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अमेरिका के वैज्ञानिक जोर देकर कह रहे हैं कि कोरोनावायरस प्राकृतिक रूप से पैदा हुआ। इसके लिए वे अपनी रिसर्च का हवाला भी दे रहे हैं।
नई दिल्ली। अमेरिका का चीन पर आरोप है कि कोरोना वायरस चीन स्थित वुहान की लैब में तैयार किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सहयोगी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं। लेकिन इसके उलट अमेरिका के वैज्ञानिक जोर देकर कह रहे हैं कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से पैदा हुआ। इसके लिए वे अपनी रिसर्च का हवाला भी दे रहे हैं।
स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट शेफर ने एबीसी न्यूज को बताया कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि यह वायरस प्रयोगशाला में तैयार किया गया हो। वह कहते हैं कि प्रकृति में कई तरह की चीजें मौजूद होती हैं जो इस प्रकार की महामारी का कारण बन सकती हैं।
इसके साथ ही डॉ. रॉबर्ट गैरी जो कि ट्यूलन स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर हैं, वह भी अमेरिका सरकार के दावों को खारिज कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ऐसा कोई प्रमाण या संकेत नहीं है कि कोविड-19 जैविक हथियार के तौर पर बनाया गया हो। वह कहते हैं कि एक विशेष तरह का म्यूटेशन इस वायरस को इतना खतरनाक व घातक बना रहा है।
गैरी के मुताबिक शुरुआत में कुछ लोगों का अनुमान था कि शायद इस वायरस को लैब में तैयार किया गया हो, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं बिल्कुल नहीं है। गैरी के अलावा अन्य वैज्ञानिक भी मानने को तैयार नहीं हैं कि वायरस को चीन ने अपनी लैब में बनाया है।
| अमेरिका के वैज्ञानिक जोर देकर कह रहे हैं कि कोरोनावायरस प्राकृतिक रूप से पैदा हुआ। इसके लिए वे अपनी रिसर्च का हवाला भी दे रहे हैं। नई दिल्ली। अमेरिका का चीन पर आरोप है कि कोरोना वायरस चीन स्थित वुहान की लैब में तैयार किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सहयोगी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं। लेकिन इसके उलट अमेरिका के वैज्ञानिक जोर देकर कह रहे हैं कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से पैदा हुआ। इसके लिए वे अपनी रिसर्च का हवाला भी दे रहे हैं। स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट शेफर ने एबीसी न्यूज को बताया कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि यह वायरस प्रयोगशाला में तैयार किया गया हो। वह कहते हैं कि प्रकृति में कई तरह की चीजें मौजूद होती हैं जो इस प्रकार की महामारी का कारण बन सकती हैं। इसके साथ ही डॉ. रॉबर्ट गैरी जो कि ट्यूलन स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर हैं, वह भी अमेरिका सरकार के दावों को खारिज कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ऐसा कोई प्रमाण या संकेत नहीं है कि कोविड-उन्नीस जैविक हथियार के तौर पर बनाया गया हो। वह कहते हैं कि एक विशेष तरह का म्यूटेशन इस वायरस को इतना खतरनाक व घातक बना रहा है। गैरी के मुताबिक शुरुआत में कुछ लोगों का अनुमान था कि शायद इस वायरस को लैब में तैयार किया गया हो, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं बिल्कुल नहीं है। गैरी के अलावा अन्य वैज्ञानिक भी मानने को तैयार नहीं हैं कि वायरस को चीन ने अपनी लैब में बनाया है। |
कोलार थाना पुलिस की डायल-100 टीम ने एक 5 साल की बच्ची तो रास्ता भटक गई थी उसे उसके माता-पिता से मिलवाया। बच्ची कुछ दिन पहले अमेरिका से अपने माता-पिता के साथ भोपाल आई थी। वो हिंदी न समझ पाती है और न ही बोल पाती है।
कोलार पुलिस के अनुसार डायल-100 की टीम को शुक्रवार सुबह एक बच्ची सिग्नेचर रेजीडेंसी के पास अकेले खड़ी दिखी। पुलिस टीम उस बच्ची से उसके बारे में जानना चाहा, मगर वो कुछ जवाब नहीं दे रही थी। डायल-100 टीम ने बच्ची लेकर आसपास के सभी कॉलोनियों में उसके परिजनों को ढूंढने के लिए गई। पुलिस को पता चला कि बच्ची के माता पिता वेस्टर्न कोर्ट कॉलोनी में हैं। पुलिस बच्ची को उनको सौंप दिया।
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| कोलार थाना पुलिस की डायल-एक सौ टीम ने एक पाँच साल की बच्ची तो रास्ता भटक गई थी उसे उसके माता-पिता से मिलवाया। बच्ची कुछ दिन पहले अमेरिका से अपने माता-पिता के साथ भोपाल आई थी। वो हिंदी न समझ पाती है और न ही बोल पाती है। कोलार पुलिस के अनुसार डायल-एक सौ की टीम को शुक्रवार सुबह एक बच्ची सिग्नेचर रेजीडेंसी के पास अकेले खड़ी दिखी। पुलिस टीम उस बच्ची से उसके बारे में जानना चाहा, मगर वो कुछ जवाब नहीं दे रही थी। डायल-एक सौ टीम ने बच्ची लेकर आसपास के सभी कॉलोनियों में उसके परिजनों को ढूंढने के लिए गई। पुलिस को पता चला कि बच्ची के माता पिता वेस्टर्न कोर्ट कॉलोनी में हैं। पुलिस बच्ची को उनको सौंप दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Akhilesh Yadav-Samajwadi Party President समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को दिन में लखनऊ से चलकर इत्रनगरी कन्नौज पहुंचेंगे। अखिलेश यादव दोपहर में करीब एक बजे कन्नौज पहुंचने के बाद रामप्रकाश शाक्य के घर जाएंगे। इसके बाद उनका रजनीकांत यादव के घर भी जाने का कार्यक्रम है।
लखनऊ, जेएनएन। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ के साथ ही रामपुर में 23 जून हो होने वाले लोकसभा के उप चुनाव में प्रचार से किनारा कर लिया है। आजमगढ़ की सीट छोडऩे वाले अखिलेश यादव एक बार भी प्रचार करने नहीं निकले। आज प्रचार के अंतिम दिन भी वह रामपुर या आजमगढ़ ना जाकर कन्नौज में रहेंगे।
समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले रामपुर और आजमगढ़ में पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का प्रचार से किनारा करना किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। 23 जून को होने वाले लोकसभा चुनाव में रामपुर तथा आजमगढ़ में आज प्रचार का अंतिम दिन है। भारतीय जनता पार्टी ने दोनों जगह पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है जबकि रामपुर में आजम खां ने अकेले ही मोर्चा संभाल रखा है। आजमगढ़ से सांसद रहे अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव को मैदान में उतारा है, लेकिन उनका प्रचार करने एक भी दिन नहीं गए।
लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का अभी तक प्रचार में नहीं उतरना चर्चा का विषय बना हुआ है। आजमगढ़ की सीट छोडऩे के बाद उसको बरकरार रखने के प्रयास में लगी समाजवादी पार्टी के मुखिया का प्रचार से दूर रहना पार्टी के नेताओं को भी हजम नहीं हो रहा है। आजमगढ़ सीट 2019 में अखिलेश यादव ने ही जीती थी। इनसे पहले 2014 में यहां से मुलायम सिंह यादव सांसद थे। बीते विधानसभा चुनाव में मैनपुरी के करहल से जीतने के बाद अखिलेश यादव ने लोकसभा से इस्तीफा देने से पहले आजमगढ़ आकर लोगों की राय भी ली थी। इसके बाद भी आजमगढ़ में प्रचार के लिए नहीं आए हैं।
आजमगढ़ में बीते दो लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर के बाद भी समाजवादी पार्टी ने जीती थी। 2014 में मुलायम सिंह और 2019 में अखिलेश यादव इस सीट से जीते थे। इस बार विधानसभा चुनाव में सपा ने आजमगढ़ की सभी दस सीट जीती है। लगता है कि विधानसभा चुनाव में क्लीन स्वीप के कारण अखिलेश यादव लोकसभा उप चुनाव में भी जीत के लिए काफी आशवस्त भी हैं।
आजमगढ़ के साथ ही अखिलेश यादव रामपुर में भी एक बार भी प्रचार करने नहीं गए। यहां पर आजम खां ने मोर्चा संभाल रखा है। रामपुर लोकसभा के चुनाव में 2019 में आजम खां जीते थे, लेकिन 2022 में विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को दिन में लखनऊ से चलकर इत्रनगरी कन्नौज पहुंचेंगे। अखिलेश यादव दोपहर में करीब एक बजे कन्नौज पहुंचने के बाद रामप्रकाश शाक्य के घर जाएंगे। यहां पर वह श्रद्धाजंलि देंगे। इसके बाद उनका रजनीकांत यादव के घर भी जाने का कार्यक्रम है। अखिलेश यादव आज कन्नौज में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। कन्नौज को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। अखिलेश यादव के बाद डिंपल यादव यहां से सांसद रहे हैं। 2019 में डिंपल को यहां से पराजय झेलनी पड़ी थी। इसके साथ ही बीते विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी को यहां से अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। इस कारण अखिलेश यादव की चिंता बढ़ गई है।
| Akhilesh Yadav-Samajwadi Party President समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को दिन में लखनऊ से चलकर इत्रनगरी कन्नौज पहुंचेंगे। अखिलेश यादव दोपहर में करीब एक बजे कन्नौज पहुंचने के बाद रामप्रकाश शाक्य के घर जाएंगे। इसके बाद उनका रजनीकांत यादव के घर भी जाने का कार्यक्रम है। लखनऊ, जेएनएन। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ के साथ ही रामपुर में तेईस जून हो होने वाले लोकसभा के उप चुनाव में प्रचार से किनारा कर लिया है। आजमगढ़ की सीट छोडऩे वाले अखिलेश यादव एक बार भी प्रचार करने नहीं निकले। आज प्रचार के अंतिम दिन भी वह रामपुर या आजमगढ़ ना जाकर कन्नौज में रहेंगे। समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले रामपुर और आजमगढ़ में पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का प्रचार से किनारा करना किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। तेईस जून को होने वाले लोकसभा चुनाव में रामपुर तथा आजमगढ़ में आज प्रचार का अंतिम दिन है। भारतीय जनता पार्टी ने दोनों जगह पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है जबकि रामपुर में आजम खां ने अकेले ही मोर्चा संभाल रखा है। आजमगढ़ से सांसद रहे अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव को मैदान में उतारा है, लेकिन उनका प्रचार करने एक भी दिन नहीं गए। लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का अभी तक प्रचार में नहीं उतरना चर्चा का विषय बना हुआ है। आजमगढ़ की सीट छोडऩे के बाद उसको बरकरार रखने के प्रयास में लगी समाजवादी पार्टी के मुखिया का प्रचार से दूर रहना पार्टी के नेताओं को भी हजम नहीं हो रहा है। आजमगढ़ सीट दो हज़ार उन्नीस में अखिलेश यादव ने ही जीती थी। इनसे पहले दो हज़ार चौदह में यहां से मुलायम सिंह यादव सांसद थे। बीते विधानसभा चुनाव में मैनपुरी के करहल से जीतने के बाद अखिलेश यादव ने लोकसभा से इस्तीफा देने से पहले आजमगढ़ आकर लोगों की राय भी ली थी। इसके बाद भी आजमगढ़ में प्रचार के लिए नहीं आए हैं। आजमगढ़ में बीते दो लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर के बाद भी समाजवादी पार्टी ने जीती थी। दो हज़ार चौदह में मुलायम सिंह और दो हज़ार उन्नीस में अखिलेश यादव इस सीट से जीते थे। इस बार विधानसभा चुनाव में सपा ने आजमगढ़ की सभी दस सीट जीती है। लगता है कि विधानसभा चुनाव में क्लीन स्वीप के कारण अखिलेश यादव लोकसभा उप चुनाव में भी जीत के लिए काफी आशवस्त भी हैं। आजमगढ़ के साथ ही अखिलेश यादव रामपुर में भी एक बार भी प्रचार करने नहीं गए। यहां पर आजम खां ने मोर्चा संभाल रखा है। रामपुर लोकसभा के चुनाव में दो हज़ार उन्नीस में आजम खां जीते थे, लेकिन दो हज़ार बाईस में विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को दिन में लखनऊ से चलकर इत्रनगरी कन्नौज पहुंचेंगे। अखिलेश यादव दोपहर में करीब एक बजे कन्नौज पहुंचने के बाद रामप्रकाश शाक्य के घर जाएंगे। यहां पर वह श्रद्धाजंलि देंगे। इसके बाद उनका रजनीकांत यादव के घर भी जाने का कार्यक्रम है। अखिलेश यादव आज कन्नौज में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। कन्नौज को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। अखिलेश यादव के बाद डिंपल यादव यहां से सांसद रहे हैं। दो हज़ार उन्नीस में डिंपल को यहां से पराजय झेलनी पड़ी थी। इसके साथ ही बीते विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी को यहां से अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। इस कारण अखिलेश यादव की चिंता बढ़ गई है। |
फूड डेस्क. मुस्लिम समुदाय बकरीद के रंग में डूबे हुए हैं। वो अच्छे-अच्छे कपड़े पहनकर टेस्टी व्यजंन का लुफ्ट उठा रहे हैं। bakrid पर आप मटन कीमा पकौड़े झटपट तरीके से तैयार करके सबको खिला सकती हैं। आइए बताते हैं रेसिपी।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 25 जून को हुए एक महिला के मर्डर का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। युवती की हत्या बदमाशों ने नहीं, बल्कि उसकी सास ने की थी। सास ने बहू को मारने के लिए एक आदमी से कुछ दिन पहले 10 हजार रुपए का देसी तमंचा खरीदा था।
एंटरटेनमेंट डेस्क. बॉलीवुड की पॉपुलर एक्ट्रेस असिन की तलाक की खबरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही थीं। इस बीच एक्ट्रेस ने एक पोस्ट शेयर कर इसे अफवाह बताया है।
लाइफस्टाइल डेस्क. मानसून के मौसम में मनी के बढ़ने के कारण बालों को संभालना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि रेनी सीजन में बालों को सॉफ्ट और चमकदार बनाने के लिए कुछ टिप्स बताए गये हैं जिसे फॉलो कर सकते हैं।
हेल्थ डेस्क. चेरी गर्मी के मौसम का फल होता है। इसके खाने से 8 तरह के शारीरिक फायदे मिलते हैं। हालांकि यह थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन हेल्थ बेनिफिट्स जानकर आप इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करने लगेंगे।
हरियाणा के चरखी दादरी की रहने वालीं 106 साल की रामबाई दुनिया की सबसे बुजुर्ग एथलीट हैं। भारत की 'बुजुर्ग उड़न परी' रामबाई ने 2 साल पहले एथलेटिक्स में कदम रखा था। 26 जून इन्होंने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
लाइफस्टाइल डेस्क. डेट नाइट पर क्या पहनकर जाए इसे लेकर कंफ्यूज हैं तो हम आपके लिए तेजस्वी प्रकाश का 10 लुक लेकर आए हैं जिससे आप आइडिया ले सकती हैं। करण कुंद्रा से डेट कर रही तेजस्वी प्रकाश अपने स्टाइल से उन्हें आए दिन दीवाना बनती हैं।
Kiara Advani At Box Office. कियारा अडवाणी की फिल्म सत्यप्रेम की कथा 29 जून को रिलीज हो रही है। फिल्म में कियारा के साथ कार्तिक आर्यन लीड रोल में हैं। बता कियारा के करियर की करें तो बीते कुछ सालों में वह काफी सफल रही हैं।
| फूड डेस्क. मुस्लिम समुदाय बकरीद के रंग में डूबे हुए हैं। वो अच्छे-अच्छे कपड़े पहनकर टेस्टी व्यजंन का लुफ्ट उठा रहे हैं। bakrid पर आप मटन कीमा पकौड़े झटपट तरीके से तैयार करके सबको खिला सकती हैं। आइए बताते हैं रेसिपी। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में पच्चीस जून को हुए एक महिला के मर्डर का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। युवती की हत्या बदमाशों ने नहीं, बल्कि उसकी सास ने की थी। सास ने बहू को मारने के लिए एक आदमी से कुछ दिन पहले दस हजार रुपए का देसी तमंचा खरीदा था। एंटरटेनमेंट डेस्क. बॉलीवुड की पॉपुलर एक्ट्रेस असिन की तलाक की खबरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही थीं। इस बीच एक्ट्रेस ने एक पोस्ट शेयर कर इसे अफवाह बताया है। लाइफस्टाइल डेस्क. मानसून के मौसम में मनी के बढ़ने के कारण बालों को संभालना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि रेनी सीजन में बालों को सॉफ्ट और चमकदार बनाने के लिए कुछ टिप्स बताए गये हैं जिसे फॉलो कर सकते हैं। हेल्थ डेस्क. चेरी गर्मी के मौसम का फल होता है। इसके खाने से आठ तरह के शारीरिक फायदे मिलते हैं। हालांकि यह थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन हेल्थ बेनिफिट्स जानकर आप इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करने लगेंगे। हरियाणा के चरखी दादरी की रहने वालीं एक सौ छः साल की रामबाई दुनिया की सबसे बुजुर्ग एथलीट हैं। भारत की 'बुजुर्ग उड़न परी' रामबाई ने दो साल पहले एथलेटिक्स में कदम रखा था। छब्बीस जून इन्होंने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। लाइफस्टाइल डेस्क. डेट नाइट पर क्या पहनकर जाए इसे लेकर कंफ्यूज हैं तो हम आपके लिए तेजस्वी प्रकाश का दस लुक लेकर आए हैं जिससे आप आइडिया ले सकती हैं। करण कुंद्रा से डेट कर रही तेजस्वी प्रकाश अपने स्टाइल से उन्हें आए दिन दीवाना बनती हैं। Kiara Advani At Box Office. कियारा अडवाणी की फिल्म सत्यप्रेम की कथा उनतीस जून को रिलीज हो रही है। फिल्म में कियारा के साथ कार्तिक आर्यन लीड रोल में हैं। बता कियारा के करियर की करें तो बीते कुछ सालों में वह काफी सफल रही हैं। |
जिस गुप्त पत्र के बारे में बात हो रही है, वह एक तिजोरी में बंद है और यह तिजोरी आस्ट्रेलियाई शहर सिडनी में रखी है। ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ-द्वितीय इस पत्र को अब से 63 साल बाद खोलने को कह गई हैं।
इंग्लैंड। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth-II) का बीते गुरुवार, 8 सितंबर को स्कॉटलैंड में निधन हो गया था। इसके बाद से उनसे जुड़ी कई चीजें दुनियाभर में सुर्खियां बनी हुई हैं। इन्हीं में एक है उनका वह सीक्रेट लेटर, जिसे दावा किया जा रहा है कि उन्होंने उसे 63 साल बाद यानी 2085 में खोलने को कहा था। बताया जा रहा है कि यह गुप्त पत्र एक तिजोरी में बंद है और यह तिजोरी आस्ट्रेलियाई शहर सिडनी में रखी है।
बता दें कि यह सीक्रेट लेटर सिडनी में स्थित एक ऐतिहासिक भवन के अंदर रखे तिजोरी में बंद है। यह पत्र उन्होंने 1986 में लिखा था और दावा किया जा रहा है कि यह सिडनी शहर के निवासियों के संबंध में लिखा गया है। हालांकि, इस लेटर में क्या लिखा है और किसके बारे में लिखा है, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है। खुद महारानी के करीबी अधिकारियों को भी इस बारे में कुछ भी नहीं पता।
हालांकि, कुछ लोगों का यह भी दावा है कि यह सीक्रेट लेटर लॉर्ड मेयर ऑफ सिडनी को संबोधित करते हुए लिखा गया है। इसके एक अलग पन्ने पर लॉर्ड मेयर ऑफ सिडनी को संबोधित करते हुए लिखा है, क्या आप वर्ष 2085 में किसी उचित दिन पर इस लिफाफे को खोलकर सिडनी के नागरिकों को मेरा यह मैसेज पहुंचा देंगे। इसके लिफाफे पर एलिजाबेथ आर. लिखा दस्तखत भी है। महारानी एलिजाबेथ-द्वितीय ने राज्य प्रमुख के तौर पर अपने जीवन में 16 बार आस्ट्रेलिया का दौरा किया था।
इस सीक्रेट लेटर के बारे में जानकारी देते हुए आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीज ने कहा कि महारानी के आस्ट्रेलिया के पहले दौरे से ही स्पष्ट हो गया था कि उनके दिल में इस देश को लेकर खास जगह थी। वैसे यह भी दिलचस्प है कि आस्ट्रेलियाई सरकार महारानी एलिजाबेथ को आस्ट्रेलिया के राज्य प्रमुख के तौर पर पसंद नहीं करती थी और उन्हें हटाने के लिए 1999 में जनमत संग्रह कराया था, मगर आस्ट्रेलियाई लोगों ने महारानी को राज्य प्रमुख के तौर पर पसंद किया और इस तरह जनमत संग्रह में सरकार हार गई।
| जिस गुप्त पत्र के बारे में बात हो रही है, वह एक तिजोरी में बंद है और यह तिजोरी आस्ट्रेलियाई शहर सिडनी में रखी है। ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ-द्वितीय इस पत्र को अब से तिरेसठ साल बाद खोलने को कह गई हैं। इंग्लैंड। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का बीते गुरुवार, आठ सितंबर को स्कॉटलैंड में निधन हो गया था। इसके बाद से उनसे जुड़ी कई चीजें दुनियाभर में सुर्खियां बनी हुई हैं। इन्हीं में एक है उनका वह सीक्रेट लेटर, जिसे दावा किया जा रहा है कि उन्होंने उसे तिरेसठ साल बाद यानी दो हज़ार पचासी में खोलने को कहा था। बताया जा रहा है कि यह गुप्त पत्र एक तिजोरी में बंद है और यह तिजोरी आस्ट्रेलियाई शहर सिडनी में रखी है। बता दें कि यह सीक्रेट लेटर सिडनी में स्थित एक ऐतिहासिक भवन के अंदर रखे तिजोरी में बंद है। यह पत्र उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियासी में लिखा था और दावा किया जा रहा है कि यह सिडनी शहर के निवासियों के संबंध में लिखा गया है। हालांकि, इस लेटर में क्या लिखा है और किसके बारे में लिखा है, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है। खुद महारानी के करीबी अधिकारियों को भी इस बारे में कुछ भी नहीं पता। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी दावा है कि यह सीक्रेट लेटर लॉर्ड मेयर ऑफ सिडनी को संबोधित करते हुए लिखा गया है। इसके एक अलग पन्ने पर लॉर्ड मेयर ऑफ सिडनी को संबोधित करते हुए लिखा है, क्या आप वर्ष दो हज़ार पचासी में किसी उचित दिन पर इस लिफाफे को खोलकर सिडनी के नागरिकों को मेरा यह मैसेज पहुंचा देंगे। इसके लिफाफे पर एलिजाबेथ आर. लिखा दस्तखत भी है। महारानी एलिजाबेथ-द्वितीय ने राज्य प्रमुख के तौर पर अपने जीवन में सोलह बार आस्ट्रेलिया का दौरा किया था। इस सीक्रेट लेटर के बारे में जानकारी देते हुए आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीज ने कहा कि महारानी के आस्ट्रेलिया के पहले दौरे से ही स्पष्ट हो गया था कि उनके दिल में इस देश को लेकर खास जगह थी। वैसे यह भी दिलचस्प है कि आस्ट्रेलियाई सरकार महारानी एलिजाबेथ को आस्ट्रेलिया के राज्य प्रमुख के तौर पर पसंद नहीं करती थी और उन्हें हटाने के लिए एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में जनमत संग्रह कराया था, मगर आस्ट्रेलियाई लोगों ने महारानी को राज्य प्रमुख के तौर पर पसंद किया और इस तरह जनमत संग्रह में सरकार हार गई। |
करेला स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ बड़े ही मीठे होते हैं। डायबिटीज के मरीजों को प्रतिदिन सुबह करेले का रस जरूर पीना चाहिए। करेले में हाइपोग्लाइकेमिक बायो−केमिकल पदार्थ होता है, जो रक्त में शर्करा के उच्च स्तर का इलाज करने के लिए उपयोगी होता है ।
मखानों में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह दिल से लेकर जोड़ों के लिए फायदेमंद माना गया है। लेकिन अगर आपको शुगर की समस्या है और आप उसे जड़ से खत्म करना चाहते हैं तो आपको प्रतिदिन खाली पेट मखाने के पांच−सात दाने खाने होंगे। कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से आपके ब्लड में शुगर लेवल खुद ब खुद ठीक हो जाएगा।
हल्दी में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं। शायद इसलिए चोट लगने से लेकर कई स्वास्थ्य व सौंदर्य समस्याओं को दूर करने के लिए इसकी मदद ली जाती है। अगर आपको शुगर की बीमारी है तो आप शहद में एक चुटकी हल्दी और सूखे आंवले का पाउडर मिलाकर उसका सेवन करें। इससे आपकी स्थिति में काफी परिवर्तन आएगा।
ठंड के मौसम में अक्सर लोग चटनी बनाकर उसका सेवन करना पसंद करते हैं। तो क्यों ना आप ऐसी चटनी बनाएं जो शुगर को भी जड़ से खत्म कर दें। इसके लिए आप पुदीने की पत्तियां लेकर उसमें अदरक का टुकड़ा, लहसुन और खट्टा अनारदाना मिक्स करके पीसें और चटनी बनाएं। आप अपने खाने के साथ इस चटनी का सेवन करें। यकीन मानिए, आपकी डायबिटीज की बीमारी आपसे दूर भाग जाएगी।
जामुन इंसुलिन रेग्युलेशन में काफी फायदेमंद साबित होती है। इसलिए आप जामुन खाने के साथ−साथ उसके पत्तों को सुबह−शाम चबाएं। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा।
अगर आपके लिए करेले का रस पीना संभव नहीं है तो आप दिन में दो या तीन बार कुछ करीपत्ता चबाएं। इससे भी आपकी शुगर काफी हद तक कंटोल हो जाएगी।
| करेला स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ बड़े ही मीठे होते हैं। डायबिटीज के मरीजों को प्रतिदिन सुबह करेले का रस जरूर पीना चाहिए। करेले में हाइपोग्लाइकेमिक बायो−केमिकल पदार्थ होता है, जो रक्त में शर्करा के उच्च स्तर का इलाज करने के लिए उपयोगी होता है । मखानों में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह दिल से लेकर जोड़ों के लिए फायदेमंद माना गया है। लेकिन अगर आपको शुगर की समस्या है और आप उसे जड़ से खत्म करना चाहते हैं तो आपको प्रतिदिन खाली पेट मखाने के पांच−सात दाने खाने होंगे। कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से आपके ब्लड में शुगर लेवल खुद ब खुद ठीक हो जाएगा। हल्दी में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं। शायद इसलिए चोट लगने से लेकर कई स्वास्थ्य व सौंदर्य समस्याओं को दूर करने के लिए इसकी मदद ली जाती है। अगर आपको शुगर की बीमारी है तो आप शहद में एक चुटकी हल्दी और सूखे आंवले का पाउडर मिलाकर उसका सेवन करें। इससे आपकी स्थिति में काफी परिवर्तन आएगा। ठंड के मौसम में अक्सर लोग चटनी बनाकर उसका सेवन करना पसंद करते हैं। तो क्यों ना आप ऐसी चटनी बनाएं जो शुगर को भी जड़ से खत्म कर दें। इसके लिए आप पुदीने की पत्तियां लेकर उसमें अदरक का टुकड़ा, लहसुन और खट्टा अनारदाना मिक्स करके पीसें और चटनी बनाएं। आप अपने खाने के साथ इस चटनी का सेवन करें। यकीन मानिए, आपकी डायबिटीज की बीमारी आपसे दूर भाग जाएगी। जामुन इंसुलिन रेग्युलेशन में काफी फायदेमंद साबित होती है। इसलिए आप जामुन खाने के साथ−साथ उसके पत्तों को सुबह−शाम चबाएं। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा। अगर आपके लिए करेले का रस पीना संभव नहीं है तो आप दिन में दो या तीन बार कुछ करीपत्ता चबाएं। इससे भी आपकी शुगर काफी हद तक कंटोल हो जाएगी। |
( ३ )का भावना - ( १ ) गोहजन्य करुणास्व-परको भागभोग, धन, वैभव. प्रशंसा आदि प्राप्ति न होने में दुखी होना, ( २ ) शुभ करुणा - शारीरिक व - मानसिक पीड़ा से दुखी देख कर करुणा भावना, ( ३ ) शुद्ध साधन कणा-यज्ञान, मिथ्यास, विष, कपाय मे स्व-परको अनन्त-दुखी होना जान ये दोष त्याग करके सम्पग् ज्ञान दर्शन चरित्र विषयमंयम व समभाव गुण प्रकट करना तथा प्रकट करवाना, ( ४ ) शुद्ध करुणास्वस्व (श्रात्मस्वरूप ) में लीन रहना । ज्ञानादि निजदुख की मलीनता ही दुःबहेतु जान प्रात्मणों की शुद्धि करना ।
( ४ ) माध्यम्य आवना - ( १ ) में जन्म समभाव--लज्जा, भय, लोभ, स्वार्थ या अज्ञानश शाति धरना, ( २ ) शुभ सममान-रेक्य. सहन शीलना, गुणानुराग, गंभीर के गण तथा कलह, कुलंय, वैग्मार विरोध के तुरुगान विरका समभार घर , ( ३ ) शुद्ध साधन समभाव - रागद्वेष करने से भाव हिंसा होती हैं । में शब्द, रूप, गय रम, स्पर्श, मन, वचन, काया, कपाय, कर्महित हैं। में अज्ञान, दर्शन, मुख, शक्तिरूप हूं । ऐमी मावना विचार कर समान धरना । ( ४ ) शुद्ध मदमाव--- परम समरसी भाव ही मेरा निज
गुण है। मैं क्यों विकार राऊँ ? क्यों राग द्वेप लाऊँ ? ऐसा विचार करके निज स्वरूप में लीन होने ।
चारों भावना में मोहजन्य पहिला भेद इस लोक तथा परलोक में दुःखदायी है व पाप बंध हेतु है और दूसरा शुभभेद इस लोक तथा परलोक में वाह्य सुखदायी व पुण्य प्राप्ति का कारण है। तीसरा शुद्ध साधन नामक भेद इस लोक तथा परलोक में बाह्य तथा अभ्यंतर दोनों में सुखदाई व बहुत कर्म क्षय का कारण है। और शुद्ध नामक चौथा भेद इस लोक तथा परलोक में परम सुखदाई व मोनाति का प्रधान कारण है ।
( ८ ३ ) प्रश्न - समकित (ध) गुण सर्वोत्कृष्ट क्यों कहाता है १
उत्तर - जैसे रोगी बहुत काल से दुखी है, जगत् में रोग स मुक्त होने के उपाय हैं, परंतु क्या रोग है, कौनसा उपाय अकसीर है, ऐसे बोध के बिना वह सदा दुखी रहता है, इसी प्रकार यह आत्मा, जड़संगी ( पुद्गल संगी) बन अनादि काल से दुखी होरहा है, इन दुःखों से छूटने का मार्ग बताना ज्ञान का काम है। मार्ग का निश्चय करना समकित गुण का काम हैं और मार्ग पर चलना चारित्र का काम है। मार्ग बता भी दिया परंतु निश्चय नहीं है तो उस पर बराबर अंततक नहीं चल सकते । | का भावना - गोहजन्य करुणास्व-परको भागभोग, धन, वैभव. प्रशंसा आदि प्राप्ति न होने में दुखी होना, शुभ करुणा - शारीरिक व - मानसिक पीड़ा से दुखी देख कर करुणा भावना, शुद्ध साधन कणा-यज्ञान, मिथ्यास, विष, कपाय मे स्व-परको अनन्त-दुखी होना जान ये दोष त्याग करके सम्पग् ज्ञान दर्शन चरित्र विषयमंयम व समभाव गुण प्रकट करना तथा प्रकट करवाना, शुद्ध करुणास्वस्व में लीन रहना । ज्ञानादि निजदुख की मलीनता ही दुःबहेतु जान प्रात्मणों की शुद्धि करना । माध्यम्य आवना - में जन्म समभाव--लज्जा, भय, लोभ, स्वार्थ या अज्ञानश शाति धरना, शुभ सममान-रेक्य. सहन शीलना, गुणानुराग, गंभीर के गण तथा कलह, कुलंय, वैग्मार विरोध के तुरुगान विरका समभार घर , शुद्ध साधन समभाव - रागद्वेष करने से भाव हिंसा होती हैं । में शब्द, रूप, गय रम, स्पर्श, मन, वचन, काया, कपाय, कर्महित हैं। में अज्ञान, दर्शन, मुख, शक्तिरूप हूं । ऐमी मावना विचार कर समान धरना । शुद्ध मदमाव--- परम समरसी भाव ही मेरा निज गुण है। मैं क्यों विकार राऊँ ? क्यों राग द्वेप लाऊँ ? ऐसा विचार करके निज स्वरूप में लीन होने । चारों भावना में मोहजन्य पहिला भेद इस लोक तथा परलोक में दुःखदायी है व पाप बंध हेतु है और दूसरा शुभभेद इस लोक तथा परलोक में वाह्य सुखदायी व पुण्य प्राप्ति का कारण है। तीसरा शुद्ध साधन नामक भेद इस लोक तथा परलोक में बाह्य तथा अभ्यंतर दोनों में सुखदाई व बहुत कर्म क्षय का कारण है। और शुद्ध नामक चौथा भेद इस लोक तथा परलोक में परम सुखदाई व मोनाति का प्रधान कारण है । प्रश्न - समकित गुण सर्वोत्कृष्ट क्यों कहाता है एक उत्तर - जैसे रोगी बहुत काल से दुखी है, जगत् में रोग स मुक्त होने के उपाय हैं, परंतु क्या रोग है, कौनसा उपाय अकसीर है, ऐसे बोध के बिना वह सदा दुखी रहता है, इसी प्रकार यह आत्मा, जड़संगी बन अनादि काल से दुखी होरहा है, इन दुःखों से छूटने का मार्ग बताना ज्ञान का काम है। मार्ग का निश्चय करना समकित गुण का काम हैं और मार्ग पर चलना चारित्र का काम है। मार्ग बता भी दिया परंतु निश्चय नहीं है तो उस पर बराबर अंततक नहीं चल सकते । |
करने की इच्छा) अर्थों में प्रति, परि और अनु की वर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है । लक्षण में वृक्षं प्रति परि अनु वा विद्योतते विद्युत् ( वृक्ष की ओर बिजली चमक रही है ) - वृक्ष बिजली चमकने की दिशा का लक्षण (ज्ञापक ) है, अतः प्रति आदि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा और वृक्षम् में द्वितीया । आगे के उदाहरणों में भी इसी प्रकार द्वितीया है । इत्यंभूताख्यान में भक्तो विष्णुं प्रति परि अनु वा ( भक्त विष्णु की भक्ति से युक्त है ) - विष्णुम् में द्वितीया । भक्त की भक्ति के स्वरूप का वर्णन है ! भाग अर्थ में लक्ष्मी हरि प्रति परि अनु वा ( लक्ष्मी हरि का भाग है, अर्थात् हरि लक्ष्मी के स्वामी है ) - भाग अर्थ में हरिम् में द्वितीया । वीप्सा में वृक्षं वृक्षं प्रति परि अनु वा सिञ्चति (प्रत्येक वृक्ष को सींचता है)-वीजा (द्विरुक्ति) होने से दोनों वृक्षम् में द्वितीया । प्रति आदि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होने से उपसर्ग गंशा नहीं रही, अतः उपसर्गात् सुनोति० (८-३-६५ ) से सिञ्चति के स्वप् नही हुआ । प्रत्युदाहरण- परिषिश्चति ( चारों ओर संचता है ) - में लक्षण आदि अर्थ न होने के कारण उपसर्ग संज्ञा होने से (८-३-६५) से स् को ष् ।
भाग अर्थ को छोड़कर शेष लक्षण, इत्थंभूताख्यान, वीप्सा) अर्थों में अभि को कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है । लक्षण में - हरिमभिवर्तते ( हरि के अनुकूल है) । इत्थंभूताख्यान में - भक्तो हरिमभि (भवत हरि की भक्ति से युक्त है ) । वीप्सा में - देवं देवमभिसिञ्चति (प्रत्येक देव को स्नान कराता है) । अभि को उपवर्गसंज्ञा न होने से उपसर्गात्० (८-३-६५ ) से स् को प् नहीं । प्रत्युदाहरण - यदत्र ममाभिष्यात् तद् दीयताम् ( इसमें जो मेरा हिस्सा हो, वह दीजिए ) -- भाग अर्थ होने से उपसर्ग संज्ञा और स् कोष, उपसर्गप्रादुर्भ्याम्॰ (८-३-८७) से ।
२३. अधिपरी अनर्थको ( १-४-९३ )
अनर्थक अधि और परि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है । कुतोऽध्यागच्छति (कहाँ से आता है ?), कुत पर्यागच्छति ( कहाँ से आता है ? ) - दोनों उदाहरणों में जो आगच्छति का अर्थ है, वही अध्यागच्छति ( आता है) और पर्यागच्छति ( आता है ) का है, अतः अधि और परि अनर्थक हैं। इनकी उपसर्ग या गति संज्ञा नहीं रही । अतः अधि और परि को गतिर्गतौ (८-१-७०) से निघात (अनुदात्त ) नहीं हुआ । यदि गति संज्ञा होती तो आ (आङ) को गति मानकर अधि और परि गतिमंज्ञकों को अनुदात्त हो जाता ।
पूजा ( सम्मान) अर्थ में सु की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है। कर्मप्रवचनीय संज्ञा होने से सु उपसर्ग नहीं रहता, अतः दोनों उदाहरणों में उपसर्गात् (८- ३ - ६५) से | करने की इच्छा) अर्थों में प्रति, परि और अनु की वर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है । लक्षण में वृक्षं प्रति परि अनु वा विद्योतते विद्युत् - वृक्ष बिजली चमकने की दिशा का लक्षण है, अतः प्रति आदि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा और वृक्षम् में द्वितीया । आगे के उदाहरणों में भी इसी प्रकार द्वितीया है । इत्यंभूताख्यान में भक्तो विष्णुं प्रति परि अनु वा - विष्णुम् में द्वितीया । भक्त की भक्ति के स्वरूप का वर्णन है ! भाग अर्थ में लक्ष्मी हरि प्रति परि अनु वा - भाग अर्थ में हरिम् में द्वितीया । वीप्सा में वृक्षं वृक्षं प्रति परि अनु वा सिञ्चति -वीजा होने से दोनों वृक्षम् में द्वितीया । प्रति आदि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होने से उपसर्ग गंशा नहीं रही, अतः उपसर्गात् सुनोतिशून्य से सिञ्चति के स्वप् नही हुआ । प्रत्युदाहरण- परिषिश्चति - में लक्षण आदि अर्थ न होने के कारण उपसर्ग संज्ञा होने से से स् को ष् । भाग अर्थ को छोड़कर शेष लक्षण, इत्थंभूताख्यान, वीप्सा) अर्थों में अभि को कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है । लक्षण में - हरिमभिवर्तते । इत्थंभूताख्यान में - भक्तो हरिमभि । वीप्सा में - देवं देवमभिसिञ्चति । अभि को उपवर्गसंज्ञा न होने से उपसर्गात्शून्य से स् को प् नहीं । प्रत्युदाहरण - यदत्र ममाभिष्यात् तद् दीयताम् -- भाग अर्थ होने से उपसर्ग संज्ञा और स् कोष, उपसर्गप्रादुर्भ्याम्॰ से । तेईस. अधिपरी अनर्थको अनर्थक अधि और परि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है । कुतोऽध्यागच्छति , कुत पर्यागच्छति - दोनों उदाहरणों में जो आगच्छति का अर्थ है, वही अध्यागच्छति और पर्यागच्छति का है, अतः अधि और परि अनर्थक हैं। इनकी उपसर्ग या गति संज्ञा नहीं रही । अतः अधि और परि को गतिर्गतौ से निघात नहीं हुआ । यदि गति संज्ञा होती तो आ को गति मानकर अधि और परि गतिमंज्ञकों को अनुदात्त हो जाता । पूजा अर्थ में सु की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है। कर्मप्रवचनीय संज्ञा होने से सु उपसर्ग नहीं रहता, अतः दोनों उदाहरणों में उपसर्गात् से |
आईआईपी के ताजा आंकड़ों पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष आदि गोदरेज का कहना है कि आईआईपी के ताजा आंकड़ों से भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। लेकिन उद्योग जगत की मंदी खत्म होने के कगार पर है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई का कहना है कि जनवरी में औद्योगिक उत्पादन विकास दर 2. 4 फीसदी रहने के बावजूद औद्योगिक और मैन्यूफैक्चरिंग विकास दर चिंता का विषय है। अगर आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती करता है, तो इससे निवेश की स्थिति में सुधार संभव है। वहीं उपभोक्ताओं वस्तुओं की मांग को बढ़ाने में भी मदद मिल सकेगी।
एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत का कहना है कि पूंजीगत और उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन नकारात्मक रहा है। यह उद्योग जगत की निवेश और मांग संबंधी समस्याओं को उजागर कर रही है। रिजर्व बैंक को मंगलवार को जारी किए गए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) से ज्यादा प्रभावित नहीं होना चाहिए और प्रमुख ब्याज दर में कटौती पर विचार करना चाहिए। महंगाई दर में कमी आने पर नौ माह में पहली दफा आरबीआई ने जनवरी में ब्याज दरों में कटौती की थी।
| आईआईपी के ताजा आंकड़ों पर भारतीय उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष आदि गोदरेज का कहना है कि आईआईपी के ताजा आंकड़ों से भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। लेकिन उद्योग जगत की मंदी खत्म होने के कगार पर है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई का कहना है कि जनवरी में औद्योगिक उत्पादन विकास दर दो. चार फीसदी रहने के बावजूद औद्योगिक और मैन्यूफैक्चरिंग विकास दर चिंता का विषय है। अगर आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती करता है, तो इससे निवेश की स्थिति में सुधार संभव है। वहीं उपभोक्ताओं वस्तुओं की मांग को बढ़ाने में भी मदद मिल सकेगी। एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत का कहना है कि पूंजीगत और उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन नकारात्मक रहा है। यह उद्योग जगत की निवेश और मांग संबंधी समस्याओं को उजागर कर रही है। रिजर्व बैंक को मंगलवार को जारी किए गए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से ज्यादा प्रभावित नहीं होना चाहिए और प्रमुख ब्याज दर में कटौती पर विचार करना चाहिए। महंगाई दर में कमी आने पर नौ माह में पहली दफा आरबीआई ने जनवरी में ब्याज दरों में कटौती की थी। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन (Rashtrapati Bhawan Mughal Garden) का नाम अब अमृत उद्यान (Amrit Udyan) कर दिया गया है। अमृत महोत्सव के तहत गार्डन का नाम बदला गया है। अमृत उद्यान (मुगल गार्डन) में 12 किस्म के ट्यूलिप के फूल होते हैं। अब उद्यान भी हर साल की तरह इस बार भी आम लोगों के लिए खुलने वाला है, जहां लोग ट्यूलिप और गुलाब के फूलों का दीदार कर सकेंगे।
हर साल अमृत उद्यान आम लोगों के लिए खोला जाता है, जो अब 31 जनवरी को खुलेगा और 26 मार्च तक दो माह तक के लिए खुला रहेगा। गार्डन खुलने का समय 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। 28 मार्च को किसानों के लिए, 29 को दिव्यांगों के लिए, 30 पुलिस और सेना के लिए यह खुलेगा।
सुबह 10 बजे से 12 बजे तक 7500 लोगों के लिए टिकट मिलेगा। उसके बाद 12 से चार बजे तक 10 हजार लोगों को प्रवेश मिलेगा। यह राष्ट्रपति भवन में उद्यान भवन की तरह होगा।
उद्यान में 12 तरह के विशेष किस्म के ट्यूलिप के फूल लगाए हैं। गार्डन में सेल्फी प्वांइट भी हैं, साथ ही यहां फूड कोर्ट भी चालू रहेगा। लोग क्यूआर कोड से पौधों के किस्मों की जानकारी ले सकेंगे। साथ ही यहां 120 प्रकार गुलाब हैं और 40 खुशबू वाले गुलाब हैं।
| राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन का नाम अब अमृत उद्यान कर दिया गया है। अमृत महोत्सव के तहत गार्डन का नाम बदला गया है। अमृत उद्यान में बारह किस्म के ट्यूलिप के फूल होते हैं। अब उद्यान भी हर साल की तरह इस बार भी आम लोगों के लिए खुलने वाला है, जहां लोग ट्यूलिप और गुलाब के फूलों का दीदार कर सकेंगे। हर साल अमृत उद्यान आम लोगों के लिए खोला जाता है, जो अब इकतीस जनवरी को खुलेगा और छब्बीस मार्च तक दो माह तक के लिए खुला रहेगा। गार्डन खुलने का समय दस बजे से शाम चार बजे तक रहेगा। अट्ठाईस मार्च को किसानों के लिए, उनतीस को दिव्यांगों के लिए, तीस पुलिस और सेना के लिए यह खुलेगा। सुबह दस बजे से बारह बजे तक सात हज़ार पाँच सौ लोगों के लिए टिकट मिलेगा। उसके बाद बारह से चार बजे तक दस हजार लोगों को प्रवेश मिलेगा। यह राष्ट्रपति भवन में उद्यान भवन की तरह होगा। उद्यान में बारह तरह के विशेष किस्म के ट्यूलिप के फूल लगाए हैं। गार्डन में सेल्फी प्वांइट भी हैं, साथ ही यहां फूड कोर्ट भी चालू रहेगा। लोग क्यूआर कोड से पौधों के किस्मों की जानकारी ले सकेंगे। साथ ही यहां एक सौ बीस प्रकार गुलाब हैं और चालीस खुशबू वाले गुलाब हैं। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
युक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी सीमा पूर्व में रूस, उत्तर में बेलारूस, पोलैंड, स्लोवाकिया, पश्चिम में हंगरी, दक्षिणपश्चिम में रोमानिया और माल्दोवा और दक्षिण में काला सागर और अजोव सागर से मिलती है। देश की राजधानी होने के साथ-साथ सबसे बड़ा शहर भी कीव है। युक्रेन का आधुनिक इतिहास 9वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब कीवियन रुस के नाम से एक बड़ा और शक्तिशाली राज्य बनकर यह खड़ा हुआ, लेकिन 12 वीं शताब्दी में यह महान उत्तरी लड़ाई के बाद क्षेत्रीय शक्तियों में विभाजित हो गया। 19वीं शताब्दी में इसका बड़ा हिस्सा रूसी साम्राज्य का और बाकी का हिस्सा आस्ट्रो-हंगेरियन नियंत्रण में आ गया। बीच के कुछ सालों के उथल-पुथल के बाद 1922 में सोवियत संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक बना। 1945 में यूक्रेनियाई एसएसआर संयुक्त राष्ट्रसंघ का सह-संस्थापक सदस्य बना। सोवियत संघ के विघटन के बाद युक्रेन फिर से स्वतंत्र देश बना। . विश्व स्वास्थ्य संगठन का ध्वज विश्व स्वास्थ्य संगठन (वि॰ स्वा॰ सं॰) (WHO) विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के १९३ सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इस संस्था की स्थापना ७ अप्रैल १९४८ को की गयी थी। इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में स्थित है। इथियोपिया के डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नए महानिदेशक निर्वाचित हुए हैं। वो डॉक्टर मार्गरेट चैन का स्थान लेंगे जो पाँच-पाँच साल के दो कार्यकाल यानी दस वर्षों तक काम करने के बाद इस पद से रिटायर हो रही हैं।। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। .
युक्रेन और विश्व स्वास्थ्य संगठन आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): संयुक्त राष्ट्र।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसके उद्देश्य में उल्लेख है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून को सुविधाजनक बनाने के सहयोग, अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, मानव अधिकार और विश्व शांति के लिए कार्यरत है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना २४ अक्टूबर १९४५ को संयुक्त राष्ट्र अधिकारपत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता देशों ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र को अन्तर्राष्ट्रीय संघर्ष में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। वे चाहते थे कि भविष्य में फ़िर कभी द्वितीय विश्वयुद्ध की तरह के युद्ध न उभर आए। संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश (संयुक्त राज्य अमेरिका, फ़्रांस, रूस और संयुक्त राजशाही) द्वितीय विश्वयुद्ध में बहुत अहम देश थे। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में १९३ देश है, विश्व के लगभग सारे अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त देश। इस संस्था की संरचन में आम सभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, सचिवालय और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय सम्मिलित है। .
युक्रेन 45 संबंध है और विश्व स्वास्थ्य संगठन 9 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.85% है = 1 / (45 + 9)।
यह लेख युक्रेन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। युक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी सीमा पूर्व में रूस, उत्तर में बेलारूस, पोलैंड, स्लोवाकिया, पश्चिम में हंगरी, दक्षिणपश्चिम में रोमानिया और माल्दोवा और दक्षिण में काला सागर और अजोव सागर से मिलती है। देश की राजधानी होने के साथ-साथ सबसे बड़ा शहर भी कीव है। युक्रेन का आधुनिक इतिहास नौवीं शताब्दी से शुरू होता है, जब कीवियन रुस के नाम से एक बड़ा और शक्तिशाली राज्य बनकर यह खड़ा हुआ, लेकिन बारह वीं शताब्दी में यह महान उत्तरी लड़ाई के बाद क्षेत्रीय शक्तियों में विभाजित हो गया। उन्नीसवीं शताब्दी में इसका बड़ा हिस्सा रूसी साम्राज्य का और बाकी का हिस्सा आस्ट्रो-हंगेरियन नियंत्रण में आ गया। बीच के कुछ सालों के उथल-पुथल के बाद एक हज़ार नौ सौ बाईस में सोवियत संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक बना। एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में यूक्रेनियाई एसएसआर संयुक्त राष्ट्रसंघ का सह-संस्थापक सदस्य बना। सोवियत संघ के विघटन के बाद युक्रेन फिर से स्वतंत्र देश बना। . विश्व स्वास्थ्य संगठन का ध्वज विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सौ तिरानवे सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इस संस्था की स्थापना सात अप्रैल एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को की गयी थी। इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में स्थित है। इथियोपिया के डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए महानिदेशक निर्वाचित हुए हैं। वो डॉक्टर मार्गरेट चैन का स्थान लेंगे जो पाँच-पाँच साल के दो कार्यकाल यानी दस वर्षों तक काम करने के बाद इस पद से रिटायर हो रही हैं।। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। . युक्रेन और विश्व स्वास्थ्य संगठन आम में एक बात है : संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसके उद्देश्य में उल्लेख है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून को सुविधाजनक बनाने के सहयोग, अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, मानव अधिकार और विश्व शांति के लिए कार्यरत है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना चौबीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को संयुक्त राष्ट्र अधिकारपत्र पर पचास देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता देशों ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र को अन्तर्राष्ट्रीय संघर्ष में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। वे चाहते थे कि भविष्य में फ़िर कभी द्वितीय विश्वयुद्ध की तरह के युद्ध न उभर आए। संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश द्वितीय विश्वयुद्ध में बहुत अहम देश थे। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में एक सौ तिरानवे देश है, विश्व के लगभग सारे अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त देश। इस संस्था की संरचन में आम सभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, सचिवालय और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय सम्मिलित है। . युक्रेन पैंतालीस संबंध है और विश्व स्वास्थ्य संगठन नौ है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.पचासी% है = एक / । यह लेख युक्रेन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
सनोडिया की उत्पत्ति :
एक किंवदन्ती के अनुसार मुगल सम्राट् ने एक कुख्यात अपराधी मग्गा बंजारे के मारने पर चार सनोडिया ब्राम्हण बन्धुओं को दो गाँव पुरस्कार स्वरूप प्रदान किये थे। इस सनोडिया वंश के एक परिवार ने जिला ललितपुर में मग्गा बंजारे की हत्या सम्बन्धित अनुदान से प्राप्त ग्रामों में बस गये थे । मेजर हैरिस जो 1858 ई0 में चन्देरी का सुपरिन्टेन्डेन्ट था, उसने इन गाँवों का वर्णन किया है ।।
भिन्न-भिन्न किंवदन्तियों के अनुसार सनोडिया की उत्पत्ति की भिन्न-भिन्न कथायें प्रचलित हैं। कुछ लोग इन्हें रावण वंशज मानते है । 2 एक अन्य किंवदन्ती के अनुसार यह पहले भीख माँग कर गुजारा करते थे, परन्तु बाद में आर्थिक तंगी के कारण लुटेरे हो गये इनके सम्बन्ध में अन्य अनेक किंवदन्तिया प्रचलित है, किन्तु ये किसी विशेष जाति के नहीं हैं । डाकुओं और चोरों का एक समूह है। अपने लिये वे एक निजी साकेतिक भाषा को काम में लाते हैं। इनका कार्य क्षेत्र समस्त उत्तर भारत है ।
डकैत :
सनोडियों उठाईगीरों के अतिरिक्त इस जनपद में डकैतों का भी काफी उत्पात रहा। डकैत यहाँ समूह अथवा गिरोह के रूप में पाये जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि चोर लुटेरों का एक बड़ा समूह
1- डेक ब्रोकमैन डी०एल०, झासी गजेटियर 1909, इलाहाबाद, पृष्ठ 98.
2- सिंह प्रतिपाल, बुन्देलखण्ड की संक्षिप्त इतिहास, पू० 209, बनारस, संवत् 19853- वही.
4- ड्रेक ब्रोकमैन डो०एल०, पृष्ठ 98, सिंह प्रतिपाल- बुन्देलखण्ड का संक्षिप्तइतिहास, पृष्ठ 209-210, बनारस सम्वत् 1985• | सनोडिया की उत्पत्ति : एक किंवदन्ती के अनुसार मुगल सम्राट् ने एक कुख्यात अपराधी मग्गा बंजारे के मारने पर चार सनोडिया ब्राम्हण बन्धुओं को दो गाँव पुरस्कार स्वरूप प्रदान किये थे। इस सनोडिया वंश के एक परिवार ने जिला ललितपुर में मग्गा बंजारे की हत्या सम्बन्धित अनुदान से प्राप्त ग्रामों में बस गये थे । मेजर हैरिस जो एक हज़ार आठ सौ अट्ठावन ईशून्य में चन्देरी का सुपरिन्टेन्डेन्ट था, उसने इन गाँवों का वर्णन किया है ।। भिन्न-भिन्न किंवदन्तियों के अनुसार सनोडिया की उत्पत्ति की भिन्न-भिन्न कथायें प्रचलित हैं। कुछ लोग इन्हें रावण वंशज मानते है । दो एक अन्य किंवदन्ती के अनुसार यह पहले भीख माँग कर गुजारा करते थे, परन्तु बाद में आर्थिक तंगी के कारण लुटेरे हो गये इनके सम्बन्ध में अन्य अनेक किंवदन्तिया प्रचलित है, किन्तु ये किसी विशेष जाति के नहीं हैं । डाकुओं और चोरों का एक समूह है। अपने लिये वे एक निजी साकेतिक भाषा को काम में लाते हैं। इनका कार्य क्षेत्र समस्त उत्तर भारत है । डकैत : सनोडियों उठाईगीरों के अतिरिक्त इस जनपद में डकैतों का भी काफी उत्पात रहा। डकैत यहाँ समूह अथवा गिरोह के रूप में पाये जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि चोर लुटेरों का एक बड़ा समूह एक- डेक ब्रोकमैन डीशून्यएलशून्य, झासी गजेटियर एक हज़ार नौ सौ नौ, इलाहाबाद, पृष्ठ अट्ठानवे. दो- सिंह प्रतिपाल, बुन्देलखण्ड की संक्षिप्त इतिहास, पूशून्य दो सौ नौ, बनारस, संवत् उन्नीस हज़ार आठ सौ तिरेपन- वही. चार- ड्रेक ब्रोकमैन डोशून्यएलशून्य, पृष्ठ अट्ठानवे, सिंह प्रतिपाल- बुन्देलखण्ड का संक्षिप्तइतिहास, पृष्ठ दो सौ नौ-दो सौ दस, बनारस सम्वत् एक हज़ार नौ सौ पचासी• |
दोस्तों, आपने जीवन में कई कठिन पहेलियाँ और प्रश्न सुने होंगे पर इससे कठिन प्रश्न नहीं सुना होगा, तो ज़रा सोचिये इसका सही जवाब। जैक नामक एक विद्यार्थी क़ानून (लॉ) की पढ़ाई करना चाहता था। पर उसके पास धन की कमी थी, इसलिए उसने अपने एक मित्र टॉम से यह कहकर पैसे उधार ले लिए कि जब वह वकील बनकर अपना पहला केस जीतेगा, तो वह पूरा धन ब्याज सहित लौटा देगा।
समय गुजरा और जैक पढ़ाई पूरी कर वकील बन गया। पर दुविधा तब शुरू हुई, जब जैक ने कोई केस ही नहीं लड़ा। जैक को पढ़ाई पूरी किये बहुत समय बीत गया फिर भी उसने कोई केस नहीं लड़ा। ऐसे में टॉम के पास जब पैसे वापस पाने का कोई उपाय नहीं बचा, तो उसने कोर्ट (अदालत) में जैक के खिलाफ केस दायर कर दिया। जैक ने भी अपना केस खुद लड़ना स्वीकार किया।
यह तो हुई जैक और टॉम की कहानी, जो हमेशा इसी तरह चलती रहेगी, पर अब ज़रा आप दिमाग लगाइये और बताइये कि अब क्या होगा? यदि जैक केस जीत गया, तो वह टॉम के पैसे क्यों लौटाएगा, इसलिए टॉम के साथ अन्याय होगा। और यदि जैक केस हार गया, तो चूँकि शर्त के मुताबिक जैक ने अभी तक कोई केस नहीं जीता है इसलिए जैक, टॉम के पैसे क्यों लौटाएगा। यानि जैक को तब भी खाली हाथ ही लौटना होगा। अब आप ही लगाइये दिमाग और फैसला कीजिये।
| दोस्तों, आपने जीवन में कई कठिन पहेलियाँ और प्रश्न सुने होंगे पर इससे कठिन प्रश्न नहीं सुना होगा, तो ज़रा सोचिये इसका सही जवाब। जैक नामक एक विद्यार्थी क़ानून की पढ़ाई करना चाहता था। पर उसके पास धन की कमी थी, इसलिए उसने अपने एक मित्र टॉम से यह कहकर पैसे उधार ले लिए कि जब वह वकील बनकर अपना पहला केस जीतेगा, तो वह पूरा धन ब्याज सहित लौटा देगा। समय गुजरा और जैक पढ़ाई पूरी कर वकील बन गया। पर दुविधा तब शुरू हुई, जब जैक ने कोई केस ही नहीं लड़ा। जैक को पढ़ाई पूरी किये बहुत समय बीत गया फिर भी उसने कोई केस नहीं लड़ा। ऐसे में टॉम के पास जब पैसे वापस पाने का कोई उपाय नहीं बचा, तो उसने कोर्ट में जैक के खिलाफ केस दायर कर दिया। जैक ने भी अपना केस खुद लड़ना स्वीकार किया। यह तो हुई जैक और टॉम की कहानी, जो हमेशा इसी तरह चलती रहेगी, पर अब ज़रा आप दिमाग लगाइये और बताइये कि अब क्या होगा? यदि जैक केस जीत गया, तो वह टॉम के पैसे क्यों लौटाएगा, इसलिए टॉम के साथ अन्याय होगा। और यदि जैक केस हार गया, तो चूँकि शर्त के मुताबिक जैक ने अभी तक कोई केस नहीं जीता है इसलिए जैक, टॉम के पैसे क्यों लौटाएगा। यानि जैक को तब भी खाली हाथ ही लौटना होगा। अब आप ही लगाइये दिमाग और फैसला कीजिये। |
जो खांसी तीन-चार दिन में ठीक हो जानी चाहिए वह कम से कम दो हफ्ते तक खांसते-खांसते जान निकाल ले रही है। हफ्तेभर में ठीक हो जाने वाला वायरल पखवाड़े भर का मरीज बना दे रहा है। भोपाल में मौसम में आए बदलाव ने हर घर को बीमार कर दिया है। इसकी वजह से इन्फ्लूएंजा और वायरल समेत अन्य बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है।
भोपाल. जो खांसी तीन-चार दिन में ठीक हो जानी चाहिए वह कम से कम दो हफ्ते तक खांसते-खांसते जान निकाल ले रही है। हफ्तेभर में ठीक हो जाने वाला वायरल पखवाड़े भर का मरीज बना दे रहा है। मौसम में आए बदलाव ने हर घर को बीमार कर दिया है। इसकी वजह से इन्फ्लूएंजा और वायरल समेत अन्य बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। हालांकि, ब्रेन स्ट्रोक और दिल से जुड़े रोगों के मरीजों की संख्या में कमी आई है। सबसे अधिक बीमारी की चपेट में बच्चे आ रहे हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जेपी अस्पताल की ओपीडी पिछले एक सप्ताह से दो हजार पहुंच रही है। जबकि, हमीदिया का आंकड़ा 3 हजार के करीब है।
डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों फेफड़ों में संक्रमण के मामले बढ़ गए हैं। हालांकि, कोविड टेस्ट निगेटिव है। चिंता वाली बात यह है कि निमोनिया का पैटर्न बदला है। मरीजों का आरटीपीसीआर नेगेटिव है, लेकिन फेफड़ों में संक्रमण कोविड जैसा ही है। मरीज गले में खराश व दर्द महसूस कर रहे हैं। खांसी 15 से 20 दिन तक परेशान कर रही है। हालांकि यह अपने आप ठीक भी हो रही है।
निमोनिया दो महीनों से लेकर दो साल तक के बच्चों में तेजी से फैल रहा है। किसी के खांसने या छींकने पर बैक्टीरिया या वायरस की बूंदें हवा में फैल रही हैं। पीडि़त व्यक्ति द्वारा टच की गई किसी वस्तु को छूने और फिर उनके मुंह या नाक को छूने से भी निमोनिया हो रहा है। इससे बचने की जरूरत है।
जेपी में बच्चों के लिए आरक्षित 25 बेड को बढ़ा कर 40 कर दिया गया है। सभी बेड 15 दिन से फुल हैं। ओपीडी भी 70 से बढ़कर 150 के पार पहुंच गई है। जिसमें 70 फीसदी के करीब बच्चे वायरल निमोनिया के हैं।
सर्वाधिक मामले बच्चों में वायरल निमोनिया के हैं। बच्चों की ओपीडी 70 से बढ़कर 150 के पार पहुंच गई है। दो माह से दो साल तक के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। यह सीजनल बीमारी है। सावधानी बरतें।
बदलते मौसम में सतर्क रहें। ज्यादा बुखार होने पर पैरासीटामोल लें। और डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। खुद से उपचार करने से समस्या बढ़ सकती है। गले में खराश, जुकाम, बदन दर्द और बुखार के मामले बढ़े हैं।
| जो खांसी तीन-चार दिन में ठीक हो जानी चाहिए वह कम से कम दो हफ्ते तक खांसते-खांसते जान निकाल ले रही है। हफ्तेभर में ठीक हो जाने वाला वायरल पखवाड़े भर का मरीज बना दे रहा है। भोपाल में मौसम में आए बदलाव ने हर घर को बीमार कर दिया है। इसकी वजह से इन्फ्लूएंजा और वायरल समेत अन्य बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। भोपाल. जो खांसी तीन-चार दिन में ठीक हो जानी चाहिए वह कम से कम दो हफ्ते तक खांसते-खांसते जान निकाल ले रही है। हफ्तेभर में ठीक हो जाने वाला वायरल पखवाड़े भर का मरीज बना दे रहा है। मौसम में आए बदलाव ने हर घर को बीमार कर दिया है। इसकी वजह से इन्फ्लूएंजा और वायरल समेत अन्य बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। हालांकि, ब्रेन स्ट्रोक और दिल से जुड़े रोगों के मरीजों की संख्या में कमी आई है। सबसे अधिक बीमारी की चपेट में बच्चे आ रहे हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में तीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जेपी अस्पताल की ओपीडी पिछले एक सप्ताह से दो हजार पहुंच रही है। जबकि, हमीदिया का आंकड़ा तीन हजार के करीब है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों फेफड़ों में संक्रमण के मामले बढ़ गए हैं। हालांकि, कोविड टेस्ट निगेटिव है। चिंता वाली बात यह है कि निमोनिया का पैटर्न बदला है। मरीजों का आरटीपीसीआर नेगेटिव है, लेकिन फेफड़ों में संक्रमण कोविड जैसा ही है। मरीज गले में खराश व दर्द महसूस कर रहे हैं। खांसी पंद्रह से बीस दिन तक परेशान कर रही है। हालांकि यह अपने आप ठीक भी हो रही है। निमोनिया दो महीनों से लेकर दो साल तक के बच्चों में तेजी से फैल रहा है। किसी के खांसने या छींकने पर बैक्टीरिया या वायरस की बूंदें हवा में फैल रही हैं। पीडि़त व्यक्ति द्वारा टच की गई किसी वस्तु को छूने और फिर उनके मुंह या नाक को छूने से भी निमोनिया हो रहा है। इससे बचने की जरूरत है। जेपी में बच्चों के लिए आरक्षित पच्चीस बेड को बढ़ा कर चालीस कर दिया गया है। सभी बेड पंद्रह दिन से फुल हैं। ओपीडी भी सत्तर से बढ़कर एक सौ पचास के पार पहुंच गई है। जिसमें सत्तर फीसदी के करीब बच्चे वायरल निमोनिया के हैं। सर्वाधिक मामले बच्चों में वायरल निमोनिया के हैं। बच्चों की ओपीडी सत्तर से बढ़कर एक सौ पचास के पार पहुंच गई है। दो माह से दो साल तक के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। यह सीजनल बीमारी है। सावधानी बरतें। बदलते मौसम में सतर्क रहें। ज्यादा बुखार होने पर पैरासीटामोल लें। और डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। खुद से उपचार करने से समस्या बढ़ सकती है। गले में खराश, जुकाम, बदन दर्द और बुखार के मामले बढ़े हैं। |
रविवार को दिल्ली के ITO इलाके में भाजपा सांसद गौतम गंभीर के लापता होने के पोस्टर्स लगाए गए। इन पर गंभीर की तस्वीर के साथ लिखा है, 'क्या आपने इन्हें देखा है? आखिरी बार इंदौर में जलेबी खाते हुए देखा था। पूरी दिल्ली इन्हें ढूढ़ रही है। '
| रविवार को दिल्ली के ITO इलाके में भाजपा सांसद गौतम गंभीर के लापता होने के पोस्टर्स लगाए गए। इन पर गंभीर की तस्वीर के साथ लिखा है, 'क्या आपने इन्हें देखा है? आखिरी बार इंदौर में जलेबी खाते हुए देखा था। पूरी दिल्ली इन्हें ढूढ़ रही है। ' |
Parliament Session Live Updates: राहुल गांधी की माफी और अडाणी मामले में हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित हो गई। दोपहर बाद फिर शुरू हुई कार्यवाही विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही कुछ देर चली। इससे पहले 13 मार्च को बजट के दूसरे चरण का सत्र शुरू हुआ था। सदन शुक्रवार तक लगभग स्थगित ही रहा।
विपक्ष ने अडाणी-हिंडनगर्ब मामले पर JPC की मांग की। वहीं, सरकार ने राहुल गांधी के बयान पर माफी की मांग को लेकर हंगामा किया।
विपक्षी दलों ने सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक की। इसमें सभी नेताओं ने एक सुर में अडाणी मामले की जांच के लिए JPC गठन की मांग को लेकर आवाज उठाने पर सहमति जताई। इसके अलावा राहुल गांधी के घर पुलिस भेजने का मुद्दा भी संसद में उठाया जाएगा। राहुल को लंदन वाले भाषण पर भी बोलने की मांग विपक्ष करेगा।
आज की बैठक में भी ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने दूरी बनाए रखी। ममता का कोई भी सांसद या नेता विपक्ष दलों की आज हुई बैठक में शामिल नहीं हुआ।
#UPDATE । Rajya Sabha adjourned till 2pm amid ruckus by Opposition MPs.
