। खुद पीएम यहां रुककर रोड शो और रैलियां करते हुए पार्टी की चुनावी तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर यहां चुनाव प्रचार किया है। प्रियंका और राहुल गांधी ने भी काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करके अपनी रैलियां की हैं।
यह सवाल तो आपके मन में जरूर उठ रहा होगा कि आखिर क्यों सभी दिग्गज नेता वाराणसी में डेरा जमाए हुए हैं। दरअसल कोई भी इस सीट से यहां पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज करने की भूल नहीं करना चाहता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए यह इलाका कमजोर कड़ी साबित हुआ था। पार्टी को यहां की 54 में से 33 विधानसभा सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। 2017 के इसी चरण में भाजपा का strike rate केवल 61 फीसदी रह गया था, जो मुस्लिम बाहुल्य वाले दूसरे चरण से भी कम था।
वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में मजबूत ही रही हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को यहां से 34 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं औसत से अधिक अनुसूचित जाति बाहुल्य वाले इस इलाके से बसपा को सामान्य लाभ ही हुआ था।
औसत के आधार पर 54 सीटों वाले इस इलाके में 12 फीसदी मुस्लिम और 24 फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी है। ब्राह्मण और ठाकुरों की आबादी 20 प्रतिशत है। 20 फीसदी आबादी कुर्मी, पटेल, निषाद, राजभर और बनिया है। यादवों की तादाद भी अच्छी खासी है। सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक आबादी मउ (19%), आजमगढ़ (16%) और वाराणसी (15%) में है। अनुसूचित जाति की सर्वाधिक आबादी सोनभद्र (42%), मीरजापुर (27%) और आजमगढ़ (26%) में है।
2017 में भाजपा ने अपना दल के साथ मिलकर 33 सीटों पर विजय हासिल की थी। सपा ने 11, बसपा ने 6 और ओपी राजभर की एसबीएसपी को 4 सीटों पर जीत मिली थी। उस समय एसबीएसपी एनडीए का हिस्सा थी लेकिन इस बार के चुनाव में यह समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा गठबंधन को 38%, बसपा को 26%, सपा को 22%, कांग्रेस 6% और अन्य को 8% वोट प्रतिशत मिला था।
इस बार भाजपा और उसके सहयोगियों तथा सपा गठबंधन इस चरण में महत्वपूर्ण किरदार निभा सकता है। अपना दल इस बार दो हिस्सों में चुनाव लड़ रहा है और इस पार्टी की कुर्मियों के बीच काफी अच्छी पैठ है। अनुप्रिया पटेल की मां समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं और वहीं वो खुद भाजपा के साथ हैं। ओपी राजभर की पार्टी एसबीएसपी इस बार भाजपा का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ रही है। वहीं संजय निषाद की निषाद पार्टी भाजपा के खेमे में है।
भाजपा 46 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं निषाद 5 और अपना दल (एस) ने 3 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। समाजवादी पार्टी 45 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसके सहयोगी एसबीएसपी 6 और अपना दल (के) 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
सातवें चरण के इस क्षेत्र में 30% सीटें ऐसी हैं जहां गठबंधन के सहयोगियों का सीधा प्रभाव है। वहीं इस चरण की 70% सीटें ऐसी हैं जहां सीधे सपा और भाजपा भिड़ रही हैं।
अब यह देखना रोचक होगा कि क्या अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद, उन सीटों पर जहां उनके नहीं बल्कि भाजपा के उम्मीदवार हैं को भाजपा के पक्ष में मतदान करवा सकेंगे। वहीं क्या राजभर और अनुप्रिया की मां कुर्मी और राजभर मतदाताओं को सपा के पक्ष में मतदान के लिए तैयार कर सकेंगे।
गैर यादव ओबीसी मतदाता यानी (एनवाई ओबीसी) मतदाता भी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 57% कुर्मी और 61% एनवाईओबीसी वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी अपने गठबंधन के जरिये भाजपा के इसी वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। SP ने ओबीसी जनगणना का पासा फेंका है। साथ ही यह भी आरोप लगाए हैं कि भाजपा आरक्षण को खत्म करने की कोशिशों में जुटी हुई है।
सपा की रणनीति है कि भाजपा के 30-35% फीसदी एनवाईओबीसी मतदाताओं को वो अपनी ओर खींच ले। यदि ऐसा हो जाता है तो भाजपा को 6-7 फीसदी वोट शेयर का नुकसान होगा और इसका सीधा फायदा सपा को होगा। 12-14 प्रतिशत का यह झुकाव पूर्वांचल का सारा समीकरण बदल सकता है।
Kurmi and NYOBC support for BJP from 2007-17 (Source: CSDS)
यदि इलाके के चुनाव को क्रिकेट के नजरिये से देखें तो यह कहा जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव अपनी अपनी टीम के कप्तान हैं। जबकि राजभर और अनुप्रिया की मां अखिलेश/समाजवादी पार्टी की उपकप्तान हैं। वहीं अनुप्रिया और संजय टीम योगी/भाजपा की उपकप्तान हैं।
इस चुनाव में इनका प्रदर्शन बहुत ज्यादा मायने रखता है। ये सभी इस चरण के किंगमेकर हैं। क्या ये अपनी अपनी जाति के निर्विवाद नेता हैं और इनका कद इतना बड़ा है कि ये भाजपा या सपा की नांव को पार लगा सकें।
भाजपा मोदी के जरिये अखिलेश के ओबीसी मुद्दे की हवा निकालना चाहती है। वहीं यह भी बता रही है कि उनकी पार्टी इस वर्ग को सत्ता के शीर्ष पदों पर बिठाने से पीछे नहीं हटती है। अब यह तो 10 मार्च को ही पता चलेगा कि मोदी फैक्टर से भाजपा को जीत मिलेगी या अखिलेश लखनऊ में वापसी करेंगे?
डिस्क्लेमरः अमिताभ तिवारी राजनीतिक टिप्पणीकार एवं रणनीतिज्ञ हैं। पूर्व में वे कॉरपोरेट एवं इनवेस्टमेंट बैंकर रह चुके हैं। ट्विटर पर ये @politicalbaaba नाम से सक्रिय हैं।
| UP सातth Phase Election दो हज़ार बाईस Analysis इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा सीधे सीधे मुकाबला कर रही है। सातवें चरण के लिए सात मार्च को मतदान होने वाला है। विधानसभा चुनाव के इस अंतिम चरण में पीएम मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है। नई दिल्ली [अमिताभ तिवारी]। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का सातवां और आखिरी चरण सात मार्च को होने वाला है। इस चरण में नौ जिलों की चौवन सीटों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद होगा। इस चरण में आजमगढ़, मउ, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, मीरजापुर और सोनभद्र जिले की विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी सीधे सीधे मुकाबला कर रही है। वहीं बहनजी की बहुजन समाज पार्टी ने भी देर से ही सही पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी भी अंतिम चरण के विधानसभा चुनाव में शामिल है। खुद पीएम यहां रुककर रोड शो और रैलियां करते हुए पार्टी की चुनावी तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर यहां चुनाव प्रचार किया है। प्रियंका और राहुल गांधी ने भी काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करके अपनी रैलियां की हैं। यह सवाल तो आपके मन में जरूर उठ रहा होगा कि आखिर क्यों सभी दिग्गज नेता वाराणसी में डेरा जमाए हुए हैं। दरअसल कोई भी इस सीट से यहां पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज करने की भूल नहीं करना चाहता है। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए यह इलाका कमजोर कड़ी साबित हुआ था। पार्टी को यहां की चौवन में से तैंतीस विधानसभा सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। दो हज़ार सत्रह के इसी चरण में भाजपा का strike rate केवल इकसठ फीसदी रह गया था, जो मुस्लिम बाहुल्य वाले दूसरे चरण से भी कम था। वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में मजबूत ही रही हैं। दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में सपा को यहां से चौंतीस सीटों पर जीत मिली थी, वहीं औसत से अधिक अनुसूचित जाति बाहुल्य वाले इस इलाके से बसपा को सामान्य लाभ ही हुआ था। औसत के आधार पर चौवन सीटों वाले इस इलाके में बारह फीसदी मुस्लिम और चौबीस फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी है। ब्राह्मण और ठाकुरों की आबादी बीस प्रतिशत है। बीस फीसदी आबादी कुर्मी, पटेल, निषाद, राजभर और बनिया है। यादवों की तादाद भी अच्छी खासी है। सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक आबादी मउ , आजमगढ़ और वाराणसी में है। अनुसूचित जाति की सर्वाधिक आबादी सोनभद्र , मीरजापुर और आजमगढ़ में है। दो हज़ार सत्रह में भाजपा ने अपना दल के साथ मिलकर तैंतीस सीटों पर विजय हासिल की थी। सपा ने ग्यारह, बसपा ने छः और ओपी राजभर की एसबीएसपी को चार सीटों पर जीत मिली थी। उस समय एसबीएसपी एनडीए का हिस्सा थी लेकिन इस बार के चुनाव में यह समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा गठबंधन को अड़तीस%, बसपा को छब्बीस%, सपा को बाईस%, कांग्रेस छः% और अन्य को आठ% वोट प्रतिशत मिला था। इस बार भाजपा और उसके सहयोगियों तथा सपा गठबंधन इस चरण में महत्वपूर्ण किरदार निभा सकता है। अपना दल इस बार दो हिस्सों में चुनाव लड़ रहा है और इस पार्टी की कुर्मियों के बीच काफी अच्छी पैठ है। अनुप्रिया पटेल की मां समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं और वहीं वो खुद भाजपा के साथ हैं। ओपी राजभर की पार्टी एसबीएसपी इस बार भाजपा का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ रही है। वहीं संजय निषाद की निषाद पार्टी भाजपा के खेमे में है। भाजपा छियालीस सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं निषाद पाँच और अपना दल ने तीन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। समाजवादी पार्टी पैंतालीस सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसके सहयोगी एसबीएसपी छः और अपना दल तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। सातवें चरण के इस क्षेत्र में तीस% सीटें ऐसी हैं जहां गठबंधन के सहयोगियों का सीधा प्रभाव है। वहीं इस चरण की सत्तर% सीटें ऐसी हैं जहां सीधे सपा और भाजपा भिड़ रही हैं। अब यह देखना रोचक होगा कि क्या अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद, उन सीटों पर जहां उनके नहीं बल्कि भाजपा के उम्मीदवार हैं को भाजपा के पक्ष में मतदान करवा सकेंगे। वहीं क्या राजभर और अनुप्रिया की मां कुर्मी और राजभर मतदाताओं को सपा के पक्ष में मतदान के लिए तैयार कर सकेंगे। गैर यादव ओबीसी मतदाता यानी मतदाता भी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्तावन% कुर्मी और इकसठ% एनवाईओबीसी वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी अपने गठबंधन के जरिये भाजपा के इसी वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। SP ने ओबीसी जनगणना का पासा फेंका है। साथ ही यह भी आरोप लगाए हैं कि भाजपा आरक्षण को खत्म करने की कोशिशों में जुटी हुई है। सपा की रणनीति है कि भाजपा के तीस-पैंतीस% फीसदी एनवाईओबीसी मतदाताओं को वो अपनी ओर खींच ले। यदि ऐसा हो जाता है तो भाजपा को छः-सात फीसदी वोट शेयर का नुकसान होगा और इसका सीधा फायदा सपा को होगा। बारह-चौदह प्रतिशत का यह झुकाव पूर्वांचल का सारा समीकरण बदल सकता है। Kurmi and NYOBC support for BJP from दो हज़ार सात-सत्रह यदि इलाके के चुनाव को क्रिकेट के नजरिये से देखें तो यह कहा जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव अपनी अपनी टीम के कप्तान हैं। जबकि राजभर और अनुप्रिया की मां अखिलेश/समाजवादी पार्टी की उपकप्तान हैं। वहीं अनुप्रिया और संजय टीम योगी/भाजपा की उपकप्तान हैं। इस चुनाव में इनका प्रदर्शन बहुत ज्यादा मायने रखता है। ये सभी इस चरण के किंगमेकर हैं। क्या ये अपनी अपनी जाति के निर्विवाद नेता हैं और इनका कद इतना बड़ा है कि ये भाजपा या सपा की नांव को पार लगा सकें। भाजपा मोदी के जरिये अखिलेश के ओबीसी मुद्दे की हवा निकालना चाहती है। वहीं यह भी बता रही है कि उनकी पार्टी इस वर्ग को सत्ता के शीर्ष पदों पर बिठाने से पीछे नहीं हटती है। अब यह तो दस मार्च को ही पता चलेगा कि मोदी फैक्टर से भाजपा को जीत मिलेगी या अखिलेश लखनऊ में वापसी करेंगे? डिस्क्लेमरः अमिताभ तिवारी राजनीतिक टिप्पणीकार एवं रणनीतिज्ञ हैं। पूर्व में वे कॉरपोरेट एवं इनवेस्टमेंट बैंकर रह चुके हैं। ट्विटर पर ये @politicalbaaba नाम से सक्रिय हैं। |
सबकुछ बताने के बादअब तुममें से किसी को कोई बात पूछनी हो या किसी शंका का समाधान करना हो तो वह कर सकता है।
यान में तुम्हें जरूरी चीजों के अलावा पोशाक व आधुनिकम हथियार आदि भी मिल जायेंगे। साथ ही एक व्यक्ति तुम्हें उन हथियारों व पोशाक की विशेषता के बारे में बता देगा, लाकि तुम लोग उनका सही समय पर सही इस्तेमाल कर सको।
आ गये तुम लोग।
नहीं चीफ, हमें कुछ नहीं पूछना है।
और रात के ठीक आठ बजे एक गुप्त हवाई अड्डे जीटो पर -
हमें भी।
तो ठीक है। अब तुम लोग अपने-अपने घर जाओ और मिशन पर जाने की तैयारी करो। ध्यान रहे, आज रात ठीक आठ बजे जीरो हवाई अड्डे पर मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगा।
आओ, यान के भीतर चलें।
ओ.के. चीफ। | सबकुछ बताने के बादअब तुममें से किसी को कोई बात पूछनी हो या किसी शंका का समाधान करना हो तो वह कर सकता है। यान में तुम्हें जरूरी चीजों के अलावा पोशाक व आधुनिकम हथियार आदि भी मिल जायेंगे। साथ ही एक व्यक्ति तुम्हें उन हथियारों व पोशाक की विशेषता के बारे में बता देगा, लाकि तुम लोग उनका सही समय पर सही इस्तेमाल कर सको। आ गये तुम लोग। नहीं चीफ, हमें कुछ नहीं पूछना है। और रात के ठीक आठ बजे एक गुप्त हवाई अड्डे जीटो पर - हमें भी। तो ठीक है। अब तुम लोग अपने-अपने घर जाओ और मिशन पर जाने की तैयारी करो। ध्यान रहे, आज रात ठीक आठ बजे जीरो हवाई अड्डे पर मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगा। आओ, यान के भीतर चलें। ओ.के. चीफ। |
ऋग्वेदः मं० २ । अ० ४ । सू० ३८ ।।
भावार्थः-हे मनुष्या इमे सर्वे लोका अन्तरिक्षस्था भ्रमणशीला ईश्वरेण नियमं प्रापिताः सन्ति तेषु सूर्यसन्निध्या भ्रमणेन च षडृतवो जायन्त इति वेद्यम् ॥ ४ ॥
पदार्थः- जो (धीरः ) धीर बुद्धिमान् (मध्या) आकाश के बीच (वयन्ती ) चलती दुई पृथिवी ( विततम् ) जो पदार्थ अपने में व्याप्त उसको ( सम्, भ व्यत् ) सम्यक् व्याप्त होती ( कर्त्ताः ) और करने योग्य जाने आने के काम को तथा ( शक्म ) शक्ति के अनुकूल जो कर्म है उस को ( नि, अधात् ) निरन्तर धारण करती है ( पुनः ) फिर पूर्व देश को ( संहाय ) अच्छे प्रकार छोड़ उत्तर अर्थात् दूसरे देश को प्राप्त होती हुई ( उत्, अस्थात् ) स्थित होती उस को जानता है। जो (अरमतिः ) विना रमण विद्यमान है वह ( सविता ) सूर्थ्यलोक ( देवः) प्रकाशमान होता हुआ ( ऋतून् ) ऋतुओं को (व्यदर्घः) निरन्तर अलग करता तथा निकट के पदार्थों को (आ, भगात् ) प्राप्त होता उस को जो जानता है वह भूगोल और खगोल विद्या का जानने वाला होता है ॥ ४ ॥
भावार्थः-हे मनुष्यो ये सब लोक अन्तरिक्ष में ठहरे हुए भ्रमणशील ईश्वर ने नियम को पहुंचाये हुए हैं उन में सूर्य के सैनिकट और भ्रमण से छः ऋतु होते हैं यह जानना चाहिये ॥ ४ ॥
नानौसि॒ दुर्य्यो विश्व॒मायु॒र्व ति॑ष्ठतेप्रभ॒वः शोक अ॒ग्नेः । ज्येष्ठ॑ मा॒ाता सू॒नवे॑ भा॒गमाध॒ादन्व॑स्य॒ केत॑मषि॒तं स॑वि॒त्रा ॥ ५ ॥ १० २ ॥
ऋग्वेदः अ० २ । भ० ८ । व० २ ॥
नाना॑ । ओसि । दुर्य॑ः । विश्वं॑म् । आयु॑ः । वि । ति॒ष्ठ॒ते । प्र॒ऽभ॒वः । शोक॑ः । अ॒ग्नेः । ज्येष्ठ॑म् । मा॒ता । सुन । भागम् । श्रा । अ॒धात् । अनु॑ । अ॒स्य॒ । केत॑म् । इष॒तम् । स॒वि॒त्रा ॥ ५ ॥ व० २ ॥
पदार्थः- (नाना) अनेकानि (ओकांसि ) समवेतानि गृहाणि ( दुः ) द्वारवन्ति ( विश्वम्) सर्वम् (आयुः) जीवनम् (वि ) ( तिष्ठते ) ( प्रभवः ) उत्पत्तिः ( शोकः ) मरणम् ( अग्नेः ) विद्युदादिरूपात् ( ज्येष्ठम् ) प्रशस्यम् ( माता ) जननी ( सूनवे ) सन्तानाय ( भागम् ) भजनी : यम् ( श्रधात् ) ( अनु ) ( अस्य ) सन्तानस्य ( केतम् ) विज्ञानम् (इषितम् ) इष्टम् ( सवित्रा ) सूर्येण सह ॥ ५ ॥
अन्वयः - हे मनुष्या यत्र नाना दुर्थ भोकांसि सन्ति यत्र सवित्रा सदाग्नेर्विश्वमायुर्वितिष्ठते प्रभवः शोकश्च भवति पत्र माता सूनवे ज्येष्ठं भागमन्वस्येषितं केतमाधात्तस्मिन् वाऽस्मिन् जगति यथावर्त्तितव्यम् ॥ ५ ॥
भावार्थः-हे मनुष्या यदि भवतां जन्मानि जातानि तर्हि मरणमपि भविष्यत्यत्र सर्वर्त्तुसुखानि गृहाणि विधाय विद्यावृद्धये पाठशाला निर्माय स्वकन्याः पुत्राँश्च विद्यासुशिक्षायुक्तान् कृत्वा पूर्णमायुर्भुक्ता यशो विस्तार्यम् ॥ ५ ॥
पदार्थः-हे मनुष्यो जहां (नाना) अनेक प्रकार के ( दुर्थः ) द्वारवान् ( भोकांसि ) घर हैं वा जहां (सवित्रा) सूर्य्यलोक के साथ ( अग्नेः ) बिजुली
ऋग्वेदः मं० २ । अ० ४ । सू० ३८ ।।
आादि रूप अग्नि से ( त्रिश्वम् ) समस्त ( आयुः ) जीवन को ( वि, तिष्ठते ) विशेषता से स्थिर करता है तथा ( प्रभवः ) उत्पत्ति और ( शोकः ) मरण भी होता है जहां ( माता ) जननी ( सूनवे ) सन्तान के लिये ( ज्येष्ठम् ) प्रशंसनीय ( भागम् ) भाग को और ( अनु, अस्य ) अनुकूल इस सन्तान को ( इषितम् ) इष्ट अभीष्ट चाहे हुए ( केतम् ) विज्ञान को (आ, अधात् ) अच्छे प्रकार धारण करती उस में वा इस जगत् में यथावत् वर्त्ताव करना चाहिये ॥ ५ ॥
भावार्थः-हे मनुष्यो जो तुम्हारे जन्म हुए तो मरण भी होगा इसके बीच सब ऋतुओं में सुख देने वाले घरों को बनाकर विद्यावृद्धि के लिये पाठशालायें बनाय अपने कन्या और पुत्रों को विद्या और उत्तम शिक्षा युक्त कर पूर्ण आयु को भोग के यश का विस्तार करना चाहिये ॥ ५ ॥
म॒माव॑वति॒ विष्टि॑तो जिग्रीषुर्वश्वे॑षां॒ काम॒श्च र॑ताम॒माभू॑त् । शश्व अपो॒ो विकृ॑तं ह॒व्यागा॒ादनु॑ व्र॒तं सवि॒तुर्दैव्य॑स्य ॥ ६ ॥
स॒ऽव॑वर्त्ति । विऽस्थितः । षुः । विश्वे॑षाम् । कार्मः । चर॑ताम् । अ॒मा । अ॒भूत् । शश्वा॑न् । अप॑ः । वि. कृ॑तम् । हि॒त्वी । मा । अ॒गात् । अनु॑ । व्र॒तम् । स॒वि॒तुः । दैव्य॑स्य ॥ ६ ॥
पदार्थः-( समाववर्त्ति) सम्यगववर्त्यते (विष्ठितः) विशेषेण स्थितः (जिगीषुः ) जयशीलः ( विश्वेषाम् ) सर्वेde c | ऋग्वेदः मंशून्य दो । अशून्य चार । सूशून्य अड़तीस ।। भावार्थः-हे मनुष्या इमे सर्वे लोका अन्तरिक्षस्था भ्रमणशीला ईश्वरेण नियमं प्रापिताः सन्ति तेषु सूर्यसन्निध्या भ्रमणेन च षडृतवो जायन्त इति वेद्यम् ॥ चार ॥ पदार्थः- जो धीर बुद्धिमान् आकाश के बीच चलती दुई पृथिवी जो पदार्थ अपने में व्याप्त उसको सम्यक् व्याप्त होती और करने योग्य जाने आने के काम को तथा शक्ति के अनुकूल जो कर्म है उस को निरन्तर धारण करती है फिर पूर्व देश को अच्छे प्रकार छोड़ उत्तर अर्थात् दूसरे देश को प्राप्त होती हुई स्थित होती उस को जानता है। जो विना रमण विद्यमान है वह सूर्थ्यलोक प्रकाशमान होता हुआ ऋतुओं को निरन्तर अलग करता तथा निकट के पदार्थों को प्राप्त होता उस को जो जानता है वह भूगोल और खगोल विद्या का जानने वाला होता है ॥ चार ॥ भावार्थः-हे मनुष्यो ये सब लोक अन्तरिक्ष में ठहरे हुए भ्रमणशील ईश्वर ने नियम को पहुंचाये हुए हैं उन में सूर्य के सैनिकट और भ्रमण से छः ऋतु होते हैं यह जानना चाहिये ॥ चार ॥ नानौसि॒ दुर्य्यो विश्व॒मायु॒र्व ति॑ष्ठतेप्रभ॒वः शोक अ॒ग्नेः । ज्येष्ठ॑ मा॒ाता सू॒नवे॑ भा॒गमाध॒ादन्व॑स्य॒ केत॑मषि॒तं स॑वि॒त्रा ॥ पाँच ॥ दस दो ॥ ऋग्वेदः अशून्य दो । भशून्य आठ । वशून्य दो ॥ नाना॑ । ओसि । दुर्य॑ः । विश्वं॑म् । आयु॑ः । वि । ति॒ष्ठ॒ते । प्र॒ऽभ॒वः । शोक॑ः । अ॒ग्नेः । ज्येष्ठ॑म् । मा॒ता । सुन । भागम् । श्रा । अ॒धात् । अनु॑ । अ॒स्य॒ । केत॑म् । इष॒तम् । स॒वि॒त्रा ॥ पाँच ॥ वशून्य दो ॥ पदार्थः- अनेकानि समवेतानि गृहाणि द्वारवन्ति सर्वम् जीवनम् उत्पत्तिः मरणम् विद्युदादिरूपात् प्रशस्यम् जननी सन्तानाय भजनी : यम् सन्तानस्य विज्ञानम् इष्टम् सूर्येण सह ॥ पाँच ॥ अन्वयः - हे मनुष्या यत्र नाना दुर्थ भोकांसि सन्ति यत्र सवित्रा सदाग्नेर्विश्वमायुर्वितिष्ठते प्रभवः शोकश्च भवति पत्र माता सूनवे ज्येष्ठं भागमन्वस्येषितं केतमाधात्तस्मिन् वाऽस्मिन् जगति यथावर्त्तितव्यम् ॥ पाँच ॥ भावार्थः-हे मनुष्या यदि भवतां जन्मानि जातानि तर्हि मरणमपि भविष्यत्यत्र सर्वर्त्तुसुखानि गृहाणि विधाय विद्यावृद्धये पाठशाला निर्माय स्वकन्याः पुत्राँश्च विद्यासुशिक्षायुक्तान् कृत्वा पूर्णमायुर्भुक्ता यशो विस्तार्यम् ॥ पाँच ॥ पदार्थः-हे मनुष्यो जहां अनेक प्रकार के द्वारवान् घर हैं वा जहां सूर्य्यलोक के साथ बिजुली ऋग्वेदः मंशून्य दो । अशून्य चार । सूशून्य अड़तीस ।। आादि रूप अग्नि से समस्त जीवन को विशेषता से स्थिर करता है तथा उत्पत्ति और मरण भी होता है जहां जननी सन्तान के लिये प्रशंसनीय भाग को और अनुकूल इस सन्तान को इष्ट अभीष्ट चाहे हुए विज्ञान को अच्छे प्रकार धारण करती उस में वा इस जगत् में यथावत् वर्त्ताव करना चाहिये ॥ पाँच ॥ भावार्थः-हे मनुष्यो जो तुम्हारे जन्म हुए तो मरण भी होगा इसके बीच सब ऋतुओं में सुख देने वाले घरों को बनाकर विद्यावृद्धि के लिये पाठशालायें बनाय अपने कन्या और पुत्रों को विद्या और उत्तम शिक्षा युक्त कर पूर्ण आयु को भोग के यश का विस्तार करना चाहिये ॥ पाँच ॥ म॒माव॑वति॒ विष्टि॑तो जिग्रीषुर्वश्वे॑षां॒ काम॒श्च र॑ताम॒माभू॑त् । शश्व अपो॒ो विकृ॑तं ह॒व्यागा॒ादनु॑ व्र॒तं सवि॒तुर्दैव्य॑स्य ॥ छः ॥ स॒ऽव॑वर्त्ति । विऽस्थितः । षुः । विश्वे॑षाम् । कार्मः । चर॑ताम् । अ॒मा । अ॒भूत् । शश्वा॑न् । अप॑ः । वि. कृ॑तम् । हि॒त्वी । मा । अ॒गात् । अनु॑ । व्र॒तम् । स॒वि॒तुः । दैव्य॑स्य ॥ छः ॥ पदार्थः- सम्यगववर्त्यते विशेषेण स्थितः जयशीलः सर्वेde c |
प्रखंड स्तरीय निबंध व फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित (युवा पेज)
भभुआ, एक प्रतिनिधि। जिले के सभी प्रखंडों में छात्र-छात्राओं के बीच निबंध सह फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में चयनित पांच छात्र-छात्राओं को एक जून को होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल कराया जाएगा। शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी उच्च शिक्षा कृष्ण मुरारी गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता के पहले चरण में विद्यालयों से निबंध एवं फोटोग्राफी के आधार पर छात्र-छात्राओं का चयन किया गया था। विद्यालयों में प्रथम स्थान लाने वाले बच्चों ओं को प्रखंड स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल कराया गया।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रखंड से पांच छात्र-छात्राओं का चयन किया जाएगा, जिन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेना है जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान लानेवाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पर्यटन निदेशालय के निर्देश पर बिहार में पर्यटन की संभावनाओं के विषय पर निबंध लेखन आयोजित किया गया। अब छात्रों के निबंध लेखन एवं फोटोग्राफी की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर बेहतर पांच प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
कैप्शन- कुदरा में सोमवार को आयोजित प्रखंड स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता में भाग लेते छात्र-छात्राएं।
| प्रखंड स्तरीय निबंध व फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित भभुआ, एक प्रतिनिधि। जिले के सभी प्रखंडों में छात्र-छात्राओं के बीच निबंध सह फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में चयनित पांच छात्र-छात्राओं को एक जून को होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल कराया जाएगा। शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी उच्च शिक्षा कृष्ण मुरारी गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता के पहले चरण में विद्यालयों से निबंध एवं फोटोग्राफी के आधार पर छात्र-छात्राओं का चयन किया गया था। विद्यालयों में प्रथम स्थान लाने वाले बच्चों ओं को प्रखंड स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल कराया गया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रखंड से पांच छात्र-छात्राओं का चयन किया जाएगा, जिन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेना है जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान लानेवाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पर्यटन निदेशालय के निर्देश पर बिहार में पर्यटन की संभावनाओं के विषय पर निबंध लेखन आयोजित किया गया। अब छात्रों के निबंध लेखन एवं फोटोग्राफी की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर बेहतर पांच प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया जाएगा। कैप्शन- कुदरा में सोमवार को आयोजित प्रखंड स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता में भाग लेते छात्र-छात्राएं। |
बताया जा रहा है कि वनिता ने अपने पति पीटर पॉल को मार-मारकर घर से बाहर निकाल दिया है. इस खबर के सामने आते ही वनिता एक बार फिर सुर्खियों में आई गई हैं.
तमिल फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री वनिता विजयकुमार (Vanitha Vijaykumar) एक बार फिर सुर्खियों में हैं. वजह है उनकी तीसरी शादी जो इस वक्त मुश्किलों के दौर से गुजर रही है. बताया जा रहा है कि वनिता ने अपने पति पीटर पॉल को मार-मारकर घर से बाहर निकाल दिया है. इस खबर के सामने आते ही वनिता एक बार फिर सुर्खियों में आई गई हैं.
बता दें, वनिता इस घटना के बाद एक के बाद एक कई ट्वीट्स किए और अपनी सफाई दी. इसके बाद उन्होंने एक आधिकारिक बयान भी दिया.
प्यार में हारना एक ऐसी चीज है जिसकी मैं अब आदि हो चुकी हूं. लेकिन मैं हमेशा आगे बढ़ती रहीं हूं और मजबूत होती जा रही हूं. प्यार में विश्वास करना और इसमें निराश होना बहुत ही दर्दनाक और असहनीय है लेकिन एक बिंदु के बाद ये सुन्न हो जाता है.. आंखों के सामने जीवन खत्म होते देखना सबसे दर्दनाक हैं.
वनिता ने कहा, मैं कुछ भी नहीं छिपाती क्योंकि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है..इसका फायदा अच्छा नहीं है..और मैं अब यह कहना चाहूंगी कि मैं एक और बड़ी चुनौती से गुजर रही हूं और मैं यह देखने की पूरी कोशिश कर रही हूं कि मैं इसे कैसे सुलझा सकती हूं.
| बताया जा रहा है कि वनिता ने अपने पति पीटर पॉल को मार-मारकर घर से बाहर निकाल दिया है. इस खबर के सामने आते ही वनिता एक बार फिर सुर्खियों में आई गई हैं. तमिल फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री वनिता विजयकुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं. वजह है उनकी तीसरी शादी जो इस वक्त मुश्किलों के दौर से गुजर रही है. बताया जा रहा है कि वनिता ने अपने पति पीटर पॉल को मार-मारकर घर से बाहर निकाल दिया है. इस खबर के सामने आते ही वनिता एक बार फिर सुर्खियों में आई गई हैं. बता दें, वनिता इस घटना के बाद एक के बाद एक कई ट्वीट्स किए और अपनी सफाई दी. इसके बाद उन्होंने एक आधिकारिक बयान भी दिया. प्यार में हारना एक ऐसी चीज है जिसकी मैं अब आदि हो चुकी हूं. लेकिन मैं हमेशा आगे बढ़ती रहीं हूं और मजबूत होती जा रही हूं. प्यार में विश्वास करना और इसमें निराश होना बहुत ही दर्दनाक और असहनीय है लेकिन एक बिंदु के बाद ये सुन्न हो जाता है.. आंखों के सामने जीवन खत्म होते देखना सबसे दर्दनाक हैं. वनिता ने कहा, मैं कुछ भी नहीं छिपाती क्योंकि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है..इसका फायदा अच्छा नहीं है..और मैं अब यह कहना चाहूंगी कि मैं एक और बड़ी चुनौती से गुजर रही हूं और मैं यह देखने की पूरी कोशिश कर रही हूं कि मैं इसे कैसे सुलझा सकती हूं. |
विश्व भर में कई ऐसी कंपनियां हैं, जो अपने कस्टमर्स के साथ धोखाधड़ी करने से परहेज नहीं करती हैं। ऐसा ही एक मामला रूस से प्रकाश में आया है। यहां एक महिला ने स्पर्म बैंक पर केस कर दिया है। महिला का कहना है कि स्पर्म बैंक ने उसके साथ धोखा किया है। दरअसल, महिला ने एक स्पर्म बैंक की वेबसाइट से ऑनलाइन स्पर्म खरीदा था। उस स्पर्म के साथ 6 फीट के उसके डोनर की तस्वीर भी लगी थी।
ऐसे में महिला को लगा कि इस स्पर्म से उसका होने वाला बच्चा भी लंबा पैदा होगा। महिला का दावा है कि स्पर्म बैंक की तरफ से भी यही वादा किया गया था। रूसी महिला के मुताबिक उसने स्पर्म खरीदने के बाद IVF तकनीक से उस स्पर्म से गर्भ धारण किया। किन्तु गर्भ धारण करने के कुछ ही महीने में उसे इस बात का पता चला कि उसका होने वाला बच्चा एक्रोंडोप्लासिया से पीड़ित है।
इस बीमारी के कारण बच्चे की लंबाई कम रह जाती है। यह जानकर महिला को बहुत बड़ा झटका लगा। इसके बाद महिला ने उस स्पर्म बैंक के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा ठोंक दिया। महिला की तरफ से किए गए मुक़दमे पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इंटरनेशनल स्पर्म बैंक की वेबसाइट को ब्लॉक करने का आदेश दे दिया है। वहीं कंपनी का कहना है कि उनकी ओर से उच्च क्वालिटी के स्पर्म दिए जाते हैं, लेकिन किसी भी गलती के लिए वो क्लिीनिक जिम्मेदार होती है, जो आईवीएफ ट्रीटमेंट करती है। फिलहाल महिला का बच्चा 2 साल का है।
| विश्व भर में कई ऐसी कंपनियां हैं, जो अपने कस्टमर्स के साथ धोखाधड़ी करने से परहेज नहीं करती हैं। ऐसा ही एक मामला रूस से प्रकाश में आया है। यहां एक महिला ने स्पर्म बैंक पर केस कर दिया है। महिला का कहना है कि स्पर्म बैंक ने उसके साथ धोखा किया है। दरअसल, महिला ने एक स्पर्म बैंक की वेबसाइट से ऑनलाइन स्पर्म खरीदा था। उस स्पर्म के साथ छः फीट के उसके डोनर की तस्वीर भी लगी थी। ऐसे में महिला को लगा कि इस स्पर्म से उसका होने वाला बच्चा भी लंबा पैदा होगा। महिला का दावा है कि स्पर्म बैंक की तरफ से भी यही वादा किया गया था। रूसी महिला के मुताबिक उसने स्पर्म खरीदने के बाद IVF तकनीक से उस स्पर्म से गर्भ धारण किया। किन्तु गर्भ धारण करने के कुछ ही महीने में उसे इस बात का पता चला कि उसका होने वाला बच्चा एक्रोंडोप्लासिया से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण बच्चे की लंबाई कम रह जाती है। यह जानकर महिला को बहुत बड़ा झटका लगा। इसके बाद महिला ने उस स्पर्म बैंक के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा ठोंक दिया। महिला की तरफ से किए गए मुक़दमे पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इंटरनेशनल स्पर्म बैंक की वेबसाइट को ब्लॉक करने का आदेश दे दिया है। वहीं कंपनी का कहना है कि उनकी ओर से उच्च क्वालिटी के स्पर्म दिए जाते हैं, लेकिन किसी भी गलती के लिए वो क्लिीनिक जिम्मेदार होती है, जो आईवीएफ ट्रीटमेंट करती है। फिलहाल महिला का बच्चा दो साल का है। |
टेलीविजन के चर्चित हास्य शो 'द कपिल शर्मा शो' में हमे कपिल के साथ में ताल से ताल मिलाते नजर आने वाली कलाकारा हम बात कर रहे कपिल की ऑनस्क्रीन पत्नी सुमोना चक्रवर्ती जो की जल्द ही हमे अपने एक अलग ही रूप में नजर आने वाली है.
जी हाँ पहले सुमोना के बारे में पता चला था कि सुमोना जल्द ही हमे एक डिटेक्टिव सीरीज में नजर आने वाली है. परन्तु अब आप इस बात को छोड़कर इस बात पर ध्यान दीजिये कि, 'द कपिल शर्मा शो' में सरला का किरदार निभाने वाली कॉमेडियन और एक्ट्रेस सुमोना चक्रवर्ती अब शो में बदले हुए अवतार में नजर आएंगी.
सुमोना ने द कपिल शर्मा शो के लिए मेकओवर करवाया और इस मेकओवर की तस्वीरों को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. शो में अब तक घरेलू लड़की के किरदार में नज़र आने वाली सुमोना अब ग्लैमरस अंदाज में दिखेंगी. सभी को शो में उनके इस अलहदा रूप मे देखने का बेसब्री से इंतजार है आप भी देखिये उनका वही रूप जो के कर देगा आपको भी चुप.
| टेलीविजन के चर्चित हास्य शो 'द कपिल शर्मा शो' में हमे कपिल के साथ में ताल से ताल मिलाते नजर आने वाली कलाकारा हम बात कर रहे कपिल की ऑनस्क्रीन पत्नी सुमोना चक्रवर्ती जो की जल्द ही हमे अपने एक अलग ही रूप में नजर आने वाली है. जी हाँ पहले सुमोना के बारे में पता चला था कि सुमोना जल्द ही हमे एक डिटेक्टिव सीरीज में नजर आने वाली है. परन्तु अब आप इस बात को छोड़कर इस बात पर ध्यान दीजिये कि, 'द कपिल शर्मा शो' में सरला का किरदार निभाने वाली कॉमेडियन और एक्ट्रेस सुमोना चक्रवर्ती अब शो में बदले हुए अवतार में नजर आएंगी. सुमोना ने द कपिल शर्मा शो के लिए मेकओवर करवाया और इस मेकओवर की तस्वीरों को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. शो में अब तक घरेलू लड़की के किरदार में नज़र आने वाली सुमोना अब ग्लैमरस अंदाज में दिखेंगी. सभी को शो में उनके इस अलहदा रूप मे देखने का बेसब्री से इंतजार है आप भी देखिये उनका वही रूप जो के कर देगा आपको भी चुप. |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
मित्र मंडल के तीन तारों और हमारे सूरज के आकारों और रंगों की आपस में तुलना शक्तिशाली दूरबीन के ज़रिये मित्र तारे का एक दृश्य (बीच का सब से रोशन तारा) मित्र "बी" की परिक्रमा करते ग़ैर-सौरीय ग्रह का काल्पनिक चित्रण मित्र या अल्फ़ा सॅन्टौरी, जिसका बायर नाम α Centauri या α Cen है, नरतुरंग तारामंडल का सब से रोशन तारा है। यह पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से चौथा सब से रोशन तारा भी है। पृथ्वी से एक दिखने वाला मित्र तारा वास्तव में तीन तारों का बहु तारा मंडल है। इनमें से दो तो एक द्वितारा मंडल में हैं और इन्हें मित्र "ए" और मित्र "बी" कहा जाता है। तीसरा तारा इनसे कुछ दूरी पर है और उसे मित्र "सी" या "प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी" का नाम मिला है। सूरज को छोड़कर, प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी हमारी पृथ्वी का सब से नज़दीकी तारा है और हमसे 4.24 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। फिर भी प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी इतना छोटा है के बिना दूरबीन के देखा नहीं जा सकता। अक्टूबर २०१२ में वैज्ञनिकों ने घोषणा करी कि मित्र तारा मंडल के एक तारे (मित्र "बी") के इर्द-गिर्द एक ग़ैर-सौरीय ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया है। इस ग्रह का नाम 'मित्र बी-बी' (Alpha Centauri Bb) रखा गया और यह पृथ्वी से सब से नज़दीकी ज्ञात ग़ैर-सौरीय ग्रह है लेकिन यह अपने तारे के बहुत पास है और वासयोग्य क्षेत्र में नहीं पड़ता।, Mike Wall, 16 अक्टूबर 2012, NBC News, Accessed: 19 अक्टूबर 2012,... सौर अर्धव्यास (solar radius), जिसे \beginR_\odot\end के चिन्ह से दर्शाया जाता है, हमारे सूरज का अर्धव्यास (रेडियस) है जो ६.९५५ x १०५ किलोमीटर के बराबर है। खगोलशास्त्र में, सौर्य अर्धव्यास का तारों के अर्धव्यास बताने के लिए इकाई की तरह इस्तेमाल होता है। अगर किसी तारे का अर्धव्यास हमारे सूरज से बीस गुना है, जो कहा जाएगा के उसका अर्धव्यास २० \beginR_\odot\end है। ज़ाहिर है के सूरज का अपना अर्धव्यास १ \beginR_\odot\end है। .
मित्र तारा और सौर अर्धव्यास आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): तारा, सौर द्रव्यमान, सूर्य।
तारे (Stars) स्वयंप्रकाशित (self-luminous) उष्ण गैस की द्रव्यमात्रा से भरपूर विशाल, खगोलीय पिंड हैं। इनका निजी गुरुत्वाकर्षण (gravitation) इनके द्रव्य को संघटित रखता है। मेघरहित आकाश में रात्रि के समय प्रकाश के बिंदुओं की तरह बिखरे हुए, टिमटिमाते प्रकाशवाले बहुत से तारे दिखलाई देते हैं। .
वी॰वाए॰ कैनिस मेजौरिस का द्रव्यमान ३०-४० \beginsmallmatrixM_\odot\endsmallmatrix है, यानि सूरज के द्रव्यमान का ३०-४० गुना है खगोलविज्ञान में सौर द्रव्यमान (solar mass) (\beginM_\odot\end) द्रव्यमान की मानक इकाई है, जिसका मान १.९८८९२ X १०३० कि.ग्रा.
सूर्य अथवा सूरज सौरमंडल के केन्द्र में स्थित एक तारा जिसके चारों तरफ पृथ्वी और सौरमंडल के अन्य अवयव घूमते हैं। सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड है और उसका व्यास लगभग १३ लाख ९० हज़ार किलोमीटर है जो पृथ्वी से लगभग १०९ गुना अधिक है। ऊर्जा का यह शक्तिशाली भंडार मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है। परमाणु विलय की प्रक्रिया द्वारा सूर्य अपने केंद्र में ऊर्जा पैदा करता है। सूर्य से निकली ऊर्जा का छोटा सा भाग ही पृथ्वी पर पहुँचता है जिसमें से १५ प्रतिशत अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है, ३० प्रतिशत पानी को भाप बनाने में काम आता है और बहुत सी ऊर्जा पेड़-पौधे समुद्र सोख लेते हैं। इसकी मजबूत गुरुत्वाकर्षण शक्ति विभिन्न कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी और अन्य ग्रहों को इसकी तरफ खींच कर रखती है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग १४,९६,००,००० किलोमीटर या ९,२९,६०,००० मील है तथा सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश को आने में ८.३ मिनट का समय लगता है। इसी प्रकाशीय ऊर्जा से प्रकाश-संश्लेषण नामक एक महत्वपूर्ण जैव-रासायनिक अभिक्रिया होती है जो पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह पृथ्वी के जलवायु और मौसम को प्रभावित करता है। सूर्य की सतह का निर्माण हाइड्रोजन, हिलियम, लोहा, निकेल, ऑक्सीजन, सिलिकन, सल्फर, मैग्निसियम, कार्बन, नियोन, कैल्सियम, क्रोमियम तत्वों से हुआ है। इनमें से हाइड्रोजन सूर्य के सतह की मात्रा का ७४ % तथा हिलियम २४ % है। इस जलते हुए गैसीय पिंड को दूरदर्शी यंत्र से देखने पर इसकी सतह पर छोटे-बड़े धब्बे दिखलाई पड़ते हैं। इन्हें सौर कलंक कहा जाता है। ये कलंक अपने स्थान से सरकते हुए दिखाई पड़ते हैं। इससे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि सूर्य पूरब से पश्चिम की ओर २७ दिनों में अपने अक्ष पर एक परिक्रमा करता है। जिस प्रकार पृथ्वी और अन्य ग्रह सूरज की परिक्रमा करते हैं उसी प्रकार सूरज भी आकाश गंगा के केन्द्र की परिक्रमा करता है। इसको परिक्रमा करनें में २२ से २५ करोड़ वर्ष लगते हैं, इसे एक निहारिका वर्ष भी कहते हैं। इसके परिक्रमा करने की गति २५१ किलोमीटर प्रति सेकेंड है। Barnhart, Robert K. (1995) The Barnhart Concise Dictionary of Etymology, page 776.
मित्र तारा 23 संबंध है और सौर अर्धव्यास 4 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 11.11% है = 3 / (23 + 4)।
यह लेख मित्र तारा और सौर अर्धव्यास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मित्र मंडल के तीन तारों और हमारे सूरज के आकारों और रंगों की आपस में तुलना शक्तिशाली दूरबीन के ज़रिये मित्र तारे का एक दृश्य मित्र "बी" की परिक्रमा करते ग़ैर-सौरीय ग्रह का काल्पनिक चित्रण मित्र या अल्फ़ा सॅन्टौरी, जिसका बायर नाम α Centauri या α Cen है, नरतुरंग तारामंडल का सब से रोशन तारा है। यह पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से चौथा सब से रोशन तारा भी है। पृथ्वी से एक दिखने वाला मित्र तारा वास्तव में तीन तारों का बहु तारा मंडल है। इनमें से दो तो एक द्वितारा मंडल में हैं और इन्हें मित्र "ए" और मित्र "बी" कहा जाता है। तीसरा तारा इनसे कुछ दूरी पर है और उसे मित्र "सी" या "प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी" का नाम मिला है। सूरज को छोड़कर, प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी हमारी पृथ्वी का सब से नज़दीकी तारा है और हमसे चार.चौबीस प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। फिर भी प्रॉक्सिमा सॅन्टौरी इतना छोटा है के बिना दूरबीन के देखा नहीं जा सकता। अक्टूबर दो हज़ार बारह में वैज्ञनिकों ने घोषणा करी कि मित्र तारा मंडल के एक तारे के इर्द-गिर्द एक ग़ैर-सौरीय ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया है। इस ग्रह का नाम 'मित्र बी-बी' रखा गया और यह पृथ्वी से सब से नज़दीकी ज्ञात ग़ैर-सौरीय ग्रह है लेकिन यह अपने तारे के बहुत पास है और वासयोग्य क्षेत्र में नहीं पड़ता।, Mike Wall, सोलह अक्टूबर दो हज़ार बारह, NBC News, Accessed: उन्नीस अक्टूबर दो हज़ार बारह,... सौर अर्धव्यास , जिसे \beginR_\odot\end के चिन्ह से दर्शाया जाता है, हमारे सूरज का अर्धव्यास है जो छः.नौ सौ पचपन x एक सौ पाँच किलोग्राममीटर के बराबर है। खगोलशास्त्र में, सौर्य अर्धव्यास का तारों के अर्धव्यास बताने के लिए इकाई की तरह इस्तेमाल होता है। अगर किसी तारे का अर्धव्यास हमारे सूरज से बीस गुना है, जो कहा जाएगा के उसका अर्धव्यास बीस \beginR_\odot\end है। ज़ाहिर है के सूरज का अपना अर्धव्यास एक \beginR_\odot\end है। . मित्र तारा और सौर अर्धव्यास आम में तीन बातें हैं : तारा, सौर द्रव्यमान, सूर्य। तारे स्वयंप्रकाशित उष्ण गैस की द्रव्यमात्रा से भरपूर विशाल, खगोलीय पिंड हैं। इनका निजी गुरुत्वाकर्षण इनके द्रव्य को संघटित रखता है। मेघरहित आकाश में रात्रि के समय प्रकाश के बिंदुओं की तरह बिखरे हुए, टिमटिमाते प्रकाशवाले बहुत से तारे दिखलाई देते हैं। . वी॰वाए॰ कैनिस मेजौरिस का द्रव्यमान तीस-चालीस \beginsmallmatrixM_\odot\endsmallmatrix है, यानि सूरज के द्रव्यमान का तीस-चालीस गुना है खगोलविज्ञान में सौर द्रव्यमान द्रव्यमान की मानक इकाई है, जिसका मान एक.अट्ठानवे हज़ार आठ सौ बानवे X एक हज़ार तीस कि.ग्रा. सूर्य अथवा सूरज सौरमंडल के केन्द्र में स्थित एक तारा जिसके चारों तरफ पृथ्वी और सौरमंडल के अन्य अवयव घूमते हैं। सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड है और उसका व्यास लगभग तेरह लाख नब्बे हज़ार किलोमीटर है जो पृथ्वी से लगभग एक सौ नौ गुना अधिक है। ऊर्जा का यह शक्तिशाली भंडार मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है। परमाणु विलय की प्रक्रिया द्वारा सूर्य अपने केंद्र में ऊर्जा पैदा करता है। सूर्य से निकली ऊर्जा का छोटा सा भाग ही पृथ्वी पर पहुँचता है जिसमें से पंद्रह प्रतिशत अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है, तीस प्रतिशत पानी को भाप बनाने में काम आता है और बहुत सी ऊर्जा पेड़-पौधे समुद्र सोख लेते हैं। इसकी मजबूत गुरुत्वाकर्षण शक्ति विभिन्न कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी और अन्य ग्रहों को इसकी तरफ खींच कर रखती है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग चौदह,छियानवे,शून्य,शून्य किलोग्राममीटर या नौ,उनतीस,साठ,शून्य मील है तथा सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश को आने में आठ दशमलव तीन मिनट का समय लगता है। इसी प्रकाशीय ऊर्जा से प्रकाश-संश्लेषण नामक एक महत्वपूर्ण जैव-रासायनिक अभिक्रिया होती है जो पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह पृथ्वी के जलवायु और मौसम को प्रभावित करता है। सूर्य की सतह का निर्माण हाइड्रोजन, हिलियम, लोहा, निकेल, ऑक्सीजन, सिलिकन, सल्फर, मैग्निसियम, कार्बन, नियोन, कैल्सियम, क्रोमियम तत्वों से हुआ है। इनमें से हाइड्रोजन सूर्य के सतह की मात्रा का चौहत्तर % तथा हिलियम चौबीस % है। इस जलते हुए गैसीय पिंड को दूरदर्शी यंत्र से देखने पर इसकी सतह पर छोटे-बड़े धब्बे दिखलाई पड़ते हैं। इन्हें सौर कलंक कहा जाता है। ये कलंक अपने स्थान से सरकते हुए दिखाई पड़ते हैं। इससे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि सूर्य पूरब से पश्चिम की ओर सत्ताईस दिनों में अपने अक्ष पर एक परिक्रमा करता है। जिस प्रकार पृथ्वी और अन्य ग्रह सूरज की परिक्रमा करते हैं उसी प्रकार सूरज भी आकाश गंगा के केन्द्र की परिक्रमा करता है। इसको परिक्रमा करनें में बाईस से पच्चीस करोड़ वर्ष लगते हैं, इसे एक निहारिका वर्ष भी कहते हैं। इसके परिक्रमा करने की गति दो सौ इक्यावन किलोग्राममीटर प्रति सेकेंड है। Barnhart, Robert K. The Barnhart Concise Dictionary of Etymology, page सात सौ छिहत्तर. मित्र तारा तेईस संबंध है और सौर अर्धव्यास चार है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक ग्यारह.ग्यारह% है = तीन / । यह लेख मित्र तारा और सौर अर्धव्यास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
छतराड़ी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छतराड़ी की एनएसएस इकाई ने विशेष स्वच्छता अभियान के तहत इलाके में साफ- सफाई अभियान छेड़कर लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। एनएसएस इकाई के प्रभारी जीवन शर्मा की अगवाई में परस राम व वंदना ठाकुर ने शिव शक्ति मंदिर छतराड़ी के प्रांगण में छात्रों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। एनएसएस प्रभारी जीवन शर्मा ने छात्रों को स्वच्छता के महत्त्व बारे विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को अपनाने से ही खुद को निरोग रखा जा सकता है। उन्होंने छात्रों को स्वच्छता को लेकर जारी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान को लेकर पाठशाला में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
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| छतराड़ी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छतराड़ी की एनएसएस इकाई ने विशेष स्वच्छता अभियान के तहत इलाके में साफ- सफाई अभियान छेड़कर लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। एनएसएस इकाई के प्रभारी जीवन शर्मा की अगवाई में परस राम व वंदना ठाकुर ने शिव शक्ति मंदिर छतराड़ी के प्रांगण में छात्रों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। एनएसएस प्रभारी जीवन शर्मा ने छात्रों को स्वच्छता के महत्त्व बारे विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को अपनाने से ही खुद को निरोग रखा जा सकता है। उन्होंने छात्रों को स्वच्छता को लेकर जारी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान को लेकर पाठशाला में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें ! |
नई दिल्ली। भारत में कैंसर बीमारी की सुनामी आने वाली है क्योंकि अमेरिका के एक कैंसर रोग विशेषज्ञ ने इस बारे में चेताया है. उन्होंने इसके पीछे की वजह ग्लोबलाइजेशन, बढ़ती अर्थव्यवस्था, बूढ़ी हो रही जनसंख्या और भारतीय आबादी के बीच तेजी से बढ़ रही खराब लाइफस्टाइल बताई है. विशेषज्ञ ने इस बीमारी की सुनामी को रोकने के लिए मेडिकल तकनीक को बढ़ाने पर जोर दिया है.
यूएस के ओहियो स्थित क्लीवलैंड क्लिनिक के हेमेटोलॉजी एंड मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जामे अब्राहम ने कहा है कि भारत में जिस तरह से गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं उनको रोकने के लिए उपचार पर तेजी से काम शुरू करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत को कैंसर के टीके, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा डिजिटल टेक्नोलॉजी तकनीक को एडवांस करना जरूरी है.
पिछले महीने ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि देश में 2020 से 2022 के बीच कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में वृद्धि हुई है. आईसीएमआर के मुताबिक 2020 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर के अनुमानित मामले 2020 में 13. 92 लाख (लगभग 14 लाख) थे. अब ये आंकड़े 2021 में बढ़कर 14. 26 लाख हुए और 2022 में बढ़कर 14. 61 लाख पर पहुंच गए थे. वहीं, भारत में 2020 में कैंसर के कारण अनुमानित मृत्यु दर 7. 70 लाख थी जो 2021 में बढ़कर 7. 89 लाख और 2022 में बढ़कर 8. 8 लाख हो गई थी. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर केसों में 2020 की रैंकिंग में चीन और अमेरिका के बाद भारत का स्थान तीसरा रखा था.
आंकड़ों के अनुसार भारत में पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह और फेफड़ों का कैंसर होता है. वहीं, महिलाओं में सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट और गर्भाशय के कैंसर के सामने आए हैं. भारत में 2018 में ब्रेस्ट कैंसर से 87 हजार महिलाओं की मौत हुई थी.
भारत के साथ ही पूरी दुनिया में इस बीमारी के बढ़ने की वजह गलत खानपान, लाइफस्टाइल, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, प्रदूषण, पेस्टिसाइड्स और केमिकल से संक्रमित भोजन का सेवन जैसे फैक्टर्स शामिल हैं. इसके अलावा कैंसर बढ़ने की प्रमुख वजहों में ह्यूमन पेपिलोमावायरस इंफेक्शन, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी संक्रमण वाली बीमारियां भी शामिल हैं. ये लिवर, ब्रेस्ट और सर्वाइकल और मुंह के कैंसर का कारण बनती हैं.
इंसान का शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बनता है. शरीर का छोटे से बड़ा अंग करोड़ों कोशिकाओं से बनता है. आपको बता दें कि ये कोशिकाएं शरीर की जरूरत के अनुसार बढ़ती और विभाजित होती हैं. परंतु जब शरीर की कोशिकाएं जरूरत के बिना अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगे तो इसको कैंसर की शुरुआत माना जाता है.
-भारत में लोगों की सबसे ज्यादा मौतें फेंफड़ों में कैंसर के कारण होती हैं जिसकी वजह तंबाकू और धूम्रपान का सेवन है. कैंसर बढ़ने का कारण मोटापा भी है. शरीर में फैट होने पर कैंसर कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं.
-मोटापा भी 13 अलग-अलग प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है जिनमें रजोनिवृत्ति के बाद का स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, किडनी कैंसर, गालब्लैडर कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर, थायरॉयड कैंसर, लिवर, इंटेस्टाइन का मल्टीपल मायलोमा और एडेनोकार्सिनोमा शामिल हैं.
-फल और सब्जियों में कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज आदि बीमारियों का खतरा कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं. इसी वजह से इनको अपनी डेली डाइट में शामिल करें.
-वहीं, नियमित रूप से व्यायाम करने से कैंसर होने का खतरा फिजिकली एक्टिव ना रहने वाले लोगों की तुलना में कम होता है.
-शराब से कैंसर होने का खतरा 5 गुना अधिक होता है. ज्यादा ड्रिंक करने पर यह खतरा 30 गुना हो जाता है. शराब से 7 तरह के कैंसर हो सकते हैं जिसमें मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, इसोफेगस कैंसर, लिवर कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर आदि शामिल हैं.
| नई दिल्ली। भारत में कैंसर बीमारी की सुनामी आने वाली है क्योंकि अमेरिका के एक कैंसर रोग विशेषज्ञ ने इस बारे में चेताया है. उन्होंने इसके पीछे की वजह ग्लोबलाइजेशन, बढ़ती अर्थव्यवस्था, बूढ़ी हो रही जनसंख्या और भारतीय आबादी के बीच तेजी से बढ़ रही खराब लाइफस्टाइल बताई है. विशेषज्ञ ने इस बीमारी की सुनामी को रोकने के लिए मेडिकल तकनीक को बढ़ाने पर जोर दिया है. यूएस के ओहियो स्थित क्लीवलैंड क्लिनिक के हेमेटोलॉजी एंड मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जामे अब्राहम ने कहा है कि भारत में जिस तरह से गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं उनको रोकने के लिए उपचार पर तेजी से काम शुरू करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत को कैंसर के टीके, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा डिजिटल टेक्नोलॉजी तकनीक को एडवांस करना जरूरी है. पिछले महीने ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि देश में दो हज़ार बीस से दो हज़ार बाईस के बीच कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में वृद्धि हुई है. आईसीएमआर के मुताबिक दो हज़ार बीस में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर के अनुमानित मामले दो हज़ार बीस में तेरह. बानवे लाख थे. अब ये आंकड़े दो हज़ार इक्कीस में बढ़कर चौदह. छब्बीस लाख हुए और दो हज़ार बाईस में बढ़कर चौदह. इकसठ लाख पर पहुंच गए थे. वहीं, भारत में दो हज़ार बीस में कैंसर के कारण अनुमानित मृत्यु दर सात. सत्तर लाख थी जो दो हज़ार इक्कीस में बढ़कर सात. नवासी लाख और दो हज़ार बाईस में बढ़कर आठ. आठ लाख हो गई थी. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर केसों में दो हज़ार बीस की रैंकिंग में चीन और अमेरिका के बाद भारत का स्थान तीसरा रखा था. आंकड़ों के अनुसार भारत में पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह और फेफड़ों का कैंसर होता है. वहीं, महिलाओं में सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट और गर्भाशय के कैंसर के सामने आए हैं. भारत में दो हज़ार अट्ठारह में ब्रेस्ट कैंसर से सत्तासी हजार महिलाओं की मौत हुई थी. भारत के साथ ही पूरी दुनिया में इस बीमारी के बढ़ने की वजह गलत खानपान, लाइफस्टाइल, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, प्रदूषण, पेस्टिसाइड्स और केमिकल से संक्रमित भोजन का सेवन जैसे फैक्टर्स शामिल हैं. इसके अलावा कैंसर बढ़ने की प्रमुख वजहों में ह्यूमन पेपिलोमावायरस इंफेक्शन, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी संक्रमण वाली बीमारियां भी शामिल हैं. ये लिवर, ब्रेस्ट और सर्वाइकल और मुंह के कैंसर का कारण बनती हैं. इंसान का शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बनता है. शरीर का छोटे से बड़ा अंग करोड़ों कोशिकाओं से बनता है. आपको बता दें कि ये कोशिकाएं शरीर की जरूरत के अनुसार बढ़ती और विभाजित होती हैं. परंतु जब शरीर की कोशिकाएं जरूरत के बिना अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगे तो इसको कैंसर की शुरुआत माना जाता है. -भारत में लोगों की सबसे ज्यादा मौतें फेंफड़ों में कैंसर के कारण होती हैं जिसकी वजह तंबाकू और धूम्रपान का सेवन है. कैंसर बढ़ने का कारण मोटापा भी है. शरीर में फैट होने पर कैंसर कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं. -मोटापा भी तेरह अलग-अलग प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है जिनमें रजोनिवृत्ति के बाद का स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, किडनी कैंसर, गालब्लैडर कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर, थायरॉयड कैंसर, लिवर, इंटेस्टाइन का मल्टीपल मायलोमा और एडेनोकार्सिनोमा शामिल हैं. -फल और सब्जियों में कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज आदि बीमारियों का खतरा कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं. इसी वजह से इनको अपनी डेली डाइट में शामिल करें. -वहीं, नियमित रूप से व्यायाम करने से कैंसर होने का खतरा फिजिकली एक्टिव ना रहने वाले लोगों की तुलना में कम होता है. -शराब से कैंसर होने का खतरा पाँच गुना अधिक होता है. ज्यादा ड्रिंक करने पर यह खतरा तीस गुना हो जाता है. शराब से सात तरह के कैंसर हो सकते हैं जिसमें मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, इसोफेगस कैंसर, लिवर कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर आदि शामिल हैं. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
मेषः
आज ग्रह गोचर कुछ ज्यादा अनुकूल नहीं है, इसलिए कोई भी बड़ा काम हाथ में लेने से पहले कई बार सोच विचार कर लें। आज आप के खर्चे सर से ऊपर जाएंगे, जो आपको तनाव भी दे सकते हैं। सेहत में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनेगी तथा आपके कुछ विरोधी आज सिर उठा सकते हैं। कोर्ट कचहरी से जुड़े मामलों में खर्च के बाद सफलता की स्थिति बनेगी। राजनीति और कानून से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन बेहद अच्छा रहने वाला है। आपको अपने कामों में सफलता मिलेगी। किसी व्यक्ति की बैंक गारंटी ना लें।
वृषः
आज ग्रहों की चाल आपको फायदा पहुंचाएगी और आपकी इनकम में स्पष्ट वृद्धि के योग बनेंगे। नौकरी में इंक्रीमेंट की बात चल सकती है, इसलिए अपनी तरफ से कोई भी ऐसा मौका ना दें, जो आपके विरुद्ध जाए। प्रेमी जातकों के लिए आज का दिन बहुत खुशगवार बीतेगा और अपने रिश्ते में बढ़ते प्रेम से आप अभिभूत हो उठेंगे। आपके प्रिय से संबंध खूबसूरत बनेंगे और आज उनके लिए कोई सरप्राइज़ प्लान भी कर सकते हैं। शादीशुदा लोगों को अपनी संतान से कोई बड़ा समाचार सुनने को मिल सकता है। बिज़नेस के लिए दिन सफलतादायक रहेगा।
आज परोपकार की भावना मन में जागेगी और लोगों की भलाई का कुछ काम करेंगे। आप जहां काम करते हैं, आज वहां आपकी ही चर्चा होगी। आपका काम भी बढ़िया होगा और खूब मन लगाकर मेहनत भी करेंगे। आप के सीनियर भी आपके पक्ष में नजर आएंगे। परिवार की जिम्मेदारियां भी आपका ध्यान आकर्षित करेंगी लेकिन इस सबके बावजूद आप अच्छा तालमेल बनाए रखने में कामयाब होंगे और अपनी लव लाइफ को इंजॉय करेंगे।
कर्कः
ग्रहों की चाल बता रही है कि आज भाग्य आपके पक्ष में रहेगा, जिससे आपको लगभग सभी कामों में सफलता हाथ लगेगी। आज किसी खूबसूरत जगह ट्रेवलिंग करने का मौका मिलेगा, जहां जाने से मन खुश हो जाएगा और जीवन में ताज़गी आएगी। सेहत में भी अच्छा सुधार देखने को मिलेगा। मान सम्मान भी बढ़ेगा और आज आर्थिक तौर पर भी कोई बढ़िया समाचार सुनने को मिल सकता है। आप कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने की ओर बढ़ सकते हैं तथा भाई बहनों के सहयोग से करियर में कोई बड़ा हाथ आजमाने की कोशिश कर सकते हैं।
सिंहः
ग्रहों का गोचर आपको अपने बारे में सोचने के लिए मजबूर करेगा। कुछ ऐसी बातें हैं, जो आपने किसी को नहीं बताई हैं। आज खुद से उन बातों पर चर्चा करेंगे। मानसिक तनाव तो बढ़ेगा और कुछ आर्थिक चिंताएं भी परेशान करेंगी लेकिन अंदर से आवाज आएगी कि आप सब कुछ कर सकते हैं और इसी वजह से आप कॉन्फिडेंट नजर आएंगे। घर की चुनौतियां आपको परेशान कर सकती हैं, फिर भी आप ईश्वर की कृपा के सहारे आज अपने हर क्षेत्र को अपना शत प्रतिशत योगदान देते नजर आएंगे। पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन बढ़िया रहेगा।
कन्याः
ग्रहों और सितारों की चाल आपके बिज़नेस के लिए आज कोई नई खुशखबरी लेकर आएगी। आज आपको कुछ नए लोगों से बिज़नेस डील मिल सकती हैं, जिससे आपका बिज़नेस चमक उठेगा। दांपत्य जीवन में भी तनावपूर्ण स्थितियों का अंत होगा और एक दूसरे के प्यार में सराबोर होने का मौका मिलेगा। जीवन साथी के नाम से कोई बिज़नेस करते हैं तो आप लाभ के हकदार बनेंगे और आज उनके नाम से कोई प्रॉपर्टी खरीदने में भी हाथ आजमा सकते हैं, जिसमें आपको लाभ मिलेगा। मन में हल्का क्रोध जरूर रहेगा, जो बीच-बीच में आपको परेशान करेगा लेकिन आप के चारों ओर की स्थितियां आपको आगे बढ़ने में मददगार बनेंगी।
तुलाः
आज ग्रह स्थितियां ज्यादा अनुकूल नहीं हैं, इसलिए धन का निवेश भूलकर भी ना करें, नहीं तो नुकसान में आ सकते हैं। यदि पहले से कहीं निवेश किया हुआ है तो आज उस निवेश का अच्छा फल आपके हाथ लग सकता है। आज खर्चों में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है लेकिन आप अपनी हिम्मत नहीं हारेंगे। नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं तो स्थिति पक्की होगी और यदि आप नौकरीपेशा हैं तो आज का दिन आपके नाम रहेगा। राशि का स्वामी पीड़ित होने से खानपान संबंधित परेशानियां सेहत में गिरावट का कारण बन सकती हैं। आज धन प्राप्ति के लिए कोई अलग रास्ता अपना सकते हैं। हालांकि से दिक्कत हो सकती है।
वृश्चिकः
ग्रहों की चाल बता रही है कि आज प्यार की हवा आपके चारों तरफ महकेगी, जिससे आपका दिन बड़ा खुशनुमा व्यतीत होगा। आज अपने प्रेम को खुलकर महसूस करेंगे और अपने साथी को खुश रखने की पूरी कोशिश करेंगे। यदि आप शादीशुदा हैं तो संतान से सुख मिलेगा। जमीन जायदाद से जुड़े मामले आपको सफलता प्रदान करेंगे और आज कोई पुरानी इच्छा पूरी हो सकती है। किसी लंबी ट्रैवलिंग की योजना बन सकती है। आज आपका भाग्य प्रबल रहेगा।
धनुः
ग्रहों की स्थिति आज आपके लिए कुछ खास लेकर आई है। दिल में खुशी की भावना रहेगी और परिवार का प्यार भी। आज परिवार की जरूरतों को समझेंगे और घरेलू जीवन पर आपका सारा फोकस रहेगा। आज अपनी मां जी के लिए कुछ करने की इच्छा होगी और हो सकता है उन्हें कोई बढ़िया सा गिफ्ट दें। नया वाहन या नए मकान की इच्छा तीव्र होगी और इस दिशा में प्रयास भी करेंगे। अपने काम को लेकर भी आप कोई कोताही नहीं बरतेंगे। मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए बहुत बढ़िया समय रहेगा।
मकरः
आज का दिन मेहनत करने के नाम जाएगा लेकिन पुरानी यादें ताजा करने का भी मौका मिलेगा। आज अपने दोस्तों से मिलने में समय लगाएंगे और खूब गपशप करेंगे। अपने भाई बहनों से कोई सुखद समाचार सुनने को मिलेगा, जो आपके चेहरे पर खुशी लेकर आएगा। किसी काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। अपने विरोधियों पर आज आप भारी पड़ेंगे और खुद को आत्मबल से भरपूर समझकर बिज़नेस में कोई बड़े डिसीजन भी लेंगे। आज का दिन आपकी काबिलियत को परखेगा।
कुंभ :
ग्रह स्थिति के आईने में आज का दिन आर्थिक चुनौतियों को कम करने वाला होगा। आपके पास कहीं ना कहीं से पैसा आएगा, जो आपको राहत की सांस लेने का मौका देगा। कर्ज में कमी आएगी लेकिन किसी बड़ी प्रॉपर्टी में हाथ डालने के लिए आप बैंक से लोन लेने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। आज अच्छा भोजन करने का सुख मिलेगा और परिवार वालों से भी कुछ महत्वपूर्ण विचार विमर्श करेंगे। आपकी बोलचाल में कुछ कड़वापन भी हो सकता है। इससे बचना जरूरी होगा। बिज़नेस में लाभ होगा।
मीनः
आज ग्रह मानो आपके साथ खड़े नजर आएंगे। जहां भी आप हाथ डालेंगे, वहीं सफलता मिलेगी। खुद पर कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा और सेहत भी मजबूत रहेगी। आज आप दांपत्य जीवन को भी बहुत अच्छे से जियेंगे और जीवन साथी के लिए कुछ खरीद कर लाएंगे, जो उनको बहुत खुशी देगा। बिज़नेस के लिए आज का दिन बहुत अच्छा देने वाला है क्योंकि आपको कोई बड़ा लाभ मिलने का मौका मिल सकता है। गवर्नमेंट सेक्टर से भी बड़ा बेनिफिट मिलने के योग बनेंगे। आज का दिन आपको आगे बढ़ने के कुछ नए मौके दे सकता है।
| मेषः आज ग्रह गोचर कुछ ज्यादा अनुकूल नहीं है, इसलिए कोई भी बड़ा काम हाथ में लेने से पहले कई बार सोच विचार कर लें। आज आप के खर्चे सर से ऊपर जाएंगे, जो आपको तनाव भी दे सकते हैं। सेहत में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनेगी तथा आपके कुछ विरोधी आज सिर उठा सकते हैं। कोर्ट कचहरी से जुड़े मामलों में खर्च के बाद सफलता की स्थिति बनेगी। राजनीति और कानून से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन बेहद अच्छा रहने वाला है। आपको अपने कामों में सफलता मिलेगी। किसी व्यक्ति की बैंक गारंटी ना लें। वृषः आज ग्रहों की चाल आपको फायदा पहुंचाएगी और आपकी इनकम में स्पष्ट वृद्धि के योग बनेंगे। नौकरी में इंक्रीमेंट की बात चल सकती है, इसलिए अपनी तरफ से कोई भी ऐसा मौका ना दें, जो आपके विरुद्ध जाए। प्रेमी जातकों के लिए आज का दिन बहुत खुशगवार बीतेगा और अपने रिश्ते में बढ़ते प्रेम से आप अभिभूत हो उठेंगे। आपके प्रिय से संबंध खूबसूरत बनेंगे और आज उनके लिए कोई सरप्राइज़ प्लान भी कर सकते हैं। शादीशुदा लोगों को अपनी संतान से कोई बड़ा समाचार सुनने को मिल सकता है। बिज़नेस के लिए दिन सफलतादायक रहेगा। आज परोपकार की भावना मन में जागेगी और लोगों की भलाई का कुछ काम करेंगे। आप जहां काम करते हैं, आज वहां आपकी ही चर्चा होगी। आपका काम भी बढ़िया होगा और खूब मन लगाकर मेहनत भी करेंगे। आप के सीनियर भी आपके पक्ष में नजर आएंगे। परिवार की जिम्मेदारियां भी आपका ध्यान आकर्षित करेंगी लेकिन इस सबके बावजूद आप अच्छा तालमेल बनाए रखने में कामयाब होंगे और अपनी लव लाइफ को इंजॉय करेंगे। कर्कः ग्रहों की चाल बता रही है कि आज भाग्य आपके पक्ष में रहेगा, जिससे आपको लगभग सभी कामों में सफलता हाथ लगेगी। आज किसी खूबसूरत जगह ट्रेवलिंग करने का मौका मिलेगा, जहां जाने से मन खुश हो जाएगा और जीवन में ताज़गी आएगी। सेहत में भी अच्छा सुधार देखने को मिलेगा। मान सम्मान भी बढ़ेगा और आज आर्थिक तौर पर भी कोई बढ़िया समाचार सुनने को मिल सकता है। आप कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने की ओर बढ़ सकते हैं तथा भाई बहनों के सहयोग से करियर में कोई बड़ा हाथ आजमाने की कोशिश कर सकते हैं। सिंहः ग्रहों का गोचर आपको अपने बारे में सोचने के लिए मजबूर करेगा। कुछ ऐसी बातें हैं, जो आपने किसी को नहीं बताई हैं। आज खुद से उन बातों पर चर्चा करेंगे। मानसिक तनाव तो बढ़ेगा और कुछ आर्थिक चिंताएं भी परेशान करेंगी लेकिन अंदर से आवाज आएगी कि आप सब कुछ कर सकते हैं और इसी वजह से आप कॉन्फिडेंट नजर आएंगे। घर की चुनौतियां आपको परेशान कर सकती हैं, फिर भी आप ईश्वर की कृपा के सहारे आज अपने हर क्षेत्र को अपना शत प्रतिशत योगदान देते नजर आएंगे। पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन बढ़िया रहेगा। कन्याः ग्रहों और सितारों की चाल आपके बिज़नेस के लिए आज कोई नई खुशखबरी लेकर आएगी। आज आपको कुछ नए लोगों से बिज़नेस डील मिल सकती हैं, जिससे आपका बिज़नेस चमक उठेगा। दांपत्य जीवन में भी तनावपूर्ण स्थितियों का अंत होगा और एक दूसरे के प्यार में सराबोर होने का मौका मिलेगा। जीवन साथी के नाम से कोई बिज़नेस करते हैं तो आप लाभ के हकदार बनेंगे और आज उनके नाम से कोई प्रॉपर्टी खरीदने में भी हाथ आजमा सकते हैं, जिसमें आपको लाभ मिलेगा। मन में हल्का क्रोध जरूर रहेगा, जो बीच-बीच में आपको परेशान करेगा लेकिन आप के चारों ओर की स्थितियां आपको आगे बढ़ने में मददगार बनेंगी। तुलाः आज ग्रह स्थितियां ज्यादा अनुकूल नहीं हैं, इसलिए धन का निवेश भूलकर भी ना करें, नहीं तो नुकसान में आ सकते हैं। यदि पहले से कहीं निवेश किया हुआ है तो आज उस निवेश का अच्छा फल आपके हाथ लग सकता है। आज खर्चों में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है लेकिन आप अपनी हिम्मत नहीं हारेंगे। नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं तो स्थिति पक्की होगी और यदि आप नौकरीपेशा हैं तो आज का दिन आपके नाम रहेगा। राशि का स्वामी पीड़ित होने से खानपान संबंधित परेशानियां सेहत में गिरावट का कारण बन सकती हैं। आज धन प्राप्ति के लिए कोई अलग रास्ता अपना सकते हैं। हालांकि से दिक्कत हो सकती है। वृश्चिकः ग्रहों की चाल बता रही है कि आज प्यार की हवा आपके चारों तरफ महकेगी, जिससे आपका दिन बड़ा खुशनुमा व्यतीत होगा। आज अपने प्रेम को खुलकर महसूस करेंगे और अपने साथी को खुश रखने की पूरी कोशिश करेंगे। यदि आप शादीशुदा हैं तो संतान से सुख मिलेगा। जमीन जायदाद से जुड़े मामले आपको सफलता प्रदान करेंगे और आज कोई पुरानी इच्छा पूरी हो सकती है। किसी लंबी ट्रैवलिंग की योजना बन सकती है। आज आपका भाग्य प्रबल रहेगा। धनुः ग्रहों की स्थिति आज आपके लिए कुछ खास लेकर आई है। दिल में खुशी की भावना रहेगी और परिवार का प्यार भी। आज परिवार की जरूरतों को समझेंगे और घरेलू जीवन पर आपका सारा फोकस रहेगा। आज अपनी मां जी के लिए कुछ करने की इच्छा होगी और हो सकता है उन्हें कोई बढ़िया सा गिफ्ट दें। नया वाहन या नए मकान की इच्छा तीव्र होगी और इस दिशा में प्रयास भी करेंगे। अपने काम को लेकर भी आप कोई कोताही नहीं बरतेंगे। मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए बहुत बढ़िया समय रहेगा। मकरः आज का दिन मेहनत करने के नाम जाएगा लेकिन पुरानी यादें ताजा करने का भी मौका मिलेगा। आज अपने दोस्तों से मिलने में समय लगाएंगे और खूब गपशप करेंगे। अपने भाई बहनों से कोई सुखद समाचार सुनने को मिलेगा, जो आपके चेहरे पर खुशी लेकर आएगा। किसी काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। अपने विरोधियों पर आज आप भारी पड़ेंगे और खुद को आत्मबल से भरपूर समझकर बिज़नेस में कोई बड़े डिसीजन भी लेंगे। आज का दिन आपकी काबिलियत को परखेगा। कुंभ : ग्रह स्थिति के आईने में आज का दिन आर्थिक चुनौतियों को कम करने वाला होगा। आपके पास कहीं ना कहीं से पैसा आएगा, जो आपको राहत की सांस लेने का मौका देगा। कर्ज में कमी आएगी लेकिन किसी बड़ी प्रॉपर्टी में हाथ डालने के लिए आप बैंक से लोन लेने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। आज अच्छा भोजन करने का सुख मिलेगा और परिवार वालों से भी कुछ महत्वपूर्ण विचार विमर्श करेंगे। आपकी बोलचाल में कुछ कड़वापन भी हो सकता है। इससे बचना जरूरी होगा। बिज़नेस में लाभ होगा। मीनः आज ग्रह मानो आपके साथ खड़े नजर आएंगे। जहां भी आप हाथ डालेंगे, वहीं सफलता मिलेगी। खुद पर कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा और सेहत भी मजबूत रहेगी। आज आप दांपत्य जीवन को भी बहुत अच्छे से जियेंगे और जीवन साथी के लिए कुछ खरीद कर लाएंगे, जो उनको बहुत खुशी देगा। बिज़नेस के लिए आज का दिन बहुत अच्छा देने वाला है क्योंकि आपको कोई बड़ा लाभ मिलने का मौका मिल सकता है। गवर्नमेंट सेक्टर से भी बड़ा बेनिफिट मिलने के योग बनेंगे। आज का दिन आपको आगे बढ़ने के कुछ नए मौके दे सकता है। |
रूसी स्वायत्त निर्जन पानी के नीचे के वाहन वाइटाज़-डी का आधुनिकीकरण हुआ है, जिसने बड़ी गहराई पर काम करने के लिए नई क्षमताएँ प्राप्त की हैं। फाउंडेशन फॉर एडवांस्ड स्टडी (एफपीआई) के महानिदेशक एंड्री ग्रिगोरिएव ने इस बारे में बात की।
उन्नत अनुसंधान फाउंडेशन के हितों में रूसी गहरे समुद्र में वाहन "वाइटाज़-डी" को सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो "रूबिन" द्वारा विकसित किया गया था। विदेशी पानी के नीचे के ड्रोन के विपरीत, रूसी एक कृत्रिम बुद्धि के तत्वों का उपयोग करके पूरी तरह से स्वायत्त निर्जन पानी के नीचे का वाहन है। "वाइटाज़-डी" गहरे समुद्र में गोता लगाने के परिसर का हिस्सा है, जहाँ, इसके अलावा, एक गहरे समुद्र के तल का स्टेशन और नियंत्रण कक्ष उपकरण है।
2020 में, 8 मई को, विटाज़ मारियाना ट्रेंच के निचले हिस्से में डूब गया, जो 10 किमी 28 मीटर की गहराई तक पहुँच गया। विश्व महासागर के सबसे गहरे बेसिन में रहने के तीन घंटे के दौरान, रूसी तंत्र ने समुद्र तल की मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियो फिल्मिंग की, और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध में विजय की 75 वीं वर्षगांठ के लिए समर्पित एक पताका स्थापित की। मेरियाना गर्त।
अब डिवाइस का आधुनिकीकरण हो गया है, जिसके विवरण का खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाता है कि इसकी कार्यक्षमता का विस्तार किया गया है, जिससे अध्ययन स्थल पर निरंतर काम करने की अनुमति मिलती है। पिछले साल, डिवाइस ने प्रशांत महासागर के गहरे पानी में परीक्षणों की एक श्रृंखला पूरी की, इसकी कार्यक्षमता की पूरी तरह से पुष्टि की।
इसकी कार्यक्षमता के विस्तार के संदर्भ में निर्जन पानी के नीचे रोबोटिक कॉम्प्लेक्स "वाइटाज़-डी" का आधुनिकीकरण किया गया था। वास्तव में, अब इसमें दो उपकरण शामिल हैं, जो किसी दिए गए क्षेत्र में निरंतर काम करने की अनुमति देता है।
- जाता है TASS ग्रिगोरिएव के शब्द।
| रूसी स्वायत्त निर्जन पानी के नीचे के वाहन वाइटाज़-डी का आधुनिकीकरण हुआ है, जिसने बड़ी गहराई पर काम करने के लिए नई क्षमताएँ प्राप्त की हैं। फाउंडेशन फॉर एडवांस्ड स्टडी के महानिदेशक एंड्री ग्रिगोरिएव ने इस बारे में बात की। उन्नत अनुसंधान फाउंडेशन के हितों में रूसी गहरे समुद्र में वाहन "वाइटाज़-डी" को सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो "रूबिन" द्वारा विकसित किया गया था। विदेशी पानी के नीचे के ड्रोन के विपरीत, रूसी एक कृत्रिम बुद्धि के तत्वों का उपयोग करके पूरी तरह से स्वायत्त निर्जन पानी के नीचे का वाहन है। "वाइटाज़-डी" गहरे समुद्र में गोता लगाने के परिसर का हिस्सा है, जहाँ, इसके अलावा, एक गहरे समुद्र के तल का स्टेशन और नियंत्रण कक्ष उपकरण है। दो हज़ार बीस में, आठ मई को, विटाज़ मारियाना ट्रेंच के निचले हिस्से में डूब गया, जो दस किमी अट्ठाईस मीटर की गहराई तक पहुँच गया। विश्व महासागर के सबसे गहरे बेसिन में रहने के तीन घंटे के दौरान, रूसी तंत्र ने समुद्र तल की मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियो फिल्मिंग की, और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध में विजय की पचहत्तर वीं वर्षगांठ के लिए समर्पित एक पताका स्थापित की। मेरियाना गर्त। अब डिवाइस का आधुनिकीकरण हो गया है, जिसके विवरण का खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाता है कि इसकी कार्यक्षमता का विस्तार किया गया है, जिससे अध्ययन स्थल पर निरंतर काम करने की अनुमति मिलती है। पिछले साल, डिवाइस ने प्रशांत महासागर के गहरे पानी में परीक्षणों की एक श्रृंखला पूरी की, इसकी कार्यक्षमता की पूरी तरह से पुष्टि की। इसकी कार्यक्षमता के विस्तार के संदर्भ में निर्जन पानी के नीचे रोबोटिक कॉम्प्लेक्स "वाइटाज़-डी" का आधुनिकीकरण किया गया था। वास्तव में, अब इसमें दो उपकरण शामिल हैं, जो किसी दिए गए क्षेत्र में निरंतर काम करने की अनुमति देता है। - जाता है TASS ग्रिगोरिएव के शब्द। |
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दिल्ली चुनाव और भाजपा : दो घंटे, दो सौ बातें, लेकिन जन मुद्दों पर एक शब्द नहीं!
