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सचिन पायलट की नाराजगी दूर होने के दावे के साथ राजस्थान में गहलोत सरकार का संकट फिलहाल टल गया है. लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट अपनी कड़वाहट भूल चुके हैं. सचिन पायलट ने आज खुल कर अपनी बातें रखीं और खुद के लिए अशोक गहलोत की ओर से पिछले महीने कहे गए तीखे शब्दबाण पर आहत होने की बात स्वीकारी. तो उधर गहलोत खेमा ये बताने से नहीं चूक रहा है कि राजस्थान कांग्रेस के असली बॉस वही हैं. सचिन पायलट आज 34 दिन बाद जयपुर पहुंचे हैं तो अशोक गहलोत जैसलमेर में अपने उन विधायकों के पास गए हैं जो उनके समर्थन में मजबूती से डटे रहे. देखें वीडियो.
सचिन पायलट की नाराजगी दूर होने के दावे के साथ राजस्थान में गहलोत सरकार का संकट फिलहाल टल गया है. लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट अपनी कड़वाहट भूल चुके हैं. सचिन पायलट ने आज खुल कर अपनी बातें रखीं और खुद के लिए अशोक गहलोत की ओर से पिछले महीने कहे गए तीखे शब्दबाण पर आहत होने की बात स्वीकारी. तो उधर गहलोत खेमा ये बताने से नहीं चूक रहा है कि राजस्थान कांग्रेस के असली बॉस वही हैं. सचिन पायलट आज चौंतीस दिन बाद जयपुर पहुंचे हैं तो अशोक गहलोत जैसलमेर में अपने उन विधायकों के पास गए हैं जो उनके समर्थन में मजबूती से डटे रहे. देखें वीडियो.
SSC CGL के टीयर 1 2017 के नतीजों की घोषित 31 अक्टूबर होगी। इस तारीख को कयास लगाए जा रहे थे लेकिन अब स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने इस पर मुहर लगा दी है। रिपोर्ट्स 31 अक्टूबर 2017 को ही नतीजों की घोषणा होगी। वहीं इससे पहले एसएससी ने उत्तर कुंजी (answer key) 18 सितंबर 2017 को रीलीज किए जाने की घोषणा की थी। SSC CGL टीयर 1 की परीक्षाएं 5 से 23 अगस्त के बीच आयोजित कराई गई थीं। एसएससी के मुताबिक, 15,43,962 उम्मीदवारों ने एग्जाम दिए थे। अब आपको बताते हैं कि आप कैसे 31 अक्टूबर को अपने नतीजे जान सकते हैं। नतीजे आप आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर देख सकेंगे। सबसे पहले आपको ssc. nic. in पर जाना होगा। इसके बाद 'Declaration of Result of Combined Graduate Level (Tier 1) Examination, 2017' का एक लिंक वहां शो करेगा। आपको उस लिंक पर क्लिक करना है। लिंक पर क्लिक करते ही एक पीडीएफ फाइल खुलगी जिसके जरिए आप अपना रीजल्ट देख पाएंगे। पीडीएफ फाइल में अपना नाम चेक करने के लिए जरूरी डीटेल्स भरें। जिन उम्मीदवारों का सिलेक्शन होगा वह आगे टीयर 2 की परीक्षा दे सकेंगे। अब आपको बताते हैं कि टीयर 2 परीक्षा का पैटर्न कैसा होगा। टीयर 2 की परीक्षा के लिए एक ही दिन में दो एग्जाम होते हैं। पहला टेस्ट क्वांटिटेटिव ऐप्टिट्यूड का होगा। यह एग्जाम 100 मार्क्स का होता है और इसमें 100 सवाल होंगे। एग्जाम देने के लिए दो घंटे का समय मिलेगा। दूसरा टेस्ट अंग्रेजी का होगा जिसके लिए भी दो घंटे का समय मिलेगा। ये टेस्ट 200 मार्क्स के लिए होगा जिसमें 200 सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बात जानना जरूरी है। टीयर 2 में JSO के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को पेपर 3 और AAO के लिए आवेदन करने वालों और पेपर 4 भी देना होगा। एक बात का ध्यान रहे गलत जवाब देने पर 0. 50 अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी। इसलिए गलत जवाब देने से बचें।
SSC CGL के टीयर एक दो हज़ार सत्रह के नतीजों की घोषित इकतीस अक्टूबर होगी। इस तारीख को कयास लगाए जा रहे थे लेकिन अब स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने इस पर मुहर लगा दी है। रिपोर्ट्स इकतीस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह को ही नतीजों की घोषणा होगी। वहीं इससे पहले एसएससी ने उत्तर कुंजी अट्ठारह सितंबर दो हज़ार सत्रह को रीलीज किए जाने की घोषणा की थी। SSC CGL टीयर एक की परीक्षाएं पाँच से तेईस अगस्त के बीच आयोजित कराई गई थीं। एसएससी के मुताबिक, पंद्रह,तैंतालीस,नौ सौ बासठ उम्मीदवारों ने एग्जाम दिए थे। अब आपको बताते हैं कि आप कैसे इकतीस अक्टूबर को अपने नतीजे जान सकते हैं। नतीजे आप आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर देख सकेंगे। सबसे पहले आपको ssc. nic. in पर जाना होगा। इसके बाद 'Declaration of Result of Combined Graduate Level Examination, दो हज़ार सत्रह' का एक लिंक वहां शो करेगा। आपको उस लिंक पर क्लिक करना है। लिंक पर क्लिक करते ही एक पीडीएफ फाइल खुलगी जिसके जरिए आप अपना रीजल्ट देख पाएंगे। पीडीएफ फाइल में अपना नाम चेक करने के लिए जरूरी डीटेल्स भरें। जिन उम्मीदवारों का सिलेक्शन होगा वह आगे टीयर दो की परीक्षा दे सकेंगे। अब आपको बताते हैं कि टीयर दो परीक्षा का पैटर्न कैसा होगा। टीयर दो की परीक्षा के लिए एक ही दिन में दो एग्जाम होते हैं। पहला टेस्ट क्वांटिटेटिव ऐप्टिट्यूड का होगा। यह एग्जाम एक सौ मार्क्स का होता है और इसमें एक सौ सवाल होंगे। एग्जाम देने के लिए दो घंटे का समय मिलेगा। दूसरा टेस्ट अंग्रेजी का होगा जिसके लिए भी दो घंटे का समय मिलेगा। ये टेस्ट दो सौ मार्क्स के लिए होगा जिसमें दो सौ सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बात जानना जरूरी है। टीयर दो में JSO के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को पेपर तीन और AAO के लिए आवेदन करने वालों और पेपर चार भी देना होगा। एक बात का ध्यान रहे गलत जवाब देने पर शून्य. पचास अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी। इसलिए गलत जवाब देने से बचें।
भारत के कुछ राज्यों में तेजी से फैलते डेंगू बुखार के प्रकोप के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने सेरोटाइप-II डेंगू के प्रसार के संबंध में चेतावनी जारी की है। इस बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए राज्यों को आवश्यक उपाय और सावधानी बरतने को कहा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की मौजूदगी में हुई बैठक में 11 राज्यों में सीरोटाइप-II डेंगू की उभरती चुनौती पर का जिक्र किया, जो बीमारी के अन्य रूपों की तुलना में अधिक मामलों और अधिक जटिलताओं से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए रोकथाम के उपाय जारी किए हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना ऐसे 11 राज्य हैं। जहां सेरोटाइप-II डेंगू के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में राजेश भूषण ने सुझाव दिया है कि डेंगू जैसी बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए राज्यों को एहतियाती कदमों को लागू करना चाहिए जैसे कि मामलों का पता लगाना, बुखार हेल्पलाइन का संचालन और परीक्षण किट, लार्वासाइड्स और दवाओं का पर्याप्त स्टॉक करना। आपको बता दें कि इससे पहले 10 सितंबर को देश में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र ने राज्य सरकार को की निर्देश दिए थे। मंत्रालय ने राज्यों से त्वरित जांच के लिए रैपिड रिस्पांस टीम तैनात करने को कहा है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई को लागू किया जाना चाहिए, जिसमें बुखार सर्वेक्षण, वेक्टर नियंत्रण, संपर्क अनुरेखण, रक्त बैंकों को रक्त और रक्त घटकों, विशेष रूप से प्लेटलेट्स के पर्याप्त स्टॉक को बनाए रखने के लिए सचेत करना शामिल है। केंद्र की सिफारिशों के अनुसार, राज्यों को हेल्पलाइन, वेक्टर नियंत्रण तकनीक, घरों में स्वच्छता प्रबंधन और डेंगू के लक्षणों से संबंधित आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) अभियान चलाने के लिए कहा गया है। 15 सितंबर तक प्रयागराज में डेंगू के 97 और गाजियाबाद में 21 एक्टिव केस सामने आ चुके हैं। फिरोजाबाद के अधिकारियों के अनुसार, जिले में वायरल बुखार से मरने वालों की संख्या 60 हो गई है। 2016 में उत्तर प्रदेश में डेंगू से 42 मौतें हुई थीं, जो 2015 के बाद से सबसे अधिक है। इससे पहले, फिरोजाबाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी दिनेश कुमार ने रायटर को बताया था कि अकेले उनके जिले में 58 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से कई बच्चे थे।
भारत के कुछ राज्यों में तेजी से फैलते डेंगू बुखार के प्रकोप के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने सेरोटाइप-II डेंगू के प्रसार के संबंध में चेतावनी जारी की है। इस बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए राज्यों को आवश्यक उपाय और सावधानी बरतने को कहा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की मौजूदगी में हुई बैठक में ग्यारह राज्यों में सीरोटाइप-II डेंगू की उभरती चुनौती पर का जिक्र किया, जो बीमारी के अन्य रूपों की तुलना में अधिक मामलों और अधिक जटिलताओं से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए रोकथाम के उपाय जारी किए हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना ऐसे ग्यारह राज्य हैं। जहां सेरोटाइप-II डेंगू के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में राजेश भूषण ने सुझाव दिया है कि डेंगू जैसी बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए राज्यों को एहतियाती कदमों को लागू करना चाहिए जैसे कि मामलों का पता लगाना, बुखार हेल्पलाइन का संचालन और परीक्षण किट, लार्वासाइड्स और दवाओं का पर्याप्त स्टॉक करना। आपको बता दें कि इससे पहले दस सितंबर को देश में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र ने राज्य सरकार को की निर्देश दिए थे। मंत्रालय ने राज्यों से त्वरित जांच के लिए रैपिड रिस्पांस टीम तैनात करने को कहा है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई को लागू किया जाना चाहिए, जिसमें बुखार सर्वेक्षण, वेक्टर नियंत्रण, संपर्क अनुरेखण, रक्त बैंकों को रक्त और रक्त घटकों, विशेष रूप से प्लेटलेट्स के पर्याप्त स्टॉक को बनाए रखने के लिए सचेत करना शामिल है। केंद्र की सिफारिशों के अनुसार, राज्यों को हेल्पलाइन, वेक्टर नियंत्रण तकनीक, घरों में स्वच्छता प्रबंधन और डेंगू के लक्षणों से संबंधित आईईसी अभियान चलाने के लिए कहा गया है। पंद्रह सितंबर तक प्रयागराज में डेंगू के सत्तानवे और गाजियाबाद में इक्कीस एक्टिव केस सामने आ चुके हैं। फिरोजाबाद के अधिकारियों के अनुसार, जिले में वायरल बुखार से मरने वालों की संख्या साठ हो गई है। दो हज़ार सोलह में उत्तर प्रदेश में डेंगू से बयालीस मौतें हुई थीं, जो दो हज़ार पंद्रह के बाद से सबसे अधिक है। इससे पहले, फिरोजाबाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी दिनेश कुमार ने रायटर को बताया था कि अकेले उनके जिले में अट्ठावन लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से कई बच्चे थे।
लकड़ी जैसे दिखने वाले इस चम्मच को गुजरात के वड़ोदरा में स्थित Bakeys कंपनी बना रही है। इस 15 अगस्त देश को आजाद हुए पूरे 72 साल हो जाएंगे। तब से अब तक देश ने आजादी के कई रंग देखें हैं फिर चाहे वो राजनीति के हों यो सामाजिक। मगर आज इतने सालों बाद भी चारों ओर सिर्फ नेगेटिव चीजें ही फैली हुई हैं। रेप, लूट-पाट, डकैती, करप्शन, बैंक स्कैम, प्रदूषण जैसी कई ऐसी समस्याएं हैं जो कहीं ना कहीं भारत में अपनी जड़ें फैलाती जा रही हैं। जहां देश में एक ओर इतनी नेगेटिवीटी भरी हैं वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो देश के विकास में अपने छोटे-छोटे प्रयास कर रहे हैं। लोकमत न्यूज सलाम करता है ऐसे लोगों को जो बिना किसी शिकायत के बस देश की सेवा में किसी ना किसी रूप से लगे हुए हैं। LokmatNews. in की ओर से चल रहे #KuchPossitiveKarteHain में आज कहानी एक ऐसे शख्स की जिसने प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्या प्लास्टिक से निपटने का रास्ता खोज निकाला है। इन्होंने प्लास्टिक के चम्मच की जगह एक ऐसे चम्मच को खोज निकाला है जिसे आप चाहें तो खाने के साथ खा भी सकते हैं। आज के समय में लोग खाने की पारम्परिक आदतों को भूल कर पश्चिमी सभ्यता से खाना खाने लगे है। यही कारण है कि आज लोग हाथ से नहीं बल्कि चम्मच से ज्यादा खाना खाते है। प्लास्टिक के इन्हीं चम्मचों से ना सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि आपके स्वास्थय को भी भारी नुकसान दे रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुजरात के क्रुविल पटेल ने ज्वार से चम्मच बनाने की शुरूआत की है। नहीं हैरान मत होईए यह बिल्कुल सच है। खास बात यह है कि यह चम्मच इतने मजबूत हैं कि आप इससे कुछ सॉलीड चीजें भी खा सकते हैं। लकड़ी जैसे दिखने वाले इस चम्मच को गुजरात के वड़ोदरा में स्थित Bakeys कंपनी बना रही है। इसे बनाने के लिए ज्वार के साथ चीनी, नमक, अजवायन, काली मिर्च और जीरे का इस्तेमाल किया गया है। इस चम्मच को एडिबल कटलरी के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि इस कटलरी के ही कुल 8 फ्लेवर हैं जिसे कई अलग-अलग चीजों से मिलाकर बनाया जाता है। एक मीडिया को दिए इंटरव्यू में कटलरी बनाने वाले क्रूवली ने बताया कि वो इंजीनियरिंग कॉलेज में थे तब उन्होंने एक बार हैदराबाद से एक ऐसे ही कटलरी मंगवाया था। जिसके बाद उन्हें ज्वार से चम्मच बनाने का आइडिया आया। उन्होंने बताया कि जब इसको बनाने का काम उन्होंने शुरू किया तो कोई भी तकनीक उनके पास नहीं थी। उनका कहना है कि प्लास्टिक हमारे पर्यावरण और स्वास्थय दोनों के लिए ही सबसे खराब होते हैं मगर फिर भी हम उन्हें इस्तेमाल करते है। इसका कारण यही है कि उसके अलावा हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं हैं। इन फ्लेवर्स में बीटरूट, पालक, चॉकलेट, मसाला, कालीमिर्च, मिंट, अजवाएन और प्लेन का फ्लेवर आता है। ज्वार से तैयार इन चम्मचों को पूरा बनाकर बेक्ड किया जाता है जिससे यह और भी मजबूत हो जाते हैं। जिसे 100 प्रतिशत नेचुरल प्रोडक्टस से बनाने का दावा किया जाता है। आप इससे सूप, सब्जी, दाल, चावल जैसे सभी फूड आइटम्स आराम से खा सकते हैं। सिर्फ यही नहीं अगर आप चाहें तो इस चम्मच को सूखा भी खा सकते हैं। यह ज्वार की रोटी जैसे ही टेस्ट भी करेगा और उसी के गुण भी देगा। इन चम्मचों की कीमत 3 से 6 रूपये के बीच की है। जो आपके चम्मच की क्वालिटी और फ्लेवर पर भी निर्भर करती है। यह चम्मच इन तरीकों से बनाए गए हैं कि इन्हें 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। हलांकि यह चम्मच ऐसे साधारण बाजारों में नहीं मिलता मगर आप इन्हें ऑनलाइन आर्डर करके भी मंगवा सकते हैं।
लकड़ी जैसे दिखने वाले इस चम्मच को गुजरात के वड़ोदरा में स्थित Bakeys कंपनी बना रही है। इस पंद्रह अगस्त देश को आजाद हुए पूरे बहत्तर साल हो जाएंगे। तब से अब तक देश ने आजादी के कई रंग देखें हैं फिर चाहे वो राजनीति के हों यो सामाजिक। मगर आज इतने सालों बाद भी चारों ओर सिर्फ नेगेटिव चीजें ही फैली हुई हैं। रेप, लूट-पाट, डकैती, करप्शन, बैंक स्कैम, प्रदूषण जैसी कई ऐसी समस्याएं हैं जो कहीं ना कहीं भारत में अपनी जड़ें फैलाती जा रही हैं। जहां देश में एक ओर इतनी नेगेटिवीटी भरी हैं वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो देश के विकास में अपने छोटे-छोटे प्रयास कर रहे हैं। लोकमत न्यूज सलाम करता है ऐसे लोगों को जो बिना किसी शिकायत के बस देश की सेवा में किसी ना किसी रूप से लगे हुए हैं। LokmatNews. in की ओर से चल रहे #KuchPossitiveKarteHain में आज कहानी एक ऐसे शख्स की जिसने प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्या प्लास्टिक से निपटने का रास्ता खोज निकाला है। इन्होंने प्लास्टिक के चम्मच की जगह एक ऐसे चम्मच को खोज निकाला है जिसे आप चाहें तो खाने के साथ खा भी सकते हैं। आज के समय में लोग खाने की पारम्परिक आदतों को भूल कर पश्चिमी सभ्यता से खाना खाने लगे है। यही कारण है कि आज लोग हाथ से नहीं बल्कि चम्मच से ज्यादा खाना खाते है। प्लास्टिक के इन्हीं चम्मचों से ना सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि आपके स्वास्थय को भी भारी नुकसान दे रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुजरात के क्रुविल पटेल ने ज्वार से चम्मच बनाने की शुरूआत की है। नहीं हैरान मत होईए यह बिल्कुल सच है। खास बात यह है कि यह चम्मच इतने मजबूत हैं कि आप इससे कुछ सॉलीड चीजें भी खा सकते हैं। लकड़ी जैसे दिखने वाले इस चम्मच को गुजरात के वड़ोदरा में स्थित Bakeys कंपनी बना रही है। इसे बनाने के लिए ज्वार के साथ चीनी, नमक, अजवायन, काली मिर्च और जीरे का इस्तेमाल किया गया है। इस चम्मच को एडिबल कटलरी के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि इस कटलरी के ही कुल आठ फ्लेवर हैं जिसे कई अलग-अलग चीजों से मिलाकर बनाया जाता है। एक मीडिया को दिए इंटरव्यू में कटलरी बनाने वाले क्रूवली ने बताया कि वो इंजीनियरिंग कॉलेज में थे तब उन्होंने एक बार हैदराबाद से एक ऐसे ही कटलरी मंगवाया था। जिसके बाद उन्हें ज्वार से चम्मच बनाने का आइडिया आया। उन्होंने बताया कि जब इसको बनाने का काम उन्होंने शुरू किया तो कोई भी तकनीक उनके पास नहीं थी। उनका कहना है कि प्लास्टिक हमारे पर्यावरण और स्वास्थय दोनों के लिए ही सबसे खराब होते हैं मगर फिर भी हम उन्हें इस्तेमाल करते है। इसका कारण यही है कि उसके अलावा हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं हैं। इन फ्लेवर्स में बीटरूट, पालक, चॉकलेट, मसाला, कालीमिर्च, मिंट, अजवाएन और प्लेन का फ्लेवर आता है। ज्वार से तैयार इन चम्मचों को पूरा बनाकर बेक्ड किया जाता है जिससे यह और भी मजबूत हो जाते हैं। जिसे एक सौ प्रतिशत नेचुरल प्रोडक्टस से बनाने का दावा किया जाता है। आप इससे सूप, सब्जी, दाल, चावल जैसे सभी फूड आइटम्स आराम से खा सकते हैं। सिर्फ यही नहीं अगर आप चाहें तो इस चम्मच को सूखा भी खा सकते हैं। यह ज्वार की रोटी जैसे ही टेस्ट भी करेगा और उसी के गुण भी देगा। इन चम्मचों की कीमत तीन से छः रूपये के बीच की है। जो आपके चम्मच की क्वालिटी और फ्लेवर पर भी निर्भर करती है। यह चम्मच इन तरीकों से बनाए गए हैं कि इन्हें छः महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। हलांकि यह चम्मच ऐसे साधारण बाजारों में नहीं मिलता मगर आप इन्हें ऑनलाइन आर्डर करके भी मंगवा सकते हैं।
रही है। स्वयं साम्राज्यशाहीने अपने निय शोषणसे उनको जगाया है पर अब उनका शोषण कठिन होता जाता है। भारत″ में अमोजोको इसका अनुभव होने लगा है। पर क्यों ज्यों शोषणका क्षेत्र सकुचित होता जाता है। त्यों त्यों साम्राज्यवादियोंकी लिप्सा बढ़ती जाती है। आपसकी प्रतियोगता और तीव्र होती जाती है। ऐसा माना जाता है कि बलवान् राज, + अर्थात् वह राज जिनकी पूँजाशाही विकसित है, दो वर्गमिं विभक्त हैं। कुछ तृप्त हैं और शेप अतृप्त + हैं। तृप्त वह हैं है जिनके पास पर्याप्त उपनिवेश है, अतृप्त वह है जिनके पास उपनिवेशोंकी कमी है। तृप्त राजोंका उत्कृष्टतम ब्रिटेन है, इटली, जापान और जर्मनी, वर्तमान युद्धके पहिले अतृप्त अग्रगण्य थे। पर यह विभाग स्थायी नहीं हो सकता पहिले तो तृष्णा कभी जीर्ण नहीं होती। ब्रिटेनके पूँजीपतियों के द्वार यन्द होते जा रहे हैं। कई बाजार उसके हाथ से निकल गये इसलिए मुँ इसे नहीं नहीं कहते हुए भी वह सदैव अतृप्त रहता है। आज जो राज इतने पिछड़े हुए है कि उनको गिनती भी नहीं हो सकती वह कल उन्नत हो सकते हैं। उनकी जनसख्या बढ़ सकती है, उद्योग व्यवसाय बढ़ सकता है । फिर उन्हें भी उपनिवेशवश्यकता प्रतीत होने लगेगी। यत वस्तुत तृप्त तो कोई नहीं है पर जिनके पास बहुत उपनिवेश या अर्द्धउपनिवेश है वह अवश्य यह चाहते हैं कि अब यह छोड़ बन्द हो जाय क्योंकि उनको यह डर है कि उनका वशवत भू-भाग कहीं Satiated Powers * Un satiated Powers इनको कभी कभी Havee और Have nots भी कहते हैं। हायसे निक्लन जाय। दूसरी ओर अतृप्तोंकी संख्या बढ़ती जाती है ।। पहिले तो गोरी जातियाँ रंगीन जतियोंके देशोंको ही अपना देव-निर्मित शिकार समतो थीं पर अब तो उनको अगत्या एक दूसरेपर भी वक्रदृष्टि डालनी पड़ती है। लड़ाईके याद जर्मनीको पगु करके उससे युद्धका हर्जाना लेने के लिए जो आयोजन किया गया था ॐ वह शोपणका नग्न रूप था। उसका निचोड़ यह था (क) जर्मनी तम्बाकू, शकर, शराब और जकातकी आयसे १ अरब २५ करोड़ स्वर्ण मार्क प्रति वर्ष दिया करे। (ख) इसके अतिरिक्त रेलों, यातायातके अन्य साधनों तथा व्यवसायव्यापारी आयसे २ अरव ५० करोड़ स्वर्ण मार्क दिया जाय। यह रकम जो (ख) के अन्तर्गत है स० १६८५ तकके लिए थीं । इसके बाद यदि जर्मनीको आय घढे तो उसी अनुपातसे यह रकम भी बढ़ायी जाय। जैसे यदि किसी वर्ष जर्मनीकी आय १९८४ की आपसे २०% बढ़ जाती तो उस साल उसको २५० करोड़ + २५० का २०% देना पड़ता । तमाशा यह है कि इतनी बड़ी-बड़ी रकमे तो माँगी गयीं पर कोई अवधि नहीं रखी गयी कि जर्मनी कबतक देता रहे। यह महात्वाकाक्षाएँ कैसे पूरी होंगी? इसका एक उपायऔर वही सबसे सीधा है - युद्ध है। प्रत्येक राज युद्धकी तैयारी में लगा रहता है। जिस रुपयेसे लोकहितके हजारों काम होते वह रण-सामग्रोपर बहाया जाता है । पचीस वर्षांमे दो महायुद्ध लड़े जा चुके और तीसरे की तय्यारी है। विजयी राजोमेसेन कोई, अपना साम्राज्य छोड रहा है, न कोई सेना कम कर रहा है। ● Daves' Plan यह गृहदाद केसे यच सकता है ? इटली अग्रीसीनिया युद्धके समय ब्रिटिश सरकार के परराष्ट्र सचिव सर सैमुएल होग्ने एक उपाय उपस्थित किया था। उनका कहना था कि बाजारों और कच्चे मालके उत्पत्तिस्थानोंका आपसमें न्यायपूर्ण वॅटवारा किया जाय यह बात सुननेमे अच्छी लगती है पर इसका अर्थ क्या है ? इटलीकी ओरसे तत्काल ही इसना खोखलापन दिखला दिया गया। न्यायपूर्ण बॅटव । रेफा तरीका तो यह है कि आवश्यकता के अनुसार सबको उपनिवेश दिये जायँ या सब उपनिवेशोंमे सबका समान अधिकार हो । परन्तु किसकी कितनी आवश्यकता है इसका निर्णय कैसे होगा ? फिर जिनके पास उपनिवेश हैं यदि वह उन्हें दूसरोंको दे देंगे या सब उपनिवेशोंमे सनको समान अधिकार होगा तो फिर उपनिवेश रखनेका उद्देश्य ही नष्ट हो जायगा । उपनिवेश तो व्यावसायिक एकाधिकार के लिए होते हैं। यदि एकाधिकार न होगा तो पूँजीपतियोंकी तुष्टि कैसे होगी ? अत जैसा कि इटलीकी सरकारकी ओरसे कहा गया था, न्यायपूर्ण बॅटवारेसे सर सैमुएल होरका इतना हो तात्पर्य हो सकता था कि जिनके पास इस समय उपनिवेश है वह जिनके पास नहीं है उनके हाथ कच्चा माल बेचा करें और अपने बाजारोंमे उनको भी कुछ माल घेचने दें। पर ऐसा तो अब भी न्यूनाधिक होता ही है। इससे अतृप्तों को तृप्ति नहीं हो सकती क्योंकि उपनिवेशोंके प्रभु जय चाहेंगे कच्चा माल रोक देंगे और बाजार बन्द कर देंगे । इन सन उपायोंमे एक और बडा दोष है परन्तु साम्राज्यवादी सरकार स्वभावत उसकी आर ध्यान नहीं देतीं। इनके सफल होनेके लिए यह नितान्त आवश्यक है कि पृथ्वी र कुछ ऐसे देश सदैव बने रहें जो अपनी प्राकृतिक सम्पत्तिका स्वत उपयोग न करें, जिनके निवासी राजनीतिअर्थनीति सृष्ट्या शोपित बने रहनेको सदैव तैयार रहें, जो. भेड़-बकरियोंकी भाँति निःसोच अपने स्वामी बदला करें। गोरीजातियाँ समझती हैं कि रङ्गीन जातियाँ इसीलिए बनायी गयी है बढ़ ऐसा नहीं मानतीं कि रङ्गीनोंको आत्म-निर्णयका अधि कार है। अभी सन फासिस्को में विश्वसुरक्षाकी जो योजना बनी है उसमें न तो उपनिवेशों को मुक्त करने की बात है न उनके निवासियों का स्वतंत्र होनेका अधिकार स्वीकार किया गया है। पर अब समय बदल रहा है। रङ्गीन जातियोंको राष्ट्रीय भावनाएँ लाग चुकी हैं। उनमें अपनी वर्तमान अवस्था के प्रति घोर असन्तोष है और वह सशस्था निःशल उपायों से अपने खोये हुए मनुष्यत्वको पुनः प्राप्त करनेका प्रयत्न कर रही हैं। इसका तात्पर्य यह है कि यदि साम्राज्यशाही सरकारें इन्हें दयाकर रखना चाहेंगो तो यह भी लड़ेंगी । परिणाम चाहे कुछ हो, परव्यापक सङ्घर्ष होगा और न किसीका व्यापार व्यवसाय पनप सकेगा, न वह शान्ति जो सबको अभिष्ट है स्थोपित हो सकेगी। x इसका एकमात्र उपाय यही प्रतीत होता है कि साम्राज्यशाहीका हो अन्त कर दिया जाय। जबतक देशों में एक दूसरेको, दबाने और एक दूसरेके आर्थिक जीवनपर नियंत्रण करनेकी अभिलाषा रहेगी तबतक शान्ति नहीं हो सकती । परन्तु साम्राज्यशाहीका कोई स्वतंत्र अस्तिव नहीं है। वह तो पूँजो शाहीकी सन्तान है। जबतक, पूँजीशाही निरश है तव्रतक साम्राज्यशाहीको सांकुश करने का प्रयास व्यर्थ है। x निजी सम्पत्ति तेरहवाँ अध्याय निजी सम्पत्ति हम पहलेके अध्यायोंमे लिए आये हैं कि समाजवादी जय आजकलके जगत् की दुरवस्थाका निदान करने चलता है तो उसे इसके मूलमे दो तीन मुख्य रोग मिलते हैं। इनमे हमने वर्गसंघर्ष और उत्पादनके साधनोंपर निजी स्वत्वका जिक्र किया है। उत्पादनके साधनोंपर निजी स्वत्वका हो परिणाम पूँजीशाही है और पूँजीशाहीका अन्तराष्ट्रिय परिणाम साम्राज्यशाही है। इसीलिए इन दोनों विषयोपर विचार करना आवश्यक था । अब थोडासा विचार निजी सम्पत्तिके सम्बन्धमे भी करना जरूरी है क्योंकि वस्तुत उसका सम्वन्ध भी उत्पादनके साधनोंपर निजी सवसे ही है। लोगोंमें ऐसी धारणा फैली हुई है कि समाजवादी निजी सम्पत्तिके विरोधी हैं। लोग समझते हैं कि यदि समाजवादियों के हाथ में अधिकार आ जाय तो वह धनवानोंकी सारी सम्पत्ति छीनकर निर्धनोंगे बाँट देंगे और किसीके पास किसी दूसरेसे अधिक सम्पत्ति न रहने देंगे। इसी कारण साम्यवाद-सयको बरावर धन वॉटने वाला बाद नाम पडा था । पहले तो इन दोनों धारणाओं में विरोध है। यदि समाजवादी निजी सम्पत्तिके विरोधी हैं तो वह बरावरका बॅटवारा भी न करेंगे। दूसरे, इस बँटवारेसे कोई लाभ नहीं हो सकता । चार दिन में फिर कोई धनिक, कोई निर्धन हो जायगा। फिर, समाजवादका उद्देश्य थोड़ेसे लोगोंको गिराना नहीं है, वह सबको उठाना चाहता है। यह उद्देश्य एक बार धनिकोको लूटनेसे सिद्ध न होगा। एक कहानी है कि एक बार बैरन राथ्सचाइल्डके पास, जो अपने समय में पृथ्वी
रही है। स्वयं साम्राज्यशाहीने अपने निय शोषणसे उनको जगाया है पर अब उनका शोषण कठिन होता जाता है। भारत″ में अमोजोको इसका अनुभव होने लगा है। पर क्यों ज्यों शोषणका क्षेत्र सकुचित होता जाता है। त्यों त्यों साम्राज्यवादियोंकी लिप्सा बढ़ती जाती है। आपसकी प्रतियोगता और तीव्र होती जाती है। ऐसा माना जाता है कि बलवान् राज, + अर्थात् वह राज जिनकी पूँजाशाही विकसित है, दो वर्गमिं विभक्त हैं। कुछ तृप्त हैं और शेप अतृप्त + हैं। तृप्त वह हैं है जिनके पास पर्याप्त उपनिवेश है, अतृप्त वह है जिनके पास उपनिवेशोंकी कमी है। तृप्त राजोंका उत्कृष्टतम ब्रिटेन है, इटली, जापान और जर्मनी, वर्तमान युद्धके पहिले अतृप्त अग्रगण्य थे। पर यह विभाग स्थायी नहीं हो सकता पहिले तो तृष्णा कभी जीर्ण नहीं होती। ब्रिटेनके पूँजीपतियों के द्वार यन्द होते जा रहे हैं। कई बाजार उसके हाथ से निकल गये इसलिए मुँ इसे नहीं नहीं कहते हुए भी वह सदैव अतृप्त रहता है। आज जो राज इतने पिछड़े हुए है कि उनको गिनती भी नहीं हो सकती वह कल उन्नत हो सकते हैं। उनकी जनसख्या बढ़ सकती है, उद्योग व्यवसाय बढ़ सकता है । फिर उन्हें भी उपनिवेशवश्यकता प्रतीत होने लगेगी। यत वस्तुत तृप्त तो कोई नहीं है पर जिनके पास बहुत उपनिवेश या अर्द्धउपनिवेश है वह अवश्य यह चाहते हैं कि अब यह छोड़ बन्द हो जाय क्योंकि उनको यह डर है कि उनका वशवत भू-भाग कहीं Satiated Powers * Un satiated Powers इनको कभी कभी Havee और Have nots भी कहते हैं। हायसे निक्लन जाय। दूसरी ओर अतृप्तोंकी संख्या बढ़ती जाती है ।। पहिले तो गोरी जातियाँ रंगीन जतियोंके देशोंको ही अपना देव-निर्मित शिकार समतो थीं पर अब तो उनको अगत्या एक दूसरेपर भी वक्रदृष्टि डालनी पड़ती है। लड़ाईके याद जर्मनीको पगु करके उससे युद्धका हर्जाना लेने के लिए जो आयोजन किया गया था ॐ वह शोपणका नग्न रूप था। उसका निचोड़ यह था जर्मनी तम्बाकू, शकर, शराब और जकातकी आयसे एक अरब पच्चीस करोड़ स्वर्ण मार्क प्रति वर्ष दिया करे। इसके अतिरिक्त रेलों, यातायातके अन्य साधनों तथा व्यवसायव्यापारी आयसे दो अरव पचास करोड़ स्वर्ण मार्क दिया जाय। यह रकम जो के अन्तर्गत है सशून्य एक हज़ार छः सौ पचासी तकके लिए थीं । इसके बाद यदि जर्मनीको आय घढे तो उसी अनुपातसे यह रकम भी बढ़ायी जाय। जैसे यदि किसी वर्ष जर्मनीकी आय एक हज़ार नौ सौ चौरासी की आपसे बीस% बढ़ जाती तो उस साल उसको दो सौ पचास करोड़ + दो सौ पचास का बीस% देना पड़ता । तमाशा यह है कि इतनी बड़ी-बड़ी रकमे तो माँगी गयीं पर कोई अवधि नहीं रखी गयी कि जर्मनी कबतक देता रहे। यह महात्वाकाक्षाएँ कैसे पूरी होंगी? इसका एक उपायऔर वही सबसे सीधा है - युद्ध है। प्रत्येक राज युद्धकी तैयारी में लगा रहता है। जिस रुपयेसे लोकहितके हजारों काम होते वह रण-सामग्रोपर बहाया जाता है । पचीस वर्षांमे दो महायुद्ध लड़े जा चुके और तीसरे की तय्यारी है। विजयी राजोमेसेन कोई, अपना साम्राज्य छोड रहा है, न कोई सेना कम कर रहा है। ● Daves' Plan यह गृहदाद केसे यच सकता है ? इटली अग्रीसीनिया युद्धके समय ब्रिटिश सरकार के परराष्ट्र सचिव सर सैमुएल होग्ने एक उपाय उपस्थित किया था। उनका कहना था कि बाजारों और कच्चे मालके उत्पत्तिस्थानोंका आपसमें न्यायपूर्ण वॅटवारा किया जाय यह बात सुननेमे अच्छी लगती है पर इसका अर्थ क्या है ? इटलीकी ओरसे तत्काल ही इसना खोखलापन दिखला दिया गया। न्यायपूर्ण बॅटव । रेफा तरीका तो यह है कि आवश्यकता के अनुसार सबको उपनिवेश दिये जायँ या सब उपनिवेशोंमे सबका समान अधिकार हो । परन्तु किसकी कितनी आवश्यकता है इसका निर्णय कैसे होगा ? फिर जिनके पास उपनिवेश हैं यदि वह उन्हें दूसरोंको दे देंगे या सब उपनिवेशोंमे सनको समान अधिकार होगा तो फिर उपनिवेश रखनेका उद्देश्य ही नष्ट हो जायगा । उपनिवेश तो व्यावसायिक एकाधिकार के लिए होते हैं। यदि एकाधिकार न होगा तो पूँजीपतियोंकी तुष्टि कैसे होगी ? अत जैसा कि इटलीकी सरकारकी ओरसे कहा गया था, न्यायपूर्ण बॅटवारेसे सर सैमुएल होरका इतना हो तात्पर्य हो सकता था कि जिनके पास इस समय उपनिवेश है वह जिनके पास नहीं है उनके हाथ कच्चा माल बेचा करें और अपने बाजारोंमे उनको भी कुछ माल घेचने दें। पर ऐसा तो अब भी न्यूनाधिक होता ही है। इससे अतृप्तों को तृप्ति नहीं हो सकती क्योंकि उपनिवेशोंके प्रभु जय चाहेंगे कच्चा माल रोक देंगे और बाजार बन्द कर देंगे । इन सन उपायोंमे एक और बडा दोष है परन्तु साम्राज्यवादी सरकार स्वभावत उसकी आर ध्यान नहीं देतीं। इनके सफल होनेके लिए यह नितान्त आवश्यक है कि पृथ्वी र कुछ ऐसे देश सदैव बने रहें जो अपनी प्राकृतिक सम्पत्तिका स्वत उपयोग न करें, जिनके निवासी राजनीतिअर्थनीति सृष्ट्या शोपित बने रहनेको सदैव तैयार रहें, जो. भेड़-बकरियोंकी भाँति निःसोच अपने स्वामी बदला करें। गोरीजातियाँ समझती हैं कि रङ्गीन जातियाँ इसीलिए बनायी गयी है बढ़ ऐसा नहीं मानतीं कि रङ्गीनोंको आत्म-निर्णयका अधि कार है। अभी सन फासिस्को में विश्वसुरक्षाकी जो योजना बनी है उसमें न तो उपनिवेशों को मुक्त करने की बात है न उनके निवासियों का स्वतंत्र होनेका अधिकार स्वीकार किया गया है। पर अब समय बदल रहा है। रङ्गीन जातियोंको राष्ट्रीय भावनाएँ लाग चुकी हैं। उनमें अपनी वर्तमान अवस्था के प्रति घोर असन्तोष है और वह सशस्था निःशल उपायों से अपने खोये हुए मनुष्यत्वको पुनः प्राप्त करनेका प्रयत्न कर रही हैं। इसका तात्पर्य यह है कि यदि साम्राज्यशाही सरकारें इन्हें दयाकर रखना चाहेंगो तो यह भी लड़ेंगी । परिणाम चाहे कुछ हो, परव्यापक सङ्घर्ष होगा और न किसीका व्यापार व्यवसाय पनप सकेगा, न वह शान्ति जो सबको अभिष्ट है स्थोपित हो सकेगी। x इसका एकमात्र उपाय यही प्रतीत होता है कि साम्राज्यशाहीका हो अन्त कर दिया जाय। जबतक देशों में एक दूसरेको, दबाने और एक दूसरेके आर्थिक जीवनपर नियंत्रण करनेकी अभिलाषा रहेगी तबतक शान्ति नहीं हो सकती । परन्तु साम्राज्यशाहीका कोई स्वतंत्र अस्तिव नहीं है। वह तो पूँजो शाहीकी सन्तान है। जबतक, पूँजीशाही निरश है तव्रतक साम्राज्यशाहीको सांकुश करने का प्रयास व्यर्थ है। x निजी सम्पत्ति तेरहवाँ अध्याय निजी सम्पत्ति हम पहलेके अध्यायोंमे लिए आये हैं कि समाजवादी जय आजकलके जगत् की दुरवस्थाका निदान करने चलता है तो उसे इसके मूलमे दो तीन मुख्य रोग मिलते हैं। इनमे हमने वर्गसंघर्ष और उत्पादनके साधनोंपर निजी स्वत्वका जिक्र किया है। उत्पादनके साधनोंपर निजी स्वत्वका हो परिणाम पूँजीशाही है और पूँजीशाहीका अन्तराष्ट्रिय परिणाम साम्राज्यशाही है। इसीलिए इन दोनों विषयोपर विचार करना आवश्यक था । अब थोडासा विचार निजी सम्पत्तिके सम्बन्धमे भी करना जरूरी है क्योंकि वस्तुत उसका सम्वन्ध भी उत्पादनके साधनोंपर निजी सवसे ही है। लोगोंमें ऐसी धारणा फैली हुई है कि समाजवादी निजी सम्पत्तिके विरोधी हैं। लोग समझते हैं कि यदि समाजवादियों के हाथ में अधिकार आ जाय तो वह धनवानोंकी सारी सम्पत्ति छीनकर निर्धनोंगे बाँट देंगे और किसीके पास किसी दूसरेसे अधिक सम्पत्ति न रहने देंगे। इसी कारण साम्यवाद-सयको बरावर धन वॉटने वाला बाद नाम पडा था । पहले तो इन दोनों धारणाओं में विरोध है। यदि समाजवादी निजी सम्पत्तिके विरोधी हैं तो वह बरावरका बॅटवारा भी न करेंगे। दूसरे, इस बँटवारेसे कोई लाभ नहीं हो सकता । चार दिन में फिर कोई धनिक, कोई निर्धन हो जायगा। फिर, समाजवादका उद्देश्य थोड़ेसे लोगोंको गिराना नहीं है, वह सबको उठाना चाहता है। यह उद्देश्य एक बार धनिकोको लूटनेसे सिद्ध न होगा। एक कहानी है कि एक बार बैरन राथ्सचाइल्डके पास, जो अपने समय में पृथ्वी
भुवनेश्वर। प्रो बिभुति भूषण बिश्वाल को ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालॉजी एंड रिसर्च के कुलपति के रुप में नियुक्त किया गया है। राज्यपाल तथा कुलाधिपति प्रो गणेशीलाल ने उन्हें कुलपति के पद पर नियुक्त किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रो बिश्वाल को चार साल के लिए इस पद के लिए नियुक्त किया गया है। वर्तमान में बिश्वाल मेघालय स्थित इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक के पर कार्यरत है। उनके पास 36 सालों का अध्यापन का अनुभव है। उन्होंने 3 पुस्तकों की रचना की है, जबकि 24 छात्र-छात्राओं ने उनके अधीन पीएचडी की है।
भुवनेश्वर। प्रो बिभुति भूषण बिश्वाल को ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालॉजी एंड रिसर्च के कुलपति के रुप में नियुक्त किया गया है। राज्यपाल तथा कुलाधिपति प्रो गणेशीलाल ने उन्हें कुलपति के पद पर नियुक्त किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रो बिश्वाल को चार साल के लिए इस पद के लिए नियुक्त किया गया है। वर्तमान में बिश्वाल मेघालय स्थित इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक के पर कार्यरत है। उनके पास छत्तीस सालों का अध्यापन का अनुभव है। उन्होंने तीन पुस्तकों की रचना की है, जबकि चौबीस छात्र-छात्राओं ने उनके अधीन पीएचडी की है।
मौसम में बदलाव के साथ ही लगता है हॉलीवुड में भी प्यार का मौसम शुरू हो गया है. एक महीने में हॉलीवुड में बहुत से नए रोमांटिक जोड़े सामने आये और अब एक और जोड़े के बारे में खबरें आ रही हैं. खबर है कि नाया रिवेरा और डेविड स्पेड एक दुसरे को डेट कर रहे हैं और अपने इस नए रोमांटिक रिलेशनशिप को पब्लिक की नजरों से बचाये रखने की भी पूरी कोशिश कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार ये पूर्व ग्ली एक्ट्रेस और ये लॉन्ग टाइम कॉमेडियन पिछले काफी हफ़्तों से एक दुसरे से मिल रहे हैं और अपने निजी जीवन और रिलेशनशिप को पूरी तरह से गुप्त रख रहे थे। लेकिन वो कहते हैं ना कि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी। मीडिया की नजरों से कभी कोई बच चूका है क्या, तो फिर ये कैसे बचते। हाल ही में दोनों के स्विमिंग पूल के अंदर रोमांस की कुछ फोटोज आम हो गयी है. जिसके बाद तो ये भी अपने रिलेशनशिप से नही मुकर पाएंगे। इस 30 वर्षीय अभिनेत्री ने दो साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद पिछले साल नवम्बर में अपने पति रयान डोरसे से तलाक फाइल किया था. इन दोनों के वैवाहिक जीवन से इनका एक दो साल का बाटे जोसे होलिस डोरसे भी है. वहीँ दूसरी तरफ डेविड स्पेड का भी पूर्व के रिलेशनशिप से एक बेटा है लेकिन उन्होंने कभी शादी नहीं की. इस 52 वर्षीय कॉमेडियन का नाम अतीत में हीथर लॉकलेएर, जूली बोवेन, लारा फ्लिन बोयले और पामेल एंडरसन जैसी कई मसहूर महिलाओं से जुड़ चूका है.
मौसम में बदलाव के साथ ही लगता है हॉलीवुड में भी प्यार का मौसम शुरू हो गया है. एक महीने में हॉलीवुड में बहुत से नए रोमांटिक जोड़े सामने आये और अब एक और जोड़े के बारे में खबरें आ रही हैं. खबर है कि नाया रिवेरा और डेविड स्पेड एक दुसरे को डेट कर रहे हैं और अपने इस नए रोमांटिक रिलेशनशिप को पब्लिक की नजरों से बचाये रखने की भी पूरी कोशिश कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार ये पूर्व ग्ली एक्ट्रेस और ये लॉन्ग टाइम कॉमेडियन पिछले काफी हफ़्तों से एक दुसरे से मिल रहे हैं और अपने निजी जीवन और रिलेशनशिप को पूरी तरह से गुप्त रख रहे थे। लेकिन वो कहते हैं ना कि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी। मीडिया की नजरों से कभी कोई बच चूका है क्या, तो फिर ये कैसे बचते। हाल ही में दोनों के स्विमिंग पूल के अंदर रोमांस की कुछ फोटोज आम हो गयी है. जिसके बाद तो ये भी अपने रिलेशनशिप से नही मुकर पाएंगे। इस तीस वर्षीय अभिनेत्री ने दो साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद पिछले साल नवम्बर में अपने पति रयान डोरसे से तलाक फाइल किया था. इन दोनों के वैवाहिक जीवन से इनका एक दो साल का बाटे जोसे होलिस डोरसे भी है. वहीँ दूसरी तरफ डेविड स्पेड का भी पूर्व के रिलेशनशिप से एक बेटा है लेकिन उन्होंने कभी शादी नहीं की. इस बावन वर्षीय कॉमेडियन का नाम अतीत में हीथर लॉकलेएर, जूली बोवेन, लारा फ्लिन बोयले और पामेल एंडरसन जैसी कई मसहूर महिलाओं से जुड़ चूका है.
मुक्तसर के गोनियाना गांव में सोमवार देर रात एक सिलेंडर लीक होने के बाद ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में घर में मौजूद परिवार बाल-बाल बच गया। सिलेंडर में ब्लास्ट होने की वजह से घर की छत तक उड़ गई। श्री मुक्तसर साहिब, जागरण संवाददाता। मुक्तसर के गोनियाना गांव में सोमवार देर रात खाना बनाते समय एक घर में सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि घर की कच्ची छत उड़ गई। जहां खाना बन रहा था, वो कमरा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। पड़ोसी के घर में भी दरारें आ गई। बता दें कि यह घटना मुक्तसर के गांव गोनियाना की है। सिलेंडर पहले लीक हो रहा था और उसके बाद अचानक ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट के साथ ही घर में पड़ा पूरा सामान भी जल कर राख हो गया। गनीमत यह रही कि ब्लास्ट में परिवार बाल-बाल बच गया। उधर, सूचना मिलने पर दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची। एक घंटे की जद्दोजहद के बाद आग पर काबू पाया गया। मजदूर सतपाल पुत्र महंगा राम निवासी गांव गोनियाना ने बताया कि वह रात को अपने बेटे के साथ घर में गैस सिलेंडर पर खाना तैयार कर रहा था। अचानक सिलेंडर लीक होने लगा और कुछ पलों में ही वह ब्लास्ट हो गया। जिस कारण घर में आग लग गई और धमाके से घर की कच्ची छत तक उड़ गई। सतपाल ने बताया कि उन्होंने घर से बाहर भाग कर जान बचाई। वह घर में केवल पिता पुत्र ही रहते हैं। आग लगने से उसके घर का सारा सामान जल गया है। प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित ने बताया कि टीवी, फ्रिज, कूलर, अलमारी, बेड व अन्य सामान पूरी तरह से जल गया है। आसपास के लोगों ने बताया कि जब यह धमाका हुआ तो उन्हें ऐसा लगा कि जैसे कहीं बम फट गया हो। एकदम से घबरा गए। घर से बाहर निकल कर देखा तो सतपाल के घर से धुआं निकल रहा था। इसके बाद उसके घर के बाहर जमा हो गए। जहां उन्हें पता चला कि गैस सिलेंडर फटने से यह धमाका हुआ था।
मुक्तसर के गोनियाना गांव में सोमवार देर रात एक सिलेंडर लीक होने के बाद ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में घर में मौजूद परिवार बाल-बाल बच गया। सिलेंडर में ब्लास्ट होने की वजह से घर की छत तक उड़ गई। श्री मुक्तसर साहिब, जागरण संवाददाता। मुक्तसर के गोनियाना गांव में सोमवार देर रात खाना बनाते समय एक घर में सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि घर की कच्ची छत उड़ गई। जहां खाना बन रहा था, वो कमरा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। पड़ोसी के घर में भी दरारें आ गई। बता दें कि यह घटना मुक्तसर के गांव गोनियाना की है। सिलेंडर पहले लीक हो रहा था और उसके बाद अचानक ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट के साथ ही घर में पड़ा पूरा सामान भी जल कर राख हो गया। गनीमत यह रही कि ब्लास्ट में परिवार बाल-बाल बच गया। उधर, सूचना मिलने पर दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची। एक घंटे की जद्दोजहद के बाद आग पर काबू पाया गया। मजदूर सतपाल पुत्र महंगा राम निवासी गांव गोनियाना ने बताया कि वह रात को अपने बेटे के साथ घर में गैस सिलेंडर पर खाना तैयार कर रहा था। अचानक सिलेंडर लीक होने लगा और कुछ पलों में ही वह ब्लास्ट हो गया। जिस कारण घर में आग लग गई और धमाके से घर की कच्ची छत तक उड़ गई। सतपाल ने बताया कि उन्होंने घर से बाहर भाग कर जान बचाई। वह घर में केवल पिता पुत्र ही रहते हैं। आग लगने से उसके घर का सारा सामान जल गया है। प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित ने बताया कि टीवी, फ्रिज, कूलर, अलमारी, बेड व अन्य सामान पूरी तरह से जल गया है। आसपास के लोगों ने बताया कि जब यह धमाका हुआ तो उन्हें ऐसा लगा कि जैसे कहीं बम फट गया हो। एकदम से घबरा गए। घर से बाहर निकल कर देखा तो सतपाल के घर से धुआं निकल रहा था। इसके बाद उसके घर के बाहर जमा हो गए। जहां उन्हें पता चला कि गैस सिलेंडर फटने से यह धमाका हुआ था।
धनबादः अपने चचेरे भाई रिकवरी एजेंट (Recovery Agent) उपेंद्र सिंह की हत्या (Murder) कराने के नामजद आरोपी सिंटू सिंह की जमानत अर्जी पर बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायधीश प्रथम सुजीत कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन ने केस डायरी प्रस्तुत नहीं किया। अदालत ने अपर लोक अभियोजक को केस डायरी (Case Diary) पेश करने का आदेश दिया है। बताते चलें 7 फरवरी 23 को पुलिस ने सिंटू सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसकी जमानत अर्जी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से खारिज हो गई थी। रिकवरी एजेंट उपेंद्र सिंह की हत्या विगत 1 फरवरी को पीके राय मेमोरियल कॉलेज (PK Rai Memorial College) के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उपेंद्र सिंह की पत्नी ने चचेरे देवर पिंटू सिंह, सिंटू सिंह, प्रिंस खान, गॉडविन खान और केंदुआ के राजेश चौहान सहित अन्य पर हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
धनबादः अपने चचेरे भाई रिकवरी एजेंट उपेंद्र सिंह की हत्या कराने के नामजद आरोपी सिंटू सिंह की जमानत अर्जी पर बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायधीश प्रथम सुजीत कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन ने केस डायरी प्रस्तुत नहीं किया। अदालत ने अपर लोक अभियोजक को केस डायरी पेश करने का आदेश दिया है। बताते चलें सात फरवरी तेईस को पुलिस ने सिंटू सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसकी जमानत अर्जी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से खारिज हो गई थी। रिकवरी एजेंट उपेंद्र सिंह की हत्या विगत एक फरवरी को पीके राय मेमोरियल कॉलेज के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उपेंद्र सिंह की पत्नी ने चचेरे देवर पिंटू सिंह, सिंटू सिंह, प्रिंस खान, गॉडविन खान और केंदुआ के राजेश चौहान सहित अन्य पर हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
कानपुर के बर्रा दो में दलित परिवार के मकान में कब्जे के मामले में एडीसीपी साउथ की जांच में सवाल उठने लगे थे। रिपोर्ट मिलने के बाद उच्चाधिकारी ने अब एडीसीपी वेस्ट को जांच सौंपी है। पहले एडीसीपी साउथ ने जांच में एसीपी समेत चार पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया था। कानपुर, जागरण संवाददाता। बर्रा दो में दलित परिवार के मकान में कब्जे के मामले में अब एडीसीपी की जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठने लगे हैं। विवेचना करने वाले एडीसीपी साउथ ही पुलिसकर्मियों के आरोपों की जांच कर रहे थे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उच्चाधिकारी ने इसकी जांच दोबारा कराने का निर्णय लेते हुए एडीसीपी वेस्ट को जांच सौंपी है। बर्रा निवासी दलित परिवार ने उमराव व उसके साथियों पर लूट, एससीएसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। दलित परिवार ने एसीपी पर मुकदमे से लूट की धारा हटाने का आरोप लगा उच्चाधिकारी से शिकायत की थी। उच्चाधिकारी के आदेश पर विवेचना एडीसीपी साउथ मनीषचंद्र सोनकर को सौंप दी गई। वह मामले की विवेचना कर रहे थे। उसके बाद उन्हें तत्कालीन डीसीपी साउथ ने पुलिस अधिकारी व पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच भी एडीसीपी साउथ को दे दी। उन्होंने मामले में धाराएं बढ़ाईं और आरोपित को जेल भेज दिया। एडीसीपी साउथ ने अपनी जांच में एसीपी विकास पांडेय, तत्कालीन बर्रा थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा, तत्कालीन बर्रा की यादव मार्केट चौकी प्रभारी आशीष व सिपाही अश्वनी को ठोषी ठहराते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारी को सौंपी, लेकिन जब उच्चाधिकारी ने रिपोर्ट देखी तो जिस मामले के विवेचक एडीसीपी साउथ दिखे। उसी मामले में विभागीय जांच भी उन्हीं की थी। जिसके बाद रिपोर्ट में सवाल उठे तो एडीसीपी वेस्ट बृजेश श्रीवास्तव को दोबरा विभागीय जांच सौंपी। यह था मामलाः बर्रा दो निवासी दलित परिवार के व्यक्ति ने 2014 में अपना मकान उमराव नाम के व्यक्ति को बेचा था। आरोप था कि उमराव ने 10 लाख नगर और आठ लाख की कीमत का खाड़ेपुर स्थित एक प्लाट उनके नाम कर बर्रा के मकान की लिखापढ़ी करा ली। बकाया 17 लाख न मिलने पर उन्होंने मकान पर अपना कब्जा जमाए रखा। जिस पर उमराव ने कोर्ट में चला गया। इसी दौरान कोर्ट ने उमराव के पक्ष में फैसला कर दिया। जिसका फायदा उठा जबरन सामान लूटकर परिवार को बाहर कर दिया था। तब दलित परिवार ने बर्रा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
कानपुर के बर्रा दो में दलित परिवार के मकान में कब्जे के मामले में एडीसीपी साउथ की जांच में सवाल उठने लगे थे। रिपोर्ट मिलने के बाद उच्चाधिकारी ने अब एडीसीपी वेस्ट को जांच सौंपी है। पहले एडीसीपी साउथ ने जांच में एसीपी समेत चार पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया था। कानपुर, जागरण संवाददाता। बर्रा दो में दलित परिवार के मकान में कब्जे के मामले में अब एडीसीपी की जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठने लगे हैं। विवेचना करने वाले एडीसीपी साउथ ही पुलिसकर्मियों के आरोपों की जांच कर रहे थे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उच्चाधिकारी ने इसकी जांच दोबारा कराने का निर्णय लेते हुए एडीसीपी वेस्ट को जांच सौंपी है। बर्रा निवासी दलित परिवार ने उमराव व उसके साथियों पर लूट, एससीएसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। दलित परिवार ने एसीपी पर मुकदमे से लूट की धारा हटाने का आरोप लगा उच्चाधिकारी से शिकायत की थी। उच्चाधिकारी के आदेश पर विवेचना एडीसीपी साउथ मनीषचंद्र सोनकर को सौंप दी गई। वह मामले की विवेचना कर रहे थे। उसके बाद उन्हें तत्कालीन डीसीपी साउथ ने पुलिस अधिकारी व पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच भी एडीसीपी साउथ को दे दी। उन्होंने मामले में धाराएं बढ़ाईं और आरोपित को जेल भेज दिया। एडीसीपी साउथ ने अपनी जांच में एसीपी विकास पांडेय, तत्कालीन बर्रा थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा, तत्कालीन बर्रा की यादव मार्केट चौकी प्रभारी आशीष व सिपाही अश्वनी को ठोषी ठहराते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारी को सौंपी, लेकिन जब उच्चाधिकारी ने रिपोर्ट देखी तो जिस मामले के विवेचक एडीसीपी साउथ दिखे। उसी मामले में विभागीय जांच भी उन्हीं की थी। जिसके बाद रिपोर्ट में सवाल उठे तो एडीसीपी वेस्ट बृजेश श्रीवास्तव को दोबरा विभागीय जांच सौंपी। यह था मामलाः बर्रा दो निवासी दलित परिवार के व्यक्ति ने दो हज़ार चौदह में अपना मकान उमराव नाम के व्यक्ति को बेचा था। आरोप था कि उमराव ने दस लाख नगर और आठ लाख की कीमत का खाड़ेपुर स्थित एक प्लाट उनके नाम कर बर्रा के मकान की लिखापढ़ी करा ली। बकाया सत्रह लाख न मिलने पर उन्होंने मकान पर अपना कब्जा जमाए रखा। जिस पर उमराव ने कोर्ट में चला गया। इसी दौरान कोर्ट ने उमराव के पक्ष में फैसला कर दिया। जिसका फायदा उठा जबरन सामान लूटकर परिवार को बाहर कर दिया था। तब दलित परिवार ने बर्रा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन US और सऊदी अरब के रिलेशन पर दोबारा विचार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि क्रूड ऑयल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने 5 अक्टूबर को तेल उत्पादन में कटौती करने का फैसला किया था। इससे अमेरिका बेहद खफा है। सऊदी अरब इस समूह का प्रमुख सदस्य है। CNN को दिए गए एक इंटरव्यू में व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी ने कहा- प्रेसिडेंट बाइडेन सऊदी अरब के साथ अमेरिकी संबंधों पर दोबारा विचार कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन जंग के चलते कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं, जिससे दुनियाभर तेल महंगा हो गया है। अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब तेल का उत्पादन बढ़ाए, ताकि वैश्विक तेल कीमतों को काबू में किया जा सके। अमेरिका के कई अधिकारियों ने सऊदी पर यूक्रेन जंग में रूस की मदद करने का आरोप लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि साऊदी अरब ऑयल प्रोडक्शन में कटौती करके रूस का साथ दे रहा है। यह मुद्दा न सिर्फ यूक्रेन जंग के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों का भी मामला है। प्रोडक्शन कम करने के ओपेक के फैसले से ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम और बढ़ जाएंगे। बाइडेन ने ओपेक के इस फैसले को निराशाजनक बताया। 1960 में ओपेक देशों के संगठन बनने के बाद 1973 में सऊदी अरब, ईरान और इराक के नेतृत्व वाले कुछ देशों ने अमेरिका जैसे ताकतवर देशों की इकोनॉमी को पूरी तरह से ठप कर दिया था। दरअसल, 1973 में होने वाले योम किपुर की लड़ाई में अमेरिका ने इजराइल का समर्थन किया था। दूसरी तरफ मिस्र और सीरिया के नेतृत्व वाले अरब देश शामिल थे। इन देशों ने जब अमेरिका को तेल देना बंद किया तो अमेरिका की इकोनॉमी अपने सबसे बुरे दौर में जा चुकी थी। इसी समय ओपेक दुनिया के ताकतवर तेल संगठन के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आया। तभी से यह माना गया कि ओपेक वर्ल्ड इकोनॉमी को सीधा प्रभावित करता है। सऊदी अरब का कहना है कि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को स्थिर रखने के लिए इसके प्रोडक्शन में कटौती की गई है। यह फैसला किसी देश के समर्थन या विरोध से नहीं जुड़ा है, लेकिन इसका असर भारत पर हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए 80% क्रूड ऑयल का आयात करता है। ओपेक देश भारत की जरूरत का 60% क्रूड ऑयल सप्लाई करते हैं। इनमें सऊदी अरब, इराक, ईरान वेनेज़ुएला शामिल हैं। ये सभी देश ओपेक के संस्थापक सदस्य हैं। जाहिर है भारत की तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा इन्हीं देशों से पूरा होता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन US और सऊदी अरब के रिलेशन पर दोबारा विचार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि क्रूड ऑयल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने पाँच अक्टूबर को तेल उत्पादन में कटौती करने का फैसला किया था। इससे अमेरिका बेहद खफा है। सऊदी अरब इस समूह का प्रमुख सदस्य है। CNN को दिए गए एक इंटरव्यू में व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी ने कहा- प्रेसिडेंट बाइडेन सऊदी अरब के साथ अमेरिकी संबंधों पर दोबारा विचार कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन जंग के चलते कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं, जिससे दुनियाभर तेल महंगा हो गया है। अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब तेल का उत्पादन बढ़ाए, ताकि वैश्विक तेल कीमतों को काबू में किया जा सके। अमेरिका के कई अधिकारियों ने सऊदी पर यूक्रेन जंग में रूस की मदद करने का आरोप लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि साऊदी अरब ऑयल प्रोडक्शन में कटौती करके रूस का साथ दे रहा है। यह मुद्दा न सिर्फ यूक्रेन जंग के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों का भी मामला है। प्रोडक्शन कम करने के ओपेक के फैसले से ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम और बढ़ जाएंगे। बाइडेन ने ओपेक के इस फैसले को निराशाजनक बताया। एक हज़ार नौ सौ साठ में ओपेक देशों के संगठन बनने के बाद एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में सऊदी अरब, ईरान और इराक के नेतृत्व वाले कुछ देशों ने अमेरिका जैसे ताकतवर देशों की इकोनॉमी को पूरी तरह से ठप कर दिया था। दरअसल, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में होने वाले योम किपुर की लड़ाई में अमेरिका ने इजराइल का समर्थन किया था। दूसरी तरफ मिस्र और सीरिया के नेतृत्व वाले अरब देश शामिल थे। इन देशों ने जब अमेरिका को तेल देना बंद किया तो अमेरिका की इकोनॉमी अपने सबसे बुरे दौर में जा चुकी थी। इसी समय ओपेक दुनिया के ताकतवर तेल संगठन के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आया। तभी से यह माना गया कि ओपेक वर्ल्ड इकोनॉमी को सीधा प्रभावित करता है। सऊदी अरब का कहना है कि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को स्थिर रखने के लिए इसके प्रोडक्शन में कटौती की गई है। यह फैसला किसी देश के समर्थन या विरोध से नहीं जुड़ा है, लेकिन इसका असर भारत पर हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए अस्सी% क्रूड ऑयल का आयात करता है। ओपेक देश भारत की जरूरत का साठ% क्रूड ऑयल सप्लाई करते हैं। इनमें सऊदी अरब, इराक, ईरान वेनेज़ुएला शामिल हैं। ये सभी देश ओपेक के संस्थापक सदस्य हैं। जाहिर है भारत की तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा इन्हीं देशों से पूरा होता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टेलीविजन एक्ट्रेस हिना खान अपने खूबसूरत अंदाज से छाई रहती हैं। सोशल मीडिया पर हर दिन हिना खान का एक से एक आकर्षक लुक ट्रेंड कर रहा है. इंडियन हो या वेस्टर्न हिना खान हर आउटफिट को बेहद कॉन्फिडेंस के साथ कैरी करती हैं। हालांकि, इस बार एक्ट्रेस को साड़ी पहनना और संभालना मुश्किल हो गया। इसी बीच हिना खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। हिना खान एक फोटो सेशन के दौरान पपराजी को पोज देकर घर के अंदर जा रही थीं। इसी बीच हिन खान की साड़ी उनके पैर में लग गई और एक्ट्रेस फिसल गई। हिना का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. साथ ही कमेंट सेक्शन में फैंस उनके लिए दुआ कर रहे हैं कि उन्हें ज्यादा चोट न लगे. आपको बता दें कि हिना खान ने स्टार प्लस के मशहूर टीवी शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में संस्कारी अक्षरा का किरदार निभाकर शोहरत हासिल की थी। इस सीरियल में उनके किरदार को इतना पसंद किया गया था कि लोग उन्हें घर में अक्षरा के नाम से जानते हैं। इसके बाद हिना ने कान्स के रेड कार्पेट पर बिग बॉस खतरों के खिलाड़ी से अपनी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए। हिना खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपने फैंस के साथ अपनी नई-नई तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं.
टेलीविजन एक्ट्रेस हिना खान अपने खूबसूरत अंदाज से छाई रहती हैं। सोशल मीडिया पर हर दिन हिना खान का एक से एक आकर्षक लुक ट्रेंड कर रहा है. इंडियन हो या वेस्टर्न हिना खान हर आउटफिट को बेहद कॉन्फिडेंस के साथ कैरी करती हैं। हालांकि, इस बार एक्ट्रेस को साड़ी पहनना और संभालना मुश्किल हो गया। इसी बीच हिना खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। हिना खान एक फोटो सेशन के दौरान पपराजी को पोज देकर घर के अंदर जा रही थीं। इसी बीच हिन खान की साड़ी उनके पैर में लग गई और एक्ट्रेस फिसल गई। हिना का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. साथ ही कमेंट सेक्शन में फैंस उनके लिए दुआ कर रहे हैं कि उन्हें ज्यादा चोट न लगे. आपको बता दें कि हिना खान ने स्टार प्लस के मशहूर टीवी शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में संस्कारी अक्षरा का किरदार निभाकर शोहरत हासिल की थी। इस सीरियल में उनके किरदार को इतना पसंद किया गया था कि लोग उन्हें घर में अक्षरा के नाम से जानते हैं। इसके बाद हिना ने कान्स के रेड कार्पेट पर बिग बॉस खतरों के खिलाड़ी से अपनी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए। हिना खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपने फैंस के साथ अपनी नई-नई तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं.
भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम के केन्द्रीय मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने आज दो केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यमों भारत पंप्स एंड कम्प्रेसर लिमिटेड और ब्रिज व रूफ कंपनी (आई) लिमिटेड को मिनी रत्न का दर्जा प्रदान किया। इस अवसर पर भारी उद्योग विभाग के सचिव श्री बी.एस.मीणा, भारत पंप्स एंड कम्प्रेसर के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक श्री अभय कुमार जैन, ब्रिज एंड रूफ कंपनी (आई) लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री मुकेश झा और भारी उद्योग के विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ब्रिज एंड रूफ कंपनी (आई) लिमिटेड को श्रेणी-I में मिनी रत्न का दर्जा दिया गया, जबकि भारत पंप्स व कम्प्रेसर लिमिटेड को श्रेणी-II का दर्जा दिया गया। समूह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री विलास राव देशमुख ने कहा कि इन केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यमों के लिए मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनको मौलिक, वित्तीय एवं निष्पादन स्वायत्तता की अनुमति देता है। (Release ID :5792)
भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम के केन्द्रीय मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने आज दो केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यमों भारत पंप्स एंड कम्प्रेसर लिमिटेड और ब्रिज व रूफ कंपनी लिमिटेड को मिनी रत्न का दर्जा प्रदान किया। इस अवसर पर भारी उद्योग विभाग के सचिव श्री बी.एस.मीणा, भारत पंप्स एंड कम्प्रेसर के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक श्री अभय कुमार जैन, ब्रिज एंड रूफ कंपनी लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री मुकेश झा और भारी उद्योग के विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ब्रिज एंड रूफ कंपनी लिमिटेड को श्रेणी-I में मिनी रत्न का दर्जा दिया गया, जबकि भारत पंप्स व कम्प्रेसर लिमिटेड को श्रेणी-II का दर्जा दिया गया। समूह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री विलास राव देशमुख ने कहा कि इन केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यमों के लिए मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनको मौलिक, वित्तीय एवं निष्पादन स्वायत्तता की अनुमति देता है।
एक दोस्त दूसरे दोस्त सेः भाई 2016 में मैं सिंगल नहीं रहूंगा। इस साल तो पक्का लड़की पटा लूंगा। दूसरा दोस्तः अरे पागल! सिर्फ साल बदला है तेरी शक्ल नहीं, जो तू लड़की पटा लेगा। लड़काः आज फिर से मेरा सलमान भाई से मिलने का मन कर रहा है। लड़कीः क्या बात है! क्या तुम पहले भी सलमान खान से मिल चुके हो? लड़काः नहीं पागल, पहले भी मेरा मन कर चुका है सलमान भाई से मिलने का। पप्पू का सिर फूट गया। मोनू ने पूछा कैसे हुआ तो पप्पू बोला, मैं चप्पल से पत्थर तोड़ने की कोशिश कर रहा था, गधे, कभी अपनी खोपड़ी का इस्तेमाल भी कर लिया कर। बंटी- ड्राइविंग करते हुए शराब पीना सच में हानिकारक है। पप्पू- क्या हुआ? बंटी- कल एक मित्र बियर पीते हुए गाडी चला रहा था। बियर छीन ली और भाग गया। राजू - कर ले। राजू - शादी वो खूब़सूरत जंगल है, जहां बहादूर शेरों का शिकार हिरणियां करती हैं। पप्पू - तुम अपने घर के बाहर खड़े ट्रक को देखकर इतना घबरा क्यों रहे हो। बंता - एक बार ऐसे ही ट्रक के ड्राइवर ने मेरी बीवी को किड्नेप किया था। पप्पू - तो? पप्पू - बस इसलिए मुझे डर हैं कि वो उसे वापस छोडऩे तो नहीं आ गया। टीचर - छोटी मधुमक्खी तुम्हें क्या देती है? बच्चे - शहद! टीचर - पतली बकरी? बच्चे - दूध! टीचर - और मोटी भैंस? बच्चे - होमवर्क और फिर थप्पड़ पे थप्पड़।
एक दोस्त दूसरे दोस्त सेः भाई दो हज़ार सोलह में मैं सिंगल नहीं रहूंगा। इस साल तो पक्का लड़की पटा लूंगा। दूसरा दोस्तः अरे पागल! सिर्फ साल बदला है तेरी शक्ल नहीं, जो तू लड़की पटा लेगा। लड़काः आज फिर से मेरा सलमान भाई से मिलने का मन कर रहा है। लड़कीः क्या बात है! क्या तुम पहले भी सलमान खान से मिल चुके हो? लड़काः नहीं पागल, पहले भी मेरा मन कर चुका है सलमान भाई से मिलने का। पप्पू का सिर फूट गया। मोनू ने पूछा कैसे हुआ तो पप्पू बोला, मैं चप्पल से पत्थर तोड़ने की कोशिश कर रहा था, गधे, कभी अपनी खोपड़ी का इस्तेमाल भी कर लिया कर। बंटी- ड्राइविंग करते हुए शराब पीना सच में हानिकारक है। पप्पू- क्या हुआ? बंटी- कल एक मित्र बियर पीते हुए गाडी चला रहा था। बियर छीन ली और भाग गया। राजू - कर ले। राजू - शादी वो खूब़सूरत जंगल है, जहां बहादूर शेरों का शिकार हिरणियां करती हैं। पप्पू - तुम अपने घर के बाहर खड़े ट्रक को देखकर इतना घबरा क्यों रहे हो। बंता - एक बार ऐसे ही ट्रक के ड्राइवर ने मेरी बीवी को किड्नेप किया था। पप्पू - तो? पप्पू - बस इसलिए मुझे डर हैं कि वो उसे वापस छोडऩे तो नहीं आ गया। टीचर - छोटी मधुमक्खी तुम्हें क्या देती है? बच्चे - शहद! टीचर - पतली बकरी? बच्चे - दूध! टीचर - और मोटी भैंस? बच्चे - होमवर्क और फिर थप्पड़ पे थप्पड़।
भारत के रविंदर जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए हंगरी के बुडापेस्ट में चल रही अंडर-23 विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में 61 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में पहुंच गए जबकि जूनियर विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता वीर देव गुलिया 79 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक के लिए लड़ेंगे। रविंदर ने प्री क्वार्टरफाइनल में हंगरी के मार्सेल बुदायी कोवाक्स को 12-1 से, क्वार्टरफाइनल में रूस के दिनिस्लाम ताख्तारोव को 11-0 से और सेमीफाइनल में अर्मेनिया के आसेर्न हारुतयुनयान को कड़े संघर्ष में 4-3 से हराकर फाइनल में जगह बना ली जहां वह इस प्रतियोगिता के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय खिलाड़ी बनने से एक कदम दूर रह गए हैं। रविंदर का फाइनल में किर्गिजिस्तान के युलुकबेक झोलदोशबेकोव से मुकाबला होगा। 79 किग्रा में जूनियर विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता वीर देव गुलिया ने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें सोमवार को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। गुलिया ने प्री क्वार्टरफाइनल में चीन के लिगान चाई को 7-2 से और क्वार्टरफाइनल में मंगोलिया के बातजुल दामजिन को 12-1 से हराया। भारतीय पहलवान को सेमीफाइनल में अजरबैजान के अबुबकर अबाकारोव से 1-8 से हार का सामना करना पड़ा। गुलिया अब कांस्य पदक के लिए मैदान में उतरेंगे जहां उनका सामना रुस के रादिक वेलीव से होगा। जूनियर एशियाई चैंपियन और दूसरी वरीयता प्राप्त श्रवण ने 65 किग्रा के प्रीक्वार्टरफाइनल में कजाकिस्तान के रिफत सैबोतालोव को कड़े संघर्ष में 8-6 से हराकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया जहां उन्हें फ्रांस के इलमैन मुख्तारोव से 6-10 से हार का सामना करना पड़ा। मुख्तारोव के सेमीफाइनल में हारने से श्रवण की रेपेचेज में उतरने की उम्मीदें टूट गयीं। 57 किग्रा में 15वीं सीड नवीन की चुनौती पहले ही राउंड में समाप्त हो गयी। नवीन को क्वॉलिफिकेशन में तुर्की के अहमत दुमान ने 11-0 से पराजित किया। दुमान फिर प्री क्वार्टरफाइनल में हार गए और इसके साथ ही नवीन मुकाबलों से बाहर हो गए। 70 किग्रा में 15वीं सीड नवीन को क्वॉलिफिकेशन में रूस के चेरमेन वेलीव ने 11-0 से हरा दिया। वेलीव के फाइनल में पहुंचने से नवीन को रेपेचेज में उतरने का मौका मिल गया लेकिन नवीन को रेपेचेज में मंगोलिया के तेमुलेन अंखतुया से 6-8 से हार का सामना करना पड़ा। 74 किग्रा में गौरव बालियान ने क्वालिफिकेशन मुकाबला जीता लेकिन वह प्री क्वार्टरफाइनल मुकाबला रुस के रज़ामबेक झामालोव से 9-12 से हार गए। झामालोव के इस वर्ग के फाइनल में पहुंचने के कारण गौरव को रेपेचेज में उतरने का मौका मिल गया जहां उनका सामना अमेरिका के ब्रॉडी गैरी बर्ज से होगा। फुटबॉल के महानायक के आस्थावानों का धर्म है 'चर्च ऑफ माराडोना' 86 किग्रा में संजीत को क्वालिफिकेशन में रुस केअज़मत जाकुएव से 0-6 से हार का सामना करना पड़ा। जाकुएव के प्रीक्वार्टरफईनल में हारने के कारण संजीत की चुनौती समाप्त हो गयी। 92 किग्रा में विकी को स्विट्जरलैंड के सैमुअल शेरर के हाथों 1-7 से हार झेलनी पड़ी। शेरर फिर क्वार्टरफाइनल में हारे और विकी मुकाबले से बाहर हो गए। 97 किग्रा में आकाश अंतिल ने प्री क्वार्टरफाइनल में चीन के जू ली को 10-0 से पस्त कर दिया। आकाश को क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन के डेनिलो स्तासियुक से कड़े संघर्ष में 5-9 से हार का सामना करना पड़ा। स्तासियुक के सेमीफाइनल में हारने से आकाश की रेपेचेज में उतरने की उम्मीदें टूट गयीं। 125 किग्रा में प्रताप आर्यन को प्री क्वार्टरफाइनल में अर्मेनिया के होवहांस माघक्यान ने कड़े संघर्ष में 4-3 से हरा दिया। रूसी पहलवान के क्वार्टरफाइनल में हारने से प्रताप की चुनौती भी समाप्त हो गई।
भारत के रविंदर जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए हंगरी के बुडापेस्ट में चल रही अंडर-तेईस विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में इकसठ किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में पहुंच गए जबकि जूनियर विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता वीर देव गुलिया उन्यासी किग्रा वर्ग में कांस्य पदक के लिए लड़ेंगे। रविंदर ने प्री क्वार्टरफाइनल में हंगरी के मार्सेल बुदायी कोवाक्स को बारह-एक से, क्वार्टरफाइनल में रूस के दिनिस्लाम ताख्तारोव को ग्यारह-शून्य से और सेमीफाइनल में अर्मेनिया के आसेर्न हारुतयुनयान को कड़े संघर्ष में चार-तीन से हराकर फाइनल में जगह बना ली जहां वह इस प्रतियोगिता के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय खिलाड़ी बनने से एक कदम दूर रह गए हैं। रविंदर का फाइनल में किर्गिजिस्तान के युलुकबेक झोलदोशबेकोव से मुकाबला होगा। उन्यासी किग्रा में जूनियर विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता वीर देव गुलिया ने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें सोमवार को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। गुलिया ने प्री क्वार्टरफाइनल में चीन के लिगान चाई को सात-दो से और क्वार्टरफाइनल में मंगोलिया के बातजुल दामजिन को बारह-एक से हराया। भारतीय पहलवान को सेमीफाइनल में अजरबैजान के अबुबकर अबाकारोव से एक-आठ से हार का सामना करना पड़ा। गुलिया अब कांस्य पदक के लिए मैदान में उतरेंगे जहां उनका सामना रुस के रादिक वेलीव से होगा। जूनियर एशियाई चैंपियन और दूसरी वरीयता प्राप्त श्रवण ने पैंसठ किग्रा के प्रीक्वार्टरफाइनल में कजाकिस्तान के रिफत सैबोतालोव को कड़े संघर्ष में आठ-छः से हराकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया जहां उन्हें फ्रांस के इलमैन मुख्तारोव से छः-दस से हार का सामना करना पड़ा। मुख्तारोव के सेमीफाइनल में हारने से श्रवण की रेपेचेज में उतरने की उम्मीदें टूट गयीं। सत्तावन किग्रा में पंद्रहवीं सीड नवीन की चुनौती पहले ही राउंड में समाप्त हो गयी। नवीन को क्वॉलिफिकेशन में तुर्की के अहमत दुमान ने ग्यारह-शून्य से पराजित किया। दुमान फिर प्री क्वार्टरफाइनल में हार गए और इसके साथ ही नवीन मुकाबलों से बाहर हो गए। सत्तर किग्रा में पंद्रहवीं सीड नवीन को क्वॉलिफिकेशन में रूस के चेरमेन वेलीव ने ग्यारह-शून्य से हरा दिया। वेलीव के फाइनल में पहुंचने से नवीन को रेपेचेज में उतरने का मौका मिल गया लेकिन नवीन को रेपेचेज में मंगोलिया के तेमुलेन अंखतुया से छः-आठ से हार का सामना करना पड़ा। चौहत्तर किग्रा में गौरव बालियान ने क्वालिफिकेशन मुकाबला जीता लेकिन वह प्री क्वार्टरफाइनल मुकाबला रुस के रज़ामबेक झामालोव से नौ-बारह से हार गए। झामालोव के इस वर्ग के फाइनल में पहुंचने के कारण गौरव को रेपेचेज में उतरने का मौका मिल गया जहां उनका सामना अमेरिका के ब्रॉडी गैरी बर्ज से होगा। फुटबॉल के महानायक के आस्थावानों का धर्म है 'चर्च ऑफ माराडोना' छियासी किग्रा में संजीत को क्वालिफिकेशन में रुस केअज़मत जाकुएव से शून्य-छः से हार का सामना करना पड़ा। जाकुएव के प्रीक्वार्टरफईनल में हारने के कारण संजीत की चुनौती समाप्त हो गयी। बानवे किग्रा में विकी को स्विट्जरलैंड के सैमुअल शेरर के हाथों एक-सात से हार झेलनी पड़ी। शेरर फिर क्वार्टरफाइनल में हारे और विकी मुकाबले से बाहर हो गए। सत्तानवे किग्रा में आकाश अंतिल ने प्री क्वार्टरफाइनल में चीन के जू ली को दस-शून्य से पस्त कर दिया। आकाश को क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन के डेनिलो स्तासियुक से कड़े संघर्ष में पाँच-नौ से हार का सामना करना पड़ा। स्तासियुक के सेमीफाइनल में हारने से आकाश की रेपेचेज में उतरने की उम्मीदें टूट गयीं। एक सौ पच्चीस किग्रा में प्रताप आर्यन को प्री क्वार्टरफाइनल में अर्मेनिया के होवहांस माघक्यान ने कड़े संघर्ष में चार-तीन से हरा दिया। रूसी पहलवान के क्वार्टरफाइनल में हारने से प्रताप की चुनौती भी समाप्त हो गई।
छत्तीसगढ़ के बालोद में एक बुजुर्ग महिला की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। महिला का खून से लथपथ शव उसके ही घर में मिला है। महिला घर में अकेले रहती थी। ग्रामीणों ने शवा देखा तो उसके बेटे को फोन कर जानकारी दी। सूचना मिलने पर पुलिस भी पहुंच गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
छत्तीसगढ़ के बालोद में एक बुजुर्ग महिला की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। महिला का खून से लथपथ शव उसके ही घर में मिला है। महिला घर में अकेले रहती थी। ग्रामीणों ने शवा देखा तो उसके बेटे को फोन कर जानकारी दी। सूचना मिलने पर पुलिस भी पहुंच गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
चीन में कोरोना के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ जगहों पर फिर लॉकडाउन लग रहा है, लोगों पर पाबंदी लगाई जा रही है और नई ट्रैवल गाइडलाइन भी जारी की गई है. इस समय चीन में ओमिक्रॉन के दो नए सब वैरिएंट सामने आए हैं- बीएफ. 7 और बीए. 5. 1. 7. इन दो सब वैरिएंट की वजह से ही चीन में अचानक से कोरोना मामलों में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. आंकड़ो के मुताबिक 10 अक्टूबर को चीन में कोरोना के 2,089 केस दर्ज किए गए थे, ये 20 अगस्त के बाद से दर्ज किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा रहा. वहीं चीन के ही Shenzhen में बीएफ. 7 की वजह से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. वहां भी मामले तीन गुना तक बढ़ चुके हैं. स्थिति को देखते हुए जो भी लोग अब Shenzhen आएंगे, उनके तीन दिन के भीतर तीन अलग-अलग टेस्ट किए जाएंगे. Shenzhen में हालात इतने चिंताजनक हो गए हैं कि अधिकारी आनन-फानन में स्कूल बंद कर रहे हैं, एंटरटेनमेंट वाली जगहों पर ताला लगा रहे हैं. अब चीन में कोरोना के अचानक बढ़ते मामलों के कई कारण माने जा रहे हैं. सबसे बड़ा तो ये है कि चीन में सप्ताह भर चलने वाले राष्ट्रीय दिवस की वजह से कई लोग एक जगह से दूसरी जगह ट्रैवल किए हैं. उस कारण से कोरोना का प्रसार भी कई इलाकों तक पहुंचा है. अब सवाल ये उठता है कि क्या कोरोना के ये नए सब वैरिएंट खतरनाक हैं? क्या इनसे डरने की जरूरत है? इस बारे में डॉक्टर राजीव जयदेवन बताते हैं कि ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट्स की वजह से कोरोना की नई लहरे कई जगह देखने को मिल रही हैं. यूके और जर्मनी में भी इस वजह से मामले बढ़ने लगे हैं. इन वैरिएंट को लेकर जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक ये इम्युनिटी को चकमा दे सकते हैं. अभी तक ये संकेत तो नहीं मिले हैं कि इस सबवैरिएंट की वजह से ज्यादा गंभीर लक्षण देखने को मिलेंगे. वहीं डॉक्टर राजीव जयदेवन चीन की कोरोना रणनीति को लेकर भी ज्यादा संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि चीन अभी भी जीरो कोविड वाली रणनीति पर काम कर रहा है. उसकी तरफ से टेस्टिंग की जा रही है, छोटे लॉकडाउन लगाए जा रहे हैं. लेकिन अब मामले एक दिन में 2000 के करीब पहुंचने लगे हैं. चीन वायरस को यूं फैलने नहीं दे सकता है. ओमिक्रॉन तेजी से फैलता है और मौते भी हो सकती हैं. हांग कांग और ऑस्ट्रेलिया में टीकाकरण के बावजूद भी ऐसा ही नजारा देखने को मिल गया था. लेकिन चीन इस सब के बावजूद भी अपनी रणनीति बदलेगा, मुश्किल लगता है.