बता दें कि दूसरे चरण का पहला सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। राहुल गांधी के बयान और अदाणी मुद्दे पर विवाद के बीच संसद के दोनों सदनों को 20 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश से बाहर जाता है तो उसे बोलने की आजादी है। लेकिन इस आजादी के साथ ही जिम्मेदारी भी जरूरी होती है। हम दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र हैं। मगर मिस्टर गांधी ब्रिटेन गए और कहा कि भारतीय लोकतंत्र बुनियादी ढांचे पर हमले का सामना कर रहा है। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए।
कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर आज राहुल गांधी को बोलने का मौका दिया जाएगा तो राहुल गांधी संसद में जवाब देंगे। लेकिन हमें लोकतंत्र में बोलने का मौका नहीं दिया जाएगा तो फिर कैसे चलेगा। कांग्रेस आज भी संसद में अडानी ग्रुप का मुद्दा उठाएगी। मामले की जेपीसी जांच की मांग को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने राज्यसभा में नोटिस दिया है।
इधर, सत्र शुरू हाेने से एक दिन पहले राहुल गांधी के घर दिल्ली पुलिस पहुंच गई। राहुल ने 30 जनवरी भारत जोड़ो यात्रा के समाप्ति के दिन श्रीनगर में रेप पीड़ित को लेकर बयान दिया था। पुलिस उसी मामले में पूछताछ के लिए पहुंची थी। हालांकि राहुल ने पुलिस अधिकारियों को करीब दो घंटे इंतजार करवाया। कांग्रेस ने कहा- हम डरेंगे नहीं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नड्डा के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें भाजपा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को देश विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा नड्डा खुद ही राष्ट्रविरोधी हैं और दूसरो को वो राष्ट्रविरोधी कह रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है और वो अडानी मामले, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को छुपाने के लिए वो ऐसी बातें कर रहे हैं।
क्या राहुल गांधी कभी राष्ट्रविरोधी हो सकते हैं? लोकतंत्र के बारे में अगर कहीं भाषण होता है और कोई उस पर बात करे तो क्या वो राष्ट्रविरोधी होते हैं? खुद मोदी जी ने 6-7 देशों में जाकर भारत के नागरिकों का अपमान किया तो पहले उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
बता दें कि 13 मार्च को शुरू हुए बजट सत्र का पहला सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ चुका हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि अगर राहुल गांधी कुछ कहते हैं और उनकी वजह से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती हैं तो इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अगर वे देश का अपमान करेंगे तो एक भारतीय के तौर पर हम चुप नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि राहुल को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रिजिजू को जवाब देते हुए कहा कि इससे पहले कई मौकों पर पीएम विदेश जाकर भी बोले हैं। ऐसे में सवाल हीं नहीं उठता कि राहुल अपने बयान को लेकर माफी मांगें।
| Parliament Session Live Updates: राहुल गांधी की माफी और अडाणी मामले में हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित हो गई। दोपहर बाद फिर शुरू हुई कार्यवाही विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही कुछ देर चली। इससे पहले तेरह मार्च को बजट के दूसरे चरण का सत्र शुरू हुआ था। सदन शुक्रवार तक लगभग स्थगित ही रहा। विपक्ष ने अडाणी-हिंडनगर्ब मामले पर JPC की मांग की। वहीं, सरकार ने राहुल गांधी के बयान पर माफी की मांग को लेकर हंगामा किया। विपक्षी दलों ने सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक की। इसमें सभी नेताओं ने एक सुर में अडाणी मामले की जांच के लिए JPC गठन की मांग को लेकर आवाज उठाने पर सहमति जताई। इसके अलावा राहुल गांधी के घर पुलिस भेजने का मुद्दा भी संसद में उठाया जाएगा। राहुल को लंदन वाले भाषण पर भी बोलने की मांग विपक्ष करेगा। आज की बैठक में भी ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने दूरी बनाए रखी। ममता का कोई भी सांसद या नेता विपक्ष दलों की आज हुई बैठक में शामिल नहीं हुआ। #UPDATE । Rajya Sabha adjourned till दोpm amid ruckus by Opposition MPs. बता दें कि दूसरे चरण का पहला सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। राहुल गांधी के बयान और अदाणी मुद्दे पर विवाद के बीच संसद के दोनों सदनों को बीस मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश से बाहर जाता है तो उसे बोलने की आजादी है। लेकिन इस आजादी के साथ ही जिम्मेदारी भी जरूरी होती है। हम दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र हैं। मगर मिस्टर गांधी ब्रिटेन गए और कहा कि भारतीय लोकतंत्र बुनियादी ढांचे पर हमले का सामना कर रहा है। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर आज राहुल गांधी को बोलने का मौका दिया जाएगा तो राहुल गांधी संसद में जवाब देंगे। लेकिन हमें लोकतंत्र में बोलने का मौका नहीं दिया जाएगा तो फिर कैसे चलेगा। कांग्रेस आज भी संसद में अडानी ग्रुप का मुद्दा उठाएगी। मामले की जेपीसी जांच की मांग को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने राज्यसभा में नोटिस दिया है। इधर, सत्र शुरू हाेने से एक दिन पहले राहुल गांधी के घर दिल्ली पुलिस पहुंच गई। राहुल ने तीस जनवरी भारत जोड़ो यात्रा के समाप्ति के दिन श्रीनगर में रेप पीड़ित को लेकर बयान दिया था। पुलिस उसी मामले में पूछताछ के लिए पहुंची थी। हालांकि राहुल ने पुलिस अधिकारियों को करीब दो घंटे इंतजार करवाया। कांग्रेस ने कहा- हम डरेंगे नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नड्डा के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें भाजपा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को देश विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा नड्डा खुद ही राष्ट्रविरोधी हैं और दूसरो को वो राष्ट्रविरोधी कह रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है और वो अडानी मामले, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को छुपाने के लिए वो ऐसी बातें कर रहे हैं। क्या राहुल गांधी कभी राष्ट्रविरोधी हो सकते हैं? लोकतंत्र के बारे में अगर कहीं भाषण होता है और कोई उस पर बात करे तो क्या वो राष्ट्रविरोधी होते हैं? खुद मोदी जी ने छः-सात देशों में जाकर भारत के नागरिकों का अपमान किया तो पहले उन्हें माफी मांगनी चाहिए। बता दें कि तेरह मार्च को शुरू हुए बजट सत्र का पहला सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ चुका हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि अगर राहुल गांधी कुछ कहते हैं और उनकी वजह से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती हैं तो इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अगर वे देश का अपमान करेंगे तो एक भारतीय के तौर पर हम चुप नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि राहुल को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रिजिजू को जवाब देते हुए कहा कि इससे पहले कई मौकों पर पीएम विदेश जाकर भी बोले हैं। ऐसे में सवाल हीं नहीं उठता कि राहुल अपने बयान को लेकर माफी मांगें। |
देश की मशहूर गायिका और स्वर कोकिला Lata Mangeshkar रविवार को निधन हो गया। रविवार की शाम लता मंगेशकर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुंबई के शिवाजी पार्क में उनकी अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से हर कोई सदमे में हैं। लता दीदी के नाम से मशहूर लता मंगेशकर क्रिकेट की बहुत बड़ी फैन थीं। क्रिकेट से जुड़ी खबरों के बारे में पोस्ट करती रहती थी। क्रिकेट से उनके खास लगाव रहा था।
लता मंगेशकर ने 2011 वर्ल्ड कप में उपवास रखा था। 2011 के वर्ल्ड कप के दौरान सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 29 रनों से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। उस मैच में लता मंगेशकर की चहेते क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 85 रनों की शानदार पारी खेली थी। मोहाली में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 260 रन बनाए और पाकिस्तान को 29 रनों से हराया। इस मैच को जीतने के बाद लता मंगेशकर ने अपना उपवास खत्म किया।
लता मंगेशकर ने उस मैच के बाद कहा था कि मैंने पूरा मैच देखा और उस समय मैं बहुत तनाव में थी। जब भारत खेल रहा होता है तो मेरे परिवार में हर कोई किसी न किसी तरह चीजें करता है। मैंने, मीना और उषा ने मैच के दौरान कुछ भी नहीं खाया।
लता मंगेशकर जी पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी की भी फैन थीं। भारत जब 2019 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हारकर बाहर हो गई था तो ऐसी खबरें आ रही थी कि धोनी अब जल्द ही क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं। यह खबर सुनकर लता जी परेशान हो गई और उन्होंने धोनी के लिए ट्वीट किया।
इसमें लता दी ने लिखा, 'प्रिय धोनी जी, मैं इन दिनों सुन रही हूं कि आप खेल से संन्यास लेना चाहते हैं। कृपया इसके बारे में न सोचें। देश को आपकी और आपके योगदान की जरूरत है। कृपया खेल से संन्यास लेने का विचार भी न लाएं। ' धोनी ने तब संन्यास नहीं लिया था लेकिन एक साल बाद ही उन्होंने संन्यास की घोषणा की थी।
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| देश की मशहूर गायिका और स्वर कोकिला Lata Mangeshkar रविवार को निधन हो गया। रविवार की शाम लता मंगेशकर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुंबई के शिवाजी पार्क में उनकी अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से हर कोई सदमे में हैं। लता दीदी के नाम से मशहूर लता मंगेशकर क्रिकेट की बहुत बड़ी फैन थीं। क्रिकेट से जुड़ी खबरों के बारे में पोस्ट करती रहती थी। क्रिकेट से उनके खास लगाव रहा था। लता मंगेशकर ने दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप में उपवास रखा था। दो हज़ार ग्यारह के वर्ल्ड कप के दौरान सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को उनतीस रनों से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। उस मैच में लता मंगेशकर की चहेते क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने पचासी रनों की शानदार पारी खेली थी। मोहाली में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर दो सौ साठ रन बनाए और पाकिस्तान को उनतीस रनों से हराया। इस मैच को जीतने के बाद लता मंगेशकर ने अपना उपवास खत्म किया। लता मंगेशकर ने उस मैच के बाद कहा था कि मैंने पूरा मैच देखा और उस समय मैं बहुत तनाव में थी। जब भारत खेल रहा होता है तो मेरे परिवार में हर कोई किसी न किसी तरह चीजें करता है। मैंने, मीना और उषा ने मैच के दौरान कुछ भी नहीं खाया। लता मंगेशकर जी पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी की भी फैन थीं। भारत जब दो हज़ार उन्नीस वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हारकर बाहर हो गई था तो ऐसी खबरें आ रही थी कि धोनी अब जल्द ही क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं। यह खबर सुनकर लता जी परेशान हो गई और उन्होंने धोनी के लिए ट्वीट किया। इसमें लता दी ने लिखा, 'प्रिय धोनी जी, मैं इन दिनों सुन रही हूं कि आप खेल से संन्यास लेना चाहते हैं। कृपया इसके बारे में न सोचें। देश को आपकी और आपके योगदान की जरूरत है। कृपया खेल से संन्यास लेने का विचार भी न लाएं। ' धोनी ने तब संन्यास नहीं लिया था लेकिन एक साल बाद ही उन्होंने संन्यास की घोषणा की थी। संबंधित खबरेंः |
केंद्र सरकार जल्द ही विवादित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगा सकती है। दरअसल, रामनवमी के मौके पर देश के कई हिस्सों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के पीछे PFI का हाथ होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि PFI पर प्रतिबंध लगाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर सकती है। इसी सप्ताह PFI पर प्रतिबंध लगने की संभावना जताई जा रही है।
PFI एक चरमपंथी इस्लामिक संगठन है और यह खुद को पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला संगठन बताता है। यह संगठन पहली बार 22 नवंबर, 2006 को केरल में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के मुख्य संगठन के रूप में अस्तित्व में आया था। उस दौरान संगठन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस आयोजित कर सुर्खियां भी बटोरी थी। यह देश के कई हिस्सों में अपने पैर जमा चुका है।
PFI पर अभी भी कई राज्यों में प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन न्यूज18 के अनुसार, अब केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर इस पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि रामनवमी के मौके पर मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में हिंसा की घटनाएं हुई थीं। मध्य प्रदेश भाजपा के प्रमुख वीडी शर्मा ने आरोप लगाया था कि राज्य के खरगौन जिले में हुई हिंसा के पीछे PFI का हाथ है।
खुफिया विभाग ने 2010 में पहली बार PFI पर डॉजियर तैयार किया था। इसमें बताया गया था कि PFI इस्लामिक संगठनों का एक संघ है, जो प्रतिबंधित संगठन SIMI (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के सहयोग से चल रहा है। इसमें आगे बताया गया था कि गोवा का सिटीजन्स फोरम, पश्चिम बंगाल की नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति, आंध्र का एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस, मणिपुर का लियोंग सोशल फोरम आदि सब PFI के बढ़ते नेटवर्क का हिस्सा है।
2017 में PFI पर प्रतिबंध की मांग ने जोर पकड़ लिया था। दरअसल, उस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गृह मंत्रालय को एक डॉजियर सौंपा था। इसमें बताया गया था कि एजेंसी ने आतंकी गतिविधियों से जुड़े जिन मामलों की जांच की है, उनमें से कई के साथ PFI के कथित संबंध पाए गए हैं। बता दें कि PFI सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से एक राजनीतिक पार्टी भी चलाता है, जिसने केरल में पंचायत चुनाव लड़े थे।
| केंद्र सरकार जल्द ही विवादित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा सकती है। दरअसल, रामनवमी के मौके पर देश के कई हिस्सों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के पीछे PFI का हाथ होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि PFI पर प्रतिबंध लगाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर सकती है। इसी सप्ताह PFI पर प्रतिबंध लगने की संभावना जताई जा रही है। PFI एक चरमपंथी इस्लामिक संगठन है और यह खुद को पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला संगठन बताता है। यह संगठन पहली बार बाईस नवंबर, दो हज़ार छः को केरल में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट के मुख्य संगठन के रूप में अस्तित्व में आया था। उस दौरान संगठन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस आयोजित कर सुर्खियां भी बटोरी थी। यह देश के कई हिस्सों में अपने पैर जमा चुका है। PFI पर अभी भी कई राज्यों में प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन न्यूजअट्ठारह के अनुसार, अब केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर इस पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि रामनवमी के मौके पर मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में हिंसा की घटनाएं हुई थीं। मध्य प्रदेश भाजपा के प्रमुख वीडी शर्मा ने आरोप लगाया था कि राज्य के खरगौन जिले में हुई हिंसा के पीछे PFI का हाथ है। खुफिया विभाग ने दो हज़ार दस में पहली बार PFI पर डॉजियर तैयार किया था। इसमें बताया गया था कि PFI इस्लामिक संगठनों का एक संघ है, जो प्रतिबंधित संगठन SIMI के सहयोग से चल रहा है। इसमें आगे बताया गया था कि गोवा का सिटीजन्स फोरम, पश्चिम बंगाल की नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति, आंध्र का एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस, मणिपुर का लियोंग सोशल फोरम आदि सब PFI के बढ़ते नेटवर्क का हिस्सा है। दो हज़ार सत्रह में PFI पर प्रतिबंध की मांग ने जोर पकड़ लिया था। दरअसल, उस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गृह मंत्रालय को एक डॉजियर सौंपा था। इसमें बताया गया था कि एजेंसी ने आतंकी गतिविधियों से जुड़े जिन मामलों की जांच की है, उनमें से कई के साथ PFI के कथित संबंध पाए गए हैं। बता दें कि PFI सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से एक राजनीतिक पार्टी भी चलाता है, जिसने केरल में पंचायत चुनाव लड़े थे। |
नोकिया के चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। नोकिया अपने ग्राहकों के लिए दो नए स्मार्टफोन लेकर आया है। दोनों ही स्मार्टफोन कम दाम में अच्छे फीचर्स के साथ हैं।
नोकिया के चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। नोकिया अपने ग्राहकों के लिए दो नए स्मार्टफोन लेकर आया है। दोनों ही स्मार्टफोन कम दाम में अच्छे फीचर्स के साथ हैं। नोकिया ने स्मार्टफोन Nokia 6300 4G और Nokia 8000 4G को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लांच किया है। कंपनी ने इन दोनों स्मार्ट फोन की सेल के लिए को कुछ सिलेक्टेड मार्केट को ही चुना है। नोकिया 6300 4G की कीमत 49 यूरो (करीब 4300 रुपये) और नोकिया 8000 4G की कीमत 79 यूरो (करीब 6900 रुपये) है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी इसे भारत में भी जल्द लांच कर सकती है। कैंडी बार डिजाइन वाले यो दोनों लेटेस्ट फीचर फोन गूगल असिस्टेंट और वॉट्सऐप सपोर्ट से लैस हैं। इन दोनों फोन को वाई-फाई हॉटस्पॉट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गूगल मैप, फेसबुक और यूट्यूब जैसी सर्विसेज भी इन दोनों फोन में ऐक्सेस की जा सकती हैं।
यह फोन 2. 4 इंच के डिस्प्ले के साथ है। इसमें 512 एमबी रैम और 4जीबी की इनबिल्ट स्टोरेज भी है। साथ ही इस फोन में स्नैपड्रैगन 210 प्रोसेसर लगा है। फोन की मेमोरी को आप माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से 32जीबी तक बढ़ा भी सकते हैं। कैमरे की बात करें तो इस फोन में फ्लैशलाइट के साथ VGA कैमरा उपलब्ध है। फोन के इस फ्लैशलाइट फीचर को टॉर्च की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन के बैकअप को 1500mAh की बैटरी दमदान बनाती है। कंपनी ने दावे के साथ कहा है कि इसकी बैटरी 27 दिन तक के स्टैंडबाई टाइम के साथ आती है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में जीपीएस, ब्लूटूथ, ड्यूअल नैनो सिम सपोर्ट, एफएम रेडियो और एक ऑडियो जैक दिया गया है।
नोकिया 8000 4G के फीचर काफी हद तक नोकिया 6300 4G से मिलते-जुलते हैं। फोन 2. 8 इंच के डिस्प्ले के साथ आकर्षक लग रहा है। वहीं, इस फोन के कैमरे की बात करें तो इसमें आपको VGA की बजाय 2 मेगापिक्सल का सेंसर मिलेगा। डिजाइन में यह नोकिया 6300 4G से थोड़ा बेहतर लगता है। इसके फ्रंट पैनल कवर्ड एज वाले हैं। वहीं, बैक पैनल पर दिया गया ग्लास फिनिश मैटेरियल फोन को प्रीमियम लुक देता है। फोन में 4जीबी इंटरनल मेमरी और 512एमबी रैम के साथ स्नैपड्रैगन 210 प्रोसेसर मिलता है। बैटरी की बात करें तो इस फोन में भी कंपनी ने 1500mAh की बैटरी दी है। यह बैटरी 8. 2 घंटे तक का टॉक-टाइम दे सकती है। कनेक्टिविटी के लिए इस फोन में आपको 3. 5mm हेडफोन जैक के साथ वाई-फाई, ब्लूटूथ, ए-जीपीएस और एफएम रेडियो जैसे फीचर मिल जाते हैं।
| नोकिया के चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। नोकिया अपने ग्राहकों के लिए दो नए स्मार्टफोन लेकर आया है। दोनों ही स्मार्टफोन कम दाम में अच्छे फीचर्स के साथ हैं। नोकिया के चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। नोकिया अपने ग्राहकों के लिए दो नए स्मार्टफोन लेकर आया है। दोनों ही स्मार्टफोन कम दाम में अच्छे फीचर्स के साथ हैं। नोकिया ने स्मार्टफोन Nokia छः हज़ार तीन सौ चारG और Nokia आठ हज़ार चारG को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लांच किया है। कंपनी ने इन दोनों स्मार्ट फोन की सेल के लिए को कुछ सिलेक्टेड मार्केट को ही चुना है। नोकिया छः हज़ार तीन सौ चारG की कीमत उनचास यूरो और नोकिया आठ हज़ार चारG की कीमत उन्यासी यूरो है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी इसे भारत में भी जल्द लांच कर सकती है। कैंडी बार डिजाइन वाले यो दोनों लेटेस्ट फीचर फोन गूगल असिस्टेंट और वॉट्सऐप सपोर्ट से लैस हैं। इन दोनों फोन को वाई-फाई हॉटस्पॉट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गूगल मैप, फेसबुक और यूट्यूब जैसी सर्विसेज भी इन दोनों फोन में ऐक्सेस की जा सकती हैं। यह फोन दो. चार इंच के डिस्प्ले के साथ है। इसमें पाँच सौ बारह एमबी रैम और चारजीबी की इनबिल्ट स्टोरेज भी है। साथ ही इस फोन में स्नैपड्रैगन दो सौ दस प्रोसेसर लगा है। फोन की मेमोरी को आप माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से बत्तीसजीबी तक बढ़ा भी सकते हैं। कैमरे की बात करें तो इस फोन में फ्लैशलाइट के साथ VGA कैमरा उपलब्ध है। फोन के इस फ्लैशलाइट फीचर को टॉर्च की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन के बैकअप को एक हज़ार पाँच सौmAh की बैटरी दमदान बनाती है। कंपनी ने दावे के साथ कहा है कि इसकी बैटरी सत्ताईस दिन तक के स्टैंडबाई टाइम के साथ आती है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में जीपीएस, ब्लूटूथ, ड्यूअल नैनो सिम सपोर्ट, एफएम रेडियो और एक ऑडियो जैक दिया गया है। नोकिया आठ हज़ार चारG के फीचर काफी हद तक नोकिया छः हज़ार तीन सौ चारG से मिलते-जुलते हैं। फोन दो. आठ इंच के डिस्प्ले के साथ आकर्षक लग रहा है। वहीं, इस फोन के कैमरे की बात करें तो इसमें आपको VGA की बजाय दो मेगापिक्सल का सेंसर मिलेगा। डिजाइन में यह नोकिया छः हज़ार तीन सौ चारG से थोड़ा बेहतर लगता है। इसके फ्रंट पैनल कवर्ड एज वाले हैं। वहीं, बैक पैनल पर दिया गया ग्लास फिनिश मैटेरियल फोन को प्रीमियम लुक देता है। फोन में चारजीबी इंटरनल मेमरी और पाँच सौ बारहएमबी रैम के साथ स्नैपड्रैगन दो सौ दस प्रोसेसर मिलता है। बैटरी की बात करें तो इस फोन में भी कंपनी ने एक हज़ार पाँच सौmAh की बैटरी दी है। यह बैटरी आठ. दो घंटाटे तक का टॉक-टाइम दे सकती है। कनेक्टिविटी के लिए इस फोन में आपको तीन. पाँच मिलीमीटर हेडफोन जैक के साथ वाई-फाई, ब्लूटूथ, ए-जीपीएस और एफएम रेडियो जैसे फीचर मिल जाते हैं। |
3 जून को रिलीज हुई आश्रम 3 (Ashram 3) वेब सीरीज में ईशा गुप्ता ने इंटीमेट सीन (Esha Gupta Intimate Scene) दे खूब तारीफें पाई हैं। आश्रम 3 में उनके किरदार का नाम सोनिया है जो बाबा निराला (Baba Nirala) को भगवान निराला (Bhagwan Nirala) का दर्जा दिलवा देती हैं। यह वेब सीरीज एमएक्स प्लेयर पर है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब ईशा ने किसी फिल्म या वेब सीरीज में बोल्ड सीन दिए हों।
वह इससे पहले नकाब वेब सीरीज में भी नजर आ चुकी हैं और इसमें उन्होंने मल्लिका शेरावत संग किसिंग सीन दिया था। यह भी एमएक्स प्लेयर पर है।
नकाब के अलावा ईशा वेब सीरीज Rejctx के पहले और दूसरे पार्ट में भी नजर आ चुकी हैं। यह दोनों पार्ट जी5 पर उपलब्ध हैं।
ईशा ने 2012 में इमरान हाशमी के अपोजिट फिल्म जन्नत 2 से डेब्यू किया था। इसमें भी उन्होंने कई बोल्ड सीन दिए थे। इसे अमेजन प्राइम पर देखा जा सकता है।
फिल्म राज 3 में भी ईशा गुप्ता के बोल्ड सीन थे। इसमें उनके साथ इमरान हाशमी और बिपाशा बसु थे। यह फिल्म अमेजन प्राइम पर है।
बादशाहो फिल्म में भी ईशा गुप्ता नजर आई थीं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स और डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर है।
2014 में आई फिल्म हमशकल में ईशा ने अपनी अदाएं दिखाई थीं। यह फिल्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर हैं। (All Photos: Social Media)
| तीन जून को रिलीज हुई आश्रम तीन वेब सीरीज में ईशा गुप्ता ने इंटीमेट सीन दे खूब तारीफें पाई हैं। आश्रम तीन में उनके किरदार का नाम सोनिया है जो बाबा निराला को भगवान निराला का दर्जा दिलवा देती हैं। यह वेब सीरीज एमएक्स प्लेयर पर है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब ईशा ने किसी फिल्म या वेब सीरीज में बोल्ड सीन दिए हों। वह इससे पहले नकाब वेब सीरीज में भी नजर आ चुकी हैं और इसमें उन्होंने मल्लिका शेरावत संग किसिंग सीन दिया था। यह भी एमएक्स प्लेयर पर है। नकाब के अलावा ईशा वेब सीरीज Rejctx के पहले और दूसरे पार्ट में भी नजर आ चुकी हैं। यह दोनों पार्ट जीपाँच पर उपलब्ध हैं। ईशा ने दो हज़ार बारह में इमरान हाशमी के अपोजिट फिल्म जन्नत दो से डेब्यू किया था। इसमें भी उन्होंने कई बोल्ड सीन दिए थे। इसे अमेजन प्राइम पर देखा जा सकता है। फिल्म राज तीन में भी ईशा गुप्ता के बोल्ड सीन थे। इसमें उनके साथ इमरान हाशमी और बिपाशा बसु थे। यह फिल्म अमेजन प्राइम पर है। बादशाहो फिल्म में भी ईशा गुप्ता नजर आई थीं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स और डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर है। दो हज़ार चौदह में आई फिल्म हमशकल में ईशा ने अपनी अदाएं दिखाई थीं। यह फिल्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर हैं। |
सबके सब सिसमाण्डीकी विचारधारा से प्रभावित हैं। उन्नीसवीं शताब्दीको नारो आर्थिक विचारधारापर सितमाण्डीका प्रभाव दृष्टिगोचर होता है ।
समाजवादी विचारधारावालों ने भी सिसमाण्डीकी भाँति समाजको गरीब और अमीर, ऐसे दो वर्गों में बाँटा है और कहा है कि व्यक्तिगत हितामें और सामाजिक हितोंमें विरोध है; औद्योगिक प्रगतिके फलस्वरूप मध्यम वर्ग क्रमशः समाप्त होता जा रहा है तथा मध्यमवर्गी लोग श्रमिक बनते जा रहे हैं; उत्पादन के साधन बुरे हैं और प्रतिस बुरी चीज है । इस स्थितिको सुधारने के लिए सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है । पर सिसमाण्डी जहाँ एक सीमातक ही सरकारी हस्तक्षेपका समर्थन करता है, वहाँ साम्यवादी अधिकतम सरकारी हस्तक्षेपकी माँग करते हैं । सिसमाण्डी जहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सम्पत्तिका समर्थन करता है, वहाँ साम्यवादी व्यक्तिगत स्वतंत्रताको कोई मूल्य ही नहीं देते और व्यक्तिगत सम्पत्तिका सर्वथा निर्मूलन कर देना चाहते हैं। सिसमाण्डीने लाभ और व्याजकी पूर्ण समाति नहीं चाही है, साम्यवादी उसे पूर्णतः समाप्त कर देना चाहते हैं। एक महान् भेद दोनों में यह था कि सिसमाण्डी जहाँ शान्तिपूर्ण और वैध उपायों द्वारा समाजकी स्थितिमें परिवर्तन लाने के लिए उत्सुक था, वहाँ साम्यवादी रक्त-क्रान्तिके पुजारी थे ।
ऐसी स्थितिमें सिसमाण्डीको न तो पक्का शास्त्रीय परम्परावादी माना जा सकता है और न साम्यवादी । वह दोनों के बीचको ऐसी कड़ी है, जिसकी महत्ता अस्वीकार नहीं की जा सकती ।
आर्थिक विचारधाराके विकासने सिसमाण्डी एक नक्षत्रकी भाँति जाज्वल्य मान है । | सबके सब सिसमाण्डीकी विचारधारा से प्रभावित हैं। उन्नीसवीं शताब्दीको नारो आर्थिक विचारधारापर सितमाण्डीका प्रभाव दृष्टिगोचर होता है । समाजवादी विचारधारावालों ने भी सिसमाण्डीकी भाँति समाजको गरीब और अमीर, ऐसे दो वर्गों में बाँटा है और कहा है कि व्यक्तिगत हितामें और सामाजिक हितोंमें विरोध है; औद्योगिक प्रगतिके फलस्वरूप मध्यम वर्ग क्रमशः समाप्त होता जा रहा है तथा मध्यमवर्गी लोग श्रमिक बनते जा रहे हैं; उत्पादन के साधन बुरे हैं और प्रतिस बुरी चीज है । इस स्थितिको सुधारने के लिए सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है । पर सिसमाण्डी जहाँ एक सीमातक ही सरकारी हस्तक्षेपका समर्थन करता है, वहाँ साम्यवादी अधिकतम सरकारी हस्तक्षेपकी माँग करते हैं । सिसमाण्डी जहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सम्पत्तिका समर्थन करता है, वहाँ साम्यवादी व्यक्तिगत स्वतंत्रताको कोई मूल्य ही नहीं देते और व्यक्तिगत सम्पत्तिका सर्वथा निर्मूलन कर देना चाहते हैं। सिसमाण्डीने लाभ और व्याजकी पूर्ण समाति नहीं चाही है, साम्यवादी उसे पूर्णतः समाप्त कर देना चाहते हैं। एक महान् भेद दोनों में यह था कि सिसमाण्डी जहाँ शान्तिपूर्ण और वैध उपायों द्वारा समाजकी स्थितिमें परिवर्तन लाने के लिए उत्सुक था, वहाँ साम्यवादी रक्त-क्रान्तिके पुजारी थे । ऐसी स्थितिमें सिसमाण्डीको न तो पक्का शास्त्रीय परम्परावादी माना जा सकता है और न साम्यवादी । वह दोनों के बीचको ऐसी कड़ी है, जिसकी महत्ता अस्वीकार नहीं की जा सकती । आर्थिक विचारधाराके विकासने सिसमाण्डी एक नक्षत्रकी भाँति जाज्वल्य मान है । |
गुजरात विधानसभा चुनाव में बहुमत के बाद भूपेंद्र पटेल ने शनिवार (10 दिसंबर) को राजभवन में गवर्नर आचार्य देवव्रत से मुलाकात की और गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश किया है. गवर्नर से मुलाकात के बाद गुजरात के कार्यवाहक सीएम भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) और राज्य भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल (CR Patil) दिल्ली के लिए रवाना हुए.
मिली जानकारी के अनुसार, आज दोनों नेता (भूपेंद्र पटेल और सीआर पाटिल) दिल्ली में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. पीएम से मुलाकात के दौरान नयी मंत्रिमंडल के नामों को लेकर इन नेताओं के बीच चर्चा होने की आसार है. इससे पहले आज ही प्रदेश मुख्यालय 'कमलम' में भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई.
पटेल ने शुक्रवार को अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ राज्य में नयी गवर्नमेंट के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए इस्तीफा दे दिया था. राज्य में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. 8 दिसंबर को हुई मतगणना में भारतीय जतना पार्टी ने 182 विधानसभा सीटों में से 156 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, कांग्रेस पार्टी ने 17 सीटों पर जीत हासिल की जबकि, आम आदमी हिस्से में 5 सीटें आई, तो 4 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है.
| गुजरात विधानसभा चुनाव में बहुमत के बाद भूपेंद्र पटेल ने शनिवार को राजभवन में गवर्नर आचार्य देवव्रत से मुलाकात की और गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश किया है. गवर्नर से मुलाकात के बाद गुजरात के कार्यवाहक सीएम भूपेंद्र पटेल और राज्य भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल दिल्ली के लिए रवाना हुए. मिली जानकारी के अनुसार, आज दोनों नेता दिल्ली में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. पीएम से मुलाकात के दौरान नयी मंत्रिमंडल के नामों को लेकर इन नेताओं के बीच चर्चा होने की आसार है. इससे पहले आज ही प्रदेश मुख्यालय 'कमलम' में भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई. पटेल ने शुक्रवार को अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ राज्य में नयी गवर्नमेंट के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए इस्तीफा दे दिया था. राज्य में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. आठ दिसंबर को हुई मतगणना में भारतीय जतना पार्टी ने एक सौ बयासी विधानसभा सीटों में से एक सौ छप्पन सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, कांग्रेस पार्टी ने सत्रह सीटों पर जीत हासिल की जबकि, आम आदमी हिस्से में पाँच सीटें आई, तो चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. |
वीर अर्जुन संवाददाता लखनउढ। बहुजन समाज पाटी के पदेश अध्यक्ष श्री स्वामी पसाद मौर्य ने डॉ. विनोद कुमार आर्या तथ डॉ. बीपीसिंह की हत्या तथा लखनउढ के सीएमओ परिवार कल्याण के कार्यालय में बरती गई वित्तीय अनियमिताओं के मामलों की अग्रेतर जांच सीबीआई को सौंपे जाने के संबंध में राज्य सरकार के निर्णय पर विरोधी पार्टियों द्वारा की जा रही बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दुराग्रह से ग्रस्त विपक्षी पार्टियों को बीएसपी सरकार के खिलाफ अनावश्यक आरोप लगाने की आदत हो गई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लिया, जो इस फैसले को स्वागत करने के बजाए अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। श्र मौर्य ने कहा कि इन मामलों में पुलिस द्वारा विवेचना कर माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में यह पहला उदाहरण है जिसमें पुलिस द्वारा माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किये जाने के बावजूद राज्य सरकार ने मामलों को अग्रेतर जांच के लिए सीबीआई को सौंपा। उन्होंने बीएसपी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस निर्णय से वे शरारती तत्व जरुर निराश हुए होंगे जो विरोधी पार्टियों की शह पर जनहित जनता से ऐसे दलाल पवृत्ति के लोगों से सावधान रहने की अपील की है। पदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इन मामलों की अग्रेतर जांच सीबीआई का इस उद्देश्य से सौंपी गई ताकि डॉ. वाई. एस. सचान की हत्या के मामले में सीबीआई तह तक sपहुंच कर यह पता लगा सके कि क्या डॉ. विनोद कुमार आर्या व डॉ. बी. पी. सिंह की हत्या का डॉ. सचान की हत्या से कोई संबंध है अथवा नहीं। इसी पकार राज्य सरकार यह सच भी सामने लाना चाहती है कि क्या डॉ. सचान की हत्या का वित्तीय अनियमिताओं से कोई संबंध है अथवा नहीं। श्री मौर्य ने कहा कि डॉ. बी. पी. सिंह की पत्नी द्वारा राज्य सरकार को लिखित रुप में अवगत कराया गया था कि इस मामले में राज्य सरकार जिस एंजेसी को उपयुक्त समझे, उसके द्वारा समयबद्ध जांच करा सकती है और उनका अपना कोई आग्रह नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लिखित किया कि वे केवल यह चाहती हैं कि उनके पति की हत्या करने वाले अपराधियों को पकड़ा जाए और उन्हें पभावी रुप से दंडित किया जाए। इसी पकार डा. आर्या के परिजनों ने भी सीबीआई जांच कराने की मांग नहीं की थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इन पकरणों की सीबीआई जांच कराने का फैसला लिया, ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके। श्री मौर्य ने कहा कि बहुजन पार्टी की सरकार ने कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा, चाहे वह कितना की पभावशाली क्यों न हो। उन्होंने कहा कि माननीया मुख्यमंत्री जी और उनकी सरकार हमेशा यह पतिबद्धता रही है कि अपराधियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाई की जानी चाहिए।
| वीर अर्जुन संवाददाता लखनउढ। बहुजन समाज पाटी के पदेश अध्यक्ष श्री स्वामी पसाद मौर्य ने डॉ. विनोद कुमार आर्या तथ डॉ. बीपीसिंह की हत्या तथा लखनउढ के सीएमओ परिवार कल्याण के कार्यालय में बरती गई वित्तीय अनियमिताओं के मामलों की अग्रेतर जांच सीबीआई को सौंपे जाने के संबंध में राज्य सरकार के निर्णय पर विरोधी पार्टियों द्वारा की जा रही बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दुराग्रह से ग्रस्त विपक्षी पार्टियों को बीएसपी सरकार के खिलाफ अनावश्यक आरोप लगाने की आदत हो गई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लिया, जो इस फैसले को स्वागत करने के बजाए अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। श्र मौर्य ने कहा कि इन मामलों में पुलिस द्वारा विवेचना कर माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में यह पहला उदाहरण है जिसमें पुलिस द्वारा माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किये जाने के बावजूद राज्य सरकार ने मामलों को अग्रेतर जांच के लिए सीबीआई को सौंपा। उन्होंने बीएसपी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस निर्णय से वे शरारती तत्व जरुर निराश हुए होंगे जो विरोधी पार्टियों की शह पर जनहित जनता से ऐसे दलाल पवृत्ति के लोगों से सावधान रहने की अपील की है। पदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इन मामलों की अग्रेतर जांच सीबीआई का इस उद्देश्य से सौंपी गई ताकि डॉ. वाई. एस. सचान की हत्या के मामले में सीबीआई तह तक sपहुंच कर यह पता लगा सके कि क्या डॉ. विनोद कुमार आर्या व डॉ. बी. पी. सिंह की हत्या का डॉ. सचान की हत्या से कोई संबंध है अथवा नहीं। इसी पकार राज्य सरकार यह सच भी सामने लाना चाहती है कि क्या डॉ. सचान की हत्या का वित्तीय अनियमिताओं से कोई संबंध है अथवा नहीं। श्री मौर्य ने कहा कि डॉ. बी. पी. सिंह की पत्नी द्वारा राज्य सरकार को लिखित रुप में अवगत कराया गया था कि इस मामले में राज्य सरकार जिस एंजेसी को उपयुक्त समझे, उसके द्वारा समयबद्ध जांच करा सकती है और उनका अपना कोई आग्रह नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लिखित किया कि वे केवल यह चाहती हैं कि उनके पति की हत्या करने वाले अपराधियों को पकड़ा जाए और उन्हें पभावी रुप से दंडित किया जाए। इसी पकार डा. आर्या के परिजनों ने भी सीबीआई जांच कराने की मांग नहीं की थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इन पकरणों की सीबीआई जांच कराने का फैसला लिया, ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके। श्री मौर्य ने कहा कि बहुजन पार्टी की सरकार ने कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा, चाहे वह कितना की पभावशाली क्यों न हो। उन्होंने कहा कि माननीया मुख्यमंत्री जी और उनकी सरकार हमेशा यह पतिबद्धता रही है कि अपराधियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाई की जानी चाहिए। |
नई दिल्ली॥ बीसीसीआई के नये अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने कहा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच दिन-रात्रि का पहला टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक प्रारूप के प्रति दर्शकों की रूचि जगाने के लिए रखा गया है। बांग्लादेश के खिलाफ भारत का पहला दिन-रात्रि का टेस्ट 22 से 26 नवंबर तक ईडन गार्डेन्स में खेला जाएगा। वहीं बांग्लादेश का भी यह पहला दिन रात्रि का टेस्ट मैच होगा। पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि इस मैच में बीसीसीआई ड्यूक्स या कूकाबूरा की जगह एसजी टेस्ट गुलाबी गेंद का ही इस्तेमाल करेगी।
| नई दिल्ली॥ बीसीसीआई के नये अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने कहा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच दिन-रात्रि का पहला टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक प्रारूप के प्रति दर्शकों की रूचि जगाने के लिए रखा गया है। बांग्लादेश के खिलाफ भारत का पहला दिन-रात्रि का टेस्ट बाईस से छब्बीस नवंबर तक ईडन गार्डेन्स में खेला जाएगा। वहीं बांग्लादेश का भी यह पहला दिन रात्रि का टेस्ट मैच होगा। पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि इस मैच में बीसीसीआई ड्यूक्स या कूकाबूरा की जगह एसजी टेस्ट गुलाबी गेंद का ही इस्तेमाल करेगी। |
Mogul Film Update: लाल सिंह चड्ढा के फ्लॉप होने पर Aamir Khan को झटका, Gulshan Kumar की बॉयोपिक भी गई एक्टर के हाथ से आपको बात दें कुछ समय पहले ये अनाउंस हुआ था कि आमिर खान प्रसिद्ध गायक गुलशन कुमार (Gulshan Kumar) की भूमिका में दिखने वाले हैं। यहां हम इसी से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास करेंगे।
नई दिल्ली। आमिर खान (Aamir Khan) की मुश्किलें पिछले एक महीने से बढ़ ही रही हैं। पहले लगातार उनकी फिल्म का बॉयकॉट चला। बॉयकॉट इस कदर हुआ की फिल्म ने इतना खराब बिजनेस किया जो आमिर ने सोचा भी नहीं होगा। उसके बाद खबरें आयीं कि नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भी आमिर से डील तोड़ दी है। इन सभी खबरों के बीच आमिर की मुश्किलें कम हुई ही नहीं थीं कि एक और मुश्किल आमिर के सामने आकर खड़ी हो गयी है। आपको बात दें कुछ समय पहले ये अनाउंस हुआ था कि आमिर खान प्रसिद्ध गायक गुलशन कुमार (Gulshan Kumar) की भूमिका में दिखने वाले हैं। कुछ समय पहले अक्षय कुमार (Akshay Kumar) को भी गुलशन कुमार की बायोपिक के लिए चुना गया लेकिन फिर फिल्म के निर्माता और अक्षय कुमार में कुछ अनबन हुई तो अक्षय कुमार इस प्रोजेक्ट से हट गए। खबरें आई की आमिर खान गुलशन कुमार की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का पोस्टर भी रिलीज़ कर दिया गया लेकिन अब ऐसी खबरें है कि लाल सिंह चड्ढा के फ्लॉप होने के चलते इस फिल्म के निर्माण का काम रोक दिया गया है। यहां हम इसी से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास करेंगे।
गुलशन कुमार को हम सब जानते हैं उन्होंने संगीत की ऐसी दुनिया बनाई जो आज भी सराही जाती है और लोगों के बीच मौजूद है। जिसे लोग पसंद भी करते हैं। गुलशन कुमार ने कैसटों का ऐसा चलन शुरू किया कि सब दंग रह गए। उन्होंने महंगे बिकने वाले कैसट के जमाने में कैसटों का चलन फुटपाथ पर भी शुरू कर दिया। गुलशन कुमार ने गरीब से गरीब तक अपने गाने पहुंचाए। जिसमें उन्हें कानूनी लड़ाई का सामना भी करना पड़ा और उन्होंने किया। इसके बाद गुलशन कुमार की हत्या कर दी गयी जिसमें बताया जाता है कि उनकी हत्या के पीछे अंडरवर्ल्ड का हाथ था।
गुलशन कुमार ने टी- सीरीज़ (Tseries) नाम की कम्पनी बनाई। जिसे अब उनके बेटे भूषण कुमार (Bhushan Kumar) संभालते हैं। भूषण कुमार ने ही यह निर्णय लिया था कि वो अपने पिता की जिंदगी पर आधारित एक फिल्म बनाएंगे जिसका नाम होगा मुगल (Mogul)। क्योंकि गुलशन कुमार खुद भी संगीत की दुनिया का मुगल कहलाना पसंद करते थे। मशहूर डायरेक्टर सुभाष कपूर (Subhash Kapoor) ने इस फिल्म की पटकथा तैयार किया और 2017 में इस फिल्म के पोस्टर को भी रिलीज़ किया गया। शुरुआत में अक्षय कुमार इस फिल्म से जुड़े लेकिन फिर अक्षय कुमार हट गए। इसके बाद खबरें रहीं की आमिर खान, गुलशन कुमार का किरदार निभाएंगे। लेकिन अब खबरें ये हैं कि इस फिल्म को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। टी सीरीज की 2023 तक के फिल्मों की लिस्ट से भी इसे हटा दिया गया है। इस वक़्त इस फिल्म पर पूरी तरह से रोक लग गयी है। आने वाले समय में यह फिल्म आती है या नहीं यह तो वक़्त बताएगा। लेकिन मुमकिन है फिल्म के एक्टर को बदल दिया जाए। ऐसी भी खबरें हैं कि आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा का हश्र देखते हुए ही मुगल फिल्म रोकने का निर्णय लिया गया है।
| Mogul Film Update: लाल सिंह चड्ढा के फ्लॉप होने पर Aamir Khan को झटका, Gulshan Kumar की बॉयोपिक भी गई एक्टर के हाथ से आपको बात दें कुछ समय पहले ये अनाउंस हुआ था कि आमिर खान प्रसिद्ध गायक गुलशन कुमार की भूमिका में दिखने वाले हैं। यहां हम इसी से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। नई दिल्ली। आमिर खान की मुश्किलें पिछले एक महीने से बढ़ ही रही हैं। पहले लगातार उनकी फिल्म का बॉयकॉट चला। बॉयकॉट इस कदर हुआ की फिल्म ने इतना खराब बिजनेस किया जो आमिर ने सोचा भी नहीं होगा। उसके बाद खबरें आयीं कि नेटफ्लिक्स ने भी आमिर से डील तोड़ दी है। इन सभी खबरों के बीच आमिर की मुश्किलें कम हुई ही नहीं थीं कि एक और मुश्किल आमिर के सामने आकर खड़ी हो गयी है। आपको बात दें कुछ समय पहले ये अनाउंस हुआ था कि आमिर खान प्रसिद्ध गायक गुलशन कुमार की भूमिका में दिखने वाले हैं। कुछ समय पहले अक्षय कुमार को भी गुलशन कुमार की बायोपिक के लिए चुना गया लेकिन फिर फिल्म के निर्माता और अक्षय कुमार में कुछ अनबन हुई तो अक्षय कुमार इस प्रोजेक्ट से हट गए। खबरें आई की आमिर खान गुलशन कुमार की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का पोस्टर भी रिलीज़ कर दिया गया लेकिन अब ऐसी खबरें है कि लाल सिंह चड्ढा के फ्लॉप होने के चलते इस फिल्म के निर्माण का काम रोक दिया गया है। यहां हम इसी से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। गुलशन कुमार को हम सब जानते हैं उन्होंने संगीत की ऐसी दुनिया बनाई जो आज भी सराही जाती है और लोगों के बीच मौजूद है। जिसे लोग पसंद भी करते हैं। गुलशन कुमार ने कैसटों का ऐसा चलन शुरू किया कि सब दंग रह गए। उन्होंने महंगे बिकने वाले कैसट के जमाने में कैसटों का चलन फुटपाथ पर भी शुरू कर दिया। गुलशन कुमार ने गरीब से गरीब तक अपने गाने पहुंचाए। जिसमें उन्हें कानूनी लड़ाई का सामना भी करना पड़ा और उन्होंने किया। इसके बाद गुलशन कुमार की हत्या कर दी गयी जिसमें बताया जाता है कि उनकी हत्या के पीछे अंडरवर्ल्ड का हाथ था। गुलशन कुमार ने टी- सीरीज़ नाम की कम्पनी बनाई। जिसे अब उनके बेटे भूषण कुमार संभालते हैं। भूषण कुमार ने ही यह निर्णय लिया था कि वो अपने पिता की जिंदगी पर आधारित एक फिल्म बनाएंगे जिसका नाम होगा मुगल । क्योंकि गुलशन कुमार खुद भी संगीत की दुनिया का मुगल कहलाना पसंद करते थे। मशहूर डायरेक्टर सुभाष कपूर ने इस फिल्म की पटकथा तैयार किया और दो हज़ार सत्रह में इस फिल्म के पोस्टर को भी रिलीज़ किया गया। शुरुआत में अक्षय कुमार इस फिल्म से जुड़े लेकिन फिर अक्षय कुमार हट गए। इसके बाद खबरें रहीं की आमिर खान, गुलशन कुमार का किरदार निभाएंगे। लेकिन अब खबरें ये हैं कि इस फिल्म को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। टी सीरीज की दो हज़ार तेईस तक के फिल्मों की लिस्ट से भी इसे हटा दिया गया है। इस वक़्त इस फिल्म पर पूरी तरह से रोक लग गयी है। आने वाले समय में यह फिल्म आती है या नहीं यह तो वक़्त बताएगा। लेकिन मुमकिन है फिल्म के एक्टर को बदल दिया जाए। ऐसी भी खबरें हैं कि आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा का हश्र देखते हुए ही मुगल फिल्म रोकने का निर्णय लिया गया है। |
क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घः नेपाल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में ड्रग तस्करी हो रही है। ड्रग तस्करी के कैरियर ही पकड़े जा रहे हैं, लेकिन किंगपिन (सरगना) तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं। एसटीएफ ने कई बार बड़ी खेप पकड़ी है, लेकिन न तो नेपाल से माल सप्लाई करने वाले और न ही माल लेने वाले को पकड़ सकी है। ऐसे में, पुलिस पूरी तरह से ड्रग तस्करी नहीं रोक पा रही है।
नेपाल से ड्रग तस्करी वाहनों में कैविटी बनाकर की जाती है। अभी तक एसटीएफ ने जितने भी मामले पकड़े हैं उनमें कैविटी में ही ड्रग को छिपाया गया था। कभी ट्रक के डीजल टैंक में कैविटी, कभी बोलेरो की सीलिंग में कैविटी, तो कभी फोर व्हीलर की फर्श तो कभी छत पर कैविटी बनाई मिली। कैविटी बनाने का मकसद साफ होता है कि किसी को शक न हो कि इसके जरिए ड्रग की सप्लाई हो रही है।
30 मार्च को एसटीएफ ने फतेहगंज पश्चिमी में बोलेरो की सीलिंग में कैविटी बनाकर ले जाई जा रही डेढ़ करोड़ की चरस पकड़ी थी। मौके से मीरापुर मुजफ्फरनगर निवासी नितिन, महबूब और उसकी पत्नी शहनाज को पकड़ा था। चरस को नेपाल बॉर्डर पर महराजगंज में संजय ने लोड किया था। इसकी मीरापुर में अमित धारीवाल को सप्लाई होनी थी, लेकिन चार दिन बाद इनकी भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
एसटीएफ ने बड़ा बाईपास पर इंडिका कार से 38 लाख की चरस बरामद की थी। मौके से हरियाणा निवासी सुनील और वीरेंद्र को गिरफ्तार किया गया था। नेपाल में शिवा से चरस लेकर आते थे और रामपुर में गुड्डू को सप्लाई करना था। न तो शिवा और न ही गुड्डू को पकड़ा जा सका है।
26 अक्टूबर 2016 को एसटीएफ ने बदायूं रोड पर 470 किलो डोडा पोस्त पकड़ा था। मौके से हसीब और दुर्गेश को गिरफ्तार किया गया था। डोडा को झारखंड के नक्सली एरिया से नारियल के बहाने लेकर आया गया था। डोडा की सप्लाई बदायूं में अनीस व दुर्गेश को होनी थी। इस मामले में अनीस और दुर्गेश की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
25 दिसंबर 2016 को एसटीएफ ने परसाखेड़ा जीरो प्वाइंट पर डीजल टैंक में कैविटी बनाकर सप्लाई हो रही 76 लाख की चरस बरामद की। चरस को डीजल टैंक में कैविटी बनाकर सप्लाई किया जा रहा था। मौके से ट्रक मालिक मुकरिन और दानिश को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें कैरेना शामली में भूरे व कयूम को चरस सप्लाई करनी थी और वह नेपाल बार्डर के सिद्धार्थनगर डिस्ट्रिक्ट से उमाशंकर से माल लाए थे। अभी तक भूरे, कय्यूम और उमाशंकर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
| क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घः नेपाल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में ड्रग तस्करी हो रही है। ड्रग तस्करी के कैरियर ही पकड़े जा रहे हैं, लेकिन किंगपिन तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं। एसटीएफ ने कई बार बड़ी खेप पकड़ी है, लेकिन न तो नेपाल से माल सप्लाई करने वाले और न ही माल लेने वाले को पकड़ सकी है। ऐसे में, पुलिस पूरी तरह से ड्रग तस्करी नहीं रोक पा रही है। नेपाल से ड्रग तस्करी वाहनों में कैविटी बनाकर की जाती है। अभी तक एसटीएफ ने जितने भी मामले पकड़े हैं उनमें कैविटी में ही ड्रग को छिपाया गया था। कभी ट्रक के डीजल टैंक में कैविटी, कभी बोलेरो की सीलिंग में कैविटी, तो कभी फोर व्हीलर की फर्श तो कभी छत पर कैविटी बनाई मिली। कैविटी बनाने का मकसद साफ होता है कि किसी को शक न हो कि इसके जरिए ड्रग की सप्लाई हो रही है। तीस मार्च को एसटीएफ ने फतेहगंज पश्चिमी में बोलेरो की सीलिंग में कैविटी बनाकर ले जाई जा रही डेढ़ करोड़ की चरस पकड़ी थी। मौके से मीरापुर मुजफ्फरनगर निवासी नितिन, महबूब और उसकी पत्नी शहनाज को पकड़ा था। चरस को नेपाल बॉर्डर पर महराजगंज में संजय ने लोड किया था। इसकी मीरापुर में अमित धारीवाल को सप्लाई होनी थी, लेकिन चार दिन बाद इनकी भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसटीएफ ने बड़ा बाईपास पर इंडिका कार से अड़तीस लाख की चरस बरामद की थी। मौके से हरियाणा निवासी सुनील और वीरेंद्र को गिरफ्तार किया गया था। नेपाल में शिवा से चरस लेकर आते थे और रामपुर में गुड्डू को सप्लाई करना था। न तो शिवा और न ही गुड्डू को पकड़ा जा सका है। छब्बीस अक्टूबर दो हज़ार सोलह को एसटीएफ ने बदायूं रोड पर चार सौ सत्तर किलो डोडा पोस्त पकड़ा था। मौके से हसीब और दुर्गेश को गिरफ्तार किया गया था। डोडा को झारखंड के नक्सली एरिया से नारियल के बहाने लेकर आया गया था। डोडा की सप्लाई बदायूं में अनीस व दुर्गेश को होनी थी। इस मामले में अनीस और दुर्गेश की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पच्चीस दिसंबर दो हज़ार सोलह को एसटीएफ ने परसाखेड़ा जीरो प्वाइंट पर डीजल टैंक में कैविटी बनाकर सप्लाई हो रही छिहत्तर लाख की चरस बरामद की। चरस को डीजल टैंक में कैविटी बनाकर सप्लाई किया जा रहा था। मौके से ट्रक मालिक मुकरिन और दानिश को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें कैरेना शामली में भूरे व कयूम को चरस सप्लाई करनी थी और वह नेपाल बार्डर के सिद्धार्थनगर डिस्ट्रिक्ट से उमाशंकर से माल लाए थे। अभी तक भूरे, कय्यूम और उमाशंकर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। |
सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया इस लड़की का हॉट डांस, देखें वीडियो!
लड़के ने की इस ढंग से चोरी, जिसे आपने फिल्मों में भी नहीं देखा होगा.... घटना CCTV में कैद!
इन 6 तरीको से लडकियां फसती हैं लव जिहाद में , और क्या होता है उसके बाद . . ?
इस आदमी ने तो फैमिली प्लानिंग की बैंड ही बजा डाली है, 97 पत्नियों और 180 बच्चों का मालिक!
अपने बच्चों के बर्थ मंथ से जानिए, उनकी इन बेहद रोचक बातों के बारे में !
एक बार फिर देखा गया अजीबो- गरीब प्राणी, वीडियो वायरल!
जापान में घटी दिल दहला देने वाली घटना, लड़कों के एक ग्रुप को हर जगह दिखती है एक भूतनी!
हर रात लड़के साथ विस्तर पर सोती है नागिन, सुबह मिलते हैं लव बाईट के निशान!
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Giridih : नगर भवन में 6 मार्च को नगर निगम बोर्ड की बैठक में शहर के विकास के लिए 462 करोड़ का बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया. बैठक में गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू और प्रभारी मेयर प्रकाश राम मौजूद थे. बैठक में विधायक ने कहा कि नगर निगम की दुकानों में किराया निर्धारण को लेकर पारदर्शिता बरती जाए. मुख्य चौक-चौराहों की दुकानों की अपेक्षा सड़क से दूर दुकानों के किराए में अंतर होना चाहिए.
बैठक में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार पर चर्चा की गई. लाइटिंग व्यवस्था में सुधार का निर्णय लिया गया. गायत्री मंदिर पथ के नामकरण को सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया. इस रोड का नामकरण गायत्री मंदिर ट्रस्ट पथ के नाम से किया गया.
बैठक में हुट्टी बाजार स्थित दुकानों पर भी चर्चा की गई. उप नगर आयुक्त स्मृता कुमारी ने कहा कि जिन दुकानदारों को दुकान आवंटित है वे न दुकान खोल रहे हैं और न ही भाड़ा दे रहे हैं. भाड़ा को लेकर दुकानदारों से एक बार फिर बातचीत करने का निर्णय लिया गया. बातचीत में दुकानदार भाड़ा देने पर राजी नहीं होंगे तो आवंटन रद्द कर दिया जाएगा. दुकानों को आवंटित करने के लिए पुनः टेंडर जारी किया जाएगा.
बैठक समाप्त होने के बाद नगर भवन में ही होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया. निगम अधिकारियों व वार्ड पार्षदों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी. बैठक में टाउन प्लानर मंजूर आलम, वार्ड पार्षद गुड़िया देवी, अजय रजक, सैफ अली गुड्डू, नीलम झा, पूनम देवी समेत अन्य वार्ड पार्षद शामिल हुए.
| Giridih : नगर भवन में छः मार्च को नगर निगम बोर्ड की बैठक में शहर के विकास के लिए चार सौ बासठ करोड़ का बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया. बैठक में गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू और प्रभारी मेयर प्रकाश राम मौजूद थे. बैठक में विधायक ने कहा कि नगर निगम की दुकानों में किराया निर्धारण को लेकर पारदर्शिता बरती जाए. मुख्य चौक-चौराहों की दुकानों की अपेक्षा सड़क से दूर दुकानों के किराए में अंतर होना चाहिए. बैठक में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार पर चर्चा की गई. लाइटिंग व्यवस्था में सुधार का निर्णय लिया गया. गायत्री मंदिर पथ के नामकरण को सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया. इस रोड का नामकरण गायत्री मंदिर ट्रस्ट पथ के नाम से किया गया. बैठक में हुट्टी बाजार स्थित दुकानों पर भी चर्चा की गई. उप नगर आयुक्त स्मृता कुमारी ने कहा कि जिन दुकानदारों को दुकान आवंटित है वे न दुकान खोल रहे हैं और न ही भाड़ा दे रहे हैं. भाड़ा को लेकर दुकानदारों से एक बार फिर बातचीत करने का निर्णय लिया गया. बातचीत में दुकानदार भाड़ा देने पर राजी नहीं होंगे तो आवंटन रद्द कर दिया जाएगा. दुकानों को आवंटित करने के लिए पुनः टेंडर जारी किया जाएगा. बैठक समाप्त होने के बाद नगर भवन में ही होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया. निगम अधिकारियों व वार्ड पार्षदों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी. बैठक में टाउन प्लानर मंजूर आलम, वार्ड पार्षद गुड़िया देवी, अजय रजक, सैफ अली गुड्डू, नीलम झा, पूनम देवी समेत अन्य वार्ड पार्षद शामिल हुए. |
दुबईः ऑलराउंडर सिद्धेश लाड ने अप्रैल में इंस्टाग्राम लाइव चैट में कहा था कि उनके लिए आंद्रे रसेल को गेंदबाजी करने से आसान जसप्रीत बुमराह के सामने बल्लेबाजी करना होगा। इस साल सिद्धेश लाड कोलकाता नाइटराइडर्स के सदस्य हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि किसी समय उन्हें पावर हिटर आंद्रे रसेल के सामने गेंदबाजी करना पड़ सकती है। लाड को कम से कम नेट्स पर तो रसेल को गेंदबाजी करनी पड़ सकती है। मगर 28 साल के लाड ने कहा कि अगर मौका मिला तो वो कोई दूसरा जरिया अपनाना पसंद करेंगे।
लाड ने केकेआर डॉट इन से बातचीत करते हुए कहा, 'अब तो तय है कि नेट्स पर ही सही, लेकिन रसेल को गेंदबाजी करनी पड़ेगी। मैं बुमराह का नेट्स और घरेलू मैचों में सामना कर चुका हूं। तो मुझे पता है कि क्या उम्मीद की जा रही है। रसेल के बारे में मुझे पता है कि वह कितने विध्वंसक बल्लेबाज हो सकते हैं। मैंने उन्हें कभी गेंदबाजी नहीं की। तो शायद अनिश्चितत्ता के चलते मैंने कहा था कि मैं आंद्रे रसेल को गेंदबाजी करना पसंद नहीं करूंगा। '
आंद्रे रसेल ने पिछले आईपीएल में 56. 66 की औसत और 204. 81 के स्ट्राइक रेट के साथ 510 रन बनाए थे, जिसमें चार अर्धशतक शामिल हैं। केकेआर के थिंक टैंक हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम और मेंटर डेविड हसी ने रसेल को तीसरे क्रम पर भेजने के संकेत दिए हैं ताकि उनके लंबे-लंबे शॉट जमाने की क्षमता का पूरा इस्तेमाल किया जा सके। हसी का तो यह भी मानना है कि अगर ज्यादा गेंदें खेलने को मिले तो रसेल टी20 क्रिकेट में दोहरा शतक जमा सकते हैं। यह वो उपलब्धि है तो अब तक कोई हासिल नहीं कर पाया।
Times Now Navbharat पर पढ़ें IPL 2022 News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
| दुबईः ऑलराउंडर सिद्धेश लाड ने अप्रैल में इंस्टाग्राम लाइव चैट में कहा था कि उनके लिए आंद्रे रसेल को गेंदबाजी करने से आसान जसप्रीत बुमराह के सामने बल्लेबाजी करना होगा। इस साल सिद्धेश लाड कोलकाता नाइटराइडर्स के सदस्य हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि किसी समय उन्हें पावर हिटर आंद्रे रसेल के सामने गेंदबाजी करना पड़ सकती है। लाड को कम से कम नेट्स पर तो रसेल को गेंदबाजी करनी पड़ सकती है। मगर अट्ठाईस साल के लाड ने कहा कि अगर मौका मिला तो वो कोई दूसरा जरिया अपनाना पसंद करेंगे। लाड ने केकेआर डॉट इन से बातचीत करते हुए कहा, 'अब तो तय है कि नेट्स पर ही सही, लेकिन रसेल को गेंदबाजी करनी पड़ेगी। मैं बुमराह का नेट्स और घरेलू मैचों में सामना कर चुका हूं। तो मुझे पता है कि क्या उम्मीद की जा रही है। रसेल के बारे में मुझे पता है कि वह कितने विध्वंसक बल्लेबाज हो सकते हैं। मैंने उन्हें कभी गेंदबाजी नहीं की। तो शायद अनिश्चितत्ता के चलते मैंने कहा था कि मैं आंद्रे रसेल को गेंदबाजी करना पसंद नहीं करूंगा। ' आंद्रे रसेल ने पिछले आईपीएल में छप्पन. छयासठ की औसत और दो सौ चार. इक्यासी के स्ट्राइक रेट के साथ पाँच सौ दस रन बनाए थे, जिसमें चार अर्धशतक शामिल हैं। केकेआर के थिंक टैंक हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम और मेंटर डेविड हसी ने रसेल को तीसरे क्रम पर भेजने के संकेत दिए हैं ताकि उनके लंबे-लंबे शॉट जमाने की क्षमता का पूरा इस्तेमाल किया जा सके। हसी का तो यह भी मानना है कि अगर ज्यादा गेंदें खेलने को मिले तो रसेल टीबीस क्रिकेट में दोहरा शतक जमा सकते हैं। यह वो उपलब्धि है तो अब तक कोई हासिल नहीं कर पाया। Times Now Navbharat पर पढ़ें IPL दो हज़ार बाईस News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें । |
नई दिल्ली : आपने ऐसी कई खबरें देखी और पढ़ी होगी जिसमें ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के साथ नए-नए तरह के फ्रॉड होते हैं. अब इसी तरह का एक और मामला सामने आया जिसमें ऑनलाइन शॉपिंग से बाहरी नुकसान हुआ. लेकिन इस बार नुक्सान सामान मंगवाने वाले का नहीं बल्कि कम्पनी का था जिसने iPhone 13 के आर्डर पर iPhone 14 भेज दिया.
जी हां! आपने बिल्कुल सही पढ़ा. ट्विटर पर वायरल हो रहे इस पोस्ट की मानें तो इसमें शख्स ने ऑनलाइन सेल का फायदा उठाते हुए iPhone 13 मंगवाया था. लेकिन किसी कारण उसे जो आर्डर रिसीव हुआ उसमें iPhone 13 नहीं था. डरने की बात नहीं है क्योंकि उसमें iPhone 13 की जगह पर iPhone-14 था. इसे देख कर शख्स की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसने ख़ुशी के मारे इस बात को ट्वीट कर दिया. शख्स के ट्वीट की मानें तो ये आर्डर उसने ऑनलाइन शॉपिंग एप्लीकशन फ्लिपकार्ट से किया था.
फ्लिपकार्ट से मिले इस आर्डर ने तो जैसे उसका दिन ही बना दिया. शख्स ने इस फ़ोन और अपने आर्डर का स्क्रीनशॉट शेयर किया है. फोटो में देखा जा सकता है कि कैसे शख्स ने फ्लिपकार्ट से iPhone-13 मंगवाया था लेकिन उसे आर्डर में iPhone-14 रिसीव हुआ है. इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूज़र व्यक्ति को खूब बधाई दे रहे हैं.
बता दें, ये अपनी तरह का पहला मामला है. इससे पहले भी इस तरह के फेरबदल हुए हैं लेकिन इन सभी ऑर्डर में घाटा शॉपिंग करने वाले शख्स को ही हुआ था. इस पोस्ट पर अब तक आठ हजार लाइक्स आ चुके हैं और कई लोगों ने इस पोस्ट को शेयर भी किया है. एक यूज़र ने इस ट्वीट पर कमेंट किया है, भाई की तो लॉटरी अल्ट्रा प्रोम मैक्स हो गई. एक अन्य यूज़र ने कमेंट करते हुए लिखा है- भाई की लॉटरी लग गई है.
| नई दिल्ली : आपने ऐसी कई खबरें देखी और पढ़ी होगी जिसमें ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के साथ नए-नए तरह के फ्रॉड होते हैं. अब इसी तरह का एक और मामला सामने आया जिसमें ऑनलाइन शॉपिंग से बाहरी नुकसान हुआ. लेकिन इस बार नुक्सान सामान मंगवाने वाले का नहीं बल्कि कम्पनी का था जिसने iPhone तेरह के आर्डर पर iPhone चौदह भेज दिया. जी हां! आपने बिल्कुल सही पढ़ा. ट्विटर पर वायरल हो रहे इस पोस्ट की मानें तो इसमें शख्स ने ऑनलाइन सेल का फायदा उठाते हुए iPhone तेरह मंगवाया था. लेकिन किसी कारण उसे जो आर्डर रिसीव हुआ उसमें iPhone तेरह नहीं था. डरने की बात नहीं है क्योंकि उसमें iPhone तेरह की जगह पर iPhone-चौदह था. इसे देख कर शख्स की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसने ख़ुशी के मारे इस बात को ट्वीट कर दिया. शख्स के ट्वीट की मानें तो ये आर्डर उसने ऑनलाइन शॉपिंग एप्लीकशन फ्लिपकार्ट से किया था. फ्लिपकार्ट से मिले इस आर्डर ने तो जैसे उसका दिन ही बना दिया. शख्स ने इस फ़ोन और अपने आर्डर का स्क्रीनशॉट शेयर किया है. फोटो में देखा जा सकता है कि कैसे शख्स ने फ्लिपकार्ट से iPhone-तेरह मंगवाया था लेकिन उसे आर्डर में iPhone-चौदह रिसीव हुआ है. इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूज़र व्यक्ति को खूब बधाई दे रहे हैं. बता दें, ये अपनी तरह का पहला मामला है. इससे पहले भी इस तरह के फेरबदल हुए हैं लेकिन इन सभी ऑर्डर में घाटा शॉपिंग करने वाले शख्स को ही हुआ था. इस पोस्ट पर अब तक आठ हजार लाइक्स आ चुके हैं और कई लोगों ने इस पोस्ट को शेयर भी किया है. एक यूज़र ने इस ट्वीट पर कमेंट किया है, भाई की तो लॉटरी अल्ट्रा प्रोम मैक्स हो गई. एक अन्य यूज़र ने कमेंट करते हुए लिखा है- भाई की लॉटरी लग गई है. |
गृहमंत्री अनिल विज (Anil Vij) ने दावा किया कि हरियाणा के किसानों (Farmers) के भरम तेजी से दूर हो रहे हैं और जल्द ही वह आंदोलन से मुंह फेर लेंगे।
चंडीगढ़। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस की तरफ से सोमवार को राज्यपाल (Governor) को तीन कृषि कानून खिलाफ दिए गए ज्ञापन को आधारहीन बताया है। चंडीगढ़ में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पल्ले कुछ भी नहीं रहा है।
वह अब दूसरों की भट्टी पर अपने दाने भूनने का काम करती है । अनिल विज (Anil Vij) ने दावा किया कि हरियाणा के किसानों के भरम तेजी से दूर हो रहे हैं और जल्द ही वह आंदोलन से मुंह फेर लेंगे।
सीजन में फसल खरीद का काम पूरा हो जाने के बाद किसानों के सामने असलियत आ जाएगी। उन्होंने कहा कि 3 कृषि कानूनों को जब सदन में रखा गया था तो कांग्रेस ने जमकर भ्रांतियां फैलाई थी लेकिन ना तो मंडिया बंद हुई। इसके अलावा सरकार ने एमएसपी घोषित कर कांग्रेस के दावों की पोल खोल दी। बड़े हुए एमएसपी का किसानों ने स्वागत भी किया है।
| गृहमंत्री अनिल विज ने दावा किया कि हरियाणा के किसानों के भरम तेजी से दूर हो रहे हैं और जल्द ही वह आंदोलन से मुंह फेर लेंगे। चंडीगढ़। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस की तरफ से सोमवार को राज्यपाल को तीन कृषि कानून खिलाफ दिए गए ज्ञापन को आधारहीन बताया है। चंडीगढ़ में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पल्ले कुछ भी नहीं रहा है। वह अब दूसरों की भट्टी पर अपने दाने भूनने का काम करती है । अनिल विज ने दावा किया कि हरियाणा के किसानों के भरम तेजी से दूर हो रहे हैं और जल्द ही वह आंदोलन से मुंह फेर लेंगे। सीजन में फसल खरीद का काम पूरा हो जाने के बाद किसानों के सामने असलियत आ जाएगी। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों को जब सदन में रखा गया था तो कांग्रेस ने जमकर भ्रांतियां फैलाई थी लेकिन ना तो मंडिया बंद हुई। इसके अलावा सरकार ने एमएसपी घोषित कर कांग्रेस के दावों की पोल खोल दी। बड़े हुए एमएसपी का किसानों ने स्वागत भी किया है। |
उदाहरण 1 और उदाहरण 2 में कौन-कौन सी मूलभूत बाते समान हैं? सुनीला की कक्षा का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करके बताइए कि उसने बच्चों के प्रत्युत्तरों के अनुसार अपनी मूल रणनीति में कहां परिवर्तन किया । यह भी बताइए कि इन परिवर्तनों के बावजूद कैसे उसने अपनी मुख्य दिशा को जारी रखा।
अब तक हमने रचनावादी कक्षाओं के बारे में जो भी देखा उससे कुछ बातें उभरती हैं। इनमें से कुछ का तो उल्लेख हम कर ही चुके हैं। अब कुछ और बातें देखते हैं ।
एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि कौन से कार्य, खेल या गतिविधियां कक्षा में बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रियता से भागीदार बनाने में मददगार होंगी। क्या सारे बच्चे किसी भी कार्य को अपने लिए उपयुक्त, रोचक व भागीदारी के लायक पाएंगे? कार्य का चुनाव छात्रों की पृष्ठभूमि, उनके स्तर तथा उन्हें सार्थक लगने वाले संदर्भ पर निर्भर है। हालांकि गतिविधियों के बारे में हम इकाई 7 में विस्तार से चर्चा करेंगे, किन्तु कक्षा की अन्तर्क्रियाओं की चर्चा करते हुए इस बात को ध्यान में रखना ज़रूरी है।
यह भी याद रखना चाहिए कि शिक्षक सिर्फ एक मददगार है। यह बात आपने इकाई 4 के उदाहरणों में व यहां भी देखी है। शिक्षक की यह भूमिका बच्चों को छूट देती है कि वे
की खोजबीन करें, जो कुछ सोचें उसे व्यक्त करें और अपनी समझ अपने सहपाठियों के साथ बांटे। ऐसे प्रश्न, जिनसे बच्चों को सोचने में तथा जो कुछ सोचें उसे कहने में मदद मिले, पूछ कर शिक्षक हर बच्ची को निहित अवधारणाओं का अपना स्कीमा विकसित करने में मदद देती है । इस प्रक्रिया में बच्चे अपनी समझ बांटते हैं और निर्मित करते हैं तथा अन्य बच्चों द्वारा व्यक्त विचारों का आदर करना सीखते हैं। इस संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षक बच्चों को जल्दी में आगे न धकेले, उनकी हंसी न उड़ाए और उनके मुंह में अपने शब्द न रखे। उसे धैर्यपूर्वक बच्चों को सोचने और अपने विचार को व्यक्त करने का समय देना होगा ।
बच्चों द्वारा कही बातों का आदर करने के अलावा शिक्षक का एक महत्वपूर्ण काम यह है कि कक्षा में जो कुछ बातें उभरे उन्हें इकट्ठा करके बांधे तथा बच्चों ने जो कुछ सीखा है उस पर उनका ध्यान केन्द्रित करने में मदद करे। चर्चा को बांधना होगा और सार्थक ढंग से गठित करना होगा ताकि जो कुछ कहा जाए, बच्चे उससे रिश्ता जोड़ सकें और सीखी जा रही अवध गरणा की एक छवि बना सकें। चूंकि ऐसे कई बच्चे हैं जिनके लिए सवाल हल करना आसान नहीं रहा होगा, इसलिए चर्चा का संचालन इस ढंग से करना होगा कि ये बच्चे भी जो हो रहा है उसे समझ सकें । तब ये बच्चे विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया आरम्भ करेंगे। ऐसी चर्चा के माध्यम से ये बच्चे अपने विचारों को सुदृढ़ कर सकेंगे। मसलन, उदाहरण 1 में शिक्षक बच्चों को यह समझने में मदद देती है कि सवाल हल करने के एक से अधिक सही तरीके हैं। इससे बच्चों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि ऐसी बहुत सी विधियां है जिनका उपयोग वे अपने हल / उत्तर की जांच के लिए कर सकते हैं। इससे उन्हें अपने हल ढूंढने में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता भी मिलती है । इस तरह की प्रक्रिया से इन्हें सही उत्तर तक पहुंचने में मदद मिलती है और संकिया तथा संक्रिया में शामिल अवधारणा की उनकी समझ बेहतर होती है ।
अभी जो उदाहरण हमने देखे उनमें बच्चे खुद सीख रहे हैं किन्तु उन्हें एक-दूसरे से बात करने और टोली में काम करने की छूट है। विचारों के आदान-प्रदान को विचारों की नकल नहीं माना जाता। बच्चों को यह समझने में मदद दी जाती है कि एक-दूसरे से बात करके तथा आपस में अपने विचारों और समझ को टटोलने से वे बहुत कुछ सीख सकते हैं । जैसा कि ऊपर कहा गया, एक महत्वपूर्ण बात वे यह सीख सकते हैं कि एक ही सवाल के कई हल सम्भव हैं। अगला अभ्यास इसी के बारे में है 1
रचनावादी कक्षा कैसे बनाएं ?
गतिविधि के कार्य को ध्यान से चुनिए ।
तुम एक ही प्रश्न को कितनी बार पूछोगे ?
चित्र 2: बच्चों की हंसी उड़ाना उनके सोचने की प्रक्रिया को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।
कक्षा में कैसे सिखाएं ?
अध्यापक को यह ध्यान देना चाहिए कि सभी बच्चे गतिविधियों में शामिल हों और उनमें रुचि लें।
बच्चों के साथ अपनी अन्तर्क्रिया का एक ऐसा उदाहरण दीजिए जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली हो कि गणित के एक ही सवाल के कई हल हो सकते हैं।
इस भाग में हमने सिखाने के कुछ ऐसे तरीकों पर गौर किया जिनसे सीखने में मदद मिलती है। अब हम इसके एक महत्वपूर्ण पहलू पर बात करेंगे। इस पहलू की झलक अब तक उदाहरणों में दिखी है, लेकिन साफ़-साफ़ नहीं ।
5.3 कक्षा की व्यवस्था
इस भाग में हम कक्षा में बच्चों के प्रबंधन के कुछ ऐसे तरीकों पर ध्यान देंगे जिनसे प्रत्येक बच्ची सीखे, और खुशी से सीखे। आइए इसका एक उदाहरण देखते हैं।
उदाहरण 3: दिनेश कक्षा 4 के बच्चों को मापन की इकाइयों से परिचित कराना चाहता था। बच्चों को पांच-पांच की टोलियों में बांट दिया गया। इसके बाद उन्हें एक-एक कार्ड दिया गया जो एक खेत को दर्शाता था । साथ में निम्नलिखित निर्देश दिए गएः
'मान लो कि तुम किसान हो और तुम्हारे पास जो कार्ड है वह तुम्हारी टोली का आम का बगीचा है। अब मान लो कि तुम इस बगीचे के चारों ओर तार का बाड़ा (fence) लगाना चाहते हो । साथ मिलकर पता करो कि तुममें से प्रत्येक को कितने तार की ज़रूरत होगी।'
चित्र 3: आम के बगीचों को दर्शाते हुए विभिन्न तरह के कार्ड जो बच्चों को दिए गए
दिनेश की योजना थी कि वह बच्चों को इस सवाल पर एक-दूसरे से चर्चा के लिए कुछ समय देगा । इस दौरान वह कक्षा में घूमकर देखेगा कि वे क्या कर रहे हैं ताकि यह तय कर सके कि चर्चाको आगे कैसे बढ़ा तथा उन्हें और क्या अनुभव दे । उसने इस कार्य का चयन सावधानीपूर्वक किया था, दो बातों का ध्यान रखते हुए • पहली, कि बच्चों को किसी माप के एक हिस्से का अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत व उसे नापने के तरीकों की समझ होनी चाहिए; और दूसरी, इस कार्य से उसे यह फीडबैक भी मिल जाएगा कि उसकी पिछली भिन्न सम्बंधी कक्षाओं में छात्र क्या सीखे हैं ।
इसलिए उसने बच्चों को सवाल पर चर्चा के लिए थोड़ा समय दिया और साथ ही साथ चर्चा जिस तरह आगे बढ़ रही थी उस पर भी नज़र रखे रहा कि कौन-कौन भाग नही ले रहे हैं, कौन से मुद्दे उठ रहे हैं, क्या बच्चे सवाल को पकड़ पा रहे हैं, क्या यह उन्हें रोचक लग रहा है, क्या उन्हें लगता है कि वे इसे कर सकते हैं, वगैरह ।
जब उसने महसूस किया कि प्रत्येक टोली ने सवाल पर चर्चा कर ली है और लगभग प्रत्येक सदस्य ने कुछ कह दिया है तब उसने उनसे कहा कि वे बताएं कि उन्होंने क्या चर्चा की। एक स्पष्ट विचार यह उभरा कि बाड़े की लम्बाई नापने के लिए उन्हें मापने की एक इकाई की आवश्यकता थी। कुछ ने सुझाया कि वे अपनी उंगलियों की लम्बाई व चौड़ाई का उपयोग करके ज़रूरी तार की लम्बाई निकाल सकते हैं। अन्य ने पैमाने या फीते के उपयोग का सुझाव भी दिया। अब दिनेश ने अपने द्वारा लाई गई तीलियां सामने रख दीं । ये छः छः सेंटीमीटर की
| उदाहरण एक और उदाहरण दो में कौन-कौन सी मूलभूत बाते समान हैं? सुनीला की कक्षा का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करके बताइए कि उसने बच्चों के प्रत्युत्तरों के अनुसार अपनी मूल रणनीति में कहां परिवर्तन किया । यह भी बताइए कि इन परिवर्तनों के बावजूद कैसे उसने अपनी मुख्य दिशा को जारी रखा। अब तक हमने रचनावादी कक्षाओं के बारे में जो भी देखा उससे कुछ बातें उभरती हैं। इनमें से कुछ का तो उल्लेख हम कर ही चुके हैं। अब कुछ और बातें देखते हैं । एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि कौन से कार्य, खेल या गतिविधियां कक्षा में बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रियता से भागीदार बनाने में मददगार होंगी। क्या सारे बच्चे किसी भी कार्य को अपने लिए उपयुक्त, रोचक व भागीदारी के लायक पाएंगे? कार्य का चुनाव छात्रों की पृष्ठभूमि, उनके स्तर तथा उन्हें सार्थक लगने वाले संदर्भ पर निर्भर है। हालांकि गतिविधियों के बारे में हम इकाई सात में विस्तार से चर्चा करेंगे, किन्तु कक्षा की अन्तर्क्रियाओं की चर्चा करते हुए इस बात को ध्यान में रखना ज़रूरी है। यह भी याद रखना चाहिए कि शिक्षक सिर्फ एक मददगार है। यह बात आपने इकाई चार के उदाहरणों में व यहां भी देखी है। शिक्षक की यह भूमिका बच्चों को छूट देती है कि वे की खोजबीन करें, जो कुछ सोचें उसे व्यक्त करें और अपनी समझ अपने सहपाठियों के साथ बांटे। ऐसे प्रश्न, जिनसे बच्चों को सोचने में तथा जो कुछ सोचें उसे कहने में मदद मिले, पूछ कर शिक्षक हर बच्ची को निहित अवधारणाओं का अपना स्कीमा विकसित करने में मदद देती है । इस प्रक्रिया में बच्चे अपनी समझ बांटते हैं और निर्मित करते हैं तथा अन्य बच्चों द्वारा व्यक्त विचारों का आदर करना सीखते हैं। इस संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षक बच्चों को जल्दी में आगे न धकेले, उनकी हंसी न उड़ाए और उनके मुंह में अपने शब्द न रखे। उसे धैर्यपूर्वक बच्चों को सोचने और अपने विचार को व्यक्त करने का समय देना होगा । बच्चों द्वारा कही बातों का आदर करने के अलावा शिक्षक का एक महत्वपूर्ण काम यह है कि कक्षा में जो कुछ बातें उभरे उन्हें इकट्ठा करके बांधे तथा बच्चों ने जो कुछ सीखा है उस पर उनका ध्यान केन्द्रित करने में मदद करे। चर्चा को बांधना होगा और सार्थक ढंग से गठित करना होगा ताकि जो कुछ कहा जाए, बच्चे उससे रिश्ता जोड़ सकें और सीखी जा रही अवध गरणा की एक छवि बना सकें। चूंकि ऐसे कई बच्चे हैं जिनके लिए सवाल हल करना आसान नहीं रहा होगा, इसलिए चर्चा का संचालन इस ढंग से करना होगा कि ये बच्चे भी जो हो रहा है उसे समझ सकें । तब ये बच्चे विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया आरम्भ करेंगे। ऐसी चर्चा के माध्यम से ये बच्चे अपने विचारों को सुदृढ़ कर सकेंगे। मसलन, उदाहरण एक में शिक्षक बच्चों को यह समझने में मदद देती है कि सवाल हल करने के एक से अधिक सही तरीके हैं। इससे बच्चों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि ऐसी बहुत सी विधियां है जिनका उपयोग वे अपने हल / उत्तर की जांच के लिए कर सकते हैं। इससे उन्हें अपने हल ढूंढने में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता भी मिलती है । इस तरह की प्रक्रिया से इन्हें सही उत्तर तक पहुंचने में मदद मिलती है और संकिया तथा संक्रिया में शामिल अवधारणा की उनकी समझ बेहतर होती है । अभी जो उदाहरण हमने देखे उनमें बच्चे खुद सीख रहे हैं किन्तु उन्हें एक-दूसरे से बात करने और टोली में काम करने की छूट है। विचारों के आदान-प्रदान को विचारों की नकल नहीं माना जाता। बच्चों को यह समझने में मदद दी जाती है कि एक-दूसरे से बात करके तथा आपस में अपने विचारों और समझ को टटोलने से वे बहुत कुछ सीख सकते हैं । जैसा कि ऊपर कहा गया, एक महत्वपूर्ण बात वे यह सीख सकते हैं कि एक ही सवाल के कई हल सम्भव हैं। अगला अभ्यास इसी के बारे में है एक रचनावादी कक्षा कैसे बनाएं ? गतिविधि के कार्य को ध्यान से चुनिए । तुम एक ही प्रश्न को कितनी बार पूछोगे ? चित्र दो: बच्चों की हंसी उड़ाना उनके सोचने की प्रक्रिया को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। कक्षा में कैसे सिखाएं ? अध्यापक को यह ध्यान देना चाहिए कि सभी बच्चे गतिविधियों में शामिल हों और उनमें रुचि लें। बच्चों के साथ अपनी अन्तर्क्रिया का एक ऐसा उदाहरण दीजिए जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली हो कि गणित के एक ही सवाल के कई हल हो सकते हैं। इस भाग में हमने सिखाने के कुछ ऐसे तरीकों पर गौर किया जिनसे सीखने में मदद मिलती है। अब हम इसके एक महत्वपूर्ण पहलू पर बात करेंगे। इस पहलू की झलक अब तक उदाहरणों में दिखी है, लेकिन साफ़-साफ़ नहीं । पाँच.तीन कक्षा की व्यवस्था इस भाग में हम कक्षा में बच्चों के प्रबंधन के कुछ ऐसे तरीकों पर ध्यान देंगे जिनसे प्रत्येक बच्ची सीखे, और खुशी से सीखे। आइए इसका एक उदाहरण देखते हैं। उदाहरण तीन: दिनेश कक्षा चार के बच्चों को मापन की इकाइयों से परिचित कराना चाहता था। बच्चों को पांच-पांच की टोलियों में बांट दिया गया। इसके बाद उन्हें एक-एक कार्ड दिया गया जो एक खेत को दर्शाता था । साथ में निम्नलिखित निर्देश दिए गएः 'मान लो कि तुम किसान हो और तुम्हारे पास जो कार्ड है वह तुम्हारी टोली का आम का बगीचा है। अब मान लो कि तुम इस बगीचे के चारों ओर तार का बाड़ा लगाना चाहते हो । साथ मिलकर पता करो कि तुममें से प्रत्येक को कितने तार की ज़रूरत होगी।' चित्र तीन: आम के बगीचों को दर्शाते हुए विभिन्न तरह के कार्ड जो बच्चों को दिए गए दिनेश की योजना थी कि वह बच्चों को इस सवाल पर एक-दूसरे से चर्चा के लिए कुछ समय देगा । इस दौरान वह कक्षा में घूमकर देखेगा कि वे क्या कर रहे हैं ताकि यह तय कर सके कि चर्चाको आगे कैसे बढ़ा तथा उन्हें और क्या अनुभव दे । उसने इस कार्य का चयन सावधानीपूर्वक किया था, दो बातों का ध्यान रखते हुए • पहली, कि बच्चों को किसी माप के एक हिस्से का अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत व उसे नापने के तरीकों की समझ होनी चाहिए; और दूसरी, इस कार्य से उसे यह फीडबैक भी मिल जाएगा कि उसकी पिछली भिन्न सम्बंधी कक्षाओं में छात्र क्या सीखे हैं । इसलिए उसने बच्चों को सवाल पर चर्चा के लिए थोड़ा समय दिया और साथ ही साथ चर्चा जिस तरह आगे बढ़ रही थी उस पर भी नज़र रखे रहा कि कौन-कौन भाग नही ले रहे हैं, कौन से मुद्दे उठ रहे हैं, क्या बच्चे सवाल को पकड़ पा रहे हैं, क्या यह उन्हें रोचक लग रहा है, क्या उन्हें लगता है कि वे इसे कर सकते हैं, वगैरह । जब उसने महसूस किया कि प्रत्येक टोली ने सवाल पर चर्चा कर ली है और लगभग प्रत्येक सदस्य ने कुछ कह दिया है तब उसने उनसे कहा कि वे बताएं कि उन्होंने क्या चर्चा की। एक स्पष्ट विचार यह उभरा कि बाड़े की लम्बाई नापने के लिए उन्हें मापने की एक इकाई की आवश्यकता थी। कुछ ने सुझाया कि वे अपनी उंगलियों की लम्बाई व चौड़ाई का उपयोग करके ज़रूरी तार की लम्बाई निकाल सकते हैं। अन्य ने पैमाने या फीते के उपयोग का सुझाव भी दिया। अब दिनेश ने अपने द्वारा लाई गई तीलियां सामने रख दीं । ये छः छः सेंटीमीटर की |
अंतिम समुद्र है और मध्य में द्वीप समुद्र हैं। सब एक दूसरे को वेष्टित किये हुये हैं और विस्तार में एक से दूसरे दूने दूने प्रमाण वाले हैं। "सब ही समुद्र चित्रापृथ्वी को खण्डित कर बज्जापृथ्वी के ऊपर और सब द्वीप चित्रा पृथ्वी के ऊपर स्थित है।"
सर्वप्रथम जंबूद्वीप है। यह १ लाख योजन विस्तृत है। इसे चारों ओर से घेरकर लवणसमुद्र है वह २ लाख योजन विस्तृत है। इसे घेरकर धातकी-खण्ड द्वीप है यह ४ लाख योजन विस्तृत है इस द्वीप को बेष्टित कर ८ लाख योजन विस्तृत कालोद समुद्र है । इसे घेरकर पुष्करद्वीप है यह १६ लाख योजन बिस्तार वाला है। इसे घेरकर ३२ लाख योजन विस्तृत पुष्करसमुद्र है। आगे के द्वोप-समुद्र भी पुष्करद्वीप समुद्र समान ही सबूश नाम वाले हैं। अंतिम द्वीप का नाम स्वयंमूरमण द्वीप है और अंतिम समुद्र का नाम स्वयंभूरमण समुद्र है। ये द्वीप समुद्र असंख्यात हैं। अतः विस्तार में दूने- दूने प्रमाण वाले होने से आगे असंख्यात असंख्यात योजन विस्तार वाले होले गए हैं। इनके नाम भी आगे ये हो जंबूद्वीप आदि पुनः पुनः आते गये हैं क्योंकि शब्द संख्यात हैं अतः असंख्यात के नाम में वे हो फिर से आयेंगे ही आयेंगे ।
मनुष्यलोक - पुष्करवर द्वीप के बीच में चूड़ी के समान आकार वाला एक मानुषोत्तर पर्वत है । इसके बाहर मनुष्यों का अस्तित्व नहीं है इसके अभ्यंतर भाग में जंबूद्वीप धातकीखंड और आधापुष्करवर द्वीप इन ढाई द्वीपों में ही मनुष्यों का निवास होने से इतने ही क्षेत्र को मनुष्यलोक कहते हैं। यह ४५ लाख योजन प्रमाण है । जंबूद्वीप १ लाख + लवण समुद्र दोनों तरफ २+२ लाख, धातकीखण्ड दोनों तरफ से ४+४ लाख कालोदधि समुद्र ८८ लाख और पुष्करार्ध ८+5 लाख ४५ । ऐसे ४५ लाख योजन हो जाते हैं ।
ऊर्ध्वलोक - एक लाख योजन कम ७ राजू में ऊर्ध्वलोक स्थित है। इसमें सौधर्म, ईशान, सानत्कुमार माहेन्द्र, ब्रह्म, ब्रह्मोत्तर, लांतव, कापिष्ठ, शुक्र, महाशुक्र, शतारसहस्रार, आनत, प्राणत और आरण-अच्युत ये सोलह स्वर्ग हैं ।
इनके ऊपर अधोग्रॅवेयक, मध्यम प्रवेयक और उपरिम प्रवेयक ऐसे मुख्य तीन ग्रंवेयक हैं। इनमें से प्रत्येक के अधो, मध्य और अर्ध्व ये तीन-तीन भेद होने से नव प्रवेयक हो
1. तिलोयपण्णत्ति, पृ० ५३० 2. तिलोयपण्णत्ति पृ० ४६५ ३. तिलोय १० १० १६ । | अंतिम समुद्र है और मध्य में द्वीप समुद्र हैं। सब एक दूसरे को वेष्टित किये हुये हैं और विस्तार में एक से दूसरे दूने दूने प्रमाण वाले हैं। "सब ही समुद्र चित्रापृथ्वी को खण्डित कर बज्जापृथ्वी के ऊपर और सब द्वीप चित्रा पृथ्वी के ऊपर स्थित है।" सर्वप्रथम जंबूद्वीप है। यह एक लाख योजन विस्तृत है। इसे चारों ओर से घेरकर लवणसमुद्र है वह दो लाख योजन विस्तृत है। इसे घेरकर धातकी-खण्ड द्वीप है यह चार लाख योजन विस्तृत है इस द्वीप को बेष्टित कर आठ लाख योजन विस्तृत कालोद समुद्र है । इसे घेरकर पुष्करद्वीप है यह सोलह लाख योजन बिस्तार वाला है। इसे घेरकर बत्तीस लाख योजन विस्तृत पुष्करसमुद्र है। आगे के द्वोप-समुद्र भी पुष्करद्वीप समुद्र समान ही सबूश नाम वाले हैं। अंतिम द्वीप का नाम स्वयंमूरमण द्वीप है और अंतिम समुद्र का नाम स्वयंभूरमण समुद्र है। ये द्वीप समुद्र असंख्यात हैं। अतः विस्तार में दूने- दूने प्रमाण वाले होने से आगे असंख्यात असंख्यात योजन विस्तार वाले होले गए हैं। इनके नाम भी आगे ये हो जंबूद्वीप आदि पुनः पुनः आते गये हैं क्योंकि शब्द संख्यात हैं अतः असंख्यात के नाम में वे हो फिर से आयेंगे ही आयेंगे । मनुष्यलोक - पुष्करवर द्वीप के बीच में चूड़ी के समान आकार वाला एक मानुषोत्तर पर्वत है । इसके बाहर मनुष्यों का अस्तित्व नहीं है इसके अभ्यंतर भाग में जंबूद्वीप धातकीखंड और आधापुष्करवर द्वीप इन ढाई द्वीपों में ही मनुष्यों का निवास होने से इतने ही क्षेत्र को मनुष्यलोक कहते हैं। यह पैंतालीस लाख योजन प्रमाण है । जंबूद्वीप एक लाख + लवण समुद्र दोनों तरफ दो+दो लाख, धातकीखण्ड दोनों तरफ से चार+चार लाख कालोदधि समुद्र अठासी लाख और पुष्करार्ध आठ+पाँच लाख पैंतालीस । ऐसे पैंतालीस लाख योजन हो जाते हैं । ऊर्ध्वलोक - एक लाख योजन कम सात राजू में ऊर्ध्वलोक स्थित है। इसमें सौधर्म, ईशान, सानत्कुमार माहेन्द्र, ब्रह्म, ब्रह्मोत्तर, लांतव, कापिष्ठ, शुक्र, महाशुक्र, शतारसहस्रार, आनत, प्राणत और आरण-अच्युत ये सोलह स्वर्ग हैं । इनके ऊपर अधोग्रॅवेयक, मध्यम प्रवेयक और उपरिम प्रवेयक ऐसे मुख्य तीन ग्रंवेयक हैं। इनमें से प्रत्येक के अधो, मध्य और अर्ध्व ये तीन-तीन भेद होने से नव प्रवेयक हो एक. तिलोयपण्णत्ति, पृशून्य पाँच सौ तीस दो. तिलोयपण्णत्ति पृशून्य चार सौ पैंसठ तीन. तिलोय दस दस सोलह । |
ओडिशा का विश्वविख्यात पुरी जगन्नाथ मंदिर एक बार फिर से विवादों में घिर गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता के साथ मंदिर की यात्रा के दौरान वहां के सहायकों ने दुर्व्यवहार किया था. अब इस घटना पर राष्ट्रपति भवन ने गहरी निराशा जताई है.
