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जैसलमेर, 7 फरवरी/ पत्रा सूचना कार्यालय, जोधपुर की ओर से 9 से 11 फरवरी शनिवार से सोमवार तक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मैदान, पोकरण में आयोजित भारत निर्माण जन सूचना अभियान का पूर्व प्रचार आज से शुरू हो गया । अभियान के प्रचार वाहन को उप खण्ड अधिकारी पोकरण श्री चांदमल वर्मा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। प्रचार वाहन के माध्यम से माईकिंग करते हुए पोकरण एवं आसपास के गांवों में अभियान के पेम्पलेट तथा अन्य प्रचार सामग्री का वितरण किया गया।
अभियान के नोडल अधिकारी राजेश मीणा ने बताया कि पूर्व प्रचार में क्षेत्राीय प्रचार निदेशालय की जोधपुर, बाड़मेर एवं जैसलमेर इकाईयों ने भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्रचार इकाईयों ने अभियान के संबंध में गांवों में प्रचार सामग्री का वितरण, मौखिक संवाद, प्रदर्शनी, संगोष्ठी और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा चलचित्रा प्रदर्शन कर आमजन को अभियान में आकर विभिन्न योजना और सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
| जैसलमेर, सात फरवरी/ पत्रा सूचना कार्यालय, जोधपुर की ओर से नौ से ग्यारह फरवरी शनिवार से सोमवार तक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मैदान, पोकरण में आयोजित भारत निर्माण जन सूचना अभियान का पूर्व प्रचार आज से शुरू हो गया । अभियान के प्रचार वाहन को उप खण्ड अधिकारी पोकरण श्री चांदमल वर्मा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। प्रचार वाहन के माध्यम से माईकिंग करते हुए पोकरण एवं आसपास के गांवों में अभियान के पेम्पलेट तथा अन्य प्रचार सामग्री का वितरण किया गया। अभियान के नोडल अधिकारी राजेश मीणा ने बताया कि पूर्व प्रचार में क्षेत्राीय प्रचार निदेशालय की जोधपुर, बाड़मेर एवं जैसलमेर इकाईयों ने भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्रचार इकाईयों ने अभियान के संबंध में गांवों में प्रचार सामग्री का वितरण, मौखिक संवाद, प्रदर्शनी, संगोष्ठी और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा चलचित्रा प्रदर्शन कर आमजन को अभियान में आकर विभिन्न योजना और सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। |
आप सभी को बता दें हाल ही में राहुल गांधी की हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा में कमल हासन भी शामिल हुए थे. जी हाँ और सुपरस्टार का यह ट्वीट हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा में शामिल होने के एक दिन बाद किया गया. ऐसे में अब कमल ट्रोल भी हो रहे हैं. आपको बता दें कि यात्रा में शामिल होने के दौरान लाल किले पर हुई जनसभा में साउथ स्टार कमल हासन ने भाषण भी दिया था. उस दौरान दिल्ली में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदी या इंग्लिश में नहीं बल्कि तमिल में भाषण दिया था.
| आप सभी को बता दें हाल ही में राहुल गांधी की हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा में कमल हासन भी शामिल हुए थे. जी हाँ और सुपरस्टार का यह ट्वीट हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा में शामिल होने के एक दिन बाद किया गया. ऐसे में अब कमल ट्रोल भी हो रहे हैं. आपको बता दें कि यात्रा में शामिल होने के दौरान लाल किले पर हुई जनसभा में साउथ स्टार कमल हासन ने भाषण भी दिया था. उस दौरान दिल्ली में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदी या इंग्लिश में नहीं बल्कि तमिल में भाषण दिया था. |
नई दिल्लीः करतारपुर साहिब गलियारे को लेकर पाकिस्तान ने हमेशा से काफी बेकरारी और दिलचस्पी दिखाई है. अब जब कोरोना महामारी के कारण यह कॉरिडोर बंद हुआ तो पाकिस्तान ने बगैर भारत से सलाह किए कॉरिडोर खोलने की तारीख की घोषणा कर दी है. पाकिस्तान सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर गलियारे को लगभग तीन महीने बाद 29 जून यानी कल सोमवार से खोलना चाहता है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा कि 29 जून को महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि है. हम चाहते हैं कि इस दिन गलियारा खोल दिया जाए. इसके लिए हम भारत से बात कर रहे हैं. वहीं भारत सरकार ने पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर को वर्तमान हालात में वापस खोलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. भारत सरकार ने कहा कि ये सद्भावना के नाम पर भ्रम फैलाने का प्रयास है.
भारत ने कहा कि समझौते के अनुसार, दोनों सरकारों को दोबारा करतारपुर गलियारा खोलने के लिए एक दूसरे को 1 हफ्ते का समय देना आवश्यक है, किन्तु पाकिस्तान केवल 2 दिन के अंदर ही कॉरिडोर को फिर से खोलने की बात कर रहा है. अब इस मामले में अंतिम फैसला गृह मंत्रालय लेगा. आपको बता दें कि कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनज़र 15 मार्च को करतारपुर कॉरिडोर को बंद करने का फैसला लिया गया था.
| नई दिल्लीः करतारपुर साहिब गलियारे को लेकर पाकिस्तान ने हमेशा से काफी बेकरारी और दिलचस्पी दिखाई है. अब जब कोरोना महामारी के कारण यह कॉरिडोर बंद हुआ तो पाकिस्तान ने बगैर भारत से सलाह किए कॉरिडोर खोलने की तारीख की घोषणा कर दी है. पाकिस्तान सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर गलियारे को लगभग तीन महीने बाद उनतीस जून यानी कल सोमवार से खोलना चाहता है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा कि उनतीस जून को महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि है. हम चाहते हैं कि इस दिन गलियारा खोल दिया जाए. इसके लिए हम भारत से बात कर रहे हैं. वहीं भारत सरकार ने पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर को वर्तमान हालात में वापस खोलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. भारत सरकार ने कहा कि ये सद्भावना के नाम पर भ्रम फैलाने का प्रयास है. भारत ने कहा कि समझौते के अनुसार, दोनों सरकारों को दोबारा करतारपुर गलियारा खोलने के लिए एक दूसरे को एक हफ्ते का समय देना आवश्यक है, किन्तु पाकिस्तान केवल दो दिन के अंदर ही कॉरिडोर को फिर से खोलने की बात कर रहा है. अब इस मामले में अंतिम फैसला गृह मंत्रालय लेगा. आपको बता दें कि कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनज़र पंद्रह मार्च को करतारपुर कॉरिडोर को बंद करने का फैसला लिया गया था. |
सौंदर्यमयी पृथ्वी पर ब्रज नारियाँ सुख भरी, मदमाती,
आकर्षक एवं विविध वस्त्रों से अलंकृता ब्रज बालाएँ,
पूजा के हेतु चल दिए। एक सखी दूसरी सखी को बुलाती है।
चलौ चलौ री सखी सब हिलमिल के, श्री गिरिराज पुजावन को।
को। धूप-दीप-नैवेद्य-आरती,
कर बँकि उस गावन को।
को। मानसी गंगा विमल तरंगा,
जल अचमन करावन को।।
पुंगीफल घरलोग इलायची, बीड़ा पान चबावन को।
को। तीनों ताप नसावन को,
मेटन जग आवन-जावन को।।
जनश्रुति है कि ब्रज में इंद्र की पूजा का विधान था,
पूजा के समय देवगिरि सुमेरु, नगाधिराज हिमालय,
मेघों को ब्रज को बहा देने का आदेश दिया।
चिन्मयता का वर्णन भी 'गर्गसंहिता' में आया है।
पर्वत पर करोड़ों की संख्या में दीप जलाए जाते थे,
स्थापन की थी।
गोवर्द्धन में दीप दान कियो मन भायो।
चहुँ दिस जगमग जोति कुहू निसि मयो सुहायो।
परिक्रमा सब कोउ भले दाहिनो दियो गिरिराय।
गीत नाद उद्घोष सो मगन भरे ब्रजराय।।
विशाल पर्वत एक स्थान पर एकत्र होने के कारण 'अन्नकूट'
वर्णन ब्रज साहित्य में उपलब्ध है।
अन्नकूट बहु भात बनाए रचि पकवानन ढेरी।
नंदराय पूजत परवत को लाओ गायन घेरी।।
नारियाँ विविध प्रकार के पकवानों के थाल लेकर आती हैं।
गोवर्द्धन पूजन चले री गोपाल।
मत्त गयंद देख जिय लज्जित निरख मंद गति चाल।
अंग-सुगंध पहर पट भूषण गावत गीत रसाल।।
ब्रज नारी पकवान बहुत कर भर भर लीने थाल।
बाजे अनेक वेणु सबसौं मिल चलत विविध सुरताल।
ध्वजा पताका छत्र चमर करत कुलाहल ग्बाल।।
बालक वृंद चहुँ दिस सोहत मानो कमल अलिमाल।
कुंभनदास प्रभु त्रिभुवन मोहन गोवर्द्धनधरलाल।।
बड़ेन को आगे दे गिरिधर, श्री गोवर्द्धन पूजत आवत।
मानसी गंगाजल न्हवाइ के पीछे दूध धोरी को नावत।
बहोरि पखार अरगजा चरचित धूप-दीप बहु भोग धरावत।
दे बीरा आरती करत हैं ब्रज भामिनी मिल मंगल गावत।
टेर ग्वाल भाजन भर दे कें पीठ थाप सिरपेच बँधावत।।
के ढेर की गोवर्द्धन की भावना से ही पूजा की जाती है।
मैं तो गोवर्द्धन कू जाऊँ मेरी बीर।
सौमोती की न्हनु परयोए, परमी न्हाइबे जाऊँ मेरी बीर।
पाँच सेर की करूँ कोथरी, पेड़-पेड़ पे खाऊँ मेरी बीर।
राधाकुंड की राधारानी, कुसुम सरोवर न्हाऊ मेरी बीर।
गोबरधन, आन्यौर, पूँछरी, जतीपुरा लौटि जाऊँ मेरी बीर।
जतीपुरा ते आय गोबरधन, मानसी गंगा न्हाऊ मेरी बीर।
सात कोस की दै परकम्मा, बाम्हन न्योति जिमाऊ मेरी बीर।
जय गोवर्द्धन महाराज नाथ तुम भक्तन हितकारी,
दान घाटी वारे गिर्राज।
हो भक्तन के सिरताज।
कृपा आपकी से प्रभु अन्न, धन और कुटुंब,
मुक्ति की मुक्ति करै धन्य तरहटी भूमि।
पूजा लई छिनाय इंद्र गर्व कियो भारी,
जय गोवर्द्धन महाराज नाथ तुम भक्तन हितकारी।
बीच में भरी मानसी गंगा,
लहर की अद्भुत उठै तरंगा,
करे स्नान पाप हो भंगा।
बच्छासुर की कृष्ण ने दीनो धरन पछार,
बाही के कारन प्रभू तन से प्रगटी धार।
कार्तिक बदी अमावस्या को दीपमान भारी।
श्रीकृष्ण की सरन।
जो कोई देय प्रदक्षिणा कुंड-कुंड लेय पान।।
जनम सुफल है जात है सुन लेव चतुर सुजान।
कर देव बेड़ौ पार नाथ मेरे गिरधर धारी,
हम सब की यही अरदास।
सदा गोबरधन करूँ निवास,
रहूँ सब गुणियन कौ दास।
सब गुणियन की दास हूँ करियो माफ़ कसूर,
बार-बार बिनती करूँ बनिहों ब्रज की धूर।
घासीराम जुगल छवि ऊपर, जाऊँ बलिहारी,
जय-जय गोबरधन महाराज।।
अधिकतम प्रकृति की गोद में निवास करने, परिक्रमा देने,
एवं आध्यात्मिक पर्यावरण बना रहता है।
| सौंदर्यमयी पृथ्वी पर ब्रज नारियाँ सुख भरी, मदमाती, आकर्षक एवं विविध वस्त्रों से अलंकृता ब्रज बालाएँ, पूजा के हेतु चल दिए। एक सखी दूसरी सखी को बुलाती है। चलौ चलौ री सखी सब हिलमिल के, श्री गिरिराज पुजावन को। को। धूप-दीप-नैवेद्य-आरती, कर बँकि उस गावन को। को। मानसी गंगा विमल तरंगा, जल अचमन करावन को।। पुंगीफल घरलोग इलायची, बीड़ा पान चबावन को। को। तीनों ताप नसावन को, मेटन जग आवन-जावन को।। जनश्रुति है कि ब्रज में इंद्र की पूजा का विधान था, पूजा के समय देवगिरि सुमेरु, नगाधिराज हिमालय, मेघों को ब्रज को बहा देने का आदेश दिया। चिन्मयता का वर्णन भी 'गर्गसंहिता' में आया है। पर्वत पर करोड़ों की संख्या में दीप जलाए जाते थे, स्थापन की थी। गोवर्द्धन में दीप दान कियो मन भायो। चहुँ दिस जगमग जोति कुहू निसि मयो सुहायो। परिक्रमा सब कोउ भले दाहिनो दियो गिरिराय। गीत नाद उद्घोष सो मगन भरे ब्रजराय।। विशाल पर्वत एक स्थान पर एकत्र होने के कारण 'अन्नकूट' वर्णन ब्रज साहित्य में उपलब्ध है। अन्नकूट बहु भात बनाए रचि पकवानन ढेरी। नंदराय पूजत परवत को लाओ गायन घेरी।। नारियाँ विविध प्रकार के पकवानों के थाल लेकर आती हैं। गोवर्द्धन पूजन चले री गोपाल। मत्त गयंद देख जिय लज्जित निरख मंद गति चाल। अंग-सुगंध पहर पट भूषण गावत गीत रसाल।। ब्रज नारी पकवान बहुत कर भर भर लीने थाल। बाजे अनेक वेणु सबसौं मिल चलत विविध सुरताल। ध्वजा पताका छत्र चमर करत कुलाहल ग्बाल।। बालक वृंद चहुँ दिस सोहत मानो कमल अलिमाल। कुंभनदास प्रभु त्रिभुवन मोहन गोवर्द्धनधरलाल।। बड़ेन को आगे दे गिरिधर, श्री गोवर्द्धन पूजत आवत। मानसी गंगाजल न्हवाइ के पीछे दूध धोरी को नावत। बहोरि पखार अरगजा चरचित धूप-दीप बहु भोग धरावत। दे बीरा आरती करत हैं ब्रज भामिनी मिल मंगल गावत। टेर ग्वाल भाजन भर दे कें पीठ थाप सिरपेच बँधावत।। के ढेर की गोवर्द्धन की भावना से ही पूजा की जाती है। मैं तो गोवर्द्धन कू जाऊँ मेरी बीर। सौमोती की न्हनु परयोए, परमी न्हाइबे जाऊँ मेरी बीर। पाँच सेर की करूँ कोथरी, पेड़-पेड़ पे खाऊँ मेरी बीर। राधाकुंड की राधारानी, कुसुम सरोवर न्हाऊ मेरी बीर। गोबरधन, आन्यौर, पूँछरी, जतीपुरा लौटि जाऊँ मेरी बीर। जतीपुरा ते आय गोबरधन, मानसी गंगा न्हाऊ मेरी बीर। सात कोस की दै परकम्मा, बाम्हन न्योति जिमाऊ मेरी बीर। जय गोवर्द्धन महाराज नाथ तुम भक्तन हितकारी, दान घाटी वारे गिर्राज। हो भक्तन के सिरताज। कृपा आपकी से प्रभु अन्न, धन और कुटुंब, मुक्ति की मुक्ति करै धन्य तरहटी भूमि। पूजा लई छिनाय इंद्र गर्व कियो भारी, जय गोवर्द्धन महाराज नाथ तुम भक्तन हितकारी। बीच में भरी मानसी गंगा, लहर की अद्भुत उठै तरंगा, करे स्नान पाप हो भंगा। बच्छासुर की कृष्ण ने दीनो धरन पछार, बाही के कारन प्रभू तन से प्रगटी धार। कार्तिक बदी अमावस्या को दीपमान भारी। श्रीकृष्ण की सरन। जो कोई देय प्रदक्षिणा कुंड-कुंड लेय पान।। जनम सुफल है जात है सुन लेव चतुर सुजान। कर देव बेड़ौ पार नाथ मेरे गिरधर धारी, हम सब की यही अरदास। सदा गोबरधन करूँ निवास, रहूँ सब गुणियन कौ दास। सब गुणियन की दास हूँ करियो माफ़ कसूर, बार-बार बिनती करूँ बनिहों ब्रज की धूर। घासीराम जुगल छवि ऊपर, जाऊँ बलिहारी, जय-जय गोबरधन महाराज।। अधिकतम प्रकृति की गोद में निवास करने, परिक्रमा देने, एवं आध्यात्मिक पर्यावरण बना रहता है। |
इससे इतना अवश्य स्पष्ट हो जाता है कि नाटक की उत्पत्तिौर उसके विकास के साथ-साथ रंगमंच की उत्पत्ति और उसका विकास हुआ है।
रंगमंच की उत्पत्ति के सम्बन्ध में एक मत और विचारणीय है और वह है अनुमान के आधार पर । मानव सभ्यता की उत्तरोत्तर उन्नति में विश्वास करनेवाले विकासवादियों का कहना है कि नाटक की उत्पत्ति नृत्य से हुई है। उस समय जब मानव की वाक्-शक्ति का विकास नहीं हुआ था तब मुख के श्रावेग को उसने नृत्य द्वारा ही व्यक्त किया होगा। आगे चलकर उस नृत्य में गति और लय को सुधरता
यी होगी। नृत्य में गति और लय आने के पश्चात् विशेष अवसरों पर नृत्य का आयोजन होता रहा होगा और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रार्थना के रूप में गीत भी गाये जाते रहे होंगे और उन गीतों के साथ वाद्यों का भी प्रयोग किया जाता रहा होगा। इन दो अवस्थों के पश्चात् धीरे-धीरे दिवंगत वीरों की जीवन घटनाओं को भी उनके साथ मिला लिया गया होगा। इस प्रकार नृत्य, गीत और घटना के जोड़मेल से उस समय के लोगों को मनोरंजन का एक साधन, मिल गया होगा। इसके बाद नाटक के जीवन में एक चौथी अवस्था आयी होगी और तब उसमें संवाद को भी स्थान मिल गया होगा। नृत्य + गीत + घटना + संवाद से नाटक का जो रूपाया होगा उसमें उस समय के कलाकारों ने अभिनय कला को भी स्थान दिया होगा और फिर कथानक के चुनाव में धार्मिक स्थलों और संवादों का विधान चल पड़ा होगा। ऐसा लगता है कि इसी के पश्चात् प्रशिक्षित लोगों के नाटक के ये पाँच तत्त्व साहित्यकारों ने अपना लिये होंगे और उन्होंने उनमें संतुलन और सामंजस्य स्थापित करके उनको 'रस' के आश्रित कर दिया होगा। इस प्रकार नृत्य + गीत + घटना + संवाद + प्रभिनय + रस ने एक साथ मिलकर नाटक को जन्म दिया होगा। इसके बाद अन्य कलाकारों ने इन छः तत्वों के अंतरंग और बहिरंग में कला का प्रवेश करके | इससे इतना अवश्य स्पष्ट हो जाता है कि नाटक की उत्पत्तिौर उसके विकास के साथ-साथ रंगमंच की उत्पत्ति और उसका विकास हुआ है। रंगमंच की उत्पत्ति के सम्बन्ध में एक मत और विचारणीय है और वह है अनुमान के आधार पर । मानव सभ्यता की उत्तरोत्तर उन्नति में विश्वास करनेवाले विकासवादियों का कहना है कि नाटक की उत्पत्ति नृत्य से हुई है। उस समय जब मानव की वाक्-शक्ति का विकास नहीं हुआ था तब मुख के श्रावेग को उसने नृत्य द्वारा ही व्यक्त किया होगा। आगे चलकर उस नृत्य में गति और लय को सुधरता यी होगी। नृत्य में गति और लय आने के पश्चात् विशेष अवसरों पर नृत्य का आयोजन होता रहा होगा और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रार्थना के रूप में गीत भी गाये जाते रहे होंगे और उन गीतों के साथ वाद्यों का भी प्रयोग किया जाता रहा होगा। इन दो अवस्थों के पश्चात् धीरे-धीरे दिवंगत वीरों की जीवन घटनाओं को भी उनके साथ मिला लिया गया होगा। इस प्रकार नृत्य, गीत और घटना के जोड़मेल से उस समय के लोगों को मनोरंजन का एक साधन, मिल गया होगा। इसके बाद नाटक के जीवन में एक चौथी अवस्था आयी होगी और तब उसमें संवाद को भी स्थान मिल गया होगा। नृत्य + गीत + घटना + संवाद से नाटक का जो रूपाया होगा उसमें उस समय के कलाकारों ने अभिनय कला को भी स्थान दिया होगा और फिर कथानक के चुनाव में धार्मिक स्थलों और संवादों का विधान चल पड़ा होगा। ऐसा लगता है कि इसी के पश्चात् प्रशिक्षित लोगों के नाटक के ये पाँच तत्त्व साहित्यकारों ने अपना लिये होंगे और उन्होंने उनमें संतुलन और सामंजस्य स्थापित करके उनको 'रस' के आश्रित कर दिया होगा। इस प्रकार नृत्य + गीत + घटना + संवाद + प्रभिनय + रस ने एक साथ मिलकर नाटक को जन्म दिया होगा। इसके बाद अन्य कलाकारों ने इन छः तत्वों के अंतरंग और बहिरंग में कला का प्रवेश करके |
मुंबई/दि. 21 - राज्य के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे को लिखे एक पत्र में विगत दिनों मुंबई के साकीनाका परिसर में घटित हुए सामूहिक दुराचार की घटना को लेकर राज्य में कानून व व्यवस्था की बिगडती स्थिति की ओर ध्यान दिलाया है. साथ ही कहा है कि, इस विषय को लेकर सीएम उध्दव ठाकरे द्वारा विधान मंडल का दो दिन का विशेष अधिवेशन बुलाया जाना चाहिए. वहीं दूसरी ओर राज्यपाल द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के मामले में दखल देते हुए इस विषय को लेकर अधिवेशन बुलाये जाने का निर्देश देना एक तरह से राज्यपाल द्वारा राज्य की सक्रिय राजनीति में बढते हस्तक्षेप का द्योतक है. ऐसा राजनीति विश्लेषकों का मानना है. ऐसे में एक बार फिर राज्य सरकार एवं राजभवन इन दो शक्ति केंद्रों के बीच टकराववाली स्थिति बनती दिखाई दे रही है.
बता दें कि, मुंबई के साकीनाका परिसर में विगत 9 सितंबर की रात 32 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक तौर पर पाश्वीक दुराचार किया गया था और आरोपियों द्वारा पीडिता के गुप्तांग में लोहे की छड डाल दी गई थी. इस मामले में पुलिस ने मोहन चव्हाण नामक आरोपी को गिरफ्तार किया था. वहीं अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. इसके अलावा इस दौरान राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से नाबालिग लडकियों, युवतियों तथा महिलाओं के साथ दुराचार किये जाने के कई मामले सामने आये. जिन पर अपनी चिंता जताते हुए राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने राज्य के हालात को संभालने तथा कानून व व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने के लिए सीएम उध्दव ठाकरे को दो दिन का विशेष सत्र बुलाये जाने का आवाहन किया है. ज्ञात रहें कि राज्यपाल द्वारा इससे पहले भी सीएम उध्दव ठाकरे को जून 2021 में पत्र लिखकर विधानसभा अध्यक्ष की नियुक्ति करने की याद दिलाई गई थी. 5 व 6 जुलाई को होनेवाले विधानमंडल अधिवेशन के मद्ेनजर लिखे गये इस पत्र में राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उठाई गई मांगों को पूरी तरह सही बताया था और सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये थे. इसके अलावा विगत वर्ष अक्तूबर 2020 में राज्यपाल ने राज्य में सभी मंदिरों को खोलने हेतु सीएम उध्दव ठाकरे को एक पत्र भेजा था. जिसमें राज्यपाल कोश्यारी ने सीएम ठाकरे को हिंदुत्व की याद दिलाई थी. जिसके बाद से राज्य सरकार और राजभवन के बीच रार व तकरार के साथ ही विवाद बढने शुरू हो गये थे.
| मुंबई/दि. इक्कीस - राज्य के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे को लिखे एक पत्र में विगत दिनों मुंबई के साकीनाका परिसर में घटित हुए सामूहिक दुराचार की घटना को लेकर राज्य में कानून व व्यवस्था की बिगडती स्थिति की ओर ध्यान दिलाया है. साथ ही कहा है कि, इस विषय को लेकर सीएम उध्दव ठाकरे द्वारा विधान मंडल का दो दिन का विशेष अधिवेशन बुलाया जाना चाहिए. वहीं दूसरी ओर राज्यपाल द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के मामले में दखल देते हुए इस विषय को लेकर अधिवेशन बुलाये जाने का निर्देश देना एक तरह से राज्यपाल द्वारा राज्य की सक्रिय राजनीति में बढते हस्तक्षेप का द्योतक है. ऐसा राजनीति विश्लेषकों का मानना है. ऐसे में एक बार फिर राज्य सरकार एवं राजभवन इन दो शक्ति केंद्रों के बीच टकराववाली स्थिति बनती दिखाई दे रही है. बता दें कि, मुंबई के साकीनाका परिसर में विगत नौ सितंबर की रात बत्तीस वर्षीय महिला के साथ सामूहिक तौर पर पाश्वीक दुराचार किया गया था और आरोपियों द्वारा पीडिता के गुप्तांग में लोहे की छड डाल दी गई थी. इस मामले में पुलिस ने मोहन चव्हाण नामक आरोपी को गिरफ्तार किया था. वहीं अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. इसके अलावा इस दौरान राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से नाबालिग लडकियों, युवतियों तथा महिलाओं के साथ दुराचार किये जाने के कई मामले सामने आये. जिन पर अपनी चिंता जताते हुए राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने राज्य के हालात को संभालने तथा कानून व व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने के लिए सीएम उध्दव ठाकरे को दो दिन का विशेष सत्र बुलाये जाने का आवाहन किया है. ज्ञात रहें कि राज्यपाल द्वारा इससे पहले भी सीएम उध्दव ठाकरे को जून दो हज़ार इक्कीस में पत्र लिखकर विधानसभा अध्यक्ष की नियुक्ति करने की याद दिलाई गई थी. पाँच व छः जुलाई को होनेवाले विधानमंडल अधिवेशन के मद्ेनजर लिखे गये इस पत्र में राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उठाई गई मांगों को पूरी तरह सही बताया था और सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये थे. इसके अलावा विगत वर्ष अक्तूबर दो हज़ार बीस में राज्यपाल ने राज्य में सभी मंदिरों को खोलने हेतु सीएम उध्दव ठाकरे को एक पत्र भेजा था. जिसमें राज्यपाल कोश्यारी ने सीएम ठाकरे को हिंदुत्व की याद दिलाई थी. जिसके बाद से राज्य सरकार और राजभवन के बीच रार व तकरार के साथ ही विवाद बढने शुरू हो गये थे. |
भाजपा की गुजरात में जीत पुष्टि करती है कि नरेंद्र मोदी 2024 लोकसभा चुनाव सबसे लोकप्रिय नेता होंगे.
हिमाचल प्रदेश और गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों एवं दिल्ली एमसीडी चुनावों की सूची में राष्ट्र ने एक और दमदार एवं शानदार परर्फोमेंस वाली चुनावी पारी को देखा है. अब जबकि चुनावी नतीजे हमारे सामने हैं इन नतीजों को परखने एवं इन पर विचार करने से इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि ब्रांड मोदी बरकरार है और अजेय मोदी अश्रांत, अनवरत और अदम्य है.
भाजपा की गुजरात में शानदार और चौंका देने वाली भारी जीत इस बात की पुष्टि करती है कि नरेंद्र मोदी 2024 लोकसभा चुनाव सबसे लोकप्रिय नेता होंगे. भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रबंधन में 2017 की 99 सीटों की तुलना में 150 सीटों पर न केवल जीत हासिल की बल्कि वह अपने वोट शेयर में लगभग 4%की वृद्धि करने में भी कामयाब रही. ये आंकड़े अभूतपूर्व हैं, खासतौर पर 27 सालों तक बेरोकटोक राज्य चलाने के बाद. बहुतेरे तर्कसंगत बहस के बीच इस दावे को ठोस समर्थन मिलता है कि गुजरात 20 राज्यों के मतदाताओं के साथ एक अत्यंत विकसित औद्योगिक राज्य है और देश का सर्वाधिक संभावनाओं वाला विकास का इंजन माना जाता है. राज्य को दिया गया उपनाम, "हिंदुत्व की प्रयोगशाला" मोदी की संभावनाओं के आकर्षण को बढ़ाता है. हां, गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे एक तरह से ब्रांड मोदी के करिश्मे एवं 2024 में देश की मनोदशा को दर्शाते हैं.
यद्यपि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में जीत हासिल की है पर वोट शेयर में अंतर केवल 0. 9% है. पूर्व भाजपा व्यवस्था के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की बहस में यह मुद्दा कहीं नहीं ठहरता. चूंकि नरेंद्र मोदी 2024 के लोकसभा चुनाव का चेहरा हैं और पहाड़ी राज्य की भारतीय सशस्त्र बल के प्रति भावनात्मक रूप से निकटता है. मोदी मैजिक निश्चित रूप से चुनाव को नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा के पक्ष में ले जाएगा.
जहां तक दिल्ली एमसीडी चुनाव के परिणामों का संबंध है लेखक सामान्य ज्ञान की अवधारणा में दृढ़ता से विश्वास करता है जो इस दावे की पुष्टि करता है कि नगर निकाय चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व संकेत नहीं है जैसा कि कुछ लुटियंस ग्रुप द्वारा इंगित किया गया है. और निश्चित रूप से यह राष्ट्र के मूड का संकेत भी नहीं है. यद्यपि 2017 में 272 वार्डों में 181 वार्ड जीतने में कामयाब रही थी भाजपा इस बार केवल 104 वार्ड में जीत हासिल की है. उसने नगर निकाय में अपने 15 साल के शासन का अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. फिर भी उल्लेखनीय पहलू यह है कि भाजपा के अपने वोट शेयर में 3% की बढ़त हुई है. इस बहस को फिर से सत्ता विरोधी तर्क को अस्वीकार करते हुए रोक दिया जाना चाहिए.
हमें ऐसे विपक्ष की आवश्यकता है जो अपने अभियान में व्यवहारिक हो और वास्तविक रूप में जनता से जुड़ा हो. विपक्ष को यह बेहतर पता होना चाहिए कि भारत को किसी एकीकरण की या किसी इवेंट मैनेज्ड मार्च की आवश्यकता नहीं है. लेकिन निश्चित रूप से प्रधानमंत्री की हत्या के आह्वान को उन लोगों द्वारा रोका जाना चाहिए जो संयुक्त, मजबूत और समृद्ध भारत को देखना चाहते हैं. अब विपक्ष को जागना होगा और एक साधारण वास्तविकता से साक्षात्कार करना होगा कि वे यहां भाजपा से मुकाबला करने और चुनौती देने के लिए हैं न कि "ब्रांड मोदी के लिए". भाजपा की अपनी ताकत और कमजोरियां हैं लेकिन मोदी के खिलाफ गोलाबारी का प्रयास हमेशा बूमरैंग के प्रभाव की तरह समाप्त हो जाता है.
2002 से मोदी आगे और ऊपर की ओर अग्रसर हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि विपक्ष कितने कठोर और क्रूर तरीके से उन्हे बदनाम, तिरस्कृत करता है और उन पर कीचड़ उछालता है. वह अपनी तरफ आने वाले गोला बारूद को अपने लाभ के लिए एवं चुनावी लाभ में बदलने के लिए मोड़ लेते हैं. आधुनिक युग इसकी पुष्टि करेगा साथ ही यह तथ्य भी है कि वे उतने ही कुशाग्र राजनेता और दयालु नायक हैं जितना कि मतदाता चाहते हैं. एक ओर वह ये जानते है कि RSS से जुड़े लोगों को कैसे रिझाना है वहीं दूसरी ओर उन्हे यह भी पता है कि कैसे पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें आदर्श मानेंगे. उनके पास RSS और भाजपा का बेजोड़ समर्थन है जो भारतीय राजनीति पर नजर रखनेवाले किसी भी विचारशील व्यक्ति के लिए आश्चर्यजनक रूप से दुर्लभ और विलक्षण है. जानकारों के लिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल अप्रूवल रेटिंग के मामले में किसी भी अन्य विश्व के नेता को पीछे छोड़ दिया है.
हालांकि परंपरागत रूप से भाजपा को ऐसी पार्टी के रूप मे जाना जाता है जो अपने विशाल संगठनात्मक ढांचे और स्टार प्रचारकों की एक विशाल सेना के माध्यम से सफलतापूर्वक जमीन तैयार करती है. प्रधानमंत्री मोदी निश्चित रुप से इससे आगे बढ़ गए है. नरेंद्र मोदी एक सतत् और पूर्णकालिक राजनेता हैं और अपनी प्राथमिकताओं के लिए गंभीर है, जिसमें शासन, सांस्कृतिक बहाली एवं चुनाव जीतना शामिल है और यह अब पब्लिक डोमेन में है. चाहे वह हैदराबाद में नगर पालिका चुनाव हो या दिल्ली या राज्य विधानसभा चुनाव वह हर जगह उपस्थित हैं. उन्हें पोस्टरों पर, सोशल मीडिया में और सबसे महत्वपूर्ण मैदान में देखा जा सकता है. पहली रैंक से दसवीं रैंक तक हर जगह मोदी ही हैं. जब सार्वजनिक सेवा और सार्वजनिक कार्यालय की बात आती है तो वह निरंकुश रहे हैं.
(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है. )
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| भाजपा की गुजरात में जीत पुष्टि करती है कि नरेंद्र मोदी दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव सबसे लोकप्रिय नेता होंगे. हिमाचल प्रदेश और गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों एवं दिल्ली एमसीडी चुनावों की सूची में राष्ट्र ने एक और दमदार एवं शानदार परर्फोमेंस वाली चुनावी पारी को देखा है. अब जबकि चुनावी नतीजे हमारे सामने हैं इन नतीजों को परखने एवं इन पर विचार करने से इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि ब्रांड मोदी बरकरार है और अजेय मोदी अश्रांत, अनवरत और अदम्य है. भाजपा की गुजरात में शानदार और चौंका देने वाली भारी जीत इस बात की पुष्टि करती है कि नरेंद्र मोदी दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव सबसे लोकप्रिय नेता होंगे. भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रबंधन में दो हज़ार सत्रह की निन्यानवे सीटों की तुलना में एक सौ पचास सीटों पर न केवल जीत हासिल की बल्कि वह अपने वोट शेयर में लगभग चार%की वृद्धि करने में भी कामयाब रही. ये आंकड़े अभूतपूर्व हैं, खासतौर पर सत्ताईस सालों तक बेरोकटोक राज्य चलाने के बाद. बहुतेरे तर्कसंगत बहस के बीच इस दावे को ठोस समर्थन मिलता है कि गुजरात बीस राज्यों के मतदाताओं के साथ एक अत्यंत विकसित औद्योगिक राज्य है और देश का सर्वाधिक संभावनाओं वाला विकास का इंजन माना जाता है. राज्य को दिया गया उपनाम, "हिंदुत्व की प्रयोगशाला" मोदी की संभावनाओं के आकर्षण को बढ़ाता है. हां, गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे एक तरह से ब्रांड मोदी के करिश्मे एवं दो हज़ार चौबीस में देश की मनोदशा को दर्शाते हैं. यद्यपि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में जीत हासिल की है पर वोट शेयर में अंतर केवल शून्य. नौ% है. पूर्व भाजपा व्यवस्था के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की बहस में यह मुद्दा कहीं नहीं ठहरता. चूंकि नरेंद्र मोदी दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव का चेहरा हैं और पहाड़ी राज्य की भारतीय सशस्त्र बल के प्रति भावनात्मक रूप से निकटता है. मोदी मैजिक निश्चित रूप से चुनाव को नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा के पक्ष में ले जाएगा. जहां तक दिल्ली एमसीडी चुनाव के परिणामों का संबंध है लेखक सामान्य ज्ञान की अवधारणा में दृढ़ता से विश्वास करता है जो इस दावे की पुष्टि करता है कि नगर निकाय चुनाव दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव के पूर्व संकेत नहीं है जैसा कि कुछ लुटियंस ग्रुप द्वारा इंगित किया गया है. और निश्चित रूप से यह राष्ट्र के मूड का संकेत भी नहीं है. यद्यपि दो हज़ार सत्रह में दो सौ बहत्तर वार्डों में एक सौ इक्यासी वार्ड जीतने में कामयाब रही थी भाजपा इस बार केवल एक सौ चार वार्ड में जीत हासिल की है. उसने नगर निकाय में अपने पंद्रह साल के शासन का अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. फिर भी उल्लेखनीय पहलू यह है कि भाजपा के अपने वोट शेयर में तीन% की बढ़त हुई है. इस बहस को फिर से सत्ता विरोधी तर्क को अस्वीकार करते हुए रोक दिया जाना चाहिए. हमें ऐसे विपक्ष की आवश्यकता है जो अपने अभियान में व्यवहारिक हो और वास्तविक रूप में जनता से जुड़ा हो. विपक्ष को यह बेहतर पता होना चाहिए कि भारत को किसी एकीकरण की या किसी इवेंट मैनेज्ड मार्च की आवश्यकता नहीं है. लेकिन निश्चित रूप से प्रधानमंत्री की हत्या के आह्वान को उन लोगों द्वारा रोका जाना चाहिए जो संयुक्त, मजबूत और समृद्ध भारत को देखना चाहते हैं. अब विपक्ष को जागना होगा और एक साधारण वास्तविकता से साक्षात्कार करना होगा कि वे यहां भाजपा से मुकाबला करने और चुनौती देने के लिए हैं न कि "ब्रांड मोदी के लिए". भाजपा की अपनी ताकत और कमजोरियां हैं लेकिन मोदी के खिलाफ गोलाबारी का प्रयास हमेशा बूमरैंग के प्रभाव की तरह समाप्त हो जाता है. दो हज़ार दो से मोदी आगे और ऊपर की ओर अग्रसर हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि विपक्ष कितने कठोर और क्रूर तरीके से उन्हे बदनाम, तिरस्कृत करता है और उन पर कीचड़ उछालता है. वह अपनी तरफ आने वाले गोला बारूद को अपने लाभ के लिए एवं चुनावी लाभ में बदलने के लिए मोड़ लेते हैं. आधुनिक युग इसकी पुष्टि करेगा साथ ही यह तथ्य भी है कि वे उतने ही कुशाग्र राजनेता और दयालु नायक हैं जितना कि मतदाता चाहते हैं. एक ओर वह ये जानते है कि RSS से जुड़े लोगों को कैसे रिझाना है वहीं दूसरी ओर उन्हे यह भी पता है कि कैसे पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें आदर्श मानेंगे. उनके पास RSS और भाजपा का बेजोड़ समर्थन है जो भारतीय राजनीति पर नजर रखनेवाले किसी भी विचारशील व्यक्ति के लिए आश्चर्यजनक रूप से दुर्लभ और विलक्षण है. जानकारों के लिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल अप्रूवल रेटिंग के मामले में किसी भी अन्य विश्व के नेता को पीछे छोड़ दिया है. हालांकि परंपरागत रूप से भाजपा को ऐसी पार्टी के रूप मे जाना जाता है जो अपने विशाल संगठनात्मक ढांचे और स्टार प्रचारकों की एक विशाल सेना के माध्यम से सफलतापूर्वक जमीन तैयार करती है. प्रधानमंत्री मोदी निश्चित रुप से इससे आगे बढ़ गए है. नरेंद्र मोदी एक सतत् और पूर्णकालिक राजनेता हैं और अपनी प्राथमिकताओं के लिए गंभीर है, जिसमें शासन, सांस्कृतिक बहाली एवं चुनाव जीतना शामिल है और यह अब पब्लिक डोमेन में है. चाहे वह हैदराबाद में नगर पालिका चुनाव हो या दिल्ली या राज्य विधानसभा चुनाव वह हर जगह उपस्थित हैं. उन्हें पोस्टरों पर, सोशल मीडिया में और सबसे महत्वपूर्ण मैदान में देखा जा सकता है. पहली रैंक से दसवीं रैंक तक हर जगह मोदी ही हैं. जब सार्वजनिक सेवा और सार्वजनिक कार्यालय की बात आती है तो वह निरंकुश रहे हैं. . |
स्थानीय नागरिकों ने यहां से क्रेशर को हटाए जाने की मांग की है ताकि ना केवल वह स्वयं बल्कि उनके बच्चे व अन्य लोगों इन धूल मिट्टी के कणों से बच सकें तो उनका मानसिक विकास भी ठीक ढंग से हो सकेगा। अब देखना है इस ओर जिला प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है। इस ओर यदि शीघ्र कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया तो नागरिक इस क्रेशर को हटाने के लिए आन्दोलन व धरना प्रदर्शन करने को भी बाध्य होंगे।
जानकारी के अनुसार दिनारा में लगे स्टोन क्रेशर के कारण यहां के लोग काफी परेशान है और आए दिन इस क्रेशर से निकलने वाले शोर-शराबे से ना केवल बच्चों को पढ़ाई करने में दिक्कत आती है वरन यहां से निकलने वाली धूप, मिट्टी व अन्य कण से यहां निकलकर स्थानीय लोगों के शरीर में प्रवेश करते है। जिससे यहां के नागरिक विभिन्न प्रकार की बीमारियों के मकडज़ाल में घिर रहे है। इस संबंध में क्रेशर मालिक भी यहां सरेआम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अव्हेलना कर रहा है जो रोड़ से महज 500 मीटर दूरी पर अपना क्रेशर संचालित कर रहा है।
इस क्रेशर से सटे निवास करने वाले दुर्गसिंह यादव उपसरपंच का पुत्र, डॉ.सियाराम यादव क्रेशर का पड़ौसी, रविन्द्र यादव व स्थानीय निरवासी एडवोकेट जयप्रकाश गुप्ता सहित अन्य लोगों की तो और भी परेशानियां है वह तो आए दिन इस समस्या से जूझते रहते है। कई बार स्टोन क्रेशर मालिक को यहां से क्रेशर हटाने की बात कही लेकिन उसने किसी की एक ना सुनी और आज भी बेधड़क रूप से क्रेशर संचालित है।
बिना अनुमति के यहां कभी भी गिट्टी की उपलब्धता के लिए विस्फोट कर दिया जाता है जिससे आए दिन जानमाल का खतरा बना रहता है जबकि क्रेशर को चलाने से पूर्व उस पर पानी का छिड़काव आवश्यक है ताकि धूल मिट्टी को पानी से ढका जा सके लेकिन आज भी यहां क्रेशर संचालक सारे नियमों को दरकिनार कर अपनी मनमानी पर उतारू है।
इस संबंध में नागरिकों ने जिला प्रशासन को भी शिकायत की है लेकिन आज तक कार्यवाही ना होने से लोगों में इस क्रेशर के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। समय रहते यदि यहां से यह क्रेशर नहीं हटा तो वह दिन दूर नहीं जब स्वयं नागरिक ही इस क्रेशर के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज करते हुए इसे हटाने के लिए बाध्य होंगें। इस संबंध में दिनारावासियों ने जिला प्रशासन से इस ओर शीघ्र कार्यवाही की गुहार करते हुए क्रेशर को हटाने की मांग की है।
| स्थानीय नागरिकों ने यहां से क्रेशर को हटाए जाने की मांग की है ताकि ना केवल वह स्वयं बल्कि उनके बच्चे व अन्य लोगों इन धूल मिट्टी के कणों से बच सकें तो उनका मानसिक विकास भी ठीक ढंग से हो सकेगा। अब देखना है इस ओर जिला प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है। इस ओर यदि शीघ्र कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया तो नागरिक इस क्रेशर को हटाने के लिए आन्दोलन व धरना प्रदर्शन करने को भी बाध्य होंगे। जानकारी के अनुसार दिनारा में लगे स्टोन क्रेशर के कारण यहां के लोग काफी परेशान है और आए दिन इस क्रेशर से निकलने वाले शोर-शराबे से ना केवल बच्चों को पढ़ाई करने में दिक्कत आती है वरन यहां से निकलने वाली धूप, मिट्टी व अन्य कण से यहां निकलकर स्थानीय लोगों के शरीर में प्रवेश करते है। जिससे यहां के नागरिक विभिन्न प्रकार की बीमारियों के मकडज़ाल में घिर रहे है। इस संबंध में क्रेशर मालिक भी यहां सरेआम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अव्हेलना कर रहा है जो रोड़ से महज पाँच सौ मीटर दूरी पर अपना क्रेशर संचालित कर रहा है। इस क्रेशर से सटे निवास करने वाले दुर्गसिंह यादव उपसरपंच का पुत्र, डॉ.सियाराम यादव क्रेशर का पड़ौसी, रविन्द्र यादव व स्थानीय निरवासी एडवोकेट जयप्रकाश गुप्ता सहित अन्य लोगों की तो और भी परेशानियां है वह तो आए दिन इस समस्या से जूझते रहते है। कई बार स्टोन क्रेशर मालिक को यहां से क्रेशर हटाने की बात कही लेकिन उसने किसी की एक ना सुनी और आज भी बेधड़क रूप से क्रेशर संचालित है। बिना अनुमति के यहां कभी भी गिट्टी की उपलब्धता के लिए विस्फोट कर दिया जाता है जिससे आए दिन जानमाल का खतरा बना रहता है जबकि क्रेशर को चलाने से पूर्व उस पर पानी का छिड़काव आवश्यक है ताकि धूल मिट्टी को पानी से ढका जा सके लेकिन आज भी यहां क्रेशर संचालक सारे नियमों को दरकिनार कर अपनी मनमानी पर उतारू है। इस संबंध में नागरिकों ने जिला प्रशासन को भी शिकायत की है लेकिन आज तक कार्यवाही ना होने से लोगों में इस क्रेशर के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। समय रहते यदि यहां से यह क्रेशर नहीं हटा तो वह दिन दूर नहीं जब स्वयं नागरिक ही इस क्रेशर के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज करते हुए इसे हटाने के लिए बाध्य होंगें। इस संबंध में दिनारावासियों ने जिला प्रशासन से इस ओर शीघ्र कार्यवाही की गुहार करते हुए क्रेशर को हटाने की मांग की है। |
लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को जयप्रकाश नारायण की जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस मौके पर अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था को यूपी सरकार पर निशाना साधा. अखिलेश ने चिन्मयानंद मामले में कहा कि पीड़ित लड़की को सरकार ने जेल भेज दिया और सरकार तेल मालिश वाले के साथ खड़ी है. वहीं एपल में काम करने वाले विवेक तिवारी को क्या पुलिस ने नहीं मारा. सरकार देखे की चीन से आ रहे पटाखे न बिके. दिवाली आ रही है पटाखे भी चीन से आ गए हैं.
जयप्रकाश नारायण की जयंती पर जेपी इंटरनेशनल सेंटर गोमतीनगर पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा कि आज किसान को फसल की कीमत नहीं मिल रही है. महंगाई बढ़ती जा रही है, बाजारीकरण होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज तक को ऐसा कौन सा अपराधी था जो सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठ गया. कोई ऐसा मुख्यमंत्री बैठा है जो अपना 307 का मुकदमा वापस ले ले.
इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि देश खुशहाल तभी हो सकता है जब जयप्रकाश नारायण के सिद्धांत पर चले. देश के सामने उस समय जो चुनौतियां थीं, वही आज भी हैं. महंगाई बढ़ती जा रही है, आज फिर हम सब समाजवादियों को मिलकर संपूर्ण क्रांति पर चलना होगा.
(इनपुटः ऋषभ मणि त्रिपाठी)
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| लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को जयप्रकाश नारायण की जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस मौके पर अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था को यूपी सरकार पर निशाना साधा. अखिलेश ने चिन्मयानंद मामले में कहा कि पीड़ित लड़की को सरकार ने जेल भेज दिया और सरकार तेल मालिश वाले के साथ खड़ी है. वहीं एपल में काम करने वाले विवेक तिवारी को क्या पुलिस ने नहीं मारा. सरकार देखे की चीन से आ रहे पटाखे न बिके. दिवाली आ रही है पटाखे भी चीन से आ गए हैं. जयप्रकाश नारायण की जयंती पर जेपी इंटरनेशनल सेंटर गोमतीनगर पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा कि आज किसान को फसल की कीमत नहीं मिल रही है. महंगाई बढ़ती जा रही है, बाजारीकरण होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज तक को ऐसा कौन सा अपराधी था जो सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठ गया. कोई ऐसा मुख्यमंत्री बैठा है जो अपना तीन सौ सात का मुकदमा वापस ले ले. इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि देश खुशहाल तभी हो सकता है जब जयप्रकाश नारायण के सिद्धांत पर चले. देश के सामने उस समय जो चुनौतियां थीं, वही आज भी हैं. महंगाई बढ़ती जा रही है, आज फिर हम सब समाजवादियों को मिलकर संपूर्ण क्रांति पर चलना होगा. ये भी पढ़ेंः . |
रतवंश में बहुत से शास्त्रोंके जानने से बुद्धियुक्हो हे शत्रुहन्ता मैं आपसे उस कथाको सुनना चाहताहूं जो कि धर्म अर्थ से युक्त होकर सुखके उदय करने वाली सृष्टिको आश्चर्यकारी है २ पुरुषोत्तम यह वह समय वर्त्तमान हुआ है जो है कि बिरादरी वाले और बांधवोंसे कठिनता से प्राप्त करने के योग्य है और आपके सिवाय हमाराहितकारी कोई मनुष्य नहीं है ३ हे निष्पाप राजा भीष्मजी जो भाइयों समेत मैं आपसे पोषण करने के योग्य तो आपसे जो २ प्रश्न मैं करू उसका उत्तर आप देनेको योग्य हैं ४ सव राजाओं में बड़े साधूं यह श्रीमान् नारायणजी बहुत मान और प्रीतिसे संयुक्तहोकर आपको सेवन करते हैं ५. तुम श्रीतिसे मेरे प्रियके निमित्त सब राजालोगों समेत मेरे भाई और इन श्रीनारायण जीके सम्मुख सब वृत्तान्त कहनेको योग्यहो ६ वैशम्पायन बोले कि उसके उस वचन को सुनकर उन गांगेय भीष्मजी ने बड़ी शीघ्रता से यह बचन कहा ७ कि हे राजा मैं अब तुमसे बड़ी चित्तरोचक कथा वर्णन करता हूं कि पूर्वसमय में इन विष्णुजी का प्रभाव वा शिवजी का प्रभाव अथवा रुद्राणीजी का संशय और शिव पार्वतीजीका जो प्रश्नोत्तरहै इन सबको मैं कहता हूँ तुम चित्त से सुनो धर्मात्मा श्रीकृष्णजी ने बारह बर्षका व्रत कियाथा उस समय नारंद और पर्वत ऋषि उन दीक्षित श्रीकृष्णजी के दर्शनके निमित्त आयें १० जप करनेवालों में श्रेष्ठ व्यास, धौम्य, देवल, काश्यप, महत्काश्यप ११ और इन्द्रियों के जीतनेवाले दीक्षायुक्त अन्य ऋषि जिनके साथ में देवताओं के समान तपोधन सिद्ध लोग थे वह सब आये १२ तब प्रसन्नचित्त श्रीकृष्णजीने उनके सरकार और अतिथिपूजनको जो अपने कुलकी प्रशंसाके योग्य और देव पूजन के योग्यथा विचार किया १३ फिर वह सव प्रसन्नमूर्ति ऋषिलोग उन आस्तरों पर बैठ गये जोकि हरित उत्तम बर्ष नवीन कुशाओं के वनेहुये थे १४ तब उन सबने राजर्षि देवता और तपोधन ऋषियों की धर्मयुक्त मधुर कथाओं को बर्णन किया १५ इसके पीछे व्रतचर्य्या रूप ईंधन से उत्पन्न नारायण तेज उन अपूर्वकर्मी श्रीकृष्णजी के मुखसे निकलकर अग्निरूप हुआ १६ उस अग्निने वृक्षलता, क्षुप, पशु, पक्षी, हिंसक, पशु, और सर्पोंसमेत उस पर्वतको भस्म करदिया १७ और पर्वतके उस शिखर को भी मथा जोकि नानाप्रकार के मृगों से हाहाकार रूप जीवतें जीवों से रहित और अकिंचन लोगोंसे दर्शनीय था १८ उस बड़ी अग्नि की ज्वालाने
जब पर्वतको अत्यन्त भस्म करदिया तब उस पर्वतने विष्णुजी के सम्मुख आ कर शिष्य के समान दोनों चरणों को आकर स्पर्श किया १६ इसके अनन्तर शत्रुओं के पराजय करनेवाले विष्णुजी ने उस भस्मरूप पर्वत को देखकर अ-. पनी अमृतरूप दृष्टि से फिर ज्योंकायों करदिया २० तव वह पर्वत वृक्ष पशु बल्लीलता और हिंसादिक जीवों से यथावस्थित शोभित हुआ सव मुनिलोग इस आश्चर्य्यकारी वृत्तान्तको देखकर कम्पायमान रोमांचों से युक्त नेत्रों में अश्रुपातयुक्तहुये २१ । २२ इसके पीछे उन महावक्का नारायणजी ने उन ऋषियोंको आअर्य्ययुक्त देखकर नम्रतापूर्वक प्रीतियुक्त मधुरवचनों से यह पूजा २३ कि हे ऋ पिलोगो सदैव संगोंसे रहित ममतासे खाली शास्त्रज्ञ होकर तुम लोगों को आश्चर्य कैसे हुआ २४ हे निर्दोष तपोधन ऋषियो इस मेरे सन्देह को निवृत्त करने के योग्यहो २५ ऋषि बोले कि सृष्टिको उत्पन्न करके नाश करते हैं आपही शीत उष्ण ऋतुरूप होकर वर्षा को करते हो २६ पृथ्वी के सब जड़ चैतन्यों के माता पिता रूपभी आपही हौ सव लोकों के स्वामी और प्रभुहौ २७ हे कल्याणरूप मधुसूदनजी इसप्रकार हमारे संशयोंका उत्पन्न करनेवाला जो आपका तेजरूप प्रकट हुआ अग्नि है उसको आपही कहने के योग्य हौ २८ हे नारायणजी इसके पीछे हम सब भी निर्भय होकर जो कुछ कि हमने देखा है और सुना है उस को वर्णन करेंगे २६ वासुदेवजी बोले कि यह वैष्णव तेज प्रलयाग्नि के समान जो मेरे मुखसे निकला जिससे यह पर्वत भस्म होगया ३० क्रोध और इन्द्रियों के जीतनेवाले तपोधन देवताओं के समान आपलोग भी आश्रयुक्त होकर पीड़ावान् हुये ३१ वह तपस्वियों का व्रत सेवन करने से मुझे व्रत करनेवाले के मुखसे अग्नि प्रकट हुआ है उससे आपलोग पीड़ावान होने के योग्य नहीं हो. ३२ में इस पर्वत पर व्रतकरके अपने समान पराक्रमी पुत्र को तपस्या के द्वारा प्राप्त करने के लिये आयाथा ३३ जब व्रतकी समाप्ति हुई तब मेरे शरीर में जो आत्माहै वह अग्निहोकर बाहर निकला और लोकों के पितामह वरके देनेवाले शिवजी महाराज के दर्शन को गया ३४ हे बड़े साधू मुनिलोगो उन महात्मा शिवजी ने उस मेरे अग्निरूप आत्माको पुत्रभाव में नियंतकरके यहवचन कहा कि आधे तेजसे तुम्हारापुत्र होगा ३५ यह वही अग्नि शिष्य के समान मेरे पास आकर मेरी सेवा के निमित्त मेरे चरणों में आकर शान्तहुआ और अब इसने
अपने पूर्व्वरूपको पाया ३६ यह मैंने विष्णु भगवान्जी के गुप्तरहस्यका संक्षेप वर्णन किया है हे तपोधन ऋषिलोगो इससे भय न करना चाहिये ३७ हे सावधान महात्मालोगो उन्नत दृष्टि के द्वारा आपलोगोंकी विज्ञता सर्वत्र है तुम सब लोग तपस्त्रियों के व्रतसे महातेजस्त्री और ज्ञान विज्ञान से शोभायमानहो ३= तुमने स्वर्ग वा पृथ्वीपर जो कुछ आश्चर्य्य देखा है वा सुना है उसको मुझसे कहौ ३६. यहां आपसरीखे तपोबननिवासी लोगों के वर्णन किये हुये उस अमृतरूपचन के मधुर रसके पीने की मेरी इच्छा है ४० हे देवदर्शन ऋऋषियोगद्यपि में स्वर्ग पृथ्वी आदि के सव दर्शन के योग्य आश्रयको जिनको कि तुमने भी नहीं देखा है उन सबको जानता और देखताभी हूं ४१ और वह मेरी पराप्रति किमीस्थान में भी नहीं रुकती है और मेरे आत्मा में वर्तमान ऐश्वर्यादिक भी मुझको अपूर्व आश्चर्य्यकारी नहीं विदित होते हैं ४२ परन्तु श्रद्धा के योग्य और महज्जनों से श्रवण किया हुआ आशय विलम्वतक पृथ्वी पर ऐसे नियत होता है जैसे कि प तपर नियत किया हुआ लेख्य होता है ४३ सो मैं सज्जनों के मुखसे निकले हुये मनुष्योंकी बुद्धि के प्रकाशक गुप्त आशयको सज्जनों की सभा में बर्णन करूंगा ४४ इसके अनन्तर मुनियों के सब समूह श्रीकृष्ण जी के पास नियंत होकर आश्चर्ययुक्त हुये और कमलदलरूप नेत्रों से युक्त उन दुष्टसंहारी विष्णु जीको देखा ४५ तब किसी ने आशीर्वाद दियां और किसी ने उनका पूजन किया और किसी ने ऋग्वेद मंत्रों से युक्त वचनों के द्वारा इन मधुसूदनजीकी स्तुतिकरी ४६ फिर मुनियों के सव समूहने बड़ेवक्ता वार्तालाप करने में सावधान देवर्षि नारदजीको वर्तमान वृत्तान्त के कहनेको प्रेरणाकरी ४७ मुनियों ने कहा हे प्रभु नारदजी तीर्थयात्रा करने वाले मुनियों ने बुद्धि से बाहर जो वृत्तान्त इस हिमालय पर्व्वतंपर देखा है ४८ उस आश्चर्य्यको इन सुनियों की वृद्धिकेलिये श्रीः कृष्णजी से आपही कहने के योग्य हैं ४६ सुनियोंके इस बचलको सुनकर भगवान् देवर्षि नारदजी ने प्राचीन वृत्तान्तोंसमेत इस कथा को वर्णन किया ५० ।। इति श्रीमहाभारतेनुशासनिके पर्व्वणिदानधर्मेश तोपरिएकोनचत्वारिंशोऽध्यायः १३९ ।।
एकसौ चालीसका अध्याय ।।
भीष्मजी ने राजा युधिष्ठिर से कहा कि तब नारायण जी के भक्त भगवान् नारद | रतवंश में बहुत से शास्त्रोंके जानने से बुद्धियुक्हो हे शत्रुहन्ता मैं आपसे उस कथाको सुनना चाहताहूं जो कि धर्म अर्थ से युक्त होकर सुखके उदय करने वाली सृष्टिको आश्चर्यकारी है दो पुरुषोत्तम यह वह समय वर्त्तमान हुआ है जो है कि बिरादरी वाले और बांधवोंसे कठिनता से प्राप्त करने के योग्य है और आपके सिवाय हमाराहितकारी कोई मनुष्य नहीं है तीन हे निष्पाप राजा भीष्मजी जो भाइयों समेत मैं आपसे पोषण करने के योग्य तो आपसे जो दो प्रश्न मैं करू उसका उत्तर आप देनेको योग्य हैं चार सव राजाओं में बड़े साधूं यह श्रीमान् नारायणजी बहुत मान और प्रीतिसे संयुक्तहोकर आपको सेवन करते हैं पाँच. तुम श्रीतिसे मेरे प्रियके निमित्त सब राजालोगों समेत मेरे भाई और इन श्रीनारायण जीके सम्मुख सब वृत्तान्त कहनेको योग्यहो छः वैशम्पायन बोले कि उसके उस वचन को सुनकर उन गांगेय भीष्मजी ने बड़ी शीघ्रता से यह बचन कहा सात कि हे राजा मैं अब तुमसे बड़ी चित्तरोचक कथा वर्णन करता हूं कि पूर्वसमय में इन विष्णुजी का प्रभाव वा शिवजी का प्रभाव अथवा रुद्राणीजी का संशय और शिव पार्वतीजीका जो प्रश्नोत्तरहै इन सबको मैं कहता हूँ तुम चित्त से सुनो धर्मात्मा श्रीकृष्णजी ने बारह बर्षका व्रत कियाथा उस समय नारंद और पर्वत ऋषि उन दीक्षित श्रीकृष्णजी के दर्शनके निमित्त आयें दस जप करनेवालों में श्रेष्ठ व्यास, धौम्य, देवल, काश्यप, महत्काश्यप ग्यारह और इन्द्रियों के जीतनेवाले दीक्षायुक्त अन्य ऋषि जिनके साथ में देवताओं के समान तपोधन सिद्ध लोग थे वह सब आये बारह तब प्रसन्नचित्त श्रीकृष्णजीने उनके सरकार और अतिथिपूजनको जो अपने कुलकी प्रशंसाके योग्य और देव पूजन के योग्यथा विचार किया तेरह फिर वह सव प्रसन्नमूर्ति ऋषिलोग उन आस्तरों पर बैठ गये जोकि हरित उत्तम बर्ष नवीन कुशाओं के वनेहुये थे चौदह तब उन सबने राजर्षि देवता और तपोधन ऋषियों की धर्मयुक्त मधुर कथाओं को बर्णन किया पंद्रह इसके पीछे व्रतचर्य्या रूप ईंधन से उत्पन्न नारायण तेज उन अपूर्वकर्मी श्रीकृष्णजी के मुखसे निकलकर अग्निरूप हुआ सोलह उस अग्निने वृक्षलता, क्षुप, पशु, पक्षी, हिंसक, पशु, और सर्पोंसमेत उस पर्वतको भस्म करदिया सत्रह और पर्वतके उस शिखर को भी मथा जोकि नानाप्रकार के मृगों से हाहाकार रूप जीवतें जीवों से रहित और अकिंचन लोगोंसे दर्शनीय था अट्ठारह उस बड़ी अग्नि की ज्वालाने जब पर्वतको अत्यन्त भस्म करदिया तब उस पर्वतने विष्णुजी के सम्मुख आ कर शिष्य के समान दोनों चरणों को आकर स्पर्श किया सोलह इसके अनन्तर शत्रुओं के पराजय करनेवाले विष्णुजी ने उस भस्मरूप पर्वत को देखकर अ-. पनी अमृतरूप दृष्टि से फिर ज्योंकायों करदिया बीस तव वह पर्वत वृक्ष पशु बल्लीलता और हिंसादिक जीवों से यथावस्थित शोभित हुआ सव मुनिलोग इस आश्चर्य्यकारी वृत्तान्तको देखकर कम्पायमान रोमांचों से युक्त नेत्रों में अश्रुपातयुक्तहुये इक्कीस । बाईस इसके पीछे उन महावक्का नारायणजी ने उन ऋषियोंको आअर्य्ययुक्त देखकर नम्रतापूर्वक प्रीतियुक्त मधुरवचनों से यह पूजा तेईस कि हे ऋ पिलोगो सदैव संगोंसे रहित ममतासे खाली शास्त्रज्ञ होकर तुम लोगों को आश्चर्य कैसे हुआ चौबीस हे निर्दोष तपोधन ऋषियो इस मेरे सन्देह को निवृत्त करने के योग्यहो पच्चीस ऋषि बोले कि सृष्टिको उत्पन्न करके नाश करते हैं आपही शीत उष्ण ऋतुरूप होकर वर्षा को करते हो छब्बीस पृथ्वी के सब जड़ चैतन्यों के माता पिता रूपभी आपही हौ सव लोकों के स्वामी और प्रभुहौ सत्ताईस हे कल्याणरूप मधुसूदनजी इसप्रकार हमारे संशयोंका उत्पन्न करनेवाला जो आपका तेजरूप प्रकट हुआ अग्नि है उसको आपही कहने के योग्य हौ अट्ठाईस हे नारायणजी इसके पीछे हम सब भी निर्भय होकर जो कुछ कि हमने देखा है और सुना है उस को वर्णन करेंगे छब्बीस वासुदेवजी बोले कि यह वैष्णव तेज प्रलयाग्नि के समान जो मेरे मुखसे निकला जिससे यह पर्वत भस्म होगया तीस क्रोध और इन्द्रियों के जीतनेवाले तपोधन देवताओं के समान आपलोग भी आश्रयुक्त होकर पीड़ावान् हुये इकतीस वह तपस्वियों का व्रत सेवन करने से मुझे व्रत करनेवाले के मुखसे अग्नि प्रकट हुआ है उससे आपलोग पीड़ावान होने के योग्य नहीं हो. बत्तीस में इस पर्वत पर व्रतकरके अपने समान पराक्रमी पुत्र को तपस्या के द्वारा प्राप्त करने के लिये आयाथा तैंतीस जब व्रतकी समाप्ति हुई तब मेरे शरीर में जो आत्माहै वह अग्निहोकर बाहर निकला और लोकों के पितामह वरके देनेवाले शिवजी महाराज के दर्शन को गया चौंतीस हे बड़े साधू मुनिलोगो उन महात्मा शिवजी ने उस मेरे अग्निरूप आत्माको पुत्रभाव में नियंतकरके यहवचन कहा कि आधे तेजसे तुम्हारापुत्र होगा पैंतीस यह वही अग्नि शिष्य के समान मेरे पास आकर मेरी सेवा के निमित्त मेरे चरणों में आकर शान्तहुआ और अब इसने अपने पूर्व्वरूपको पाया छत्तीस यह मैंने विष्णु भगवान्जी के गुप्तरहस्यका संक्षेप वर्णन किया है हे तपोधन ऋषिलोगो इससे भय न करना चाहिये सैंतीस हे सावधान महात्मालोगो उन्नत दृष्टि के द्वारा आपलोगोंकी विज्ञता सर्वत्र है तुम सब लोग तपस्त्रियों के व्रतसे महातेजस्त्री और ज्ञान विज्ञान से शोभायमानहो तीन= तुमने स्वर्ग वा पृथ्वीपर जो कुछ आश्चर्य्य देखा है वा सुना है उसको मुझसे कहौ छत्तीस. यहां आपसरीखे तपोबननिवासी लोगों के वर्णन किये हुये उस अमृतरूपचन के मधुर रसके पीने की मेरी इच्छा है चालीस हे देवदर्शन ऋऋषियोगद्यपि में स्वर्ग पृथ्वी आदि के सव दर्शन के योग्य आश्रयको जिनको कि तुमने भी नहीं देखा है उन सबको जानता और देखताभी हूं इकतालीस और वह मेरी पराप्रति किमीस्थान में भी नहीं रुकती है और मेरे आत्मा में वर्तमान ऐश्वर्यादिक भी मुझको अपूर्व आश्चर्य्यकारी नहीं विदित होते हैं बयालीस परन्तु श्रद्धा के योग्य और महज्जनों से श्रवण किया हुआ आशय विलम्वतक पृथ्वी पर ऐसे नियत होता है जैसे कि प तपर नियत किया हुआ लेख्य होता है तैंतालीस सो मैं सज्जनों के मुखसे निकले हुये मनुष्योंकी बुद्धि के प्रकाशक गुप्त आशयको सज्जनों की सभा में बर्णन करूंगा चौंतालीस इसके अनन्तर मुनियों के सब समूह श्रीकृष्ण जी के पास नियंत होकर आश्चर्ययुक्त हुये और कमलदलरूप नेत्रों से युक्त उन दुष्टसंहारी विष्णु जीको देखा पैंतालीस तब किसी ने आशीर्वाद दियां और किसी ने उनका पूजन किया और किसी ने ऋग्वेद मंत्रों से युक्त वचनों के द्वारा इन मधुसूदनजीकी स्तुतिकरी छियालीस फिर मुनियों के सव समूहने बड़ेवक्ता वार्तालाप करने में सावधान देवर्षि नारदजीको वर्तमान वृत्तान्त के कहनेको प्रेरणाकरी सैंतालीस मुनियों ने कहा हे प्रभु नारदजी तीर्थयात्रा करने वाले मुनियों ने बुद्धि से बाहर जो वृत्तान्त इस हिमालय पर्व्वतंपर देखा है अड़तालीस उस आश्चर्य्यको इन सुनियों की वृद्धिकेलिये श्रीः कृष्णजी से आपही कहने के योग्य हैं छियालीस सुनियोंके इस बचलको सुनकर भगवान् देवर्षि नारदजी ने प्राचीन वृत्तान्तोंसमेत इस कथा को वर्णन किया पचास ।। इति श्रीमहाभारतेनुशासनिके पर्व्वणिदानधर्मेश तोपरिएकोनचत्वारिंशोऽध्यायः एक सौ उनतालीस ।। एकसौ चालीसका अध्याय ।। भीष्मजी ने राजा युधिष्ठिर से कहा कि तब नारायण जी के भक्त भगवान् नारद |
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में नए जिलों की वकालत की है, साथ ही कहा है कि समान नागरिक संहिता बिल को अगले दो माह में लाया जाएगा। माना जा रहा है कि सीएम धामी राज्य में पांच नए जिले बनाए जाने के लिए संगठन और जन प्रतिनिधियों से चर्चा करने वाले है।
उत्तराखंड में चुनाव से पहले पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता कानून राज्य में लाने की घोषणा की थी, इस के लिए रिटायर जज रंजना देसाई के नेतृत्व में एक समिति भी बना दी गई । समिति की कई बैठके हो चुकी है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता हमारे लिए कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। हमे अगले दो माह में इस बिल को विधानसभा में पेश करके केंद्र के पास भेजना है। उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य होगा जो एक देश एक समान कानून को लागू करेगा। उत्तराखंड में लंबे समय से की जा रही नए जिलों की मांग पर सीएम धामी ने कहा कि वो भी जिलों का पुनर्गठन चाहते है। इसके लिए वो पार्टी संगठन और जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे।
अभी हाल ही में बीजेपी ने भी पांच नए जिलों की घोषणा की थी, जिनमे रानीखेत, कोटद्वार, रुड़की, काशीपुर और ऋषिकेश शामिल है। लेकिन इसमें हरिद्वार और उधामसिंह नगर के दो-दो जिले बना देने की बात गले इस लिए नही उतरती क्योंकि ये पहले से ही छोटे-छोटे जिले है।
जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी से यमुनाघाटी, पौड़ी से कोटद्वार और अल्मोड़ा से रानीखेत जिले को अलग किया जा सकता है और ये मांगे पुरानी भी हैं। एक संभावना ये भी है कि नैनीताल से आबादी का बोझ कम करने के लिए जिला मुख्यालय को हल्द्वानी शिफ्ट किया जा सकता है, सर्दियों में वैसे भी मुख्यालय हल्द्वानी आता रहा है, इस लिए इसमें खर्चा भी नही होगा।
बरहाल मुख्यमंत्री धामी अब बीजेपी के दृष्टि प्रपत्र पर काम करते जा रहे है। उन्होंने अब पुनः अपने कामकाज की रफ्तार पकड़ ली है। माना ये भी जा रहा है कि इसी हफ्ते वे अपने मंत्रीमंडल में एक दो नए चेहरे शामिल कर सकते है और एक दो मंत्रियों को बदल भी सकते है।
| मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में नए जिलों की वकालत की है, साथ ही कहा है कि समान नागरिक संहिता बिल को अगले दो माह में लाया जाएगा। माना जा रहा है कि सीएम धामी राज्य में पांच नए जिले बनाए जाने के लिए संगठन और जन प्रतिनिधियों से चर्चा करने वाले है। उत्तराखंड में चुनाव से पहले पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता कानून राज्य में लाने की घोषणा की थी, इस के लिए रिटायर जज रंजना देसाई के नेतृत्व में एक समिति भी बना दी गई । समिति की कई बैठके हो चुकी है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता हमारे लिए कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। हमे अगले दो माह में इस बिल को विधानसभा में पेश करके केंद्र के पास भेजना है। उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य होगा जो एक देश एक समान कानून को लागू करेगा। उत्तराखंड में लंबे समय से की जा रही नए जिलों की मांग पर सीएम धामी ने कहा कि वो भी जिलों का पुनर्गठन चाहते है। इसके लिए वो पार्टी संगठन और जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। अभी हाल ही में बीजेपी ने भी पांच नए जिलों की घोषणा की थी, जिनमे रानीखेत, कोटद्वार, रुड़की, काशीपुर और ऋषिकेश शामिल है। लेकिन इसमें हरिद्वार और उधामसिंह नगर के दो-दो जिले बना देने की बात गले इस लिए नही उतरती क्योंकि ये पहले से ही छोटे-छोटे जिले है। जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी से यमुनाघाटी, पौड़ी से कोटद्वार और अल्मोड़ा से रानीखेत जिले को अलग किया जा सकता है और ये मांगे पुरानी भी हैं। एक संभावना ये भी है कि नैनीताल से आबादी का बोझ कम करने के लिए जिला मुख्यालय को हल्द्वानी शिफ्ट किया जा सकता है, सर्दियों में वैसे भी मुख्यालय हल्द्वानी आता रहा है, इस लिए इसमें खर्चा भी नही होगा। बरहाल मुख्यमंत्री धामी अब बीजेपी के दृष्टि प्रपत्र पर काम करते जा रहे है। उन्होंने अब पुनः अपने कामकाज की रफ्तार पकड़ ली है। माना ये भी जा रहा है कि इसी हफ्ते वे अपने मंत्रीमंडल में एक दो नए चेहरे शामिल कर सकते है और एक दो मंत्रियों को बदल भी सकते है। |
फेमस पंजाबी सिंगर सारा गुरपाल इस साल बिग बॉस के घर में कंटेस्टेंट बनकर आई हैं, और शो में आते ही उनके नाम पर एक कॉन्ट्रोवर्सी सामने आ गई है। पंजाबी सिंगर तुषार कुमार ने ये दावा किया है कि सारा गुरपाल शादीशुदा हैं और वो झूठ बोल रही हैं। सारा और उनकी शादी 2014 में हो चुकी है.