चीन में कोरोना के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ जगहों पर फिर लॉकडाउन लग रहा है, लोगों पर पाबंदी लगाई जा रही है और नई ट्रैवल गाइडलाइन भी जारी की गई है. इस समय चीन में ओमिक्रॉन के दो नए सब वैरिएंट सामने आए हैं- बीएफ. सात और बीए. पाँच. एक. सात. इन दो सब वैरिएंट की वजह से ही चीन में अचानक से कोरोना मामलों में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. आंकड़ो के मुताबिक दस अक्टूबर को चीन में कोरोना के दो,नवासी केस दर्ज किए गए थे, ये बीस अगस्त के बाद से दर्ज किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा रहा. वहीं चीन के ही Shenzhen में बीएफ. सात की वजह से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. वहां भी मामले तीन गुना तक बढ़ चुके हैं. स्थिति को देखते हुए जो भी लोग अब Shenzhen आएंगे, उनके तीन दिन के भीतर तीन अलग-अलग टेस्ट किए जाएंगे. Shenzhen में हालात इतने चिंताजनक हो गए हैं कि अधिकारी आनन-फानन में स्कूल बंद कर रहे हैं, एंटरटेनमेंट वाली जगहों पर ताला लगा रहे हैं. अब चीन में कोरोना के अचानक बढ़ते मामलों के कई कारण माने जा रहे हैं. सबसे बड़ा तो ये है कि चीन में सप्ताह भर चलने वाले राष्ट्रीय दिवस की वजह से कई लोग एक जगह से दूसरी जगह ट्रैवल किए हैं. उस कारण से कोरोना का प्रसार भी कई इलाकों तक पहुंचा है. अब सवाल ये उठता है कि क्या कोरोना के ये नए सब वैरिएंट खतरनाक हैं? क्या इनसे डरने की जरूरत है? इस बारे में डॉक्टर राजीव जयदेवन बताते हैं कि ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट्स की वजह से कोरोना की नई लहरे कई जगह देखने को मिल रही हैं. यूके और जर्मनी में भी इस वजह से मामले बढ़ने लगे हैं. इन वैरिएंट को लेकर जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक ये इम्युनिटी को चकमा दे सकते हैं. अभी तक ये संकेत तो नहीं मिले हैं कि इस सबवैरिएंट की वजह से ज्यादा गंभीर लक्षण देखने को मिलेंगे. वहीं डॉक्टर राजीव जयदेवन चीन की कोरोना रणनीति को लेकर भी ज्यादा संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि चीन अभी भी जीरो कोविड वाली रणनीति पर काम कर रहा है. उसकी तरफ से टेस्टिंग की जा रही है, छोटे लॉकडाउन लगाए जा रहे हैं. लेकिन अब मामले एक दिन में दो हज़ार के करीब पहुंचने लगे हैं. चीन वायरस को यूं फैलने नहीं दे सकता है. ओमिक्रॉन तेजी से फैलता है और मौते भी हो सकती हैं. हांग कांग और ऑस्ट्रेलिया में टीकाकरण के बावजूद भी ऐसा ही नजारा देखने को मिल गया था. लेकिन चीन इस सब के बावजूद भी अपनी रणनीति बदलेगा, मुश्किल लगता है.
1 कलेक्टर सभाकक्ष में कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा द्वारा साप्ताहिक समीक्षा बैठक ली गई साप्ताहिक समीक्षा बैठक में सप्ताह भर के कार्यों की समीक्षा एवं सीएम हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतों को लेकर जल्द से जल्द निपटारा करने के आदेश दिए। बैठक में एडीएम राजेशाही नगर निगम कमिश्नर अक्षित गढ़पाले जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह एसडीएम सहित सभी विभाग प्रमुख उपस्थित थे । 2 स्थानीय पोला ग्राउंड में रोटरी फेस्टिवल का आयोजन किया गया । रोटरी फेस्टिवल का यह आयोजन विकलांग इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न प्रकार के स्टालों के माध्यम से फेस्टिवल को सुसज्जित किया गया इस कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर इक्षित गढ़पाले ने शिरकत की कार्यक्रम में रोटरी क्लब के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यगण उपस्थित थे । 3 जिला संत गुरु रविदास समिति द्वारा पटेल मंगल भवन में युवक एवं युवती परिचय सम्मेलन का आयोजन किया गया । इस परिचय सम्मेलन का आयोजन सकल रविदास समाज द्वारा आयोजन किया गया था आयोजन में अलग अलग प्रांतों से आए युवक एवं युवतियों शामिल हुए । 4 जिला मुस्लिम समाज द्वारा आज प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों को जानकारी दी एनआरसी बिल के विरोध में कंट्रोल रूम ज्ञापन सौंपा गया और देश के अमन और चौन की दुआ मांगी गई । 5 सुन्दरकाण्ड ग्रूप छिंदवाड़ा धार्मिकता के साथ-साथ सामाजिक कार्यों को करने को लेकर छिंदवाड़ा जिले के साथ साथ अन्य जिलों में भी में अपनी अलग पहचान बनाये हुए है,ग्रुप द्वारा प्रति शनिवार को कई सालो से आपके के बुलावे निरूशुल्क संगीतमय सुन्दरकाण्ड का महापाठ किया जाता है साथ ही सामाजिक कार्य भो किये जाते है--इसी क्रम मे ग्रुप द्वारा 21 दिसंबर को ग्राम नेर में निःशुल्क नेत्र शिविर, दंत चिकित्सा ,होम्योपैथी,आयोर्दीक शिविर का आयोजन किया गया जिसमें आस-पास के ग्राम से आये हुए मरीजो का इलाज किया गया ।
एक कलेक्टर सभाकक्ष में कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा द्वारा साप्ताहिक समीक्षा बैठक ली गई साप्ताहिक समीक्षा बैठक में सप्ताह भर के कार्यों की समीक्षा एवं सीएम हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतों को लेकर जल्द से जल्द निपटारा करने के आदेश दिए। बैठक में एडीएम राजेशाही नगर निगम कमिश्नर अक्षित गढ़पाले जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह एसडीएम सहित सभी विभाग प्रमुख उपस्थित थे । दो स्थानीय पोला ग्राउंड में रोटरी फेस्टिवल का आयोजन किया गया । रोटरी फेस्टिवल का यह आयोजन विकलांग इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न प्रकार के स्टालों के माध्यम से फेस्टिवल को सुसज्जित किया गया इस कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर इक्षित गढ़पाले ने शिरकत की कार्यक्रम में रोटरी क्लब के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यगण उपस्थित थे । तीन जिला संत गुरु रविदास समिति द्वारा पटेल मंगल भवन में युवक एवं युवती परिचय सम्मेलन का आयोजन किया गया । इस परिचय सम्मेलन का आयोजन सकल रविदास समाज द्वारा आयोजन किया गया था आयोजन में अलग अलग प्रांतों से आए युवक एवं युवतियों शामिल हुए । चार जिला मुस्लिम समाज द्वारा आज प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों को जानकारी दी एनआरसी बिल के विरोध में कंट्रोल रूम ज्ञापन सौंपा गया और देश के अमन और चौन की दुआ मांगी गई । पाँच सुन्दरकाण्ड ग्रूप छिंदवाड़ा धार्मिकता के साथ-साथ सामाजिक कार्यों को करने को लेकर छिंदवाड़ा जिले के साथ साथ अन्य जिलों में भी में अपनी अलग पहचान बनाये हुए है,ग्रुप द्वारा प्रति शनिवार को कई सालो से आपके के बुलावे निरूशुल्क संगीतमय सुन्दरकाण्ड का महापाठ किया जाता है साथ ही सामाजिक कार्य भो किये जाते है--इसी क्रम मे ग्रुप द्वारा इक्कीस दिसंबर को ग्राम नेर में निःशुल्क नेत्र शिविर, दंत चिकित्सा ,होम्योपैथी,आयोर्दीक शिविर का आयोजन किया गया जिसमें आस-पास के ग्राम से आये हुए मरीजो का इलाज किया गया ।
- News चीन के विदेश मंत्री की नहीं मिल रही कोई खोज खबर, तमाम प्रोग्राम हो गये कैंसिल. . बीमार हैं या है कोई और बात? - Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! लॉकडाउन के दौरान बॉलीवुड स्टार्स अपनी स्किन और बालों का देखभाल कर रहे हैं। करीना कपूर और दीपिका पादुकोण इंस्टाग्राम पर अपनी स्किन केयर की वीडियो शेयर की हैं। करीना कपूर ने हाल ही में होममेड फेस पैक के बारे में अपने फैंस के साथ शेयर किया है। आज हम तमन्ना भाटिया के होममेड हेयर ऑयल के बारे में बात करेंगे। तमन्ना भाटिया ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से अपने फैंस के साथ होममेड हेयर ऑयल शेयर किया है। आप भी अपने घर में इस होममेड हेयर ऑयल बना सकते है। होममेड हेयर ऑयल से बाल घने और काले हो सकते है। होममेड हेयर ऑयल बनाने के लिए नारियल तेल और प्याज की जररुत होती है। तमन्ना ने प्याज के रस के साथ नारियल तेल को मिक्स करके होममेड ऑयल बनाया है। बालों की मालिश करें। इस मिश्रण को बालों में 30 मिनट के लिए लगाएं। बालों में इस मिश्रण को लगाने के लिए कॉटन को मिश्रण में डालकर बालों में लगाना चाहिए। इस मिश्रण को बालों मे लगाने से पहले इस बात का ध्यान देना चाहिए। यह मिश्रण आपके आंखों में ना चला जाएं। अपनी आंखों को बचाकर इस मिश्रण को बालों में लगाएं। प्याज बालों की देखभाल की करने के लिए सबसे कारगार साबित होता है। प्याज में सल्फर पाया जाता है, जो बालों के विकास के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। बालों की ग्रोथ के लिए आप प्याज के रस का इस्तेमाल कर सकते हैं। सिल्की बालों के लिए नारियल का तेल बहुत ही लाभदायक साबित होता है। नारियल तेल में लॉरिक एसिड पाया जाता है, जो बालों को प्रोटीन देता है। जिससे बाल सिल्की हो जाते हैं। नारियल तेल में नेचुरल कंडीशनर पाया जाता है। जिससे बालों में शाइन देखने को मिलती हैं। नारियल तेल और प्याज के रस को मिक्स करके बालों में लगाने से बालों की ग्रोथ बढ़ती हैं। पतले बालों को लिए ये मिश्रण बहुत ही लाभदायक है।
- News चीन के विदेश मंत्री की नहीं मिल रही कोई खोज खबर, तमाम प्रोग्राम हो गये कैंसिल. . बीमार हैं या है कोई और बात? - Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! लॉकडाउन के दौरान बॉलीवुड स्टार्स अपनी स्किन और बालों का देखभाल कर रहे हैं। करीना कपूर और दीपिका पादुकोण इंस्टाग्राम पर अपनी स्किन केयर की वीडियो शेयर की हैं। करीना कपूर ने हाल ही में होममेड फेस पैक के बारे में अपने फैंस के साथ शेयर किया है। आज हम तमन्ना भाटिया के होममेड हेयर ऑयल के बारे में बात करेंगे। तमन्ना भाटिया ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से अपने फैंस के साथ होममेड हेयर ऑयल शेयर किया है। आप भी अपने घर में इस होममेड हेयर ऑयल बना सकते है। होममेड हेयर ऑयल से बाल घने और काले हो सकते है। होममेड हेयर ऑयल बनाने के लिए नारियल तेल और प्याज की जररुत होती है। तमन्ना ने प्याज के रस के साथ नारियल तेल को मिक्स करके होममेड ऑयल बनाया है। बालों की मालिश करें। इस मिश्रण को बालों में तीस मिनट के लिए लगाएं। बालों में इस मिश्रण को लगाने के लिए कॉटन को मिश्रण में डालकर बालों में लगाना चाहिए। इस मिश्रण को बालों मे लगाने से पहले इस बात का ध्यान देना चाहिए। यह मिश्रण आपके आंखों में ना चला जाएं। अपनी आंखों को बचाकर इस मिश्रण को बालों में लगाएं। प्याज बालों की देखभाल की करने के लिए सबसे कारगार साबित होता है। प्याज में सल्फर पाया जाता है, जो बालों के विकास के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। बालों की ग्रोथ के लिए आप प्याज के रस का इस्तेमाल कर सकते हैं। सिल्की बालों के लिए नारियल का तेल बहुत ही लाभदायक साबित होता है। नारियल तेल में लॉरिक एसिड पाया जाता है, जो बालों को प्रोटीन देता है। जिससे बाल सिल्की हो जाते हैं। नारियल तेल में नेचुरल कंडीशनर पाया जाता है। जिससे बालों में शाइन देखने को मिलती हैं। नारियल तेल और प्याज के रस को मिक्स करके बालों में लगाने से बालों की ग्रोथ बढ़ती हैं। पतले बालों को लिए ये मिश्रण बहुत ही लाभदायक है।
तंत्रिकाएं विद्युत धाराओं के माध्यम से मानव शरीर के सभी अंगों और मांसपेशियों को नियंत्रित करती हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स टीम के काम में कई तंत्र को नियंत्रित करते हैं। कई मामलों में, विभिन्न खनिज एक दूसरे पर पारस्परिक रूप से प्रभावित होते हैं; एक खनिज दूसरों को इसके प्रभाव में बढ़ावा या रोक सकता है। यह उदाहरण के लिए, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लिए लागू होता हैः कैल्शियम मांसपेशी कोशिकाओं को अनुबंध (संकुचन) का कारण बनता है, और मैग्नीशियम उन्हें आराम देता है। मांसपेशी कोशिका केवल तभी ठीक से काम कर सकती है जब इलेक्ट्रोलाइट्स दोनों की सांद्रता संतुलित हो। तदनुसार, उनके मात्रात्मक अनुपात एक दूसरे के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स की कार्यक्षमता के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शरीर में उपलब्ध कुल राशि। खनिज मनुष्यों द्वारा स्वयं नहीं बनाया जा सकता है। उन्हें आहार के माध्यम से खिलाया जाना है। खनिजों विशेष रूप से फल, सब्जियां और पूरे अनाज में पाए जाते हैं। खनिज सेवन की कमीः • भारी पसीना (उदाहरण के लिए खेल के माध्यम से भारी नमक हानि) • शराब की खपत (शराब): अल्कोहल इलेक्ट्रोलाइट्स के अवशोषण को धीमा कर देता है और विसर्जन को बढ़ा देता है। तो वह प्रभावी रूप से शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स प्राप्त करता है। सुबह के बाद हैंगओवर या बछड़े के रात के क्रैम्प से संकेत मिलता है कि शराब की अत्यधिक खपत से कई खनिजों का विसर्जन हुआ है। • हार्मोन संतुलन के कुछ विकार (उदाहरण के लिए, पिट्यूटरी, एड्रेनल, या एड्रेनल हार्मोन) खनिज की कमी के संकेत अधिक फैलाने वाले और गैर-विशिष्ट हैं, जैसे थकावट, मांसपेशियों में दर्द या नींद की बढ़ती आवश्यकता। फिर भी, विभिन्न लक्षणों का नाम दिया जा सकता है, जिन्हें विशिष्ट खनिजों की कमी से चिह्नित किया जा सकता है। क्लोरीनः पेट एसिड की कमी, मांसपेशी कमजोरी; 45 ग्राम क्लोराइड का नुकसान जीवन को खतरे में डाल रहा है! क्या मैं मैग्नीशियम की कमी से पीड़ित हूं? मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है कि हमारा शरीर स्वयं का उत्पादन नहीं कर सकता है। आम तौर पर यह कोई समस्या नहीं है क्योंकि हम अपने भोजन के साथ पर्याप्त मैग्नीशियम लेते हैं। कुछ मामलों में, हालांकि, खनिज का उचित उपयोग नहीं किया जाता है - एक कमी उत्पन्न होती है जो गंभीर बीमारियों को इंगित कर सकती है। हमारे परीक्षण के साथ, आपको प्रारंभिक मूल्यांकन मिलता है कि क्या आप मैग्नीशियम की कमी से पीड़ित हो सकते हैं - स्वयं परीक्षण डॉक्टर की यात्रा को प्रतिस्थापित नहीं करता है।
तंत्रिकाएं विद्युत धाराओं के माध्यम से मानव शरीर के सभी अंगों और मांसपेशियों को नियंत्रित करती हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स टीम के काम में कई तंत्र को नियंत्रित करते हैं। कई मामलों में, विभिन्न खनिज एक दूसरे पर पारस्परिक रूप से प्रभावित होते हैं; एक खनिज दूसरों को इसके प्रभाव में बढ़ावा या रोक सकता है। यह उदाहरण के लिए, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लिए लागू होता हैः कैल्शियम मांसपेशी कोशिकाओं को अनुबंध का कारण बनता है, और मैग्नीशियम उन्हें आराम देता है। मांसपेशी कोशिका केवल तभी ठीक से काम कर सकती है जब इलेक्ट्रोलाइट्स दोनों की सांद्रता संतुलित हो। तदनुसार, उनके मात्रात्मक अनुपात एक दूसरे के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स की कार्यक्षमता के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शरीर में उपलब्ध कुल राशि। खनिज मनुष्यों द्वारा स्वयं नहीं बनाया जा सकता है। उन्हें आहार के माध्यम से खिलाया जाना है। खनिजों विशेष रूप से फल, सब्जियां और पूरे अनाज में पाए जाते हैं। खनिज सेवन की कमीः • भारी पसीना • शराब की खपत : अल्कोहल इलेक्ट्रोलाइट्स के अवशोषण को धीमा कर देता है और विसर्जन को बढ़ा देता है। तो वह प्रभावी रूप से शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स प्राप्त करता है। सुबह के बाद हैंगओवर या बछड़े के रात के क्रैम्प से संकेत मिलता है कि शराब की अत्यधिक खपत से कई खनिजों का विसर्जन हुआ है। • हार्मोन संतुलन के कुछ विकार खनिज की कमी के संकेत अधिक फैलाने वाले और गैर-विशिष्ट हैं, जैसे थकावट, मांसपेशियों में दर्द या नींद की बढ़ती आवश्यकता। फिर भी, विभिन्न लक्षणों का नाम दिया जा सकता है, जिन्हें विशिष्ट खनिजों की कमी से चिह्नित किया जा सकता है। क्लोरीनः पेट एसिड की कमी, मांसपेशी कमजोरी; पैंतालीस ग्राम क्लोराइड का नुकसान जीवन को खतरे में डाल रहा है! क्या मैं मैग्नीशियम की कमी से पीड़ित हूं? मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है कि हमारा शरीर स्वयं का उत्पादन नहीं कर सकता है। आम तौर पर यह कोई समस्या नहीं है क्योंकि हम अपने भोजन के साथ पर्याप्त मैग्नीशियम लेते हैं। कुछ मामलों में, हालांकि, खनिज का उचित उपयोग नहीं किया जाता है - एक कमी उत्पन्न होती है जो गंभीर बीमारियों को इंगित कर सकती है। हमारे परीक्षण के साथ, आपको प्रारंभिक मूल्यांकन मिलता है कि क्या आप मैग्नीशियम की कमी से पीड़ित हो सकते हैं - स्वयं परीक्षण डॉक्टर की यात्रा को प्रतिस्थापित नहीं करता है।
कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि एंबुलेंस दान देने वालों को चालक भी साथ देना चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक चंद्रशेखर और राकेश जम्वाल ने एंबुलेंसों का सही लाभ नहीं मिलने का मामला उठाया। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि एंबुलेंस दान देने वालों को चालक भी साथ देना चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक चंद्रशेखर और राकेश जम्वाल ने एंबुलेंसों का सही लाभ नहीं मिलने का मामला उठाया। विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा को राज्य सरकार अपने हाथ में ले। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका लाभ नहीं मिल रहा है। विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज में पुराने विद्यार्थियों की ओर से दी गईं एंबुलेंस अभी तक खड़ी ही हैं। विधायक चंद्रशेखर ने पीजीआई चंडीगढ़ में पुलिस थाना खोलने की मांग उठाई। कहा कि हादसा या जहर के सेवन से होने वाली मौत के बाद तीमारदार परेशान होते हैं। हिमाचल से पुलिस पहुंचने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाते हैं। पीजीआई में ही हिमाचल का पुलिस थाना खुलने से इस तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। ऑनलाइन ही पुलिस थाना जब प्रदेश के संबंधित क्षेत्रों से जानकारी ले लेंगे तो परिजनों को उस दुख की घड़ी में कुछ राहत मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया। एंबुलेंस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में एक लाख की जनसंख्या और पहाड़ी क्षेत्रों में 70 हजार की आबादी पर एक 108 एंबुलेंस दी जाती है। विधायक विनोद सुल्तानपुरी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का युक्तिकरण किया जाएगा। सरप्लस डाॅक्टरों को भी बदलकर अन्य संस्थानों में भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कई विधायक कह रहे हैं कि जल जीवन मिशन के तहत पानी के अधिक कनेक्शन कागजों में ही लगे हैं। कांग्रेस विधायक मलेंद्र राजन के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में जरूरत के हिसाब से पानी के कनेक्शन लगा दिए जाएंगे। इंदौरा में 24,251 पेयजल नल कनेक्शन लगाए गए हैं। 1532 कनेक्शन लगाना शेष हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि बीते आठ साल में आईआईएम धौलाकुआं का 65 फीसदी भवन निर्माण हुआ है। सरकार की ओर से 1010-15 बीघा भूमि निर्माण के लिए निशुल्क दी गई। अब पता लगाया जाएगा कि संस्थान के निर्माण के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों को भी सुरक्षित किया जाएगा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि चिह्नित स्थान से हटकर आईआईएम का निर्माण हो रहा है। गांवों के वैकल्पिक मार्ग इस कारण बंद हो रहे हैं। जवाब में तकनीकी शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2014 में धौलाकुआं को आईआईएम मिला। इसके लिए 392 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। वैकल्पिक मार्गों के लिए अलग से सात करोड़ की राशि मंजूर की गई है। दो करोड़ रुपये लोकनिर्माण विभाग को जारी भी कर दिए गए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि एंबुलेंस दान देने वालों को चालक भी साथ देना चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक चंद्रशेखर और राकेश जम्वाल ने एंबुलेंसों का सही लाभ नहीं मिलने का मामला उठाया। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि एंबुलेंस दान देने वालों को चालक भी साथ देना चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक चंद्रशेखर और राकेश जम्वाल ने एंबुलेंसों का सही लाभ नहीं मिलने का मामला उठाया। विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि एक सौ आठ एंबुलेंस सेवा को राज्य सरकार अपने हाथ में ले। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका लाभ नहीं मिल रहा है। विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज में पुराने विद्यार्थियों की ओर से दी गईं एंबुलेंस अभी तक खड़ी ही हैं। विधायक चंद्रशेखर ने पीजीआई चंडीगढ़ में पुलिस थाना खोलने की मांग उठाई। कहा कि हादसा या जहर के सेवन से होने वाली मौत के बाद तीमारदार परेशान होते हैं। हिमाचल से पुलिस पहुंचने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाते हैं। पीजीआई में ही हिमाचल का पुलिस थाना खुलने से इस तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। ऑनलाइन ही पुलिस थाना जब प्रदेश के संबंधित क्षेत्रों से जानकारी ले लेंगे तो परिजनों को उस दुख की घड़ी में कुछ राहत मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया। एंबुलेंस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में एक लाख की जनसंख्या और पहाड़ी क्षेत्रों में सत्तर हजार की आबादी पर एक एक सौ आठ एंबुलेंस दी जाती है। विधायक विनोद सुल्तानपुरी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का युक्तिकरण किया जाएगा। सरप्लस डाॅक्टरों को भी बदलकर अन्य संस्थानों में भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कई विधायक कह रहे हैं कि जल जीवन मिशन के तहत पानी के अधिक कनेक्शन कागजों में ही लगे हैं। कांग्रेस विधायक मलेंद्र राजन के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में जरूरत के हिसाब से पानी के कनेक्शन लगा दिए जाएंगे। इंदौरा में चौबीस,दो सौ इक्यावन पेयजल नल कनेक्शन लगाए गए हैं। एक हज़ार पाँच सौ बत्तीस कनेक्शन लगाना शेष हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि बीते आठ साल में आईआईएम धौलाकुआं का पैंसठ फीसदी भवन निर्माण हुआ है। सरकार की ओर से एक हज़ार दस-पंद्रह बीघा भूमि निर्माण के लिए निशुल्क दी गई। अब पता लगाया जाएगा कि संस्थान के निर्माण के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों को भी सुरक्षित किया जाएगा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि चिह्नित स्थान से हटकर आईआईएम का निर्माण हो रहा है। गांवों के वैकल्पिक मार्ग इस कारण बंद हो रहे हैं। जवाब में तकनीकी शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्ष दो हज़ार चौदह में धौलाकुआं को आईआईएम मिला। इसके लिए तीन सौ बानवे करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। वैकल्पिक मार्गों के लिए अलग से सात करोड़ की राशि मंजूर की गई है। दो करोड़ रुपये लोकनिर्माण विभाग को जारी भी कर दिए गए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
कहते हैं सुंदरता देखने वाले नज़रों में होती है. ये बातें सिर्फ़ कहने के लिये ही नहीं लिखी जातीं, बल्कि इनका हकीक़त से भी वास्ता होता है. कई बार हमारे आस-पास ऐसी चीज़ें होती हैं, जो सुंदरता की एक नई परिभाषा गढ़ रही होती हैं. आज भी सुंदर चीज़ों को देखने के लिये आपको बहुत दूर नहीं जाना है. बस इन तस्वीरों को देख लीजियेः 1. फ़िश टैंक के माध्यम से टकरा कर सूरज की रौशनी से बना दृश्य. 2. ये केला नहीं है, बल्कि एक पत्ता है जो केले की तरह दिख रहा है. 3. समुद्र, धरती और आसमान सब दिख रहा है. 5. G Clef की तरह दिख रहा है. 6. Dandelion Seeds के ज़रिये Light Diffraction से बनाया गया मिनी रेनबो. 7. कॉर्न के साथ बेबी कॉर्न. 8. Kitten के पैरों के दो रंग. 9. दिल की शेप पर ध्यान दो. 10. यहां भी दिल. 11. क्रिस्टल की तरह दिखने वाला Snail. 12. मिंट के पौधे के बीच Albino. 13. ख़ूबसूरती. 15. नज़ारा. 16. स्पाइडर मैन. 17. वाइट रोज़ में दो सेंटर हैं. 18. ये दृश्य. 19. दूसरा रेनबो. 20. ये पेड़. आपके आस-पास भी ऐसी ख़ूबसूरती है, कमेंट में पोस्ट करना. Life के और आर्टिकल्स पढ़ने के लिये ScoopWhoop Hindi पर क्लिक करें.
कहते हैं सुंदरता देखने वाले नज़रों में होती है. ये बातें सिर्फ़ कहने के लिये ही नहीं लिखी जातीं, बल्कि इनका हकीक़त से भी वास्ता होता है. कई बार हमारे आस-पास ऐसी चीज़ें होती हैं, जो सुंदरता की एक नई परिभाषा गढ़ रही होती हैं. आज भी सुंदर चीज़ों को देखने के लिये आपको बहुत दूर नहीं जाना है. बस इन तस्वीरों को देख लीजियेः एक. फ़िश टैंक के माध्यम से टकरा कर सूरज की रौशनी से बना दृश्य. दो. ये केला नहीं है, बल्कि एक पत्ता है जो केले की तरह दिख रहा है. तीन. समुद्र, धरती और आसमान सब दिख रहा है. पाँच. G Clef की तरह दिख रहा है. छः. Dandelion Seeds के ज़रिये Light Diffraction से बनाया गया मिनी रेनबो. सात. कॉर्न के साथ बेबी कॉर्न. आठ. Kitten के पैरों के दो रंग. नौ. दिल की शेप पर ध्यान दो. दस. यहां भी दिल. ग्यारह. क्रिस्टल की तरह दिखने वाला Snail. बारह. मिंट के पौधे के बीच Albino. तेरह. ख़ूबसूरती. पंद्रह. नज़ारा. सोलह. स्पाइडर मैन. सत्रह. वाइट रोज़ में दो सेंटर हैं. अट्ठारह. ये दृश्य. उन्नीस. दूसरा रेनबो. बीस. ये पेड़. आपके आस-पास भी ऐसी ख़ूबसूरती है, कमेंट में पोस्ट करना. Life के और आर्टिकल्स पढ़ने के लिये ScoopWhoop Hindi पर क्लिक करें.
आम आदमी पार्टी की राजस्थान शाखा के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए जाने-माने कवि और नेता कुमार विश्वास ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला. राम से लेकर राष्ट्र तक की इनकी अवधारणा की कलई खोली. कुमार विश्वास ने यहां तक कह दिया कि नरेंद्र मोदी के पास विजन के नाम पर केवल टेलीविजन है. सुनिए उनके भाषण एक मजेदार हिस्सा....
आम आदमी पार्टी की राजस्थान शाखा के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए जाने-माने कवि और नेता कुमार विश्वास ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला. राम से लेकर राष्ट्र तक की इनकी अवधारणा की कलई खोली. कुमार विश्वास ने यहां तक कह दिया कि नरेंद्र मोदी के पास विजन के नाम पर केवल टेलीविजन है. सुनिए उनके भाषण एक मजेदार हिस्सा....
केरल विधानसभा के अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन Shri Ramakrishnan इन दिनों अपने महंगे चश्मे को लेकर सुर्खियों में है। यह चश्मा सरकारी खर्चे से तब खरीदा गया जब राज्य नकदी की कमी से जूझ रहा है। केरल विधानसभा के अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन Shri Ramakrishnan ने बीते दिनों एक चश्मा खरीदा था। उनके इस चश्मे का भुगतान सरकारी खजाने से हुआ है। - इस चश्मे का बिल सुनकार हर कोई हैरान है । - एलडीएफ सरकार ने इस साल का बजट पेश करने के दौरान नकदी संकट का जिक्र किया था। - इतना ही नहीं उसने बजट में नकदी के संकट को खत्म करने के लिए कड़े वित्तीय अनुशासनों की वकालत भी की थी। - चश्मे के भुगतान का मामला हाल ही में वकील डीबी बीनू की आरटीआई पर सामने आया है। - आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि चश्मे का भुगतान 49,900 रुपये किया गया है। - इसमें 45,000 लेंस पर और 4,900 रुपये चश्मे के फ्रेम पर खर्च हुए हैं। - पी श्रीरामकृष्णन का कहना है कि चिकित्सकों की सलाह पर उनके लिए यह चश्मा खरीदा गया है। - एलडीएफ सरकार ने इस साल का बजट,डीबी बीनू की आरटीआई पर सामने आया । - चश्मे का भुगतान 49,900 रुपये किया गया। - इसमें 45,000 लेंस पर और 4,900 रुपये चश्मे के फ्रेम पर खर्च हुए। - चश्मे का भुगतान सरकारी खजाने से किया गया। ।
केरल विधानसभा के अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन Shri Ramakrishnan इन दिनों अपने महंगे चश्मे को लेकर सुर्खियों में है। यह चश्मा सरकारी खर्चे से तब खरीदा गया जब राज्य नकदी की कमी से जूझ रहा है। केरल विधानसभा के अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन Shri Ramakrishnan ने बीते दिनों एक चश्मा खरीदा था। उनके इस चश्मे का भुगतान सरकारी खजाने से हुआ है। - इस चश्मे का बिल सुनकार हर कोई हैरान है । - एलडीएफ सरकार ने इस साल का बजट पेश करने के दौरान नकदी संकट का जिक्र किया था। - इतना ही नहीं उसने बजट में नकदी के संकट को खत्म करने के लिए कड़े वित्तीय अनुशासनों की वकालत भी की थी। - चश्मे के भुगतान का मामला हाल ही में वकील डीबी बीनू की आरटीआई पर सामने आया है। - आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि चश्मे का भुगतान उनचास,नौ सौ रुपयापये किया गया है। - इसमें पैंतालीस,शून्य लेंस पर और चार,नौ सौ रुपयापये चश्मे के फ्रेम पर खर्च हुए हैं। - पी श्रीरामकृष्णन का कहना है कि चिकित्सकों की सलाह पर उनके लिए यह चश्मा खरीदा गया है। - एलडीएफ सरकार ने इस साल का बजट,डीबी बीनू की आरटीआई पर सामने आया । - चश्मे का भुगतान उनचास,नौ सौ रुपयापये किया गया। - इसमें पैंतालीस,शून्य लेंस पर और चार,नौ सौ रुपयापये चश्मे के फ्रेम पर खर्च हुए। - चश्मे का भुगतान सरकारी खजाने से किया गया। ।
चार मुख्य तत्वों में से प्रत्येक - पृथ्वी, वायु, अग्नि और जल - जादुई अभ्यास और अनुष्ठान में शामिल किया जा सकता है। आपकी जरूरतों और इरादों के आधार पर, आप स्वयं को इन तत्वों में से एक के लिए आकर्षित कर सकते हैं ताकि अन्य। उत्तर से जुड़ा हुआ, पृथ्वी परम स्त्री तत्व माना जाता है। पृथ्वी देवी से जुड़ी उपजाऊ और स्थिर है। ग्रह स्वयं जीवन की एक गेंद है, और जैसा कि वर्ष का व्हील बदल जाता है, हम पृथ्वी के जीवन के सभी पहलुओं को देख सकते हैंः जन्म, जीवन, मृत्यु, और अंत में पुनर्जन्म। पृथ्वी धीरज और स्थिर, स्थिर और दृढ़ है, धीरज और शक्ति से भरा है। रंगीन पत्राचार में, पृथ्वी के हरे और भूरे रंग दोनों स्पष्ट रूप से स्पष्ट कारणों से जुड़ते हैं! टैरो रीडिंग में, पृथ्वी पेंटाकल्स या सिक्के के सूट से संबंधित है। आइए पृथ्वी के आस-पास की कई जादुई मिथकों और किंवदंतियों को देखें। कई संस्कृतियों में, पृथ्वी की आत्माएं ऐसे प्राणी होते हैं जो भूमि और पौधे के साम्राज्य से बंधे होते हैं। आम तौर पर, ये प्राणियों को एक और क्षेत्र, प्रकृति की शक्तियां जो एक विशेष भौतिक स्थान में रहती हैं, और चट्टानों और टीजों जैसे स्थलों से जुड़ी होती हैं। सेल्टिक पौराणिक कथाओं में, एफएई का क्षेत्र मनुष्य की भूमि के साथ समानांतर अंतरिक्ष में मौजूद है। Fae Tuatha डी Danaan का हिस्सा हैं , और भूमिगत रहते हैं। उनके लिए देखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे उनसे जुड़ने के लिए प्राणियों को धोखा देने की उनकी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। यूरोपीय किंवदंती और लोअर में जीनोम प्रमुख रूप से विशेषता है। यद्यपि ऐसा माना जाता है कि उनका नाम पैरासेलस नामक एक स्विस एल्केमिस्ट द्वारा बनाया गया था, लेकिन इन मूलभूत प्राणियों को लंबे समय से एक रूप में या दूसरे में भूमिगत स्थानांतरित करने की क्षमता के साथ जोड़ा गया है। इसी तरह, elves अक्सर भूमि के बारे में कहानियों में दिखाई देते हैं। जैकब ग्रिम ने अपनी पुस्तक टीटोनिक मिथोलॉजी संकलित करते हुए elves के बारे में कई कहानियां एकत्र कीं, और कहती हैं कि elves एडडास में अलौकिक, जादू-प्रयोग करने वाले प्राणियों के रूप में दिखाई देते हैं। वे कई पुराने अंग्रेजी और नोर्स किंवदंतियों में दिखाई देते हैं। 1 9 20 के दशक की शुरुआत में अल्फ्रेड वाटकिंस नामक एक शौकिया पुरातात्विक द्वारा लेई लाइनों को आम जनता को पहली बार सुझाव दिया गया था। लेट लाइनों को जादुई, रहस्यमय संरेखण माना जाता है। विचार के एक स्कूल का मानना है कि इन पंक्तियों में सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा है। यह भी माना जाता है कि जहां दो या दो से अधिक रेखाएं एकत्र होती हैं, आपके पास महान शक्ति और ऊर्जा का स्थान होता है। ऐसा माना जाता है कि कई प्रसिद्ध पवित्र स्थलों, जैसे स्टोनहेज , ग्लास्टोनबरी टोर , सेडोना और माचू पिचू कई लाइनों के अभिसरण पर बैठते हैं। कुछ देशों में, विभिन्न स्थलों से जुड़े आत्माएं मामूली, स्थानीय देवताओं बन गईं। प्राचीन रोमनों ने प्रतिभा लोकी के अस्तित्व को स्वीकार किया , जो विशिष्ट स्थानों से जुड़े सुरक्षात्मक आत्माएं थीं। नोर्स मिथक में, लैंडविएटर आत्माओं, या झगड़े हैं, सीधे जमीन से जुड़े हुए हैं। आज, कई आधुनिक पगान पृथ्वी दिवस मनाकर भूमि की आत्माओं का सम्मान करते हैं, और पृथ्वी के कार्यवाहकों के रूप में अपनी भूमिकाओं की पुष्टि करने के लिए इसे एक समय के रूप में उपयोग करते हैं। यदि आप पृथ्वी ध्यान या अनुष्ठान करने की उम्मीद कर रहे हैं, तो आप भूमि से जुड़े विभिन्न देवताओं और देवी-देवताओं का सम्मान कर सकते हैं। यदि आप सेल्टिक-आधारित पथ का पालन करते हैं, तो ब्रिगेड या सेर्नुनोस तक पहुंचने पर विचार करें। रोमन pantheon में, साइबेले एक मां देवी है जो पृथ्वी से जुड़ा हुआ है। यूनानी या हेलेनिक पेगन्स के लिए, डायोनिसस या गाया पर कॉल करने के लिए उपयुक्त हो सकता है। यदि आपकी धारणा मिस्र या केमेटिक पुनर्निर्माण की तर्ज पर अधिक है, तो हमेशा गीब है, जो मिट्टी से जुड़ा हुआ है। क्या आपको हवाईयन देवताओं और देवियों में रुचि है? पेले के साथ काम करने पर विचार करें, जो न केवल ज्वालामुखी के साथ जुड़ा हुआ है, बल्कि द्वीपों के साथ ही जुड़ा हुआ है।
चार मुख्य तत्वों में से प्रत्येक - पृथ्वी, वायु, अग्नि और जल - जादुई अभ्यास और अनुष्ठान में शामिल किया जा सकता है। आपकी जरूरतों और इरादों के आधार पर, आप स्वयं को इन तत्वों में से एक के लिए आकर्षित कर सकते हैं ताकि अन्य। उत्तर से जुड़ा हुआ, पृथ्वी परम स्त्री तत्व माना जाता है। पृथ्वी देवी से जुड़ी उपजाऊ और स्थिर है। ग्रह स्वयं जीवन की एक गेंद है, और जैसा कि वर्ष का व्हील बदल जाता है, हम पृथ्वी के जीवन के सभी पहलुओं को देख सकते हैंः जन्म, जीवन, मृत्यु, और अंत में पुनर्जन्म। पृथ्वी धीरज और स्थिर, स्थिर और दृढ़ है, धीरज और शक्ति से भरा है। रंगीन पत्राचार में, पृथ्वी के हरे और भूरे रंग दोनों स्पष्ट रूप से स्पष्ट कारणों से जुड़ते हैं! टैरो रीडिंग में, पृथ्वी पेंटाकल्स या सिक्के के सूट से संबंधित है। आइए पृथ्वी के आस-पास की कई जादुई मिथकों और किंवदंतियों को देखें। कई संस्कृतियों में, पृथ्वी की आत्माएं ऐसे प्राणी होते हैं जो भूमि और पौधे के साम्राज्य से बंधे होते हैं। आम तौर पर, ये प्राणियों को एक और क्षेत्र, प्रकृति की शक्तियां जो एक विशेष भौतिक स्थान में रहती हैं, और चट्टानों और टीजों जैसे स्थलों से जुड़ी होती हैं। सेल्टिक पौराणिक कथाओं में, एफएई का क्षेत्र मनुष्य की भूमि के साथ समानांतर अंतरिक्ष में मौजूद है। Fae Tuatha डी Danaan का हिस्सा हैं , और भूमिगत रहते हैं। उनके लिए देखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे उनसे जुड़ने के लिए प्राणियों को धोखा देने की उनकी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। यूरोपीय किंवदंती और लोअर में जीनोम प्रमुख रूप से विशेषता है। यद्यपि ऐसा माना जाता है कि उनका नाम पैरासेलस नामक एक स्विस एल्केमिस्ट द्वारा बनाया गया था, लेकिन इन मूलभूत प्राणियों को लंबे समय से एक रूप में या दूसरे में भूमिगत स्थानांतरित करने की क्षमता के साथ जोड़ा गया है। इसी तरह, elves अक्सर भूमि के बारे में कहानियों में दिखाई देते हैं। जैकब ग्रिम ने अपनी पुस्तक टीटोनिक मिथोलॉजी संकलित करते हुए elves के बारे में कई कहानियां एकत्र कीं, और कहती हैं कि elves एडडास में अलौकिक, जादू-प्रयोग करने वाले प्राणियों के रूप में दिखाई देते हैं। वे कई पुराने अंग्रेजी और नोर्स किंवदंतियों में दिखाई देते हैं। एक नौ बीस के दशक की शुरुआत में अल्फ्रेड वाटकिंस नामक एक शौकिया पुरातात्विक द्वारा लेई लाइनों को आम जनता को पहली बार सुझाव दिया गया था। लेट लाइनों को जादुई, रहस्यमय संरेखण माना जाता है। विचार के एक स्कूल का मानना है कि इन पंक्तियों में सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा है। यह भी माना जाता है कि जहां दो या दो से अधिक रेखाएं एकत्र होती हैं, आपके पास महान शक्ति और ऊर्जा का स्थान होता है। ऐसा माना जाता है कि कई प्रसिद्ध पवित्र स्थलों, जैसे स्टोनहेज , ग्लास्टोनबरी टोर , सेडोना और माचू पिचू कई लाइनों के अभिसरण पर बैठते हैं। कुछ देशों में, विभिन्न स्थलों से जुड़े आत्माएं मामूली, स्थानीय देवताओं बन गईं। प्राचीन रोमनों ने प्रतिभा लोकी के अस्तित्व को स्वीकार किया , जो विशिष्ट स्थानों से जुड़े सुरक्षात्मक आत्माएं थीं। नोर्स मिथक में, लैंडविएटर आत्माओं, या झगड़े हैं, सीधे जमीन से जुड़े हुए हैं। आज, कई आधुनिक पगान पृथ्वी दिवस मनाकर भूमि की आत्माओं का सम्मान करते हैं, और पृथ्वी के कार्यवाहकों के रूप में अपनी भूमिकाओं की पुष्टि करने के लिए इसे एक समय के रूप में उपयोग करते हैं। यदि आप पृथ्वी ध्यान या अनुष्ठान करने की उम्मीद कर रहे हैं, तो आप भूमि से जुड़े विभिन्न देवताओं और देवी-देवताओं का सम्मान कर सकते हैं। यदि आप सेल्टिक-आधारित पथ का पालन करते हैं, तो ब्रिगेड या सेर्नुनोस तक पहुंचने पर विचार करें। रोमन pantheon में, साइबेले एक मां देवी है जो पृथ्वी से जुड़ा हुआ है। यूनानी या हेलेनिक पेगन्स के लिए, डायोनिसस या गाया पर कॉल करने के लिए उपयुक्त हो सकता है। यदि आपकी धारणा मिस्र या केमेटिक पुनर्निर्माण की तर्ज पर अधिक है, तो हमेशा गीब है, जो मिट्टी से जुड़ा हुआ है। क्या आपको हवाईयन देवताओं और देवियों में रुचि है? पेले के साथ काम करने पर विचार करें, जो न केवल ज्वालामुखी के साथ जुड़ा हुआ है, बल्कि द्वीपों के साथ ही जुड़ा हुआ है।
वीवो की वेबसाइट पर आपके लिए तगड़ा ऑफर है. इस ऑफर के अनुसार आप Vivo V25 Pro को बंपर डिस्काउंट के साथ खरीद सकते हैं. 8जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वाले इस टेलीफोन का MRP 39,999 है. ऑफर में आप इसे 35,999 रुपये में खरीद सकते हैं. इसके अतिरिक्त कंपनी इस टेलीफोन पर 2 हजार रुपये का फ्लैट डिस्काउंट भी दे रही है. इस डिस्काउंट के लिए आपको HDFC बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करना. इस धमाकेदार ऑफर का लाभ आप 31 मार्च तक उठा सकते हैं. वीवो का यह टेलीफोन 12जीबी तक की रैम और 256जीबी तक के इंटरनल स्टोरेज ऑप्शन में आता है. प्रोसेसर के तौर पर कंपनी इस टेलीफोन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 1300 चिपसेट ऑफर कर रही है. टेलीफोन का डिस्प्ले बहुत जबर्दस्त है. इसमें आपको 120Hz के रिफ्रेश दर वाला 6. 56 इंच का फुल एचडी+ 3D कर्व्ड डिस्प्ले मिलेगा. टेलीफोन के रियर में एलईडी फ्लैश के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है. इनमें 64 मेगापिक्सल के प्राइमरी कैमरा के साथ एक एक 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड ऐंगल लेंस और एक 2 मेगापिक्ल का मैक्रो कैमरा शामिल है. टेलीफोन के फ्रंट में सेल्फी के लिए 32 मेगापिक्सल का कैमरा लगा है. टेलीफोन में कंपनी 4830mAh की बैटरी ऑफर कर रही है. यह बैटरी 66 वॉट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है. बायोमेट्रिक सिक्योरिटी के लिए टेलीफोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर लगा है. ओएस की जहां तक बात है, तो टेलीफोन ऐंड्रॉयड 12 पर बेस्ड Funtouch OS 12 पर काम करता है. कनेक्टिविटी के लिए इसमें वाई-फाई, ब्लूटूथ 5. 2, ड्यूल सिम और 3. 5mm हेडफोन जैक जैसे ऑप्शन दिए गए हैं.
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भारत में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में खोज एवं उत्पादन को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ व ऊर्जा कुशल समाधानों के जरिये उत्सर्जन में कमी, हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और जैव ईंधन उत्पादन में बढ़ोतरी जैसे क्षेत्रों पर चर्चा होगी. पेट्रोल- डीजल की लगातार बढ़ रही कीमत एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है. अब संभावना जतायी जा रही है कि लगातार बढ़ रही कीमत पर लगाम लग सकता है. आज शाम छह बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये वैश्विक तेल एवं गैस क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और विशेषज्ञों से बातचीत करेंगे. इस बातचीत से उम्मीद की जा रही है कि लगातार बढ़ रही पेट्रोल- डीजल की कीमत से निपटने के लिए कोई तरीका निकाला जायेगा. चर्चा है कि भारत में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में खोज एवं उत्पादन को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ व ऊर्जा कुशल समाधानों के जरिये उत्सर्जन में कमी, हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और जैव ईंधन उत्पादन में बढ़ोतरी जैसे क्षेत्रों पर चर्चा होगी. प्रधानमंत्री के साथ होने वाली इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में बहुराष्ट्रीय निगमों एवं शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सीईओ और विशेषज्ञ इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल होंगे. इस बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए पीएमओ ने कहा, यह छठी ऐसी सालाना बातचीत होगी, जो 2016 में शुरू हुई थी. तेल और गैस क्षेत्र के वैश्विक नेता शामिल होते हैं.
भारत में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में खोज एवं उत्पादन को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ व ऊर्जा कुशल समाधानों के जरिये उत्सर्जन में कमी, हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और जैव ईंधन उत्पादन में बढ़ोतरी जैसे क्षेत्रों पर चर्चा होगी. पेट्रोल- डीजल की लगातार बढ़ रही कीमत एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है. अब संभावना जतायी जा रही है कि लगातार बढ़ रही कीमत पर लगाम लग सकता है. आज शाम छह बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये वैश्विक तेल एवं गैस क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों से बातचीत करेंगे. इस बातचीत से उम्मीद की जा रही है कि लगातार बढ़ रही पेट्रोल- डीजल की कीमत से निपटने के लिए कोई तरीका निकाला जायेगा. चर्चा है कि भारत में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में खोज एवं उत्पादन को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ व ऊर्जा कुशल समाधानों के जरिये उत्सर्जन में कमी, हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और जैव ईंधन उत्पादन में बढ़ोतरी जैसे क्षेत्रों पर चर्चा होगी. प्रधानमंत्री के साथ होने वाली इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में बहुराष्ट्रीय निगमों एवं शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सीईओ और विशेषज्ञ इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल होंगे. इस बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए पीएमओ ने कहा, यह छठी ऐसी सालाना बातचीत होगी, जो दो हज़ार सोलह में शुरू हुई थी. तेल और गैस क्षेत्र के वैश्विक नेता शामिल होते हैं.
मुंबई, 26 सितंबर निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफ़सी बैंक ने रविवार को कहा कि वह ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच को दोगुना कर दो लाख गांव तक करेगा। इसके लिए बैंक ने अगले छह माह में 2,500 लोगों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। बैंक ने कहा कि उसका लक्ष्य अगले 18-24 महीनों में शाखा नेटवर्क, व्यापार प्रतिनिधियों, सीएससी (साझाा सेवा केंद्रों), भागीदारों, आभासी संबंध प्रबंधन और डिजिटल पहुंच मंचों के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को दोगुना करने का है। इससे पहले रविवार को ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों की पहुंच पर निराशा व्यक्त करते हुए उनसे अपनी उपस्थिति को और अधिक बढ़ाने के लिए कहा था। शुक्ला ने कहा कि आगे चलकर बैंक का सपना देश के हर पिनकोड में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
मुंबई, छब्बीस सितंबर निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफ़सी बैंक ने रविवार को कहा कि वह ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच को दोगुना कर दो लाख गांव तक करेगा। इसके लिए बैंक ने अगले छह माह में दो,पाँच सौ लोगों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। बैंक ने कहा कि उसका लक्ष्य अगले अट्ठारह-चौबीस महीनों में शाखा नेटवर्क, व्यापार प्रतिनिधियों, सीएससी , भागीदारों, आभासी संबंध प्रबंधन और डिजिटल पहुंच मंचों के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को दोगुना करने का है। इससे पहले रविवार को ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों की पहुंच पर निराशा व्यक्त करते हुए उनसे अपनी उपस्थिति को और अधिक बढ़ाने के लिए कहा था। शुक्ला ने कहा कि आगे चलकर बैंक का सपना देश के हर पिनकोड में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
IPL 2023,DC vs GT: इंडियन प्रीमियर लीग 2023 (IPL 2023) के 7वें मैच में मंगलवार को गुजरात टाइटंस (GT) ने दिल्ली कैपिटल्स (DC) को हरा दिया। हार्दिक पांड्या की अगुआई वाली टीम ने लगातार दूसरी जीत तो वहीं डेविड वार्नर की अगुआई वाली टीम को लगातार दूसरी हार मिली है। दिल्ली के अरूण जेटली स्टेडियम में हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। दिल्ली कैपिटल्स ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 162 रन बनाए। कप्तान डेविड वार्नर ने 37, अक्षर पटेल ने 36 रन बनाए। गुजरात की ओर से मोहम्मद शमी और राशिद ने 3-3 विकेट लिए। 163 रन के लक्ष्य के जवाब में साई सुदर्शन के अर्धशतक की मदद से गुजरात ने 18. 1 ओवर में जीत हासिल कर ली। साई सुदर्शन 48 गेंद पर 4 चौके 2 छक्के की मदद से 62 रन बनाए। डेविड मिवर ने 16 गेंद पर 2 चौके और 2 छक्के की मदद से 31 रन बनाए। दोनों नाबाद रहे। गुजरात की टीम में दो बदलाव हुआ। डेविड मिलर को केन विलियमसन की जगह टीम में मौका मिला। दिल्ली की टीम में भी दो बदलाव हुए। अभिषेक पोरेल ने डेब्यू किया। उन्हें ऋषभ पंत के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया था। एनरिक नॉर्खिया को रोवमैन पॉवेल की जगह मौका मिला। Delhi Capitals 162/8 (20. 0) Gujarat Titans 163/4 (18. 1) Delhi Capitals vs Gujarat Titans IPL 2023: दिल्ली कैपिटल्स को लगातार दूसरी हार मिली। हार्दिक पांड्या की अगुआई वाली टीम ने लगातार दूसरी जीत तो वहीं डेविड वार्नर की अगुआई वाली टीम को लगातार दूसरी हार मिली है। गुजरात टाइटंस की टीम 2 में से 2 मैच जीतकर अंक तालिक में शीर्ष पर पहुंच गई है। दिल्ली कैपिटल्स की टीम 2 में से 2 मैच हारकर 8वें नंबर पर है। गुजरात टाइटंस की टीम ने 18. 1 ओवर में 163 रन के लक्ष्य को हासिल कर लिया। साई सुदर्शन 48 गेंद पर 4 चौके 2 छक्के की मदद से 62 रन बनाए। डेविड मिवर ने 16 गेंद पर 2 चौके और 2 छक्के की मदद से 31 रन बनाए। साई सुदर्शन ने एनरिक नॉर्खिया की गेंद पर अपर कट खेलकर अर्धशतक पूरा किया। वह 44 गेंद पर 4 चौके और 1 छक्के की ममद से 52 रन बनाकर खेल रहे है। गुजरात की टीम को 21 गेंद पर 20 रन चाहिए। गुजरात का स्कोर 16. 3 ओवर में 4 विकेट पर 143 रन। गुजरात टाइटंस ने 16 ओवर में 4 विकेट पर 137 रन बना लिए हैं। जीत के लिए 24 गेंद पर 26 रन चाहिए। साई सुदर्शन 42 गेंद पर 47 और डेविड मिलर ने 9 गेंद पर 21 रन ठोक दिए हैं। मुकेश कुमार के ओवर में 20 रन बने। गुजरात टाइटंस को मिशेल मार्श ने चौथा झटका दिया। विजय शंकर 23 गेंद पर 29 रन बनाकर आउट हुए। साई सुदर्शन 35 गेंद पर 3 चौके 1 छक्के की मदद से 40 रन बनाकर खेल रहे हैं। गुजरात टाइटंस का स्कोर 13. 2 ओवर में 4 विकेट पर 107 रन। जीत के लिए 40 गेंद पर 56 रन चाहिए। गुजरात टाइटंस ने 13 ओवर में 3 विकेट पर 106 रन बना लिए हैं। जीत के लिए 44 गेंद पर 58 रन चाहिए। साई सुदर्शन 39 और विजय शंकर 29 रन बनाकर क्रीज पर। दोनों के बीच 42 गेंद पर 52 रन की साझेदारी हुई। गुजरात को 8. 14 के रन रेट से रन बनाने हैं। उनका रन रेट 8. 15 है। गुजरात टाइटंस ने 9 ओवर के बाद 3 विकेट पर 74 रन बना लिए हैं। जीत के लिए 67 गेंद पर 89 रन चाहिए। साई सुदर्शन 24 गेंद पर 29 और विजय शंकर 8 गेंद पर 9 रन बनाकर क्रीज पर। मुकेश कुमार के ओवर में 8 रन बने। खलील अहमद ने हार्दिक पांड्या को विकेट के पीछ अभिषेक पोरेल के हाथों कैच कराया। उन्होंने 5 रन बनाए। गुजरात का स्कोर 6 ओवर में 3 विकेट पर 54 रन। जीत के लिए 84 गेंद पर 109 रन चाहिए। साई सुदर्शन 18 रन बनाकर क्रीज पर। एनरिक नॉर्खिया की रफ्तार के आगे गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज घुटने टेक रहे हैं। 148. 8 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली गेंद पर शुभमन गिल बोल्ड हुए। उन्होंने 13 गेंद पर 14 रन बनाए। हार्दिक पांड्या नए कप्तान के तौर पर क्रीज पर। साई सुदर्शन 7 रन बनाकर क्रीज पर। गुजरात को जीत के लिए 94 गेंद पर 126 रन चाहिए। एनरिक नॉर्खिया ने पहली ही गेंद पर गुजरात टाइटंस को झटका दिया। उन्होंने 143. 5 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंद की। ऋद्धिमान साहा बोल्ड हो गए। उन्होंने 7 गेंद पर 14 रन बनाए। गुजरात का स्कोर 2. 1 ओवर में 1 विकेट पर 22 रन। जीत के लिए 141 रन और चाहिए। गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी शुरू हो गई है। ऋद्धिमान साहा और शुभमन गिल क्रीज पर। खलील अहमद ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए गेंदबाजी की शुरुआत की। वह इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर दिल्ली कैपिटल्स की प्लेइंग 11 मे सरफराज खान की जगह शामिल हुए। ऋद्धिमान साहा ने गुजरात को ताबड़तोड़ शुरुआत दिलाई। उन्होंने 2 चौके और 1 छक्के की मदद से पहले मैच से 14 रन बनाए। अक्षर पटेल आखिरी ओवर में आउट हुए। दिल्ली कैपिटल्स ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 162 रन बनाए। गुजरात टाइटंस को 163 रन का टारगेट दिया। एनरिक नॉर्खिया 4 और कुलदीप यादव 1 रन बनाकर नाबाद रहे। गुजरात की ओर से मोहम्मद शमी और राशिद ने 3-3 विकेट लिए। राशिद खान ने दिल्ली कैपिटल्स को 7वां झटका दिया। अमन हकीम खान 8 रन बनाकर हार्दिक पांड्या को कैच थमा बैठे। इस गेंद स पहले उन्होंने छक्का जड़ा था। अक्षर पटेल 27 रन बनाकर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर 18. 4 ओवर में 7 विकेट पर 148 रन। नए बल्लेबाज के तौर पर कुलदीप यादव क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स को राशिद खान ने छठा झटका दिया है। उन्होंने सरफराज खान को पवेलियन भेजा। उन्होंने 34 गेंद पर 30 रन बनाए। अक्षर पटेल 11 गेंद पर 17 रन बनाकर क्रीज पर। नए बल्लेबाज के तौर पर अमन खान क्रीज पर। राशिद का यह दूसरा विकेट था। दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने 16 ओवर के बाद 5 विकेट पर 126 रन बना लिए हैं। टीम 7. 88 के रन रेट से रन बना रही है। सरफराज खान 26 और अक्षर पटेल 17 रन बनाकर क्रीज पर। दोनों के बीच 22 गेंद पर 25 रन की साझेदारी हुई। राशिद खान ने 2 ओवर में 16 रन देकर 1 विकेट लिया है। वहीं जोशुआ लिटिल ने 3 ओवर में 18 रन दिए हैं। राशिद खान ने अभिषेक पोरेल को पवेलियन भेजा। उन्होंने 11 गेंद पर 2 छक्के की मदद से 20 रन बनाए। सरफराज खान 21 गेंद पर 18 रन बनाकर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर 12. 2 ओवर में 5 विकेट पर 101 रन। नए बल्लेबाज के तौर पर अक्षर पटेल क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने 11 ओवर के बाद 4 विकेट पर 88 रन बना लिए हैं। अभिषेक पोरेल 7 गेंद पर 1 छक्के की मदद से 12 रन बनाकर क्रीज पर है। सरफराज खान 17 गेंद पर 1 चौके की मदद से 13 रन बनाकर क्रीज पर। दोनों के बीच 15 गेंद पर 21 रन साझेदारी हुई है। अल्जारी जोसेफ के ओवर में 10 रन बने। अल्जारी जोसेफ ने अगली ही गेंद पर रिले रोसौव को गोल्डेन डक पर पवेलियन भेजा। राहुल तेवतिया ने प्वाइंट पर बेहतरीन कैच लपका। हालांकि, वह हैट्रिक से चूक गए। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर 9 ओवर में 4 विकेट पर 70 रन। सरफराज खान 6 और अभिषेक पोरेल 1 रन बनाकर क्रीज पर। अल्जारी जोसेफ ने दिल्ली कैपिटल्स को तीसरा झटका दिया। डेविड वार्नर 32 गेंद पर 37 रन बनाकर लौटे पवेलियन। सरफराज खान 9 गेंद पर 4 रन बनाकर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर 8. 2 ओवर में 3 विकेट पर 67 रन। नए बल्लेबाज के तौर पर रिले रोसौव क्रीज पर। इससे पहले मोहम्मद शमी ने 2 विकेट लिए। पिछले साल दिसंबर में कार दुर्घटना के शिकार हुए ऋषभ पंत दिल्ली कैपिटल्स को सपोर्ट करने अरूण जेटली स्टेडियम पहुंचे हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच में दिल्ली की टीम ने ऋषभ की जर्सी को डग आउट के ऊपर टांग दिया था। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर 7 ओवर में 2 विकेट पर 63 रन है। सरफराज खान 2 और डेविड वार्नर 35 रन बनाकर क्रीज पर। मोहम्मद शमी ने दिल्ली कैपिटल्स को दूसरा झटका दिया हैं। उन्होंने मिशेल मार्श को 4 रन पर पवेलियन भेजा। दिल्ली का स्कोर 4. 1 ओवर में 1 विकेट पर 37 रन। डेविड वार्नर 16 रन बनाकर क्रीज पर। मोहम्मद शमी ने दिल्ली कैपिटल्स को पहला झटका दिया। पृथ्वी शॉ 4 गेंद पर 7 रन बनाकर आउट। दिल्ली का स्कोर 2. 4 ओवर में 1 विकेट पर 29 रन। डेविड वार्नर 12 रन बनाकर क्रीज पर। मिशेल मार्श नए बल्लेबाज के तौर पर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स की बल्लेबाजी शुरू हो गई है। डेविड वार्नर और पृथ्वी शॉ क्रीज पर। मोहम्मद शमी ने गुजरात टाइटंस की ओर से गेंदबाजी की शुरुआत की। पहले ओवर के बाद दिल्ली का स्कोर बगैर विकेट के 11 रन। डेविड वार्नर 4 और पृथ्वी शॉ बगैर खाता खोले क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ साई किशोर, विजय शंकर, जयंत यादव, अभिनव मनोहर और श्रीकर भरत का नाम गुजरात टाइटंस ने इम्पैक्ट प्लेयर के लिए दिया। आईपीएल 2023 के सातवें मैच में गुजरात टाइटंस के खिलाफ दिल्ली कैप्टिल्स ने इम्पैक्ट प्लेयर के लिए ललित यादव, रोवमैन पॉवेल, चेतन सकारिया, मनीष पांडे और खलील अहमद का नाम दिया है। ऋद्धिमान साहा (विकेटकीपर), शुभमन गिल, साई सुदर्शन, हार्दिक पांड्या (कप्तान), डेविड मिलर, राहुल तेवतिया, राशिद खान, मोहम्मद शमी, जोशुआ लिटिल, यश दयाल, अल्जारी जोसेफ। गुजरात टाइटंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। दिल्ली कैपिटल्स की टीम पहले बल्लेबाजी करेगी। गुजरात की टीम में दो बदलाव हुआ। डेविड मिलर को केन विलियमसन की जगह टीम में मौका मिला। दिल्ली की टीम में भी दो बदलाव हुए। अभिषेक पोरेल डेब्यू करेंगे। एनरिच नॉर्खिया को रोवमैन पॉवेल की जगह मौका मिला। दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत पिछले साल दिसंबर में कार दुर्घटना के शिकार हो गए थे। इसके कारण वह आईपीएल 2023 सत्र से बाहर हो गए। हालांकि, लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच में फ्रेंचाइजी ने उनकी जर्सी को डगआउट के ऊपर टांग दिया था। पंत आज मैच देखने अरूण जेटली स्टेडियम आएंगे। गुजरात टाइटंस की टीम के साथ किलर मिलर यानी डेविड मिलर जुड़ गए हैं। पिछले मैच में वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण नहीं खेले थे। टीम को बड़ा झटका तब लगा जब केन विलियमसन चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। Delhi Capitals vs Gujarat Titans IPL 2023:डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर शानादर अंदाज में आईपीएल 2023 में अपने अभियान की शुरुआत की। हालांकि, इस दौरान केन विलियमसन चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। टीम को उनकी कमी नहीं खलेगी, क्योंकि डेविड मिलर उसके साथ जुड़ गए हैं। पिछले उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। दिल्ली कैपिटल्स के लिए ऋषभ पंत का न होना सबसे बड़ी परेशानी का सबब है। हालांकि इस मैच में उसे रिले रोसौव की सेवा मिलेगी।
IPL दो हज़ार तेईस,DC vs GT: इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस के सातवें मैच में मंगलवार को गुजरात टाइटंस ने दिल्ली कैपिटल्स को हरा दिया। हार्दिक पांड्या की अगुआई वाली टीम ने लगातार दूसरी जीत तो वहीं डेविड वार्नर की अगुआई वाली टीम को लगातार दूसरी हार मिली है। दिल्ली के अरूण जेटली स्टेडियम में हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। दिल्ली कैपिटल्स ने बीस ओवर में आठ विकेट पर एक सौ बासठ रन बनाए। कप्तान डेविड वार्नर ने सैंतीस, अक्षर पटेल ने छत्तीस रन बनाए। गुजरात की ओर से मोहम्मद शमी और राशिद ने तीन-तीन विकेट लिए। एक सौ तिरेसठ रन के लक्ष्य के जवाब में साई सुदर्शन के अर्धशतक की मदद से गुजरात ने अट्ठारह. एक ओवर में जीत हासिल कर ली। साई सुदर्शन अड़तालीस गेंद पर चार चौके दो छक्के की मदद से बासठ रन बनाए। डेविड मिवर ने सोलह गेंद पर दो चौके और दो छक्के की मदद से इकतीस रन बनाए। दोनों नाबाद रहे। गुजरात की टीम में दो बदलाव हुआ। डेविड मिलर को केन विलियमसन की जगह टीम में मौका मिला। दिल्ली की टीम में भी दो बदलाव हुए। अभिषेक पोरेल ने डेब्यू किया। उन्हें ऋषभ पंत के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया था। एनरिक नॉर्खिया को रोवमैन पॉवेल की जगह मौका मिला। Delhi Capitals एक सौ बासठ/आठ Gujarat Titans एक सौ तिरेसठ/चार Delhi Capitals vs Gujarat Titans IPL दो हज़ार तेईस: दिल्ली कैपिटल्स को लगातार दूसरी हार मिली। हार्दिक पांड्या की अगुआई वाली टीम ने लगातार दूसरी जीत तो वहीं डेविड वार्नर की अगुआई वाली टीम को लगातार दूसरी हार मिली है। गुजरात टाइटंस की टीम दो में से दो मैच जीतकर अंक तालिक में शीर्ष पर पहुंच गई है। दिल्ली कैपिटल्स की टीम दो में से दो मैच हारकर आठवें नंबर पर है। गुजरात टाइटंस की टीम ने अट्ठारह. एक ओवर में एक सौ तिरेसठ रन के लक्ष्य को हासिल कर लिया। साई सुदर्शन अड़तालीस गेंद पर चार चौके दो छक्के की मदद से बासठ रन बनाए। डेविड मिवर ने सोलह गेंद पर दो चौके और दो छक्के की मदद से इकतीस रन बनाए। साई सुदर्शन ने एनरिक नॉर्खिया की गेंद पर अपर कट खेलकर अर्धशतक पूरा किया। वह चौंतालीस गेंद पर चार चौके और एक छक्के की ममद से बावन रन बनाकर खेल रहे है। गुजरात की टीम को इक्कीस गेंद पर बीस रन चाहिए। गुजरात का स्कोर सोलह. तीन ओवर में चार विकेट पर एक सौ तैंतालीस रन। गुजरात टाइटंस ने सोलह ओवर में चार विकेट पर एक सौ सैंतीस रन बना लिए हैं। जीत के लिए चौबीस गेंद पर छब्बीस रन चाहिए। साई सुदर्शन बयालीस गेंद पर सैंतालीस और डेविड मिलर ने नौ गेंद पर इक्कीस रन ठोक दिए हैं। मुकेश कुमार के ओवर में बीस रन बने। गुजरात टाइटंस को मिशेल मार्श ने चौथा झटका दिया। विजय शंकर तेईस गेंद पर उनतीस रन बनाकर आउट हुए। साई सुदर्शन पैंतीस गेंद पर तीन चौके एक छक्के की मदद से चालीस रन बनाकर खेल रहे हैं। गुजरात टाइटंस का स्कोर तेरह. दो ओवर में चार विकेट पर एक सौ सात रन। जीत के लिए चालीस गेंद पर छप्पन रन चाहिए। गुजरात टाइटंस ने तेरह ओवर में तीन विकेट पर एक सौ छः रन बना लिए हैं। जीत के लिए चौंतालीस गेंद पर अट्ठावन रन चाहिए। साई सुदर्शन उनतालीस और विजय शंकर उनतीस रन बनाकर क्रीज पर। दोनों के बीच बयालीस गेंद पर बावन रन की साझेदारी हुई। गुजरात को आठ. चौदह के रन रेट से रन बनाने हैं। उनका रन रेट आठ. पंद्रह है। गुजरात टाइटंस ने नौ ओवर के बाद तीन विकेट पर चौहत्तर रन बना लिए हैं। जीत के लिए सरसठ गेंद पर नवासी रन चाहिए। साई सुदर्शन चौबीस गेंद पर उनतीस और विजय शंकर आठ गेंद पर नौ रन बनाकर क्रीज पर। मुकेश कुमार के ओवर में आठ रन बने। खलील अहमद ने हार्दिक पांड्या को विकेट के पीछ अभिषेक पोरेल के हाथों कैच कराया। उन्होंने पाँच रन बनाए। गुजरात का स्कोर छः ओवर में तीन विकेट पर चौवन रन। जीत के लिए चौरासी गेंद पर एक सौ नौ रन चाहिए। साई सुदर्शन अट्ठारह रन बनाकर क्रीज पर। एनरिक नॉर्खिया की रफ्तार के आगे गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज घुटने टेक रहे हैं। एक सौ अड़तालीस. आठ किलोग्राममीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली गेंद पर शुभमन गिल बोल्ड हुए। उन्होंने तेरह गेंद पर चौदह रन बनाए। हार्दिक पांड्या नए कप्तान के तौर पर क्रीज पर। साई सुदर्शन सात रन बनाकर क्रीज पर। गुजरात को जीत के लिए चौरानवे गेंद पर एक सौ छब्बीस रन चाहिए। एनरिक नॉर्खिया ने पहली ही गेंद पर गुजरात टाइटंस को झटका दिया। उन्होंने एक सौ तैंतालीस. पाँच किलोग्राममीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंद की। ऋद्धिमान साहा बोल्ड हो गए। उन्होंने सात गेंद पर चौदह रन बनाए। गुजरात का स्कोर दो. एक ओवर में एक विकेट पर बाईस रन। जीत के लिए एक सौ इकतालीस रन और चाहिए। गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी शुरू हो गई है। ऋद्धिमान साहा और शुभमन गिल क्रीज पर। खलील अहमद ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए गेंदबाजी की शुरुआत की। वह इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर दिल्ली कैपिटल्स की प्लेइंग ग्यारह मे सरफराज खान की जगह शामिल हुए। ऋद्धिमान साहा ने गुजरात को ताबड़तोड़ शुरुआत दिलाई। उन्होंने दो चौके और एक छक्के की मदद से पहले मैच से चौदह रन बनाए। अक्षर पटेल आखिरी ओवर में आउट हुए। दिल्ली कैपिटल्स ने बीस ओवर में आठ विकेट पर एक सौ बासठ रन बनाए। गुजरात टाइटंस को एक सौ तिरेसठ रन का टारगेट दिया। एनरिक नॉर्खिया चार और कुलदीप यादव एक रन बनाकर नाबाद रहे। गुजरात की ओर से मोहम्मद शमी और राशिद ने तीन-तीन विकेट लिए। राशिद खान ने दिल्ली कैपिटल्स को सातवां झटका दिया। अमन हकीम खान आठ रन बनाकर हार्दिक पांड्या को कैच थमा बैठे। इस गेंद स पहले उन्होंने छक्का जड़ा था। अक्षर पटेल सत्ताईस रन बनाकर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर अट्ठारह. चार ओवर में सात विकेट पर एक सौ अड़तालीस रन। नए बल्लेबाज के तौर पर कुलदीप यादव क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स को राशिद खान ने छठा झटका दिया है। उन्होंने सरफराज खान को पवेलियन भेजा। उन्होंने चौंतीस गेंद पर तीस रन बनाए। अक्षर पटेल ग्यारह गेंद पर सत्रह रन बनाकर क्रीज पर। नए बल्लेबाज के तौर पर अमन खान क्रीज पर। राशिद का यह दूसरा विकेट था। दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने सोलह ओवर के बाद पाँच विकेट पर एक सौ छब्बीस रन बना लिए हैं। टीम सात. अठासी के रन रेट से रन बना रही है। सरफराज खान छब्बीस और अक्षर पटेल सत्रह रन बनाकर क्रीज पर। दोनों के बीच बाईस गेंद पर पच्चीस रन की साझेदारी हुई। राशिद खान ने दो ओवर में सोलह रन देकर एक विकेट लिया है। वहीं जोशुआ लिटिल ने तीन ओवर में अट्ठारह रन दिए हैं। राशिद खान ने अभिषेक पोरेल को पवेलियन भेजा। उन्होंने ग्यारह गेंद पर दो छक्के की मदद से बीस रन बनाए। सरफराज खान इक्कीस गेंद पर अट्ठारह रन बनाकर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर बारह. दो ओवर में पाँच विकेट पर एक सौ एक रन। नए बल्लेबाज के तौर पर अक्षर पटेल क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने ग्यारह ओवर के बाद चार विकेट पर अठासी रन बना लिए हैं। अभिषेक पोरेल सात गेंद पर एक छक्के की मदद से बारह रन बनाकर क्रीज पर है। सरफराज खान सत्रह गेंद पर एक चौके की मदद से तेरह रन बनाकर क्रीज पर। दोनों के बीच पंद्रह गेंद पर इक्कीस रन साझेदारी हुई है। अल्जारी जोसेफ के ओवर में दस रन बने। अल्जारी जोसेफ ने अगली ही गेंद पर रिले रोसौव को गोल्डेन डक पर पवेलियन भेजा। राहुल तेवतिया ने प्वाइंट पर बेहतरीन कैच लपका। हालांकि, वह हैट्रिक से चूक गए। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर नौ ओवर में चार विकेट पर सत्तर रन। सरफराज खान छः और अभिषेक पोरेल एक रन बनाकर क्रीज पर। अल्जारी जोसेफ ने दिल्ली कैपिटल्स को तीसरा झटका दिया। डेविड वार्नर बत्तीस गेंद पर सैंतीस रन बनाकर लौटे पवेलियन। सरफराज खान नौ गेंद पर चार रन बनाकर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर आठ. दो ओवर में तीन विकेट पर सरसठ रन। नए बल्लेबाज के तौर पर रिले रोसौव क्रीज पर। इससे पहले मोहम्मद शमी ने दो विकेट लिए। पिछले साल दिसंबर में कार दुर्घटना के शिकार हुए ऋषभ पंत दिल्ली कैपिटल्स को सपोर्ट करने अरूण जेटली स्टेडियम पहुंचे हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच में दिल्ली की टीम ने ऋषभ की जर्सी को डग आउट के ऊपर टांग दिया था। दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर सात ओवर में दो विकेट पर तिरेसठ रन है। सरफराज खान दो और डेविड वार्नर पैंतीस रन बनाकर क्रीज पर। मोहम्मद शमी ने दिल्ली कैपिटल्स को दूसरा झटका दिया हैं। उन्होंने मिशेल मार्श को चार रन पर पवेलियन भेजा। दिल्ली का स्कोर चार. एक ओवर में एक विकेट पर सैंतीस रन। डेविड वार्नर सोलह रन बनाकर क्रीज पर। मोहम्मद शमी ने दिल्ली कैपिटल्स को पहला झटका दिया। पृथ्वी शॉ चार गेंद पर सात रन बनाकर आउट। दिल्ली का स्कोर दो. चार ओवर में एक विकेट पर उनतीस रन। डेविड वार्नर बारह रन बनाकर क्रीज पर। मिशेल मार्श नए बल्लेबाज के तौर पर क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स की बल्लेबाजी शुरू हो गई है। डेविड वार्नर और पृथ्वी शॉ क्रीज पर। मोहम्मद शमी ने गुजरात टाइटंस की ओर से गेंदबाजी की शुरुआत की। पहले ओवर के बाद दिल्ली का स्कोर बगैर विकेट के ग्यारह रन। डेविड वार्नर चार और पृथ्वी शॉ बगैर खाता खोले क्रीज पर। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ साई किशोर, विजय शंकर, जयंत यादव, अभिनव मनोहर और श्रीकर भरत का नाम गुजरात टाइटंस ने इम्पैक्ट प्लेयर के लिए दिया। आईपीएल दो हज़ार तेईस के सातवें मैच में गुजरात टाइटंस के खिलाफ दिल्ली कैप्टिल्स ने इम्पैक्ट प्लेयर के लिए ललित यादव, रोवमैन पॉवेल, चेतन सकारिया, मनीष पांडे और खलील अहमद का नाम दिया है। ऋद्धिमान साहा , शुभमन गिल, साई सुदर्शन, हार्दिक पांड्या , डेविड मिलर, राहुल तेवतिया, राशिद खान, मोहम्मद शमी, जोशुआ लिटिल, यश दयाल, अल्जारी जोसेफ। गुजरात टाइटंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। दिल्ली कैपिटल्स की टीम पहले बल्लेबाजी करेगी। गुजरात की टीम में दो बदलाव हुआ। डेविड मिलर को केन विलियमसन की जगह टीम में मौका मिला। दिल्ली की टीम में भी दो बदलाव हुए। अभिषेक पोरेल डेब्यू करेंगे। एनरिच नॉर्खिया को रोवमैन पॉवेल की जगह मौका मिला। दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत पिछले साल दिसंबर में कार दुर्घटना के शिकार हो गए थे। इसके कारण वह आईपीएल दो हज़ार तेईस सत्र से बाहर हो गए। हालांकि, लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच में फ्रेंचाइजी ने उनकी जर्सी को डगआउट के ऊपर टांग दिया था। पंत आज मैच देखने अरूण जेटली स्टेडियम आएंगे। गुजरात टाइटंस की टीम के साथ किलर मिलर यानी डेविड मिलर जुड़ गए हैं। पिछले मैच में वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण नहीं खेले थे। टीम को बड़ा झटका तब लगा जब केन विलियमसन चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। Delhi Capitals vs Gujarat Titans IPL दो हज़ार तेईस:डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर शानादर अंदाज में आईपीएल दो हज़ार तेईस में अपने अभियान की शुरुआत की। हालांकि, इस दौरान केन विलियमसन चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। टीम को उनकी कमी नहीं खलेगी, क्योंकि डेविड मिलर उसके साथ जुड़ गए हैं। पिछले उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। दिल्ली कैपिटल्स के लिए ऋषभ पंत का न होना सबसे बड़ी परेशानी का सबब है। हालांकि इस मैच में उसे रिले रोसौव की सेवा मिलेगी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
जयपुर में बढ़ती वाहन चोरी की वारदातों को लेकर जयपुर जीआरपी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जीआरपी जयपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश कर दो शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है । पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी नागौर निवासी सुरेश कुमावत और महावीर नायक है। जीआरपी पुलिस ने बताया कि बीते दिनों रेलवे स्टेशन के आसपास से वाहन चोरी की घटनाएं बढ रही थी। आए दिन लोग वाहन चोरी की शिकायत को लेकर थाने पहुंच रहे थे। जिस पर जीआरपी थाने की स्पेशल टीम को अलर्ट किया गया और इलाके में संदिग्धों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए। पुलिस ने इलाके में संदिग्ध घूम रहे दो युवकों को पकड़ा जिन्होंने इलाके में दर्जनों वाहन चोरी करना कबूला। पुलिस ने इन वाहन चोरों से पूछताछ के बाद चोरी की 15 बाइक बरामद की है । फिलहाल पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है । माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई और खुलासे सामने आ सकते है। पुलिस पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि वह हैंडल लॉक को केवल एक मिनट में तोड़ देते हैं। अगर टायर लॉक लगा हो तो उस वाहन को नहीं चुराते। क्यों की एक वाहन को चोरी करने में समय कम मिलता है। इसलिए वह एक समय में केवल एक लॉक तोड़ते हैं। वैसे भी टायर लॉक वाली गाड़ी में महनत ज्यादा होती है इस लिए ये वाहन चोर केवल हैडल लॉक वाली गाड़ियों को तोड़ कर उसे चोरी करते थे। चोरी वाहन को ये बदमाश जयपुर के आसपास के लोगों को सस्ती कीमत यानी की 5से 10हजार रुपए में बेच दिया करते थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जयपुर में बढ़ती वाहन चोरी की वारदातों को लेकर जयपुर जीआरपी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जीआरपी जयपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश कर दो शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है । पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी नागौर निवासी सुरेश कुमावत और महावीर नायक है। जीआरपी पुलिस ने बताया कि बीते दिनों रेलवे स्टेशन के आसपास से वाहन चोरी की घटनाएं बढ रही थी। आए दिन लोग वाहन चोरी की शिकायत को लेकर थाने पहुंच रहे थे। जिस पर जीआरपी थाने की स्पेशल टीम को अलर्ट किया गया और इलाके में संदिग्धों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए। पुलिस ने इलाके में संदिग्ध घूम रहे दो युवकों को पकड़ा जिन्होंने इलाके में दर्जनों वाहन चोरी करना कबूला। पुलिस ने इन वाहन चोरों से पूछताछ के बाद चोरी की पंद्रह बाइक बरामद की है । फिलहाल पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है । माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई और खुलासे सामने आ सकते है। पुलिस पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि वह हैंडल लॉक को केवल एक मिनट में तोड़ देते हैं। अगर टायर लॉक लगा हो तो उस वाहन को नहीं चुराते। क्यों की एक वाहन को चोरी करने में समय कम मिलता है। इसलिए वह एक समय में केवल एक लॉक तोड़ते हैं। वैसे भी टायर लॉक वाली गाड़ी में महनत ज्यादा होती है इस लिए ये वाहन चोर केवल हैडल लॉक वाली गाड़ियों को तोड़ कर उसे चोरी करते थे। चोरी वाहन को ये बदमाश जयपुर के आसपास के लोगों को सस्ती कीमत यानी की पाँचसे दसहजार रुपए में बेच दिया करते थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां विभिन्न देशों की सरकारों के तय समय में उधार चुकाने की क्षमता के आधार पर संप्रभु रेटिंग तय करती हैं। इसके लिए अर्थव्यवस्था, बाजार और राजनीतिक जोखिम को आधार बनाया जाता है। रेटिंग एजेंसी फिच ने मंगलवार को भारत की संप्रभु रेटिंग के परिदृश्य को स्थिर बताते हुए कहा कि भारत का विकास मजबूत दिख रहा है। फिच रेटिंग्स ने अपने बयान में कहा कि फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ 'बीबीबी' के स्तर पर रखा है। फिच ने कहा कि संप्रभु रेटिंग के लिए मजबूत वृद्धि क्षमता एक महत्वपूर्ण वजह है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत की रेटिंग अन्य देशों की तुलना में मजबूत ग्रोथ और बाहरी वित्तीय लचीलापन दर्शा रही है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले साल के बड़े बाहरी झटकों से पार पाने में मदद मिली है। एजेंसी अगस्त 2006 से भारत की रेटिंग को 'बीबीबी' पर रखा है, जो सबसे कम निवेश ग्रेड रेटिंग है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां विभिन्न देशों की सरकारों के तय समय में उधार चुकाने की क्षमता के आधार पर संप्रभु रेटिंग तय करती हैं। इसके लिए अर्थव्यवस्था, बाजार और राजनीतिक जोखिम को आधार बनाया जाता है। संप्रभु रेटिंग से पता चलता है कि कोई देश भविष्य में अपने उधार और देनदारियां चुका सकेगा या नहीं। पूरी दुनिया में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स, फिच और मूडीज इन्वेस्टर्स जैसी रेटिंग एजेंसियां ही संप्रभु रेटिंग तय करती हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां विभिन्न देशों की सरकारों के तय समय में उधार चुकाने की क्षमता के आधार पर संप्रभु रेटिंग तय करती हैं। इसके लिए अर्थव्यवस्था, बाजार और राजनीतिक जोखिम को आधार बनाया जाता है। रेटिंग एजेंसी फिच ने मंगलवार को भारत की संप्रभु रेटिंग के परिदृश्य को स्थिर बताते हुए कहा कि भारत का विकास मजबूत दिख रहा है। फिच रेटिंग्स ने अपने बयान में कहा कि फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ 'बीबीबी' के स्तर पर रखा है। फिच ने कहा कि संप्रभु रेटिंग के लिए मजबूत वृद्धि क्षमता एक महत्वपूर्ण वजह है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत की रेटिंग अन्य देशों की तुलना में मजबूत ग्रोथ और बाहरी वित्तीय लचीलापन दर्शा रही है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले साल के बड़े बाहरी झटकों से पार पाने में मदद मिली है। एजेंसी अगस्त दो हज़ार छः से भारत की रेटिंग को 'बीबीबी' पर रखा है, जो सबसे कम निवेश ग्रेड रेटिंग है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां विभिन्न देशों की सरकारों के तय समय में उधार चुकाने की क्षमता के आधार पर संप्रभु रेटिंग तय करती हैं। इसके लिए अर्थव्यवस्था, बाजार और राजनीतिक जोखिम को आधार बनाया जाता है। संप्रभु रेटिंग से पता चलता है कि कोई देश भविष्य में अपने उधार और देनदारियां चुका सकेगा या नहीं। पूरी दुनिया में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स, फिच और मूडीज इन्वेस्टर्स जैसी रेटिंग एजेंसियां ही संप्रभु रेटिंग तय करती हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
नई दिल्ली, (भाषा)। राजधानी में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से "ाrक पहले नौ सदस्यीय भारतीय जिम्नास्टिक्स टीम विश्व कप में भाग लेने के लिए कल बेल्जियम जा रही है। कलात्मक जिम्नास्टिक्स का यह विश्व कप 11 और 12 सितंबर को बेल्जियम में होगा जिसमें भारत सहित दुनिया भर के 31 देशों के जिम्नास्ट भाग लेंगे। इस विश्व कप में नौ सदस्यीय भारतीय टीम भाग लेगी जिसमें छह पुरूष और नौ महिला जिम्नास्ट शामिल हैं। ये सभी जिम्नास्ट तीन से 14 अक्तूबर तक दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भी भाग लेंगे। जिम्नास्टिक्स के भारतीय कोच अशोक मिश्रा ने पुणे से `भाषा' को बताया, नौ सदस्यीय कलात्मक जिम्नास्ट टीम बेल्जियम में विश्व कप में भाग लेने के लिए नौ सितंबर को (कल) यहां से रवाना होगी। राष्ट्रमंडल खेलों के लिहाज से जिम्नास्टों के बेल्जियम दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान इन खिलाड़ियों को दुनिया भर के शीर्ष जिम्नास्टों के साथ खेलने का मौका मिला।
नई दिल्ली, । राजधानी में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से "ाrक पहले नौ सदस्यीय भारतीय जिम्नास्टिक्स टीम विश्व कप में भाग लेने के लिए कल बेल्जियम जा रही है। कलात्मक जिम्नास्टिक्स का यह विश्व कप ग्यारह और बारह सितंबर को बेल्जियम में होगा जिसमें भारत सहित दुनिया भर के इकतीस देशों के जिम्नास्ट भाग लेंगे। इस विश्व कप में नौ सदस्यीय भारतीय टीम भाग लेगी जिसमें छह पुरूष और नौ महिला जिम्नास्ट शामिल हैं। ये सभी जिम्नास्ट तीन से चौदह अक्तूबर तक दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भी भाग लेंगे। जिम्नास्टिक्स के भारतीय कोच अशोक मिश्रा ने पुणे से `भाषा' को बताया, नौ सदस्यीय कलात्मक जिम्नास्ट टीम बेल्जियम में विश्व कप में भाग लेने के लिए नौ सितंबर को यहां से रवाना होगी। राष्ट्रमंडल खेलों के लिहाज से जिम्नास्टों के बेल्जियम दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान इन खिलाड़ियों को दुनिया भर के शीर्ष जिम्नास्टों के साथ खेलने का मौका मिला।
तब वनस्पति को भस्म कर देता है। गर्मी से तो वृक्ष धीरे-धीरे सूखते है परन्तु दाह पड़ने से एक ही रात्रि मे सारा वन भस्म हो जाता है । लहलहाते वृक्ष सूख कर ठूठ बन जाते हैं । नरक मे देखिए, प्रथम के तीन नरको मे उष्ण-वेदना होती है और आगे के चार नरको में शीत वेदना होती है । इस प्रकार उष्ण-वेदना की अपेक्षा शीत-वेदना अधिक घातक सिद्ध होती है । और द्वेप के समान शीत और उष्णता के पुद्गल हैं । राग के पुद्गल शीत है और द्वेप के उष्ण । क्रोध की अपेक्षा लोभ से अधिक हानि होती है। क्रोध थोड़ी देर ठहरता है पर लोभ स्थायी रूप से भी बना रहता है । भगवान् के लिए वीतराग विशेषण का प्रयोग किया जाता है, वीतद्वेप कोई नही कहता । इस प्रकार रहस्य यही है कि द्वेप की अपेक्षा राग अधिक घातक होता है । श्रीठाणांगसूत्र के चौथे ठाणे मे वतलाया गया है कि जहाँ राग है वहाँ माया और लोभ है तथा जहाँ द्वेप है वहाँ क्रोध और है। जब वोट देने का प्रसङ्ग आता है तो लोभ और माया रागचदजी को अपना वोट देते हैं; क्रोध और मान द्वेषचदजो को । मोक्ष का साधक अपनी विशिष्ट सावना के द्वारा जब मोह रूपी राजा को परास्त करने के लिए प्रचड पराक्रम करता है तो क्रोध और मान पहले नष्ट होते है, माया ओर लोभ उनके वाद । माया और लोभ में भी लोभ ही अन्त तक जूझता रहता है। दसवें गुण-स्थान तक भी वह आत्मा का पिंड नहीं छोड़ता । वहाँ भी सूक्ष्म संज्वलन लोभ बना रहता है। इसी से राग की प्रचण्डता का पता चल जाता है । राग क्या है ? अनात्मभूत वस्तुओं के प्रति अर्थात् पर
तब वनस्पति को भस्म कर देता है। गर्मी से तो वृक्ष धीरे-धीरे सूखते है परन्तु दाह पड़ने से एक ही रात्रि मे सारा वन भस्म हो जाता है । लहलहाते वृक्ष सूख कर ठूठ बन जाते हैं । नरक मे देखिए, प्रथम के तीन नरको मे उष्ण-वेदना होती है और आगे के चार नरको में शीत वेदना होती है । इस प्रकार उष्ण-वेदना की अपेक्षा शीत-वेदना अधिक घातक सिद्ध होती है । और द्वेप के समान शीत और उष्णता के पुद्गल हैं । राग के पुद्गल शीत है और द्वेप के उष्ण । क्रोध की अपेक्षा लोभ से अधिक हानि होती है। क्रोध थोड़ी देर ठहरता है पर लोभ स्थायी रूप से भी बना रहता है । भगवान् के लिए वीतराग विशेषण का प्रयोग किया जाता है, वीतद्वेप कोई नही कहता । इस प्रकार रहस्य यही है कि द्वेप की अपेक्षा राग अधिक घातक होता है । श्रीठाणांगसूत्र के चौथे ठाणे मे वतलाया गया है कि जहाँ राग है वहाँ माया और लोभ है तथा जहाँ द्वेप है वहाँ क्रोध और है। जब वोट देने का प्रसङ्ग आता है तो लोभ और माया रागचदजी को अपना वोट देते हैं; क्रोध और मान द्वेषचदजो को । मोक्ष का साधक अपनी विशिष्ट सावना के द्वारा जब मोह रूपी राजा को परास्त करने के लिए प्रचड पराक्रम करता है तो क्रोध और मान पहले नष्ट होते है, माया ओर लोभ उनके वाद । माया और लोभ में भी लोभ ही अन्त तक जूझता रहता है। दसवें गुण-स्थान तक भी वह आत्मा का पिंड नहीं छोड़ता । वहाँ भी सूक्ष्म संज्वलन लोभ बना रहता है। इसी से राग की प्रचण्डता का पता चल जाता है । राग क्या है ? अनात्मभूत वस्तुओं के प्रति अर्थात् पर
स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी फुटबॉल की दुनियां के बेताज बादशाह माने जाते हैं वहीं टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली इस समय दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़ हैं. यूं तो दुनियां में लोकप्रियता के मामले में फुटबॉल क्रिकेट से बहुत आगे लेकिन फिर भी एक मामले में कोहली मेसी से आगे निकल गए हैं. दरअसल, दुनिया के करोड़पति लोगों का हिसाब-किताब रखने वाली मशहूर पत्रिका 'फोर्ब्स' ने हाल ही में वर्ल्ड में सबसे ज़्यादा ब्रांड वैल्यू रखने वाले 40 खिलाड़ियों की लिस्ट जारी की है जिसमें टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली टॉप 10 में हैं. वह एकमात्र क्रिकेटर हैं जिन्हें इस लिस्ट में जगह मिली है. दिलचस्प बात ये है कि भारतीय कप्तान ने ब्रांड वैल्यू के मामले में अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी को भी पीछे छोड़ दिया है. फोर्ब्स फेब-40 की इस लिस्ट में विराट कोहली सातवें स्थान पर हैं। वहीं अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी उनसे पीछे नौवें स्थान पर हैं। इस लिस्ट में स्विटजरलैंड के स्टार टेनिस प्लेयर रोजर फेडरर नंबर वन पोजिशन पर हैं. आपको बता दें कि किसी भी खिलाड़ी की ब्रांड वैल्यू में उसकी सैलरी, बोनस, और इंवेस्टमेंट से होने वाली कमाई शामिल नहीं होती. विराट की एड और स्पॉन्सरशिप से होने वाली कमाई ना सिर्फ मैसी बल्कि गोल्फर रोरी मैक्लरॉय, स्टीफन करी से भी ज्यादा है. इस लिस्ट में विराट की कमाई 1. 45 करोड़ डॉलर बताई गई है. टॉप टेन की इस लिस्ट में टॉप पर रोजर फेडरर ($3. 72 करोड़ डॉलर), लीब्रॉन जेम्स ($3. 34 करोड़), उसेन बोल्ट ($2. 7 करोड़), क्रिस्टियानो रोनाल्डो ($2. 15), फिल मिकल्सन ($1. 96), टाइगर वुड्स ($1. 66 करोड़ डॉलर) शामिल हैं.