| क्या होगा कमलनाथ का आखिरी दांव? मध्यप्रदेश : पिक्चर अभी बाक़ी है, कांग्रेस ही नहीं भाजपा के माथे पर भी पसीना! नदी घाटियों में नियोजन : विकास या विनाश? दिल्ली चुनाव और भाजपा : दो घंटे, दो सौ बातें, लेकिन जन मुद्दों पर एक शब्द नहीं! |
इंदौर। भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मप्र में भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही हरा सकती है। यदि हमने संगठन की गलतियां ठीक नहीं कीं तो भाजपा ही भाजपा को हरा देगी। उनका यह बयान उस वक्त आया है जब मप्र में भाजपा अपने ही नेताओं को मनाने में लगी है।
हाल ही में मध्यप्रदेश में पूर्व मंत्री दीपक जोशी, वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन और पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत के बगावती तेवर से भाजपा में सियासत गरमा गई है। विजयवर्गीय ने एक समाचार कार्यक्रम में कहा कि कांग्रेस में दम नहीं कि वह भाजपा को हरा सके। यह बात सही है कि हममें कुछ कमियां हैं, हम उनको ठीक कर रहे हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि आज की तारीख में मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ही जीतेगी। इस दौरान विजयवर्गीय ने नाइट कल्चर पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नाइट कल्चर के नाम पर जो नशा हो रहा है और संस्कृति विकृति में बदल रही है, उसका हमने विरोध किया है और करते रहेंगे। हम भी पहले खानपान के लिए जाते थे। राजबाड़ा स्थित अन्ना की पान की दुकान पर दरवाजा ही नहीं था। हम वहां जाकर पान-गुटखा खाते थे। जब पीएससी की तैयारी कर रहे थे तो स्टेशन पर पोहे खाने जाते थे। रात 2 बजे सराफा बंद हो जाता था तो सीधे स्टेशन चले जाते थे। इंदौर के हर नागरिक ने इन जगहों का आनंद लिया है। अब नाइट कल्चर के नाम पर जो भी हो रहा है वह गलत है और उसे रोकना ही होगा।
भोपाल। पूर्व मंत्री दीपक जोशी के भाजपा छोडक़र कांग्रेस जॉइन करने के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा का बयान सामने आया है। शर्मा ने कहा कि प्रदेश में संगठन अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से नुकसान हो रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने निवास पर मीडिया से बातचीत में कहा कि सचमुच में कहीं ना कहीं संगठन को जिन कामों को प्राथमिकता देना चाहिए, उनकी प्राथमिकताएं निर्धारित नहीं कर पा रहा है। सरकार में बैठे लोगों को भी कार्यकर्ताओं के कामों को जितनी गंभीरता से लेना चाहिए, उतनी गंभीरता से वे नहीं ले रहे हैं। इसका नुकसान हो रहा है। शर्मा ने कहा कि जहां भाजपा में अब हाईकमान जैसा बचा ही नहीं है। पार्टी में कोई हाईकमान है ही नहीं। पहले कुशाभाऊ ठाकरे और प्यारेलाल खंडेलवाल जैसे नेता थे, जो अंतिम निर्णय लेते थे। वे त्वरित विचार करके निर्णय लेते थे। उनके आदेश माने जाते थे और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने का प्रयत्न होता था।
| इंदौर। भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मप्र में भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही हरा सकती है। यदि हमने संगठन की गलतियां ठीक नहीं कीं तो भाजपा ही भाजपा को हरा देगी। उनका यह बयान उस वक्त आया है जब मप्र में भाजपा अपने ही नेताओं को मनाने में लगी है। हाल ही में मध्यप्रदेश में पूर्व मंत्री दीपक जोशी, वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन और पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत के बगावती तेवर से भाजपा में सियासत गरमा गई है। विजयवर्गीय ने एक समाचार कार्यक्रम में कहा कि कांग्रेस में दम नहीं कि वह भाजपा को हरा सके। यह बात सही है कि हममें कुछ कमियां हैं, हम उनको ठीक कर रहे हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि आज की तारीख में मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ही जीतेगी। इस दौरान विजयवर्गीय ने नाइट कल्चर पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नाइट कल्चर के नाम पर जो नशा हो रहा है और संस्कृति विकृति में बदल रही है, उसका हमने विरोध किया है और करते रहेंगे। हम भी पहले खानपान के लिए जाते थे। राजबाड़ा स्थित अन्ना की पान की दुकान पर दरवाजा ही नहीं था। हम वहां जाकर पान-गुटखा खाते थे। जब पीएससी की तैयारी कर रहे थे तो स्टेशन पर पोहे खाने जाते थे। रात दो बजे सराफा बंद हो जाता था तो सीधे स्टेशन चले जाते थे। इंदौर के हर नागरिक ने इन जगहों का आनंद लिया है। अब नाइट कल्चर के नाम पर जो भी हो रहा है वह गलत है और उसे रोकना ही होगा। भोपाल। पूर्व मंत्री दीपक जोशी के भाजपा छोडक़र कांग्रेस जॉइन करने के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा का बयान सामने आया है। शर्मा ने कहा कि प्रदेश में संगठन अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से नुकसान हो रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने निवास पर मीडिया से बातचीत में कहा कि सचमुच में कहीं ना कहीं संगठन को जिन कामों को प्राथमिकता देना चाहिए, उनकी प्राथमिकताएं निर्धारित नहीं कर पा रहा है। सरकार में बैठे लोगों को भी कार्यकर्ताओं के कामों को जितनी गंभीरता से लेना चाहिए, उतनी गंभीरता से वे नहीं ले रहे हैं। इसका नुकसान हो रहा है। शर्मा ने कहा कि जहां भाजपा में अब हाईकमान जैसा बचा ही नहीं है। पार्टी में कोई हाईकमान है ही नहीं। पहले कुशाभाऊ ठाकरे और प्यारेलाल खंडेलवाल जैसे नेता थे, जो अंतिम निर्णय लेते थे। वे त्वरित विचार करके निर्णय लेते थे। उनके आदेश माने जाते थे और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने का प्रयत्न होता था। |
जिस भारतीय बाजार में दुनिया की जानी-मानी कार निर्माता कंपनियों को बड़ी संभावनाएं दिख रही थीं, इस उसके साल हालात काफी हद तक बदल चुके हैं। महंगे ईंधन, महंगे ऑटो लोन और आर्थिक सुस्ती के चलते गत दिसंबर में कारों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले करीब 12. 5 फीसदी गिरी है। इसे देखते हुए वाहन निर्माताओं के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सिआम) ने चालू वित्त वर्ष में कारों की बिक्री में वृद्धि के अनुमान को घटाकर शून्य से एक फीसदी के बीच कर दिया है, जो गत नौ वर्षों में सबसे कम है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र को सुस्ती की मार से उबारने के लिए सिआम ने वाहनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती के साथ-साथ ऑटो मिशन प्लान को दस साल बढ़ाने की मांग की है। सिआम के अध्यक्ष एस शांडिल्य का कहना है कि अगर सरकार की ओर से पूरी मदद नहीं मिलती है तो मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ऑटोमोबाइल उद्योग के आगामी मार्च तक भी उबरने के आसार नहीं हैं। पिछले बजट में सरकार ने वाहनों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था, जिसे कम करने की जरूरत है। कॉमर्शियल वाहनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
गौरतलब है कि फिलहाल वाहनों पर छह फीसदी से लेकर 27 फीसदी तक उत्पाद शुल्क लगता है। बुधवार को सिआम की ओर से जारी वाहनों की बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक कारों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0. 33 फीसदी कम रही है। गत अगस्त में भी कारों की बिक्री में 18 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में कारों की बिक्री में 9-11 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान था, जिसे बाद में घटाते हुए 1-3 फीसदी किया गया था।
कार निर्माता कंपनियों की ओर से दिए जा रहे तमाम ऑफर और छूट के बावजूद कारों की बिक्री सुस्त है। जिसके चलते ऑटोमोबाइल मिशन प्लान (एएमपी) के तहत वर्ष 2016 तक 145 अरब डॉलर के सालाना कारोबार का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
| जिस भारतीय बाजार में दुनिया की जानी-मानी कार निर्माता कंपनियों को बड़ी संभावनाएं दिख रही थीं, इस उसके साल हालात काफी हद तक बदल चुके हैं। महंगे ईंधन, महंगे ऑटो लोन और आर्थिक सुस्ती के चलते गत दिसंबर में कारों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले करीब बारह. पाँच फीसदी गिरी है। इसे देखते हुए वाहन निर्माताओं के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने चालू वित्त वर्ष में कारों की बिक्री में वृद्धि के अनुमान को घटाकर शून्य से एक फीसदी के बीच कर दिया है, जो गत नौ वर्षों में सबसे कम है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र को सुस्ती की मार से उबारने के लिए सिआम ने वाहनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती के साथ-साथ ऑटो मिशन प्लान को दस साल बढ़ाने की मांग की है। सिआम के अध्यक्ष एस शांडिल्य का कहना है कि अगर सरकार की ओर से पूरी मदद नहीं मिलती है तो मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ऑटोमोबाइल उद्योग के आगामी मार्च तक भी उबरने के आसार नहीं हैं। पिछले बजट में सरकार ने वाहनों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था, जिसे कम करने की जरूरत है। कॉमर्शियल वाहनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती करना सबसे ज्यादा जरूरी है। गौरतलब है कि फिलहाल वाहनों पर छह फीसदी से लेकर सत्ताईस फीसदी तक उत्पाद शुल्क लगता है। बुधवार को सिआम की ओर से जारी वाहनों की बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक कारों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले शून्य. तैंतीस फीसदी कम रही है। गत अगस्त में भी कारों की बिक्री में अट्ठारह फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में कारों की बिक्री में नौ-ग्यारह फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान था, जिसे बाद में घटाते हुए एक-तीन फीसदी किया गया था। कार निर्माता कंपनियों की ओर से दिए जा रहे तमाम ऑफर और छूट के बावजूद कारों की बिक्री सुस्त है। जिसके चलते ऑटोमोबाइल मिशन प्लान के तहत वर्ष दो हज़ार सोलह तक एक सौ पैंतालीस अरब डॉलर के सालाना कारोबार का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
मुग़ल ज़माने में खोदा गया था खान के अन्दर नमक की ईंटों की बनी छोटी-सी मस्जिद खेवड़े के पत्थरीले नमक के बने कंदील (लैम्प) बाहर से नमक कोह के पहाड़ों में खेवड़ा नमक खान का नज़ारा खेवड़ा नमक खान (उर्दूः, खेवड़ा नमक की कान; अंग्रेज़ीः Khewra Salt Mines) पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के झेलम ज़िले में राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद से १६० किमी दूर स्थित नमक की एक प्रसिद्ध खान है जहाँ से सदियों से सेंधा नमक खोदकर निकाला जा रहा है। यह नमक कोह (नमक पर्वतों) की निचली पहाड़ियों में स्थित हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में नमक की सबसे पुरानी लगातार उत्पादन करती आ रही नमक की खानों में से हैं। इसमें सेंधे नमक का बहुत ही बड़ा भण्डार है जिसकी तादाद २२ करोड़ टन अनुमानित की गई है। हर साल इसमें से ४.६५ लाख टन निकाला जाता है और इस दर पर यह खान अभी और ५०० वर्षों तक नमक दे सकती है। यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नमक की खान मानी जाती है।, Mark Bitterman, Random House Digital, Inc., 2010, ISBN 978-1-58008-262-4,... मुसलमानों की इबादत गाह को मस्जिद कहते हैं। इसे नमाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है मुसलमानों के प्रारंभिक काल में मस्जिदे नबवी को विदेश से आने वाले ओफ़ोद से मुलाकात और चर्चा के लिए भी इस्तेमाल किया गया था। मस्जिद से मुसलमानों की पहली विश्वविद्यालयों (विश्वविद्यालयों) ने भी जन्म लिया है। इसके अलावा इस्लामी वास्तुकला भी मुख्य रूप से मस्जिदों से विकास हुई है। .
खेवड़ा नमक खान और मस्जिद आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
खेवड़ा नमक खान 17 संबंध है और मस्जिद 21 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (17 + 21)।
यह लेख खेवड़ा नमक खान और मस्जिद के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मुग़ल ज़माने में खोदा गया था खान के अन्दर नमक की ईंटों की बनी छोटी-सी मस्जिद खेवड़े के पत्थरीले नमक के बने कंदील बाहर से नमक कोह के पहाड़ों में खेवड़ा नमक खान का नज़ारा खेवड़ा नमक खान पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के झेलम ज़िले में राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद से एक सौ साठ किमी दूर स्थित नमक की एक प्रसिद्ध खान है जहाँ से सदियों से सेंधा नमक खोदकर निकाला जा रहा है। यह नमक कोह की निचली पहाड़ियों में स्थित हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में नमक की सबसे पुरानी लगातार उत्पादन करती आ रही नमक की खानों में से हैं। इसमें सेंधे नमक का बहुत ही बड़ा भण्डार है जिसकी तादाद बाईस करोड़ टन अनुमानित की गई है। हर साल इसमें से चार.पैंसठ लाख टन निकाला जाता है और इस दर पर यह खान अभी और पाँच सौ वर्षों तक नमक दे सकती है। यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नमक की खान मानी जाती है।, Mark Bitterman, Random House Digital, Inc., दो हज़ार दस, ISBN नौअठहत्तर जनवरी पाँच हज़ार आठ सौआठ-दो सौ बासठ-चार,... मुसलमानों की इबादत गाह को मस्जिद कहते हैं। इसे नमाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है मुसलमानों के प्रारंभिक काल में मस्जिदे नबवी को विदेश से आने वाले ओफ़ोद से मुलाकात और चर्चा के लिए भी इस्तेमाल किया गया था। मस्जिद से मुसलमानों की पहली विश्वविद्यालयों ने भी जन्म लिया है। इसके अलावा इस्लामी वास्तुकला भी मुख्य रूप से मस्जिदों से विकास हुई है। . खेवड़ा नमक खान और मस्जिद आम में शून्य बातें हैं । खेवड़ा नमक खान सत्रह संबंध है और मस्जिद इक्कीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख खेवड़ा नमक खान और मस्जिद के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
रायपुर। देशभर में अन्नदाता कोरोना की मार से सहमे हुए हैं. ऐसे में किसानों पर फर्टिलाइजर की बढ़ती कीमतें वार कर रही हैं. जिससे किसानों को परेशानियां हो रही है. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है. मंत्री रविंद्र चौबे ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय उर्वरक मंत्री को पत्र लिखा है. साथ ही फर्टिलाइजर की बढ़ी कीमतें कम करने की मांग की है.
इस दौरान रविंद्र चौबे ने कहा कि पहली बार खाद की कीमतों में वृद्धि हुई है. प्रधानमंत्री ने कहा था किसानों की आय दोगुनी की जाएगी, लेकिन खाद की कीमतें दोगुनी हो गई है. ऐसे में रविंद्र चौबे ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय कृषि और केंद्रीय उर्वरक मंत्री को पत्र लिखा है.
इसके अलावा रविंद्र चौबे ने देश के अन्य राज्यों के कृषि मंत्रियों को भी पत्र लिखा है. उनसे अपील की है कि खाद की कीमतों में कमी के लिए केंद्र को चिट्ठी लिखें, अगर खाद की कीमतें कम नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान होगा.
बता दें कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में PM Kisan Yojana लांच की थी. केंद्रीय वित्त मंत्री और पीएम मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा की थी. किसानों को मिलने वाली आर्थिक मदद बढ़ाए जाने की बात कही थी. जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने के आसार थे, लेकिन फर्टिलाइजर की बढ़ती कीमतें किसानों को निराश कर रही हैं.
| रायपुर। देशभर में अन्नदाता कोरोना की मार से सहमे हुए हैं. ऐसे में किसानों पर फर्टिलाइजर की बढ़ती कीमतें वार कर रही हैं. जिससे किसानों को परेशानियां हो रही है. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है. मंत्री रविंद्र चौबे ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय उर्वरक मंत्री को पत्र लिखा है. साथ ही फर्टिलाइजर की बढ़ी कीमतें कम करने की मांग की है. इस दौरान रविंद्र चौबे ने कहा कि पहली बार खाद की कीमतों में वृद्धि हुई है. प्रधानमंत्री ने कहा था किसानों की आय दोगुनी की जाएगी, लेकिन खाद की कीमतें दोगुनी हो गई है. ऐसे में रविंद्र चौबे ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय कृषि और केंद्रीय उर्वरक मंत्री को पत्र लिखा है. इसके अलावा रविंद्र चौबे ने देश के अन्य राज्यों के कृषि मंत्रियों को भी पत्र लिखा है. उनसे अपील की है कि खाद की कीमतों में कमी के लिए केंद्र को चिट्ठी लिखें, अगर खाद की कीमतें कम नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान होगा. बता दें कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए साल दो हज़ार अट्ठारह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में PM Kisan Yojana लांच की थी. केंद्रीय वित्त मंत्री और पीएम मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा की थी. किसानों को मिलने वाली आर्थिक मदद बढ़ाए जाने की बात कही थी. जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने के आसार थे, लेकिन फर्टिलाइजर की बढ़ती कीमतें किसानों को निराश कर रही हैं. |
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी ने कहा कि KYC (नो योर कैंडिडेट ऐप) का स्थानीय स्थल पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए।
UP Election 2022: उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए कई तरह के ऐप बनाये हैं। जिसके माध्यम से मतदाता हर तरह की जानकारियों को हासिल कर सकता है। निर्वाचन आयोग ने इन सभी ऐप्स के प्रचार प्रसार को तेज करने को कहा है।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी ने कहा कि KYC (नो योर कैंडिडेट ऐप) का स्थानीय स्थल पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, जिससे आम जनता अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों के संबंध में सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सके तथा प्रत्याशी के आचरण को ध्यान में रखकर अपना मत दें। C-vigil ऐप, वोटर हेल्प लाइन ऐप, PwD ऐप इत्यादि समस्त ऐप का जन सामान्य में व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाकर जनपद की थीम, आइकॉन का संदेश मतदाताओं तक पहुंचाकर कम मतदान वाले बूथों का मतदान प्रतिशत बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि मीडिया को निर्वाचन सम्बंधी समस्त सूचनाएं समय से उपलब्ध करायी जाय।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी ने विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2022 की तैयारियों के मद्देनज़र शिकायत, सुगम्य मतदान, मीडिया, एनवीडी, स्वीप से संबंधित बिंदुओं पर समस्त उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, समस्त रिटर्निंग ऑफिसर, नोडल अधिकारी शिकायत, नोडल अधिकारी स्वीप, दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, जिला सूचना अधिकारियों, एनएसएस एवं स्काउट के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि अअपने-अपने जनपदों में निर्वाचन कार्याे से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम (DCC) को 24 घंटे चालू रखें, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता तथा कोविड-19 के उल्लंघन की दशा में की गई कार्यवाही का प्रिंट तथा विवरण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भेजकर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाय। साथ ही जनपद के ट्विटर हैंडल, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम इत्यादि पर भी पोस्ट किया जाय और भारत निर्वाचन आयोग तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भी टैग किया जाए।
जनपद स्तरीय सोशल मीडिया अकाउंट पर किए जा रहे पोस्ट की स्थिति तथा फॉलोअर्स की संख्या पर विशेष ध्यान दें। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक चैनल तथा सोशल मीडिया पर निर्वाचन संबंधी सूचनाओं पर कड़ी निगरानी रखी जाए, जहां कहीं आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की खबर मिले तत्काल संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाय।
| अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी ने कहा कि KYC का स्थानीय स्थल पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। UP Election दो हज़ार बाईस: उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए कई तरह के ऐप बनाये हैं। जिसके माध्यम से मतदाता हर तरह की जानकारियों को हासिल कर सकता है। निर्वाचन आयोग ने इन सभी ऐप्स के प्रचार प्रसार को तेज करने को कहा है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी ने कहा कि KYC का स्थानीय स्थल पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, जिससे आम जनता अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों के संबंध में सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सके तथा प्रत्याशी के आचरण को ध्यान में रखकर अपना मत दें। C-vigil ऐप, वोटर हेल्प लाइन ऐप, PwD ऐप इत्यादि समस्त ऐप का जन सामान्य में व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाकर जनपद की थीम, आइकॉन का संदेश मतदाताओं तक पहुंचाकर कम मतदान वाले बूथों का मतदान प्रतिशत बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि मीडिया को निर्वाचन सम्बंधी समस्त सूचनाएं समय से उपलब्ध करायी जाय। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ ब्रह्मदेव राम तिवारी ने विधानसभा सामान्य निर्वाचन-दो हज़ार बाईस की तैयारियों के मद्देनज़र शिकायत, सुगम्य मतदान, मीडिया, एनवीडी, स्वीप से संबंधित बिंदुओं पर समस्त उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, समस्त रिटर्निंग ऑफिसर, नोडल अधिकारी शिकायत, नोडल अधिकारी स्वीप, दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, जिला सूचना अधिकारियों, एनएसएस एवं स्काउट के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि अअपने-अपने जनपदों में निर्वाचन कार्याे से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम को चौबीस घंटाटे चालू रखें, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता तथा कोविड-उन्नीस के उल्लंघन की दशा में की गई कार्यवाही का प्रिंट तथा विवरण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भेजकर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाय। साथ ही जनपद के ट्विटर हैंडल, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम इत्यादि पर भी पोस्ट किया जाय और भारत निर्वाचन आयोग तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भी टैग किया जाए। जनपद स्तरीय सोशल मीडिया अकाउंट पर किए जा रहे पोस्ट की स्थिति तथा फॉलोअर्स की संख्या पर विशेष ध्यान दें। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक चैनल तथा सोशल मीडिया पर निर्वाचन संबंधी सूचनाओं पर कड़ी निगरानी रखी जाए, जहां कहीं आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की खबर मिले तत्काल संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाय। |
भारत में भीख मांगना जुर्म है। इसके लिए 3-10 साल की कैद है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनावों में धांधली से गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए।
पत्रकार बरखा दत्त ने टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी पर एक बार फिर से हमला बोला है।
आप प्रवक्ता आशुतोष ने गुरुवार को दावा किया कि भाजपा के एक सदस्य ने उन्हें मारने की धमकी दी है।
| भारत में भीख मांगना जुर्म है। इसके लिए तीन-दस साल की कैद है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनावों में धांधली से गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए। पत्रकार बरखा दत्त ने टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी पर एक बार फिर से हमला बोला है। आप प्रवक्ता आशुतोष ने गुरुवार को दावा किया कि भाजपा के एक सदस्य ने उन्हें मारने की धमकी दी है। |
सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव।
न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः॥
"अर्जुन ने कहाः आप भगवान्, परम-धाम, पवित्रतम परम सत्य हैं। आप शाश्वत, दिव्य आदि पुरुष, अजन्मा तथा महानतम हैं। नारद, असित देवल तथा व्यास जैसे समस्त महामुनि आपके विषय में इस सत्य की पुष्टि करते हैंऔर अब आप स्वयं मुझसे इसी कीघोषणा कर रहे हैं। हे कृष्ण! आपनेजो कुछ कहा है उसे पूर्णरूप से मैं सत्य मानता हूँ। हे प्रभु! न तो देवता ओर न असुर ही आपके व्यक्तित्व को समझ सकते हैं ।"
भगवान् से भगवद्गीता सुनने के बाद अर्जुन ने कृष्ण को परम ब्रह्म स्वीकार कर लिया। प्रत्येक जीव ब्रह्म है, लेकिन परम पुरुषोत्तम भगवान् परम ब्रह्म हैं। परम् धाम का अर्थ है कि वे सबों के परम आश्रय या धाम हैं। पवित्रम् का अर्थ हे कि वे शुद्ध हैं ओर भौतिक कल्मष से अरंजितहैं। पुरुषम् का अर्थ हे कि वे परम भोक्ता हैं, शाश्र्वतम् अर्थात्सनातन; दिव्यम् अर्थात् दिव्य :आदि देवम्-भगवान्; अजम्-अजन्मा तथा विभुम् अर्थात महानतम हैं।
कोई यह सोच सकता है कि चूँकि कृष्ण अर्जुन के मित्र थे, अतएव अर्जुन यह सब चाटुकारिता के रूप में कह रहा था । लेकिन अर्जुन भगवद्गीता के पाठकों के मन से इस प्रकार के सन्देह को दूर करने के लिए अगले श्लोक में इस प्रशंसा के पुष्टि करता है, जब वह यह कहता है कि कृष्ण को मैं ही भगवान् नहीं मानता, अपितु नारद, असित, देवल तथा व्यासदेव जैसे महापुरुष भी स्वीकार करते हैं । ये सब महापुरुष हैं जो समस्त आचार्यो द्वारा स्वीकृत वैदिक ज्ञान का वितरण (प्रचार) करते हैं। अतएव अर्जुन कृष्ण से कहता है कि वे जो कुछ भी कहते हैं, उसे वह पूर्ण सत्य मानता हूँ । सर्वमेतदृतंमन्ये- "आप जो कुछ कहते है, उसे मैं सत्य मानता हूँ ।" अर्जुन यह भी कहता है कि भगवान् के व्यक्तित्व को समझ पाना बहुत कठिन है, यहाँ तक कि बड़े-बड़े देवता भी उन्हें नहीं समझ पाते। अतएव मानव भक्त बने विना भगवान् श्रीकृष्ण को कैसे समझ सकता है?
अतएव भगवद्गीता को भक्तिभाव से ग्रहण करना चाहिये। किसी को यह नहीं सोचना चाहिये कि वह कृष्ण के तुल्य हे, न ही यह सोचना चाहिये कि कृष्ण सामान्य पुरुष हैं या कि एक महानतम व्यक्ति हैं। भगवान् श्रीकृष्ण साक्षात् पुरुषोत्तम भगवान् हैं। अतएव भगवद्गीता के कथनानुसार, या भगवद्गीता को समझने का प्रयत्न करने वाले अर्जुन के कथनानुसार हमें सिद्धान्त रूप में कम से कम इतना तो स्वीकार कर लेना चाहिये कि श्रीकृष्ण भगवान् हैं, ओर उसी विनीत भाव से हम भगवद्गीता को समझ सकते हैं । जब तक कोई भगवद्गीता का पाठ विनम्र भाव से नहीं करता है, तब तक उसे समझ पाना अत्यन्त कठिन है. क्योंकि यह एक महान रहस्य है ।
तो भगवद्गीता है क्या? भगवद्गीता का प्रयोजन मनुष्य को भौतिक संसार के अज्ञान से उबारना है। प्रत्येक व्यक्ति अनेक प्रकार की कठिनाइयों में फँसा रहता है, जिस प्रकार अर्जुन भी कुरुक्षेत्र में युद्ध करने के लिए कठिनाई में था । अर्जुन ने श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण कर ली, फलस्वरूप इस भगवद्गीता का प्रवचन हुआ। न केवल अर्जुन
वरन हम में से प्रत्येक व्यक्ति इस भौतिक अस्तित्व के कारण चिन्ताओं से पूर्ण है। हमारा अस्तित्व ही अनस्तित्व के परिवेश में है। वस्तुतः हमें अनस्तित्व से भयभीत नहीं होना चाहिए। हमारा अस्तित्व सनातन है। लेकिन हम किसी न किसी कारण से असत में डाल दिए गये हैं। असत् का अर्थ उससे है जिसका अस्तित्व नहीं
कष्ट भोगने वाले अनेक मनुष्यों में केवल कुछ ही ऐसे हैं जो वास्तव में यह जानने के जिज्ञासु हैं कि वे क्या हैं और वे इस विषय स्थिति में क्यों डाल दिये गये हैं, आदि-आदि । जब तक मनुष्य को अपने कष्टों के विषय में जिज्ञासा नहीं होती, जब तक उसे यह अनुभूति नहीं होती कि वह कष्ट भोगना नहीं, अपितु सारे कष्टों का हल ढूँढना चाहता है, तब तक उसे सिद्ध मानव नहींसमझना चाहिए । मानवता तभी शरू होती है जब मन में इस प्रकार की जिज्ञासा उदित होती है। ब्रह्म-सूत्र में इस जिज्ञासा को ब्रह्म जिज्ञासा कहा गया है। अथातो ब्रह्मजिज्ञासा । मनुष्य के सारे कार्यकलाप तब तक असफल माने जाने चाहिए, जब तक वह परब्रह्म के स्वभाव के विषय में जिज्ञासा न करे । अतएव जो लोग लोग यह प्रश्न करना प्रारम्भ कर देते हैं कि वे क्यों कष्ट उठा रहे हैं, या वे कहाँ से आये हैं और मृत्यु के बाद कहाँ जायेंगे, वे ही भगवद्गीता को समझने के सुपात्र विद्यार्थी हैं। निष्ठावान विद्यार्थी में भगवान् के प्रति आदर भाव भी होना चाहिए । अर्जुन ऐसा ही विद्यार्थी था। के
जब मनुष्य जीवन के वास्तविक प्रयोजन को भूल जाता है तो भगवान् कृष्ण विशेष रूप से उस प्रयोजन की पुनर्स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। तब भी असंख्य जागृत हुए लोगों में से कोई एक होता है जो वास्तव में अपनी स्थिति को जान पाता है और यह भगवद्गीता उसी के लिए कही गई है। वस्तुतः हम सभी अविद्या रूपी बाघिन के द्वारा निगल लिए गए हैं, लेकिन भगवान् जीवों पर, विशेषतया मनुष्यों पर कृपालु हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने मित्र को अपना शिष्य बना कर भगवद्गीता का प्रवचन किया ।
भगवान् कृष्ण का पार्षद होने के कारण अर्जुन समस्त अज्ञान (अविद्या) से मुक्त था, लेकिन कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में वह अज्ञानी बन कर भगवान् कृष्ण के जीवन की समस्याओं के विषय में प्रश्न करने लगा जिससे भगवान् उनकी व्याख्या भावी पीढ़ियों के मनुष्यों के लाभ के लिए कर दें और जीवन की योजना का निर्धारण कर दें । तब मनुष्य तदनुसार कार्य कर पायेगा और मानव जीवन के उद्देश्य को पूर्ण कर सकेगा ।
भगवद्गीता की विषयवस्तु में पाँच मूल सत्यों का ज्ञान निहित है। सर्व प्रथम ईश्र्वर के विज्ञान की और फिर जीवों की स्वरूप स्थिति की विवेचना की गई है। ईश्वर का अर्थ नियन्ता है और जीवोब का अर्थ है नियन्त्रित । यदि जीव यह कहे कि वह नियन्त्रित नहीं है, अपितु स्वतन्त्र है तो समझो कि वह पागल है। जीव सभी प्रकार से, कम से कम बद्ध जीवन में, तो नियन्त्रित है ही। अतएव भगवद्गीता की विषय वस्तु ईश्वर तथा जीव से सम्बन्धित है। इसमें प्रकृति, काल (समस्त ब्रह्माण्ड की काला वधि या प्रकृति का प्राकट्य) तथा कर्म की भी व्याख्या है । यह दृश्य- जगत विभिन्न कार्य कलापों से ओतप्रोत है। सारे जीव भिन्न-भिन्न कार्यों में लगे हुए हैं। भगवद्गीता से हमें अवश्य सीखना चाहिए कि ईश्वर क्या है, जीव क्या है, प्रकृति क्या है, दृश्य-जगत क्या है, यह काल द्वारा किस प्रकार नियन्त्रित किया जाता है, और जीवों के कार्य कलाप क्या हैं ?
भगवद्गीता के इन पाँच मूलभूत विषयों में से इसकी स्थापना की गई है कि भगवान्, अथवा कृष्ण, अथवा ब्रह्म, या परमात्मा, आप जो चाहे कह लें, सबसे श्रेष्ठ हैं। जीव गुण में परम-नियन्ता के ही समान हैं। उदाहरणार्थ, जैसा कि भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों में बताया जायेगा, भगवान् भौतिक प्रकृति के समस्त कार्यों के ऊपर नियन्त्रण रखते हैं। भौतिक प्रकृति स्वतन्त्र नहीं है। वह परमेश्वर की अध्यक्षता में कार्य करती है। जैसा कि भगवान् कृष्ण कहते हैं - मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम - भौतिक प्रकृति मेरी अध्यक्षता में कार्य करती है । जब हम दृश्य-जगत में विचित्र विचित्र बातें घटते देखते हैं, तो हमें यह जानना चाहिए कि इस जगत के पीछे नियन्ता का हाथ है । बिना नियन्त्रण के कुछ भी हो पाना सम्भव नहीं । नियन्ता को न मानना बचपना होगा । उदाहरणार्थ, एक बालक सोच सकता है कि स्वतोचालित यान विचित्र होता है, क्योंकि यह बिना घोड़े के या खींचने वाले पशु से चलता है। किन्तु अभिज्ञ व्यक्ति स्वतोचालितयान की अभियान्त्रिक व्यवस्था से परिचित होता है । वह सदैव जानता है कि इस यन्त्र के पीछे एक व्यक्ति, एक चालक होता है। इसी प्रकार परमेश्र्वर वह चालक है जिसके निर्देशन में सब कुछ चल रहा है। भगवान् ने जीवों को अपने अंश-रूप में स्वीकार किया है, जैसा कि हम अगले अध्यायों में देखेंगे। सोने का एक कण भी सोना है, समुद्र के जल की बूँद भी खारी होती है। इसी प्रकार हम जीव भी परम-नियन्ता ईश्र्वर या भगवान् श्रीकृष्ण के अंश होने के कारण सूक्ष्म ईश्र्वर या अधीनस्थ ईश्र्वर हैं। हम प्रकृति पर नियन्त्रण करने का प्रयास कर रहे हैं, और इस समय हम अन्तरिक्ष या ग्रहों को वश में करना चाहता हैं, और हममें नियन्त्रण रखने की यह प्रवृत्ति होती है, लेकिन हमें यह जानना चाहिए कि हम परम-नियन्ता नहीं हैं। इसकी व्याख्या भगवद्गीता में की गई है।
भौतिक प्रकृति क्या है? गीता में इसकी व्याख्या अपरा प्रकृति के रूप में हुई है। जीव को परा प्रकृति (उत्कृष्ट प्रकृति) कहा गया है । प्रकृति चाहे परा हो या अपरा, सदैव नियन्त्रण में रहती है। प्रकृति स्त्री-स्वरूपा है और वह भगवान् द्वारा उसी प्रकार नियन्त्रित होती है, जिस प्रकार पत्नी अपने पति द्वारा प्रकृति सदैव अधीन रहती है, उस पर भगवान् का प्रभुत्व रहता है, क्योंकि भगवान् ही अध्यक्ष हैं। जीव तथा भौतिक प्रकृति दोनों ही परमेश्र्वर द्वारा अधिशासित एवं नियन्त्रित होते हैं। गीता के अनुसार यद्यपि सारे जीव परमेश्वर के अंश हैं, लेकिन वे प्रकृति ही माने जाते हैं । इसका उल्लेख भगवद्गीता के सातवें अध्याय में हुआ है। अपरेयमितस्त्वन्यां-"यह भौतिक प्रकृति मेरी अपरा प्रकृति है।"प्रकृतिं विद्धि मे पराम् । जीव भूताम् महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् ॥ लेकिन इससे भी परे दूसरी प्रकृति हैः जीव भूताम् अर्थात् जीव है।
प्रकृति तीन गुणों से निर्मित है - सतोगुण, रजोगुण तथा तमोगुण । इन गुणों के ऊपर नित्य काल है। इन गुणों तथा नित्य काल के संयोग से अनेक कार्यकलाप होते हैं, जो कर्म कहलाते हैं। ये कार्यकलाप अनादि काल से चले आ रहे हैं और हम सभी अपने कार्य कलाप (कर्मों) के फलस्वरूप सुख या दुख भोग रहे हैं। उदाहरणार्थ, मान लें कि मैं व्यापारी हूँ और मैंने बुद्धि के बल पर कठोर श्रम किया है और बहुत सम्पत्ति संचित कर ली है । तब मैं सम्पत्ति के सुख का भोक्ता हूँ किन्तु यदि मान लें कि व्यापार में मेरा सब धन जाता रहा तो मैं दुख का भोक्ता हो जाता हूँ । इसी प्रकार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हम अपने कर्म के फल का सुख भोगते हैं या उसका कष्ट उठाते हैं । यह कर्म कहलाता है ।
ईश्र्वर, जीव, प्रकृति, काल तथा कर्म इन सबकी व्याख्या भगवद्गीता में हुई है । इन पाँचों में से ईश्र्वर, जीव, प्रकृति तथा काल शाश्र्वत हैं । प्रकृति कि अभिव्यक्ति अस्थायी हो सकती है, परन्तु यह मिथ्या नहीं है । कोकोई दार्शनिक कहते हैं कि प्रकृति कि अभिव्यक्ति मिथ्या है, लेकिन भगवद्गीता या वैष्णवों के दर्शन के अनुसार ऐसा नहीं है । जगत की अभिव्यक्ति को मिथ्या नहीं माना जाता । इसे वास्तविक, किन्तु अस्थायी माना जाता है । यह उस बादल के सदृश है जो आकाश में घूमता रहता है, या वर्षा ऋतु के आगमन के समान है, जो अन्न का पोषण करती है । ज्योंही वर्षा ऋतु समाप्त होती है और बादल चले जाते हैं, त्योंही वर्षा द्वारा पोषित सारी फसल सूख जाती है । इसी प्रकार यह भौतिक अभिव्यक्ति भी किसी समय में, किसी स्थान पर होती है, कुछ काल तक रहती-ठहरती है और फिर लुप्त हो जाती है । प्रकृति इस रूप में कार्यशील है । लेकिन यह चक्र निरन्तर चलता रहता है । इसीलिए प्रकृति शाश्र्वत है, मिथ्या नहीं है । भगवान् इस "मेरी प्रकृति" कहते हैं । यह भौतिक प्रकृति (अपरा प्रकृति) परमेश्र्वर की भिन्न-शक्ति है । इसी प्रकार जीव भी परमेश्र्वर कि शक्ति हैं, किन्तु वे विलग नहीं, अपितु भगवान् से नित्य-सम्बद्ध हैं । इस तरह भगवान्, जीव, प्रकृति तथा काल, ये सब परस्पर सम्बद्ध हैं और सभी शाश्र्वत हैं । लेकिन कर्म शाश्र्वत नहीं है । हाँ, कर्म के फल अत्यन्त पुरातन हो सकते हैं । हम अनादि काल से अपने शुभ-अशुभ कर्मफलों को भोग रहे हैं, किन्तु साथ ही हम अपने कर्मों के फल को बदल भी सकते हैं और यह परिवर्तन हमारे ज्ञान की पूर्णता पर निर्भर कर्ता है । हम विविध प्रकार के कर्मों में व्यस्त रहते हैं । निस्संदेह हम यह नहीं जानते कि किस प्रकार के कर्म करने से हम कर्मफल से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं । लेकिन भगवद्गीता में इसका भी वर्णन हुआ हो ।
ईश्र्वर अर्थात् परम ईश्र्वर परम चेतना-स्वरूप है । जीव भी ईश्वर का अंश होने के कारण चेतन है । जीव तथा भौतिक प्रकृति दोनों को प्रकृति बताया गया है, अर्थात् वे परमेश्वर की शक्ति हैं, किन्तु इन दोनों में से केवल जीव चेतन है, दूसरी प्रकृति चेतन नहीं है । यही अन्तर है । इसीलिए जीव प्रकृति परा या उत्कृष्ट कहलाती है, क्योंकि जीव, भगवान् जैसी चेतना से युक्त है । लेकिन भगवान् की चेतना परम है, और किसी को यह नहीं कहना चाहिए कि जीव भी परम चेतन है । जीव कभी भी, यहाँ तक कि अपनी सिद्ध अवस्था में भी, परम चेतन नहीं हो सकता और यह सिद्धान्त भ्रामक है कि जीव परम चेतन हो सकता है । वः चेतन तो है, लेकिन पूर्ण या परम चेतन नहीं ।
जीव तथा ईश्र्वर का अन्तर भगवद्गीता के तेरहवें अध्याय में बताया गया है । ईश्वर क्षेत्रज्ञ या चेतन है, जैसा कि जीव भी है, लेकिन जीव केवल अपने शरीर के प्रति सचेत रहता है, जबकि भगवान् समस्त शरीरों के प्रति सचेत रहते हैं । चूँकि वे प्रत्येक जीव के हृदय में वास करने वाले हैं, अतएव वे जीवविशेष की मानसिक गतिशीलता से परिचित रहते हैं । हमें यह नहीं भूलना चाहिए । यह भी बताया गया है कि परमात्मा प्रत्येक जीव के हृदय में ईश्र्वर या नियन्ता के रूप में वास कर रहे हैं और जैसा जीव चाहता है वैसा करने के लिए जीव को निर्देशित करते रहते हैं । जीव भूल जाता है कि उसे क्या करना है । पहले तो वह किसी एक विधि से कर्म करने का संकल्प
करता है, लेकिन फिर वह अपने ही कर्म के पाप-पुण्य में फँस जाता है । वह एक शरीर को त्याग कर दूसरा शरीर ग्रहण करता है, जिस प्रकार हम वस्त्र उतारते तथा पहनते रहते हैं । चूँकि इस प्रकार आत्मा देहान्तरण कर जाता है, अतः उसे अपने विगत (पूर्वकृत्) कर्मों का फल भोगना पड़ता है । ये कार्यकलाप तभी बदल सकते हैं जब जीव सतोगुण में स्थित हो और यह समझे कि उसे कौन से कर्म करने चाहिए । यदि वह ऐसा कर्ता है तो उसे विगत (पूर्वकृत्) कर्मों के सारे फल बदल जाते हैं । फलस्वरूप कर्म शाश्र्वत नहीं हैं । इसीलिए हमने यह कहा है कि पाँच तत्त्वों ईश्र्वर, जीव, प्रकृति, काल तथा कर्म में से चार शाश्र्वत हैं, कर्म शाश्र्वत नहीं है ।
परम चेतन ईश्र्वर जीव से इस मामले में समान है - भगवान् तथा जीव दोनों कि चेतनाएँ दिव्य हैं । यह चेतना पदार्थ के संयोग से उत्पन्न नहीं होती हैं । ऐसा सोचना भ्रान्तिमूलक है । भगवद्गीता इस सिद्धान्त को स्वीकार नहीं करती कि चेतना भौतिक संयोग की किन्हीं परिस्थितियों में उत्पन्न होती है । यह चेतना भौतिक परिस्थितियों के आवरण के कारण विकृत रूप से प्रतिबिम्बित हो सकती है, जिस प्रकार रंगीन काँच से परावर्तित प्रकाश उसी रंग का प्रतीत होता है । किन्तु भगवान् की चेतना भौतिकता से प्रभावित नहीं होती है । भगवान् कहते हैं - मयाध्यक्षेण प्रकृतिः । जब वे इस भौतिक विश्र्व में अवतरित होते हैं तो उनकी चेतना पर भौतिक प्रभाव नहीं पड़ता । यदि वे इस तरह प्रभावित होते तो दिव्य विधयों के सम्बन्ध में उस तरह बोलने के अधिकारी न होते जैसा कि भगवद्गीता में बोलते हैं । भौतिक कल्मष-ग्रस्त चेतना से मुक्त हुए बिना कोई दिव्य-जगत के विषय में कुछ नहीं कह सकता । अतः भगवान् भौतिक दृष्टि से कलुषित (दूषित) नहीं हैं । भगवद्गीता तो शिक्षा देती है कि हमें इस कलुचित चेतना को शुद्ध करना है । शुद्ध चेतना होने पर हमारे सारे कर्म ईश्वर की इच्छानुसार होंगे और इससे हम सुखी ही सकेंगे । परन्तु इसका अर्थ यह भी नहीं है कि हमें अपने सारे कार्य बन्द कर देने चाहिए ।अपितु, हमें अपने कर्मों को शुद्ध करना चाहिए और शुद्ध कर्म भक्ति कहलाते हैं । भक्ति में कर्म सामान्य कर्म प्रतीत होते हैं, किन्तु वे कलुषित नहीं होते । एक अज्ञानी व्यक्ति भक्त को सामान्य व्यक्ति की भाँति कर्म करते देखता है, किन्तु ऐसा मुर्ख यह नहीं समझता कि भक्त या भगवान् के कर्म अशुद्ध चेतना या पदार्थ से कलुषित नहीं होते । वे त्रिगुणातीत होते हैं । जो भी हो, हमें यह जान लेना चाहिए कि अभी हमारी चेतना कलुषित है ।
जब हम भौतिक दृष्टि से कलुषित होते हैं, तो हम बढ कहलाते हैं । मिथ्या चेतना का प्राकट्य इसलिए होता है कि हम अपने-आपको पप्रकृति का प्रतिफल (उत्पाद) मान बैठते हैं । यह मिथ्या अहंकार कहलाता है । जो व्यक्ति देहात्मबुद्धि में लीन रहता है वः अपनी स्थिति (स्वरूप) को नहीं समझ पाता । भगवद्गीता का प्रवचन देहात्मबुद्धि से मनुष्य को मुक्त करने के लिए ही हुआ था और भगवान् से यह सुचना प्राप्त करने के लिए ही अर्जुन ने अपने-आपको इस अवस्था में उपस्थित किया था । मनुष्य को देहात्मबुद्धि से मुक्त होना है, और अध्यात्मवादी के लिए प्रारम्भिक कर्तव्य यही है । जो मुक्त होना चाहता है, जो स्वच्छन्द रहना चाहता है, उसे सर्वप्रथम यह जान लेना होगा कि वः शरीर नहीं है । मुक्ति का अर्थ है - भौतिक चेतना से स्वतन्त्रता । श्रीमद्भागवतम् में भी मुक्ति की परिभाषा दी गई है । मुक्तिर्हित्वान्यथारूपं स्वरूपेण व्यवस्थिति - मुक्ति का अर्थ है
इस भौतिक जगत की कलुषित चेतना से मुक्त होना और शुद्ध चेतना में स्थित होना । भगवद्गीता के सारे उपदेशों का मन्तव्य इसी शुद्ग चेतना को जागृत करना है । इसीलिए हम गीता के अन्त में कृष्ण को अर्जुन से यह प्रश्न करते पाते हैं कि वः विशुद्ध चेतना को प्राप्त हुआ या नहीं? शुद्ध चेतना का अर्थ है-भगवान् के आदेशानुसार कर्म करना ।शुद्ध चेतना का यही सार है । भगवान् का अंश होने के कारण हममें चेतना पहले से ही रहती है, लेकिन हममें निकृष्ट गुणों द्वारा प्रभावित होने की प्रवृत्ति पाई जाती है । किन्तु भगवान् परमेश्र्वर होने के कारण कभी प्रभावित नहीं होते । परमेश्र्वर तथा क्षुद्र जीवों में यही अन्तर है ।
यह चेतना क्या है? यह है "मैं हूँ" । तो फिर "मैं हूँ" क्या है? कलुषित चेतना में "मैं हूँ" का अर्थ है कि मैं सर्वेसर्वा हूँ, मैं ही भोक्ता हूँ । यह संसार चलायमान है, क्योंकि प्रत्येक जीव यही सोचता है कि वही इस भौतिक जगत का स्वामी तथा स्रष्टा है । भौतिक चेतना के दो मनोमय विभाग हैं । एक के अनुसार मैं ही स्रष्टा हूँ, और दूसरे के अनुसार मैं ही भोक्ता हूँ । लेकिन वास्तव में परमेश्र्वर स्रष्टा तथा भोक्ता दोनों है, और परमेश्र्वर का अंश होने के कारण जीव ण तो स्रष्टा है ण ही भोक्ता । वह मात्र सहयोगी है । वः सृजित तथा भुक्त है । उदाहरणार्थ, मशीन का कोई एक अंग सम्पूर्ण मशीन के साथ सहयोग करता है, इसी प्रकार शरीर का कोई एक अंग पूरे शरीर के साथ सहयोग कर्ता है । हाथ, पाँव, आँखें आदि शरीर के अंग हैं, लेकिन ये वास्तविक भोक्ता नहीं हैं । भोक्ता तो उदर है । पाँव चलते हैं, हाथ भोजन देते हैं, दाँत चबाते हैं और शरीर के सारे अंग उदर को तुष्ट करने में लगे रहते हैं, क्योनी उदर ही प्रधान कारक है, जो शरीर रूपी संगठन का पोषण करता है । अतएव सारी वस्तुएँ उदर को दी जाती हैं । जड़ को सींच कर वृक्ष का पोषण किया जाता है, और उदर का भरण करके शरीर का पोषण किया जाता है, क्योंकि यदि शरीर को स्वस्थ रखना है तो शरीर के सारे अंगों को उदरपूर्ति में सहयोग देना होगा । इसी प्रकार परमेश्र्वर ही भोक्ता तथा स्रष्टा हैं और उनके अधीनस्थ हम उन्हें प्रसन्न रखने के निमित्त सहयोग करने के लिए हैं । इस सहयोग से हमें लाभ पहुँचता है । यदि हाथ की अँगुलियाँ यह सोचें कि वे उदर को भोजन ण देकर स्वयं ग्रहण कर लें, तो उन्हें निराश होना पड़ेगा । सृजन तथा भोग के केन्द्रबिन्दु परमेश्र्वर हैं, और सारे जीव उनके सहयोगी हैं । सहयोग के कारण ही वे भोग करते हैं । यह सम्बन्ध स्वामी तथा दास जैसा है । यदि स्वामी तुष्ट रहता है, तो दास भी तुष्ट रहता है । इसी प्रकार परमेश्र्वर को तुष्ट रखना चाहिए, यद्यपि जीवों में भी स्रष्टा बनने तथा भौतिक जगत का भोग करने की प्रवृत्ति होती है, क्योंकि इस दृश्य-जगत् के स्रष्टा परमेश्र्वर में ये प्रवृत्तियाँ हैं
अतएव भगवद्गीता में हम पाएंगे कि भगवान् ही पूर्ण हैं जिनमें परम नियन्ता, नियन्त्रित जीव, दृश्य-जगत, शाश्र्वत-काल तथा कर्म सन्निहित हैं, और इन सबकी व्याख्या इसके मूल पाठ में की गई है । ये सब मिलकर परम पूर्ण का निर्माण करते हैं और यही परम पूर्ण परम ब्रह्म या परम सत्य कहलाता है । यही परम पूर्ण तथा परम सत्य पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण हैं । सारी अभिव्यक्तियाँ उनकी विभिन्न शक्तियों के फलस्वरूप हैं । वे ही
पूर्ण हैं ।
भगवद्गीता में यह भी बताया गया है कि ब्रह्म भी पूर्ण परम पुरुष के अधीन है (ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहम्) । ब्रह्मसूत्र में ब्रह्म की विशद व्याख्या, सूर्य की किरणों के रूप में की गई है । निर्विशेष ब्रह्म भगवान् का प्रभामय किरणसमूह है । निर्विशेष ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म की अपूर्ण अनुभूति है और इसी तरह परमात्मा की धारणा भी है ।पन्द्रहवें अध्याय में यह देखा जायेगा कि भगवान् पुरुषोत्तम निर्विशेष ब्रह्म तथा परमात्मा की आंशिक अनुभूति से बढ़कर हैं । भगवान् को सच्चिदानन्द विग्रह कहा जाता है । ब्रह्मसंहिता का शुभारम्भ इस प्रकार से होता है -ईश्र्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्द विग्रहः । अनादिरादिर्गोविन्दः सर्वकारणकारणम् । "गोविन्द या कृष्ण सभी कारणों के कारन हैं । वे ही आदि कारण हैं और सत्, चित् तथा आनन्द के रूप हैं ।" निर्विशेष ब्रह्म उनके सत् (शाश्र्वत) स्वरूप की अनुभूति है, परमात्मा सत्-चित् (शाश्र्वत-ज्ञान) की अनुभूति है । परन्तु भगवान् कृष्ण समस्त दिव्य स्वरूपों की अनुभूति हैं सत्-चित्-आनन्द के पूर्ण विग्रह हैं
अल्पज्ञानी लोग परम सत्य को निर्विशेष मानते हैं, लेकिन वे हैं- दिव्य पुरुष और इसकी पुष्टि समस्त वैदिक ग्रंथों में हुई है । नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम् (कठोपनिषद् २.२.१३) । जिस प्रकार हम सभी जीव हैं और हम सबकी अपनी-अपनी व्यष्टि सत्ता है, उसी प्रकार परम सत्य भी अन्ततः व्यक्ति हैं और भगवान् की अनुभूति उनके पूर्ण स्वरूप में समस्त दिव्य लक्षणों की ही अनुभूति है । यह पूर्णतया रुपविहीन (निराकार) नहीं है । यदि वः निराकार है, या किसी अन्य वस्तु से घट कर है, तो वह पूर्ण नहीं हो सकता । जो पूर्ण है, उसे हमारे लिए अनुभवगम्य तथा अनुभवातीत हर वस्तुओं से युक्त होना चाहिए, अन्यथा वह पूर्ण कैसे हो सकता है ?