पंजाबी गायिका सारा को अपने गृह राज्य में किए अपने काम पर बेहद गर्व है. उनका कहना है कि 'बिग बॉस' जैसे किसी नेशनल प्लेटफॉर्म पर ब्रेक मिलना बहुत बड़ी बात है और इसका पूरा श्रेय वह पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने काम को देती हैं.
| फेमस पंजाबी सिंगर सारा गुरपाल इस साल बिग बॉस के घर में कंटेस्टेंट बनकर आई हैं, और शो में आते ही उनके नाम पर एक कॉन्ट्रोवर्सी सामने आ गई है। पंजाबी सिंगर तुषार कुमार ने ये दावा किया है कि सारा गुरपाल शादीशुदा हैं और वो झूठ बोल रही हैं। सारा और उनकी शादी दो हज़ार चौदह में हो चुकी है. पंजाबी गायिका सारा को अपने गृह राज्य में किए अपने काम पर बेहद गर्व है. उनका कहना है कि 'बिग बॉस' जैसे किसी नेशनल प्लेटफॉर्म पर ब्रेक मिलना बहुत बड़ी बात है और इसका पूरा श्रेय वह पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने काम को देती हैं. |
हसनपुरा/सीवान। एमएच नगर थाना के झौवा गांव में बीती रात्रि गुमटीनुमा दुकान में आग लगने से 7 हजार नगद समेत करीब 50 हजार की संपत्ति जलकर राख हो गई। पीड़ित राकेश यादव ने बताया कि आग लगी में 7 हजार नगद समेत चावल, दाल, आटा, सरसो तेल, सरफ-साबुन सहित अन्य समान जल कर राख हो गई। घटना 11 बजे रात की बताई जा रही है। पीड़ित ने बताया कि जब जलने की आवाज सुनाई दी। तभी हम निकल देखे की मेरा दुकान जल रहा है। तब मैंने आस-पास के लोगो को बुलाया। जब तक आग पर काबू पाते सब कुछ जल कर राख हो गया। घटना के बाद स्थानीय मुखिया अनिल कुमार सिंह, सरपंच हरेंद्र यादव सहित गांव के दोनों कौम के लोगो ने मानवता को मिशाल पेश करते हुए चंदे इकट्ठा कर पीड़ित की मदद की। ताकि पुनः दुकान कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सके। बताया जाता है कि पीड़ित राकेश यादव इसी दुकान से अपने सात परिवार का भरण पोषण करते थे। घटना के बाद पीड़ित काफी सदमे में है।
| हसनपुरा/सीवान। एमएच नगर थाना के झौवा गांव में बीती रात्रि गुमटीनुमा दुकान में आग लगने से सात हजार नगद समेत करीब पचास हजार की संपत्ति जलकर राख हो गई। पीड़ित राकेश यादव ने बताया कि आग लगी में सात हजार नगद समेत चावल, दाल, आटा, सरसो तेल, सरफ-साबुन सहित अन्य समान जल कर राख हो गई। घटना ग्यारह बजे रात की बताई जा रही है। पीड़ित ने बताया कि जब जलने की आवाज सुनाई दी। तभी हम निकल देखे की मेरा दुकान जल रहा है। तब मैंने आस-पास के लोगो को बुलाया। जब तक आग पर काबू पाते सब कुछ जल कर राख हो गया। घटना के बाद स्थानीय मुखिया अनिल कुमार सिंह, सरपंच हरेंद्र यादव सहित गांव के दोनों कौम के लोगो ने मानवता को मिशाल पेश करते हुए चंदे इकट्ठा कर पीड़ित की मदद की। ताकि पुनः दुकान कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सके। बताया जाता है कि पीड़ित राकेश यादव इसी दुकान से अपने सात परिवार का भरण पोषण करते थे। घटना के बाद पीड़ित काफी सदमे में है। |
कल यानी 22 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स (DC vs RR) के बीच मैच खेला गया। इस मुकाबले के दौरान कई विवाद देखने को मिले।
खेल। कल यानी 22 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स (DC vs RR) के बीच मैच खेला गया। इस मुकाबले के दौरान कई विवाद देखने को मिले। जिसमे से एक विवाद तो थमने का नाम ही नहीं ले रहा। हुआ ये की मैच में अंपायर ने एक गेंद को नो बॉल (No Ball) नहीं दिया। जिसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत (Rishabh Pant) और टीम के कुछ अन्य खिलाड़ी भड़क गए। अब वह सभी खिलाड़ी विवादों के घेरे में खड़े हैं। जिसके बाद इन सभी खिलाड़ियों पर मैच फीस का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा दिल्ली के एक कोच को भी बड़ी सजा दी गई है।
वहीं इस मामले के बाद ऋषभ पंत समेत शार्दुल ठाकुर के ऊपर मैच फीस का जुर्माना लगा दिया गया है। लेकिन सहायक कोच प्रवीण आमरे (Pravin Amre) को एक मुकाबले के लिए बैन किया गया है। इसके अलावा उनके ऊपर भी मैच फीस का 100% जुर्माना लगा दिया गया है। गौरतलब है कि, कोच प्रवीण आमरे बीच मुकाबले के दौरान मैदान में अंपायर से नो बॉल की अपील करने चले गए थे। जिसका खामियाजा उन्हें अब भुगतना पड़ रहा है।
यह मामला राजस्थान और दिल्ली के बीच हुए मुकाबले के दौरान देखने को मिला। इस मैच को राजस्थान की टीम ने 15 रनों से जीत लिया था। ये घटना तब घटी जब मैच के आखिरी ओवर में ओबेड मैक्कॉय की तीसरी गेंद पर रोवमैन पॉवेल ने एक छक्का जड़ा। यह बॉल फुलटॉस थी जिसे दिल्ली कैपिटल्स नो बॉल बता रही थी। लेकिन अंपायर ने इसे नो बॉल करार नहीं दिया। जिसके बाद इसी को लेकर बीच मुकाबले में विवाद की लहर उठ गई।
| कल यानी बाईस अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच मैच खेला गया। इस मुकाबले के दौरान कई विवाद देखने को मिले। खेल। कल यानी बाईस अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच मैच खेला गया। इस मुकाबले के दौरान कई विवाद देखने को मिले। जिसमे से एक विवाद तो थमने का नाम ही नहीं ले रहा। हुआ ये की मैच में अंपायर ने एक गेंद को नो बॉल नहीं दिया। जिसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत और टीम के कुछ अन्य खिलाड़ी भड़क गए। अब वह सभी खिलाड़ी विवादों के घेरे में खड़े हैं। जिसके बाद इन सभी खिलाड़ियों पर मैच फीस का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा दिल्ली के एक कोच को भी बड़ी सजा दी गई है। वहीं इस मामले के बाद ऋषभ पंत समेत शार्दुल ठाकुर के ऊपर मैच फीस का जुर्माना लगा दिया गया है। लेकिन सहायक कोच प्रवीण आमरे को एक मुकाबले के लिए बैन किया गया है। इसके अलावा उनके ऊपर भी मैच फीस का एक सौ% जुर्माना लगा दिया गया है। गौरतलब है कि, कोच प्रवीण आमरे बीच मुकाबले के दौरान मैदान में अंपायर से नो बॉल की अपील करने चले गए थे। जिसका खामियाजा उन्हें अब भुगतना पड़ रहा है। यह मामला राजस्थान और दिल्ली के बीच हुए मुकाबले के दौरान देखने को मिला। इस मैच को राजस्थान की टीम ने पंद्रह रनों से जीत लिया था। ये घटना तब घटी जब मैच के आखिरी ओवर में ओबेड मैक्कॉय की तीसरी गेंद पर रोवमैन पॉवेल ने एक छक्का जड़ा। यह बॉल फुलटॉस थी जिसे दिल्ली कैपिटल्स नो बॉल बता रही थी। लेकिन अंपायर ने इसे नो बॉल करार नहीं दिया। जिसके बाद इसी को लेकर बीच मुकाबले में विवाद की लहर उठ गई। |
इस लेख में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी बाल श्रम पर सरकार की नीति का उल्लेख किया गया है।
इस पृष्ठ में बिहार राज्य में बाल श्रम के उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास हेतु कार्य योजना की जानकारी दी गयी है।
इस भाग में बालश्रम की उत्पत्ति, उससे जुड़ीं चुनौतियों के साथ संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा की जानकारी के साथ इस विषय से जुड़े अनेक पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपायों की सिफारिश की है।
इस आलेख में पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम क्या है इसके बारे में जानकारी दी गयी है।
इस पृष्ठ पर बिहार समेकित बाल विकास सेवा की योजनाएं और कार्यक्रम की जानकारी दी गयी है।
इस भाग में बाल श्रमिकों की समस्याओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
इस भाग में गैरसरकारी संगठनों के लिए सहायता प्राप्त किये जाने वाले क्षेत्रों की जानकारी मंत्रालय अनुसार दी गई है।
| इस लेख में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी बाल श्रम पर सरकार की नीति का उल्लेख किया गया है। इस पृष्ठ में बिहार राज्य में बाल श्रम के उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास हेतु कार्य योजना की जानकारी दी गयी है। इस भाग में बालश्रम की उत्पत्ति, उससे जुड़ीं चुनौतियों के साथ संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा की जानकारी के साथ इस विषय से जुड़े अनेक पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपायों की सिफारिश की है। इस आलेख में पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम क्या है इसके बारे में जानकारी दी गयी है। इस पृष्ठ पर बिहार समेकित बाल विकास सेवा की योजनाएं और कार्यक्रम की जानकारी दी गयी है। इस भाग में बाल श्रमिकों की समस्याओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इस भाग में गैरसरकारी संगठनों के लिए सहायता प्राप्त किये जाने वाले क्षेत्रों की जानकारी मंत्रालय अनुसार दी गई है। |
PATNA : बिहार के छपरा में जहरीली शराब से मरनेवालों की तादाद बढ़ती जा रही है। जहां बीती रात मरनेवालों की संख्या सात थी, वहीं शुक्रवार सुबह यह संख्या बढ़कर 11 हो गई है। एक साथ जहरीली शराब से हुई इतनी मौतों के बाद अब विपक्ष भी एक्शन के मूड में आ गई है। मुख्य विपक्ष पार्टी राजद की फायर ब्रांड नेता रितु जायसवाल इन मौतों को लेकर आगबबूला नजर आई। उन्होंने इन मौतों के लिए सीधे सीधे बिहार के मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया।
रितु जायसवाल ने कहा कि बिहार के दंभी और जिद्दी मुख्यमंत्री के कारण हर दिन शराब पीकर लोगों की मौत हो रही है। उनकी शराबबंदी सिर्फ कागजों पर ही नजर आती है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। राजद प्रवक्ता ने कहा हम शराबबंदी का समर्थन करते हैं, लेकिन ऐसी शराबबंदी का नहीं, जो सिर्फ कागजों पर नजर आती है। रितु जायसवाल ने कहा कि बिहार में शराबबंदी को लगाम लगाने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है।
रितु जायसवाल ने कहा बिहार में एक हत्या पर आरोपी को उम्र कैद, फांसी की सजा तक हो जाती है। यहां एक मुख्यमंत्री की जिद के कारण इतने लोगों की मौत हो गई है तो उसके लिए जो जिम्मेदार है, उनके खिलाफ हत्या का केस क्यों नहीं दर्ज होना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री के नाकाम अधिकारियों के कारण यह मौतें हो रही है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री ही दोषी हैं।
रितु जायसवाल ने शराबबंदी पर केंद्र सरकार पर जमकर हमला किया। हाल में गुजरात में जहरीली शराब से 40 लोगों की हुई मौत की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। ऐसे शराबबंदी की आवश्यकता नहीं है, जो सिर्फ कागजों तक सीमित है।
| PATNA : बिहार के छपरा में जहरीली शराब से मरनेवालों की तादाद बढ़ती जा रही है। जहां बीती रात मरनेवालों की संख्या सात थी, वहीं शुक्रवार सुबह यह संख्या बढ़कर ग्यारह हो गई है। एक साथ जहरीली शराब से हुई इतनी मौतों के बाद अब विपक्ष भी एक्शन के मूड में आ गई है। मुख्य विपक्ष पार्टी राजद की फायर ब्रांड नेता रितु जायसवाल इन मौतों को लेकर आगबबूला नजर आई। उन्होंने इन मौतों के लिए सीधे सीधे बिहार के मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। रितु जायसवाल ने कहा कि बिहार के दंभी और जिद्दी मुख्यमंत्री के कारण हर दिन शराब पीकर लोगों की मौत हो रही है। उनकी शराबबंदी सिर्फ कागजों पर ही नजर आती है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। राजद प्रवक्ता ने कहा हम शराबबंदी का समर्थन करते हैं, लेकिन ऐसी शराबबंदी का नहीं, जो सिर्फ कागजों पर नजर आती है। रितु जायसवाल ने कहा कि बिहार में शराबबंदी को लगाम लगाने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है। रितु जायसवाल ने कहा बिहार में एक हत्या पर आरोपी को उम्र कैद, फांसी की सजा तक हो जाती है। यहां एक मुख्यमंत्री की जिद के कारण इतने लोगों की मौत हो गई है तो उसके लिए जो जिम्मेदार है, उनके खिलाफ हत्या का केस क्यों नहीं दर्ज होना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री के नाकाम अधिकारियों के कारण यह मौतें हो रही है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री ही दोषी हैं। रितु जायसवाल ने शराबबंदी पर केंद्र सरकार पर जमकर हमला किया। हाल में गुजरात में जहरीली शराब से चालीस लोगों की हुई मौत की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। ऐसे शराबबंदी की आवश्यकता नहीं है, जो सिर्फ कागजों तक सीमित है। |
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पचास करोड़ रूपये तक के निवेश वाले उद्योगों को सूक्ष्म लघु और मझौले उद्योगों को मिलने वाले लाभ देने का फैसला किया
खरीफ की चौदह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी मंजूरी दी गई है
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में कोविड19 के मरीजों की स्वस्थ ने होने की दर चार हज़ार आठ सौ उन्नीस प्रतिशत हो गई है
हरियाणा में आज कोविड19 के दो सौ इकसठ पोजिटिव मामले सामने आये
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आज के राजदूत सतोशी सजुकी सतोशी सज़ुकी से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बात की
जापानी कंपनियों ने हरियाणा में और निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई
जापान केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज सूक्षम लघु और मझौले उद्योगों एमएसएमई किसानों रेहड़ी व फड़ी पर सामान बेचने वालों की मदद करने के लिए कई ऐतिहासिक फैस्ले लिये है
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये फैसले के बारे मीडिया को बताते हुये सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सूक्षम लघु और मझौले उद्योगों की परिभाषा मे और संशोधन किया गया है जिससे और उद्योग भी इसके दायरे में आ जायेंगे
जिन उद्योगों में पचास करोड़ रूपये तक का निवेश हुआ है और कारोबरा ाई सौ करोड़ रूपये तक है वे अब एमएसएमई सेक्टर के लाभ भी ले सकते है
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ की चौदह फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी मंजूरी दे दी है और अब किसानों को उनकी लागत पर पचास से तिरासी प्रतिशत लाभ होगा
कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि अब किसानों को ऋण उतारने के लिए अगस्त का सयम मिला गया है
मंत्रिमंडल ने धान के न्यूनतम समर्थनमूल्य में तिरेपन रूये प्रति क्विंटल इजाफे को मंजूरी दी है जोकि अब एक हज़ार आठ सौ अड़सठ रूपये हो जायेगा
जबकि कपास के समर्थनमूल्य में दो सौ साठ रूपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है जो पाँच हज़ार पाँच सौ पंद्रह रूपये प्रति क्विंटल के दाम बिकेगा
ने स्कूलों केन्द्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल किये गये उस दावे का खंडन किया है कि केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएससी ने को निर्देश दिये है कि द्वारा की गई एप्प खरीद कर ऑन लाइन परीक्षायें ली जायें और इस कार्य के लिए डॉ साहिल गहलोत को विशेष्ज्ञ कार्य अधिकारी ओएसडी नियुक्त किया है
पत्र सूचना कार्यालय ने एक टवीट में इस खबर को झूठी और गुमराहूपर्ण बताया है
इसने सीबीएससी ने इस कार्य के लिए कोई ओएसडी नियुक्त नहीं किया
कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में कोविड19 के मरीजों की स्वस्थ होने की दर चार हज़ार आठ सौ उन्नीस प्रतिशत हो गई है
पिछले चौबिस घंटों के दौरान कोविड19 के चार हज़ार आठ सौ पैंतीस मरीज़ स्वस्थ हुये है
मंत्रालय ने कहा है कि अब तक बानवे हजार कोरोना मरीज़ स्वस्थ हो चुके है
इस समय कोविड19 के तिरानवे हजार तीन सौ बाईस मरीज़ उपचाराधीन है और उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है
मंत्रालय ने कहा कि सरकार राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से मिलकर कोविड19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिए बहुत उठा रही है
इसने कहा है कि एक तरफ मरीज़ों की स्वस्थ होने की दर में सुधार है दूसरी ओर मृत्यु दर में भी कमी आई है
भारत में मृत्यु दर दो सौ तिरासी प्रतिशत है जबकि विश्व में औसतन मृत्यु दर छः सौ उन्नीस प्रतिशत है
से कदम चंडीगढ़ में आज बापूधाम कालोनी की एक पचहत्तर वर्षीय महिला को स्वस्थ होने के बाद पीजीआई चंडीगढ़ से छुटटी दे दी गई है
महिला कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थी
हमारे संवाददाता ने बताया कि कल देर रात मनी माजरा ने प्रसव के दौरान कोरोना पोजिटिव पाई गई अट्ठाईस वर्षीय महिला के दस पारिवारिक सम्बधियों के नमूने लिये गये है
ये महिला बापूधाम कालोनी से है
इसके साथ चंडीगढ़ में कोविड19 के मरीजों की गिनती दो सौ चौरानवे हो गई है जिनमें से दो सौ व्यक्ति स्वस्थ हो गये है और चार लोगों की मृत्यु हुई है
अंतिम आंकड़ों के अनुसार कोविड19 के नब्बे मरीज़ उपचाराधीन है
रवाना हरियाणा में अम्बाला छावनी से रेल सेवा शुरू हो गई है
आज हरिद्वार के लिए अमृतसरहरिद्वार जन शताब्दी की गई
हमारे संवाददाता ने बताया कि पहले दिन इस रेलगाड़ी में सवार होने के लिए अम्बाला छावनी रेलवे स्टेशन पर बाईस यात्री पहुंचे जबकि पंद्रह यात्री गाड़ी से इस स्टेशन पर उतरे
अम्बाला से सवार होने वाले यात्रियों की मुख्य द्वारा पर थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई
अम्बाला मंडल रेल प्रबंधक जी एम सिंह ने बताया कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुये आज से देश मे सौ जोड़ा रेलगाडियां चलनी शुरू हो गई है
होडल पुलिस ने आज पुन्हाना मोड़ पर एक कार से इक्कीस किलो गांजा बरामद किया है
पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर लिया है
होडल अपराध जांच शाखा प्रभारी ने बताया कि ने अपना नाम आविद बताया है
वह गांव नई का रहने वाला है
पूछताछ में आरोपी में आरोपी युवक तीन हरियाणा के आज कोविड19 के दो सौ इकसठ नये पोजिटिव मामले सामने आये है जबकि सात कोरोना मरीज़ों की स्वस्थ होने के बाद छुटटी दी गई है
हमारे सवादाता ने बताया है कि आज सर्वाधिक एक सौ उनतीस पोजिटिव मामले गुरूग्राम से आये है
इसके साथ ही अब पोजिटिव पाये गये कोविड19 मरीज़ों की गिनती दो हज़ार तीन सौ बावन हो गई है जबकि स्वस्थ होने वाले कोरोना मरीज़ों की गिनती एक हज़ार पचपन हो गई है
प्रदेश में अबकि तक कोरोना संक्रमण से बीस लोगों की मृत्यु हुई है
इस सयम एक हज़ार दो सौ सतहत्तर कोरोना मरीज़ विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन है
सिरसा से हमारे संवाददाता ने बताया कि आज एक कविड19 के अट्ठाईस पोजिटिव मामले आये है जिनमें मुम्बई से लौटे पंद्रह व्यक्तेि चार कैदी और जेल में तैनात एक पुलिस कर्मी शामिल है
सिविल सर्जन डॉ सुरेन्द्र जैन ने बताया कि दो कैदी जमानत पर रिहा हुये थे
उन्होंने कहा कि छब्बीस लोगों की सिरसा के कोविड अस्पताल में और दो मरीजों को अग्रोहा मेडिकल कालेज में दाखिल करवाया गया है
फतेहाबाद जिले मे भी कोविड19 के दो नये मामले सामने आये है
इनमें से दिल्ली से टोहाना पहुंचे गुजराती परिवार का एक व्यक्ति और रेलवे पुलिस बल का जाखल प्रभारी भी शामिल है
जाखल रेलवे स्टेशन के पीछे लगती गली को सैनेटाइज़ किया किया गया
भिवानी में कोविड19 के पांच और चरखी दादरी में सात मामले सामने आये है
पंचकूला में एक तिरेसठ वर्षीय एक बुजुर्ग वायरस से संक्रमित पाया गया है
सिविल सर्जन डा जसजीत कौर ने बताया कि यह बुजुर्ग मूलत दिल्ली के रहने वाले है और इन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती किया गया है
वहीं गया है
वहीं भिवानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि विद्यायक व उनकी बेटी के दोबारा नमूने लेकर रोहतक भेजे थे जिनकी रिपोट नेगीटिव आई है
रोहतक में नगर निगम के एक सफाई कर्मचारी की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई है
सिविल सर्जन डॉ अनिल बिरला ने बताया कि कई दिन पहले तबीयत खराब होने पर उसे पीजीआई में भर्ती करवाया गया था
इसके अलावा पीजीआई की दो स्टाफ नर्सी के कोरोना पोजिटिव पाये जाने की भी खबर है
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज भारत में जापान के राजदूत सतोषी सुजुकी के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बातचीत की
पहले से हरियाणा मे काम कर रही कई जापानी कंपनियों से हरियाणा मे और निवेश करने में रूचि दिखाई
मुख्यमंत्री ने राजय सरकार द्वारा विदेशी निवेशकों को उद्योग के लिए भूमि को उद्योग के लिए भूमि आंवटित करने सहित कई जानकारियां दी
उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक विकास नीति देश मे बेहतर नीति है जिसमें निवेश को और आसान बनाया गया है
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सूक्ष्म लघु और मझौले उद्योगों के लिए तीन नये विभाग भी कायम किये है | केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पचास करोड़ रूपये तक के निवेश वाले उद्योगों को सूक्ष्म लघु और मझौले उद्योगों को मिलने वाले लाभ देने का फैसला किया खरीफ की चौदह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी मंजूरी दी गई है केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में कोविडउन्नीस के मरीजों की स्वस्थ ने होने की दर चार हज़ार आठ सौ उन्नीस प्रतिशत हो गई है हरियाणा में आज कोविडउन्नीस के दो सौ इकसठ पोजिटिव मामले सामने आये हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आज के राजदूत सतोशी सजुकी सतोशी सज़ुकी से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बात की जापानी कंपनियों ने हरियाणा में और निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई जापान केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज सूक्षम लघु और मझौले उद्योगों एमएसएमई किसानों रेहड़ी व फड़ी पर सामान बेचने वालों की मदद करने के लिए कई ऐतिहासिक फैस्ले लिये है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये फैसले के बारे मीडिया को बताते हुये सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सूक्षम लघु और मझौले उद्योगों की परिभाषा मे और संशोधन किया गया है जिससे और उद्योग भी इसके दायरे में आ जायेंगे जिन उद्योगों में पचास करोड़ रूपये तक का निवेश हुआ है और कारोबरा ाई सौ करोड़ रूपये तक है वे अब एमएसएमई सेक्टर के लाभ भी ले सकते है केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ की चौदह फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी मंजूरी दे दी है और अब किसानों को उनकी लागत पर पचास से तिरासी प्रतिशत लाभ होगा कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि अब किसानों को ऋण उतारने के लिए अगस्त का सयम मिला गया है मंत्रिमंडल ने धान के न्यूनतम समर्थनमूल्य में तिरेपन रूये प्रति क्विंटल इजाफे को मंजूरी दी है जोकि अब एक हज़ार आठ सौ अड़सठ रूपये हो जायेगा जबकि कपास के समर्थनमूल्य में दो सौ साठ रूपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है जो पाँच हज़ार पाँच सौ पंद्रह रूपये प्रति क्विंटल के दाम बिकेगा ने स्कूलों केन्द्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल किये गये उस दावे का खंडन किया है कि केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएससी ने को निर्देश दिये है कि द्वारा की गई एप्प खरीद कर ऑन लाइन परीक्षायें ली जायें और इस कार्य के लिए डॉ साहिल गहलोत को विशेष्ज्ञ कार्य अधिकारी ओएसडी नियुक्त किया है पत्र सूचना कार्यालय ने एक टवीट में इस खबर को झूठी और गुमराहूपर्ण बताया है इसने सीबीएससी ने इस कार्य के लिए कोई ओएसडी नियुक्त नहीं किया कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में कोविडउन्नीस के मरीजों की स्वस्थ होने की दर चार हज़ार आठ सौ उन्नीस प्रतिशत हो गई है पिछले चौबिस घंटों के दौरान कोविडउन्नीस के चार हज़ार आठ सौ पैंतीस मरीज़ स्वस्थ हुये है मंत्रालय ने कहा है कि अब तक बानवे हजार कोरोना मरीज़ स्वस्थ हो चुके है इस समय कोविडउन्नीस के तिरानवे हजार तीन सौ बाईस मरीज़ उपचाराधीन है और उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है मंत्रालय ने कहा कि सरकार राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से मिलकर कोविडउन्नीस की रोकथाम और प्रबंधन के लिए बहुत उठा रही है इसने कहा है कि एक तरफ मरीज़ों की स्वस्थ होने की दर में सुधार है दूसरी ओर मृत्यु दर में भी कमी आई है भारत में मृत्यु दर दो सौ तिरासी प्रतिशत है जबकि विश्व में औसतन मृत्यु दर छः सौ उन्नीस प्रतिशत है से कदम चंडीगढ़ में आज बापूधाम कालोनी की एक पचहत्तर वर्षीय महिला को स्वस्थ होने के बाद पीजीआई चंडीगढ़ से छुटटी दे दी गई है महिला कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थी हमारे संवाददाता ने बताया कि कल देर रात मनी माजरा ने प्रसव के दौरान कोरोना पोजिटिव पाई गई अट्ठाईस वर्षीय महिला के दस पारिवारिक सम्बधियों के नमूने लिये गये है ये महिला बापूधाम कालोनी से है इसके साथ चंडीगढ़ में कोविडउन्नीस के मरीजों की गिनती दो सौ चौरानवे हो गई है जिनमें से दो सौ व्यक्ति स्वस्थ हो गये है और चार लोगों की मृत्यु हुई है अंतिम आंकड़ों के अनुसार कोविडउन्नीस के नब्बे मरीज़ उपचाराधीन है रवाना हरियाणा में अम्बाला छावनी से रेल सेवा शुरू हो गई है आज हरिद्वार के लिए अमृतसरहरिद्वार जन शताब्दी की गई हमारे संवाददाता ने बताया कि पहले दिन इस रेलगाड़ी में सवार होने के लिए अम्बाला छावनी रेलवे स्टेशन पर बाईस यात्री पहुंचे जबकि पंद्रह यात्री गाड़ी से इस स्टेशन पर उतरे अम्बाला से सवार होने वाले यात्रियों की मुख्य द्वारा पर थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई अम्बाला मंडल रेल प्रबंधक जी एम सिंह ने बताया कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुये आज से देश मे सौ जोड़ा रेलगाडियां चलनी शुरू हो गई है होडल पुलिस ने आज पुन्हाना मोड़ पर एक कार से इक्कीस किलो गांजा बरामद किया है पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर लिया है होडल अपराध जांच शाखा प्रभारी ने बताया कि ने अपना नाम आविद बताया है वह गांव नई का रहने वाला है पूछताछ में आरोपी में आरोपी युवक तीन हरियाणा के आज कोविडउन्नीस के दो सौ इकसठ नये पोजिटिव मामले सामने आये है जबकि सात कोरोना मरीज़ों की स्वस्थ होने के बाद छुटटी दी गई है हमारे सवादाता ने बताया है कि आज सर्वाधिक एक सौ उनतीस पोजिटिव मामले गुरूग्राम से आये है इसके साथ ही अब पोजिटिव पाये गये कोविडउन्नीस मरीज़ों की गिनती दो हज़ार तीन सौ बावन हो गई है जबकि स्वस्थ होने वाले कोरोना मरीज़ों की गिनती एक हज़ार पचपन हो गई है प्रदेश में अबकि तक कोरोना संक्रमण से बीस लोगों की मृत्यु हुई है इस सयम एक हज़ार दो सौ सतहत्तर कोरोना मरीज़ विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन है सिरसा से हमारे संवाददाता ने बताया कि आज एक कविडउन्नीस के अट्ठाईस पोजिटिव मामले आये है जिनमें मुम्बई से लौटे पंद्रह व्यक्तेि चार कैदी और जेल में तैनात एक पुलिस कर्मी शामिल है सिविल सर्जन डॉ सुरेन्द्र जैन ने बताया कि दो कैदी जमानत पर रिहा हुये थे उन्होंने कहा कि छब्बीस लोगों की सिरसा के कोविड अस्पताल में और दो मरीजों को अग्रोहा मेडिकल कालेज में दाखिल करवाया गया है फतेहाबाद जिले मे भी कोविडउन्नीस के दो नये मामले सामने आये है इनमें से दिल्ली से टोहाना पहुंचे गुजराती परिवार का एक व्यक्ति और रेलवे पुलिस बल का जाखल प्रभारी भी शामिल है जाखल रेलवे स्टेशन के पीछे लगती गली को सैनेटाइज़ किया किया गया भिवानी में कोविडउन्नीस के पांच और चरखी दादरी में सात मामले सामने आये है पंचकूला में एक तिरेसठ वर्षीय एक बुजुर्ग वायरस से संक्रमित पाया गया है सिविल सर्जन डा जसजीत कौर ने बताया कि यह बुजुर्ग मूलत दिल्ली के रहने वाले है और इन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती किया गया है वहीं गया है वहीं भिवानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि विद्यायक व उनकी बेटी के दोबारा नमूने लेकर रोहतक भेजे थे जिनकी रिपोट नेगीटिव आई है रोहतक में नगर निगम के एक सफाई कर्मचारी की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई है सिविल सर्जन डॉ अनिल बिरला ने बताया कि कई दिन पहले तबीयत खराब होने पर उसे पीजीआई में भर्ती करवाया गया था इसके अलावा पीजीआई की दो स्टाफ नर्सी के कोरोना पोजिटिव पाये जाने की भी खबर है हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज भारत में जापान के राजदूत सतोषी सुजुकी के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बातचीत की पहले से हरियाणा मे काम कर रही कई जापानी कंपनियों से हरियाणा मे और निवेश करने में रूचि दिखाई मुख्यमंत्री ने राजय सरकार द्वारा विदेशी निवेशकों को उद्योग के लिए भूमि को उद्योग के लिए भूमि आंवटित करने सहित कई जानकारियां दी उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक विकास नीति देश मे बेहतर नीति है जिसमें निवेश को और आसान बनाया गया है मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सूक्ष्म लघु और मझौले उद्योगों के लिए तीन नये विभाग भी कायम किये है |
देश में अब तक दो करोड़ नौ लाख से अधिक लोगों का हुआ कोविड वैक्सीनेशन तीस लाख से अधिक बुजुर्गो ने लगावाया कोविड का टीका
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से हो रहा है शुरू | आज मनाया जा रहा है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस रोडवेज बसों में महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सौगात पर्यटन स्थलों पर भी महिला पर्यटकों को मिलेगा मुफ्त प्रवेश
राज्य में गर्मी का असर बढ़ा मौसम विभाग ने अगले आठदस दिनों तक मौसम में उतारचढ़ाव की जताई संभावना
शून्य कोविड19 महामारी के खिलाफ देश एकजुट होकर लड़ रहा है
आप भी हमारे साथ सुरक्षा और बचाव के तीन आसान एहतियाती उपायों का संकल्प लें
मास्क पहनें दो गज की दूरी है जरूरी सुरक्षित दूरी बनाए रखें हाथ और मुंह साफ रखें
शून्य देश में अब तक दो करोड़ नौ लाख बाईस हजार से अधिक लोगों को कोविड टीके की डोज दी जा चुकी है
तीस लाख से अधिक बुजुर्गों ने भी कोरोना टीका लगवाया गया है
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले पचास दिनों में भारत ने टीकाकरण अभियान में महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किया है
भारत दुनिया के गिनेचुने देशों में से एक है जिसने इतने कम समय में अधिक लोगों का टीकाकरण किया है
इस बीच देश में कोविड से स्वस्थ होने की दर छियानवे दशमलव नौपांच प्रतिशत हो गई है
इधर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के नए मामलों में बढ़ोतरी बनी हुई है
कल पच्चीस जिलों में संक्रमण के एक सौ छिहत्तर नए मामलों की पुष्टि हुई
राहत यह रही कि संक्रमण से एक भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई
कल इस बीमारी से एक सौ चौबिस मरीज ठीक हुए
वहीं सकिय मामलों की संख्या बढ़कर एक हजार सात सौ पचपन पर पहुंच गई है
राज्य में चूरू एकमात्र ऐसा जिला है जहां एक भी सक्रिय केस नहीं है
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कल सर्वाधिक उनतीस मामले डूंगरपुर जिले में दर्ज किए गए
इसके अलावा जयपुर में चौबिस उदयपुर में उन्नीस जोधपुर में सत्रह कोटा में चौदह भीलवाड़ा में बारह झालावाड़ में ग्यारह राजसमंद में दस अजमेर में छः चित्तौड़गढ़ में चार अलवर श्रीगंगानगर करौली पाली बाड़मेर और बांसवाड़ा में तैंतीस भरतपुर हनुमानगढ़ और बीकानेर में बाईस तथा दौसा नागौर प्रतापगढ़ सवाई माधोपुर सिरोही और जैसलमेर में ग्यारह व्यक्ति में संक्रमण मिला है
आठ जिलों बारां बूंदी चूरू धौलपुर जालौर झुंझुनूं सीकर और टोंक में संक्रमण का कोई भी नया मामला नहीं मिला
राज्य में इस बीमारी से अब तक दो हजार सात सौ नवासी लोगों की मृत्यु हो चुकी है
शून्य केन्द्र सरकार की ओर से कोरोना के प्रति जागरूकता लाने के लिए जन आंदोलन चलाया जा रहा है
इसी के तहत आकाशवाणी जयपुर के समाचार बुलेटिनों में प्रसारित की जा रही विशेष श्रृखंला जनता का संदेश जनता के नाम के तहत सुनिये हमारे श्रोता का संदेश
आकाशवाणी के अन्य श्रोता भी कोरोना जनजागरुकता आंदोलन से जुड़ सकते हैं
हमारे ऐसे श्रोता भी अपना संदेश भेज सकते हैं जो कोरोना वैक्सीन ले चुके हैं
इसके लिए आपको अपना संदेश रिकॉर्ड कर या टाइप कर हमारे व्हाट्स एप नम्बर चौरानवे चौदह शून्य पाँच तेईस अड़सठ पर भेजना है
चयनित संदेशों को आगामी बुलेटिनों में शामिल किया जाएगा
शून्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना महामारी पर अनुसंधान के लिए देश में हेल्थ रिसर्च का बजट बढ़ाने की पैरवी की है
उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की है कि सरकार को स्वास्थ्य अनुसंधान का खर्च बढ़ाकर कोरोना पर व्यापक शोध करना चाहिए
मुख्यमंत्री ने कल एक ट्वीट कर कहा कि हम सभी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर स्वयं और दूसरों को संक्रमित होने से बचाएं
श्री गहलोत ने कहा कि कोरोना महामारी के अनुभव को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने बजट में वायरस जनित बीमारियों की जांच उपचार और रिसर्च के लिए जयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड वॉयरोलोजी की स्थापना करने का ऐलान किया है
शून्य उदयपुर जिले का प्रसिद्ध एकलिंगनाथ महादेव मंदिर दर्शनार्थियों के लिए दस से बारह मार्च तक बंद रहेगा
यह निर्णय कोरोना संक्रमण के दुबारा बढ़ रहे खतरे को ध्यान में रखते हुए किया गया है
शून्य संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू होगा
कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए इस बार भी राज्यसभा की बैठक सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक आयोजित की जायेगी जबकि लोकसभा शाम चार बजे से रात नौ बजे तक चलेगी
सत्र के इस चरण का समापन आठ अप्रैल को होगा
गौरतलब है कि | बजट सत्र का पहला चरण उनतीस जनवरी को शुरू हुआ था
राज्यसभा की कार्यवाही बारह फरवरी को स्थगित की गई जबकि लोकसभा की बैठक इसके अगले दिन स्थगित हुई थी
शून्य आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है
विश्व में लैंगिक समानता महिला उपलब्धियों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनकी उपस्थिति को दर्शाने के लिए यह दिन मनाया जाता है
इस वर्ष महिला दिवस का विषय है महिला नेतृत्व कोविड19 विश्व में समान भविष्य की प्राप्ति
इस अवसर पर आज राज्य सरकार की ओर से महिलाओं को रोड़वेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है
परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि रोडवेज की राज्य की सीमा में संचालित सभी साधारण और एक्सप्रेस बसों में ये सुविधा उपलब्ध है
इधर केन्द्र सरकार के सभी पुरातात्विक स्थलों पर आज महिला पर्यटकों को प्रवेश निःशुल्क का उपहार दिया गया है
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राज्यपाल कलराज मिश्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को बधाई और शुभकामनायें दी है
राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि समाज को नारी शक्ति के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी
मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिये समान अवसर प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका निभायें
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज जयपुर में पिंक रन राइड साइकिल रैली निकाली गई
स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने इस हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया
इधर कार्यक्रमों की श्रृंखला मे कल जयपुर में शक्ति आर्ट कैम्प की शुरूआत हुई
कला संस्कृति विभाग और राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से जवाहर कला केन्द्र में लगाये गये इस शिविर में जयपुर सहित चंडीगढ जालन्धर और दिल्ली के पचास से अधिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं
जयपुर के जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में महिला दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा है
कुलपति डॉ अनुला मौर्य की अध्यक्षता में होने वाले इस कार्यक्रम में विशिष्ट सेवाओं के लिए महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा
अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर कल सवाई माधोपुर में महिला थाने में महिला पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया गया
शून्य उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य में विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के लिए एडवाइजरी जारी की है
कोरोना की परिस्थितियों के मद्देनजर आगामी परीक्षा में विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए परीक्षा अवधि तीन घंटे की बजाय दो घंटे रखी गयी है
परीक्षा अवधि के अनुपात में ही पेपर का पूर्णांक होगा
किसी भी इकाई में से प्रश्न हल करने की छूट होगी
प्रायोगिक परीक्षाएं और स्वयंपाठी विद्यार्थियों की सैद्धांतिक परीक्षाएं अप्रैल में आरंभ होगी
नियमित विद्यार्थियों की सैद्धांतिक परीक्षाएं मई में शुरू होंगी
अंतिम कक्षाओं के परिणाम इकतीस जुलाई तक जारी होंगे
शून्य राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने से गर्मी का असर धीरेधीरे बढ़ रहा है
ज्यादातर स्थानों पर पारा पैंतीस डिग्री सैल्सियस के पार पहुंच गया
हनुमानगढ चूरू और श्रीगंगानगर जिलों में आज कहीं कहीं हल्की वर्षा की संभावना है
मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि प्रदेश में अगले आठ सौ दस दिनों तक मौसम में उतार चढाव का दौर जारी रहेगा
शून्य | देश में अब तक दो करोड़ नौ लाख से अधिक लोगों का हुआ कोविड वैक्सीनेशन तीस लाख से अधिक बुजुर्गो ने लगावाया कोविड का टीका संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से हो रहा है शुरू | आज मनाया जा रहा है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस रोडवेज बसों में महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सौगात पर्यटन स्थलों पर भी महिला पर्यटकों को मिलेगा मुफ्त प्रवेश राज्य में गर्मी का असर बढ़ा मौसम विभाग ने अगले आठदस दिनों तक मौसम में उतारचढ़ाव की जताई संभावना शून्य कोविडउन्नीस महामारी के खिलाफ देश एकजुट होकर लड़ रहा है आप भी हमारे साथ सुरक्षा और बचाव के तीन आसान एहतियाती उपायों का संकल्प लें मास्क पहनें दो गज की दूरी है जरूरी सुरक्षित दूरी बनाए रखें हाथ और मुंह साफ रखें शून्य देश में अब तक दो करोड़ नौ लाख बाईस हजार से अधिक लोगों को कोविड टीके की डोज दी जा चुकी है तीस लाख से अधिक बुजुर्गों ने भी कोरोना टीका लगवाया गया है स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले पचास दिनों में भारत ने टीकाकरण अभियान में महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किया है भारत दुनिया के गिनेचुने देशों में से एक है जिसने इतने कम समय में अधिक लोगों का टीकाकरण किया है इस बीच देश में कोविड से स्वस्थ होने की दर छियानवे दशमलव नौपांच प्रतिशत हो गई है इधर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के नए मामलों में बढ़ोतरी बनी हुई है कल पच्चीस जिलों में संक्रमण के एक सौ छिहत्तर नए मामलों की पुष्टि हुई राहत यह रही कि संक्रमण से एक भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई कल इस बीमारी से एक सौ चौबिस मरीज ठीक हुए वहीं सकिय मामलों की संख्या बढ़कर एक हजार सात सौ पचपन पर पहुंच गई है राज्य में चूरू एकमात्र ऐसा जिला है जहां एक भी सक्रिय केस नहीं है स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कल सर्वाधिक उनतीस मामले डूंगरपुर जिले में दर्ज किए गए इसके अलावा जयपुर में चौबिस उदयपुर में उन्नीस जोधपुर में सत्रह कोटा में चौदह भीलवाड़ा में बारह झालावाड़ में ग्यारह राजसमंद में दस अजमेर में छः चित्तौड़गढ़ में चार अलवर श्रीगंगानगर करौली पाली बाड़मेर और बांसवाड़ा में तैंतीस भरतपुर हनुमानगढ़ और बीकानेर में बाईस तथा दौसा नागौर प्रतापगढ़ सवाई माधोपुर सिरोही और जैसलमेर में ग्यारह व्यक्ति में संक्रमण मिला है आठ जिलों बारां बूंदी चूरू धौलपुर जालौर झुंझुनूं सीकर और टोंक में संक्रमण का कोई भी नया मामला नहीं मिला राज्य में इस बीमारी से अब तक दो हजार सात सौ नवासी लोगों की मृत्यु हो चुकी है शून्य केन्द्र सरकार की ओर से कोरोना के प्रति जागरूकता लाने के लिए जन आंदोलन चलाया जा रहा है इसी के तहत आकाशवाणी जयपुर के समाचार बुलेटिनों में प्रसारित की जा रही विशेष श्रृखंला जनता का संदेश जनता के नाम के तहत सुनिये हमारे श्रोता का संदेश आकाशवाणी के अन्य श्रोता भी कोरोना जनजागरुकता आंदोलन से जुड़ सकते हैं हमारे ऐसे श्रोता भी अपना संदेश भेज सकते हैं जो कोरोना वैक्सीन ले चुके हैं इसके लिए आपको अपना संदेश रिकॉर्ड कर या टाइप कर हमारे व्हाट्स एप नम्बर चौरानवे चौदह शून्य पाँच तेईस अड़सठ पर भेजना है चयनित संदेशों को आगामी बुलेटिनों में शामिल किया जाएगा शून्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना महामारी पर अनुसंधान के लिए देश में हेल्थ रिसर्च का बजट बढ़ाने की पैरवी की है उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की है कि सरकार को स्वास्थ्य अनुसंधान का खर्च बढ़ाकर कोरोना पर व्यापक शोध करना चाहिए मुख्यमंत्री ने कल एक ट्वीट कर कहा कि हम सभी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर स्वयं और दूसरों को संक्रमित होने से बचाएं श्री गहलोत ने कहा कि कोरोना महामारी के अनुभव को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने बजट में वायरस जनित बीमारियों की जांच उपचार और रिसर्च के लिए जयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड वॉयरोलोजी की स्थापना करने का ऐलान किया है शून्य उदयपुर जिले का प्रसिद्ध एकलिंगनाथ महादेव मंदिर दर्शनार्थियों के लिए दस से बारह मार्च तक बंद रहेगा यह निर्णय कोरोना संक्रमण के दुबारा बढ़ रहे खतरे को ध्यान में रखते हुए किया गया है शून्य संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू होगा कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए इस बार भी राज्यसभा की बैठक सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक आयोजित की जायेगी जबकि लोकसभा शाम चार बजे से रात नौ बजे तक चलेगी सत्र के इस चरण का समापन आठ अप्रैल को होगा गौरतलब है कि | बजट सत्र का पहला चरण उनतीस जनवरी को शुरू हुआ था राज्यसभा की कार्यवाही बारह फरवरी को स्थगित की गई जबकि लोकसभा की बैठक इसके अगले दिन स्थगित हुई थी शून्य आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है विश्व में लैंगिक समानता महिला उपलब्धियों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनकी उपस्थिति को दर्शाने के लिए यह दिन मनाया जाता है इस वर्ष महिला दिवस का विषय है महिला नेतृत्व कोविडउन्नीस विश्व में समान भविष्य की प्राप्ति इस अवसर पर आज राज्य सरकार की ओर से महिलाओं को रोड़वेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि रोडवेज की राज्य की सीमा में संचालित सभी साधारण और एक्सप्रेस बसों में ये सुविधा उपलब्ध है इधर केन्द्र सरकार के सभी पुरातात्विक स्थलों पर आज महिला पर्यटकों को प्रवेश निःशुल्क का उपहार दिया गया है राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राज्यपाल कलराज मिश्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को बधाई और शुभकामनायें दी है राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि समाज को नारी शक्ति के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिये समान अवसर प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका निभायें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज जयपुर में पिंक रन राइड साइकिल रैली निकाली गई स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने इस हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया इधर कार्यक्रमों की श्रृंखला मे कल जयपुर में शक्ति आर्ट कैम्प की शुरूआत हुई कला संस्कृति विभाग और राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से जवाहर कला केन्द्र में लगाये गये इस शिविर में जयपुर सहित चंडीगढ जालन्धर और दिल्ली के पचास से अधिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं जयपुर के जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में महिला दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा है कुलपति डॉ अनुला मौर्य की अध्यक्षता में होने वाले इस कार्यक्रम में विशिष्ट सेवाओं के लिए महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर कल सवाई माधोपुर में महिला थाने में महिला पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया गया शून्य उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य में विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के लिए एडवाइजरी जारी की है कोरोना की परिस्थितियों के मद्देनजर आगामी परीक्षा में विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए परीक्षा अवधि तीन घंटे की बजाय दो घंटे रखी गयी है परीक्षा अवधि के अनुपात में ही पेपर का पूर्णांक होगा किसी भी इकाई में से प्रश्न हल करने की छूट होगी प्रायोगिक परीक्षाएं और स्वयंपाठी विद्यार्थियों की सैद्धांतिक परीक्षाएं अप्रैल में आरंभ होगी नियमित विद्यार्थियों की सैद्धांतिक परीक्षाएं मई में शुरू होंगी अंतिम कक्षाओं के परिणाम इकतीस जुलाई तक जारी होंगे शून्य राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने से गर्मी का असर धीरेधीरे बढ़ रहा है ज्यादातर स्थानों पर पारा पैंतीस डिग्री सैल्सियस के पार पहुंच गया हनुमानगढ चूरू और श्रीगंगानगर जिलों में आज कहीं कहीं हल्की वर्षा की संभावना है मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि प्रदेश में अगले आठ सौ दस दिनों तक मौसम में उतार चढाव का दौर जारी रहेगा शून्य |
सऊदी अरब ने यमन से मिलने वाली सीमा पर रहने वालों को ज़बरदस्ती निकालने का क्रम आरंभ किया है और इसका विरोध करने वालों को गिरफ़्तार भी कर लिया है।
यमन की समाचार एजेन्सी अलमसीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों असीर, जीज़ान और नजरान के निवासियों को ज़बरदस्ती क्षेत्र छोड़ने की आले सऊद शासन की नीतियों का स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं जिसके कारण इस शासन ने क्षेत्र के दसियों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। सऊदी अरब की सरकार ने ज़ोर ज़बरदस्ती और वायु सैन्य अभ्यास करके लोगों को भयभीत करने का प्रयास किया और कुछ स्थानीय लोगों को गिरफ़्तार कर लिया।
सऊदी अरब पिछले कई महीनों से इन क्षेत्रों को लोगों से ख़ाली कराने और इनके स्थान पर सैकड़ों किराए के पिट्ठुओं को बसाने के प्रयास में है।
सऊदी अरब अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को ख़ाली कराके जनमत को भटकाने और यह दावा करने के प्रयास में है कि यमनी सेनाओं के भीषण हमलों के कारण सीमावर्ती क्षेत्र के निवासी अपने घर बार छोड़ने पर विवश हो गये हैं। (AK)
| सऊदी अरब ने यमन से मिलने वाली सीमा पर रहने वालों को ज़बरदस्ती निकालने का क्रम आरंभ किया है और इसका विरोध करने वालों को गिरफ़्तार भी कर लिया है। यमन की समाचार एजेन्सी अलमसीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों असीर, जीज़ान और नजरान के निवासियों को ज़बरदस्ती क्षेत्र छोड़ने की आले सऊद शासन की नीतियों का स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं जिसके कारण इस शासन ने क्षेत्र के दसियों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। सऊदी अरब की सरकार ने ज़ोर ज़बरदस्ती और वायु सैन्य अभ्यास करके लोगों को भयभीत करने का प्रयास किया और कुछ स्थानीय लोगों को गिरफ़्तार कर लिया। सऊदी अरब पिछले कई महीनों से इन क्षेत्रों को लोगों से ख़ाली कराने और इनके स्थान पर सैकड़ों किराए के पिट्ठुओं को बसाने के प्रयास में है। सऊदी अरब अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को ख़ाली कराके जनमत को भटकाने और यह दावा करने के प्रयास में है कि यमनी सेनाओं के भीषण हमलों के कारण सीमावर्ती क्षेत्र के निवासी अपने घर बार छोड़ने पर विवश हो गये हैं। |
खबर के अनुसार 1991 की जनसंख्या के आधार पर पंचायतों का पुनर्गठन किया जा सकता हैं। जिस पंचायत की जनसंख्या 3000 से कम हैं उस पंचायत को बगल की पंचायत में विलय किया जा सकता हैं। इसको लेकर मुख्य सचिव ने आदेश दिए हैं।
बता दें की मुख्य सचिव के निर्देश के पर बीडीओ इस काम को करेंगे और जिला पंचायत राज पदाधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे। इसके बाद डीएम इस प्रस्ताव को पंचायती राज्य विभाग के पास भेजेंगे। फिर इसपर निर्णय सरकार करेगी।
वहीं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा है की इसी साल पंचायत का पुर्नगठन किया जा सकता हैं। इस पुर्नगठन से राज्य के करीब 300 पंचायत खत्म हो सकते हैं वहीं 200 पंचायतों का गठन किया जा सकता हैं।
| खबर के अनुसार एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे की जनसंख्या के आधार पर पंचायतों का पुनर्गठन किया जा सकता हैं। जिस पंचायत की जनसंख्या तीन हज़ार से कम हैं उस पंचायत को बगल की पंचायत में विलय किया जा सकता हैं। इसको लेकर मुख्य सचिव ने आदेश दिए हैं। बता दें की मुख्य सचिव के निर्देश के पर बीडीओ इस काम को करेंगे और जिला पंचायत राज पदाधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे। इसके बाद डीएम इस प्रस्ताव को पंचायती राज्य विभाग के पास भेजेंगे। फिर इसपर निर्णय सरकार करेगी। वहीं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा है की इसी साल पंचायत का पुर्नगठन किया जा सकता हैं। इस पुर्नगठन से राज्य के करीब तीन सौ पंचायत खत्म हो सकते हैं वहीं दो सौ पंचायतों का गठन किया जा सकता हैं। |
लखनऊः वैसे तो राजनीति में विज्ञान की तरह दो और दो चार नहीं होते, लेकिन दो और दो के 22 होने की संभावना को भी सियासत में नकारा नहीं जा सकता। गठबंधन में ऐसे ही फार्मूलों को आदर्श समझा जाता है। सूबे की सियासत में इसकी संभावनाओं को टटोला जाए तो गणित, विज्ञान और राजनीति विज्ञान के इस फार्मूले का जोड़-घटाव यहां जरूरी हो जाता है। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। मायावती के इस रुख से 2019 के चुनावों में होने वाले महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। उनका यह खारिज किया जाना सिर्फ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों तक सीमित रहेगा या फिर लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। बसपा अपने धुर विरोधी सपा से गठबंधन की संभावनाओं को भी नकारती नहीं दिख रही है।
दरअसल बीते उपचुनावों में प्रदेश की कैराना, गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट भाजपा से छिन गयीं। खास यह है कि 2014 में इन तीनों सीटों पर भाजपा को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिला था। इन उपचुनावों में सपा को बसपा व अन्य विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था। ये नतीजे आने के बाद से ही प्रदेश में महागठबंधन के ताने-बाने बुने जाने लगे। सीटों के बंटवारे को लेकर कशमकश शुरू हुई। 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों को आधार मानकर देखा जाए कि यदि 2019 में भी भाजपा और विपक्षी दलों को 2014 जितने ही वोट मिलें और विपक्षी दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ें तो ज्यादातर सीटों पर विपक्षी दलों को मिले वोटों की संख्या भाजपा को मिले वोटों की संख्या से ज्यादा होगी।
2014 चुनाव में जगदंबिका पाल 298845 वोट पाकर डुमरियागंज सीट से जीते। बसपा के मुहम्मद मुकीम 195257 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। जबकि पूर्व विधानसभाध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय की साइकिल पर 174778 वोटरों ने मुहर लगाई। इस सीट पर यदि कांग्रेस को छोड़ दिया जाए। बसपा अपने वोट सपा को ट्रांसफर करती है तो यह आंकड़ा 370035 तक पहुंचता है। यह जगदम्बिका पाल को मिले वोटों से ज्यादा है। इसी तरह इलाहाबाद सीट पर श्यामा चरण गुप्ता को 313772 वोट मिले थे। सपा के कुंवर रेवती रमन सिंह को 251763 और बसपा की केशरी देवी को 162073 वोट मिले। यदि इस सीट पर बसपा या सपा अपने वोट एक दूसरे को ट्रांसफर करते हैं तो यह आंकड़ा 413836 तक पहुंचता है, जो श्यामा चरण गुप्ता को मिले 313772 वोटों से ज्यादा है।
वैसे देखा जाए तो 2009 में बसपा ने 20 सीटें पर परचम लहराया था। 47 सीटों पर हाथी रनरअप रहा। वहीं 2014 में बसपा के खाते में एक भी सीट नहीं आ सकी पर उसके प्रत्याशी 34 सीटों पर दूसरे नम्बर पर रहे। 2014 के चुनाव में सपा के मुकाबले अलीगढ़, सलेमपुर और धौरहरा सीटों पर बसपा प्रत्याशी करीब दो हजार वोटों के अंतर से पीछे रह गए जबकि हरदोई, सुल्तानपुर, भदोही, संतकबीरनगर में सपा के मुकाबले बसपा प्रत्याशी करीबन 20 हजार वोटों से पीछे रह गए थे। संभल सीट पर भाजपा के सत्यपाल सिंह को विजय मिली थी। उन्हें कुल 360242 वोट मिले थे। सपा के डा. शफीकुर्रहमान बर्क 355068 वोटों के साथ रनरअप रहे थे। सिर्फ 5174 मतों के अंतर की वजह से यह सीट सपा के हाथ से निकल गई थी। बसपा के अकीलउर्र रहमान खान को 252640 वोट मिले थे। सपा-बसपा के वोटों को ही मिला लिया जाए तो 607708 तक वोटों का आंकड़ा पहुंचता है।
सुल्तानपुर सीट से वरुण गांधी 410348 वोट पाकर सांसद बने। इसी सीट पर बसपा के पवन पांडे को 231446 वोट और सपा के शकील अहमद को 228144 वोट मिले थे। विपक्ष के दोनों प्रत्याशियों का वोट जोडऩे पर यह 459590 हो जाएगा जो वरुण गांधी को मिले वोटों से ज्यादा है। बांदा सीट पर बीजेपी के भैरो प्रसाद मिश्रा को 342066 वोट मिले थे। बसपा के आर के सिंह पटेल को 226278 वोट और बाल कुमार पटेल को 189730 वोट मिले थे। इनका योग भी 416008 होता है जो भैरो प्रसाद मिश्रा को मिले मतों से ज्यादा है।
भदोही सीट से भाजपा के वीरेंद्र सिंह 403544 वोट पाकर संसद पहुंचे थे। यहां से बसपा के राकेश धर त्रिपाठी को 245505 वोट और सपा की सीमा मिश्रा को 238615 मत मिले थे। यदि इनके वोट को ही जोड़ा जाए तो यह 484120 हो जाएगा जो वीरेंद्र सिंह को मिले मतों से ज्यादा है। खीरी लोकसभा सीट पर भाजपा के अजय कुमार को विजयश्री मिली थी। उन्हें कुल 398578 वोट मिले थे जबकि बसपा के अरविंद गिरि को 288304 और सपा के रवि प्रकाश वर्मा को 160112 मत मिले थे। इनके मतों का योग भी अजय कुमार को मिले मतों से ज्यादा है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव भी सीटों के बंटवारे में नरमी बरतते दिख रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए यहां तक कहा कि उसे बड़ा दिल दिखाना चाहिए मगर बसपा सुप्रीमो मायावती के तेवर नहीं बदले। गठबंधन को लेकर उन्होंने साफ कहा कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही पार्टी गठबंधन में शामिल होगी। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह के मायावती के सीबीआई व ईडी से डरने का बयान आने के बाद मायावती के तेवर और सख्त हो गए। उन्होंने साफ तौर पर कांग्रेस से गठबंधन की संभावनाओं को नकार दिया है।
भाजपा के जातीय सम्मेलनों के जवाब में समाजवादी पार्टी जिलावार पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय सम्मेलन कर रही है। इन सम्मेलनों में सजातीय नेताओं को अगुवा बनाया गया है जो जिलों में पिछड़े व अतिपिछड़े वर्ग के मतदाताओं के सामने भाजपा के लुभावने जातीय सम्मेलनों की हकीकत बयां कर रहे हैं। सपा का प्रमुख मकसद पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को सतर्क करना है। पहले चरण में पूर्वांचल के सात जिलों में 27 अगस्त से 2 सितम्बर और दूसरे चरण में भी सात जिलों में 25 सितम्बर से दो अक्टूबर के बीच सम्मेलन हुआ। इसके अलावा प्रदेश भर में 3 से 7 अक्टूबर तक विधानसभावार बूथ सम्मेलन जारी है।
| लखनऊः वैसे तो राजनीति में विज्ञान की तरह दो और दो चार नहीं होते, लेकिन दो और दो के बाईस होने की संभावना को भी सियासत में नकारा नहीं जा सकता। गठबंधन में ऐसे ही फार्मूलों को आदर्श समझा जाता है। सूबे की सियासत में इसकी संभावनाओं को टटोला जाए तो गणित, विज्ञान और राजनीति विज्ञान के इस फार्मूले का जोड़-घटाव यहां जरूरी हो जाता है। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। मायावती के इस रुख से दो हज़ार उन्नीस के चुनावों में होने वाले महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। उनका यह खारिज किया जाना सिर्फ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों तक सीमित रहेगा या फिर लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। बसपा अपने धुर विरोधी सपा से गठबंधन की संभावनाओं को भी नकारती नहीं दिख रही है। दरअसल बीते उपचुनावों में प्रदेश की कैराना, गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट भाजपा से छिन गयीं। खास यह है कि दो हज़ार चौदह में इन तीनों सीटों पर भाजपा को पचास फीसदी से ज्यादा वोट मिला था। इन उपचुनावों में सपा को बसपा व अन्य विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था। ये नतीजे आने के बाद से ही प्रदेश में महागठबंधन के ताने-बाने बुने जाने लगे। सीटों के बंटवारे को लेकर कशमकश शुरू हुई। दो हज़ार चौदह लोकसभा चुनाव के नतीजों को आधार मानकर देखा जाए कि यदि दो हज़ार उन्नीस में भी भाजपा और विपक्षी दलों को दो हज़ार चौदह जितने ही वोट मिलें और विपक्षी दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ें तो ज्यादातर सीटों पर विपक्षी दलों को मिले वोटों की संख्या भाजपा को मिले वोटों की संख्या से ज्यादा होगी। दो हज़ार चौदह चुनाव में जगदंबिका पाल दो लाख अट्ठानवे हज़ार आठ सौ पैंतालीस वोट पाकर डुमरियागंज सीट से जीते। बसपा के मुहम्मद मुकीम एक लाख पचानवे हज़ार दो सौ सत्तावन वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। जबकि पूर्व विधानसभाध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय की साइकिल पर एक लाख चौहत्तर हज़ार सात सौ अठहत्तर वोटरों ने मुहर लगाई। इस सीट पर यदि कांग्रेस को छोड़ दिया जाए। बसपा अपने वोट सपा को ट्रांसफर करती है तो यह आंकड़ा तीन लाख सत्तर हज़ार पैंतीस तक पहुंचता है। यह जगदम्बिका पाल को मिले वोटों से ज्यादा है। इसी तरह इलाहाबाद सीट पर श्यामा चरण गुप्ता को तीन लाख तेरह हज़ार सात सौ बहत्तर वोट मिले थे। सपा के कुंवर रेवती रमन सिंह को दो लाख इक्यावन हज़ार सात सौ तिरेसठ और बसपा की केशरी देवी को एक लाख बासठ हज़ार तिहत्तर वोट मिले। यदि इस सीट पर बसपा या सपा अपने वोट एक दूसरे को ट्रांसफर करते हैं तो यह आंकड़ा चार लाख तेरह हज़ार आठ सौ छत्तीस तक पहुंचता है, जो श्यामा चरण गुप्ता को मिले तीन लाख तेरह हज़ार सात सौ बहत्तर वोटों से ज्यादा है। वैसे देखा जाए तो दो हज़ार नौ में बसपा ने बीस सीटें पर परचम लहराया था। सैंतालीस सीटों पर हाथी रनरअप रहा। वहीं दो हज़ार चौदह में बसपा के खाते में एक भी सीट नहीं आ सकी पर उसके प्रत्याशी चौंतीस सीटों पर दूसरे नम्बर पर रहे। दो हज़ार चौदह के चुनाव में सपा के मुकाबले अलीगढ़, सलेमपुर और धौरहरा सीटों पर बसपा प्रत्याशी करीब दो हजार वोटों के अंतर से पीछे रह गए जबकि हरदोई, सुल्तानपुर, भदोही, संतकबीरनगर में सपा के मुकाबले बसपा प्रत्याशी करीबन बीस हजार वोटों से पीछे रह गए थे। संभल सीट पर भाजपा के सत्यपाल सिंह को विजय मिली थी। उन्हें कुल तीन लाख साठ हज़ार दो सौ बयालीस वोट मिले थे। सपा के डा. शफीकुर्रहमान बर्क तीन लाख पचपन हज़ार अड़सठ वोटों के साथ रनरअप रहे थे। सिर्फ पाँच हज़ार एक सौ चौहत्तर मतों के अंतर की वजह से यह सीट सपा के हाथ से निकल गई थी। बसपा के अकीलउर्र रहमान खान को दो लाख बावन हज़ार छः सौ चालीस वोट मिले थे। सपा-बसपा के वोटों को ही मिला लिया जाए तो छः लाख सात हज़ार सात सौ आठ तक वोटों का आंकड़ा पहुंचता है। सुल्तानपुर सीट से वरुण गांधी चार लाख दस हज़ार तीन सौ अड़तालीस वोट पाकर सांसद बने। इसी सीट पर बसपा के पवन पांडे को दो लाख इकतीस हज़ार चार सौ छियालीस वोट और सपा के शकील अहमद को दो लाख अट्ठाईस हज़ार एक सौ चौंतालीस वोट मिले थे। विपक्ष के दोनों प्रत्याशियों का वोट जोडऩे पर यह चार लाख उनसठ हज़ार पाँच सौ नब्बे हो जाएगा जो वरुण गांधी को मिले वोटों से ज्यादा है। बांदा सीट पर बीजेपी के भैरो प्रसाद मिश्रा को तीन लाख बयालीस हज़ार छयासठ वोट मिले थे। बसपा के आर के सिंह पटेल को दो लाख छब्बीस हज़ार दो सौ अठहत्तर वोट और बाल कुमार पटेल को एक लाख नवासी हज़ार सात सौ तीस वोट मिले थे। इनका योग भी चार लाख सोलह हज़ार आठ होता है जो भैरो प्रसाद मिश्रा को मिले मतों से ज्यादा है। भदोही सीट से भाजपा के वीरेंद्र सिंह चार लाख तीन हज़ार पाँच सौ चौंतालीस वोट पाकर संसद पहुंचे थे। यहां से बसपा के राकेश धर त्रिपाठी को दो लाख पैंतालीस हज़ार पाँच सौ पाँच वोट और सपा की सीमा मिश्रा को दो लाख अड़तीस हज़ार छः सौ पंद्रह मत मिले थे। यदि इनके वोट को ही जोड़ा जाए तो यह चार लाख चौरासी हज़ार एक सौ बीस हो जाएगा जो वीरेंद्र सिंह को मिले मतों से ज्यादा है। खीरी लोकसभा सीट पर भाजपा के अजय कुमार को विजयश्री मिली थी। उन्हें कुल तीन लाख अट्ठानवे हज़ार पाँच सौ अठहत्तर वोट मिले थे जबकि बसपा के अरविंद गिरि को दो लाख अठासी हज़ार तीन सौ चार और सपा के रवि प्रकाश वर्मा को एक लाख साठ हज़ार एक सौ बारह मत मिले थे। इनके मतों का योग भी अजय कुमार को मिले मतों से ज्यादा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव भी सीटों के बंटवारे में नरमी बरतते दिख रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए यहां तक कहा कि उसे बड़ा दिल दिखाना चाहिए मगर बसपा सुप्रीमो मायावती के तेवर नहीं बदले। गठबंधन को लेकर उन्होंने साफ कहा कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही पार्टी गठबंधन में शामिल होगी। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह के मायावती के सीबीआई व ईडी से डरने का बयान आने के बाद मायावती के तेवर और सख्त हो गए। उन्होंने साफ तौर पर कांग्रेस से गठबंधन की संभावनाओं को नकार दिया है। भाजपा के जातीय सम्मेलनों के जवाब में समाजवादी पार्टी जिलावार पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय सम्मेलन कर रही है। इन सम्मेलनों में सजातीय नेताओं को अगुवा बनाया गया है जो जिलों में पिछड़े व अतिपिछड़े वर्ग के मतदाताओं के सामने भाजपा के लुभावने जातीय सम्मेलनों की हकीकत बयां कर रहे हैं। सपा का प्रमुख मकसद पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को सतर्क करना है। पहले चरण में पूर्वांचल के सात जिलों में सत्ताईस अगस्त से दो सितम्बर और दूसरे चरण में भी सात जिलों में पच्चीस सितम्बर से दो अक्टूबर के बीच सम्मेलन हुआ। इसके अलावा प्रदेश भर में तीन से सात अक्टूबर तक विधानसभावार बूथ सम्मेलन जारी है। |
27अगस्त से शुरू होने वाले एशिया कप के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 17 सदस्य टीम की घोषणा कर दी है। इस टूर्नामेंट के लिए और आने वाले टी20 विश्व कप के लिए बीसीबी ने शाकिब अल हसन को टीम का कप्तान नियुक्त किया है। शाकिब अल हसन लगभग तीन साल बाद बांग्लादेश की टी20 टीम की तरफ से कप्तानी करते हुए नज़र आयेंगे।
शाकिब का पिछले कुछ समय में बीसीबी के साथ रिश्ता विवादित रहा है। दरअसल शाकिब ने बिना बोर्ड को सूचना दिए एक न्यूज प्लेटफॉर्म के साथ करार करना था, जो जुआ फर्म के मालिकाना हक वाली कंपनी है। परंतु इसके लिए शाकिब ने अपनी गलती को स्वीकार किया और अंत में कंपनी से करार खत्म कर दिया।
शाकिब अल हसन को हाल ही में बांग्लादेश की टेस्ट टीम का भी कप्तान नियुक्त किया गया था। इस समय बांग्लादेश की टीम तीनों प्रारूपों में संघर्ष कर रही है। जिसके चलते बीसीबी ने टी20 में शाकिब को टीम का कप्तान नियुक्त किया है।
शाकिब अल हसन (कप्तान), अनामुल हक, परवेज एमन, अफीफ हुसैन, मुश्फिकुर रहीम, महमूदुल्लाह, तास्किन अहमद, नुरुल हसन, सब्बीर रहमान, मोसद्देक हुसैन, सैफुद्दीन, मेहदी हसन, मेहदी हसन मिराज, नासुम अहमद, हसन महमूद, मुस्ताफिजुर रहमान और इबादत हुसैन।
| सत्ताईसअगस्त से शुरू होने वाले एशिया कप के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सत्रह सदस्य टीम की घोषणा कर दी है। इस टूर्नामेंट के लिए और आने वाले टीबीस विश्व कप के लिए बीसीबी ने शाकिब अल हसन को टीम का कप्तान नियुक्त किया है। शाकिब अल हसन लगभग तीन साल बाद बांग्लादेश की टीबीस टीम की तरफ से कप्तानी करते हुए नज़र आयेंगे। शाकिब का पिछले कुछ समय में बीसीबी के साथ रिश्ता विवादित रहा है। दरअसल शाकिब ने बिना बोर्ड को सूचना दिए एक न्यूज प्लेटफॉर्म के साथ करार करना था, जो जुआ फर्म के मालिकाना हक वाली कंपनी है। परंतु इसके लिए शाकिब ने अपनी गलती को स्वीकार किया और अंत में कंपनी से करार खत्म कर दिया। शाकिब अल हसन को हाल ही में बांग्लादेश की टेस्ट टीम का भी कप्तान नियुक्त किया गया था। इस समय बांग्लादेश की टीम तीनों प्रारूपों में संघर्ष कर रही है। जिसके चलते बीसीबी ने टीबीस में शाकिब को टीम का कप्तान नियुक्त किया है। शाकिब अल हसन , अनामुल हक, परवेज एमन, अफीफ हुसैन, मुश्फिकुर रहीम, महमूदुल्लाह, तास्किन अहमद, नुरुल हसन, सब्बीर रहमान, मोसद्देक हुसैन, सैफुद्दीन, मेहदी हसन, मेहदी हसन मिराज, नासुम अहमद, हसन महमूद, मुस्ताफिजुर रहमान और इबादत हुसैन। |
साक्षी (Sakshi Dhoni) इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) के मैचों में एमएस धोनी (MS Dhoni) की टीम का हौसला बढ़ाने पहुंचती रहीं हैं.
नई दिल्ली. आईपीएल (IPL) चल रहा हो तो स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा रहता है. प्रशंसकों का शोर और कुछ सुनने ही नहीं देता. खिलाड़ियों के परिवार वाले भी हौसला आफजाई के लिए दर्शकदीर्घा में नजर आते हैं. मगर ये तब है जब हालात सामान्य हो. फिलहाल तो आईपीएल यूएई में खेला जा रहा है. न दर्शकों से पैक स्टेडियम है न ही खिलाड़ियों के परिवारवाले ही नजर आ रहे हैं. कोरोना काल (Corona) के इस मुश्किल वक्त में खिलाड़ी परिवार की सुरक्षा के लिए उनसे दूर रहकर ही आईपीएल खेल रहे हैं. चेन्नई सुपरकिंग्स् (Chennai Superkings) के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) भी पत्नी साक्षी (Sakshi) और बेटी जीवा के बिना ही यूएई पहुंचे हैं. बेशक धोनी को अपनी भावनाएं छिपाने के लिए जाना जाता है, लेकिन साक्षी ने ये स्वीकार करने में जरा भी देर नहीं लगाई कि उन्हें माही की याद आ रही है.
जीवा और मेरे लिए बायो बबल में दो महीने बिताना मुश्किल होता इनसाइड स्पोटर्स से बातचीत में साक्षी ने कहा कि उनके लिए यूएई जाना आसान नहीं था. साक्षी के अनुसार, मैं इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहने को मिस नहीं कर रही, क्योंकि मैं टीवी पर मैच देख रही हूं. मगर मैं अपने पति को बहुत मिस कर रही हूं. इस दौरान साक्षी ने इस बात का भी खुलासा किया कि वह आखिर धोनी के साथ यूएई क्यों नहीं गईं. इस सवाल के जवाब में साक्षी धोनी ने कहा, ईमानदारी से कहूं तो जीवा और मेरे लिए बायो बबल में दो महीने तक रहना बेहद मुश्किल साबित होता.
क्या एमएस धोनी के साथ बिगड़ गए हैं सुरेश रैना के रिश्ते? रैना के इस कदम से मिला जवाब!
आज हैदराबाद से होगी चेन्नई की भिड़ंत पांच दिन के ब्रेक के बाद महेंद्र सिंह धोनी की की अगुआई में चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले में उतरने के लिए तैयार है. हालांकि चेन्नई ने अभी तक तीन मुकाबले खेले हैं, जिसमें से दो में उसे हार मिली है. वहीं हैदराबाद का भी मौजूदा सीजन में यही रिकॉर्ड है. अभी तक खेले तीन मुकाबलों में चेन्नई को राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स ने मात दी है जबकि इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन के उद्घाटन मुकाबले में टीम ने चार बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को मात दी थी.
(IPL 2020 की सबसे खास कवरेज मिलेगी TV9 भारतवर्ष पर. देखिए हर रोजः 'रेगिस्तान में महासंग्राम)
| साक्षी इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों में एमएस धोनी की टीम का हौसला बढ़ाने पहुंचती रहीं हैं. नई दिल्ली. आईपीएल चल रहा हो तो स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा रहता है. प्रशंसकों का शोर और कुछ सुनने ही नहीं देता. खिलाड़ियों के परिवार वाले भी हौसला आफजाई के लिए दर्शकदीर्घा में नजर आते हैं. मगर ये तब है जब हालात सामान्य हो. फिलहाल तो आईपीएल यूएई में खेला जा रहा है. न दर्शकों से पैक स्टेडियम है न ही खिलाड़ियों के परिवारवाले ही नजर आ रहे हैं. कोरोना काल के इस मुश्किल वक्त में खिलाड़ी परिवार की सुरक्षा के लिए उनसे दूर रहकर ही आईपीएल खेल रहे हैं. चेन्नई सुपरकिंग्स् के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी पत्नी साक्षी और बेटी जीवा के बिना ही यूएई पहुंचे हैं. बेशक धोनी को अपनी भावनाएं छिपाने के लिए जाना जाता है, लेकिन साक्षी ने ये स्वीकार करने में जरा भी देर नहीं लगाई कि उन्हें माही की याद आ रही है. जीवा और मेरे लिए बायो बबल में दो महीने बिताना मुश्किल होता इनसाइड स्पोटर्स से बातचीत में साक्षी ने कहा कि उनके लिए यूएई जाना आसान नहीं था. साक्षी के अनुसार, मैं इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहने को मिस नहीं कर रही, क्योंकि मैं टीवी पर मैच देख रही हूं. मगर मैं अपने पति को बहुत मिस कर रही हूं. इस दौरान साक्षी ने इस बात का भी खुलासा किया कि वह आखिर धोनी के साथ यूएई क्यों नहीं गईं. इस सवाल के जवाब में साक्षी धोनी ने कहा, ईमानदारी से कहूं तो जीवा और मेरे लिए बायो बबल में दो महीने तक रहना बेहद मुश्किल साबित होता. क्या एमएस धोनी के साथ बिगड़ गए हैं सुरेश रैना के रिश्ते? रैना के इस कदम से मिला जवाब! आज हैदराबाद से होगी चेन्नई की भिड़ंत पांच दिन के ब्रेक के बाद महेंद्र सिंह धोनी की की अगुआई में चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले में उतरने के लिए तैयार है. हालांकि चेन्नई ने अभी तक तीन मुकाबले खेले हैं, जिसमें से दो में उसे हार मिली है. वहीं हैदराबाद का भी मौजूदा सीजन में यही रिकॉर्ड है. अभी तक खेले तीन मुकाबलों में चेन्नई को राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स ने मात दी है जबकि इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें सीजन के उद्घाटन मुकाबले में टीम ने चार बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को मात दी थी. |
मुंबई में कई पुराने पुल हैं, लेकिन कोई भी एजेंसी उनकी उम्र और मरम्मत का रिकॉर्ड नहीं रखती है कि उनकी मरम्मत चल रही है या उनको मरम्मत की जरूरत है। और हर एक दुर्घटना के बाद हमेशा एक दूसरे पर दोष लगाने का खेल चलता है।
मुंबईः मुंबई बहुत सारे पुराने पुल के सहारे फल-फूल रहा है, जिनमें से कुछ औपनिवेशिक काल से भी पहले के हैं। लेकिन, किसी भी एजेंसी के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है कि वास्तव में उनमें से कितने पुल कमजोर या जर्जर हैं और कितने पुलों की आवश्यक मरम्मत हो चुकी है, इस सप्ताह के शुरूआत में उपनगरीय अंधेरी में ओवरब्रिज गिरने के कारण यह चिंता पैदा हुई है।
शहर में 314 नए और पुराने पुल हैं जिनका कम से कम पाँच अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा रख-रखाव किया जाता है। और किसी भी दुर्घटना के मामले में उनको एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुए देखा जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, इस सप्ताह की शुरुआत में अंधेरी में हुई घटना के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम और पश्चिमी रेलवे अब एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
जब औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश सरकार के अंत के दौरान पुलों का निर्माण करवाया गया था, तो उनके पास इस तरह के ढाँचों का एक समेकित लेखाजोखा है, उन ढाँचों का रखरखाव करने के लिए आमतौर पर वह भारतीय समकक्षों को पत्र भेजते हैं।
2016 में दुर्घटनाग्रस्त महाद पुल के मामले में, ब्रिटिश सरकार ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को एक पत्र भेजा था कि पुल अपने जीवनकाल के अंत के करीब था और उसे ध्वस्त या उसका पुननिर्माण करने की आवश्यकता थी।
महाद में सावित्री नदी पर बने ब्रिटिश कालीन पुल के बाढ़ में बह जाने के बाद, बीएमसी ने सितंबर 2016 में एक सूची तैयार करने के लिए शहर के पुलों का सर्वेक्षण करना शुरू किया था।
शहर में कुल 314 पुल हैं, जिसमें फ्लाईओवर, सबवे, रोड ओवरब्रिज और फुट ओवरब्रिज सहित 274 पुल निरीक्षण के लिए चुने गए।
274 में से 77 पुल आइलैंड सिटी में हैं, 137 पुल पश्चिमी उपनगरों में और 60 पुल पूर्वी उपनगरों में हैं। कुल मिलाकर 77 पुल रेलवे की भूमि पर स्थिति हैं।
अंधेरी में 70 मीटर लंबा गोखले पुल है, जिसका एक हिस्सा इस सप्ताह के शुरू में ढह गया था। इस पुल का निर्माण 1975 में करवाया गया था।
मुंबई ऐसे कई पुराने पुलों, यहाँ तक कि कई बहुत पुराने हैं, जैसे लोअर परेल में एल्फिंस्टन रोड पुल या दादर में तिलक पुल, के साथ उन्नति कर रहा है। शहर के अधिकांश पुराने पुल रेलवे ट्रैक के ऊपर बने हैं, जो बड़े पैमाने पर उत्तर-दक्षिण संरेखित रेलवे प्रणाली से पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करते हैं।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की वरिष्ठ शोधकर्ता सायली उदास मंकीकर ने कहा कि इन पुलों के जीर्ण होने का कारण या तो कार्यात्मक रूप से पुरानी प्रौद्योगिकी और घिसावट है या फिर ये संरचनात्मक रूप से अपूर्ण हैं और इसकी जाँच में जटिल इंजीनियरिंग एल्गोरिदमिक सिस्टम (कलन विधि प्रणाली) शामिल है।
उन्होंने कहा, "मुंबई में क्षेत्रों को जोड़ने लिए पुल, एक योजक के रूप में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका पुनःसंयोजन करने का मतलब है यातायात प्रवाह में बाधा डालना और इसलिए उन पुलों की मरम्मत करने वाली एजेंसियों के लिए यातायात पुलिस से अनुमतियां प्राप्त करना भी एक आसान काम नहीं है।
अंधेरी पुल की दुर्घटना के मामले में, बीएमसी ने जोर देकर कहा कि उसने संरचना को बनाए रखने के लिए पश्चिमी रेलवे को धन वितरित किया था, जबकि बाद में उन्होंने कहा कि इसकी मरम्मत करना नागरिक निकाय की जिम्मेदारी थी।
एक अचूक सवाल यह भी है कि किस एजेंसी ने 3 मीटर चौड़े पुल को पॉवर ब्लॉक के नीचे पाई गईं लगभग 60 यूटिलिटी केबल्स को स्थापित करने की मंजूरी दे दी, जो संरचना को कमजोर कर सकता हैं।
मंकीकर ने कहा कि क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दों को केवल पारदर्शिता और सामंजस्य के माध्यम से हल किया जा सकता है जो गैरहाजिर है।
| मुंबई में कई पुराने पुल हैं, लेकिन कोई भी एजेंसी उनकी उम्र और मरम्मत का रिकॉर्ड नहीं रखती है कि उनकी मरम्मत चल रही है या उनको मरम्मत की जरूरत है। और हर एक दुर्घटना के बाद हमेशा एक दूसरे पर दोष लगाने का खेल चलता है। मुंबईः मुंबई बहुत सारे पुराने पुल के सहारे फल-फूल रहा है, जिनमें से कुछ औपनिवेशिक काल से भी पहले के हैं। लेकिन, किसी भी एजेंसी के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है कि वास्तव में उनमें से कितने पुल कमजोर या जर्जर हैं और कितने पुलों की आवश्यक मरम्मत हो चुकी है, इस सप्ताह के शुरूआत में उपनगरीय अंधेरी में ओवरब्रिज गिरने के कारण यह चिंता पैदा हुई है। शहर में तीन सौ चौदह नए और पुराने पुल हैं जिनका कम से कम पाँच अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा रख-रखाव किया जाता है। और किसी भी दुर्घटना के मामले में उनको एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुए देखा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, इस सप्ताह की शुरुआत में अंधेरी में हुई घटना के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम और पश्चिमी रेलवे अब एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. जब औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश सरकार के अंत के दौरान पुलों का निर्माण करवाया गया था, तो उनके पास इस तरह के ढाँचों का एक समेकित लेखाजोखा है, उन ढाँचों का रखरखाव करने के लिए आमतौर पर वह भारतीय समकक्षों को पत्र भेजते हैं। दो हज़ार सोलह में दुर्घटनाग्रस्त महाद पुल के मामले में, ब्रिटिश सरकार ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को एक पत्र भेजा था कि पुल अपने जीवनकाल के अंत के करीब था और उसे ध्वस्त या उसका पुननिर्माण करने की आवश्यकता थी। महाद में सावित्री नदी पर बने ब्रिटिश कालीन पुल के बाढ़ में बह जाने के बाद, बीएमसी ने सितंबर दो हज़ार सोलह में एक सूची तैयार करने के लिए शहर के पुलों का सर्वेक्षण करना शुरू किया था। शहर में कुल तीन सौ चौदह पुल हैं, जिसमें फ्लाईओवर, सबवे, रोड ओवरब्रिज और फुट ओवरब्रिज सहित दो सौ चौहत्तर पुल निरीक्षण के लिए चुने गए। दो सौ चौहत्तर में से सतहत्तर पुल आइलैंड सिटी में हैं, एक सौ सैंतीस पुल पश्चिमी उपनगरों में और साठ पुल पूर्वी उपनगरों में हैं। कुल मिलाकर सतहत्तर पुल रेलवे की भूमि पर स्थिति हैं। अंधेरी में सत्तर मीटर लंबा गोखले पुल है, जिसका एक हिस्सा इस सप्ताह के शुरू में ढह गया था। इस पुल का निर्माण एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में करवाया गया था। मुंबई ऐसे कई पुराने पुलों, यहाँ तक कि कई बहुत पुराने हैं, जैसे लोअर परेल में एल्फिंस्टन रोड पुल या दादर में तिलक पुल, के साथ उन्नति कर रहा है। शहर के अधिकांश पुराने पुल रेलवे ट्रैक के ऊपर बने हैं, जो बड़े पैमाने पर उत्तर-दक्षिण संरेखित रेलवे प्रणाली से पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करते हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की वरिष्ठ शोधकर्ता सायली उदास मंकीकर ने कहा कि इन पुलों के जीर्ण होने का कारण या तो कार्यात्मक रूप से पुरानी प्रौद्योगिकी और घिसावट है या फिर ये संरचनात्मक रूप से अपूर्ण हैं और इसकी जाँच में जटिल इंजीनियरिंग एल्गोरिदमिक सिस्टम शामिल है। उन्होंने कहा, "मुंबई में क्षेत्रों को जोड़ने लिए पुल, एक योजक के रूप में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका पुनःसंयोजन करने का मतलब है यातायात प्रवाह में बाधा डालना और इसलिए उन पुलों की मरम्मत करने वाली एजेंसियों के लिए यातायात पुलिस से अनुमतियां प्राप्त करना भी एक आसान काम नहीं है। अंधेरी पुल की दुर्घटना के मामले में, बीएमसी ने जोर देकर कहा कि उसने संरचना को बनाए रखने के लिए पश्चिमी रेलवे को धन वितरित किया था, जबकि बाद में उन्होंने कहा कि इसकी मरम्मत करना नागरिक निकाय की जिम्मेदारी थी। एक अचूक सवाल यह भी है कि किस एजेंसी ने तीन मीटर चौड़े पुल को पॉवर ब्लॉक के नीचे पाई गईं लगभग साठ यूटिलिटी केबल्स को स्थापित करने की मंजूरी दे दी, जो संरचना को कमजोर कर सकता हैं। मंकीकर ने कहा कि क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दों को केवल पारदर्शिता और सामंजस्य के माध्यम से हल किया जा सकता है जो गैरहाजिर है। |
अलीगढ़ : अलीगढ़ के लोधा क्षेत्र में सिलेंडर फटने से मकान की छत उड़ गई. मलबा में एक व्यक्ति दब गया. स्थानीय लोगों ने उसे मलबे से निकालकर जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है. उसकी हालत गंभीर है. घटना थाना लोधा क्षेत्र के मीर की नगरिया की है.