यह चौंकाने वाला मामला उस समय सामने आया जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजीटीए) ने दुर्व्यवहार के लिए अपने 3 आरोपी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है.
राष्ट्रपति कोविंद अपनी पत्नी सविता के साथ 18 मार्च को इस प्रतिष्ठित मंदिर में पहली बार दर्शन के लिए गए थे. कोविंद दंपति की मंदिर यात्रा को लेकर वहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, लेकिन उनके मंदिर दर्शन के दौरान कुछ सहायक सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनके करीब पहुंच गए और उन्होंने इस वीआईपी दंपति के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की बल्कि कोहनी से उन्हें टक्कर भी मारी.
हालांकि मंदिर के मुख्य प्रशासक आईएएस प्रदीप्ता कुमार मोहपात्रा ने घटना के बारे में कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया. माना जा रहा है कि मंदिर और जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया, फिलहाल आरोपियों को नोटिस जारी करने का फैसला लिया गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में आईएएस मोहपात्रा ने कहा, 'हमें राष्ट्रपति भवन से पत्र मिला है. हमने मंदिर की मैनेजिंग कमिटी से इस संबंध बातचीत भी की है. हम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. '
मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सहायकों ने कोविंद दंपति के रास्ते को उस समय रोक दिया था जब वे मंदिर में पूजा करने जा रहे थे.
दूसरी ओर, मंदिर से जुड़े अधिकारियों का कहना था कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को लेकर छोटी सी घटना थी. उनकी मंदिर यात्रा के दौरान कुछ सहायकों और सरकारी अफसरों को ही मंदिर के अंदर जाने दिया गया. जबकि आम लोगों के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए थे. इस दौरान कुछ सहायक उनसे मिलने को लेकर आतुर थे और उनसे बात करना चाहते थे, इसलिए वे राष्ट्रपति के करीब चले गए.
इससे पहले अप्रैल में मंदिर का चाबी खोने का मामला सामने आया. इस मामले पर वहां की राजनीति भी गरमा गई है. मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है.
| ओडिशा का विश्वविख्यात पुरी जगन्नाथ मंदिर एक बार फिर से विवादों में घिर गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता के साथ मंदिर की यात्रा के दौरान वहां के सहायकों ने दुर्व्यवहार किया था. अब इस घटना पर राष्ट्रपति भवन ने गहरी निराशा जताई है. यह चौंकाने वाला मामला उस समय सामने आया जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने दुर्व्यवहार के लिए अपने तीन आरोपी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है. राष्ट्रपति कोविंद अपनी पत्नी सविता के साथ अट्ठारह मार्च को इस प्रतिष्ठित मंदिर में पहली बार दर्शन के लिए गए थे. कोविंद दंपति की मंदिर यात्रा को लेकर वहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, लेकिन उनके मंदिर दर्शन के दौरान कुछ सहायक सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनके करीब पहुंच गए और उन्होंने इस वीआईपी दंपति के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की बल्कि कोहनी से उन्हें टक्कर भी मारी. हालांकि मंदिर के मुख्य प्रशासक आईएएस प्रदीप्ता कुमार मोहपात्रा ने घटना के बारे में कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया. माना जा रहा है कि मंदिर और जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया, फिलहाल आरोपियों को नोटिस जारी करने का फैसला लिया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में आईएएस मोहपात्रा ने कहा, 'हमें राष्ट्रपति भवन से पत्र मिला है. हमने मंदिर की मैनेजिंग कमिटी से इस संबंध बातचीत भी की है. हम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. ' मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सहायकों ने कोविंद दंपति के रास्ते को उस समय रोक दिया था जब वे मंदिर में पूजा करने जा रहे थे. दूसरी ओर, मंदिर से जुड़े अधिकारियों का कहना था कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को लेकर छोटी सी घटना थी. उनकी मंदिर यात्रा के दौरान कुछ सहायकों और सरकारी अफसरों को ही मंदिर के अंदर जाने दिया गया. जबकि आम लोगों के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए थे. इस दौरान कुछ सहायक उनसे मिलने को लेकर आतुर थे और उनसे बात करना चाहते थे, इसलिए वे राष्ट्रपति के करीब चले गए. इससे पहले अप्रैल में मंदिर का चाबी खोने का मामला सामने आया. इस मामले पर वहां की राजनीति भी गरमा गई है. मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है. |
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कोरोना वायरस महामारी का असर देश में लगातार बढ़ता जा रहा है. मंगलवार सुबह स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 29 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है. जबकि अबतक देश में इस महामारी की वजह से 934 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
मंगलवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नए आंकड़े जारी किए गए. जिसके मुताबिक, देश में अभी कोरोना वायरस के कुल केस की संख्या 29 हजार 435 है. जबकि अबतक 934 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
राहत की बात ये है कि देश में अबतक 6869 लोग इस महामारी को मात देकर ठीक हो चुके हैं. देश में कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है.
अगर पिछले 24 घंटों की बात करें तो देश में करीब 1543 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 62 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. जो एक दिन में आया अबतक का सबसे अधिक आंकड़ा है.
देश में कोरोना वायरस का सबसे अधिक कहर महाराष्ट्र में देखने को मिला है. राज्य में अबतक कोरोना वायरस के कुल 8590 केस सामने आ चुके हैं, जबकि 369 लोगों की मौत हो चुकी है. महाराष्ट्र के बाद गुजरात और दिल्ली में सबसे अधिक मामले हैं, जहां कुल केस की संख्या 3000 का आंकड़ा पार कर चुकी है. देश में अबतक 6 लाख से अधिक कोरोना वायरस के टेस्ट हो चुके हैं.
गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लागू है और ये लॉकडाउन 3 मई को खत्म हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इसी मसले पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी, जिसमें 3 मई के बाद की रणनीति पर चर्चा की गई.
प्रधानमंत्री की बैठक से इस तरह के संकेत सामने आए कि देश में 3 मई के बाद लॉकडाउन उन इलाकों में जारी रह सकता है जहां पर कोरोना वायरस के मामले हैं.
| कोरोना वायरस महामारी का असर देश में लगातार बढ़ता जा रहा है. मंगलवार सुबह स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या उनतीस हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है. जबकि अबतक देश में इस महामारी की वजह से नौ सौ चौंतीस लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. मंगलवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नए आंकड़े जारी किए गए. जिसके मुताबिक, देश में अभी कोरोना वायरस के कुल केस की संख्या उनतीस हजार चार सौ पैंतीस है. जबकि अबतक नौ सौ चौंतीस लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. राहत की बात ये है कि देश में अबतक छः हज़ार आठ सौ उनहत्तर लोग इस महामारी को मात देकर ठीक हो चुके हैं. देश में कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. अगर पिछले चौबीस घंटाटों की बात करें तो देश में करीब एक हज़ार पाँच सौ तैंतालीस नए मामले सामने आए हैं, जबकि बासठ लोगों ने अपनी जान गंवाई है. जो एक दिन में आया अबतक का सबसे अधिक आंकड़ा है. देश में कोरोना वायरस का सबसे अधिक कहर महाराष्ट्र में देखने को मिला है. राज्य में अबतक कोरोना वायरस के कुल आठ हज़ार पाँच सौ नब्बे केस सामने आ चुके हैं, जबकि तीन सौ उनहत्तर लोगों की मौत हो चुकी है. महाराष्ट्र के बाद गुजरात और दिल्ली में सबसे अधिक मामले हैं, जहां कुल केस की संख्या तीन हज़ार का आंकड़ा पार कर चुकी है. देश में अबतक छः लाख से अधिक कोरोना वायरस के टेस्ट हो चुके हैं. गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लागू है और ये लॉकडाउन तीन मई को खत्म हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इसी मसले पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी, जिसमें तीन मई के बाद की रणनीति पर चर्चा की गई. प्रधानमंत्री की बैठक से इस तरह के संकेत सामने आए कि देश में तीन मई के बाद लॉकडाउन उन इलाकों में जारी रह सकता है जहां पर कोरोना वायरस के मामले हैं. |
लखनऊः उत्तर प्रदेश के सियासी गुणा-भाग पर असर डालने में सक्षम जातियों में अपनी पैठ रखने वाली एक दर्जन से ज्यादा छोटी पार्टियां राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे बड़े दलों के साथ मोलभाव करने में जुटी हैं। खासकर पिछड़ी जातियों में असर रखने वाली यह पार्टियां भाजपा, सपा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के लिए मुनाफे का सौदा साबित होती रही है क्योंकि जातीय समीकरण के चलते कुछ हजार वोट भी खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।
वर्ष 2017 में 32 ऐसी छोटी पार्टियां थी जिनके प्रत्याशियों ने 5000 से लेकर 50000 तक वोट हासिल किए थे। छह ऐसे दल भी थे जिनके प्रत्याशियों ने 50,000 से ज्यादा वोट पाए थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में विभिन्न पार्टियों के कम से कम आठ प्रत्याशी 1000 से कम वोट के अंतर से जीते थे। डुमरियागंज सीट से भाजपा प्रत्याशी राघवेंद्र सिंह की बसपा उम्मीदवार सैयदा खातून पर 171 वोटों की जीत मतों की संख्या के लिहाज से सबसे नजदीकी थी। ऐसे में छोटी राजनीतिक पार्टियों की अहमियत बड़ी पार्टियों की नजर में काफी बढ़ जाती है।
मछुआरा समुदाय पर प्रभाव रखने वाली निषाद पार्टी भाजपा के साथ मोल भाव में जुटी है। उसके मुखिया संजय निषाद भाजपा से आगामी विधानसभा चुनाव में खुद को उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की मांग कर रहे हैं। करीब आधा दर्जन लोकसभा क्षेत्रों में निषाद समुदाय यानी मछुआरा बिरादरी की खासी तादाद है। वहीं, अपना दल सोनेलाल का कुर्मी बिरादरी में खासा प्रभुत्व है। वर्ष 2018 में सपा ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण को गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में टिकट दी थी और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के इस गढ़ में सेंध लगाते हुए यह सीट जीत ली थी। तब गोरखपुर सीट योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होने के कारण रिक्त हुई थी।
। उसने तब गोरखपुर से सांसद रहे प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर से टिकट दिया और वह यहां भी जीत गए। वर्ष 2017 में भाजपा ने अपना दल सोनेलाल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से गठबंधन किया था। तब अपना दल ने नौ तथा सुभासपा ने चार सीटें जीती थीं। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था लेकिन मुख्यमंत्री से तल्खी की वजह से वह भाजपा से अलग हो गए थे। राजभर ने हाल ही में भागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है, जिसमें सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी शामिल है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में 200 से ज्यादा पंजीकृत पार्टियों ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। वहीं, 2017 के चुनाव में 290 पार्टियों ने किस्मत आजमाई थी। सपा के साथ राष्ट्रीय लोक दल, महान दल, जनवादी सोशलिस्ट पार्टी, तथा कुछ अन्य छोटे दल हैं। महान दल का शाक्य, सैनी, मौर्य तथा कुशवाहा बिरादरियों में प्रभाव माना जाता है। ऐसी अपेक्षा है कि इससे सपा को अति पिछड़े वर्ग के कुछ वोट मिल सकते हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग में 14% की हिस्सेदारी रखते हैं। कभी सपा के कद्दावर नेता रहे शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (प्रसपा) भी भाजपा के खिलाफ एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रही है। प्रसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक मिश्रा ने बताया 'पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। गठबंधन के लिए कई पार्टियों से बातचीत चल रही है। जल्द ही इस बारे में घोषणा होगी। '
सपा से गठबंधन की संभावना के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी ने प्रसपा से गठबंधन करने से इंकार कर दिया है। 'हम गैर भाजपावाद पर मजबूती से कायम रहेंगे। ' विधानसभा चुनाव के लिए तैयार चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) भी छोटे दलों के साथ गठबंधन की कोशिश में है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले थे। हालांकि संजय सिंह ने इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया था।
| लखनऊः उत्तर प्रदेश के सियासी गुणा-भाग पर असर डालने में सक्षम जातियों में अपनी पैठ रखने वाली एक दर्जन से ज्यादा छोटी पार्टियां राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे बड़े दलों के साथ मोलभाव करने में जुटी हैं। खासकर पिछड़ी जातियों में असर रखने वाली यह पार्टियां भाजपा, सपा, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के लिए मुनाफे का सौदा साबित होती रही है क्योंकि जातीय समीकरण के चलते कुछ हजार वोट भी खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं। वर्ष दो हज़ार सत्रह में बत्तीस ऐसी छोटी पार्टियां थी जिनके प्रत्याशियों ने पाँच हज़ार से लेकर पचास हज़ार तक वोट हासिल किए थे। छह ऐसे दल भी थे जिनके प्रत्याशियों ने पचास,शून्य से ज्यादा वोट पाए थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में विभिन्न पार्टियों के कम से कम आठ प्रत्याशी एक हज़ार से कम वोट के अंतर से जीते थे। डुमरियागंज सीट से भाजपा प्रत्याशी राघवेंद्र सिंह की बसपा उम्मीदवार सैयदा खातून पर एक सौ इकहत्तर वोटों की जीत मतों की संख्या के लिहाज से सबसे नजदीकी थी। ऐसे में छोटी राजनीतिक पार्टियों की अहमियत बड़ी पार्टियों की नजर में काफी बढ़ जाती है। मछुआरा समुदाय पर प्रभाव रखने वाली निषाद पार्टी भाजपा के साथ मोल भाव में जुटी है। उसके मुखिया संजय निषाद भाजपा से आगामी विधानसभा चुनाव में खुद को उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की मांग कर रहे हैं। करीब आधा दर्जन लोकसभा क्षेत्रों में निषाद समुदाय यानी मछुआरा बिरादरी की खासी तादाद है। वहीं, अपना दल सोनेलाल का कुर्मी बिरादरी में खासा प्रभुत्व है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में सपा ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण को गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में टिकट दी थी और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के इस गढ़ में सेंध लगाते हुए यह सीट जीत ली थी। तब गोरखपुर सीट योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होने के कारण रिक्त हुई थी। । उसने तब गोरखपुर से सांसद रहे प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर से टिकट दिया और वह यहां भी जीत गए। वर्ष दो हज़ार सत्रह में भाजपा ने अपना दल सोनेलाल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया था। तब अपना दल ने नौ तथा सुभासपा ने चार सीटें जीती थीं। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था लेकिन मुख्यमंत्री से तल्खी की वजह से वह भाजपा से अलग हो गए थे। राजभर ने हाल ही में भागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है, जिसमें सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी शामिल है। वर्ष दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में दो सौ से ज्यादा पंजीकृत पार्टियों ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। वहीं, दो हज़ार सत्रह के चुनाव में दो सौ नब्बे पार्टियों ने किस्मत आजमाई थी। सपा के साथ राष्ट्रीय लोक दल, महान दल, जनवादी सोशलिस्ट पार्टी, तथा कुछ अन्य छोटे दल हैं। महान दल का शाक्य, सैनी, मौर्य तथा कुशवाहा बिरादरियों में प्रभाव माना जाता है। ऐसी अपेक्षा है कि इससे सपा को अति पिछड़े वर्ग के कुछ वोट मिल सकते हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग में चौदह% की हिस्सेदारी रखते हैं। कभी सपा के कद्दावर नेता रहे शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया भी भाजपा के खिलाफ एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रही है। प्रसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक मिश्रा ने बताया 'पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। गठबंधन के लिए कई पार्टियों से बातचीत चल रही है। जल्द ही इस बारे में घोषणा होगी। ' सपा से गठबंधन की संभावना के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी ने प्रसपा से गठबंधन करने से इंकार कर दिया है। 'हम गैर भाजपावाद पर मजबूती से कायम रहेंगे। ' विधानसभा चुनाव के लिए तैयार चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी भी छोटे दलों के साथ गठबंधन की कोशिश में है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले थे। हालांकि संजय सिंह ने इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया था। |
ज्ञात हो कि शहर के नागरिकों की सुविधा के लिए रामेश्वर मंदिर से बागेफिरदौस मस्जिद तक स्व. राजीव गांधी उड़ान पुल निर्माण किया गया था लेकिन निम्न दर्जे का निर्माण होने के कारण यह उड़ान पुल हमेशा से विवादों में घिरा रहा है। उड़ान पुल मरम्मत के नाम पर हर वर्ष भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया जाता है। लगभग छह महीना पहले एसटी डिपो के पास उड़ान पुल का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था जिसके कारण उड़ान पुल मरम्मत के लिए एक महीने तक बंद कर दिया गया था। मनपा प्रशासन द्वारा उड़ान पुल की मरम्मत करवाकर एक महीने के बाद आवागमन के लिये खोल दिया गया था। लेकिन उड़ान पुल की मरम्मत भी सही ठंग से न करके केवल मरहम लगाकर के कर दिया गया था। जिसके कारण उड़ान पुल जगह-जगह टूट गया था जिसके कारण भारी वाहनों के आवागमन से उड़ान पुल वाहन चालकों को हिलता हुआ महसूस होने लगा था। उड़ान पुल हिलने की शिकायत स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन से की थी, दुर्घटना की संभावना को ध्यान में रखते हुए मनपा प्रशासन ने उड़ान पुल को बरसात से पूर्व ही मरम्मत करने के लिए भारी वाहनों के लिये बंद कर दिया है और उड़ान पुल के मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है। उड़ान पुल की क्षमता को देखते हुए भारी वाहनों के लिए यह उड़ान पुल हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है।
स्व. राजीव गांधी उड़ान पुल भारी वाहनों के आवागमन के लिए नहीं बनाया गया था इसके बावजूद उड़ान पुल से छोटे-बड़े सभी वाहनों का आवागमन रहता था। भारी वाहनों के आवागमन के लिए उड़ान पुल की क्षमता न होने के बावजूद भी भारी वाहनों का आवागमन होता था। भारी वाहनों के आवागमन के कारण ही उड़ान पुल के लिए खतरा पैदा हो गया है, आगामी दिनों में कोई दुर्घटना घटित न हो इसलिए स्व. राजीव गांधी उड़ान पुल से भारी वाहनों का आवागमन हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है।
| ज्ञात हो कि शहर के नागरिकों की सुविधा के लिए रामेश्वर मंदिर से बागेफिरदौस मस्जिद तक स्व. राजीव गांधी उड़ान पुल निर्माण किया गया था लेकिन निम्न दर्जे का निर्माण होने के कारण यह उड़ान पुल हमेशा से विवादों में घिरा रहा है। उड़ान पुल मरम्मत के नाम पर हर वर्ष भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया जाता है। लगभग छह महीना पहले एसटी डिपो के पास उड़ान पुल का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था जिसके कारण उड़ान पुल मरम्मत के लिए एक महीने तक बंद कर दिया गया था। मनपा प्रशासन द्वारा उड़ान पुल की मरम्मत करवाकर एक महीने के बाद आवागमन के लिये खोल दिया गया था। लेकिन उड़ान पुल की मरम्मत भी सही ठंग से न करके केवल मरहम लगाकर के कर दिया गया था। जिसके कारण उड़ान पुल जगह-जगह टूट गया था जिसके कारण भारी वाहनों के आवागमन से उड़ान पुल वाहन चालकों को हिलता हुआ महसूस होने लगा था। उड़ान पुल हिलने की शिकायत स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन से की थी, दुर्घटना की संभावना को ध्यान में रखते हुए मनपा प्रशासन ने उड़ान पुल को बरसात से पूर्व ही मरम्मत करने के लिए भारी वाहनों के लिये बंद कर दिया है और उड़ान पुल के मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है। उड़ान पुल की क्षमता को देखते हुए भारी वाहनों के लिए यह उड़ान पुल हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। स्व. राजीव गांधी उड़ान पुल भारी वाहनों के आवागमन के लिए नहीं बनाया गया था इसके बावजूद उड़ान पुल से छोटे-बड़े सभी वाहनों का आवागमन रहता था। भारी वाहनों के आवागमन के लिए उड़ान पुल की क्षमता न होने के बावजूद भी भारी वाहनों का आवागमन होता था। भारी वाहनों के आवागमन के कारण ही उड़ान पुल के लिए खतरा पैदा हो गया है, आगामी दिनों में कोई दुर्घटना घटित न हो इसलिए स्व. राजीव गांधी उड़ान पुल से भारी वाहनों का आवागमन हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। |
"जो कह रामु लखनु बैदेही ।
सूर्य-ग्रहण के पर्व काल के उत्तम समय पर पूरे पर्वकाल में ही इस मन्त्र को जपते रहें, तो यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है । इसके पश्चात् जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र को सात बार पढ़ करके गोरोचन का टीका लगा लें ।
इस प्रकार करने से मन्त्र के प्रयोग से वशीकरण होता है ।
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| "जो कह रामु लखनु बैदेही । सूर्य-ग्रहण के पर्व काल के उत्तम समय पर पूरे पर्वकाल में ही इस मन्त्र को जपते रहें, तो यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है । इसके पश्चात् जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र को सात बार पढ़ करके गोरोचन का टीका लगा लें । इस प्रकार करने से मन्त्र के प्रयोग से वशीकरण होता है । You may also like: |
भोगो में असन्त अनुरक्त ने, अपवित्र नरक में पडते हैं । इस दि नाना परकार की पुनर्जन्म में कारणता देखलायी है और फिर से भी उसी का विस्तार सेवर्णन ( श्लो० १७ - २० ) करते हैं"आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः । यजन्ते नाम यज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् ॥ हंकारं बलं दर्प कामं क्रोधं च संश्रिताः । मामात्मपरदेहेनु प्रदिषन्तोऽभ्यसूयकाः ॥ तानहं द्विषतः क्रूरान् संसारेषु नराधमान् । क्षिपाम्पजस्त्रमशुभानासुरीष्वेवयोनिषु । आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि । माममाप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गातम्" इति ॥ शुद्धवासना तु ज्ञातज्ञेया । ज्ञेयस्वरूपं त्रयोदशाव्याये भगवानाहअर्थः - अपने आप अपनी स्तुति (तारीफ ) करनेवाले, स्तब्ध पूज्यों का सत्कार न करनेवाल, धन से उत्पन्न हुए मानमदों करके युक्त, वे पाखण्डपने से विधिपूर्वक यज्ञ नहीं करते है। अहङ्कार, बल, गर्व, काम, एवं क्रोध को भली भांति प्राप्त हुए वे अपने और दूसरों के शरीर में स्थित जो मैं तिस ( मेरे ) साथ द्वेष करते हुए निन्दा मे प्रवृत्त होते हैं । सन्मार्ग के शत्रु क्रूर, अशुभ कर्म करने हारे, उन नीच मनुष्यों को मैं सदा इस संसार में आसुरी योनि के बीच जन्म देता हूं । हे कौन्तेय (अर्जुन) वे मूढ प्रति जन्म में असुर योनि को प्राप्त होते हैं मुझ को न पाकर अधमा गति को जाते हैं । ज्ञेय की ज्ञान करानेवाली शुद्धवासना है ।
ज्ञेयवस्तु का स्वरूप भगवान ने गीता के १३ अ० में कथन किया है | भोगो में असन्त अनुरक्त ने, अपवित्र नरक में पडते हैं । इस दि नाना परकार की पुनर्जन्म में कारणता देखलायी है और फिर से भी उसी का विस्तार सेवर्णन करते हैं"आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः । यजन्ते नाम यज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् ॥ हंकारं बलं दर्प कामं क्रोधं च संश्रिताः । मामात्मपरदेहेनु प्रदिषन्तोऽभ्यसूयकाः ॥ तानहं द्विषतः क्रूरान् संसारेषु नराधमान् । क्षिपाम्पजस्त्रमशुभानासुरीष्वेवयोनिषु । आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि । माममाप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गातम्" इति ॥ शुद्धवासना तु ज्ञातज्ञेया । ज्ञेयस्वरूपं त्रयोदशाव्याये भगवानाहअर्थः - अपने आप अपनी स्तुति करनेवाले, स्तब्ध पूज्यों का सत्कार न करनेवाल, धन से उत्पन्न हुए मानमदों करके युक्त, वे पाखण्डपने से विधिपूर्वक यज्ञ नहीं करते है। अहङ्कार, बल, गर्व, काम, एवं क्रोध को भली भांति प्राप्त हुए वे अपने और दूसरों के शरीर में स्थित जो मैं तिस साथ द्वेष करते हुए निन्दा मे प्रवृत्त होते हैं । सन्मार्ग के शत्रु क्रूर, अशुभ कर्म करने हारे, उन नीच मनुष्यों को मैं सदा इस संसार में आसुरी योनि के बीच जन्म देता हूं । हे कौन्तेय वे मूढ प्रति जन्म में असुर योनि को प्राप्त होते हैं मुझ को न पाकर अधमा गति को जाते हैं । ज्ञेय की ज्ञान करानेवाली शुद्धवासना है । ज्ञेयवस्तु का स्वरूप भगवान ने गीता के तेरह अशून्य में कथन किया है |
पितामह के पास गए और सब हाल कह सुनाया। भीम्स फौरन समझ गए कि वह गुणवान ब्राह्मण द्रोणाचार्य के सिवा और कोई नहीं हो सकता और यह सोचकर वे अत्यंत प्रसन्न हुए कि द्रोणाचार्य फौरन राजकुमारों को धनुर्वेद की बहुत अच्छी शिक्षा दे सकेंगे। बड़े आदर और सम्मान के साथ उन्होंने द्रोणाचार्य को अलवा भेजा और जब वे या गए तो भीष्म ने उनका परिचय और हस्तिनापुर थाने का कारण पूछा। वे बोले, " महर्षि मराज का हूँ। मेरा नाम होगा है। महर्षि अभिवेश के आश्रम में मैं धनुर्वेद और अस्त्र-विद्या सीमने गया था। वहीं पांचाल देश के राजकुमार द्रुपद भी उसी मतलब से ग्राम हुए थे। धीरे-धीरे हम दोनों में गाढ़ी मित्रता हो गई। वे मुझसे बार-बार कहा करते, "पिता के मरने पर जब मुझे राजगद्दी मिल जाय तो तुम मेरे यहाँ आना । हम-तुम मिलकर राज्य के सारे सुख और ऐश्वर्य भोग करेंगे।" द्रुपद की यह प्रतिज्ञा उनके चले जाने पर भी मुझे भूली नहीं। थोड़े दिनों बाद शिक्षा समाप्त होने पर मैंने भी उस आश्रम को छोड़ दिया और घर जाकर एक व्याह कर लिया, जिससे मेरे अश्वत्थामा नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ। हम लोग बहुत निर्धन थे। एक बार जय पेट की ज्वाला से अत्यंत दुखी हुआ तो मैं द्रुपद के पास गया और उन्हें पुरानी प्रतिज्ञा याद दिलाकर कुछ सहायता चाही। लेकिन उन्होंने मेरी दीन दशा पर कुछ भी ध्यान न दिया, उलटा यह कहकर अपमान और किया, "राजा और रंक में भी कहीं मित्रता हो सकती है ?" तब से मैं उन्हें अपना शत्रु समझने लगा हूँ और बदला लेने की फिक्र में स्त्री-पुत्र सहित | पितामह के पास गए और सब हाल कह सुनाया। भीम्स फौरन समझ गए कि वह गुणवान ब्राह्मण द्रोणाचार्य के सिवा और कोई नहीं हो सकता और यह सोचकर वे अत्यंत प्रसन्न हुए कि द्रोणाचार्य फौरन राजकुमारों को धनुर्वेद की बहुत अच्छी शिक्षा दे सकेंगे। बड़े आदर और सम्मान के साथ उन्होंने द्रोणाचार्य को अलवा भेजा और जब वे या गए तो भीष्म ने उनका परिचय और हस्तिनापुर थाने का कारण पूछा। वे बोले, " महर्षि मराज का हूँ। मेरा नाम होगा है। महर्षि अभिवेश के आश्रम में मैं धनुर्वेद और अस्त्र-विद्या सीमने गया था। वहीं पांचाल देश के राजकुमार द्रुपद भी उसी मतलब से ग्राम हुए थे। धीरे-धीरे हम दोनों में गाढ़ी मित्रता हो गई। वे मुझसे बार-बार कहा करते, "पिता के मरने पर जब मुझे राजगद्दी मिल जाय तो तुम मेरे यहाँ आना । हम-तुम मिलकर राज्य के सारे सुख और ऐश्वर्य भोग करेंगे।" द्रुपद की यह प्रतिज्ञा उनके चले जाने पर भी मुझे भूली नहीं। थोड़े दिनों बाद शिक्षा समाप्त होने पर मैंने भी उस आश्रम को छोड़ दिया और घर जाकर एक व्याह कर लिया, जिससे मेरे अश्वत्थामा नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ। हम लोग बहुत निर्धन थे। एक बार जय पेट की ज्वाला से अत्यंत दुखी हुआ तो मैं द्रुपद के पास गया और उन्हें पुरानी प्रतिज्ञा याद दिलाकर कुछ सहायता चाही। लेकिन उन्होंने मेरी दीन दशा पर कुछ भी ध्यान न दिया, उलटा यह कहकर अपमान और किया, "राजा और रंक में भी कहीं मित्रता हो सकती है ?" तब से मैं उन्हें अपना शत्रु समझने लगा हूँ और बदला लेने की फिक्र में स्त्री-पुत्र सहित |
11वें सीजन के शूरू होने से पहले खिलाड़ियों के बाहर होने का सिलसिला शुरू हो चुका है. अब इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज कागिसो राबाडा का भी नाम जुड़ गया है. पहली बार आईपीएल खिताब जीतने की उम्मीदों के साथ मैदान पर उतरने की रणनीति बना रही दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए ये बड़ा झटका है.
राबाडा कमर में लगी चोट के कारण आईपीएल नहीं खेल पाएंगे. दिल्ली ने 4. 2 करोड़ की कीमत पर राइट टू मैच का इस्तेमाल कर राबाडा को टीम से जोड़ा था. लेकिन अब चोट के कारण अगले तीन महीने तक मैदान पर नहीं उतर पाएंगे.
साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम के मैनेजर मोहम्मद मोसाजी ने कहा,राबाडा के लोअर बैक में फैक्चर है जिसके कारण तो तीन महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे. 22 साल के राबाडा टेस्ट क्रिकेट के नंबर वन गेंदबाज हैं और हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था.
भारत के खिलाफ जहां उन्होंने तीन टेस्ट में 15 विकेट झटके थे वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट में 23 विकेट लेकर टीम को पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घेरलू सीरीज जीतने में अहम भूमिका निभाई थी.
दिल्ली 8 अप्रैल को किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी. टीम की कमान एक बार फिर गौतम गंभीर के हाथों में है.
गौतम गंभीर (कप्तान), जेसन रॉय, पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर, मंजोत कालरा, कॉलिन मुनरो, ऋषभ पंत, नमन ओझा, क्रिस मॉरिस, ग्लेन मैक्सवेल, विजय शंकर, डैनियल क्रिस्तियन, गुरकीरत सिंह मान, जयंत यादव, मोहम्मद शमी, ट्रेंट बोल्ट, अभे खान, हर्षल पटेल, सयन घोष, अमित मिश्रा, शाहबाज नदीम, राहुल तेवतीया, अभिषेक शर्मा, संदीप लामिचाने.
| ग्यारहवें सीजन के शूरू होने से पहले खिलाड़ियों के बाहर होने का सिलसिला शुरू हो चुका है. अब इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज कागिसो राबाडा का भी नाम जुड़ गया है. पहली बार आईपीएल खिताब जीतने की उम्मीदों के साथ मैदान पर उतरने की रणनीति बना रही दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए ये बड़ा झटका है. राबाडा कमर में लगी चोट के कारण आईपीएल नहीं खेल पाएंगे. दिल्ली ने चार. दो करोड़ की कीमत पर राइट टू मैच का इस्तेमाल कर राबाडा को टीम से जोड़ा था. लेकिन अब चोट के कारण अगले तीन महीने तक मैदान पर नहीं उतर पाएंगे. साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम के मैनेजर मोहम्मद मोसाजी ने कहा,राबाडा के लोअर बैक में फैक्चर है जिसके कारण तो तीन महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे. बाईस साल के राबाडा टेस्ट क्रिकेट के नंबर वन गेंदबाज हैं और हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था. भारत के खिलाफ जहां उन्होंने तीन टेस्ट में पंद्रह विकेट झटके थे वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट में तेईस विकेट लेकर टीम को पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घेरलू सीरीज जीतने में अहम भूमिका निभाई थी. दिल्ली आठ अप्रैल को किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी. टीम की कमान एक बार फिर गौतम गंभीर के हाथों में है. गौतम गंभीर , जेसन रॉय, पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर, मंजोत कालरा, कॉलिन मुनरो, ऋषभ पंत, नमन ओझा, क्रिस मॉरिस, ग्लेन मैक्सवेल, विजय शंकर, डैनियल क्रिस्तियन, गुरकीरत सिंह मान, जयंत यादव, मोहम्मद शमी, ट्रेंट बोल्ट, अभे खान, हर्षल पटेल, सयन घोष, अमित मिश्रा, शाहबाज नदीम, राहुल तेवतीया, अभिषेक शर्मा, संदीप लामिचाने. |
तृतीयाफ ।
सुनो गाना ।
तेरी सूरत मोहक प्यारो मेरे मनमें गई समाय ॥ टेक ॥ हम तुम दोनों में मी हुये, तन मन धन अरपण कर दीये । मन माफिक सुख हासिल कोये, अव कैसे विराय ।। तेरी० ॥ मन अरु तन यह सभी तुम्हारा, तेरी सूरत पर दिल वारा। तु मम प्यारी मैं तुव प्यारा, मजा करो सुखदाय । तेरी० ॥ २॥ मैं तुझ पर आसक्त हुआ हु में मन्यन्धमें आान फसा हूँ । तेरे सुखमें चूर हुआ हूँ, वह न कमो विघटाय ॥ तेरी० ॥ ३ ॥ ( आइट पाकर गाना बन्द कर देते है। सामने अनमति तका आजाता है।
मनगति० --(पुष्पतिलकापे) क्यों ? यह क्या हो रहा है ?
क्या भोजन करने की भी याद नहीं ? क्या मेरे कहने पर ने ध्यान नहीं दिया ?
पुष्पति-(नीची निगाह करके) अभी भूख नहीं लगी यी इससे जरा देरके लिये वाजा लेकर बैठ गई, चल में खाती हूँ ।
अनङ्गति०-(स्वगत) अच्छा आत तो तू और इसके तू साथ आनन्द लुटले कल तो इसे मैं इस लहानसे ही उठा दुगो ( प्रगट ) जल्दी आामा मैं जाती हू' ( चली जाती है
पुष्पति (लिफाके चले जानेपर (मणिभद्र) प्यारे ! अरा प्राप बैठे में अभी आती हूँ (पुष्पतिलका चली जाती है और मणिभद्र इधर उधर टहलता है | तृतीयाफ । सुनो गाना । तेरी सूरत मोहक प्यारो मेरे मनमें गई समाय ॥ टेक ॥ हम तुम दोनों में मी हुये, तन मन धन अरपण कर दीये । मन माफिक सुख हासिल कोये, अव कैसे विराय ।। तेरीशून्य ॥ मन अरु तन यह सभी तुम्हारा, तेरी सूरत पर दिल वारा। तु मम प्यारी मैं तुव प्यारा, मजा करो सुखदाय । तेरीशून्य ॥ दो॥ मैं तुझ पर आसक्त हुआ हु में मन्यन्धमें आान फसा हूँ । तेरे सुखमें चूर हुआ हूँ, वह न कमो विघटाय ॥ तेरीशून्य ॥ तीन ॥ क्यों ? यह क्या हो रहा है ? क्या भोजन करने की भी याद नहीं ? क्या मेरे कहने पर ने ध्यान नहीं दिया ? पुष्पति- अभी भूख नहीं लगी यी इससे जरा देरके लिये वाजा लेकर बैठ गई, चल में खाती हूँ । अनङ्गतिशून्य- अच्छा आत तो तू और इसके तू साथ आनन्द लुटले कल तो इसे मैं इस लहानसे ही उठा दुगो जल्दी आामा मैं जाती हू' प्यारे ! अरा प्राप बैठे में अभी आती हूँ (पुष्पतिलका चली जाती है और मणिभद्र इधर उधर टहलता है |
हैं, लेकिन यथार्थ जीवन में जिसके निकट हम अवश्य पहुँच सकते हैं । गरिणतशास्त्र के बिन्दु की इस परिभाषा पर कि उसको स्थिति होती है, किन्तु कोई प्रकार नहीं होता, कभी किसी ने कोई आपत्ति नहीं की । पुनश्च, जिन्हें हम अहिंसा का अपवाद कहकर पुकारते हैं, वे वास्तव में ऐसे अपवाद नहीं हैं जो इस सिद्धान्त को गलत सिद्ध करते हों; वे तो मनुष्य की अपूर्णताओं से उत्पन्न होनेवाली स्थितियां हैं जो अहिंसा के पुजारी को अहिंसा की कला में और अधिक पूर्णता प्राप्त करने के लिये प्रेरित करती है ।
अहिंसा में गांधीजी की आस्था का प्राधार उनका यह विश्वास है कि मनुष्य की प्रवृत्ति का अध्ययन किया जाय तो यह स्पष्ट है कि मनुष्य हिंसक से अहिंसक होता जा रहा है । सदियों का इतिहास इस परिवर्तन का प्रमाण है । प्रारम्भिक अवस्था में मनुष्य नरभक्षी थे लेकिन उनकी प्राकृतिक अहिंसाप्रियता ने इसे अनुचित समझा, अन्यथा प्राज़ की विशाल और घनी आबादी के स्थान पर दो-चार सर्वशक्तिशाली व्यक्ति ही दिखाई देते । यह सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, ज्ञान और विवेक आज नहीं होते । नर-भक्षरण की अवस्था के बाद मनुष्य ने पशु-पक्षियों के मांस को उदरपूर्ति का आधार बनाया, किन्तु शीघ्र ही स्वाभाविक प्रकृति ने मांस भक्षण के प्रति भी असमर्थता उत्पन्न की और अहिंसाधारी जीव, मनुष्य में कृषि कर्म प्रारम्भ किया। जिन पशुओं का वध कर के वह अपना पेट भरता था उनको उसने पालना शुरू किया । वस्तुतः नर-भक्षी युग से आज के सभ्य मनुष्य तक आते हुए हमें मनुष्य की हिंसक प्रवृत्ति से अहिंसा की और उसका विकास दिखाई देता है । मनुष्य के विकास का इतिहास मूलतः अहिंसात्मक विकास का इतिहास है । यद्यपि मनुष्य ने हिंसा का पूर्ण परित्याग नहीं किया है और वह आज भी एक बड़ी सीमा तक हिंसक है किन्तु कोई मनुष्य चाहे कितना भी बुरा क्यों न हो, उसके अन्तःस्थल में सद्गुरण का निवास होता है और इसलिये वह सत्याग्रही की सहर्ष और बिना किसी दुर्भावना के कष्ट उठाने की भावना को देखकर पिघल जाता है और उसमें सम्वेदना तथा प्रेम की भावनायें जागृत हो जाती हैं । यही बात संघर्ष और हिंसा के बजाय सत्य और प्रेम को मानव-जीवन के नियम बनाती है। यदि मनुष्यों को एक और हिमा और द्वेप तथा दूसरी ओर अहिंसा तथा उदारता के बीच चुनाव करने को कहा जाय तो निश्चित रूप से एक विशाल बहुमत अहिंसा और उदारता का ही चुनाव करेगा । केवल ऐसे ही व्यक्ति इस मार्ग को स्वीकार नहीं करेंगे जो मैकियावली तथा हॉब्स के समान यह विश्वास करते हैं कि मनुष्य मूल रूप से स्वार्थी और बुरा है ।
गांधीजी की अहिंसा क्या है, इसका स्वरूप क्या है, इसका क्षेत्र कितना विशाल है - इन सत्र पर हम विस्तार से चर्चा कर चुके हैं। जहां तक हिमा की महान् शक्ति और इसके प्रयोग की व्यापकता का सम्बन्ध है, यह कुछ और विस्तार का विषय है जिस पर गांधीजी की 'सत्याग्रह' की अवधारणा पर विचार करते समय प्रकाश डाला जायगा। यहां केवल इतना ही लिख देना पर्याप्त है कि गांधीजी की अहिंसा को अपना धर्म स्वीकार कर के अपने को असहाय कभी अनुभव नहीं किया। उनके कथनानुसार "कठोरनम धातु मी पर्याप्त तोप के आगे पिघल जाती है इसी प्रकार कठोर से कठोर हृदय भी
गाधो, लास्को, फोल धौर रसल के राजनैतिक विचार
अहिंसा के पर्याप्त ताप के आगे द्रवित हो जाता है, भोर ताप उत्पन्न करने की महिंसा की क्षमता की कोई सीमा नहीं है ।" अहिंसा वह बन्धन है जो सार समाज का एक सूत्र मे बाघता है। हम इस शक्ति स उसी प्रकार परिचित नही हैं जैसे कि आकाशीय पिण्डो को एक मूत्र मे बाधने वाली आकर्षण की शक्ति उसकी खोज से पूर्व हम परिचित न थे । अहिंसा प्रजातंत्र का दृश्य या अदृश्य भाघार है और इसके प्रभाव क्षेत्र में आनेवाले लोग जितने भी इसके भाधारो से परिचित होगे, उतने ही कम के युद्धों की ओर प्रेरित होंगे। गांधीजी की दृष्टि में हर राष्ट्र के लिये ग्रहिसा साधन और पूर्ण स्वतंत्रता एक साध्य है । अहिंसा और सत्य प्रेम के व्याकरण है। वे सत्याग्रह के समाज में उनके प्रयोग की खोज से भी पहले के हैं जैसे कि व्याकरणों के सधि एवं सधिविच्छेद के नियमों से ज्ञात करने से पहले भाषा के प्रयोग उत्पन्न हो गये थे । "1
गांधीजी और सत्याग्रह
( Gandhiji & Satyagrah )
व्यक्ति और समाज को नैतिक बनाने के दृष्टिकोण से गांधीजी ने सत्य, अहिमा और उचित एवं न्यायपूर्ण साधन आदि कुछ सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया जो एक दूसरे से सम्बन्धित थे और तदनुसार एक दूसरे के अनुपूरक और पूरक हैं। गाघोजी की राजनैतिक विचारधारा उनकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि मे ही फलती फूलती है और राजनीति के युद्ध क्षेत्र में उन्होंने जिस सत्योंग्रह रूपी हथियार की अनोखी खोज की वह मी आध्यात्मिकता के आधार पर ही प्रतिपादित है । सत्याग्रह ने न केवल युद्ध की कला को प्रभावित किया है, वरन इसने आये दिन हानेवाली क्रान्तियों को भी दिशा प्रदान की है । यही नहीं, सत्याग्रह मानवी ज्ञान और मानवी दिवारधारा को भी निकट से प्रभावित किया है । सत्याग्रह एक नया विज्ञान है, कर्मयोग का एक व्यावहारिक दर्शन है। यह एक सकिय अवधारणा है जिसको परीक्षा प्रारम्भ में मर्यादित क्षेत्रों में की जा चुकी है और यह सफने सिद्ध हुई है। अब विस्तृत क्षेत्र में और विशेषकर संसार की विस्फोटक स्थिति में सत्याग्रह रूपी अस्त्र की परीक्षा होनी शेष है ।
'सत्याग्रह' का शाब्दिक अर्थ 'सत्य' पर 'आह' है । सत्याग्रह के सम्पूर्ण दर्शन का आधारभूत सिद्धान्त यह है कि सत्य की ही जीत होती है । सत्य पर चलनेवाला कमी झूठ नहीं बोलना, घोखे मोर चालों का प्रयोग भी नही करना । वह अपनी गतिविधियों को छुपाने का प्रयत्त नहीं करता और अपनी त्रुटियो को भी स्वीकार करने में कभी नहीं हिचकिचाता । सत्य का सिद्धान्त जीवन के सभी क्षेत्रों में लागू हो सकता है। इसका महत्वपूर्ण आधार महिंसा है। प्रत. 'सत्याग्रह' सिद्धान्त के दो आधार 'सत्य' और 'हिमा' है ।
गांधीवाद का मूल तत्व सत्याग्रह वह केन्द्र है जिसके चारो मोर उनको अन्य धारणायें-- राजनीति का माध्यात्मिकरण, start aथा साध्य को
3 डा० पट्टाभिसीतामैया-गाधो नौर गाधीवाद पृष्ठ ६८ | हैं, लेकिन यथार्थ जीवन में जिसके निकट हम अवश्य पहुँच सकते हैं । गरिणतशास्त्र के बिन्दु की इस परिभाषा पर कि उसको स्थिति होती है, किन्तु कोई प्रकार नहीं होता, कभी किसी ने कोई आपत्ति नहीं की । पुनश्च, जिन्हें हम अहिंसा का अपवाद कहकर पुकारते हैं, वे वास्तव में ऐसे अपवाद नहीं हैं जो इस सिद्धान्त को गलत सिद्ध करते हों; वे तो मनुष्य की अपूर्णताओं से उत्पन्न होनेवाली स्थितियां हैं जो अहिंसा के पुजारी को अहिंसा की कला में और अधिक पूर्णता प्राप्त करने के लिये प्रेरित करती है । अहिंसा में गांधीजी की आस्था का प्राधार उनका यह विश्वास है कि मनुष्य की प्रवृत्ति का अध्ययन किया जाय तो यह स्पष्ट है कि मनुष्य हिंसक से अहिंसक होता जा रहा है । सदियों का इतिहास इस परिवर्तन का प्रमाण है । प्रारम्भिक अवस्था में मनुष्य नरभक्षी थे लेकिन उनकी प्राकृतिक अहिंसाप्रियता ने इसे अनुचित समझा, अन्यथा प्राज़ की विशाल और घनी आबादी के स्थान पर दो-चार सर्वशक्तिशाली व्यक्ति ही दिखाई देते । यह सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, ज्ञान और विवेक आज नहीं होते । नर-भक्षरण की अवस्था के बाद मनुष्य ने पशु-पक्षियों के मांस को उदरपूर्ति का आधार बनाया, किन्तु शीघ्र ही स्वाभाविक प्रकृति ने मांस भक्षण के प्रति भी असमर्थता उत्पन्न की और अहिंसाधारी जीव, मनुष्य में कृषि कर्म प्रारम्भ किया। जिन पशुओं का वध कर के वह अपना पेट भरता था उनको उसने पालना शुरू किया । वस्तुतः नर-भक्षी युग से आज के सभ्य मनुष्य तक आते हुए हमें मनुष्य की हिंसक प्रवृत्ति से अहिंसा की और उसका विकास दिखाई देता है । मनुष्य के विकास का इतिहास मूलतः अहिंसात्मक विकास का इतिहास है । यद्यपि मनुष्य ने हिंसा का पूर्ण परित्याग नहीं किया है और वह आज भी एक बड़ी सीमा तक हिंसक है किन्तु कोई मनुष्य चाहे कितना भी बुरा क्यों न हो, उसके अन्तःस्थल में सद्गुरण का निवास होता है और इसलिये वह सत्याग्रही की सहर्ष और बिना किसी दुर्भावना के कष्ट उठाने की भावना को देखकर पिघल जाता है और उसमें सम्वेदना तथा प्रेम की भावनायें जागृत हो जाती हैं । यही बात संघर्ष और हिंसा के बजाय सत्य और प्रेम को मानव-जीवन के नियम बनाती है। यदि मनुष्यों को एक और हिमा और द्वेप तथा दूसरी ओर अहिंसा तथा उदारता के बीच चुनाव करने को कहा जाय तो निश्चित रूप से एक विशाल बहुमत अहिंसा और उदारता का ही चुनाव करेगा । केवल ऐसे ही व्यक्ति इस मार्ग को स्वीकार नहीं करेंगे जो मैकियावली तथा हॉब्स के समान यह विश्वास करते हैं कि मनुष्य मूल रूप से स्वार्थी और बुरा है । गांधीजी की अहिंसा क्या है, इसका स्वरूप क्या है, इसका क्षेत्र कितना विशाल है - इन सत्र पर हम विस्तार से चर्चा कर चुके हैं। जहां तक हिमा की महान् शक्ति और इसके प्रयोग की व्यापकता का सम्बन्ध है, यह कुछ और विस्तार का विषय है जिस पर गांधीजी की 'सत्याग्रह' की अवधारणा पर विचार करते समय प्रकाश डाला जायगा। यहां केवल इतना ही लिख देना पर्याप्त है कि गांधीजी की अहिंसा को अपना धर्म स्वीकार कर के अपने को असहाय कभी अनुभव नहीं किया। उनके कथनानुसार "कठोरनम धातु मी पर्याप्त तोप के आगे पिघल जाती है इसी प्रकार कठोर से कठोर हृदय भी गाधो, लास्को, फोल धौर रसल के राजनैतिक विचार अहिंसा के पर्याप्त ताप के आगे द्रवित हो जाता है, भोर ताप उत्पन्न करने की महिंसा की क्षमता की कोई सीमा नहीं है ।" अहिंसा वह बन्धन है जो सार समाज का एक सूत्र मे बाघता है। हम इस शक्ति स उसी प्रकार परिचित नही हैं जैसे कि आकाशीय पिण्डो को एक मूत्र मे बाधने वाली आकर्षण की शक्ति उसकी खोज से पूर्व हम परिचित न थे । अहिंसा प्रजातंत्र का दृश्य या अदृश्य भाघार है और इसके प्रभाव क्षेत्र में आनेवाले लोग जितने भी इसके भाधारो से परिचित होगे, उतने ही कम के युद्धों की ओर प्रेरित होंगे। गांधीजी की दृष्टि में हर राष्ट्र के लिये ग्रहिसा साधन और पूर्ण स्वतंत्रता एक साध्य है । अहिंसा और सत्य प्रेम के व्याकरण है। वे सत्याग्रह के समाज में उनके प्रयोग की खोज से भी पहले के हैं जैसे कि व्याकरणों के सधि एवं सधिविच्छेद के नियमों से ज्ञात करने से पहले भाषा के प्रयोग उत्पन्न हो गये थे । "एक गांधीजी और सत्याग्रह व्यक्ति और समाज को नैतिक बनाने के दृष्टिकोण से गांधीजी ने सत्य, अहिमा और उचित एवं न्यायपूर्ण साधन आदि कुछ सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया जो एक दूसरे से सम्बन्धित थे और तदनुसार एक दूसरे के अनुपूरक और पूरक हैं। गाघोजी की राजनैतिक विचारधारा उनकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि मे ही फलती फूलती है और राजनीति के युद्ध क्षेत्र में उन्होंने जिस सत्योंग्रह रूपी हथियार की अनोखी खोज की वह मी आध्यात्मिकता के आधार पर ही प्रतिपादित है । सत्याग्रह ने न केवल युद्ध की कला को प्रभावित किया है, वरन इसने आये दिन हानेवाली क्रान्तियों को भी दिशा प्रदान की है । यही नहीं, सत्याग्रह मानवी ज्ञान और मानवी दिवारधारा को भी निकट से प्रभावित किया है । सत्याग्रह एक नया विज्ञान है, कर्मयोग का एक व्यावहारिक दर्शन है। यह एक सकिय अवधारणा है जिसको परीक्षा प्रारम्भ में मर्यादित क्षेत्रों में की जा चुकी है और यह सफने सिद्ध हुई है। अब विस्तृत क्षेत्र में और विशेषकर संसार की विस्फोटक स्थिति में सत्याग्रह रूपी अस्त्र की परीक्षा होनी शेष है । 'सत्याग्रह' का शाब्दिक अर्थ 'सत्य' पर 'आह' है । सत्याग्रह के सम्पूर्ण दर्शन का आधारभूत सिद्धान्त यह है कि सत्य की ही जीत होती है । सत्य पर चलनेवाला कमी झूठ नहीं बोलना, घोखे मोर चालों का प्रयोग भी नही करना । वह अपनी गतिविधियों को छुपाने का प्रयत्त नहीं करता और अपनी त्रुटियो को भी स्वीकार करने में कभी नहीं हिचकिचाता । सत्य का सिद्धान्त जीवन के सभी क्षेत्रों में लागू हो सकता है। इसका महत्वपूर्ण आधार महिंसा है। प्रत. 'सत्याग्रह' सिद्धान्त के दो आधार 'सत्य' और 'हिमा' है । गांधीवाद का मूल तत्व सत्याग्रह वह केन्द्र है जिसके चारो मोर उनको अन्य धारणायें-- राजनीति का माध्यात्मिकरण, start aथा साध्य को तीन डाशून्य पट्टाभिसीतामैया-गाधो नौर गाधीवाद पृष्ठ अड़सठ |
करौली के मासलपुर के देवरी गांव में खेत जुताई के भुगतान को लेकर हुए विवाद में फायरिंग और महिला की हत्या के 7 आरोपियों को मासलपुर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। फायरिंग में एक महिला की मौत और 2 लोग घायल हुए थे। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
मासलपुर थाना अधिकारी परसोत्तम ने बताया कि देवरी गांव में खेत जुताई के विवाद में हुई फायरिंग में महिला की हत्या के 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थानाधिकारी ने बताया कि मामले में एसपी नारायण टोगस, एएसपी सुरेश जैफ और डीएसपी दीपक गर्ग के निर्देश में टीम का गठन किया गया। पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी राजेन्द्र (60) पुत्र श्रीपत, गजराज (48) पुत्र श्रीपत, कुमर सिंह (44) पुत्र श्रीपत, महेश (25) पुत्र दलेल, विजय सिंह (29) पुत्र दलेल, लेखराज (20) पुत्र रविन्द्र और हरिओम (21) पुत्र कुमर सिंह निवासी देवरी थाना मासलपुर को गिरफ्तार किया है।
थानाधिकारी ने बताया कि रोशन ने राजेंद्र सिंह के ट्रैक्टर से कुछ दिन पहले खेत की जुताई कराई। बुधवार 4 बजे राजेंद्र सिंह खेत मालिक रोशन गुर्जर पुत्र वचन सिंह के घर गया और जुताई के रुपए मांगे। रोशन ने सवा बीघा खेत के हिसाब से भुगतान कर दिया। राजेंद्र ने डेढ़ बीघा खेत के हिसाब से भुगतान मांगा। इसको लेकर दोनों में विवाद हो गया। इसके बाद राजेंद्र के अन्य साथी भी मौके पर आ गए और गाली गलौज करने लगे। इसके बाद आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में घर के दरवाजे पर खड़ी राजेश पत्नी स्वर्गीय रामरज को गोली लग गई। गोली लगने से महिला की मौके पर मौत हो गई। इस दौरान बीच-बचाव के लिए आए दीवान सिंह (50) पुत्र मदने निवासी बडरिया हाल निवासी देवरी और ध्रुव पुत्र भगवान सिंह निवासी देवरी घायल हो गए। मामले में पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है।
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| करौली के मासलपुर के देवरी गांव में खेत जुताई के भुगतान को लेकर हुए विवाद में फायरिंग और महिला की हत्या के सात आरोपियों को मासलपुर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले में ग्यारह आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। फायरिंग में एक महिला की मौत और दो लोग घायल हुए थे। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। मासलपुर थाना अधिकारी परसोत्तम ने बताया कि देवरी गांव में खेत जुताई के विवाद में हुई फायरिंग में महिला की हत्या के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थानाधिकारी ने बताया कि मामले में एसपी नारायण टोगस, एएसपी सुरेश जैफ और डीएसपी दीपक गर्ग के निर्देश में टीम का गठन किया गया। पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी राजेन्द्र पुत्र श्रीपत, गजराज पुत्र श्रीपत, कुमर सिंह पुत्र श्रीपत, महेश पुत्र दलेल, विजय सिंह पुत्र दलेल, लेखराज पुत्र रविन्द्र और हरिओम पुत्र कुमर सिंह निवासी देवरी थाना मासलपुर को गिरफ्तार किया है। थानाधिकारी ने बताया कि रोशन ने राजेंद्र सिंह के ट्रैक्टर से कुछ दिन पहले खेत की जुताई कराई। बुधवार चार बजे राजेंद्र सिंह खेत मालिक रोशन गुर्जर पुत्र वचन सिंह के घर गया और जुताई के रुपए मांगे। रोशन ने सवा बीघा खेत के हिसाब से भुगतान कर दिया। राजेंद्र ने डेढ़ बीघा खेत के हिसाब से भुगतान मांगा। इसको लेकर दोनों में विवाद हो गया। इसके बाद राजेंद्र के अन्य साथी भी मौके पर आ गए और गाली गलौज करने लगे। इसके बाद आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में घर के दरवाजे पर खड़ी राजेश पत्नी स्वर्गीय रामरज को गोली लग गई। गोली लगने से महिला की मौके पर मौत हो गई। इस दौरान बीच-बचाव के लिए आए दीवान सिंह पुत्र मदने निवासी बडरिया हाल निवासी देवरी और ध्रुव पुत्र भगवान सिंह निवासी देवरी घायल हो गए। मामले में पुलिस ने ग्यारह लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Thursday September 22, 2022,
हाल ही में IIFL Wealth Hurun India Rich List 2022 जारी हुई है. इस लिस्ट में एक तो गौतम अडानी (Gautam Adani) हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है, जिन्होंने 2021 में हर दिन करीब 1.1 करोड़ रुपये कमाए हैं. वहीं दूसरी ओर इस लिस्ट में शामिल होने वालेके को-फाउंडर्स कैवल्य वोहरा (1036 रैंक) और आदित पलीचा (950 रैंक) ने भी लोगों का ध्यान खींचा है. कैवल्य वोहरा (Kaivalya Vohra) की उम्र अभी सिर्फ 19 साल है और उनकी दौलत 1000 करोड़ रुपये के पार हो गई है. वह भारत के सबसे कम उम्र के अरबपति (Youngest Billionaire) बन गए हैं. वहीं आदित पलीचा (Aadit Palicha) की उम्र भी सिर्फ 20 साल है और उनकी दौलत करीब 1200 करोड़ रुपये है.
जेप्टो के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा और आदित पलीचा दोनों ही बचपन के दोस्त हैं. साथ ही दोनों ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है. हालांकि, दोनों ने ही अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और बिजनस में घुस गए. जेप्टो से पहले वोहरा ने एक दूसरे ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म किरानाकार्ट की स्थापना की थी. जेप्टो महज 10 मिनट में डिलीवरी के वाद के साथ आया था. दोनों ने यह कंपनी महज 2 साल पहले अप्रैल 2021 में शुरू की थी. कोरोना काल में उन्हें लगा कि लोगों को जल्दी ग्रॉसरी डिलीवरी चाहिए और जेप्टो की शुरुआत कर दी. देखते ही देखते कंपनी ने तगड़ी ग्रोथ हासिल की और आज एक बड़ा नाम बन चुका है.
आज के वक्त में जेप्टो की नेटवर्थ करीब 900 मिलियन डॉलर हो गई है. खैर, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इतनी कम उम्र में कोई अरबों की दौलत कैसे कमा लेता है? यहां सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि जो उनकी नेटवर्थ है वह उनके बिजनस की शेयर होल्डिंग और कंपनी के वैल्युएशन के आधार पर निकाली गई है. यानी अगर आज वोहरा या पलीचा अपने सारे शेयर बेच दें तो अभी की वैल्युएशन के हिसाब से उनके पास ये पैसे होंगे, जिनकी बात की जा रही है.
जेप्टो के लिए कैवल्य और आदित ने कई राउंड की फंडिंग ली है, जिसकी वजह से उनकी कंपनी की बहुत सारी हिस्सेदारी दूसरों के पास है. आइए जानते हैं चौथे राउंड तक किसके पास कितनी हिस्सेदारी है.
किसी भी कंपनी की वैल्युएशन उसके बिजनस, रेवेन्यू और आइडिया के आधार पर निकलती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहली बार नवंबर 2021 में जेप्टो के को-फाउंडर्स ने सीरीज ए की फंडिंग के दौरान 60 मिलियन डॉलर जुटाए. इसके तहत उन्होंने 225 मिलियन डॉलर के वैल्युएशन पर करीब 26 फीसदी हिस्सेदारी दी. दूसरे राउंड की फंडिंग की जानकारी मीडिया में मौजूद नहीं है. तीसरे राउंड में दिसंबर 2021 में 570 मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर जेप्टो ने 100 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया. वहीं इसी साल अप्रैल में चौथे यानी डी राउंड में कंपनी ने 900 मिलियन डॉलर की कीमत 200 मिलियन डॉलर जुटाए.
जब कोई कंपनी फंड जुटाती है तो वह अपने रेवेन्यू, ग्रोथ, डिमांड और आइडिया आदि के आधार पर पिछली बार से अधिक वैल्युएशन पर पैसे उठाती है. ठीक वैसा ही जेप्टो के को-फाउंडर्स के साथ भी देखने को मिल रहा है. पहली बार उन्होंने 225 मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर फंड जुटाए थे. इस तरह अगर तब भी उनके पास कंपनी की उतनी ही हिस्सेदारी थी, जितनी अभी है तो उनकी दौलत काफी कम थी. इस स्थिति में वोहरा की नेटवर्थ 227 करोड़ रुपये और पलीचा की नेटवर्थ 275 करोड़ रुपये के करीब रही होगी. जैसे-जैसे कंपनी की वैल्युएशन बढ़ती गई, उनकी नेटवर्थ अपने आप बढ़ती रही.
मान लीजिए आपने एक कंपनी शुरू की है और उसके लिए आपको फंडिंग चाहिए. भले ही आपकी कंपनी का बिजनस कुछ भी हो, आपको फायदा हो रहा हो या नुकसान हो रहा हो, आप भारी वैल्युएशन ले सकते हैं. आपको सिर्फ निवेशकों को इस बात के लिए मनाना है कि आपकी कंपनी उस वैल्युएशन के लायक है. मान लीजिए कि आपने किसी तरह उन्हें मनाकर अपनी कंपनी के 1 फीसदी शेयर 1 करोड़ में बेच दिए, तो आपकी कंपनी की वैल्युएशन 100 करोड़ रुपये मानी जाएगी. इसका ये बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि कंपनी के पास 100 करोड़ रुपये आ गए हैं, सिर्फ फंडिंग लेने के आधार पर उसकी वैल्युएशन 100 करोड़ रुपये हुई है.
अब आप समझ ही गए होंगे कि कैसे जेप्टो के को-फाउंडर्स की दौलत छोटी सी उम्र में 1000 करोड़ से भी अधिक हो गई है. यहां एक बात समझनी होगी कि अगर आने वाले दिनों में कंपनी वैल्युएशन और बढ़ती है तो बिना कुछ अतिरिक्त मेहनत के ही कंपनी के को-फाउंडर्स की दौलत और बढ़ जाएगी. वहीं अगर वैल्युएशन गिरती है तो इसका भी खामियाजा उन्हें भुगतना होगा और उनकी दौलत घट जाएगी.
| Thursday September बाईस, दो हज़ार बाईस, हाल ही में IIFL Wealth Hurun India Rich List दो हज़ार बाईस जारी हुई है. इस लिस्ट में एक तो गौतम अडानी हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है, जिन्होंने दो हज़ार इक्कीस में हर दिन करीब एक.एक करोड़ रुपये कमाए हैं. वहीं दूसरी ओर इस लिस्ट में शामिल होने वालेके को-फाउंडर्स कैवल्य वोहरा और आदित पलीचा ने भी लोगों का ध्यान खींचा है. कैवल्य वोहरा की उम्र अभी सिर्फ उन्नीस साल है और उनकी दौलत एक हज़ार करोड़ रुपये के पार हो गई है. वह भारत के सबसे कम उम्र के अरबपति बन गए हैं. वहीं आदित पलीचा की उम्र भी सिर्फ बीस साल है और उनकी दौलत करीब एक हज़ार दो सौ करोड़ रुपये है. जेप्टो के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा और आदित पलीचा दोनों ही बचपन के दोस्त हैं. साथ ही दोनों ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है. हालांकि, दोनों ने ही अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और बिजनस में घुस गए. जेप्टो से पहले वोहरा ने एक दूसरे ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म किरानाकार्ट की स्थापना की थी. जेप्टो महज दस मिनट में डिलीवरी के वाद के साथ आया था. दोनों ने यह कंपनी महज दो साल पहले अप्रैल दो हज़ार इक्कीस में शुरू की थी. कोरोना काल में उन्हें लगा कि लोगों को जल्दी ग्रॉसरी डिलीवरी चाहिए और जेप्टो की शुरुआत कर दी. देखते ही देखते कंपनी ने तगड़ी ग्रोथ हासिल की और आज एक बड़ा नाम बन चुका है. आज के वक्त में जेप्टो की नेटवर्थ करीब नौ सौ मिलियन डॉलर हो गई है. खैर, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इतनी कम उम्र में कोई अरबों की दौलत कैसे कमा लेता है? यहां सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि जो उनकी नेटवर्थ है वह उनके बिजनस की शेयर होल्डिंग और कंपनी के वैल्युएशन के आधार पर निकाली गई है. यानी अगर आज वोहरा या पलीचा अपने सारे शेयर बेच दें तो अभी की वैल्युएशन के हिसाब से उनके पास ये पैसे होंगे, जिनकी बात की जा रही है. जेप्टो के लिए कैवल्य और आदित ने कई राउंड की फंडिंग ली है, जिसकी वजह से उनकी कंपनी की बहुत सारी हिस्सेदारी दूसरों के पास है. आइए जानते हैं चौथे राउंड तक किसके पास कितनी हिस्सेदारी है. किसी भी कंपनी की वैल्युएशन उसके बिजनस, रेवेन्यू और आइडिया के आधार पर निकलती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहली बार नवंबर दो हज़ार इक्कीस में जेप्टो के को-फाउंडर्स ने सीरीज ए की फंडिंग के दौरान साठ मिलियन डॉलर जुटाए. इसके तहत उन्होंने दो सौ पच्चीस मिलियन डॉलर के वैल्युएशन पर करीब छब्बीस फीसदी हिस्सेदारी दी. दूसरे राउंड की फंडिंग की जानकारी मीडिया में मौजूद नहीं है. तीसरे राउंड में दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में पाँच सौ सत्तर मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर जेप्टो ने एक सौ मिलियन डॉलर का फंड जुटाया. वहीं इसी साल अप्रैल में चौथे यानी डी राउंड में कंपनी ने नौ सौ मिलियन डॉलर की कीमत दो सौ मिलियन डॉलर जुटाए. जब कोई कंपनी फंड जुटाती है तो वह अपने रेवेन्यू, ग्रोथ, डिमांड और आइडिया आदि के आधार पर पिछली बार से अधिक वैल्युएशन पर पैसे उठाती है. ठीक वैसा ही जेप्टो के को-फाउंडर्स के साथ भी देखने को मिल रहा है. पहली बार उन्होंने दो सौ पच्चीस मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर फंड जुटाए थे. इस तरह अगर तब भी उनके पास कंपनी की उतनी ही हिस्सेदारी थी, जितनी अभी है तो उनकी दौलत काफी कम थी. इस स्थिति में वोहरा की नेटवर्थ दो सौ सत्ताईस करोड़ रुपये और पलीचा की नेटवर्थ दो सौ पचहत्तर करोड़ रुपये के करीब रही होगी. जैसे-जैसे कंपनी की वैल्युएशन बढ़ती गई, उनकी नेटवर्थ अपने आप बढ़ती रही. मान लीजिए आपने एक कंपनी शुरू की है और उसके लिए आपको फंडिंग चाहिए. भले ही आपकी कंपनी का बिजनस कुछ भी हो, आपको फायदा हो रहा हो या नुकसान हो रहा हो, आप भारी वैल्युएशन ले सकते हैं. आपको सिर्फ निवेशकों को इस बात के लिए मनाना है कि आपकी कंपनी उस वैल्युएशन के लायक है. मान लीजिए कि आपने किसी तरह उन्हें मनाकर अपनी कंपनी के एक फीसदी शेयर एक करोड़ में बेच दिए, तो आपकी कंपनी की वैल्युएशन एक सौ करोड़ रुपये मानी जाएगी. इसका ये बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि कंपनी के पास एक सौ करोड़ रुपये आ गए हैं, सिर्फ फंडिंग लेने के आधार पर उसकी वैल्युएशन एक सौ करोड़ रुपये हुई है. अब आप समझ ही गए होंगे कि कैसे जेप्टो के को-फाउंडर्स की दौलत छोटी सी उम्र में एक हज़ार करोड़ से भी अधिक हो गई है. यहां एक बात समझनी होगी कि अगर आने वाले दिनों में कंपनी वैल्युएशन और बढ़ती है तो बिना कुछ अतिरिक्त मेहनत के ही कंपनी के को-फाउंडर्स की दौलत और बढ़ जाएगी. वहीं अगर वैल्युएशन गिरती है तो इसका भी खामियाजा उन्हें भुगतना होगा और उनकी दौलत घट जाएगी. |
आशिक माशूक है गया, इश्क कहावै सोइ । दादू उस माशूक का, अल्लाह आशिक होइ ॥ 147 ॥ राम विरहनी ह्वै रह्या, विरहनी ह्वै गई राम । दादू विरहा बापुरा, ऐसे कर गया काम ।। 148 ।। विरह बिचारा ले गया, दादू हमको आइ ।
जहं अगम अगोचर राम था, तहँ विरह बिना को जाइ ।। 149 ।। विरह बापुरा आइ कर, सोवत जगावे जीव । दादू अंग लगाइ कर, ले पहुँचावे पीव ।। 150 ।। विरहा मेरा मीत है, विरहा बैरी नांहि । विरहा को बैरी कहै, सो दादू किस मांहि ।। 151 ॥ दादू इश्क अलह की जाति है, इश्क अलह का अंग । इश्क अलह वजूदहै, इश्क अलह का रंग ॥ 152 ॥ साध महिमा महात्म
दादू प्रीतम के पग परसिये, मुझ देखण का चाव । तहाँ ले सीस नवाइये, जहाँ धरे थे पाँव ॥ 153 ॥ विरह पतिव्रत
बाट विरही की सोधि करि, पंथ प्रेम का लेहु । लै के मारग जाइये, दूसर पांव न देहु ।। 154 ।। बिरही बेगा भक्ति सहज में, आगे पीछे जाइ । थोड़े माहीं बहुत है, दादू रहू ल्यौ लाइ ।। 155 ।। बिरहा बेगा ले मिलै, तालाबेली पीर ।
दादू मन घाइल भया, सालै सकल सरीर ॥ 156 ॥ विरह विनती
आज्ञा अपरंपार की, बसि अंबर भरतार ।
हरे पटंबर पहरि करि, धरती करै सिंगार । 157 ॥
वसुधा सब फूलै फलै, पृथ्वी अनंत अपार । गगन गर्ज जल थल भरै, दादू जै जै कार ।। 158 ।। काला मुँह कर काल का, सांई सदा सुकाल । मेघ तुम्हारे घर घणां, बरसहु दीनदयाल ।। 159 ॥ ।। इति श्री दादूदास - विरचिते सतगुरु प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत- सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान - सर्वशास्त्र - शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश- ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य तृतीयो विरह काअंग सम्पूर्ण ।। अंग 3 ।। साखी 159 ।। | आशिक माशूक है गया, इश्क कहावै सोइ । दादू उस माशूक का, अल्लाह आशिक होइ ॥ एक सौ सैंतालीस ॥ राम विरहनी ह्वै रह्या, विरहनी ह्वै गई राम । दादू विरहा बापुरा, ऐसे कर गया काम ।। एक सौ अड़तालीस ।। विरह बिचारा ले गया, दादू हमको आइ । जहं अगम अगोचर राम था, तहँ विरह बिना को जाइ ।। एक सौ उनचास ।। विरह बापुरा आइ कर, सोवत जगावे जीव । दादू अंग लगाइ कर, ले पहुँचावे पीव ।। एक सौ पचास ।। विरहा मेरा मीत है, विरहा बैरी नांहि । विरहा को बैरी कहै, सो दादू किस मांहि ।। एक सौ इक्यावन ॥ दादू इश्क अलह की जाति है, इश्क अलह का अंग । इश्क अलह वजूदहै, इश्क अलह का रंग ॥ एक सौ बावन ॥ साध महिमा महात्म दादू प्रीतम के पग परसिये, मुझ देखण का चाव । तहाँ ले सीस नवाइये, जहाँ धरे थे पाँव ॥ एक सौ तिरेपन ॥ विरह पतिव्रत बाट विरही की सोधि करि, पंथ प्रेम का लेहु । लै के मारग जाइये, दूसर पांव न देहु ।। एक सौ चौवन ।। बिरही बेगा भक्ति सहज में, आगे पीछे जाइ । थोड़े माहीं बहुत है, दादू रहू ल्यौ लाइ ।। एक सौ पचपन ।। बिरहा बेगा ले मिलै, तालाबेली पीर । दादू मन घाइल भया, सालै सकल सरीर ॥ एक सौ छप्पन ॥ विरह विनती आज्ञा अपरंपार की, बसि अंबर भरतार । हरे पटंबर पहरि करि, धरती करै सिंगार । एक सौ सत्तावन ॥ वसुधा सब फूलै फलै, पृथ्वी अनंत अपार । गगन गर्ज जल थल भरै, दादू जै जै कार ।। एक सौ अट्ठावन ।। काला मुँह कर काल का, सांई सदा सुकाल । मेघ तुम्हारे घर घणां, बरसहु दीनदयाल ।। एक सौ उनसठ ॥ ।। इति श्री दादूदास - विरचिते सतगुरु प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत- सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान - सर्वशास्त्र - शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश- ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य तृतीयो विरह काअंग सम्पूर्ण ।। अंग तीन ।। साखी एक सौ उनसठ ।। |
दीप सिद्धू की मौत के बाद 2022 में अमृतपाल ने संभाली वारिस पंजाब दे की कमान. (file photo)
चंडीगढ़ः वारिस पंजाब दे के प्रमुख (Waris Punjab De) अमृतपाल सिंह (AmritPal Singh) आज शुक्रवार को शादी के बंधन में बंधेंगे. उनका आनंद कारज (विवाह) जालंधर के फतेहपुर दोनां स्थित ऐतिहासिक गुरु घर में होगा. इस जानकारी को अमृतपाल सिंह की ओर से गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उनकी शादी इंग्लैड में रहने वाली एक एनआरआई (NRI) लड़की से होने जा रही है, जो मूल रूप से जालंधर के गांव कुलारां की रहने वाली हैं. लड़की के पिता प्यारा सिंह और परिवार इंग्लैंड में ही रहते हैं. परिवार की अमृतपाल सिंह से पुरानी जान पहचान है. लड़की का नाम किरणदीप है जो शादी के लिए पंजाब पहुंची हैं.
1993 में जन्मे अमृतपाल सिंह संधू अमृतसर जिले की बाबा बकाला तहसील के जल्लूपुर खेड़ा गांव के रहने वाले हैं. कहा जाता है कि 2012 में काम के लिए दुबई जाने से पहले उन्होंने प्लस टू तक पढ़ाई की थी. उन्होंने दुबई में परिवहन व्यवसाय में काम किया और 2022 में "वारिस पंजाब दे" को संभालने के लिए वापस आए. उनके आस-पास की सोशल मीडिया गतिविधियां बताती हैं कि वह कम से कम पिछले पांच वर्षों से सिखों से संबंधित मुद्दों पर बोलते रहे हैं.
पढ़ें- गुब्बारे से जासूसी करता है चीन, 40 देशों में आजमा चुका है हाथ, US के दावे से मचा हड़कंप, ड्रैगन ने जानें क्या कहा?