पूर्ण भगवान् में अपार शक्तियां हैं (परास्य शक्तिर्विविधैव श्रूयते) । कृष्ण किस प्रकार अपनी विभिन्न शक्तियों द्वारा कार्यशील हैं, इसकी भी व्याख्या भगवद्गीता में हुई है । यहदृश्य-जगत, या जिस जगत में हम रह रहे हैं, यह भी स्वयंमें पूर्ण है, क्योंकि जिन चौबीस तत्त्वों से यह नश्र्वर ब्रह्माण्ड निर्मित है, वे सांख्य दर्शन के अनुसार इस ब्रह्माण्ड के पालन तथा धारण के लिए अपेक्षित संसाधनों से पूर्णतया समन्वित हैं । इसमें न तो कोई विजातीय तत्त्व है, न ही किसी भी वस्तु की आवश्यकता है । इस सृष्टि का अपना निजी नियत-काल है, जिसका निर्धारण परमेश्र्वर की शक्ति द्वारा हुआ है, और जब यह काल पूर्ण हो जाता है, तो उसे पूर्ण व्यवस्था से इस क्षणभंगुर सृष्टि का विनाश हो जाता है । सभी प्रकार की अपूर्णताओं का अनुभव पूर्ण विषयक ज्ञान की अपूर्णता के कारण है । इस प्रकार भगवद्गीतामें वैदिक विद्या का पूर्ण ज्ञान पाया जाता है।
सारावैदिक ज्ञान अमोघ(अच्युत) है, और सारे हिन्दू इस ज्ञान को पूर्ण तथा अमोघ मानते हैं । उदाहरणार्थ, गोबर पशुमल है और स्मृति तथा वैदिक आदेश के अनुसार यदि कोई पशुमल का स्पर्श कर्ता है, तो उसे शुद्ध होने के लिए स्नान करना पड़ता है । लेकिन वैदिक शास्त्रों में गोबर को पवित्र करनेवाला माना गया है । इसे विरोधाभास कहा जा सकता है, लेकिन यह मान्य है क्योंकियह वैदिक आदेश है और इसमें सन्देह नहीं कि इसेस्वीकार करनेपर किसी प्रकार की त्रुटि नहीं होगी । अब तो आधुनिक विज्ञान द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि गाय के
गोबर में समस्त जीवाणुनाशक गुण पाये जाते हैं । अतएव वैदिक ज्ञान पूर्ण है, क्योंकि यह समस्त संशयों एवं त्रुटियों से परे है, औरभगवद्गीता समस्त वैदिक ज्ञान का सार है ।
वैदिक ज्ञान शोध का विषय नहीं है । हमारा शोधकार्य अपूर्ण है, क्योंकि हम अपूर्ण इन्द्रियों के द्वारा शोध करते हैं हमेंपहले से चले आ रहे पूर्ण ज्ञान को परम्परा द्वारा स्वीकार करना होता है, जैसा कि भगवद्गीता में कहा गया है । हमें ज्ञान को उपयुक्त स्रोत से, परम्परा से, ग्रहण करना होता है जो परम साक्षात् भगवान् से प्रारम्भ होती है, और शिष्य-गुरुओं की यह परम्परा आगे बढती जाती है । छात्र के रूप में अर्जुन भगवान् कृष्ण से शिक्षा ग्रहण कर्ता है, और उनका विरोध किये बिना वह कृष्ण की सारी बातें स्वीकार कर लेता है । किसी को भगवद्गीताके एक अंश को स्वीकार करने और दूसरे अंश को अस्वीकार करने की अनुमति नहीं दि जाती । हमेंभगवद्गीताको बिना किसी प्रकार की टिप्पणी, बिना घटाए- बढ़ाए तथा विषय-वस्तु में बिना किसी मनोकल्पना के स्वीकार करना चाहिए । गीताको वैदिक ज्ञान की सर्वाधिक पूर्ण प्रस्तुति समझना चाहिए । वैदिक ज्ञान दिव्य स्रोतों से प्राप्त होता है, और स्वयं भगवान ने पहला प्रवचन किया था । भगवान् द्वारा कहे गये शब्द अपौरुषेय कहलाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे चार दोषों से युक्त संसारी व्यक्ति द्वारा कहे गये (पौरुषेय) शब्दों से भिन्न होते हैं । संसारी पुरुष के दोष हैं - (१) वह त्रुटियाँ अवश्य करता है, (२) वह अनिवार्य रूप से भ्रमित होता है, (३) उसमें स्न्यों को धोखा देने की प्रवृत्ति होती है, तथा(४) वह अपूर्ण इन्द्रियों के कारण सीमित होता है । इन चार दोषों के कारण मनुष्य सर्वव्यापी ज्ञान विषयक पूर्ण सूचना नहीं दे पाता ।
ऐसे दोषपूर्ण व्यक्तियों द्वारा वैदिक ज्ञान प्रदान नहीं किया जाता। इसे पहले-पहल प्रथम सृष्ट जीव, ब्रह्मा के हृदय में प्रदान किया गया, फिर ब्रह्मा ने इस ज्ञान को अपने पुत्रों तथा शिष्यों को उसी रूप में प्रदान किया जिस रूप में उन्हें भगवान् से प्राप्त हुआ था। भगवान् पूर्ण हैं और उनका प्रकृति के नियमों के वशीभूत होने का प्रश्न ही नहीं उठता । अतएव मनुष्य में इतना समझने की बुद्धि होनी ही चाहिए कि भगवान् ही इस ब्रह्माण्ड की साड़ी वस्तुओं के एकमात्र स्वामी हैं, वे ही आदि स्रष्टा तथा ब्रह्मा के भी सृजनकर्ता हैं । ग्याहरवें अध्याय में भगवान् को प्रपितामह के रूप में संबोधित किया गया है, क्योंकि ब्रह्मा को पितामह कहकर संबोधित किया गया है, और वे तो इन पितामह से भी स्रष्टा हैं । अतेव किसी को अपने-आपको किसी भी वस्तु का स्वामी नहीं मानना चाहिए, उसे केवल उन्हीं वस्तुओं को अपना मानना चाहिए जो उसके पोषण के लिए भगवान् ने अलग कर दी हैं । भगवान् द्वार हमारे सदुपयोग के लिए राखी गई वस्तुओं को किस काम में लाया जाय, इसके अनेक उदाहरण हैं । इसकी भी व्याख्या भगवद्गीता में हुई है । प्रारम्भ में अर्जुन ने निश्चय किया था कि वह कुरुक्षेत्र के युद्ध में नहीं लडेगा। यह उसका निर्णय था । अर्जुन ने भगवान् से कहा कि वह अपने ही सम्बन्धियों को मार कर राज्य का भोग नहीं करना चाहता । यह निर्णय शरीर पर आधारित था, क्योंकि वह अपने-आपको शरीर मान रहा था और अपने भाइयों, भतीजों, सालों, पितामहों आदि को अपने शारीरिक सम्बन्ध या विस्तार के रूप में ले रहा था । अतएव वः अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को तुष्ट करना चाह रहा था । भगवान् ने भगवद्गीताका प्रवचन इस
दृष्टिकोण को बदलने के लिए ही किया, और अन्त में अर्जुन भगवान् के आदेशानुसार युद्ध अकरने करते हुए कहता है - करिष्ये वचनं तव - "मैं आपके वचन के अनुसार ही कार्य करूँगा ।"
इस संसार में मनुष्य बिल्लियों तथा कुत्तों के समान लड़ने के लिए नहीं है । मनुष्यों को मनुष्य जीवन की महत्ता समझकर सामान्य पशुओं की भाँति आचरण करना बन्द कर देना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन के उद्देश्य को समझना चाहिए, और इसका निर्देश वैदिक ग्रंथों में दिया गया है, जिसका सार भगवद्गीतामें मिलता है । वैदिक ग्रंथ मनुष्यों के लिए हैं, पशुओं के लिए नहीं । एक पशु दूसरे पशु का वध करे तो कोई पाप नहीं लगता, लेकिन यदि `मनुष्य अपनी अनियन्त्रित स्वादेन्द्रिय की तुष्टि के लिए पशु वध करता है, तो वह प्रकृति के नियम को तोड़ने के लिए उत्तरदायी है । भगवद्गीतामें स्पष्ट रूप से प्रकृति के गुणों के अनुसार तीन प्रकार के कर्मों का उल्लेख है - सात्त्विक कर्म, राजसिक कर्म तथा तामसिक कर्म । इसी प्रकार आहार के भी तीन भेद हैं - सात्त्विक आहार, राजसिक आहार तथा तामसिक आहार । इन सबका विशद वर्णन हुआ है, और यदि हम भगवद्गीताके उपदेशों का ठीक से उपयोग करे तो हमारा सम्पूर्ण जीवन शुद्ध हो जाए, और अन्ततः हम अपने गन्तव्य को प्राप्त हो सकते हैं, जो इस भौतिक से परे है (यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम) ।
यह गन्तव्य सनातन आकाश, या नित्य चिन्मय आकाश कहलाता है । इस संसार में हम पाते हैं कि प्रत्येक पदार्थ क्षणिक है । यह उत्पन्न होता है, कुछ काल तक रहता है, कुछ गौण वस्तुएँ उत्पन्न कर्ता है, क्षीण होता है और अन्त में लुप्त हो जाता है । भौतिक संसार का यही नियम है, चाहे हम इस शरीर का दृष्टान्त लें, या फल का या किसी वस्तु का । किन्तु इस क्षणिक संसार से परे एक अन्य संसार है, जिसकेविषय में हमें जानकारी है । उस संसार में अन्य प्रकृति है, जो सनातन है । जीवभी सनातन है और ग्यारहवें अध्याय में भगवान् को भी सनातन बताया गया है । हमारा भगवान् के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध है, और चूँकि हम सभी गुणात्मक रूप से एक हैं - सनातन-धाम, सनातन -ब्रह्म तथा सनातन-जीव - अतएवगीताका सारा अभिप्राय हमारे सनातन धर्म को जागृत करना है, जो कि जीव की शाश्वत वृत्ति है । हम अस्थायी रूप से विभिन्न कर्मों में लगे रहते हैं, किन्तु यदि हम इन क्षणिक कर्मों को त्याग कर परमेश्वर द्वारा प्रस्तावित कर्मों को ग्रहण कर लें, तो हमारे ये सारे कर्म जाएँ । यही शुद्ध जीवन कहलाता है ।
परमेश्र्वर तथा उनका दिव्य धाम, ये दोनों ही सनातन हैं और जीव भी सनातन हैं । सनातन धर्म में परमेश्वर तथा जीव की संयुक्त संगति ही मानव जीवन की सार्थकता है । भगवान् जीवों पर अत्यन्त दयालु रहते हैं, क्योंकि वे उनके आत्मज हैं । भगवान् कृष्ण ने भगवद्गीता में घोषित किया है सर्वयोनिषु... अहं बीजप्रदः पिता - "मैं सबका पिता हूँ ।" निस्सन्देह अपने-अपने कर्मों के अनुसार नाना प्रकार के जीव हैं, लेकिन यहाँ पर कृष्ण कहते हैं कि वे उन सबके पिता हैं । अतेव भगवान् उन्स अम्स्त पतित बद्धजीवों का उद्धार करने तथा उन्हें सनातन-धाम वापस बुलाने के लिए अवतरित होते हैं या फिर अपने विश्वस्त सेवकों को अपने पुत्रों, पार्षदों या आचार्यों के रूप में इन बद्धजीवों का उद्धार करने के लिए भेजते हैं ।
अतएव सनातन-धर्म किसी साम्प्रदायिक धर्म पद्धति का सूचक नहीं है । यह तो नित्य परमेश्र्वर के साथ नित्य जीवों के नित्य कर्म-धर्म का सूचक है । जैसा कि पहले कहा जा चुका है, यह जीव के नित्य धर्म (वृत्ति) को बताता है । श्रीपाद रामानुजाचार्य ने सनातन शब्द की व्याख्या इस प्रकार की है, "वह, जिसका न आदि है और न अन्त" अतेव जब हम सनातन-धर्म के विषय में बातें करते हैं तो हमें श्रीपाद रामानुजाचार्य के प्रमाण के आधार पर यह मान लेना चाहिए कि इसका न आदि है न अन्त ।
अंग्रेजी का 'रिलीजन 'शब्द सनातन धर्म से थोड़ा भिन्न है । 'रिलीजन से विश्वास का भाव सूचित होता है, और विश्र्वास परिवर्तित हो सकता है । किसी को एक विशेष विधि में विश्वास हो सकता है और वः इस विश्र्वास को बदल कर दूसरा ग्रहण क्र सकता है, लेकिन सनातन-धर्म उस कर्म का सूचक है जो बदला नहीं जा सकता । उदाहरणार्थ, न तो जल से उसकी तरलता विलग की जा सकती है, न अग्नि से उष्मा विलग की जा सकती है । इसी प्रकार जीव से उसके नित्य कर्म को विलग नहीं किया जा सकता । सनातन धर्म जीव का शाश्वत अंग है । अतेव जब हम सनातन-धर्म के विषय में बात करते हैं तो हमें श्रीपाद रामानुजाचार्य के प्रमाण को मानना चाहिए कि उसका न तो आदि है न अन्त । जिसका आदि-अन्त न हो वः साम्प्रदायिक नहीं हो सकता क्योंकि उसे किसी सीमा में नहीं बाँधा जा सकता । जिनका सम्बन्ध किसी सम्प्रदाय से होगा वे सनातन धर्म को भी साम्प्रदायिक मानने की भूल करेंगे, किन्तु यदि हम इस विषय पर गम्भीरता से विचार करें और आधुनिक विज्ञान के प्रकाश में सोचें तो हम सहज ही देख सकते है कि सनातन-धर्म विश्र्व के समस्त लोगों का ही नहीं अपितु ब्रह्माण्ड के समस्त जीवों का है ।
भले ही असनातन धार्मिक विश्वास का मानव इतिहास के पृष्ठों में कोई आदि हो, लेकिन सनातन-धर्म के इतिहास का कोई आदि नहीं होता, क्योंकि यह जीवों के साथ शाश्र्वत चलता रहता है । जहाँ तक जीवों का सम्बन्ध है, प्रामाणिक शास्त्रों का कथन है कि जीव का न तो जन्म होता है, न मृत्यु । गीता में कहा गया है कि जीव न तो कभी जन्मता है, न कभी मरता है । वः शाश्वत तथा अविनाशी है, और इस क्षणभंगुर शरीर के नष्ट होने के बाद भी रहता है । सनातन धर्म के स्वरूप के प्रसंग में हमें धर्म की धारणा को संस्कृत की मूल धातु से समझना होगा । धर्म का अर्थ है जो पदार्थ विशेष में सदैव रहता है। हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अग्नि के साथ ऊष्मा तथा प्रकाश सदैव रहते हैं, ऊष्मा व प्रकाश के बिना अग्नि शब्द का कोई अर्थ नहीं होता । इसी प्रकार हमें जीव के उस अनिवार्य अंग को ढूँढना चाहिए जो उसका चिर सहचर है । यह चिर सहचर उसका शाश्र्वत गू है और यह शाश्र्वत गुण ही उसका नित्य धर्म है ।
जब सनातन गोस्वामी ने श्री चैतन्यमहापभु से प्रत्येक जीव के स्वरूप के विषय में जिज्ञासा की तो भगवान् ने उत्तर दिया कि जीव का स्वरूप या स्वाभाविक स्थिति भगवान् की सेवा करना है । यदि हम महाप्रभु के इस कथन का विश्लेषण करें तो हम देखेंगे कि एक जीव दूसरे जीव की सेवा में निरन्तर लगा हुआ है । एक जीव दूसरे जीव की सेवा कई रूपों में कर्ता है । ऐसा करके, जीव जीवन का भोग कर्ता है । निम्न पशु मनुष्यों की सेवा करते
हैं जैसे सेवक अपने स्वामी की सेवा करते हैं । एक व्यक्ति 'अ' अपने स्वामी 'ब' की सेवा कर्ता है और 'ब' अपने स्वामी 'स' कीतथा'स' अपने स्वामी 'द' की। इस प्रकार हम देखते हैं कि एक मित्र की सेवा करता है, माता पुत्र की सेवा करती है, पति पत्नी की सेवा करता है । यदि हम इसी भावना से खोज करते चलें तो पाएँगे कि समाज में ऐसा भी अपवाद नहीं है जिसमें कोई जीव सेवा में न लगा हो । एक राजनेता जनता के समक्ष अपनी सेवा करने की क्षमता का घोषणा-पत्र प्रस्तुत कर्ता है । फलतः मतदाता उसे यह सोचते हुए मत देते हैं कि वह समाज की महत्त्वपूर्ण सेवा करेगा । दुकानदार अपने ग्राहक की सेवा करता है और कारीगर (शिल्पी) पूँजीपतियों की सेवा करते हैं । पूँजीपति अपने परिवार की सेवा कर्ता है और अफ्रिवार शाश्र्वत जीव की शाश्र्वत सेवा क्षमता से राज्य की सेवा कर्ता है । इस प्रकार हम देख सकते हैं कि कोई भी जीव अन्य जीव की सेवा करने मुक्त नहीं है । अतएव हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सेवा जीव की चिर सहचरी है और सेवा करना जीव का शाश्र्वत (सनातन) धर्म है ।
तथापि मनुष्य काल तथा परिस्थिति विशेष के प्रसंग में एक विशिष्ट प्रकार के विश्र्वास को अंगीकार करता है, और इस प्रकार वः अपने को हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, बौद्ध या किसी अन्य सम्प्रदाय का मानने वाला बताता है ये सभी उपाधियाँ सनातन धर्म नहीं हैं । एक हिन्दू अपना विश्वास बदल क्र मुसलमान बन सकता है, या एक मुसलमान अपना विश्र्वास बदल क्र हिन्दू बन सकता है या कोई ईसाई अपना विश्वास बदल सकता है, इत्यादि । किन्तु इन सभी परिस्थितियों में धार्मिक विश्वास में परिवर्तन होने से अन्यों की सेवा करने का शाश्र्वत-धर्म (वृत्ति) प्रभावित नहीं होता । हिन्दू, मुसलमान या ईसाई समस्त परिस्थितियों में किसी न किसी के सेवक हैं। अतेव किसी विशेष विश्र्वास को अंगीकार करना अपने सनातन धर्म को अंगीकार करना नहीं है । सेवा करना ही सनातन धर्म है ।
वस्तुतः भगवान् के साथ हमारा सम्बन्ध सेवा का सम्बन्ध है । परमेश्र्वर परम भोक्ता हैं और हम सारे जीव उनके सेवक है । हम सब उनके भोग (सुख) के लिए बने हैं और यदि हम भगवान् के साथ उस नित्य भोग में भाग लेते हैं, तो हम सुखी बनते हैं । हम किसी अन्य प्रकार से सुखी नहीं हो सकते ।स्वतन्त्र रूप से सुखी बन पाना सम्भव नहीं, जिस प्रकार शरीर का कोई भी भाग उदर से सहयोग किये बिना सुखी नहीं रह सकता । परमेश्वर की दिव्य प्रेमाभाक्तिमयसेवा किये बिना जीव सुखी नहीं हो सकता ।
भगवद्गीता में विभिन्न देवों की पूजा या सेवा करने का अनुमोदन नहीं किया गया है । उसमें(७.२०) कहा गया है
कामैस्तैस्तैर्हतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः 1
तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ।। २० ।।
"जिनकी बुद्धि भौतिक इच्छाओं द्वारा मारी गई है वे देवताओं की शरण में आजाते हैं, और वे अपने-अपने स्वभावों के अनुसार पूजा के विशेष विधिविधानों का पालन करते हैं ।" यहाँ यह स्पष्ट खा गया है कि जो कामवासना द्वारा निर्देशित होते हैं वे भगवान् कृष्ण की पूजा न करके देवताओं की पूजा करते हैं । जब हम कृष्ण का नाम लेते हैं तो हम किसी साम्प्रदायिक नाम का उल्लेख नैन करते । कृष्ण का अर्थ है - सर्वोच्च आनन्द, और इसकी पुष्टि हुई है कि परमेश्र्वर समस्त आनन्द के आगार हैं । हम सभी आनन्द की खोज में लगे रहते हैं । आनन्दमयोऽभ्यासात् (वेदान्त-सूत्र १.१.१२) । भगवान् की ही भाँति जीव चेतना से पूर्ण हैं, और सुख की खोज में रहते हैं । भगवान् तो नित्य सुखी हैं, और यदि जीव उनकी संगति करते हैं, उनके साथ सहयोग करते हैं, तो वे भी सुखी बन जाते हैं ।
भगवान् इस मर्त्य लोक में सुख से पूर्ण अपनी वृन्दावन लीलाएँ प्रदर्शित करने के लिए अवतरित होते हैं । अपने गोपमित्रों के साथ, अपनी गोपिका-सखियों के साथ, वृन्दावन के अन्य निवासियों के साथ तथा गायों के साथ उनकी लीलाएँ सुख से ओतप्रोत हैं । वृन्दावन की सारी जनता कृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी को नहीं जानती थी।
| सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव। न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः॥ "अर्जुन ने कहाः आप भगवान्, परम-धाम, पवित्रतम परम सत्य हैं। आप शाश्वत, दिव्य आदि पुरुष, अजन्मा तथा महानतम हैं। नारद, असित देवल तथा व्यास जैसे समस्त महामुनि आपके विषय में इस सत्य की पुष्टि करते हैंऔर अब आप स्वयं मुझसे इसी कीघोषणा कर रहे हैं। हे कृष्ण! आपनेजो कुछ कहा है उसे पूर्णरूप से मैं सत्य मानता हूँ। हे प्रभु! न तो देवता ओर न असुर ही आपके व्यक्तित्व को समझ सकते हैं ।" भगवान् से भगवद्गीता सुनने के बाद अर्जुन ने कृष्ण को परम ब्रह्म स्वीकार कर लिया। प्रत्येक जीव ब्रह्म है, लेकिन परम पुरुषोत्तम भगवान् परम ब्रह्म हैं। परम् धाम का अर्थ है कि वे सबों के परम आश्रय या धाम हैं। पवित्रम् का अर्थ हे कि वे शुद्ध हैं ओर भौतिक कल्मष से अरंजितहैं। पुरुषम् का अर्थ हे कि वे परम भोक्ता हैं, शाश्र्वतम् अर्थात्सनातन; दिव्यम् अर्थात् दिव्य :आदि देवम्-भगवान्; अजम्-अजन्मा तथा विभुम् अर्थात महानतम हैं। कोई यह सोच सकता है कि चूँकि कृष्ण अर्जुन के मित्र थे, अतएव अर्जुन यह सब चाटुकारिता के रूप में कह रहा था । लेकिन अर्जुन भगवद्गीता के पाठकों के मन से इस प्रकार के सन्देह को दूर करने के लिए अगले श्लोक में इस प्रशंसा के पुष्टि करता है, जब वह यह कहता है कि कृष्ण को मैं ही भगवान् नहीं मानता, अपितु नारद, असित, देवल तथा व्यासदेव जैसे महापुरुष भी स्वीकार करते हैं । ये सब महापुरुष हैं जो समस्त आचार्यो द्वारा स्वीकृत वैदिक ज्ञान का वितरण करते हैं। अतएव अर्जुन कृष्ण से कहता है कि वे जो कुछ भी कहते हैं, उसे वह पूर्ण सत्य मानता हूँ । सर्वमेतदृतंमन्ये- "आप जो कुछ कहते है, उसे मैं सत्य मानता हूँ ।" अर्जुन यह भी कहता है कि भगवान् के व्यक्तित्व को समझ पाना बहुत कठिन है, यहाँ तक कि बड़े-बड़े देवता भी उन्हें नहीं समझ पाते। अतएव मानव भक्त बने विना भगवान् श्रीकृष्ण को कैसे समझ सकता है? अतएव भगवद्गीता को भक्तिभाव से ग्रहण करना चाहिये। किसी को यह नहीं सोचना चाहिये कि वह कृष्ण के तुल्य हे, न ही यह सोचना चाहिये कि कृष्ण सामान्य पुरुष हैं या कि एक महानतम व्यक्ति हैं। भगवान् श्रीकृष्ण साक्षात् पुरुषोत्तम भगवान् हैं। अतएव भगवद्गीता के कथनानुसार, या भगवद्गीता को समझने का प्रयत्न करने वाले अर्जुन के कथनानुसार हमें सिद्धान्त रूप में कम से कम इतना तो स्वीकार कर लेना चाहिये कि श्रीकृष्ण भगवान् हैं, ओर उसी विनीत भाव से हम भगवद्गीता को समझ सकते हैं । जब तक कोई भगवद्गीता का पाठ विनम्र भाव से नहीं करता है, तब तक उसे समझ पाना अत्यन्त कठिन है. क्योंकि यह एक महान रहस्य है । तो भगवद्गीता है क्या? भगवद्गीता का प्रयोजन मनुष्य को भौतिक संसार के अज्ञान से उबारना है। प्रत्येक व्यक्ति अनेक प्रकार की कठिनाइयों में फँसा रहता है, जिस प्रकार अर्जुन भी कुरुक्षेत्र में युद्ध करने के लिए कठिनाई में था । अर्जुन ने श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण कर ली, फलस्वरूप इस भगवद्गीता का प्रवचन हुआ। न केवल अर्जुन वरन हम में से प्रत्येक व्यक्ति इस भौतिक अस्तित्व के कारण चिन्ताओं से पूर्ण है। हमारा अस्तित्व ही अनस्तित्व के परिवेश में है। वस्तुतः हमें अनस्तित्व से भयभीत नहीं होना चाहिए। हमारा अस्तित्व सनातन है। लेकिन हम किसी न किसी कारण से असत में डाल दिए गये हैं। असत् का अर्थ उससे है जिसका अस्तित्व नहीं कष्ट भोगने वाले अनेक मनुष्यों में केवल कुछ ही ऐसे हैं जो वास्तव में यह जानने के जिज्ञासु हैं कि वे क्या हैं और वे इस विषय स्थिति में क्यों डाल दिये गये हैं, आदि-आदि । जब तक मनुष्य को अपने कष्टों के विषय में जिज्ञासा नहीं होती, जब तक उसे यह अनुभूति नहीं होती कि वह कष्ट भोगना नहीं, अपितु सारे कष्टों का हल ढूँढना चाहता है, तब तक उसे सिद्ध मानव नहींसमझना चाहिए । मानवता तभी शरू होती है जब मन में इस प्रकार की जिज्ञासा उदित होती है। ब्रह्म-सूत्र में इस जिज्ञासा को ब्रह्म जिज्ञासा कहा गया है। अथातो ब्रह्मजिज्ञासा । मनुष्य के सारे कार्यकलाप तब तक असफल माने जाने चाहिए, जब तक वह परब्रह्म के स्वभाव के विषय में जिज्ञासा न करे । अतएव जो लोग लोग यह प्रश्न करना प्रारम्भ कर देते हैं कि वे क्यों कष्ट उठा रहे हैं, या वे कहाँ से आये हैं और मृत्यु के बाद कहाँ जायेंगे, वे ही भगवद्गीता को समझने के सुपात्र विद्यार्थी हैं। निष्ठावान विद्यार्थी में भगवान् के प्रति आदर भाव भी होना चाहिए । अर्जुन ऐसा ही विद्यार्थी था। के जब मनुष्य जीवन के वास्तविक प्रयोजन को भूल जाता है तो भगवान् कृष्ण विशेष रूप से उस प्रयोजन की पुनर्स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। तब भी असंख्य जागृत हुए लोगों में से कोई एक होता है जो वास्तव में अपनी स्थिति को जान पाता है और यह भगवद्गीता उसी के लिए कही गई है। वस्तुतः हम सभी अविद्या रूपी बाघिन के द्वारा निगल लिए गए हैं, लेकिन भगवान् जीवों पर, विशेषतया मनुष्यों पर कृपालु हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने मित्र को अपना शिष्य बना कर भगवद्गीता का प्रवचन किया । भगवान् कृष्ण का पार्षद होने के कारण अर्जुन समस्त अज्ञान से मुक्त था, लेकिन कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में वह अज्ञानी बन कर भगवान् कृष्ण के जीवन की समस्याओं के विषय में प्रश्न करने लगा जिससे भगवान् उनकी व्याख्या भावी पीढ़ियों के मनुष्यों के लाभ के लिए कर दें और जीवन की योजना का निर्धारण कर दें । तब मनुष्य तदनुसार कार्य कर पायेगा और मानव जीवन के उद्देश्य को पूर्ण कर सकेगा । भगवद्गीता की विषयवस्तु में पाँच मूल सत्यों का ज्ञान निहित है। सर्व प्रथम ईश्र्वर के विज्ञान की और फिर जीवों की स्वरूप स्थिति की विवेचना की गई है। ईश्वर का अर्थ नियन्ता है और जीवोब का अर्थ है नियन्त्रित । यदि जीव यह कहे कि वह नियन्त्रित नहीं है, अपितु स्वतन्त्र है तो समझो कि वह पागल है। जीव सभी प्रकार से, कम से कम बद्ध जीवन में, तो नियन्त्रित है ही। अतएव भगवद्गीता की विषय वस्तु ईश्वर तथा जीव से सम्बन्धित है। इसमें प्रकृति, काल तथा कर्म की भी व्याख्या है । यह दृश्य- जगत विभिन्न कार्य कलापों से ओतप्रोत है। सारे जीव भिन्न-भिन्न कार्यों में लगे हुए हैं। भगवद्गीता से हमें अवश्य सीखना चाहिए कि ईश्वर क्या है, जीव क्या है, प्रकृति क्या है, दृश्य-जगत क्या है, यह काल द्वारा किस प्रकार नियन्त्रित किया जाता है, और जीवों के कार्य कलाप क्या हैं ? भगवद्गीता के इन पाँच मूलभूत विषयों में से इसकी स्थापना की गई है कि भगवान्, अथवा कृष्ण, अथवा ब्रह्म, या परमात्मा, आप जो चाहे कह लें, सबसे श्रेष्ठ हैं। जीव गुण में परम-नियन्ता के ही समान हैं। उदाहरणार्थ, जैसा कि भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों में बताया जायेगा, भगवान् भौतिक प्रकृति के समस्त कार्यों के ऊपर नियन्त्रण रखते हैं। भौतिक प्रकृति स्वतन्त्र नहीं है। वह परमेश्वर की अध्यक्षता में कार्य करती है। जैसा कि भगवान् कृष्ण कहते हैं - मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम - भौतिक प्रकृति मेरी अध्यक्षता में कार्य करती है । जब हम दृश्य-जगत में विचित्र विचित्र बातें घटते देखते हैं, तो हमें यह जानना चाहिए कि इस जगत के पीछे नियन्ता का हाथ है । बिना नियन्त्रण के कुछ भी हो पाना सम्भव नहीं । नियन्ता को न मानना बचपना होगा । उदाहरणार्थ, एक बालक सोच सकता है कि स्वतोचालित यान विचित्र होता है, क्योंकि यह बिना घोड़े के या खींचने वाले पशु से चलता है। किन्तु अभिज्ञ व्यक्ति स्वतोचालितयान की अभियान्त्रिक व्यवस्था से परिचित होता है । वह सदैव जानता है कि इस यन्त्र के पीछे एक व्यक्ति, एक चालक होता है। इसी प्रकार परमेश्र्वर वह चालक है जिसके निर्देशन में सब कुछ चल रहा है। भगवान् ने जीवों को अपने अंश-रूप में स्वीकार किया है, जैसा कि हम अगले अध्यायों में देखेंगे। सोने का एक कण भी सोना है, समुद्र के जल की बूँद भी खारी होती है। इसी प्रकार हम जीव भी परम-नियन्ता ईश्र्वर या भगवान् श्रीकृष्ण के अंश होने के कारण सूक्ष्म ईश्र्वर या अधीनस्थ ईश्र्वर हैं। हम प्रकृति पर नियन्त्रण करने का प्रयास कर रहे हैं, और इस समय हम अन्तरिक्ष या ग्रहों को वश में करना चाहता हैं, और हममें नियन्त्रण रखने की यह प्रवृत्ति होती है, लेकिन हमें यह जानना चाहिए कि हम परम-नियन्ता नहीं हैं। इसकी व्याख्या भगवद्गीता में की गई है। भौतिक प्रकृति क्या है? गीता में इसकी व्याख्या अपरा प्रकृति के रूप में हुई है। जीव को परा प्रकृति कहा गया है । प्रकृति चाहे परा हो या अपरा, सदैव नियन्त्रण में रहती है। प्रकृति स्त्री-स्वरूपा है और वह भगवान् द्वारा उसी प्रकार नियन्त्रित होती है, जिस प्रकार पत्नी अपने पति द्वारा प्रकृति सदैव अधीन रहती है, उस पर भगवान् का प्रभुत्व रहता है, क्योंकि भगवान् ही अध्यक्ष हैं। जीव तथा भौतिक प्रकृति दोनों ही परमेश्र्वर द्वारा अधिशासित एवं नियन्त्रित होते हैं। गीता के अनुसार यद्यपि सारे जीव परमेश्वर के अंश हैं, लेकिन वे प्रकृति ही माने जाते हैं । इसका उल्लेख भगवद्गीता के सातवें अध्याय में हुआ है। अपरेयमितस्त्वन्यां-"यह भौतिक प्रकृति मेरी अपरा प्रकृति है।"प्रकृतिं विद्धि मे पराम् । जीव भूताम् महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् ॥ लेकिन इससे भी परे दूसरी प्रकृति हैः जीव भूताम् अर्थात् जीव है। प्रकृति तीन गुणों से निर्मित है - सतोगुण, रजोगुण तथा तमोगुण । इन गुणों के ऊपर नित्य काल है। इन गुणों तथा नित्य काल के संयोग से अनेक कार्यकलाप होते हैं, जो कर्म कहलाते हैं। ये कार्यकलाप अनादि काल से चले आ रहे हैं और हम सभी अपने कार्य कलाप के फलस्वरूप सुख या दुख भोग रहे हैं। उदाहरणार्थ, मान लें कि मैं व्यापारी हूँ और मैंने बुद्धि के बल पर कठोर श्रम किया है और बहुत सम्पत्ति संचित कर ली है । तब मैं सम्पत्ति के सुख का भोक्ता हूँ किन्तु यदि मान लें कि व्यापार में मेरा सब धन जाता रहा तो मैं दुख का भोक्ता हो जाता हूँ । इसी प्रकार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हम अपने कर्म के फल का सुख भोगते हैं या उसका कष्ट उठाते हैं । यह कर्म कहलाता है । ईश्र्वर, जीव, प्रकृति, काल तथा कर्म इन सबकी व्याख्या भगवद्गीता में हुई है । इन पाँचों में से ईश्र्वर, जीव, प्रकृति तथा काल शाश्र्वत हैं । प्रकृति कि अभिव्यक्ति अस्थायी हो सकती है, परन्तु यह मिथ्या नहीं है । कोकोई दार्शनिक कहते हैं कि प्रकृति कि अभिव्यक्ति मिथ्या है, लेकिन भगवद्गीता या वैष्णवों के दर्शन के अनुसार ऐसा नहीं है । जगत की अभिव्यक्ति को मिथ्या नहीं माना जाता । इसे वास्तविक, किन्तु अस्थायी माना जाता है । यह उस बादल के सदृश है जो आकाश में घूमता रहता है, या वर्षा ऋतु के आगमन के समान है, जो अन्न का पोषण करती है । ज्योंही वर्षा ऋतु समाप्त होती है और बादल चले जाते हैं, त्योंही वर्षा द्वारा पोषित सारी फसल सूख जाती है । इसी प्रकार यह भौतिक अभिव्यक्ति भी किसी समय में, किसी स्थान पर होती है, कुछ काल तक रहती-ठहरती है और फिर लुप्त हो जाती है । प्रकृति इस रूप में कार्यशील है । लेकिन यह चक्र निरन्तर चलता रहता है । इसीलिए प्रकृति शाश्र्वत है, मिथ्या नहीं है । भगवान् इस "मेरी प्रकृति" कहते हैं । यह भौतिक प्रकृति परमेश्र्वर की भिन्न-शक्ति है । इसी प्रकार जीव भी परमेश्र्वर कि शक्ति हैं, किन्तु वे विलग नहीं, अपितु भगवान् से नित्य-सम्बद्ध हैं । इस तरह भगवान्, जीव, प्रकृति तथा काल, ये सब परस्पर सम्बद्ध हैं और सभी शाश्र्वत हैं । लेकिन कर्म शाश्र्वत नहीं है । हाँ, कर्म के फल अत्यन्त पुरातन हो सकते हैं । हम अनादि काल से अपने शुभ-अशुभ कर्मफलों को भोग रहे हैं, किन्तु साथ ही हम अपने कर्मों के फल को बदल भी सकते हैं और यह परिवर्तन हमारे ज्ञान की पूर्णता पर निर्भर कर्ता है । हम विविध प्रकार के कर्मों में व्यस्त रहते हैं । निस्संदेह हम यह नहीं जानते कि किस प्रकार के कर्म करने से हम कर्मफल से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं । लेकिन भगवद्गीता में इसका भी वर्णन हुआ हो । ईश्र्वर अर्थात् परम ईश्र्वर परम चेतना-स्वरूप है । जीव भी ईश्वर का अंश होने के कारण चेतन है । जीव तथा भौतिक प्रकृति दोनों को प्रकृति बताया गया है, अर्थात् वे परमेश्वर की शक्ति हैं, किन्तु इन दोनों में से केवल जीव चेतन है, दूसरी प्रकृति चेतन नहीं है । यही अन्तर है । इसीलिए जीव प्रकृति परा या उत्कृष्ट कहलाती है, क्योंकि जीव, भगवान् जैसी चेतना से युक्त है । लेकिन भगवान् की चेतना परम है, और किसी को यह नहीं कहना चाहिए कि जीव भी परम चेतन है । जीव कभी भी, यहाँ तक कि अपनी सिद्ध अवस्था में भी, परम चेतन नहीं हो सकता और यह सिद्धान्त भ्रामक है कि जीव परम चेतन हो सकता है । वः चेतन तो है, लेकिन पूर्ण या परम चेतन नहीं । जीव तथा ईश्र्वर का अन्तर भगवद्गीता के तेरहवें अध्याय में बताया गया है । ईश्वर क्षेत्रज्ञ या चेतन है, जैसा कि जीव भी है, लेकिन जीव केवल अपने शरीर के प्रति सचेत रहता है, जबकि भगवान् समस्त शरीरों के प्रति सचेत रहते हैं । चूँकि वे प्रत्येक जीव के हृदय में वास करने वाले हैं, अतएव वे जीवविशेष की मानसिक गतिशीलता से परिचित रहते हैं । हमें यह नहीं भूलना चाहिए । यह भी बताया गया है कि परमात्मा प्रत्येक जीव के हृदय में ईश्र्वर या नियन्ता के रूप में वास कर रहे हैं और जैसा जीव चाहता है वैसा करने के लिए जीव को निर्देशित करते रहते हैं । जीव भूल जाता है कि उसे क्या करना है । पहले तो वह किसी एक विधि से कर्म करने का संकल्प करता है, लेकिन फिर वह अपने ही कर्म के पाप-पुण्य में फँस जाता है । वह एक शरीर को त्याग कर दूसरा शरीर ग्रहण करता है, जिस प्रकार हम वस्त्र उतारते तथा पहनते रहते हैं । चूँकि इस प्रकार आत्मा देहान्तरण कर जाता है, अतः उसे अपने विगत कर्मों का फल भोगना पड़ता है । ये कार्यकलाप तभी बदल सकते हैं जब जीव सतोगुण में स्थित हो और यह समझे कि उसे कौन से कर्म करने चाहिए । यदि वह ऐसा कर्ता है तो उसे विगत कर्मों के सारे फल बदल जाते हैं । फलस्वरूप कर्म शाश्र्वत नहीं हैं । इसीलिए हमने यह कहा है कि पाँच तत्त्वों ईश्र्वर, जीव, प्रकृति, काल तथा कर्म में से चार शाश्र्वत हैं, कर्म शाश्र्वत नहीं है । परम चेतन ईश्र्वर जीव से इस मामले में समान है - भगवान् तथा जीव दोनों कि चेतनाएँ दिव्य हैं । यह चेतना पदार्थ के संयोग से उत्पन्न नहीं होती हैं । ऐसा सोचना भ्रान्तिमूलक है । भगवद्गीता इस सिद्धान्त को स्वीकार नहीं करती कि चेतना भौतिक संयोग की किन्हीं परिस्थितियों में उत्पन्न होती है । यह चेतना भौतिक परिस्थितियों के आवरण के कारण विकृत रूप से प्रतिबिम्बित हो सकती है, जिस प्रकार रंगीन काँच से परावर्तित प्रकाश उसी रंग का प्रतीत होता है । किन्तु भगवान् की चेतना भौतिकता से प्रभावित नहीं होती है । भगवान् कहते हैं - मयाध्यक्षेण प्रकृतिः । जब वे इस भौतिक विश्र्व में अवतरित होते हैं तो उनकी चेतना पर भौतिक प्रभाव नहीं पड़ता । यदि वे इस तरह प्रभावित होते तो दिव्य विधयों के सम्बन्ध में उस तरह बोलने के अधिकारी न होते जैसा कि भगवद्गीता में बोलते हैं । भौतिक कल्मष-ग्रस्त चेतना से मुक्त हुए बिना कोई दिव्य-जगत के विषय में कुछ नहीं कह सकता । अतः भगवान् भौतिक दृष्टि से कलुषित नहीं हैं । भगवद्गीता तो शिक्षा देती है कि हमें इस कलुचित चेतना को शुद्ध करना है । शुद्ध चेतना होने पर हमारे सारे कर्म ईश्वर की इच्छानुसार होंगे और इससे हम सुखी ही सकेंगे । परन्तु इसका अर्थ यह भी नहीं है कि हमें अपने सारे कार्य बन्द कर देने चाहिए ।अपितु, हमें अपने कर्मों को शुद्ध करना चाहिए और शुद्ध कर्म भक्ति कहलाते हैं । भक्ति में कर्म सामान्य कर्म प्रतीत होते हैं, किन्तु वे कलुषित नहीं होते । एक अज्ञानी व्यक्ति भक्त को सामान्य व्यक्ति की भाँति कर्म करते देखता है, किन्तु ऐसा मुर्ख यह नहीं समझता कि भक्त या भगवान् के कर्म अशुद्ध चेतना या पदार्थ से कलुषित नहीं होते । वे त्रिगुणातीत होते हैं । जो भी हो, हमें यह जान लेना चाहिए कि अभी हमारी चेतना कलुषित है । जब हम भौतिक दृष्टि से कलुषित होते हैं, तो हम बढ कहलाते हैं । मिथ्या चेतना का प्राकट्य इसलिए होता है कि हम अपने-आपको पप्रकृति का प्रतिफल मान बैठते हैं । यह मिथ्या अहंकार कहलाता है । जो व्यक्ति देहात्मबुद्धि में लीन रहता है वः अपनी स्थिति को नहीं समझ पाता । भगवद्गीता का प्रवचन देहात्मबुद्धि से मनुष्य को मुक्त करने के लिए ही हुआ था और भगवान् से यह सुचना प्राप्त करने के लिए ही अर्जुन ने अपने-आपको इस अवस्था में उपस्थित किया था । मनुष्य को देहात्मबुद्धि से मुक्त होना है, और अध्यात्मवादी के लिए प्रारम्भिक कर्तव्य यही है । जो मुक्त होना चाहता है, जो स्वच्छन्द रहना चाहता है, उसे सर्वप्रथम यह जान लेना होगा कि वः शरीर नहीं है । मुक्ति का अर्थ है - भौतिक चेतना से स्वतन्त्रता । श्रीमद्भागवतम् में भी मुक्ति की परिभाषा दी गई है । मुक्तिर्हित्वान्यथारूपं स्वरूपेण व्यवस्थिति - मुक्ति का अर्थ है इस भौतिक जगत की कलुषित चेतना से मुक्त होना और शुद्ध चेतना में स्थित होना । भगवद्गीता के सारे उपदेशों का मन्तव्य इसी शुद्ग चेतना को जागृत करना है । इसीलिए हम गीता के अन्त में कृष्ण को अर्जुन से यह प्रश्न करते पाते हैं कि वः विशुद्ध चेतना को प्राप्त हुआ या नहीं? शुद्ध चेतना का अर्थ है-भगवान् के आदेशानुसार कर्म करना ।शुद्ध चेतना का यही सार है । भगवान् का अंश होने के कारण हममें चेतना पहले से ही रहती है, लेकिन हममें निकृष्ट गुणों द्वारा प्रभावित होने की प्रवृत्ति पाई जाती है । किन्तु भगवान् परमेश्र्वर होने के कारण कभी प्रभावित नहीं होते । परमेश्र्वर तथा क्षुद्र जीवों में यही अन्तर है । यह चेतना क्या है? यह है "मैं हूँ" । तो फिर "मैं हूँ" क्या है? कलुषित चेतना में "मैं हूँ" का अर्थ है कि मैं सर्वेसर्वा हूँ, मैं ही भोक्ता हूँ । यह संसार चलायमान है, क्योंकि प्रत्येक जीव यही सोचता है कि वही इस भौतिक जगत का स्वामी तथा स्रष्टा है । भौतिक चेतना के दो मनोमय विभाग हैं । एक के अनुसार मैं ही स्रष्टा हूँ, और दूसरे के अनुसार मैं ही भोक्ता हूँ । लेकिन वास्तव में परमेश्र्वर स्रष्टा तथा भोक्ता दोनों है, और परमेश्र्वर का अंश होने के कारण जीव ण तो स्रष्टा है ण ही भोक्ता । वह मात्र सहयोगी है । वः सृजित तथा भुक्त है । उदाहरणार्थ, मशीन का कोई एक अंग सम्पूर्ण मशीन के साथ सहयोग करता है, इसी प्रकार शरीर का कोई एक अंग पूरे शरीर के साथ सहयोग कर्ता है । हाथ, पाँव, आँखें आदि शरीर के अंग हैं, लेकिन ये वास्तविक भोक्ता नहीं हैं । भोक्ता तो उदर है । पाँव चलते हैं, हाथ भोजन देते हैं, दाँत चबाते हैं और शरीर के सारे अंग उदर को तुष्ट करने में लगे रहते हैं, क्योनी उदर ही प्रधान कारक है, जो शरीर रूपी संगठन का पोषण करता है । अतएव सारी वस्तुएँ उदर को दी जाती हैं । जड़ को सींच कर वृक्ष का पोषण किया जाता है, और उदर का भरण करके शरीर का पोषण किया जाता है, क्योंकि यदि शरीर को स्वस्थ रखना है तो शरीर के सारे अंगों को उदरपूर्ति में सहयोग देना होगा । इसी प्रकार परमेश्र्वर ही भोक्ता तथा स्रष्टा हैं और उनके अधीनस्थ हम उन्हें प्रसन्न रखने के निमित्त सहयोग करने के लिए हैं । इस सहयोग से हमें लाभ पहुँचता है । यदि हाथ की अँगुलियाँ यह सोचें कि वे उदर को भोजन ण देकर स्वयं ग्रहण कर लें, तो उन्हें निराश होना पड़ेगा । सृजन तथा भोग के केन्द्रबिन्दु परमेश्र्वर हैं, और सारे जीव उनके सहयोगी हैं । सहयोग के कारण ही वे भोग करते हैं । यह सम्बन्ध स्वामी तथा दास जैसा है । यदि स्वामी तुष्ट रहता है, तो दास भी तुष्ट रहता है । इसी प्रकार परमेश्र्वर को तुष्ट रखना चाहिए, यद्यपि जीवों में भी स्रष्टा बनने तथा भौतिक जगत का भोग करने की प्रवृत्ति होती है, क्योंकि इस दृश्य-जगत् के स्रष्टा परमेश्र्वर में ये प्रवृत्तियाँ हैं अतएव भगवद्गीता में हम पाएंगे कि भगवान् ही पूर्ण हैं जिनमें परम नियन्ता, नियन्त्रित जीव, दृश्य-जगत, शाश्र्वत-काल तथा कर्म सन्निहित हैं, और इन सबकी व्याख्या इसके मूल पाठ में की गई है । ये सब मिलकर परम पूर्ण का निर्माण करते हैं और यही परम पूर्ण परम ब्रह्म या परम सत्य कहलाता है । यही परम पूर्ण तथा परम सत्य पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण हैं । सारी अभिव्यक्तियाँ उनकी विभिन्न शक्तियों के फलस्वरूप हैं । वे ही पूर्ण हैं । भगवद्गीता में यह भी बताया गया है कि ब्रह्म भी पूर्ण परम पुरुष के अधीन है । ब्रह्मसूत्र में ब्रह्म की विशद व्याख्या, सूर्य की किरणों के रूप में की गई है । निर्विशेष ब्रह्म भगवान् का प्रभामय किरणसमूह है । निर्विशेष ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म की अपूर्ण अनुभूति है और इसी तरह परमात्मा की धारणा भी है ।पन्द्रहवें अध्याय में यह देखा जायेगा कि भगवान् पुरुषोत्तम निर्विशेष ब्रह्म तथा परमात्मा की आंशिक अनुभूति से बढ़कर हैं । भगवान् को सच्चिदानन्द विग्रह कहा जाता है । ब्रह्मसंहिता का शुभारम्भ इस प्रकार से होता है -ईश्र्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्द विग्रहः । अनादिरादिर्गोविन्दः सर्वकारणकारणम् । "गोविन्द या कृष्ण सभी कारणों के कारन हैं । वे ही आदि कारण हैं और सत्, चित् तथा आनन्द के रूप हैं ।" निर्विशेष ब्रह्म उनके सत् स्वरूप की अनुभूति है, परमात्मा सत्-चित् की अनुभूति है । परन्तु भगवान् कृष्ण समस्त दिव्य स्वरूपों की अनुभूति हैं सत्-चित्-आनन्द के पूर्ण विग्रह हैं अल्पज्ञानी लोग परम सत्य को निर्विशेष मानते हैं, लेकिन वे हैं- दिव्य पुरुष और इसकी पुष्टि समस्त वैदिक ग्रंथों में हुई है । नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम् । जिस प्रकार हम सभी जीव हैं और हम सबकी अपनी-अपनी व्यष्टि सत्ता है, उसी प्रकार परम सत्य भी अन्ततः व्यक्ति हैं और भगवान् की अनुभूति उनके पूर्ण स्वरूप में समस्त दिव्य लक्षणों की ही अनुभूति है । यह पूर्णतया रुपविहीन नहीं है । यदि वः निराकार है, या किसी अन्य वस्तु से घट कर है, तो वह पूर्ण नहीं हो सकता । जो पूर्ण है, उसे हमारे लिए अनुभवगम्य तथा अनुभवातीत हर वस्तुओं से युक्त होना चाहिए, अन्यथा वह पूर्ण कैसे हो सकता है ? पूर्ण भगवान् में अपार शक्तियां हैं । कृष्ण किस प्रकार अपनी विभिन्न शक्तियों द्वारा कार्यशील हैं, इसकी भी व्याख्या भगवद्गीता में हुई है । यहदृश्य-जगत, या जिस जगत में हम रह रहे हैं, यह भी स्वयंमें पूर्ण है, क्योंकि जिन चौबीस तत्त्वों से यह नश्र्वर ब्रह्माण्ड निर्मित है, वे सांख्य दर्शन के अनुसार इस ब्रह्माण्ड के पालन तथा धारण के लिए अपेक्षित संसाधनों से पूर्णतया समन्वित हैं । इसमें न तो कोई विजातीय तत्त्व है, न ही किसी भी वस्तु की आवश्यकता है । इस सृष्टि का अपना निजी नियत-काल है, जिसका निर्धारण परमेश्र्वर की शक्ति द्वारा हुआ है, और जब यह काल पूर्ण हो जाता है, तो उसे पूर्ण व्यवस्था से इस क्षणभंगुर सृष्टि का विनाश हो जाता है । सभी प्रकार की अपूर्णताओं का अनुभव पूर्ण विषयक ज्ञान की अपूर्णता के कारण है । इस प्रकार भगवद्गीतामें वैदिक विद्या का पूर्ण ज्ञान पाया जाता है। सारावैदिक ज्ञान अमोघ है, और सारे हिन्दू इस ज्ञान को पूर्ण तथा अमोघ मानते हैं । उदाहरणार्थ, गोबर पशुमल है और स्मृति तथा वैदिक आदेश के अनुसार यदि कोई पशुमल का स्पर्श कर्ता है, तो उसे शुद्ध होने के लिए स्नान करना पड़ता है । लेकिन वैदिक शास्त्रों में गोबर को पवित्र करनेवाला माना गया है । इसे विरोधाभास कहा जा सकता है, लेकिन यह मान्य है क्योंकियह वैदिक आदेश है और इसमें सन्देह नहीं कि इसेस्वीकार करनेपर किसी प्रकार की त्रुटि नहीं होगी । अब तो आधुनिक विज्ञान द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि गाय के गोबर में समस्त जीवाणुनाशक गुण पाये जाते हैं । अतएव वैदिक ज्ञान पूर्ण है, क्योंकि यह समस्त संशयों एवं त्रुटियों से परे है, औरभगवद्गीता समस्त वैदिक ज्ञान का सार है । वैदिक ज्ञान शोध का विषय नहीं है । हमारा शोधकार्य अपूर्ण है, क्योंकि हम अपूर्ण इन्द्रियों के द्वारा शोध करते हैं हमेंपहले से चले आ रहे पूर्ण ज्ञान को परम्परा द्वारा स्वीकार करना होता है, जैसा कि भगवद्गीता में कहा गया है । हमें ज्ञान को उपयुक्त स्रोत से, परम्परा से, ग्रहण करना होता है जो परम साक्षात् भगवान् से प्रारम्भ होती है, और शिष्य-गुरुओं की यह परम्परा आगे बढती जाती है । छात्र के रूप में अर्जुन भगवान् कृष्ण से शिक्षा ग्रहण कर्ता है, और उनका विरोध किये बिना वह कृष्ण की सारी बातें स्वीकार कर लेता है । किसी को भगवद्गीताके एक अंश को स्वीकार करने और दूसरे अंश को अस्वीकार करने की अनुमति नहीं दि जाती । हमेंभगवद्गीताको बिना किसी प्रकार की टिप्पणी, बिना घटाए- बढ़ाए तथा विषय-वस्तु में बिना किसी मनोकल्पना के स्वीकार करना चाहिए । गीताको वैदिक ज्ञान की सर्वाधिक पूर्ण प्रस्तुति समझना चाहिए । वैदिक ज्ञान दिव्य स्रोतों से प्राप्त होता है, और स्वयं भगवान ने पहला प्रवचन किया था । भगवान् द्वारा कहे गये शब्द अपौरुषेय कहलाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे चार दोषों से युक्त संसारी व्यक्ति द्वारा कहे गये शब्दों से भिन्न होते हैं । संसारी पुरुष के दोष हैं - वह त्रुटियाँ अवश्य करता है, वह अनिवार्य रूप से भ्रमित होता है, उसमें स्न्यों को धोखा देने की प्रवृत्ति होती है, तथा वह अपूर्ण इन्द्रियों के कारण सीमित होता है । इन चार दोषों के कारण मनुष्य सर्वव्यापी ज्ञान विषयक पूर्ण सूचना नहीं दे पाता । ऐसे दोषपूर्ण व्यक्तियों द्वारा वैदिक ज्ञान प्रदान नहीं किया जाता। इसे पहले-पहल प्रथम सृष्ट जीव, ब्रह्मा के हृदय में प्रदान किया गया, फिर ब्रह्मा ने इस ज्ञान को अपने पुत्रों तथा शिष्यों को उसी रूप में प्रदान किया जिस रूप में उन्हें भगवान् से प्राप्त हुआ था। भगवान् पूर्ण हैं और उनका प्रकृति के नियमों के वशीभूत होने का प्रश्न ही नहीं उठता । अतएव मनुष्य में इतना समझने की बुद्धि होनी ही चाहिए कि भगवान् ही इस ब्रह्माण्ड की साड़ी वस्तुओं के एकमात्र स्वामी हैं, वे ही आदि स्रष्टा तथा ब्रह्मा के भी सृजनकर्ता हैं । ग्याहरवें अध्याय में भगवान् को प्रपितामह के रूप में संबोधित किया गया है, क्योंकि ब्रह्मा को पितामह कहकर संबोधित किया गया है, और वे तो इन पितामह से भी स्रष्टा हैं । अतेव किसी को अपने-आपको किसी भी वस्तु का स्वामी नहीं मानना चाहिए, उसे केवल उन्हीं वस्तुओं को अपना मानना चाहिए जो उसके पोषण के लिए भगवान् ने अलग कर दी हैं । भगवान् द्वार हमारे सदुपयोग के लिए राखी गई वस्तुओं को किस काम में लाया जाय, इसके अनेक उदाहरण हैं । इसकी भी व्याख्या भगवद्गीता में हुई है । प्रारम्भ में अर्जुन ने निश्चय किया था कि वह कुरुक्षेत्र के युद्ध में नहीं लडेगा। यह उसका निर्णय था । अर्जुन ने भगवान् से कहा कि वह अपने ही सम्बन्धियों को मार कर राज्य का भोग नहीं करना चाहता । यह निर्णय शरीर पर आधारित था, क्योंकि वह अपने-आपको शरीर मान रहा था और अपने भाइयों, भतीजों, सालों, पितामहों आदि को अपने शारीरिक सम्बन्ध या विस्तार के रूप में ले रहा था । अतएव वः अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को तुष्ट करना चाह रहा था । भगवान् ने भगवद्गीताका प्रवचन इस दृष्टिकोण को बदलने के लिए ही किया, और अन्त में अर्जुन भगवान् के आदेशानुसार युद्ध अकरने करते हुए कहता है - करिष्ये वचनं तव - "मैं आपके वचन के अनुसार ही कार्य करूँगा ।" इस संसार में मनुष्य बिल्लियों तथा कुत्तों के समान लड़ने के लिए नहीं है । मनुष्यों को मनुष्य जीवन की महत्ता समझकर सामान्य पशुओं की भाँति आचरण करना बन्द कर देना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन के उद्देश्य को समझना चाहिए, और इसका निर्देश वैदिक ग्रंथों में दिया गया है, जिसका सार भगवद्गीतामें मिलता है । वैदिक ग्रंथ मनुष्यों के लिए हैं, पशुओं के लिए नहीं । एक पशु दूसरे पशु का वध करे तो कोई पाप नहीं लगता, लेकिन यदि `मनुष्य अपनी अनियन्त्रित स्वादेन्द्रिय की तुष्टि के लिए पशु वध करता है, तो वह प्रकृति के नियम को तोड़ने के लिए उत्तरदायी है । भगवद्गीतामें स्पष्ट रूप से प्रकृति के गुणों के अनुसार तीन प्रकार के कर्मों का उल्लेख है - सात्त्विक कर्म, राजसिक कर्म तथा तामसिक कर्म । इसी प्रकार आहार के भी तीन भेद हैं - सात्त्विक आहार, राजसिक आहार तथा तामसिक आहार । इन सबका विशद वर्णन हुआ है, और यदि हम भगवद्गीताके उपदेशों का ठीक से उपयोग करे तो हमारा सम्पूर्ण जीवन शुद्ध हो जाए, और अन्ततः हम अपने गन्तव्य को प्राप्त हो सकते हैं, जो इस भौतिक से परे है । यह गन्तव्य सनातन आकाश, या नित्य चिन्मय आकाश कहलाता है । इस संसार में हम पाते हैं कि प्रत्येक पदार्थ क्षणिक है । यह उत्पन्न होता है, कुछ काल तक रहता है, कुछ गौण वस्तुएँ उत्पन्न कर्ता है, क्षीण होता है और अन्त में लुप्त हो जाता है । भौतिक संसार का यही नियम है, चाहे हम इस शरीर का दृष्टान्त लें, या फल का या किसी वस्तु का । किन्तु इस क्षणिक संसार से परे एक अन्य संसार है, जिसकेविषय में हमें जानकारी है । उस संसार में अन्य प्रकृति है, जो सनातन है । जीवभी सनातन है और ग्यारहवें अध्याय में भगवान् को भी सनातन बताया गया है । हमारा भगवान् के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध है, और चूँकि हम सभी गुणात्मक रूप से एक हैं - सनातन-धाम, सनातन -ब्रह्म तथा सनातन-जीव - अतएवगीताका सारा अभिप्राय हमारे सनातन धर्म को जागृत करना है, जो कि जीव की शाश्वत वृत्ति है । हम अस्थायी रूप से विभिन्न कर्मों में लगे रहते हैं, किन्तु यदि हम इन क्षणिक कर्मों को त्याग कर परमेश्वर द्वारा प्रस्तावित कर्मों को ग्रहण कर लें, तो हमारे ये सारे कर्म जाएँ । यही शुद्ध जीवन कहलाता है । परमेश्र्वर तथा उनका दिव्य धाम, ये दोनों ही सनातन हैं और जीव भी सनातन हैं । सनातन धर्म में परमेश्वर तथा जीव की संयुक्त संगति ही मानव जीवन की सार्थकता है । भगवान् जीवों पर अत्यन्त दयालु रहते हैं, क्योंकि वे उनके आत्मज हैं । भगवान् कृष्ण ने भगवद्गीता में घोषित किया है सर्वयोनिषु... अहं बीजप्रदः पिता - "मैं सबका पिता हूँ ।" निस्सन्देह अपने-अपने कर्मों के अनुसार नाना प्रकार के जीव हैं, लेकिन यहाँ पर कृष्ण कहते हैं कि वे उन सबके पिता हैं । अतेव भगवान् उन्स अम्स्त पतित बद्धजीवों का उद्धार करने तथा उन्हें सनातन-धाम वापस बुलाने के लिए अवतरित होते हैं या फिर अपने विश्वस्त सेवकों को अपने पुत्रों, पार्षदों या आचार्यों के रूप में इन बद्धजीवों का उद्धार करने के लिए भेजते हैं । अतएव सनातन-धर्म किसी साम्प्रदायिक धर्म पद्धति का सूचक नहीं है । यह तो नित्य परमेश्र्वर के साथ नित्य जीवों के नित्य कर्म-धर्म का सूचक है । जैसा कि पहले कहा जा चुका है, यह जीव के नित्य धर्म को बताता है । श्रीपाद रामानुजाचार्य ने सनातन शब्द की व्याख्या इस प्रकार की है, "वह, जिसका न आदि है और न अन्त" अतेव जब हम सनातन-धर्म के विषय में बातें करते हैं तो हमें श्रीपाद रामानुजाचार्य के प्रमाण के आधार पर यह मान लेना चाहिए कि इसका न आदि है न अन्त । अंग्रेजी का 'रिलीजन 'शब्द सनातन धर्म से थोड़ा भिन्न है । 'रिलीजन से विश्वास का भाव सूचित होता है, और विश्र्वास परिवर्तित हो सकता है । किसी को एक विशेष विधि में विश्वास हो सकता है और वः इस विश्र्वास को बदल कर दूसरा ग्रहण क्र सकता है, लेकिन सनातन-धर्म उस कर्म का सूचक है जो बदला नहीं जा सकता । उदाहरणार्थ, न तो जल से उसकी तरलता विलग की जा सकती है, न अग्नि से उष्मा विलग की जा सकती है । इसी प्रकार जीव से उसके नित्य कर्म को विलग नहीं किया जा सकता । सनातन धर्म जीव का शाश्वत अंग है । अतेव जब हम सनातन-धर्म के विषय में बात करते हैं तो हमें श्रीपाद रामानुजाचार्य के प्रमाण को मानना चाहिए कि उसका न तो आदि है न अन्त । जिसका आदि-अन्त न हो वः साम्प्रदायिक नहीं हो सकता क्योंकि उसे किसी सीमा में नहीं बाँधा जा सकता । जिनका सम्बन्ध किसी सम्प्रदाय से होगा वे सनातन धर्म को भी साम्प्रदायिक मानने की भूल करेंगे, किन्तु यदि हम इस विषय पर गम्भीरता से विचार करें और आधुनिक विज्ञान के प्रकाश में सोचें तो हम सहज ही देख सकते है कि सनातन-धर्म विश्र्व के समस्त लोगों का ही नहीं अपितु ब्रह्माण्ड के समस्त जीवों का है । भले ही असनातन धार्मिक विश्वास का मानव इतिहास के पृष्ठों में कोई आदि हो, लेकिन सनातन-धर्म के इतिहास का कोई आदि नहीं होता, क्योंकि यह जीवों के साथ शाश्र्वत चलता रहता है । जहाँ तक जीवों का सम्बन्ध है, प्रामाणिक शास्त्रों का कथन है कि जीव का न तो जन्म होता है, न मृत्यु । गीता में कहा गया है कि जीव न तो कभी जन्मता है, न कभी मरता है । वः शाश्वत तथा अविनाशी है, और इस क्षणभंगुर शरीर के नष्ट होने के बाद भी रहता है । सनातन धर्म के स्वरूप के प्रसंग में हमें धर्म की धारणा को संस्कृत की मूल धातु से समझना होगा । धर्म का अर्थ है जो पदार्थ विशेष में सदैव रहता है। हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अग्नि के साथ ऊष्मा तथा प्रकाश सदैव रहते हैं, ऊष्मा व प्रकाश के बिना अग्नि शब्द का कोई अर्थ नहीं होता । इसी प्रकार हमें जीव के उस अनिवार्य अंग को ढूँढना चाहिए जो उसका चिर सहचर है । यह चिर सहचर उसका शाश्र्वत गू है और यह शाश्र्वत गुण ही उसका नित्य धर्म है । जब सनातन गोस्वामी ने श्री चैतन्यमहापभु से प्रत्येक जीव के स्वरूप के विषय में जिज्ञासा की तो भगवान् ने उत्तर दिया कि जीव का स्वरूप या स्वाभाविक स्थिति भगवान् की सेवा करना है । यदि हम महाप्रभु के इस कथन का विश्लेषण करें तो हम देखेंगे कि एक जीव दूसरे जीव की सेवा में निरन्तर लगा हुआ है । एक जीव दूसरे जीव की सेवा कई रूपों में कर्ता है । ऐसा करके, जीव जीवन का भोग कर्ता है । निम्न पशु मनुष्यों की सेवा करते हैं जैसे सेवक अपने स्वामी की सेवा करते हैं । एक व्यक्ति 'अ' अपने स्वामी 'ब' की सेवा कर्ता है और 'ब' अपने स्वामी 'स' कीतथा'स' अपने स्वामी 'द' की। इस प्रकार हम देखते हैं कि एक मित्र की सेवा करता है, माता पुत्र की सेवा करती है, पति पत्नी की सेवा करता है । यदि हम इसी भावना से खोज करते चलें तो पाएँगे कि समाज में ऐसा भी अपवाद नहीं है जिसमें कोई जीव सेवा में न लगा हो । एक राजनेता जनता के समक्ष अपनी सेवा करने की क्षमता का घोषणा-पत्र प्रस्तुत कर्ता है । फलतः मतदाता उसे यह सोचते हुए मत देते हैं कि वह समाज की महत्त्वपूर्ण सेवा करेगा । दुकानदार अपने ग्राहक की सेवा करता है और कारीगर पूँजीपतियों की सेवा करते हैं । पूँजीपति अपने परिवार की सेवा कर्ता है और अफ्रिवार शाश्र्वत जीव की शाश्र्वत सेवा क्षमता से राज्य की सेवा कर्ता है । इस प्रकार हम देख सकते हैं कि कोई भी जीव अन्य जीव की सेवा करने मुक्त नहीं है । अतएव हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सेवा जीव की चिर सहचरी है और सेवा करना जीव का शाश्र्वत धर्म है । तथापि मनुष्य काल तथा परिस्थिति विशेष के प्रसंग में एक विशिष्ट प्रकार के विश्र्वास को अंगीकार करता है, और इस प्रकार वः अपने को हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, बौद्ध या किसी अन्य सम्प्रदाय का मानने वाला बताता है ये सभी उपाधियाँ सनातन धर्म नहीं हैं । एक हिन्दू अपना विश्वास बदल क्र मुसलमान बन सकता है, या एक मुसलमान अपना विश्र्वास बदल क्र हिन्दू बन सकता है या कोई ईसाई अपना विश्वास बदल सकता है, इत्यादि । किन्तु इन सभी परिस्थितियों में धार्मिक विश्वास में परिवर्तन होने से अन्यों की सेवा करने का शाश्र्वत-धर्म प्रभावित नहीं होता । हिन्दू, मुसलमान या ईसाई समस्त परिस्थितियों में किसी न किसी के सेवक हैं। अतेव किसी विशेष विश्र्वास को अंगीकार करना अपने सनातन धर्म को अंगीकार करना नहीं है । सेवा करना ही सनातन धर्म है । वस्तुतः भगवान् के साथ हमारा सम्बन्ध सेवा का सम्बन्ध है । परमेश्र्वर परम भोक्ता हैं और हम सारे जीव उनके सेवक है । हम सब उनके भोग के लिए बने हैं और यदि हम भगवान् के साथ उस नित्य भोग में भाग लेते हैं, तो हम सुखी बनते हैं । हम किसी अन्य प्रकार से सुखी नहीं हो सकते ।स्वतन्त्र रूप से सुखी बन पाना सम्भव नहीं, जिस प्रकार शरीर का कोई भी भाग उदर से सहयोग किये बिना सुखी नहीं रह सकता । परमेश्वर की दिव्य प्रेमाभाक्तिमयसेवा किये बिना जीव सुखी नहीं हो सकता । भगवद्गीता में विभिन्न देवों की पूजा या सेवा करने का अनुमोदन नहीं किया गया है । उसमें कहा गया है कामैस्तैस्तैर्हतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः एक तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ।। बीस ।। "जिनकी बुद्धि भौतिक इच्छाओं द्वारा मारी गई है वे देवताओं की शरण में आजाते हैं, और वे अपने-अपने स्वभावों के अनुसार पूजा के विशेष विधिविधानों का पालन करते हैं ।" यहाँ यह स्पष्ट खा गया है कि जो कामवासना द्वारा निर्देशित होते हैं वे भगवान् कृष्ण की पूजा न करके देवताओं की पूजा करते हैं । जब हम कृष्ण का नाम लेते हैं तो हम किसी साम्प्रदायिक नाम का उल्लेख नैन करते । कृष्ण का अर्थ है - सर्वोच्च आनन्द, और इसकी पुष्टि हुई है कि परमेश्र्वर समस्त आनन्द के आगार हैं । हम सभी आनन्द की खोज में लगे रहते हैं । आनन्दमयोऽभ्यासात् । भगवान् की ही भाँति जीव चेतना से पूर्ण हैं, और सुख की खोज में रहते हैं । भगवान् तो नित्य सुखी हैं, और यदि जीव उनकी संगति करते हैं, उनके साथ सहयोग करते हैं, तो वे भी सुखी बन जाते हैं । भगवान् इस मर्त्य लोक में सुख से पूर्ण अपनी वृन्दावन लीलाएँ प्रदर्शित करने के लिए अवतरित होते हैं । अपने गोपमित्रों के साथ, अपनी गोपिका-सखियों के साथ, वृन्दावन के अन्य निवासियों के साथ तथा गायों के साथ उनकी लीलाएँ सुख से ओतप्रोत हैं । वृन्दावन की सारी जनता कृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी को नहीं जानती थी। |
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की सभी 70 विधानसभाओं के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से सीधे फोन के माध्यम से जुड़कर उनकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें अपने क्षेत्रों में किस रणनीति को अपनाना चाहिए, इस पर भी सुझाव दिया।
उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने अंतिम क्षणों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित सभी भाजपा नेता जगह-जगह रैली कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे व्यस्त क्षणों में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने सोशल मीडिया के कार्यकर्ताओं को पूरी तरह मुस्तैद रहने की सलाह दे रहे हैं। हर विधानसभा के अनुसार विशेष योजनाओं को हर एक मतदाता तक प्रचार करने की सलाह देकर वे भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की सलाह दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की सभी 70 विधानसभाओं के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से सीधे फोन के माध्यम से जुड़कर उनकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें अपने क्षेत्रों में किस रणनीति को अपनाना चाहिए, इस पर भी सुझाव दिया। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह लोगों को बताएं कि भाजपा सरकार आने के बाद उनके विधानसभा क्षेत्र में क्या-क्या कार्य हुए हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों के वीडियो, ऑडियो और पार्टी के द्वारा समय-समय पर भेजे जा रहे संदेशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा गया है।
उत्तराखंड में कल शनिवार शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा। तब से लेकर चुनाव के अंतिम क्षणों तक सोशल मीडिया के योद्धाओं को सूचनाओं, वीडियो, गाने, भाषण और अन्य जानकारियों से लैस कर दिया गया है। फोन कॉल्स के माध्यम से हर एक मतदाता तक सुबह से शाम के बीच कम से कम पांच बार संपर्क करने के लिए कहा गया है। रिकॉर्ड संदेशों में मतदाताओं से राज्य में मोदी-धामी सरकार बनाने के लिए वोट मांगे जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि इससे अंतिम क्षणों में पार्टी के पक्ष में हवा बनाने में मदद मिलेगी और उसकी सत्ता में वापसी हो सकेगी।
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के उत्तराखंड प्रभारी तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अमर उजाला को बताया कि इस बार का चुनाव सोशल मीडिया पर ज्यादा केंद्रित रहा है। उनकी पूरी कोशिश रही है कि केंद्र और उत्तराखंड सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी हर एक मतदाता तक पहुंचे और लोग अपने लिए एक बेहतर सरकार का चुनाव करने के लिए उपयुक्त मन बना सकें।
बग्गा ने बताया कि कांग्रेस ने पिछली सरकार में शुक्रवार को विशेष समुदाय के लोगों के लिए छुट्टी की घोषणा कर कांग्रेस की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण नीति को आगे बढ़ाया था, इस बार वे मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में इस तरह का वर्ग विशेष का तुष्टिकरण स्वीकार नहीं है। यहां के राष्ट्रवादी युवा उसी दल को लाने के लिए वोट करेंगे जो किसी वर्ग विशेष से पहले राष्ट्रीय अस्मिता को प्रमुखता देता हो। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा की वापसी तय है।
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या शनिवार को उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। वे पार्टी के सभी युवा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर अंतिम चरणों में अपनी ताकत झोंकेंगे। आज शुक्रवार को भी मसूरी में कार्यकर्ताओं की बैठक हुई है जिसमें पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे हैं। इसमें सभी युवा मतदाताओं से सीधा संपर्क कर केंद्र और राज्य की उन योजनाओं की जानकारी देने की रणनीति बनाई गई है जिससे उत्तराखंड से युवाओं के पलायन को रोका जा सकेगा पार्टी को उम्मीद है कि युवा मतदाताओं के रोजगार और हर राष्ट्रीय रुझान को प्रभावित कर वह सत्ता में वापसी कर सकती है।
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| मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की सभी सत्तर विधानसभाओं के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से सीधे फोन के माध्यम से जुड़कर उनकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें अपने क्षेत्रों में किस रणनीति को अपनाना चाहिए, इस पर भी सुझाव दिया। उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने अंतिम क्षणों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित सभी भाजपा नेता जगह-जगह रैली कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे व्यस्त क्षणों में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने सोशल मीडिया के कार्यकर्ताओं को पूरी तरह मुस्तैद रहने की सलाह दे रहे हैं। हर विधानसभा के अनुसार विशेष योजनाओं को हर एक मतदाता तक प्रचार करने की सलाह देकर वे भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की सलाह दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की सभी सत्तर विधानसभाओं के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से सीधे फोन के माध्यम से जुड़कर उनकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें अपने क्षेत्रों में किस रणनीति को अपनाना चाहिए, इस पर भी सुझाव दिया। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह लोगों को बताएं कि भाजपा सरकार आने के बाद उनके विधानसभा क्षेत्र में क्या-क्या कार्य हुए हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों के वीडियो, ऑडियो और पार्टी के द्वारा समय-समय पर भेजे जा रहे संदेशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा गया है। उत्तराखंड में कल शनिवार शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा। तब से लेकर चुनाव के अंतिम क्षणों तक सोशल मीडिया के योद्धाओं को सूचनाओं, वीडियो, गाने, भाषण और अन्य जानकारियों से लैस कर दिया गया है। फोन कॉल्स के माध्यम से हर एक मतदाता तक सुबह से शाम के बीच कम से कम पांच बार संपर्क करने के लिए कहा गया है। रिकॉर्ड संदेशों में मतदाताओं से राज्य में मोदी-धामी सरकार बनाने के लिए वोट मांगे जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि इससे अंतिम क्षणों में पार्टी के पक्ष में हवा बनाने में मदद मिलेगी और उसकी सत्ता में वापसी हो सकेगी। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के उत्तराखंड प्रभारी तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अमर उजाला को बताया कि इस बार का चुनाव सोशल मीडिया पर ज्यादा केंद्रित रहा है। उनकी पूरी कोशिश रही है कि केंद्र और उत्तराखंड सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी हर एक मतदाता तक पहुंचे और लोग अपने लिए एक बेहतर सरकार का चुनाव करने के लिए उपयुक्त मन बना सकें। बग्गा ने बताया कि कांग्रेस ने पिछली सरकार में शुक्रवार को विशेष समुदाय के लोगों के लिए छुट्टी की घोषणा कर कांग्रेस की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण नीति को आगे बढ़ाया था, इस बार वे मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में इस तरह का वर्ग विशेष का तुष्टिकरण स्वीकार नहीं है। यहां के राष्ट्रवादी युवा उसी दल को लाने के लिए वोट करेंगे जो किसी वर्ग विशेष से पहले राष्ट्रीय अस्मिता को प्रमुखता देता हो। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा की वापसी तय है। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या शनिवार को उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। वे पार्टी के सभी युवा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर अंतिम चरणों में अपनी ताकत झोंकेंगे। आज शुक्रवार को भी मसूरी में कार्यकर्ताओं की बैठक हुई है जिसमें पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे हैं। इसमें सभी युवा मतदाताओं से सीधा संपर्क कर केंद्र और राज्य की उन योजनाओं की जानकारी देने की रणनीति बनाई गई है जिससे उत्तराखंड से युवाओं के पलायन को रोका जा सकेगा पार्टी को उम्मीद है कि युवा मतदाताओं के रोजगार और हर राष्ट्रीय रुझान को प्रभावित कर वह सत्ता में वापसी कर सकती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
कृपाराम बारहठ राजस्थानी कवि एवं नीतिकार थे। उन्होने राजिया रा दूहा नामक नीतिग्रन्थ की रचना की। वे राव राजा देवी सिंह के समय में हुए थे।
In which year did kriparam died ?
When was kriparam born and die?
| कृपाराम बारहठ राजस्थानी कवि एवं नीतिकार थे। उन्होने राजिया रा दूहा नामक नीतिग्रन्थ की रचना की। वे राव राजा देवी सिंह के समय में हुए थे। In which year did kriparam died ? When was kriparam born and die? |
कोरोना वायरस से बचने के लिए बिग बॉस 14 हाउस में पूरा इंतजाम किया जा रहा है. सारे कंटेस्टेंट्स को 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया गया था. सबकी कोरोना टेस्ट करने के बाद ही घर में एंट्री दी जाएगी.
बिग बॉस 14 के कंटेस्टेंट इस सीजन में बिग बॉस के शानदार घर को काफी एन्जॉय करने वाले हैं. डिजाइनर उमंग कुमार और उनकी पत्नी वनिता द्वारा घर को एक नया रूप दिया गया है और कई सारे शानदार बदलाव भी किये गए हैं.
चैनल द्वारा पोस्ट किये वीडियो में एक शानदार डाइनिंग एरिया, रसोई और बेडरूम हम देख सकते है. इतना ही नहीं, कंटेस्टेंट के मनोरंजन के लिए, घर में अब एक थिएटर, मॉल, स्पा और एक खूबसूरत रेस्टोरेंट भी मौजूद होगा.
हमेशा की तरह इस साल भी बिग बॉस के घर में पूल, बगीचे के लिए खास जगह बनाई गई है. इस साल घर की थीम है "शेड्स ऑफ सिल्वर" यानि सिल्वर रंग के कई छटाओं का इस बार घर के सजावट में उपयोग किया गया है. घर के लॉन क्षेत्र में दो रोबोट के आकार के कुत्ते हैं. दीवारें भी चमकदार हैं. लिविंग रूम में भी चमकदार चांदी के रंग का सोफा है. बेडरूम क्षेत्र को काफी रंगीन और मजेदार रखा हुआ है .
बिग बॉस के घर में थिएटर, मॉल और स्पा तो बन गया पर क्या सब को इतनी आसानी से इनका लाभ मिलेगा ? शायद कंटेस्टेंट्स को टास्क या कुछ और जीतकर इन सभी सुविधाओं को हासिल करना होगा.
हम आपको बता दे की बिग बॉस 14 की शूटिंग अब शुरू हो चुकी है. इस बार शुरुआती पड़ाव में बिग बॉस के एक्स कंटेस्टेंट्स भी घर में नजर आएंगे.
कोरोना वायरस से बचने के लिए बिग बॉस 14 हाउस में पूरा इंतजाम किया जा रहा है. सारे कंटेस्टेंट्स को 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया गया था. सबकी कोरोना टेस्ट करने के बाद ही घर में एंट्री दी जाएगी.
| कोरोना वायरस से बचने के लिए बिग बॉस चौदह हाउस में पूरा इंतजाम किया जा रहा है. सारे कंटेस्टेंट्स को चौदह दिन के लिए क्वारंटीन किया गया था. सबकी कोरोना टेस्ट करने के बाद ही घर में एंट्री दी जाएगी. बिग बॉस चौदह के कंटेस्टेंट इस सीजन में बिग बॉस के शानदार घर को काफी एन्जॉय करने वाले हैं. डिजाइनर उमंग कुमार और उनकी पत्नी वनिता द्वारा घर को एक नया रूप दिया गया है और कई सारे शानदार बदलाव भी किये गए हैं. चैनल द्वारा पोस्ट किये वीडियो में एक शानदार डाइनिंग एरिया, रसोई और बेडरूम हम देख सकते है. इतना ही नहीं, कंटेस्टेंट के मनोरंजन के लिए, घर में अब एक थिएटर, मॉल, स्पा और एक खूबसूरत रेस्टोरेंट भी मौजूद होगा. हमेशा की तरह इस साल भी बिग बॉस के घर में पूल, बगीचे के लिए खास जगह बनाई गई है. इस साल घर की थीम है "शेड्स ऑफ सिल्वर" यानि सिल्वर रंग के कई छटाओं का इस बार घर के सजावट में उपयोग किया गया है. घर के लॉन क्षेत्र में दो रोबोट के आकार के कुत्ते हैं. दीवारें भी चमकदार हैं. लिविंग रूम में भी चमकदार चांदी के रंग का सोफा है. बेडरूम क्षेत्र को काफी रंगीन और मजेदार रखा हुआ है . बिग बॉस के घर में थिएटर, मॉल और स्पा तो बन गया पर क्या सब को इतनी आसानी से इनका लाभ मिलेगा ? शायद कंटेस्टेंट्स को टास्क या कुछ और जीतकर इन सभी सुविधाओं को हासिल करना होगा. हम आपको बता दे की बिग बॉस चौदह की शूटिंग अब शुरू हो चुकी है. इस बार शुरुआती पड़ाव में बिग बॉस के एक्स कंटेस्टेंट्स भी घर में नजर आएंगे. कोरोना वायरस से बचने के लिए बिग बॉस चौदह हाउस में पूरा इंतजाम किया जा रहा है. सारे कंटेस्टेंट्स को चौदह दिन के लिए क्वारंटीन किया गया था. सबकी कोरोना टेस्ट करने के बाद ही घर में एंट्री दी जाएगी. |
हमीरपुर(नादौन). पार्किंग समस्या को लेकर नादौन के ब्रिलियंट क्लब के सदस्यों ने प्रशासन से रोष व्यक्त किया है. उनका कहना है कि नादौन शहर में पार्किंग की सुचारु व्यवस्था न होने के कारण वाहनों को नेशनल हाइवे किनारे खड़ा करना पड़ रहा है.
एनएच पर गाड़ी खड़ा करने की वजह से पुलिस द्वारा किए चालान को भी भरना पड़ता है. क्लब के लोगों ने बताया कि नादौन में पार्किंग के लिए उपयुक्त स्थान न होने से लोगों को मजबूर होकर अपने वाहनों को सड़क के किनारे खड़ा करना पड़ रहा है.
सड़क किनारे खडे़ इन वाहनों की वजह से कई बार नादौन बस स्टैंड से ब्यास पुल तक कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं. त्योहारों के दिनों में तो इंद्रपाल चौक से व्यास पुल तक भारी ट्रैफिक हो जाता.
कुछ वर्ष पहले पूर्व सरकार के समय में नादौन शहर में बस स्टैंड के साथ खरीड़ी मैदान में पर्यटन सूचना केंद्र एवं पार्किंग स्थल बनाने के लिए शिलान्यास भी किया गया था, लेकिन सरकार बदलते ही यह योजना फाइलों में ही सिमट कर रह गई.
| हमीरपुर. पार्किंग समस्या को लेकर नादौन के ब्रिलियंट क्लब के सदस्यों ने प्रशासन से रोष व्यक्त किया है. उनका कहना है कि नादौन शहर में पार्किंग की सुचारु व्यवस्था न होने के कारण वाहनों को नेशनल हाइवे किनारे खड़ा करना पड़ रहा है. एनएच पर गाड़ी खड़ा करने की वजह से पुलिस द्वारा किए चालान को भी भरना पड़ता है. क्लब के लोगों ने बताया कि नादौन में पार्किंग के लिए उपयुक्त स्थान न होने से लोगों को मजबूर होकर अपने वाहनों को सड़क के किनारे खड़ा करना पड़ रहा है. सड़क किनारे खडे़ इन वाहनों की वजह से कई बार नादौन बस स्टैंड से ब्यास पुल तक कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं. त्योहारों के दिनों में तो इंद्रपाल चौक से व्यास पुल तक भारी ट्रैफिक हो जाता. कुछ वर्ष पहले पूर्व सरकार के समय में नादौन शहर में बस स्टैंड के साथ खरीड़ी मैदान में पर्यटन सूचना केंद्र एवं पार्किंग स्थल बनाने के लिए शिलान्यास भी किया गया था, लेकिन सरकार बदलते ही यह योजना फाइलों में ही सिमट कर रह गई. |
IPL 2021 का फाइनल Chennai Super Kings और Kolkata Knight Riders के बीच खेला जा रहा है। चेन्नई की टीम ने तीन बार आईपीएल खिताब अपने नाम कर चुकी है। वहीं कोलकाता ने भी दो बार आईपीएल ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाया है। कोलकाता ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया। यह सीजन ऋतुराज गायकवाड़ और फाफ डु प्लेसिस के शानदार रहा। दोनों के बीच ऑरेंज कैप को लेकर कड़ी टक्कर चल रही थी। इस सीजन में ऋतुराज गायकवाड़ ने 635 रन बनाए। वहीं फाफ डु प्लेसिस ने 633 रन बनाए। उसके बाद पंजाब किंग्स के कप्तान केएल राहुल ने 626 रन बनाए।
इस सत्र में गायकवाड़ ने 16 मैचों में 45 की औसत से 635 रन बनाए। इसमें 4 अर्धशतक और राजस्थान के खिलाफ लगाया गया विस्फोटक शतक (101) शामिल है। इस सत्र में उन्होंने कुल 64 चौके और 23 छक्के लगाए। पारी को तेज गति देने का काम गायकवाड़ को सौंपा गया जो उन्होंने बखूबी निभाया।
पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपरकिंग्स की शुरुआत अच्छी रही और पहले विकेट के लिए फाफ डू प्लेसी ने ऋतुराज गायकवाड़ (27 गेंद 32) के साथ 61 रन जोड़े। पावरप्ले के 6 ओवर के बाद स्कोर 50/0 था। नौवें ओवर में ऋतुराज गायकवाड़ के आउट होने के बाद फाफ डू प्लेसी ने दूसरे विकेट के लिए रॉबिन उथप्पा (15 गेंद 31) के साथ 63 रन जोड़े और 12वें ओवर में ही टीम को 100 के पार पहुंचाया।
उथप्पा के आउट होने के बाद डू प्लेसी ने मोईन अली (20 गेंद 37) के साथ तीसरे विकेट के लिए 68 रनों की ताबड़तोड़ साझेदारी निभाई और टीम को 190 के पार पहुंचाया। फाफ डू प्लेसी ने 59 गेंदों में सात चौके एवं तीन छक्कों की मदद से 86 रनों की शानदार पारी खेली। केकेआर की तरफ से सुनील नारेन ने दो और शिवम मावी ने एक विकेट लिया।
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| IPL दो हज़ार इक्कीस का फाइनल Chennai Super Kings और Kolkata Knight Riders के बीच खेला जा रहा है। चेन्नई की टीम ने तीन बार आईपीएल खिताब अपने नाम कर चुकी है। वहीं कोलकाता ने भी दो बार आईपीएल ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाया है। कोलकाता ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया। यह सीजन ऋतुराज गायकवाड़ और फाफ डु प्लेसिस के शानदार रहा। दोनों के बीच ऑरेंज कैप को लेकर कड़ी टक्कर चल रही थी। इस सीजन में ऋतुराज गायकवाड़ ने छः सौ पैंतीस रन बनाए। वहीं फाफ डु प्लेसिस ने छः सौ तैंतीस रन बनाए। उसके बाद पंजाब किंग्स के कप्तान केएल राहुल ने छः सौ छब्बीस रन बनाए। इस सत्र में गायकवाड़ ने सोलह मैचों में पैंतालीस की औसत से छः सौ पैंतीस रन बनाए। इसमें चार अर्धशतक और राजस्थान के खिलाफ लगाया गया विस्फोटक शतक शामिल है। इस सत्र में उन्होंने कुल चौंसठ चौके और तेईस छक्के लगाए। पारी को तेज गति देने का काम गायकवाड़ को सौंपा गया जो उन्होंने बखूबी निभाया। पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपरकिंग्स की शुरुआत अच्छी रही और पहले विकेट के लिए फाफ डू प्लेसी ने ऋतुराज गायकवाड़ के साथ इकसठ रन जोड़े। पावरप्ले के छः ओवर के बाद स्कोर पचास/शून्य था। नौवें ओवर में ऋतुराज गायकवाड़ के आउट होने के बाद फाफ डू प्लेसी ने दूसरे विकेट के लिए रॉबिन उथप्पा के साथ तिरेसठ रन जोड़े और बारहवें ओवर में ही टीम को एक सौ के पार पहुंचाया। उथप्पा के आउट होने के बाद डू प्लेसी ने मोईन अली के साथ तीसरे विकेट के लिए अड़सठ रनों की ताबड़तोड़ साझेदारी निभाई और टीम को एक सौ नब्बे के पार पहुंचाया। फाफ डू प्लेसी ने उनसठ गेंदों में सात चौके एवं तीन छक्कों की मदद से छियासी रनों की शानदार पारी खेली। केकेआर की तरफ से सुनील नारेन ने दो और शिवम मावी ने एक विकेट लिया। यह भी पढ़ेंः |
MUMBAI LIVE IN:
स्कायवॉक बना कचरापेटी ।
व्हॉट्सअप पर व्हायरल नकली टाईम टेबल !
जे पी रोड पर कब साफ होगा कचरा ।
चकाचक हुआ भादवा पार्क ।
चित्रों से जागरुकता अभियान ।
कब चालू होगा मुख्य ब्रिज ?
वडाला लोहमार्ग पुलिस थाने की खराब हालत ।
पुनर्विकास समिति ने किया विरोध ।
अक्सा बीच की साफ सफाई ।
चेंबूर में कचरे से परेशान लोग ।
सेंट्रल लाईन पर 10 घंटो का मेगा ब्लॉक ।
इन तरीकों से रहिए डेंगू से दूर ।
अगर घर में हुआ डेंगू का लार्वा...तो जाना होगा जेल !
बच्चों को रखे पोकेमॉन से दूर ।
NEW UPDATE (S)
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यूट्यूब टीवी ने एक नया 'मल्टीव्यू' फीचर लॉन्च किया है जो ग्राहकों को एक ही समय में चार अलग-अलग कार्यक्रम देखने की अनुमति देगा।
स्ट्रीमिंग की दिग्गज कंपनी ने कहा कि अगले कुछ महीनों में सभी यूट्यूब टीवी सदस्यों के लिए मल्टीव्यू की शुरुआती पहुंच शुरू हो जाएगी।
प्रारंभ में, यूएस में केवल चुनिंदा उपयोगकर्ता ही टीवी उपकरणों पर मल्टीव्यू तक पहुंच प्राप्त करेंगे।
यूट्यूब ने एक ब्लॉगपोस्ट में कहा, "शुरुआती पहुंच के दौरान, कुछ सदस्यों को अपने 'टॉप पिक्स फॉर यू' सेक्शन में एक बार में चार पूर्व-चयनित, अलग-अलग स्ट्रीम देखने का विकल्प दिखाई देने लगेगा। मल्टीव्यू का चयन करने के बाद, दर्शक स्ट्रीम के बीच ऑडियो और कैप्शन को स्विच करने में सक्षम होंगे और गेम के फुलस्क्रीन ²श्य में और बाहर जा सकेंगे। "
कंपनी ने कहा कि जो लोग अर्ली एक्सेस का हिस्सा हैं, उन्हें एक ईमेल प्राप्त होगा और उन्हें अपने यूट्यूब टीवी अनुभव में इस फीचर के बारे में अलर्ट दिखाई देगा।
कंपनी के अनुसार, चूंकि मल्टी-व्यूइंग के लिए एक हाई पॉवर्ड वाले डिवाइस की आवश्यकता होती है, यह उन उपयोगकर्ताओं तक सीमित होगा जिनके पास विशिष्ट उपकरण हैं।
आने वाले महीनों में और एनएफएल (नेशनल फुटबॉल लीग) सीजन के आने के साथ-साथ अधिक लोगों तक पहुंच प्राप्त होने पर यूट्यूब मल्टीव्यू उपयोगकर्ताओं से प्रतिक्रिया की निगरानी करने का इरादा रखता है।
लक्ष्य सभी ग्राहकों के लिए नियमित सीजन की शुरुआत तक मल्टीव्यू तक पहुंच बनाना है।
यूट्यूब ने एनएफएल संडे टिकट की एक्सेस तिथि की पुष्टि कर दी है, जो 10 सितंबर से शुरू होगी।
| यूट्यूब टीवी ने एक नया 'मल्टीव्यू' फीचर लॉन्च किया है जो ग्राहकों को एक ही समय में चार अलग-अलग कार्यक्रम देखने की अनुमति देगा। स्ट्रीमिंग की दिग्गज कंपनी ने कहा कि अगले कुछ महीनों में सभी यूट्यूब टीवी सदस्यों के लिए मल्टीव्यू की शुरुआती पहुंच शुरू हो जाएगी। प्रारंभ में, यूएस में केवल चुनिंदा उपयोगकर्ता ही टीवी उपकरणों पर मल्टीव्यू तक पहुंच प्राप्त करेंगे। यूट्यूब ने एक ब्लॉगपोस्ट में कहा, "शुरुआती पहुंच के दौरान, कुछ सदस्यों को अपने 'टॉप पिक्स फॉर यू' सेक्शन में एक बार में चार पूर्व-चयनित, अलग-अलग स्ट्रीम देखने का विकल्प दिखाई देने लगेगा। मल्टीव्यू का चयन करने के बाद, दर्शक स्ट्रीम के बीच ऑडियो और कैप्शन को स्विच करने में सक्षम होंगे और गेम के फुलस्क्रीन ²श्य में और बाहर जा सकेंगे। " कंपनी ने कहा कि जो लोग अर्ली एक्सेस का हिस्सा हैं, उन्हें एक ईमेल प्राप्त होगा और उन्हें अपने यूट्यूब टीवी अनुभव में इस फीचर के बारे में अलर्ट दिखाई देगा। कंपनी के अनुसार, चूंकि मल्टी-व्यूइंग के लिए एक हाई पॉवर्ड वाले डिवाइस की आवश्यकता होती है, यह उन उपयोगकर्ताओं तक सीमित होगा जिनके पास विशिष्ट उपकरण हैं। आने वाले महीनों में और एनएफएल सीजन के आने के साथ-साथ अधिक लोगों तक पहुंच प्राप्त होने पर यूट्यूब मल्टीव्यू उपयोगकर्ताओं से प्रतिक्रिया की निगरानी करने का इरादा रखता है। लक्ष्य सभी ग्राहकों के लिए नियमित सीजन की शुरुआत तक मल्टीव्यू तक पहुंच बनाना है। यूट्यूब ने एनएफएल संडे टिकट की एक्सेस तिथि की पुष्टि कर दी है, जो दस सितंबर से शुरू होगी। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
भारतीय नववर्ष की विशेषता - ग्रंथो में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी १ रविवार था। हमारे लिए आने वाला संवत्सर २०७५ बहुत ही भाग्यशाली होगा, क़्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है, शुदी एवम 'शुक्ल पक्ष एक ही है। चैत्र के महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि (प्रतिपद या प्रतिपदा) को सृष्टि का आरंभ हुआ था।हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शरू होता है। इस दिन ग्रह और नक्षत्र मे परिवर्तन होता है । हिन्दी महीने की शुरूआत इसी दिन से होती है । पेड़-पोधों मे फूल,मंजर,कली इसी समय आना शुरू होते है, वातावरण मे एक नया उल्लास होता है जो मन को आह्लादित कर देता है । जीवो में धर्म के प्रति आस्था बढ़ जाती है । इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था । भगवान विष्णु जी का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था । नवरात्र की शुरुअात इसी दिन से होती है । जिसमे हमलोग उपवास एवं पवित्र रह कर नव वर्ष की शुरूआत करते है । परम पुरूष अपनी प्रकृति से मिलने जब आता है तो सदा चैत्र में ही आता है। इसीलिए सारी सृष्टि सबसे ज्यादा चैत्र में ही महक रही होती है। वैष्णव दर्शन में चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है। चैत्र का आध्यात्मिक स्वरूप इतना उन्नत है कि इसने वैकुंठ में बसने वाले ईश्वर को भी धरती पर उतार दिया। न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऎसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए, श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के ठीक नवे दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था । आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी । यह दिन कल्प, सृष्टि, युगादि का प्रारंभिक दिन है । संसारव्यापी निर्मलता और कोमलता के बीच प्रकट होता है हमारा अपना नया साल * *विक्रम संवत्सर विक्रम संवत का संबंध हमारे कालचक्र से ही नहीं, बल्कि हमारे सुदीर्घ साहित्य और जीवन जीने की विविधता से भी है। कहीं धूल-धक्कड़ नहीं, कुत्सित कीच नहीं, बाहर-भीतर जमीन-आसमान सर्वत्र स्नानोपरांत मन जैसी शुद्धता। पता नहीं किस महामना ऋषि ने चैत्र के इस दिव्य भाव को समझा होगा और किसान को सबसे ज्यादा सुहाती इस चैत मेे ही काल गणना की शुरूआत मानी होगी। चैत्र मास का वैदिक नाम है-मधु मास। मधु मास अर्थात आनंद बांटती वसंत का मास। यह वसंत आ तो जाता है फाल्गुन में ही, पर पूरी तरह से व्यक्त होता है चैत्र में। सारी वनस्पति और सृष्टि प्रस्फुटित होती है, पके मीठे अन्न के दानों में, आम की मन को लुभाती खुशबू में, गणगौर पूजती कन्याओं और सुहागिन नारियों के हाथ की हरी-हरी दूब में तथा वसंतदूत कोयल की गूंजती स्वर लहरी में। चारों ओर पकी फसल का दर्शन, आत्मबल और उत्साह को जन्म देता है। खेतों में हलचल, फसलों की कटाई, हंसिए का मंगलमय खर-खर करता स्वर और खेतों में डांट-डपट-मजाक करती आवाजें। जरा दृष्टि फैलाइए, भारत के आभा मंडल के चारों ओर। चैत्र क्या आया मानो खेतों में हंसी-खुशी की रौनक छा गई। नई फसल घर मे आने का समय भी यही है । इस समय प्रकृति मे उष्णता बढ्ने लगती है, जिससे पेड़ -पौधे, जीव-जन्तु मे नव जीवन आ जाता है । लोग इतने मदमस्त हो जाते है कि आनंद में मंगलमय गीत गुनगुनाने लगते है । गौर और गणेश कि पूजा भी इसी दिन से तीन दिन तक राजस्थान मे कि जाती है । चैत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है वह ही वर्ष में संवत्सर का राजा कहा जाता है, मेषार्क प्रवेश के दिन जो वार होता है वही संवत्सर का मंत्री होता है इस दिन सूर्य मेष राशि मे होता है । नये साल के अवसर पर फ़्लोरिडा में आतिशबाज़ी का एक दृश्य। नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है। . 21 मार्च ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 80वॉ (लीप वर्ष मे 81 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 285 दिन बाकी है। .
नव वर्ष और २१ मार्च आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): बांग्लादेश, ग्रेगोरी कैलेंडर।
बांग्लादेश गणतन्त्र (बांग्ला) ("गणप्रजातन्त्री बांग्लादेश") दक्षिण जंबूद्वीप का एक राष्ट्र है। देश की उत्तर, पूर्व और पश्चिम सीमाएँ भारत और दक्षिणपूर्व सीमा म्यान्मार देशों से मिलती है; दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल हैं, जिसका ऐतिहासिक नाम "বঙ্গ" बंग या "বাংলা" बांग्ला है। इसकी सीमारेखा उस समय निर्धारित हुई जब 1947 में भारत के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का पूर्वी भाग घोषित किया गया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान के मध्य लगभग 1600 किमी (1000 मील) की भौगोलिक दूरी थी। पाकिस्तान के दोनों भागों की जनता का धर्म (इस्लाम) एक था, पर उनके बीच जाति और भाषागत काफ़ी दूरियाँ थीं। पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय के विरुद्ध 1971 में भारत के सहयोग से एक रक्तरंजित युद्ध के बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश का उदभव हुआ। स्वाधीनता के बाद बांग्लादेश के कुछ प्रारंभिक वर्ष राजनैतिक अस्थिरता से परिपूर्ण थे, देश में 13 राष्ट्रशासक बदले गए और 4 सैन्य बगावतें हुई। विश्व के सबसे जनबहुल देशों में बांग्लादेश का स्थान आठवां है। किन्तु क्षेत्रफल की दृष्टि से बांग्लादेश विश्व में 93वाँ है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है। मुसलमान- सघन जनसंख्या वाले देशों में बांग्लादेश का स्थान 4था है, जबकि बांग्लादेश के मुसलमानों की संख्या भारत के अल्पसंख्यक मुसलमानों की संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है और चक्रवात भी बहुत सामान्य हैं। बांग्लादेश दक्षिण एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था, सार्क और बिम्सटेक का प्रतिष्ठित सदस्य है। यह ओआइसी और डी-8 का भी सदस्य है।.
ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar), दुनिया में लगभग हर जगह उपयोग किया जाने वाला कालदर्शक या तिथिपत्रक है। यह जूलियन कालदर्शक (Julian calendar) का रूपान्तरण है। इसे पोप ग्रेगोरी (Pope Gregory XIII) ने लागू किया था। इससे पहले जूलियन कालदर्शक प्रचलन में था, लेकिन उसमें अनेक त्रुटियाँ थीं, जिन्हें ग्रेगोरी कालदर्शक में दूर कर दिया गया। .
नव वर्ष 28 संबंध है और २१ मार्च 14 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 4.76% है = 2 / (28 + 14)।
यह लेख नव वर्ष और २१ मार्च के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। भारतीय नववर्ष की विशेषता - ग्रंथो में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी एक रविवार था। हमारे लिए आने वाला संवत्सर दो हज़ार पचहत्तर बहुत ही भाग्यशाली होगा, क़्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है, शुदी एवम 'शुक्ल पक्ष एक ही है। चैत्र के महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि को सृष्टि का आरंभ हुआ था।हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शरू होता है। इस दिन ग्रह और नक्षत्र मे परिवर्तन होता है । हिन्दी महीने की शुरूआत इसी दिन से होती है । पेड़-पोधों मे फूल,मंजर,कली इसी समय आना शुरू होते है, वातावरण मे एक नया उल्लास होता है जो मन को आह्लादित कर देता है । जीवो में धर्म के प्रति आस्था बढ़ जाती है । इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था । भगवान विष्णु जी का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था । नवरात्र की शुरुअात इसी दिन से होती है । जिसमे हमलोग उपवास एवं पवित्र रह कर नव वर्ष की शुरूआत करते है । परम पुरूष अपनी प्रकृति से मिलने जब आता है तो सदा चैत्र में ही आता है। इसीलिए सारी सृष्टि सबसे ज्यादा चैत्र में ही महक रही होती है। वैष्णव दर्शन में चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है। चैत्र का आध्यात्मिक स्वरूप इतना उन्नत है कि इसने वैकुंठ में बसने वाले ईश्वर को भी धरती पर उतार दिया। न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऎसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए, श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के ठीक नवे दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था । आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी । यह दिन कल्प, सृष्टि, युगादि का प्रारंभिक दिन है । संसारव्यापी निर्मलता और कोमलता के बीच प्रकट होता है हमारा अपना नया साल * *विक्रम संवत्सर विक्रम संवत का संबंध हमारे कालचक्र से ही नहीं, बल्कि हमारे सुदीर्घ साहित्य और जीवन जीने की विविधता से भी है। कहीं धूल-धक्कड़ नहीं, कुत्सित कीच नहीं, बाहर-भीतर जमीन-आसमान सर्वत्र स्नानोपरांत मन जैसी शुद्धता। पता नहीं किस महामना ऋषि ने चैत्र के इस दिव्य भाव को समझा होगा और किसान को सबसे ज्यादा सुहाती इस चैत मेे ही काल गणना की शुरूआत मानी होगी। चैत्र मास का वैदिक नाम है-मधु मास। मधु मास अर्थात आनंद बांटती वसंत का मास। यह वसंत आ तो जाता है फाल्गुन में ही, पर पूरी तरह से व्यक्त होता है चैत्र में। सारी वनस्पति और सृष्टि प्रस्फुटित होती है, पके मीठे अन्न के दानों में, आम की मन को लुभाती खुशबू में, गणगौर पूजती कन्याओं और सुहागिन नारियों के हाथ की हरी-हरी दूब में तथा वसंतदूत कोयल की गूंजती स्वर लहरी में। चारों ओर पकी फसल का दर्शन, आत्मबल और उत्साह को जन्म देता है। खेतों में हलचल, फसलों की कटाई, हंसिए का मंगलमय खर-खर करता स्वर और खेतों में डांट-डपट-मजाक करती आवाजें। जरा दृष्टि फैलाइए, भारत के आभा मंडल के चारों ओर। चैत्र क्या आया मानो खेतों में हंसी-खुशी की रौनक छा गई। नई फसल घर मे आने का समय भी यही है । इस समय प्रकृति मे उष्णता बढ्ने लगती है, जिससे पेड़ -पौधे, जीव-जन्तु मे नव जीवन आ जाता है । लोग इतने मदमस्त हो जाते है कि आनंद में मंगलमय गीत गुनगुनाने लगते है । गौर और गणेश कि पूजा भी इसी दिन से तीन दिन तक राजस्थान मे कि जाती है । चैत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है वह ही वर्ष में संवत्सर का राजा कहा जाता है, मेषार्क प्रवेश के दिन जो वार होता है वही संवत्सर का मंत्री होता है इस दिन सूर्य मेष राशि मे होता है । नये साल के अवसर पर फ़्लोरिडा में आतिशबाज़ी का एक दृश्य। नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है। . इक्कीस मार्च ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का अस्सीवॉ दिन है। साल मे अभी और दो सौ पचासी दिन बाकी है। . नव वर्ष और इक्कीस मार्च आम में दो बातें हैं : बांग्लादेश, ग्रेगोरी कैलेंडर। बांग्लादेश गणतन्त्र दक्षिण जंबूद्वीप का एक राष्ट्र है। देश की उत्तर, पूर्व और पश्चिम सीमाएँ भारत और दक्षिणपूर्व सीमा म्यान्मार देशों से मिलती है; दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल हैं, जिसका ऐतिहासिक नाम "বঙ্গ" बंग या "বাংলা" बांग्ला है। इसकी सीमारेखा उस समय निर्धारित हुई जब एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का पूर्वी भाग घोषित किया गया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान के मध्य लगभग एक हज़ार छः सौ किमी की भौगोलिक दूरी थी। पाकिस्तान के दोनों भागों की जनता का धर्म एक था, पर उनके बीच जाति और भाषागत काफ़ी दूरियाँ थीं। पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय के विरुद्ध एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत के सहयोग से एक रक्तरंजित युद्ध के बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश का उदभव हुआ। स्वाधीनता के बाद बांग्लादेश के कुछ प्रारंभिक वर्ष राजनैतिक अस्थिरता से परिपूर्ण थे, देश में तेरह राष्ट्रशासक बदले गए और चार सैन्य बगावतें हुई। विश्व के सबसे जनबहुल देशों में बांग्लादेश का स्थान आठवां है। किन्तु क्षेत्रफल की दृष्टि से बांग्लादेश विश्व में तिरानवेवाँ है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है। मुसलमान- सघन जनसंख्या वाले देशों में बांग्लादेश का स्थान चारथा है, जबकि बांग्लादेश के मुसलमानों की संख्या भारत के अल्पसंख्यक मुसलमानों की संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है और चक्रवात भी बहुत सामान्य हैं। बांग्लादेश दक्षिण एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था, सार्क और बिम्सटेक का प्रतिष्ठित सदस्य है। यह ओआइसी और डी-आठ का भी सदस्य है।. ग्रेगोरियन कैलेंडर , दुनिया में लगभग हर जगह उपयोग किया जाने वाला कालदर्शक या तिथिपत्रक है। यह जूलियन कालदर्शक का रूपान्तरण है। इसे पोप ग्रेगोरी ने लागू किया था। इससे पहले जूलियन कालदर्शक प्रचलन में था, लेकिन उसमें अनेक त्रुटियाँ थीं, जिन्हें ग्रेगोरी कालदर्शक में दूर कर दिया गया। . नव वर्ष अट्ठाईस संबंध है और इक्कीस मार्च चौदह है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक चार.छिहत्तर% है = दो / । यह लेख नव वर्ष और इक्कीस मार्च के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
Success tips: हर इंसान जिंदगी में सफलता पाने और आगे बढत्ने के ख्वाब संजोता है। ये ख्वाब उसी दिन से आंखों में पनपने लगता है, जब हम इस बात को समझ जाते हैं कि जो लोग जीवन में अपनी पहचान बना चुके हैं, वे औरों के लिए कितने मूल्यवान होते हैं। हमें बचपन से ही कामयाब लोगों की मिसाल देकर हर बात को समझाया जाता है। कहीं न कहीं हम भी उन कामयाब लोगों की फहरिस्त में शामिल होने के लिए उन्हें फॉलो करने लगते हैं। मगर कुछ ऐसी भी बातें होती हैं, जिन पर शायद हमारा ध्यान जा ही नहीं पाता। आइए जानते हैं, वो कौन सी ऐसी अहम बातें हैं, जो हमें जीवन में कामयाबी दिलाने में मुख्य रोल अदा करती है।
अगर आप कामयाब लोगों के बारे में पढ़ेगे और उनके विचार सुनेगे, तो आप जान पाएंगे कि उनकी सफलता काफी हद तक उनके सोने और उठने के समय पर निर्भर करती है। वे सभर कामों को समय से निपटाकर वक्त पर सोते हैं और फिर सुबह जल्दी उठ जाते हैं, ताकि सूरज की पहली किरण के साथ ही वे भी काम करना शुरू कर सकें। बेहद व्यवस्थित ढंग से अपने कार्यों को अज़ाम देने वाले लोगों के कदम सफलता खुद चूमती है।
अगर कोई ऐसा शख्स जिसने आपको हमेशा प्यार और सम्मान दिया। साथ ही उस वक्त आपका खास ख्याल रखा जब आप मुसीबतों से घिरे थे। तो ऐसे लोगों को आप हमेशा याद रखें और उन्हें सुबह उठकर और रात को सोने से पहले मन ही मन धन्यवाद कहना न भूलें। इससे आपके अंदर सकारात्मकता का विकास होगा और आपका व्यवहार खुद ब खुद थैंक्स गीविंग होता चला जाएगा।
सफलता पाने का मतलब ये कदापि नहीं कि आप दूसरों को धोखा दें और उनके बनाए रास्तों पर चलकर आगे बढ़े। सफलता का मतलब और मकसद एकता यानि टीम पर निर्भर है। अगर आप एक टीम के रूप में आगे बढ़ेगे, तो इसका फयदा आपके साथ साथ आपकी आर्गनाईजे़शन को भी होगा। ऐसे में अपनी टीम के कमज़ोर साथियों को साथ लेकर चलें और उनका मार्गदर्शन करें। अगर आप आज किसी की मदद करेंगे, तो कल अवश्य वो भी तत्परता से आपके सहयोग के लिए अवश्य आगे आंएगे।
समस्याएं हमारी जिदंगी का एक अभिन्न अंग है। इन्हें समाप्त करने के लिए हमें खुद को मज़बूत बनाना होगां। यदि हम अपनी समस्याओं से बाहर निकलने के लिए दूसरों पर निर्भर रहेंगे, तो ऐसे में हम जीवन में सफलता को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। सबसे पहले आपको खुद पर आत्मविश्वास होना चाहिए, जो हमें हमारी मंज़िलों तक पहुंचाने में मददगार साबित होता है। अगर आपके अंदर कांफिडेंस की भावना आ जाती है, तो आप बड़े से बड़े तुफान से भिड़ जाने का भी दम रखते हैं। अन्यथा आप हर परेशानी पर मदद के लिए दूसरों का दरवाज़ा ही खटखटाते रहेंगे।
इसमें कोई दोराय नहीं है कि हमें जीवन में बहुत से लोग ऐसे मिलते हैं, जिनसे हमारे विचार मेल नहीं खाते यां विचारों में समानता महसूस नहीं होती है। ऐसे में आपको उन लोगों से दूर होने का तरीका नहीं बल्कि आपसी समानता और एकता बरकरार रखने का उपाय खोजना है। अगर आप छोटी छोटी बातों पर दूसरों के लिए अपने मन में हीनभावना और भेदभाव रखेंगे, तो निश्चित तौर पर आप धीरे धीरे सभी से दूर होने लगेंगे।
वाणी की सौम्यता और मधुरता आपको जीवन में हर मोड़ पर काम आमी है। अगर आप बातचीत करने में सही शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और हर किसी को इज्जत देते हैं, तो आपको जीवन में सफलता अवश्य प्राप्त होगी। कई बार हम किसी कारण वश दूसरों को खुद से नीचा देखने लगते हैं। उन्हें नज़रअंदाज़ करने लगते हैं और उनके सामने आने से कतराते हैं और अगर वो सामने आ जाएं, तो उन्हें इज्जत नहीं देते हैं। ये सब बातें आपके व्यवहार को खराब करती है, जो जीवन में आपको आगे बढ़ने से रोकता है। साथ ही समाज में आपकी छवि को बिगाड़ने में भी अहम रोल अदा करता है।
कई बार कामयाब लोगों को देख्कर मन में ख्याल आता है कि ये अपनी किस्मत से इस मकाम को हासिल कर पाएं है। उसके बाद वैसा बनने की होड़ में हम उन लोगों का लाइफस्टाइल, हेयर स्टाइल, वेशभूषा समेत कई चीजें कॉपी करने लगते है। मगर हम उनके वर्किंग स्टाइल को समझना भूल जाते हैं। हमें उनके काम करने के ढ़ग और काम करने के घंटों पर ध्यान देना होगा। हमें ये समझना होगा कि वे किन लोगों की संगती में रहते हैं। इसके अलावा उनकी सफलता के पीछे उनका कितना संघर्ष छिपा है। कोशिशों के दम पर मिलने वाली सफलता से आपको उसकी कीमत का अंदाज़ा होने लगता है। बिना संघर्ष मिलने वाली सफलता न तो आपको खुशी दे पाएंगी और न ही ज्यादा वक्त तक आपके पास टिक पाएंगी। अगर आप सच में सफलता का स्वद चखना चाहते हैं, तो संघर्ष करते रहे, सफलता आपको अपनेआप प्राप्त हो जाएगी।
सकारात्मकता जीवन के लिए उतनी ही आवश्यक है, जितना जल और वायु। अगर हम हर वक्त नकारात्मक विचारों के करीब रहेंगे, तो आगे बढ़ने में कई कठिनाईयां होगी। हमें मुश्किल हालात में भी खुद पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। स्वंय अपना मार्ग बनाने के लिए तैयार रहना चाहिए। सीमित साधनों में भी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता होनी चाहिए, जो इंसान को ज़मीन से जोड़कर रखती है। सफलता के लिए हमें अपने ज़हन में सकारात्मकता का एक बीज बोना होगा, जो आगे चलकर कए विशाल पेड़ की तरह लहलहाएं। मगर इसके लिए उस बीज को विश्वास, हिम्मत और इक्ष्छाशक्ति् के बल पर सींचना होगा। ताकि वे आगे चलकर हमारे सपनों की उड़ान को भर सके।
| Success tips: हर इंसान जिंदगी में सफलता पाने और आगे बढत्ने के ख्वाब संजोता है। ये ख्वाब उसी दिन से आंखों में पनपने लगता है, जब हम इस बात को समझ जाते हैं कि जो लोग जीवन में अपनी पहचान बना चुके हैं, वे औरों के लिए कितने मूल्यवान होते हैं। हमें बचपन से ही कामयाब लोगों की मिसाल देकर हर बात को समझाया जाता है। कहीं न कहीं हम भी उन कामयाब लोगों की फहरिस्त में शामिल होने के लिए उन्हें फॉलो करने लगते हैं। मगर कुछ ऐसी भी बातें होती हैं, जिन पर शायद हमारा ध्यान जा ही नहीं पाता। आइए जानते हैं, वो कौन सी ऐसी अहम बातें हैं, जो हमें जीवन में कामयाबी दिलाने में मुख्य रोल अदा करती है। अगर आप कामयाब लोगों के बारे में पढ़ेगे और उनके विचार सुनेगे, तो आप जान पाएंगे कि उनकी सफलता काफी हद तक उनके सोने और उठने के समय पर निर्भर करती है। वे सभर कामों को समय से निपटाकर वक्त पर सोते हैं और फिर सुबह जल्दी उठ जाते हैं, ताकि सूरज की पहली किरण के साथ ही वे भी काम करना शुरू कर सकें। बेहद व्यवस्थित ढंग से अपने कार्यों को अज़ाम देने वाले लोगों के कदम सफलता खुद चूमती है। अगर कोई ऐसा शख्स जिसने आपको हमेशा प्यार और सम्मान दिया। साथ ही उस वक्त आपका खास ख्याल रखा जब आप मुसीबतों से घिरे थे। तो ऐसे लोगों को आप हमेशा याद रखें और उन्हें सुबह उठकर और रात को सोने से पहले मन ही मन धन्यवाद कहना न भूलें। इससे आपके अंदर सकारात्मकता का विकास होगा और आपका व्यवहार खुद ब खुद थैंक्स गीविंग होता चला जाएगा। सफलता पाने का मतलब ये कदापि नहीं कि आप दूसरों को धोखा दें और उनके बनाए रास्तों पर चलकर आगे बढ़े। सफलता का मतलब और मकसद एकता यानि टीम पर निर्भर है। अगर आप एक टीम के रूप में आगे बढ़ेगे, तो इसका फयदा आपके साथ साथ आपकी आर्गनाईजे़शन को भी होगा। ऐसे में अपनी टीम के कमज़ोर साथियों को साथ लेकर चलें और उनका मार्गदर्शन करें। अगर आप आज किसी की मदद करेंगे, तो कल अवश्य वो भी तत्परता से आपके सहयोग के लिए अवश्य आगे आंएगे। समस्याएं हमारी जिदंगी का एक अभिन्न अंग है। इन्हें समाप्त करने के लिए हमें खुद को मज़बूत बनाना होगां। यदि हम अपनी समस्याओं से बाहर निकलने के लिए दूसरों पर निर्भर रहेंगे, तो ऐसे में हम जीवन में सफलता को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। सबसे पहले आपको खुद पर आत्मविश्वास होना चाहिए, जो हमें हमारी मंज़िलों तक पहुंचाने में मददगार साबित होता है। अगर आपके अंदर कांफिडेंस की भावना आ जाती है, तो आप बड़े से बड़े तुफान से भिड़ जाने का भी दम रखते हैं। अन्यथा आप हर परेशानी पर मदद के लिए दूसरों का दरवाज़ा ही खटखटाते रहेंगे। इसमें कोई दोराय नहीं है कि हमें जीवन में बहुत से लोग ऐसे मिलते हैं, जिनसे हमारे विचार मेल नहीं खाते यां विचारों में समानता महसूस नहीं होती है। ऐसे में आपको उन लोगों से दूर होने का तरीका नहीं बल्कि आपसी समानता और एकता बरकरार रखने का उपाय खोजना है। अगर आप छोटी छोटी बातों पर दूसरों के लिए अपने मन में हीनभावना और भेदभाव रखेंगे, तो निश्चित तौर पर आप धीरे धीरे सभी से दूर होने लगेंगे। वाणी की सौम्यता और मधुरता आपको जीवन में हर मोड़ पर काम आमी है। अगर आप बातचीत करने में सही शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और हर किसी को इज्जत देते हैं, तो आपको जीवन में सफलता अवश्य प्राप्त होगी। कई बार हम किसी कारण वश दूसरों को खुद से नीचा देखने लगते हैं। उन्हें नज़रअंदाज़ करने लगते हैं और उनके सामने आने से कतराते हैं और अगर वो सामने आ जाएं, तो उन्हें इज्जत नहीं देते हैं। ये सब बातें आपके व्यवहार को खराब करती है, जो जीवन में आपको आगे बढ़ने से रोकता है। साथ ही समाज में आपकी छवि को बिगाड़ने में भी अहम रोल अदा करता है। कई बार कामयाब लोगों को देख्कर मन में ख्याल आता है कि ये अपनी किस्मत से इस मकाम को हासिल कर पाएं है। उसके बाद वैसा बनने की होड़ में हम उन लोगों का लाइफस्टाइल, हेयर स्टाइल, वेशभूषा समेत कई चीजें कॉपी करने लगते है। मगर हम उनके वर्किंग स्टाइल को समझना भूल जाते हैं। हमें उनके काम करने के ढ़ग और काम करने के घंटों पर ध्यान देना होगा। हमें ये समझना होगा कि वे किन लोगों की संगती में रहते हैं। इसके अलावा उनकी सफलता के पीछे उनका कितना संघर्ष छिपा है। कोशिशों के दम पर मिलने वाली सफलता से आपको उसकी कीमत का अंदाज़ा होने लगता है। बिना संघर्ष मिलने वाली सफलता न तो आपको खुशी दे पाएंगी और न ही ज्यादा वक्त तक आपके पास टिक पाएंगी। अगर आप सच में सफलता का स्वद चखना चाहते हैं, तो संघर्ष करते रहे, सफलता आपको अपनेआप प्राप्त हो जाएगी। सकारात्मकता जीवन के लिए उतनी ही आवश्यक है, जितना जल और वायु। अगर हम हर वक्त नकारात्मक विचारों के करीब रहेंगे, तो आगे बढ़ने में कई कठिनाईयां होगी। हमें मुश्किल हालात में भी खुद पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। स्वंय अपना मार्ग बनाने के लिए तैयार रहना चाहिए। सीमित साधनों में भी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता होनी चाहिए, जो इंसान को ज़मीन से जोड़कर रखती है। सफलता के लिए हमें अपने ज़हन में सकारात्मकता का एक बीज बोना होगा, जो आगे चलकर कए विशाल पेड़ की तरह लहलहाएं। मगर इसके लिए उस बीज को विश्वास, हिम्मत और इक्ष्छाशक्ति् के बल पर सींचना होगा। ताकि वे आगे चलकर हमारे सपनों की उड़ान को भर सके। |
ढाका। पूर्वोत्तर बांग्लादेश में शनिवार को आतंकवादियों के ठिकाने पर सुरक्षाबलों की छापेमारी के दौरान बम विस्फोट की दो घटनाओं में एक पुलिसकर्मी समेत तीन लोग मारे गए और 30 से अधिक लोग घायल हो गए।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि विस्फोट की ये दो अलग-अलग घटनाएं उस समय हुई जब कमांडो दस्ता आतंकवादियों के ठिकाने पर छापेमारी कर रहा था।
पुलिस अधिकारी रोकोनउद्दीन ने बताया कि आतंकवादियों के ठिकाने के पास विस्फोट की एक घटना में दो लोग मारे गए और 30 से अधिक लोग घायल हो गए और भवन के सामने विस्फोट की दूसरी घटना में एक पुलिसकर्मी मारा गया। इस घटना की जिम्मेदारी किसी फिलहाल किसी आतंकवादी संगठन ने नहीं ली है।
दरअसल सेना के कमांडो गत वर्ष जुलाई में एक कैफे पर हमले के संबंध में स्थानीय आतंकवादी समूह के सदस्यों की तलाश में आज इस ठिकाने पर छापेमारी कर रहे थे। कमांडो ने इस पांच मंजिला इमारत में फंसे सभी 78 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरे एक दिन चला यह अभियान अभी भी जारी है। गौरतलब है कि कैफे पर हुए उस हमले में 22 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश विदेशी नागरिक थे। (वार्ता)
| ढाका। पूर्वोत्तर बांग्लादेश में शनिवार को आतंकवादियों के ठिकाने पर सुरक्षाबलों की छापेमारी के दौरान बम विस्फोट की दो घटनाओं में एक पुलिसकर्मी समेत तीन लोग मारे गए और तीस से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि विस्फोट की ये दो अलग-अलग घटनाएं उस समय हुई जब कमांडो दस्ता आतंकवादियों के ठिकाने पर छापेमारी कर रहा था। पुलिस अधिकारी रोकोनउद्दीन ने बताया कि आतंकवादियों के ठिकाने के पास विस्फोट की एक घटना में दो लोग मारे गए और तीस से अधिक लोग घायल हो गए और भवन के सामने विस्फोट की दूसरी घटना में एक पुलिसकर्मी मारा गया। इस घटना की जिम्मेदारी किसी फिलहाल किसी आतंकवादी संगठन ने नहीं ली है। दरअसल सेना के कमांडो गत वर्ष जुलाई में एक कैफे पर हमले के संबंध में स्थानीय आतंकवादी समूह के सदस्यों की तलाश में आज इस ठिकाने पर छापेमारी कर रहे थे। कमांडो ने इस पांच मंजिला इमारत में फंसे सभी अठहत्तर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरे एक दिन चला यह अभियान अभी भी जारी है। गौरतलब है कि कैफे पर हुए उस हमले में बाईस लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश विदेशी नागरिक थे। |
कानपुर भौती की एसबीआई बैंक में सुरंग बनाकर चोरी करने के मामले में पुलिस की पांच टीमें जांच कर रही हैं। अब तक बैंक कर्मचारियों से लेकर बैंक के संपर्क में किसी भी तरह से आए और आसपास के गांव के करीब 550 लोगों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 37 लोगों को रडार पर लिया है। अब इन सभी के फिंगर प्रिंट, कॉल डिटेल समेत अन्य जांच की जा रही है।
सचेंडी थाना क्षेत्र के भौती स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में 22 दिसंबर की रात को चोरों ने सुरंग बनाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोर बैंक के स्ट्रांग रूम में रखे 1 किलो. 800 ग्राम सोना चोरी कर ले गए थे। करीब एक करोड़ से ज्यादा सोना चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। मामले की जांच के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने क्राइमब्रांच, सचेंडी थाने की पुलिस, सर्विलांस टीम समेत 5 टीमों को जांच के लिए लगाया था।
मामले की सीधे मॉनीटरिंग कर रहे डीसीपी वेस्ट विजय ढुल ने बताया कि पुलिस की पांच टीमों ने करीब 550 लोगों से पूछताछ की है। इसमें 37 लोगों को संदिग्ध पाया गया और उनसे पूरी डिटेल में पूछताछ की जा रही है। जल्द ही पुलिस बैंक चोरी का खुलासा करके आरोपियों को जेल भेजेगी।
डीसीपी वेस्ट ने बताया कि जांच के दायरे में बैंक कर्मचारी, बैंक के संपर्क में आने वाले राजमिस्त्री, लेबर, पेंटर, इलेक्ट्रीशियन, चाय वाला समेत अन्य जो भी किसी तरह से बैंक से जुड़े थे। सभी को जांच के दायरे में लिया गया है। इसके साथ ही बैंक के आसपास गांव से भी एक-एक व्यक्ति की डिटेल जुटाई गई है। कौन वारदात के बाद से गायब है। इस तरह के एक-एक व्यक्ति से पूछताछ कर उसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
डीसीपी ने बताया कि वारदात वाले दिन सीसीटीवी कैमरा बंद था। इसके साथ ही पहले का बैकअप डिलीट होने के चलते वारदात का खुलासा करने में उन्हें ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। अगर बैंक का सीसीटीवी फुटेज मिल जाता तो बैंक के भीतर आने-जाने वाले एक-एक व्यक्ति की हरकतों का एनलिसिस करके आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को आसानी होती।
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| कानपुर भौती की एसबीआई बैंक में सुरंग बनाकर चोरी करने के मामले में पुलिस की पांच टीमें जांच कर रही हैं। अब तक बैंक कर्मचारियों से लेकर बैंक के संपर्क में किसी भी तरह से आए और आसपास के गांव के करीब पाँच सौ पचास लोगों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने सैंतीस लोगों को रडार पर लिया है। अब इन सभी के फिंगर प्रिंट, कॉल डिटेल समेत अन्य जांच की जा रही है। सचेंडी थाना क्षेत्र के भौती स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बाईस दिसंबर की रात को चोरों ने सुरंग बनाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोर बैंक के स्ट्रांग रूम में रखे एक किलो. आठ सौ ग्राम सोना चोरी कर ले गए थे। करीब एक करोड़ से ज्यादा सोना चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। मामले की जांच के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने क्राइमब्रांच, सचेंडी थाने की पुलिस, सर्विलांस टीम समेत पाँच टीमों को जांच के लिए लगाया था। मामले की सीधे मॉनीटरिंग कर रहे डीसीपी वेस्ट विजय ढुल ने बताया कि पुलिस की पांच टीमों ने करीब पाँच सौ पचास लोगों से पूछताछ की है। इसमें सैंतीस लोगों को संदिग्ध पाया गया और उनसे पूरी डिटेल में पूछताछ की जा रही है। जल्द ही पुलिस बैंक चोरी का खुलासा करके आरोपियों को जेल भेजेगी। डीसीपी वेस्ट ने बताया कि जांच के दायरे में बैंक कर्मचारी, बैंक के संपर्क में आने वाले राजमिस्त्री, लेबर, पेंटर, इलेक्ट्रीशियन, चाय वाला समेत अन्य जो भी किसी तरह से बैंक से जुड़े थे। सभी को जांच के दायरे में लिया गया है। इसके साथ ही बैंक के आसपास गांव से भी एक-एक व्यक्ति की डिटेल जुटाई गई है। कौन वारदात के बाद से गायब है। इस तरह के एक-एक व्यक्ति से पूछताछ कर उसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। डीसीपी ने बताया कि वारदात वाले दिन सीसीटीवी कैमरा बंद था। इसके साथ ही पहले का बैकअप डिलीट होने के चलते वारदात का खुलासा करने में उन्हें ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। अगर बैंक का सीसीटीवी फुटेज मिल जाता तो बैंक के भीतर आने-जाने वाले एक-एक व्यक्ति की हरकतों का एनलिसिस करके आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को आसानी होती। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
अमरावती/ दि. 2- शहर में लगातार पॉकेट मारी की घटनाएं सामने आ रही है. इसी तरह राजापेठ बस स्टैंड पर बस में चढते समय बुलढाणा का एक व्यक्ति के जेब से मोबाइल चोरी हो गया था. राजापेठ पुलिस ने अपराध दर्ज कर तलाश शुरू की. सायबर पुलिस की सहायता व गुप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने चांदुर बाजार के ताजनगर में रहनेवाले शातिर पॉकेट मार चोर आरिफ खान को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपी के पास से ओपो कंपनी का 17 हजार 500 रूपए का मोबाइल भी बरामद करने में सफलता हासिल की है.
आरिफ खान अफरोज खान (28, ताजनगर, तह. चांदुर बाजार) यह गिरफ्तार किए गए कुख्यात पॉकेट मार चोर का नाम है. 2 मार्च को शिकायतकर्ता गजानन देवीदास ठाकरे(58, बुलढाणा) ने राजापेठ पुलिस थाने में दी शिकायत के अनुसार वे राजापेठ बस स्टैंड पर बस पकडने गए. बस में चढते समय किसी अज्ञात चोर ने उनकी जेब से 17 हजार 500 रूपए कीमत का ओपो कंपनी का मोबाइल चुरा लिया. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ दफा 379 के तहत अपराध दर्ज कर तलाश शुरू की. इस दौरान राजापेठ पुलिस ने सायबर सेल की सहायता से तकनीकी जानकारी हासिल करते हुए गुप्त सूचना के आधार पर चांदुरबाजार तहसील के ताजनगर में रहनेवाले आरिफ खान नामक शातिर चोर को गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, पुलिस उपायुक्त विक्रम साली, सहायक पुलिस आयुक्त भारत गायकवाड के मार्गदर्शन मेें राजापेठ के थानेदार मनीष ठाकरे, सायबर सेल के पुलिस निरीक्षक सहारे, छोटेलाल यादव, सागर सरदार, निलेश गुल्हाने, दिनेश भिसे, विकास गुलदे, पंकज गाडे, नरेश मोहरी के दल ने की.
| अमरावती/ दि. दो- शहर में लगातार पॉकेट मारी की घटनाएं सामने आ रही है. इसी तरह राजापेठ बस स्टैंड पर बस में चढते समय बुलढाणा का एक व्यक्ति के जेब से मोबाइल चोरी हो गया था. राजापेठ पुलिस ने अपराध दर्ज कर तलाश शुरू की. सायबर पुलिस की सहायता व गुप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने चांदुर बाजार के ताजनगर में रहनेवाले शातिर पॉकेट मार चोर आरिफ खान को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपी के पास से ओपो कंपनी का सत्रह हजार पाँच सौ रूपए का मोबाइल भी बरामद करने में सफलता हासिल की है. आरिफ खान अफरोज खान यह गिरफ्तार किए गए कुख्यात पॉकेट मार चोर का नाम है. दो मार्च को शिकायतकर्ता गजानन देवीदास ठाकरे ने राजापेठ पुलिस थाने में दी शिकायत के अनुसार वे राजापेठ बस स्टैंड पर बस पकडने गए. बस में चढते समय किसी अज्ञात चोर ने उनकी जेब से सत्रह हजार पाँच सौ रूपए कीमत का ओपो कंपनी का मोबाइल चुरा लिया. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ दफा तीन सौ उन्यासी के तहत अपराध दर्ज कर तलाश शुरू की. इस दौरान राजापेठ पुलिस ने सायबर सेल की सहायता से तकनीकी जानकारी हासिल करते हुए गुप्त सूचना के आधार पर चांदुरबाजार तहसील के ताजनगर में रहनेवाले आरिफ खान नामक शातिर चोर को गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, पुलिस उपायुक्त विक्रम साली, सहायक पुलिस आयुक्त भारत गायकवाड के मार्गदर्शन मेें राजापेठ के थानेदार मनीष ठाकरे, सायबर सेल के पुलिस निरीक्षक सहारे, छोटेलाल यादव, सागर सरदार, निलेश गुल्हाने, दिनेश भिसे, विकास गुलदे, पंकज गाडे, नरेश मोहरी के दल ने की. |
Rewa MP News: रीवा जिले के ग्रामीण अंचल में कुत्तां के मरने की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है। कुत्ते किस बीमारी के कारण मर रहे हैं इसका पता अभी नहीं चल पाया है। स्थिति यह है कि पिछले एक सप्ताह के अंतराल में सेमरिया विधानसभा के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन से अधिक गांवो में 70 से 80 कुत्तों की मौत हो चुकी है। इस तरह से हो रही कुत्तों की मौत के कारण ग्रामीण भी दहशत में है। ग्रामीण इस बात से परेशान है कि जिस अज्ञात बीमारी के कारण कुत्तों की मौत हो रही है कहीं वह बीमारी हमारे बच्चों में न आ जाए। ग्रामीणों की माने तो इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भी सूचना पूर्व में दी जा चुकी है। इसके बाद भी अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम किसी भी गांव में नही पहुंची है। समय रहते अगर जिला प्रशासन और पशु स्वास्थ्य विभाग नही पहुंचा तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
बताया गया है कि कुत्तों की मौत जिस अज्ञात बीमारी के कारण हो रही है उसके लक्षण समान ही है। ग्रामीणों की माने तो बीमारी की चपेट में आने से सबसे पहले कुत्ते खाना छोड़ देते हैं। इसके बाद वह कुछ दिनों बाद कुत्ते पानी पीना भी बंद कर देते हैं। बीमारी के एक सप्ताह के अंदर ही अचानक कुत्ते को उल्टी आती है और अंत में कुत्ते की मौत हो जाती है। बताते हैं कि बीमारी की चपेट में आने के एक सप्ताह के अंदर ही कुत्तों की जान चली जाती है।
कुत्तों के मरने का सिलसिला सेमरिया विधानसभा के आधा दर्जन गांवो में देखने को मिला है। जिन गांवो में कुत्तों के मरने की घटना हुई उसमें बिहरा, कुल्लू, पैपखरा, बिड़वा, जेरूका, कुंइया गांव शामिल है। गौरतलब है कि मरने वाले कुत्तों की उम्र एक माह से आठ माह के बीच बताई गई है।
कुल्लू निवासी प्रदीप पाठक ने बताया कि पिछले दस दिन से गांव में अचानक काफी तेजी के साथ से कुत्तों के मरने की घटनाएं घटित हो रही है। बीते दिवस जहां मेरे घर का कुत्ता मर गया वहीं मेरे पड़ोसियों के कुत्तों की भी मौत अज्ञात बीमारी से हो गई है। इसी प्रकार बिहरा निवासी सुनील उर्मलिया ने बताया कि कुत्तों की मौत जिस तेजी के साथ हो रही है वैसा कभी नहीं हुआ। ग्रामीण भी दहशत में है कि आखिर किस कारण से कुत्तों की मौत हो रही है। कहीं यह बीमारी गांव के बच्चां में तो नहीं हो जाएगी। इस बात को लेकर भी ग्रामीण दहशत में है।
| Rewa MP News: रीवा जिले के ग्रामीण अंचल में कुत्तां के मरने की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है। कुत्ते किस बीमारी के कारण मर रहे हैं इसका पता अभी नहीं चल पाया है। स्थिति यह है कि पिछले एक सप्ताह के अंतराल में सेमरिया विधानसभा के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन से अधिक गांवो में सत्तर से अस्सी कुत्तों की मौत हो चुकी है। इस तरह से हो रही कुत्तों की मौत के कारण ग्रामीण भी दहशत में है। ग्रामीण इस बात से परेशान है कि जिस अज्ञात बीमारी के कारण कुत्तों की मौत हो रही है कहीं वह बीमारी हमारे बच्चों में न आ जाए। ग्रामीणों की माने तो इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भी सूचना पूर्व में दी जा चुकी है। इसके बाद भी अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम किसी भी गांव में नही पहुंची है। समय रहते अगर जिला प्रशासन और पशु स्वास्थ्य विभाग नही पहुंचा तो स्थिति और भयावह हो सकती है। बताया गया है कि कुत्तों की मौत जिस अज्ञात बीमारी के कारण हो रही है उसके लक्षण समान ही है। ग्रामीणों की माने तो बीमारी की चपेट में आने से सबसे पहले कुत्ते खाना छोड़ देते हैं। इसके बाद वह कुछ दिनों बाद कुत्ते पानी पीना भी बंद कर देते हैं। बीमारी के एक सप्ताह के अंदर ही अचानक कुत्ते को उल्टी आती है और अंत में कुत्ते की मौत हो जाती है। बताते हैं कि बीमारी की चपेट में आने के एक सप्ताह के अंदर ही कुत्तों की जान चली जाती है। कुत्तों के मरने का सिलसिला सेमरिया विधानसभा के आधा दर्जन गांवो में देखने को मिला है। जिन गांवो में कुत्तों के मरने की घटना हुई उसमें बिहरा, कुल्लू, पैपखरा, बिड़वा, जेरूका, कुंइया गांव शामिल है। गौरतलब है कि मरने वाले कुत्तों की उम्र एक माह से आठ माह के बीच बताई गई है। कुल्लू निवासी प्रदीप पाठक ने बताया कि पिछले दस दिन से गांव में अचानक काफी तेजी के साथ से कुत्तों के मरने की घटनाएं घटित हो रही है। बीते दिवस जहां मेरे घर का कुत्ता मर गया वहीं मेरे पड़ोसियों के कुत्तों की भी मौत अज्ञात बीमारी से हो गई है। इसी प्रकार बिहरा निवासी सुनील उर्मलिया ने बताया कि कुत्तों की मौत जिस तेजी के साथ हो रही है वैसा कभी नहीं हुआ। ग्रामीण भी दहशत में है कि आखिर किस कारण से कुत्तों की मौत हो रही है। कहीं यह बीमारी गांव के बच्चां में तो नहीं हो जाएगी। इस बात को लेकर भी ग्रामीण दहशत में है। |
मौलाना साद जमातियों के लिए और अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए बाकायदा Youtube चैनल चलाता है. मरकज़ की 6 मंजिला इमारत में बैठ कर मौलाना Youtube चैनल के जरिये हर रोज सुबह बयान देता है.
उसके बाद मौलाना के बयान को Youtube में अपलोड किया जाता है. Youtube में अपलोड करने और एडिट करने के लिए बाकायदा 3 से 4 लोग काम करते हैं. मरकज़ का Youtube चैनल 1 जनवरी 2016 को शुरू किया गया था. जिसमें अब तक हजारों ऑडियो और वीडियो अपलोड किए जा चुके हैं. इन्ही ऑडियो-वीडियो और Youtube चैनल के जरिये मौलाना देश और विदेश में अपने कई फॉलोअर्स बना चुका है.
| मौलाना साद जमातियों के लिए और अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए बाकायदा Youtube चैनल चलाता है. मरकज़ की छः मंजिला इमारत में बैठ कर मौलाना Youtube चैनल के जरिये हर रोज सुबह बयान देता है. उसके बाद मौलाना के बयान को Youtube में अपलोड किया जाता है. Youtube में अपलोड करने और एडिट करने के लिए बाकायदा तीन से चार लोग काम करते हैं. मरकज़ का Youtube चैनल एक जनवरी दो हज़ार सोलह को शुरू किया गया था. जिसमें अब तक हजारों ऑडियो और वीडियो अपलोड किए जा चुके हैं. इन्ही ऑडियो-वीडियो और Youtube चैनल के जरिये मौलाना देश और विदेश में अपने कई फॉलोअर्स बना चुका है. |
बॉलीवुड एक्टर रितिक रोशन (hrithik roshan) अपनी आगामी फिल्म "कृष 4" को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। वहीं हाल ही में खबरें आ रही हैं कि एक टॉक शो के दौरान सौरव गांगुली (sourav ganguly) ने रितिक की जमकर तारीफ की है और उन्होंने अपनी बॉयोपिक के लिए रितिक को अप्रोच भी किया है।
हाल ही में रितिक रोशन (hrithik roshan) और टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) स्टारर फिल्म वॉर (war) का ट्रेलर जारी किया गया है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई सारे रिएक्शन आ रहे हैं। कई लोग ने तो इसे अभी से ब्लॉकबस्टर बता रहे हैं। वहीं इसके ट्रेलक को लेकर मजेदार मीम्स भी खूब वायरल हो रहे हैं।
| बॉलीवुड एक्टर रितिक रोशन अपनी आगामी फिल्म "कृष चार" को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। वहीं हाल ही में खबरें आ रही हैं कि एक टॉक शो के दौरान सौरव गांगुली ने रितिक की जमकर तारीफ की है और उन्होंने अपनी बॉयोपिक के लिए रितिक को अप्रोच भी किया है। हाल ही में रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ स्टारर फिल्म वॉर का ट्रेलर जारी किया गया है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई सारे रिएक्शन आ रहे हैं। कई लोग ने तो इसे अभी से ब्लॉकबस्टर बता रहे हैं। वहीं इसके ट्रेलक को लेकर मजेदार मीम्स भी खूब वायरल हो रहे हैं। |
KGF 2 Box Office Collection Day 6: कन्नड़ सुपरस्टार यश की सुपरहिट फिल्म KGF 2 (KGF: Chapter 2)का धमाल लगातार जारी है। केजीएफ 2 (KGF: Chapter 2) बॉक्स ऑफिस सुनामी ला रही है। यश की फिल्म रोजाना नए रिकॉर्ड सेट कर रही है। बुधवार को मूवी का हिंदी वर्जन 250 करोड़ का कलेक्शन पार कर लेगा। वहीं ये फिल्म इसी तरह से कमाई करती रही तो बहुत जल्द 1000 करोड़ के क्लब में शामिल हो जाएगी।
ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने 6 दिन में 238. 70 करोड़ कमाए हैं। KGF 2 वर्किंग डेज में भी सुपर कमाई कर रही है। बुधवार को यानी फिल्म 7वें दिन 250 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी।
इसी के साथ ये फिल्म सबसे जल्दी 250 करोड़ कमाने वाली मूवी बन जाएगी। फिल्म के हिंदी वर्जन ने गुरुवार को 53. 95 करोड़, शुक्रवार को 46. 79 करोड़, शनिवार को 42. 90 करोड़, रविवार को 50. 35 करोड़, सोमवार को 25. 57 करोड़, मंगलवार को 19. 14 करोड़ कमाए।
KGF 2 को लेकर रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त हाईप बना हुआ है। बॉक्स ऑफिस पर आजकल हिंदी नहीं बल्कि साउथ मूवीज का डंका बज रहा है। KGF 2 से पहले पुष्पा और RRR की ताबड़तोड़ कमाई ने लोगों को हैरान किया है।
'केजीएफ चैप्टर 2' ने सिर्फ पांच दिनों में कमाई की तबाही मचा दी है। फिल्म ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी शानदार प्रदर्शन किया है। रिलीज के पांचवें दिन भी फिल्म ने रिकॉर्डतोड़ कमाई की है। रिलीज के 5वें दिन ही दुनिया भर में इसकी कुल कमाई 625 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
Ranveer Singh को चाहिए लड़की या लड़का? Deepika Padukone सुन रही है न आप?
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| KGF दो Box Office Collection Day छः: कन्नड़ सुपरस्टार यश की सुपरहिट फिल्म KGF दो का धमाल लगातार जारी है। केजीएफ दो बॉक्स ऑफिस सुनामी ला रही है। यश की फिल्म रोजाना नए रिकॉर्ड सेट कर रही है। बुधवार को मूवी का हिंदी वर्जन दो सौ पचास करोड़ का कलेक्शन पार कर लेगा। वहीं ये फिल्म इसी तरह से कमाई करती रही तो बहुत जल्द एक हज़ार करोड़ के क्लब में शामिल हो जाएगी। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने छः दिन में दो सौ अड़तीस. सत्तर करोड़ कमाए हैं। KGF दो वर्किंग डेज में भी सुपर कमाई कर रही है। बुधवार को यानी फिल्म सातवें दिन दो सौ पचास करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी। इसी के साथ ये फिल्म सबसे जल्दी दो सौ पचास करोड़ कमाने वाली मूवी बन जाएगी। फिल्म के हिंदी वर्जन ने गुरुवार को तिरेपन. पचानवे करोड़, शुक्रवार को छियालीस. उन्यासी करोड़, शनिवार को बयालीस. नब्बे करोड़, रविवार को पचास. पैंतीस करोड़, सोमवार को पच्चीस. सत्तावन करोड़, मंगलवार को उन्नीस. चौदह करोड़ कमाए। KGF दो को लेकर रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त हाईप बना हुआ है। बॉक्स ऑफिस पर आजकल हिंदी नहीं बल्कि साउथ मूवीज का डंका बज रहा है। KGF दो से पहले पुष्पा और RRR की ताबड़तोड़ कमाई ने लोगों को हैरान किया है। 'केजीएफ चैप्टर दो' ने सिर्फ पांच दिनों में कमाई की तबाही मचा दी है। फिल्म ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी शानदार प्रदर्शन किया है। रिलीज के पांचवें दिन भी फिल्म ने रिकॉर्डतोड़ कमाई की है। रिलीज के पाँचवें दिन ही दुनिया भर में इसकी कुल कमाई छः सौ पच्चीस करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। Ranveer Singh को चाहिए लड़की या लड़का? Deepika Padukone सुन रही है न आप? बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के किये यहाँ क्लिक करेंः |
- दीवारों पर दाग-रोधी रंगों का इस्तेमाल करें। बाजार में दीवारों के लिए (मेट, सेमी-ग्लास और ग्लॉसी) कई तरह के फिनिशेस (रंग के प्रकार) मौजूद हैं। दीवारों पर दाग-रोधी रंगों के इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इससे दीवारों पर लगे दाग आसानी से साफ किए जा सकते हैं।
- दाग मिटाने के लिए दीवारों को अधिक न रगड़ें। दीवारों पर लगाए गए सिंथेटिक रंगों पर सामान्यता गहरे दाग पड़ जाते हैं। इसलिए दागों को छुड़ाने के लिए उसे ज्यादा रगडऩे से बचें। रंगों को खराब होने से बचाने के लिए नरम टॉवल से दाग छुटाएं।
| - दीवारों पर दाग-रोधी रंगों का इस्तेमाल करें। बाजार में दीवारों के लिए कई तरह के फिनिशेस मौजूद हैं। दीवारों पर दाग-रोधी रंगों के इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इससे दीवारों पर लगे दाग आसानी से साफ किए जा सकते हैं। - दाग मिटाने के लिए दीवारों को अधिक न रगड़ें। दीवारों पर लगाए गए सिंथेटिक रंगों पर सामान्यता गहरे दाग पड़ जाते हैं। इसलिए दागों को छुड़ाने के लिए उसे ज्यादा रगडऩे से बचें। रंगों को खराब होने से बचाने के लिए नरम टॉवल से दाग छुटाएं। |
सोलनः हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में उपमंडल कसौली में एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई है। जबकि एक अन्य घायल हुआ है। बताया जा रहा है कि हादसा पट्टा जोहड़जी सड़क पर पेश आया है। पुलिस को जब इस घटना की सूचना मिली तो मौके पर पहुंच गई। जहां पर गाड़ी सड़क से करीब चार सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी हुई थी।
पुलिस ने स्थानीये लोगों की मदद से खाई में जाकर घायल व्यक्ति को बाहर निकाला और उचार के लिए भेज दिया। वहीं मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिये। मृतकों की पहचान चालक लक्ष्मण सिंह पुत्र राम सिंह निवासी गांव नेहल डाकघर पट्टा, तुला राम (58) पुत्र स्व० बोगल राम के रूप में हुई है। वहीं घायल की पहचान खुशी राम पुत्र दिला राम (45) निवासी गांव बडैहरी पट्टा के रूप में हुई है।
बताया जा रहा है कि तीनों कार में सवार होकर पट्टा दृजोहड़जी सड़क पर जा रहे थे। जैसे ही उक्त स्थान पर पहुंचे तो कार एचपी-14 ए - 8362 अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 400 मीटर नीचे लुढ़क गई हादसे में दो की मौत हो गई। जबकि एक घायल हो गया है। वहीं पुलिस ने मामला दर्जकर आगामी कर्रवाई शुरू कर दी है।
| सोलनः हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में उपमंडल कसौली में एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई है। जबकि एक अन्य घायल हुआ है। बताया जा रहा है कि हादसा पट्टा जोहड़जी सड़क पर पेश आया है। पुलिस को जब इस घटना की सूचना मिली तो मौके पर पहुंच गई। जहां पर गाड़ी सड़क से करीब चार सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी हुई थी। पुलिस ने स्थानीये लोगों की मदद से खाई में जाकर घायल व्यक्ति को बाहर निकाला और उचार के लिए भेज दिया। वहीं मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिये। मृतकों की पहचान चालक लक्ष्मण सिंह पुत्र राम सिंह निवासी गांव नेहल डाकघर पट्टा, तुला राम पुत्र स्वशून्य बोगल राम के रूप में हुई है। वहीं घायल की पहचान खुशी राम पुत्र दिला राम निवासी गांव बडैहरी पट्टा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि तीनों कार में सवार होकर पट्टा दृजोहड़जी सड़क पर जा रहे थे। जैसे ही उक्त स्थान पर पहुंचे तो कार एचपी-चौदह ए - आठ हज़ार तीन सौ बासठ अनियंत्रित होकर सड़क से करीब चार सौ मीटर नीचे लुढ़क गई हादसे में दो की मौत हो गई। जबकि एक घायल हो गया है। वहीं पुलिस ने मामला दर्जकर आगामी कर्रवाई शुरू कर दी है। |
श्रीवारी दादा ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में परंपरा के अनुसार अनुष्ठान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने दर्शन की प्रक्रिया के बारे में भी शिकायत की थी।
नई दिल्लीःसुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संवैधानिक अदालतें जनहित याचिकाओं के आधार पर मंदिरों में किए जाने वाले दिन-प्रतिदिन के अनुष्ठानों और सेवाओं में हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि नारियल को कैसे तोड़ा जाना चाहिए या मंदिर में पूजा कैसे करनी चाहिए, यह संवैधानिक न्यायालय का विषय नहीं है।
श्रीवारी दादा ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में परंपरा के अनुसार अनुष्ठान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने दर्शन की प्रक्रिया के बारे में भी शिकायत की थी।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि धार्मिक विद्वानों और पुजारियों को अच्छी तरह से सुसज्जित किया गया है कि क्या मंदिर में अनुष्ठान रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार किए जा रहे हैं।
अनुच्छेद 226 और 32 के तहत एक संवैधानिक न्यायालय का रिट अधिकार क्षेत्र सीमित है। कोई विशेष अनुष्ठान सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं, यह विवादित प्रश्न है।
हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अधिक से अधिक इस संबंध में किसी निचली अदालत में दीवानी मुकदमा दायर किया जा सकता है।
| श्रीवारी दादा ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में परंपरा के अनुसार अनुष्ठान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने दर्शन की प्रक्रिया के बारे में भी शिकायत की थी। नई दिल्लीःसुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संवैधानिक अदालतें जनहित याचिकाओं के आधार पर मंदिरों में किए जाने वाले दिन-प्रतिदिन के अनुष्ठानों और सेवाओं में हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि नारियल को कैसे तोड़ा जाना चाहिए या मंदिर में पूजा कैसे करनी चाहिए, यह संवैधानिक न्यायालय का विषय नहीं है। श्रीवारी दादा ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में परंपरा के अनुसार अनुष्ठान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने दर्शन की प्रक्रिया के बारे में भी शिकायत की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि धार्मिक विद्वानों और पुजारियों को अच्छी तरह से सुसज्जित किया गया है कि क्या मंदिर में अनुष्ठान रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार किए जा रहे हैं। अनुच्छेद दो सौ छब्बीस और बत्तीस के तहत एक संवैधानिक न्यायालय का रिट अधिकार क्षेत्र सीमित है। कोई विशेष अनुष्ठान सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं, यह विवादित प्रश्न है। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अधिक से अधिक इस संबंध में किसी निचली अदालत में दीवानी मुकदमा दायर किया जा सकता है। |
मिन्स्क समझौतों की शुरुआत के दो महीने बीत चुके हैं।
दो महीने पहले, न्यू रूस के सशस्त्र बलों द्वारा बड़े पैमाने पर आक्रमण को रोक दिया गया था, जो कि यूक्रेनी सैनिकों से डोनबास के क्षेत्र को मुक्त करना था।
परिणाम क्या है?
युद्ध विराम के दौरान, 300 से अधिक लोग गोलाबारी के तहत मारे गए (डेटा अप्रचलित हैं, अब शायद 500 से अधिक हैं)। यह 6-10 ओडेसा में मई 2 से बड़ा है।
लेकिन यह एक ट्रस माना जाता है।
केवल चुनाव के दिन ही युद्धविराम देखा गया था, जब अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा डीपीआर और एलपीआर का दौरा किया गया था। अन्य सभी दिनों में, गोलाबारी की गई, जिसमें MLRS ग्रैड और सामरिक जटिल टोहका-यू के हमले शामिल थे।
यह वह दुनिया है जिसे मास्को ने डोनबास को भेंट किया था।
बहुत कुछ कहा गया है कि सितंबर की शुरुआत में मिलिशिया को एक रीग्रुपिंग की आवश्यकता थी। शायद ऐसा है। लेकिन गोले के नीचे दो महीने एक पुनर्संरचना नहीं है, यह नाकाबंदी की तरह अधिक है।
आगे बढ़ते सैनिकों ने कभी भी किसी भी युद्धविराम प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं ताकि दुश्मन फिर से संगठित हो जाए। सैनिकों को आगे बढ़ाने के लिए, फिर से इकट्ठा करने के लिए यह एकतरफा आक्रामक रूप से बंद करने के लिए पर्याप्त है और समय पर और फिर मुख्यालय द्वारा निर्धारित पैमाने पर संलग्न होने के लिए, किसी भी युद्धविराम समझौते द्वारा खुद को रोकना नहीं।
नोवोरोसिया की सेना सितंबर में स्लाव्यास्क और मारियुपोल का नियंत्रण ले सकती थी या नहीं - एक मुश्किल सवाल। यहां आप बहस कर सकते हैं। लेकिन वे सुनिश्चित करने के लिए हवाई अड्डे, अवदिवका, सैंड्स ले सकते थे। यूक्रेनी तोपखाने को कुछ दूरी तक धकेलना जिससे बड़े शहरों का गोलाबारी असंभव होगा, काफी वास्तविक था।
ऐसा क्यों नहीं किया गया?
नीति। किसी को आग के नीचे रहने के लिए इस समय डोनबास की जरूरत थी। कि डोनबास में शांति नहीं थी। कीव में और डोनेट्स्क चुनाव "शांति के बिना और युद्ध के बिना" की स्थिति में आयोजित किए गए थे।
यह एक ऐसी नीति है। लोगों, सरकारों, शहरों में हेरफेर करने का यह तरीका।
अस्थिर संतुलन की स्थिति में, तराजू को किसी भी समय सही दिशा में टिप करना बहुत आसान है। क्या अधिक लाभदायक होगा पर निर्भर करता है। थोड़ा प्रयास - और दाईं ओर एक फायदा। थोड़ा प्रयास - और दूसरे पर।
इसलिए वे बाजार में व्यापार करते हैं।
यह पैमाना है। एक तरफ माल है, और दूसरी तरफ पैसा है। कुछ चालाक चाल - और तराजू जम गया, माल और पैसे का संतुलन दिखा। बिक गया!
व्यापार विक्रेता और खरीदार के हितों के बीच संतुलन हासिल करने की प्रक्रिया है। जैसे ही संतुलन मिलता है, एक सौदा तय हो जाता है।
385 गैस - बेची गई!
बहुत लंबे समय तक इस सौदे को बंद करना संभव नहीं था। खरीदार के सहमत होने के पैमाने पर कुछ गायब था। लेकिन अब, मिन्स्क समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, दो महीने नाजुक संतुलन - और खरीदार सहमत हैं। बिक गया!
На одной из чаш этих весов оказались люди. Часть русского народа. Часть исторической России. Часть, которая должна когда-нибудь вернуться к России, если конечно наша страна хочет обрести былой статус, стать прежней, большой и настоящей.
लेकिन रूस का यह हिस्सा कैसे वापस आएगा अगर आज यह संतुलन पर है?
सामान आमतौर पर तराजू पर रखा जाता है। और सामान खरीदार की पहल पर ही वापस आ सकते हैं। विक्रेता कुछ भी वापस नहीं कर सकेगा।
मैं इस सौदे का विवरण नहीं जानता, लेकिन यह एक बुरा सौदा है।
मेरा मानना है कि कोई भी सौदा जिसमें लोगों, लोगों या राष्ट्रीय हितों की तस्करी शामिल है, एक बुरा सौदा है। और ऐसे सौदों को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।
लेकिन एक अलग तरीके से, व्यापार करने वाले लोग बस यह नहीं जानते कि कैसे। इसमें वे सेना से अलग हैं। ट्रेडिंग करने वाले लोग नहीं जानते कि कैसे लड़ना है। वे सुरक्षा करना नहीं जानते। वे केवल व्यापार करना जानते हैं। हितों का संतुलन खोजने के लिए, आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन कायम रखें, और लाभदायक समझौतों का समापन करें। यह एक बहुत ही उपयोगी गुण है, लेकिन केवल जब तक यह लोगों और राष्ट्रीय हितों के लिए नहीं आता है। जब तक युद्ध की बात नहीं आती।
और जब युद्ध शुरू होता है, तो व्यापारिक लोगों के पास केवल एक ही रास्ता होता है - एक कटोरे में युद्ध डालना और दूसरे पर शांति। और उन्हें संतुलित करते हैं। इसे ट्रस कहा जाता है।
न तो शांति और न ही युद्ध।
केवल पैसे और सामान के बीच संतुलन के विपरीत, युद्ध और शांति के बीच संतुलन किसी को भी पसंद नहीं है। न ही ओर।
इसलिए, युद्ध अभी भी होगा। वास्तव में, यह बंद नहीं हुआ, यह बस धीमा हो गया ताकि राजनेताओं को व्यापार करने के लिए बात करने और व्यापारियों के लिए अधिक आरामदायक हो। इस बीच, युद्ध जारी है। कोई अभी भी गोलाबारी से छिपा हुआ है, कोई बेघर हो गया है, कोई रिश्तेदारों को दफन कर रहा है।
क्या यह सब खत्म हो सकता है?
बेशक, और लंबे समय तक।
ओससेटिया को एक्सएनयूएमएक्स दिनों में जारी किया गया था और एक सप्ताह बाद स्वतंत्र के रूप में मान्यता दी गई थी। तकनीकी रूप से, कुछ भी असंभव नहीं है। डोनबास को पहले ही कई बार मुक्त किया जा सकता था। और रूसी सैनिकों के साथ और बिना। डोनबेस को मुक्त करने की लागत लगभग 8 बिलियन है।
कोई और अधिक लाभदायक है कि यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में कोई युद्ध नहीं था, कोई शांति नहीं थी। ताकि स्थिति अस्थिर संतुलन में हो। इस स्थिति को प्रबंधित करना आसान बनाने के लिए। ताकि आप व्यापार कर सकें। और इस व्यापार में, संभवतः, बहुत बड़ी पूंजी शामिल है।
उनका कहना है कि अगर आसमान में तारे चमकते हैं, तो किसी को इसकी जरूरत है।
मैं सितारों के बारे में नहीं जानता, मैं उन पर नहीं था - मैंने जाँच नहीं की।
लेकिन तथ्य यह है कि मॉस्को में किसी को दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन में अस्थिर अस्थिरता की स्थिति की आवश्यकता होती है। यदि ऐसा नहीं होता तो यह स्थिति दो महीने तक बनी नहीं रहती।
इसलिए, अगर यूक्रेनी सैनिकों ने डोनेट्स्क खोल दिया, तो इसका मतलब है कि किसी को न केवल कीव में, बल्कि क्रेमलिन में भी इसकी आवश्यकता है। और किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि रूस के पास अपने खुद के या गलत हाथों से दस किलोमीटर में यूक्रेनी तोपखाने को आगे बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं है।
अगर आर्मनेट 300 या 500 के दौरान डोनेट्स्क में लोगों की मृत्यु हो गई, तो इसका मतलब है कि किसी को भी इसकी आवश्यकता है। और न केवल कीव में।
और अगर डोनबास की आबादी का हिस्सा बिना रोटी, बिना रोशनी, बिना पानी के बैठता है - तो यह भी किसी के लिए फायदेमंद है। और न केवल यूक्रेनी ओर से।
और अगर युद्ध और शांति के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखा जाता है, अगर दो महीने के लिए यह पूरी तरह से शांति के कप या युद्ध के कप को पछाड़ने में सक्षम नहीं है, तो मॉस्को में किसी को ऐसा करने की आवश्यकता है।
और जब मास्को में कोई व्यक्ति इस स्थिति, राजनीतिक बिंदुओं या धन पर पैसा बनाता है - तो कोई फर्क नहीं पड़ता - तब तक यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में कोई शांति या युद्ध नहीं होगा।
| मिन्स्क समझौतों की शुरुआत के दो महीने बीत चुके हैं। दो महीने पहले, न्यू रूस के सशस्त्र बलों द्वारा बड़े पैमाने पर आक्रमण को रोक दिया गया था, जो कि यूक्रेनी सैनिकों से डोनबास के क्षेत्र को मुक्त करना था। परिणाम क्या है? युद्ध विराम के दौरान, तीन सौ से अधिक लोग गोलाबारी के तहत मारे गए । यह छः-दस ओडेसा में मई दो से बड़ा है। लेकिन यह एक ट्रस माना जाता है। केवल चुनाव के दिन ही युद्धविराम देखा गया था, जब अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा डीपीआर और एलपीआर का दौरा किया गया था। अन्य सभी दिनों में, गोलाबारी की गई, जिसमें MLRS ग्रैड और सामरिक जटिल टोहका-यू के हमले शामिल थे। यह वह दुनिया है जिसे मास्को ने डोनबास को भेंट किया था। बहुत कुछ कहा गया है कि सितंबर की शुरुआत में मिलिशिया को एक रीग्रुपिंग की आवश्यकता थी। शायद ऐसा है। लेकिन गोले के नीचे दो महीने एक पुनर्संरचना नहीं है, यह नाकाबंदी की तरह अधिक है। आगे बढ़ते सैनिकों ने कभी भी किसी भी युद्धविराम प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं ताकि दुश्मन फिर से संगठित हो जाए। सैनिकों को आगे बढ़ाने के लिए, फिर से इकट्ठा करने के लिए यह एकतरफा आक्रामक रूप से बंद करने के लिए पर्याप्त है और समय पर और फिर मुख्यालय द्वारा निर्धारित पैमाने पर संलग्न होने के लिए, किसी भी युद्धविराम समझौते द्वारा खुद को रोकना नहीं। नोवोरोसिया की सेना सितंबर में स्लाव्यास्क और मारियुपोल का नियंत्रण ले सकती थी या नहीं - एक मुश्किल सवाल। यहां आप बहस कर सकते हैं। लेकिन वे सुनिश्चित करने के लिए हवाई अड्डे, अवदिवका, सैंड्स ले सकते थे। यूक्रेनी तोपखाने को कुछ दूरी तक धकेलना जिससे बड़े शहरों का गोलाबारी असंभव होगा, काफी वास्तविक था। ऐसा क्यों नहीं किया गया? नीति। किसी को आग के नीचे रहने के लिए इस समय डोनबास की जरूरत थी। कि डोनबास में शांति नहीं थी। कीव में और डोनेट्स्क चुनाव "शांति के बिना और युद्ध के बिना" की स्थिति में आयोजित किए गए थे। यह एक ऐसी नीति है। लोगों, सरकारों, शहरों में हेरफेर करने का यह तरीका। अस्थिर संतुलन की स्थिति में, तराजू को किसी भी समय सही दिशा में टिप करना बहुत आसान है। क्या अधिक लाभदायक होगा पर निर्भर करता है। थोड़ा प्रयास - और दाईं ओर एक फायदा। थोड़ा प्रयास - और दूसरे पर। इसलिए वे बाजार में व्यापार करते हैं। यह पैमाना है। एक तरफ माल है, और दूसरी तरफ पैसा है। कुछ चालाक चाल - और तराजू जम गया, माल और पैसे का संतुलन दिखा। बिक गया! व्यापार विक्रेता और खरीदार के हितों के बीच संतुलन हासिल करने की प्रक्रिया है। जैसे ही संतुलन मिलता है, एक सौदा तय हो जाता है। तीन सौ पचासी गैस - बेची गई! बहुत लंबे समय तक इस सौदे को बंद करना संभव नहीं था। खरीदार के सहमत होने के पैमाने पर कुछ गायब था। लेकिन अब, मिन्स्क समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, दो महीने नाजुक संतुलन - और खरीदार सहमत हैं। बिक गया! На одной из чаш этих весов оказались люди. Часть русского народа. Часть исторической России. Часть, которая должна когда-нибудь вернуться к России, если конечно наша страна хочет обрести былой статус, стать прежней, большой и настоящей. लेकिन रूस का यह हिस्सा कैसे वापस आएगा अगर आज यह संतुलन पर है? सामान आमतौर पर तराजू पर रखा जाता है। और सामान खरीदार की पहल पर ही वापस आ सकते हैं। विक्रेता कुछ भी वापस नहीं कर सकेगा। मैं इस सौदे का विवरण नहीं जानता, लेकिन यह एक बुरा सौदा है। मेरा मानना है कि कोई भी सौदा जिसमें लोगों, लोगों या राष्ट्रीय हितों की तस्करी शामिल है, एक बुरा सौदा है। और ऐसे सौदों को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। लेकिन एक अलग तरीके से, व्यापार करने वाले लोग बस यह नहीं जानते कि कैसे। इसमें वे सेना से अलग हैं। ट्रेडिंग करने वाले लोग नहीं जानते कि कैसे लड़ना है। वे सुरक्षा करना नहीं जानते। वे केवल व्यापार करना जानते हैं। हितों का संतुलन खोजने के लिए, आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन कायम रखें, और लाभदायक समझौतों का समापन करें। यह एक बहुत ही उपयोगी गुण है, लेकिन केवल जब तक यह लोगों और राष्ट्रीय हितों के लिए नहीं आता है। जब तक युद्ध की बात नहीं आती। और जब युद्ध शुरू होता है, तो व्यापारिक लोगों के पास केवल एक ही रास्ता होता है - एक कटोरे में युद्ध डालना और दूसरे पर शांति। और उन्हें संतुलित करते हैं। इसे ट्रस कहा जाता है। न तो शांति और न ही युद्ध। केवल पैसे और सामान के बीच संतुलन के विपरीत, युद्ध और शांति के बीच संतुलन किसी को भी पसंद नहीं है। न ही ओर। इसलिए, युद्ध अभी भी होगा। वास्तव में, यह बंद नहीं हुआ, यह बस धीमा हो गया ताकि राजनेताओं को व्यापार करने के लिए बात करने और व्यापारियों के लिए अधिक आरामदायक हो। इस बीच, युद्ध जारी है। कोई अभी भी गोलाबारी से छिपा हुआ है, कोई बेघर हो गया है, कोई रिश्तेदारों को दफन कर रहा है। क्या यह सब खत्म हो सकता है? बेशक, और लंबे समय तक। ओससेटिया को एक्सएनयूएमएक्स दिनों में जारी किया गया था और एक सप्ताह बाद स्वतंत्र के रूप में मान्यता दी गई थी। तकनीकी रूप से, कुछ भी असंभव नहीं है। डोनबास को पहले ही कई बार मुक्त किया जा सकता था। और रूसी सैनिकों के साथ और बिना। डोनबेस को मुक्त करने की लागत लगभग आठ बिलियन है। कोई और अधिक लाभदायक है कि यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में कोई युद्ध नहीं था, कोई शांति नहीं थी। ताकि स्थिति अस्थिर संतुलन में हो। इस स्थिति को प्रबंधित करना आसान बनाने के लिए। ताकि आप व्यापार कर सकें। और इस व्यापार में, संभवतः, बहुत बड़ी पूंजी शामिल है। उनका कहना है कि अगर आसमान में तारे चमकते हैं, तो किसी को इसकी जरूरत है। मैं सितारों के बारे में नहीं जानता, मैं उन पर नहीं था - मैंने जाँच नहीं की। लेकिन तथ्य यह है कि मॉस्को में किसी को दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन में अस्थिर अस्थिरता की स्थिति की आवश्यकता होती है। यदि ऐसा नहीं होता तो यह स्थिति दो महीने तक बनी नहीं रहती। इसलिए, अगर यूक्रेनी सैनिकों ने डोनेट्स्क खोल दिया, तो इसका मतलब है कि किसी को न केवल कीव में, बल्कि क्रेमलिन में भी इसकी आवश्यकता है। और किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि रूस के पास अपने खुद के या गलत हाथों से दस किलोमीटर में यूक्रेनी तोपखाने को आगे बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं है। अगर आर्मनेट तीन सौ या पाँच सौ के दौरान डोनेट्स्क में लोगों की मृत्यु हो गई, तो इसका मतलब है कि किसी को भी इसकी आवश्यकता है। और न केवल कीव में। और अगर डोनबास की आबादी का हिस्सा बिना रोटी, बिना रोशनी, बिना पानी के बैठता है - तो यह भी किसी के लिए फायदेमंद है। और न केवल यूक्रेनी ओर से। और अगर युद्ध और शांति के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखा जाता है, अगर दो महीने के लिए यह पूरी तरह से शांति के कप या युद्ध के कप को पछाड़ने में सक्षम नहीं है, तो मॉस्को में किसी को ऐसा करने की आवश्यकता है। और जब मास्को में कोई व्यक्ति इस स्थिति, राजनीतिक बिंदुओं या धन पर पैसा बनाता है - तो कोई फर्क नहीं पड़ता - तब तक यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में कोई शांति या युद्ध नहीं होगा। |
नई दिल्ली, Vastu Tips: वास्तु शास्त्र की उत्पत्ति हमारे वेदों से हुई है, इसका उल्लेख हमारे वेद, पुराण, वास्तु ग्रंथों में किया गया है, यहां तक के रामायण और महाभारत में भी वास्तु के संदर्भ में विशेष वर्णन है। वास्तु का सरल अर्थ होता है, जहां तुम वास करते हो। घर में रहने वाले सभी सदस्यों पर वास्तु का असर पड़ता है, ये जान लेना बहुत जरूरी है कि घर के वास्तु उपाय ये असर सकारात्मक है या नकारात्मक। इसके लिए वास्तु का पूर्ण ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है।
वास्तु के अनुसार भूखंड विशेषण, घर का निर्माण, मुख्य द्वार, कमरे, पानी का स्थान, रसोई घर, भ्रमस्थान बनाना बहुत जरूरी है।
आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ अकल्ट साइंस की वास्तु विशेषज्ञ रम्मन एस खन्ना जी के मुताबिक वास्तु का असर घर की खुशहाली, सुख समृद्धि, पारिवारिक सुख पर सीधा असर पड़ता है।
वास्तु का वैवाहिक जीवन पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अपने विवाहिक जीवन को सुखी समृद्धि रखने के लिए ये सरल वास्तु टिप्स का प्रयोग करें और जिंदगी भर की खुशियां पाएं।
- नवविवाहित दम्पति को घर के उत्तर पश्चिम क्षेत्र के कमरे में रहना चाहिए, इससे जीवन और संबंध में खुशहाली आती है।
- नवविवाहित दम्पति को पश्चिम की ओर स्थित कमरे में सोना चाहिए। दक्षिण पश्चिम क्षेत्र पृथ्वी तत्व होता है और वो रिश्ते को स्थिरता और संतुलन देता है।
- शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए दम्पति के बेडरूम में एक ही बेड हो जिस पर डबल बेड मैट्रेस हो, दो सिंगल मैट्रेस नहीं होने चाहिए, इससे रिश्ते में दरार आ सकती है।
- पति-पत्नी के आपस के संबंध मधुर हो इसमें दीवार के रंगों का भी बहुत महत्व होता है। जहां तक हो सके अपने कमरे के रंगो को हल्का रखें। ज्यादा गहरे रंग जैसे काला और लाल रिश्तों में परेशानियां ला सकते हैं। मधुर रंग जैसे गुलाबी या लाइट रंगो का प्रयोग करें।
आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ अकल्ट साइंस की वास्तु विशेषज्ञ रम्मन एस खन्ना जी के अनुसार, जहां तक हो सके पति पत्नी को कभी साउथ ईस्ट डायरेक्शन के कमरे में नहीं सोना चाहिए, ये अग्नि का कोना होता है, इससे या तो उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है, जैसे ब्लड प्रेशर या एसिडिटी या तो रिश्ते में तकरार आ सकती है। अगर साउथ ईस्ट कमरे में सोने के अलावा और कोई आप्शन ना तो आप कमरे में एक छोटा लाल बल्ब जला ले साउथ ईस्ट डायरेक्शन में।
अपने पूर्वजों की फोटो को हमेशा साउथ वेस्ट की ओर दीवार पर लगाएं।
- बेडरूम को मोमबतियों, फूलों और सजावट से सुज्जित करें, शादीशुदा जोड़े की फोटो फ्रेम में लगा के कमरे के वेस्ट साइड पर रखें।
- पति-पत्नी को हमेशा दक्षिण दिशा में सिर रख के सोना चाहिए।
- बेडरूम से जितना हो सके इलेक्ट्रॉनिक आइटम दूर रखें, इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होगी।
- शुक्रवार को लक्ष्मी जी की वंदना करें, घर में पूजा पाठ करें। सुगंधित अगरबत्तियां पूरे घर में जलाएं। इससे घर में सकारात्मक उर्जा बढ़ेगी और शादीशुदा जिंदगी और भी मधुर बनेगी। देवी को सफेद मिठाई अर्पण करें और उसका प्रसाद पूरे परिवार को खिलाएं। मां के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि और धन में वृद्धि होगी।
रम्मन एस खन्ना, वास्तु विशेषज्ञ (आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ अकल्ट साइंससे बातचीत पर आधारित)
| नई दिल्ली, Vastu Tips: वास्तु शास्त्र की उत्पत्ति हमारे वेदों से हुई है, इसका उल्लेख हमारे वेद, पुराण, वास्तु ग्रंथों में किया गया है, यहां तक के रामायण और महाभारत में भी वास्तु के संदर्भ में विशेष वर्णन है। वास्तु का सरल अर्थ होता है, जहां तुम वास करते हो। घर में रहने वाले सभी सदस्यों पर वास्तु का असर पड़ता है, ये जान लेना बहुत जरूरी है कि घर के वास्तु उपाय ये असर सकारात्मक है या नकारात्मक। इसके लिए वास्तु का पूर्ण ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है। वास्तु के अनुसार भूखंड विशेषण, घर का निर्माण, मुख्य द्वार, कमरे, पानी का स्थान, रसोई घर, भ्रमस्थान बनाना बहुत जरूरी है। आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ अकल्ट साइंस की वास्तु विशेषज्ञ रम्मन एस खन्ना जी के मुताबिक वास्तु का असर घर की खुशहाली, सुख समृद्धि, पारिवारिक सुख पर सीधा असर पड़ता है। वास्तु का वैवाहिक जीवन पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अपने विवाहिक जीवन को सुखी समृद्धि रखने के लिए ये सरल वास्तु टिप्स का प्रयोग करें और जिंदगी भर की खुशियां पाएं। - नवविवाहित दम्पति को घर के उत्तर पश्चिम क्षेत्र के कमरे में रहना चाहिए, इससे जीवन और संबंध में खुशहाली आती है। - नवविवाहित दम्पति को पश्चिम की ओर स्थित कमरे में सोना चाहिए। दक्षिण पश्चिम क्षेत्र पृथ्वी तत्व होता है और वो रिश्ते को स्थिरता और संतुलन देता है। - शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए दम्पति के बेडरूम में एक ही बेड हो जिस पर डबल बेड मैट्रेस हो, दो सिंगल मैट्रेस नहीं होने चाहिए, इससे रिश्ते में दरार आ सकती है। - पति-पत्नी के आपस के संबंध मधुर हो इसमें दीवार के रंगों का भी बहुत महत्व होता है। जहां तक हो सके अपने कमरे के रंगो को हल्का रखें। ज्यादा गहरे रंग जैसे काला और लाल रिश्तों में परेशानियां ला सकते हैं। मधुर रंग जैसे गुलाबी या लाइट रंगो का प्रयोग करें। आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ अकल्ट साइंस की वास्तु विशेषज्ञ रम्मन एस खन्ना जी के अनुसार, जहां तक हो सके पति पत्नी को कभी साउथ ईस्ट डायरेक्शन के कमरे में नहीं सोना चाहिए, ये अग्नि का कोना होता है, इससे या तो उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है, जैसे ब्लड प्रेशर या एसिडिटी या तो रिश्ते में तकरार आ सकती है। अगर साउथ ईस्ट कमरे में सोने के अलावा और कोई आप्शन ना तो आप कमरे में एक छोटा लाल बल्ब जला ले साउथ ईस्ट डायरेक्शन में। अपने पूर्वजों की फोटो को हमेशा साउथ वेस्ट की ओर दीवार पर लगाएं। - बेडरूम को मोमबतियों, फूलों और सजावट से सुज्जित करें, शादीशुदा जोड़े की फोटो फ्रेम में लगा के कमरे के वेस्ट साइड पर रखें। - पति-पत्नी को हमेशा दक्षिण दिशा में सिर रख के सोना चाहिए। - बेडरूम से जितना हो सके इलेक्ट्रॉनिक आइटम दूर रखें, इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होगी। - शुक्रवार को लक्ष्मी जी की वंदना करें, घर में पूजा पाठ करें। सुगंधित अगरबत्तियां पूरे घर में जलाएं। इससे घर में सकारात्मक उर्जा बढ़ेगी और शादीशुदा जिंदगी और भी मधुर बनेगी। देवी को सफेद मिठाई अर्पण करें और उसका प्रसाद पूरे परिवार को खिलाएं। मां के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि और धन में वृद्धि होगी। रम्मन एस खन्ना, वास्तु विशेषज्ञ |
नवरात्रि के आखिरी दिन यानि नवमी को दुर्गाजी के नवें स्वरुप माँ सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। माँ का यह रूप सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला है। इनकी उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्त इनकी पूजा से यश, बल, कीर्ति और धन की प्राप्ति करते हैं। माँ भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाता है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था,इसी कारण वह इस लोक में अर्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता,सर्वत्र विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। सिंह पर सवार,कमल पुष्प पर आसीन,अत्यंत दिव्य स्वरुप वाली माँ सिद्धिदात्री चारभुजाओं वाली हैं। इनके दाहिने तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र,ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरुप माना गया है जो श्वेत वस्त्रालंकार से युक्त महाज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं।
सर्वप्रथम कलश की पूजा करके व उसमें स्थापित सभी देवी-देवताओ का ध्यान करना चाहिए। रोली,मोली,कुमकुम,पुष्प चुनरी आदि से माँ की भक्ति भाव से पूजा करें। हलुआ,पूरी,खीर,चने,नारियल से माता को भोग लगाएं। इसके पश्चात माता के मंत्रो का जाप करना चाहिए। इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन करना चाहिए। कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए। नव-दुर्गाओं में सिद्धिदात्री अंतिम है तथा इनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस तरह से की गई पूजा से माता अपने भक्तों पर तुरंत प्रसन्न होती है। भक्तों को संसार में धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
| नवरात्रि के आखिरी दिन यानि नवमी को दुर्गाजी के नवें स्वरुप माँ सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। माँ का यह रूप सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला है। इनकी उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्त इनकी पूजा से यश, बल, कीर्ति और धन की प्राप्ति करते हैं। माँ भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाता है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था,इसी कारण वह इस लोक में अर्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता,सर्वत्र विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। सिंह पर सवार,कमल पुष्प पर आसीन,अत्यंत दिव्य स्वरुप वाली माँ सिद्धिदात्री चारभुजाओं वाली हैं। इनके दाहिने तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र,ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरुप माना गया है जो श्वेत वस्त्रालंकार से युक्त महाज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं। सर्वप्रथम कलश की पूजा करके व उसमें स्थापित सभी देवी-देवताओ का ध्यान करना चाहिए। रोली,मोली,कुमकुम,पुष्प चुनरी आदि से माँ की भक्ति भाव से पूजा करें। हलुआ,पूरी,खीर,चने,नारियल से माता को भोग लगाएं। इसके पश्चात माता के मंत्रो का जाप करना चाहिए। इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन करना चाहिए। कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और दस वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम नौ तो होनी ही चाहिए। नव-दुर्गाओं में सिद्धिदात्री अंतिम है तथा इनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस तरह से की गई पूजा से माता अपने भक्तों पर तुरंत प्रसन्न होती है। भक्तों को संसार में धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि, सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी। |
मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला में कहा कि इस संबंध में डीजीपी को निर्देश दे दिया गया है. बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा,. .