स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी फुटबॉल की दुनियां के बेताज बादशाह माने जाते हैं वहीं टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली इस समय दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़ हैं. यूं तो दुनियां में लोकप्रियता के मामले में फुटबॉल क्रिकेट से बहुत आगे लेकिन फिर भी एक मामले में कोहली मेसी से आगे निकल गए हैं. दरअसल, दुनिया के करोड़पति लोगों का हिसाब-किताब रखने वाली मशहूर पत्रिका 'फोर्ब्स' ने हाल ही में वर्ल्ड में सबसे ज़्यादा ब्रांड वैल्यू रखने वाले चालीस खिलाड़ियों की लिस्ट जारी की है जिसमें टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली टॉप दस में हैं. वह एकमात्र क्रिकेटर हैं जिन्हें इस लिस्ट में जगह मिली है. दिलचस्प बात ये है कि भारतीय कप्तान ने ब्रांड वैल्यू के मामले में अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी को भी पीछे छोड़ दिया है. फोर्ब्स फेब-चालीस की इस लिस्ट में विराट कोहली सातवें स्थान पर हैं। वहीं अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मैसी उनसे पीछे नौवें स्थान पर हैं। इस लिस्ट में स्विटजरलैंड के स्टार टेनिस प्लेयर रोजर फेडरर नंबर वन पोजिशन पर हैं. आपको बता दें कि किसी भी खिलाड़ी की ब्रांड वैल्यू में उसकी सैलरी, बोनस, और इंवेस्टमेंट से होने वाली कमाई शामिल नहीं होती. विराट की एड और स्पॉन्सरशिप से होने वाली कमाई ना सिर्फ मैसी बल्कि गोल्फर रोरी मैक्लरॉय, स्टीफन करी से भी ज्यादा है. इस लिस्ट में विराट की कमाई एक. पैंतालीस करोड़ डॉलर बताई गई है. टॉप टेन की इस लिस्ट में टॉप पर रोजर फेडरर , लीब्रॉन जेम्स , उसेन बोल्ट , क्रिस्टियानो रोनाल्डो , फिल मिकल्सन , टाइगर वुड्स शामिल हैं.
West Bengal Election: पीएम मोदी के मंच पर पहुंचने से पहले मंच से मिथुन चक्रवर्ती ने वहां मौजूद लोगों का अपने डायलॉग से खासा मनोरंजन किया। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 27 मार्च से शुरू होगा जिसके लिए पीएम मोदी ने रैली की। West Bengal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज कल तो हमारे विरोधी भी कहते हैं कि मैं दोस्तों के लिए काम करता हूं। हम सभी जानते हैं कि बचपन में हम जहां पले-बढ़े होते हैं, बचपन में जहां खेले-कूदे होते हैं, जिनके साथ पढ़े होते हैं, वो हमारे जीवन भर के पक्के दोस्त होते हैं। " West Bengal Election:भाजपा के बंगाल प्रभारी और पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से जब पूछा गया कि क्या मिथुन चक्रवर्ती भाजपा का दामन थाम सकते हैं। क्या वह पीएम मोदी के जनसभा वाले मंच पर मौजूद रहेंगे तो उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के इस रैली में केवल पीएम होंगे और साथ में जनता होगी। इसमें कौन बड़ी हस्ती है कौन सामान्य जन है हम सभी सबका स्वागत करेंगे। चाहे वह मिथुन चक्रवर्ती ही क्यों ना हों।
West Bengal Election: पीएम मोदी के मंच पर पहुंचने से पहले मंच से मिथुन चक्रवर्ती ने वहां मौजूद लोगों का अपने डायलॉग से खासा मनोरंजन किया। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान सत्ताईस मार्च से शुरू होगा जिसके लिए पीएम मोदी ने रैली की। West Bengal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज कल तो हमारे विरोधी भी कहते हैं कि मैं दोस्तों के लिए काम करता हूं। हम सभी जानते हैं कि बचपन में हम जहां पले-बढ़े होते हैं, बचपन में जहां खेले-कूदे होते हैं, जिनके साथ पढ़े होते हैं, वो हमारे जीवन भर के पक्के दोस्त होते हैं। " West Bengal Election:भाजपा के बंगाल प्रभारी और पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से जब पूछा गया कि क्या मिथुन चक्रवर्ती भाजपा का दामन थाम सकते हैं। क्या वह पीएम मोदी के जनसभा वाले मंच पर मौजूद रहेंगे तो उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के इस रैली में केवल पीएम होंगे और साथ में जनता होगी। इसमें कौन बड़ी हस्ती है कौन सामान्य जन है हम सभी सबका स्वागत करेंगे। चाहे वह मिथुन चक्रवर्ती ही क्यों ना हों।
इलायची की तासीर गर्म होती है या ठंडी? आयुर्वेद एक्सपर्ट्स की मानें तो हरी इलायची की तासीर ठंडी ( Green Cardamom Hot or Cold in Nature ) होती है, इसलिए कई हेल्थ एक्सपर्ट्स गर्मियों में हरी इलायची का पानी पीने की सलाह देते हैं। वहीं, कई लोग गर्मियों में चाय में अदरक के बजाय इलायची देते हैं, क्योंकि इसका स्वभाव ठंडा होता है। इससे गर्मियों की परेशानियों को कम किया जा सकता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक, एक दिन में आधा से एक ग्राम हरी इलायची पाउडर खाना आपकी सेहत के लिए उपयुक्त है। अगर आप किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो इसका प्रयोग घरेलू उपचार के रूप में कर सकते हैं। किसी गंभीर परेशानी से पीड़ित व्यक्तियों को इसकी सही खुराक जानने के लिए आपको चिकित्सक से परामर्थ की जरूरत है। हरी इलायची का सेवन करने से आपकी पाचन संबंधी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। इसमें कई ऐसे गुण होते हैं, जो पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं। नियमित रूप से 1 इलायची चबाने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की परेशानियां जैसे- मतली, अपच, उल्टी, पेट में दर्द और ऐंठन संबंधी ( cardamom for acidity ) परेशानियों को कम किया जा सकता है। हरी इलायची में एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो सांसों की दुर्गंध से छुटकारा दिलाने में प्रभावी हो सकते हैं। अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है, तो रोजाना खाने के बाद हरी इलायची चबाएं। हरी इलायची की खुशबू आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरह होत है। यही कारण है कि अगर आप इसका सेवन करते हैं, तो यह आपके मानसिक तनाव, डिप्रेशन को दूर करने में प्रभावी है। अगर आप डिप्रेशन से जूझ रहे हैं तो हरी इलायची को पानी में उबालकर पिएं। इससे डिप्रेशन की समस्याएं दूर होंगी। हरी इलायची स्वास्थ्य के लिए काफी हेल्दी होती है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। वही, अगर आपको किसी तरह की परेशानी है तो हरी इलायची का सेवन करने से पहले एक बार एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ताकि किसी भी समस्या की गंभीरता को कम किया जा सके। Total Wellness is now just a click away.
इलायची की तासीर गर्म होती है या ठंडी? आयुर्वेद एक्सपर्ट्स की मानें तो हरी इलायची की तासीर ठंडी होती है, इसलिए कई हेल्थ एक्सपर्ट्स गर्मियों में हरी इलायची का पानी पीने की सलाह देते हैं। वहीं, कई लोग गर्मियों में चाय में अदरक के बजाय इलायची देते हैं, क्योंकि इसका स्वभाव ठंडा होता है। इससे गर्मियों की परेशानियों को कम किया जा सकता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक, एक दिन में आधा से एक ग्राम हरी इलायची पाउडर खाना आपकी सेहत के लिए उपयुक्त है। अगर आप किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो इसका प्रयोग घरेलू उपचार के रूप में कर सकते हैं। किसी गंभीर परेशानी से पीड़ित व्यक्तियों को इसकी सही खुराक जानने के लिए आपको चिकित्सक से परामर्थ की जरूरत है। हरी इलायची का सेवन करने से आपकी पाचन संबंधी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। इसमें कई ऐसे गुण होते हैं, जो पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं। नियमित रूप से एक इलायची चबाने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की परेशानियां जैसे- मतली, अपच, उल्टी, पेट में दर्द और ऐंठन संबंधी परेशानियों को कम किया जा सकता है। हरी इलायची में एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो सांसों की दुर्गंध से छुटकारा दिलाने में प्रभावी हो सकते हैं। अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है, तो रोजाना खाने के बाद हरी इलायची चबाएं। हरी इलायची की खुशबू आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरह होत है। यही कारण है कि अगर आप इसका सेवन करते हैं, तो यह आपके मानसिक तनाव, डिप्रेशन को दूर करने में प्रभावी है। अगर आप डिप्रेशन से जूझ रहे हैं तो हरी इलायची को पानी में उबालकर पिएं। इससे डिप्रेशन की समस्याएं दूर होंगी। हरी इलायची स्वास्थ्य के लिए काफी हेल्दी होती है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। वही, अगर आपको किसी तरह की परेशानी है तो हरी इलायची का सेवन करने से पहले एक बार एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ताकि किसी भी समस्या की गंभीरता को कम किया जा सके। Total Wellness is now just a click away.
भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि अफगानिस्तान से लौटे कुछ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें पृथकवास में रखकर इलाज किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने प्रेस वार्ता में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "जो कोई भी (भारत में) आया है उसे पोलियो रोधी टीका लगाया गया है क्योंकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी वाल्इड पोलियो का प्रसार है। हमने उन सब की आरटी-पीसीआर से जांच किए जाने की व्यवस्था की और उनमें से कुछ संक्रमित पाए गए। "उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अब तक 400 से ज्यादा लोगों को निकाला जा चुका है। भूषण ने कहा कि जो कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, उन्हें पृथकवास में रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "कई लोगों को छावला (दिल्ली) में आईटीबीपी के कैंप भेजा गया है, जहां उन्हें 14 दिनों तक पृथकवास में रखा जाएगा और बाद में तय किया जाएगा कि उन्हें कहां भेजा जाना है। "भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी में सुरक्षा स्थिति और खराब होने की पृष्ठभूमि में बृहस्पतिवार को काबुल से अपने 24 नागरिकों और 11 नेपाली नागरिकों को एक सैन्य विमान के जरिए निकाला। इसने पहले भारत ने अपने दूतावास के कर्मियों, अन्य भारतीय नागरिकों और हिंदुओं व सिखों सहित कुछ अफगान नागरिकों को निकाला था। तालिबान ने अमेरिकी बलों के पूरी तरह से वापस जाने से पहले ही काबुल समेत अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि अफगानिस्तान से लौटे कुछ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें पृथकवास में रखकर इलाज किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने प्रेस वार्ता में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "जो कोई भी आया है उसे पोलियो रोधी टीका लगाया गया है क्योंकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी वाल्इड पोलियो का प्रसार है। हमने उन सब की आरटी-पीसीआर से जांच किए जाने की व्यवस्था की और उनमें से कुछ संक्रमित पाए गए। "उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अब तक चार सौ से ज्यादा लोगों को निकाला जा चुका है। भूषण ने कहा कि जो कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, उन्हें पृथकवास में रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "कई लोगों को छावला में आईटीबीपी के कैंप भेजा गया है, जहां उन्हें चौदह दिनों तक पृथकवास में रखा जाएगा और बाद में तय किया जाएगा कि उन्हें कहां भेजा जाना है। "भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी में सुरक्षा स्थिति और खराब होने की पृष्ठभूमि में बृहस्पतिवार को काबुल से अपने चौबीस नागरिकों और ग्यारह नेपाली नागरिकों को एक सैन्य विमान के जरिए निकाला। इसने पहले भारत ने अपने दूतावास के कर्मियों, अन्य भारतीय नागरिकों और हिंदुओं व सिखों सहित कुछ अफगान नागरिकों को निकाला था। तालिबान ने अमेरिकी बलों के पूरी तरह से वापस जाने से पहले ही काबुल समेत अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
Jamshedpur (Mujtaba Haider Rizvi): मजदूरों ने टाटा पावर और नुवोको के लोको ट्रैक को जाम कर दिया है. झारखंड मजदूर यूनियन के नेता व झामुमो नेता दुलाल भुइयां के नेतृत्व में मजदूर टाटा पावर और नुवोको के लोको ट्रैक पर बैठ गए हैं. मजदूरों की मांग है कि उनकी मजदूरी बढ़ाई जाए. साथ ही मजदूरी और नौकरी देने में 75% स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए. इनकी मांग है कि रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज बनाया जाए. इलाके की मुख्य सड़क का पुनर्निर्माण किया जाए. दुलाल भुइयां ने बताया कि अगर कंपनी प्रबंधन मांग नहीं मानता तो आगे और जोरदार आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कंपनियां इलाके के लोगों को बेवकूफ बना रही हैं. उनके साथ धोखा किया जा रहा है. उनको कम मजदूरी दी जा रही है. प्रदर्शन के जरिए राज्य सरकार और कंपनी का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है. इलाके में पेयजल की सुविधा नहीं है. कंपनी को पेयजल की जिम्मेदारी भी उठानी होगी और इसका इंतजाम करना होगा.
Jamshedpur : मजदूरों ने टाटा पावर और नुवोको के लोको ट्रैक को जाम कर दिया है. झारखंड मजदूर यूनियन के नेता व झामुमो नेता दुलाल भुइयां के नेतृत्व में मजदूर टाटा पावर और नुवोको के लोको ट्रैक पर बैठ गए हैं. मजदूरों की मांग है कि उनकी मजदूरी बढ़ाई जाए. साथ ही मजदूरी और नौकरी देने में पचहत्तर% स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए. इनकी मांग है कि रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज बनाया जाए. इलाके की मुख्य सड़क का पुनर्निर्माण किया जाए. दुलाल भुइयां ने बताया कि अगर कंपनी प्रबंधन मांग नहीं मानता तो आगे और जोरदार आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कंपनियां इलाके के लोगों को बेवकूफ बना रही हैं. उनके साथ धोखा किया जा रहा है. उनको कम मजदूरी दी जा रही है. प्रदर्शन के जरिए राज्य सरकार और कंपनी का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है. इलाके में पेयजल की सुविधा नहीं है. कंपनी को पेयजल की जिम्मेदारी भी उठानी होगी और इसका इंतजाम करना होगा.
खरमास के महीने में आने वाली दोनों एकादशी का व्रत रखें और विष्णु जी को भोग लगाएं। नई दिल्ली. 14 जनवरी को खत्म होने वाले खरमास यानि मलमास का महीना भी आपके लिए शुभ है। इसलिए 14 तारीख से पहले-पहले इन बचे हुए दिनों का उपयोग करके अपने घर में हो रही पैसों की किल्लत को दूर कर लें। इस अपवित्र महीने को अगर आप अपने लिए अनुकूल बनाना चाहते हैं तो आपको कुछ ऐसे शास्त्रीय उपायों को ध्यान में रखकर कुछ कार्य करने चाहिए। खरमास के समय प्रातः जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की मूर्ति का चंदन और दूध के साथ अभिषेक करना चाहिए। खरमास के समय तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। नियमित रूप से तुलसी पूजा करना और तुलसी के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। तुलसी की पूजा करने के बाद परिक्रमा करते-करते "ॐ वासुदेवाय नमः" मंत्र का भी जाप करते रहें। खरमास के समय प्रातः जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की मूर्ति का चंदन और दूध के साथ अभिषेक करना चाहिए। खरमास के महीने में आने वाली दोनों एकादशी का व्रत रखें और विष्णु जी को भोग लगाएं। भोग में तुलसी की पत्ती डालना ना भूलें। सूर्योदय से एक घंटा, छत्तीस मिनट पहले के समय को ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है जोकि निश्चित तौर पर सबसे पवित्र समय होता है। इस पूरे माह पीले रंग की अत्याधिक महत्ता होती है, आप भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाएं, उन्हें पीले फल और फूल का भोग लगाएं और सभी में बांट दें। गौरतलब है कि हिन्दू शास्त्रों में खरमास को अशुद्धि का काल यानि अपवित्र समय करार दिया जाता है। इस दौरान आप कोई नया काम शुरू नहीं कर सकते और ना ही किसी शुभ कार्य को पूर्ण कर सकते हैं। लेकिन आर्थिक लाभ के लिए यह बेहद शुभ है।
खरमास के महीने में आने वाली दोनों एकादशी का व्रत रखें और विष्णु जी को भोग लगाएं। नई दिल्ली. चौदह जनवरी को खत्म होने वाले खरमास यानि मलमास का महीना भी आपके लिए शुभ है। इसलिए चौदह तारीख से पहले-पहले इन बचे हुए दिनों का उपयोग करके अपने घर में हो रही पैसों की किल्लत को दूर कर लें। इस अपवित्र महीने को अगर आप अपने लिए अनुकूल बनाना चाहते हैं तो आपको कुछ ऐसे शास्त्रीय उपायों को ध्यान में रखकर कुछ कार्य करने चाहिए। खरमास के समय प्रातः जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की मूर्ति का चंदन और दूध के साथ अभिषेक करना चाहिए। खरमास के समय तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। नियमित रूप से तुलसी पूजा करना और तुलसी के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। तुलसी की पूजा करने के बाद परिक्रमा करते-करते "ॐ वासुदेवाय नमः" मंत्र का भी जाप करते रहें। खरमास के समय प्रातः जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की मूर्ति का चंदन और दूध के साथ अभिषेक करना चाहिए। खरमास के महीने में आने वाली दोनों एकादशी का व्रत रखें और विष्णु जी को भोग लगाएं। भोग में तुलसी की पत्ती डालना ना भूलें। सूर्योदय से एक घंटा, छत्तीस मिनट पहले के समय को ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है जोकि निश्चित तौर पर सबसे पवित्र समय होता है। इस पूरे माह पीले रंग की अत्याधिक महत्ता होती है, आप भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाएं, उन्हें पीले फल और फूल का भोग लगाएं और सभी में बांट दें। गौरतलब है कि हिन्दू शास्त्रों में खरमास को अशुद्धि का काल यानि अपवित्र समय करार दिया जाता है। इस दौरान आप कोई नया काम शुरू नहीं कर सकते और ना ही किसी शुभ कार्य को पूर्ण कर सकते हैं। लेकिन आर्थिक लाभ के लिए यह बेहद शुभ है।
क्रयकृषिजलयानप्राप्तवितागमो वा । भवति गुरुवियोगो बान्धवातिर्मनोरुक् ।।२६।। श्लोक ५ से १७ तक सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि राहु तथा केतु यह जो ग्रहों का साधारण कम है -- इस क्रम से प्रत्येक ग्रह की अपनी महादशा में फल देने की प्रवृत्ति बतलाई है। अब श्लोक १८ से २६ तक - विशोत्तरी महादशा में ग्रहों का जो क्रम है अर्थात् सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, बृहस्पति, शनि, बुध, केतु और शुक्र उस क्रम से प्रत्येक ग्रह की अपनी-अपनी महादशा में फल देने की प्रवृत्ति बताते हैं । इस एक ही १९वें अध्याय में जो ग्रहों के महादशा फल दो बार बताये गये हैं, इसमें हमारे विचार से रहस्य निम्नलिखित है । (i) ५ से १७ श्लोक तक जो फलादेश है वह ग्रहों की साधारण प्रवृत्ति बताई है - जैसा योगिनी दशा में होता है कि शुभग्रहों की योगिनी दशा शुभ, पापग्रहों की अशुभ । अन्य मतों के अनुसार अष्टोत्तरी आदि में भी श्लोक ५ से १७ तक दिये गये सिद्धान्तों के अनुसार फलादेश बैठाना चाहिये । (ii) श्लोक १८ से २६ तक ग्रहों का क्रम वही रक्खा है जो विशोत्तरी दशा में बतलाया गया है। विशोत्तरी दशा में कुछ विशेषताएँ हैं। यथा एकादश जैसे सुन्दर 'लाभ' के स्वामी को पापी कहा गया। केवल पापी ही नहीं तीसरे, छठे, ग्यारहवें के मालिक तीनों पापी - इनमें भी क्रमशः तीसरे से अधिक पापी छडे का मालिक, छठे के मालिक से अधिक पापी ग्यारहवें का मालिक । दूसरी विशेषता यह है कि केन्द्र का स्वामी शुभ ग्रह हो तो शुभ फल नहीं करता, केन्द्र का स्वामी क्रूर ग्रह हो तो अशुभ फल नहीं करता । अर्थात् साधारण नियम लागू नहीं करना चाहिये कि शुभ ग्रह है तो शुभ फल करेगा क्रूर ग्रह है तो दुष्ट फल करेगा। इसी कारण श्लोक ५ से १७ तक ग्रहों का फल विविध दशाओं में (यथा अष्टोत्तरी, योगिनी, काल चक्र ) घटाना चाहिये -- जहाँ सिद्धान्त यह है कि क्रूर ग्रह की दशा है तो क्रूर फल और शुभ ग्रह की दशा है तो शुभ फल । और जब विशोत्तरी दशावश ग्रहों की महादशा कैसी जावेगी यह विचार करना हो तो श्लोक १८ से २६ तक वर्णित सिद्धान्त लागू करना चाहिये । (i) जब सूर्य की दशा हो तो क्रूरता से राजाओं से या युद्ध से धन प्राप्ति हो । अग्नि से और चौपायों से पीड़ा हो । आँखों में ताप (जलन) हो । पेट के तथा दांत के रोग हों । पुत्र और स्त्री को बीमारी हो या अन्य प्रकार का कष्ट हो । नौकरों का नाश हो, धन की हानि हो और गुरुजन (पिता, चाचा आदि) का वियोग या विरह हो । इस श्लोक में सूर्य की दशा का अनिष्ट फल बताया गया है । यह तभी घटित होगा जब सूर्य बिगड़ा हुआ हो । प्रत्येक ग्रह सम्बन्धी कुछ विशेष बातें हैं । जब ग्रह बिगड़ा हुआ होता है तो जिन बस्तुओं का वह अविष्ठाता है उनसे सम्बन्धी अनिष्ट फल दिखाता है और जब ग्रह सुधरा हुआ होता है तो अपने से सम्बन्धित वस्तुओं का लाभ कराता है । ।।१८।। (ii) चन्द्रमा की महादशा में मन्त्रों से, देवताओं से, ब्राह्मणों से तथा राजा से ऐश्वर्य प्राप्त होगा । मन्त्रों से ऐश्वर्य कैसे प्राप्त हो सकता है ? या तो स्वयं मन्त्रों का अनुष्ठान करे जिससे धन प्राप्ति हो या अनुष्ठान करने से दक्षिणा प्राप्त हो । चन्द्रमा की महादशा में स्त्री, धन और कृषि की भूमि प्राप्त होती है । पुष्प, वस्त्र, आभूषण, सुगन्धित पदार्थ तथा विविध प्रकार के रस प्राप्त हों। दुष्टों से विरोध हो, शरीर का या धन का क्षय हो और वातरोग हो । इस श्लोक में चन्द्रमा की महादशा के शुभाशुभ दोनों फल बताये हैं। यदि चन्द्रमा बलवान् होगा, शुभ स्थान में होगा, शुभ भवन का स्वामी होगा तो
क्रयकृषिजलयानप्राप्तवितागमो वा । भवति गुरुवियोगो बान्धवातिर्मनोरुक् ।।छब्बीस।। श्लोक पाँच से सत्रह तक सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि राहु तथा केतु यह जो ग्रहों का साधारण कम है -- इस क्रम से प्रत्येक ग्रह की अपनी महादशा में फल देने की प्रवृत्ति बतलाई है। अब श्लोक अट्ठारह से छब्बीस तक - विशोत्तरी महादशा में ग्रहों का जो क्रम है अर्थात् सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, बृहस्पति, शनि, बुध, केतु और शुक्र उस क्रम से प्रत्येक ग्रह की अपनी-अपनी महादशा में फल देने की प्रवृत्ति बताते हैं । इस एक ही उन्नीसवें अध्याय में जो ग्रहों के महादशा फल दो बार बताये गये हैं, इसमें हमारे विचार से रहस्य निम्नलिखित है । पाँच से सत्रह श्लोक तक जो फलादेश है वह ग्रहों की साधारण प्रवृत्ति बताई है - जैसा योगिनी दशा में होता है कि शुभग्रहों की योगिनी दशा शुभ, पापग्रहों की अशुभ । अन्य मतों के अनुसार अष्टोत्तरी आदि में भी श्लोक पाँच से सत्रह तक दिये गये सिद्धान्तों के अनुसार फलादेश बैठाना चाहिये । श्लोक अट्ठारह से छब्बीस तक ग्रहों का क्रम वही रक्खा है जो विशोत्तरी दशा में बतलाया गया है। विशोत्तरी दशा में कुछ विशेषताएँ हैं। यथा एकादश जैसे सुन्दर 'लाभ' के स्वामी को पापी कहा गया। केवल पापी ही नहीं तीसरे, छठे, ग्यारहवें के मालिक तीनों पापी - इनमें भी क्रमशः तीसरे से अधिक पापी छडे का मालिक, छठे के मालिक से अधिक पापी ग्यारहवें का मालिक । दूसरी विशेषता यह है कि केन्द्र का स्वामी शुभ ग्रह हो तो शुभ फल नहीं करता, केन्द्र का स्वामी क्रूर ग्रह हो तो अशुभ फल नहीं करता । अर्थात् साधारण नियम लागू नहीं करना चाहिये कि शुभ ग्रह है तो शुभ फल करेगा क्रूर ग्रह है तो दुष्ट फल करेगा। इसी कारण श्लोक पाँच से सत्रह तक ग्रहों का फल विविध दशाओं में घटाना चाहिये -- जहाँ सिद्धान्त यह है कि क्रूर ग्रह की दशा है तो क्रूर फल और शुभ ग्रह की दशा है तो शुभ फल । और जब विशोत्तरी दशावश ग्रहों की महादशा कैसी जावेगी यह विचार करना हो तो श्लोक अट्ठारह से छब्बीस तक वर्णित सिद्धान्त लागू करना चाहिये । जब सूर्य की दशा हो तो क्रूरता से राजाओं से या युद्ध से धन प्राप्ति हो । अग्नि से और चौपायों से पीड़ा हो । आँखों में ताप हो । पेट के तथा दांत के रोग हों । पुत्र और स्त्री को बीमारी हो या अन्य प्रकार का कष्ट हो । नौकरों का नाश हो, धन की हानि हो और गुरुजन का वियोग या विरह हो । इस श्लोक में सूर्य की दशा का अनिष्ट फल बताया गया है । यह तभी घटित होगा जब सूर्य बिगड़ा हुआ हो । प्रत्येक ग्रह सम्बन्धी कुछ विशेष बातें हैं । जब ग्रह बिगड़ा हुआ होता है तो जिन बस्तुओं का वह अविष्ठाता है उनसे सम्बन्धी अनिष्ट फल दिखाता है और जब ग्रह सुधरा हुआ होता है तो अपने से सम्बन्धित वस्तुओं का लाभ कराता है । ।।अट्ठारह।। चन्द्रमा की महादशा में मन्त्रों से, देवताओं से, ब्राह्मणों से तथा राजा से ऐश्वर्य प्राप्त होगा । मन्त्रों से ऐश्वर्य कैसे प्राप्त हो सकता है ? या तो स्वयं मन्त्रों का अनुष्ठान करे जिससे धन प्राप्ति हो या अनुष्ठान करने से दक्षिणा प्राप्त हो । चन्द्रमा की महादशा में स्त्री, धन और कृषि की भूमि प्राप्त होती है । पुष्प, वस्त्र, आभूषण, सुगन्धित पदार्थ तथा विविध प्रकार के रस प्राप्त हों। दुष्टों से विरोध हो, शरीर का या धन का क्षय हो और वातरोग हो । इस श्लोक में चन्द्रमा की महादशा के शुभाशुभ दोनों फल बताये हैं। यदि चन्द्रमा बलवान् होगा, शुभ स्थान में होगा, शुभ भवन का स्वामी होगा तो
मशहूर ब्रांड प्रसिद्ध और लोकप्रिय हैं1 9 83 को प्रतिभाशाली डिजाइनर फ्रैंको मॉस्चिनो ने इटली में 1 9 50 में पैदा हुआ था। अपने शुरुआती बचपन से, वह एक मशहूर कलाकार बनने का सख्ती से सपना देखा, यही कारण है कि उन्होंने कला के मिलान अकादमी में प्रवेश किया। उनकी रचनाएं असाधारण हैं और सूक्ष्मता के साथ प्रचलित हैंविडंबना। सख्त, क्लासिक संगठनों को कुछ अजीब शिलालेखों या ऐप्पलिक्सेस के साथ सजाया जा सकता है, दिल, धनुष और धूमधाम के रूप में जेब। मोस्किनो को विश्वास था कि यह सुंदर है - अमीरों का मतलब नहीं है यह आदर्श वाक्य, वह अपने सारे काम के माध्यम से किया। वह सड़कों के फैशन का अधिक शौक है, और कड़ी दुनिया नहीं है"कपूर से।" "प्रसिद्ध जैकेट" या टी-शर्ट के साथ अपनी प्रसिद्ध जैकेट को याद करने के लिए इसे पर्याप्त रूप से स्पॉट के रूप में एक पैटर्न के साथ और "यह काली कैवियार के साथ लिप्त है" पर लिखा है। उन्होंने कृतियों को उत्साहपूर्वक बनाया, जैसे कि खेलना। वह बहुत पहले ही निधन हो गया (वह 44 साल का नहीं था), लेकिन शानदार रंगीन तमाशा, जो फ्रेंको मोस्किनो शुरू कर देते हैं, आज भी जारी है। मास्टर के प्रस्थान के बाद, कंपनी ने विकास जारी रखा और 2002 में घड़ियों के निर्माण पर सेक्टर ग्रुप के साथ समझौता किया गया। मोस्कीनो महिलाओं की घड़ियों का स्वाद,चंचलता और अलंकार अपने लिए एक से अधिक सीजन को खुश करने के लिए, कंपनी ने न केवल डिजाइन को ध्यान से सोचा, बल्कि अपने उत्पादन के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का भी इस्तेमाल किया। वे एक स्विस क्वार्ट्ज आंदोलन स्थापित करते हैं, जो एक लंबा और उत्तम काम की गारंटी देता है। मामले और कंगन स्टेनलेस स्टील से बना है, और पट्टा प्राकृतिक नरम चमड़े से बना है। डायल खनिज कांच के साथ कवर किया गया है, सामान्य से अधिक टिकाऊ इसके अलावा, यह चिप्स और खरोंचों के लिए अधिक प्रतिरोधी है। मॉस्कीनो द्वारा निर्मित महिलाओं के लिए देखता है - यह स्टाइलिश हैऔर एक उज्जवल सहायक डिजाइनर ने प्रसिद्धि के लिए काम किया है, सुंदर महिलाओं के लिए ऐसे मॉडल बनाने, जो कंपनी की अवधारणा को पूरा करेंगे और उनकी मालकिन के व्यक्तित्व पर जोर देंगे। महिलाओं की घड़ियों Moschino एक विशाल प्रस्तुत कियावर्गीकरण, इसलिए फैशन की हर महिला अपनी पसंद के लिए एक मॉडल चुन सकते हैं। आप उस मॉडल के प्रति उदासीन नहीं होंगे, जिसमें एक पट्टा के बजाय एक ब्रांड प्रिंट के साथ रूमाल का प्रयोग किया जाता है। और दूसरे हाथ की नोक पर थोड़ा दिल छू सकता है? यह कंपनी का एक अजीब प्रतीक है, जो इस घड़ी को किसने बनाया है, इसके बिना शब्दों के बिना बोलता है। मॉस्कोनो घड़ी बनाने के ब्रांड के डिजाइनर, नहींएक शैली तक सीमित हैं, वे सभी अवसरों के लिए फैशन सहायक उपकरण बनाने की कोशिश करते हैं। यह इस दिशा में है कि कई प्रसिद्ध घड़ी ब्रांड अब काम करते हैं।
मशहूर ब्रांड प्रसिद्ध और लोकप्रिय हैंएक नौ तिरासी को प्रतिभाशाली डिजाइनर फ्रैंको मॉस्चिनो ने इटली में एक नौ पचास में पैदा हुआ था। अपने शुरुआती बचपन से, वह एक मशहूर कलाकार बनने का सख्ती से सपना देखा, यही कारण है कि उन्होंने कला के मिलान अकादमी में प्रवेश किया। उनकी रचनाएं असाधारण हैं और सूक्ष्मता के साथ प्रचलित हैंविडंबना। सख्त, क्लासिक संगठनों को कुछ अजीब शिलालेखों या ऐप्पलिक्सेस के साथ सजाया जा सकता है, दिल, धनुष और धूमधाम के रूप में जेब। मोस्किनो को विश्वास था कि यह सुंदर है - अमीरों का मतलब नहीं है यह आदर्श वाक्य, वह अपने सारे काम के माध्यम से किया। वह सड़कों के फैशन का अधिक शौक है, और कड़ी दुनिया नहीं है"कपूर से।" "प्रसिद्ध जैकेट" या टी-शर्ट के साथ अपनी प्रसिद्ध जैकेट को याद करने के लिए इसे पर्याप्त रूप से स्पॉट के रूप में एक पैटर्न के साथ और "यह काली कैवियार के साथ लिप्त है" पर लिखा है। उन्होंने कृतियों को उत्साहपूर्वक बनाया, जैसे कि खेलना। वह बहुत पहले ही निधन हो गया , लेकिन शानदार रंगीन तमाशा, जो फ्रेंको मोस्किनो शुरू कर देते हैं, आज भी जारी है। मास्टर के प्रस्थान के बाद, कंपनी ने विकास जारी रखा और दो हज़ार दो में घड़ियों के निर्माण पर सेक्टर ग्रुप के साथ समझौता किया गया। मोस्कीनो महिलाओं की घड़ियों का स्वाद,चंचलता और अलंकार अपने लिए एक से अधिक सीजन को खुश करने के लिए, कंपनी ने न केवल डिजाइन को ध्यान से सोचा, बल्कि अपने उत्पादन के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का भी इस्तेमाल किया। वे एक स्विस क्वार्ट्ज आंदोलन स्थापित करते हैं, जो एक लंबा और उत्तम काम की गारंटी देता है। मामले और कंगन स्टेनलेस स्टील से बना है, और पट्टा प्राकृतिक नरम चमड़े से बना है। डायल खनिज कांच के साथ कवर किया गया है, सामान्य से अधिक टिकाऊ इसके अलावा, यह चिप्स और खरोंचों के लिए अधिक प्रतिरोधी है। मॉस्कीनो द्वारा निर्मित महिलाओं के लिए देखता है - यह स्टाइलिश हैऔर एक उज्जवल सहायक डिजाइनर ने प्रसिद्धि के लिए काम किया है, सुंदर महिलाओं के लिए ऐसे मॉडल बनाने, जो कंपनी की अवधारणा को पूरा करेंगे और उनकी मालकिन के व्यक्तित्व पर जोर देंगे। महिलाओं की घड़ियों Moschino एक विशाल प्रस्तुत कियावर्गीकरण, इसलिए फैशन की हर महिला अपनी पसंद के लिए एक मॉडल चुन सकते हैं। आप उस मॉडल के प्रति उदासीन नहीं होंगे, जिसमें एक पट्टा के बजाय एक ब्रांड प्रिंट के साथ रूमाल का प्रयोग किया जाता है। और दूसरे हाथ की नोक पर थोड़ा दिल छू सकता है? यह कंपनी का एक अजीब प्रतीक है, जो इस घड़ी को किसने बनाया है, इसके बिना शब्दों के बिना बोलता है। मॉस्कोनो घड़ी बनाने के ब्रांड के डिजाइनर, नहींएक शैली तक सीमित हैं, वे सभी अवसरों के लिए फैशन सहायक उपकरण बनाने की कोशिश करते हैं। यह इस दिशा में है कि कई प्रसिद्ध घड़ी ब्रांड अब काम करते हैं।
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले इन दिनों देश में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते पूरा राजतंत्र चुनाव आयोग के हाथ में है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की यही ताकत है कि यहां चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के पास इतनी शक्ति निहित है। मजे की बात यह कि चुनाव आयोग ने समय-समय पर इस शक्ति का भरपूर उपयोग भी किया है। एक बार तो यह तक हुआ कि चुनाव आयोग को अमिताभ बच्चन की फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश जारी करना पड़ा। किस्सा सन् 1984 का है। तब इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा मैदान में थे और कांग्रेस नेता राजीव गांधी ने उन्हें हराने के लिए उनके खिलाफ अमिताभ बच्चन को टिकट दे दिया। अमिताभ राजीव गांधी के मित्र थे, इसलिए बच्चन भी सामने बहुगुणा जैसा वरिष्ठ नेता होने के बावजूद लड़ने से मना नहीं कर पाए। बच्चन ने चुनाव प्रचार शुरू किया और भीड़ उमड़ने लगी। इसी बीच चुनाव आयोग ने पूरी निष्पक्षता दिखाते हुए दूरदर्शन को आदेश दिया कि 'चुनाव आचार संहिता के दौरान अमिताभ बच्चन की फिल्मों का प्रसारण न किया जाए। ' दरअसल, आयोग का मानना था कि फिल्म में हीरो की छवि के चलते अमिताभ को चुनाव में लाभ मिल सकता है। आयोग का यह सोचना सही भी साबित हुआ। अमिताभ तब अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में छाए हुए थे, इसलिए पांसा पलट गया और दिग्गज नेता होने के बावजूद हेमवती नंदन बहुगुणा चुनाव हार गए।
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले इन दिनों देश में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते पूरा राजतंत्र चुनाव आयोग के हाथ में है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की यही ताकत है कि यहां चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के पास इतनी शक्ति निहित है। मजे की बात यह कि चुनाव आयोग ने समय-समय पर इस शक्ति का भरपूर उपयोग भी किया है। एक बार तो यह तक हुआ कि चुनाव आयोग को अमिताभ बच्चन की फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश जारी करना पड़ा। किस्सा सन् एक हज़ार नौ सौ चौरासी का है। तब इलाहाबाद से दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा मैदान में थे और कांग्रेस नेता राजीव गांधी ने उन्हें हराने के लिए उनके खिलाफ अमिताभ बच्चन को टिकट दे दिया। अमिताभ राजीव गांधी के मित्र थे, इसलिए बच्चन भी सामने बहुगुणा जैसा वरिष्ठ नेता होने के बावजूद लड़ने से मना नहीं कर पाए। बच्चन ने चुनाव प्रचार शुरू किया और भीड़ उमड़ने लगी। इसी बीच चुनाव आयोग ने पूरी निष्पक्षता दिखाते हुए दूरदर्शन को आदेश दिया कि 'चुनाव आचार संहिता के दौरान अमिताभ बच्चन की फिल्मों का प्रसारण न किया जाए। ' दरअसल, आयोग का मानना था कि फिल्म में हीरो की छवि के चलते अमिताभ को चुनाव में लाभ मिल सकता है। आयोग का यह सोचना सही भी साबित हुआ। अमिताभ तब अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में छाए हुए थे, इसलिए पांसा पलट गया और दिग्गज नेता होने के बावजूद हेमवती नंदन बहुगुणा चुनाव हार गए।
मनोज वर्मा, कैथलः आज इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय कैथल में प्रातः कालीन व सांयकालीन सत्र की छात्राओं के लिए प्रतिभा खोज समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया । प्रातः कालीन सत्र में मुख्यातिथि के रूप में प्रबंधक समिति के प्रधान रामबहादुर ख़ुरानिया ने एवं सांयकालीन चरण में बतोर मुख्यातिथि अमिता ख़ुरानिया ने शिरकत की। महाविद्यालय की प्राचार्या आरती गर्ग व साँयक़ालीन सत्र की प्राचार्य प्रभारी सुरभि शर्मा व स्टाफ ने पुष्पगुच्छ देकर मुख्यातिथि का कार्यक्रम में स्वागत किया। मुख्यातिथि द्वारा दीपदान की परंपरा को निभाते हुए कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात् संगीत विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की बड़ी मनमोहक प्रस्तुति दी। प्रातः कालीन चरण में हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत में भाषण, कविता पाठ व श्लोकोच्चारण व सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत् लोकगीत, प्लेइंग इंस्ट्रुमेंट ,चुटकुले, लघुनाटक व प्रश्नोतरी प्रतियोगिता, पोस्टर मेंकिंग, पेंटिंग, रंगोली, फ़्लावर अर्रेनजमेंट व फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। सांयकालीन चरण में एकल नृत्य, समूह नृत्य व फैशन शो का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधक समिति के प्रधान रामबहादुर खुरानिया ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के नियमानुसार कॉलेज में छात्राओं की छिपी हुई प्रतिभा को खोजने के लिए प्रत्येक वर्ष टैंलेट शो का आयोजन किया जाता है। जिससे छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ता है एवं सृजनात्मकता विकसित होती है। कॉलेज की छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी महाविद्यालय का नाम पूरे हरियाणा में रोशन कर रहीं हैं। हिन्दी कविता पाठ में पायल ने प्रथम एवं हिन्दी भाषण प्रतियोगिता में करमजीत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। संस्कृत भाषण में अँजू ने प्रथम स्थान एवं श्लोकोच्चारण में कमल ने पहला स्थान प्राप्त किया। अंग्रेजी भाषण में सचलीनप्रीत कौर ने पहला व अंग्रेजी कविता पाठ में जूही ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में स्नेहा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लोकगीत प्रतियोगिता में तमन्ना ने प्रथम स्थान, नवजोत ने दूसरा व साक्षी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। प्रश्नोतरी प्रतियोगिता में ख़ुशी , दिव्या, मीरा की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लघुनाटक में गीता व टीम ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम पर सुंदर प्रस्तुति देते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। रंगोली में काजल ने प्रथम, संजना ने दूसरा ,पेंटिंग में सरबजीत ने प्रथम, सोनिया ने द्वितीय व पोस्टर मेंकिग में प्रिया ने प्रथम, निकित्ता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। फ़्लावर अर्रेनजमेंट में रीतू ने प्रथम,निशा ने दूसरा ,सोलो डांस में सोनी ने पहला , राधिका ने दूसरा व नेहा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया । ग्रुप डांस में श्वेता एंड ग्रुप ने प्रथम स्थान ,ग्रुप डांस में शेफाली एंड ग्रुप ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। प्लेइंग इंस्ट्रुमेंट में ख़ुशी व चुटकुले में अनु को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। फैशन शो में मधु ने प्रथम ,अक्षिता ने दूसरा व प्रज्ञा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया । कार्यक्रम के अंत में सभी विजेता प्रतिभागियों को मुख्यातिथि व गेस्ट ऑफ आनर के द्वारा पुरस्कार व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या आरती गर्ग ने मुख्यातिथि एवं गेस्ट ऑफ आनर का कार्यक्रम में आकर इसकी शोभा बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया। इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टॉफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की छात्राओं ने पूरे कार्यक्रम की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी की।
मनोज वर्मा, कैथलः आज इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय कैथल में प्रातः कालीन व सांयकालीन सत्र की छात्राओं के लिए प्रतिभा खोज समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया । प्रातः कालीन सत्र में मुख्यातिथि के रूप में प्रबंधक समिति के प्रधान रामबहादुर ख़ुरानिया ने एवं सांयकालीन चरण में बतोर मुख्यातिथि अमिता ख़ुरानिया ने शिरकत की। महाविद्यालय की प्राचार्या आरती गर्ग व साँयक़ालीन सत्र की प्राचार्य प्रभारी सुरभि शर्मा व स्टाफ ने पुष्पगुच्छ देकर मुख्यातिथि का कार्यक्रम में स्वागत किया। मुख्यातिथि द्वारा दीपदान की परंपरा को निभाते हुए कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात् संगीत विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की बड़ी मनमोहक प्रस्तुति दी। प्रातः कालीन चरण में हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत में भाषण, कविता पाठ व श्लोकोच्चारण व सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत् लोकगीत, प्लेइंग इंस्ट्रुमेंट ,चुटकुले, लघुनाटक व प्रश्नोतरी प्रतियोगिता, पोस्टर मेंकिंग, पेंटिंग, रंगोली, फ़्लावर अर्रेनजमेंट व फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। सांयकालीन चरण में एकल नृत्य, समूह नृत्य व फैशन शो का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधक समिति के प्रधान रामबहादुर खुरानिया ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के नियमानुसार कॉलेज में छात्राओं की छिपी हुई प्रतिभा को खोजने के लिए प्रत्येक वर्ष टैंलेट शो का आयोजन किया जाता है। जिससे छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ता है एवं सृजनात्मकता विकसित होती है। कॉलेज की छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी महाविद्यालय का नाम पूरे हरियाणा में रोशन कर रहीं हैं। हिन्दी कविता पाठ में पायल ने प्रथम एवं हिन्दी भाषण प्रतियोगिता में करमजीत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। संस्कृत भाषण में अँजू ने प्रथम स्थान एवं श्लोकोच्चारण में कमल ने पहला स्थान प्राप्त किया। अंग्रेजी भाषण में सचलीनप्रीत कौर ने पहला व अंग्रेजी कविता पाठ में जूही ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में स्नेहा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लोकगीत प्रतियोगिता में तमन्ना ने प्रथम स्थान, नवजोत ने दूसरा व साक्षी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। प्रश्नोतरी प्रतियोगिता में ख़ुशी , दिव्या, मीरा की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लघुनाटक में गीता व टीम ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम पर सुंदर प्रस्तुति देते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। रंगोली में काजल ने प्रथम, संजना ने दूसरा ,पेंटिंग में सरबजीत ने प्रथम, सोनिया ने द्वितीय व पोस्टर मेंकिग में प्रिया ने प्रथम, निकित्ता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। फ़्लावर अर्रेनजमेंट में रीतू ने प्रथम,निशा ने दूसरा ,सोलो डांस में सोनी ने पहला , राधिका ने दूसरा व नेहा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया । ग्रुप डांस में श्वेता एंड ग्रुप ने प्रथम स्थान ,ग्रुप डांस में शेफाली एंड ग्रुप ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। प्लेइंग इंस्ट्रुमेंट में ख़ुशी व चुटकुले में अनु को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। फैशन शो में मधु ने प्रथम ,अक्षिता ने दूसरा व प्रज्ञा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया । कार्यक्रम के अंत में सभी विजेता प्रतिभागियों को मुख्यातिथि व गेस्ट ऑफ आनर के द्वारा पुरस्कार व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या आरती गर्ग ने मुख्यातिथि एवं गेस्ट ऑफ आनर का कार्यक्रम में आकर इसकी शोभा बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया। इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टॉफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की छात्राओं ने पूरे कार्यक्रम की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी की।
आगराः पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिंकर पहली बार जनता से रूबरू होंगे। वह जनता को इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों के बारे में बताएंगे। रक्षा मंत्री 6 अक्टूबर को आगरा आ रहे हैं। इस मौके पर उनके साथ बीजेपी के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर भी रहेंगे। पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिंकर पहली बार सावर्जनिक कार्यक्रम में आ रहे हैं। बीजेपी प्रदेश में चुनावी वातावरण बनाने के लिए इसकी शुरूआत कर दी है। इस कार्यक्रम को पार्टी ने गंभीरता से लिया है। महानगर में होने वाले इस कार्यक्रम का संयोजक फतेहपुरसीकरी लोकसभा क्षेत्र के पालक शिवशंकर शर्मा को बनाया गया है। वहीं क्षेत्रीय उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता को सह संयोजक नियुक्त किया गया है। जीआईसी के मैदान पर जनसभा का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। मंगलवार को दोपहर में इसको लेकर संगठन की बैठक भी हो रही है। बीजेपी में इस समय नौ हजार से अधिक पदाधिकारी हैं। इनमें 8104 पदाधिकारी बूथ इकाइयों के हैं। वहीं 915 पदाधिकारी मंडल स्तर के हैं। महानगर इकाई के 91 पदाधिकारी हैं। इसके अलावा महिला मोर्चा, युवा मोर्चा सहित अन्य प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों की संख्या अलग है। इन सभी पदाधिकारियों को जनसभा में अनिवार्य रूप से रहने को कहा जा रहा है। इसके अलावा ये पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र से आम जनता को भी जनसभा में लाएंगे। जनसभा प्रातः दस बजे होगी। रक्षा मंत्री दिल्ली से चार्टर प्लेन से प्रदेश प्रभारी माथुर के साथ आगरा आएंगे। वह एयरपोर्ट से सीधे जीआईसी मैदान पहुंचेंगे। जनसभा को संबोधित कर वह सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। आगरा के अलावा अन्य जिलों में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे ने बताया कि जनसभा की तैयारियां प्रारंभ कर दी गईं हैं। क्षेत्र में कार्यकर्ता इसके लिए जनसंपर्क में जुट गए हैं।
आगराः पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिंकर पहली बार जनता से रूबरू होंगे। वह जनता को इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों के बारे में बताएंगे। रक्षा मंत्री छः अक्टूबर को आगरा आ रहे हैं। इस मौके पर उनके साथ बीजेपी के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर भी रहेंगे। पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिंकर पहली बार सावर्जनिक कार्यक्रम में आ रहे हैं। बीजेपी प्रदेश में चुनावी वातावरण बनाने के लिए इसकी शुरूआत कर दी है। इस कार्यक्रम को पार्टी ने गंभीरता से लिया है। महानगर में होने वाले इस कार्यक्रम का संयोजक फतेहपुरसीकरी लोकसभा क्षेत्र के पालक शिवशंकर शर्मा को बनाया गया है। वहीं क्षेत्रीय उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता को सह संयोजक नियुक्त किया गया है। जीआईसी के मैदान पर जनसभा का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। मंगलवार को दोपहर में इसको लेकर संगठन की बैठक भी हो रही है। बीजेपी में इस समय नौ हजार से अधिक पदाधिकारी हैं। इनमें आठ हज़ार एक सौ चार पदाधिकारी बूथ इकाइयों के हैं। वहीं नौ सौ पंद्रह पदाधिकारी मंडल स्तर के हैं। महानगर इकाई के इक्यानवे पदाधिकारी हैं। इसके अलावा महिला मोर्चा, युवा मोर्चा सहित अन्य प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों की संख्या अलग है। इन सभी पदाधिकारियों को जनसभा में अनिवार्य रूप से रहने को कहा जा रहा है। इसके अलावा ये पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र से आम जनता को भी जनसभा में लाएंगे। जनसभा प्रातः दस बजे होगी। रक्षा मंत्री दिल्ली से चार्टर प्लेन से प्रदेश प्रभारी माथुर के साथ आगरा आएंगे। वह एयरपोर्ट से सीधे जीआईसी मैदान पहुंचेंगे। जनसभा को संबोधित कर वह सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। आगरा के अलावा अन्य जिलों में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे ने बताया कि जनसभा की तैयारियां प्रारंभ कर दी गईं हैं। क्षेत्र में कार्यकर्ता इसके लिए जनसंपर्क में जुट गए हैं।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आईटी हार्डवेयर सेक्टर के लिए PLI स्कीम को मंजूरी मिली है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में इस साल 100 बिलियन डॉलर का उत्पादन हुआ है। इसके साथ ही पिछले साल 11 बिलियन डॉलर के मोबाइल का रिकॉर्ड निर्यात किया गया। कैबिनेट ने आईटी हार्डवेयर क्षेत्र के लिए 17,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना पास की है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में 42 कंपनियों ने पहले साल में 900 करोड़ रुपए का निवेश करना था लेकिन यह निवेश 1600 करोड़ रुपए का हुआ। नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैठक की जानकारी दी। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में इस साल 100 बिलियन डॉलर का उत्पादन हुआ है। इसके साथ ही पिछले साल 11 बिलियन डॉलर के मोबाइल का रिकॉर्ड निर्यात किया गया। कैबिनेट ने आईटी हार्डवेयर क्षेत्र के लिए 17,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना पास की है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में 42 कंपनियों ने पहले साल में 900 करोड़ रुपए का निवेश करना था लेकिन यह निवेश 1600 करोड़ रुपए का हुआ। वहीं केंद्र सरकार ने खाद पर भी सब्सिडी का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि देश में 325 से 350 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपयोग होता है। 100 से 125 लाख मीट्रिक टन डीएपी और एनपीके का उपयोग किया जाता है। 50-60 लाख मीट्रिक टन एमओपी का इस्तेमाल होता है। किसानों को समय पर खाद मिले इसके लिए मोदी सरकार ने सब्सिडी बढ़ाई पर एमआरपी नहीं बढ़ाई। मंडाविया ने बताया कि खरीफ फसलों के लिए सरकार ने तय किया है कि भारत सरकार खाद की कीमत नहीं बढ़ाएगी। भारत सरकार खरीफ सीजन की फसल के लिए सब्सिडी में 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की अवधि छह साल है। आईटी हार्डवेयर पीएलआई योजना-2 के तहत लैपटॉप, टैबलेट, सभी उपकरणों से लैस पर्सनल कंप्यूटर सर्वर आदि दिए आएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्रोत्साहन योजना से 3. 35 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और 2,430 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इससे सीधे तौर पर 75,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने बताया कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में 42 कंपनियों को पहले साल में 900 करोड़ रुपये का निवेश करना था उसकी जगह 1600 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आईटी हार्डवेयर सेक्टर के लिए PLI स्कीम को मंजूरी मिली है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में इस साल एक सौ बिलियन डॉलर का उत्पादन हुआ है। इसके साथ ही पिछले साल ग्यारह बिलियन डॉलर के मोबाइल का रिकॉर्ड निर्यात किया गया। कैबिनेट ने आईटी हार्डवेयर क्षेत्र के लिए सत्रह,शून्य करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना पास की है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बयालीस कंपनियों ने पहले साल में नौ सौ करोड़ रुपए का निवेश करना था लेकिन यह निवेश एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपए का हुआ। नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैठक की जानकारी दी। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में इस साल एक सौ बिलियन डॉलर का उत्पादन हुआ है। इसके साथ ही पिछले साल ग्यारह बिलियन डॉलर के मोबाइल का रिकॉर्ड निर्यात किया गया। कैबिनेट ने आईटी हार्डवेयर क्षेत्र के लिए सत्रह,शून्य करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना पास की है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बयालीस कंपनियों ने पहले साल में नौ सौ करोड़ रुपए का निवेश करना था लेकिन यह निवेश एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपए का हुआ। वहीं केंद्र सरकार ने खाद पर भी सब्सिडी का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि देश में तीन सौ पच्चीस से तीन सौ पचास लाख मीट्रिक टन यूरिया उपयोग होता है। एक सौ से एक सौ पच्चीस लाख मीट्रिक टन डीएपी और एनपीके का उपयोग किया जाता है। पचास-साठ लाख मीट्रिक टन एमओपी का इस्तेमाल होता है। किसानों को समय पर खाद मिले इसके लिए मोदी सरकार ने सब्सिडी बढ़ाई पर एमआरपी नहीं बढ़ाई। मंडाविया ने बताया कि खरीफ फसलों के लिए सरकार ने तय किया है कि भारत सरकार खाद की कीमत नहीं बढ़ाएगी। भारत सरकार खरीफ सीजन की फसल के लिए सब्सिडी में एक लाख आठ हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की अवधि छह साल है। आईटी हार्डवेयर पीएलआई योजना-दो के तहत लैपटॉप, टैबलेट, सभी उपकरणों से लैस पर्सनल कंप्यूटर सर्वर आदि दिए आएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्रोत्साहन योजना से तीन. पैंतीस लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और दो,चार सौ तीस करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इससे सीधे तौर पर पचहत्तर,शून्य लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने बताया कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बयालीस कंपनियों को पहले साल में नौ सौ करोड़ रुपये का निवेश करना था उसकी जगह एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
Leo Weekly Horoscope 27 Feb 2023 - 5 March 2023 सिंह राशि साप्ताहिक राशिफलः ज्योतिषी अनिल कुमार ठक्कर से जानिए आने वाला सप्ताह सिंह राशि वालों के लिए कैसा होगा और किन बातों का ध्यान सिंह राशि वालों को रखना होगा। इस सप्ताह भर आपकी सेहत ठीक-ठाक रहेगी, लेकिन इस दौरान किसी भी तरह की यात्रा करने से बचें। क्योंकि अभी यात्रा आपके लिए थकाऊ और तनावपूर्ण साबित हो सकती है। आपकी चंद्र राशि में बृहस्पति आठवें भाव में मौजूद हैं, ऐसे में जितना संभव को उससे परहेज करें। इस सप्ताह आपको अचानक से धन लाभ तो होगा,परंतु इस धन की प्राप्ति बेहद कम अवधि के लिए होगी। इसलिए खासतौर से वो जातक जो किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़े हैं, उन्हें इस समय किसी भी प्रकार के जोख़िम को लेने से पहले, हज़ार बार सोचने की ज़रूरत होगी। अन्यथा आपको धन हानि संभव है। इस सप्ताह घर-परिवार में किसी भी प्रकार की वाद-विवाद की परिस्थिति में, पड़ने से आपको बचना होगा। क्योंकि ऐसा न करना आपकी छवि को दूसरों के सामने दूषित कर सकता है। इसलिए किसी से भी यदि कोई समस्या है तो, उसे शांति से बातचीत के ज़रिए सुलझाने का प्रयास करें। इस सप्ताह आप सभी कार्यों को छोड़कर उन कामों को करना चाहेंगे, जिन्हें आप बचपन के दिनों में करना पसंद करते थे। ये काम आपकी किसी गुप्त कला जैसे डांस, गाना, चित्र बनाना, आदि से संबंधित भी हो सकते हैं। हालांकि इसके चलते आपको अपने करियर और उसके लक्ष्यों को भी, ध्यान में रखने की ज़रूरत होगी। घर पर किसी अनचाहे मेहमान के आने से, छात्रों का पूरा सप्ताह बेकार गुज़रने की आशंका है। ऐसे में अगर संभव हो तो किसी दोस्त के घर जाकर पढ़ाई करें, अन्यथा इसका ख़ामियाज़ा आपको आने वाली परीक्षा में उठाना पड़ेगा। - उपायः रोज़ाना दुर्गा चालीसा का जाप करें। - यह राशिफल आपकी चंद्र राशि पर आधारित है। (लेखक के बारे मेंः अनिल कुमार ठक्कर देश के जाने-माने Aromalogist हैं, जो चंद्र राशि यानी आपकी जन्म तारीख के आधार पर राशिफल व भविष्यफल बताते हैं। )
Leo Weekly Horoscope सत्ताईस फ़रवरी दो हज़ार तेईस - पाँच मार्चch दो हज़ार तेईस सिंह राशि साप्ताहिक राशिफलः ज्योतिषी अनिल कुमार ठक्कर से जानिए आने वाला सप्ताह सिंह राशि वालों के लिए कैसा होगा और किन बातों का ध्यान सिंह राशि वालों को रखना होगा। इस सप्ताह भर आपकी सेहत ठीक-ठाक रहेगी, लेकिन इस दौरान किसी भी तरह की यात्रा करने से बचें। क्योंकि अभी यात्रा आपके लिए थकाऊ और तनावपूर्ण साबित हो सकती है। आपकी चंद्र राशि में बृहस्पति आठवें भाव में मौजूद हैं, ऐसे में जितना संभव को उससे परहेज करें। इस सप्ताह आपको अचानक से धन लाभ तो होगा,परंतु इस धन की प्राप्ति बेहद कम अवधि के लिए होगी। इसलिए खासतौर से वो जातक जो किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़े हैं, उन्हें इस समय किसी भी प्रकार के जोख़िम को लेने से पहले, हज़ार बार सोचने की ज़रूरत होगी। अन्यथा आपको धन हानि संभव है। इस सप्ताह घर-परिवार में किसी भी प्रकार की वाद-विवाद की परिस्थिति में, पड़ने से आपको बचना होगा। क्योंकि ऐसा न करना आपकी छवि को दूसरों के सामने दूषित कर सकता है। इसलिए किसी से भी यदि कोई समस्या है तो, उसे शांति से बातचीत के ज़रिए सुलझाने का प्रयास करें। इस सप्ताह आप सभी कार्यों को छोड़कर उन कामों को करना चाहेंगे, जिन्हें आप बचपन के दिनों में करना पसंद करते थे। ये काम आपकी किसी गुप्त कला जैसे डांस, गाना, चित्र बनाना, आदि से संबंधित भी हो सकते हैं। हालांकि इसके चलते आपको अपने करियर और उसके लक्ष्यों को भी, ध्यान में रखने की ज़रूरत होगी। घर पर किसी अनचाहे मेहमान के आने से, छात्रों का पूरा सप्ताह बेकार गुज़रने की आशंका है। ऐसे में अगर संभव हो तो किसी दोस्त के घर जाकर पढ़ाई करें, अन्यथा इसका ख़ामियाज़ा आपको आने वाली परीक्षा में उठाना पड़ेगा। - उपायः रोज़ाना दुर्गा चालीसा का जाप करें। - यह राशिफल आपकी चंद्र राशि पर आधारित है।