29 साल की उम्र में दुबई से लौटे अमृतपाल सिंह ने फरवरी 2022 में दुर्घटना में अभिनेता-कार्यकर्ता दीप सिद्धू की मृत्यु के बाद उनके संगठन "वारिस पंजाब दे" को संभाला. जिसके बाद वह अचानक पंजाब के धार्मिक-राजनीतिक परिदृश्य में प्रवेश कर गए हैं. अमृतपाल पंजाब के परिदृश्य में घुल-मिल चुके हैं. भारी तादाद में उनके प्रशंसक हैं. हालांकि काफी लोग उनके आलोचक भी हैं.
बीते साल 29 सितंबर को अमृतपाल सिंह ने मोगा जिले में जरनैल सिंह भिंडरावाले के पैतृक गांव रोड में एक बड़ी सभा को संबोधित किया था. हालांकि, उनके आस-पास की जनता की राय उनके प्रति बंटी हुई है. प्रशंसकों ने उनके समारोहों में सिख धर्म को पुनर्जीवित करने के उनके प्रयासों और ड्रग्स के खिलाफ उनके अभियान की प्रशंसा की है. दूसरी ओर आलोचक उन पर पंजाब को अस्थिर करने की कोशिश करने और सूदखोर होने का आरोप लगाते आ रहे हैं. गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को उनकी गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है.
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| दीप सिद्धू की मौत के बाद दो हज़ार बाईस में अमृतपाल ने संभाली वारिस पंजाब दे की कमान. चंडीगढ़ः वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह आज शुक्रवार को शादी के बंधन में बंधेंगे. उनका आनंद कारज जालंधर के फतेहपुर दोनां स्थित ऐतिहासिक गुरु घर में होगा. इस जानकारी को अमृतपाल सिंह की ओर से गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उनकी शादी इंग्लैड में रहने वाली एक एनआरआई लड़की से होने जा रही है, जो मूल रूप से जालंधर के गांव कुलारां की रहने वाली हैं. लड़की के पिता प्यारा सिंह और परिवार इंग्लैंड में ही रहते हैं. परिवार की अमृतपाल सिंह से पुरानी जान पहचान है. लड़की का नाम किरणदीप है जो शादी के लिए पंजाब पहुंची हैं. एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में जन्मे अमृतपाल सिंह संधू अमृतसर जिले की बाबा बकाला तहसील के जल्लूपुर खेड़ा गांव के रहने वाले हैं. कहा जाता है कि दो हज़ार बारह में काम के लिए दुबई जाने से पहले उन्होंने प्लस टू तक पढ़ाई की थी. उन्होंने दुबई में परिवहन व्यवसाय में काम किया और दो हज़ार बाईस में "वारिस पंजाब दे" को संभालने के लिए वापस आए. उनके आस-पास की सोशल मीडिया गतिविधियां बताती हैं कि वह कम से कम पिछले पांच वर्षों से सिखों से संबंधित मुद्दों पर बोलते रहे हैं. पढ़ें- गुब्बारे से जासूसी करता है चीन, चालीस देशों में आजमा चुका है हाथ, US के दावे से मचा हड़कंप, ड्रैगन ने जानें क्या कहा? उनतीस साल की उम्र में दुबई से लौटे अमृतपाल सिंह ने फरवरी दो हज़ार बाईस में दुर्घटना में अभिनेता-कार्यकर्ता दीप सिद्धू की मृत्यु के बाद उनके संगठन "वारिस पंजाब दे" को संभाला. जिसके बाद वह अचानक पंजाब के धार्मिक-राजनीतिक परिदृश्य में प्रवेश कर गए हैं. अमृतपाल पंजाब के परिदृश्य में घुल-मिल चुके हैं. भारी तादाद में उनके प्रशंसक हैं. हालांकि काफी लोग उनके आलोचक भी हैं. बीते साल उनतीस सितंबर को अमृतपाल सिंह ने मोगा जिले में जरनैल सिंह भिंडरावाले के पैतृक गांव रोड में एक बड़ी सभा को संबोधित किया था. हालांकि, उनके आस-पास की जनता की राय उनके प्रति बंटी हुई है. प्रशंसकों ने उनके समारोहों में सिख धर्म को पुनर्जीवित करने के उनके प्रयासों और ड्रग्स के खिलाफ उनके अभियान की प्रशंसा की है. दूसरी ओर आलोचक उन पर पंजाब को अस्थिर करने की कोशिश करने और सूदखोर होने का आरोप लगाते आ रहे हैं. गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को उनकी गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है. . |
जींद,(एजेंसी/वार्ता): राजस्थान सरकार द्वारा लाए जा रहे राइट-टू-हेल्थ(आरटीएच) कानून के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर हरियाणा के जींद जिले में भी मंगलवार को निजी अस्पताल बंद और इनके चिकित्सक हड़ताल पर रहे।
निजी अस्पतालों में सभी प्रकार की सेवाएं पूर्णतया ठप रहीं। निजी चिकित्सकों ने स्थानीय नेहरू पार्क में धरना देकर विरोध सभा की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस कानून को वापस लिए जाने की मांग को लेकर तहसीलदार अजय सैनी को ज्ञापन सौंपा। आईएमए ने सोमवार को ही हड़ताल का नोटिस दे दिया था और अस्पतालों के बाहर इस सम्बंध में नोटिस चस्पा कर दिए थे।
इसके बावजूद मंगलवार को काफी संख्या में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज तथा उनके परिजन निजी अस्पतालों में जांच और उपचार के लिए पहुंचे लेकिन अस्पताल बंद मिलने पर इन्हें भारी परेशानी हुई। वहीं सार्वजनिक अवकाश होने के चलते नागरिक अस्ताल में भी केवल आपात और प्रसव जैसी सेवाएं रहीं। इससे भी आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा।
आईएमए के जिला प्रधान डाॅ मनोज कुमार और सचिव डाॅ कुलदीप राणा ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा चिकित्सकों और अस्पतालों पर बलपूर्वक आरटीएच कानून लाया जा रहा है जो सरकार की चिकित्सकों के प्रति कथित दुर्भावना को दर्शाता है। डॉक्टर ऋण लेकर अस्पताल बनाता है,
कई लोगों को रोजगार देता है और लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक उपकरण खरीदता है। इससे निजी अस्पतालों में निशुल्क उपचार करना सम्भव नहीं रह जाता है। इन्होंने राजस्थान सरकार के इस विधेयक को बिल स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने दायित्व को निजी क्षेत्र पर डालने तथा बिना कोई खर्च किये इसे बर्बाद करने के समान बताया।
इन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार जब तक इस जनविरोधी कानून को वापस नहीं लेती तब तक आईएमए इसका हर स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन सरकार इस जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ रही है।
-(एजेंसी/वार्ता)
यह भी पढ़ेः- भिंडी कई पोषक तत्वों से भरपूर, सेवन करने से सेहत को मिलेगा फायदा!
| जींद,: राजस्थान सरकार द्वारा लाए जा रहे राइट-टू-हेल्थ कानून के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर हरियाणा के जींद जिले में भी मंगलवार को निजी अस्पताल बंद और इनके चिकित्सक हड़ताल पर रहे। निजी अस्पतालों में सभी प्रकार की सेवाएं पूर्णतया ठप रहीं। निजी चिकित्सकों ने स्थानीय नेहरू पार्क में धरना देकर विरोध सभा की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस कानून को वापस लिए जाने की मांग को लेकर तहसीलदार अजय सैनी को ज्ञापन सौंपा। आईएमए ने सोमवार को ही हड़ताल का नोटिस दे दिया था और अस्पतालों के बाहर इस सम्बंध में नोटिस चस्पा कर दिए थे। इसके बावजूद मंगलवार को काफी संख्या में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज तथा उनके परिजन निजी अस्पतालों में जांच और उपचार के लिए पहुंचे लेकिन अस्पताल बंद मिलने पर इन्हें भारी परेशानी हुई। वहीं सार्वजनिक अवकाश होने के चलते नागरिक अस्ताल में भी केवल आपात और प्रसव जैसी सेवाएं रहीं। इससे भी आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा। आईएमए के जिला प्रधान डाॅ मनोज कुमार और सचिव डाॅ कुलदीप राणा ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा चिकित्सकों और अस्पतालों पर बलपूर्वक आरटीएच कानून लाया जा रहा है जो सरकार की चिकित्सकों के प्रति कथित दुर्भावना को दर्शाता है। डॉक्टर ऋण लेकर अस्पताल बनाता है, कई लोगों को रोजगार देता है और लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक उपकरण खरीदता है। इससे निजी अस्पतालों में निशुल्क उपचार करना सम्भव नहीं रह जाता है। इन्होंने राजस्थान सरकार के इस विधेयक को बिल स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने दायित्व को निजी क्षेत्र पर डालने तथा बिना कोई खर्च किये इसे बर्बाद करने के समान बताया। इन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार जब तक इस जनविरोधी कानून को वापस नहीं लेती तब तक आईएमए इसका हर स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन सरकार इस जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ रही है। - यह भी पढ़ेः- भिंडी कई पोषक तत्वों से भरपूर, सेवन करने से सेहत को मिलेगा फायदा! |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
हुबली (कर्नाटक): मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के विकास के लिए कई विशेष कार्यक्रमों की शुरूआत करने के लिए 5 अप्रैल को कर्नाटक का दौरा करने वाले हैं।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह 1 अप्रैल को राज्य का दौरा करने वाले हैं उन्होंने कहा कि शाह सहकारिता क्षेत्र में बड़े सुधार लाने के इच्छुक हैं और राज्य सरकार क्षीरा अभिवृद्धि बैंक शुरू करने के लिए तैयार हैं।
शाह अपनी यात्रा के दौरान क्षीरा अभिवृद्धि बैंक के लोगो और यशस्विनी कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। बोम्मई ने कहा कि लॉन्च कार्यक्रम के तहत एक विशाल सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, क्योंकि इससे डेयरी क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
कैबिनेट विस्तार के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दिल्ली में पार्टी के शीर्ष अधिकारियों के साथ चर्चा करनी होगी। उन्होंने कहा, जब नेतृत्व मुझे बुलाएगा, तो मैं दिल्ली जाऊंगा।
| हुबली : मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के विकास के लिए कई विशेष कार्यक्रमों की शुरूआत करने के लिए पाँच अप्रैल को कर्नाटक का दौरा करने वाले हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह एक अप्रैल को राज्य का दौरा करने वाले हैं उन्होंने कहा कि शाह सहकारिता क्षेत्र में बड़े सुधार लाने के इच्छुक हैं और राज्य सरकार क्षीरा अभिवृद्धि बैंक शुरू करने के लिए तैयार हैं। शाह अपनी यात्रा के दौरान क्षीरा अभिवृद्धि बैंक के लोगो और यशस्विनी कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। बोम्मई ने कहा कि लॉन्च कार्यक्रम के तहत एक विशाल सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, क्योंकि इससे डेयरी क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। कैबिनेट विस्तार के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दिल्ली में पार्टी के शीर्ष अधिकारियों के साथ चर्चा करनी होगी। उन्होंने कहा, जब नेतृत्व मुझे बुलाएगा, तो मैं दिल्ली जाऊंगा। |
भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर (Arjun Tendulkar) को लेकर फिलहाल चर्चाएं जोरों पर हैं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में घरेलू क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद आईपीएल के लिए अर्हता प्राप्त की। आईपीएल में उनका बेस ब्राइस 20 लाख रुपये है। आगामी सीजन नीलामी से पहले अर्जुन तेंदुलकर ने कमाल का प्रदर्शन किया। अर्जुन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 31 गेंद पर 77 रन ठोंक डाले।
अर्जुन तेंदुलकर ने रविवार को 73वें पुलिस आमंत्रण शील्ड क्रिकेट टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन का नजारा पेश किए। टूर्नामेंट के ग्रुप ए के दूसरे दौर के मैच में अर्जुन ने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया। मैच में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 31 गेंद में नाबाद 77 रन की पारी खेली।
वहीं गेंदबाजी करने मैदान पर उतरे तो 41 रन देकर तीन विकेट झटके, अर्जुन के शानदार प्रदर्शन के बदौलत उनकी टीम एमआईजी क्रिकेट क्लब ने इस्लाम जिमखाना टीम को 194 रन से करारी शिकस्त दी। यह टूर्नामेंट मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के बाद शहर में पहली क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित की गई है।
मैच में अर्जुन से धाकड़ बल्लेबाजी देखने को मिली उन्होंने अपनी पारी के दौरान पांच चौके और आठ छक्के लगाये। मैच में जब उनके सामने गेंदबाजी करने विरोधी टीम के ऑफ स्पिनर हाशिर दाफेदार आए तो अर्जुन ने एक ही ओवर में पांच छक्के जड़ दिये।
अर्जुन के शानदार प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने आईपीएल में इंट्री की दावेदारी पेश कर दी है, उनके ऐसे प्रदर्शन के साथ ही अब उनपर टीमें पैसे खर्च करने पर ज्यादा विचार नहीं करेंगी। अर्जुन ने हाल में भारत के घरेलू क्रिकेट में सैयद मुश्ताक अली ट्राफी में खेलकर मुंबई की सीनियर टीम में डेब्यू किया था।
अर्जुन के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत 18 फरवरी को चेन्नई में होने वाली इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में कोई भी फ्रेंचाइजी उनपर दांव लगा सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा की उनकी बिकने वाली कीमत आईपीएल की नीलामी में क्या होती है। उनका बेस प्राइस 20 लाख रुपये हैं।
| भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर को लेकर फिलहाल चर्चाएं जोरों पर हैं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में घरेलू क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद आईपीएल के लिए अर्हता प्राप्त की। आईपीएल में उनका बेस ब्राइस बीस लाख रुपये है। आगामी सीजन नीलामी से पहले अर्जुन तेंदुलकर ने कमाल का प्रदर्शन किया। अर्जुन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए इकतीस गेंद पर सतहत्तर रन ठोंक डाले। अर्जुन तेंदुलकर ने रविवार को तिहत्तरवें पुलिस आमंत्रण शील्ड क्रिकेट टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन का नजारा पेश किए। टूर्नामेंट के ग्रुप ए के दूसरे दौर के मैच में अर्जुन ने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया। मैच में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने इकतीस गेंद में नाबाद सतहत्तर रन की पारी खेली। वहीं गेंदबाजी करने मैदान पर उतरे तो इकतालीस रन देकर तीन विकेट झटके, अर्जुन के शानदार प्रदर्शन के बदौलत उनकी टीम एमआईजी क्रिकेट क्लब ने इस्लाम जिमखाना टीम को एक सौ चौरानवे रन से करारी शिकस्त दी। यह टूर्नामेंट मुंबई क्रिकेट संघ के तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के बाद शहर में पहली क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित की गई है। मैच में अर्जुन से धाकड़ बल्लेबाजी देखने को मिली उन्होंने अपनी पारी के दौरान पांच चौके और आठ छक्के लगाये। मैच में जब उनके सामने गेंदबाजी करने विरोधी टीम के ऑफ स्पिनर हाशिर दाफेदार आए तो अर्जुन ने एक ही ओवर में पांच छक्के जड़ दिये। अर्जुन के शानदार प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने आईपीएल में इंट्री की दावेदारी पेश कर दी है, उनके ऐसे प्रदर्शन के साथ ही अब उनपर टीमें पैसे खर्च करने पर ज्यादा विचार नहीं करेंगी। अर्जुन ने हाल में भारत के घरेलू क्रिकेट में सैयद मुश्ताक अली ट्राफी में खेलकर मुंबई की सीनियर टीम में डेब्यू किया था। अर्जुन के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत अट्ठारह फरवरी को चेन्नई में होने वाली इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में कोई भी फ्रेंचाइजी उनपर दांव लगा सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा की उनकी बिकने वाली कीमत आईपीएल की नीलामी में क्या होती है। उनका बेस प्राइस बीस लाख रुपये हैं। |
क्या होगा अगर मिल गया बवासीर? बवासीर के लिए मलहमः सस्ते और कुशल। कैसे घर पर बवासीर के इलाज के लिए?
कुछ बीमारियां जोर सौंदर्य कारणों के लिए बात नहीं करते, और अक्सर। हालांकि, छुपा समस्याओं कोई भी ठीक करने के लिए मदद की है। उचित कार्रवाई करने के बिना, रोगी चलाता जोखिम की स्थिति बढ़। लेकिन क्या होगा अगर आप बवासीर मिल गया? जवाब स्पष्ट हैः यह एक गंभीर और कभी कभी अपरिवर्तनीय स्वास्थ्य जटिलताओं के लिए इंतजार करना जितनी जल्दी हो सके उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक नहीं है।
बीमारी दुनिया की आबादी के बीच सबसे लोकप्रिय में से एक है। एक नियम के रूप में, वयस्क पुरुषों और महिलाओं की इसके लक्षणों से ग्रस्त हैं, बच्चों लगभग रोग से प्रभावित नहीं थे। रोग के कारणों की परवाह किए बिना विकसित करने, यह दवाओं के साथ प्रयोग करने के लिए आवश्यक नहीं है। प्रोक्टोलॉजिस्ट केवल एक पेशेवर अगर मिल गया क्या कार्रवाई करने के लिए जानता है बवासीर कैसे घर पर इलाज के लिए इस रोग और कौन सी दवाएं।
इस रोग से छुटकारा मलाशय की रक्त वाहिकाओं में रक्त परिसंचरण साथ जुड़ा हुआ है पाने के लिए, इसे सही ढंग से उसके निदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। रोग पारंपरिक तीन प्रकार में विभाजित हैः
- आंतरिक;
- आउटडोर;
- संयुक्त।
रोगों के इन प्रकार हर जगह निदान कर रहे हैं। आदेश मलाशय की आंतरिक सूजन की पुष्टि करने के लिए, परीक्षा प्रोक्टोलॉजिस्ट बिना नहीं कर सकते। जलन, खुजली, परिपूर्णता की भावना आंत्र और अन्य आंतों की बीमारियों का संकेत हो सकता। अक्सर मरीजों के लक्षणों की अनदेखी करने की कोशिश कर रहा है, एक समय पर ढंग से चिकित्सा देखभाल की तलाश नहीं है। ज्यादातर मामलों में, लोगों को डॉक्टर के पास जाना है, तो आप पहले से ही बवासीर के साथ एक पाइन शंकु चढ़ गए है। क्या होगा यदि सूजन गले में बवासीर, खून और पूरी तरह से लाइव अनुमति नहीं देते?
अक्सर मंच नहीं चल पर बीमारी के इलाज से अधिक नहीं 10-14 दिनों तक रहता है। बवासीर का इलाज करने के बाहर हो गया, यह आमतौर पर और अधिक जटिल है और इसलिए, समय समस्या को ठीक करने के लिए अधिक की आवश्यकता होगी।
लक्षण है कि एक लंबे समय के लिए रोगी को परेशानी का कारण की गंभीरता को कम, बवासीर के लिए मोमबत्तियां और मलहम में मदद मिलेगी। एक सस्ती और प्रभावी दवाओं के लिए निम्नलिखित शामिल हैंः
- "Emla", "राहत अग्रिम" - एनाल्जेसिक घटक के साथ मोमबत्ती। एक संवेदनाहारी रचना के रूप में "Emly" lidocaine शामिल थे। "राहत अग्रिम" उसमें benzocaine निहित के कारण दर्द दूर करता है।
- "Nigepan" हेपरिन मरहम - उपलब्ध थक्का-रोधी सपोजिटरी और मलहम के रूप krovosvertyvayuschee और hemostatic कार्रवाई होने गुदा दरारें उपचार की सुविधा के लिए कर रहे हैं।
- "Proctosedyl", "Aurobin" - हार्मोनल मोमबत्ती और बवासीर, प्रभावी और सस्ती के लिए मलहम। ड्रग्स और उनके अनुरूप त्वरित जटिल प्रभाव है -, गुदा क्षेत्र में सूजन को कम खुजली और दर्द है, जो मरीज की हालत की सुविधा को राहत देने के।
- "डाईक्लोफेनाक", "Viburkol" "आइबूप्रोफेन" - विरोधी भड़काऊ ऊपर मोमबत्ती और बवासीर के उपचार के लिए मलहम साथ संयोजन में उपयोग दवाओं।
गुदा आसपास के त्वचा के भड़काऊ प्रक्रिया में शामिल होने, "Levomekol" "Mafenits एसीटेट" का उपयोग के साथ।
"Adrokson", "राहत", "Proktoglivenol" - यह भी संयुक्त प्रकार बवासीर से दवाओं ध्यान देने योग्य है। उन में सामग्री के कारण venotonic, vasoconstrictor और संवेदनाहारी एजेंट ऊतक पुनर्जनन तेज हो गया है।
मैं आंतरिक बवासीर के लिए मरहम का उपयोग कर सकते हैं?
मरहम आवेदन एक दिन में कई बार किया जाता है। बाहरी चिकित्सा के इस प्रकार यदि बवासीर है, लेकिन भीतरी कोलोरेक्टल घावों के साथ क्या करना है विशेष रूप से उपयोगी है? इस मामले में, रोग और मलहम के प्रारंभिक चरणों में। सूजन की साइट में प्रवेश करने के लिए एक विशेष उपकरण है जो करने के लिए दवा लागू किया जाता है, या उंगली का उपयोग करना गुदा नहर चिकना करने के लिए। मलहम और किसी अन्य तरीके सेः दवा एक कपास पट्टी के साथ गर्भवती और मलाशय में इंजेक्ट किया।
आज के लिए बवासीर के लिए दवाओं के वर्गीकरण भी मुश्किल रोगियों के एक अनुभवी प्रोक्टोलॉजिस्ट शामिल इलाज का चयन करने कि इतने महान है। खाते में लागत और मजबूत के व्यक्तिगत घटकों, जिस स्थिति में दवा का एक परिवर्तन अपरिहार्य हो जाएगा करने के लिए असहिष्णुता की संभावना है।
बवासीर के इलाज में एलर्जी और साइड इफेक्ट से बचें संभव के रूप में sostavuom प्राकृतिक या समान के साथ दवाओं के उपयोग के प्राकृतिक करने के लिए की वजह से संभव है। सबसे इन उपकरणों के बीच लोकप्रिय नीचे सूचीबद्ध दवाओं रहे हैं।
"Bezornil" - मरहम, एक मजबूत hemostatic और रोगाणुरोधी कार्रवाई है। दवा की hypoallergenic रचना के लिए धन्यवाद एलर्जी का कारण नहीं है, यह एक स्थानीय कसैले प्रभाव पैदा करता है। इसके अलावा, गुदा अंगूठी पर "Bezornila" के आवेदन और उसके चारों ओर त्वचा - यह जब, बवासीर क्योंकि दवा सूजन को हटा करने के लिए पहली बात है। मलाशय एक व्यावसायिक रूप से टिप पैकिंग का उपयोग करते हुए मरहम कर सकते हैं और बाहर की दरारें और गहरी बवासीर, शुरू करने के लिए दवा का प्रयोग करें। सुबह और सोने से पहले के रूप में "Bezornil" लागू शौच के प्रत्येक कार्य के बाद, साथ ही।
हार्मोनल और immunomodulating "Posterisan"
"Posterisan" सपोजिटरी और मलहम के रूप में निर्मित है। हार्मोनल एजेंटों की एक सुस्पष्ट विशेषता ई कोलाई, जो संयुक्त immunostimulatory सामयिक तैयारी की श्रेणी में इसे ले जाने के लिए अनुमति देता के माइक्रोबियल कोशिकाओं की उपस्थिति है।
जब नियमित रूप से इस्तेमाल, "Posterisan" आंत के प्राकृतिक सुरक्षा को मजबूत बनाने में मदद करता है। हार्मोनल तत्वों के कारण मलहम इसके उपयोग सहवर्ती जिल्द की सूजन, घाव और भंग होने के लिए उचित है। गरिमा "Posterisan" कहा जा सकता है और इसके किफायती मूल्य।
बवासीर के उपचार और मरहम के लिए होम्योपैथिक उपचार के अलावा फ्लेमिंग ध्यान दिया जाना चाहिए। निरूपण हानिरहित, उसके घटकों बीमारी अभिव्यक्तियों के एक व्यापक स्पेक्ट्रम, खुजली, दर्द, खून बह रहा, सूजन सहित से निपटने के लिए। दवा का रहस्य प्रभावकारिता कैलेंडुला, जिंक ऑक्साइड, Hamamelis, मेन्थॉल और Eskuljus का एक संयोजन है। मलहम फ्लेमिंग रक्त वाहिकाओं को मजबूत के आवेदन के एक सप्ताह के पाठ्यक्रम के बाद, रक्त का प्रवाह स्थिर है। यह गुदा के शीर्ष पर लागू किया जाना चाहिए अगर बवासीर मिला है। वास्तव में क्या हो सकता है नहीं है, क्योंकि यह आंतरिक भागों में जब बवासीर की सूजन यह लागू करने के लिए है। जब जटिलताओं दवा नहीं है। फ्लेमिंग एक पर्चे के बिना मरहम जारी किया गया है, लेकिन आवेदन करने से पहले एक डॉक्टर से परामर्श करने की सलाह दी जाती है।
बेशक, इस तरह बवासीर के रूप में एक बीमारी का इलाज करने के लिए, सामान्य जीवन असंभव नेतृत्व करने के लिए जारी है। ज़ोरदार अभ्यास, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और उचित पोषण के अभाव - कि चिकित्सा का आधार है। लेकिन फिर भी बवासीर का इलाज, आप एक सौ प्रतिशत यकीन है कि रोग फिर से वापस नहीं आता है नहीं हो सकता।
रोग का मुकाबला करने के उद्देश्य से उपचारात्मक उपायों के जटिल, यह कब्ज की रोकथाम के शामिल करने के लिए आवश्यक है। कुर्सी एक नियमित रूप से होना चाहिए, लेकिन क्योंकि आहार के पालन - वसूली के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त।
बवासीर के लिए आहारः क्या आप जानना चाहते हैं?
डॉक्टर के रोगी पर आम तौर पर अगर आप बवासीर मिल गया कि क्या करना है के बारे में सलाह प्राप्त करता है। लेकिन अगर किसी भी कारण से वहाँ विशेषज्ञों के कोई संभावना नहीं है, यह निम्न आहार का पालन करने के लिए आवश्यक हैः
- ताजे फल और सब्जियों का न्यूनतम - उत्पादों उपचार गर्मी के अधीन किया जाना चाहिए।
- आहार का एक घटक के रूप में सही आलूबुखारा, सूखे खुबानी, अलसी या सूरजमुखी तेल slabyaschih।
- बवासीर के उपचार के दौरान शराब पीने अस्वीकार्य है।
- बेकरी और पास्ता गेहूं का आटा, राई से बनाया से, यह बचना करने के लिए बेहतर है।
- उबला हुआ या धीमी आंच पर पकाया मांस व्यंजन, कुटू चावल या जौ का आटा, कम वसा वाले डेयरी उत्पादों को प्राथमिकता दें।
- प्रतिदिन कम से कम 1. 5 लीटर - यह नियमित रूप से पानी का खूब पीने के लिए महत्वपूर्ण है।
तो बाहर परिणाम की एक त्वरित उपलब्धि के लिए बवासीर, खून बह रहा और गले मिल आहार लोक उपचार पूरक होना चाहिए। साल और आज एक महान कई के लिए व्यंजनों की मानवीय अनुभव से अधिक सिद्ध, लेकिन उन के बीच में सबसे प्रभावी और सुरक्षित है।
क्या मिला बवासीर हैं - पुरुषों में काफी आम सवाल है। जड़ी बूटियों के हिप स्नान प्रारंभिक अवस्था में इस बीमारी से निपटने के लिए सस्ती और आसान तरीका में से एक हैं। सक्रिय तत्व कैमोमाइल, बारी, कैलेंडुला, ओक छाल और अन्य औषधीय पौधों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक प्रकार का पौधा, मैंगनीज समाधान के साथ हर्बल चाय कम्बाइन और पानी को जोड़ा गया। यह स्नान कम से कम 20-30 मिनट लग चाहिए, पानी का तापमान बहुत शरीर का तापमान अधिक नहीं होनी चाहिए।
आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं को अक्सर एक समान समस्या का सामना करना पड़ है, लेकिन क्योंकि वे क्या अगर आप बवासीर मिल करने के लिए पता है। समुद्र हिरन का सींग तेलः महिला उपकरण सिद्ध कर दिया है। रोग शिक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ता लिए, आप एक तंपन उपयोग कर सकते हैं। यह, तेल हिरन का सींग गुदा में डाला जाता है और रात भर छोड़ दें भिगो। अधिक सुविधाजनक सादृश्य समुद्र हिरन का सींग तेल है, जो किसी भी दवा की दुकान में बेचा जाता है के साथ एक मोमबत्ती है।
एक और साधन के रूप में घर पर बवासीर के इलाज के लिए आलू मोमबत्ती फोन करना चाहिए। उन्हें पकाने के लिए, बस कच्चे जड़ को साफ करने और शंकु के आकार वस्तु से इसे काट। सपोसिटरी के व्यास से अधिक 1 सेमी नहीं होना चाहिए, और लंबाई -। 4 सेमी मोमबत्ती आलू पूरी रात के लिए मलाशय में डाल दिया, प्रक्रिया 10 दिनों के लिए दोहराया गया। अनुपूरक चिकित्सा आलू लोशन हो सकता हैः गुदा लागू किया कपास जड़ों के रस में भिगो पट्टी के लिए हर शाम, और 20-30 मिनट के लिए इसे छोड़।
उनकी समस्याओं पर शर्म आनी नहीं है और अगले दिन अपने फैसले को स्थगित करने का। मुख्य बात - समय चिकित्सा मदद लेने की। इलाज और प्रगतिशील बवासीर कोलोरेक्टल कैंसर में विकसित करने में सक्षम।
| क्या होगा अगर मिल गया बवासीर? बवासीर के लिए मलहमः सस्ते और कुशल। कैसे घर पर बवासीर के इलाज के लिए? कुछ बीमारियां जोर सौंदर्य कारणों के लिए बात नहीं करते, और अक्सर। हालांकि, छुपा समस्याओं कोई भी ठीक करने के लिए मदद की है। उचित कार्रवाई करने के बिना, रोगी चलाता जोखिम की स्थिति बढ़। लेकिन क्या होगा अगर आप बवासीर मिल गया? जवाब स्पष्ट हैः यह एक गंभीर और कभी कभी अपरिवर्तनीय स्वास्थ्य जटिलताओं के लिए इंतजार करना जितनी जल्दी हो सके उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक नहीं है। बीमारी दुनिया की आबादी के बीच सबसे लोकप्रिय में से एक है। एक नियम के रूप में, वयस्क पुरुषों और महिलाओं की इसके लक्षणों से ग्रस्त हैं, बच्चों लगभग रोग से प्रभावित नहीं थे। रोग के कारणों की परवाह किए बिना विकसित करने, यह दवाओं के साथ प्रयोग करने के लिए आवश्यक नहीं है। प्रोक्टोलॉजिस्ट केवल एक पेशेवर अगर मिल गया क्या कार्रवाई करने के लिए जानता है बवासीर कैसे घर पर इलाज के लिए इस रोग और कौन सी दवाएं। इस रोग से छुटकारा मलाशय की रक्त वाहिकाओं में रक्त परिसंचरण साथ जुड़ा हुआ है पाने के लिए, इसे सही ढंग से उसके निदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। रोग पारंपरिक तीन प्रकार में विभाजित हैः - आंतरिक; - आउटडोर; - संयुक्त। रोगों के इन प्रकार हर जगह निदान कर रहे हैं। आदेश मलाशय की आंतरिक सूजन की पुष्टि करने के लिए, परीक्षा प्रोक्टोलॉजिस्ट बिना नहीं कर सकते। जलन, खुजली, परिपूर्णता की भावना आंत्र और अन्य आंतों की बीमारियों का संकेत हो सकता। अक्सर मरीजों के लक्षणों की अनदेखी करने की कोशिश कर रहा है, एक समय पर ढंग से चिकित्सा देखभाल की तलाश नहीं है। ज्यादातर मामलों में, लोगों को डॉक्टर के पास जाना है, तो आप पहले से ही बवासीर के साथ एक पाइन शंकु चढ़ गए है। क्या होगा यदि सूजन गले में बवासीर, खून और पूरी तरह से लाइव अनुमति नहीं देते? अक्सर मंच नहीं चल पर बीमारी के इलाज से अधिक नहीं दस-चौदह दिनों तक रहता है। बवासीर का इलाज करने के बाहर हो गया, यह आमतौर पर और अधिक जटिल है और इसलिए, समय समस्या को ठीक करने के लिए अधिक की आवश्यकता होगी। लक्षण है कि एक लंबे समय के लिए रोगी को परेशानी का कारण की गंभीरता को कम, बवासीर के लिए मोमबत्तियां और मलहम में मदद मिलेगी। एक सस्ती और प्रभावी दवाओं के लिए निम्नलिखित शामिल हैंः - "Emla", "राहत अग्रिम" - एनाल्जेसिक घटक के साथ मोमबत्ती। एक संवेदनाहारी रचना के रूप में "Emly" lidocaine शामिल थे। "राहत अग्रिम" उसमें benzocaine निहित के कारण दर्द दूर करता है। - "Nigepan" हेपरिन मरहम - उपलब्ध थक्का-रोधी सपोजिटरी और मलहम के रूप krovosvertyvayuschee और hemostatic कार्रवाई होने गुदा दरारें उपचार की सुविधा के लिए कर रहे हैं। - "Proctosedyl", "Aurobin" - हार्मोनल मोमबत्ती और बवासीर, प्रभावी और सस्ती के लिए मलहम। ड्रग्स और उनके अनुरूप त्वरित जटिल प्रभाव है -, गुदा क्षेत्र में सूजन को कम खुजली और दर्द है, जो मरीज की हालत की सुविधा को राहत देने के। - "डाईक्लोफेनाक", "Viburkol" "आइबूप्रोफेन" - विरोधी भड़काऊ ऊपर मोमबत्ती और बवासीर के उपचार के लिए मलहम साथ संयोजन में उपयोग दवाओं। गुदा आसपास के त्वचा के भड़काऊ प्रक्रिया में शामिल होने, "Levomekol" "Mafenits एसीटेट" का उपयोग के साथ। "Adrokson", "राहत", "Proktoglivenol" - यह भी संयुक्त प्रकार बवासीर से दवाओं ध्यान देने योग्य है। उन में सामग्री के कारण venotonic, vasoconstrictor और संवेदनाहारी एजेंट ऊतक पुनर्जनन तेज हो गया है। मैं आंतरिक बवासीर के लिए मरहम का उपयोग कर सकते हैं? मरहम आवेदन एक दिन में कई बार किया जाता है। बाहरी चिकित्सा के इस प्रकार यदि बवासीर है, लेकिन भीतरी कोलोरेक्टल घावों के साथ क्या करना है विशेष रूप से उपयोगी है? इस मामले में, रोग और मलहम के प्रारंभिक चरणों में। सूजन की साइट में प्रवेश करने के लिए एक विशेष उपकरण है जो करने के लिए दवा लागू किया जाता है, या उंगली का उपयोग करना गुदा नहर चिकना करने के लिए। मलहम और किसी अन्य तरीके सेः दवा एक कपास पट्टी के साथ गर्भवती और मलाशय में इंजेक्ट किया। आज के लिए बवासीर के लिए दवाओं के वर्गीकरण भी मुश्किल रोगियों के एक अनुभवी प्रोक्टोलॉजिस्ट शामिल इलाज का चयन करने कि इतने महान है। खाते में लागत और मजबूत के व्यक्तिगत घटकों, जिस स्थिति में दवा का एक परिवर्तन अपरिहार्य हो जाएगा करने के लिए असहिष्णुता की संभावना है। बवासीर के इलाज में एलर्जी और साइड इफेक्ट से बचें संभव के रूप में sostavuom प्राकृतिक या समान के साथ दवाओं के उपयोग के प्राकृतिक करने के लिए की वजह से संभव है। सबसे इन उपकरणों के बीच लोकप्रिय नीचे सूचीबद्ध दवाओं रहे हैं। "Bezornil" - मरहम, एक मजबूत hemostatic और रोगाणुरोधी कार्रवाई है। दवा की hypoallergenic रचना के लिए धन्यवाद एलर्जी का कारण नहीं है, यह एक स्थानीय कसैले प्रभाव पैदा करता है। इसके अलावा, गुदा अंगूठी पर "Bezornila" के आवेदन और उसके चारों ओर त्वचा - यह जब, बवासीर क्योंकि दवा सूजन को हटा करने के लिए पहली बात है। मलाशय एक व्यावसायिक रूप से टिप पैकिंग का उपयोग करते हुए मरहम कर सकते हैं और बाहर की दरारें और गहरी बवासीर, शुरू करने के लिए दवा का प्रयोग करें। सुबह और सोने से पहले के रूप में "Bezornil" लागू शौच के प्रत्येक कार्य के बाद, साथ ही। हार्मोनल और immunomodulating "Posterisan" "Posterisan" सपोजिटरी और मलहम के रूप में निर्मित है। हार्मोनल एजेंटों की एक सुस्पष्ट विशेषता ई कोलाई, जो संयुक्त immunostimulatory सामयिक तैयारी की श्रेणी में इसे ले जाने के लिए अनुमति देता के माइक्रोबियल कोशिकाओं की उपस्थिति है। जब नियमित रूप से इस्तेमाल, "Posterisan" आंत के प्राकृतिक सुरक्षा को मजबूत बनाने में मदद करता है। हार्मोनल तत्वों के कारण मलहम इसके उपयोग सहवर्ती जिल्द की सूजन, घाव और भंग होने के लिए उचित है। गरिमा "Posterisan" कहा जा सकता है और इसके किफायती मूल्य। बवासीर के उपचार और मरहम के लिए होम्योपैथिक उपचार के अलावा फ्लेमिंग ध्यान दिया जाना चाहिए। निरूपण हानिरहित, उसके घटकों बीमारी अभिव्यक्तियों के एक व्यापक स्पेक्ट्रम, खुजली, दर्द, खून बह रहा, सूजन सहित से निपटने के लिए। दवा का रहस्य प्रभावकारिता कैलेंडुला, जिंक ऑक्साइड, Hamamelis, मेन्थॉल और Eskuljus का एक संयोजन है। मलहम फ्लेमिंग रक्त वाहिकाओं को मजबूत के आवेदन के एक सप्ताह के पाठ्यक्रम के बाद, रक्त का प्रवाह स्थिर है। यह गुदा के शीर्ष पर लागू किया जाना चाहिए अगर बवासीर मिला है। वास्तव में क्या हो सकता है नहीं है, क्योंकि यह आंतरिक भागों में जब बवासीर की सूजन यह लागू करने के लिए है। जब जटिलताओं दवा नहीं है। फ्लेमिंग एक पर्चे के बिना मरहम जारी किया गया है, लेकिन आवेदन करने से पहले एक डॉक्टर से परामर्श करने की सलाह दी जाती है। बेशक, इस तरह बवासीर के रूप में एक बीमारी का इलाज करने के लिए, सामान्य जीवन असंभव नेतृत्व करने के लिए जारी है। ज़ोरदार अभ्यास, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और उचित पोषण के अभाव - कि चिकित्सा का आधार है। लेकिन फिर भी बवासीर का इलाज, आप एक सौ प्रतिशत यकीन है कि रोग फिर से वापस नहीं आता है नहीं हो सकता। रोग का मुकाबला करने के उद्देश्य से उपचारात्मक उपायों के जटिल, यह कब्ज की रोकथाम के शामिल करने के लिए आवश्यक है। कुर्सी एक नियमित रूप से होना चाहिए, लेकिन क्योंकि आहार के पालन - वसूली के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त। बवासीर के लिए आहारः क्या आप जानना चाहते हैं? डॉक्टर के रोगी पर आम तौर पर अगर आप बवासीर मिल गया कि क्या करना है के बारे में सलाह प्राप्त करता है। लेकिन अगर किसी भी कारण से वहाँ विशेषज्ञों के कोई संभावना नहीं है, यह निम्न आहार का पालन करने के लिए आवश्यक हैः - ताजे फल और सब्जियों का न्यूनतम - उत्पादों उपचार गर्मी के अधीन किया जाना चाहिए। - आहार का एक घटक के रूप में सही आलूबुखारा, सूखे खुबानी, अलसी या सूरजमुखी तेल slabyaschih। - बवासीर के उपचार के दौरान शराब पीने अस्वीकार्य है। - बेकरी और पास्ता गेहूं का आटा, राई से बनाया से, यह बचना करने के लिए बेहतर है। - उबला हुआ या धीमी आंच पर पकाया मांस व्यंजन, कुटू चावल या जौ का आटा, कम वसा वाले डेयरी उत्पादों को प्राथमिकता दें। - प्रतिदिन कम से कम एक. पाँच लीटरटर - यह नियमित रूप से पानी का खूब पीने के लिए महत्वपूर्ण है। तो बाहर परिणाम की एक त्वरित उपलब्धि के लिए बवासीर, खून बह रहा और गले मिल आहार लोक उपचार पूरक होना चाहिए। साल और आज एक महान कई के लिए व्यंजनों की मानवीय अनुभव से अधिक सिद्ध, लेकिन उन के बीच में सबसे प्रभावी और सुरक्षित है। क्या मिला बवासीर हैं - पुरुषों में काफी आम सवाल है। जड़ी बूटियों के हिप स्नान प्रारंभिक अवस्था में इस बीमारी से निपटने के लिए सस्ती और आसान तरीका में से एक हैं। सक्रिय तत्व कैमोमाइल, बारी, कैलेंडुला, ओक छाल और अन्य औषधीय पौधों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक प्रकार का पौधा, मैंगनीज समाधान के साथ हर्बल चाय कम्बाइन और पानी को जोड़ा गया। यह स्नान कम से कम बीस-तीस मिनट लग चाहिए, पानी का तापमान बहुत शरीर का तापमान अधिक नहीं होनी चाहिए। आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं को अक्सर एक समान समस्या का सामना करना पड़ है, लेकिन क्योंकि वे क्या अगर आप बवासीर मिल करने के लिए पता है। समुद्र हिरन का सींग तेलः महिला उपकरण सिद्ध कर दिया है। रोग शिक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ता लिए, आप एक तंपन उपयोग कर सकते हैं। यह, तेल हिरन का सींग गुदा में डाला जाता है और रात भर छोड़ दें भिगो। अधिक सुविधाजनक सादृश्य समुद्र हिरन का सींग तेल है, जो किसी भी दवा की दुकान में बेचा जाता है के साथ एक मोमबत्ती है। एक और साधन के रूप में घर पर बवासीर के इलाज के लिए आलू मोमबत्ती फोन करना चाहिए। उन्हें पकाने के लिए, बस कच्चे जड़ को साफ करने और शंकु के आकार वस्तु से इसे काट। सपोसिटरी के व्यास से अधिक एक सेमी नहीं होना चाहिए, और लंबाई -। चार सेमी मोमबत्ती आलू पूरी रात के लिए मलाशय में डाल दिया, प्रक्रिया दस दिनों के लिए दोहराया गया। अनुपूरक चिकित्सा आलू लोशन हो सकता हैः गुदा लागू किया कपास जड़ों के रस में भिगो पट्टी के लिए हर शाम, और बीस-तीस मिनट के लिए इसे छोड़। उनकी समस्याओं पर शर्म आनी नहीं है और अगले दिन अपने फैसले को स्थगित करने का। मुख्य बात - समय चिकित्सा मदद लेने की। इलाज और प्रगतिशील बवासीर कोलोरेक्टल कैंसर में विकसित करने में सक्षम। |
समार की प्राचान कहानिया
लोक जो प्रारत बना हुआ था, हमदर्दी के स्वर में बोला
" हे ओडिन की सुन्दरी रानी फ्रिग । तुम्हारी इस तरह की चिन्ता वृथा है । देवता लोग चाल्डर को बहुत चाहते है उसके ऊपर पत्थर भाले तलवारे चला कर वह इसलिये खेल करते हैं कि वह जानते हैं कि हम सब से उसका कुछ बिगाड नही हो सकता ।"
फ्रिग मतोप से बाली "धातु, लकडी, पत्थर किसी भी चीज से मेरे पुत्र का नुकशान नहीं हो सकता क्योंकि दुनिया की सभी वस्तुओं ने उसको न मारने का मुझे वचन दिया है । "
लोक यह सुन कर मीठी बोली में चतुरता से बोला " हे फ्रिग तुम जितनी सुन्दर हो उतनी ही बुद्धिमान भी हो । मुझे यह सुन कर बहुत खुशी हुई है कि ससार की हर चीज से तुमने ऐसा वचन ले लिया है। मेरा विचार है कि मजबूत, कमजोर, कठार र नरम सभी से तुमने ऐसा वचन ले लिया होगा ।"
"हॉ सभी से", लापरवाही से फ्रिग ने हाथ हिला कर उत्तर दिया, "केवल एक पतली और नरम वेल रह गई थी और वह इतनी कमजोर थी कि मेरी नोकरानिया ने उससे वचन लेना वृथा समझा क्योकि ऐसी नाचीज वेल भला किसी का 'बगाड़ भा क्या सकता है ? १
दुष्ट ला यह सुन कर अपने मन में बहुत खुश हुआ पर उसने अपनी खुशी का जाहिर नहीं होने दिया र भालेपन से पूछा
"भला उस वेल का नाम क्या है ?"
"उसका नाम मिसलन्दा है'", उसी लापरवाही के साथ किंग ने जवाब दिया ।
जब लोक वहाँ से लाटा ता सीवा मनुष्या की दुनिया मे गया यार वहा से उसने मिसलन्टा की एक पतली वेल उग्वादी । उसको लेकर वह एक बोने कार्य गर हेल ग्याट के पास पहुंचा और जाते ही अपने जादू से उसकी डिसम पर वाकर लिया । वह उससे बोला
' हे हेर्ल न्वाईतेरेः काबले का कारीगर दुनिया भर में कहीं नहीं है । इमेल्डे और उसरे पुरेअर उसने पुत्र यह सभी कारीगर तुझमे नीचे | समार की प्राचान कहानिया लोक जो प्रारत बना हुआ था, हमदर्दी के स्वर में बोला " हे ओडिन की सुन्दरी रानी फ्रिग । तुम्हारी इस तरह की चिन्ता वृथा है । देवता लोग चाल्डर को बहुत चाहते है उसके ऊपर पत्थर भाले तलवारे चला कर वह इसलिये खेल करते हैं कि वह जानते हैं कि हम सब से उसका कुछ बिगाड नही हो सकता ।" फ्रिग मतोप से बाली "धातु, लकडी, पत्थर किसी भी चीज से मेरे पुत्र का नुकशान नहीं हो सकता क्योंकि दुनिया की सभी वस्तुओं ने उसको न मारने का मुझे वचन दिया है । " लोक यह सुन कर मीठी बोली में चतुरता से बोला " हे फ्रिग तुम जितनी सुन्दर हो उतनी ही बुद्धिमान भी हो । मुझे यह सुन कर बहुत खुशी हुई है कि ससार की हर चीज से तुमने ऐसा वचन ले लिया है। मेरा विचार है कि मजबूत, कमजोर, कठार र नरम सभी से तुमने ऐसा वचन ले लिया होगा ।" "हॉ सभी से", लापरवाही से फ्रिग ने हाथ हिला कर उत्तर दिया, "केवल एक पतली और नरम वेल रह गई थी और वह इतनी कमजोर थी कि मेरी नोकरानिया ने उससे वचन लेना वृथा समझा क्योकि ऐसी नाचीज वेल भला किसी का 'बगाड़ भा क्या सकता है ? एक दुष्ट ला यह सुन कर अपने मन में बहुत खुश हुआ पर उसने अपनी खुशी का जाहिर नहीं होने दिया र भालेपन से पूछा "भला उस वेल का नाम क्या है ?" "उसका नाम मिसलन्दा है'", उसी लापरवाही के साथ किंग ने जवाब दिया । जब लोक वहाँ से लाटा ता सीवा मनुष्या की दुनिया मे गया यार वहा से उसने मिसलन्टा की एक पतली वेल उग्वादी । उसको लेकर वह एक बोने कार्य गर हेल ग्याट के पास पहुंचा और जाते ही अपने जादू से उसकी डिसम पर वाकर लिया । वह उससे बोला ' हे हेर्ल न्वाईतेरेः काबले का कारीगर दुनिया भर में कहीं नहीं है । इमेल्डे और उसरे पुरेअर उसने पुत्र यह सभी कारीगर तुझमे नीचे |
इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने इस्लामिक स्टेट से संबंध रखने वाले नौसेना के 5 अफसरों को फांसी की सजा सुनाई है. उन पांच आरोपियों पर अमेरिकी नौसेना के ईंधन संबंधी एक जहाज पर हमला करने के लिए एक पाकिस्तानी जंगी जहाज को अगवा करने की साजिश रचने का आरोप है.
कहा जा रहा है कि जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि आईएस आतंकी एक पाकिस्तानी युद्धपोत का अपहरण करके उससे अमरीकी जहाजों पर हमला करने की साजिश रच रहे थे. इस साजिश में नौसेना के ये पांच अफसर भी शामिल थे.
सब-लेफ्टीनेंट हमाद अहमद और चार अन्य अधिकारियों को एक नेवी कोर्ट ने दोषी पाया है. ये लोग 6 सितंबर 2014 को कराची के नेवल डॉकयार्ड पर हुए हमले के आरोपी थे.
| इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने इस्लामिक स्टेट से संबंध रखने वाले नौसेना के पाँच अफसरों को फांसी की सजा सुनाई है. उन पांच आरोपियों पर अमेरिकी नौसेना के ईंधन संबंधी एक जहाज पर हमला करने के लिए एक पाकिस्तानी जंगी जहाज को अगवा करने की साजिश रचने का आरोप है. कहा जा रहा है कि जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि आईएस आतंकी एक पाकिस्तानी युद्धपोत का अपहरण करके उससे अमरीकी जहाजों पर हमला करने की साजिश रच रहे थे. इस साजिश में नौसेना के ये पांच अफसर भी शामिल थे. सब-लेफ्टीनेंट हमाद अहमद और चार अन्य अधिकारियों को एक नेवी कोर्ट ने दोषी पाया है. ये लोग छः सितंबर दो हज़ार चौदह को कराची के नेवल डॉकयार्ड पर हुए हमले के आरोपी थे. |
लखनऊ (ब्यूरो)। बिजली विभाग की हेल्पलाइन 1912 फिलहाल पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गई है। इस नंबर पर कॉल करने वाले उपभोक्ताओं को कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। जिसके चलते उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व याचिका दायर की है। परिषद ने सवाल उठाया है कि जब 1912 पर सुनवाई नहीं हो रही है तो उपभोक्ताओं को मुआवजा कैसे मिलेगा।
1912 पर उपभोक्ताओं की शिकायतों पर ज्यादातर मामलों में फर्जी रिपोर्ट लगाने, बिजली विभाग की रेटिंग खराब होने के बावजूद भी विभाग में तीन आईएएस की नई तैनाती किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह, सदस्य बीके श्रीवास्तव व संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर लोक महत्व याचिका दाखिल करते हुए मांग रखी कि जब 1912 पूरी तरीके से प्रभावी नहीं है, तो उपभोक्ताओं को मुआवजा कैसे मिलेगा। विद्युत नियामक आयोग बिजली कंपनियों को निर्देश दिए कि जिन इलाकों में बिजली का व्यवधान हुआ है और तय समय के तहत उसका निदान नहीं हुआ है तो उस क्षेत्र के सभी बिजली उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में मुआवजा दिया जाए। विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन ने कहा कि उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए मामले निश्चित तौर पर गंभीर हैैं। आयोग विद्युत अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति सिस्टम सुधार और सुविधा के लिए उचित कार्रवाई कार्रवाई पर विचार करेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष का कहना है कि आने वाले दिनों में बिजली की डिमांड 28 हजार मेगावाट पार जा सकती है। ऐसे में बिजली कंपनियों को अपने सिस्टम पर फोकस करना होगा। जिससे जब 28 हजार मेगावाट के पार डिमांड पहुंचेगी, तो साफ है कि उस समय चुनौती बढ़ जाएगी और जनता को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।
| लखनऊ । बिजली विभाग की हेल्पलाइन एक हज़ार नौ सौ बारह फिलहाल पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गई है। इस नंबर पर कॉल करने वाले उपभोक्ताओं को कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। जिसके चलते उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व याचिका दायर की है। परिषद ने सवाल उठाया है कि जब एक हज़ार नौ सौ बारह पर सुनवाई नहीं हो रही है तो उपभोक्ताओं को मुआवजा कैसे मिलेगा। एक हज़ार नौ सौ बारह पर उपभोक्ताओं की शिकायतों पर ज्यादातर मामलों में फर्जी रिपोर्ट लगाने, बिजली विभाग की रेटिंग खराब होने के बावजूद भी विभाग में तीन आईएएस की नई तैनाती किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह, सदस्य बीके श्रीवास्तव व संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर लोक महत्व याचिका दाखिल करते हुए मांग रखी कि जब एक हज़ार नौ सौ बारह पूरी तरीके से प्रभावी नहीं है, तो उपभोक्ताओं को मुआवजा कैसे मिलेगा। विद्युत नियामक आयोग बिजली कंपनियों को निर्देश दिए कि जिन इलाकों में बिजली का व्यवधान हुआ है और तय समय के तहत उसका निदान नहीं हुआ है तो उस क्षेत्र के सभी बिजली उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में मुआवजा दिया जाए। विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन ने कहा कि उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए मामले निश्चित तौर पर गंभीर हैैं। आयोग विद्युत अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति सिस्टम सुधार और सुविधा के लिए उचित कार्रवाई कार्रवाई पर विचार करेगा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष का कहना है कि आने वाले दिनों में बिजली की डिमांड अट्ठाईस हजार मेगावाट पार जा सकती है। ऐसे में बिजली कंपनियों को अपने सिस्टम पर फोकस करना होगा। जिससे जब अट्ठाईस हजार मेगावाट के पार डिमांड पहुंचेगी, तो साफ है कि उस समय चुनौती बढ़ जाएगी और जनता को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। |
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
न्यूजीलैंड की प्राइम मिनिस्टर जैसिंडा अर्डर्न ने अचानक से अपने इस्तीफे की घोषणा की और इस घोषणा में उन्होंने एक शब्द 'टैंक खाली है' का इस्तेमाल किया, जिसको दूसरे शब्दों में बर्नआउट कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वो अब अपनी फैमली - अपने पति क्लार्क टिमोथी गेफोर्ड और चार साल की बेटी नेवे के साथ समय बिताने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन ये बर्नआउट क्या है? जिसके कारण न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिका अर्डर्न ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 2019 में, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने बर्नआउट को एक प्रोफेशनल घटना के रूप में बताया है। हेल्थ स्पेशलिस्ट इस बारें में कहते हैं कि ये ध्यान रखना काफी जरूरी है कि स्ट्रेस और बर्नआउट दो अलग-अलग कंडीशन हैं। लेकिन किसी भी काम के दौरान, एक वक्त के बाद बर्नआउट उबलकर कर सामने आ जाता है।
Burnout: आइये जानते हैं कि ये बर्नआउट क्या है ?
Burnout: बर्नआउट के शुरूआती लक्षण क्या है ?
बर्नआउट वर्क रिलेटेड स्ट्रेस होता है। इसका सबसे बड़ा आम लक्षण थकान महसूस होना है। घर के काम जिसे आप डेली रूटीन के साथ करती थीं वहीं काम आपको बोझ लगने लगते हैं। ऑफिस के घंटे पहाड़ जितने लगने लगते हैं। तो आप समझ ले कि आप बर्नआउट के शिकार हो रहे हैं।
जब आपको बर्नआउट होता है तब आप खुद को उदासी फील होती है। दिमाग में तरह तरह के बुरे खयाल आते हैं। जो आगे जाकर डिप्रेशन में बदलने लग जाती है।
इस दौरान आपको नींद सही से नहीं आती है। नींद आपको आते हुए भी मुश्किल से सो पाते हैं। तो आप बर्न आउट के शिकार होते हैं। इसकी वजह से आपको दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लग जाती है। जिसमें हार्ट की प्रॉबलम, हाई ब्लड प्रेशर, और डायबीटीज का खतरा बढ़ सकता है।
जो काम आपको खुशी देता था वही बोझ लगने लगे। अगर ऐसा आपके साथ हो रहा है तो आपको एक ब्रेक की काफी रख्त जरूरत है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बर्नआउट सिंड्रोम 'क्रोनिक वर्कप्लेस स्ट्रेस' की वजह से हो सकता है। यानी काम को लेकर ज्यादा तनाव। इसको कम करने के लिए आपको विकेशन पर जाना चाहिए। परिवार के साथ वक्त बिताना, ऑफिस के काम से कुछ वक्त के लिए छुट्टी इसको सही करने में सबसे बड़ा रोल प्ले करती है।
| - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? न्यूजीलैंड की प्राइम मिनिस्टर जैसिंडा अर्डर्न ने अचानक से अपने इस्तीफे की घोषणा की और इस घोषणा में उन्होंने एक शब्द 'टैंक खाली है' का इस्तेमाल किया, जिसको दूसरे शब्दों में बर्नआउट कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वो अब अपनी फैमली - अपने पति क्लार्क टिमोथी गेफोर्ड और चार साल की बेटी नेवे के साथ समय बिताने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन ये बर्नआउट क्या है? जिसके कारण न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिका अर्डर्न ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दो हज़ार उन्नीस में, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने बर्नआउट को एक प्रोफेशनल घटना के रूप में बताया है। हेल्थ स्पेशलिस्ट इस बारें में कहते हैं कि ये ध्यान रखना काफी जरूरी है कि स्ट्रेस और बर्नआउट दो अलग-अलग कंडीशन हैं। लेकिन किसी भी काम के दौरान, एक वक्त के बाद बर्नआउट उबलकर कर सामने आ जाता है। Burnout: आइये जानते हैं कि ये बर्नआउट क्या है ? Burnout: बर्नआउट के शुरूआती लक्षण क्या है ? बर्नआउट वर्क रिलेटेड स्ट्रेस होता है। इसका सबसे बड़ा आम लक्षण थकान महसूस होना है। घर के काम जिसे आप डेली रूटीन के साथ करती थीं वहीं काम आपको बोझ लगने लगते हैं। ऑफिस के घंटे पहाड़ जितने लगने लगते हैं। तो आप समझ ले कि आप बर्नआउट के शिकार हो रहे हैं। जब आपको बर्नआउट होता है तब आप खुद को उदासी फील होती है। दिमाग में तरह तरह के बुरे खयाल आते हैं। जो आगे जाकर डिप्रेशन में बदलने लग जाती है। इस दौरान आपको नींद सही से नहीं आती है। नींद आपको आते हुए भी मुश्किल से सो पाते हैं। तो आप बर्न आउट के शिकार होते हैं। इसकी वजह से आपको दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लग जाती है। जिसमें हार्ट की प्रॉबलम, हाई ब्लड प्रेशर, और डायबीटीज का खतरा बढ़ सकता है। जो काम आपको खुशी देता था वही बोझ लगने लगे। अगर ऐसा आपके साथ हो रहा है तो आपको एक ब्रेक की काफी रख्त जरूरत है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बर्नआउट सिंड्रोम 'क्रोनिक वर्कप्लेस स्ट्रेस' की वजह से हो सकता है। यानी काम को लेकर ज्यादा तनाव। इसको कम करने के लिए आपको विकेशन पर जाना चाहिए। परिवार के साथ वक्त बिताना, ऑफिस के काम से कुछ वक्त के लिए छुट्टी इसको सही करने में सबसे बड़ा रोल प्ले करती है। |
किन्तु प्रश्न यह है कि इस बात का आधार क्या है कि विशेषणविशेष्यभाव का अर्थ है विशेषणता तथा विशेष्यता । उत्तर यह है कि विशेषण- विशेष्यभाव शब्द दो समासों द्वारा निष्पन्न होता है। पहले तो 'विशेषणं च विशेष्यं च विशेषणविशेष्ये' इस प्रकार विशेषण और विशेष्य शब्द में द्वन्द्व समास होता है और उसके बाद 'तयोर्भावः' इस प्रकार उस द्वन्द्व का मात्रशब्द के साथ षष्ठीतत्पुरुष समास होता है । यह नियम है कि 'द्वन्द्वान्ते द्वन्द्वादौ वा श्रयमाणं पदं प्रत्येकममिसम्बध्यते - द्वन्द्वसमास से पूर्व वा उत्तर में सुनाई देने वाले शब्द का सम्बन्ध द्वन्द्व समास के अङ्गभूत प्रत्येक शब्द के साथ होता है'। विशेषण विशेषप्रभाव शब्द में 'विशेषणविशेष्य' इस द्वन्द्व समास के उत्तर में 'भाव' शब्द सुनाई देता है, अतः अत्र नियमानुसार विशेषण और विशेष्य दोनो शब्दों के साथ उसका सम्बन्ध होने से 'विशेषणभाव' तथा 'विशेष्यभाव' ऐसे दो शब्द बुद्धिगत होते हैं, उनमें 'विशेषणभाव' का अर्थ है 'विशेषणता' और 'विशेष्यभाव' का अर्थ है 'विशेष्यता' । इस प्रकार 'विशेषण- विशेष्यभाव' का अर्थ होता है विशेषता और विशेष्यता । तो इस प्रकार विशेषणविशेष्यभाव जत्र विशेषणता एवं विशेषता के रूप में उभयात्मक है, और विशेषणता केवल विशेषण में ही आश्रित तथा विशेषणस्वरूप है एवं विशेष्यता केवल विशेष्य में आश्रित तथा विशेष्यस्वरूप है तब उसका विशेषण- विशेष्य से भिन्न न होना, विशेषण विशेष्य उभय में आश्रित न होना तथा एक व्यक्तिरूप न होना युक्तिसंगत ही है और उसी कारण उसका सम्बन्ध न होना भी सर्वथा न्यायसंगत ही है ।
विशेषणविशेष्यभाव के समान ही व्याप्यव्यापकभाव, कार्यकारणभाव, आधाराधेयभाव, स्वस्वामिभाव, प्रतियोग्यनुयोगिभाव आदि का भी सम्बन्धत्व असिद्ध है।
प्रश्न होता है कि जब उक्तरीति से इंन सत्रों में सम्वन्धरव सिद्ध नहीं हो पाता तब किस आधार पर शास्त्रों में इन्हें सम्बन्ध शब्द से व्यवहृत किया जाता है ? उत्तर है कि इनमें सम्बन्धत्व नहीं है, यह तो सत्य है, किन्तु इनमें सम्बन्ध का साधर्म्य है और वह है उभयनिरूपणीयत्व - उभय से बोधित होना । आशय यह है कि जैसे मेरी और दण्ड का संयोगसम्बन्ध मेरी और दण्ड के विना बोध्य नहीं होता किन्तु उन दोनों से ही बोध्य होता है उसी प्रकार विशेषण- विशेष्यभाव आदि विशेषण और विशेष्य आदि युगल के विना बोध्य नहीं होते किन्तु उस युगल से ही चोध्य होते हैं, अत; उभयनिरूपणीयत्व - उभयत्रो ध्यत्वरूप से सम्बन्ध का सघर्मा होने से वे सब सम्बन्ध न होते हुये भी उपचार - लक्षणा से सम्बन्ध कहे जाते हैं ।
उपर्युक्त सन्दर्भ से यह स्पष्ट है कि अभाव के साथ इन्द्रिय का कोई सम्बन्ध न होने से अभाव इन्द्रिय से सर्वथा असम्बद्ध है और इन्द्रिय में स्वसम्बद्ध अर्थ की ही ग्राहकता
का नियम है अतः इन्द्रिय से उसका ग्रहण शक्य न होने के कारण उसके ग्रहणार्थ अभावनामक अतिरिक्त प्रमाण की कल्पना अनिवार्य ।
इस विषय में न्यायदर्शन का मन्तव्य यह है कि 'इन्द्रिय स्वसम्बद्ध ही अर्थ का ग्राहक होती है' यह नियम भाव और अभाव सभी पदार्थों के लिये नहीं है किन्तु केवल भावात्मक पदार्थों के ही लिये है, अतः इन्द्रिय से किसी भावात्मक पदार्थ का ग्रहण तभी होगा जब वह इन्द्रिय से सम्बद्ध होगा, किन्तु अभाव को ग्रहण करने के लिये उसके साथ इन्द्रिय के सम्बन्ध की कोई अपेक्षा नहीं है, उसका ग्रहण तो इन्द्रियसम्बन्ध के विना ही केवल विशेषणविशेष्यभाव के आधार पर ही इन्द्रिय द्वारा ही सम्पन्न हो सकता है, अतः तदर्थ अभावनामक पृथक् प्रमाण की कल्पना अनावश्यक है ।
यह कहना कि इन्द्रिय से यदि असम्बद्ध अभाव का ग्रहण माना जायगा तब किसी सन्निहित स्थान में किसी एक अभाव के ग्रहण के समय असन्निहित स्थानों में विद्यमान अन्य सभी अभावों के भी ग्रहण का अतिप्रसङ्ग होगा, ठीक नहीं है, क्योंकि अभावका ग्रहण होने के लिये अभाव में विशेषणता का होना आवश्यक है जो असन्निहित स्थानो के अभाव में सम्भव नहीं है, क्योंकि असन्निहित स्थान के अभाव सन्निहित स्थान में. विद्यमान न होने के कारण सन्निहित स्थान में विशेषण नहीं हो सकते और असन्निहित स्थान के साथ इन्द्रिय का सम्बन्ध न होने से असन्निहित स्थान में भी विशेषण नहीं हो सकते ।
मुख्य बात तो यह है कि यह अतिप्रसङ्ग दोष अभावनामक पृथक् प्रमाण के स्वीकारपक्ष में भी है क्योंकि जैसे इन्द्रिय का अभाव के साथ कोई सम्बन्ध नहीं बन पाता, अतः इन्द्रिय से असम्बद्ध अभाव का ग्रहण मानने पर जैसे एक अभाव के ग्रहण समय अन्य सभी अभावों के ग्रहण की आपत्ति होगी उसी प्रकार अभाव प्रमाण से भी असम्बद्ध अभाव का ग्रहण मानने पर एक अभाव के ग्रहण के समय अन्य सभी अभाव के ग्रहण की आपत्ति होगी ।
इस प्रकार यह दोष जब दोनों पक्षों में समान है तब किसी एक ही पक्ष में इसका उद्भावन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस दोष का जैसा परिहार एक पक्ष में किया जायगा वैसा ही परिहार दूसरे पक्ष में भी कर दिया जा सकता है, अतः सभी वादी प्रतिवादियों ने यह मान्यता स्वीकार की है कि किसी विषय के ऊपर विचार करते समय जो दोष वादी और प्रतिवादी दोनों के मत में समानरूप से सम्भावित हो उस के परिहार का दोनों पर समान दायित्व होने के कारण उसका उद्भावन किसी को न. करना चाहिये । | किन्तु प्रश्न यह है कि इस बात का आधार क्या है कि विशेषणविशेष्यभाव का अर्थ है विशेषणता तथा विशेष्यता । उत्तर यह है कि विशेषण- विशेष्यभाव शब्द दो समासों द्वारा निष्पन्न होता है। पहले तो 'विशेषणं च विशेष्यं च विशेषणविशेष्ये' इस प्रकार विशेषण और विशेष्य शब्द में द्वन्द्व समास होता है और उसके बाद 'तयोर्भावः' इस प्रकार उस द्वन्द्व का मात्रशब्द के साथ षष्ठीतत्पुरुष समास होता है । यह नियम है कि 'द्वन्द्वान्ते द्वन्द्वादौ वा श्रयमाणं पदं प्रत्येकममिसम्बध्यते - द्वन्द्वसमास से पूर्व वा उत्तर में सुनाई देने वाले शब्द का सम्बन्ध द्वन्द्व समास के अङ्गभूत प्रत्येक शब्द के साथ होता है'। विशेषण विशेषप्रभाव शब्द में 'विशेषणविशेष्य' इस द्वन्द्व समास के उत्तर में 'भाव' शब्द सुनाई देता है, अतः अत्र नियमानुसार विशेषण और विशेष्य दोनो शब्दों के साथ उसका सम्बन्ध होने से 'विशेषणभाव' तथा 'विशेष्यभाव' ऐसे दो शब्द बुद्धिगत होते हैं, उनमें 'विशेषणभाव' का अर्थ है 'विशेषणता' और 'विशेष्यभाव' का अर्थ है 'विशेष्यता' । इस प्रकार 'विशेषण- विशेष्यभाव' का अर्थ होता है विशेषता और विशेष्यता । तो इस प्रकार विशेषणविशेष्यभाव जत्र विशेषणता एवं विशेषता के रूप में उभयात्मक है, और विशेषणता केवल विशेषण में ही आश्रित तथा विशेषणस्वरूप है एवं विशेष्यता केवल विशेष्य में आश्रित तथा विशेष्यस्वरूप है तब उसका विशेषण- विशेष्य से भिन्न न होना, विशेषण विशेष्य उभय में आश्रित न होना तथा एक व्यक्तिरूप न होना युक्तिसंगत ही है और उसी कारण उसका सम्बन्ध न होना भी सर्वथा न्यायसंगत ही है । विशेषणविशेष्यभाव के समान ही व्याप्यव्यापकभाव, कार्यकारणभाव, आधाराधेयभाव, स्वस्वामिभाव, प्रतियोग्यनुयोगिभाव आदि का भी सम्बन्धत्व असिद्ध है। प्रश्न होता है कि जब उक्तरीति से इंन सत्रों में सम्वन्धरव सिद्ध नहीं हो पाता तब किस आधार पर शास्त्रों में इन्हें सम्बन्ध शब्द से व्यवहृत किया जाता है ? उत्तर है कि इनमें सम्बन्धत्व नहीं है, यह तो सत्य है, किन्तु इनमें सम्बन्ध का साधर्म्य है और वह है उभयनिरूपणीयत्व - उभय से बोधित होना । आशय यह है कि जैसे मेरी और दण्ड का संयोगसम्बन्ध मेरी और दण्ड के विना बोध्य नहीं होता किन्तु उन दोनों से ही बोध्य होता है उसी प्रकार विशेषण- विशेष्यभाव आदि विशेषण और विशेष्य आदि युगल के विना बोध्य नहीं होते किन्तु उस युगल से ही चोध्य होते हैं, अत; उभयनिरूपणीयत्व - उभयत्रो ध्यत्वरूप से सम्बन्ध का सघर्मा होने से वे सब सम्बन्ध न होते हुये भी उपचार - लक्षणा से सम्बन्ध कहे जाते हैं । उपर्युक्त सन्दर्भ से यह स्पष्ट है कि अभाव के साथ इन्द्रिय का कोई सम्बन्ध न होने से अभाव इन्द्रिय से सर्वथा असम्बद्ध है और इन्द्रिय में स्वसम्बद्ध अर्थ की ही ग्राहकता का नियम है अतः इन्द्रिय से उसका ग्रहण शक्य न होने के कारण उसके ग्रहणार्थ अभावनामक अतिरिक्त प्रमाण की कल्पना अनिवार्य । इस विषय में न्यायदर्शन का मन्तव्य यह है कि 'इन्द्रिय स्वसम्बद्ध ही अर्थ का ग्राहक होती है' यह नियम भाव और अभाव सभी पदार्थों के लिये नहीं है किन्तु केवल भावात्मक पदार्थों के ही लिये है, अतः इन्द्रिय से किसी भावात्मक पदार्थ का ग्रहण तभी होगा जब वह इन्द्रिय से सम्बद्ध होगा, किन्तु अभाव को ग्रहण करने के लिये उसके साथ इन्द्रिय के सम्बन्ध की कोई अपेक्षा नहीं है, उसका ग्रहण तो इन्द्रियसम्बन्ध के विना ही केवल विशेषणविशेष्यभाव के आधार पर ही इन्द्रिय द्वारा ही सम्पन्न हो सकता है, अतः तदर्थ अभावनामक पृथक् प्रमाण की कल्पना अनावश्यक है । यह कहना कि इन्द्रिय से यदि असम्बद्ध अभाव का ग्रहण माना जायगा तब किसी सन्निहित स्थान में किसी एक अभाव के ग्रहण के समय असन्निहित स्थानों में विद्यमान अन्य सभी अभावों के भी ग्रहण का अतिप्रसङ्ग होगा, ठीक नहीं है, क्योंकि अभावका ग्रहण होने के लिये अभाव में विशेषणता का होना आवश्यक है जो असन्निहित स्थानो के अभाव में सम्भव नहीं है, क्योंकि असन्निहित स्थान के अभाव सन्निहित स्थान में. विद्यमान न होने के कारण सन्निहित स्थान में विशेषण नहीं हो सकते और असन्निहित स्थान के साथ इन्द्रिय का सम्बन्ध न होने से असन्निहित स्थान में भी विशेषण नहीं हो सकते । मुख्य बात तो यह है कि यह अतिप्रसङ्ग दोष अभावनामक पृथक् प्रमाण के स्वीकारपक्ष में भी है क्योंकि जैसे इन्द्रिय का अभाव के साथ कोई सम्बन्ध नहीं बन पाता, अतः इन्द्रिय से असम्बद्ध अभाव का ग्रहण मानने पर जैसे एक अभाव के ग्रहण समय अन्य सभी अभावों के ग्रहण की आपत्ति होगी उसी प्रकार अभाव प्रमाण से भी असम्बद्ध अभाव का ग्रहण मानने पर एक अभाव के ग्रहण के समय अन्य सभी अभाव के ग्रहण की आपत्ति होगी । इस प्रकार यह दोष जब दोनों पक्षों में समान है तब किसी एक ही पक्ष में इसका उद्भावन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस दोष का जैसा परिहार एक पक्ष में किया जायगा वैसा ही परिहार दूसरे पक्ष में भी कर दिया जा सकता है, अतः सभी वादी प्रतिवादियों ने यह मान्यता स्वीकार की है कि किसी विषय के ऊपर विचार करते समय जो दोष वादी और प्रतिवादी दोनों के मत में समानरूप से सम्भावित हो उस के परिहार का दोनों पर समान दायित्व होने के कारण उसका उद्भावन किसी को न. करना चाहिये । |
ब्रह्मक्षेत्रं महातीर्थं ब्रह्मणा निर्मितं पुरा ।
कुरुक्षेत्रे पुण्यतमे पितामहनिषेविते ॥१०७॥
#अर्थात - हे ऋषिगण ! वसिष्ठ, शक्ति, #पराशर, इन्दुप्रमति, भरद्वसु, मैत्रावरुण और कुण्डिन - ये सात ऋषि #ब्रह्मक्षेत्र के निवासी कहे गए हैं। यह ब्रह्मक्षेत्र तीर्थ लोक पितामह
ब्रह्मा द्वारा सेवित परम् पवित्र कुरुक्षेत्र में अवस्थित है, प्राचीन काल में स्वयं ब्रह्मा जी ने इस महातीर्थ का निर्माण किया था।।१०५-१०७॥
वायुपुराण, #अध्याय - ५९
(४.) बद्रिकाश्रम
ततस्ते ऋषयः सर्वे धर्मतत्वार्थकांक्षिणः ।
ऋषिं व्यासं पुरस्कृत्य गता बदरिकाश्रमं ॥५॥ तस्मिन्नृषिसभामध्ये शक्तिपुत्रं पराशरम् । सुखासीनं महातेजा मुनिमुख्यगणावृतम् ॥८॥
कृतांजलिपुटो भूत्वा व्यासस्तु ऋषिभिः सह। प्रदक्षिणाभिवादैश्च स्तुतिभिः समपूज्यत्॥९॥
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#अर्थात - तब धर्म के तत्व की अभिलाषा करने वाले वह सम्पूर्ण ऋषि यह सुनकर श्री व्यास जी को आगे कर #बदरिकाश्रम को गये । | ब्रह्मक्षेत्रं महातीर्थं ब्रह्मणा निर्मितं पुरा । कुरुक्षेत्रे पुण्यतमे पितामहनिषेविते ॥एक सौ सात॥ #अर्थात - हे ऋषिगण ! वसिष्ठ, शक्ति, #पराशर, इन्दुप्रमति, भरद्वसु, मैत्रावरुण और कुण्डिन - ये सात ऋषि #ब्रह्मक्षेत्र के निवासी कहे गए हैं। यह ब्रह्मक्षेत्र तीर्थ लोक पितामह ब्रह्मा द्वारा सेवित परम् पवित्र कुरुक्षेत्र में अवस्थित है, प्राचीन काल में स्वयं ब्रह्मा जी ने इस महातीर्थ का निर्माण किया था।।एक सौ पाँच-एक सौ सात॥ वायुपुराण, #अध्याय - उनसठ बद्रिकाश्रम ततस्ते ऋषयः सर्वे धर्मतत्वार्थकांक्षिणः । ऋषिं व्यासं पुरस्कृत्य गता बदरिकाश्रमं ॥पाँच॥ तस्मिन्नृषिसभामध्ये शक्तिपुत्रं पराशरम् । सुखासीनं महातेजा मुनिमुख्यगणावृतम् ॥आठ॥ कृतांजलिपुटो भूत्वा व्यासस्तु ऋषिभिः सह। प्रदक्षिणाभिवादैश्च स्तुतिभिः समपूज्यत्॥नौ॥ Page तैंतालीस of बावन #अर्थात - तब धर्म के तत्व की अभिलाषा करने वाले वह सम्पूर्ण ऋषि यह सुनकर श्री व्यास जी को आगे कर #बदरिकाश्रम को गये । |
फिल्म शुभ मंगल सावधान की हिट जोड़ी आनंद एल राय और आयुष्मान खुराना एक बार फिर एक साथ काम करते दिखेंगे। साल 2017 में आई आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर (Ayushmann Khurrana and Bhumi Pednekar) स्टारर फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' का सीक्वल बनने जा रहा है। फिल्म के सीक्वल का नाम 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' (Shubh Mangal Zyada Saavdhan) होगा। इसे हितेश केवल्या डायरेक्ट करेंगे।
फिल्म शुभ मंगल सावधान इरेक्टल डिस्फंक्शन जैसे टैबू पर आधारित थी, जबकि फिल्म के सीक्वल में होमोसेक्सुएलिटी पर आधारित होगी। फिल्म अगले साल रिलीज होगी। प्रोड्यूसर आनंद एल राय का कहना है कि शुभ मंगल सावधान की सफलता ने उन्हें एक ऐसी फ्रैंचाइजी में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया, जो वर्जित विषयों( जिस पर लोग बात करने से बचते हैं) को सबसे हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है।
कलर येलो प्रोडक्शन के मालिक प्रोड्यूसर आनंद एल राय ने कहा कि वह ये भी उम्मीद करते हैं कि ऑडियंस पहले की तरह ही फिल्म का आनंद लें। आपको बता दें आनंद एल राय ने 'रांझणा', 'तनु वेड्स मनु' (Tanu Weds Manu) और 'हैप्पी भाग जाएगी' जैसी फैमली एंटरटेनर फिल्में बनाई हैं।
आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने खुराना फिल्म के बारे में कहा कि इसकी कहानी बहुती ही अच्छी है, जो ऑडियंस का दिल जीत लेगी और उनके चेहरे पर स्माइल आ जाएगी। उन्होंने कहा कि होमोसेक्सुएलिटी एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है जिसे बहुत ही खूबसूरती के हैंडिल करती है। आनंद एल राय के साथ फिर से काम करना बहुत ही खुशी की बात है। यह फिल्म अगले साल तक रिलीज होगी।
| फिल्म शुभ मंगल सावधान की हिट जोड़ी आनंद एल राय और आयुष्मान खुराना एक बार फिर एक साथ काम करते दिखेंगे। साल दो हज़ार सत्रह में आई आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' का सीक्वल बनने जा रहा है। फिल्म के सीक्वल का नाम 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' होगा। इसे हितेश केवल्या डायरेक्ट करेंगे। फिल्म शुभ मंगल सावधान इरेक्टल डिस्फंक्शन जैसे टैबू पर आधारित थी, जबकि फिल्म के सीक्वल में होमोसेक्सुएलिटी पर आधारित होगी। फिल्म अगले साल रिलीज होगी। प्रोड्यूसर आनंद एल राय का कहना है कि शुभ मंगल सावधान की सफलता ने उन्हें एक ऐसी फ्रैंचाइजी में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया, जो वर्जित विषयों को सबसे हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है। कलर येलो प्रोडक्शन के मालिक प्रोड्यूसर आनंद एल राय ने कहा कि वह ये भी उम्मीद करते हैं कि ऑडियंस पहले की तरह ही फिल्म का आनंद लें। आपको बता दें आनंद एल राय ने 'रांझणा', 'तनु वेड्स मनु' और 'हैप्पी भाग जाएगी' जैसी फैमली एंटरटेनर फिल्में बनाई हैं। आयुष्मान खुराना ने खुराना फिल्म के बारे में कहा कि इसकी कहानी बहुती ही अच्छी है, जो ऑडियंस का दिल जीत लेगी और उनके चेहरे पर स्माइल आ जाएगी। उन्होंने कहा कि होमोसेक्सुएलिटी एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है जिसे बहुत ही खूबसूरती के हैंडिल करती है। आनंद एल राय के साथ फिर से काम करना बहुत ही खुशी की बात है। यह फिल्म अगले साल तक रिलीज होगी। |
हर महिला के जीवन में अभी या बाद में आता हैएक पल जो कि दुनिया में किसी और चीज़ से तुलना नहीं की जा सकती - उसकी गर्भावस्था। पहले क्योंकि हर गर्भावस्था अद्वितीय है और शायद हर औरत अपने जीवन में इस खूबसूरत समय के हर पल पर कब्जा करना चाहता है, उदाहरण के लिए, तीसरे, बिल्कुल कोई फर्क नहीं पड़ता एक बच्चा है या,। शरद ऋतु में प्रकृति पर गर्भवती फोटो सत्र, ज़ाहिर है, सबसे सुंदर कार्रवाई शरद ऋतु फसल का समय है, निवर्तमान वर्ष की अंतिम गर्म मुस्कान शरद ऋतु में गर्भवती फोटो शूट के लिए सबसे अच्छा समय भारतीय गर्मियों में है, जब पत्ते के समृद्ध रंगों को देखकर खुशी होती है। हवा शांति और शांति के साथ पोषित है कद्दू, नाशपाती, सेब, या फूल, जो गिरावट में विशेष रूप से सुंदर हैं - - गुलदाउदी, dahlias, asters गर्भावस्था फोटो शूट के दौरान, आप प्रकृति के उपहार का उपयोग कर सकते हैं। सबसे अच्छा सजावट, ज़ाहिर है, पेड़ों की गर्म शरद ऋतु का परिदृश्य और घास पर पत्तियों के एक लाल रंग का कालीन होगा।
एक गर्भवती महिला के लिए सबसे उपयुक्त समयगिरावट की प्रकृति पर फोटो शूट 28-30 सप्ताह, जब पेट पहले से ही अच्छा है और धीरे गोल, और एक गर्भवती महिला को अभी भी एक लंबा दिन से बहुत थक गया और एक फोटो शूट के शारीरिक शक्ति के लिए खर्च करने के लिए तैयार नहीं है गर्भ की आयु है। प्रकाश का उपयोग करने - बेशक, गिरावट गर्भवती में एक फोटो शूट के लिए सबसे अधिक आरामदायक जगह एक स्टूडियो, जहां औरत, उदाहरण के लिए क्रम बदलने के लिए या, महिलाओं का रूम का दौरा करने के लिए, और तस्वीरें सुविधाजनक हो जाएगा। लेकिन, जैसा कि आप अनुमान लगा सकते हैं, के सबसे खूबसूरत चित्रों अभी भी प्रकृति में प्राप्त की। इस बयान मुश्किल के साथ बहस करने, क्योंकि इस तरह के चित्रों हमें लगते हैं और अधिक जीवित है और प्राकृतिक, केवल वो नहीं दिखा क्या जन्म से पहले भविष्य बच्चे की माँ थी, लेकिन यह भी क्या सौंदर्य की तरह गर्भवती मां के आसपास किया गया है।