शिमलाः पंजाब में अमृतपाल सिंह को लेकर पुलिस की सतर्कता बरती जा रही है और उसकी तलाश जारी है. हालातों को देखते हुए हिमाचल में भी सतर्कता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि राज्य में पंजाब से लगी सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, लेकिन पुलिस को पर्यटकों और दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को परेशान नहीं करने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही संदिग्धों पर नजर रखने को भी कहा गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला में कहा कि इस संबंध में डीजीपी को निर्देश दे दिया गया है. बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जाएगी। पंजाब और हिमाचल के लोग भाई-भाई हैं।
हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा गया है लेकिन हिमाचल में ऐसी कोई तनावपूर्ण स्थिति नहीं है। उनका कहना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी बात करेंगे. बता दें कि अमृत[पाल को पकड़ने के लिए हिमाचल पुलिस पहले ही अलर्ट पर है।
| मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला में कहा कि इस संबंध में डीजीपी को निर्देश दे दिया गया है. बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा,. . शिमलाः पंजाब में अमृतपाल सिंह को लेकर पुलिस की सतर्कता बरती जा रही है और उसकी तलाश जारी है. हालातों को देखते हुए हिमाचल में भी सतर्कता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि राज्य में पंजाब से लगी सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, लेकिन पुलिस को पर्यटकों और दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को परेशान नहीं करने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही संदिग्धों पर नजर रखने को भी कहा गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला में कहा कि इस संबंध में डीजीपी को निर्देश दे दिया गया है. बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जाएगी। पंजाब और हिमाचल के लोग भाई-भाई हैं। हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा गया है लेकिन हिमाचल में ऐसी कोई तनावपूर्ण स्थिति नहीं है। उनका कहना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी बात करेंगे. बता दें कि अमृत[पाल को पकड़ने के लिए हिमाचल पुलिस पहले ही अलर्ट पर है। |
कस्टम पर्यटन - ऐसा नहीं है बहुत पहले पर्यटन उद्योग, एक नई प्रवृत्ति में। इस प्रवृत्ति को अधिक से अधिक बढ़ाने की लोकप्रियता। यह गैर मानक पर्यटन, जो आंदोलन के रास्ते से ग्राहक के लिए व्यक्तिगत रूप से विकसित कर रहे हैं, और पर्यटन कार्यक्रम के साथ समाप्त होने का आह्वान किया।
ग्राहकों के लिए सबसे यात्रा कंपनियों पैकेज टूर के विशाल चयन। लेकिन एक निजी स्पर्श के साथ कस्टम पर्यटन, नहीं हर टूर ऑपरेटर की पेशकश कर सकते हैं। यह इस प्रवृत्ति के peculiarities के कारण है।
अपरंपरागत दौरे के ड्राइविंग दौरे एक पैकेज प्रस्ताव के साथ कोई संबंध नहीं है। दौरे को व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक ग्राहक के लिए बनाया गया है। अपरंपरागत दौरे हो सकता हैः
- एक जगह है कि मार्गों कि लोकप्रिय हैं से दूर रखा के लिए एक यात्रा;
- पारिस्थितिकी पर्यटन;
- रिसॉर्ट, कंपनी द्वारा बिना साथी सहित पर्यटन स्थलों पर जाकर;
- विदेश में सस्ते असामान्य छुट्टी विकल्प।
इस वजह से, अमानक पर्यटन कई लाभ प्रदान करते हैं, जिनमें से मुख्य कार्रवाई के लगभग पूरी आजादी है। इन पर्यटन एक व्यक्ति के प्रयोजन के लिए दुनिया में कहीं भी जाने के लिए अनुमति देते हैंः
- बेहतर हो जाएगा;
- मैं नए और दिलचस्प का एक बहुत देखते हैं;
- संस्कृति और अन्य पहलुओं का पता लगाएं।
इसके अलावा, विकलांग लोगों के लिए एक यात्रा है, जो सभी अपने जीवन का सपना है पर जा सकते हैं।
के बाद से गैर मानक पर्यटन के साथ काम विशिष्ट है, इस तरह के रूप में HappyTravel. ru टूर ऑपरेटरों प्रस्तावों और पैकेज सौदों, के बहुमत। तथ्य यह है कि प्रत्येक ग्राहक के लिए एक व्यक्ति के दृष्टिकोण कंपनियों की ओर से समय और ध्यान का एक बहुत आवश्यकता है। दौरा था जिसमें पैकेज प्रस्ताव के साथ कोई संबंध नहीं है का निर्माण, देश के बारे में ज्ञान का एक बहुत आवश्यकता है।
इन यात्राओं की लागत वांछित दिशा, अवधि और पर्यटन सुविधाओं पर निर्भर है। टूर ऑपरेटर को फोन पर या इंटरनेट के माध्यम अमानक पर्यटन पर यात्रा पर्यटकों, यात्रा के दौरान समर्थन करता है।
इस पर्यटन स्थल के लोग हैं, जो सबसे सकारात्मक या यात्रा के रोमांच प्राप्त करना चाहते हैं के लिए एक असली वरदान है। सबसे पहले, यह लोग हैं, जो पहले से ही पैकेज टूर, साथ ही चरम खेल प्यार पर्यटकों से तंग आ चुके होते हैं।
इसके अलावा, एक कस्टम दौरे शोधकर्ताओं, या बस लोग हैं, जो संस्कृति या एक देश के इतिहास में रुचि रखते हैं के लिए एकदम सही है। यह एक बढ़िया इतने पर इतालवी भोजन के साथ परिचित हो और तिब्बत में जीवन की विशेषताओं के बारे में जानने के लिए, और अवसर है।
अलग-अलग दृष्टिकोण यह संभव एक सीमित बजट के साथ लोगों के लिए एक सस्ती लेकिन दिलचस्प छुट्टी की व्यवस्था करने, इसलिए यात्रा, आय के अपने स्तर की परवाह किए बिना लगभग किसी को भी, साथ ही बच्चों के साथ परिवार के लिए जा सकते बनाता है।
| कस्टम पर्यटन - ऐसा नहीं है बहुत पहले पर्यटन उद्योग, एक नई प्रवृत्ति में। इस प्रवृत्ति को अधिक से अधिक बढ़ाने की लोकप्रियता। यह गैर मानक पर्यटन, जो आंदोलन के रास्ते से ग्राहक के लिए व्यक्तिगत रूप से विकसित कर रहे हैं, और पर्यटन कार्यक्रम के साथ समाप्त होने का आह्वान किया। ग्राहकों के लिए सबसे यात्रा कंपनियों पैकेज टूर के विशाल चयन। लेकिन एक निजी स्पर्श के साथ कस्टम पर्यटन, नहीं हर टूर ऑपरेटर की पेशकश कर सकते हैं। यह इस प्रवृत्ति के peculiarities के कारण है। अपरंपरागत दौरे के ड्राइविंग दौरे एक पैकेज प्रस्ताव के साथ कोई संबंध नहीं है। दौरे को व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक ग्राहक के लिए बनाया गया है। अपरंपरागत दौरे हो सकता हैः - एक जगह है कि मार्गों कि लोकप्रिय हैं से दूर रखा के लिए एक यात्रा; - पारिस्थितिकी पर्यटन; - रिसॉर्ट, कंपनी द्वारा बिना साथी सहित पर्यटन स्थलों पर जाकर; - विदेश में सस्ते असामान्य छुट्टी विकल्प। इस वजह से, अमानक पर्यटन कई लाभ प्रदान करते हैं, जिनमें से मुख्य कार्रवाई के लगभग पूरी आजादी है। इन पर्यटन एक व्यक्ति के प्रयोजन के लिए दुनिया में कहीं भी जाने के लिए अनुमति देते हैंः - बेहतर हो जाएगा; - मैं नए और दिलचस्प का एक बहुत देखते हैं; - संस्कृति और अन्य पहलुओं का पता लगाएं। इसके अलावा, विकलांग लोगों के लिए एक यात्रा है, जो सभी अपने जीवन का सपना है पर जा सकते हैं। के बाद से गैर मानक पर्यटन के साथ काम विशिष्ट है, इस तरह के रूप में HappyTravel. ru टूर ऑपरेटरों प्रस्तावों और पैकेज सौदों, के बहुमत। तथ्य यह है कि प्रत्येक ग्राहक के लिए एक व्यक्ति के दृष्टिकोण कंपनियों की ओर से समय और ध्यान का एक बहुत आवश्यकता है। दौरा था जिसमें पैकेज प्रस्ताव के साथ कोई संबंध नहीं है का निर्माण, देश के बारे में ज्ञान का एक बहुत आवश्यकता है। इन यात्राओं की लागत वांछित दिशा, अवधि और पर्यटन सुविधाओं पर निर्भर है। टूर ऑपरेटर को फोन पर या इंटरनेट के माध्यम अमानक पर्यटन पर यात्रा पर्यटकों, यात्रा के दौरान समर्थन करता है। इस पर्यटन स्थल के लोग हैं, जो सबसे सकारात्मक या यात्रा के रोमांच प्राप्त करना चाहते हैं के लिए एक असली वरदान है। सबसे पहले, यह लोग हैं, जो पहले से ही पैकेज टूर, साथ ही चरम खेल प्यार पर्यटकों से तंग आ चुके होते हैं। इसके अलावा, एक कस्टम दौरे शोधकर्ताओं, या बस लोग हैं, जो संस्कृति या एक देश के इतिहास में रुचि रखते हैं के लिए एकदम सही है। यह एक बढ़िया इतने पर इतालवी भोजन के साथ परिचित हो और तिब्बत में जीवन की विशेषताओं के बारे में जानने के लिए, और अवसर है। अलग-अलग दृष्टिकोण यह संभव एक सीमित बजट के साथ लोगों के लिए एक सस्ती लेकिन दिलचस्प छुट्टी की व्यवस्था करने, इसलिए यात्रा, आय के अपने स्तर की परवाह किए बिना लगभग किसी को भी, साथ ही बच्चों के साथ परिवार के लिए जा सकते बनाता है। |
कार्ड नंबर पर कार्ड "ऑस्टिन" पर बोनस कैसे चेक करें?
ट्रेडमार्क "ऑस्टिन" से पूरे परिवार के लिए स्टाइलिश कपड़ों की दुकानों की श्रृंखला अपने सभी ग्राहकों को क्लब में शामिल होने की पेशकश करती है। सदस्यता की पुष्टि के लिए, एक क्लब कार्ड जारी किया गया था। वहाँ किए गए प्रत्येक खरीद के लिए अंक दिए गए हैं बोनस की संख्या समान नहीं है और यह स्टोर में छोड़ी गई राशि और सदस्य के कार्ड पर निर्भर करता है।
और कार्ड "ऑस्टिन" पर कितने बोनस की जांच करें? आप इसे चार तरीकों से कर सकते हैं, जो केवल क्लब कार्ड की लोकप्रियता को जोड़ता है।
कैसे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए?
चूंकि "ऑस्टिन" एक क्लब बोनस कार्ड है, इसलिए आप केवल कार्यक्रम के सदस्य बनकर धन की शेष राशि की जांच कर सकते हैं।
क्लब के सदस्य बनने के लिए, आपको कुछ खास ज़रूरत नहीं होगी। किसी भी राशि के लिए खरीदारी करने के लिए, एक छोटी प्रश्नावली भरने के लिए और अपनी पहचान प्रमाणित करने वाले किसी दस्तावेज़ के साथ इसे कैशियर में पेश करने के लिए पर्याप्त है बेशक, इस मामले में आपको कानूनी आयु का होना चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल होने का एक अन्य तरीका ऑनलाइन स्टोर "ऑस्टिन" की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकृत होना है।
"ऑस्टिन" कार्ड पर बोनस की जांच करने के बारे में बात करने से पहले, आपको यह पता लगाना होगा कि उन्हें किस चीज़ का श्रेय दिया जाता है।
बोनस सशर्त इकाइयां हैं। भविष्य में, उनकी सहायता से, आप इस नेटवर्क के रिटेल आउटलेट्स पर खरीदी गई खरीद के लिए आंशिक रूप से भुगतान कर सकते हैं। उन्हें प्राप्त करने के लिए, आपको भुगतान के समय कैशीयर को कार्ड पेश करना होगा। अंक दिन के दौरान सम्मानित किया जाएगा।
उनकी संख्या आपके किस प्रकार के कार्ड पर निर्भर करती हैः
- "बोनस"। ऐसा कार्ड किसी भी खरीदार को इच्छा के अनुसार जारी किया जाता है। उसी समय, खरीद राशि कोई फर्क नहीं पड़ती कार्डधारक को ट्रेडिंग नेटवर्क में बिताए गए प्रत्येक पूर्ण 500 रूबल के 25 बोनस अंक का श्रेय दिया जाएगा।
- «बोनस प्लस» यह प्लास्टिक उन ग्राहकों को दिया जाता है जिन्होंने एक चेक के साथ 15 हजार और 1 रूबल (या अधिक) की खरीदारी की। यह कार्ड आपको प्रत्येक बचे हुए आधा हज़ार रूबल के लिए 35 बोनस प्राप्त करने का अधिकार देता है। "बोनस प्लस" कार्ड "बोनस" के बदले में आवश्यक राशि के जमा होने के बाद भी प्राप्त किया जा सकता है।
क्या आप घर पर अपने ऑस्टिन स्टोर कार्ड को भूल गए हैं? कार्ड पर बोनस (जैसा कि आप नीचे देख सकते हैं) प्लास्टिक की उपस्थिति के बिना खर्च किया जा सकता है। ऐसा करने के लिए, बस खजांची को अपने फोन की संख्या को पंजीकरण के दौरान निर्दिष्ट करें। थोड़ा इंतजार आप एक कोड के साथ एसएमएस प्राप्त करेंगे, एक बार का संयोजन। यह खजांची को सूचित किया जाना चाहिए और वह अधिकृत होगा।
यह न केवल आवश्यक है कि कार्ड "ऑस्टिन" कार्ड पर बोनस को कैसे जांचें, बल्कि इसे नियमित रूप से करने के लिए भी। तथ्य यह है कि संचित बिंदुओं को एक सीमा अवधि है और जला दिया जाता है, यदि वे एक निश्चित बिंदु तक नहीं उपयोग किए गए हैं।
निष्पक्षता में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अंक लंबे समय तक संरक्षित किए गए हैं - पूरे साल, यहां तक कि थोड़ी अधिक। अधिक सटीक होने के लिए, वर्ष के लिए जमा बोनस अगले साल मार्च तक खर्च किया जा सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने मई या दिसंबर में खरीदारी की थी। अगले साल मार्च में वे जला देंगे। उदाहरण के लिए, जनवरी या फरवरी 2016 में प्राप्त अंक 01/03/2017 को रद्द किए गए हैं। और फरवरी 2017 में किए गए खरीद के लिए अर्जित बोनस, मार्च 2018 तक आपके फैसले का इंतजार करेंगे।
जैसा कि आप पहले से जानते थे, "ऑस्टिन" एक बोनस कार्ड है। बोनस की जांच करें और अपनी संख्या को कई मायनों में ढूंढें।
ऐसा करने का सबसे आसान तरीका हैः स्टाइलिश कपड़ों की दुकान की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्टर करें, अधिकृत करें और "बोनस" अनुभाग पर जाएं। यहां आपको सभी आवश्यक जानकारी मिल जाएगी, अपने व्यक्तिगत खाते की स्थिति देखें।
यदि आप स्टोर में नहीं गए और आपके पास कोई इंटरनेट नहीं है, तो आप बस एक संदर्भ सेवा की संख्या डायल कर सकते हैं। यह मुफ़्त है, और फोन नंबर बोनस प्लास्टिक के पीछे सूचीबद्ध है। कॉल सेंटर ऑपरेटर द्वारा कॉल का उत्तर दिया जाएगा। उन्हें आपके कार्ड नंबर प्रदान करने की आवश्यकता होगी और कुछ मिनटों में आपको आवश्यक जानकारी प्राप्त होगी।
बोनस "ऑस्टिन" कहां खर्च करना है?
क्लब कार्ड के बाद से, आप विशेष रूप से व्यापार नेटवर्क "ऑस्टिन" में खरीदारी करने वाले बोनस का खर्च कर सकते हैं। एक अंक इकाई एक रूबल के बराबर होती है वे पर्याप्त जमा करने के बाद, आप खर्च कर सकते हैं यहां नियम केवल एक ही बात हैः अंक की मदद से भुगतान की गई कुल राशि अधिग्रहित वस्तु की लागत का 30% से अधिक नहीं हो सकती (सभी ऑपरेटिंग छूट को ध्यान में रखकर)
कई अन्य प्रतिबंध हैं सामानों के वितरण के लिए बोनस का भुगतान नहीं किया जा सकता है, उन्हें "लाइव" पैसे के लिए आदान प्रदान और नेटवर्क "ऑस्टिन डिस्काउंट" में छूट का उपयोग करें।
| कार्ड नंबर पर कार्ड "ऑस्टिन" पर बोनस कैसे चेक करें? ट्रेडमार्क "ऑस्टिन" से पूरे परिवार के लिए स्टाइलिश कपड़ों की दुकानों की श्रृंखला अपने सभी ग्राहकों को क्लब में शामिल होने की पेशकश करती है। सदस्यता की पुष्टि के लिए, एक क्लब कार्ड जारी किया गया था। वहाँ किए गए प्रत्येक खरीद के लिए अंक दिए गए हैं बोनस की संख्या समान नहीं है और यह स्टोर में छोड़ी गई राशि और सदस्य के कार्ड पर निर्भर करता है। और कार्ड "ऑस्टिन" पर कितने बोनस की जांच करें? आप इसे चार तरीकों से कर सकते हैं, जो केवल क्लब कार्ड की लोकप्रियता को जोड़ता है। कैसे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए? चूंकि "ऑस्टिन" एक क्लब बोनस कार्ड है, इसलिए आप केवल कार्यक्रम के सदस्य बनकर धन की शेष राशि की जांच कर सकते हैं। क्लब के सदस्य बनने के लिए, आपको कुछ खास ज़रूरत नहीं होगी। किसी भी राशि के लिए खरीदारी करने के लिए, एक छोटी प्रश्नावली भरने के लिए और अपनी पहचान प्रमाणित करने वाले किसी दस्तावेज़ के साथ इसे कैशियर में पेश करने के लिए पर्याप्त है बेशक, इस मामले में आपको कानूनी आयु का होना चाहिए। कार्यक्रम में शामिल होने का एक अन्य तरीका ऑनलाइन स्टोर "ऑस्टिन" की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकृत होना है। "ऑस्टिन" कार्ड पर बोनस की जांच करने के बारे में बात करने से पहले, आपको यह पता लगाना होगा कि उन्हें किस चीज़ का श्रेय दिया जाता है। बोनस सशर्त इकाइयां हैं। भविष्य में, उनकी सहायता से, आप इस नेटवर्क के रिटेल आउटलेट्स पर खरीदी गई खरीद के लिए आंशिक रूप से भुगतान कर सकते हैं। उन्हें प्राप्त करने के लिए, आपको भुगतान के समय कैशीयर को कार्ड पेश करना होगा। अंक दिन के दौरान सम्मानित किया जाएगा। उनकी संख्या आपके किस प्रकार के कार्ड पर निर्भर करती हैः - "बोनस"। ऐसा कार्ड किसी भी खरीदार को इच्छा के अनुसार जारी किया जाता है। उसी समय, खरीद राशि कोई फर्क नहीं पड़ती कार्डधारक को ट्रेडिंग नेटवर्क में बिताए गए प्रत्येक पूर्ण पाँच सौ रूबल के पच्चीस बोनस अंक का श्रेय दिया जाएगा। - «बोनस प्लस» यह प्लास्टिक उन ग्राहकों को दिया जाता है जिन्होंने एक चेक के साथ पंद्रह हजार और एक रूबल की खरीदारी की। यह कार्ड आपको प्रत्येक बचे हुए आधा हज़ार रूबल के लिए पैंतीस बोनस प्राप्त करने का अधिकार देता है। "बोनस प्लस" कार्ड "बोनस" के बदले में आवश्यक राशि के जमा होने के बाद भी प्राप्त किया जा सकता है। क्या आप घर पर अपने ऑस्टिन स्टोर कार्ड को भूल गए हैं? कार्ड पर बोनस प्लास्टिक की उपस्थिति के बिना खर्च किया जा सकता है। ऐसा करने के लिए, बस खजांची को अपने फोन की संख्या को पंजीकरण के दौरान निर्दिष्ट करें। थोड़ा इंतजार आप एक कोड के साथ एसएमएस प्राप्त करेंगे, एक बार का संयोजन। यह खजांची को सूचित किया जाना चाहिए और वह अधिकृत होगा। यह न केवल आवश्यक है कि कार्ड "ऑस्टिन" कार्ड पर बोनस को कैसे जांचें, बल्कि इसे नियमित रूप से करने के लिए भी। तथ्य यह है कि संचित बिंदुओं को एक सीमा अवधि है और जला दिया जाता है, यदि वे एक निश्चित बिंदु तक नहीं उपयोग किए गए हैं। निष्पक्षता में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अंक लंबे समय तक संरक्षित किए गए हैं - पूरे साल, यहां तक कि थोड़ी अधिक। अधिक सटीक होने के लिए, वर्ष के लिए जमा बोनस अगले साल मार्च तक खर्च किया जा सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने मई या दिसंबर में खरीदारी की थी। अगले साल मार्च में वे जला देंगे। उदाहरण के लिए, जनवरी या फरवरी दो हज़ार सोलह में प्राप्त अंक एक मार्च दो हज़ार सत्रह को रद्द किए गए हैं। और फरवरी दो हज़ार सत्रह में किए गए खरीद के लिए अर्जित बोनस, मार्च दो हज़ार अट्ठारह तक आपके फैसले का इंतजार करेंगे। जैसा कि आप पहले से जानते थे, "ऑस्टिन" एक बोनस कार्ड है। बोनस की जांच करें और अपनी संख्या को कई मायनों में ढूंढें। ऐसा करने का सबसे आसान तरीका हैः स्टाइलिश कपड़ों की दुकान की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्टर करें, अधिकृत करें और "बोनस" अनुभाग पर जाएं। यहां आपको सभी आवश्यक जानकारी मिल जाएगी, अपने व्यक्तिगत खाते की स्थिति देखें। यदि आप स्टोर में नहीं गए और आपके पास कोई इंटरनेट नहीं है, तो आप बस एक संदर्भ सेवा की संख्या डायल कर सकते हैं। यह मुफ़्त है, और फोन नंबर बोनस प्लास्टिक के पीछे सूचीबद्ध है। कॉल सेंटर ऑपरेटर द्वारा कॉल का उत्तर दिया जाएगा। उन्हें आपके कार्ड नंबर प्रदान करने की आवश्यकता होगी और कुछ मिनटों में आपको आवश्यक जानकारी प्राप्त होगी। बोनस "ऑस्टिन" कहां खर्च करना है? क्लब कार्ड के बाद से, आप विशेष रूप से व्यापार नेटवर्क "ऑस्टिन" में खरीदारी करने वाले बोनस का खर्च कर सकते हैं। एक अंक इकाई एक रूबल के बराबर होती है वे पर्याप्त जमा करने के बाद, आप खर्च कर सकते हैं यहां नियम केवल एक ही बात हैः अंक की मदद से भुगतान की गई कुल राशि अधिग्रहित वस्तु की लागत का तीस% से अधिक नहीं हो सकती कई अन्य प्रतिबंध हैं सामानों के वितरण के लिए बोनस का भुगतान नहीं किया जा सकता है, उन्हें "लाइव" पैसे के लिए आदान प्रदान और नेटवर्क "ऑस्टिन डिस्काउंट" में छूट का उपयोग करें। |
- मशहूर अभिनेता एवं 'बिग बॉस-13' के विजेता सिद्धार्थ शुक्ला ने गुरुवार को अपनी आखिरी सांस ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वह 40 वर्ष के थे। शुक्ला को सुबह करीब 10 बजकर 20 मिनट पर जुहू स्थित कूपर अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले की उनकी मौत हो चुकी थी। अभिनेता का गुरुवार को कूपर हॉस्पिटल में सिद्धार्थ का पोस्टमार्टम हुआ। वहीं अब उनके शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है।
सिद्धार्थ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने राय नहीं दी है वहीं हिस्टोपैथोलॉजी स्टडी और केमिकल एनालिसिस से मौत की वजहों का पता चलेगा। इसके लिए विसरा को सुरक्षित रखा जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि सिद्धार्थ के शरीर पर बाहरी या भीतरी चोट के निशान नहीं हैं। सिद्धार्थ का थोड़ी देर में अंतिम संस्कार होना है। उनका अंतिम संस्कार ओशिवारा में होगा। बताया जा रहा है कि ब्रह्मकुमारी में परमिशन ना मिलने की वजह से ओशिवारा में ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
शुक्ला ने एक मॉडल के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। 'बाबुल का आंगन छूटे ना' धारावाहिक के साथ छोटे पर्दे पर उन्होंने कदम रखा और बाद में 'जाने पहचाने से ... ये अजनबी', 'लव यू जिंदगी' जैसे धारावाहिकों में भी वह दिखाई दिए, लेकिन 'बालिका वधू' में निभाए अपने किरदार से वह घर-घर में पहचाने जाने लगे। यह एक दुखत इत्तेफाक है कि धारावाहिक बालिका वधू में उनकी सहकलाकार प्रत्युषा बनर्जी की मौत भी कम उम्र में ही हो गई थी। बनर्जी 2016 में मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फंदे से लटकती मिली थीं। उस वक्त वह सिर्फ 24 साल की थीं।
| - मशहूर अभिनेता एवं 'बिग बॉस-तेरह' के विजेता सिद्धार्थ शुक्ला ने गुरुवार को अपनी आखिरी सांस ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वह चालीस वर्ष के थे। शुक्ला को सुबह करीब दस बजकर बीस मिनट पर जुहू स्थित कूपर अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले की उनकी मौत हो चुकी थी। अभिनेता का गुरुवार को कूपर हॉस्पिटल में सिद्धार्थ का पोस्टमार्टम हुआ। वहीं अब उनके शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। सिद्धार्थ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने राय नहीं दी है वहीं हिस्टोपैथोलॉजी स्टडी और केमिकल एनालिसिस से मौत की वजहों का पता चलेगा। इसके लिए विसरा को सुरक्षित रखा जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि सिद्धार्थ के शरीर पर बाहरी या भीतरी चोट के निशान नहीं हैं। सिद्धार्थ का थोड़ी देर में अंतिम संस्कार होना है। उनका अंतिम संस्कार ओशिवारा में होगा। बताया जा रहा है कि ब्रह्मकुमारी में परमिशन ना मिलने की वजह से ओशिवारा में ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है। शुक्ला ने एक मॉडल के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। 'बाबुल का आंगन छूटे ना' धारावाहिक के साथ छोटे पर्दे पर उन्होंने कदम रखा और बाद में 'जाने पहचाने से ... ये अजनबी', 'लव यू जिंदगी' जैसे धारावाहिकों में भी वह दिखाई दिए, लेकिन 'बालिका वधू' में निभाए अपने किरदार से वह घर-घर में पहचाने जाने लगे। यह एक दुखत इत्तेफाक है कि धारावाहिक बालिका वधू में उनकी सहकलाकार प्रत्युषा बनर्जी की मौत भी कम उम्र में ही हो गई थी। बनर्जी दो हज़ार सोलह में मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फंदे से लटकती मिली थीं। उस वक्त वह सिर्फ चौबीस साल की थीं। |
वैश्विक स्तर(World Level) पर गौर करें तो पिछले 24 घंटों में पूरी दुनिया में रिकॉर्ड 3,07,000 नए कोरोना(Corona) मामले सामने आए हैं। वहीं, 5,537 लोगों की मौत हुई है। 24 घंटे में सामने आए कुल कोरोना मामलों में हर तीसरा संक्रमित मरीज भारतीय है।
स्वास्थ्य मंत्रालय(Health Ministry) का कहना है कि ऐसे लोगों का अगर स्वास्थ्य ठीक है, तो घर के काम करें और ऑफिस के कार्य भी शुरू कर दें। साथ ही योगासन(Yoga), प्राणायाम और ध्यान लगाएं।
देश के लगभग सभी राज्यों से कोरोना(Corona) मरीज सामने आ रहे हैं। कई राज्य ऐसे भी हैं, जो इस महामारी से मुक्त हो चुके थे लेकिन प्रवासियों के राज्य में दाखिल होने से वह फिर से इस संक्रमण की जद में आ गए।
पीएम मोदी(PM Modi) ने कहा कि, आपका स्वास्थ्य उत्तम रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को दवाई की बात कहकर संदेश दिया कि जब तक वैक्सीन(Vaccine) नहीं आ जाती, तब तक लोग अतिरिक्त सावधानियां बरतें।
देशभर में कोरोना(Corona) कुल मामले साढ़े 46 लाख के पार चले गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय(Health Ministry) के मुताबिक देशभर में 46 लाख 59 हजार 985 कोरोना के मामले हैं।
शुक्रवार को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय(Health Ministry) ने जानकारी देते हुए बताया कि, भारत(India) में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 96 हजार 551 नए मामले सामने आए हैं। वहीं एक दिन में कोरोना की वजह से 1,209 मौतें दर्ज की गई हैं।
अगर हम सबसे प्रभावित देश अमेरिका(America Corona) से तुलना करें तो पिछले पांच दिन में भारत(India) में मरीजों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है। गुरुवार को अमेरिका में सिर्फ 38 हजार 811 केस आए और 1090 लोगों की मौत हुई।
टेस्टिंग की बात करें तो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR) इसको लेकर जानकारी दी कि, कल(9 सितंबर) तक कोरोना वायरस(Corona Virus) के लिए कुल 5,29,34,433 सैंपल टेस्ट किए गए, जिनमें से 11,29,756 सैंपल कल टेस्ट किए गए हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने टेस्टिंग को लेकर बताया कि, "कल (8 सितंबर) तक कोरोना(Corona) वायरस के लिए कुल 5,18,04,677 सैंपल टेस्ट किए गए जिनमें से 11,54,549 सैंपल कल टेस्ट किए गए। "
हैदराबाद(Hyderabad) की वैक्सीन(Vaccine) निर्माता कंपनी भारत बॉयोटेक (Bharat Biotech) की कोवैक्सीन (Covaxin) का दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है।
| वैश्विक स्तर पर गौर करें तो पिछले चौबीस घंटाटों में पूरी दुनिया में रिकॉर्ड तीन,सात,शून्य नए कोरोना मामले सामने आए हैं। वहीं, पाँच,पाँच सौ सैंतीस लोगों की मौत हुई है। चौबीस घंटाटे में सामने आए कुल कोरोना मामलों में हर तीसरा संक्रमित मरीज भारतीय है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ऐसे लोगों का अगर स्वास्थ्य ठीक है, तो घर के काम करें और ऑफिस के कार्य भी शुरू कर दें। साथ ही योगासन, प्राणायाम और ध्यान लगाएं। देश के लगभग सभी राज्यों से कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं। कई राज्य ऐसे भी हैं, जो इस महामारी से मुक्त हो चुके थे लेकिन प्रवासियों के राज्य में दाखिल होने से वह फिर से इस संक्रमण की जद में आ गए। पीएम मोदी ने कहा कि, आपका स्वास्थ्य उत्तम रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को दवाई की बात कहकर संदेश दिया कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक लोग अतिरिक्त सावधानियां बरतें। देशभर में कोरोना कुल मामले साढ़े छियालीस लाख के पार चले गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देशभर में छियालीस लाख उनसठ हजार नौ सौ पचासी कोरोना के मामले हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि, भारत में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस के छियानवे हजार पाँच सौ इक्यावन नए मामले सामने आए हैं। वहीं एक दिन में कोरोना की वजह से एक,दो सौ नौ मौतें दर्ज की गई हैं। अगर हम सबसे प्रभावित देश अमेरिका से तुलना करें तो पिछले पांच दिन में भारत में मरीजों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है। गुरुवार को अमेरिका में सिर्फ अड़तीस हजार आठ सौ ग्यारह केस आए और एक हज़ार नब्बे लोगों की मौत हुई। टेस्टिंग की बात करें तो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद इसको लेकर जानकारी दी कि, कल तक कोरोना वायरस के लिए कुल पाँच,उनतीस,चौंतीस,चार सौ तैंतीस सैंपल टेस्ट किए गए, जिनमें से ग्यारह,उनतीस,सात सौ छप्पन सैंपल कल टेस्ट किए गए हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने टेस्टिंग को लेकर बताया कि, "कल तक कोरोना वायरस के लिए कुल पाँच,अट्ठारह,चार,छः सौ सतहत्तर सैंपल टेस्ट किए गए जिनमें से ग्यारह,चौवन,पाँच सौ उनचास सैंपल कल टेस्ट किए गए। " हैदराबाद की वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन का दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। |
अंगूरी भाभी शादी का कार्ड छपने के बाद भी रह गईं कुंवारी! जानिए क्यों?
अंगूरी भाभी उर्फ शिल्पा शिंदे अपनी रियल लाइफ में काफी उतार-चढ़ाव देख चुकी है। शायद आप लोग नहीं जानते होंगे कि उनकी असल ज़िंदगी में शादी होते-होते रह गई थी। साल 2009 में उनकी शादी की तारीख-वेन्यू, कार्ड तक सब फाइनल हो चुका था लेकिन करवाचौथ के ठीक दो दिन पहले अंगूरी भाभी की शादी टूट गई।
शिल्पा, टीवी एक्टर रोमित राज से शादी करनी वाली थी। रोमित राज 'मायका' और 'मात-पिता के चरणों में स्वर्ग' जैसे सीरियल्स में काम कर चुके हैं। सीरियल में वह एक दूसरे के पार्टनर थे। 29 नवंबर 2009 को गोवा में शादी की तारीख फाइनल हुई थी। शादी के कार्ड छप चुके थे, लेकिन बाद में शादी रद्द करने पड़ी।
शिल्पा को करवा चौथ के दो दिन पहले एहसास हुआ था कि रोमित एक एडजस्टिंग हसबैंड साबित नहीं हो सकते है। जब शिल्पा ने रोमित को अपनी ये बात बताई तो रोमित ने उनकी बात सुने बगैर फैमिली की बेइज्जती कर डाली। बस फिर क्या था, शिल्पा ने शादी नहीं करने का फैसला किया।
हलांकि कि दोनों ने सीरियल में शादी की थी, जिसमें वे दूल्हा-दुल्हन बने थे और उनके फ्रेंड्स उन्हें बधाई तक देने पहुंच गए थे। आपको बता दें कि रोमित राज शिल्पा शिंदे से 3 साल छोटे भी थे।
शिल्पा से ब्रेकअप के बाद रोमित ने 28 मार्च 2010 को पुणे में टीना कक्कड़ से शादी कर ली। अब वे एक बच्ची के पिता हैं, जिसका नाम उन्होंने रिया राज रखा।
मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
| अंगूरी भाभी शादी का कार्ड छपने के बाद भी रह गईं कुंवारी! जानिए क्यों? अंगूरी भाभी उर्फ शिल्पा शिंदे अपनी रियल लाइफ में काफी उतार-चढ़ाव देख चुकी है। शायद आप लोग नहीं जानते होंगे कि उनकी असल ज़िंदगी में शादी होते-होते रह गई थी। साल दो हज़ार नौ में उनकी शादी की तारीख-वेन्यू, कार्ड तक सब फाइनल हो चुका था लेकिन करवाचौथ के ठीक दो दिन पहले अंगूरी भाभी की शादी टूट गई। शिल्पा, टीवी एक्टर रोमित राज से शादी करनी वाली थी। रोमित राज 'मायका' और 'मात-पिता के चरणों में स्वर्ग' जैसे सीरियल्स में काम कर चुके हैं। सीरियल में वह एक दूसरे के पार्टनर थे। उनतीस नवंबर दो हज़ार नौ को गोवा में शादी की तारीख फाइनल हुई थी। शादी के कार्ड छप चुके थे, लेकिन बाद में शादी रद्द करने पड़ी। शिल्पा को करवा चौथ के दो दिन पहले एहसास हुआ था कि रोमित एक एडजस्टिंग हसबैंड साबित नहीं हो सकते है। जब शिल्पा ने रोमित को अपनी ये बात बताई तो रोमित ने उनकी बात सुने बगैर फैमिली की बेइज्जती कर डाली। बस फिर क्या था, शिल्पा ने शादी नहीं करने का फैसला किया। हलांकि कि दोनों ने सीरियल में शादी की थी, जिसमें वे दूल्हा-दुल्हन बने थे और उनके फ्रेंड्स उन्हें बधाई तक देने पहुंच गए थे। आपको बता दें कि रोमित राज शिल्पा शिंदे से तीन साल छोटे भी थे। शिल्पा से ब्रेकअप के बाद रोमित ने अट्ठाईस मार्च दो हज़ार दस को पुणे में टीना कक्कड़ से शादी कर ली। अब वे एक बच्ची के पिता हैं, जिसका नाम उन्होंने रिया राज रखा। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें। |
नई दिल्ली। घरेलू कोयले की भारी किल्लत से जूझ रहे भारत में अब बिजली संकट गहराने लगा है। इस बीच बिजली मंत्रालय महंगे दाम पर आयातित कोयले का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने की तैयारी कर रहा है। इसका एक मतलब साफ़ है कि आने वाले समय में बिजली और महंगी हो सकती है। बता दें कि देश में पिछले कुछ समय से कोयले की कमी महसूस की जा रही है।
केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार का कहना है कि दिसंबर 2022 तक कुछ कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों के लिए आयातित कोयले पर आने वाली उच्च लागत का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि यदि आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं चलेंगे, तो बिजली की बढ़ती मांग के की वजह से घरेलू कोयला आधारित इकाइयों पर दबाव पड़ेगा।
सचिव ने कहा इस कदम से बिजली की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि दाम बढ़ने से अडानी समूह, टाटा पावर और एस्सार जैसी आयातित कोयला आधारित इकाइयां बिजली पैदा करने और राज्य वितरण कंपनियों को बेचने में सक्षम होंगी।
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में ही बिजली मंत्री आर के सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें एस्सार के 1,200 मेगावाट के सलाया संयंत्र और मुंद्रा में अडाणी के 1,980 मेगावाट संयंत्र जैसी इकाइयों को शामिल करते हुए आयातित कोयले की ऊंची लागत को उपभोक्ताओं पर ही डालने को लेकर सहमति बनी थी।
| नई दिल्ली। घरेलू कोयले की भारी किल्लत से जूझ रहे भारत में अब बिजली संकट गहराने लगा है। इस बीच बिजली मंत्रालय महंगे दाम पर आयातित कोयले का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने की तैयारी कर रहा है। इसका एक मतलब साफ़ है कि आने वाले समय में बिजली और महंगी हो सकती है। बता दें कि देश में पिछले कुछ समय से कोयले की कमी महसूस की जा रही है। केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार का कहना है कि दिसंबर दो हज़ार बाईस तक कुछ कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों के लिए आयातित कोयले पर आने वाली उच्च लागत का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि यदि आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं चलेंगे, तो बिजली की बढ़ती मांग के की वजह से घरेलू कोयला आधारित इकाइयों पर दबाव पड़ेगा। सचिव ने कहा इस कदम से बिजली की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि दाम बढ़ने से अडानी समूह, टाटा पावर और एस्सार जैसी आयातित कोयला आधारित इकाइयां बिजली पैदा करने और राज्य वितरण कंपनियों को बेचने में सक्षम होंगी। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में ही बिजली मंत्री आर के सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें एस्सार के एक,दो सौ मेगावाट के सलाया संयंत्र और मुंद्रा में अडाणी के एक,नौ सौ अस्सी मेगावाट संयंत्र जैसी इकाइयों को शामिल करते हुए आयातित कोयले की ऊंची लागत को उपभोक्ताओं पर ही डालने को लेकर सहमति बनी थी। |
इंदौर. इंदौर में तेज बारिश होने से शहर की सड़कों पर पानी भर गया. बारिश से आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग समेत अन्य सड़कों पर पानी जमा हो गया. एबी रोड के अलावा बीआरटीएस, एलआईजी समेत कई सड़कों पर लंबा जाम लग गया. तेज रफ्तार से दौड़ने वाले वाहन रेंगते हुए नजर आए. जाम में एक एंबुलेंस भी लंबे समय तक फंसी रही. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है.
इंदौर में सोमवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश से पूरा शहर तरबतर हो गया. बारिश से आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भर गया. एबी रोड, बीआरटीएस, एलआईजी समेत कई सड़कों पर पानी भर जाने से जाम लग गया. कनाडिया रोड और बंगाली चौराहा पर भी पानी भर गया. खजराना चौराहे पर तो एक एम्बुलेंस जाम में फंसी रही, जिसे काफी देर बाद रास्ता मिल पाया. शहर में सुबह से ही बादल छाए हुए थे, हालांकि अल सुबह हल्की बारिश भी हुई, लेकिन देर शाम को हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया.
शहर में भारी बारिश के बीच शाम के समय ऑफिस से घर जाने वालों लोगों को खासी मुसीबत का सामना करना पड़ा. उन्हें घंटों तक पानी रुकने का इंतजार करना पड़ा. सड़कों पर पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया और वाहन रेंगते हुए नजर आए. एयरपोर्ट के वेदर स्टेशन पर पिछले 24 घंटे में 1. 9 मिलीमीटर और रीगल के मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वेदर स्टेशन पर 4. 50 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई.
भोपाल के मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक इंदौर में अगले दो से तीन दिन तक हल्की से मध्यम बारिश होने संभावना है. वर्तमान में उड़ीसा के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. जिसकी वजह से इंदौर संभाग में तेज बारिश की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं. हालांकि जुलाई के 17 में से 15 दिन मानसून ने शहर को भिगोया है, लेकिन रफ्तार हमेशा जैसी नहीं रही. जुलाई में एवरेज 13 दिन में ही 12 से 14 इंच पानी बरस जाता है. इस बार जुलाई के 17 में से 15 दिन पानी बरसने के बावजूद इस महीने इंदौर पश्चिम में आठ इंच और पूर्व में मात्र 3 इंच बारिश दर्ज की गई है. हालांकि दोनों इलाकों में जून और जुलाई में मिलाकर 12-12 इंच बारिश हो चुकी है.
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| इंदौर. इंदौर में तेज बारिश होने से शहर की सड़कों पर पानी भर गया. बारिश से आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग समेत अन्य सड़कों पर पानी जमा हो गया. एबी रोड के अलावा बीआरटीएस, एलआईजी समेत कई सड़कों पर लंबा जाम लग गया. तेज रफ्तार से दौड़ने वाले वाहन रेंगते हुए नजर आए. जाम में एक एंबुलेंस भी लंबे समय तक फंसी रही. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है. इंदौर में सोमवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश से पूरा शहर तरबतर हो गया. बारिश से आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भर गया. एबी रोड, बीआरटीएस, एलआईजी समेत कई सड़कों पर पानी भर जाने से जाम लग गया. कनाडिया रोड और बंगाली चौराहा पर भी पानी भर गया. खजराना चौराहे पर तो एक एम्बुलेंस जाम में फंसी रही, जिसे काफी देर बाद रास्ता मिल पाया. शहर में सुबह से ही बादल छाए हुए थे, हालांकि अल सुबह हल्की बारिश भी हुई, लेकिन देर शाम को हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया. शहर में भारी बारिश के बीच शाम के समय ऑफिस से घर जाने वालों लोगों को खासी मुसीबत का सामना करना पड़ा. उन्हें घंटों तक पानी रुकने का इंतजार करना पड़ा. सड़कों पर पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया और वाहन रेंगते हुए नजर आए. एयरपोर्ट के वेदर स्टेशन पर पिछले चौबीस घंटाटे में एक. नौ मिलीमीटर और रीगल के मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वेदर स्टेशन पर चार. पचास मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. भोपाल के मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक इंदौर में अगले दो से तीन दिन तक हल्की से मध्यम बारिश होने संभावना है. वर्तमान में उड़ीसा के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. जिसकी वजह से इंदौर संभाग में तेज बारिश की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं. हालांकि जुलाई के सत्रह में से पंद्रह दिन मानसून ने शहर को भिगोया है, लेकिन रफ्तार हमेशा जैसी नहीं रही. जुलाई में एवरेज तेरह दिन में ही बारह से चौदह इंच पानी बरस जाता है. इस बार जुलाई के सत्रह में से पंद्रह दिन पानी बरसने के बावजूद इस महीने इंदौर पश्चिम में आठ इंच और पूर्व में मात्र तीन इंच बारिश दर्ज की गई है. हालांकि दोनों इलाकों में जून और जुलाई में मिलाकर बारह-बारह इंच बारिश हो चुकी है. . |
ने मुझे बतलाया कि उसका लड़का उसे और अपनी पत्नी को पीछे छोड़कर घर से भागा हुआ है। किसी ने उसे बतलाया था कि वह भाग कर दिल्ली गया है। वह यह सुन कर कि मैं दिल्ली के पास से आया है, अब एक मील से यह पता करने आया है कि मैने उसके लड़के को वहां कहीं देखा तो नहीं, लड़के का नाम भूमिनाथन है । वह लगभग मेरी ही श्रायु का है और जरा जरा हकला कर बोलता है ।
जब उसने मेरी बात बुड्ढे से कही कि एक तो मैं दिल्ली का रहने वाला नहीं, फिर दिल्जी इतना बड़ा शहर है कि वहां किसी को इन लक्षणों से पहचान लेना असंभव है, तो वह निराश होकर कुछ क्षण तो अनिश्चित सा खड़ा रहा। फिर वापस चल पड़ा । औौरत उसी तरह खड़ी थी । मैने अनुमान लगा लिया था कि वह बडढने की बहू होगी । जब व उ डढा उसके पास पहुंचा तो युवती ने धीमे स्वर में उससे कुछ कहा । बुडढा उसकी बात सुनकर फिर लौट । इस बार कर वह लड़के कद, रंग और नकश श्रादि के विषय में विस्तृत जानकारी देने लगा । उस पर भी जव मैं उसे कोई सन्तोषजनक उत्तर नहीं दे सका तो वह कुछ ऐसे अविश्वास के साथ एक दृष्टि मुझ पर डालकर जैसे मैंने जानबूझ कर उसे टालने की चेष्टा की हो, और एक ठण्डी सांस भर कर चुपचाप वापस चल पड़ा। इस बार वह युवती बिना कुछ कहे उसके पीछे पीछे चली गई ।
उन दोनों के चले जाने पर मैंने अपने साथ वाले व्यक्ति से पूछा, "इसका लड़का घर छोड़कर क्यों भाग गया था ?"
"अपनी जमीन हाथ से चली गई थी, 'वह बोला' इन दो प्राणियों के अतिरिक्त उसके दो बच्चे भी हैं। मजदूरी करके पांच आदमियों के खाने लायक कमा नहीं पाता था । एक दिन गुस्से में आकर बाप मार बैठा। फिर वह बात मन को लग गई और उसी रात घर छोड़
"आखिरी चट्टान
जाने हुए वह कह गया कि सवेरे मैं उसको प्रतीक्षा करू, जल्दी न चला जाऊ, वह अपना पता लिखवा कर एक पोस्ट कार्ड मुझे दे जायगा ।
कन्या कुमारीकेप होटल के आगे बने हुए बाथ टैंक के बाईं ओर उभरी हुई चट्टानों पर खड़े होकर मैंने पहली बार भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देखा । पीछे कन्या कुमारी के मन्दिर की लाल और सफेद लकीरें दिखाई दे रहीं थी। लहरें रास्ते की चट्टानों से कटती हुई श्राती थी, अतः उनके ऊपर चूर्णित बूंदों की सफेद जालीसी बन जाती थी । एक और अरब सागर और हिन्द महासागर को क्षितिज-रेखा को और दूसरी श्रोर तट पर लहरों के श्राघात को देखते हुए वहां से विस्तार और शक्ति का एक साथ पूरा अनुभव किया जा
सकता था ।
कन्या कुमारी को सुनहरे सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि कहा जाता है। पश्चिम के क्षितिज में सूर्य धीरे धीरे नीचे जा रहा था । मैं चट्टानों से सड़क पर था गया । पश्चिमी तट-रेखा के एक मोड़ के पास रेत का ऊंचा उभार दिखाई दे रहा था। मैं उसे लक्ष्य में रखकर चलने लगा। कितनी ही टोलियाँ उस समय सड़क पर सूर्यास्त की दिशा में जा रही थीं। मेरे आगे आगे कुछ मिशनरी रमणियाँ सैल्वेशान को समस्या पर विचार करती चल रही थीं। मेरी समस्या में नहीं, पीली रेत के वैषम्य में उनके लबादा के रंग को देखने में थी । सैंड हिलपर पहुँचकर वे रुक गईं,
आखिरी चट्टान त क
भी बहुत से लोग वहीं रुके हुए थे। आठ दस युवक और दो तीन गांधी टोपी वाले प्रौद व्यक्ति वे लोग भारत सरकार के अतिथि थे क्योंकि गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के बैरे उस समय वहां उन्हें सूर्यास्त के समय की काफी पिला रहे थे । वे शायद हैदराबाद कांप्रदेश के अधिवेशन से वहां आये थे । उनकी वजह से सैंड हिल बहुत रंगीन हो उठी थी । उन्होंने कन्या कुमारी का सूर्यास्त देखने के लिए विशेष रुचि के साथ सुन्दर रंगों का रेशस पहना था, जिसे तेज हवा उस समय उमिल बनाये हुए थी । मैं सैंडहिल की रंगीनी से आगे बढ़ गया । मुझे लगता था कि अगले मोड़ के पास रेत और ऊंची है और वहां से पश्चिमीय क्षितिज का अपेक्षाकृत अधिक खुला भाग दिखाई देगा। वहां पहुंचकर फिर लगता कि शायद और आगे जाकर और खुला भाग आ जायगा । धीरे धीरे उस तरह मैं ऊंचाई तक चला गया, जहां से आगे की ओर भी उलान आरंभ हो जाती थी । वहां से दूर-दूर हटकर उगे हुए कुछ नारियलों के झुरमुट दिखाई दे रहे थे। गूंजती हुई हवा के वेग में नारियलों के पत्ते इस तरह श्राकाश की ओर उड़ रहे थे जैसे तेज तूफान में किन्हीं जंगली युवतियों के खुले केश । पश्चिम की ओर तट के साथ साथ सूखी पहाड़ियों की शृंखला थी, जो सामने फैली हुई रेत के कारण और भी वीरान लग रही थी । रेत सूर्यास्त काल की सुनहरी ग्राभा में इस तरह चमक रही थी, जैसे उसके निर्माण के समय का रंग अभी ताजा हो । उस भूमि और उस वातावरण में एक आवेश जन्म देने वाली मासूमियत थी ।
सूर्यास्त के बाद जब मैं वापस लौटने लगा तो मैंने देखा कि सैंड-हिल से मैं इा आगे आ गया हूं कि वहां पर माननीय प्राकृतियों की बजाय केवल हिलते हुए रंगीन वस्त्र ही दिखाई देते हैं। जिस रास्ते से आया था उस रास्ते से लौटने की बजाय अब में रेत पर
बैठकर नीचे 'बीच' की ओर फिसल गया और वहां मिले जुले रंगों की रेत पर चलने लगा। लाल आंधी औौर काली घटा के रंगों को आपस में मिला देने से जितनी तरह के हल्के गहरे रंग मिल सकते हैं वे सब रंग उस तट की रेत में दिखाई दे रहे थे । समुद्र में पानी बढ़ रहा था। बीच की चौड़ाई क्रमशः कम होती जा रही थी। कहीं कहीं
तो वह चार पांच फुट ही रह गई थी। दूसरी श्रोर पोली रेत इस तरह ऊंची उठी हुई थी कि उस पर चढ़कर ऊपर पहुंच जाना संभव नहीं था। मैं तेज तेज चलने लगा। दो एक लहरें आकर मेरे पैरों को भिगी गई । अब रास्ते में एक चट्टान श्री गयी। उस पर से कूदने पर आगे कुछ चौड़ा 'बीच' मिल गया और वहां से ऊपर की ओर जाने का रास्ता दिखाई देने लगा ।
केप होटल पहुचकर खाना खाने के बाद मैं बाहर लान के सिरे के पास एक कुर्सी बिछाकर बैठ गया। अंधेरे में विशाल हिन्द महासागर के आगे फैली हुई पास के एक पौधे की टहनियां काली रेखाओं जैसी दिखायी दे रही थीं। नीचे तट के पास की सड़क पर कोई टार्च जल/ता बुझाता चल रहा था। दूर दक्षिण पूर्व में एक जहाज को महम रौशनी दिखाई दे रही थी । उसी समय एक नीत का स्वर सुनाई देने लगा जो क्रमशः पासता गया। एक बस होटल के कम्पाउंड में श्री गई । वह शायद किसी कान्वेंट को बस थी । बस में बैठी हुई लड़कियां एक अंग्रेजी गीत गा रही थीं, जिसमें समुद्र पर के सितारे को सम्बोधित किया गया था। बस कुछ देर रुक कर वापस चली गई, परन्तु वातावरण में उस गीत की धुन देर तक समाई रही।
"अकेले कन्याकुमारी में चार पांच सौ शिक्षित नवयुवक हैं जो बेकार हैं। सौ के लगभग तो ग्रेजुएट ही हैं। हमारी आठ हजार की बस्ती में यह हाल है तो पूरी स्टेट को अवस्था का अनुमान श्राप
अखिरी चट्टान तक
लगा सकते हैं । त्रिबेन्द्रम् में बसों के प्रायः
सभी कण्डक्टर ग्रेजुएट
हैं। वह काम भी उन्हें आसानी से नहीं मिलता। कहने को तो कहा जाता है कि ट्रावनकोर कोचिन में शिक्षा का बहुत प्रसार है, पर इस शिक्षा का उपयोग क्या हो रहा है ? कोई छोटा मोटा उद्योग भी चलाना चाहें उसके लिए पैसा हम लोगों के पास नहीं होता । बस नौकरी के लिए धजियां भेजते रहते हैं, दिन भर इधर उधर घूमते रहते हैं या बैठकर आपस में बहस किया करते हैं। कभी कभी थाड़ा बहुत सोशल वर्क कर लेते हैं। परन्तु इससे हमारी समस्या तो नहीं हल होती। हम लगदर राजनीतिक काम भी नहीं कर सकते, क्योंकि कई मेरे जैसे नवयुवकों की परिस्थितियां ऐसी हैं कि पूरा पूरा परिवार उन पर निर्भर करता है। मैं यहां पर फोटो एल्बम बेचता हूँ। ये लोग भी ऐसे ही छोटे मोटे काम कर लेते हैं। बस इसी तरह चल रहा है। और क्या किया जा सकता है ? "
सबेरे सूर्योदय के समय हम श्राठ व्यक्ति उस चट्टान पर बैठे थे, जिस पर जाकर स्वामी विवेकानन्द ने समाधि लगाई थी । यह चट्टान खट से सौ सवा सौ गज श्रागे, समुद्र के उस भाग में है, जहाँ बंगाल की खाड़ी की भौगोलिक सीमा समाप्त हो जाती है। हम
में से तीन कन्या कुमारी के बेकार नवयुवक थे, जिसमें से एक जो मोजुएट था, मुझे वहां की बेकारी की समस्या के विषय में बतला रहा था । चार मल्लाह थे, जो एक छोटी सी मछुआ नाव में हमें किनारे से वहां तक लाये ये । यद्यपि अन्तर बहुत थोड़ा ही था, फिर भी नीचे की चट्टानों में बचाते हुए और ऊंची ऊंची लहरों के ऊपर से सँभलते हुए नाव को वहां तक ले थाना बड़ी कुशलता का काम था । अब उनमें से एक मल्लाह कुछ सीपियां इकट्ठी करके ले आया। ग्रेजुएट नवयुवक मुझे उनका गूदा निकालकर दिखाने लगा, जो वहां का एक खाद्य है। सूर्योदय होने वाला था । हम सब सीपियां तोड़ते हुए उदयदिशा की. ओर देखने लगे । | ने मुझे बतलाया कि उसका लड़का उसे और अपनी पत्नी को पीछे छोड़कर घर से भागा हुआ है। किसी ने उसे बतलाया था कि वह भाग कर दिल्ली गया है। वह यह सुन कर कि मैं दिल्ली के पास से आया है, अब एक मील से यह पता करने आया है कि मैने उसके लड़के को वहां कहीं देखा तो नहीं, लड़के का नाम भूमिनाथन है । वह लगभग मेरी ही श्रायु का है और जरा जरा हकला कर बोलता है । जब उसने मेरी बात बुड्ढे से कही कि एक तो मैं दिल्ली का रहने वाला नहीं, फिर दिल्जी इतना बड़ा शहर है कि वहां किसी को इन लक्षणों से पहचान लेना असंभव है, तो वह निराश होकर कुछ क्षण तो अनिश्चित सा खड़ा रहा। फिर वापस चल पड़ा । औौरत उसी तरह खड़ी थी । मैने अनुमान लगा लिया था कि वह बडढने की बहू होगी । जब व उ डढा उसके पास पहुंचा तो युवती ने धीमे स्वर में उससे कुछ कहा । बुडढा उसकी बात सुनकर फिर लौट । इस बार कर वह लड़के कद, रंग और नकश श्रादि के विषय में विस्तृत जानकारी देने लगा । उस पर भी जव मैं उसे कोई सन्तोषजनक उत्तर नहीं दे सका तो वह कुछ ऐसे अविश्वास के साथ एक दृष्टि मुझ पर डालकर जैसे मैंने जानबूझ कर उसे टालने की चेष्टा की हो, और एक ठण्डी सांस भर कर चुपचाप वापस चल पड़ा। इस बार वह युवती बिना कुछ कहे उसके पीछे पीछे चली गई । उन दोनों के चले जाने पर मैंने अपने साथ वाले व्यक्ति से पूछा, "इसका लड़का घर छोड़कर क्यों भाग गया था ?" "अपनी जमीन हाथ से चली गई थी, 'वह बोला' इन दो प्राणियों के अतिरिक्त उसके दो बच्चे भी हैं। मजदूरी करके पांच आदमियों के खाने लायक कमा नहीं पाता था । एक दिन गुस्से में आकर बाप मार बैठा। फिर वह बात मन को लग गई और उसी रात घर छोड़ "आखिरी चट्टान जाने हुए वह कह गया कि सवेरे मैं उसको प्रतीक्षा करू, जल्दी न चला जाऊ, वह अपना पता लिखवा कर एक पोस्ट कार्ड मुझे दे जायगा । कन्या कुमारीकेप होटल के आगे बने हुए बाथ टैंक के बाईं ओर उभरी हुई चट्टानों पर खड़े होकर मैंने पहली बार भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देखा । पीछे कन्या कुमारी के मन्दिर की लाल और सफेद लकीरें दिखाई दे रहीं थी। लहरें रास्ते की चट्टानों से कटती हुई श्राती थी, अतः उनके ऊपर चूर्णित बूंदों की सफेद जालीसी बन जाती थी । एक और अरब सागर और हिन्द महासागर को क्षितिज-रेखा को और दूसरी श्रोर तट पर लहरों के श्राघात को देखते हुए वहां से विस्तार और शक्ति का एक साथ पूरा अनुभव किया जा सकता था । कन्या कुमारी को सुनहरे सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि कहा जाता है। पश्चिम के क्षितिज में सूर्य धीरे धीरे नीचे जा रहा था । मैं चट्टानों से सड़क पर था गया । पश्चिमी तट-रेखा के एक मोड़ के पास रेत का ऊंचा उभार दिखाई दे रहा था। मैं उसे लक्ष्य में रखकर चलने लगा। कितनी ही टोलियाँ उस समय सड़क पर सूर्यास्त की दिशा में जा रही थीं। मेरे आगे आगे कुछ मिशनरी रमणियाँ सैल्वेशान को समस्या पर विचार करती चल रही थीं। मेरी समस्या में नहीं, पीली रेत के वैषम्य में उनके लबादा के रंग को देखने में थी । सैंड हिलपर पहुँचकर वे रुक गईं, आखिरी चट्टान त क भी बहुत से लोग वहीं रुके हुए थे। आठ दस युवक और दो तीन गांधी टोपी वाले प्रौद व्यक्ति वे लोग भारत सरकार के अतिथि थे क्योंकि गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के बैरे उस समय वहां उन्हें सूर्यास्त के समय की काफी पिला रहे थे । वे शायद हैदराबाद कांप्रदेश के अधिवेशन से वहां आये थे । उनकी वजह से सैंड हिल बहुत रंगीन हो उठी थी । उन्होंने कन्या कुमारी का सूर्यास्त देखने के लिए विशेष रुचि के साथ सुन्दर रंगों का रेशस पहना था, जिसे तेज हवा उस समय उमिल बनाये हुए थी । मैं सैंडहिल की रंगीनी से आगे बढ़ गया । मुझे लगता था कि अगले मोड़ के पास रेत और ऊंची है और वहां से पश्चिमीय क्षितिज का अपेक्षाकृत अधिक खुला भाग दिखाई देगा। वहां पहुंचकर फिर लगता कि शायद और आगे जाकर और खुला भाग आ जायगा । धीरे धीरे उस तरह मैं ऊंचाई तक चला गया, जहां से आगे की ओर भी उलान आरंभ हो जाती थी । वहां से दूर-दूर हटकर उगे हुए कुछ नारियलों के झुरमुट दिखाई दे रहे थे। गूंजती हुई हवा के वेग में नारियलों के पत्ते इस तरह श्राकाश की ओर उड़ रहे थे जैसे तेज तूफान में किन्हीं जंगली युवतियों के खुले केश । पश्चिम की ओर तट के साथ साथ सूखी पहाड़ियों की शृंखला थी, जो सामने फैली हुई रेत के कारण और भी वीरान लग रही थी । रेत सूर्यास्त काल की सुनहरी ग्राभा में इस तरह चमक रही थी, जैसे उसके निर्माण के समय का रंग अभी ताजा हो । उस भूमि और उस वातावरण में एक आवेश जन्म देने वाली मासूमियत थी । सूर्यास्त के बाद जब मैं वापस लौटने लगा तो मैंने देखा कि सैंड-हिल से मैं इा आगे आ गया हूं कि वहां पर माननीय प्राकृतियों की बजाय केवल हिलते हुए रंगीन वस्त्र ही दिखाई देते हैं। जिस रास्ते से आया था उस रास्ते से लौटने की बजाय अब में रेत पर बैठकर नीचे 'बीच' की ओर फिसल गया और वहां मिले जुले रंगों की रेत पर चलने लगा। लाल आंधी औौर काली घटा के रंगों को आपस में मिला देने से जितनी तरह के हल्के गहरे रंग मिल सकते हैं वे सब रंग उस तट की रेत में दिखाई दे रहे थे । समुद्र में पानी बढ़ रहा था। बीच की चौड़ाई क्रमशः कम होती जा रही थी। कहीं कहीं तो वह चार पांच फुट ही रह गई थी। दूसरी श्रोर पोली रेत इस तरह ऊंची उठी हुई थी कि उस पर चढ़कर ऊपर पहुंच जाना संभव नहीं था। मैं तेज तेज चलने लगा। दो एक लहरें आकर मेरे पैरों को भिगी गई । अब रास्ते में एक चट्टान श्री गयी। उस पर से कूदने पर आगे कुछ चौड़ा 'बीच' मिल गया और वहां से ऊपर की ओर जाने का रास्ता दिखाई देने लगा । केप होटल पहुचकर खाना खाने के बाद मैं बाहर लान के सिरे के पास एक कुर्सी बिछाकर बैठ गया। अंधेरे में विशाल हिन्द महासागर के आगे फैली हुई पास के एक पौधे की टहनियां काली रेखाओं जैसी दिखायी दे रही थीं। नीचे तट के पास की सड़क पर कोई टार्च जल/ता बुझाता चल रहा था। दूर दक्षिण पूर्व में एक जहाज को महम रौशनी दिखाई दे रही थी । उसी समय एक नीत का स्वर सुनाई देने लगा जो क्रमशः पासता गया। एक बस होटल के कम्पाउंड में श्री गई । वह शायद किसी कान्वेंट को बस थी । बस में बैठी हुई लड़कियां एक अंग्रेजी गीत गा रही थीं, जिसमें समुद्र पर के सितारे को सम्बोधित किया गया था। बस कुछ देर रुक कर वापस चली गई, परन्तु वातावरण में उस गीत की धुन देर तक समाई रही। "अकेले कन्याकुमारी में चार पांच सौ शिक्षित नवयुवक हैं जो बेकार हैं। सौ के लगभग तो ग्रेजुएट ही हैं। हमारी आठ हजार की बस्ती में यह हाल है तो पूरी स्टेट को अवस्था का अनुमान श्राप अखिरी चट्टान तक लगा सकते हैं । त्रिबेन्द्रम् में बसों के प्रायः सभी कण्डक्टर ग्रेजुएट हैं। वह काम भी उन्हें आसानी से नहीं मिलता। कहने को तो कहा जाता है कि ट्रावनकोर कोचिन में शिक्षा का बहुत प्रसार है, पर इस शिक्षा का उपयोग क्या हो रहा है ? कोई छोटा मोटा उद्योग भी चलाना चाहें उसके लिए पैसा हम लोगों के पास नहीं होता । बस नौकरी के लिए धजियां भेजते रहते हैं, दिन भर इधर उधर घूमते रहते हैं या बैठकर आपस में बहस किया करते हैं। कभी कभी थाड़ा बहुत सोशल वर्क कर लेते हैं। परन्तु इससे हमारी समस्या तो नहीं हल होती। हम लगदर राजनीतिक काम भी नहीं कर सकते, क्योंकि कई मेरे जैसे नवयुवकों की परिस्थितियां ऐसी हैं कि पूरा पूरा परिवार उन पर निर्भर करता है। मैं यहां पर फोटो एल्बम बेचता हूँ। ये लोग भी ऐसे ही छोटे मोटे काम कर लेते हैं। बस इसी तरह चल रहा है। और क्या किया जा सकता है ? " सबेरे सूर्योदय के समय हम श्राठ व्यक्ति उस चट्टान पर बैठे थे, जिस पर जाकर स्वामी विवेकानन्द ने समाधि लगाई थी । यह चट्टान खट से सौ सवा सौ गज श्रागे, समुद्र के उस भाग में है, जहाँ बंगाल की खाड़ी की भौगोलिक सीमा समाप्त हो जाती है। हम में से तीन कन्या कुमारी के बेकार नवयुवक थे, जिसमें से एक जो मोजुएट था, मुझे वहां की बेकारी की समस्या के विषय में बतला रहा था । चार मल्लाह थे, जो एक छोटी सी मछुआ नाव में हमें किनारे से वहां तक लाये ये । यद्यपि अन्तर बहुत थोड़ा ही था, फिर भी नीचे की चट्टानों में बचाते हुए और ऊंची ऊंची लहरों के ऊपर से सँभलते हुए नाव को वहां तक ले थाना बड़ी कुशलता का काम था । अब उनमें से एक मल्लाह कुछ सीपियां इकट्ठी करके ले आया। ग्रेजुएट नवयुवक मुझे उनका गूदा निकालकर दिखाने लगा, जो वहां का एक खाद्य है। सूर्योदय होने वाला था । हम सब सीपियां तोड़ते हुए उदयदिशा की. ओर देखने लगे । |
रांचीः CM Hemant Soren (मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन) मंगलवार को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा (Bhagwan Birsa Munda) की जयंती पर कोकर (Kokar) स्थित भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल (Grave Site) पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
इसके बाद बिरसा चौक रांची (Birsa Chowk Ranchi) स्थित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। फिर मुख्यमंत्री खूंटी (Khunti) स्थित उलिहातू (Ulihatu) के कार्यक्रम कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।
वहां से मुख्यमंत्री दोपहर में मोरहाबादी मैदान रांची (Morabadi Ground Ranchi) में आयोजित झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे।
झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेश बैस (Governor Ramesh Bais) होंगे।
शाम पांच बजे मुख्यमंत्री झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
| रांचीः CM Hemant Soren मंगलवार को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद बिरसा चौक रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। फिर मुख्यमंत्री खूंटी स्थित उलिहातू के कार्यक्रम कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। वहां से मुख्यमंत्री दोपहर में मोरहाबादी मैदान रांची में आयोजित झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेश बैस होंगे। शाम पांच बजे मुख्यमंत्री झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। |
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 20 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया।
यह आर्टिकल ८,०४१ बार देखा गया है।
आप जिस लड़की को पसंद करते हैं, उससे दूर रहना शायद आपके लिए सबसे मुश्किल काम हो सकता है। तो आप कैसे इस बात पर भरोसा कर सकते हैं कि आपके जाने के बाद वो लड़की भी आपको याद करती है? आपको केवल उसके मन में आपको फिर से और जल्दी देखने की चाह जगाना है, उसके लिए आपके साथ में वक़्त बिताना मजेदार बनाना है और साथ ही उससे दूर रहने पर भी उसके मन में आपके लिए मौजूद प्यार की याद दिलाने के लिए भी कुछ कदम उठाना है। अगर आप सच में कोशिश करते हैं, तो "मेरे दिमाग से निकल गया, मैं भूल गई," जैसी बातें आपके लिए गायब ही हो जाएँगी।
उसके मन में आपको और पाने की चाह जगाना (Leaving Her Wanting More)
- आप जब उससे मिलें, तब अपना पूरा दिन उसके साथ में मत बिताएँ, बल्कि कुछ ही घंटे के बाद किसी और काम के लिए निकल जाएँ, ताकि वो आपके साथ में बहुत ज्यादा कम्फ़र्टेबल होने की बजाय, आपके साथ में बिताए हुए पलों को याद करे।
- ये शुरू-शुरू में आपको थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन कुछ बड़ा पाने के लिए ऐसा करना भी जरूरी होता है।
2फोन पर होने वाली बातचीत को सीमित रखेंः अगर आप और आपकी पसंद की लड़की फोन पर बातें किया करते हैं, तो अपने बीच में होने वाली बातों को छोटा ही रखें, ताकि उसे ऐसा न लगे कि आपके पास में सारा समय बस उसी से बातें करने के अलावा और कोई काम नहीं है। आप चाहें तो प्लान्स बनाने के लिए या फिर वो कैसी है, ये जानने के लिए उससे सिर्फ कुछ मिनट के लिए बातें कर सकते हैं, लेकिन आपको बातचीत को बहुत ज्यादा भी लंबा नहीं खींचना है, जिससे आपके बीच में कहने लायक बातें ही खत्म हो जाएँ। उसके इन्ट्रस्ट को बनाए रखने के लिए, आपको उसे ऐसा महसूस कराना है जैसे वो आप से कभी-भी कितनी ही बातें कर सकती है।
- फोन पर ही, आपके मन में चलने वाली हर एक बात या आपकी ज़िंदगी में चल रही हर एक चीज के बारे में उसे मत बताएँ। कुछ बातों को उसके साथ सामने बैठकर करने के लिए भी बचाकर रखें।
- समय का ख्याल रखें। अगर आप उससे सिर्फ कुछ मिनट ही फोन पर बातें करते हैं। तो सुनिश्चित करें कि आप अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं और उसे खुश कर रहे हैं, उसे हँसाएँ और उसे स्पेशल फील कराएँ। कोई गेम खेलते हुए उससे बात मत करें; उसे ऐसा महसूस कराएँ कि आपको उसकी बातों की अहमियत है।
3सारी बातों को सिर्फ उसी को बताने के लिए मत छोड़ देंः लड़की को आपकी याद दिलाने के लिए, आपको उसे ऐसा नहीं महसूस कराना है कि आप बस उसी के और उसके कॉल के ही ऊपर निर्भर हैं। अगर वो आपको मैसेज करती है और आप बिजी हैं, तो उसे फौरन एक बड़ा सा जवाब देने के लिए कुछ भी कर गुजरने को मत खड़े हो जाएँ, बशर्ते उसे इसकी बहुत जरूरत न हो। इसकी बजाय, उसे जवाब देने के पहले कुछ घंटे का इंतज़ार करें। ठीक ऐसा ही फोन के साथ भी होता है; अगर वो आपको कॉल करे, तो हमेशा कैसे भी उसके फोन को उठाने या पहली ही रिंग में फोन लेने के लिए मजबूर मत महसूस करें।
- अगर उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कि वो कभी भी आप तक पहुँच सकती है, तो उसके आपको याद करने की उम्मीद कम हो जाएगी। अगर उसे आपका थोड़ा सा समय निकालना थोड़ा मुश्किल लगता है, तो वो इसे और ज्यादा अहमियत देगी।
- बेशक, अगर वो उदास नजर आती है और आप से फौरन बात करना चाहती है, तो फिर आपको उसके साथ रहने की पूरी कोशिश करना चाहिए। लेकिन अगर वो सिर्फ आपके बारे में जानने के लिए बार-बार कॉल या मैसेज कर रही है, तो आपको फौरन उसका जवाब देने के लिए मजबूर जैसा नहीं महसूस करना चाहिए।
4अपनी खुद की रुचियों को भी पूरा करना मत भूलेंः आपको जो भी चीजें करना अच्छा लगता है, उन्हें सिर्फ उसी लड़की के साथ करने के लिए मत छोड़ दें। अगर आप चाहते हैं कि वो आपके आसपास न होने पर आपको याद करे, तो फिर आपको वो सारी चीजें करना जारी रखना होगा, जो आपको अच्छी लगती हैं। अपनी सॉकर प्रैक्टिस जारी रखें, अपनी नॉवेल के ऊपर काम करते रहें या फिर जापानी भाषा सीखना जारी रखें। उसे पट चलने दें कि आप क्या कर रहे हैं, ताकि वो आपको एक ऐसा इन्ट्रस्टिंग, डाइनैमिक इंसान समझे, जो खुद की ज़िंदगी को लेकर एक्साइटेड है और जिसके पास में उसके रोमांटिक इन्ट्रस्ट के अलावा भी करने के लायक और भी बहुत कुछ है।
- अगर उस लड़की को मालूम होगा कि आपके पास में करने के लिए बहुत कुछ है, तो वो समझ जाएगी कि आपका वक़्त कितना कीमती है और वो आपके साथ में बिताए पलों को और भी ज्यादा याद करने लग जाएगी।
- अगर उसे मालूम होगा कि आपके पास में ऐसे कई फ्रेंड्स हैं, जिनके बारे में आप सोचा करते हैं, तो वो देख सकेगी कि आपके आसपास ऐसे कई सारे लोग हैं, जो आपके साथ में वक़्त बिताना चाहते हैं। अगर उसे ऐसा लगेगा कि आप बस उसके कॉल के इंतज़ार में बैठे हैं, क्योंकि आपके पास में बात करने के लिए और कोई भी नहीं है, तो फिर वो आपको शायद ही याद कर पाएगी।
- उससे और अपने फ्रेंड्स से मिलने के बीच में एक अच्छा बैलेंस बनाने की कोशिश करें। आपको उनके साथ में इतना ज्यादा भी वक़्त नहीं बिताना है कि उसकी वजह से आप उस लड़की के लिए वक़्त ही न निकाल पाएँ और आप में उसका इन्ट्रस्ट ही खो बैठें, लेकिन आपको उन्हें इतना कम भी नहीं मिलना शुरू करना है कि उसे ऐसा लगने लगे जैसे कि आपकी ज़िंदगी में उसके अलावा और कुछ नहीं है।
- आप उसे कोम्प्लीमेंट दे सकते हैं और आपको उसके बारे में जो भी पसंद है उसके बारे में बता सकते हैं, लेकिन आपको उसे आपके मन में उसके बारे में जो भी है, वो सब नहीं बता देना चाहिए, नहीं तो वो आपको अजीब परिस्थिति में डाल सकती है।
- आपको उसे आपके प्लान्स के बारे में अनुमान लगाते रहने देने चाहिए। अगर आपको आपके भाई के बास्केटबॉल गेम के लिए जल्दी निकलना है, तो इसके लिए जरूरी नहीं कि उए आपके हर एक प्लान के बारे में हर एक बात मालूम ही रहना चाहिए।
उसके मन पर छाए रहना (Staying on Her Mind)
1जब आप एक-दूसरे से दूर हों, तब उसके बारे में पता करते रहेंः अगर आप चाहते हैं कि आपके करीब न होने पर, वो आपको याद करे, तो आपको वक़्त-वक़्त पर उसे आपके बारे में याद दिलाते जाना होगा। हाय (hi) कहने या वो क्या कर रही है, पूछने के लिए उसे मैसेज भेज दें या फिर आप क्या करने जा रहे हैं, इसके बारे में बताने के लिए उसे एक कॉल करें। आप चाहें तो ऑफिस से उसे एक ईमेल भी कर सकते हैं या फिर जब आप वीकेंड पर आपके फ्रेंड्स के साथ में बाहर हों, तब उसे जल्दी से एक मैसेज कर दें। बस सुनिश्चित कर लें कि आप उससे इतनी बातें करते हैं, कि वो आपके बारे में भूल ही न जाए, लेकिन साथ ही वो आपको लेकर परेशान जैसा भी न महसूस करने लग जाए।