थाना लोधा क्षेत्र के गांव मीर की नगरिया निवासी 65 वर्षीय वृद्ध प्रेमवीर सिंह ने गुरुवार की रात गैस पर दूध गरम करने को जैसे ही माचिस की तीली जलाई सिलेंडर में आग लग गयी. आग पूरे कमरे में आग फैल गई. धमाका के साथ मकान गिर गया. मकान गिरते ही आग बुझ गयी लेकिन प्रेमवीर मलबा में दब गया. प्रेमवीर को बचाने के लिये ग्रामीण दौड़ पड़े . ग्रामीणों ने वृद्ध को बाहर निकाला एवं थाना पुलिस को सूचित कर अस्पताल पहुंचाया.
पड़ोसी गवेन्द्र ने बताया कि प्रेमवीर सिंह वृद्ध है और घर में अकेले रहते थे. पत्नी की छह महीने पहले डेथ हो गई थी. बैंक से बकरी पालन के लिए पांच लाख रुपये का लोन लिया था. उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर मिला था. गैस लीक होने से सिलेंडर पाइप फट गया और मकान की छत गिर गई. प्रेमवीर सिंह वर्षों पूर्व होमगार्ड में पीसी थे और नौकरी से रिजाइन दे दिया था. वह होमगार्ड विभाग से रिजाइन कर बकरी पालन कर रहा था.
| अलीगढ़ : अलीगढ़ के लोधा क्षेत्र में सिलेंडर फटने से मकान की छत उड़ गई. मलबा में एक व्यक्ति दब गया. स्थानीय लोगों ने उसे मलबे से निकालकर जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है. उसकी हालत गंभीर है. घटना थाना लोधा क्षेत्र के मीर की नगरिया की है. थाना लोधा क्षेत्र के गांव मीर की नगरिया निवासी पैंसठ वर्षीय वृद्ध प्रेमवीर सिंह ने गुरुवार की रात गैस पर दूध गरम करने को जैसे ही माचिस की तीली जलाई सिलेंडर में आग लग गयी. आग पूरे कमरे में आग फैल गई. धमाका के साथ मकान गिर गया. मकान गिरते ही आग बुझ गयी लेकिन प्रेमवीर मलबा में दब गया. प्रेमवीर को बचाने के लिये ग्रामीण दौड़ पड़े . ग्रामीणों ने वृद्ध को बाहर निकाला एवं थाना पुलिस को सूचित कर अस्पताल पहुंचाया. पड़ोसी गवेन्द्र ने बताया कि प्रेमवीर सिंह वृद्ध है और घर में अकेले रहते थे. पत्नी की छह महीने पहले डेथ हो गई थी. बैंक से बकरी पालन के लिए पांच लाख रुपये का लोन लिया था. उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर मिला था. गैस लीक होने से सिलेंडर पाइप फट गया और मकान की छत गिर गई. प्रेमवीर सिंह वर्षों पूर्व होमगार्ड में पीसी थे और नौकरी से रिजाइन दे दिया था. वह होमगार्ड विभाग से रिजाइन कर बकरी पालन कर रहा था. |
ODI World Cup के इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड टीम के विस्फोटक बल्लेबाज के नाम है। आइए जानते हैं टॉप 10 लिस्ट में शामिल बल्लेबाजों के बारे में।
Highest Individual Score in ODI World Cup: वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड न्यूज़ीलैंड टीम के विस्फोटक बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल के नाम है, जिन्होंने 2015 वनडे वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ 237 रन बनाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था। वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले दूसरे बल्लेबाज वेस्टइंडीज टीम के क्रिस गेल हैं, जिन्होंने भी 2015 वनडे वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ 215 रनों की पारी खेली थी। इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका के गैरी किर्स्टन तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 1996 वनडे वर्ल्ड कप में यूएई के खिलाफ नाबाद 188 की पारी खेली थी।
इस लिस्ट में चौथे स्थान पर भारतीय टीम के दिग्गज बल्लेबाज सौरव गांगुली हैं, जिन्होंने 1999 वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ 183 रनों की पारी खेली थी। वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले पांचवे बल्लेबाज वेस्टइंडीज टीम के सर विवियन रिचर्ड्स हैं, जिन्होंने 1987 वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ 181 रनों की पारी खेली थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम के विस्फोटक बल्लेबाज डेविड वॉर्नर 178 रनों के साथ छठे स्थान पर हैं, उन्होंने 2015 वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान के खिलाफ यह कारनामा किया था।
वनडे वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी पारी खेलने के मामले में भारतीय टीम के महान बल्लेबाज खिलाड़ी कपिल देव सातवें स्थान पर हैं, उन्होंने 1983 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 175 रनों की पारी खेली थी। इस लिस्ट में वीरेन्द्र सहवाग 175 रनों के साथ आठवें स्थान पर हैं, उन्होंने 2011 वर्ल्ड कप के दौरान बांग्लादेश के खिलाफ 175 रनों की पारी खेली थी।
जिम्बाब्वे के क्रेग विशर्ट ने 172 रनों के साथ 9वें स्थान पर हैं, उन्होंने नामीबिया के खिलाफ 2003 में नाबाद 172 रनों की पारी खेली थी। इस टॉप 10 लिस्ट में न्यूजीलैंड टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ग्लेन टर्नर 10वें स्थान पर हैं। उन्होंने 1975 वर्ल्ड कप में ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 171 रन की पारी खेली थी।
| ODI World Cup के इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड टीम के विस्फोटक बल्लेबाज के नाम है। आइए जानते हैं टॉप दस लिस्ट में शामिल बल्लेबाजों के बारे में। Highest Individual Score in ODI World Cup: वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड न्यूज़ीलैंड टीम के विस्फोटक बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल के नाम है, जिन्होंने दो हज़ार पंद्रह वनडे वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ दो सौ सैंतीस रन बनाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था। वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले दूसरे बल्लेबाज वेस्टइंडीज टीम के क्रिस गेल हैं, जिन्होंने भी दो हज़ार पंद्रह वनडे वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ दो सौ पंद्रह रनों की पारी खेली थी। इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका के गैरी किर्स्टन तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियानवे वनडे वर्ल्ड कप में यूएई के खिलाफ नाबाद एक सौ अठासी की पारी खेली थी। इस लिस्ट में चौथे स्थान पर भारतीय टीम के दिग्गज बल्लेबाज सौरव गांगुली हैं, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ एक सौ तिरासी रनों की पारी खेली थी। वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले पांचवे बल्लेबाज वेस्टइंडीज टीम के सर विवियन रिचर्ड्स हैं, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ सत्तासी वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ एक सौ इक्यासी रनों की पारी खेली थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम के विस्फोटक बल्लेबाज डेविड वॉर्नर एक सौ अठहत्तर रनों के साथ छठे स्थान पर हैं, उन्होंने दो हज़ार पंद्रह वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान के खिलाफ यह कारनामा किया था। वनडे वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी पारी खेलने के मामले में भारतीय टीम के महान बल्लेबाज खिलाड़ी कपिल देव सातवें स्थान पर हैं, उन्होंने एक हज़ार नौ सौ तिरासी वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद एक सौ पचहत्तर रनों की पारी खेली थी। इस लिस्ट में वीरेन्द्र सहवाग एक सौ पचहत्तर रनों के साथ आठवें स्थान पर हैं, उन्होंने दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप के दौरान बांग्लादेश के खिलाफ एक सौ पचहत्तर रनों की पारी खेली थी। जिम्बाब्वे के क्रेग विशर्ट ने एक सौ बहत्तर रनों के साथ नौवें स्थान पर हैं, उन्होंने नामीबिया के खिलाफ दो हज़ार तीन में नाबाद एक सौ बहत्तर रनों की पारी खेली थी। इस टॉप दस लिस्ट में न्यूजीलैंड टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ग्लेन टर्नर दसवें स्थान पर हैं। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर वर्ल्ड कप में ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ नाबाद एक सौ इकहत्तर रन की पारी खेली थी। |
त्रिसंयोजनमेवास्ति, अत्राऽनन्तानुबंधिनाम् ।
ततो मोहत्रयस्यैवो ऽपशान्तिरत्र कीर्तिता ।।१०२ ॥
मातवें । अप्रमत्त गुणस्थान में जब जीव उपशमश्रेणी । चढ़ने के सम्मुख होता है तब क्षायोपशमिक सम्यक्त्व से यह द्वितीयोपशम सम्यक्त्व होता है । इस द्वितीयोपशम सम्यक्त्व में अनंतानुबंधी का विसंयोजन * ( अप्रन्याख्यानादि कपाय रूप परिणमन करना ) होता है। यहां भी करणत्रय द्वारा तीन हो प्रकतियों (तिथ्यगत्त्र, सम्पङ - मिथ्यात्व और सम्यक प्रकृति) का उपशम किया जाता है क्योंकि यहां तीन हो प्रकृतियों की मा पाई जाती है ।
प्रश्न - उपशम किसे कहते हैं ?
+ सातवें गुरणस्थान के दो भेद हैं - स्वस्थान अप्रमत्त और मानिशय अप्रमत्त । जो छठे और मानवें गुरणस्थान में चक्कर लगाना रहे उसे 'स्वस्थान' और जो श्रेणी चढ़ने के सम्मुख हो उसे 'मातिशय अप्रमत्त' कहते हैं। यहां मातिशय अप्रमत्त ही लेना चाहिये ।
१ जहां चारित्र मोहनीय की २१ अवशिष्ट प्रकृतियों का उपशम किया जावे उसे 'उपशम श्रेणी' कहते हैं ।
* कुछ आचार्य इस विसंयोजन के नियम को नहीं मानते । | त्रिसंयोजनमेवास्ति, अत्राऽनन्तानुबंधिनाम् । ततो मोहत्रयस्यैवो ऽपशान्तिरत्र कीर्तिता ।।एक सौ दो ॥ मातवें । अप्रमत्त गुणस्थान में जब जीव उपशमश्रेणी । चढ़ने के सम्मुख होता है तब क्षायोपशमिक सम्यक्त्व से यह द्वितीयोपशम सम्यक्त्व होता है । इस द्वितीयोपशम सम्यक्त्व में अनंतानुबंधी का विसंयोजन * होता है। यहां भी करणत्रय द्वारा तीन हो प्रकतियों का उपशम किया जाता है क्योंकि यहां तीन हो प्रकृतियों की मा पाई जाती है । प्रश्न - उपशम किसे कहते हैं ? + सातवें गुरणस्थान के दो भेद हैं - स्वस्थान अप्रमत्त और मानिशय अप्रमत्त । जो छठे और मानवें गुरणस्थान में चक्कर लगाना रहे उसे 'स्वस्थान' और जो श्रेणी चढ़ने के सम्मुख हो उसे 'मातिशय अप्रमत्त' कहते हैं। यहां मातिशय अप्रमत्त ही लेना चाहिये । एक जहां चारित्र मोहनीय की इक्कीस अवशिष्ट प्रकृतियों का उपशम किया जावे उसे 'उपशम श्रेणी' कहते हैं । * कुछ आचार्य इस विसंयोजन के नियम को नहीं मानते । |
Reliance Jio Fibre जब लॉंच हुआ था तो कंपनी ने यूजर्स को लुभाने के लिए कई आकर्षक ऑफर दिये थे। मोबाइल डेटा की तरह कंपनी ने लॉंच के बाद ब्रॉडबैंड सर्विस भी कुछ वक़्त के लिए फ्री देने की घोषणा की थी। लेकिन अब कंपनी ने फ्री सर्विस वापस लेने का फैसला किया है। कंपनी ने अपनी ब्रॉडबैंड सर्विस के लिए नए यूजर्स को चार्ज करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी मौजूदा ब्रॉडबैंड यूजर्स को पेड प्लान चुनने के लिए कह रही है।
मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली टेल्को ने कहा है कि 5 लाख जियो फाइबर ट्रायल यूजर्स को ऑनबोर्ड करना शुरू कर दिया है, जिन्होंने कमर्शल लॉन्च से पहले इस सर्विस को सब्सक्राइब कर लिया था। यह प्रक्रिया अगले एक महीने में चरणों में पूरा होने की संभावना है।
एक अन्य व्यक्ति ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि कंपनी ट्रायल सर्विस इस्तेमाल कर रहे मौजूदा यूजर्स से कहा है कि फ्री ब्रॉडबैंड सर्विस बहुत जल्द बंद कर दी जाएगी और उन्हें इस सर्विस से जुड़े रहने के लिए जियो फाइबर प्लान्स को सब्सक्राइब कराना होगा।
JioFiber की टैरिफ योजनाएं 699 रुपये से लेकर 8,499 रूपाय प्रति माह तक हैं। जिसके तहत जियो फाइबर यूजर्स को 100Mbps से 1Gbps तक की इंटरनेट स्पीड दे रहा है। प्लान में गेमिंग, होम नेटवर्क शेयरिंग, टीवी विडियो कॉलिंग और कॉन्फ्रेसिंग के साथ डिवाइस सुरक्षा और ओटीटी कॉन्टेंट प्लैटफॉर्म्स का ऐक्सेस दिया जा रहा है।
बता दें जियो फाइबर के पास इस वक्त लगभग 7 लाख यूजर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो द्वारा ऑफर की जाने वाली 4G और होम ब्रॉडबैंड सर्विस कंपनी के फायदे को बढ़ाने का काम करेंगी।
| Reliance Jio Fibre जब लॉंच हुआ था तो कंपनी ने यूजर्स को लुभाने के लिए कई आकर्षक ऑफर दिये थे। मोबाइल डेटा की तरह कंपनी ने लॉंच के बाद ब्रॉडबैंड सर्विस भी कुछ वक़्त के लिए फ्री देने की घोषणा की थी। लेकिन अब कंपनी ने फ्री सर्विस वापस लेने का फैसला किया है। कंपनी ने अपनी ब्रॉडबैंड सर्विस के लिए नए यूजर्स को चार्ज करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी मौजूदा ब्रॉडबैंड यूजर्स को पेड प्लान चुनने के लिए कह रही है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली टेल्को ने कहा है कि पाँच लाख जियो फाइबर ट्रायल यूजर्स को ऑनबोर्ड करना शुरू कर दिया है, जिन्होंने कमर्शल लॉन्च से पहले इस सर्विस को सब्सक्राइब कर लिया था। यह प्रक्रिया अगले एक महीने में चरणों में पूरा होने की संभावना है। एक अन्य व्यक्ति ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि कंपनी ट्रायल सर्विस इस्तेमाल कर रहे मौजूदा यूजर्स से कहा है कि फ्री ब्रॉडबैंड सर्विस बहुत जल्द बंद कर दी जाएगी और उन्हें इस सर्विस से जुड़े रहने के लिए जियो फाइबर प्लान्स को सब्सक्राइब कराना होगा। JioFiber की टैरिफ योजनाएं छः सौ निन्यानवे रुपयापये से लेकर आठ,चार सौ निन्यानवे रूपाय प्रति माह तक हैं। जिसके तहत जियो फाइबर यूजर्स को एक सौMbps से एकGbps तक की इंटरनेट स्पीड दे रहा है। प्लान में गेमिंग, होम नेटवर्क शेयरिंग, टीवी विडियो कॉलिंग और कॉन्फ्रेसिंग के साथ डिवाइस सुरक्षा और ओटीटी कॉन्टेंट प्लैटफॉर्म्स का ऐक्सेस दिया जा रहा है। बता दें जियो फाइबर के पास इस वक्त लगभग सात लाख यूजर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो द्वारा ऑफर की जाने वाली चारG और होम ब्रॉडबैंड सर्विस कंपनी के फायदे को बढ़ाने का काम करेंगी। |
नई दिल्ली. आज देश में छठ पर्व मनाया जा है. छठ को लोक आस्था का पर्व कहा जाता है. इसमें छठी मैया और सूर्य की पूजा की जाती है. दिवाली के 6 दिन बाद शुरू होने वाले छठ पूजा का विशेष स्थान है. ये त्योहार चार दिन तक चलता है. ये त्योहार नहाय खाय से शुरू होकर भोर के अर्घ्य पर संपन्न होगा. इस पर्व में उगते सूर्य के साथ- साथ डूबते सूर्य की भी आराधना की जाती है. ये पर्व अनेक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक संदेशों को खुद में समेटे हुए है. ये ऐसा पर्व है जिसे महापर्व की संज्ञा दी गई है. इस पर्व को मनाने के पीछे कई कथाएं प्रचलित है.
मान्यता है कि महाभारत की द्रोपदी ने भी इस व्रत को रखा था. शास्त्रों के अनुसार पांडव अपना पूरा राजपाठ कौरवों से जुए में हार गए थे और जंगल-जंगल भटक रहे थे. द्रौपदी से यह देखा न गया और उसने छठ पूजा की और व्रत रखा. जिसके प्रभाव के कारण पांडवों को अपना खोया हुआ राज वापस मिल गया था. इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार कहा गया है कि राम और सीता ने भी छठ पूजा की थी. शास्त्रों के अनुसार जब भगवान श्री राम वनवास से वापस आए तब राम और सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन व्रत रख कर रखकर भगवान सूर्य की आराधना की और सप्तमी के दिन यह व्रत पूरा किया. इसके बाद राम और सीता ने पवित्र सरयू के तट पर भगवान सूर्य का अनुष्ठान कर उन्हें प्रसन्न किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था. इस विशेष पर्व को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. आज भी लोग पूरे पारंपरिक तौर तरीके से इस त्योहर को सेलेब्रेट करते हैं. आइए दिखाते हैं कि कुछ ऐसी तस्वीरे जिसमें आप छठ पूजा के अलग अलग रंगों को देख सकते हैं.
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| नई दिल्ली. आज देश में छठ पर्व मनाया जा है. छठ को लोक आस्था का पर्व कहा जाता है. इसमें छठी मैया और सूर्य की पूजा की जाती है. दिवाली के छः दिन बाद शुरू होने वाले छठ पूजा का विशेष स्थान है. ये त्योहार चार दिन तक चलता है. ये त्योहार नहाय खाय से शुरू होकर भोर के अर्घ्य पर संपन्न होगा. इस पर्व में उगते सूर्य के साथ- साथ डूबते सूर्य की भी आराधना की जाती है. ये पर्व अनेक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक संदेशों को खुद में समेटे हुए है. ये ऐसा पर्व है जिसे महापर्व की संज्ञा दी गई है. इस पर्व को मनाने के पीछे कई कथाएं प्रचलित है. मान्यता है कि महाभारत की द्रोपदी ने भी इस व्रत को रखा था. शास्त्रों के अनुसार पांडव अपना पूरा राजपाठ कौरवों से जुए में हार गए थे और जंगल-जंगल भटक रहे थे. द्रौपदी से यह देखा न गया और उसने छठ पूजा की और व्रत रखा. जिसके प्रभाव के कारण पांडवों को अपना खोया हुआ राज वापस मिल गया था. इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार कहा गया है कि राम और सीता ने भी छठ पूजा की थी. शास्त्रों के अनुसार जब भगवान श्री राम वनवास से वापस आए तब राम और सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन व्रत रख कर रखकर भगवान सूर्य की आराधना की और सप्तमी के दिन यह व्रत पूरा किया. इसके बाद राम और सीता ने पवित्र सरयू के तट पर भगवान सूर्य का अनुष्ठान कर उन्हें प्रसन्न किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था. इस विशेष पर्व को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. आज भी लोग पूरे पारंपरिक तौर तरीके से इस त्योहर को सेलेब्रेट करते हैं. आइए दिखाते हैं कि कुछ ऐसी तस्वीरे जिसमें आप छठ पूजा के अलग अलग रंगों को देख सकते हैं. एक. दो. तीन. चार. पाँच. छः. सात. आठ. |
मीडिया में प्रकाशन के लिए भेजे गए आयोग की सामग्रियों सेः
प्रक्षेपण वाहन से अलग होने के बाद फ्रीगट ऊपरी चरण के अप्रत्याशित व्यवहार के कारण पतन हुआ था। इस एल्गोरिथ्म में एक छिपी हुई समस्या सामने आई, जो दशकों तक सोयूज-फ्रीगेट लिगामेंट के सफल प्रक्षेपणों के लिए प्रकट नहीं हुई थी।
शब्द "अप्रत्याशित व्यवहार" और "एक समस्या जो दशकों तक स्वयं प्रकट नहीं हुई है", खुलकर बोलना, चिंताजनक है।
Roscosmos के आयोग से आगेः
ऊपरी चरण के अलग होने के बाद, नियंत्रण प्रणाली ने कक्षीय इकाई को आवश्यक कोणीय स्थिति में बदलने के लिए एक नियंत्रण कार्रवाई जारी करना शुरू किया। त्वरित इकाई के स्थानिक अभिविन्यास के क्षण में, आरबी "फ्रीगैट" की गैर-मानक कोणीय स्थिति दर्ज की गई थी। नतीजतन, उन्होंने मुख्य इंजनों को शामिल करने के बाद गणना की कक्षा को छोड़ दिया।
इसके अलावा, विशेषज्ञों ने कहा कि कॉसमोड्रोम के लॉन्चिंग पैड और लॉन्च वाहन और ऊपरी चरण के अज़ीमुथ के मापदंडों का मौजूदा संयोजन कभी नहीं मिला। इसीलिए, वे रोस्कोस्मोस में घोषणा करते हैं, मौजूदा तरीकों ने शुरू में इस तरह के संयोजन के साथ समस्याओं की पहचान करने की अनुमति नहीं दी।
मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट से अधिकः
एक व्यापक विश्लेषण करने के बाद, आयोग के सदस्यों का मानना है कि एल्गोरिथ्म की इस गलतता का प्रकटीकरण हो सकता है जब एक ही रॉकेट पर उसी ऊपरी चरण के साथ वोस्टोचनी कोस्मोड्रोम से एक ही पेलोड को लॉन्च करते समय। लॉन्च सामान्य रूप से, उदाहरण के लिए, गर्मियों में या घटना में होगा कि PH के वियोज्य भागों के गिरने के क्षेत्रों को चयनित लोगों से अलग रखा गया था।
सच कहूं, तो अंतिम रिपोर्ट में दिए गए ऐसे बयान काफी अजीब लगते हैं। किसी को यह आभास हो जाता है कि इन सभी व्याख्याओं के बारे में "अब तक अनदेखी" मापदंडों के संयोजन और अज़ीमुथ का उपयोग मुख्य समस्याओं पर ध्यान केंद्रित न करने के लिए किया जाता है। लेकिन मुख्य समस्याएं दूसरों की ओर से नियंत्रण की कमी की पृष्ठभूमि के खिलाफ कुछ की वास्तविक गैरजिम्मेदारी में निहित हैं।
जब आप गिरावट के कारणों के बारे में "जैसे कि अगर" पैराग्राफ को पढ़ते हैं, और इसमें (रिपोर्ट के पैराग्राफ में) एक वाक्यांश दिखाई देता है, तो वे कहते हैं, लॉन्च सामान्य रूप से होगा, यदि यह गर्मी थी, और देर से शरद ऋतु नहीं - सर्दियों के पूर्व की अवधि, तो आप अनजाने में खुद से पूछेंगेः और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए समय कब आया, जब प्रक्षेपण के विशिष्ट समय और इसकी विशिष्ट तिथि के बजाय वर्ष के पूरे समय को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो गया, उपग्रहों का उत्पादन पृथ्वी की कक्षा के लिए? यह पता चला है कि लॉन्च साइट के प्रक्षेपण स्थल और रोसोस्मोस विशेषज्ञों के लिए लॉन्च वाहन के अज़ीमुथ के समन्वय को ध्यान में रखते हुए गर्मियों में गिरावट के समान मापदंडों पर नज़र रखना आसान है . . . क्या यह संभव है कि केवल गणना में शामिल लोग हैं, लेकिन उपकरण में उपयोग किए गए प्रोसेसर का प्रदर्शन भी ठंडा है? . .
विशेष आयोग के बयान के आधार पर, यह केवल इस सवाल का जवाब देते समय पूरी तरह से खो जाने के लिए रहता हैः सोवियत विशेषज्ञों ने अक्टूबर में पहला कृत्रिम पृथ्वी उपग्रह नकली और लॉन्च करने का प्रबंधन कैसे किया? क्या यह संभव है कि उनके पार्श्व कंप्यूटिंग उपकरण अक्टूबर डंक मौसम से प्रभावित नहीं थे, और गणना के दौरान लॉन्च वाहन अजिमुथ के संबंध में लॉन्चिंग टेबल "झुकाव नहीं था"।
आखिरकार, अगर यह कहने के लिए प्रथागत था, तो मुझे स्पष्ट चीजों को बताना होगाः स्टोरकीपर (या वेल्डर), परिभाषा के अनुसार, अंतरिक्ष यान के दुर्घटनाग्रस्त होने के मुख्य कारण में मुख्य अपराधी नहीं हो सकता है क्योंकि यह सिर्फ एक स्टोरकीपर (और सिर्फ एक वेल्डर) है। और उनके पीछे "प्रभावी प्रबंधन" की एक पूरी प्रणाली है, जिनके प्रतिनिधि बजट से भारी धनराशि का मालिक हैं, लेकिन एक प्राथमिकता व्यक्तिगत जिम्मेदारी वहन करने के लिए तैयार नहीं है।
यदि हम शिक्षा प्रणाली से शुरू करते हैं, तो रिपोर्ट का पेपर काम के किसी भी वास्तविक परिणाम को बदल देता है, और यह कागज पर है कि निरीक्षण निकायों की आँखें जल रही हैं, फिर अन्य उद्योगों में क्या कहना है। एक ही स्थान में, आप तब सदस्यता समाप्त कर सकते हैं, जो कहते हैं, निर्देशांक, पैरामीटर और दिगंश "यह बेहतर होगा कि गर्मी हो", और फिर बीमा पॉलिसी के रूप - और "सभी मामलों में" डाल दें।
सभी इच्छुक पार्टियों ने पहले ही पता लगा लिया है कि यह प्रबंधन के अनुरूप है। और फिर यह आवश्यक है, वास्तव में, शैक्षिक "संगठनों" में आधुनिक प्रशिक्षण का संदर्भ खोजने के लिए, वास्तविक अपराधियों की तलाश करें। खैर, यह अच्छा है, आपको प्रसिद्ध टीवी पत्रकार कोन्स्टेंटिन सेमिन के वर्तमान कार्यक्रमों में आना होगा, और उनके जलते सवालों का जवाब देना चाहिए कि हमारे शैक्षिक केंद्र बारिश के बाद मशरूम की तरह क्यों बढ़ रहे हैं, और शिक्षा का स्तर गिरना जारी है, क्यों संघीय चैनलों के माध्यम से - " सिरियस "और अन्य" कवेंटोरियम ", और प्रांतीय स्कूलों में सड़क पर शौचालय हैं, पतली छतें (हालांकि तबाही कोठरी नहीं जानी जाती . . . ), और एक्सएनयूएमएक्स कंप्यूटर विज्ञान कार्यालय में एक कंप्यूटर है, और एक उत्साही शिक्षक द्वारा घर से लाया गया था।
इसलिए, यह पता चला है कि गर्मियों में अगले लॉन्च की उम्मीद की जा सकती है? . . या फिर फिर समस्याएं होंगीः गर्मी, टिड्डियां और शुष्क हवाएं, जो रॉकेट और पूरे आधुनिक अंतरिक्ष उद्योग को रोकती हैं? . . ?
अन्यथा, अब डीडीटी प्रदर्शनों की सूची "शरद ऋतु, आकाश में जहाजों का दोहन" का एक अतिरिक्त अर्थ है।
| मीडिया में प्रकाशन के लिए भेजे गए आयोग की सामग्रियों सेः प्रक्षेपण वाहन से अलग होने के बाद फ्रीगट ऊपरी चरण के अप्रत्याशित व्यवहार के कारण पतन हुआ था। इस एल्गोरिथ्म में एक छिपी हुई समस्या सामने आई, जो दशकों तक सोयूज-फ्रीगेट लिगामेंट के सफल प्रक्षेपणों के लिए प्रकट नहीं हुई थी। शब्द "अप्रत्याशित व्यवहार" और "एक समस्या जो दशकों तक स्वयं प्रकट नहीं हुई है", खुलकर बोलना, चिंताजनक है। Roscosmos के आयोग से आगेः ऊपरी चरण के अलग होने के बाद, नियंत्रण प्रणाली ने कक्षीय इकाई को आवश्यक कोणीय स्थिति में बदलने के लिए एक नियंत्रण कार्रवाई जारी करना शुरू किया। त्वरित इकाई के स्थानिक अभिविन्यास के क्षण में, आरबी "फ्रीगैट" की गैर-मानक कोणीय स्थिति दर्ज की गई थी। नतीजतन, उन्होंने मुख्य इंजनों को शामिल करने के बाद गणना की कक्षा को छोड़ दिया। इसके अलावा, विशेषज्ञों ने कहा कि कॉसमोड्रोम के लॉन्चिंग पैड और लॉन्च वाहन और ऊपरी चरण के अज़ीमुथ के मापदंडों का मौजूदा संयोजन कभी नहीं मिला। इसीलिए, वे रोस्कोस्मोस में घोषणा करते हैं, मौजूदा तरीकों ने शुरू में इस तरह के संयोजन के साथ समस्याओं की पहचान करने की अनुमति नहीं दी। मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट से अधिकः एक व्यापक विश्लेषण करने के बाद, आयोग के सदस्यों का मानना है कि एल्गोरिथ्म की इस गलतता का प्रकटीकरण हो सकता है जब एक ही रॉकेट पर उसी ऊपरी चरण के साथ वोस्टोचनी कोस्मोड्रोम से एक ही पेलोड को लॉन्च करते समय। लॉन्च सामान्य रूप से, उदाहरण के लिए, गर्मियों में या घटना में होगा कि PH के वियोज्य भागों के गिरने के क्षेत्रों को चयनित लोगों से अलग रखा गया था। सच कहूं, तो अंतिम रिपोर्ट में दिए गए ऐसे बयान काफी अजीब लगते हैं। किसी को यह आभास हो जाता है कि इन सभी व्याख्याओं के बारे में "अब तक अनदेखी" मापदंडों के संयोजन और अज़ीमुथ का उपयोग मुख्य समस्याओं पर ध्यान केंद्रित न करने के लिए किया जाता है। लेकिन मुख्य समस्याएं दूसरों की ओर से नियंत्रण की कमी की पृष्ठभूमि के खिलाफ कुछ की वास्तविक गैरजिम्मेदारी में निहित हैं। जब आप गिरावट के कारणों के बारे में "जैसे कि अगर" पैराग्राफ को पढ़ते हैं, और इसमें एक वाक्यांश दिखाई देता है, तो वे कहते हैं, लॉन्च सामान्य रूप से होगा, यदि यह गर्मी थी, और देर से शरद ऋतु नहीं - सर्दियों के पूर्व की अवधि, तो आप अनजाने में खुद से पूछेंगेः और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए समय कब आया, जब प्रक्षेपण के विशिष्ट समय और इसकी विशिष्ट तिथि के बजाय वर्ष के पूरे समय को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो गया, उपग्रहों का उत्पादन पृथ्वी की कक्षा के लिए? यह पता चला है कि लॉन्च साइट के प्रक्षेपण स्थल और रोसोस्मोस विशेषज्ञों के लिए लॉन्च वाहन के अज़ीमुथ के समन्वय को ध्यान में रखते हुए गर्मियों में गिरावट के समान मापदंडों पर नज़र रखना आसान है . . . क्या यह संभव है कि केवल गणना में शामिल लोग हैं, लेकिन उपकरण में उपयोग किए गए प्रोसेसर का प्रदर्शन भी ठंडा है? . . विशेष आयोग के बयान के आधार पर, यह केवल इस सवाल का जवाब देते समय पूरी तरह से खो जाने के लिए रहता हैः सोवियत विशेषज्ञों ने अक्टूबर में पहला कृत्रिम पृथ्वी उपग्रह नकली और लॉन्च करने का प्रबंधन कैसे किया? क्या यह संभव है कि उनके पार्श्व कंप्यूटिंग उपकरण अक्टूबर डंक मौसम से प्रभावित नहीं थे, और गणना के दौरान लॉन्च वाहन अजिमुथ के संबंध में लॉन्चिंग टेबल "झुकाव नहीं था"। आखिरकार, अगर यह कहने के लिए प्रथागत था, तो मुझे स्पष्ट चीजों को बताना होगाः स्टोरकीपर , परिभाषा के अनुसार, अंतरिक्ष यान के दुर्घटनाग्रस्त होने के मुख्य कारण में मुख्य अपराधी नहीं हो सकता है क्योंकि यह सिर्फ एक स्टोरकीपर है। और उनके पीछे "प्रभावी प्रबंधन" की एक पूरी प्रणाली है, जिनके प्रतिनिधि बजट से भारी धनराशि का मालिक हैं, लेकिन एक प्राथमिकता व्यक्तिगत जिम्मेदारी वहन करने के लिए तैयार नहीं है। यदि हम शिक्षा प्रणाली से शुरू करते हैं, तो रिपोर्ट का पेपर काम के किसी भी वास्तविक परिणाम को बदल देता है, और यह कागज पर है कि निरीक्षण निकायों की आँखें जल रही हैं, फिर अन्य उद्योगों में क्या कहना है। एक ही स्थान में, आप तब सदस्यता समाप्त कर सकते हैं, जो कहते हैं, निर्देशांक, पैरामीटर और दिगंश "यह बेहतर होगा कि गर्मी हो", और फिर बीमा पॉलिसी के रूप - और "सभी मामलों में" डाल दें। सभी इच्छुक पार्टियों ने पहले ही पता लगा लिया है कि यह प्रबंधन के अनुरूप है। और फिर यह आवश्यक है, वास्तव में, शैक्षिक "संगठनों" में आधुनिक प्रशिक्षण का संदर्भ खोजने के लिए, वास्तविक अपराधियों की तलाश करें। खैर, यह अच्छा है, आपको प्रसिद्ध टीवी पत्रकार कोन्स्टेंटिन सेमिन के वर्तमान कार्यक्रमों में आना होगा, और उनके जलते सवालों का जवाब देना चाहिए कि हमारे शैक्षिक केंद्र बारिश के बाद मशरूम की तरह क्यों बढ़ रहे हैं, और शिक्षा का स्तर गिरना जारी है, क्यों संघीय चैनलों के माध्यम से - " सिरियस "और अन्य" कवेंटोरियम ", और प्रांतीय स्कूलों में सड़क पर शौचालय हैं, पतली छतें , और एक्सएनयूएमएक्स कंप्यूटर विज्ञान कार्यालय में एक कंप्यूटर है, और एक उत्साही शिक्षक द्वारा घर से लाया गया था। इसलिए, यह पता चला है कि गर्मियों में अगले लॉन्च की उम्मीद की जा सकती है? . . या फिर फिर समस्याएं होंगीः गर्मी, टिड्डियां और शुष्क हवाएं, जो रॉकेट और पूरे आधुनिक अंतरिक्ष उद्योग को रोकती हैं? . . ? अन्यथा, अब डीडीटी प्रदर्शनों की सूची "शरद ऋतु, आकाश में जहाजों का दोहन" का एक अतिरिक्त अर्थ है। |
ओला इलेक्ट्रिक ने अपना अब तक का सबसे सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर भारत में लॉन्च कर दिया है। इसे ओला S1 एयर नाम दिया गया है। इसका ओवरऑल डिजाइन कंपनी के पहले से मौजूद S1 और S1 प्रो जैसा ही है, लेकिन इसकी लोअर बॉडी में ब्लैक क्लैडिंग दी गई है। साथ ही इसमें स्टील व्हील्स मिलेंगे। इसकी शुरुआती कीमत केवल दिवाली तक ही मान्य रहेगी। आइये इसकी कीमत और इसके फीचर्स के बारे में जानते हैं।
ओला S1 एयर में क्या है खास?
देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता ओला का यह नया स्कूटर डिजाइन में पहले से मौजूद कंपनी के दो उत्पादों से ज्यादा अलग नहीं है। इसमें स्माइली-शेप्ड डुअल-पॉड हेडलाइट, इंडिकेटर-माउंटेड फ्रंट एप्रन, रबराइज्ड मैट के साथ फ्लैट फुटबॉर्ड, सिंगल-पीस ट्यूबलर ग्रैब रेल के साथ फ्लैट टाइप सीट और LED टेललैंप मिलेंगे। इसके निचले हिस्से में ब्लैक क्लैडिंग और 12 इंच के स्टील व्हील्स दिए गए हैं। साथ ही इसमें 7 इंच का TFT टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट कलस्टर दिया गया है।
ओला S1 एयर को 4. 5kW हब-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर से पावर मिलती है, जिसे 2. 5kW बैटरी पैक से जोड़ा गया है। कंपनी का दावा है कि यह 101 किलोमीटर की सिंगल चार्ज रेंज देती है और यह स्कूटर अधिकतम 85 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से रफ्तार भर सकता है। इस स्कूटर के 4. 3 सेकंड में 0-40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पकड़ने का भी दावा किया गया है। कंपनी ने इसमें 34 लीटर का बूटस्पेस दिया है।
राइडर सेफ्टी के लिए क्या इंतजाम?
राइडर सेफ्टी की बात करें तो ओला के इस नए स्कूटर में फ्रंट और रियर व्हील पर ड्रम ब्रेक और कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है। सस्पेंशन के लिए इसमें आगे की तरफ टेलीस्कोपिक फोर्क्स और रियर एंड पर डुअल शॉक एब्जॉर्बर की सुविधा दी गई है। स्कूटर में इको, रेगुलर और स्पोर्ट समेत तीन राइडिंग मोड मिलेंगे। स्पोर्ट मोड में यह स्कूटर 90 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ सकता है।
ओला S1 एयर की कीमत क्या है?
| ओला इलेक्ट्रिक ने अपना अब तक का सबसे सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर भारत में लॉन्च कर दिया है। इसे ओला Sएक एयर नाम दिया गया है। इसका ओवरऑल डिजाइन कंपनी के पहले से मौजूद Sएक और Sएक प्रो जैसा ही है, लेकिन इसकी लोअर बॉडी में ब्लैक क्लैडिंग दी गई है। साथ ही इसमें स्टील व्हील्स मिलेंगे। इसकी शुरुआती कीमत केवल दिवाली तक ही मान्य रहेगी। आइये इसकी कीमत और इसके फीचर्स के बारे में जानते हैं। ओला Sएक एयर में क्या है खास? देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता ओला का यह नया स्कूटर डिजाइन में पहले से मौजूद कंपनी के दो उत्पादों से ज्यादा अलग नहीं है। इसमें स्माइली-शेप्ड डुअल-पॉड हेडलाइट, इंडिकेटर-माउंटेड फ्रंट एप्रन, रबराइज्ड मैट के साथ फ्लैट फुटबॉर्ड, सिंगल-पीस ट्यूबलर ग्रैब रेल के साथ फ्लैट टाइप सीट और LED टेललैंप मिलेंगे। इसके निचले हिस्से में ब्लैक क्लैडिंग और बारह इंच के स्टील व्हील्स दिए गए हैं। साथ ही इसमें सात इंच का TFT टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट कलस्टर दिया गया है। ओला Sएक एयर को चार. पाँच किलोवाट हब-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर से पावर मिलती है, जिसे दो. पाँच किलोवाट बैटरी पैक से जोड़ा गया है। कंपनी का दावा है कि यह एक सौ एक किलोग्राममीटर की सिंगल चार्ज रेंज देती है और यह स्कूटर अधिकतम पचासी किलोग्राममीटर प्रति घंटे की स्पीड से रफ्तार भर सकता है। इस स्कूटर के चार. तीन सेकंड में शून्य-चालीस किलोग्राममीटर प्रति घंटे की स्पीड पकड़ने का भी दावा किया गया है। कंपनी ने इसमें चौंतीस लीटरटर का बूटस्पेस दिया है। राइडर सेफ्टी के लिए क्या इंतजाम? राइडर सेफ्टी की बात करें तो ओला के इस नए स्कूटर में फ्रंट और रियर व्हील पर ड्रम ब्रेक और कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है। सस्पेंशन के लिए इसमें आगे की तरफ टेलीस्कोपिक फोर्क्स और रियर एंड पर डुअल शॉक एब्जॉर्बर की सुविधा दी गई है। स्कूटर में इको, रेगुलर और स्पोर्ट समेत तीन राइडिंग मोड मिलेंगे। स्पोर्ट मोड में यह स्कूटर नब्बे किलोग्राममीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ सकता है। ओला Sएक एयर की कीमत क्या है? |
राजा ययाति के देवयानी से दो पुत्र यदु तथा तुवर्सु और शर्मिष्ठा से तीन पुत्र द्रुह्य, अनु तथा पुरु हुये। पुरु राजा ययाति के प्रिय पुत्र थे, आगे चल कर कुरु वन्श इसी की शाखा के रूप मे विश्व इतिहास का महान साम्राज्य बना। चन्द्रवंशी ययाति से पुरू हुए। पूरू के वंश में भरत और भरत के कुल में राजा कुरु हुए। पूरु कुल के पहले राजा।.
39 संबंधोंः चन्द्रवंशी, तोमर, दिलीप, दुष्यन्त, देवातिथि, परीक्षित १, पुरुजानु, प्रतीप, पौरव नगर, ब्रह्म पुराण, ब्रह्मिष्ठ, बृहत्क्षत्र, भुवमन्यु, भृम्यश्व, महाभारत, महाभारत भाग १, महाभारत की संक्षिप्त कथा, महाभौम, मित्रयु, मुद्गल, मैत्रेय, सार्वभौम, संवरण, सुशान्ति, सुहोत्र, सुखदेव(राजा), सृञ्जय, सोमक, हस्तिन्, जयत्सेन, वध्र्यश्व, वितथ, अभिमन्यु (अर्जुनपुत्र), अराधिन, अजमीढ, अक्रोधन, उर्वशी, ऋक्ष, ऋक्ष २।
चंद्रवंश एक प्रमुख प्राचीन भारतीय क्षत्रियकुल। आनुश्रुतिक साहित्य से ज्ञात होता है। कि आर्यों के प्रथम शासक (राजा) वैवस्वत मनु हुए। उनके नौ पुत्रों से सूर्यवंशी क्षत्रियों का प्रारंभ हुआ। मनु की एक कन्या भी थी - इला। उसका विवाह बुध से हुआ जो चंद्रमा का पुत्र था। उनसे पुरुरवस् की उत्पत्ति हुई, जो ऐल कहलाया और चंद्रवंशियों का प्रथम शासक हुआ। उसकी राजधानी प्रतिष्ठान थी, जहाँ आज प्रयाग के निकट झूँसी बसी है। पुरुरवा के छः पुत्रों में आयु और अमावसु अत्यंत प्रसिद्ध हुए। आयु प्रतिष्ठान का शासक हुआ और अमावसु ने कान्यकुब्ज में एक नए राजवंश की स्थापना की। कान्यकुब्ज के राजाओं में जह्वु प्रसिद्ध हुए जिनके नाम पर गंगा का नाम जाह्नवी पड़ा। आगे चलकर विश्वरथ अथवा विश्वामित्र भी प्रसिद्ध हुए, जो पौरोहित्य प्रतियोगिता में कोसल के पुरोहित वसिष्ठ के संघर्ष में आए।ततपश्चात वे तपस्वी हो गए तथा उन्होंने ब्रह्मर्षि की उपाधि प्राप्त की। आयु के बाद उसका जेठा पुत्र नहुष प्रतिष्ठान का शासक हुआ। उसके छोटे भाई क्षत्रवृद्ध ने काशी में एक राज्य की स्थापना की। नहुष के छह पुत्रों में यति और ययाति सर्वमुख्य हुए। यति संन्यासी हो गया और ययाति को राजगद्दी मिली। ययाति शक्तिशाली और विजेता सम्राट् हुआ तथा अनेक आनुश्रुतिक कथाओं का नायक भी। उसके पाँच पुत्र हुए - यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु, अनु और पुरु। इन पाँचों ने अपने अपने वंश चलाए और उनके वंशजों ने दूर दूर तक विजय कीं। आगे चलकर ये ही वंश यादव, तुर्वसु, द्रुह्यु, आनव और पौरव कहलाए। ऋग्वेद में इन्हीं को पंचकृष्टयः कहा गया है। यादवों की एक शाखा हैहय नाम से प्रसिद्ध हुई और दक्षिणापथ में नर्मदा के किनारे जा बसी। माहिष्मती हैहयों की राजधानी थी और कार्तवीर्य अर्जुन उनका सर्वशक्तिमान् और विजेता राजा हुआ। तुर्वसुके वंशजों ने पहले तो दक्षिण पूर्व के प्रदेशों को अधीनस्थ किया, परंतु बाद में वे पश्चिमोत्तर चले गए। द्रुह्युओं ने सिंध के किनारों पर कब्जा कर लिया और उनके राजा गांधार के नाम पर प्रदेश का नाम गांधार पड़ा। आनवों की एक शाखा पूर्वी पंजाब और दूसरी पूर्वी बिहार में बसी। पंजाब के आनव कुल में उशीनर और शिवि नामक प्रसिद्ध राजा हुए। पौरवों ने मध्यदेश में अनेक राज्य स्थापित किए और गंगा-यमुना-दोआब पर शासन करनेवाला दुष्यंत नामक राजा उनमें मुख्य हुआ। शकुंतला से उसे भरत नामक मेधावी पुत्र उत्पन्न हुआ। उसने दिग्विजय द्वारा एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की और संभवतः देश को भारतवर्ष नाम दिया। चंद्रवंशियों की मूल राजधानी प्रतिष्ठान में, ययाति ने अपने छोटे लड़के पुरु को उसके व्यवहार से प्रसन्न होकर - कहा जाता है कि उसने अपने पिता की आज्ञा से उसके सुखोपभोग के लिये अपनी युवावस्था दे दी और उसका बुढ़ापा ले लिया - राज्य दे दिया। फिर अयोध्या के ऐक्ष्वाकुओं के दबाव के कारण प्रतिष्ठान के चंद्रवंशियों ने अपना राज्य खो दिया। परंतु रामचंद्र के युग के बाद पुनः उनके उत्कर्ष की बारी आई और एक बार फिर यादवों और पौरवों ने अपने पुराने गौरव के अनुरूप आगे बढ़ना शुरू कर दिया। मथुरा से द्वारका तक यदुकुल फैल गए और अंधक, वृष्णि, कुकुर और भोज उनमें मुख्य हुए। कृष्ण उनके सर्वप्रमुख प्रतिनिधि थे। बरार और उसके दक्षिण में भी उनकी शाखाएँ फैल गई। पांचाल में पौरवों का राजा सुदास अत्यंत प्रसिद्ध हुआ। उसकी बढ़ती हुई शक्ति से सशंक होकर पश्चिमोत्तर भारत के दस राजाओं ने एक संघ बनाया और परुष्णी (रावी) के किनारे उनका सुदास से युद्ध हुआ, जिसे दाशराज्ञ युद्ध कहते हैं और जो ऋग्वेद की प्रमुख कथाओं में एक का विषय है। किंतु विजय सुदास की ही हुई। थोड़े ही दिनों बाद पौरव वंश के ही राजा संवरण और उसके पुत्र कुरु का युग आया। कुरु के ही नाम से कुरु वंश प्रसिद्ध हुआ, उस के वंशज कौरव कहलाए और आगे चलकर दिल्ली के पास इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर उनके दो प्रसिद्ध नगर हुए। कौरवों और पांडवों का विख्यात महाभारत युद्ध भारतीय इतिहास की विनाशकारी घटना सिद्ध हुआ। सारे भारतवर्ष के राजाओं ने उसमें भाग लिया। पांडवों की विजय तो हुई, परंतु वह निःसार विजय थी। उस युद्ध का समय प्रायः 1400 ई.पू.
एक भारतीय उपनाम। तोमर राजवंश - चंद्रवंशी पुरुवंशी कुरुवंशी । .
पूरु कुल के राजा।.
दुष्यन्त पुरु कुल के राजा। कालिदास के नाटक के पात्र।.
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
पौरव नगर या पौरव राष्ट्र झेलम नदी के तट के पास बसा हुआ नगर है। राजा पुरु ने यह नगर बसाया था। राजा पौराव,उनके बेटे राजा बमनी और उनके बेटे राजा पुरुषोतम (पोरस या पुरू) ने पौरव नगर पर बहुत साल राज किया था।.
ब्रह्म पुराण हिंदू धर्म के 18 पुराणों में से एक प्रमुख पुराण है। इसे पुराणों में महापुराण भी कहा जाता है। पुराणों की दी गयी सूची में इस पुराण को प्रथम स्थान पर रखा जाता है। कुछ लोग इसे पहला पुराण भी मानते हैं। इसमें विस्तार से सृष्टि जन्म, जल की उत्पत्ति, ब्रह्म का आविर्भाव तथा देव-दानव जन्मों के विषय में बताया गया है। इसमें सूर्य और चन्द्र वंशों के विषय में भी वर्णन किया गया है। इसमें ययाति या पुरु के वंश-वर्णन से मानव-विकास के विषय में बताकर राम-कृष्ण-कथा भी वर्णित है। इसमें राम और कृष्ण के कथा के माध्यम से अवतार के सम्बन्ध में वर्णन करते हुए अवतारवाद की प्रतिष्ठा की गई है। इस पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति, पृथु का पावन चरित्र, सूर्य एवं चन्द्रवंश का वर्णन, श्रीकृष्ण-चरित्र, कल्पान्तजीवी मार्कण्डेय मुनि का चरित्र, तीर्थों का माहात्म्य एवं अनेक भक्तिपरक आख्यानों की सुन्दर चर्चा की गयी है। भगवान् श्रीकृष्ण की ब्रह्मरूप में विस्तृत व्याख्या होने के कारण यह ब्रह्मपुराण के नाम से प्रसिद्ध है। इस पुराण में साकार ब्रह्म की उपासना का विधान है। इसमें 'ब्रह्म' को सर्वोपरि माना गया है। इसीलिए इस पुराण को प्रथम स्थान दिया गया है। पुराणों की परम्परा के अनुसार 'ब्रह्म पुराण' में सृष्टि के समस्त लोकों और भारतवर्ष का भी वर्णन किया गया है। कलियुग का वर्णन भी इस पुराण में विस्तार से उपलब्ध है। ब्रह्म के आदि होने के कारण इस पुराण को 'आदिपुरण' भी कहा जाता है। व्यास मुनि ने इसे सर्वप्रथम लिखा है। इसमें दस सहस्र श्लोक हैं। प्राचीन पवित्र भूमि नैमिष अरण्य में व्यास शिष्य सूत मुनि ने यह पुराण समाहित ऋषि वृन्द में सुनाया था। इसमें सृष्टि, मनुवंश, देव देवता, प्राणि, पुथ्वी, भूगोल, नरक, स्वर्ग, मंदिर, तीर्थ आदि का निरूपण है। शिव-पार्वती विवाह, कृष्ण लीला, विष्णु अवतार, विष्णु पूजन, वर्णाश्रम, श्राद्धकर्म, आदि का विचार है। .
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति वर्ग में आता है। कभी कभी केवल "भारत" कहा जाने वाला यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है। इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है। यद्यपि इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों में से एक माना जाता है, किन्तु आज भी यह ग्रंथ प्रत्येक भारतीय के लिये एक अनुकरणीय स्रोत है। यह कृति प्राचीन भारत के इतिहास की एक गाथा है। इसी में हिन्दू धर्म का पवित्रतम ग्रंथ भगवद्गीता सन्निहित है। पूरे महाभारत में लगभग १,१०,००० श्लोक हैं, जो यूनानी काव्यों इलियड और ओडिसी से परिमाण में दस गुणा अधिक हैं। हिन्दू मान्यताओं, पौराणिक संदर्भो एवं स्वयं महाभारत के अनुसार इस काव्य का रचनाकार वेदव्यास जी को माना जाता है। इस काव्य के रचयिता वेदव्यास जी ने अपने इस अनुपम काव्य में वेदों, वेदांगों और उपनिषदों के गुह्यतम रहस्यों का निरुपण किया हैं। इसके अतिरिक्त इस काव्य में न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्र का भी विस्तार से वर्णन किया गया हैं। .
कोई विवरण नहीं।
महाभारत प्राचीन भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य है। ये एक धार्मिक ग्रन्थ भी है। इसमें उस समय का इतिहास लगभग १,११,००० श्लोकों में लिखा हुआ है। इस की पूर्ण कथा का संक्षेप इस प्रकार से है। .
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा। .
पूरु कुल के राजा।.
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इसी नाम से प्रसिद्ध एक भारतीय क्रांतिकारी के बारे में जानने के लिए यहां जाँय - सुखदेव महाभारत के पश्चात के कुरु वंश के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
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अभिमन्यु (अर्जुनपुत्र)
अभिमन्यु चक्रव्यूह में। हिंदुओं की पौराणिक कथा महाभारत के एक महत्त्वपूर्ण पात्र अभिमन्यु पूरु कुल के राजा व पंच पांडवों में से अर्जुन के पुत्र थे। कथा में उनका छल द्वारा कारुणिक अंत बताया गया है। अभिमन्यु महाभारत के नायक अर्जुन और सुभद्रा, जो बलराम व कृष्ण की बहन थीं, के पुत्र थे। उन्हें चंद्र देवता का पुत्र भी माना जाता है। धारणा है कि समस्त देवताओ ने अपने पुत्रों को अवतार रूप में धरती पर भेजा था परंतु चंद्रदेव ने कहा कि वे अपने पुत्र का वियोग सहन नही कर सकते अतः उनके पुत्र को मानव योनि में मात्र सोलह वर्ष की आयु दी जाए। अभिमन्यु का बाल्यकाल अपनी ननिहाल द्वारका में ही बीता। उनका विवाह महाराज विराट की पुत्री उत्तरा से हुआ। अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित, जिसका जन्म अभिमन्यु के मृत्योपरांत हुआ, कुरुवंश के एकमात्र जीवित सदस्य पुरुष थे जिन्होंने युद्ध की समाप्ति के पश्चात पांडव वंश को आगे बढ़ाया। अभिमन्यु एक असाधारण योद्धा थे। उन्होंने कौरव पक्ष की व्यूह रचना, जिसे चक्रव्यूह कहा जाता था, के सात में से छह द्वार भेद दिए थे। कथानुसार अभिमन्यु ने अपनी माता की कोख में रहते ही अर्जुन के मुख से चक्रव्यूह भेदन का रहस्य जान लिया था। पर सुभद्रा के बीच में ही निद्रामग्न होने से वे व्यूह से बाहर आने की विधि नहीं सुन पाये थे। अभिमन्यु की म्रृत्यु का कारण जयद्रथ था जिसने अन्य पांडवों को व्यूह में प्रवेश करने से रोक दिया था। संभवतः इसी का लाभ उठा कर व्यूह के अंतिम चरण में कौरव पक्ष के सभी महारथी युद्ध के मानदंडों को भुलाकर उस बालक पर टूट पड़े, जिस कारण उसने वीरगति प्राप्त की। अभिमन्यु की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिये अर्जुन ने जयद्रथ के वध की शपथ ली थी। .
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा। इनके नाम से आगे चल कर मीढव वंश हुआ जो बाद में राजा कुरु के कुरु वंश नाम से विख्यात हुआ.
पूरु कुल के राजा।.
उर्वशी और पुरुरवा। साहित्य और पुराण में उर्वशी सौंदर्य की प्रतिमूर्ति रही है। स्वर्ग की इस अप्सरा की उत्पत्ति नारायण की जंघा से मानी जाती है। पद्मपुराण के अनुसार इनका जन्म कामदेव के उरु से हुआ था। श्रीमद्भागवत के अनुसार यह स्वर्ग की सर्वसुंदर अप्सरा थी। एक बार इंद्र की राजसभा में नाचते समय वह राजा पुरु के प्रति क्षण भर के लिए आकृष्ट हो गई। इस कारण उनके नृत्य का ताल बिगड़ गया। इस अपराध के कारण राजा इंद्र ने रुष्ट होकर उसे मर्त्यलोक में रहने का अभिशाप दे दिया। मर्त्य लोक में उसने पुरु को अपना पति चुना किंतु शर्त यह रखी कि वह पुरु को नग्न अवस्था में देख ले या पुरुरवा उसकी इच्क्षा के प्रतिकूल समागम करे अथवा उसके दो मेष स्थानांतरित कर दिए जाएं तो वह उनसे संबंध विच्छेद कर स्वर्ग जाने के लिए स्वतंत्र हो जाएगी। ऊर्वशी और पुरुरवा बहुत समय तक पति पत्नी के रूप में सात-साथ रहे। इनके नौ पुत्र आयु, अमावसु, श्रुतायु, दृढ़ायु, विश्वायु, शतायु आदि उत्पन्न हुए। दीर्घ अवधि बीतने पर गंधर्वों को ऊर्वशी की अनुपस्थिति अप्रीय प्रतीत होने लगी। गंधर्वों ने विश्वावसु को उसके मेष चुराने के लिए भेजा। उस समय पुरुरवा नग्नावस्था में थे। आहट पाकर वे उसी अवस्था में विश्वाबसु को पकड़ने दौड़े। अवसर का लाभ उठाकर गंधर्वों ने उसी समय प्रकाश कर दिया। जिससे उर्वशी ने पुरुरवा को नंगा देख लिया। आरोपित प्रतिबंधों के टूट जाने पर ऊर्वशी श्राप से मुक्त हो गई और पुरुरवा को छोड़कर स्वर्ग लोक चली गई। महाकवि कालीदास के संस्कृत महाकाव्य विक्रमोर्वशीय नाटक की कथा का आधार यही प्रसंग है। आधुनिक हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह दिनकर ने इसी कथा को अपने काव्यकृति का आधार बनाया और उसका शीर्षक भी रखा ऊर्वशी। महाभारत की एक कथा के अनुसार एक बार जब अर्जुन इंद्र के पास अस्त्र विद्या की शिक्षा लेने गए तो उर्वशी उन्हें देखकर मुग्ध हो गई। अर्जुन ने ऊर्वशी को मातृवत देखा। अतः उसकी इच्छा पूर्ति न करने के कारण। इन्हें शापित होकर एक वर्ष तक पुंसत्व से वंचित रहना पड़ा। .
पूरु कुल के राजा।.
पूरु कुल के राजा।.
| राजा ययाति के देवयानी से दो पुत्र यदु तथा तुवर्सु और शर्मिष्ठा से तीन पुत्र द्रुह्य, अनु तथा पुरु हुये। पुरु राजा ययाति के प्रिय पुत्र थे, आगे चल कर कुरु वन्श इसी की शाखा के रूप मे विश्व इतिहास का महान साम्राज्य बना। चन्द्रवंशी ययाति से पुरू हुए। पूरू के वंश में भरत और भरत के कुल में राजा कुरु हुए। पूरु कुल के पहले राजा।. उनतालीस संबंधोंः चन्द्रवंशी, तोमर, दिलीप, दुष्यन्त, देवातिथि, परीक्षित एक, पुरुजानु, प्रतीप, पौरव नगर, ब्रह्म पुराण, ब्रह्मिष्ठ, बृहत्क्षत्र, भुवमन्यु, भृम्यश्व, महाभारत, महाभारत भाग एक, महाभारत की संक्षिप्त कथा, महाभौम, मित्रयु, मुद्गल, मैत्रेय, सार्वभौम, संवरण, सुशान्ति, सुहोत्र, सुखदेव, सृञ्जय, सोमक, हस्तिन्, जयत्सेन, वध्र्यश्व, वितथ, अभिमन्यु , अराधिन, अजमीढ, अक्रोधन, उर्वशी, ऋक्ष, ऋक्ष दो। चंद्रवंश एक प्रमुख प्राचीन भारतीय क्षत्रियकुल। आनुश्रुतिक साहित्य से ज्ञात होता है। कि आर्यों के प्रथम शासक वैवस्वत मनु हुए। उनके नौ पुत्रों से सूर्यवंशी क्षत्रियों का प्रारंभ हुआ। मनु की एक कन्या भी थी - इला। उसका विवाह बुध से हुआ जो चंद्रमा का पुत्र था। उनसे पुरुरवस् की उत्पत्ति हुई, जो ऐल कहलाया और चंद्रवंशियों का प्रथम शासक हुआ। उसकी राजधानी प्रतिष्ठान थी, जहाँ आज प्रयाग के निकट झूँसी बसी है। पुरुरवा के छः पुत्रों में आयु और अमावसु अत्यंत प्रसिद्ध हुए। आयु प्रतिष्ठान का शासक हुआ और अमावसु ने कान्यकुब्ज में एक नए राजवंश की स्थापना की। कान्यकुब्ज के राजाओं में जह्वु प्रसिद्ध हुए जिनके नाम पर गंगा का नाम जाह्नवी पड़ा। आगे चलकर विश्वरथ अथवा विश्वामित्र भी प्रसिद्ध हुए, जो पौरोहित्य प्रतियोगिता में कोसल के पुरोहित वसिष्ठ के संघर्ष में आए।ततपश्चात वे तपस्वी हो गए तथा उन्होंने ब्रह्मर्षि की उपाधि प्राप्त की। आयु के बाद उसका जेठा पुत्र नहुष प्रतिष्ठान का शासक हुआ। उसके छोटे भाई क्षत्रवृद्ध ने काशी में एक राज्य की स्थापना की। नहुष के छह पुत्रों में यति और ययाति सर्वमुख्य हुए। यति संन्यासी हो गया और ययाति को राजगद्दी मिली। ययाति शक्तिशाली और विजेता सम्राट् हुआ तथा अनेक आनुश्रुतिक कथाओं का नायक भी। उसके पाँच पुत्र हुए - यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु, अनु और पुरु। इन पाँचों ने अपने अपने वंश चलाए और उनके वंशजों ने दूर दूर तक विजय कीं। आगे चलकर ये ही वंश यादव, तुर्वसु, द्रुह्यु, आनव और पौरव कहलाए। ऋग्वेद में इन्हीं को पंचकृष्टयः कहा गया है। यादवों की एक शाखा हैहय नाम से प्रसिद्ध हुई और दक्षिणापथ में नर्मदा के किनारे जा बसी। माहिष्मती हैहयों की राजधानी थी और कार्तवीर्य अर्जुन उनका सर्वशक्तिमान् और विजेता राजा हुआ। तुर्वसुके वंशजों ने पहले तो दक्षिण पूर्व के प्रदेशों को अधीनस्थ किया, परंतु बाद में वे पश्चिमोत्तर चले गए। द्रुह्युओं ने सिंध के किनारों पर कब्जा कर लिया और उनके राजा गांधार के नाम पर प्रदेश का नाम गांधार पड़ा। आनवों की एक शाखा पूर्वी पंजाब और दूसरी पूर्वी बिहार में बसी। पंजाब के आनव कुल में उशीनर और शिवि नामक प्रसिद्ध राजा हुए। पौरवों ने मध्यदेश में अनेक राज्य स्थापित किए और गंगा-यमुना-दोआब पर शासन करनेवाला दुष्यंत नामक राजा उनमें मुख्य हुआ। शकुंतला से उसे भरत नामक मेधावी पुत्र उत्पन्न हुआ। उसने दिग्विजय द्वारा एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की और संभवतः देश को भारतवर्ष नाम दिया। चंद्रवंशियों की मूल राजधानी प्रतिष्ठान में, ययाति ने अपने छोटे लड़के पुरु को उसके व्यवहार से प्रसन्न होकर - कहा जाता है कि उसने अपने पिता की आज्ञा से उसके सुखोपभोग के लिये अपनी युवावस्था दे दी और उसका बुढ़ापा ले लिया - राज्य दे दिया। फिर अयोध्या के ऐक्ष्वाकुओं के दबाव के कारण प्रतिष्ठान के चंद्रवंशियों ने अपना राज्य खो दिया। परंतु रामचंद्र के युग के बाद पुनः उनके उत्कर्ष की बारी आई और एक बार फिर यादवों और पौरवों ने अपने पुराने गौरव के अनुरूप आगे बढ़ना शुरू कर दिया। मथुरा से द्वारका तक यदुकुल फैल गए और अंधक, वृष्णि, कुकुर और भोज उनमें मुख्य हुए। कृष्ण उनके सर्वप्रमुख प्रतिनिधि थे। बरार और उसके दक्षिण में भी उनकी शाखाएँ फैल गई। पांचाल में पौरवों का राजा सुदास अत्यंत प्रसिद्ध हुआ। उसकी बढ़ती हुई शक्ति से सशंक होकर पश्चिमोत्तर भारत के दस राजाओं ने एक संघ बनाया और परुष्णी के किनारे उनका सुदास से युद्ध हुआ, जिसे दाशराज्ञ युद्ध कहते हैं और जो ऋग्वेद की प्रमुख कथाओं में एक का विषय है। किंतु विजय सुदास की ही हुई। थोड़े ही दिनों बाद पौरव वंश के ही राजा संवरण और उसके पुत्र कुरु का युग आया। कुरु के ही नाम से कुरु वंश प्रसिद्ध हुआ, उस के वंशज कौरव कहलाए और आगे चलकर दिल्ली के पास इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर उनके दो प्रसिद्ध नगर हुए। कौरवों और पांडवों का विख्यात महाभारत युद्ध भारतीय इतिहास की विनाशकारी घटना सिद्ध हुआ। सारे भारतवर्ष के राजाओं ने उसमें भाग लिया। पांडवों की विजय तो हुई, परंतु वह निःसार विजय थी। उस युद्ध का समय प्रायः एक हज़ार चार सौ ई.पू. एक भारतीय उपनाम। तोमर राजवंश - चंद्रवंशी पुरुवंशी कुरुवंशी । . पूरु कुल के राजा।. दुष्यन्त पुरु कुल के राजा। कालिदास के नाटक के पात्र।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पौरव नगर या पौरव राष्ट्र झेलम नदी के तट के पास बसा हुआ नगर है। राजा पुरु ने यह नगर बसाया था। राजा पौराव,उनके बेटे राजा बमनी और उनके बेटे राजा पुरुषोतम ने पौरव नगर पर बहुत साल राज किया था।. ब्रह्म पुराण हिंदू धर्म के अट्ठारह पुराणों में से एक प्रमुख पुराण है। इसे पुराणों में महापुराण भी कहा जाता है। पुराणों की दी गयी सूची में इस पुराण को प्रथम स्थान पर रखा जाता है। कुछ लोग इसे पहला पुराण भी मानते हैं। इसमें विस्तार से सृष्टि जन्म, जल की उत्पत्ति, ब्रह्म का आविर्भाव तथा देव-दानव जन्मों के विषय में बताया गया है। इसमें सूर्य और चन्द्र वंशों के विषय में भी वर्णन किया गया है। इसमें ययाति या पुरु के वंश-वर्णन से मानव-विकास के विषय में बताकर राम-कृष्ण-कथा भी वर्णित है। इसमें राम और कृष्ण के कथा के माध्यम से अवतार के सम्बन्ध में वर्णन करते हुए अवतारवाद की प्रतिष्ठा की गई है। इस पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति, पृथु का पावन चरित्र, सूर्य एवं चन्द्रवंश का वर्णन, श्रीकृष्ण-चरित्र, कल्पान्तजीवी मार्कण्डेय मुनि का चरित्र, तीर्थों का माहात्म्य एवं अनेक भक्तिपरक आख्यानों की सुन्दर चर्चा की गयी है। भगवान् श्रीकृष्ण की ब्रह्मरूप में विस्तृत व्याख्या होने के कारण यह ब्रह्मपुराण के नाम से प्रसिद्ध है। इस पुराण में साकार ब्रह्म की उपासना का विधान है। इसमें 'ब्रह्म' को सर्वोपरि माना गया है। इसीलिए इस पुराण को प्रथम स्थान दिया गया है। पुराणों की परम्परा के अनुसार 'ब्रह्म पुराण' में सृष्टि के समस्त लोकों और भारतवर्ष का भी वर्णन किया गया है। कलियुग का वर्णन भी इस पुराण में विस्तार से उपलब्ध है। ब्रह्म के आदि होने के कारण इस पुराण को 'आदिपुरण' भी कहा जाता है। व्यास मुनि ने इसे सर्वप्रथम लिखा है। इसमें दस सहस्र श्लोक हैं। प्राचीन पवित्र भूमि नैमिष अरण्य में व्यास शिष्य सूत मुनि ने यह पुराण समाहित ऋषि वृन्द में सुनाया था। इसमें सृष्टि, मनुवंश, देव देवता, प्राणि, पुथ्वी, भूगोल, नरक, स्वर्ग, मंदिर, तीर्थ आदि का निरूपण है। शिव-पार्वती विवाह, कृष्ण लीला, विष्णु अवतार, विष्णु पूजन, वर्णाश्रम, श्राद्धकर्म, आदि का विचार है। . पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति वर्ग में आता है। कभी कभी केवल "भारत" कहा जाने वाला यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है। इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है। यद्यपि इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों में से एक माना जाता है, किन्तु आज भी यह ग्रंथ प्रत्येक भारतीय के लिये एक अनुकरणीय स्रोत है। यह कृति प्राचीन भारत के इतिहास की एक गाथा है। इसी में हिन्दू धर्म का पवित्रतम ग्रंथ भगवद्गीता सन्निहित है। पूरे महाभारत में लगभग एक,दस,शून्य श्लोक हैं, जो यूनानी काव्यों इलियड और ओडिसी से परिमाण में दस गुणा अधिक हैं। हिन्दू मान्यताओं, पौराणिक संदर्भो एवं स्वयं महाभारत के अनुसार इस काव्य का रचनाकार वेदव्यास जी को माना जाता है। इस काव्य के रचयिता वेदव्यास जी ने अपने इस अनुपम काव्य में वेदों, वेदांगों और उपनिषदों के गुह्यतम रहस्यों का निरुपण किया हैं। इसके अतिरिक्त इस काव्य में न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्र का भी विस्तार से वर्णन किया गया हैं। . कोई विवरण नहीं। महाभारत प्राचीन भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य है। ये एक धार्मिक ग्रन्थ भी है। इसमें उस समय का इतिहास लगभग एक,ग्यारह,शून्य श्लोकों में लिखा हुआ है। इस की पूर्ण कथा का संक्षेप इस प्रकार से है। . पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा। . पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. इसी नाम से प्रसिद्ध एक भारतीय क्रांतिकारी के बारे में जानने के लिए यहां जाँय - सुखदेव महाभारत के पश्चात के कुरु वंश के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. अभिमन्यु अभिमन्यु चक्रव्यूह में। हिंदुओं की पौराणिक कथा महाभारत के एक महत्त्वपूर्ण पात्र अभिमन्यु पूरु कुल के राजा व पंच पांडवों में से अर्जुन के पुत्र थे। कथा में उनका छल द्वारा कारुणिक अंत बताया गया है। अभिमन्यु महाभारत के नायक अर्जुन और सुभद्रा, जो बलराम व कृष्ण की बहन थीं, के पुत्र थे। उन्हें चंद्र देवता का पुत्र भी माना जाता है। धारणा है कि समस्त देवताओ ने अपने पुत्रों को अवतार रूप में धरती पर भेजा था परंतु चंद्रदेव ने कहा कि वे अपने पुत्र का वियोग सहन नही कर सकते अतः उनके पुत्र को मानव योनि में मात्र सोलह वर्ष की आयु दी जाए। अभिमन्यु का बाल्यकाल अपनी ननिहाल द्वारका में ही बीता। उनका विवाह महाराज विराट की पुत्री उत्तरा से हुआ। अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित, जिसका जन्म अभिमन्यु के मृत्योपरांत हुआ, कुरुवंश के एकमात्र जीवित सदस्य पुरुष थे जिन्होंने युद्ध की समाप्ति के पश्चात पांडव वंश को आगे बढ़ाया। अभिमन्यु एक असाधारण योद्धा थे। उन्होंने कौरव पक्ष की व्यूह रचना, जिसे चक्रव्यूह कहा जाता था, के सात में से छह द्वार भेद दिए थे। कथानुसार अभिमन्यु ने अपनी माता की कोख में रहते ही अर्जुन के मुख से चक्रव्यूह भेदन का रहस्य जान लिया था। पर सुभद्रा के बीच में ही निद्रामग्न होने से वे व्यूह से बाहर आने की विधि नहीं सुन पाये थे। अभिमन्यु की म्रृत्यु का कारण जयद्रथ था जिसने अन्य पांडवों को व्यूह में प्रवेश करने से रोक दिया था। संभवतः इसी का लाभ उठा कर व्यूह के अंतिम चरण में कौरव पक्ष के सभी महारथी युद्ध के मानदंडों को भुलाकर उस बालक पर टूट पड़े, जिस कारण उसने वीरगति प्राप्त की। अभिमन्यु की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिये अर्जुन ने जयद्रथ के वध की शपथ ली थी। . पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा। इनके नाम से आगे चल कर मीढव वंश हुआ जो बाद में राजा कुरु के कुरु वंश नाम से विख्यात हुआ. पूरु कुल के राजा।. उर्वशी और पुरुरवा। साहित्य और पुराण में उर्वशी सौंदर्य की प्रतिमूर्ति रही है। स्वर्ग की इस अप्सरा की उत्पत्ति नारायण की जंघा से मानी जाती है। पद्मपुराण के अनुसार इनका जन्म कामदेव के उरु से हुआ था। श्रीमद्भागवत के अनुसार यह स्वर्ग की सर्वसुंदर अप्सरा थी। एक बार इंद्र की राजसभा में नाचते समय वह राजा पुरु के प्रति क्षण भर के लिए आकृष्ट हो गई। इस कारण उनके नृत्य का ताल बिगड़ गया। इस अपराध के कारण राजा इंद्र ने रुष्ट होकर उसे मर्त्यलोक में रहने का अभिशाप दे दिया। मर्त्य लोक में उसने पुरु को अपना पति चुना किंतु शर्त यह रखी कि वह पुरु को नग्न अवस्था में देख ले या पुरुरवा उसकी इच्क्षा के प्रतिकूल समागम करे अथवा उसके दो मेष स्थानांतरित कर दिए जाएं तो वह उनसे संबंध विच्छेद कर स्वर्ग जाने के लिए स्वतंत्र हो जाएगी। ऊर्वशी और पुरुरवा बहुत समय तक पति पत्नी के रूप में सात-साथ रहे। इनके नौ पुत्र आयु, अमावसु, श्रुतायु, दृढ़ायु, विश्वायु, शतायु आदि उत्पन्न हुए। दीर्घ अवधि बीतने पर गंधर्वों को ऊर्वशी की अनुपस्थिति अप्रीय प्रतीत होने लगी। गंधर्वों ने विश्वावसु को उसके मेष चुराने के लिए भेजा। उस समय पुरुरवा नग्नावस्था में थे। आहट पाकर वे उसी अवस्था में विश्वाबसु को पकड़ने दौड़े। अवसर का लाभ उठाकर गंधर्वों ने उसी समय प्रकाश कर दिया। जिससे उर्वशी ने पुरुरवा को नंगा देख लिया। आरोपित प्रतिबंधों के टूट जाने पर ऊर्वशी श्राप से मुक्त हो गई और पुरुरवा को छोड़कर स्वर्ग लोक चली गई। महाकवि कालीदास के संस्कृत महाकाव्य विक्रमोर्वशीय नाटक की कथा का आधार यही प्रसंग है। आधुनिक हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह दिनकर ने इसी कथा को अपने काव्यकृति का आधार बनाया और उसका शीर्षक भी रखा ऊर्वशी। महाभारत की एक कथा के अनुसार एक बार जब अर्जुन इंद्र के पास अस्त्र विद्या की शिक्षा लेने गए तो उर्वशी उन्हें देखकर मुग्ध हो गई। अर्जुन ने ऊर्वशी को मातृवत देखा। अतः उसकी इच्छा पूर्ति न करने के कारण। इन्हें शापित होकर एक वर्ष तक पुंसत्व से वंचित रहना पड़ा। . पूरु कुल के राजा।. पूरु कुल के राजा।. |
Mouni Roy Honeymoon Video: मौनी रॉय ने हाल ही में फैंस के साथ हनीमून से जुड़ा एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह बर्फ में मस्ती करती नजर आ रही हैं। लेकिन फोटोशूट के दौरान एक्ट्रेस उसी बर्फ में गिर भी पड़ीं।
Mouni Roy Honeymoon Video: बॉलीवुड और टीवी की मशहूर एक्ट्रेस मौनी रॉय इन दिनों अपनी शादी-शुदा जिंदगी को लेकर सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। एक्ट्रेस इन दिनों पति सूरज नंबियार के साथ कश्मीर में हनीमून मना रही हैं, लेकिन खास बात तो यह है कि इस बीच वह सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़ने का भी एक मौका नहीं छोड़तीं। मौनी रॉय ने हाल ही में फैंस के साथ हनीमून से जुड़ा एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह बर्फ में मस्ती करती नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस वीडियो में फोटोशूट कराती दिखाई दीं, लेकिन इसी बीच वह बर्फ में धड़ाम से गिर पड़ीं।
मौनी रॉय का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। चंद घंटों पहले साझा किये गए इस वीडियो को अभी तक 2.5 लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो में एक्ट्रेस बर्फ में घुटनों के बल चलती दिखाई दीं। आसपास के नजारों को कैमरे में कैद करते हुए, होटल के नजारों को एंजॉय करती हुई नजर आईं।
मौनी रॉय के साथ वीडियो में उनके पति सूरज नंबियार भी नजर आए। बता दें कि एक्ट्रेस ने इसके अलावा अपनी कुछ तस्वीरें भी साझा की थीं, जिसमें वह बर्फ के बीच सेल्फी लेती नजर आईं। बता दें कि मौनी रॉय और सूरज नंबियार बीते 27 जनवरी को शादी के बंधन में बंधी थीं। दोनों ने दक्षिण भारतीय और बंगाली रीति-रिवाजों से शादी की थी।
मौनी रॉय और सूरज नंबियार की पहली मुलाकात दुबई में हुई थी। वहीं से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई थी और वे एक-दूसरे को दिल भी दे बैठे थे। इससे इतर मौनी रॉय के करियर की शुरुआत करें तो वह जल्द ही फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में अहम भूमिका अदा करती आएंगी। फिल्म में उनके साथ रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और अमिताभ बच्चन भी मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे।
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| Mouni Roy Honeymoon Video: मौनी रॉय ने हाल ही में फैंस के साथ हनीमून से जुड़ा एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह बर्फ में मस्ती करती नजर आ रही हैं। लेकिन फोटोशूट के दौरान एक्ट्रेस उसी बर्फ में गिर भी पड़ीं। Mouni Roy Honeymoon Video: बॉलीवुड और टीवी की मशहूर एक्ट्रेस मौनी रॉय इन दिनों अपनी शादी-शुदा जिंदगी को लेकर सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। एक्ट्रेस इन दिनों पति सूरज नंबियार के साथ कश्मीर में हनीमून मना रही हैं, लेकिन खास बात तो यह है कि इस बीच वह सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़ने का भी एक मौका नहीं छोड़तीं। मौनी रॉय ने हाल ही में फैंस के साथ हनीमून से जुड़ा एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह बर्फ में मस्ती करती नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस वीडियो में फोटोशूट कराती दिखाई दीं, लेकिन इसी बीच वह बर्फ में धड़ाम से गिर पड़ीं। मौनी रॉय का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। चंद घंटों पहले साझा किये गए इस वीडियो को अभी तक दो.पाँच लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो में एक्ट्रेस बर्फ में घुटनों के बल चलती दिखाई दीं। आसपास के नजारों को कैमरे में कैद करते हुए, होटल के नजारों को एंजॉय करती हुई नजर आईं। मौनी रॉय के साथ वीडियो में उनके पति सूरज नंबियार भी नजर आए। बता दें कि एक्ट्रेस ने इसके अलावा अपनी कुछ तस्वीरें भी साझा की थीं, जिसमें वह बर्फ के बीच सेल्फी लेती नजर आईं। बता दें कि मौनी रॉय और सूरज नंबियार बीते सत्ताईस जनवरी को शादी के बंधन में बंधी थीं। दोनों ने दक्षिण भारतीय और बंगाली रीति-रिवाजों से शादी की थी। मौनी रॉय और सूरज नंबियार की पहली मुलाकात दुबई में हुई थी। वहीं से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई थी और वे एक-दूसरे को दिल भी दे बैठे थे। इससे इतर मौनी रॉय के करियर की शुरुआत करें तो वह जल्द ही फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में अहम भूमिका अदा करती आएंगी। फिल्म में उनके साथ रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और अमिताभ बच्चन भी मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
हरियाणा के पंचकूला जिले में अब पिटबुल-रोटविलर जैसे खूंखार डॉग्स की एंट्री बैन कर दी गई है। नगर निगम की आम बैठक में मेयर कुलभूषण की अध्यक्षता में यह प्रस्ताव पास किया गया। अब शहर में यदि डॉग लवर घरों में इन खूंखार डॉग्स को रखते हैं तो उन्हे 2000 रुपए पैनल्टी भरनी होगी।
बैठक में पास प्रस्ताव में पैनल्टी नहीं भरने वालों के लिए सजा का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि यह सजा क्या होगी, अभी इस पर कोई फैसला नगर निगम ने नहीं लिया है। नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही सजा पर भी फैसला ले लिया जाएगा।
पिटबुल और रोटविलर ब्रीड के डॉग्स सबसे खतरनाक और खूंखार नस्ल के होते हैं। इनका वजन 16 से 30 किलो के बीच होता है। दुनियाभर के कई देशों ने इन कुत्तों को रखने पर प्रतिबंध लगा रखा है। हालांकि, अमेरिका सहित कई अन्य देशों में पिटबुल को आज भी पाला जाता है, लेकिन इनको आक्रामक होने से रोकने के लिए बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत होती है।
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| हरियाणा के पंचकूला जिले में अब पिटबुल-रोटविलर जैसे खूंखार डॉग्स की एंट्री बैन कर दी गई है। नगर निगम की आम बैठक में मेयर कुलभूषण की अध्यक्षता में यह प्रस्ताव पास किया गया। अब शहर में यदि डॉग लवर घरों में इन खूंखार डॉग्स को रखते हैं तो उन्हे दो हज़ार रुपयापए पैनल्टी भरनी होगी। बैठक में पास प्रस्ताव में पैनल्टी नहीं भरने वालों के लिए सजा का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि यह सजा क्या होगी, अभी इस पर कोई फैसला नगर निगम ने नहीं लिया है। नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही सजा पर भी फैसला ले लिया जाएगा। पिटबुल और रोटविलर ब्रीड के डॉग्स सबसे खतरनाक और खूंखार नस्ल के होते हैं। इनका वजन सोलह से तीस किलो के बीच होता है। दुनियाभर के कई देशों ने इन कुत्तों को रखने पर प्रतिबंध लगा रखा है। हालांकि, अमेरिका सहित कई अन्य देशों में पिटबुल को आज भी पाला जाता है, लेकिन इनको आक्रामक होने से रोकने के लिए बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
जय, मैडिसन, डब्ल्यूआई ने पूछाः
कुछ रेस्तरां छोटे प्लेट मेनू करते हैं। क्या यह मुझे वजन कम करने में मदद करने के लिए माना जाता है?