फोटो सत्र की शुरुआत से पहले सोचने के लिए आवश्यक हैकपड़े, मेकअप, हेअरस्टोन, सामान, आरामदायक जूते और एक गर्भवती महिला के आराम के बारे में। एक आरामदायक चुनने के लिए वस्त्र सबसे अच्छा है, जिसमें एक महिला गर्म और आरामदायक महसूस करेगी शरद ऋतु के लिए, आरामदायक स्वेटर आदर्श होते हैं, जो शांत रंगों का चयन करना सबसे अच्छा होता है - मरुण, बेज, जेड। मेकअप और हेयरस्टाइल को जितना संभव हो उतना स्वाभाविक और निरंतर होना चाहिए, और यदि आपने कई इमेजेस की कल्पना की है, तो आपके पास एक व्यक्ति है जो आपके मेकअप और बालों को बना सकता है, और आपको बदलने में मदद कर सकता है। एक गर्भवती महिला के आराम के बारे में सोचना सुनिश्चित करें, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान उसकी शारीरिक ज़रूरत बहुत ज्यादा बढ़ गई है और घटनाओं के विकास के लिए सभी संभव विकल्प प्रदान करना अच्छा होगा।
गर्भवती महिलाओं के सामान के लिएशरद ऋतु में प्रकृति की तस्वीरें, वे बहुत विविधतापूर्ण हो सकते हैं - प्रकृति और शरद ऋतु के फूलों से अप्रभावित बच्चे से जुड़े सुंदर छोटी चीजों के लिए। आप अपनी तस्वीर, छोटे कपड़े, कार या प्यूपा के बाद बच्चे को स्नैपशॉट, बूटीज़, सॉफ्ट खिलौने देने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं, जो आपको उम्मीद है कि एक लड़की या लड़का है।
फोटो सत्र का समय 2 से 3 घंटे तक रहना चाहिए,इस समय के शेयर आपको धीरे-धीरे अपने सभी विचारों को जीवन में लागू करने की अनुमति देंगे, और शूटिंग की प्रक्रिया से बहुत थक नहीं पाएंगे। फोटो शूट की प्रक्रिया में, आप अकेले या अपने पति के साथ, या, उदाहरण के लिए, बड़े बच्चों के साथ हो सकते हैं अगर आपका पति अपनी शूटिंग में भाग लेने के खिलाफ है, तो अपने जीवन में इस तरह के एक सौम्य समय पर कब्जा करने के लिए इस तरह का एक शानदार मौका कभी नहीं छोड़ेगा, क्योंकि जब आपका बच्चा बढ़ता है, तो वह यह देखकर बहुत प्रसन्न हो जाएगा कि उसकी माँ जब थी पैदा होने के लिए हालांकि, शरद ऋतु में अपने पति के साथ गर्भवती महिलाओं की फोटोशूट बहुत निविदा और कामुक है, तो इन तस्वीरों में उसके पति के अपने महत्व को समझने की कोशिश करें।
शरद ऋतु में प्रकृति पर गर्भवती फोटो सत्र, जैसा कि पहले से ही हैजैसा कि ऊपर चर्चा की गई है, एक भाप कमरे हो सकता है, जहां अंतिम चित्र भविष्य के माता-पिता को चमत्कार, या एकल की प्रत्याशा में चित्रित करेंगे, जहां फोटोग्राफर भविष्य की मां की सुंदरता दिखाएगा और उसे अपने विचारों को सुधारने और पेश करने की अनुमति देगा। भविष्य की मां को फिल्मांकन की प्रक्रिया को आराम और आनंद लेना चाहिए, फोटोग्राफर के सुझावों और विचारों के लिए सक्रिय, आनंददायक और खुले रहना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं की तस्वीर शूट पर एक तस्वीर के लिए विचार गिरने में विचारप्रकृति से उत्पादन तक प्रकृति बहुत विविध हो सकती है। रिपोर्टेज फोटो में, खुश भविष्य की मां लैंडस्केप पार्क या गली के माध्यम से चलेगी, और मंच पर महिलाएं विभिन्न प्रकार के प्रोप का उपयोग कर सकती हैं और फोटोग्राफ के माध्यम से विभिन्न कहानियों को बता सकती हैं। जब आप अपने रिश्तेदारों से किसी के साथ चित्र ले रहे हैं, तो प्रिंट के बिना एक समान रंग योजना खोजने का प्रयास करें, अलमारी के समान विवरण ढूंढें, उदाहरण के लिए, चेकर्ड स्कार्फ या लाल बेरेट। शरद ऋतु पार्क की पृष्ठभूमि के खिलाफ, इस तरह की तस्वीरें बहुत दिलचस्प लगती हैं। बेशक, एक फोटो शूट के लिए सबसे अच्छा स्थान आपके शहर में सबसे सुंदर पार्क होगा।
आप गर्भवती महिलाओं की तस्वीरों में गिरावट में फोटोशूट ले सकते हैंअपने पालतू जानवर की प्रकृति पर, जिसके साथ आप दोनों उत्पादन कर्मचारियों के लिए तैयार हो सकते हैं, और पीले पेड़ों के बीच गिरने वाली पत्तियों में उसके साथ घूम सकते हैं। आपकी बिल्ली या कुत्ता फ्रेम को और अधिक रोचक और पतला दिखेंगे, अगर आप इसे कुछ सहायक रखते हैं जो आपकी तरफ फिट बैठता है - उदाहरण के लिए, एक गर्दन या धनुष-गर्दन कॉलर। अपने पालतू जानवर के लिए स्वादिष्ट भोजन को न भूलें, ताकि वह अचानक पूरी शूटिंग, और गीले पोंछे को फाड़ न सके, ताकि किसी भी समय आप अपने पंजे या ऊन से गंदगी निकाल सकें।
फोटो शूट के लिए फोटो के लिए एक बहुत ही रोचक विचारउदाहरण के लिए एक फ़ोल्डर उठाओ और अपने चश्मे पर डाल दिया, यदि आप एक कार्यालय में काम करते हैं, या, पार्क, पेंट और ब्रश में एक चित्रफलक लाने के लिए, अगर आप एक कलाकार हैं - गर्भवती महिलाओं सड़क पर शरद ऋतु में यह रंगमंच की सामग्री की मदद से अपने पेशे या अपने शौक को हरा करना संभव है। बेबी, आप की तरह, यह दिलचस्प भविष्य में इस तरह की तस्वीरों की जांच करने के लिए किया जाएगा।
| हर महिला के जीवन में अभी या बाद में आता हैएक पल जो कि दुनिया में किसी और चीज़ से तुलना नहीं की जा सकती - उसकी गर्भावस्था। पहले क्योंकि हर गर्भावस्था अद्वितीय है और शायद हर औरत अपने जीवन में इस खूबसूरत समय के हर पल पर कब्जा करना चाहता है, उदाहरण के लिए, तीसरे, बिल्कुल कोई फर्क नहीं पड़ता एक बच्चा है या,। शरद ऋतु में प्रकृति पर गर्भवती फोटो सत्र, ज़ाहिर है, सबसे सुंदर कार्रवाई शरद ऋतु फसल का समय है, निवर्तमान वर्ष की अंतिम गर्म मुस्कान शरद ऋतु में गर्भवती फोटो शूट के लिए सबसे अच्छा समय भारतीय गर्मियों में है, जब पत्ते के समृद्ध रंगों को देखकर खुशी होती है। हवा शांति और शांति के साथ पोषित है कद्दू, नाशपाती, सेब, या फूल, जो गिरावट में विशेष रूप से सुंदर हैं - - गुलदाउदी, dahlias, asters गर्भावस्था फोटो शूट के दौरान, आप प्रकृति के उपहार का उपयोग कर सकते हैं। सबसे अच्छा सजावट, ज़ाहिर है, पेड़ों की गर्म शरद ऋतु का परिदृश्य और घास पर पत्तियों के एक लाल रंग का कालीन होगा। एक गर्भवती महिला के लिए सबसे उपयुक्त समयगिरावट की प्रकृति पर फोटो शूट अट्ठाईस-तीस सप्ताह, जब पेट पहले से ही अच्छा है और धीरे गोल, और एक गर्भवती महिला को अभी भी एक लंबा दिन से बहुत थक गया और एक फोटो शूट के शारीरिक शक्ति के लिए खर्च करने के लिए तैयार नहीं है गर्भ की आयु है। प्रकाश का उपयोग करने - बेशक, गिरावट गर्भवती में एक फोटो शूट के लिए सबसे अधिक आरामदायक जगह एक स्टूडियो, जहां औरत, उदाहरण के लिए क्रम बदलने के लिए या, महिलाओं का रूम का दौरा करने के लिए, और तस्वीरें सुविधाजनक हो जाएगा। लेकिन, जैसा कि आप अनुमान लगा सकते हैं, के सबसे खूबसूरत चित्रों अभी भी प्रकृति में प्राप्त की। इस बयान मुश्किल के साथ बहस करने, क्योंकि इस तरह के चित्रों हमें लगते हैं और अधिक जीवित है और प्राकृतिक, केवल वो नहीं दिखा क्या जन्म से पहले भविष्य बच्चे की माँ थी, लेकिन यह भी क्या सौंदर्य की तरह गर्भवती मां के आसपास किया गया है। फोटो सत्र की शुरुआत से पहले सोचने के लिए आवश्यक हैकपड़े, मेकअप, हेअरस्टोन, सामान, आरामदायक जूते और एक गर्भवती महिला के आराम के बारे में। एक आरामदायक चुनने के लिए वस्त्र सबसे अच्छा है, जिसमें एक महिला गर्म और आरामदायक महसूस करेगी शरद ऋतु के लिए, आरामदायक स्वेटर आदर्श होते हैं, जो शांत रंगों का चयन करना सबसे अच्छा होता है - मरुण, बेज, जेड। मेकअप और हेयरस्टाइल को जितना संभव हो उतना स्वाभाविक और निरंतर होना चाहिए, और यदि आपने कई इमेजेस की कल्पना की है, तो आपके पास एक व्यक्ति है जो आपके मेकअप और बालों को बना सकता है, और आपको बदलने में मदद कर सकता है। एक गर्भवती महिला के आराम के बारे में सोचना सुनिश्चित करें, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान उसकी शारीरिक ज़रूरत बहुत ज्यादा बढ़ गई है और घटनाओं के विकास के लिए सभी संभव विकल्प प्रदान करना अच्छा होगा। गर्भवती महिलाओं के सामान के लिएशरद ऋतु में प्रकृति की तस्वीरें, वे बहुत विविधतापूर्ण हो सकते हैं - प्रकृति और शरद ऋतु के फूलों से अप्रभावित बच्चे से जुड़े सुंदर छोटी चीजों के लिए। आप अपनी तस्वीर, छोटे कपड़े, कार या प्यूपा के बाद बच्चे को स्नैपशॉट, बूटीज़, सॉफ्ट खिलौने देने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं, जो आपको उम्मीद है कि एक लड़की या लड़का है। फोटो सत्र का समय दो से तीन घंटाटे तक रहना चाहिए,इस समय के शेयर आपको धीरे-धीरे अपने सभी विचारों को जीवन में लागू करने की अनुमति देंगे, और शूटिंग की प्रक्रिया से बहुत थक नहीं पाएंगे। फोटो शूट की प्रक्रिया में, आप अकेले या अपने पति के साथ, या, उदाहरण के लिए, बड़े बच्चों के साथ हो सकते हैं अगर आपका पति अपनी शूटिंग में भाग लेने के खिलाफ है, तो अपने जीवन में इस तरह के एक सौम्य समय पर कब्जा करने के लिए इस तरह का एक शानदार मौका कभी नहीं छोड़ेगा, क्योंकि जब आपका बच्चा बढ़ता है, तो वह यह देखकर बहुत प्रसन्न हो जाएगा कि उसकी माँ जब थी पैदा होने के लिए हालांकि, शरद ऋतु में अपने पति के साथ गर्भवती महिलाओं की फोटोशूट बहुत निविदा और कामुक है, तो इन तस्वीरों में उसके पति के अपने महत्व को समझने की कोशिश करें। शरद ऋतु में प्रकृति पर गर्भवती फोटो सत्र, जैसा कि पहले से ही हैजैसा कि ऊपर चर्चा की गई है, एक भाप कमरे हो सकता है, जहां अंतिम चित्र भविष्य के माता-पिता को चमत्कार, या एकल की प्रत्याशा में चित्रित करेंगे, जहां फोटोग्राफर भविष्य की मां की सुंदरता दिखाएगा और उसे अपने विचारों को सुधारने और पेश करने की अनुमति देगा। भविष्य की मां को फिल्मांकन की प्रक्रिया को आराम और आनंद लेना चाहिए, फोटोग्राफर के सुझावों और विचारों के लिए सक्रिय, आनंददायक और खुले रहना चाहिए। गर्भवती महिलाओं की तस्वीर शूट पर एक तस्वीर के लिए विचार गिरने में विचारप्रकृति से उत्पादन तक प्रकृति बहुत विविध हो सकती है। रिपोर्टेज फोटो में, खुश भविष्य की मां लैंडस्केप पार्क या गली के माध्यम से चलेगी, और मंच पर महिलाएं विभिन्न प्रकार के प्रोप का उपयोग कर सकती हैं और फोटोग्राफ के माध्यम से विभिन्न कहानियों को बता सकती हैं। जब आप अपने रिश्तेदारों से किसी के साथ चित्र ले रहे हैं, तो प्रिंट के बिना एक समान रंग योजना खोजने का प्रयास करें, अलमारी के समान विवरण ढूंढें, उदाहरण के लिए, चेकर्ड स्कार्फ या लाल बेरेट। शरद ऋतु पार्क की पृष्ठभूमि के खिलाफ, इस तरह की तस्वीरें बहुत दिलचस्प लगती हैं। बेशक, एक फोटो शूट के लिए सबसे अच्छा स्थान आपके शहर में सबसे सुंदर पार्क होगा। आप गर्भवती महिलाओं की तस्वीरों में गिरावट में फोटोशूट ले सकते हैंअपने पालतू जानवर की प्रकृति पर, जिसके साथ आप दोनों उत्पादन कर्मचारियों के लिए तैयार हो सकते हैं, और पीले पेड़ों के बीच गिरने वाली पत्तियों में उसके साथ घूम सकते हैं। आपकी बिल्ली या कुत्ता फ्रेम को और अधिक रोचक और पतला दिखेंगे, अगर आप इसे कुछ सहायक रखते हैं जो आपकी तरफ फिट बैठता है - उदाहरण के लिए, एक गर्दन या धनुष-गर्दन कॉलर। अपने पालतू जानवर के लिए स्वादिष्ट भोजन को न भूलें, ताकि वह अचानक पूरी शूटिंग, और गीले पोंछे को फाड़ न सके, ताकि किसी भी समय आप अपने पंजे या ऊन से गंदगी निकाल सकें। फोटो शूट के लिए फोटो के लिए एक बहुत ही रोचक विचारउदाहरण के लिए एक फ़ोल्डर उठाओ और अपने चश्मे पर डाल दिया, यदि आप एक कार्यालय में काम करते हैं, या, पार्क, पेंट और ब्रश में एक चित्रफलक लाने के लिए, अगर आप एक कलाकार हैं - गर्भवती महिलाओं सड़क पर शरद ऋतु में यह रंगमंच की सामग्री की मदद से अपने पेशे या अपने शौक को हरा करना संभव है। बेबी, आप की तरह, यह दिलचस्प भविष्य में इस तरह की तस्वीरों की जांच करने के लिए किया जाएगा। |
मोदी सरकार के एक साल पूर होने पर भाजपा कर्मचारियों में और आम जनता में काफी उत्साह है। जहां लोग नरेंद्र मोदी से प्रेम करते है वहीं सोशल मीडिया पर उसी प्रेम के तहत कुछ लोगों ने उनपर जोक्स भी बनाए। लोक सभा चुनाव से पहले तो उनके और उनके प्रतिद्वंदियों पर काफी जोक्स बनाए गए थे। वहीं मोदी सरकार आने के बाद भी सोशल मीडिया पर हंसी-मजाक का सिलसिला जारी रहा।
फेसबुक पर तो मोदी की लोकप्रियता का कोई जवाब नहीं और ये देख कुछ लोगों ने चुनाव से पहले ही कुछ इस तरीके से उन्हें प्रधानमंत्री घोषित कर दिया था।
| मोदी सरकार के एक साल पूर होने पर भाजपा कर्मचारियों में और आम जनता में काफी उत्साह है। जहां लोग नरेंद्र मोदी से प्रेम करते है वहीं सोशल मीडिया पर उसी प्रेम के तहत कुछ लोगों ने उनपर जोक्स भी बनाए। लोक सभा चुनाव से पहले तो उनके और उनके प्रतिद्वंदियों पर काफी जोक्स बनाए गए थे। वहीं मोदी सरकार आने के बाद भी सोशल मीडिया पर हंसी-मजाक का सिलसिला जारी रहा। फेसबुक पर तो मोदी की लोकप्रियता का कोई जवाब नहीं और ये देख कुछ लोगों ने चुनाव से पहले ही कुछ इस तरीके से उन्हें प्रधानमंत्री घोषित कर दिया था। |
सम्यग्ज्ञान प्रौर उसका महात्म्य ]
का समय हो, तूफान हो, भूचाल हो रहा हो, घोर कलह या युद्ध हो रहा हो, किसी महापुरुष के मरण का शोक मनाया जा रहा हो, ऐसे ग्रापत्तियों के समय पर शांति से ध्यान करना योग्य है ।
बड़े आदर से शास्त्र को पढना चाहिये, बडी भक्ति भावो मे रखनी चाहिये कि मैं शास्त्रो को इसीलिए पढता हूँ कि मुझे प्रात्मज्ञान का लाभ हो, मेरे जीवन का समय सफल हो । अन्तरग प्रेम पूर्ण भक्ति को विनय कहते हैं ।
(६) उपधान :- धारणा करते हुए ग्रन्थ को पढना चाहिये । जो कुछ पढा जावे वह भीतर जमता जावे जिससे वह पीछे स्मरण मे श्रा सके । यदि पढते चले गये और ध्यान मे न लिया तो अज्ञान का नाश नही होगा । इसलिए एकाग्र चित्त होकर ध्यान के साथ पढना, धारणा मे रखते जाना उपधान है । यह बहुत जरूरी अग है, ज्ञान का प्रबल साधन है ।
(७) बहुमान शास्त्र को बहुत मान प्रतिष्ठा से विराजमान करके पढना चाहिये । उच्च चौकी पर रखकर आसन से बैठकर पढना उचित है तथा शास्त्र को अच्छे गत्ते वेष्टन से विभूषित करके जहा दीमक न लगे, शास्त्र सुरक्षित रहे इस तरह विराजमान करना चाहिये ।
(८) मनिष :- शास्त्रज्ञान अपने को हो उसको छिपाना नही चाहिये, कोई समझना चाहे तो उसको समझाना चाहिये । तथा जिस गुरु से समझा हो उसका नाम न छिपाना चाहिये । इस तरह जो आठ अगो को पालता हुआ शास्त्रो का मनन • करेगा वह व्यवहार सम्यग्ज्ञान का सेवन करता हुआ आत्मज्ञान रूपी निश्चय सम्यग्ज्ञान को प्राप्त कर सकेगा ।
यद्यपि ज्ञान एक ही है, वह आत्मा का स्वभाव है, उसमे कुछ भेद नही है जैसे सूर्य के प्रकाश मे कोई भेद नही है तथापि सूर्य के ऊपर घने मेघ आ जावे तो प्रकाश कम झलकता है मेघ उससे कम हो तो और अधिक प्रकाश प्रगट होता, और अधिक कम मेघ हो तो और अधिक प्रकाश झलकता । और भी अधिक कम मेघ हो तो और भी अधिक प्रकाश प्रगट होता । बिलकुल मेघ न हो तो पूर्ण प्रकाश प्रगट होता है। इस तरह मेघो के कम व
अधिक आवरण के कारण सूर्य प्रकाश के पाच भेद हो सकते है तथा और भी सूक्ष्म विचार करोगे तो सूर्य के प्रकाश के अनेक भेद हो सकते है उसी तरह ज्ञानावरण कर्म के क्षयोपशम या क्षय के अनुसार ज्ञान के मुख्य पाच भेद हो गये है - मतिज्ञान, श्रतज्ञान, प्रवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान तथा केवलज्ञान । मति, श्रुत, अवधि तीन ज्ञान जब मिथ्यादृष्टि के होते है - कुमति, कुश्र त, कुप्रवधि कहलाते है । सम्यग्दृष्टि के मति, श्रुत, प्रवधि कहलाते है। इस तरह तीन कुज्ञान को लेकर ज्ञान के प्राठ भेद हो जाते है ।
मतिज्ञान पाच इन्द्रिय तथा मन के द्वारा सीधा किसी पदार्थ का जानना मतिज्ञान है । जैसे स्पर्श इन्द्रिय से स्पर्श करके किसी पदार्थ को ठण्डा, गरम, रूखा, चिकना, नरम, कठोर, हलका, भारी जानना । रसना इन्द्रिय से रसना द्वारा रसना योग्य पदार्थ को स्पर्श करके खट्टा मीठा, चरपरा, कडवा, कसायला या मिश्रित स्वाद जानना । नासिका इन्द्रिय से गधयोग्य पदार्थ को छूकर सुगन्ध या दुर्गन्ध जानना । चक्षु इन्द्रिय से बिना स्पर्श किये दूर से किसी पदार्थ को सफेद, लाल, पीला, काला या मिश्रित रंग रूप जानना । कानो से शब्द स्पर्श कर मुरीला व अमुरीला शब्द जानना । मन के द्वारा दूर से किसी पूर्व बात को यकायक जान लेना । इस तरह जो सीधा ज्ञान इन्द्रिय व मन से होता है उसको मतिज्ञान कहते है। जितना मतिज्ञानावरण का क्षयोपशम होता है उतनी ही अधिक मतिज्ञान की शक्ति प्रकट होती है । इसलिये सर्व प्रारिणयो का मतिज्ञान एकसा नही मिलेगा। किसी के कम, किसी के अधिक, किसी के मन्द, किसी के तीव्र । जानी हुई चीज का स्मरण हो जाना व एक दफे इन्द्रयो से व मन से जानी हुई चीज को फिर ग्रहण कर पहचानना कि वही है यह सज्ञा ज्ञान, तथा यह चिन्ता ज्ञान कि जहा जहा धूम होगा वहा वहा आग होगी। जहा जहा सूर्य का प्रकाश होगा कमल प्रफुल्लित होगे तथा चिन्ह को देखकर या जानकर चिन्हों का जानना, धूम को देखकर अग्नि का जानना यह अनुमान ज्ञान, ये सब भी मतिज्ञान है क्योंकि मतिज्ञानावरण कर्म क क्षयोपशम से होते है ।
श्र. तज्ञान मतिज्ञान से जाने हुए पदार्थ के द्वारा दूसरे पदार्थ का या विषय का जानना श्रुतज्ञान है । जैसे कान से आत्मा शब्द सुना यह मतिज्ञान
है । आत्मा शब्द से प्रात्मा के गुरण पर्याय श्रादि का बोध करना श्रुतज्ञान है । इसीलिए शास्त्रज्ञान को श्रुतज्ञान कहते है । हम अक्षरो को देखते है या सुनते है उनके द्वारा फिर मन से विचार करके शब्दों से जिन जिन पदार्थों का सकेत होता है उनको ठीक ठीक जान लेते है यही श्रुतज्ञान है, यह श्रुतज्ञान मनके ही द्वारा होता है। श्रुतज्ञान के दो भेद हैं :- प्रक्षरात्मक श्रुतज्ञान, अक्षरात्मक श्रुतज्ञान । जो अक्षरो के द्वारा अर्थ विचारने पर हो वह अक्षरात्मक श्रुतज्ञान
जैसे शास्त्र द्वारा ज्ञान । जो स्पर्शनादि इन्द्रियो से मतिज्ञान द्वारा पदार्थ को जानकर फिर उस ज्ञान के द्वारा उस पदार्थ मे हितरूप या ग्रहितरूप बुद्धि हो सो अक्षरात्मक श्रुतज्ञान है। यह एकेन्द्रियादि सब प्राणियों को होता है । जैसे वृक्ष को कुल्हाडी लगाने से कठोर स्पर्श का ज्ञान होना सो मतिज्ञान है, फिर उससे दु ख का बोध होना श्रुतज्ञान है । लट को रसना के द्वारा स्वाद के का ज्ञान होना मतिज्ञान है, फिर उसे वह सुखदाई या दुखदाई भासना श्रुतज्ञान है । चीटी को दूर से सुगन्ध आना मतिज्ञान से सुगन्ध आना मतिज्ञान है फिर सुगंधित पदार्थ की ओर आने की बुद्धि होना श्रुतज्ञान है । पतग को आख से दीपक का वर्ण । देखकर ज्ञान होना मतिज्ञान है । वह हितकारी भासना श्रुतज्ञान है । कर्ण से कठोर शब्द सुनना मतिज्ञान है, वह अहितकारी भासना श्रुतज्ञान है । मतिश्रतज्ञान सर्व प्राणियों को सामान्य से होते है । एकेन्द्रियादि पचेन्द्रिय पर्यत सबके इन दो ज्ञानो से कम ज्ञान नहीं होते है । इन दो ज्ञानो की शक्ति होती है, परन्तु ये ज्ञान भी क्रम से काम करते है ।
अवधिज्ञान :- अवधि नाम मर्यादा का है । द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव की मर्यादा लिये हुए पुद्गलो को या पुद्गल सहित अशुद्ध जीवो का वर्णन जानना इस ज्ञान का काम है । द्रव्य से मतलब है कि मोटे पदार्थ को जाने कि सूक्ष्म को जाने, क्षेत्र से मतलब है कि कितनी दूर तक की जाने, एक कोस की या १०० या १००० या १०००० आदि कोस तक की जाने । काल से मतलब है कि कितने समय आगे व पीछे की जाने । १० वर्ष, १०० वर्ष एक भव या अनेक भव को आगे पीछे । भाव से मतलब अवस्था विशेष या स्वभाव विशेष से है । से अवधिज्ञान के बहुत से भेद हो सकते है, जिसको जितना अवधिज्ञानावरण कर्म का क्षयोपशम होता है । उतना कम या अधिक अवधिज्ञान होता है। इस ज्ञान
के होने मे मन व इन्द्रियों की जरूरत नहीं है आत्मा स्वय ही जानता है। देव तथा नारकियो को तो जन्म से ही होता है । पशुप्रो को व मानवो को सम्यक्त के व तप के प्रभाव से होता है । यह एक प्रकार की ऐसी विशेष शक्ति का प्रकाश है जिससे प्रवधिज्ञानी किसी मानव को देखकर विचारता हुआ उसके पूर्व जन्म व भागामी जन्म की घटनाओ को जान सकता है। योगी तपस्वी ऐसा अधिक अवधिज्ञान पा सकते हैं कि सैकडो जन्म पूर्व व आगे की बाते जान लेवे । ज्ञान की जितनी निर्मलता होती है उतना ही उसका अधिक प्रकाश होता है ।
दूसरो के मन मे पुद्गल व अशुद्ध जीवो के सम्बन्ध मे क्या विचार चल रहा है व विचार हो चुका है व विचार होवेगा उस सर्व को जो कोई आत्मा के द्वार जान सके वह मनःपर्ययज्ञान है, यह ज्ञान बहुत सूक्ष्म बातो को जान सकता है । जिसको अवधिज्ञानी भी न जान सके इसलिये यह ज्ञान अवधिज्ञान से अधिक निर्मल है । यह ज्ञान ध्यानी तपस्वी योगियों के ही होता है - सम्यग्दृष्टि महात्माओ के ही होता है । मन पर्यय ज्ञानावरण कर्म के कम व अधिक क्षयोपशम के अनुसार किसी को कम या किसी को अधिक होता है ।
केवलज्ञान :- सर्व ज्ञानावरण कर्म के क्षय होने से अनन्तज्ञान का प्रकाश होना केवलज्ञान है । यही स्वाभाविक पूर्ण ज्ञान है, जो परमात्मा अरहत तथा सिद्ध मे सदा व्यक्ति रूप से चमकता रहता है ससारी जीवो में शक्ति रूप से रहता है उस पर ज्ञानावरण का पर्दा पड़ा रहता है । जब शुक्ल ध्यान के प्रभाव से सर्व ज्ञानावरण कर्म का क्षय हो जाता है तब ही यह ज्ञान तेरहवे गुरणस्थान मे सयोग केवली जिनको प्रगट होता है । एक दफे प्रकाश होने पर फिर वह मलीन नही होता है, सदा ही शुद्ध स्वभाव मे प्रगट रहता है। पाच ज्ञानो मे मति, श्रुति परोक्ष है क्योकि इन्द्रिय व मन से होते है परन्तु तीन ज्ञान प्रत्यक्ष है - आत्मा से ही होते हैं ।
श्र सज्ञान ही केवलज्ञान का कारण है :- इन चार ज्ञानो मे श्रुतज्ञान ही ऐसा ज्ञान है जिससे शास्त्र ज्ञान होकर प्रात्मा का भेदविज्ञान होता ह कि यह आत्मा भावकर्म रागादि, द्रव्यकर्म ज्ञानावरणादि व नौकर्म शरीरादि से
भिन्न है, सिद्धसम शुद्ध है। जिसको आत्मानुभव हो जाता है वही भाव श्रुतज्ञान को पा लेता है । यही आत्मानुभव ही केवलज्ञान को प्रकाश कर देता है । किसी योगी को अवधिज्ञान व मन पर्ययज्ञान भी हो तो भी श्रुतज्ञान के बल से केवलज्ञान हो सकता है। अवधि मन पर्ययज्ञान का विषय ही शुद्धात्मा नही है, ये तो रूपी पदार्थ को ही जानते है जब कि श्रुतज्ञान अरूपी पदार्थों को भी जान सकता है इसलिये श्रुतज्ञान प्रधान है । हम लोगो को उचित है कि हम शास्त्र - ज्ञान का विशेष अभ्यास करते रहे जिससे आत्मानुभव मिले । यही सहज सुख का साधन है व यही केवलज्ञान का प्रकाशक है ।
चार दर्शनोपयोग पहले हम बता चुके है कि जीव के पहिचानने के आठ ज्ञान व चार दर्शन साधन है। दर्शन और ज्ञान में यह अन्तर है कि ज्ञान साकार है, दर्शन निराकार है। दर्शन मे पदार्थ का बोध नहीं होता है । जब बोध होने लगता है तब उसे ज्ञान कहते है । जिस समय आत्मा का उपयोग किसी पदार्थ के जानने की तैयारी करता है तब ही दर्शन होता है, उसके पोछे जो कुछ ग्रहण मे आता है वह ज्ञान है । कर मे शब्द आते ही जब उपयोग उधर गया और शब्द को जाना नही तब दर्शन है । जब जान लिया कि शब्द है तब ज्ञान कहा जाता है । अल्पज्ञानियों के दर्शन पूर्वक मतिज्ञान होता है, मतिज्ञान पूर्वक श्रुतज्ञान होता है । सम्यग्दृष्टि महात्माम्रो को प्रवधि दर्शन पूर्वक अवधिज्ञान होता है। केवलज्ञानी को केवलदर्शन, केवलज्ञान के साथ २ होता है । चक्षु इन्द्रिय द्वारा जो दर्शन हो वह चक्षुदर्शन है। जैसे भाँख ने घडी को जाना यह मतिज्ञान है । इसी तरह चक्षु इन्द्रिय के सिवाय चार इन्द्रिय और मन से जो दर्शन होता है वह प्रचक्षुदर्शन है । अवधिदर्शन सम्यक्ती ज्ञानियो को आत्मा से होता है। केवलदर्शन सर्वदर्शी है, वह दर्शनावरण कर्म के सर्वथा क्षय से प्रगट होता है ।
निश्चय और व्यहारनय :- प्रमारण जब वस्तु को सर्वाग ग्रहरण करता है तब नय वस्तु के एक प्रश को ग्रहण करता है व बताता है। पहले कहे गये पाचों ज्ञान प्रमाण हैं व तीन कुज्ञान प्रमारणाभास हैं। जैसे कोई मानव व्यापारी है और मजिस्ट्रेट भी है, प्रमारणज्ञान दोनों बातो को एक साथ जानता है । नय को अपेक्षा किसी समय वह व्यापारी कहा जायेगा तब मजिस्ट्रेटपना गौरण
रहेगा व कभी मजिस्ट्रेट कहा जायेगा तब व्यापारीपना गौरण रहेगा । अध्यात्म शास्त्रो मे निश्चयनय और व्यवहारनय का उपयोग बहुत मिलता है । स्वाश्रय निश्चय पराश्रय व्यवहार जो नय एक ही वस्तु को उसी को पर की अपेक्षा बिना वर्णन करे वह निश्चयनय है । जो किसी वस्तु को परकी अपेक्षा से और का और कहे वह व्यवहारनय है । एक खडग सोने की म्यान के भीतर है, उसमे खडग को खडग और म्यान को म्यान कहना निश्चयनय का काम है तथा सोने को खडग कहना व्यवहार नय का काम है । लोक मे ऐसा व्यवहार चलता कि परके सयोग से उस वस्तु को अनेक तरह से कहा जाता है ।
जैसे दो खडग रक्खी है, एक चादी के म्यान में है और एक सोने के म्यान मे है । किसी को इनमे से एक ही खडग चाहिये थी, वह इतना लम्बा वाक्य नही कहता है कि सोने की म्यान में रखी हुई खडग लाओ, किन्तु छोटा वाक्य कह देता है कि सोने की खडग लाओ। तब यह वचन व्यवहार में असत्य नहीं है किन्तु निश्चय मे असत्य है, क्योकि वह भ्रम पैदा कर सकता है कि खडग सोने की है जबकि खडग सोने की नहीं है । इसी तरह हमारी आत्मा मनुष्य आयु व गति के उदय से मनुष्य के शरीर मे है, आत्मा भिन्न है । तैजस कारण और औदारिक शरीर भिन्न है । निश्चयनय से आत्मा को आत्मा ही कहा जायेगा । व्यवहारनय से आत्मा को मनुष्य कहने का लोक व्यवहार है क्योंकि मनुष्य शरीर मे वह विद्यमान है। आत्मा को मनुष्य कहना व्यवहार से सत्य है तो भी निश्चय नय से असत्य है, क्योंकि आत्मा मनुष्य नही है, उसका कर्म मनुष्य है, उसका देह मनुष्य है ।
निश्चयनय की भूतार्थ, सत्यार्थ, यथार्थ, वास्तविक, असल मूल कहते है । व्यवहारनय को असत्यार्थ प्रभूतार्थ, प्रयथार्थ, प्रवास्तविक कहते है । ससारी आत्मा को समझने के लिए व पर के सयोग मे प्राप्त किसी भी वस्तु को समझने के लिये दोनो नयो को आवश्यकता पडती है । कपडा मलीन है उसको शुद्ध करने के लिये दोनो नयो के ज्ञान की जरूरत है। निश्चयनय से कपडा उज्ज्वल है, रूई का बना है व्यवहारनय से मैला कहाता है, क्योकि मैल का सयोग है । यदि एक ही नय या अपेक्षा को समझे तो कपडा कभी स्वच्छ नही हो सकता है । यदि ऐसा मानले कि कपडा सर्वथा शुद्ध ही है तब भी वह
शुद्ध नही किया जायेगा । यदि मानले कि मैला ही है तब भी वह शुद्ध नही किया जायेगा । शुद्ध तब हो किया जायेगा जब यह माना जायेगा कि असल मे मूल मे तो यह शुद्ध है परन्तु मैल के सयोग से वर्तमान में इसका स्वरूप मैला में हो रहा है । मैल पर है छुडाया जा सकता है ऐसा निश्चय होने पर ही कपडा साफ किया जायेगा । इसी तरह निश्चयनय कहता है कि आत्मा शुद्ध है । व्यवहारनय कहता है कि आत्मा अशुद्ध है, कर्मा से बद्ध है दोनो बातो को जानने पर ही कर्मों को काटने का पुरुषार्थ किया जायेगा ।
निश्चयनय के भी दो भेद अध्यात्म शास्त्रो मे लिये गये है - एक शुद्ध निश्चयनय, दूसरा अशुद्ध निश्चयनय । जिसका लक्ष्य केवल शुद्ध गुरा पर्याय व द्रव्य पर हो वह शुद्ध निश्चयनय है व जिसका लक्ष्य उसो एक द्रव्य के अशुद्ध द्रव्य, गुग्गा पर्याय पर हो वह अशुद्ध निश्चय है जैसे जीव सिद्धसम शुद्ध है यह वाक्य शुद्ध निश्चयनय से कहा जाता है । यह जीव रागी द्वेषी है यह वाक्य अशुद्ध निश्चयनय से कहा जाता है । राग द्वेप जीव के हो नैमित्तिक व औपाधिक भाव है । उन भावो मे मोहनीय कर्म का सयोग पा रहा है इसलिये वे भाव शुद्ध नहीं है, अशुद्ध भाव है । इन अशुद्ध भावो को आत्मा के भाव कहना अशुद्ध निश्चयनय से ठीक है, जबकि शुद्ध निश्चयनय से ठीक नहीं है । ये दोनो नय एक ही द्रव्य पर लक्ष्य रखते हे ।
व्यवहारनय के कई भेद है- अनुपचारित प्रसदभूत व्यवह रनय । यह । वह नय है कि पर वस्तु का किसी से सयोग होते हुए ही पर को उसका कहना । जैसे यह घी का घड़ा है । इसमे घी का संयोग है इसलिये घडे को घी का घडा कहते है । यह जीव पापी है पुण्यात्मा है । यह जीव मानब है, पशु है । यह गोरा है, यह काला है। ये सब वाक्य इस नय से ठीक है, क्योकि कार्मारण व औदारिक शरीर का सयोग है इसलिये अनुपचारित है परन्तु है आत्मा के मूल स्वरूप से भिन्न इसलिये अद्भुत है । विल्कुल भिन्न वस्तु को किसी की कहना उपचरित प्रेसद्भूत व्यवहारनय है। जैसे यह दुकान रामलाल की है, यह टोपी चालक की है, यह स्त्री रामलाल की है, यह गाय फतहचन्द की है, ये कपडे मेरे है, ये आभूपा मेरे है, यह देश मेरा है ।
निश्चयनय का विषय जब वस्तु को अभेद रूप से प्रखण्ड रूप से ग्रहगा करना है तब उसी को खण्डरूप से ग्रहण करना सद्भूत व्यवहारनय का विषय
। ऐसा भी शास्त्रो मे विवेचन है । जैसे आत्मा को अभेद एक ज्ञायक मात्र ग्रहरण करना निश्चयनय का अभिप्राय है तब आत्मा को ज्ञानरूप, दर्शनरूप, चारित्ररूप इस तरह गुरण व गुणी भेद करके कहना सद्भूत व्यवहारनय का विषय है। कही कही इस सद्भूत व्यवहार को भी निश्चयनय मे गर्भित करके कथन किया गया है क्योकि यह सद्भूत व्यवहार भी एक ही द्रव्य की तरफ भेदरूप से लक्ष्य रखता है, परकी तरफ लक्ष्य नहीं है । जहा परकी तरफ लक्ष्य करके पर का कथन है वह असद्भुत व्यवहारनय है या सामान्य से ही व्यवहारनय है ।
द्रव्याथिक पर्यायाथिक नय जो नय या अपेक्षा केवल द्रव्य को लक्ष्य मे लेकर वस्तु को कहे वह द्रव्याथिक है । जो द्रव्य की किसी पर्याय को लक्ष्य मे लेकर कहे वह पर्यायाधिक है। जैसे द्रव्याथिकनय से हर एक आत्मा समानरूप से शुद्ध है, निज स्वरूप मे है । पर्यायाथिकनय से आत्मा सिद्ध है, समारी है, पश् है, मानव है, वृक्ष है इत्यादि । यह आत्मा नित्य है द्रव्याथिकनय का वाक्य है। यह आत्मा ससारी अनित्य है, यह पर्यायिाथिकनय का वाक्य है क्योकि द्रव्य कभी नाश नहीं होता है, पर्याय क्षरण में बदलती है ।
जगत मे अपेक्षाबाद के बिना व्यवहार नही हो सकता है । भिन्न भिन्न अपेक्षा से वाक्य सत्य माने जाते है। उन अपेक्षाम्रो को या नयो को बताने के लिये जिनसे लोक मे व्यवहार होता है, जैन सिद्धात मे सात नय प्रसिद्ध हैं - नैगम, सग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शब्द, समभिरूढ, एव भूत । इनमे पहले तीन नय द्रव्याथिक मे गर्भित है क्योंकि इनकी दृष्टि द्रव्य पर रहती है, शेष चार नय पर्यायाथिक मे गर्भित है क्योंकि उनकी दृष्टि पर्याय पर ही रहती है तथा अन्त के तीन नयो की दृष्टि शब्द पर रहती है. इसलिये वे शब्दनय है । शेष चार की दृष्टि पदार्थ पर मुख्यता से रहती है इससे वे अर्थनय हैं ।
नैगमनय :-- जिसमे संकल्प किया जावे नैगमनय है । भूतकाल की बात को वर्तमान मे सकल्प करना यह भूतनैगमनय है । जैसे कार्तिक मुदी १४ को
कहना कि आज श्री वर्द्धमानस्वामी का निर्वाण दिवस है। भावी नंगमनय भविष्य की बात को वर्तमान में कहता है जैसे अर्हन्त अवस्था में विराजित किसी केवली को सिद्ध कहना । वर्तमान नैगमनय वह है जो वर्तमान की अधूरी बात को पूरी कहे जैसे कोई लकडी काट रहा है, उससे किसी ने पूछा क्या कर रहे हो ? उसने कहा किवाड बना रहा हू । क्योंकि उसका उद्देश्य लकडी काटने मे किवाड ही बनाने का है ।
संग्रहनय जो एक जाति के बहुत से द्रव्यो को एक साथ बतावे वह संग्रहनय है। जैसे कहना कि सत् द्रव्य का लक्षण है। यह वाक्य सर्व द्रव्यो को सत् बताता है । जीव का उपयोग लक्षण है । यह वाक्य सब जीवो का लक्षरण उपयोग सिद्ध करता है ।
व्यवहारनय -- जिस अपेक्षा से सग्रहनय से ग्रहीत पदार्थों का भेद करते चले जावे वह व्यवहारनय है। जैसे कहना कि द्रव्य छ है जीव ससारी प्रौर सिद्ध है समारी स्थावर व त्रस है, स्थावर पृथ्वी आदि पाच प्रकार के हैं इत्यादि ।
ऋजुसूत्रनय जो सूक्ष्म तथा स्थूल पर्याय मात्र को जो वर्तमान मे है उसी को ग्रहण करे वह ऋजसूत्रनय है । जैसे स्त्री को स्त्री, पुरुष को पुरुष, श्वान को श्वान, अश्व को अश्व, क्रोध पर्याय सहित को क्रोधी दया भाव सहित को दयावान कहना ।
शब्दनय व्याकरण व साहित्य के नियमों की अपेक्षा से शब्दो को व्यवहार करना शब्दनय है । उसमे लिग, वचन, कारक, काल आदि का दोष झलकता हो तो भी उसे नहीं गिनना सो शब्दनय है । जैसे स्त्री को सस्कृत मे दाग, भार्या, कलत्र कहते है । यहा दारा शब्द पुल्लिंग है, कलत्र नपु सक लिग है तो भी ठीक । कोई महान पुरुष आ रहा है उसे प्रतिष्ठावाचक शब्द मे कहते हैं - वे भ्रा रहे है । यह वाक्य यद्यपि बहुवचन का प्रयोग एकवचन मे है तथापि शब्दनय से ठीक है। कही की कथा का वर्णन करते हुए भूतकाल मे वर्तमान का प्रयोग कर देते है जैसा सेना लड रही है, तोपे चल रही हैं, रुधिर के
वर्तमान काल मे प्रयोग करना शब्दनय से ठीक है । शब्द नय मे शब्दो पर ही दृष्टि है कि शब्द भाषा साहित्य के अनुसार व्यवहार किया जावे ।
समभिरूढ़ नय एक शब्द के अनेक अर्थ प्रसिद्ध हैं। उनमे से एक अर्थ को लेकर किसी के लिये व्यवहार करना समभिरूढ नय है । जैसे गो शब्द के अर्थ, नक्षत्र, आकाश, बिजली, पृथ्वी, वाणी आदि है, तो भी गाय के लिये भी व्यवहार करना समभिरूढनय से ठीक है। यद्यपि गो शब्द के अर्थ जाननेवाले के है । तथापि सोई, बैठी हरएक दशा मे गाय पशु को गो कहना समभिरूढ मे नय से ठीक है या एक पदार्थ के अनेक शब्द नियत करना, चाहे उनके अर्थो मे भेद हो, यह भी समभिरूढ नय से है। जैसे स्त्री को स्त्री, अबला, नारी आदि कहना । अथवा इन्द्र को शक, पुरन्दर, इन्द्र, सहस्राक्षी आदि कहना । यहा इन शब्दो के भिन्न २ अर्थ है तो भी एक व्यक्ति के लिये व्यवहार करना समभिरूढ नय से ठीक है ।
एवभूत :- जिस शब्द का जो वास्तविक अर्थ हो उसी समान क्रिया हुए को उसी शब्द से व्यवहार करना एवभूतनय है। जैसे वैद्यक करते हुए वैद्य को वैद्य कहना, दुर्बल स्त्री को ही अबला कहना, पूजन करते को पुजारी कहना, राज्य करते हुए न्याय करते हुए को राजा कहना । लोक व्यवहार मे इन नयो की बडी उपयोगिता है ।
स्याद्वादनय या सप्तभंगवारणी पदार्थ मे अनेक स्वभाव रहते है जो साधारण रूप से विचारने मे विरोधरूप भासते हैं परन्तु वे सब भिन्न २ अपेक्षा से पदार्थ रूप से पाए जाते है उनको समझाने का उपाय स्याद्वाद या सप्तभग है ।
हर एक पदार्थ मे प्रस्ति या भावपना, नास्ति या अभावपना ये दो विरोधी स्वभाव है । नित्यपना तथा प्रनित्यपना ये भी दो विरोधी स्वभाव है । एकपना और अनेकपना ये भी दो विरोधी स्वभाव है। एक ही समय मे एक ही स्वभाव को वचन द्वारा कहा जाता है तब दूसरा स्वभाव यद्यपि कहा नही जाता है । तो भी पदार्थ मे रहता अवश्य है, इसी बात को जताने के लिये स्याद्वाद है ।
सम्य ज्ञान और उसका महात्म्य ।
स्यात् अथवा कथचित् अर्थात् किसी अपेक्षा से वाद अर्थात् कहना सो स्याद्वाद है । जैसे एक पुरुष पिता भी है पुत्र भी है उसको जब किसी को समभावेगे तब कहेंगे कि स्यात् पिता अस्ति । किसी अपेक्षा से ( अपने पुत्र की अपेक्षा से) पिता है । यहा स्यात् शब्द बताता है कि वह कुछ और भी है । फिर कहेगे स्यात् पुत्र अस्ति किसी अपेक्षा से ( अपने पिता की अपेक्षा से ) पुत्र है । वह पुम्ष पिता व पुत्र दोनो है । ऐसा दृढ करने के लिये तीसरा भग कहा जाता है 'स्यात् पिता पुत्रश्च ।
किसी अपेक्षा से यदि दोनो को विचार करे तो वह पिता भी है पुत्र भी है । वह पिता व पुत्र तो एक ही समय मे है परन्तु शब्दो मे यह शक्ति नही है कि दोनो स्वभावो को एक साथ कहा जा सके । अतएव कहते है चौथा भगस्यात् प्रवक्तव्य । किसी अपेक्षा से यह वस्तु प्रवक्तव्य है, कथनगोचर नही है । यद्यपि यह पिता व पुत्र दोनो एक समय में है, परन्तु कहा नहीं जा सकता । सर्वथा प्रवक्तव्य नही है इसी बात को दृढ करने के लिये शेष तीन भग है । स्यात् पिता अवक्तव्य च । किसी अपेक्षा से श्रवक्तव्य होने पर भी पिता है, स्यात् पुत्र. अवक्तव्य च । किसी अपेक्षा अवक्तव्य होने पर भी पुत्र है । स्यात् पिता पुत्रश्च प्रवक्तव्य च किसी अपेक्षा प्रवक्तव्य होने पर भी पिता व पुत्र दोनो है । इस तरह दो विरोधी स्वभावो को समझाने के लिये सात भग शिष्यो को दृढ ज्ञान कराने के हेतु किये जाते है । वास्तव मे उस पुरुष मे तीन स्वभाव है पिता पना, पुत्र पना व प्रवक्तव्य पना इसी के सात भग ही हो सकते है न छः न म्राठ । जैसे १ पिता, २ पुत्र, ३ पिता पुत्र, ४ अवतव्य ५ पिता प्रवक्तव्य, ६ पुत्र प्रवक्तव्य, ७ पिता पुत्र अवक्तव्य ।
यदि किसी को सफेद, काला, पीला, तीन रग दिये जावे और कहा जावे कि इसके भिन्न २ रग बनाओ तो वह नीचे प्रमारण सात ही बना देगा ।
१ सफेद, २ काला, ३ पीला, ४ सफेद काला, ५ सफेद पीला, ६ काला पीला, ७ सफेद काला पीला। इससे कम व अधिक नही बन सकते है ।
प्रात्मा के स्वभाव को समझने के लिये इस स्याद्वाद की बड़ी जरूरत है । आत्मा मे अस्तित्व या भावपना अपने प्रखड द्रव्य, अपने प्रख्यात प्रदेश रूप क्षेत्र, अपनी स्वाभाविक पर्यायरूप काल व अपने शुद्ध ज्ञानानन्द मय भाव
की अपेक्षा है उसी समय इस अपने आत्मा मे सम्पूर्ण अन्य आत्माओ के, सर्व पुद्गलो के, धर्म, अधर्म, प्रकाश व काल के द्रव्य, क्षेत्र, काल तथा भाव का नास्तिपना या प्रभाव भी है । अस्तित्व के साथ नास्तित्व न हो तो यह आत्मा है । यह भी श्री महावीर स्वामी का आत्मा है अन्य नहीं है यह बोध ही न हो । आत्मा मे आत्मापना तो है परन्तु आत्मा मे भाव कर्म रागादि, द्रव्य कम ज्ञानावरणादि, नौकर्म शरीरादि इनका तथा अन्य सर्व द्रव्यों का नास्तित्व है या प्रभाव है ऐसा जानने पर आत्मा का भेदविज्ञान होगा, श्रात्मानुभव हो सकेगा । इसी को सात तरह से कहेगे
१ स्यात् अस्ति आत्मा, २ स्यात् नास्ति आत्मा, ३ स्यात् अस्ति नास्ति श्रात्मा, ४ स्यात् प्रवक्तव्य, ५ स्यात् अस्ति आत्मा वक्तव्य च ६ स्यात् नास्ति प्रात्मा श्रवक्तव्य च, ७ स्यात् अस्ति नास्ति आत्मा प्रवक्तव्य च । इसी तरह यह श्रात्मा अपने द्रव्य व स्वभाव की अपेक्षा ध्रुव है नित्य है तब ही पर्याय की अपेक्षा अनित्य है । इस तरह एक ही समय में आत्मा मे नित्यपना तथा अनित्यपना दोनो स्वभाव है इसी को सात भगो द्वारा समझाया जा सकता है ।
१ स्यात् नित्य, २ स्यात् अनित्य, प्रवक्तव्य, ५ स्यात् नित्य अवक्तव्य च स्यात् नित्य अनित्य प्रवक्तव्य च ।
३ स्यात् नित्य प्रनित्य, ४ स्यात् ६ स्यात् अनित्य अवक्तव्य च, ७
इसी तरह आत्मा अनत गुणों का अभेद पिड है, इसलिये एक रूप है । वही आत्मा उसी समय ज्ञान गुरग की अपेक्षा ज्ञानरूप है, सम्यक्त गुरण की अपेक्षा सम्यक्त रूप है, चारित्र गुरण की अपेक्षा चारित्र रूप है, वीर्यगुरण की अपेक्षा वीर्यरूप है । जितने गुरण प्रात्मा मे है वे सर्व आत्मा मे व्यापक है । इस लिये उनकी अपेक्षा आत्मा अनेक रूप है। इसी के सप्तभग इस तरह करेगे स्यात् एक, स्यात् अनेक स्यात् एक अनेकश्च, स्यात् प्रवक्तव्य, स्यात् एक नवक्तव्य च स्यात् अनेक प्रवक्तव्य च स्यात् एक अनेक प्रवक्तव्य च ।
यह ससारी आत्मा स्वभाव की अपेक्षा शुद्ध है, उसी समय कर्म सयोग की अपेक्षा प्रशुद्ध है । इसके भी सात भग बनेगे । स्यात् शुद्ध, स्यात् अशुद्ध, स्यात् शुद्ध प्रशुद्धः स्यात् प्रवक्तव्य, स्यात् शुद्ध प्रवक्तव्य च स्यात् प्रशुद्ध भवक्तव्य च, स्यात् शुद्ध अशुद्ध प्रवक्तव्य च ।
स्याद्वाद के बिना किसी पदार्थ के अनेक स्वभावों का ज्ञान प्रज्ञाना शिष्य को न होगा। इसलिये यह बहुत आवश्यक सिद्धान्त है, आत्मा के भेद विज्ञान के लिये तो बहुत ही जरूरी है तथा यह स्याद्वाद का सिद्धांत अनेक एकान्त मत के धारियो का एकान्त हठ छुडाकर उनमे प्रेम व ऐक्य स्थापन करने का भी साधन है ।
जैसे दूर से किसी का मकान पाँच आदमियो को दिखाई दिया, वह मकान भिन्न भिन्न स्थानो पर पांच तरह के रगो से रगा है । जिसकी दृष्टि सफेदी पर पड़ी वह कहता है ( मकान सफेद है), जिसकी दृष्टि लाल रग पर पडी वह कहता है, मकान लाल है, जिसकी दृष्टि पीले रंग पर पडी वह कहता है, मकान पीला है, जिसकी दृष्टि नीले रंग पर पडी वह कहता है, मकान नीला है, जिसकी दष्टि काले रंग पर पड़ी वह कहता है मकान फाला है । इस तरह आपस में झगडते थे, तब एक समझदार ने कहा कि क्यो झगडते हो, तुम सब एकात से सच्चे हो परन्तु पूर्ण सत्य नही हो । यह मकान पाँच रंग का है, ऐसा समझो । जब पाचों ने यह बात समझली तब उन सबका एकति हट गया तब सबको बडा श्रानद हुआ। इसी तरह अनेकान्तमय अनेक स्वभाव वाले पदार्थ को अनेक स्वभाववाला बताने को स्याद्वाद दर्पगा के समान है व परस्पर विरोध मेटने को एक अटल न्यायाधीश के समान है। सहज मुख साधन के लिये तो बहुत ही उपयोगी है । कल्पित इन्द्रिय मुख को त्यागने योग्य व प्रतीन्द्रिय सुख को ग्रहण योग्य बताने वाला है ।
निश्चयनय से आत्मा को आत्मारूप ही जानना सम्यग्ज्ञान है । जैसे सूर्य पर मेघो के आ जाने से प्रकाश अत्यल्प प्रगट है तो भी समझदार जानता है कि सूर्य का प्रकाश उतना ही नहीं है, वह तो दोपहर के समय मेघ रहित जैसा पूर्गा प्रकाशमान रहता है वैसा ही है मेघो के कारण कम प्रकाश है। सूर्य का स्वभाव ऐसा नहीं है । ऐसा जो सूर्य के असली प्रकाश कोपूर्ण प्रकाश को भली प्रकार बिना किसी सशय के जानता है वही सम्यग्ज्ञानी है, इसी तरह अपने प्रात्मा पर ज्ञानावररणादि कर्मों के मेघ होने पर ज्ञान का प्रकाश कम व मलीन हो रहा है। रागी द्वेषी प्रज्ञानमय हो रहा है तो भी यह | सम्यग्ज्ञान प्रौर उसका महात्म्य ] का समय हो, तूफान हो, भूचाल हो रहा हो, घोर कलह या युद्ध हो रहा हो, किसी महापुरुष के मरण का शोक मनाया जा रहा हो, ऐसे ग्रापत्तियों के समय पर शांति से ध्यान करना योग्य है । बड़े आदर से शास्त्र को पढना चाहिये, बडी भक्ति भावो मे रखनी चाहिये कि मैं शास्त्रो को इसीलिए पढता हूँ कि मुझे प्रात्मज्ञान का लाभ हो, मेरे जीवन का समय सफल हो । अन्तरग प्रेम पूर्ण भक्ति को विनय कहते हैं । उपधान :- धारणा करते हुए ग्रन्थ को पढना चाहिये । जो कुछ पढा जावे वह भीतर जमता जावे जिससे वह पीछे स्मरण मे श्रा सके । यदि पढते चले गये और ध्यान मे न लिया तो अज्ञान का नाश नही होगा । इसलिए एकाग्र चित्त होकर ध्यान के साथ पढना, धारणा मे रखते जाना उपधान है । यह बहुत जरूरी अग है, ज्ञान का प्रबल साधन है । बहुमान शास्त्र को बहुत मान प्रतिष्ठा से विराजमान करके पढना चाहिये । उच्च चौकी पर रखकर आसन से बैठकर पढना उचित है तथा शास्त्र को अच्छे गत्ते वेष्टन से विभूषित करके जहा दीमक न लगे, शास्त्र सुरक्षित रहे इस तरह विराजमान करना चाहिये । मनिष :- शास्त्रज्ञान अपने को हो उसको छिपाना नही चाहिये, कोई समझना चाहे तो उसको समझाना चाहिये । तथा जिस गुरु से समझा हो उसका नाम न छिपाना चाहिये । इस तरह जो आठ अगो को पालता हुआ शास्त्रो का मनन • करेगा वह व्यवहार सम्यग्ज्ञान का सेवन करता हुआ आत्मज्ञान रूपी निश्चय सम्यग्ज्ञान को प्राप्त कर सकेगा । यद्यपि ज्ञान एक ही है, वह आत्मा का स्वभाव है, उसमे कुछ भेद नही है जैसे सूर्य के प्रकाश मे कोई भेद नही है तथापि सूर्य के ऊपर घने मेघ आ जावे तो प्रकाश कम झलकता है मेघ उससे कम हो तो और अधिक प्रकाश प्रगट होता, और अधिक कम मेघ हो तो और अधिक प्रकाश झलकता । और भी अधिक कम मेघ हो तो और भी अधिक प्रकाश प्रगट होता । बिलकुल मेघ न हो तो पूर्ण प्रकाश प्रगट होता है। इस तरह मेघो के कम व अधिक आवरण के कारण सूर्य प्रकाश के पाच भेद हो सकते है तथा और भी सूक्ष्म विचार करोगे तो सूर्य के प्रकाश के अनेक भेद हो सकते है उसी तरह ज्ञानावरण कर्म के क्षयोपशम या क्षय के अनुसार ज्ञान के मुख्य पाच भेद हो गये है - मतिज्ञान, श्रतज्ञान, प्रवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान तथा केवलज्ञान । मति, श्रुत, अवधि तीन ज्ञान जब मिथ्यादृष्टि के होते है - कुमति, कुश्र त, कुप्रवधि कहलाते है । सम्यग्दृष्टि के मति, श्रुत, प्रवधि कहलाते है। इस तरह तीन कुज्ञान को लेकर ज्ञान के प्राठ भेद हो जाते है । मतिज्ञान पाच इन्द्रिय तथा मन के द्वारा सीधा किसी पदार्थ का जानना मतिज्ञान है । जैसे स्पर्श इन्द्रिय से स्पर्श करके किसी पदार्थ को ठण्डा, गरम, रूखा, चिकना, नरम, कठोर, हलका, भारी जानना । रसना इन्द्रिय से रसना द्वारा रसना योग्य पदार्थ को स्पर्श करके खट्टा मीठा, चरपरा, कडवा, कसायला या मिश्रित स्वाद जानना । नासिका इन्द्रिय से गधयोग्य पदार्थ को छूकर सुगन्ध या दुर्गन्ध जानना । चक्षु इन्द्रिय से बिना स्पर्श किये दूर से किसी पदार्थ को सफेद, लाल, पीला, काला या मिश्रित रंग रूप जानना । कानो से शब्द स्पर्श कर मुरीला व अमुरीला शब्द जानना । मन के द्वारा दूर से किसी पूर्व बात को यकायक जान लेना । इस तरह जो सीधा ज्ञान इन्द्रिय व मन से होता है उसको मतिज्ञान कहते है। जितना मतिज्ञानावरण का क्षयोपशम होता है उतनी ही अधिक मतिज्ञान की शक्ति प्रकट होती है । इसलिये सर्व प्रारिणयो का मतिज्ञान एकसा नही मिलेगा। किसी के कम, किसी के अधिक, किसी के मन्द, किसी के तीव्र । जानी हुई चीज का स्मरण हो जाना व एक दफे इन्द्रयो से व मन से जानी हुई चीज को फिर ग्रहण कर पहचानना कि वही है यह सज्ञा ज्ञान, तथा यह चिन्ता ज्ञान कि जहा जहा धूम होगा वहा वहा आग होगी। जहा जहा सूर्य का प्रकाश होगा कमल प्रफुल्लित होगे तथा चिन्ह को देखकर या जानकर चिन्हों का जानना, धूम को देखकर अग्नि का जानना यह अनुमान ज्ञान, ये सब भी मतिज्ञान है क्योंकि मतिज्ञानावरण कर्म क क्षयोपशम से होते है । श्र. तज्ञान मतिज्ञान से जाने हुए पदार्थ के द्वारा दूसरे पदार्थ का या विषय का जानना श्रुतज्ञान है । जैसे कान से आत्मा शब्द सुना यह मतिज्ञान है । आत्मा शब्द से प्रात्मा के गुरण पर्याय श्रादि का बोध करना श्रुतज्ञान है । इसीलिए शास्त्रज्ञान को श्रुतज्ञान कहते है । हम अक्षरो को देखते है या सुनते है उनके द्वारा फिर मन से विचार करके शब्दों से जिन जिन पदार्थों का सकेत होता है उनको ठीक ठीक जान लेते है यही श्रुतज्ञान है, यह श्रुतज्ञान मनके ही द्वारा होता है। श्रुतज्ञान के दो भेद हैं :- प्रक्षरात्मक श्रुतज्ञान, अक्षरात्मक श्रुतज्ञान । जो अक्षरो के द्वारा अर्थ विचारने पर हो वह अक्षरात्मक श्रुतज्ञान जैसे शास्त्र द्वारा ज्ञान । जो स्पर्शनादि इन्द्रियो से मतिज्ञान द्वारा पदार्थ को जानकर फिर उस ज्ञान के द्वारा उस पदार्थ मे हितरूप या ग्रहितरूप बुद्धि हो सो अक्षरात्मक श्रुतज्ञान है। यह एकेन्द्रियादि सब प्राणियों को होता है । जैसे वृक्ष को कुल्हाडी लगाने से कठोर स्पर्श का ज्ञान होना सो मतिज्ञान है, फिर उससे दु ख का बोध होना श्रुतज्ञान है । लट को रसना के द्वारा स्वाद के का ज्ञान होना मतिज्ञान है, फिर उसे वह सुखदाई या दुखदाई भासना श्रुतज्ञान है । चीटी को दूर से सुगन्ध आना मतिज्ञान से सुगन्ध आना मतिज्ञान है फिर सुगंधित पदार्थ की ओर आने की बुद्धि होना श्रुतज्ञान है । पतग को आख से दीपक का वर्ण । देखकर ज्ञान होना मतिज्ञान है । वह हितकारी भासना श्रुतज्ञान है । कर्ण से कठोर शब्द सुनना मतिज्ञान है, वह अहितकारी भासना श्रुतज्ञान है । मतिश्रतज्ञान सर्व प्राणियों को सामान्य से होते है । एकेन्द्रियादि पचेन्द्रिय पर्यत सबके इन दो ज्ञानो से कम ज्ञान नहीं होते है । इन दो ज्ञानो की शक्ति होती है, परन्तु ये ज्ञान भी क्रम से काम करते है । अवधिज्ञान :- अवधि नाम मर्यादा का है । द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव की मर्यादा लिये हुए पुद्गलो को या पुद्गल सहित अशुद्ध जीवो का वर्णन जानना इस ज्ञान का काम है । द्रव्य से मतलब है कि मोटे पदार्थ को जाने कि सूक्ष्म को जाने, क्षेत्र से मतलब है कि कितनी दूर तक की जाने, एक कोस की या एक सौ या एक हज़ार या दस हज़ार आदि कोस तक की जाने । काल से मतलब है कि कितने समय आगे व पीछे की जाने । दस वर्ष, एक सौ वर्ष एक भव या अनेक भव को आगे पीछे । भाव से मतलब अवस्था विशेष या स्वभाव विशेष से है । से अवधिज्ञान के बहुत से भेद हो सकते है, जिसको जितना अवधिज्ञानावरण कर्म का क्षयोपशम होता है । उतना कम या अधिक अवधिज्ञान होता है। इस ज्ञान के होने मे मन व इन्द्रियों की जरूरत नहीं है आत्मा स्वय ही जानता है। देव तथा नारकियो को तो जन्म से ही होता है । पशुप्रो को व मानवो को सम्यक्त के व तप के प्रभाव से होता है । यह एक प्रकार की ऐसी विशेष शक्ति का प्रकाश है जिससे प्रवधिज्ञानी किसी मानव को देखकर विचारता हुआ उसके पूर्व जन्म व भागामी जन्म की घटनाओ को जान सकता है। योगी तपस्वी ऐसा अधिक अवधिज्ञान पा सकते हैं कि सैकडो जन्म पूर्व व आगे की बाते जान लेवे । ज्ञान की जितनी निर्मलता होती है उतना ही उसका अधिक प्रकाश होता है । दूसरो के मन मे पुद्गल व अशुद्ध जीवो के सम्बन्ध मे क्या विचार चल रहा है व विचार हो चुका है व विचार होवेगा उस सर्व को जो कोई आत्मा के द्वार जान सके वह मनःपर्ययज्ञान है, यह ज्ञान बहुत सूक्ष्म बातो को जान सकता है । जिसको अवधिज्ञानी भी न जान सके इसलिये यह ज्ञान अवधिज्ञान से अधिक निर्मल है । यह ज्ञान ध्यानी तपस्वी योगियों के ही होता है - सम्यग्दृष्टि महात्माओ के ही होता है । मन पर्यय ज्ञानावरण कर्म के कम व अधिक क्षयोपशम के अनुसार किसी को कम या किसी को अधिक होता है । केवलज्ञान :- सर्व ज्ञानावरण कर्म के क्षय होने से अनन्तज्ञान का प्रकाश होना केवलज्ञान है । यही स्वाभाविक पूर्ण ज्ञान है, जो परमात्मा अरहत तथा सिद्ध मे सदा व्यक्ति रूप से चमकता रहता है ससारी जीवो में शक्ति रूप से रहता है उस पर ज्ञानावरण का पर्दा पड़ा रहता है । जब शुक्ल ध्यान के प्रभाव से सर्व ज्ञानावरण कर्म का क्षय हो जाता है तब ही यह ज्ञान तेरहवे गुरणस्थान मे सयोग केवली जिनको प्रगट होता है । एक दफे प्रकाश होने पर फिर वह मलीन नही होता है, सदा ही शुद्ध स्वभाव मे प्रगट रहता है। पाच ज्ञानो मे मति, श्रुति परोक्ष है क्योकि इन्द्रिय व मन से होते है परन्तु तीन ज्ञान प्रत्यक्ष है - आत्मा से ही होते हैं । श्र सज्ञान ही केवलज्ञान का कारण है :- इन चार ज्ञानो मे श्रुतज्ञान ही ऐसा ज्ञान है जिससे शास्त्र ज्ञान होकर प्रात्मा का भेदविज्ञान होता ह कि यह आत्मा भावकर्म रागादि, द्रव्यकर्म ज्ञानावरणादि व नौकर्म शरीरादि से भिन्न है, सिद्धसम शुद्ध है। जिसको आत्मानुभव हो जाता है वही भाव श्रुतज्ञान को पा लेता है । यही आत्मानुभव ही केवलज्ञान को प्रकाश कर देता है । किसी योगी को अवधिज्ञान व मन पर्ययज्ञान भी हो तो भी श्रुतज्ञान के बल से केवलज्ञान हो सकता है। अवधि मन पर्ययज्ञान का विषय ही शुद्धात्मा नही है, ये तो रूपी पदार्थ को ही जानते है जब कि श्रुतज्ञान अरूपी पदार्थों को भी जान सकता है इसलिये श्रुतज्ञान प्रधान है । हम लोगो को उचित है कि हम शास्त्र - ज्ञान का विशेष अभ्यास करते रहे जिससे आत्मानुभव मिले । यही सहज सुख का साधन है व यही केवलज्ञान का प्रकाशक है । चार दर्शनोपयोग पहले हम बता चुके है कि जीव के पहिचानने के आठ ज्ञान व चार दर्शन साधन है। दर्शन और ज्ञान में यह अन्तर है कि ज्ञान साकार है, दर्शन निराकार है। दर्शन मे पदार्थ का बोध नहीं होता है । जब बोध होने लगता है तब उसे ज्ञान कहते है । जिस समय आत्मा का उपयोग किसी पदार्थ के जानने की तैयारी करता है तब ही दर्शन होता है, उसके पोछे जो कुछ ग्रहण मे आता है वह ज्ञान है । कर मे शब्द आते ही जब उपयोग उधर गया और शब्द को जाना नही तब दर्शन है । जब जान लिया कि शब्द है तब ज्ञान कहा जाता है । अल्पज्ञानियों के दर्शन पूर्वक मतिज्ञान होता है, मतिज्ञान पूर्वक श्रुतज्ञान होता है । सम्यग्दृष्टि महात्माम्रो को प्रवधि दर्शन पूर्वक अवधिज्ञान होता है। केवलज्ञानी को केवलदर्शन, केवलज्ञान के साथ दो होता है । चक्षु इन्द्रिय द्वारा जो दर्शन हो वह चक्षुदर्शन है। जैसे भाँख ने घडी को जाना यह मतिज्ञान है । इसी तरह चक्षु इन्द्रिय के सिवाय चार इन्द्रिय और मन से जो दर्शन होता है वह प्रचक्षुदर्शन है । अवधिदर्शन सम्यक्ती ज्ञानियो को आत्मा से होता है। केवलदर्शन सर्वदर्शी है, वह दर्शनावरण कर्म के सर्वथा क्षय से प्रगट होता है । निश्चय और व्यहारनय :- प्रमारण जब वस्तु को सर्वाग ग्रहरण करता है तब नय वस्तु के एक प्रश को ग्रहण करता है व बताता है। पहले कहे गये पाचों ज्ञान प्रमाण हैं व तीन कुज्ञान प्रमारणाभास हैं। जैसे कोई मानव व्यापारी है और मजिस्ट्रेट भी है, प्रमारणज्ञान दोनों बातो को एक साथ जानता है । नय को अपेक्षा किसी समय वह व्यापारी कहा जायेगा तब मजिस्ट्रेटपना गौरण रहेगा व कभी मजिस्ट्रेट कहा जायेगा तब व्यापारीपना गौरण रहेगा । अध्यात्म शास्त्रो मे निश्चयनय और व्यवहारनय का उपयोग बहुत मिलता है । स्वाश्रय निश्चय पराश्रय व्यवहार जो नय एक ही वस्तु को उसी को पर की अपेक्षा बिना वर्णन करे वह निश्चयनय है । जो किसी वस्तु को परकी अपेक्षा से और का और कहे वह व्यवहारनय है । एक खडग सोने की म्यान के भीतर है, उसमे खडग को खडग और म्यान को म्यान कहना निश्चयनय का काम है तथा सोने को खडग कहना व्यवहार नय का काम है । लोक मे ऐसा व्यवहार चलता कि परके सयोग से उस वस्तु को अनेक तरह से कहा जाता है । जैसे दो खडग रक्खी है, एक चादी के म्यान में है और एक सोने के म्यान मे है । किसी को इनमे से एक ही खडग चाहिये थी, वह इतना लम्बा वाक्य नही कहता है कि सोने की म्यान में रखी हुई खडग लाओ, किन्तु छोटा वाक्य कह देता है कि सोने की खडग लाओ। तब यह वचन व्यवहार में असत्य नहीं है किन्तु निश्चय मे असत्य है, क्योकि वह भ्रम पैदा कर सकता है कि खडग सोने की है जबकि खडग सोने की नहीं है । इसी तरह हमारी आत्मा मनुष्य आयु व गति के उदय से मनुष्य के शरीर मे है, आत्मा भिन्न है । तैजस कारण और औदारिक शरीर भिन्न है । निश्चयनय से आत्मा को आत्मा ही कहा जायेगा । व्यवहारनय से आत्मा को मनुष्य कहने का लोक व्यवहार है क्योंकि मनुष्य शरीर मे वह विद्यमान है। आत्मा को मनुष्य कहना व्यवहार से सत्य है तो भी निश्चय नय से असत्य है, क्योंकि आत्मा मनुष्य नही है, उसका कर्म मनुष्य है, उसका देह मनुष्य है । निश्चयनय की भूतार्थ, सत्यार्थ, यथार्थ, वास्तविक, असल मूल कहते है । व्यवहारनय को असत्यार्थ प्रभूतार्थ, प्रयथार्थ, प्रवास्तविक कहते है । ससारी आत्मा को समझने के लिए व पर के सयोग मे प्राप्त किसी भी वस्तु को समझने के लिये दोनो नयो को आवश्यकता पडती है । कपडा मलीन है उसको शुद्ध करने के लिये दोनो नयो के ज्ञान की जरूरत है। निश्चयनय से कपडा उज्ज्वल है, रूई का बना है व्यवहारनय से मैला कहाता है, क्योकि मैल का सयोग है । यदि एक ही नय या अपेक्षा को समझे तो कपडा कभी स्वच्छ नही हो सकता है । यदि ऐसा मानले कि कपडा सर्वथा शुद्ध ही है तब भी वह शुद्ध नही किया जायेगा । यदि मानले कि मैला ही है तब भी वह शुद्ध नही किया जायेगा । शुद्ध तब हो किया जायेगा जब यह माना जायेगा कि असल मे मूल मे तो यह शुद्ध है परन्तु मैल के सयोग से वर्तमान में इसका स्वरूप मैला में हो रहा है । मैल पर है छुडाया जा सकता है ऐसा निश्चय होने पर ही कपडा साफ किया जायेगा । इसी तरह निश्चयनय कहता है कि आत्मा शुद्ध है । व्यवहारनय कहता है कि आत्मा अशुद्ध है, कर्मा से बद्ध है दोनो बातो को जानने पर ही कर्मों को काटने का पुरुषार्थ किया जायेगा । निश्चयनय के भी दो भेद अध्यात्म शास्त्रो मे लिये गये है - एक शुद्ध निश्चयनय, दूसरा अशुद्ध निश्चयनय । जिसका लक्ष्य केवल शुद्ध गुरा पर्याय व द्रव्य पर हो वह शुद्ध निश्चयनय है व जिसका लक्ष्य उसो एक द्रव्य के अशुद्ध द्रव्य, गुग्गा पर्याय पर हो वह अशुद्ध निश्चय है जैसे जीव सिद्धसम शुद्ध है यह वाक्य शुद्ध निश्चयनय से कहा जाता है । यह जीव रागी द्वेषी है यह वाक्य अशुद्ध निश्चयनय से कहा जाता है । राग द्वेप जीव के हो नैमित्तिक व औपाधिक भाव है । उन भावो मे मोहनीय कर्म का सयोग पा रहा है इसलिये वे भाव शुद्ध नहीं है, अशुद्ध भाव है । इन अशुद्ध भावो को आत्मा के भाव कहना अशुद्ध निश्चयनय से ठीक है, जबकि शुद्ध निश्चयनय से ठीक नहीं है । ये दोनो नय एक ही द्रव्य पर लक्ष्य रखते हे । व्यवहारनय के कई भेद है- अनुपचारित प्रसदभूत व्यवह रनय । यह । वह नय है कि पर वस्तु का किसी से सयोग होते हुए ही पर को उसका कहना । जैसे यह घी का घड़ा है । इसमे घी का संयोग है इसलिये घडे को घी का घडा कहते है । यह जीव पापी है पुण्यात्मा है । यह जीव मानब है, पशु है । यह गोरा है, यह काला है। ये सब वाक्य इस नय से ठीक है, क्योकि कार्मारण व औदारिक शरीर का सयोग है इसलिये अनुपचारित है परन्तु है आत्मा के मूल स्वरूप से भिन्न इसलिये अद्भुत है । विल्कुल भिन्न वस्तु को किसी की कहना उपचरित प्रेसद्भूत व्यवहारनय है। जैसे यह दुकान रामलाल की है, यह टोपी चालक की है, यह स्त्री रामलाल की है, यह गाय फतहचन्द की है, ये कपडे मेरे है, ये आभूपा मेरे है, यह देश मेरा है । निश्चयनय का विषय जब वस्तु को अभेद रूप से प्रखण्ड रूप से ग्रहगा करना है तब उसी को खण्डरूप से ग्रहण करना सद्भूत व्यवहारनय का विषय । ऐसा भी शास्त्रो मे विवेचन है । जैसे आत्मा को अभेद एक ज्ञायक मात्र ग्रहरण करना निश्चयनय का अभिप्राय है तब आत्मा को ज्ञानरूप, दर्शनरूप, चारित्ररूप इस तरह गुरण व गुणी भेद करके कहना सद्भूत व्यवहारनय का विषय है। कही कही इस सद्भूत व्यवहार को भी निश्चयनय मे गर्भित करके कथन किया गया है क्योकि यह सद्भूत व्यवहार भी एक ही द्रव्य की तरफ भेदरूप से लक्ष्य रखता है, परकी तरफ लक्ष्य नहीं है । जहा परकी तरफ लक्ष्य करके पर का कथन है वह असद्भुत व्यवहारनय है या सामान्य से ही व्यवहारनय है । द्रव्याथिक पर्यायाथिक नय जो नय या अपेक्षा केवल द्रव्य को लक्ष्य मे लेकर वस्तु को कहे वह द्रव्याथिक है । जो द्रव्य की किसी पर्याय को लक्ष्य मे लेकर कहे वह पर्यायाधिक है। जैसे द्रव्याथिकनय से हर एक आत्मा समानरूप से शुद्ध है, निज स्वरूप मे है । पर्यायाथिकनय से आत्मा सिद्ध है, समारी है, पश् है, मानव है, वृक्ष है इत्यादि । यह आत्मा नित्य है द्रव्याथिकनय का वाक्य है। यह आत्मा ससारी अनित्य है, यह पर्यायिाथिकनय का वाक्य है क्योकि द्रव्य कभी नाश नहीं होता है, पर्याय क्षरण में बदलती है । जगत मे अपेक्षाबाद के बिना व्यवहार नही हो सकता है । भिन्न भिन्न अपेक्षा से वाक्य सत्य माने जाते है। उन अपेक्षाम्रो को या नयो को बताने के लिये जिनसे लोक मे व्यवहार होता है, जैन सिद्धात मे सात नय प्रसिद्ध हैं - नैगम, सग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शब्द, समभिरूढ, एव भूत । इनमे पहले तीन नय द्रव्याथिक मे गर्भित है क्योंकि इनकी दृष्टि द्रव्य पर रहती है, शेष चार नय पर्यायाथिक मे गर्भित है क्योंकि उनकी दृष्टि पर्याय पर ही रहती है तथा अन्त के तीन नयो की दृष्टि शब्द पर रहती है. इसलिये वे शब्दनय है । शेष चार की दृष्टि पदार्थ पर मुख्यता से रहती है इससे वे अर्थनय हैं । नैगमनय :-- जिसमे संकल्प किया जावे नैगमनय है । भूतकाल की बात को वर्तमान मे सकल्प करना यह भूतनैगमनय है । जैसे कार्तिक मुदी चौदह को कहना कि आज श्री वर्द्धमानस्वामी का निर्वाण दिवस है। भावी नंगमनय भविष्य की बात को वर्तमान में कहता है जैसे अर्हन्त अवस्था में विराजित किसी केवली को सिद्ध कहना । वर्तमान नैगमनय वह है जो वर्तमान की अधूरी बात को पूरी कहे जैसे कोई लकडी काट रहा है, उससे किसी ने पूछा क्या कर रहे हो ? उसने कहा किवाड बना रहा हू । क्योंकि उसका उद्देश्य लकडी काटने मे किवाड ही बनाने का है । संग्रहनय जो एक जाति के बहुत से द्रव्यो को एक साथ बतावे वह संग्रहनय है। जैसे कहना कि सत् द्रव्य का लक्षण है। यह वाक्य सर्व द्रव्यो को सत् बताता है । जीव का उपयोग लक्षण है । यह वाक्य सब जीवो का लक्षरण उपयोग सिद्ध करता है । व्यवहारनय -- जिस अपेक्षा से सग्रहनय से ग्रहीत पदार्थों का भेद करते चले जावे वह व्यवहारनय है। जैसे कहना कि द्रव्य छ है जीव ससारी प्रौर सिद्ध है समारी स्थावर व त्रस है, स्थावर पृथ्वी आदि पाच प्रकार के हैं इत्यादि । ऋजुसूत्रनय जो सूक्ष्म तथा स्थूल पर्याय मात्र को जो वर्तमान मे है उसी को ग्रहण करे वह ऋजसूत्रनय है । जैसे स्त्री को स्त्री, पुरुष को पुरुष, श्वान को श्वान, अश्व को अश्व, क्रोध पर्याय सहित को क्रोधी दया भाव सहित को दयावान कहना । शब्दनय व्याकरण व साहित्य के नियमों की अपेक्षा से शब्दो को व्यवहार करना शब्दनय है । उसमे लिग, वचन, कारक, काल आदि का दोष झलकता हो तो भी उसे नहीं गिनना सो शब्दनय है । जैसे स्त्री को सस्कृत मे दाग, भार्या, कलत्र कहते है । यहा दारा शब्द पुल्लिंग है, कलत्र नपु सक लिग है तो भी ठीक । कोई महान पुरुष आ रहा है उसे प्रतिष्ठावाचक शब्द मे कहते हैं - वे भ्रा रहे है । यह वाक्य यद्यपि बहुवचन का प्रयोग एकवचन मे है तथापि शब्दनय से ठीक है। कही की कथा का वर्णन करते हुए भूतकाल मे वर्तमान का प्रयोग कर देते है जैसा सेना लड रही है, तोपे चल रही हैं, रुधिर के वर्तमान काल मे प्रयोग करना शब्दनय से ठीक है । शब्द नय मे शब्दो पर ही दृष्टि है कि शब्द भाषा साहित्य के अनुसार व्यवहार किया जावे । समभिरूढ़ नय एक शब्द के अनेक अर्थ प्रसिद्ध हैं। उनमे से एक अर्थ को लेकर किसी के लिये व्यवहार करना समभिरूढ नय है । जैसे गो शब्द के अर्थ, नक्षत्र, आकाश, बिजली, पृथ्वी, वाणी आदि है, तो भी गाय के लिये भी व्यवहार करना समभिरूढनय से ठीक है। यद्यपि गो शब्द के अर्थ जाननेवाले के है । तथापि सोई, बैठी हरएक दशा मे गाय पशु को गो कहना समभिरूढ मे नय से ठीक है या एक पदार्थ के अनेक शब्द नियत करना, चाहे उनके अर्थो मे भेद हो, यह भी समभिरूढ नय से है। जैसे स्त्री को स्त्री, अबला, नारी आदि कहना । अथवा इन्द्र को शक, पुरन्दर, इन्द्र, सहस्राक्षी आदि कहना । यहा इन शब्दो के भिन्न दो अर्थ है तो भी एक व्यक्ति के लिये व्यवहार करना समभिरूढ नय से ठीक है । एवभूत :- जिस शब्द का जो वास्तविक अर्थ हो उसी समान क्रिया हुए को उसी शब्द से व्यवहार करना एवभूतनय है। जैसे वैद्यक करते हुए वैद्य को वैद्य कहना, दुर्बल स्त्री को ही अबला कहना, पूजन करते को पुजारी कहना, राज्य करते हुए न्याय करते हुए को राजा कहना । लोक व्यवहार मे इन नयो की बडी उपयोगिता है । स्याद्वादनय या सप्तभंगवारणी पदार्थ मे अनेक स्वभाव रहते है जो साधारण रूप से विचारने मे विरोधरूप भासते हैं परन्तु वे सब भिन्न दो अपेक्षा से पदार्थ रूप से पाए जाते है उनको समझाने का उपाय स्याद्वाद या सप्तभग है । हर एक पदार्थ मे प्रस्ति या भावपना, नास्ति या अभावपना ये दो विरोधी स्वभाव है । नित्यपना तथा प्रनित्यपना ये भी दो विरोधी स्वभाव है । एकपना और अनेकपना ये भी दो विरोधी स्वभाव है। एक ही समय मे एक ही स्वभाव को वचन द्वारा कहा जाता है तब दूसरा स्वभाव यद्यपि कहा नही जाता है । तो भी पदार्थ मे रहता अवश्य है, इसी बात को जताने के लिये स्याद्वाद है । सम्य ज्ञान और उसका महात्म्य । स्यात् अथवा कथचित् अर्थात् किसी अपेक्षा से वाद अर्थात् कहना सो स्याद्वाद है । जैसे एक पुरुष पिता भी है पुत्र भी है उसको जब किसी को समभावेगे तब कहेंगे कि स्यात् पिता अस्ति । किसी अपेक्षा से पिता है । यहा स्यात् शब्द बताता है कि वह कुछ और भी है । फिर कहेगे स्यात् पुत्र अस्ति किसी अपेक्षा से पुत्र है । वह पुम्ष पिता व पुत्र दोनो है । ऐसा दृढ करने के लिये तीसरा भग कहा जाता है 'स्यात् पिता पुत्रश्च । किसी अपेक्षा से यदि दोनो को विचार करे तो वह पिता भी है पुत्र भी है । वह पिता व पुत्र तो एक ही समय मे है परन्तु शब्दो मे यह शक्ति नही है कि दोनो स्वभावो को एक साथ कहा जा सके । अतएव कहते है चौथा भगस्यात् प्रवक्तव्य । किसी अपेक्षा से यह वस्तु प्रवक्तव्य है, कथनगोचर नही है । यद्यपि यह पिता व पुत्र दोनो एक समय में है, परन्तु कहा नहीं जा सकता । सर्वथा प्रवक्तव्य नही है इसी बात को दृढ करने के लिये शेष तीन भग है । स्यात् पिता अवक्तव्य च । किसी अपेक्षा से श्रवक्तव्य होने पर भी पिता है, स्यात् पुत्र. अवक्तव्य च । किसी अपेक्षा अवक्तव्य होने पर भी पुत्र है । स्यात् पिता पुत्रश्च प्रवक्तव्य च किसी अपेक्षा प्रवक्तव्य होने पर भी पिता व पुत्र दोनो है । इस तरह दो विरोधी स्वभावो को समझाने के लिये सात भग शिष्यो को दृढ ज्ञान कराने के हेतु किये जाते है । वास्तव मे उस पुरुष मे तीन स्वभाव है पिता पना, पुत्र पना व प्रवक्तव्य पना इसी के सात भग ही हो सकते है न छः न म्राठ । जैसे एक पिता, दो पुत्र, तीन पिता पुत्र, चार अवतव्य पाँच पिता प्रवक्तव्य, छः पुत्र प्रवक्तव्य, सात पिता पुत्र अवक्तव्य । यदि किसी को सफेद, काला, पीला, तीन रग दिये जावे और कहा जावे कि इसके भिन्न दो रग बनाओ तो वह नीचे प्रमारण सात ही बना देगा । एक सफेद, दो काला, तीन पीला, चार सफेद काला, पाँच सफेद पीला, छः काला पीला, सात सफेद काला पीला। इससे कम व अधिक नही बन सकते है । प्रात्मा के स्वभाव को समझने के लिये इस स्याद्वाद की बड़ी जरूरत है । आत्मा मे अस्तित्व या भावपना अपने प्रखड द्रव्य, अपने प्रख्यात प्रदेश रूप क्षेत्र, अपनी स्वाभाविक पर्यायरूप काल व अपने शुद्ध ज्ञानानन्द मय भाव की अपेक्षा है उसी समय इस अपने आत्मा मे सम्पूर्ण अन्य आत्माओ के, सर्व पुद्गलो के, धर्म, अधर्म, प्रकाश व काल के द्रव्य, क्षेत्र, काल तथा भाव का नास्तिपना या प्रभाव भी है । अस्तित्व के साथ नास्तित्व न हो तो यह आत्मा है । यह भी श्री महावीर स्वामी का आत्मा है अन्य नहीं है यह बोध ही न हो । आत्मा मे आत्मापना तो है परन्तु आत्मा मे भाव कर्म रागादि, द्रव्य कम ज्ञानावरणादि, नौकर्म शरीरादि इनका तथा अन्य सर्व द्रव्यों का नास्तित्व है या प्रभाव है ऐसा जानने पर आत्मा का भेदविज्ञान होगा, श्रात्मानुभव हो सकेगा । इसी को सात तरह से कहेगे एक स्यात् अस्ति आत्मा, दो स्यात् नास्ति आत्मा, तीन स्यात् अस्ति नास्ति श्रात्मा, चार स्यात् प्रवक्तव्य, पाँच स्यात् अस्ति आत्मा वक्तव्य च छः स्यात् नास्ति प्रात्मा श्रवक्तव्य च, सात स्यात् अस्ति नास्ति आत्मा प्रवक्तव्य च । इसी तरह यह श्रात्मा अपने द्रव्य व स्वभाव की अपेक्षा ध्रुव है नित्य है तब ही पर्याय की अपेक्षा अनित्य है । इस तरह एक ही समय में आत्मा मे नित्यपना तथा अनित्यपना दोनो स्वभाव है इसी को सात भगो द्वारा समझाया जा सकता है । एक स्यात् नित्य, दो स्यात् अनित्य, प्रवक्तव्य, पाँच स्यात् नित्य अवक्तव्य च स्यात् नित्य अनित्य प्रवक्तव्य च । तीन स्यात् नित्य प्रनित्य, चार स्यात् छः स्यात् अनित्य अवक्तव्य च, सात इसी तरह आत्मा अनत गुणों का अभेद पिड है, इसलिये एक रूप है । वही आत्मा उसी समय ज्ञान गुरग की अपेक्षा ज्ञानरूप है, सम्यक्त गुरण की अपेक्षा सम्यक्त रूप है, चारित्र गुरण की अपेक्षा चारित्र रूप है, वीर्यगुरण की अपेक्षा वीर्यरूप है । जितने गुरण प्रात्मा मे है वे सर्व आत्मा मे व्यापक है । इस लिये उनकी अपेक्षा आत्मा अनेक रूप है। इसी के सप्तभग इस तरह करेगे स्यात् एक, स्यात् अनेक स्यात् एक अनेकश्च, स्यात् प्रवक्तव्य, स्यात् एक नवक्तव्य च स्यात् अनेक प्रवक्तव्य च स्यात् एक अनेक प्रवक्तव्य च । यह ससारी आत्मा स्वभाव की अपेक्षा शुद्ध है, उसी समय कर्म सयोग की अपेक्षा प्रशुद्ध है । इसके भी सात भग बनेगे । स्यात् शुद्ध, स्यात् अशुद्ध, स्यात् शुद्ध प्रशुद्धः स्यात् प्रवक्तव्य, स्यात् शुद्ध प्रवक्तव्य च स्यात् प्रशुद्ध भवक्तव्य च, स्यात् शुद्ध अशुद्ध प्रवक्तव्य च । स्याद्वाद के बिना किसी पदार्थ के अनेक स्वभावों का ज्ञान प्रज्ञाना शिष्य को न होगा। इसलिये यह बहुत आवश्यक सिद्धान्त है, आत्मा के भेद विज्ञान के लिये तो बहुत ही जरूरी है तथा यह स्याद्वाद का सिद्धांत अनेक एकान्त मत के धारियो का एकान्त हठ छुडाकर उनमे प्रेम व ऐक्य स्थापन करने का भी साधन है । जैसे दूर से किसी का मकान पाँच आदमियो को दिखाई दिया, वह मकान भिन्न भिन्न स्थानो पर पांच तरह के रगो से रगा है । जिसकी दृष्टि सफेदी पर पड़ी वह कहता है , जिसकी दृष्टि लाल रग पर पडी वह कहता है, मकान लाल है, जिसकी दृष्टि पीले रंग पर पडी वह कहता है, मकान पीला है, जिसकी दृष्टि नीले रंग पर पडी वह कहता है, मकान नीला है, जिसकी दष्टि काले रंग पर पड़ी वह कहता है मकान फाला है । इस तरह आपस में झगडते थे, तब एक समझदार ने कहा कि क्यो झगडते हो, तुम सब एकात से सच्चे हो परन्तु पूर्ण सत्य नही हो । यह मकान पाँच रंग का है, ऐसा समझो । जब पाचों ने यह बात समझली तब उन सबका एकति हट गया तब सबको बडा श्रानद हुआ। इसी तरह अनेकान्तमय अनेक स्वभाव वाले पदार्थ को अनेक स्वभाववाला बताने को स्याद्वाद दर्पगा के समान है व परस्पर विरोध मेटने को एक अटल न्यायाधीश के समान है। सहज मुख साधन के लिये तो बहुत ही उपयोगी है । कल्पित इन्द्रिय मुख को त्यागने योग्य व प्रतीन्द्रिय सुख को ग्रहण योग्य बताने वाला है । निश्चयनय से आत्मा को आत्मारूप ही जानना सम्यग्ज्ञान है । जैसे सूर्य पर मेघो के आ जाने से प्रकाश अत्यल्प प्रगट है तो भी समझदार जानता है कि सूर्य का प्रकाश उतना ही नहीं है, वह तो दोपहर के समय मेघ रहित जैसा पूर्गा प्रकाशमान रहता है वैसा ही है मेघो के कारण कम प्रकाश है। सूर्य का स्वभाव ऐसा नहीं है । ऐसा जो सूर्य के असली प्रकाश कोपूर्ण प्रकाश को भली प्रकार बिना किसी सशय के जानता है वही सम्यग्ज्ञानी है, इसी तरह अपने प्रात्मा पर ज्ञानावररणादि कर्मों के मेघ होने पर ज्ञान का प्रकाश कम व मलीन हो रहा है। रागी द्वेषी प्रज्ञानमय हो रहा है तो भी यह |
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि एक तलाकशुदा मुसलमान स्त्री अपने पूर्व पति से तब तक भरण-पोषण की हकदार है, जब तक कि वह दूसरी विवाह नहीं कर लेती. हाई कोर्ट ने निचली न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गुजारा भत्ता के भुगतान के लिए एक निर्धारित समय-सीमा तय की गई थी. जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की पीठ एक मुसलमान स्त्री जाहिदा खातून से जुड़े एक मुद्दे की सुनवाई कर रही थी, जिसके पति नरुल अधिकार ने 11 वर्ष की विवाह के बाद वर्ष 2000 में उसे तलाक दे दिया था.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर, 2022 को गाजीपुर फैमिली न्यायालय के चीफ जस्टिस के निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें बोला गया था कि अपीलकर्ता जाहिदा खातून सिर्फ इद्दत की अवधि के लिए भरण-पोषण की हकदार थी, जिसे तलाक की तारीख से तीन महीने और 13 दिनों के रूप में परिभाषित किया गया था. उच्च न्यायालय ने कहा, हमें यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि प्रधान न्यायाधीश, परिवार अदालत, गाजीपुर ने कानून की एक त्रुटि की है कि अपीलकर्ता सिर्फ इद्दत की अवधि के लिए रखरखाव का हकदार है.
हाईकोर्ट ने कहा, "निचली न्यायालय ने डेनियल लतीफी और अन्य बनाम हिंदुस्तान संघ (2001) के मुद्दे में उच्चतम न्यायालय के निर्णय को गलत समझा, जो यह कहता है कि एक मुसलमान पति तलाकशुदा पत्नी के भविष्य के लिए उचित प्रावधान करने के लिए उत्तरदायी है. इसमें साफ तौर पर उसका रखरखाव भी शामिल है. ऐसा उचित प्रावधान (रखरखाव), जो इद्दत अवधि से आगे तक फैला हुआ है. उच्च न्यायालय ने फिर मुद्दे को वापस सक्षम न्यायालय को भेज दिया, ताकि तीन महीने के भीतर रखरखाव की राशि और पति द्वारा कानून के मुताबिक अपीलकर्ता को संपत्तियों की वापसी का निर्धारण किया जा सके.
लतीफी के मुद्दे में सुप्रीम न्यायालय ने गुजारा भत्ता के मामलों में मुसलमान स्त्री (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के बीच संतुलन बनाया. 2001 के निर्णय ने निर्णय सुनाया कि एक मुसलमान पति अपनी तलाकशुदा पत्नी को इद्दत अवधि से अधिक भरण पोषण प्रदान करने के लिए बाध्य है, और उसे इद्दत अवधि के भीतर अपने दायित्व का एहसास होना चाहिए. उच्चतम न्यायालय ने माना कि एक मुसलमान पति इद्दत अवधि से परे अपनी तलाकशुदा पत्नी के भविष्य के लिए उचित और उचित प्रावधान करने के लिए उत्तरदायी है.
बता दें कि इस मुद्दे में जाहिदा खातून ने 21 मई, 1989 को अधिकार से विवाह की. उस समय, अधिकार कार्यरत नहीं थे, लेकिन बाद में राज्य डाक विभाग में सेवा में शामिल हो गए. उन्होंने 28 जून 2000 को जाहिद को तलाक दे दिया और 2002 में दूसरी स्त्री से विवाह कर ली.
| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि एक तलाकशुदा मुसलमान स्त्री अपने पूर्व पति से तब तक भरण-पोषण की हकदार है, जब तक कि वह दूसरी विवाह नहीं कर लेती. हाई कोर्ट ने निचली न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गुजारा भत्ता के भुगतान के लिए एक निर्धारित समय-सीमा तय की गई थी. जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की पीठ एक मुसलमान स्त्री जाहिदा खातून से जुड़े एक मुद्दे की सुनवाई कर रही थी, जिसके पति नरुल अधिकार ने ग्यारह वर्ष की विवाह के बाद वर्ष दो हज़ार में उसे तलाक दे दिया था. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंद्रह सितंबर, दो हज़ार बाईस को गाजीपुर फैमिली न्यायालय के चीफ जस्टिस के निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें बोला गया था कि अपीलकर्ता जाहिदा खातून सिर्फ इद्दत की अवधि के लिए भरण-पोषण की हकदार थी, जिसे तलाक की तारीख से तीन महीने और तेरह दिनों के रूप में परिभाषित किया गया था. उच्च न्यायालय ने कहा, हमें यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि प्रधान न्यायाधीश, परिवार अदालत, गाजीपुर ने कानून की एक त्रुटि की है कि अपीलकर्ता सिर्फ इद्दत की अवधि के लिए रखरखाव का हकदार है. हाईकोर्ट ने कहा, "निचली न्यायालय ने डेनियल लतीफी और अन्य बनाम हिंदुस्तान संघ के मुद्दे में उच्चतम न्यायालय के निर्णय को गलत समझा, जो यह कहता है कि एक मुसलमान पति तलाकशुदा पत्नी के भविष्य के लिए उचित प्रावधान करने के लिए उत्तरदायी है. इसमें साफ तौर पर उसका रखरखाव भी शामिल है. ऐसा उचित प्रावधान , जो इद्दत अवधि से आगे तक फैला हुआ है. उच्च न्यायालय ने फिर मुद्दे को वापस सक्षम न्यायालय को भेज दिया, ताकि तीन महीने के भीतर रखरखाव की राशि और पति द्वारा कानून के मुताबिक अपीलकर्ता को संपत्तियों की वापसी का निर्धारण किया जा सके. लतीफी के मुद्दे में सुप्रीम न्यायालय ने गुजारा भत्ता के मामलों में मुसलमान स्त्री अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा एक सौ पच्चीस के बीच संतुलन बनाया. दो हज़ार एक के निर्णय ने निर्णय सुनाया कि एक मुसलमान पति अपनी तलाकशुदा पत्नी को इद्दत अवधि से अधिक भरण पोषण प्रदान करने के लिए बाध्य है, और उसे इद्दत अवधि के भीतर अपने दायित्व का एहसास होना चाहिए. उच्चतम न्यायालय ने माना कि एक मुसलमान पति इद्दत अवधि से परे अपनी तलाकशुदा पत्नी के भविष्य के लिए उचित और उचित प्रावधान करने के लिए उत्तरदायी है. बता दें कि इस मुद्दे में जाहिदा खातून ने इक्कीस मई, एक हज़ार नौ सौ नवासी को अधिकार से विवाह की. उस समय, अधिकार कार्यरत नहीं थे, लेकिन बाद में राज्य डाक विभाग में सेवा में शामिल हो गए. उन्होंने अट्ठाईस जून दो हज़ार को जाहिद को तलाक दे दिया और दो हज़ार दो में दूसरी स्त्री से विवाह कर ली. |
आज उत्तर प्रदेश के दस जिलों की 57 सीटों मतदान हो रहे हैं। इन जिलों में देवरिया जिला भी शामिल है। आरोप है कि मतदान से कुछ घंटे पहले ही देवरिया में होने वाली हार से बौखलाए सपा कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला कर दिया। दरअसल, बुधवार की रात गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस दौरान बीजेपी के चार कार्यकर्ता घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर देवरिया सदर विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी शलभमणि त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और घायलों को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां हालत गंभीर होने पर वह एक कार्यकर्ता को लेकर गोरखपुर रवाना हो गए।
जानकारी के मुताबिक, देवरिया जिले के करमाजीतपुर गांव के सगड़ा टोला में बुधवार की रात राम आशीष साहनी के घर पर कीर्तन था। इसमें सपा और बीजेपी कार्यकर्ता भी मौजूद आए हुए थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इस मारपीट में बीजेपी के चार कार्यकर्ता घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर देवरिया सदर विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी शलभमणि त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और घायलों को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां हालत गंभीर होने पर वह मयंक ओझा को लेकर गोरखपुर रवाना हो गए।
घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन और एसपी/डीआईजी डॉ. श्रीपति मिश्र भी मौके पर पहुंचे हैं। सपा प्रत्याशी अजय प्रताप सिंह पिंटू ने आरोप लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके भाई समेत चार समर्थकों को पीटकर घायल कर दिया। भाजपा के लोगों ने गोली चलाई है। वहीं भाजपा प्रत्याशी का कहना था कि सपा के लोग पैसा बांट रहे थे। जब इसका विरोध हुआ तो भाजपा कार्यकर्ताओं को बेरहमी से पीटा गया।
वहीं भाजपा प्रत्याशी शलभ मणि त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मतदान से ठीक 12 घण्टे पहले सपा प्रत्याशी अजय सिंह'पिंटू' के समर्थकों ने हमला किया है। उन्होंने कहा कि हार से बुरी तरह बौखलाए समाजवादी पार्टी के गुंडों ने सपा प्रत्याशी पिंटू की अगुवाई में करमाजीतपुर के ग्राम प्रधान अशोक निषाद, ग्राम प्रधान अर्जुन निषाद, पूर्व प्रधान महेंद्र निषाद, पूर्व प्रधान शिव अवतार निषाद, बीडीसी सदस्य शशिकांत निषाद, पूर्व प्रधान राम सजन निषाद और भाजपा के मंडल अध्यक्ष बृजेश गुप्ता पर जानलेवा हमला किया। शलभ मणि ने कहा कि सपा का चरित्र ही अराजकता और गुंडागर्दी का है। देवभूमि देवरिया की जनता इसका करारा जवाब देगी।
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| आज उत्तर प्रदेश के दस जिलों की सत्तावन सीटों मतदान हो रहे हैं। इन जिलों में देवरिया जिला भी शामिल है। आरोप है कि मतदान से कुछ घंटे पहले ही देवरिया में होने वाली हार से बौखलाए सपा कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला कर दिया। दरअसल, बुधवार की रात गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस दौरान बीजेपी के चार कार्यकर्ता घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर देवरिया सदर विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी शलभमणि त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और घायलों को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां हालत गंभीर होने पर वह एक कार्यकर्ता को लेकर गोरखपुर रवाना हो गए। जानकारी के मुताबिक, देवरिया जिले के करमाजीतपुर गांव के सगड़ा टोला में बुधवार की रात राम आशीष साहनी के घर पर कीर्तन था। इसमें सपा और बीजेपी कार्यकर्ता भी मौजूद आए हुए थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इस मारपीट में बीजेपी के चार कार्यकर्ता घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर देवरिया सदर विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी शलभमणि त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और घायलों को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां हालत गंभीर होने पर वह मयंक ओझा को लेकर गोरखपुर रवाना हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन और एसपी/डीआईजी डॉ. श्रीपति मिश्र भी मौके पर पहुंचे हैं। सपा प्रत्याशी अजय प्रताप सिंह पिंटू ने आरोप लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके भाई समेत चार समर्थकों को पीटकर घायल कर दिया। भाजपा के लोगों ने गोली चलाई है। वहीं भाजपा प्रत्याशी का कहना था कि सपा के लोग पैसा बांट रहे थे। जब इसका विरोध हुआ तो भाजपा कार्यकर्ताओं को बेरहमी से पीटा गया। वहीं भाजपा प्रत्याशी शलभ मणि त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मतदान से ठीक बारह घण्टे पहले सपा प्रत्याशी अजय सिंह'पिंटू' के समर्थकों ने हमला किया है। उन्होंने कहा कि हार से बुरी तरह बौखलाए समाजवादी पार्टी के गुंडों ने सपा प्रत्याशी पिंटू की अगुवाई में करमाजीतपुर के ग्राम प्रधान अशोक निषाद, ग्राम प्रधान अर्जुन निषाद, पूर्व प्रधान महेंद्र निषाद, पूर्व प्रधान शिव अवतार निषाद, बीडीसी सदस्य शशिकांत निषाद, पूर्व प्रधान राम सजन निषाद और भाजपा के मंडल अध्यक्ष बृजेश गुप्ता पर जानलेवा हमला किया। शलभ मणि ने कहा कि सपा का चरित्र ही अराजकता और गुंडागर्दी का है। देवभूमि देवरिया की जनता इसका करारा जवाब देगी। |
जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खात्मे के लिए सुरक्षा बल एड़ी चोटी का जोर लगाए रहते हैं लेकिन ये आतंकी मस्जिद की दीवारों का सहारा लेकर गोलीबारी को अंजाम देते हैं और भाग निकलने में कामयाब होते हैं। ऐसा एक-दो नहीं बल्कि कई बार देखा गया है।
कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने सोमवार को बताया कि आतंकवादियों ने पंपोर, सोपोर और शोपियां में हमलों के लिए बार-बार मस्जिदों का गलत इस्तेमाल किया है।
आईजीपी के मुताबिक, आतंकवादियों ने 19 जून, 2020 को पंपोर में हमलों के लिए मस्जिद की आड़ ली, 1 जुलाई, 2020 को सोपोर और 9 अप्रैल, 2021 को शोपियां में। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक, मस्जिद इंतिज़ामिया, नागरिक समाज और मीडिया को इस तरह के कृत्यों की निंदा करनी चाहिए।
वहीं 9 अप्रैल को, शोपियां में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में कुल पांच आतंकवादी मारे गए थे। यहां एक मस्जिद के अंदर छुपकर आतंकवादी गोलीबारी कर रहे थे। मस्जिद को नुकसान न पहुंचे इसलिए सुरक्षाबलों ने उसके भाई और इमाम साहब को मस्जिद के अंदर भेजा। हालांकि, कोशिश नाकामयाब रही और आतंकियों फिर से गोलियां बरसाना शुरू कर दिया था। हालांकि, मस्जिद से बाहर निकलने की कोशिश करते समय आतंकियों को ढेर कर दिया गया।
आईजी ने बताया कि 19 जून 2020 को पंपोर मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए थे, ये सभी भी शरण लेने के लिए जामिया मस्जिद में घुस गए थे। 1 जुलाई, 2020 को सोपोर के एक मस्जिद से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की पार्टी पर आतंकवादियों द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद एक जवान और एक नागरिक की मौत हो गई, जबकि तीन कर्मियों को चोटें आईं।
| जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खात्मे के लिए सुरक्षा बल एड़ी चोटी का जोर लगाए रहते हैं लेकिन ये आतंकी मस्जिद की दीवारों का सहारा लेकर गोलीबारी को अंजाम देते हैं और भाग निकलने में कामयाब होते हैं। ऐसा एक-दो नहीं बल्कि कई बार देखा गया है। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने सोमवार को बताया कि आतंकवादियों ने पंपोर, सोपोर और शोपियां में हमलों के लिए बार-बार मस्जिदों का गलत इस्तेमाल किया है। आईजीपी के मुताबिक, आतंकवादियों ने उन्नीस जून, दो हज़ार बीस को पंपोर में हमलों के लिए मस्जिद की आड़ ली, एक जुलाई, दो हज़ार बीस को सोपोर और नौ अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को शोपियां में। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक, मस्जिद इंतिज़ामिया, नागरिक समाज और मीडिया को इस तरह के कृत्यों की निंदा करनी चाहिए। वहीं नौ अप्रैल को, शोपियां में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में कुल पांच आतंकवादी मारे गए थे। यहां एक मस्जिद के अंदर छुपकर आतंकवादी गोलीबारी कर रहे थे। मस्जिद को नुकसान न पहुंचे इसलिए सुरक्षाबलों ने उसके भाई और इमाम साहब को मस्जिद के अंदर भेजा। हालांकि, कोशिश नाकामयाब रही और आतंकियों फिर से गोलियां बरसाना शुरू कर दिया था। हालांकि, मस्जिद से बाहर निकलने की कोशिश करते समय आतंकियों को ढेर कर दिया गया। आईजी ने बताया कि उन्नीस जून दो हज़ार बीस को पंपोर मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए थे, ये सभी भी शरण लेने के लिए जामिया मस्जिद में घुस गए थे। एक जुलाई, दो हज़ार बीस को सोपोर के एक मस्जिद से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की पार्टी पर आतंकवादियों द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद एक जवान और एक नागरिक की मौत हो गई, जबकि तीन कर्मियों को चोटें आईं। |
यस्मिन्विन्दति दोपभाजन विधामा मोदिना मेदिनी
चित्रस्तत्र च रत्नतानुरयते निष्कम्मदीपा कृतिम् ॥ 388 ॥
"जिसे प्रसाद गुण कहते हैं वह सभी रसों में रहने वाला एक ऐसाधर्म है जिससे सामाजिक हृदय इस प्रकार भर उठता है जिस प्रकार अग्नि के द्वारा सूखा ईंधन अथवा जल के द्वारा स्वच्छ कपड़ा ।" जर्थात् जिस प्रकार से सूखे ईंधन में अग्नि सहसा व्याप्त हो जाती है अथवा साफ धुले हुए वस्त्रों में जल सहसा व्याप्त हो जाता है उसी प्रकार जो चित्र में सहसा व्याप्त हो जाता है वह प्रसाद गुण कहलाता है और वह सभी रसों और समस्त रचनाओं में विद्यमान रहता है ।
अग्नि और जल इन दो उदाहरणों का आशय यह है कि जब रौद्र, वीरादि उग्र ओजस्वी रसों में प्रसाद गुण होता है तब वह सूखें ईंधन में अग्नि के समान हृदय में अनायास ही व्याप्त हो जाता है और जब श्रृंगार, करुण आदि कोमलसर रसों में प्रसाद गुण होता है तब साफ वस्त्र में जल के समान हृदय में व्याप्त हो जाता है ।
इस सम्बन्ध में ध्वनिकार ने भी कहा हैसम्पर्कत्वं काव्यस्य यत्तु सर्वरतान् प्रति ।
मतैक्य हैं177
ध्वन्यालोक 2/1u
स प्रभादो गुणो ज्ञेयः सर्वसाधारणक्रियः ॥
लोचनकार ने भी प्रसाद के सम्बन्ध में यही अवधारणा प्रस्तुत की है"सम्पर्कत्वं सम्यगर्षकन्यवादन प्रतिपत प्रति स्वात्मावेशेन शुष्ककाष्ठाग्निदृष्टान्तेन कलुषोदकदृष्टान्तेन च । तदकालुऽयं प्रतन्नत्वं नाम सर्वरताना गुणः उपचारात्तु तथा विथे व्यङ्ग्येऽर्थे यच्छब्दार्थेयोः सम्पर्कत्वं तदपि प्रमादः ।
ध्वन्यालोक लोचन 2/13
साहित्य दर्पणकार व काव्यप्रकाशकार दोनों का प्रसाद गुण सम्बन्धी
चित्तुं व्याप्नोति यः क्षिप्रं शुष्केन्धन भिवानलः ।
स प्रसादः समस्तेषु रसेषु रचनासु च शब्दास्तद्वयञ्जका अर्थ बोधकाः श्रुतिमात्रतः ।।
1. शुष्केन्धनाग्निवत् स्वच्छजलव त्सहसैव यः
व्याप्नो त्यन्यत् प्रतादोसो सर्वत्र विहितस्थितिः ॥
काव्यप्रकाश 8/70.
* जिस शब्द, समास वा रचना के द्वारा श्रवणमात्र शब्द से अर्थप्रतीति हो जाय, वह सब वर्णो समाप्त तथा रचनाओं में रहने वाला प्रमादगुण माना जाता है । अर्थात् प्रसादगुणकिये हैं -
1. वर्ण : वे सुकुमार अथवा दिनी शब्द जिनके श्रवणमात्र ते ही अर्थ प्रतीति हो जाय ।
2. वृत्ति : वह समास अथवा वृत्ति जिनके श्रवणमात्र से जर्थ का प्रताति हो जाय ।
3. रचना : वह रचना जो श्रवणमात्र से अर्थ की प्रतीति करा दें । 'सममरणां
अर्थात् सभी रसों और रचनाजों का साधारण धर्म प्रसादगुण होता है।
विश्वगुणादर्शचम्पू काव्य में कवि ने प्रप्तादगुण युक्त अनेक श्लोकों की रचना प्रप्त दिगुण युक्त यह
की है
श्लोक दर्शनीय हैकल्याणोल्लाससीमा क्लयतु कुपालं काल मेघा भिरामा
का चित्साकेतधामा भवगहनगतिजालान्तहा रिप्रणामा ।।
1. श्रुतिमात्रेण शब्दात्तु येनार्थप्रत्ययो भवेत्
साधारणः समग्राणां स प्रतादी गुणो मतः ।।
काव्यप्रकाश 8/76. | यस्मिन्विन्दति दोपभाजन विधामा मोदिना मेदिनी चित्रस्तत्र च रत्नतानुरयते निष्कम्मदीपा कृतिम् ॥ तीन सौ अठासी ॥ "जिसे प्रसाद गुण कहते हैं वह सभी रसों में रहने वाला एक ऐसाधर्म है जिससे सामाजिक हृदय इस प्रकार भर उठता है जिस प्रकार अग्नि के द्वारा सूखा ईंधन अथवा जल के द्वारा स्वच्छ कपड़ा ।" जर्थात् जिस प्रकार से सूखे ईंधन में अग्नि सहसा व्याप्त हो जाती है अथवा साफ धुले हुए वस्त्रों में जल सहसा व्याप्त हो जाता है उसी प्रकार जो चित्र में सहसा व्याप्त हो जाता है वह प्रसाद गुण कहलाता है और वह सभी रसों और समस्त रचनाओं में विद्यमान रहता है । अग्नि और जल इन दो उदाहरणों का आशय यह है कि जब रौद्र, वीरादि उग्र ओजस्वी रसों में प्रसाद गुण होता है तब वह सूखें ईंधन में अग्नि के समान हृदय में अनायास ही व्याप्त हो जाता है और जब श्रृंगार, करुण आदि कोमलसर रसों में प्रसाद गुण होता है तब साफ वस्त्र में जल के समान हृदय में व्याप्त हो जाता है । इस सम्बन्ध में ध्वनिकार ने भी कहा हैसम्पर्कत्वं काव्यस्य यत्तु सर्वरतान् प्रति । मतैक्य हैंएक सौ सतहत्तर ध्वन्यालोक दो/एकu स प्रभादो गुणो ज्ञेयः सर्वसाधारणक्रियः ॥ लोचनकार ने भी प्रसाद के सम्बन्ध में यही अवधारणा प्रस्तुत की है"सम्पर्कत्वं सम्यगर्षकन्यवादन प्रतिपत प्रति स्वात्मावेशेन शुष्ककाष्ठाग्निदृष्टान्तेन कलुषोदकदृष्टान्तेन च । तदकालुऽयं प्रतन्नत्वं नाम सर्वरताना गुणः उपचारात्तु तथा विथे व्यङ्ग्येऽर्थे यच्छब्दार्थेयोः सम्पर्कत्वं तदपि प्रमादः । ध्वन्यालोक लोचन दो/तेरह साहित्य दर्पणकार व काव्यप्रकाशकार दोनों का प्रसाद गुण सम्बन्धी चित्तुं व्याप्नोति यः क्षिप्रं शुष्केन्धन भिवानलः । स प्रसादः समस्तेषु रसेषु रचनासु च शब्दास्तद्वयञ्जका अर्थ बोधकाः श्रुतिमात्रतः ।। एक. शुष्केन्धनाग्निवत् स्वच्छजलव त्सहसैव यः व्याप्नो त्यन्यत् प्रतादोसो सर्वत्र विहितस्थितिः ॥ काव्यप्रकाश आठ/सत्तर. * जिस शब्द, समास वा रचना के द्वारा श्रवणमात्र शब्द से अर्थप्रतीति हो जाय, वह सब वर्णो समाप्त तथा रचनाओं में रहने वाला प्रमादगुण माना जाता है । अर्थात् प्रसादगुणकिये हैं - एक. वर्ण : वे सुकुमार अथवा दिनी शब्द जिनके श्रवणमात्र ते ही अर्थ प्रतीति हो जाय । दो. वृत्ति : वह समास अथवा वृत्ति जिनके श्रवणमात्र से जर्थ का प्रताति हो जाय । तीन. रचना : वह रचना जो श्रवणमात्र से अर्थ की प्रतीति करा दें । 'सममरणां अर्थात् सभी रसों और रचनाजों का साधारण धर्म प्रसादगुण होता है। विश्वगुणादर्शचम्पू काव्य में कवि ने प्रप्तादगुण युक्त अनेक श्लोकों की रचना प्रप्त दिगुण युक्त यह की है श्लोक दर्शनीय हैकल्याणोल्लाससीमा क्लयतु कुपालं काल मेघा भिरामा का चित्साकेतधामा भवगहनगतिजालान्तहा रिप्रणामा ।। एक. श्रुतिमात्रेण शब्दात्तु येनार्थप्रत्ययो भवेत् साधारणः समग्राणां स प्रतादी गुणो मतः ।। काव्यप्रकाश आठ/छिहत्तर. |
एक जून से शहर में क्या खुलेगा और किस पर रोक रहेगी। इसे लेकर भले ही अभी 31 मई को क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में निर्णय होगा, लेकिन इसके सदस्यों से सुझाव मांगे गए हैं। अधिकतर सदस्य एक साथ पूरे बाजार खोलने के पक्ष में नहीं हैं। चरणबद्ध तरीके से शहर खुलेगा। पहले चरण में निर्माण क्षेत्र और इससे जुड़ी दुकानों को खोला जाएगा। लोगों की जिंदगी के लिए जरूरी राशन, सैलून और ऑटो मोबाइल्स की दुकानें भी खोलने पर विचार चल रहा है।
जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की वर्चुअल मीटिंग शुक्रवार को कोविड प्रभारी मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के संग की। उन्होंने एक जून से अनलॉक में क्या खोलना है और क्या बंद रखा जाएगा, इस पर चर्चा की और सभी से 30 मई तक अपने-अपने सुझाव पेश करने का आग्रह किया है। 31 मई को जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा और गृह विभाग को फाइनल अनुमाेदन के लिए भेजा जाएगा।
सहकारिता एवं लोकसेवा प्रबंधन मंत्री भदौरिया ने कहा कि जबलपुर जिले में कोरोना संक्रमण की दर घटकर दो फीसदी आ गई है, लेकिन शहरी क्षेत्र में संक्रमण की दर ग्रामीण की तुलना में अधिक है। इसके लिए जबलपुर शहर में लगातार सख्ती बरतने की जरूरत है। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पॉजिटिविटी रेट 0. 7 फीसदी और शहर में तीन प्रतिशत बनी हुई है।
वर्चुअल मीटिंग में डॉ जीतेन्द्र जामदार ने बताया कि कैंसर की दवा बना रही रेवा क्योर बायोसाइंस कम्पनी ब्लैक फंगस के लिए जरूरी इंजेक्शन बनाने को तैयार है। कंपनी शासन से अनुमति प्रदान करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही है। इसकी अनुमति मिलने पर जबलपुर में भी ये इंजेक्शन बन सकते हैं।
वर्चुअल मीटिंग से विधायक नन्दिनी मरावी, अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, विनय सक्सेना, संजय यादव, डॉ जीतेन्द्र जामदार, कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा, नगर निगम आयुक्त संदीप जीआर, जिला पंचायत की सीईओ रिजु बाफना, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ प्रदीप कसार, सीएमएचओ डॉ रत्नेश कुररिया जुड़े थे ।
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| एक जून से शहर में क्या खुलेगा और किस पर रोक रहेगी। इसे लेकर भले ही अभी इकतीस मई को क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में निर्णय होगा, लेकिन इसके सदस्यों से सुझाव मांगे गए हैं। अधिकतर सदस्य एक साथ पूरे बाजार खोलने के पक्ष में नहीं हैं। चरणबद्ध तरीके से शहर खुलेगा। पहले चरण में निर्माण क्षेत्र और इससे जुड़ी दुकानों को खोला जाएगा। लोगों की जिंदगी के लिए जरूरी राशन, सैलून और ऑटो मोबाइल्स की दुकानें भी खोलने पर विचार चल रहा है। जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की वर्चुअल मीटिंग शुक्रवार को कोविड प्रभारी मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के संग की। उन्होंने एक जून से अनलॉक में क्या खोलना है और क्या बंद रखा जाएगा, इस पर चर्चा की और सभी से तीस मई तक अपने-अपने सुझाव पेश करने का आग्रह किया है। इकतीस मई को जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा और गृह विभाग को फाइनल अनुमाेदन के लिए भेजा जाएगा। सहकारिता एवं लोकसेवा प्रबंधन मंत्री भदौरिया ने कहा कि जबलपुर जिले में कोरोना संक्रमण की दर घटकर दो फीसदी आ गई है, लेकिन शहरी क्षेत्र में संक्रमण की दर ग्रामीण की तुलना में अधिक है। इसके लिए जबलपुर शहर में लगातार सख्ती बरतने की जरूरत है। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पॉजिटिविटी रेट शून्य. सात फीसदी और शहर में तीन प्रतिशत बनी हुई है। वर्चुअल मीटिंग में डॉ जीतेन्द्र जामदार ने बताया कि कैंसर की दवा बना रही रेवा क्योर बायोसाइंस कम्पनी ब्लैक फंगस के लिए जरूरी इंजेक्शन बनाने को तैयार है। कंपनी शासन से अनुमति प्रदान करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही है। इसकी अनुमति मिलने पर जबलपुर में भी ये इंजेक्शन बन सकते हैं। वर्चुअल मीटिंग से विधायक नन्दिनी मरावी, अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, विनय सक्सेना, संजय यादव, डॉ जीतेन्द्र जामदार, कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा, नगर निगम आयुक्त संदीप जीआर, जिला पंचायत की सीईओ रिजु बाफना, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ प्रदीप कसार, सीएमएचओ डॉ रत्नेश कुररिया जुड़े थे । This website follows the DNPA Code of Ethics. |
टाटा सन्स ने इशात हुसैन को टीसीएस का नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया है. इशात हुसैन को तत्काल प्रभाव के साथ चेयरमैन का पदभार सौंप दिया गया है. इशात हुसैन को टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की जगह नियुक्त किया गया है. टाटा संस ने पिछले माह सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया था. इसके बाद रतन टाटा को ग्रुप का अंतरिम चेयरमैन घोषित किया गया.
- इशात हुसैन को जुलाई 2000 में टाटा सन्स का फाइनेंस डायरेक्टर बनाया गया था.
- इससे पहले जुलाई 1999 में उन्होंने टाटा सन्स के बोर्ड में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर ज्वाइन किया था.
- हुसैन टाटा की कई कंपनियों जैसे टाटा इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और वॉल्टास के डायरेक्ट हैं.
- इसके अलावा, वह टाटा स्काई और वॉल्टास के चेयरमैन हैं.
- टाटा सन्स में आने से पहले हुसैन करीब 10 साल के लिए टाटा स्टील में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ फाइनेंस थे.
- 1981 में उन्होंने इंडियन टयूब कंपनी (टाटा स्टील की एसोसिएट कंपनी) के बोर्ड में ज्वाइन किया था.
- 1983 में टाटा स्टील और इंडियन ट्यूब में मर्जर के बाद वह टाटा स्टील में चले गए थे.
टाटा सन्स में बड़े बदलाव किए गए हैं. डॉ. मुकुंद राजन को अमेरिका, सिंगापुर, दुबई और चीन के विदेशी कारोबार की एडिशनल जिम्मेदारी दी गई है. टाटा संस में अब एस पद्मनाभन ग्रुप ह्यूमन रिसोर्सेज (एचआरडी) के हेड होंगे.
- साइरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पोस्ट से 24 अक्टूबर को अचानक हटा दिया गया था.
| टाटा सन्स ने इशात हुसैन को टीसीएस का नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया है. इशात हुसैन को तत्काल प्रभाव के साथ चेयरमैन का पदभार सौंप दिया गया है. इशात हुसैन को टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की जगह नियुक्त किया गया है. टाटा संस ने पिछले माह सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया था. इसके बाद रतन टाटा को ग्रुप का अंतरिम चेयरमैन घोषित किया गया. - इशात हुसैन को जुलाई दो हज़ार में टाटा सन्स का फाइनेंस डायरेक्टर बनाया गया था. - इससे पहले जुलाई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में उन्होंने टाटा सन्स के बोर्ड में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर ज्वाइन किया था. - हुसैन टाटा की कई कंपनियों जैसे टाटा इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और वॉल्टास के डायरेक्ट हैं. - इसके अलावा, वह टाटा स्काई और वॉल्टास के चेयरमैन हैं. - टाटा सन्स में आने से पहले हुसैन करीब दस साल के लिए टाटा स्टील में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ फाइनेंस थे. - एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में उन्होंने इंडियन टयूब कंपनी के बोर्ड में ज्वाइन किया था. - एक हज़ार नौ सौ तिरासी में टाटा स्टील और इंडियन ट्यूब में मर्जर के बाद वह टाटा स्टील में चले गए थे. टाटा सन्स में बड़े बदलाव किए गए हैं. डॉ. मुकुंद राजन को अमेरिका, सिंगापुर, दुबई और चीन के विदेशी कारोबार की एडिशनल जिम्मेदारी दी गई है. टाटा संस में अब एस पद्मनाभन ग्रुप ह्यूमन रिसोर्सेज के हेड होंगे. - साइरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पोस्ट से चौबीस अक्टूबर को अचानक हटा दिया गया था. |
Phulwari Sharif Case: बिहार में फुलवारी शरीफ केस के तार अब मोतिहारी से जुड़ गए हैं। जांच-पड़ताल के बीच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के दस्ते ने इसी कड़ी में असगर अली नाम के शख्स को अरेस्ट कर लिया है। बताया जा रहा है कि दबोचा गया व्यक्ति मदरसा टीचर है।
जानकारी के मुताबिक, यह गिरफ्तारी सूबे के पूर्वी चंपारण के ढाका से की गई। हुआ यूं कि एनआईए की टीम और स्थानीय प्रशासन मदरसा में छापेमारी करने पहुंच गए थे। इस बीच, वहां इस टीचर को पकड़ लिया गया। अली ही इस मदरसा का संचालक बताया जा रहा है।
अली से पूछताछ भी की गई। एनआईए टीम और स्थानीय प्रशासन इसके बाद गिरफ्तार टीचर को पटना लेकर रवाना हो गए, जहां दोबारा पूछताछ की जाएगी।
कहा जा रहा है कि एफआईआर में अली का नाम भी है। पुलिस इस सिलिसिले में उसके घर पर भी दबिश देने पहुंची थी, जहां पांच बोरे में किताबें मिली हैं। ये किताबें आपत्तिजनक बताई जा रही हैं, जिनकी आगे जांच की जाएगी। पता लगाया जाएगा कि वे कैसी धार्मिक किताबें हैं।
दरअसल, राज्य की राजधानी पटना में पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों का खुलासा किया था। जांच-पड़ताल और छापेमारी के बीच कई गिरफ्तारियां भी की गईं।
बिहार में इस टेरर मॉड्यूल से जुड़े मामले में यह भी बात सामने आई थी कि तुर्की समेत कई मुस्लिम मुल्कों से कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) को फंड मिला था।
इस केस में संदिग्ध आतंकी मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर भी दबोचा गया था, जिसके इंटरनेशनल कनेक्शन होने की बात सामने आ रही थी। इस बीच, एनआईए, रॉ और आईबी समेत अन्य केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं।
| Phulwari Sharif Case: बिहार में फुलवारी शरीफ केस के तार अब मोतिहारी से जुड़ गए हैं। जांच-पड़ताल के बीच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के दस्ते ने इसी कड़ी में असगर अली नाम के शख्स को अरेस्ट कर लिया है। बताया जा रहा है कि दबोचा गया व्यक्ति मदरसा टीचर है। जानकारी के मुताबिक, यह गिरफ्तारी सूबे के पूर्वी चंपारण के ढाका से की गई। हुआ यूं कि एनआईए की टीम और स्थानीय प्रशासन मदरसा में छापेमारी करने पहुंच गए थे। इस बीच, वहां इस टीचर को पकड़ लिया गया। अली ही इस मदरसा का संचालक बताया जा रहा है। अली से पूछताछ भी की गई। एनआईए टीम और स्थानीय प्रशासन इसके बाद गिरफ्तार टीचर को पटना लेकर रवाना हो गए, जहां दोबारा पूछताछ की जाएगी। कहा जा रहा है कि एफआईआर में अली का नाम भी है। पुलिस इस सिलिसिले में उसके घर पर भी दबिश देने पहुंची थी, जहां पांच बोरे में किताबें मिली हैं। ये किताबें आपत्तिजनक बताई जा रही हैं, जिनकी आगे जांच की जाएगी। पता लगाया जाएगा कि वे कैसी धार्मिक किताबें हैं। दरअसल, राज्य की राजधानी पटना में पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों का खुलासा किया था। जांच-पड़ताल और छापेमारी के बीच कई गिरफ्तारियां भी की गईं। बिहार में इस टेरर मॉड्यूल से जुड़े मामले में यह भी बात सामने आई थी कि तुर्की समेत कई मुस्लिम मुल्कों से कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई को फंड मिला था। इस केस में संदिग्ध आतंकी मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर भी दबोचा गया था, जिसके इंटरनेशनल कनेक्शन होने की बात सामने आ रही थी। इस बीच, एनआईए, रॉ और आईबी समेत अन्य केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। |
साहब! आई लव यू नहीं बोला तो युवक कॉल कर धमकी दे रहा है। साथ ही घर के बाहर हंगामा कर रहा है। घर से बाहर आते-जाते भी रास्ता रोककर जबरन बात करने का दबाव बन रहा है। शनिवार को कोतवाली पहुंची युवती ने ये शिकायत कर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र निवासी युवती ने बताया कि करीब एक महीने पूर्व उसकी पास में रहने वाले युवक से मुलाकात हुई थी। दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। इस बीच युवती को पता चला कि वह नशा करता है। साथ ही लोगों से गालीगलौज और मारपीट करता है। इस पर उसने युवक से किनारा करना शुरू कर दिया। साथ ही उससे बातचीत भी बंद कर दी। मोबाइल पर बातचीत न करने से नाराज युवक उसके घर के बाहर पहुंचा और हंगामा कर दिया। आरोप है कि वह बाजार जाने के लिए निकली तो युवक ने रास्ता रोक लिया और जबरन आई लव यू बोलने का दबाव बनाने लगा। आरोप है कि अब वह युवती और उसकी मां के मोबाइल पर कॉल कर धमकी दे रहा है। परेशान युवती रविवार को कोतवाली पहुंची और पुलिस को तहरीर दी। एसआई बारू सिंह चौहान ने बताया कि युवक और उसके पिता को कोतवाली बुलाया गया है। युवक से जानकारी लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
| साहब! आई लव यू नहीं बोला तो युवक कॉल कर धमकी दे रहा है। साथ ही घर के बाहर हंगामा कर रहा है। घर से बाहर आते-जाते भी रास्ता रोककर जबरन बात करने का दबाव बन रहा है। शनिवार को कोतवाली पहुंची युवती ने ये शिकायत कर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र निवासी युवती ने बताया कि करीब एक महीने पूर्व उसकी पास में रहने वाले युवक से मुलाकात हुई थी। दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। इस बीच युवती को पता चला कि वह नशा करता है। साथ ही लोगों से गालीगलौज और मारपीट करता है। इस पर उसने युवक से किनारा करना शुरू कर दिया। साथ ही उससे बातचीत भी बंद कर दी। मोबाइल पर बातचीत न करने से नाराज युवक उसके घर के बाहर पहुंचा और हंगामा कर दिया। आरोप है कि वह बाजार जाने के लिए निकली तो युवक ने रास्ता रोक लिया और जबरन आई लव यू बोलने का दबाव बनाने लगा। आरोप है कि अब वह युवती और उसकी मां के मोबाइल पर कॉल कर धमकी दे रहा है। परेशान युवती रविवार को कोतवाली पहुंची और पुलिस को तहरीर दी। एसआई बारू सिंह चौहान ने बताया कि युवक और उसके पिता को कोतवाली बुलाया गया है। युवक से जानकारी लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। |
बिलासपुर - चुनावों को लेकर पूरे क्षेत्र के विधानसभा प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां पर प्रत्याशी अपनी विकास कार्यों की उपलब्धियां गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं तो वहीं प्रत्याशी विपक्ष के प्रत्याशियों की भी कड़ी निंदा कर रहे हैं। वहीं आचार संहिता लागू होने के बावजूद नियमों की उल्लंघना सरेआम होती नजर आ रही है। इसके तहत चुनाव आयोग के पास जिला भर से सात शिकायतें पहुंची है। जिसमें नोडल आफिसर ने संज्ञान लेते हुए तत्काल मामलों में जांच बिठाई है।
बजट की कमी के कारण सामरिक महत्त्व की रेल पहाड़ नहीं चढ़ पा रही। विडंबना है कि जिला प्रशासन की ओर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए भेजी रेट अप्रूवल भी सचिवालय की फाइलों में धूल फांक रही है। अभी तक स्वीकृति न मिलने की वजह से सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-बरमाणा-लेह रेलवे लाइन निर्माण की कवायद लटक गई है। चुनावी माहौल में रेल लाइन निर्माण का यक्ष प्रश्न भी राजनीतिक दलों के समक्ष मुद्दा बनकर गूंजा रहा है।
रिखीराम को सीने में दर्द, दिल्ली में भर्ती पार्टी का टिकट कटने से खफा झंडूता विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल अचानक बीमार हो गए हैं। रविवार देर रात उनके सीने में दर्द उठा और परिजन उन्हें बड़सर अस्पताल ले गए, जहां हालात गंभीर होती देख डाक्टरोें ने उन्हें बड़े अस्पताल के लिए रैफर किया है। परिजन उन्हें फोर्टिस अस्पताल दिल्ली लेकर चले गए हैं। ऐसे में झंडूता हलके में टिकट बदलने की भाजपा की रणनीति को झटका लग सकता है।
बिलासपुर क्रिकेट संघ द्वारा मंगलवार को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर का जन्मदिन बड़े हर्षाेल्लास से मनाया गया। इस मौके पर बिलासपुर क्रिकेट संघ के पदाधिकारियोें एवं सदस्यों ने पहले इंडोर स्टेडियम के इर्द गिर्द स्वच्छता अभियान छेड़ा और अवांछित झाडि़यों को काटकर जलाया।
स्वास्थ्य विभाग बिलासपुर द्वारा शुक्रवार को डियारा सेक्टर के सभी वार्डों में डेंगू बीमारी से बचने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया। इस शिविर में डेंगू से पीडि़त व्यक्तियों और लोगों को बीमारी के रोकथाम और बचाव के बारे बताया गया। जनशिक्षा सूचना अधिकारी रोमा शर्मा ने बताया कि डियारा सेक्टर में डेंगू से संबंधित मरीजों की संख्यां ज्यादा है। इस दौरान उन्होंने इन मरीजों के घरों-घरों में जाकर लोगों को अपने आस-पास सफाई रखने के लिए लोगों को जागरूक किया।
फिजियोथैरिपिस्ट ज्योति ठाकुर के परिजनों ने पुलिस व एसआईटी टीम द्वारा इस मामले की जांच न करने के चलते बीते सोमवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर से एसपी कार्यालय तक काले बिल्ले लगाकर कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च में ज्योति के परिजनों के साथ बिलासपुर की कई संस्थाओं ने भी उन्हें समर्थन दिया और उनके साथ इस मार्च में शामिल हुए।
भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र गर्ग ने कहा कि कांग्रेस ने युवा वर्ग को रोजगार के नाम पर छल किया है, जिसका हिसाब युवा वर्ग मांग कर रहा है। कांग्रेस के सत्तासीन होते ही बेराजगारी छा गई है, जिसमें घुमारवीं भी अछूता नही रहा है। पिछले पांच सालों से घुमारवीं में बेरोजगारों का ग्राफ बढ़ा है, जिसका प्रमाण उपरोजगा कार्यालय में बेराजगारों के आंकड़े बता रहे है।
जिला के थाना बरमाणा के गांव देलग में एक वृद्धा की पेड़ से गिरने के कारण मौत होने का समाचार है। जानकारी के अनुसार देलग गांव की चिंता देवी विधवा शंकर सिंह मंगलवार सुबह करीब दस बजे पेड़ पर चढ़कर चारा काट रही थी कि अचानक उसका पैर फिसला और जमीन पर गिर गई। परिजनों और अन्य लोगों ने तुरंत 108 को यह सूचना दी। 108 एंबुलेंस की मदद से उक्त घायल महिला को तुरंत जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
उच्च न्यायालय के आदेशों पर मंगलवार को तहसीलदार सदर जेआर भारद्वाज की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम ने सुइसुरहाड़ में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से तैयार मकान से कब्जा हटाया गया। तहसील के नेतृव्य में राजस्व विभाग लोक निर्माण विभाग, वन विभाग पुलिस विभाग की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की गई। इसके तरह शेष बच्ी दीवार, शौचालय को तो मौके परव ही हटा दिया गया।
बिलासपुर में पहली बार एसआईवी सौजन्य से देश-विदेश से आए 12 पायलटों ने इस कोर्स में ट्रेनिंग ली। इस कोर्स में फ्रांस, रशिया और भी कई विदेशी जगहों से पायलट बिलासपुर पहुंचे है। इसमें उन्होंने बिलासपुर की पहाडि़यो और यहां की मानव निर्मित झील का बहुत तारिफ की।
घुमारवीं की बेटी आरजू-यू टयूब पर धमाल मचा रही है। जा तुझको ...में दमदार किरदार निभाने वाली आरजू साई की इस वीडियो को यू-ट्यूब पर तीन लाख से अधिक लोग देख कर पसंद कर चुके हैं। दीपक राठौर का लिखा व गाया गया गाना तथा स्न्नो लैपर्ड प्रोडक्शन व फार्मर प्रोडक्शन द्वारा निर्मित इस वीडियो को पसंद करने वालों की संख्यां में दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।
पंजाब नेशनल बैंक की मलोखर शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस ने शाखा प्रबंधक की आरे से शिकायत मिलने के बाद आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। वरिष्ठ शाखा प्रबंधक गौरव शर्मा ने बताया कि बुधवार को बैंक की मीटिंग में भाग लेने के लिए हमीरपुर मंडल कार्यालय गए थे। मीटिंग समाप्त होने के बाद वह वापस मलोखर के लिए रवाना हुए। इस दौरान उनके साथ पत्नी व तीन वर्ष की बेटी भी थी। कुछ दूरी पर उन्हें एक गाड़ी और एक बाइक सवार लोगों ने उनके साथ मारपीट कर दी।
| बिलासपुर - चुनावों को लेकर पूरे क्षेत्र के विधानसभा प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां पर प्रत्याशी अपनी विकास कार्यों की उपलब्धियां गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं तो वहीं प्रत्याशी विपक्ष के प्रत्याशियों की भी कड़ी निंदा कर रहे हैं। वहीं आचार संहिता लागू होने के बावजूद नियमों की उल्लंघना सरेआम होती नजर आ रही है। इसके तहत चुनाव आयोग के पास जिला भर से सात शिकायतें पहुंची है। जिसमें नोडल आफिसर ने संज्ञान लेते हुए तत्काल मामलों में जांच बिठाई है। बजट की कमी के कारण सामरिक महत्त्व की रेल पहाड़ नहीं चढ़ पा रही। विडंबना है कि जिला प्रशासन की ओर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए भेजी रेट अप्रूवल भी सचिवालय की फाइलों में धूल फांक रही है। अभी तक स्वीकृति न मिलने की वजह से सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-बरमाणा-लेह रेलवे लाइन निर्माण की कवायद लटक गई है। चुनावी माहौल में रेल लाइन निर्माण का यक्ष प्रश्न भी राजनीतिक दलों के समक्ष मुद्दा बनकर गूंजा रहा है। रिखीराम को सीने में दर्द, दिल्ली में भर्ती पार्टी का टिकट कटने से खफा झंडूता विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल अचानक बीमार हो गए हैं। रविवार देर रात उनके सीने में दर्द उठा और परिजन उन्हें बड़सर अस्पताल ले गए, जहां हालात गंभीर होती देख डाक्टरोें ने उन्हें बड़े अस्पताल के लिए रैफर किया है। परिजन उन्हें फोर्टिस अस्पताल दिल्ली लेकर चले गए हैं। ऐसे में झंडूता हलके में टिकट बदलने की भाजपा की रणनीति को झटका लग सकता है। बिलासपुर क्रिकेट संघ द्वारा मंगलवार को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर का जन्मदिन बड़े हर्षाेल्लास से मनाया गया। इस मौके पर बिलासपुर क्रिकेट संघ के पदाधिकारियोें एवं सदस्यों ने पहले इंडोर स्टेडियम के इर्द गिर्द स्वच्छता अभियान छेड़ा और अवांछित झाडि़यों को काटकर जलाया। स्वास्थ्य विभाग बिलासपुर द्वारा शुक्रवार को डियारा सेक्टर के सभी वार्डों में डेंगू बीमारी से बचने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया। इस शिविर में डेंगू से पीडि़त व्यक्तियों और लोगों को बीमारी के रोकथाम और बचाव के बारे बताया गया। जनशिक्षा सूचना अधिकारी रोमा शर्मा ने बताया कि डियारा सेक्टर में डेंगू से संबंधित मरीजों की संख्यां ज्यादा है। इस दौरान उन्होंने इन मरीजों के घरों-घरों में जाकर लोगों को अपने आस-पास सफाई रखने के लिए लोगों को जागरूक किया। फिजियोथैरिपिस्ट ज्योति ठाकुर के परिजनों ने पुलिस व एसआईटी टीम द्वारा इस मामले की जांच न करने के चलते बीते सोमवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर से एसपी कार्यालय तक काले बिल्ले लगाकर कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च में ज्योति के परिजनों के साथ बिलासपुर की कई संस्थाओं ने भी उन्हें समर्थन दिया और उनके साथ इस मार्च में शामिल हुए। भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र गर्ग ने कहा कि कांग्रेस ने युवा वर्ग को रोजगार के नाम पर छल किया है, जिसका हिसाब युवा वर्ग मांग कर रहा है। कांग्रेस के सत्तासीन होते ही बेराजगारी छा गई है, जिसमें घुमारवीं भी अछूता नही रहा है। पिछले पांच सालों से घुमारवीं में बेरोजगारों का ग्राफ बढ़ा है, जिसका प्रमाण उपरोजगा कार्यालय में बेराजगारों के आंकड़े बता रहे है। जिला के थाना बरमाणा के गांव देलग में एक वृद्धा की पेड़ से गिरने के कारण मौत होने का समाचार है। जानकारी के अनुसार देलग गांव की चिंता देवी विधवा शंकर सिंह मंगलवार सुबह करीब दस बजे पेड़ पर चढ़कर चारा काट रही थी कि अचानक उसका पैर फिसला और जमीन पर गिर गई। परिजनों और अन्य लोगों ने तुरंत एक सौ आठ को यह सूचना दी। एक सौ आठ एंबुलेंस की मदद से उक्त घायल महिला को तुरंत जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेशों पर मंगलवार को तहसीलदार सदर जेआर भारद्वाज की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम ने सुइसुरहाड़ में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से तैयार मकान से कब्जा हटाया गया। तहसील के नेतृव्य में राजस्व विभाग लोक निर्माण विभाग, वन विभाग पुलिस विभाग की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की गई। इसके तरह शेष बच्ी दीवार, शौचालय को तो मौके परव ही हटा दिया गया। बिलासपुर में पहली बार एसआईवी सौजन्य से देश-विदेश से आए बारह पायलटों ने इस कोर्स में ट्रेनिंग ली। इस कोर्स में फ्रांस, रशिया और भी कई विदेशी जगहों से पायलट बिलासपुर पहुंचे है। इसमें उन्होंने बिलासपुर की पहाडि़यो और यहां की मानव निर्मित झील का बहुत तारिफ की। घुमारवीं की बेटी आरजू-यू टयूब पर धमाल मचा रही है। जा तुझको ...में दमदार किरदार निभाने वाली आरजू साई की इस वीडियो को यू-ट्यूब पर तीन लाख से अधिक लोग देख कर पसंद कर चुके हैं। दीपक राठौर का लिखा व गाया गया गाना तथा स्न्नो लैपर्ड प्रोडक्शन व फार्मर प्रोडक्शन द्वारा निर्मित इस वीडियो को पसंद करने वालों की संख्यां में दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। पंजाब नेशनल बैंक की मलोखर शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस ने शाखा प्रबंधक की आरे से शिकायत मिलने के बाद आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। वरिष्ठ शाखा प्रबंधक गौरव शर्मा ने बताया कि बुधवार को बैंक की मीटिंग में भाग लेने के लिए हमीरपुर मंडल कार्यालय गए थे। मीटिंग समाप्त होने के बाद वह वापस मलोखर के लिए रवाना हुए। इस दौरान उनके साथ पत्नी व तीन वर्ष की बेटी भी थी। कुछ दूरी पर उन्हें एक गाड़ी और एक बाइक सवार लोगों ने उनके साथ मारपीट कर दी। |
कॉफ़ी विद करण सीज़न 7 के तीसरे एपिसोड में अक्षय कुमार और सामंथा प्रभु को किस्से सुनाते हुए, रिश्तों पर खुलासे पेश करते हुए और कुछ मज़ेदार चुटकुले सुनाते हुए दिखाया गया।
Koffee with Karan: कॉफ़ी विद करण सीज़न 7 के तीसरे एपिसोड में अक्षय कुमार और सामंथा प्रभु को किस्से सुनाते हुए, रिश्तों पर खुलासे पेश करते हुए और कुछ मज़ेदार चुटकुले सुनाते हुए दिखाया गया। लेकिन हमेशा की तरह, यह करण जौहर की रैपिड फ़ायर थी जिसने सबसे अधिक चर्चित विषयों को सामने लाया। सामंथा और अक्षय से पहले के सेगमेंट में अपनी-अपनी शादियों के बारे में पूछने के बाद, करण ने अक्षय से रैपिड फायर सेक्शन में एक सीधा सा सवाल किया। करण ने पूछा, "अक्षय, आप इन शादीशुदा एक्टर्स को क्या सलाह देंगे? "
जिसके बाद अक्षय कुमार ने आलिया और रणबीर के लिए एक मीठा और छोटा जवाब दिया और कहा, "हैप्पी वाइफ, हैप्पी लाइफ " और इसके साथ ही अक्षय ने आलिया की तारीफ की और उन्हें 'छोटा पैकेट बड़ा धमाका' कहा। अक्षय शो में सामंथा प्रभु के साथ आए और रैपिड-फायर राउंड भी जीता।
इसके साथ ही जब करण ने कैटरीना कैफ के लिए संकेत दिया, तो अक्षय ने अपनी खास टिप्पणी देते हुए कहा की, "मैं उसे बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। कैटरीना, उसका कान मत खाओ। बस थोड़ा सा चबाओ। " इसके बाद, करण ने अक्षय से पूछा कि वह विक्की कौशल को क्या सलाह देंगे। बिना किसी विचार-विमर्श के, अक्षय ने जवाब दिया, "उसे एक होम जिम बनाओ और आप उसे घर पर और अधिक देखेंगे। "
अगर हम काम कि बात करें तो, अक्षय कुमार अपनी जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म 'रक्षा बंधन' में भूमि पेडनेकर के साथ नजर आएंगे। आनंद एल राय के निर्देशन में बनी यह फिल्म 11 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। वहीं दूसरी ओर, रणबीर और आलिया की अयान मुखर्जी के द्वारा निर्मित फिल्म पौराणिक नाटक 'ब्रह्मास्त्र' में नजर आने वाले हैं। फिल्म इस साल सितंबर में रिलीज होने वाली है।
इसके साथ कैटरीना कैफ जल्द ही अपनी अपकमिंग फिल्म "फोन भूत" में ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ स्क्रीन स्पेस साझा करते हुए दिखाई देंगी। उनकी झोली में 'टाइगर 3' भी है जिसमें सलमान खान और इमरान हाशमी मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसके अलावा, उन्हें अली अब्बास ज़फ़र की सुपरहीरो सीरीज़ के लिए भी चुना गया है।
वहीं विक्की कौशल के फिल्मों कि बात करें तो, विक्की फिलहाल विजान की फिल्म "रोम-कॉम" का इंतजार कर रहे हैं जिसमें वो सारा अली खान के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। मेघना गुलज़ार की "सैम बहादुर" और सान्या मल्होत्रा, फातिमा सना शेख और आदित्य धर की फिल्म "द इम्मोर्टल अश्वत्थामा" इसके साथ ही शशांक खेतान की फिल्म "गोविंदा नाम मेरा" में भूमि पेडनेकर और कियारा आडवाणी के साथ दिखाई देंगे।
| कॉफ़ी विद करण सीज़न सात के तीसरे एपिसोड में अक्षय कुमार और सामंथा प्रभु को किस्से सुनाते हुए, रिश्तों पर खुलासे पेश करते हुए और कुछ मज़ेदार चुटकुले सुनाते हुए दिखाया गया। Koffee with Karan: कॉफ़ी विद करण सीज़न सात के तीसरे एपिसोड में अक्षय कुमार और सामंथा प्रभु को किस्से सुनाते हुए, रिश्तों पर खुलासे पेश करते हुए और कुछ मज़ेदार चुटकुले सुनाते हुए दिखाया गया। लेकिन हमेशा की तरह, यह करण जौहर की रैपिड फ़ायर थी जिसने सबसे अधिक चर्चित विषयों को सामने लाया। सामंथा और अक्षय से पहले के सेगमेंट में अपनी-अपनी शादियों के बारे में पूछने के बाद, करण ने अक्षय से रैपिड फायर सेक्शन में एक सीधा सा सवाल किया। करण ने पूछा, "अक्षय, आप इन शादीशुदा एक्टर्स को क्या सलाह देंगे? " जिसके बाद अक्षय कुमार ने आलिया और रणबीर के लिए एक मीठा और छोटा जवाब दिया और कहा, "हैप्पी वाइफ, हैप्पी लाइफ " और इसके साथ ही अक्षय ने आलिया की तारीफ की और उन्हें 'छोटा पैकेट बड़ा धमाका' कहा। अक्षय शो में सामंथा प्रभु के साथ आए और रैपिड-फायर राउंड भी जीता। इसके साथ ही जब करण ने कैटरीना कैफ के लिए संकेत दिया, तो अक्षय ने अपनी खास टिप्पणी देते हुए कहा की, "मैं उसे बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। कैटरीना, उसका कान मत खाओ। बस थोड़ा सा चबाओ। " इसके बाद, करण ने अक्षय से पूछा कि वह विक्की कौशल को क्या सलाह देंगे। बिना किसी विचार-विमर्श के, अक्षय ने जवाब दिया, "उसे एक होम जिम बनाओ और आप उसे घर पर और अधिक देखेंगे। " अगर हम काम कि बात करें तो, अक्षय कुमार अपनी जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म 'रक्षा बंधन' में भूमि पेडनेकर के साथ नजर आएंगे। आनंद एल राय के निर्देशन में बनी यह फिल्म ग्यारह अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। वहीं दूसरी ओर, रणबीर और आलिया की अयान मुखर्जी के द्वारा निर्मित फिल्म पौराणिक नाटक 'ब्रह्मास्त्र' में नजर आने वाले हैं। फिल्म इस साल सितंबर में रिलीज होने वाली है। इसके साथ कैटरीना कैफ जल्द ही अपनी अपकमिंग फिल्म "फोन भूत" में ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ स्क्रीन स्पेस साझा करते हुए दिखाई देंगी। उनकी झोली में 'टाइगर तीन' भी है जिसमें सलमान खान और इमरान हाशमी मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसके अलावा, उन्हें अली अब्बास ज़फ़र की सुपरहीरो सीरीज़ के लिए भी चुना गया है। वहीं विक्की कौशल के फिल्मों कि बात करें तो, विक्की फिलहाल विजान की फिल्म "रोम-कॉम" का इंतजार कर रहे हैं जिसमें वो सारा अली खान के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। मेघना गुलज़ार की "सैम बहादुर" और सान्या मल्होत्रा, फातिमा सना शेख और आदित्य धर की फिल्म "द इम्मोर्टल अश्वत्थामा" इसके साथ ही शशांक खेतान की फिल्म "गोविंदा नाम मेरा" में भूमि पेडनेकर और कियारा आडवाणी के साथ दिखाई देंगे। |
हैती में शक्तिशाली भूकंप से तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। यहां अबतक 227 लोगों की मौत हो गई है। देश के नागरिक सुरक्षा सेवा ने ये जानकारी दी है। समाचार एजेंसी स्पूतनिक के मुताबिक, भूकंप के कारण सैकड़ों लोग घायल और लापता हुए हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7. 2 आंकी गई है। आशंका जताई जा रही है कि अभी मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है।
इससे पहले अमेरिका के अलास्का में भी भूकंप आया। जिसकी तीव्रता 6. 9 आंकी गई। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने हैती में आए भूकंप की तीव्रता 7. 2 आंकी है। समाचार एजेंसी एएफपी ने हैती में 29 लोगों के मारे जाने की खबर दी है।
अलास्का में स्थानीय समयानुसार सुबह 5. 27 पर भूकंप महसूस किया गया। अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार इसका केंद्र होमर से 605 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में था।
| हैती में शक्तिशाली भूकंप से तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। यहां अबतक दो सौ सत्ताईस लोगों की मौत हो गई है। देश के नागरिक सुरक्षा सेवा ने ये जानकारी दी है। समाचार एजेंसी स्पूतनिक के मुताबिक, भूकंप के कारण सैकड़ों लोग घायल और लापता हुए हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता सात. दो आंकी गई है। आशंका जताई जा रही है कि अभी मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। इससे पहले अमेरिका के अलास्का में भी भूकंप आया। जिसकी तीव्रता छः. नौ आंकी गई। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने हैती में आए भूकंप की तीव्रता सात. दो आंकी है। समाचार एजेंसी एएफपी ने हैती में उनतीस लोगों के मारे जाने की खबर दी है। अलास्का में स्थानीय समयानुसार सुबह पाँच. सत्ताईस पर भूकंप महसूस किया गया। अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार इसका केंद्र होमर से छः सौ पाँच किलोग्राममीटर दक्षिण पश्चिम में था। |
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चेतावनी दी है कि वॉशिंगटन को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अभी भी सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि वह अमेरिका के लिए बड़ा खतरा हैं।
अमेरिका में हिलेरी क्लिंटन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान परमाणु समझौते से अलग होने की धमकी को खतरनाक बताते हुए सुझाव दिया कि उनके पूर्व चुनावी प्रतिद्वंद्वी अन्य देशों से किए गए अमेरिका के वादों की वैधता कम कर रहे हैं।
विकीलीक्स द्वारा हिलेरी क्लिंटन की आलोचना करते हुए पोस्ट किए गए दस्तावेजों ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई। वायरल हुए ट्वीट के अध्ययन में यह बात सामने आई है।
रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार अरबपति बिजनेसमैन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्रपति होंगे। वह अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति होंगे।
| अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चेतावनी दी है कि वॉशिंगटन को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अभी भी सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि वह अमेरिका के लिए बड़ा खतरा हैं। अमेरिका में हिलेरी क्लिंटन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान परमाणु समझौते से अलग होने की धमकी को खतरनाक बताते हुए सुझाव दिया कि उनके पूर्व चुनावी प्रतिद्वंद्वी अन्य देशों से किए गए अमेरिका के वादों की वैधता कम कर रहे हैं। विकीलीक्स द्वारा हिलेरी क्लिंटन की आलोचना करते हुए पोस्ट किए गए दस्तावेजों ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई। वायरल हुए ट्वीट के अध्ययन में यह बात सामने आई है। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार अरबपति बिजनेसमैन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्रपति होंगे। वह अमेरिका के पैंतालीसवें राष्ट्रपति होंगे। |
निंद्य और उच्छृङ्खल होता है इसका ज्ञान मुझे पहले ही से था । इसलिए कला के सच्चे स्वरूप को जानने में मुझे विलम्ब न लगा। इतनी पूर्व-तैयारी के बाद कला पर कई प्रामाणिक ग्रन्थों के पढ़ते समय मुझे कोई कठिनाई या शंका नहीं हुई ।
कला का विवेचन शुरू करने के पहले उपर्युक्त अनुभव का सार कह दूँ । जीवन की पूर्व दशा में पहले-पहल सद्गुणों का विकास कर उन्हें दृढ़ करना चाहिए । और सदाचार की महत्ता तथा दुराचार की हीनता हृदय पर शिला लेख को भांति अ होजानी चाहिए । इतना हो जाने पर ही कहा जा सकता है कि कला की दीक्षा लेने की पूर्व तैयारी हो गई । जिस प्रकार यौवन चारों पुरुषार्थों का उत्तम काल है उसी प्रकार अनन्त प्रमादों का उद्गम स्थान भी वही है । यौवन के पास सब कुछ है, केवल torate or dreaर्ण नहीं है। यदि धर्म-संस्कार और सदाचार से यह कर्ण प्राम न हो सके तो उसे वह कला से कदापि नहीं प्राप्त हो सकता । एक बार मनुष्य के जीवन में धर्म प्रतिष्ठित हुआ कि उसे सब कुछ मिल गया । धर्म-वीर्य के साथ मनुष्य चाहे जिस क्षेत्र में या विषय में गहराई के साथ प्रवेश कर सकता है। जीवन समस्त में प्रत्येक वस्तु को निर्मल दृष्टि से देख वह चसके स्थान प्रयोजन और विनियोग को निश्चित कर सकता है ।
धर्म अर्थात् श्रद्धायुक्त सदाचार के आधार पर जिस कला की रचना होती है वह रस-गंभीर, प्राण-पोषक और अनन्तवीर्य होती है । कला पर जिस सदाचार की रचना की जाती है वह प्रायः ऊपरी शिष्टाचार ही होता है। जिस तरह सड़े हुए फल पर रङ्गीन काराज लपेटकर उसे सुन्दर दिखाने का प्रयत्न किया जाता
है उसी प्रकार अ-संस्कारी असंयत जीवन पर नागरिकता का श्राडम्बर रचकर जीवन सदाचारी बताया जा सकता है। कला के द्वारा विकसित सदाचार को तो हलकी धातु पर चढ़ाई हुई कलई ही समझिए । जब से धर्म अप्रतिष्ठ हुआ है तब से सुधार एक तरह का 'वेनीर' बन गया है। वेनीर के मानी हैं इलकी जाति की लकड़ी पर चढ़ाया हुआ शीशम अथवा महागनी-जैसी लकड़ी का आवरण । यदि हम मांसाहार को सदाचार के विपरीत मानते हैं, तो इसका कारण हमें धर्म से प्राप्त होना चाहिए, कला से नहीं। मांसाहार में क्रूरता है, पाप है, हृदय-धर्म का द्रोह है। इस भावना से जब मांसाहार का त्याग किया जाता है तो वह स्थिर होता है, बलप्रद होता है। कितने ही कवि और कलाकार कहते है कि हम मांसाहार इसलिए नहीं करते कि मांसाहार हमारी सौंदर्य की कल्पना को आघात पहुँचाता है। इसलिए हम निरामिष भोजी हैं। ऐसे लोगों के निरामिष भोजन में व्रत की दृढ़ता नहीं होती। कभी-कभी वे मांस का सेवन कर भी लें । कला के हिमायती कला का केवल सेवन कर सकते है पूजा नहीं। पूजन की वृत्ति का उदय धर्म से ही होता है। बिना स्वार्थ और अहंकार को मारे पूजा हो ही नहीं सकती ।
जीवन-विषयक कल्पना जबतक स्थिर नहीं हो जाती तब तक हमें इस बात का खयाल भी नहीं हो सकता कि कला क्या वस्तु है । पशु के समान ही मनुष्य में भी भोगवृत्ति है, स्वामित्वबुद्धि है, आलस्य है, उतार में फिसलने का आनन्द भी है । पर मनुष्य बुद्धिमान प्राणी है। इसलिए वह इन वृत्तियों को व्यव स्थित रूप दे देता है। शब्द-जाल फैलाकर वह पशु-जीवन को भी
रसमय या यथार्थ बता सकता है। यह अनुभव तो बाद मिलता है कि भोगमय जीवन न तो रसमय हो सकता है, और न यथार्थ । एक के अनुभव से मिली हुई मुफ्त की होशियारी लेने से जबतक दूसरे इनकार करते रहेंगे तबतक भोग की फिलासफी और उस पर रचा हुआ सौंदर्यशास्त्र इसी तरह चलते रहेंगे।
सब से पहले यह तय करना चाहिए कि सफल जीवन किसे कहते हैं । किस प्रकार जीवन व्यतीत करने से हम निष्प्राण नहीं होंगे, हीन न होंगे, विनाश-मार्ग के पथिक न बनेंगे। इसके बाद इस मंगल-जीवन के अनुकूल कला का विकास अपने अन्दर करना चाहिए । इन्द्रियों का अपने-अपने विषयों की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है। यदि इस आकर्षण को ही कोई कलावृत्ति मान ले, इसी को यदि कोई रसिकता का नाम दे दे तब तो कहना होगा उसनेमातही कर लिया । और कला का भी मान किया। कला का आनन्द विषयातीत होना चाहिए ।
कितने ही बैरागी इन्द्रियों में परिपूर्ण अविश्वास वे कहते हैं--- "इन्द्रियों को स्वाधीनता यदि दे दी जाय तो वे तो अपने विषयों की ओर अवश्य दौड़ेंगी, और यह निःसन्देह सिद्ध है कि विषयों का सेवन ही आध्यात्मिक मृत्यु है। इन्द्रियों की प्रवृत्ति शुभ तो हरगिज़ नहीं और न वह एकदम बन्द ही हो सकती है । यदि एकदम उसे बन्द करने जाते हैं तो बलवान् इन्द्रिय-श्राम कोई न कोई विकृति खड़ी कर देता है। इसीलिए युक्ति प्रयुक्ति द्वारा, मधुरता पर साथ ही दृढ़ता के साथ इंन्द्रियों को विषय पराङ्मुख करने में ही हमारा सच्चा पुरुषार्थ है।"
कला के उपासकों की दृष्टि इससे कुछ भिन्न है। वे कहते हैं
कि "इन्द्रियों को विषय सेवन करने के लिए स्वाधीनता दे दी जाय तो वे बात की बात में जीवन की तमाम सुन्दरता को नष्ट-भ्रष्ट कर देंगी । विषय-सेवन में सुन्दरता नहीं । सुन्दरता, कला, काव्य ये सब इन्द्रियातीत वस्तुयें हैं। इनका आनन्द सच पूछा जाय तो इन्द्रिय-निरपेक्ष है इसलिए शुद्ध सात्विक है। इस आनंद के सेवन में इन्द्रियों की सहायता की जा सकती है। यही केवल हमारा कथन है। यह कोई बात नहीं कि इन्द्रियों को सभी प्रवृ त्तियाँ अधःपात की ओर ले जाती है । हृदय की एक खास तरह से शुद्धि कर लेने पर इन्हीं इन्द्रियों के द्वारा सौंदर्य का आकलन किया जा सकता है। एक ही युवती को पति और पिता जिस तरह भिन्न-भिन्न दृष्टि से देखते हैं उसी प्रकार विषयी पुरुष और कलारसिक भी एक ही वस्तु को भिन्न-भिन्न दृष्टि से देख सकते हैं। हम इस बात को क़बूल करते हैं कि पिता की दृष्टि की निर्मलता दुर्लभ है। इस बात को भी हम स्वीकार करते हैं कि आज कल अपनेको कलारसिक कहलानेवाले कितने ही लोग विषयी या विलासी ही होते हैं। हम जानते हैं कि हमारी जाति में इन बाहरी लोगों की संख्या बहुत बढ़ गई है। अतः ज्ञान-शुद्धि का प्रयत्न हमें करना चाहिए- सबको करना चाहिए । पर इस जाति का अन्त तो कैसे किया जा सकता है ? "
प्रायः सभी कलापूजक इस बात को जानते हैं कि कलापूजन में सभी इन्द्रियों एक-सी योग्यता नहीं रखतीं। स्पर्शेन्द्रिय और स्वादेन्द्रिय इतनी उन्मादकारी और असंयत होती हैं कि कलापूजन में हम उनकी सहायता ले ही नहीं सकते। गन्ध भी स्पर्शसुख ही है। इसलिए गन्धकमाही इन्द्रियों को भी कला-पूजन
[ जीवनकला
इन्द्रियों में स्थान मिलना शंकास्पद है। अब शेष रही दो ज्ञानेन्द्रियों, श्रवण और नयन । इन दोनों की विलासिता को संयत कर इन्हें कलाग्रह की दीक्षा दी जा सकती है ।
पर कला का सच्चा आनन्द शब्द या रूप के आस्वाद में नहीं है । कला निर्दोष सृष्टि निर्माण करने ही में आनन्द मानती है। अर्थात् हाथ और कशठ की सहायता से ही कला की श्रेष्ठ-सेश्रेष्ठ उपासना हो सकती है । कण्ठ से स्वर्गीय संगीत ध्वनि निकालने का आनन्द कला का प्रधान आनन्द है। पर जबतक उसकी जाँच नहीं कर लेते, श्रवण द्वारा अनुरंजक शक्ति का तथा भावनाओं को उद्दीपित करने के सामर्थ्य की जाँच नहीं हो जाती तबतक संगीत से आनन्द मिल ही नहीं सकता। संगीत का आनन्द अन्ततोगत्वा इन्द्रियों से परे तो है ही पर वह श्रवण और कण्ठ की सहायता से ही जागृत हो सकता है ।
सच देखा जाय तो प्रत्येक इन्द्रिय द्वारा कला का आनन्द प्राप्त हो सकता है । पर उसे पहचानने की मनुष्य को शक्ति हो तब । कितनी ही इन्द्रियों का संयम करने से ही एक असाधारण और निर्विषय आनन्द प्राप्त किया जा सकता है। यह मनुष्य-जाति का दुर्देव है कि उसने इस आनन्द का बहुत कम अनुभव किया है । जिस आदमी को खुजली हो जाती है वह खुजलाने को ही आनंद मानता है, पर नीरोग मनुष्य तो शुद्ध आरोग्य आनंद को ही पसंद करता है । जाड़े के दिनों में, जब हम बिलकुल स्वस्थ होते हैं, बिलकुल सुबह उठकर ठण्डे पानी से नहाते है तब सारे शरीर में से-रोम-रोम से आनंद फूटता है। क्या उसे छोड़कर हम खुजलाने के सुख को पसंद करेंगे ? ब्रह्मचर्य का आनंद आरोग्य | निंद्य और उच्छृङ्खल होता है इसका ज्ञान मुझे पहले ही से था । इसलिए कला के सच्चे स्वरूप को जानने में मुझे विलम्ब न लगा। इतनी पूर्व-तैयारी के बाद कला पर कई प्रामाणिक ग्रन्थों के पढ़ते समय मुझे कोई कठिनाई या शंका नहीं हुई । कला का विवेचन शुरू करने के पहले उपर्युक्त अनुभव का सार कह दूँ । जीवन की पूर्व दशा में पहले-पहल सद्गुणों का विकास कर उन्हें दृढ़ करना चाहिए । और सदाचार की महत्ता तथा दुराचार की हीनता हृदय पर शिला लेख को भांति अ होजानी चाहिए । इतना हो जाने पर ही कहा जा सकता है कि कला की दीक्षा लेने की पूर्व तैयारी हो गई । जिस प्रकार यौवन चारों पुरुषार्थों का उत्तम काल है उसी प्रकार अनन्त प्रमादों का उद्गम स्थान भी वही है । यौवन के पास सब कुछ है, केवल torate or dreaर्ण नहीं है। यदि धर्म-संस्कार और सदाचार से यह कर्ण प्राम न हो सके तो उसे वह कला से कदापि नहीं प्राप्त हो सकता । एक बार मनुष्य के जीवन में धर्म प्रतिष्ठित हुआ कि उसे सब कुछ मिल गया । धर्म-वीर्य के साथ मनुष्य चाहे जिस क्षेत्र में या विषय में गहराई के साथ प्रवेश कर सकता है। जीवन समस्त में प्रत्येक वस्तु को निर्मल दृष्टि से देख वह चसके स्थान प्रयोजन और विनियोग को निश्चित कर सकता है । धर्म अर्थात् श्रद्धायुक्त सदाचार के आधार पर जिस कला की रचना होती है वह रस-गंभीर, प्राण-पोषक और अनन्तवीर्य होती है । कला पर जिस सदाचार की रचना की जाती है वह प्रायः ऊपरी शिष्टाचार ही होता है। जिस तरह सड़े हुए फल पर रङ्गीन काराज लपेटकर उसे सुन्दर दिखाने का प्रयत्न किया जाता है उसी प्रकार अ-संस्कारी असंयत जीवन पर नागरिकता का श्राडम्बर रचकर जीवन सदाचारी बताया जा सकता है। कला के द्वारा विकसित सदाचार को तो हलकी धातु पर चढ़ाई हुई कलई ही समझिए । जब से धर्म अप्रतिष्ठ हुआ है तब से सुधार एक तरह का 'वेनीर' बन गया है। वेनीर के मानी हैं इलकी जाति की लकड़ी पर चढ़ाया हुआ शीशम अथवा महागनी-जैसी लकड़ी का आवरण । यदि हम मांसाहार को सदाचार के विपरीत मानते हैं, तो इसका कारण हमें धर्म से प्राप्त होना चाहिए, कला से नहीं। मांसाहार में क्रूरता है, पाप है, हृदय-धर्म का द्रोह है। इस भावना से जब मांसाहार का त्याग किया जाता है तो वह स्थिर होता है, बलप्रद होता है। कितने ही कवि और कलाकार कहते है कि हम मांसाहार इसलिए नहीं करते कि मांसाहार हमारी सौंदर्य की कल्पना को आघात पहुँचाता है। इसलिए हम निरामिष भोजी हैं। ऐसे लोगों के निरामिष भोजन में व्रत की दृढ़ता नहीं होती। कभी-कभी वे मांस का सेवन कर भी लें । कला के हिमायती कला का केवल सेवन कर सकते है पूजा नहीं। पूजन की वृत्ति का उदय धर्म से ही होता है। बिना स्वार्थ और अहंकार को मारे पूजा हो ही नहीं सकती । जीवन-विषयक कल्पना जबतक स्थिर नहीं हो जाती तब तक हमें इस बात का खयाल भी नहीं हो सकता कि कला क्या वस्तु है । पशु के समान ही मनुष्य में भी भोगवृत्ति है, स्वामित्वबुद्धि है, आलस्य है, उतार में फिसलने का आनन्द भी है । पर मनुष्य बुद्धिमान प्राणी है। इसलिए वह इन वृत्तियों को व्यव स्थित रूप दे देता है। शब्द-जाल फैलाकर वह पशु-जीवन को भी रसमय या यथार्थ बता सकता है। यह अनुभव तो बाद मिलता है कि भोगमय जीवन न तो रसमय हो सकता है, और न यथार्थ । एक के अनुभव से मिली हुई मुफ्त की होशियारी लेने से जबतक दूसरे इनकार करते रहेंगे तबतक भोग की फिलासफी और उस पर रचा हुआ सौंदर्यशास्त्र इसी तरह चलते रहेंगे। सब से पहले यह तय करना चाहिए कि सफल जीवन किसे कहते हैं । किस प्रकार जीवन व्यतीत करने से हम निष्प्राण नहीं होंगे, हीन न होंगे, विनाश-मार्ग के पथिक न बनेंगे। इसके बाद इस मंगल-जीवन के अनुकूल कला का विकास अपने अन्दर करना चाहिए । इन्द्रियों का अपने-अपने विषयों की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है। यदि इस आकर्षण को ही कोई कलावृत्ति मान ले, इसी को यदि कोई रसिकता का नाम दे दे तब तो कहना होगा उसनेमातही कर लिया । और कला का भी मान किया। कला का आनन्द विषयातीत होना चाहिए । कितने ही बैरागी इन्द्रियों में परिपूर्ण अविश्वास वे कहते हैं--- "इन्द्रियों को स्वाधीनता यदि दे दी जाय तो वे तो अपने विषयों की ओर अवश्य दौड़ेंगी, और यह निःसन्देह सिद्ध है कि विषयों का सेवन ही आध्यात्मिक मृत्यु है। इन्द्रियों की प्रवृत्ति शुभ तो हरगिज़ नहीं और न वह एकदम बन्द ही हो सकती है । यदि एकदम उसे बन्द करने जाते हैं तो बलवान् इन्द्रिय-श्राम कोई न कोई विकृति खड़ी कर देता है। इसीलिए युक्ति प्रयुक्ति द्वारा, मधुरता पर साथ ही दृढ़ता के साथ इंन्द्रियों को विषय पराङ्मुख करने में ही हमारा सच्चा पुरुषार्थ है।" कला के उपासकों की दृष्टि इससे कुछ भिन्न है। वे कहते हैं कि "इन्द्रियों को विषय सेवन करने के लिए स्वाधीनता दे दी जाय तो वे बात की बात में जीवन की तमाम सुन्दरता को नष्ट-भ्रष्ट कर देंगी । विषय-सेवन में सुन्दरता नहीं । सुन्दरता, कला, काव्य ये सब इन्द्रियातीत वस्तुयें हैं। इनका आनन्द सच पूछा जाय तो इन्द्रिय-निरपेक्ष है इसलिए शुद्ध सात्विक है। इस आनंद के सेवन में इन्द्रियों की सहायता की जा सकती है। यही केवल हमारा कथन है। यह कोई बात नहीं कि इन्द्रियों को सभी प्रवृ त्तियाँ अधःपात की ओर ले जाती है । हृदय की एक खास तरह से शुद्धि कर लेने पर इन्हीं इन्द्रियों के द्वारा सौंदर्य का आकलन किया जा सकता है। एक ही युवती को पति और पिता जिस तरह भिन्न-भिन्न दृष्टि से देखते हैं उसी प्रकार विषयी पुरुष और कलारसिक भी एक ही वस्तु को भिन्न-भिन्न दृष्टि से देख सकते हैं। हम इस बात को क़बूल करते हैं कि पिता की दृष्टि की निर्मलता दुर्लभ है। इस बात को भी हम स्वीकार करते हैं कि आज कल अपनेको कलारसिक कहलानेवाले कितने ही लोग विषयी या विलासी ही होते हैं। हम जानते हैं कि हमारी जाति में इन बाहरी लोगों की संख्या बहुत बढ़ गई है। अतः ज्ञान-शुद्धि का प्रयत्न हमें करना चाहिए- सबको करना चाहिए । पर इस जाति का अन्त तो कैसे किया जा सकता है ? " प्रायः सभी कलापूजक इस बात को जानते हैं कि कलापूजन में सभी इन्द्रियों एक-सी योग्यता नहीं रखतीं। स्पर्शेन्द्रिय और स्वादेन्द्रिय इतनी उन्मादकारी और असंयत होती हैं कि कलापूजन में हम उनकी सहायता ले ही नहीं सकते। गन्ध भी स्पर्शसुख ही है। इसलिए गन्धकमाही इन्द्रियों को भी कला-पूजन [ जीवनकला इन्द्रियों में स्थान मिलना शंकास्पद है। अब शेष रही दो ज्ञानेन्द्रियों, श्रवण और नयन । इन दोनों की विलासिता को संयत कर इन्हें कलाग्रह की दीक्षा दी जा सकती है । पर कला का सच्चा आनन्द शब्द या रूप के आस्वाद में नहीं है । कला निर्दोष सृष्टि निर्माण करने ही में आनन्द मानती है। अर्थात् हाथ और कशठ की सहायता से ही कला की श्रेष्ठ-सेश्रेष्ठ उपासना हो सकती है । कण्ठ से स्वर्गीय संगीत ध्वनि निकालने का आनन्द कला का प्रधान आनन्द है। पर जबतक उसकी जाँच नहीं कर लेते, श्रवण द्वारा अनुरंजक शक्ति का तथा भावनाओं को उद्दीपित करने के सामर्थ्य की जाँच नहीं हो जाती तबतक संगीत से आनन्द मिल ही नहीं सकता। संगीत का आनन्द अन्ततोगत्वा इन्द्रियों से परे तो है ही पर वह श्रवण और कण्ठ की सहायता से ही जागृत हो सकता है । सच देखा जाय तो प्रत्येक इन्द्रिय द्वारा कला का आनन्द प्राप्त हो सकता है । पर उसे पहचानने की मनुष्य को शक्ति हो तब । कितनी ही इन्द्रियों का संयम करने से ही एक असाधारण और निर्विषय आनन्द प्राप्त किया जा सकता है। यह मनुष्य-जाति का दुर्देव है कि उसने इस आनन्द का बहुत कम अनुभव किया है । जिस आदमी को खुजली हो जाती है वह खुजलाने को ही आनंद मानता है, पर नीरोग मनुष्य तो शुद्ध आरोग्य आनंद को ही पसंद करता है । जाड़े के दिनों में, जब हम बिलकुल स्वस्थ होते हैं, बिलकुल सुबह उठकर ठण्डे पानी से नहाते है तब सारे शरीर में से-रोम-रोम से आनंद फूटता है। क्या उसे छोड़कर हम खुजलाने के सुख को पसंद करेंगे ? ब्रह्मचर्य का आनंद आरोग्य |
पटना : वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हार के बाद क्रिकेट के मैदान पर धोनी और रोहत शर्मा की मायूसी किसी से छिपी नहीं है। दोनों ही क्रिकेटर के आंखों में आंसू थे। वहीं, उसी सेमीफाइनल मैच में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सलीमी बल्लेबाज रविंद्र जडेजा इंडिया टीम के टूर्नामेंट से बाहर होने के लिए खुद को दोषी मान रहे हैं। मैच हारने के बाद अपने घर लौटे रविंद जडेजा उस मैच के हार से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उनका मानना है कि अगर वो आउट नहीं तो टीम मैच जीत जाती और फाइनल में पहुंच जाती। यह खुलासा रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा सोलंकी ने किया है। रिवाबा अपने पति को इस गम से बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं।
अपने पति के खेल के बारे में रिवाबा ने कहा कि वो हमेशा हर मैच अपना बेस्ट देते हैं।
| पटना : वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हार के बाद क्रिकेट के मैदान पर धोनी और रोहत शर्मा की मायूसी किसी से छिपी नहीं है। दोनों ही क्रिकेटर के आंखों में आंसू थे। वहीं, उसी सेमीफाइनल मैच में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सलीमी बल्लेबाज रविंद्र जडेजा इंडिया टीम के टूर्नामेंट से बाहर होने के लिए खुद को दोषी मान रहे हैं। मैच हारने के बाद अपने घर लौटे रविंद जडेजा उस मैच के हार से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उनका मानना है कि अगर वो आउट नहीं तो टीम मैच जीत जाती और फाइनल में पहुंच जाती। यह खुलासा रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा सोलंकी ने किया है। रिवाबा अपने पति को इस गम से बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं। अपने पति के खेल के बारे में रिवाबा ने कहा कि वो हमेशा हर मैच अपना बेस्ट देते हैं। |
भारतकी श्री समृद्धि और विदेशी
मुगलों का शासनकाल था । भारत अपनी श्री समृद्धि की चरम सीमा पर था और पर्यटकों की कहानियां विदेशियों की लिप्सा भारत के प्रति जागृत कर चुकी थीं। प्रागैतिहासिक काल से ही भारत विविध वस्तुओं के निर्माण की कला प्राप्त कर चुका था और इतिहास साक्षी है कि भारत के ऊनी, रेशमी वस्त्र, धातु के बर्तन, इत्र, रंग, हीरे, जवाहरात, दरेस, जरदोजी के काम, इस्पात आदि विभिन्न पदार्थ अनेक देशों की राजधानियों में चर्चा के विषय हो रहे थे। भारतीय वस्तुएँ अनेक देशों में जाती और भारत लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन रहा था । प्राचीन भारत की श्री समृद्धि का वर्णन करते हुए थार्टन ने लिखा है
"नील नदी की उपत्यका पर पिरामिड के सिर ऊंचा करने के पहले ही, और यूरोपीय सभ्यता के पीठिका स्वरूप यूनान और रोम के निवासी जब जङ्गलों में ही मारे-मारे फिरते थे, भारत तभी से श्री और समृद्धि का केन्द्र था । उद्योग धन्धों में लीन उसकी विशाल जनसंख्या थी, लहलहाने वाली हरीभरी फसल किसानों को निहाल कर देती थी और कठोर वस्तुओं को भी कला-कौशल से सम्पन्न शिल्पी अद्वितीय सुन्दरता और नफासत के साथ बुन देते थे। स्थापत्य कला के शिल्पियों ने वास्तु निर्माण की दिशा में वह दक्षता प्राप्त कर ली थी कि उनके कुशल हाथों द्वारा निर्मित शिल्प हजारों वर्षों के झाड़ झंखाड़ के बाद भी, ज्यों-के-त्यों खड़े | भारतकी श्री समृद्धि और विदेशी मुगलों का शासनकाल था । भारत अपनी श्री समृद्धि की चरम सीमा पर था और पर्यटकों की कहानियां विदेशियों की लिप्सा भारत के प्रति जागृत कर चुकी थीं। प्रागैतिहासिक काल से ही भारत विविध वस्तुओं के निर्माण की कला प्राप्त कर चुका था और इतिहास साक्षी है कि भारत के ऊनी, रेशमी वस्त्र, धातु के बर्तन, इत्र, रंग, हीरे, जवाहरात, दरेस, जरदोजी के काम, इस्पात आदि विभिन्न पदार्थ अनेक देशों की राजधानियों में चर्चा के विषय हो रहे थे। भारतीय वस्तुएँ अनेक देशों में जाती और भारत लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन रहा था । प्राचीन भारत की श्री समृद्धि का वर्णन करते हुए थार्टन ने लिखा है "नील नदी की उपत्यका पर पिरामिड के सिर ऊंचा करने के पहले ही, और यूरोपीय सभ्यता के पीठिका स्वरूप यूनान और रोम के निवासी जब जङ्गलों में ही मारे-मारे फिरते थे, भारत तभी से श्री और समृद्धि का केन्द्र था । उद्योग धन्धों में लीन उसकी विशाल जनसंख्या थी, लहलहाने वाली हरीभरी फसल किसानों को निहाल कर देती थी और कठोर वस्तुओं को भी कला-कौशल से सम्पन्न शिल्पी अद्वितीय सुन्दरता और नफासत के साथ बुन देते थे। स्थापत्य कला के शिल्पियों ने वास्तु निर्माण की दिशा में वह दक्षता प्राप्त कर ली थी कि उनके कुशल हाथों द्वारा निर्मित शिल्प हजारों वर्षों के झाड़ झंखाड़ के बाद भी, ज्यों-के-त्यों खड़े |
बलौदाबाजार। जिले कसडोल विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में स्थित आदर्श प्राथमिक शाला देवरुंग में पदस्थ प्रधान पाठक का अनोखा कारनामा सामने आया है। जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। प्रधान पाठक पिछले 7 माह से कभी-कभी ही स्कूल आते हैं और अपने स्थान पर एक किराए में शिक्षिका रखे हैं जो बच्चों को पढ़ाते है। प्रधान पाठक का नाम समीर कुमार मिश्रा है।
किराए में शिक्षा दे रही रूपाली सोनी ने बताया कि समीर उन्हें महीने में 6000 देते हैं। साथ ही बताया कि, वो पिछले 7 महीने से बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। इस दौरान कोई भी अधिकारी इस स्कूल में निरीक्षण करने नहीं आए हैं। शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही निकल के सामने आ रही है। वही इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सी एस ध्रुव ने जल्द ही जांच कर कार्यवाही करने की बात कही है।
| बलौदाबाजार। जिले कसडोल विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में स्थित आदर्श प्राथमिक शाला देवरुंग में पदस्थ प्रधान पाठक का अनोखा कारनामा सामने आया है। जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। प्रधान पाठक पिछले सात माह से कभी-कभी ही स्कूल आते हैं और अपने स्थान पर एक किराए में शिक्षिका रखे हैं जो बच्चों को पढ़ाते है। प्रधान पाठक का नाम समीर कुमार मिश्रा है। किराए में शिक्षा दे रही रूपाली सोनी ने बताया कि समीर उन्हें महीने में छः हज़ार देते हैं। साथ ही बताया कि, वो पिछले सात महीने से बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। इस दौरान कोई भी अधिकारी इस स्कूल में निरीक्षण करने नहीं आए हैं। शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही निकल के सामने आ रही है। वही इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सी एस ध्रुव ने जल्द ही जांच कर कार्यवाही करने की बात कही है। |
RPSC School Lecturer Recruitment for 102 vacancies (Photo Credit: फाइल)
नई दिल्लीः
राजस्थान सरकार ने शिक्षकों के लिए वैकेंसी निकाली है. राजस्थान लोक सेवा चयन आयोग (RPSC) ने संस्कृत डिपार्टमेंट में फर्स्ट ग्रेड की वैकेंसी निकालीं हैं. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत 102 पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई है. इस वैकेंसी के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख 14 जून तय की गई है. शिक्षकों के लिए निकली इस वैकेंसी के लिए आप खुद भी फॉर्म भर सकते हैं. इसके लिए आपको RPSC की ऑफिशियल वेबसाइट rpsc. rajasthan. gov. in पर जाकर आवेदन करना होगा.
राजस्थान लोक सेवा चयन आयोग (RPSC) ने संस्कृत शिक्षा विभाग में स्कूल लेक्चरर के अलग-अलग विषयों के लिए 102 पदों पर वैकेंसी निकालीं हैं. हिंदी के विषय के लिए 28 पदों पर, इंग्लिश के लिए 26 पदों पर, सामान्य ग्रामर के लिए 25 पदों पर, साहित्य के लिए 21 और व्याकरण के लिए 2 पदों पर भर्तियां निकाली गईं हैं. अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है. इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक नोटिफिकेशन पर जाकर इसके बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं.
इन पदों पर भर्ती के लिए आयुसीमा 21 से 40 साल तक तय की गई है. वहीं, अगर आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य (अनारक्षित) वर्ग एवं राजस्थान के क्रीमीलेयर श्रेणी के अन्य पिछड़ा वर्ग /अति पिछड़ा वर्ग के आवेदक को 350 रुपए, राजस्थान के नॉन क्रीमीलेयर श्रेणी के अन्य पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए को 250 रुपए, राजस्थान की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग तथा जिनकी पारिवारिक आय 2. 50 लाख से कम है, के आवेदक को 150 रुपए देने होने होंगे. उमीदवारों का चतयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा.
ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को आयोग के ऑनलाइन पोर्टल rpsc. rajasthan. gov. in पर उपलब्ध अप्लाई ऑनलाइन लिंक को क्लिक या एस. एस. ओ. पोर्टल sso. rajasthan. gov. in से लॉगिन करना होगा. सिटिजन ऐप में उपलब्ध रिक्रूटमेंट पोर्टल का चयन कर वन टाइम रजिस्ट्रेशन करना होगा. पहली बार वन टाइम रजिस्ट्रेशन करने के लिए अभ्यर्थी के नाम, पिता के नाम, जन्म तिथि, लिंग, सेकेंडरी/समकक्ष परीक्षा एवं आधार कार्ड/पैन कार्ड/वोटर कार्ड/ड्राइविंग लाइसेंस आईडी में से किसी एक आईडी प्रूफ की डीटेल भरनी होगी. परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद वेबसाइट पर ऑनलाइन पेमेंट करना होगा. इसके बाद एप्लीकेशन आईडी जनरेट करनी होगी.
| RPSC School Lecturer Recruitment for एक सौ दो vacancies नई दिल्लीः राजस्थान सरकार ने शिक्षकों के लिए वैकेंसी निकाली है. राजस्थान लोक सेवा चयन आयोग ने संस्कृत डिपार्टमेंट में फर्स्ट ग्रेड की वैकेंसी निकालीं हैं. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत एक सौ दो पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई है. इस वैकेंसी के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख चौदह जून तय की गई है. शिक्षकों के लिए निकली इस वैकेंसी के लिए आप खुद भी फॉर्म भर सकते हैं. इसके लिए आपको RPSC की ऑफिशियल वेबसाइट rpsc. rajasthan. gov. in पर जाकर आवेदन करना होगा. राजस्थान लोक सेवा चयन आयोग ने संस्कृत शिक्षा विभाग में स्कूल लेक्चरर के अलग-अलग विषयों के लिए एक सौ दो पदों पर वैकेंसी निकालीं हैं. हिंदी के विषय के लिए अट्ठाईस पदों पर, इंग्लिश के लिए छब्बीस पदों पर, सामान्य ग्रामर के लिए पच्चीस पदों पर, साहित्य के लिए इक्कीस और व्याकरण के लिए दो पदों पर भर्तियां निकाली गईं हैं. अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है. इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक नोटिफिकेशन पर जाकर इसके बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं. इन पदों पर भर्ती के लिए आयुसीमा इक्कीस से चालीस साल तक तय की गई है. वहीं, अगर आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य वर्ग एवं राजस्थान के क्रीमीलेयर श्रेणी के अन्य पिछड़ा वर्ग /अति पिछड़ा वर्ग के आवेदक को तीन सौ पचास रुपयापए, राजस्थान के नॉन क्रीमीलेयर श्रेणी के अन्य पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए को दो सौ पचास रुपयापए, राजस्थान की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग तथा जिनकी पारिवारिक आय दो. पचास लाख से कम है, के आवेदक को एक सौ पचास रुपयापए देने होने होंगे. उमीदवारों का चतयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा. ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को आयोग के ऑनलाइन पोर्टल rpsc. rajasthan. gov. in पर उपलब्ध अप्लाई ऑनलाइन लिंक को क्लिक या एस. एस. ओ. पोर्टल sso. rajasthan. gov. in से लॉगिन करना होगा. सिटिजन ऐप में उपलब्ध रिक्रूटमेंट पोर्टल का चयन कर वन टाइम रजिस्ट्रेशन करना होगा. पहली बार वन टाइम रजिस्ट्रेशन करने के लिए अभ्यर्थी के नाम, पिता के नाम, जन्म तिथि, लिंग, सेकेंडरी/समकक्ष परीक्षा एवं आधार कार्ड/पैन कार्ड/वोटर कार्ड/ड्राइविंग लाइसेंस आईडी में से किसी एक आईडी प्रूफ की डीटेल भरनी होगी. परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद वेबसाइट पर ऑनलाइन पेमेंट करना होगा. इसके बाद एप्लीकेशन आईडी जनरेट करनी होगी. |
महराजगंजः जनपद के प्रभागीय वन अधिकारी ने एक व्यक्ति द्वारा फ़र्जी वीडियो वायरल कर साजिश के तहत फंसाने, रुपयों की मांग करने, धमकी देने का आरोप लगाया है। जिस पर पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुक़दमा दर्ज कर लिया है।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार महराजगंज के प्रभागीय वन अधिकारी पुष्प कुमार के कोतवाली मे तहरीर दिया है कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें एक तथाकथित महिला द्वारा साजिश के तहत फंसाने का आरोप लगाया है।
वन अधिकारी ने एक नामजद व्यक्ति मनोज तिवारी के खिलाफ तहरीर मे लिखा है वन विभाग ने जब से उसके खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराया है, तब से वो साजिश करता रहता है मुझे फंसाने के लिए और धमकी देकर रुपयों की मांग भी करता है।
वन अधिकारी ने कोतवाली मे तहरीर देकर कारवाई की मांग किया। तहरीर के आधर पर कोतवाली पुलिस ने मु0अ0सं0 0335/23 भा0द0वि0 1860 की धारा 353, 384, 506, 500 ,120B मनोज कुमार तिवारी व एक तथाकथित महिला नाम पता अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया है जाँच पड़ताल मे जुट गई हैं।
| महराजगंजः जनपद के प्रभागीय वन अधिकारी ने एक व्यक्ति द्वारा फ़र्जी वीडियो वायरल कर साजिश के तहत फंसाने, रुपयों की मांग करने, धमकी देने का आरोप लगाया है। जिस पर पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुक़दमा दर्ज कर लिया है। डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार महराजगंज के प्रभागीय वन अधिकारी पुष्प कुमार के कोतवाली मे तहरीर दिया है कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें एक तथाकथित महिला द्वारा साजिश के तहत फंसाने का आरोप लगाया है। वन अधिकारी ने एक नामजद व्यक्ति मनोज तिवारी के खिलाफ तहरीर मे लिखा है वन विभाग ने जब से उसके खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराया है, तब से वो साजिश करता रहता है मुझे फंसाने के लिए और धमकी देकर रुपयों की मांग भी करता है। वन अधिकारी ने कोतवाली मे तहरीर देकर कारवाई की मांग किया। तहरीर के आधर पर कोतवाली पुलिस ने मुशून्यअशून्यसंशून्य तीन सौ पैंतीस/तेईस भाशून्यदशून्यविशून्य एक हज़ार आठ सौ साठ की धारा तीन सौ तिरेपन, तीन सौ चौरासी, पाँच सौ छः, पाँच सौ ,एक सौ बीसB मनोज कुमार तिवारी व एक तथाकथित महिला नाम पता अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया है जाँच पड़ताल मे जुट गई हैं। |
अपना एक पुराना देश-भक्ति गीत!
मेरे प्यारे वतन, जग से न्यारे वतन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।
अपने पावों को रुकने न दूँगा कहीं,
मैं तिरंगे को झुकने न दूँगा कहीं,
तुझपे कुर्बान कर दूँगा मैं जानो तन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।
जन्म पाया यहाँ, अन्न खाया यहाँ,
सुर सजाया यहाँ, गीत गाया यहाँ,
नेक-नीयत से जल से किया आचमन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।
तेरी गोदी में पल कर बड़ा मैं हुआ,
तेरी माटी में चल कर खड़ा मैं हुआ,
मैं तो इक फूल हूँ तू है मेरा चमन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।
स्वप्न स्वाधीनता का सजाये हुए,
लाखों बलिदान माता के जाये हुए,
कोटि-कोटि हैं उनको हमारे नमन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।
"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।
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कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!
और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।
बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको "आपका ब्लॉग" पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।
"देश-भक्ति गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
"दो हल्की-फुल्की परिभाषाएँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
"चलना ही है जीवन!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
।जीवन पथ पर, आगे बढ़ते रहो हमेशा,
साहस से टल जायेंगी सारी ही उलझन।
नदी और तालाब, यही देते हैं सन्देशा,
रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।।
पोथी पढ़ने से जन पण्डित कहलाता है,
बून्द-बून्द मिलकर ही सागर बन जाता है,
प्यार रोपने से ही आता है अपनापन।
रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।।
सर्दी,गर्मी, धरा हमेशा सहती है,
अपना दुखड़ा नही किसी से कहती है,
इसकी ही गोदी में पलते हैं वन कानन।
रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।।
शीतल-मन्द-सुगऩ्ध बयारें चलकर आतीं,
नभ से चल कर मस्त फुहारें जल बरसातीं,
चलने से ही स्वस्थ हमेशा रहता तन-मन।
रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।।
"श्यामपट (BLACK-BOARD" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
"होली के हुड़दंग मेंःमदन विरक्त" (प्रस्तुति-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
"स्लेट और तख़्ती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
।सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,
तख्ती ने दम तोड़ दिया है।
सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,
कलम टाट का छोड़ दिया है।।
दादी कहती एक कहानी,
बीत गई सभ्यता पुरानी,
लकड़ी की पाटी होती थी,
बची न उसकी कोई निशानी।।
फाउण्टेन-पेन गायब हैं,
जेल पेन फल-फूल रहे हैं।
रीत पुरानी भूल रहे हैं,
नवयुग में सब झूल रहे हैं।।
समीकरण सब बदल गये हैं,
शिक्षा का पिट गया दिवाला।
बिगड़ गये परिवेश प्रीत के,
बिखर गई है मंजुल माला।।
"लैपटॉप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
| अपना एक पुराना देश-भक्ति गीत! मेरे प्यारे वतन, जग से न्यारे वतन। मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। अपने पावों को रुकने न दूँगा कहीं, मैं तिरंगे को झुकने न दूँगा कहीं, तुझपे कुर्बान कर दूँगा मैं जानो तन। मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। जन्म पाया यहाँ, अन्न खाया यहाँ, सुर सजाया यहाँ, गीत गाया यहाँ, नेक-नीयत से जल से किया आचमन। मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। तेरी गोदी में पल कर बड़ा मैं हुआ, तेरी माटी में चल कर खड़ा मैं हुआ, मैं तो इक फूल हूँ तू है मेरा चमन। मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। स्वप्न स्वाधीनता का सजाये हुए, लाखों बलिदान माता के जाये हुए, कोटि-कोटि हैं उनको हमारे नमन। मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। "उच्चारण" एक हज़ार नौ सौ छियानवे से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति "दो हल्की-फुल्की परिभाषाएँ" "चलना ही है जीवन!" ।जीवन पथ पर, आगे बढ़ते रहो हमेशा, साहस से टल जायेंगी सारी ही उलझन। नदी और तालाब, यही देते हैं सन्देशा, रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।। पोथी पढ़ने से जन पण्डित कहलाता है, बून्द-बून्द मिलकर ही सागर बन जाता है, प्यार रोपने से ही आता है अपनापन। रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।। सर्दी,गर्मी, धरा हमेशा सहती है, अपना दुखड़ा नही किसी से कहती है, इसकी ही गोदी में पलते हैं वन कानन। रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।। शीतल-मन्द-सुगऩ्ध बयारें चलकर आतीं, नभ से चल कर मस्त फुहारें जल बरसातीं, चलने से ही स्वस्थ हमेशा रहता तन-मन। रुकना तो सड़ना है, चलना ही है जीवन।। "श्यामपट "होली के हुड़दंग मेंःमदन विरक्त" "स्लेट और तख़्ती" ।सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही, तख्ती ने दम तोड़ दिया है। सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है, कलम टाट का छोड़ दिया है।। दादी कहती एक कहानी, बीत गई सभ्यता पुरानी, लकड़ी की पाटी होती थी, बची न उसकी कोई निशानी।। फाउण्टेन-पेन गायब हैं, जेल पेन फल-फूल रहे हैं। रीत पुरानी भूल रहे हैं, नवयुग में सब झूल रहे हैं।। समीकरण सब बदल गये हैं, शिक्षा का पिट गया दिवाला। बिगड़ गये परिवेश प्रीत के, बिखर गई है मंजुल माला।। "लैपटॉप" |
- भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
- माघ शुक्ल पक्ष की चर्तुथी तिथि पर वरदाचतुर्थी व्रत किया जाता है।
- वरदाचतुर्थी पर गौरी देवता की पूजा की जाती है।
- वरदाचतुर्थी व्रत नारियों के लिए होता है।
- गदाधरपद्धति[1], हेमाद्रि[2] में गौरी चतुर्थी का उल्लेख है, जो यही है।
- निर्णयसिन्धु[3] के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चर्तुथी को वरदचतुर्थी है, किन्तु पुरुषार्थचिन्तामणि[4] के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल की चर्तुथी को इस नाम से पुकारा जाता है।
| - भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है। - माघ शुक्ल पक्ष की चर्तुथी तिथि पर वरदाचतुर्थी व्रत किया जाता है। - वरदाचतुर्थी पर गौरी देवता की पूजा की जाती है। - वरदाचतुर्थी व्रत नारियों के लिए होता है। - गदाधरपद्धति[एक], हेमाद्रि[दो] में गौरी चतुर्थी का उल्लेख है, जो यही है। - निर्णयसिन्धु[तीन] के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चर्तुथी को वरदचतुर्थी है, किन्तु पुरुषार्थचिन्तामणि[चार] के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल की चर्तुथी को इस नाम से पुकारा जाता है। |
ऊँट एक बड़ा जानवर होता है, जो विशिष्ट वसायुक्त निक्षेपों को धारण करता है जिसे उसकी पीठ पर 'कूबड़' के रूप में जाना जाता है। ऊँट की दो प्रजातियाँ होती हैं जिनमें ड्रोमेडरी ऊँट भी शामिल है जिसमें एक कूबड़ और बैक्ट्रियन ऊँट होता है जिसमें दो कूबड़ होते हैं। ऊंट की दोनों प्रजातियों को पालतू बनाया गया है। वे दूध, मांस, बाल और ऊन प्रदान करते हैं। इनका उपयोग मानव के परिवहन और भार वहन करने के लिए भी किया जाता है। एक ऊंट की अनूठी विशेषता यह है कि यह गर्म, शुष्क रेगिस्तानों में थोड़ी-थोड़ी भोजन या पानी के साथ लंबी दूरी तय कर सकता है।
भारत में पाए जाने वाले ऊँट एकल-कुबड़े होते हैं जिन्हें ड्रोमेडरी ऊँटों के रूप में भी जाना जाता है। वे आम तौर पर 6 फीट लंबे होते हैं और उनका वजन लगभग 700 किलोग्राम होता है। लंबी-घुमावदार गर्दन, गहरी-संकीर्ण छाती और बड़ा मुंह भारतीय ऊंट की अन्य विशेषताएं हैं। भारतीय ड्रोमेडरी ऊंटों के गले, कंधे और कूबड़ पर बालों की बड़ी मात्रा होती है जो शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में लंबा होता है। एक ऊंट की औसत उम्र चालीस से पचास साल होती है।
ऊँट देश के रेगिस्तान, शुष्क शुष्क क्षेत्रों विशेषकर राजस्थान में पाए जाते हैं। इसीलिए उन्हें 'शिप ऑफ द डेजर्ट' भी कहा जाता है। उन्हें काजीरंगा और डेजर्ट नेशनल पार्क में भी देखा जाता है। ऊंट निडर हैं और समूहों में भटकते देखे जा सकते हैं। प्रत्येक समूह में, एक पुरुष सदस्य होता है जो बाकी सदस्यों पर हावी होता है। बाकी सदस्यों में महिलाएं, उप वयस्क और युवा शामिल हैं। समूह में जाते समय, महिला सदस्य समूह का नेतृत्व करती है, जबकि प्रमुख पुरुष पीछे से समूह का निर्देशन करता है। भारतीय ऊंट चार से पांच साल की उम्र में परिपक्वता प्राप्त कर लेते हैं। वे एक समय में एक संतान को जन्म देते हैं और गर्भ की अवधि लगभग पंद्रह महीने होती है। जन्म के दो घंटे के भीतर बछड़े चलना शुरू कर सकते हैं। मां दो साल तक जवानों की देखभाल करती है जिसके बाद वे अपने दम पर जी सकते हैं।
ऊंट शाकाहारी हैं और कांटेदार पौधों, सूखी घास, अनाज, गेहूं, जई, सूखे पत्ते और बीजों का सेवन करते हैं। वे 3-4 दिनों के लिए भोजन के बिना जा सकते हैं क्योंकि उनके कूबड़ में वसा होता है। ऊंट वसा के ऊतकों के भंडार के रूप में कूबड़ का उपयोग करते हैं। जरूरत के समय में, ऊतकों को चयापचय किया जाता है और ऊंट को ऊर्जा मिलती है। कूबड़ का आकार ऊंट से ऊंट की पौष्टिक अवस्था पर निर्भर करता है। भुखमरी के समय में, कूबड़ आकार में कम हो सकता है और लगभग न के बराबर हो सकता है।
| ऊँट एक बड़ा जानवर होता है, जो विशिष्ट वसायुक्त निक्षेपों को धारण करता है जिसे उसकी पीठ पर 'कूबड़' के रूप में जाना जाता है। ऊँट की दो प्रजातियाँ होती हैं जिनमें ड्रोमेडरी ऊँट भी शामिल है जिसमें एक कूबड़ और बैक्ट्रियन ऊँट होता है जिसमें दो कूबड़ होते हैं। ऊंट की दोनों प्रजातियों को पालतू बनाया गया है। वे दूध, मांस, बाल और ऊन प्रदान करते हैं। इनका उपयोग मानव के परिवहन और भार वहन करने के लिए भी किया जाता है। एक ऊंट की अनूठी विशेषता यह है कि यह गर्म, शुष्क रेगिस्तानों में थोड़ी-थोड़ी भोजन या पानी के साथ लंबी दूरी तय कर सकता है। भारत में पाए जाने वाले ऊँट एकल-कुबड़े होते हैं जिन्हें ड्रोमेडरी ऊँटों के रूप में भी जाना जाता है। वे आम तौर पर छः फीट लंबे होते हैं और उनका वजन लगभग सात सौ किलोग्रामग्राम होता है। लंबी-घुमावदार गर्दन, गहरी-संकीर्ण छाती और बड़ा मुंह भारतीय ऊंट की अन्य विशेषताएं हैं। भारतीय ड्रोमेडरी ऊंटों के गले, कंधे और कूबड़ पर बालों की बड़ी मात्रा होती है जो शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में लंबा होता है। एक ऊंट की औसत उम्र चालीस से पचास साल होती है। ऊँट देश के रेगिस्तान, शुष्क शुष्क क्षेत्रों विशेषकर राजस्थान में पाए जाते हैं। इसीलिए उन्हें 'शिप ऑफ द डेजर्ट' भी कहा जाता है। उन्हें काजीरंगा और डेजर्ट नेशनल पार्क में भी देखा जाता है। ऊंट निडर हैं और समूहों में भटकते देखे जा सकते हैं। प्रत्येक समूह में, एक पुरुष सदस्य होता है जो बाकी सदस्यों पर हावी होता है। बाकी सदस्यों में महिलाएं, उप वयस्क और युवा शामिल हैं। समूह में जाते समय, महिला सदस्य समूह का नेतृत्व करती है, जबकि प्रमुख पुरुष पीछे से समूह का निर्देशन करता है। भारतीय ऊंट चार से पांच साल की उम्र में परिपक्वता प्राप्त कर लेते हैं। वे एक समय में एक संतान को जन्म देते हैं और गर्भ की अवधि लगभग पंद्रह महीने होती है। जन्म के दो घंटे के भीतर बछड़े चलना शुरू कर सकते हैं। मां दो साल तक जवानों की देखभाल करती है जिसके बाद वे अपने दम पर जी सकते हैं। ऊंट शाकाहारी हैं और कांटेदार पौधों, सूखी घास, अनाज, गेहूं, जई, सूखे पत्ते और बीजों का सेवन करते हैं। वे तीन-चार दिनों के लिए भोजन के बिना जा सकते हैं क्योंकि उनके कूबड़ में वसा होता है। ऊंट वसा के ऊतकों के भंडार के रूप में कूबड़ का उपयोग करते हैं। जरूरत के समय में, ऊतकों को चयापचय किया जाता है और ऊंट को ऊर्जा मिलती है। कूबड़ का आकार ऊंट से ऊंट की पौष्टिक अवस्था पर निर्भर करता है। भुखमरी के समय में, कूबड़ आकार में कम हो सकता है और लगभग न के बराबर हो सकता है। |
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में ट्रिपल तलाक का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां दो सगी बहनों को उनके ससुराल वालों ने तलाक देकर घर से निकाल दिया. अब दोनों लड़कियों पर ससुर के साथ हलाला करने का दबाव बनाया जा रहा है. इंकार करने पर एक पति ने घर में घुसकर पीड़ित पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए इस दौरान जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गयी. पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कारवाही शुरू कर दी है.
यह पूरा मामला बुलंदशहर के अकबरपुर गांव का है. जहां रहने वाले एक शख्स ने अपनी दो बेटियों का निकाह धमैड़ा इलाके में रहने वाले दो सगे भाइयों के साथ किया था. कुछ दिन तो सबकुछ सामान्य चलता रहा लेकिन फिर दोनों विवाहिताओं के साथ उनका ससुर छेड़छाड़ करने लगा.
वो अपनी दोनों बहुओं पर पर गलत नजर रखता था. एक बार उसने अपनी बहुओं के साथ दरिंदगी करने की कोशिश भी की लेकिन वो नाकाम हो गया. इसके बाद उसने उन दोनों की शिकायत अपने बेटों से की. दोनों बेटे आपा खो बैठे और अपनी पत्नियों को जमकर पीटा.
मामला इतने पर भी शांत नहीं हुआ. ससुर ने ऐसी साजिश रची कि उसके बेटों ने अपनी पत्नियों को घर से ही निकाल दिया. लड़कियों ने उनकी खूब मिन्नतें की. रहम की भीख मांगी लेकिन ससुराल वालों ने एक न सुनी. बीते दिनों दोनों दामाद पुनः घर आए और उसकी पुत्रियों से फिर से निकाह करने की बात कहते हुए पिता के साथ हलाला करने के लिए दबाव बनाया. जिसका कि दोनों पुत्रियों ने इंकार कर दिया.
वहीं पीड़ित महिला की माँ का कहना है कि 19 नवंबर की शाम को एक आरोपी दामाद घर में घुस आया और उसकी पुत्री से जबरन शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया. इंकार करने पर आरोपी ने उसकी पुत्री से मारपीट की और घर से एक बच्चे को लेकर फरार हो गया.
पीड़िता के परिजनों ने पुलिस को बताया कि बीती 20 अक्तूबर को दोनों दामादों ने उनकी बेटियों को तलाक दे दिया था. अब वे उनकी बेटियों से दोबारा निकाह करने के लिए तो राजी हो गए लेकिन वे लड़कियों पर अपने पिता के साथ हलाला करने का दबाव बना रहे हैं. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
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| उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में ट्रिपल तलाक का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां दो सगी बहनों को उनके ससुराल वालों ने तलाक देकर घर से निकाल दिया. अब दोनों लड़कियों पर ससुर के साथ हलाला करने का दबाव बनाया जा रहा है. इंकार करने पर एक पति ने घर में घुसकर पीड़ित पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए इस दौरान जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गयी. पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कारवाही शुरू कर दी है. यह पूरा मामला बुलंदशहर के अकबरपुर गांव का है. जहां रहने वाले एक शख्स ने अपनी दो बेटियों का निकाह धमैड़ा इलाके में रहने वाले दो सगे भाइयों के साथ किया था. कुछ दिन तो सबकुछ सामान्य चलता रहा लेकिन फिर दोनों विवाहिताओं के साथ उनका ससुर छेड़छाड़ करने लगा. वो अपनी दोनों बहुओं पर पर गलत नजर रखता था. एक बार उसने अपनी बहुओं के साथ दरिंदगी करने की कोशिश भी की लेकिन वो नाकाम हो गया. इसके बाद उसने उन दोनों की शिकायत अपने बेटों से की. दोनों बेटे आपा खो बैठे और अपनी पत्नियों को जमकर पीटा. मामला इतने पर भी शांत नहीं हुआ. ससुर ने ऐसी साजिश रची कि उसके बेटों ने अपनी पत्नियों को घर से ही निकाल दिया. लड़कियों ने उनकी खूब मिन्नतें की. रहम की भीख मांगी लेकिन ससुराल वालों ने एक न सुनी. बीते दिनों दोनों दामाद पुनः घर आए और उसकी पुत्रियों से फिर से निकाह करने की बात कहते हुए पिता के साथ हलाला करने के लिए दबाव बनाया. जिसका कि दोनों पुत्रियों ने इंकार कर दिया. वहीं पीड़ित महिला की माँ का कहना है कि उन्नीस नवंबर की शाम को एक आरोपी दामाद घर में घुस आया और उसकी पुत्री से जबरन शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया. इंकार करने पर आरोपी ने उसकी पुत्री से मारपीट की और घर से एक बच्चे को लेकर फरार हो गया. पीड़िता के परिजनों ने पुलिस को बताया कि बीती बीस अक्तूबर को दोनों दामादों ने उनकी बेटियों को तलाक दे दिया था. अब वे उनकी बेटियों से दोबारा निकाह करने के लिए तो राजी हो गए लेकिन वे लड़कियों पर अपने पिता के साथ हलाला करने का दबाव बना रहे हैं. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. |
UPSC Civil Services 2022 Main DAF Form: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सर्विस मेन एग्जाम, 2022 के लिए डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म (DAF- 2) जारी कर दिया है. जो उम्मीदवार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में पास हुए थे, वे अब यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsc. gov. in पर जाकर यूपीएससी डीएएफ फॉर्म (UPSC DAF 2022) भर सकते हैं. डीएएफ फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 15 जुलाई 2022 शाम 05 बजे तक है.
यूपीएससी सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स भर्ती परीक्षा 2022 में पास होने वाले उम्मीदवारों को अब यूपीएससी मुख्य परीक्षा (UPSC IAS/IFS Main Exam 2022) के लिए बुलाया जाएगा. इससे पहले पास हुए उम्मीदवारों को डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म (UPSC DAF Online 2022) भरना होगा. बिना डीएएफ के किसी भी उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा. डीएएफ फॉर्म भरने का तरीका नीचे देख सकते हैं.
स्टेप 1: सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsc. gov. in या upsconline. nic. in पर जाएं.
स्टेप 2: होम पेज पर, 'Whats New' सेक्शन में 'Civil Services (Main) Examination, 2022' लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3: यहां यूपीएससी DAF I के लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 4: नया पेज खुल जाएगा, यहां 'Civil Services (Main) Examination, 2022 proceed' लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 5: अब अपना रोल नंबर, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके लॉग इन करें.
स्टेप 6: यूपीएससी डीएएफ-1 फॉर्म खुल जाएगा, इसे भरें.
स्टेप 7: जरूरी डॉक्यूटमेंट्स अपलोड करें और सबमिट करें.
स्टेप 8: आपका फॉर्म जमा हो जाएगा, आगे के लिए कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके अपने पास रखें.
बता दें कि यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2022 05 जून को आयोजित की गई थी जबकि रिजल्ट 22 जून 2022 को आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया था. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे जारी की गई यूपीएससी मेन नोटिफिकेशन को देखें जिसमें शैक्षणिक योग्यता, डीएएफ 1 और डीएएफ 2 के लिए निर्देश, सिलेबस, परीक्षा स्थान, सभी स्तरों के लिए वेतनमान आदि जैसे सभी विवरण शामिल हैं. यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2022 सितंबर में आयोजित की जा सकती है.
| UPSC Civil Services दो हज़ार बाईस Main DAF Form: संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सर्विस मेन एग्जाम, दो हज़ार बाईस के लिए डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म जारी कर दिया है. जो उम्मीदवार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दो हज़ार बाईस में पास हुए थे, वे अब यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsc. gov. in पर जाकर यूपीएससी डीएएफ फॉर्म भर सकते हैं. डीएएफ फॉर्म भरने की आखिरी तारीख पंद्रह जुलाई दो हज़ार बाईस शाम पाँच बजे तक है. यूपीएससी सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स भर्ती परीक्षा दो हज़ार बाईस में पास होने वाले उम्मीदवारों को अब यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा. इससे पहले पास हुए उम्मीदवारों को डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म भरना होगा. बिना डीएएफ के किसी भी उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा. डीएएफ फॉर्म भरने का तरीका नीचे देख सकते हैं. स्टेप एक: सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsc. gov. in या upsconline. nic. in पर जाएं. स्टेप दो: होम पेज पर, 'Whats New' सेक्शन में 'Civil Services Examination, दो हज़ार बाईस' लिंक पर क्लिक करें. स्टेप तीन: यहां यूपीएससी DAF I के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप चार: नया पेज खुल जाएगा, यहां 'Civil Services Examination, दो हज़ार बाईस proceed' लिंक पर क्लिक करें. स्टेप पाँच: अब अपना रोल नंबर, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके लॉग इन करें. स्टेप छः: यूपीएससी डीएएफ-एक फॉर्म खुल जाएगा, इसे भरें. स्टेप सात: जरूरी डॉक्यूटमेंट्स अपलोड करें और सबमिट करें. स्टेप आठ: आपका फॉर्म जमा हो जाएगा, आगे के लिए कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करके अपने पास रखें. बता दें कि यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा दो हज़ार बाईस पाँच जून को आयोजित की गई थी जबकि रिजल्ट बाईस जून दो हज़ार बाईस को आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया था. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे जारी की गई यूपीएससी मेन नोटिफिकेशन को देखें जिसमें शैक्षणिक योग्यता, डीएएफ एक और डीएएफ दो के लिए निर्देश, सिलेबस, परीक्षा स्थान, सभी स्तरों के लिए वेतनमान आदि जैसे सभी विवरण शामिल हैं. यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा दो हज़ार बाईस सितंबर में आयोजित की जा सकती है. |
तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
किश्तवाड़/जम्मू : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बृहस्पतिवार सुबह चीड़ का पेड़ एक तंबू पर गिरने से घुमंतू समुदाय के एक परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। घटना केशवन में भालना वन क्षेत्र में हुई। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण पेड़ उखड़ कर तंबू पर गिर गया।
किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खलील पोसवाल ने कहा, " वनीय क्षेत्र में खानाबदोश परिवार द्वारा लगाए गए तंबू पर चीड़ का पेड़ गिर गया। आज तड़के इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। " उन्होंने बताया कि यह परिवार अपनी भेड़-बकरियों के साथ दाचन की ओर जा रहा था लेकिन भारी बारिश के कारण उन्हें भालना के जंगल में रुकना पड़ा।
किश्तवाड़ के उपायुक्त देवांश यादव ने बताया कि तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यादव ने कहा, " पुलिस का एक दल तुरंत मौके पर पहुंचा और बचाव अभियान शुरू किया। " उन्होंने बताया कि शवों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है।
| तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। किश्तवाड़/जम्मू : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बृहस्पतिवार सुबह चीड़ का पेड़ एक तंबू पर गिरने से घुमंतू समुदाय के एक परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। घटना केशवन में भालना वन क्षेत्र में हुई। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण पेड़ उखड़ कर तंबू पर गिर गया। किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खलील पोसवाल ने कहा, " वनीय क्षेत्र में खानाबदोश परिवार द्वारा लगाए गए तंबू पर चीड़ का पेड़ गिर गया। आज तड़के इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। " उन्होंने बताया कि यह परिवार अपनी भेड़-बकरियों के साथ दाचन की ओर जा रहा था लेकिन भारी बारिश के कारण उन्हें भालना के जंगल में रुकना पड़ा। किश्तवाड़ के उपायुक्त देवांश यादव ने बताया कि तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यादव ने कहा, " पुलिस का एक दल तुरंत मौके पर पहुंचा और बचाव अभियान शुरू किया। " उन्होंने बताया कि शवों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है। |
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में फूलपुर स्थित इफको के प्लांट में मंगलवार की देर रात एक पाइप में तकनीकी खराबी के कारण अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। इस घटना से 15 कर्मचारी बेहोश हो गए। दो अधिकारियों की गैस रिसाव के कारण मौत हो चुकी है। अचेत हुए 15 लोगों को शहर के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बताया जा रहा है कि रात 11 बजे के आसपास अमोनिया गैस पाइप का कोई पार्ट मिस हो गया। इस कारण अमोनिया गैस का रिसाव होने लगा। कर्मचारी बीपी सिंह इस रिसाव को रोकने के लिए गए, लेकिन वे वहीं अचेत होकर गिर पड़े। साथ ही वह गंभीर रूप से झुलस गए। फिर बीपी सिंह को बचाने की कोशिश में अभिनंदन भी झुलस गए।
तब तक मौके पर हड़कंप मच गया। मौजूद सभी कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। तब तक इफको के पी 1 यूनिट में अमोनया गैस का रिसाव हो चुका था. इससे कुल 15 कर्मचारी बीमार हो गए। इनमें कई अचेत हो चुके थे। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची एक्सपर्ट की टीम ने हालात पर काबू पाया। इफको के जनसपर्क अधिकारी विश्वजीत श्रीवास्तव ने गैस लीक की बात की पुष्टि की।
गैस रिसाव की सूचना अफसरों और पुलिस को मिली तो वे मौके पर पहुंचे। किसी तरह लोगों को फैक्ट्री से बाहर निकालकर शहर के एक अस्पताल ले जाया गया। इनमें से असिस्टेंट मैनेजर (यूरिया) वीपी सिंह व डिप्टी मैनेजर (ऑफसाइट) अभिनंदन कुमार की हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ घंटों बाद दोनों की मौत हो गई।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में फूलपुर स्थित इफको के प्लांट में मंगलवार की देर रात एक पाइप में तकनीकी खराबी के कारण अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। इस घटना से पंद्रह कर्मचारी बेहोश हो गए। दो अधिकारियों की गैस रिसाव के कारण मौत हो चुकी है। अचेत हुए पंद्रह लोगों को शहर के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि रात ग्यारह बजे के आसपास अमोनिया गैस पाइप का कोई पार्ट मिस हो गया। इस कारण अमोनिया गैस का रिसाव होने लगा। कर्मचारी बीपी सिंह इस रिसाव को रोकने के लिए गए, लेकिन वे वहीं अचेत होकर गिर पड़े। साथ ही वह गंभीर रूप से झुलस गए। फिर बीपी सिंह को बचाने की कोशिश में अभिनंदन भी झुलस गए। तब तक मौके पर हड़कंप मच गया। मौजूद सभी कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। तब तक इफको के पी एक यूनिट में अमोनया गैस का रिसाव हो चुका था. इससे कुल पंद्रह कर्मचारी बीमार हो गए। इनमें कई अचेत हो चुके थे। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची एक्सपर्ट की टीम ने हालात पर काबू पाया। इफको के जनसपर्क अधिकारी विश्वजीत श्रीवास्तव ने गैस लीक की बात की पुष्टि की। गैस रिसाव की सूचना अफसरों और पुलिस को मिली तो वे मौके पर पहुंचे। किसी तरह लोगों को फैक्ट्री से बाहर निकालकर शहर के एक अस्पताल ले जाया गया। इनमें से असिस्टेंट मैनेजर वीपी सिंह व डिप्टी मैनेजर अभिनंदन कुमार की हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ घंटों बाद दोनों की मौत हो गई। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
हुमायू की समस्याए 77
अच्छा नही था । मुहम्मद खान देखा कि पारस्परिक झगडा से लाभ उठावर वह मिया हसन की जागीर पर अधिकार कर सकता है। उसने फरीद से अपने वकील द्वारा कहलाया कि वह इस झगडे का निर्णय करेगा तथा जो उसका निर्णय स्वीकार नहीं करेगा उसके साथ वह कठोरता का बर्ताव करेगा। फरीद ने मुहम्मद खाको सूचित किया कि वह अपने सौतेले भाइयो को अधिक से अधिक जागीर देने के लिए तैयार है, किंतु वह परगने के शासन को विभाजित नहीं करेगा । मुहम्मद याने निश्चित किया कि सैय बल द्वारा वह फरीद से सुलेमान वो अधिकार दिलाएगा। इस सूचना से फरीद चितित हुआ तथा उसने किसी शक्तिशाली सरक्षक की सहायता प्राप्त करने का निश्चय किया । इसी समय पानीपत वे युद्ध तथा उसमे इब्राहीम की मृत्यु की सूचना मिली । फरीद ने देखा कि बिहार वे शासक सुल्तान मुहम्मद ( बहार खा) के अतिरिक्त अन्य कोई व्यक्ति उसकी सहायता नही कर सकता । सुल्तान मुहम्मद इस समय स्वतन शासक के रूप मे बिहार पर शासन करता था। फरीद न सुल्तान मुहम्मद के यहां नौकरी कर लो । अपनी योग्यता से उसने सुल्तान मुहम्मद को प्रसन्न कर लिया तथा उसका दाहिना हाथ बन गया ।" इसी समय उसने बडी बहादुरी से एक शेर मारा जिससे प्रसन्न होकर सुल्तान मुहम्मद ने उसे 'शेर खा को उपाधि दो । सुल्तान मुहम्मद ने उसे 3 अपन राज्य का वकील तथा जपने पुत्र का शिक्षक (जताली+) नियुक्त किया।
शेर या के इस उत्पप से सुल्तान मुहम्मद के जय अमीरा म विद्वेष फैल गया । उन लोगा ने सुल्तान मुहम्मद से शेर खा की शिकायत की । शेर खा इस समय अपनी जागीर पर चला गया था, जिससे उह विरोध का अवसर मिला । किंतु सुल्तान मुहम्मद शेर खा से इतना प्रभावित तथा प्रसन था कि उसने सुलेमान वे पक्ष मे शेर खा पर आक्रमण नहीं किया।
चौध वे जागोरदार मुहम्मद खा न प्रारम्भ म जागीर वो भाइया म विभाजित करने की सलाह दी। शेर खा इसके लिए तैयार नहीं था तथा उसने
1 सुल्तान मुहम्मद की उपाधि धारण करने के पूर्व उसका सही नाम क्या था, यह निश्चित रूप से पता नहीं चलता । अव्वास उसे बहार खा, असकिन बिहार या कहता है तथा कम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, भाग 4 मे उसे बहादुर खा लिखा गया है ।
2 वानूनगो, शेरशाह प० 31, अवास खा, तारीखे शेरशाही, इलियट तथा डासन, 4, पृ० 325
3 इलियट तथा डासन 4 प० 325 | हुमायू की समस्याए सतहत्तर अच्छा नही था । मुहम्मद खान देखा कि पारस्परिक झगडा से लाभ उठावर वह मिया हसन की जागीर पर अधिकार कर सकता है। उसने फरीद से अपने वकील द्वारा कहलाया कि वह इस झगडे का निर्णय करेगा तथा जो उसका निर्णय स्वीकार नहीं करेगा उसके साथ वह कठोरता का बर्ताव करेगा। फरीद ने मुहम्मद खाको सूचित किया कि वह अपने सौतेले भाइयो को अधिक से अधिक जागीर देने के लिए तैयार है, किंतु वह परगने के शासन को विभाजित नहीं करेगा । मुहम्मद याने निश्चित किया कि सैय बल द्वारा वह फरीद से सुलेमान वो अधिकार दिलाएगा। इस सूचना से फरीद चितित हुआ तथा उसने किसी शक्तिशाली सरक्षक की सहायता प्राप्त करने का निश्चय किया । इसी समय पानीपत वे युद्ध तथा उसमे इब्राहीम की मृत्यु की सूचना मिली । फरीद ने देखा कि बिहार वे शासक सुल्तान मुहम्मद के अतिरिक्त अन्य कोई व्यक्ति उसकी सहायता नही कर सकता । सुल्तान मुहम्मद इस समय स्वतन शासक के रूप मे बिहार पर शासन करता था। फरीद न सुल्तान मुहम्मद के यहां नौकरी कर लो । अपनी योग्यता से उसने सुल्तान मुहम्मद को प्रसन्न कर लिया तथा उसका दाहिना हाथ बन गया ।" इसी समय उसने बडी बहादुरी से एक शेर मारा जिससे प्रसन्न होकर सुल्तान मुहम्मद ने उसे 'शेर खा को उपाधि दो । सुल्तान मुहम्मद ने उसे तीन अपन राज्य का वकील तथा जपने पुत्र का शिक्षक नियुक्त किया। शेर या के इस उत्पप से सुल्तान मुहम्मद के जय अमीरा म विद्वेष फैल गया । उन लोगा ने सुल्तान मुहम्मद से शेर खा की शिकायत की । शेर खा इस समय अपनी जागीर पर चला गया था, जिससे उह विरोध का अवसर मिला । किंतु सुल्तान मुहम्मद शेर खा से इतना प्रभावित तथा प्रसन था कि उसने सुलेमान वे पक्ष मे शेर खा पर आक्रमण नहीं किया। चौध वे जागोरदार मुहम्मद खा न प्रारम्भ म जागीर वो भाइया म विभाजित करने की सलाह दी। शेर खा इसके लिए तैयार नहीं था तथा उसने एक सुल्तान मुहम्मद की उपाधि धारण करने के पूर्व उसका सही नाम क्या था, यह निश्चित रूप से पता नहीं चलता । अव्वास उसे बहार खा, असकिन बिहार या कहता है तथा कम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, भाग चार मे उसे बहादुर खा लिखा गया है । दो वानूनगो, शेरशाह पशून्य इकतीस, अवास खा, तारीखे शेरशाही, इलियट तथा डासन, चार, पृशून्य तीन सौ पच्चीस तीन इलियट तथा डासन चार पशून्य तीन सौ पच्चीस |
बाजार ने की अच्छी शुरुआत ( Image Source : PTI Photo )
Share Market Opening on 10 May: दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है. हालांकि घरेलू मोर्चे पर राहत के संकेत दिख रहे हैं और बाजार रिकवरी दिखा रहा है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख घरेलू सूचकांकों बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की है.
घरेलू शेयर बाजार आज का कारोबार शुरू होने के पहले से ही तेजी का संकेत का दिखा रहा था. सिंगापुर में एनएसई निफ्टी का वायदा एसजीक्स निफ्टी (SGX Nifty) सुबह 20 अंक की तेजी में कारोबार कर रहा था और. इससे संकेत मिल रहा था कि घरेलू बाजार आज अच्छी शुरुआत कर सकता है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रो-ओपन सेशन (Pre-Open Session) में बढ़त में थे. सेशन शुरू होने से पहले सेंसेक्स करीब 80 अंक चढ़ा हुआ था तो निफ्टी करीब 50 अंक की तेजी में था.
जैसे ही कारोबार की शुरुआत हुई, दोनों प्रमुख सूचकांक ठीक-ठाक बढ़त में चले गए. सुबह 09:15 बजे जब बाजार में कारोबार की शुरुआत हुई, तो बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स करीब 200 अंक के फायदे के साथ 61,950 अंक के पार निकल गया. निफ्टी करीब 40 अंक मजबूत होकर 18,300 अंक के पार रहा. आज के कारोबार में घरेलू बाजार में तेजी बनी रहने की उम्मीद है.
दुनिया भर के बाजारों में गिरावट का दौर बना हुआ है. मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट का सिलसिला जारी रहा. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0. 17 फीसदी और एसएंडपी 500 में 0. 46 फीसदी की गिरावट देखी गई थी, वहीं टेक फोकस्ड नासडैक कंपोजिट इंडेक्स भी 0. 63 फीसदी का नुकसान रहा था. आज के कारोबार में एशियाई बाजारों में भी गिरावट है. अमेरिका में अहम आर्थिक आंकड़े जारी होने से पहले इन्वेस्टर्स सतर्कता बरत रहे हैं.
शुरुआती कारोबार की बात करें तो बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़िया सुधार दिख रहा है. सुबह 09:20 बजे सेंसेक्स की 30 में से 11 कंपनियों के शेयर लाल निशान में थे. शुरुआती कारोबार में 19 कंपनियों के शेयर तेजी में थे. बैंकिंग शेयर रिकवरी दिखा रहे हैं. सेंसेक्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी में इंडसइंड बैंक है. यह 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा हुआ है. वहीं टाटा मोटर्स, पारवग्रिड जैसे शेयरों में भी अच्छी तेजी है.
| बाजार ने की अच्छी शुरुआत Share Market Opening on दस मई: दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है. हालांकि घरेलू मोर्चे पर राहत के संकेत दिख रहे हैं और बाजार रिकवरी दिखा रहा है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख घरेलू सूचकांकों बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की है. घरेलू शेयर बाजार आज का कारोबार शुरू होने के पहले से ही तेजी का संकेत का दिखा रहा था. सिंगापुर में एनएसई निफ्टी का वायदा एसजीक्स निफ्टी सुबह बीस अंक की तेजी में कारोबार कर रहा था और. इससे संकेत मिल रहा था कि घरेलू बाजार आज अच्छी शुरुआत कर सकता है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रो-ओपन सेशन में बढ़त में थे. सेशन शुरू होने से पहले सेंसेक्स करीब अस्सी अंक चढ़ा हुआ था तो निफ्टी करीब पचास अंक की तेजी में था. जैसे ही कारोबार की शुरुआत हुई, दोनों प्रमुख सूचकांक ठीक-ठाक बढ़त में चले गए. सुबह नौ:पंद्रह बजे जब बाजार में कारोबार की शुरुआत हुई, तो बीएसई का तीस शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स करीब दो सौ अंक के फायदे के साथ इकसठ,नौ सौ पचास अंक के पार निकल गया. निफ्टी करीब चालीस अंक मजबूत होकर अट्ठारह,तीन सौ अंक के पार रहा. आज के कारोबार में घरेलू बाजार में तेजी बनी रहने की उम्मीद है. दुनिया भर के बाजारों में गिरावट का दौर बना हुआ है. मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट का सिलसिला जारी रहा. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में शून्य. सत्रह फीसदी और एसएंडपी पाँच सौ में शून्य. छियालीस फीसदी की गिरावट देखी गई थी, वहीं टेक फोकस्ड नासडैक कंपोजिट इंडेक्स भी शून्य. तिरेसठ फीसदी का नुकसान रहा था. आज के कारोबार में एशियाई बाजारों में भी गिरावट है. अमेरिका में अहम आर्थिक आंकड़े जारी होने से पहले इन्वेस्टर्स सतर्कता बरत रहे हैं. शुरुआती कारोबार की बात करें तो बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़िया सुधार दिख रहा है. सुबह नौ:बीस बजे सेंसेक्स की तीस में से ग्यारह कंपनियों के शेयर लाल निशान में थे. शुरुआती कारोबार में उन्नीस कंपनियों के शेयर तेजी में थे. बैंकिंग शेयर रिकवरी दिखा रहे हैं. सेंसेक्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी में इंडसइंड बैंक है. यह दो फीसदी से ज्यादा चढ़ा हुआ है. वहीं टाटा मोटर्स, पारवग्रिड जैसे शेयरों में भी अच्छी तेजी है. |
संबलपुर। ओडिशा माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से बुधवार से आरंभ हुए दसवीं की परीक्षा में संबलपुर जिला के कुल 11 हजार 940 विद्यार्थी शामिल हुए। परीक्षा को लेकर छात्र एवं छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया। परीक्षा के सफल संचालन हेतु पूरे संबलपुर जिला में कुल 71 परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। जिसमें 211 स्कूलों के 11 हजार 186 नियमित, 692 अनियमित एवं 3 सीसी एक्सरेगुलर छात्र परीक्षा दे रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार जिला के बामड़ा ब्लॉक में 10, धनकौड़ा ब्लॉक में 3, जमनकिरा ब्लॉक में 7, जुजुमुरा ब्लॉक में 4, कुचिंडा ब्लॉक में 9, मानेश्वर ब्लॉक में 5, नाकटीदेउल ब्लॉक में 5, रेढ़ाखोल ब्लॉक में 8, रेंगाली ब्लॉक में 4 एवं संबलपुर नगर निगम में 16 परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। प्रश्न पत्र की सुरक्षा एवं सही समय पर परीक्षा केन्द्र में पहुंचाने हेतु 6 नोडल केन्द्र खोला गया है। परीक्षा में नकल रोकने हेतु स्क्वायड टीम का गठन किया गया है। टीम के सदस्य बुधवार को विभिन्न स्कूलों में गए और परीक्षा का निरीक्षण किया। जिला के 26 परीक्षा केन्द्रों को सीसीटीवी कैमरे से लैश किया गया है। कुल मिलाकर बुधवार को परीक्षा शांतिपूर्ण वातावरण में सपंन्न हो गया।
| संबलपुर। ओडिशा माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से बुधवार से आरंभ हुए दसवीं की परीक्षा में संबलपुर जिला के कुल ग्यारह हजार नौ सौ चालीस विद्यार्थी शामिल हुए। परीक्षा को लेकर छात्र एवं छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया। परीक्षा के सफल संचालन हेतु पूरे संबलपुर जिला में कुल इकहत्तर परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। जिसमें दो सौ ग्यारह स्कूलों के ग्यारह हजार एक सौ छियासी नियमित, छः सौ बानवे अनियमित एवं तीन सीसी एक्सरेगुलर छात्र परीक्षा दे रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार जिला के बामड़ा ब्लॉक में दस, धनकौड़ा ब्लॉक में तीन, जमनकिरा ब्लॉक में सात, जुजुमुरा ब्लॉक में चार, कुचिंडा ब्लॉक में नौ, मानेश्वर ब्लॉक में पाँच, नाकटीदेउल ब्लॉक में पाँच, रेढ़ाखोल ब्लॉक में आठ, रेंगाली ब्लॉक में चार एवं संबलपुर नगर निगम में सोलह परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। प्रश्न पत्र की सुरक्षा एवं सही समय पर परीक्षा केन्द्र में पहुंचाने हेतु छः नोडल केन्द्र खोला गया है। परीक्षा में नकल रोकने हेतु स्क्वायड टीम का गठन किया गया है। टीम के सदस्य बुधवार को विभिन्न स्कूलों में गए और परीक्षा का निरीक्षण किया। जिला के छब्बीस परीक्षा केन्द्रों को सीसीटीवी कैमरे से लैश किया गया है। कुल मिलाकर बुधवार को परीक्षा शांतिपूर्ण वातावरण में सपंन्न हो गया। |
खेतों को चीरती एक सिंगल लेन सड़क के दाईं ओर सिर्फ़ फैक्ट्रियां ही फ़ैक्ट्रियाँ दिखती हैं. यह रास्ता गुजरात के साबरकांठा ज़िले का है.
हिम्मतनगर शहर के आगे बसा ढूंढर गाँव, पांच किलोमीटर भीतर चलने पर एक चाय और पान का ढाबा मिलता है, जिसके बाहर कुर्सियों पर गुजरात पुलिस के सिपाही बैठे हैं.
ठीक सामने एक सेरामिक पाउडर बनाने वाली फ़ैक्ट्री के बड़े गेट पर पुलिस का ताला है और भीतर जली हुई कारें पड़ी हैं. साइकिल या स्कूटी से निकलने वाला हर शख़्स, एक नज़र इस फ़ैक्ट्री और दूसरी नज़र ढाबे पर मारे बिना आगे नहीं जाता.
अगर कोई रुकता है तो पुलिसवाला चिल्लाता है, "आगे बढ़ो. तमाशा नहीं चल रहा". वजह 28 सितंबर की एक घटना है जिसने पूरे गुजरात को झझकोर कर रख दिया है.
प्रदेश में रोज़गार की वजह से रह रहे हज़ारों उत्तर भारतीय प्रवासियों को आनन-फानन में घर लौटना पड़ा है.
हमेशा की तरह उस दिन भी इस फ़ैक्ट्री में शिफ़्टों में काम चल रहा था. काम करने वाले मज़दूर बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे, जिन्हें आम तौर पर कैम्पस में रहने के लिए कमरे भी दिए जाते हैं.
उस शाम छह बजे जब शिफ़्ट ख़त्म हुई तब बिहार के रहने वाले एक 19 वर्षीय मज़दूर ने रोज़ की तरह बाहर के ढाबे का रुख किया. ढाबे पर नियमित रूप से बैठने वाले कुछ लोगों के मुताबिक़, "ज़्यादातर मज़दूर अपना काम खत्म कर पान-बीड़ी और देसी शराब की फ़िराक में बाहर निकलते हैं".
उस शाम भी ढाबे के पास कुछ लोगों ने देसी शराब पी थी जिसे पास के ढूंढर गाँव से नशाबंदी के बावजूद आसानी से "जुगाड़ लिया जाता है".
इस गाँव में हम सुबह साढ़े दस बजे पहुंचे थे और चार-पांच ऐसे लोगों से बात हुई जिनके मुँह से शराब की गंध आ रही थी.
"बापू, हमारे यहाँ कोई नहीं पीता. अगर आप को चाहिए तो दिलवाने की कोशिश कर देंगे", 61 साल के एक गाँव वाले ने मुझसे कहा.
तो वारदात की शाम जब कुछ लोगों ने कथित तौर पर शराब पी, उसके करीब एक घंटे बाद ढाबे के मालिक की 14 महीने की नातिन गायब हुई थी. चारों तरफ़ खोज की गई और परिवार वालों ने पुलिस थाने का रुख किया.
पुलिस आई और जांच शुरू होने तक रात के आठ बज चुके थे, किसी को कोई सुराग नहीं मिल रहा था. इस ठाकोर बहुल जनसंख्या वाले ढूंढर गाँव के लोग भी जमा हो गए क्योंकि ढाबे के मालिक इसी समुदाय से हैं और उसी गाँव के रहने वाले भी.
साढ़े आठ बजे के आस-पास कुछ लोगों को 19 वर्षीय मज़दूर एक दूसरी सड़क से पैदल आता दिखा. शक तब बढ़ा जब एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उस मज़दूर के कपड़े पर खून के धब्बे देखे.
पूछताछ शुरू हुई और पुलिस के मुताबिक़ थोड़ी देर में उस मज़दूर ने "हमें वो जगह भी दिखाई जहाँ बच्ची घायल अवस्था में पड़ी थी. फिर उसे गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया".
- यह भी पढ़ें ।'पीटने वाले कह रहे थे, गुजरात खाली करो'
उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी.
इसके बाद उग्र भीड़ ने ढाबे के सामने वाली फ़ैक्ट्री में घुस कर आग लगाई, गाड़िया जलाईं और मज़दूरों के रहने वाले कोठरियों को भी तहस-नहस कर दिया.
सोशल मीडिया पर ख़बर आग की तरह फैली थी उस रात. अगले दिन ठाकोर समुदाय के लोगों ने आंदोलन की घोषणा भी कर दी. घटनास्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर शक्ति नगर में आज भी लोगों के पास वो व्हाट्सऐप मैसेज हैं जिनमें कहा गया था, "भैयाजी लोगों को यहाँ से निकालना होगा".
गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय, मूलतः उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी लोगों को अक्सर 'भैयाजी" कहा जाता है.
सोशल मीडिया पर कथित तौर से ऐसे संदेश भी फैलने लगे जिसमें कहा गया, "बाहरी लोगों की बुरी नज़र गुजराती महिलाओं पर पड़ चुकी है".
शायद यही वजह है कि गुजरात के गृह मंत्री ने बीबीसी को बताया कि, "ग़लत और भड़काऊ खबरें फैलाने के आरोप में हमने साइबर क्राइम सेल में 21 मामले दर्ज किए हैं और जांच जारी है".
अगले तीन दिन के भीतर ही उत्तर भारतीयों पर हमले शुरू हो चुके थे. साबरकांठा, मोरबी, बनासकांठा और मेहसाणा जैसे गुजरात के कई ज़िलों में डेढ़ हफ्ते के भीतर दो दर्जन से भी ज़्यादा हमले की वारदातें हुईं.
हज़ारों मज़दूरों को गुजरात छोड़कर भागना पड़ा और जो नहीं भागे, वे घरों में डरकर बैठे रहे.
शक्तिनगर इलाके के पूरन चंद उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर के रहने वाले हैं और दो हफ्ते बाद भी उन दिनों को याद कर सिहर उठते हैं.
"हमने अपना सामान एक गुजराती मित्र के यहाँ पहुंचा दिया, ताकि लोग अगर घर में आग दें तो नुकसान कम हो. परिवार को यूपी में हर दो घंटे पर फ़ोन कर बता रहे थे कि सब ठीक है, चिंता न करो. लेकिन मन काँप रहा था कि अगर गुस्साई भीड़ पहुँच गई, तो कहाँ भागेंगे".
इलाके में आज भी दर्जनों घरों में ताला लगा है और गलियां वीरान हैं. ऐसा ही मंज़र उत्तर गुजरात के कई ज़िलों की दूसरी बस्तियों में भी है, जहाँ उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रदेशों से आए लोग रहते आए हैं.
राजधानी अहमदाबाद, जिसे सुरक्षा के लिहाज़ से सबसे महफूज़ माना जाता है, वहां भी कई इलाकों में उत्तर भारतीय या हिंदी-भाषी लोगों पर हमले की खबरें आती रही हैं.
उत्तर भारतीय विकास परिषद के प्रमुख श्याम सिंह ठाकुर ने बताया, "जिस तरह से लोगों को भागना पड़ा वो पहले कभी नहीं देखा-सुना गया. लोग अपनी नौकरियां और कारोबार छोड़ कर भागे हैं. बहुतों के पास तो लौटने का किराया तक नहीं था. यूपी और बिहार लौट चुके लोगों से मेरी बात हो रही है लेकिन वे वापसी पर कुछ भी बात नहीं करना चाहते".
प्रदेश की भाजपा सरकार ने मामले पर लगातार सफाई दी है और उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हालात पर काबू पा लिया गया है और अगर कुछ लोग प्रदेश छोड़ कर गए भी हैं तो वे त्योहारों-छुट्टियों के बाद वापस लौट भी आएँगे. हमारी सरकार उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगी".
प्रदेश के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा का दावा है कि उत्तर भारतीय प्रवासियों के ख़िलाफ़ हिंसा करने के आरोप में "अब तक 541 गिरफ्तारियां हुई हैं और 67 मामले दर्ज किए गए हैं. व्हाट्सएप ग्रुप्स पर हमारी निगरानी है और पूरे प्रदेश में सुरक्षा स्तर बढ़ा दिया गया है".
कहा जा रहा है कि इस बलात्कार के बाद 1 अक्टूबर को ओबीसी ठाकोर समुदाय के नेता और कॉंग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर के एक 'भड़काऊ भाषण' से हिंसा बढ़ गई.
खुद अल्पेश ठाकोर ने बाद में इसका खंडन किया और बीबीसी से कहा कि, "मुझ पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं. हम और हमारा समुदाय तो चाहता है कि उत्तर भारतीय प्रवासी हमेशा की तरह यहाँ खुश रहे और हम लोग उनके अंदर इस बात का भरोसा जताने की ही कोशिश करते रहे हैं".
मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और आरोपों का जो लंबा दौर शुरू हुआ वो आज भी जारी है.
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी सरकार अल्पेश की 'ठाकोर सेना' पर इल्ज़ाम लगा रही है जबकि कॉंग्रेस को लगता है कि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा किया है.
काँग्रेस में शामिल हो चुके अल्पेश ठाकोर ने 2011 में क्षत्रिय ठाकोर सेना नाम का संगठन बनाया था और उत्तर गुजरात के चार ज़िलों में बहुसंख्यक ठाकोर समुदाय के हितों की बात करनी शुरू कर दी थी.
जानकारों का मानना है कि अल्पेश ठाकोर के लोकप्रिय होने में इस समुदाय की महिलाओं का बड़ा हाथ है क्योंकि अल्पेश ने अवैध और ज़हरीली शराब पीने और बनाने के ख़िलाफ़ ज़ोर-शोर से अभियान चलाया है.
लेकिन माना जाता है कि गुजरात के कई दूसरे ज़िलों की तरह ही ठाकोर बहुल ज़िलों में भी अवैध देसी शराब का काफ़ी धंधा फल-फूल रहा है.
साबरकांठा के तीन स्थानीय पत्रकारों ने हमें बताया, "उस रात और अगले कुछ दिनों तक फ़ैक्ट्रियों पर जो ताबड़तोड़ हमले हुए, हमले करने वाली भीड़ में कई लोग देसी शराब के नशे में थे".
बीबीसी ने अल्पेश ठाकोर से इस घटना और ठाकोर इलाके में अवैध शराब की बिक्री के बारे में सवाल किया.
उनका जवाब था, "हमारे समुदाय ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाई थीं और आंदोलन एक दिन बाद वापस ले लिया था जब सरकार ने मांगें स्वीकार कर ली थीं. उसके तीन दिन बाद जिन लोगों ने हिंसा की उससे ठाकोर समुदाय का लेना-देना नहीं है. मैं खुद अवैध शराब के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ता आया हूँ और आगे भी लड़ता रहूंगा. ख़ास तौर से बताना चाहूँगा कि अब ठाकोर समुदाय के 80 प्रतिशत लोग इस लत को छोड़ चुके हैं".
इधर, ढाबा चलाने वाले उस बुज़ुर्ग नाना को आज इस बात का अफ़सोस है कि 14 महीने की नातिन को, "चारपाई पर छोड़ वे दुकान का बल्ब जलाने के लिए पीछे क्यों मुड़े थे".
दरअसल, उनकी बेटी अपनी दूध पीती बच्ची के साथ उसी सुबह पड़ोस वाले गाँव से मिलने के लिए ढूंढर आई थी.
घटना के दो हफ़्ते बाद पास की कुछ फ़ैक्ट्रियों मे राजस्थान के मूल निवासी और घटना के बाद भाग गए सेरामिक टाइल बनाने वाले कुछ मज़दूर वापस लौट आए हैं.
नाम न लिए जाने की शर्त पर एक ने कहा, "साहब पूरे फ़साद की जड़ शराब है. यहाँ अवैध शराब की भट्टियां आए दिन पकड़ी जाती हैं. झगडे-फ़साद इसी वजह से होते हैं. उस ढाबे पर शाम को लगभग सभी लोग शराब पिए बैठे मिलते हैं जहाँ पर ये वारदात हुई है".
हालाँकि ढाबे के मालिक उस बुज़ुर्ग ने इस बात की जानकारी होने से इनकार किया और कहा, "मुझे नहीं पता कौन पीता था और कौन नहीं. कुछ लोग कभी-कभार पीकर आते ज़रूर थे. इलाके में इतने सारे बाहरी मज़दूर हैं, मैं सबको नहीं पहचानता".
हालाँकि गुजरात में शराब बेचने या पीने पर पाबंदी है. सिर्फ बाहरी व्यक्ति कागज़ी कार्रवाई पूरी करने के बाद परमिट हासिल करके, सीमित मात्रा में शराब ख़रीद सकता है.
लेकिन इसका एक दूसरा पहलू ये भी है कि सरकार पिछले कई वर्षों से शराब की अवैध तस्करी से निबटने की कोशिशें करती रही है.
प्रदेश के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने बीबीसी से कहा, "हमने शराबबंदी को ज़्यादा सख़्त किया है और इसके लिए क़ानून में संशोधन किया है. व्हाट्सऐप ग्रुप्स के ज़रिए जागरुगता बढ़ाने और नियमित मॉनिटरिंग के ज़रिए इसके अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना हमारा उद्देश्य रहा है".
28 सितंबर को हुई कथित बलात्कार की इस घटना के दो दिन बाद इलाके में देसी शराब की अवैध भट्टी पर छापा मारा गया.
वायड विधानसभा से कांग्रेसी विधायक तवलसिंह जाला और परवाली के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह बोरैया पीड़ित बच्ची के परिवार से मिलने हिम्मतनगर पहुँचने वाले थे.
करीब सात किलोमीटर पहले दोनों ने NH-8 के किनारे बसे एक गाँव में चल रही अवैध शराब की भट्टी पर खुद ही रेड डाली और पुलिस ने पहुँच कर ज़हरीली शराब बनाने वाली इस भट्टी को ज़ब्त किया. लेकिन जानकारों का कहना है कि पूरे राज्य में ऐसी भट्टियां सैकड़ों की तादाद में हैं.
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| खेतों को चीरती एक सिंगल लेन सड़क के दाईं ओर सिर्फ़ फैक्ट्रियां ही फ़ैक्ट्रियाँ दिखती हैं. यह रास्ता गुजरात के साबरकांठा ज़िले का है. हिम्मतनगर शहर के आगे बसा ढूंढर गाँव, पांच किलोमीटर भीतर चलने पर एक चाय और पान का ढाबा मिलता है, जिसके बाहर कुर्सियों पर गुजरात पुलिस के सिपाही बैठे हैं. ठीक सामने एक सेरामिक पाउडर बनाने वाली फ़ैक्ट्री के बड़े गेट पर पुलिस का ताला है और भीतर जली हुई कारें पड़ी हैं. साइकिल या स्कूटी से निकलने वाला हर शख़्स, एक नज़र इस फ़ैक्ट्री और दूसरी नज़र ढाबे पर मारे बिना आगे नहीं जाता. अगर कोई रुकता है तो पुलिसवाला चिल्लाता है, "आगे बढ़ो. तमाशा नहीं चल रहा". वजह अट्ठाईस सितंबर की एक घटना है जिसने पूरे गुजरात को झझकोर कर रख दिया है. प्रदेश में रोज़गार की वजह से रह रहे हज़ारों उत्तर भारतीय प्रवासियों को आनन-फानन में घर लौटना पड़ा है. हमेशा की तरह उस दिन भी इस फ़ैक्ट्री में शिफ़्टों में काम चल रहा था. काम करने वाले मज़दूर बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे, जिन्हें आम तौर पर कैम्पस में रहने के लिए कमरे भी दिए जाते हैं. उस शाम छह बजे जब शिफ़्ट ख़त्म हुई तब बिहार के रहने वाले एक उन्नीस वर्षीय मज़दूर ने रोज़ की तरह बाहर के ढाबे का रुख किया. ढाबे पर नियमित रूप से बैठने वाले कुछ लोगों के मुताबिक़, "ज़्यादातर मज़दूर अपना काम खत्म कर पान-बीड़ी और देसी शराब की फ़िराक में बाहर निकलते हैं". उस शाम भी ढाबे के पास कुछ लोगों ने देसी शराब पी थी जिसे पास के ढूंढर गाँव से नशाबंदी के बावजूद आसानी से "जुगाड़ लिया जाता है". इस गाँव में हम सुबह साढ़े दस बजे पहुंचे थे और चार-पांच ऐसे लोगों से बात हुई जिनके मुँह से शराब की गंध आ रही थी. "बापू, हमारे यहाँ कोई नहीं पीता. अगर आप को चाहिए तो दिलवाने की कोशिश कर देंगे", इकसठ साल के एक गाँव वाले ने मुझसे कहा. तो वारदात की शाम जब कुछ लोगों ने कथित तौर पर शराब पी, उसके करीब एक घंटे बाद ढाबे के मालिक की चौदह महीने की नातिन गायब हुई थी. चारों तरफ़ खोज की गई और परिवार वालों ने पुलिस थाने का रुख किया. पुलिस आई और जांच शुरू होने तक रात के आठ बज चुके थे, किसी को कोई सुराग नहीं मिल रहा था. इस ठाकोर बहुल जनसंख्या वाले ढूंढर गाँव के लोग भी जमा हो गए क्योंकि ढाबे के मालिक इसी समुदाय से हैं और उसी गाँव के रहने वाले भी. साढ़े आठ बजे के आस-पास कुछ लोगों को उन्नीस वर्षीय मज़दूर एक दूसरी सड़क से पैदल आता दिखा. शक तब बढ़ा जब एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उस मज़दूर के कपड़े पर खून के धब्बे देखे. पूछताछ शुरू हुई और पुलिस के मुताबिक़ थोड़ी देर में उस मज़दूर ने "हमें वो जगह भी दिखाई जहाँ बच्ची घायल अवस्था में पड़ी थी. फिर उसे गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया". - यह भी पढ़ें ।'पीटने वाले कह रहे थे, गुजरात खाली करो' उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. इसके बाद उग्र भीड़ ने ढाबे के सामने वाली फ़ैक्ट्री में घुस कर आग लगाई, गाड़िया जलाईं और मज़दूरों के रहने वाले कोठरियों को भी तहस-नहस कर दिया. सोशल मीडिया पर ख़बर आग की तरह फैली थी उस रात. अगले दिन ठाकोर समुदाय के लोगों ने आंदोलन की घोषणा भी कर दी. घटनास्थल से करीब दस किलोग्राममीटर दूर शक्ति नगर में आज भी लोगों के पास वो व्हाट्सऐप मैसेज हैं जिनमें कहा गया था, "भैयाजी लोगों को यहाँ से निकालना होगा". गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय, मूलतः उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी लोगों को अक्सर 'भैयाजी" कहा जाता है. सोशल मीडिया पर कथित तौर से ऐसे संदेश भी फैलने लगे जिसमें कहा गया, "बाहरी लोगों की बुरी नज़र गुजराती महिलाओं पर पड़ चुकी है". शायद यही वजह है कि गुजरात के गृह मंत्री ने बीबीसी को बताया कि, "ग़लत और भड़काऊ खबरें फैलाने के आरोप में हमने साइबर क्राइम सेल में इक्कीस मामले दर्ज किए हैं और जांच जारी है". अगले तीन दिन के भीतर ही उत्तर भारतीयों पर हमले शुरू हो चुके थे. साबरकांठा, मोरबी, बनासकांठा और मेहसाणा जैसे गुजरात के कई ज़िलों में डेढ़ हफ्ते के भीतर दो दर्जन से भी ज़्यादा हमले की वारदातें हुईं. हज़ारों मज़दूरों को गुजरात छोड़कर भागना पड़ा और जो नहीं भागे, वे घरों में डरकर बैठे रहे. शक्तिनगर इलाके के पूरन चंद उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर के रहने वाले हैं और दो हफ्ते बाद भी उन दिनों को याद कर सिहर उठते हैं. "हमने अपना सामान एक गुजराती मित्र के यहाँ पहुंचा दिया, ताकि लोग अगर घर में आग दें तो नुकसान कम हो. परिवार को यूपी में हर दो घंटे पर फ़ोन कर बता रहे थे कि सब ठीक है, चिंता न करो. लेकिन मन काँप रहा था कि अगर गुस्साई भीड़ पहुँच गई, तो कहाँ भागेंगे". इलाके में आज भी दर्जनों घरों में ताला लगा है और गलियां वीरान हैं. ऐसा ही मंज़र उत्तर गुजरात के कई ज़िलों की दूसरी बस्तियों में भी है, जहाँ उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रदेशों से आए लोग रहते आए हैं. राजधानी अहमदाबाद, जिसे सुरक्षा के लिहाज़ से सबसे महफूज़ माना जाता है, वहां भी कई इलाकों में उत्तर भारतीय या हिंदी-भाषी लोगों पर हमले की खबरें आती रही हैं. उत्तर भारतीय विकास परिषद के प्रमुख श्याम सिंह ठाकुर ने बताया, "जिस तरह से लोगों को भागना पड़ा वो पहले कभी नहीं देखा-सुना गया. लोग अपनी नौकरियां और कारोबार छोड़ कर भागे हैं. बहुतों के पास तो लौटने का किराया तक नहीं था. यूपी और बिहार लौट चुके लोगों से मेरी बात हो रही है लेकिन वे वापसी पर कुछ भी बात नहीं करना चाहते". प्रदेश की भाजपा सरकार ने मामले पर लगातार सफाई दी है और उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हालात पर काबू पा लिया गया है और अगर कुछ लोग प्रदेश छोड़ कर गए भी हैं तो वे त्योहारों-छुट्टियों के बाद वापस लौट भी आएँगे. हमारी सरकार उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगी". प्रदेश के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा का दावा है कि उत्तर भारतीय प्रवासियों के ख़िलाफ़ हिंसा करने के आरोप में "अब तक पाँच सौ इकतालीस गिरफ्तारियां हुई हैं और सरसठ मामले दर्ज किए गए हैं. व्हाट्सएप ग्रुप्स पर हमारी निगरानी है और पूरे प्रदेश में सुरक्षा स्तर बढ़ा दिया गया है". कहा जा रहा है कि इस बलात्कार के बाद एक अक्टूबर को ओबीसी ठाकोर समुदाय के नेता और कॉंग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर के एक 'भड़काऊ भाषण' से हिंसा बढ़ गई. खुद अल्पेश ठाकोर ने बाद में इसका खंडन किया और बीबीसी से कहा कि, "मुझ पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं. हम और हमारा समुदाय तो चाहता है कि उत्तर भारतीय प्रवासी हमेशा की तरह यहाँ खुश रहे और हम लोग उनके अंदर इस बात का भरोसा जताने की ही कोशिश करते रहे हैं". मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और आरोपों का जो लंबा दौर शुरू हुआ वो आज भी जारी है. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी सरकार अल्पेश की 'ठाकोर सेना' पर इल्ज़ाम लगा रही है जबकि कॉंग्रेस को लगता है कि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा किया है. काँग्रेस में शामिल हो चुके अल्पेश ठाकोर ने दो हज़ार ग्यारह में क्षत्रिय ठाकोर सेना नाम का संगठन बनाया था और उत्तर गुजरात के चार ज़िलों में बहुसंख्यक ठाकोर समुदाय के हितों की बात करनी शुरू कर दी थी. जानकारों का मानना है कि अल्पेश ठाकोर के लोकप्रिय होने में इस समुदाय की महिलाओं का बड़ा हाथ है क्योंकि अल्पेश ने अवैध और ज़हरीली शराब पीने और बनाने के ख़िलाफ़ ज़ोर-शोर से अभियान चलाया है. लेकिन माना जाता है कि गुजरात के कई दूसरे ज़िलों की तरह ही ठाकोर बहुल ज़िलों में भी अवैध देसी शराब का काफ़ी धंधा फल-फूल रहा है. साबरकांठा के तीन स्थानीय पत्रकारों ने हमें बताया, "उस रात और अगले कुछ दिनों तक फ़ैक्ट्रियों पर जो ताबड़तोड़ हमले हुए, हमले करने वाली भीड़ में कई लोग देसी शराब के नशे में थे". बीबीसी ने अल्पेश ठाकोर से इस घटना और ठाकोर इलाके में अवैध शराब की बिक्री के बारे में सवाल किया. उनका जवाब था, "हमारे समुदाय ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाई थीं और आंदोलन एक दिन बाद वापस ले लिया था जब सरकार ने मांगें स्वीकार कर ली थीं. उसके तीन दिन बाद जिन लोगों ने हिंसा की उससे ठाकोर समुदाय का लेना-देना नहीं है. मैं खुद अवैध शराब के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ता आया हूँ और आगे भी लड़ता रहूंगा. ख़ास तौर से बताना चाहूँगा कि अब ठाकोर समुदाय के अस्सी प्रतिशत लोग इस लत को छोड़ चुके हैं". इधर, ढाबा चलाने वाले उस बुज़ुर्ग नाना को आज इस बात का अफ़सोस है कि चौदह महीने की नातिन को, "चारपाई पर छोड़ वे दुकान का बल्ब जलाने के लिए पीछे क्यों मुड़े थे". दरअसल, उनकी बेटी अपनी दूध पीती बच्ची के साथ उसी सुबह पड़ोस वाले गाँव से मिलने के लिए ढूंढर आई थी. घटना के दो हफ़्ते बाद पास की कुछ फ़ैक्ट्रियों मे राजस्थान के मूल निवासी और घटना के बाद भाग गए सेरामिक टाइल बनाने वाले कुछ मज़दूर वापस लौट आए हैं. नाम न लिए जाने की शर्त पर एक ने कहा, "साहब पूरे फ़साद की जड़ शराब है. यहाँ अवैध शराब की भट्टियां आए दिन पकड़ी जाती हैं. झगडे-फ़साद इसी वजह से होते हैं. उस ढाबे पर शाम को लगभग सभी लोग शराब पिए बैठे मिलते हैं जहाँ पर ये वारदात हुई है". हालाँकि ढाबे के मालिक उस बुज़ुर्ग ने इस बात की जानकारी होने से इनकार किया और कहा, "मुझे नहीं पता कौन पीता था और कौन नहीं. कुछ लोग कभी-कभार पीकर आते ज़रूर थे. इलाके में इतने सारे बाहरी मज़दूर हैं, मैं सबको नहीं पहचानता". हालाँकि गुजरात में शराब बेचने या पीने पर पाबंदी है. सिर्फ बाहरी व्यक्ति कागज़ी कार्रवाई पूरी करने के बाद परमिट हासिल करके, सीमित मात्रा में शराब ख़रीद सकता है. लेकिन इसका एक दूसरा पहलू ये भी है कि सरकार पिछले कई वर्षों से शराब की अवैध तस्करी से निबटने की कोशिशें करती रही है. प्रदेश के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने बीबीसी से कहा, "हमने शराबबंदी को ज़्यादा सख़्त किया है और इसके लिए क़ानून में संशोधन किया है. व्हाट्सऐप ग्रुप्स के ज़रिए जागरुगता बढ़ाने और नियमित मॉनिटरिंग के ज़रिए इसके अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना हमारा उद्देश्य रहा है". अट्ठाईस सितंबर को हुई कथित बलात्कार की इस घटना के दो दिन बाद इलाके में देसी शराब की अवैध भट्टी पर छापा मारा गया. वायड विधानसभा से कांग्रेसी विधायक तवलसिंह जाला और परवाली के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह बोरैया पीड़ित बच्ची के परिवार से मिलने हिम्मतनगर पहुँचने वाले थे. करीब सात किलोमीटर पहले दोनों ने NH-आठ के किनारे बसे एक गाँव में चल रही अवैध शराब की भट्टी पर खुद ही रेड डाली और पुलिस ने पहुँच कर ज़हरीली शराब बनाने वाली इस भट्टी को ज़ब्त किया. लेकिन जानकारों का कहना है कि पूरे राज्य में ऐसी भट्टियां सैकड़ों की तादाद में हैं. |
कारण आधुनिक यूरोपकी दशा रोमन साम्राज्य के अधीन पश्चिमीय यूरोपकी दशासे बहुत बदल गयी। इन परिवर्तनों में से कुछ एक यह हैं(१) कुछ राष्ट्रोंने एक संघ स्थापित किया जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकारकी राष्ट्रीयताओं का प्रादुर्भाव हो रहा था । उस संघने रोम साम्राज्यका स्थान ग्रहण किया । इन लोगोंने अपने शासनमें इटली, गाल, जर्मनी तथा ब्रिटनके मतभेदोंको स्थान नहीं दिया। अनवस्थित मनसबदारी जो गत अन्धकारयुग में शासन कर रही थी, राजशक्तिके आधिपत्य के नीचे झुक गयी। जर्मनी और इटली इस राजशक्ति के नीचे न थे और पश्चिमी यूरोप में एक साम्राज्य स्थापित करने की कोई आशा भा न थो ।
( २ ) एक प्रकार से धर्म संस्था भी रोम साम्राज्यका अधिकार हथिया रही थी । पोपने पश्चमी यूरोपके बहुत से लोगोंको अपने अधीन कर लिया था और सामन्त । कोण न्याय तथा शान्तिके स्थापन में समर्थ न थे, इस कारण उसने राज्यका भी समस्त कार्य अपने हाथ में ले लिया । स्वच्छन्द राजाकी भाँति मध्ययुगकी धर्मसंस्था सबसे अधिक शक्तिशाली हो गयी थी। इसकी राजनीतिक दशा तेरहवीं शदाब्दीके आरम्भमें तृतीय इनोसेन्टके समय उच्च शिखर पर पहुँच गयी थी । तेरहवीं शताब्दी - के समाप्ति के पूर्व ही संगठन इतना शक्तिशाली हो गया था कि देखने से प्रतीत होता था कि वह पोन तथा पादरियों के हाथ से शंघ्र शासन अधिकार छीन लेगा और उनके हाथ में केवल धर्मकर्य रह जायगा ।
(३) पादरी तथा नाइट लोगोंके संघके साथ-साथ एक नयी सामाजिक संस्था और उत्पन्न हुई । इससे कृषक दासोंको सुधार, नगरोंकी स्थापना और व्यवसायको उन्नति हुई और वणिकों तथा कारीगरों को भी अवसर मिला कि वे भी द्रव्योपार्जन कर विख्यात तथा प्रभावशाली हो जायँ। आधुनिक विद्वानोंका यहीं से प्रादुर्भाव होना प्रारम्भ होता है ।
(४) नाना प्रकारकी आधुनिक भाषाओंका प्रयोग लेख में होने लगा । जर्मनों के आक्रमणके ६ सौ वर्ष पर्यन्त लैटिनका प्रयोग होता रहा, परन्तु ग्यारहवीं तथा बादकी शताब्दियोंमें बोल-चालकी भाषाने पुरानी भाषाओंका स्थान ले लिया । इसका परिणाम यह हुआ कि वे साधारण लोग भी जो प्राचीन रोमन भाषाकी गूढ़ताको नहीं समझते थे, अब फेन्च, प्रोवॅकल, जर्मन, अंग्रेजी, स्पेनिश तथा इटली भाषा में लिखी कथाओंका आस्वाद भी लेने लगे ।
यद्यपि शिक्षाका प्रबन्ध अब भी पादरियोंके ही हाथमें था और साधारण लोग लिखने-पढ़ने लगे थे, तथापि वाङ्मय-साहित्य परसे पादरियोंका एकाधिकार धीरे-धीरे लुप्त होने लगा ।
(५) संवत् ११५७ ( सन् ११००ई० ) से ही छात्र लोग शिक्षकों के निकट
एकत्र होने लगे और रोमकी धर्म-व्यवस्था, तर्क, दर्शन तथा धर्म शास्त्रकी शिक्षा भी लेने लगे । अरस्तू के ग्रन्थ एकत्र किये गये और छात्रवर्ग विद्याकी समस्त शाखाओं में उत्साह के साथ उसके ग्रन्थोंका मनन करने लगे। उसी समय में आधुनिक सभ्यता के विशेष अंगरूप विद्यापीठोंका भी प्रादुर्भाव हुआ था ।
(६) अब शिक्षक लोग केवल अरस्तूके प्राप्त निबन्धोसे ही सन्तुष्ट न हो सके इससे उन्होंने स्वयं अपने प्रयत्नसे विद्याकी उन्नति करनी चाही। रोजर वेकन तथा उसके समकालिक विद्वान् एक वैज्ञानिक वर्ग के अंग थे। इस वर्गने विज्ञानकी सभी शाखाओं में उन्नतितक पहुँचनेका मार्ग तैयार कर दिया । वे आधुनिक समयकी भो एक मान प्रतिष्ठा हैं ।
(७) बारहवीं तथा तेरहवीं शताब्दी के गिरजोंका शिल्प देखकर उस समयकी कलाभिरुचिका पता चलता है। यह सब किसी प्राचीन कलाका अनुकरण नहीं था, परन्तु उस समय के शिल्पी तथा मूर्तिकारोंकी स्वमूलक रचना थी ।
अध्याय १९
चौदहवीं तथा पन्द्रहवी शताब्दी के यूरोपीय इतिहासका वर्णन निम्नलिखित क्रमसे किया गया है । ( १ ) आंग्लं देश तथा फ्रांसका वर्णन एक साथ किया गया है, क्योंकि आंग्ल देशके राजा लोग फ्रांस के राज्यपर भी अपना अधिकार जतल ते थे । दोनों प्रदेशों के बीच शतवर्षीय युद्धसे प्रथम दोनों देशों में दुर्व्यवहार और कलह उत्पन्न होता है और पश्चात् इनकी सुलह होती है । ( २ ) दूसरे पोपके अधिकार तथा कान्स्टेन्सकी सभा धर्म संस्थाकी उन्नति के प्रयत्नके इतिहासका वर्णन है । (३) इसके बाद जागृतेकी उन्नतिका वर्णन है । विशेषतः इटलीके उन नगरोंका संक्षेपतः वर्णन है जो उस समय में विज्ञान वृद्धि के अग्रसर नेता थे। इसके साथ-साथ पन्द्रहवीं शताब्दी के बाद के भाग में छापाखाना तथा भूगोल - विद्या की नवीन खोजें और उनसे हुई उन्नतिका वर्णन है । ( ४ ) चतुर्थ भाग में सोलहवीं शताब्दी के यूरोपका वर्णन है। इससे मार्टिन लूथरके नेतृत्व में हुए धर्म संस्था के नवीन आन्दोलनको पाठक भली भांति समझ सकेंगे ।
सबसे पहले आंग्ल देशकी दशा देखना उचित है। प्रथम शासकों का ग्रेट ब्रिटेन के एक अंशपर ही शासन था, उनके राज्य के पहाड़ी प्रान्त था । इस प्रान्तमें आदि ब्रिटन जातिके वे लोग बसे थे जिनको जर्मन आक्रामक लोग परास्त नहीं कर सके थे। इसके उत्तर में स्काटलैण्डका राज्य था । यह राज्य भी स्वतन्त्र था। वह केवल कभी-कभी आंग्लदेशीय शासकको अधिपति मानकर उच्च श्रेणीका सामन्तराज्य मान लिया जाता था। प्रथम एडवर्डने वेलजको सर्वदाके लिए तथा स्काटलैण्डको कुछ समयके लिए जीत लिया था ।
कई शताब्दियों-पर्यन्त आंग्ल देश तथा वेल्जकी सीमाओपर लड़ाई होती रही । विजयी विलियमुने आवश्यक समझकर वेल्जकी सीमापर "अर्लंडम" स्थापित किया था और चेस्टर श्रृजवरी तथा मन्मथ नार्मन लोगोंके लिए अच्छी रोक थी । वेल्जचालोंकी लगातार आक्रान्तिसे अंग्रेजी राजा क्रुद्ध होकर वेल्जपर चढ़ाई करना चाहते थे, परन्तु शत्रुपर विजय पाना सरल नहीं था, क्योंकि वे लोग स्नोडानके समीप बर्फीली पहाड़ी कन्दराओं में छिप जाते थे और अंग्रेजी सैनिकोंको वहाँकी जंगलो भूमिमें भूखों मरना पड़ता था। वेल्जवासी सफलता के साथ इतने अधिक समयतक
शक्तिशाली अंग्रेजी सेनाओंका सामना करते रहे; इससे वेल्ज केवळ उनके रक्षास्थान ही नहीं थे, परन्तु वहाँके भाटोंने भी अपने उत्साइभरे कवित्तोंसे वहाँके लोगोंको उत्तेजित किया था। इन लोगोंको विश्वास था कि जो आंग्ल देश एंगल तथा सैक्सनोंके आगमनके पूर्व इनके अधिकार में था उसको ये लोग पुनः जीत लेंगे ।
सिंहासनारूढ़ होते ही प्रथम एडवर्डने आज्ञापत्र भेजा कि वेल्ज जातिका अधिपति लूएलिन जो वेल्जका युवराज कहलाता है हमारे दरबार में आकर सिर झुकावे । लुएलिन प्रभावशाली तथा योग्य पुरुष था। उसने राजाकी आज्ञा न मानी। इसपर एडवर्डने वेल्ज देशपर आक्रमण किया। लगातार दो युद्धों के बाद वेल्जका दम उखड़ गया। लूएलिन युद्ध में मारा गया और उसके साथ वेल्जकी स्वतन्त्रता भी सदाके लिए लुप्त हो गयी। एडवर्डने सम्पूर्ण देशको शहरों में बाँट दिया और आंग्ल देशके नियम तथा प्रथाओं का प्रचार किया। उसको साम-उपायसे इतनी सफलता हुई कि एक शताब्दी - पर्यन्त उस देश में आकान्ति हुई ही नहीं । पश्चात् उसने अपने पुत्रको वेल्जका युवराज बनाया और उसी समयसे आंग्ल देशके राज्य के उत्तराधिरीको 'वेजके युवराज' ( प्रिंस आव वेल्स ) की उपाधि मिलती है ।
स्काटलैण्डका जीतना वेल्जके जीतनेसे भी अधिक कठिन था। स्काटलैण्डका प्राचीन इतिहास बड़ा जटिक है । जिस समय एंगल तथा सैकसन लोग आंग्ल देश में आये, उस समय फोर्थ के मुहानेके उत्तरके पहाड़ी प्रदेश में पिक्टनामी केल्टिके जाति बसी हुई थी। पश्चिमीय तटपर एक छोटासा राज्य आयरिश केल्ट लोगोंका था जो स्काट कहाते थे । दशवीं शताब्दी के आरम्भमें पिक्ट लोगोंने स्काट लोगोंको अपना शासक मान लिया था और इतिहास लेखकोंने हाईलैण्ड नामका प्रदेशको स्काट लोगोंका देश लिखना प्रारम्भ कर दिया था। समयके परिवर्तनके साथ-साथ आंग्ल देश के राजाओंने अपने लाभार्थं सीमापरके कुछ नगर स्काटवालोंको दे दिये, जिसमें ट्वीड् तथा फोर्थ नदीकी खाड़ी के मध्यका लोलैंण्ड बामक प्रदेश भी था । इसके निवासी अंग्रेज थे और वे लोग आंग्ल भाषा बोलते थे परन्तु हाईलैण्डवाले अगतक भी गेलिक भाषा बोलते हैं ।
स्काटलैण्ड के इतिहास में यह एक बड़े महत्वकी घटना थी कि उसके रराजा लोग हाईलैण्डमें न रहकर कोलॅण्डमें रहे और उन्होंने अपनी राजधानी दुर्भेद्य दुर्गान्वित एडिनवराको नियत किया था। विजयी विलियमके सिंहासनपर बैठते ही अनेक अग्ल देशीय तथा असन्तुष्ट नार्मन अमीर लोग भी इंगलैंण्डकी सीमाको पार कर लोलैण्ड में आ बसे । इन्होंने बड़े-बड़े कुटुम्ब स्थापित किये। इनमें वेलियल तथा ब्रूस अत्यन्त विख्यात हैं जिन्होंने बादको स्काटलैण्डकी स्वतन्त्रता के लिए भीषण युद्ध भी किये । बारहवीं तथा तेरहवीं शताब्दी में यह देश, विशेषतः इसके दक्षिणी प्रान्त इन ऍग्लो | कारण आधुनिक यूरोपकी दशा रोमन साम्राज्य के अधीन पश्चिमीय यूरोपकी दशासे बहुत बदल गयी। इन परिवर्तनों में से कुछ एक यह हैं कुछ राष्ट्रोंने एक संघ स्थापित किया जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकारकी राष्ट्रीयताओं का प्रादुर्भाव हो रहा था । उस संघने रोम साम्राज्यका स्थान ग्रहण किया । इन लोगोंने अपने शासनमें इटली, गाल, जर्मनी तथा ब्रिटनके मतभेदोंको स्थान नहीं दिया। अनवस्थित मनसबदारी जो गत अन्धकारयुग में शासन कर रही थी, राजशक्तिके आधिपत्य के नीचे झुक गयी। जर्मनी और इटली इस राजशक्ति के नीचे न थे और पश्चिमी यूरोप में एक साम्राज्य स्थापित करने की कोई आशा भा न थो । एक प्रकार से धर्म संस्था भी रोम साम्राज्यका अधिकार हथिया रही थी । पोपने पश्चमी यूरोपके बहुत से लोगोंको अपने अधीन कर लिया था और सामन्त । कोण न्याय तथा शान्तिके स्थापन में समर्थ न थे, इस कारण उसने राज्यका भी समस्त कार्य अपने हाथ में ले लिया । स्वच्छन्द राजाकी भाँति मध्ययुगकी धर्मसंस्था सबसे अधिक शक्तिशाली हो गयी थी। इसकी राजनीतिक दशा तेरहवीं शदाब्दीके आरम्भमें तृतीय इनोसेन्टके समय उच्च शिखर पर पहुँच गयी थी । तेरहवीं शताब्दी - के समाप्ति के पूर्व ही संगठन इतना शक्तिशाली हो गया था कि देखने से प्रतीत होता था कि वह पोन तथा पादरियों के हाथ से शंघ्र शासन अधिकार छीन लेगा और उनके हाथ में केवल धर्मकर्य रह जायगा । पादरी तथा नाइट लोगोंके संघके साथ-साथ एक नयी सामाजिक संस्था और उत्पन्न हुई । इससे कृषक दासोंको सुधार, नगरोंकी स्थापना और व्यवसायको उन्नति हुई और वणिकों तथा कारीगरों को भी अवसर मिला कि वे भी द्रव्योपार्जन कर विख्यात तथा प्रभावशाली हो जायँ। आधुनिक विद्वानोंका यहीं से प्रादुर्भाव होना प्रारम्भ होता है । नाना प्रकारकी आधुनिक भाषाओंका प्रयोग लेख में होने लगा । जर्मनों के आक्रमणके छः सौ वर्ष पर्यन्त लैटिनका प्रयोग होता रहा, परन्तु ग्यारहवीं तथा बादकी शताब्दियोंमें बोल-चालकी भाषाने पुरानी भाषाओंका स्थान ले लिया । इसका परिणाम यह हुआ कि वे साधारण लोग भी जो प्राचीन रोमन भाषाकी गूढ़ताको नहीं समझते थे, अब फेन्च, प्रोवॅकल, जर्मन, अंग्रेजी, स्पेनिश तथा इटली भाषा में लिखी कथाओंका आस्वाद भी लेने लगे । यद्यपि शिक्षाका प्रबन्ध अब भी पादरियोंके ही हाथमें था और साधारण लोग लिखने-पढ़ने लगे थे, तथापि वाङ्मय-साहित्य परसे पादरियोंका एकाधिकार धीरे-धीरे लुप्त होने लगा । संवत् एक हज़ार एक सौ सत्तावन से ही छात्र लोग शिक्षकों के निकट एकत्र होने लगे और रोमकी धर्म-व्यवस्था, तर्क, दर्शन तथा धर्म शास्त्रकी शिक्षा भी लेने लगे । अरस्तू के ग्रन्थ एकत्र किये गये और छात्रवर्ग विद्याकी समस्त शाखाओं में उत्साह के साथ उसके ग्रन्थोंका मनन करने लगे। उसी समय में आधुनिक सभ्यता के विशेष अंगरूप विद्यापीठोंका भी प्रादुर्भाव हुआ था । अब शिक्षक लोग केवल अरस्तूके प्राप्त निबन्धोसे ही सन्तुष्ट न हो सके इससे उन्होंने स्वयं अपने प्रयत्नसे विद्याकी उन्नति करनी चाही। रोजर वेकन तथा उसके समकालिक विद्वान् एक वैज्ञानिक वर्ग के अंग थे। इस वर्गने विज्ञानकी सभी शाखाओं में उन्नतितक पहुँचनेका मार्ग तैयार कर दिया । वे आधुनिक समयकी भो एक मान प्रतिष्ठा हैं । बारहवीं तथा तेरहवीं शताब्दी के गिरजोंका शिल्प देखकर उस समयकी कलाभिरुचिका पता चलता है। यह सब किसी प्राचीन कलाका अनुकरण नहीं था, परन्तु उस समय के शिल्पी तथा मूर्तिकारोंकी स्वमूलक रचना थी । अध्याय उन्नीस चौदहवीं तथा पन्द्रहवी शताब्दी के यूरोपीय इतिहासका वर्णन निम्नलिखित क्रमसे किया गया है । आंग्लं देश तथा फ्रांसका वर्णन एक साथ किया गया है, क्योंकि आंग्ल देशके राजा लोग फ्रांस के राज्यपर भी अपना अधिकार जतल ते थे । दोनों प्रदेशों के बीच शतवर्षीय युद्धसे प्रथम दोनों देशों में दुर्व्यवहार और कलह उत्पन्न होता है और पश्चात् इनकी सुलह होती है । दूसरे पोपके अधिकार तथा कान्स्टेन्सकी सभा धर्म संस्थाकी उन्नति के प्रयत्नके इतिहासका वर्णन है । इसके बाद जागृतेकी उन्नतिका वर्णन है । विशेषतः इटलीके उन नगरोंका संक्षेपतः वर्णन है जो उस समय में विज्ञान वृद्धि के अग्रसर नेता थे। इसके साथ-साथ पन्द्रहवीं शताब्दी के बाद के भाग में छापाखाना तथा भूगोल - विद्या की नवीन खोजें और उनसे हुई उन्नतिका वर्णन है । चतुर्थ भाग में सोलहवीं शताब्दी के यूरोपका वर्णन है। इससे मार्टिन लूथरके नेतृत्व में हुए धर्म संस्था के नवीन आन्दोलनको पाठक भली भांति समझ सकेंगे । सबसे पहले आंग्ल देशकी दशा देखना उचित है। प्रथम शासकों का ग्रेट ब्रिटेन के एक अंशपर ही शासन था, उनके राज्य के पहाड़ी प्रान्त था । इस प्रान्तमें आदि ब्रिटन जातिके वे लोग बसे थे जिनको जर्मन आक्रामक लोग परास्त नहीं कर सके थे। इसके उत्तर में स्काटलैण्डका राज्य था । यह राज्य भी स्वतन्त्र था। वह केवल कभी-कभी आंग्लदेशीय शासकको अधिपति मानकर उच्च श्रेणीका सामन्तराज्य मान लिया जाता था। प्रथम एडवर्डने वेलजको सर्वदाके लिए तथा स्काटलैण्डको कुछ समयके लिए जीत लिया था । कई शताब्दियों-पर्यन्त आंग्ल देश तथा वेल्जकी सीमाओपर लड़ाई होती रही । विजयी विलियमुने आवश्यक समझकर वेल्जकी सीमापर "अर्लंडम" स्थापित किया था और चेस्टर श्रृजवरी तथा मन्मथ नार्मन लोगोंके लिए अच्छी रोक थी । वेल्जचालोंकी लगातार आक्रान्तिसे अंग्रेजी राजा क्रुद्ध होकर वेल्जपर चढ़ाई करना चाहते थे, परन्तु शत्रुपर विजय पाना सरल नहीं था, क्योंकि वे लोग स्नोडानके समीप बर्फीली पहाड़ी कन्दराओं में छिप जाते थे और अंग्रेजी सैनिकोंको वहाँकी जंगलो भूमिमें भूखों मरना पड़ता था। वेल्जवासी सफलता के साथ इतने अधिक समयतक शक्तिशाली अंग्रेजी सेनाओंका सामना करते रहे; इससे वेल्ज केवळ उनके रक्षास्थान ही नहीं थे, परन्तु वहाँके भाटोंने भी अपने उत्साइभरे कवित्तोंसे वहाँके लोगोंको उत्तेजित किया था। इन लोगोंको विश्वास था कि जो आंग्ल देश एंगल तथा सैक्सनोंके आगमनके पूर्व इनके अधिकार में था उसको ये लोग पुनः जीत लेंगे । सिंहासनारूढ़ होते ही प्रथम एडवर्डने आज्ञापत्र भेजा कि वेल्ज जातिका अधिपति लूएलिन जो वेल्जका युवराज कहलाता है हमारे दरबार में आकर सिर झुकावे । लुएलिन प्रभावशाली तथा योग्य पुरुष था। उसने राजाकी आज्ञा न मानी। इसपर एडवर्डने वेल्ज देशपर आक्रमण किया। लगातार दो युद्धों के बाद वेल्जका दम उखड़ गया। लूएलिन युद्ध में मारा गया और उसके साथ वेल्जकी स्वतन्त्रता भी सदाके लिए लुप्त हो गयी। एडवर्डने सम्पूर्ण देशको शहरों में बाँट दिया और आंग्ल देशके नियम तथा प्रथाओं का प्रचार किया। उसको साम-उपायसे इतनी सफलता हुई कि एक शताब्दी - पर्यन्त उस देश में आकान्ति हुई ही नहीं । पश्चात् उसने अपने पुत्रको वेल्जका युवराज बनाया और उसी समयसे आंग्ल देशके राज्य के उत्तराधिरीको 'वेजके युवराज' की उपाधि मिलती है । स्काटलैण्डका जीतना वेल्जके जीतनेसे भी अधिक कठिन था। स्काटलैण्डका प्राचीन इतिहास बड़ा जटिक है । जिस समय एंगल तथा सैकसन लोग आंग्ल देश में आये, उस समय फोर्थ के मुहानेके उत्तरके पहाड़ी प्रदेश में पिक्टनामी केल्टिके जाति बसी हुई थी। पश्चिमीय तटपर एक छोटासा राज्य आयरिश केल्ट लोगोंका था जो स्काट कहाते थे । दशवीं शताब्दी के आरम्भमें पिक्ट लोगोंने स्काट लोगोंको अपना शासक मान लिया था और इतिहास लेखकोंने हाईलैण्ड नामका प्रदेशको स्काट लोगोंका देश लिखना प्रारम्भ कर दिया था। समयके परिवर्तनके साथ-साथ आंग्ल देश के राजाओंने अपने लाभार्थं सीमापरके कुछ नगर स्काटवालोंको दे दिये, जिसमें ट्वीड् तथा फोर्थ नदीकी खाड़ी के मध्यका लोलैंण्ड बामक प्रदेश भी था । इसके निवासी अंग्रेज थे और वे लोग आंग्ल भाषा बोलते थे परन्तु हाईलैण्डवाले अगतक भी गेलिक भाषा बोलते हैं । स्काटलैण्ड के इतिहास में यह एक बड़े महत्वकी घटना थी कि उसके रराजा लोग हाईलैण्डमें न रहकर कोलॅण्डमें रहे और उन्होंने अपनी राजधानी दुर्भेद्य दुर्गान्वित एडिनवराको नियत किया था। विजयी विलियमके सिंहासनपर बैठते ही अनेक अग्ल देशीय तथा असन्तुष्ट नार्मन अमीर लोग भी इंगलैंण्डकी सीमाको पार कर लोलैण्ड में आ बसे । इन्होंने बड़े-बड़े कुटुम्ब स्थापित किये। इनमें वेलियल तथा ब्रूस अत्यन्त विख्यात हैं जिन्होंने बादको स्काटलैण्डकी स्वतन्त्रता के लिए भीषण युद्ध भी किये । बारहवीं तथा तेरहवीं शताब्दी में यह देश, विशेषतः इसके दक्षिणी प्रान्त इन ऍग्लो |
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में तेजी लाने के लिए करीब 19 अरब रुपये लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी है।
कार्यकारिणी द्वारा मंजूर की गई 20 परियोजनाओं में से 13 उत्तराखंड से सम्बद्ध है जिनमें नए मलजल उपचार संयंत्रों की स्थापना, मौजूदा सीवर उपचार संयंत्रों का उन्नयन और हरिद्वार में मलजल नेटवर्क कायम करने जैसे कार्य शामिल हैं।
इन सभी पर करीब 415 करोड़ रुपये की लागत आएगी। हरिद्वार देश के सर्वाधिक पवित्र शहरों में से एक है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। अनुमोदित योजना का लक्ष्य न केवल शहर के 1.5 लाख स्थानीय निवासियों द्वारा, बल्कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वाले लोगों द्वारा उत्सर्जित मलजल का उपचार भी करना है।
इन सभी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषण किया जाएगा। यहां तक कि इन परियोजनाओं के प्रचालन और रख-रखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी। उत्तराखंड में अनुमोदित अन्य परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं अलकनंदा नदी का प्रदूषण दूर करने से संबंधित हैं, ताकि नीचे की तरफ नदी की धार का स्वच्छतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। इसमें गंदे पानी के नालों को नदी में जाने से रोकने के लिए उनका मार्ग बदलना, बीच मार्ग में अवरोधक संयंत्र लगाना और साथ ही चार महत्वपूर्ण स्थानों - जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और कीर्तिनगर में नए लघु एसटीपीज़ लगाना शामिल है, जिन पर करीब 78 करोड़ रूपये की लागत आएगी।
इनके अलावा गंगा का प्रदूषण दूर करने के लिए ऋषिकेश में 158 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक बड़ी परियोजना का अनुमोदन किया गया है। गंगा जैसे ही पर्वत से उतरकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है, तो वहीं ऋषिकेश से नगरीय प्रदूषक गंगा में मिलने शुरू हो जाते हैं।
गंगा को इन प्रदूषकों से छुटकारा दिलाने के लिए ऋषिकेश में यह सर्व-समावेशी परियोजना शुरू करने को हरी झंडी दिखाई गयी है। इससे न केवल सभी शहरी नालों को ऋषिकेश में गंगा में जाने से रोका जा सकेगा बल्कि उत्सर्जित जल को उपचार के जरिए फिर से इस्तेमाल योग्य भी बनाया जाएगा।
ऋषिकेश संबंधी इस विशेष परियोजना में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी क्षमता के नये एसटीपी का निर्माण किया जाएगा जिसके लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की भी व्यवस्था है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 665 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्कृष्ट प्रदूषक मानकों के साथ 564 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक ओखला मलजल उपचार संयंत्र के निर्माण की परियोजना भी अनुमोदित की गयी है। यह संयंत्र मौजूदा एसटीपी फेज़- I, II, III और IV का स्थान लेगा। इसके अलावा पीतमपुरा और कोंडली में 100 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाली नई मलजल पाइपलाइनें बिछाने की दो परियोजनाएं भी मंजूर की गयी है, ताकि रिसाव रोका जा सके।
पटना में कर्मालिचक और झारखंड में राजमहल में 335 करोड़ रुपये से अधिक लागत से मलजल निकासी संबंधी कार्यों का भी कार्य समिति की बैठक में अनुमोदन किया गया। वाराणसी में, जहां वर्ष भर लाखों तीर्थ यात्री आते हैं, गंगा के प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए सार्वजनिक-निजी-भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल वाली 151 करोड़ रुपये की परियोजना का भी कार्यकारिणी की बैठक में अनुमोदन किया गया।
उज्जैन। मप्र के उज्जैन में मां-बेटी के साथ हुए दुष्कर्म मामले की जांच पुलिस ने तेज कर दी है। पुलिस ने 12 वर्षीय पीड़िता को तो ढूंढ लिया है, लेकिन उसकी मां लापता है। पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए 400 सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
पुलिस के मुताबिक, बच्ची की मां के साथ भी दुष्कर्म होने की आशंका है, लेकिन वो कहां है इसकी जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि पीड़िता प्रयागराज के किसी इलाके की रहने वाली है। दोनों के उज्जैन में आने की वजह का पता नहीं चल सका है। पुलिस ने बताया कि बच्ची हाटकेश्वर विहार कालोनी में लावारिस घूमती रही। वहां से पैदल ही वह बड़नगर रोड पहुंची थी।
गौरतलब है कि 12 वर्षीय मासूम बड़नगर रोड पर मुरलीपुरा से आगे दांडी आश्रम के समीप मिली थी। मासूम के कपड़े खून से सने थे और वो कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी। इलाज के लिए उसे चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है। देर रात हालत खराब होने पर उसे इंदौर रेफर किया गया। पीड़िता की हालत में अब सुधार है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस इसकी तफ्तीश में जुट गई है। पुलिस की कई टीमें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। करीब 400 से ज्यादा कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है।
बताया जा रहा है कि पीड़िता मानसिक रूप से बीमार भी है। चिंतामन बाईपास पर बनी हाटेश्वर विहार कालोनी सहित आसपास की कालोनियों के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे हैं। फुटेज में पीड़िता अर्धनग्न अवस्था में खून से सनी करीब ढाई घंटे तक घूमती हुई नजर आ रही है। लोगों ने डायल 100 पर सूचना दी थी।
| नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की कार्यकारी समिति ने गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में तेजी लाने के लिए करीब उन्नीस अरब रुपये लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी है। कार्यकारिणी द्वारा मंजूर की गई बीस परियोजनाओं में से तेरह उत्तराखंड से सम्बद्ध है जिनमें नए मलजल उपचार संयंत्रों की स्थापना, मौजूदा सीवर उपचार संयंत्रों का उन्नयन और हरिद्वार में मलजल नेटवर्क कायम करने जैसे कार्य शामिल हैं। इन सभी पर करीब चार सौ पंद्रह करोड़ रुपये की लागत आएगी। हरिद्वार देश के सर्वाधिक पवित्र शहरों में से एक है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। अनुमोदित योजना का लक्ष्य न केवल शहर के एक.पाँच लाख स्थानीय निवासियों द्वारा, बल्कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वाले लोगों द्वारा उत्सर्जित मलजल का उपचार भी करना है। इन सभी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषण किया जाएगा। यहां तक कि इन परियोजनाओं के प्रचालन और रख-रखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी। उत्तराखंड में अनुमोदित अन्य परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं अलकनंदा नदी का प्रदूषण दूर करने से संबंधित हैं, ताकि नीचे की तरफ नदी की धार का स्वच्छतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। इसमें गंदे पानी के नालों को नदी में जाने से रोकने के लिए उनका मार्ग बदलना, बीच मार्ग में अवरोधक संयंत्र लगाना और साथ ही चार महत्वपूर्ण स्थानों - जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और कीर्तिनगर में नए लघु एसटीपीज़ लगाना शामिल है, जिन पर करीब अठहत्तर करोड़ रूपये की लागत आएगी। इनके अलावा गंगा का प्रदूषण दूर करने के लिए ऋषिकेश में एक सौ अट्ठावन करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक बड़ी परियोजना का अनुमोदन किया गया है। गंगा जैसे ही पर्वत से उतरकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है, तो वहीं ऋषिकेश से नगरीय प्रदूषक गंगा में मिलने शुरू हो जाते हैं। गंगा को इन प्रदूषकों से छुटकारा दिलाने के लिए ऋषिकेश में यह सर्व-समावेशी परियोजना शुरू करने को हरी झंडी दिखाई गयी है। इससे न केवल सभी शहरी नालों को ऋषिकेश में गंगा में जाने से रोका जा सकेगा बल्कि उत्सर्जित जल को उपचार के जरिए फिर से इस्तेमाल योग्य भी बनाया जाएगा। ऋषिकेश संबंधी इस विशेष परियोजना में लक्कड़घाट पर छब्बीस एमएलडी क्षमता के नये एसटीपी का निर्माण किया जाएगा जिसके लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की भी व्यवस्था है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छः सौ पैंसठ करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्कृष्ट प्रदूषक मानकों के साथ पाँच सौ चौंसठ एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक ओखला मलजल उपचार संयंत्र के निर्माण की परियोजना भी अनुमोदित की गयी है। यह संयंत्र मौजूदा एसटीपी फेज़- I, II, III और IV का स्थान लेगा। इसके अलावा पीतमपुरा और कोंडली में एक सौ करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाली नई मलजल पाइपलाइनें बिछाने की दो परियोजनाएं भी मंजूर की गयी है, ताकि रिसाव रोका जा सके। पटना में कर्मालिचक और झारखंड में राजमहल में तीन सौ पैंतीस करोड़ रुपये से अधिक लागत से मलजल निकासी संबंधी कार्यों का भी कार्य समिति की बैठक में अनुमोदन किया गया। वाराणसी में, जहां वर्ष भर लाखों तीर्थ यात्री आते हैं, गंगा के प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए सार्वजनिक-निजी-भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल वाली एक सौ इक्यावन करोड़ रुपये की परियोजना का भी कार्यकारिणी की बैठक में अनुमोदन किया गया। उज्जैन। मप्र के उज्जैन में मां-बेटी के साथ हुए दुष्कर्म मामले की जांच पुलिस ने तेज कर दी है। पुलिस ने बारह वर्षीय पीड़िता को तो ढूंढ लिया है, लेकिन उसकी मां लापता है। पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए चार सौ सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस के मुताबिक, बच्ची की मां के साथ भी दुष्कर्म होने की आशंका है, लेकिन वो कहां है इसकी जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि पीड़िता प्रयागराज के किसी इलाके की रहने वाली है। दोनों के उज्जैन में आने की वजह का पता नहीं चल सका है। पुलिस ने बताया कि बच्ची हाटकेश्वर विहार कालोनी में लावारिस घूमती रही। वहां से पैदल ही वह बड़नगर रोड पहुंची थी। गौरतलब है कि बारह वर्षीय मासूम बड़नगर रोड पर मुरलीपुरा से आगे दांडी आश्रम के समीप मिली थी। मासूम के कपड़े खून से सने थे और वो कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी। इलाज के लिए उसे चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है। देर रात हालत खराब होने पर उसे इंदौर रेफर किया गया। पीड़िता की हालत में अब सुधार है। मामला सामने आने के बाद पुलिस इसकी तफ्तीश में जुट गई है। पुलिस की कई टीमें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। करीब चार सौ से ज्यादा कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। बताया जा रहा है कि पीड़िता मानसिक रूप से बीमार भी है। चिंतामन बाईपास पर बनी हाटेश्वर विहार कालोनी सहित आसपास की कालोनियों के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे हैं। फुटेज में पीड़िता अर्धनग्न अवस्था में खून से सनी करीब ढाई घंटे तक घूमती हुई नजर आ रही है। लोगों ने डायल एक सौ पर सूचना दी थी। |
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति से अयोध्या में विवादित स्थल को लेकर फैसला सुना दिया. शीर्ष कोर्ट के फैसले से राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि नई मस्जिद के निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ का भूखंड मुहैया कराया जाए. शीर्ष कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया. आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया.
अयोध्या फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबसे ज्यादा मस्जिद शब्द को दोहराया. फैसले के दौरान शीर्ष कोर्ट ने 1433 बार मस्जिद, 223 बार पूजा शब्द, 386 बार दिसंबर, 230 बार मंहत, 1062 बार राम, 418 बार मुद्दई, 481 बार मुद्दइयों, हिंदू 506 बार, एक 382 बार, मंदिर 696 बार, संपत्ति 908 बार, सबूत 528 बार, कानून 574 बार, ढांचा 612, विवादित 764, धार्मिक 375, भगवान 490, निर्मोही 493 बार, अखाड़ा 501 बार, कानूनी 515 बार, हिंदुओं शब्द 516 बार इस्तेमाल किया गया.
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया. इस विवाद ने देश के सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव के ताने बाने को तार तार कर दिया था.
संविधान पीठ ने अपने 1045 पन्नों के फैसले में कहा कि नई मस्जिद का निर्माण 'प्रमुख स्थल' पर किया जाना चाहिए. साथ ही उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए जिसके प्रति हिन्दुओं की यह आस्था है कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था.
इस स्थान पर 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद थी जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था. विवादित स्थल गिराए जाने की घटना के बाद देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे.
पीठ ने कहा कि 2. 77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला विराजमान को सौंप दिया जाए, जो इस मामले में एक वादकारी हैं. हालांकि यह भूमि केन्द्र सरकार के रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी.
न्यायालय ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्योध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है.
संविधान पीठ ने यह माना कि विवादित स्थल के बाहरी बरामदे में हिन्दुओं द्वारा व्यापक रूप से पूजा अर्चना की जाती रही है और साक्ष्यों से पता चलता है कि मस्जिद में शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे जो इस बात का सूचक है कि उन्होंने इस स्थान पर कब्जा छोड़ा नहीं था.
| सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति से अयोध्या में विवादित स्थल को लेकर फैसला सुना दिया. शीर्ष कोर्ट के फैसले से राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि नई मस्जिद के निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ का भूखंड मुहैया कराया जाए. शीर्ष कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया. आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया. अयोध्या फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबसे ज्यादा मस्जिद शब्द को दोहराया. फैसले के दौरान शीर्ष कोर्ट ने एक हज़ार चार सौ तैंतीस बार मस्जिद, दो सौ तेईस बार पूजा शब्द, तीन सौ छियासी बार दिसंबर, दो सौ तीस बार मंहत, एक हज़ार बासठ बार राम, चार सौ अट्ठारह बार मुद्दई, चार सौ इक्यासी बार मुद्दइयों, हिंदू पाँच सौ छः बार, एक तीन सौ बयासी बार, मंदिर छः सौ छियानवे बार, संपत्ति नौ सौ आठ बार, सबूत पाँच सौ अट्ठाईस बार, कानून पाँच सौ चौहत्तर बार, ढांचा छः सौ बारह, विवादित सात सौ चौंसठ, धार्मिक तीन सौ पचहत्तर, भगवान चार सौ नब्बे, निर्मोही चार सौ तिरानवे बार, अखाड़ा पाँच सौ एक बार, कानूनी पाँच सौ पंद्रह बार, हिंदुओं शब्द पाँच सौ सोलह बार इस्तेमाल किया गया. बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील एक सौ चौंतीस साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया. इस विवाद ने देश के सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव के ताने बाने को तार तार कर दिया था. संविधान पीठ ने अपने एक हज़ार पैंतालीस पन्नों के फैसले में कहा कि नई मस्जिद का निर्माण 'प्रमुख स्थल' पर किया जाना चाहिए. साथ ही उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए जिसके प्रति हिन्दुओं की यह आस्था है कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था. इस स्थान पर सोलहवीं सदी की बाबरी मस्जिद थी जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ बानवे को गिरा दिया था. विवादित स्थल गिराए जाने की घटना के बाद देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे. पीठ ने कहा कि दो. सतहत्तर एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला विराजमान को सौंप दिया जाए, जो इस मामले में एक वादकारी हैं. हालांकि यह भूमि केन्द्र सरकार के रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी. न्यायालय ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्योध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है. संविधान पीठ ने यह माना कि विवादित स्थल के बाहरी बरामदे में हिन्दुओं द्वारा व्यापक रूप से पूजा अर्चना की जाती रही है और साक्ष्यों से पता चलता है कि मस्जिद में शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे जो इस बात का सूचक है कि उन्होंने इस स्थान पर कब्जा छोड़ा नहीं था. |
छात्र सामग्री विज्ञान की जांच कर सकते हैं यदि वे किसी प्रासंगिक उद्योग में रोज़गार हासिल करने में रुचि रखते हैं, जैसे कि माइक्रोचिप विनिर्माण या प्लास्टिक अनुसंधान इस विषय के कार्यक्रमों में एक छात्र को एक सामग्री अभियंता या शोधकर्ता के रूप में आगे शैक्षणिक विशेषज्ञता प्राप्त हो सकती है।
विज्ञान डिग्री के मास्टर उन्नत शैक्षिक कार्यक्रम है कि छात्रों को, जो पहले से ही एक स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों द्वारा की पेशकश कर रहे हैं। एमएससी कमाई स्नातकों के लिए अधिक से अधिक पेशेवर और व्यक्तिगत अवसरों को जन्म दे सकती।
ऑन-कैंपस लर्निंग का तात्पर्य व्यक्तिगत रूप से कक्षाओं में भाग लेने से है। इसमें आम तौर पर पारंपरिक कक्षाओं और व्याख्यानों में जाना, समूह गतिविधियों में भाग लेना और व्यक्तिगत रूप से संकाय और साथियों के साथ जुड़ना शामिल है। ऑन-कैंपस सीखने में अक्सर प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अन्य कैंपस संसाधनों जैसे कि छात्र क्लब, करियर सेवा कार्यालय और मनोरंजन केंद्र तक पहुंच शामिल होती है।
| छात्र सामग्री विज्ञान की जांच कर सकते हैं यदि वे किसी प्रासंगिक उद्योग में रोज़गार हासिल करने में रुचि रखते हैं, जैसे कि माइक्रोचिप विनिर्माण या प्लास्टिक अनुसंधान इस विषय के कार्यक्रमों में एक छात्र को एक सामग्री अभियंता या शोधकर्ता के रूप में आगे शैक्षणिक विशेषज्ञता प्राप्त हो सकती है। विज्ञान डिग्री के मास्टर उन्नत शैक्षिक कार्यक्रम है कि छात्रों को, जो पहले से ही एक स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों द्वारा की पेशकश कर रहे हैं। एमएससी कमाई स्नातकों के लिए अधिक से अधिक पेशेवर और व्यक्तिगत अवसरों को जन्म दे सकती। ऑन-कैंपस लर्निंग का तात्पर्य व्यक्तिगत रूप से कक्षाओं में भाग लेने से है। इसमें आम तौर पर पारंपरिक कक्षाओं और व्याख्यानों में जाना, समूह गतिविधियों में भाग लेना और व्यक्तिगत रूप से संकाय और साथियों के साथ जुड़ना शामिल है। ऑन-कैंपस सीखने में अक्सर प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अन्य कैंपस संसाधनों जैसे कि छात्र क्लब, करियर सेवा कार्यालय और मनोरंजन केंद्र तक पहुंच शामिल होती है। |
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बिग बॉस के सीजन 13 के शो के विनर बन गए हैं सिद्धार्थ शुक्ला। बीते 4 महीने से सोशल मीडिया से लेकर कई स्टार्स के बीच इसकी चर्चा रही कि आखिर कौन इस शो का विनर होगा। हालांकि दो महीने में ये साफ हो चला था कि असीम रियाज या फिर सिद्धार्थ शुक्ला में से कोई एक शो का विनर बनेगा। सोशल मीडिया पर दोनों के फैंस के बीच की लड़ाई खबरों का हिस्सा बनते चली गई।
खैर, इसमें कोई दोराय नहीं है कि सिद्धार्थ शुक्ला के कारण कई बार मेकर्स और सलमान खान पर पक्षपात का आरोप भी लगा। लेकिन सिद्धार्थ शो के भीतर बाहरी उलझन से दूर अपने सफर को उतार चढ़ाव पर ले जा रहे थे।
हाथापाई के बाद जहां सिद्धार्थ ने माफी मांगी तो वहीं सलमान खान के साथ उन्हें घर के भीतर कई कंटेस्टेंट के गुस्से का सामना भी करना पड़ा। चलिए जानते हैं कि ऐसी कौन सी खास वजह है जिसने इस ऐतिहासिक सीजन का विनर सिद्धार्थ शुक्ला को बना दिया। वो इस टाइटल के लिए हकदार हैं।
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नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने धर्मांतरण कर इस्लाम कबूल करने और इस्लामिक स्टेट द्वारा भर्ती की गई महिलाओं की दुर्दशा को दर्शाने का दावा करने वाली फिल्म 'द केरला स्टोरी' पर प्रतिबंध लगाने के लिए सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की और कहा कि उनका यह फैसला नागरिक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाता है।
भाजपा के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि फिल्म उन पीड़ितों का वास्तविक विवरण देती है जिन्होंने जनसांख्यिकीय आक्रमण की भयावहता को सहन किया है और जिन्हें आतंकवादी संगठन आईएस के चारे के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस धमकी को एक नहीं बल्कि केरल के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, वी एस अच्युतानंदन और कांग्रेस के ओमन चांडी ने स्वीकार किया है।
मालवीय ने कहा, "ममता बनर्जी इस प्रतिबंध से किसे खुश करने की कोशिश कर रही हैं? क्या उन्हें लगता है कि बंगाल के मुसलमान भारतीय संविधान से ज्यादा आईएस से जुड़े हुए हैं? शर्म आती है उनकी पिछड़ी राजनीति पर। "
उन्होंने कहा, "अकेले कोलकाता में एक दर्जन से अधिक सिनेमाघरों में दिखाई जा रही फिल्म के कारण बंगाल में कानून-व्यवस्था को कोई खतरा नहीं था। "
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई भाजपा नेताओं ने फिल्म के पक्ष में बात की है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बनर्जी ने सोमवार को विवादास्पद फिल्म 'द केरला स्टोरी' के प्रदर्शन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया ताकि 'घृणा और हिंसा की किसी भी घटना' से बचा जा सके।
अधिकारी ने कहा कि जो भी थिएटर इस फिल्म को दिखाता पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले दिन में बनर्जी ने 'द केरला स्टोरी' को विकृत फिल्म करार दिया, जिसका उद्देश्य दक्षिणी राज्य केरल को बदनाम करना है।
यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।
| नयी दिल्ली, आठ मई भारतीय जनता पार्टी ने धर्मांतरण कर इस्लाम कबूल करने और इस्लामिक स्टेट द्वारा भर्ती की गई महिलाओं की दुर्दशा को दर्शाने का दावा करने वाली फिल्म 'द केरला स्टोरी' पर प्रतिबंध लगाने के लिए सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की और कहा कि उनका यह फैसला नागरिक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाता है। भाजपा के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि फिल्म उन पीड़ितों का वास्तविक विवरण देती है जिन्होंने जनसांख्यिकीय आक्रमण की भयावहता को सहन किया है और जिन्हें आतंकवादी संगठन आईएस के चारे के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस धमकी को एक नहीं बल्कि केरल के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, वी एस अच्युतानंदन और कांग्रेस के ओमन चांडी ने स्वीकार किया है। मालवीय ने कहा, "ममता बनर्जी इस प्रतिबंध से किसे खुश करने की कोशिश कर रही हैं? क्या उन्हें लगता है कि बंगाल के मुसलमान भारतीय संविधान से ज्यादा आईएस से जुड़े हुए हैं? शर्म आती है उनकी पिछड़ी राजनीति पर। " उन्होंने कहा, "अकेले कोलकाता में एक दर्जन से अधिक सिनेमाघरों में दिखाई जा रही फिल्म के कारण बंगाल में कानून-व्यवस्था को कोई खतरा नहीं था। " प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई भाजपा नेताओं ने फिल्म के पक्ष में बात की है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बनर्जी ने सोमवार को विवादास्पद फिल्म 'द केरला स्टोरी' के प्रदर्शन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया ताकि 'घृणा और हिंसा की किसी भी घटना' से बचा जा सके। अधिकारी ने कहा कि जो भी थिएटर इस फिल्म को दिखाता पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले दिन में बनर्जी ने 'द केरला स्टोरी' को विकृत फिल्म करार दिया, जिसका उद्देश्य दक्षिणी राज्य केरल को बदनाम करना है। यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है। |
मॉनसून ने गुरुवार को दक्षिणी छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दस्तक दे दी है। इसके साथ वहां कई इलाकों में लगातार बारिश देखी गई है। इसके बाद झारखंड और बिहार में इसके तय समय पर पहुंचने की उम्मीद है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि झारखंड, बिहार में दस्तक देने के बाद यह सोमवार या मंगलवार तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण मानसून की प्रगति अच्छी है। मानसून ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लिया है। गुरुवार को मॉनसून मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कर्नाटक, रायलसीमा, कोस्टल आंध्र प्रदेश होते हुए ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में छा गया है।
दक्षिण पश्चिम मानसून ने बृहस्पतिवार (11 जून) को गोवा और दक्षिण एवं तटीय महाराष्ट्र के हिस्सों में दस्तक दे दी और इसके अगले दो दिनों में इसके और आगे बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने मुंबई में यह जानकारी दी। विभाग ने अगले 48 घंटे में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के मुंबई केंद्र के उप महानिदेशक के एस होसलीकर ने कहा "दक्षिण पश्चिम मानसून महाराष्ट्र पहुंच गया है। यह हरनई (तटीय रत्नागिरि जिले में), सोलापुर (दक्षिण महाराष्ट्र में), रामागुंडम (तेलंगाना) और जगदलपुर (छत्तीसगढ़) के ऊपर से गुजर रहा है। " उन्होंने कहा, "अगले 48 घंटों में महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों में इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। भारी वर्षा की चेतावनी जारी की जाती है। "
| मॉनसून ने गुरुवार को दक्षिणी छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दस्तक दे दी है। इसके साथ वहां कई इलाकों में लगातार बारिश देखी गई है। इसके बाद झारखंड और बिहार में इसके तय समय पर पहुंचने की उम्मीद है। मौसम विभाग का अनुमान है कि झारखंड, बिहार में दस्तक देने के बाद यह सोमवार या मंगलवार तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण मानसून की प्रगति अच्छी है। मानसून ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लिया है। गुरुवार को मॉनसून मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कर्नाटक, रायलसीमा, कोस्टल आंध्र प्रदेश होते हुए ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में छा गया है। दक्षिण पश्चिम मानसून ने बृहस्पतिवार को गोवा और दक्षिण एवं तटीय महाराष्ट्र के हिस्सों में दस्तक दे दी और इसके अगले दो दिनों में इसके और आगे बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने मुंबई में यह जानकारी दी। विभाग ने अगले अड़तालीस घंटाटे में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के मुंबई केंद्र के उप महानिदेशक के एस होसलीकर ने कहा "दक्षिण पश्चिम मानसून महाराष्ट्र पहुंच गया है। यह हरनई , सोलापुर , रामागुंडम और जगदलपुर के ऊपर से गुजर रहा है। " उन्होंने कहा, "अगले अड़तालीस घंटाटों में महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों में इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। भारी वर्षा की चेतावनी जारी की जाती है। " |
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