- अगर आप उससे दूर हैं, तो सुनिश्चित कर लें कि आप वो इंसान नहीं हैं, जो पहले उससे बात कर रहा है। आप उसे समय-समय पर कॉल या टेक्स्ट कर सकते हैं, लेकिन आपको उसे नजरअंदाज भी नहीं करना है और ऐसा भी नहीं सोचना है, कि आप उसे हमेशा कॉल कर सकते हैं।
- अगर आपको मालूम है, कि उसका कोई जरूरी काम आने वाला है, जैसे कि कोई जॉब इंटरव्यू या वॉलीबॉल गेम, तो उसके बारे में उससे बात करें और उसे बेस्ट लक विश कर दें। अगर ये अभी हुआ है, तो उससे इसके बारे में पूछें। ये उसे ऐसा जताएगा, कि आपको उसकी परवाह है और आप उसके ऊपर ध्यान दे रहे हैं, फिर चाहे आप उसके करीब हों या न हों।
2रात में उसके ख़यालों में रहने वाले आखिरी इंसान बनेंः जब वो रात को सोने के लिए बेड पर जा रही हो, उस वक़्त उसकी यादों में ताजा रहना, किसी लड़की को अपनी याद दिलाने का सबसे अच्छा तरीका होता है। आप उसे एक प्यारा सा मैसेज भेज सकते हैं या फिर एक फोन कॉल कर सकते हैं, ताकि आप उससे शाम को बात कर सकें, और जब वो रात में सोने जा रही हो, तब वो आपके बारे में सोचे और शायद आपके बारे में सपने भी देखे। हो सकता है कि वो सुबह जब उठे तब उसके मन में आपके साथ में हुई बातें ताजा रहें-और इसके चलते वो आपको और ज्यादा याद करने लगे।
- उसके सोने जाने की तैयारी करते वक़्त उससे बात करना, उसके ध्यान को आपकी तरफ खींचने की संभावना को और बढ़ा देगा। वो अपना मन खाली कर रही होगी और उसके मन में चलने वाली कई सारी बातों के बारे में सोचे बिना, इस वक़्त आपकी तरफ ज्यादा अच्छी तरह से ध्यान दे सकेगी।
- बेशक, आपको इस बात की पुष्टि भी करना होगी, कि रात में उसके साथ में फोन पर बात करना उसके लिए सही होगा या नहीं - आप भी उसे उसके पैरेंट्स के साथ मुश्किल में नहीं डालना चाहेंगे।
3उसे ऐसा कुछ दें, जो उसे आपके बारे में याद दिलाएः किसी भी लड़की को आपकी याद दिलाने का एक और सबसे अच्छा तरीका ये भी होता है, कि आप उसे कुछ ऐसा दे दें, जिससे उसे ऐसा लगे कि आप उससे दूर नहीं हैं। ये उसके बर्थडे में दिया हुआ एक नेकलेस, उसके लिए लिखा कोई एक लैटर, एक स्वेटशर्ट, जिसमें आपकी महक आती हो, जो उसने आप से मांगी हो या फिर एक बुक या सीडी, जो आपको लगती है, कि उसे पसंद आएगी, ऐसा कुछ भी हो सकता है। इस तरह की चीजें उसकी ज़िंदगी में आपकी अहमियत को बढ़ाने में मदद करेंगी और आप से दूर होने पर उसके आपको और ज्यादा याद करने की संभावना बढ़ जाएगी।
- आप चाहें तो आपकी किसी डेट पर उसे कुछ यादगार दे सकते हैं, किसी कार्निवाल में स्टफ़्ड एनिमल जीत सकते हैं या फिर किसी ट्रिप पर एक-साथ जाने पर उसे ऐसा कुछ खरीदकर दे सकते हैं, जो उसे आपकी याद दिलाए।
- आपको इस आइटम को कुछ बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर भी नहीं देना है। अगर कुछ जरूरी है, तो वो ये कि इससे उसे उस चीज पर लगे प्राइज़ टैग की वजह से नहीं, बल्कि उस चीज की वजह से आपकी याद आना चाहिए।
4उसके लिए स्वीट नोट लिखेंः आप किसी लड़की को कितना पसंद करते हैं, इसके बारे में उसे एक स्वीट और सच्चा नोट लिखकर देना भी उसे आपकी याद दिलाने का एक और दूसरा अच्छा तरीका हो है। इसे बहुत बड़ा या बहुत लंबा नहीं होना चाहिए, लेकिन इतना होना चाहिए, कि उसे इस बात का अहसास हो जाए, कि आप उसकी कितनी फिक्र करते हैं। आप इसे आपकी किसी डेट पर उसे दे सकते हैं या फिर अगर आप अलग हैं, तो उसे मेल भी कर सकते हैं। वो उस नोट को अपने पास रखेगी और आपको याद करने के लिए उसे बार-बार पढ़ेगी भी। आपको उसकी कितनी परवाह है, इसके बारे में कुछ सबूत देना, उसे आपकी और भी ज्यादा याद दिला सकता है।
- आपको सिर्फ उसे आपकी याद दिलाने के लिए नोट नहीं लिखना है; आप जो भी लिखें, उसके एकदम पूरे सही और आपके दिल से निकले होने की पुष्टि कर लें। अगर आप बहुत सोच-समझकर लिखेंगे, तो वो उसे समझ जाएगी।
5उसकी ज़िंदगी में दिलचस्पी दिखाने के लिए उससे सवाल पूछेंः अगर आप किसी लड़की को आपकी और ज्यादा याद और आपकी ज्यादा परवाह करते हुए पाना चाहते हैं, तो आप उससे उसके बारे में सवाल पूछ सकते हैं, फिर चाहे आप ऐसा उसके सामने से, फोन पर या फिर लैटर के जरिए कर रहे हैं। बस आपको उसकी परवाह है, ये दिखाने के लिए आपको उसके एकदम पीछे नहीं लग जाना है या उससे बहुत सारे सवाल नहीं करना है। अगर आप उसके सामने हैं, तो आप उससे उसके परिवार, उसके पैट्स, उसके वीकेंड प्लान्स, उसके फ्रेंड्स या उसकी हॉबीज के बारे में पूछ सकते हैं। अगर आप उसे मैसेज कर रहे हैं, तो आप उसकी ज़िंदगी के किसी खास पल के बारे में पूछ सकते हैं या फिर उससे सिर्फ उसके गुजरे हुए दिन के बारे में पूछ सकते हैं।
- सच्चाई तो ये है, कि अगर आप किसी लड़की की पसंद बनना चाहते हैं, तो आपको ऐसा दिखाना होगा, कि आप उसमें इन्ट्रस्टेड हैं। ये उसके आसपास मौजूद सबसे कूल या सबसे आकर्षक लड़का होने से कहीं ज्यादा जरूरी होता है; लड़कियां अक्सर ऐसे लड़कों को पसंद करती हैं, जो उनके बारे में परवाह करते हैं। अगर उस लड़की को ऐसा महसूस होगा कि आपको उसकी फिक्र है, तो वो आपके जाने के बाद आपको और भी ज्यादा याद करेगी।
- सुनिश्चित करें, कि आपको आपके जवाब याद रहते हैं। अगर उस लड़की को ऐसा महसूस होता है कि उसे बार-बार आपके सामने बातें दोहराना पड़ती हैं, तो उसे ऐसा लगेगा कि आपको उसकी कोई परवाह नहीं है।
6आप जब साथ में हों, तब उसके साथ में अच्छा बर्ताव करेंः आप जब भी आपकी पसंद की लड़की के साथ में हों, तब जरूरी नहीं, कि आप मिस्टर कूल ही बनकर रहें। अगर आप आपके जाने के बाद उसे आपकी याद दिलाना चाहते हैं, तो फिर उसके साथ में होने के दौरान आपको उसके ऊपर अपना अच्छा इम्प्रेसन डालने की पूरी कोशिश करना होगी। बहुत ज्यादा भी मेहनत किए बिना, उसे मोहित करने, उसे हँसाने, स्पेशल महसूस कराने और आमतौर पर ये अहसास दिलाने की कोशिश करें, कि आपको उसकी परवाह है। आपको उसके मन में आपके एक अच्छे, स्मार्ट, इन्ट्रस्टिंग इंसान होने की याद दिलाना है, इसलिए आपको आपका ज़्यादातर वक़्त एक-साथ बिताना है, खासतौर पर जब आपके पास में इसकी कमी हो।
- उसे हँसाएँ। हर वक़्त बस रोमांटिक बनने की चिंता मत करते रहें; रिलैक्स करें और उसके साथ में रहते हुए थोड़े मज़ाकिया भी बन जाएँ और इसके लिए वो आपको और भी ज्यादा पसंद करेगी।
- उसे बोलने दें। बातचीत के दौरान आपके द्वारा आधे से ज्यादा वक़्त तक सिर्फ आप ही के न बोलने की पुष्टि कर लें। बहुत ज्यादा बोलकर आपको उसे ऐसा नहीं महसूस कराना है, जैसे कि आप उसे लैक्चर दे रहे हैं या फिर अपनी चतुराई दिखा रहे हैं।
7अपने कन्वर्जेशन को अच्छे नोट पर छोड़ेंः जब आप आपकी पसंद की किसी लड़की के साथ में वक़्त बिताते हैं, तब आपको ये सुनिश्चित करना है कि आप बातों को बहुत ज्यादा लंबे समय तक न ठहराए रखें। इसकी बजाय, जब तक कि आप दोनों के बीच में अच्छी बातचीत न होने लगें, तब तक का इंतज़ार करें और फिर उसे कहें कि आपको जाना होगा; इसलिए अभी आप और देर तक उसके पास नहीं रुक सकेंगे, इस तरफ से उसकी फीलिंग्स भी हर्ट नहीं होंगी। जब बातचीत अच्छी जा रही होगी, तब वो आपके बारे में और ज्यादा सोच रही होगी, इस तरह से आप उसे आपके जाने के बाद एक पॉज़िटिव इम्प्रेसन के साथ में छोड़ेंगे।
- अगर आप दोनों इतनी देर तक एक-दूसरे के साथ में बातें करते रहेंगे, कि आपके पास में फिर बात करने के लायक कुछ रह ही न जाए, तो वो लड़की आपको शायद एक मजेदार इंसान की तरह याद नहीं कर पाएगी। इसकी बाय, उस वक़्त छोड़ें, जब आप दोनों के पास में कई बातें बची हों, इससे वो अगली बार आपके साथ में बात करने के लिए और भी एक्साइटेड महसूस करेगी।
इसे बहुत ज्यादा भी आगे तक नहीं बढ़ाना (Not Taking it Too Far)
1उसे जैलस (jealous) करने के लिए बहुत ज्यादा कोशिश मत करेंः हालांकि ऐसी कई सारी ट्रिक्स मौजूद हैं, जिनसे आप आपकी पसंद की लड़की को आपकी याद दिला सकते हैं, लेकिन आपको उसे इतना भी ज्यादा जैलस करने की कोशिश नहीं करना चाहिए, जिससे उसे ऐसा लगना शुरू हो जाए कि क्योंकि आप एक प्लेयर हैं या वो आपके प्यार के लिए किसी से लड़ना नहीं चाहती है, इसलिए उसे आपके साथ में नहीं रहना चाहिए। हालांकि आपको उसे आपके हर एक पल की खबर तो नहीं देना है, लेकिन अगर आप नहीं चाहते, कि वो आपकी हरकत से चिढ़ जाए, तो दूसरी लड़कियों के साथ में बहुत ज्यादा भी बातें मत करें या फिर आपके सामने आने वाली हर एक लड़की के साथ में खुलकर फ़्लर्ट न करें।
- हालांकि दूसरी लड़कियों के साथ में की हुई थोड़ी सी फ़्लर्टिंग से उस लड़की ये समझ आ सकता है कि आप उसके लिए एक सही पसंद हैं, लेकिन आपको इसे इतना भी ज्यादा नहीं बढ़ाना है कि उसे ऐसा लगना शुरू हो जाए, कि आपको उसकी कोई परवाह ही नहीं।
- अगर आप से दूर होने पर वो ऐसा सोचेगी कि आप दूसरी लड़कियों के साथ में घूम रहे होंगे, तो ऐसे में शायद उसके आपको याद करने की बहुत ज्यादा संभावना नहीं होगी।
- अगर आप उसे बाहर कहीं देखें, तो आपको खुद को थोड़ा कॉन्फ़िडेंस देना चाहिए और उसके पास जाने से पहले आपको एक या दो मिनट लेना चाहिए। अगर आप ऐसा दिखाएंगे, जैसे कि आपने उसे देखा ही नहीं या वो आपके हिसाब से कूल नहीं है, तो फिर वो उन लोगों से जैलस नहीं होगी, जिनसे आप बात कर रहे हैं; वो बस इतना सोचेगी कि आप अच्छे इंसान नहीं हैं।
2उसका दिल जीतने के लिए किसी और की तरह बनने की कोशिश मत करेंः ये सुनने में जितना कड़वा लग रहा है, असल में भी उतना ही कड़वा है, आखिर में, अगर आप सच में उस लड़की का दिला जीतना चाहते हैं, तो आपके लिए आप जैसे हैं, वैसे ही बने रहना बहुत जरूरी होता है। आपको जबर्दस्ती में कुछ ज्यादा करने की कोई जरूरत नहीं है या न ही उस तरह का लड़का बनने की कोई जरूरत है, जिसे आपके हिसाब से उसे पसंद करना चाहिए; इसकी बजाय, उसे आपके अंदर मौजूद आपके सबसे अच्छे गुणों को देखने दें और आपके बारे में कुछ अजीब चीजें बताने तक खुलने में थोड़ा वक़्त लें। हालांकि, आपको उसके सामने हमेशा उसी तरह से भी एक्ट नहीं करना है, जैसा आप आपके फ्रेंड्स के साथ में किया करते हैं, और आपको कुछ दिखावा भी नहीं करना है, नहीं तो आखिर में उसे इसके बारे में समझ आ ही जाएगा।
- अगर आप सच में किसी लड़की को पसंद करते हैं और चाहते हैं कि वो आपको याद करे, तो आपको ये पक्का करना होगा कि वो किसी बनावटी इंसान को नहीं, बल्कि आपके सच्चे, असली रूप को याद करती है।
- हालांकि आपके लिए उसके सामने खुलने में और आपके असली रूप को दीखाने में कुछ वक़्त जरूर लग सकता है, उसे जानने की कोशिश के दौरान, आपको जितना हो सके, उतना ज्यादा सच्चा इंसान बनकर रहने की कोशिश करना है।
3बहुत ज्यादा गेम्स न खेलेंः बेशक, अपने फोन टाइम को लिमिट करना या एक-दूसरे के साथ में बिताए जाने वाले वक़्त को लिमिट करना और उसके लिए आपको पाना जरा सा कठिन बना देना, उस लड़की की आप में दिलचस्पी बनाए रखने में और उसके आपको याद करने की संभावना को बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर आप इसकी अति कर देते हैं, तो ऐसा करके आप सिर्फ उस लड़की को कनफ्यूज ही कर रहे हैं - और शायद इस प्रोसेस में आप खुद को भी कनफ्यूज कर रहे हैं। अगर उसे ऐसा लगेगा, जैसे आपका पूरा रिश्ता सिर्फ माइंड गेम्स के ऊपर ही खड़ा है और उसे तो पता ही नहीं, कि आप असल में हैं कौन, तो उसका जो धैर्य है, वो धीरे-धीरे अपना जवाब दे ही देगा।
- अगर आप एक मिनट तो अच्छे रहते और प्यार को महसूस करते हैं, लेकिन अगले ही मिनट आप ठंडे और एक-दूसरे से दूरी महसूस करते हैं, तो वो बड़ी आसानी से फ्रस्ट्रेट हो जाएगी। हालांकि, अगर उसे ऐसा लगेगा कि उसे समझ ही नहीं आता कि आखिर आपके मन में क्या चल रहा है, तो वो भी आपको लेकर हताश होना शुरू कर देगी और शायद आप से दूर भी हो जाएगी।
4आप उसके बारे में जो भी महसूस करते हैं, उसे उसके बारे में बताने से घबराएँ नहींः भले हिए उसके मन में आपको और पाने की चाह जगाना और आपकी यादों को लाना जरूरी है, लेकिन आपको इसे खींचकर इतने भी दूर नहीं ले जाना है, कि उसे ऐसा लगना शुरू हो जाए, कि उसे तो आपके मन की बात मालूम ही नहीं। भले ही आप थोड़े शर्मीले टाइप के ही क्यों हों, लेकिन फिर भी आपको उसे बता देना चाहिए कि आप उसे पसंद करते हैं और आप उसके साथ में और ज्यादा वक़्त बिताना चाहते हैं। सारा काम उसे ही न करने दें, नहीं तो उसे लगेगा कि आपको उसकी कोई परवाह ही नहीं, इसलिए वो आप से थक जाएगी।
- आपको भी उसे पाने की कोशिश में अपनी आधी हिस्सेदारी निभाना होगी। अगर आप उसे आपका पीछा करने के लिए मजबूर करेंगे, तो शायद वो किसी ऐसे लड़के के पास चली जाएगी, जो उसकी फीलिंग्स को आप से तो ज्यादा ओपन हो।
- इसमें शायद कुछ वक़्त जरूर लग सकता है, लेकिन इसका फल आपको जरूर मिलेगा।
- हर एक लड़की की पसंद और नापसंद अलग होती है, इसलिए ऊपर बताए हुए किसी भी स्टेप का इस्तेमाल करने से पहले, उस लड़की के बारे में अच्छी तरह से जानकारी जुटा लें।
| विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, बीस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल आठ,इकतालीस बार देखा गया है। आप जिस लड़की को पसंद करते हैं, उससे दूर रहना शायद आपके लिए सबसे मुश्किल काम हो सकता है। तो आप कैसे इस बात पर भरोसा कर सकते हैं कि आपके जाने के बाद वो लड़की भी आपको याद करती है? आपको केवल उसके मन में आपको फिर से और जल्दी देखने की चाह जगाना है, उसके लिए आपके साथ में वक़्त बिताना मजेदार बनाना है और साथ ही उससे दूर रहने पर भी उसके मन में आपके लिए मौजूद प्यार की याद दिलाने के लिए भी कुछ कदम उठाना है। अगर आप सच में कोशिश करते हैं, तो "मेरे दिमाग से निकल गया, मैं भूल गई," जैसी बातें आपके लिए गायब ही हो जाएँगी। उसके मन में आपको और पाने की चाह जगाना - आप जब उससे मिलें, तब अपना पूरा दिन उसके साथ में मत बिताएँ, बल्कि कुछ ही घंटे के बाद किसी और काम के लिए निकल जाएँ, ताकि वो आपके साथ में बहुत ज्यादा कम्फ़र्टेबल होने की बजाय, आपके साथ में बिताए हुए पलों को याद करे। - ये शुरू-शुरू में आपको थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन कुछ बड़ा पाने के लिए ऐसा करना भी जरूरी होता है। दोफोन पर होने वाली बातचीत को सीमित रखेंः अगर आप और आपकी पसंद की लड़की फोन पर बातें किया करते हैं, तो अपने बीच में होने वाली बातों को छोटा ही रखें, ताकि उसे ऐसा न लगे कि आपके पास में सारा समय बस उसी से बातें करने के अलावा और कोई काम नहीं है। आप चाहें तो प्लान्स बनाने के लिए या फिर वो कैसी है, ये जानने के लिए उससे सिर्फ कुछ मिनट के लिए बातें कर सकते हैं, लेकिन आपको बातचीत को बहुत ज्यादा भी लंबा नहीं खींचना है, जिससे आपके बीच में कहने लायक बातें ही खत्म हो जाएँ। उसके इन्ट्रस्ट को बनाए रखने के लिए, आपको उसे ऐसा महसूस कराना है जैसे वो आप से कभी-भी कितनी ही बातें कर सकती है। - फोन पर ही, आपके मन में चलने वाली हर एक बात या आपकी ज़िंदगी में चल रही हर एक चीज के बारे में उसे मत बताएँ। कुछ बातों को उसके साथ सामने बैठकर करने के लिए भी बचाकर रखें। - समय का ख्याल रखें। अगर आप उससे सिर्फ कुछ मिनट ही फोन पर बातें करते हैं। तो सुनिश्चित करें कि आप अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं और उसे खुश कर रहे हैं, उसे हँसाएँ और उसे स्पेशल फील कराएँ। कोई गेम खेलते हुए उससे बात मत करें; उसे ऐसा महसूस कराएँ कि आपको उसकी बातों की अहमियत है। तीनसारी बातों को सिर्फ उसी को बताने के लिए मत छोड़ देंः लड़की को आपकी याद दिलाने के लिए, आपको उसे ऐसा नहीं महसूस कराना है कि आप बस उसी के और उसके कॉल के ही ऊपर निर्भर हैं। अगर वो आपको मैसेज करती है और आप बिजी हैं, तो उसे फौरन एक बड़ा सा जवाब देने के लिए कुछ भी कर गुजरने को मत खड़े हो जाएँ, बशर्ते उसे इसकी बहुत जरूरत न हो। इसकी बजाय, उसे जवाब देने के पहले कुछ घंटे का इंतज़ार करें। ठीक ऐसा ही फोन के साथ भी होता है; अगर वो आपको कॉल करे, तो हमेशा कैसे भी उसके फोन को उठाने या पहली ही रिंग में फोन लेने के लिए मजबूर मत महसूस करें। - अगर उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कि वो कभी भी आप तक पहुँच सकती है, तो उसके आपको याद करने की उम्मीद कम हो जाएगी। अगर उसे आपका थोड़ा सा समय निकालना थोड़ा मुश्किल लगता है, तो वो इसे और ज्यादा अहमियत देगी। - बेशक, अगर वो उदास नजर आती है और आप से फौरन बात करना चाहती है, तो फिर आपको उसके साथ रहने की पूरी कोशिश करना चाहिए। लेकिन अगर वो सिर्फ आपके बारे में जानने के लिए बार-बार कॉल या मैसेज कर रही है, तो आपको फौरन उसका जवाब देने के लिए मजबूर जैसा नहीं महसूस करना चाहिए। चारअपनी खुद की रुचियों को भी पूरा करना मत भूलेंः आपको जो भी चीजें करना अच्छा लगता है, उन्हें सिर्फ उसी लड़की के साथ करने के लिए मत छोड़ दें। अगर आप चाहते हैं कि वो आपके आसपास न होने पर आपको याद करे, तो फिर आपको वो सारी चीजें करना जारी रखना होगा, जो आपको अच्छी लगती हैं। अपनी सॉकर प्रैक्टिस जारी रखें, अपनी नॉवेल के ऊपर काम करते रहें या फिर जापानी भाषा सीखना जारी रखें। उसे पट चलने दें कि आप क्या कर रहे हैं, ताकि वो आपको एक ऐसा इन्ट्रस्टिंग, डाइनैमिक इंसान समझे, जो खुद की ज़िंदगी को लेकर एक्साइटेड है और जिसके पास में उसके रोमांटिक इन्ट्रस्ट के अलावा भी करने के लायक और भी बहुत कुछ है। - अगर उस लड़की को मालूम होगा कि आपके पास में करने के लिए बहुत कुछ है, तो वो समझ जाएगी कि आपका वक़्त कितना कीमती है और वो आपके साथ में बिताए पलों को और भी ज्यादा याद करने लग जाएगी। - अगर उसे मालूम होगा कि आपके पास में ऐसे कई फ्रेंड्स हैं, जिनके बारे में आप सोचा करते हैं, तो वो देख सकेगी कि आपके आसपास ऐसे कई सारे लोग हैं, जो आपके साथ में वक़्त बिताना चाहते हैं। अगर उसे ऐसा लगेगा कि आप बस उसके कॉल के इंतज़ार में बैठे हैं, क्योंकि आपके पास में बात करने के लिए और कोई भी नहीं है, तो फिर वो आपको शायद ही याद कर पाएगी। - उससे और अपने फ्रेंड्स से मिलने के बीच में एक अच्छा बैलेंस बनाने की कोशिश करें। आपको उनके साथ में इतना ज्यादा भी वक़्त नहीं बिताना है कि उसकी वजह से आप उस लड़की के लिए वक़्त ही न निकाल पाएँ और आप में उसका इन्ट्रस्ट ही खो बैठें, लेकिन आपको उन्हें इतना कम भी नहीं मिलना शुरू करना है कि उसे ऐसा लगने लगे जैसे कि आपकी ज़िंदगी में उसके अलावा और कुछ नहीं है। - आप उसे कोम्प्लीमेंट दे सकते हैं और आपको उसके बारे में जो भी पसंद है उसके बारे में बता सकते हैं, लेकिन आपको उसे आपके मन में उसके बारे में जो भी है, वो सब नहीं बता देना चाहिए, नहीं तो वो आपको अजीब परिस्थिति में डाल सकती है। - आपको उसे आपके प्लान्स के बारे में अनुमान लगाते रहने देने चाहिए। अगर आपको आपके भाई के बास्केटबॉल गेम के लिए जल्दी निकलना है, तो इसके लिए जरूरी नहीं कि उए आपके हर एक प्लान के बारे में हर एक बात मालूम ही रहना चाहिए। उसके मन पर छाए रहना एकजब आप एक-दूसरे से दूर हों, तब उसके बारे में पता करते रहेंः अगर आप चाहते हैं कि आपके करीब न होने पर, वो आपको याद करे, तो आपको वक़्त-वक़्त पर उसे आपके बारे में याद दिलाते जाना होगा। हाय कहने या वो क्या कर रही है, पूछने के लिए उसे मैसेज भेज दें या फिर आप क्या करने जा रहे हैं, इसके बारे में बताने के लिए उसे एक कॉल करें। आप चाहें तो ऑफिस से उसे एक ईमेल भी कर सकते हैं या फिर जब आप वीकेंड पर आपके फ्रेंड्स के साथ में बाहर हों, तब उसे जल्दी से एक मैसेज कर दें। बस सुनिश्चित कर लें कि आप उससे इतनी बातें करते हैं, कि वो आपके बारे में भूल ही न जाए, लेकिन साथ ही वो आपको लेकर परेशान जैसा भी न महसूस करने लग जाए। - अगर आप उससे दूर हैं, तो सुनिश्चित कर लें कि आप वो इंसान नहीं हैं, जो पहले उससे बात कर रहा है। आप उसे समय-समय पर कॉल या टेक्स्ट कर सकते हैं, लेकिन आपको उसे नजरअंदाज भी नहीं करना है और ऐसा भी नहीं सोचना है, कि आप उसे हमेशा कॉल कर सकते हैं। - अगर आपको मालूम है, कि उसका कोई जरूरी काम आने वाला है, जैसे कि कोई जॉब इंटरव्यू या वॉलीबॉल गेम, तो उसके बारे में उससे बात करें और उसे बेस्ट लक विश कर दें। अगर ये अभी हुआ है, तो उससे इसके बारे में पूछें। ये उसे ऐसा जताएगा, कि आपको उसकी परवाह है और आप उसके ऊपर ध्यान दे रहे हैं, फिर चाहे आप उसके करीब हों या न हों। दोरात में उसके ख़यालों में रहने वाले आखिरी इंसान बनेंः जब वो रात को सोने के लिए बेड पर जा रही हो, उस वक़्त उसकी यादों में ताजा रहना, किसी लड़की को अपनी याद दिलाने का सबसे अच्छा तरीका होता है। आप उसे एक प्यारा सा मैसेज भेज सकते हैं या फिर एक फोन कॉल कर सकते हैं, ताकि आप उससे शाम को बात कर सकें, और जब वो रात में सोने जा रही हो, तब वो आपके बारे में सोचे और शायद आपके बारे में सपने भी देखे। हो सकता है कि वो सुबह जब उठे तब उसके मन में आपके साथ में हुई बातें ताजा रहें-और इसके चलते वो आपको और ज्यादा याद करने लगे। - उसके सोने जाने की तैयारी करते वक़्त उससे बात करना, उसके ध्यान को आपकी तरफ खींचने की संभावना को और बढ़ा देगा। वो अपना मन खाली कर रही होगी और उसके मन में चलने वाली कई सारी बातों के बारे में सोचे बिना, इस वक़्त आपकी तरफ ज्यादा अच्छी तरह से ध्यान दे सकेगी। - बेशक, आपको इस बात की पुष्टि भी करना होगी, कि रात में उसके साथ में फोन पर बात करना उसके लिए सही होगा या नहीं - आप भी उसे उसके पैरेंट्स के साथ मुश्किल में नहीं डालना चाहेंगे। तीनउसे ऐसा कुछ दें, जो उसे आपके बारे में याद दिलाएः किसी भी लड़की को आपकी याद दिलाने का एक और सबसे अच्छा तरीका ये भी होता है, कि आप उसे कुछ ऐसा दे दें, जिससे उसे ऐसा लगे कि आप उससे दूर नहीं हैं। ये उसके बर्थडे में दिया हुआ एक नेकलेस, उसके लिए लिखा कोई एक लैटर, एक स्वेटशर्ट, जिसमें आपकी महक आती हो, जो उसने आप से मांगी हो या फिर एक बुक या सीडी, जो आपको लगती है, कि उसे पसंद आएगी, ऐसा कुछ भी हो सकता है। इस तरह की चीजें उसकी ज़िंदगी में आपकी अहमियत को बढ़ाने में मदद करेंगी और आप से दूर होने पर उसके आपको और ज्यादा याद करने की संभावना बढ़ जाएगी। - आप चाहें तो आपकी किसी डेट पर उसे कुछ यादगार दे सकते हैं, किसी कार्निवाल में स्टफ़्ड एनिमल जीत सकते हैं या फिर किसी ट्रिप पर एक-साथ जाने पर उसे ऐसा कुछ खरीदकर दे सकते हैं, जो उसे आपकी याद दिलाए। - आपको इस आइटम को कुछ बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर भी नहीं देना है। अगर कुछ जरूरी है, तो वो ये कि इससे उसे उस चीज पर लगे प्राइज़ टैग की वजह से नहीं, बल्कि उस चीज की वजह से आपकी याद आना चाहिए। चारउसके लिए स्वीट नोट लिखेंः आप किसी लड़की को कितना पसंद करते हैं, इसके बारे में उसे एक स्वीट और सच्चा नोट लिखकर देना भी उसे आपकी याद दिलाने का एक और दूसरा अच्छा तरीका हो है। इसे बहुत बड़ा या बहुत लंबा नहीं होना चाहिए, लेकिन इतना होना चाहिए, कि उसे इस बात का अहसास हो जाए, कि आप उसकी कितनी फिक्र करते हैं। आप इसे आपकी किसी डेट पर उसे दे सकते हैं या फिर अगर आप अलग हैं, तो उसे मेल भी कर सकते हैं। वो उस नोट को अपने पास रखेगी और आपको याद करने के लिए उसे बार-बार पढ़ेगी भी। आपको उसकी कितनी परवाह है, इसके बारे में कुछ सबूत देना, उसे आपकी और भी ज्यादा याद दिला सकता है। - आपको सिर्फ उसे आपकी याद दिलाने के लिए नोट नहीं लिखना है; आप जो भी लिखें, उसके एकदम पूरे सही और आपके दिल से निकले होने की पुष्टि कर लें। अगर आप बहुत सोच-समझकर लिखेंगे, तो वो उसे समझ जाएगी। पाँचउसकी ज़िंदगी में दिलचस्पी दिखाने के लिए उससे सवाल पूछेंः अगर आप किसी लड़की को आपकी और ज्यादा याद और आपकी ज्यादा परवाह करते हुए पाना चाहते हैं, तो आप उससे उसके बारे में सवाल पूछ सकते हैं, फिर चाहे आप ऐसा उसके सामने से, फोन पर या फिर लैटर के जरिए कर रहे हैं। बस आपको उसकी परवाह है, ये दिखाने के लिए आपको उसके एकदम पीछे नहीं लग जाना है या उससे बहुत सारे सवाल नहीं करना है। अगर आप उसके सामने हैं, तो आप उससे उसके परिवार, उसके पैट्स, उसके वीकेंड प्लान्स, उसके फ्रेंड्स या उसकी हॉबीज के बारे में पूछ सकते हैं। अगर आप उसे मैसेज कर रहे हैं, तो आप उसकी ज़िंदगी के किसी खास पल के बारे में पूछ सकते हैं या फिर उससे सिर्फ उसके गुजरे हुए दिन के बारे में पूछ सकते हैं। - सच्चाई तो ये है, कि अगर आप किसी लड़की की पसंद बनना चाहते हैं, तो आपको ऐसा दिखाना होगा, कि आप उसमें इन्ट्रस्टेड हैं। ये उसके आसपास मौजूद सबसे कूल या सबसे आकर्षक लड़का होने से कहीं ज्यादा जरूरी होता है; लड़कियां अक्सर ऐसे लड़कों को पसंद करती हैं, जो उनके बारे में परवाह करते हैं। अगर उस लड़की को ऐसा महसूस होगा कि आपको उसकी फिक्र है, तो वो आपके जाने के बाद आपको और भी ज्यादा याद करेगी। - सुनिश्चित करें, कि आपको आपके जवाब याद रहते हैं। अगर उस लड़की को ऐसा महसूस होता है कि उसे बार-बार आपके सामने बातें दोहराना पड़ती हैं, तो उसे ऐसा लगेगा कि आपको उसकी कोई परवाह नहीं है। छःआप जब साथ में हों, तब उसके साथ में अच्छा बर्ताव करेंः आप जब भी आपकी पसंद की लड़की के साथ में हों, तब जरूरी नहीं, कि आप मिस्टर कूल ही बनकर रहें। अगर आप आपके जाने के बाद उसे आपकी याद दिलाना चाहते हैं, तो फिर उसके साथ में होने के दौरान आपको उसके ऊपर अपना अच्छा इम्प्रेसन डालने की पूरी कोशिश करना होगी। बहुत ज्यादा भी मेहनत किए बिना, उसे मोहित करने, उसे हँसाने, स्पेशल महसूस कराने और आमतौर पर ये अहसास दिलाने की कोशिश करें, कि आपको उसकी परवाह है। आपको उसके मन में आपके एक अच्छे, स्मार्ट, इन्ट्रस्टिंग इंसान होने की याद दिलाना है, इसलिए आपको आपका ज़्यादातर वक़्त एक-साथ बिताना है, खासतौर पर जब आपके पास में इसकी कमी हो। - उसे हँसाएँ। हर वक़्त बस रोमांटिक बनने की चिंता मत करते रहें; रिलैक्स करें और उसके साथ में रहते हुए थोड़े मज़ाकिया भी बन जाएँ और इसके लिए वो आपको और भी ज्यादा पसंद करेगी। - उसे बोलने दें। बातचीत के दौरान आपके द्वारा आधे से ज्यादा वक़्त तक सिर्फ आप ही के न बोलने की पुष्टि कर लें। बहुत ज्यादा बोलकर आपको उसे ऐसा नहीं महसूस कराना है, जैसे कि आप उसे लैक्चर दे रहे हैं या फिर अपनी चतुराई दिखा रहे हैं। सातअपने कन्वर्जेशन को अच्छे नोट पर छोड़ेंः जब आप आपकी पसंद की किसी लड़की के साथ में वक़्त बिताते हैं, तब आपको ये सुनिश्चित करना है कि आप बातों को बहुत ज्यादा लंबे समय तक न ठहराए रखें। इसकी बजाय, जब तक कि आप दोनों के बीच में अच्छी बातचीत न होने लगें, तब तक का इंतज़ार करें और फिर उसे कहें कि आपको जाना होगा; इसलिए अभी आप और देर तक उसके पास नहीं रुक सकेंगे, इस तरफ से उसकी फीलिंग्स भी हर्ट नहीं होंगी। जब बातचीत अच्छी जा रही होगी, तब वो आपके बारे में और ज्यादा सोच रही होगी, इस तरह से आप उसे आपके जाने के बाद एक पॉज़िटिव इम्प्रेसन के साथ में छोड़ेंगे। - अगर आप दोनों इतनी देर तक एक-दूसरे के साथ में बातें करते रहेंगे, कि आपके पास में फिर बात करने के लायक कुछ रह ही न जाए, तो वो लड़की आपको शायद एक मजेदार इंसान की तरह याद नहीं कर पाएगी। इसकी बाय, उस वक़्त छोड़ें, जब आप दोनों के पास में कई बातें बची हों, इससे वो अगली बार आपके साथ में बात करने के लिए और भी एक्साइटेड महसूस करेगी। इसे बहुत ज्यादा भी आगे तक नहीं बढ़ाना एकउसे जैलस करने के लिए बहुत ज्यादा कोशिश मत करेंः हालांकि ऐसी कई सारी ट्रिक्स मौजूद हैं, जिनसे आप आपकी पसंद की लड़की को आपकी याद दिला सकते हैं, लेकिन आपको उसे इतना भी ज्यादा जैलस करने की कोशिश नहीं करना चाहिए, जिससे उसे ऐसा लगना शुरू हो जाए कि क्योंकि आप एक प्लेयर हैं या वो आपके प्यार के लिए किसी से लड़ना नहीं चाहती है, इसलिए उसे आपके साथ में नहीं रहना चाहिए। हालांकि आपको उसे आपके हर एक पल की खबर तो नहीं देना है, लेकिन अगर आप नहीं चाहते, कि वो आपकी हरकत से चिढ़ जाए, तो दूसरी लड़कियों के साथ में बहुत ज्यादा भी बातें मत करें या फिर आपके सामने आने वाली हर एक लड़की के साथ में खुलकर फ़्लर्ट न करें। - हालांकि दूसरी लड़कियों के साथ में की हुई थोड़ी सी फ़्लर्टिंग से उस लड़की ये समझ आ सकता है कि आप उसके लिए एक सही पसंद हैं, लेकिन आपको इसे इतना भी ज्यादा नहीं बढ़ाना है कि उसे ऐसा लगना शुरू हो जाए, कि आपको उसकी कोई परवाह ही नहीं। - अगर आप से दूर होने पर वो ऐसा सोचेगी कि आप दूसरी लड़कियों के साथ में घूम रहे होंगे, तो ऐसे में शायद उसके आपको याद करने की बहुत ज्यादा संभावना नहीं होगी। - अगर आप उसे बाहर कहीं देखें, तो आपको खुद को थोड़ा कॉन्फ़िडेंस देना चाहिए और उसके पास जाने से पहले आपको एक या दो मिनट लेना चाहिए। अगर आप ऐसा दिखाएंगे, जैसे कि आपने उसे देखा ही नहीं या वो आपके हिसाब से कूल नहीं है, तो फिर वो उन लोगों से जैलस नहीं होगी, जिनसे आप बात कर रहे हैं; वो बस इतना सोचेगी कि आप अच्छे इंसान नहीं हैं। दोउसका दिल जीतने के लिए किसी और की तरह बनने की कोशिश मत करेंः ये सुनने में जितना कड़वा लग रहा है, असल में भी उतना ही कड़वा है, आखिर में, अगर आप सच में उस लड़की का दिला जीतना चाहते हैं, तो आपके लिए आप जैसे हैं, वैसे ही बने रहना बहुत जरूरी होता है। आपको जबर्दस्ती में कुछ ज्यादा करने की कोई जरूरत नहीं है या न ही उस तरह का लड़का बनने की कोई जरूरत है, जिसे आपके हिसाब से उसे पसंद करना चाहिए; इसकी बजाय, उसे आपके अंदर मौजूद आपके सबसे अच्छे गुणों को देखने दें और आपके बारे में कुछ अजीब चीजें बताने तक खुलने में थोड़ा वक़्त लें। हालांकि, आपको उसके सामने हमेशा उसी तरह से भी एक्ट नहीं करना है, जैसा आप आपके फ्रेंड्स के साथ में किया करते हैं, और आपको कुछ दिखावा भी नहीं करना है, नहीं तो आखिर में उसे इसके बारे में समझ आ ही जाएगा। - अगर आप सच में किसी लड़की को पसंद करते हैं और चाहते हैं कि वो आपको याद करे, तो आपको ये पक्का करना होगा कि वो किसी बनावटी इंसान को नहीं, बल्कि आपके सच्चे, असली रूप को याद करती है। - हालांकि आपके लिए उसके सामने खुलने में और आपके असली रूप को दीखाने में कुछ वक़्त जरूर लग सकता है, उसे जानने की कोशिश के दौरान, आपको जितना हो सके, उतना ज्यादा सच्चा इंसान बनकर रहने की कोशिश करना है। तीनबहुत ज्यादा गेम्स न खेलेंः बेशक, अपने फोन टाइम को लिमिट करना या एक-दूसरे के साथ में बिताए जाने वाले वक़्त को लिमिट करना और उसके लिए आपको पाना जरा सा कठिन बना देना, उस लड़की की आप में दिलचस्पी बनाए रखने में और उसके आपको याद करने की संभावना को बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर आप इसकी अति कर देते हैं, तो ऐसा करके आप सिर्फ उस लड़की को कनफ्यूज ही कर रहे हैं - और शायद इस प्रोसेस में आप खुद को भी कनफ्यूज कर रहे हैं। अगर उसे ऐसा लगेगा, जैसे आपका पूरा रिश्ता सिर्फ माइंड गेम्स के ऊपर ही खड़ा है और उसे तो पता ही नहीं, कि आप असल में हैं कौन, तो उसका जो धैर्य है, वो धीरे-धीरे अपना जवाब दे ही देगा। - अगर आप एक मिनट तो अच्छे रहते और प्यार को महसूस करते हैं, लेकिन अगले ही मिनट आप ठंडे और एक-दूसरे से दूरी महसूस करते हैं, तो वो बड़ी आसानी से फ्रस्ट्रेट हो जाएगी। हालांकि, अगर उसे ऐसा लगेगा कि उसे समझ ही नहीं आता कि आखिर आपके मन में क्या चल रहा है, तो वो भी आपको लेकर हताश होना शुरू कर देगी और शायद आप से दूर भी हो जाएगी। चारआप उसके बारे में जो भी महसूस करते हैं, उसे उसके बारे में बताने से घबराएँ नहींः भले हिए उसके मन में आपको और पाने की चाह जगाना और आपकी यादों को लाना जरूरी है, लेकिन आपको इसे खींचकर इतने भी दूर नहीं ले जाना है, कि उसे ऐसा लगना शुरू हो जाए, कि उसे तो आपके मन की बात मालूम ही नहीं। भले ही आप थोड़े शर्मीले टाइप के ही क्यों हों, लेकिन फिर भी आपको उसे बता देना चाहिए कि आप उसे पसंद करते हैं और आप उसके साथ में और ज्यादा वक़्त बिताना चाहते हैं। सारा काम उसे ही न करने दें, नहीं तो उसे लगेगा कि आपको उसकी कोई परवाह ही नहीं, इसलिए वो आप से थक जाएगी। - आपको भी उसे पाने की कोशिश में अपनी आधी हिस्सेदारी निभाना होगी। अगर आप उसे आपका पीछा करने के लिए मजबूर करेंगे, तो शायद वो किसी ऐसे लड़के के पास चली जाएगी, जो उसकी फीलिंग्स को आप से तो ज्यादा ओपन हो। - इसमें शायद कुछ वक़्त जरूर लग सकता है, लेकिन इसका फल आपको जरूर मिलेगा। - हर एक लड़की की पसंद और नापसंद अलग होती है, इसलिए ऊपर बताए हुए किसी भी स्टेप का इस्तेमाल करने से पहले, उस लड़की के बारे में अच्छी तरह से जानकारी जुटा लें। |
नेपाल देश से निकलकर जिले के खड्डा व हनुमानगंज थाना क्षेत्र से होकर तमकुहीराज तहसील के रास्ते निकलने वाली बड़ी गंडक नदी बालू माफियाओं के कब्जे में हैं। जिले भर के विभिन्न अवैध घाटो पर सफेद बालू के अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है।
बड़ी गंडक के ठोकर नम्बर तीन व चार पर कारोबारि बिना डर भय के दिन-रात अवैध खनन को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। जिसका सीधा असर किसानों के ऊपर पड़ रहा है। बालू का खनन होने से किसानों की खेती योग्य जमीन ऊसर होने के साथ-साथ नदी में विलीन होती जा रही है। बालू के अवैध खनन पर प्रशासन की चुप्पी से माफियाओं का हौसला बुलन्द है। प्रशासन की मिलीभगत से बालू का अवैध खनन बदस्तूर जारी है।
जानकारी के मुताबिक खड्डा थाना क्षेत्र के भैसाह गंडक नदी के ठोकर नम्बर तीन व चार आदि जगहों पर अवैध बालू खनन का खेल लगातार जारी है। तो वही हनुमानगंज थाना क्षेत्र के नौतार जंगल, भगवानपुर व पनियहवा आदि कई जगहों पर नारायणी नदी के किनारे अवैध खनन जोरों पर चल रहा है। पड़रौना, सेवरही, विसुनपुरा आदि थाना क्षेत्र में भी अवैध बालू खनन जोरो पर है। जिसके कारण बरसात के दिनों में नदी के आस पास बसे हजारों घरों में नदी का पानी घुस जाता है। जिससे नदी में कटान भी तेजी से होता है।
जिले भर में बालू खनन माफियाओं द्वारा चाहे रात का अंधेरा हो या, दिन की चकाचौंध रोशनी बेरोक टोक अवैध खनन करते हैं। अवैध बालू खनन में प्रशासन के ढीले रवैये का नतीजा है कि घाटो के आस-पास के किसानों का कृषि योग्य उपजाऊ भूमि भी ऊसर हो रहा है।
ऊसर हो जाने के कारण खेती नहीं हो पा रही है जो बची है। वह भी अवैध खनन की वजह से नदी में विलीन होती जा रही है। जिससे किसान भुखमरी के कगार पर आ गये हैं। जब इस सम्बंध में जिला खनन अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई पर उनका नम्बर नही उठा।
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| नेपाल देश से निकलकर जिले के खड्डा व हनुमानगंज थाना क्षेत्र से होकर तमकुहीराज तहसील के रास्ते निकलने वाली बड़ी गंडक नदी बालू माफियाओं के कब्जे में हैं। जिले भर के विभिन्न अवैध घाटो पर सफेद बालू के अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। बड़ी गंडक के ठोकर नम्बर तीन व चार पर कारोबारि बिना डर भय के दिन-रात अवैध खनन को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। जिसका सीधा असर किसानों के ऊपर पड़ रहा है। बालू का खनन होने से किसानों की खेती योग्य जमीन ऊसर होने के साथ-साथ नदी में विलीन होती जा रही है। बालू के अवैध खनन पर प्रशासन की चुप्पी से माफियाओं का हौसला बुलन्द है। प्रशासन की मिलीभगत से बालू का अवैध खनन बदस्तूर जारी है। जानकारी के मुताबिक खड्डा थाना क्षेत्र के भैसाह गंडक नदी के ठोकर नम्बर तीन व चार आदि जगहों पर अवैध बालू खनन का खेल लगातार जारी है। तो वही हनुमानगंज थाना क्षेत्र के नौतार जंगल, भगवानपुर व पनियहवा आदि कई जगहों पर नारायणी नदी के किनारे अवैध खनन जोरों पर चल रहा है। पड़रौना, सेवरही, विसुनपुरा आदि थाना क्षेत्र में भी अवैध बालू खनन जोरो पर है। जिसके कारण बरसात के दिनों में नदी के आस पास बसे हजारों घरों में नदी का पानी घुस जाता है। जिससे नदी में कटान भी तेजी से होता है। जिले भर में बालू खनन माफियाओं द्वारा चाहे रात का अंधेरा हो या, दिन की चकाचौंध रोशनी बेरोक टोक अवैध खनन करते हैं। अवैध बालू खनन में प्रशासन के ढीले रवैये का नतीजा है कि घाटो के आस-पास के किसानों का कृषि योग्य उपजाऊ भूमि भी ऊसर हो रहा है। ऊसर हो जाने के कारण खेती नहीं हो पा रही है जो बची है। वह भी अवैध खनन की वजह से नदी में विलीन होती जा रही है। जिससे किसान भुखमरी के कगार पर आ गये हैं। जब इस सम्बंध में जिला खनन अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई पर उनका नम्बर नही उठा। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
झारखंड की सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने नक्सली संगठन (Naxal Commander) के कमांडर समेत दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।
झारखंड की सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने नक्सली संगठन (Naxal Commander) के कमांडर समेत दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।
झारखंड की सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने नक्सली संगठन (Naxal Commander) के कमांडर समेत दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार नक्सलियों में संगठन का कमांडर गणेश गागराई और सावन तियू शामिल हैं। जिला पुलिस कार्यालय में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राकेश रंजन ने 17 फरवरी को प्रेसवार्ता में पत्रकारों को यह जानकारी दी।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राकेश रंजन के अनुसार, नक्सली संगठन का कमांडर (Naxal Commander) गणेश गागराई ठेकेदारों एवं कारोबारियों से लगातार लेवी की मांग कर रहा था और उन्हें धमकी दे रहा था। गणेश पश्चिमी सिंहभूम जिला के सोनुवा थानांतर्गत परसा गांव का रहने वाला है। जबकि उसके साथ पकड़ा गया नक्सली सावन तियू पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर थाना के सिकीदिरी का रहने वाला है।
एसडीपीओ राकेश रंजन के मुताबिक, जिले के पुलिस अधीक्षक को सूचना मिली थी कि नक्सली संगठन पीएलएफआइ (PLFI) का पूर्व सदस्य जेएसजेएमएम के नाम पर संगठन बनाकर सरायकेला-खरसावां के कई थाना क्षेत्र में घूम-घूमकर सरकार की विकास योजनाओं के तहत कार्य करा रहे ठेकेदारों एवं कारोबारियों से लेवी की वसूली कर रहा है। लेवी नहीं देने पर वह हिंसक कार्रवाई करने की धमकी दे रहा है।
सूचना के आधार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में छापेमारी टीम गठित की गई। छापेमारी टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नक्सली कमांडर (Naxal Commander) और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार नक्सलियों की निशानदेही पर व्यवसायियों से लेवी वसूलने के लिए प्रयुक्त सिम के साथ मोबाइल और बाइक भी बरामद की गई।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ करने पर गणेश गागराई और सावन तियु ने सरायकेला एवं चाईबासा जिले में आधा दर्जन से अधिक मामलों में संलिप्तता स्वीकार की। गणेश गागराई दिसंबर, 2019 के महीने में जमानत पर जेल से निकला था। उसके बाद वह बड़ाबांबो से सुपाईसाई तक सड़क बना रहे ठेकेदार से लगातार लेवी की मांग कर रहा था। एसडीपीओ के अनुसार, इनकी गिरफ्तारी से क्षेत्र में हो रहा विकास कार्य शांतिपूर्ण संपन्न हो पाएगा। जेल के बाहर निकल गणेश ने खरसावां के ईंट भट्ठा कारोबारी से दो लाख रुपये लेवी की वसूली की थी, जबकि सरायकेला के व्यवसायी को लेवी नहीं देने पर धमकी दी थी।
गिरफ्तार नक्सली कमांडर (Naxal Commander) गणेश गागराई ने साल 2016 में सरायकेला थाना इलाके के सीनी मोड़ से उकरी मोड़ होते हुए खरसावां तक सड़क निर्माण में लगी मशीन को आकर्षिणी मंदिर के पास जला दिया था। साथ ही हवाई फायरिंग भी की थी। साल 2016 में खरसावां थाना इलाके में हुई डकैती में भी वह शामिल था। साल 2016 में ही चाईबासा थाना इलाके में पेट्रोल पंप संचालक से रंगदारी वसूलने के मामले में गिरफ्तार हुआ था और उसकी निशानदेही पर उसके घर से कार्बाइन बरामद हुआ था।
| झारखंड की सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने नक्सली संगठन के कमांडर समेत दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। झारखंड की सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने नक्सली संगठन के कमांडर समेत दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। झारखंड की सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने नक्सली संगठन के कमांडर समेत दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार नक्सलियों में संगठन का कमांडर गणेश गागराई और सावन तियू शामिल हैं। जिला पुलिस कार्यालय में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राकेश रंजन ने सत्रह फरवरी को प्रेसवार्ता में पत्रकारों को यह जानकारी दी। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राकेश रंजन के अनुसार, नक्सली संगठन का कमांडर गणेश गागराई ठेकेदारों एवं कारोबारियों से लगातार लेवी की मांग कर रहा था और उन्हें धमकी दे रहा था। गणेश पश्चिमी सिंहभूम जिला के सोनुवा थानांतर्गत परसा गांव का रहने वाला है। जबकि उसके साथ पकड़ा गया नक्सली सावन तियू पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर थाना के सिकीदिरी का रहने वाला है। एसडीपीओ राकेश रंजन के मुताबिक, जिले के पुलिस अधीक्षक को सूचना मिली थी कि नक्सली संगठन पीएलएफआइ का पूर्व सदस्य जेएसजेएमएम के नाम पर संगठन बनाकर सरायकेला-खरसावां के कई थाना क्षेत्र में घूम-घूमकर सरकार की विकास योजनाओं के तहत कार्य करा रहे ठेकेदारों एवं कारोबारियों से लेवी की वसूली कर रहा है। लेवी नहीं देने पर वह हिंसक कार्रवाई करने की धमकी दे रहा है। सूचना के आधार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में छापेमारी टीम गठित की गई। छापेमारी टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नक्सली कमांडर और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार नक्सलियों की निशानदेही पर व्यवसायियों से लेवी वसूलने के लिए प्रयुक्त सिम के साथ मोबाइल और बाइक भी बरामद की गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ करने पर गणेश गागराई और सावन तियु ने सरायकेला एवं चाईबासा जिले में आधा दर्जन से अधिक मामलों में संलिप्तता स्वीकार की। गणेश गागराई दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस के महीने में जमानत पर जेल से निकला था। उसके बाद वह बड़ाबांबो से सुपाईसाई तक सड़क बना रहे ठेकेदार से लगातार लेवी की मांग कर रहा था। एसडीपीओ के अनुसार, इनकी गिरफ्तारी से क्षेत्र में हो रहा विकास कार्य शांतिपूर्ण संपन्न हो पाएगा। जेल के बाहर निकल गणेश ने खरसावां के ईंट भट्ठा कारोबारी से दो लाख रुपये लेवी की वसूली की थी, जबकि सरायकेला के व्यवसायी को लेवी नहीं देने पर धमकी दी थी। गिरफ्तार नक्सली कमांडर गणेश गागराई ने साल दो हज़ार सोलह में सरायकेला थाना इलाके के सीनी मोड़ से उकरी मोड़ होते हुए खरसावां तक सड़क निर्माण में लगी मशीन को आकर्षिणी मंदिर के पास जला दिया था। साथ ही हवाई फायरिंग भी की थी। साल दो हज़ार सोलह में खरसावां थाना इलाके में हुई डकैती में भी वह शामिल था। साल दो हज़ार सोलह में ही चाईबासा थाना इलाके में पेट्रोल पंप संचालक से रंगदारी वसूलने के मामले में गिरफ्तार हुआ था और उसकी निशानदेही पर उसके घर से कार्बाइन बरामद हुआ था। |
इटली की वाहन निर्माता कंपनी पियाजियो अपने सबसे लोकप्रिय तिपहिया स्कूटर MP3 को कार जैसे सुरक्षा फीचर के साथ उतारने की तैयारी कर रही है। इस स्कूटर को एयरबैग से लैस करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए कंपनी और उसकी एयरबैग सहयोगी द्वारा पेटेंट फाइल किया गया है। कंपनी ने 2022 EICMA में पियाजियो MP3 350 पर एक एयरबैग प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया था। वर्तमान में होंडा गोल्डविंग बाइक ही एयरबैग के साथ आती है।
पेटेंट तस्वीरों के अनुसार, राइडर के घुटने के हिस्से के पास हैंडलबार के नीचे एक चौड़ा एयरबैग दिया गया है। यह एयरबैग प्लास्टिक के छेदों के माध्यम से खुल जाता है। इसमें एक इनफ्लेटर और एक गैस जनरेटर है, जिसके सक्रिय होने पर एयरबैग खुलता है। दुर्घटना का अंदेशा होते ही यह चौड़ा और बड़ा एयरबैग सवार के ठीक सामने खुलकर झटके को रोक लेता है। इससे दुर्घटना में कम से कम नुकसान होने की संभावना रहती है।
| इटली की वाहन निर्माता कंपनी पियाजियो अपने सबसे लोकप्रिय तिपहिया स्कूटर MPतीन को कार जैसे सुरक्षा फीचर के साथ उतारने की तैयारी कर रही है। इस स्कूटर को एयरबैग से लैस करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए कंपनी और उसकी एयरबैग सहयोगी द्वारा पेटेंट फाइल किया गया है। कंपनी ने दो हज़ार बाईस EICMA में पियाजियो MPतीन तीन सौ पचास पर एक एयरबैग प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया था। वर्तमान में होंडा गोल्डविंग बाइक ही एयरबैग के साथ आती है। पेटेंट तस्वीरों के अनुसार, राइडर के घुटने के हिस्से के पास हैंडलबार के नीचे एक चौड़ा एयरबैग दिया गया है। यह एयरबैग प्लास्टिक के छेदों के माध्यम से खुल जाता है। इसमें एक इनफ्लेटर और एक गैस जनरेटर है, जिसके सक्रिय होने पर एयरबैग खुलता है। दुर्घटना का अंदेशा होते ही यह चौड़ा और बड़ा एयरबैग सवार के ठीक सामने खुलकर झटके को रोक लेता है। इससे दुर्घटना में कम से कम नुकसान होने की संभावना रहती है। |
पूर्वांचल के कई बड़े ब्राह्मण चेहरे आज समाजवादी पार्टी का दामन थामेंगे। पूर्वी उत्तर-प्रदेश के लगभग हर जिले से ब्राह्मण नेता सपा की साइकिल पर सवार होंगे। इसमें पूर्वांचल की सियासत में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के परिवार के अलावा संतकबीरनगर-खलीलाबाद से भाजपा विधायक दिग्विजय नारायण चौबे उर्फ जय चौबे भी है।
यूपी का चुनावी इतिहास उठाकर देखें तो जातीय समीकरण के गुणा-भाग को अपने पक्ष में किए बिना कोई दल सरकार नहीं बना पाता। पिछड़ों और दलितों के दम पर एसपी और बीएसपी अब तक यूपी में कई बार सरकार बनाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन इस बार यूपी की आबादी में 13% ब्राह्मण भी चुनावी मुद्दा बन गए हैं।
हरिशंकर तिवारी के परिवार और जय चौबे के जरिए अखिलेश यादव प्रदेश के ब्राह्मण समाज को संदेश देने की कोशिश कर रहें है। माना जा रहा है कि यूपी के विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी के तौर पर स्थापित करने में जुटा है। ब्राह्म्ण बनाम ठाकुर की राजनीति के बीच हरिशंकर तिवारी परिवार का सपा में जाने से पूर्वांचल के समीकरण बदल सकते हैं। यह इलाका ब्राह्मण बहुल माना जाता है और हरिशंकर तिवारी पूर्वांचल में ब्राह्मण के बड़े चेहरे माने जाते है।
उत्तर प्रदेश की सियासी जंग में पूर्वांचल और जातीय समीकरण एक बड़ा फैक्टर बन गए हैं और सियासी दलों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी भी। सत्ताधारी बीजेपी के लिए यहां पर चुनौतियां कहीं ज्यादा बड़ी हैं। जिस दौर में भाजपा लहर चल रही थी, उस लहर में पूर्वांचल समाजवादी पार्टी के साथ था। अब एक बार फिर पूर्वांचल में सपा ब्राह्मण वोट साधने में जुट गई है। कहा जा रहा है कि आज से समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण समाज की एंट्री शुरु हुई है। जल्द ही पश्चिमी यूपी के भी कुछ बड़े ब्राह्मण चेहरे सपा में शामिल होंगे।
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| पूर्वांचल के कई बड़े ब्राह्मण चेहरे आज समाजवादी पार्टी का दामन थामेंगे। पूर्वी उत्तर-प्रदेश के लगभग हर जिले से ब्राह्मण नेता सपा की साइकिल पर सवार होंगे। इसमें पूर्वांचल की सियासत में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के परिवार के अलावा संतकबीरनगर-खलीलाबाद से भाजपा विधायक दिग्विजय नारायण चौबे उर्फ जय चौबे भी है। यूपी का चुनावी इतिहास उठाकर देखें तो जातीय समीकरण के गुणा-भाग को अपने पक्ष में किए बिना कोई दल सरकार नहीं बना पाता। पिछड़ों और दलितों के दम पर एसपी और बीएसपी अब तक यूपी में कई बार सरकार बनाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन इस बार यूपी की आबादी में तेरह% ब्राह्मण भी चुनावी मुद्दा बन गए हैं। हरिशंकर तिवारी के परिवार और जय चौबे के जरिए अखिलेश यादव प्रदेश के ब्राह्मण समाज को संदेश देने की कोशिश कर रहें है। माना जा रहा है कि यूपी के विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी के तौर पर स्थापित करने में जुटा है। ब्राह्म्ण बनाम ठाकुर की राजनीति के बीच हरिशंकर तिवारी परिवार का सपा में जाने से पूर्वांचल के समीकरण बदल सकते हैं। यह इलाका ब्राह्मण बहुल माना जाता है और हरिशंकर तिवारी पूर्वांचल में ब्राह्मण के बड़े चेहरे माने जाते है। उत्तर प्रदेश की सियासी जंग में पूर्वांचल और जातीय समीकरण एक बड़ा फैक्टर बन गए हैं और सियासी दलों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी भी। सत्ताधारी बीजेपी के लिए यहां पर चुनौतियां कहीं ज्यादा बड़ी हैं। जिस दौर में भाजपा लहर चल रही थी, उस लहर में पूर्वांचल समाजवादी पार्टी के साथ था। अब एक बार फिर पूर्वांचल में सपा ब्राह्मण वोट साधने में जुट गई है। कहा जा रहा है कि आज से समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण समाज की एंट्री शुरु हुई है। जल्द ही पश्चिमी यूपी के भी कुछ बड़े ब्राह्मण चेहरे सपा में शामिल होंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Sarkari Naukri 2022 : केवीएस में कुल 13404 वैकेंसी है.
Sarkari Naukri 2022 : केंद्रीय विद्यालय संगठन ने टीचिंग और नॉन टीचिंग कैटेगरी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि आगे बढ़ा दी है. टीजीटी, पीजीटी, पीआरटी समेत कई टीचिंग और नॉन टीचिंग पदों निकली 13404 वैकेंसी के लिए आवेदन की लास्ट डेट 2 जनवरी 2023 हो गई है. इसके लिए आवेदन केवीएस की वेबसाइट पर जाकर करना है. जो उम्मीदवार अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं और चाहते हैं उन्हें एक और सप्ताह का समय मिल गया है. इससे पहले आज 26 दिसंबर 2023 को ही आवेदन की लास्ट डेट थी. केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अन्य शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी.
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| Sarkari Naukri दो हज़ार बाईस : केवीएस में कुल तेरह हज़ार चार सौ चार वैकेंसी है. Sarkari Naukri दो हज़ार बाईस : केंद्रीय विद्यालय संगठन ने टीचिंग और नॉन टीचिंग कैटेगरी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि आगे बढ़ा दी है. टीजीटी, पीजीटी, पीआरटी समेत कई टीचिंग और नॉन टीचिंग पदों निकली तेरह हज़ार चार सौ चार वैकेंसी के लिए आवेदन की लास्ट डेट दो जनवरी दो हज़ार तेईस हो गई है. इसके लिए आवेदन केवीएस की वेबसाइट पर जाकर करना है. जो उम्मीदवार अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं और चाहते हैं उन्हें एक और सप्ताह का समय मिल गया है. इससे पहले आज छब्बीस दिसंबर दो हज़ार तेईस को ही आवेदन की लास्ट डेट थी. केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अन्य शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी. . |
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक यमुनापार चक्रेश मिश्रा के मार्गदर्शन में ऑपरेशन "पाताल" के तहत नैनी थाना प्रभारी अवन कुमार दीक्षित द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई में अवैध असलहे का जखीरा पकड़ा गया।
इसके अलावा 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर 17 अवैध असलहे व 14 अदद कारतूस जिन्दा बरामद कर जेल भेजा गया।
आपको बता दें पुलिस अधीक्षक यमुनापार चक्रेश मिश्रा द्वारा लगातार यमुनापार का निरीक्षण करते सभी थाना प्रभारी को निर्देश दिया जा रहा है कि क्षेत्र में इसी तरह अवैध कारोबार करने वाले अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई जारी रहे।
वही लिस्ट बनाकर निरीक्षण किया जाए कि कौन सा अपराधी वंचित है, कहां पर रह रहा है और घटना को अंजाम दे रहा है या फिर सुधर गया है।
वही कड़े निर्देश देते हुए यमुनापार पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने बताया क्षेत्र में किसी तरह का अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि लोग पुलिस पर विश्वास करें। पुलिस की समाज में अच्छी छवि बनाना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
| वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक यमुनापार चक्रेश मिश्रा के मार्गदर्शन में ऑपरेशन "पाताल" के तहत नैनी थाना प्रभारी अवन कुमार दीक्षित द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई में अवैध असलहे का जखीरा पकड़ा गया। इसके अलावा सात अभियुक्तों को गिरफ्तार कर सत्रह अवैध असलहे व चौदह अदद कारतूस जिन्दा बरामद कर जेल भेजा गया। आपको बता दें पुलिस अधीक्षक यमुनापार चक्रेश मिश्रा द्वारा लगातार यमुनापार का निरीक्षण करते सभी थाना प्रभारी को निर्देश दिया जा रहा है कि क्षेत्र में इसी तरह अवैध कारोबार करने वाले अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई जारी रहे। वही लिस्ट बनाकर निरीक्षण किया जाए कि कौन सा अपराधी वंचित है, कहां पर रह रहा है और घटना को अंजाम दे रहा है या फिर सुधर गया है। वही कड़े निर्देश देते हुए यमुनापार पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने बताया क्षेत्र में किसी तरह का अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि लोग पुलिस पर विश्वास करें। पुलिस की समाज में अच्छी छवि बनाना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। |
तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर फिल्म 'सांड की आंख' में साथ नज़र आएंगी। इस फिल्म में दुनिया की सबसे बुजुर्ग शार्प शूटर्स चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म को तुषार हीरानंदानी डायरेक्ट करेंगे। फिल्म के प्रोड्यूसर्स रिलायंस एंटरटेनमेंट, अनुराग कश्यप, निधि परमार और चॉक एंड चीज हैं। तुषार इससे पहले स्क्रिप्ट राइटर थे।
दोनों एक्ट्रेसेज ने किरदार के मुताबिक खुद को ढ़ालने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अनुराग कश्यप ने एक बयान जारी कर कहा, "ऐसे वक्त में जब कंटेंट ही अहम है, हमारा मानना है कि 'सांड की आंख' अच्छा करेगी। अच्छी स्क्रिप्ट, तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर जैसी बेहतरीन अभिनेत्रियों, बेहद प्रतिभावान तुषार हीरानंदानी की अगुवाई वाली इस फिल्म की सफलता पर हमें पूरा विश्वास है। "
तापसी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर भूमि, प्रकाशी और चंद्रो संग अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- "यो रहा टाइटल क्योंकि मन्ने ना दिखती चिड़िया की आंख, मन्ने तो सांड की आंख दिखे है। "
भूमि ने भी यही तस्वीर शेयर की और इसके साथ लिखा, "ओल्ड इज गोल्ड और यह निश्चित रूप से सोना है। दुनिया की सबसे बुजुर्ग निशानेबाज की वास्तविक कहानी की शूटिंग शुरू करने को लेकर उत्साहित हूं। "
फिल्म की रिलीज़ डेट पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
(इनपुट- भाषा)
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| तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर फिल्म 'सांड की आंख' में साथ नज़र आएंगी। इस फिल्म में दुनिया की सबसे बुजुर्ग शार्प शूटर्स चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म को तुषार हीरानंदानी डायरेक्ट करेंगे। फिल्म के प्रोड्यूसर्स रिलायंस एंटरटेनमेंट, अनुराग कश्यप, निधि परमार और चॉक एंड चीज हैं। तुषार इससे पहले स्क्रिप्ट राइटर थे। दोनों एक्ट्रेसेज ने किरदार के मुताबिक खुद को ढ़ालने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अनुराग कश्यप ने एक बयान जारी कर कहा, "ऐसे वक्त में जब कंटेंट ही अहम है, हमारा मानना है कि 'सांड की आंख' अच्छा करेगी। अच्छी स्क्रिप्ट, तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर जैसी बेहतरीन अभिनेत्रियों, बेहद प्रतिभावान तुषार हीरानंदानी की अगुवाई वाली इस फिल्म की सफलता पर हमें पूरा विश्वास है। " तापसी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर भूमि, प्रकाशी और चंद्रो संग अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- "यो रहा टाइटल क्योंकि मन्ने ना दिखती चिड़िया की आंख, मन्ने तो सांड की आंख दिखे है। " भूमि ने भी यही तस्वीर शेयर की और इसके साथ लिखा, "ओल्ड इज गोल्ड और यह निश्चित रूप से सोना है। दुनिया की सबसे बुजुर्ग निशानेबाज की वास्तविक कहानी की शूटिंग शुरू करने को लेकर उत्साहित हूं। " फिल्म की रिलीज़ डेट पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। बॉलीवुड की अन्य खबरों के लिए क्लिक करें। Also Read: |
बिग बॉस हाउस में तीन महीने का लंबा सफर तय करने के बाद विकास ने अपने दोस्तों के साथ देर रात तक जमकर पार्टी की. पार्टी की कुछ तस्वीरें हमारे हाथ लगी. इन तस्वीरों में विकास व्हाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स में दिखाई दे रहे हैं. विकास के साथ उनके दोस्त मनीष छेड़ा, वाहिद अली खान, बच्ची सिंह मौजूद हैं.
विकास के दोस्त वाहिद अली खान ने बताया कि विकास बिग बॉस के घर से आने के बाद भी वैसे ही हैं जैसे पहले थे उनमें कोई बदलाव नहीं आया हैं. बस थोड़े पतले हो गए हैं. बिग बॉस खाने के लिए नहीं देते थे (हंसते हुए). हमने खूब पार्टी की.
बता दें, विकास बालाजी टेलीफिल्म्स के पॉपुलर शो 'महाभारत' 'क्यूंकि सास भी कभी बहु थी' जैसे शो के लिए क्रिएटिव हेड का काम कर चुके हैं. एकता कपूर के बहुत करीबी दोस्त हैं.
| बिग बॉस हाउस में तीन महीने का लंबा सफर तय करने के बाद विकास ने अपने दोस्तों के साथ देर रात तक जमकर पार्टी की. पार्टी की कुछ तस्वीरें हमारे हाथ लगी. इन तस्वीरों में विकास व्हाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स में दिखाई दे रहे हैं. विकास के साथ उनके दोस्त मनीष छेड़ा, वाहिद अली खान, बच्ची सिंह मौजूद हैं. विकास के दोस्त वाहिद अली खान ने बताया कि विकास बिग बॉस के घर से आने के बाद भी वैसे ही हैं जैसे पहले थे उनमें कोई बदलाव नहीं आया हैं. बस थोड़े पतले हो गए हैं. बिग बॉस खाने के लिए नहीं देते थे . हमने खूब पार्टी की. बता दें, विकास बालाजी टेलीफिल्म्स के पॉपुलर शो 'महाभारत' 'क्यूंकि सास भी कभी बहु थी' जैसे शो के लिए क्रिएटिव हेड का काम कर चुके हैं. एकता कपूर के बहुत करीबी दोस्त हैं. |
ललितपुर. ललितपुर महरौनी मार्ग पर शनिवार की रात ट्रैक्टर बाइक की भिडंत में घायल हुए दो दोस्तों में से एक दोस्त की ग्वालियर में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, रविवार की शाम मृतक पुरुष का मृत शरीर ग्वालियर से ललितपुर लाया गया. मृतक पुरुष का रविवार को जन्मदिन था और वह शनिवार को अपने दोस्त के साथ बाइक से मामा के गांव पठा जा रहा था. पुरुष की मृत्यु से दोस्तों, नाते संबंधियों और परिजनों में कोहराम मच गया है.
कोतवाली सदर भीतर मोहल्ला गांधीनगर नेशनल कॉवेंट विद्यालय के पास निवासी 21वर्षीय सचिन तिवारी पुत्र स्व। मुन्ना तिवारी अपने दोस्त 20 वर्षीय छोटू लिटौरिया पुत्र सरमन लिटौरिया निवासी जुगपुरा के साथ केटीएम बाइक से अपने मामा के घर कोतवाली महरौनी के ग्राम पठा जाने के लिए शनिवार की शाम को घर से निकले थे, जब वह लोग महरौनी ललितपुर मार्ग पर स्थित ग्राम सिलावन के निकट पुल के पहुंचे ही थे कि एक ट्रैक्टर से उनकी बाइक जा भिड़ी, जिसके चलते सचिन तिवारी और छोटू गंभीर रूप से घायल हो गये, तभी वहां से निकल रहे ग्राम मसौराखुर्द निवासी सचिन तिवारी ने अपने दोस्तों की सहायता से दोनों घायलों को एम्बूलेंस से जिला हॉस्पिटल पहुंचावाया था,जहां सचिन तिवारी की हालत गंभीर होने पर उसे इलाज के लिए झांसी मेडीकल कॉलेज रेफर किया गया था, झांसी में भी हालत में सुधार नहीं होने पर ग्वालियर रेफर कर दिया, जहां रविवार को मृत्यु हो गई.
परिजनों ने बताया कि सचिन का रविवार को जन्मदिन था और वह दो दिन पहले ही इंदौर से ललितपुर लौटा था. सचिन दो भाइयों में सबसे छोटा था,दो साल पहले उसके की भी रोग के चलते मृत्यु हो गई थी, सचिन अपने भाई और मां का सहारा था.
इधर सचिन की मृत्यु से परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं उसके दोस्त भी शौक हो गये थे, क्योंकि उसके जन्मदिन की तैयारियां वह लोग कर रहे थे, यहां तक कि जिन्हें पता नहीं था, उनके द्वारा जन्मदिन की बधाईयों की पोस्ट भी सोशल मीडिया पर डाली गई, अब जब उन्हें पता चला कि जन्मदिन के दिन ही सचिन की मृत्यु हो गई तो उन्हें गहरा सदमा लगा है.
| ललितपुर. ललितपुर महरौनी मार्ग पर शनिवार की रात ट्रैक्टर बाइक की भिडंत में घायल हुए दो दोस्तों में से एक दोस्त की ग्वालियर में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, रविवार की शाम मृतक पुरुष का मृत शरीर ग्वालियर से ललितपुर लाया गया. मृतक पुरुष का रविवार को जन्मदिन था और वह शनिवार को अपने दोस्त के साथ बाइक से मामा के गांव पठा जा रहा था. पुरुष की मृत्यु से दोस्तों, नाते संबंधियों और परिजनों में कोहराम मच गया है. कोतवाली सदर भीतर मोहल्ला गांधीनगर नेशनल कॉवेंट विद्यालय के पास निवासी इक्कीसवर्षीय सचिन तिवारी पुत्र स्व। मुन्ना तिवारी अपने दोस्त बीस वर्षीय छोटू लिटौरिया पुत्र सरमन लिटौरिया निवासी जुगपुरा के साथ केटीएम बाइक से अपने मामा के घर कोतवाली महरौनी के ग्राम पठा जाने के लिए शनिवार की शाम को घर से निकले थे, जब वह लोग महरौनी ललितपुर मार्ग पर स्थित ग्राम सिलावन के निकट पुल के पहुंचे ही थे कि एक ट्रैक्टर से उनकी बाइक जा भिड़ी, जिसके चलते सचिन तिवारी और छोटू गंभीर रूप से घायल हो गये, तभी वहां से निकल रहे ग्राम मसौराखुर्द निवासी सचिन तिवारी ने अपने दोस्तों की सहायता से दोनों घायलों को एम्बूलेंस से जिला हॉस्पिटल पहुंचावाया था,जहां सचिन तिवारी की हालत गंभीर होने पर उसे इलाज के लिए झांसी मेडीकल कॉलेज रेफर किया गया था, झांसी में भी हालत में सुधार नहीं होने पर ग्वालियर रेफर कर दिया, जहां रविवार को मृत्यु हो गई. परिजनों ने बताया कि सचिन का रविवार को जन्मदिन था और वह दो दिन पहले ही इंदौर से ललितपुर लौटा था. सचिन दो भाइयों में सबसे छोटा था,दो साल पहले उसके की भी रोग के चलते मृत्यु हो गई थी, सचिन अपने भाई और मां का सहारा था. इधर सचिन की मृत्यु से परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं उसके दोस्त भी शौक हो गये थे, क्योंकि उसके जन्मदिन की तैयारियां वह लोग कर रहे थे, यहां तक कि जिन्हें पता नहीं था, उनके द्वारा जन्मदिन की बधाईयों की पोस्ट भी सोशल मीडिया पर डाली गई, अब जब उन्हें पता चला कि जन्मदिन के दिन ही सचिन की मृत्यु हो गई तो उन्हें गहरा सदमा लगा है. |
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की तारीख नजदीक आते ही, प्रत्याशियों का विरोध तेज हो गया है. पूर्वी चंपारण जिले की केसरिया विधानसभा से आरजेडी प्रत्याशी के विरोध में कार्यकर्ता उतर आए हैं. आरजेडी प्रत्याशी के काफिले को कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए. कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिटिंग विधायक को ही टिकट दिया जाए.
आरजेडी प्रत्याशी संतोष कुशवाहा पटना से टिकट लेकर केसरिया पहुंचे, जहां चंपारण सीमा पर कार्यकर्ताओं ने रोककर उनका फूल मालाओं से स्वागत किया गया. जैसे ही उनका काफिला आगे बढ़ा तो काफिले को आरजेडी विधायक डॉ. राजेश कुमार व आरजेडी नेता राजन कुमार गुप्ता के नेतृत्व में काले झंडे दिखाये गए.
इतना ही नहीं आरजेडी प्रत्याशी को बीच सड़क पर रोक लिया गया, जिसके बाद संतोष कुशवाहा मुर्दाबाद, आरजेडी जिलाध्यक्ष मुर्दाबाद के नारे लगाए गए.