नए शोध के मुताबिक, हम "यूनिट पूर्वाग्रह" से पीड़ित हैं, जिसका अर्थ है कि हम भाग के आकार के बावजूद, जो हमें सेवा करते हैं, उसके आधार पर संतुष्ट होते हैं। एडवान-टेज लें और छोटे से शुरू करेंः प्रति व्यक्ति एक या दो छोटी प्लेटें शरीर और मस्तिष्क को 18-औंस टी-हड्डी के रूप में संतुष्ट करने के लिए भी ऐसा ही कर सकती हैं।
| जय, मैडिसन, डब्ल्यूआई ने पूछाः कुछ रेस्तरां छोटे प्लेट मेनू करते हैं। क्या यह मुझे वजन कम करने में मदद करने के लिए माना जाता है? नए शोध के मुताबिक, हम "यूनिट पूर्वाग्रह" से पीड़ित हैं, जिसका अर्थ है कि हम भाग के आकार के बावजूद, जो हमें सेवा करते हैं, उसके आधार पर संतुष्ट होते हैं। एडवान-टेज लें और छोटे से शुरू करेंः प्रति व्यक्ति एक या दो छोटी प्लेटें शरीर और मस्तिष्क को अट्ठारह-औंस टी-हड्डी के रूप में संतुष्ट करने के लिए भी ऐसा ही कर सकती हैं। |
कोरोना काल में अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन ज्यादा पैसे नहीं है तो आप घर की छत का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फार्मिंग से लेकर कई बिजनेस शुरू किए जा सकते हैं.
कोरोना संकट में एक बार फिर रोजगार पर खतरा मंडराने लगा है. कई लोगों की तो जॉब भी जा चुकी है. ऐसे में अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन पर्याप्त जमीन नही है और न ही दुकान लेने के लिए ज्यादा पैसे, तो टेंशन न लें. आप घर की खाली पड़ी छत को अपनी कमाई का जरिया बना सकते हैं. इसमें कम लागत के आप उद्यम शुरू कर सकते हैं और तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. तो क्या हैं ये बिजनेस आईडियाज (Business Ideas) आइए जानते हैं.
अगर आप बिना निवेश किए अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आप अपनी छत पर होर्डिंग्स लगवा सकते हैं. इसके लिए आप घर की छत को किराये पर दे सकते हैं. अगर आपका घर मेन रोड पर है तो बड़ी - बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड के प्रचार के लिए विज्ञापन के लिए छत का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके बदले कंपनी आपको अच्छा किराया देगी. होर्डिंग्स जितने बड़े होंगे कीमत उतनी ही अच्छी मिलेंगी. ये बिजनेस करने के लिए विज्ञापन एजेंसियों से आप संपर्क कर सकते हैं.
अगर आपकी घर की छत खाली है तो आप इसे मोबाइल कंपनियों को किराए पर दे सकते हैं. कंपनियां यहां मोबाइल टावर लगाकर आपको हर महीने बढ़िया किराया देंगी. चूंकि मोबाइल कंपनियों ने कॉल ड्रॉप की बढ़ती समस्या को खत्म करने के लिए जगह-जगह टावर लगाने का निर्णय लिया है, इससे आपकी कमाई की संभावना बढ़ गई है. हालांकि इसके लिए आपको न केवल पड़ोस के लोगों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा, बल्कि आपको स्थानीय नगर निगम से भी अनुमति लेनी होगी.
भारत में टेरेस खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसके लिए बिल्डिंग की छत पर ग्रीनहाउस बनाना होगा. जहां पॉलीबैग में सब्जी के थैले लगाए जा सकते हैं और ड्रिप सिस्टम के जरिए लगातार सिंचाई की जा सकती है. तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए, उपकरण स्थापित करना होगा. पॉलीबैग में कीचड़ और कोकोपिट भरना पड़ता है. इसके लिए जैविक खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरीके से आप आर्गेनिक सब्जियां उगा सकते हैं. इनकी मार्केट में काफी मांग है.
सौर ऊर्जा से संचालित उपकरण इन दिनों काफी चलन में है. सरकार भी सोलर पैनल को लगाए जाने को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में आप अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगवाकर इससे बिजली का बिल बचा सकते हैं. आप चाहे तो अतिरिक्त बिजली को बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं. इसके लिए आपको अपने क्षेत्र में DISCOM से संपर्क करना होगा. वो आपके घर पर एक मीटर लगाएगा, जिससे यह पता चलेगा कि आपने DISCOM को कितनी बिजली बेची है.
| कोरोना काल में अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन ज्यादा पैसे नहीं है तो आप घर की छत का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फार्मिंग से लेकर कई बिजनेस शुरू किए जा सकते हैं. कोरोना संकट में एक बार फिर रोजगार पर खतरा मंडराने लगा है. कई लोगों की तो जॉब भी जा चुकी है. ऐसे में अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन पर्याप्त जमीन नही है और न ही दुकान लेने के लिए ज्यादा पैसे, तो टेंशन न लें. आप घर की खाली पड़ी छत को अपनी कमाई का जरिया बना सकते हैं. इसमें कम लागत के आप उद्यम शुरू कर सकते हैं और तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. तो क्या हैं ये बिजनेस आईडियाज आइए जानते हैं. अगर आप बिना निवेश किए अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आप अपनी छत पर होर्डिंग्स लगवा सकते हैं. इसके लिए आप घर की छत को किराये पर दे सकते हैं. अगर आपका घर मेन रोड पर है तो बड़ी - बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड के प्रचार के लिए विज्ञापन के लिए छत का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके बदले कंपनी आपको अच्छा किराया देगी. होर्डिंग्स जितने बड़े होंगे कीमत उतनी ही अच्छी मिलेंगी. ये बिजनेस करने के लिए विज्ञापन एजेंसियों से आप संपर्क कर सकते हैं. अगर आपकी घर की छत खाली है तो आप इसे मोबाइल कंपनियों को किराए पर दे सकते हैं. कंपनियां यहां मोबाइल टावर लगाकर आपको हर महीने बढ़िया किराया देंगी. चूंकि मोबाइल कंपनियों ने कॉल ड्रॉप की बढ़ती समस्या को खत्म करने के लिए जगह-जगह टावर लगाने का निर्णय लिया है, इससे आपकी कमाई की संभावना बढ़ गई है. हालांकि इसके लिए आपको न केवल पड़ोस के लोगों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा, बल्कि आपको स्थानीय नगर निगम से भी अनुमति लेनी होगी. भारत में टेरेस खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसके लिए बिल्डिंग की छत पर ग्रीनहाउस बनाना होगा. जहां पॉलीबैग में सब्जी के थैले लगाए जा सकते हैं और ड्रिप सिस्टम के जरिए लगातार सिंचाई की जा सकती है. तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए, उपकरण स्थापित करना होगा. पॉलीबैग में कीचड़ और कोकोपिट भरना पड़ता है. इसके लिए जैविक खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरीके से आप आर्गेनिक सब्जियां उगा सकते हैं. इनकी मार्केट में काफी मांग है. सौर ऊर्जा से संचालित उपकरण इन दिनों काफी चलन में है. सरकार भी सोलर पैनल को लगाए जाने को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में आप अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगवाकर इससे बिजली का बिल बचा सकते हैं. आप चाहे तो अतिरिक्त बिजली को बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं. इसके लिए आपको अपने क्षेत्र में DISCOM से संपर्क करना होगा. वो आपके घर पर एक मीटर लगाएगा, जिससे यह पता चलेगा कि आपने DISCOM को कितनी बिजली बेची है. |
नई दिल्ली। 6 जुलाई 2022 को रेलवे ने 144 ट्रेनों (IRCTC कैंसिल ट्रेन) को रद्द कर दिया है। इन ट्रेनों को विभिन्न कारणों से रद्द किया गया है। अगर आप कहीं यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं तो ट्रेनों की वर्तमान स्थिति देखकर ही निकलें। विभिन्न कारणों से रेलवे कई ट्रेनों को रद्द करता है। रेलवे की जानकारी के मुताबिक 6 जुलाई को 137 ट्रेनों को रद्द किया गया है, 9 ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि 16 ट्रेनों का मार्ग बदला गया है. इधर, रेलवे ने एक ट्वीट कर बिना टिकट यात्रा न करने की हिदायत दी है (रेलवे अलर्ट यात्री बिना टिकट यात्रा न करें)। बता दें कि मध्य रेलवे ने अप्रैल से जून 2022 के दौरान टिकट चेकिंग से 103. 99 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया है।
जिन ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है उनमें नई दिल्ली से गया, आनंद विहार से भागलपुर, नई दिल्ली से दरभंगा, अहमदाबाद से हावड़ा, आनंद विहार से मधुपुर के बीच चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं। इस तरह ग्वालियर-बरौनी, बरेली-भुज, नई दिल्ली-दरभंगा आदि सहित 16 ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है. रद्द, डायवर्ट या रीशेड्यूल की गई ट्रेनों की जानकारी आप रेलवे की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।
enquiry. indianrail. gov. in/mntes/ या एनटीईएस ऐप के माध्यम से। यहां आपको एक्सेप्शनल ट्रेनों का विकल्प दिखाई देगा। यहां आपको रद्द, पुनर्निर्धारित और डायवर्ट की गई ट्रेनों की सूची दिखाई देगी।
ट्रेन संख्या 22454 (मेरठ सिटी-लखनऊ) 04 से 06 जुलाई तक रद्द रहेगी.
ट्रेन संख्या 04379 (रोजा-बरेली) 04 से 06 जुलाई तक रद्द रहेगी.
नॉन इंटरलॉकिंग व मेंटेनेंस कार्य के चलते राजनांदगांव-रसमाड़ा के बीच छह जुलाई तक 18 ट्रेनों को रद्द किया गया है. इसमें दुर्ग-गोंदिया और गोंदिया-दुर्ग स्पेशल ट्रेनें 6 जुलाई तक रद्द रहेंगी. गोंदिया-इतवारी मेमू, इतवारी-गोंडिया मेमू, इतवारी-बिलासपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस 6 जुलाई तक रद्द है. इतवारी-टाटानगर एक्सप्रेस सात जुलाई तक रद्द रहेगी।
| नई दिल्ली। छः जुलाई दो हज़ार बाईस को रेलवे ने एक सौ चौंतालीस ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इन ट्रेनों को विभिन्न कारणों से रद्द किया गया है। अगर आप कहीं यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं तो ट्रेनों की वर्तमान स्थिति देखकर ही निकलें। विभिन्न कारणों से रेलवे कई ट्रेनों को रद्द करता है। रेलवे की जानकारी के मुताबिक छः जुलाई को एक सौ सैंतीस ट्रेनों को रद्द किया गया है, नौ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि सोलह ट्रेनों का मार्ग बदला गया है. इधर, रेलवे ने एक ट्वीट कर बिना टिकट यात्रा न करने की हिदायत दी है । बता दें कि मध्य रेलवे ने अप्रैल से जून दो हज़ार बाईस के दौरान टिकट चेकिंग से एक सौ तीन. निन्यानवे करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया है। जिन ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है उनमें नई दिल्ली से गया, आनंद विहार से भागलपुर, नई दिल्ली से दरभंगा, अहमदाबाद से हावड़ा, आनंद विहार से मधुपुर के बीच चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं। इस तरह ग्वालियर-बरौनी, बरेली-भुज, नई दिल्ली-दरभंगा आदि सहित सोलह ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है. रद्द, डायवर्ट या रीशेड्यूल की गई ट्रेनों की जानकारी आप रेलवे की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। enquiry. indianrail. gov. in/mntes/ या एनटीईएस ऐप के माध्यम से। यहां आपको एक्सेप्शनल ट्रेनों का विकल्प दिखाई देगा। यहां आपको रद्द, पुनर्निर्धारित और डायवर्ट की गई ट्रेनों की सूची दिखाई देगी। ट्रेन संख्या बाईस हज़ार चार सौ चौवन चार से छः जुलाई तक रद्द रहेगी. ट्रेन संख्या चार हज़ार तीन सौ उन्यासी चार से छः जुलाई तक रद्द रहेगी. नॉन इंटरलॉकिंग व मेंटेनेंस कार्य के चलते राजनांदगांव-रसमाड़ा के बीच छह जुलाई तक अट्ठारह ट्रेनों को रद्द किया गया है. इसमें दुर्ग-गोंदिया और गोंदिया-दुर्ग स्पेशल ट्रेनें छः जुलाई तक रद्द रहेंगी. गोंदिया-इतवारी मेमू, इतवारी-गोंडिया मेमू, इतवारी-बिलासपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस छः जुलाई तक रद्द है. इतवारी-टाटानगर एक्सप्रेस सात जुलाई तक रद्द रहेगी। |
मुंबई। एक्टर बमन ईरानी ने खुलासा किया है कि 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के उनके सह-कलाकार अरशद वारसी ने 25 साल पहले उनसे फिल्मों में आने का आग्रह किया था। अपनी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ माइकल मिश्रा' के संगीत लॉन्च के मौके पर बमन ने कहा कि अरशद के साथ उन्होंने पहला नाटक 25 साल पहले किया था।
बमन ने बताया कि शो के दौरान अरशद ने उन्हें बताया था कि जया बच्चन ने उन्हें फिल्म 'तेरे मेरे सपने' में एक भूमिका का प्रस्ताव दिया था।
'द लीजेंड ऑफ माइकल मिश्रा' पांच अगस्त को रिलीज होगी।
| मुंबई। एक्टर बमन ईरानी ने खुलासा किया है कि 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के उनके सह-कलाकार अरशद वारसी ने पच्चीस साल पहले उनसे फिल्मों में आने का आग्रह किया था। अपनी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ माइकल मिश्रा' के संगीत लॉन्च के मौके पर बमन ने कहा कि अरशद के साथ उन्होंने पहला नाटक पच्चीस साल पहले किया था। बमन ने बताया कि शो के दौरान अरशद ने उन्हें बताया था कि जया बच्चन ने उन्हें फिल्म 'तेरे मेरे सपने' में एक भूमिका का प्रस्ताव दिया था। 'द लीजेंड ऑफ माइकल मिश्रा' पांच अगस्त को रिलीज होगी। |
टीवी शो 'कहाँ हम कहाँ तुम' छोटे परदे का बहुप्रतीक्षित शो बन गया है। 17 जून से स्टार प्लस पर प्रसारित होने शो में दीपिका कक्कड़ (Dipika Kakar) और करण वी ग्रोवर अहम किरदार निभा रहे हैं। शो के प्रोमो को दर्शको से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और शो के नरेटर और कोई नहीं बल्कि बॉलीवुड सुपरस्टार सैफ अली खान हैं। शो में प्यार को एक नए एंगल से दिखाया जाएगा जहाँ आज के व्यस्त युवा कैसे अपने प्रेमी के लिए वक़्त निकालते हैं और अपने प्यार को अहमियत देते हैं।
हाल ही में, शो के मेकर्स ने मुंबई में एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया था जिसमे कई अभिनेता और डॉक्टर शामिल हुए थे। शो में दीपिका एक अभिनेत्री और करण एक सर्जन का किरदार निभा रहे हैं, इसलिए शो के प्रचार के लिए मेकर्स ने ये अनोखा तरीका निकाला था।
| टीवी शो 'कहाँ हम कहाँ तुम' छोटे परदे का बहुप्रतीक्षित शो बन गया है। सत्रह जून से स्टार प्लस पर प्रसारित होने शो में दीपिका कक्कड़ और करण वी ग्रोवर अहम किरदार निभा रहे हैं। शो के प्रोमो को दर्शको से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और शो के नरेटर और कोई नहीं बल्कि बॉलीवुड सुपरस्टार सैफ अली खान हैं। शो में प्यार को एक नए एंगल से दिखाया जाएगा जहाँ आज के व्यस्त युवा कैसे अपने प्रेमी के लिए वक़्त निकालते हैं और अपने प्यार को अहमियत देते हैं। हाल ही में, शो के मेकर्स ने मुंबई में एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया था जिसमे कई अभिनेता और डॉक्टर शामिल हुए थे। शो में दीपिका एक अभिनेत्री और करण एक सर्जन का किरदार निभा रहे हैं, इसलिए शो के प्रचार के लिए मेकर्स ने ये अनोखा तरीका निकाला था। |
विशेष पतिनिधि नई दिल्ली। भारत और चीन ने अपनी सीमा पर शांति बढाने और 2010 में वीजा मुद्दों को लेकर हुए राजनयिक विवाद के बाद स्थगित सैन्य अभ्यास को `जल्द' बहाल करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री एके एंटनी और उनके चीनी समकक्ष जनरल लियांग गुआंगली के बीच आज अहम वार्ता के बाद यह घोषणा की गई। बीते आ" साल के दौरान भारत का दौरा करने वाले गुआंगली चीन के पहले रक्षा मंत्री हैं। एंटनी ने प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता को बेहद `बेहद फलदायी' बताया। उन्होंने अगले साल बीजिंग का दौरा करने के निमंत्रण को भी स्वीकार कर लिया। साउढथ ब्लॉक में दोनों के बीच चली करीब 90 मिनट की वार्ता में दोनें पक्षों ने उच्च स्तरीय आधिकारिक आदान-प्रदान, एक दूसरे के यहां सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और समुदी सुरक्षा सहयोग पर सहमति जताई। एंटनी ने कहा, हमने सैन्य स्तर के अभ्यास को बहाल करने का फैसला किया है और मैंने अगले साल चीन जाने का न्यौता भी स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने सीमावर्ती इलाकों में संबंधों और दक्षिण एशिया एवं दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में स्थिति को सुधारने के बारे में चर्चा की। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, दोनों पक्षों के बीच अगले चरण का सैन्य अभ्यास जल्द आयोजित करने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा, दोनों देशों ने सीमा पर सैनिकों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है ताकि भारत-चीन सीमा के इलाकों में शांति बहाल की जा सके। चीन के रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए सहमति बनी है तथा दोनों पक्षों ने अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। जनरल लियांग ने कहा, उच्च स्तरीय दौरों, नवोदित अधिकारियों को एक दूसरे के यहां प्रशिक्षण देने और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई है। माना जा रहा है कि दोनों देशों ने दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की ओर से नौसेना के बेड़े को स्थानांतरित करने की योजना और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के बारे में चर्चा की। उन्हेंने कहा कि यह भारत और चीन के बीच मित्रता एवं सहयोग का साल रहा है तथा दोनों देशों को इस अवसर का ज्यादा से ज्यादा लाभ उ"ाना चाहिए। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास 2007 से आरंभ हुआ था, लेकिन रक्षा संबंधों में कई उतार-चढ़ाव के बाद 2010 में इसे रोक दिया गया था। पहला युद्ध अभ्यास 2007 में चीन के कुनमिंग में आयोजित किया गया था। दूसरा साल 2008 में भारत के बेलगाम में था। अभ्यास का तीसरा चरण 2010 में आयोजित होना था, लेकिन यह नहीं हो सका। सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बी एस जसवाल को चीन ने 2010 में वीजा जारी करने से मना कर दिया था। इसके बाद भारत ने सभी द्विपक्षीय रक्षा संबंधों पर विराम लगा दिया था। उधर बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने संवाददाताओं से कहा कि चीन के रक्षा मंत्री जनरल लिआंग गुआंगली के भारत दौरे का लक्ष्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच पारस्परिक विश्वास को बढ़ावा देना है और यह पड़ोसी देशों के साथ तनाव को कम करने की जनमुक्ति सेना की `सैन्य कूटनीति' का एक हिस्सा है।
| विशेष पतिनिधि नई दिल्ली। भारत और चीन ने अपनी सीमा पर शांति बढाने और दो हज़ार दस में वीजा मुद्दों को लेकर हुए राजनयिक विवाद के बाद स्थगित सैन्य अभ्यास को `जल्द' बहाल करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री एके एंटनी और उनके चीनी समकक्ष जनरल लियांग गुआंगली के बीच आज अहम वार्ता के बाद यह घोषणा की गई। बीते आ" साल के दौरान भारत का दौरा करने वाले गुआंगली चीन के पहले रक्षा मंत्री हैं। एंटनी ने प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता को बेहद `बेहद फलदायी' बताया। उन्होंने अगले साल बीजिंग का दौरा करने के निमंत्रण को भी स्वीकार कर लिया। साउढथ ब्लॉक में दोनों के बीच चली करीब नब्बे मिनट की वार्ता में दोनें पक्षों ने उच्च स्तरीय आधिकारिक आदान-प्रदान, एक दूसरे के यहां सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और समुदी सुरक्षा सहयोग पर सहमति जताई। एंटनी ने कहा, हमने सैन्य स्तर के अभ्यास को बहाल करने का फैसला किया है और मैंने अगले साल चीन जाने का न्यौता भी स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने सीमावर्ती इलाकों में संबंधों और दक्षिण एशिया एवं दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में स्थिति को सुधारने के बारे में चर्चा की। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, दोनों पक्षों के बीच अगले चरण का सैन्य अभ्यास जल्द आयोजित करने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा, दोनों देशों ने सीमा पर सैनिकों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है ताकि भारत-चीन सीमा के इलाकों में शांति बहाल की जा सके। चीन के रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए सहमति बनी है तथा दोनों पक्षों ने अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। जनरल लियांग ने कहा, उच्च स्तरीय दौरों, नवोदित अधिकारियों को एक दूसरे के यहां प्रशिक्षण देने और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई है। माना जा रहा है कि दोनों देशों ने दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की ओर से नौसेना के बेड़े को स्थानांतरित करने की योजना और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के बारे में चर्चा की। उन्हेंने कहा कि यह भारत और चीन के बीच मित्रता एवं सहयोग का साल रहा है तथा दोनों देशों को इस अवसर का ज्यादा से ज्यादा लाभ उ"ाना चाहिए। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास दो हज़ार सात से आरंभ हुआ था, लेकिन रक्षा संबंधों में कई उतार-चढ़ाव के बाद दो हज़ार दस में इसे रोक दिया गया था। पहला युद्ध अभ्यास दो हज़ार सात में चीन के कुनमिंग में आयोजित किया गया था। दूसरा साल दो हज़ार आठ में भारत के बेलगाम में था। अभ्यास का तीसरा चरण दो हज़ार दस में आयोजित होना था, लेकिन यह नहीं हो सका। सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बी एस जसवाल को चीन ने दो हज़ार दस में वीजा जारी करने से मना कर दिया था। इसके बाद भारत ने सभी द्विपक्षीय रक्षा संबंधों पर विराम लगा दिया था। उधर बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने संवाददाताओं से कहा कि चीन के रक्षा मंत्री जनरल लिआंग गुआंगली के भारत दौरे का लक्ष्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच पारस्परिक विश्वास को बढ़ावा देना है और यह पड़ोसी देशों के साथ तनाव को कम करने की जनमुक्ति सेना की `सैन्य कूटनीति' का एक हिस्सा है। |
Raja Ji Hone Gali Me Chalo Song: खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) की फिल्म 'मेंहदी लगा के रखना 3' (Mehandi Laga Ke Rakhna 3) के बेहद रोमांटिक गाने 'राजा जी होने गली में चलो' न इंटरनेट पर धमाल मचा रखा है।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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| Raja Ji Hone Gali Me Chalo Song: खेसारी लाल यादव की फिल्म 'मेंहदी लगा के रखना तीन' के बेहद रोमांटिक गाने 'राजा जी होने गली में चलो' न इंटरनेट पर धमाल मचा रखा है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
नई दिल्ली Tiger Shroff Birthday Special: बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ आज अपना 33 वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. टाइगर बॉलीवुड सिनेमा में एक्शन एक्टर के रूप में जाने जाते हैं. लेकिन उन्हें शुरुआती समय में फेमिनिन लुक की वजह से काफी ट्रोल किया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसान एक बार एक डायरेक्टर ने उनका मजाक उड़ा दिया था. डायरेक्टर ने टाइगर को ट्रांसजेंडर के साथ-साथ मोस्ट ब्यूटीफुल वूमेन तक बोल दिया था.
साल 2017 में बॉलीवुड एक्टर विद्युत जामवाल ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप शेयर किया था. एक्टर ने दावा किया था यह ऑडियो डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा का है. शराब के नशे में उन्हें टाइगर और उन्हें भिड़ाने की बात की थी. इस ऑडियो क्लिप में टाइगर श्रॉफ को ट्रांसजेंडर बताया था इसी के साथ उन्हें मोस्ट ब्यूटीफुल वूमेन भी कहा था.
इस ऑडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाइगर की मां इस बात से काफी गुस्सा हो गई थी. उन्होंने ऑडियो का जवाब देते हुए कहा था कि कुत्ते तो भौंकते रहते है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. विवाद बढ़ने के बाद राम गोपाल वर्मा ने माफी मांग ली थी. उन्होंने माफी मांगते हुए लिखा- ये सारी बाते मजाक के रूप में कही गई थी. मैं विद्युत जामवाल और टाइगर से माफी मांगना चाहता हूं.
टाइगर श्रॉफ जाने माने एक्टर जैकी श्रॉफ के बेटे हैं. टाइगर का असली नाम जय हेमंत श्रॉफ है. घर में उन्हें टाइगर नाम से पुकारा जाता है. इसी वजह से उन्हेंने बॉलीवुड में टाइगर नाम से अपना डेब्यू किया.
टाइगर श्रॉफ ने साल 2014 में साजिद नाडियावाला की फिल्म हीरोपंती से अपना करियर शुरू किया था. उनकी डेब्यू फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी. इसके बाद टाइगर श्रद्धा कपूर के साथ बागी फिल्म में नजर आए. फिल्म बागी भी थिएटर में हिट रही थी. टाइगर ए फ्लाइंग जट्ट, बागी 3, स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 और वॉर में नजर आ चुके हैं.
टाइगर की लव लाइफ किसी से छिपी नहीं है. टाइगर अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. टाइगर का नाम लंबे समय से दिशा पाटनी के साथ जोड़ा गया. हाल ही में दावा किया गया था कि दोनों का ब्रेकअप हो चुका है. दिशा और टाइगर ने अपने रिलेशन को लेकर किसी तरह का रिएक्शन नहीं दिया है.
Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप.
| नई दिल्ली Tiger Shroff Birthday Special: बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ आज अपना तैंतीस वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. टाइगर बॉलीवुड सिनेमा में एक्शन एक्टर के रूप में जाने जाते हैं. लेकिन उन्हें शुरुआती समय में फेमिनिन लुक की वजह से काफी ट्रोल किया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसान एक बार एक डायरेक्टर ने उनका मजाक उड़ा दिया था. डायरेक्टर ने टाइगर को ट्रांसजेंडर के साथ-साथ मोस्ट ब्यूटीफुल वूमेन तक बोल दिया था. साल दो हज़ार सत्रह में बॉलीवुड एक्टर विद्युत जामवाल ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप शेयर किया था. एक्टर ने दावा किया था यह ऑडियो डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा का है. शराब के नशे में उन्हें टाइगर और उन्हें भिड़ाने की बात की थी. इस ऑडियो क्लिप में टाइगर श्रॉफ को ट्रांसजेंडर बताया था इसी के साथ उन्हें मोस्ट ब्यूटीफुल वूमेन भी कहा था. इस ऑडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाइगर की मां इस बात से काफी गुस्सा हो गई थी. उन्होंने ऑडियो का जवाब देते हुए कहा था कि कुत्ते तो भौंकते रहते है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. विवाद बढ़ने के बाद राम गोपाल वर्मा ने माफी मांग ली थी. उन्होंने माफी मांगते हुए लिखा- ये सारी बाते मजाक के रूप में कही गई थी. मैं विद्युत जामवाल और टाइगर से माफी मांगना चाहता हूं. टाइगर श्रॉफ जाने माने एक्टर जैकी श्रॉफ के बेटे हैं. टाइगर का असली नाम जय हेमंत श्रॉफ है. घर में उन्हें टाइगर नाम से पुकारा जाता है. इसी वजह से उन्हेंने बॉलीवुड में टाइगर नाम से अपना डेब्यू किया. टाइगर श्रॉफ ने साल दो हज़ार चौदह में साजिद नाडियावाला की फिल्म हीरोपंती से अपना करियर शुरू किया था. उनकी डेब्यू फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी. इसके बाद टाइगर श्रद्धा कपूर के साथ बागी फिल्म में नजर आए. फिल्म बागी भी थिएटर में हिट रही थी. टाइगर ए फ्लाइंग जट्ट, बागी तीन, स्टूडेंट ऑफ द ईयर दो और वॉर में नजर आ चुके हैं. टाइगर की लव लाइफ किसी से छिपी नहीं है. टाइगर अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. टाइगर का नाम लंबे समय से दिशा पाटनी के साथ जोड़ा गया. हाल ही में दावा किया गया था कि दोनों का ब्रेकअप हो चुका है. दिशा और टाइगर ने अपने रिलेशन को लेकर किसी तरह का रिएक्शन नहीं दिया है. Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप. |
इस शीर्षक में कीचड़ में पाये जाने वाले केकड़े के पालन की जानकारी दी गई है।
इस लेख में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कहानियों,कविताओं, चुटकुलों, जीव जन्तुओं का अनोखा संसार और विज्ञान बच्चों के लिए किये गए कुछ प्रयोगों का विस्तृत उल्लेख है।
इस भाग में भेड़ की विभिन्न नस्लों सहित, एक वाणिज्यिक भेड़ फार्म की स्थापना करना, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन और वित्तीय सहायता आदि की जानकारी को शामिल किया जाता है।
सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। 'सिद्ध' शब्द का अर्थ है उपलब्धियां और सिद्ध, संत पुरुष होते थे जो दवा में परिणाम हासिल करते थे। है। इस भाग में इन्हीं परिणामों और उनका वर्तमान उपयोग बताया गया है।
इस भाग में समाज कल्याण डोमेन से संबंधित विषयसामग्री दानकर्ता हैं।
इस भाग में समुदायों में सौर ऊर्जा के उपयोग के प्रोत्साहन से जुड़े विभिन्न केस अध्ययनों और सर्वोत्क्रष्ट प्रयासों को प्रस्तुत किया गया है।
ऊर्जा विभिन्न प्रकार के स्त्रोतों से प्राप्त होती है। विभिन्न प्रकार के नवीनीकृत और अ-नवीनीकृत ऊर्जा के स्त्रोत,उनके उपयोग लाभ और हानि की संक्षिप्त जानकारी दी गई है।
एस.आर.आई (श्री)
यह भाग श्री विधि पर जानकारी प्रस्तुत करता है।
| इस शीर्षक में कीचड़ में पाये जाने वाले केकड़े के पालन की जानकारी दी गई है। इस लेख में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कहानियों,कविताओं, चुटकुलों, जीव जन्तुओं का अनोखा संसार और विज्ञान बच्चों के लिए किये गए कुछ प्रयोगों का विस्तृत उल्लेख है। इस भाग में भेड़ की विभिन्न नस्लों सहित, एक वाणिज्यिक भेड़ फार्म की स्थापना करना, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन और वित्तीय सहायता आदि की जानकारी को शामिल किया जाता है। सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। 'सिद्ध' शब्द का अर्थ है उपलब्धियां और सिद्ध, संत पुरुष होते थे जो दवा में परिणाम हासिल करते थे। है। इस भाग में इन्हीं परिणामों और उनका वर्तमान उपयोग बताया गया है। इस भाग में समाज कल्याण डोमेन से संबंधित विषयसामग्री दानकर्ता हैं। इस भाग में समुदायों में सौर ऊर्जा के उपयोग के प्रोत्साहन से जुड़े विभिन्न केस अध्ययनों और सर्वोत्क्रष्ट प्रयासों को प्रस्तुत किया गया है। ऊर्जा विभिन्न प्रकार के स्त्रोतों से प्राप्त होती है। विभिन्न प्रकार के नवीनीकृत और अ-नवीनीकृत ऊर्जा के स्त्रोत,उनके उपयोग लाभ और हानि की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। एस.आर.आई यह भाग श्री विधि पर जानकारी प्रस्तुत करता है। |
इंदौर। (www. arya-tv. com) मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र से गेहूं की दो जुड़वा किस्में निकली हैं। जल्द ही ये देश के गेहूं उत्पादक राज्यों के खेतों में लहलहाती दिखाई देंगी। एक का नाम पूसा-अहिल्या है तो दूसरी का नाम पूसा-वाणी। बीज रूप में दोनों के माता-पिता एक ही हैं। जिस तरह एक ही माता-पिता की दो संतानें रूप और गुण में हमेशा एक-सी नहीं होती उसी तरह अहिल्या और वाणी में कुछ अंतर है।
अहिल्या का विकास मध्यभारत की जलवायु के हिसाब से किया गया है तो वाणी को प्रायद्वीपीय (समुद्र तट) राज्यों की जलवायु के अनुूल बनाया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के इंदौर स्थित क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र ने इन दोनों प्रजातियों को विकसित किया है। इन प्रजातियों का मातृ बीज गुजरात और पितृ बीज पंजाब से लेकर इनकी क्रासिंग कराई गई है। एक पूसा-वाणी का वैज्ञानिक नाम एचआइ-1633 है तो पूसा-अहिल्या को एचआई-1634 है। किसानों के लिए यह खुशी का समय है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में अपने गजट में प्रकाशित कर इनहें मान्यता दी है।
| इंदौर। मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र से गेहूं की दो जुड़वा किस्में निकली हैं। जल्द ही ये देश के गेहूं उत्पादक राज्यों के खेतों में लहलहाती दिखाई देंगी। एक का नाम पूसा-अहिल्या है तो दूसरी का नाम पूसा-वाणी। बीज रूप में दोनों के माता-पिता एक ही हैं। जिस तरह एक ही माता-पिता की दो संतानें रूप और गुण में हमेशा एक-सी नहीं होती उसी तरह अहिल्या और वाणी में कुछ अंतर है। अहिल्या का विकास मध्यभारत की जलवायु के हिसाब से किया गया है तो वाणी को प्रायद्वीपीय राज्यों की जलवायु के अनुूल बनाया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के इंदौर स्थित क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र ने इन दोनों प्रजातियों को विकसित किया है। इन प्रजातियों का मातृ बीज गुजरात और पितृ बीज पंजाब से लेकर इनकी क्रासिंग कराई गई है। एक पूसा-वाणी का वैज्ञानिक नाम एचआइ-एक हज़ार छः सौ तैंतीस है तो पूसा-अहिल्या को एचआई-एक हज़ार छः सौ चौंतीस है। किसानों के लिए यह खुशी का समय है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में अपने गजट में प्रकाशित कर इनहें मान्यता दी है। |
Donald Trump Farewell : विदाई भाषण में भावुक हुए ट्रंप, बोले- गुड बाय, जल्द आपके बीच लौटेंगे!
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अमेरिका के लोगों से कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैंने आपके राष्ट्रपति (President) के तौर पर काम किया.
ट्रंप (Trump) ने अपने विदाई भाषण में सभी साथियों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि ये चार साल अद्भुत रहे. इस दौरान हमने बहुत कुछ किया. उन्होंने अमेरिका (America) के लोगों से कहा कि आप सभी को मेरा प्यार. ये मेरा सौभाग्य है कि मैंने आपके राष्ट्रपति (President) के तौर पर काम किया. गुड बाय, जल्द आपके बीच लौटेंगे!
ट्रंप ने कहा कि हमने मिलिट्री में काफी बदलाव किया. स्पेस फोर्स बनाया, टैक्स रिफॉर्म्स किया, जिससे लोगों को फायदा पहुंचा. हमने इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए काफी काम किया. राष्ट्रपति के तौर पर अपने संबोधन को खत्म करते हुए ट्रंप ने कहा वो अमेरिका के लिए हमेशा 'लड़ते' रहेंगे. उन्होंने कहा कि हमने सबसे जल्दी वैक्सीन बनाया और हम जल्द कोविड महामारी को काबू कर लेंगे. चीनी वायरस की वजह से हमने कई लोगों को खोया, आज हम उन सभी को याद करते हैं, मैं हमेशा उनके साथ हूं.
ट्रंप ने आगामी प्रशासन को शुभकामनाएं दीं, साथ ही उपराष्ट्रपति माइक पेंस और सेकेंड लेडी कैरेन पेंस और कांग्रेस को भी शुक्रिया कहा. राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम लेडी मेलानिया ट्रंप फ्लोरिडा के लिए ज्वाइंट बेस एंड्रयूज छोड़ने वाले हैं. उन्होंने अपने परिवार का धन्यवाद दिया और 'हमेशा लड़ने' की कसम खाई.
नए प्रशासन को शुभकामनाएं देते समय ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर बाइडेन का नाम नहीं लिया. प्लेन में बैठने से पहले उनके आखिरी शब्द थे, 'Have a good life, we will see you soon.' ट्रंप अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में मीडिया और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे. अपने अंतिम दिनों में उन्हें अपने कार्यकाल के दूसरे महाभियोग का सामना करना पड़ा था.
20 जनवरी को बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे. बाइडेन के साथ कमला हैरिस भी अमेरिका के उप राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण करेंगी. वो अमेरिका की पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली भारतीय-मूल की उप राष्ट्रपति होंगी. जो बाइडेन (Joe Biden) अपने शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले मंगलवार की शाम को वॉशिंगटन पहुंचे.
| Donald Trump Farewell : विदाई भाषण में भावुक हुए ट्रंप, बोले- गुड बाय, जल्द आपके बीच लौटेंगे! डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के लोगों से कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैंने आपके राष्ट्रपति के तौर पर काम किया. ट्रंप ने अपने विदाई भाषण में सभी साथियों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि ये चार साल अद्भुत रहे. इस दौरान हमने बहुत कुछ किया. उन्होंने अमेरिका के लोगों से कहा कि आप सभी को मेरा प्यार. ये मेरा सौभाग्य है कि मैंने आपके राष्ट्रपति के तौर पर काम किया. गुड बाय, जल्द आपके बीच लौटेंगे! ट्रंप ने कहा कि हमने मिलिट्री में काफी बदलाव किया. स्पेस फोर्स बनाया, टैक्स रिफॉर्म्स किया, जिससे लोगों को फायदा पहुंचा. हमने इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए काफी काम किया. राष्ट्रपति के तौर पर अपने संबोधन को खत्म करते हुए ट्रंप ने कहा वो अमेरिका के लिए हमेशा 'लड़ते' रहेंगे. उन्होंने कहा कि हमने सबसे जल्दी वैक्सीन बनाया और हम जल्द कोविड महामारी को काबू कर लेंगे. चीनी वायरस की वजह से हमने कई लोगों को खोया, आज हम उन सभी को याद करते हैं, मैं हमेशा उनके साथ हूं. ट्रंप ने आगामी प्रशासन को शुभकामनाएं दीं, साथ ही उपराष्ट्रपति माइक पेंस और सेकेंड लेडी कैरेन पेंस और कांग्रेस को भी शुक्रिया कहा. राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम लेडी मेलानिया ट्रंप फ्लोरिडा के लिए ज्वाइंट बेस एंड्रयूज छोड़ने वाले हैं. उन्होंने अपने परिवार का धन्यवाद दिया और 'हमेशा लड़ने' की कसम खाई. नए प्रशासन को शुभकामनाएं देते समय ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर बाइडेन का नाम नहीं लिया. प्लेन में बैठने से पहले उनके आखिरी शब्द थे, 'Have a good life, we will see you soon.' ट्रंप अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में मीडिया और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे. अपने अंतिम दिनों में उन्हें अपने कार्यकाल के दूसरे महाभियोग का सामना करना पड़ा था. बीस जनवरी को बाइडेन अमेरिका के छियालीसवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे. बाइडेन के साथ कमला हैरिस भी अमेरिका के उप राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण करेंगी. वो अमेरिका की पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली भारतीय-मूल की उप राष्ट्रपति होंगी. जो बाइडेन अपने शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले मंगलवार की शाम को वॉशिंगटन पहुंचे. |
घटना नागौर जिले के पांचौड़ी थाने करणु सर्विस सेंटर की है. आरोप है कि इस सर्विस सेंटर के कर्मचारियों ने दो युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए मारपीट की.
नागौर से एक बार फिर से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है. यहां पर दो युवकों के साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की गई. वहीं एक युवक के प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने का मामला सामने आया है.
दोनों युवकों से मारपीट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. घटना नागौर जिले के पांचौड़ी थाने स्थित करणु सर्विस सेंटर की है. आरोप है कि इस सर्विस सेंटर के कर्मचारियों ने दो युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए मारपीट की.
इस घटना पर पीड़ित के भाई की ओर से थाने में रिपोर्ट दी गई है. वहीं इस पूरे मामले को लेकर नागौर के ASP रामकुमार कस्वां ने बताया कि घटना 16 फरवरी की बताई जा रही है. इस मामले में घीसाराम और पन्नालाल दोनों युवक बाइक सर्विस स्टेशन पर गए. जहां पर सर्विस सेंटर के कर्मचारियों ने दोनों युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए बेरहमी के साथ मारपीट की.
इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से थाने में मामला दर्ज हुआ है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. घटना को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
वहीं इस मामले को लेकर गुरुवार को विधानसभा में दलित अत्याचार का मुद्दा उठा. विधानसभा में वाक आउट के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के तीनों विधायक सदन की सीढ़ियों पर धरना देकर बैठ गए.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर घटना की निंदा की है. उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा है.
The recent video of two young Dalit men being brutally tortured in Nagaur, Rajasthan is horrific sickening. I urge the state Government to take immediate action to bring the perpetrators of this shocking crime to justice.
सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि नागौर की भयावह घटना में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की गई है. सात आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाएगी. हमारी प्राथिमकता पीड़ितों को न्याय दिलाने की रहेगी.
In the horrific incident in Nagaur, immediate and effective action has been taken and seven accused have been arrested so far. Nobody will be spared. The culprits will be punished according to the law and we will ensure that the victims get justice.
| घटना नागौर जिले के पांचौड़ी थाने करणु सर्विस सेंटर की है. आरोप है कि इस सर्विस सेंटर के कर्मचारियों ने दो युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए मारपीट की. नागौर से एक बार फिर से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है. यहां पर दो युवकों के साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की गई. वहीं एक युवक के प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने का मामला सामने आया है. दोनों युवकों से मारपीट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. घटना नागौर जिले के पांचौड़ी थाने स्थित करणु सर्विस सेंटर की है. आरोप है कि इस सर्विस सेंटर के कर्मचारियों ने दो युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए मारपीट की. इस घटना पर पीड़ित के भाई की ओर से थाने में रिपोर्ट दी गई है. वहीं इस पूरे मामले को लेकर नागौर के ASP रामकुमार कस्वां ने बताया कि घटना सोलह फरवरी की बताई जा रही है. इस मामले में घीसाराम और पन्नालाल दोनों युवक बाइक सर्विस स्टेशन पर गए. जहां पर सर्विस सेंटर के कर्मचारियों ने दोनों युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए बेरहमी के साथ मारपीट की. इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से थाने में मामला दर्ज हुआ है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. घटना को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं इस मामले को लेकर गुरुवार को विधानसभा में दलित अत्याचार का मुद्दा उठा. विधानसभा में वाक आउट के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीनों विधायक सदन की सीढ़ियों पर धरना देकर बैठ गए. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर घटना की निंदा की है. उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा है. The recent video of two young Dalit men being brutally tortured in Nagaur, Rajasthan is horrific sickening. I urge the state Government to take immediate action to bring the perpetrators of this shocking crime to justice. सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि नागौर की भयावह घटना में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की गई है. सात आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाएगी. हमारी प्राथिमकता पीड़ितों को न्याय दिलाने की रहेगी. In the horrific incident in Nagaur, immediate and effective action has been taken and seven accused have been arrested so far. Nobody will be spared. The culprits will be punished according to the law and we will ensure that the victims get justice. |
के उत्तराध के कर्ता, चारण, चाणूर अध्र, देवकुल, पचमहाशब्द, पाणिनी की कविता, भारद्वाज गृह्यमूत्र यूनानी प्राकृत सिंहलद्वीप मे महाकवि कालिदास का समाधिस्थल प्रवत सुटरी डिगल न्यायघण्टा, पुरानी पगडी राजाम्रो को नियत से बरक्त हूण बौद्धा के काल में भारतवप मारेसि मोहि कुठाऊ, पुरान राजाम्रो की चिट्ठिया गोदानम् वैदिक पटतप तथा पुरानी हिन्दी आदि प्रमुख निबंध है। यू तो पण्डित जी व निवाघो की संख्या 100 के करीब है परन्तु उनके केवल 25-26 निर धो का प्रकाशन ही काशी नागरी प्रचारिणी सभा गुलरी ग्राथ के अन्तगत कर पाई। गुलेरी जी की समस्त कृतिया को प्रकाशित करने की योजना काशी नागरी प्रचारिणी सभा ने सूयकुमारी पुस्तवमाला के प्रतगत गुलेरी ग्राथ शोषक म 800 पृष्ठो मे स्वीकृत की थी । गुलेरी प्रात्य वी इतिहास, भाषा रचना और प्रालोचना इन चार काटियो मे प्रकाशित होन की याजना दुर्भाग्यवश पूरा न हो सकी और वाशी नागरी प्रचारिणी सभा न (जिसको गुलेरी जी अपनी स्वजाया क्या की तरह मानत थे) केवल गुलेरी ग्रन्थ का पहला भाग, इतिहास ही स्व कृष्णाजीक सम्पादन में प्रकाशित करके अपने कर्तव्य की इतिश्री समझो । पुरानी हिंदी शोषव से गुलेरी जी के कई निर्बंध नागरी प्रचारिणी पत्रिका के भाग दो मे प्रकाशित हुए थे जिन मे से शौरसैनी, पैशाची, भूतभाषा अपभ्रंश, शारङ्गधर पद्धति से उद्धत प्रकरण प्रमुख हैं। प्रसिद्ध जैन प्राचाय मेहतुग का प्रबंध चितामरिण जो स 1361 में लिखा गया था पर गुलेरी जो न विद्वत्तापूर्ण व्याख्याए लिखी । पुराने हिन्दी कवि राजा मुझ ने कृतित्व को व ही स्वय प्रकाश में लाए
प चन्द्रधर शर्मा को साहित्यिक प्रतिभा की महत्वपूर्ण गति व विशेषता यह थी कि वे 'क्ल्पभेदेन व्याख्ययम् सिद्धान्त के अनुसार ही शास्त्रीय, और साहित्यिक समस्याश्रा की सहज व्याख्या करते थे । गायकवाड संस्कृत सोरीज मे काव्यमाला के अन्तगत प्रकाशित सोमप्रभ और सिद्धपाल की रचनाम्रो के 16 उदाहरणो का विवेचन करके उन्हाने इनका कही खण्डन व कहीं मण्डन किया है । खड़ी बोली, जिसे गुलेरी जो म्लेच्छ भाषा का नाम दते हैं के अध्ययन मे उन्हान भूषण कविराज को 'शिवा वादनी' पर मुसलमानी प्रभाव को स्वीकारा है। पुरानी हिन्दी ग्रथ पुरानी हिन्दी ग्राथ मे पृष्ठ 115 से 124 तक हेमचन्द्र के व्याकरण और कुमारपालचरित म से पाणिनी पर उनका विद्वत्तापूर्ण लेख पतजलि के 'शोभना खलु पाणिनिता सूत्रस्य कृति
सिद्ध करता है । जहा वे पारिणनि के मत से असहमत हैं वहा स्थान-स्थान पर होंने अपनी पूरा प्रसहमति भी व्यक्त की है। इसी प्रकार हमचद्र व्याकरणयुक्त रचना पर भी उन्होंने बहुत अधिक लिखा । हेमचंद्र व्याकरण | के उत्तराध के कर्ता, चारण, चाणूर अध्र, देवकुल, पचमहाशब्द, पाणिनी की कविता, भारद्वाज गृह्यमूत्र यूनानी प्राकृत सिंहलद्वीप मे महाकवि कालिदास का समाधिस्थल प्रवत सुटरी डिगल न्यायघण्टा, पुरानी पगडी राजाम्रो को नियत से बरक्त हूण बौद्धा के काल में भारतवप मारेसि मोहि कुठाऊ, पुरान राजाम्रो की चिट्ठिया गोदानम् वैदिक पटतप तथा पुरानी हिन्दी आदि प्रमुख निबंध है। यू तो पण्डित जी व निवाघो की संख्या एक सौ के करीब है परन्तु उनके केवल पच्चीस-छब्बीस निर धो का प्रकाशन ही काशी नागरी प्रचारिणी सभा गुलरी ग्राथ के अन्तगत कर पाई। गुलेरी जी की समस्त कृतिया को प्रकाशित करने की योजना काशी नागरी प्रचारिणी सभा ने सूयकुमारी पुस्तवमाला के प्रतगत गुलेरी ग्राथ शोषक म आठ सौ पृष्ठो मे स्वीकृत की थी । गुलेरी प्रात्य वी इतिहास, भाषा रचना और प्रालोचना इन चार काटियो मे प्रकाशित होन की याजना दुर्भाग्यवश पूरा न हो सकी और वाशी नागरी प्रचारिणी सभा न केवल गुलेरी ग्रन्थ का पहला भाग, इतिहास ही स्व कृष्णाजीक सम्पादन में प्रकाशित करके अपने कर्तव्य की इतिश्री समझो । पुरानी हिंदी शोषव से गुलेरी जी के कई निर्बंध नागरी प्रचारिणी पत्रिका के भाग दो मे प्रकाशित हुए थे जिन मे से शौरसैनी, पैशाची, भूतभाषा अपभ्रंश, शारङ्गधर पद्धति से उद्धत प्रकरण प्रमुख हैं। प्रसिद्ध जैन प्राचाय मेहतुग का प्रबंध चितामरिण जो स एक हज़ार तीन सौ इकसठ में लिखा गया था पर गुलेरी जो न विद्वत्तापूर्ण व्याख्याए लिखी । पुराने हिन्दी कवि राजा मुझ ने कृतित्व को व ही स्वय प्रकाश में लाए प चन्द्रधर शर्मा को साहित्यिक प्रतिभा की महत्वपूर्ण गति व विशेषता यह थी कि वे 'क्ल्पभेदेन व्याख्ययम् सिद्धान्त के अनुसार ही शास्त्रीय, और साहित्यिक समस्याश्रा की सहज व्याख्या करते थे । गायकवाड संस्कृत सोरीज मे काव्यमाला के अन्तगत प्रकाशित सोमप्रभ और सिद्धपाल की रचनाम्रो के सोलह उदाहरणो का विवेचन करके उन्हाने इनका कही खण्डन व कहीं मण्डन किया है । खड़ी बोली, जिसे गुलेरी जो म्लेच्छ भाषा का नाम दते हैं के अध्ययन मे उन्हान भूषण कविराज को 'शिवा वादनी' पर मुसलमानी प्रभाव को स्वीकारा है। पुरानी हिन्दी ग्रथ पुरानी हिन्दी ग्राथ मे पृष्ठ एक सौ पंद्रह से एक सौ चौबीस तक हेमचन्द्र के व्याकरण और कुमारपालचरित म से पाणिनी पर उनका विद्वत्तापूर्ण लेख पतजलि के 'शोभना खलु पाणिनिता सूत्रस्य कृति सिद्ध करता है । जहा वे पारिणनि के मत से असहमत हैं वहा स्थान-स्थान पर होंने अपनी पूरा प्रसहमति भी व्यक्त की है। इसी प्रकार हमचद्र व्याकरणयुक्त रचना पर भी उन्होंने बहुत अधिक लिखा । हेमचंद्र व्याकरण |
शाहीन बाग वाली ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान ने कहा कि दिल्ली की जनता ने आज भाजपा और अमित शाह जी को करंट लगाने का काम किया है। ये काम की जीत हुई है और नफरत की हार। मैंने नहीं जनता ने रिकॉर्ड तोड़ा है।
पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने कहा कि हम दिल्ली चुनाव परिणाम को स्वीकार करते हैं। अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की जनता को बधाई देते हैं।
हमने पूरी कोशिश की लेकिन, शायद हम राज्य के लोगों को मना नहीं सके। मुझे उम्मीद है कि अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्रित्व काल में दिल्ली का विकास होगा।
| शाहीन बाग वाली ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान ने कहा कि दिल्ली की जनता ने आज भाजपा और अमित शाह जी को करंट लगाने का काम किया है। ये काम की जीत हुई है और नफरत की हार। मैंने नहीं जनता ने रिकॉर्ड तोड़ा है। पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने कहा कि हम दिल्ली चुनाव परिणाम को स्वीकार करते हैं। अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की जनता को बधाई देते हैं। हमने पूरी कोशिश की लेकिन, शायद हम राज्य के लोगों को मना नहीं सके। मुझे उम्मीद है कि अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्रित्व काल में दिल्ली का विकास होगा। |
ध्येय या कक्ष्य से महाकाव्य लिखने बैठता है। अपनी कला के विषय मे अत्यधिक सचेत होने से उसकी शैली परिष्कृत होती है और इस परिष्कृत शैली मे निर्मित महाकाव्य कलापूर्ण या अलंकृत महाकाव्य कहा जाता है' । इस प्रकार महाकाव्य के दो स्वरूप सामने आते हैं। (१) मापं और (२) विदग्ध
आर्ष महाकाव्य का स्वरूप
महाकाव्यों का विकास ऐतिहासिक एव तात्विक दृष्टि से अधिक स्प रूप से समझने के लिये महाभारत रामायण जैसे विकसनशील महाकाव्यो को आर्ष काव्य कहा गया है । कवि विश्वनाथ ने साहित्य दर्पण मे ( ६, ३२५ ) रामायण महाभारत को 'आर्ष, विशेषण अधिक जोडकर उनकी प्राथमिकता, प्राचीनता, प्रामाणिकता, पवित्रता एव स्वाभाविक विकसनशीलतादि गुणो को व्यक्त करते हुये, उत्तरकालीन संस्कृतिजन्य महाकाव्यो रघुवश, किंगत, माघ, को इनसे अलग कर दिया है। आषं से तात्पर्य ऋषिप्रणीत से है । ऋषिप्रणीत होने से उक्त भाव प्राचीनतादि एवं स्वयस्फूर्तता तथा ऋषिदर्शनादिभाव उसमे स्वयमेव ही निहित है। कवि को ऋषि कहा गया है। मट्टतौत ने कवि को ऋषि कहते हुये उसे स्वयंप्रज्ञ एव द्रष्टा कहा है । और उदाहरण स्वरूप आदिकवि वाल्मीकि को उद्धृत किया है। वस्तु में निहित भाववैचित्र्य, धर्म एवं तत्व को सम्यकरीत्या अवगत करने वाला व्यक्ति 'ऋषि' शब्द से अभिहित होता है । कवि को भी कान्तदर्शी 'कवय क्रान्तदशिन ' कहा गया है। किन्तु दोनो मे थोडा अन्तर है । यावत् वस्तुतत्व को अवगत कर, उससे अनुभूत वस्तुतत्व को वह अपने सरस शब्दो मे व्यक्त नहीं करता है, तावत् वह कविशब्दवाच्य नहीं हो सकता है। इस प्रकार कवि की कल्पना मे दर्शन के साथ साथ सरस वर्णन का भी मनोरम सामजस्य है ।
१. A man would decide that he would like best to be an epic poet and he would set out, in consious determination, on an epic poem The result good or bad, of such a determination is calla Literary Epic
The Epic. The Art and Craft of letters. L. Abercrombiec. Page 21.
२. 'दर्शनात् वर्णनाच्चाथ रूढ़ालोके कविश्रुति
तथाहि दर्शने स्वच्छे नित्येऽप्यादिकवेर्मुने.
नोदिता कविता लोके यावज्जाता न वर्णना ।। आदिपर्व ५५ अ. प्र.
इसके अतिरिक्त आनन्दवर्धन ने ध्वन्यालोक मे उद्योत ३ रामायण महाभारत को इतिवृत्तप्रधान, कथाश्रय एवं सिद्धरसप्रख्य कहा है । इनसे आर्ष काव्य के विशेषण एवं निम्नलिखित तत्व स्पष्ट होते हैं । (१) आर्ष महाकाव्य ऋषिप्रणीत प्राचीन, स्वयंस्फूर्त, सत्य एव प्राथमिकता से इतिहास कथन करने वाले होते हैं । पाश्चात्य आलोचकों ने भी इसी प्रकार के कुछ विशेषणों का प्रयोग विकसनशील या सकलनात्मकम Epic of growth महाकाव्यो के लिये किया है primitive आद्य प्राकृतिक अवस्था के द्योतक, ( primary ) ( मूल आधारभूत ( Natural ) निसर्गस्फूर्त, Authentic सत्य, प्रामाणिक, Communal विशिष्ट जमात, सघ या वंश से सम्बन्धित ( Popular ) लोक जीवन स्पर्शी, राष्ट्रीय ( Oral ) लोकसमुदाय के सामने मौखिक रूप से कही या गाई जानेवाली ( Epic of Growth ) विकसनशील या
सकलनात्मक ।
उपर्युक्त इन दोनो काव्यो मे ( १ ) आर्ष (२) संस्कृत अलंकृत-भेद प्रतिपा दन करने वाले विशेषण का प्रयोग भामहादि से लेकर साहित्य दर्पणकार तक किसी आचार्य ने नही किया है। सर्वप्रथम विश्वनाथ ने ही आर्ष विशेषण का प्रयोग कर पूर्वकालीन संस्कृति की ओर संकेत किया । यद्यपि ध्वनिकार आनन्दवर्धन ने महाभारत को महाकाव्यात्मक शास्त्र कहा है। फिर भी इस प्रयुक्त विशेषण से उसके स्वरूप विकास का संकेत नही मिलने पाता जो आर्ष से मिलता है । इन आर्ष महाकाव्यो रामायण महाभारत ने ही उत्तरकालीन संस्कृत महाकाव्यो रघुवंशादि को अपने जीवन से अनुप्रारिणत किया है यह हम आगे देखेंगे ।
अतः इन प्राचीन काव्योपजीवी नवीन काव्यो के लिये संस्कृत के अलंकृत रघुवशमाघादि 'विदग्ध, विशेषण यदि अधिक जोड़ दिया जाय तो अधिक समीचीन प्रतीत होता है। विदूग्ध महाकाव्यो से तात्पर्य उत्तरकालीन संस्कृति सभ्यता की परिवर्तित धारा में प्राचीन काव्यों के आधार पर ही विशिष्ट
१. सन्ति सिद्धरसप्रख्या ये च रामायणादय कथाश्रया न तैयज्या स्वेच्छा रसविरोधिनी ।
ध्वन्यालोक कारिका १४, उद्योत ३
२ 'अस्मिन्नार्षे पुन सर्गा भवन्त्याख्यानसंज्ञका
अस्मिन्महाकाव्ये यथा महाभारतम् । सा दर्पण ६ ३२५
३ महाभारतेऽपि शास्त्ररूपे काव्यछायान्वयिनि.........
ध्वन्यालोक ४यं उद्योत
हेतु चातुर्य, विद्वत्ता, एव कलामण्डित महाकाव्य से है । पाश्चात्य आलोचको ने भी इसी अर्थ मे Epic of Growth ईलियड, ओडेसी व वेल्फ की विकसनशील प्रामाणिक, प्राचीन महाकाव्य और एनीड पेरेडाइज् लोस्ट को विदग्धमहाकाव्य, कलायुक्त Literary परोपजीवी, Secondary कृत्रिम Artificial राजसभा निमित्तकृत, या राजप्रशस्ति पर Epics of Culture नवसंस्कृत प्रधान classical नियमवद्ध, आदर्शदर्शी written विशिष्ट पाठको के लिये लिखी हुई कहा है । उपर्युक्त सभी विशेषण संस्कृत के महाकाव्यो, रघु, किरात, माधादि के लिये अधिक उपयुक्त एव समीचीन है । इन सभी विशेषणो के लिये उपयुक्त एव सर्वव्यापी विशेषण विदग्ध ही है। इस विदग्ध शब्द मे चातुर्य कलात्मकता, पाडित्य, नागरिकता, एव सास्कृतिक विकासादि प्रमुख अर्थछटा निहित है ।
विदग्ध का यौगिक अर्थ विशिष्ट प्रकार से भुजा हुआ well roasted वि + दह + क्त है। अपक्व मूल खाद्य वस्तु को प्रथम सुखाकर बाद मे पकाकर Baked or Toasted दग्ध उपयोग में लाया जाता है। अर्थात् इससे तात्पर्य' प्राकृतिक खाद्य वस्तु को सुसकृत नागरिक मनुष्य के द्वारा विशिष्ट सस्कारों से संस्कृत कर उपयोग में लाये हुए पक्व या सम्वृत अन्न से है ।
'सुश्रुत मे विग्ध अन्न का उल्लेख मिलता है ।' त्रिकाण्डकोश व शब्द रत्नावली कोश के अनुसार प्राकृतिक वस्तु पर मानव द्वारा बुद्धिपूर्वक किये हुये सस्कारों को विदग्ध शब्द द्योतित करता है । रसमंजरी, मे विदग्ध, एक नायिकाप्रकार के लिये प्रयोग किया गया है यह नायिका
१ विदग्ध त्रि (वि. + दह + क्त ) छेक, कुशल नागर विदग्धाया विदग्धेन संग्मोगुणवान् भवेत् । इति देवी भागवते ९ निपुण, लिप्तं न मुखं नाग्म् न पक्षती चरण परागेण अस्पृशतेव नलिन्या विदग्धमधुपेन मधुपीतम्' इति आर्यासप्तशत्याम् । ५०६ । पिडित विशेषेणदग्ध । २ शोफयोरुपनाहतु कुर्यादामविदग्धयो । अविदग्ध शम याति विदग्ध पाकमेति च इति सुश्रुते । ४ । १ । ३८५ पेज ६१२ हलायुध कोश ३. उपपति सभोगोपयोगिवचनक्रियाऽन्यतर नैपुण्यं विदग्धात्वम्, वाक्रियाम्या विदग्धा विदधा विभक्तुमाह विदग्धा च द्विषा वाग्विदग्धा क्रिया विदग्धा च,
पत्र न ० ५५ रसमजरी, चतुर्थमणि महाकाविभानुदतमिश्रविरचिता
क्रियाचतुर एवं भाषण चतुर होती है। किन्तु विग्ध शब्द से थोतित होनेवाली अर्थ छटाओ की कलात्मकता नागरिकता, चातुर्य आदि का आर्ष काव्य मे अभाव समझना भ्रम है । संस्कृत महाकाव्यो मे उपर्युक्त गुण ( सुसंवद्धता एवं गठन सहेतुकता, और चमत्कारप्रियतादि ) उत्तरकालीन संस्कृत एव सभ्यता की विकासावस्थाजन्य ही है। यह आगे देखेंगे ।
आपकाव्यो का महत्व *
ये दोनो आर्ष काव्य, पाश्चात्य विद्वानो के अनुसार, कपोलकल्पित या केवल रूपक भी नही है ( Allegory )। मनुष्य जीवन के उद्देश्यरूप धर्म अर्थ, काम और मोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थ की शिक्षा देते हैं । लोकिक भावो से युक्त होने पर भी ऐतिहासिक घटनाओं को अभिव्यक्त करते हैं । तत्कालीन मानव का प्रतिमानुष शक्ति पर अधिक विश्वास होने से एवं कथा केन्द्रस्थ मानव का महत्व प्रतिपादन करने के हेतु ही इनमे देव दानवो की नियोजना को गई है। धर्म स्वरूप राम एवं पाण्डवो के पथ मे जो पद पद पर विषमताये एवं अवरोध है, वे केवल सद्गुण-दुर्गणो के प्रतीक स्वरूप है । महाकाव्यो की प्रत्येक कथा या विशिष्ट प्रसंग, मानवी जीवन का गंभीर अर्थ और चिरन्तन सत्य की ही द्योतक है । मानवी मन सदा एक रूप होने से, मानवी कार्य सदा पूर्ववत् हो घटित होते है और सुख-दुख के वे ही अनुभव आते है । द्रौपदी का स्वाभिमान, रावण को परस्त्रीलोलुपवृत्ति, भीम एव वेओउल्फ की साहस प्रियता, राम, धर्मराज एव युलिसीम की धैर्यवृत्ति, सीता, सावित्री की पतिभक्ति, दुर्योधन दुःशासन की दीर्घद्वेष वृत्ति भावना, शकुनि की कपटमनोवृत्ति आदि मनोविकारो का चित्रण इतना सुस्पष्ट एवं सूक्ष्म हुआ है कि इन सभी मनोविकारो की प्रतिध्वनि आज भी तत् तत् परिस्थितियों मे सुनाई पड़ती है ।
इसीलिये कुछ विद्वानों ने आर्ष काव्यो में, त्रिकालाबाधित चिरन्तन सत्य को देखकर इन्हे इतिहास की पुनरावृत्ति के रूप मे स्वीकार किया है। इन काव्यो में वर्णित घटनाओं के द्वारा प्राचीन कवि ने मानवी जीवन के कुछ त्रिकालावाधित विचार सिद्धान्त रूप मे प्रतिपादित किये हैं।
पाडवो जैसे पराक्रमी वीरों एवं श्रीकृष्ण जैसे कुशल राजनीतिज्ञ होने पर भी, वीर अभिमन्यु का वध होना, रामलक्ष्मण एव पाण्डवों का वनवास, आदि बातें नियति की सर्वशक्तिमत्ता ही निश्चित करती है। चौदह वर्ष के पश्चात् कण्टकाकीर्ण वनवास करके जब श्री रामचन्द्र जी अयोध्या लौटे और
* संस्कृत काव्याचे पञ्चप्राण - डॉ० ब्राटवे १० १८-२४ | ध्येय या कक्ष्य से महाकाव्य लिखने बैठता है। अपनी कला के विषय मे अत्यधिक सचेत होने से उसकी शैली परिष्कृत होती है और इस परिष्कृत शैली मे निर्मित महाकाव्य कलापूर्ण या अलंकृत महाकाव्य कहा जाता है' । इस प्रकार महाकाव्य के दो स्वरूप सामने आते हैं। मापं और विदग्ध आर्ष महाकाव्य का स्वरूप महाकाव्यों का विकास ऐतिहासिक एव तात्विक दृष्टि से अधिक स्प रूप से समझने के लिये महाभारत रामायण जैसे विकसनशील महाकाव्यो को आर्ष काव्य कहा गया है । कवि विश्वनाथ ने साहित्य दर्पण मे रामायण महाभारत को 'आर्ष, विशेषण अधिक जोडकर उनकी प्राथमिकता, प्राचीनता, प्रामाणिकता, पवित्रता एव स्वाभाविक विकसनशीलतादि गुणो को व्यक्त करते हुये, उत्तरकालीन संस्कृतिजन्य महाकाव्यो रघुवश, किंगत, माघ, को इनसे अलग कर दिया है। आषं से तात्पर्य ऋषिप्रणीत से है । ऋषिप्रणीत होने से उक्त भाव प्राचीनतादि एवं स्वयस्फूर्तता तथा ऋषिदर्शनादिभाव उसमे स्वयमेव ही निहित है। कवि को ऋषि कहा गया है। मट्टतौत ने कवि को ऋषि कहते हुये उसे स्वयंप्रज्ञ एव द्रष्टा कहा है । और उदाहरण स्वरूप आदिकवि वाल्मीकि को उद्धृत किया है। वस्तु में निहित भाववैचित्र्य, धर्म एवं तत्व को सम्यकरीत्या अवगत करने वाला व्यक्ति 'ऋषि' शब्द से अभिहित होता है । कवि को भी कान्तदर्शी 'कवय क्रान्तदशिन ' कहा गया है। किन्तु दोनो मे थोडा अन्तर है । यावत् वस्तुतत्व को अवगत कर, उससे अनुभूत वस्तुतत्व को वह अपने सरस शब्दो मे व्यक्त नहीं करता है, तावत् वह कविशब्दवाच्य नहीं हो सकता है। इस प्रकार कवि की कल्पना मे दर्शन के साथ साथ सरस वर्णन का भी मनोरम सामजस्य है । एक. एम्पीयर man would decide that he would like best to be an epic poet and he would set out, in consious determination, on an epic poem The result good or bad, of such a determination is calla Literary Epic The Epic. The Art and Craft of letters. L. Abercrombiec. Page इक्कीस. दो. 'दर्शनात् वर्णनाच्चाथ रूढ़ालोके कविश्रुति तथाहि दर्शने स्वच्छे नित्येऽप्यादिकवेर्मुने. नोदिता कविता लोके यावज्जाता न वर्णना ।। आदिपर्व पचपन अ. प्र. इसके अतिरिक्त आनन्दवर्धन ने ध्वन्यालोक मे उद्योत तीन रामायण महाभारत को इतिवृत्तप्रधान, कथाश्रय एवं सिद्धरसप्रख्य कहा है । इनसे आर्ष काव्य के विशेषण एवं निम्नलिखित तत्व स्पष्ट होते हैं । आर्ष महाकाव्य ऋषिप्रणीत प्राचीन, स्वयंस्फूर्त, सत्य एव प्राथमिकता से इतिहास कथन करने वाले होते हैं । पाश्चात्य आलोचकों ने भी इसी प्रकार के कुछ विशेषणों का प्रयोग विकसनशील या सकलनात्मकम Epic of growth महाकाव्यो के लिये किया है primitive आद्य प्राकृतिक अवस्था के द्योतक, निसर्गस्फूर्त, Authentic सत्य, प्रामाणिक, Communal विशिष्ट जमात, सघ या वंश से सम्बन्धित लोक जीवन स्पर्शी, राष्ट्रीय लोकसमुदाय के सामने मौखिक रूप से कही या गाई जानेवाली विकसनशील या सकलनात्मक । उपर्युक्त इन दोनो काव्यो मे आर्ष संस्कृत अलंकृत-भेद प्रतिपा दन करने वाले विशेषण का प्रयोग भामहादि से लेकर साहित्य दर्पणकार तक किसी आचार्य ने नही किया है। सर्वप्रथम विश्वनाथ ने ही आर्ष विशेषण का प्रयोग कर पूर्वकालीन संस्कृति की ओर संकेत किया । यद्यपि ध्वनिकार आनन्दवर्धन ने महाभारत को महाकाव्यात्मक शास्त्र कहा है। फिर भी इस प्रयुक्त विशेषण से उसके स्वरूप विकास का संकेत नही मिलने पाता जो आर्ष से मिलता है । इन आर्ष महाकाव्यो रामायण महाभारत ने ही उत्तरकालीन संस्कृत महाकाव्यो रघुवंशादि को अपने जीवन से अनुप्रारिणत किया है यह हम आगे देखेंगे । अतः इन प्राचीन काव्योपजीवी नवीन काव्यो के लिये संस्कृत के अलंकृत रघुवशमाघादि 'विदग्ध, विशेषण यदि अधिक जोड़ दिया जाय तो अधिक समीचीन प्रतीत होता है। विदूग्ध महाकाव्यो से तात्पर्य उत्तरकालीन संस्कृति सभ्यता की परिवर्तित धारा में प्राचीन काव्यों के आधार पर ही विशिष्ट एक. सन्ति सिद्धरसप्रख्या ये च रामायणादय कथाश्रया न तैयज्या स्वेच्छा रसविरोधिनी । ध्वन्यालोक कारिका चौदह, उद्योत तीन दो 'अस्मिन्नार्षे पुन सर्गा भवन्त्याख्यानसंज्ञका अस्मिन्महाकाव्ये यथा महाभारतम् । सा दर्पण छः तीन सौ पच्चीस तीन महाभारतेऽपि शास्त्ररूपे काव्यछायान्वयिनि......... ध्वन्यालोक चारयं उद्योत हेतु चातुर्य, विद्वत्ता, एव कलामण्डित महाकाव्य से है । पाश्चात्य आलोचको ने भी इसी अर्थ मे Epic of Growth ईलियड, ओडेसी व वेल्फ की विकसनशील प्रामाणिक, प्राचीन महाकाव्य और एनीड पेरेडाइज् लोस्ट को विदग्धमहाकाव्य, कलायुक्त Literary परोपजीवी, Secondary कृत्रिम Artificial राजसभा निमित्तकृत, या राजप्रशस्ति पर Epics of Culture नवसंस्कृत प्रधान classical नियमवद्ध, आदर्शदर्शी written विशिष्ट पाठको के लिये लिखी हुई कहा है । उपर्युक्त सभी विशेषण संस्कृत के महाकाव्यो, रघु, किरात, माधादि के लिये अधिक उपयुक्त एव समीचीन है । इन सभी विशेषणो के लिये उपयुक्त एव सर्वव्यापी विशेषण विदग्ध ही है। इस विदग्ध शब्द मे चातुर्य कलात्मकता, पाडित्य, नागरिकता, एव सास्कृतिक विकासादि प्रमुख अर्थछटा निहित है । विदग्ध का यौगिक अर्थ विशिष्ट प्रकार से भुजा हुआ well roasted वि + दह + क्त है। अपक्व मूल खाद्य वस्तु को प्रथम सुखाकर बाद मे पकाकर Baked or Toasted दग्ध उपयोग में लाया जाता है। अर्थात् इससे तात्पर्य' प्राकृतिक खाद्य वस्तु को सुसकृत नागरिक मनुष्य के द्वारा विशिष्ट सस्कारों से संस्कृत कर उपयोग में लाये हुए पक्व या सम्वृत अन्न से है । 'सुश्रुत मे विग्ध अन्न का उल्लेख मिलता है ।' त्रिकाण्डकोश व शब्द रत्नावली कोश के अनुसार प्राकृतिक वस्तु पर मानव द्वारा बुद्धिपूर्वक किये हुये सस्कारों को विदग्ध शब्द द्योतित करता है । रसमंजरी, मे विदग्ध, एक नायिकाप्रकार के लिये प्रयोग किया गया है यह नायिका एक विदग्ध त्रि छेक, कुशल नागर विदग्धाया विदग्धेन संग्मोगुणवान् भवेत् । इति देवी भागवते नौ निपुण, लिप्तं न मुखं नाग्म् न पक्षती चरण परागेण अस्पृशतेव नलिन्या विदग्धमधुपेन मधुपीतम्' इति आर्यासप्तशत्याम् । पाँच सौ छः । पिडित विशेषेणदग्ध । दो शोफयोरुपनाहतु कुर्यादामविदग्धयो । अविदग्ध शम याति विदग्ध पाकमेति च इति सुश्रुते । चार । एक । तीन सौ पचासी पेज छः सौ बारह हलायुध कोश तीन. उपपति सभोगोपयोगिवचनक्रियाऽन्यतर नैपुण्यं विदग्धात्वम्, वाक्रियाम्या विदग्धा विदधा विभक्तुमाह विदग्धा च द्विषा वाग्विदग्धा क्रिया विदग्धा च, पत्र न शून्य पचपन रसमजरी, चतुर्थमणि महाकाविभानुदतमिश्रविरचिता क्रियाचतुर एवं भाषण चतुर होती है। किन्तु विग्ध शब्द से थोतित होनेवाली अर्थ छटाओ की कलात्मकता नागरिकता, चातुर्य आदि का आर्ष काव्य मे अभाव समझना भ्रम है । संस्कृत महाकाव्यो मे उपर्युक्त गुण उत्तरकालीन संस्कृत एव सभ्यता की विकासावस्थाजन्य ही है। यह आगे देखेंगे । आपकाव्यो का महत्व * ये दोनो आर्ष काव्य, पाश्चात्य विद्वानो के अनुसार, कपोलकल्पित या केवल रूपक भी नही है । मनुष्य जीवन के उद्देश्यरूप धर्म अर्थ, काम और मोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थ की शिक्षा देते हैं । लोकिक भावो से युक्त होने पर भी ऐतिहासिक घटनाओं को अभिव्यक्त करते हैं । तत्कालीन मानव का प्रतिमानुष शक्ति पर अधिक विश्वास होने से एवं कथा केन्द्रस्थ मानव का महत्व प्रतिपादन करने के हेतु ही इनमे देव दानवो की नियोजना को गई है। धर्म स्वरूप राम एवं पाण्डवो के पथ मे जो पद पद पर विषमताये एवं अवरोध है, वे केवल सद्गुण-दुर्गणो के प्रतीक स्वरूप है । महाकाव्यो की प्रत्येक कथा या विशिष्ट प्रसंग, मानवी जीवन का गंभीर अर्थ और चिरन्तन सत्य की ही द्योतक है । मानवी मन सदा एक रूप होने से, मानवी कार्य सदा पूर्ववत् हो घटित होते है और सुख-दुख के वे ही अनुभव आते है । द्रौपदी का स्वाभिमान, रावण को परस्त्रीलोलुपवृत्ति, भीम एव वेओउल्फ की साहस प्रियता, राम, धर्मराज एव युलिसीम की धैर्यवृत्ति, सीता, सावित्री की पतिभक्ति, दुर्योधन दुःशासन की दीर्घद्वेष वृत्ति भावना, शकुनि की कपटमनोवृत्ति आदि मनोविकारो का चित्रण इतना सुस्पष्ट एवं सूक्ष्म हुआ है कि इन सभी मनोविकारो की प्रतिध्वनि आज भी तत् तत् परिस्थितियों मे सुनाई पड़ती है । इसीलिये कुछ विद्वानों ने आर्ष काव्यो में, त्रिकालाबाधित चिरन्तन सत्य को देखकर इन्हे इतिहास की पुनरावृत्ति के रूप मे स्वीकार किया है। इन काव्यो में वर्णित घटनाओं के द्वारा प्राचीन कवि ने मानवी जीवन के कुछ त्रिकालावाधित विचार सिद्धान्त रूप मे प्रतिपादित किये हैं। पाडवो जैसे पराक्रमी वीरों एवं श्रीकृष्ण जैसे कुशल राजनीतिज्ञ होने पर भी, वीर अभिमन्यु का वध होना, रामलक्ष्मण एव पाण्डवों का वनवास, आदि बातें नियति की सर्वशक्तिमत्ता ही निश्चित करती है। चौदह वर्ष के पश्चात् कण्टकाकीर्ण वनवास करके जब श्री रामचन्द्र जी अयोध्या लौटे और * संस्कृत काव्याचे पञ्चप्राण - डॉशून्य ब्राटवे दस अट्ठारह-चौबीस |
स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली आज अपना 34वां जन्मदिन मना रहे हैं। जहां विश्व भर से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं मिल रही हैं और लोग उनका जन्मदिन मना रहे हैं, वहीं उनकी पत्नी और बाॅलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने भी उनकी कुछ अनदेखी तस्वीरें शेयर करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों की मलाकात एक टीवी एड के दौरान हुई थी जिसके बाद दोनों में प्यार बढ़ा और कुछ सालों बाद दोनों ने शादी कर ली। अब विराट और अनुष्का की एक बेटी भी है जिसका नाम वामिका है।
2013 में एक शैम्पू के ऐड शूट दौरान अनुष्का और विराट मिले थे। इसके बाद दोनों में डेटिंग का सिलसिला शुरू हुआ। 2014 के साउथ अफ्रीका टूर के दौरान तब इन अफवाहों को बल मिला जब अनुष्का जहां इंडियन क्रिकेट टीम ठहरी थी, उस होटल में देखी गईं। इसके बाद मुंबई में विराट कोहली अनुष्का शर्मा को अपनी कार में उनके घर छोड़ते हुए भी नजर आए थे।
इन सब अफवाहों के बीच विराट कोहली और अनुष्का लगातार अपने रिलेशनशिप छिपा रहे थे। इसी बीच 2014 की फरवरी में दोनों को न्यूजीलैंड की गलियों में हाथों में हाथ डाले देखा गया। तब भी भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे पर थी, इसके बाद जब अनुष्का श्रीलंका में अपनी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' की शूटिंग के दौरान गई थी, तब वह विराट को उनके 26 वें जन्म दिवस पर बधाई देने के लिए उदयपुर आई थीं।
अफवाहें ज्यादा फैली तो 2014 के अंत में उन्होंने यह घोषणा कर ही दी कि वह एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। इस दौरान 2014 में ही श्रीलंका के खिलाफ एक मैच दौरान जब विराट कोहली ने शतक लगाया तो दर्शकों के बीच बैठी अनुष्का शर्मा की तरफ उन्होंने फ्लाइंग किस दिया था। तब से यह बात साफ हो गई थी कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। विराट कोहली ने भी खुलकर कहा कि हां, हम किसी से कुछ भी छिपाएंगे नहीं, क्योंकि हम आम इंसान हैं। आम इंसान की तरह हमें अपने रिलेशन को छिपाने की जरूरत नहीं है।
इसके बाद विराट और अनुष्का कई तरह के विज्ञापन में भी दिखे। विराट और अनुष्का ने मान्यवर के एक विज्ञापन में साथ काम किया। ये विज्ञापन एक शादी की थीम पर आधारित था, जिसमें दोनों एक-दूसरे से प्यार भरे वादे करते नजर आए। उनके विज्ञापन का यह वीडियो काफी वायरल हुआ और लोगों ने दोनों को काफी पसंद भी किया।
लम्बे समय तक रिलेशनशिप के बाद विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने इटली में दिसम्बर 2017 में शादी की थी। विराट और अनुष्का की शादी को पांच साल हो चुके हैं और अब वह माता-पिता बन चुके हैं। अनुष्का ने जनवरी 2021 में बेटी को जन्म दिया था जिसका नाम वामिका रखा गया है। हालांकि बेटी के जन्म के बाद से ही विराट और अनुष्का वामिका को कैमरे से दूर रखते आए हैं और फोटोग्राफरों और फैंस से भी प्राइवेसी का ध्यान रखने की कई बार अपील कर चुके हैं लेकिन फिर भी कई बार उनकी बेटी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं।
| स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली आज अपना चौंतीसवां जन्मदिन मना रहे हैं। जहां विश्व भर से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं मिल रही हैं और लोग उनका जन्मदिन मना रहे हैं, वहीं उनकी पत्नी और बाॅलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने भी उनकी कुछ अनदेखी तस्वीरें शेयर करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों की मलाकात एक टीवी एड के दौरान हुई थी जिसके बाद दोनों में प्यार बढ़ा और कुछ सालों बाद दोनों ने शादी कर ली। अब विराट और अनुष्का की एक बेटी भी है जिसका नाम वामिका है। दो हज़ार तेरह में एक शैम्पू के ऐड शूट दौरान अनुष्का और विराट मिले थे। इसके बाद दोनों में डेटिंग का सिलसिला शुरू हुआ। दो हज़ार चौदह के साउथ अफ्रीका टूर के दौरान तब इन अफवाहों को बल मिला जब अनुष्का जहां इंडियन क्रिकेट टीम ठहरी थी, उस होटल में देखी गईं। इसके बाद मुंबई में विराट कोहली अनुष्का शर्मा को अपनी कार में उनके घर छोड़ते हुए भी नजर आए थे। इन सब अफवाहों के बीच विराट कोहली और अनुष्का लगातार अपने रिलेशनशिप छिपा रहे थे। इसी बीच दो हज़ार चौदह की फरवरी में दोनों को न्यूजीलैंड की गलियों में हाथों में हाथ डाले देखा गया। तब भी भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे पर थी, इसके बाद जब अनुष्का श्रीलंका में अपनी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' की शूटिंग के दौरान गई थी, तब वह विराट को उनके छब्बीस वें जन्म दिवस पर बधाई देने के लिए उदयपुर आई थीं। अफवाहें ज्यादा फैली तो दो हज़ार चौदह के अंत में उन्होंने यह घोषणा कर ही दी कि वह एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। इस दौरान दो हज़ार चौदह में ही श्रीलंका के खिलाफ एक मैच दौरान जब विराट कोहली ने शतक लगाया तो दर्शकों के बीच बैठी अनुष्का शर्मा की तरफ उन्होंने फ्लाइंग किस दिया था। तब से यह बात साफ हो गई थी कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। विराट कोहली ने भी खुलकर कहा कि हां, हम किसी से कुछ भी छिपाएंगे नहीं, क्योंकि हम आम इंसान हैं। आम इंसान की तरह हमें अपने रिलेशन को छिपाने की जरूरत नहीं है। इसके बाद विराट और अनुष्का कई तरह के विज्ञापन में भी दिखे। विराट और अनुष्का ने मान्यवर के एक विज्ञापन में साथ काम किया। ये विज्ञापन एक शादी की थीम पर आधारित था, जिसमें दोनों एक-दूसरे से प्यार भरे वादे करते नजर आए। उनके विज्ञापन का यह वीडियो काफी वायरल हुआ और लोगों ने दोनों को काफी पसंद भी किया। लम्बे समय तक रिलेशनशिप के बाद विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने इटली में दिसम्बर दो हज़ार सत्रह में शादी की थी। विराट और अनुष्का की शादी को पांच साल हो चुके हैं और अब वह माता-पिता बन चुके हैं। अनुष्का ने जनवरी दो हज़ार इक्कीस में बेटी को जन्म दिया था जिसका नाम वामिका रखा गया है। हालांकि बेटी के जन्म के बाद से ही विराट और अनुष्का वामिका को कैमरे से दूर रखते आए हैं और फोटोग्राफरों और फैंस से भी प्राइवेसी का ध्यान रखने की कई बार अपील कर चुके हैं लेकिन फिर भी कई बार उनकी बेटी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। |
भोपालः 66 दिन बाद आखिरकार मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने चप्पल पहन ही लिया है। दरअसल, ग्वालियर की सड़कें सही नहीं थी और न हीं उनका निर्माण और न ही उनकी मरम्मत हो रही थी, ऐसे मे वे पिछले कई दिनों से इस बात से काफी नाराज थे।
इस कारण मंत्री जी ने एक दिन यह कहकर चप्पल-जूता को त्याग दिया था कि जब तक सड़कें नहीं बन जाती, वे अपने पैर में चप्पल-जूते नहीं पहनेंगे। ऐसे में अंत में मंत्री जी ने चप्पल पहन लिया और इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें उन्हें चप्पल पहनते हुए देखा गया है।
ऐसे में राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा चप्पल-जूता को त्यागने के बाद इलाके में सड़कों की मरम्मत शुरू हो गई थी और अब उन सड़कों का काम पूरा होने वाला है। ऐसे में जब सड़कें ठीक होने वाली है तो नगर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार को ग्वालियर पहुंचे और मंत्री तोमर को चप्पल पहनाना चाहा है।
उन्होंने मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सामने चप्पल रखा और उनसे आग्रह कर चप्पल पहनने को कहा है। इसके बाद मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने चप्पल पहन लिया।
| भोपालः छयासठ दिन बाद आखिरकार मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने चप्पल पहन ही लिया है। दरअसल, ग्वालियर की सड़कें सही नहीं थी और न हीं उनका निर्माण और न ही उनकी मरम्मत हो रही थी, ऐसे मे वे पिछले कई दिनों से इस बात से काफी नाराज थे। इस कारण मंत्री जी ने एक दिन यह कहकर चप्पल-जूता को त्याग दिया था कि जब तक सड़कें नहीं बन जाती, वे अपने पैर में चप्पल-जूते नहीं पहनेंगे। ऐसे में अंत में मंत्री जी ने चप्पल पहन लिया और इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें उन्हें चप्पल पहनते हुए देखा गया है। ऐसे में राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा चप्पल-जूता को त्यागने के बाद इलाके में सड़कों की मरम्मत शुरू हो गई थी और अब उन सड़कों का काम पूरा होने वाला है। ऐसे में जब सड़कें ठीक होने वाली है तो नगर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार को ग्वालियर पहुंचे और मंत्री तोमर को चप्पल पहनाना चाहा है। उन्होंने मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सामने चप्पल रखा और उनसे आग्रह कर चप्पल पहनने को कहा है। इसके बाद मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने चप्पल पहन लिया। |
पटनाः राज्य सरकार ने एक आइएएस अधिकारी का ट्रांस्फर कर दिया है जबकि दो अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार गन्ना उद्योग विभाग की प्रधान सचिव विजय लक्ष्मी एन को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, पशु संसाधन विभाग के पद पर पदस्थापित किया गया है।
जबकि कृषि विभाग के सचिव एन सरवन कुमार अगले आदेश तक गन्ना विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। इसके अलावा सहकारिता विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी अगले आदेश तक कला एवं संस्कृति विभाग बिहार की सचिव एवं प्रबंधन निदेशक, बिहार राज फिल्म विकास एवं वित्त निगम के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगी।
| पटनाः राज्य सरकार ने एक आइएएस अधिकारी का ट्रांस्फर कर दिया है जबकि दो अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार गन्ना उद्योग विभाग की प्रधान सचिव विजय लक्ष्मी एन को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, पशु संसाधन विभाग के पद पर पदस्थापित किया गया है। जबकि कृषि विभाग के सचिव एन सरवन कुमार अगले आदेश तक गन्ना विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। इसके अलावा सहकारिता विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी अगले आदेश तक कला एवं संस्कृति विभाग बिहार की सचिव एवं प्रबंधन निदेशक, बिहार राज फिल्म विकास एवं वित्त निगम के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगी। |
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POSTER: करण जौहर की 'कपूर एंड सन्स'.. 2016 की सबसे HAPPY फैमिली!