जिस ढंग से शिक्षक शिक्षार्थी को ज्ञान प्रदान करता है उसे शिक्षण विधि कहते हैं। "शिक्षण विधि" पद का प्रयोग बड़े व्यापक अर्थ में होता है। एक ओर तो इसके अंतर्गत अनेक प्रणालियाँ एवं योजनाएँ सम्मिलित की जाती हैं, दूसरी ओर शिक्षण की बहुत सी प्रक्रियाएँ भी सम्मिलित कर ली जाती हैं। कभी-कभी लोग युक्तियों को भी विधि मान लेते हैं; परंतु ऐसा करना भूल है। युक्तियाँ किसी विधि का अंग हो सकती हैं, संपूर्ण विधि नहीं। एक ही युक्ति अनेक विधियों में प्रयुक्त हो सकती है। . 27 संबंधोंः चुटकुला, निगमनात्मक विधि, प्रयोगशाला, बाल मनोविज्ञान, भूगोल, महात्मा गांधी, मानचित्र, शिक्षा दर्शन, शिक्षाशास्त्र, शिक्षक, संयुक्त राज्य, संश्लेषणात्मक विधि, हरबर्ट स्पेंसर, हिन्दी, जर्मनी, ज्ञान, वर्धा शिक्षा योजना, विद्यार्थी, विज्ञान, गणित, आगमनात्मक तर्क, कताई, कहानी, कौशल, कृषि, अनुमान, उपमा। NAMA 3373चुटकुला। किसी घटना की हास्यास्पद प्रस्तुति को चुटकुला या परिहास कहते हैं। इसे अंग्रेज़ी में 'जोक' (joke) कहते हैं और इसे लतीफ़ा भी कहा जाता है। अक्सर कहा जाता है के "लतीफ़े की जान आख़री जुमले (अंतिम वाक्य) में होती है" - अंग्रेज़ी में इस वाक्य को 'पंचलाइन' (punchline) कहते हैं। लतीफ़ा एक छोटी सी कहानी हो सकता है या एक लघु वाक्यांश या वाक्य के रूप में भी हो सकता है। लतीफे प्रायः मित्रों एवं दर्शकों के मनोरंजन के सरल साधन हैं। चुटकुले सुनाने का उद्देश्य अट्टहास पैदा करना होता है। किन्तु किन्हीं कारणों से जब ऐसा नहीं हो पाता तो कभी-कभी चुटकुले का ही मजाक उड़ा दिया जाता है। . बाहर से देखने पर निगमनात्मक तथा आगमनात्मक विधियाँ विपरीत दिशाओं में हैं, किंतु अंदर से वे वैज्ञानिक ज्ञान की सारी प्रणाली के द्रुत विकास को बढ़ावा देनेवाले एक गहन द्वंद्वात्मक एकत्व (dialectical unity) की रचना करती हैं। इसके साथ ही आगमनात्मक पद्धति की सीमाओं को, उनके परिणामस्वरूप प्राप्त ज्ञान की समस्यामूलक प्रकृति को भी ध्यान में रखना चाहिये। आगमन विधि की ख़ामी यह है कि यह अध्ययनाधीन वस्तु के विकास की प्रक्रिया को ध्यान में नहीं रख सकती है, जबकि निगमन विचाराधीन वस्तु के रूपांतरण की ऐतिहासिक अवस्थाओं के अनुसार संरचित होता है। इसी तरह निगमनात्मक पद्धति की भी अपनी कमजोरियां है कि वह बुनियादी सामान्य आधारिकाओं की कुल तादाद तथा उन आधारिकाओं की सत्यता को प्रमाणित करने की अक्षमता से सीमित होता है। संज्ञान की वास्तविक प्रक्रिया में आगमन और निगमन की एकता होती है। यह एकता इन दोनों पद्धतियों के फ़ायदों को इस्तेमाल करना संभव बना देती है, इससे एक की ख़ामी का असर दूसरी के गुण से दूर हो जाता है। आगमन, निगमन से अनिवार्यतः संपूरित (supplemented) होता है और उसमें निगमन के तत्व शामिल होते हैं। यह विचाराधीन वस्तुओं में एक समान लक्षणों को सही-सही दर्शाने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि उनके बीच से मूलभूत तत्वों को अलग करता है तथा उनके पारस्परिक संयोजनों व संबंधों को प्रकट करता है, जो निगमन के कुछ तत्वों के बिना असंभव है। दूसरी तरफ़, निगमन को प्रारंभिक आधारिकाओं की सच्चाई तथा तर्क-संगति को ध्यान में रखे बिना तर्कणा की प्रणाली में परिणत नहीं किया जा सकता, जो एक ऐसी चीज़ है, जिसे आगमन के तत्वों को शामिल करके सुनिश्चित बनाया जाता है। आगमन और निगमन की पद्धतियों के उपयोग की आवश्यकता वहां पर होती है, जहां प्राप्त सूचना के आधार पर अनुमान लगाकर ज्ञान हासिल किया जाता है। इन पद्धतियों के उपयोग में पारंगत होने से, एक ओर तो, वास्तविकता के तथ्यों तथा घटनाओं के दैनिक व्यावहारिक कार्यों के सामान्यीकरणमें दूसरी ओर, सामान्य कार्यों और प्रस्थापनाओं के आधार पर व्यावहारिक समस्याओं के ठोस समाधान पाने में मदद मिलती है। शिक्षाशास्त्रीय आगमन व निगमन की विधियों के कुशल उपयोग से शिक्षा तथा काम में बहुत व्यावहारिक सहायता मिलती है। आगमन और निगमन का शिक्षाशास्त्रीय उपयोग अनुमानित ज्ञान हासिल करने की तदनुरूप पद्धतियों से इस बात में भिन्न है कि इसका लक्ष्य आधारिकाओं से निष्कर्ष निकालना नहीं, बल्कि ज्ञान की एक इकाई से दूसरी में जाना, विविध संकल्पनाओं (concepts) और प्रस्थापनाओं (propositions) को प्रकट करना होता है। अध्ययन की हुई सामग्री को व्यवस्थित करने में उसे आगमनात्मक ढंग से भी पेश किया जा सकता है और निगमनात्मक ढंग से भी। यदि वह सामग्री अलग-अलग तथ्यों से सामान्य प्रस्थापनाओं की ओर संक्रमण के रूप में व्यवस्थित व प्रस्तुत की गयी है, तो प्रयुक्त पद्धति आगमनात्मक है, और अगर समस्या का प्रस्तुतीकरण सामान्य प्रस्थापनाओं से प्रारंभ होता है और बाद में अलग-अलग तथ्यों की ओर संक्रमण किया गया है, तो प्रयुक्त पद्धति निगमनात्मक है। लगभग सभी समस्याओं को आगमनात्मक और निगमनात्मक, दोनों ही तरीक़ों से पेश किया जा सकता है। पद्धति का चुनाव सामान्यतः प्रस्तुतिकरण के लक्ष्यों, स्वयं समस्या की विशिष्टताओं और उन लोगों की विशेषताओं के अनुसार किया जाता है, जिनके सामने वह समस्या पेश की जानी है। समस्या को पेश करने की एक सुप्रचलित, आसानी से समझ में आनेवाली विधि आगमन की सहायता से उपलब्ध होती है, जबकि पेश की जानेवाली प्रस्थापनाओं के परिशुद्ध प्रमाण के लिए निगमन की आवश्यकता होती है। द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के अध्ययन में इन दोनों पद्धतियों का इस्तेमाल होना चाहिये, प्रत्येक विषय में वरीयता (preference) उसे देनी चाहिये, जो शिक्षार्थी को समस्या की अंतर्वस्तु (content) को अधिक अच्छी तरह से समझने में तथा प्राप्त ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करने में समर्थ बनाती है। सामान्य से विशिष्ठ की ओर जाने को निगमनात्मक (Deductive) प्रक्रिया कहा जाता है। जिसके उत्तम उदहारण के रूप में हम सिलॉजिस्म (Syllogism) को देख सकते हैं, जहाँ कुछ सामान्य नियमों के आधार मानकर व उनका विशेष परिस्थितियों में उपयोग कर समस्या समाधान किया जाता है।. उन्नीसवीं शताब्दी के भौतिकशास्त्री एवं रसायनज्ञ माइकल फैराडे अपनी प्रयोगशाला में जैव रसायन प्रयोगशाला प्रयोगशाला एक ऐसी सुविधा (कक्ष, भवन या स्थान) को कहते हैं, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोग एवं मापन के लिए आवश्यक माहौल प्रदान करता है। . बालमनोविज्ञान मनोविज्ञान की वह शाखा है, जिसमें गर्भावस्था से लेकर प्रौढ़ावस्था तक के मनुष्य के मानसिक विकास का अध्ययन किया जाता है। जहाँ सामान्य मनोविज्ञान प्रौढ़ व्यक्तियों की मानसिक क्रियाओं का वर्णन करता है तथा उनको वैज्ञानिक ढंग से समझने की चेष्टा करता है, वहीं बालमनोविज्ञान बालकों की मानसिक क्रियाओं का वर्णन करता और उन्हें समझाने का प्रयत्न करता है। . पृथ्वी का मानचित्र भूगोल (Geography) वह शास्त्र है जिसके द्वारा पृथ्वी के ऊपरी स्वरुप और उसके प्राकृतिक विभागों (जैसे पहाड़, महादेश, देश, नगर, नदी, समुद्र, झील, डमरुमध्य, उपत्यका, अधित्यका, वन आदि) का ज्ञान होता है। प्राकृतिक विज्ञानों के निष्कर्षों के बीच कार्य-कारण संबंध स्थापित करते हुए पृथ्वीतल की विभिन्नताओं का मानवीय दृष्टिकोण से अध्ययन ही भूगोल का सार तत्व है। पृथ्वी की सतह पर जो स्थान विशेष हैं उनकी समताओं तथा विषमताओं का कारण और उनका स्पष्टीकरण भूगोल का निजी क्षेत्र है। भूगोल शब्द दो शब्दों भू यानि पृथ्वी और गोल से मिलकर बना है। भूगोल एक ओर अन्य शृंखलाबद्ध विज्ञानों से प्राप्त ज्ञान का उपयोग उस सीमा तक करता है जहाँ तक वह घटनाओं और विश्लेषणों की समीक्षा तथा उनके संबंधों के यथासंभव समुचित समन्वय करने में सहायक होता है। दूसरी ओर अन्य विज्ञानों से प्राप्त जिस ज्ञान का उपयोग भूगोल करता है, उसमें अनेक व्युत्पत्तिक धारणाएँ एवं निर्धारित वर्गीकरण होते हैं। यदि ये धारणाएँ और वर्गीकरण भौगोलिक उद्देश्यों के लिये उपयोगी न हों, तो भूगोल को निजी व्युत्पत्तिक धारणाएँ तथा वर्गीकरण की प्रणाली विकसित करनी होती है। अतः भूगोल मानवीय ज्ञान की वृद्धि में तीन प्रकार से सहायक होता हैः सर्वप्रथम प्राचीन यूनानी विद्वान इरैटोस्थनिज़ ने भूगोल को धरातल के एक विशिष्टविज्ञान के रूप में मान्यता दी। इसके बाद हिरोडोटस तथा रोमन विद्वान स्ट्रैबो तथा क्लाडियस टॉलमी ने भूगोल को सुनिइतिहासश्चित स्वरुप प्रदान किया। इस प्रकार भूगोल में 'कहाँ' 'कैसे 'कब' 'क्यों' व 'कितनें' प्रश्नों की उचित वयाख्या की जाती हैं। . मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले १९१५ में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था।। उन्हें बापू (गुजराती भाषा में બાપુ बापू यानी पिता) के नाम से भी याद किया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ने ६ जुलाई १९४४ को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष २ अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है। सबसे पहले गान्धी ने प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष हेतु सत्याग्रह करना शुरू किया। १९१५ में उनकी भारत वापसी हुई। उसके बाद उन्होंने यहाँ के किसानों, मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये एकजुट किया। १९२१ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था। गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाये गये नमक कर के विरोध में १९३० में नमक सत्याग्रह और इसके बाद १९४२ में अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन से खासी प्रसिद्धि प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी को इनका पालन करने के लिये वकालत भी की। उन्होंने साबरमती आश्रम में अपना जीवन गुजारा और परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनी जिसे वे स्वयं चरखे पर सूत कातकर हाथ से बनाते थे। उन्होंने सादा शाकाहारी भोजन खाया और आत्मशुद्धि के लिये लम्बे-लम्बे उपवास रखे। . विश्व का मानचित्र (२००४, सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक) पृथ्वी के सतह के किसी भाग के स्थानों, नगरों, देशों, पर्वत, नदी आदि की स्थिति को पैमाने की सहायता से कागज पर लघु रूप में बनाना मानचित्रण कहलाता हैं। मानचित्र दो शब्दों मान और चित्र से मिल कर बना है जिसका अर्थ किसी माप या मूल्य को चित्र द्वारा प्रदर्शित करना है। जिस प्रकार एक सूक्ष्मदर्शी किसी छोटी वस्तु को बड़ा करके दिखाता है, उसके विपरीत मानचित्र किसी बड़े भूभाग को छोटे रूप में प्रस्तुत करते हैं जिससे एक नजर में भौगोलिक जानकारी और उनके अन्तर्सम्बन्धों की जानकारी मिल सके। मानचित्र को नक्शा भी कहा जाता है। आजकल मानचित्र केवल धरती, या धरती की सतह, या किसी वास्तविक वस्तु तक ही सीमित नहीं हैं। उदाहरण के लिये चन्द्रमा या मंगल ग्रह की सतह का मानचित्र बनाया जा सकता है; किसी विचार या अवधारणा का मानचित्र बनाया जा सकता है; मस्तिष्क का मानचित्रण (जैसे एम आर आई की सहायता से) किया जा रहा है। . गाँधीजी महान शिक्षा-दार्शनिक भी थे। शिक्षा और दर्शन में गहरा सम्बन्ध है। अनेकों महान शिक्षाशास्त्री स्वयं महान दार्शनिक भी रहे हैं। इस सह-सम्बन्ध से दर्शन और शिक्षा दोनों का हित सम्पादित हुआ है। शैक्षिक समस्या के प्रत्येक क्षेत्र में उस विषय के दार्शनिक आधार की आवश्यकता अनुभव की जाती है। फिहते अपनी पुस्तक "एड्रेसेज टु दि जर्मन नेशन" में शिक्षा तथा दर्शन के अन्योन्याश्रय का समर्थन करते हुए लिखते हैं - "दर्शन के अभाव में 'शिक्षण-कला' कभी भी पूर्ण स्पष्टता नहीं प्राप्त कर सकती। दोनों के बीच एक अन्योन्य क्रिया चलती रहती है और एक के बिना दूसरा अपूर्ण तथा अनुपयोगी है।" डिवी शिक्षा तथा दर्शन के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि दर्शन की जो सबसे गहन परिभाषा हो सकती है, यह है कि "दर्शन शिक्षा-विषयक सिद्धान्त का अत्यधिक सामान्यीकृत रूप है।" दर्शन जीवन का लक्ष्य निर्धारित करता है, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा उपाय प्रस्तुत करती है। दर्शन पर शिक्षा की निर्भरता इतनी स्पष्ट और कहीं नहीं दिखाई देती जितनी कि पाठ्यक्रम संबंधी समस्याओं के संबंध में। विशिष्ट पाठ्यक्रमीय समस्याओं के समाधान के लिए दर्शन की आवश्यकता होती है। पाठ्यक्रम से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ प्रश्न उपयुक्त पाठ्यपुस्तकों के चुनाव का है और इसमें भी दर्शन सन्निहित है। जो बात पाठ्यक्रम के संबंध में है, वही बात शिक्षण-विधि के संबंध में कही जा सकती है। लक्ष्य विधि का निर्धारण करते हैं, जबकि मानवीय लक्ष्य दर्शन का विषय हैं। शिक्षा के अन्य अंगों की तरह अनुशासन के विषय में भी दर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालय के अनुशासन निर्धारण में राजनीतिक कारणों से भी कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण कारण मनुष्य की प्रकृति के संबंध में हमारी अवधारणा होती है। प्रकृतिवादी दार्शनिक नैतिक सहज प्रवृत्तियों की वैधता को अस्वीकार करता है। अतः बालक की जन्मजात सहज प्रवृत्तियों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति के लिए छोड़ देता है; प्रयोजनवादी भी इस प्रकार के मापदण्ड को अस्वीकार करके बालक व्यवहार को सामाजिक मान्यता के आधार पर नियंत्रित करने में विश्वास करता है; दूसरी ओर आदर्शवादी नैतिक आदर्शों के सर्वोपरि प्रभाव को स्वीकार किए बिना मानव व्यवहार की व्याख्या अपूर्ण मानता है, इसलिए वह इसे अपना कर्त्तव्य मानता है कि बालक द्वारा इन नैतिक आधारों को मान्यता दिलवाई जाये तथा इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वह शनैःशनैः इन्हें अपने आचरण में उतार सके। शिक्षा का क्या प्रयोजन है और मानव जीवन के मूल उद्देश्य से इसका क्या संबंध है, यही शिक्षा दर्शन का विजिज्ञास्य प्रश्न है। चीन के दार्शनिक मानव को नीतिशास्त्र में दीक्षित कर उसे राज्य का विश्वासपात्र सेवक बनाना ही शिक्षा का उद्देश्य मानते थे। प्राचीन भारत में सांसारिक अभ्युदय और पारलौकिक कर्मकांड तथा लौकिक विषयों का बोध होता था और परा विद्या से निःश्रेयस की प्राप्ति ही विद्या के उद्देश्य थे। अपरा विद्या से अध्यात्म तथा रात्पर तत्व का ज्ञान होता था। परा विद्या मानव की विमुक्ति का साधन मान जाती थी। गुरुकुलों और आचार्यकुलों में अंतेवासियों के लिये ब्रह्मचर्य, तप, सत्य व्रत आदि श्रेयों की प्राप्ति परमाभीष्ट थी और तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला आदि विश्वविद्यालय प्राकृतिक विषयों के सम्यक् ज्ञान के अतिरिक्त नैष्ठिक शीलपूर्ण जीवन के महान उपस्तंभक थे। भारतीय शिक्षा दर्शन का आध्यात्मिक धरातल विनय, नियम, आश्रममर्यादा आदि पर सदियों तक अवलंबित रहा। . दक्षिण भारत के एक गाँव में शिक्षण शिक्षण-कार्य की प्रक्रिया का विधिवत अध्ययन शिक्षाशास्त्र या शिक्षणशास्त्र (Pedagogy) कहलाता है। इसमें अध्यापन की शैली या नीतियों का अध्ययन किया जाता है। शिक्षक अध्यापन कार्य करता है तो वह इस बात का ध्यान रखता है कि अधिगमकर्ता को अधिक से अधिक समझ में आवे। शिक्षा एक सजीव गतिशील प्रक्रिया है। इसमें अध्यापक और शिक्षार्थी के मध्य अन्तःक्रिया होती रहती है और सम्पूर्ण अन्तःक्रिया किसी लक्ष्य की ओर उन्मुख होती है। शिक्षक और शिक्षार्थी शिक्षाशास्त्र के आधार पर एक दूसरे के व्यक्तित्व से लाभान्वित और प्रभावित होते रहते हैं और यह प्रभाव किसी विशिष्ट दिशा की और स्पष्ट रूप से अभिमुख होता है। बदलते समय के साथ सम्पूर्ण शिक्षा-चक्र गतिशील है। उसकी गति किस दिशा में हो रही है? कौन प्रभावित हो रहा है? इस दिशा का लक्ष्य निर्धारण शिक्षाशास्त्र करता है। . शिक्षा देने वाले को शिक्षक कहते हैं। शिक्षिका शब्द 'शिक्षक' का स्त्रीलिंग रूप है। यह एकवचन अथवा बहुवचन दोनों तरह से प्रयुक्त किया जा सकता है। शिष्य के मन में सीखने की इच्छा को जो जागृत कर पाते हैं वे ही शिक्षक कहलाते हैं। शिक्षक के द्वारा व्यक्ति के भविष्य को बनाया जाता है। एवं शिक्षक ही वह सुधार लाने वाला व्यक्ति होता है। धन्यवाद दोस्तों जय हिन्द जय भारत। विषयः -डिजिटल भारत और #भारत # श्रेणीःशिक्षा श्रेणीःशब्दावली. संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. जैसा कि नाम से ही विदित है संश्लेषण अर्थात परत दर परत । अतः हम कह सकते है कि किसी पाठ्य सामग्री का परत दर परत निरूपण ही संलेशन विधि है ।उदाहरणस्वरूप महान बल्लेबाज सचिन की जीवनी हम कैसे पढेएँगे हमे उनके बचपन से होते हुए उनके सम्पूर्ण काल खंड को बताना होगा ।इस हेतु से इस विधि का प्रयोग हिंदी तथा अंग्रेजी में किसी विषय को खंडगत पढ़ेंगे हेतु किया जाता है. अन्य व्यक्तियों के लिये हरबर्ट स्पेंसर (बहुविकल्पी) देखें। ---- हरबर्ट स्पेंसर (27 अप्रैल 1820-8 दिसम्बर 1903) विक्टोरियाई काल के एक अंग्रेज़ दार्शनिक, जीव-विज्ञानी, समाजशास्री और प्रसिद्ध पारंपरिक उदारवादी राजनैतिक सिद्धांतकार थे। स्पेंसर ने भौतिक विश्व, जैविक सजीवों, मानव मन, तथा मानवीय संस्कृ्ति व समाजों की क्रमिक विकास के रूप में उत्पत्ति की एक सर्व-समावेशक अवधारणा विकसित की. हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin 2001 की भारतीय जनगणना में भारत में ४२ करोड़ २० लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में 648,983; मॉरीशस में ६,८५,१७०; दक्षिण अफ्रीका में ८,९०,२९२; यमन में २,३२,७६०; युगांडा में १,४७,०००; सिंगापुर में ५,०००; नेपाल में ८ लाख; जर्मनी में ३०,००० हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में १४ करोड़ १० लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की १४ आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग १ अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत (आमतौर पर एक सरल या पिज्जाइज्ड किस्म जैसे बाजार हिंदुस्तान या हाफ्लोंग हिंदी में)। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' (भाषा), 'देशना वचन' (विद्यापति), 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' (स्वामी दयानन्द सरस्वती), 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। . कोई विवरण नहीं। निरपेक्ष सत्य की स्वानुभूति ही ज्ञान है। यह प्रिय अप्रिय सुख-दूःख इत्यादि भावों से निरपेक्ष होता है। इसका विभाजन विषयों के आधार पर होता है। विषय पाँच होते हैं - रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श। ज्ञान लोगों के भौतिक तथा बौद्धिक सामाजिक क्रियाकलाप की उपज; संकेतों के रूप में जगत के वस्तुनिष्ठ गुणों और संबंधों, प्राकृतिक और मानवीय तत्त्वों के बारे में विचारों की अभिव्यक्ति है। ज्ञान दैनंदिन तथा वैज्ञानिक हो सकता है। वैज्ञानिक ज्ञान आनुभविक और सैद्धांतिक वर्गों में विभक्त होता है। इसके अलावा समाज में ज्ञान की मिथकीय, कलात्मक, धार्मिक तथा अन्य कई अनुभूतियाँ होती हैं। सिद्धांततः सामाजिक-ऐतिहासिक अवस्थाओं पर मनुष्य के क्रियाकलाप की निर्भरता को प्रकट किये बिना ज्ञान के सार को नहीं समझा जा सकता है। ज्ञान में मनुष्य की सामाजिक शक्ति संचित होती है, निश्चित रूप धारण करती है तथा विषयीकृत होती है। यह तथ्य मनुष्य के बौद्धिक कार्यकलाप की प्रमुखता और आत्मनिर्भर स्वरूप के बारे में आत्मगत-प्रत्ययवादी सिद्धांतों का आधार है। gyan . महात्मा गांधी की भारत को जो देन है उसमें बुनियादी शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण एवं बहुमूल्य है। इसे वर्धा योजना, नयी तालीम, 'बुनियादी तालीम' तथा 'बेसिक शिक्षा' के नामों से भी जाना जाता है। गांधीजी ने २३ अक्टूबर १९३७ को 'नयी तालीम' की योजना बनायी जिसे राष्ट्रव्यापी व्यावहारिक रूप दिया जाना था। उनके शैक्षिक विचार शिक्षाशास्त्रियों के तत्कालीन विचारों से मेल नहीं खाते, इसलिये प्रारम्भ में उनके विचारों का विरोध हुआ। गांधीजी ने कहा था कि नयी तालीम का विचार भारत के लिए उनका अन्तिम एवं सर्वश्रेष्ठ योगदान है। गांधीजी के जीनव-पर्यन्त चले सत्य के अन्वेषण एवं राष्ट्र के निर्माण हेतु सक्रिय प्रयोगों के माध्यम से लम्बे समय तक विचारों के गहन मंथन के परिणामस्वरूप नयी तालीम का दर्शन एवं प्रक्रिया का प्रादुर्भाव हुआ जो केवल भारतवर्ष ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण मानव समाज को एक नयी दिशा देने में सक्षम था। परन्तु दुर्भाग्यवश इस सर्वोत्तम कल्याणकारी शिक्षा-प्रणाली का राष्ट्रीय स्तर पर भी समुचित प्रयोग नहीं हो पाया जिसके फलस्वरूप आजतक यह देश गांधीजी के सपनों के अनुरूप सार्थक और सही स्वराज प्राप्त करने में असमर्थ रहा। बल्कि इसके विपरीत आज तो आलम यह है कि शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से भारत पुनः पाश्चात्य साम्राज्यवाद के अधीन निरन्तर सरकता चला जा रहा है। आज भारत की अधिकांश शिक्षा-व्यवस्था राज्याश्रित अथवा पूंजीपतियों पर आश्रित है। अधिकांश राज्याश्रित शिक्षण-संस्थाएँ संसाधन एवं अनुशासन के अभाव में निष्क्रिय हैं। इसलिए गुणवत्ता से युक्त शिक्षा देने में असमर्थ हैं। इसी प्रकार पूजीपतियों पर आश्रित सभी शिक्षण-संस्थाएं व्यावसायिक रूप में सक्रिय हैं, जो गरीबों की पहुंच से बाहर हैं। उनमें सिर्फ सम्पन्न लोगों के बच्चे ही पढ़ सकते हैं। भारत की स्वाधीनता के ६० से अधिक वर्ष बीतने के पश्चात् भी ऐसे बच्चों की संख्या काफी अधिक है, जिन्होंने विद्यालय के द्वार तक नहीं देखे हैं। जो विद्यालय जाने का सामर्थ्य रखते हैं, उन्हें लॉर्ड मैकाले की परम्परा से चली आ रही अंग्रेजी शिक्षा के अतिरिक्त कुछ भी प्राप्त नहीं होता। कुल मिलाकर उनमें भारतीय मौलिक शिक्षा को ग्रहण करनेवाले शायद ही कोई मिले। यह बात नहीं कि भारतीय शिक्षा देनेवालों का अभाव है। परन्तु इसलिए कि सभी अभिभावकों में यह इच्छाशक्ति एवं साहस नहीं है कि अपने बच्चों को सरकारों अथवा पूंजीपतियों द्वारा निर्धारित अंग्रेजी शिक्षा को त्यागकर भारतीय शिक्षा दिलावें। जब तक जनसाधारण की इस कायरतापूर्ण मानसिकता में परिवर्तन न किया जायेगा, तबतक नयी तालीम सहित कोई भी भारतीय शिक्षण-प्रणाली इस देश में पनप नहीं सकती। . गणित की कक्षा में कुछ विद्यार्थी पढ़ते हुए। विद्यार्थी वह व्यक्ति होता है जो कोई चीज सीख रहा होता है। विद्यार्थी दो शब्दों से बना होता है - "विद्या" + "अर्थी" जिसका अर्थ होता है 'विद्या चाहने वाला'। विद्यार्थी किसी भी आयुवर्ग का हो सकता है बालक, किशोर, युवा, या वयस्क। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि वह कुछ सीख रहा होना चाहिए। संस्कृत सुभाषितों में विद्या और विद्यार्थी के बारे बहुत अच्छी-अच्छी बातें कहीं गयीं हैं- काकचेष्टा बकोध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च। अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंचलक्षणम्॥ अर्थात् (विद्यार्थी के पाँच लक्षण हैं- कौए की तरह चेष्टा (सब ओर दृष्टि, त्वरित निरीक्षण क्षमता), बगुले की तरह ध्यान, कुत्ते की तरह नींद (अल्प व्यवधान पर नींद छोड़कर उठ जाय), अल्पहारी (कम भोजन करने वाला), गृहत्यागी (अपने घर और माता-पिता का अधिक मोह न रखने वाला)। सुखार्थी वा त्यजेत विद्या विद्यार्थी वा त्यजेत सुखम्। सुखार्थिनः कुतो विद्या विद्यार्थिनः कुतो सुखम्॥ अर्थात् (सुख चाहने वाले को विद्या छोड़ देनी चाहिए और विद्या चाहने वाले को सुख छोड़ देना चाहिए। क्योंकि सुख चाहने वाले को विद्या नहीं आ सकती और विद्या चाहने वाले को सुख कहाँ?) आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया । पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च ॥ अर्थात् (विद्यार्थी अपना एक-चौथाई ज्ञान अपने गुरु से प्राप्त करता है, एक चौथाई अपनी बुद्धि से प्राप्त करता है, एक-चौथाई अपने सहपाठियों से और एक-चौथाई समय के साथ (कालक्रम से, अनुभव से) प्राप्त करता है। . संक्षेप में, प्रकृति के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान (Science) कहते हैं। विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कह सकते है। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के 'ज्ञान-भण्डार' के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है। . पुणे में आर्यभट की मूर्ति ४७६-५५० गणित ऐसी विद्याओं का समूह है जो संख्याओं, मात्राओं, परिमाणों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती हैं। गणित एक अमूर्त या निराकार (abstract) और निगमनात्मक प्रणाली है। गणित की कई शाखाएँ हैंः अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित, कलन, इत्यादि। गणित में अभ्यस्त व्यक्ति या खोज करने वाले वैज्ञानिक को गणितज्ञ कहते हैं। बीसवीं शताब्दी के प्रख्यात ब्रिटिश गणितज्ञ और दार्शनिक बर्टेंड रसेल के अनुसार "गणित को एक ऐसे विषय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें हम जानते ही नहीं कि हम क्या कह रहे हैं, न ही हमें यह पता होता है कि जो हम कह रहे हैं वह सत्य भी है या नहीं।" गणित कुछ अमूर्त धारणाओं एवं नियमों का संकलन मात्र ही नहीं है, बल्कि दैनंदिन जीवन का मूलाधार है। . तर्क की जिस प्रक्रिया में एकाकी प्रेक्षणों के ज्ञात तथ्यों को जोड़कर अधिक व्यापक कथन निर्मित किया जाता है, आगमनात्मक तर्क (Inductive reasoning या induction) कहलाता है। यह 'निगमनात्मक तर्क' से बहुत भिन्न तर्क है। तर्क की शब्दावली . नेपाली चरखे से सूत कातती हुई महिला 'स्पिनिंग जेन्नी' का मॉडलः इसके आविष्कार से कताई की उत्पादकता में कई गुना वृद्धि हो गयी। कताई (Spinning) वस्त्र उद्योग का आरम्भिक और बहुत बड़ा प्रक्रम है। कपास आदि प्राकृतिक रेशों या अन्य कृत्रिम रेशों को ऐंठकर सूत बनाने की क्रिया को 'कताई करना' कहते हैं। पहले यह कार्य हाथ से किया जाता था किन्तु आजकल अधिकांश कताई स्वचालित मशीनों से की जाती है। श्रेणीःवस्त्र उद्योग श्रेणीःकताई श्रेणीःवस्त्र कला. कथाकार (एक प्राचीन कलाकृति)कहानी हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना गया। बंगला में इसे गल्प कहा जाता है। कहानी ने अंग्रेजी से हिंदी तक की यात्रा बंगला के माध्यम से की। कहानी गद्य कथा साहित्य का एक अन्यतम भेद तथा उपन्यास से भी अधिक लोकप्रिय साहित्य का रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना तथा सुनना मानव का आदिम स्वभाव बन गया। इसी कारण से प्रत्येक सभ्य तथा असभ्य समाज में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में कहानियों की बड़ी लंबी और सम्पन्न परंपरा रही है। वेदों, उपनिषदों तथा ब्राह्मणों में वर्णित 'यम-यमी', 'पुरुरवा-उर्वशी', 'सौपणीं-काद्रव', 'सनत्कुमार- नारद', 'गंगावतरण', 'श्रृंग', 'नहुष', 'ययाति', 'शकुन्तला', 'नल-दमयन्ती' जैसे आख्यान कहानी के ही प्राचीन रूप हैं। प्राचीनकाल में सदियों तक प्रचलित वीरों तथा राजाओं के शौर्य, प्रेम, न्याय, ज्ञान, वैराग्य, साहस, समुद्री यात्रा, अगम्य पर्वतीय प्रदेशों में प्राणियों का अस्तित्व आदि की कथाएँ, जिनकी कथानक घटना प्रधान हुआ करती थीं, भी कहानी के ही रूप हैं। 'गुणढ्य' की "वृहत्कथा" को, जिसमें 'उदयन', 'वासवदत्ता', समुद्री व्यापारियों, राजकुमार तथा राजकुमारियों के पराक्रम की घटना प्रधान कथाओं का बाहुल्य है, प्राचीनतम रचना कहा जा सकता है। वृहत्कथा का प्रभाव 'दण्डी' के "दशकुमार चरित", 'बाणभट्ट' की "कादम्बरी", 'सुबन्धु' की "वासवदत्ता", 'धनपाल' की "तिलकमंजरी", 'सोमदेव' के "यशस्तिलक" तथा "मालतीमाधव", "अभिज्ञान शाकुन्तलम्", "मालविकाग्निमित्र", "विक्रमोर्वशीय", "रत्नावली", "मृच्छकटिकम्" जैसे अन्य काव्यग्रंथों पर साफ-साफ परिलक्षित होता है। इसके पश्चात् छोटे आकार वाली "पंचतंत्र", "हितोपदेश", "बेताल पच्चीसी", "सिंहासन बत्तीसी", "शुक सप्तति", "कथा सरित्सागर", "भोजप्रबन्ध" जैसी साहित्यिक एवं कलात्मक कहानियों का युग आया। इन कहानियों से श्रोताओं को मनोरंजन के साथ ही साथ नीति का उपदेश भी प्राप्त होता है। प्रायः कहानियों में असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की और अधर्म पर धर्म की विजय दिखाई गई हैं। . कौशल का अर्थ इनमें से कुछ भी हो सकता है. कॉफी की खेती कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कृषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है तथा इसी से संबंधित विषय बागवानी का अध्ययन बागवानी (हॉर्टिकल्चर) में किया जाता है। तकनीकों और विशेषताओं की बहुत सी किस्में कृषि के अन्तर्गत आती है, इसमें वे तरीके शामिल हैं जिनसे पौधे उगाने के लिए उपयुक्त भूमि का विस्तार किया जाता है, इसके लिए पानी के चैनल खोदे जाते हैं और सिंचाई के अन्य रूपों का उपयोग किया जाता है। कृषि योग्य भूमि पर फसलों को उगाना और चारागाहों और रेंजलैंड पर पशुधन को गड़रियों के द्वारा चराया जाना, मुख्यतः कृषि से सम्बंधित रहा है। कृषि के भिन्न रूपों की पहचान करना व उनकी मात्रात्मक वृद्धि, पिछली शताब्दी में विचार के मुख्य मुद्दे बन गए। विकसित दुनिया में यह क्षेत्र जैविक खेती (उदाहरण पर्माकल्चर या कार्बनिक कृषि) से लेकर गहन कृषि (उदाहरण औद्योगिक कृषि) तक फैली है। आधुनिक एग्रोनोमी, पौधों में संकरण, कीटनाशकों और उर्वरकों और तकनीकी सुधारों ने फसलों से होने वाले उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है और साथ ही यह व्यापक रूप से पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बना है और इसने मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चयनात्मक प्रजनन और पशुपालन की आधुनिक प्रथाओं जैसे गहन सूअर खेती (और इसी प्रकार के अभ्यासों को मुर्गी पर भी लागू किया जाता है) ने मांस के उत्पादन में वृद्धि की है, लेकिन इससे पशु क्रूरता, प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) दवाओं के स्वास्थ्य प्रभाव, वृद्धि हॉर्मोन और मांस के औद्योगिक उत्पादन में सामान्य रूप से काम में लिए जाने वाले रसायनों के बारे में मुद्दे सामने आये हैं। प्रमुख कृषि उत्पादों को मोटे तौर पर भोजन, रेशा, ईंधन, कच्चा माल, फार्मास्यूटिकल्स और उद्दीपकों में समूहित किया जा सकता है। साथ ही सजावटी या विदेशी उत्पादों की भी एक श्रेणी है। वर्ष 2000 से पौधों का उपयोग जैविक ईंधन, जैवफार्मास्यूटिकल्स, जैवप्लास्टिक, और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में किया जा रहा है। विशेष खाद्यों में शामिल हैं अनाज, सब्जियां, फल और मांस। रेशे में कपास, ऊन, सन, रेशम और सन (फ्लैक्स) शामिल हैं। कच्चे माल में लकड़ी और बाँस शामिल हैं। उद्दीपकों में तम्बाकू, शराब, अफ़ीम, कोकीन और डिजिटेलिस शामिल हैं। पौधों से अन्य उपयोगी पदार्थ भी उत्पन्न होते हैं, जैसे रेजिन। जैव ईंधनों में शामिल हैं मिथेन, जैवभार (बायोमास), इथेनॉल और बायोडीजल। कटे हुए फूल, नर्सरी के पौधे, उष्णकटिबंधीय मछलियाँ और व्यापार के लिए पालतू पक्षी, कुछ सजावटी उत्पाद हैं। 2007 में, दुनिया के लगभग एक तिहाई श्रमिक कृषि क्षेत्र में कार्यरत थे। हालांकि, औद्योगिकीकरण की शुरुआत के बाद से कृषि से सम्बंधित महत्त्व कम हो गया है और 2003 में-इतिहास में पहली बार-सेवा क्षेत्र ने एक आर्थिक क्षेत्र के रूप में कृषि को पछाड़ दिया क्योंकि इसने दुनिया भर में अधिकतम लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। इस तथ्य के बावजूद कि कृषि दुनिया के आबादी के एक तिहाई से अधिक लोगों की रोजगार उपलब्ध कराती है, कृषि उत्पादन, सकल विश्व उत्पाद (सकल घरेलू उत्पाद का एक समुच्चय) का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा बनता है। . अनुमान, दर्शन और तर्कशास्त्र का पारिभाषिक शब्द है। भारतीय दर्शन में ज्ञानप्राप्ति के साधनों का नाम प्रमाण हैं। अनुमान भी एक प्रमाण हैं। चार्वाक दर्शन को छोड़कर प्रायः सभी दर्शन अनुमान को ज्ञानप्राप्ति का एक साधन मानते हैं। अनुमान के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त होता हैं उसका नाम अनुमिति हैं। प्रत्यक्ष (इंद्रिय सन्निकर्ष) द्वारा जिस वस्तु के अस्तित्व का ज्ञान नहीं हो रहा हैं उसका ज्ञान किसी ऐसी वस्तु के प्रत्यक्ष ज्ञान के आधार पर, जो उस अप्रत्यक्ष वस्तु के अस्तित्व का संकेत इस ज्ञान पर पहुँचने की प्रक्रिया का नाम अनुमान है। इस प्रक्रिया का सरलतम उदाहरण इस प्रकार है-किसी पर्वत के उस पार धुआँ उठता हुआ देखकर वहाँ पर आग के अस्तित्व का ज्ञान अनुमिति है और यह ज्ञान जिस प्रक्रिया से उत्पन्न होता है उसका नाम अनुमान है। यहाँ प्रत्यक्ष का विषय नहीं है, केवल धुएँ का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है। पर पूर्वकाल में अनेक बार कई स्थानों पर आग और धुएँ के साथ-साथ प्रत्यक्ष ज्ञान होने से मन में यह धारणा बन गई है कि जहाँ-जहाँ धुआँ होता है वहीं-वहीं आग भी होती है। अब जब हम केवल धुएँ का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं और हमको यह स्मरण होता है कि जहाँ-जहाँ धुआँ है वहाँ-वहाँ आग होती है, तो हम सोचते हैं कि अब हमको जहाँ धुआँ दिखाई दे रहा हैं वहाँ आग अवश्य होगीः अतएव पर्वत के उस पार जहाँ हमें इस समय धुएँ का प्रत्यक्ष ज्ञान हो रहा है अवश्य ही आग वर्तमान होगी। इस प्रकार की प्रक्रिया के मुख्य अंगों के पारिभाषिक शब्द ये हैं. अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार श्रेणीःसाहित्य श्रेणीःअलंकार श्रेणीःहिन्दी साहित्य.
जिस ढंग से शिक्षक शिक्षार्थी को ज्ञान प्रदान करता है उसे शिक्षण विधि कहते हैं। "शिक्षण विधि" पद का प्रयोग बड़े व्यापक अर्थ में होता है। एक ओर तो इसके अंतर्गत अनेक प्रणालियाँ एवं योजनाएँ सम्मिलित की जाती हैं, दूसरी ओर शिक्षण की बहुत सी प्रक्रियाएँ भी सम्मिलित कर ली जाती हैं। कभी-कभी लोग युक्तियों को भी विधि मान लेते हैं; परंतु ऐसा करना भूल है। युक्तियाँ किसी विधि का अंग हो सकती हैं, संपूर्ण विधि नहीं। एक ही युक्ति अनेक विधियों में प्रयुक्त हो सकती है। . सत्ताईस संबंधोंः चुटकुला, निगमनात्मक विधि, प्रयोगशाला, बाल मनोविज्ञान, भूगोल, महात्मा गांधी, मानचित्र, शिक्षा दर्शन, शिक्षाशास्त्र, शिक्षक, संयुक्त राज्य, संश्लेषणात्मक विधि, हरबर्ट स्पेंसर, हिन्दी, जर्मनी, ज्ञान, वर्धा शिक्षा योजना, विद्यार्थी, विज्ञान, गणित, आगमनात्मक तर्क, कताई, कहानी, कौशल, कृषि, अनुमान, उपमा। NAMA तीन हज़ार तीन सौ तिहत्तरचुटकुला। किसी घटना की हास्यास्पद प्रस्तुति को चुटकुला या परिहास कहते हैं। इसे अंग्रेज़ी में 'जोक' कहते हैं और इसे लतीफ़ा भी कहा जाता है। अक्सर कहा जाता है के "लतीफ़े की जान आख़री जुमले में होती है" - अंग्रेज़ी में इस वाक्य को 'पंचलाइन' कहते हैं। लतीफ़ा एक छोटी सी कहानी हो सकता है या एक लघु वाक्यांश या वाक्य के रूप में भी हो सकता है। लतीफे प्रायः मित्रों एवं दर्शकों के मनोरंजन के सरल साधन हैं। चुटकुले सुनाने का उद्देश्य अट्टहास पैदा करना होता है। किन्तु किन्हीं कारणों से जब ऐसा नहीं हो पाता तो कभी-कभी चुटकुले का ही मजाक उड़ा दिया जाता है। . बाहर से देखने पर निगमनात्मक तथा आगमनात्मक विधियाँ विपरीत दिशाओं में हैं, किंतु अंदर से वे वैज्ञानिक ज्ञान की सारी प्रणाली के द्रुत विकास को बढ़ावा देनेवाले एक गहन द्वंद्वात्मक एकत्व की रचना करती हैं। इसके साथ ही आगमनात्मक पद्धति की सीमाओं को, उनके परिणामस्वरूप प्राप्त ज्ञान की समस्यामूलक प्रकृति को भी ध्यान में रखना चाहिये। आगमन विधि की ख़ामी यह है कि यह अध्ययनाधीन वस्तु के विकास की प्रक्रिया को ध्यान में नहीं रख सकती है, जबकि निगमन विचाराधीन वस्तु के रूपांतरण की ऐतिहासिक अवस्थाओं के अनुसार संरचित होता है। इसी तरह निगमनात्मक पद्धति की भी अपनी कमजोरियां है कि वह बुनियादी सामान्य आधारिकाओं की कुल तादाद तथा उन आधारिकाओं की सत्यता को प्रमाणित करने की अक्षमता से सीमित होता है। संज्ञान की वास्तविक प्रक्रिया में आगमन और निगमन की एकता होती है। यह एकता इन दोनों पद्धतियों के फ़ायदों को इस्तेमाल करना संभव बना देती है, इससे एक की ख़ामी का असर दूसरी के गुण से दूर हो जाता है। आगमन, निगमन से अनिवार्यतः संपूरित होता है और उसमें निगमन के तत्व शामिल होते हैं। यह विचाराधीन वस्तुओं में एक समान लक्षणों को सही-सही दर्शाने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि उनके बीच से मूलभूत तत्वों को अलग करता है तथा उनके पारस्परिक संयोजनों व संबंधों को प्रकट करता है, जो निगमन के कुछ तत्वों के बिना असंभव है। दूसरी तरफ़, निगमन को प्रारंभिक आधारिकाओं की सच्चाई तथा तर्क-संगति को ध्यान में रखे बिना तर्कणा की प्रणाली में परिणत नहीं किया जा सकता, जो एक ऐसी चीज़ है, जिसे आगमन के तत्वों को शामिल करके सुनिश्चित बनाया जाता है। आगमन और निगमन की पद्धतियों के उपयोग की आवश्यकता वहां पर होती है, जहां प्राप्त सूचना के आधार पर अनुमान लगाकर ज्ञान हासिल किया जाता है। इन पद्धतियों के उपयोग में पारंगत होने से, एक ओर तो, वास्तविकता के तथ्यों तथा घटनाओं के दैनिक व्यावहारिक कार्यों के सामान्यीकरणमें दूसरी ओर, सामान्य कार्यों और प्रस्थापनाओं के आधार पर व्यावहारिक समस्याओं के ठोस समाधान पाने में मदद मिलती है। शिक्षाशास्त्रीय आगमन व निगमन की विधियों के कुशल उपयोग से शिक्षा तथा काम में बहुत व्यावहारिक सहायता मिलती है। आगमन और निगमन का शिक्षाशास्त्रीय उपयोग अनुमानित ज्ञान हासिल करने की तदनुरूप पद्धतियों से इस बात में भिन्न है कि इसका लक्ष्य आधारिकाओं से निष्कर्ष निकालना नहीं, बल्कि ज्ञान की एक इकाई से दूसरी में जाना, विविध संकल्पनाओं और प्रस्थापनाओं को प्रकट करना होता है। अध्ययन की हुई सामग्री को व्यवस्थित करने में उसे आगमनात्मक ढंग से भी पेश किया जा सकता है और निगमनात्मक ढंग से भी। यदि वह सामग्री अलग-अलग तथ्यों से सामान्य प्रस्थापनाओं की ओर संक्रमण के रूप में व्यवस्थित व प्रस्तुत की गयी है, तो प्रयुक्त पद्धति आगमनात्मक है, और अगर समस्या का प्रस्तुतीकरण सामान्य प्रस्थापनाओं से प्रारंभ होता है और बाद में अलग-अलग तथ्यों की ओर संक्रमण किया गया है, तो प्रयुक्त पद्धति निगमनात्मक है। लगभग सभी समस्याओं को आगमनात्मक और निगमनात्मक, दोनों ही तरीक़ों से पेश किया जा सकता है। पद्धति का चुनाव सामान्यतः प्रस्तुतिकरण के लक्ष्यों, स्वयं समस्या की विशिष्टताओं और उन लोगों की विशेषताओं के अनुसार किया जाता है, जिनके सामने वह समस्या पेश की जानी है। समस्या को पेश करने की एक सुप्रचलित, आसानी से समझ में आनेवाली विधि आगमन की सहायता से उपलब्ध होती है, जबकि पेश की जानेवाली प्रस्थापनाओं के परिशुद्ध प्रमाण के लिए निगमन की आवश्यकता होती है। द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के अध्ययन में इन दोनों पद्धतियों का इस्तेमाल होना चाहिये, प्रत्येक विषय में वरीयता उसे देनी चाहिये, जो शिक्षार्थी को समस्या की अंतर्वस्तु को अधिक अच्छी तरह से समझने में तथा प्राप्त ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करने में समर्थ बनाती है। सामान्य से विशिष्ठ की ओर जाने को निगमनात्मक प्रक्रिया कहा जाता है। जिसके उत्तम उदहारण के रूप में हम सिलॉजिस्म को देख सकते हैं, जहाँ कुछ सामान्य नियमों के आधार मानकर व उनका विशेष परिस्थितियों में उपयोग कर समस्या समाधान किया जाता है।. उन्नीसवीं शताब्दी के भौतिकशास्त्री एवं रसायनज्ञ माइकल फैराडे अपनी प्रयोगशाला में जैव रसायन प्रयोगशाला प्रयोगशाला एक ऐसी सुविधा को कहते हैं, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोग एवं मापन के लिए आवश्यक माहौल प्रदान करता है। . बालमनोविज्ञान मनोविज्ञान की वह शाखा है, जिसमें गर्भावस्था से लेकर प्रौढ़ावस्था तक के मनुष्य के मानसिक विकास का अध्ययन किया जाता है। जहाँ सामान्य मनोविज्ञान प्रौढ़ व्यक्तियों की मानसिक क्रियाओं का वर्णन करता है तथा उनको वैज्ञानिक ढंग से समझने की चेष्टा करता है, वहीं बालमनोविज्ञान बालकों की मानसिक क्रियाओं का वर्णन करता और उन्हें समझाने का प्रयत्न करता है। . पृथ्वी का मानचित्र भूगोल वह शास्त्र है जिसके द्वारा पृथ्वी के ऊपरी स्वरुप और उसके प्राकृतिक विभागों का ज्ञान होता है। प्राकृतिक विज्ञानों के निष्कर्षों के बीच कार्य-कारण संबंध स्थापित करते हुए पृथ्वीतल की विभिन्नताओं का मानवीय दृष्टिकोण से अध्ययन ही भूगोल का सार तत्व है। पृथ्वी की सतह पर जो स्थान विशेष हैं उनकी समताओं तथा विषमताओं का कारण और उनका स्पष्टीकरण भूगोल का निजी क्षेत्र है। भूगोल शब्द दो शब्दों भू यानि पृथ्वी और गोल से मिलकर बना है। भूगोल एक ओर अन्य शृंखलाबद्ध विज्ञानों से प्राप्त ज्ञान का उपयोग उस सीमा तक करता है जहाँ तक वह घटनाओं और विश्लेषणों की समीक्षा तथा उनके संबंधों के यथासंभव समुचित समन्वय करने में सहायक होता है। दूसरी ओर अन्य विज्ञानों से प्राप्त जिस ज्ञान का उपयोग भूगोल करता है, उसमें अनेक व्युत्पत्तिक धारणाएँ एवं निर्धारित वर्गीकरण होते हैं। यदि ये धारणाएँ और वर्गीकरण भौगोलिक उद्देश्यों के लिये उपयोगी न हों, तो भूगोल को निजी व्युत्पत्तिक धारणाएँ तथा वर्गीकरण की प्रणाली विकसित करनी होती है। अतः भूगोल मानवीय ज्ञान की वृद्धि में तीन प्रकार से सहायक होता हैः सर्वप्रथम प्राचीन यूनानी विद्वान इरैटोस्थनिज़ ने भूगोल को धरातल के एक विशिष्टविज्ञान के रूप में मान्यता दी। इसके बाद हिरोडोटस तथा रोमन विद्वान स्ट्रैबो तथा क्लाडियस टॉलमी ने भूगोल को सुनिइतिहासश्चित स्वरुप प्रदान किया। इस प्रकार भूगोल में 'कहाँ' 'कैसे 'कब' 'क्यों' व 'कितनें' प्रश्नों की उचित वयाख्या की जाती हैं। . मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था।। उन्हें बापू के नाम से भी याद किया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ने छः जुलाई एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष दो अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है। सबसे पहले गान्धी ने प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष हेतु सत्याग्रह करना शुरू किया। एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में उनकी भारत वापसी हुई। उसके बाद उन्होंने यहाँ के किसानों, मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये एकजुट किया। एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था। गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाये गये नमक कर के विरोध में एक हज़ार नौ सौ तीस में नमक सत्याग्रह और इसके बाद एक हज़ार नौ सौ बयालीस में अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन से खासी प्रसिद्धि प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी को इनका पालन करने के लिये वकालत भी की। उन्होंने साबरमती आश्रम में अपना जीवन गुजारा और परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनी जिसे वे स्वयं चरखे पर सूत कातकर हाथ से बनाते थे। उन्होंने सादा शाकाहारी भोजन खाया और आत्मशुद्धि के लिये लम्बे-लम्बे उपवास रखे। . विश्व का मानचित्र पृथ्वी के सतह के किसी भाग के स्थानों, नगरों, देशों, पर्वत, नदी आदि की स्थिति को पैमाने की सहायता से कागज पर लघु रूप में बनाना मानचित्रण कहलाता हैं। मानचित्र दो शब्दों मान और चित्र से मिल कर बना है जिसका अर्थ किसी माप या मूल्य को चित्र द्वारा प्रदर्शित करना है। जिस प्रकार एक सूक्ष्मदर्शी किसी छोटी वस्तु को बड़ा करके दिखाता है, उसके विपरीत मानचित्र किसी बड़े भूभाग को छोटे रूप में प्रस्तुत करते हैं जिससे एक नजर में भौगोलिक जानकारी और उनके अन्तर्सम्बन्धों की जानकारी मिल सके। मानचित्र को नक्शा भी कहा जाता है। आजकल मानचित्र केवल धरती, या धरती की सतह, या किसी वास्तविक वस्तु तक ही सीमित नहीं हैं। उदाहरण के लिये चन्द्रमा या मंगल ग्रह की सतह का मानचित्र बनाया जा सकता है; किसी विचार या अवधारणा का मानचित्र बनाया जा सकता है; मस्तिष्क का मानचित्रण किया जा रहा है। . गाँधीजी महान शिक्षा-दार्शनिक भी थे। शिक्षा और दर्शन में गहरा सम्बन्ध है। अनेकों महान शिक्षाशास्त्री स्वयं महान दार्शनिक भी रहे हैं। इस सह-सम्बन्ध से दर्शन और शिक्षा दोनों का हित सम्पादित हुआ है। शैक्षिक समस्या के प्रत्येक क्षेत्र में उस विषय के दार्शनिक आधार की आवश्यकता अनुभव की जाती है। फिहते अपनी पुस्तक "एड्रेसेज टु दि जर्मन नेशन" में शिक्षा तथा दर्शन के अन्योन्याश्रय का समर्थन करते हुए लिखते हैं - "दर्शन के अभाव में 'शिक्षण-कला' कभी भी पूर्ण स्पष्टता नहीं प्राप्त कर सकती। दोनों के बीच एक अन्योन्य क्रिया चलती रहती है और एक के बिना दूसरा अपूर्ण तथा अनुपयोगी है।" डिवी शिक्षा तथा दर्शन के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि दर्शन की जो सबसे गहन परिभाषा हो सकती है, यह है कि "दर्शन शिक्षा-विषयक सिद्धान्त का अत्यधिक सामान्यीकृत रूप है।" दर्शन जीवन का लक्ष्य निर्धारित करता है, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा उपाय प्रस्तुत करती है। दर्शन पर शिक्षा की निर्भरता इतनी स्पष्ट और कहीं नहीं दिखाई देती जितनी कि पाठ्यक्रम संबंधी समस्याओं के संबंध में। विशिष्ट पाठ्यक्रमीय समस्याओं के समाधान के लिए दर्शन की आवश्यकता होती है। पाठ्यक्रम से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ प्रश्न उपयुक्त पाठ्यपुस्तकों के चुनाव का है और इसमें भी दर्शन सन्निहित है। जो बात पाठ्यक्रम के संबंध में है, वही बात शिक्षण-विधि के संबंध में कही जा सकती है। लक्ष्य विधि का निर्धारण करते हैं, जबकि मानवीय लक्ष्य दर्शन का विषय हैं। शिक्षा के अन्य अंगों की तरह अनुशासन के विषय में भी दर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालय के अनुशासन निर्धारण में राजनीतिक कारणों से भी कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण कारण मनुष्य की प्रकृति के संबंध में हमारी अवधारणा होती है। प्रकृतिवादी दार्शनिक नैतिक सहज प्रवृत्तियों की वैधता को अस्वीकार करता है। अतः बालक की जन्मजात सहज प्रवृत्तियों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति के लिए छोड़ देता है; प्रयोजनवादी भी इस प्रकार के मापदण्ड को अस्वीकार करके बालक व्यवहार को सामाजिक मान्यता के आधार पर नियंत्रित करने में विश्वास करता है; दूसरी ओर आदर्शवादी नैतिक आदर्शों के सर्वोपरि प्रभाव को स्वीकार किए बिना मानव व्यवहार की व्याख्या अपूर्ण मानता है, इसलिए वह इसे अपना कर्त्तव्य मानता है कि बालक द्वारा इन नैतिक आधारों को मान्यता दिलवाई जाये तथा इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वह शनैःशनैः इन्हें अपने आचरण में उतार सके। शिक्षा का क्या प्रयोजन है और मानव जीवन के मूल उद्देश्य से इसका क्या संबंध है, यही शिक्षा दर्शन का विजिज्ञास्य प्रश्न है। चीन के दार्शनिक मानव को नीतिशास्त्र में दीक्षित कर उसे राज्य का विश्वासपात्र सेवक बनाना ही शिक्षा का उद्देश्य मानते थे। प्राचीन भारत में सांसारिक अभ्युदय और पारलौकिक कर्मकांड तथा लौकिक विषयों का बोध होता था और परा विद्या से निःश्रेयस की प्राप्ति ही विद्या के उद्देश्य थे। अपरा विद्या से अध्यात्म तथा रात्पर तत्व का ज्ञान होता था। परा विद्या मानव की विमुक्ति का साधन मान जाती थी। गुरुकुलों और आचार्यकुलों में अंतेवासियों के लिये ब्रह्मचर्य, तप, सत्य व्रत आदि श्रेयों की प्राप्ति परमाभीष्ट थी और तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला आदि विश्वविद्यालय प्राकृतिक विषयों के सम्यक् ज्ञान के अतिरिक्त नैष्ठिक शीलपूर्ण जीवन के महान उपस्तंभक थे। भारतीय शिक्षा दर्शन का आध्यात्मिक धरातल विनय, नियम, आश्रममर्यादा आदि पर सदियों तक अवलंबित रहा। . दक्षिण भारत के एक गाँव में शिक्षण शिक्षण-कार्य की प्रक्रिया का विधिवत अध्ययन शिक्षाशास्त्र या शिक्षणशास्त्र कहलाता है। इसमें अध्यापन की शैली या नीतियों का अध्ययन किया जाता है। शिक्षक अध्यापन कार्य करता है तो वह इस बात का ध्यान रखता है कि अधिगमकर्ता को अधिक से अधिक समझ में आवे। शिक्षा एक सजीव गतिशील प्रक्रिया है। इसमें अध्यापक और शिक्षार्थी के मध्य अन्तःक्रिया होती रहती है और सम्पूर्ण अन्तःक्रिया किसी लक्ष्य की ओर उन्मुख होती है। शिक्षक और शिक्षार्थी शिक्षाशास्त्र के आधार पर एक दूसरे के व्यक्तित्व से लाभान्वित और प्रभावित होते रहते हैं और यह प्रभाव किसी विशिष्ट दिशा की और स्पष्ट रूप से अभिमुख होता है। बदलते समय के साथ सम्पूर्ण शिक्षा-चक्र गतिशील है। उसकी गति किस दिशा में हो रही है? कौन प्रभावित हो रहा है? इस दिशा का लक्ष्य निर्धारण शिक्षाशास्त्र करता है। . शिक्षा देने वाले को शिक्षक कहते हैं। शिक्षिका शब्द 'शिक्षक' का स्त्रीलिंग रूप है। यह एकवचन अथवा बहुवचन दोनों तरह से प्रयुक्त किया जा सकता है। शिष्य के मन में सीखने की इच्छा को जो जागृत कर पाते हैं वे ही शिक्षक कहलाते हैं। शिक्षक के द्वारा व्यक्ति के भविष्य को बनाया जाता है। एवं शिक्षक ही वह सुधार लाने वाला व्यक्ति होता है। धन्यवाद दोस्तों जय हिन्द जय भारत। विषयः -डिजिटल भारत और #भारत # श्रेणीःशिक्षा श्रेणीःशब्दावली. संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. जैसा कि नाम से ही विदित है संश्लेषण अर्थात परत दर परत । अतः हम कह सकते है कि किसी पाठ्य सामग्री का परत दर परत निरूपण ही संलेशन विधि है ।उदाहरणस्वरूप महान बल्लेबाज सचिन की जीवनी हम कैसे पढेएँगे हमे उनके बचपन से होते हुए उनके सम्पूर्ण काल खंड को बताना होगा ।इस हेतु से इस विधि का प्रयोग हिंदी तथा अंग्रेजी में किसी विषय को खंडगत पढ़ेंगे हेतु किया जाता है. अन्य व्यक्तियों के लिये हरबर्ट स्पेंसर देखें। ---- हरबर्ट स्पेंसर विक्टोरियाई काल के एक अंग्रेज़ दार्शनिक, जीव-विज्ञानी, समाजशास्री और प्रसिद्ध पारंपरिक उदारवादी राजनैतिक सिद्धांतकार थे। स्पेंसर ने भौतिक विश्व, जैविक सजीवों, मानव मन, तथा मानवीय संस्कृ्ति व समाजों की क्रमिक विकास के रूप में उत्पत्ति की एक सर्व-समावेशक अवधारणा विकसित की. हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin दो हज़ार एक की भारतीय जनगणना में भारत में बयालीस करोड़ बीस लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में छः सौ अड़तालीस,नौ सौ तिरासी; मॉरीशस में छः,पचासी,एक सौ सत्तर; दक्षिण अफ्रीका में आठ,नब्बे,दो सौ बानवे; यमन में दो,बत्तीस,सात सौ साठ; युगांडा में एक,सैंतालीस,शून्य; सिंगापुर में पाँच,शून्य; नेपाल में आठ लाख; जर्मनी में तीस,शून्य हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में चौदह करोड़ दस लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की चौदह आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग एक अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत । भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' , 'देशना वचन' , 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' , 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। . कोई विवरण नहीं। निरपेक्ष सत्य की स्वानुभूति ही ज्ञान है। यह प्रिय अप्रिय सुख-दूःख इत्यादि भावों से निरपेक्ष होता है। इसका विभाजन विषयों के आधार पर होता है। विषय पाँच होते हैं - रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श। ज्ञान लोगों के भौतिक तथा बौद्धिक सामाजिक क्रियाकलाप की उपज; संकेतों के रूप में जगत के वस्तुनिष्ठ गुणों और संबंधों, प्राकृतिक और मानवीय तत्त्वों के बारे में विचारों की अभिव्यक्ति है। ज्ञान दैनंदिन तथा वैज्ञानिक हो सकता है। वैज्ञानिक ज्ञान आनुभविक और सैद्धांतिक वर्गों में विभक्त होता है। इसके अलावा समाज में ज्ञान की मिथकीय, कलात्मक, धार्मिक तथा अन्य कई अनुभूतियाँ होती हैं। सिद्धांततः सामाजिक-ऐतिहासिक अवस्थाओं पर मनुष्य के क्रियाकलाप की निर्भरता को प्रकट किये बिना ज्ञान के सार को नहीं समझा जा सकता है। ज्ञान में मनुष्य की सामाजिक शक्ति संचित होती है, निश्चित रूप धारण करती है तथा विषयीकृत होती है। यह तथ्य मनुष्य के बौद्धिक कार्यकलाप की प्रमुखता और आत्मनिर्भर स्वरूप के बारे में आत्मगत-प्रत्ययवादी सिद्धांतों का आधार है। gyan . महात्मा गांधी की भारत को जो देन है उसमें बुनियादी शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण एवं बहुमूल्य है। इसे वर्धा योजना, नयी तालीम, 'बुनियादी तालीम' तथा 'बेसिक शिक्षा' के नामों से भी जाना जाता है। गांधीजी ने तेईस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सैंतीस को 'नयी तालीम' की योजना बनायी जिसे राष्ट्रव्यापी व्यावहारिक रूप दिया जाना था। उनके शैक्षिक विचार शिक्षाशास्त्रियों के तत्कालीन विचारों से मेल नहीं खाते, इसलिये प्रारम्भ में उनके विचारों का विरोध हुआ। गांधीजी ने कहा था कि नयी तालीम का विचार भारत के लिए उनका अन्तिम एवं सर्वश्रेष्ठ योगदान है। गांधीजी के जीनव-पर्यन्त चले सत्य के अन्वेषण एवं राष्ट्र के निर्माण हेतु सक्रिय प्रयोगों के माध्यम से लम्बे समय तक विचारों के गहन मंथन के परिणामस्वरूप नयी तालीम का दर्शन एवं प्रक्रिया का प्रादुर्भाव हुआ जो केवल भारतवर्ष ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण मानव समाज को एक नयी दिशा देने में सक्षम था। परन्तु दुर्भाग्यवश इस सर्वोत्तम कल्याणकारी शिक्षा-प्रणाली का राष्ट्रीय स्तर पर भी समुचित प्रयोग नहीं हो पाया जिसके फलस्वरूप आजतक यह देश गांधीजी के सपनों के अनुरूप सार्थक और सही स्वराज प्राप्त करने में असमर्थ रहा। बल्कि इसके विपरीत आज तो आलम यह है कि शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से भारत पुनः पाश्चात्य साम्राज्यवाद के अधीन निरन्तर सरकता चला जा रहा है। आज भारत की अधिकांश शिक्षा-व्यवस्था राज्याश्रित अथवा पूंजीपतियों पर आश्रित है। अधिकांश राज्याश्रित शिक्षण-संस्थाएँ संसाधन एवं अनुशासन के अभाव में निष्क्रिय हैं। इसलिए गुणवत्ता से युक्त शिक्षा देने में असमर्थ हैं। इसी प्रकार पूजीपतियों पर आश्रित सभी शिक्षण-संस्थाएं व्यावसायिक रूप में सक्रिय हैं, जो गरीबों की पहुंच से बाहर हैं। उनमें सिर्फ सम्पन्न लोगों के बच्चे ही पढ़ सकते हैं। भारत की स्वाधीनता के साठ से अधिक वर्ष बीतने के पश्चात् भी ऐसे बच्चों की संख्या काफी अधिक है, जिन्होंने विद्यालय के द्वार तक नहीं देखे हैं। जो विद्यालय जाने का सामर्थ्य रखते हैं, उन्हें लॉर्ड मैकाले की परम्परा से चली आ रही अंग्रेजी शिक्षा के अतिरिक्त कुछ भी प्राप्त नहीं होता। कुल मिलाकर उनमें भारतीय मौलिक शिक्षा को ग्रहण करनेवाले शायद ही कोई मिले। यह बात नहीं कि भारतीय शिक्षा देनेवालों का अभाव है। परन्तु इसलिए कि सभी अभिभावकों में यह इच्छाशक्ति एवं साहस नहीं है कि अपने बच्चों को सरकारों अथवा पूंजीपतियों द्वारा निर्धारित अंग्रेजी शिक्षा को त्यागकर भारतीय शिक्षा दिलावें। जब तक जनसाधारण की इस कायरतापूर्ण मानसिकता में परिवर्तन न किया जायेगा, तबतक नयी तालीम सहित कोई भी भारतीय शिक्षण-प्रणाली इस देश में पनप नहीं सकती। . गणित की कक्षा में कुछ विद्यार्थी पढ़ते हुए। विद्यार्थी वह व्यक्ति होता है जो कोई चीज सीख रहा होता है। विद्यार्थी दो शब्दों से बना होता है - "विद्या" + "अर्थी" जिसका अर्थ होता है 'विद्या चाहने वाला'। विद्यार्थी किसी भी आयुवर्ग का हो सकता है बालक, किशोर, युवा, या वयस्क। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि वह कुछ सीख रहा होना चाहिए। संस्कृत सुभाषितों में विद्या और विद्यार्थी के बारे बहुत अच्छी-अच्छी बातें कहीं गयीं हैं- काकचेष्टा बकोध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च। अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंचलक्षणम्॥ अर्थात् , बगुले की तरह ध्यान, कुत्ते की तरह नींद , अल्पहारी , गृहत्यागी । सुखार्थी वा त्यजेत विद्या विद्यार्थी वा त्यजेत सुखम्। सुखार्थिनः कुतो विद्या विद्यार्थिनः कुतो सुखम्॥ अर्थात् आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया । पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च ॥ अर्थात् प्राप्त करता है। . संक्षेप में, प्रकृति के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहते हैं। विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कह सकते है। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के 'ज्ञान-भण्डार' के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है। . पुणे में आर्यभट की मूर्ति चार सौ छिहत्तर-पाँच सौ पचास गणित ऐसी विद्याओं का समूह है जो संख्याओं, मात्राओं, परिमाणों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती हैं। गणित एक अमूर्त या निराकार और निगमनात्मक प्रणाली है। गणित की कई शाखाएँ हैंः अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित, कलन, इत्यादि। गणित में अभ्यस्त व्यक्ति या खोज करने वाले वैज्ञानिक को गणितज्ञ कहते हैं। बीसवीं शताब्दी के प्रख्यात ब्रिटिश गणितज्ञ और दार्शनिक बर्टेंड रसेल के अनुसार "गणित को एक ऐसे विषय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें हम जानते ही नहीं कि हम क्या कह रहे हैं, न ही हमें यह पता होता है कि जो हम कह रहे हैं वह सत्य भी है या नहीं।" गणित कुछ अमूर्त धारणाओं एवं नियमों का संकलन मात्र ही नहीं है, बल्कि दैनंदिन जीवन का मूलाधार है। . तर्क की जिस प्रक्रिया में एकाकी प्रेक्षणों के ज्ञात तथ्यों को जोड़कर अधिक व्यापक कथन निर्मित किया जाता है, आगमनात्मक तर्क कहलाता है। यह 'निगमनात्मक तर्क' से बहुत भिन्न तर्क है। तर्क की शब्दावली . नेपाली चरखे से सूत कातती हुई महिला 'स्पिनिंग जेन्नी' का मॉडलः इसके आविष्कार से कताई की उत्पादकता में कई गुना वृद्धि हो गयी। कताई वस्त्र उद्योग का आरम्भिक और बहुत बड़ा प्रक्रम है। कपास आदि प्राकृतिक रेशों या अन्य कृत्रिम रेशों को ऐंठकर सूत बनाने की क्रिया को 'कताई करना' कहते हैं। पहले यह कार्य हाथ से किया जाता था किन्तु आजकल अधिकांश कताई स्वचालित मशीनों से की जाती है। श्रेणीःवस्त्र उद्योग श्रेणीःकताई श्रेणीःवस्त्र कला. कथाकार कहानी हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना गया। बंगला में इसे गल्प कहा जाता है। कहानी ने अंग्रेजी से हिंदी तक की यात्रा बंगला के माध्यम से की। कहानी गद्य कथा साहित्य का एक अन्यतम भेद तथा उपन्यास से भी अधिक लोकप्रिय साहित्य का रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना तथा सुनना मानव का आदिम स्वभाव बन गया। इसी कारण से प्रत्येक सभ्य तथा असभ्य समाज में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में कहानियों की बड़ी लंबी और सम्पन्न परंपरा रही है। वेदों, उपनिषदों तथा ब्राह्मणों में वर्णित 'यम-यमी', 'पुरुरवा-उर्वशी', 'सौपणीं-काद्रव', 'सनत्कुमार- नारद', 'गंगावतरण', 'श्रृंग', 'नहुष', 'ययाति', 'शकुन्तला', 'नल-दमयन्ती' जैसे आख्यान कहानी के ही प्राचीन रूप हैं। प्राचीनकाल में सदियों तक प्रचलित वीरों तथा राजाओं के शौर्य, प्रेम, न्याय, ज्ञान, वैराग्य, साहस, समुद्री यात्रा, अगम्य पर्वतीय प्रदेशों में प्राणियों का अस्तित्व आदि की कथाएँ, जिनकी कथानक घटना प्रधान हुआ करती थीं, भी कहानी के ही रूप हैं। 'गुणढ्य' की "वृहत्कथा" को, जिसमें 'उदयन', 'वासवदत्ता', समुद्री व्यापारियों, राजकुमार तथा राजकुमारियों के पराक्रम की घटना प्रधान कथाओं का बाहुल्य है, प्राचीनतम रचना कहा जा सकता है। वृहत्कथा का प्रभाव 'दण्डी' के "दशकुमार चरित", 'बाणभट्ट' की "कादम्बरी", 'सुबन्धु' की "वासवदत्ता", 'धनपाल' की "तिलकमंजरी", 'सोमदेव' के "यशस्तिलक" तथा "मालतीमाधव", "अभिज्ञान शाकुन्तलम्", "मालविकाग्निमित्र", "विक्रमोर्वशीय", "रत्नावली", "मृच्छकटिकम्" जैसे अन्य काव्यग्रंथों पर साफ-साफ परिलक्षित होता है। इसके पश्चात् छोटे आकार वाली "पंचतंत्र", "हितोपदेश", "बेताल पच्चीसी", "सिंहासन बत्तीसी", "शुक सप्तति", "कथा सरित्सागर", "भोजप्रबन्ध" जैसी साहित्यिक एवं कलात्मक कहानियों का युग आया। इन कहानियों से श्रोताओं को मनोरंजन के साथ ही साथ नीति का उपदेश भी प्राप्त होता है। प्रायः कहानियों में असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की और अधर्म पर धर्म की विजय दिखाई गई हैं। . कौशल का अर्थ इनमें से कुछ भी हो सकता है. कॉफी की खेती कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कृषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है तथा इसी से संबंधित विषय बागवानी का अध्ययन बागवानी में किया जाता है। तकनीकों और विशेषताओं की बहुत सी किस्में कृषि के अन्तर्गत आती है, इसमें वे तरीके शामिल हैं जिनसे पौधे उगाने के लिए उपयुक्त भूमि का विस्तार किया जाता है, इसके लिए पानी के चैनल खोदे जाते हैं और सिंचाई के अन्य रूपों का उपयोग किया जाता है। कृषि योग्य भूमि पर फसलों को उगाना और चारागाहों और रेंजलैंड पर पशुधन को गड़रियों के द्वारा चराया जाना, मुख्यतः कृषि से सम्बंधित रहा है। कृषि के भिन्न रूपों की पहचान करना व उनकी मात्रात्मक वृद्धि, पिछली शताब्दी में विचार के मुख्य मुद्दे बन गए। विकसित दुनिया में यह क्षेत्र जैविक खेती से लेकर गहन कृषि तक फैली है। आधुनिक एग्रोनोमी, पौधों में संकरण, कीटनाशकों और उर्वरकों और तकनीकी सुधारों ने फसलों से होने वाले उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है और साथ ही यह व्यापक रूप से पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बना है और इसने मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चयनात्मक प्रजनन और पशुपालन की आधुनिक प्रथाओं जैसे गहन सूअर खेती ने मांस के उत्पादन में वृद्धि की है, लेकिन इससे पशु क्रूरता, प्रतिजैविक दवाओं के स्वास्थ्य प्रभाव, वृद्धि हॉर्मोन और मांस के औद्योगिक उत्पादन में सामान्य रूप से काम में लिए जाने वाले रसायनों के बारे में मुद्दे सामने आये हैं। प्रमुख कृषि उत्पादों को मोटे तौर पर भोजन, रेशा, ईंधन, कच्चा माल, फार्मास्यूटिकल्स और उद्दीपकों में समूहित किया जा सकता है। साथ ही सजावटी या विदेशी उत्पादों की भी एक श्रेणी है। वर्ष दो हज़ार से पौधों का उपयोग जैविक ईंधन, जैवफार्मास्यूटिकल्स, जैवप्लास्टिक, और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में किया जा रहा है। विशेष खाद्यों में शामिल हैं अनाज, सब्जियां, फल और मांस। रेशे में कपास, ऊन, सन, रेशम और सन शामिल हैं। कच्चे माल में लकड़ी और बाँस शामिल हैं। उद्दीपकों में तम्बाकू, शराब, अफ़ीम, कोकीन और डिजिटेलिस शामिल हैं। पौधों से अन्य उपयोगी पदार्थ भी उत्पन्न होते हैं, जैसे रेजिन। जैव ईंधनों में शामिल हैं मिथेन, जैवभार , इथेनॉल और बायोडीजल। कटे हुए फूल, नर्सरी के पौधे, उष्णकटिबंधीय मछलियाँ और व्यापार के लिए पालतू पक्षी, कुछ सजावटी उत्पाद हैं। दो हज़ार सात में, दुनिया के लगभग एक तिहाई श्रमिक कृषि क्षेत्र में कार्यरत थे। हालांकि, औद्योगिकीकरण की शुरुआत के बाद से कृषि से सम्बंधित महत्त्व कम हो गया है और दो हज़ार तीन में-इतिहास में पहली बार-सेवा क्षेत्र ने एक आर्थिक क्षेत्र के रूप में कृषि को पछाड़ दिया क्योंकि इसने दुनिया भर में अधिकतम लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। इस तथ्य के बावजूद कि कृषि दुनिया के आबादी के एक तिहाई से अधिक लोगों की रोजगार उपलब्ध कराती है, कृषि उत्पादन, सकल विश्व उत्पाद का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा बनता है। . अनुमान, दर्शन और तर्कशास्त्र का पारिभाषिक शब्द है। भारतीय दर्शन में ज्ञानप्राप्ति के साधनों का नाम प्रमाण हैं। अनुमान भी एक प्रमाण हैं। चार्वाक दर्शन को छोड़कर प्रायः सभी दर्शन अनुमान को ज्ञानप्राप्ति का एक साधन मानते हैं। अनुमान के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त होता हैं उसका नाम अनुमिति हैं। प्रत्यक्ष द्वारा जिस वस्तु के अस्तित्व का ज्ञान नहीं हो रहा हैं उसका ज्ञान किसी ऐसी वस्तु के प्रत्यक्ष ज्ञान के आधार पर, जो उस अप्रत्यक्ष वस्तु के अस्तित्व का संकेत इस ज्ञान पर पहुँचने की प्रक्रिया का नाम अनुमान है। इस प्रक्रिया का सरलतम उदाहरण इस प्रकार है-किसी पर्वत के उस पार धुआँ उठता हुआ देखकर वहाँ पर आग के अस्तित्व का ज्ञान अनुमिति है और यह ज्ञान जिस प्रक्रिया से उत्पन्न होता है उसका नाम अनुमान है। यहाँ प्रत्यक्ष का विषय नहीं है, केवल धुएँ का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है। पर पूर्वकाल में अनेक बार कई स्थानों पर आग और धुएँ के साथ-साथ प्रत्यक्ष ज्ञान होने से मन में यह धारणा बन गई है कि जहाँ-जहाँ धुआँ होता है वहीं-वहीं आग भी होती है। अब जब हम केवल धुएँ का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं और हमको यह स्मरण होता है कि जहाँ-जहाँ धुआँ है वहाँ-वहाँ आग होती है, तो हम सोचते हैं कि अब हमको जहाँ धुआँ दिखाई दे रहा हैं वहाँ आग अवश्य होगीः अतएव पर्वत के उस पार जहाँ हमें इस समय धुएँ का प्रत्यक्ष ज्ञान हो रहा है अवश्य ही आग वर्तमान होगी। इस प्रकार की प्रक्रिया के मुख्य अंगों के पारिभाषिक शब्द ये हैं. अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार श्रेणीःसाहित्य श्रेणीःअलंकार श्रेणीःहिन्दी साहित्य.
इस भूकंप में यहाँ बहुत सारे मवेशी भी मारे गए थे । यहाँ गुजरात भूकंप की कुछ तस्वीरें हैं, आप वहाँ होने वाली तबाही को देख सकते हैं। (Refer Slide Time: 03:23 ) RELOCATION SITE-1 CORNICATION COUN और, हर जगह तबाही थी, जिसे आप इन चित्रों के माध्यम से देख सकते हैं । यह चित्र यहां सिर्फ आपको प्रसंग का ज्ञान कराने के लिए सम्मिलित किए गए हैं । (Refer Slide Time: 02:39 ) CIPCATON COUR यहाँ गाँवों, दूरदराज के इलाकों और शहरी इलाकों में होने वाले बहुत अधिक नुकसान को दिखाया गया है। (Refer Slide Time: 03:47 ) REHABILITATION AND RECONSTRUCTION POLICY PACKAGE NO.1 Public-private Partnership Programme (Relocation of villages): Re-Location of completely damaged villages (more) than 70%) with full involvement of the villagers and with the consent of Gram Sabha (Local Government) Earthquake resistant infra-structural facilities will be developed The State Government will provide layout design technical specifications and composition of material ingredients for the reconstruction The minimum contribution by NGOs will be 50% of the total cost PACKAGE NO.2 (In-situ Rehabilitation) The assistance will be available to owner according to the extent of damage the owners have to build their own houses The Damage Assessment will be carried out by a team. Stages of Financial Allocation इसलिए, गुजरात भूकंप के बाद, गुजरात सरकार ने पुनर्वास (rehabilitation) और पुनर्निर्माण (reconstruction) की नीति घोषित की। हम यहां आवास क्षेत्र और आवासीय भवनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं । मुख्य रूप से 2 पैकेज (package)उपलब्ध कराया गया। पहले पैकेज के अंतर्गत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त गांवों को तथा ऐसे गांव जो कि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है या फिर जहां 70% से अधिक इमारतों की क्षति पहुंची है, दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। बेशक, यह ग्राम सभा जो कि वहां की स्थानीय सरकार है उसकी सहमति पर निर्भर करता है । वह उस जगह पर भूकंप प्रतिरोध (earthquake resistant) बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करेंगे और राज्य सरकार योजना की नक़्शा(layout design), तकनीकी विनिर्देश(technical specifications), पुनर्निर्माण के लिए सामग्री इत्यादि प्रदान करेगी। यदि कोई गैर सरकारी संस्थान (NGO) किसी गांव को अपनाने जा रहा है, तो उनको कुल लागत का 50% न्यूनतम योगदान के रूप में देना होगा । अब, यह मूल रूप से स्थानांतरण (relocation) के लिए था। दूसरा पैकेज इन-सीटू (in-situ) के लिए दिया गया था ।इसके अंतर्गत यह था कि अगर गाँव आंशिक रूप से या पूरी तरह से ढह गया, तबाह हो गया और वहां के लोग अगर दूसरी जगह पर बसना नहीं चाहते, तो यह इन-सीटू (in-situ)विकास हो सकता है । यदि भवनों के मालिक और वहां के नागरिक अपना घर बनाना चाहते हैं, तो सरकार उन्हें सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। उस स्थिति में जहां सहायता सीधे मालिकों को दिया जा रहा था वहां कुल खर्च का 50% दिया जाना था। इससे पहले, सरकार की एक टीम द्वारा नुकसान का आकलन किया जाएगा, और आवंटित धन 3 चरणों में दिया जाएगा। प्रथम चरण में परियोजना की मंजूरी के बाद वे 40% प्राप्त कर सकते हैं; लगभग 30% या 40% धन दूसरे चरण में और फिर जब वे लिंटेल(lintel) स्तर को पूरा करते हैं, तो उनको एक और चरण में 40% या 35% धन मिलता है। फिर, शेष धन संपूर्ण पुनर्निर्माण के पूरा होने के बाद प्रदान किया जाना था । (Refer Slide Time: 06:54 )
इस भूकंप में यहाँ बहुत सारे मवेशी भी मारे गए थे । यहाँ गुजरात भूकंप की कुछ तस्वीरें हैं, आप वहाँ होने वाली तबाही को देख सकते हैं। RELOCATION SITE-एक CORNICATION COUN और, हर जगह तबाही थी, जिसे आप इन चित्रों के माध्यम से देख सकते हैं । यह चित्र यहां सिर्फ आपको प्रसंग का ज्ञान कराने के लिए सम्मिलित किए गए हैं । CIPCATON COUR यहाँ गाँवों, दूरदराज के इलाकों और शहरी इलाकों में होने वाले बहुत अधिक नुकसान को दिखाया गया है। REHABILITATION AND RECONSTRUCTION POLICY PACKAGE NO.एक Public-private Partnership Programme : Re-Location of completely damaged villages than सत्तर%) with full involvement of the villagers and with the consent of Gram Sabha Earthquake resistant infra-structural facilities will be developed The State Government will provide layout design technical specifications and composition of material ingredients for the reconstruction The minimum contribution by NGOs will be पचास% of the total cost PACKAGE NO.दो The assistance will be available to owner according to the extent of damage the owners have to build their own houses The Damage Assessment will be carried out by a team. Stages of Financial Allocation इसलिए, गुजरात भूकंप के बाद, गुजरात सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण की नीति घोषित की। हम यहां आवास क्षेत्र और आवासीय भवनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं । मुख्य रूप से दो पैकेज उपलब्ध कराया गया। पहले पैकेज के अंतर्गत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त गांवों को तथा ऐसे गांव जो कि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है या फिर जहां सत्तर% से अधिक इमारतों की क्षति पहुंची है, दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। बेशक, यह ग्राम सभा जो कि वहां की स्थानीय सरकार है उसकी सहमति पर निर्भर करता है । वह उस जगह पर भूकंप प्रतिरोध बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करेंगे और राज्य सरकार योजना की नक़्शा, तकनीकी विनिर्देश, पुनर्निर्माण के लिए सामग्री इत्यादि प्रदान करेगी। यदि कोई गैर सरकारी संस्थान किसी गांव को अपनाने जा रहा है, तो उनको कुल लागत का पचास% न्यूनतम योगदान के रूप में देना होगा । अब, यह मूल रूप से स्थानांतरण के लिए था। दूसरा पैकेज इन-सीटू के लिए दिया गया था ।इसके अंतर्गत यह था कि अगर गाँव आंशिक रूप से या पूरी तरह से ढह गया, तबाह हो गया और वहां के लोग अगर दूसरी जगह पर बसना नहीं चाहते, तो यह इन-सीटू विकास हो सकता है । यदि भवनों के मालिक और वहां के नागरिक अपना घर बनाना चाहते हैं, तो सरकार उन्हें सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। उस स्थिति में जहां सहायता सीधे मालिकों को दिया जा रहा था वहां कुल खर्च का पचास% दिया जाना था। इससे पहले, सरकार की एक टीम द्वारा नुकसान का आकलन किया जाएगा, और आवंटित धन तीन चरणों में दिया जाएगा। प्रथम चरण में परियोजना की मंजूरी के बाद वे चालीस% प्राप्त कर सकते हैं; लगभग तीस% या चालीस% धन दूसरे चरण में और फिर जब वे लिंटेल स्तर को पूरा करते हैं, तो उनको एक और चरण में चालीस% या पैंतीस% धन मिलता है। फिर, शेष धन संपूर्ण पुनर्निर्माण के पूरा होने के बाद प्रदान किया जाना था ।
लोजपा में जारी चाचा भतीजे की लड़ाई के बीच चाचा का कुनबा मज़बूत होता जा रहा है जहाँ एक तरफ चिराग पासवान लगातार हाथ पैर मारने में जुटे हुए है वहीं दूसरी तरफ पशुपति पारस ने पहले तो मंत्रिमंडल में जगह बनाते हुए खाद्य एवम प्रसंस्करण मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उठाई वहीं अब संगठन को और ज्यादा मज़बूत करने के लिए 7 राज्यों में लोजपा के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है. इसको लेकर पशुपति पारस खेमे की तरफ से आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है. जिसके तहत लोजपा के पारस खेमे की तरफ से बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, दादर एवम नागर हवेली राज्य के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गई है. पत्र के अनुसार प्रिंस राज को बिहार में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ज़िम्मेदारी सौंपी गई है वहीं विकास रंजन को झारखण्ड का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है इसके साथ ही ललित नारायण चौधरी को उत्तर प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है. इसके अलावा रवि गरूड को महाराष्ट्र में लोजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, वहीं वीरेंदर कुमार बैंग को उड़ीसा लोजपा का प्रदेश अध्यक्ष, रुपमकर को त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्ष और अमित नरेश राठी को दादर हवेली एवम दमन दीव का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इन सब के बीच चिराग पासवान भी अपनी तरफ से पार्टी की कमान हासिल करने में पुरजोर जुट गए है विधानसभा चुनाव के बाद मैदान से गायब हुए चिराग आशीर्वाद यात्रा करते देखे जा रहे है. वहीं पशुपति पारस के खिलाफ हाई कोर्ट जाना भी चिराग के लिए भारी पड़ा, क्यूंकि चिराग को हाई कोर्ट की तरफ से भी करारा झटका लगा है.
लोजपा में जारी चाचा भतीजे की लड़ाई के बीच चाचा का कुनबा मज़बूत होता जा रहा है जहाँ एक तरफ चिराग पासवान लगातार हाथ पैर मारने में जुटे हुए है वहीं दूसरी तरफ पशुपति पारस ने पहले तो मंत्रिमंडल में जगह बनाते हुए खाद्य एवम प्रसंस्करण मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उठाई वहीं अब संगठन को और ज्यादा मज़बूत करने के लिए सात राज्यों में लोजपा के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है. इसको लेकर पशुपति पारस खेमे की तरफ से आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है. जिसके तहत लोजपा के पारस खेमे की तरफ से बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, दादर एवम नागर हवेली राज्य के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गई है. पत्र के अनुसार प्रिंस राज को बिहार में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ज़िम्मेदारी सौंपी गई है वहीं विकास रंजन को झारखण्ड का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है इसके साथ ही ललित नारायण चौधरी को उत्तर प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है. इसके अलावा रवि गरूड को महाराष्ट्र में लोजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, वहीं वीरेंदर कुमार बैंग को उड़ीसा लोजपा का प्रदेश अध्यक्ष, रुपमकर को त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्ष और अमित नरेश राठी को दादर हवेली एवम दमन दीव का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इन सब के बीच चिराग पासवान भी अपनी तरफ से पार्टी की कमान हासिल करने में पुरजोर जुट गए है विधानसभा चुनाव के बाद मैदान से गायब हुए चिराग आशीर्वाद यात्रा करते देखे जा रहे है. वहीं पशुपति पारस के खिलाफ हाई कोर्ट जाना भी चिराग के लिए भारी पड़ा, क्यूंकि चिराग को हाई कोर्ट की तरफ से भी करारा झटका लगा है.