वहीं आरजेडी प्रत्याशी संतोष कुशवाह को काले झंडे दिखाने वाले नेता राजन गुप्ता ने कहा कि संतोष कुशवाह से टिकट वापस लेकर डॉ. राजेश कुमार को टिकट दिया जाए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस विधानसभा से आरजेडी को हार का मुंह देखना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सिटिंग विधायक का टिकट काटा जाना सही नहीं है.
| बिहार विधानसभा चुनाव दो हज़ार बीस की तारीख नजदीक आते ही, प्रत्याशियों का विरोध तेज हो गया है. पूर्वी चंपारण जिले की केसरिया विधानसभा से आरजेडी प्रत्याशी के विरोध में कार्यकर्ता उतर आए हैं. आरजेडी प्रत्याशी के काफिले को कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए. कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिटिंग विधायक को ही टिकट दिया जाए. आरजेडी प्रत्याशी संतोष कुशवाहा पटना से टिकट लेकर केसरिया पहुंचे, जहां चंपारण सीमा पर कार्यकर्ताओं ने रोककर उनका फूल मालाओं से स्वागत किया गया. जैसे ही उनका काफिला आगे बढ़ा तो काफिले को आरजेडी विधायक डॉ. राजेश कुमार व आरजेडी नेता राजन कुमार गुप्ता के नेतृत्व में काले झंडे दिखाये गए. इतना ही नहीं आरजेडी प्रत्याशी को बीच सड़क पर रोक लिया गया, जिसके बाद संतोष कुशवाहा मुर्दाबाद, आरजेडी जिलाध्यक्ष मुर्दाबाद के नारे लगाए गए. वहीं आरजेडी प्रत्याशी संतोष कुशवाह को काले झंडे दिखाने वाले नेता राजन गुप्ता ने कहा कि संतोष कुशवाह से टिकट वापस लेकर डॉ. राजेश कुमार को टिकट दिया जाए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस विधानसभा से आरजेडी को हार का मुंह देखना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सिटिंग विधायक का टिकट काटा जाना सही नहीं है. |
गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी (Jignesh Mevani) को कोर्ट ने पांच दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। मेवानी पर महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ करने और उन्हें गाली देने का आरोप है।
गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी (Jignesh Mevani) की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रहे है। मगंलवार को असम के बारपेटा जिले की स्थानीय अदालत ने मेवानी को महिला पुलिसकर्मी के साथ छेड़छाड़ मामले में पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित ट्वीट करने को लेकर कोर्ट ने सोमवार को ही जिग्नेश मेवानी को जमानत दी थी। जमानत के कुछ ही देर बाद जिग्नेश मेवानी पर दूसरे थाने में दर्ज महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
बता दें कि असम के कोकराझार कोर्ट से जिग्नेश मेवानी को जमानत मिल गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने मेवानी को एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान कोरकाझार से जिग्नेश मेवानी को बारपेटा ले जाया गया। इसी दौरान उनपर महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ करने और उन्हें गाली देने का आरोप लगा। इससे पहले जिग्नेश मेवानी पर पीएम मोदी के खिलाफ विवादित ट्वीट करने को लेकर गिरफ्तार किया गया था। असम पुलिस ने मेवानी को गुजरात से गिरफ्तार किया था। इस मामले में मेवानी तीन दिनों तक पुलिस की रिमांड में थे।
जिग्नेश मेवानी पर दर्ज शिकायत में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 120 (बी) समेत कई धाराएं लगाई गई है। उनपर बीजेपी, आरएसएस और पीएम मोदी के खिलाफ विवादित और तल्ख टिप्पणी करने का आरोप है। पीएम मोदी के गुजरात दौरे से पहले भी मेवानी ने कुछ विवादित ट्वीट किए थे जिसपर पुलिस ने संज्ञान लिया है।
| गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी को कोर्ट ने पांच दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। मेवानी पर महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ करने और उन्हें गाली देने का आरोप है। गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रहे है। मगंलवार को असम के बारपेटा जिले की स्थानीय अदालत ने मेवानी को महिला पुलिसकर्मी के साथ छेड़छाड़ मामले में पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित ट्वीट करने को लेकर कोर्ट ने सोमवार को ही जिग्नेश मेवानी को जमानत दी थी। जमानत के कुछ ही देर बाद जिग्नेश मेवानी पर दूसरे थाने में दर्ज महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि असम के कोकराझार कोर्ट से जिग्नेश मेवानी को जमानत मिल गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने मेवानी को एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान कोरकाझार से जिग्नेश मेवानी को बारपेटा ले जाया गया। इसी दौरान उनपर महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ करने और उन्हें गाली देने का आरोप लगा। इससे पहले जिग्नेश मेवानी पर पीएम मोदी के खिलाफ विवादित ट्वीट करने को लेकर गिरफ्तार किया गया था। असम पुलिस ने मेवानी को गुजरात से गिरफ्तार किया था। इस मामले में मेवानी तीन दिनों तक पुलिस की रिमांड में थे। जिग्नेश मेवानी पर दर्ज शिकायत में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा एक सौ बीस समेत कई धाराएं लगाई गई है। उनपर बीजेपी, आरएसएस और पीएम मोदी के खिलाफ विवादित और तल्ख टिप्पणी करने का आरोप है। पीएम मोदी के गुजरात दौरे से पहले भी मेवानी ने कुछ विवादित ट्वीट किए थे जिसपर पुलिस ने संज्ञान लिया है। |
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य के 6 पॉलीटेक्निक कॉलेज, 14 आईटीआई, दो आयुर्वेदिक अस्पताल समेत 43 आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटर (AHC) को बंद कर दिया है.
हिमाचल प्रदेश में Congress की सरकार बनने के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल के दौरान खोले गए संस्थानों और कार्यालयों को बंद किया जा रहा है. ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि एक बार फिर से कई विभागों और संस्थानों को बंद किया गया है. दरअसल, मौजूदा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने राज्य के 6 पॉलीटेक्निक कॉलेज, 14 आईटीआई, दो आयुर्वेदिक अस्पताल समेत 43 आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटर (AHC) को बंद कर दिया है. अभी तक सरकार की तरफ से 404 कार्यालयों और संस्थानों को बंद किया गया है.
राज्य में कई ऐसे ट्रेड भी बंद किए जाने वाले हैं, जिनकी शुरुआत विधानसभा चुनाव शुरू होने से ठीक पहले हुई थी. राज्य सरकार ने चोलथरा और मंडी में खोले गए पॉलीटेक्निक कॉलेजों को बंद कर दिया है. चोलथरा पूर्व जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र है. मंडी में कुल मिलाकर तीन आईटीआई को भी बंद किया गया है. हालांकि, सरकार के इस फैसले से स्टूडेंट्स को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि यहां पर अभी क्लासेज शुरू नहीं हुई थीं. कांग्रेस सरकार ने एजुकेशन संस्थानों के अलावा स्वास्थ्य केंद्रों को भी बंद करने का फैसला किया है.
पूर्ववर्ती सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए थे. इन आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी बंद कर दिया गया है. ये स्वास्थ्य केंद्र सुंदरनगर और गड़खल में बनाए गए थे. मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य के 43 आयुर्वेदिक संस्थानों में से 31 आयुर्वेदिक संस्थान ऐसे थे, जहां लोगों का इलाज किया जा रहा था. इसमें से पांच स्थान अभी नहीं खोले गए थे.
वहीं, इन संस्थानों में काम करने वाले स्टाफ को कहा गया है कि वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अपने बारे में जानकारी दें. माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार इन संस्थानों के कर्मचारियों को दूसरी जगह तैनात कर देगी. दरअसल, राज्य में सरकार बनने के बाद से ही पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को कांग्रेस सरकार द्वारा पलटा जा रहा है. कई फैसलों को लेकर रिव्यू रिपोर्ट भी मांगी गई है.
हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के फोटो वाले बैग दिए जाने थे. लेकिन हिमाचल सरकार ने अब इन बैगों के बांटने पर रोक लगा दी है. इन बैगों को 2.5 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स को दिया जाना था.
| हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य के छः पॉलीटेक्निक कॉलेज, चौदह आईटीआई, दो आयुर्वेदिक अस्पताल समेत तैंतालीस आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटर को बंद कर दिया है. हिमाचल प्रदेश में Congress की सरकार बनने के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल के दौरान खोले गए संस्थानों और कार्यालयों को बंद किया जा रहा है. ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि एक बार फिर से कई विभागों और संस्थानों को बंद किया गया है. दरअसल, मौजूदा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने राज्य के छः पॉलीटेक्निक कॉलेज, चौदह आईटीआई, दो आयुर्वेदिक अस्पताल समेत तैंतालीस आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटर को बंद कर दिया है. अभी तक सरकार की तरफ से चार सौ चार कार्यालयों और संस्थानों को बंद किया गया है. राज्य में कई ऐसे ट्रेड भी बंद किए जाने वाले हैं, जिनकी शुरुआत विधानसभा चुनाव शुरू होने से ठीक पहले हुई थी. राज्य सरकार ने चोलथरा और मंडी में खोले गए पॉलीटेक्निक कॉलेजों को बंद कर दिया है. चोलथरा पूर्व जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र है. मंडी में कुल मिलाकर तीन आईटीआई को भी बंद किया गया है. हालांकि, सरकार के इस फैसले से स्टूडेंट्स को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि यहां पर अभी क्लासेज शुरू नहीं हुई थीं. कांग्रेस सरकार ने एजुकेशन संस्थानों के अलावा स्वास्थ्य केंद्रों को भी बंद करने का फैसला किया है. पूर्ववर्ती सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए थे. इन आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी बंद कर दिया गया है. ये स्वास्थ्य केंद्र सुंदरनगर और गड़खल में बनाए गए थे. मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य के तैंतालीस आयुर्वेदिक संस्थानों में से इकतीस आयुर्वेदिक संस्थान ऐसे थे, जहां लोगों का इलाज किया जा रहा था. इसमें से पांच स्थान अभी नहीं खोले गए थे. वहीं, इन संस्थानों में काम करने वाले स्टाफ को कहा गया है कि वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अपने बारे में जानकारी दें. माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार इन संस्थानों के कर्मचारियों को दूसरी जगह तैनात कर देगी. दरअसल, राज्य में सरकार बनने के बाद से ही पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को कांग्रेस सरकार द्वारा पलटा जा रहा है. कई फैसलों को लेकर रिव्यू रिपोर्ट भी मांगी गई है. हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के फोटो वाले बैग दिए जाने थे. लेकिन हिमाचल सरकार ने अब इन बैगों के बांटने पर रोक लगा दी है. इन बैगों को दो.पाँच लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स को दिया जाना था. |
रविवार शाम छह बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं-:
पुणे, गृह मंत्री अमित शाह ने मुगलों और अन्य विदेशी आक्रमणकारियों के शासन के दौरान नष्ट किए गए मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज की रविवार को सराहना की और कहा कि मराठा योद्धा के बाद से जारी जीर्णोद्धार कार्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है।
कांग्रेस ने रविवार को कहा कि 24 फरवरी से शुरू हो रहे पार्टी के तीन दिवसीय पूर्ण अधिवेशन में 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में चर्चा की जाएगी एवं आगे का रुख तय किया जाएगा। हालांकि, उसने इस बात पर भी जोर दिया कि उसकी मौजूदगी के बिना देश में विपक्षी एकता की कोई भी कवायद सफल नहीं हो सकती।
भारत में कोविड-19 के बाद अंग प्रतिरोपण के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2022 में पहली बार एक साल में 15 हजार से ज्यादा प्रतिरोपण हुए। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने रविवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को अपील की कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को आबकारी नीति मामले में उनसे पूछताछ फरवरी के आखिरी हफ्ते तक टाल देनी चाहिए क्योंकि वह दिल्ली के बजट को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं।
शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि शिवसेना पार्टी के नाम एवं निशान 'तीर-धनुष' को "खरीदने" के लिए "2000 करोड़ रुपये का सौदा" हुआ है।
कोल्हापुर के पूर्व मराठा राजपरिवार के सदस्य संभाजी राजे छत्रपति ने रविवार को दावा किया कि पुणे में पुलिस ने शिवाजी महाराज के समर्थकों को कुछ अति विशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) की यात्रा के कारण इन मराठा योद्धा की जयंती पर शिवनेरी किले में नहीं जाने दिया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लालच देकर शिकायतकर्ता को हिंदू से ईसाई बनने लिए मजबूर करने के आरोपी 37 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी है।
इजराइल ने बीती रात मध्य दमिश्क के एक रिहायशी इलाके पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए।
चीन के कथित जासूसी गुब्बारे को लेकर संबंधों में आई कड़वाहट के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शनिवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की और अमेरिकी संप्रभुता के "अस्वीकार्य" उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यूक्रेन युद्ध में रूस को मदद पहुंचाने को लेकर चीन पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं।
बैंकों की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) दिसंबर, 2022 को समाप्त तिमाही में रिकॉर्ड 25. 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1. 78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। यह ऋण के बेहतर उठाव और कर्ज पर ऊंची प्राप्तियों की स्थिति को दर्शाता है। एक विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है।
नयी दिल्ली, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि पिछले आठ साल के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार के सुधारों के कारण भारत ऊंची वृद्धि दर की राह पर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष 2023-24 में देश की अर्थव्यवस्था के छह प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है।
भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन रविवार को यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेजी से 25,000 रन पूरे करने वाले खिलाड़ी बने।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की भ्रष्टाचार रोधी इकाई (एसीयू) के प्रमुख रहे पूर्व आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी नीरज कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान महसूस किया कि इस खेल के प्रशासकों द्वारा की जाने वाली हेरा फेरी के सामने मैच फिक्सिंग काफी छोटा मामला है।
| रविवार शाम छह बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं-: पुणे, गृह मंत्री अमित शाह ने मुगलों और अन्य विदेशी आक्रमणकारियों के शासन के दौरान नष्ट किए गए मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज की रविवार को सराहना की और कहा कि मराठा योद्धा के बाद से जारी जीर्णोद्धार कार्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। कांग्रेस ने रविवार को कहा कि चौबीस फरवरी से शुरू हो रहे पार्टी के तीन दिवसीय पूर्ण अधिवेशन में दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में चर्चा की जाएगी एवं आगे का रुख तय किया जाएगा। हालांकि, उसने इस बात पर भी जोर दिया कि उसकी मौजूदगी के बिना देश में विपक्षी एकता की कोई भी कवायद सफल नहीं हो सकती। भारत में कोविड-उन्नीस के बाद अंग प्रतिरोपण के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। वर्ष दो हज़ार बाईस में पहली बार एक साल में पंद्रह हजार से ज्यादा प्रतिरोपण हुए। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने रविवार को यह जानकारी दी। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को अपील की कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को आबकारी नीति मामले में उनसे पूछताछ फरवरी के आखिरी हफ्ते तक टाल देनी चाहिए क्योंकि वह दिल्ली के बजट को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। शिवसेना के नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि शिवसेना पार्टी के नाम एवं निशान 'तीर-धनुष' को "खरीदने" के लिए "दो हज़ार करोड़ रुपये का सौदा" हुआ है। कोल्हापुर के पूर्व मराठा राजपरिवार के सदस्य संभाजी राजे छत्रपति ने रविवार को दावा किया कि पुणे में पुलिस ने शिवाजी महाराज के समर्थकों को कुछ अति विशिष्ट व्यक्तियों की यात्रा के कारण इन मराठा योद्धा की जयंती पर शिवनेरी किले में नहीं जाने दिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लालच देकर शिकायतकर्ता को हिंदू से ईसाई बनने लिए मजबूर करने के आरोपी सैंतीस व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी है। इजराइल ने बीती रात मध्य दमिश्क के एक रिहायशी इलाके पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और पंद्रह अन्य घायल हो गए। चीन के कथित जासूसी गुब्बारे को लेकर संबंधों में आई कड़वाहट के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शनिवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की और अमेरिकी संप्रभुता के "अस्वीकार्य" उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यूक्रेन युद्ध में रूस को मदद पहुंचाने को लेकर चीन पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। बैंकों की शुद्ध ब्याज आय दिसंबर, दो हज़ार बाईस को समाप्त तिमाही में रिकॉर्ड पच्चीस. पाँच प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक. अठहत्तर लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। यह ऋण के बेहतर उठाव और कर्ज पर ऊंची प्राप्तियों की स्थिति को दर्शाता है। एक विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है। नयी दिल्ली, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि पिछले आठ साल के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार के सुधारों के कारण भारत ऊंची वृद्धि दर की राह पर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस में देश की अर्थव्यवस्था के छह प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन रविवार को यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेजी से पच्चीस,शून्य रन पूरे करने वाले खिलाड़ी बने। भारतीय क्रिकेट बोर्ड की भ्रष्टाचार रोधी इकाई के प्रमुख रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी नीरज कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान महसूस किया कि इस खेल के प्रशासकों द्वारा की जाने वाली हेरा फेरी के सामने मैच फिक्सिंग काफी छोटा मामला है। |
बद्दी - दून हलके के तहत पट्टा महलोग में आयोजित पूर्व शासक एनसी सिशोदिया की याद में करवाए गए एकदिवसीय मेले में दिल्ली के सुनील ने कुश्ती की माली हासिल की। सुनील ने माली के मुकाबले में उत्तर प्रदेश के नसीम को हराया। इसी तरह कबड्डी के ओपन मुकाबले में दाड़वा की टीम विजयी रही, दाड़वा की टीम ने चामियां की टीम को 29-19 से हराया। जबकि 50 किलो वर्ग में छमकडी की टीम ने गुनाई की टीम को 31-25 के अंतर से हराया। मेले में दून के विधायक परमजीत सिंह पम्मी ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की व कुश्ती के विजेता पहलवानों को सम्मानित किया। उन्होंने 11000 की राशि मेला कमेटी को सहयोग राशि मौके पर प्रदान की। इसी तरह समारोह की अध्यक्षता जिला भाजपा सचिव बलविंद्र ठाकुर ने की उन्होंने कबड्डी में विजयी रही टीमों को सम्मानित किया व 11000 की राशि आयोजकों को भेंट की। पम्मी ने कहा कि उन्होंने अपने पांच माह के शासनकाल में दून के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 84 लाख की राशि विभिन्न मदों से विकास कार्यों के लिए वितरित की है। इस अवसर पर दून भाजपा अध्यक्ष बलवीर ठाकुर, पंचायत प्रधान ममता गुप्ता, भागुडी की प्रधान दुर्गावती, पवन गुप्ता, रिंकू गिल, अशोक शर्मा, ललित वर्मा, आशद्धष शर्मा, जीतराम, गुरविंद्र मेहता, अभिनव, हैप्पी शर्मा, प्रिंस मेहता, ज्योति, सोनू, बब्लू, प्रेम चंद, राजकुमार शर्मा, रूपराम, नरेश मेहता, रमेश, संजीव गिरी, कैलाश गुप्ता, पारस गुप्ता, खुरमिंद्र कंवर, अनिल गुप्ता, श्याम लाल, राजेश, गीता राम व अन्य लोग उपस्थित रहे।
| बद्दी - दून हलके के तहत पट्टा महलोग में आयोजित पूर्व शासक एनसी सिशोदिया की याद में करवाए गए एकदिवसीय मेले में दिल्ली के सुनील ने कुश्ती की माली हासिल की। सुनील ने माली के मुकाबले में उत्तर प्रदेश के नसीम को हराया। इसी तरह कबड्डी के ओपन मुकाबले में दाड़वा की टीम विजयी रही, दाड़वा की टीम ने चामियां की टीम को उनतीस-उन्नीस से हराया। जबकि पचास किलो वर्ग में छमकडी की टीम ने गुनाई की टीम को इकतीस-पच्चीस के अंतर से हराया। मेले में दून के विधायक परमजीत सिंह पम्मी ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की व कुश्ती के विजेता पहलवानों को सम्मानित किया। उन्होंने ग्यारह हज़ार की राशि मेला कमेटी को सहयोग राशि मौके पर प्रदान की। इसी तरह समारोह की अध्यक्षता जिला भाजपा सचिव बलविंद्र ठाकुर ने की उन्होंने कबड्डी में विजयी रही टीमों को सम्मानित किया व ग्यारह हज़ार की राशि आयोजकों को भेंट की। पम्मी ने कहा कि उन्होंने अपने पांच माह के शासनकाल में दून के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग चौरासी लाख की राशि विभिन्न मदों से विकास कार्यों के लिए वितरित की है। इस अवसर पर दून भाजपा अध्यक्ष बलवीर ठाकुर, पंचायत प्रधान ममता गुप्ता, भागुडी की प्रधान दुर्गावती, पवन गुप्ता, रिंकू गिल, अशोक शर्मा, ललित वर्मा, आशद्धष शर्मा, जीतराम, गुरविंद्र मेहता, अभिनव, हैप्पी शर्मा, प्रिंस मेहता, ज्योति, सोनू, बब्लू, प्रेम चंद, राजकुमार शर्मा, रूपराम, नरेश मेहता, रमेश, संजीव गिरी, कैलाश गुप्ता, पारस गुप्ता, खुरमिंद्र कंवर, अनिल गुप्ता, श्याम लाल, राजेश, गीता राम व अन्य लोग उपस्थित रहे। |
मुंबईः आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी को लेकर भले ही दोनों के परिवार वाले खामोश हैं लेकिन तैयारियां बता रही हैं कि बहुत जल्द शहनाई बजने वाली है। गुजरात में रणबीर कपूर के कृष्णा राज बंगले पर सजावट शुरू हो गई है और खूबसूरत लाइटों से पूरे बंगले को सजाया जा रहा है। माना जा रहा है कि ये सजावट रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी के चलते की जा रही हैं।
हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बंगले की सजावट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है जिसमें कारीगरों को सजावट करते हुए देखा जा सकता है। जहां तक बात है शादी की तारीख की तो रणबीर कपूर और आलिया भट्ट 14 अप्रैल को शादी के बंधन में बंधेंगे। किसी वेडिंग प्लानर को हायर करने के बजाए आलिया की मैनेजर ने ही ये पूरा जिम्मा संभाला है।
| मुंबईः आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी को लेकर भले ही दोनों के परिवार वाले खामोश हैं लेकिन तैयारियां बता रही हैं कि बहुत जल्द शहनाई बजने वाली है। गुजरात में रणबीर कपूर के कृष्णा राज बंगले पर सजावट शुरू हो गई है और खूबसूरत लाइटों से पूरे बंगले को सजाया जा रहा है। माना जा रहा है कि ये सजावट रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी के चलते की जा रही हैं। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बंगले की सजावट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है जिसमें कारीगरों को सजावट करते हुए देखा जा सकता है। जहां तक बात है शादी की तारीख की तो रणबीर कपूर और आलिया भट्ट चौदह अप्रैल को शादी के बंधन में बंधेंगे। किसी वेडिंग प्लानर को हायर करने के बजाए आलिया की मैनेजर ने ही ये पूरा जिम्मा संभाला है। |
Ranchi: राज्य ग्रामीण विकास अनुसमर्थन मिशन- 2023 के दल संख्या-10 के तीन पदाधिकारियों- जितेंद्र कुमार देव, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, मुकेश कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग और कुमार सौरभ, मीडिया-सह-प्रशिक्षण पदाधिकारी, मनरेगा द्वारा आज सोमवार को जिला परिषद सभागार में लोहरदगा जिला में कार्यान्वित योजनाओं समीक्षात्मक एवं परिचयात्मक बैठक की गई. बैठक में अनुसमर्थन दल के पदाधिकारी जितेंद्र कुमार देव द्वारा अनुसमर्थन दल का जिला में आगमन का प्रयोजन बताया और सभी योजनाओं की गुणवत्ता जांच एवं भौतिक सत्यापन करने की बात कही. निरीक्षण के दौरान योजनाओं में पायी जाने वाली त्रुटियों के निराकरण की जानकारी भी दी गई.
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की समीक्षा करते हुए आवास योजना की प्रथम एवं तीसरी किस्त के अंतर को कम किये जाने और प्रखण्डवार अपूर्ण आवासों को पूर्ण किये जाने का निदेश दिया गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत प्रखण्डों में संचालित योजनाओं की प्रखण्डवार समीक्षा की जाएगी। साथ ही निदेश दिया गया कि प्रखण्डों/पंचायतों में जो भी समस्याएं हैं उनसे पदाधिकारी अवश्य अवगत कराएंगे. बैठक में उप विकास आयुक्त समीरा एस० द्वारा अनुसमर्थन दल को जिला का पूर्ण सहयोग करने की बात कही. ज्ञातव्य हो कि उक्त दल लोहरदगा जिला में दिनांक 27. 04. 2023 तक भ्रमण पर रहेगा.
आज की बैठक में जिला योजना पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद, सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, परियोजना पदाधिकारी डीआरडीए, एसएजीवाई के नोडल पदाधिकारी, डीपीएम जेएसएलपीएस, जिला एवं प्रखण्ड समन्वयक, पीएमएवाई के प्रशिक्षण समन्वयक, डब्ल्यूसीडीसी के तकनीकी विशेषज्ञ, जिला समन्वयक एनआरएम/सीएफपी, जीआईएस कोर्डिनेटर एनआरएम सीएफपी, सभी बीपीओ मनरेगा, सभी बीपीएम और प्रखण्ड समन्वयक जेएसएलपीएस के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
| Ranchi: राज्य ग्रामीण विकास अनुसमर्थन मिशन- दो हज़ार तेईस के दल संख्या-दस के तीन पदाधिकारियों- जितेंद्र कुमार देव, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, मुकेश कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग और कुमार सौरभ, मीडिया-सह-प्रशिक्षण पदाधिकारी, मनरेगा द्वारा आज सोमवार को जिला परिषद सभागार में लोहरदगा जिला में कार्यान्वित योजनाओं समीक्षात्मक एवं परिचयात्मक बैठक की गई. बैठक में अनुसमर्थन दल के पदाधिकारी जितेंद्र कुमार देव द्वारा अनुसमर्थन दल का जिला में आगमन का प्रयोजन बताया और सभी योजनाओं की गुणवत्ता जांच एवं भौतिक सत्यापन करने की बात कही. निरीक्षण के दौरान योजनाओं में पायी जाने वाली त्रुटियों के निराकरण की जानकारी भी दी गई. प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए आवास योजना की प्रथम एवं तीसरी किस्त के अंतर को कम किये जाने और प्रखण्डवार अपूर्ण आवासों को पूर्ण किये जाने का निदेश दिया गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत प्रखण्डों में संचालित योजनाओं की प्रखण्डवार समीक्षा की जाएगी। साथ ही निदेश दिया गया कि प्रखण्डों/पंचायतों में जो भी समस्याएं हैं उनसे पदाधिकारी अवश्य अवगत कराएंगे. बैठक में उप विकास आयुक्त समीरा एसशून्य द्वारा अनुसमर्थन दल को जिला का पूर्ण सहयोग करने की बात कही. ज्ञातव्य हो कि उक्त दल लोहरदगा जिला में दिनांक सत्ताईस. चार. दो हज़ार तेईस तक भ्रमण पर रहेगा. आज की बैठक में जिला योजना पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद, सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, परियोजना पदाधिकारी डीआरडीए, एसएजीवाई के नोडल पदाधिकारी, डीपीएम जेएसएलपीएस, जिला एवं प्रखण्ड समन्वयक, पीएमएवाई के प्रशिक्षण समन्वयक, डब्ल्यूसीडीसी के तकनीकी विशेषज्ञ, जिला समन्वयक एनआरएम/सीएफपी, जीआईएस कोर्डिनेटर एनआरएम सीएफपी, सभी बीपीओ मनरेगा, सभी बीपीएम और प्रखण्ड समन्वयक जेएसएलपीएस के प्रतिनिधि उपस्थित थे. |
आईसीसी विश्व कप में सबसे ज्यादा छक्कों के मामले में क्रिस गेल अब नंबर-1 बन गए हैं। क्रिस गेल ने छक्कों के मामले में दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स को पीछे छोड़ दिया है। इस मैच से पहले एबी डिविलियर्स के खाते में 37 छक्के थे।
39 साल के गेल ने विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में शुक्रवार को वेस्टइंडीज की पारी के चौथे ओवर में हसन अली की गेंदों पर लगातार दो छक्के मारकर ये रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। गेल ने दक्षिण अफ्रीका के एबी डीविलियर्स का विश्व कप में 37 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
गेल इन दो छक्कों के साथ विश्वकप के नए सिक्सर किंग बन गए। इस लिस्ट में डीविलियर्स के 37 छक्के, ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग के 31 छक्के, न्यूजीलैंड के ब्रैंडन मैकुलम के 29 छक्के, दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स के 28 छक्के और भारत के सचिन तेंदुलकर और श्रीलंका के सनत जयसूर्या के 27 छक्के हैं। क्रिस गेल ने पाकिस्तान के खिलाफ 34 गेंद पर 50 रनों की पारी खेली। इस दौरान गेल ने कुल तीन छक्के जड़े।
| आईसीसी विश्व कप में सबसे ज्यादा छक्कों के मामले में क्रिस गेल अब नंबर-एक बन गए हैं। क्रिस गेल ने छक्कों के मामले में दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स को पीछे छोड़ दिया है। इस मैच से पहले एबी डिविलियर्स के खाते में सैंतीस छक्के थे। उनतालीस साल के गेल ने विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में शुक्रवार को वेस्टइंडीज की पारी के चौथे ओवर में हसन अली की गेंदों पर लगातार दो छक्के मारकर ये रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। गेल ने दक्षिण अफ्रीका के एबी डीविलियर्स का विश्व कप में सैंतीस छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। गेल इन दो छक्कों के साथ विश्वकप के नए सिक्सर किंग बन गए। इस लिस्ट में डीविलियर्स के सैंतीस छक्के, ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग के इकतीस छक्के, न्यूजीलैंड के ब्रैंडन मैकुलम के उनतीस छक्के, दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स के अट्ठाईस छक्के और भारत के सचिन तेंदुलकर और श्रीलंका के सनत जयसूर्या के सत्ताईस छक्के हैं। क्रिस गेल ने पाकिस्तान के खिलाफ चौंतीस गेंद पर पचास रनों की पारी खेली। इस दौरान गेल ने कुल तीन छक्के जड़े। |
टेंगिन झरने सबसे सुंदर हैंक्रास्नोडर क्षेत्र के एक प्राकृतिक मील का पत्थर वे शेप्सह्हो नदी के नजदीक स्थित हैं और ये ल्यूमेन्टोवो गांव से कुछ किलोमीटर दूर Tuapse जिले में स्थित है, जो काफी प्रसिद्ध और लोकप्रिय समुद्र तटीय रिसोर्ट है। यह नाम आस-पास स्थित तेंगचिना गांव से आया था।
कैसे अपने आप से वहाँ पाने के लिए?
प्रकृति के इस सुंदर कोने पर जाने के लिए, आप कई विकल्पों में से एक का लाभ उठा सकते हैं।
अगर आप टेंगिन फॉल्स पर जाना नहीं चाहते हैंस्वतंत्र रूप से, ट्रैवल एजेंसी में भ्रमण खरीदना संभव है। इसकी लागत में दोनों दिशाओं में प्रवेश, प्रवेश द्वार, मार्गदर्शन सहयोग शामिल है। वह आपको इन स्थानों के इतिहास के बारे में बताएंगे, उनके साथ जुड़े विभिन्न किंवदंतियों के बारे में। अक्सर दौरे में दोपहर का भोजन होता है, जिसके बाद आप झीलों में तैर सकते हैं, इसलिए आपको अपने स्नान उपसाधन लाने की जरूरत है।
Tenginsky झरने पर उबरने, यह कैमरे को भूल नहीं लायक है। यहां पर दी गई तस्वीरें बेहद उज्ज्वल और प्रभावी हैं यह उम्मीद करना जरूरी है कि दौरा पूरे दिन लगेगा।
यहां कई झरने हैं सबसे प्रसिद्ध और महान पहला है यह दुर्लभ फव्वारे की श्रेणी के अंतर्गत आता है। इसकी एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यह डबल है, कैस्केड नहीं है, अधिकांश की तरह यह समानांतर में बहने वाले पानी की दो धाराओं का प्रतिनिधित्व करता है। जिस ऊंचाई से पानी की उड़ान का जेट पन्द्रह मीटर है पानी एक प्राकृतिक कटोरे में बहता है, एक झील का निर्माण करता है। यदि आप ऊपर से इसे देखना चाहते हैं, तो आपको पथ पर चढ़ने की जरूरत है। यह जगह यहां स्थित आकार ग्रॉटोस में उल्लेखनीय और असामान्य है।
लगभग सभी तेंगिन झरने में किंवदंतियों की मौजूदगी है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध बड़े दोगुने के बारे में है, जो इन स्थानों पर प्रतिष्ठित माना जाता है।
इतिहास का कहना है कि कई सदियों पहले वहाँ रहते थेसुल्तान, जिनकी दो सुंदर बेटियां थीं जब वे बड़े हो गए और उन्हें शादी करने का समय था, तो पिता ने उन्हें लड़कों के रूप में चुना, इसका मुख्य लाभ उनकी संपत्ति थी। न तो सौंदर्य और न ही एक तेज दिमाग वे अलग नहीं थे। इसके अलावा, वे बहुत छोटे नहीं थे लेकिन लड़कियों के पास अपने पसंदीदा युवा लोग थे, जिनकी कमी पैसे की कमी थी, लेकिन वे स्मार्ट और खूबसूरत, उनके लिए सुंदर थे और शादी करना चाहते थे फिर पिता ने एक प्रतियोगिता का आयोजन करने का फैसला किया, जिनमें से विजेता अपनी बेटियों को पत्नियों के रूप में लेना चाहते थे। युवक जीता, लेकिन सुल्तान ने अपना फैसला मापा क्योंकि वह युवा अयोग्य पुरुषों को मानते थे। इसलिए उसने लड़कियों को टॉवर में कैद कर दिया, जहां वे शादी के दिन तक रहें। लेकिन उस रात, सुल्तान की बेटियां अपने प्रिय के साथ भाग गईं पीछा उनके पीछे आयोजित किया गया था। जब गार्ड उनके साथ लगभग पकड़े, एक बहनों ने चिल्लाया कि वह उसे और उसकी बहन को दो झरने में बदलना चाहती है, और प्रियजनों को उनकी शांति की रखवाली की गुफाओं में तो ऐसा हुआ, और सबसे अधिक डबल झरना और ग्रॉटो को इसके आगे दिखाई दिया।
अन्य झरने कैसे देखें?
लेकिन अन्य टेंगिन झरने भी हैं। उन्हें कैसे प्राप्त करें, क्षेत्र में संकेत संकेत देंगे। दूसरे झरने तक पहुंचने के लिए, आपको स्थानीय केबल कार का प्रयास करना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि इसे गति में रखने के लिए आपको शारीरिक रूप से काम करने की आवश्यकता है। खुले डबल केबिन पेडल से लैस हैं, जिन्हें मोड़ने की जरूरत है। लेकिन यह केवल मौसम में ही काम करता है।
यदि आप स्ट्रीम को अपस्ट्रीम करते हैंVolodarsky, तो आप कुछ दर्जन झरने देख सकते हैं। वे पहले की तुलना में बहुत कम हैं - अधिकतम आठ मीटर की ऊंचाई के साथ। लेकिन वे काफी आकर्षक हैं।
| टेंगिन झरने सबसे सुंदर हैंक्रास्नोडर क्षेत्र के एक प्राकृतिक मील का पत्थर वे शेप्सह्हो नदी के नजदीक स्थित हैं और ये ल्यूमेन्टोवो गांव से कुछ किलोमीटर दूर Tuapse जिले में स्थित है, जो काफी प्रसिद्ध और लोकप्रिय समुद्र तटीय रिसोर्ट है। यह नाम आस-पास स्थित तेंगचिना गांव से आया था। कैसे अपने आप से वहाँ पाने के लिए? प्रकृति के इस सुंदर कोने पर जाने के लिए, आप कई विकल्पों में से एक का लाभ उठा सकते हैं। अगर आप टेंगिन फॉल्स पर जाना नहीं चाहते हैंस्वतंत्र रूप से, ट्रैवल एजेंसी में भ्रमण खरीदना संभव है। इसकी लागत में दोनों दिशाओं में प्रवेश, प्रवेश द्वार, मार्गदर्शन सहयोग शामिल है। वह आपको इन स्थानों के इतिहास के बारे में बताएंगे, उनके साथ जुड़े विभिन्न किंवदंतियों के बारे में। अक्सर दौरे में दोपहर का भोजन होता है, जिसके बाद आप झीलों में तैर सकते हैं, इसलिए आपको अपने स्नान उपसाधन लाने की जरूरत है। Tenginsky झरने पर उबरने, यह कैमरे को भूल नहीं लायक है। यहां पर दी गई तस्वीरें बेहद उज्ज्वल और प्रभावी हैं यह उम्मीद करना जरूरी है कि दौरा पूरे दिन लगेगा। यहां कई झरने हैं सबसे प्रसिद्ध और महान पहला है यह दुर्लभ फव्वारे की श्रेणी के अंतर्गत आता है। इसकी एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यह डबल है, कैस्केड नहीं है, अधिकांश की तरह यह समानांतर में बहने वाले पानी की दो धाराओं का प्रतिनिधित्व करता है। जिस ऊंचाई से पानी की उड़ान का जेट पन्द्रह मीटर है पानी एक प्राकृतिक कटोरे में बहता है, एक झील का निर्माण करता है। यदि आप ऊपर से इसे देखना चाहते हैं, तो आपको पथ पर चढ़ने की जरूरत है। यह जगह यहां स्थित आकार ग्रॉटोस में उल्लेखनीय और असामान्य है। लगभग सभी तेंगिन झरने में किंवदंतियों की मौजूदगी है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध बड़े दोगुने के बारे में है, जो इन स्थानों पर प्रतिष्ठित माना जाता है। इतिहास का कहना है कि कई सदियों पहले वहाँ रहते थेसुल्तान, जिनकी दो सुंदर बेटियां थीं जब वे बड़े हो गए और उन्हें शादी करने का समय था, तो पिता ने उन्हें लड़कों के रूप में चुना, इसका मुख्य लाभ उनकी संपत्ति थी। न तो सौंदर्य और न ही एक तेज दिमाग वे अलग नहीं थे। इसके अलावा, वे बहुत छोटे नहीं थे लेकिन लड़कियों के पास अपने पसंदीदा युवा लोग थे, जिनकी कमी पैसे की कमी थी, लेकिन वे स्मार्ट और खूबसूरत, उनके लिए सुंदर थे और शादी करना चाहते थे फिर पिता ने एक प्रतियोगिता का आयोजन करने का फैसला किया, जिनमें से विजेता अपनी बेटियों को पत्नियों के रूप में लेना चाहते थे। युवक जीता, लेकिन सुल्तान ने अपना फैसला मापा क्योंकि वह युवा अयोग्य पुरुषों को मानते थे। इसलिए उसने लड़कियों को टॉवर में कैद कर दिया, जहां वे शादी के दिन तक रहें। लेकिन उस रात, सुल्तान की बेटियां अपने प्रिय के साथ भाग गईं पीछा उनके पीछे आयोजित किया गया था। जब गार्ड उनके साथ लगभग पकड़े, एक बहनों ने चिल्लाया कि वह उसे और उसकी बहन को दो झरने में बदलना चाहती है, और प्रियजनों को उनकी शांति की रखवाली की गुफाओं में तो ऐसा हुआ, और सबसे अधिक डबल झरना और ग्रॉटो को इसके आगे दिखाई दिया। अन्य झरने कैसे देखें? लेकिन अन्य टेंगिन झरने भी हैं। उन्हें कैसे प्राप्त करें, क्षेत्र में संकेत संकेत देंगे। दूसरे झरने तक पहुंचने के लिए, आपको स्थानीय केबल कार का प्रयास करना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि इसे गति में रखने के लिए आपको शारीरिक रूप से काम करने की आवश्यकता है। खुले डबल केबिन पेडल से लैस हैं, जिन्हें मोड़ने की जरूरत है। लेकिन यह केवल मौसम में ही काम करता है। यदि आप स्ट्रीम को अपस्ट्रीम करते हैंVolodarsky, तो आप कुछ दर्जन झरने देख सकते हैं। वे पहले की तुलना में बहुत कम हैं - अधिकतम आठ मीटर की ऊंचाई के साथ। लेकिन वे काफी आकर्षक हैं। |
दिल्ली और एनसीटी में आज वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार होने की संभावना है। हालांकि यह मध्यम श्रेणी में बनी रहेगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा दिल्ली के लिए जारी किए गए वायु गुणवत्ता बुलेटिन और मौसम पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली व एनसीटी में 5 और 6 जुलाई को भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में ही रहेगी। दिल्ली की हवाओं में प्रदूषण मुख्यतः धूल के कणों के कारण होगा जिसका अर्थ है कि वायु में पीएम 10 का स्तर अधिक रहेगा। अगले 5 दिनों के दौरान वायु गुणवत्ता के मुख्यतः मध्यम श्रेणी के आसपास रहने का अनुमान। हालांकि बारिश के बाद प्रदूषण में सुधार होगा और यह संतोषजनक स्तर पर आ जाएगी।
आंशिक बादल छाए रहने तथा गर्जना के साथ बौछारें गिरने की संभावना है।
- विस्तृत पूर्वानुमान विश्लेषण के लिए वेबसाइट https://ews.tropmet.res.in. पर लॉग ऑन करें।
- दिल्ली में हवाओं की स्थिति और वेंटीलेशन इंडेक्स संलग्न है।
(और अधिक जानकारी तथा ग्राफिक्स के लिए यहां क्लिक करें)
| दिल्ली और एनसीटी में आज वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार होने की संभावना है। हालांकि यह मध्यम श्रेणी में बनी रहेगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दिल्ली के लिए जारी किए गए वायु गुणवत्ता बुलेटिन और मौसम पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली व एनसीटी में पाँच और छः जुलाई को भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में ही रहेगी। दिल्ली की हवाओं में प्रदूषण मुख्यतः धूल के कणों के कारण होगा जिसका अर्थ है कि वायु में पीएम दस का स्तर अधिक रहेगा। अगले पाँच दिनों के दौरान वायु गुणवत्ता के मुख्यतः मध्यम श्रेणी के आसपास रहने का अनुमान। हालांकि बारिश के बाद प्रदूषण में सुधार होगा और यह संतोषजनक स्तर पर आ जाएगी। आंशिक बादल छाए रहने तथा गर्जना के साथ बौछारें गिरने की संभावना है। - विस्तृत पूर्वानुमान विश्लेषण के लिए वेबसाइट https://ews.tropmet.res.in. पर लॉग ऑन करें। - दिल्ली में हवाओं की स्थिति और वेंटीलेशन इंडेक्स संलग्न है। |
अमर उजाला की हिमाचल स्थित धर्मशाला यूनिट में मजीठिया वेज बोर्ड में धांधली की प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करने वाले चंबा ब्यूरो प्रभारी रविंद्र अग्रवाल का प्रबंधन ने जम्मू यूनिट में तबादला कर दिया है। हालांकि प्रबंधन ने किसी विरोध से बचने के लिए सात साल बाद उन्हें पदोन्नति का लॉलीपॉप भी थमाया है। लेकिन यह बात सभी जानते हैं कि अमर उजाला में रिपोर्टर/सब एडिटर से सीनियर रिपोर्टर/सीनियर सब-एडिटर पद पर जाने से कोई फायदा नहीं बल्कि आर्थिक नुकसान ही झेलना पड़ता है।
चर्चा है कि रविंद्र अग्रवाल ने पारिवारिक कारणों से जम्मू जाने से इंकार कर दिया है। ज्ञात रहे कि परिवार की जिम्मेदारी उन पर ही है। इसके चलते वे लंबे समय से घर के नजदीक के स्टेशन पर ट्रांस्फर की मांग करते आ रहे हैं। वहीं चंबा ब्यूरों में स्टाफ न होने के बावजूद प्रबंधन उन्हें रिलीव करने पर आमादा है। हाल ही में धर्मशाला भेजे गए राजेश मंढोत्रा को चार्ज लेने के लिए भेजा गया है।
इस तरह एक रिपोर्टर के सहारे चल रहा चंबा ब्यूरो अब राम भरोसे होगा। प्रबंधन को तो बस किसी न किसी तरह अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले को हिमाचल से बाहर करने की पड़ी हुई है। उधर, पता चला है कि रविंद्र अग्रवाल ने अब प्रबंधन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का भी निर्णय लिया है। चर्चा है कि अपनी सभी यूनिटों को अलग दिखाकर मजीठिया वेज बोर्ड लगाने वाला अमर उजाला प्रबंधन इसका विरोध कर रहे एक मात्र कर्मी का तबादला दूसरी यूनिट में करके कानूनी तौर पर बड़ी गलती कर बैठा है।
जल्द ही इस संबंध में कोर्ट जाने की खबर सुनने को मिल सकती है। प्रबंधन के इस रवैये के चलते रवीन्द्र पत्रकारिता छोड़ वकालत करने की भी सोच रहे हैं। फिलहाल वह प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाने के बाद की परिस्थितियों को झेल रहे हैं।
| अमर उजाला की हिमाचल स्थित धर्मशाला यूनिट में मजीठिया वेज बोर्ड में धांधली की प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करने वाले चंबा ब्यूरो प्रभारी रविंद्र अग्रवाल का प्रबंधन ने जम्मू यूनिट में तबादला कर दिया है। हालांकि प्रबंधन ने किसी विरोध से बचने के लिए सात साल बाद उन्हें पदोन्नति का लॉलीपॉप भी थमाया है। लेकिन यह बात सभी जानते हैं कि अमर उजाला में रिपोर्टर/सब एडिटर से सीनियर रिपोर्टर/सीनियर सब-एडिटर पद पर जाने से कोई फायदा नहीं बल्कि आर्थिक नुकसान ही झेलना पड़ता है। चर्चा है कि रविंद्र अग्रवाल ने पारिवारिक कारणों से जम्मू जाने से इंकार कर दिया है। ज्ञात रहे कि परिवार की जिम्मेदारी उन पर ही है। इसके चलते वे लंबे समय से घर के नजदीक के स्टेशन पर ट्रांस्फर की मांग करते आ रहे हैं। वहीं चंबा ब्यूरों में स्टाफ न होने के बावजूद प्रबंधन उन्हें रिलीव करने पर आमादा है। हाल ही में धर्मशाला भेजे गए राजेश मंढोत्रा को चार्ज लेने के लिए भेजा गया है। इस तरह एक रिपोर्टर के सहारे चल रहा चंबा ब्यूरो अब राम भरोसे होगा। प्रबंधन को तो बस किसी न किसी तरह अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले को हिमाचल से बाहर करने की पड़ी हुई है। उधर, पता चला है कि रविंद्र अग्रवाल ने अब प्रबंधन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का भी निर्णय लिया है। चर्चा है कि अपनी सभी यूनिटों को अलग दिखाकर मजीठिया वेज बोर्ड लगाने वाला अमर उजाला प्रबंधन इसका विरोध कर रहे एक मात्र कर्मी का तबादला दूसरी यूनिट में करके कानूनी तौर पर बड़ी गलती कर बैठा है। जल्द ही इस संबंध में कोर्ट जाने की खबर सुनने को मिल सकती है। प्रबंधन के इस रवैये के चलते रवीन्द्र पत्रकारिता छोड़ वकालत करने की भी सोच रहे हैं। फिलहाल वह प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाने के बाद की परिस्थितियों को झेल रहे हैं। |
मेट्रोपॉलिटन न्यायाधीश प्रयांक नायक ने 8 अप्रैल तक जेल अधिकारियों से एटीआर मांगी है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का अगले मामले पर कोई असर नहीं होगा। इस मामले के कारण फांसी को नहीं रोका जाएगा।
कोर्ट ने कल जेल अधिकारियों से पवन के उस आवेदन पर जबाव मांगा था, जिसमें पवन ने हर्ष विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ से अनिल कुमार और एक अन्य पुलिस कांस्टेबल पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। पवन ने आरोप लगाया है कि उसे पिछले साल 26 से 28 जुलाई के बीच लाठी और घूंसे से पूरे शरीर पर वार किए गए थे।
| मेट्रोपॉलिटन न्यायाधीश प्रयांक नायक ने आठ अप्रैल तक जेल अधिकारियों से एटीआर मांगी है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का अगले मामले पर कोई असर नहीं होगा। इस मामले के कारण फांसी को नहीं रोका जाएगा। कोर्ट ने कल जेल अधिकारियों से पवन के उस आवेदन पर जबाव मांगा था, जिसमें पवन ने हर्ष विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ से अनिल कुमार और एक अन्य पुलिस कांस्टेबल पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। पवन ने आरोप लगाया है कि उसे पिछले साल छब्बीस से अट्ठाईस जुलाई के बीच लाठी और घूंसे से पूरे शरीर पर वार किए गए थे। |
बालाकोट एयर स्ट्राइक के जवाब में हुई हवाई झड़प में पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनंदन के अलावा जिस दूसरे लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा कर रहा था, हिंदुस्तान ने आज वायु सेना दिवस पर उसी को उड़ा कर पाकिस्तान को करारा तमाचा मारा है। यही नहीं, अभिनंदन वर्तमान समेत फरवरी की उस संक्षिप्त जंग में पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स को धूल चटाने वाले विमान के चालक दल के सैनिक भी वायुसेना की परेड का हिस्सा बने। 87वें वायु सेना दिवस पर यह नज़ारा दिल्ली के पास स्थित हिंडन वायु सेना बेस, गाज़ियाबाद पर देखने को मिला।
परेड का एक हिस्सा था वायुसेना का Avenger नामक battle formation (हवा में युद्धक विमानों का व्यूह)। इसमें शामिल थे तीन मिराज-2000, और उन्हें अपने सुरक्षा घेरे में लिए हुए दो Sukhoi-30MKI। और इन्हीं Sukhoi-30MKI में से एक का नाम है Avenger-1, जिसके लिए पाकिस्तानी वायु सेना ने दावा किया था कि उसने इस विमान को 27 फरवरी की झड़प में मार गिराया था। हिंदुस्तान ने उस समय भी इस दावे को सिरे से नकार दिया था, और आज उस विमान का दुनिया के सामने प्रदर्शन कर पाकिस्तान के मुँह पर जवाब फेंक कर मारा है। Avenger-1 के चालक दल के सदस्य वही वायु सैनिक थे, जिन्होंने इस Sukhoi-30MKI को फरवरी में हुए 'ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट' में हिस्सा लिया था।
इसके अलावा वीर चक्र से सम्मानित होने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने भी अपने MiG- Bison विमान के साथ परेड में हिंदुस्तानी वायु सेना की ताकत और घातकता का प्रदर्शन किया। MiG- Bison वही विमान है, जिसमें बैठकर उन्होंने फरवरी में पाकिस्तान के अत्याधुनिक F-16 विमान को हवा में दौड़ा कर मार गिराया था। उसके बाद उनका विमान भी पाकिस्तानी हमले की चपेट में आकर पाकिस्तानी सीमा में क्रैश हो गया, और उन्हें 60 घंटों तक पाकिस्तानी कैद में रहना पड़ा।
| बालाकोट एयर स्ट्राइक के जवाब में हुई हवाई झड़प में पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनंदन के अलावा जिस दूसरे लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा कर रहा था, हिंदुस्तान ने आज वायु सेना दिवस पर उसी को उड़ा कर पाकिस्तान को करारा तमाचा मारा है। यही नहीं, अभिनंदन वर्तमान समेत फरवरी की उस संक्षिप्त जंग में पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स को धूल चटाने वाले विमान के चालक दल के सैनिक भी वायुसेना की परेड का हिस्सा बने। सत्तासीवें वायु सेना दिवस पर यह नज़ारा दिल्ली के पास स्थित हिंडन वायु सेना बेस, गाज़ियाबाद पर देखने को मिला। परेड का एक हिस्सा था वायुसेना का Avenger नामक battle formation । इसमें शामिल थे तीन मिराज-दो हज़ार, और उन्हें अपने सुरक्षा घेरे में लिए हुए दो Sukhoi-तीसMKI। और इन्हीं Sukhoi-तीसMKI में से एक का नाम है Avenger-एक, जिसके लिए पाकिस्तानी वायु सेना ने दावा किया था कि उसने इस विमान को सत्ताईस फरवरी की झड़प में मार गिराया था। हिंदुस्तान ने उस समय भी इस दावे को सिरे से नकार दिया था, और आज उस विमान का दुनिया के सामने प्रदर्शन कर पाकिस्तान के मुँह पर जवाब फेंक कर मारा है। Avenger-एक के चालक दल के सदस्य वही वायु सैनिक थे, जिन्होंने इस Sukhoi-तीसMKI को फरवरी में हुए 'ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट' में हिस्सा लिया था। इसके अलावा वीर चक्र से सम्मानित होने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने भी अपने MiG- Bison विमान के साथ परेड में हिंदुस्तानी वायु सेना की ताकत और घातकता का प्रदर्शन किया। MiG- Bison वही विमान है, जिसमें बैठकर उन्होंने फरवरी में पाकिस्तान के अत्याधुनिक F-सोलह विमान को हवा में दौड़ा कर मार गिराया था। उसके बाद उनका विमान भी पाकिस्तानी हमले की चपेट में आकर पाकिस्तानी सीमा में क्रैश हो गया, और उन्हें साठ घंटाटों तक पाकिस्तानी कैद में रहना पड़ा। |
संख्यात्मक अनुक्रम और अपनी सीमा इस विज्ञान के इतिहास में गणित में सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक हैं। लगातार, ज्ञान के साथ अद्यतन नए प्रमेयों और सबूत तैयार - यह सब नया पदों के लिए और विभिन्न पर इस अवधारणा पर विचार करने की अनुमति देता है कोण।
संख्यात्मक अनुक्रम, सबसे आम निर्धारण में से एक के अनुसार गणितीय समारोह जिसका आधार प्राकृतिक संख्या का सेट है, एक खास पैटर्न के अनुसार व्यवस्थित कर रहे हैं।
इस समारोह के लिए हर के लिए जो अनुसार, कुछ के रूप में माना जा सकता है अगर आप कानून जानते हैं, प्राकृतिक संख्या स्पष्ट रूप से वास्तविक संख्या निर्धारित कर सकते हैं।
वहाँ संख्या दृश्यों बनाने के लिए कई विकल्प हैं।
सबसे पहले, इस समारोह तथाकथित "स्पष्ट" जिस तरह से सेट किया जा सकता, जब वहाँ एक निश्चित सूत्र है जिसके द्वारा प्रत्येक सदस्य बस अनुक्रम में क्रम संख्या प्रतिस्थापन निर्धारित किया जा सकता है।
दूसरी विधि "rekkurentnogo" कहा जाता है। इसका सार तथ्य यह है कि हम एक संख्यात्मक अनुक्रम के पहले कुछ शर्तों के साथ-साथ विशेष rekkurentnaya सूत्र जो पिछले सदस्य जानने से, आप अगले एक मिल सकता है दिया जाता है में निहित है।
अंत में, अनुक्रम सेट करने के लिए सबसे आम तरीका तथाकथित है , "विश्लेषणात्मक विधि" जब यह संभव है न केवल आसानी से एक निश्चित क्रम संख्या की एक विशेष सदस्य की पहचान करने के लिए, लेकिन यह जानकर कुछ लगातार सदस्यों समारोह के सामान्य सूत्र के लिए आते हैं।
संख्यात्मक अनुक्रम बढ़ाने या कम हो रहा है। इसके विपरीत, अधिक - पहले मामले में, अपने सदस्यों के बाद प्रत्येक पिछले एक है, और दूसरे से कम है।
विषय को देखते हुए, हम दृश्यों की सीमाओं के बारे प्रश्न को हल नहीं कर सकते हैं। सीमित करें कोई हो, असीम छोटे मूल्य के लिए सहित, वहाँ एक क्रम संख्या, जिसके बाद अंकीय रूप में एक भी बिंदु से दृश्य के लगातार मामले का विचलन भी जब इस समारोह के गठन निर्धारित मूल्य से भी कम समय हो जाता है जब दृश्यों की संख्या कहा जाता है।
सक्रिय रूप से की अवधारणा संख्यात्मक एक या एक और अभिन्न और अंतर अंकन के दौरान इस्तेमाल किया अनुक्रम की सीमा।
गणितीय दृश्यों एक पूरी पर्याप्त दिलचस्प गुण सेट के अधिकारी।
सबसे पहले, किसी भी संख्यात्मक अनुक्रम एक गणितीय समारोह का एक उदाहरण है, इसलिए, गुण है कि कार्यों की विशेषता रहे हैं सुरक्षित रूप से दृश्यों के लिए लागू किया जा सकता। monotonic अनुक्रम - जैसे गुण का सबसे स्पष्ट उदाहरण में वृद्धि और गणित श्रृंखला है, जो एक सामान्य अवधारणा के साथ संयुक्त कर रहे हैं कम करने का प्रावधान है।
दूसरे, वहाँ दृश्यों के एक काफी बड़े समूह है कि बढ़ती है और न ही, कम करने नहीं ठहराया जा सकता है - यह समय-समय पर अनुक्रम है। गणित में, वे एक समारोह में जो तथाकथित अवधि लंबाई है वहाँ, कि है, एक निश्चित बिंदु से (एन) निम्नलिखित समीकरण y एन = y n + टी संचालित करने के लिए शुरू होता है, जहां टी माना जाता है और कहा कि इसी अवधि की लंबाई हो जाएगा।
| संख्यात्मक अनुक्रम और अपनी सीमा इस विज्ञान के इतिहास में गणित में सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक हैं। लगातार, ज्ञान के साथ अद्यतन नए प्रमेयों और सबूत तैयार - यह सब नया पदों के लिए और विभिन्न पर इस अवधारणा पर विचार करने की अनुमति देता है कोण। संख्यात्मक अनुक्रम, सबसे आम निर्धारण में से एक के अनुसार गणितीय समारोह जिसका आधार प्राकृतिक संख्या का सेट है, एक खास पैटर्न के अनुसार व्यवस्थित कर रहे हैं। इस समारोह के लिए हर के लिए जो अनुसार, कुछ के रूप में माना जा सकता है अगर आप कानून जानते हैं, प्राकृतिक संख्या स्पष्ट रूप से वास्तविक संख्या निर्धारित कर सकते हैं। वहाँ संख्या दृश्यों बनाने के लिए कई विकल्प हैं। सबसे पहले, इस समारोह तथाकथित "स्पष्ट" जिस तरह से सेट किया जा सकता, जब वहाँ एक निश्चित सूत्र है जिसके द्वारा प्रत्येक सदस्य बस अनुक्रम में क्रम संख्या प्रतिस्थापन निर्धारित किया जा सकता है। दूसरी विधि "rekkurentnogo" कहा जाता है। इसका सार तथ्य यह है कि हम एक संख्यात्मक अनुक्रम के पहले कुछ शर्तों के साथ-साथ विशेष rekkurentnaya सूत्र जो पिछले सदस्य जानने से, आप अगले एक मिल सकता है दिया जाता है में निहित है। अंत में, अनुक्रम सेट करने के लिए सबसे आम तरीका तथाकथित है , "विश्लेषणात्मक विधि" जब यह संभव है न केवल आसानी से एक निश्चित क्रम संख्या की एक विशेष सदस्य की पहचान करने के लिए, लेकिन यह जानकर कुछ लगातार सदस्यों समारोह के सामान्य सूत्र के लिए आते हैं। संख्यात्मक अनुक्रम बढ़ाने या कम हो रहा है। इसके विपरीत, अधिक - पहले मामले में, अपने सदस्यों के बाद प्रत्येक पिछले एक है, और दूसरे से कम है। विषय को देखते हुए, हम दृश्यों की सीमाओं के बारे प्रश्न को हल नहीं कर सकते हैं। सीमित करें कोई हो, असीम छोटे मूल्य के लिए सहित, वहाँ एक क्रम संख्या, जिसके बाद अंकीय रूप में एक भी बिंदु से दृश्य के लगातार मामले का विचलन भी जब इस समारोह के गठन निर्धारित मूल्य से भी कम समय हो जाता है जब दृश्यों की संख्या कहा जाता है। सक्रिय रूप से की अवधारणा संख्यात्मक एक या एक और अभिन्न और अंतर अंकन के दौरान इस्तेमाल किया अनुक्रम की सीमा। गणितीय दृश्यों एक पूरी पर्याप्त दिलचस्प गुण सेट के अधिकारी। सबसे पहले, किसी भी संख्यात्मक अनुक्रम एक गणितीय समारोह का एक उदाहरण है, इसलिए, गुण है कि कार्यों की विशेषता रहे हैं सुरक्षित रूप से दृश्यों के लिए लागू किया जा सकता। monotonic अनुक्रम - जैसे गुण का सबसे स्पष्ट उदाहरण में वृद्धि और गणित श्रृंखला है, जो एक सामान्य अवधारणा के साथ संयुक्त कर रहे हैं कम करने का प्रावधान है। दूसरे, वहाँ दृश्यों के एक काफी बड़े समूह है कि बढ़ती है और न ही, कम करने नहीं ठहराया जा सकता है - यह समय-समय पर अनुक्रम है। गणित में, वे एक समारोह में जो तथाकथित अवधि लंबाई है वहाँ, कि है, एक निश्चित बिंदु से निम्नलिखित समीकरण y एन = y n + टी संचालित करने के लिए शुरू होता है, जहां टी माना जाता है और कहा कि इसी अवधि की लंबाई हो जाएगा। |
श्रीनगर, पांच जून सुरक्षा बलों ने कुलगाम जिले में आतंकवादियों के दो सहयोगियों को गिरफ्तार करके कश्मीर में हथियार तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया।
पुलिस ने बताया कि इनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया है।
एक अधिकारी ने कहा कि दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड के लोअर मुंडा चौराहे से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने एक वाहन को तलाशी के लिए रोका, जिसमें दो एके 56 राइफल, 10 पिस्तौल, कुछ ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद हुआ। इस मामले में आतंकियों के दो सहयोगियों जाहिद नबी और मेहराजुद्दीन को गिरफ्तार किया गया है जोकि पुलवामा के रहने वाले हैं।
अधिकारी ने बताया कि एक मामला दर्ज करके इसकी जांच की जा रही है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| श्रीनगर, पांच जून सुरक्षा बलों ने कुलगाम जिले में आतंकवादियों के दो सहयोगियों को गिरफ्तार करके कश्मीर में हथियार तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया। पुलिस ने बताया कि इनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड के लोअर मुंडा चौराहे से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने एक वाहन को तलाशी के लिए रोका, जिसमें दो एके छप्पन राइफल, दस पिस्तौल, कुछ ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद हुआ। इस मामले में आतंकियों के दो सहयोगियों जाहिद नबी और मेहराजुद्दीन को गिरफ्तार किया गया है जोकि पुलवामा के रहने वाले हैं। अधिकारी ने बताया कि एक मामला दर्ज करके इसकी जांच की जा रही है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
समय उनके पास जाकर बैठजाता, सर्वो को प्यार करता । थोड़ा सा भी अनुशासन भंग में सहन नहीं करता। रात्रि को एक दो बार उठकर उनके बिस्तरों के पास जाता कोई उधाया पड़ाहोता तो कृपदा डाल श्राता यह विद्यार्थी मेरा सर्वस्व थे। मैं उनको जितना अच्छा बनाना चाहता था व जितने समय में बनाना चाहता था उसमें यदि कोई त्रुटि आती तो मैं सह नहीं सकता था। यदि किसी विद्यार्थी का प्रति होता दिखताःतो मैं रो पढ़ता था। मेरा कोई छात्र प्रसाद करता तो उसके प्रायश्चित्त स्वरूप या तो मैं एक दिन का या कई दिनों का उपवास कर लेता, या मेरी हथेलियां सामने कर के मेरे अपने ही हाथ से बेंतों से पीटता । मेरे छात्र एवं मैले कुचैले गांवों के लड़कों को जब मैले देखता तो मैं उन्हें अपने हाथ से नल्दाता व उनके कपड़े धो देता। उद्दण्ड बच्चे बड़े ही होशियार निकलते हुए पाये गए हैं । फारसी व फ्रेंच भाषा का अध्यापन भो में करता था ।
तड़के मेरे थे, वे मेरे सर्वस्व थे । कोई बच्चा किसी दूसरे का है यह तो मैंने कभी समझा ही नहीं, गरीव व श्रीमान का भेद मेरे छात्रों मेंः कभी नहीं रहा, लड़का प्रमाद करता तो मैं उसे बुलाकर हँसाता खिलाता को सजा देता । जिस लड़के को इतवा खिलाया जाता उसके रोने का कोई ठिकाना नहीं रहता, अन्य छात्रों की नजरों से वह
को छिपाता। इस का परिणाम यह हुआ कि मेरे छात्र व्यागम व नियमित संयमी जीवन बिता कर हृष्ट-पुष्ट व होशियार निकले हैं ।
में कुछ शान्ति स्थापित होने पर मैंने विद्यालय को बढ़ाने का काम हाथ में लिया । वर्धा व वक्षं से रामगढ़ कांग्रेस (बिहार) मे सम्मिलित होकर शिक्षाशास्त्रियों से इस विषय में विचार विमर्ष किया। काशी विद्यापीठ व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवम् पुनश्च शान्तिनिकेतन गया। वहांने मेरे कृषि शिक्षा की व्यवस्था को एक निश्चित अच्छा स्वरूप देने को दृष्टि से विविद्यालय देखते २ लाहाबाद काँ कृषि महाविद्यालय जो अमेरिकन चलाते हैं देखा । आचार्य नरेद्र देव जी व पं० जवाहरलाल जी आदि लोगों ने एक अखिल भारतीय औद्योगिक सङ्घ स्थापित किया था उससे कुछ सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न किया व ऐसे किरपिसते व व्याड लागया । च्याइ आते ही इस जिले के अंग्रेज पुलिस सुपरिटेण्डेण्ट को तर गई। इसने मेरे व गांव के कुछ लोगों के विरुद्ध कुछ पुराने मुकदमे चलाना श्रारंभ कर दिया । पहिले ही हमारे व्याड के प्रथम आन्दोलन को कुछ साम्प्रदा यिका का स्वरूप सरकार ने व मुस्लिमलीग के लोगों ने देने का प्रयत्न किया था। अब लड़ने के लिये तो में तैयारथा व जेलखाना भो मेरे लिये कोई बड़ी बात नहीं थी, परन्तु साम्प्रदायिकता का प्रचार में होने देना नहीं चाहता था । अन्त में किसी कदर उन मुकदमों का गर्भ में ही पतन हुआ । वैसे तो कांग्रेस मिनिस्ट्री का काल छोड़ दिया जाय तो गत २० वर्षों में ऐसा एकभी बर्ष नहीं गया होगा कि उस वर्ष में सरकार
ने मेरे विरुद्ध मुकदमे न चलाये हो, ( हां जनता में से किसीने कभी भी मेरे विरुद्ध कोई मुकदमा नही चलाया ) ऐसे केसेस कुछ तो गर्भ
में ही गिर जाते, कुछमें सरकार द्वार जाती व कुछ मुकदमे अभी तक लटक ही रहे हैं, व सत्याग्रह या आन्दोलनों में हमें जेल हो जाती थी । इस प्रकार गुरुकुल को गरेमियों की छुट्टियों होगई, छात्र अपने घर चले गये, मैं विगाव, घर पर प्रचार करने जाने लगा, जहाँ भी जाता लोग भोजन समारोह करते, वडी बडी सभाएँ होती। मुझे कोई पैदल नहीं चलने देते थे, जो कार होती वहाँ कार नहीं तो. तांगा, गाडी ऋदि सवारियां गे से आगे तैयार रहती, लोग मुझ से प्रार्थना करते कि मैं उनमें आर्थिक सहायता लू । परन्तु
किसी से व्याड गुरुकुल के लिए भी चंदा को याचना नहीं की थी । मेरी गरीची चढ़ती ही जारही थीं, यहाँ तक कि गुरुकुल के वार्षिकोत्सव के दिन रातको मेरी झोपडी को आग लग कर जब मेरे बहुत से सामान के साथ मेरे दो कोट मी मम्मो भूत होगये, तो इसके पश्चात् ६ वर्ष तक अर्थात् सन् १६४६ तक मैं बिना कोट पहने ही रहा, मेरे लिए नये कोट नहीं बनवा सका था। गुरु का खर्च वडे अंशों में तो विद्यार्थियों से प्राप्त होने वाली गुरुदक्षिणा या मेरे परिभ्रम व पैसे से चल जाता था। मैंने कभी किसी धनवा कासरा खोजने का प्रयत्न नहीं किया ।
दूसरे वर्ष का गुरुकुल का कार्य प्रारंभ हुआ तो मेरे पास दूर दूर से विद्यार्थी आग्हुचे थे, इन लड़कों में श्रावे लडके तो लखपति सेटों के थे, मैने एक विदेश विभाग भी स्थापित कर लिया था। इस वर्ष ३ विद्याथी इस विभाग से हमारे खरचे से शिक्षा प्राप्त करने जापान मेजने थे । "विद्यार्थी चुनलिये गये थे व उनको जापानी भाषा आदि की निग भी दी
जा रही थी । जापानी पढ़ाने वाला अध्यापक न मिलने से मैं स्वयम्
जारानी पढ़ाया करता था, सरकार को जापान युद्ध में नेको शंका
शेरही थी तो भी मुझे व मेरे विद्यार्थियों के लिये जापान जाने को पास
पोर्ट देने का वचन सरकार दे चुकी थी.1. हमने पासपोर्ट का प्रयत्न
करना आरंभ कर दिया । जागन में रहने वाले हिन्दुस्थानियों से संबंध स्थापित किया, मैं मेरे छात्रों के जापान में नव निर्वाह की व्यवस्था उनके परिश्रम से करवाना चाहता था, तमाम जोड तोड़ में बैठा चुका था । जनता चंदा देने को उत्सुक थी, थोड़ा सा चंदा में स्वीकार भी कर लेना चाहता था। परंतु कुछ दिनों बाद सरकार ने हमें पासपोर्ट देने में अपनी असमर्थता प्रकट करदी। अब तक जितनी भी संस्थाएं इकने स्थापित की उनमें एक-दो छोटे मोटे अपवाद छोड़कर किसी से कभी चन्दा नहीं लिया केवल अपनी कमाई व उद्योग के बल पर ही सब संस्थाऐं चलाई।
साड में तथा आस पास में हमारे विरुद्ध अब प्रत्यक्ष तो कोई नहीं बोलता था परंतु गुंडो का दमन होजाने से ( व गुडे मुसलमान हो ये इसलिए ) इस भाग में सांप्रदायिकता की भावना कुछ प्रवल होचुकी थी। विद्यार्थियों पर भी इसका असर था, मैंने इस भावना को हटाने का प्रयत्न भी किया, मैं इस साम्प्रदायिकता के बातावरण में से गुरुकुल हटाकर अधिक एकांत में या अन्य सुभीताजनक स्थानपर लेजाना चाहता था, इसी बीन बरसात के कारण हमारी फ़ोडियों में पानी हो पानी भरगया। हम लोग कीं चाडपर पास बिछाकर उसपर बिस्तरे डालकर लेटते थे, हमारे पास न
तो खादें ही थी और न झोपड़ियों के ऊपर ड लनेके लिए टीन के चद्दर हो पे, लक्ष्मीकी श्रब कृपा थी, लक्ष्मी भी कृपा क्यों करें ? जब लक्ष्मी का हमारे पास कोई आदर सम्मान नहीं था, दो सप्ताह तक बरसात जोर से होती रही, काली मिट्टी की चिकनी जमीन थी, हम छोड़कर गांव में
आगये, तो भी बाहर निकलने ही एक डेढ फांट पैर कीचड़ में घंप जाते थे। मेरे पास ग्राने जाने वालों की और भी फजीहत होती थी, गुरुकुल गांव सेतो और गडबडी होगई, दिन चर्या,
विचारों में बाधा पड़ने लगी, मैंनें गुरुकुल व्याड से हटाकर दूर, एकांत में फौरन ही लेजाना निश्चिन किया, व्याङ के मेरे साथी गुरुकुल को अपने गांव का गौरव समझते थे, वे जैसे भी बने गुरुकुल को वहां रखने पर तुले हुए थे। हमारे यास में फूट पड़गई। यदि मैं गुरुकुल वहां से हटाने का प्रयत्न करता हूँ तो गुरुकुल के दो भाग होजावेंगे, विद्यर्थियों के अध्ययन का नुकसान होगा और फिर भी यहां का वातावरण शुद्ध बनाकर काम करने में समय लग जायेगा । इस विद्यालय की कीर्ति खूब फैल चुकी है, गुरुकुल जमा हुआ है, लखपतियों के लड़के थे, चाहे जितनी पूंजी इच्छा करते ही प्राप्त हो सकती थी । मैंने सोचा अच्छा मैं ही यहाँ से हटजाऊं । कई दिनों तक सोचते रह । । अपनी पत्नी को पर भेज दिया। मैंने सोचा चलो अब ऐसे एकांत में चलें जहां कोई अशुद्ध वातावरण नहीं होगा और इस इमारा अलग गांव बसा लेंगे। फिर भी छात्रों को साथ लेने का प्रयत्न करना चाहा परन्तु अन्त में मैं अकेला ही यहां से चलता बना।
( १व्ह }
मेरे पास एक कमीज, एक धोती व एक टोपी जो पहिने हुए था । इसके अलावा कोई वस्त्र या पैसा साथ नहीं लिया । संध्या समय निजाम राज्य के एक गांव में पहुँचा, नदी तैर कर मुझे जाना पंडा था, कपड़े गीले थे, गांवों के लोग मुझे जानते हो थे । उन्होंने मेरा स्वागत किया मैंने उनसे कुछ नहीं कहां वे मेरे लिये सवारी व नौकरों का इंतजाम मेरे साथ ही करके भेजना चाइये । परन्तु किसी से बिना कुछ कहे ही प्रातःकाल जल्दी उठकर वहां से चल दिया। सभी गांवों के लोग मुझे जानते थे । खेतों में से मूंगफली उखाकर खाते हुए व गांवों को टालते हुए, वनस्पति का वैज्ञानिक निरीक्षण चिना साहित्य के जो कुछ कर सकता था करता हुआ, हिंगोली नामक नंगर में गया। यहां के लोगों ने मेरा स्वागत किया, इस गांव में मेरे पास रहे हुए काकी और वे सब लखनति ] मैं किसी विद्या के यहां नहीं गया। मेरे एक मित्र की दूकान पर ठहर गया । मेरा स्वतंत्र रहने का बड़ा ही इंतजाम किया गया। नगर के बड़े २ लोग मुझ से श्राकर मिले । इस नगर में भारवायो -अगरवालों को बहुत सी दुकाने थी। इनमें आपस में बड़ा हो द्वोर था। इनके आपस में मुकदमे बाजी भी चलतो ये व भई २ को कटवाने पिटवाने के लिए मुसलमान नौकर भो रखे हुये थे । इनके हजारों रुपये गुडे व सरकार खा रही थी। इनके पसीभगडों को बड़ा नीट स्वरूप प्राप्त होगया था । हैदराबाद के राजा बहादूर पित्तियों की अगरवालों में बड़ी प्रतिष्ठा, वे भी इनकोसने का प्रयत्न
करके चले गये थे । और भी कई महानुभाव इन्हें समझा चुके थे । मैंने भी इनमें मेल जोल करवाने के लिए इनको समझाने का प्रयत्न किया परन्तु यह कत्र मानने वाले थे ? मैंने इनके आपस का शत्रुहूत्र मिटाने का निश्चय कर लिया । जब ये लोग किसी कदर नही मने i तो मैं दूसरे दिन प्रातःकाल उठकर के गोपालजी के मंदिर में जाकर बैठ गया व अनशन आरंभ कर दिया । मेरे इस उपवास की खबर गांव में फैल गई। मैंने कह दिया कि मैं अन्नग्रहण तमी करूंगा जब यहां की तमाम अग्रवाल जाति में आपस में मेल जोल व प्रेमभाव स्थापित हो जायेगा । अवाल लोग अधिक अकड गये ।
लेकिन ब्राम्हण व महेश्वरी व महाराष्ट्रीयन लोग मुझे मदत कर रहे थे । मेरे उपवाज के दूसरे दिन विद्यार्थी विद्यालयों को छोड़कर अग्रवालों एकी करो के नारे लगाते हुए जुलूम के रूप में फिरने लगे। उपवास का तीसरा दिन हुआ गांव के कई जाति के पंचों ने अग्रवाल पंचों को समझाने का प्रयत्न किया, अमवाल नौजवान घल तो मान गये परन्तु चूढे सजनों ने इनकार कर दिया । अब नगर के लोग श्रमवालों से सहयोग करने लगे । सारा धमवालों के विरूद्ध होगया । मेरे उपवास के चौथे दिन श्रमवालों का नगर में तिरस्कार होने लगा । उनके आपस में पंचायते होने लगी । रात व दिन विचारों ने पंचायती व विचार में ही व्यतीत किया । मेरे - उपवास का पांचवा दिन प्राय, दोनों पक्ष के अग्रवाल पंचों को लेकर शहर के प्रतिष्ठित लोग मेरे सामने मा उपस्थित हुए। अमवाल
लोगों ने मेरी सभी बातें मानली । एक दूसरे के खिलाफ न्यायान्तप में चलने वाले मुकदमे वापस ले लिये । एक पार्टी के लोग दूसरी पार्टी के घर जैने मैं ने कहा जाकर बिना बुलावे ही भोजन कर आये । बाद में मैंने उपवास छोड़ा। बाद में अग्रवालों का एक सहभोज हुवा । उसमें सवाल लोग एक साथ मिलकर बैठे व भोजन किया। इस प्रकार इनकी शत्रुत्व समाप्त हुआ। इन लोगों ने राजा लक्ष्मीनिवास को हैदराबाद से बुलवाकर एक वडा समारोह मेरे सम्मान में किया । मुझे मानपत्र भी भेट किया गया। यहां के अमवाल लोग व अन्य नगरवासी मुझे खूब चाहते थे। इन लोगो ने मुके थैलो भेट करना चाहा, इसके सिवा और इनके पास अधिक प्रिय था ही क्या ? मैंने थैली लेने से इनकार कर दिया, और एक दिन मैं हिंगोली नगर छोड़कर श्रागे पैदल भ्रमय को निकल पड़ा । मेरे पास मेरे जूने काफी अच्छे थे । उनको में संभालकर रखता था। एक जगह एक विद्यार्थी को नंगे पैर कांटो में जाते देख व जूते मैंने उसको वहां दे दिये और नंगे पैर ही पैदल भ्रमण प्रारंभ
कर दिया। इस प्रकार मेरे रहने के लिए व मेरे विद्या प्रचार व अन्य सेवा कार्य के लिए नवा नगर बसाने के लिए स्थान खोजते हुए फिरता रहा दो बार तो हैदराबाद रियासत को पूर्व से पश्चिम तक
पर पैदल ही फिरकर देखी। इस भ्रमण में स्थान २ पर ठहर कर नतियों का रूट प्रेशर अर्थात पोवे भूमि से जड़ों के द्वारा कितना पानी लेते हैं व Transperation अर्यात् पौधे धरने पानों में तथा | समय उनके पास जाकर बैठजाता, सर्वो को प्यार करता । थोड़ा सा भी अनुशासन भंग में सहन नहीं करता। रात्रि को एक दो बार उठकर उनके बिस्तरों के पास जाता कोई उधाया पड़ाहोता तो कृपदा डाल श्राता यह विद्यार्थी मेरा सर्वस्व थे। मैं उनको जितना अच्छा बनाना चाहता था व जितने समय में बनाना चाहता था उसमें यदि कोई त्रुटि आती तो मैं सह नहीं सकता था। यदि किसी विद्यार्थी का प्रति होता दिखताःतो मैं रो पढ़ता था। मेरा कोई छात्र प्रसाद करता तो उसके प्रायश्चित्त स्वरूप या तो मैं एक दिन का या कई दिनों का उपवास कर लेता, या मेरी हथेलियां सामने कर के मेरे अपने ही हाथ से बेंतों से पीटता । मेरे छात्र एवं मैले कुचैले गांवों के लड़कों को जब मैले देखता तो मैं उन्हें अपने हाथ से नल्दाता व उनके कपड़े धो देता। उद्दण्ड बच्चे बड़े ही होशियार निकलते हुए पाये गए हैं । फारसी व फ्रेंच भाषा का अध्यापन भो में करता था । तड़के मेरे थे, वे मेरे सर्वस्व थे । कोई बच्चा किसी दूसरे का है यह तो मैंने कभी समझा ही नहीं, गरीव व श्रीमान का भेद मेरे छात्रों मेंः कभी नहीं रहा, लड़का प्रमाद करता तो मैं उसे बुलाकर हँसाता खिलाता को सजा देता । जिस लड़के को इतवा खिलाया जाता उसके रोने का कोई ठिकाना नहीं रहता, अन्य छात्रों की नजरों से वह को छिपाता। इस का परिणाम यह हुआ कि मेरे छात्र व्यागम व नियमित संयमी जीवन बिता कर हृष्ट-पुष्ट व होशियार निकले हैं । में कुछ शान्ति स्थापित होने पर मैंने विद्यालय को बढ़ाने का काम हाथ में लिया । वर्धा व वक्षं से रामगढ़ कांग्रेस मे सम्मिलित होकर शिक्षाशास्त्रियों से इस विषय में विचार विमर्ष किया। काशी विद्यापीठ व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवम् पुनश्च शान्तिनिकेतन गया। वहांने मेरे कृषि शिक्षा की व्यवस्था को एक निश्चित अच्छा स्वरूप देने को दृष्टि से विविद्यालय देखते दो लाहाबाद काँ कृषि महाविद्यालय जो अमेरिकन चलाते हैं देखा । आचार्य नरेद्र देव जी व पंशून्य जवाहरलाल जी आदि लोगों ने एक अखिल भारतीय औद्योगिक सङ्घ स्थापित किया था उससे कुछ सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न किया व ऐसे किरपिसते व व्याड लागया । च्याइ आते ही इस जिले के अंग्रेज पुलिस सुपरिटेण्डेण्ट को तर गई। इसने मेरे व गांव के कुछ लोगों के विरुद्ध कुछ पुराने मुकदमे चलाना श्रारंभ कर दिया । पहिले ही हमारे व्याड के प्रथम आन्दोलन को कुछ साम्प्रदा यिका का स्वरूप सरकार ने व मुस्लिमलीग के लोगों ने देने का प्रयत्न किया था। अब लड़ने के लिये तो में तैयारथा व जेलखाना भो मेरे लिये कोई बड़ी बात नहीं थी, परन्तु साम्प्रदायिकता का प्रचार में होने देना नहीं चाहता था । अन्त में किसी कदर उन मुकदमों का गर्भ में ही पतन हुआ । वैसे तो कांग्रेस मिनिस्ट्री का काल छोड़ दिया जाय तो गत बीस वर्षों में ऐसा एकभी बर्ष नहीं गया होगा कि उस वर्ष में सरकार ने मेरे विरुद्ध मुकदमे न चलाये हो, ऐसे केसेस कुछ तो गर्भ में ही गिर जाते, कुछमें सरकार द्वार जाती व कुछ मुकदमे अभी तक लटक ही रहे हैं, व सत्याग्रह या आन्दोलनों में हमें जेल हो जाती थी । इस प्रकार गुरुकुल को गरेमियों की छुट्टियों होगई, छात्र अपने घर चले गये, मैं विगाव, घर पर प्रचार करने जाने लगा, जहाँ भी जाता लोग भोजन समारोह करते, वडी बडी सभाएँ होती। मुझे कोई पैदल नहीं चलने देते थे, जो कार होती वहाँ कार नहीं तो. तांगा, गाडी ऋदि सवारियां गे से आगे तैयार रहती, लोग मुझ से प्रार्थना करते कि मैं उनमें आर्थिक सहायता लू । परन्तु किसी से व्याड गुरुकुल के लिए भी चंदा को याचना नहीं की थी । मेरी गरीची चढ़ती ही जारही थीं, यहाँ तक कि गुरुकुल के वार्षिकोत्सव के दिन रातको मेरी झोपडी को आग लग कर जब मेरे बहुत से सामान के साथ मेरे दो कोट मी मम्मो भूत होगये, तो इसके पश्चात् छः वर्ष तक अर्थात् सन् एक हज़ार छः सौ छियालीस तक मैं बिना कोट पहने ही रहा, मेरे लिए नये कोट नहीं बनवा सका था। गुरु का खर्च वडे अंशों में तो विद्यार्थियों से प्राप्त होने वाली गुरुदक्षिणा या मेरे परिभ्रम व पैसे से चल जाता था। मैंने कभी किसी धनवा कासरा खोजने का प्रयत्न नहीं किया । दूसरे वर्ष का गुरुकुल का कार्य प्रारंभ हुआ तो मेरे पास दूर दूर से विद्यार्थी आग्हुचे थे, इन लड़कों में श्रावे लडके तो लखपति सेटों के थे, मैने एक विदेश विभाग भी स्थापित कर लिया था। इस वर्ष तीन विद्याथी इस विभाग से हमारे खरचे से शिक्षा प्राप्त करने जापान मेजने थे । "विद्यार्थी चुनलिये गये थे व उनको जापानी भाषा आदि की निग भी दी जा रही थी । जापानी पढ़ाने वाला अध्यापक न मिलने से मैं स्वयम् जारानी पढ़ाया करता था, सरकार को जापान युद्ध में नेको शंका शेरही थी तो भी मुझे व मेरे विद्यार्थियों के लिये जापान जाने को पास पोर्ट देने का वचन सरकार दे चुकी थी.एक. हमने पासपोर्ट का प्रयत्न करना आरंभ कर दिया । जागन में रहने वाले हिन्दुस्थानियों से संबंध स्थापित किया, मैं मेरे छात्रों के जापान में नव निर्वाह की व्यवस्था उनके परिश्रम से करवाना चाहता था, तमाम जोड तोड़ में बैठा चुका था । जनता चंदा देने को उत्सुक थी, थोड़ा सा चंदा में स्वीकार भी कर लेना चाहता था। परंतु कुछ दिनों बाद सरकार ने हमें पासपोर्ट देने में अपनी असमर्थता प्रकट करदी। अब तक जितनी भी संस्थाएं इकने स्थापित की उनमें एक-दो छोटे मोटे अपवाद छोड़कर किसी से कभी चन्दा नहीं लिया केवल अपनी कमाई व उद्योग के बल पर ही सब संस्थाऐं चलाई। साड में तथा आस पास में हमारे विरुद्ध अब प्रत्यक्ष तो कोई नहीं बोलता था परंतु गुंडो का दमन होजाने से इस भाग में सांप्रदायिकता की भावना कुछ प्रवल होचुकी थी। विद्यार्थियों पर भी इसका असर था, मैंने इस भावना को हटाने का प्रयत्न भी किया, मैं इस साम्प्रदायिकता के बातावरण में से गुरुकुल हटाकर अधिक एकांत में या अन्य सुभीताजनक स्थानपर लेजाना चाहता था, इसी बीन बरसात के कारण हमारी फ़ोडियों में पानी हो पानी भरगया। हम लोग कीं चाडपर पास बिछाकर उसपर बिस्तरे डालकर लेटते थे, हमारे पास न तो खादें ही थी और न झोपड़ियों के ऊपर ड लनेके लिए टीन के चद्दर हो पे, लक्ष्मीकी श्रब कृपा थी, लक्ष्मी भी कृपा क्यों करें ? जब लक्ष्मी का हमारे पास कोई आदर सम्मान नहीं था, दो सप्ताह तक बरसात जोर से होती रही, काली मिट्टी की चिकनी जमीन थी, हम छोड़कर गांव में आगये, तो भी बाहर निकलने ही एक डेढ फांट पैर कीचड़ में घंप जाते थे। मेरे पास ग्राने जाने वालों की और भी फजीहत होती थी, गुरुकुल गांव सेतो और गडबडी होगई, दिन चर्या, विचारों में बाधा पड़ने लगी, मैंनें गुरुकुल व्याड से हटाकर दूर, एकांत में फौरन ही लेजाना निश्चिन किया, व्याङ के मेरे साथी गुरुकुल को अपने गांव का गौरव समझते थे, वे जैसे भी बने गुरुकुल को वहां रखने पर तुले हुए थे। हमारे यास में फूट पड़गई। यदि मैं गुरुकुल वहां से हटाने का प्रयत्न करता हूँ तो गुरुकुल के दो भाग होजावेंगे, विद्यर्थियों के अध्ययन का नुकसान होगा और फिर भी यहां का वातावरण शुद्ध बनाकर काम करने में समय लग जायेगा । इस विद्यालय की कीर्ति खूब फैल चुकी है, गुरुकुल जमा हुआ है, लखपतियों के लड़के थे, चाहे जितनी पूंजी इच्छा करते ही प्राप्त हो सकती थी । मैंने सोचा अच्छा मैं ही यहाँ से हटजाऊं । कई दिनों तक सोचते रह । । अपनी पत्नी को पर भेज दिया। मैंने सोचा चलो अब ऐसे एकांत में चलें जहां कोई अशुद्ध वातावरण नहीं होगा और इस इमारा अलग गांव बसा लेंगे। फिर भी छात्रों को साथ लेने का प्रयत्न करना चाहा परन्तु अन्त में मैं अकेला ही यहां से चलता बना। ( एकव्ह } मेरे पास एक कमीज, एक धोती व एक टोपी जो पहिने हुए था । इसके अलावा कोई वस्त्र या पैसा साथ नहीं लिया । संध्या समय निजाम राज्य के एक गांव में पहुँचा, नदी तैर कर मुझे जाना पंडा था, कपड़े गीले थे, गांवों के लोग मुझे जानते हो थे । उन्होंने मेरा स्वागत किया मैंने उनसे कुछ नहीं कहां वे मेरे लिये सवारी व नौकरों का इंतजाम मेरे साथ ही करके भेजना चाइये । परन्तु किसी से बिना कुछ कहे ही प्रातःकाल जल्दी उठकर वहां से चल दिया। सभी गांवों के लोग मुझे जानते थे । खेतों में से मूंगफली उखाकर खाते हुए व गांवों को टालते हुए, वनस्पति का वैज्ञानिक निरीक्षण चिना साहित्य के जो कुछ कर सकता था करता हुआ, हिंगोली नामक नंगर में गया। यहां के लोगों ने मेरा स्वागत किया, इस गांव में मेरे पास रहे हुए काकी और वे सब लखनति ] मैं किसी विद्या के यहां नहीं गया। मेरे एक मित्र की दूकान पर ठहर गया । मेरा स्वतंत्र रहने का बड़ा ही इंतजाम किया गया। नगर के बड़े दो लोग मुझ से श्राकर मिले । इस नगर में भारवायो -अगरवालों को बहुत सी दुकाने थी। इनमें आपस में बड़ा हो द्वोर था। इनके आपस में मुकदमे बाजी भी चलतो ये व भई दो को कटवाने पिटवाने के लिए मुसलमान नौकर भो रखे हुये थे । इनके हजारों रुपये गुडे व सरकार खा रही थी। इनके पसीभगडों को बड़ा नीट स्वरूप प्राप्त होगया था । हैदराबाद के राजा बहादूर पित्तियों की अगरवालों में बड़ी प्रतिष्ठा, वे भी इनकोसने का प्रयत्न करके चले गये थे । और भी कई महानुभाव इन्हें समझा चुके थे । मैंने भी इनमें मेल जोल करवाने के लिए इनको समझाने का प्रयत्न किया परन्तु यह कत्र मानने वाले थे ? मैंने इनके आपस का शत्रुहूत्र मिटाने का निश्चय कर लिया । जब ये लोग किसी कदर नही मने i तो मैं दूसरे दिन प्रातःकाल उठकर के गोपालजी के मंदिर में जाकर बैठ गया व अनशन आरंभ कर दिया । मेरे इस उपवास की खबर गांव में फैल गई। मैंने कह दिया कि मैं अन्नग्रहण तमी करूंगा जब यहां की तमाम अग्रवाल जाति में आपस में मेल जोल व प्रेमभाव स्थापित हो जायेगा । अवाल लोग अधिक अकड गये । लेकिन ब्राम्हण व महेश्वरी व महाराष्ट्रीयन लोग मुझे मदत कर रहे थे । मेरे उपवाज के दूसरे दिन विद्यार्थी विद्यालयों को छोड़कर अग्रवालों एकी करो के नारे लगाते हुए जुलूम के रूप में फिरने लगे। उपवास का तीसरा दिन हुआ गांव के कई जाति के पंचों ने अग्रवाल पंचों को समझाने का प्रयत्न किया, अमवाल नौजवान घल तो मान गये परन्तु चूढे सजनों ने इनकार कर दिया । अब नगर के लोग श्रमवालों से सहयोग करने लगे । सारा धमवालों के विरूद्ध होगया । मेरे उपवास के चौथे दिन श्रमवालों का नगर में तिरस्कार होने लगा । उनके आपस में पंचायते होने लगी । रात व दिन विचारों ने पंचायती व विचार में ही व्यतीत किया । मेरे - उपवास का पांचवा दिन प्राय, दोनों पक्ष के अग्रवाल पंचों को लेकर शहर के प्रतिष्ठित लोग मेरे सामने मा उपस्थित हुए। अमवाल लोगों ने मेरी सभी बातें मानली । एक दूसरे के खिलाफ न्यायान्तप में चलने वाले मुकदमे वापस ले लिये । एक पार्टी के लोग दूसरी पार्टी के घर जैने मैं ने कहा जाकर बिना बुलावे ही भोजन कर आये । बाद में मैंने उपवास छोड़ा। बाद में अग्रवालों का एक सहभोज हुवा । उसमें सवाल लोग एक साथ मिलकर बैठे व भोजन किया। इस प्रकार इनकी शत्रुत्व समाप्त हुआ। इन लोगों ने राजा लक्ष्मीनिवास को हैदराबाद से बुलवाकर एक वडा समारोह मेरे सम्मान में किया । मुझे मानपत्र भी भेट किया गया। यहां के अमवाल लोग व अन्य नगरवासी मुझे खूब चाहते थे। इन लोगो ने मुके थैलो भेट करना चाहा, इसके सिवा और इनके पास अधिक प्रिय था ही क्या ? मैंने थैली लेने से इनकार कर दिया, और एक दिन मैं हिंगोली नगर छोड़कर श्रागे पैदल भ्रमय को निकल पड़ा । मेरे पास मेरे जूने काफी अच्छे थे । उनको में संभालकर रखता था। एक जगह एक विद्यार्थी को नंगे पैर कांटो में जाते देख व जूते मैंने उसको वहां दे दिये और नंगे पैर ही पैदल भ्रमण प्रारंभ कर दिया। इस प्रकार मेरे रहने के लिए व मेरे विद्या प्रचार व अन्य सेवा कार्य के लिए नवा नगर बसाने के लिए स्थान खोजते हुए फिरता रहा दो बार तो हैदराबाद रियासत को पूर्व से पश्चिम तक पर पैदल ही फिरकर देखी। इस भ्रमण में स्थान दो पर ठहर कर नतियों का रूट प्रेशर अर्थात पोवे भूमि से जड़ों के द्वारा कितना पानी लेते हैं व Transperation अर्यात् पौधे धरने पानों में तथा |
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने शनिवार की रात अपने 17 जिलों में अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर ली। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी, सपा और बसपा ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था। आज पहले चरण के नामांकन का आखिरी दिन है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के हस्ताक्षर से जारी प्रत्याशियों की सूची में अयोध्या से 32' श्रावस्ती से 13' प्रयागराज से 46' बरेली से 33' गोरखपुर से 50' जौनपुर से 38 और आगरा से 14 जिला पंचायत सदस्यों के नाम घोषित किए गए हैं। इसी तरह भदोही से 16, गाजियाबाद से 7' हाथरस से 18' झांसी से 16' कानपुर से 19' महोबा से 14' संतकबीर नगर से 18' सहारनपुर से 44 और हरदोई से 14 प्रत्याशियों की सूची जारी की है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रदेश के 18 जिलों में प्रथम चरण का नामांकन कार्य शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन इन जिलों के 212 विकास खंड व 18 जिला मुख्यालयों पर विभिन्न स्तर के 2,21,464 पदों के लिए नामांकन करने वालों की भारी भीड़ रही। नामांकन के लिए विकास खंड मुख्यालयों पर कई काउंटर बनाए गए थे' ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रथम चरण के नामांकन पत्र रविवार को भी दाखिल किए जा सकेंगे।
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| उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने शनिवार की रात अपने सत्रह जिलों में अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर ली। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी, सपा और बसपा ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था। आज पहले चरण के नामांकन का आखिरी दिन है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के हस्ताक्षर से जारी प्रत्याशियों की सूची में अयोध्या से बत्तीस' श्रावस्ती से तेरह' प्रयागराज से छियालीस' बरेली से तैंतीस' गोरखपुर से पचास' जौनपुर से अड़तीस और आगरा से चौदह जिला पंचायत सदस्यों के नाम घोषित किए गए हैं। इसी तरह भदोही से सोलह, गाजियाबाद से सात' हाथरस से अट्ठारह' झांसी से सोलह' कानपुर से उन्नीस' महोबा से चौदह' संतकबीर नगर से अट्ठारह' सहारनपुर से चौंतालीस और हरदोई से चौदह प्रत्याशियों की सूची जारी की है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रदेश के अट्ठारह जिलों में प्रथम चरण का नामांकन कार्य शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन इन जिलों के दो सौ बारह विकास खंड व अट्ठारह जिला मुख्यालयों पर विभिन्न स्तर के दो,इक्कीस,चार सौ चौंसठ पदों के लिए नामांकन करने वालों की भारी भीड़ रही। नामांकन के लिए विकास खंड मुख्यालयों पर कई काउंटर बनाए गए थे' ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रथम चरण के नामांकन पत्र रविवार को भी दाखिल किए जा सकेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
पंचायत चुनाव पहले चरण के मतदान के बाद गुरुवार रात मतपेटी सील न होने का आरोप लगाते हुए प्रधान प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने कैंट के कांधरपुर और भुता के केसरपुर ग्राम पंचायत में बवाल किया। उन्होंने पीठासीन अधिकारी समेत बस को आग लगाने की धमकी दी। इतना ही नहीं, मौके पर पहुंची पुलिस पर पथराव कर दिया। सीओ का एक सिपाही पत्थर लगने से घायल हो गये। पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ा। दोनों थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
गुरुवार को पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद कांधरपुर के पीठासीन अधिकारी बॉक्स लेकर बस से जाने की तैयारी में थे। इसी दौरान एक प्रधान पद के प्रत्याशी ने उनकी बस को घेर लिया। कहा कि बगैर सील किये मतपेटियों को क्यों ले जा रहे हो। इसके बाद उसने दूसरे प्रत्याशी से मिलीभगत करने और रिश्वत का आरोप लगाते हुये हंगामा किया। पीठासीन अधिकारी से कहासुनी हुई। आरोप है कि प्रधान पद प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने बस में आग लगा कर जिंदा जलाने की धमकी दी। मामले की सूचना पर पुलिस पहुंची पुलिस पर भी हमलावरों ने पथराव कर दिया। पथराव में सीओ प्रथम दिलीप सिंह का हमराह सिपाही सूरज सिंह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर हमलावरों को वहां से खदेड़ा। पुलिस ने छह से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। सीओ कैंट थाने पहुंचे। निर्वाचन कर्मियों को बुलाकर हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है।
कांधरपुर में कुछ लोगों ने पीठासीन अधिकारी और बस का घेराव किया था। उन्होंने पथराव कर दिया। जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया है। सभी हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। केसरपुर में भी सभी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
| पंचायत चुनाव पहले चरण के मतदान के बाद गुरुवार रात मतपेटी सील न होने का आरोप लगाते हुए प्रधान प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने कैंट के कांधरपुर और भुता के केसरपुर ग्राम पंचायत में बवाल किया। उन्होंने पीठासीन अधिकारी समेत बस को आग लगाने की धमकी दी। इतना ही नहीं, मौके पर पहुंची पुलिस पर पथराव कर दिया। सीओ का एक सिपाही पत्थर लगने से घायल हो गये। पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ा। दोनों थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। गुरुवार को पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद कांधरपुर के पीठासीन अधिकारी बॉक्स लेकर बस से जाने की तैयारी में थे। इसी दौरान एक प्रधान पद के प्रत्याशी ने उनकी बस को घेर लिया। कहा कि बगैर सील किये मतपेटियों को क्यों ले जा रहे हो। इसके बाद उसने दूसरे प्रत्याशी से मिलीभगत करने और रिश्वत का आरोप लगाते हुये हंगामा किया। पीठासीन अधिकारी से कहासुनी हुई। आरोप है कि प्रधान पद प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने बस में आग लगा कर जिंदा जलाने की धमकी दी। मामले की सूचना पर पुलिस पहुंची पुलिस पर भी हमलावरों ने पथराव कर दिया। पथराव में सीओ प्रथम दिलीप सिंह का हमराह सिपाही सूरज सिंह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर हमलावरों को वहां से खदेड़ा। पुलिस ने छह से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। सीओ कैंट थाने पहुंचे। निर्वाचन कर्मियों को बुलाकर हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है। कांधरपुर में कुछ लोगों ने पीठासीन अधिकारी और बस का घेराव किया था। उन्होंने पथराव कर दिया। जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया है। सभी हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। केसरपुर में भी सभी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। |
Jamshedpur : बिरसानगर थाना क्षेत्र में अपराधियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है. ताजा मामला क्षेत्र के जोन नंबर-तीन/डी स्थित शिवपथ निवासी पूर्व सैनिक धनेश्वर बारीक के घर अपराधियों का धावा बोलने का है. इस दौरान अपराधियों ने करीब पांच घंटे तक उत्पात मचाया. घर की खिड़की से मोबाइल और चुक्के में रखे पैसे निकाल लिए. इतना ही नहीं, घर में तोड़-फोड़ की और पूर्व सैनिक की पत्नी को जान से मारने की धमकी भी दी. धनेश्वर बारीक सेना से रिटायर होने के बाद टाटा स्टील के सुरक्षा विभाग में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं. इस घटना से घर वाले दहशत में हैं.
घटना तब घटी जब धनेश्वर बीती रात ड्यूटी पर गए हुए थे. घर में उनकी पत्नी शकुंतला बारीक अकेली थी. रात करीब पौने ग्यारह बजे दो अपराधी दीवार फांदकर घुसे और आगे की खिड़की से मोबाइल और चुक्का में रखे कुछ पैसे निकाल लिए. उसके बाद दोनों घर के पीछे की ओर गए और वहां रखे ईट और लोहे के अन्य सामानों को औजार बनाकर घर के अंदर घुसने की कोशिश करने लगे. इसका आभास होते ही शकुंतला बारीक ने शोर मचाना शुरु कर दिया. उसके बाद अपराधियों ने धमकी देते हुए कहा कि उनका मोबाइल पहले ही निकाल लिया है, अगर घर का दरवाजा नहीं खोला तो वे लोग उसे जान से मार देंगे. हालांकि, शकुंतला ने साहस दिखाते हुए घर का दरवाजा नहीं खोला, जिससे अपराधी घर के भीतर नहीं घुस सके. बावजूद इसके दोनों अपराधी घर के दरवाजे के कुंडी, वेंटिलेटर और एसी में तोड़फोड़ कर घर में घुसने का प्रयास किया. यहां तक कि घर के छत पर चढ़कर भी दरवाजे में तोड़फोड़ की. यह दौर भोर के करीब चार-साढ़े चार बजे तक चला. उसी बीच पूर्व सैनिक के घर के सामने रहने वाले अमरेंद्र सिंह के पिता की नींद खुली, तब उन्हें शकुंतला की शोर सुनाई दी. इस बीच आस-पास के लोगों को भी मामले की जानकारी मिल गई. तब तक अपराधी फरार हो चुके थे. घटना की जानकारी धनेश्वर बारीक को तब मिली जब सुबह वे घर पहुंचे. उन्होंने घटना की लिखित शिकायत बिरसानगर थाने में की है. मामला थाना पहुंचने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है.
इधर सीटीवी फुटेज की जांच करने पर घर की चाहरदीवारी फांदकर आते-जाते युवक को देखा गया. घरवालों ने पुलिस को सीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए हैं. उस आधार पर युवक की पहचान कर पुलिस आगे की कर रही है.
स्थानीय लोगों की माने तो घटना के पीछे नशेड़ियों का हाथ हो सकता है. उनका कहना है कि उनका घर पहाड़ की ऊंचाई पर स्थित है. उसके आगे रास्ता नहीं है. इस कारण पिछले कुछ दिनों से घर के आस-पास नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों को आना-जाना ज्यादा होने लगा है. पुलिस से क्षेत्र में ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई है.
| Jamshedpur : बिरसानगर थाना क्षेत्र में अपराधियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है. ताजा मामला क्षेत्र के जोन नंबर-तीन/डी स्थित शिवपथ निवासी पूर्व सैनिक धनेश्वर बारीक के घर अपराधियों का धावा बोलने का है. इस दौरान अपराधियों ने करीब पांच घंटे तक उत्पात मचाया. घर की खिड़की से मोबाइल और चुक्के में रखे पैसे निकाल लिए. इतना ही नहीं, घर में तोड़-फोड़ की और पूर्व सैनिक की पत्नी को जान से मारने की धमकी भी दी. धनेश्वर बारीक सेना से रिटायर होने के बाद टाटा स्टील के सुरक्षा विभाग में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं. इस घटना से घर वाले दहशत में हैं. घटना तब घटी जब धनेश्वर बीती रात ड्यूटी पर गए हुए थे. घर में उनकी पत्नी शकुंतला बारीक अकेली थी. रात करीब पौने ग्यारह बजे दो अपराधी दीवार फांदकर घुसे और आगे की खिड़की से मोबाइल और चुक्का में रखे कुछ पैसे निकाल लिए. उसके बाद दोनों घर के पीछे की ओर गए और वहां रखे ईट और लोहे के अन्य सामानों को औजार बनाकर घर के अंदर घुसने की कोशिश करने लगे. इसका आभास होते ही शकुंतला बारीक ने शोर मचाना शुरु कर दिया. उसके बाद अपराधियों ने धमकी देते हुए कहा कि उनका मोबाइल पहले ही निकाल लिया है, अगर घर का दरवाजा नहीं खोला तो वे लोग उसे जान से मार देंगे. हालांकि, शकुंतला ने साहस दिखाते हुए घर का दरवाजा नहीं खोला, जिससे अपराधी घर के भीतर नहीं घुस सके. बावजूद इसके दोनों अपराधी घर के दरवाजे के कुंडी, वेंटिलेटर और एसी में तोड़फोड़ कर घर में घुसने का प्रयास किया. यहां तक कि घर के छत पर चढ़कर भी दरवाजे में तोड़फोड़ की. यह दौर भोर के करीब चार-साढ़े चार बजे तक चला. उसी बीच पूर्व सैनिक के घर के सामने रहने वाले अमरेंद्र सिंह के पिता की नींद खुली, तब उन्हें शकुंतला की शोर सुनाई दी. इस बीच आस-पास के लोगों को भी मामले की जानकारी मिल गई. तब तक अपराधी फरार हो चुके थे. घटना की जानकारी धनेश्वर बारीक को तब मिली जब सुबह वे घर पहुंचे. उन्होंने घटना की लिखित शिकायत बिरसानगर थाने में की है. मामला थाना पहुंचने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है. इधर सीटीवी फुटेज की जांच करने पर घर की चाहरदीवारी फांदकर आते-जाते युवक को देखा गया. घरवालों ने पुलिस को सीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए हैं. उस आधार पर युवक की पहचान कर पुलिस आगे की कर रही है. स्थानीय लोगों की माने तो घटना के पीछे नशेड़ियों का हाथ हो सकता है. उनका कहना है कि उनका घर पहाड़ की ऊंचाई पर स्थित है. उसके आगे रास्ता नहीं है. इस कारण पिछले कुछ दिनों से घर के आस-पास नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों को आना-जाना ज्यादा होने लगा है. पुलिस से क्षेत्र में ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई है. |
कोरोना की दवाइयों और उससे जुड़े उपकरणों पर पांच फीसदी की दर पर जीएसटी लगेगा. जबकि, दूसरी दवाइयों को पांच से 12 फीसदी की जीएसटी दर पर बेचा जा रहा है.
कोरोना की दवाइयों (Covid-19 Medicines) और उससे जुड़े उपकरणों पर पांच फीसदी की दर पर जीएसटी (GST) लगेगा. जबकि, दूसरी दवाइयों को पांच से 12 फीसदी की जीएसटी दर (GST Rates) पर बेचा जा रहा है. यह रेट महामारी (Covid-19 Pandemic) की शुरुआत से बना हुआ है. यह जानकारी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी है. चौधरी ने यह भी कहा कि देश में सरकार द्वारा प्रायोजित 66 फीसदी स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) योजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा है. उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि जब कोविड-19 महामारी शुरू हुई थी, उस समय सभी दवाइयों को 5 से 12 फीसदी की जीएसटी दर पर बेचने का फैसला किया गया था.
इसके आगे उन्होंने बताया कि कोविड-19 से संबंधित दवाइयों और उपकरणों के लिए जीएसटी दर को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है.
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा के लिए जीएसटी दर 18 फीसदी है, जो अंतरराष्ट्रीय मापदंडों और उसके सामान है, जो देश में कोरोना से पहले के दिनों के दौरान थी. उन्होंने आगे कहा कि वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर एक लाख रुपये तक के टैक्स रिबेट का फायदा ले सकते हैं.
चौधरी ने कहा कि सभी सेवाओं (जिसमें स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी शामिल है) पर जीएसटी छूट जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों पर दी गई है. जीएसटी काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री और अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा नामित मंत्री भी शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में, हेल्थ इंश्योरेंस सेवाओं पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) 18 फीसदी की दर पर लगाया जा रहा है.
इसके अलावा आपको बता दें कि ईंट का कारोबार करने वालों के लिए जीएसटी बढ़ गया है. शुक्रवार से ईंट कारोबारी कंपोजिशन स्कीम को चुन सकते हैं, जिसके तहत उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना 6 फीसदी जीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा. यह पहले के 5 फीसदी से ज्यादा होगा. जो कारोबारी कंपोजिशन स्कीम को चुनना नहीं चाहते हैं, उन्हें आईटीसी के साथ 12 फीसदी जीएसटी देना होगा. सरकार ने 31 मार्च को जीएसटी दरों के बारे में नोटिफिकेशन जारी किया है. ये रेट्स 1 अप्रैल से लागू होंगे. नोटिफिकेशन के मुताबिक, ईंटों, टाइल्स, फ्लाई एश ब्रिक्स और ब्लॉक्स, फॉसिल मील्स की ब्रिक्स के लिए कंपोजिशन स्कीम को चुना जा सकता है.
| कोरोना की दवाइयों और उससे जुड़े उपकरणों पर पांच फीसदी की दर पर जीएसटी लगेगा. जबकि, दूसरी दवाइयों को पांच से बारह फीसदी की जीएसटी दर पर बेचा जा रहा है. कोरोना की दवाइयों और उससे जुड़े उपकरणों पर पांच फीसदी की दर पर जीएसटी लगेगा. जबकि, दूसरी दवाइयों को पांच से बारह फीसदी की जीएसटी दर पर बेचा जा रहा है. यह रेट महामारी की शुरुआत से बना हुआ है. यह जानकारी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी है. चौधरी ने यह भी कहा कि देश में सरकार द्वारा प्रायोजित छयासठ फीसदी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा है. उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि जब कोविड-उन्नीस महामारी शुरू हुई थी, उस समय सभी दवाइयों को पाँच से बारह फीसदी की जीएसटी दर पर बेचने का फैसला किया गया था. इसके आगे उन्होंने बताया कि कोविड-उन्नीस से संबंधित दवाइयों और उपकरणों के लिए जीएसटी दर को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है. मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा के लिए जीएसटी दर अट्ठारह फीसदी है, जो अंतरराष्ट्रीय मापदंडों और उसके सामान है, जो देश में कोरोना से पहले के दिनों के दौरान थी. उन्होंने आगे कहा कि वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर एक लाख रुपये तक के टैक्स रिबेट का फायदा ले सकते हैं. चौधरी ने कहा कि सभी सेवाओं पर जीएसटी छूट जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों पर दी गई है. जीएसटी काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री और अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा नामित मंत्री भी शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में, हेल्थ इंश्योरेंस सेवाओं पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अट्ठारह फीसदी की दर पर लगाया जा रहा है. इसके अलावा आपको बता दें कि ईंट का कारोबार करने वालों के लिए जीएसटी बढ़ गया है. शुक्रवार से ईंट कारोबारी कंपोजिशन स्कीम को चुन सकते हैं, जिसके तहत उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना छः फीसदी जीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा. यह पहले के पाँच फीसदी से ज्यादा होगा. जो कारोबारी कंपोजिशन स्कीम को चुनना नहीं चाहते हैं, उन्हें आईटीसी के साथ बारह फीसदी जीएसटी देना होगा. सरकार ने इकतीस मार्च को जीएसटी दरों के बारे में नोटिफिकेशन जारी किया है. ये रेट्स एक अप्रैल से लागू होंगे. नोटिफिकेशन के मुताबिक, ईंटों, टाइल्स, फ्लाई एश ब्रिक्स और ब्लॉक्स, फॉसिल मील्स की ब्रिक्स के लिए कंपोजिशन स्कीम को चुना जा सकता है. |
मुंबई : भोजपुरी (Bhojpuri) एक्ट्रेस (Actress) मोनालिसा (Monalisa) अपने सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो आए दिन अपने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट शेयर करती रहती हैं। फैंस भी उनके पोस्ट के बड़े दिवाने हैं। वो अक्सर अपने कातिलाना अंदाज के लिए सुर्खियों में रहती है। हाल ही में अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ बोल्ड लेटेस्ट तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें वो गोल्डन शिमरी गाउन में नजर आ रही हैं।
मोनालिसा स्मोकी मेकअप के साथ डार्क शेड लिपस्टिक लगाई है। उन्होंने अपने बालों को स्ट्रेट लुक दिया है। मोनालिसा कानों में स्टाइलिश इयरिंग्स और अपने हाथ की कलाई में गोल्डन कंगन पहने नजर आ रही हैं। मोनालिसा ने कैमरे के सामने एक से बढ़कर एक कातिलाना पोज दी हैं।
उन्होंने तस्वीरों को शेयर करते हुए पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'सुनहरा रहिए' मोनालिसा के इस हॉट लुक पोस्ट पर फैंस के लाइक्स और कमेंट्स का तांता लगा हुआ है। उनके इन तस्वीरों को उनके पति विक्रांत सिंह ने भी लाइक किया है। मोनालिसा के इस पोस्ट को अब तक 27 हजार से भी अधिक लोग लाइक कर चुके हैं। मोनालिसा इन दिनों 'रात्रि के यात्री' के सीजन 2 को लेकर सुर्खियों में हैं।
| मुंबई : भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा अपने सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो आए दिन अपने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट शेयर करती रहती हैं। फैंस भी उनके पोस्ट के बड़े दिवाने हैं। वो अक्सर अपने कातिलाना अंदाज के लिए सुर्खियों में रहती है। हाल ही में अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ बोल्ड लेटेस्ट तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें वो गोल्डन शिमरी गाउन में नजर आ रही हैं। मोनालिसा स्मोकी मेकअप के साथ डार्क शेड लिपस्टिक लगाई है। उन्होंने अपने बालों को स्ट्रेट लुक दिया है। मोनालिसा कानों में स्टाइलिश इयरिंग्स और अपने हाथ की कलाई में गोल्डन कंगन पहने नजर आ रही हैं। मोनालिसा ने कैमरे के सामने एक से बढ़कर एक कातिलाना पोज दी हैं। उन्होंने तस्वीरों को शेयर करते हुए पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'सुनहरा रहिए' मोनालिसा के इस हॉट लुक पोस्ट पर फैंस के लाइक्स और कमेंट्स का तांता लगा हुआ है। उनके इन तस्वीरों को उनके पति विक्रांत सिंह ने भी लाइक किया है। मोनालिसा के इस पोस्ट को अब तक सत्ताईस हजार से भी अधिक लोग लाइक कर चुके हैं। मोनालिसा इन दिनों 'रात्रि के यात्री' के सीजन दो को लेकर सुर्खियों में हैं। |
उत्तर प्रदेश । । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के किले को ढहाना इतना आसान नहीं है, ये सपाइयों ने साबित कर दिया है। सपा के गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी में सपाइयों ने चाचा शिवपाल यादव के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान सपा खेमे से अलग हुए नेताओं की समाजवादी पार्टी में वापसी करा दी गई है। उस दौरान जितने भी नेता सपा से अलग हुए थे, वे ज्यादातर शिवपाल यादव की नई पार्टी में पहुंच गए थे।
मैनपुरी में सांसद तेज प्रताप यादव की मौजूदगी में सपा जिला कार्यालय पर मासिक बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अनुजेश प्रताप यादव, सपा जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा, पूर्व राज्यमंत्री तोताराम यादव, सपा मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय सचिव हरिओम मिश्रा, सपा युवजन सभा के प्रदेश सचिव राजेश खटीक सहित कई बड़े नेता मौजूद थे। इनकी मौजूदगी में कुरावली से जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव व पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव ठेकेदार ने सपा में वापसी की।
इन दोनों नेताओं की बात की जाए, तो ये शिवपाल सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते थे। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले सैफई परिवार में जब कलह हुई, तो शिवपाल यादव के साथ सबसे आगे ये नेता नजर आए। इतना ही नहीं इन नेताओं ने सपा से इस्तीफा दिया। विधानसभा चुनाव 2017 में खुलकर तो नहीं, लेकिन इन नेताओं द्वारा बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी का साथ दिया गया था।
अभी तक चर्चा ये थी, कि जल्द ही ये नेता शिवपाल यादव के साथ दिखाई देंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इन दोनों नेताओं ने शिवपाल यादव को ठुकराते हुए दोबारा समाजवादी पार्टी में वापसी कर ली है। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव ने बताया कि समाजवादी पार्टी पुराना घर हैं, वहां वापसी की है। शिवपाल यादव से नजदीकी के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी न किसी से नजदीकी तो होती है। इसमें कोई खास बात नहीं है।
| उत्तर प्रदेश । । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के किले को ढहाना इतना आसान नहीं है, ये सपाइयों ने साबित कर दिया है। सपा के गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी में सपाइयों ने चाचा शिवपाल यादव के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। विधानसभा चुनाव दो हज़ार सत्रह के दौरान सपा खेमे से अलग हुए नेताओं की समाजवादी पार्टी में वापसी करा दी गई है। उस दौरान जितने भी नेता सपा से अलग हुए थे, वे ज्यादातर शिवपाल यादव की नई पार्टी में पहुंच गए थे। मैनपुरी में सांसद तेज प्रताप यादव की मौजूदगी में सपा जिला कार्यालय पर मासिक बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अनुजेश प्रताप यादव, सपा जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा, पूर्व राज्यमंत्री तोताराम यादव, सपा मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय सचिव हरिओम मिश्रा, सपा युवजन सभा के प्रदेश सचिव राजेश खटीक सहित कई बड़े नेता मौजूद थे। इनकी मौजूदगी में कुरावली से जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव व पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव ठेकेदार ने सपा में वापसी की। इन दोनों नेताओं की बात की जाए, तो ये शिवपाल सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते थे। विधानसभा चुनाव दो हज़ार सत्रह से पहले सैफई परिवार में जब कलह हुई, तो शिवपाल यादव के साथ सबसे आगे ये नेता नजर आए। इतना ही नहीं इन नेताओं ने सपा से इस्तीफा दिया। विधानसभा चुनाव दो हज़ार सत्रह में खुलकर तो नहीं, लेकिन इन नेताओं द्वारा बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी का साथ दिया गया था। अभी तक चर्चा ये थी, कि जल्द ही ये नेता शिवपाल यादव के साथ दिखाई देंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इन दोनों नेताओं ने शिवपाल यादव को ठुकराते हुए दोबारा समाजवादी पार्टी में वापसी कर ली है। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव ने बताया कि समाजवादी पार्टी पुराना घर हैं, वहां वापसी की है। शिवपाल यादव से नजदीकी के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी न किसी से नजदीकी तो होती है। इसमें कोई खास बात नहीं है। |
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार भारत ने इतिहास रच दिया. दस साल पुराना रिकार्ड तोड़कर नया वर्ल्ड रिकार्ड बनाया गया. इस मौके पर राजपथ पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मानव के आंतरिक विकास के लिए योग बेहद जरूरी है. प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश-दुनिया के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए मोदी ने कहा कि योग शरीर तथा मन को संतुलित करने का माध्यम और मानवता, प्रेम, शांति, एकता, सद्भाव के भाव को जीवन में उतारने का कार्यक्रम है.
| अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार भारत ने इतिहास रच दिया. दस साल पुराना रिकार्ड तोड़कर नया वर्ल्ड रिकार्ड बनाया गया. इस मौके पर राजपथ पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मानव के आंतरिक विकास के लिए योग बेहद जरूरी है. प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश-दुनिया के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए मोदी ने कहा कि योग शरीर तथा मन को संतुलित करने का माध्यम और मानवता, प्रेम, शांति, एकता, सद्भाव के भाव को जीवन में उतारने का कार्यक्रम है. |
"हर घर तिरंगा" अभियान को लेकर अब नई सियासत शुरू हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने 52 सालों तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा क्यों नहीं फहराया। इस सवाल का एक टीवी डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब दिया है। उन्होंने कांग्रेस के इन आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है।
बीजेपी प्रवक्ता ने श्रीनगर में 10 सालों तक झंडा ना फहराने की अनुमति का हवाला देते हुए कांग्रेस को घेरा और कहा कि आपने तिरंगे के साथ गजब का न्याय किया है। उन्होंने कहा कि आजाद हिंदुस्तान में 1988 से 1998 तक दस साल श्रीनगर के लाल चौक में राज्यपाल झंडा नहीं फहरा सकता था।
उन्होंने कहा कि 1992 में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी वहां गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया कि श्रीनगर में झंडा नहीं फहराने देंगे। इसके बाद साल 2012-13 में जब अनुराग ठाकुर युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे, तब सुषमा स्वराज, अरुण जेटली , अनंत कुमार को गिरफ्तार कर लिया कि श्रीनगर में झंडा नहीं फहराने देंगे।
बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा कि इतिहास गवाह है, 'हर घर तिरंगा' मुहीम चलाने वाले, उस देशद्रोही संगठन से निकले हैं, जिन्होंने 52 सालों तक तिरंगा नहीं फहराया। आजादी की लड़ाई से ये कांग्रेस पार्टी को तब भी नहीं रोक पाए और आज भी नहीं रोक पाएंगे।
| "हर घर तिरंगा" अभियान को लेकर अब नई सियासत शुरू हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने बावन सालों तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा क्यों नहीं फहराया। इस सवाल का एक टीवी डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब दिया है। उन्होंने कांग्रेस के इन आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। बीजेपी प्रवक्ता ने श्रीनगर में दस सालों तक झंडा ना फहराने की अनुमति का हवाला देते हुए कांग्रेस को घेरा और कहा कि आपने तिरंगे के साथ गजब का न्याय किया है। उन्होंने कहा कि आजाद हिंदुस्तान में एक हज़ार नौ सौ अठासी से एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे तक दस साल श्रीनगर के लाल चौक में राज्यपाल झंडा नहीं फहरा सकता था। उन्होंने कहा कि एक हज़ार नौ सौ बानवे में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी वहां गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया कि श्रीनगर में झंडा नहीं फहराने देंगे। इसके बाद साल दो हज़ार बारह-तेरह में जब अनुराग ठाकुर युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे, तब सुषमा स्वराज, अरुण जेटली , अनंत कुमार को गिरफ्तार कर लिया कि श्रीनगर में झंडा नहीं फहराने देंगे। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा कि इतिहास गवाह है, 'हर घर तिरंगा' मुहीम चलाने वाले, उस देशद्रोही संगठन से निकले हैं, जिन्होंने बावन सालों तक तिरंगा नहीं फहराया। आजादी की लड़ाई से ये कांग्रेस पार्टी को तब भी नहीं रोक पाए और आज भी नहीं रोक पाएंगे। |
मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस पर कड़ी पाबंदियां लगाने की बात कही है। बाइडेन ने कहा की यदि उनके समकक्ष रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नहीं रोका गया तो वे और आगे बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा की यदि रूस ने नाटो देशों पर हमला किया तो अमरीका हस्तक्षेप करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकोमोस के चीफ दिमित्रि रोगोजिन ने जवाब दिया है। रोगोजिन ने कहा की अगर वॉशिंगटन ने सहयोग करना बंद किया, तो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISIS) को अनियंत्रित डोरबिट से कौन बचाएगा?
जानकारी के अनुसार, रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकोमोस के प्रमुख दिमित्रि रोगोजिन ने अमेरिका को धमकी भरे लहजे में चेतवानी देते हुए कहा की गर आप हमारे साथ सहयोग को रोकते हैं, तो आईएसएस को अनियंत्रित रूप से परिक्रमा करने और संयुक्त राज्य या यूरोप में गिरने से कौन बचाएगा? ' रोगोजिन ने एक ट्वीट थ्रेड में धमकी भरे लहजे में कहा- 'रूस के पास भारत और चीन के लिए 500 टन के ढांचे को छोड़ने का विकल्प भी है। '
रोगोजिन ने आगे कहा कि 'आईएसएस रूस के ऊपर से नहीं उड़ता है, इसलिए सभी जोखिम आपके हवाले हैं. क्या आप उनके लिए तैयार हैं? ' उन्होंने आगे कहा कि ' या तो हम साथ काम करें जिसके लिए अमेरिका को फौरन ही पाबंदियां हटानी होगी या फिर हम साथ काम नहीं करेंगे और हम खुद का ही स्टेशन स्थापित करेंगे। '
| मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस पर कड़ी पाबंदियां लगाने की बात कही है। बाइडेन ने कहा की यदि उनके समकक्ष रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नहीं रोका गया तो वे और आगे बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा की यदि रूस ने नाटो देशों पर हमला किया तो अमरीका हस्तक्षेप करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकोमोस के चीफ दिमित्रि रोगोजिन ने जवाब दिया है। रोगोजिन ने कहा की अगर वॉशिंगटन ने सहयोग करना बंद किया, तो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अनियंत्रित डोरबिट से कौन बचाएगा? जानकारी के अनुसार, रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकोमोस के प्रमुख दिमित्रि रोगोजिन ने अमेरिका को धमकी भरे लहजे में चेतवानी देते हुए कहा की गर आप हमारे साथ सहयोग को रोकते हैं, तो आईएसएस को अनियंत्रित रूप से परिक्रमा करने और संयुक्त राज्य या यूरोप में गिरने से कौन बचाएगा? ' रोगोजिन ने एक ट्वीट थ्रेड में धमकी भरे लहजे में कहा- 'रूस के पास भारत और चीन के लिए पाँच सौ टन के ढांचे को छोड़ने का विकल्प भी है। ' रोगोजिन ने आगे कहा कि 'आईएसएस रूस के ऊपर से नहीं उड़ता है, इसलिए सभी जोखिम आपके हवाले हैं. क्या आप उनके लिए तैयार हैं? ' उन्होंने आगे कहा कि ' या तो हम साथ काम करें जिसके लिए अमेरिका को फौरन ही पाबंदियां हटानी होगी या फिर हम साथ काम नहीं करेंगे और हम खुद का ही स्टेशन स्थापित करेंगे। ' |
राज्य विरोधी वातावरण धीरे धीरे अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगा। मई, १६२५ मे भलवर राज्य की दो तहमीलों बानसूर भोर गाजी काथाना में भरकार द्वारा लागू किए गए नए करो को लेकर एक प्रादोलन छिड़ गया । जनता का कहना था कि उन पर पहने हो कर भार बहुत है और अब और अधिक वर नहीं दिए जा सकते। परंतु महाराजा जयसिंह ने किसानों की स्थिति सुधारने पर कोई ध्यान नहीं दिया और दमन चक्र का सहारा लिया १४ मई १९२५ को राज्य की सशस्त्र सेनाओं ने उपर्युक्त दोनों गावों को घेर लिया और बिना किमी चेतावनी के शात किसानों पर गोनी चनाई । यहा तक कि स्त्रियो तक को नहीं छोड़ा गया और बडे ही निर्लज्जता पूर्ण ढंग से उन्हें अपमानित किया गया। ऐमा विश्वास किया जाता है कि इस गोलीबारी मे कम से कम ३५३ मकान जलकर नष्ट हो गए जिनमे ७१ पशु भी जीवित जल गए भौर लगभग ५०००० रुपए से लेकर १००००० रुपए तक की सम्पति लूटी गयी। इसके अतिरिक्त लगभग ६५ व्यक्ति घटनास्थल पर ही मारे गए जबकि २५० से अधिक घायल हुए। इस घटना ने समूचे राज्य में प्रातक फैला दिया।
परन्तु सरकार की दमन नीति जारी रही। १९२७२८ मे महाराजा अलवर के प्रदेश के अन्तर्गत बाहर से आने वाले आधे दर्जन से अधिक समा चार पत्रो के राज्य प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। आदेश में यहां तक कहा गया था कि यदि प्रतिवधित समाचार पत्रों का एक भी किसी नागरिक के पास वरामद हुआ तो उम पर पाच हजार रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है और यदि आवश्यकता हुई तो उसे राज्य मे निष्कासित भी किया जा सकता है। इस दमनकारी नीति का परिणाम यह हुआ कि महाराजा जनता में बहुत प्रिय हो गए औौर जन वे सनातन धर्म सभा बी एक बैठक मे भाग लेने के लिए पहुंचे तो जनता ने शर्म शम के नारे लगाए स्थिति यहा तक विगडी कि महाराजा को पुलिस सुरक्षा में बाहर ले जाया गया । मेव आंदोलन
राज्य की शिक्षानीति के परिणामस्वरूप मुसलमानों में बहुत अधिक प्रमोष था। मुसलमानो की माग थी कि राज्य में कुरान की शिक्षा देने पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए और उर्दू माध्यम से भी शिक्षा दी जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इन मार्गों के साथ १९३२ में मुस्लिम प्रादोलन प्रारम्भ हुधा महाराजा का कहना था कि वास्तव में मुस्लिम यांदोवन में कोई
रामे रा. मान्दोलन श्री राजनैतिक सम्यामों को स्थापना ८१
धीरे-धीरे बढ़ता गया और राज्य की सोमा के बाहर तक पहुन गया। स्थिति यहा तर बिगडगुडा और गेह मे मे मुसलमानों के जत्ये अनवर राज्य में प्रलये और उन्होंने सीबी कार्यवाही करने तक को धमकी दो स्थिति को बिगडा देसर महाराजा अलवर ने ब्रिटिश सरकार से तुरंत सैनिक सहायता भेजने का अनुरोध किया । ब्रिटिश सरकार ने तुरन्त वार्यवाही की और जनवरी १६३३ को ब्रिटिश सेनाए अलवर पहुन गयो तथा शीघ्र ही शाति और उदा स्थापित हो गई । ब्रिटिश सरकार ने महाराजा को परामर्श दिया कि वे ब्रिटिश अधिकारियो को राजस्व मंत्री और मदा प्रारी पुलिस के रूप में नियुक्त बाध्य होहर पनि महारानी सहमति दे दो।
ससवन वास्तविकता यह थी कि ब्रिटिश सरकार महाराजा से प्रमन्न नहीं पी जैसाकि हम देव चुरे हैं, महाराजा काटिल ब्रिटिश विशेरी या पट्टी कारण है कि विटा सरकार ने महाराजा म यह मनुरोध किया कि वे भरनी समस्त शक्तिया प्रधान मन्त्री एम यो वादनको सौर दो वर्ष के लिए राज्य से बाहर बने जाए अन्यथा उनके विरुद्ध एक प्रयोग स्थापित किया जायगा, जो उनके कार्यकलापोंजाच वरेगा । असत. महाराज को राज्य छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा और पेचने गए। बाद में अक्टूबर १९३७ में उन्हें वापिस राज्य में सौटन की अनुमति मिली ।
उत्तरदायो सरकार को माग .
र १९३७ मे जैसे ही महाराजा यावर राज्य में वाशिम लौटे तो लोकप्रिय सरकार की स्थापना की माग को लेकर दो डि गया। १६३८ में राज्य में प्रजामण्डल की स्थापना हुई। राज्य सरकार ने दमनकारी नीति का लिया और व्यक्ति को कर लिया जमण
स्वरूप त्रिपाठी, प्रधान, काग्रेम नमैदो, प्रजाम के सचित्र हरि नारायण शर्मा और काग्रेस कमेटी के सचिव राधाचरण गुप्त भी मिल थे। इन सभी को दो वर्ष के कठोर वागवान का दे दिया गया। इनके अतिरिक्त दो अन्य कार्यइन्दरसिंह माजाद पदको एक-एक वर्ग के माधारण कारावास का दमिना राज्य की दमनकारी नीति का परिणाम यह हुमा कि समूचे राज्य में एक तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थिति का अध्ययन करने के लिए हरिभाऊ उपाध्याय ने राज्य की मात्रा की, नागरिको ने काग्रेस | राज्य विरोधी वातावरण धीरे धीरे अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगा। मई, एक हज़ार छः सौ पच्चीस मे भलवर राज्य की दो तहमीलों बानसूर भोर गाजी काथाना में भरकार द्वारा लागू किए गए नए करो को लेकर एक प्रादोलन छिड़ गया । जनता का कहना था कि उन पर पहने हो कर भार बहुत है और अब और अधिक वर नहीं दिए जा सकते। परंतु महाराजा जयसिंह ने किसानों की स्थिति सुधारने पर कोई ध्यान नहीं दिया और दमन चक्र का सहारा लिया चौदह मई एक हज़ार नौ सौ पच्चीस को राज्य की सशस्त्र सेनाओं ने उपर्युक्त दोनों गावों को घेर लिया और बिना किमी चेतावनी के शात किसानों पर गोनी चनाई । यहा तक कि स्त्रियो तक को नहीं छोड़ा गया और बडे ही निर्लज्जता पूर्ण ढंग से उन्हें अपमानित किया गया। ऐमा विश्वास किया जाता है कि इस गोलीबारी मे कम से कम तीन सौ तिरेपन मकान जलकर नष्ट हो गए जिनमे इकहत्तर पशु भी जीवित जल गए भौर लगभग पचास हज़ार रुपयापए से लेकर एक लाख रुपयापए तक की सम्पति लूटी गयी। इसके अतिरिक्त लगभग पैंसठ व्यक्ति घटनास्थल पर ही मारे गए जबकि दो सौ पचास से अधिक घायल हुए। इस घटना ने समूचे राज्य में प्रातक फैला दिया। परन्तु सरकार की दमन नीति जारी रही। एक लाख बानवे हज़ार सात सौ अट्ठाईस मे महाराजा अलवर के प्रदेश के अन्तर्गत बाहर से आने वाले आधे दर्जन से अधिक समा चार पत्रो के राज्य प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। आदेश में यहां तक कहा गया था कि यदि प्रतिवधित समाचार पत्रों का एक भी किसी नागरिक के पास वरामद हुआ तो उम पर पाच हजार रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है और यदि आवश्यकता हुई तो उसे राज्य मे निष्कासित भी किया जा सकता है। इस दमनकारी नीति का परिणाम यह हुआ कि महाराजा जनता में बहुत प्रिय हो गए औौर जन वे सनातन धर्म सभा बी एक बैठक मे भाग लेने के लिए पहुंचे तो जनता ने शर्म शम के नारे लगाए स्थिति यहा तक विगडी कि महाराजा को पुलिस सुरक्षा में बाहर ले जाया गया । मेव आंदोलन राज्य की शिक्षानीति के परिणामस्वरूप मुसलमानों में बहुत अधिक प्रमोष था। मुसलमानो की माग थी कि राज्य में कुरान की शिक्षा देने पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए और उर्दू माध्यम से भी शिक्षा दी जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इन मार्गों के साथ एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में मुस्लिम प्रादोलन प्रारम्भ हुधा महाराजा का कहना था कि वास्तव में मुस्लिम यांदोवन में कोई रामे रा. मान्दोलन श्री राजनैतिक सम्यामों को स्थापना इक्यासी धीरे-धीरे बढ़ता गया और राज्य की सोमा के बाहर तक पहुन गया। स्थिति यहा तर बिगडगुडा और गेह मे मे मुसलमानों के जत्ये अनवर राज्य में प्रलये और उन्होंने सीबी कार्यवाही करने तक को धमकी दो स्थिति को बिगडा देसर महाराजा अलवर ने ब्रिटिश सरकार से तुरंत सैनिक सहायता भेजने का अनुरोध किया । ब्रिटिश सरकार ने तुरन्त वार्यवाही की और जनवरी एक हज़ार छः सौ तैंतीस को ब्रिटिश सेनाए अलवर पहुन गयो तथा शीघ्र ही शाति और उदा स्थापित हो गई । ब्रिटिश सरकार ने महाराजा को परामर्श दिया कि वे ब्रिटिश अधिकारियो को राजस्व मंत्री और मदा प्रारी पुलिस के रूप में नियुक्त बाध्य होहर पनि महारानी सहमति दे दो। ससवन वास्तविकता यह थी कि ब्रिटिश सरकार महाराजा से प्रमन्न नहीं पी जैसाकि हम देव चुरे हैं, महाराजा काटिल ब्रिटिश विशेरी या पट्टी कारण है कि विटा सरकार ने महाराजा म यह मनुरोध किया कि वे भरनी समस्त शक्तिया प्रधान मन्त्री एम यो वादनको सौर दो वर्ष के लिए राज्य से बाहर बने जाए अन्यथा उनके विरुद्ध एक प्रयोग स्थापित किया जायगा, जो उनके कार्यकलापोंजाच वरेगा । असत. महाराज को राज्य छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा और पेचने गए। बाद में अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में उन्हें वापिस राज्य में सौटन की अनुमति मिली । उत्तरदायो सरकार को माग . र एक हज़ार नौ सौ सैंतीस मे जैसे ही महाराजा यावर राज्य में वाशिम लौटे तो लोकप्रिय सरकार की स्थापना की माग को लेकर दो डि गया। एक हज़ार छः सौ अड़तीस में राज्य में प्रजामण्डल की स्थापना हुई। राज्य सरकार ने दमनकारी नीति का लिया और व्यक्ति को कर लिया जमण स्वरूप त्रिपाठी, प्रधान, काग्रेम नमैदो, प्रजाम के सचित्र हरि नारायण शर्मा और काग्रेस कमेटी के सचिव राधाचरण गुप्त भी मिल थे। इन सभी को दो वर्ष के कठोर वागवान का दे दिया गया। इनके अतिरिक्त दो अन्य कार्यइन्दरसिंह माजाद पदको एक-एक वर्ग के माधारण कारावास का दमिना राज्य की दमनकारी नीति का परिणाम यह हुमा कि समूचे राज्य में एक तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थिति का अध्ययन करने के लिए हरिभाऊ उपाध्याय ने राज्य की मात्रा की, नागरिको ने काग्रेस |
- 21 min ago ब्रालेट दिखाने के लिए हर एंगल से क्लिक कीं तस्वीरें, 21 साल की हसीना को देख इंटरनेट पर आई सुनामी!
- 23 min ago अविनाश सचदेव का दो ब्रेकअप के बाद फिर धड़क रहा इस हसीना के लिए दिल, कहा- 'तुम मुझे पसंद हो'
Don't Miss!
इन दिनों बिग बॉस ओटीटी 2 काफ़ी सुर्खियां बटोर रहा है। इतना ही नहीं इस शो में कंटेस्टेंट भी काफी ज्यादा अच्छा खेल रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल जैड और आकांक्षा का एक लिप लॉक किसिंग वीडियो वायरल हो रहा है। बिग बॉस के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब खुलेआम ऐसा वीडियो वायरल हो गया। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सलमान खान, जिन्होंने इस बात का दावा किया था कि इस बिग बॉस सीजन को वह एक फैमिली शो बनाएंगे। लेकिन जब से सोशल मीडिया पर इस किसिंग वीडियो को लोगों ने देखा है तभी से वह भड़क गए हैं। इतना ही नहीं अब सलमान खान की कही बात पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं।
लेकिन अगर हम पूरे मामले की बात करें तो आपको बता दें कि ब्लैक और वाइट टीम के बीच में एक टास्क हुआ। उसी वक्त जैड और आकांक्षा को एक दूसरे को किस करने का भी डेयर मिल गया था। लेकिन अविनाश सचदेवा ने इस बात की घोषणा तब कर दी जब पूरी टीम इस बात पर चर्चा करने में लगी हुई थी कि किस कितने वक्त के लिए होगी। जिसके बाद में सब ने डिसाइड किया कि 30 सैकेंड तक किस रखनी चाहिए। जिसके बाद में आकांक्षा और जैड ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिया और बाकी के सारे घर वाले भी हूट करते हुए वायरल वीडियो में नजर आए।
लेकिन अब दूसरी तरफ जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वैसे ही पूरे इंटरनेट पर बवाल मच गया। एक तरफ तो लोग इसका मजाक बना रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ लोगों का गुस्सा भी फूट रहा है। बता दें कि लोग इस वीडियो को लेकर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। एक यूजर ने लिखा कि "आकांक्षा और जैड लिप किस कर लेंगे। मुझे ऐसा लग रहा है कि सिर्फ एक यही टास्क जैड अच्छी तरह से कर पाएंगे। दोनों ने इस टास्क को बहुत ही शिद्दत से पूरा किया है। " वहीं एक और यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है कि "इस बार बहुत ही ज्यादा अनफिल्टर्ड और बिना सेंसर के इन्होंने किया है। "
जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस टास्क के खत्म हो जाने के बाद में जैड ने अविनाश को कहां की आकांक्षा बहुत ही बुरी किसर है। जिसके बाद में एक्ट्रेस भी हंसने लग जाती है। देखने को मिला है कि जैड पहले दिल से ही आकांक्षा को पसंद करने लगे हैं। लेकिन अब यह कहानी किस पर आकर रुक गई है। अब जल्दी ही फैंस को वीकेंड का वार का इंतजार है और लोग जानना चाहते हैं कि सलमान खान आकर इन दोनों को क्या नसीहत देंगे? जब इस शो की शुरुआत की गई थी तो सलमान खान ने इस बात का दावा किया था कि यह एक फैमिली शो के रूप में दर्शाया जाएगा और अब उनके दावों की पोल खुल चुकी है।
| - इक्कीस मिनट ago ब्रालेट दिखाने के लिए हर एंगल से क्लिक कीं तस्वीरें, इक्कीस साल की हसीना को देख इंटरनेट पर आई सुनामी! - तेईस मिनट ago अविनाश सचदेव का दो ब्रेकअप के बाद फिर धड़क रहा इस हसीना के लिए दिल, कहा- 'तुम मुझे पसंद हो' Don't Miss! इन दिनों बिग बॉस ओटीटी दो काफ़ी सुर्खियां बटोर रहा है। इतना ही नहीं इस शो में कंटेस्टेंट भी काफी ज्यादा अच्छा खेल रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल जैड और आकांक्षा का एक लिप लॉक किसिंग वीडियो वायरल हो रहा है। बिग बॉस के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब खुलेआम ऐसा वीडियो वायरल हो गया। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सलमान खान, जिन्होंने इस बात का दावा किया था कि इस बिग बॉस सीजन को वह एक फैमिली शो बनाएंगे। लेकिन जब से सोशल मीडिया पर इस किसिंग वीडियो को लोगों ने देखा है तभी से वह भड़क गए हैं। इतना ही नहीं अब सलमान खान की कही बात पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। लेकिन अगर हम पूरे मामले की बात करें तो आपको बता दें कि ब्लैक और वाइट टीम के बीच में एक टास्क हुआ। उसी वक्त जैड और आकांक्षा को एक दूसरे को किस करने का भी डेयर मिल गया था। लेकिन अविनाश सचदेवा ने इस बात की घोषणा तब कर दी जब पूरी टीम इस बात पर चर्चा करने में लगी हुई थी कि किस कितने वक्त के लिए होगी। जिसके बाद में सब ने डिसाइड किया कि तीस सैकेंड तक किस रखनी चाहिए। जिसके बाद में आकांक्षा और जैड ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिया और बाकी के सारे घर वाले भी हूट करते हुए वायरल वीडियो में नजर आए। लेकिन अब दूसरी तरफ जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वैसे ही पूरे इंटरनेट पर बवाल मच गया। एक तरफ तो लोग इसका मजाक बना रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ लोगों का गुस्सा भी फूट रहा है। बता दें कि लोग इस वीडियो को लेकर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। एक यूजर ने लिखा कि "आकांक्षा और जैड लिप किस कर लेंगे। मुझे ऐसा लग रहा है कि सिर्फ एक यही टास्क जैड अच्छी तरह से कर पाएंगे। दोनों ने इस टास्क को बहुत ही शिद्दत से पूरा किया है। " वहीं एक और यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है कि "इस बार बहुत ही ज्यादा अनफिल्टर्ड और बिना सेंसर के इन्होंने किया है। " जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस टास्क के खत्म हो जाने के बाद में जैड ने अविनाश को कहां की आकांक्षा बहुत ही बुरी किसर है। जिसके बाद में एक्ट्रेस भी हंसने लग जाती है। देखने को मिला है कि जैड पहले दिल से ही आकांक्षा को पसंद करने लगे हैं। लेकिन अब यह कहानी किस पर आकर रुक गई है। अब जल्दी ही फैंस को वीकेंड का वार का इंतजार है और लोग जानना चाहते हैं कि सलमान खान आकर इन दोनों को क्या नसीहत देंगे? जब इस शो की शुरुआत की गई थी तो सलमान खान ने इस बात का दावा किया था कि यह एक फैमिली शो के रूप में दर्शाया जाएगा और अब उनके दावों की पोल खुल चुकी है। |
देहरादून। देहरादून को पॉलीथीन - प्लास्टिक मुफ्त बनाने के लिए नगर निगम देहरादून लगातार कोशिश कर रहा है। इसी के मद्देनजर आज नगर निगम देहरादून के सहयोग से उत्तराखंड सचिवालय में सचिवालय अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक जागरूकता रैली निकाली।
पॉलिथीन प्लास्टिक मुक्त रैली को सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर देहरादून के मेयर और सचिवालय के कई अधिकारियों ने शिरकत की । रैली सचिवालय से लेकर घंटाघर तक निकाली गई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के आह्वान पर ये अभियान देहरादून में ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में चलाया जा रहा है।
देहरादून को पॉलिथीन प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए देहरादून के सभी लोगो को इस अभियान से जुड़ना होगा तभी जाकर देहरादून पॉलिथीन प्लस्टिक मुक्त होगा। सचिवालय अधिकारियों और कर्मचारियों की ये पहल भी इस अभियान में कारगर साबित होगी।
देहरादून को प्लास्टिक पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए नगर निगम पिछले कई हफ्तों अभियान चला रहा है। कई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके है जिसका असर नज़र भी आ रहा है 5 नवम्बर को नगर निगम इसी अभियान के तहत एक 50 किलोमीटर लंबी मानव श्रंखला बनाने जा रहा है ताकि देहरादून के लोग को प्लास्टिक मुक्त बनाने लिए संदेश दिया का सके।
देहरादून के नगर आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय का कहना है कि यदि 5 नवंबर के बाद देहरादून ने कोई भी प्लास्टिक पॉलिथीन का इस्तेमाल करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
| देहरादून। देहरादून को पॉलीथीन - प्लास्टिक मुफ्त बनाने के लिए नगर निगम देहरादून लगातार कोशिश कर रहा है। इसी के मद्देनजर आज नगर निगम देहरादून के सहयोग से उत्तराखंड सचिवालय में सचिवालय अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक जागरूकता रैली निकाली। पॉलिथीन प्लास्टिक मुक्त रैली को सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर देहरादून के मेयर और सचिवालय के कई अधिकारियों ने शिरकत की । रैली सचिवालय से लेकर घंटाघर तक निकाली गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के आह्वान पर ये अभियान देहरादून में ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में चलाया जा रहा है। देहरादून को पॉलिथीन प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए देहरादून के सभी लोगो को इस अभियान से जुड़ना होगा तभी जाकर देहरादून पॉलिथीन प्लस्टिक मुक्त होगा। सचिवालय अधिकारियों और कर्मचारियों की ये पहल भी इस अभियान में कारगर साबित होगी। देहरादून को प्लास्टिक पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए नगर निगम पिछले कई हफ्तों अभियान चला रहा है। कई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके है जिसका असर नज़र भी आ रहा है पाँच नवम्बर को नगर निगम इसी अभियान के तहत एक पचास किलोग्राममीटर लंबी मानव श्रंखला बनाने जा रहा है ताकि देहरादून के लोग को प्लास्टिक मुक्त बनाने लिए संदेश दिया का सके। देहरादून के नगर आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय का कहना है कि यदि पाँच नवंबर के बाद देहरादून ने कोई भी प्लास्टिक पॉलिथीन का इस्तेमाल करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। |
( तदैवाऽग्निस्तदादित्यस्तद्वायुरित्यादि ० य० संहिता प्र०, इन्द्रं मित्रं वरुणमित्यादि० ऋ० सं० प्र०, बृहस्पतिवें ब्रह्म गणपतिर्वै ब्रह्म, प्रारणो वै ब्रह्म, ब्रह्म, आपो : वे ब्रह्म, नहा हाग्निरित्यादि शतपथ ऐतरेय त्राक्षणादि० प्र०, और महान्तमेवाः त्मानमित्यादि ० ) निरुक्तादि प्रमाणों से परब्रह्म ही अर्थ लिया जाता है । तथा : मुखाग्निरजायतेत्यादि ० य० सं० प्र०, वायोरन्भिरित्यादि० ब्राह्मण प्र० तथा अ भिरमणीर्भवतीत्यादि • निरुक्क प्रमाणों से यह प्रत्यक्ष जो रूप गुणवाला दाह प्रकारायुक्त भौतिक अप्नेि यह लिया जाता है इत्यादि दृढ़ प्रमाण, युक्ति और प्रत्यक्ष व्यवहार से दोनों अर्थ वेदभाप्य में लिखे जायेंगे जिससे सायणादिकृत भाष्यदोष और उसके अनुसार अंग्रेजी कृतार्थ दोपरूप वेदों के कलंक निवृत्त हो जायँगे और वेदों के सत्यार्थ का प्रकाश होने से, वेदों का महत्व तथा वेदों का अनन्तार्थ जानने से मनुष्यों को महालाभ और वेदों में यथावत् प्रीति होगी । इस ग्रन्थ से तो केवल मनुष्यों को ईश्वर का स्वरूप ज्ञान और भक्ति, धर्मनिष्ठा, व्यवहारशुद्धि इत्यादि प्रयोजन सिद्ध होंगे जिससे नास्तिक और पाखण्ड मतादि अधर्म में मनुष्य न फसें । कि सब प्रकार के मनुष्य अति उत्तम हों और सर्वशक्तिमान् जगदीश्वर की कृपा सब मनुष्यों पर हो, जिससे सब मनुष्य दुष्टता को छोड़ के श्रेष्ठता को स्वीकार करें, यह मेरी परमात्मा से प्रार्थना है सो परमेश्वर अवश्य पूरी करेगा।
इत्युपक्रमणिका संचेपतः सम्पूर्ण ॥
wwwyour wwvvv | निरुक्तादि प्रमाणों से परब्रह्म ही अर्थ लिया जाता है । तथा : मुखाग्निरजायतेत्यादि शून्य यशून्य संशून्य प्रशून्य, वायोरन्भिरित्यादिशून्य ब्राह्मण प्रशून्य तथा अ भिरमणीर्भवतीत्यादि • निरुक्क प्रमाणों से यह प्रत्यक्ष जो रूप गुणवाला दाह प्रकारायुक्त भौतिक अप्नेि यह लिया जाता है इत्यादि दृढ़ प्रमाण, युक्ति और प्रत्यक्ष व्यवहार से दोनों अर्थ वेदभाप्य में लिखे जायेंगे जिससे सायणादिकृत भाष्यदोष और उसके अनुसार अंग्रेजी कृतार्थ दोपरूप वेदों के कलंक निवृत्त हो जायँगे और वेदों के सत्यार्थ का प्रकाश होने से, वेदों का महत्व तथा वेदों का अनन्तार्थ जानने से मनुष्यों को महालाभ और वेदों में यथावत् प्रीति होगी । इस ग्रन्थ से तो केवल मनुष्यों को ईश्वर का स्वरूप ज्ञान और भक्ति, धर्मनिष्ठा, व्यवहारशुद्धि इत्यादि प्रयोजन सिद्ध होंगे जिससे नास्तिक और पाखण्ड मतादि अधर्म में मनुष्य न फसें । कि सब प्रकार के मनुष्य अति उत्तम हों और सर्वशक्तिमान् जगदीश्वर की कृपा सब मनुष्यों पर हो, जिससे सब मनुष्य दुष्टता को छोड़ के श्रेष्ठता को स्वीकार करें, यह मेरी परमात्मा से प्रार्थना है सो परमेश्वर अवश्य पूरी करेगा। इत्युपक्रमणिका संचेपतः सम्पूर्ण ॥ wwwyour wwvvv |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो ।
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद )
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद )
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
लखनऊ, भारत। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने आज शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को समर्थन देने का बड़ा ऐलान किया है। ओम प्रकाश राजभर के ऐलान के बाद से सियासी गलियारों में कयास तेज हो गई है।
द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी ओपी राजभर की पार्टीः
बता दें कि, उत्तर प्रदेश की सियासत में शुक्रवार को बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने ऐलान करते हुए कहा कि, राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को उनकी पार्टी समर्थन करेगी।
ओपी राजभर ने कही यह बातः
SBSP के अध्यक्ष ओ. पी. राजभर ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, "CM योगी ने मुझे बुलाकर कहा कि आप पिछड़े, दलित, वंचित की लड़ाई लड़ते हैं। आप द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करें। मैंने उनसे मुलाकात की। जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात हुई। उनसे बात होने के बाद हमने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन का ऐलान किया है। "
ओपी राजभर ने आगे कहा कि, "समाजवादी पार्टी के नेता को हमारी जरूरत नहीं है। प्रेस वार्ता में जयंत चौधरी को बुला लेते हैं, लेकिन ओपी राजभर को न बुलाना। राज्यसभा चुनाव आया तो राज्यसभा जयंत चौधरी को दे देना, MLC चुनाव में हमें न पूछना। उनकी तरफ से नजर अंदाज करने वाली चीजें हो रही हैं। "
जानकारी के लिए बता दें कि, पिछले कुछ दिनों से ओपी राजभर और अखिलेश यादव के बीच तल्खियां खुलकर सामने आ गई है। उपचुनाव में मिली हार के बाद से ओपी राजभर, अखिलेश यादव पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव के बारे में कहा था कि, उनके पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद से सपा कोई चुनाव नहीं जीती है।
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| लखनऊ, भारत। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने आज शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का बड़ा ऐलान किया है। ओम प्रकाश राजभर के ऐलान के बाद से सियासी गलियारों में कयास तेज हो गई है। द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी ओपी राजभर की पार्टीः बता दें कि, उत्तर प्रदेश की सियासत में शुक्रवार को बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने ऐलान करते हुए कहा कि, राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को उनकी पार्टी समर्थन करेगी। ओपी राजभर ने कही यह बातः SBSP के अध्यक्ष ओ. पी. राजभर ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, "CM योगी ने मुझे बुलाकर कहा कि आप पिछड़े, दलित, वंचित की लड़ाई लड़ते हैं। आप द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करें। मैंने उनसे मुलाकात की। जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात हुई। उनसे बात होने के बाद हमने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन का ऐलान किया है। " ओपी राजभर ने आगे कहा कि, "समाजवादी पार्टी के नेता को हमारी जरूरत नहीं है। प्रेस वार्ता में जयंत चौधरी को बुला लेते हैं, लेकिन ओपी राजभर को न बुलाना। राज्यसभा चुनाव आया तो राज्यसभा जयंत चौधरी को दे देना, MLC चुनाव में हमें न पूछना। उनकी तरफ से नजर अंदाज करने वाली चीजें हो रही हैं। " जानकारी के लिए बता दें कि, पिछले कुछ दिनों से ओपी राजभर और अखिलेश यादव के बीच तल्खियां खुलकर सामने आ गई है। उपचुनाव में मिली हार के बाद से ओपी राजभर, अखिलेश यादव पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव के बारे में कहा था कि, उनके पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद से सपा कोई चुनाव नहीं जीती है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें। |
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पूजा भट्ट की नई खोज इंडो-कैनेडियन पोर्न स्टार सन्नी लियोन ने अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म 'जिस्म 2' से ही अपने इंटिमेट और किसिंग सीन्स से इतनी सुर्खियां बटोर लीं कि सन्नी के नाम से ही फिल्म को देखने के लिए लोगों का हजूम उमड़ पड़ा। जिस्म 2 ने रिलीज के पहले तीन दिनों में ही कुल 22 करोड़ का बिजनेस कर लिया। इस तरह इस फिल्म ने अपने बजट के हिसाब से काफी अच्छी कमाई की। फिल्म में रणदीप हुड्डा के साथ सन्नी के इंटिमेट सीन्स और साथ में किसिंग सीन काफी चर्चा में रहे।
पूजा भट्ट की 'जिस्म 2' में सन्नी लियोन के साथ रणदीप हुड्डा और अरुणोदय सिंह भी मुख्य किरदार में नज़र आए। जिस्म 2 रिलीज होने से पहले ही हिट करार दे दी गई। इससे जुड़े इतने विवाद थे कि फिल्म ने लगातार दो महीने तक खुद को सुर्खियों में बनाए रखा।
Sunny Leone entered in Bollywood with Pooja Bhatt's Jism 2. Her kissing and intimate scenes made her famous actress of Bollywood. Here are the top liplocks of Bollywood.
| Don't Miss! पूजा भट्ट की नई खोज इंडो-कैनेडियन पोर्न स्टार सन्नी लियोन ने अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म 'जिस्म दो' से ही अपने इंटिमेट और किसिंग सीन्स से इतनी सुर्खियां बटोर लीं कि सन्नी के नाम से ही फिल्म को देखने के लिए लोगों का हजूम उमड़ पड़ा। जिस्म दो ने रिलीज के पहले तीन दिनों में ही कुल बाईस करोड़ का बिजनेस कर लिया। इस तरह इस फिल्म ने अपने बजट के हिसाब से काफी अच्छी कमाई की। फिल्म में रणदीप हुड्डा के साथ सन्नी के इंटिमेट सीन्स और साथ में किसिंग सीन काफी चर्चा में रहे। पूजा भट्ट की 'जिस्म दो' में सन्नी लियोन के साथ रणदीप हुड्डा और अरुणोदय सिंह भी मुख्य किरदार में नज़र आए। जिस्म दो रिलीज होने से पहले ही हिट करार दे दी गई। इससे जुड़े इतने विवाद थे कि फिल्म ने लगातार दो महीने तक खुद को सुर्खियों में बनाए रखा। Sunny Leone entered in Bollywood with Pooja Bhatt's Jism दो. Her kissing and intimate scenes made her famous actress of Bollywood. Here are the top liplocks of Bollywood. |
दिल्ली सरकार ने शहर में इलेक्ट्रिक ऑटो की खरीद और रजिस्ट्रेशन की सुविधा के लिए माई ईवी नामक एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने का ऐलान किया है। ऑनलाइन पोर्टल इच्छुक ग्राहकों को approved vehicles के कई ऑप्शन भी देगा।
हिंदुस्तान जिंक दुनिया की बड़ी जस्ता-सीसा-चांदी उत्पादक कंपनी है, इसने हाल ही में अपने बेड़े में कई इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया है। इसमें टाटा नेक्सॉन ईवी, इलेक्ट्रिक स्कूटर और खदानों के लिए underground service EV शामिल हैं।
एस्टन मार्टिन ने इसका नया टीज़र शेयर किया है, जिसनें वी12 इंजन की आवाज को सुना जा सकता है। कार निर्माता ने कहा कि 'वी12 वैंटेज के इंजन में जबरदस्त ताकत मिलती है। ये एक बेहद आरामदायक लग्जरी कार है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है, ऐसे में सीएनजी सस्ता होने से वाहन चालकों को इसका फायदा मिलेगा। वहीं सीएनजी ईंधन से प्रदूषण पर भी कंट्रोल होगा।
यह रेमन सर्वर ट्रे दो इलेक्ट्रिक मोटर्स का उपयोग करती है जो स्वतंत्र रूप से संचालित होती हैं और विशेष रूप से इंजीनियरों द्वारा ट्यून की जाती हैं, ये ट्रे निसान व्हीकल में भी इस्तेमाल की जाती हैं, जो कार सवार को किसी भी स्थिति में झटके नहीं लगने देती है।
| दिल्ली सरकार ने शहर में इलेक्ट्रिक ऑटो की खरीद और रजिस्ट्रेशन की सुविधा के लिए माई ईवी नामक एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने का ऐलान किया है। ऑनलाइन पोर्टल इच्छुक ग्राहकों को approved vehicles के कई ऑप्शन भी देगा। हिंदुस्तान जिंक दुनिया की बड़ी जस्ता-सीसा-चांदी उत्पादक कंपनी है, इसने हाल ही में अपने बेड़े में कई इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया है। इसमें टाटा नेक्सॉन ईवी, इलेक्ट्रिक स्कूटर और खदानों के लिए underground service EV शामिल हैं। एस्टन मार्टिन ने इसका नया टीज़र शेयर किया है, जिसनें वीबारह इंजन की आवाज को सुना जा सकता है। कार निर्माता ने कहा कि 'वीबारह वैंटेज के इंजन में जबरदस्त ताकत मिलती है। ये एक बेहद आरामदायक लग्जरी कार है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है, ऐसे में सीएनजी सस्ता होने से वाहन चालकों को इसका फायदा मिलेगा। वहीं सीएनजी ईंधन से प्रदूषण पर भी कंट्रोल होगा। यह रेमन सर्वर ट्रे दो इलेक्ट्रिक मोटर्स का उपयोग करती है जो स्वतंत्र रूप से संचालित होती हैं और विशेष रूप से इंजीनियरों द्वारा ट्यून की जाती हैं, ये ट्रे निसान व्हीकल में भी इस्तेमाल की जाती हैं, जो कार सवार को किसी भी स्थिति में झटके नहीं लगने देती है। |
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