[बॉलीवुड न्यूज] कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसे देखते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। करण जौहर की फिल्म 'कपूर एंड सन्स' का पहला पोस्टर भी कुछ ऐसी ही चीज है। फुल ऑफ लाइफ, एनर्जी और खुशिंयां.... आखिर करण जौहर की फिल्म होती ही ऐसी है।
बता दें, फिल्म का ट्रेलर 10 फरवरी को रिलीज किया जाएगा। फिल्म में सिद्धार्थ और फवाद भाई बने हैं। शकुन बत्रा के निर्देशन में बन रही यह फिल्म 18 मार्च को रिलीज होने वाली है। बहरहाल, इस फर्स्ट पोस्टर के बाद फिल्म से हमारी उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई है।
ALERT: एक धमाकेदार रिमेक.. ये फ्लॉप जोड़ी है फाइनल!
अफवाहों की मानें तो फवाद खान फिल्म में 'होमोसेक्सुअल' का किरदार निभा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अब तक बाकि फिल्मों में जिस तरह 'गे' किरदारों को दिखाया गया है, यह उनसे बहुत अलग होगा। बहरहाल, हमें भी पूरी उम्मीद है कि फवाद अपने एक्टिंग टैलेंट के जरीए यह किरदार बेहतरीन ढ़ंग से निभा ले जाएंगे।
| Don't Miss! POSTER: करण जौहर की 'कपूर एंड सन्स'.. दो हज़ार सोलह की सबसे HAPPY फैमिली! [बॉलीवुड न्यूज] कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसे देखते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। करण जौहर की फिल्म 'कपूर एंड सन्स' का पहला पोस्टर भी कुछ ऐसी ही चीज है। फुल ऑफ लाइफ, एनर्जी और खुशिंयां.... आखिर करण जौहर की फिल्म होती ही ऐसी है। बता दें, फिल्म का ट्रेलर दस फरवरी को रिलीज किया जाएगा। फिल्म में सिद्धार्थ और फवाद भाई बने हैं। शकुन बत्रा के निर्देशन में बन रही यह फिल्म अट्ठारह मार्च को रिलीज होने वाली है। बहरहाल, इस फर्स्ट पोस्टर के बाद फिल्म से हमारी उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई है। ALERT: एक धमाकेदार रिमेक.. ये फ्लॉप जोड़ी है फाइनल! अफवाहों की मानें तो फवाद खान फिल्म में 'होमोसेक्सुअल' का किरदार निभा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अब तक बाकि फिल्मों में जिस तरह 'गे' किरदारों को दिखाया गया है, यह उनसे बहुत अलग होगा। बहरहाल, हमें भी पूरी उम्मीद है कि फवाद अपने एक्टिंग टैलेंट के जरीए यह किरदार बेहतरीन ढ़ंग से निभा ले जाएंगे। |
ज़ेबरा ट्रेडमार्क से वैलेनोक्स फैशनेबल हैं औरबच्चों के लिए गर्म सर्दियों के जूते। एक बड़ा मॉडल और आकार सीमा, उत्कृष्ट गुणवत्ता और सस्ती कीमतें ज़ेबरा जूते की पसंद को आसान और आनंददायक बनाती हैं।
ज़ेबरा फैक्ट्री 2004 से चल रही हैसाल। आकार सीमा में बच्चों के लिए एक वर्ष से किशोरावस्था के लिए उत्पाद शामिल हैं। मॉडल रेंज किसी भी मौसम और स्वाद वरीयताओं के लिए हर रोज और उत्सव के जूते में समृद्ध है।
ब्रांड "ज़ेबरा" के उत्पादों के निर्माण मेंकेवल पर्यावरण के अनुकूल और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें। सभी डिजाइन परियोजनाओं और जूता पैटर्न इतालवी कारीगरों द्वारा रूसी उपभोक्ता के लिए अनुकूलित मानकों के लिए डिजाइन किए गए हैं। रूस में आधुनिक उद्यमों में सामग्रियों और सिलाई की प्रसंस्करण की जाती है। तैयार जूते अंतरराष्ट्रीय और रूसी मानकों को पूरा करते हैं।
बच्चों की वैलेंकी "ज़ेबरा"
"ज़ेबरा" से गर्म जूते जितना संभव हो उतना आसान है।और गर्म वह बच्चों के पैर निचोड़ नहीं करती है और रगड़ती नहीं है। सभी मॉडलों में एक इंस्टेप सपोर्ट, एक कठोर पृष्ठभूमि और एक ऑर्थोपेडिक सही इनसोल होता है, जो कि बच्चे के लिए जूते चुनते समय महत्वपूर्ण होता है।
सभी उत्पादों के अनुसार डिजाइन कर रहे हैंबच्चों के पैर की संरचना की रचनात्मक विशेषताएं। सुंदर और सुरुचिपूर्ण जूते सबसे छोटे विवरणों के बारे में सोचते हैं और बच्चे वास्तव में इसे पसंद करेंगे, क्योंकि यह आसान और सुविधाजनक है।
लड़कों के लिए सुंदर और आरामदायक जूते "ज़ेबरा"और लड़कियों बस पोशाक और ले लो। सभी उत्पादों को रूसी क्षेत्रों की जलवायु सुविधाओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बच्चों के लिए मूल जूते नियमों के अनुसार बनाए जाते हैं, और गुणवत्ता में वे अन्य कंपनियों के कई समान उत्पादों से बेहतर होते हैं। जोड़ी की लागत माता-पिता को सुखद आश्चर्यचकित करेगी, फैक्ट्री के अधिकांश मॉडल लाइन "इकोनॉमी +" के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
सर्दियों के जूते "ज़ेबरा" का सोल महसूस किया जाता हैऔर पारंपरिक ऊन, परंपरागत महसूस जूते की विनिर्माण तकनीक दोहराते हैं। एल्यूमीनियम पन्नी की एक विशेष परत वाला एक टैब भी प्रदान किया जाता है, जो ठंड से अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में कार्य करता है। जोड़ी में एक उच्च गुणवत्ता वाले झुकाव है, जिपर के चारों ओर विशेष कपड़े की एक पानी की प्रतिरोधी परत भी प्रदान की जाती है।
आंतरिक इन्सुलेट परत न केवल बनाई गई हैचर्मपत्र। निटवेअर एक आधार के रूप में कार्य करता है, जो बेहतर गर्मी प्रतिधारण के लिए अनुमति देता है। अधिकांश मॉडलों में, मोजे और ऊँची एड़ी के जूते विशेष प्रभाव प्रतिरोधी आवेषण से ढके होते हैं जो जूते को गीले होने से रोकते हैं और उन्हें यांत्रिक क्षति से बचाते हैं। वैलेनोक "ज़ेबरा" की बाहरी परत प्राकृतिक महसूस ऊन से बना है। सामग्री को पानी की प्रतिरोधी के साथ इलाज किया जाता है। जूता का घिरा हुआ एकमात्र सतह का पालन करता है, फिसलने से रोकता है और चलते समय आसानी प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, ज़ेबरा ब्रांड के जूते सुंदर हैंउच्च गुणवत्ता वाले घरेलू उत्पादों का एक उदाहरण। कंपनी के सामान के लिए बाजार में लंबे और व्यापक रूप से प्रतिनिधित्व किया गया है और पहले ही वफादार ग्राहकों को जीतने में कामयाब रहा है। माता-पिता अपने उत्कृष्ट गुणवत्ता, लालित्य, उचित मूल्य और रूसी बच्चों के आकार सीमा के लिए उपयुक्त घरेलू जूते ब्रांड पसंद करते हैं। बच्चों को बस आरामदायक और सुंदर जूते पसंद हैं, जो पहले मोजे के तुरंत बाद खराब नहीं होते हैं। कंपनी ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए अक्सर सभी प्रकार के प्रचार और छूट की व्यवस्था करती है।
| ज़ेबरा ट्रेडमार्क से वैलेनोक्स फैशनेबल हैं औरबच्चों के लिए गर्म सर्दियों के जूते। एक बड़ा मॉडल और आकार सीमा, उत्कृष्ट गुणवत्ता और सस्ती कीमतें ज़ेबरा जूते की पसंद को आसान और आनंददायक बनाती हैं। ज़ेबरा फैक्ट्री दो हज़ार चार से चल रही हैसाल। आकार सीमा में बच्चों के लिए एक वर्ष से किशोरावस्था के लिए उत्पाद शामिल हैं। मॉडल रेंज किसी भी मौसम और स्वाद वरीयताओं के लिए हर रोज और उत्सव के जूते में समृद्ध है। ब्रांड "ज़ेबरा" के उत्पादों के निर्माण मेंकेवल पर्यावरण के अनुकूल और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें। सभी डिजाइन परियोजनाओं और जूता पैटर्न इतालवी कारीगरों द्वारा रूसी उपभोक्ता के लिए अनुकूलित मानकों के लिए डिजाइन किए गए हैं। रूस में आधुनिक उद्यमों में सामग्रियों और सिलाई की प्रसंस्करण की जाती है। तैयार जूते अंतरराष्ट्रीय और रूसी मानकों को पूरा करते हैं। बच्चों की वैलेंकी "ज़ेबरा" "ज़ेबरा" से गर्म जूते जितना संभव हो उतना आसान है।और गर्म वह बच्चों के पैर निचोड़ नहीं करती है और रगड़ती नहीं है। सभी मॉडलों में एक इंस्टेप सपोर्ट, एक कठोर पृष्ठभूमि और एक ऑर्थोपेडिक सही इनसोल होता है, जो कि बच्चे के लिए जूते चुनते समय महत्वपूर्ण होता है। सभी उत्पादों के अनुसार डिजाइन कर रहे हैंबच्चों के पैर की संरचना की रचनात्मक विशेषताएं। सुंदर और सुरुचिपूर्ण जूते सबसे छोटे विवरणों के बारे में सोचते हैं और बच्चे वास्तव में इसे पसंद करेंगे, क्योंकि यह आसान और सुविधाजनक है। लड़कों के लिए सुंदर और आरामदायक जूते "ज़ेबरा"और लड़कियों बस पोशाक और ले लो। सभी उत्पादों को रूसी क्षेत्रों की जलवायु सुविधाओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बच्चों के लिए मूल जूते नियमों के अनुसार बनाए जाते हैं, और गुणवत्ता में वे अन्य कंपनियों के कई समान उत्पादों से बेहतर होते हैं। जोड़ी की लागत माता-पिता को सुखद आश्चर्यचकित करेगी, फैक्ट्री के अधिकांश मॉडल लाइन "इकोनॉमी +" के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। सर्दियों के जूते "ज़ेबरा" का सोल महसूस किया जाता हैऔर पारंपरिक ऊन, परंपरागत महसूस जूते की विनिर्माण तकनीक दोहराते हैं। एल्यूमीनियम पन्नी की एक विशेष परत वाला एक टैब भी प्रदान किया जाता है, जो ठंड से अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में कार्य करता है। जोड़ी में एक उच्च गुणवत्ता वाले झुकाव है, जिपर के चारों ओर विशेष कपड़े की एक पानी की प्रतिरोधी परत भी प्रदान की जाती है। आंतरिक इन्सुलेट परत न केवल बनाई गई हैचर्मपत्र। निटवेअर एक आधार के रूप में कार्य करता है, जो बेहतर गर्मी प्रतिधारण के लिए अनुमति देता है। अधिकांश मॉडलों में, मोजे और ऊँची एड़ी के जूते विशेष प्रभाव प्रतिरोधी आवेषण से ढके होते हैं जो जूते को गीले होने से रोकते हैं और उन्हें यांत्रिक क्षति से बचाते हैं। वैलेनोक "ज़ेबरा" की बाहरी परत प्राकृतिक महसूस ऊन से बना है। सामग्री को पानी की प्रतिरोधी के साथ इलाज किया जाता है। जूता का घिरा हुआ एकमात्र सतह का पालन करता है, फिसलने से रोकता है और चलते समय आसानी प्रदान करता है। कुल मिलाकर, ज़ेबरा ब्रांड के जूते सुंदर हैंउच्च गुणवत्ता वाले घरेलू उत्पादों का एक उदाहरण। कंपनी के सामान के लिए बाजार में लंबे और व्यापक रूप से प्रतिनिधित्व किया गया है और पहले ही वफादार ग्राहकों को जीतने में कामयाब रहा है। माता-पिता अपने उत्कृष्ट गुणवत्ता, लालित्य, उचित मूल्य और रूसी बच्चों के आकार सीमा के लिए उपयुक्त घरेलू जूते ब्रांड पसंद करते हैं। बच्चों को बस आरामदायक और सुंदर जूते पसंद हैं, जो पहले मोजे के तुरंत बाद खराब नहीं होते हैं। कंपनी ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए अक्सर सभी प्रकार के प्रचार और छूट की व्यवस्था करती है। |
Anti Itching Cream: के इस्तेमाल से खुजली की प्रॉब्लम कम हो सकती है। ये नेचुरल और हर्बल क्रीम हैं, जो स्किन को रिलैक्स और बेहतर फील भी देती हैं। इनमें किसी भी हार्मफुल केमिकल को शामिल नहीं किया गया है।
Cream For Itching: गर्मी से इचिंग और इर्रिटेशन की प्रॉब्लम बढ़ने लगती है, जिससे स्किन भी डैमेज हो सकती है। अगर आप दाद, खाज, खुजली से परेशान हैं, तो इन क्रीम को ट्राय कर सकती हैं। इनके इस्तेमाल से कई स्किन इंफेक्शन से राहत मिल सकती है। इनमें से कुछ क्रीम को तो क्रैक्ड हील्स भरने में भी मददगार माना जाता है। यहां पर मिलने वाली क्रीम को प्रेगनेंसी स्ट्रेच मार्क्स को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन्हें बनाने के लिए नेचुरल प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया गया है। यह क्रीम आपको लगभग हर तरह के स्किन इन्फेक्शन से सुरक्षा देने में मददगार मानी जाती हैं। इनसे खुजली में भी राहत मिल सकती है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
कंपनी के मुताबिक ये आयुर्वेदिक इनग्रेडिएंट से बनी हुई क्रीम है। इसके इस्तेमाल से आप खुजली, दाद और दूसरी इन स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा पा सकते हैं। यह स्किन पर हुए रैशेज को कम करने में भी मददगार मानी जाती है। यह क्रीम स्किन इनफेक्शन के अलावा प्रेगनेंसी स्ट्रेच मार्क्स को कम करने के साथ क्रैक हील में भी राहत दे सकती है।
अगर आपके स्किन पर इंफेक्शन के कारण खुजली और रैशेज हो गए हैं, तो इस क्रीम के इस्तेमाल से आपको काफी फायदा मिल सकता है। कंपनी के मुताबिक इसे बनाने के लिए नेचुरल इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल किया गया है। ये पैराबेन और हार्मफुल केमिकल से मुक्त क्रीम है। कंपनी की माने तो यह इचिंग कम करने में बढ़िया है।
यह क्रीम खुजली कम करने में काफी फायदेमंद मानी जाती है। इस क्रीम में किसी हार्मफुल केमिकल को ऐड नहीं किया गया है। यह क्रीम कई नेचुरल खूबियों के साथ आ रही है। इस नेचुरल क्रीम के इस्तेमाल से स्किन की ड्रायनेस भी कम हो सकती है। यह स्किन को फंगल अटैक से भी प्रोटेक्शन देने में मददगार हो सकती है। यह स्किन को सॉफ्ट और स्मूद बना सकती है।
यह स्किन फ्रेंडली इंग्रेडिएंट्स से बनी हुई एंटी इचिंग क्रीम है। यह खुजली को कम करने में काफी मददगार मानी जाती है। इसके इस्तेमाल से इन्फ्मेलेशन, स्किन रेडनेस, ड्राई स्किन में राहत मिल सकती है। यह अनइवन स्किन टोन को बेहतर बनाने में मददगार मानी जाती है। इसमेंकूलिंग मेंथोल भी दिया गया है। इसका इस्तेमाल महिला और पुरुष दोनों के द्वारा किया जा सकता है।
यह आयुर्वेदिक क्रीम है जो खुजली को कम करने में मददगार मानी जाती है। इसके इस्तेमाल से एक्जिमा, दाद, खुजली, सफेद निशान, फुंसी के निशान और फटी एड़ियों की प्रॉब्लम से छुटकारा मिल सकता है। यह 30 ग्राम वाली क्रीम दो के पैक में आ रही है। कंपनी के मुताबिक ये सुरक्षित और आयुर्वेदिक स्किन क्रीम है जो त्वचा को कंप्लीट प्रोटेक्शन दे सकती है।
| Anti Itching Cream: के इस्तेमाल से खुजली की प्रॉब्लम कम हो सकती है। ये नेचुरल और हर्बल क्रीम हैं, जो स्किन को रिलैक्स और बेहतर फील भी देती हैं। इनमें किसी भी हार्मफुल केमिकल को शामिल नहीं किया गया है। Cream For Itching: गर्मी से इचिंग और इर्रिटेशन की प्रॉब्लम बढ़ने लगती है, जिससे स्किन भी डैमेज हो सकती है। अगर आप दाद, खाज, खुजली से परेशान हैं, तो इन क्रीम को ट्राय कर सकती हैं। इनके इस्तेमाल से कई स्किन इंफेक्शन से राहत मिल सकती है। इनमें से कुछ क्रीम को तो क्रैक्ड हील्स भरने में भी मददगार माना जाता है। यहां पर मिलने वाली क्रीम को प्रेगनेंसी स्ट्रेच मार्क्स को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें बनाने के लिए नेचुरल प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया गया है। यह क्रीम आपको लगभग हर तरह के स्किन इन्फेक्शन से सुरक्षा देने में मददगार मानी जाती हैं। इनसे खुजली में भी राहत मिल सकती है। आइए इनके बारे में जानते हैं। कंपनी के मुताबिक ये आयुर्वेदिक इनग्रेडिएंट से बनी हुई क्रीम है। इसके इस्तेमाल से आप खुजली, दाद और दूसरी इन स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा पा सकते हैं। यह स्किन पर हुए रैशेज को कम करने में भी मददगार मानी जाती है। यह क्रीम स्किन इनफेक्शन के अलावा प्रेगनेंसी स्ट्रेच मार्क्स को कम करने के साथ क्रैक हील में भी राहत दे सकती है। अगर आपके स्किन पर इंफेक्शन के कारण खुजली और रैशेज हो गए हैं, तो इस क्रीम के इस्तेमाल से आपको काफी फायदा मिल सकता है। कंपनी के मुताबिक इसे बनाने के लिए नेचुरल इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल किया गया है। ये पैराबेन और हार्मफुल केमिकल से मुक्त क्रीम है। कंपनी की माने तो यह इचिंग कम करने में बढ़िया है। यह क्रीम खुजली कम करने में काफी फायदेमंद मानी जाती है। इस क्रीम में किसी हार्मफुल केमिकल को ऐड नहीं किया गया है। यह क्रीम कई नेचुरल खूबियों के साथ आ रही है। इस नेचुरल क्रीम के इस्तेमाल से स्किन की ड्रायनेस भी कम हो सकती है। यह स्किन को फंगल अटैक से भी प्रोटेक्शन देने में मददगार हो सकती है। यह स्किन को सॉफ्ट और स्मूद बना सकती है। यह स्किन फ्रेंडली इंग्रेडिएंट्स से बनी हुई एंटी इचिंग क्रीम है। यह खुजली को कम करने में काफी मददगार मानी जाती है। इसके इस्तेमाल से इन्फ्मेलेशन, स्किन रेडनेस, ड्राई स्किन में राहत मिल सकती है। यह अनइवन स्किन टोन को बेहतर बनाने में मददगार मानी जाती है। इसमेंकूलिंग मेंथोल भी दिया गया है। इसका इस्तेमाल महिला और पुरुष दोनों के द्वारा किया जा सकता है। यह आयुर्वेदिक क्रीम है जो खुजली को कम करने में मददगार मानी जाती है। इसके इस्तेमाल से एक्जिमा, दाद, खुजली, सफेद निशान, फुंसी के निशान और फटी एड़ियों की प्रॉब्लम से छुटकारा मिल सकता है। यह तीस ग्राम वाली क्रीम दो के पैक में आ रही है। कंपनी के मुताबिक ये सुरक्षित और आयुर्वेदिक स्किन क्रीम है जो त्वचा को कंप्लीट प्रोटेक्शन दे सकती है। |
नई दिल्ली, BSNL Recharge Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (BSNL) समय - समय पर अपने ग्राहकों को खुश करने के लिए नए - नए रिचार्ज प्लान्स और ऑफर्स लेकर आती रहती है। ताकि वो अपने यूजर्स को बनाये रखें। यह कहना गलत नहीं होगा कि बीएसएनएल (Bsnl Cheapest Plan) के प्लान्स बहुत ही सस्ते होते हैं। बीएसएनएल (Bsnl Latest Plan) के ज्यादातर रिचार्ज प्लान्स अनलिमिटेड कॉलिंग, हाई स्पीड डेटा सहित कई बड़ी सुविधाओं के साथ आते हैं।
इसी बीच एक बार फिर से बीएसएनएल लंबी वैलिडिटी वाले सस्ते रिचार्ज प्लान को लेकर आई है। इस प्लान की कीमत ₹321 की है, जिसमें आपको कई बेनिफिट दिए जा रहे हैं। जिसे देखने के बाद आप पक्का इसे रिचार्ज करवा ही लेंगे इतना सस्ता ऑफर वह भी लंबी वैलिडिटी के साथ शायद ही आजकल के रिचार्ज प्लान में देखने को मिलता है। आइए आप यूजर्स को डिटेल के साथ इस बारे में जानकारी देते हैं।
आपको बता दें कि इस बीएसएनएल के रीचार्ज प्लान में यूजर्स को कंपनी की तरह से हर महीने 250 एसएमएस की सुविधा के साथ ही हर महीने 15 जीबी फ्री डेटा की सुविधा देखने को मिलती है। इसके अलावा आपको इस प्लान में 7 पैसे प्रति मिनट के हिसाब से लोकल कॉल को भी चार्ज करता है और STD कॉलिंग के लिए 15 पैसे प्रति मिनट के हिसाब से चार्ज लिया जाता है।
आपको बता दें कि मार्केट में मौजूद सभी टेलीकॉम कंपनियों में से किसी के भी पास ऐसा सस्ता प्लान उपलब्ध नहीं है, जो अपने इस 321 रुपये वाले प्लान में यूजर्स को 365 दिनों की वैलिडिटी को ऑफर कराता है। लेकिन आपको इस प्लान के साथ एक ट्विस्ट मिलता है और वो यह है कि ये प्लान सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध नहीं है।
आइए आपको बताते हैं कि इस रिचार्ज प्लान का आखिर किसे फायदा हो सकता है और कौन इसे रीचार्ज करवा सकता है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस प्लान में मौजूद रोमिंग के इनकमिंग वॉयस कॉल्स फ्री में मिल रहा हैं यानी आपको इस कॉलिंग के लिए किसी भी तरह का कोई भी पैसा नहीं लगेगा।
इस बीएसएनएल के रीचार्ज प्लान में आपको कंपनी की तरफ से हर महीने 250 एसएमएस मिलते है। इसके साथ ही आपको हर महीने 15 जीबी का फ्री इंटरनेट डेटा मिलता है।
इस रिचार्ज प्लान को बीएसएनएल कंपनी ने तमिलनाडु में काम करने वाले पुलिस ऑफिसर्स के लिए लाया गया है। यानी इस प्लान का फायदा सिर्फ वही पुलिस ऑफिसर्स उठा पाएंगे जो तमिलनाडु में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इसके अलावा आपको ये प्लान बीएसएनएल की आधिकारिक वेबसाइट तमिलनाडु सर्कल के लिए उपलब्ध किया गया है। लेकिन आपको इस रिचार्ज प्लान में किसी अन्य सर्कल के लिए उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा आपको बीएसएनएल के कई किफायती रिचार्ज प्लान भी उपलब्ध मिलते हैं। जिन्हें आप कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी जाकर देख सकते हैं। जिनमें आपको फ्री ओटीटी प्लेटफार्म का एक्सेस भी मिलता हैं। साथ ही फ्री एसएमएस, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और ज्यादा वैलिडिटी के साथ ज्यादा डाटा भी इस्तेमाल करने को मिल रहा है। जिसका फायदा आप अभी उठा सकते हैं। वरना ये प्लान हो सकता हैं बाद में महंगे भी हो जाएं। इसलिए आप घर बैठे अभी इन रिचार्ज को करवा इसका लाभ उठा सकते हैं।
| नई दिल्ली, BSNL Recharge Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल समय - समय पर अपने ग्राहकों को खुश करने के लिए नए - नए रिचार्ज प्लान्स और ऑफर्स लेकर आती रहती है। ताकि वो अपने यूजर्स को बनाये रखें। यह कहना गलत नहीं होगा कि बीएसएनएल के प्लान्स बहुत ही सस्ते होते हैं। बीएसएनएल के ज्यादातर रिचार्ज प्लान्स अनलिमिटेड कॉलिंग, हाई स्पीड डेटा सहित कई बड़ी सुविधाओं के साथ आते हैं। इसी बीच एक बार फिर से बीएसएनएल लंबी वैलिडिटी वाले सस्ते रिचार्ज प्लान को लेकर आई है। इस प्लान की कीमत तीन सौ इक्कीस रुपया की है, जिसमें आपको कई बेनिफिट दिए जा रहे हैं। जिसे देखने के बाद आप पक्का इसे रिचार्ज करवा ही लेंगे इतना सस्ता ऑफर वह भी लंबी वैलिडिटी के साथ शायद ही आजकल के रिचार्ज प्लान में देखने को मिलता है। आइए आप यूजर्स को डिटेल के साथ इस बारे में जानकारी देते हैं। आपको बता दें कि इस बीएसएनएल के रीचार्ज प्लान में यूजर्स को कंपनी की तरह से हर महीने दो सौ पचास एसएमएस की सुविधा के साथ ही हर महीने पंद्रह जीबी फ्री डेटा की सुविधा देखने को मिलती है। इसके अलावा आपको इस प्लान में सात पैसे प्रति मिनट के हिसाब से लोकल कॉल को भी चार्ज करता है और STD कॉलिंग के लिए पंद्रह पैसे प्रति मिनट के हिसाब से चार्ज लिया जाता है। आपको बता दें कि मार्केट में मौजूद सभी टेलीकॉम कंपनियों में से किसी के भी पास ऐसा सस्ता प्लान उपलब्ध नहीं है, जो अपने इस तीन सौ इक्कीस रुपयापये वाले प्लान में यूजर्स को तीन सौ पैंसठ दिनों की वैलिडिटी को ऑफर कराता है। लेकिन आपको इस प्लान के साथ एक ट्विस्ट मिलता है और वो यह है कि ये प्लान सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध नहीं है। आइए आपको बताते हैं कि इस रिचार्ज प्लान का आखिर किसे फायदा हो सकता है और कौन इसे रीचार्ज करवा सकता है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस प्लान में मौजूद रोमिंग के इनकमिंग वॉयस कॉल्स फ्री में मिल रहा हैं यानी आपको इस कॉलिंग के लिए किसी भी तरह का कोई भी पैसा नहीं लगेगा। इस बीएसएनएल के रीचार्ज प्लान में आपको कंपनी की तरफ से हर महीने दो सौ पचास एसएमएस मिलते है। इसके साथ ही आपको हर महीने पंद्रह जीबी का फ्री इंटरनेट डेटा मिलता है। इस रिचार्ज प्लान को बीएसएनएल कंपनी ने तमिलनाडु में काम करने वाले पुलिस ऑफिसर्स के लिए लाया गया है। यानी इस प्लान का फायदा सिर्फ वही पुलिस ऑफिसर्स उठा पाएंगे जो तमिलनाडु में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इसके अलावा आपको ये प्लान बीएसएनएल की आधिकारिक वेबसाइट तमिलनाडु सर्कल के लिए उपलब्ध किया गया है। लेकिन आपको इस रिचार्ज प्लान में किसी अन्य सर्कल के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा आपको बीएसएनएल के कई किफायती रिचार्ज प्लान भी उपलब्ध मिलते हैं। जिन्हें आप कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी जाकर देख सकते हैं। जिनमें आपको फ्री ओटीटी प्लेटफार्म का एक्सेस भी मिलता हैं। साथ ही फ्री एसएमएस, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और ज्यादा वैलिडिटी के साथ ज्यादा डाटा भी इस्तेमाल करने को मिल रहा है। जिसका फायदा आप अभी उठा सकते हैं। वरना ये प्लान हो सकता हैं बाद में महंगे भी हो जाएं। इसलिए आप घर बैठे अभी इन रिचार्ज को करवा इसका लाभ उठा सकते हैं। |
सीहोर। भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा को कलेक्टर से क्लीन चिट मिल गई है। क्लीनचिट दिग्विजय सिंह को आतंकी वाले बयान पर मिला है। कलेक्टर गणेश शंकर के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर ने कोई आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है। प्रज्ञा ने दिग्विजिय सिंह को किसी पब्लिक मीटिंग में आतंकी नहीं कहा है। उन्होंने कहा है कि दिग्विजय को आतंकी कहने का कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए ये आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में नहीं आता।
बता दें मध्यप्रदेश के भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को आतंकी बताया है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को 16 साल पहले उमा भारती ने हराया था, तब से मुंह नहीं उठाया, अब फिर उठा है तो एक सन्यासी को आना पड़ा।
बीजेपी प्रत्याशी ने कहा कि अब मैं इसे इसके परिणाम तक पहुंचाऊंगी। खुद का व्यवसाय बढ़ाया खुद की फैक्ट्री बढ़ाई, ऐसे आतंकी के समापन के लिए संन्यासी को खड़ा होना पड़ा। साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय ने सीहोर में शुगर फैक्टरी ओर ऑयल मिल बंद करकर बेरोजगारी बढ़ाई है।
| सीहोर। भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा को कलेक्टर से क्लीन चिट मिल गई है। क्लीनचिट दिग्विजय सिंह को आतंकी वाले बयान पर मिला है। कलेक्टर गणेश शंकर के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर ने कोई आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है। प्रज्ञा ने दिग्विजिय सिंह को किसी पब्लिक मीटिंग में आतंकी नहीं कहा है। उन्होंने कहा है कि दिग्विजय को आतंकी कहने का कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए ये आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में नहीं आता। बता दें मध्यप्रदेश के भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को आतंकी बताया है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को सोलह साल पहले उमा भारती ने हराया था, तब से मुंह नहीं उठाया, अब फिर उठा है तो एक सन्यासी को आना पड़ा। बीजेपी प्रत्याशी ने कहा कि अब मैं इसे इसके परिणाम तक पहुंचाऊंगी। खुद का व्यवसाय बढ़ाया खुद की फैक्ट्री बढ़ाई, ऐसे आतंकी के समापन के लिए संन्यासी को खड़ा होना पड़ा। साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय ने सीहोर में शुगर फैक्टरी ओर ऑयल मिल बंद करकर बेरोजगारी बढ़ाई है। |
शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की समरस पंचायतें बनाने की पहल इस पंचायत चुनाव में रंग लाई है। सीएम शिवराज ने 33 समरस ग्राम पंचायतें बनने पर बधाई दी है। वहीं निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को पुरस्कार भी मिलेगा।
बुधनी जनपद की 9 ग्राम पंचायतें जिनके सरपंच निर्विरोध चुने गए, उनमें ग्राम पंचायत मढ़ावन, ग्राम पंचायत चिकली, ग्राम पंचायत जैत, ग्राम पंचायत वनेटा , ग्राम पंचायत खेरी सिलगेंना, ग्राम पंचायत कुसुमखेड़ा, ग्राम पंचायत पीलीकरार, ग्राम पंचायत ऊंचाखेड़ा तथा ग्राम पंचायत तालपुरा शामिल हैं।
इसी प्रकार नसरुल्लागंज जनपद की 17 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए हैं। इन ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत पिपलानी, ,इटावाकला, चौरसाखेडी, बडनगर, रिछाडिया कदीम, गिल्लौर, छापरी, हाथीघाट, खात्याखेडी, आंबाजदीद, तिलाडिया, सीलकंठ, ससली, कोसमी, मोगराखेड़ा लावापानी तथा बोरखेडी शामिल है। इछावर जनपद में ग्राम पंचायत मायोपानी, सहारन, गाजाखेड़ी तथा जमुनिया हटेसिंह एवं आष्टा जनपद में आवलीखेड़ा एवं अतरालिया तथा सीहोर जनपद में आमला ग्राम पंचायत के सरपंच निर्विरोध चुने गए हैं।
सात जनपद सदस्य निर्विरोध निर्वाचित - इसी प्रकार बुधनी जनपद के 6 वार्डों के जनपद सदस्य निर्विरोध चुने गए। इसमें खाण्डाबड, जहानपुर, बनेटा, सरदारनगर, बोरना, बकतरा वार्ड शामिल है। नसरुल्लागंज जनपद के वार्ड क्रमांक 5 इटारसी से भी निर्विरोध जनपद सदस्य निर्वाचित हुए।
समरस पंचायतें होंगी पुरस्कृत-ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं उन पंचायतों को पुरस्कार राशि रुपये 5 लाख तथा सरपंच पद हेतु वर्तमान निर्वाचन एवं पिछला निर्वाचन निरंतर निर्विरोध होने पर पुरस्कार राशि रूपये 7 लाख एवं ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच तथा सभी पंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं उन पंचायतों को पुरस्कार राशि रुपये 7 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा। ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच तथा सभी पंच महिला निर्वाचित हुए हैं, पुरस्कार राशि रुपये 12 लाख एवं पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन निर्विरोध रूप से हुए हैं उन्हें राशि 15 लाख पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
| शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की समरस पंचायतें बनाने की पहल इस पंचायत चुनाव में रंग लाई है। सीएम शिवराज ने तैंतीस समरस ग्राम पंचायतें बनने पर बधाई दी है। वहीं निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को पुरस्कार भी मिलेगा। बुधनी जनपद की नौ ग्राम पंचायतें जिनके सरपंच निर्विरोध चुने गए, उनमें ग्राम पंचायत मढ़ावन, ग्राम पंचायत चिकली, ग्राम पंचायत जैत, ग्राम पंचायत वनेटा , ग्राम पंचायत खेरी सिलगेंना, ग्राम पंचायत कुसुमखेड़ा, ग्राम पंचायत पीलीकरार, ग्राम पंचायत ऊंचाखेड़ा तथा ग्राम पंचायत तालपुरा शामिल हैं। इसी प्रकार नसरुल्लागंज जनपद की सत्रह ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए हैं। इन ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत पिपलानी, ,इटावाकला, चौरसाखेडी, बडनगर, रिछाडिया कदीम, गिल्लौर, छापरी, हाथीघाट, खात्याखेडी, आंबाजदीद, तिलाडिया, सीलकंठ, ससली, कोसमी, मोगराखेड़ा लावापानी तथा बोरखेडी शामिल है। इछावर जनपद में ग्राम पंचायत मायोपानी, सहारन, गाजाखेड़ी तथा जमुनिया हटेसिंह एवं आष्टा जनपद में आवलीखेड़ा एवं अतरालिया तथा सीहोर जनपद में आमला ग्राम पंचायत के सरपंच निर्विरोध चुने गए हैं। सात जनपद सदस्य निर्विरोध निर्वाचित - इसी प्रकार बुधनी जनपद के छः वार्डों के जनपद सदस्य निर्विरोध चुने गए। इसमें खाण्डाबड, जहानपुर, बनेटा, सरदारनगर, बोरना, बकतरा वार्ड शामिल है। नसरुल्लागंज जनपद के वार्ड क्रमांक पाँच इटारसी से भी निर्विरोध जनपद सदस्य निर्वाचित हुए। समरस पंचायतें होंगी पुरस्कृत-ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं उन पंचायतों को पुरस्कार राशि पाँच रुपया लाख तथा सरपंच पद हेतु वर्तमान निर्वाचन एवं पिछला निर्वाचन निरंतर निर्विरोध होने पर पुरस्कार राशि रूपये सात लाख एवं ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच तथा सभी पंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं उन पंचायतों को पुरस्कार राशि सात रुपया लाख का पुरस्कार दिया जाएगा। ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच तथा सभी पंच महिला निर्वाचित हुए हैं, पुरस्कार राशि बारह रुपया लाख एवं पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन निर्विरोध रूप से हुए हैं उन्हें राशि पंद्रह लाख पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। |
कोहरा के कारण हरियाणा के हिसार में देर रात डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के काफिले की गाड़ियां आपस में भिड़ गईं। गनीमत रही की हादसे में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला बच गए।
बढ़ती ठंड के कारण कोहरा भी काफी बढ़ता जा रहा है। इसके कारण से हरियाणा के हिसार में देर रात हिसार के अग्रोहा के पास डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं। गनीमत रही की हादसे में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला सही सलामत बच गए। लेकिन उनके काफिले में शामिल पुलिस कमांडो को चोटें आई हैं।
घटना सोमवार देर रात की है, जब हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला सार से सिरसा जा रहे थे। इस दौरान रात में हिसार के आसपास के इलाके में काफी कोहरा छाया हुआ था। तभी अचानक अग्रोहा के पास डिप्टी सीएम के काफिले में शामिल पुलिस की बोलेरो गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगा दिए। जिसके कारण से उसके ठीक पीछे खड़ी काफिले की गाड़ियां भी आपस में टकरा गई। हादसे में गाड़ी पर बैठे पुलिस कमांडो घायल हो गया, जबकि सीएम को किसी भी तरह की चोट नहीं आई। डिप्टी सीएम बिल्कुल सुरक्षित हैं।
| कोहरा के कारण हरियाणा के हिसार में देर रात डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के काफिले की गाड़ियां आपस में भिड़ गईं। गनीमत रही की हादसे में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला बच गए। बढ़ती ठंड के कारण कोहरा भी काफी बढ़ता जा रहा है। इसके कारण से हरियाणा के हिसार में देर रात हिसार के अग्रोहा के पास डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं। गनीमत रही की हादसे में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला सही सलामत बच गए। लेकिन उनके काफिले में शामिल पुलिस कमांडो को चोटें आई हैं। घटना सोमवार देर रात की है, जब हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला सार से सिरसा जा रहे थे। इस दौरान रात में हिसार के आसपास के इलाके में काफी कोहरा छाया हुआ था। तभी अचानक अग्रोहा के पास डिप्टी सीएम के काफिले में शामिल पुलिस की बोलेरो गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगा दिए। जिसके कारण से उसके ठीक पीछे खड़ी काफिले की गाड़ियां भी आपस में टकरा गई। हादसे में गाड़ी पर बैठे पुलिस कमांडो घायल हो गया, जबकि सीएम को किसी भी तरह की चोट नहीं आई। डिप्टी सीएम बिल्कुल सुरक्षित हैं। |
दिल्ली के सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड मामले में चार दोषियों के खिलाफ मौत का फरमान जारी करने के विषय पर सुनवाई को अदालत द्वारा सात जनवरी के लिए स्थगित किये जाने के बाद निर्भया की मां बुधवार को पटियाला हाउस अदालत के बाहर अत्यंत भावुक और रोने लगीं।
निर्भया की मां ने दोषियों की फांसी में देरी को लेकर सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया। कहा कि मुजरिमों को सपॉर्ट कर रहा है सिस्टम। उन्होंने कहा कि वह अदालत के फैसले से "निराश" हैं। उन्होंने कहा, "दोषियों को एक और मौका दिया गया। उनके अधिकारियों पर इतना क्यों विचार किया जा रहा है? हमारे अधिकारों का क्या? " इससे पहले दोपहर में उन्होंने चार में से एक दोषी की पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था।
इस मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने के शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया गया था। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने चार दोषियों को फांसी पर लटकाने का फरमान सुनाने की दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई शुरू की। अदालत ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रति का इंतजार करेगी और फिर मामले में अगली सुनवाई की तारीख सात जनवरी, 2020 तय कर दी।
हालांकि निर्भया के पिता ने कहा कि पटियाला हाउस अदालत से 'डेथ वारंट' जारी होने तक वह संतुष्ट नहीं होंगे । उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमारा बहुत दुखदायी सफर रहा है। उच्चतम न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी लेकिन जब तक पटियाला हाउस अदालत मौत का फरमान जारी नहीं करती, तब तक हम खुश नहीं होंगे।
समूचा देश आरोपियों के लिए फांसी चाहता है। " गौरतलब है कि दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने एक चलती बस में 23 वर्षीय निर्भया का सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था। इस घटना की निर्ममता के बारे में जिसने भी पढ़ा-सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस घटना के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था।
| दिल्ली के सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड मामले में चार दोषियों के खिलाफ मौत का फरमान जारी करने के विषय पर सुनवाई को अदालत द्वारा सात जनवरी के लिए स्थगित किये जाने के बाद निर्भया की मां बुधवार को पटियाला हाउस अदालत के बाहर अत्यंत भावुक और रोने लगीं। निर्भया की मां ने दोषियों की फांसी में देरी को लेकर सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया। कहा कि मुजरिमों को सपॉर्ट कर रहा है सिस्टम। उन्होंने कहा कि वह अदालत के फैसले से "निराश" हैं। उन्होंने कहा, "दोषियों को एक और मौका दिया गया। उनके अधिकारियों पर इतना क्यों विचार किया जा रहा है? हमारे अधिकारों का क्या? " इससे पहले दोपहर में उन्होंने चार में से एक दोषी की पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था। इस मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने के शीर्ष अदालत के दो हज़ार सत्रह के फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया गया था। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने चार दोषियों को फांसी पर लटकाने का फरमान सुनाने की दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई शुरू की। अदालत ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रति का इंतजार करेगी और फिर मामले में अगली सुनवाई की तारीख सात जनवरी, दो हज़ार बीस तय कर दी। हालांकि निर्भया के पिता ने कहा कि पटियाला हाउस अदालत से 'डेथ वारंट' जारी होने तक वह संतुष्ट नहीं होंगे । उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमारा बहुत दुखदायी सफर रहा है। उच्चतम न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी लेकिन जब तक पटियाला हाउस अदालत मौत का फरमान जारी नहीं करती, तब तक हम खुश नहीं होंगे। समूचा देश आरोपियों के लिए फांसी चाहता है। " गौरतलब है कि दिल्ली में सात साल पहले सोलह दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने एक चलती बस में तेईस वर्षीय निर्भया का सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था। इस घटना की निर्ममता के बारे में जिसने भी पढ़ा-सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस घटना के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था। |
नाहन - डा. वाईएस परमार स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन में शुक्रवार को रोजगार मेले का शुभारंभ किया गया। दो दिवसीय रोजगार मेले का शुभारंभ कालेज की प्रधानाचार्य डा. वीना राठौर ने किया तथा रोजगार मेले से अधिक से अधिक लाभ उठाने का युवाओं से आग्रह किया। उन्होंने बताया कि नाहन कालेज में रोजगार मेले का पहली मर्तबा आयोजन किया जा रहा है। वहीं यदि इस रोजगार मेले से छात्रों को लाभ मिला तो आगामी समय में रोजगार मेले का आयोजन यहां पर निरंतर किया जाएगा। इस दौरान कालेज के करियर गाइडेंस सैल के संयोजक डा. नीलकांत ने बताया कि रोजगार मेले में देश की एक दर्जन से अधिक नामी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं, जिसमें एलआईसी, बिग बाजार देहरादून, पोली फिल्मस देहरादून, सूर्यालक्ष्मी, रिलायंस, यूरेका फोर्स सहित कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। इस दौरान एलआईसी के रिसोर्स पर्सन विक्रम व इटरनल यूनिवर्सिटी से अमरप्रीत पॉल ने युवाओं के साथ रोजगार पर विचार सांझा किए। इस अवसर पर डा. रितु पंत, प्रो. अंजु अग्रवाल, डा. उर्वशी, डा. विनिता पाल, प्रो. प्रवेश, वीरेंद्र व रवि आदि अन्य लोग उपस्थित रहे।
| नाहन - डा. वाईएस परमार स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन में शुक्रवार को रोजगार मेले का शुभारंभ किया गया। दो दिवसीय रोजगार मेले का शुभारंभ कालेज की प्रधानाचार्य डा. वीना राठौर ने किया तथा रोजगार मेले से अधिक से अधिक लाभ उठाने का युवाओं से आग्रह किया। उन्होंने बताया कि नाहन कालेज में रोजगार मेले का पहली मर्तबा आयोजन किया जा रहा है। वहीं यदि इस रोजगार मेले से छात्रों को लाभ मिला तो आगामी समय में रोजगार मेले का आयोजन यहां पर निरंतर किया जाएगा। इस दौरान कालेज के करियर गाइडेंस सैल के संयोजक डा. नीलकांत ने बताया कि रोजगार मेले में देश की एक दर्जन से अधिक नामी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं, जिसमें एलआईसी, बिग बाजार देहरादून, पोली फिल्मस देहरादून, सूर्यालक्ष्मी, रिलायंस, यूरेका फोर्स सहित कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। इस दौरान एलआईसी के रिसोर्स पर्सन विक्रम व इटरनल यूनिवर्सिटी से अमरप्रीत पॉल ने युवाओं के साथ रोजगार पर विचार सांझा किए। इस अवसर पर डा. रितु पंत, प्रो. अंजु अग्रवाल, डा. उर्वशी, डा. विनिता पाल, प्रो. प्रवेश, वीरेंद्र व रवि आदि अन्य लोग उपस्थित रहे। |
सांकेतिक तस्वीर.
मंडी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIU) ने बल्ह में चिट्टे के साथ एक 26 वर्षीय युवक को पकड़ने में सफलता हासिल की है. आरोपी युवक से 4. 20 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार कर जाँच शुरू कर दी है.
जानकारी के अनुसार, सूचना के आधार पर हेड कांस्टेबल टेक चंद के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल प्रदीप कुमार, कांस्टेबल कश्मीर सिंह, कांस्टेबल शंकर सिद्धार्थ, महिला कांस्टेबल प्रियंका व कांस्टेबल गिरधारी ने बल्ह के गांव कुम्मी में आरोपी गोल्डी पुत्र धर्म सिंह के घर दबिश देकर उसे 4. 20 ग्राम चिट्टा पकड़ा.
पुलिस ने आरोपी से चिट्टे के साथ-साथ उसको तोलने वाली मशीन भी कब्जा में ली है. वहीं SIU टीम ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर आगामी कार्रवाई के लिए पुलिस थाना बल्ह को सौंप दिया है.
एसपी मंडी गुरदेव चंद शर्मा ने कहा कि युवक को 4. 20 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है. जिसके खिलाफ पुलिस ने एनडीपीएस की धारा 21 में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है.
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| सांकेतिक तस्वीर. मंडी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने बल्ह में चिट्टे के साथ एक छब्बीस वर्षीय युवक को पकड़ने में सफलता हासिल की है. आरोपी युवक से चार. बीस ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार कर जाँच शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार, सूचना के आधार पर हेड कांस्टेबल टेक चंद के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल प्रदीप कुमार, कांस्टेबल कश्मीर सिंह, कांस्टेबल शंकर सिद्धार्थ, महिला कांस्टेबल प्रियंका व कांस्टेबल गिरधारी ने बल्ह के गांव कुम्मी में आरोपी गोल्डी पुत्र धर्म सिंह के घर दबिश देकर उसे चार. बीस ग्राम चिट्टा पकड़ा. पुलिस ने आरोपी से चिट्टे के साथ-साथ उसको तोलने वाली मशीन भी कब्जा में ली है. वहीं SIU टीम ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर आगामी कार्रवाई के लिए पुलिस थाना बल्ह को सौंप दिया है. एसपी मंडी गुरदेव चंद शर्मा ने कहा कि युवक को चार. बीस ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है. जिसके खिलाफ पुलिस ने एनडीपीएस की धारा इक्कीस में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. . |
राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. मीनाक्षी जौली की अध्यक्षता में आज हैदराबाद दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों एवं उपक्रमों इत्यादि के लिए संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विशिष्ट वैज्ञानिक व अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, परमाणु ऊर्जा विभाग डॉ. दिनेश श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के निदेशक एवं नराकास अध्यक्ष डॉ. वी.एम. तिवारी सहित दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विभिन्न कार्यालयों के वरिष्ठअधिकारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. मीनाक्षी जौली ने कहा कि विकास की किसी भी योजना और उसके संबंध में भारत सरकार की नीति को सही रूप में पेश करने के लिए यह आवश्यक है कि ये बातें जनता तक जनता की भाषा में पहुंचें । उनका कहना था कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं तभी प्रभावी होती हैं जब जनता और सरकार के बीच निरंतर संवाद, संपर्क और पारदर्शिता बनी रहे और सरकार की योजनाओं का लाभ देश के सभी नागरिकों को समान रूप से मिले ।
डॉ. मीनाक्षी ने कहा कि इसके हमारे पास हिंदी के रूप में एक ऐसी भाषा है जो सरल एवं सहज होने के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं व्याकरण की दृष्टि से भी उत्कृष्ट है । अपनी उदारता, सहजता, व्यापकता एवं मधुरता जैसे गुणों की वजह से तथा देश की अन्य भाषाओं एवं बोलियों से सामंजस्य बनाए रखकर सांस्कृतिक संवाहक होने की अपनी क्षमता के कारण हिंदी देश की प्रमुख संपर्क भाषा है । डॉ. जौली ने कहा कि समृद्ध साहित्यिक धरोहर, विज्ञापनों में हिंदी का बढ़ता प्रयोग, लोकप्रिय हिंदी सिनेमा, संपर्क भाषा के रूप में हिंदी का बढ़ता दायरा एवं सरकारी कार्यालयों में हिंदी का बढ़ता प्रयोग इस बात का प्रमाण है कि हिंदी एक सशक्त, समृद्ध एवं लोकप्रिय भाषा हैI उनका कहना था कि वैश्वीकरण और उदारीकरण के वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में तो हिंदी अब कारोबारी जगत की व्यावसायिक आवश्यकता बन गई है।
कार्यक्रम में बोलते हुए राजभाषा विभाग के निदेशक श्री बी. एल. मीना ने कहा कि पूरे देश में स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों आदि में राजभाषा संबंधी प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा सरकारी काम-काज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में राजभाषा विभाग अहम भूमिका निभाता है । राजभाषा सबंधी संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन करने एवं सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा विभाग सतत प्रयासरत है । उनका कहना था कि हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका है। राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी में सहजता से कार्य करने के लिए अनेक प्रभावी साधन मुहैया कराए गए हैं। सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग आसान बनाने के उद्देश्य से राजभाषा विभाग ने अन्य ई-टूल्स एवं एप्लिकेशन्स के अलावा 'ई महाशब्दकोश मोबाइल ऐप' और 'ई-सरल हिंदी वाक्य कोश' तैयार किए हैं I उनका कहना था कि राजभाषा विभाग ने अनुवाद में सहायता के लिए स्मृति आधारित अनुवाद साफ्टवेयर 'कंठस्थ,' सी-डैक पुणे की सहायता से विकसित किया है जिसका प्रयोग करके सरकारी कामकाज में हिंदी को बढ़ावा दिया जा सकता है I श्री मीना ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के "आत्मनिर्भर भारत- स्थानीय के लिए मुखर हों" के आह्वान से प्रेरित होकर राजभाषा विभाग स्वदेशी स्मृति आधारित अनुवाद टूल "कंठस्थ" को और अधिक लोकप्रिय बनाने और विभिन्न संगठनों में इसका विस्तार करने के सभी प्रयास कर रहा है।
श्री बीएल मीना ने बताया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए देश के विभिन्न नगरों में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किया गया है और इस समय पूरे देश में इन समितियों की कुल संख्या 524 है। समारोह में श्री के पी शर्मा व श्री हरीश चौहान द्वारा दक्षिण तथा दक्षिण - पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालयों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई ।
| राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. मीनाक्षी जौली की अध्यक्षता में आज हैदराबाद दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों एवं उपक्रमों इत्यादि के लिए संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विशिष्ट वैज्ञानिक व अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, परमाणु ऊर्जा विभाग डॉ. दिनेश श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के निदेशक एवं नराकास अध्यक्ष डॉ. वी.एम. तिवारी सहित दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विभिन्न कार्यालयों के वरिष्ठअधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. मीनाक्षी जौली ने कहा कि विकास की किसी भी योजना और उसके संबंध में भारत सरकार की नीति को सही रूप में पेश करने के लिए यह आवश्यक है कि ये बातें जनता तक जनता की भाषा में पहुंचें । उनका कहना था कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं तभी प्रभावी होती हैं जब जनता और सरकार के बीच निरंतर संवाद, संपर्क और पारदर्शिता बनी रहे और सरकार की योजनाओं का लाभ देश के सभी नागरिकों को समान रूप से मिले । डॉ. मीनाक्षी ने कहा कि इसके हमारे पास हिंदी के रूप में एक ऐसी भाषा है जो सरल एवं सहज होने के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं व्याकरण की दृष्टि से भी उत्कृष्ट है । अपनी उदारता, सहजता, व्यापकता एवं मधुरता जैसे गुणों की वजह से तथा देश की अन्य भाषाओं एवं बोलियों से सामंजस्य बनाए रखकर सांस्कृतिक संवाहक होने की अपनी क्षमता के कारण हिंदी देश की प्रमुख संपर्क भाषा है । डॉ. जौली ने कहा कि समृद्ध साहित्यिक धरोहर, विज्ञापनों में हिंदी का बढ़ता प्रयोग, लोकप्रिय हिंदी सिनेमा, संपर्क भाषा के रूप में हिंदी का बढ़ता दायरा एवं सरकारी कार्यालयों में हिंदी का बढ़ता प्रयोग इस बात का प्रमाण है कि हिंदी एक सशक्त, समृद्ध एवं लोकप्रिय भाषा हैI उनका कहना था कि वैश्वीकरण और उदारीकरण के वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में तो हिंदी अब कारोबारी जगत की व्यावसायिक आवश्यकता बन गई है। कार्यक्रम में बोलते हुए राजभाषा विभाग के निदेशक श्री बी. एल. मीना ने कहा कि पूरे देश में स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों आदि में राजभाषा संबंधी प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा सरकारी काम-काज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में राजभाषा विभाग अहम भूमिका निभाता है । राजभाषा सबंधी संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन करने एवं सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा विभाग सतत प्रयासरत है । उनका कहना था कि हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका है। राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी में सहजता से कार्य करने के लिए अनेक प्रभावी साधन मुहैया कराए गए हैं। सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग आसान बनाने के उद्देश्य से राजभाषा विभाग ने अन्य ई-टूल्स एवं एप्लिकेशन्स के अलावा 'ई महाशब्दकोश मोबाइल ऐप' और 'ई-सरल हिंदी वाक्य कोश' तैयार किए हैं I उनका कहना था कि राजभाषा विभाग ने अनुवाद में सहायता के लिए स्मृति आधारित अनुवाद साफ्टवेयर 'कंठस्थ,' सी-डैक पुणे की सहायता से विकसित किया है जिसका प्रयोग करके सरकारी कामकाज में हिंदी को बढ़ावा दिया जा सकता है I श्री मीना ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के "आत्मनिर्भर भारत- स्थानीय के लिए मुखर हों" के आह्वान से प्रेरित होकर राजभाषा विभाग स्वदेशी स्मृति आधारित अनुवाद टूल "कंठस्थ" को और अधिक लोकप्रिय बनाने और विभिन्न संगठनों में इसका विस्तार करने के सभी प्रयास कर रहा है। श्री बीएल मीना ने बताया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए देश के विभिन्न नगरों में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किया गया है और इस समय पूरे देश में इन समितियों की कुल संख्या पाँच सौ चौबीस है। समारोह में श्री के पी शर्मा व श्री हरीश चौहान द्वारा दक्षिण तथा दक्षिण - पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालयों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई । |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
भारत के वीवीएस लक्ष्मण को भले ही इडेन गार्डन में खेली गई उनकी 281 रनों की पारी के लिए ही याद किया जाता हो, पर आज के दिन उन्होंने अपनी 79 रनों की पारी से एक कमाल किया था। यह बात है छह साल पहले 2010 की।
नई दिल्ली (जेएनएन)। भारत के वीवीएस लक्ष्मण को भले ही 2001 में इडेन गार्डन में खेली गई उनकी 281 रनों की पारी के लिए ही याद किया जाता हो, पर आज के दिन उन्होंने अपनी 79 रनों की पारी से एक कमाल किया था। यह बात है छह साल पहले 2010 की।
मोहाली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच चल रहा था। इस मैच में लक्ष्मण ने वनडे के अंदाज में 73 गेंदों में नाबाद 79 रनों की पारी खेली थी। इससे भारत नाटकीय अंदाज में पहला टेस्ट एक विकेट से जीतने में सफल रहा था।
यह जीत नाटकीय इसलिए थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में शेन वॉट्सन के 126 और विकेटकीपर टिम पैनी के 92 रनों की बदौलत 428 रनों का पहाड़ खड़ा किया था। इसके जवाब में भारत ने सचिन के 98, सुरेश रैना के 86, राहुल द्रविड़ के 77 और वीरेंद्र सहवाग के 59 रनों की बदौलत 405 रन बनाए। दूसरी पारी में भारत ने जहीर खान और इशांत शर्मा के 3-3 विकेटों की मदद से ऑस्ट्रेलिया को 192 रनों पर आउट कर दिया। इस तरह भारत को चौथी पारी में 216 रनों का लक्ष्य मिला।
चौथी पारी में भारत के एक समय 76 रनों पर चार खिलाड़ी आउट हो गए थे। यह आंकड़ा कुछ ही देर में 124 रनों पर 8 विकेट हो गया। इसके बाद इशांत शर्मा के 92 गेंदों में साहसी 31 रनों की बदौलत उनके और लक्ष्मण के बीच नौवें विकेट के लिए 81 रनों की साझेदारी हुई। उनके आउट होने के बाद प्रज्ञान ओझा (5 रन नाबाद) ने टीम को नाटकीय अंदाज में जीत दिलाई।
इस जीत के असली नायक लक्ष्मण थे, जिन्होंने पहली पारी में पीठ दर्द की वजह से नंबर 10 पर बैटिंग की थी और दूसरी पारी में भी दर्द में ही खेलने उतरे और कुछ शानदार चौके लगाकर टीम को जीत दिलाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने चौके के साथ ही टेस्ट में अपना 46वां अर्धशतक बनाया था।
| भारत के वीवीएस लक्ष्मण को भले ही इडेन गार्डन में खेली गई उनकी दो सौ इक्यासी रनों की पारी के लिए ही याद किया जाता हो, पर आज के दिन उन्होंने अपनी उन्यासी रनों की पारी से एक कमाल किया था। यह बात है छह साल पहले दो हज़ार दस की। नई दिल्ली । भारत के वीवीएस लक्ष्मण को भले ही दो हज़ार एक में इडेन गार्डन में खेली गई उनकी दो सौ इक्यासी रनों की पारी के लिए ही याद किया जाता हो, पर आज के दिन उन्होंने अपनी उन्यासी रनों की पारी से एक कमाल किया था। यह बात है छह साल पहले दो हज़ार दस की। मोहाली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच चल रहा था। इस मैच में लक्ष्मण ने वनडे के अंदाज में तिहत्तर गेंदों में नाबाद उन्यासी रनों की पारी खेली थी। इससे भारत नाटकीय अंदाज में पहला टेस्ट एक विकेट से जीतने में सफल रहा था। यह जीत नाटकीय इसलिए थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में शेन वॉट्सन के एक सौ छब्बीस और विकेटकीपर टिम पैनी के बानवे रनों की बदौलत चार सौ अट्ठाईस रनों का पहाड़ खड़ा किया था। इसके जवाब में भारत ने सचिन के अट्ठानवे, सुरेश रैना के छियासी, राहुल द्रविड़ के सतहत्तर और वीरेंद्र सहवाग के उनसठ रनों की बदौलत चार सौ पाँच रन बनाए। दूसरी पारी में भारत ने जहीर खान और इशांत शर्मा के तीन-तीन विकेटों की मदद से ऑस्ट्रेलिया को एक सौ बानवे रनों पर आउट कर दिया। इस तरह भारत को चौथी पारी में दो सौ सोलह रनों का लक्ष्य मिला। चौथी पारी में भारत के एक समय छिहत्तर रनों पर चार खिलाड़ी आउट हो गए थे। यह आंकड़ा कुछ ही देर में एक सौ चौबीस रनों पर आठ विकेट हो गया। इसके बाद इशांत शर्मा के बानवे गेंदों में साहसी इकतीस रनों की बदौलत उनके और लक्ष्मण के बीच नौवें विकेट के लिए इक्यासी रनों की साझेदारी हुई। उनके आउट होने के बाद प्रज्ञान ओझा ने टीम को नाटकीय अंदाज में जीत दिलाई। इस जीत के असली नायक लक्ष्मण थे, जिन्होंने पहली पारी में पीठ दर्द की वजह से नंबर दस पर बैटिंग की थी और दूसरी पारी में भी दर्द में ही खेलने उतरे और कुछ शानदार चौके लगाकर टीम को जीत दिलाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने चौके के साथ ही टेस्ट में अपना छियालीसवां अर्धशतक बनाया था। |
जनकपुरी का टाइम पास आता जा रहा है लेकिन विकास कार्य धीरे-धीरे स्टार्ट किए जा रहे हैैं। पब्लिक इससे खुश नहीं है। नाखुशी की एक और वजह है। वह है यहां सड़क किनारे टाइल्स लगाने का जो काम स्टार्ट किया गया है उसे करने के दौरान पब्लिक की टेलीफोन लाइन ही डिस्कनेक्ट कर दी गयी।
जनकपुरी एरिया के रहने वाले और कमला नगर विकास समिति के प्रेसीडेंट अनिल अग्रवाल का कहना है कि सड़क किनारे टाइल्स बिछाने के लिए खुदाई की जा रही है। इस काम के दौरान डिपार्टमेंट कोआर्डिनेशन की बहुत कमी है. इससे खुदाई करने वाली जेसीबी मशीन के बीच में आने वाली टेलीफोन लाइन्स तक डेमेज हो रही हैैं। एक बार लाइन डेमेज होने का मतलब है कि दो-तीन दिनों तक लाइन में दिक्कत बनी रहती है। अगर एडमिनिस्ट्रेवि ऑफिसर्स कोआर्डिनेशन से काम कराते तो इस सिचुएशन से बचा जा सकता है।
सोशल एक्टिविस्ट नीरज वर्मा का कहना है कि जनकपुरी महोत्सव की तारीख दिनोंदिन नजदीक आती जा रही है। जनकपुरी एरिया में जितनी स्पीड से काम कराए जाने चाहिए, उस हिसाब से नहीं हो रहा है। सीवर की समस्या को लेकर लोग काफी परेशान है। इस तरफ जल संस्थान ध्यान ही नहीं दे रहा है। इसी का नतीजा है कि जनकमहल सजाए जाने वाले शिवम पार्क के पास मुख्य सड़क पर बुरी तरह से सीवर उफन रहा है। कमला नगर की सड़कों का हाल भी अच्छा भी किसी से छिपा नहीं है। खस्ताहाल सड़कों को बनाने को लेकर भी एडमिनिस्ट्रेशन सीरियस नहीं है।
कमला नगर एरिया के काम को लेकर सीरियसनैस नहीं दिखाई जा रही है। डिपार्टमेंटल कोआर्डिनेशन नहीं होने से लाइन तक डेमेज हो चुकी हैं।
जिस हिसाब से यहां काम चल रहा है लग नहीं रहा कि क्वालिटी वर्क होगा। इसको लेकर ऑफिसर्स लेवल से मॉनीटरिंग भी नहीं दिख रही है।
डेवलेपमेंट के लिए डिपार्टमेंटल कोआर्डिनेशन होना बहुत जरूरी है। अगर इसके बिना काम होगा तो आगे भी पब्लिक को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
इस एरिया में जनकपुरी सज रही है। लेकिन, जनकमहल वाले पार्क के नजदीक सीवर उफन कर सड़क पर बह रहा है.
| जनकपुरी का टाइम पास आता जा रहा है लेकिन विकास कार्य धीरे-धीरे स्टार्ट किए जा रहे हैैं। पब्लिक इससे खुश नहीं है। नाखुशी की एक और वजह है। वह है यहां सड़क किनारे टाइल्स लगाने का जो काम स्टार्ट किया गया है उसे करने के दौरान पब्लिक की टेलीफोन लाइन ही डिस्कनेक्ट कर दी गयी। जनकपुरी एरिया के रहने वाले और कमला नगर विकास समिति के प्रेसीडेंट अनिल अग्रवाल का कहना है कि सड़क किनारे टाइल्स बिछाने के लिए खुदाई की जा रही है। इस काम के दौरान डिपार्टमेंट कोआर्डिनेशन की बहुत कमी है. इससे खुदाई करने वाली जेसीबी मशीन के बीच में आने वाली टेलीफोन लाइन्स तक डेमेज हो रही हैैं। एक बार लाइन डेमेज होने का मतलब है कि दो-तीन दिनों तक लाइन में दिक्कत बनी रहती है। अगर एडमिनिस्ट्रेवि ऑफिसर्स कोआर्डिनेशन से काम कराते तो इस सिचुएशन से बचा जा सकता है। सोशल एक्टिविस्ट नीरज वर्मा का कहना है कि जनकपुरी महोत्सव की तारीख दिनोंदिन नजदीक आती जा रही है। जनकपुरी एरिया में जितनी स्पीड से काम कराए जाने चाहिए, उस हिसाब से नहीं हो रहा है। सीवर की समस्या को लेकर लोग काफी परेशान है। इस तरफ जल संस्थान ध्यान ही नहीं दे रहा है। इसी का नतीजा है कि जनकमहल सजाए जाने वाले शिवम पार्क के पास मुख्य सड़क पर बुरी तरह से सीवर उफन रहा है। कमला नगर की सड़कों का हाल भी अच्छा भी किसी से छिपा नहीं है। खस्ताहाल सड़कों को बनाने को लेकर भी एडमिनिस्ट्रेशन सीरियस नहीं है। कमला नगर एरिया के काम को लेकर सीरियसनैस नहीं दिखाई जा रही है। डिपार्टमेंटल कोआर्डिनेशन नहीं होने से लाइन तक डेमेज हो चुकी हैं। जिस हिसाब से यहां काम चल रहा है लग नहीं रहा कि क्वालिटी वर्क होगा। इसको लेकर ऑफिसर्स लेवल से मॉनीटरिंग भी नहीं दिख रही है। डेवलेपमेंट के लिए डिपार्टमेंटल कोआर्डिनेशन होना बहुत जरूरी है। अगर इसके बिना काम होगा तो आगे भी पब्लिक को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इस एरिया में जनकपुरी सज रही है। लेकिन, जनकमहल वाले पार्क के नजदीक सीवर उफन कर सड़क पर बह रहा है. |
(फाइल फोटो- दिनेश त्रिवेदी, पीटीआई)
विपक्षी पार्टियां संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली हैं. केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों का अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मंजूर कर लिया है. 20 जुलाई यानी शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी. केंद्र सरकार के विरोध में प्रमुखता से मुखर तृणमूल कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है.
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव संसद का महत्वपूर्ण पक्ष है. जुलाई की 21 तारीख तृणमूल कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण तिथि है. यह उन 14 टीएमसी कार्यकर्ताओं के लिए शहादत दिवस की तरह है जिन्हें मार दिया गया था. तृणमूल कांग्रेस के सभी सांसद वहां मौजूद रहेंगे. "
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| विपक्षी पार्टियां संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली हैं. केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों का अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मंजूर कर लिया है. बीस जुलाई यानी शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी. केंद्र सरकार के विरोध में प्रमुखता से मुखर तृणमूल कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है. इस मामले पर टिप्पणी करते हुए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव संसद का महत्वपूर्ण पक्ष है. जुलाई की इक्कीस तारीख तृणमूल कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण तिथि है. यह उन चौदह टीएमसी कार्यकर्ताओं के लिए शहादत दिवस की तरह है जिन्हें मार दिया गया था. तृणमूल कांग्रेस के सभी सांसद वहां मौजूद रहेंगे. " . |
पूर्वी दिल्ली, चाँद-बाग में स्थित एक घर। वो घर, जहाँ एक हिंदू की बेटी की शादी हो रही थी। ताहिर हुसैन के गुंडों और दंगाइयों के हमले और आगजनी से वो घर पूरी तरह जलकर खाक हो गया है और एक मलबे के ढेर में बदल चुका है। मजहबी दंगाइयों द्वारा घर के ऊपर लगातार पेट्रोल बम फेंके गए। लोगों के ऊपर हजारों की संख्या में टाइल्स फेंके गए। पूरा का पूरा पार्किंग लॉट फूँक दिया गया और सारी गाड़ियाँ जलकर कबाड़ में बदल चुकी हैं।
आईबी के लिए काम करने वाले अंकित शर्मा की सैकड़ों बार चाकुओं से गुदी हुई लाश एक नाले से बरामद हुई है। लेकिन वामपंथी मीडिया ये कहानियाँ नहीं दिखाएगा क्योंकि ये कहानियाँ महत्वपूर्ण नहीं हैं। हिन्दुओं की मौत से इस देश की मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
| पूर्वी दिल्ली, चाँद-बाग में स्थित एक घर। वो घर, जहाँ एक हिंदू की बेटी की शादी हो रही थी। ताहिर हुसैन के गुंडों और दंगाइयों के हमले और आगजनी से वो घर पूरी तरह जलकर खाक हो गया है और एक मलबे के ढेर में बदल चुका है। मजहबी दंगाइयों द्वारा घर के ऊपर लगातार पेट्रोल बम फेंके गए। लोगों के ऊपर हजारों की संख्या में टाइल्स फेंके गए। पूरा का पूरा पार्किंग लॉट फूँक दिया गया और सारी गाड़ियाँ जलकर कबाड़ में बदल चुकी हैं। आईबी के लिए काम करने वाले अंकित शर्मा की सैकड़ों बार चाकुओं से गुदी हुई लाश एक नाले से बरामद हुई है। लेकिन वामपंथी मीडिया ये कहानियाँ नहीं दिखाएगा क्योंकि ये कहानियाँ महत्वपूर्ण नहीं हैं। हिन्दुओं की मौत से इस देश की मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता है। |
EV Market Foxconn: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। दुनियाभर की कंपनियां यहां निवेश करने को लेकर उत्साहित नजर आ रही हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Apple के लिए iPhone बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी में है, और अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कुछ राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उसे इस साल एक प्रोडक्शन लाइन डेवलप करने में सहायता करेगा, जो दोपहिया ईवी मैन्युफैक्चरिंग सर्विस को एक नई दिशा में ले जाने का काम करेगी।
ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई ताइवान की कंपनी भारत में अपनी ईवी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बनाने की योजना के बारे में विचार कर रही है। एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही ताइवान का दौरा करने और कंपनी की ईवी योजनाओं पर चर्चा करने के लिए फॉक्सकॉन के अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार है। फरवरी 2022 में वेदांता और होन हाई टेक्नोलॉजी ग्रुप (फॉक्सकॉन) ने भारत में सेमीकंडक्टर बनाने के लिए एक साथ काम करने की घोषणा की थी। वेदांता और ताइवानी निर्माता फॉक्सकॉन ने गुजरात में सेमीकंडक्टर और डेमोंस्ट्रेशन प्रोडक्शन प्लांट के निर्माण में 19. 5 अरब डॉलर का निवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के अधिकारियों ने ईवी निर्माण योजनाओं पर चर्चा करने के लिए पिछले साल अपनी यात्रा के दौरान फॉक्सकॉन के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी।
पिछले साल फॉक्सकॉन के अध्यक्ष यंग लियू की भारत की पहली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था कि ताइवान की कंपनी का ईवी मैन्युफेक्चरिंग के लिए धक्का नेट शून्य उत्सर्जन की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है। कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल कहा है कि इस बीच ऐप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर फॉक्सकॉन ने अप्रैल 2024 तक अपने प्रस्तावित देवनहल्ली प्लांट में आईफोन इकाइयों का निर्माण शुरू करने की योजना बनाई है और राज्य सरकार इस साल 1 जुलाई तक कंपनी के लिए आवश्यक जमीन सौंप देगी। ताइवान स्थित वैश्विक कंपनी ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) को भूमि की लागत का 30 प्रतिशत (90 करोड़ रुपये) पहले ही भुगतान कर दिया है। इसने परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है और तीनों चरणों के पूरा होने के बाद संयंत्र से सालाना 20 मिलियन यूनिट (2 करोड़ यूनिट) के निर्माण का भी लक्ष्य रखा है।
| EV Market Foxconn: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। दुनियाभर की कंपनियां यहां निवेश करने को लेकर उत्साहित नजर आ रही हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Apple के लिए iPhone बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन भारत में इलेक्ट्रिक वाहन के क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी में है, और अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कुछ राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उसे इस साल एक प्रोडक्शन लाइन डेवलप करने में सहायता करेगा, जो दोपहिया ईवी मैन्युफैक्चरिंग सर्विस को एक नई दिशा में ले जाने का काम करेगी। ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई ताइवान की कंपनी भारत में अपनी ईवी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बनाने की योजना के बारे में विचार कर रही है। एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही ताइवान का दौरा करने और कंपनी की ईवी योजनाओं पर चर्चा करने के लिए फॉक्सकॉन के अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार है। फरवरी दो हज़ार बाईस में वेदांता और होन हाई टेक्नोलॉजी ग्रुप ने भारत में सेमीकंडक्टर बनाने के लिए एक साथ काम करने की घोषणा की थी। वेदांता और ताइवानी निर्माता फॉक्सकॉन ने गुजरात में सेमीकंडक्टर और डेमोंस्ट्रेशन प्रोडक्शन प्लांट के निर्माण में उन्नीस. पाँच अरब डॉलर का निवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के अधिकारियों ने ईवी निर्माण योजनाओं पर चर्चा करने के लिए पिछले साल अपनी यात्रा के दौरान फॉक्सकॉन के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। पिछले साल फॉक्सकॉन के अध्यक्ष यंग लियू की भारत की पहली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था कि ताइवान की कंपनी का ईवी मैन्युफेक्चरिंग के लिए धक्का नेट शून्य उत्सर्जन की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है। कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल कहा है कि इस बीच ऐप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर फॉक्सकॉन ने अप्रैल दो हज़ार चौबीस तक अपने प्रस्तावित देवनहल्ली प्लांट में आईफोन इकाइयों का निर्माण शुरू करने की योजना बनाई है और राज्य सरकार इस साल एक जुलाई तक कंपनी के लिए आवश्यक जमीन सौंप देगी। ताइवान स्थित वैश्विक कंपनी ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड को भूमि की लागत का तीस प्रतिशत पहले ही भुगतान कर दिया है। इसने परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है और तीनों चरणों के पूरा होने के बाद संयंत्र से सालाना बीस मिलियन यूनिट के निर्माण का भी लक्ष्य रखा है। |
21 जून,नई दिल्ली। दूसरे टी-20 मुकाबले में केएल राहुल और मंदीप सिंह की युवा सलामी जोड़ी की बदौलत भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे को दस विकेट से रौंद दिया। इस बड़ी जीत के साथ ही इस जोड़ी ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
जिम्बाब्वे के खिलाफ 100 रन के आसान लक्ष्य के जवाब में केएल राहुल औऱ मंदीप सिंह को जोड़ी ने 13.1 ओवर में 103 रन बनाकर आसानी से मैच जीत लिया। इस 103 रन की साझेदारी की बदौलत इन दोनों ने एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
भारतीय क्रिकेट इतिहास का यह दूसरा मौका है जब टी-20 क्रिकेट में भारत की सलामी जोड़ी ने शतकीय साझेदारी की है। इससे पहले साल 2007 में हुए वर्ल्ड टी20 के में वीरेंद्र सहवाग औऱ गौतम गंभीर की सलामी जोड़ी ने इंग्लैंड के खिलाफ 136 रनों की साझेदारी निभाई थी। उसके बाद से कोई भी भारतयी सलामी जोड़ी 100 रन की साझेदारी नही कर पाई थी।
| इक्कीस जून,नई दिल्ली। दूसरे टी-बीस मुकाबले में केएल राहुल और मंदीप सिंह की युवा सलामी जोड़ी की बदौलत भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे को दस विकेट से रौंद दिया। इस बड़ी जीत के साथ ही इस जोड़ी ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। जिम्बाब्वे के खिलाफ एक सौ रन के आसान लक्ष्य के जवाब में केएल राहुल औऱ मंदीप सिंह को जोड़ी ने तेरह.एक ओवर में एक सौ तीन रन बनाकर आसानी से मैच जीत लिया। इस एक सौ तीन रन की साझेदारी की बदौलत इन दोनों ने एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। भारतीय क्रिकेट इतिहास का यह दूसरा मौका है जब टी-बीस क्रिकेट में भारत की सलामी जोड़ी ने शतकीय साझेदारी की है। इससे पहले साल दो हज़ार सात में हुए वर्ल्ड टीबीस के में वीरेंद्र सहवाग औऱ गौतम गंभीर की सलामी जोड़ी ने इंग्लैंड के खिलाफ एक सौ छत्तीस रनों की साझेदारी निभाई थी। उसके बाद से कोई भी भारतयी सलामी जोड़ी एक सौ रन की साझेदारी नही कर पाई थी। |
Samsa एक पारंपरिक एशियाई बेकरी है, जिसने हाल ही में पूरे सीआईएस के विस्तार पर विजय प्राप्त की है और न केवल। और यह समझ में आता है, क्योंकि सांसा - एक बहुत स्वादिष्ट और संतोषजनक पकवान, आप जल्दी से चलने पर नाश्ता कर सकते हैं या कामकाजी दिन की शुरुआत से पहले एक हार्दिक नाश्ता कर सकते हैं। बेशक, तैयार किए गए सांसा को खरीदना आसान है, लेकिन घर पकाने के प्रेमियों के लिए, हम कई व्यंजनों की पेशकश करते हैं।
यह सांसा के लिए एक क्लासिक नुस्खा है। बेशक, आप एक पफ पेस्ट्री खरीद सकते हैं और खाना पकाने की गति बढ़ा सकते हैं, लेकिन जो लोग कठिनाइयों से डरते नहीं हैं और स्वादिष्ट परिणाम के लिए तैयार हैं, वे थोड़ा और समय बिताने के लिए तैयार हैं, हम मांस के साथ एक सांसा के लिए नुस्खा सुझाएंगे।
सामग्रीः
- गोमांस या वील - 600 ग्राम;
- प्याज - 600 ग्राम;
- वसा कुटिल - 200 ग्राम;
- आटा - 3 कप;
- पानी - 300 मिलीलीटर;
- जर्दी - 1 टुकड़ा;
- घी - 150 ग्राम;
- ज़ीर, धनिया , लाल और काली मिर्च, नमक।
हम पानी को नमक करते हैं और क्रिस्टल पूरी तरह से भंग होने तक हलचल करते हैं, फिर एक आटे में डालें और ताजा, मुलायम आटा गूंध लें। हम एक मेज पर मिश्रण खत्म करते हैं, आटा के साथ छिड़कते हैं। हम परीक्षण को 30-40 मिनट तक आराम देते हैं, फिर एक बार फिर हम मिश्रण करते हैं, 15-20 मिनट के लिए फिर से छोड़ दें। हम अपने हाथों से फिर से काम करते हैं और 3 भागों में विभाजित होते हैं। मेज पर आटा डालना न भूलें ताकि आटा छड़ी न हो। प्रत्येक फ्लैट केक पतला होता है, 2 मिमी से अधिक मोटा नहीं होता है। पहली परत पिघला हुआ मक्खन (या मार्जरीन) के साथ smeared है, हम शीर्ष पर दूसरी परत फैलते हैं, यह भी तेल के साथ smeared है, और हम तीसरी परत भी लागू करते हैं। फिर सभी तीन परतें ट्यूब में अच्छी तरह से रोल करने लगती हैं, और अंत तक लुढ़कने के बाद, आपको एक छोटी सी टर्निकिकेट की तरह मोड़ना पड़ता है, ताकि एक दूसरे के बीच परतें घनत्व से जुड़ी हों। परिणामी सॉसेज केक 2-2. 5 सेमी मोटी में काटा जाता है। हम उन्हें एक डोसोचुकु में फैलाते हैं और 30 मिनट तक फ्रीजर में डाल देते हैं।
गोमांस भरने के लिए, आकार में 1x1 सेमी छोटे टुकड़ों में काट लें, प्याज और वसा काट लें, सब कुछ मिलाएं, नमक और मसाले जोड़ें।
वनस्पति तेल के साथ मेज को चिकनाई करें और आटा के प्रत्येक टुकड़े को 2 मिमी मोटी फ्लैट केक में घुमाएं। हम प्रत्येक केक में एक चम्मच पर आटा भरने फैलाते हैं और इसे त्रिकोण के साथ बांधते हैं। हमने बेकिंग शीट पर एक सीम के साथ सैमसा फैलाया, एक पीटा अंडे के साथ शीर्ष को कवर किया, 200 डिग्री 20 मिनट के तापमान पर सेंकना।
सामग्रीः
- सूक्ष्म सूअर का मांस-गोमांस वसा - 850 ग्राम;
- प्याज - 0,5 किलो;
- आटा flaky - 1 किलो;
- जर्दी - 1 टुकड़ा;
- नमक, तिल, मसालों, काली मिर्च।
सूखे मांस में बारीक कटा हुआ प्याज, मसालों, नमक, हलचल डालना। आटा वर्गों में कटौती और केवल थोड़ा सा रोल आउट, भरने के प्रत्येक टुकड़े के बीच पछतावा के बिना फैल रहा है। हम आटा के किनारों की रक्षा करते हैं, इसे चालू करते हैं और इसे थोड़ा निचोड़ते हैं, इसे व्हीप्ड अंडे की जर्दी से पीसते हैं, तिल के साथ छिड़कते हैं और 180 डिग्री के तापमान पर 30 मिनट के लिए ओवन में पकाते हैं।
| Samsa एक पारंपरिक एशियाई बेकरी है, जिसने हाल ही में पूरे सीआईएस के विस्तार पर विजय प्राप्त की है और न केवल। और यह समझ में आता है, क्योंकि सांसा - एक बहुत स्वादिष्ट और संतोषजनक पकवान, आप जल्दी से चलने पर नाश्ता कर सकते हैं या कामकाजी दिन की शुरुआत से पहले एक हार्दिक नाश्ता कर सकते हैं। बेशक, तैयार किए गए सांसा को खरीदना आसान है, लेकिन घर पकाने के प्रेमियों के लिए, हम कई व्यंजनों की पेशकश करते हैं। यह सांसा के लिए एक क्लासिक नुस्खा है। बेशक, आप एक पफ पेस्ट्री खरीद सकते हैं और खाना पकाने की गति बढ़ा सकते हैं, लेकिन जो लोग कठिनाइयों से डरते नहीं हैं और स्वादिष्ट परिणाम के लिए तैयार हैं, वे थोड़ा और समय बिताने के लिए तैयार हैं, हम मांस के साथ एक सांसा के लिए नुस्खा सुझाएंगे। सामग्रीः - गोमांस या वील - छः सौ ग्राम; - प्याज - छः सौ ग्राम; - वसा कुटिल - दो सौ ग्राम; - आटा - तीन कप; - पानी - तीन सौ मिलीलीटर; - जर्दी - एक टुकड़ा; - घी - एक सौ पचास ग्राम; - ज़ीर, धनिया , लाल और काली मिर्च, नमक। हम पानी को नमक करते हैं और क्रिस्टल पूरी तरह से भंग होने तक हलचल करते हैं, फिर एक आटे में डालें और ताजा, मुलायम आटा गूंध लें। हम एक मेज पर मिश्रण खत्म करते हैं, आटा के साथ छिड़कते हैं। हम परीक्षण को तीस-चालीस मिनट तक आराम देते हैं, फिर एक बार फिर हम मिश्रण करते हैं, पंद्रह-बीस मिनट के लिए फिर से छोड़ दें। हम अपने हाथों से फिर से काम करते हैं और तीन भागों में विभाजित होते हैं। मेज पर आटा डालना न भूलें ताकि आटा छड़ी न हो। प्रत्येक फ्लैट केक पतला होता है, दो मिमी से अधिक मोटा नहीं होता है। पहली परत पिघला हुआ मक्खन के साथ smeared है, हम शीर्ष पर दूसरी परत फैलते हैं, यह भी तेल के साथ smeared है, और हम तीसरी परत भी लागू करते हैं। फिर सभी तीन परतें ट्यूब में अच्छी तरह से रोल करने लगती हैं, और अंत तक लुढ़कने के बाद, आपको एक छोटी सी टर्निकिकेट की तरह मोड़ना पड़ता है, ताकि एक दूसरे के बीच परतें घनत्व से जुड़ी हों। परिणामी सॉसेज केक दो-दो. पाँच सेमी मोटी में काटा जाता है। हम उन्हें एक डोसोचुकु में फैलाते हैं और तीस मिनट तक फ्रीजर में डाल देते हैं। गोमांस भरने के लिए, आकार में एकxएक सेमी छोटे टुकड़ों में काट लें, प्याज और वसा काट लें, सब कुछ मिलाएं, नमक और मसाले जोड़ें। वनस्पति तेल के साथ मेज को चिकनाई करें और आटा के प्रत्येक टुकड़े को दो मिमी मोटी फ्लैट केक में घुमाएं। हम प्रत्येक केक में एक चम्मच पर आटा भरने फैलाते हैं और इसे त्रिकोण के साथ बांधते हैं। हमने बेकिंग शीट पर एक सीम के साथ सैमसा फैलाया, एक पीटा अंडे के साथ शीर्ष को कवर किया, दो सौ डिग्री बीस मिनट के तापमान पर सेंकना। सामग्रीः - सूक्ष्म सूअर का मांस-गोमांस वसा - आठ सौ पचास ग्राम; - प्याज - शून्य,पाँच किलो; - आटा flaky - एक किलो; - जर्दी - एक टुकड़ा; - नमक, तिल, मसालों, काली मिर्च। सूखे मांस में बारीक कटा हुआ प्याज, मसालों, नमक, हलचल डालना। आटा वर्गों में कटौती और केवल थोड़ा सा रोल आउट, भरने के प्रत्येक टुकड़े के बीच पछतावा के बिना फैल रहा है। हम आटा के किनारों की रक्षा करते हैं, इसे चालू करते हैं और इसे थोड़ा निचोड़ते हैं, इसे व्हीप्ड अंडे की जर्दी से पीसते हैं, तिल के साथ छिड़कते हैं और एक सौ अस्सी डिग्री के तापमान पर तीस मिनट के लिए ओवन में पकाते हैं। |
क्रिकेट वर्ल्ड कप का आगाज 30 मई से इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में शुरू हो चुका है और जैसे जैसे टीमों के बीच मैच खेले जा रहे हैं वैसे वैसे विश्व कप का रोमांच भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोलने लगा है। वर्ल्ड कप के साथ साथ भारतीय दर्शकों में भारतीय टीम की जर्सी को लेकर भी काफी कौतुहलता मची हुई है साथ ही साथ कुछ कन्फ़्युजन भी है। असल देश में लोकसभा चुनाव के बाद दुबारा से प्रचंड जीत के साथ मोदी सरकार की वापसी के साथ हर तरफ बस भगवा माहौल छाया हुआ है और ऐसे में यह भी खबर आ रही है की इस विश्व कप में कोहली एंड कंपनी भी भगवा जर्सी पहन कर अपने मैच खेलेगी।
जी हाँ, वैसे तो आपको मिल रही रही ये सही है मगर आधी, असल में आपको बता दें की इस बार विश्व कप के लिए आईसीसी ने भी कई नए बदलाव किए हैं, जो दर्शकों को हैरान तो करेंगे ही साथ ही साथ उनमे जोश भी भर देंगे। जी हाँ, इस बार विश्व कप को रोचक बनाने के लिए फुटबॉल की तर्ज पर एक रंग की जर्सी पहनने वाली टीम के लिए अल्टरनेटिव जर्सी की योजना बनायी गई है और ऐसे में इस बार भारतीय टीम विश्व कप में दो अलग अलग तरह की जर्सी में नजर आएगी।
आईसीसी की इस योजना के अनुसार भारतीय टीम की जर्सी इस बार दो अलग अलग रंगों में नजर आने वाली है। मगर आपको यह भी बता दें की ऐसा पूरे मैच के दौरान नहीं बल्कि तब ही होगा जब भारतीय टीम विश्व कप में मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ अपना मुकाबला खेलेगी। इस दौरान उसकी जर्सी पूरी तरह से ब्लू नहीं होगी, बल्कि भारतीय टीम ऑरेंज जर्सी में नजर आयेगी।
इस नए नियम के जारी होने के बाद से भारतीय क्रिकेट टीम की अल्टरनेटिव जर्सी का ना सिर्फ फैंस बल्कि कप्तान कोहली समेत पूरी भारतीय टीम को भी बेसब्री से इंतजार है। हालांकि कहीं कहीं पर टीम की नयी जर्सी का लुक सामने आया है मगर आधिकारिक रूप से यह अभी तक स्पष्ट नही हो पाया है। खैर आपको ये भी बता दें की हर मैच में भारतीय टीम की जर्सी हमेशा की तरह नीली ही रहेगी मगर मेजबान टीम के साथ खेलते वक़्त भारतीय टीम अपनी जर्सी में थोड़ा बदलाव करगी जो आगे से तो नीला मगर पीछे से हैं ऑरेंज कलर का दिखेगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इंग्लैंड की टीम की जर्सी का रंग भी नीला ही है।
भारतीय टीम इस विश्व कप के लिए जो अल्टरनेटिव जर्सी सामने आयी है वो पीछे की साइड से पूरी तरह से ऑरेंज कलर की है, लेकिन जर्सी के आगे का दृश्य अब तक सामने नहीं आया है लेकिन पीछे के दृश्य को देखते हुए तो ये पूरी तरह से ऑरेंज कलर की जर्सी है।
माना जा रहा है कि आईसीसी के नए नियमों के मुताबिक भारतीय टीम ये अल्टरनेटिव नारंगी रंग की जर्सी अफगानिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ पहनेगी। इसके साथ साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका की जर्सी का रंग भी हरा है, जिसके चलते उन्हें भी अपनी जर्सी में कुछ बदलाव करने होंगे।
| क्रिकेट वर्ल्ड कप का आगाज तीस मई से इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में शुरू हो चुका है और जैसे जैसे टीमों के बीच मैच खेले जा रहे हैं वैसे वैसे विश्व कप का रोमांच भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोलने लगा है। वर्ल्ड कप के साथ साथ भारतीय दर्शकों में भारतीय टीम की जर्सी को लेकर भी काफी कौतुहलता मची हुई है साथ ही साथ कुछ कन्फ़्युजन भी है। असल देश में लोकसभा चुनाव के बाद दुबारा से प्रचंड जीत के साथ मोदी सरकार की वापसी के साथ हर तरफ बस भगवा माहौल छाया हुआ है और ऐसे में यह भी खबर आ रही है की इस विश्व कप में कोहली एंड कंपनी भी भगवा जर्सी पहन कर अपने मैच खेलेगी। जी हाँ, वैसे तो आपको मिल रही रही ये सही है मगर आधी, असल में आपको बता दें की इस बार विश्व कप के लिए आईसीसी ने भी कई नए बदलाव किए हैं, जो दर्शकों को हैरान तो करेंगे ही साथ ही साथ उनमे जोश भी भर देंगे। जी हाँ, इस बार विश्व कप को रोचक बनाने के लिए फुटबॉल की तर्ज पर एक रंग की जर्सी पहनने वाली टीम के लिए अल्टरनेटिव जर्सी की योजना बनायी गई है और ऐसे में इस बार भारतीय टीम विश्व कप में दो अलग अलग तरह की जर्सी में नजर आएगी। आईसीसी की इस योजना के अनुसार भारतीय टीम की जर्सी इस बार दो अलग अलग रंगों में नजर आने वाली है। मगर आपको यह भी बता दें की ऐसा पूरे मैच के दौरान नहीं बल्कि तब ही होगा जब भारतीय टीम विश्व कप में मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ अपना मुकाबला खेलेगी। इस दौरान उसकी जर्सी पूरी तरह से ब्लू नहीं होगी, बल्कि भारतीय टीम ऑरेंज जर्सी में नजर आयेगी। इस नए नियम के जारी होने के बाद से भारतीय क्रिकेट टीम की अल्टरनेटिव जर्सी का ना सिर्फ फैंस बल्कि कप्तान कोहली समेत पूरी भारतीय टीम को भी बेसब्री से इंतजार है। हालांकि कहीं कहीं पर टीम की नयी जर्सी का लुक सामने आया है मगर आधिकारिक रूप से यह अभी तक स्पष्ट नही हो पाया है। खैर आपको ये भी बता दें की हर मैच में भारतीय टीम की जर्सी हमेशा की तरह नीली ही रहेगी मगर मेजबान टीम के साथ खेलते वक़्त भारतीय टीम अपनी जर्सी में थोड़ा बदलाव करगी जो आगे से तो नीला मगर पीछे से हैं ऑरेंज कलर का दिखेगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इंग्लैंड की टीम की जर्सी का रंग भी नीला ही है। भारतीय टीम इस विश्व कप के लिए जो अल्टरनेटिव जर्सी सामने आयी है वो पीछे की साइड से पूरी तरह से ऑरेंज कलर की है, लेकिन जर्सी के आगे का दृश्य अब तक सामने नहीं आया है लेकिन पीछे के दृश्य को देखते हुए तो ये पूरी तरह से ऑरेंज कलर की जर्सी है। माना जा रहा है कि आईसीसी के नए नियमों के मुताबिक भारतीय टीम ये अल्टरनेटिव नारंगी रंग की जर्सी अफगानिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ पहनेगी। इसके साथ साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका की जर्सी का रंग भी हरा है, जिसके चलते उन्हें भी अपनी जर्सी में कुछ बदलाव करने होंगे। |
रायपुर । उड़ान आईएएस एकेडमी को छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान से नवाजा गया है। एक निजी चैनल की आेर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एकेडमी के डायरेक्टर अंकित अग्रवाल को यह अवॉर्ड दिया। एकेडमी को यह अवॉर्ड सीजीपीएससी, यूपीएससी,व्यापम की परीक्षाआें में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया है। उड़ान आईएएस ने विगत 8 साल से प्रदेश में आयोजित विभिन्न परीक्षाआें में टॉपर के साथ-साथ सर्वाधिक चयन देने वाली संस्था के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। संस्था में सामाजिक- आर्थिक रूप से अक्षम अभ्यार्थियों को विशेष दी जाती हैं।
रायपुर । लक्ष्मी इलेक्ट्रॉनिक्स में मोबाइल हैंडसेट की खरीदी पर ग्राहकों को आकर्षक इनामी स्कीम दी जा रही है। स्कीम में शामिल होकर ग्राहक सोने का सिक्का आैर हर खरीदी पर निश्चित उपहार जीत सकेंगे। सीमित समय के लिए लाई गई फाइनेंस की स्कीम को ग्राहकों काे अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। शोरूम संचालक राजेश वासवानी व कैलाश वासवानी ने बताया कि वे ग्राहकों के लिए समय-समय पर फायदेमंद स्कीम लाते रहे हैं। इसी श्रृंखला में ये स्कीम लॉन्च की गई है। शोरूम में लगभग सभी नामी कंपनियों के मोबाइल हैंडसेट उपलब्ध हैं। कटोरातालाब स्थित ब्रांच के गुरदास वासवानी ने बताया कि पिछले साल इसी तरह की एक स्कीम में एक्टिवा, एलईडी टीवी व आेवन जैसे गिफ्ट लकी विनर्स को दिए गए थे।
| रायपुर । उड़ान आईएएस एकेडमी को छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान से नवाजा गया है। एक निजी चैनल की आेर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एकेडमी के डायरेक्टर अंकित अग्रवाल को यह अवॉर्ड दिया। एकेडमी को यह अवॉर्ड सीजीपीएससी, यूपीएससी,व्यापम की परीक्षाआें में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया है। उड़ान आईएएस ने विगत आठ साल से प्रदेश में आयोजित विभिन्न परीक्षाआें में टॉपर के साथ-साथ सर्वाधिक चयन देने वाली संस्था के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। संस्था में सामाजिक- आर्थिक रूप से अक्षम अभ्यार्थियों को विशेष दी जाती हैं। रायपुर । लक्ष्मी इलेक्ट्रॉनिक्स में मोबाइल हैंडसेट की खरीदी पर ग्राहकों को आकर्षक इनामी स्कीम दी जा रही है। स्कीम में शामिल होकर ग्राहक सोने का सिक्का आैर हर खरीदी पर निश्चित उपहार जीत सकेंगे। सीमित समय के लिए लाई गई फाइनेंस की स्कीम को ग्राहकों काे अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। शोरूम संचालक राजेश वासवानी व कैलाश वासवानी ने बताया कि वे ग्राहकों के लिए समय-समय पर फायदेमंद स्कीम लाते रहे हैं। इसी श्रृंखला में ये स्कीम लॉन्च की गई है। शोरूम में लगभग सभी नामी कंपनियों के मोबाइल हैंडसेट उपलब्ध हैं। कटोरातालाब स्थित ब्रांच के गुरदास वासवानी ने बताया कि पिछले साल इसी तरह की एक स्कीम में एक्टिवा, एलईडी टीवी व आेवन जैसे गिफ्ट लकी विनर्स को दिए गए थे। |
सरकारी स्कूलों की बदहाली (Photo Credit: News State Bihar Jharkhand)
Latehar:
सरकारी स्कूलों की बदहाली सुधरने की जगह दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है. शिक्षकों की मनमानी और मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी की बात हो गई है. खासकर ग्रामीण इलाकों से इस तरह की शिकायतें हरदिन देखने को मिल जाती है. शिक्षकों की मनमानी का आलम यह है कि मीटिंग का हवाला देकर शिक्षक मीटिंग से 2-3 घंटे पहले ही स्कूल छोड़कर निकल जा रहे हैं. सरकारी स्कूलों की मनमानी से जुड़ा मामला लातेहार से सामने आया है. लातेहार में शिक्षकों की मनमानी के कारण सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों का भविष्य अंधकार में जाता हुआ नजर आ रहा है.
हमने लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत संचालित रुद, पंडरा, विजयपुर समेत कई अन्य सरकारी स्कूलों की पड़ताल की, जहां से घोर लापरवाही सामने आई है. दरअसल, इन स्कूलों में शुक्रवार को शिक्षक नजर ही नहीं आये. स्कूल के शिक्षक मीटिंग का हवाला देकर 11 बजे ही स्कूल छोड़कर निकल गए, जबकि बीआरसी में 1 बजे से मीटिंग आयोजित की गई थी. इन स्कूलों से बीआरसी भवन की दूरी महज 15 किलोमीटर है. जहां से पहुचने में मात्र 30 मिनट ही लगता है.
बावजूद शिक्षक 11 बजे ही स्कूल से निकल गए थे, जिसके बाद स्कूली बच्चे स्कूल की छुट्टी तक स्कूल प्रांगण में खेलते हुए नजर आए. ये सिर्फ शुक्रवार की बात नहीं है, बल्कि इस तरह की बहानेबाजी कर प्रखंड के लगभग कई शिक्षक स्कूल से अमूमन गायब ही रहते हैं. जिसके कारण स्कूल में अध्ययनत बच्चों का पठन-पाठन पर काफी असर पड़ रहा है. आलम यह कि स्कूली बच्चों को शिक्षा मंत्री, प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तक का भी नाम नहीं पता है.
इन स्कूलों में मनमानी का आलम यह है कि बच्चों के मध्याह्न भोजन में भी घोटाला किया जा रहा है. सरकार के द्वारा तय मेन्यू के अनुसार शुक्रवार को बच्चो को अंडा चावल देना था, लेकिन शुक्रवार को पंडरा स्कूल के बच्चो को अंडा की जगह दाल, चावल और टमाटर की चटनी दिया गया था. जबकि रुद स्कूल में चावल, दाल और खानापूर्ति के नाम पर 100 से भी अधिक बच्चों के बीच महज 10-12 अंडा का भुजिया दिया गया था.
इधर कड़ाके की ठंड होने के बावजूद कई स्कूलों के बीच के बदन पर स्वेटर तक नहीं था, जबकि पैरों में जूता भी नजर नहीं आया. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी किस हद तक हावी है. बावजूद विभाग इससे अंजान बना हुआ है. शिक्षकों के स्कूल से गायब रहने समेत अन्य तरह की खामियां सामने है. बता दें कि यह इलाका मूल रूप से आदिवासी बहुल है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आदिवासी बच्चों के साथ खिलवाड़ व मध्यान भोजन में घोटाला कर रहे शिक्षकों पर क्या कुछ कार्रवाई होती है.
| सरकारी स्कूलों की बदहाली Latehar: सरकारी स्कूलों की बदहाली सुधरने की जगह दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है. शिक्षकों की मनमानी और मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी की बात हो गई है. खासकर ग्रामीण इलाकों से इस तरह की शिकायतें हरदिन देखने को मिल जाती है. शिक्षकों की मनमानी का आलम यह है कि मीटिंग का हवाला देकर शिक्षक मीटिंग से दो-तीन घंटाटे पहले ही स्कूल छोड़कर निकल जा रहे हैं. सरकारी स्कूलों की मनमानी से जुड़ा मामला लातेहार से सामने आया है. लातेहार में शिक्षकों की मनमानी के कारण सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों का भविष्य अंधकार में जाता हुआ नजर आ रहा है. हमने लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत संचालित रुद, पंडरा, विजयपुर समेत कई अन्य सरकारी स्कूलों की पड़ताल की, जहां से घोर लापरवाही सामने आई है. दरअसल, इन स्कूलों में शुक्रवार को शिक्षक नजर ही नहीं आये. स्कूल के शिक्षक मीटिंग का हवाला देकर ग्यारह बजे ही स्कूल छोड़कर निकल गए, जबकि बीआरसी में एक बजे से मीटिंग आयोजित की गई थी. इन स्कूलों से बीआरसी भवन की दूरी महज पंद्रह किलोग्राममीटर है. जहां से पहुचने में मात्र तीस मिनट ही लगता है. बावजूद शिक्षक ग्यारह बजे ही स्कूल से निकल गए थे, जिसके बाद स्कूली बच्चे स्कूल की छुट्टी तक स्कूल प्रांगण में खेलते हुए नजर आए. ये सिर्फ शुक्रवार की बात नहीं है, बल्कि इस तरह की बहानेबाजी कर प्रखंड के लगभग कई शिक्षक स्कूल से अमूमन गायब ही रहते हैं. जिसके कारण स्कूल में अध्ययनत बच्चों का पठन-पाठन पर काफी असर पड़ रहा है. आलम यह कि स्कूली बच्चों को शिक्षा मंत्री, प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तक का भी नाम नहीं पता है. इन स्कूलों में मनमानी का आलम यह है कि बच्चों के मध्याह्न भोजन में भी घोटाला किया जा रहा है. सरकार के द्वारा तय मेन्यू के अनुसार शुक्रवार को बच्चो को अंडा चावल देना था, लेकिन शुक्रवार को पंडरा स्कूल के बच्चो को अंडा की जगह दाल, चावल और टमाटर की चटनी दिया गया था. जबकि रुद स्कूल में चावल, दाल और खानापूर्ति के नाम पर एक सौ से भी अधिक बच्चों के बीच महज दस-बारह अंडा का भुजिया दिया गया था. इधर कड़ाके की ठंड होने के बावजूद कई स्कूलों के बीच के बदन पर स्वेटर तक नहीं था, जबकि पैरों में जूता भी नजर नहीं आया. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी किस हद तक हावी है. बावजूद विभाग इससे अंजान बना हुआ है. शिक्षकों के स्कूल से गायब रहने समेत अन्य तरह की खामियां सामने है. बता दें कि यह इलाका मूल रूप से आदिवासी बहुल है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आदिवासी बच्चों के साथ खिलवाड़ व मध्यान भोजन में घोटाला कर रहे शिक्षकों पर क्या कुछ कार्रवाई होती है. |
दक्षिण अफ्रीका टेस्ट के लिए चुने गए बल्लेबाज प्रियांक पांचाल ने कहा कि वह टीम इंडिया की जर्सी पाकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं। प्रियांक पांचाल को चोटिल भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा की जगह टीम में शामिल किया गया।
बीसीसीआई ने अपने बयान में कहा, "टीम इंडिया के टेस्ट उप-कप्तान रोहित शर्मा को मुंबई में अपने प्रैक्टिस सत्र के दौरान बाएं हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई थी। वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी 3 मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। प्रियांक पांचाल टेस्ट टीम में रोहित शर्मा की जगह लेंगे। "
रोहित शर्मा के टेस्ट सीरीज से बाहर होने के बाद कौन उप-कप्तान बनेगा इसका बीसीसीआई ने ऐलान नहीं किया है। प्रियांक पांचाल ने टीम इंडिया का टिकट हासिल करने के बाद कहा, "सभी की दुआओं के लिए धन्यवाद। टीम इंडिया की जर्सी पाकर गर्व महसूस कर रहा हूं। मुझ पर भरोसा जताने के लिए शुक्रिया। "
| दक्षिण अफ्रीका टेस्ट के लिए चुने गए बल्लेबाज प्रियांक पांचाल ने कहा कि वह टीम इंडिया की जर्सी पाकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं। प्रियांक पांचाल को चोटिल भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा की जगह टीम में शामिल किया गया। बीसीसीआई ने अपने बयान में कहा, "टीम इंडिया के टेस्ट उप-कप्तान रोहित शर्मा को मुंबई में अपने प्रैक्टिस सत्र के दौरान बाएं हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई थी। वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी तीन मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। प्रियांक पांचाल टेस्ट टीम में रोहित शर्मा की जगह लेंगे। " रोहित शर्मा के टेस्ट सीरीज से बाहर होने के बाद कौन उप-कप्तान बनेगा इसका बीसीसीआई ने ऐलान नहीं किया है। प्रियांक पांचाल ने टीम इंडिया का टिकट हासिल करने के बाद कहा, "सभी की दुआओं के लिए धन्यवाद। टीम इंडिया की जर्सी पाकर गर्व महसूस कर रहा हूं। मुझ पर भरोसा जताने के लिए शुक्रिया। " |
रेलवे रोड स्थित नगर निगम बालिका हाईस्कूल में 18 साल से कार्यरत चौकीदार विजय नारायण को बकाया वेतन के भुगतान के लिए हाई कोर्ट जाना महंगा पड़ गया। नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें स्कूल से निकाल दिया और उसका सामान बाहर फेंक दिया। ऐसे में वह ठंड में आसमान के नीचे परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। इसकी शिकायत उन्होंने डीएम को दी है। विजय नारायण ने बताया कि वह जुलाई 1998 से स्कूल में डेली वेजज कर्मचारी के रूप में चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं। 2001 तक उन्हें पूरे साल का वेतन मिलता रहा। 2002 से अचानक ग्रीष्मकालीन अवकाश के 40 दिनों का उनका वेतन काटना शुरू कर दिया गया, जबकि उनसे ड्यूटी करवाई गई। वेतन दिलाने के लिए वह लगातार नगर निगम के अधिकारियों से मिलते रहे और मांग पत्र सौंपते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर 2014 में उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर किया। 21 सितंबर को हाई कोर्ट ने नगरायुक्त को 8 सप्ताह के भीतर ब्याज सहित बकाया वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया। उन्होंने अक्टूबर में आदेश की कॉपी नगर आयुक्त को सौंपी। आदेश की कॉपी मिलते ही अधिकारियों को गुस्सा आ गया और बीते मंगलवार को उन्हें निगम की ओर से स्कूल में दिए गए कमरे से बाहर निकाल दिया गया। तब से वह स्कूल के पास खाली पड़े एक प्लॉट में खुले आसमान के नीचे पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से इसकी शिकायत की है। उधर, डीएम निधि केसरवानी का कहना है कि उनके संज्ञान में कोई मामला नहीं है।
| रेलवे रोड स्थित नगर निगम बालिका हाईस्कूल में अट्ठारह साल से कार्यरत चौकीदार विजय नारायण को बकाया वेतन के भुगतान के लिए हाई कोर्ट जाना महंगा पड़ गया। नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें स्कूल से निकाल दिया और उसका सामान बाहर फेंक दिया। ऐसे में वह ठंड में आसमान के नीचे परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। इसकी शिकायत उन्होंने डीएम को दी है। विजय नारायण ने बताया कि वह जुलाई एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से स्कूल में डेली वेजज कर्मचारी के रूप में चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं। दो हज़ार एक तक उन्हें पूरे साल का वेतन मिलता रहा। दो हज़ार दो से अचानक ग्रीष्मकालीन अवकाश के चालीस दिनों का उनका वेतन काटना शुरू कर दिया गया, जबकि उनसे ड्यूटी करवाई गई। वेतन दिलाने के लिए वह लगातार नगर निगम के अधिकारियों से मिलते रहे और मांग पत्र सौंपते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर दो हज़ार चौदह में उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर किया। इक्कीस सितंबर को हाई कोर्ट ने नगरायुक्त को आठ सप्ताह के भीतर ब्याज सहित बकाया वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया। उन्होंने अक्टूबर में आदेश की कॉपी नगर आयुक्त को सौंपी। आदेश की कॉपी मिलते ही अधिकारियों को गुस्सा आ गया और बीते मंगलवार को उन्हें निगम की ओर से स्कूल में दिए गए कमरे से बाहर निकाल दिया गया। तब से वह स्कूल के पास खाली पड़े एक प्लॉट में खुले आसमान के नीचे पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से इसकी शिकायत की है। उधर, डीएम निधि केसरवानी का कहना है कि उनके संज्ञान में कोई मामला नहीं है। |
की प्रतीति हो जाने पर दूसरे व्यंग्य- अर्थ की प्रतीति होती जाती है, यही सम्बन्ध-सम्बन्धिता है।
इस विवेचना से स्पष्ट है कि वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से व्यंग्यार्थ विलक्षण है, और व्यंग्यार्थ का बोध श्रमिधा, लक्षणा या तात्पर्या. वृत्ति द्वारा नहीं हो सकता है। अतरव व्यञ्जना शक्ति का माना जाना. अनिवार्यतः आवश्यक है ।
महिम भट्ट के मत का खण्डन
महिम भट्ट व्यञ्जना और ध्वनि-सिद्धान्त के कट्टर विरोधी हैं। इन्होंने ध्वनि-सिद्धान्त के खण्डन पर 'व्यक्तिविवेक' नामक ग्रन्थ लिखा है ।. इनका कहना है कि जिस व्यञ्जनावृत्ति के आधार पर ध्वनि सिद्धान्त, का विशाल भवन निर्माण किया गया है, वह व्यञ्जना पूर्व-सिद्ध अनुः मान के अतिरिक्त कोई पृथक् पदार्थ नहीं है ।
यहाँ यह समझ लेना उचित होगा कि 'अनुमान' किसे कहते हैं अनुमान में साधन द्वारा साध्य सिद्ध किया जाता है । साधन कहते हैंः हेतु या लिङ्ग को अनुमान किये जाने के कारण को, अर्थात् जिसके द्वारा अनुमान किया जाता है। साध्य या लिंङ्गी उसे कहते हैं जो अनुमान के ज्ञान का विषय हो, अर्थात् जिसका अनुमान किया जाता है। जैसे धुएँ से का अनुमान किया जाता है - 'धु' साधन ( हेतु ) है, और 'अग्नि' साध्य । क्योंकि धुएँ से यह अनुमान हो जाता है किं. यहाँ धुत्र है, अतः यहाँ अग्नि भी है। अनुमान में व्याप्ति सम्बन्ध रहता है, अर्थात् जहाँ जहाँ घुयाँ है वहाँ वहाँ श्रग्नि भी अवश्य है . और यह व्याप्त सम्बन्ध ही अनुमान है।
महिम मट्ट कहते हैं कि जिसे तुम व्यञ्जक कहते हो - जिसके द्वारा व्यंग्यार्थ का ज्ञान होना बतलाते हो वह अनुमान का साधन ( हेतु ) है । अर्थात् जिस प्रकार धुएँ से अग्नि का अनुमान हो जाता है, उसी
प्रकार तुम्हारे माने हुए व्यञ्जक शब्द वा अर्थ का, जिसे तुम व्यंग्यार्थ मानते हो, अनुमान हो जाता है ।
अपने मत की पुष्टि में महिम मह ने ऐसे अनेक पद्य, जिनको ध्वनिकार ने ध्वनि के उदाहरणों में दिखाए हैं, उद्धृत करके उनमें 'अनुमान' होना सिद्ध किया है । जैसे----
भगत निधरक विचर वह न स्वान इत आज; हत्यो ताहि, जो रहत इहि सरिता-तट मृगराज । ३२५
यह पद्य किसी कुलटा स्त्री द्वारा उस भक्त के प्रति कहा हुआ है जो उस कुलटा के एकान्त स्थल में पुष्प लेने के लिये प्रतिदिन प्राया करता था ' । ध्वनिकार ने कहा है - 'इस पद्य के वाच्यार्थ में कुत्ते से डरनेवाले उस भक्त को, सिंह द्वारा कुत्ते का मारा जाना कहकर निश्शक आने के लिये कुलटा कह रही है। किन्तु व्यंग्यार्थ में उस कुलटा ने उसे, सिंह का भय दिखाकर, आने का निषेध किया है। क्योंकि जो व्यक्ति कुत्ते से भयभीत होता है, वह उसी स्थान पर सिंह के रहने की बात सुनकर वहाँ जाने का किस प्रकार साइस कर सकता है। और यह निषेध व्यंग्यार्थ है' ।
महिम भट्ट का कहना है -- 'जिस वाच्यार्थ में निश्शाने के लिये कहा गया है, वह वाच्यार्थ ही न आने को कहने का साधन ( हेतु ) है; जिसको व्यंग्यर्थ बताया जाता है, वह व्यञ्जना का व्यापार नहीं, किन्तु वाच्यार्थ द्वारा ही उसका अनुमान हो जाता है। जैसे अग्नि का अनुमान करने के लिए धुएँ का होना हेतु है, उसी प्रकार सिंह के होने की सूचना देना वहाँ आने के निषेध का हेतु है । इसी प्रकार के तर्कों द्वारा उन्होंने अपने मत का प्रतिपादन किया है ।
१ देखो, पृष्ठ ११४ ।
मम्मटन तर्कों का बड़ी सारगर्भित युक्तियों द्वारा खण्डन किया है । श्रीमम्मट कहते है -- "सिंह का होना जो तुम अनुमान का हेतु बताते हो, व अनैकान्तिक है - निश्चयात्मक नहीं है। अनुमान वहीं हो सकता है जहाँ हेत निश्चयात्मक होता है। जैसे अग्नि का अनुमान वहीं हो सकता है, जहाँ धुएँ का होना निश्चित हो । यदि धुएँ के स्तित्व में ही संशय होतो का अनुमान भी नहीं किया जा सकता । कुलटा द्वारा सिंह का होना बताए जाने में उस भक्त के वहाँ न आने का देत निश्चयात्मक नहीं है, क्योंकि गुरु या स्वामी की आज्ञा से या किसी प्रेमी के अनुराग से अथवा ऐसे ही किसी विशेष कारण से डरपोक व्यक्ति का भी भय वाले स्थान पर जाना हो सकता है। अतएव यहाँ हेतु नहीं - हेतु का आभास है। फिर वहाँ पर सिंह का होना, न तो प्रत्यक्ष सिद्ध है, और न अनुमान- सिद्ध ही है । सिंह को बतलानेवाली .एक कुलटा है, जिसका कथन वाक्य ( सत्यवादी ऋषियों का वाक्य ) नहीं हो सकता है, प्रत्युत ऐसी स्त्रियों का झूठ बोलना तो स्वभाव-सिद्ध है । अतएव वहाँ सिंह है या नहीं ? यह भी सन्देहास्पद है। इस प्रकार व्याप्ति सम्बन्ध, जिसका होना अनुमान के लिये परमावश्यक है सन्दिग्ध है। ऐसी अवस्था में अनुमान सिद्ध नहीं होता है। महिम भट्ट के सभी प्राक्षेपों का इसी प्रकार समुचित उत्तर देकर मम्मटाचार्य ने यह भली भाँति सिद्ध कर दिया है कि व्यञ्जना का माना जाना आवश्यक है, और व्यञ्जना का व्यंग्यार्थ, अनुमान का विषय किसी भी प्रकार नहीं हो सकता है ।
यहाँ तक काव्य के प्रथम भेद 'ध्वनि' का निरूपण किया गया है । व काव्य के दूसरे भेदं गुणीभूतव्यंग्य का निरूपण किया जायगा ।
जहाँ वाच्यार्थ प्रधान होता है और व्यंग्यार्थ गौण होता है, उसको 'गुणीभूत॒व्यंग्य' कहते हैं ।
'गोण' का अर्थ है प्रधान, और 'गुणीभूत' का अर्थ है गौण हो जाना- प्रधान हो जाना । वाच्यार्थ से गौण होने का तात्पर्य यह है कि व्यंग्य का वाच्यार्थ से कारक न होना वाच्यार्थ के समान चमत्कारक होना या वाच्यार्थ से न्यून चमत्कारक होना ।
ध्वनि और गुणीभूतव्यंग्य में यही भेद है कि ध्वनि में वाच्यार्थ की अपेक्षा व्यंग्यार्थ प्रधान होता है । और गुणीभूतव्यंग्य में व्यंग्यार्थ से चाच्या प्रधान होता है ।
गुणीभूतव्यंग्य के प्रधानतः भेद होते हैं । ( १ ) अगूढ़, ( २ ) रा, ( ३ ) वाच्यसिध्यङ्ग, (४) फुट ( ५ ) सन्दिग्ध, ( ६ )
तुल्यप्राधान्य, ( ७ ) काकाक्षिप्त (८) सुन्दर ।
( १ ) गूढ व्यंग्य
जो 'व्यंग्यार्थ' वाच्यार्थ के समान स्पष्ट प्रतीत होता
है, उसे गूढ व्यंग्य कहते हैं। | की प्रतीति हो जाने पर दूसरे व्यंग्य- अर्थ की प्रतीति होती जाती है, यही सम्बन्ध-सम्बन्धिता है। इस विवेचना से स्पष्ट है कि वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से व्यंग्यार्थ विलक्षण है, और व्यंग्यार्थ का बोध श्रमिधा, लक्षणा या तात्पर्या. वृत्ति द्वारा नहीं हो सकता है। अतरव व्यञ्जना शक्ति का माना जाना. अनिवार्यतः आवश्यक है । महिम भट्ट के मत का खण्डन महिम भट्ट व्यञ्जना और ध्वनि-सिद्धान्त के कट्टर विरोधी हैं। इन्होंने ध्वनि-सिद्धान्त के खण्डन पर 'व्यक्तिविवेक' नामक ग्रन्थ लिखा है ।. इनका कहना है कि जिस व्यञ्जनावृत्ति के आधार पर ध्वनि सिद्धान्त, का विशाल भवन निर्माण किया गया है, वह व्यञ्जना पूर्व-सिद्ध अनुः मान के अतिरिक्त कोई पृथक् पदार्थ नहीं है । यहाँ यह समझ लेना उचित होगा कि 'अनुमान' किसे कहते हैं अनुमान में साधन द्वारा साध्य सिद्ध किया जाता है । साधन कहते हैंः हेतु या लिङ्ग को अनुमान किये जाने के कारण को, अर्थात् जिसके द्वारा अनुमान किया जाता है। साध्य या लिंङ्गी उसे कहते हैं जो अनुमान के ज्ञान का विषय हो, अर्थात् जिसका अनुमान किया जाता है। जैसे धुएँ से का अनुमान किया जाता है - 'धु' साधन है, और 'अग्नि' साध्य । क्योंकि धुएँ से यह अनुमान हो जाता है किं. यहाँ धुत्र है, अतः यहाँ अग्नि भी है। अनुमान में व्याप्ति सम्बन्ध रहता है, अर्थात् जहाँ जहाँ घुयाँ है वहाँ वहाँ श्रग्नि भी अवश्य है . और यह व्याप्त सम्बन्ध ही अनुमान है। महिम मट्ट कहते हैं कि जिसे तुम व्यञ्जक कहते हो - जिसके द्वारा व्यंग्यार्थ का ज्ञान होना बतलाते हो वह अनुमान का साधन है । अर्थात् जिस प्रकार धुएँ से अग्नि का अनुमान हो जाता है, उसी प्रकार तुम्हारे माने हुए व्यञ्जक शब्द वा अर्थ का, जिसे तुम व्यंग्यार्थ मानते हो, अनुमान हो जाता है । अपने मत की पुष्टि में महिम मह ने ऐसे अनेक पद्य, जिनको ध्वनिकार ने ध्वनि के उदाहरणों में दिखाए हैं, उद्धृत करके उनमें 'अनुमान' होना सिद्ध किया है । जैसे---- भगत निधरक विचर वह न स्वान इत आज; हत्यो ताहि, जो रहत इहि सरिता-तट मृगराज । तीन सौ पच्चीस यह पद्य किसी कुलटा स्त्री द्वारा उस भक्त के प्रति कहा हुआ है जो उस कुलटा के एकान्त स्थल में पुष्प लेने के लिये प्रतिदिन प्राया करता था ' । ध्वनिकार ने कहा है - 'इस पद्य के वाच्यार्थ में कुत्ते से डरनेवाले उस भक्त को, सिंह द्वारा कुत्ते का मारा जाना कहकर निश्शक आने के लिये कुलटा कह रही है। किन्तु व्यंग्यार्थ में उस कुलटा ने उसे, सिंह का भय दिखाकर, आने का निषेध किया है। क्योंकि जो व्यक्ति कुत्ते से भयभीत होता है, वह उसी स्थान पर सिंह के रहने की बात सुनकर वहाँ जाने का किस प्रकार साइस कर सकता है। और यह निषेध व्यंग्यार्थ है' । महिम भट्ट का कहना है -- 'जिस वाच्यार्थ में निश्शाने के लिये कहा गया है, वह वाच्यार्थ ही न आने को कहने का साधन है; जिसको व्यंग्यर्थ बताया जाता है, वह व्यञ्जना का व्यापार नहीं, किन्तु वाच्यार्थ द्वारा ही उसका अनुमान हो जाता है। जैसे अग्नि का अनुमान करने के लिए धुएँ का होना हेतु है, उसी प्रकार सिंह के होने की सूचना देना वहाँ आने के निषेध का हेतु है । इसी प्रकार के तर्कों द्वारा उन्होंने अपने मत का प्रतिपादन किया है । एक देखो, पृष्ठ एक सौ चौदह । मम्मटन तर्कों का बड़ी सारगर्भित युक्तियों द्वारा खण्डन किया है । श्रीमम्मट कहते है -- "सिंह का होना जो तुम अनुमान का हेतु बताते हो, व अनैकान्तिक है - निश्चयात्मक नहीं है। अनुमान वहीं हो सकता है जहाँ हेत निश्चयात्मक होता है। जैसे अग्नि का अनुमान वहीं हो सकता है, जहाँ धुएँ का होना निश्चित हो । यदि धुएँ के स्तित्व में ही संशय होतो का अनुमान भी नहीं किया जा सकता । कुलटा द्वारा सिंह का होना बताए जाने में उस भक्त के वहाँ न आने का देत निश्चयात्मक नहीं है, क्योंकि गुरु या स्वामी की आज्ञा से या किसी प्रेमी के अनुराग से अथवा ऐसे ही किसी विशेष कारण से डरपोक व्यक्ति का भी भय वाले स्थान पर जाना हो सकता है। अतएव यहाँ हेतु नहीं - हेतु का आभास है। फिर वहाँ पर सिंह का होना, न तो प्रत्यक्ष सिद्ध है, और न अनुमान- सिद्ध ही है । सिंह को बतलानेवाली .एक कुलटा है, जिसका कथन वाक्य नहीं हो सकता है, प्रत्युत ऐसी स्त्रियों का झूठ बोलना तो स्वभाव-सिद्ध है । अतएव वहाँ सिंह है या नहीं ? यह भी सन्देहास्पद है। इस प्रकार व्याप्ति सम्बन्ध, जिसका होना अनुमान के लिये परमावश्यक है सन्दिग्ध है। ऐसी अवस्था में अनुमान सिद्ध नहीं होता है। महिम भट्ट के सभी प्राक्षेपों का इसी प्रकार समुचित उत्तर देकर मम्मटाचार्य ने यह भली भाँति सिद्ध कर दिया है कि व्यञ्जना का माना जाना आवश्यक है, और व्यञ्जना का व्यंग्यार्थ, अनुमान का विषय किसी भी प्रकार नहीं हो सकता है । यहाँ तक काव्य के प्रथम भेद 'ध्वनि' का निरूपण किया गया है । व काव्य के दूसरे भेदं गुणीभूतव्यंग्य का निरूपण किया जायगा । जहाँ वाच्यार्थ प्रधान होता है और व्यंग्यार्थ गौण होता है, उसको 'गुणीभूत॒व्यंग्य' कहते हैं । 'गोण' का अर्थ है प्रधान, और 'गुणीभूत' का अर्थ है गौण हो जाना- प्रधान हो जाना । वाच्यार्थ से गौण होने का तात्पर्य यह है कि व्यंग्य का वाच्यार्थ से कारक न होना वाच्यार्थ के समान चमत्कारक होना या वाच्यार्थ से न्यून चमत्कारक होना । ध्वनि और गुणीभूतव्यंग्य में यही भेद है कि ध्वनि में वाच्यार्थ की अपेक्षा व्यंग्यार्थ प्रधान होता है । और गुणीभूतव्यंग्य में व्यंग्यार्थ से चाच्या प्रधान होता है । गुणीभूतव्यंग्य के प्रधानतः भेद होते हैं । अगूढ़, रा, वाच्यसिध्यङ्ग, फुट सन्दिग्ध, तुल्यप्राधान्य, काकाक्षिप्त सुन्दर । गूढ व्यंग्य जो 'व्यंग्यार्थ' वाच्यार्थ के समान स्पष्ट प्रतीत होता है, उसे गूढ व्यंग्य कहते हैं। |
आप खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट से प्रो-बायोटिक्स ले सकती हैं। ये मां के साथ साथ शिशु की इम्यूनिटी को भी बढ़ाने का काम करते हैं। इससे आगे चलकर बच्चे को अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर परेशानियों से बचाव मिल सकता है। प्रेगनेंट महिलाओं को नियमित प्रोबायोटिक्स लेने चाहिए।
प्रेगनेंट महिला को दिनभर में लगभग ढाई लीटर पानी पीने की जरूरत होती है ताकि इस समय उनका शरीर हाइड्रेट रहता है। अगर शरीर हाइड्रेट रहेगा तो कोशिकाओं को अपना कार्य करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिल पाएगा।
पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल देता है और लिम्फ बनाने में मदद करता है जिससे पूरे शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं और पोषक तत्व संचारित होते हैं।
प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ नींद आने में दिक्कत होने लगती हैं लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि प्रेगनेंसी में थकान आसानी से हो जाती है इसलिए शरीर को आराम देने के लिए सोना बहुत जरूरी है। नींद की कमी का बुरा असर आपके इम्यून सिस्टम पर पड़ सकता है।
बेहतर नींद पाने के लिए करवट लेकर सो सकती हैं। सोने से पहले गर्म पानी से नहाने से भी रात को अच्छी नींद आती है।
हंसने से इम्यूनिटी बढ़ती है और इसका बच्चे पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। कहते हैं कि प्रेगनेंट महिलाओं को खुश रहना चाहिए, क्योंकि इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। हंसने पर पल्स और ब्लड प्रेशर बढता है और सांस तेज चलती है जिससे शरीर के ऊतकों को ज्यादा ऑक्सीजन मिल पाता है।
इस सबका असर इम्यून सिस्टम पर पड़ताहै। विटामिन डी भी इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करता है। इससे फर्टिलिटी पॉवर भी बढ़ती है। प्रेगनेंसी में गर्भवती महिलाओं को जिंक का सेवन भी करना चाहिए।
तनाव को दूर रखने और सकारात्मक रहने से इम्यून सिस्टम स्वस्थ रहता है। गर्भवती महिलाओं को तनाव से दूर रहना चाहिए, क्योंकि न केवल इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है बल्कि शिशु के लिए भी यह फायदेमंद होता है। आप ध्यान, योग, संगीत और किताबें पढ़कर तनाव से दूर रह सकती हैं।
लहसुन में इम्यूनिटी को बढ़ाने और शरीर को निरोगी रखने के गुण होते हैं। लहसुन की एक कली में 100 से सल्फ्यूरिक एसिड होते हैं और कैल्शियम एवं पोटैशियम भी अधिक मात्रा में होते हैं।
ये शरीर से बैक्टीरिया को मार सकता है। अगर आप कच्चा लहसुन नहीं खा सकती हैं तो खाना पकाते समय इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। भोजन में भी लहसुन को शामिल कर इसका लाभ उठा सकती हैं।
| आप खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट से प्रो-बायोटिक्स ले सकती हैं। ये मां के साथ साथ शिशु की इम्यूनिटी को भी बढ़ाने का काम करते हैं। इससे आगे चलकर बच्चे को अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर परेशानियों से बचाव मिल सकता है। प्रेगनेंट महिलाओं को नियमित प्रोबायोटिक्स लेने चाहिए। प्रेगनेंट महिला को दिनभर में लगभग ढाई लीटर पानी पीने की जरूरत होती है ताकि इस समय उनका शरीर हाइड्रेट रहता है। अगर शरीर हाइड्रेट रहेगा तो कोशिकाओं को अपना कार्य करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिल पाएगा। पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल देता है और लिम्फ बनाने में मदद करता है जिससे पूरे शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं और पोषक तत्व संचारित होते हैं। प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ नींद आने में दिक्कत होने लगती हैं लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि प्रेगनेंसी में थकान आसानी से हो जाती है इसलिए शरीर को आराम देने के लिए सोना बहुत जरूरी है। नींद की कमी का बुरा असर आपके इम्यून सिस्टम पर पड़ सकता है। बेहतर नींद पाने के लिए करवट लेकर सो सकती हैं। सोने से पहले गर्म पानी से नहाने से भी रात को अच्छी नींद आती है। हंसने से इम्यूनिटी बढ़ती है और इसका बच्चे पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। कहते हैं कि प्रेगनेंट महिलाओं को खुश रहना चाहिए, क्योंकि इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। हंसने पर पल्स और ब्लड प्रेशर बढता है और सांस तेज चलती है जिससे शरीर के ऊतकों को ज्यादा ऑक्सीजन मिल पाता है। इस सबका असर इम्यून सिस्टम पर पड़ताहै। विटामिन डी भी इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करता है। इससे फर्टिलिटी पॉवर भी बढ़ती है। प्रेगनेंसी में गर्भवती महिलाओं को जिंक का सेवन भी करना चाहिए। तनाव को दूर रखने और सकारात्मक रहने से इम्यून सिस्टम स्वस्थ रहता है। गर्भवती महिलाओं को तनाव से दूर रहना चाहिए, क्योंकि न केवल इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है बल्कि शिशु के लिए भी यह फायदेमंद होता है। आप ध्यान, योग, संगीत और किताबें पढ़कर तनाव से दूर रह सकती हैं। लहसुन में इम्यूनिटी को बढ़ाने और शरीर को निरोगी रखने के गुण होते हैं। लहसुन की एक कली में एक सौ से सल्फ्यूरिक एसिड होते हैं और कैल्शियम एवं पोटैशियम भी अधिक मात्रा में होते हैं। ये शरीर से बैक्टीरिया को मार सकता है। अगर आप कच्चा लहसुन नहीं खा सकती हैं तो खाना पकाते समय इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। भोजन में भी लहसुन को शामिल कर इसका लाभ उठा सकती हैं। |
कोविड-19 महामारी के बाद आनलाइन सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच विस्तारित करने के लिए, ईपीएफओ ने पीएफ सदस्यों को अपने ईपीएफओ जन्म तिथि के रिकार्ड को ठीक करने की सुविधा प्रदान करने के लिए अपने फील्ड अधिकारियों को संशोधित निर्देश जारी किए हैं और इस प्रकार,सुनिश्चित किया कि उनका यूएएन केवाईसी अनुवर्ती है।
'आधार'में दर्ज जन्म की तिथि को अब शुद्धिकरण के प्रयोजन के लिए जन्म की वैध तिथि के रूप में स्वीकार किया जाएगा, बशर्ते कि दोनों तिथियों में अंतर तीन वर्ष से कम हो। पीएफ अभिदाता शुद्धिकरण के आग्रहों को ऑनलाइन जमा कर सकता है।
यह ईपीएफओ को यूआईडीएआई के साथ तत्काल ऑनलाइन सदस्यों की जन्म तिथि को सत्यापित करने में सक्षम बनाएगा,इस प्रकार बदलाव आग्रहों के अधिप्रमाणन और प्रोसेसिंग समय में कमी लाएगा।
ईपीएफओ ने कोविड-19 महामारी पर काबू पाने में अपने पीएफ संचयों से गैर वापसी योग्य अग्रिम का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आग्रह करने में वित्तीय संकटग्रस्त पीएफ सदस्यों को सक्षम बनाते हुए अपने फील्ड अधिकारियों को ऑनलाइन आग्रहों के निपटान में तेजी लाने को कहा है।
| कोविड-उन्नीस महामारी के बाद आनलाइन सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच विस्तारित करने के लिए, ईपीएफओ ने पीएफ सदस्यों को अपने ईपीएफओ जन्म तिथि के रिकार्ड को ठीक करने की सुविधा प्रदान करने के लिए अपने फील्ड अधिकारियों को संशोधित निर्देश जारी किए हैं और इस प्रकार,सुनिश्चित किया कि उनका यूएएन केवाईसी अनुवर्ती है। 'आधार'में दर्ज जन्म की तिथि को अब शुद्धिकरण के प्रयोजन के लिए जन्म की वैध तिथि के रूप में स्वीकार किया जाएगा, बशर्ते कि दोनों तिथियों में अंतर तीन वर्ष से कम हो। पीएफ अभिदाता शुद्धिकरण के आग्रहों को ऑनलाइन जमा कर सकता है। यह ईपीएफओ को यूआईडीएआई के साथ तत्काल ऑनलाइन सदस्यों की जन्म तिथि को सत्यापित करने में सक्षम बनाएगा,इस प्रकार बदलाव आग्रहों के अधिप्रमाणन और प्रोसेसिंग समय में कमी लाएगा। ईपीएफओ ने कोविड-उन्नीस महामारी पर काबू पाने में अपने पीएफ संचयों से गैर वापसी योग्य अग्रिम का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आग्रह करने में वित्तीय संकटग्रस्त पीएफ सदस्यों को सक्षम बनाते हुए अपने फील्ड अधिकारियों को ऑनलाइन आग्रहों के निपटान में तेजी लाने को कहा है। |
शब्द "बदमाशी" - यह क्या है? अंग्रेजी से अनुवादित, इसका अर्थ है गुंडागर्दी। बुलिंग एक व्यक्ति पर बार-बार नकारात्मक मनोवैज्ञानिक दबाव है। यह न केवल स्कूलों में होता है, बल्कि काम पर भी होता है। नतीजतन, जिस व्यक्ति को नकारात्मक प्रभाव का निर्देशन किया जाता है, वह निरंतर तनाव का अनुभव करना शुरू कर देता है। और परिणामस्वरूप - मुझे अपने अध्ययन या कार्य के स्थान को बदलना होगा। स्कूल की बदमाशी अपनी क्रूरता, अकर्मण्यता के लिए उल्लेखनीय है। और इसे अलग से माना जाना चाहिए।
बाहरी रूप से, उभयलिंगी अनुचित रूप से प्रकट होता हैएक व्यक्ति (कर्मचारी, छात्र) के प्रति बर्खास्तगी और अभिमानी रवैया। उनकी पूरी पहल पर सवाल उठाए गए और उनका मजाक उड़ाया गया। साथ ही बयान और कोई कार्रवाई। यह सब जहरीली आलोचना के अंतर्गत आता है।
धमकाने वाला व्यक्ति कोशिश कर रहा हैयह साबित करें कि सामूहिक के लिए उनका बलिदान मूर्खतापूर्ण और बेकार है। वह खुले अपमान और अपमान और अपमान का सामना कर सकता है। हमलावर हमेशा एक सहयोगी नहीं होता है, वह पीड़ित का मुखिया हो सकता है।
मैनेजर की ओर सेप्रबंधन की गतिविधियों में संलग्न होने में उनकी अक्षमता और अक्षमता को दर्शाता है। हमला पेशेवर अक्षमता और हीनता को छुपाता है, जो उत्पीड़न की डिग्री से निर्धारित होता है। यदि एक साधारण कर्मचारी धमकाने में लगा हुआ है, तो यह किसी और के खर्च पर आत्म-पुष्टि है।
इस तरह के उत्पीड़न का विरोध करना बहुत मुश्किल है। सहकर्मी अक्सर तटस्थ स्थिति लेते हैं, और शायद ही कभी पीड़ित व्यक्ति के लिए हस्तक्षेप करना शुरू करते हैं, अन्य लोगों के संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं। कभी-कभी कर्मचारी हमलावर का समर्थन करते हैं, उसकी बदमाशी में शामिल होते हैं। खासकर अगर बॉस बुलिंग में व्यस्त हो।
लोग तैरने क्यों जाते हैं?
बुलिंग एक सामाजिक घटना हैकिसी अन्य व्यक्ति पर आक्रमण को निर्देशित करके उनकी असंगतता को छिपाने में मदद करता है अपनी हीनता दिखाने का डर। इस प्रकार हमलावर अपनी कमजोरियों को छिपाने की कोशिश करता है। ज्यादातर अक्सर यह काम में अक्षम व्यक्ति होता है।
कभी-कभी अन्य कर्मचारी उससे जुड़ जाते हैं। इसका मतलब यह है कि उपरोक्त गुणों का हिस्सा उनमें मौजूद है। लेकिन अगर हमलावर - प्रमुख, फिर अपने कार्यों का समर्थन करना अपनी नौकरी खोने के डर का प्रकटन हो सकता है।
मानव-निर्देशित खुला नकारात्मकमनोवैज्ञानिक प्रेस, उत्पीड़न - यह बुलिंग है। यह समझना कि कोई व्यक्ति या लोगों का एक समूह ऐसा क्यों करता है जो खड़े होने का सही तरीका चुनने में मदद करेगा।
सबसे पहले, पीड़ित को इस के आगे नहीं झुकना चाहिए।दबाव, घबराहट - शांत रखने का प्रयास करना चाहिए। और धमकाने का कारण समझें। उनमें से बहुत कुछ हो सकता है - व्यक्तिगत शत्रुता, एक लंबे समय तक संघर्ष, एक पीड़ित का पद पाने की इच्छा आदि। इस पर निर्भर करते हुए, हमलावर के प्रति व्यवहार की रणनीति पर काम करने की कोशिश करें।
यदि आप इसे स्वयं नहीं कर सकते,आप मैनुअल को संदर्भित करने का प्रयास कर सकते हैं। दूसरे विभाग या शाखा में स्थानांतरण के लिए कहें। यदि इस तरह के कोई विकल्प नहीं हैं और हमलावर के हमलावर का विरोध करने के लिए कोई शक्ति नहीं बची है, तो नौकरी बदलना आसान है। आपकी नसें और स्वास्थ्य अधिक महत्वपूर्ण हैं।
बुलिंग - यह क्या है? दूसरे शब्दों में - एक व्यक्ति या लोगों के समूह के उद्देश्य से लगातार मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न। आप बुलिंग का विरोध कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिक इस समस्या के कई समाधान देते हैंः
- इस तरह से काम करना कि व्यावसायिकता को ठेस पहुँचाना असंभव हो;
- एक ही के साथ हमलावर का जवाब नहीं और स्टिंग टिप्पणी और अपमान का जवाब नहीं देने की कोशिश करें;
- रोने, एक खुले मौखिक संघर्ष, घोटालों और अशिष्टता के रूप में विघटन की अनुमति नहीं देने के लिए (यह केवल पीड़ित की नपुंसकता को दर्शाता है)
- समान विचारधारा वाले लोगों को ढूंढें (कुछ पहले इस तरह के उत्पीड़न के अधीन हो सकते हैं);
- उन सहयोगियों को खोजें, जिनके पास हमलावर के प्रति एंटीपैथी है, और उनके साथ एक आम भाषा खोजने की कोशिश करते हैं;
- प्रत्येक चरण और क्रिया की गणना करें।
बैल काम पर क्यों दिखाई देता है?
बुलिंग - यह क्या है? सरल शब्दों में - किसी व्यक्ति पर एक नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव, जिसके दौरान उसे खुले तौर पर अपमानित किया जाता है, अपमानित किया जाता है, आलोचना की जाती है और सब कुछ कास्टिक टोन में किया जाता है।
सबसे अधिक बार, रैंक्स रैंकों में होता हैकर्मचारियों को। यद्यपि यह कंपनी के व्यक्तिगत ग्राहकों को निर्देशित किया जा सकता है। प्रबंधक कभी-कभी अपनी स्थिति का दुरुपयोग करते हैं, और ऐसे मामले होते हैं जब उन्हें प्रबंधकों द्वारा भी समर्थन दिया जाता है।
शोध के अनुसार यह पाया गया किज्यादातर, बदमाशी के शिकार आज्ञाकारी, कमजोर और मामूली कार्यकर्ता होते हैं। ये गुण उन्हें सहयोगियों या वरिष्ठों को नापसंद करने का कारण बन सकते हैं। लेकिन मुखर और सफल कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न के अधीन किया जा सकता है, जिससे अन्य लोग ईर्ष्या करते हैं।
बदमाशी करने में सक्षम प्रमुख खराब हैंप्रबंधक जो उच्च पदों के लिए सक्षम नहीं हैं, क्योंकि वे नहीं जानते कि क्रोध का सामना कैसे करना है, संचार और सामाजिक कौशल नहीं है। इस तरह के मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न के साथ वे बस अपनी शक्ति को बनाए रखना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए, कर्मचारियों के अपमान और अपमान का तिरस्कार न करें।
काम की वजह से बुलिंग हो सकती हैअसुविधाजनक कार्यस्थलों, तंग कमरे, खराब उपकरण और काम करने की स्थिति। इन मामलों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए कर्मचारियों पर दबाव टीम में ज्यादातर स्क्वैबल्स का कारण बनता है। और यह बदमाशी की अभिव्यक्ति की शुरुआत हो सकती है।
मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया हैजिसके परिणाम ने बदमाशी और व्यक्तित्व विकार के बीच एक संबंध स्थापित किया। कुल मिलाकर 11 प्रकार के मानसिक विकार हैं। इनमें से 3 सबसे अधिक बार अपराधियों के बीच नहीं, बल्कि संगठनों के प्रमुखों में पाए जाते हैंः
- थियेट्रिकल डिसऑर्डर - इनसाइनरिटी, मैनिपुलेशन, इगोरोस्ट्रिज्म और ध्यान की बढ़ी हुई आवश्यकता की विशेषता है;
- narcissistic - भव्यता के भ्रम से प्रतिष्ठित, सहानुभूति और समझ की कमी, अन्य लोगों पर श्रेष्ठता;
- जुनूनी-बाध्यकारी - पूर्णतावाद, हठ, तानाशाही, क्रूरता और काम के प्रति अत्यधिक समर्पण की विशेषता।
बदमाशी के कई प्रमुख रूप हैं। वे आक्रामक, अनुचित, निरंतर और अत्यधिक दृढ़ता के साथ दिखाई देते हैं। काम पर, बदमाशी के रूप में हो सकता हैः
- कर्मचारियों की थकावट (आदर्श से ऊपर का काम);
- ब्लैकमेल, डराना;
- किसी और की सफलता के लिए विनियोग करना;
- काम के लिए आवश्यक जानकारी (या इसकी अविश्वसनीयता) को छिपाना;
- टीम के बाकी कर्मचारियों से अलगाव;
- अच्छे काम की गैर-मान्यता;
- पिछले कर्मचारी गलतियों के निरंतर अनुस्मारक।
बुलिंग एक लंबी आक्रामक हैदूसरे व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक (कम शारीरिक) दबाव। यह सामान्य रूप से टीम के काम और विशेष रूप से लक्षित कर्मचारी के कार्य की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। उसके लिए नकारात्मक परिणामों में से एक तनाव होगा। किसी व्यक्ति को धमकाने की मदद से कभी-कभी आत्महत्या के लिए प्रेरित किया जाता है।
गवाहों के उत्पीड़न नकारात्मकता की उनकी खुराक प्राप्त करते हैं। काम पर स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है, और वे दूसरी जगह जाने की कोशिश करते हैं। नतीजतन, संगठन उच्च योग्य कर्मचारियों को खो सकता है। कार्मिक टर्नओवर, मुकदमे, अनुपस्थिति, काम में गलतियाँ, आदि दिखाई देते हैं।
स्कूल बदमाशी - यह घटना क्या है? दूसरे शब्दों में, एक बच्चे का आक्रामक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक उत्पीड़न दूसरे द्वारा (या व्यक्तियों का एक समूह)। मूल रूप से, यह घटना 11 साल से दिखाई देने लगती है। अक्सर न केवल मनोवैज्ञानिक दबाव होता है, बल्कि पिटाई भी होती है। गपशप, नाम-पुकार और चुभने वाले चुटकुले को भीड़ कहते हैं।
रूस में लगभग 50% बच्चे वस्तु बन जाते हैं।बदमाशी। प्राथमिक ग्रेड में, यह खुद को एक स्कूल रैकेट के रूप में प्रकट कर सकता है (सेल फोन, पैसे आदि के शिकार से वंचित)। 11 से 15 वर्ष की आयु में, उपहास, अपमान, बहिष्कार का दंश शुरू हो जाता है। नतीजतन, बच्चा पीड़ित निराशा, अकेलेपन और दर्द की भावना का अनुभव करता है।
बुलिंग हमेशा एक बच्चे को शुरू करता है। फिर अन्य लोग इसमें शामिल होते हैं। यदि पीड़ित विरोध नहीं करता है और शिक्षक उत्पीड़न को रोकने की कोशिश नहीं करता है, तो पीड़ित बच्चे के लिए कोई भी हस्तक्षेप नहीं करेगा। कभी-कभी उसके प्रति सहानुभूति उदासीनता और जलन में बदल जाती है।
ऐसे स्कूलों में जहां मानव गरिमा की शिक्षा पर जोर दिया जाता है, बदमाशी दुर्लभ है। शैक्षिक संस्थानों के विपरीत, जहां सब कुछ संयोग से निर्धारित होता है।
बुलिंग को भी मजबूत किया जा सकता है।स्कूली बच्चे, अगर उन पर सहपाठियों या अन्य बच्चों के समूह द्वारा दबाव डाला जाता है। अक्सर, पीड़ित खुद अनजाने में हमलावरों को उकसाते हैं। उदाहरण के लिए, उनकी अशिष्ट उपस्थिति, अतिसंवेदनशीलता और भेद्यता, यह शिक्षकों का पसंदीदा भी हो सकता है। बच्चों के साथ-साथ अपने सहपाठियों से अलग तरह से।
बुलिंग - यह क्या है और यह खुद को कैसे प्रकट करता है? इस शब्द को लंबे समय तक आक्रामकता के रूप में वर्णित किया जा सकता है,किसी अन्य व्यक्ति के उद्देश्य से। स्कूली बच्चे जिनके माता-पिता या वयस्कों का कोई सम्मान नहीं है, वे बछड़े बन जाते हैं। ऐसे आक्रामक बच्चों में अक्सर ध्यान और समझ की कमी होती है। अपने कार्यों से, वे उन्हें नोटिस करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ माता-पिता के प्यार के लिए तरसते हैं, जो अन्य बच्चों पर नहीं है।
| शब्द "बदमाशी" - यह क्या है? अंग्रेजी से अनुवादित, इसका अर्थ है गुंडागर्दी। बुलिंग एक व्यक्ति पर बार-बार नकारात्मक मनोवैज्ञानिक दबाव है। यह न केवल स्कूलों में होता है, बल्कि काम पर भी होता है। नतीजतन, जिस व्यक्ति को नकारात्मक प्रभाव का निर्देशन किया जाता है, वह निरंतर तनाव का अनुभव करना शुरू कर देता है। और परिणामस्वरूप - मुझे अपने अध्ययन या कार्य के स्थान को बदलना होगा। स्कूल की बदमाशी अपनी क्रूरता, अकर्मण्यता के लिए उल्लेखनीय है। और इसे अलग से माना जाना चाहिए। बाहरी रूप से, उभयलिंगी अनुचित रूप से प्रकट होता हैएक व्यक्ति के प्रति बर्खास्तगी और अभिमानी रवैया। उनकी पूरी पहल पर सवाल उठाए गए और उनका मजाक उड़ाया गया। साथ ही बयान और कोई कार्रवाई। यह सब जहरीली आलोचना के अंतर्गत आता है। धमकाने वाला व्यक्ति कोशिश कर रहा हैयह साबित करें कि सामूहिक के लिए उनका बलिदान मूर्खतापूर्ण और बेकार है। वह खुले अपमान और अपमान और अपमान का सामना कर सकता है। हमलावर हमेशा एक सहयोगी नहीं होता है, वह पीड़ित का मुखिया हो सकता है। मैनेजर की ओर सेप्रबंधन की गतिविधियों में संलग्न होने में उनकी अक्षमता और अक्षमता को दर्शाता है। हमला पेशेवर अक्षमता और हीनता को छुपाता है, जो उत्पीड़न की डिग्री से निर्धारित होता है। यदि एक साधारण कर्मचारी धमकाने में लगा हुआ है, तो यह किसी और के खर्च पर आत्म-पुष्टि है। इस तरह के उत्पीड़न का विरोध करना बहुत मुश्किल है। सहकर्मी अक्सर तटस्थ स्थिति लेते हैं, और शायद ही कभी पीड़ित व्यक्ति के लिए हस्तक्षेप करना शुरू करते हैं, अन्य लोगों के संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं। कभी-कभी कर्मचारी हमलावर का समर्थन करते हैं, उसकी बदमाशी में शामिल होते हैं। खासकर अगर बॉस बुलिंग में व्यस्त हो। लोग तैरने क्यों जाते हैं? बुलिंग एक सामाजिक घटना हैकिसी अन्य व्यक्ति पर आक्रमण को निर्देशित करके उनकी असंगतता को छिपाने में मदद करता है अपनी हीनता दिखाने का डर। इस प्रकार हमलावर अपनी कमजोरियों को छिपाने की कोशिश करता है। ज्यादातर अक्सर यह काम में अक्षम व्यक्ति होता है। कभी-कभी अन्य कर्मचारी उससे जुड़ जाते हैं। इसका मतलब यह है कि उपरोक्त गुणों का हिस्सा उनमें मौजूद है। लेकिन अगर हमलावर - प्रमुख, फिर अपने कार्यों का समर्थन करना अपनी नौकरी खोने के डर का प्रकटन हो सकता है। मानव-निर्देशित खुला नकारात्मकमनोवैज्ञानिक प्रेस, उत्पीड़न - यह बुलिंग है। यह समझना कि कोई व्यक्ति या लोगों का एक समूह ऐसा क्यों करता है जो खड़े होने का सही तरीका चुनने में मदद करेगा। सबसे पहले, पीड़ित को इस के आगे नहीं झुकना चाहिए।दबाव, घबराहट - शांत रखने का प्रयास करना चाहिए। और धमकाने का कारण समझें। उनमें से बहुत कुछ हो सकता है - व्यक्तिगत शत्रुता, एक लंबे समय तक संघर्ष, एक पीड़ित का पद पाने की इच्छा आदि। इस पर निर्भर करते हुए, हमलावर के प्रति व्यवहार की रणनीति पर काम करने की कोशिश करें। यदि आप इसे स्वयं नहीं कर सकते,आप मैनुअल को संदर्भित करने का प्रयास कर सकते हैं। दूसरे विभाग या शाखा में स्थानांतरण के लिए कहें। यदि इस तरह के कोई विकल्प नहीं हैं और हमलावर के हमलावर का विरोध करने के लिए कोई शक्ति नहीं बची है, तो नौकरी बदलना आसान है। आपकी नसें और स्वास्थ्य अधिक महत्वपूर्ण हैं। बुलिंग - यह क्या है? दूसरे शब्दों में - एक व्यक्ति या लोगों के समूह के उद्देश्य से लगातार मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न। आप बुलिंग का विरोध कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिक इस समस्या के कई समाधान देते हैंः - इस तरह से काम करना कि व्यावसायिकता को ठेस पहुँचाना असंभव हो; - एक ही के साथ हमलावर का जवाब नहीं और स्टिंग टिप्पणी और अपमान का जवाब नहीं देने की कोशिश करें; - रोने, एक खुले मौखिक संघर्ष, घोटालों और अशिष्टता के रूप में विघटन की अनुमति नहीं देने के लिए - समान विचारधारा वाले लोगों को ढूंढें ; - उन सहयोगियों को खोजें, जिनके पास हमलावर के प्रति एंटीपैथी है, और उनके साथ एक आम भाषा खोजने की कोशिश करते हैं; - प्रत्येक चरण और क्रिया की गणना करें। बैल काम पर क्यों दिखाई देता है? बुलिंग - यह क्या है? सरल शब्दों में - किसी व्यक्ति पर एक नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव, जिसके दौरान उसे खुले तौर पर अपमानित किया जाता है, अपमानित किया जाता है, आलोचना की जाती है और सब कुछ कास्टिक टोन में किया जाता है। सबसे अधिक बार, रैंक्स रैंकों में होता हैकर्मचारियों को। यद्यपि यह कंपनी के व्यक्तिगत ग्राहकों को निर्देशित किया जा सकता है। प्रबंधक कभी-कभी अपनी स्थिति का दुरुपयोग करते हैं, और ऐसे मामले होते हैं जब उन्हें प्रबंधकों द्वारा भी समर्थन दिया जाता है। शोध के अनुसार यह पाया गया किज्यादातर, बदमाशी के शिकार आज्ञाकारी, कमजोर और मामूली कार्यकर्ता होते हैं। ये गुण उन्हें सहयोगियों या वरिष्ठों को नापसंद करने का कारण बन सकते हैं। लेकिन मुखर और सफल कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न के अधीन किया जा सकता है, जिससे अन्य लोग ईर्ष्या करते हैं। बदमाशी करने में सक्षम प्रमुख खराब हैंप्रबंधक जो उच्च पदों के लिए सक्षम नहीं हैं, क्योंकि वे नहीं जानते कि क्रोध का सामना कैसे करना है, संचार और सामाजिक कौशल नहीं है। इस तरह के मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न के साथ वे बस अपनी शक्ति को बनाए रखना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए, कर्मचारियों के अपमान और अपमान का तिरस्कार न करें। काम की वजह से बुलिंग हो सकती हैअसुविधाजनक कार्यस्थलों, तंग कमरे, खराब उपकरण और काम करने की स्थिति। इन मामलों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए कर्मचारियों पर दबाव टीम में ज्यादातर स्क्वैबल्स का कारण बनता है। और यह बदमाशी की अभिव्यक्ति की शुरुआत हो सकती है। मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया हैजिसके परिणाम ने बदमाशी और व्यक्तित्व विकार के बीच एक संबंध स्थापित किया। कुल मिलाकर ग्यारह प्रकार के मानसिक विकार हैं। इनमें से तीन सबसे अधिक बार अपराधियों के बीच नहीं, बल्कि संगठनों के प्रमुखों में पाए जाते हैंः - थियेट्रिकल डिसऑर्डर - इनसाइनरिटी, मैनिपुलेशन, इगोरोस्ट्रिज्म और ध्यान की बढ़ी हुई आवश्यकता की विशेषता है; - narcissistic - भव्यता के भ्रम से प्रतिष्ठित, सहानुभूति और समझ की कमी, अन्य लोगों पर श्रेष्ठता; - जुनूनी-बाध्यकारी - पूर्णतावाद, हठ, तानाशाही, क्रूरता और काम के प्रति अत्यधिक समर्पण की विशेषता। बदमाशी के कई प्रमुख रूप हैं। वे आक्रामक, अनुचित, निरंतर और अत्यधिक दृढ़ता के साथ दिखाई देते हैं। काम पर, बदमाशी के रूप में हो सकता हैः - कर्मचारियों की थकावट ; - ब्लैकमेल, डराना; - किसी और की सफलता के लिए विनियोग करना; - काम के लिए आवश्यक जानकारी को छिपाना; - टीम के बाकी कर्मचारियों से अलगाव; - अच्छे काम की गैर-मान्यता; - पिछले कर्मचारी गलतियों के निरंतर अनुस्मारक। बुलिंग एक लंबी आक्रामक हैदूसरे व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक दबाव। यह सामान्य रूप से टीम के काम और विशेष रूप से लक्षित कर्मचारी के कार्य की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। उसके लिए नकारात्मक परिणामों में से एक तनाव होगा। किसी व्यक्ति को धमकाने की मदद से कभी-कभी आत्महत्या के लिए प्रेरित किया जाता है। गवाहों के उत्पीड़न नकारात्मकता की उनकी खुराक प्राप्त करते हैं। काम पर स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है, और वे दूसरी जगह जाने की कोशिश करते हैं। नतीजतन, संगठन उच्च योग्य कर्मचारियों को खो सकता है। कार्मिक टर्नओवर, मुकदमे, अनुपस्थिति, काम में गलतियाँ, आदि दिखाई देते हैं। स्कूल बदमाशी - यह घटना क्या है? दूसरे शब्दों में, एक बच्चे का आक्रामक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक उत्पीड़न दूसरे द्वारा । मूल रूप से, यह घटना ग्यारह साल से दिखाई देने लगती है। अक्सर न केवल मनोवैज्ञानिक दबाव होता है, बल्कि पिटाई भी होती है। गपशप, नाम-पुकार और चुभने वाले चुटकुले को भीड़ कहते हैं। रूस में लगभग पचास% बच्चे वस्तु बन जाते हैं।बदमाशी। प्राथमिक ग्रेड में, यह खुद को एक स्कूल रैकेट के रूप में प्रकट कर सकता है । ग्यारह से पंद्रह वर्ष की आयु में, उपहास, अपमान, बहिष्कार का दंश शुरू हो जाता है। नतीजतन, बच्चा पीड़ित निराशा, अकेलेपन और दर्द की भावना का अनुभव करता है। बुलिंग हमेशा एक बच्चे को शुरू करता है। फिर अन्य लोग इसमें शामिल होते हैं। यदि पीड़ित विरोध नहीं करता है और शिक्षक उत्पीड़न को रोकने की कोशिश नहीं करता है, तो पीड़ित बच्चे के लिए कोई भी हस्तक्षेप नहीं करेगा। कभी-कभी उसके प्रति सहानुभूति उदासीनता और जलन में बदल जाती है। ऐसे स्कूलों में जहां मानव गरिमा की शिक्षा पर जोर दिया जाता है, बदमाशी दुर्लभ है। शैक्षिक संस्थानों के विपरीत, जहां सब कुछ संयोग से निर्धारित होता है। बुलिंग को भी मजबूत किया जा सकता है।स्कूली बच्चे, अगर उन पर सहपाठियों या अन्य बच्चों के समूह द्वारा दबाव डाला जाता है। अक्सर, पीड़ित खुद अनजाने में हमलावरों को उकसाते हैं। उदाहरण के लिए, उनकी अशिष्ट उपस्थिति, अतिसंवेदनशीलता और भेद्यता, यह शिक्षकों का पसंदीदा भी हो सकता है। बच्चों के साथ-साथ अपने सहपाठियों से अलग तरह से। बुलिंग - यह क्या है और यह खुद को कैसे प्रकट करता है? इस शब्द को लंबे समय तक आक्रामकता के रूप में वर्णित किया जा सकता है,किसी अन्य व्यक्ति के उद्देश्य से। स्कूली बच्चे जिनके माता-पिता या वयस्कों का कोई सम्मान नहीं है, वे बछड़े बन जाते हैं। ऐसे आक्रामक बच्चों में अक्सर ध्यान और समझ की कमी होती है। अपने कार्यों से, वे उन्हें नोटिस करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ माता-पिता के प्यार के लिए तरसते हैं, जो अन्य बच्चों पर नहीं है। |
नई दिल्ली। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकटर एंड्रयू साइमंड्स की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। साइमंड्स की बहन ने कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को नहीं पता कि सायमंड्स हादसे वाली रात को उस सुनसान सड़क पर क्या कर रहे थे।
उनकी बहन लुईस साइमंड्स ने कहा कि वह चाहती हैं कि वह अपने भाई के साथ बस एक और दिन समय बिता सकें। उन्होंने आगे कहा कि मेरे भाई वापस आ जाओ और परिवार के साथ समय बिताओ।
लुईस के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि, दुर्घटना बहुत भयानक थी। हम नहीं जानते कि आंद्रे साइमंड्स वहां क्या कर रहे थे। हादसे में साइमंड्स के दो कुत्ते बच गए।
रिपोर्ट के अनुसार, दो स्थानीय लोग बबेथा नेलीमन और वायलन टाउनसन दुर्घटना के कुछ ही मिनटों के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने पूर्व क्रिकेटर को गाड़ी में लहुलुहान पाया। दोनों ने साइमंड्स के पास जाने की कोशिश की, लेकिन एक कुत्ते ने व्यक्ति को पास नहीं जाने दिया।
| नई दिल्ली। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकटर एंड्रयू साइमंड्स की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। साइमंड्स की बहन ने कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को नहीं पता कि सायमंड्स हादसे वाली रात को उस सुनसान सड़क पर क्या कर रहे थे। उनकी बहन लुईस साइमंड्स ने कहा कि वह चाहती हैं कि वह अपने भाई के साथ बस एक और दिन समय बिता सकें। उन्होंने आगे कहा कि मेरे भाई वापस आ जाओ और परिवार के साथ समय बिताओ। लुईस के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि, दुर्घटना बहुत भयानक थी। हम नहीं जानते कि आंद्रे साइमंड्स वहां क्या कर रहे थे। हादसे में साइमंड्स के दो कुत्ते बच गए। रिपोर्ट के अनुसार, दो स्थानीय लोग बबेथा नेलीमन और वायलन टाउनसन दुर्घटना के कुछ ही मिनटों के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने पूर्व क्रिकेटर को गाड़ी में लहुलुहान पाया। दोनों ने साइमंड्स के पास जाने की कोशिश की, लेकिन एक कुत्ते ने व्यक्ति को पास नहीं जाने दिया। |
गोंद के लड्डू खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। ऐसे में आज हम आपको गोंद के लड्डू बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं गोंद के लड्डू बनाने का तरीका।
Gond Laddu Recipe: अक्सर लोग सर्दियों में मेवे के लड्डू बनाकर खाते हैं। यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। वहीं गोंद के लड्डू खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। ऐसे में आज हम आपको गोंद के लड्डू बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं गोंद के लड्डू बनाने का तरीका।
- इसे बनाने के लिए आप सबसे पहले गैस पर भारी तले वाली कड़ाही में घी गर्म करके इसमें गोंद डालकर मध्यम आंच पर तल लें।
- फिर जब गोंद का रंग गोल्डन ब्राउन हो जाए तो गैस बंद करें।
- इसके बाद फिर गोंद को थोड़ा ठंडा करके कूट लें या फिर आप चाहें तो इसे मिक्सी में पीस लें।
- फिर इसके बाद कड़ाही को फिर से गैस पर रखकर घी गर्म करें।
- इसके बाद इसमें आटा डालकर मध्यम आंच पर भून लें।
- आटे को हल्का ब्राउन होने तक भून लें।
- इसके बाद आटे में गोंद, काजू, बादाम और तरबूज के बीज डालकर गैस बंद करें।
- फिर तैयार इस मिक्सचर को कढ़ाई से बाहर निकालकर ठंडा होने के लिए रख दें।
- अब आटा और गोंद के मिक्सचर में पिसी चीनी मिला दें।
- इसके बाद इस मिक्सचर के गोल-गोल लड्डू बना लें।
| गोंद के लड्डू खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। ऐसे में आज हम आपको गोंद के लड्डू बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं गोंद के लड्डू बनाने का तरीका। Gond Laddu Recipe: अक्सर लोग सर्दियों में मेवे के लड्डू बनाकर खाते हैं। यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। वहीं गोंद के लड्डू खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। ऐसे में आज हम आपको गोंद के लड्डू बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं गोंद के लड्डू बनाने का तरीका। - इसे बनाने के लिए आप सबसे पहले गैस पर भारी तले वाली कड़ाही में घी गर्म करके इसमें गोंद डालकर मध्यम आंच पर तल लें। - फिर जब गोंद का रंग गोल्डन ब्राउन हो जाए तो गैस बंद करें। - इसके बाद फिर गोंद को थोड़ा ठंडा करके कूट लें या फिर आप चाहें तो इसे मिक्सी में पीस लें। - फिर इसके बाद कड़ाही को फिर से गैस पर रखकर घी गर्म करें। - इसके बाद इसमें आटा डालकर मध्यम आंच पर भून लें। - आटे को हल्का ब्राउन होने तक भून लें। - इसके बाद आटे में गोंद, काजू, बादाम और तरबूज के बीज डालकर गैस बंद करें। - फिर तैयार इस मिक्सचर को कढ़ाई से बाहर निकालकर ठंडा होने के लिए रख दें। - अब आटा और गोंद के मिक्सचर में पिसी चीनी मिला दें। - इसके बाद इस मिक्सचर के गोल-गोल लड्डू बना लें। |
नेशनल हेराल्ड कथित भ्रष्टाचार मामले में आज भी तीन घंटे से अधिक समय तक सोनिया गांधी से ईडी में पूछताछ की गयी। आज भी कांग्रेस के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि उनके मनोबल को तोड़ने के लिए सरकार इस प्रकार की कार्यवाही कर रही है परंतु वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
इराक़ी सुरक्षा सूत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक़, मूसिल स्थित तुर्की के वाणिज्य दूतावास पर रॉकेट हमला हुआ है।
बांग्लादेश की न्यूज़ वेबसाइट डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक़, ढाका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ से 4. 5 अरब डॉलर के क़र्ज़ की मांग की है, ताकि ख़ाली होते विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखा जा सके।
ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने ट्वीट किया कि मैंने कुवैत, यूएई, ओमान, क़तर और इराक़ के अपने समकक्षों से टेलिफोन पर वार्ताएं की हैं।
नैन्सी पेलोसी अमरीकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा की प्रमुख हैं। वह इस सदन की पहली महिला प्रमुख हैं और ताइवान की ख़तरनाक यात्रा करने पर तुली हुई हैं।
भारत में ज़बरदस्त राजनैतिक संघर्ष के हालात नज़र आने लगे हैं। संसद के भीतर भी और सड़क पर भी विपक्ष की ओर से संघर्ष देखने में आ रहा है।
पाकिस्तान ने भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ़ से पाक चीन आर्थिक कारीडोर सीपेक से संबंधित टिप्पणी को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह बड़ी परियोजना को सियासी रंग देने की नाकाम कोशिश है।
ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि ज़ायोनियों की वजह से इलाक़े में अशांति और अस्थिरता फैलती है।
पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य मंत्री के चयन के बारे में डिप्टी स्पीकर दोस्त मुहम्मद मज़ारी की ओर से मुस्लिम लीग क़ाफ़ के 10 वोट रद्द करने के फ़ैसले को ख़ारिज करते हुए पीटीआई के उम्मीदवार चौधरी परवेज़ इलाही को नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया है।
इस्राईल के युद्ध मंत्री बेनी गांट्स ने एक बयान दिया है जिससे यह साफ़ ज़ाहिर है कि रूस ने सीरिया के पटल पर इस्राईल को सज़ा देना शुरू कर दिया है।
| नेशनल हेराल्ड कथित भ्रष्टाचार मामले में आज भी तीन घंटे से अधिक समय तक सोनिया गांधी से ईडी में पूछताछ की गयी। आज भी कांग्रेस के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि उनके मनोबल को तोड़ने के लिए सरकार इस प्रकार की कार्यवाही कर रही है परंतु वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। इराक़ी सुरक्षा सूत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक़, मूसिल स्थित तुर्की के वाणिज्य दूतावास पर रॉकेट हमला हुआ है। बांग्लादेश की न्यूज़ वेबसाइट डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक़, ढाका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ से चार. पाँच अरब डॉलर के क़र्ज़ की मांग की है, ताकि ख़ाली होते विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखा जा सके। ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने ट्वीट किया कि मैंने कुवैत, यूएई, ओमान, क़तर और इराक़ के अपने समकक्षों से टेलिफोन पर वार्ताएं की हैं। नैन्सी पेलोसी अमरीकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा की प्रमुख हैं। वह इस सदन की पहली महिला प्रमुख हैं और ताइवान की ख़तरनाक यात्रा करने पर तुली हुई हैं। भारत में ज़बरदस्त राजनैतिक संघर्ष के हालात नज़र आने लगे हैं। संसद के भीतर भी और सड़क पर भी विपक्ष की ओर से संघर्ष देखने में आ रहा है। पाकिस्तान ने भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ़ से पाक चीन आर्थिक कारीडोर सीपेक से संबंधित टिप्पणी को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह बड़ी परियोजना को सियासी रंग देने की नाकाम कोशिश है। ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि ज़ायोनियों की वजह से इलाक़े में अशांति और अस्थिरता फैलती है। पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य मंत्री के चयन के बारे में डिप्टी स्पीकर दोस्त मुहम्मद मज़ारी की ओर से मुस्लिम लीग क़ाफ़ के दस वोट रद्द करने के फ़ैसले को ख़ारिज करते हुए पीटीआई के उम्मीदवार चौधरी परवेज़ इलाही को नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया है। इस्राईल के युद्ध मंत्री बेनी गांट्स ने एक बयान दिया है जिससे यह साफ़ ज़ाहिर है कि रूस ने सीरिया के पटल पर इस्राईल को सज़ा देना शुरू कर दिया है। |
उत्तर प्रदेश स्थित संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क (Shafiqur Rahman Barq) ने नमाज़ को लेकर कहा है कि कोरोना कोई बीमारी नहीं बल्कि अल्लाह द्वारा हमारे गुनाहों की सजा है और हुकूमत द्वारा मस्जिद और ईदगाह में नमाज़ करने पर लगी पाबंदी को हटाया जाना चाहिए क्योंकि जब मुल्क के सभी लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ेंगे तभी ये मुल्क बचेगा।
सपा सांसद का कहना है कि कि ईद-उल-अज़हा के मौके पर मस्जिदों और ईदगाह में इजतेमाई नमाज़ पर पाबंदी लगाना गलत है क्योंकि हम सबको सामूहिक रूप से अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगनी चाहिए।
शफीकुर्रहमान बर्क ने यह भी दावा किया है कि जब तक मुल्क के सारे लोग मस्जिदों में नमाज अदा नहीं करेंगे और अपने गुनाहों की माफ़ी नहीं माँगेंगे, तब तक कोरोना वायरस महामारी को नहीं भगाया जा सकता है।
इसके साथ ही सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने ईद के मौके पर लगने वाले पशुओं के बाजार पर पाबंदी के लिए भी जिला प्रसासन से भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि ईद-उल-अज़हा समुदाय विशेष का बड़ा त्यौहार है, जब लोग जानवरों की खरीदारी नहीं कर सकेंगे तो त्यौहार कैसे मनाएँगे?
इस सम्बन्ध में उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर बकरीद के अवसर पर पहले की तरह पशु बाजार लगाए जाने की माँग की है, जिससे समुदाय के लोग कुर्बानी के लिए जानवरों को खरीद कर सकें।
| उत्तर प्रदेश स्थित संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने नमाज़ को लेकर कहा है कि कोरोना कोई बीमारी नहीं बल्कि अल्लाह द्वारा हमारे गुनाहों की सजा है और हुकूमत द्वारा मस्जिद और ईदगाह में नमाज़ करने पर लगी पाबंदी को हटाया जाना चाहिए क्योंकि जब मुल्क के सभी लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ेंगे तभी ये मुल्क बचेगा। सपा सांसद का कहना है कि कि ईद-उल-अज़हा के मौके पर मस्जिदों और ईदगाह में इजतेमाई नमाज़ पर पाबंदी लगाना गलत है क्योंकि हम सबको सामूहिक रूप से अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगनी चाहिए। शफीकुर्रहमान बर्क ने यह भी दावा किया है कि जब तक मुल्क के सारे लोग मस्जिदों में नमाज अदा नहीं करेंगे और अपने गुनाहों की माफ़ी नहीं माँगेंगे, तब तक कोरोना वायरस महामारी को नहीं भगाया जा सकता है। इसके साथ ही सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने ईद के मौके पर लगने वाले पशुओं के बाजार पर पाबंदी के लिए भी जिला प्रसासन से भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि ईद-उल-अज़हा समुदाय विशेष का बड़ा त्यौहार है, जब लोग जानवरों की खरीदारी नहीं कर सकेंगे तो त्यौहार कैसे मनाएँगे? इस सम्बन्ध में उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर बकरीद के अवसर पर पहले की तरह पशु बाजार लगाए जाने की माँग की है, जिससे समुदाय के लोग कुर्बानी के लिए जानवरों को खरीद कर सकें। |
कोलकाता, 2 मई (Cricketnmore) । बांग्लादेश के हरफनमौला खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मंगलवार को अपनी मौजूदा टीम को देश की अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम बताया है।
कोलकाता, 2 मई (Cricketnmore)। बांग्लादेश के हरफनमौला खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मंगलवार को अपनी मौजूदा टीम को देश की अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम बताया है।शाकिब ने हालांकि यह भी माना है कि टीम को खेल के सबसे छोटे प्रारूप में सुधार करने की जरूरत है।
इस समय इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेल रहे शाकिब ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमारे पास कुछ अच्छे बल्लेबाज हैं। अच्छे तेज गेंदबाज हैं और अच्छे स्पिन गेंदबाज भी हैं। मेरा मानना है कि हमारी टीम अभी तक की सर्वश्रेष्ठ टीम है।"
शाकिब को हाल ही में मशरफे मुर्तजा के टी-20 से संन्यास लेने के बाद बांग्लादेश की टी-20 टीम का कप्तान बनाया गया है।
शाकिब ने कहा, "मुझे किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। हमारी क्रिकेट सही रास्ते पर है। इस बात का सबूत हमारे पिछले दो साल के प्रदर्शन से मिलता है।"
उन्होंने कहा, "हर जिम्मेदारी चुनौती होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे लेते हैं। हां हम बेशक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन हमारा टी-20 का रिकार्ड अच्छा नहीं है। हमें इस क्षेत्र में सुधार करने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "जब मैं एकदिवसीय और टेस्ट टीम का कप्तान था तब हमारी स्थिति इस तरह की थी कि हम जीत नहीं सकते थे। इसके बाद हमने धीरे-धीरे जीतना शुरू किया। अब हम लगातार मैच जीत रहे हैं। टी-20 में भी हमारा लक्ष्य इस स्तर तक पहुंचना है।"
शाकिब का मानना है कि चैम्पियंस ट्रॉफी में बांग्लादेश का जिस ग्रुप में रखा गया है वो कठिन है। बंग्लादेश को चैम्पियंस ट्रॉफी में आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के साथ ग्रुप-ए में स्थान मिला है।
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि हमारा ग्रुप मुश्किल है। सभी टीमें अच्छी हैं लेकिन आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड कड़े प्रतिद्वंद्वी हैं। दक्षिण अफ्रीका ने हमेशा अच्छा किया है। इस टूर्नामेंट में हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे इसे लेकर मैं आश्वस्त हूं। हमारे प्रदर्शन को लोग याद रखेंगे।"
शाकिब ने आईपीएल के इस संस्करण में कोलकाता के लिए सिर्फ एक मैच खेला है। शाकिब का कहना है कि वह मौका मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हम पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी हैं। टीम संयोजन को ध्यान में रखकर टीम का चयन किया जाता है। जो खिलाड़ी खेलते नहीं हैं वह मिले हुए मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं।"
कोलकाता के कप्तान गौतम गंभीर की नेतृत्व क्षमता के बारे में शाकिब ने कहा, "उन्होंने जिस तरह से टीम को बदला है वह काबिले तारीफ है। फ्रेंचाइजी क्रिकेट में इस तरह से टीम का नेतृत्व करना आसान नहीं होता। बीते सात वर्षों में हमने नॉक आउट के लिए क्वालीफाई किया है और शीर्ष चार में जगह बनाई है। 2012 और 2014 में हम विजेता बने और यह दोनों जीत उन्हीं की कप्तानी में आईं।"
| कोलकाता, दो मई । बांग्लादेश के हरफनमौला खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मंगलवार को अपनी मौजूदा टीम को देश की अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम बताया है। कोलकाता, दो मई । बांग्लादेश के हरफनमौला खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मंगलवार को अपनी मौजूदा टीम को देश की अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम बताया है।शाकिब ने हालांकि यह भी माना है कि टीम को खेल के सबसे छोटे प्रारूप में सुधार करने की जरूरत है। इस समय इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेल रहे शाकिब ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमारे पास कुछ अच्छे बल्लेबाज हैं। अच्छे तेज गेंदबाज हैं और अच्छे स्पिन गेंदबाज भी हैं। मेरा मानना है कि हमारी टीम अभी तक की सर्वश्रेष्ठ टीम है।" शाकिब को हाल ही में मशरफे मुर्तजा के टी-बीस से संन्यास लेने के बाद बांग्लादेश की टी-बीस टीम का कप्तान बनाया गया है। शाकिब ने कहा, "मुझे किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। हमारी क्रिकेट सही रास्ते पर है। इस बात का सबूत हमारे पिछले दो साल के प्रदर्शन से मिलता है।" उन्होंने कहा, "हर जिम्मेदारी चुनौती होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे लेते हैं। हां हम बेशक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन हमारा टी-बीस का रिकार्ड अच्छा नहीं है। हमें इस क्षेत्र में सुधार करने की जरूरत है।" उन्होंने कहा, "जब मैं एकदिवसीय और टेस्ट टीम का कप्तान था तब हमारी स्थिति इस तरह की थी कि हम जीत नहीं सकते थे। इसके बाद हमने धीरे-धीरे जीतना शुरू किया। अब हम लगातार मैच जीत रहे हैं। टी-बीस में भी हमारा लक्ष्य इस स्तर तक पहुंचना है।" शाकिब का मानना है कि चैम्पियंस ट्रॉफी में बांग्लादेश का जिस ग्रुप में रखा गया है वो कठिन है। बंग्लादेश को चैम्पियंस ट्रॉफी में आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के साथ ग्रुप-ए में स्थान मिला है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि हमारा ग्रुप मुश्किल है। सभी टीमें अच्छी हैं लेकिन आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड कड़े प्रतिद्वंद्वी हैं। दक्षिण अफ्रीका ने हमेशा अच्छा किया है। इस टूर्नामेंट में हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे इसे लेकर मैं आश्वस्त हूं। हमारे प्रदर्शन को लोग याद रखेंगे।" शाकिब ने आईपीएल के इस संस्करण में कोलकाता के लिए सिर्फ एक मैच खेला है। शाकिब का कहना है कि वह मौका मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी हैं। टीम संयोजन को ध्यान में रखकर टीम का चयन किया जाता है। जो खिलाड़ी खेलते नहीं हैं वह मिले हुए मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं।" कोलकाता के कप्तान गौतम गंभीर की नेतृत्व क्षमता के बारे में शाकिब ने कहा, "उन्होंने जिस तरह से टीम को बदला है वह काबिले तारीफ है। फ्रेंचाइजी क्रिकेट में इस तरह से टीम का नेतृत्व करना आसान नहीं होता। बीते सात वर्षों में हमने नॉक आउट के लिए क्वालीफाई किया है और शीर्ष चार में जगह बनाई है। दो हज़ार बारह और दो हज़ार चौदह में हम विजेता बने और यह दोनों जीत उन्हीं की कप्तानी में आईं।" |
नई दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करते हुए प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों ने 18 फरवरी को 4 घंटे के राष्ट्रव्यापी रेल रोको अभियान की बुधवार को घोषणा की।
संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान में यह भी घोषणा की कि राजस्थान में 12 फरवरी से टोल संग्रह नहीं करने दिया जाएगा।
बयान में कहा गया है कि पूरे देश में 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेल रोको अभियान चलाया जाएगा। तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर इस महीने के शुरू में उन्होंने 3 घंटे के लिए सड़कों को अवरुद्ध किया था।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल ने बताया कि किसानों द्वारा 12 फरवरी से राजस्थान के सभी रोड के टोल प्लाजा को टोल फ्री कर दिया जाएगा। 14 फरवरी को देशभर में कैंडल मार्च, मशाल जुलूस और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों के बलिदान को याद किया जाएगा। 16 फरवरी को किसान सर छोटूराम की जयंती पर देशभर में एकजुटता दिखाएंगे।
केंद्र में नहीं चाहते सत्ता परिवर्तन : भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि आंदोलनकारी किसान केंद्र में कोई सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसान नेता आंदोलन के प्रसार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे।
टिकैत ने सिंघू बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि 3 नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि केंद्र कृषकों के मुद्दों का समाधान नहीं कर देता। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन (केंद्र में) का हमारा कोई उद्देश्य नहीं है। सरकार को अपना काम करना चाहिए।
हम कृषि कानूनों को निरस्त कराना और एमएसपी पर कानून चाहते हैं। टिकैत ने यह भी कहा कि संयुक्त किसान मोर्चे की एकता अक्षुण्ण है और सरकार को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी बैठकों का आयोजन कर और 40 लाख ट्रैक्टरों को शामिल कर आंदोलन को विस्तारित किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि किसान नेता आंदोलन के प्रसार के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा करेंगे।
कानून का विकल्प नहीं दे पाई सरकार : संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को कहा कि किसान इसलिए अब भी आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि केन्द्र सरकार के मंत्री तीन नए कृषि कानूनों का कोई विकल्प पेश करने में विफल रहे हैं।
एसककेएम दिल्ली की सीमाओं पर केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रहा हैं। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन पर एसकेएम नेता दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन के नेता किसानों के असली मुद्दे उठा रहे हैं।
पाल ने एक वीडियो संदेश में कहा कि आंदोलन इसलिए जारी है क्योंकि 11 दौर की बातचीत के बाद भी मोदी सरकार के मंत्री नये कानूनों या न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कोई ठोस विकल्प सामने नहीं ला पाए।
| नई दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करते हुए प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों ने अट्ठारह फरवरी को चार घंटाटे के राष्ट्रव्यापी रेल रोको अभियान की बुधवार को घोषणा की। संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान में यह भी घोषणा की कि राजस्थान में बारह फरवरी से टोल संग्रह नहीं करने दिया जाएगा। बयान में कहा गया है कि पूरे देश में अट्ठारह फरवरी को दोपहर बारह बजे से शाम चार बजे तक रेल रोको अभियान चलाया जाएगा। तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर इस महीने के शुरू में उन्होंने तीन घंटाटे के लिए सड़कों को अवरुद्ध किया था। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल ने बताया कि किसानों द्वारा बारह फरवरी से राजस्थान के सभी रोड के टोल प्लाजा को टोल फ्री कर दिया जाएगा। चौदह फरवरी को देशभर में कैंडल मार्च, मशाल जुलूस और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों के बलिदान को याद किया जाएगा। सोलह फरवरी को किसान सर छोटूराम की जयंती पर देशभर में एकजुटता दिखाएंगे। केंद्र में नहीं चाहते सत्ता परिवर्तन : भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि आंदोलनकारी किसान केंद्र में कोई सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसान नेता आंदोलन के प्रसार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे। टिकैत ने सिंघू बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि केंद्र कृषकों के मुद्दों का समाधान नहीं कर देता। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन का हमारा कोई उद्देश्य नहीं है। सरकार को अपना काम करना चाहिए। हम कृषि कानूनों को निरस्त कराना और एमएसपी पर कानून चाहते हैं। टिकैत ने यह भी कहा कि संयुक्त किसान मोर्चे की एकता अक्षुण्ण है और सरकार को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी बैठकों का आयोजन कर और चालीस लाख ट्रैक्टरों को शामिल कर आंदोलन को विस्तारित किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि किसान नेता आंदोलन के प्रसार के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा करेंगे। कानून का विकल्प नहीं दे पाई सरकार : संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को कहा कि किसान इसलिए अब भी आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि केन्द्र सरकार के मंत्री तीन नए कृषि कानूनों का कोई विकल्प पेश करने में विफल रहे हैं। एसककेएम दिल्ली की सीमाओं पर केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रहा हैं। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन पर एसकेएम नेता दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन के नेता किसानों के असली मुद्दे उठा रहे हैं। पाल ने एक वीडियो संदेश में कहा कि आंदोलन इसलिए जारी है क्योंकि ग्यारह दौर की बातचीत के बाद भी मोदी सरकार के मंत्री नये कानूनों या न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई ठोस विकल्प सामने नहीं ला पाए। |
भावना स्पष्ट झलकती है, जो अद्वैत को भावना अर्थात् वहद्तुल वजूद वे सिद्धान्त के अनुकूल नही पड़ती ।
उपर्युक्त सम्प्रदायों के सूक्ष्म विवेचन स प्रतीत होता है कि इनवा पूर्ण उत्थान हुगल शासन काल में ही हुआ। अकबर, जहाँगीर आदि अनेक मुगल सम्राट् पीरो के रम भक्त थे । शाहजहाँ का पुत्र दारा शिकोह तो मुस्लिम और हिन्दू रहस्य-ज्ञान का अच्छा वेता था। उसने सूफीमत और वेदान्त का गम्भीर अध्ययन किया। तदुपरात उसने दोनो मतो के गूढ सिद्धान्तों की तुलनात्मक विवेचना की ग्रो वतलाया कि
कोई तात्विक अन्तर नहीं है। कलेवर भिन्न अवश्य है, परन्तु आत्मा एक ही है । हादुरशाह भी शाह होते हुए एक सन्त से कम न था । उसको अनेक कविता में पूफीमत के उच्च सिद्धान्तो की बडी विशद व्याख्या है।
इन सभी सम्प्रदायो का प्राध्यात्मिक नेता, जो अन्य मुस्लिम देशो में प्राय ख कहलाता है, भारतवर्ष में मुरशिद या पीर कहलाता है। भारतवर्ष मे पोरों की अधिक मान्यता हुई । मुसलमान तो इन्हें सम्मान देते थे, हिन्दू भी प्राय श्रद्धावश, कामनावश, अथवा नृत्य-वाद्य से पूर्ण ईश्वर के कीर्तन में सम्मिलित होकर पीरों के दर्शन करते थे। कुछ सूफी फकीर झाड-फूंक भी करते थे, जिससे मूर्ख एवं अनजान लोगो को चमत्कार दिखाकर अपना भक्त बना लेते भे । यही नहीं धीर-धीरे प्रतिष्ठित व्यक्ति भी इनसे प्रभावित हुए बिना न रहे । वाड्माथुर्य चमत्कृति के साथ मिलकर द्रुतग्राह्यता का कारण होता था। यह प्रभाव हमे आज भी दृष्टिगोचर होता है ।
पोर हो विविध सम्प्रदायों की शाखा प्रतिशाखाओ के व्यवस्थापक होते आये है । या तो ये नियुक्त होते है या उत्तराधिकार स बनते है । समयानुसार विधान निर्मित कर व्यवस्था का उत्तरदायित्व भी इन्हीं पर होता है। नवीन शिष्यो को दीक्षित करना एव उन्हें ईश्वरीय ज्ञान प्रदान करना भी इन्ही का कार्य है। खानकाहो में पीरो का निवास स्थान होता है। पौर की शिष्य परम्परा में दो प्रकार के व्यक्ति होते है । एक तो वे जो स्थान-स्थान पर जाकर निर्धनो के भोजन, वस्न एवं अध्ययन के लिए द्रव्य आदि एकत्र करते है और दूसरे ने जो शान्त, एकान्त अथवा विरक्त जीवन विताते है । इन खानवाहो का मुस्लिम जनता पर वडा प्रभाव रहा है
इन पीरो ने ग्राध्यात्मिक क्षेत्रो मे ही नहीं वरन् सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में बड़ा प्रभावशाली कार्य किया । अपन जीवन काल में बहुधा ये बडी प्रतिष्ठा के पात्र रहे भोर निधनोपरान्त उनकी समाधि पर बड़-बडे भवन बन जो सदैव में प्रधानत मुसलमाना की धर्म-यात्रा के केन्द्र रहे है। भारतवर्ष में दिल्ली, अजमेर, मुल्तान,
1 "The spiritual guide knows as Sheyhh in Islamic countries is common known as Murshid or pir in India "-( in Introduction to the History of Sufiam, Introduction P 8 )
फतहपुर सीमरी, गुजरात तथा दक्षिण में हैदराबाद आदि अनेक स्थानों पर समाय पोरोपे समाधि मन्दिर बने हुए हूँ । इनमें से अनेक स्थानों में प्रतिवर्ष उत्सव भो होते है, जहाँ सहर्सो नरनारी जाते और विमानानुसार यामिन वा सम्पादन प्रकार के उपहार ले जाते है । प्रोति-भोज भी होते हैं जिनमें पक्वान एवं मिष्टान्न के अतिरिक्त मोदन वा प्राधान्य होता है। पीरों की समाधि पर होने वाले उत्सवो वो उमं पहा जाता है। वहाँ गायन और वादन का विशेष प्रवन्य होता है । कव्वाल मृत पीर को प्रदामा में बवाली गाते हैं । इस अवसर पर नियंत! को मिष्टान श्रादि पदार्थ वितरित किये जाते हैं । समाधि पर विपुल मात्रा में सचित हुमा सुमन-भार भागातुको यो न्यूनाधिन रूप में दे दिया जाता है, जिमे वे पवित्र उपहार समभकर घर से जाते हैं और माधि-व्याधि के निवारणार्थं काम में लाते हैं। इस पर पूजा का प्रभाव हिन्दुनों पर भी अधिक रहा है। यही कारण है कि सहस्रों हिन्दू स्त्रियाँ प्राज भो समाधियों पर जाती मौर फूल-पत्रादि चड़ाती हूँ। पीरो से भाड मराती है भोर ताबीज, गडा एव भस्म आदि लेकर उन्ह है विविध प्रकार से सम्मानित करती है। परन्तु जागृतियश यह प्रतिष्ठा कम होती जा रही है, क्योंकि पूर्व की सी पवित्रता अब पोर और प्रवीरों में नहीं रही बरन् जादू-टोना आदि उपचारो ने उन्हें पथ भ्रष्ट कर दिया है।
भारतवर्ष में यह एक प्रमुख बात रही है कि इनके सिद्धान्त अधिकारातः समान रह है अत एक सम्प्रदायका अनुयायी अपने सम्प्रदाय को छोडे बिना ही दूसरे सम्प्रदाय को ग्रहण कर सकता है। हिन्दु वर्णाश्रम भेद की भाँति यहाँ भेद नहीं है। कोई भी मुसलमान किसी भी सम्प्रदाय में दीक्षित हो सकता है और अपने को चिश्ती, मुहरावर्दी, कादरी, सत्तारी या नक्शबन्दी कहला सकता है । मुसलमानों में समाधियो को यात्रा, समाधि पर दीप जलाना एवं भोजन पदान करना भादि प्रयाएँ हिन्दुनो से प्राई । हिन्दुनो में मूर्ति पूजा का प्रचार था, जिसका प्रभाव मुसलमानो पर भी पड़ा। उनके यहाँ पीरों की समाधि के अतिरिक्त और कोई स्थान न था कि जहाँ श्रद्धाभाव प्रदर्शित किया जाय अत व स्थान ही धूप-दीपादि के स्थान बने ।
उपरिलिखिन विवेचना से प्रतीत होता है कि भारत में सूफीमत का स्थल स्थापन १२वी शताब्दी से हुआ और मुगल शासन काल में इसका अत्यधिक प्रचार और प्रसार हुमा । किन्तु इससे पूर्व भी सूपो सन्त सिन्ध पर सन् ७१२ ई० में प्रथम मुस्लिम आक्रमण के पश्चात् भारत के पश्चिमी भाग में आने लगे थे । मुल्तान इनका प्रधान केन्द्र था । प्रारम्भ में आने वाले इन सन्तो का नाम सूफी न रहा हो परन्तु
1 An Introduction to the Historu of Sufiam Introduction. P. 15 | भावना स्पष्ट झलकती है, जो अद्वैत को भावना अर्थात् वहद्तुल वजूद वे सिद्धान्त के अनुकूल नही पड़ती । उपर्युक्त सम्प्रदायों के सूक्ष्म विवेचन स प्रतीत होता है कि इनवा पूर्ण उत्थान हुगल शासन काल में ही हुआ। अकबर, जहाँगीर आदि अनेक मुगल सम्राट् पीरो के रम भक्त थे । शाहजहाँ का पुत्र दारा शिकोह तो मुस्लिम और हिन्दू रहस्य-ज्ञान का अच्छा वेता था। उसने सूफीमत और वेदान्त का गम्भीर अध्ययन किया। तदुपरात उसने दोनो मतो के गूढ सिद्धान्तों की तुलनात्मक विवेचना की ग्रो वतलाया कि कोई तात्विक अन्तर नहीं है। कलेवर भिन्न अवश्य है, परन्तु आत्मा एक ही है । हादुरशाह भी शाह होते हुए एक सन्त से कम न था । उसको अनेक कविता में पूफीमत के उच्च सिद्धान्तो की बडी विशद व्याख्या है। इन सभी सम्प्रदायो का प्राध्यात्मिक नेता, जो अन्य मुस्लिम देशो में प्राय ख कहलाता है, भारतवर्ष में मुरशिद या पीर कहलाता है। भारतवर्ष मे पोरों की अधिक मान्यता हुई । मुसलमान तो इन्हें सम्मान देते थे, हिन्दू भी प्राय श्रद्धावश, कामनावश, अथवा नृत्य-वाद्य से पूर्ण ईश्वर के कीर्तन में सम्मिलित होकर पीरों के दर्शन करते थे। कुछ सूफी फकीर झाड-फूंक भी करते थे, जिससे मूर्ख एवं अनजान लोगो को चमत्कार दिखाकर अपना भक्त बना लेते भे । यही नहीं धीर-धीरे प्रतिष्ठित व्यक्ति भी इनसे प्रभावित हुए बिना न रहे । वाड्माथुर्य चमत्कृति के साथ मिलकर द्रुतग्राह्यता का कारण होता था। यह प्रभाव हमे आज भी दृष्टिगोचर होता है । पोर हो विविध सम्प्रदायों की शाखा प्रतिशाखाओ के व्यवस्थापक होते आये है । या तो ये नियुक्त होते है या उत्तराधिकार स बनते है । समयानुसार विधान निर्मित कर व्यवस्था का उत्तरदायित्व भी इन्हीं पर होता है। नवीन शिष्यो को दीक्षित करना एव उन्हें ईश्वरीय ज्ञान प्रदान करना भी इन्ही का कार्य है। खानकाहो में पीरो का निवास स्थान होता है। पौर की शिष्य परम्परा में दो प्रकार के व्यक्ति होते है । एक तो वे जो स्थान-स्थान पर जाकर निर्धनो के भोजन, वस्न एवं अध्ययन के लिए द्रव्य आदि एकत्र करते है और दूसरे ने जो शान्त, एकान्त अथवा विरक्त जीवन विताते है । इन खानवाहो का मुस्लिम जनता पर वडा प्रभाव रहा है इन पीरो ने ग्राध्यात्मिक क्षेत्रो मे ही नहीं वरन् सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में बड़ा प्रभावशाली कार्य किया । अपन जीवन काल में बहुधा ये बडी प्रतिष्ठा के पात्र रहे भोर निधनोपरान्त उनकी समाधि पर बड़-बडे भवन बन जो सदैव में प्रधानत मुसलमाना की धर्म-यात्रा के केन्द्र रहे है। भारतवर्ष में दिल्ली, अजमेर, मुल्तान, एक "The spiritual guide knows as Sheyhh in Islamic countries is common known as Murshid or pir in India "- फतहपुर सीमरी, गुजरात तथा दक्षिण में हैदराबाद आदि अनेक स्थानों पर समाय पोरोपे समाधि मन्दिर बने हुए हूँ । इनमें से अनेक स्थानों में प्रतिवर्ष उत्सव भो होते है, जहाँ सहर्सो नरनारी जाते और विमानानुसार यामिन वा सम्पादन प्रकार के उपहार ले जाते है । प्रोति-भोज भी होते हैं जिनमें पक्वान एवं मिष्टान्न के अतिरिक्त मोदन वा प्राधान्य होता है। पीरों की समाधि पर होने वाले उत्सवो वो उमं पहा जाता है। वहाँ गायन और वादन का विशेष प्रवन्य होता है । कव्वाल मृत पीर को प्रदामा में बवाली गाते हैं । इस अवसर पर नियंत! को मिष्टान श्रादि पदार्थ वितरित किये जाते हैं । समाधि पर विपुल मात्रा में सचित हुमा सुमन-भार भागातुको यो न्यूनाधिन रूप में दे दिया जाता है, जिमे वे पवित्र उपहार समभकर घर से जाते हैं और माधि-व्याधि के निवारणार्थं काम में लाते हैं। इस पर पूजा का प्रभाव हिन्दुनों पर भी अधिक रहा है। यही कारण है कि सहस्रों हिन्दू स्त्रियाँ प्राज भो समाधियों पर जाती मौर फूल-पत्रादि चड़ाती हूँ। पीरो से भाड मराती है भोर ताबीज, गडा एव भस्म आदि लेकर उन्ह है विविध प्रकार से सम्मानित करती है। परन्तु जागृतियश यह प्रतिष्ठा कम होती जा रही है, क्योंकि पूर्व की सी पवित्रता अब पोर और प्रवीरों में नहीं रही बरन् जादू-टोना आदि उपचारो ने उन्हें पथ भ्रष्ट कर दिया है। भारतवर्ष में यह एक प्रमुख बात रही है कि इनके सिद्धान्त अधिकारातः समान रह है अत एक सम्प्रदायका अनुयायी अपने सम्प्रदाय को छोडे बिना ही दूसरे सम्प्रदाय को ग्रहण कर सकता है। हिन्दु वर्णाश्रम भेद की भाँति यहाँ भेद नहीं है। कोई भी मुसलमान किसी भी सम्प्रदाय में दीक्षित हो सकता है और अपने को चिश्ती, मुहरावर्दी, कादरी, सत्तारी या नक्शबन्दी कहला सकता है । मुसलमानों में समाधियो को यात्रा, समाधि पर दीप जलाना एवं भोजन पदान करना भादि प्रयाएँ हिन्दुनो से प्राई । हिन्दुनो में मूर्ति पूजा का प्रचार था, जिसका प्रभाव मुसलमानो पर भी पड़ा। उनके यहाँ पीरों की समाधि के अतिरिक्त और कोई स्थान न था कि जहाँ श्रद्धाभाव प्रदर्शित किया जाय अत व स्थान ही धूप-दीपादि के स्थान बने । उपरिलिखिन विवेचना से प्रतीत होता है कि भारत में सूफीमत का स्थल स्थापन बारहवी शताब्दी से हुआ और मुगल शासन काल में इसका अत्यधिक प्रचार और प्रसार हुमा । किन्तु इससे पूर्व भी सूपो सन्त सिन्ध पर सन् सात सौ बारह ईशून्य में प्रथम मुस्लिम आक्रमण के पश्चात् भारत के पश्चिमी भाग में आने लगे थे । मुल्तान इनका प्रधान केन्द्र था । प्रारम्भ में आने वाले इन सन्तो का नाम सूफी न रहा हो परन्तु एक An Introduction to the Historu of Sufiam Introduction. P. पंद्रह |
चंडीगढ़, 21 नवंबरः
फि़ल्म 'पद्मावती' पर पाबंदी के सुझाव को रद्द करते हुए पंजाब के मु यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दोष लगाया है कि कुछ स्वार्थी हितों द्वारा इस मुद्दे पर उनके बयान की गलत व्या या करने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर चल रही चर्चा के संबंध में संयम इस्तेमाल किये जाने की बात करते हुए कहा कि उन्होंने न तो फि़ल्म पर पाबंदी की हिमायत की थी और न ही पद्मावती के कलाकारों और अन्य सदस्यों को धमकाने वालों की हिमायत की थी।
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि वह फि़ल्म के अभिनेताओं और डायरेक्टरों को कुछ कट्टर तत्वों द्वारा धमकियां देने का पूरी तरह से विरोध करते हैं परंतु उन्होंने दोहराया कि ऐतिहासिक तथ्यों में छेड़-छाड़ के कारण अगर किसी को दुख हुआ है तो उसे शांतीपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकि यां और रोष में अंतर किये जाने की ज़रूरत है।
कैप्टन अमरिंदर ने कहा, "मैं फि़ल्म पर पाबंदी की किस तरह मांग या समर्थन कर सकता हूँ जबकि मैने यह फि़ल्म देखी ही नहीं है "। उन्होंने अपने बयान से यह निष्कर्ष निकाले जाने को नकारा है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास को तोडऩे -मरोडऩे की कोई कोशिश की गई है तो इसके विरुद्ध विरोध जायज है।
उन्होंने कहा कि एक स य और लोकतांत्रिक समाज में शांतीपूर्ण विरोध करने के अधिकार से कोई भी असहमति नहीं प्रकट कर सकता और न ही किसी व्यक्ति या संस्था को किसी के साथ असहमत होने के कारण उसे धमकि यां देने का अधिकार है। मु यमंत्री ने कहा कि वह उन सभी लोगों की पूरी तरह निंदा करते हैं जो धमकि यां दे रहे हैं और उनके विरुद्ध कानून को अपना रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की शांति को भंग करने और इसकी सद्भावना को चोट पहुंचाने वालों के साथ स ती से निपटने की ज़रूरत है।
सोमवार को अपने बयान में कैप्टन अमरिंदर ने कहा था कि एक सैनिक इतिहासकार होने के नाते, जिसने इतिहास का अध्ययन किया है और चित्तौड़ भी गया है, उनके लिए ऐतिहासिक तथ्यों को तोडऩे-मरोडऩे की बात अस्वीकार्य है। उन्होंने आगे कहा कि सिनेमैटिक लाईसेंस ने किसी को भी ऐतिहासिक तथ्य बदलने का हक नहीं दिया है और कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में रोष प्रर्दशन पूरी तरह उचित है।
| चंडीगढ़, इक्कीस नवंबरः फि़ल्म 'पद्मावती' पर पाबंदी के सुझाव को रद्द करते हुए पंजाब के मु यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दोष लगाया है कि कुछ स्वार्थी हितों द्वारा इस मुद्दे पर उनके बयान की गलत व्या या करने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर चल रही चर्चा के संबंध में संयम इस्तेमाल किये जाने की बात करते हुए कहा कि उन्होंने न तो फि़ल्म पर पाबंदी की हिमायत की थी और न ही पद्मावती के कलाकारों और अन्य सदस्यों को धमकाने वालों की हिमायत की थी। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि वह फि़ल्म के अभिनेताओं और डायरेक्टरों को कुछ कट्टर तत्वों द्वारा धमकियां देने का पूरी तरह से विरोध करते हैं परंतु उन्होंने दोहराया कि ऐतिहासिक तथ्यों में छेड़-छाड़ के कारण अगर किसी को दुख हुआ है तो उसे शांतीपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकि यां और रोष में अंतर किये जाने की ज़रूरत है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा, "मैं फि़ल्म पर पाबंदी की किस तरह मांग या समर्थन कर सकता हूँ जबकि मैने यह फि़ल्म देखी ही नहीं है "। उन्होंने अपने बयान से यह निष्कर्ष निकाले जाने को नकारा है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास को तोडऩे -मरोडऩे की कोई कोशिश की गई है तो इसके विरुद्ध विरोध जायज है। उन्होंने कहा कि एक स य और लोकतांत्रिक समाज में शांतीपूर्ण विरोध करने के अधिकार से कोई भी असहमति नहीं प्रकट कर सकता और न ही किसी व्यक्ति या संस्था को किसी के साथ असहमत होने के कारण उसे धमकि यां देने का अधिकार है। मु यमंत्री ने कहा कि वह उन सभी लोगों की पूरी तरह निंदा करते हैं जो धमकि यां दे रहे हैं और उनके विरुद्ध कानून को अपना रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की शांति को भंग करने और इसकी सद्भावना को चोट पहुंचाने वालों के साथ स ती से निपटने की ज़रूरत है। सोमवार को अपने बयान में कैप्टन अमरिंदर ने कहा था कि एक सैनिक इतिहासकार होने के नाते, जिसने इतिहास का अध्ययन किया है और चित्तौड़ भी गया है, उनके लिए ऐतिहासिक तथ्यों को तोडऩे-मरोडऩे की बात अस्वीकार्य है। उन्होंने आगे कहा कि सिनेमैटिक लाईसेंस ने किसी को भी ऐतिहासिक तथ्य बदलने का हक नहीं दिया है और कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में रोष प्रर्दशन पूरी तरह उचित है। |
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एकादशी बलका माहात
मार्कण्डेयजीने कहा- तुमने यहाँ सच्ची बात कही है, असत्व भाषण नहीं किया है, इसलिये मैं तुम्हे कल्याणप्रद व्रतका उपदेश करता हूँ। तुम आषाढ़के कृष्णपक्षमें योगिनी एकादशीका व्रत करो। इस व्रतके पुण्यसे तुम्हारी कोढ़ निश्चय ही दूर हो जायगी।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- ऋषिके ये वचन सुनकर हेममाली दण्डकी भाँति मुनिके चरणों में पड़ गया। मुनिने उसे उठाया इससे उसको बड़ा हर्ष हुआ। मार्कण्डेयजीके उपदेशसे उसने योगिनी एकादशीका व्रत किया, जिससे उसके शरीरकी कोढ़ दूर हो गयी। मुनिके कथनानुसार उस उत्तम व्रतका अनुष्ठान करनेपर वह पूर्ण सुखी हो गया। नृपश्रेष्ठ! यह योगिनीका व्रत ऐसा ही बताया गया है। जो अट्ठासी हजार ब्राह्मणांको भोजन कराता है, उसके समान ही
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आगदमामको यागिता और शायनी एकादशीका माहात्य
फल उस मनुष्यको भी मिलता है, जो योगिनी एकादशीका व्रत करता है । 'योगिनी महान् प्रापीको शान्त करनेवाली और महान् पुण्य फल देनेवाली है। इसके पढ़ने और सुननेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है।
युधिष्ठिस्ने पूछा- भगवन्! आषाढ़के शुकृपक्षमें कौन-सी एकादशी होती है? उसका नाम और विधि क्या है? यह बतलानेकी कृपा करें।
भगवान् श्रीकृष्ण ने राजन्! आषाढ़ शुकृपक्षकी एकादशीका शयनी है। मैं उसका वर्णन करता हूँ। वह महान् पुण्यमयी, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करनेवाली सब पापोंको हरनेवाली तथा उत्तम व्रत हैं। आषाढ़ शुक्रपक्षमें शयनी एकादशी के दिन जिन्होंने कमल-पुष्पमं कमललोचन भगवान् विष्णुका पूजन तथा
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एकादशीका उत्तम व्रत किया है. उन्होंने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओंका पूजन कर लिया। हरिशयनी एकादशी के दिन मेरा एक स्वरूप राजा बलिक यहाँ रहता है और दूसरा क्षीरसागरमें शेषनागको शब्यापर तबतक शयन करता है, जबतक आगामी कार्तिककी एकादशी नहीं आ जाती; अतः आषाढशुका एकादशीसे लेकर कार्तिकशुका एकादशीतक मनुष्यको भलीभाँति धर्मका आचरण करना चाहिये। जो मनुष्य इस व्रतका अनुष्ठान करता है, वह परम गतिको प्राप्त होता है, इस कारण यत्नपूर्वक इस एकादशीका व्रत करना चाहिये। एकादशीको रातमें जागरण करके शङ्ख, चक्र और गदा धारण करनेवाले भगवान् विष्णुकी भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिये। ऐसा करनेवाले पुरुषके पुण्यको गणना करने में चतुर्मुख ब्रह्माजी भी असमर्थ हैं। | नौ करोड़ चौंसठ लाख पचानवे हज़ार पाँच सौ पचपनFEBRY EFFKS FI एकादशी बलका माहात मार्कण्डेयजीने कहा- तुमने यहाँ सच्ची बात कही है, असत्व भाषण नहीं किया है, इसलिये मैं तुम्हे कल्याणप्रद व्रतका उपदेश करता हूँ। तुम आषाढ़के कृष्णपक्षमें योगिनी एकादशीका व्रत करो। इस व्रतके पुण्यसे तुम्हारी कोढ़ निश्चय ही दूर हो जायगी। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- ऋषिके ये वचन सुनकर हेममाली दण्डकी भाँति मुनिके चरणों में पड़ गया। मुनिने उसे उठाया इससे उसको बड़ा हर्ष हुआ। मार्कण्डेयजीके उपदेशसे उसने योगिनी एकादशीका व्रत किया, जिससे उसके शरीरकी कोढ़ दूर हो गयी। मुनिके कथनानुसार उस उत्तम व्रतका अनुष्ठान करनेपर वह पूर्ण सुखी हो गया। नृपश्रेष्ठ! यह योगिनीका व्रत ऐसा ही बताया गया है। जो अट्ठासी हजार ब्राह्मणांको भोजन कराता है, उसके समान ही उनसठ#पैंसठ#FFपाँचFपाँच#LIFKHUSSAFF G चारGIF पंद्रह RFIR甜FA RIGपाँच हज़ार चार सौ चौवन资金पाँच成nneral आगदमामको यागिता और शायनी एकादशीका माहात्य फल उस मनुष्यको भी मिलता है, जो योगिनी एकादशीका व्रत करता है । 'योगिनी महान् प्रापीको शान्त करनेवाली और महान् पुण्य फल देनेवाली है। इसके पढ़ने और सुननेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। युधिष्ठिस्ने पूछा- भगवन्! आषाढ़के शुकृपक्षमें कौन-सी एकादशी होती है? उसका नाम और विधि क्या है? यह बतलानेकी कृपा करें। भगवान् श्रीकृष्ण ने राजन्! आषाढ़ शुकृपक्षकी एकादशीका शयनी है। मैं उसका वर्णन करता हूँ। वह महान् पुण्यमयी, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करनेवाली सब पापोंको हरनेवाली तथा उत्तम व्रत हैं। आषाढ़ शुक्रपक्षमें शयनी एकादशी के दिन जिन्होंने कमल-पुष्पमं कमललोचन भगवान् विष्णुका पूजन तथा =ERFERIFIFS RAFINES GABE IS INDIA IF=पचपन हज़ार एक सौ पचपन SMSSIRHIT Rसत्तानवे हज़ार एक सौ पचपन RSS FIFFIFURT OF TIERSESEI SBIF# BF FRIE एकादशीका उत्तम व्रत किया है. उन्होंने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओंका पूजन कर लिया। हरिशयनी एकादशी के दिन मेरा एक स्वरूप राजा बलिक यहाँ रहता है और दूसरा क्षीरसागरमें शेषनागको शब्यापर तबतक शयन करता है, जबतक आगामी कार्तिककी एकादशी नहीं आ जाती; अतः आषाढशुका एकादशीसे लेकर कार्तिकशुका एकादशीतक मनुष्यको भलीभाँति धर्मका आचरण करना चाहिये। जो मनुष्य इस व्रतका अनुष्ठान करता है, वह परम गतिको प्राप्त होता है, इस कारण यत्नपूर्वक इस एकादशीका व्रत करना चाहिये। एकादशीको रातमें जागरण करके शङ्ख, चक्र और गदा धारण करनेवाले भगवान् विष्णुकी भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिये। ऐसा करनेवाले पुरुषके पुण्यको गणना करने में चतुर्मुख ब्रह्माजी भी असमर्थ हैं। |
नयी दिल्ली, 14 जनवरी कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने बृहस्पतिवार को कहा कि वे सरकार के साथ नौवें दौर की वार्ता में भाग लेंगे, लेकिन उन्हें इस बातचीत से ज्यादा उम्मीद नहीं है, क्योंकि वे विवादित कानूनों को वापस लिए जाने से कम पर नहीं मानेंगे।
चूंकि, कृषि कानूनों के मुद्दे पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पैनल की पहली बैठक 19 जनवरी को होने की संभावना है, ऐसे में शुक्रवार को केन्द्र सरकार और किसान संघों के बीच इस मुद्दे पर यह अंतिम बैठक हो सकती है।
एक अन्य किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सरकार को पता है कि अदालत कानूनों को रद्द नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को 28 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए।
कोहाड़ ने कहा कि समिति का गठन समाधान नहीं है, नए कानूनों को संसद ने बनाया है और अदालत इन्हें वापस नहीं ले सकती है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, चौदह जनवरी कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने बृहस्पतिवार को कहा कि वे सरकार के साथ नौवें दौर की वार्ता में भाग लेंगे, लेकिन उन्हें इस बातचीत से ज्यादा उम्मीद नहीं है, क्योंकि वे विवादित कानूनों को वापस लिए जाने से कम पर नहीं मानेंगे। चूंकि, कृषि कानूनों के मुद्दे पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पैनल की पहली बैठक उन्नीस जनवरी को होने की संभावना है, ऐसे में शुक्रवार को केन्द्र सरकार और किसान संघों के बीच इस मुद्दे पर यह अंतिम बैठक हो सकती है। एक अन्य किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सरकार को पता है कि अदालत कानूनों को रद्द नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को अट्ठाईस नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए। कोहाड़ ने कहा कि समिति का गठन समाधान नहीं है, नए कानूनों को संसद ने बनाया है और अदालत इन्हें वापस नहीं ले सकती है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
जयपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जैनाचार्य विजय वल्लभ जी की 'स्टैच्यू ऑफ पीस' का अनावरण किया। वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा अनावरण करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा पूरे विश्व को, मानवता को, शांति, अहिंसा और बंधुत्व का मार्ग दिखाया है, ये वो संदेश हैं जिनकी प्रेरणा विश्व को भारत से मिलती है, इसी मार्गदर्शन के लिए दुनिया आज एक बार फिर भारत की ओर देख रही है।
संतों से अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 21वीं सदी में मैं आचार्यों, संतों से एक आग्रह करना चाहता हूं कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन की पीठिका भक्ति आंदोलन से शुरु हुई। वैसे ही आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का काम संतों, आचार्यों, महंतों का है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का, संतों का विचार इसलिए अमर होता है, क्योंकि वो जो बताते हैं, वही अपने जीवन में जीते हैं। आचार्य विजय वल्लभ जी कहते थे कि साधु, महात्माओं का कर्तव्य है कि वो अज्ञान, कलह, बेगारी, आलस, व्यसन और समाज के बुरे रीति रिवाजों को दूर करने के लिए प्रयत्न करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आचार्य विजयवल्लभ जी का जीवन हर जीव के लिए दया, करुणा और प्रेम से ओत-प्रोत था। उनके आशीर्वाद से आज जीवदया के लिए पक्षी हॉस्पिटल और अनेक गौशालाएं देश में चल रहीं हैं, ये कोई सामान्य संस्थान नहीं हैं, ये भारत की भावना के अनुष्ठान हैं, ये भारत और भारतीय मूल्यों की पहचान हैं।
| जयपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जैनाचार्य विजय वल्लभ जी की 'स्टैच्यू ऑफ पीस' का अनावरण किया। वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा अनावरण करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा पूरे विश्व को, मानवता को, शांति, अहिंसा और बंधुत्व का मार्ग दिखाया है, ये वो संदेश हैं जिनकी प्रेरणा विश्व को भारत से मिलती है, इसी मार्गदर्शन के लिए दुनिया आज एक बार फिर भारत की ओर देख रही है। संतों से अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज इक्कीसवीं सदी में मैं आचार्यों, संतों से एक आग्रह करना चाहता हूं कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन की पीठिका भक्ति आंदोलन से शुरु हुई। वैसे ही आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का काम संतों, आचार्यों, महंतों का है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का, संतों का विचार इसलिए अमर होता है, क्योंकि वो जो बताते हैं, वही अपने जीवन में जीते हैं। आचार्य विजय वल्लभ जी कहते थे कि साधु, महात्माओं का कर्तव्य है कि वो अज्ञान, कलह, बेगारी, आलस, व्यसन और समाज के बुरे रीति रिवाजों को दूर करने के लिए प्रयत्न करें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आचार्य विजयवल्लभ जी का जीवन हर जीव के लिए दया, करुणा और प्रेम से ओत-प्रोत था। उनके आशीर्वाद से आज जीवदया के लिए पक्षी हॉस्पिटल और अनेक गौशालाएं देश में चल रहीं हैं, ये कोई सामान्य संस्थान नहीं हैं, ये भारत की भावना के अनुष्ठान हैं, ये भारत और भारतीय मूल्यों की पहचान हैं। |
बिहार पुलिस कॉन्सटेबल के लिए पीईटी को टाल दिया गया है.
नई दिल्ली. सेंट्रल सेलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्सटेबल (Central Selection Board of Constable, CSBC) ने बिहार पुलिस कॉन्सटेबल (Bihar Police Constable), बिहार होम गार्ड ड्राइवर कॉन्सटेबल (Bihar Home Guard driver constable) और बिहार मोबाइल स्क्वॉड कॉन्सटेबल रिक्रूटमेंट (Bihar mobile squad constable recruitments) के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test, PET) को टाल दिया है. सीएसबीसी पीईटी परीक्षा (CSBC PET) 3, 6 और 15 जुलाई को होने वाली थी. अब इस परीक्षा को 31 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है. हालांकि, वास्तविक तारीख से सही समय पर कैंडीडेट्स को अवगत करा दिया जाएगा.
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| बिहार पुलिस कॉन्सटेबल के लिए पीईटी को टाल दिया गया है. नई दिल्ली. सेंट्रल सेलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्सटेबल ने बिहार पुलिस कॉन्सटेबल , बिहार होम गार्ड ड्राइवर कॉन्सटेबल और बिहार मोबाइल स्क्वॉड कॉन्सटेबल रिक्रूटमेंट के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा को टाल दिया है. सीएसबीसी पीईटी परीक्षा तीन, छः और पंद्रह जुलाई को होने वाली थी. अब इस परीक्षा को इकतीस जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है. हालांकि, वास्तविक तारीख से सही समय पर कैंडीडेट्स को अवगत करा दिया जाएगा. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
नई दिल्लीः केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने स्थायी खाता संख्या (पैन) को आधार कार्ड से जोड़ने की अंतिम तिथि को तीन महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया है.
आम जनता अब अपने पैन को 30 जून, 2023 तक आधार कार्ड से लिंक कर सकती है. हालांकि, इस तारीख तक अगर टैक्सपेयर्स पैन को लिंक नहीं कर पाते हैं, तो उनका पैन निष्क्रिय हो जाएगा.
सीबीडीटी ने पैन को आधार से लिंक करने की समय सीमा मंगलवार को पांचवीं बार बढ़ाई है. बता दें कि पहले ये तारीख 31 मार्च, 2023 थी.
गौरतलब है कि 30 जून तक पैन को आधार से लिंक करने में विफल रहने वाले व्यक्ति इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे और कईं बैंकिंग सर्विसेज या स्टॉक मार्केट के ट्रांसजेक्शन नहीं कर पाएंगे.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
पैन के निष्क्रिय हो जाने के परिणाम इस प्रकार होंगे.
- ऐसे पैन के लिए कोई रिफंड नहीं किया जाएगा और ऐसे रिफंड पर उस अवधि के लिए ब्याज देय नहीं होगा, जिसके दौरान पैन निष्क्रिय रहता है.
- टीडीएस और टीसीएस की कटौती/एकत्रीकरण उच्च दर पर किया जाएगा, जैसा कि आयकर अधिनियम, 1961 में प्रदान किया गया है.
सीबीडीटी ने कहा कि अगर पैन निष्क्रिय हो जाता है, तो व्यक्तियों को इसे आधार से लिंक करने के लिए 1,000 रुपये का मामूली जुर्माना देना होगा.
इसमें ये भी कहा गया है कि पैन को आधार से लिंक करने की अनिवार्यता चार श्रेणियों पर लागू नहीं होती है.
- आधार को पैन से अनिवार्य रूप से लिंक करने की अनिवार्यता असम, जम्मू-कश्मीर और मेघालय के निवासियों पर लागू नहीं होती.
- आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार अनिवासी भारतीय यानी (एनआरआई) व्यक्तियों पर भी ये अनिवार्यता नहीं है.
- कोई भी व्यक्ति जो पिछले साल किसी भी समय 80 वर्ष या उससे अधिक आयु का था. ऐसे व्यक्ति जो भारत के नागरिक नहीं हैं.
जो लोग उपरोक्त किसी भी श्रेणी में आते हैं, उन्हें समय सीमा तक अपने पैन को अपने आधार से लिंक करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि वे चाहें तो स्वेच्छा से दोनों दस्तावेज़ लिंक करवा सकते हैं. अन्य व्यक्तियों के लिए, 30 जून की समय सीमा तक अपने आधार को अपने पैन से लिंक करना अनिवार्य है.
सीबीडीटी ने बताया कि अब तक 51 करोड़ से अधिक पैन को आधार से जोड़ा जा चुका है.
| नई दिल्लीः केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने स्थायी खाता संख्या को आधार कार्ड से जोड़ने की अंतिम तिथि को तीन महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया है. आम जनता अब अपने पैन को तीस जून, दो हज़ार तेईस तक आधार कार्ड से लिंक कर सकती है. हालांकि, इस तारीख तक अगर टैक्सपेयर्स पैन को लिंक नहीं कर पाते हैं, तो उनका पैन निष्क्रिय हो जाएगा. सीबीडीटी ने पैन को आधार से लिंक करने की समय सीमा मंगलवार को पांचवीं बार बढ़ाई है. बता दें कि पहले ये तारीख इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस थी. गौरतलब है कि तीस जून तक पैन को आधार से लिंक करने में विफल रहने वाले व्यक्ति इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे और कईं बैंकिंग सर्विसेज या स्टॉक मार्केट के ट्रांसजेक्शन नहीं कर पाएंगे. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. पैन के निष्क्रिय हो जाने के परिणाम इस प्रकार होंगे. - ऐसे पैन के लिए कोई रिफंड नहीं किया जाएगा और ऐसे रिफंड पर उस अवधि के लिए ब्याज देय नहीं होगा, जिसके दौरान पैन निष्क्रिय रहता है. - टीडीएस और टीसीएस की कटौती/एकत्रीकरण उच्च दर पर किया जाएगा, जैसा कि आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ में प्रदान किया गया है. सीबीडीटी ने कहा कि अगर पैन निष्क्रिय हो जाता है, तो व्यक्तियों को इसे आधार से लिंक करने के लिए एक,शून्य रुपयापये का मामूली जुर्माना देना होगा. इसमें ये भी कहा गया है कि पैन को आधार से लिंक करने की अनिवार्यता चार श्रेणियों पर लागू नहीं होती है. - आधार को पैन से अनिवार्य रूप से लिंक करने की अनिवार्यता असम, जम्मू-कश्मीर और मेघालय के निवासियों पर लागू नहीं होती. - आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ के अनुसार अनिवासी भारतीय यानी व्यक्तियों पर भी ये अनिवार्यता नहीं है. - कोई भी व्यक्ति जो पिछले साल किसी भी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक आयु का था. ऐसे व्यक्ति जो भारत के नागरिक नहीं हैं. जो लोग उपरोक्त किसी भी श्रेणी में आते हैं, उन्हें समय सीमा तक अपने पैन को अपने आधार से लिंक करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि वे चाहें तो स्वेच्छा से दोनों दस्तावेज़ लिंक करवा सकते हैं. अन्य व्यक्तियों के लिए, तीस जून की समय सीमा तक अपने आधार को अपने पैन से लिंक करना अनिवार्य है. सीबीडीटी ने बताया कि अब तक इक्यावन करोड़ से अधिक पैन को आधार से जोड़ा जा चुका है. |
देशभर में आतंक का पर्याय बने गैंग्स ऑफ गैंगस्टर्स(Gangs of gangsters) में हड़कंप मच गया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(NIA) ने इनके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस(ISI) के अलावा खालिस्तानी आतंकवादियों से सांठगांठ की जानकारियों के बाद देशभर में छापा मारा है।
असम के पर्यटन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ कैबिनेट की मीटिंग के बाद कहा कि राज्य भर में लाखों छोटे मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा, "हमने सीआरपीसी की धारा 321 को लागू करते हुए 4. 19 लाख छोटे अपराध के मामलों में से लगभग तीन लाख को वापस लेने का फैसला किया है।
पिछले 8 वर्षों में भारत में दूध उत्पादन में 44 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इस तरह का पिछला सम्मेलन भारत में लगभग आधी सदी पहले 1974 में आयोजित किया गया था। दुनिभर में दूध के प्रॉडक्शन में भारत की 23 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
सितंबर के दूसरे हफ्ते में भी कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने आजकल में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना के कुछ हिस्सों, विदर्भ, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात आदि कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
रविवार की दोपहर करीब तीन बजे एक कैदी को चाय की दुकान पर देख, किसी गांववाले ने पहचान लिया। इसके बाद उसने आसपास के लोगों को सचेत कर दिया। देखते ही देखते काफी संख्या में लोग पहुंच गए तो सबने मिलकर पांचों कैदियों को पकड़ लिया। इसके बाद उनकी पिटाई शुरू कर दी। गांव के लोगों ने लाठी-डंडों से पांचों की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी।
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में एससीओ सदस्य देशों के नेता, पर्यवेक्षक राज्यों, एससीओ के महासचिव, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (आरएटीएस) के कार्यकारी निदेशक और अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट जिन 220 याचिकाओं की सुनवाई के लिए सोमवार को लिस्टिंग किया है, उनमें से कई ऐसी याचिकाओं का नंबर सुनवाई के लिए सालों बाद आया है। शीर्ष अदालत में यह जनहित याचिकाएं कई वर्षों से लंबित थीं। 220 याचिकाओं में सबसे प्रमुख सीएए के खिलाफ इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग की याचिका है।
ज्योर्तिमठ बद्रीनाथ और शारदा पीठ द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को दोपहर साढ़े तीन बजे ब्रह्मलीन हो गए। उनकी आयु 99 वर्ष थी। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम पर वह काफी दिनों से रह रहे थे। शंकराचार्य के शिष्य ब्रह्म विद्यानंद ने बताया- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को सोमवार को शाम 5 बजे परमहंसी गंगा आश्रम में समाधि दी जाएगी।
भारतीय रेलवे ने यात्री यातायात में 116 प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि दर्ज की है। यात्री यातायात से राजस्व 25,276. 54 करोड़ रुपये था। सालाना आधार पर इस राजस्व में 13,574. 44 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि करीब 116 प्रतिशत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 72 साल के हो गए हैं। 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के महेसाणा जिले के वडनगर में पैदा हुए नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने अपनी मां हीराबेन मोदी के जन्मदिन पर 'मां' शीर्षक से एक ब्लॉग लिखा था। इस ब्लॉग में उन्होंने जीवन में मां के महत्व को बताया है।
| देशभर में आतंक का पर्याय बने गैंग्स ऑफ गैंगस्टर्स में हड़कंप मच गया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने इनके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस के अलावा खालिस्तानी आतंकवादियों से सांठगांठ की जानकारियों के बाद देशभर में छापा मारा है। असम के पर्यटन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ कैबिनेट की मीटिंग के बाद कहा कि राज्य भर में लाखों छोटे मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा, "हमने सीआरपीसी की धारा तीन सौ इक्कीस को लागू करते हुए चार. उन्नीस लाख छोटे अपराध के मामलों में से लगभग तीन लाख को वापस लेने का फैसला किया है। पिछले आठ वर्षों में भारत में दूध उत्पादन में चौंतालीस प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इस तरह का पिछला सम्मेलन भारत में लगभग आधी सदी पहले एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में आयोजित किया गया था। दुनिभर में दूध के प्रॉडक्शन में भारत की तेईस प्रतिशत हिस्सेदारी है। सितंबर के दूसरे हफ्ते में भी कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने आजकल में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना के कुछ हिस्सों, विदर्भ, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात आदि कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। रविवार की दोपहर करीब तीन बजे एक कैदी को चाय की दुकान पर देख, किसी गांववाले ने पहचान लिया। इसके बाद उसने आसपास के लोगों को सचेत कर दिया। देखते ही देखते काफी संख्या में लोग पहुंच गए तो सबने मिलकर पांचों कैदियों को पकड़ लिया। इसके बाद उनकी पिटाई शुरू कर दी। गांव के लोगों ने लाठी-डंडों से पांचों की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में एससीओ सदस्य देशों के नेता, पर्यवेक्षक राज्यों, एससीओ के महासचिव, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना के कार्यकारी निदेशक और अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट जिन दो सौ बीस याचिकाओं की सुनवाई के लिए सोमवार को लिस्टिंग किया है, उनमें से कई ऐसी याचिकाओं का नंबर सुनवाई के लिए सालों बाद आया है। शीर्ष अदालत में यह जनहित याचिकाएं कई वर्षों से लंबित थीं। दो सौ बीस याचिकाओं में सबसे प्रमुख सीएए के खिलाफ इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग की याचिका है। ज्योर्तिमठ बद्रीनाथ और शारदा पीठ द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को दोपहर साढ़े तीन बजे ब्रह्मलीन हो गए। उनकी आयु निन्यानवे वर्ष थी। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम पर वह काफी दिनों से रह रहे थे। शंकराचार्य के शिष्य ब्रह्म विद्यानंद ने बताया- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को सोमवार को शाम पाँच बजे परमहंसी गंगा आश्रम में समाधि दी जाएगी। भारतीय रेलवे ने यात्री यातायात में एक सौ सोलह प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि दर्ज की है। यात्री यातायात से राजस्व पच्चीस,दो सौ छिहत्तर. चौवन करोड़ रुपये था। सालाना आधार पर इस राजस्व में तेरह,पाँच सौ चौहत्तर. चौंतालीस करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि करीब एक सौ सोलह प्रतिशत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहत्तर साल के हो गए हैं। सत्रह सितंबर, एक हज़ार नौ सौ पचास को गुजरात के महेसाणा जिले के वडनगर में पैदा हुए नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने अपनी मां हीराबेन मोदी के जन्मदिन पर 'मां' शीर्षक से एक ब्लॉग लिखा था। इस ब्लॉग में उन्होंने जीवन में मां के महत्व को बताया है। |
Lok Sabha Election 2019. डंडा-टोपी वाले विभाग के दो बड़े अधिकारी रिटायर क्या हुए अब एक-दूसरे से ही दो-दो हाथ के मूड में आ गए हैं। जो कल तक सलामी ठोकते थे अब प्रतिद्वंद्वी हो गए हैं।
रांची, राज्य ब्यूरो। Lok Sabha Election 2019 की रणभेरी बजने के साथ ही झारखंड में सत्ता और विपक्ष का गलियारा गुलजार है। रोज नई-नई घोषणाएं, नए गठबंधन और नई सीटों पर चुनाव लड़ने की अाजमाइश-फरमाइश जारी है। छोटे-बड़े सब इस बार अपनी पार्टी को जिताने के लिए चुनाव में दम भर रहे हैं। आचार संहिता के बीच कई नेताओं की परेशानी भी बढ़ी है, तो कुछ सेटिंग-गेटिंग के खेल में हाथ मांज रहे हैं।
भैया की पार्टी को एक ही सीट मिली है। यह उनकी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि तो है। लेकिन अंदर-अंदर ही परेशान हैं। वे स्वयं चुनाव लडऩा चाहते हैं लेकिन पार्टी में दूसरा स्थान रखने वाले नेताजी ने भी उस सीट के लिए दावा ठोक दिया है। उनका उस क्षेत्र में जनाधार भी है। अब भैया करें तो क्या करें। कह दिया है कि चुनाव में नेता महत्वपूर्ण नहीं होता है। महत्वपूर्ण होता है कि उसका जनाधार कितना है। अब देखना है कि होली के बाद वे क्या घोषणा करते हैं।
गम जब हद से गुजर जाता है तो शेर बनकर जुबान पर उभर आता है। सरयू सी गहराई रखने वाले माननीय अपना दर्द इन दिनों शेरों से ही बयां कर रहे हैं। उनका हालिया शेर की राजनीतिक गलियारे में खूब चर्चा है। बयां भी खूब किया है। 'अच्छा लगे वो मुझको, मैने बता दिया, नुकसान ये हुआ कि वो मगरूर हो गए। ये पहला शेर नहीं है, पिछले शेरों पर गौर करें तो उनके दर्द की गंभीरता की झलक और स्पष्ट होगी। कहते थे, 'सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। लेकिन उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी सूरत नहीं अलबत्ता इस्तीफे की पेशकश कर खुद की फजीहत करा बैठे।
कानूनी दावपेंच में महारथ हासिल करने के बाद अब सत्ता की गद्दी पर विराजमान होने की उमंगे कुलाचें मार रही हैं। काली कोट वाले साहब के पास मौका भी है दस्तूर भी। मुखिया को अपनी ख्वाहिश बताई, तो सिर्फ कानूनी दावपेंच वाले काम करने की नसीहत मिली। पर साहेब हैं कि मानने को तैयार नहीं लग रहे। काली कोट वालों की जमात का मुखिया होने के नाते सभी को फूल पर मुहर लगाने का एहसास करा रहे हैं। साहेब की मन की बात पर फूल दल के कई भंवरे मंडरा कर अपना समर्थन जाहिर कर रहे है, लेकिन राजनीति-राजनीति खेलने वाले कब काली कोट वाले साहेब की बिसात पर पानी फेर दें, कहा नहीं जा सकता। कहीं साहेब की मन की बात मन में ही न रह जाए।
डंडा-टोपी वाले विभाग के दो बड़े अधिकारी रिटायर क्या हुए, अब एक-दूसरे से ही दो-दो हाथ के मूड में आ गए हैं। जो कल तक सलामी ठोकते थे, अब प्रतिद्वंद्वी हो गए हैं। कहते हैं, हुजूर बहुत हो गई सलामी, अब मैदान में भी आजमा लिया जाय कि कौन कितने चहेते हैं। दोनों ही सूरमां अपना डंडा-टोपी अपने विभाग में ही छोड़ आएं हैं। चोला बदल लिए हैं ताकि जनता को नया चेहरा दिखा सकें। इसमें एक साहब को तो पूर्व में सफलता मिल चुकी है। दूसरे साहब को जनता कितना स्वीकारती है, यह तो वक्त बताएगा। फिलहाल, दोनों साहब एक-दूसरे के लिए सिर्फ एक ही गीत गुनगुना रहे हैं 'ये पब्लिक है, ये सब जानती है पब्लिक है।
| Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस. डंडा-टोपी वाले विभाग के दो बड़े अधिकारी रिटायर क्या हुए अब एक-दूसरे से ही दो-दो हाथ के मूड में आ गए हैं। जो कल तक सलामी ठोकते थे अब प्रतिद्वंद्वी हो गए हैं। रांची, राज्य ब्यूरो। Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस की रणभेरी बजने के साथ ही झारखंड में सत्ता और विपक्ष का गलियारा गुलजार है। रोज नई-नई घोषणाएं, नए गठबंधन और नई सीटों पर चुनाव लड़ने की अाजमाइश-फरमाइश जारी है। छोटे-बड़े सब इस बार अपनी पार्टी को जिताने के लिए चुनाव में दम भर रहे हैं। आचार संहिता के बीच कई नेताओं की परेशानी भी बढ़ी है, तो कुछ सेटिंग-गेटिंग के खेल में हाथ मांज रहे हैं। भैया की पार्टी को एक ही सीट मिली है। यह उनकी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि तो है। लेकिन अंदर-अंदर ही परेशान हैं। वे स्वयं चुनाव लडऩा चाहते हैं लेकिन पार्टी में दूसरा स्थान रखने वाले नेताजी ने भी उस सीट के लिए दावा ठोक दिया है। उनका उस क्षेत्र में जनाधार भी है। अब भैया करें तो क्या करें। कह दिया है कि चुनाव में नेता महत्वपूर्ण नहीं होता है। महत्वपूर्ण होता है कि उसका जनाधार कितना है। अब देखना है कि होली के बाद वे क्या घोषणा करते हैं। गम जब हद से गुजर जाता है तो शेर बनकर जुबान पर उभर आता है। सरयू सी गहराई रखने वाले माननीय अपना दर्द इन दिनों शेरों से ही बयां कर रहे हैं। उनका हालिया शेर की राजनीतिक गलियारे में खूब चर्चा है। बयां भी खूब किया है। 'अच्छा लगे वो मुझको, मैने बता दिया, नुकसान ये हुआ कि वो मगरूर हो गए। ये पहला शेर नहीं है, पिछले शेरों पर गौर करें तो उनके दर्द की गंभीरता की झलक और स्पष्ट होगी। कहते थे, 'सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। लेकिन उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी सूरत नहीं अलबत्ता इस्तीफे की पेशकश कर खुद की फजीहत करा बैठे। कानूनी दावपेंच में महारथ हासिल करने के बाद अब सत्ता की गद्दी पर विराजमान होने की उमंगे कुलाचें मार रही हैं। काली कोट वाले साहब के पास मौका भी है दस्तूर भी। मुखिया को अपनी ख्वाहिश बताई, तो सिर्फ कानूनी दावपेंच वाले काम करने की नसीहत मिली। पर साहेब हैं कि मानने को तैयार नहीं लग रहे। काली कोट वालों की जमात का मुखिया होने के नाते सभी को फूल पर मुहर लगाने का एहसास करा रहे हैं। साहेब की मन की बात पर फूल दल के कई भंवरे मंडरा कर अपना समर्थन जाहिर कर रहे है, लेकिन राजनीति-राजनीति खेलने वाले कब काली कोट वाले साहेब की बिसात पर पानी फेर दें, कहा नहीं जा सकता। कहीं साहेब की मन की बात मन में ही न रह जाए। डंडा-टोपी वाले विभाग के दो बड़े अधिकारी रिटायर क्या हुए, अब एक-दूसरे से ही दो-दो हाथ के मूड में आ गए हैं। जो कल तक सलामी ठोकते थे, अब प्रतिद्वंद्वी हो गए हैं। कहते हैं, हुजूर बहुत हो गई सलामी, अब मैदान में भी आजमा लिया जाय कि कौन कितने चहेते हैं। दोनों ही सूरमां अपना डंडा-टोपी अपने विभाग में ही छोड़ आएं हैं। चोला बदल लिए हैं ताकि जनता को नया चेहरा दिखा सकें। इसमें एक साहब को तो पूर्व में सफलता मिल चुकी है। दूसरे साहब को जनता कितना स्वीकारती है, यह तो वक्त बताएगा। फिलहाल, दोनों साहब एक-दूसरे के लिए सिर्फ एक ही गीत गुनगुना रहे हैं 'ये पब्लिक है, ये सब जानती है पब्लिक है। |
स्वच्छन्दतावादी आन्दोलन का सूत्रपात किया था। अमरीका के उन्नत सामाजिक विकास के कारण, आल्स्टन भी, अपने पूर्ववर्ती चित्रकारों की भाँति, यूरोप के समृद्ध दर्शन को ग्रहण करने के लिए तैयार था । थोड़े समय के भीतर ही कोलरिज ने लिखा कि केवल प्राल्स्टन ही ऐसा चित्रकार है जो प्रकृति की नवीन भावपूर्ण अभि व्यक्ति में सक्षम है। 'और इस प्रक्रिया में निष्प्राण प्राकृतियाँ अथवा बाह्य आकार नहीं बनते वरन् प्रकृति की सप्राणता का उद्घाटन होता है।' आल्स्टन की लालसा थी कि वह 'राइम ब्रॉफ़ व ऐन्शेन्ट मैरिनर' जैसी कविताओं द्वारा उद्भूत विस्मय को रंगों में व्यक्त कर सके, इसलिए उसने मस्तिष्क की तार्किक क्षमताओं को नजरअन्दाज़ करके सीधे संवेगों को स्पर्श करने का प्रयास किया। संगीतज्ञ जैसे स्वरों का उपयोग करता है उसी तरह रंगों के उपयोग द्वारा वह 'दृष्टि से परे की हजारों वस्तुओं को जन्म देना चाहता था। 1819 में उसने 'चांदनी में नहाया हुआ वृश्य' (Moonlit landscape ) चित्रफलक 12, का सृजन किया। इसमें एक रात के प्रशान्त सौन्दर्य का अंकन है, फिर भी प्रतीत होता है कि दृश्यचित्र की मानव प्राकृतियाँ किसी प्रसाधारण उद्देश्य से चल फिर रही हैं। अल्स्टन इससे प्रागे नहीं बढ़ता, मानो रहस्यात्मकता का बोध कराना ही उसका उद्देश्य हो : रहस्य का अर्थ तो हमें ही प्रयत्न करके समझना है। मुख्यतः रंगों के उपयोग द्वारा अद्भुत भावावेगपूर्ण प्रभावों की सृष्टि करना आल्स्टन की विशेषता थी । यही गुण देलाॉय जैसे परवर्ती फ्रांसीसी स्वच्छन्दतावादियों में भी आया ।
वेस्ट की अपेक्षा प्राल्स्टन अधिक प्रखर चित्रकार था और लगता था कि शीघ्र ही वह एक महत्त्वपूर्ण स्थान बना लेगा । किन्तु यकायक उसमें स्नायविक विकार उत्पन्न हो गया और उसके व्यक्तित्व में क्रमशः परिवर्तन आने लगा । पहले तो उसकी कार्यक्षमता पर इस स्नायविक विकार का कोई प्रभाव न पड़ा। इतना अवश्य था कि अब उसने अपने दृश्यचित्रों के उत्तेजक प्रयोग कम कर दिये
1. बेलाक्रॉय, फडिनेंड विक्टर यूजीन ( 1798-1863 ) : फ्रांसीसी ऐतिहासिक चित्रकार । स्वच्छन्दतावादी धारा का एक नेता, प्रारम्भ में जेरीकॉल्त से प्रभावित, फिर स्वतन्त्र शैली का विकास । प्रसिद्ध चित्र : दांते और वर्जिल, किड्स का हत्याकांड, धर्मयोद्धाओं का प्रवेश आदि ।
और अपना अधिकांश समय प्राकृतियों के विशाल सम्पुंजनों में लगाना प्रारम्भ कर दिया था; ये सम्पुंजन वेनिस के महान् चित्रकारों की अनुकृतियाँ मात्र थे । फिर भी, 'ओल्ड टेस्टामेंट' की अलौकिक घटनाओं पर आधारित उसके चित्र इंगलैंड-वासियों की रुचि के अनुकूल थे; ये लन्दन में पुरस्कृत हुए और आल्स्टन को प्रसिद्धि मिली ।
1818 में वह मैसाच्युसेट्स लौट गया। उस समय उसके पास बेहशाजार की बाबत (Belshazzar's Feast ) नामक एक लगभग पूर्ण चित्र था । वह चित्र उस समय तक इतना प्रसिद्ध हो चुका था कि बोस्टन-वासियों ने उसे खरीदने के लिए 10,000 डालर (लगभग 47,600 रुपये) की राशि चन्दे से इकट्ठी कर ली थी। आल्स्टन को सन्तोष हुआ। उसने चित्र को अन्तिम स्पर्श देने के इरादे से काम प्रारम्भ किया, किन्तु परिणाम उल्टा हुआ । वह जितना अधिक श्रम करता गया, चित्र में उलझाव उतना ही बढ़ता गया। उसने लिखा है कि वह इस कदर परेशान हो चुका था जैसे कोई विशाल हाथ 'मेरे चित्र से बाहर निकलकर मुझे फर्श पर पीस डालने वाला हो ।' अनेक वर्षों तक उसकी अधिकांश शक्ति बेल्शाजार की दावत में लगती रही ; प्राखिरकार मृत्यु ने ही उसे इस काम से ने मुक्त किया । चित्र उस समय भी अस्पष्ट असम्बद्ध प्राकृतियों का समूह मात्र था। उसके एक घनिष्ट मित्र का कथन हैः 'प्राल्स्टन को जीवन भर यंत्रणा देने वाला यह चित्र एक भयानक कल्पना है, दुःस्वप्न है, मरीचिका है।'
अमरीका वापस पहुँचते ही श्राल्स्टन की सृजन शक्ति समाप्त हो गई थी; अतः बाद के प्रवासियों ने यही उदाहरण देकर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि (हेनरी जेम्स के शब्दों में ) कला अमरीका के 'क्रूर वातावरण में मुरझा जाती है ।' किन्तु सचाई यह है कि आल्स्टन की परेशानियाँ विदेश में ही प्रारम्भ हो
1. हेनरी जेम्स (1843-1916) : अमरीका में जन्मा उपन्यासकार, जो अधिकतर यूरोप में रहा और अन्त में ब्रिटेन का नागरिक बन गया। उसके उपन्यासों की विशेषता है : इस सभ्य संसार के व्यवहारों और नैतिकता के सूक्ष्मातिसूक्ष्म स्तरों का अध्ययन प्रमुख । कृतियाँ : डेजी मिलर, द बॉस्टोनियन्म, द पोर्ट्रेट भाफ ए लेडी, वाशिंगटन स्क्वायर, टर्न भाफ़ द आदि ।
चुकी थीं । वह स्वयं को यूरोपीय जीवन का एक अंग कभी भी न मान सका था इसीलिए वह लगातार अधिकाधिक उद्विग्न होता गया और अन्त में देशप्रेम के जोश में अमरीका वापस चला गया। और वहाँ पहुँचकर उसने पाया कि अमरीका की गति की दिशा उसके लिए सर्वथा अरुचिकर थी । निजी प्राय समाप्त हो गई तो उसे धन कमाने के लिए चित्र बनाने पड़े; फलतः उसने स्वयं को अपमानित महसूस किया और अमरीका की व्यापारी संस्कृति के प्रति उसमें द्वेष भावना जागी। उसने कहा कि युद्धों को छोड़कर अमरीकी इतिहास की कोई भी घटना चित्रांकन के योग्य नहीं है। मैसाच्युसेट्स के देहातों में वह स्पेनी युवतियों और खंडहरों-भरी इतालवी पहाड़ियों को अंकित करता । उसने लिखा है : 'मुझे अपने देश की कमियों का ज्ञान है और कोई भी अमरीकी मुझसे अधिक गहराई से इन्हें महसूस नहीं करता, तथा हमारी शासन प्रणाली के प्रति प्रास्था मुझसे कम किसी में नहीं है ।' सुपरिचित पुरानी दुनिया तथा नव-परिचित नई दुनिया दोनों से आल्स्टन का सम्पर्क सूत्र टूट गया था । जड़ें न रहीं और प्रतिभा स्वयं मुरझा गई ।
स्ट की कुंठा की कहानी ज्यों-ज्यों फैलती गई, त्यों-त्यों उसकी प्रसिद्धि बढ़ती गई । इस नये गतिशील राष्ट्र में स्वयं को अजनबी महसूस करनेवाले अनेक संस्कृति के दावेदार श्रमरीकी इस कल्पना मात्र पर मुग्ध थे कि कोई कलाकार इतना सुरुचि सम्पन्न है कि नयी हलचलों से भरे इस वातावरण में सृजन नहीं कर पाता । असफलता को संवेदनीयता का प्रमाण मान लिया गया था, इसीलिए सृजनशक्ति खो देनेवाले व्यक्ति को एकमात्र महान् अमरीकी चित्रकार मान लिया
स्टनका प्रिय शिष्य था सैम्युएल एफ़० बी० मॉर्स ( 1791-1872 ) । चित्रकार बनने के इच्छुक मॉर्म ने उस समय तक स्वप्न में भी न सोचा था कि कभी वह टेलीग्राफ का आविष्कार करेगा । मॉर्स के पिता एक प्रसिद्ध पादरी थे और अपने पुत्र के लिए चित्रकला को निम्न कोटि का व्यवसाय मानते थे । कारण, अमरीकी चित्रकार परम्परा से स्वयंप्रशिक्षित कारीगर-मात्र थे । लेकिन ऊँचे घराने का प्रल्स्टन चित्रकार बना, इस उदाहरण से पिता ने अपना विरोध त्याग दिया। आल्स्टन के साथ मॉर्स भी इंगलैंड गया । वहाँ से उसने प्रसन्नतापूर्वक लिखा
अभिमानी चित्रकार और अमरीको चित्रकला का ह्रास
कि अमरीका की भाँति इंगलैंड में चित्रकला को 'सिर्फ निम्न श्रेणी के लोगों का पेशा नहीं माना जाता ।' उसने यह भी लिखा कि 'सम्भ्रान्त महिलाएं बेझिझक सार्वजनिक रूप से मॉडेल बनती हैं, जिससे सिद्ध होता है कि कला को 'कितना स्पृहणीय स्थान प्राप्त है।'
मॉर्स के पूर्ववर्ती अमरीकी चित्रकारों की रुचि व्यक्तिचित्रण में सबसे अधिक थी किन्तु मॉर्स ने इसे ओछा काम कहकर तिरस्कृत किया : 'मैं अपनी कला को व्यापार बनाकर अपना अपमान कभी नहीं करूँगा । यदि मैं भले आदमी की भाँति नहीं जी सकता, तो भूखा मर जाना पसन्द करूंगा। मैं पन्द्रहवीं शताब्दी की गरिमा को पुनरुज्जीवित करनेवालों में से एक और राफेल, माइकेलांजेलो अथवा तीत्यां जैसा श्रेष्ठ कलाकार बनना चाहता हूँ ।' अपने प्रोटेस्टेंट धर्म के कारण वह धार्मिक विषयों को स्पर्श नहीं कर सकता था और अनगढ़ स्वदेश का दर्शन कराने वाले विचारों से दूर भागता था । इसीलिए उसने मृतप्राय हरक्युलीज ( The Dying Hercules) और ज्युपिटर का न्याय ( The Judgement of Jupiter) नामक चित्रों का सृजन किया। 1816 में धन की समस्या ने उसे प्रमरीका लौटने को बाध्य कर दिया। उसका ख्याल था कि अपने अज्ञानी प्रसंस्कृत देशवासियों के लिए वह संस्कृति की सौगात लेकर आया है, किन्तु देशवासियों ने
1. माइकेलांजेलो (1475 1564): सर्वाधिक प्रसिद्ध इतालवी मूर्तिकार, वास्तुकार, चित्रकार और कवि । संसार के प्रसिद्धतम कलाकारों में से एक । उसे पोप जूलियस द्वितीय का शानदार मकबरा बनाने का काम मिला लेकिन यह विचार कभी पूरा न हुआ । सिस्ताइन गिरजे की छत को उसने चित्रित किया; यही उसकी महानतम कृति है । इसमें सृष्टि के जन्म से लेकर प्रलय तक की 'जेनेसिस' की कथा सैकड़ों प्राकृतियों की एक डिजायन में प्रदर्शित है । 'मोजियों', 'गुलाम' भौर मेडिकी स्मारक की मूर्तियाँ उसकी प्रसिद्ध मूर्तियाँ हैं ।
2. तिजियानो वेसेली तोस्यां (1477-1576) इतालवी चित्रकार । चार्ल्स पंचम के व्यक्ति चित्र का अंकन और सम्राट द्वारा सम्मान । धार्मिक और ऐतिहासिक चित्रों तथा व्यक्तियों में रंगों की अप्रतिम प्रभविष्णुता तीत्यां के चित्रों की विशेषता है । प्रसिद्ध चित्र : वीनस और क्यूपिड, वोनस, एमैन्स का भोजन, साठ वर्ष की उम्र में आत्मचित्र, असी वर्ष की उम्र में आत्मचित्र ।
उसके रूढ़ोपम शैली के चित्रों को न खरीदकर अपनी रुचिहीनता का ही परिचय दिया - कम से कम उसका विश्वास यही था । और जब व्यक्ति चित्रण को ही उसे अपनी जीविका का साधन बनाना पड़ा तो वह बहुत निराश हुआ ।
मॉर्स व्यक्ति चित्रों को धन कमाने वाली चीजों से ज्यादा कुछ नहीं समझता था, जिनके लिए गम्भीर प्रयास की आवश्यकता नहीं। इसीलिए अपना ध्यान संगठन सम्बन्धी मामलों में लगाकर उसे खुशी ही मिली। 1800 तक अमरीका में ऐसी संस्थाएँ न थीं जहाँ पर चित्रकार अपना कार्य सोख सकें या अपने चित्रों का प्रदर्शन और सहकर्मियों के चित्रों का अवलोकन कर सकें । धनी नागरिकों ने प्रवश्य संगठित होकर धीरे-धीरे प्रादेशिक प्रकादेमियाँ बना ली थीं, जिनके लिए वे अनुकृतियाँ और मूर्तियाँ मँगाया करते थे और कभी-कभी अपनी रुचि के समकालीन प्रमरीकी चित्रों की प्रदर्शनियाँ भी आयोजित करते थे । किन्तु चित्रकारों और इन तानाशाह कला-पारखियों के बीच तनाव जन्मा और बढ़ने लगा। 1825 में कला के विद्यार्थियों ने अध्ययनाधिकार की माँग पेश की तो 'अमरीकी ललित कला अकादेमी के अध्यक्ष पद से जॉन ट्रम्बुल ने उत्तर दिया : 'दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते।' यह तनाव की चरम सीमा थी। अपने ऊंचे घराने के कारण जॉन ट्रम्बुल स्वयं को अपने साथी चित्रकारों से ऊँचा समझता था। मॉर्स भी उतने ही ऊँचे घराने का था, किन्तु अपने सहकर्मियों को ऊँचे उठाकर अपने स्तर पर लाना चाहता था। कुछ क्षुब्ध चित्रकारों का अगुआ बनकर मॉर्स ने 'नेशनल अकादेमी ऑफ डिज़ायन का संगठन किया। यह एक जनतन्त्रतात्मक संस्था थी, जिस पर चित्रकारों का अधिकार था । स्वयंभू कला-पारखियों की सहायता पर निर्भर न रहकर इस संस्था को कला में रुचि रखनेवाले किसी भी व्यक्ति का सहाय्य स्वीकार था। मॉर्स की अध्यक्षता में नेशनल अकादेमी आफ डिज़ायन' शीघ्र ही अमरीका की सर्वाधिक प्रभावशाली कला-सम्बन्धी संस्था बन गई।
मॉर्स की स्थिति अब सम्माननीय थी । प्रतः उसने अपनी कुंठाओं का प्रदर्शन दूसरे ढंग से किया । उसने कहा कि विदेशों में अध्ययन करने के पश्चात् स्वदेश वापस आने पर चित्रकारों को अमरीका के 'ठण्डे और बंजर रेगिस्तान में मरणान्त अकेलेपन और निराशा का अनुभव होता है क्योंकि उनके देशवासी
अभिमानी चित्रकार और प्रमरीकी चित्रकला का ह्रास
चाहते हुए भी उन्हें समझ नहीं पाते ।' अक्सर कोई 'घटिया दर्जे का चित्रकार', जिसे यूरोप में कोई पूछता तक नहीं, श्रमरीकियों को अच्छा लगता है और श्रेष्ठतर चित्रकारों पर हावी हो जाता है। इस बात से एक कला-पारखी को बहुत बुरा लगा और उसने आक्रोशपूर्वक दावा किया कि कला पारखी भी विदेशों में अध्य यन कर चुके हैं और उन्हें इतनी आसानी से बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। विवाद जारी रहा, किन्तु दोनों पक्ष इस बात पर एकमत थे कि अमरीकी रुचि 'स्वदेश - जन्य' नहीं है ।
वर्षों की कुंठा के बाद मॉर्स की इच्छा पूरी हुई। उसे एक विवरणात्मक चित्र बनाने का काम मिला । आतुरतापूर्वक उसने ब्रश उठाये, किन्तु फिर रख दिए । उसे अनुभव हुआ कि अपने गुरु आल्स्टन की भाँति वह भी मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अन्धी गली में है। वह अपने महान् चित्र का प्रारम्भ तक न कर सका और ग्रन्त में उसने चित्रकला से ही विराग ले लिया । दुःखी मन से उसने कहा : 'चित्रकला बहुतों की निष्ठुर प्रेमिका रह चुकी है, लेकिन मुझे तो उसने निर्दयतापूर्वक ठुकराया। मैंने उसे नहीं छोड़ा, वह मुझे छोड़ गई ।' उसका विश्वास था कि उसके 'अत्यधिक उच्च आदर्श ही उसकी असफलता के कारण बने ।
अमरीकी जीवन को निन्दनीय पदार्थवादी ठहराते हुए मॉर्स अमरीकियों का सुधार करना और इस उद्देश्य से धुंधले अतीत को अमरीकियों पर लादना चाहता था । लेकिन कला से नाता तोड़ने के बाद वह सर्वाधिक पदार्थवादी व्यवसाय - आविष्कार - में लग गया । और असफलता तब सफलता में बदल गई; उसने टेलिग्राफ का आविष्कार किया। उसके लफायेत ( Lafayette ), चित्रफलक 14, से स्पष्ट है कि आविष्कारों की भाँति चित्रकला को भी उसने समान व्यावहारिकता से अपनाया होता तो वह किस तरह के चित्र बनाता । व्यक्ति चित्र को भव्य बनाने के उद्देश्य से उसने अनेक रूपक एक साथ उपस्थित कर दिये -सूर्यास्त का आकाश, बाड़ा, बस्ट, बरतन, सूर्यमुखी श्रादि । किन्तु इन रूपकों ने चित्र की शक्ति को और कम कर दिया, क्योंकि व्यक्ति चित्र की शक्ति यथार्थ चित्रण पर निर्भर करती है, काल्पनिक जगत् के अंकन पर नहीं । किन्तु इतना प्रवश्य है कि इस चित्र में परिवेश जितना भड़कीला है, प्रधेड़ नायक की प्राकृति प्रौर मुख के
अंकन में उतनी ही सक्षमता और सहजता है । अमरीका में अनेक स्वप्नदर्शी कलाकार हुए हैं, लेकिन मॉर्स वैसा न था; उसके आविष्कारों से स्पष्ट है कि वह वास्तव में यथार्थवादी था । अपने प्राडम्बरपूर्ण सिद्धान्तों के कारण ही उसने मूर्त संसार को चित्रित नहीं किया, वरना वह शायद एक महान् चित्रकार होता ।
अनेक प्रतिभा के विनाश का एकमात्र कारण यह धारणा है कि कला एक चाय का प्याला है जिसे अँगुलियाँ टेढ़ी किये बिना उठाया ही नहीं जा सकता। जॉन वाण्डरलीन (1775-1852 ) एक होनहार चित्रकार था । वह लन्दन या रोम के बजाय पेरिस में अध्ययन करनेवाला पहला अमरीकी था। उसने निरावरण चित्रों में, जो इंगलैंड में उपेक्षित और अमरीका में गर्हित थे, कमाल हासिल किया । उसकी कृति एरियाद्ने (Ariadne ), चित्रफलक 13 में, एक निरावरण 'क्लासिकल' नायिका अपने प्रेमी के चले जाने के बाद सोई पड़ी है। 1815 में वह इसे लेकर श्रमरीका पहुँचा तो लोगों को बहुत बुरा लगा। किन्तु लोगों में श्रौचित्य की अनुचित धारणा उसकी असफलता का प्रमुख कारण न थी । वह अमरीकी धरती पर कला के उन बीजों को रोपने के लिए कृतसंकल्प था जो यूरोप में सदियों पहले पुष्पित हो चुके थे। ये बीज नहीं उगे तो उसने ऐसे बीजों की तलाश तक न की जो उस धरती पर उग सकते । इसके विपरीत उसने घोषित कर दिया कि धरती ही बंजर है। उसने कहा : 'कोई अनाड़ी चित्रकार ही अमरीका में कला-साधना कर सकता है।'
उन दिनों अमरीका की मिसीसीपी श्रौर श्रोहायो नदियों की घाटियों में एक महान् कार्य सम्पन्न हो रहा था। पहले बन्दूकधारी अन्वेषक प्राए; फिर कुल्हाड़े लिये आदमी; तब लकड़ी के घर बनानेवाले श्रादमी । जहाँ कभी सिर्फ पत्तियों की सरसराहट सुनाई पड़ा करती थी, वहाँ पर शीघ्र ही एक नगर बस गया। धन और विचारों का प्रवाह पूर्व की ओर होने लगा ; धन से लोगों की तिजोरियाँ भरीं और विचारों ने उनके मस्तिष्कों को उत्तेजित-स्तम्भित कर दिया। इस इलाके के निवासी ऐण्डू जैकसन क्रमशः राष्ट्रपति पद की ओर अग्रसर थे। किन्तु चित्रकार तो हरक्युलोज़ के स्वप्न ले रहे थे, उन्हें सीमान्त के जंगलों के लकड़1. हरक्युलोज : यूनान का महान् पौराणिक योद्धा । विलक्षण शक्ति का धनी । अनेक असम्भव कार्यों को सम्पन्न करने में सफलता प्राप्त की। देवताओं के समान पूज्य ।
हारे पॉल बन्यन को देखने तक की फुर्सत न थी ।
विदग्ध कलाकारों में से केवल व्यक्ति चित्रकारों ने अमरीका के किसी पक्ष का चित्रण किया । उनका व्यापार खूब चलता था, क्योंकि व्यक्ति पूजा ही उस समय भी अमरीका का राष्ट्रीय गुण था। फिर भी, मॉर्स की तरह उन्होंने भी मान लिया था कि व्यक्ति चित्रण कला का निम्नतम प्रकार है क्योंकि व्यक्तियों में श्रादर्श का नहीं वरन् यथार्थ का चित्रण होता है। वे अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करना चाहते थे, इसलिए व्यक्ति चित्र के लिए बैठनेवाले व्यक्ति को खुश करना उन्हें बुरा लगता था। मैथ्यू हैरिस जूएट (1788-1827) और रेम्ब्रान्त पील (17781860) जैसे शिल्पियों ने यथार्थवादी प्रनलंकृत व्यक्ति चित्रों में अमरीकी समानतावाद की अभिव्यक्ति तो की, किन्तु कलात्मक उपलब्धि के लिए प्रयास करना उन्हें भी समय का अपव्यय लगता था । उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के व्यक्तिचित्र ऐसे तथ्यों के सशक्त और अक्सर कठोर चित्रण हैं, जो परस्पर संयुक्त होकर किसी एक प्रखण्ड बिम्ब ( unified image ) की सृष्टि नहीं करते ।
टॉमस सली (1783-1872 ) एक अपवाद था । यथातथ्य से अधिक उसका प्रयास था चित्रमयता (pictorial effect ) उत्पन्न करना, किन्तु उसमें भी गम्भीरता का प्रभाव था । बायांका की भूमिका में फैनी केम्बिल (Fanny Kemble as Bianca ), चित्रफलक 16, को पहली बार देखते ही हम मुग्ध हो जाते हैं, किन्तु दुबारा देखने पर रीतापन ही दीख पड़ता है। फैनी केम्बिल को महान् अभिनेत्री बनानेवाला गुण था भावनात्मक गाम्भीर्य, किन्तु श्रेष्ठ प्रकाश-संयोजन प्रौर साहसिक ब्रश संचालन के बावजूद सली इस गाम्भीर्य को नहीं पकड़ सका। सली की कला अत्यधिक सतही है इसीलिए उसे सुन्दर नहीं कहा जा सकता; वह बस लुभावने चित्रों का चितेरा था ।
प्रमुख चित्रकारों को अपने औपनिवेशिक पूर्ववर्तियों के प्रति तनिक भी रुचि न थी । अमरीकी व्यक्ति चित्रण - परम्परा का वयोवृद्ध चित्रकार गिल्बर्ट स्टुअर्ट
1. पॉल बन्यनः अमरीकी लोककथाओं का एक प्रसिद्ध नायक । विलक्षण बुद्धि का धनी । अनेक कथाओं में बन्यन के अद्भुत कारनामों का वर्णन है; एक कथा में तो उसने एक नदी को काट दिया था ।
हमेशा कॉप्ले के बोस्टनी चित्रों का मजाक उड़ाता था; उसका कहना था कि कॉप्ले के मांस के रंग 'कमाए हुए चमड़े' जैसे हैं । 1810 में 'सोसायटी ऑफ द आर्टिस्ट्स ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स' ( अमरीकी चित्रकार संस्था ) का संगठन हुआ, तो एकत्र चित्रकारों ने एकमत होकर स्वीकार किया किया कि वेस्ट के यूरोप जाने पर ही अमरीकी कला का प्रारम्भ हुआ। अमरीका के सबसे अधिक ख्यातनामा चित्रकारों ने जानबूझकर स्वयं को स्वदेश की मिट्टी से विच्छिन्न कर लिया ।
इसके बावजूद, निम्नतर आर्थिक स्तर पर औपनिवेशिक कला पनपती रही। अक्सर घुमक्कड़ चित्रकार सीधे-सादे नागरिकों के यहाँ जा पहुचते थे प्रौर लोग सभी प्रकार के चित्र खरीद लेते थे । कभी-कभी तो चित्रों का मूल्य अंशतः निवास, भोजन और शराब से भी चुकाया जाता था। इस तरह बने चित्रों को अमरीकी प्राद्य चित्र ( American Primitives ) कहा जाता है और आजकल संग्रह - कर्ताओं को इनके संग्रह की धुन है । इस प्रकार के चित्रों का एक श्रेष्ठ उदाहरण है कनेक्टीकट के इरास्टस सैलिसबरी फील्ड (1805-लगभग 1900 ) का नीलवसन बालक (The Blue Boy ), चित्रफलक 15 इस चित्र का अंकन उन्नीसवीं शताब्दी के पाँचवें दशक में हुआ था, किन्तु शैली की दृष्टि से यह ऐन पालडं (चित्रफलक 4) जैसे बहुत पहले के चित्रों के समान है। यह समानता कितने अंश तक सीधे प्रभाव का परिणाम है और कितने अंश तक स्वतन्त्र विकास है, यह बता सकना प्रसंभव है । हर समय और हर स्थान के स्वयं शिक्षित चित्रकारों के काम करने का ढंग एक-सा होता है। वे बच्चों की तरह, पहले टिपाई करते हैं और फिर रंग भर देते हैं । वे प्रकृति की जटिलता में से कुछ विवरण, जो उन्हें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मालूम पड़ते हैं, चुन लेते हैं और फिर उन्हें सपाट प्राकृतियों के रूप में अंकित कर देते हैं। कैनवस पर साथ-साथ अंकित ये प्राकृतियाँ देखने में अच्छी लगती हैं; अच्छे लगने का कारण यथार्थ अंकन नहीं वरन् पैटनों में समंजन हैं और पैटर्न प्राकारों की पुनरावृत्ति पर निर्भर हैं। यही कारण है कि नीलवसन बालक के कान, जो श्रादमी के कानों से अधिक किसी रोमन ग्राम-देवता के कानों जैसे हैं, उसके वस्त्रों के फैलाव को और अधिक बढ़ाते हैं।
औपनिवेशिक काल में चित्रकार अलग-अलग रहने के कारण आदिम या | स्वच्छन्दतावादी आन्दोलन का सूत्रपात किया था। अमरीका के उन्नत सामाजिक विकास के कारण, आल्स्टन भी, अपने पूर्ववर्ती चित्रकारों की भाँति, यूरोप के समृद्ध दर्शन को ग्रहण करने के लिए तैयार था । थोड़े समय के भीतर ही कोलरिज ने लिखा कि केवल प्राल्स्टन ही ऐसा चित्रकार है जो प्रकृति की नवीन भावपूर्ण अभि व्यक्ति में सक्षम है। 'और इस प्रक्रिया में निष्प्राण प्राकृतियाँ अथवा बाह्य आकार नहीं बनते वरन् प्रकृति की सप्राणता का उद्घाटन होता है।' आल्स्टन की लालसा थी कि वह 'राइम ब्रॉफ़ व ऐन्शेन्ट मैरिनर' जैसी कविताओं द्वारा उद्भूत विस्मय को रंगों में व्यक्त कर सके, इसलिए उसने मस्तिष्क की तार्किक क्षमताओं को नजरअन्दाज़ करके सीधे संवेगों को स्पर्श करने का प्रयास किया। संगीतज्ञ जैसे स्वरों का उपयोग करता है उसी तरह रंगों के उपयोग द्वारा वह 'दृष्टि से परे की हजारों वस्तुओं को जन्म देना चाहता था। एक हज़ार आठ सौ उन्नीस में उसने 'चांदनी में नहाया हुआ वृश्य' चित्रफलक बारह, का सृजन किया। इसमें एक रात के प्रशान्त सौन्दर्य का अंकन है, फिर भी प्रतीत होता है कि दृश्यचित्र की मानव प्राकृतियाँ किसी प्रसाधारण उद्देश्य से चल फिर रही हैं। अल्स्टन इससे प्रागे नहीं बढ़ता, मानो रहस्यात्मकता का बोध कराना ही उसका उद्देश्य हो : रहस्य का अर्थ तो हमें ही प्रयत्न करके समझना है। मुख्यतः रंगों के उपयोग द्वारा अद्भुत भावावेगपूर्ण प्रभावों की सृष्टि करना आल्स्टन की विशेषता थी । यही गुण देलाॉय जैसे परवर्ती फ्रांसीसी स्वच्छन्दतावादियों में भी आया । वेस्ट की अपेक्षा प्राल्स्टन अधिक प्रखर चित्रकार था और लगता था कि शीघ्र ही वह एक महत्त्वपूर्ण स्थान बना लेगा । किन्तु यकायक उसमें स्नायविक विकार उत्पन्न हो गया और उसके व्यक्तित्व में क्रमशः परिवर्तन आने लगा । पहले तो उसकी कार्यक्षमता पर इस स्नायविक विकार का कोई प्रभाव न पड़ा। इतना अवश्य था कि अब उसने अपने दृश्यचित्रों के उत्तेजक प्रयोग कम कर दिये एक. बेलाक्रॉय, फडिनेंड विक्टर यूजीन : फ्रांसीसी ऐतिहासिक चित्रकार । स्वच्छन्दतावादी धारा का एक नेता, प्रारम्भ में जेरीकॉल्त से प्रभावित, फिर स्वतन्त्र शैली का विकास । प्रसिद्ध चित्र : दांते और वर्जिल, किड्स का हत्याकांड, धर्मयोद्धाओं का प्रवेश आदि । और अपना अधिकांश समय प्राकृतियों के विशाल सम्पुंजनों में लगाना प्रारम्भ कर दिया था; ये सम्पुंजन वेनिस के महान् चित्रकारों की अनुकृतियाँ मात्र थे । फिर भी, 'ओल्ड टेस्टामेंट' की अलौकिक घटनाओं पर आधारित उसके चित्र इंगलैंड-वासियों की रुचि के अनुकूल थे; ये लन्दन में पुरस्कृत हुए और आल्स्टन को प्रसिद्धि मिली । एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में वह मैसाच्युसेट्स लौट गया। उस समय उसके पास बेहशाजार की बाबत नामक एक लगभग पूर्ण चित्र था । वह चित्र उस समय तक इतना प्रसिद्ध हो चुका था कि बोस्टन-वासियों ने उसे खरीदने के लिए दस,शून्य डालर की राशि चन्दे से इकट्ठी कर ली थी। आल्स्टन को सन्तोष हुआ। उसने चित्र को अन्तिम स्पर्श देने के इरादे से काम प्रारम्भ किया, किन्तु परिणाम उल्टा हुआ । वह जितना अधिक श्रम करता गया, चित्र में उलझाव उतना ही बढ़ता गया। उसने लिखा है कि वह इस कदर परेशान हो चुका था जैसे कोई विशाल हाथ 'मेरे चित्र से बाहर निकलकर मुझे फर्श पर पीस डालने वाला हो ।' अनेक वर्षों तक उसकी अधिकांश शक्ति बेल्शाजार की दावत में लगती रही ; प्राखिरकार मृत्यु ने ही उसे इस काम से ने मुक्त किया । चित्र उस समय भी अस्पष्ट असम्बद्ध प्राकृतियों का समूह मात्र था। उसके एक घनिष्ट मित्र का कथन हैः 'प्राल्स्टन को जीवन भर यंत्रणा देने वाला यह चित्र एक भयानक कल्पना है, दुःस्वप्न है, मरीचिका है।' अमरीका वापस पहुँचते ही श्राल्स्टन की सृजन शक्ति समाप्त हो गई थी; अतः बाद के प्रवासियों ने यही उदाहरण देकर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि कला अमरीका के 'क्रूर वातावरण में मुरझा जाती है ।' किन्तु सचाई यह है कि आल्स्टन की परेशानियाँ विदेश में ही प्रारम्भ हो एक. हेनरी जेम्स : अमरीका में जन्मा उपन्यासकार, जो अधिकतर यूरोप में रहा और अन्त में ब्रिटेन का नागरिक बन गया। उसके उपन्यासों की विशेषता है : इस सभ्य संसार के व्यवहारों और नैतिकता के सूक्ष्मातिसूक्ष्म स्तरों का अध्ययन प्रमुख । कृतियाँ : डेजी मिलर, द बॉस्टोनियन्म, द पोर्ट्रेट भाफ ए लेडी, वाशिंगटन स्क्वायर, टर्न भाफ़ द आदि । चुकी थीं । वह स्वयं को यूरोपीय जीवन का एक अंग कभी भी न मान सका था इसीलिए वह लगातार अधिकाधिक उद्विग्न होता गया और अन्त में देशप्रेम के जोश में अमरीका वापस चला गया। और वहाँ पहुँचकर उसने पाया कि अमरीका की गति की दिशा उसके लिए सर्वथा अरुचिकर थी । निजी प्राय समाप्त हो गई तो उसे धन कमाने के लिए चित्र बनाने पड़े; फलतः उसने स्वयं को अपमानित महसूस किया और अमरीका की व्यापारी संस्कृति के प्रति उसमें द्वेष भावना जागी। उसने कहा कि युद्धों को छोड़कर अमरीकी इतिहास की कोई भी घटना चित्रांकन के योग्य नहीं है। मैसाच्युसेट्स के देहातों में वह स्पेनी युवतियों और खंडहरों-भरी इतालवी पहाड़ियों को अंकित करता । उसने लिखा है : 'मुझे अपने देश की कमियों का ज्ञान है और कोई भी अमरीकी मुझसे अधिक गहराई से इन्हें महसूस नहीं करता, तथा हमारी शासन प्रणाली के प्रति प्रास्था मुझसे कम किसी में नहीं है ।' सुपरिचित पुरानी दुनिया तथा नव-परिचित नई दुनिया दोनों से आल्स्टन का सम्पर्क सूत्र टूट गया था । जड़ें न रहीं और प्रतिभा स्वयं मुरझा गई । स्ट की कुंठा की कहानी ज्यों-ज्यों फैलती गई, त्यों-त्यों उसकी प्रसिद्धि बढ़ती गई । इस नये गतिशील राष्ट्र में स्वयं को अजनबी महसूस करनेवाले अनेक संस्कृति के दावेदार श्रमरीकी इस कल्पना मात्र पर मुग्ध थे कि कोई कलाकार इतना सुरुचि सम्पन्न है कि नयी हलचलों से भरे इस वातावरण में सृजन नहीं कर पाता । असफलता को संवेदनीयता का प्रमाण मान लिया गया था, इसीलिए सृजनशक्ति खो देनेवाले व्यक्ति को एकमात्र महान् अमरीकी चित्रकार मान लिया स्टनका प्रिय शिष्य था सैम्युएल एफ़शून्य बीशून्य मॉर्स । चित्रकार बनने के इच्छुक मॉर्म ने उस समय तक स्वप्न में भी न सोचा था कि कभी वह टेलीग्राफ का आविष्कार करेगा । मॉर्स के पिता एक प्रसिद्ध पादरी थे और अपने पुत्र के लिए चित्रकला को निम्न कोटि का व्यवसाय मानते थे । कारण, अमरीकी चित्रकार परम्परा से स्वयंप्रशिक्षित कारीगर-मात्र थे । लेकिन ऊँचे घराने का प्रल्स्टन चित्रकार बना, इस उदाहरण से पिता ने अपना विरोध त्याग दिया। आल्स्टन के साथ मॉर्स भी इंगलैंड गया । वहाँ से उसने प्रसन्नतापूर्वक लिखा अभिमानी चित्रकार और अमरीको चित्रकला का ह्रास कि अमरीका की भाँति इंगलैंड में चित्रकला को 'सिर्फ निम्न श्रेणी के लोगों का पेशा नहीं माना जाता ।' उसने यह भी लिखा कि 'सम्भ्रान्त महिलाएं बेझिझक सार्वजनिक रूप से मॉडेल बनती हैं, जिससे सिद्ध होता है कि कला को 'कितना स्पृहणीय स्थान प्राप्त है।' मॉर्स के पूर्ववर्ती अमरीकी चित्रकारों की रुचि व्यक्तिचित्रण में सबसे अधिक थी किन्तु मॉर्स ने इसे ओछा काम कहकर तिरस्कृत किया : 'मैं अपनी कला को व्यापार बनाकर अपना अपमान कभी नहीं करूँगा । यदि मैं भले आदमी की भाँति नहीं जी सकता, तो भूखा मर जाना पसन्द करूंगा। मैं पन्द्रहवीं शताब्दी की गरिमा को पुनरुज्जीवित करनेवालों में से एक और राफेल, माइकेलांजेलो अथवा तीत्यां जैसा श्रेष्ठ कलाकार बनना चाहता हूँ ।' अपने प्रोटेस्टेंट धर्म के कारण वह धार्मिक विषयों को स्पर्श नहीं कर सकता था और अनगढ़ स्वदेश का दर्शन कराने वाले विचारों से दूर भागता था । इसीलिए उसने मृतप्राय हरक्युलीज और ज्युपिटर का न्याय नामक चित्रों का सृजन किया। एक हज़ार आठ सौ सोलह में धन की समस्या ने उसे प्रमरीका लौटने को बाध्य कर दिया। उसका ख्याल था कि अपने अज्ञानी प्रसंस्कृत देशवासियों के लिए वह संस्कृति की सौगात लेकर आया है, किन्तु देशवासियों ने एक. माइकेलांजेलो : सर्वाधिक प्रसिद्ध इतालवी मूर्तिकार, वास्तुकार, चित्रकार और कवि । संसार के प्रसिद्धतम कलाकारों में से एक । उसे पोप जूलियस द्वितीय का शानदार मकबरा बनाने का काम मिला लेकिन यह विचार कभी पूरा न हुआ । सिस्ताइन गिरजे की छत को उसने चित्रित किया; यही उसकी महानतम कृति है । इसमें सृष्टि के जन्म से लेकर प्रलय तक की 'जेनेसिस' की कथा सैकड़ों प्राकृतियों की एक डिजायन में प्रदर्शित है । 'मोजियों', 'गुलाम' भौर मेडिकी स्मारक की मूर्तियाँ उसकी प्रसिद्ध मूर्तियाँ हैं । दो. तिजियानो वेसेली तोस्यां इतालवी चित्रकार । चार्ल्स पंचम के व्यक्ति चित्र का अंकन और सम्राट द्वारा सम्मान । धार्मिक और ऐतिहासिक चित्रों तथा व्यक्तियों में रंगों की अप्रतिम प्रभविष्णुता तीत्यां के चित्रों की विशेषता है । प्रसिद्ध चित्र : वीनस और क्यूपिड, वोनस, एमैन्स का भोजन, साठ वर्ष की उम्र में आत्मचित्र, असी वर्ष की उम्र में आत्मचित्र । उसके रूढ़ोपम शैली के चित्रों को न खरीदकर अपनी रुचिहीनता का ही परिचय दिया - कम से कम उसका विश्वास यही था । और जब व्यक्ति चित्रण को ही उसे अपनी जीविका का साधन बनाना पड़ा तो वह बहुत निराश हुआ । मॉर्स व्यक्ति चित्रों को धन कमाने वाली चीजों से ज्यादा कुछ नहीं समझता था, जिनके लिए गम्भीर प्रयास की आवश्यकता नहीं। इसीलिए अपना ध्यान संगठन सम्बन्धी मामलों में लगाकर उसे खुशी ही मिली। एक हज़ार आठ सौ तक अमरीका में ऐसी संस्थाएँ न थीं जहाँ पर चित्रकार अपना कार्य सोख सकें या अपने चित्रों का प्रदर्शन और सहकर्मियों के चित्रों का अवलोकन कर सकें । धनी नागरिकों ने प्रवश्य संगठित होकर धीरे-धीरे प्रादेशिक प्रकादेमियाँ बना ली थीं, जिनके लिए वे अनुकृतियाँ और मूर्तियाँ मँगाया करते थे और कभी-कभी अपनी रुचि के समकालीन प्रमरीकी चित्रों की प्रदर्शनियाँ भी आयोजित करते थे । किन्तु चित्रकारों और इन तानाशाह कला-पारखियों के बीच तनाव जन्मा और बढ़ने लगा। एक हज़ार आठ सौ पच्चीस में कला के विद्यार्थियों ने अध्ययनाधिकार की माँग पेश की तो 'अमरीकी ललित कला अकादेमी के अध्यक्ष पद से जॉन ट्रम्बुल ने उत्तर दिया : 'दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते।' यह तनाव की चरम सीमा थी। अपने ऊंचे घराने के कारण जॉन ट्रम्बुल स्वयं को अपने साथी चित्रकारों से ऊँचा समझता था। मॉर्स भी उतने ही ऊँचे घराने का था, किन्तु अपने सहकर्मियों को ऊँचे उठाकर अपने स्तर पर लाना चाहता था। कुछ क्षुब्ध चित्रकारों का अगुआ बनकर मॉर्स ने 'नेशनल अकादेमी ऑफ डिज़ायन का संगठन किया। यह एक जनतन्त्रतात्मक संस्था थी, जिस पर चित्रकारों का अधिकार था । स्वयंभू कला-पारखियों की सहायता पर निर्भर न रहकर इस संस्था को कला में रुचि रखनेवाले किसी भी व्यक्ति का सहाय्य स्वीकार था। मॉर्स की अध्यक्षता में नेशनल अकादेमी आफ डिज़ायन' शीघ्र ही अमरीका की सर्वाधिक प्रभावशाली कला-सम्बन्धी संस्था बन गई। मॉर्स की स्थिति अब सम्माननीय थी । प्रतः उसने अपनी कुंठाओं का प्रदर्शन दूसरे ढंग से किया । उसने कहा कि विदेशों में अध्ययन करने के पश्चात् स्वदेश वापस आने पर चित्रकारों को अमरीका के 'ठण्डे और बंजर रेगिस्तान में मरणान्त अकेलेपन और निराशा का अनुभव होता है क्योंकि उनके देशवासी अभिमानी चित्रकार और प्रमरीकी चित्रकला का ह्रास चाहते हुए भी उन्हें समझ नहीं पाते ।' अक्सर कोई 'घटिया दर्जे का चित्रकार', जिसे यूरोप में कोई पूछता तक नहीं, श्रमरीकियों को अच्छा लगता है और श्रेष्ठतर चित्रकारों पर हावी हो जाता है। इस बात से एक कला-पारखी को बहुत बुरा लगा और उसने आक्रोशपूर्वक दावा किया कि कला पारखी भी विदेशों में अध्य यन कर चुके हैं और उन्हें इतनी आसानी से बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। विवाद जारी रहा, किन्तु दोनों पक्ष इस बात पर एकमत थे कि अमरीकी रुचि 'स्वदेश - जन्य' नहीं है । वर्षों की कुंठा के बाद मॉर्स की इच्छा पूरी हुई। उसे एक विवरणात्मक चित्र बनाने का काम मिला । आतुरतापूर्वक उसने ब्रश उठाये, किन्तु फिर रख दिए । उसे अनुभव हुआ कि अपने गुरु आल्स्टन की भाँति वह भी मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अन्धी गली में है। वह अपने महान् चित्र का प्रारम्भ तक न कर सका और ग्रन्त में उसने चित्रकला से ही विराग ले लिया । दुःखी मन से उसने कहा : 'चित्रकला बहुतों की निष्ठुर प्रेमिका रह चुकी है, लेकिन मुझे तो उसने निर्दयतापूर्वक ठुकराया। मैंने उसे नहीं छोड़ा, वह मुझे छोड़ गई ।' उसका विश्वास था कि उसके 'अत्यधिक उच्च आदर्श ही उसकी असफलता के कारण बने । अमरीकी जीवन को निन्दनीय पदार्थवादी ठहराते हुए मॉर्स अमरीकियों का सुधार करना और इस उद्देश्य से धुंधले अतीत को अमरीकियों पर लादना चाहता था । लेकिन कला से नाता तोड़ने के बाद वह सर्वाधिक पदार्थवादी व्यवसाय - आविष्कार - में लग गया । और असफलता तब सफलता में बदल गई; उसने टेलिग्राफ का आविष्कार किया। उसके लफायेत , चित्रफलक चौदह, से स्पष्ट है कि आविष्कारों की भाँति चित्रकला को भी उसने समान व्यावहारिकता से अपनाया होता तो वह किस तरह के चित्र बनाता । व्यक्ति चित्र को भव्य बनाने के उद्देश्य से उसने अनेक रूपक एक साथ उपस्थित कर दिये -सूर्यास्त का आकाश, बाड़ा, बस्ट, बरतन, सूर्यमुखी श्रादि । किन्तु इन रूपकों ने चित्र की शक्ति को और कम कर दिया, क्योंकि व्यक्ति चित्र की शक्ति यथार्थ चित्रण पर निर्भर करती है, काल्पनिक जगत् के अंकन पर नहीं । किन्तु इतना प्रवश्य है कि इस चित्र में परिवेश जितना भड़कीला है, प्रधेड़ नायक की प्राकृति प्रौर मुख के अंकन में उतनी ही सक्षमता और सहजता है । अमरीका में अनेक स्वप्नदर्शी कलाकार हुए हैं, लेकिन मॉर्स वैसा न था; उसके आविष्कारों से स्पष्ट है कि वह वास्तव में यथार्थवादी था । अपने प्राडम्बरपूर्ण सिद्धान्तों के कारण ही उसने मूर्त संसार को चित्रित नहीं किया, वरना वह शायद एक महान् चित्रकार होता । अनेक प्रतिभा के विनाश का एकमात्र कारण यह धारणा है कि कला एक चाय का प्याला है जिसे अँगुलियाँ टेढ़ी किये बिना उठाया ही नहीं जा सकता। जॉन वाण्डरलीन एक होनहार चित्रकार था । वह लन्दन या रोम के बजाय पेरिस में अध्ययन करनेवाला पहला अमरीकी था। उसने निरावरण चित्रों में, जो इंगलैंड में उपेक्षित और अमरीका में गर्हित थे, कमाल हासिल किया । उसकी कृति एरियाद्ने , चित्रफलक तेरह में, एक निरावरण 'क्लासिकल' नायिका अपने प्रेमी के चले जाने के बाद सोई पड़ी है। एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में वह इसे लेकर श्रमरीका पहुँचा तो लोगों को बहुत बुरा लगा। किन्तु लोगों में श्रौचित्य की अनुचित धारणा उसकी असफलता का प्रमुख कारण न थी । वह अमरीकी धरती पर कला के उन बीजों को रोपने के लिए कृतसंकल्प था जो यूरोप में सदियों पहले पुष्पित हो चुके थे। ये बीज नहीं उगे तो उसने ऐसे बीजों की तलाश तक न की जो उस धरती पर उग सकते । इसके विपरीत उसने घोषित कर दिया कि धरती ही बंजर है। उसने कहा : 'कोई अनाड़ी चित्रकार ही अमरीका में कला-साधना कर सकता है।' उन दिनों अमरीका की मिसीसीपी श्रौर श्रोहायो नदियों की घाटियों में एक महान् कार्य सम्पन्न हो रहा था। पहले बन्दूकधारी अन्वेषक प्राए; फिर कुल्हाड़े लिये आदमी; तब लकड़ी के घर बनानेवाले श्रादमी । जहाँ कभी सिर्फ पत्तियों की सरसराहट सुनाई पड़ा करती थी, वहाँ पर शीघ्र ही एक नगर बस गया। धन और विचारों का प्रवाह पूर्व की ओर होने लगा ; धन से लोगों की तिजोरियाँ भरीं और विचारों ने उनके मस्तिष्कों को उत्तेजित-स्तम्भित कर दिया। इस इलाके के निवासी ऐण्डू जैकसन क्रमशः राष्ट्रपति पद की ओर अग्रसर थे। किन्तु चित्रकार तो हरक्युलोज़ के स्वप्न ले रहे थे, उन्हें सीमान्त के जंगलों के लकड़एक. हरक्युलोज : यूनान का महान् पौराणिक योद्धा । विलक्षण शक्ति का धनी । अनेक असम्भव कार्यों को सम्पन्न करने में सफलता प्राप्त की। देवताओं के समान पूज्य । हारे पॉल बन्यन को देखने तक की फुर्सत न थी । विदग्ध कलाकारों में से केवल व्यक्ति चित्रकारों ने अमरीका के किसी पक्ष का चित्रण किया । उनका व्यापार खूब चलता था, क्योंकि व्यक्ति पूजा ही उस समय भी अमरीका का राष्ट्रीय गुण था। फिर भी, मॉर्स की तरह उन्होंने भी मान लिया था कि व्यक्ति चित्रण कला का निम्नतम प्रकार है क्योंकि व्यक्तियों में श्रादर्श का नहीं वरन् यथार्थ का चित्रण होता है। वे अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करना चाहते थे, इसलिए व्यक्ति चित्र के लिए बैठनेवाले व्यक्ति को खुश करना उन्हें बुरा लगता था। मैथ्यू हैरिस जूएट और रेम्ब्रान्त पील जैसे शिल्पियों ने यथार्थवादी प्रनलंकृत व्यक्ति चित्रों में अमरीकी समानतावाद की अभिव्यक्ति तो की, किन्तु कलात्मक उपलब्धि के लिए प्रयास करना उन्हें भी समय का अपव्यय लगता था । उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के व्यक्तिचित्र ऐसे तथ्यों के सशक्त और अक्सर कठोर चित्रण हैं, जो परस्पर संयुक्त होकर किसी एक प्रखण्ड बिम्ब की सृष्टि नहीं करते । टॉमस सली एक अपवाद था । यथातथ्य से अधिक उसका प्रयास था चित्रमयता उत्पन्न करना, किन्तु उसमें भी गम्भीरता का प्रभाव था । बायांका की भूमिका में फैनी केम्बिल , चित्रफलक सोलह, को पहली बार देखते ही हम मुग्ध हो जाते हैं, किन्तु दुबारा देखने पर रीतापन ही दीख पड़ता है। फैनी केम्बिल को महान् अभिनेत्री बनानेवाला गुण था भावनात्मक गाम्भीर्य, किन्तु श्रेष्ठ प्रकाश-संयोजन प्रौर साहसिक ब्रश संचालन के बावजूद सली इस गाम्भीर्य को नहीं पकड़ सका। सली की कला अत्यधिक सतही है इसीलिए उसे सुन्दर नहीं कहा जा सकता; वह बस लुभावने चित्रों का चितेरा था । प्रमुख चित्रकारों को अपने औपनिवेशिक पूर्ववर्तियों के प्रति तनिक भी रुचि न थी । अमरीकी व्यक्ति चित्रण - परम्परा का वयोवृद्ध चित्रकार गिल्बर्ट स्टुअर्ट एक. पॉल बन्यनः अमरीकी लोककथाओं का एक प्रसिद्ध नायक । विलक्षण बुद्धि का धनी । अनेक कथाओं में बन्यन के अद्भुत कारनामों का वर्णन है; एक कथा में तो उसने एक नदी को काट दिया था । हमेशा कॉप्ले के बोस्टनी चित्रों का मजाक उड़ाता था; उसका कहना था कि कॉप्ले के मांस के रंग 'कमाए हुए चमड़े' जैसे हैं । एक हज़ार आठ सौ दस में 'सोसायटी ऑफ द आर्टिस्ट्स ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स' का संगठन हुआ, तो एकत्र चित्रकारों ने एकमत होकर स्वीकार किया किया कि वेस्ट के यूरोप जाने पर ही अमरीकी कला का प्रारम्भ हुआ। अमरीका के सबसे अधिक ख्यातनामा चित्रकारों ने जानबूझकर स्वयं को स्वदेश की मिट्टी से विच्छिन्न कर लिया । इसके बावजूद, निम्नतर आर्थिक स्तर पर औपनिवेशिक कला पनपती रही। अक्सर घुमक्कड़ चित्रकार सीधे-सादे नागरिकों के यहाँ जा पहुचते थे प्रौर लोग सभी प्रकार के चित्र खरीद लेते थे । कभी-कभी तो चित्रों का मूल्य अंशतः निवास, भोजन और शराब से भी चुकाया जाता था। इस तरह बने चित्रों को अमरीकी प्राद्य चित्र कहा जाता है और आजकल संग्रह - कर्ताओं को इनके संग्रह की धुन है । इस प्रकार के चित्रों का एक श्रेष्ठ उदाहरण है कनेक्टीकट के इरास्टस सैलिसबरी फील्ड का नीलवसन बालक , चित्रफलक पंद्रह इस चित्र का अंकन उन्नीसवीं शताब्दी के पाँचवें दशक में हुआ था, किन्तु शैली की दृष्टि से यह ऐन पालडं जैसे बहुत पहले के चित्रों के समान है। यह समानता कितने अंश तक सीधे प्रभाव का परिणाम है और कितने अंश तक स्वतन्त्र विकास है, यह बता सकना प्रसंभव है । हर समय और हर स्थान के स्वयं शिक्षित चित्रकारों के काम करने का ढंग एक-सा होता है। वे बच्चों की तरह, पहले टिपाई करते हैं और फिर रंग भर देते हैं । वे प्रकृति की जटिलता में से कुछ विवरण, जो उन्हें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मालूम पड़ते हैं, चुन लेते हैं और फिर उन्हें सपाट प्राकृतियों के रूप में अंकित कर देते हैं। कैनवस पर साथ-साथ अंकित ये प्राकृतियाँ देखने में अच्छी लगती हैं; अच्छे लगने का कारण यथार्थ अंकन नहीं वरन् पैटनों में समंजन हैं और पैटर्न प्राकारों की पुनरावृत्ति पर निर्भर हैं। यही कारण है कि नीलवसन बालक के कान, जो श्रादमी के कानों से अधिक किसी रोमन ग्राम-देवता के कानों जैसे हैं, उसके वस्त्रों के फैलाव को और अधिक बढ़ाते हैं। औपनिवेशिक काल में चित्रकार अलग-अलग रहने के कारण आदिम या |
थोड़ी सी ख़ट-पट थोड़ी सी नोक-झोंक आज आपके साथ हो सकती है. सीनीयर्स और सबऑर्डिनेट का सपोर्ट आज शायद आपको ना मिले. पर कोई बात नहीं, लगे रहो, धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा.
आपने अगर कोई प्लान बनाया है तो उसे एक्सक्यूट करने से पहले एक बार फिर से जरा सोच समझ लें ताकि आज समय का सही उपयोग कर पाएं. आपकी इमैजिनेशन आज बहुत हद तक सही रहेगी तो सोचते रहो और काम करते रहो.
कभी कभी बड़ों की बात सच हो जाती है, चाहे आप कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं और ये हमें तब लगता है जब हम बड़ों की कोई बात नहीं मानते हैं. तो आज बड़ों की बात मानना अच्छा रहेगा आपके लिए.
दिन तो अच्छा है जी, पर सोच कर चलना है जी कि कौन से काम को किस समय करना है. अगर आप किसी कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं तो आज पढ़ाई शुरू करना अच्छा रहेगा आपके लिए.
तुम आ गए हो नूर आ गया है. कुछ ऐसी ही ट्रीटमेंट आज आपको मिलने वाली है आपकी फैमिली से. बड़ों से बहुत प्यार भी मिलेगा और इस कारण आपकी फैमिली से आपकी बॉडिंग काफी मजबूत होने वाली है.
आज आप जितना कम इमोशनल होंगे उतना ही बेहतर होगा आपके लिए स्पेशियली बिजनेस रिलेटेड कोई भी फैसला लेते हुए. दिन अच्छा है. कोई भी डील करना अच्छा साबित हो सकता है आज आपके लिए.
समय के साथ-साथ रिश्तों में भी लचीलापन लाना जरूरी है आपके लिए. याद रखिएगा कि वक्त के साथ-साथ सब कुछ बदल जाता है. नासमझ भी समझ जाते हैं तो आज आपको अपने रिश्तों में समझदारी लाने की जरूरत है.
"ये कहॉ आ गए हम यूं ही साथ चलते-चलते". बंधु, सिर्फ साथ चलना ही बड़ी बात नहीं होती बल्कि साथ में प्यार होना भी बड़ी बात है. तो सोच क्या रहे हो, आज मौका दे रहे हैं आपके सितारे अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए.
इंसान को उसकी बातों से ही जाना जाता है. आउटस्पोकेन होना अच्छी बात है. पर कौन सी बात किसे बुरी लग जाएगी इस बात पर ध्यान देना जरूरी है.
आज अगर आपने बहुत ज्यादा उम्मीदें लगा रखी हैं तो निराशा हाथ लग सकती है. इसलिए जरूरत से ज्यादा एक्स्पेक्ट करना आपके लिए गलत साबित हो सकता है आज.
आज आप किसी पर भी भरोसा ना करें तो अच्छा रहेगा आपके लिए. किसी की गलत सलाह मानने से बेहतर है कि आज आप अपनी दिल की सुनें तो ज्यादा अच्छा फैसला ले पाएंगे.
| थोड़ी सी ख़ट-पट थोड़ी सी नोक-झोंक आज आपके साथ हो सकती है. सीनीयर्स और सबऑर्डिनेट का सपोर्ट आज शायद आपको ना मिले. पर कोई बात नहीं, लगे रहो, धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा. आपने अगर कोई प्लान बनाया है तो उसे एक्सक्यूट करने से पहले एक बार फिर से जरा सोच समझ लें ताकि आज समय का सही उपयोग कर पाएं. आपकी इमैजिनेशन आज बहुत हद तक सही रहेगी तो सोचते रहो और काम करते रहो. कभी कभी बड़ों की बात सच हो जाती है, चाहे आप कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं और ये हमें तब लगता है जब हम बड़ों की कोई बात नहीं मानते हैं. तो आज बड़ों की बात मानना अच्छा रहेगा आपके लिए. दिन तो अच्छा है जी, पर सोच कर चलना है जी कि कौन से काम को किस समय करना है. अगर आप किसी कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं तो आज पढ़ाई शुरू करना अच्छा रहेगा आपके लिए. तुम आ गए हो नूर आ गया है. कुछ ऐसी ही ट्रीटमेंट आज आपको मिलने वाली है आपकी फैमिली से. बड़ों से बहुत प्यार भी मिलेगा और इस कारण आपकी फैमिली से आपकी बॉडिंग काफी मजबूत होने वाली है. आज आप जितना कम इमोशनल होंगे उतना ही बेहतर होगा आपके लिए स्पेशियली बिजनेस रिलेटेड कोई भी फैसला लेते हुए. दिन अच्छा है. कोई भी डील करना अच्छा साबित हो सकता है आज आपके लिए. समय के साथ-साथ रिश्तों में भी लचीलापन लाना जरूरी है आपके लिए. याद रखिएगा कि वक्त के साथ-साथ सब कुछ बदल जाता है. नासमझ भी समझ जाते हैं तो आज आपको अपने रिश्तों में समझदारी लाने की जरूरत है. "ये कहॉ आ गए हम यूं ही साथ चलते-चलते". बंधु, सिर्फ साथ चलना ही बड़ी बात नहीं होती बल्कि साथ में प्यार होना भी बड़ी बात है. तो सोच क्या रहे हो, आज मौका दे रहे हैं आपके सितारे अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए. इंसान को उसकी बातों से ही जाना जाता है. आउटस्पोकेन होना अच्छी बात है. पर कौन सी बात किसे बुरी लग जाएगी इस बात पर ध्यान देना जरूरी है. आज अगर आपने बहुत ज्यादा उम्मीदें लगा रखी हैं तो निराशा हाथ लग सकती है. इसलिए जरूरत से ज्यादा एक्स्पेक्ट करना आपके लिए गलत साबित हो सकता है आज. आज आप किसी पर भी भरोसा ना करें तो अच्छा रहेगा आपके लिए. किसी की गलत सलाह मानने से बेहतर है कि आज आप अपनी दिल की सुनें तो ज्यादा अच्छा फैसला ले पाएंगे. |
IND vs AUS: भारत में क्रिकेट एक धर्म की तह है और फैंस यहां क्रिकेटरों को भगवान मानते हैं। टीम में किसे खेलना चाहिए और किसे बाहर बैठाना चाहिए, इस पर सभी राय देते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में केएल राहुल (KL Rahul) के फॉर्म में नहीं होने के कारण, टीम प्रबंधन की उनके साथ बने रहने के लिए उनकी आलोचना की जा रही थी। अंत में, भारत द्वारा दिल्ली में जीत के साथ 2-0 की बढ़त लेने के बाद उन्हें उप-कप्तान के पद से हटा दिया गया। इंदौर में तीसरे टेस्ट (IND vs AUS 3rd Test) में उन्हें बाहर कर दिया गया था और फिर भारत नौ विकेट से मैच हार गया। फैंस अब राहुल को लकी चार्म मान रहे हैं और अब वे कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) से राहुल को अहमदाबाद (IND vs AUS Ahmedabad) वापस लाने का आग्रह कर रहे हैं। Cricket News के लिए Hindi. InsideSport. In के साथ जुड़े रहें।
पेश हैं कुछ फैन्स के रिएक्शनः
Bring back KL Rahul even if he scores 0 in next 2 innings.
KL Rahul is lucky for us man, first those centuries of Kohli in his captaincy and now this. Bring him back in the next game. Cannot afford to lose now😭.
शुभमन गिल, जिन्हें राहुल के लिए लाया गया था, ने इंदौर में अपने दो मैचों में 21 और पांच का स्कोर बनाया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अहमदाबाद मैच के दौरान राहुल की वापसी होती है या नहीं। चौथा और अंतिम टेस्ट नौ मार्च से शुरू हो रहा है।
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| IND vs AUS: भारत में क्रिकेट एक धर्म की तह है और फैंस यहां क्रिकेटरों को भगवान मानते हैं। टीम में किसे खेलना चाहिए और किसे बाहर बैठाना चाहिए, इस पर सभी राय देते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में केएल राहुल के फॉर्म में नहीं होने के कारण, टीम प्रबंधन की उनके साथ बने रहने के लिए उनकी आलोचना की जा रही थी। अंत में, भारत द्वारा दिल्ली में जीत के साथ दो-शून्य की बढ़त लेने के बाद उन्हें उप-कप्तान के पद से हटा दिया गया। इंदौर में तीसरे टेस्ट में उन्हें बाहर कर दिया गया था और फिर भारत नौ विकेट से मैच हार गया। फैंस अब राहुल को लकी चार्म मान रहे हैं और अब वे कप्तान रोहित शर्मा से राहुल को अहमदाबाद वापस लाने का आग्रह कर रहे हैं। Cricket News के लिए Hindi. InsideSport. In के साथ जुड़े रहें। पेश हैं कुछ फैन्स के रिएक्शनः Bring back KL Rahul even if he scores शून्य in next दो innings. KL Rahul is lucky for us man, first those centuries of Kohli in his captaincy and now this. Bring him back in the next game. Cannot afford to lose now😭. शुभमन गिल, जिन्हें राहुल के लिए लाया गया था, ने इंदौर में अपने दो मैचों में इक्कीस और पांच का स्कोर बनाया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अहमदाबाद मैच के दौरान राहुल की वापसी होती है या नहीं। चौथा और अंतिम टेस्ट नौ मार्च से शुरू हो रहा है। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें। |
दाड़लाघाट (अत्री): रविवार को अम्बुजा सीमैंट कंपनी में एक कामगार की छत से गिरने के कारण मौत हो गई। मृतक की पहचान भूपेंद्र (37) निवासी शौर्य चौक साहू पठानकोट के रूप में हुई है। रविवार को सुल्ली प्लांट के कोल यार्ड में दोपहर 1 बजे के करीब भूपेंद्र वैल्डिंग का कार्य कर रहा था। जैसे ही वह कार्य करके नीचे उतर रहा था तो अचानक पांव फिसलने से वह नीचे गिर गया और गंभीर चोट लगने के कारण वह बेहोश हो गया। उसे घायल अवस्था में अम्बुजा अस्पताल में लाया गया, जहां से उसे अर्की सिविल अस्पताल रैफर कर दिया गया, जहां पर डाॅक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
डीएसपी दाड़ला संदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस थाना दाड़ला में मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के लिए शव को सिविल अस्पताल अर्की में रखा गया है। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। अम्बुजा सीमैंट कर्मचारी संघ संबंधित (भारतीय मजदूर संघ) दाड़ला के अध्यक्ष सुरेश व महामंत्री नरेश ने बताया कि कंपनी में कार्यरत कर्मचारी कामगार भूपेंद्र के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। अम्बुजा के दोनों प्लांटों व माइनिंग में काम को ठप्प कर दिया है व ट्रक को लोड करने की प्रक्रिया में भी रोक लगा दी गई है। जब तक कोई हल निकल कर सामने नहीं आता, तब तक काम को ठप्प ही रखा जाएगा।
| दाड़लाघाट : रविवार को अम्बुजा सीमैंट कंपनी में एक कामगार की छत से गिरने के कारण मौत हो गई। मृतक की पहचान भूपेंद्र निवासी शौर्य चौक साहू पठानकोट के रूप में हुई है। रविवार को सुल्ली प्लांट के कोल यार्ड में दोपहर एक बजे के करीब भूपेंद्र वैल्डिंग का कार्य कर रहा था। जैसे ही वह कार्य करके नीचे उतर रहा था तो अचानक पांव फिसलने से वह नीचे गिर गया और गंभीर चोट लगने के कारण वह बेहोश हो गया। उसे घायल अवस्था में अम्बुजा अस्पताल में लाया गया, जहां से उसे अर्की सिविल अस्पताल रैफर कर दिया गया, जहां पर डाॅक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। डीएसपी दाड़ला संदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस थाना दाड़ला में मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के लिए शव को सिविल अस्पताल अर्की में रखा गया है। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। अम्बुजा सीमैंट कर्मचारी संघ संबंधित दाड़ला के अध्यक्ष सुरेश व महामंत्री नरेश ने बताया कि कंपनी में कार्यरत कर्मचारी कामगार भूपेंद्र के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। अम्बुजा के दोनों प्लांटों व माइनिंग में काम को ठप्प कर दिया है व ट्रक को लोड करने की प्रक्रिया में भी रोक लगा दी गई है। जब तक कोई हल निकल कर सामने नहीं आता, तब तक काम को ठप्प ही रखा जाएगा। |
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