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अष्टपाहुडमें पाहुडकी भाषावचनिका । अविनाशी मोक्ष ताहि साथै है । इहां गाथामैं सूत्र ऐसा विशेष्य पदन कह्या तौऊ विशेषणनिकी सामर्थ्यतें लिया है । भावार्थ - जो अरहंत सर्वज्ञ करि भाषित है अर गणधर देवनिकरि अक्षर पद वाक्यमयी गूंध्या है अर सूत्रके अर्थका जाननेकाही है अर्थ प्रयोजन जामैं ऐसा सूत्र करि मुनि परमार्थ जो मोक्ष ताहि साधै है । अन्य जे अक्षपाद जैमिनि कपिल सुगत आदि छद्मस्थनिकरि रचे कल्पित सूत्र हैं तिनिकरि परमार्थकी सिद्धि नांही है, ऐसा आशय जाननां ॥१॥ आरौं कहें है जो ऐसा सूत्रका अर्थ आचार्यनिकी परंपरा करि वर्ते तिसकूं जानि मोक्षमार्गकूं साधै है सो भव्य है; - गाथा - सुत्तम्मि जं सुदि आइरियपरंपरेण मग्गेण । णाऊण दुविह सुत्तं वइ सिवमग्ग जो भव्वो ॥ २ ॥ संस्कृत - सूत्रे यत् सुदृष्टं आचार्य परंपरेण मार्गेण । ज्ञात्वा द्विविधं सूत्रं वर्त्तते शिवमार्गे यः भव्यः ॥ २॥ अर्थ - जो सर्वज्ञभाषित सूत्रवि जो किछू भलै प्रकार का है ताकूं आचार्यनिकी परंपरारूप मार्ग करि दोय प्रकार सूत्रकूं शब्द थकी अर्थ थकी जानि अर मोक्षमार्गवि प्रवर्ते है सो भव्यजीव है मोक्ष पावनें योग्य है । भावार्थ - इहां कोई कहै -- अरहंतका भाष्या अर गणधर देवनिका गूंध्या सूत्र तौ द्वादशांगरूप हैं ते तो अवार कालमैं दीखें नांही तब परमार्थरूप मोक्षमार्ग कैसैं सधै, ताका समाधानकूं यह गाथा हैजो अरहंतभाषित गणधर गूंथित सूत्रमैं जो उपदेश है तिसकूं आचार्य - निकी परंपराकरि जानिये है, तिसकूं शब्द अर्थ करि जानि जो मोक्षमार्ग पंडित जयचंद्रजी छावड़ा विरचितसाधै है सो मोक्ष होनें योग्य भव्य है । इहां फेरि कोऊ पूछे - जो, आचार्यनिकी परंपरा कहा ? तहां अन्य ग्रंथनिमें आचार्यनिकी परंपरा कही है, सो ऐसैं है; - श्रीवर्द्धमान तीर्थकर सर्वज्ञ देव पीछें तीन तौ केवलज्ञानी भये; गौतम १ सुधर्म २ जंबू ३ । बहुरि तापीछें पांच श्रुतकेवली भये तिनिकूं द्वादशांग सूत्रका ज्ञान भया, - विष्णु १ नंदिमित्र २ अपराजित ३ गोवर्द्धन ४ भद्रबाहु ५ । तिनिपी दश पूर्वनिके पाठी ग्यारह भये; विशाख १ प्रौष्टिल २ क्षत्रिय ३ जयसेन ४ नागसेन ५ सिद्धार्थ धृतिषेण ७ विजय ८ बुद्धिल ९ गंगदेव १० धर्मसेन ११ । तिनि पीछे पांच ग्यारह अंगनिके धारक भये; नक्षत्र १ जयपाल २ पांडु ३ ध्रुवसेन ४ कंस ५ । बहुरि तिनि पीछें एक अंगके धारक च्यार भये; सुभद्र १ यशोभद्र २ भद्रबाहु ३ लोहाचार्य ४ । इनि पीछें एक अंगके पूर्ण ज्ञानीकी तौ व्युच्छित्ति भई अर अंगना एकदेश अर्थके ज्ञानी आचार्य भये तिनिमैं केतेकनिके नाम - अर्हदूलि, माघनंदि, धरसेन, पुष्त, भूतवलि, जिनचन्द्र, कुन्दकुन्द, उमास्वामी, समन्तभद्र, शिवकोटि, शिवायन, पूज्यपाद, वीरसेन, जिनसेन, नेमिचन्द्र इत्यादि । बहुरि तिनि पीछें तिनिकी परिपाटीमैं आचार्य भये तिनि अर्थका व्युच्छेद नहीं भया, ऐसैं दिगंबरनिके संप्रदाय मैं प्ररूपणा यथार्थ है। बहुरि अन्य श्वेताम्बरादिक वर्द्धमानस्वामीतैं परंपरा मिला है सो कल्पित है जातैं भद्रबाहु स्वामी पीछें केई मुनिकालमै भ्रष्ट भये ते अर्द्धफालक कहाये तिनिकी संप्रदायमैं श्वेताम्बर भये, तिनिमैं देवगणनामा साधु तिनिकी संप्रदायम भया है तानें सूत्र रचे हैं सो तिनिमै शिथिलाचार पोषनेकूं कल्पित कथा तथा कल्पित आचरणकी कथनी करी है सो प्रमाणभूत नाहीं है। पंचमकालमै जैनाभासनिकै शिथिलाचारकी बाहुल्यता है सो अष्टपाहुडमें सूत्रपाडुडकी भाषावचनिका । युक्त है इस कालमै सांचा मोक्षमार्गकी विरलता है तातैं शिथिलाचारीनिकै सांचा मोक्षमार्ग कहां तै होय ऐसा जाननां । अब इहां कछूक द्वादशांगसूत्र तथा अंगवाह्यश्रुतका वर्णन लिखिये है; - तहां तीर्थकरके मुखतैं उपजी जो सर्व भाषामय दिव्यध्वनि तांकूं सुनिकरि च्यार ज्ञान सप्तऋद्धिके घारक गणघर देवनिर्नै अक्षर पदमय सूत्ररचना करी । तहां सूत्रदोय प्रकार है; - एक अंग दूसरा अंगवाह्य । तिनके अपुनरुक्त अक्षरनिकी संख्या वीस अंकनि प्रमाण है ते अंक एक घाटि इकट्ठी प्रमाण हैं । ते अंक - १८४४६७४४०७३७०९५५१६१५ एते अक्षर हैं । तिनिके पद करिये तब एक मध्यपदके अक्षर सौलासे चौतीस कोडि तियासीलाख सात हजार आठसै अठ्यासी कहे हैं तिनिका भाग दिये एकसौ वारह कोडि तियासीलाख अठावन हजार पांच इतनें पावैं येते पदहैं ते तौ बारह अंगरूप सूत्रके पदहैं। अर अवशेप वीस अंकशिमैं अक्षर रहे ते अंगवाह्य सूत्र कहिये, ते आठ कोडि एक लाख आठ हजार एकसौ पिचहत्तर अक्षर हैं तिनि अक्षरनिए कौदह प्रकीर्णकरूप सूत्ररचना है । अब सत्र द्वादशांगरूप सूत्ररचनाके नाम अर पद संख्या लिखिए है; - तहां प्रथम अंग आचारांग है तामैं मुनीश्वर निके आचारका निरूपण है ताके पद अठारह हजार हैं । बहुरि दूसरा सूत्रकृत अंग ताविपैं ज्ञानका विनय आदिक अथवा धर्मक्रियामैं स्वमत परमतकी क्रियाका विशेषका निरूपण है याँके पद छत्तीस हजार हैं । बहुरि तीसरा स्थान अंग है ताविषै पदार्थनिका एक आदि स्थाननिका निरू पण है जैसैं जीव सामान्य करि एकप्रकार विशेषकरि दोय प्रकार तीन प्रकार इत्यादि ऐसें स्थान कहे हैं याके पद वियालीस हजार हैं। बहुरि चौथा सममाय अंग है याविषै जीवादिक छह द्रव्यनिका द्रव्य क्षेत्र पंडित जयचंदजी छावड़ा विरचितकालादि करि वर्णन है याके पद एक लाख चौसठि हजार हैं। पांचमां व्याख्याप्रज्ञप्ति अंग है याविषै जीवके अस्ति नास्ति आदिक साठि हजार प्रश्न गणाधरदेव तीर्थकरके निकट किये तिनिका वर्णन है बाके पद दोय लाख अठाईस हजार हैं। बहुरि छठा ज्ञातृधर्मकथा नामा अंग है यामैं तीर्थकरनिके धर्मकी कथा जीवादिक पदार्थनिका स्वभावका वर्णन तथा गणधरके प्रश्ननिका उत्तरका वर्णन है याके पद पांच लाख छप्पन हजार हैं । बहुरि सातवां उपासकाध्ययननाम अंग है याविषै ग्यारह प्रतिमा आदि श्रावकका आचारका वर्णन है याके पद ग्यारह लाख सत्तर हजार हैं । बहुरि आठमां अंतकृतदशांगनामा अंग हैं याविषै एक एक तीर्थंकर के वारें दशदश अंतकृत केवली भये तिनिका वर्णन है याके पद तेईस लाख अठाईस हजार हैं । बहुरि नवमां अनुत्तरोपपादकनामा अंग है याविपैं एक एक तीर्थकरकै बारें दशदश महामुनि घोर उपसर्ग सहि अनुत्तर विमाननिमैं उपजे तिनिका वर्णन है याके पद बाणवै लाख चवालीस हजार हैं। बहुरि दशमां प्रश्न व्याकरणनाम अंग है। अनागत कालसंबंधी शुभाशुभका प्रश्न कोई करे ताक कहनेका उपायका वर्णन हैं तथा आक्षेपणी विक्षेपणी संवेदनी निर्वेदनी इनि च्यार कथानिका भी या अंगमैं वर्णन है याके पद तिराणवैं लाख सोलह हजार हैं । बहुरि ग्यारमां विपाकसूत्र नामा अंग है यावि कर्मका उदयका तीव्र मंद अनुभागका द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा लिये वर्णन है याके पद एक कोडि चौरासी लाख हैं । ऐसें ग्यारह अंग हैं तिनिके पदनिकी संख्याका जोड़ दिये च्यार कोडि पंदरह लाख दोय हजार पद होय हैं । बहुरि बारमां दृष्टिवादनामा अंग ताविषै मिथ्यादर्शनसंबंधी तीनसै तरेसठि कुवाद हैं तिनिका वर्णन है पाके पद एक सौ आठ कोडि अडसठि लाख छप्पनहजार पांच पद हैं। या बारमा अंगका पांच अधिकार हैं; - परिकर्म १ सूत्र २ प्रथमानुयोग ३ पूर्वगत ४ चूलिका ५ ऐसें । तहां परिकर्मविषै गणितके करण सूत्र हैं ताके पांच भेद हैं; - तहां चन्द्रप्रज्ञप्ति प्रथम है तामैं चन्द्रमाका गमनादिक परिवार वृद्धि हानि ग्रह आदिका वर्णन है याके पद छत्तीस लाख पांच हजार हैं । बहुरि दूजा सूर्यप्रज्ञप्ति है यामैं सूर्यकी ऋद्धि परिवार गमन आदिका वर्णन है याके पद पांच लाख तीन हजार हैं। बहुरि तीजा जंबूद्वीपप्रज्ञप्ति है यामैं जंबूद्वीपसंबंधी मेरु गिरि क्षेत्र कुलाचल आदिका वर्णन है याकै पद तीन लाख पचीस हजार है । बहुरि चौथा द्वीपसागरप्रज्ञप्ति है यामैं द्वीपसागरका स्वरूप तथा तहां तिष्ठै ज्योतिषी व्यंतर भवनवासी देवनिके आवास तथा तहां तिष्ठै जिनमंदिरनिका वर्णन है याके पद बावन लाख छत्तीस हजार हैं । बहुरि पांचमां व्याख्याप्रज्ञप्ति है याविषै जीव अजीव पदार्थनिका प्रमाणका वर्णन है याके पद चौरासी लाख छत्तीस हजार हैं। ऐसैं परिकर्मके पांच भेदनिके पद जोड़े एक कोडि इक्यासी लाख पांच हजार हैं। बहुरि बारमां अंगका दूजा भेद सूत्र नाम है ताविषै मिथ्यादर्शनसंबंधी तीनसै तरेसठि कुवाद तिनिकी पूर्वपक्ष लेकरि तिनिका जीव पदार्थपरि लगावनां आदि वर्णन है याके भेद अठ्यासी लाख हैं। बहुरि बारमां अंगका तीजा भेद प्रथमानुयोग है या विषै प्रथम जीवकूं उपदेशयोग्य तीर्थकर आदि तरेसठि शलाका पुरुषनिका वर्णन है याके पद पांच हजार हैं । बहुरि बारमां अंगका चौथा भेद पूर्वगत है, ताके चौदह भेद हैं तहां प्रथम उत्पाद नामा है ताविषै जीव आदि वस्तुनिकै उत्पाद व्यय ध्रौव्य आदि अनेक धर्मनिकी अपेक्षा भेद वर्णन है याके पद एक कोडि हैं । बहुरि दूजा अप्रायणीनाम पूर्व है याविषै सातसै सुनय दुर्नयका अर षद्रव्य पंडित जयचंद्रजी छावड़ा विरचितसप्त तत्व नव पदार्थनिका वर्णन है याके छिनवै लाख पद हैं। बहुरि तीजा वीर्यानुवादनाम पूर्व है याविषै षट् द्रव्यनिकी शक्तिरूप वीर्यका बर्णन है याके पद सत्तरि लाख हैं। बहुरि चौथा अस्तिनास्ति प्रवाद - नामा पूर्व है या विषै जीवादिक वस्तुका स्वरूप द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा अस्ति पररूप द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा नास्ति आदि अनेक धर्मनिविषै विधि निषेध करि सप्तभंगकरि कथंचित् विरोध मेटनें रूप मुख्य गौण करि वर्णन है याके पद साठि लाख हैं। बहुरि ज्ञानप्रवादनामा पांचमां पूर्व है यामैं ज्ञानके भेदनिका स्वरूप संख्या विषय फल आदिका वर्णन है याके पद एक घाटि कोडि हैं । बहुरि छठा सत्यप्रवादनामा पूर्व है या विषै सत्य असत्य आदिक वचननिकी अनेक प्रकार प्रवृत्ति है ताका वर्णन है याके पद एक कोडि छह हैं । बहुरि सातमां आत्मप्रवादनामा पूर्व है याविषै आत्मा जो जीव पदार्थ है ताका कर्त्ता भोक्ता आदि अनेक धर्मनिका निश्चय व्यवहार नय अपेक्षा वर्णन है याके पद छव्वीस कोडि हैं । बहुरि कर्मप्रवाद नामा आठमां पूर्व है याविषै ज्ञानावरण आदि आठ कर्मनिका बंध सत्व उदय उदीरणपणा आदिका तथा क्रियारूप कर्मनिका वर्णन है याके पद एक कोडि अस्सी लाख हैं । बहुरि प्रत्याख्याननामा नवमां पूर्व है यामैं पापके त्यागका अनेक प्रकार करि वर्णन है याके पद चौरासी लाख हैं। बहुरि दशमां विद्यानुवादनामा पूर्व है यामैं सातस क्षुद्रविद्या अर पांचसै महाविद्या इनिका स्वरूप साधन मंत्रादिक अर सिद्ध भये इनिका फलका वर्णन है तथा अष्टांग निमित्त ज्ञानका वर्णन हैं याके पद एक कोडि दश लाख हैं बहुरि कल्याणवादनामा ग्यारवां पूर्व है यामैं तीर्थकर चक्रवर्त्ती आदिके गर्भ आदिकल्याणका उत्सव तथा तिसके कारण षोडश भावनादिके तपश्चरणादिक तथा चन्द्रमा सूर्याअष्टपाहुडमें सूत्रपाहुडकी भाषावचनिका । दिकके गमनविशेष आदिकका वर्णन है याके पद छबीस कोडि हैं बहुरि प्राणवादनामा बारमा पूर्व है यामैं आठ प्रकार वैद्यक तथा भूतादिक व्याधि दूरि करनेके मंत्रादिक तथा विष दूर करने के उपाय तथा स्वरोदय आदिका वर्णन है याके तेरह कोडि पद हैं। बहुरि क्रियाविशालनामा तेरमां पूर्व है यामैं संगीतशास्त्र छंद अलंकारादिक तथा चौसठि कला, गर्भाधानादि चौरासी किया, सम्यग्दर्शन आदि एकसौ आठ क्रिया, देववंदनादि पच्चीस क्रिया, नित्य नैमित्तिक क्रिया इत्यादिका वर्णन है, याके पाद्र नव कोडि हैं। चौदमां त्रिलोकविंदुसार नामा पूर्व है या विषै तीन लोकका स्वरूप अर बीजगणितका स्वरूप तथा मोक्षका स्वरूप तथा मोक्षकी कारणभूत क्रियाका स्वरूप इत्यादिका वर्णन है याके पाद बारह कोडि पचास लाख हैं । ऐसें चौदह पूर्व हैं, इनिके सर्व पदनिका जोड़ पिच्याणवै कोडि पचास लाख है । बहुरि बारमां अंगका पांचमां चूळिका है ताके पांच भेद हैं तिनिके पद दोय कोडि नव लाख निवासी हजार दोयसै हैं । तहां जलगता चूलिकामैं जलका स्तंभन करनां जलमैं गमन करना । अग्निगता चूलि - कामैं अग्निस्तंभन करनां अग्निमें प्रवेश करनां अग्निका भक्षण करना इत्यादिके कारणभूत मंत्र तंत्रादिकका प्ररूपण है, याके पद दोय कोडि नवलाख निवासी हजार दोयसैं हैं । एते एते ही पद अन्य च्यार चूलिकाके जाननें । बहुरि दूजी स्थलगता चूलिका है याविषै मेरुपर्वत भूमि इत्यादि विषै प्रवेश करनां शीघ्र गमन करना इत्यादि क्रिया के कारण मंत्र तंत्र तपश्चरणादिकका प्ररूपण है। बहुरि तीजी मायागता चूलिका है तामैं मायामयी इंद्रजाल विक्रिया के कारणभूत मंत्र तंत्र तपश्चरणादिका प्ररूपण है। बहुरि चौथी रूपगता चूलिका है यामैं सिंह हाथी घोडा बैल हरिण इत्यादि अनेकप्रकार रूप पलटि लेनां ताके कारणभूत मंत्र तंत्र तपश्चरण आदिका प्ररूपणा है, तथा चित्राम काष्ठलेपादिकका लक्षण वर्णन है तथा धातु रसायनका निरूपण है । बहुरि पांचमी आकाशगता चूलिका है यामैं आकाशविषै गमनादिकके कारणभूत मंत्र यंत्र तंत्रादिकका प्ररूपण है। ऐसें बारमां अंग है। या प्रकार बारह अंग सूत्र हैं । बहुरि अंगबाह्य श्रुतके चौदह प्रकीर्णक हैं । तिनिमैं प्रथम प्रकीर्णक सामायिक नामा है, तात्रिनाम स्थापना द्रव्य क्षेत्र काल भाव भेदकरि छह प्रकार इत्यादिक सामायिकका विशेषकरि वर्णन है । बहुरि दूजा चतुर्विंशतिस्तव नाम प्रकीर्णक है ताविषै चौवीस तीर्थकर निकी महिमाका वर्णन है । बहुरि तीजा बंदनानाम प्रकीर्णक है तामैं एक तीर्थकरके आश्रय वंदना स्तुतिका वर्णन है । बहुरि चौथा प्रतिक्रमणनामा प्रकीर्णक हैं तामें सात प्रकारके प्रतिक्रमणका वर्णन है । बहुरि पांचमां वैनयिकनाम प्रकीर्णक है तामैं पंच प्रकारके विनयका वर्णन है । बहुरि छठा कृतिकर्मनामा प्रकीर्णक है तामैं अरहंत आदिककी वंदनाकी क्रियाका वर्णन है । बहुरि सातमां दशवैकालिकनामा प्रकीर्णक है तिसविषै मुनिका आचार आहारकी शुद्धता आदिका वर्णन है । बहुरि आठमां उत्तराध्ययननामा प्रकीर्णक है ताविषै परीषह उपसर्गका सहनेंका विधान वर्णन है । बहुरि नवमां कल्पव्यवहार नामा प्रकीर्णक है तामैं मुनिके योग्य आचरण अस् अयोग्य सेवनके प्रायश्चित तिनिका वर्णन है । बहुरि दशमां कल्पाकल्प नाम प्रकीर्णक है ताविषै मुनिकूं यह योग्य है यह अयोग्य है ऐसा द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा वर्णन है । बहुरि ग्यारमां महाकल्पनामा प्रकीर्णक है तामैं जिनकल्पी मुनिकै प्रतिमायोग त्रिकालयोगका प्ररूपण है तथा स्थविरकल्पी मुनिनिकी प्रवृत्तिका वर्णन है । बहुरि बारमा
अष्टपाहुडमें पाहुडकी भाषावचनिका । अविनाशी मोक्ष ताहि साथै है । इहां गाथामैं सूत्र ऐसा विशेष्य पदन कह्या तौऊ विशेषणनिकी सामर्थ्यतें लिया है । भावार्थ - जो अरहंत सर्वज्ञ करि भाषित है अर गणधर देवनिकरि अक्षर पद वाक्यमयी गूंध्या है अर सूत्रके अर्थका जाननेकाही है अर्थ प्रयोजन जामैं ऐसा सूत्र करि मुनि परमार्थ जो मोक्ष ताहि साधै है । अन्य जे अक्षपाद जैमिनि कपिल सुगत आदि छद्मस्थनिकरि रचे कल्पित सूत्र हैं तिनिकरि परमार्थकी सिद्धि नांही है, ऐसा आशय जाननां ॥एक॥ आरौं कहें है जो ऐसा सूत्रका अर्थ आचार्यनिकी परंपरा करि वर्ते तिसकूं जानि मोक्षमार्गकूं साधै है सो भव्य है; - गाथा - सुत्तम्मि जं सुदि आइरियपरंपरेण मग्गेण । णाऊण दुविह सुत्तं वइ सिवमग्ग जो भव्वो ॥ दो ॥ संस्कृत - सूत्रे यत् सुदृष्टं आचार्य परंपरेण मार्गेण । ज्ञात्वा द्विविधं सूत्रं वर्त्तते शिवमार्गे यः भव्यः ॥ दो॥ अर्थ - जो सर्वज्ञभाषित सूत्रवि जो किछू भलै प्रकार का है ताकूं आचार्यनिकी परंपरारूप मार्ग करि दोय प्रकार सूत्रकूं शब्द थकी अर्थ थकी जानि अर मोक्षमार्गवि प्रवर्ते है सो भव्यजीव है मोक्ष पावनें योग्य है । भावार्थ - इहां कोई कहै -- अरहंतका भाष्या अर गणधर देवनिका गूंध्या सूत्र तौ द्वादशांगरूप हैं ते तो अवार कालमैं दीखें नांही तब परमार्थरूप मोक्षमार्ग कैसैं सधै, ताका समाधानकूं यह गाथा हैजो अरहंतभाषित गणधर गूंथित सूत्रमैं जो उपदेश है तिसकूं आचार्य - निकी परंपराकरि जानिये है, तिसकूं शब्द अर्थ करि जानि जो मोक्षमार्ग पंडित जयचंद्रजी छावड़ा विरचितसाधै है सो मोक्ष होनें योग्य भव्य है । इहां फेरि कोऊ पूछे - जो, आचार्यनिकी परंपरा कहा ? तहां अन्य ग्रंथनिमें आचार्यनिकी परंपरा कही है, सो ऐसैं है; - श्रीवर्द्धमान तीर्थकर सर्वज्ञ देव पीछें तीन तौ केवलज्ञानी भये; गौतम एक सुधर्म दो जंबू तीन । बहुरि तापीछें पांच श्रुतकेवली भये तिनिकूं द्वादशांग सूत्रका ज्ञान भया, - विष्णु एक नंदिमित्र दो अपराजित तीन गोवर्द्धन चार भद्रबाहु पाँच । तिनिपी दश पूर्वनिके पाठी ग्यारह भये; विशाख एक प्रौष्टिल दो क्षत्रिय तीन जयसेन चार नागसेन पाँच सिद्धार्थ धृतिषेण सात विजय आठ बुद्धिल नौ गंगदेव दस धर्मसेन ग्यारह । तिनि पीछे पांच ग्यारह अंगनिके धारक भये; नक्षत्र एक जयपाल दो पांडु तीन ध्रुवसेन चार कंस पाँच । बहुरि तिनि पीछें एक अंगके धारक च्यार भये; सुभद्र एक यशोभद्र दो भद्रबाहु तीन लोहाचार्य चार । इनि पीछें एक अंगके पूर्ण ज्ञानीकी तौ व्युच्छित्ति भई अर अंगना एकदेश अर्थके ज्ञानी आचार्य भये तिनिमैं केतेकनिके नाम - अर्हदूलि, माघनंदि, धरसेन, पुष्त, भूतवलि, जिनचन्द्र, कुन्दकुन्द, उमास्वामी, समन्तभद्र, शिवकोटि, शिवायन, पूज्यपाद, वीरसेन, जिनसेन, नेमिचन्द्र इत्यादि । बहुरि तिनि पीछें तिनिकी परिपाटीमैं आचार्य भये तिनि अर्थका व्युच्छेद नहीं भया, ऐसैं दिगंबरनिके संप्रदाय मैं प्ररूपणा यथार्थ है। बहुरि अन्य श्वेताम्बरादिक वर्द्धमानस्वामीतैं परंपरा मिला है सो कल्पित है जातैं भद्रबाहु स्वामी पीछें केई मुनिकालमै भ्रष्ट भये ते अर्द्धफालक कहाये तिनिकी संप्रदायमैं श्वेताम्बर भये, तिनिमैं देवगणनामा साधु तिनिकी संप्रदायम भया है तानें सूत्र रचे हैं सो तिनिमै शिथिलाचार पोषनेकूं कल्पित कथा तथा कल्पित आचरणकी कथनी करी है सो प्रमाणभूत नाहीं है। पंचमकालमै जैनाभासनिकै शिथिलाचारकी बाहुल्यता है सो अष्टपाहुडमें सूत्रपाडुडकी भाषावचनिका । युक्त है इस कालमै सांचा मोक्षमार्गकी विरलता है तातैं शिथिलाचारीनिकै सांचा मोक्षमार्ग कहां तै होय ऐसा जाननां । अब इहां कछूक द्वादशांगसूत्र तथा अंगवाह्यश्रुतका वर्णन लिखिये है; - तहां तीर्थकरके मुखतैं उपजी जो सर्व भाषामय दिव्यध्वनि तांकूं सुनिकरि च्यार ज्ञान सप्तऋद्धिके घारक गणघर देवनिर्नै अक्षर पदमय सूत्ररचना करी । तहां सूत्रदोय प्रकार है; - एक अंग दूसरा अंगवाह्य । तिनके अपुनरुक्त अक्षरनिकी संख्या वीस अंकनि प्रमाण है ते अंक एक घाटि इकट्ठी प्रमाण हैं । ते अंक - एक आठ चार चार छः सात चार चार शून्य सात तीन सात शून्य नौ पाँच पाँच एक छः एक पाँच एते अक्षर हैं । तिनिके पद करिये तब एक मध्यपदके अक्षर सौलासे चौतीस कोडि तियासीलाख सात हजार आठसै अठ्यासी कहे हैं तिनिका भाग दिये एकसौ वारह कोडि तियासीलाख अठावन हजार पांच इतनें पावैं येते पदहैं ते तौ बारह अंगरूप सूत्रके पदहैं। अर अवशेप वीस अंकशिमैं अक्षर रहे ते अंगवाह्य सूत्र कहिये, ते आठ कोडि एक लाख आठ हजार एकसौ पिचहत्तर अक्षर हैं तिनि अक्षरनिए कौदह प्रकीर्णकरूप सूत्ररचना है । अब सत्र द्वादशांगरूप सूत्ररचनाके नाम अर पद संख्या लिखिए है; - तहां प्रथम अंग आचारांग है तामैं मुनीश्वर निके आचारका निरूपण है ताके पद अठारह हजार हैं । बहुरि दूसरा सूत्रकृत अंग ताविपैं ज्ञानका विनय आदिक अथवा धर्मक्रियामैं स्वमत परमतकी क्रियाका विशेषका निरूपण है याँके पद छत्तीस हजार हैं । बहुरि तीसरा स्थान अंग है ताविषै पदार्थनिका एक आदि स्थाननिका निरू पण है जैसैं जीव सामान्य करि एकप्रकार विशेषकरि दोय प्रकार तीन प्रकार इत्यादि ऐसें स्थान कहे हैं याके पद वियालीस हजार हैं। बहुरि चौथा सममाय अंग है याविषै जीवादिक छह द्रव्यनिका द्रव्य क्षेत्र पंडित जयचंदजी छावड़ा विरचितकालादि करि वर्णन है याके पद एक लाख चौसठि हजार हैं। पांचमां व्याख्याप्रज्ञप्ति अंग है याविषै जीवके अस्ति नास्ति आदिक साठि हजार प्रश्न गणाधरदेव तीर्थकरके निकट किये तिनिका वर्णन है बाके पद दोय लाख अठाईस हजार हैं। बहुरि छठा ज्ञातृधर्मकथा नामा अंग है यामैं तीर्थकरनिके धर्मकी कथा जीवादिक पदार्थनिका स्वभावका वर्णन तथा गणधरके प्रश्ननिका उत्तरका वर्णन है याके पद पांच लाख छप्पन हजार हैं । बहुरि सातवां उपासकाध्ययननाम अंग है याविषै ग्यारह प्रतिमा आदि श्रावकका आचारका वर्णन है याके पद ग्यारह लाख सत्तर हजार हैं । बहुरि आठमां अंतकृतदशांगनामा अंग हैं याविषै एक एक तीर्थंकर के वारें दशदश अंतकृत केवली भये तिनिका वर्णन है याके पद तेईस लाख अठाईस हजार हैं । बहुरि नवमां अनुत्तरोपपादकनामा अंग है याविपैं एक एक तीर्थकरकै बारें दशदश महामुनि घोर उपसर्ग सहि अनुत्तर विमाननिमैं उपजे तिनिका वर्णन है याके पद बाणवै लाख चवालीस हजार हैं। बहुरि दशमां प्रश्न व्याकरणनाम अंग है। अनागत कालसंबंधी शुभाशुभका प्रश्न कोई करे ताक कहनेका उपायका वर्णन हैं तथा आक्षेपणी विक्षेपणी संवेदनी निर्वेदनी इनि च्यार कथानिका भी या अंगमैं वर्णन है याके पद तिराणवैं लाख सोलह हजार हैं । बहुरि ग्यारमां विपाकसूत्र नामा अंग है यावि कर्मका उदयका तीव्र मंद अनुभागका द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा लिये वर्णन है याके पद एक कोडि चौरासी लाख हैं । ऐसें ग्यारह अंग हैं तिनिके पदनिकी संख्याका जोड़ दिये च्यार कोडि पंदरह लाख दोय हजार पद होय हैं । बहुरि बारमां दृष्टिवादनामा अंग ताविषै मिथ्यादर्शनसंबंधी तीनसै तरेसठि कुवाद हैं तिनिका वर्णन है पाके पद एक सौ आठ कोडि अडसठि लाख छप्पनहजार पांच पद हैं। या बारमा अंगका पांच अधिकार हैं; - परिकर्म एक सूत्र दो प्रथमानुयोग तीन पूर्वगत चार चूलिका पाँच ऐसें । तहां परिकर्मविषै गणितके करण सूत्र हैं ताके पांच भेद हैं; - तहां चन्द्रप्रज्ञप्ति प्रथम है तामैं चन्द्रमाका गमनादिक परिवार वृद्धि हानि ग्रह आदिका वर्णन है याके पद छत्तीस लाख पांच हजार हैं । बहुरि दूजा सूर्यप्रज्ञप्ति है यामैं सूर्यकी ऋद्धि परिवार गमन आदिका वर्णन है याके पद पांच लाख तीन हजार हैं। बहुरि तीजा जंबूद्वीपप्रज्ञप्ति है यामैं जंबूद्वीपसंबंधी मेरु गिरि क्षेत्र कुलाचल आदिका वर्णन है याकै पद तीन लाख पचीस हजार है । बहुरि चौथा द्वीपसागरप्रज्ञप्ति है यामैं द्वीपसागरका स्वरूप तथा तहां तिष्ठै ज्योतिषी व्यंतर भवनवासी देवनिके आवास तथा तहां तिष्ठै जिनमंदिरनिका वर्णन है याके पद बावन लाख छत्तीस हजार हैं । बहुरि पांचमां व्याख्याप्रज्ञप्ति है याविषै जीव अजीव पदार्थनिका प्रमाणका वर्णन है याके पद चौरासी लाख छत्तीस हजार हैं। ऐसैं परिकर्मके पांच भेदनिके पद जोड़े एक कोडि इक्यासी लाख पांच हजार हैं। बहुरि बारमां अंगका दूजा भेद सूत्र नाम है ताविषै मिथ्यादर्शनसंबंधी तीनसै तरेसठि कुवाद तिनिकी पूर्वपक्ष लेकरि तिनिका जीव पदार्थपरि लगावनां आदि वर्णन है याके भेद अठ्यासी लाख हैं। बहुरि बारमां अंगका तीजा भेद प्रथमानुयोग है या विषै प्रथम जीवकूं उपदेशयोग्य तीर्थकर आदि तरेसठि शलाका पुरुषनिका वर्णन है याके पद पांच हजार हैं । बहुरि बारमां अंगका चौथा भेद पूर्वगत है, ताके चौदह भेद हैं तहां प्रथम उत्पाद नामा है ताविषै जीव आदि वस्तुनिकै उत्पाद व्यय ध्रौव्य आदि अनेक धर्मनिकी अपेक्षा भेद वर्णन है याके पद एक कोडि हैं । बहुरि दूजा अप्रायणीनाम पूर्व है याविषै सातसै सुनय दुर्नयका अर षद्रव्य पंडित जयचंद्रजी छावड़ा विरचितसप्त तत्व नव पदार्थनिका वर्णन है याके छिनवै लाख पद हैं। बहुरि तीजा वीर्यानुवादनाम पूर्व है याविषै षट् द्रव्यनिकी शक्तिरूप वीर्यका बर्णन है याके पद सत्तरि लाख हैं। बहुरि चौथा अस्तिनास्ति प्रवाद - नामा पूर्व है या विषै जीवादिक वस्तुका स्वरूप द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा अस्ति पररूप द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा नास्ति आदि अनेक धर्मनिविषै विधि निषेध करि सप्तभंगकरि कथंचित् विरोध मेटनें रूप मुख्य गौण करि वर्णन है याके पद साठि लाख हैं। बहुरि ज्ञानप्रवादनामा पांचमां पूर्व है यामैं ज्ञानके भेदनिका स्वरूप संख्या विषय फल आदिका वर्णन है याके पद एक घाटि कोडि हैं । बहुरि छठा सत्यप्रवादनामा पूर्व है या विषै सत्य असत्य आदिक वचननिकी अनेक प्रकार प्रवृत्ति है ताका वर्णन है याके पद एक कोडि छह हैं । बहुरि सातमां आत्मप्रवादनामा पूर्व है याविषै आत्मा जो जीव पदार्थ है ताका कर्त्ता भोक्ता आदि अनेक धर्मनिका निश्चय व्यवहार नय अपेक्षा वर्णन है याके पद छव्वीस कोडि हैं । बहुरि कर्मप्रवाद नामा आठमां पूर्व है याविषै ज्ञानावरण आदि आठ कर्मनिका बंध सत्व उदय उदीरणपणा आदिका तथा क्रियारूप कर्मनिका वर्णन है याके पद एक कोडि अस्सी लाख हैं । बहुरि प्रत्याख्याननामा नवमां पूर्व है यामैं पापके त्यागका अनेक प्रकार करि वर्णन है याके पद चौरासी लाख हैं। बहुरि दशमां विद्यानुवादनामा पूर्व है यामैं सातस क्षुद्रविद्या अर पांचसै महाविद्या इनिका स्वरूप साधन मंत्रादिक अर सिद्ध भये इनिका फलका वर्णन है तथा अष्टांग निमित्त ज्ञानका वर्णन हैं याके पद एक कोडि दश लाख हैं बहुरि कल्याणवादनामा ग्यारवां पूर्व है यामैं तीर्थकर चक्रवर्त्ती आदिके गर्भ आदिकल्याणका उत्सव तथा तिसके कारण षोडश भावनादिके तपश्चरणादिक तथा चन्द्रमा सूर्याअष्टपाहुडमें सूत्रपाहुडकी भाषावचनिका । दिकके गमनविशेष आदिकका वर्णन है याके पद छबीस कोडि हैं बहुरि प्राणवादनामा बारमा पूर्व है यामैं आठ प्रकार वैद्यक तथा भूतादिक व्याधि दूरि करनेके मंत्रादिक तथा विष दूर करने के उपाय तथा स्वरोदय आदिका वर्णन है याके तेरह कोडि पद हैं। बहुरि क्रियाविशालनामा तेरमां पूर्व है यामैं संगीतशास्त्र छंद अलंकारादिक तथा चौसठि कला, गर्भाधानादि चौरासी किया, सम्यग्दर्शन आदि एकसौ आठ क्रिया, देववंदनादि पच्चीस क्रिया, नित्य नैमित्तिक क्रिया इत्यादिका वर्णन है, याके पाद्र नव कोडि हैं। चौदमां त्रिलोकविंदुसार नामा पूर्व है या विषै तीन लोकका स्वरूप अर बीजगणितका स्वरूप तथा मोक्षका स्वरूप तथा मोक्षकी कारणभूत क्रियाका स्वरूप इत्यादिका वर्णन है याके पाद बारह कोडि पचास लाख हैं । ऐसें चौदह पूर्व हैं, इनिके सर्व पदनिका जोड़ पिच्याणवै कोडि पचास लाख है । बहुरि बारमां अंगका पांचमां चूळिका है ताके पांच भेद हैं तिनिके पद दोय कोडि नव लाख निवासी हजार दोयसै हैं । तहां जलगता चूलिकामैं जलका स्तंभन करनां जलमैं गमन करना । अग्निगता चूलि - कामैं अग्निस्तंभन करनां अग्निमें प्रवेश करनां अग्निका भक्षण करना इत्यादिके कारणभूत मंत्र तंत्रादिकका प्ररूपण है, याके पद दोय कोडि नवलाख निवासी हजार दोयसैं हैं । एते एते ही पद अन्य च्यार चूलिकाके जाननें । बहुरि दूजी स्थलगता चूलिका है याविषै मेरुपर्वत भूमि इत्यादि विषै प्रवेश करनां शीघ्र गमन करना इत्यादि क्रिया के कारण मंत्र तंत्र तपश्चरणादिकका प्ररूपण है। बहुरि तीजी मायागता चूलिका है तामैं मायामयी इंद्रजाल विक्रिया के कारणभूत मंत्र तंत्र तपश्चरणादिका प्ररूपण है। बहुरि चौथी रूपगता चूलिका है यामैं सिंह हाथी घोडा बैल हरिण इत्यादि अनेकप्रकार रूप पलटि लेनां ताके कारणभूत मंत्र तंत्र तपश्चरण आदिका प्ररूपणा है, तथा चित्राम काष्ठलेपादिकका लक्षण वर्णन है तथा धातु रसायनका निरूपण है । बहुरि पांचमी आकाशगता चूलिका है यामैं आकाशविषै गमनादिकके कारणभूत मंत्र यंत्र तंत्रादिकका प्ररूपण है। ऐसें बारमां अंग है। या प्रकार बारह अंग सूत्र हैं । बहुरि अंगबाह्य श्रुतके चौदह प्रकीर्णक हैं । तिनिमैं प्रथम प्रकीर्णक सामायिक नामा है, तात्रिनाम स्थापना द्रव्य क्षेत्र काल भाव भेदकरि छह प्रकार इत्यादिक सामायिकका विशेषकरि वर्णन है । बहुरि दूजा चतुर्विंशतिस्तव नाम प्रकीर्णक है ताविषै चौवीस तीर्थकर निकी महिमाका वर्णन है । बहुरि तीजा बंदनानाम प्रकीर्णक है तामैं एक तीर्थकरके आश्रय वंदना स्तुतिका वर्णन है । बहुरि चौथा प्रतिक्रमणनामा प्रकीर्णक हैं तामें सात प्रकारके प्रतिक्रमणका वर्णन है । बहुरि पांचमां वैनयिकनाम प्रकीर्णक है तामैं पंच प्रकारके विनयका वर्णन है । बहुरि छठा कृतिकर्मनामा प्रकीर्णक है तामैं अरहंत आदिककी वंदनाकी क्रियाका वर्णन है । बहुरि सातमां दशवैकालिकनामा प्रकीर्णक है तिसविषै मुनिका आचार आहारकी शुद्धता आदिका वर्णन है । बहुरि आठमां उत्तराध्ययननामा प्रकीर्णक है ताविषै परीषह उपसर्गका सहनेंका विधान वर्णन है । बहुरि नवमां कल्पव्यवहार नामा प्रकीर्णक है तामैं मुनिके योग्य आचरण अस् अयोग्य सेवनके प्रायश्चित तिनिका वर्णन है । बहुरि दशमां कल्पाकल्प नाम प्रकीर्णक है ताविषै मुनिकूं यह योग्य है यह अयोग्य है ऐसा द्रव्य क्षेत्र काल भावकी अपेक्षा वर्णन है । बहुरि ग्यारमां महाकल्पनामा प्रकीर्णक है तामैं जिनकल्पी मुनिकै प्रतिमायोग त्रिकालयोगका प्ररूपण है तथा स्थविरकल्पी मुनिनिकी प्रवृत्तिका वर्णन है । बहुरि बारमा
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आज रात मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये। राष्ट्रीय भूकंप केन्द्र के अनुसार रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4. 5 मापी गयी। भूकंप के झटके रात नौ बजकर आठ मिनट पर महसूस किये गये। भूकंप से झटके महसूस होते ही रोहतक में लोग घरों से बाहर आ गए साथ ही कुछ इलाकों में इमारतों में लगे शीशे भी टूट गए हैं। भूकंप का केन्द्र हरियाणा के राेहतक से 14 किलोमीटर दक्षिण पूर्व जमीन की सतह से पांच किलोमीटर गहराई में था। भूकंप अक्षांश 28. 8 औऱ देशान्तर 76. 7 पर दर्ज किया गया। इस बीच हरियाणा के रोहतक में एक घंटे से भी कम समय में एक और हल्का झटका महसूस किया गया। रोहतक में रात 10 बजे एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2. 9 मापी गयी। पिछले कई महीनों से दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिनों के अंतराल में भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। 12 और 13 अप्रैल को भी दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। 12 अप्रैल को आए भूकंप की तीव्रता 3. 5 थी, जबकि 13 अप्रैल को आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2. 7 थी. दोनों भूकंप के झटकों का केंद्र दिल्ली ही था। इसके बाद 10 मई को दोपहर में करीब 1. 45 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3. 5 बताई जा रही थी। 15 मई को दिल्ली में भूकंप का झटका महसूस किया गया। हालांकि, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता केवल 2. 2 थी।
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आज रात मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये। राष्ट्रीय भूकंप केन्द्र के अनुसार रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता चार. पाँच मापी गयी। भूकंप के झटके रात नौ बजकर आठ मिनट पर महसूस किये गये। भूकंप से झटके महसूस होते ही रोहतक में लोग घरों से बाहर आ गए साथ ही कुछ इलाकों में इमारतों में लगे शीशे भी टूट गए हैं। भूकंप का केन्द्र हरियाणा के राेहतक से चौदह किलोग्राममीटर दक्षिण पूर्व जमीन की सतह से पांच किलोमीटर गहराई में था। भूकंप अक्षांश अट्ठाईस. आठ औऱ देशान्तर छिहत्तर. सात पर दर्ज किया गया। इस बीच हरियाणा के रोहतक में एक घंटे से भी कम समय में एक और हल्का झटका महसूस किया गया। रोहतक में रात दस बजे एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता दो. नौ मापी गयी। पिछले कई महीनों से दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिनों के अंतराल में भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। बारह और तेरह अप्रैल को भी दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। बारह अप्रैल को आए भूकंप की तीव्रता तीन. पाँच थी, जबकि तेरह अप्रैल को आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर दो. सात थी. दोनों भूकंप के झटकों का केंद्र दिल्ली ही था। इसके बाद दस मई को दोपहर में करीब एक. पैंतालीस बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता तीन. पाँच बताई जा रही थी। पंद्रह मई को दिल्ली में भूकंप का झटका महसूस किया गया। हालांकि, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता केवल दो. दो थी।
चंडीगढ़, 23 जून . Haryana में ओल्ड पेंशन बहाली की मांग को लेकर पेंशन बहाली संघर्ष समिति के बैनर तले चलाई जा रही संकल्प साइकिल यात्रा Friday को Chandigarh पहुंची. राजभवन में राज्यपाल के संयुक्त सचिव को ज्ञापन देकर यात्रा का समापन किया गया. समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल के नेतृत्व में दो जून को नांगल चौधरी (महेंद्रगढ) से शुरू हुई पेंशन संकल्प साइकिल यात्रा 1400 किलोमीटर का सफर तय करके आज पंचकूला पहुंची. यहां प्रदेशभर से हजारों की संख्या में आए हुए कर्मचारियों व पेंशन भोगियों ने शक्ति प्रदर्शन किया. विजेंद्र धारीवाल ने प्रदेशभर से आए हुए कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा प्रदेश के सभी जिलों और रास्ते में आने वाले सभी गांवों से गुजरते हुए पंचकूला पहुंची है. यात्रा को सभी ग्राम पंचायतों, विभिन्न खापों, विभिन्न विभागों के संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आमजन का भरपूर समर्थन मिला है. धारीवाल ने कहा कि Member of parliament व विधायक शपथ लेते ही पेंशन का हकदार हो जाता है परंतु 30 से 35 साल तक सेवा देने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्त होने के बाद उसकी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली पेंशन क्यों प्रदान नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि ओल्ड पेंशन को बहाल करने के लिए सरकारा द्वारा बनाई गई कमेटी आजतक किसी नजीते पर पहुंचना तो दूर बैठक ही नहीं कर सकी है. सरकार इस मामले में लगातार टालमटोल कर रही है. पेंशन बहाली संघर्ष समिति Haryana के राज्य महासचिव ऋषि नैन ने बताया कि संघर्ष समिति लगातार सरकार से गुहार लगा चुकी है कि नेशनल पेंशन व्यवस्था बंद करके सरकारी सेवा में काम करने वाले गरीब मजदूर, किसान एवं दुकानदार के बेटे और बेटियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था ही लागू करें जो उनका संवैधानिक हक है, लेकिन Haryana सरकार अनसुना कर रही है और गलत बयानी कर मुद्दे को गुमराह करना चाहती है.
चंडीगढ़, तेईस जून . Haryana में ओल्ड पेंशन बहाली की मांग को लेकर पेंशन बहाली संघर्ष समिति के बैनर तले चलाई जा रही संकल्प साइकिल यात्रा Friday को Chandigarh पहुंची. राजभवन में राज्यपाल के संयुक्त सचिव को ज्ञापन देकर यात्रा का समापन किया गया. समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल के नेतृत्व में दो जून को नांगल चौधरी से शुरू हुई पेंशन संकल्प साइकिल यात्रा एक हज़ार चार सौ किलोग्राममीटर का सफर तय करके आज पंचकूला पहुंची. यहां प्रदेशभर से हजारों की संख्या में आए हुए कर्मचारियों व पेंशन भोगियों ने शक्ति प्रदर्शन किया. विजेंद्र धारीवाल ने प्रदेशभर से आए हुए कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा प्रदेश के सभी जिलों और रास्ते में आने वाले सभी गांवों से गुजरते हुए पंचकूला पहुंची है. यात्रा को सभी ग्राम पंचायतों, विभिन्न खापों, विभिन्न विभागों के संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आमजन का भरपूर समर्थन मिला है. धारीवाल ने कहा कि Member of parliament व विधायक शपथ लेते ही पेंशन का हकदार हो जाता है परंतु तीस से पैंतीस साल तक सेवा देने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्त होने के बाद उसकी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली पेंशन क्यों प्रदान नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि ओल्ड पेंशन को बहाल करने के लिए सरकारा द्वारा बनाई गई कमेटी आजतक किसी नजीते पर पहुंचना तो दूर बैठक ही नहीं कर सकी है. सरकार इस मामले में लगातार टालमटोल कर रही है. पेंशन बहाली संघर्ष समिति Haryana के राज्य महासचिव ऋषि नैन ने बताया कि संघर्ष समिति लगातार सरकार से गुहार लगा चुकी है कि नेशनल पेंशन व्यवस्था बंद करके सरकारी सेवा में काम करने वाले गरीब मजदूर, किसान एवं दुकानदार के बेटे और बेटियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था ही लागू करें जो उनका संवैधानिक हक है, लेकिन Haryana सरकार अनसुना कर रही है और गलत बयानी कर मुद्दे को गुमराह करना चाहती है.
अपनी उद्यम शक्ति और महती ऊर्जा के द्वारा डैरेन सैमी किसी भी काम को बहुत अच्छे तरीके से पूरा करने में सक्षम रहेंगे। डैरेन सैमी के उद्देश्य की दृढ़ता सराही जायेगी। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण विपरीत परिस्थिति में भी डैरेन सैमी को मति भ्रम नहीं होगा और सही काम करेंगे। डैरेन सैमी का सामाजिक दायरा बढ़ेगा और डैरेन सैमी की प्रतिष्ठा में भी बढोत्तरी होगी। काफी भ्रमण करना पड़ेगा। भाई बहिनों से संबंध अच्छे रहेंगे। संचार माध्यम व्दारा डैरेन सैमी को उत्साहवर्धक समाचार मिलेगा। व्यापार और लेन देन के सौदों की बहुत अच्छे रहने की संभावना है। अगर नौकरी में हैं तो शीघ्र पदोन्नति होनी चाहिये। इस वर्ष यह अवधि डैरेन सैमी के लिये सर्वश्रेष्ठ सिद्ध होगी। डैरेन सैमी प्रचुर सफलता और सम्मान प्राप्त करेंगे। इस अवधि का उपयोग डैरेन सैमी मन को एकाग्र करने समाधि और योग क्रियाओं को करने के लिए भी कर सकते हैं। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र के किसी मुखिया से भी डैरेन सैमी का सम्पर्क हो सकता है। अपने काम को पूरा करने के लिये डैरेन सैमी में प्रचुर उत्साह और विश्वास रहेगा। परिवारिक माहौल से भी सहारा मिलेगा। लम्बी यात्रा सफलदायक सिद्ध होगी। परिवार में नये सदस्य की बढोत्तरी होगी। कोई महत्वपूर्ण चीज खोने का खतरा बना रहेगा। वरिष्ठ जनों या सत्ताधारी अफसरों से डैरेन सैमी के संबंध बिगड़ सकते हैं। लेन देन के व्यापार में हानि होने की भी संभावना है। डैरेन सैमी के मित्र या सहयोगी अपना वचन नहीं निभाएंगें। परिवारजनों के व्यवहार में भी फर्क आ जाएगा। मानसिक वेदना की स्थिति डैरेन सैमी के व्यवहार से परिलक्षित होती रहेगी। वैसे इस अवधि में गूढ मान या परामनोविाान आदि क्षेत्रों से कुछ मदद मिल सकती है। अच्छा यही होगा कि अपनी योग्यता और प्रतिभा पर ही निर्भर करें। अगर वसीयत प्राप्ति के इच्छुक है तो वह अचानक प्राप्त होकर डैरेन सैमी को चमत्कृत कर देगी। किसी की मौत की बुरी खबर मिल सकती है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यापार या व्यवसाय में डैरेन सैमी बहुत अच्छा काम करेंगे। व्यापार का विस्तार भी हो सकता है। इस अवधि के दौरान डैरेन सैमी पूरी तरह कर्मठ रहेंगे। वरिष्ठ लोगों या सत्तावान व्यक्तियों के साथ डैरेन सैमी के संबंधों में सुधार आयेगा। पारिवारिक माहौल संतोषप्रद रहेगा। डैरेन सैमी को वाहन भी प्राप्त हो सकता है। विदेशों से अच्छी खबर मिलने की संभावना है। घर में किसी शुभ कृत्य का आयोजन होगा। किसी संस्थान के प्रमुख व्यक्ति के डैरेन सैमी सम्पर्क में आयेंगे। औरों के प्रति जनकल्याण की भावना से काम करने की प्रवृति होगी। किसी नयी सृजनात्मक उपलब्धि के कारण डैरेन सैमी को मान्यता मिल सकती है। वैसे इस अवधि में डैरेन सैमी की प्रतिष्ठा बढेंगी और सम्मान में इजाफा होगा। डैरेन सैमी अति सम्मानीय व्यक्ति समझे जायेंगे। यात्रा का बहुत महत्व होगा। डैरेन सैमी की धर्म एवम् अध्यात्म की ओर झुकने की प्रवृति में भावनात्मक गहराई का समावेश होगा। पारिवारिक जीवन हर्षोल्लास से सम्पन्न रहेगा। परिवार में कोई मंगल कृत्य होगा। इस अवधि का पूरा लाभ उठाने का प्रयत्न करें। किसी बदनामी देने वाले काण्ड में फंसने के कारण डैरेन सैमी की प्रतिष्ठा पर आंच आयेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह कोई अच्छा समय नहीं है। अचानक धन प्रात की संभावना है। लेकिन साथ ही साथ खर्चे भी बढेंगे। गुप्त और निगूढ सुखों को भोगने वाली प्रवृति पर अंकुश लगाये नहीं तो बड़ी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वैसे परिवारजनों का सहयोग पूरा रहेगा। यद्यपि कभी कभी मतभेद भी रह सकता है। जहां तक संभव हो यात्राएं न करें। इस अवधि में डैरेन सैमी बहुत क्रियाशील एवम् व्यस्त रहेंगे। व्यापार या नौकरी में सफलता प्राप्त करेंगे और अपने वरिष्ठ अधिकारियों के कृपाभाजन रहेंगे। यह समय डैरेन सैमी की कर्मठता का समय सिद्ध होगा। व्यापार के कारण सफलदायक यात्राएं करेंगे। सब लिहाज से यह समय काफी संतोषप्रद सिद्ध होगा। इस समय में डैरेन सैमी अपनी सारी आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पा जायेंगे। यह बहुत अच्छा समय है। डैरेन सैमी सुखी और विलासपूर्ण जीवन व्यतीत करेंगे। विलास सामग्री पर भी खर्च करेंगे। मां बाप से संबंध बहुत मधुर रहेंगे। अगर नौकरी करते हैं तो पदोन्नति प्राप्त करेंगे। शत्रुओं पर विजय पायेंगे। आमदनी में काफी इजाफा होगा। नित्य चर्चा में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। शत्रु छवि बिगाड़ने का प्रयत्न करेंगे। सहयोगियों तथा भागीदारों से विवाद होने की संभावना है। पारिवारिक जीवन भी सुखद नहीं रहेगा। अपनी तन्दुरस्ती का ख्याल रखें। यात्राओं से निराशा मिलेगी। साथी के स्वास्थ्य के कारण चिन्तित रहेंगे। इस दौरान डैरेन सैमी का जीवन समस्याओं एवम् परेशानियों से आक्रान्त रहेगा।
अपनी उद्यम शक्ति और महती ऊर्जा के द्वारा डैरेन सैमी किसी भी काम को बहुत अच्छे तरीके से पूरा करने में सक्षम रहेंगे। डैरेन सैमी के उद्देश्य की दृढ़ता सराही जायेगी। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण विपरीत परिस्थिति में भी डैरेन सैमी को मति भ्रम नहीं होगा और सही काम करेंगे। डैरेन सैमी का सामाजिक दायरा बढ़ेगा और डैरेन सैमी की प्रतिष्ठा में भी बढोत्तरी होगी। काफी भ्रमण करना पड़ेगा। भाई बहिनों से संबंध अच्छे रहेंगे। संचार माध्यम व्दारा डैरेन सैमी को उत्साहवर्धक समाचार मिलेगा। व्यापार और लेन देन के सौदों की बहुत अच्छे रहने की संभावना है। अगर नौकरी में हैं तो शीघ्र पदोन्नति होनी चाहिये। इस वर्ष यह अवधि डैरेन सैमी के लिये सर्वश्रेष्ठ सिद्ध होगी। डैरेन सैमी प्रचुर सफलता और सम्मान प्राप्त करेंगे। इस अवधि का उपयोग डैरेन सैमी मन को एकाग्र करने समाधि और योग क्रियाओं को करने के लिए भी कर सकते हैं। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र के किसी मुखिया से भी डैरेन सैमी का सम्पर्क हो सकता है। अपने काम को पूरा करने के लिये डैरेन सैमी में प्रचुर उत्साह और विश्वास रहेगा। परिवारिक माहौल से भी सहारा मिलेगा। लम्बी यात्रा सफलदायक सिद्ध होगी। परिवार में नये सदस्य की बढोत्तरी होगी। कोई महत्वपूर्ण चीज खोने का खतरा बना रहेगा। वरिष्ठ जनों या सत्ताधारी अफसरों से डैरेन सैमी के संबंध बिगड़ सकते हैं। लेन देन के व्यापार में हानि होने की भी संभावना है। डैरेन सैमी के मित्र या सहयोगी अपना वचन नहीं निभाएंगें। परिवारजनों के व्यवहार में भी फर्क आ जाएगा। मानसिक वेदना की स्थिति डैरेन सैमी के व्यवहार से परिलक्षित होती रहेगी। वैसे इस अवधि में गूढ मान या परामनोविाान आदि क्षेत्रों से कुछ मदद मिल सकती है। अच्छा यही होगा कि अपनी योग्यता और प्रतिभा पर ही निर्भर करें। अगर वसीयत प्राप्ति के इच्छुक है तो वह अचानक प्राप्त होकर डैरेन सैमी को चमत्कृत कर देगी। किसी की मौत की बुरी खबर मिल सकती है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यापार या व्यवसाय में डैरेन सैमी बहुत अच्छा काम करेंगे। व्यापार का विस्तार भी हो सकता है। इस अवधि के दौरान डैरेन सैमी पूरी तरह कर्मठ रहेंगे। वरिष्ठ लोगों या सत्तावान व्यक्तियों के साथ डैरेन सैमी के संबंधों में सुधार आयेगा। पारिवारिक माहौल संतोषप्रद रहेगा। डैरेन सैमी को वाहन भी प्राप्त हो सकता है। विदेशों से अच्छी खबर मिलने की संभावना है। घर में किसी शुभ कृत्य का आयोजन होगा। किसी संस्थान के प्रमुख व्यक्ति के डैरेन सैमी सम्पर्क में आयेंगे। औरों के प्रति जनकल्याण की भावना से काम करने की प्रवृति होगी। किसी नयी सृजनात्मक उपलब्धि के कारण डैरेन सैमी को मान्यता मिल सकती है। वैसे इस अवधि में डैरेन सैमी की प्रतिष्ठा बढेंगी और सम्मान में इजाफा होगा। डैरेन सैमी अति सम्मानीय व्यक्ति समझे जायेंगे। यात्रा का बहुत महत्व होगा। डैरेन सैमी की धर्म एवम् अध्यात्म की ओर झुकने की प्रवृति में भावनात्मक गहराई का समावेश होगा। पारिवारिक जीवन हर्षोल्लास से सम्पन्न रहेगा। परिवार में कोई मंगल कृत्य होगा। इस अवधि का पूरा लाभ उठाने का प्रयत्न करें। किसी बदनामी देने वाले काण्ड में फंसने के कारण डैरेन सैमी की प्रतिष्ठा पर आंच आयेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह कोई अच्छा समय नहीं है। अचानक धन प्रात की संभावना है। लेकिन साथ ही साथ खर्चे भी बढेंगे। गुप्त और निगूढ सुखों को भोगने वाली प्रवृति पर अंकुश लगाये नहीं तो बड़ी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वैसे परिवारजनों का सहयोग पूरा रहेगा। यद्यपि कभी कभी मतभेद भी रह सकता है। जहां तक संभव हो यात्राएं न करें। इस अवधि में डैरेन सैमी बहुत क्रियाशील एवम् व्यस्त रहेंगे। व्यापार या नौकरी में सफलता प्राप्त करेंगे और अपने वरिष्ठ अधिकारियों के कृपाभाजन रहेंगे। यह समय डैरेन सैमी की कर्मठता का समय सिद्ध होगा। व्यापार के कारण सफलदायक यात्राएं करेंगे। सब लिहाज से यह समय काफी संतोषप्रद सिद्ध होगा। इस समय में डैरेन सैमी अपनी सारी आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पा जायेंगे। यह बहुत अच्छा समय है। डैरेन सैमी सुखी और विलासपूर्ण जीवन व्यतीत करेंगे। विलास सामग्री पर भी खर्च करेंगे। मां बाप से संबंध बहुत मधुर रहेंगे। अगर नौकरी करते हैं तो पदोन्नति प्राप्त करेंगे। शत्रुओं पर विजय पायेंगे। आमदनी में काफी इजाफा होगा। नित्य चर्चा में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। शत्रु छवि बिगाड़ने का प्रयत्न करेंगे। सहयोगियों तथा भागीदारों से विवाद होने की संभावना है। पारिवारिक जीवन भी सुखद नहीं रहेगा। अपनी तन्दुरस्ती का ख्याल रखें। यात्राओं से निराशा मिलेगी। साथी के स्वास्थ्य के कारण चिन्तित रहेंगे। इस दौरान डैरेन सैमी का जीवन समस्याओं एवम् परेशानियों से आक्रान्त रहेगा।
तुरंत गुलाब की तरह चेहरा चमकाता है टमाटर का मास्क.... आयुर्वेद में अमृत है नीम.... . इन आसान तरीका से करे शुगर को नियंत्रित.... इन लोगो को 15 साल बाद मिलेगी पूरी पेंशन....
तुरंत गुलाब की तरह चेहरा चमकाता है टमाटर का मास्क.... आयुर्वेद में अमृत है नीम.... . इन आसान तरीका से करे शुगर को नियंत्रित.... इन लोगो को पंद्रह साल बाद मिलेगी पूरी पेंशन....
LUCKNOW : लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन कोरोना काल में कैंपस में क्लासेस कैसे हों, इस पर कई योजनाएं बना रहा है। एलयू नई तरह से क्लासेस चलाने पर विचार कर रहा है। इसमें पहला हाईब्रिड और दूसरा फिलिप क्लासेस है। इसके तहत स्टूडेंट्स कैंपस भी आ सकेंगे और ऑनलाइन क्लासेस भी अटेंड कर सकेंगे। योजना एलयू वीसी प्रो। आलोक कुमार राय द्वारा बनाई जा रही है ताकि कैंपस में स्टूडेंट्स कम से कम आएं। इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेस और वीडियो लेक्चर रिकॉर्डिंग के लिए करीब तीन रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाने की योजना बनाई जा रही है। यूनिवर्सिटी के सूत्रों के मुताबिक ओल्ड और न्यू कैंपस में करीब तीन स्टूडियो बनाने की योजना बनाई जा रही है। एक स्टूडियो को बनाने में करीब 20 से 25 लाख की लागत आएगी। स्टूडियो में हाईटेक कैमरे व अन्य रिकॉर्डिंग के हाईटेक टूल्स होंगे, जिससे प्रोफेसर अपने वीडियो लेक्चर रिकॉर्ड कर सकेंगे। साथ ही यूनिवर्सिटी को एक नई दिशा में ले जाने की जानकारी के अहम बिन्दुओं पर वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे। रिकॉर्डिंग वीडियो से न केवल शिक्षा का बल्कि स्टूडेंट्स का भी विकास होगा। हाइब्रिड क्लासेस में आधे स्टूडेंट्स घर से तो आधे कैंपस आकर ऑनलाइन क्लासेस कर सकेंगे। हालांकि ये कार्य रोटेशन वाइस होगा, जिससे हर स्टूडेंट्स को कैंपस में क्लास करने का मौका मिल सके। इसमें स्टूडेंट्स घर बैठकर ऑनलाइन क्लासेस करेंगे। क्लासेस के दौरान कोर्स के टॉपिक से संबंधित कोई भी समस्या आने पर वे कैंपस में आकर प्रोफेसर से सवाल पूछ सकेंगे। इसमें भी एक दिन में कितने स्टूडेंट्स क्वारी के लिए कैंपस आ सकेंगे ये एलयू प्रशासन निर्णय करेगा।
LUCKNOW : लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन कोरोना काल में कैंपस में क्लासेस कैसे हों, इस पर कई योजनाएं बना रहा है। एलयू नई तरह से क्लासेस चलाने पर विचार कर रहा है। इसमें पहला हाईब्रिड और दूसरा फिलिप क्लासेस है। इसके तहत स्टूडेंट्स कैंपस भी आ सकेंगे और ऑनलाइन क्लासेस भी अटेंड कर सकेंगे। योजना एलयू वीसी प्रो। आलोक कुमार राय द्वारा बनाई जा रही है ताकि कैंपस में स्टूडेंट्स कम से कम आएं। इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेस और वीडियो लेक्चर रिकॉर्डिंग के लिए करीब तीन रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाने की योजना बनाई जा रही है। यूनिवर्सिटी के सूत्रों के मुताबिक ओल्ड और न्यू कैंपस में करीब तीन स्टूडियो बनाने की योजना बनाई जा रही है। एक स्टूडियो को बनाने में करीब बीस से पच्चीस लाख की लागत आएगी। स्टूडियो में हाईटेक कैमरे व अन्य रिकॉर्डिंग के हाईटेक टूल्स होंगे, जिससे प्रोफेसर अपने वीडियो लेक्चर रिकॉर्ड कर सकेंगे। साथ ही यूनिवर्सिटी को एक नई दिशा में ले जाने की जानकारी के अहम बिन्दुओं पर वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे। रिकॉर्डिंग वीडियो से न केवल शिक्षा का बल्कि स्टूडेंट्स का भी विकास होगा। हाइब्रिड क्लासेस में आधे स्टूडेंट्स घर से तो आधे कैंपस आकर ऑनलाइन क्लासेस कर सकेंगे। हालांकि ये कार्य रोटेशन वाइस होगा, जिससे हर स्टूडेंट्स को कैंपस में क्लास करने का मौका मिल सके। इसमें स्टूडेंट्स घर बैठकर ऑनलाइन क्लासेस करेंगे। क्लासेस के दौरान कोर्स के टॉपिक से संबंधित कोई भी समस्या आने पर वे कैंपस में आकर प्रोफेसर से सवाल पूछ सकेंगे। इसमें भी एक दिन में कितने स्टूडेंट्स क्वारी के लिए कैंपस आ सकेंगे ये एलयू प्रशासन निर्णय करेगा।
अल्मोड़ा पहुंचे सांसद अजय टम्टा ने किसानों के तीन बिलो के वापसी को लेकर कहा कि किसानों के बहुत से संगठन किसानों बिलो को लेकर पक्ष में थे। लेकिन कुछ ही संगठन इस बिल को लेकर खुश नहीं थे। फिर भी प्रधानमंत्री ने जो फैसला लिया है वह देश हित को देखते हुए लिया है। G-7 की अहम बैठक, आसियान देशों को बुला रहा ब्रिटेन, एशिया में चीन को घेरने का प्लान ! किसान आंदोलन से दिल्ली की आवाजाही से लेकर आम जनमानस को जो परेशानियों हो रही थी वो भी अब सुलझ जाएंगी । उत्तराखंड के साथ अन्य बोर्डरों की आवाजाही की परेशानियों भी दूर होंगी।
अल्मोड़ा पहुंचे सांसद अजय टम्टा ने किसानों के तीन बिलो के वापसी को लेकर कहा कि किसानों के बहुत से संगठन किसानों बिलो को लेकर पक्ष में थे। लेकिन कुछ ही संगठन इस बिल को लेकर खुश नहीं थे। फिर भी प्रधानमंत्री ने जो फैसला लिया है वह देश हित को देखते हुए लिया है। G-सात की अहम बैठक, आसियान देशों को बुला रहा ब्रिटेन, एशिया में चीन को घेरने का प्लान ! किसान आंदोलन से दिल्ली की आवाजाही से लेकर आम जनमानस को जो परेशानियों हो रही थी वो भी अब सुलझ जाएंगी । उत्तराखंड के साथ अन्य बोर्डरों की आवाजाही की परेशानियों भी दूर होंगी।
(active tab) राज - दंड या विप्र - दंड? कई ऐतिहासिक घटनाक्रम का साक्षी है 'पुराना' संसद भवन, एक नज़र इतिहास के पन्नों पर..! दो टूकः क्या पांव तले खिसकती ज़मीन को मेगा-इवेंट्स की चकाचौंध बचा पाएगी? 'नई संसद में नए संविधान के साथ प्रवेश की मांग देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान का अनादर' भारतीय आर्किटेक्चर के लिए अलग-अलग विषयों के समायोजन का वक़्त?
राज - दंड या विप्र - दंड? कई ऐतिहासिक घटनाक्रम का साक्षी है 'पुराना' संसद भवन, एक नज़र इतिहास के पन्नों पर..! दो टूकः क्या पांव तले खिसकती ज़मीन को मेगा-इवेंट्स की चकाचौंध बचा पाएगी? 'नई संसद में नए संविधान के साथ प्रवेश की मांग देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान का अनादर' भारतीय आर्किटेक्चर के लिए अलग-अलग विषयों के समायोजन का वक़्त?
एंटरटेनमेंट डेस्क । एक्ट्रेस और डांसर नम्रता मल्ला अपने बोल्ड फोटोशूट की वजह से चर्चाओं में रहती हैं। भोजपुरी म्यूजिक वीडियो में धमाल मचाने वाली इस एक्ट्रेस ने एक बार फिर अपने बिकिनी लुक से फैंस को एक्साइटेड कर दिया है। लाइफस्टाइल डेस्क. छोटे पर्दे की 'बालिका वधू' अविका गौर (Avika Gor) साउथ में पैर जमा चुकी हैं अब वो बॉलीवुड में '1920 हॉरर ऑफ द हार्ट्स' के जरिए डेब्यू करने वाली हैं। एक्टिंग के साथ-साथ उनके स्टाइल के भी चर्चे होते हैं। आइए देखते हैं उनके 10 लुक्स। Adipurush And These films Flop After Bumper Opening. ओम राउत की फिल्म आदिपुरुष बंपर ओपनिंग के बाद भी फ्लॉप साबित हुई। आपको बता दें कि आदिपुरुष के अलावा ऐसी और भी फिल्में जिन्हें शानदार ओपनिंग तो मिली पर ये बॉक्स ऑफिस परऔंधे मुंह गिरी। एंटरटेनमेंट डेस्क. काजोल इन दिनों अपनी अपकमिंग वेब सीरीज 'लस्ट स्टोरीज 2' के प्रमोशन में वयस्त हैं। उन्होंने इस दौरान 1994 में आई डायरेक्टर नरेश मल्होत्रा की फिल्म 'ये दिल्लगी' के गाने 'होंठों पे बस तेरा नाम है' की शूटिंग को याद किया। How To Get Rid Of Ants: बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और घर में चीटियों का आतंक भी। अगर आप भी किचन और पूरे घर में चीटियों की मौजदूगी से परेशान हो गए हैं तो हम आपके लिए खास 8 घरेलू उपाय लेकर आए हैं। इन घरेलू उपचारों से आप चींटियों को अलविदा कहें। एंटरटेनमेंट डेस्क. टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस निया शर्मा ने हाल ही में अपने लेटेस्ट फोटोशूट की झलक फैंस को दिखाई। इसमें वे बेहद बोल्ड अंदाज में नजर आईं, जिसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स उन पर भड़क गए। रिलेशनशिप डेस्क. कहते हैं शादी उसी से करो जिससे प्यार करते हो। प्रेमी-प्रेमिका को लगता है कि शादी करके वो अरेंज मैरेज करने वाले कपल से ज्यादा खुश रहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हैं लव मैरेज करके भी कपल पछताते हैं। आइए जानते हैं इसके असफल होने के पीछे की वजह। प्रिया सिंह ने जयपुर के साइबर थाने में केस दर्ज कराया है। कोई शख्स उनके नाम से फेक आईडी अकाउंट पर अश्लील फोटो वीडियो शेयर कर रहा है। पुलिस ने बताया कि फिलहाल केस की जांच पड़ताल की जा रही है। blood donation after tattoo: सदियों से शरीर पर टैटू बनवाने का चलन रहा है। कोई अपने लव वन का नाम शरीर पर गुदवाता है, तो कोई भगवान की तस्वीर, नाम या कोई अनोखी डिजाइन बनाता है, लेकिन क्या टैटू करवाने वाले लोग ब्लड डोनेट कर सकते हैं? ट्रेंडिंग डेस्क : कर्नाटक में एक कोबरा अपनी आखिरी सांसे गिन रहा था। उसे जैसे-जैसे कर डॉक्टर के पास लाया गया। जहां ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली गई। इस कांप ने एक प्लास्टिक का डिब्बा निगल लिया था, जिससे उसकी जान पर बन आई थी।
एंटरटेनमेंट डेस्क । एक्ट्रेस और डांसर नम्रता मल्ला अपने बोल्ड फोटोशूट की वजह से चर्चाओं में रहती हैं। भोजपुरी म्यूजिक वीडियो में धमाल मचाने वाली इस एक्ट्रेस ने एक बार फिर अपने बिकिनी लुक से फैंस को एक्साइटेड कर दिया है। लाइफस्टाइल डेस्क. छोटे पर्दे की 'बालिका वधू' अविका गौर साउथ में पैर जमा चुकी हैं अब वो बॉलीवुड में 'एक हज़ार नौ सौ बीस हॉरर ऑफ द हार्ट्स' के जरिए डेब्यू करने वाली हैं। एक्टिंग के साथ-साथ उनके स्टाइल के भी चर्चे होते हैं। आइए देखते हैं उनके दस लुक्स। Adipurush And These films Flop After Bumper Opening. ओम राउत की फिल्म आदिपुरुष बंपर ओपनिंग के बाद भी फ्लॉप साबित हुई। आपको बता दें कि आदिपुरुष के अलावा ऐसी और भी फिल्में जिन्हें शानदार ओपनिंग तो मिली पर ये बॉक्स ऑफिस परऔंधे मुंह गिरी। एंटरटेनमेंट डेस्क. काजोल इन दिनों अपनी अपकमिंग वेब सीरीज 'लस्ट स्टोरीज दो' के प्रमोशन में वयस्त हैं। उन्होंने इस दौरान एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में आई डायरेक्टर नरेश मल्होत्रा की फिल्म 'ये दिल्लगी' के गाने 'होंठों पे बस तेरा नाम है' की शूटिंग को याद किया। How To Get Rid Of Ants: बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और घर में चीटियों का आतंक भी। अगर आप भी किचन और पूरे घर में चीटियों की मौजदूगी से परेशान हो गए हैं तो हम आपके लिए खास आठ घरेलू उपाय लेकर आए हैं। इन घरेलू उपचारों से आप चींटियों को अलविदा कहें। एंटरटेनमेंट डेस्क. टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस निया शर्मा ने हाल ही में अपने लेटेस्ट फोटोशूट की झलक फैंस को दिखाई। इसमें वे बेहद बोल्ड अंदाज में नजर आईं, जिसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स उन पर भड़क गए। रिलेशनशिप डेस्क. कहते हैं शादी उसी से करो जिससे प्यार करते हो। प्रेमी-प्रेमिका को लगता है कि शादी करके वो अरेंज मैरेज करने वाले कपल से ज्यादा खुश रहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हैं लव मैरेज करके भी कपल पछताते हैं। आइए जानते हैं इसके असफल होने के पीछे की वजह। प्रिया सिंह ने जयपुर के साइबर थाने में केस दर्ज कराया है। कोई शख्स उनके नाम से फेक आईडी अकाउंट पर अश्लील फोटो वीडियो शेयर कर रहा है। पुलिस ने बताया कि फिलहाल केस की जांच पड़ताल की जा रही है। blood donation after tattoo: सदियों से शरीर पर टैटू बनवाने का चलन रहा है। कोई अपने लव वन का नाम शरीर पर गुदवाता है, तो कोई भगवान की तस्वीर, नाम या कोई अनोखी डिजाइन बनाता है, लेकिन क्या टैटू करवाने वाले लोग ब्लड डोनेट कर सकते हैं? ट्रेंडिंग डेस्क : कर्नाटक में एक कोबरा अपनी आखिरी सांसे गिन रहा था। उसे जैसे-जैसे कर डॉक्टर के पास लाया गया। जहां ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली गई। इस कांप ने एक प्लास्टिक का डिब्बा निगल लिया था, जिससे उसकी जान पर बन आई थी।
बहेड़ी में चल रहे 164 साल पुराने मेला श्री रामलीला में बुधवार को दशहरा मनाने की तैयारियां चल रही थी। इसी बीच उस वक्त दहशत फैल गई, जब लोगों की नजर मेले में बुर्का पहनकर घूम रहे एक संदिग्ध पर पड़ी। लोगों का आरोप है कि संदिग्ध मेले में रेकी करने के अंदाज में घूम रहा था, इसके अलावा मेले में चल रही गतिविधियों पर पैनी नजर भी बनाये हुए था। शक होने पर कुछ युवाओं ने उससे पूछने की कोशिश की तो वह भागने लगी। जिस पर लोगों ने दौड़ाकर उसे पकड़ लिया। उसका बुर्का उतारा तो वह महिला ना होकर एक डाड़ी वाला मुस्लिम युवक निकला। गुस्साए लोगो ने उसकी पिटाई शुरू कर दी पर इससे पहले ही मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे भीड़ से बचाकर रामलीला मेले की धर्मशाला में बंद कर लिया। पुलिस द्वारा काफी पूछने के बाद भी उसने अपना नाम-पता नही बताया। बार-बार कहता रहा कि अल्लाह की मर्जी से वह यहां आया है और अल्लाह अगर चाहेंगे तो उसे सजा मिलेगी और मेरे रब की मर्जी नही होगी तो दुनिया में किसी की हिम्मत नही कि मुझे सजा दे सके। बुर्का पहनकर पूरे मेले में रेकी कर रहे संदिग्ध युवक पर पुलिस के पकड़े जाने पर तनिक भी खौफ नही दिखा। जब थाने के लिए उसे ई-रिक्शा पर बैठने को कहा गया तो बोला कि मै पैदल ही जाऊंगा।और तो और, चीता सिपाही की बाइक को चलाने के लिए सिपाही से ऐंठ दिखाने लगा। संदिग्ध के पकड़े जाने पर मेला देखने आए दूर-दराज के लोगो में दहशत व्याप्त हो गई। लोगों का कहना था कि इतनी पुलिस व्यवस्था के बाद भी अगर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तो मेले में श्रद्वालुओं की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। उन्होने युवक से कड़ी पूछताछ कर उसके इरादे जानने की मांग की।
बहेड़ी में चल रहे एक सौ चौंसठ साल पुराने मेला श्री रामलीला में बुधवार को दशहरा मनाने की तैयारियां चल रही थी। इसी बीच उस वक्त दहशत फैल गई, जब लोगों की नजर मेले में बुर्का पहनकर घूम रहे एक संदिग्ध पर पड़ी। लोगों का आरोप है कि संदिग्ध मेले में रेकी करने के अंदाज में घूम रहा था, इसके अलावा मेले में चल रही गतिविधियों पर पैनी नजर भी बनाये हुए था। शक होने पर कुछ युवाओं ने उससे पूछने की कोशिश की तो वह भागने लगी। जिस पर लोगों ने दौड़ाकर उसे पकड़ लिया। उसका बुर्का उतारा तो वह महिला ना होकर एक डाड़ी वाला मुस्लिम युवक निकला। गुस्साए लोगो ने उसकी पिटाई शुरू कर दी पर इससे पहले ही मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे भीड़ से बचाकर रामलीला मेले की धर्मशाला में बंद कर लिया। पुलिस द्वारा काफी पूछने के बाद भी उसने अपना नाम-पता नही बताया। बार-बार कहता रहा कि अल्लाह की मर्जी से वह यहां आया है और अल्लाह अगर चाहेंगे तो उसे सजा मिलेगी और मेरे रब की मर्जी नही होगी तो दुनिया में किसी की हिम्मत नही कि मुझे सजा दे सके। बुर्का पहनकर पूरे मेले में रेकी कर रहे संदिग्ध युवक पर पुलिस के पकड़े जाने पर तनिक भी खौफ नही दिखा। जब थाने के लिए उसे ई-रिक्शा पर बैठने को कहा गया तो बोला कि मै पैदल ही जाऊंगा।और तो और, चीता सिपाही की बाइक को चलाने के लिए सिपाही से ऐंठ दिखाने लगा। संदिग्ध के पकड़े जाने पर मेला देखने आए दूर-दराज के लोगो में दहशत व्याप्त हो गई। लोगों का कहना था कि इतनी पुलिस व्यवस्था के बाद भी अगर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तो मेले में श्रद्वालुओं की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। उन्होने युवक से कड़ी पूछताछ कर उसके इरादे जानने की मांग की।
यूपी के औरैया में नोएडा से महोबा आ रहे दो दोस्तों की सड़क हादसे में हुई मौत. . Star Plus के सीरियल 'तेरी मेरी डोरियां' में जल्द आने वाला है ये बड़ा ट्विस्ट. . हैदराबाद में आतंकवादी हमले की साजिश का हुआ खुलासा, यूएपीए के तहत एनआईए ने की कार्रवाई. . PM मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'जयपुर महाखेल' के प्रतिभागियों को किया संबोधित. .
यूपी के औरैया में नोएडा से महोबा आ रहे दो दोस्तों की सड़क हादसे में हुई मौत. . Star Plus के सीरियल 'तेरी मेरी डोरियां' में जल्द आने वाला है ये बड़ा ट्विस्ट. . हैदराबाद में आतंकवादी हमले की साजिश का हुआ खुलासा, यूएपीए के तहत एनआईए ने की कार्रवाई. . PM मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'जयपुर महाखेल' के प्रतिभागियों को किया संबोधित. .
सिलीगुड़ी के ऐसे जमाकर्ता, जिन्होंने सहारा की चार कंपनियों में पैसा लगाया है और वे रिटर्न की उम्मीद छोड़ चुके हैं, उन्हें यह जानकर काफी प्रसन्नता होगी कि उनका पैसा वापस मिलने जा रहा है! सहारा की विभिन्न कंपनियों में पैसा लगाने वाले निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौट गई है. जिस सहारा ने निवेशकों को ठेंगा दिखाया और उनकी जमा पूंजी लूट ली, सहारा से पैसा नहीं मिलने पर जाने कितने लोगों ने आत्महत्या तक कर ली... कई ऐसे निवेशक भी थे जो बड़े-बड़े सपने पूरा करना चाहते थे, लेकिन उनके सपने बिखर गए. अब ऐसे निराश और हताश निवेशकों को उनके पैसे सहारा से लौटाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है. सहारा की विभिन्न कंपनियों में पैसा जमा करने वाले सिलीगुड़ी में अत्यधिक हैं. डबल और ट्रिपल के चक्कर में सिलीगुड़ी के अनेक लोगों ने सहारा की विभिन्न कंपनियों में निवेश किया था और जब मेच्योरिटी का टाइम आया तब तक सहारा रास्ते पर आ चुका था. सहारा के एजेंट और अधिकारी ग्राहकों को समझा नहीं पा रहे थे. कई भोले-भाले लोगों को सहारा के एजेंटों ने सब्जबाग दिखाकर उनकी पूंजी को फिर से सहारा की कंपनियों में निवेश कराया. लेकिन जब पैसे लेने की बारी आई तब तक सहारा के कार्यालय ही बंद होने लगे. सिलीगुड़ी में सहारा के जितने भी ऑफिस है, लगभग सभी पर ताला लग चुका है. परंतु अब सहारा के एजेंट और अधिकारी भी जोश में नजर आ रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि सहारा के बंद कार्यालय फिर से खोले जा सकते हैं. पीड़ित सहारा के जमा कर्ताओं को पैसा दिलाने का फैसला केंद्र सरकार ने किया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि सहारा समूह में पैसे लगाने वाले 10 करोड निवेशकों को 9 महीने के भीतर रिफंड मिल जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने सहारा समूह की को ऑपरेटिव सोसाइटी में पैसा लगाने वालों को रिफंड दिलाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है. योजना के अनुसार सहारा सेबी रिफंड अकाउंट में जमा 5000 करोड की राशि को सेंट्रल रजिस्ट्रार के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा और फिर यह निवेशकों को पैसा लौटाया जाएगा. केंद्रीय सहकारी मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद 10 करोड निवेशकों का पैसा लौटाने का रास्ता साफ हो चुका है. इन सभी निवेशकों ने सहारा समूह की 4 सहकारी समितियों में पैसा लगाया था. अब सहारा सेबी रिफंड अकाउंट में जमा राशि को निवेशकों को लौटाया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सहारा समूह की चार कंपनियों में पैसे लगाने वालों को रिफंड मिलेगा. इसमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारा यूनिवर्सल मल्टीपरपज सोसायटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड तथा स्टार मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड शामिल हैं. अगर आपका पैसा इन कंपनियों में लगा है तो धीरज रखिए, आपका पैसा सरकार वापस दिलाने जा रही है.
सिलीगुड़ी के ऐसे जमाकर्ता, जिन्होंने सहारा की चार कंपनियों में पैसा लगाया है और वे रिटर्न की उम्मीद छोड़ चुके हैं, उन्हें यह जानकर काफी प्रसन्नता होगी कि उनका पैसा वापस मिलने जा रहा है! सहारा की विभिन्न कंपनियों में पैसा लगाने वाले निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौट गई है. जिस सहारा ने निवेशकों को ठेंगा दिखाया और उनकी जमा पूंजी लूट ली, सहारा से पैसा नहीं मिलने पर जाने कितने लोगों ने आत्महत्या तक कर ली... कई ऐसे निवेशक भी थे जो बड़े-बड़े सपने पूरा करना चाहते थे, लेकिन उनके सपने बिखर गए. अब ऐसे निराश और हताश निवेशकों को उनके पैसे सहारा से लौटाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है. सहारा की विभिन्न कंपनियों में पैसा जमा करने वाले सिलीगुड़ी में अत्यधिक हैं. डबल और ट्रिपल के चक्कर में सिलीगुड़ी के अनेक लोगों ने सहारा की विभिन्न कंपनियों में निवेश किया था और जब मेच्योरिटी का टाइम आया तब तक सहारा रास्ते पर आ चुका था. सहारा के एजेंट और अधिकारी ग्राहकों को समझा नहीं पा रहे थे. कई भोले-भाले लोगों को सहारा के एजेंटों ने सब्जबाग दिखाकर उनकी पूंजी को फिर से सहारा की कंपनियों में निवेश कराया. लेकिन जब पैसे लेने की बारी आई तब तक सहारा के कार्यालय ही बंद होने लगे. सिलीगुड़ी में सहारा के जितने भी ऑफिस है, लगभग सभी पर ताला लग चुका है. परंतु अब सहारा के एजेंट और अधिकारी भी जोश में नजर आ रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि सहारा के बंद कार्यालय फिर से खोले जा सकते हैं. पीड़ित सहारा के जमा कर्ताओं को पैसा दिलाने का फैसला केंद्र सरकार ने किया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि सहारा समूह में पैसे लगाने वाले दस करोड निवेशकों को नौ महीने के भीतर रिफंड मिल जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने सहारा समूह की को ऑपरेटिव सोसाइटी में पैसा लगाने वालों को रिफंड दिलाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है. योजना के अनुसार सहारा सेबी रिफंड अकाउंट में जमा पाँच हज़ार करोड की राशि को सेंट्रल रजिस्ट्रार के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा और फिर यह निवेशकों को पैसा लौटाया जाएगा. केंद्रीय सहकारी मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद दस करोड निवेशकों का पैसा लौटाने का रास्ता साफ हो चुका है. इन सभी निवेशकों ने सहारा समूह की चार सहकारी समितियों में पैसा लगाया था. अब सहारा सेबी रिफंड अकाउंट में जमा राशि को निवेशकों को लौटाया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सहारा समूह की चार कंपनियों में पैसे लगाने वालों को रिफंड मिलेगा. इसमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारा यूनिवर्सल मल्टीपरपज सोसायटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड तथा स्टार मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड शामिल हैं. अगर आपका पैसा इन कंपनियों में लगा है तो धीरज रखिए, आपका पैसा सरकार वापस दिलाने जा रही है.
कवोर ] चर्चा करने का उन्हें अवसर मिला था जिसके कारण उनकी रचनाओं में इन प्रान्तो के शब्द सहजरूप से प्रा गये है । यद्यपि कवीर अपनी भाषा को परिमार्जित करने तथा शुद्ध साहित्यिक रूप देने के लिए कभी सचेष्ट नहीं थे परन्तु उनके कुछ हृदयोद्गार ऐसे पदो में व्यक्त हो गये हैं जिनमें भाव-सौन्दर्य और भाषा-लालित्य दोनों का पूर्व समन्वय हो गया है । जैसा कि पंडित परशुराम चतुर्वेदी ने महत्त्वपूर्ण श्रध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला है - "कबीर की इस मिश्रित भाषा में 'हिन्दवी' अथवा पुरानी खड़ीबोली का अंश अधिक रहता था और इसके अतिरिक्त उसमें पूर्वी हिन्दी, व्रज तथा पछाँही बोलियाँ तक मिली-जुली रहती थीं । कबीर साहब के प्रतिनिकट की साहित्यिक भाषा पूर्वी हिन्दी अथवा अवधी थी, जिसका प्रयोग अधिकतर उन्होने पनीरमैनियों में किया है ।" मलिक मुहम्मद जायसी मुसलमान कवियो ने किस प्रकार हिन्दी भाषा को अगीकार करके हिन्दी साहित्य का सृजन किया और उसके भडार का सपोषण किया, यह हमारे देश के इतिहास में उल्लेखनीय घटना है । कुछ घटनावश ही नहीं, वरन् स्वेच्छा एव पूर्ण श्रद्धा से इन लोगों ने इस कार्य को सम्पन्न किया । यदि सन्त कबीर ज्ञानमार्गो शाखा के सर्वोत्कृष्ट कवि के रूप में प्रकट हुए, तो मलिक मुहम्मद जायसी प्रेममार्गी शाखा के प्रतिनिधि एव सर्वश्रेष्ठ कवि के रूप में आविर्भूत हुए । इन दोनों में हिन्दू-सस्कृति के लिए सहज श्रद्धा थी । नाम और जाति से विजातीय होते हुए भी ये लोग अन्त कररण से हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के रग में पूर्ण रीति से रंगे हुए थे । मलिक मुहम्मद जायसी सूफी फकीर थे । ये प्रसिद्ध सन्त श्री शेख मोहिदो ( मुहीउद्दीन ) के शिष्य थे । इनका निवास स्थान 'जायस' था । अत यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कालान्तर में इनके नाम के साथ 'जायसी' पद सयुक्त कर दिया गया हो । जायसी ने अपनी पुस्तक 'आखिरी फलाम' में अपना जीवन-वृत्तान्त दिया है। अपने जन्मादि के विषय में इस पुस्तक में उन्होंने सकेत किया है । पुस्तक के आरम्भ की अर्धालियाँ इस प्रकार हैंभा अवतार मोर नौ सदी । तीस बरस ऊपर कवि वदी ।। प्राचार्य प० रामचन्द्रजी शुक्ल का मत है कि "इन पक्तियों का ठीक तात्पर्य नहीं खुलता । जन्म-काल १०० हिजरी मानें तो दूसरी पक्ति का श्रयं यही निकलेगा कि जन्म से ३० वर्ष पीछे जायसी कविता करने लगे और इस पुस्तक के कुछ पद्य उन्होंने बनाये ।" कुछ भी हो, स्वयं-वरिंगत, इन पक्तियों के अतिरिक्त अन्य कौन मत प्रामाणिक हो सकता है ? श्रत. इस मत को ही युक्तियुक्त माना गया है । जायसी कुछ विशेष लक्षरण लेकर आविर्भूत हुए थे ; क्योंकि जिस समय उनका जन्म हुआ, पृथ्वी में भूकम्प आ गया और समस्त संसार में स्त और तकित हो गया । सूर्य में भी ग्रहरण लग गया था -- श्रावत उद्यत चार विधि ठाना । भा भूकम्प जगत अकुलाना ॥ तथासूरज सेवक ताकर अहै । आठो पहर फिरत जो रहे ।। अपने निवास स्थान के विषय में उल्लेख करते हुए जायसी लिखते हैंजायस नगर मोर प्रस्थान, नगरक गाँव आदि उदयानू । तहाँ दिवस दस पहुँने आएऊं । भा वैराग बहुत सुख पाएऊं ॥ इस उद्धरण से स्पष्ट है कि जायस का पूर्व नाम उदयन था । जायसी वहाँ कुछ दिन के लिए अतिथि के रूप में गये । उन्हें वहाँ वैराग्य हों गया । इससे यह बात सिद्ध नहीं हो पाती कि जायसी का जन्म स्थान भी जायस हो था। जायस के विषय में 'पद्मावत' के स्तुति खंड में केवल इतना उल्लेख हैजायस नगर धरम प्रस्थान । तहाँ श्राइ कवि कीन्ह वखानू ।। प्रतः जायस में मलिक मुहम्मद किसी अन्य स्थान से प्राये थे। जायस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल था । प्रमाण एवं जनश्रुति के सामंजस्य से उपरिकथित निष्कर्ष के प्रतिरिक्त और किसी बात को पुष्टि नहीं हो पाती । कोई जनश्रुति उनके जन्मस्थान को जायस बताती है, कोई गाजीपुर । मानिकपुर जिला प्रतापगढ़, को उनका ननिहाल कहा जाता है। माता-पिता और भाइयों के बारे में प्रसिद्ध है कि उनके माता-पिता की मृत्यु इनके वचपन में ही हो गई थी । ततपश्चात् ये साधु-सन्तों के साथ रहने लग गये थे । जनश्रुति के आधार पर इनका विवाह हुश्रा था और सन्तान भी थो । अमेठी के राजा को इन पर बडी श्रद्धा थी और उस राज्य में वे सम्मान सहित बहुत दिन तक रहे । वहीं पर इनको मृत्यु भी हो गई । जायस में उनका मकान और 'अमेठी' में उनकी कब्र प्राज भी विद्यमान है । ऐसा सुना जाता है कि जायस में इनके वशज भी हैं । इन विवरणो से यह स्पष्ट है कि जायसी का जन्म चाहे जायस में हुआ हो या कहीं अन्यत्र परन्तु उनका सम्बन्ध जायस से प्रवश्य रहा। इसमें सदेह नहीं हो सकता कि जायस ही उनका स्थायी निवास स्थान था । 'जायसी' नाम से उनकी प्रसिद्धि से भी यही अर्थ व्यक्त होता है । इस विषय में विविध विद्वानों ने शोध किया है । उसके आधार पर सक्षेप में कहा जा सकता है - "जान पड़ता है, जायस जायसी का जन्म स्थान नहीं था । वे दस दिन के पाहूने के रूप में चले श्राये, परन्तु पीछे वैरागी वन गये । 'आखिरी कलाम' की रचना वैरागी बनने के बाद की बात है । सम्भव है इसके बाद लेखक कहीं अन्यत्र चला गया, कदाचित् कालपी । यहीं वह सूफीमत में दीक्षित हुश्रा और उसे अपने मधुर कण्ठ के द्वारा 'कवि' के नाते प्रसिद्धि भी मिल गई। यह भी सम्भव है कि 'पद्मावत' की रचना प्रवास में हुई हो औौर सूफी दृष्टिकोरण के कारण शीघ्र ही प्रसिद्धि हो गई हो; जायस को धर्म-स्थान मानकर हो उसे अपना स्थान बना लिया हो ।" व्यक्तित्व - जायसी जी काने थे । देखने में फुरुप भी थे । प्राचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी का हास्य है कि 'भगवान् ने इन्हें रूप देने में कजूसी को । जनश्रुति है कि शेरशाह इनके रूप को देखकर हँसा । उसको उन्होंने तुरन्त प्रत्युत्तर दिया था - "मोहि का हँससि कि कोहरहि ।" ये चडे हो वाक्पटु और प्रत्युत्पन्नमति थे । जायसी सूफी कवि थे । इस वर्ग के कवियों में उनका स्थान द्वितीय हिन्दी में वे सूफी सम्प्रदाय के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते है । जायसी पहले साधक हैं और पीछे कवि । सच तो यह है कि सूफी-सम्प्रदाय और सूफी विचारधारा को मनोरम और आकर्षक रूप में उपस्थित करने के उद्देश्य से ही जायसी ने काव्य-रचना की तथा उन्हें इस उद्देश्य की पूर्ति में पर्याप्त सफलता भी मिली । जायसी अत्यन्त उदार व्यक्ति थे । शील और सहिष्णुता इनके प्रधान गुरग थे । वे सन्त थे, साधक थे, दार्शनिक थे औौर थे प्रति उदार कवि । इन गुरगो के समन्वय से जायसी की रचना विशेष प्रभावोत्पादक बन गई । जायसी की प्रसिद्धि सन्त- समुदाय में सर्वत्र व्याप्त हो गई । इनके जोवन-काल ही में इनके शिष्य इनके बनाये भावपूर्ण दोहे-चौपाई गाते फिरते थे । इससे जायसी की प्रसिद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि होती गई । कथानक को दृष्टि से जायसी की रचना में अन्य सब प्रेममार्गी कवियो को परम्परा से भेद पाया जाता है। जहाँ अन्य प्रेममार्गी संतो ने केवल कल्पित कथाओं का ही श्राश्रय लिया है, वहाँ जायसी ने उसमें इतिहास का भी मिश्रण कर दिया है । पद्मावत के पूर्वार्द्ध में व्यष्टि की प्रधानता है परन्तु उत्तरार्द्ध में कवि व्यष्टि से हटकर समष्टि अथवा लोक-पक्ष पर या गया है । इसके अतिरिक्त उसने अलाउद्दीन और पद्मिनी का ऐतिहासिक श्राख्यान जोड़ दिया है । इस कारण जायसी का पद्मावत प्रन्य प्रेममार्गी साहित्य से पृथक् हो गया है। अन्य सूफी कवि जहाँ प्रेम, करुणा, श्रद्धा, भक्ति तथा कोमल भावो को ही व्यक्त करते हैं वहां जायसी ने लोक-दृष्टि से प्रेरित होकर युद्ध, उत्साह, क्रोध, खीझ आदि भाव भी प्रदर्शित किये हैं। प्रतः वे सब प्रेम-मार्गी कवियों से एक कदम श्रागे बढ जाते हैं । माता-पिता और भाइयों के बारे में प्रसिद्ध है कि उनके माता-पिता की मृत्यु इनके बचपन में ही हो गई थी । तत्पश्चात् ये साधु-सन्तों के साथ रहने लग गये थे । जनश्रुति के आधार पर इनका विवाह हुश्रा था और सन्तान भी थी । अमेठी के राजा की इन पर बड़ी श्रद्धा थी और उस राज्य में वे सम्मान सहित बहुत दिन तक रहे । वहीं पर इनकी मृत्यु भी हो गई । जायस में उनका मकान और 'अमेठी' में उनकी कब्र प्राज भी विद्यमान है । ऐसा सुना जाता है कि जायस में इनके वशज भी हैं । इन विवरणों से यह स्पष्ट है कि जायसी का जन्म चाहे जायस में हुआ हो या कहीं अन्यत्र, परन्तु उनका सम्बन्ध जायस से अवश्य रहा । इसमें सदेह नहीं हो सकता कि जायस हो उनका स्थायी निवास स्थान था । 'जायसी' नाम से उनकी प्रसिद्धि से भी यही अर्थ व्यक्त होता है । इस विषय में विविध विद्वानों ने शोध किया है । उसके आधार पर सक्षेप में कहा जा सकता है"जान पडता है, जायस जायसी का जन्म स्थान नहीं था । वे दस दिन के पाहूने के रूप में चले श्राये, परन्तु पीछे वैरागी बन गये । 'आखिरी कलाम' की रचना वैरागी बनने के बाद की बात है । सम्भव है इसके बाद लेखक कहीं अन्यत्र चला गया, कदाचित् कालपी । यहीं वह सूफीमत में दीक्षित हुआ और उसे अपने मधुर कण्ठ के द्वारा 'कवि' के नाते प्रसिद्धि भी मिल गई । यह भी सम्भव है कि 'पद्मावत' की रचना प्रवास में हुई हो और सूफी दृष्टिकोरण के कारण शीघ्र ही प्रसिद्धि हो गई हो; जायस को धर्म स्थान मानकर हो उसे अपना स्थान बना लिया हो ।" व्यक्तित्व - जायसी जी काने थे । देखने में फुरूप भी थे । प्राचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी का हास्य है कि 'भगवान् इन्हें रूप देने में कजूसी को । जनश्रुति है कि शेरशाह इनके रूप को देखकर हँसा । उसको उन्होंने तुरन्त प्रत्युत्तर दिया था - "मोहि का हँससि कि कोहरहि ।" ये बडे ही वाक्पटु और प्रत्युत्पन्नमति थे । जायसी सूफी कवि थे । इस वर्ग के कवियों में उनका स्थान अद्वितीय है । हिन्दी में वे सूफी सम्प्रदाय के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं । जायसी पहले साधक हैं और पीछे कवि । सच तो यह है कि सूफी-सम्प्रदाय और सूफी विचारधारा को मनोरम प्रौर प्राकर्षक रूप में उपस्थित करने के उद्देश्य से हो जायसी ने काव्य रचना की तथा उन्हें इस उद्देश्य की पूर्ति में पर्याप्त सफलता भी मिली । जायसी अत्यन्त उदार व्यक्ति थे । शील और सहिष्णुता इनके प्रधान गुरग थे । वे सन्त थे, साधक थे, दार्शनिक थे औौर थे प्रति उदार कवि । इन गुरगो के समन्वय से जायसी की रचना विशेष प्रभावोत्पादक वन गई । जायसी की प्रसिद्धि सन्त- समुदाय में सर्वत्र व्याप्त हो गई । इनके जीवन-काल ही में इनके शिष्य इनके बनाये भावपूर्ण दोहे-चौपाई गाते फिरते थे। इससे जायसी की प्रसिद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि होती गई । कथानक की दृष्टि से जायसी की रचना में अन्य सब प्रेममार्गों कवियो को परम्परा से भेद पाया जाता है। जहाँ अन्य प्रेममार्गों सतों ने केवल कल्पित कयाम्रो का ही श्राश्रय लिया है, वहाँ जायसी ने उसमें इतिहास का भी मिश्ररण कर दिया है। पद्मावत के पूर्वार्द्ध में व्यष्टि की प्रधानता है परन्तु उत्तरार्द्ध में कवि व्यष्टि से हटकर समष्टि प्रयवा लोक-पक्ष पर गया है। इसके अतिरिक्त उसने अलाउद्दीन और पद्मिनी का ऐति हासिक श्राख्यान जोड दिया है। इस कारण जायसी का पद्मावत प्रन्य प्रेममार्गी साहित्य से पृथक् हो गया है। अन्य सूफी कवि जहाँ प्रेम, करुणा, श्रद्धा, भक्ति तथा कोमल भावों को ही व्यक्त करते हैं वहां जायसी ने लोक दृष्टि से प्रेरित होकर युद्ध, उत्साह, क्रोध, खीझ श्रादि भाव भी प्रदर्शित किये हैं। अतः वे सव प्रेम-मार्गी कवियो से एक कदम श्रागे वढ जाते हैं । कृतियाँ - जायसी के जन्म संवत् और जन्म स्थान के विविध शोघों के अनुरूप हो, उनकी कृतियों के विषय में भी महत्त्वपूर्ण शोध कार्य किया गया है। विविध खोजों के फलस्वरूप जायसी के कुल ग्रंथों को सख्या २१ (इक्कीस) तक पहुँचती है परन्तु उनके नामों के अतिरिक्त और कुछ नहीं ज्ञात हो सका है । जायसी की तीन प्रधान रचनाएँ है - 'पद्मावत', 'श्रखरावट' और 'आखिरी फलाम' । इनके अतिरिक्त भी कुछ रचनाएँ उपलब्ध कही जाती हैं। उदाहरण के लिए - बगाल एशियाटिक सोसायटी के पास 'सोरठ' और 'उपजो' की हस्तलिखित प्रतियाँ, डा० स्प्रंगर के पास 'घनावट' को प्रति । इससे अधिक अन्य पुस्तकों के विषय में कुछ ज्ञात नहीं । इन पुस्तकों पर जब तक पूर्णतया शोध न हो कुछ भी साधिकार कहना उचित नहीं । प्रत अब तक की खोजों के आधार पर जायसी के केवल तीन ग्रथ ही प्रामारिगक कहे जा सकते हैं । ये ग्रथ काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित है । जिनके सम्पादक है प्राचार्य प० रामचन्द्र शुक्ल । रचनाक्रम के सम्बन्ध में विद्वानों का मत है कि 'आखिरी फलाम' सर्वप्रथम लिखा गया । एक प्रलोचक लिखते हैं - "पानीपत की लडाई के तीन वर्ष पश्चात् जब वाबर 'शाह छत्रपति राजा था, उन्होंने 'आखिरी फलाम' (१५२६) की रचना की और इसके ग्यारह वर्ष बाद सन् १५४० में पद्मावत को लिखना प्रारम्भ किया । इस समय जायसी ४५ वर्ष की प्रौढ़ अवस्था को प्राप्त कर चुके थे ।" डा० कमलफुलश्रेष्ठ की गणना के अनुसार जायसो का जन्म १०६ हिजरी ( १४९६ ई० ) में हुआ और पद्मावत ( १५२० ई० ) उनको २१ वर्ष की रचना ठहरती है । पद्मावत-जैसे प्रौढ़ काव्य की रचना २१ वर्ष का युवक करे, यह कुछ प्रसम्भव- सी बात है। फिर 'आखिरी कलाम' ( १५२६ ई० ) को भाषा-शैली में प्रौढ़ता के चिह्न भी नहीं मिलते और इसमें इस्लामी भाव भरे पड़े है, सूफी चिन्तन का जरा भी प्रभात नहीं है । स्पष्ट है कि 'आखिरी कलाम' (१५२६ ई०) २६-३० वर्ष के युवा की रचना है। इसमें श्रादि से अन्त तक इस्लामी कट्टर भावना है । भ्रम का कारण ग्रंथ का नाम जान पडता है । कदाचित् जायसी ने इसका कोई नाम ही नहीं रखा । फारसी में 'श्राखिरितनामा' (रोजेआखिर की कथा ) की परम्परा थी। इसी विचार से किसी ने ग्रंथ को 'खिरी कलाम' कह दिया और आलोचक इस भ्रम में पड़ गये कि यह जायसी को अन्तिम रचना है । कट्टर इस्लाम से सूफीमत की ओोर वढना प्रगति के चिह्न है । इसके विपरीत जो है, वह भ्रष. पतन है । पद्मावत के रचयिता से हम यह प्राशा नहीं करते कि वह अन्तिम रचना के समय कट्टर इस्लामी विचारधारा का पोषरग करे । हो सकता है 'कया-प्रारम्भवैन' के रूप में पद्मावत की प्रारम्भिक पंक्तियाँ कवि ने मुख्य काव्य-रचना के वाद की हों । तब १५४० ई० में पद्मावत समाप्त समझा जाना चाहिए । इस प्रकार पद्मावत का रचना-काल १५२६ और १५४० ई० के बीच का समय रहेगा । इस प्रकार यह सिद्ध है कि 'पद्मावत' का से १५४० तक हो सकता है । 'अखरावट' के रचना-काल के विषय में सप्रमारण शोध नहीं, परन्तु सामान्य रूप से यह मान्य है कि वह पद्मावत के पहले की ही रचना हो सकती है। यह तो रचना-काल का प्रसंग रहा । जायसी के सम्यक् ज्ञान के लिए के इन तीनों ग्रंथों का विशद विवेचन आवश्यक है। प्रत. काल-क्रम के अनुसार प्रथम 'आखिरी कलाम' का निरूपण उचित एवं तर्कयुक्त है। ( १ ) आखिरी कलाम - यह जायसी का श्रादि-ग्रंथ प्रतीत होता है । इसका रचना-फाल सन् १५२६ ई० है । 'आखिरी फलाम' के शब्दार्थ को ही आधार मानकर इसे उनको अन्तिम रचना कहना युक्तियुक्त नहीं । चाहे विषयवस्तु के दृष्टिकोरण से हम 'आखिरी कलाम' को
कवोर ] चर्चा करने का उन्हें अवसर मिला था जिसके कारण उनकी रचनाओं में इन प्रान्तो के शब्द सहजरूप से प्रा गये है । यद्यपि कवीर अपनी भाषा को परिमार्जित करने तथा शुद्ध साहित्यिक रूप देने के लिए कभी सचेष्ट नहीं थे परन्तु उनके कुछ हृदयोद्गार ऐसे पदो में व्यक्त हो गये हैं जिनमें भाव-सौन्दर्य और भाषा-लालित्य दोनों का पूर्व समन्वय हो गया है । जैसा कि पंडित परशुराम चतुर्वेदी ने महत्त्वपूर्ण श्रध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला है - "कबीर की इस मिश्रित भाषा में 'हिन्दवी' अथवा पुरानी खड़ीबोली का अंश अधिक रहता था और इसके अतिरिक्त उसमें पूर्वी हिन्दी, व्रज तथा पछाँही बोलियाँ तक मिली-जुली रहती थीं । कबीर साहब के प्रतिनिकट की साहित्यिक भाषा पूर्वी हिन्दी अथवा अवधी थी, जिसका प्रयोग अधिकतर उन्होने पनीरमैनियों में किया है ।" मलिक मुहम्मद जायसी मुसलमान कवियो ने किस प्रकार हिन्दी भाषा को अगीकार करके हिन्दी साहित्य का सृजन किया और उसके भडार का सपोषण किया, यह हमारे देश के इतिहास में उल्लेखनीय घटना है । कुछ घटनावश ही नहीं, वरन् स्वेच्छा एव पूर्ण श्रद्धा से इन लोगों ने इस कार्य को सम्पन्न किया । यदि सन्त कबीर ज्ञानमार्गो शाखा के सर्वोत्कृष्ट कवि के रूप में प्रकट हुए, तो मलिक मुहम्मद जायसी प्रेममार्गी शाखा के प्रतिनिधि एव सर्वश्रेष्ठ कवि के रूप में आविर्भूत हुए । इन दोनों में हिन्दू-सस्कृति के लिए सहज श्रद्धा थी । नाम और जाति से विजातीय होते हुए भी ये लोग अन्त कररण से हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के रग में पूर्ण रीति से रंगे हुए थे । मलिक मुहम्मद जायसी सूफी फकीर थे । ये प्रसिद्ध सन्त श्री शेख मोहिदो के शिष्य थे । इनका निवास स्थान 'जायस' था । अत यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कालान्तर में इनके नाम के साथ 'जायसी' पद सयुक्त कर दिया गया हो । जायसी ने अपनी पुस्तक 'आखिरी फलाम' में अपना जीवन-वृत्तान्त दिया है। अपने जन्मादि के विषय में इस पुस्तक में उन्होंने सकेत किया है । पुस्तक के आरम्भ की अर्धालियाँ इस प्रकार हैंभा अवतार मोर नौ सदी । तीस बरस ऊपर कवि वदी ।। प्राचार्य पशून्य रामचन्द्रजी शुक्ल का मत है कि "इन पक्तियों का ठीक तात्पर्य नहीं खुलता । जन्म-काल एक सौ हिजरी मानें तो दूसरी पक्ति का श्रयं यही निकलेगा कि जन्म से तीस वर्ष पीछे जायसी कविता करने लगे और इस पुस्तक के कुछ पद्य उन्होंने बनाये ।" कुछ भी हो, स्वयं-वरिंगत, इन पक्तियों के अतिरिक्त अन्य कौन मत प्रामाणिक हो सकता है ? श्रत. इस मत को ही युक्तियुक्त माना गया है । जायसी कुछ विशेष लक्षरण लेकर आविर्भूत हुए थे ; क्योंकि जिस समय उनका जन्म हुआ, पृथ्वी में भूकम्प आ गया और समस्त संसार में स्त और तकित हो गया । सूर्य में भी ग्रहरण लग गया था -- श्रावत उद्यत चार विधि ठाना । भा भूकम्प जगत अकुलाना ॥ तथासूरज सेवक ताकर अहै । आठो पहर फिरत जो रहे ।। अपने निवास स्थान के विषय में उल्लेख करते हुए जायसी लिखते हैंजायस नगर मोर प्रस्थान, नगरक गाँव आदि उदयानू । तहाँ दिवस दस पहुँने आएऊं । भा वैराग बहुत सुख पाएऊं ॥ इस उद्धरण से स्पष्ट है कि जायस का पूर्व नाम उदयन था । जायसी वहाँ कुछ दिन के लिए अतिथि के रूप में गये । उन्हें वहाँ वैराग्य हों गया । इससे यह बात सिद्ध नहीं हो पाती कि जायसी का जन्म स्थान भी जायस हो था। जायस के विषय में 'पद्मावत' के स्तुति खंड में केवल इतना उल्लेख हैजायस नगर धरम प्रस्थान । तहाँ श्राइ कवि कीन्ह वखानू ।। प्रतः जायस में मलिक मुहम्मद किसी अन्य स्थान से प्राये थे। जायस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल था । प्रमाण एवं जनश्रुति के सामंजस्य से उपरिकथित निष्कर्ष के प्रतिरिक्त और किसी बात को पुष्टि नहीं हो पाती । कोई जनश्रुति उनके जन्मस्थान को जायस बताती है, कोई गाजीपुर । मानिकपुर जिला प्रतापगढ़, को उनका ननिहाल कहा जाता है। माता-पिता और भाइयों के बारे में प्रसिद्ध है कि उनके माता-पिता की मृत्यु इनके वचपन में ही हो गई थी । ततपश्चात् ये साधु-सन्तों के साथ रहने लग गये थे । जनश्रुति के आधार पर इनका विवाह हुश्रा था और सन्तान भी थो । अमेठी के राजा को इन पर बडी श्रद्धा थी और उस राज्य में वे सम्मान सहित बहुत दिन तक रहे । वहीं पर इनको मृत्यु भी हो गई । जायस में उनका मकान और 'अमेठी' में उनकी कब्र प्राज भी विद्यमान है । ऐसा सुना जाता है कि जायस में इनके वशज भी हैं । इन विवरणो से यह स्पष्ट है कि जायसी का जन्म चाहे जायस में हुआ हो या कहीं अन्यत्र परन्तु उनका सम्बन्ध जायस से प्रवश्य रहा। इसमें सदेह नहीं हो सकता कि जायस ही उनका स्थायी निवास स्थान था । 'जायसी' नाम से उनकी प्रसिद्धि से भी यही अर्थ व्यक्त होता है । इस विषय में विविध विद्वानों ने शोध किया है । उसके आधार पर सक्षेप में कहा जा सकता है - "जान पड़ता है, जायस जायसी का जन्म स्थान नहीं था । वे दस दिन के पाहूने के रूप में चले श्राये, परन्तु पीछे वैरागी वन गये । 'आखिरी कलाम' की रचना वैरागी बनने के बाद की बात है । सम्भव है इसके बाद लेखक कहीं अन्यत्र चला गया, कदाचित् कालपी । यहीं वह सूफीमत में दीक्षित हुश्रा और उसे अपने मधुर कण्ठ के द्वारा 'कवि' के नाते प्रसिद्धि भी मिल गई। यह भी सम्भव है कि 'पद्मावत' की रचना प्रवास में हुई हो औौर सूफी दृष्टिकोरण के कारण शीघ्र ही प्रसिद्धि हो गई हो; जायस को धर्म-स्थान मानकर हो उसे अपना स्थान बना लिया हो ।" व्यक्तित्व - जायसी जी काने थे । देखने में फुरुप भी थे । प्राचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी का हास्य है कि 'भगवान् ने इन्हें रूप देने में कजूसी को । जनश्रुति है कि शेरशाह इनके रूप को देखकर हँसा । उसको उन्होंने तुरन्त प्रत्युत्तर दिया था - "मोहि का हँससि कि कोहरहि ।" ये चडे हो वाक्पटु और प्रत्युत्पन्नमति थे । जायसी सूफी कवि थे । इस वर्ग के कवियों में उनका स्थान द्वितीय हिन्दी में वे सूफी सम्प्रदाय के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते है । जायसी पहले साधक हैं और पीछे कवि । सच तो यह है कि सूफी-सम्प्रदाय और सूफी विचारधारा को मनोरम और आकर्षक रूप में उपस्थित करने के उद्देश्य से ही जायसी ने काव्य-रचना की तथा उन्हें इस उद्देश्य की पूर्ति में पर्याप्त सफलता भी मिली । जायसी अत्यन्त उदार व्यक्ति थे । शील और सहिष्णुता इनके प्रधान गुरग थे । वे सन्त थे, साधक थे, दार्शनिक थे औौर थे प्रति उदार कवि । इन गुरगो के समन्वय से जायसी की रचना विशेष प्रभावोत्पादक बन गई । जायसी की प्रसिद्धि सन्त- समुदाय में सर्वत्र व्याप्त हो गई । इनके जोवन-काल ही में इनके शिष्य इनके बनाये भावपूर्ण दोहे-चौपाई गाते फिरते थे । इससे जायसी की प्रसिद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि होती गई । कथानक को दृष्टि से जायसी की रचना में अन्य सब प्रेममार्गी कवियो को परम्परा से भेद पाया जाता है। जहाँ अन्य प्रेममार्गी संतो ने केवल कल्पित कथाओं का ही श्राश्रय लिया है, वहाँ जायसी ने उसमें इतिहास का भी मिश्रण कर दिया है । पद्मावत के पूर्वार्द्ध में व्यष्टि की प्रधानता है परन्तु उत्तरार्द्ध में कवि व्यष्टि से हटकर समष्टि अथवा लोक-पक्ष पर या गया है । इसके अतिरिक्त उसने अलाउद्दीन और पद्मिनी का ऐतिहासिक श्राख्यान जोड़ दिया है । इस कारण जायसी का पद्मावत प्रन्य प्रेममार्गी साहित्य से पृथक् हो गया है। अन्य सूफी कवि जहाँ प्रेम, करुणा, श्रद्धा, भक्ति तथा कोमल भावो को ही व्यक्त करते हैं वहां जायसी ने लोक-दृष्टि से प्रेरित होकर युद्ध, उत्साह, क्रोध, खीझ आदि भाव भी प्रदर्शित किये हैं। प्रतः वे सब प्रेम-मार्गी कवियों से एक कदम श्रागे बढ जाते हैं । माता-पिता और भाइयों के बारे में प्रसिद्ध है कि उनके माता-पिता की मृत्यु इनके बचपन में ही हो गई थी । तत्पश्चात् ये साधु-सन्तों के साथ रहने लग गये थे । जनश्रुति के आधार पर इनका विवाह हुश्रा था और सन्तान भी थी । अमेठी के राजा की इन पर बड़ी श्रद्धा थी और उस राज्य में वे सम्मान सहित बहुत दिन तक रहे । वहीं पर इनकी मृत्यु भी हो गई । जायस में उनका मकान और 'अमेठी' में उनकी कब्र प्राज भी विद्यमान है । ऐसा सुना जाता है कि जायस में इनके वशज भी हैं । इन विवरणों से यह स्पष्ट है कि जायसी का जन्म चाहे जायस में हुआ हो या कहीं अन्यत्र, परन्तु उनका सम्बन्ध जायस से अवश्य रहा । इसमें सदेह नहीं हो सकता कि जायस हो उनका स्थायी निवास स्थान था । 'जायसी' नाम से उनकी प्रसिद्धि से भी यही अर्थ व्यक्त होता है । इस विषय में विविध विद्वानों ने शोध किया है । उसके आधार पर सक्षेप में कहा जा सकता है"जान पडता है, जायस जायसी का जन्म स्थान नहीं था । वे दस दिन के पाहूने के रूप में चले श्राये, परन्तु पीछे वैरागी बन गये । 'आखिरी कलाम' की रचना वैरागी बनने के बाद की बात है । सम्भव है इसके बाद लेखक कहीं अन्यत्र चला गया, कदाचित् कालपी । यहीं वह सूफीमत में दीक्षित हुआ और उसे अपने मधुर कण्ठ के द्वारा 'कवि' के नाते प्रसिद्धि भी मिल गई । यह भी सम्भव है कि 'पद्मावत' की रचना प्रवास में हुई हो और सूफी दृष्टिकोरण के कारण शीघ्र ही प्रसिद्धि हो गई हो; जायस को धर्म स्थान मानकर हो उसे अपना स्थान बना लिया हो ।" व्यक्तित्व - जायसी जी काने थे । देखने में फुरूप भी थे । प्राचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी का हास्य है कि 'भगवान् इन्हें रूप देने में कजूसी को । जनश्रुति है कि शेरशाह इनके रूप को देखकर हँसा । उसको उन्होंने तुरन्त प्रत्युत्तर दिया था - "मोहि का हँससि कि कोहरहि ।" ये बडे ही वाक्पटु और प्रत्युत्पन्नमति थे । जायसी सूफी कवि थे । इस वर्ग के कवियों में उनका स्थान अद्वितीय है । हिन्दी में वे सूफी सम्प्रदाय के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं । जायसी पहले साधक हैं और पीछे कवि । सच तो यह है कि सूफी-सम्प्रदाय और सूफी विचारधारा को मनोरम प्रौर प्राकर्षक रूप में उपस्थित करने के उद्देश्य से हो जायसी ने काव्य रचना की तथा उन्हें इस उद्देश्य की पूर्ति में पर्याप्त सफलता भी मिली । जायसी अत्यन्त उदार व्यक्ति थे । शील और सहिष्णुता इनके प्रधान गुरग थे । वे सन्त थे, साधक थे, दार्शनिक थे औौर थे प्रति उदार कवि । इन गुरगो के समन्वय से जायसी की रचना विशेष प्रभावोत्पादक वन गई । जायसी की प्रसिद्धि सन्त- समुदाय में सर्वत्र व्याप्त हो गई । इनके जीवन-काल ही में इनके शिष्य इनके बनाये भावपूर्ण दोहे-चौपाई गाते फिरते थे। इससे जायसी की प्रसिद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि होती गई । कथानक की दृष्टि से जायसी की रचना में अन्य सब प्रेममार्गों कवियो को परम्परा से भेद पाया जाता है। जहाँ अन्य प्रेममार्गों सतों ने केवल कल्पित कयाम्रो का ही श्राश्रय लिया है, वहाँ जायसी ने उसमें इतिहास का भी मिश्ररण कर दिया है। पद्मावत के पूर्वार्द्ध में व्यष्टि की प्रधानता है परन्तु उत्तरार्द्ध में कवि व्यष्टि से हटकर समष्टि प्रयवा लोक-पक्ष पर गया है। इसके अतिरिक्त उसने अलाउद्दीन और पद्मिनी का ऐति हासिक श्राख्यान जोड दिया है। इस कारण जायसी का पद्मावत प्रन्य प्रेममार्गी साहित्य से पृथक् हो गया है। अन्य सूफी कवि जहाँ प्रेम, करुणा, श्रद्धा, भक्ति तथा कोमल भावों को ही व्यक्त करते हैं वहां जायसी ने लोक दृष्टि से प्रेरित होकर युद्ध, उत्साह, क्रोध, खीझ श्रादि भाव भी प्रदर्शित किये हैं। अतः वे सव प्रेम-मार्गी कवियो से एक कदम श्रागे वढ जाते हैं । कृतियाँ - जायसी के जन्म संवत् और जन्म स्थान के विविध शोघों के अनुरूप हो, उनकी कृतियों के विषय में भी महत्त्वपूर्ण शोध कार्य किया गया है। विविध खोजों के फलस्वरूप जायसी के कुल ग्रंथों को सख्या इक्कीस तक पहुँचती है परन्तु उनके नामों के अतिरिक्त और कुछ नहीं ज्ञात हो सका है । जायसी की तीन प्रधान रचनाएँ है - 'पद्मावत', 'श्रखरावट' और 'आखिरी फलाम' । इनके अतिरिक्त भी कुछ रचनाएँ उपलब्ध कही जाती हैं। उदाहरण के लिए - बगाल एशियाटिक सोसायटी के पास 'सोरठ' और 'उपजो' की हस्तलिखित प्रतियाँ, डाशून्य स्प्रंगर के पास 'घनावट' को प्रति । इससे अधिक अन्य पुस्तकों के विषय में कुछ ज्ञात नहीं । इन पुस्तकों पर जब तक पूर्णतया शोध न हो कुछ भी साधिकार कहना उचित नहीं । प्रत अब तक की खोजों के आधार पर जायसी के केवल तीन ग्रथ ही प्रामारिगक कहे जा सकते हैं । ये ग्रथ काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित है । जिनके सम्पादक है प्राचार्य पशून्य रामचन्द्र शुक्ल । रचनाक्रम के सम्बन्ध में विद्वानों का मत है कि 'आखिरी फलाम' सर्वप्रथम लिखा गया । एक प्रलोचक लिखते हैं - "पानीपत की लडाई के तीन वर्ष पश्चात् जब वाबर 'शाह छत्रपति राजा था, उन्होंने 'आखिरी फलाम' की रचना की और इसके ग्यारह वर्ष बाद सन् एक हज़ार पाँच सौ चालीस में पद्मावत को लिखना प्रारम्भ किया । इस समय जायसी पैंतालीस वर्ष की प्रौढ़ अवस्था को प्राप्त कर चुके थे ।" डाशून्य कमलफुलश्रेष्ठ की गणना के अनुसार जायसो का जन्म एक सौ छः हिजरी में हुआ और पद्मावत उनको इक्कीस वर्ष की रचना ठहरती है । पद्मावत-जैसे प्रौढ़ काव्य की रचना इक्कीस वर्ष का युवक करे, यह कुछ प्रसम्भव- सी बात है। फिर 'आखिरी कलाम' को भाषा-शैली में प्रौढ़ता के चिह्न भी नहीं मिलते और इसमें इस्लामी भाव भरे पड़े है, सूफी चिन्तन का जरा भी प्रभात नहीं है । स्पष्ट है कि 'आखिरी कलाम' छब्बीस-तीस वर्ष के युवा की रचना है। इसमें श्रादि से अन्त तक इस्लामी कट्टर भावना है । भ्रम का कारण ग्रंथ का नाम जान पडता है । कदाचित् जायसी ने इसका कोई नाम ही नहीं रखा । फारसी में 'श्राखिरितनामा' की परम्परा थी। इसी विचार से किसी ने ग्रंथ को 'खिरी कलाम' कह दिया और आलोचक इस भ्रम में पड़ गये कि यह जायसी को अन्तिम रचना है । कट्टर इस्लाम से सूफीमत की ओोर वढना प्रगति के चिह्न है । इसके विपरीत जो है, वह भ्रष. पतन है । पद्मावत के रचयिता से हम यह प्राशा नहीं करते कि वह अन्तिम रचना के समय कट्टर इस्लामी विचारधारा का पोषरग करे । हो सकता है 'कया-प्रारम्भवैन' के रूप में पद्मावत की प्रारम्भिक पंक्तियाँ कवि ने मुख्य काव्य-रचना के वाद की हों । तब एक हज़ार पाँच सौ चालीस ईशून्य में पद्मावत समाप्त समझा जाना चाहिए । इस प्रकार पद्मावत का रचना-काल एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस और एक हज़ार पाँच सौ चालीस ईशून्य के बीच का समय रहेगा । इस प्रकार यह सिद्ध है कि 'पद्मावत' का से एक हज़ार पाँच सौ चालीस तक हो सकता है । 'अखरावट' के रचना-काल के विषय में सप्रमारण शोध नहीं, परन्तु सामान्य रूप से यह मान्य है कि वह पद्मावत के पहले की ही रचना हो सकती है। यह तो रचना-काल का प्रसंग रहा । जायसी के सम्यक् ज्ञान के लिए के इन तीनों ग्रंथों का विशद विवेचन आवश्यक है। प्रत. काल-क्रम के अनुसार प्रथम 'आखिरी कलाम' का निरूपण उचित एवं तर्कयुक्त है। आखिरी कलाम - यह जायसी का श्रादि-ग्रंथ प्रतीत होता है । इसका रचना-फाल सन् एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस ईशून्य है । 'आखिरी फलाम' के शब्दार्थ को ही आधार मानकर इसे उनको अन्तिम रचना कहना युक्तियुक्त नहीं । चाहे विषयवस्तु के दृष्टिकोरण से हम 'आखिरी कलाम' को
- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? यूरोप में 1,379 व्यक्तियों पर किए गए अध्ययन से मालूम हुआ है कि जो लोग भोजन में अधिक लाइकोपीन (जो टमाटर में पाया जाता है) लेते हैं। उनमें हार्ट अटैक का खतरे कम होता हैं। अध्ययन में शामिल अधिकत्तर लोग वृद्व थे। और वे सभी दिल के मरीज थे जिनको दिल का दौरा पड़ चुका था। उनके शरीर में लाइकोपीन की उपस्थिति की मात्रा का आकलन किया गया था। बीटा केरोटीन की तरह लाइकोपीन भी वसा में घुलने वाला पदार्थ है जो आँतों में सोखा जाता है। लाइकोपीन की सुरक्षा का काम इसके प्रभावशाली ऑक्सीकरण रोधक के रूप में है। जिससे फ्री रेडिकलों के द्वारा कोशिकाओं, अणुओं और जीन्स के नुकसान को रोकती है। फ्री रेडिकल्स अत्यधिक प्रतिक्रियात्मक अणु हैं, जो रक्त प्रवाह में अन्य पदार्थों से मिलकर हानि पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए इनमें कोलेस्टरोलिमोआ धमनियों में जम कर आघात का कारण बन सकता है। यह जेनेटिक परिवर्तन करके कैंसर उत्पन्न कर सकता है। फ्री रेडिकल क्षति से सूर्य प्रकाश के कारण होने वाला कैंसर अथवा ओजोन जैसे प्रदूषण में साँस लेने से फेफड़ों की बीमारियाँ हो सकती हैं।
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India-Canada Row: जिस तरह से कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर सिख आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाया है. इसके बाद से ही इस तरह का हंगामा शुरू हो गया है, जिसकी चपेट में दोनों पक्षों के लोग आने लगे हैं. भारत ने कनाडाई लोगों के वीजा पर रोक लगा दी है. दूसरी ओर, जो भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई करना चाहते हैं, वे अब ऐसा करने से बच रहे हैं। इसकी वजह दोनों देशों के बीच पैदा हुआ तनाव है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संक्षात्र धामनकर के माता-पिता उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कनाडा भेजना चाहते थे. लेकिन जिस तरह से भारत और कनाडा के बीच रिश्ते ख़राब हुए हैं उसके बाद संस्कृति ने अपनी योजना बदल दी है. संस्कृति की जननी अमृता ने कहा कि वह उन परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहतीं जो रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद यूक्रेन में पढ़ने वाले छात्रों को झेलनी पड़ीं। यूक्रेन से हजारों भारतीय छात्रों को देश लौटना पड़ा. महाराष्ट्र के ठाणे जिले की रहने वाली अमृता धमनकर ने कहा, 'पिछले हफ्ते हमने जो रिपोर्ट देखी है वह चिंताजनक है। हम बच्चों की शिक्षा के लिए एक स्थिर माहौल चाहते हैं, जो फिलहाल कनाडा में दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने तय किया है कि वह अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के लिए जॉर्जिया जाएंगी. हम नहीं चाहते कि यूक्रेन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के साथ जो हुआ वह हमारी बेटी के साथ हो। संस्कृति उन छात्रों में से हैं जो कनाडा नहीं जाना चाहते. विदेश में पढ़ाई में मदद करने वाली सलाहकार कंपनी विंगरो ईजुनेक्स्ट के निदेशक हरीश मिश्रा ने कहा, हमारे पास 45 ऐसे छात्र थे जो कनाडा में पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन अब उन्होंने अपना मन बदल लिया है। उन्होंने कहा, 'मेरे पास कनाडा के लिए 45 प्रवेश आवेदन थे. इन सभी ने कहा है कि वे अब कनाडा नहीं जाना चाहते इसलिए उन्हें रिफंड दिया जाए। माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हरीश ने कहा कि कनाडा में उनके जिस सहकर्मी को इन छात्रों की मदद करनी थी, उसने भी अपना काम बंद कर दिया है. ऐसे में तो यही लगता है कि हालात सामान्य होने तक कोई भी कनाडा में पढ़ाई नहीं करना चाहेगा.
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कोरोना वायरस महामारी के बीच वित्त मंत्रालय ने राज्यों को राहत देने के लिए जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत जीएसटी मुआवजे के मद में दो चरणों में 34 हजार करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। यह मुआवजा राज्यों को जीएसटी व्यवस्था में हुई राजस्व हानि की भरपाई के लिए दिया जाता है। सूत्रों ने कहा कि मंगलवार को 14,103 करोड़ रुपये जारी किए जाने के साथ ही केंद्र ने अक्तूबर और नवंबर के लिए कुल 34,053 करोड़ रुपये के जीएसटी मुआवजा उपकर का भुगतान कर दिया है। 19,950 करोड़ रुपये की पहली किस्त 17 फरवरी को जारी कर दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय राज्यों को दिसंबर और जनवरी के लंबित बकाये का भुगतान करने पर भी विचार कर रहा है, जिसका जल्द ही कई चरणों में भुगतान किया जा सकता है। सरकार राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को जीएसटी मुआवजा उपकर के मद में 1. 35 लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। जीएसटी कानून के अंतर्गत राज्यों को जीएसटी व्यवस्था में पहले पांच साल के लिए राजस्व हानि की भरपाई की जानी है। कुल मिलाकर राज्यों को ऐसे समय में 34,053 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। जब राज्यों को कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के चलते तरलता के संकट का सामना करना पड़ रहा है। मार्च महीने में जीएसटी संग्रह एक साल पहले के समान महीने की तुलना में 8. 4 फीसदी घटकर 1. 06 लाख करोड़ रुपये रह गया। संग्रह में कमी की मुख्य वजह घरेलू लेनदेन के साथ ही आयात से राजस्व में गिरावट रही। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
कोरोना वायरस महामारी के बीच वित्त मंत्रालय ने राज्यों को राहत देने के लिए जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत जीएसटी मुआवजे के मद में दो चरणों में चौंतीस हजार करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। यह मुआवजा राज्यों को जीएसटी व्यवस्था में हुई राजस्व हानि की भरपाई के लिए दिया जाता है। सूत्रों ने कहा कि मंगलवार को चौदह,एक सौ तीन करोड़ रुपये जारी किए जाने के साथ ही केंद्र ने अक्तूबर और नवंबर के लिए कुल चौंतीस,तिरेपन करोड़ रुपये के जीएसटी मुआवजा उपकर का भुगतान कर दिया है। उन्नीस,नौ सौ पचास करोड़ रुपये की पहली किस्त सत्रह फरवरी को जारी कर दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय राज्यों को दिसंबर और जनवरी के लंबित बकाये का भुगतान करने पर भी विचार कर रहा है, जिसका जल्द ही कई चरणों में भुगतान किया जा सकता है। सरकार राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को जीएसटी मुआवजा उपकर के मद में एक. पैंतीस लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। जीएसटी कानून के अंतर्गत राज्यों को जीएसटी व्यवस्था में पहले पांच साल के लिए राजस्व हानि की भरपाई की जानी है। कुल मिलाकर राज्यों को ऐसे समय में चौंतीस,तिरेपन करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। जब राज्यों को कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के चलते तरलता के संकट का सामना करना पड़ रहा है। मार्च महीने में जीएसटी संग्रह एक साल पहले के समान महीने की तुलना में आठ. चार फीसदी घटकर एक. छः लाख करोड़ रुपये रह गया। संग्रह में कमी की मुख्य वजह घरेलू लेनदेन के साथ ही आयात से राजस्व में गिरावट रही। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली की मृत्यु के बाद आज (अगस्त 27, 2019 को) DDCA ने फिरोजशाह कोटला मैदान का नाम बदलकर अरुण जेटली के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। दिल्ली के इतिहास में मध्यकालीन भारत का काफी महत्त्व देखने को मिलता है। जिसका कारण यह है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने इसे और आगरा को अपना ख़ास ठिकाना बनाकर रखा। इन्हीं में से एक नाम है फिरोजशाह तुगलक, जिसे इतिहास एक असहिष्णु और धर्मांध शासक के रूप में जानता है। फिरोज शाह तुगलक दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का शासक था। उसकी माँ- बीबी जैजैला (भड़ी) राजपूत सरदार रजामल की पुत्री थी। फिरोजशाह, मुहम्मद बिन तुगलक का चचेरा भाई एवं सिपहसलार 'रजब' का पुत्र था। मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद ही फिरोज शाह का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त, 1351 में हुआ था। इस तरह से फिरोजशाह तुगलक वंश का तीसरा शासक (1351-1388) बना और उसने दिल्ली में एक नया शहर बसाया-फिरोजाबाद! इतिहासकारों के अनुसार, फिरोजशाह द्वारा हिन्दुओं पर जुर्म और बर्बरता करने का एक यह भी कारण था कि उसे एक राजपूत माँ से पैदा होने के कारण अपने समय के उलेमाओं के सामने अपनी कट्टर मुस्लिम छवि को बनाए रखना था। यही वजह है कि इतिहास में उसे एक धर्मांध शासक के रूप में जाना गया। उसने अपनी हूकूमत के दौरान कई हिन्दूओं को मुस्लिम धर्म अपनाने पर मजबूर किया। फिरोज तुगलक ने उलेमाओं का सहयोग पाने के लिए कट्टर धार्मिक नीति अपनाई, उलेमाओं को विशेषाधिकार पुनः प्राप्त किए तथा शरीयत को न केवल प्रशासन का आधार घोषित किया बल्कि व्यवहार में भी उसे लागू किया। ऐसा करने वाला वह सल्तनत का पहला शासक था। इसी फिरोजशाह तुगलक ने शरीयत के अनुसार जनता से 4 तरह के कर वसूले थे- जकात, सिंचाई कर (यह अपवाद था, क्योंकि यह शरियत में नहीं है), खम्स (युद्ध से प्राप्त लूट तथा भूमि में दबा खजाना तथा खानों से प्राप्त आय का बँटवारा) जिसके अनुपात को शरीयत के आधार पर वसूला। और इसी ने पहली बार ब्राह्मणों से भी जजिया (गैर मुस्लमानों से लिया जाने वाला कर) कर वसूला। वह पहला शासक था, जो जजिया को खराज (भू-राजस्व) से पृथक रूप से वसूलता था। इससे पूर्व ब्राह्मणों को इस कर से मुक्त रखा गया था। यह पहला सुल्तान था जिसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगा दिया। फिरोज तुगलक के ऐसा करने के विरोध में दिल्ली के ब्राह्मणों ने भूख हड़ताल कर दी थी। इसके बावजूद भी फिरोज तुगलक ने इसे समाप्त करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अंत में दिल्ली की जनता ने ब्राह्मणों के बदले स्वयं जजिया देने का निर्णय लिया। फिरोज शाह एक कमजोर सेनापति था, इसलिए उसने सत्ता में बने रहने का सबसे आसान तरीका अपनाकर उलेमाओं को खुश रखने का काम किया। यह सब फिरोजशाह ने सिर्फ और सिर्फ अपना सिंहासन बचाए रखने के लिए किया था। फिरोजशाह ने अपने जीवन काल में मात्र 4 अभियान किए। इसी क्रम में फिरोज तुगलक ने एक ब्राह्मण को सिर्फ इसलिए जिंदा जलाया था क्योंकि वह मुस्लिमों के बीच हिन्दुओं की प्रशंसा कर रहा था। उसने नागरकोट (बंगाल) और 1360 में प्रसिद्ध जगन्नाथपुरी के मंदिर को नष्ट किया और मंदिर में स्थित पुस्तकालय के 1300 संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद करवाया जिसे 'दलायते फिरोजशाही' नाम दिया। इसके साथ ही फिरोज शाह ने प्रशासन में हिन्दुओं को शामिल करना अत्यंत सीमित कर दिया। उलेमाओं को प्रसन्न करने के लिए ही उसने हिन्दुओं पर अत्याचार के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं के पीरों की मजार जाने पर पाबंदी लगाई। पर्दा प्रथा को प्रोत्साहन दिया तथा अनेक मस्जिदों व मदरसों का निर्माण करवाया। इतिहास में फिरोजशाह तुगलक को बुलंद इमारतों की तामीर करवाने के शौक के कारण भी याद किया जाता है। उसने करीब 300 नगर बसाए थे जिनमें हिसार, फिरोजाबाद (दिल्ली में नया शहर), फतेहाबाद, जौनपुर आदि प्रमुख हैं। दिल्ली स्थित कोटला फिरोजशाह दुर्ग जो कि फिरोजशाह कोटला मैदान के नाम से जाना जाता है, भी इसी ने बनाया था। फिरोजशाह तुगलक ने दिल्ली में एक नया शहर बसाया था, जिसे फिरोजाबाद नाम दिया। फिलहाल दिल्ली में स्थित 'कोटला फिरोजशाह आबाद' कभी उसके दुर्ग का काम करता था। इस किले को कुश्के-फिरोज यानी फिरोज के महल के नाम से पुकारा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि फिरोजाबाद, हौज खास से लेकर 'पीर गायब' (हिंदूराव हॉस्पिटल) तक आबाद था। लेकिन अब इसके अवशेष भी ढूँढे नहीं मिलते हैं। इतिहासकार फिरोजाबाद को दिल्ली का 5वाँ शहर मानते हैं। दिल्ली स्थित हौज खास में फिरोजशाह तुगलक का मकबरा है। उसके शासन में दिल्ली में कई मस्जिदें भी बनाई गईं। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने अपने पुत्र फ़तेह खान के जन्मदिवस के मौके पर फतेहाबाद शहर की स्थापना की थी। इसके साथ ही उसने जौनपुर शहर की भी स्थापना अपने बड़े भाई जौना खान की याद में की और इस नगर का नाम जौनाखाँ (मुहम्मद बिन तुगलक) के नाम पर रखा।
भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली की मृत्यु के बाद आज DDCA ने फिरोजशाह कोटला मैदान का नाम बदलकर अरुण जेटली के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। दिल्ली के इतिहास में मध्यकालीन भारत का काफी महत्त्व देखने को मिलता है। जिसका कारण यह है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने इसे और आगरा को अपना ख़ास ठिकाना बनाकर रखा। इन्हीं में से एक नाम है फिरोजशाह तुगलक, जिसे इतिहास एक असहिष्णु और धर्मांध शासक के रूप में जानता है। फिरोज शाह तुगलक दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का शासक था। उसकी माँ- बीबी जैजैला राजपूत सरदार रजामल की पुत्री थी। फिरोजशाह, मुहम्मद बिन तुगलक का चचेरा भाई एवं सिपहसलार 'रजब' का पुत्र था। मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद ही फिरोज शाह का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त, एक हज़ार तीन सौ इक्यावन में हुआ था। इस तरह से फिरोजशाह तुगलक वंश का तीसरा शासक बना और उसने दिल्ली में एक नया शहर बसाया-फिरोजाबाद! इतिहासकारों के अनुसार, फिरोजशाह द्वारा हिन्दुओं पर जुर्म और बर्बरता करने का एक यह भी कारण था कि उसे एक राजपूत माँ से पैदा होने के कारण अपने समय के उलेमाओं के सामने अपनी कट्टर मुस्लिम छवि को बनाए रखना था। यही वजह है कि इतिहास में उसे एक धर्मांध शासक के रूप में जाना गया। उसने अपनी हूकूमत के दौरान कई हिन्दूओं को मुस्लिम धर्म अपनाने पर मजबूर किया। फिरोज तुगलक ने उलेमाओं का सहयोग पाने के लिए कट्टर धार्मिक नीति अपनाई, उलेमाओं को विशेषाधिकार पुनः प्राप्त किए तथा शरीयत को न केवल प्रशासन का आधार घोषित किया बल्कि व्यवहार में भी उसे लागू किया। ऐसा करने वाला वह सल्तनत का पहला शासक था। इसी फिरोजशाह तुगलक ने शरीयत के अनुसार जनता से चार तरह के कर वसूले थे- जकात, सिंचाई कर , खम्स जिसके अनुपात को शरीयत के आधार पर वसूला। और इसी ने पहली बार ब्राह्मणों से भी जजिया कर वसूला। वह पहला शासक था, जो जजिया को खराज से पृथक रूप से वसूलता था। इससे पूर्व ब्राह्मणों को इस कर से मुक्त रखा गया था। यह पहला सुल्तान था जिसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगा दिया। फिरोज तुगलक के ऐसा करने के विरोध में दिल्ली के ब्राह्मणों ने भूख हड़ताल कर दी थी। इसके बावजूद भी फिरोज तुगलक ने इसे समाप्त करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अंत में दिल्ली की जनता ने ब्राह्मणों के बदले स्वयं जजिया देने का निर्णय लिया। फिरोज शाह एक कमजोर सेनापति था, इसलिए उसने सत्ता में बने रहने का सबसे आसान तरीका अपनाकर उलेमाओं को खुश रखने का काम किया। यह सब फिरोजशाह ने सिर्फ और सिर्फ अपना सिंहासन बचाए रखने के लिए किया था। फिरोजशाह ने अपने जीवन काल में मात्र चार अभियान किए। इसी क्रम में फिरोज तुगलक ने एक ब्राह्मण को सिर्फ इसलिए जिंदा जलाया था क्योंकि वह मुस्लिमों के बीच हिन्दुओं की प्रशंसा कर रहा था। उसने नागरकोट और एक हज़ार तीन सौ साठ में प्रसिद्ध जगन्नाथपुरी के मंदिर को नष्ट किया और मंदिर में स्थित पुस्तकालय के एक हज़ार तीन सौ संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद करवाया जिसे 'दलायते फिरोजशाही' नाम दिया। इसके साथ ही फिरोज शाह ने प्रशासन में हिन्दुओं को शामिल करना अत्यंत सीमित कर दिया। उलेमाओं को प्रसन्न करने के लिए ही उसने हिन्दुओं पर अत्याचार के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं के पीरों की मजार जाने पर पाबंदी लगाई। पर्दा प्रथा को प्रोत्साहन दिया तथा अनेक मस्जिदों व मदरसों का निर्माण करवाया। इतिहास में फिरोजशाह तुगलक को बुलंद इमारतों की तामीर करवाने के शौक के कारण भी याद किया जाता है। उसने करीब तीन सौ नगर बसाए थे जिनमें हिसार, फिरोजाबाद , फतेहाबाद, जौनपुर आदि प्रमुख हैं। दिल्ली स्थित कोटला फिरोजशाह दुर्ग जो कि फिरोजशाह कोटला मैदान के नाम से जाना जाता है, भी इसी ने बनाया था। फिरोजशाह तुगलक ने दिल्ली में एक नया शहर बसाया था, जिसे फिरोजाबाद नाम दिया। फिलहाल दिल्ली में स्थित 'कोटला फिरोजशाह आबाद' कभी उसके दुर्ग का काम करता था। इस किले को कुश्के-फिरोज यानी फिरोज के महल के नाम से पुकारा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि फिरोजाबाद, हौज खास से लेकर 'पीर गायब' तक आबाद था। लेकिन अब इसके अवशेष भी ढूँढे नहीं मिलते हैं। इतिहासकार फिरोजाबाद को दिल्ली का पाँचवाँ शहर मानते हैं। दिल्ली स्थित हौज खास में फिरोजशाह तुगलक का मकबरा है। उसके शासन में दिल्ली में कई मस्जिदें भी बनाई गईं। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने अपने पुत्र फ़तेह खान के जन्मदिवस के मौके पर फतेहाबाद शहर की स्थापना की थी। इसके साथ ही उसने जौनपुर शहर की भी स्थापना अपने बड़े भाई जौना खान की याद में की और इस नगर का नाम जौनाखाँ के नाम पर रखा।
Policeman Dance Video: वीडियो में आप देख सकते हैं कि दो-तीन पुलिसकर्मी देशभक्ति गीत पर मस्त कमर लचका रहे हैं। उनके जोशीले डांस ने वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया है। Policeman Dance Video : सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। यह वीडियो कुछ पुलिसकर्मियों का है, जो गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभक्ति गाने पर जबरदस्त डांस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मियों का डांस वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि दो-तीन पुलिसकर्मी देशभक्ति गीत पर मस्त कमर लचका रहे हैं। उनके जोशीले डांस ने वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया है। वीडियो सामने आने के बाद लोग पुलिसकर्मियोंं के डांस की जमकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा वीडियो शाजापुर जिले के मक्सी थाना का है। वीडियो में जबरदस्त कमर लचका रहे पुलिसकर्मी एएसआई जितेंद्र दुबे हैं। वह 'हिंदुस्तान की कसम' फिल्म के देशभक्ति गीत 'जलवा तेरा जलवा' गाने पर जमकर झूमते नजर आ रहे हैं। इस गाने पर उनके डांस ने आस-पास मौजूद पुलिसकर्मियों के भीतर देशभक्ति का जोश भर दिया। आप देख सकते हैं कि जब जितेंद्र दुबे अपने डांस का जलवा दिखा रहे थे, तब पास मौजूद पुलिसकर्मी जोर-जोर से चिल्लाकर उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं। ट्रेंडिंगः
Policeman Dance Video: वीडियो में आप देख सकते हैं कि दो-तीन पुलिसकर्मी देशभक्ति गीत पर मस्त कमर लचका रहे हैं। उनके जोशीले डांस ने वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया है। Policeman Dance Video : सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। यह वीडियो कुछ पुलिसकर्मियों का है, जो गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभक्ति गाने पर जबरदस्त डांस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मियों का डांस वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि दो-तीन पुलिसकर्मी देशभक्ति गीत पर मस्त कमर लचका रहे हैं। उनके जोशीले डांस ने वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया है। वीडियो सामने आने के बाद लोग पुलिसकर्मियोंं के डांस की जमकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा वीडियो शाजापुर जिले के मक्सी थाना का है। वीडियो में जबरदस्त कमर लचका रहे पुलिसकर्मी एएसआई जितेंद्र दुबे हैं। वह 'हिंदुस्तान की कसम' फिल्म के देशभक्ति गीत 'जलवा तेरा जलवा' गाने पर जमकर झूमते नजर आ रहे हैं। इस गाने पर उनके डांस ने आस-पास मौजूद पुलिसकर्मियों के भीतर देशभक्ति का जोश भर दिया। आप देख सकते हैं कि जब जितेंद्र दुबे अपने डांस का जलवा दिखा रहे थे, तब पास मौजूद पुलिसकर्मी जोर-जोर से चिल्लाकर उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं। ट्रेंडिंगः
देश में ऊर्जा के बढ़ते संकट से जूझते हुए भारतीय कॉर्पोरेट की नजर उभरते हुई सौर ऊर्जा क्षेत्र पर जा टिकी है। साथ ही कंपनियां इस क्षेत्र में पहले उतर कर अधिक मुनाफा कमाने पर विचार कर रही हैं। इस मामले में बड़ी कंपनियां, जिनमें एस्सार, इंडियाबुल्स, रिलायसं एडीएजी, टाटा पावर, सूर्यचक्र और यूरो समूह भी गुजरात की तपती धरती पर अपने पांव रखने को तैयार हैं। राज्य सरकार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर जॉन बायर्न के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए बातचीत के अंतिम दैर में है ताकि 600 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन के सपने को हकीकत में बदला जा सके। बड़ी कंपनियां जैसे एस्सार, इंडियाबुल्स, रिलायंस, एडीएजी, टाटा पावर, सूर्या चक्र और यूरो समूह के साथ अन्य कंपनियां भी गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (जीईडीए) के पास अपने फोटोवोल्टिक, थर्मल और हाइब्रिड सोलर परियोजनाओं के प्रस्तावों को लेकर पहुंच रही हैं। सूत्रों के अनुसार एस्सार का मकसद सौर ऊर्जा के क्षेत्र में खास हाइब्रिड परियोजना के साथ उतरने का है, जिसमें बिजली उत्पादन के लिए धूप और गैस दोनों के मिश्रण का इस्तेमाल होगा, जबकि इंडियाबुल्स राज्य में 150 मेगावाट के फोटोवोल्टिक (पीवी) सेल्स की इकाई लगाने की योजना बना रही है। मुकेश अंबानी की रिलायंस और यूरो सोलर दोनों को केन्द्र सरकार की ओर से हर राज्य में 10 मेगावाट आवंटित कोटा में से 5-5 मेगावाट के लिए आशय पत्र मिल चुका है। रिलायंस की योजना अपने जामनगर विशेष आर्थिक क्षेत्र में पीवी सेल्स इकाई लगाने की है। गुजरात सरकार कंपनियों को राज्य में बढ़ावा देने के लिए अलग से 'गुजरात सौर ऊर्जा' पर काम कर रही है। साथ ही इसके लिए अलग शुल्क की भी योजना बनाई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि टाटा पावर की कच्छ में एक फोटोवोल्टिक सेल्स इकाई लगाने की एक बड़ी परियोजना है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 150-200 मेगावाट होगी। उनके मुताबिक सूर्या चक्र जहां 100 मेगावाट बिजली परियोजना लगाने पर विचार कर रही है, वहीं एडीएजी समूह संभाव्यता परीक्षण करने जा रही है। जीईडीए के निदेशक वाघमिन बुच ने कंपनियों के नामों का खुलासा किए बिना बताया, 'हम 10-12 कंपनियों से मिलने प्रस्तावों पर अंतिम विचार कर रहे हैं, जो कम से कम सौर ऊर्जा का 600 मेगावाट उत्पादन कर सकें। ' फिलहाल पीवी सेल्स के लिए उत्पादन लागत 13-15 रुपये प्रति इकाई आती है, जबकि थर्मल के लिए यह लागत 10 से 11 रुपये प्रति इकाई है।
देश में ऊर्जा के बढ़ते संकट से जूझते हुए भारतीय कॉर्पोरेट की नजर उभरते हुई सौर ऊर्जा क्षेत्र पर जा टिकी है। साथ ही कंपनियां इस क्षेत्र में पहले उतर कर अधिक मुनाफा कमाने पर विचार कर रही हैं। इस मामले में बड़ी कंपनियां, जिनमें एस्सार, इंडियाबुल्स, रिलायसं एडीएजी, टाटा पावर, सूर्यचक्र और यूरो समूह भी गुजरात की तपती धरती पर अपने पांव रखने को तैयार हैं। राज्य सरकार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर जॉन बायर्न के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए बातचीत के अंतिम दैर में है ताकि छः सौ मेगावाट ऊर्जा उत्पादन के सपने को हकीकत में बदला जा सके। बड़ी कंपनियां जैसे एस्सार, इंडियाबुल्स, रिलायंस, एडीएजी, टाटा पावर, सूर्या चक्र और यूरो समूह के साथ अन्य कंपनियां भी गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी के पास अपने फोटोवोल्टिक, थर्मल और हाइब्रिड सोलर परियोजनाओं के प्रस्तावों को लेकर पहुंच रही हैं। सूत्रों के अनुसार एस्सार का मकसद सौर ऊर्जा के क्षेत्र में खास हाइब्रिड परियोजना के साथ उतरने का है, जिसमें बिजली उत्पादन के लिए धूप और गैस दोनों के मिश्रण का इस्तेमाल होगा, जबकि इंडियाबुल्स राज्य में एक सौ पचास मेगावाट के फोटोवोल्टिक सेल्स की इकाई लगाने की योजना बना रही है। मुकेश अंबानी की रिलायंस और यूरो सोलर दोनों को केन्द्र सरकार की ओर से हर राज्य में दस मेगावाट आवंटित कोटा में से पाँच-पाँच मेगावाट के लिए आशय पत्र मिल चुका है। रिलायंस की योजना अपने जामनगर विशेष आर्थिक क्षेत्र में पीवी सेल्स इकाई लगाने की है। गुजरात सरकार कंपनियों को राज्य में बढ़ावा देने के लिए अलग से 'गुजरात सौर ऊर्जा' पर काम कर रही है। साथ ही इसके लिए अलग शुल्क की भी योजना बनाई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि टाटा पावर की कच्छ में एक फोटोवोल्टिक सेल्स इकाई लगाने की एक बड़ी परियोजना है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग एक सौ पचास-दो सौ मेगावाट होगी। उनके मुताबिक सूर्या चक्र जहां एक सौ मेगावाट बिजली परियोजना लगाने पर विचार कर रही है, वहीं एडीएजी समूह संभाव्यता परीक्षण करने जा रही है। जीईडीए के निदेशक वाघमिन बुच ने कंपनियों के नामों का खुलासा किए बिना बताया, 'हम दस-बारह कंपनियों से मिलने प्रस्तावों पर अंतिम विचार कर रहे हैं, जो कम से कम सौर ऊर्जा का छः सौ मेगावाट उत्पादन कर सकें। ' फिलहाल पीवी सेल्स के लिए उत्पादन लागत तेरह-पंद्रह रुपयापये प्रति इकाई आती है, जबकि थर्मल के लिए यह लागत दस से ग्यारह रुपयापये प्रति इकाई है।
मुंबई. लता मंगेशकर के गाए मशहूर गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' के पचास साल पूरा हो गए हैं। इस मौके पर मुंबई में एक भव्य आयोजन किया गया। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी ने लता मंगेशकर को सम्मानित किया। इस गाने के लिए लता मंगेशकर के सम्मान को भी राजनैतिक हवा देने की कोशिश की जा रही है। लता ने अपनी पहचान बने इस गाने को सम्मान समारोह में नहीं गाने की बात कही थी, लेकिन भाई नरेद्र मोदी के कहने पर उन्होंने गाने का अंतरा गाया। कवि प्रदीप के लिखे इस गाने को लता मंगेशकर ने सबसे पहले 27 जनवरी 1963 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने गाया। इस गाने को सुनकर पंडित जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू आ गए थे।
मुंबई. लता मंगेशकर के गाए मशहूर गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' के पचास साल पूरा हो गए हैं। इस मौके पर मुंबई में एक भव्य आयोजन किया गया। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी ने लता मंगेशकर को सम्मानित किया। इस गाने के लिए लता मंगेशकर के सम्मान को भी राजनैतिक हवा देने की कोशिश की जा रही है। लता ने अपनी पहचान बने इस गाने को सम्मान समारोह में नहीं गाने की बात कही थी, लेकिन भाई नरेद्र मोदी के कहने पर उन्होंने गाने का अंतरा गाया। कवि प्रदीप के लिखे इस गाने को लता मंगेशकर ने सबसे पहले सत्ताईस जनवरी एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने गाया। इस गाने को सुनकर पंडित जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू आ गए थे।
उन्होंने कहा," वह सबसे महान गेंदबाज थे, जिनके खिलाफ मैंने कभी खेला या उनके खिलाफ खेला। श्रद्धांजलि किंग, मेरी संवेदनाएं कीथ, ब्रिजेट, जेसन, ब्रुक, जैक्सन और समर के साथ हैं। " वार्न इतिहास के सबसे प्रभावशाली क्रिकेटरों में से एक थे। 1990 के दशक की शुरुआत में जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया, तब उन्होंने लगभग अकेले दम पर लेग-स्पिन की कला को फिर से खोजा, और 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने तक, वह 700 टेस्ट विकेट तक पहुंचने वाले पहले गेंदबाज बन गए थे। वार्न ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को 708 टेस्ट विकेट और एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में 293 के साथ समाप्त किया, जिससे वह श्रीलंका के प्रतिद्वंद्वी मुथैया मुरलीधरन (1,347) के बाद सर्वकालिक अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। शेन ने 11 एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी की, जिसमें 10 में जीत और सिर्फ एक बार हार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा," वह सबसे महान गेंदबाज थे, जिनके खिलाफ मैंने कभी खेला या उनके खिलाफ खेला। श्रद्धांजलि किंग, मेरी संवेदनाएं कीथ, ब्रिजेट, जेसन, ब्रुक, जैक्सन और समर के साथ हैं। " वार्न इतिहास के सबसे प्रभावशाली क्रिकेटरों में से एक थे। एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक की शुरुआत में जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया, तब उन्होंने लगभग अकेले दम पर लेग-स्पिन की कला को फिर से खोजा, और दो हज़ार सात में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने तक, वह सात सौ टेस्ट विकेट तक पहुंचने वाले पहले गेंदबाज बन गए थे। वार्न ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को सात सौ आठ टेस्ट विकेट और एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में दो सौ तिरानवे के साथ समाप्त किया, जिससे वह श्रीलंका के प्रतिद्वंद्वी मुथैया मुरलीधरन के बाद सर्वकालिक अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। शेन ने ग्यारह एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी की, जिसमें दस में जीत और सिर्फ एक बार हार का सामना करना पड़ा।
मंडी जिला के बाजारों में वीकेंड के बाद सोमवार को खूब चहल-पहल रही। निर्धारित समय अनुसार जैसे ही बाजार खुलेे, तो लोग कोरोना से बैखौफ होकर आवश्यक वस्तुओं सहित अन्य दुकानों पर भारी संख्या में पहुंच गए। सबसे अधिक भीड़ मंडी शहर के सेरी मंच पर स्थित सब्जियों की दुकानों पर रही। शहर में इतनी भीड़ थी कि लोगों को फुटपाथ पर चलने को जगह नहीं बची थी।
मंडी जिला के बाजारों में वीकेंड के बाद सोमवार को खूब चहल-पहल रही। निर्धारित समय अनुसार जैसे ही बाजार खुलेे, तो लोग कोरोना से बैखौफ होकर आवश्यक वस्तुओं सहित अन्य दुकानों पर भारी संख्या में पहुंच गए। सबसे अधिक भीड़ मंडी शहर के सेरी मंच पर स्थित सब्जियों की दुकानों पर रही। शहर में इतनी भीड़ थी कि लोगों को फुटपाथ पर चलने को जगह नहीं बची थी।
पटना वीमेंस कॉलेज की ओर से आयोजित वेबिनार में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि कोरोना के विरुद्ध इस अभियान में मीडियाकर्मी अग्रणी योद्धा रहे हैं। पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना के कारण प्रवेश परीक्षा नहीं होगी। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को सीधे मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए आयोजित इस प्रकिया में आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 9 अगस्त, 2021 है। प्रवेश परीक्षा 29 अगस्त को आयोजित की जाएगी। आईआईएमसी की ओर से कराए गए इस सर्वेक्षण में देशभर से 529 पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और मीडिया स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया। 'भारतीय जनसंचार संस्थान' (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है। चंद रोज पहले मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने 'कानून का राज' विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान एक बात बड़े मार्के की कही। वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'न्यूज नशा' (News Nasha) की मैनेजिंग एडिटर विनीता यादव ने समाचार4मीडिया के साथ तमाम मुद्दों पर चर्चा की है। 'गवर्नेंस नाउ' के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार और 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' के पूर्व प्रेजिडेंट आलोक मेहता (पद्मश्री) ने तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी है। पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया। 'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं 'पं. युगल किशोर' भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा। कमाल है। ऐसे पत्रकार तो कभी नहीं थे। हर सूचना को सच मान लेना और उसके आधार पर निष्कर्ष भी निकाल लेना कौन सा पेशेवर धर्म है? एक पत्रकार के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी होती है और जब किसी पत्रकार को अपनी यह पूंजी गंवानी पड़े या गिरवी रखनी पड़े तो उसकी मनःस्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों की तरह मीडिया भी इन दिनों सवालों के घेरे में है। उसकी विश्वसनीयता व प्रामाणिकता पर उठते हुए सवाल बताते हैं कि कहीं कुछ चूक हो रही है।
पटना वीमेंस कॉलेज की ओर से आयोजित वेबिनार में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि कोरोना के विरुद्ध इस अभियान में मीडियाकर्मी अग्रणी योद्धा रहे हैं। पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना के कारण प्रवेश परीक्षा नहीं होगी। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को सीधे मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शैक्षणिक सत्र दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए आयोजित इस प्रकिया में आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि नौ अगस्त, दो हज़ार इक्कीस है। प्रवेश परीक्षा उनतीस अगस्त को आयोजित की जाएगी। आईआईएमसी की ओर से कराए गए इस सर्वेक्षण में देशभर से पाँच सौ उनतीस पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और मीडिया स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया। 'भारतीय जनसंचार संस्थान' के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने समाचारचारमीडिया से खास बातचीत की है। चंद रोज पहले मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने 'कानून का राज' विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान एक बात बड़े मार्के की कही। वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'न्यूज नशा' की मैनेजिंग एडिटर विनीता यादव ने समाचारचारमीडिया के साथ तमाम मुद्दों पर चर्चा की है। 'गवर्नेंस नाउ' के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार और 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' के पूर्व प्रेजिडेंट आलोक मेहता ने तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी है। पं. माधवराव सप्रे की एक सौ पचासवीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जनसंचार संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया। 'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं 'पं. युगल किशोर' भारतीय जन संचार संस्थान का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा। कमाल है। ऐसे पत्रकार तो कभी नहीं थे। हर सूचना को सच मान लेना और उसके आधार पर निष्कर्ष भी निकाल लेना कौन सा पेशेवर धर्म है? एक पत्रकार के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी होती है और जब किसी पत्रकार को अपनी यह पूंजी गंवानी पड़े या गिरवी रखनी पड़े तो उसकी मनःस्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों की तरह मीडिया भी इन दिनों सवालों के घेरे में है। उसकी विश्वसनीयता व प्रामाणिकता पर उठते हुए सवाल बताते हैं कि कहीं कुछ चूक हो रही है।
You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. (+91) You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. कंगना रनौतः क्या करूं मैं इतनी टैलेंटेड हूं तो. . . ! क्या कंगना रनौत (Kangna ranaut) के पास तारीफ करने वालों की कमी हो गई है? जो खुद की तारीफ खुद ही किए जा रही हैं. माना कि Valentine Week चल रहा है लेकिन हाजमें की एक गोली तो बनती है.
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Indian Oil Corporation Limited 2020 : इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) में ट्रेड अपरेंटिस के पदों पर भर्तियां होने जा रही हैं। इन खाली पदों पर नियुक्तियों के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किए गए ही मान्य होंगे। इन भर्तियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया जारी है। पदों पर आवेदन से संबंधित पूरी जानकारी के लिए उम्मीदवार को विज्ञापन लिंक के साथ-साथ आवेदन लिंक भी खबर में आगे की स्लाइड्स में दिए जा रहे हैं। इस नौकरी से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अगली स्लाइड देखें। पदों का विवरण : पद का नाम : पदों की संख्या : शैक्षिक योग्यता : उम्मीदवार के लिए शैक्षिक योग्यता 12वीं पास निर्धारित की गई है। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए आगे दी गई नोटिफिकेशन देखें। महत्वपूर्ण तिथियां : चयन प्रक्रिया : उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक उम्मीदवार IOCL की आधिकारिक वेबसाइट जाएं और नोटिफिकेशन डाउनलोड करें। दिए गए दिशा -निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया को अंतिम तिथि 24 फरवरी, 2020 (शाम 5 : 00 बजे) तक पूरा करें। ध्यान रहें की आवेदन पत्र भरते समय किसी प्रकार कि त्रुटि न हो। आयु सीमा : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आपकी उम्र इस नौकरी के लिए मांगी गई तय सीमा में है या नहीं, यह जानने के लिए यहां क्लिक करें। आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें। शिक्षा की अन्य खबरों से अपडेट रहने के लिए यहां क्लिक करें। सरकारी नौकरियों की अन्य खबरों से अपडेट रहने के लिए यहां क्लिक करें।
Indian Oil Corporation Limited दो हज़ार बीस : इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में ट्रेड अपरेंटिस के पदों पर भर्तियां होने जा रही हैं। इन खाली पदों पर नियुक्तियों के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किए गए ही मान्य होंगे। इन भर्तियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया जारी है। पदों पर आवेदन से संबंधित पूरी जानकारी के लिए उम्मीदवार को विज्ञापन लिंक के साथ-साथ आवेदन लिंक भी खबर में आगे की स्लाइड्स में दिए जा रहे हैं। इस नौकरी से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अगली स्लाइड देखें। पदों का विवरण : पद का नाम : पदों की संख्या : शैक्षिक योग्यता : उम्मीदवार के लिए शैक्षिक योग्यता बारहवीं पास निर्धारित की गई है। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए आगे दी गई नोटिफिकेशन देखें। महत्वपूर्ण तिथियां : चयन प्रक्रिया : उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक उम्मीदवार IOCL की आधिकारिक वेबसाइट जाएं और नोटिफिकेशन डाउनलोड करें। दिए गए दिशा -निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया को अंतिम तिथि चौबीस फरवरी, दो हज़ार बीस तक पूरा करें। ध्यान रहें की आवेदन पत्र भरते समय किसी प्रकार कि त्रुटि न हो। आयु सीमा : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष और अधिकतम आयु चौबीस वर्ष निर्धारित की गई है। आपकी उम्र इस नौकरी के लिए मांगी गई तय सीमा में है या नहीं, यह जानने के लिए यहां क्लिक करें। आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें। शिक्षा की अन्य खबरों से अपडेट रहने के लिए यहां क्लिक करें। सरकारी नौकरियों की अन्य खबरों से अपडेट रहने के लिए यहां क्लिक करें।
आनी - आनी क्षेत्र के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल पनेऊ और आसपास के दो बड़े गांव को जाने वाली एकमात्र पनेऊ बस पांच किमी पीछे जैहरा कैंची से आगे नहीं निकल पा रही। शनिवार को यहां आने वाली बस कैंची में इस कद्र फंस गई कि ग्रामीणों को धक्के मारकर बड़ी मशक्कत के बाद बस को निकालना पड़ा। इस क्षेत्र में पिछले कई दिनों के बाद लोनिवि द्वारा सड़क तो एक हफ्ते से बहाल की गई, लेकिन अब फिर उसी प्वाइंट जैहरा कैंची में भारी कीचड़ मिट्टी इकट्ठा होने से बस आगे नहीं निकल पाई। बागी, रिश्ता और बाला गांव के सीताराम, सीमा, देव, आलम चंद, बिशन चंद, रोशन लाल, जीत कुमार, संजु, नेत्र सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्र को आने वाली एकमात्र पनेऊ बस पिछले एक हफ्ते पूर्व करीब एक माह बाद बहाल तो की गई, लेकिन बस अब जैहरा कैंची में फंस रही है। यहां भारी मात्रा में कीचड़ जमा होने से बस कीचड़ में फंस रही है। शनिवार को ग्रामीणों ने धक्के मारकर बस को निकाला। ग्रामीणों का कहना है कि चालक ने अब यहां बस लाने से साफ मना कर दिया है, जिसके बाद अब ग्रामीणों की परेशानियां एक बार फिर बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जरूरी सामान उन्हें बसों में लाना पड़ता है, जबकि बिना बस सुविधा के उनको भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। ग्रामीणों ने लोनिवि से मांग उठाई है कि जैहरा कैंची के कीचड़ को मशीन द्वारा साफ कर यहां सोलिंग की जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को इस सड़क का लाभ मिले। वहीं इस बारे लोनिवि आनी के एसडीओ केएल सुमन का कहना है कि जैहरा कैंची के पास दलदल को दुरुस्त करने के लिए लेबर लगा दी गई है बहुत जल्द सड़क ठीक कर दी जाएगी । गुम्मा। ग्राम पंचायत क धार के लोगों ने मिडिल स्कूल घटासनी को हाइस्कूल बनाने की मांग उठाई है। लोगों ने बताया कि जब ठाकुर गुलाब सिंह सरकार में मंत्री थे, उन्होंने घटासनी के लोगों को मिडल स्कूल का तोहफा दिया था, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी यह स्कूल हाई स्कूल नहीं बन पाया है। क्षेत्र के छात्रों को हाइ स्कूल न होने से सीसे स्कूल उरला का रुख करना पड़ता है। यदि घटासनी को हाइ स्कूल बनाया जाए तो यहां के छात्रों को काफी लाभा मिलेगा। ग्राम पंचायत कंधार के प्रधान रघुवीर सिंह, भीखम राम, कुंतला देवी, सीता देवी, रामकली, पुरुषोत्तम सिंह, नित्यानंद, सुरेश कुमार, सूरत सिंह, जयकुमार, हिम्मत राम व सुखदेव ने जयराम सरकार से अपील की है की जहां कंधार पंचायत ने भारतीय जनता पार्टी को जिताने में अपना पूर्ण सहयोग दिया है। वहीं सरकार से भी आशा रखते हैं की सत्र से घटासनी और को हाई स्कूल बनाने में अपना सहयोग दें।
आनी - आनी क्षेत्र के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल पनेऊ और आसपास के दो बड़े गांव को जाने वाली एकमात्र पनेऊ बस पांच किमी पीछे जैहरा कैंची से आगे नहीं निकल पा रही। शनिवार को यहां आने वाली बस कैंची में इस कद्र फंस गई कि ग्रामीणों को धक्के मारकर बड़ी मशक्कत के बाद बस को निकालना पड़ा। इस क्षेत्र में पिछले कई दिनों के बाद लोनिवि द्वारा सड़क तो एक हफ्ते से बहाल की गई, लेकिन अब फिर उसी प्वाइंट जैहरा कैंची में भारी कीचड़ मिट्टी इकट्ठा होने से बस आगे नहीं निकल पाई। बागी, रिश्ता और बाला गांव के सीताराम, सीमा, देव, आलम चंद, बिशन चंद, रोशन लाल, जीत कुमार, संजु, नेत्र सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्र को आने वाली एकमात्र पनेऊ बस पिछले एक हफ्ते पूर्व करीब एक माह बाद बहाल तो की गई, लेकिन बस अब जैहरा कैंची में फंस रही है। यहां भारी मात्रा में कीचड़ जमा होने से बस कीचड़ में फंस रही है। शनिवार को ग्रामीणों ने धक्के मारकर बस को निकाला। ग्रामीणों का कहना है कि चालक ने अब यहां बस लाने से साफ मना कर दिया है, जिसके बाद अब ग्रामीणों की परेशानियां एक बार फिर बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जरूरी सामान उन्हें बसों में लाना पड़ता है, जबकि बिना बस सुविधा के उनको भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। ग्रामीणों ने लोनिवि से मांग उठाई है कि जैहरा कैंची के कीचड़ को मशीन द्वारा साफ कर यहां सोलिंग की जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को इस सड़क का लाभ मिले। वहीं इस बारे लोनिवि आनी के एसडीओ केएल सुमन का कहना है कि जैहरा कैंची के पास दलदल को दुरुस्त करने के लिए लेबर लगा दी गई है बहुत जल्द सड़क ठीक कर दी जाएगी । गुम्मा। ग्राम पंचायत क धार के लोगों ने मिडिल स्कूल घटासनी को हाइस्कूल बनाने की मांग उठाई है। लोगों ने बताया कि जब ठाकुर गुलाब सिंह सरकार में मंत्री थे, उन्होंने घटासनी के लोगों को मिडल स्कूल का तोहफा दिया था, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी यह स्कूल हाई स्कूल नहीं बन पाया है। क्षेत्र के छात्रों को हाइ स्कूल न होने से सीसे स्कूल उरला का रुख करना पड़ता है। यदि घटासनी को हाइ स्कूल बनाया जाए तो यहां के छात्रों को काफी लाभा मिलेगा। ग्राम पंचायत कंधार के प्रधान रघुवीर सिंह, भीखम राम, कुंतला देवी, सीता देवी, रामकली, पुरुषोत्तम सिंह, नित्यानंद, सुरेश कुमार, सूरत सिंह, जयकुमार, हिम्मत राम व सुखदेव ने जयराम सरकार से अपील की है की जहां कंधार पंचायत ने भारतीय जनता पार्टी को जिताने में अपना पूर्ण सहयोग दिया है। वहीं सरकार से भी आशा रखते हैं की सत्र से घटासनी और को हाई स्कूल बनाने में अपना सहयोग दें।
ग्वालियर। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक शादी समारोह में शामिल होने शताब्दी एक्सप्रेस से ग्वालियर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्टेशन पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। ग्वालियर में कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कलेक्ट्रेट में बैठक लेने के सवाल पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले हम समझते थे कि प्रदेश में ढाई मुख्यमंत्री की सरकार है लेकिन यहाँ तो 12 मुख्यमंत्री हैं। जिसकी मर्जी होती है वही बैठक ले लेता है जबकि प्रदेश में त्राहि त्राहि मची इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। महाराष्ट्र से जुड़े सवाल पर चुटकी लेते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि ये बेमेल गठबंधन और राजनीति है अब महाराष्ट्र का क्या होगा और ये सरकार कब तक चलेगी कोई नहीं जानता।
ग्वालियर। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक शादी समारोह में शामिल होने शताब्दी एक्सप्रेस से ग्वालियर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्टेशन पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। ग्वालियर में कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कलेक्ट्रेट में बैठक लेने के सवाल पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले हम समझते थे कि प्रदेश में ढाई मुख्यमंत्री की सरकार है लेकिन यहाँ तो बारह मुख्यमंत्री हैं। जिसकी मर्जी होती है वही बैठक ले लेता है जबकि प्रदेश में त्राहि त्राहि मची इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। महाराष्ट्र से जुड़े सवाल पर चुटकी लेते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि ये बेमेल गठबंधन और राजनीति है अब महाराष्ट्र का क्या होगा और ये सरकार कब तक चलेगी कोई नहीं जानता।
रायपुर : विश्व रिकार्ड से दो बार सम्मानित हो चुकी राजधानी की बहुचर्चित सामाजिक संस्था रायपुर ब्राइट फाउंडेशन के द्वारा 5 मार्च को विधवा, विधुर व वैध तलाकशुदा प्राप्त महिला/पुरुषों का परिचय सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही दो जोड़ों का विवाह संपन्न हो चुका है और यह दोनों जोड़े भी इस परिचय सम्मेलन में शामिल होंगे। दोनों जोड़ें अंधत्व की बीमारी से ग्रसित हैं। इस सम्मेलन में 85 वर्ष का एक बुजुर्ग भी अपनी दास्तां सुनाएगा। फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप गोविंद शितूत, महासचिव डॉ. मनोज ठाकुर, प्रमुख सलाहकार लक्ष्मीनारायण लाहोटी, प्रवक्ता चेतन चंदेल व उपाध्यक्ष राधा राजपाल ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में बताया कि विभिन्न कारणों से विवाह का पवित्र बंधन जीवन भर साथ नहीं चल पाता और स्त्री-पुरुष की अधूरी जिन्दगी में अंधेरा छा जाता है, इन्हीं कठिनाईयों से निजात दिलाने के लिये एक बार पुनः जीवन में खुशियों की बहार लाने परिचय सम्मेलन का आयोजन 5 मार्च को सुबह 10 बजे से सत्संग भवन महामाया मंदिर में आयोजित किया जा रहा है जिसमें अविवाहित युवक-युवतियों व दिव्यांगजनों को भी परिचय के लिये स्थान दिया जायेगा। पहली बार ऐसा हुआ है कि पंजीयन से पहले ही दो जोड़ों का विवाह संपन्न भी हो है और यह दोनों जोड़े बचपन से अंधत्व से पीड़ित हैं और वर्तमान में अपने दाम्पत्य जीवन को खुशी-खुशी जी रहे है, ये दोनों जोड़े भी इस परिचय सम्मेलन में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि अभी तक छत्तीसगढ़ के साथ ही वर्धा, नागपुर, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तरप्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों से भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए अग्रिम पंजीयन करा चुके है। 5 मार्च को भी पंजीयन सुबह 9 बजे से प्रारंभ हो जाएगा जिसके लिए दो रंगीन फोटो व आधार कार्ड की छायाप्रति लाना अनिवार्य है। बिना पंजीयन के किसी भी प्रतिभागी को प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।
रायपुर : विश्व रिकार्ड से दो बार सम्मानित हो चुकी राजधानी की बहुचर्चित सामाजिक संस्था रायपुर ब्राइट फाउंडेशन के द्वारा पाँच मार्च को विधवा, विधुर व वैध तलाकशुदा प्राप्त महिला/पुरुषों का परिचय सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही दो जोड़ों का विवाह संपन्न हो चुका है और यह दोनों जोड़े भी इस परिचय सम्मेलन में शामिल होंगे। दोनों जोड़ें अंधत्व की बीमारी से ग्रसित हैं। इस सम्मेलन में पचासी वर्ष का एक बुजुर्ग भी अपनी दास्तां सुनाएगा। फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप गोविंद शितूत, महासचिव डॉ. मनोज ठाकुर, प्रमुख सलाहकार लक्ष्मीनारायण लाहोटी, प्रवक्ता चेतन चंदेल व उपाध्यक्ष राधा राजपाल ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में बताया कि विभिन्न कारणों से विवाह का पवित्र बंधन जीवन भर साथ नहीं चल पाता और स्त्री-पुरुष की अधूरी जिन्दगी में अंधेरा छा जाता है, इन्हीं कठिनाईयों से निजात दिलाने के लिये एक बार पुनः जीवन में खुशियों की बहार लाने परिचय सम्मेलन का आयोजन पाँच मार्च को सुबह दस बजे से सत्संग भवन महामाया मंदिर में आयोजित किया जा रहा है जिसमें अविवाहित युवक-युवतियों व दिव्यांगजनों को भी परिचय के लिये स्थान दिया जायेगा। पहली बार ऐसा हुआ है कि पंजीयन से पहले ही दो जोड़ों का विवाह संपन्न भी हो है और यह दोनों जोड़े बचपन से अंधत्व से पीड़ित हैं और वर्तमान में अपने दाम्पत्य जीवन को खुशी-खुशी जी रहे है, ये दोनों जोड़े भी इस परिचय सम्मेलन में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि अभी तक छत्तीसगढ़ के साथ ही वर्धा, नागपुर, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तरप्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों से भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए अग्रिम पंजीयन करा चुके है। पाँच मार्च को भी पंजीयन सुबह नौ बजे से प्रारंभ हो जाएगा जिसके लिए दो रंगीन फोटो व आधार कार्ड की छायाप्रति लाना अनिवार्य है। बिना पंजीयन के किसी भी प्रतिभागी को प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।
(दक्षिण तमिलनाडु और दक्षिण केरल के तटवर्ती इलाकों में चक्रवात की चेतावनी - यलो मैसेज) भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के चक्रवात चेतावनी विभाग के अनुसारः बंगाल की खाड़ी में कल बना गहरा दबाव पश्चिम की तरफ बढ़ गया है, दक्षिण-पश्चिम और इससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में आज सुबह (भारतीय समयानुसार 0530 बजे ) यानि 3 दिसंबर को गहरे दबाव में परिवर्तित हुआ। भारतीय समयानुसार आज 0830 बजे यह त्रिंकोमाली (श्रीलंका) के पूर्व-दक्षिण-पूर्व से लगभग 500 किमी और कन्याकुमारी (भारत) के पूर्व-दक्षिण-पूर्व से लगभग 900 किमी की दूरी पर स्थित है। इस चक्रवाती तूफान के 2 दिसंबर की शाम / रात पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और त्रिंकोमाली के करीब श्रीलंका के तट को पार करने की संभावना है। इसके बाद तूफान के पश्चिम की ओर बढ़ने की बहुत संभावना है, 3 दिसंबर की सुबह मन्नार की खाड़ी और आसपास के कोमोरिन क्षेत्र में पहुंचने और पश्चिम से दक्षिण तमिलनाडु तट की ओर बढ़ने की संभावना है। पूर्वानुमान ट्रैक और तीव्रता नीचे दी गई हैः तिथि/समय(भारतीय समय के अनुसार) (अक्षांश 0उत्तर/ देशांतर 0पूर्व) (किमी प्रति घंटा) - दक्षिण तमिलनाडु (कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, थुथुकुडी, तेनकासी, रामनाथपुरम और शिवगंगई) में 2 और 3 दिसंबर, 2020 के कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने के साथ अलग-थलग स्थानों पर अत्यधिक तेज बारिश होने की संभावना है।3 दिसंबर को दक्षिण केरल (तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानमथिट्टा और अलाप्पुझा) और 2 तथा 4 दिसंबर 2020 को दक्षिण तमिलनाडु और 3 तथा 4 दिसंबर, 2020 को दक्षिण केरल में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। - 2 और 3 दिसंबर के दौरान उत्तरी तमिलनाडु, पुदुचेरी, माहे और कराईकल तथा उत्तरी केरल के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने और 4 दिसंबर को भारी बारिश होने की संभावना है। 1 दिसंबर को तटीय तमिलनाडु में भारी बारिश होने के आसार है। - 2 और 03 दिसंबर के दौरान दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और 03 तथा 4 दिसंबर, 2020 के दौरान लक्षद्वीप के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने के साथ -साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने के साथ -साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। अलग- अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने के साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने के साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। अलग- अलग स्थानों पर भारी बारिश होने के साथ-साथ कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। अधिकांश जगहों पर भारी बारिश होने के साथ-साथ कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है। अधिकांश स्थानों पर भारी बारिश औऱ कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है। - अगले 12 घंटों के दौरान बंगाल की दक्षिण खाड़ी के मध्य भागों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा की गति बढकर 70 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। - यह रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ेगी और दक्षिण-पश्चिम में 60-70 किमी प्रति घंटे से लेकर 80 किमी प्रतिघंटे तक हवा की रफ्तार पहुंच सकती है और 1 दिसंबर की शाम बंगाल की दक्षिण-पूर्व की खाड़ी तक पहुँच जाएगी। यह 2 दिसंबर की सुबह से लेकर अगले चौबीस घंटे के दौरान बंगाल के दक्षिण-पश्चिम खाड़ी की खाड़ी के साथ श्रीलंका के तट की तरफ बढ़ेगी और धीरे-धीरे इसकी रफ्तार 70 -80 कमी प्रति घंटे से बढकर 90 किमी प्रति घंटे तक हो जाएगी। - 2 दिसंबर की दोपहर तक कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु-केरल तटों पर 45-55 किलोमीटर से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। - यह 3 दिसंबर की सुबह से धीरे-धीरे बढ़कर 55-65 किमी प्रति घंटे से लेकर 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मन्नार की खाड़ी, दक्षिण-तमिलनाडु और केरल के तटों पर, कोमोरिन क्षेत्र, लक्षद्वीप-मालदीव क्षेत्र और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर से सटे इलाकों में तेज हवा चल सकती है। और इसके बाद अगले 24 घंटों के दौरान 3 दिसंबर की शाम हवा की रफ्तार 70-80 किमी प्रति से लेकर 90 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 1 दिसंबर से बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में और 1 तथा 2 दिसंबर के दौरान, दक्षिण-पूर्व में दक्षिण-पश्चिम खाड़ी से सटे दक्षिण-पूर्व तथा पूर्वी श्रीलंका तट से सटे इलाकों और 2 से 4 दिसंबर तक कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु-केरल तटों में समुद्र में तेज और ऊंची लहरें उठ सकती हैं। 3 से 4 दिसंबर के दौरान लक्षद्वीप-मालदीव क्षेत्र और आसपास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर में समुद्र में तेज लहरें उठ सकती हैं। - नीचे दिए गए इलाकों में 1 दिसंबर से लेकर 4 दिसंबर के दौरान मछुआरों को नहीं जाने की सलाह दी गई है। - मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे 1 दिसंबर के दौरान बंगाल की दक्षिण-पूर्व खाड़ी, बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी, 1 से 3 दिसंबर तक पूर्वी श्रीलंका तट के किनारों पर ना जाएं। इसके अलावा 2 से 4 दिसंबर तक कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु-केरल के तट और 3 से 4 दिसंबर तक लक्षद्वीप-मालदीव क्षेत्र और आसपास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर में मछुआरों को नहीं जाने की सलाह दी जाती है। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संबंधित राज्य सरकारों को नियमित रूप से सूचित किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए कृपया www.rsmcnewdelhi.imd.gov.in, www.mausam.imd.gov.inपर विजिट करें। कृपया स्थान विशेष से जुड़े पूर्वानुमान और चेतावनी के लिए मौसम ऐप (MAUSAM APP), कृषि संबंधी सलाह के लिए मेघदूत ऐप (MEGHDOOT APP) और बिजली गिरने की चेतावनी के लिए दामिनी ऐप (DAMINI APP) को डाउनलोड करें।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के चक्रवात चेतावनी विभाग के अनुसारः बंगाल की खाड़ी में कल बना गहरा दबाव पश्चिम की तरफ बढ़ गया है, दक्षिण-पश्चिम और इससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में आज सुबह यानि तीन दिसंबर को गहरे दबाव में परिवर्तित हुआ। भारतीय समयानुसार आज आठ सौ तीस बजे यह त्रिंकोमाली के पूर्व-दक्षिण-पूर्व से लगभग पाँच सौ किमी और कन्याकुमारी के पूर्व-दक्षिण-पूर्व से लगभग नौ सौ किमी की दूरी पर स्थित है। इस चक्रवाती तूफान के दो दिसंबर की शाम / रात पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और त्रिंकोमाली के करीब श्रीलंका के तट को पार करने की संभावना है। इसके बाद तूफान के पश्चिम की ओर बढ़ने की बहुत संभावना है, तीन दिसंबर की सुबह मन्नार की खाड़ी और आसपास के कोमोरिन क्षेत्र में पहुंचने और पश्चिम से दक्षिण तमिलनाडु तट की ओर बढ़ने की संभावना है। पूर्वानुमान ट्रैक और तीव्रता नीचे दी गई हैः तिथि/समय - दक्षिण तमिलनाडु में दो और तीन दिसंबर, दो हज़ार बीस के कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने के साथ अलग-थलग स्थानों पर अत्यधिक तेज बारिश होने की संभावना है।तीन दिसंबर को दक्षिण केरल और दो तथा चार दिसंबर दो हज़ार बीस को दक्षिण तमिलनाडु और तीन तथा चार दिसंबर, दो हज़ार बीस को दक्षिण केरल में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। - दो और तीन दिसंबर के दौरान उत्तरी तमिलनाडु, पुदुचेरी, माहे और कराईकल तथा उत्तरी केरल के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने और चार दिसंबर को भारी बारिश होने की संभावना है। एक दिसंबर को तटीय तमिलनाडु में भारी बारिश होने के आसार है। - दो और तीन दिसंबर के दौरान दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और तीन तथा चार दिसंबर, दो हज़ार बीस के दौरान लक्षद्वीप के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने के साथ -साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने के साथ -साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। अलग- अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने के साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने के साथ अधिकांश स्थानों पर बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। अलग- अलग स्थानों पर भारी बारिश होने के साथ-साथ कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। अधिकांश जगहों पर भारी बारिश होने के साथ-साथ कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है। अधिकांश स्थानों पर भारी बारिश औऱ कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है। - अगले बारह घंटाटों के दौरान बंगाल की दक्षिण खाड़ी के मध्य भागों में पचास-साठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा की गति बढकर सत्तर किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। - यह रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ेगी और दक्षिण-पश्चिम में साठ-सत्तर किमी प्रति घंटे से लेकर अस्सी किमी प्रतिघंटे तक हवा की रफ्तार पहुंच सकती है और एक दिसंबर की शाम बंगाल की दक्षिण-पूर्व की खाड़ी तक पहुँच जाएगी। यह दो दिसंबर की सुबह से लेकर अगले चौबीस घंटे के दौरान बंगाल के दक्षिण-पश्चिम खाड़ी की खाड़ी के साथ श्रीलंका के तट की तरफ बढ़ेगी और धीरे-धीरे इसकी रफ्तार सत्तर -अस्सी कमी प्रति घंटे से बढकर नब्बे किमी प्रति घंटे तक हो जाएगी। - दो दिसंबर की दोपहर तक कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु-केरल तटों पर पैंतालीस-पचपन किलोग्राममीटर से लेकर पैंसठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। - यह तीन दिसंबर की सुबह से धीरे-धीरे बढ़कर पचपन-पैंसठ किमी प्रति घंटे से लेकर पचहत्तर किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मन्नार की खाड़ी, दक्षिण-तमिलनाडु और केरल के तटों पर, कोमोरिन क्षेत्र, लक्षद्वीप-मालदीव क्षेत्र और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर से सटे इलाकों में तेज हवा चल सकती है। और इसके बाद अगले चौबीस घंटाटों के दौरान तीन दिसंबर की शाम हवा की रफ्तार सत्तर-अस्सी किमी प्रति से लेकर नब्बे किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। एक दिसंबर से बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में और एक तथा दो दिसंबर के दौरान, दक्षिण-पूर्व में दक्षिण-पश्चिम खाड़ी से सटे दक्षिण-पूर्व तथा पूर्वी श्रीलंका तट से सटे इलाकों और दो से चार दिसंबर तक कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु-केरल तटों में समुद्र में तेज और ऊंची लहरें उठ सकती हैं। तीन से चार दिसंबर के दौरान लक्षद्वीप-मालदीव क्षेत्र और आसपास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर में समुद्र में तेज लहरें उठ सकती हैं। - नीचे दिए गए इलाकों में एक दिसंबर से लेकर चार दिसंबर के दौरान मछुआरों को नहीं जाने की सलाह दी गई है। - मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे एक दिसंबर के दौरान बंगाल की दक्षिण-पूर्व खाड़ी, बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी, एक से तीन दिसंबर तक पूर्वी श्रीलंका तट के किनारों पर ना जाएं। इसके अलावा दो से चार दिसंबर तक कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण तमिलनाडु-केरल के तट और तीन से चार दिसंबर तक लक्षद्वीप-मालदीव क्षेत्र और आसपास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर में मछुआरों को नहीं जाने की सलाह दी जाती है। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संबंधित राज्य सरकारों को नियमित रूप से सूचित किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए कृपया www.rsmcnewdelhi.imd.gov.in, www.mausam.imd.gov.inपर विजिट करें। कृपया स्थान विशेष से जुड़े पूर्वानुमान और चेतावनी के लिए मौसम ऐप , कृषि संबंधी सलाह के लिए मेघदूत ऐप और बिजली गिरने की चेतावनी के लिए दामिनी ऐप को डाउनलोड करें।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। एमएमएमयूटी की पांच छात्राएं करेंगी इंटर्नशिप, अमेजन व स्केलर बाई इंटरव्यूबिट ने दिए ऑफर । बाएं प्रज्ञा व दाएं रूपल। - फोटो : अमर उजाला। गोरखपुर में रूपल सिंह और प्रज्ञा तिवारी को छह महीने के लिए अमेजन कंपनी 80 हजार रुपये प्रतिमाह प्रदान करेगी। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) की इन दोनों ही छात्राओं का चयन अमेजन में इंटर्नशिप के लिए हुआ है। विवि की पांच छात्राओं का चयन विश्वप्रसिद्ध टेक्नोलॉजी की कंपनियां अमेजन और स्केलर बाई इंटरव्यूबिट में इंटर्नशिप के लिए हुआ है। ये सभी छात्राएं छह महीने तक संबंधित कंपनी के लिए काम करेंगी। इसके लिए इन छात्राओं को 30 हजार से 80 हजार रुपये प्रति माह इंटर्नशिप में मिलेंगे। एमएमएमयूटी के जनसंपर्क अधिकारी डॉ अभिजीत मिश्रा ने बताया कि रूपल सिंह, स्मिता मिश्रा, प्रज्ञा तिवारी, शान्या गोयल और आराध्या त्रिपाठी का चयन इंटर्नशिप के लिए हुआ है। ये सभी छात्राएं जनवरी 2022 से छह महीनों के लिए इन कंपनियों में काम करेंगी और संबंधित कंपनी इनके प्रदर्शन को देखते हुए इस इंटर्नशिप को जॉब ऑफर में भी परिवर्तित कर सकती है। इन छात्राओं के चयन पर कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बधाई दी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। एमएमएमयूटी की पांच छात्राएं करेंगी इंटर्नशिप, अमेजन व स्केलर बाई इंटरव्यूबिट ने दिए ऑफर । बाएं प्रज्ञा व दाएं रूपल। - फोटो : अमर उजाला। गोरखपुर में रूपल सिंह और प्रज्ञा तिवारी को छह महीने के लिए अमेजन कंपनी अस्सी हजार रुपये प्रतिमाह प्रदान करेगी। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की इन दोनों ही छात्राओं का चयन अमेजन में इंटर्नशिप के लिए हुआ है। विवि की पांच छात्राओं का चयन विश्वप्रसिद्ध टेक्नोलॉजी की कंपनियां अमेजन और स्केलर बाई इंटरव्यूबिट में इंटर्नशिप के लिए हुआ है। ये सभी छात्राएं छह महीने तक संबंधित कंपनी के लिए काम करेंगी। इसके लिए इन छात्राओं को तीस हजार से अस्सी हजार रुपये प्रति माह इंटर्नशिप में मिलेंगे। एमएमएमयूटी के जनसंपर्क अधिकारी डॉ अभिजीत मिश्रा ने बताया कि रूपल सिंह, स्मिता मिश्रा, प्रज्ञा तिवारी, शान्या गोयल और आराध्या त्रिपाठी का चयन इंटर्नशिप के लिए हुआ है। ये सभी छात्राएं जनवरी दो हज़ार बाईस से छह महीनों के लिए इन कंपनियों में काम करेंगी और संबंधित कंपनी इनके प्रदर्शन को देखते हुए इस इंटर्नशिप को जॉब ऑफर में भी परिवर्तित कर सकती है। इन छात्राओं के चयन पर कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बधाई दी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। 1423फ. आदेशानुसार न्यायालय उपजिलाधिकारी मेहनगर वाद सं t.20151506051509 अन्तर्गत धारा 122बी 4 एफ. ज0वि0 अधि0 रिर्पोट बनाम राजपति मौजा मानपुर परगना बेलहाबास जिला आजमगढ फै सला दि. 07-09-15/ 15-09-15 के अनुपालन मे ग्राम मानपुर के खाता सं. 405 आ.न. 1179मि. रकबा 0.133हे. ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। एक हज़ार चार सौ तेईसफ. आदेशानुसार न्यायालय उपजिलाधिकारी मेहनगर वाद सं t. दो शून्य एक पाँच एक पाँच शून्य छः शून्य पाँच एक पाँच शून्य नौ अन्तर्गत धारा एक सौ बाईसबी चार एफ. जशून्यविशून्य अधिशून्य रिर्पोट बनाम राजपति मौजा मानपुर परगना बेलहाबास जिला आजमगढ फै सला दि. सात सितंबर पंद्रह/ पंद्रह सितंबर पंद्रह के अनुपालन मे ग्राम मानपुर के खाता सं. चार सौ पाँच आ.न. एक हज़ार एक सौ उन्यासीमि. रकबा शून्य.एक सौ तैंतीसहे. ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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सिहुंता - पूर्व सैनिक लीग सिहुंता इकाई का वार्षिक सम्मेलन रविवार को लोक निर्माण विभाग सिहुंता के रेस्ट हाउस परिसर में संपन्न हुआ। सम्मेलन में पूर्व सैनिक लीग के प्रदेशाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। पूर्व सैनिक लीग सिहुंता के महासचिव महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि इस वार्षिक सम्मेलन में सिहुंता के पूर्व सैनिक पदाधिकारियों के अलावा कांगड़ा जिला के यूनिटों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर उपनिदेशक सैनिक कल्याण बोर्ड चंबा लेफ्टिनेंट कर्नल जयकरण सिंह ने पूर्व सैनिकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पूर्व सैनिकों व वीर नारियों की समस्याएं सुनकर मौके पर निपटारा किया। सम्मेलन में सिहुंता इकाई के उपाध्यक्ष कर्नल प्रवीण ने भी अपने विचार रखे। मुख्यातिथि मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि 40 साल के संघर्ष के बाद पूर्व सैनिकों को वन रैंक-वन पेंशन का लाभ मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने संगठन को महत्त्व देते हुए कहा कि कोई भी कार्य बिना संगठन के संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने पूर्व सैनिकों को संगठित रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रदेश के महासचिव कर्नल वाईएस राणा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर अध्यक्ष पूर्व सैनिक लीग सिहुंता इकाई के भूपेंद्र सिंह चौहान ने भी पूर्व सैनिकों को संबोधित किया। इस सम्मेलन में लेफ्टिनेंट एमडी शर्मा कैप्टन बिहारी लाल, सूबेदार महेंद्र सिंह, जैसिंह मनकोटिया, कैप्टन अशोक धीमान, मेजर पीसी डोगरा, लव चौहान व चैन सिंह आदि सैकड़ों पूर्व सैनिकों व वीर नारियों ने भाग लिया।
सिहुंता - पूर्व सैनिक लीग सिहुंता इकाई का वार्षिक सम्मेलन रविवार को लोक निर्माण विभाग सिहुंता के रेस्ट हाउस परिसर में संपन्न हुआ। सम्मेलन में पूर्व सैनिक लीग के प्रदेशाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। पूर्व सैनिक लीग सिहुंता के महासचिव महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि इस वार्षिक सम्मेलन में सिहुंता के पूर्व सैनिक पदाधिकारियों के अलावा कांगड़ा जिला के यूनिटों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर उपनिदेशक सैनिक कल्याण बोर्ड चंबा लेफ्टिनेंट कर्नल जयकरण सिंह ने पूर्व सैनिकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पूर्व सैनिकों व वीर नारियों की समस्याएं सुनकर मौके पर निपटारा किया। सम्मेलन में सिहुंता इकाई के उपाध्यक्ष कर्नल प्रवीण ने भी अपने विचार रखे। मुख्यातिथि मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि चालीस साल के संघर्ष के बाद पूर्व सैनिकों को वन रैंक-वन पेंशन का लाभ मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने संगठन को महत्त्व देते हुए कहा कि कोई भी कार्य बिना संगठन के संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने पूर्व सैनिकों को संगठित रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रदेश के महासचिव कर्नल वाईएस राणा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर अध्यक्ष पूर्व सैनिक लीग सिहुंता इकाई के भूपेंद्र सिंह चौहान ने भी पूर्व सैनिकों को संबोधित किया। इस सम्मेलन में लेफ्टिनेंट एमडी शर्मा कैप्टन बिहारी लाल, सूबेदार महेंद्र सिंह, जैसिंह मनकोटिया, कैप्टन अशोक धीमान, मेजर पीसी डोगरा, लव चौहान व चैन सिंह आदि सैकड़ों पूर्व सैनिकों व वीर नारियों ने भाग लिया।
WhatsApp Rules: WhatsApp एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसे दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर व्यक्ति के स्मार्टफोन में ये App जरूर रहता है. WhatsApp वैसे तो काफी मजेदार ऐप है लेकिन आपको इसके बारे में कुछ जरूरी बातें पता रहनी चाहिए क्योंकि अगर आप इन बातों को नहीं जानेंगे तो आपको समस्या हो सकती है, समस्या भी ऐसी कि आपको जेल जाने तक की नौबत आ सकती है. अगर आप इस बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो हम आपको WhatsApp Group से जुड़ी कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं. अगर आप WhatsApp ग्रुप पर आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ कंटेंट शेयर करते हैं तो इस बात से ग्रुप के अन्य मेंबर्स को दिक्कत हो सकती है और अगर उनमें से कोई भी इसकी शिकायत पुलिस में कर देता है या आईटी सेल में कर देता है तो आप को जेल जाना पड़ सकता है. अगर आप मौज मस्ती के नजरिए से चाइल्ड क्राइम से जुड़ा कोई भी वीडियो ग्रुप पर शेयर करते हैं तो इसका खामियाजा आपको जेल जाकर भुगतना पड़ सकता है क्योंकि अगर ग्रुप का कोई भी मेंबर इसकी जानकारी पुलिस को दे देता है तो आपका जेल जाना तय है. आतंकी गतिविधियों को सपोर्ट करने वाला कोई भी वीडियो अगर WhatsApp ग्रुप पर भेजा जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत एडमिन को पुलिस तक पहुंचा देनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता है और फिर भी इसकी जानकारी लीक हो जाती है तो सभी ग्रुप मेंबर्स को जेल जाना पड़ सकता है. कुछ लोग हिंसा से जुड़ा हुआ वीडियो अक्सर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करते हैं लेकिन आपको बता दें कि ऐसा करना पूरी तरह से जुर्म है और ऐसा करने पर जेल जाने तक के सख्त नियम है.
WhatsApp Rules: WhatsApp एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसे दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर व्यक्ति के स्मार्टफोन में ये App जरूर रहता है. WhatsApp वैसे तो काफी मजेदार ऐप है लेकिन आपको इसके बारे में कुछ जरूरी बातें पता रहनी चाहिए क्योंकि अगर आप इन बातों को नहीं जानेंगे तो आपको समस्या हो सकती है, समस्या भी ऐसी कि आपको जेल जाने तक की नौबत आ सकती है. अगर आप इस बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो हम आपको WhatsApp Group से जुड़ी कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं. अगर आप WhatsApp ग्रुप पर आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ कंटेंट शेयर करते हैं तो इस बात से ग्रुप के अन्य मेंबर्स को दिक्कत हो सकती है और अगर उनमें से कोई भी इसकी शिकायत पुलिस में कर देता है या आईटी सेल में कर देता है तो आप को जेल जाना पड़ सकता है. अगर आप मौज मस्ती के नजरिए से चाइल्ड क्राइम से जुड़ा कोई भी वीडियो ग्रुप पर शेयर करते हैं तो इसका खामियाजा आपको जेल जाकर भुगतना पड़ सकता है क्योंकि अगर ग्रुप का कोई भी मेंबर इसकी जानकारी पुलिस को दे देता है तो आपका जेल जाना तय है. आतंकी गतिविधियों को सपोर्ट करने वाला कोई भी वीडियो अगर WhatsApp ग्रुप पर भेजा जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत एडमिन को पुलिस तक पहुंचा देनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता है और फिर भी इसकी जानकारी लीक हो जाती है तो सभी ग्रुप मेंबर्स को जेल जाना पड़ सकता है. कुछ लोग हिंसा से जुड़ा हुआ वीडियो अक्सर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करते हैं लेकिन आपको बता दें कि ऐसा करना पूरी तरह से जुर्म है और ऐसा करने पर जेल जाने तक के सख्त नियम है.
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भारत के टीकाकरण अभियान को पैमाने और गति में बेजोड़ बताया। भारत ने रविवार को COVID-19 टीकाकरण में 200 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। इस अवसर पर देश को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। PM मोदी ने ट्वीट कर कहा, भारत ने फिर से इतिहास रच दिया। टीके की 200 करोड़ खुराक के विशेष आंकड़े को पार करने के लिए सभी भारतीयों को बधाई। भारत के टीकाकरण अभियान (Vaccination Campaign) को व्यापक बनाने में अद्वितीय योगदान देने वालों पर गर्व है। इसने COVID-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत किया है। बाद के एक ट्वीट में उन्होंने कहा, वैक्सीन अभियान के दौरान भारत के लोगों ने विज्ञान में उल्लेखनीय विश्वास दिखाया है। हमारे डॉक्टरों, नर्सो, फ्रंटलाइन वर्कर्स, वैज्ञानिकों, इनोवेटर्स और उद्यमियों ने एक सुरक्षित पृथ्वी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं उनकी भावना और दृढ़ संकल्प की सराहना करता हूं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Union Health Minister Mansukh Mandaviya) ने भी केवल 18 महीनों में यह उपलब्धि हासिल करने पर लोगों को बधाई दी और कहा कि यह असाधारण उपलब्धि इतिहास में दर्ज होगी। मंडाविया ने एक ट्वीट में कहा, बधाई हो भारत! सभी के प्रयास से देश ने आज 200 करोड़ वैक्सीन का आंकड़ा पार कर लिया है। पीएम नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने इतिहास रचा है। यह असाधारण उपलब्धि इतिहास में दर्ज होगी! केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, डॉ. भारती प्रवीण पवार ने भी मानवता की सेवा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को उनकी कड़ी मेहनत, दूर²ष्टि और नवाचार के लिए धन्यवाद दिया। भारत का राष्ट्रव्यापी COVID-19 टीकाकरण कार्यक्रम 16 जनवरी, 2021 (Nationwide COVID-19 Vaccination Program) को PM मोदी द्वारा शुरू किया गया था। देशभर में मामलों में गिरावट के बावजूद, सभी पात्र नागरिकों का टीकाकरण करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। टीकाकरण अभियान की शुरुआत के बाद से इसे 100 करोड़ अंक तक पहुंचने में लगभग नौ महीने और 200 करोड़ टीकाकरण के निशान तक पहुंचने में नौ महीने लग गए।
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के टीकाकरण अभियान को पैमाने और गति में बेजोड़ बताया। भारत ने रविवार को COVID-उन्नीस टीकाकरण में दो सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। इस अवसर पर देश को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। PM मोदी ने ट्वीट कर कहा, भारत ने फिर से इतिहास रच दिया। टीके की दो सौ करोड़ खुराक के विशेष आंकड़े को पार करने के लिए सभी भारतीयों को बधाई। भारत के टीकाकरण अभियान को व्यापक बनाने में अद्वितीय योगदान देने वालों पर गर्व है। इसने COVID-उन्नीस के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत किया है। बाद के एक ट्वीट में उन्होंने कहा, वैक्सीन अभियान के दौरान भारत के लोगों ने विज्ञान में उल्लेखनीय विश्वास दिखाया है। हमारे डॉक्टरों, नर्सो, फ्रंटलाइन वर्कर्स, वैज्ञानिकों, इनोवेटर्स और उद्यमियों ने एक सुरक्षित पृथ्वी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं उनकी भावना और दृढ़ संकल्प की सराहना करता हूं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी केवल अट्ठारह महीनों में यह उपलब्धि हासिल करने पर लोगों को बधाई दी और कहा कि यह असाधारण उपलब्धि इतिहास में दर्ज होगी। मंडाविया ने एक ट्वीट में कहा, बधाई हो भारत! सभी के प्रयास से देश ने आज दो सौ करोड़ वैक्सीन का आंकड़ा पार कर लिया है। पीएम नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने इतिहास रचा है। यह असाधारण उपलब्धि इतिहास में दर्ज होगी! केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, डॉ. भारती प्रवीण पवार ने भी मानवता की सेवा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को उनकी कड़ी मेहनत, दूर²ष्टि और नवाचार के लिए धन्यवाद दिया। भारत का राष्ट्रव्यापी COVID-उन्नीस टीकाकरण कार्यक्रम सोलह जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को PM मोदी द्वारा शुरू किया गया था। देशभर में मामलों में गिरावट के बावजूद, सभी पात्र नागरिकों का टीकाकरण करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। टीकाकरण अभियान की शुरुआत के बाद से इसे एक सौ करोड़ अंक तक पहुंचने में लगभग नौ महीने और दो सौ करोड़ टीकाकरण के निशान तक पहुंचने में नौ महीने लग गए।
आदरणीय सुधीजनो, महोत्सव में 29 रचनाकारों नें दोहा, आल्हा, गीत-नवगीत, ग़ज़ल व अतुकान्त आदि विधाओं में अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति द्वारा महोत्सव को सफल बनाया. यथासम्भव ध्यान रखा गया है कि इस पूर्णतः सफल आयोजन के सभी प्रतिभागियों की समस्त रचनाएँ प्रस्तुत हो सकें. फिर भी भूलवश यदि किन्हीं प्रतिभागी की कोई रचना संकलित होने से रह ,गयी हो, वह अवश्य सूचित करें. बेलौस बोलती.. भागती.. चीखती.. कुछ भी नहीं... . .. . बेटियाँ गंगा नदी सी, पाप सारे धो रहीं। झेलतीं संताप अनगिन, अस्मिता को खो रहीं ।। वेद मन्त्रों की ऋचाएँ, बेटियाँ ही भक्ति हैं। चेतना सामर्थ्य दात्री, बेटियाँ ही शक्ति हैं।१। नारियों को पूजते थे, देवियों के रूप में। देवता भी देखते थे, स्वर्ग के प्रारुप में।। घूमते निर्द्वंद्व हो के, आततायी देश में। माँगती है न्याय बेटी, निर्भया के वेश में।२। कामियों के आज हाथों, लाज बेटी खो रही । भ्रूण हत्या कोख में ही, बेटियों की हो रही ।। यातना का दर्द सारा, नर्क का परिवेश हैं। लुप्त होती बेटियाँ औ, सुप्त सारा देश है।३। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। न माँगे, भगवान से बेटी, बेटे की सब चाह रखें। और कोई न चाहे बेटी , माँ की चाहत रहती है। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। जिस घर में बेटी होती है, घर ज़्यादा प्यारा लगता। बचपन में गुड्डे गुड़ियों से, बिटिया खेला करती है। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। फर्क नहीं बेटी - बेटे में, बात बड़ी हम सब करते। सुखी रहे, मायका ससुराल , रोज प्रार्थना करती हैं। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। बेटे को अधिकार सभी है, सब से ज़्यादा प्यार मिले। बेटियाँ परिवार का हर पल, ध्यान बराबर रखती हैं। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। जब होती है बेटी बिदा, घर आँगन सूना लगता है। हे समाज के ठेकेदारों , बेटी हम पर भार नहीं। सब रिश्तों को निभाने वाली, बिटिया सब कुछ सहती हैं। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। भरा-भरा घर आँगन लगता, जब चिड़ियों सी चहकती है॥ . बेटी ! समस्या ज्वलंत है , पर स्वयँ को समस्या का जनक , कारण नहीं मानना चाहता , मै भी , आप भी , ये भी, वो भी , सभ्यता भी , संस्कार भी , पुलिस भी , प्रशासन भी , जनता भी , नेता भी , खलनायक भी अभिनेता भी , यहाँ तक कि , खुद थामो पतवार, बेटियों, नाव बचानी है। मझधारे से तार, तीर तक लेकर जानी है। यह समाज बैठा है तत्पर। गहराई तक घात लगाकर। तुम्हें घेरकर चट कर लेगा, मगरमच्छ ये पूर्ण निगलकर। हो जाए लाचार, इस तरह, जुगत भिड़ानी है। यह सैय्याद कुटिलतम कातिल। वसन श्वेत, रखता काला दिल। उग्र रूप वो धरो बेटियों, झुके तुम्हारे कदमों बुज़दिल। पत्थर की इस बार, मिटे जो, रेख पुरानी है। हों वज़ीर के ध्वस्त इरादे। कुटिल चाल चल सकें न प्यादे। इस बिसात का हर चौख़ाना, एक सुरक्षित कोट बना दे। निकट न फटके हार, हरिक यूँ गोट जमानी है। आंगन खेलती बेटी ! और पन्ना पलट लिखने लगता हूँ चाँद-तारे,ब्रह्माण्ड ! जब खोज रहा होता हूँ चाँद के धब्बों का रहस्य , तय कर लेतीं है बेटी से लड़की होने तक का सफर ! चुप-चाप बटोर लेती है प्रेम-पत्र पढ़ने जितने शब्द ! बिना दूध पिए बड़ी हो जाती है समय से पहले , दुपट्टे जितना ,झाड़ू जितना ,चूल्हे जितना जरूरी ! प्रेम पोसती लड़की पालती है जंजीरें भी ! पिता के सम्मान का विलोम नहीं रह जाता ! थोड़ा-थोड़ा रोज कम होती है लड़की ! और एक दिन रीत जाता है उसका लड़कीपन भी ! पीले पड़े पत्ते, सूखती हुई नदी, बड़ी हो चुकी बेटी ! तब उसकी गोद में एक बेटा लिख देता हूँ मैं ! बेटा अपनी किस्मत में बिदेस लिख लेता है , चुहानी के धुँआए सांकल से लटकती अकेली मौत ! अब मैं जब भी लिखूंगा 'बेटी'तो नहीं देखूंगा आकाश , कि वो छीन लेती है अपने हिस्से की किताबें ! प्रेम को मानती है नमक जितना जरूरी ! "जस्ट फॉर यू" लिखा कॉफ़ी मग , सम्मान के नए शिखर , बेटी के मजबूत होते पंख ! कि वो खुद तय करे अपनी कहानी का उपसंहार ! बेटी घर की रौनके , इनसे घर का गान । घर मे डाले जान , कोना कोना महकाये । कहती हरदम 'अंजु' , बागडोर थाम लेती । कितनी बार दोहराओगे बाबू! बेटी-"कितनी बार दोहराओगे बाबू! जंग लगे रीति रिवाज़. जंगल-जंगल ही रहे. राष्ट्र का विनाश हुआ अश्वमभावी. तुझे देश की सैर कराऊँगी. कब तक बेटी धरा पर जाएगी कुचली? दिया भी जलता है बेटियों से। जो बेटियाँ मारते रहोगे, समाज घटता है बेटियों से।। क्या लिखू? कैसे लिखू? मंज़र को ताकें भौचक निगाहें, राह अब समाज को दिखा रही हैं बेटियाँ, सत्य झूठ का सफा पढ़ा रही हैं बेटियाँ, बेटियाँ विकास की मिसाल हैं समाज में, मान आज देश का बढ़ा रही हैं बेटियाँ, फौजियों के वेश में लड़ा रही है जान जो, देश में समाज में बला रही हैं बेटियाँ , दानवों की सोच में अधिक नहीं है देह से, जान आज देश में गँवा रही हैं बेटियाँ, लोभ कूप में गिरे कई-कई हैं आदमी, मूल्य लोभ का मगर चुका रही हैं बेटियाँ, कायरों की भीड़ और शोर व्यर्थ के सभी, रोज ही गुनाह जब छुपा रही हैं बेटियाँ, शेरनी का रूप आज हिरनियाँ ठगी गयी, जाल में बहेलिये के जा रही हैं बेटियाँ, शायरों की शायरी हरेक गीत छंद में, दर्द है कहाँ कहाँ लिखा रही हैं बेटियाँ, बोलना 'अशोक' का रास भी न आए तो, छली जाएंगी ? कर दो आजा़द उन्हें.. कब होगी ये कविता पूरी! जब कर ले वह कविता पूरी! होनी होगी कविता पूरी! क्यूँ आज भी समाज़ मे घुट-घुट के जी रही हैं बेटियाँ? आज बेटियों के सुरक्षा देने में समाज बिलकुल असफल सा नजर आ रहा है... जहां माता पिता बहुत विवश हैं तो बेटियाँ बहुत सहमी.. बेटियों के साथ दरिन्दगी का ये सिलसिला थमता सा ही नहीं दिखाई देता.. आदरणीया डॉ प्राची जी इस सफल आयोजन एवं शीघ्र संकलन के लिए सर्व प्रथम मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. अवकाश का दिन न होने के कारण इसबार आयोजन का पूरा आनंद उठाने से वंचित रहा अतएव आयोजन के सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई तथा अपनी रचना पर प्राप्त अनुमोदन/सुझाओं हेतु सभी सुधिजनों का हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. इस सफल आयोजन के सभी प्रतिभागियों की समस्त रचनाएँ एक साथ पढ़कर सचमुच आनंद आ गया आदरणीया सादर धन्यवाद. //अवकाश का दिन न होने के कारण इसबार आयोजन का पूरा आनंद उठाने से वंचित रहा//.......अपनी अपनी व्यस्त-व्यस्ततम दिनचर्या में से हम सभी कुछ पल चुरा कर इस मंच पर जितना समय शक्ति दे पाते हैं उतना देने का भरसक प्रयत्न करते हैं...आपने भी कुछ ऐसा ही किया, ये कहीं न कहीं हमारे काव्य सागर में भावात्मक आत्मसंतोष को ही जताता है. अवकाश के दिन कई सदस्यों का मंच को समय दे पाना संभव ही नहीं होता...घर परिवार बच्चों समाज की जिम्मेरियों का निर्वहन करने को एक अवकाश का दिन उन्ही अत्यंत आवश्यक कार्यों के लिए सुरक्षित रहे, ऐसा यही सोच कर किया गया है....फिर शनिवार की पूरी शाम तो आयोजन के लिए मिल ही जाती है :) 'समाज और बेटियाँ' जैसे शीर्षक ने रचनाकारों और प्रतिभागियों को गहरे छूआ. तदनुरूप रचनायें भी आयीं. हर सम्मिलित रचना इस आयोजन की सफलता की कहानी कह रही है. आपके इस संकलन के माध्यम से कई रचनाकार अपनी रचनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर सकेंगे. संकलन हेतु सादर आभार, आदरणीया प्राचीजी.. . आदरणीय सौरभ जी.... ये सामयिक विषय समाज की हालिया स्थिति को देखते हुए सचमुच सभी रचनाकारों को संवेदित करने में सफल रहा. ये विषय देने के लिए आपका आभार. हर रचना नें अपने कथ्य से प्रभावित किया... वैसे तो आयोजन ही रचनाओं का मूल्यांकन कर तदनुरूप चर्चा और संशोधन करने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराते हैं.... पुनर्मूल्यांकन तो होते ही रहना चाहिए और हर सजग रचनाकार को ये करना ही चाहिए. यह सही है, आदरणीया प्राचीजी, कि समवेत स्वर में बहुत कुछ सधता चलता है. लेकिन उसके पहले बहुत कुछ सोचना-गुनना होता है. हम जब सोचने से फ़ारिग़ होने लगते हैं तथा व्यक्तिवाची स्वर हावी होने लगता है, तो व्यक्तिगत तौर पर ही नहीं हम सामाजिक तौर पर भी एकाकी तथा एकांगी सोच के मुखर धारक बनने लगते हैं. 'स्व' का स्वार्थी आरोपण इतना हावी हो जाता है कि हमें फिर किसी नितांत आत्मीय की संलग्नता भी खटकने लगती है या उसका उदार जुड़ाव भी कसैला प्रतीत होने लगता है. देख लीजिये, आज समाज में परिवार की मूल अवधारणा का हश्र क्या हो चुका है ! सर्वसमाही समाज कहाँ है ! एक बात और, इस खुलेपन से न कहा करें, आदरणीया, कि सहयोग के क्रम में कौन, किसने क्या दिया. सामुहिकता तो सदा से आपसी मिल-बाँट कर जी जाने वाली प्रक्रिया है. सर्वोपरि, आजके दौर में किसी की ऐसी संलग्नता पचती भी नहीं. जबतक मौका पचा पाता है और व्यवस्था स्वीकार करती चलती है, लोग-बाग चलने देते हैं. बस ! वर्ना, गुरुदेव तक 'घुड़देउआ' हो जाते हैं.. नाकाबिलेबर्दाश्त.. यही है समाज का हालिया परिचय.. . gratitude एक ऐसा भाव है... जो मेरे वजूद में मुझसे पहले जुड़ा है.. जो उस परमसत्ता से ये जीवन का सुअवसर देने से लेकर हर सूक्ष्मतम चीज़ के लिए हर किसी का आभार तद्क्षण देते चलने की एक आदत सी बन गयी है. तो ये उसी के कारण हुआ की आभार के क्रम में मैं इस छोटी सी बात का भी आभार प्रकट कर गयी.. मैंने इतना सोचा नहीं था .पर हाँ सामूहिक निर्णयों में ये मायने तो नहीं रखता..सहमत हूँ अब ध्यान अवश्य ही रखूँगी :) ये 'स्व' भाव अहंकार का बड़ा पोषक है... आपकी बातों से सहमत हूँ. समाज का हालिया स्वरुप बहुत आहत करने वाला ही है. समझ सकती हूँ. कथ्य, मंतव्य और उसका अवश्यंभावी प्रभाव आपने सहज ही स्वीकार किया, आदरणीया, इस निमित्त सादर आभार.. आपकी संवेदनशील उपस्थिति नें ऐसे किन्ही आयोजनों के उद्देश्य को सामने रखा है..... कविताओं का कहन जब तक अपने भाव से शब्द से प्राण से किसी सुप्त मनस को स्पंदित नहीं कर देता ..जागृत नहीं कर देता ..तब तक काव्य अपने उद्देश्य में असफल रहता है. आयोजन में आपकी सक्रिय उपस्थित सराहनीय रही.. संकलन कर्म को मान देने के लिए आपका धन्यवाद. आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी सादर, महा-उत्सव अंक-४४ की समस्त रचनाओं को संकलित करने के लिए बहुत-बहुत आभार. यह संकलन सदैव ही बहु-उपयोगी रहा है सादर.
आदरणीय सुधीजनो, महोत्सव में उनतीस रचनाकारों नें दोहा, आल्हा, गीत-नवगीत, ग़ज़ल व अतुकान्त आदि विधाओं में अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति द्वारा महोत्सव को सफल बनाया. यथासम्भव ध्यान रखा गया है कि इस पूर्णतः सफल आयोजन के सभी प्रतिभागियों की समस्त रचनाएँ प्रस्तुत हो सकें. फिर भी भूलवश यदि किन्हीं प्रतिभागी की कोई रचना संकलित होने से रह ,गयी हो, वह अवश्य सूचित करें. बेलौस बोलती.. भागती.. चीखती.. कुछ भी नहीं... . .. . बेटियाँ गंगा नदी सी, पाप सारे धो रहीं। झेलतीं संताप अनगिन, अस्मिता को खो रहीं ।। वेद मन्त्रों की ऋचाएँ, बेटियाँ ही भक्ति हैं। चेतना सामर्थ्य दात्री, बेटियाँ ही शक्ति हैं।एक। नारियों को पूजते थे, देवियों के रूप में। देवता भी देखते थे, स्वर्ग के प्रारुप में।। घूमते निर्द्वंद्व हो के, आततायी देश में। माँगती है न्याय बेटी, निर्भया के वेश में।दो। कामियों के आज हाथों, लाज बेटी खो रही । भ्रूण हत्या कोख में ही, बेटियों की हो रही ।। यातना का दर्द सारा, नर्क का परिवेश हैं। लुप्त होती बेटियाँ औ, सुप्त सारा देश है।तीन। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। न माँगे, भगवान से बेटी, बेटे की सब चाह रखें। और कोई न चाहे बेटी , माँ की चाहत रहती है। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। जिस घर में बेटी होती है, घर ज़्यादा प्यारा लगता। बचपन में गुड्डे गुड़ियों से, बिटिया खेला करती है। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। फर्क नहीं बेटी - बेटे में, बात बड़ी हम सब करते। सुखी रहे, मायका ससुराल , रोज प्रार्थना करती हैं। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। बेटे को अधिकार सभी है, सब से ज़्यादा प्यार मिले। बेटियाँ परिवार का हर पल, ध्यान बराबर रखती हैं। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। जब होती है बेटी बिदा, घर आँगन सूना लगता है। हे समाज के ठेकेदारों , बेटी हम पर भार नहीं। सब रिश्तों को निभाने वाली, बिटिया सब कुछ सहती हैं। आने दो प्यारी बिटिया को, घर की रौनक बढ़ती है। भरा-भरा घर आँगन लगता, जब चिड़ियों सी चहकती है॥ . बेटी ! समस्या ज्वलंत है , पर स्वयँ को समस्या का जनक , कारण नहीं मानना चाहता , मै भी , आप भी , ये भी, वो भी , सभ्यता भी , संस्कार भी , पुलिस भी , प्रशासन भी , जनता भी , नेता भी , खलनायक भी अभिनेता भी , यहाँ तक कि , खुद थामो पतवार, बेटियों, नाव बचानी है। मझधारे से तार, तीर तक लेकर जानी है। यह समाज बैठा है तत्पर। गहराई तक घात लगाकर। तुम्हें घेरकर चट कर लेगा, मगरमच्छ ये पूर्ण निगलकर। हो जाए लाचार, इस तरह, जुगत भिड़ानी है। यह सैय्याद कुटिलतम कातिल। वसन श्वेत, रखता काला दिल। उग्र रूप वो धरो बेटियों, झुके तुम्हारे कदमों बुज़दिल। पत्थर की इस बार, मिटे जो, रेख पुरानी है। हों वज़ीर के ध्वस्त इरादे। कुटिल चाल चल सकें न प्यादे। इस बिसात का हर चौख़ाना, एक सुरक्षित कोट बना दे। निकट न फटके हार, हरिक यूँ गोट जमानी है। आंगन खेलती बेटी ! और पन्ना पलट लिखने लगता हूँ चाँद-तारे,ब्रह्माण्ड ! जब खोज रहा होता हूँ चाँद के धब्बों का रहस्य , तय कर लेतीं है बेटी से लड़की होने तक का सफर ! चुप-चाप बटोर लेती है प्रेम-पत्र पढ़ने जितने शब्द ! बिना दूध पिए बड़ी हो जाती है समय से पहले , दुपट्टे जितना ,झाड़ू जितना ,चूल्हे जितना जरूरी ! प्रेम पोसती लड़की पालती है जंजीरें भी ! पिता के सम्मान का विलोम नहीं रह जाता ! थोड़ा-थोड़ा रोज कम होती है लड़की ! और एक दिन रीत जाता है उसका लड़कीपन भी ! पीले पड़े पत्ते, सूखती हुई नदी, बड़ी हो चुकी बेटी ! तब उसकी गोद में एक बेटा लिख देता हूँ मैं ! बेटा अपनी किस्मत में बिदेस लिख लेता है , चुहानी के धुँआए सांकल से लटकती अकेली मौत ! अब मैं जब भी लिखूंगा 'बेटी'तो नहीं देखूंगा आकाश , कि वो छीन लेती है अपने हिस्से की किताबें ! प्रेम को मानती है नमक जितना जरूरी ! "जस्ट फॉर यू" लिखा कॉफ़ी मग , सम्मान के नए शिखर , बेटी के मजबूत होते पंख ! कि वो खुद तय करे अपनी कहानी का उपसंहार ! बेटी घर की रौनके , इनसे घर का गान । घर मे डाले जान , कोना कोना महकाये । कहती हरदम 'अंजु' , बागडोर थाम लेती । कितनी बार दोहराओगे बाबू! बेटी-"कितनी बार दोहराओगे बाबू! जंग लगे रीति रिवाज़. जंगल-जंगल ही रहे. राष्ट्र का विनाश हुआ अश्वमभावी. तुझे देश की सैर कराऊँगी. कब तक बेटी धरा पर जाएगी कुचली? दिया भी जलता है बेटियों से। जो बेटियाँ मारते रहोगे, समाज घटता है बेटियों से।। क्या लिखू? कैसे लिखू? मंज़र को ताकें भौचक निगाहें, राह अब समाज को दिखा रही हैं बेटियाँ, सत्य झूठ का सफा पढ़ा रही हैं बेटियाँ, बेटियाँ विकास की मिसाल हैं समाज में, मान आज देश का बढ़ा रही हैं बेटियाँ, फौजियों के वेश में लड़ा रही है जान जो, देश में समाज में बला रही हैं बेटियाँ , दानवों की सोच में अधिक नहीं है देह से, जान आज देश में गँवा रही हैं बेटियाँ, लोभ कूप में गिरे कई-कई हैं आदमी, मूल्य लोभ का मगर चुका रही हैं बेटियाँ, कायरों की भीड़ और शोर व्यर्थ के सभी, रोज ही गुनाह जब छुपा रही हैं बेटियाँ, शेरनी का रूप आज हिरनियाँ ठगी गयी, जाल में बहेलिये के जा रही हैं बेटियाँ, शायरों की शायरी हरेक गीत छंद में, दर्द है कहाँ कहाँ लिखा रही हैं बेटियाँ, बोलना 'अशोक' का रास भी न आए तो, छली जाएंगी ? कर दो आजा़द उन्हें.. कब होगी ये कविता पूरी! जब कर ले वह कविता पूरी! होनी होगी कविता पूरी! क्यूँ आज भी समाज़ मे घुट-घुट के जी रही हैं बेटियाँ? आज बेटियों के सुरक्षा देने में समाज बिलकुल असफल सा नजर आ रहा है... जहां माता पिता बहुत विवश हैं तो बेटियाँ बहुत सहमी.. बेटियों के साथ दरिन्दगी का ये सिलसिला थमता सा ही नहीं दिखाई देता.. आदरणीया डॉ प्राची जी इस सफल आयोजन एवं शीघ्र संकलन के लिए सर्व प्रथम मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. अवकाश का दिन न होने के कारण इसबार आयोजन का पूरा आनंद उठाने से वंचित रहा अतएव आयोजन के सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई तथा अपनी रचना पर प्राप्त अनुमोदन/सुझाओं हेतु सभी सुधिजनों का हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. इस सफल आयोजन के सभी प्रतिभागियों की समस्त रचनाएँ एक साथ पढ़कर सचमुच आनंद आ गया आदरणीया सादर धन्यवाद. //अवकाश का दिन न होने के कारण इसबार आयोजन का पूरा आनंद उठाने से वंचित रहा//.......अपनी अपनी व्यस्त-व्यस्ततम दिनचर्या में से हम सभी कुछ पल चुरा कर इस मंच पर जितना समय शक्ति दे पाते हैं उतना देने का भरसक प्रयत्न करते हैं...आपने भी कुछ ऐसा ही किया, ये कहीं न कहीं हमारे काव्य सागर में भावात्मक आत्मसंतोष को ही जताता है. अवकाश के दिन कई सदस्यों का मंच को समय दे पाना संभव ही नहीं होता...घर परिवार बच्चों समाज की जिम्मेरियों का निर्वहन करने को एक अवकाश का दिन उन्ही अत्यंत आवश्यक कार्यों के लिए सुरक्षित रहे, ऐसा यही सोच कर किया गया है....फिर शनिवार की पूरी शाम तो आयोजन के लिए मिल ही जाती है :) 'समाज और बेटियाँ' जैसे शीर्षक ने रचनाकारों और प्रतिभागियों को गहरे छूआ. तदनुरूप रचनायें भी आयीं. हर सम्मिलित रचना इस आयोजन की सफलता की कहानी कह रही है. आपके इस संकलन के माध्यम से कई रचनाकार अपनी रचनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर सकेंगे. संकलन हेतु सादर आभार, आदरणीया प्राचीजी.. . आदरणीय सौरभ जी.... ये सामयिक विषय समाज की हालिया स्थिति को देखते हुए सचमुच सभी रचनाकारों को संवेदित करने में सफल रहा. ये विषय देने के लिए आपका आभार. हर रचना नें अपने कथ्य से प्रभावित किया... वैसे तो आयोजन ही रचनाओं का मूल्यांकन कर तदनुरूप चर्चा और संशोधन करने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराते हैं.... पुनर्मूल्यांकन तो होते ही रहना चाहिए और हर सजग रचनाकार को ये करना ही चाहिए. यह सही है, आदरणीया प्राचीजी, कि समवेत स्वर में बहुत कुछ सधता चलता है. लेकिन उसके पहले बहुत कुछ सोचना-गुनना होता है. हम जब सोचने से फ़ारिग़ होने लगते हैं तथा व्यक्तिवाची स्वर हावी होने लगता है, तो व्यक्तिगत तौर पर ही नहीं हम सामाजिक तौर पर भी एकाकी तथा एकांगी सोच के मुखर धारक बनने लगते हैं. 'स्व' का स्वार्थी आरोपण इतना हावी हो जाता है कि हमें फिर किसी नितांत आत्मीय की संलग्नता भी खटकने लगती है या उसका उदार जुड़ाव भी कसैला प्रतीत होने लगता है. देख लीजिये, आज समाज में परिवार की मूल अवधारणा का हश्र क्या हो चुका है ! सर्वसमाही समाज कहाँ है ! एक बात और, इस खुलेपन से न कहा करें, आदरणीया, कि सहयोग के क्रम में कौन, किसने क्या दिया. सामुहिकता तो सदा से आपसी मिल-बाँट कर जी जाने वाली प्रक्रिया है. सर्वोपरि, आजके दौर में किसी की ऐसी संलग्नता पचती भी नहीं. जबतक मौका पचा पाता है और व्यवस्था स्वीकार करती चलती है, लोग-बाग चलने देते हैं. बस ! वर्ना, गुरुदेव तक 'घुड़देउआ' हो जाते हैं.. नाकाबिलेबर्दाश्त.. यही है समाज का हालिया परिचय.. . gratitude एक ऐसा भाव है... जो मेरे वजूद में मुझसे पहले जुड़ा है.. जो उस परमसत्ता से ये जीवन का सुअवसर देने से लेकर हर सूक्ष्मतम चीज़ के लिए हर किसी का आभार तद्क्षण देते चलने की एक आदत सी बन गयी है. तो ये उसी के कारण हुआ की आभार के क्रम में मैं इस छोटी सी बात का भी आभार प्रकट कर गयी.. मैंने इतना सोचा नहीं था .पर हाँ सामूहिक निर्णयों में ये मायने तो नहीं रखता..सहमत हूँ अब ध्यान अवश्य ही रखूँगी :) ये 'स्व' भाव अहंकार का बड़ा पोषक है... आपकी बातों से सहमत हूँ. समाज का हालिया स्वरुप बहुत आहत करने वाला ही है. समझ सकती हूँ. कथ्य, मंतव्य और उसका अवश्यंभावी प्रभाव आपने सहज ही स्वीकार किया, आदरणीया, इस निमित्त सादर आभार.. आपकी संवेदनशील उपस्थिति नें ऐसे किन्ही आयोजनों के उद्देश्य को सामने रखा है..... कविताओं का कहन जब तक अपने भाव से शब्द से प्राण से किसी सुप्त मनस को स्पंदित नहीं कर देता ..जागृत नहीं कर देता ..तब तक काव्य अपने उद्देश्य में असफल रहता है. आयोजन में आपकी सक्रिय उपस्थित सराहनीय रही.. संकलन कर्म को मान देने के लिए आपका धन्यवाद. आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी सादर, महा-उत्सव अंक-चौंतालीस की समस्त रचनाओं को संकलित करने के लिए बहुत-बहुत आभार. यह संकलन सदैव ही बहु-उपयोगी रहा है सादर.
ईमानदार और साफ छवि की वकालत करने वाली आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती एक और विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं. दरअसल, पिछले साल सीबीआई ने वकील सोमनाथ भारती पर भ्रष्टाचार के एक मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और अभियोजन पक्ष के गवाह को प्रभावित करने का आरोप लगा था. इस बाबत पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआई अदालत ने सोमनाथ भारती को फटकार भी लगाई थी. सीबीआई की विशेष अदालत की जज पूनम बाम्बा ने पिछले साल अगस्त में सोमनाथ भारती और उनके क्लाइंट पवन कुमार को फटकारा था. पवन कुमार पर एक भ्रष्टाचार का मामला चल रहा था. 2006 के दौरान स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में कुछ कार्यों के लिए पवन कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप था. पवन कुमार चाहते थे कि उन्हें बेल मिल जाए और उनके वकील थे सोमनाथ भारती, जो इस समय केजरीवाल कैबिनेट के सदस्य हैं. पवन कुमार को जमानत दिलाने के लिए भारती ने ऐसा काम किया कि कोर्ट को वकील और क्लाइंट दोनों के खिलाफ सख्त शब्द अपनाने पड़े. सीबीआई ने आरोप लगाया कि पवन कुमार और उनके वकील सोमनाथ ने संबंधित मामले को लेकर फोन पर अभियोजन पक्ष के गवाह से बात की. इसके बाद जज बाम्बा ने कहा कि यह बहुत आपत्तिजनक (हाईली ऑब्जेक्शनेबल) और अनैतिक (अन-एथिकल) है. यही नहीं यह मामला सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश से भी जुड़ता है. तब अदालत ने पवन कुमार को बेल देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद पवन ने वकील सोमनाथ भारती और प्रशांत भूषण के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत याचिका दायर की, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली. आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में कानून मंत्री सोमनाथ भारती को पिछले साल अदालत ने फटकार लगाई थी.
ईमानदार और साफ छवि की वकालत करने वाली आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती एक और विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं. दरअसल, पिछले साल सीबीआई ने वकील सोमनाथ भारती पर भ्रष्टाचार के एक मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और अभियोजन पक्ष के गवाह को प्रभावित करने का आरोप लगा था. इस बाबत पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआई अदालत ने सोमनाथ भारती को फटकार भी लगाई थी. सीबीआई की विशेष अदालत की जज पूनम बाम्बा ने पिछले साल अगस्त में सोमनाथ भारती और उनके क्लाइंट पवन कुमार को फटकारा था. पवन कुमार पर एक भ्रष्टाचार का मामला चल रहा था. दो हज़ार छः के दौरान स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में कुछ कार्यों के लिए पवन कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप था. पवन कुमार चाहते थे कि उन्हें बेल मिल जाए और उनके वकील थे सोमनाथ भारती, जो इस समय केजरीवाल कैबिनेट के सदस्य हैं. पवन कुमार को जमानत दिलाने के लिए भारती ने ऐसा काम किया कि कोर्ट को वकील और क्लाइंट दोनों के खिलाफ सख्त शब्द अपनाने पड़े. सीबीआई ने आरोप लगाया कि पवन कुमार और उनके वकील सोमनाथ ने संबंधित मामले को लेकर फोन पर अभियोजन पक्ष के गवाह से बात की. इसके बाद जज बाम्बा ने कहा कि यह बहुत आपत्तिजनक और अनैतिक है. यही नहीं यह मामला सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश से भी जुड़ता है. तब अदालत ने पवन कुमार को बेल देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद पवन ने वकील सोमनाथ भारती और प्रशांत भूषण के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत याचिका दायर की, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली. आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में कानून मंत्री सोमनाथ भारती को पिछले साल अदालत ने फटकार लगाई थी.
अधिक तेजस्वी बनता चला जाता है। आग में पड़कर सोना कभी मैला या काला नहीं पड़ता। तभी तो कहा जाता है - 'आग में पड़कर भी सोने की चमक जाती नहीं।" साधु जीवन में कहां तक सत्यता है, कौन साधु किस रूप में साधना की ज्योति में ज्योतित हो रहा है, यह भी बिना परीक्षा के नहीं जाना जा सकता। साधु-जीवन की परिपक्व साधुता उसकी परीक्षा के अनन्तर ही निर्धारित की जा सकती है। जो साधु अनुकूल परीषहों के आने पर समभाव से रहता है, संकट की उपस्थिति में जरा भी डांवाडोल नहीं होता, विषम से विषम परिस्थितियों में समभाव की डोरी टूटने नहीं देता, वही सच्चा साधु या खरा साधु कहा जा सकता है। निःसन्देह ऐसा साधु ही साधुत्व की उच्च भूमिका प्राप्त करने में सफल हो सकता है। किन्तु जो साधु जरा-सी प्रतिकूलता में बौखला उठता है, सामान्य कष्ट के आ जाने पर आकुल-व्याकुल हो जाता है, शान्ति खो बैठता है तो उसे साधु पद के महान् सिंहासन पर कैसे बिठलाया जा सकता है? वह साधु नहीं स्वादु (स्वाद - प्रिय) होता है । वह साधु ही क्या जो कष्ट से भयभीत होता हो ! वस्तुतः साधु की साधना का निर्णय उसकी परीक्षा के अनन्तर ही किया जा सकता है। केशलांच' जैन साधु की एक परीक्षा है। केशलोच के द्वारा साधु की सहिष्णुता और सहनशीलता का पता चल जाता है। साधु कष्ट सहने में कितनी क्षमता रखता है और समय आने पर कष्टों को झेल सकेगा या नहीं, आदि सभी बातें केश लोच के द्वारा मालूम पड़ जाती हैं। साधु- जीवन के प्रति साधु कितना दृढ़ है तथा कितना स्थिर है, इस बात का भी लोच के द्वारा आसानी से बोध हो जाता है। साधु- जीवन में मान और अपमान दोनों की वर्षा होती है। अच्छी और बुरी दोनों घड़ियां उसके जीवन में आती हैं। जब सम्मान का अवसर आता है तो वह सर्वत्र सम्मान को 1. श्री कल्पसूत्र की 24वीं समाचारी में लिखा है- वासावासं पज्जोसवियाणं नो कप्पइ निग्गन्थाणं निग्गन्थीण वा परं पज्जोसवणाओ गोलोमप्यमाण मित्तेऽवि केसे तं रयणि उवायणावित्तए... । अर्थात् साधुओं को साध्वियों को सम्वत्सरी से पहले-पहले केशलोच करवा लेना चाहिए। गोरोम से अधिक लम्बे केश नहीं रखने चाहिएं। श्री निशीथ सूत्र के प्रथम उद्देश्य में लिखा है कि जो साधु, साध्वी सम्वत्सरी को गोरोम से अधिक लम्बे केश रखता है, उसको गुरु चातुर्मासिक प्रायश्चित्त आता है, उसे लगातार चार उपवास रखने पड़ते हैं। जे भिक्खू पज्जोसवणाए गोलोमाइपि बालाई उव्वायणावेइ उव्वायणावंतं वा साइज्जड़ 45 [ बारहवां अध्याय : अनगार धर्म / 395] प्राप्त करता है। आहार भी उसे सम्मान के साथ मिलता है और वस्त्रादि की प्राप्ति भी उसे सम्मान से ही होती है। जहां भी वह जाता है, वहीं अभिवन्दनों और अभिनन्दनों के पुलिन्दे उसके चरणों में अर्पित किये जाते हैं। अमीर-गरीब, राजा - रंक सभी के मस्तक उसकी चरण-रज प्राप्त करते हैं। स्थान-स्थान पर उसे आतिथ्य मिलता है। उसके जय-नादों से कई बार तो आकाश भी गूंज उठता है। इस प्रकार सर्वत्र साधु को सम्मान ही सम्मान प्राप्त होता है। किन्तु जब जीवन में अपमान की घड़ियां आती हैं तो कई बार उसे अपमान का सामना भी करना पड़ता है। लोग उसे घृणा से देखते हैं, उस पर दुत्कार और तिरस्कार की वर्षा करते हैं। भोजन तो किसने देना है, प्रेम-पूर्वक उससे कोई बात भी नहीं करता। प्यास के मारे कण्ठ सूख रहा है तथापि पानी की दो घूंटें उपलब्ध नहीं होतीं, भोजन को देखे तीन-तीन दिन गुजर जाते हैं। वृक्षों के नीचे रातें व्यतीत करनी होती हैं। रोगों से शरीर आक्रान्त हो जाता है। इस प्रकार असातावेदनीय कर्म के अनेकों प्रकोप उसे जीवन में दृष्टिगोचर होते हैं । जैन दर्शन कहता है कि साधु- जीवन में मान की प्राप्ति हो या अपमान की, दोनों अवस्थाओं में साधु को शान्त और दान्त रहना चाहिए। हर्ष- शोक के प्याले उसे बिना झिझक पीने चाहिएं। समता भगवती की आराधना ही उसके जीवन की साधना होनी चाहिए। परन्तु प्रश्न उपस्थित होता है कि इस बात का पता कैसे चले कि साधु मानापमान में शान्त रहता है या नहीं और समता के महापथ पर दृढ़ता से बढ़ रहा है या नहीं? इसी बात की जांच करने के लिए जैनाचार्यों ने वर्ष में एक परीक्षा नियत की है और वह परीक्षा है - केशलोच। केशलोच साधु की मानसिक स्थिति का पूरा-पूरा बोध प्राप्त हो जाता है। सम्मान पाकर क्या वह सुख- प्रिय बन गया है? दुःख में आकुल- व्याकुल तो नहीं हो जाता ? आदि सभी प्रश्न केशलोच के समय समाहित हो जाते हैं। केशलोच ही ऐसी परीक्षा है जो जैन साधु के अन्तरंग जीवन का प्रत्यक्ष दर्शन करा देती है। वास्तव में कष्ट में ही जीवन की सहनशीलता का परिचय मिलता है। इन पंक्तियों के लेखक ने एक बार बंगाल के राजनैतिक क्रान्तिकारी दल का एक इतिहास पढ़ा था। उसके एक अध्याय में क्रान्तिकारी दल का सदस्य बनने के लिए कुछ नियमों का निर्देश किया गया था। उन नियमों में एक नियम यह भी था कि उस दल का सदस्य बनने वाले व्यक्ति को प्रज्वलित दीपक-शिखा पर अंगुली रखनी पड़ती थी। अग्निदाह से उंगली के जलने पर भी जो व्यक्ति उफ तक नहीं करता था, उसे उस दल का सदस्य बनाया जाता था। अनुमान लगाइये, क्रान्तिकारी दल का सदस्य बनने के लिए अपने को कितना सहनशील प्रमाणित । जैन ज्ञान प्रकाश / 396 ] करना पड़ता था। उस कठोर परीक्षा के पीछे यही भावना थी कि दल का सदस्य सरकार द्वारा बन्दी बनाये जाने पर आग में भी जला दिया जाए तब भी वह डांवाडोल न होने पावे और अपने दल के रहस्य प्रकट न करने पावे। केशचोल भी इसी प्रकार की एक परीक्षा है। केशचाल कराने वाले साधक भी एक क्रातिंकारी दल के सदस्य के रूप में हमारे सामने आते हैं। यह सत्य है कि इस दल की क्रांति आध्यात्मिक क्रांति है। इसमें किसी के विनाश का कोई लक्ष्य नहीं होता है। इस क्रांति में आत्मा को विकारों के साथ संघर्ष करना पड़ता है। विकारों के राज्य पर काबू पाने के लिए ही इस क्रांति का आश्रयण किया जाता है। परन्तु इस आध्यात्मिक क्रांतिकारी दल का सदस्य बनने के लिए भी मनुष्य को परीक्षा देनी पड़ती है ताकि विकारों द्वारा बन्दी बना लिए जाने पर यह डांवाडोल न हो जाए। विकारों के प्रहारों से आकुल होकर कहीं यह संयमभ्रष्ट न हो जाए। एतदर्थ उसकी केशलोच द्वारा परीक्षा ली जाती है। जो इस परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता है, उस पर विकारों के कितने ही प्रहार हों और उस पर कितना भी संकट आ जाए, फिर भी वह धर्म से च्युत नहीं होता प्रत्युत धर्म को जीवन के साथ संभाल कर रखता है। केशलोच जैसी भीषण परीक्षा प्रत्येक व्यक्ति नहीं दे सकता। यह परीक्षा तो वही दे सकता है, जिसका मानस तप-त्याग की पवित्र भावना से सदा भावित रहता है, जिसने मोक्ष को ही अपना परम - साध्य बना लिया है, वही व्यक्ति इस अहिंसक परीक्षा में अपने को प्रस्तुत करता है। फिर यह परीक्षा ऐसी विलक्षण है कि प्रतिवर्ष देनी पड़ती है। बंगाल के क्रांतिकारी दल के सदस्य को तो एक बार ही परीक्षा देनी पड़ती थी, किन्तु केशलोच की परीक्षा साधु को प्रतिवर्ष देनी होती है। ' लोच को हिंसा समझना ठीक नहीं है। क्योंकि हिंसा में दूसरों को दुःख दिया जाता परन्तु लोच में दूसरों को दुःख नहीं दिया जाता, प्रत्युत स्वयं दुःख सहन किया जाता है। ऐसी स्थिति में लोच को हिंसा कैसे कहा जा सकता है? दूसरी बात, लोच कराने वाला साधक उसे दुःख समझ कर नहीं कराता है। वह तो उसे आध्यात्मिक परीक्षा की घड़ी समझता है। आजकल वर्ष में दो बार सिर की लोच कराने की परम्परा पाई जाती है। यह सत्य है किन्तु यह तो साधक की साधना की पराकाष्ठा है। साधक अधिक से अधिक साधना का लाभ प्राप्त करना चाहता है। वैसे शास्त्रीय दृष्टि से वर्ष में एक बार लोच कराना आवश्यक है। [ बारहवां अध्याय : अनगार धर्म / 397] जैसे विद्यार्थी परीक्षा में बड़े उत्साह से बैठता है वैसे ही साधु इस परीक्षा में सोत्साह भाग लेता है और उसमें उत्तीर्ण होने के लिए अपने को पूर्णतया सहिष्णु बनाए रखता है। यदि अपने को सहिष्णु बनाना और कष्टों को सहर्ष सहन करना भी हिंसा कृत्य मान लिया जाए तब तो असिधारा व्रत ब्रह्मचर्य का परिपालन भी हिंसा- कृत्य स्वीकार करना पड़ेगा। ब्रह्मचर्य के अतिरिक्त अहिंसा, सत्य आदि अन्य सभी साधनाओं में मन को मारना पड़ता है, अनेकविध संकटों का सामना करना पड़ता है। तब ये सभी साधनाएं हिंसा में परिगणित करनी पड़ेंगी। पर वस्तुस्थिति ऐसी नहीं है। वस्तुतः आत्म-शुद्धि तथा आत्म-कल्याण के महापथ पर बढ़ते हुए साधक को जिन कष्टों का सामना करना पड़ता है, उनको साधना का रूप देता है। अतः लोच करना हिंसा नहीं है; प्रत्युत जीवन-निर्मात्री अहिंसा का ही एक रूपान्तर है। प्रज्ञापना सूत्र के 22वें क्रिया पद में आचार्य मलयगिरि ने इस सम्बन्ध में बहुत सुन्दर ऊहापोह किया है। वहां लिखा है पारितापनिकी क्रिया के तीन भेद होते हैं - स्वपारितापनिकी, परपारितापनिकी और उभयपारितापनिकी। स्वयं को पीड़ित करना स्वपारितापनिकी, दूसरों को पीड़ित करना परपारितापनिकी और दोनों को पीड़ित करना उभयपारितापनिकी क्रिया कहलाती है। यहां प्रश्न उपस्थित होता है कि यदि दुःख देने से क्रिया लगती है, तो स्वयं लोच करने पर स्वपारितापनिकी, दूसरे की लोच करने से परपारितापनिकी, और परस्पर एक-दूसरे की लोच करने पर उभयपारितापनिकी क्रिया लगनी चाहिए। क्योंकि इससे दुःखोत्पत्ति होती है। इसका समाधान निम्नोक्त है दुष्ट बुद्धि से दिया गया दुःख पारितापनिकी क्रिया का कारण बना करता है। किन्तु जिस दुःख के पीछे सद्भावना हो और जिसका परिणाम हितकर हो, उससे कर्मबन्ध नहीं होता। जैसे डॉक्टर शल्य चिकित्सा करता है, चिकित्सा में रोगी को वेदना भी होती है, किन्तु डॉक्टर की भावना शुद्ध होने से और उसका फल हितप्रद होने से डॉक्टर पाप का भागी नहीं बनता। ऐसे ही लोच का परिणाम हितावह और आत्मशुद्धि तथा साहिष्णुता आदि आत्मगुणों का संवर्धक होने से लोच पारितापनिकी क्रिया का कारण नहीं बन सकती। केश लोच जैसी कठिनतम साधना को देखकर सामान्य व्यक्ति कई बार आकुल- व्याकुल हो जाते हैं किन्तु यदि गम्भीरता से विचार किया जाए तो यह मानना पड़ेगा कि लोच जैन साधु का भूषण है। इस भूषण से विभूषित होने के कारण ही आज जैन साधु का जैन और अजैन [ जैन ज्ञान प्रकाश / 398 ] सभी विचारक सम्मान करते हैं। संसार के सभी साधु आचारगत - शिथिलता के कारण आज अपना सम्मान समाप्त करते जा रहे हैं। केवल एक जैन साधु ही ऐसा साधु है जो केश लोच और अखण्ड ब्रह्मचर्य जैसी विलक्षण साधनाओं के कारण आज भी गौरवास्पद बना हुआ है और उसे सर्वत्र आदर से देखा जाता है। जैन दर्शन से भले ही कोई विरोध रखता हो पर जैन साधु की साधना के आगे सबको नतमस्तक होना पड़ता है। जैन साधु की कठोर साधुवृत्ति का आज भी लोग मान करते हैं और उसके आदर्श तप, त्याग का लोहा मानते हैं। अतः केश लोच जैसी अध्यात्म साधना से भयभीत नहीं होना चाहिए। अध्यात्म जगत में इसका एक विशिष्ट स्थान है, इसे हिंसा समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। सत्य का अर्थ है-वस्तु के यथार्थ रूप को प्रकट करना अथवा ऐसी वाणी या भाषा का प्रयोग नहीं करना जिससे यथार्थता पर पर्दा पड़ता हो । परन्तु सत्य भाषा के साथ मधुरता भी होनी चाहिए। जिस सत्य के साथ कटुता रहती है या यों कहिए जो सत्य दूसरे के मन को दुःखाने-पीड़ा पहुंचाने के लिए, उसको नीचा दिखाने के लिए, उसका अपमान - तिरस्कार करने के लिए या उसका सर्वनाश करने की दृष्टि से बोला जाता है, वह सत्य नहीं, बल्कि असत्य है। सत्य वचन यथार्थ और कल्याणकारी, हितकारी एवं मधुर होना चाहिए। सत्य के भी नौ भेद बताए गए हैं- मन, वचन और काया से असत्य बोले नहीं, दूसरे को असत्य बोलने को कहे या प्रेरित करे नहीं और असत्य बोलने वाले को अच्छा भी नहीं समझे। इस तरह साधु सर्वथा असत्य का त्याग करता है। इसलिए वह कभी भी दूसरे व्यक्ति को कष्ट हो ऐसी सावद्य-पापकारी भाषा का तथा निश्चयकारी- जब तक किसी भी वस्तु या प्राणी के सम्बन्ध में पूरा निश्चय न हो- भाषा का उपयोग नहीं करता। यदि कभी उसके सामने अयथार्थ बात कहने का प्रसंग उपस्थित हो जाए तो उस समय मौन रहता है। सत्य - यथार्थ भाषा हो, परन्तु साथ में सर्व क्षेमकारी भी होनी चाहिए। क्योंकि साधु का जीवन जगहित के लिए होता है। अतः उस की भाषा भी कल्याणकारी होनी चाहिए। इस भावना को ध्यान में रखकर सत्य को भगवान् और लोक में सारभूत कहा है। सत्य से बढ़कर दुनिया में कोई पदार्थ नहीं है । "सच्चं खु भगवं," "सच्चं लोगम्मि सारभूयं "। - प्रश्नव्याकरण सूत्र, संवरद्वार। ( बारहवां अध्याय : अनगार धर्म / 399] स्तेय का अर्थ है चोरी करना। चोरी करना भी पाप है। इस कार्य से स्व और पर दोनों की आत्मा में अशांति एवं जलन बनी रहती है। अतः साधु चोरी का सर्वथा परित्याग करते हैं। वे मन से, वचन से और शरीर से न चोरी करते हैं, न दूसरे व्यक्ति के द्वारा चोरी करवाते हैं और न चोरी करने वाले व्यक्ति को अच्छा ही समझते हैं। यहां तक कि यदि उन्हें एक तिनका या कंकर भी आवश्यकतावश लेना होता है तो वह भी मांग कर लेते हैं, बिना आज्ञा के छोटी या बड़ी कोई वस्तु नहीं उठाते। यदि कहीं कोई व्यक्ति न मिले तो शक्रेन्द्र महाराज की आज्ञा लेकर तृण आदि ग्रहण करते हैं। विहार के समय रास्ते में विश्रांति करने से पूर्व या शौच जाते समय बैठने के लिए स्थान की आज्ञा भी शक्रेन्द्र से लेने की परम्परा है। इस तरह साधु यत्र-तत्र सर्वत्र आज्ञा लेकर ही प्रत्येक वस्तु को स्वीकार करते हैं । ब्रह्म + चर्य इन दो शब्दों के संयोग से ब्रह्मचर्य शब्द बना है। अतः ब्रह्मचर्य शब्द का अर्थ हुआ ब्रह्म में रमण करना । ब्रह्म शब्द के आनन्दवर्धक, वेद, धर्म शास्त्र, तप, मैथुन- त्याग आदि अनेकों अर्थ होते हैं। परन्तु ब्रह्मचर्य का अर्थ मैथुन- त्याग किया जाता रहा है। मैथुन - वासना आत्मा को ब्रह्म - ईश्वरीय भावना से दूर और दूरतर कर देती है, इसलिए काम-वासना को दोषी माना गया है और साधु के लिए यह विधान है कि वह सर्वथा मैथुन का परित्याग करे। यह व्रत भी 9 कोटि से स्वीकार किया जाता है अर्थात् साधु मन, वचन और शरीर से न मैथुन सेवन करते हैं, न करवाते हैं और न करने वाले को अच्छा समझते हैं। आजकल ब्रह्मचर्य का अर्थ सिर्फ स्त्री-पुरुष संसर्ग-त्याग किया जाता है और इसी में ब्रह्मचर्य की पूर्णता मान ली जाती है। परन्तु ऐसा नहीं है, ब्रह्मचर्य का अर्थ है- सम्पूर्ण वासना से मुक्त होना । भगवान् अजितनाथ से लेकर पार्श्वनाथ पर्यन्त चार महाव्रत ही थे, ब्रह्मचर्य महाव्रत का अपरिग्रह महाव्रत में ही समावेश कर लिया जाता था। ममता, मूर्च्छा, आसक्ति का नाम परिग्रह है और इसका नाम अब्रह्मचर्य भी है। भोग सेवन करना भी अब्रह्मचर्य है और उन भोगों की आसक्ति रखना भी अब्रह्मचर्य है। परन्तु अब्रह्मचर्य को अलग 1. शक्रेन्द्र महाराज ने सभी साधु-साध्वियों को जंगल में या अन्यत्र कभी कोई व्यक्ति न मिले तो उस समय तृण-काष्ठ आदि पदार्थ लेने की आज्ञा दी । देखो - भगवती शतक 16 उद्देशक 2. [ जैन ज्ञान प्रकाश / 400] न करने से पीछे से साधुओं में दोष प्रवृत्ति की ओर झुकाव होने लगा। मर्यादा से अधिक रखे गये एक सामान्य से उपकरण के दोष को और मैथुन सेवन के दोष को समान रूपता दी जाने लगी। यह देखकर भगवान् महावीर ने अब्रह्मचर्य को परिग्रह से अलग करके उस दोष से भी सर्वथा बचने की बात कही। इससे यह लाभ हुआ कि स्त्री-पुरुष संसर्ग का त्याग किया जाने लगा, परन्तु आगे चलकर इसमें यह दोष भी आ गया कि ब्रह्मचर्य का विस्तृत अर्थ भुला कर उसे केवल स्त्री-पुरुष संसर्ग के परित्याग तक ही सीमित रखा गया। आगम के स्वाध्याय से यह स्पष्ट हो जाता है कि स्त्री-पुरुष का संसर्ग ही नहीं, पदार्थों के भोगोपभोग की वासना, तृष्णा भी अब्रह्मचर्य है। दशवैकालिक सूत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि "वस्त्र, गन्ध - सुगन्धित पदार्थ, अलंकार - शृंगार सामग्री, स्त्री, शय्या आदि का जो स्वतन्त्रता से भोग नहीं कर सकता है, फिर भी अन्तर् में उसकी लालसा, कामना, वासना रखता है तो वह त्यागी नहीं है। इसी तरह उत्तराध्ययन के 32वें अध्ययन में ब्रह्मचारी को प्रकाम-विकारोत्पादक सरस आहार करने का निषेध किया गया है। श्रमण सूत्र के "निगाम सिज्जाए " पाठ में उसे नर्म-सुकोमल शय्या के परित्याग की बात कही है। इसके सिवाय ब्रह्मचर्य की नौ बाड़ें भी इस सत्य को पूर्णतया प्रमाणित कर रही हैं। वे नौ बाड़ें इस प्रकार हैं 1. साधु उस मकान में रात को न रहे जिस मकान में स्त्री, नपुंसक और पशु रहते हों, 2. साधु स्त्री की तथा साध्वी पुरुष की विकारोत्पादक कथा न करे, 3. जिस स्थान पर स्त्री बैठी हो उस स्थान पर साधु और जिस स्थान पर पुरुष बैठा हो उस स्थान पर साध्वी उसके उठने के बाद 48 मिनट तक न बैठे, 4. साधु स्त्री के और साध्वी पुरुष के अंगोपांगों को विकारी दृष्टि से न देखे, 5. दीवार या पर्दे की ओट में स्त्री-पुरुष की विषय-वासना युक्त बातें न सुने, 6. पूर्व में भोगे हुए भोगों का चिन्तन-मनन न करे, 7. प्रतिदिन सरस आहार न करे, 8. मर्यादा या भूख से अधिक भोजन न करे, और 9. शरीर को विभूषित - शृंगारित न करे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि केवल स्त्री-पुरुष संसर्ग ही अब्रह्मचर्य नहीं प्रत्युत भोगोपभोग जन्य सामग्री की वासना या आकांक्षा रखना भी अब्रह्मचर्य है। मैथुन या अब्रह्मचर्य का सम्बन्ध मोह कर्म से है, मोह कर्म के उदय से ही आत्मा भोगों में आसक्त होती है और 1. दशवैकालिक 2. 2. । बारहवां अध्याय : अनगार धर्म / 401] तृष्णा, अभिलाषा, आकांक्षा ये मोह के ही दूसरे नाम हैं, अतः समस्त वासनाओं पर विजय पाना ही साधुत्व या पूर्ण ब्रह्मचर्य की साधना है। इस व्रत में वासना या तृष्णा को जरा भी छूट देने का अवकाश नहीं है। जैसे तम्बू रस्सों से कसा हुआ होने के कारण ही उसमें स्थित सामग्री एवं मनुष्यों को वर्षा से सुरक्षित रख सकता है, यदि उसकी एक रस्सी भी शिथिल पड़ जाए तो उसमें वर्षा का जल टपकने लगेगा। इसी तरह वासना या तृष्णा को भोगोपभोग के साधनों में किसी भी तरफ जरा-सी छूट दी गई तो उसका परिणाम यह होगा कि धीरे-धीरे सारा जीवन कामवासना के पानी से भर जाएगा। अतः साधु-साध्वी के लिए स्त्री-पुरुष संसर्ग त्याग की बात ही नहीं, बल्कि विकारोत्पादक सभी तरह के भोगोपभोग का मन, वचन और शरीर से सेवन करने, करवाने और करते हुए को अच्छा समझने का निषेध किया गया है। अपरिग्रह "परिगृह्णातीति परिग्रहः" इस परिभाषा से परिग्रह का अर्थ होता है - जो कुछ ग्रहण किया जाय। दुनिया में स्थित पुद्गलों को दो तरह से ग्रहण किया जाता है - 1. द्रव्य से और 2. भाव से। धन-धान्य आदि स्थूल पदार्थों को हम द्रव्य रूप से ग्रहण करते हैं, इसलिए इसे द्रव्य परिग्रह कहते हैं और राग-द्वेष एवं कषायादि भाव परिणति से हम कर्म पुद्गलों को ग्रहण करते हैं, अतः उसे (कषायादि भावों एवं कर्मों को) भाव- परिग्रह कहते हैं। द्रव्य-परिग्रह के 9 भेद किए गए हैं- 1. क्षेत्र, 2. वास्तु, 3. हिरण्य, 4. सुवर्ण, 5. धन, 6. धान्य, 7. द्विपद, 8. चतुष्पद, और 9. कुप्य पदार्थ । इनका अर्थ इस प्रकार है 1. क्षेत्र - कृषि के उपयोग में आने वाली भूमि को क्षेत्र कहते हैं। वह सेतु और केतु के भेद से दो प्रकार का कहा गया है। नहर, कुआं आदि कृत्रिम साधनों से सींची जाने वाली भूमि को सेतु और मात्र वर्षा के जल पर आधारित कृषि योग्य भूमि को केतु कहते हैं। 2. वास्तु - मकान को वास्तु कहते हैं। वास्तु संस्कृत का शब्द है, प्राकृत में वत्थु रूप बनता है। मकान तीन तरह के होते हैं - 1. खात, 2. उच्छृत और 3. खातोच्छृत । भूमिगृह- तलघर या जमीन के अन्दर बनाए जाने वाले मकानों को खात, जमीन के ऊपर बनाए जाने वाले मकानों को उच्छृत और नीचे तलघर बनाकर उसके ऊपर मकान बनाने को खातोच्छृत कहते हैं। 3. हिरण्य - आभूषणों के आकार में रही हुई तथा ढेले के रूप में स्थित चांदी को हिरण्य कहते हैं। [ जैन ज्ञान प्रकाश / 402 ]
अधिक तेजस्वी बनता चला जाता है। आग में पड़कर सोना कभी मैला या काला नहीं पड़ता। तभी तो कहा जाता है - 'आग में पड़कर भी सोने की चमक जाती नहीं।" साधु जीवन में कहां तक सत्यता है, कौन साधु किस रूप में साधना की ज्योति में ज्योतित हो रहा है, यह भी बिना परीक्षा के नहीं जाना जा सकता। साधु-जीवन की परिपक्व साधुता उसकी परीक्षा के अनन्तर ही निर्धारित की जा सकती है। जो साधु अनुकूल परीषहों के आने पर समभाव से रहता है, संकट की उपस्थिति में जरा भी डांवाडोल नहीं होता, विषम से विषम परिस्थितियों में समभाव की डोरी टूटने नहीं देता, वही सच्चा साधु या खरा साधु कहा जा सकता है। निःसन्देह ऐसा साधु ही साधुत्व की उच्च भूमिका प्राप्त करने में सफल हो सकता है। किन्तु जो साधु जरा-सी प्रतिकूलता में बौखला उठता है, सामान्य कष्ट के आ जाने पर आकुल-व्याकुल हो जाता है, शान्ति खो बैठता है तो उसे साधु पद के महान् सिंहासन पर कैसे बिठलाया जा सकता है? वह साधु नहीं स्वादु होता है । वह साधु ही क्या जो कष्ट से भयभीत होता हो ! वस्तुतः साधु की साधना का निर्णय उसकी परीक्षा के अनन्तर ही किया जा सकता है। केशलांच' जैन साधु की एक परीक्षा है। केशलोच के द्वारा साधु की सहिष्णुता और सहनशीलता का पता चल जाता है। साधु कष्ट सहने में कितनी क्षमता रखता है और समय आने पर कष्टों को झेल सकेगा या नहीं, आदि सभी बातें केश लोच के द्वारा मालूम पड़ जाती हैं। साधु- जीवन के प्रति साधु कितना दृढ़ है तथा कितना स्थिर है, इस बात का भी लोच के द्वारा आसानी से बोध हो जाता है। साधु- जीवन में मान और अपमान दोनों की वर्षा होती है। अच्छी और बुरी दोनों घड़ियां उसके जीवन में आती हैं। जब सम्मान का अवसर आता है तो वह सर्वत्र सम्मान को एक. श्री कल्पसूत्र की चौबीसवीं समाचारी में लिखा है- वासावासं पज्जोसवियाणं नो कप्पइ निग्गन्थाणं निग्गन्थीण वा परं पज्जोसवणाओ गोलोमप्यमाण मित्तेऽवि केसे तं रयणि उवायणावित्तए... । अर्थात् साधुओं को साध्वियों को सम्वत्सरी से पहले-पहले केशलोच करवा लेना चाहिए। गोरोम से अधिक लम्बे केश नहीं रखने चाहिएं। श्री निशीथ सूत्र के प्रथम उद्देश्य में लिखा है कि जो साधु, साध्वी सम्वत्सरी को गोरोम से अधिक लम्बे केश रखता है, उसको गुरु चातुर्मासिक प्रायश्चित्त आता है, उसे लगातार चार उपवास रखने पड़ते हैं। जे भिक्खू पज्जोसवणाए गोलोमाइपि बालाई उव्वायणावेइ उव्वायणावंतं वा साइज्जड़ पैंतालीस [ बारहवां अध्याय : अनगार धर्म / तीन सौ पचानवे] प्राप्त करता है। आहार भी उसे सम्मान के साथ मिलता है और वस्त्रादि की प्राप्ति भी उसे सम्मान से ही होती है। जहां भी वह जाता है, वहीं अभिवन्दनों और अभिनन्दनों के पुलिन्दे उसके चरणों में अर्पित किये जाते हैं। अमीर-गरीब, राजा - रंक सभी के मस्तक उसकी चरण-रज प्राप्त करते हैं। स्थान-स्थान पर उसे आतिथ्य मिलता है। उसके जय-नादों से कई बार तो आकाश भी गूंज उठता है। इस प्रकार सर्वत्र साधु को सम्मान ही सम्मान प्राप्त होता है। किन्तु जब जीवन में अपमान की घड़ियां आती हैं तो कई बार उसे अपमान का सामना भी करना पड़ता है। लोग उसे घृणा से देखते हैं, उस पर दुत्कार और तिरस्कार की वर्षा करते हैं। भोजन तो किसने देना है, प्रेम-पूर्वक उससे कोई बात भी नहीं करता। प्यास के मारे कण्ठ सूख रहा है तथापि पानी की दो घूंटें उपलब्ध नहीं होतीं, भोजन को देखे तीन-तीन दिन गुजर जाते हैं। वृक्षों के नीचे रातें व्यतीत करनी होती हैं। रोगों से शरीर आक्रान्त हो जाता है। इस प्रकार असातावेदनीय कर्म के अनेकों प्रकोप उसे जीवन में दृष्टिगोचर होते हैं । जैन दर्शन कहता है कि साधु- जीवन में मान की प्राप्ति हो या अपमान की, दोनों अवस्थाओं में साधु को शान्त और दान्त रहना चाहिए। हर्ष- शोक के प्याले उसे बिना झिझक पीने चाहिएं। समता भगवती की आराधना ही उसके जीवन की साधना होनी चाहिए। परन्तु प्रश्न उपस्थित होता है कि इस बात का पता कैसे चले कि साधु मानापमान में शान्त रहता है या नहीं और समता के महापथ पर दृढ़ता से बढ़ रहा है या नहीं? इसी बात की जांच करने के लिए जैनाचार्यों ने वर्ष में एक परीक्षा नियत की है और वह परीक्षा है - केशलोच। केशलोच साधु की मानसिक स्थिति का पूरा-पूरा बोध प्राप्त हो जाता है। सम्मान पाकर क्या वह सुख- प्रिय बन गया है? दुःख में आकुल- व्याकुल तो नहीं हो जाता ? आदि सभी प्रश्न केशलोच के समय समाहित हो जाते हैं। केशलोच ही ऐसी परीक्षा है जो जैन साधु के अन्तरंग जीवन का प्रत्यक्ष दर्शन करा देती है। वास्तव में कष्ट में ही जीवन की सहनशीलता का परिचय मिलता है। इन पंक्तियों के लेखक ने एक बार बंगाल के राजनैतिक क्रान्तिकारी दल का एक इतिहास पढ़ा था। उसके एक अध्याय में क्रान्तिकारी दल का सदस्य बनने के लिए कुछ नियमों का निर्देश किया गया था। उन नियमों में एक नियम यह भी था कि उस दल का सदस्य बनने वाले व्यक्ति को प्रज्वलित दीपक-शिखा पर अंगुली रखनी पड़ती थी। अग्निदाह से उंगली के जलने पर भी जो व्यक्ति उफ तक नहीं करता था, उसे उस दल का सदस्य बनाया जाता था। अनुमान लगाइये, क्रान्तिकारी दल का सदस्य बनने के लिए अपने को कितना सहनशील प्रमाणित । जैन ज्ञान प्रकाश / तीन सौ छियानवे ] करना पड़ता था। उस कठोर परीक्षा के पीछे यही भावना थी कि दल का सदस्य सरकार द्वारा बन्दी बनाये जाने पर आग में भी जला दिया जाए तब भी वह डांवाडोल न होने पावे और अपने दल के रहस्य प्रकट न करने पावे। केशचोल भी इसी प्रकार की एक परीक्षा है। केशचाल कराने वाले साधक भी एक क्रातिंकारी दल के सदस्य के रूप में हमारे सामने आते हैं। यह सत्य है कि इस दल की क्रांति आध्यात्मिक क्रांति है। इसमें किसी के विनाश का कोई लक्ष्य नहीं होता है। इस क्रांति में आत्मा को विकारों के साथ संघर्ष करना पड़ता है। विकारों के राज्य पर काबू पाने के लिए ही इस क्रांति का आश्रयण किया जाता है। परन्तु इस आध्यात्मिक क्रांतिकारी दल का सदस्य बनने के लिए भी मनुष्य को परीक्षा देनी पड़ती है ताकि विकारों द्वारा बन्दी बना लिए जाने पर यह डांवाडोल न हो जाए। विकारों के प्रहारों से आकुल होकर कहीं यह संयमभ्रष्ट न हो जाए। एतदर्थ उसकी केशलोच द्वारा परीक्षा ली जाती है। जो इस परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता है, उस पर विकारों के कितने ही प्रहार हों और उस पर कितना भी संकट आ जाए, फिर भी वह धर्म से च्युत नहीं होता प्रत्युत धर्म को जीवन के साथ संभाल कर रखता है। केशलोच जैसी भीषण परीक्षा प्रत्येक व्यक्ति नहीं दे सकता। यह परीक्षा तो वही दे सकता है, जिसका मानस तप-त्याग की पवित्र भावना से सदा भावित रहता है, जिसने मोक्ष को ही अपना परम - साध्य बना लिया है, वही व्यक्ति इस अहिंसक परीक्षा में अपने को प्रस्तुत करता है। फिर यह परीक्षा ऐसी विलक्षण है कि प्रतिवर्ष देनी पड़ती है। बंगाल के क्रांतिकारी दल के सदस्य को तो एक बार ही परीक्षा देनी पड़ती थी, किन्तु केशलोच की परीक्षा साधु को प्रतिवर्ष देनी होती है। ' लोच को हिंसा समझना ठीक नहीं है। क्योंकि हिंसा में दूसरों को दुःख दिया जाता परन्तु लोच में दूसरों को दुःख नहीं दिया जाता, प्रत्युत स्वयं दुःख सहन किया जाता है। ऐसी स्थिति में लोच को हिंसा कैसे कहा जा सकता है? दूसरी बात, लोच कराने वाला साधक उसे दुःख समझ कर नहीं कराता है। वह तो उसे आध्यात्मिक परीक्षा की घड़ी समझता है। आजकल वर्ष में दो बार सिर की लोच कराने की परम्परा पाई जाती है। यह सत्य है किन्तु यह तो साधक की साधना की पराकाष्ठा है। साधक अधिक से अधिक साधना का लाभ प्राप्त करना चाहता है। वैसे शास्त्रीय दृष्टि से वर्ष में एक बार लोच कराना आवश्यक है। [ बारहवां अध्याय : अनगार धर्म / तीन सौ सत्तानवे] जैसे विद्यार्थी परीक्षा में बड़े उत्साह से बैठता है वैसे ही साधु इस परीक्षा में सोत्साह भाग लेता है और उसमें उत्तीर्ण होने के लिए अपने को पूर्णतया सहिष्णु बनाए रखता है। यदि अपने को सहिष्णु बनाना और कष्टों को सहर्ष सहन करना भी हिंसा कृत्य मान लिया जाए तब तो असिधारा व्रत ब्रह्मचर्य का परिपालन भी हिंसा- कृत्य स्वीकार करना पड़ेगा। ब्रह्मचर्य के अतिरिक्त अहिंसा, सत्य आदि अन्य सभी साधनाओं में मन को मारना पड़ता है, अनेकविध संकटों का सामना करना पड़ता है। तब ये सभी साधनाएं हिंसा में परिगणित करनी पड़ेंगी। पर वस्तुस्थिति ऐसी नहीं है। वस्तुतः आत्म-शुद्धि तथा आत्म-कल्याण के महापथ पर बढ़ते हुए साधक को जिन कष्टों का सामना करना पड़ता है, उनको साधना का रूप देता है। अतः लोच करना हिंसा नहीं है; प्रत्युत जीवन-निर्मात्री अहिंसा का ही एक रूपान्तर है। प्रज्ञापना सूत्र के बाईसवें क्रिया पद में आचार्य मलयगिरि ने इस सम्बन्ध में बहुत सुन्दर ऊहापोह किया है। वहां लिखा है पारितापनिकी क्रिया के तीन भेद होते हैं - स्वपारितापनिकी, परपारितापनिकी और उभयपारितापनिकी। स्वयं को पीड़ित करना स्वपारितापनिकी, दूसरों को पीड़ित करना परपारितापनिकी और दोनों को पीड़ित करना उभयपारितापनिकी क्रिया कहलाती है। यहां प्रश्न उपस्थित होता है कि यदि दुःख देने से क्रिया लगती है, तो स्वयं लोच करने पर स्वपारितापनिकी, दूसरे की लोच करने से परपारितापनिकी, और परस्पर एक-दूसरे की लोच करने पर उभयपारितापनिकी क्रिया लगनी चाहिए। क्योंकि इससे दुःखोत्पत्ति होती है। इसका समाधान निम्नोक्त है दुष्ट बुद्धि से दिया गया दुःख पारितापनिकी क्रिया का कारण बना करता है। किन्तु जिस दुःख के पीछे सद्भावना हो और जिसका परिणाम हितकर हो, उससे कर्मबन्ध नहीं होता। जैसे डॉक्टर शल्य चिकित्सा करता है, चिकित्सा में रोगी को वेदना भी होती है, किन्तु डॉक्टर की भावना शुद्ध होने से और उसका फल हितप्रद होने से डॉक्टर पाप का भागी नहीं बनता। ऐसे ही लोच का परिणाम हितावह और आत्मशुद्धि तथा साहिष्णुता आदि आत्मगुणों का संवर्धक होने से लोच पारितापनिकी क्रिया का कारण नहीं बन सकती। केश लोच जैसी कठिनतम साधना को देखकर सामान्य व्यक्ति कई बार आकुल- व्याकुल हो जाते हैं किन्तु यदि गम्भीरता से विचार किया जाए तो यह मानना पड़ेगा कि लोच जैन साधु का भूषण है। इस भूषण से विभूषित होने के कारण ही आज जैन साधु का जैन और अजैन [ जैन ज्ञान प्रकाश / तीन सौ अट्ठानवे ] सभी विचारक सम्मान करते हैं। संसार के सभी साधु आचारगत - शिथिलता के कारण आज अपना सम्मान समाप्त करते जा रहे हैं। केवल एक जैन साधु ही ऐसा साधु है जो केश लोच और अखण्ड ब्रह्मचर्य जैसी विलक्षण साधनाओं के कारण आज भी गौरवास्पद बना हुआ है और उसे सर्वत्र आदर से देखा जाता है। जैन दर्शन से भले ही कोई विरोध रखता हो पर जैन साधु की साधना के आगे सबको नतमस्तक होना पड़ता है। जैन साधु की कठोर साधुवृत्ति का आज भी लोग मान करते हैं और उसके आदर्श तप, त्याग का लोहा मानते हैं। अतः केश लोच जैसी अध्यात्म साधना से भयभीत नहीं होना चाहिए। अध्यात्म जगत में इसका एक विशिष्ट स्थान है, इसे हिंसा समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। सत्य का अर्थ है-वस्तु के यथार्थ रूप को प्रकट करना अथवा ऐसी वाणी या भाषा का प्रयोग नहीं करना जिससे यथार्थता पर पर्दा पड़ता हो । परन्तु सत्य भाषा के साथ मधुरता भी होनी चाहिए। जिस सत्य के साथ कटुता रहती है या यों कहिए जो सत्य दूसरे के मन को दुःखाने-पीड़ा पहुंचाने के लिए, उसको नीचा दिखाने के लिए, उसका अपमान - तिरस्कार करने के लिए या उसका सर्वनाश करने की दृष्टि से बोला जाता है, वह सत्य नहीं, बल्कि असत्य है। सत्य वचन यथार्थ और कल्याणकारी, हितकारी एवं मधुर होना चाहिए। सत्य के भी नौ भेद बताए गए हैं- मन, वचन और काया से असत्य बोले नहीं, दूसरे को असत्य बोलने को कहे या प्रेरित करे नहीं और असत्य बोलने वाले को अच्छा भी नहीं समझे। इस तरह साधु सर्वथा असत्य का त्याग करता है। इसलिए वह कभी भी दूसरे व्यक्ति को कष्ट हो ऐसी सावद्य-पापकारी भाषा का तथा निश्चयकारी- जब तक किसी भी वस्तु या प्राणी के सम्बन्ध में पूरा निश्चय न हो- भाषा का उपयोग नहीं करता। यदि कभी उसके सामने अयथार्थ बात कहने का प्रसंग उपस्थित हो जाए तो उस समय मौन रहता है। सत्य - यथार्थ भाषा हो, परन्तु साथ में सर्व क्षेमकारी भी होनी चाहिए। क्योंकि साधु का जीवन जगहित के लिए होता है। अतः उस की भाषा भी कल्याणकारी होनी चाहिए। इस भावना को ध्यान में रखकर सत्य को भगवान् और लोक में सारभूत कहा है। सत्य से बढ़कर दुनिया में कोई पदार्थ नहीं है । "सच्चं खु भगवं," "सच्चं लोगम्मि सारभूयं "। - प्रश्नव्याकरण सूत्र, संवरद्वार। भाव- परिग्रह कहते हैं। द्रव्य-परिग्रह के नौ भेद किए गए हैं- एक. क्षेत्र, दो. वास्तु, तीन. हिरण्य, चार. सुवर्ण, पाँच. धन, छः. धान्य, सात. द्विपद, आठ. चतुष्पद, और नौ. कुप्य पदार्थ । इनका अर्थ इस प्रकार है एक. क्षेत्र - कृषि के उपयोग में आने वाली भूमि को क्षेत्र कहते हैं। वह सेतु और केतु के भेद से दो प्रकार का कहा गया है। नहर, कुआं आदि कृत्रिम साधनों से सींची जाने वाली भूमि को सेतु और मात्र वर्षा के जल पर आधारित कृषि योग्य भूमि को केतु कहते हैं। दो. वास्तु - मकान को वास्तु कहते हैं। वास्तु संस्कृत का शब्द है, प्राकृत में वत्थु रूप बनता है। मकान तीन तरह के होते हैं - एक. खात, दो. उच्छृत और तीन. खातोच्छृत । भूमिगृह- तलघर या जमीन के अन्दर बनाए जाने वाले मकानों को खात, जमीन के ऊपर बनाए जाने वाले मकानों को उच्छृत और नीचे तलघर बनाकर उसके ऊपर मकान बनाने को खातोच्छृत कहते हैं। तीन. हिरण्य - आभूषणों के आकार में रही हुई तथा ढेले के रूप में स्थित चांदी को हिरण्य कहते हैं। [ जैन ज्ञान प्रकाश / चार सौ दो ]
जाय, तब तो पुनर्विवाह से भरणाधिकार का विनाश अवश्य हो जायगा । दूसरे शब्दों में, क्या उपरोक्त अधिनियम उन जातियों या वर्गों पर भी लागू किया जा सकता है जिनके यहाँ विधवा-विवाह वैसे भी अनुज्ञात है ? इसका उत्तर इलाहाबाद हाई कोर्ट का व अवध तथा नागपुर चीफ कोर्टों का नकारात्मक तथा अन्य हाई कोर्टों का सकारात्मक है । ' सन् १९५६ वाले "हिन्दू एडाप्शन ऐण्ड मेण्टीनेन्स ऐक्ट" की धारा २१ ( ३ ) व धारा २२ ने विहित कर दिया है कि पुनर्विवाह कर लेने के बाद विधवा की गणना समाश्रितों में नहीं रह जाती है, अर्थात वह भरण-पोषण की अधिकारी नहीं रहती। (ट) विधवा पुत्रवधू- मृतक की विषवा तथा विधवा पुत्रवधू दोनों की गणना उन समाश्रितों में है जिनको सन १९५६ वाले "हिन्दू एडाप्शन ऐण्ड मेण्टिनेन्स ऐक्ट " की धारा १९ में भरणाधिकार दिया गया है । सन् १९३७ वाले "हिन्दू वीमेन्स राइटस टु प्रापर्टी ऐक्ट" तथा १९५६ वाले "हिन्दू सक्सेशन ऐक्ट" ने विधवाओं के हकों में अधिक सारवत्ता, दृढता व प्रसार समावेष्टित कर दिया है । इसके पहले का नजीरी कानून इस प्रकार का है। यह असामान्य बात नहीं है कि विधवा पुत्रवध् के मृत पति ने कुछ पृथक् वस्तु - सामग्री न छोड़ी हो, या जिस समांशिता का वह सदस्य था उसके पास गुजर के लिए पर्याप्त सम्पदा न हो । तो उसका भरण पोषण कैसे हो ? कौन इसका दायित्व उठाये ? पहले नियम यह था कि ऐसा दायित्व न तो उसके ससुराल वालों पर है न पीहर के लोगों पर । यहाँ तक कि उसके ससुर पर भी दायित्व नहीं है। यदि ससुर सम्पत्तिवान् हो, तब तो नैतिक दायित्व उस पर आ सकता है, वैधिक फिर भी नही । यह सिद्धान्त बतलाया गया है कि नैतिक दायित्व परिणत हो जाता है वैधिक दायित्व में, जब नैतिक दायित्वधारी की सम्पदा उसके दायाद के हाथ में आ जाती है। उसी सिद्धान्त के विनियोग से, ससुर का नैतिक दायित्व वैधिक में परिणत होकर उसके उत्तराधिकारी को विधवा पुत्रवधू का भरण-पोषण करने के लिए विवश १. " भोला के० उमर ब० कोसिला" ५५, इलाहाबाद २४ । "गजाघर ब० सुखदेई" (१९३०) ५, लखनऊ ६८९ ॥ २. " आर० पतील ब० एस० घरल" (१९५४) ५६, बं० ला० रि० २२७ । "वासल ब० रामसुरम" (१८९५) २२, कलकत्ता ५८९ ॥ "मुरुगयी ब० विरमकलो" ( १८७७) १, मद्रास २२६ । 'सूरज ब० अत्तर" (१९२२) १, पटना ७०६ । ३. "बाई दया ब० नत्था ( १८८५) ९, बम्बई २७९ । "मीनाक्षी ब० राम ऐयर" ( १९१४) ३७, मद्रास ३९६ । करने लगता है ।' पोषणाधिकार का सह-सम्बन्धी पत्नी का यह कर्तव्य है कि वह अपने पति के साथ रहे । विधवा या विधवा पुत्रवधू के ऊपर ऐसी कोई शर्त नहीं लगती। गुजारें की रकम या भरण-पोषण की मात्रा - मात्रा या रकम निर्धारित करना - पहले भी अदालत के विवेक पर आश्रित रहता था और अब भी रहता है। अदालत के माग प्रदशन के लिए जो अलिखित नियम पहले विद्यमान थे वे सन् १९५६ वाले "हिन्दू एडाप्शन ऐण्ड मेण्टिनेन्स ऐक्ट" की धारा २३ में निगमित हो गये हैं । उदाहरणार्थ पोषण राशि नियत करने म मोटे तौर से ये बातें ध्यान में रखने योग्य होती हैं(क) सम्पदा का मूल्य क्या है, ( ख ) यदि मृत प्रभु ने कोई वैध या अवैध इच्छापत्र 'छाड़ा है ता किस आत के लिए उसमे क्या उपबन्ध किया गया था, (ग) मृत प्रभु. तथा पाषणार्था में कौन नाता था, (घ ) दोनों के परस्पर सम्बन्ध कैसे थे, पोषणार्थी की स्वतंत्र आय कितनी है, (च) कुल कितने अभ्यर्थी है, (छ) इस काल में "निर्वाह का मूल्य-देशनांक" क्या है। किन्तु यदि कई पोषणार्थी हों, तो यह नहीं देखा जाता कि किसका परिवार बड़ा है किसका छोटा । उपरोक्त सिद्धान्त व्यापक है। पत्नी का गुजारा नियत करने में ये अन्य बातें भी विचार योग्य होती है। उसका पूर्व आचरण; यदि वह भ्रष्ट हो गयी थी तो उसका हाल का आचरण, पति-पत्नी का परस्पर सम्बन्ध, कुटुम्ब के जीवन का स्तर, कुटुम्ब की आाय, यदि पति अलग हो तो उसकी पत्नी की उचित आवश्यकताएँ, पत्नी की स्वतंत्र आय। जितने दिन वह भ्रष्ट रही है, उतने दिनों का गुजारा तो काट ही लेना चाहिए । " जाब्ता फौजदारी की धारा ४८८ में जब रोटी कपड़े का दावा होता है तो दायित्व से बचने के लिए पति को यह प्रमाणित करना चाहिए कि उस काल में पत्नी वस्तुतः भ्रष्ट जीवन व्यतीत कर रही थी। विधवा का गुजारा निर्धारित करते समय निम्नोक्त बातों का ध्यान रखना चाहिए। यह याद रखते हुए कि वह विधवा हो चुकी है, उसकी सुविधा व उचित सुख १. "सिद्धेश्वरी ब० जनार्दन" ( १९०२) २९, कलकत्ता ५५७३ ३. "चमवा ब० इरया ", ए० आई० आर० १९३१, बम्बई ४९२ । ४. शान्ति ब० सुघराम", ए० आई० आर० १९५५, पंजाब २२ । ५. " देवी ब० गुनवती" (१८९५) २२, कलकत्ता ४१० । "कन्ता स्वामी ब० मूर गम्मल" (१८९५) १९, मद्रास ६ । ६. "इन रि० फूलचन्द", ए० आई० आर० २८, बम्बई ५९ । का वैसा ही प्रबन्ध होना चाहिए जैसा उसके पति के समय में था । संक्षेप में यह देखना चाहिए कि ( क ) पति ने कितना ऋण छोड़ा है और सम्पदा का मूल्य क्या है', (ख) पति तथा विधवा का पद व सम्मान क्या था ओर है, (ग) धार्मिक कृत्यों तथा अपने पदानुकूल अन्य कर्त्तव्यों को निवाहने के और अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं की उचित पूर्ति करने के लिए उसको कितना व्यय करना पड़ेगा, ' ( घ) पति के साथ उसकी कैसी पटती थी, (च) भूषण-वसनादि अनुत्पादक सामग्री को छोड़कर उसके पास कितना स्त्रीधन है, (छ) व्यक्तिगत स्वाजित आय तथा स्वेच्छित दान-दक्षिणाउपहार को छोड़कर उसकी स्थायी आय कितनी है, (ज) पति की मृत्यु के समय सम्पदा का मूल्य चाहे जो रहा हो, विचारणीय मूल्य तो वर्तमान काल का है । प्रायः यही बातें अन्य नारी- समाश्रिताओं का गुजारा विनिश्चित करने में विचारणीय होनी चाहिए । याद रहे कि "निर्वाह के मूल्य-देशनांक" के घटने-बढ़ने या आय के घटने-बढ़ने के अनुपात से गुजारे की राशि म भी घटा-बढ़ी करी या करा दी जा सकती है, यदि ऐसा करना उचित व न्याय सम्मत लगे । यह परिवर्तन दोनों दशाओं में हो सकता है, चाहे अदालती डिग्री द्वारा गुजारा नियत हुआ हो या निजी समझौते द्वारा । किन्तु यदि विधवा ने यह शत कर ली हो कि वह किसी भी दशा मे गुजारे की वृद्धि की याचना नहीं करेगी, तो उसको इस सविदा का पालन करना पड़ेगा। ज्ञातव्य है कि सन् १९५६ वाले "हिन्दू ए० ऐण्ड मे० ऐक्ट " की धारा २५ ने अब यह विहित कर दिया है कि यदि परिस्थितियों के अदल-बदलने से गुजारे की राशि का परिवर्तन समर्थनीय लगे, तो उसमें हेर-फेर किया जा सकता है, वह राशि चाहे अदालदी डिग्री द्वारा विनिश्चित की गयी हो, या समझौते द्वारा । १. "श्रीघर एम० जी० तेली ब० मु० सीताबाई" (१९३८), नागपुर २८९१ २. "लाला म० प्रसाद ब० मु० सहदेई कुं० " ( १९३८), लखनऊ १३ । ३. "पी० हरजीवनदास ब० बाई रुक्मिनी" (१९३८) बम्बई १ । ४. "गोकी बाई ब० लक्ष्मीदास " ( १८९० ) १४, बम्बई ४९० । ५. "बी० एस० कुंअर ब० बी० ए० कुंअर" (१९३३) १२, पटना ८६९ । "बाई जया ब० जी० कालीदास " ( १९४१), बम्बई ४८३ । ६. "बीरजू ब० नारायनम्मा " ( १९५३ ) मद्रास २२ । ८. "ठा० एस० एम० सिंह ब० ठकुराइन बाघी कुं० ( १९३६) ११, लख० ६०७। "पी० हरजीवनदास ब० बाई रुक्मिनी ( १९३८) बम्बई १ ।
जाय, तब तो पुनर्विवाह से भरणाधिकार का विनाश अवश्य हो जायगा । दूसरे शब्दों में, क्या उपरोक्त अधिनियम उन जातियों या वर्गों पर भी लागू किया जा सकता है जिनके यहाँ विधवा-विवाह वैसे भी अनुज्ञात है ? इसका उत्तर इलाहाबाद हाई कोर्ट का व अवध तथा नागपुर चीफ कोर्टों का नकारात्मक तथा अन्य हाई कोर्टों का सकारात्मक है । ' सन् एक हज़ार नौ सौ छप्पन वाले "हिन्दू एडाप्शन ऐण्ड मेण्टीनेन्स ऐक्ट" की धारा इक्कीस व धारा बाईस ने विहित कर दिया है कि पुनर्विवाह कर लेने के बाद विधवा की गणना समाश्रितों में नहीं रह जाती है, अर्थात वह भरण-पोषण की अधिकारी नहीं रहती। विधवा पुत्रवधू- मृतक की विषवा तथा विधवा पुत्रवधू दोनों की गणना उन समाश्रितों में है जिनको सन एक हज़ार नौ सौ छप्पन वाले "हिन्दू एडाप्शन ऐण्ड मेण्टिनेन्स ऐक्ट " की धारा उन्नीस में भरणाधिकार दिया गया है । सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतीस वाले "हिन्दू वीमेन्स राइटस टु प्रापर्टी ऐक्ट" तथा एक हज़ार नौ सौ छप्पन वाले "हिन्दू सक्सेशन ऐक्ट" ने विधवाओं के हकों में अधिक सारवत्ता, दृढता व प्रसार समावेष्टित कर दिया है । इसके पहले का नजीरी कानून इस प्रकार का है। यह असामान्य बात नहीं है कि विधवा पुत्रवध् के मृत पति ने कुछ पृथक् वस्तु - सामग्री न छोड़ी हो, या जिस समांशिता का वह सदस्य था उसके पास गुजर के लिए पर्याप्त सम्पदा न हो । तो उसका भरण पोषण कैसे हो ? कौन इसका दायित्व उठाये ? पहले नियम यह था कि ऐसा दायित्व न तो उसके ससुराल वालों पर है न पीहर के लोगों पर । यहाँ तक कि उसके ससुर पर भी दायित्व नहीं है। यदि ससुर सम्पत्तिवान् हो, तब तो नैतिक दायित्व उस पर आ सकता है, वैधिक फिर भी नही । यह सिद्धान्त बतलाया गया है कि नैतिक दायित्व परिणत हो जाता है वैधिक दायित्व में, जब नैतिक दायित्वधारी की सम्पदा उसके दायाद के हाथ में आ जाती है। उसी सिद्धान्त के विनियोग से, ससुर का नैतिक दायित्व वैधिक में परिणत होकर उसके उत्तराधिकारी को विधवा पुत्रवधू का भरण-पोषण करने के लिए विवश एक. " भोला केशून्य उमर बशून्य कोसिला" पचपन, इलाहाबाद चौबीस । "गजाघर बशून्य सुखदेई" पाँच, लखनऊ छः सौ नवासी ॥ दो. " आरशून्य पतील बशून्य एसशून्य घरल" छप्पन, बंशून्य लाशून्य रिशून्य दो सौ सत्ताईस । "वासल बशून्य रामसुरम" बाईस, कलकत्ता पाँच सौ नवासी ॥ "मुरुगयी बशून्य विरमकलो" एक, मद्रास दो सौ छब्बीस । 'सूरज बशून्य अत्तर" एक, पटना सात सौ छः । तीन. "बाई दया बशून्य नत्था नौ, बम्बई दो सौ उन्यासी । "मीनाक्षी बशून्य राम ऐयर" सैंतीस, मद्रास तीन सौ छियानवे । करने लगता है ।' पोषणाधिकार का सह-सम्बन्धी पत्नी का यह कर्तव्य है कि वह अपने पति के साथ रहे । विधवा या विधवा पुत्रवधू के ऊपर ऐसी कोई शर्त नहीं लगती। गुजारें की रकम या भरण-पोषण की मात्रा - मात्रा या रकम निर्धारित करना - पहले भी अदालत के विवेक पर आश्रित रहता था और अब भी रहता है। अदालत के माग प्रदशन के लिए जो अलिखित नियम पहले विद्यमान थे वे सन् एक हज़ार नौ सौ छप्पन वाले "हिन्दू एडाप्शन ऐण्ड मेण्टिनेन्स ऐक्ट" की धारा तेईस में निगमित हो गये हैं । उदाहरणार्थ पोषण राशि नियत करने म मोटे तौर से ये बातें ध्यान में रखने योग्य होती हैं सम्पदा का मूल्य क्या है, यदि मृत प्रभु ने कोई वैध या अवैध इच्छापत्र 'छाड़ा है ता किस आत के लिए उसमे क्या उपबन्ध किया गया था, मृत प्रभु. तथा पाषणार्था में कौन नाता था, दोनों के परस्पर सम्बन्ध कैसे थे, पोषणार्थी की स्वतंत्र आय कितनी है, कुल कितने अभ्यर्थी है, इस काल में "निर्वाह का मूल्य-देशनांक" क्या है। किन्तु यदि कई पोषणार्थी हों, तो यह नहीं देखा जाता कि किसका परिवार बड़ा है किसका छोटा । उपरोक्त सिद्धान्त व्यापक है। पत्नी का गुजारा नियत करने में ये अन्य बातें भी विचार योग्य होती है। उसका पूर्व आचरण; यदि वह भ्रष्ट हो गयी थी तो उसका हाल का आचरण, पति-पत्नी का परस्पर सम्बन्ध, कुटुम्ब के जीवन का स्तर, कुटुम्ब की आाय, यदि पति अलग हो तो उसकी पत्नी की उचित आवश्यकताएँ, पत्नी की स्वतंत्र आय। जितने दिन वह भ्रष्ट रही है, उतने दिनों का गुजारा तो काट ही लेना चाहिए । " जाब्ता फौजदारी की धारा चार सौ अठासी में जब रोटी कपड़े का दावा होता है तो दायित्व से बचने के लिए पति को यह प्रमाणित करना चाहिए कि उस काल में पत्नी वस्तुतः भ्रष्ट जीवन व्यतीत कर रही थी। विधवा का गुजारा निर्धारित करते समय निम्नोक्त बातों का ध्यान रखना चाहिए। यह याद रखते हुए कि वह विधवा हो चुकी है, उसकी सुविधा व उचित सुख एक. "सिद्धेश्वरी बशून्य जनार्दन" उनतीस, कलकत्ता पाँच हज़ार पाँच सौ तिहत्तर तीन. "चमवा बशून्य इरया ", एशून्य आईशून्य आरशून्य एक हज़ार नौ सौ इकतीस, बम्बई चार सौ बानवे । चार. शान्ति बशून्य सुघराम", एशून्य आईशून्य आरशून्य एक हज़ार नौ सौ पचपन, पंजाब बाईस । पाँच. " देवी बशून्य गुनवती" बाईस, कलकत्ता चार सौ दस । "कन्ता स्वामी बशून्य मूर गम्मल" उन्नीस, मद्रास छः । छः. "इन रिशून्य फूलचन्द", एशून्य आईशून्य आरशून्य अट्ठाईस, बम्बई उनसठ । का वैसा ही प्रबन्ध होना चाहिए जैसा उसके पति के समय में था । संक्षेप में यह देखना चाहिए कि पति ने कितना ऋण छोड़ा है और सम्पदा का मूल्य क्या है', पति तथा विधवा का पद व सम्मान क्या था ओर है, धार्मिक कृत्यों तथा अपने पदानुकूल अन्य कर्त्तव्यों को निवाहने के और अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं की उचित पूर्ति करने के लिए उसको कितना व्यय करना पड़ेगा, ' पति के साथ उसकी कैसी पटती थी, भूषण-वसनादि अनुत्पादक सामग्री को छोड़कर उसके पास कितना स्त्रीधन है, व्यक्तिगत स्वाजित आय तथा स्वेच्छित दान-दक्षिणाउपहार को छोड़कर उसकी स्थायी आय कितनी है, पति की मृत्यु के समय सम्पदा का मूल्य चाहे जो रहा हो, विचारणीय मूल्य तो वर्तमान काल का है । प्रायः यही बातें अन्य नारी- समाश्रिताओं का गुजारा विनिश्चित करने में विचारणीय होनी चाहिए । याद रहे कि "निर्वाह के मूल्य-देशनांक" के घटने-बढ़ने या आय के घटने-बढ़ने के अनुपात से गुजारे की राशि म भी घटा-बढ़ी करी या करा दी जा सकती है, यदि ऐसा करना उचित व न्याय सम्मत लगे । यह परिवर्तन दोनों दशाओं में हो सकता है, चाहे अदालती डिग्री द्वारा गुजारा नियत हुआ हो या निजी समझौते द्वारा । किन्तु यदि विधवा ने यह शत कर ली हो कि वह किसी भी दशा मे गुजारे की वृद्धि की याचना नहीं करेगी, तो उसको इस सविदा का पालन करना पड़ेगा। ज्ञातव्य है कि सन् एक हज़ार नौ सौ छप्पन वाले "हिन्दू एशून्य ऐण्ड मेशून्य ऐक्ट " की धारा पच्चीस ने अब यह विहित कर दिया है कि यदि परिस्थितियों के अदल-बदलने से गुजारे की राशि का परिवर्तन समर्थनीय लगे, तो उसमें हेर-फेर किया जा सकता है, वह राशि चाहे अदालदी डिग्री द्वारा विनिश्चित की गयी हो, या समझौते द्वारा । एक. "श्रीघर एमशून्य जीशून्य तेली बशून्य मुशून्य सीताबाई" , नागपुर दो हज़ार आठ सौ इक्यानवे दो. "लाला मशून्य प्रसाद बशून्य मुशून्य सहदेई कुंशून्य " , लखनऊ तेरह । तीन. "पीशून्य हरजीवनदास बशून्य बाई रुक्मिनी" बम्बई एक । चार. "गोकी बाई बशून्य लक्ष्मीदास " चौदह, बम्बई चार सौ नब्बे । पाँच. "बीशून्य एसशून्य कुंअर बशून्य बीशून्य एशून्य कुंअर" बारह, पटना आठ सौ उनहत्तर । "बाई जया बशून्य जीशून्य कालीदास " , बम्बई चार सौ तिरासी । छः. "बीरजू बशून्य नारायनम्मा " मद्रास बाईस । आठ. "ठाशून्य एसशून्य एमशून्य सिंह बशून्य ठकुराइन बाघी कुंशून्य ग्यारह, लखशून्य छः सौ सात। "पीशून्य हरजीवनदास बशून्य बाई रुक्मिनी बम्बई एक ।
दलित छात्र ने स्कूल में पानी की मटकी क्या छू ली, टीचर ने उसे इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। पिछले करीब 24 दिन से बच्चे का अहमदाबाद में इलाज चल रहा था। इससे पहले उदयपुर में भी इलाज चला था। घटना राजस्थान के जालोर जिले के सायला थाना क्षेत्र के सुराणा गांव की है। पिता का आरोप है कि 20 जुलाई को तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले उनके 9 साल के बेटे इंद्र मेघवाल ने पानी की मटकी को छू ली थी। इसके बाद टीचर छैल सिंह ने इतनी पिटाई की थी कि उसकी हालत गंभीर हो गई। पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट में मामला दर्ज किया है। बच्चे के पिता देवाराम ने बताया कि स्कूल में जातिवाद के नाम पर मेरे बेटे की पिटाई की गई। सामान्य दिनों की तरह 20 जुलाई को भी इंद्र स्कूल गया था। सुबह करीब साढ़े दस बजे उसे प्यास लगी। उसने स्कूल में रखी मटकी से पानी पी लिया। उसे नहीं पता था कि यह मटकी स्कूल के टीचर छैल सिंह के लिए रखी गई है। इससे सिर्फ छैल सिंह ही पानी पीते हैं। छैल सिंह ने इंद्र को बुलाया और जमकर पीटा। इतना पीटा की उसकी दाहिनी आंख और कान पर अंदरुनी चोटें आईं। छैल सिंह ने जातिसूचक शब्दों का भी प्रयोग किया। पहले तो लगा कि हल्की चोट आई है, लेकिन ऐसा नहीं था। पिटाई के बाद इंद्र की तबीयत खराब होने लगी तो उसे जालोर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल ले गए। जालोर से उसी दिन उदयपुर रेफर कर दिया गया था। यहां भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो कुछ दिनों बाद अहमदाबाद ले गए थे। यहां इलाज के दौरान शनिवार सुबह करीब 11 बजे मौत हो गई। इस बीच शनिवार दोपहर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि पिटाई से बच्चे के कान की नस फट गई थी। शनिवार को बच्चे की मौत के बाद शनिवार शाम टीचर छैल सिंह को सायला पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बच्चा सुराणा गांव के ही सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ता था। इस मामले के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की ओर से जांच कमेटी बनाई गई है। आदेश में बताया कि सरस्वती विद्या मंदिर सुराना में एक बच्चे की पिटाई का मामला सामने आया है। पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (PEEO) अशोक कुमार दवे और प्रतापराम को जांच सौंपी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल और सीओ हिम्मत सिंह बच्चे के घर पहुंचे। मामले की जांच जालोर सीओ हिम्मत सिंह चारण को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्टूडेंट की मौत पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि मामले की जल्द जांच के लिए केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया है। जालोर के एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा कि मर्डर और SC-ST एक्ट में मामला दर्ज कर लिया गया है। टीचर को हिरासत में लिया गया है। मटकी वाली बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है। स्कूल में पानी की एक बड़ी टंकी है, वहीं सारे लोग पानी पीते हैं। ऐसी जानकारी सामने आई है। स्कूल में पढ़ाने वाले SC टीचर ने भी यही बात बताई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दलित छात्र ने स्कूल में पानी की मटकी क्या छू ली, टीचर ने उसे इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। पिछले करीब चौबीस दिन से बच्चे का अहमदाबाद में इलाज चल रहा था। इससे पहले उदयपुर में भी इलाज चला था। घटना राजस्थान के जालोर जिले के सायला थाना क्षेत्र के सुराणा गांव की है। पिता का आरोप है कि बीस जुलाई को तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले उनके नौ साल के बेटे इंद्र मेघवाल ने पानी की मटकी को छू ली थी। इसके बाद टीचर छैल सिंह ने इतनी पिटाई की थी कि उसकी हालत गंभीर हो गई। पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट में मामला दर्ज किया है। बच्चे के पिता देवाराम ने बताया कि स्कूल में जातिवाद के नाम पर मेरे बेटे की पिटाई की गई। सामान्य दिनों की तरह बीस जुलाई को भी इंद्र स्कूल गया था। सुबह करीब साढ़े दस बजे उसे प्यास लगी। उसने स्कूल में रखी मटकी से पानी पी लिया। उसे नहीं पता था कि यह मटकी स्कूल के टीचर छैल सिंह के लिए रखी गई है। इससे सिर्फ छैल सिंह ही पानी पीते हैं। छैल सिंह ने इंद्र को बुलाया और जमकर पीटा। इतना पीटा की उसकी दाहिनी आंख और कान पर अंदरुनी चोटें आईं। छैल सिंह ने जातिसूचक शब्दों का भी प्रयोग किया। पहले तो लगा कि हल्की चोट आई है, लेकिन ऐसा नहीं था। पिटाई के बाद इंद्र की तबीयत खराब होने लगी तो उसे जालोर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल ले गए। जालोर से उसी दिन उदयपुर रेफर कर दिया गया था। यहां भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो कुछ दिनों बाद अहमदाबाद ले गए थे। यहां इलाज के दौरान शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे मौत हो गई। इस बीच शनिवार दोपहर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि पिटाई से बच्चे के कान की नस फट गई थी। शनिवार को बच्चे की मौत के बाद शनिवार शाम टीचर छैल सिंह को सायला पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बच्चा सुराणा गांव के ही सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ता था। इस मामले के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की ओर से जांच कमेटी बनाई गई है। आदेश में बताया कि सरस्वती विद्या मंदिर सुराना में एक बच्चे की पिटाई का मामला सामने आया है। पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार दवे और प्रतापराम को जांच सौंपी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल और सीओ हिम्मत सिंह बच्चे के घर पहुंचे। मामले की जांच जालोर सीओ हिम्मत सिंह चारण को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्टूडेंट की मौत पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवार को पाँच लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि मामले की जल्द जांच के लिए केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया है। जालोर के एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा कि मर्डर और SC-ST एक्ट में मामला दर्ज कर लिया गया है। टीचर को हिरासत में लिया गया है। मटकी वाली बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है। स्कूल में पानी की एक बड़ी टंकी है, वहीं सारे लोग पानी पीते हैं। ऐसी जानकारी सामने आई है। स्कूल में पढ़ाने वाले SC टीचर ने भी यही बात बताई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। बांग्लादेश गणतन्त्र (बांग्ला) ("गणप्रजातन्त्री बांग्लादेश") दक्षिण जंबूद्वीप का एक राष्ट्र है। देश की उत्तर, पूर्व और पश्चिम सीमाएँ भारत और दक्षिणपूर्व सीमा म्यान्मार देशों से मिलती है; दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल हैं, जिसका ऐतिहासिक नाम "বঙ্গ" बंग या "বাংলা" बांग्ला है। इसकी सीमारेखा उस समय निर्धारित हुई जब 1947 में भारत के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का पूर्वी भाग घोषित किया गया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान के मध्य लगभग 1600 किमी (1000 मील) की भौगोलिक दूरी थी। पाकिस्तान के दोनों भागों की जनता का धर्म (इस्लाम) एक था, पर उनके बीच जाति और भाषागत काफ़ी दूरियाँ थीं। पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय के विरुद्ध 1971 में भारत के सहयोग से एक रक्तरंजित युद्ध के बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश का उदभव हुआ। स्वाधीनता के बाद बांग्लादेश के कुछ प्रारंभिक वर्ष राजनैतिक अस्थिरता से परिपूर्ण थे, देश में 13 राष्ट्रशासक बदले गए और 4 सैन्य बगावतें हुई। विश्व के सबसे जनबहुल देशों में बांग्लादेश का स्थान आठवां है। किन्तु क्षेत्रफल की दृष्टि से बांग्लादेश विश्व में 93वाँ है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है। मुसलमान- सघन जनसंख्या वाले देशों में बांग्लादेश का स्थान 4था है, जबकि बांग्लादेश के मुसलमानों की संख्या भारत के अल्पसंख्यक मुसलमानों की संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है और चक्रवात भी बहुत सामान्य हैं। बांग्लादेश दक्षिण एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था, सार्क और बिम्सटेक का प्रतिष्ठित सदस्य है। यह ओआइसी और डी-8 का भी सदस्य है।. बांग्लापीडिया या बांग्लादेश का राष्ट्रीय विश्वकोश, एशियाटिक सोसाइटी बांग्लादेश द्वारा प्रकाशित एक द्विभाषी और पहला बांग्लादेशी विश्वकोश है। यह बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है। इसे प्रथम बार 2003 में 500 पृष्ठों वाले 10 खण्डों में प्रकाशित किया गया था। इसमें लगभग 6000 आलेख हैं। मुद्रित और आनलाइन संस्करण के अलावा यह सीडी रोम पर भी उपलब्ध है। इसका प्रस्तावित अद्यतन प्रति 2 वर्षों पश्चात होना तय पाया गया है। बांग्लापीडिया के प्रधान सम्पादक सिराजुल इस्लाम थे। लगभग 1200 बंग्लादेशी और विदेशी लेखकों ने इस विश्वकोश में उपलब्ध लेखों को लिखा है। इस परियोजना का वित्त-पोषण बंग्लादेशी सरकार, निजी क्षेत्र के संगठनों, शैक्षिक संस्थानों और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस परियोजना का मूल बजट 800,000 टका था, पर अंत में इस परियोजना पर एशियाटिक सोसाइटी को लगभग 8 करोड़ टका खर्च करना पड़ा। बांग्लादेश मुक्ति युद्ध और स्वदेशी लोगों पर की गयीं विवादास्पद प्रविष्टियों के बावजूद, दोनों बांग्ला और अंग्रेजी संस्करण प्रकाशन के समय से ही पर पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। बांग्लापीडिया एक सामान्य विश्वकोश न होकर, बांग्लादेश से संबंधित विषयों पर आधारित एक विशेष विश्वकोश है। विश्वकोश के प्रयोजनों के लिए, बांग्लादेश को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है जो ऐतिहासिक रूप से क्रमशः प्राचीन पूर्वी भारत, सूबा बांग्ला, शाही बंगलाह, मुगल सूबा बंगला, बंगाल प्रेसीडेंसी, बंगाल प्रांत, पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान और स्वतंत्र बांग्लादेश के रूप में अस्तित्व में आया। . बांग्लादेश और बांग्लापीडिया आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): बाङ्ला भाषा। बाङ्ला भाषा अथवा बंगाली भाषा (बाङ्ला लिपि मेंः বাংলা ভাষা / बाङ्ला), बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जानेवाली एक प्रमुख भाषा है। भाषाई परिवार की दृष्टि से यह हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार का सदस्य है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में हिन्दी, नेपाली, पंजाबी, गुजराती, असमिया, ओड़िया, मैथिली इत्यादी भाषाएँ हैं। बंगाली बोलने वालों की सँख्या लगभग २३ करोड़ है और यह विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा है। इसके बोलने वाले बांग्लादेश और भारत के अलावा विश्व के बहुत से अन्य देशों में भी फ़ैले हैं। . बांग्लादेश 63 संबंध है और बांग्लापीडिया 6 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.45% है = 1 / (63 + 6)। यह लेख बांग्लादेश और बांग्लापीडिया के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। बांग्लादेश गणतन्त्र दक्षिण जंबूद्वीप का एक राष्ट्र है। देश की उत्तर, पूर्व और पश्चिम सीमाएँ भारत और दक्षिणपूर्व सीमा म्यान्मार देशों से मिलती है; दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल हैं, जिसका ऐतिहासिक नाम "বঙ্গ" बंग या "বাংলা" बांग्ला है। इसकी सीमारेखा उस समय निर्धारित हुई जब एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का पूर्वी भाग घोषित किया गया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान के मध्य लगभग एक हज़ार छः सौ किमी की भौगोलिक दूरी थी। पाकिस्तान के दोनों भागों की जनता का धर्म एक था, पर उनके बीच जाति और भाषागत काफ़ी दूरियाँ थीं। पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय के विरुद्ध एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत के सहयोग से एक रक्तरंजित युद्ध के बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश का उदभव हुआ। स्वाधीनता के बाद बांग्लादेश के कुछ प्रारंभिक वर्ष राजनैतिक अस्थिरता से परिपूर्ण थे, देश में तेरह राष्ट्रशासक बदले गए और चार सैन्य बगावतें हुई। विश्व के सबसे जनबहुल देशों में बांग्लादेश का स्थान आठवां है। किन्तु क्षेत्रफल की दृष्टि से बांग्लादेश विश्व में तिरानवेवाँ है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है। मुसलमान- सघन जनसंख्या वाले देशों में बांग्लादेश का स्थान चारथा है, जबकि बांग्लादेश के मुसलमानों की संख्या भारत के अल्पसंख्यक मुसलमानों की संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है और चक्रवात भी बहुत सामान्य हैं। बांग्लादेश दक्षिण एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था, सार्क और बिम्सटेक का प्रतिष्ठित सदस्य है। यह ओआइसी और डी-आठ का भी सदस्य है।. बांग्लापीडिया या बांग्लादेश का राष्ट्रीय विश्वकोश, एशियाटिक सोसाइटी बांग्लादेश द्वारा प्रकाशित एक द्विभाषी और पहला बांग्लादेशी विश्वकोश है। यह बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है। इसे प्रथम बार दो हज़ार तीन में पाँच सौ पृष्ठों वाले दस खण्डों में प्रकाशित किया गया था। इसमें लगभग छः हज़ार आलेख हैं। मुद्रित और आनलाइन संस्करण के अलावा यह सीडी रोम पर भी उपलब्ध है। इसका प्रस्तावित अद्यतन प्रति दो वर्षों पश्चात होना तय पाया गया है। बांग्लापीडिया के प्रधान सम्पादक सिराजुल इस्लाम थे। लगभग एक हज़ार दो सौ बंग्लादेशी और विदेशी लेखकों ने इस विश्वकोश में उपलब्ध लेखों को लिखा है। इस परियोजना का वित्त-पोषण बंग्लादेशी सरकार, निजी क्षेत्र के संगठनों, शैक्षिक संस्थानों और यूनेस्को द्वारा किया गया है। इस परियोजना का मूल बजट आठ सौ,शून्य टका था, पर अंत में इस परियोजना पर एशियाटिक सोसाइटी को लगभग आठ करोड़ टका खर्च करना पड़ा। बांग्लादेश मुक्ति युद्ध और स्वदेशी लोगों पर की गयीं विवादास्पद प्रविष्टियों के बावजूद, दोनों बांग्ला और अंग्रेजी संस्करण प्रकाशन के समय से ही पर पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। बांग्लापीडिया एक सामान्य विश्वकोश न होकर, बांग्लादेश से संबंधित विषयों पर आधारित एक विशेष विश्वकोश है। विश्वकोश के प्रयोजनों के लिए, बांग्लादेश को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है जो ऐतिहासिक रूप से क्रमशः प्राचीन पूर्वी भारत, सूबा बांग्ला, शाही बंगलाह, मुगल सूबा बंगला, बंगाल प्रेसीडेंसी, बंगाल प्रांत, पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान और स्वतंत्र बांग्लादेश के रूप में अस्तित्व में आया। . बांग्लादेश और बांग्लापीडिया आम में एक बात है : बाङ्ला भाषा। बाङ्ला भाषा अथवा बंगाली भाषा , बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जानेवाली एक प्रमुख भाषा है। भाषाई परिवार की दृष्टि से यह हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार का सदस्य है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में हिन्दी, नेपाली, पंजाबी, गुजराती, असमिया, ओड़िया, मैथिली इत्यादी भाषाएँ हैं। बंगाली बोलने वालों की सँख्या लगभग तेईस करोड़ है और यह विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा है। इसके बोलने वाले बांग्लादेश और भारत के अलावा विश्व के बहुत से अन्य देशों में भी फ़ैले हैं। . बांग्लादेश तिरेसठ संबंध है और बांग्लापीडिया छः है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.पैंतालीस% है = एक / । यह लेख बांग्लादेश और बांग्लापीडिया के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने एक बार फिर पेड प्रीमियम वेरिफिकेशन सर्विस 'ट्विटर ब्लू' को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने सोमवार यानी आज से इस सर्विस को कुछ बदलाव के साथ पेश किया है। कंपनी ने कहा कि यूजर्स अब ट्विटर ब्लू का सब्सक्रिप्शन खरीद सकते हैं, ताकि वे ब्लू वेरिफाइड अकाउंट और विशेष फीचर हासिल कर सकें। इस सर्विस को पहले फर्जी अकाउंट्स की समस्या के चलते बंद कर दिया गया था। Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadgets News apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने एक बार फिर पेड प्रीमियम वेरिफिकेशन सर्विस 'ट्विटर ब्लू' को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने सोमवार यानी आज से इस सर्विस को कुछ बदलाव के साथ पेश किया है। कंपनी ने कहा कि यूजर्स अब ट्विटर ब्लू का सब्सक्रिप्शन खरीद सकते हैं, ताकि वे ब्लू वेरिफाइड अकाउंट और विशेष फीचर हासिल कर सकें। इस सर्विस को पहले फर्जी अकाउंट्स की समस्या के चलते बंद कर दिया गया था। Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadgets News apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
आज का दिन आपके लिए अच्छा गुजरने वाला है। खर्चे का भी जरूर योग बन रहा है और आप नये कपड़े, आभूषण खरीद सकते हैं। परिवार या किसी रिश्तेदार से लंबे समय से चला आ रहा मतभेद खत्म होगा। दिन व्यस्त रहेगा। शादी-विवाह के संबंध में कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आज आप पर काम का दबाव रहने वाला है। धैर्य बनाये रखें। ऑफिस में सीनियर या अपने बॉस अपयश मिल सकता है। दिन थोड़ा निराशा वाला हो सकता है। हालांकि, दोपहर बाद वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। संतान के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रह सकती है। वित्तीय संबंधी बात आपकी चिंता बढ़ा सकता है। व्यवसाय में सहयोगी का सहयोग मिलेगा। कार्य में यश प्राप्त होगा। छात्रों के लिए दिन अच्छा है, शुभ समाचार मिल सकता है। आज लक्ष्मी जी की आप पर कृपा रहेगी। व्यापार में मुनाफा रहने का योग है। पुराना कर्ज लौटेंगे। विपरीत लिंग के प्रति खास आकर्षण पैदा होगा। किसी खास की ओर आप आकर्षित होते चले जाएंगे। माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। छात्र करियर को लेकर कोई अहम फैसला ले सकते हैं। आपके प्रतिद्वंद्वी परास्त होंगे और दिन अच्छा गुजरने वाला है। अपने काम में सफल रहेंगे। आज काम में निर्धारित लक्ष्य हासिल करेंगे। उसे पूरा करने में सफल रहेंगे। हालांकि, धैर्य बनाये रखने की जरूरत है। जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लें। आज वाणी पर संयम रखना जरूरी है। कार्यस्थल पर किसी प्रकार की बहस से बचें। मनमुटाव की आशंका है। पूंजी- निवेश के बारे में सोच रहे हैं तो आज कोई फैसला लेने का बेहतर समय है। भाग्य का साथ मिलेगा। मान-सम्मान आज समाज में आपका और बढ़ेगा। साथ ही धन लाभ होने के संकेत मिल रहे हैं। आपके काम आसानी से आज पूरे होंगे और कोई बाधा नहीं आएगी। मित्रों या परिवार के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं। व्यवसाय में लाभ का योग बन रहा है। आय में वृद्धि होगी। किसी के साथ वाद-विवाद या तकरार से नुकसान की आशंका है। इसलिए इससे बचने की कोशिश करें। क्रोध पर भी संयम रखने की जरूरत है। किसी और के गैरकानूनी कामों में उलझने से बचने का प्रयास करें। अचानक किसी लंबी यात्रा का भी योग बन सकता है। आज अपनी वाकपटुता का लाभ आपको मिलेगा। सफलता हासिल होगी। यश मिलने की संभावना है। विपरीत लिंग आपकी ओर आकर्षित होंगे। खर्चे पर संयम रखें। आज का दिन आपके लिए खासा व्यस्त रहने वाला है। मेहनत के अनुरूप नतीजे नहीं मिलने से निराशा होगी। किसी पुराने मित्र से अचानक मुलाकात से मन खुश होगा। कोई बड़ी खुशी भी मिल सकती है। खान-पान और अपनी सेहत का ध्यान रखें। आज आप उर्जा से भरे हुए हैं। आपने दिन की जो योजना बनाई है, सबकुछ वैसे ही गुजरेगा। काम का कुछ हद तक दबाव रह सकता है लेकिन आप इससे आसानी से पार पा लेंगे। शाम का वक्त दोस्तों के साथ बितेगा। आज आपको अपने पार्टनर का भरपूर साथ मिलेगा। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मौसम संबंधी बीमारी आपको परेशान कर सकती है। यात्रा का योग है। नये कार्य को आज के लिए टाल दें।
आज का दिन आपके लिए अच्छा गुजरने वाला है। खर्चे का भी जरूर योग बन रहा है और आप नये कपड़े, आभूषण खरीद सकते हैं। परिवार या किसी रिश्तेदार से लंबे समय से चला आ रहा मतभेद खत्म होगा। दिन व्यस्त रहेगा। शादी-विवाह के संबंध में कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आज आप पर काम का दबाव रहने वाला है। धैर्य बनाये रखें। ऑफिस में सीनियर या अपने बॉस अपयश मिल सकता है। दिन थोड़ा निराशा वाला हो सकता है। हालांकि, दोपहर बाद वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। संतान के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रह सकती है। वित्तीय संबंधी बात आपकी चिंता बढ़ा सकता है। व्यवसाय में सहयोगी का सहयोग मिलेगा। कार्य में यश प्राप्त होगा। छात्रों के लिए दिन अच्छा है, शुभ समाचार मिल सकता है। आज लक्ष्मी जी की आप पर कृपा रहेगी। व्यापार में मुनाफा रहने का योग है। पुराना कर्ज लौटेंगे। विपरीत लिंग के प्रति खास आकर्षण पैदा होगा। किसी खास की ओर आप आकर्षित होते चले जाएंगे। माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। छात्र करियर को लेकर कोई अहम फैसला ले सकते हैं। आपके प्रतिद्वंद्वी परास्त होंगे और दिन अच्छा गुजरने वाला है। अपने काम में सफल रहेंगे। आज काम में निर्धारित लक्ष्य हासिल करेंगे। उसे पूरा करने में सफल रहेंगे। हालांकि, धैर्य बनाये रखने की जरूरत है। जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लें। आज वाणी पर संयम रखना जरूरी है। कार्यस्थल पर किसी प्रकार की बहस से बचें। मनमुटाव की आशंका है। पूंजी- निवेश के बारे में सोच रहे हैं तो आज कोई फैसला लेने का बेहतर समय है। भाग्य का साथ मिलेगा। मान-सम्मान आज समाज में आपका और बढ़ेगा। साथ ही धन लाभ होने के संकेत मिल रहे हैं। आपके काम आसानी से आज पूरे होंगे और कोई बाधा नहीं आएगी। मित्रों या परिवार के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं। व्यवसाय में लाभ का योग बन रहा है। आय में वृद्धि होगी। किसी के साथ वाद-विवाद या तकरार से नुकसान की आशंका है। इसलिए इससे बचने की कोशिश करें। क्रोध पर भी संयम रखने की जरूरत है। किसी और के गैरकानूनी कामों में उलझने से बचने का प्रयास करें। अचानक किसी लंबी यात्रा का भी योग बन सकता है। आज अपनी वाकपटुता का लाभ आपको मिलेगा। सफलता हासिल होगी। यश मिलने की संभावना है। विपरीत लिंग आपकी ओर आकर्षित होंगे। खर्चे पर संयम रखें। आज का दिन आपके लिए खासा व्यस्त रहने वाला है। मेहनत के अनुरूप नतीजे नहीं मिलने से निराशा होगी। किसी पुराने मित्र से अचानक मुलाकात से मन खुश होगा। कोई बड़ी खुशी भी मिल सकती है। खान-पान और अपनी सेहत का ध्यान रखें। आज आप उर्जा से भरे हुए हैं। आपने दिन की जो योजना बनाई है, सबकुछ वैसे ही गुजरेगा। काम का कुछ हद तक दबाव रह सकता है लेकिन आप इससे आसानी से पार पा लेंगे। शाम का वक्त दोस्तों के साथ बितेगा। आज आपको अपने पार्टनर का भरपूर साथ मिलेगा। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मौसम संबंधी बीमारी आपको परेशान कर सकती है। यात्रा का योग है। नये कार्य को आज के लिए टाल दें।
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों कीमती धातुओं में रही गिरावट के बावजूद त्योहारी मांग आने से दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोना 75 रुपए चमककर 30 हजार 450 रुपए दस ग्राम पर पहुंच गया। औद्योगिक ग्राहकी आने से चांदी भी 100 रुपए उछलकर 40 हजार 100 रुपए प्रति किलोग्राम बोली गई। विदेशी बाजारों में लंदन का सोना हाजिर 0. 03 डॉलर लुढ़ककर 1,268. 55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी 1. 7 डॉलर फिसलकर 1,271. 5 डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी में हालांकि 0. 02 डॉलर बढ़त रही और यह 16. 60 डॉलर प्रति औंस पर रही। बाजार विश्लेषकों के अनुसार दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु पर दबाव बढ़ा है। हालांकि स्थानीय बाजार में जेवराती मांग बरकरार है जिससे यहां इसकी कीमतों में तेजी का रुख रहा। (वार्ता)
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों कीमती धातुओं में रही गिरावट के बावजूद त्योहारी मांग आने से दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोना पचहत्तर रुपयापए चमककर तीस हजार चार सौ पचास रुपयापए दस ग्राम पर पहुंच गया। औद्योगिक ग्राहकी आने से चांदी भी एक सौ रुपयापए उछलकर चालीस हजार एक सौ रुपयापए प्रति किलोग्राम बोली गई। विदेशी बाजारों में लंदन का सोना हाजिर शून्य. तीन डॉलर लुढ़ककर एक,दो सौ अड़सठ. पचपन डॉलर प्रति औंस पर आ गया। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी एक. सात डॉलर फिसलकर एक,दो सौ इकहत्तर. पाँच डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी में हालांकि शून्य. दो डॉलर बढ़त रही और यह सोलह. साठ डॉलर प्रति औंस पर रही। बाजार विश्लेषकों के अनुसार दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु पर दबाव बढ़ा है। हालांकि स्थानीय बाजार में जेवराती मांग बरकरार है जिससे यहां इसकी कीमतों में तेजी का रुख रहा।
प्लेटिनम के छल्ले सुंदर गहने हैं,आज अविश्वसनीय रूप से लोकप्रिय। वे बहुत महंगा और सुंदर लगते हैं। इसके अलावा, प्लैटिनम के छल्ले धन का एक उत्कृष्ट निवेश हैं, क्योंकि समय के साथ उनका मूल्य केवल बढ़ता है। ऐसे उत्पाद अनुकूल रूप से इसके मालिक की स्थिरता और स्थिति पर जोर देते हैं। रिंग्स स्क्रैच-प्रतिरोधी और पहनने वाले प्रतिरोधी हैं। और उनकी देखभाल बहुत आसान है। उन्हें सिर्फ गर्म पानी में धोया जाना चाहिए और मुलायम कपड़े से पोंछना चाहिए। पत्थरों के साथ और बिना पतले और चौड़े, चिकनी और नक्काशीदार - उत्पादों की श्रृंखला काफी व्यापक है। तो, अधिक विस्तार से। प्लैटिनम के छल्ले - सबसे कीमती कीमती धातु से गहने। इसके लिए कीमत लगभग सौ गुना चांदी की कीमत से अधिक है। इस अंतर को प्लैटिनम की प्रकृति और इस धातु को संसाधित करने में कठिनाइयों में सीमित रिजर्व द्वारा समझाया गया है। इस सामग्री को केवल कुछ सदियों पहलेसभी सस्ता था। इसलिए, उन्हें बचाने के लिए ज्वेलर्स द्वारा चांदी और सोने के मिश्र धातुओं में जोड़ा गया था। आज स्थिति बदल गई है। प्लेटिनम की सराहना की जाती है। ध्यान देने के लिए क्या जरूरी हैगहने खरीदना? हीरे के साथ विशेष रूप से सुरुचिपूर्ण देखो प्लैटिनम अंगूठियां। एक सुस्त चांदी की टिंट कीमती पत्थरों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि है। प्लैटिनम के साथ संयोजन में, यहां तक कि छोटे हीरे उज्ज्वल और शानदार लगते हैं। आवेषण के बिना रिंगों को असामान्य द्वारा सबसे अच्छा चुना जाता हैप्रपत्र। वे जटिल नक्काशी या उत्कीर्णन के साथ भी सजाए गए हैं। जौहरी से गहने का ऑर्डर करना, आपको निश्चित रूप से बिल्कुल वही सामान मिलते हैं, जो आप चाहते हैं। इस प्रकार, उच्च स्थिति की एक अचूक विशेषता प्लैटिनम के छल्ले हैं। इन गहने की तस्वीर स्पष्ट रूप से दिखाती है कि वे कितनी शानदार लगती हैं, वे कितनी चमकदार और समृद्ध दिखती हैं। नवविवाहित के साथ प्लैटिनम शादी के छल्लेहाल ही में खरीदा जाता है। यह इस तथ्य से समझाया गया है कि शादी का दिन उनके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है। यही है, वे इस छुट्टी के सभी बेहतरीन के योग्य हैं। स्वाभाविक रूप से, वे उन छल्ले चुनना चाहते हैं जो सबसे ज्वलंत, महंगे, सुंदर हैं। कई मेहमानों से जोड़े की शैली की भावना में संदेह के कारण बस नहीं रहेंगे। वैसे, हाल के वर्षों में, युवा प्लैटिनम के छल्ले स्वतंत्र रूप से उनके सामाजिक स्थिति और धन से अधिग्रहित किए गए हैं। इन उत्पादों को अमीर व्यापारियों, और स्क्रीन सितारों, और "केवल प्राणियों" द्वारा खरीदा जाता है।
प्लेटिनम के छल्ले सुंदर गहने हैं,आज अविश्वसनीय रूप से लोकप्रिय। वे बहुत महंगा और सुंदर लगते हैं। इसके अलावा, प्लैटिनम के छल्ले धन का एक उत्कृष्ट निवेश हैं, क्योंकि समय के साथ उनका मूल्य केवल बढ़ता है। ऐसे उत्पाद अनुकूल रूप से इसके मालिक की स्थिरता और स्थिति पर जोर देते हैं। रिंग्स स्क्रैच-प्रतिरोधी और पहनने वाले प्रतिरोधी हैं। और उनकी देखभाल बहुत आसान है। उन्हें सिर्फ गर्म पानी में धोया जाना चाहिए और मुलायम कपड़े से पोंछना चाहिए। पत्थरों के साथ और बिना पतले और चौड़े, चिकनी और नक्काशीदार - उत्पादों की श्रृंखला काफी व्यापक है। तो, अधिक विस्तार से। प्लैटिनम के छल्ले - सबसे कीमती कीमती धातु से गहने। इसके लिए कीमत लगभग सौ गुना चांदी की कीमत से अधिक है। इस अंतर को प्लैटिनम की प्रकृति और इस धातु को संसाधित करने में कठिनाइयों में सीमित रिजर्व द्वारा समझाया गया है। इस सामग्री को केवल कुछ सदियों पहलेसभी सस्ता था। इसलिए, उन्हें बचाने के लिए ज्वेलर्स द्वारा चांदी और सोने के मिश्र धातुओं में जोड़ा गया था। आज स्थिति बदल गई है। प्लेटिनम की सराहना की जाती है। ध्यान देने के लिए क्या जरूरी हैगहने खरीदना? हीरे के साथ विशेष रूप से सुरुचिपूर्ण देखो प्लैटिनम अंगूठियां। एक सुस्त चांदी की टिंट कीमती पत्थरों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि है। प्लैटिनम के साथ संयोजन में, यहां तक कि छोटे हीरे उज्ज्वल और शानदार लगते हैं। आवेषण के बिना रिंगों को असामान्य द्वारा सबसे अच्छा चुना जाता हैप्रपत्र। वे जटिल नक्काशी या उत्कीर्णन के साथ भी सजाए गए हैं। जौहरी से गहने का ऑर्डर करना, आपको निश्चित रूप से बिल्कुल वही सामान मिलते हैं, जो आप चाहते हैं। इस प्रकार, उच्च स्थिति की एक अचूक विशेषता प्लैटिनम के छल्ले हैं। इन गहने की तस्वीर स्पष्ट रूप से दिखाती है कि वे कितनी शानदार लगती हैं, वे कितनी चमकदार और समृद्ध दिखती हैं। नवविवाहित के साथ प्लैटिनम शादी के छल्लेहाल ही में खरीदा जाता है। यह इस तथ्य से समझाया गया है कि शादी का दिन उनके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है। यही है, वे इस छुट्टी के सभी बेहतरीन के योग्य हैं। स्वाभाविक रूप से, वे उन छल्ले चुनना चाहते हैं जो सबसे ज्वलंत, महंगे, सुंदर हैं। कई मेहमानों से जोड़े की शैली की भावना में संदेह के कारण बस नहीं रहेंगे। वैसे, हाल के वर्षों में, युवा प्लैटिनम के छल्ले स्वतंत्र रूप से उनके सामाजिक स्थिति और धन से अधिग्रहित किए गए हैं। इन उत्पादों को अमीर व्यापारियों, और स्क्रीन सितारों, और "केवल प्राणियों" द्वारा खरीदा जाता है।
अहमदाबाद, 25 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में टिक-टॉक पर वीडियो बनाने और पोस्ट करने के बाद मेहसाणा जिले के लांघणज गांव के पुलिस स्टेशन में तैनात महिला पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया यूजर्स ने निलंबन के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में लोक रक्षक दल (एलआरडी) की रंगरूट अर्पिता चौधरी को लॉकअप के सामने डांस करते हुए देखा जा सकता है। अर्पिता पर की गई कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि उन्हें वीडियो बनाने के चलते निलंबित करना ठीक नहीं है। एक अन्य ने उन्हें 'लेडी दबंग' करार दिया।
अहमदाबाद, पच्चीस जुलाई । गुजरात में टिक-टॉक पर वीडियो बनाने और पोस्ट करने के बाद मेहसाणा जिले के लांघणज गांव के पुलिस स्टेशन में तैनात महिला पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया यूजर्स ने निलंबन के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में लोक रक्षक दल की रंगरूट अर्पिता चौधरी को लॉकअप के सामने डांस करते हुए देखा जा सकता है। अर्पिता पर की गई कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि उन्हें वीडियो बनाने के चलते निलंबित करना ठीक नहीं है। एक अन्य ने उन्हें 'लेडी दबंग' करार दिया।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक लड़की ने राजस्व विभाग के अफसर देर रात कॉल किया और फिर वह कपड़े उतारकर कर न्यूड हो गई। इसके बाद अधिकारी से 50 हजार रुपए की मांग करने लगी। ग्वालियर (मध्य प्रदेश). देश में हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेल करने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जहां फेंक आईडी बनाकर लोगों को शिकार बनाय जा रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक लड़की ने राजस्व विभाग के अफसर देर रात कॉल किया और फिर वह कपड़े उतारकर कर न्यूड हो गई। इसके बाद अधिकारी से 50 हजार रुपए की मांग करने लगी। दरअसल, यह मामला ग्वालियर शहर का है, जहां एक अनजान नंबर से राजस्व विभाग के अधिकारी रविनंदन तिवारी के पास कॉल आया था। फोन करने वाली एक युवती थी, जिसका मकसद था हनी ट्रैप के जरिए अफसर को फंसाना। जिसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैंसे ऐंठना। लेकिन रविनंदन तिवारी की समझदारी से वह बच गए और अपनी फेसबुक वॉल पर रात को ही पूरा घटनाक्रम शेयर कर दिया। अधिकारी रविनंदन तिवारी ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा- मुझे रात 10. 45 बजे 9670425088 नंबर से वीडियो कॉल आया था। जब मैंने रिसीव किया तो दूसरी तरफ एक महिला थी। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले वह अश्लीलता करने लगी। में घबरा गया और मैंने फोन काट दिया। लेकिन कुछ देर बाद उसका फिर कॉल आया, हिम्मत करके उससे बात और जाना आखिर वह क्या चाहती है। लेकिन देखते ही देखते वह अपने सारे कपड़े उतारने लगी। इसके बाद मैंने फिर फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। अफसर ने बताया कि करीब आधे घंटे बाद 11. 25 पर उसी नंबर से एक वीडियो आया जो की एडिट किया हुआ था। साथ ही लिखा था कि 50 हजार रुपए दे दो नहीं तो यह वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। अधिकारी ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए कहा कि मैं 5 रुपए नहीं दूंगा तुझे जो लगता वह कर। वायरल कर या फिर पुलिस को दिखा दे। मैं सहीं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। लेकिन इस घटना से मुझे रातभर नहीं नहीं आई, मैं यही सोचता रहा कि कैसे कोई भी आपकी बनी बनाई इज्जत को बर्बाद कर सकता है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक लड़की ने राजस्व विभाग के अफसर देर रात कॉल किया और फिर वह कपड़े उतारकर कर न्यूड हो गई। इसके बाद अधिकारी से पचास हजार रुपए की मांग करने लगी। ग्वालियर . देश में हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेल करने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जहां फेंक आईडी बनाकर लोगों को शिकार बनाय जा रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक लड़की ने राजस्व विभाग के अफसर देर रात कॉल किया और फिर वह कपड़े उतारकर कर न्यूड हो गई। इसके बाद अधिकारी से पचास हजार रुपए की मांग करने लगी। दरअसल, यह मामला ग्वालियर शहर का है, जहां एक अनजान नंबर से राजस्व विभाग के अधिकारी रविनंदन तिवारी के पास कॉल आया था। फोन करने वाली एक युवती थी, जिसका मकसद था हनी ट्रैप के जरिए अफसर को फंसाना। जिसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैंसे ऐंठना। लेकिन रविनंदन तिवारी की समझदारी से वह बच गए और अपनी फेसबुक वॉल पर रात को ही पूरा घटनाक्रम शेयर कर दिया। अधिकारी रविनंदन तिवारी ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा- मुझे रात दस. पैंतालीस बजे नौ छः सात शून्य चार दो पाँच शून्य आठ आठ नंबर से वीडियो कॉल आया था। जब मैंने रिसीव किया तो दूसरी तरफ एक महिला थी। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले वह अश्लीलता करने लगी। में घबरा गया और मैंने फोन काट दिया। लेकिन कुछ देर बाद उसका फिर कॉल आया, हिम्मत करके उससे बात और जाना आखिर वह क्या चाहती है। लेकिन देखते ही देखते वह अपने सारे कपड़े उतारने लगी। इसके बाद मैंने फिर फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। अफसर ने बताया कि करीब आधे घंटे बाद ग्यारह. पच्चीस पर उसी नंबर से एक वीडियो आया जो की एडिट किया हुआ था। साथ ही लिखा था कि पचास हजार रुपए दे दो नहीं तो यह वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। अधिकारी ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए कहा कि मैं पाँच रुपयापए नहीं दूंगा तुझे जो लगता वह कर। वायरल कर या फिर पुलिस को दिखा दे। मैं सहीं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। लेकिन इस घटना से मुझे रातभर नहीं नहीं आई, मैं यही सोचता रहा कि कैसे कोई भी आपकी बनी बनाई इज्जत को बर्बाद कर सकता है।
आईपीएल 2020 का 13वां मैच मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच 1 अक्टूबर को आबू धाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है. यह दोनों ही टीमें टूर्नामेंट में 3-3 मैच खेल चुकी है और दोनों ही टीमें टूर्नामेंट में अब तक 2 मैच हारी है और 1 मैच जीती हुई हैं. मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच अब तक कुल 24 मैच खेले गए हैं, जिसमे से 13 मैच मुंबई इंडियंस की टीम ने जीते हुए हैं. वहीं 11 मैच किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने जीते हुए हैं. इस मैच में मुंबई के पास किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ अपनी 14वीं जीत का मौका होगा. वहीं किंग्स इलेवन पंजाब के पास अपनी 12वीं जीत का मौका होगा. आबू धाबी के शेख जैयाद क्रिकेट स्टेडियम की पिच में बल्ले और गेंद के बीच अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. इस पिच से तेज को तो मदद नहीं मिलती है, लेकिन स्पिनरों का गेंद भी इस पिच पर घूमता है. हालांकि, जो बल्लेबाज इस पिच पर कुछ समय बिताता है. वह रन भी आसानी से बनाने लगता है, इसलिए इस पिच पर गेंद और बल्ले दोनों का अच्छा संतुलन रहता है. निश्चित रूप से यह मैच काफी रोचक होने वाला है. मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच होने वाले इस मैच का टॉस हो गया है. इस मैच का टॉस किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने जीता हैं और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. अपने पिछले मुकाबले में जहां मुंबई को आरसीबी के खिलाफ सुपर ओवर में हार का सामना करना पड़ा था. वहीं पंजाब की टीम को राजस्थान रॉयल्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इस मैच को जीत दोनों ही टीमें जीत की पटरी पर वापस लौटना चाहेगी. Teams:
आईपीएल दो हज़ार बीस का तेरहवां मैच मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच एक अक्टूबर को आबू धाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है. यह दोनों ही टीमें टूर्नामेंट में तीन-तीन मैच खेल चुकी है और दोनों ही टीमें टूर्नामेंट में अब तक दो मैच हारी है और एक मैच जीती हुई हैं. मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच अब तक कुल चौबीस मैच खेले गए हैं, जिसमे से तेरह मैच मुंबई इंडियंस की टीम ने जीते हुए हैं. वहीं ग्यारह मैच किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने जीते हुए हैं. इस मैच में मुंबई के पास किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ अपनी चौदहवीं जीत का मौका होगा. वहीं किंग्स इलेवन पंजाब के पास अपनी बारहवीं जीत का मौका होगा. आबू धाबी के शेख जैयाद क्रिकेट स्टेडियम की पिच में बल्ले और गेंद के बीच अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. इस पिच से तेज को तो मदद नहीं मिलती है, लेकिन स्पिनरों का गेंद भी इस पिच पर घूमता है. हालांकि, जो बल्लेबाज इस पिच पर कुछ समय बिताता है. वह रन भी आसानी से बनाने लगता है, इसलिए इस पिच पर गेंद और बल्ले दोनों का अच्छा संतुलन रहता है. निश्चित रूप से यह मैच काफी रोचक होने वाला है. मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच होने वाले इस मैच का टॉस हो गया है. इस मैच का टॉस किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने जीता हैं और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. अपने पिछले मुकाबले में जहां मुंबई को आरसीबी के खिलाफ सुपर ओवर में हार का सामना करना पड़ा था. वहीं पंजाब की टीम को राजस्थान रॉयल्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इस मैच को जीत दोनों ही टीमें जीत की पटरी पर वापस लौटना चाहेगी. Teams: