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नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात रहे आईजी कल्लूरी वह शख्स है जिसका नाम सुनते ही नक्सलियों को मौत का डर सताने लगता है. कल्लूरी जब बस्तर में आई जी थे वहां नक्सलियों का नहीं बल्कि कल्लूरी का आंतक था. उनके दो साल के कार्यकाल में नक्सली पुलिस या सुरक्षा बलों पर हमला करना तो दूर अपने घर से निकलने से भी डरते थे. नक्सलियों के सफाए के लिए नक्सली विरोधी अभियान छेड़े आई जी कल्लूरी ने कई नक्सलियों का सफाया किया. जब ये अधिकारी छत्तीसगढ़ दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला तो उस वक्त उन्होंने प्रधानमंत्री से वादा किया था कि एक साल के अंदर वे राज्य से नक्सलवाद को खत्म कर देंगे. लेकिन ये विडंबना ही है कि उसके कुछ महीने बाद ही उनका तबादला कर दिया गया. कल्लूरी का नक्सलवादियों के बीच किस कदर भय था इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हाल में नक्सलियों से मिले सामान की तलाशी के दौरान मिले पत्र में बताया गया है कि आई जी कल्लूरी नक्सलियों का सबसे बड़ा दुश्मन है. गौरतलब है कि एरिया कमेटी मेम्बर वर्गिश ने यह पत्र जगदीश नाम के अपने एक बड़े लीडर को लिखा है. मार्च महीने की तारीख वाले इस पत्र में इलाके में नक्सलवाद को बचाने के लिए आईजी का खात्मा जरूरी बताया गया है. क्योंकि यदि कल्लूरी को मार दिया जाता है तो नक्सलियों के पुलिस के सामने आत्मसमर्पण की नीति बंद हो जाएगी. उल्लेखनीय है कि बस्तर रेंज में करीब दो वर्ष तैनात आईजी एसआरपी कल्लूरी ने बस्तर में कई नक्सली विरोधी अभियान चलाए हैं, जिसके फलस्वरूप कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है. कल्लूरी के बारे में बताया जाता है कि वे बेहद सक्रिय अधिकारी हैं. नक्सली विरोधी अभियान में खुद रात-रात भर पैदल चलकर हिस्सेदारी करते हैं और उत्तर छत्तीसगढ़ से नक्सल आंदोलन को खत्म करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है. लेकिन उनके इस नक्सली विरोधी अभियान को रोकने के लिए नक्सलियों ने देश में बैठे अपने बुद्धिजीवियों और मानवाधिकारवादियों को उनके पीछे लगा दिया. मीडिया में बैठे अपने सहयोगियों के माध्यम से उन पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगाए जाने लगे. उनको बदनाम करने और नक्सल ऑपरेशन को रोकने के लिए उनपर नक्सल ऑपरेशन के दौरान आदिवासियों के घरों को जलाने और फर्जी एनकाउंटर में मासूम आदिवासियों को मारने के आरोप लगाए जाने लग. दिल्ली में बैठे में नक्सल समर्थक सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रोफेसरों और पत्रकारों ने उनकी कार्यशैली का जमकर विरोध किया. नक्सलियों के समर्थन और कल्लूरी के विरोध में खूब प्रचार किया गया. इसके विरोध में सहायक पुलिस कर्मियों ने भी रैलियां निकालकर मानवाधिकारवादियों के पुतले जलाए थे. राज्य में नक्सल विरोधी लोगों ने वहां की नक्सल समर्थक सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया के घर पर हमला कर दिया. इसको लेकर नक्सल समर्थकों ने कल्लूरी को जिम्मेंवार ठहराकर उनके खिलाफ एक मुहिम छेड़ दी. इस मामले में मुख्यमंत्री रमनसिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा. कहा जाता है कि रमन सिंह यहां कमजोर साबित हुए और उन्होंन मानवाधिकारवादियों के दवाब में कल्लूरी का तबादला कर दिया. इसके बाद से राज्य में नक्सलियों के हौसंले बुलंद हो गए है और जो नक्सली पुलिस और सुरक्षा बलों के डर से छिपे हुए थे वे बाहर निकलकर अब उन पर हमले करने लगे हैं.
नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात रहे आईजी कल्लूरी वह शख्स है जिसका नाम सुनते ही नक्सलियों को मौत का डर सताने लगता है. कल्लूरी जब बस्तर में आई जी थे वहां नक्सलियों का नहीं बल्कि कल्लूरी का आंतक था. उनके दो साल के कार्यकाल में नक्सली पुलिस या सुरक्षा बलों पर हमला करना तो दूर अपने घर से निकलने से भी डरते थे. नक्सलियों के सफाए के लिए नक्सली विरोधी अभियान छेड़े आई जी कल्लूरी ने कई नक्सलियों का सफाया किया. जब ये अधिकारी छत्तीसगढ़ दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला तो उस वक्त उन्होंने प्रधानमंत्री से वादा किया था कि एक साल के अंदर वे राज्य से नक्सलवाद को खत्म कर देंगे. लेकिन ये विडंबना ही है कि उसके कुछ महीने बाद ही उनका तबादला कर दिया गया. कल्लूरी का नक्सलवादियों के बीच किस कदर भय था इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हाल में नक्सलियों से मिले सामान की तलाशी के दौरान मिले पत्र में बताया गया है कि आई जी कल्लूरी नक्सलियों का सबसे बड़ा दुश्मन है. गौरतलब है कि एरिया कमेटी मेम्बर वर्गिश ने यह पत्र जगदीश नाम के अपने एक बड़े लीडर को लिखा है. मार्च महीने की तारीख वाले इस पत्र में इलाके में नक्सलवाद को बचाने के लिए आईजी का खात्मा जरूरी बताया गया है. क्योंकि यदि कल्लूरी को मार दिया जाता है तो नक्सलियों के पुलिस के सामने आत्मसमर्पण की नीति बंद हो जाएगी. उल्लेखनीय है कि बस्तर रेंज में करीब दो वर्ष तैनात आईजी एसआरपी कल्लूरी ने बस्तर में कई नक्सली विरोधी अभियान चलाए हैं, जिसके फलस्वरूप कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है. कल्लूरी के बारे में बताया जाता है कि वे बेहद सक्रिय अधिकारी हैं. नक्सली विरोधी अभियान में खुद रात-रात भर पैदल चलकर हिस्सेदारी करते हैं और उत्तर छत्तीसगढ़ से नक्सल आंदोलन को खत्म करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है. लेकिन उनके इस नक्सली विरोधी अभियान को रोकने के लिए नक्सलियों ने देश में बैठे अपने बुद्धिजीवियों और मानवाधिकारवादियों को उनके पीछे लगा दिया. मीडिया में बैठे अपने सहयोगियों के माध्यम से उन पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगाए जाने लगे. उनको बदनाम करने और नक्सल ऑपरेशन को रोकने के लिए उनपर नक्सल ऑपरेशन के दौरान आदिवासियों के घरों को जलाने और फर्जी एनकाउंटर में मासूम आदिवासियों को मारने के आरोप लगाए जाने लग. दिल्ली में बैठे में नक्सल समर्थक सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रोफेसरों और पत्रकारों ने उनकी कार्यशैली का जमकर विरोध किया. नक्सलियों के समर्थन और कल्लूरी के विरोध में खूब प्रचार किया गया. इसके विरोध में सहायक पुलिस कर्मियों ने भी रैलियां निकालकर मानवाधिकारवादियों के पुतले जलाए थे. राज्य में नक्सल विरोधी लोगों ने वहां की नक्सल समर्थक सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया के घर पर हमला कर दिया. इसको लेकर नक्सल समर्थकों ने कल्लूरी को जिम्मेंवार ठहराकर उनके खिलाफ एक मुहिम छेड़ दी. इस मामले में मुख्यमंत्री रमनसिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा. कहा जाता है कि रमन सिंह यहां कमजोर साबित हुए और उन्होंन मानवाधिकारवादियों के दवाब में कल्लूरी का तबादला कर दिया. इसके बाद से राज्य में नक्सलियों के हौसंले बुलंद हो गए है और जो नक्सली पुलिस और सुरक्षा बलों के डर से छिपे हुए थे वे बाहर निकलकर अब उन पर हमले करने लगे हैं.
आयिन संस्थान कि बाजार जितना हो कम पूर्ण होता है उतना ही उद्यमक्र्ता को विशेषज्ञों की कियाग्रो मे समन्वय वरने का अवसर मिलता है। यह सोचना गलत है कि विशेषज्ञता के सिद्धान्त बड़े पैमाने के संगठन के अनुकूल होते है। मच्छी तरह सगठित बाजारो मे छोटो फम सरलतापूर्वक चल सकती है, क्योकि उन्हे विशेषज्ञो वी रालाह, इजीनियरी सेवा पुर्ज़े, कच्चा माल मौर ऐसौ ही चीजे सस्ती दर पर उपलब्ध होती हैं और वे अपना माल भन्तिम या मध्यवर्ती खरीदार को श्रासानी से बेच सकती है। बाजार जितना अच्छी तरह सगठित होगा, उतना ही हर फर्म को खुद कम काम करना होगा, और बड़े पैमाने पर सगठन के लाभ भी कम होगे । इसी का उपसिद्धान्त यह है वि भगर हम छोटे पैमाने के उद्यम को बढ़ावा देना चाहते हैं तो इसवा सर्वोत्तम उपाय यह है कि छोटी फर्म के मासपास विशेषज्ञ सेवामी और विपणन एजेंसियों की व्यवस्था कर दी जाए, जो इतनी कार्यकुशल और सस्ती हो कि फर्म को छोटा होने के कारण ही हानियों न उठानी पडें । बडा सगठन अनुसन्धान कर सकता है, बडो राशियों में सरीदबेच सकता है, रुपया इकट्ठा कर सकता है, मानव-वस्तु तैयार कर सकता है, विज्ञापन का सर्च उठा सकता है बढ़िया-से-चढ़िया विशेषज्ञ की सलाह प्राप्त वर सकता है, प्रादि-प्रादि । छोटा सगठन भी यह सब काम सफलतापूर्वक कर रास्ता है मगर उसके चारो भोर-निजी, सहवारी या साविधिव-एजेंसियाँ हो जो वे सारा काम सँभाल सके, जिसका निष्पादन बड़े पैमाने पर हो सम्भव है। इस स्थिति म छोटो फर्म उन कार्यों पर ध्यान केन्द्रित र सकती है जो छोटे पैमाने पर मच्छी तरह किये जा सकते हैं। उदाहरण वे लिए, छोटी फर्म का विशेषज्ञ की सलाह दृषि-विस्तार सेवा से, मानक बोजगोदामो से और ट्रैक्टर विराय पर देने वाली एजेंसी से लेने की सुविधा हो, और वह अपना माल ऐसी एजेंसी को बेच सवे जो अनेक ऐसी पा माल इकट्ठा करके उसकी दर्जेबन्दी, प्रक्रियाकरण, विज्ञापन और बडी राशियो में बेचने को व्यवस्था कर गर्ने । यह सही नहीं है कि वायंबुशलना या माथित्र विषास के हित में बड़े पैमाने पर उत्पादन करना हो हर कर्म के लिए भावश्यक है, लेकिन यह ठीक है कि विशेषता के लाभ प्राप्त करने में लिए पर्म के सन्दरही या मुमठिन बाजारो को रचना वे पन्तर्गत बड़े पैमान के लाभ उपलब्ध हो । सुगगठित बाजार बडो पर्म वा स्थान मि सीमा तन ग्रहण कर सकता है यह उद्योग की प्रकृति पर निर्भर है। रेल यातायात, इस्पात का निर्माण और मोटरवार जोडो वा बाम छोटे पैमाने पर बुरालतापूर्वक वरना बहुत मुश्विल होगा, जबति छाटे पैमाने ने उद्यमग यातायात, दुशानदारी, बुछ विशिष्ट इपिनार्य और बुछ विनिर्माण कार्य बडो
आयिन संस्थान कि बाजार जितना हो कम पूर्ण होता है उतना ही उद्यमक्र्ता को विशेषज्ञों की कियाग्रो मे समन्वय वरने का अवसर मिलता है। यह सोचना गलत है कि विशेषज्ञता के सिद्धान्त बड़े पैमाने के संगठन के अनुकूल होते है। मच्छी तरह सगठित बाजारो मे छोटो फम सरलतापूर्वक चल सकती है, क्योकि उन्हे विशेषज्ञो वी रालाह, इजीनियरी सेवा पुर्ज़े, कच्चा माल मौर ऐसौ ही चीजे सस्ती दर पर उपलब्ध होती हैं और वे अपना माल भन्तिम या मध्यवर्ती खरीदार को श्रासानी से बेच सकती है। बाजार जितना अच्छी तरह सगठित होगा, उतना ही हर फर्म को खुद कम काम करना होगा, और बड़े पैमाने पर सगठन के लाभ भी कम होगे । इसी का उपसिद्धान्त यह है वि भगर हम छोटे पैमाने के उद्यम को बढ़ावा देना चाहते हैं तो इसवा सर्वोत्तम उपाय यह है कि छोटी फर्म के मासपास विशेषज्ञ सेवामी और विपणन एजेंसियों की व्यवस्था कर दी जाए, जो इतनी कार्यकुशल और सस्ती हो कि फर्म को छोटा होने के कारण ही हानियों न उठानी पडें । बडा सगठन अनुसन्धान कर सकता है, बडो राशियों में सरीदबेच सकता है, रुपया इकट्ठा कर सकता है, मानव-वस्तु तैयार कर सकता है, विज्ञापन का सर्च उठा सकता है बढ़िया-से-चढ़िया विशेषज्ञ की सलाह प्राप्त वर सकता है, प्रादि-प्रादि । छोटा सगठन भी यह सब काम सफलतापूर्वक कर रास्ता है मगर उसके चारो भोर-निजी, सहवारी या साविधिव-एजेंसियाँ हो जो वे सारा काम सँभाल सके, जिसका निष्पादन बड़े पैमाने पर हो सम्भव है। इस स्थिति म छोटो फर्म उन कार्यों पर ध्यान केन्द्रित र सकती है जो छोटे पैमाने पर मच्छी तरह किये जा सकते हैं। उदाहरण वे लिए, छोटी फर्म का विशेषज्ञ की सलाह दृषि-विस्तार सेवा से, मानक बोजगोदामो से और ट्रैक्टर विराय पर देने वाली एजेंसी से लेने की सुविधा हो, और वह अपना माल ऐसी एजेंसी को बेच सवे जो अनेक ऐसी पा माल इकट्ठा करके उसकी दर्जेबन्दी, प्रक्रियाकरण, विज्ञापन और बडी राशियो में बेचने को व्यवस्था कर गर्ने । यह सही नहीं है कि वायंबुशलना या माथित्र विषास के हित में बड़े पैमाने पर उत्पादन करना हो हर कर्म के लिए भावश्यक है, लेकिन यह ठीक है कि विशेषता के लाभ प्राप्त करने में लिए पर्म के सन्दरही या मुमठिन बाजारो को रचना वे पन्तर्गत बड़े पैमान के लाभ उपलब्ध हो । सुगगठित बाजार बडो पर्म वा स्थान मि सीमा तन ग्रहण कर सकता है यह उद्योग की प्रकृति पर निर्भर है। रेल यातायात, इस्पात का निर्माण और मोटरवार जोडो वा बाम छोटे पैमाने पर बुरालतापूर्वक वरना बहुत मुश्विल होगा, जबति छाटे पैमाने ने उद्यमग यातायात, दुशानदारी, बुछ विशिष्ट इपिनार्य और बुछ विनिर्माण कार्य बडो
गोरखपुर के ज्योतिष से जानिए राखी बांधने का सही समय। गोरखपुर के ज्योतिष से मिली जानकारी के अनुसार 22 अगस्त 2021, पूर्णिमा के दिन पूजा करने का सबसे शुभ मुहूर्त 06 बजकर 15 मिनट सुबह से शाम 05 बजकर 31 मिनट कर रहेगा। इस अवधि में आप स्नान करने के बाद पूजा-पाठ कर सकते हैं। वहीं बहन के लिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 01 बजकर 42 मिनट दोपहर से शाम 04 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। बहन इस अवधि में अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इससे भाई-बहन के रिश्ते मजबूत और स्नेह से भरे रहेंगे। इस मंत्र का करें जापः बहन भाई की कलाई पर राखी बांधते समय येन बुद्धो बलिः राजा दानवेंद्रो महाबल। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल। मंत्र का जाप कर सकते हैं।
गोरखपुर के ज्योतिष से जानिए राखी बांधने का सही समय। गोरखपुर के ज्योतिष से मिली जानकारी के अनुसार बाईस अगस्त दो हज़ार इक्कीस, पूर्णिमा के दिन पूजा करने का सबसे शुभ मुहूर्त छः बजकर पंद्रह मिनट सुबह से शाम पाँच बजकर इकतीस मिनट कर रहेगा। इस अवधि में आप स्नान करने के बाद पूजा-पाठ कर सकते हैं। वहीं बहन के लिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त एक बजकर बयालीस मिनट दोपहर से शाम चार बजकर अट्ठारह मिनट तक रहेगा। बहन इस अवधि में अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इससे भाई-बहन के रिश्ते मजबूत और स्नेह से भरे रहेंगे। इस मंत्र का करें जापः बहन भाई की कलाई पर राखी बांधते समय येन बुद्धो बलिः राजा दानवेंद्रो महाबल। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल। मंत्र का जाप कर सकते हैं।
जानी-मानी भोजपुरी एक्ट्रेस प्राची सिंह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर को-आर्टिस्ट अरविंद अकेला कल्लू के लिए एक दिल जीत लेने वाला नोट लिखा है . कथित तौर पर, दोनों कलाकार इन दिनों मुंबई के मड आईलैंड एरिया में एक स्पेशल गाने की शूटिंग में बिजी है. इंस्टाग्राम पर प्राची सिंह ने सेट से कल्लू के साथ एक रोमांटिक फोटोज भी साझा की है. फोटोज में, जोड़ी एक्टर को एक ऑरेंज कलर की ड्रेस में देखा जा सकता है. अभिनेत्री खूबसूरत लहंगा पहने दिखाई दे रही है जबकि अरविंद ने ऑरेंज टी-शर्ट पहन रखी है. फोटोज साझा करते हुए उन्होंने लिखा, "अच्छे आदमी को ढूंढना मुश्किल है, क्योंकि वो आमतौर पर #shootday #shootingdairies @arvindakelakallu" काम करने में बिजी रहते हैं. वर्क फ्रंट के बारें में बात की जाए तो, प्राची की झोली में इस वक्त कई फिल्में हैं जैसे 'मेरे प्यार से मिला दे' और 'पाच महरिया' में सह-अभिनीत प्रियंका पंडित, निशा दुबे, कनक पांडे, संचिता बनर्जी और किशन राय के साथ वो दिखाई देने वाली है. अरविंद अकेला कल्लू ने हाल ही में भोजपुरी की सुप्रसिद्ध एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे के साथ मूवी 'शादी मुबारक' कंप्लीट की है. इस मूवी के समापन पर कल्लू ने हनुमान गढ़ी से कुछ फोटोज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा कर दी है.
जानी-मानी भोजपुरी एक्ट्रेस प्राची सिंह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर को-आर्टिस्ट अरविंद अकेला कल्लू के लिए एक दिल जीत लेने वाला नोट लिखा है . कथित तौर पर, दोनों कलाकार इन दिनों मुंबई के मड आईलैंड एरिया में एक स्पेशल गाने की शूटिंग में बिजी है. इंस्टाग्राम पर प्राची सिंह ने सेट से कल्लू के साथ एक रोमांटिक फोटोज भी साझा की है. फोटोज में, जोड़ी एक्टर को एक ऑरेंज कलर की ड्रेस में देखा जा सकता है. अभिनेत्री खूबसूरत लहंगा पहने दिखाई दे रही है जबकि अरविंद ने ऑरेंज टी-शर्ट पहन रखी है. फोटोज साझा करते हुए उन्होंने लिखा, "अच्छे आदमी को ढूंढना मुश्किल है, क्योंकि वो आमतौर पर #shootday #shootingdairies @arvindakelakallu" काम करने में बिजी रहते हैं. वर्क फ्रंट के बारें में बात की जाए तो, प्राची की झोली में इस वक्त कई फिल्में हैं जैसे 'मेरे प्यार से मिला दे' और 'पाच महरिया' में सह-अभिनीत प्रियंका पंडित, निशा दुबे, कनक पांडे, संचिता बनर्जी और किशन राय के साथ वो दिखाई देने वाली है. अरविंद अकेला कल्लू ने हाल ही में भोजपुरी की सुप्रसिद्ध एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे के साथ मूवी 'शादी मुबारक' कंप्लीट की है. इस मूवी के समापन पर कल्लू ने हनुमान गढ़ी से कुछ फोटोज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा कर दी है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
रिकार्ड्स उनके नाम : # रविन्द्र जडेजा वनडे रैंकिंग में नंबर-1 के पायदान पर आने वाले भारत के दूसरे गेंदबाज हैं, उनसे पहेल सिर्फ अनिल कुंबले ये उपलब्धि हासिल कर पाए थे. वह साल 2013 में आईसीसी की रैंकिंग में नंबर-1 पायदान पर आये थे. # सौराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम में खेली गई अंतर जिला टी-20 टूनार्मेंट के दौरान जामनगर और अमरेली के बीच मैच में रविन्द्र जडेजा ने एक ओवर में छह छक्के जड़ दिये थे. # रविन्द्र जडेजा आईपीएल में कुल 4 टीम से खेल चुके हैं. जिसमे राजस्थान रॉयल्स, कोच्ची टस्कर्स केरला, चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात लायंस शामिल है.
रिकार्ड्स उनके नाम : # रविन्द्र जडेजा वनडे रैंकिंग में नंबर-एक के पायदान पर आने वाले भारत के दूसरे गेंदबाज हैं, उनसे पहेल सिर्फ अनिल कुंबले ये उपलब्धि हासिल कर पाए थे. वह साल दो हज़ार तेरह में आईसीसी की रैंकिंग में नंबर-एक पायदान पर आये थे. # सौराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम में खेली गई अंतर जिला टी-बीस टूनार्मेंट के दौरान जामनगर और अमरेली के बीच मैच में रविन्द्र जडेजा ने एक ओवर में छह छक्के जड़ दिये थे. # रविन्द्र जडेजा आईपीएल में कुल चार टीम से खेल चुके हैं. जिसमे राजस्थान रॉयल्स, कोच्ची टस्कर्स केरला, चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात लायंस शामिल है.
सड़क पर अविभाजित शक्ति प्राप्त करना चाहते हैंऔर एक अविस्मरणीय ड्राइविंग खुशी? फिर आपका नया दोस्त एक नया निसान पाथफाइंडर होना चाहिए - एक ऑफ-रोड कार, नवीनतम तकनीक और उच्च स्तर के उपकरण के साथ बनाया गया। बुद्धिमान ऑल-मोड सिस्टम के लिए धन्यवाद4 × 4-आई, जिसमें शस्त्रागार का इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण होता है और निचले गियर को स्थानांतरित करने की संभावना है, निसान पाथफाइंडर गंदगी, बर्फ या गीली सड़कों के माध्यम से आसानी से चलती है, जो अधिकतम गतिशील प्रयास दिखाती है। निर्माता नोट करता है कि यह मॉडल बन गया हैईंधन की खपत में 25% अधिक किफायती, इसके पूर्ववर्ती की तुलना में। यह परिणाम डेवलपर्स द्वारा प्राप्त किया गया था, शरीर के फ्रेम संरचना की अस्वीकृति के कारण। इसके अलावा, निसान पाथफाइंडर (नया) 227 किलो वजन "वज़न" और अब एसयूवी के फ्रंट व्हील ड्राइव संस्करण का वजन 1,882 किलोग्राम और ऑल-व्हील ड्राइव -1946 किलोग्राम है। कार के तकनीकी कार्यों की सूची में दिखाई देते हैंतीन बैंड जलवायु नियंत्रण, डीवीडी प्लेयर और मॉनिटर वापस पंक्ति, मल्टीमीडिया प्रणाली, ऑडियो सिस्टम बोस, 13 वीं स्पीकर सिस्टम परिपत्र वीडियो की समीक्षा, एक गर्म स्टीयरिंग व्हील, सामने की सीट की वेंटिलेशन के प्रणाली, यात्री हीटिंग सिस्टम के साथ पूरा में बैठे यात्रियों के लिए करना है दूसरी पंक्ति और बूट लिड, एक इलेक्ट्रिक ड्राइव से सुसज्जित सामान्य तौर पर, डेवलपर्स ने चालक और यात्रियों दोनों के लिए अधिकतम प्रयासों को बनाने में बहुत मेहनत की है। गति और ड्राइविंग के लिएनए विदेशी की विशेषताओं, तो सब कुछ उच्चतम स्तर पर है। 100 किमी में तेजी लाने के लिए, कार को केवल 8.2 सेकंड की आवश्यकता होती है। सड़क पर, निसान पाथफाइंडर स्थिर और अनुमान लगाने योग्य व्यवहार दर्शाता है। इस मॉडल के निर्विवाद "प्लसस" भी एक स्पष्ट स्टीयरिंग और आरामदायक ऊर्जा-सघन निलंबन हैं। मिश्रित मोड में, ईंधन की खपत हैऔसत 11-11.5 लीटर, और शहरी में - कार की जरूरत 13-14 लीटर तक बढ़ जाती है, लेकिन यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि 256 "घोड़ों" को उपयुक्त "खिला" की आवश्यकता होती है।
सड़क पर अविभाजित शक्ति प्राप्त करना चाहते हैंऔर एक अविस्मरणीय ड्राइविंग खुशी? फिर आपका नया दोस्त एक नया निसान पाथफाइंडर होना चाहिए - एक ऑफ-रोड कार, नवीनतम तकनीक और उच्च स्तर के उपकरण के साथ बनाया गया। बुद्धिमान ऑल-मोड सिस्टम के लिए धन्यवादचार × चार-आई, जिसमें शस्त्रागार का इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण होता है और निचले गियर को स्थानांतरित करने की संभावना है, निसान पाथफाइंडर गंदगी, बर्फ या गीली सड़कों के माध्यम से आसानी से चलती है, जो अधिकतम गतिशील प्रयास दिखाती है। निर्माता नोट करता है कि यह मॉडल बन गया हैईंधन की खपत में पच्चीस% अधिक किफायती, इसके पूर्ववर्ती की तुलना में। यह परिणाम डेवलपर्स द्वारा प्राप्त किया गया था, शरीर के फ्रेम संरचना की अस्वीकृति के कारण। इसके अलावा, निसान पाथफाइंडर दो सौ सत्ताईस किलो वजन "वज़न" और अब एसयूवी के फ्रंट व्हील ड्राइव संस्करण का वजन एक,आठ सौ बयासी किलोग्रामग्राम और ऑल-व्हील ड्राइव -एक हज़ार नौ सौ छियालीस किलोग्रामग्राम है। कार के तकनीकी कार्यों की सूची में दिखाई देते हैंतीन बैंड जलवायु नियंत्रण, डीवीडी प्लेयर और मॉनिटर वापस पंक्ति, मल्टीमीडिया प्रणाली, ऑडियो सिस्टम बोस, तेरह वीं स्पीकर सिस्टम परिपत्र वीडियो की समीक्षा, एक गर्म स्टीयरिंग व्हील, सामने की सीट की वेंटिलेशन के प्रणाली, यात्री हीटिंग सिस्टम के साथ पूरा में बैठे यात्रियों के लिए करना है दूसरी पंक्ति और बूट लिड, एक इलेक्ट्रिक ड्राइव से सुसज्जित सामान्य तौर पर, डेवलपर्स ने चालक और यात्रियों दोनों के लिए अधिकतम प्रयासों को बनाने में बहुत मेहनत की है। गति और ड्राइविंग के लिएनए विदेशी की विशेषताओं, तो सब कुछ उच्चतम स्तर पर है। एक सौ किमी में तेजी लाने के लिए, कार को केवल आठ दशमलव दो सेकंड की आवश्यकता होती है। सड़क पर, निसान पाथफाइंडर स्थिर और अनुमान लगाने योग्य व्यवहार दर्शाता है। इस मॉडल के निर्विवाद "प्लसस" भी एक स्पष्ट स्टीयरिंग और आरामदायक ऊर्जा-सघन निलंबन हैं। मिश्रित मोड में, ईंधन की खपत हैऔसत ग्यारह-ग्यारह दशमलव पाँच लीटरटर, और शहरी में - कार की जरूरत तेरह-चौदह लीटरटर तक बढ़ जाती है, लेकिन यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि दो सौ छप्पन "घोड़ों" को उपयुक्त "खिला" की आवश्यकता होती है।
गर्मी और तेज चिलचिलाती धूप में बहुत से लोग घमोरियों से परेशान रहते हैं। कई बार पसीना आने से फंगस और बैक्टीरियल इंफेक्शन होने की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही पसीना आने से स्किन एलर्जी और स्किन डिजीज होने का भी खतरा रहता है। ऐसे में जिन्हे इन सब चीजों की अधिक दिक्कत हो उन्हें साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही अधिक देर तक गर्मी में रहते हैं तो कपड़े भी बदल लें। पसीने से भीगा हुआ कपड़ा अधिक देर तक न पहने। गर्मियों में कोशिश करें कॉटन के कपड़े पहनें और फुटवियर भी ऐसे पहनें जिनमें आसानी हवा पास होती रहे। इंफेक्शन होने पर एंटी फंगल पाउडर, सोप या बॉडीवॉश का इस्तेमाल करें। गर्मी के सीजन में घमौरियां सबसे अधिक परेशान करती हैं। घमौरियों से बचने के लिए साफ-सफाई रखें। एंटी फंगस प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। दरअसल घमौरी एक तरह से स्किन एलर्जी है, जिसमें गर्दन, पीठ और फेस पर छोटे-छोटे लाल रंग के दाने निकल आते हैं। ये दाने पसीने से रोम छिद्र बंद हों ऐसे हो जाते हैं। घमौरी से राहत पाने के लिए आप एलोवेरा जेल लगा सकती है। इसके साथ ही पाउडर और लैक्टो कैलेमाइन लोशन का इस्तेमाल किया सकता है। कई बार पसीने और चिपचिपाहट की वजह से स्किन पर रैशेज आ जाते हैं। पसीने से भीगे कपड़ों की वजह से सिरोसिस नाम की बीमारी होने का खतरा रहता है। इस बीमारी में त्वचा पर रैशेज पड़ जाते हैं। इससे बचने के लिए हमेशा सूखे कपड़े पहनें और पाउडर लगाएं। सिर को साफ रखने के लिए रेगुलर शैम्पू करें। पसीने की वजह से शरीर पर फंगस और बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं। फंगल इंफेक्शन में दाद, एथलीट फुट और नेल इंफेक्शन होने का जोखिम रहता है। इससे बचने के लिए दिन में 2-3 बार स्किन को धो और स्किन को ड्राई रखने की कोशिश करें। ड्राई स्किन के लिए त्वचा पर मॉइस्चराइज का इस्तेमाल करें जबकि ऑयली स्किन को साफ करते रहे।
गर्मी और तेज चिलचिलाती धूप में बहुत से लोग घमोरियों से परेशान रहते हैं। कई बार पसीना आने से फंगस और बैक्टीरियल इंफेक्शन होने की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही पसीना आने से स्किन एलर्जी और स्किन डिजीज होने का भी खतरा रहता है। ऐसे में जिन्हे इन सब चीजों की अधिक दिक्कत हो उन्हें साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही अधिक देर तक गर्मी में रहते हैं तो कपड़े भी बदल लें। पसीने से भीगा हुआ कपड़ा अधिक देर तक न पहने। गर्मियों में कोशिश करें कॉटन के कपड़े पहनें और फुटवियर भी ऐसे पहनें जिनमें आसानी हवा पास होती रहे। इंफेक्शन होने पर एंटी फंगल पाउडर, सोप या बॉडीवॉश का इस्तेमाल करें। गर्मी के सीजन में घमौरियां सबसे अधिक परेशान करती हैं। घमौरियों से बचने के लिए साफ-सफाई रखें। एंटी फंगस प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। दरअसल घमौरी एक तरह से स्किन एलर्जी है, जिसमें गर्दन, पीठ और फेस पर छोटे-छोटे लाल रंग के दाने निकल आते हैं। ये दाने पसीने से रोम छिद्र बंद हों ऐसे हो जाते हैं। घमौरी से राहत पाने के लिए आप एलोवेरा जेल लगा सकती है। इसके साथ ही पाउडर और लैक्टो कैलेमाइन लोशन का इस्तेमाल किया सकता है। कई बार पसीने और चिपचिपाहट की वजह से स्किन पर रैशेज आ जाते हैं। पसीने से भीगे कपड़ों की वजह से सिरोसिस नाम की बीमारी होने का खतरा रहता है। इस बीमारी में त्वचा पर रैशेज पड़ जाते हैं। इससे बचने के लिए हमेशा सूखे कपड़े पहनें और पाउडर लगाएं। सिर को साफ रखने के लिए रेगुलर शैम्पू करें। पसीने की वजह से शरीर पर फंगस और बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं। फंगल इंफेक्शन में दाद, एथलीट फुट और नेल इंफेक्शन होने का जोखिम रहता है। इससे बचने के लिए दिन में दो-तीन बार स्किन को धो और स्किन को ड्राई रखने की कोशिश करें। ड्राई स्किन के लिए त्वचा पर मॉइस्चराइज का इस्तेमाल करें जबकि ऑयली स्किन को साफ करते रहे।
शिव पूजा का विश्व-प्रसार भगवान शिव पार्वती के पति हैं। उनकी पूजा भी सारे विश्व में होती थी । उन्हें Father God यानि पितृदेव कहा जाता था। इंग्लैण्ड में Caius College है । उस शब्द के प्रथम अक्षर 'C' का उच्चार यदि 'श' किया जाए तो शिवस्' उच्चार होता है । Canterbury इंग्लैण्ड की शंकरपुरी है । प्रायश्चित की प्रथा ईसाइयों में धर्मगुरु से भेंट कर निजी पापों को प्रकट रूप से स्वयं कह डालना और धर्मगुरु द्वारा उसका प्रायश्चित कराने की प्रथा वैदिक प्रणाली से ही चली आ रही है। राम और कृष्ण की भक्ति राम और कृष्ण वैदिक परम्परा में माने हुए अवतार हैं। उनकी भक्ति प्राचीन विश्व में हर प्रदेश और हर नगर में होती थी। इसके अनेक प्रमाण इस ग्रन्थ में समय-समय पर हम दे चुके हैं। रामायण हर देश में अभी भी किसी न किसी रूप में उपलब्ध है। उसका ब्यौरा हम दे चुके हैं । रोम नगर, राम के नाम से बसा हुआ है तो जेरूसलेम = येरूशालेयम यदुईशालयम् कृष्ण के नाम से बसा हुआ है। उधर मुसलमानों में रामझान यानि रामध्यान का महीना है तो इधर ईसाई कृसमास यानि कृष्णमासोत्सर्व का पर्व मनाते हैं। राम और कृष्ण से स्थान नाम और व्यक्ति के नाम मुसलमानों में और ईसाइयों में किस तरह पड़े हैं, यह हम बता चुके हैं। मुसलमानों का 'ईदगाह' वस्तुतः 'ईड + गेह' यानि 'पूजा घर' संस्कृत शब्द है। ईदगाहों में वैदिक देवमूर्तियाँ होती थीं। वैदिक वर्ण- प्रथा वैदिक समाज में चार प्रमुख वर्ण यानि व्यवसाय वर्ग - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र होते हैं। सारे विश्व में ऐसा चार वर्ण का समाज होता था; इसका उल्लेख हम इस ग्रन्थ में समय-समय पर कर चुके हैं। जैसे रोमन सेनानी जूलियस सीझर के संस्मरण में यूरोपीय समाज के चार वर्णों का उल्लेख है। आवश्यकता पड़ने पर ब्राह्मण चारों वर्णों से एक-एक पत्नी रख सकता था। इस प्रकार चार पत्नियाँ रखने की प्रथा अरबों में इस्लामपूर्व काल से चली आ रही थी । दैनन्दिन वैदिक आचार-प्रणाली वैदिक जीवन पद्धति में दैनन्दिन व्यवहार पंचांग में बताए ग्रहयोगों से बँधे होते हैं । इस व्यवस्था में कई बड़े ऊंचे तथ्य अन्तर्भूत हैं। एक तो यह कि मानवीय जीवन विश्वयंत्रणा का एक अंग है। दूसरा यह कि मनमाना जीवन बिताने से समाज में अव्यवस्था, अनाचार और अशान्ति फैलती है। अतः प्रत्येक व्यक्ति के दैनन्दिन व्यवहार, दैवी ग्रहयोगों के नियमानुसार ढाले जाने चाहिएँ । प्रत्येक दिन के ग्रहयोगों के अनुसार उस दिन के विशिष्ट आचार-व्यवहार आदि निश्चित किए जाने से जीवन में एक नई स्फूति, नया रंग, नया उत्साह, नई कर्त्तव्यपूर्ति की भावना जागृत रहकर, आलस्य, जीर्णता, नीरसता, विफलता, निराशा आदि से मन मुक्त रहता है। अतः पंचांग दैनन्दिन ग्रहयोग देखकर जब अक्षय्य तृतीया, कर्वा चौथ, नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, एकादशी, सर्वपित्री अमावस्या, प्रदोष, विजयादशमी, नवरात्र, लोढ़ी, नवरात्र, दशहरा, दीपावली, गणेश चतुर्थी आदि के अनुसार समाज के व्यवहार होते रहते हैं तो समाज में मिलकर रहने की भावना बढ़ती है और प्रत्येक व्यक्ति आगामी दिन के व्यवहार बड़े उत्साह, स्फूर्ति और श्रद्धा के साथ निभाता है । इस्लाम और ईसाई पन्थ चलाए जाने से पूर्व सारे विश्व में उसी वैदिक ज्योतिषीय नियमानुसार मानवीय व्यवहार किए जाते थे। इसी कारण ब्रिटिश ज्ञानकोष में Church शीर्षक के नीचे दिए ब्यौरे में लिखा है कि विश्व के लगभग सारे प्रमुख गिरिजाघर ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बने हैं। ईजिप्त का प्रचीन Karnak मन्दिर संस्कृत कोणार्क का अपभ्रंश है । भारत के पूर्वी किनारे पर उड़ीसा राज्य में बना प्राचीन भव्य मन्दिर इसीPDF compression, OCR, web optimization using a watermarked evaluation copy of CVISION PDFCompressor
शिव पूजा का विश्व-प्रसार भगवान शिव पार्वती के पति हैं। उनकी पूजा भी सारे विश्व में होती थी । उन्हें Father God यानि पितृदेव कहा जाता था। इंग्लैण्ड में Caius College है । उस शब्द के प्रथम अक्षर 'C' का उच्चार यदि 'श' किया जाए तो शिवस्' उच्चार होता है । Canterbury इंग्लैण्ड की शंकरपुरी है । प्रायश्चित की प्रथा ईसाइयों में धर्मगुरु से भेंट कर निजी पापों को प्रकट रूप से स्वयं कह डालना और धर्मगुरु द्वारा उसका प्रायश्चित कराने की प्रथा वैदिक प्रणाली से ही चली आ रही है। राम और कृष्ण की भक्ति राम और कृष्ण वैदिक परम्परा में माने हुए अवतार हैं। उनकी भक्ति प्राचीन विश्व में हर प्रदेश और हर नगर में होती थी। इसके अनेक प्रमाण इस ग्रन्थ में समय-समय पर हम दे चुके हैं। रामायण हर देश में अभी भी किसी न किसी रूप में उपलब्ध है। उसका ब्यौरा हम दे चुके हैं । रोम नगर, राम के नाम से बसा हुआ है तो जेरूसलेम = येरूशालेयम यदुईशालयम् कृष्ण के नाम से बसा हुआ है। उधर मुसलमानों में रामझान यानि रामध्यान का महीना है तो इधर ईसाई कृसमास यानि कृष्णमासोत्सर्व का पर्व मनाते हैं। राम और कृष्ण से स्थान नाम और व्यक्ति के नाम मुसलमानों में और ईसाइयों में किस तरह पड़े हैं, यह हम बता चुके हैं। मुसलमानों का 'ईदगाह' वस्तुतः 'ईड + गेह' यानि 'पूजा घर' संस्कृत शब्द है। ईदगाहों में वैदिक देवमूर्तियाँ होती थीं। वैदिक वर्ण- प्रथा वैदिक समाज में चार प्रमुख वर्ण यानि व्यवसाय वर्ग - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र होते हैं। सारे विश्व में ऐसा चार वर्ण का समाज होता था; इसका उल्लेख हम इस ग्रन्थ में समय-समय पर कर चुके हैं। जैसे रोमन सेनानी जूलियस सीझर के संस्मरण में यूरोपीय समाज के चार वर्णों का उल्लेख है। आवश्यकता पड़ने पर ब्राह्मण चारों वर्णों से एक-एक पत्नी रख सकता था। इस प्रकार चार पत्नियाँ रखने की प्रथा अरबों में इस्लामपूर्व काल से चली आ रही थी । दैनन्दिन वैदिक आचार-प्रणाली वैदिक जीवन पद्धति में दैनन्दिन व्यवहार पंचांग में बताए ग्रहयोगों से बँधे होते हैं । इस व्यवस्था में कई बड़े ऊंचे तथ्य अन्तर्भूत हैं। एक तो यह कि मानवीय जीवन विश्वयंत्रणा का एक अंग है। दूसरा यह कि मनमाना जीवन बिताने से समाज में अव्यवस्था, अनाचार और अशान्ति फैलती है। अतः प्रत्येक व्यक्ति के दैनन्दिन व्यवहार, दैवी ग्रहयोगों के नियमानुसार ढाले जाने चाहिएँ । प्रत्येक दिन के ग्रहयोगों के अनुसार उस दिन के विशिष्ट आचार-व्यवहार आदि निश्चित किए जाने से जीवन में एक नई स्फूति, नया रंग, नया उत्साह, नई कर्त्तव्यपूर्ति की भावना जागृत रहकर, आलस्य, जीर्णता, नीरसता, विफलता, निराशा आदि से मन मुक्त रहता है। अतः पंचांग दैनन्दिन ग्रहयोग देखकर जब अक्षय्य तृतीया, कर्वा चौथ, नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, एकादशी, सर्वपित्री अमावस्या, प्रदोष, विजयादशमी, नवरात्र, लोढ़ी, नवरात्र, दशहरा, दीपावली, गणेश चतुर्थी आदि के अनुसार समाज के व्यवहार होते रहते हैं तो समाज में मिलकर रहने की भावना बढ़ती है और प्रत्येक व्यक्ति आगामी दिन के व्यवहार बड़े उत्साह, स्फूर्ति और श्रद्धा के साथ निभाता है । इस्लाम और ईसाई पन्थ चलाए जाने से पूर्व सारे विश्व में उसी वैदिक ज्योतिषीय नियमानुसार मानवीय व्यवहार किए जाते थे। इसी कारण ब्रिटिश ज्ञानकोष में Church शीर्षक के नीचे दिए ब्यौरे में लिखा है कि विश्व के लगभग सारे प्रमुख गिरिजाघर ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बने हैं। ईजिप्त का प्रचीन Karnak मन्दिर संस्कृत कोणार्क का अपभ्रंश है । भारत के पूर्वी किनारे पर उड़ीसा राज्य में बना प्राचीन भव्य मन्दिर इसीPDF compression, OCR, web optimization using a watermarked evaluation copy of CVISION PDFCompressor
Saraikela : सार्थक युवा क्लब के द्वारा आदित्यपुर के उर्मिला भवन में निःशुल्क हेल्थ चेकअप कैम्प का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में आरआईटी थाना प्रभारी मो. तंज़ील खान और विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्पूर्ण मानवता कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ संजय गिरी शामिल हुए. इस दौरान उपस्थित अतिथियों को अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया और क्लब के सदस्यों को सम्मानित भी किया गया. होम्योपैथी के लिए डॉ रेणु शर्मा, सर्जन डॉ अजय कुमार एवं नेत्र जांच के लिए संजीव नेत्रालय के चिकित्सकों का सहयोग रहा. जापानी मशीन के द्वारा पूरे शरीर की जांच जितेंद्र कुमार द्वारा की गई. मुख्य अतिथि ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए समय-समय पर इस तरह के कैम्प का आयोजन होते रहना चाहिए. वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा, अभय मिश्रा, सौरभ पाठक, राहुल कुमार, रोहित कुमार, सौरभ कुमार, आयुष, अक्षय मिश्रा, रविन्द्र नाथ मिश्रा, निर्मल मिश्रा, दीपक कुमार समेत अन्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
Saraikela : सार्थक युवा क्लब के द्वारा आदित्यपुर के उर्मिला भवन में निःशुल्क हेल्थ चेकअप कैम्प का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में आरआईटी थाना प्रभारी मो. तंज़ील खान और विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्पूर्ण मानवता कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ संजय गिरी शामिल हुए. इस दौरान उपस्थित अतिथियों को अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया और क्लब के सदस्यों को सम्मानित भी किया गया. होम्योपैथी के लिए डॉ रेणु शर्मा, सर्जन डॉ अजय कुमार एवं नेत्र जांच के लिए संजीव नेत्रालय के चिकित्सकों का सहयोग रहा. जापानी मशीन के द्वारा पूरे शरीर की जांच जितेंद्र कुमार द्वारा की गई. मुख्य अतिथि ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए समय-समय पर इस तरह के कैम्प का आयोजन होते रहना चाहिए. वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा, अभय मिश्रा, सौरभ पाठक, राहुल कुमार, रोहित कुमार, सौरभ कुमार, आयुष, अक्षय मिश्रा, रविन्द्र नाथ मिश्रा, निर्मल मिश्रा, दीपक कुमार समेत अन्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
Don't Miss! कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं जिन्हें देखते ही बस मुंह से Awww निकल जाता है। अब शाहरूख खान और एम एस धोनी की बेटी ज़ीवा की भी ऐसी ही कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं जिन्हें देखकर आपके मुंह से Aww निकल ही जाएगा। ये तस्वीर आईपीएल मैच के दौरान की है जहां शाहरूख खान, ज़ीवा के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। एक बार एक वीडियो में तो ज़ीवा, एमएस धोनी के साथ उनकी ही भाषा में बात करती दिखाई दी थीं जिसके बाद लोगों ने धोनी की काफी तारीफ दी थी कि वो अपने बच्चे को अपनी मिट्टी से जुड़े रहना सिखा रहे हैं। ज़ीवा की तस्वीरों का पूरा खज़ाना आप धोनी और साक्षी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर देख सकते हैं।
Don't Miss! कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं जिन्हें देखते ही बस मुंह से Awww निकल जाता है। अब शाहरूख खान और एम एस धोनी की बेटी ज़ीवा की भी ऐसी ही कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं जिन्हें देखकर आपके मुंह से Aww निकल ही जाएगा। ये तस्वीर आईपीएल मैच के दौरान की है जहां शाहरूख खान, ज़ीवा के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। एक बार एक वीडियो में तो ज़ीवा, एमएस धोनी के साथ उनकी ही भाषा में बात करती दिखाई दी थीं जिसके बाद लोगों ने धोनी की काफी तारीफ दी थी कि वो अपने बच्चे को अपनी मिट्टी से जुड़े रहना सिखा रहे हैं। ज़ीवा की तस्वीरों का पूरा खज़ाना आप धोनी और साक्षी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर देख सकते हैं।
बारिश के मौसम में अक्सर स्किन से सम्बंधित बहुत सारी परेशानिया हो जाती है. इस मौसम में सूर्य की रोशनी, कीड़े-मकोड़ों और मच्छरों के काटने से व बरसात के गंदे पानी का असर स्किन को बहुत नुकसान पहुंचाता है. जिसके कारन स्किन पर फोड़े-फुंसियां होने लगते हैं जिनमें काफी दर्द रहता है. इन फोड़े-फुंसियों का कितना भी इलाज करवा लिया जाये पर ये ठीक नहीं हो पाते है. और अगर खत्म हो भी जाते है तो खत्म होने के बाद इनके दाग त्वचा पर रह जाते हैं जो दिखने में बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते. आज हम आपको स्किन का ख्याल रखने के कुछ तरीको के बारे में बताने जा रहे है. चंदन के इस्तेमाल से स्किन से जुडी सभी समस्याओ का इलाज किया जा सकता है. ये किसी भी तरह के फोड़े-फुंसियों का इलाज करने में सक्षम होते है. चंदन में भरपूर मात्रा में एंटीबायोटिक तत्व मौजूद होते हैं, जो स्किन को बाहरी धूल मिट्टी से होने वाले बैक्टीरिया से स्किन की रक्षा करते है. चन्दन के पेस्ट को फोडे-फुंसी और घाव में लगाने से ये जल्दी भरने लगते हैं. साथ ही इसका नियमित इस्तेमाल से इन फोड़े-फुंसी और घाव के दाग भी त्वचा में नहीं रहते.
बारिश के मौसम में अक्सर स्किन से सम्बंधित बहुत सारी परेशानिया हो जाती है. इस मौसम में सूर्य की रोशनी, कीड़े-मकोड़ों और मच्छरों के काटने से व बरसात के गंदे पानी का असर स्किन को बहुत नुकसान पहुंचाता है. जिसके कारन स्किन पर फोड़े-फुंसियां होने लगते हैं जिनमें काफी दर्द रहता है. इन फोड़े-फुंसियों का कितना भी इलाज करवा लिया जाये पर ये ठीक नहीं हो पाते है. और अगर खत्म हो भी जाते है तो खत्म होने के बाद इनके दाग त्वचा पर रह जाते हैं जो दिखने में बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते. आज हम आपको स्किन का ख्याल रखने के कुछ तरीको के बारे में बताने जा रहे है. चंदन के इस्तेमाल से स्किन से जुडी सभी समस्याओ का इलाज किया जा सकता है. ये किसी भी तरह के फोड़े-फुंसियों का इलाज करने में सक्षम होते है. चंदन में भरपूर मात्रा में एंटीबायोटिक तत्व मौजूद होते हैं, जो स्किन को बाहरी धूल मिट्टी से होने वाले बैक्टीरिया से स्किन की रक्षा करते है. चन्दन के पेस्ट को फोडे-फुंसी और घाव में लगाने से ये जल्दी भरने लगते हैं. साथ ही इसका नियमित इस्तेमाल से इन फोड़े-फुंसी और घाव के दाग भी त्वचा में नहीं रहते.
तुम में से प्रत्येक व्यक्ति को नए सिरे से जाँच करनी चाहिए कि अपने पूरे जीवन में तुमने परमेश्वर पर किस तरह से विश्वास किया है, ताकि तुम यह देख सको कि परमेश्वर का अनुसरण करने की प्रक्रिया में तुम परमेश्वर को वास्तव में समझ, बूझ और जान पाए हो या नहीं, तुम वास्तव में जानते हो या नहीं कि विभिन्न प्रकार के मनुष्यों के प्रति परमेश्वर कैसा रवैया रखता है, और तुम वास्तव में उस कार्य को समझ पाए हो या नहीं, जो परमेश्वर तुम पर कर रहा है और परमेश्वर तुम्हारे प्रत्येक कार्य को किस तरह परिभाषित करता है। यह परमेश्वर, जो तुम्हारे साथ है, तुम्हारी प्रगति को दिशा दे रहा है, तुम्हारी नियति निर्धारित कर रहा है, और तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए आपूर्ति कर रहा है - आखिर तुम इस परमेश्वर को कितना समझते हो? तुम इस परमेश्वर के बारे में वास्तव में कितना जानते हो? क्या तुम जानते हो कि हर दिन वह तुम पर क्या कार्य करता है? क्या तुम उन सिद्धांतों और उद्देश्यों को जानते हो, जिन पर वह अपने हर क्रियाकलाप को आधारित करता है? क्या तुम जानते हो, वह कैसे तुम्हारा मार्गदर्शन करता है? क्या तुम उन साधनों को जानते हो, जिनसे वह तुम्हारे लिए आपूर्ति करता है? क्या तुम जानते हो कि किन तरीकों से वह तुम्हारी अगुआई करता है? क्या तुम जानते हो कि वह तुमसे क्या प्राप्त करना चाहता है और तुम में क्या हासिल करना चाहता है? क्या तुम जानते हो कि तुम्हारे अलग-अलग तरह के व्यवहार के प्रति उसका क्या रवैया रहता है? क्या तुम जानते हो कि तुम उसके प्रिय व्यक्ति हो या नहीं? क्या तुम उसके आनंद, क्रोध, दुःख और प्रसन्नता के उद्गम और उनके पीछे छिपे विचारों और अभिप्रायों तथा उसके सत्व को जानते हो? अंततः, क्या तुम जानते हो कि जिस परमेश्वर पर तुम विश्वास करते हो, वह किस प्रकार का परमेश्वर है? क्या ये और इसी प्रकार के अन्य प्रश्न, ऐसे प्रश्न हैं जिनके बारे में तुमने पहले कभी नहीं सोचा या समझा? परमेश्वर पर अपने विश्वास का अनुसरण करते हुए, क्या तुमने परमेश्वर के वचनों की वास्तविक समझ और उनके अनुभव से उसके बारे में अपनी सभी गलतफहमियाँ दूर की हैं? क्या तुमने परमेश्वर के अनुशासन और ताड़ना से गुज़र कर सच्ची आज्ञाकारिता और परवाह पाई है? क्या तुम परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के दौरान मनुष्य की विद्रोहशीलता और शैतानी प्रकृति को जान पाए हो और क्या तुमने परमेश्वर की पवित्रता के बारे में थोड़ी-सी भी समझ प्राप्त की है? क्या तुमने परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन और प्रबुद्धता से जीवन का कोई नया नज़रिया अपनाया है? क्या तुमने परमेश्वर द्वारा भेजे गए परीक्षणों के दौरान मनुष्य के अपराधों के प्रति उसकी असहिष्णुता के साथ-साथ यह महसूस किया है कि वह तुमसे क्या अपेक्षा रखता है और वह तुम्हें कैसे बचा रहा है? यदि तुम यह नहीं जानते कि परमेश्वर को गलत समझना क्या है या इस गलतफहमी को कैसे दूर किया जाए, तो यह कहा जा सकता है कि तुमने परमेश्वर के साथ कभी भी वास्तविक समागम में प्रवेश नहीं किया है और परमेश्वर को कभी नहीं समझा है, या कम-से-कम यह कहा जा सकता है कि तुमने उसे कभी समझना नहीं चाहा है। यदि तुम नहीं जानते कि परमेश्वर का अनुशासन और ताड़ना क्या हैं, तो निश्चित रूप से तुम नहीं जानते कि आज्ञाकारिता और परवाह क्या हैं, या कम से कम तुमने कभी वास्तव में परमेश्वर का आज्ञापालन और उसकी परवाह नहीं की। यदि तुमने कभी परमेश्वर की ताड़ना और न्याय का अनुभव नहीं किया है, तो तुम निश्चित रूप से नहीं जान पाओगे कि उसकी पवित्रता क्या है, और यह तो बिलकुल भी नहीं समझ पाओगे कि मनुष्यों का विद्रोह क्या होता है। यदि जीवन के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण कभी उचित नहीं रहा है या जीवन में सही उद्देश्य नहीं रहा है, बल्कि तुम अभी भी अपने भविष्य के मार्ग के प्रति दुविधा और अनिर्णय की स्थिति में हो, यहाँ तक कि तुम्हें आगे बढ़ने में भी हिचकिचाहट महसूस होती है, तो यह निश्चित है कि तुमने कभी परमेश्वर की प्रबुद्धता और मार्गदर्शन नहीं पाया है; यह भी कहा जा सकता है कि तुम्हें कभी वास्तव में परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति या पुनःपूर्ति प्राप्त नहीं हुई है। यदि तुम अभी तक परमेश्वर के परीक्षणों से नहीं गुज़रे हो, तो कहने की आवश्यकता नहीं है कि तुम निश्चित रूप से नहीं जान पाओगे कि मनुष्य के अपराधों के प्रति परमेश्वर की असहिष्णुता क्या है, न ही तुम यह समझ पाओगे कि आख़िरकार परमेश्वर तुमसे क्या चाहता है, और यह तो बिलकुल भी नहीं समझ पाओगे कि अंततः मनुष्य के प्रबंधन और बचाव का उसका कार्य क्या है। चाहे कोई व्यक्ति कितने ही वर्षों से परमेश्वर पर विश्वास कर रहा हो, यदि उसने कभी उसके वचनों में कुछ अनुभव नहीं किया या उनसे कोई बोध हासिल नहीं किया है, तो फिर वह निश्चित रूप से उद्धार के मार्ग पर नहीं चल रहा है, परमेश्वर पर उसका विश्वास किसी वास्तविक तत्त्व से रहित है, उसका परमेश्वर का ज्ञान भी निश्चित ही शून्य है, और कहने की आवश्यकता नहीं कि परमेश्वर के प्रति श्रद्धा क्या होती है, इसका उसे बिलकुल भी पता नहीं है। परमेश्वर का स्वरूप और अस्तित्व, परमेश्वर का सार, परमेश्वर का स्वभाव - यह सब मानवजाति को उसके वचनों के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। जब मनुष्य परमेश्वर के वचनों को अनुभव करता है, तो उन्हें अभ्यास में लाने की प्रक्रिया में वह परमेश्वर के कहे वचनों के पीछे छिपे उद्देश्य को समझेगा, परमेश्वर के वचनों के स्रोत और पृष्ठभूमि को समझेगा, और परमेश्वर के वचनों के अभीष्ट प्रभाव को समझेगा और बूझेगा। जीवन और सत्य में प्रवेश करने, परमेश्वर के इरादों को समझने, अपना स्वभाव परिवर्तित करने, परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं के प्रति आज्ञाकारी होने में सक्षम होने के लिए मनुष्य को ये सब चीज़ें अनुभव करनी, समझनी और प्राप्त करनी चाहिए। जिस समय मनुष्य इन चीज़ों को अनुभव करता, समझता और प्राप्त करता है, उसी समय वह धीरे-धीरे परमेश्वर की समझ प्राप्त कर लेता है, और साथ ही उसके विषय में वह ज्ञान के विभिन्न स्तरों को भी प्राप्त कर लेता है। यह समझ और ज्ञान मनुष्य द्वारा कल्पित या निर्मित किसी चीज़ से नहीं आती, बल्कि उससे आती है, जिसे वह अपने भीतर समझता, अनुभव करता, महसूस करता और पुष्टि करता है। इन बातों को समझने, अनुभव करने, महसूस करने और पुष्टि करने के बाद ही मनुष्य के परमेश्वर संबंधी ज्ञान में तत्त्व की प्राप्ति होती है; केवल मनुष्य द्वारा इस समय प्राप्त ज्ञान ही वास्तविक, असली और सटीक होता है और यह प्रक्रिया - परमेश्वर के वचनों को समझने, अनुभव करने, महसूस करने और उनकी पुष्टि करने के माध्यम से परमेश्वर की वास्तविक समझ और ज्ञान प्राप्त करने की यह प्रक्रिया, और कुछ नहीं, वरन् परमेश्वर और मनुष्य के मध्य सच्चा संवाद है। इस प्रकार के समागम के मध्य मनुष्य सच में परमेश्वर के उद्देश्यों को समझ-बूझ पाता है, परमेश्वर के स्वरूप और अस्तित्व को जान पाता है, सच में परमेश्वर के सार को समझ और जान पाता है, धीरे-धीरे परमेश्वर के स्वभाव को जान और समझ पाता है, संपूर्ण सृष्टि के ऊपर परमेश्वर के प्रभुत्व के बारे में निश्चितता और उसकी सही परिभाषा पर पहुँच पाता है और परमेश्वर की पहचान और स्थिति का ज्ञान और अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्थिति की अनिवार्य समझ प्राप्त कर पाता है। इस प्रकार के समागम के मध्य मनुष्य परमेश्वर के प्रति अपने विचार थोड़ा-थोड़ा करके बदलता है, वह परमेश्वर को अपनी कल्पना की उड़ान नहीं मानता, या वह उसके बारे में अपने संदेहों को बेलगाम नहीं दौड़ाता, या उसे गलत नहीं समझता, उसकी निंदा नहीं करता, उसकी आलोचना नहीं करता या उस पर संदेह नहीं करता। इस प्रकार, परमेश्वर के साथ मनुष्य के विवाद बहुत कम होंगे, वह परमेश्वर के साथ कम संघर्ष करेगा, और ऐसे मौके कम आएँगे, जब वह परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करेगा। इसके विपरीत, मनुष्य द्वारा परमेश्वर की परवाह और आज्ञाकारिता बढ़ेगी और परमेश्वर के प्रति उसका आदर अधिक वास्तविक और गहन होगा। ऐसे समागम के मध्य, मनुष्य न केवल सत्य का पोषण और जीवन का बपतिस्मा प्राप्त करेगा, बल्कि उसी समय वह परमेश्वर का वास्तविक ज्ञान भी प्राप्त करेगा। ऐसे समागम के मध्य न केवल मनुष्य का स्वभाव बदलेगा और वह उद्धार पाएगा, बल्कि उसी समय वह परमेश्वर के प्रति एक सृजित प्राणी की वास्तविक श्रद्धा और आराधना भी प्राप्त करेगा। इस प्रकार का समागम कर लेने के बाद मनुष्य का परमेश्वर पर विश्वास किसी कोरे कागज़ की तरह या दिखावटी प्रतिज्ञा के समान, या एक अंधानुकरण अथवा मूर्ति-पूजा के रूप में नहीं रहेगा; केवल इस प्रकार के समागम से ही मनुष्य का जीवन दिन-प्रतिदिन परिपक्वता की ओर बढ़ेगा, और तभी उसका स्वभाव धीरे-धीरे परिवर्तित होगा और परमेश्वर के प्रति उसका विश्वास कदम-दर-कदम अस्पष्ट और अनिश्चित विश्वास से एक सच्ची आज्ञाकारिता और परवाह में, वास्तविक श्रद्धा में बदलेगा और परमेश्वर के अनुसरण की प्रक्रिया में मनुष्य का रुख भी उत्तरोत्तर निष्क्रियता से सक्रियता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ेगा; केवल इस प्रकार के समागम से ही मनुष्य परमेश्वर के बारे में वास्तविक समझ-बूझ और सच्चा ज्ञान प्राप्त करेगा। चूँकि अधिकतर लोगों ने कभी परमेश्वर के साथ वास्तविक समागम नहीं किया है, अतः परमेश्वर के बारे में उनका ज्ञान सिद्धांत, शब्द और वाद पर आकर ठहर जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि लोगों का एक बड़ा समूह, भले ही कितने भी सालों से परमेश्वर पर विश्वास करता आ रहा हो, लेकिन परमेश्वर को जानने के संबंध में अभी भी उसी स्थान पर है, जहाँ से उसने शुरुआत की थी, और वह सामंती अंधविश्वासों और रोमानी रंगों से युक्त भक्ति के पारंपरिक रूपों की बुनियाद पर ही अटका हुआ है। मनुष्य के परमेश्वर संबंधी ज्ञान के प्रस्थान-बिंदु पर ही रुके होने का अर्थ व्यावहारिक रूप से उसका न होना है। मनुष्य द्वारा परमेश्वर की स्थिति और पहचान की पुष्टि के अलावा परमेश्वर पर मनुष्य का विश्वास अभी भी अस्पष्ट अनिश्चतता की स्थिति में ही है। ऐसा होने से, मनुष्य परमेश्वर के प्रति कितनी वास्तविक श्रद्धा रख सकता है? चाहे तुम कितनी भी दृढ़ता से परमेश्वर के अस्तित्व पर विश्वास क्यों न करो, वह परमेश्वर संबंधी तुम्हारे ज्ञान की जगह नहीं ले सकता, न ही वह परमेश्वर के प्रति तुम्हारी श्रद्धा की जगह ले सकता है। चाहे तुमने उसके आशीष और अनुग्रह का कितना भी आनंद क्यों न लिया हो, वह तुम्हारे परमेश्वर संबंधी ज्ञान की जगह नहीं ले सकता। चाहे तुम उस पर अपना सर्वस्व अर्पित करने और उसके लिए अपना सब-कुछ व्यय करने के लिए कितने भी तैयार हो, वह तुम्हारे परमेश्वर संबंधी ज्ञान का स्थान नहीं ले सकता। शायद तुम परमेश्वर के कहे हुए वचनों से बहुत परिचित हो गए हो, या शायद तुमने उन्हें रट भी लिया हो और तुम उन्हें तेजी से दोहरा सकते हो; लेकिन यह तुम्हारे परमेश्वर संबंधी ज्ञान का स्थान नहीं ले सकता। मनुष्य परमेश्वर का अनुसरण करने का कितना भी अभिलाषी हो, यदि उसका परमेश्वर के साथ वास्तविक समागम नहीं हुआ है, या उसने परमेश्वर के वचनों का वास्तविक अनुभव नहीं किया है, तो परमेश्वर संबंधी उसका ज्ञान खाली शून्य या एक अंतहीन दिवास्वप्न के अलावा कुछ नहीं होगा; तुम भले ही आते-जाते परमेश्वर से "टकराए" हो या उससे रूबरू हुए हो, तुम्हारा परमेश्वर संबंधी ज्ञान फिर भी शून्य ही है और परमेश्वर के प्रति तुम्हारी श्रद्धा खोखले नारे या आदर्शवादी अवधारणा के अलावा और कुछ नहीं है। कई लोग परमेश्वर के वचनों को दिन-रात पढ़ते रहते हैं, यहाँ तक कि उनके उत्कृष्ट अंशों को सबसे बेशकीमती संपत्ति के तौर पर स्मृति में अंकित कर लेते हैं, इतना ही नहीं, वे जगह-जगह परमेश्वर के वचनों का प्रचार करते हैं, और दूसरों को भी परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति करके उनकी सहायता करते हैं। वे सोचते हैं कि ऐसा करना परमेश्वर की गवाही देना है, उसके वचनों की गवाही देना है; ऐसा करना परमेश्वर के मार्ग का पालन करना है; वे सोचते हैं कि ऐसा करना परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीना है, ऐसा करना उसके वचनों को अपने जीवन में लागू करना है, ऐसा करना उन्हें परमेश्वर की सराहना प्राप्त करने, बचाए जाने और पूर्ण बनाए जाने योग्य बनाएगा। परंतु परमेश्वर के वचनों का प्रचार करते हुए भी वे कभी परमेश्वर के वचनों पर खुद अमल नहीं करते या परमेश्वर के वचनों में जो प्रकाशित किया गया है, उससे अपनी तुलना करने की कोशिश नहीं करते। इसके बजाय, वे परमेश्वर के वचनों का उपयोग छल से दूसरों की प्रशंसा और विश्वास प्राप्त करने, अपने दम पर प्रबंधन में प्रवेश करने, परमेश्वर की महिमा का गबन और उसकी चोरी करने के लिए करते हैं। वे परमेश्वर के वचनों के प्रसार से मिले अवसर का दोहन परमेश्वर का कार्य और उसकी प्रशंसा पाने के लिए करने की व्यर्थ आशा करते हैं। कितने ही वर्ष गुज़र चुके हैं, परंतु ये लोग परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने की प्रक्रिया में न केवल परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं, परमेश्वर के वचनों की गवाही देने की प्रक्रिया में न केवल उस मार्ग को खोजने में असफल रहे हैं जिसका उन्हें अनुसरण करना चाहिए, दूसरों को परमेश्वर के वचनों से सहायता और पोषण प्रदान करने की प्रक्रिया में न केवल उन्होंने स्वयं सहायता और पोषण नहीं पाया है, और इन सब चीज़ों को करने की प्रक्रिया में वे न केवल परमेश्वर को जानने या परमेश्वर के प्रति स्वयं में वास्तविक श्रद्धा जगाने में असमर्थ रहे हैं; बल्कि, इसके विपरीत, परमेश्वर के बारे में उनकी गलतफहमियाँ और अधिक गहरी हो रही हैं; उस पर अविश्वास और अधिक बढ़ रहा है और उसके बारे में उनकी कल्पनाएँ और अधिक अतिशयोक्तिपूर्ण होती जा रही हैं। परमेश्वर के वचनों के बारे में अपने सिद्धांतों से आपूर्ति और निर्देशन पाकर वे ऐसे प्रतीत होते हैं मानो वे बिलकुल मनोनुकूल परिस्थिति में हों, मानो वे अपने कौशल का सरलता से इस्तेमाल कर रहे हों, मानो उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य, अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया हो, और मानो उन्होंने एक नया जीवन जीत लिया हो और वे बचा लिए गए हों, मानो परमेश्वर के वचनों को धाराप्रवाह बोलने से उन्होंने सत्य प्राप्त कर लिया हो, परमेश्वर के इरादे समझ लिए हों, और परमेश्वर को जानने का मार्ग खोज लिया हो, मानो परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने की प्रक्रिया में वे अकसर परमेश्वर से रूबरू होते हों। साथ ही, अक्सर वे "द्रवित" होकर बार-बार रोते हैं और बहुधा परमेश्वर के वचनों में "परमेश्वर" की अगुआई प्राप्त करते हुए, वे उसकी गंभीर परवाह और उदार मंतव्य समझते प्रतीत होते हैं और साथ ही लगता है कि उन्होंने मनुष्य के लिए परमेश्वर के उद्धार और उसके प्रबंधन को भी जान लिया है, उसके सार को भी जान लिया है और उसके धार्मिक स्वभाव को भी समझ लिया है। इस नींव के आधार पर, वे परमेश्वर के अस्तित्व पर और अधिक दृढ़ता से विश्वास करते, उसकी उत्कृष्टता की स्थिति से और अधिक परिचित होते और उसकी भव्यता एवं श्रेष्ठता को और अधिक गहराई से महसूस करते प्रतीत होते हैं। परमेश्वर के वचनों के सतही ज्ञान से ओतप्रोत होने से ऐसा प्रतीत होता है कि उनके विश्वास में वृद्धि हुई है, कष्ट सहने का उनका संकल्प दृढ़ हुआ है, और परमेश्वर संबंधी उनका ज्ञान और अधिक गहरा हुआ है। वे नहीं जानते कि जब तक वे परमेश्वर के वचनों का वास्तव में अनुभव नहीं करेंगे, तब तक उनका परमेश्वर संबंधी सारा ज्ञान और उसके बारे में उनके विचार उनकी अपनी इच्छित कल्पनाओं और अनुमान से निकलते हैं। उनका विश्वास परमेश्वर की किसी भी प्रकार की परीक्षा के सामने नहीं ठहरेगा, उनकी तथाकथित आध्यात्मिकता और उनका आध्यात्मिक कद परमेश्वर के किसी भी परीक्षण या निरीक्षण के तहत बिलकुल नहीं ठहरेगी, उनका संकल्प रेत पर बने हुए महल से अधिक कुछ नहीं है, और उनका परमेश्वर संबंधी तथाकथित ज्ञान उनकी कल्पना की उड़ान से अधिक कुछ नहीं है। वास्तव में इन लोगों ने, जिन्होंने एक तरह से परमेश्वर के वचनों पर काफी परिश्रम किया है, कभी यह एहसास ही नहीं किया कि सच्ची आस्था क्या है, सच्ची आज्ञाकारिता क्या है, सच्ची देखभाल क्या है, या परमेश्वर का सच्चा ज्ञान क्या है। वे सिद्धांत, कल्पना, ज्ञान, हुनर, परंपरा, अंधविश्वास, यहाँ तक कि मानवता के नैतिक मूल्यों को भी परमेश्वर पर विश्वास करने और उसका अनुसरण करने के लिए "पूँजी" और "हथियार" का रूप दे देते हैं, उन्हें परमेश्वर पर विश्वास करने और उसका अनुसरण करने का आधार बना लेते हैं। साथ ही, वे इस पूँजी और हथियार का जादुई तावीज़ भी बना लेते हैं और उसके माध्यम से परमेश्वर को जानते हैं और उसके निरीक्षणों, परीक्षणों, ताड़ना और न्याय का सामना करते हैं। अंत में जो कुछ वे प्राप्त करते हैं, उसमें फिर भी परमेश्वर के बारे में धार्मिक संकेतार्थों और सामंती अंधविश्वासों से ओतप्रोत निष्कर्षों से अधिक कुछ नहीं होता, जो हर तरह से रोमानी, विकृत और रहस्यमय होता है। परमेश्वर को जानने और उसे परिभाषित करने का उनका तरीका उन्हीं लोगों के साँचे में ढला होता है, जो केवल ऊपर स्वर्ग में या आसमान में किसी वृद्ध के होने में विश्वास करते हैं, जबकि परमेश्वर की वास्तविकता, उसका सार, उसका स्वभाव, उसका स्वरूप और अस्तित्व आदि - वह सब, जो वास्तविक स्वयं परमेश्वर से संबंध रखता है - ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें समझने में उनका ज्ञान विफल रहा है, जिनसे उनके ज्ञान का पूरी तरह से संबंध-विच्छेद हो गया है, यहाँ तक कि वे इतने अलग हैं, जितने उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव। इस तरह, हालाँकि वे लोग परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति और पोषण में जीते हैं, फिर भी वे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के मार्ग पर सचमुच चलने में असमर्थ हैं। इसका वास्तविक कारण यह है कि वे कभी भी परमेश्वर से परिचित नहीं हुए हैं, न ही उन्होंने उसके साथ कभी वास्तविक संपर्क या समागम किया है, अतः उनके लिए परमेश्वर के साथ पारस्परिक समझ पर पहुँचना, या अपने भीतर परमेश्वर के प्रति सच्चा विश्वास पैदा कर पाना, उसका सच्चा अनुसरण या उसकी सच्ची आराधना जाग्रत कर पाना असंभव है। इस परिप्रेक्ष्य और दृष्टिकोण ने - कि उन्हें इस प्रकार परमेश्वर के वचनों को देखना चाहिए, उन्हें इस प्रकार परमेश्वर को देखना चाहिए, उन्हें अनंत काल तक अपने प्रयासों में खाली हाथ लौटने, और परमेश्वर का भय मानने तथा बुराई से दूर रहने के मार्ग पर न चल पाने के लिए अभिशप्त कर दिया है। जिस लक्ष्य को वे साध रहे हैं और जिस ओर वे जा रहे हैं, वह प्रदर्शित करता है कि अनंत काल से वे परमेश्वर के शत्रु हैं और अनंत काल तक वे कभी उद्धार प्राप्त नहीं कर सकेंगे। यदि किसी ऐसे व्यक्ति की, जिसने कई वर्षों तक परमेश्वर का अनुसरण किया है और कई सालों तक उसके वचनों के पोषण का आनंद लिया है, परमेश्वर संबंधी परिभाषा अनिवार्यतः वैसी ही है, जैसी मूर्तियों के सामने भक्ति-भाव से दंडवत करने वाले व्यक्ति की होती है, तो यह इस बात का सूचक है कि इस व्यक्ति ने परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता प्राप्त नहीं की है। इसका कारण यह है कि उसने परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में बिलकुल भी प्रवेश नहीं किया है और इस कारण से, परमेश्वर के वचनों में निहित वास्तविकता, सत्य, इरादों और मनुष्य से उसकी अपेक्षाओं का उस व्यक्ति से कुछ लेना-देना नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के वचनों के सतही अर्थ पर चाहे कितनी भी मेहनत से कार्य करे, वह सब व्यर्थ है : क्योंकि वह मात्र शब्दों का अनुसरण करता है, इसलिए उसे अनिवार्य रूप से मात्र शब्द ही प्राप्त होंगे। परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन दिखने में भले ही सीधे-सादे या गहन हों, लेकिन वे सभी सत्य हैं, और जीवन में प्रवेश करने वाले मनुष्य के लिए अपरिहार्य हैं; वे जीवन-जल के ऐसे झरने हैं, जो मनुष्य को आत्मा और देह दोनों से जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं। वे मनुष्य को जीवित रहने के लिए हर ज़रूरी चीज़ मुहैया कराते हैं; उसके दैनिक जीवन के लिए सिद्धांत और मत; उद्धार पाने के लिए जो मार्ग उसे अपनाना आवश्यक है साथ ही उस मार्ग के लक्ष्य और दिशा; उसके अंदर परमेश्वर के समक्ष एक सृजित प्राणी के रूप में हर सत्य होना चाहिए; तथा हर वह सत्य होना चाहिए कि मनुष्य परमेश्वर की आज्ञाकारिता और आराधना कैसे करता है। वे मनुष्य का अस्तित्व सुनिश्चित करने वाली गारंटी हैं, वे मनुष्य का दैनिक आहार हैं, और ऐसा मजबूत सहारा भी हैं, जो मनुष्य को सशक्त और अटल रहने में सक्षम बनाते हैं। वे सत्य की वास्तविकता से संपन्न हैं जिससे सृजित मनुष्य सामान्य मानवता को जीता है, वे उस सत्य से संपन्न हैं, जिससे मनुष्य भ्रष्टता से मुक्त होता है और शैतान के जाल से बचता है, वे उस अथक शिक्षा, उपदेश, प्रोत्साहन और सांत्वना से संपन्न हैं, जो स्रष्टा सृजित मानवजाति को देता है। वे ऐसे प्रकाश-स्तंभ हैं, जो मनुष्य को सभी सकारात्मक बातों को समझने के लिए मार्गदर्शन और प्रबुद्धता देते हैं, ऐसी गारंटी हैं जो यह सुनिश्चित करती है कि मनुष्य उस सबको जो धार्मिक और अच्छा है, उन मापदंडों को जिन पर सभी लोगों, घटनाओं और वस्तुओं को मापा जाता है, तथा ऐसे सभी दिशानिर्देशों को जिए और प्राप्त करे, जो मनुष्य को उद्धार और प्रकाश के मार्ग पर ले जाते हैं। केवल परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अनुभवों में ही मनुष्य को सत्य और जीवन की आपूर्ति की जा सकती है; केवल इनसे ही मनुष्य की समझ में आ सकता है कि सामान्य मानवता क्या है, सार्थक जीवन क्या है, वास्तविक सृजित प्राणी क्या है, परमेश्वर के प्रति वास्तविक आज्ञाकारिता क्या है; केवल इनसे ही मनुष्य को समझ में आ सकता है कि उसे परमेश्वर की परवाह किस तरह करनी चाहिए, सृजित प्राणी का कर्तव्य कैसे पूरा करना चाहिए, और एक वास्तविक मनुष्य की समानता कैसे प्राप्त करनी चाहिए; केवल इनसे ही मनुष्य को समझ में आ सकता है कि सच्ची आस्था और सच्ची आराधना क्या है; केवल इनसे ही मनुष्य समझ पाता है कि स्वर्ग, पृथ्वी और सभी चीजों का शासक कौन है; केवल इनसे ही मनुष्य समझ सकता है कि वह जो समस्त सृष्टि का स्वामी है, किन साधनों से सृष्टि पर शासन करता है, उसकी अगुआई करता है और उसका पोषण करता है; और केवल इनसे ही मनुष्य समझ-बूझ सकता है कि वह, जो समस्त सृष्टि का स्वामी है, किन साधनों के ज़रिये मौजूद रहता है, स्वयं को अभिव्यक्त करता है और कार्य करता है। परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अनुभवों से अलग, मनुष्य के पास परमेश्वर के वचनों और सत्य का कोई वास्तविक ज्ञान या अंतदृष्टि नहीं होती। ऐसा व्यक्ति पूरी तरह से एक ज़िंदा लाश, पूरा घोंघा होता है, और स्रष्टा से संबंधित किसी भी ज्ञान का उससे कोई वास्ता नहीं होता। परमेश्वर की दृष्टि में, ऐसे व्यक्ति ने कभी उस पर विश्वास नहीं किया है, न कभी उसका अनुसरण किया है, और इसलिए परमेश्वर न तो उसे अपना विश्वासी मानता है और न ही अपना अनुयायी, एक सच्चा सृजित प्राणी मानना तो दूर की बात रही। एक सच्चे सृजित प्राणी को यह जानना चाहिए कि स्रष्टा कौन है, मनुष्य का सृजन किसलिए हुआ है, एक सृजित प्राणी की ज़िम्मेदारियों को किस तरह पूरा करें, और संपूर्ण सृष्टि के प्रभु की आराधना किस तरह करें, उसे स्रष्टा के इरादों, इच्छाओं और अपेक्षाओं को समझना, बूझना और जानना चाहिए, उनकी परवाह करनी चाहिए, और स्रष्टा के तरीके के अनुरूप कार्य करना चाहिए - परमेश्वर का भय मानो और बुराई से दूर रहो। परमेश्वर का भय मानना क्या है? और बुराई से दूर कैसे रहा जा सकता है? "परमेश्वर का भय मानने" का अर्थ अज्ञात डर या दहशत नहीं होता, न ही इसका अर्थ टाल-मटोल करना, दूर रहना, मूर्तिपूजा करना या अंधविश्वास होता है। वरन् यह श्रद्धा, सम्मान, विश्वास, समझ, परवाह, आज्ञाकारिता, समर्पण और प्रेम के साथ-साथ बिना शर्त और बिना शिकायत आराधना, प्रतिदान और समर्पण होता है। परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्ची श्रद्धा, सच्चा विश्वास, सच्ची समझ, सच्ची परवाह या आज्ञाकारिता नहीं होगी, वरन् केवल डर और व्यग्रता, केवल शंका, गलतफहमी, टालमटोल और आनाकानी होगी; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्चा समर्पण और प्रतिदान नहीं होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्ची आराधना और समर्पण नहीं होगा, मात्र अंधी मूर्तिपूजा और अंधविश्वास होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य परमेश्वर के तरीके के अनुसार कार्य नहीं कर पाएगा, या परमेश्वर का भय नहीं मानेगा, या बुराई का त्याग नहीं कर पाएगा। इसके विपरीत, मनुष्य का हर क्रियाकलाप और व्यवहार, परमेश्वर के प्रति विद्रोह और अवज्ञा से, निंदात्मक आरोपों और आलोचनात्मक आकलनों से तथा सत्य और परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अर्थ के विपरीत चलने वाले दुष्ट आचरण से भरा होगा। जब मनुष्य को परमेश्वर में सच्चा विश्वास होगा, तो वह सच्चाई से उसका अनुसरण करेगा और उस पर निर्भर रहेगा; केवल परमेश्वर पर सच्चे विश्वास और निर्भरता से ही मनुष्य में सच्ची समझ और सच्चा बोध होगा; परमेश्वर के वास्तविक बोध के साथ उसके प्रति वास्तविक परवाह आती है; परमेश्वर के प्रति सच्ची परवाह से ही मनुष्य में सच्ची आज्ञाकारिता आ सकती है; परमेश्वर के प्रति सच्ची आज्ञाकारिता से ही मनुष्य में सच्चा समर्पण आ सकता है; परमेश्वर के प्रति सच्चे समर्पण से ही मनुष्य बिना शर्त और बिना शिकायत प्रतिदान कर सकता है; सच्चे विश्वास और निर्भरता, सच्ची समझ और परवाह, सच्ची आज्ञाकारिता, सच्चे समर्पण और प्रतिदान से ही मनुष्य परमेश्वर के स्वभाव और सार को जान सकता है, स्रष्टा की पहचान को जान सकता है; स्रष्टा को वास्तव में जान लेने के बाद ही मनुष्य अपने भीतर सच्ची आराधना और समर्पण जाग्रत कर सकता है; स्रष्टा के प्रति सच्ची आराधना और समर्पण होने के बाद ही वह वास्तव में बुरे मार्गों का त्याग कर पाएगा, अर्थात्, बुराई से दूर रह पाएगा। इससे "परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने" की संपूर्ण प्रक्रिया बनती है, और यही परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मूल तत्व भी है। यही वह मार्ग है, जिसे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के लिए पार करना आवश्यक है। "परमेश्वर का भय मानना और दुष्टता का त्याग करना" तथा परमेश्वर को जानना अभिन्न रूप से असंख्य सूत्रों से जुड़े हैं, और उनके बीच का संबंध स्वतः स्पष्ट है। यदि कोई बुराई से दूर रहना चाहता है, तो उसमें पहले परमेश्वर का वास्तविक भय होना चाहिए; यदि कोई परमेश्वर का वास्तविक भय मानना चाहता है, तो उसमें पहले परमेश्वर का सच्चा ज्ञान होना चाहिए; यदि कोई परमेश्वर का ज्ञान हासिल करना चाहता है, तो उसे पहले परमेश्वर के वचनों का अनुभव करना चाहिए, परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश करना चाहिए, परमेश्वर की ताड़ना, अनुशासन और न्याय का अनुभव करना चाहिए; यदि कोई परमेश्वर के वचनों का अनुभव करना चाहता है, तो उसे पहले परमेश्वर के वचनों के रूबरू आना चाहिए, परमेश्वर के रूबरू आना चाहिए, और परमेश्वर से निवेदन करना चाहिए कि वह लोगों, घटनाओं और वस्तुओं से युक्त सभी प्रकार के परिवेशों के रूप में परमेश्वर के वचनों को अनुभव करने के अवसर प्रदान करे; यदि कोई परमेश्वर और उसके वचनों के रूबरू आना चाहता है, तो उसे पहले एक सरल और सच्चा हृदय, सत्य को स्वीकार करने की तत्परता, कष्ट झेलने की इच्छा, और बुराई से दूर रहने का संकल्प और साहस, और एक सच्चा सृजित प्राणी बनने की अभिलाषा रखनी चाहिए...। इस प्रकार कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए, तुम परमेश्वर के निरंतर करीब आते जाओगे, तुम्हारा हृदय निरंतर शुद्ध होता जाएगा, और तुम्हारा जीवन और जीवित रहने के मूल्य, परमेश्वर को जान पाने के कारण निरंतर अधिक अर्थपूर्ण और दीप्तिमान होते जाएँगे। फिर एक दिन तुम अनुभव करोगे कि स्रष्टा अब कोई पहेली नहीं रह गया है, स्रष्टा कभी तुमसे छिपा नहीं था, स्रष्टा ने कभी अपना चेहरा तुमसे छिपाया नहीं था, स्रष्टा तुमसे बिलकुल भी दूर नहीं है, स्रष्टा अब बिलकुल भी वह नहीं है जिसके लिए तुम अपने विचारों में लगातार तरस रहे हो लेकिन जिसके पास तुम अपनी भावनाओं से पहुँच नहीं पा रहे हो, वह वाकई और सच में तुम्हारे दाएँ-बाएँ खड़ा तुम्हारी सुरक्षा कर रहा है, तुम्हारे जीवन को पोषण दे रहा है और तुम्हारी नियति को नियंत्रित कर रहा है। वह सुदूर क्षितिज पर नहीं है, न ही उसने अपने आपको ऊपर कहीं बादलों में छिपाया हुआ है। वह एकदम तुम्हारी बगल में है, तुम्हारे सर्वस्व पर आधिपत्य कर रहा है, वह वो सब है जो तुम्हारे पास है, और वही एकमात्र चीज़ है जो तुम्हारे पास है। ऐसा परमेश्वर तुम्हें स्वयं को अपने हृदय से प्रेम करने देता है, स्वयं से लिपटने देता है, स्वयं को पकड़ने देता है, अपनी स्तुति करने देता है, गँवा देने का भय पैदा करता है, अपना त्याग करने, अपनी अवज्ञा करने, अपने को टालने या दूर करने का अनिच्छुक बना देता है। तुम बस उसकी परवाह करना, उसका आज्ञापालन करना, जो भी वह देता है उस सबका प्रतिदान करना और उसके प्रभुत्व के प्रति समर्पित होना चाहते हो। तुम अब उसके द्वारा मार्गदर्शन किए जाने, पोषण दिए जाने, निगरानी किए जाने, उसके द्वारा देखभाल किए जाने से इंकार नहीं करते और न ही उसकी आज्ञा और आदेश का पालन करने से इंकार करते हो। तुम सिर्फ़ उसका अनुसरण करना चाहते हो, उसके साथ उसके आस-पास रहना चाहते हो, उसे अपना एकमात्र जीवन स्वीकार करना चाहते हो, उसे अपना एकमात्र प्रभु, अपना एकमात्र परमेश्वर स्वीकार करना चाहते हो।
तुम में से प्रत्येक व्यक्ति को नए सिरे से जाँच करनी चाहिए कि अपने पूरे जीवन में तुमने परमेश्वर पर किस तरह से विश्वास किया है, ताकि तुम यह देख सको कि परमेश्वर का अनुसरण करने की प्रक्रिया में तुम परमेश्वर को वास्तव में समझ, बूझ और जान पाए हो या नहीं, तुम वास्तव में जानते हो या नहीं कि विभिन्न प्रकार के मनुष्यों के प्रति परमेश्वर कैसा रवैया रखता है, और तुम वास्तव में उस कार्य को समझ पाए हो या नहीं, जो परमेश्वर तुम पर कर रहा है और परमेश्वर तुम्हारे प्रत्येक कार्य को किस तरह परिभाषित करता है। यह परमेश्वर, जो तुम्हारे साथ है, तुम्हारी प्रगति को दिशा दे रहा है, तुम्हारी नियति निर्धारित कर रहा है, और तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए आपूर्ति कर रहा है - आखिर तुम इस परमेश्वर को कितना समझते हो? तुम इस परमेश्वर के बारे में वास्तव में कितना जानते हो? क्या तुम जानते हो कि हर दिन वह तुम पर क्या कार्य करता है? क्या तुम उन सिद्धांतों और उद्देश्यों को जानते हो, जिन पर वह अपने हर क्रियाकलाप को आधारित करता है? क्या तुम जानते हो, वह कैसे तुम्हारा मार्गदर्शन करता है? क्या तुम उन साधनों को जानते हो, जिनसे वह तुम्हारे लिए आपूर्ति करता है? क्या तुम जानते हो कि किन तरीकों से वह तुम्हारी अगुआई करता है? क्या तुम जानते हो कि वह तुमसे क्या प्राप्त करना चाहता है और तुम में क्या हासिल करना चाहता है? क्या तुम जानते हो कि तुम्हारे अलग-अलग तरह के व्यवहार के प्रति उसका क्या रवैया रहता है? क्या तुम जानते हो कि तुम उसके प्रिय व्यक्ति हो या नहीं? क्या तुम उसके आनंद, क्रोध, दुःख और प्रसन्नता के उद्गम और उनके पीछे छिपे विचारों और अभिप्रायों तथा उसके सत्व को जानते हो? अंततः, क्या तुम जानते हो कि जिस परमेश्वर पर तुम विश्वास करते हो, वह किस प्रकार का परमेश्वर है? क्या ये और इसी प्रकार के अन्य प्रश्न, ऐसे प्रश्न हैं जिनके बारे में तुमने पहले कभी नहीं सोचा या समझा? परमेश्वर पर अपने विश्वास का अनुसरण करते हुए, क्या तुमने परमेश्वर के वचनों की वास्तविक समझ और उनके अनुभव से उसके बारे में अपनी सभी गलतफहमियाँ दूर की हैं? क्या तुमने परमेश्वर के अनुशासन और ताड़ना से गुज़र कर सच्ची आज्ञाकारिता और परवाह पाई है? क्या तुम परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के दौरान मनुष्य की विद्रोहशीलता और शैतानी प्रकृति को जान पाए हो और क्या तुमने परमेश्वर की पवित्रता के बारे में थोड़ी-सी भी समझ प्राप्त की है? क्या तुमने परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन और प्रबुद्धता से जीवन का कोई नया नज़रिया अपनाया है? क्या तुमने परमेश्वर द्वारा भेजे गए परीक्षणों के दौरान मनुष्य के अपराधों के प्रति उसकी असहिष्णुता के साथ-साथ यह महसूस किया है कि वह तुमसे क्या अपेक्षा रखता है और वह तुम्हें कैसे बचा रहा है? यदि तुम यह नहीं जानते कि परमेश्वर को गलत समझना क्या है या इस गलतफहमी को कैसे दूर किया जाए, तो यह कहा जा सकता है कि तुमने परमेश्वर के साथ कभी भी वास्तविक समागम में प्रवेश नहीं किया है और परमेश्वर को कभी नहीं समझा है, या कम-से-कम यह कहा जा सकता है कि तुमने उसे कभी समझना नहीं चाहा है। यदि तुम नहीं जानते कि परमेश्वर का अनुशासन और ताड़ना क्या हैं, तो निश्चित रूप से तुम नहीं जानते कि आज्ञाकारिता और परवाह क्या हैं, या कम से कम तुमने कभी वास्तव में परमेश्वर का आज्ञापालन और उसकी परवाह नहीं की। यदि तुमने कभी परमेश्वर की ताड़ना और न्याय का अनुभव नहीं किया है, तो तुम निश्चित रूप से नहीं जान पाओगे कि उसकी पवित्रता क्या है, और यह तो बिलकुल भी नहीं समझ पाओगे कि मनुष्यों का विद्रोह क्या होता है। यदि जीवन के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण कभी उचित नहीं रहा है या जीवन में सही उद्देश्य नहीं रहा है, बल्कि तुम अभी भी अपने भविष्य के मार्ग के प्रति दुविधा और अनिर्णय की स्थिति में हो, यहाँ तक कि तुम्हें आगे बढ़ने में भी हिचकिचाहट महसूस होती है, तो यह निश्चित है कि तुमने कभी परमेश्वर की प्रबुद्धता और मार्गदर्शन नहीं पाया है; यह भी कहा जा सकता है कि तुम्हें कभी वास्तव में परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति या पुनःपूर्ति प्राप्त नहीं हुई है। यदि तुम अभी तक परमेश्वर के परीक्षणों से नहीं गुज़रे हो, तो कहने की आवश्यकता नहीं है कि तुम निश्चित रूप से नहीं जान पाओगे कि मनुष्य के अपराधों के प्रति परमेश्वर की असहिष्णुता क्या है, न ही तुम यह समझ पाओगे कि आख़िरकार परमेश्वर तुमसे क्या चाहता है, और यह तो बिलकुल भी नहीं समझ पाओगे कि अंततः मनुष्य के प्रबंधन और बचाव का उसका कार्य क्या है। चाहे कोई व्यक्ति कितने ही वर्षों से परमेश्वर पर विश्वास कर रहा हो, यदि उसने कभी उसके वचनों में कुछ अनुभव नहीं किया या उनसे कोई बोध हासिल नहीं किया है, तो फिर वह निश्चित रूप से उद्धार के मार्ग पर नहीं चल रहा है, परमेश्वर पर उसका विश्वास किसी वास्तविक तत्त्व से रहित है, उसका परमेश्वर का ज्ञान भी निश्चित ही शून्य है, और कहने की आवश्यकता नहीं कि परमेश्वर के प्रति श्रद्धा क्या होती है, इसका उसे बिलकुल भी पता नहीं है। परमेश्वर का स्वरूप और अस्तित्व, परमेश्वर का सार, परमेश्वर का स्वभाव - यह सब मानवजाति को उसके वचनों के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। जब मनुष्य परमेश्वर के वचनों को अनुभव करता है, तो उन्हें अभ्यास में लाने की प्रक्रिया में वह परमेश्वर के कहे वचनों के पीछे छिपे उद्देश्य को समझेगा, परमेश्वर के वचनों के स्रोत और पृष्ठभूमि को समझेगा, और परमेश्वर के वचनों के अभीष्ट प्रभाव को समझेगा और बूझेगा। जीवन और सत्य में प्रवेश करने, परमेश्वर के इरादों को समझने, अपना स्वभाव परिवर्तित करने, परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं के प्रति आज्ञाकारी होने में सक्षम होने के लिए मनुष्य को ये सब चीज़ें अनुभव करनी, समझनी और प्राप्त करनी चाहिए। जिस समय मनुष्य इन चीज़ों को अनुभव करता, समझता और प्राप्त करता है, उसी समय वह धीरे-धीरे परमेश्वर की समझ प्राप्त कर लेता है, और साथ ही उसके विषय में वह ज्ञान के विभिन्न स्तरों को भी प्राप्त कर लेता है। यह समझ और ज्ञान मनुष्य द्वारा कल्पित या निर्मित किसी चीज़ से नहीं आती, बल्कि उससे आती है, जिसे वह अपने भीतर समझता, अनुभव करता, महसूस करता और पुष्टि करता है। इन बातों को समझने, अनुभव करने, महसूस करने और पुष्टि करने के बाद ही मनुष्य के परमेश्वर संबंधी ज्ञान में तत्त्व की प्राप्ति होती है; केवल मनुष्य द्वारा इस समय प्राप्त ज्ञान ही वास्तविक, असली और सटीक होता है और यह प्रक्रिया - परमेश्वर के वचनों को समझने, अनुभव करने, महसूस करने और उनकी पुष्टि करने के माध्यम से परमेश्वर की वास्तविक समझ और ज्ञान प्राप्त करने की यह प्रक्रिया, और कुछ नहीं, वरन् परमेश्वर और मनुष्य के मध्य सच्चा संवाद है। इस प्रकार के समागम के मध्य मनुष्य सच में परमेश्वर के उद्देश्यों को समझ-बूझ पाता है, परमेश्वर के स्वरूप और अस्तित्व को जान पाता है, सच में परमेश्वर के सार को समझ और जान पाता है, धीरे-धीरे परमेश्वर के स्वभाव को जान और समझ पाता है, संपूर्ण सृष्टि के ऊपर परमेश्वर के प्रभुत्व के बारे में निश्चितता और उसकी सही परिभाषा पर पहुँच पाता है और परमेश्वर की पहचान और स्थिति का ज्ञान और अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्थिति की अनिवार्य समझ प्राप्त कर पाता है। इस प्रकार के समागम के मध्य मनुष्य परमेश्वर के प्रति अपने विचार थोड़ा-थोड़ा करके बदलता है, वह परमेश्वर को अपनी कल्पना की उड़ान नहीं मानता, या वह उसके बारे में अपने संदेहों को बेलगाम नहीं दौड़ाता, या उसे गलत नहीं समझता, उसकी निंदा नहीं करता, उसकी आलोचना नहीं करता या उस पर संदेह नहीं करता। इस प्रकार, परमेश्वर के साथ मनुष्य के विवाद बहुत कम होंगे, वह परमेश्वर के साथ कम संघर्ष करेगा, और ऐसे मौके कम आएँगे, जब वह परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करेगा। इसके विपरीत, मनुष्य द्वारा परमेश्वर की परवाह और आज्ञाकारिता बढ़ेगी और परमेश्वर के प्रति उसका आदर अधिक वास्तविक और गहन होगा। ऐसे समागम के मध्य, मनुष्य न केवल सत्य का पोषण और जीवन का बपतिस्मा प्राप्त करेगा, बल्कि उसी समय वह परमेश्वर का वास्तविक ज्ञान भी प्राप्त करेगा। ऐसे समागम के मध्य न केवल मनुष्य का स्वभाव बदलेगा और वह उद्धार पाएगा, बल्कि उसी समय वह परमेश्वर के प्रति एक सृजित प्राणी की वास्तविक श्रद्धा और आराधना भी प्राप्त करेगा। इस प्रकार का समागम कर लेने के बाद मनुष्य का परमेश्वर पर विश्वास किसी कोरे कागज़ की तरह या दिखावटी प्रतिज्ञा के समान, या एक अंधानुकरण अथवा मूर्ति-पूजा के रूप में नहीं रहेगा; केवल इस प्रकार के समागम से ही मनुष्य का जीवन दिन-प्रतिदिन परिपक्वता की ओर बढ़ेगा, और तभी उसका स्वभाव धीरे-धीरे परिवर्तित होगा और परमेश्वर के प्रति उसका विश्वास कदम-दर-कदम अस्पष्ट और अनिश्चित विश्वास से एक सच्ची आज्ञाकारिता और परवाह में, वास्तविक श्रद्धा में बदलेगा और परमेश्वर के अनुसरण की प्रक्रिया में मनुष्य का रुख भी उत्तरोत्तर निष्क्रियता से सक्रियता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ेगा; केवल इस प्रकार के समागम से ही मनुष्य परमेश्वर के बारे में वास्तविक समझ-बूझ और सच्चा ज्ञान प्राप्त करेगा। चूँकि अधिकतर लोगों ने कभी परमेश्वर के साथ वास्तविक समागम नहीं किया है, अतः परमेश्वर के बारे में उनका ज्ञान सिद्धांत, शब्द और वाद पर आकर ठहर जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि लोगों का एक बड़ा समूह, भले ही कितने भी सालों से परमेश्वर पर विश्वास करता आ रहा हो, लेकिन परमेश्वर को जानने के संबंध में अभी भी उसी स्थान पर है, जहाँ से उसने शुरुआत की थी, और वह सामंती अंधविश्वासों और रोमानी रंगों से युक्त भक्ति के पारंपरिक रूपों की बुनियाद पर ही अटका हुआ है। मनुष्य के परमेश्वर संबंधी ज्ञान के प्रस्थान-बिंदु पर ही रुके होने का अर्थ व्यावहारिक रूप से उसका न होना है। मनुष्य द्वारा परमेश्वर की स्थिति और पहचान की पुष्टि के अलावा परमेश्वर पर मनुष्य का विश्वास अभी भी अस्पष्ट अनिश्चतता की स्थिति में ही है। ऐसा होने से, मनुष्य परमेश्वर के प्रति कितनी वास्तविक श्रद्धा रख सकता है? चाहे तुम कितनी भी दृढ़ता से परमेश्वर के अस्तित्व पर विश्वास क्यों न करो, वह परमेश्वर संबंधी तुम्हारे ज्ञान की जगह नहीं ले सकता, न ही वह परमेश्वर के प्रति तुम्हारी श्रद्धा की जगह ले सकता है। चाहे तुमने उसके आशीष और अनुग्रह का कितना भी आनंद क्यों न लिया हो, वह तुम्हारे परमेश्वर संबंधी ज्ञान की जगह नहीं ले सकता। चाहे तुम उस पर अपना सर्वस्व अर्पित करने और उसके लिए अपना सब-कुछ व्यय करने के लिए कितने भी तैयार हो, वह तुम्हारे परमेश्वर संबंधी ज्ञान का स्थान नहीं ले सकता। शायद तुम परमेश्वर के कहे हुए वचनों से बहुत परिचित हो गए हो, या शायद तुमने उन्हें रट भी लिया हो और तुम उन्हें तेजी से दोहरा सकते हो; लेकिन यह तुम्हारे परमेश्वर संबंधी ज्ञान का स्थान नहीं ले सकता। मनुष्य परमेश्वर का अनुसरण करने का कितना भी अभिलाषी हो, यदि उसका परमेश्वर के साथ वास्तविक समागम नहीं हुआ है, या उसने परमेश्वर के वचनों का वास्तविक अनुभव नहीं किया है, तो परमेश्वर संबंधी उसका ज्ञान खाली शून्य या एक अंतहीन दिवास्वप्न के अलावा कुछ नहीं होगा; तुम भले ही आते-जाते परमेश्वर से "टकराए" हो या उससे रूबरू हुए हो, तुम्हारा परमेश्वर संबंधी ज्ञान फिर भी शून्य ही है और परमेश्वर के प्रति तुम्हारी श्रद्धा खोखले नारे या आदर्शवादी अवधारणा के अलावा और कुछ नहीं है। कई लोग परमेश्वर के वचनों को दिन-रात पढ़ते रहते हैं, यहाँ तक कि उनके उत्कृष्ट अंशों को सबसे बेशकीमती संपत्ति के तौर पर स्मृति में अंकित कर लेते हैं, इतना ही नहीं, वे जगह-जगह परमेश्वर के वचनों का प्रचार करते हैं, और दूसरों को भी परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति करके उनकी सहायता करते हैं। वे सोचते हैं कि ऐसा करना परमेश्वर की गवाही देना है, उसके वचनों की गवाही देना है; ऐसा करना परमेश्वर के मार्ग का पालन करना है; वे सोचते हैं कि ऐसा करना परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीना है, ऐसा करना उसके वचनों को अपने जीवन में लागू करना है, ऐसा करना उन्हें परमेश्वर की सराहना प्राप्त करने, बचाए जाने और पूर्ण बनाए जाने योग्य बनाएगा। परंतु परमेश्वर के वचनों का प्रचार करते हुए भी वे कभी परमेश्वर के वचनों पर खुद अमल नहीं करते या परमेश्वर के वचनों में जो प्रकाशित किया गया है, उससे अपनी तुलना करने की कोशिश नहीं करते। इसके बजाय, वे परमेश्वर के वचनों का उपयोग छल से दूसरों की प्रशंसा और विश्वास प्राप्त करने, अपने दम पर प्रबंधन में प्रवेश करने, परमेश्वर की महिमा का गबन और उसकी चोरी करने के लिए करते हैं। वे परमेश्वर के वचनों के प्रसार से मिले अवसर का दोहन परमेश्वर का कार्य और उसकी प्रशंसा पाने के लिए करने की व्यर्थ आशा करते हैं। कितने ही वर्ष गुज़र चुके हैं, परंतु ये लोग परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने की प्रक्रिया में न केवल परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं, परमेश्वर के वचनों की गवाही देने की प्रक्रिया में न केवल उस मार्ग को खोजने में असफल रहे हैं जिसका उन्हें अनुसरण करना चाहिए, दूसरों को परमेश्वर के वचनों से सहायता और पोषण प्रदान करने की प्रक्रिया में न केवल उन्होंने स्वयं सहायता और पोषण नहीं पाया है, और इन सब चीज़ों को करने की प्रक्रिया में वे न केवल परमेश्वर को जानने या परमेश्वर के प्रति स्वयं में वास्तविक श्रद्धा जगाने में असमर्थ रहे हैं; बल्कि, इसके विपरीत, परमेश्वर के बारे में उनकी गलतफहमियाँ और अधिक गहरी हो रही हैं; उस पर अविश्वास और अधिक बढ़ रहा है और उसके बारे में उनकी कल्पनाएँ और अधिक अतिशयोक्तिपूर्ण होती जा रही हैं। परमेश्वर के वचनों के बारे में अपने सिद्धांतों से आपूर्ति और निर्देशन पाकर वे ऐसे प्रतीत होते हैं मानो वे बिलकुल मनोनुकूल परिस्थिति में हों, मानो वे अपने कौशल का सरलता से इस्तेमाल कर रहे हों, मानो उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य, अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया हो, और मानो उन्होंने एक नया जीवन जीत लिया हो और वे बचा लिए गए हों, मानो परमेश्वर के वचनों को धाराप्रवाह बोलने से उन्होंने सत्य प्राप्त कर लिया हो, परमेश्वर के इरादे समझ लिए हों, और परमेश्वर को जानने का मार्ग खोज लिया हो, मानो परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने की प्रक्रिया में वे अकसर परमेश्वर से रूबरू होते हों। साथ ही, अक्सर वे "द्रवित" होकर बार-बार रोते हैं और बहुधा परमेश्वर के वचनों में "परमेश्वर" की अगुआई प्राप्त करते हुए, वे उसकी गंभीर परवाह और उदार मंतव्य समझते प्रतीत होते हैं और साथ ही लगता है कि उन्होंने मनुष्य के लिए परमेश्वर के उद्धार और उसके प्रबंधन को भी जान लिया है, उसके सार को भी जान लिया है और उसके धार्मिक स्वभाव को भी समझ लिया है। इस नींव के आधार पर, वे परमेश्वर के अस्तित्व पर और अधिक दृढ़ता से विश्वास करते, उसकी उत्कृष्टता की स्थिति से और अधिक परिचित होते और उसकी भव्यता एवं श्रेष्ठता को और अधिक गहराई से महसूस करते प्रतीत होते हैं। परमेश्वर के वचनों के सतही ज्ञान से ओतप्रोत होने से ऐसा प्रतीत होता है कि उनके विश्वास में वृद्धि हुई है, कष्ट सहने का उनका संकल्प दृढ़ हुआ है, और परमेश्वर संबंधी उनका ज्ञान और अधिक गहरा हुआ है। वे नहीं जानते कि जब तक वे परमेश्वर के वचनों का वास्तव में अनुभव नहीं करेंगे, तब तक उनका परमेश्वर संबंधी सारा ज्ञान और उसके बारे में उनके विचार उनकी अपनी इच्छित कल्पनाओं और अनुमान से निकलते हैं। उनका विश्वास परमेश्वर की किसी भी प्रकार की परीक्षा के सामने नहीं ठहरेगा, उनकी तथाकथित आध्यात्मिकता और उनका आध्यात्मिक कद परमेश्वर के किसी भी परीक्षण या निरीक्षण के तहत बिलकुल नहीं ठहरेगी, उनका संकल्प रेत पर बने हुए महल से अधिक कुछ नहीं है, और उनका परमेश्वर संबंधी तथाकथित ज्ञान उनकी कल्पना की उड़ान से अधिक कुछ नहीं है। वास्तव में इन लोगों ने, जिन्होंने एक तरह से परमेश्वर के वचनों पर काफी परिश्रम किया है, कभी यह एहसास ही नहीं किया कि सच्ची आस्था क्या है, सच्ची आज्ञाकारिता क्या है, सच्ची देखभाल क्या है, या परमेश्वर का सच्चा ज्ञान क्या है। वे सिद्धांत, कल्पना, ज्ञान, हुनर, परंपरा, अंधविश्वास, यहाँ तक कि मानवता के नैतिक मूल्यों को भी परमेश्वर पर विश्वास करने और उसका अनुसरण करने के लिए "पूँजी" और "हथियार" का रूप दे देते हैं, उन्हें परमेश्वर पर विश्वास करने और उसका अनुसरण करने का आधार बना लेते हैं। साथ ही, वे इस पूँजी और हथियार का जादुई तावीज़ भी बना लेते हैं और उसके माध्यम से परमेश्वर को जानते हैं और उसके निरीक्षणों, परीक्षणों, ताड़ना और न्याय का सामना करते हैं। अंत में जो कुछ वे प्राप्त करते हैं, उसमें फिर भी परमेश्वर के बारे में धार्मिक संकेतार्थों और सामंती अंधविश्वासों से ओतप्रोत निष्कर्षों से अधिक कुछ नहीं होता, जो हर तरह से रोमानी, विकृत और रहस्यमय होता है। परमेश्वर को जानने और उसे परिभाषित करने का उनका तरीका उन्हीं लोगों के साँचे में ढला होता है, जो केवल ऊपर स्वर्ग में या आसमान में किसी वृद्ध के होने में विश्वास करते हैं, जबकि परमेश्वर की वास्तविकता, उसका सार, उसका स्वभाव, उसका स्वरूप और अस्तित्व आदि - वह सब, जो वास्तविक स्वयं परमेश्वर से संबंध रखता है - ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें समझने में उनका ज्ञान विफल रहा है, जिनसे उनके ज्ञान का पूरी तरह से संबंध-विच्छेद हो गया है, यहाँ तक कि वे इतने अलग हैं, जितने उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव। इस तरह, हालाँकि वे लोग परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति और पोषण में जीते हैं, फिर भी वे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के मार्ग पर सचमुच चलने में असमर्थ हैं। इसका वास्तविक कारण यह है कि वे कभी भी परमेश्वर से परिचित नहीं हुए हैं, न ही उन्होंने उसके साथ कभी वास्तविक संपर्क या समागम किया है, अतः उनके लिए परमेश्वर के साथ पारस्परिक समझ पर पहुँचना, या अपने भीतर परमेश्वर के प्रति सच्चा विश्वास पैदा कर पाना, उसका सच्चा अनुसरण या उसकी सच्ची आराधना जाग्रत कर पाना असंभव है। इस परिप्रेक्ष्य और दृष्टिकोण ने - कि उन्हें इस प्रकार परमेश्वर के वचनों को देखना चाहिए, उन्हें इस प्रकार परमेश्वर को देखना चाहिए, उन्हें अनंत काल तक अपने प्रयासों में खाली हाथ लौटने, और परमेश्वर का भय मानने तथा बुराई से दूर रहने के मार्ग पर न चल पाने के लिए अभिशप्त कर दिया है। जिस लक्ष्य को वे साध रहे हैं और जिस ओर वे जा रहे हैं, वह प्रदर्शित करता है कि अनंत काल से वे परमेश्वर के शत्रु हैं और अनंत काल तक वे कभी उद्धार प्राप्त नहीं कर सकेंगे। यदि किसी ऐसे व्यक्ति की, जिसने कई वर्षों तक परमेश्वर का अनुसरण किया है और कई सालों तक उसके वचनों के पोषण का आनंद लिया है, परमेश्वर संबंधी परिभाषा अनिवार्यतः वैसी ही है, जैसी मूर्तियों के सामने भक्ति-भाव से दंडवत करने वाले व्यक्ति की होती है, तो यह इस बात का सूचक है कि इस व्यक्ति ने परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता प्राप्त नहीं की है। इसका कारण यह है कि उसने परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में बिलकुल भी प्रवेश नहीं किया है और इस कारण से, परमेश्वर के वचनों में निहित वास्तविकता, सत्य, इरादों और मनुष्य से उसकी अपेक्षाओं का उस व्यक्ति से कुछ लेना-देना नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के वचनों के सतही अर्थ पर चाहे कितनी भी मेहनत से कार्य करे, वह सब व्यर्थ है : क्योंकि वह मात्र शब्दों का अनुसरण करता है, इसलिए उसे अनिवार्य रूप से मात्र शब्द ही प्राप्त होंगे। परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन दिखने में भले ही सीधे-सादे या गहन हों, लेकिन वे सभी सत्य हैं, और जीवन में प्रवेश करने वाले मनुष्य के लिए अपरिहार्य हैं; वे जीवन-जल के ऐसे झरने हैं, जो मनुष्य को आत्मा और देह दोनों से जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं। वे मनुष्य को जीवित रहने के लिए हर ज़रूरी चीज़ मुहैया कराते हैं; उसके दैनिक जीवन के लिए सिद्धांत और मत; उद्धार पाने के लिए जो मार्ग उसे अपनाना आवश्यक है साथ ही उस मार्ग के लक्ष्य और दिशा; उसके अंदर परमेश्वर के समक्ष एक सृजित प्राणी के रूप में हर सत्य होना चाहिए; तथा हर वह सत्य होना चाहिए कि मनुष्य परमेश्वर की आज्ञाकारिता और आराधना कैसे करता है। वे मनुष्य का अस्तित्व सुनिश्चित करने वाली गारंटी हैं, वे मनुष्य का दैनिक आहार हैं, और ऐसा मजबूत सहारा भी हैं, जो मनुष्य को सशक्त और अटल रहने में सक्षम बनाते हैं। वे सत्य की वास्तविकता से संपन्न हैं जिससे सृजित मनुष्य सामान्य मानवता को जीता है, वे उस सत्य से संपन्न हैं, जिससे मनुष्य भ्रष्टता से मुक्त होता है और शैतान के जाल से बचता है, वे उस अथक शिक्षा, उपदेश, प्रोत्साहन और सांत्वना से संपन्न हैं, जो स्रष्टा सृजित मानवजाति को देता है। वे ऐसे प्रकाश-स्तंभ हैं, जो मनुष्य को सभी सकारात्मक बातों को समझने के लिए मार्गदर्शन और प्रबुद्धता देते हैं, ऐसी गारंटी हैं जो यह सुनिश्चित करती है कि मनुष्य उस सबको जो धार्मिक और अच्छा है, उन मापदंडों को जिन पर सभी लोगों, घटनाओं और वस्तुओं को मापा जाता है, तथा ऐसे सभी दिशानिर्देशों को जिए और प्राप्त करे, जो मनुष्य को उद्धार और प्रकाश के मार्ग पर ले जाते हैं। केवल परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अनुभवों में ही मनुष्य को सत्य और जीवन की आपूर्ति की जा सकती है; केवल इनसे ही मनुष्य की समझ में आ सकता है कि सामान्य मानवता क्या है, सार्थक जीवन क्या है, वास्तविक सृजित प्राणी क्या है, परमेश्वर के प्रति वास्तविक आज्ञाकारिता क्या है; केवल इनसे ही मनुष्य को समझ में आ सकता है कि उसे परमेश्वर की परवाह किस तरह करनी चाहिए, सृजित प्राणी का कर्तव्य कैसे पूरा करना चाहिए, और एक वास्तविक मनुष्य की समानता कैसे प्राप्त करनी चाहिए; केवल इनसे ही मनुष्य को समझ में आ सकता है कि सच्ची आस्था और सच्ची आराधना क्या है; केवल इनसे ही मनुष्य समझ पाता है कि स्वर्ग, पृथ्वी और सभी चीजों का शासक कौन है; केवल इनसे ही मनुष्य समझ सकता है कि वह जो समस्त सृष्टि का स्वामी है, किन साधनों से सृष्टि पर शासन करता है, उसकी अगुआई करता है और उसका पोषण करता है; और केवल इनसे ही मनुष्य समझ-बूझ सकता है कि वह, जो समस्त सृष्टि का स्वामी है, किन साधनों के ज़रिये मौजूद रहता है, स्वयं को अभिव्यक्त करता है और कार्य करता है। परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अनुभवों से अलग, मनुष्य के पास परमेश्वर के वचनों और सत्य का कोई वास्तविक ज्ञान या अंतदृष्टि नहीं होती। ऐसा व्यक्ति पूरी तरह से एक ज़िंदा लाश, पूरा घोंघा होता है, और स्रष्टा से संबंधित किसी भी ज्ञान का उससे कोई वास्ता नहीं होता। परमेश्वर की दृष्टि में, ऐसे व्यक्ति ने कभी उस पर विश्वास नहीं किया है, न कभी उसका अनुसरण किया है, और इसलिए परमेश्वर न तो उसे अपना विश्वासी मानता है और न ही अपना अनुयायी, एक सच्चा सृजित प्राणी मानना तो दूर की बात रही। एक सच्चे सृजित प्राणी को यह जानना चाहिए कि स्रष्टा कौन है, मनुष्य का सृजन किसलिए हुआ है, एक सृजित प्राणी की ज़िम्मेदारियों को किस तरह पूरा करें, और संपूर्ण सृष्टि के प्रभु की आराधना किस तरह करें, उसे स्रष्टा के इरादों, इच्छाओं और अपेक्षाओं को समझना, बूझना और जानना चाहिए, उनकी परवाह करनी चाहिए, और स्रष्टा के तरीके के अनुरूप कार्य करना चाहिए - परमेश्वर का भय मानो और बुराई से दूर रहो। परमेश्वर का भय मानना क्या है? और बुराई से दूर कैसे रहा जा सकता है? "परमेश्वर का भय मानने" का अर्थ अज्ञात डर या दहशत नहीं होता, न ही इसका अर्थ टाल-मटोल करना, दूर रहना, मूर्तिपूजा करना या अंधविश्वास होता है। वरन् यह श्रद्धा, सम्मान, विश्वास, समझ, परवाह, आज्ञाकारिता, समर्पण और प्रेम के साथ-साथ बिना शर्त और बिना शिकायत आराधना, प्रतिदान और समर्पण होता है। परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्ची श्रद्धा, सच्चा विश्वास, सच्ची समझ, सच्ची परवाह या आज्ञाकारिता नहीं होगी, वरन् केवल डर और व्यग्रता, केवल शंका, गलतफहमी, टालमटोल और आनाकानी होगी; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्चा समर्पण और प्रतिदान नहीं होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्ची आराधना और समर्पण नहीं होगा, मात्र अंधी मूर्तिपूजा और अंधविश्वास होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य परमेश्वर के तरीके के अनुसार कार्य नहीं कर पाएगा, या परमेश्वर का भय नहीं मानेगा, या बुराई का त्याग नहीं कर पाएगा। इसके विपरीत, मनुष्य का हर क्रियाकलाप और व्यवहार, परमेश्वर के प्रति विद्रोह और अवज्ञा से, निंदात्मक आरोपों और आलोचनात्मक आकलनों से तथा सत्य और परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अर्थ के विपरीत चलने वाले दुष्ट आचरण से भरा होगा। जब मनुष्य को परमेश्वर में सच्चा विश्वास होगा, तो वह सच्चाई से उसका अनुसरण करेगा और उस पर निर्भर रहेगा; केवल परमेश्वर पर सच्चे विश्वास और निर्भरता से ही मनुष्य में सच्ची समझ और सच्चा बोध होगा; परमेश्वर के वास्तविक बोध के साथ उसके प्रति वास्तविक परवाह आती है; परमेश्वर के प्रति सच्ची परवाह से ही मनुष्य में सच्ची आज्ञाकारिता आ सकती है; परमेश्वर के प्रति सच्ची आज्ञाकारिता से ही मनुष्य में सच्चा समर्पण आ सकता है; परमेश्वर के प्रति सच्चे समर्पण से ही मनुष्य बिना शर्त और बिना शिकायत प्रतिदान कर सकता है; सच्चे विश्वास और निर्भरता, सच्ची समझ और परवाह, सच्ची आज्ञाकारिता, सच्चे समर्पण और प्रतिदान से ही मनुष्य परमेश्वर के स्वभाव और सार को जान सकता है, स्रष्टा की पहचान को जान सकता है; स्रष्टा को वास्तव में जान लेने के बाद ही मनुष्य अपने भीतर सच्ची आराधना और समर्पण जाग्रत कर सकता है; स्रष्टा के प्रति सच्ची आराधना और समर्पण होने के बाद ही वह वास्तव में बुरे मार्गों का त्याग कर पाएगा, अर्थात्, बुराई से दूर रह पाएगा। इससे "परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने" की संपूर्ण प्रक्रिया बनती है, और यही परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मूल तत्व भी है। यही वह मार्ग है, जिसे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के लिए पार करना आवश्यक है। "परमेश्वर का भय मानना और दुष्टता का त्याग करना" तथा परमेश्वर को जानना अभिन्न रूप से असंख्य सूत्रों से जुड़े हैं, और उनके बीच का संबंध स्वतः स्पष्ट है। यदि कोई बुराई से दूर रहना चाहता है, तो उसमें पहले परमेश्वर का वास्तविक भय होना चाहिए; यदि कोई परमेश्वर का वास्तविक भय मानना चाहता है, तो उसमें पहले परमेश्वर का सच्चा ज्ञान होना चाहिए; यदि कोई परमेश्वर का ज्ञान हासिल करना चाहता है, तो उसे पहले परमेश्वर के वचनों का अनुभव करना चाहिए, परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश करना चाहिए, परमेश्वर की ताड़ना, अनुशासन और न्याय का अनुभव करना चाहिए; यदि कोई परमेश्वर के वचनों का अनुभव करना चाहता है, तो उसे पहले परमेश्वर के वचनों के रूबरू आना चाहिए, परमेश्वर के रूबरू आना चाहिए, और परमेश्वर से निवेदन करना चाहिए कि वह लोगों, घटनाओं और वस्तुओं से युक्त सभी प्रकार के परिवेशों के रूप में परमेश्वर के वचनों को अनुभव करने के अवसर प्रदान करे; यदि कोई परमेश्वर और उसके वचनों के रूबरू आना चाहता है, तो उसे पहले एक सरल और सच्चा हृदय, सत्य को स्वीकार करने की तत्परता, कष्ट झेलने की इच्छा, और बुराई से दूर रहने का संकल्प और साहस, और एक सच्चा सृजित प्राणी बनने की अभिलाषा रखनी चाहिए...। इस प्रकार कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए, तुम परमेश्वर के निरंतर करीब आते जाओगे, तुम्हारा हृदय निरंतर शुद्ध होता जाएगा, और तुम्हारा जीवन और जीवित रहने के मूल्य, परमेश्वर को जान पाने के कारण निरंतर अधिक अर्थपूर्ण और दीप्तिमान होते जाएँगे। फिर एक दिन तुम अनुभव करोगे कि स्रष्टा अब कोई पहेली नहीं रह गया है, स्रष्टा कभी तुमसे छिपा नहीं था, स्रष्टा ने कभी अपना चेहरा तुमसे छिपाया नहीं था, स्रष्टा तुमसे बिलकुल भी दूर नहीं है, स्रष्टा अब बिलकुल भी वह नहीं है जिसके लिए तुम अपने विचारों में लगातार तरस रहे हो लेकिन जिसके पास तुम अपनी भावनाओं से पहुँच नहीं पा रहे हो, वह वाकई और सच में तुम्हारे दाएँ-बाएँ खड़ा तुम्हारी सुरक्षा कर रहा है, तुम्हारे जीवन को पोषण दे रहा है और तुम्हारी नियति को नियंत्रित कर रहा है। वह सुदूर क्षितिज पर नहीं है, न ही उसने अपने आपको ऊपर कहीं बादलों में छिपाया हुआ है। वह एकदम तुम्हारी बगल में है, तुम्हारे सर्वस्व पर आधिपत्य कर रहा है, वह वो सब है जो तुम्हारे पास है, और वही एकमात्र चीज़ है जो तुम्हारे पास है। ऐसा परमेश्वर तुम्हें स्वयं को अपने हृदय से प्रेम करने देता है, स्वयं से लिपटने देता है, स्वयं को पकड़ने देता है, अपनी स्तुति करने देता है, गँवा देने का भय पैदा करता है, अपना त्याग करने, अपनी अवज्ञा करने, अपने को टालने या दूर करने का अनिच्छुक बना देता है। तुम बस उसकी परवाह करना, उसका आज्ञापालन करना, जो भी वह देता है उस सबका प्रतिदान करना और उसके प्रभुत्व के प्रति समर्पित होना चाहते हो। तुम अब उसके द्वारा मार्गदर्शन किए जाने, पोषण दिए जाने, निगरानी किए जाने, उसके द्वारा देखभाल किए जाने से इंकार नहीं करते और न ही उसकी आज्ञा और आदेश का पालन करने से इंकार करते हो। तुम सिर्फ़ उसका अनुसरण करना चाहते हो, उसके साथ उसके आस-पास रहना चाहते हो, उसे अपना एकमात्र जीवन स्वीकार करना चाहते हो, उसे अपना एकमात्र प्रभु, अपना एकमात्र परमेश्वर स्वीकार करना चाहते हो।
पूरे देश में शारदीय नवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। अभी दीपावली आने में एक महीने से भी कम समय बचा है। इसी बीच मोदी सरकार ने 80 करोड़ परिवारों को नवरात्रि और दीपावली का गिफ्ट देकर उनके घरों में खुशियां बिखेर दी हैं। गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (28 सितंबर, 2022) को हुई कैबिनेट की बैठक में गरीबों को राहत देने के लिए एक बड़ा फैसला किया गया। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना यानि पीएमजीकेएवाई को अगले तीन महीने तक बढ़ाने की मंजूरी दी। अब इस योजना के तहत अक्टूबर से दिसंबर 2022 तक 80 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि आने वाले तीन महीने त्योहारों के हैं। सरकार चाहती है कि इस दौरान लोगों के चेहरे पर मुस्कान हो। योजना का लाभ देश के 80 करोड़ लोगों को मिलता है और यह तीन महीने आगे जारी रहेगा। पहले छह चरण में इस योजना पर 3. 45 लाख करोड़ सब्सिडी के तौर पर खर्च हो चुका है। सातवें विस्तार के साथ यह 3. 91 लाख करोड़ होगा। "मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले तीन महीने (अक्टूबर 2022-दिसंबर 2022) के लिए बढ़ाने को मंज़ूरी दी है । कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों घरों में रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया था। तब मोदी सरकार ने अप्रैल 2020 में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की थी। लोगों को राहत देने के लिए लाई गई इस योजना को सातवीं बार विस्तार दिया गया है। इस चरण के विस्तार के लिए 44,762 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इससे 122 लाख मीट्रिक टन अनाज वितरित किया जाएगा। वहीं सात चरणों में कुल 1121 लाख मीट्रिक टन अनाज वितरित हुए। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले तीन महीने (अक्टूबर 2022-दिसंबर 2022) के लिए बढ़ाने को मंज़ूरी दे दी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना दुनिया की सबसे बड़ी अन्न योजना है। इसकी डेडलाइन 30 सितंबर को खत्म हो रही थी। इसलिए सरकार ने इसे विस्तार देने का फैसला किया। इस योजना के तहत मोदी सरकार हर राशन कार्ड धारकों को प्रति व्यक्ति पांच किलो मुफ्त अनाज देती है। अतिरिक्त मुफ्त अनाज एनएफएसए के तहत प्रदान किए गए सामान्य कोटे से ज्यादा है, जो अत्यधिक रियायती दर पर 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम है। यह योजना नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत मिलने वाले कोटे से अलग है। इस कानून के तहत ग्रामीण इलाकों में 75 फीसदी और शहरी इलाकों में 50 फीसदी आबादी को सस्ता राशन दिया जाता है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास अनाज के स्टॉक में कोई कमी नहीं है। एक अगस्त तक सरकार के पास केंद्रीय पूल में 2. 8 करोड़ टन चावल और 2. 67 करोड़ टन गेहूं था।
पूरे देश में शारदीय नवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। अभी दीपावली आने में एक महीने से भी कम समय बचा है। इसी बीच मोदी सरकार ने अस्सी करोड़ परिवारों को नवरात्रि और दीपावली का गिफ्ट देकर उनके घरों में खुशियां बिखेर दी हैं। गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में गरीबों को राहत देने के लिए एक बड़ा फैसला किया गया। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना यानि पीएमजीकेएवाई को अगले तीन महीने तक बढ़ाने की मंजूरी दी। अब इस योजना के तहत अक्टूबर से दिसंबर दो हज़ार बाईस तक अस्सी करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि आने वाले तीन महीने त्योहारों के हैं। सरकार चाहती है कि इस दौरान लोगों के चेहरे पर मुस्कान हो। योजना का लाभ देश के अस्सी करोड़ लोगों को मिलता है और यह तीन महीने आगे जारी रहेगा। पहले छह चरण में इस योजना पर तीन. पैंतालीस लाख करोड़ सब्सिडी के तौर पर खर्च हो चुका है। सातवें विस्तार के साथ यह तीन. इक्यानवे लाख करोड़ होगा। "मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले तीन महीने के लिए बढ़ाने को मंज़ूरी दी है । कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान लाखों घरों में रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया था। तब मोदी सरकार ने अप्रैल दो हज़ार बीस में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की थी। लोगों को राहत देने के लिए लाई गई इस योजना को सातवीं बार विस्तार दिया गया है। इस चरण के विस्तार के लिए चौंतालीस,सात सौ बासठ करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इससे एक सौ बाईस लाख मीट्रिक टन अनाज वितरित किया जाएगा। वहीं सात चरणों में कुल एक हज़ार एक सौ इक्कीस लाख मीट्रिक टन अनाज वितरित हुए। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले तीन महीने के लिए बढ़ाने को मंज़ूरी दे दी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना दुनिया की सबसे बड़ी अन्न योजना है। इसकी डेडलाइन तीस सितंबर को खत्म हो रही थी। इसलिए सरकार ने इसे विस्तार देने का फैसला किया। इस योजना के तहत मोदी सरकार हर राशन कार्ड धारकों को प्रति व्यक्ति पांच किलो मुफ्त अनाज देती है। अतिरिक्त मुफ्त अनाज एनएफएसए के तहत प्रदान किए गए सामान्य कोटे से ज्यादा है, जो अत्यधिक रियायती दर पर दो-तीन रुपयापये प्रति किलोग्राम है। यह योजना नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत मिलने वाले कोटे से अलग है। इस कानून के तहत ग्रामीण इलाकों में पचहत्तर फीसदी और शहरी इलाकों में पचास फीसदी आबादी को सस्ता राशन दिया जाता है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम के पास अनाज के स्टॉक में कोई कमी नहीं है। एक अगस्त तक सरकार के पास केंद्रीय पूल में दो. आठ करोड़ टन चावल और दो. सरसठ करोड़ टन गेहूं था।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव में आरएसएस से जुड़े एबीवीपी ने शुक्रवार को अध्यक्ष सहित तीन पदों पर जीत हासिल की जबकि कांग्रेस सर्मिथत एनएसयूआई को सचिव पद पर जीत मिली। चुनाव परिणाम आते ही किंग्सवे कैम्प स्थित मतगणना केंद्र के बाहर जश्न शुरू हो गया। समर्थकों ने 'ढोल' की थाप पर नृत्य किया तथा विजेता उम्मीदवारों पर गुलाब की पंखुडियां बरसाईं। इसके बाद माला पहने विजेताओं ने विश्वविद्यालय के कला संकाय की तरफ कूच किया जहां से विजयी जुलूस निकाला जाएगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के अश्वित दहिया ने अध्यक्ष पद के लिए नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के चेतन त्यागी को 19 हजार मतों से पराजित किया। एबीवीपी के प्रदीप तंवर और शिवांगी खरवाल उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर क्रमशः 8574 और 2914 वोटों से विजयी रहे। डूसू चुनावों में बृहस्पतिवार को 39. 90 फीसदी वोट पड़े जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब चार फीसदी कम थे। पिछले वर्ष के चुनाव में 44. 46 फीसदी वोट पड़े। डूसू में चार पदों के लिए चुनाव ईवीएम में खराबी के आरोपों के बीच संपन्न हुए। चार महिलाओं सहित 16 उम्मीदवार मैदान में थे और इसके लिए 52 मतदान केंद्र बनाए गए थे। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में आरएसएस से जुड़े एबीवीपी ने शुक्रवार को अध्यक्ष सहित तीन पदों पर जीत हासिल की जबकि कांग्रेस सर्मिथत एनएसयूआई को सचिव पद पर जीत मिली। चुनाव परिणाम आते ही किंग्सवे कैम्प स्थित मतगणना केंद्र के बाहर जश्न शुरू हो गया। समर्थकों ने 'ढोल' की थाप पर नृत्य किया तथा विजेता उम्मीदवारों पर गुलाब की पंखुडियां बरसाईं। इसके बाद माला पहने विजेताओं ने विश्वविद्यालय के कला संकाय की तरफ कूच किया जहां से विजयी जुलूस निकाला जाएगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अश्वित दहिया ने अध्यक्ष पद के लिए नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के चेतन त्यागी को उन्नीस हजार मतों से पराजित किया। एबीवीपी के प्रदीप तंवर और शिवांगी खरवाल उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर क्रमशः आठ हज़ार पाँच सौ चौहत्तर और दो हज़ार नौ सौ चौदह वोटों से विजयी रहे। डूसू चुनावों में बृहस्पतिवार को उनतालीस. नब्बे फीसदी वोट पड़े जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब चार फीसदी कम थे। पिछले वर्ष के चुनाव में चौंतालीस. छियालीस फीसदी वोट पड़े। डूसू में चार पदों के लिए चुनाव ईवीएम में खराबी के आरोपों के बीच संपन्न हुए। चार महिलाओं सहित सोलह उम्मीदवार मैदान में थे और इसके लिए बावन मतदान केंद्र बनाए गए थे। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
माया एवं अविद्या की चर्चा की गयी है। लेकिन इस विषय में दोनों दार्शनिकों के दृष्टिकोण भावनात्मक दृष्टि से समान होते हुए भी शाब्दिक रूप से भिन्नता लिए हुए है। शङ्कर ने उपदेशसाहस्री में माया शब्द का अर्थ मायावी परमेश्वर की शक्ति के रूप में लिया है और परमेश्वर की इस शक्ति को सत् एवं असत् से विलक्षण होने के कारण अनिवर्चनीय एवं मिथ्या बताया है। 22 जबकि रामानुजाचार्य ने माया को परमात्मा की विचित्र शक्ति का रूप दिया है। श्रीभाष्य में माया शब्द को आश्चर्य अर्थ का बोधक माना गया है। 23 इसके अतिरिक्त रामानुज ने अपने गीताभाष्य में माया शब्द का अर्थ कूटयुक्ति भी लगाया है। 24 अविद्या के विषय में शङ्कराचार्य का कहना है कि शरीर के साथ जीव का तादात्म्य भाव उसकी अनादि अविद्या का स्पष्ट प्रमाण है। 25 परन्तु रामानुजाचार्य शरीर के साथ जीव का तादात्म्य, अज्ञान का परिणाम मानते हैं। 26 इस प्रकार शङ्कर की 'अविद्या' रामानुज के 'अज्ञान' के समकक्ष प्रतीत होती है। शङ्कर और रामानु की मुक्तिविषयक विचारधारा में भी पर्याप्त न हस्ती न तदारूढ़ो मायाव्यन्यो यथास्थितः । न प्राणादि न तद्रष्टा तथा ज्ञोऽन्यः सदादृशिः।। (उ.सा. 17/30 ) मायाशब्दो ह्याश्चर्यवाची (श्रीभाष्य 3/2/3) बीजं चैकं यथा भिन्नं प्राणस्वप्नादिभिस्तथा । स्वप्नजाग्रच्छरीरेषु तद्वच्चात्मा जलेन्दुवत् । ( उ.सा. 17/28 ) शरीरगोचरा चाहं बुद्धिरविद्यैव (रा.भा.ब्र.सू. 1/1/1)
माया एवं अविद्या की चर्चा की गयी है। लेकिन इस विषय में दोनों दार्शनिकों के दृष्टिकोण भावनात्मक दृष्टि से समान होते हुए भी शाब्दिक रूप से भिन्नता लिए हुए है। शङ्कर ने उपदेशसाहस्री में माया शब्द का अर्थ मायावी परमेश्वर की शक्ति के रूप में लिया है और परमेश्वर की इस शक्ति को सत् एवं असत् से विलक्षण होने के कारण अनिवर्चनीय एवं मिथ्या बताया है। बाईस जबकि रामानुजाचार्य ने माया को परमात्मा की विचित्र शक्ति का रूप दिया है। श्रीभाष्य में माया शब्द को आश्चर्य अर्थ का बोधक माना गया है। तेईस इसके अतिरिक्त रामानुज ने अपने गीताभाष्य में माया शब्द का अर्थ कूटयुक्ति भी लगाया है। चौबीस अविद्या के विषय में शङ्कराचार्य का कहना है कि शरीर के साथ जीव का तादात्म्य भाव उसकी अनादि अविद्या का स्पष्ट प्रमाण है। पच्चीस परन्तु रामानुजाचार्य शरीर के साथ जीव का तादात्म्य, अज्ञान का परिणाम मानते हैं। छब्बीस इस प्रकार शङ्कर की 'अविद्या' रामानुज के 'अज्ञान' के समकक्ष प्रतीत होती है। शङ्कर और रामानु की मुक्तिविषयक विचारधारा में भी पर्याप्त न हस्ती न तदारूढ़ो मायाव्यन्यो यथास्थितः । न प्राणादि न तद्रष्टा तथा ज्ञोऽन्यः सदादृशिः।। मायाशब्दो ह्याश्चर्यवाची बीजं चैकं यथा भिन्नं प्राणस्वप्नादिभिस्तथा । स्वप्नजाग्रच्छरीरेषु तद्वच्चात्मा जलेन्दुवत् । शरीरगोचरा चाहं बुद्धिरविद्यैव
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने आज 23 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इस सूची में कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहाँ पर पूर्व घोषित प्रत्याशियों को बदल दिया गया है। रामपुर की स्वार विधानसभा क्षेत्र से मोहम्मद आज़म खां के बेटे अब्दुल्ला आज़म को प्रत्याशी बनाया गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सूची जारी करते हुए बांदा से बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी के भाई हशमुद्दीन सिद्दीकी को टिकट दिया है। सूची में बुडहाना से क़मर हसन को प्रत्याशी बनाया गया है। मुज़फ्फरनगर के सरधना से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बदल गया है। यहाँ पर मुकेश कुमार के स्थान पर अब्दुल्ला राना को टिकट दिया गया है। चमरउआ से बीना भारद्वाज को प्रत्याशी बनाया गया है। बड़ौत से विजय कुमार चौधरी को टिकट दिया गया है। दादरी सीट से रवीन्द्र भारती एडवोकेट चुनाव लड़ेंगे। बुलंदशहर से राकेश वर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है। बहुजन समाज पार्टी छोड़कर हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान को संडीला से टिकट दिया गया है। वीरगंज से शराफ़त यार खान, बरेली शहर से राजेश अग्रवाल और खागा (सुरक्षित) से ओम प्रकाश को टिकट दिया गया है। तिलहर विधानसभा क्षेत्र से अनवर अली का टिकट काटकर वहां से कादिर अली को प्रत्याशी बनाया गया है। कानपुर कैन्ट से हाजी परवेज़ का टिकट काटकर अतीक़ अहमद को टिकट दिया गया है। अतीक अहमद अब तक इलाहाबाद से चुनाव लड़ते रहे हैं। मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र से शिवमोहन को प्रत्याशी बनाया गया है। बारा से अजय भारती को टिकट दिया गया है। रुदौली से ब्रज किशोर सिंह उर्फ़ डिम्पल को प्रत्याशी बनाया गया है। रुद्रपुर से अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ़ खोखा सिंह को टिकट दिया गया है।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने आज तेईस प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इस सूची में कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहाँ पर पूर्व घोषित प्रत्याशियों को बदल दिया गया है। रामपुर की स्वार विधानसभा क्षेत्र से मोहम्मद आज़म खां के बेटे अब्दुल्ला आज़म को प्रत्याशी बनाया गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सूची जारी करते हुए बांदा से बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी के भाई हशमुद्दीन सिद्दीकी को टिकट दिया है। सूची में बुडहाना से क़मर हसन को प्रत्याशी बनाया गया है। मुज़फ्फरनगर के सरधना से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बदल गया है। यहाँ पर मुकेश कुमार के स्थान पर अब्दुल्ला राना को टिकट दिया गया है। चमरउआ से बीना भारद्वाज को प्रत्याशी बनाया गया है। बड़ौत से विजय कुमार चौधरी को टिकट दिया गया है। दादरी सीट से रवीन्द्र भारती एडवोकेट चुनाव लड़ेंगे। बुलंदशहर से राकेश वर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है। बहुजन समाज पार्टी छोड़कर हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान को संडीला से टिकट दिया गया है। वीरगंज से शराफ़त यार खान, बरेली शहर से राजेश अग्रवाल और खागा से ओम प्रकाश को टिकट दिया गया है। तिलहर विधानसभा क्षेत्र से अनवर अली का टिकट काटकर वहां से कादिर अली को प्रत्याशी बनाया गया है। कानपुर कैन्ट से हाजी परवेज़ का टिकट काटकर अतीक़ अहमद को टिकट दिया गया है। अतीक अहमद अब तक इलाहाबाद से चुनाव लड़ते रहे हैं। मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र से शिवमोहन को प्रत्याशी बनाया गया है। बारा से अजय भारती को टिकट दिया गया है। रुदौली से ब्रज किशोर सिंह उर्फ़ डिम्पल को प्रत्याशी बनाया गया है। रुद्रपुर से अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ़ खोखा सिंह को टिकट दिया गया है।
अभिनेता-निर्देशक फरहान अख्तर ने कहा है कि निर्देशक बिजॉय नांबियार ने उन्हें एक पटकथा की पेशकश की। यह उन्हें इतनी पसंद आई है कि वह इसमें काम करने के इच्छुक हैं। फरहान ने कहा, "जो पटकथा उन्होंने मुझे दी वह बेहद पसंद आई। उनकी प्रमुख किरदार के लिए महानायक अभिताभ बच्चन को लेने की योजना थी। मुझे इसका हिस्सा होने की आशा है। "आखिरी बार विख्यात एथलीट मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' में दिखे फरहान को बहुत सराहा गया था। उन्होंने पुष्टि की कि वह अपनी बहन जोया अख्तर द्वारा निर्देशित की जाने वाली अगली फिल्म में भी दिखेंगे। इसमें अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा भी हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या बहन की अगली फिल्म में प्रियंका संग रोमांस करेंगे? फरहान ने कहा, "मैं फिल्म में उनके संग अभिनय कर रहा हूं और इससे अधिक क्या कह सकता हूं। " जोया की फिल्म एक भाई-बहन के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। इस निर्देशिका ने इन किरदारों के लिए प्रियंका और रणवीर सिंह से बात कर ली है, जबकि फरहान इसमें प्रमुख महिला नायिका के प्रेमी की भूमिका में दिखेंगे।
अभिनेता-निर्देशक फरहान अख्तर ने कहा है कि निर्देशक बिजॉय नांबियार ने उन्हें एक पटकथा की पेशकश की। यह उन्हें इतनी पसंद आई है कि वह इसमें काम करने के इच्छुक हैं। फरहान ने कहा, "जो पटकथा उन्होंने मुझे दी वह बेहद पसंद आई। उनकी प्रमुख किरदार के लिए महानायक अभिताभ बच्चन को लेने की योजना थी। मुझे इसका हिस्सा होने की आशा है। "आखिरी बार विख्यात एथलीट मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' में दिखे फरहान को बहुत सराहा गया था। उन्होंने पुष्टि की कि वह अपनी बहन जोया अख्तर द्वारा निर्देशित की जाने वाली अगली फिल्म में भी दिखेंगे। इसमें अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा भी हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या बहन की अगली फिल्म में प्रियंका संग रोमांस करेंगे? फरहान ने कहा, "मैं फिल्म में उनके संग अभिनय कर रहा हूं और इससे अधिक क्या कह सकता हूं। " जोया की फिल्म एक भाई-बहन के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। इस निर्देशिका ने इन किरदारों के लिए प्रियंका और रणवीर सिंह से बात कर ली है, जबकि फरहान इसमें प्रमुख महिला नायिका के प्रेमी की भूमिका में दिखेंगे।
दो पत्रकारों की लिखी किताब 'इंडियाज मोस्ट फियरलेस 3 : न्यू मिलिटरी स्टोरीज ऑफ अनइमैजिनेबल करेज ऐंड सेक्रिफाइस' में जून 2020 की उस रात को क्या-क्या हुआ था, उसके बारे में विस्तार से बताया गया है। शिव अरूर और राहुल सिंह की लिखी किताब में ये भी बताया गया है कि किस तरह से इंडियन आर्मी के एक कॉक्टर ने कई जख्मी चीनी सैनिकों की जान बचाई और किस तरह धूर्त चीन ने उसी डॉक्टर की बर्बरता से हत्या कर दी। 15 जून 2020 की रात को गलवान घाटी में हुई झड़प में एक कर्नल समेत भारतीय सेना के 20 जांबाजों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। चीन ने बताया कि झड़प में उसके सिर्फ 4 सैनिक मारे गए लेकिन नई किताब तथ्यों के आधार पर उसके इस झूठे दावे की धज्जियां उड़ाती है। किताब बताती है कि चीन ने किस तरह अपने नुकसान को छिपाने के लिए बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार का सहारा लिया। पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया की तरफ से प्रकाशित ये किताब इस स्वतंत्रता दिवस को रिलीज होने वाली है। गलवान घाटी में चीन ने अपने ही जख्मी सैनिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। तब भारतीय डॉक्टर नायक दीपक सिंह ने न सिर्फ जख्मी भारतीय सैनिकों बल्कि कई चीनी सैनिकों की जान बचाई। करीब 30 से ज्यादा भारतीय सैनिकों की जान बचाने के लिए उन्हें मरणोपरांत युद्धकाल के दूसरे सर्वोच्च सम्मान वीर चक्र से नवाजा गया। हालांकि, यह बात अबतक सामने नहीं आई थी कि दीपक सिंह ने कई जख्मी दुश्मनों की भी जान बचाई थी। किताब में भारतीय सेना के कर्नल रवि कांत के हवाले से बताया गया है, 'दीपक ने कितने भारतीय सैनिकों को बचाया, इसका हमारे पास आंकड़ा है। लेकिन उन्होंने उस रात चीन के कितने सैनिकों की जान बचाई, इसका आंकड़ा हमारे पास नहीं है। हम इतना जरूर कह सकते हैं कि उस रात कई जख्मी चीनी सैनिक अगर जिंदा रह पाए तो ये नायक दीपक सिंह की मेहरबानी थी। उन्हें उनकी ही सेना ने उनके हाल पर छोड़ दिया था लेकिन सिंह ने उनके जख्मों का इलाज किया। हमें देश की रक्षा के लिए जान लेने की ट्रेनिंग मिली हुई है लेकिन जिंदगी बचाने से बड़ा आखिर क्या हो सकता है? ' कर्नल रविकांत तब पीएलए से लोहा लेने वाली 16 बिहार बटालियन के सेकंड-इन-कमांड थे। कर्नल बी. संतोष बाबू के सर्वोच्च बलिदान के बाद उन्होंने बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली। किताब में बताया गया है कि नायक दीपक जख्मी चीनी सैनिकों का इलाज कर रहे थे, तभी अचानक ऊपर पहाड़ से एक चट्टान उनके ठीक बगल में गिरा। उसका एक टुकड़ा उनके ललाट पर लगा और वह गिर गए। तब एक इंडियन मेजर ने गुस्से में लाल होकर चीनियों को चेतावनी दी कि वे उस डॉक्टर को निशाना बना रहे हैं जो PLA के जख्मी जवानों का इलाज कर रहा है। खुद जख्मी होने के बावजूद नायक दीपक ने घायल सैनिकों का इलाज करना बंद नहीं किया। उसी दौरान चीनी सैनिकों ने दीपक को बंधक बना लिया। चीनियों ने उनका अपहरण करके अपने बाकी घायल सैनिकों का इलाज करवाया। अपने ही जख्मी सैनिकों को उनके हाल पर छोड़ देने वाले चीन की कायरता तो देखिए। भारतीय डॉक्टर का अपहरण करके उसने अपने बाकी जख्मी सैनिकों का भी इलाज करवाया लेकिन इलाज हो जाने के बाद उसने डॉक्टर की हत्या कर दी। 26 जनवरी 2021 को नायक दीपक सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया। उनकी पत्नी रेखा ने मई 2022 में चेन्नै स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी को जॉइन किया है। वह 2023 में बतौर लेफ्टिनेंट इंडियन आर्मी का हिस्सा बनेंगे। रेखा चाहती हैं कि वह कम से कम एक बार गलवान घाटी जरूर जाएं जहां उनके पति ने न सिर्फ अपने साथियों बल्कि दुश्मनों को भी अपने इलाज से जीवनदान दिया था। गलवान घाटी की झड़प में शामिल अफसरों और जवानों के हवाले से किताब में भारतीयों के शौर्य को विस्तार से बताया गया है। उस रात भारत की तरफ से करीब 400 सैनिक थे तो चीन की तरफ से इसके करीब तीन गुना। लेकिन भारतीयों के शौर्य से दुश्मन खेमे में खलबली मच गई। पीएलए में भगदड़ मच गई। गलवान घाटी चीनी सैनिकों की लाशों से पट गई। हवलदार धर्मवीर के हवाले से किताब में बताया गया है, 'जब हम 16 जून की सुबह इलाके में इकट्ठे हुए तब आस-पास कई चीनी सैनिकों की लाशें पड़ी हुई थीं। हमें आदेश था कि हम चीनियों के शवों को न छुए क्योंकि पीएलए बाद में अपने मारे गए सैनिकों की लाशें ले जाती। '
दो पत्रकारों की लिखी किताब 'इंडियाज मोस्ट फियरलेस तीन : न्यू मिलिटरी स्टोरीज ऑफ अनइमैजिनेबल करेज ऐंड सेक्रिफाइस' में जून दो हज़ार बीस की उस रात को क्या-क्या हुआ था, उसके बारे में विस्तार से बताया गया है। शिव अरूर और राहुल सिंह की लिखी किताब में ये भी बताया गया है कि किस तरह से इंडियन आर्मी के एक कॉक्टर ने कई जख्मी चीनी सैनिकों की जान बचाई और किस तरह धूर्त चीन ने उसी डॉक्टर की बर्बरता से हत्या कर दी। पंद्रह जून दो हज़ार बीस की रात को गलवान घाटी में हुई झड़प में एक कर्नल समेत भारतीय सेना के बीस जांबाजों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। चीन ने बताया कि झड़प में उसके सिर्फ चार सैनिक मारे गए लेकिन नई किताब तथ्यों के आधार पर उसके इस झूठे दावे की धज्जियां उड़ाती है। किताब बताती है कि चीन ने किस तरह अपने नुकसान को छिपाने के लिए बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार का सहारा लिया। पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया की तरफ से प्रकाशित ये किताब इस स्वतंत्रता दिवस को रिलीज होने वाली है। गलवान घाटी में चीन ने अपने ही जख्मी सैनिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। तब भारतीय डॉक्टर नायक दीपक सिंह ने न सिर्फ जख्मी भारतीय सैनिकों बल्कि कई चीनी सैनिकों की जान बचाई। करीब तीस से ज्यादा भारतीय सैनिकों की जान बचाने के लिए उन्हें मरणोपरांत युद्धकाल के दूसरे सर्वोच्च सम्मान वीर चक्र से नवाजा गया। हालांकि, यह बात अबतक सामने नहीं आई थी कि दीपक सिंह ने कई जख्मी दुश्मनों की भी जान बचाई थी। किताब में भारतीय सेना के कर्नल रवि कांत के हवाले से बताया गया है, 'दीपक ने कितने भारतीय सैनिकों को बचाया, इसका हमारे पास आंकड़ा है। लेकिन उन्होंने उस रात चीन के कितने सैनिकों की जान बचाई, इसका आंकड़ा हमारे पास नहीं है। हम इतना जरूर कह सकते हैं कि उस रात कई जख्मी चीनी सैनिक अगर जिंदा रह पाए तो ये नायक दीपक सिंह की मेहरबानी थी। उन्हें उनकी ही सेना ने उनके हाल पर छोड़ दिया था लेकिन सिंह ने उनके जख्मों का इलाज किया। हमें देश की रक्षा के लिए जान लेने की ट्रेनिंग मिली हुई है लेकिन जिंदगी बचाने से बड़ा आखिर क्या हो सकता है? ' कर्नल रविकांत तब पीएलए से लोहा लेने वाली सोलह बिहार बटालियन के सेकंड-इन-कमांड थे। कर्नल बी. संतोष बाबू के सर्वोच्च बलिदान के बाद उन्होंने बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली। किताब में बताया गया है कि नायक दीपक जख्मी चीनी सैनिकों का इलाज कर रहे थे, तभी अचानक ऊपर पहाड़ से एक चट्टान उनके ठीक बगल में गिरा। उसका एक टुकड़ा उनके ललाट पर लगा और वह गिर गए। तब एक इंडियन मेजर ने गुस्से में लाल होकर चीनियों को चेतावनी दी कि वे उस डॉक्टर को निशाना बना रहे हैं जो PLA के जख्मी जवानों का इलाज कर रहा है। खुद जख्मी होने के बावजूद नायक दीपक ने घायल सैनिकों का इलाज करना बंद नहीं किया। उसी दौरान चीनी सैनिकों ने दीपक को बंधक बना लिया। चीनियों ने उनका अपहरण करके अपने बाकी घायल सैनिकों का इलाज करवाया। अपने ही जख्मी सैनिकों को उनके हाल पर छोड़ देने वाले चीन की कायरता तो देखिए। भारतीय डॉक्टर का अपहरण करके उसने अपने बाकी जख्मी सैनिकों का भी इलाज करवाया लेकिन इलाज हो जाने के बाद उसने डॉक्टर की हत्या कर दी। छब्बीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को नायक दीपक सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया। उनकी पत्नी रेखा ने मई दो हज़ार बाईस में चेन्नै स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी को जॉइन किया है। वह दो हज़ार तेईस में बतौर लेफ्टिनेंट इंडियन आर्मी का हिस्सा बनेंगे। रेखा चाहती हैं कि वह कम से कम एक बार गलवान घाटी जरूर जाएं जहां उनके पति ने न सिर्फ अपने साथियों बल्कि दुश्मनों को भी अपने इलाज से जीवनदान दिया था। गलवान घाटी की झड़प में शामिल अफसरों और जवानों के हवाले से किताब में भारतीयों के शौर्य को विस्तार से बताया गया है। उस रात भारत की तरफ से करीब चार सौ सैनिक थे तो चीन की तरफ से इसके करीब तीन गुना। लेकिन भारतीयों के शौर्य से दुश्मन खेमे में खलबली मच गई। पीएलए में भगदड़ मच गई। गलवान घाटी चीनी सैनिकों की लाशों से पट गई। हवलदार धर्मवीर के हवाले से किताब में बताया गया है, 'जब हम सोलह जून की सुबह इलाके में इकट्ठे हुए तब आस-पास कई चीनी सैनिकों की लाशें पड़ी हुई थीं। हमें आदेश था कि हम चीनियों के शवों को न छुए क्योंकि पीएलए बाद में अपने मारे गए सैनिकों की लाशें ले जाती। '
Narsinghpur News : नरसिंहपुर, नई दुनिया प्रतिनिधि। जिले में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण फैला है। जिसकी वर्षो से अनदेखी करने वाले प्रशासन को अब कार्यवाही के दाैरान विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जिले के सुदूर ग्राम मलाह पिपरिया में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही दाैरान एक राजस्व निरीक्षक से ग्रामीण ने स्वजन सहित अभद्रता करते हुए अपशब्द कहे,मारने के लिए हाथ उठाया। राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने रामजी और उसके पुत्र सहित अन्य पर मामला कायम किया है। राजस्व विभाग का अमला पुलिस बल के साथ ग्राम मलाह पिपरिया में गुरुवार की दोपहर अतिक्रमण हटाने गया था। अमले ने रामजी द्वारा अतिक्रमण कर बनाई गई गुड भट्टी, दो कमरों के मकान को हटाने की कार्यवाही की। इसी समय रामजी और उसके पुत्र सहित अन्य स्वजनों ने राजस्व निरीक्षक जगदीश ठाकुर को अपशब्द कहते हुए धमकाना शुरू कर दिया। उसे मारने के लिए हाथ उठाया तो राजस्व निरीक्षक को अपना बचाव करते हुए हाथ उठाना पड़ा। यह घटना देख तत्काल पुलिस बल और कोटवारों ने आगे आकर बचाव किया। अतिक्रमण हटवाने पहुंचे सरकारी अमला में तहसीलदार, पटवारी, पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। अतिक्रमण हटाने के दौरान झगड़ा हुआ । कर्मचारियों ने जिसकी शिकायत थाना ठेमी में दर्ज करवाई है । थाना प्रभारी शंकरसिंह ठाकुर ने बताया की मामले की जांच करते हुए आरोपितों की पतासाजी की जा रही है। इस घटना क्रम को देखते हुए ग्रामीण यह कह रहे है की अब अतिक्रमण करने वालो को प्रशासन का डर नही रहा है।
Narsinghpur News : नरसिंहपुर, नई दुनिया प्रतिनिधि। जिले में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण फैला है। जिसकी वर्षो से अनदेखी करने वाले प्रशासन को अब कार्यवाही के दाैरान विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जिले के सुदूर ग्राम मलाह पिपरिया में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही दाैरान एक राजस्व निरीक्षक से ग्रामीण ने स्वजन सहित अभद्रता करते हुए अपशब्द कहे,मारने के लिए हाथ उठाया। राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने रामजी और उसके पुत्र सहित अन्य पर मामला कायम किया है। राजस्व विभाग का अमला पुलिस बल के साथ ग्राम मलाह पिपरिया में गुरुवार की दोपहर अतिक्रमण हटाने गया था। अमले ने रामजी द्वारा अतिक्रमण कर बनाई गई गुड भट्टी, दो कमरों के मकान को हटाने की कार्यवाही की। इसी समय रामजी और उसके पुत्र सहित अन्य स्वजनों ने राजस्व निरीक्षक जगदीश ठाकुर को अपशब्द कहते हुए धमकाना शुरू कर दिया। उसे मारने के लिए हाथ उठाया तो राजस्व निरीक्षक को अपना बचाव करते हुए हाथ उठाना पड़ा। यह घटना देख तत्काल पुलिस बल और कोटवारों ने आगे आकर बचाव किया। अतिक्रमण हटवाने पहुंचे सरकारी अमला में तहसीलदार, पटवारी, पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। अतिक्रमण हटाने के दौरान झगड़ा हुआ । कर्मचारियों ने जिसकी शिकायत थाना ठेमी में दर्ज करवाई है । थाना प्रभारी शंकरसिंह ठाकुर ने बताया की मामले की जांच करते हुए आरोपितों की पतासाजी की जा रही है। इस घटना क्रम को देखते हुए ग्रामीण यह कह रहे है की अब अतिक्रमण करने वालो को प्रशासन का डर नही रहा है।
पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ(Diljit Dosanjh) इन दिनों काफी व्यस्त हैं। उनकी जल्द पंजाबी फिल्म 'शाड्डा' रिलीज़ होने वाली है और इसके बाद दो बॉलीवुड फिल्में भी रिलीज़ के लिए तैयार हैं। वह आज इंडस्ट्री के सफल अभिनेता है लेकिन उनका कहना है कि सफलता मिलने के बाद उनके काम के प्रति न तो उनका दृष्टिकोण और न ही उनका अनुशासन बदला है। फिल्म 'शाड्डा' में वह एक शादी के फोटोग्राफर की भूमिका निभा रहे हैं जिनकी खुद शादी योग्य उम्र हो गयी है। फिल्म समाज और आज के युवाओं की जीवनशैली का प्रतिबिंब है। पंजाब का अधिकांश युवा विदेश में बसने की इच्छा क्यों रखता है? दिलजीत कहते हैं कि इसका जवाब बेरोजगारी है। दिलजीत ने जबसे 2016 में फिल्म 'उड़ता पंजाब' से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया है, तबसे उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा है। उन्होंने बाद में कई हिंदी फिल्मो में काम किया जिसमे 'फिल्लौरी', 'वेलकम टू न्यू यॉर्क', 'सूरमा' और आगामी फिल्में 'गुड न्यूज़' और 'अर्जुन पटियाला' शामिल है। चाहे उनका संगीत हो या फिल्मो का चयन, दिलजीत ने हमेशा रचनात्मक संतुष्टि और बॉक्स ऑफिस कामयाबी के बीच संतुलन बना कर रखा है। जगदीप सिद्धू द्वारा निर्देशित फिल्म 'शाड्डा' में नीरू बाजवा भी अहम किरदार में दिखाई देंगी। फिल्म 21 जून को रिलीज़ हो रही है।
पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ इन दिनों काफी व्यस्त हैं। उनकी जल्द पंजाबी फिल्म 'शाड्डा' रिलीज़ होने वाली है और इसके बाद दो बॉलीवुड फिल्में भी रिलीज़ के लिए तैयार हैं। वह आज इंडस्ट्री के सफल अभिनेता है लेकिन उनका कहना है कि सफलता मिलने के बाद उनके काम के प्रति न तो उनका दृष्टिकोण और न ही उनका अनुशासन बदला है। फिल्म 'शाड्डा' में वह एक शादी के फोटोग्राफर की भूमिका निभा रहे हैं जिनकी खुद शादी योग्य उम्र हो गयी है। फिल्म समाज और आज के युवाओं की जीवनशैली का प्रतिबिंब है। पंजाब का अधिकांश युवा विदेश में बसने की इच्छा क्यों रखता है? दिलजीत कहते हैं कि इसका जवाब बेरोजगारी है। दिलजीत ने जबसे दो हज़ार सोलह में फिल्म 'उड़ता पंजाब' से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया है, तबसे उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा है। उन्होंने बाद में कई हिंदी फिल्मो में काम किया जिसमे 'फिल्लौरी', 'वेलकम टू न्यू यॉर्क', 'सूरमा' और आगामी फिल्में 'गुड न्यूज़' और 'अर्जुन पटियाला' शामिल है। चाहे उनका संगीत हो या फिल्मो का चयन, दिलजीत ने हमेशा रचनात्मक संतुष्टि और बॉक्स ऑफिस कामयाबी के बीच संतुलन बना कर रखा है। जगदीप सिद्धू द्वारा निर्देशित फिल्म 'शाड्डा' में नीरू बाजवा भी अहम किरदार में दिखाई देंगी। फिल्म इक्कीस जून को रिलीज़ हो रही है।
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरावट के बावजूद त्योहारी मांग आने से दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना मंगलवार को लगातार दो दिन की गिरावट से उबरता हुआ 80 रुपए चमककर 30,780 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। सिक्का निर्माताओं के उठाव में तेजी आने से चांदी 520 रुपए की छलांग लगाकर 41,270 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंदन में सोना हाजिर 1. 95 डॉलर की गिरावट लेकर 1,306. 15 डॉलर प्रति औंस बोला गया। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी 1. 7 डॉलर लुढ़ककर 1,309. 80 डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी हाजिर 0. 01 डॉलर फिसलकर 17. 09 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। बाजार विश्लेषकों ने बताया कि दुनिया की प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों का पीली धातु के प्रति रुझान कम हो गया है। हालांकि, विदेशी बाजारों में रही इस गिरावट का घरेलू सर्राफा कारोबार पर व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा। बाजार में त्योहारी मांग आ रही है जिससे सोने की चमक तेज हो गई है। (वार्ता)
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरावट के बावजूद त्योहारी मांग आने से दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना मंगलवार को लगातार दो दिन की गिरावट से उबरता हुआ अस्सी रुपयापए चमककर तीस,सात सौ अस्सी रुपयापए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। सिक्का निर्माताओं के उठाव में तेजी आने से चांदी पाँच सौ बीस रुपयापए की छलांग लगाकर इकतालीस,दो सौ सत्तर रुपयापए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंदन में सोना हाजिर एक. पचानवे डॉलर की गिरावट लेकर एक,तीन सौ छः. पंद्रह डॉलर प्रति औंस बोला गया। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी एक. सात डॉलर लुढ़ककर एक,तीन सौ नौ. अस्सी डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी हाजिर शून्य. एक डॉलर फिसलकर सत्रह. नौ डॉलर प्रति औंस पर आ गई। बाजार विश्लेषकों ने बताया कि दुनिया की प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों का पीली धातु के प्रति रुझान कम हो गया है। हालांकि, विदेशी बाजारों में रही इस गिरावट का घरेलू सर्राफा कारोबार पर व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा। बाजार में त्योहारी मांग आ रही है जिससे सोने की चमक तेज हो गई है।
All Party Meet In Parliament: बजट सत्र से ऐन पहले सरकार की तरफ से बुलाई गई ऑल पार्टी मीट (सर्वदलीय बैठक) में उद्योगपति गौतम अडानी के साथ चीनी घुसपैठ का मामला जोरशोर से गूंजा। विपक्षी दलों की मांग थी कि संसद के सत्र में अडानी के साथ चीन मामले पर व्यापक चर्चा कराई जाए। लेकिन सरकार का कहना था कि चीन का मसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। संसद में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। संसद भवन में हुई मीटिंग में कांग्रेस को कोई नेता शिरकत करने नहीं पहुंचा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त थे। इस वजह से वो सर्वदलीय बैठक में शिरकत नहीं कर सके। एएनआई के मुताबिक मीटिंग में 27 दलों के 37 नेताओं ने शिरकत की। चीन का मसला बहुजन समाज पार्टी ने उठाया। संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होगा। पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। 31 जनवरी को ही सरकार आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी, 2023 को वित्त वर्ष 2023-24 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 13 मार्च से शुरू होकर छह अप्रैल तक चलेगा। बजट सत्र के दौरान 27 बैठक होंगी। सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने जाति आधारित गणना और महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने का मुद्दा भी उठाया। सरकार ने कहा कि वह संसद में नियमों के तहत हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि हम विपक्ष का सहयोग चाहते हैं। उनका कहना था कि विपक्ष सरकार के साथ सहयोग करे तो सदन में सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा कराई जा सकती है। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद थे। विपक्ष की तरफ से राकांपा के शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, आप के संजय सिंह, द्रमुक केटी आर बालू, तृणमूल के सुदीप बंदोपाध्याय और अन्नाद्रमुक के थम्बीदुरै मौजूद रहे।
All Party Meet In Parliament: बजट सत्र से ऐन पहले सरकार की तरफ से बुलाई गई ऑल पार्टी मीट में उद्योगपति गौतम अडानी के साथ चीनी घुसपैठ का मामला जोरशोर से गूंजा। विपक्षी दलों की मांग थी कि संसद के सत्र में अडानी के साथ चीन मामले पर व्यापक चर्चा कराई जाए। लेकिन सरकार का कहना था कि चीन का मसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। संसद में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। संसद भवन में हुई मीटिंग में कांग्रेस को कोई नेता शिरकत करने नहीं पहुंचा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त थे। इस वजह से वो सर्वदलीय बैठक में शिरकत नहीं कर सके। एएनआई के मुताबिक मीटिंग में सत्ताईस दलों के सैंतीस नेताओं ने शिरकत की। चीन का मसला बहुजन समाज पार्टी ने उठाया। संसद का बजट सत्र इकतीस जनवरी से शुरू होगा। पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। इकतीस जनवरी को ही सरकार आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी, दो हज़ार तेईस को वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट सत्र का पहला चरण तेरह फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण तेरह मार्च से शुरू होकर छह अप्रैल तक चलेगा। बजट सत्र के दौरान सत्ताईस बैठक होंगी। सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने जाति आधारित गणना और महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने का मुद्दा भी उठाया। सरकार ने कहा कि वह संसद में नियमों के तहत हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि हम विपक्ष का सहयोग चाहते हैं। उनका कहना था कि विपक्ष सरकार के साथ सहयोग करे तो सदन में सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा कराई जा सकती है। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद थे। विपक्ष की तरफ से राकांपा के शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, आप के संजय सिंह, द्रमुक केटी आर बालू, तृणमूल के सुदीप बंदोपाध्याय और अन्नाद्रमुक के थम्बीदुरै मौजूद रहे।
Rani Chatterjee Transformation: भोजपुरी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस में से एक रानी चटर्जी अपने दिलकश अंदाज और दमदार एक्टिंग से हमेशा फैंस का दिल जीतने में सफल रहती हैं। रानी चटर्जी की सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग है। रानी इन दिनों अपनी फिटनेस पर जमकर ध्यान दे रही हैं। वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर जिम के फोटो और वीडियो भी साझा करती रहती हैं। रानी के ट्रांसफॉर्मेशन से फैंस काफी इंप्रेस हैं। रानी चटर्जी ने जिम में स्ट्रेचिंग करते हुए अपने वर्कआउट की झलक फैंस के साथ साझा की है। रानी के इन फोटोज वह ब्लैक कलर के जिम वियर में नजर आ रही हैं। आप देख सकते हैं कि रानी जमीन पर हाथ और पैर टच करके स्ट्रेचिंग कर रही हैं। ये रानी का मोस्ट फेवरेट स्ट्रेचिंग पोज है। रानी ने फोटो कैप्शन में बताया है कि यह उनकी मोस्ट फेवरेट स्ट्रेचिंग पोज है। रानी चटर्जी का इंटेंस वर्कआउट देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएंगे। रानी खुद को फिट और शेप में रखने के लिए काफी मेहनत करती हैं। फैंस भी रानी के वर्कआउट से काफी इंस्पायर नजर आ रहे हैं। रानी चटर्जी से इंप्रेस होकर फैंस कमेंट सेक्शन में उनकी जमकर तारीफें कर रहे हैं। रानी के एक फैन ने कमेंट में लिखा है 'अमेजिंग। ' वहीं एक और यूजर ने लिखा-Uffff 🔥🔥❤️❤️. वहीं कई यूजर फायर और हार्ट इमोजी के साथ अपने रिएक्शन दे रहे हैं। बॉलीवुड और टीवी से जुड़ी अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें!
Rani Chatterjee Transformation: भोजपुरी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस में से एक रानी चटर्जी अपने दिलकश अंदाज और दमदार एक्टिंग से हमेशा फैंस का दिल जीतने में सफल रहती हैं। रानी चटर्जी की सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग है। रानी इन दिनों अपनी फिटनेस पर जमकर ध्यान दे रही हैं। वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर जिम के फोटो और वीडियो भी साझा करती रहती हैं। रानी के ट्रांसफॉर्मेशन से फैंस काफी इंप्रेस हैं। रानी चटर्जी ने जिम में स्ट्रेचिंग करते हुए अपने वर्कआउट की झलक फैंस के साथ साझा की है। रानी के इन फोटोज वह ब्लैक कलर के जिम वियर में नजर आ रही हैं। आप देख सकते हैं कि रानी जमीन पर हाथ और पैर टच करके स्ट्रेचिंग कर रही हैं। ये रानी का मोस्ट फेवरेट स्ट्रेचिंग पोज है। रानी ने फोटो कैप्शन में बताया है कि यह उनकी मोस्ट फेवरेट स्ट्रेचिंग पोज है। रानी चटर्जी का इंटेंस वर्कआउट देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएंगे। रानी खुद को फिट और शेप में रखने के लिए काफी मेहनत करती हैं। फैंस भी रानी के वर्कआउट से काफी इंस्पायर नजर आ रहे हैं। रानी चटर्जी से इंप्रेस होकर फैंस कमेंट सेक्शन में उनकी जमकर तारीफें कर रहे हैं। रानी के एक फैन ने कमेंट में लिखा है 'अमेजिंग। ' वहीं एक और यूजर ने लिखा-Uffff 🔥🔥❤️❤️. वहीं कई यूजर फायर और हार्ट इमोजी के साथ अपने रिएक्शन दे रहे हैं। बॉलीवुड और टीवी से जुड़ी अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें!
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Delhi Police) ने इंटरनेशनल अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया है. इस फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए विदेशों मे अवैध तरीके से कॉल की जा रही थी, जिसके चलते भारत सरकार के दूरसंचार विभाग को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा था. इस मामले में बुलन्दशहर के रहने वाले एक शख्स नबाब खान को गिरफ्तार किया गया है. यह टेलीफोन एक्सचेंज जीएसएम और एसआईपी ट्रंक इंटरनेट कॉलीग पर आधारित था. स्पेशल सेल को कुछ खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद अंसारी रोड, दरियागंज में रेड की गई और तब यह पता चला कि कटियाल हाउस के तीसरे माले पर इसे चलाया जा रहा था. इससे पहले, 14 जनवरी को भी इस तरह का एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज झिलमिल कालोनी शहादरा से पकड़ा गया था. यहां से भी फर्जी कॉल करने के तमाम इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए गए थे.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इंटरनेशनल अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया है. इस फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए विदेशों मे अवैध तरीके से कॉल की जा रही थी, जिसके चलते भारत सरकार के दूरसंचार विभाग को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा था. इस मामले में बुलन्दशहर के रहने वाले एक शख्स नबाब खान को गिरफ्तार किया गया है. यह टेलीफोन एक्सचेंज जीएसएम और एसआईपी ट्रंक इंटरनेट कॉलीग पर आधारित था. स्पेशल सेल को कुछ खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद अंसारी रोड, दरियागंज में रेड की गई और तब यह पता चला कि कटियाल हाउस के तीसरे माले पर इसे चलाया जा रहा था. इससे पहले, चौदह जनवरी को भी इस तरह का एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज झिलमिल कालोनी शहादरा से पकड़ा गया था. यहां से भी फर्जी कॉल करने के तमाम इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए गए थे.
भगवान शिव के विशेष पूजन के महापर्व महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने को पौराणिक शिवालयों मेें आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर, बम-बम के जयकारे व ओम नमः शिवाय के महामंत्र के बीच भक्तों ने जलाभिषेक कर दूध, भांग, धतूरा, मदार अर्पित कर भगवान शिव से मन्नतें मांगीं। सुबह से लेकर देरशाम तक जलाभिषेक को भक्तों की कतार लगी रही। पौराणिक शिवालय बाबा बेलखरनाथ धाम में पट खुलने से पहले ही भक्तों की लंबी कतार लग गई थी। वैदिक मंत्रों के बीच बाबा भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन हुआ। घंट-घड़ियाल व शंखनाद के बीच आरती और हर-हर, बम-बम के जयकारे गूंजते रहे। आरती के बाद जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया। मंदिर परिसर से लेकर मुख्य द्वार तक भक्तों की अपार भीड़ थी। युवाओं व वृद्धों के बीच बच्चे भी भक्ति भावना से लबरेज दिखे। सुबह 10 बजे के बाद भक्तों की भीड़ और बढ़ गई। मंदिर में भीड़ नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग व जाम से निजात के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। बावजूद इसके वाहनों की लंबी कतार के चलते रुक-रुक कर जाम की स्थिति बनती रही। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, भाजपा के कौशंाबी जिला प्रभारी ओमप्रकाश त्रिपाठी, मंत्री प्रतिनिधि विनोद पांडेय ने जलाभिषेक कर पूजन अर्चन किया। इसी तरह बाबा भयहरणनाथ धाम में भी महाशिवरात्रि के पर्व पर जलाभिषेक करने को लेकर भक्तों की भीड़ रही। इसी तरह शहर के बेल्हादेवी धाम, अष्टभुजा नगर, स्टेशन रोड स्थित शिव मंदिर व करनपुर स्थित सर्वेश्वरमहादेव धाम में दर्शन पूजन को लेकर शहरियों की भीड़ रही। अजगरा। महाशिवरात्रि के महापर्व पर देवघाट स्थित बालुकेश्वरनाथ धाम में जलाभिषेक को लेकर भक्तों का रेला लगा रहा। इसी तरह मानधाता के खुशहालेश्वरनाथ धाम में भी जलाभिषेक कर भक्तों पूजन-अर्चन किया। पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। महाशिवरात्रि पर पौराणिक शिवालयों एवं शहर से लेकर गांव स्थित शिव मंदिरों पर जगह-जगह जाप व रुद्राभिषेक हुए। मानधाता के जमुआ गांव स्थित बाबा ब्रह्मचारी धाम पर ओम नमः शिवाय के जाप का आयोजन हुआ। रोहित सिंह ने बताया कि मंगलवार को पूर्णाहुति के बाद भंडारे का आयोजन होगा। इसी तरह बेल्हादेवी धाम, बेलखरनाथधाम, भयहरणनाथधाम में भी जाप व रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ। बीरापुर। रानीगंज क्षेत्र के कमलेश्वरनाथ धाम, सई नदी राम घाट जामताली व पंडियननाथ महादेव गोई में भोर में ही शिवभक्तों की कतार लग गई। सुबह से शुरू हुआ जलाभिषेक देर रात तक चलता रहा। शिवभक्तों द्वारा भगवान भोलेनाथ के जयकारे के साथ जलाभिषेक किया गया। संकीर्तन के साथ शिवभक्तों द्वारा भजन आदि का कार्यक्रम किया गया। कमलेश्वरनाथ धाम में शिवभक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जहां पर हजारों भक्तों ने देर शाम तक प्रसाद ग्रहण किया। यह जानकारी आयोजक करमचंद उमरवैश्य ने दी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
भगवान शिव के विशेष पूजन के महापर्व महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने को पौराणिक शिवालयों मेें आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर, बम-बम के जयकारे व ओम नमः शिवाय के महामंत्र के बीच भक्तों ने जलाभिषेक कर दूध, भांग, धतूरा, मदार अर्पित कर भगवान शिव से मन्नतें मांगीं। सुबह से लेकर देरशाम तक जलाभिषेक को भक्तों की कतार लगी रही। पौराणिक शिवालय बाबा बेलखरनाथ धाम में पट खुलने से पहले ही भक्तों की लंबी कतार लग गई थी। वैदिक मंत्रों के बीच बाबा भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन हुआ। घंट-घड़ियाल व शंखनाद के बीच आरती और हर-हर, बम-बम के जयकारे गूंजते रहे। आरती के बाद जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया। मंदिर परिसर से लेकर मुख्य द्वार तक भक्तों की अपार भीड़ थी। युवाओं व वृद्धों के बीच बच्चे भी भक्ति भावना से लबरेज दिखे। सुबह दस बजे के बाद भक्तों की भीड़ और बढ़ गई। मंदिर में भीड़ नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग व जाम से निजात के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। बावजूद इसके वाहनों की लंबी कतार के चलते रुक-रुक कर जाम की स्थिति बनती रही। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, भाजपा के कौशंाबी जिला प्रभारी ओमप्रकाश त्रिपाठी, मंत्री प्रतिनिधि विनोद पांडेय ने जलाभिषेक कर पूजन अर्चन किया। इसी तरह बाबा भयहरणनाथ धाम में भी महाशिवरात्रि के पर्व पर जलाभिषेक करने को लेकर भक्तों की भीड़ रही। इसी तरह शहर के बेल्हादेवी धाम, अष्टभुजा नगर, स्टेशन रोड स्थित शिव मंदिर व करनपुर स्थित सर्वेश्वरमहादेव धाम में दर्शन पूजन को लेकर शहरियों की भीड़ रही। अजगरा। महाशिवरात्रि के महापर्व पर देवघाट स्थित बालुकेश्वरनाथ धाम में जलाभिषेक को लेकर भक्तों का रेला लगा रहा। इसी तरह मानधाता के खुशहालेश्वरनाथ धाम में भी जलाभिषेक कर भक्तों पूजन-अर्चन किया। पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। महाशिवरात्रि पर पौराणिक शिवालयों एवं शहर से लेकर गांव स्थित शिव मंदिरों पर जगह-जगह जाप व रुद्राभिषेक हुए। मानधाता के जमुआ गांव स्थित बाबा ब्रह्मचारी धाम पर ओम नमः शिवाय के जाप का आयोजन हुआ। रोहित सिंह ने बताया कि मंगलवार को पूर्णाहुति के बाद भंडारे का आयोजन होगा। इसी तरह बेल्हादेवी धाम, बेलखरनाथधाम, भयहरणनाथधाम में भी जाप व रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ। बीरापुर। रानीगंज क्षेत्र के कमलेश्वरनाथ धाम, सई नदी राम घाट जामताली व पंडियननाथ महादेव गोई में भोर में ही शिवभक्तों की कतार लग गई। सुबह से शुरू हुआ जलाभिषेक देर रात तक चलता रहा। शिवभक्तों द्वारा भगवान भोलेनाथ के जयकारे के साथ जलाभिषेक किया गया। संकीर्तन के साथ शिवभक्तों द्वारा भजन आदि का कार्यक्रम किया गया। कमलेश्वरनाथ धाम में शिवभक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जहां पर हजारों भक्तों ने देर शाम तक प्रसाद ग्रहण किया। यह जानकारी आयोजक करमचंद उमरवैश्य ने दी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Womens World Cup 2023 Schedule आइसीसी ने वुमेन टी20 वर्ल्ड कप 2023 के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। 10 टीमों के बीच खेली जाने वाली इस वर्ल्ड कप की मेजबानी साउथ अफ्रीका करेगा जबकि इसकी शुरुआत 10 फरवरी से हो जाएगी। नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) ने 2023 वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप के लिए कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है जिसमें एकबार फिर भारत और पाकिस्तान की राइवलरी दिखेगी। दोनों टीमें 12 फरवरी को भिड़ेंगी। इस महिला वर्ल्ड कप की मेजबानी साउथ अफ्रीका करेगा। इस टुर्नामेंट का आखिरी दो स्थान बांग्लादेश और आयरलैंड की टीम द्वारा पूरा किया था। आइसीसी वर्ल्ड कप के 8वें एडिशन की शुरुआत 10 फरवरी 2023 से होगी। पहले मुकाबले में मेजवान साउथ अफ्रीका की टीम श्रीलंका से भिड़ेगी। फाइनल मुकाबला 26 फरवरी को खेला जाएगा जिसके लिए एक रिजर्व डे की भी व्यव्स्था है। यह मैच तीन वेन्यू केप टाउन, पार्ल और गेबरहा में खेला जाएगा। नॉक आउट मुकाबले केप टाउन में ही खेले जाएंगे। पांच बार की विजेता और डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया मेजबान साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के साथ ग्रुप 1 में है। इसके अलावा इस ग्रुप में श्रीलंका और बांग्लागदेश की टीम है जो हाल ही में क्वालीफायर जीतकर आई है। ग्रुप 2 में आयरलैंड की टीम है। आयरलैंड के अलावा इस ग्रुप में इंग्लैंड, भारत, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान की टीम है। ग्रुप 1- साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और बांग्लादेश। ग्रुप-2- इंग्लैंड, भारत, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और आयलैंड। क्या है इसका फॉर्मेट? दोनों ग्रुपों में 5-5 टीमें हैं। ग्रुप गेम्स की बात करें तो 21 फरवरी तक इसके मुकाबले चलेंगे। हर टीम बाकी चार टीमों से एक-एक बार खेलेगी और दोनों ग्रुपों की टॉप 2 टीम सेमीफाइनल में भिड़ेगी। 10 फरवरी, साउथ अफ्रीका बनाम श्रीलंका (केप टाउन) 11 फरवरी, वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड (पार्ल) 11 फरवरी, ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड (पार्ल) 12 फरवरी, भारत बनाम पाकिस्तान (केप टाउन) 12 फरवरी, बांग्लादेश बनाम श्रीलंका (केप टाउन) 13 फरवरी, आयरलैंड बनाम इंग्लैंड (पार्ल) 13 फरवरी, साउथ अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड (पार्ल) 14 फरवरी, ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश (गेबरहा) 15 फरवरी, वेस्टइंडीज बनाम इंडिया (केप टाउन) 15 फरवरी, पाकिस्तान बनाम आयरलैंड (केप टाउन) 16 फरवरी, श्रीलंका बनाम ऑस्ट्रेलिया (गेबरहा) 17 फरवरी, न्यूजीलैंड बनाम बांग्लादेश (केपटाउन) 17 फरवरी, वेस्टइंडीज बनाम आयरलैंड (केप टाउन) 18 फरवरी, इंग्लैंड बनाम भारत (गेबरहा) 18 फरवरी, साउथ अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया (गेबरहा) 19 फरवरी, पाकिस्तान बनाम वेस्टइंडीज (पार्ल) 19 फरवरी, न्यूजीलैंड बनाम श्रीलंका (पार्ल) 20 फरवरी, आयरलैंड बनाम भारत (गेबरहा) 21 फरवरी, इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान (केप टाउन) 21 फरवरी, दक्षिण अफ्रीका बनाम बांग्लादेश (केप टाउन) 24 फरवरी, सेमी-फाइनल 2 (केप टाउन) 25 फरवरी, रिजर्व डे (केप टाउन) 27 फरवरी, रिजर्व डे (केप टाउन)
Womens World Cup दो हज़ार तेईस Schedule आइसीसी ने वुमेन टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। दस टीमों के बीच खेली जाने वाली इस वर्ल्ड कप की मेजबानी साउथ अफ्रीका करेगा जबकि इसकी शुरुआत दस फरवरी से हो जाएगी। नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने दो हज़ार तेईस वुमेंस टीबीस वर्ल्ड कप के लिए कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है जिसमें एकबार फिर भारत और पाकिस्तान की राइवलरी दिखेगी। दोनों टीमें बारह फरवरी को भिड़ेंगी। इस महिला वर्ल्ड कप की मेजबानी साउथ अफ्रीका करेगा। इस टुर्नामेंट का आखिरी दो स्थान बांग्लादेश और आयरलैंड की टीम द्वारा पूरा किया था। आइसीसी वर्ल्ड कप के आठवें एडिशन की शुरुआत दस फरवरी दो हज़ार तेईस से होगी। पहले मुकाबले में मेजवान साउथ अफ्रीका की टीम श्रीलंका से भिड़ेगी। फाइनल मुकाबला छब्बीस फरवरी को खेला जाएगा जिसके लिए एक रिजर्व डे की भी व्यव्स्था है। यह मैच तीन वेन्यू केप टाउन, पार्ल और गेबरहा में खेला जाएगा। नॉक आउट मुकाबले केप टाउन में ही खेले जाएंगे। पांच बार की विजेता और डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया मेजबान साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के साथ ग्रुप एक में है। इसके अलावा इस ग्रुप में श्रीलंका और बांग्लागदेश की टीम है जो हाल ही में क्वालीफायर जीतकर आई है। ग्रुप दो में आयरलैंड की टीम है। आयरलैंड के अलावा इस ग्रुप में इंग्लैंड, भारत, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान की टीम है। ग्रुप एक- साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और बांग्लादेश। ग्रुप-दो- इंग्लैंड, भारत, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और आयलैंड। क्या है इसका फॉर्मेट? दोनों ग्रुपों में पाँच-पाँच टीमें हैं। ग्रुप गेम्स की बात करें तो इक्कीस फरवरी तक इसके मुकाबले चलेंगे। हर टीम बाकी चार टीमों से एक-एक बार खेलेगी और दोनों ग्रुपों की टॉप दो टीम सेमीफाइनल में भिड़ेगी। दस फरवरी, साउथ अफ्रीका बनाम श्रीलंका ग्यारह फरवरी, वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड ग्यारह फरवरी, ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड बारह फरवरी, भारत बनाम पाकिस्तान बारह फरवरी, बांग्लादेश बनाम श्रीलंका तेरह फरवरी, आयरलैंड बनाम इंग्लैंड तेरह फरवरी, साउथ अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड चौदह फरवरी, ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश पंद्रह फरवरी, वेस्टइंडीज बनाम इंडिया पंद्रह फरवरी, पाकिस्तान बनाम आयरलैंड सोलह फरवरी, श्रीलंका बनाम ऑस्ट्रेलिया सत्रह फरवरी, न्यूजीलैंड बनाम बांग्लादेश सत्रह फरवरी, वेस्टइंडीज बनाम आयरलैंड अट्ठारह फरवरी, इंग्लैंड बनाम भारत अट्ठारह फरवरी, साउथ अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया उन्नीस फरवरी, पाकिस्तान बनाम वेस्टइंडीज उन्नीस फरवरी, न्यूजीलैंड बनाम श्रीलंका बीस फरवरी, आयरलैंड बनाम भारत इक्कीस फरवरी, इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान इक्कीस फरवरी, दक्षिण अफ्रीका बनाम बांग्लादेश चौबीस फरवरी, सेमी-फाइनल दो पच्चीस फरवरी, रिजर्व डे सत्ताईस फरवरी, रिजर्व डे
हाई कोलेस्ट्रॉल स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है जो पूरी दुनिया में आम है। बहुत से लोगों को इस बात का अहसास नहीं होता कि वे इस परेशानी का शिकार हो चुके हैं। बैड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के लक्षणों को जानना महत्वपूर्ण है ताकि इससे बचा जा सके। इससे शरीर को काफी हानि पहुंच सकता है। अधिकतम लोग अपनी प्रतिदिन की लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों के प्रति लापरवाह होते हैं जिसके वजह से खून में गंदा कोलेस्ट्रॉल जमा होता है। इससे हमारी बॉडी को कई तरह के हानि हो सकते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल एक घातक परेशानी है जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती है। यह आपकी धमनियों को ब्लड फ्लो को प्रभावित करके हाई ब्लड प्रेशर के लिए उत्पन्न होने का कारण बन सकता है। जब हमारी अर्टरीज में ब्लॉकेज होती हैं तो खून को जमा होने की अवधि में अधिक जोर लगाना पड़ता है। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण कोरोनरी आर्टरी में प्लाक बिल्डअप होता है, जिससे हार्ट मसल्स में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इससे सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और ट्रिपल वेसल डिजीज जैसी जानलेवा रोंगों का खतरा बढ़ता है। इसलिए हमें हमारी खान-पान की आदतों का ध्यान रखना चाहिए और हमेशा स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम और ठीक दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए। शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर किस तरह संकेत मिलते हैं? (high cholesterol symptoms) यदि आपको ये संकेत महसूस होते हैं, तो बैड कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना चाहिए और संभवतः इलाज के लिए एक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कौन का अंग होता है प्रभावित? शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कोरोनरी आर्टरीज या दिल को हानि पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से इन आर्टरीज में फैट, कैल्शियम और अन्य पदार्थों का एक पात्र जमा होता है जिससे आर्टरीज की ऊपरी परत तंग हो जाती है, जिससे दिल को खून पहुंचाने में मुश्किलें होती हैं और इससे दिल की रोग का खतरा बढ़ जाता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है जो पूरी दुनिया में आम है। बहुत से लोगों को इस बात का अहसास नहीं होता कि वे इस परेशानी का शिकार हो चुके हैं। बैड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के लक्षणों को जानना महत्वपूर्ण है ताकि इससे बचा जा सके। इससे शरीर को काफी हानि पहुंच सकता है। अधिकतम लोग अपनी प्रतिदिन की लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों के प्रति लापरवाह होते हैं जिसके वजह से खून में गंदा कोलेस्ट्रॉल जमा होता है। इससे हमारी बॉडी को कई तरह के हानि हो सकते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल एक घातक परेशानी है जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती है। यह आपकी धमनियों को ब्लड फ्लो को प्रभावित करके हाई ब्लड प्रेशर के लिए उत्पन्न होने का कारण बन सकता है। जब हमारी अर्टरीज में ब्लॉकेज होती हैं तो खून को जमा होने की अवधि में अधिक जोर लगाना पड़ता है। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण कोरोनरी आर्टरी में प्लाक बिल्डअप होता है, जिससे हार्ट मसल्स में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इससे सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और ट्रिपल वेसल डिजीज जैसी जानलेवा रोंगों का खतरा बढ़ता है। इसलिए हमें हमारी खान-पान की आदतों का ध्यान रखना चाहिए और हमेशा स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम और ठीक दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए। शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर किस तरह संकेत मिलते हैं? यदि आपको ये संकेत महसूस होते हैं, तो बैड कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना चाहिए और संभवतः इलाज के लिए एक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कौन का अंग होता है प्रभावित? शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कोरोनरी आर्टरीज या दिल को हानि पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से इन आर्टरीज में फैट, कैल्शियम और अन्य पदार्थों का एक पात्र जमा होता है जिससे आर्टरीज की ऊपरी परत तंग हो जाती है, जिससे दिल को खून पहुंचाने में मुश्किलें होती हैं और इससे दिल की रोग का खतरा बढ़ जाता है।
लिए तो साहित्य में क्रान्ति का संदेश हो और वह संदेश गांवों के कोने-कोने तक पहुंच सके। आज हमें साहित्य में कालिदास की ज़रूरत नहीं है, जो एक रोमांस के वातावरण में शकुन्तला जैसे पात्रों की सृष्टि करे, हमें तो गोर्की चाहिए जो मां जैसी चीज़ हमें दे सके। हमारे बीच कालिदास और भवभूति ग्राज हों भी तो उनकी कल्पना की उड़ान की प्रशंसा कराने का समय आज हमारे पास नहीं है, आज़ादी की अपनी इस लड़ाई के बाद शायद हमें उसके लिए फुरसत हो, ग्राज के विश्व - संघर्ष में शायद वह भी संभव न हो सके। हमें ग्राज साहित्यकार की जनता के संपर्क में लेना है । जवाहरलालजी लिखते हैं - "ग्राज संस्कृति का आधार अधिक व्यापक होना चाहिए, और वही भाषा का जो संस्कृति की अभि व्यक्ति का साधन है, आधार होगा ।" आज के युग के सबसे बड़े कलाकार रोमां रोलां ने एक बार लिखा था, "जीवन कला वही है जो मानवता के निकट संपर्क में हो ।" रोमां रोलां लिखते हैं, "यह एक अच्छी प्रसिद्धि है, जो अपने को जीवन से काट कर, और अन्य मनुष्यों से मित्र बन कर, प्राप्त की जाती है ! इस प्रकार के सब कलाकारों का नाश हो। हम तो जीवन के साथ रहेंगे, पृथ्वी के स्तनों से दुग्ध-पान करेंगे, और जनसाधारण में जो गहराई और पवित्रता है उसे स्वीकार करेंगे ।" कल्पना की उड़ान प्रकाश की ऊंचाई का स्पर्श करे, पर उसका आधार पृथ्वी पर हो । कलाकार की कल्पना इन्द्रधनुष के रंगों के समान ज़मीन को छूती हुई यह है समस्या का एक अंग दूसरा अंग कृत्रिमता की उन दीवारों को, जो उर्दू और हिन्दी के बीच चिन दी गई हैं, तोड़ फेंकना है । एक ही प्रदेश के हिन्दू और मुसल्मान अलग-अलग भाषाओं में सोचें, संस्कृतियों से प्रेरणा प्राप्त करें, उनके विचार जुदा-जुदा हों, उनकी अभिव्यक्ति का ढंग भिन्न हो, यह असह्य है, और यदि इसे जारी रखा गया तो हमारे देश का भविष्य नितांत अंधकारमय है । मैं मानता हूं और ऊपर की विवेचना में इसकी बहुत स्पष्ट स्वीकृति है-~~कि आज उर्दू और हिन्दी दो अलग-अलग भाषाएं बन गई हैं, और उनके साहित्य, और उन साहित्यों की मूल-प्रेरणा एक-दूसरे से भिन्न है, पर यदि हमारी राष्ट्रीयता को जीना है, और विकास पाना है तो शीघ्र ही मौजूदा उर्दू और हिन्दी के साहित्य इतिहास के संग्रहालयों में पहुंचा देनी चाहिए, और जन-साधारण में से एक सामान्य भाषा को चुन कर, उसमें नई कल्पना की उड़ान और नये भावों के प्रवेश से, एक नये साहित्य का निर्माण करना पड़ेगा, जो शुद्ध हिंदू अथवा मुस्लिम संस्कृति का एकान्त प्रतिनिधि न होकर उत्तर भारत हिन्दू और मुसल्मान दोनों के अन्यान्य उल्लास-स्वप्नों को प्रतीक बन सके, जिसमें हमारे भूत-काल की सिद्धियों का संदेश, और भविष्य के आदशों की झलक हो । समाधान की दिशा इन दोनों भाषाओं के समन्वय से यदि एक राष्ट्रभाषा की सृष्टि की जाय तो उससे उर्दू वालों को यह डर है कि उर्दू भाषा के विकास को क्षति पहुंचेगी । यह डर बिल्कुल काल्पनिक है । इसके पीछे ग़लतफ़हमी के अलावा कुछ नहीं है । यह सच है कि उर्दू हिंदी के समान ही, राष्ट्र-भाषा के लिए एक पोषकधारा (Feeder) का काम करेगी। पर इससे उसका विकास रुकेगा नहीं । उर्दू के बिना जैसे राष्ट्र-भाषा की कल्पना करना कठिन है, वैसे ही बिना अपने को राष्ट्र-भाषा के संपर्क में रखे उर्दू अपना विकास भी नहीं कर सकती । वह केवल फ़ारसी और अपरलंबित रह कर पनप नहीं सकती। इस ज़मीन में उसकी पैदाइश हुई है, इसीसे उसे अपनी जड़ों को सींचना होगा । बिना इस जीवन-शक्ति को ग्रहण किये वह सूख और मुरझा जायगी। आज उर्दू का साहित्य उस वेग से आगे नहीं बढ़ रहा है जैसे बंगला, मराठी, गुजराती और हिन्दी आगे बढ़ रहे हैं, इसका कारण यही है कि उसने अपने को देश के जीवन से अलहदा कर लिया है। हम लोग जो उर्दू को एक Prodigal Son की तरह, राष्ट्र-भाषा के विस्तृत कुटुम्ब में लौटा लेना चाहते हैं, उर्दू के लाभ के लिए भी उतने ही चिंतित हैं, जितने राष्ट्र के; क्योंकि हम जानते हैं कि उर्दू को नुकसान पहुंचा कर राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता । उर्दू एक अलग भाषा बन गई है और एक काफी लंबे अर्से तक अलग भाषा के रूप में उसका विकास होगा । उसे मिटाने की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती । वह हमारे लिए मुस्लिम देशों से संपर्क का एक बड़ा अच्छा माध्यम बन सकेगी । इस्लाम की संस्कृति में जो सर्वश्रेष्ठ है, उर्दू के द्वारा हम उसे बड़ी आसानी से पा सकेंगे । इस रूप की और तत्वों के बिना - मैं न तो राष्ट्र-भाषा के विकास की ही कोई कल्पना कर सकता हूं, न राष्ट्र के उत्थान की-उर्दू ही हमें -ईरान और तुर्की की संस्कृति और भाषा के संपर्क में रख सकेगी। सच पूछा जाय तो हिन्दी और उर्दू का आपस में कोई झगड़ा नहीं है - वह तो कुछ ग़लतफ़हमियों के कारण कुछ थोड़े से के लिए पैदा हो गया है, जिसका मिट जाना ज़रूरी ही नहीं स्वाभाविक भी होगा । गांधीजी ने इस संबंध में लिखा था, "असली प्रतिस्पर्धा तो हिन्दी और उर्दू में नहीं, बल्कि · हिन्दुस्तानी और अंग्रेज़ी में है । वही करारा मुक़ाबला है। मैं तो उसके लिए निश्चय ही बड़ा ही चिन्तित हूं । हिंदी-उर्दू विवाद का कोई आधार नहीं है ।
लिए तो साहित्य में क्रान्ति का संदेश हो और वह संदेश गांवों के कोने-कोने तक पहुंच सके। आज हमें साहित्य में कालिदास की ज़रूरत नहीं है, जो एक रोमांस के वातावरण में शकुन्तला जैसे पात्रों की सृष्टि करे, हमें तो गोर्की चाहिए जो मां जैसी चीज़ हमें दे सके। हमारे बीच कालिदास और भवभूति ग्राज हों भी तो उनकी कल्पना की उड़ान की प्रशंसा कराने का समय आज हमारे पास नहीं है, आज़ादी की अपनी इस लड़ाई के बाद शायद हमें उसके लिए फुरसत हो, ग्राज के विश्व - संघर्ष में शायद वह भी संभव न हो सके। हमें ग्राज साहित्यकार की जनता के संपर्क में लेना है । जवाहरलालजी लिखते हैं - "ग्राज संस्कृति का आधार अधिक व्यापक होना चाहिए, और वही भाषा का जो संस्कृति की अभि व्यक्ति का साधन है, आधार होगा ।" आज के युग के सबसे बड़े कलाकार रोमां रोलां ने एक बार लिखा था, "जीवन कला वही है जो मानवता के निकट संपर्क में हो ।" रोमां रोलां लिखते हैं, "यह एक अच्छी प्रसिद्धि है, जो अपने को जीवन से काट कर, और अन्य मनुष्यों से मित्र बन कर, प्राप्त की जाती है ! इस प्रकार के सब कलाकारों का नाश हो। हम तो जीवन के साथ रहेंगे, पृथ्वी के स्तनों से दुग्ध-पान करेंगे, और जनसाधारण में जो गहराई और पवित्रता है उसे स्वीकार करेंगे ।" कल्पना की उड़ान प्रकाश की ऊंचाई का स्पर्श करे, पर उसका आधार पृथ्वी पर हो । कलाकार की कल्पना इन्द्रधनुष के रंगों के समान ज़मीन को छूती हुई यह है समस्या का एक अंग दूसरा अंग कृत्रिमता की उन दीवारों को, जो उर्दू और हिन्दी के बीच चिन दी गई हैं, तोड़ फेंकना है । एक ही प्रदेश के हिन्दू और मुसल्मान अलग-अलग भाषाओं में सोचें, संस्कृतियों से प्रेरणा प्राप्त करें, उनके विचार जुदा-जुदा हों, उनकी अभिव्यक्ति का ढंग भिन्न हो, यह असह्य है, और यदि इसे जारी रखा गया तो हमारे देश का भविष्य नितांत अंधकारमय है । मैं मानता हूं और ऊपर की विवेचना में इसकी बहुत स्पष्ट स्वीकृति है-~~कि आज उर्दू और हिन्दी दो अलग-अलग भाषाएं बन गई हैं, और उनके साहित्य, और उन साहित्यों की मूल-प्रेरणा एक-दूसरे से भिन्न है, पर यदि हमारी राष्ट्रीयता को जीना है, और विकास पाना है तो शीघ्र ही मौजूदा उर्दू और हिन्दी के साहित्य इतिहास के संग्रहालयों में पहुंचा देनी चाहिए, और जन-साधारण में से एक सामान्य भाषा को चुन कर, उसमें नई कल्पना की उड़ान और नये भावों के प्रवेश से, एक नये साहित्य का निर्माण करना पड़ेगा, जो शुद्ध हिंदू अथवा मुस्लिम संस्कृति का एकान्त प्रतिनिधि न होकर उत्तर भारत हिन्दू और मुसल्मान दोनों के अन्यान्य उल्लास-स्वप्नों को प्रतीक बन सके, जिसमें हमारे भूत-काल की सिद्धियों का संदेश, और भविष्य के आदशों की झलक हो । समाधान की दिशा इन दोनों भाषाओं के समन्वय से यदि एक राष्ट्रभाषा की सृष्टि की जाय तो उससे उर्दू वालों को यह डर है कि उर्दू भाषा के विकास को क्षति पहुंचेगी । यह डर बिल्कुल काल्पनिक है । इसके पीछे ग़लतफ़हमी के अलावा कुछ नहीं है । यह सच है कि उर्दू हिंदी के समान ही, राष्ट्र-भाषा के लिए एक पोषकधारा का काम करेगी। पर इससे उसका विकास रुकेगा नहीं । उर्दू के बिना जैसे राष्ट्र-भाषा की कल्पना करना कठिन है, वैसे ही बिना अपने को राष्ट्र-भाषा के संपर्क में रखे उर्दू अपना विकास भी नहीं कर सकती । वह केवल फ़ारसी और अपरलंबित रह कर पनप नहीं सकती। इस ज़मीन में उसकी पैदाइश हुई है, इसीसे उसे अपनी जड़ों को सींचना होगा । बिना इस जीवन-शक्ति को ग्रहण किये वह सूख और मुरझा जायगी। आज उर्दू का साहित्य उस वेग से आगे नहीं बढ़ रहा है जैसे बंगला, मराठी, गुजराती और हिन्दी आगे बढ़ रहे हैं, इसका कारण यही है कि उसने अपने को देश के जीवन से अलहदा कर लिया है। हम लोग जो उर्दू को एक Prodigal Son की तरह, राष्ट्र-भाषा के विस्तृत कुटुम्ब में लौटा लेना चाहते हैं, उर्दू के लाभ के लिए भी उतने ही चिंतित हैं, जितने राष्ट्र के; क्योंकि हम जानते हैं कि उर्दू को नुकसान पहुंचा कर राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता । उर्दू एक अलग भाषा बन गई है और एक काफी लंबे अर्से तक अलग भाषा के रूप में उसका विकास होगा । उसे मिटाने की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती । वह हमारे लिए मुस्लिम देशों से संपर्क का एक बड़ा अच्छा माध्यम बन सकेगी । इस्लाम की संस्कृति में जो सर्वश्रेष्ठ है, उर्दू के द्वारा हम उसे बड़ी आसानी से पा सकेंगे । इस रूप की और तत्वों के बिना - मैं न तो राष्ट्र-भाषा के विकास की ही कोई कल्पना कर सकता हूं, न राष्ट्र के उत्थान की-उर्दू ही हमें -ईरान और तुर्की की संस्कृति और भाषा के संपर्क में रख सकेगी। सच पूछा जाय तो हिन्दी और उर्दू का आपस में कोई झगड़ा नहीं है - वह तो कुछ ग़लतफ़हमियों के कारण कुछ थोड़े से के लिए पैदा हो गया है, जिसका मिट जाना ज़रूरी ही नहीं स्वाभाविक भी होगा । गांधीजी ने इस संबंध में लिखा था, "असली प्रतिस्पर्धा तो हिन्दी और उर्दू में नहीं, बल्कि · हिन्दुस्तानी और अंग्रेज़ी में है । वही करारा मुक़ाबला है। मैं तो उसके लिए निश्चय ही बड़ा ही चिन्तित हूं । हिंदी-उर्दू विवाद का कोई आधार नहीं है ।
नई दिल्ली। टी-20 वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड द्वारा मिली शिकस्त के बाद जहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशंसक कड़ी आलोचनाएं करते नज़र आ रहे हैं वहीं दूसरी ओर रोहित शर्मा की कप्तानी में भी उंगली उठती हुई नज़र आ रही है। इसी दौरान भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने भी आपनी राय सामने रखी है। उनकी यह राय भारतीय टीम के नए कप्तान को लेकर है। क्या कहा गावस्कर ने? टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद रोहित शर्मा एवं के एल राहुल को मुख्य रूप से निशाना बनाया जा रहा है। कई पूर्व खिलाड़ी जहाँ भारतीय टीम का बचाव करते नज़र आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुनील गावस्कर ने भी अपनी राय एक स्पोर्टस चैनल के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत की है। उन्होने कहा है कि रोहित शर्मा के बाद भारतीय टीम की कप्तानी कौन संभालेगा यह बड़ा सवाल है,लेकिन इस सवाल का जवाब टीम में ही मौजूद है। गावस्कर का यह बयान कहीं न कहीं रोहित शर्मा की कप्तानी पर उंगली उठाता हुआ नज़र आ रहा है। गावस्कर ने भले ही अपनी सलाह दी है, लेकिन उनकी यह राय भारतीय टीम के इस खिलाड़ी के लिए किसी तोहफे से कम नहीं हैं उन्होने अगले कप्तान को लेकर हार्दिक पांड्या का नाम आगे रखा। उन्होने कहा कि, जिस तरह आईपीएल में नई टीम गुजरात का नेतृत्व करते हुए पांड्या ने अपनी टीम को जीत दिलाई वह काबिले तारीफ थी। उन्होने कहा कि, पांड्या में सफल कप्तानों वाले सभी गुण हैं। आईसीसी की सभी अहम ट्रॉफियों में रोहित शर्मा बतौर कप्तान सफलता हासिल नहीं कर पाए। इससे पहले एशिया कप में भी रोहित शर्मा अपने नेतृत्व में टीम को फाइनल तक नहीं पहुंचा सके, जिसके चलते रोहित शर्मा की कप्तानी पर लगातार उंगली उठ रही हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा था कि,रोहित शर्मा मैदान में हाइपर एवं निराश हो जाते हैं इसके उलट धोनी के रवैये से कभी भी विपक्षी टीम यह नहीं भांप पाती थी कि, टीम के मस्तिष्क में क्या चल रहा है।
नई दिल्ली। टी-बीस वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड द्वारा मिली शिकस्त के बाद जहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशंसक कड़ी आलोचनाएं करते नज़र आ रहे हैं वहीं दूसरी ओर रोहित शर्मा की कप्तानी में भी उंगली उठती हुई नज़र आ रही है। इसी दौरान भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने भी आपनी राय सामने रखी है। उनकी यह राय भारतीय टीम के नए कप्तान को लेकर है। क्या कहा गावस्कर ने? टी-बीस वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद रोहित शर्मा एवं के एल राहुल को मुख्य रूप से निशाना बनाया जा रहा है। कई पूर्व खिलाड़ी जहाँ भारतीय टीम का बचाव करते नज़र आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुनील गावस्कर ने भी अपनी राय एक स्पोर्टस चैनल के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत की है। उन्होने कहा है कि रोहित शर्मा के बाद भारतीय टीम की कप्तानी कौन संभालेगा यह बड़ा सवाल है,लेकिन इस सवाल का जवाब टीम में ही मौजूद है। गावस्कर का यह बयान कहीं न कहीं रोहित शर्मा की कप्तानी पर उंगली उठाता हुआ नज़र आ रहा है। गावस्कर ने भले ही अपनी सलाह दी है, लेकिन उनकी यह राय भारतीय टीम के इस खिलाड़ी के लिए किसी तोहफे से कम नहीं हैं उन्होने अगले कप्तान को लेकर हार्दिक पांड्या का नाम आगे रखा। उन्होने कहा कि, जिस तरह आईपीएल में नई टीम गुजरात का नेतृत्व करते हुए पांड्या ने अपनी टीम को जीत दिलाई वह काबिले तारीफ थी। उन्होने कहा कि, पांड्या में सफल कप्तानों वाले सभी गुण हैं। आईसीसी की सभी अहम ट्रॉफियों में रोहित शर्मा बतौर कप्तान सफलता हासिल नहीं कर पाए। इससे पहले एशिया कप में भी रोहित शर्मा अपने नेतृत्व में टीम को फाइनल तक नहीं पहुंचा सके, जिसके चलते रोहित शर्मा की कप्तानी पर लगातार उंगली उठ रही हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा था कि,रोहित शर्मा मैदान में हाइपर एवं निराश हो जाते हैं इसके उलट धोनी के रवैये से कभी भी विपक्षी टीम यह नहीं भांप पाती थी कि, टीम के मस्तिष्क में क्या चल रहा है।
डेढ़ वर्ष की लंबी-चौड़ी कसरत के बाद आखिरकार नगर निगम ने नए 32 वार्डों में व्यवसायिक भवन कर की दरें लागू कर दीं। देहरादून, जेएनएन। डेढ़ वर्ष की लंबी-चौड़ी कसरत के बाद आखिरकार नगर निगम ने नए 32 वार्डों में व्यवसायिक भवन कर की दरें लागू कर दीं। सरकार ने अप्रैल-2018 में शहरी सीमा से सटी 72 ग्राम सभाओं को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया था। इससे पहले निगम में 60 वार्ड होते थे पर नए परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 100 हो गई। हालांकि, जो 72 गांव शामिल किए गए थे, उनसे नए 32 वार्ड बने। बाकी आठ नए वार्ड पुराने क्षेत्रों का परिसीमन होने से बने थे। सरकार द्वारा इन 72 ग्राम सभाओं के ग्रामीणों को भवन कर में दस साल की छूट दी हुई है, लेकिन यह छूट केवल आवासीय भवनों पर मान्य है। व्यवसायिक भवन इस दायरे से बाहर हैं और इन पर भवन कर को लगाने के लिए नगर निगम कसरत कर रहा था। निगम ने 2014 में पहली मर्तबा स्वतः कर निर्धारण (सेल्फ टैक्स असेसमेंट) सेवा लागू की थी। इसके बाद पुराने निगम क्षेत्र में बीते वर्ष टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी पर नए वार्डों में व्यवसायिक संपत्ति पर कर को आरोपित करने के प्रयास चलते रहे। पहले कमेटी बनाई गई और फिर दरें जारी कर इन पर आपत्तियों की सुनवाई की गई। अब दरें तय करने के बाद इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई। निगम ने भवन कर का निर्धारण सड़कवार किया है। न्यूनतम दरें 12 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर स्थित भवन की हैं, जबकि अधिकतम दरें 24 मीटर से अधिक सड़क के भवन पर लागू होंगी। आरसीसी छत के अलावा अन्य पक्के भवन, कच्चे भवन, खाली पड़े आवासीय भूखंड की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। नए वार्डों में 31 जनवरी तक व्यवसायिक भवन कर जमा कराने पर लोगों को डबल छूट दी जा रही। भवन कर की राशि पर 20 फीसद सीधे छूट मिलेगी। इसके बाद बाकी राशि पर पांच फीसद की अतिरिक्त छूट और दी जाएगी। नगर आयुक्त ने बताया कि 31 जनवरी के बाद पांच फीसद वाली अतिरिक्त छूट बंद कर दी जाएगी। भवन कर की दरें प्रतिवर्ग फुट के हिसाब से वसूली जाएंगी। वार्डः मालसी, डांडा लखौंडा, आमवाला तरला, ननूरखेड़ा, मोहकमपुर, मियांवाला, भारूवाला ग्रांट, बंजारावाला, मोथरोवाला, मोहब्बेवाला, नत्थनपुर-1, नत्थनपुर-2। वार्डः विजयपुर, रांझावाला, गुजराड़ा मानसिंह, लाडपुर, नेहरूग्राम, डोभाल चौक, रायपरु, सेवलाकलां, पित्थूवाला, मेहूंवाला, हरभजवाला, नवादा, हर्रावाला, बालावाला, नथुआवाला। वार्डः चंद्रबनी, आरकेडिया-1, आरकेडिया-2, नकरौंदा। पक्के भवन (आरसीसी, आरबी छत) अन्य पक्के भवन (टीन शेड) नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय के मुताबिक, नए 32 वार्डों में व्यवसायिक भवनों पर भवन कर लागू कर दिया गया है। नए वार्ड में कुछ भवन ऐसे हैं, जो पहले नगर निगम क्षेत्र में थे और भवन कर पहले से देते आ रहे हैं। इन भवनों पर पुरानी दरें लागू रहेंगी। 31 जनवरी तक भवन कर जमा करने पर डबल छूट दी जाएगी।
डेढ़ वर्ष की लंबी-चौड़ी कसरत के बाद आखिरकार नगर निगम ने नए बत्तीस वार्डों में व्यवसायिक भवन कर की दरें लागू कर दीं। देहरादून, जेएनएन। डेढ़ वर्ष की लंबी-चौड़ी कसरत के बाद आखिरकार नगर निगम ने नए बत्तीस वार्डों में व्यवसायिक भवन कर की दरें लागू कर दीं। सरकार ने अप्रैल-दो हज़ार अट्ठारह में शहरी सीमा से सटी बहत्तर ग्राम सभाओं को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया था। इससे पहले निगम में साठ वार्ड होते थे पर नए परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या एक सौ हो गई। हालांकि, जो बहत्तर गांव शामिल किए गए थे, उनसे नए बत्तीस वार्ड बने। बाकी आठ नए वार्ड पुराने क्षेत्रों का परिसीमन होने से बने थे। सरकार द्वारा इन बहत्तर ग्राम सभाओं के ग्रामीणों को भवन कर में दस साल की छूट दी हुई है, लेकिन यह छूट केवल आवासीय भवनों पर मान्य है। व्यवसायिक भवन इस दायरे से बाहर हैं और इन पर भवन कर को लगाने के लिए नगर निगम कसरत कर रहा था। निगम ने दो हज़ार चौदह में पहली मर्तबा स्वतः कर निर्धारण सेवा लागू की थी। इसके बाद पुराने निगम क्षेत्र में बीते वर्ष टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी पर नए वार्डों में व्यवसायिक संपत्ति पर कर को आरोपित करने के प्रयास चलते रहे। पहले कमेटी बनाई गई और फिर दरें जारी कर इन पर आपत्तियों की सुनवाई की गई। अब दरें तय करने के बाद इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई। निगम ने भवन कर का निर्धारण सड़कवार किया है। न्यूनतम दरें बारह मीटर से कम चौड़ी सड़क पर स्थित भवन की हैं, जबकि अधिकतम दरें चौबीस मीटर से अधिक सड़क के भवन पर लागू होंगी। आरसीसी छत के अलावा अन्य पक्के भवन, कच्चे भवन, खाली पड़े आवासीय भूखंड की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। नए वार्डों में इकतीस जनवरी तक व्यवसायिक भवन कर जमा कराने पर लोगों को डबल छूट दी जा रही। भवन कर की राशि पर बीस फीसद सीधे छूट मिलेगी। इसके बाद बाकी राशि पर पांच फीसद की अतिरिक्त छूट और दी जाएगी। नगर आयुक्त ने बताया कि इकतीस जनवरी के बाद पांच फीसद वाली अतिरिक्त छूट बंद कर दी जाएगी। भवन कर की दरें प्रतिवर्ग फुट के हिसाब से वसूली जाएंगी। वार्डः मालसी, डांडा लखौंडा, आमवाला तरला, ननूरखेड़ा, मोहकमपुर, मियांवाला, भारूवाला ग्रांट, बंजारावाला, मोथरोवाला, मोहब्बेवाला, नत्थनपुर-एक, नत्थनपुर-दो। वार्डः विजयपुर, रांझावाला, गुजराड़ा मानसिंह, लाडपुर, नेहरूग्राम, डोभाल चौक, रायपरु, सेवलाकलां, पित्थूवाला, मेहूंवाला, हरभजवाला, नवादा, हर्रावाला, बालावाला, नथुआवाला। वार्डः चंद्रबनी, आरकेडिया-एक, आरकेडिया-दो, नकरौंदा। पक्के भवन अन्य पक्के भवन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय के मुताबिक, नए बत्तीस वार्डों में व्यवसायिक भवनों पर भवन कर लागू कर दिया गया है। नए वार्ड में कुछ भवन ऐसे हैं, जो पहले नगर निगम क्षेत्र में थे और भवन कर पहले से देते आ रहे हैं। इन भवनों पर पुरानी दरें लागू रहेंगी। इकतीस जनवरी तक भवन कर जमा करने पर डबल छूट दी जाएगी।
Quick links: Cricket Schedule: आईपीएल 2023 के शेड्यूल का एलान हो चुका है। पिछले सीजन में सिर्फ तीन वेन्यू- मुंबई, पुणे और अहमदाबाद में आईपीएल का आयोजन किया गया था, लेकिन आईपीएल का 16वां सीजन यानी आईपीएल 2023 होम और अवे फॉर्मेट में वापस आ जाएगा। इस साल सभी टीमें लीग राउंड में सात होम मैच और सात अवे मैच खेलेंगी। मेगा इवेंट का पहला मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) और आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के बीच होगा। एमएस धोनी (MS Dhoni) और हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) के बीच ये टक्कर 31 मार्च को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से होगा। आईपीएल में 52 दिनों के दौरान 12 स्थानों पर 70 लीग राउंड के मैच खेले जाएंगे। 16वें सीजन की शुरुआत 31 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मैच से होगी। हालांकि, फैन्स को आईपीएल से पहले भी क्रिकेट का डोज मिलेगा। क्रिकेट के त्योहार की शुरुआत चार मार्च से ही हो जाएगी। दरअसल, विमेंस प्रीमियर लीग का शेड्यूल 14 फरवरी को ही जारी हो गया था। 4 मार्च से लेकर 26 मार्च कर विमेंस प्रीमियर लीग के मैच खेले जाएंगे। इसके बाद 31 मार्च से 28 मई तक आईपीएल के मुकाबले होंगे। ऐसे में अगले तीन महीने फैन्स को क्रिकेट का भरपूर डोज मिलने वाला है। विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में चार और आईपीएल 2023 में 18 डबल हेडर मैच होंगे। डबल हेडर में दिन के मैच की शुरुआत दोपहर साढ़े तीन बजे और शाम के मैच की शुरुआत शाम साढ़े सात बजे से होगी। विमेंस प्रीमियर लीग के मैच मुंबई के दो वेन्यू डीवाई पाटिल और ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेले जाएंगे। वहीं, आईपीएल के प्लेऑफ और फाइनल के कार्यक्रम और स्थानों की घोषणा बाद में की जाएगी।
Quick links: Cricket Schedule: आईपीएल दो हज़ार तेईस के शेड्यूल का एलान हो चुका है। पिछले सीजन में सिर्फ तीन वेन्यू- मुंबई, पुणे और अहमदाबाद में आईपीएल का आयोजन किया गया था, लेकिन आईपीएल का सोलहवां सीजन यानी आईपीएल दो हज़ार तेईस होम और अवे फॉर्मेट में वापस आ जाएगा। इस साल सभी टीमें लीग राउंड में सात होम मैच और सात अवे मैच खेलेंगी। मेगा इवेंट का पहला मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटंस और आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपर किंग्स के बीच होगा। एमएस धोनी और हार्दिक पांड्या के बीच ये टक्कर इकतीस मार्च को भारतीय समयानुसार शाम सात:तीस बजे से होगा। आईपीएल में बावन दिनों के दौरान बारह स्थानों पर सत्तर लीटरग राउंड के मैच खेले जाएंगे। सोलहवें सीजन की शुरुआत इकतीस मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मैच से होगी। हालांकि, फैन्स को आईपीएल से पहले भी क्रिकेट का डोज मिलेगा। क्रिकेट के त्योहार की शुरुआत चार मार्च से ही हो जाएगी। दरअसल, विमेंस प्रीमियर लीग का शेड्यूल चौदह फरवरी को ही जारी हो गया था। चार मार्च से लेकर छब्बीस मार्च कर विमेंस प्रीमियर लीग के मैच खेले जाएंगे। इसके बाद इकतीस मार्च से अट्ठाईस मई तक आईपीएल के मुकाबले होंगे। ऐसे में अगले तीन महीने फैन्स को क्रिकेट का भरपूर डोज मिलने वाला है। विमेंस प्रीमियर लीग में चार और आईपीएल दो हज़ार तेईस में अट्ठारह डबल हेडर मैच होंगे। डबल हेडर में दिन के मैच की शुरुआत दोपहर साढ़े तीन बजे और शाम के मैच की शुरुआत शाम साढ़े सात बजे से होगी। विमेंस प्रीमियर लीग के मैच मुंबई के दो वेन्यू डीवाई पाटिल और ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेले जाएंगे। वहीं, आईपीएल के प्लेऑफ और फाइनल के कार्यक्रम और स्थानों की घोषणा बाद में की जाएगी।
Aries/Mesh rashi, Aaj Ka Rashifal- धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रबंधन के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे. महत्वपूर्ण मामले पक्ष में बनेंगे. पेशेवर शिक्षा पर जोर रहेगा. महत्वपूर्ण कार्यों पर जोर देंगे. सहकारिता व साझेदारी में वृद्धि होगी. चहुंओर शुभता रहेगी. विनम्रता व अनुकूलता रहेगी. योजनाओं पर अमल बढ़ाएंगे. वाणिज्य व्यापार में वृद्धि होगी. प्रभावशाली परिणाम पाएंगे. आस्था और विश्वास से आगे बढ़ेंगे. दीर्घकालीन लक्ष्यों को साधने में सफल होंगे. सूची बनाकर तैयारी से आगे बढ़ेंगे. निसंकोच होंगे. धनलाभ- जिम्मेदारों से मुलाकात होगी. आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ेंगे. विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे. आत्मविश्वास बल पाएगा. पेशेवरता बनाए रखेंगे. नया कार्य आरंभ कर सकते हैं. समकक्षों पर विश्वास बढ़ेगा. शुभ सूचना मिलेगी. लक्ष्य पर फोकस रहेगा. चर्चा में शामिल होंगे. प्रतिस्पर्धा में प्रभावी रहेंगे. वाणिज्यिक विषयों में रुचि रहेगी. लंबी दूरी की यात्रा संभव है. सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम बनेंगे. प्रेम मैत्री- संबंधों में प्रेम और विश्वास बना रहेगा. प्रेम बल पाएगा. भावनात्मक विषयों में शुभता का संचार रहेगा. रिश्तों में प्रभावशाली रहेंगे. सभी से मेलजोल बढ़ेगा. पारिवारिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी. खुशियों का ध्यान रखेंगे. प्रियजनों के साथ स्मरणीय पल संभव है. संबंध संवरेंगे. जिम्मेदारों से मिलेंगे. स्वास्थ्य मनोबल- आवश्यक निर्णय लेंगे. सम्मान बढ़ेगा. निजी कार्यों में सक्रियता बनाए रखेंगे. प्रयासों में बेहतर रहेंगे. अवसर भुनाएंगे. मनोबल ऊंचा रहेगा. हर्ष उत्साह से भरे रहेंगे. स्वास्थ्य व्यक्तित्व संवरेगा. आज का उपाय : भगवान श्रीगणेशजी और हनुमानजी की पूजा वंदना करें. सुंदरकांड का पाठ करें. लाल फल मिठाई बांटें. दान बढ़ाएं.
Aries/Mesh rashi, Aaj Ka Rashifal- धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रबंधन के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे. महत्वपूर्ण मामले पक्ष में बनेंगे. पेशेवर शिक्षा पर जोर रहेगा. महत्वपूर्ण कार्यों पर जोर देंगे. सहकारिता व साझेदारी में वृद्धि होगी. चहुंओर शुभता रहेगी. विनम्रता व अनुकूलता रहेगी. योजनाओं पर अमल बढ़ाएंगे. वाणिज्य व्यापार में वृद्धि होगी. प्रभावशाली परिणाम पाएंगे. आस्था और विश्वास से आगे बढ़ेंगे. दीर्घकालीन लक्ष्यों को साधने में सफल होंगे. सूची बनाकर तैयारी से आगे बढ़ेंगे. निसंकोच होंगे. धनलाभ- जिम्मेदारों से मुलाकात होगी. आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ेंगे. विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे. आत्मविश्वास बल पाएगा. पेशेवरता बनाए रखेंगे. नया कार्य आरंभ कर सकते हैं. समकक्षों पर विश्वास बढ़ेगा. शुभ सूचना मिलेगी. लक्ष्य पर फोकस रहेगा. चर्चा में शामिल होंगे. प्रतिस्पर्धा में प्रभावी रहेंगे. वाणिज्यिक विषयों में रुचि रहेगी. लंबी दूरी की यात्रा संभव है. सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम बनेंगे. प्रेम मैत्री- संबंधों में प्रेम और विश्वास बना रहेगा. प्रेम बल पाएगा. भावनात्मक विषयों में शुभता का संचार रहेगा. रिश्तों में प्रभावशाली रहेंगे. सभी से मेलजोल बढ़ेगा. पारिवारिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी. खुशियों का ध्यान रखेंगे. प्रियजनों के साथ स्मरणीय पल संभव है. संबंध संवरेंगे. जिम्मेदारों से मिलेंगे. स्वास्थ्य मनोबल- आवश्यक निर्णय लेंगे. सम्मान बढ़ेगा. निजी कार्यों में सक्रियता बनाए रखेंगे. प्रयासों में बेहतर रहेंगे. अवसर भुनाएंगे. मनोबल ऊंचा रहेगा. हर्ष उत्साह से भरे रहेंगे. स्वास्थ्य व्यक्तित्व संवरेगा. आज का उपाय : भगवान श्रीगणेशजी और हनुमानजी की पूजा वंदना करें. सुंदरकांड का पाठ करें. लाल फल मिठाई बांटें. दान बढ़ाएं.
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 70 साल तक ब्रिटेन की गद्दी पर राज किया लेकिन उनके प्यार की उम्र इससे भी कहीं बड़ी थी. ये प्रेम कहानी शुरू होती है साल 1939 में... तब एलिजाबेथ महज 13 साल की थीं जब पहली बार उन्होंने ग्रीस और डेनमार्क राजकुमार प्रिंस फिलिप को देखा था. उस वक्त फिलिप की उम्र 18 साल की थी. ये मुलाकात लंदन के रॉयल नेवल कॉलेज में हुई थी जहां एलिजाबेथ अपनी मां के साथ गई थीं.
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने सत्तर साल तक ब्रिटेन की गद्दी पर राज किया लेकिन उनके प्यार की उम्र इससे भी कहीं बड़ी थी. ये प्रेम कहानी शुरू होती है साल एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में... तब एलिजाबेथ महज तेरह साल की थीं जब पहली बार उन्होंने ग्रीस और डेनमार्क राजकुमार प्रिंस फिलिप को देखा था. उस वक्त फिलिप की उम्र अट्ठारह साल की थी. ये मुलाकात लंदन के रॉयल नेवल कॉलेज में हुई थी जहां एलिजाबेथ अपनी मां के साथ गई थीं.
फिल्म जगत एक ऐसी जगह है जहां हजारों लोग संघर्ष करने आते हैं, कुछ यहां सफल हो जाते हैं और कई टेलीविजन और बॉलीवुड दुनिया को अलविदा कह देते हैं। यहां कुछ ऐसे सितारे भी हैं जिन्हें उनके एक ही धारावाहिक से खूब शोहरत मिल जाती है और वो बड़े सितारे बन जाते हैं। लेकिन उसके बाद वो गुमनामी के अंधेरों में खो जाते हैं। आज हम आपको टेलीविजन की दुनिया की 10 ऐसी अभिनेत्रियों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें टेलीविजन में एक शो ने रातों-रात जगमगाता सितारा बना दिया लेकिन आज वो छोटे परदे से गायब हैं। वर्ष 2005 में जीटीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल 'सात फेरे' में सलोनी का किरदार निभाने वाली राजश्री ठाकुर तो आपको निश्चित रूप से याद होंगी। इस सीरियल ने राजश्री को टेलीविजन का एक जगमाता सितारा बना दिया था। शो में अपने सांवले रंग को लेकर उन्हें समाज की उपेक्षा का सामना करना पड़ता था। लेकिन असल जिंदगी में सीधी-साधी बहु के रूप में दर्शकों के दिलों में इस कलाकार ने अपनी खास जगह बनाई थी। इस किरदार को राजश्री ने पूरी तरह जिया था। लेकिन शो का सफर खत्म होने के बाद राजश्री का करियर भी टेलीविजन में फीका पड़ गया। सात फेरे खत्म होने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में काम किया। कुछ समय के बाद उन्होंने सीरियल 'महाराण प्रताप' से अपनी वापसी की और सपोर्टिंग भूमिका निभाई, लेकिन मुख्य कलाकार के रूप में टेलीविजन में वो अपनी जगह बनाने में नाकामयाब हुईं। सोनी सब का शो 'कुसुम' बेहद पॉपुलर सीरियल था। एकता कपूर के बैनर 'बालाजी टेलीफिल्म्स' में बना यह शो चार साल तक चला था। इसमें नौशीन अली सरदार ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसके बाद वह हर घर में जाना-माना नाम बन गईं थी। कुसुम के रूप में नौशीन को काफी पसंद किया गया था। दर्शक उन्हें इस शो में इतना ज्यादा पसंद करते थे कि वह उनका असली नाम भूल उन्हें कुसुम के नाम से ही बुलाया करते थे। लेकिन इस शो के बाद कुसुम छोटे परदे से गायब हो गईं। शो के बाद उन्होंने टेलीविजन पर मुख्य कलाकार के तौर पर वापसी करनी चाही लेकिन नाकामयाब रहीं। नौशीन ने कुसुम के बाद कई रियलिटी शो और एपिसोडिक शो किए, यहां तक कि बॉलीवुड में भी उन्होंने अपना हाथ आजमाया लेकिन कुसुम के बाद उन्हें वो सफलता हासिल नहीं हुई जो वो चाहती थी। अंतिम बार उन्होंने साल 2018 में सीरियल अलादीनः नाम तो सुना होगा में एक कैमियो किया था। एकता कपूर के शो 'कहानी घर-घर की' में पल्ल्वी अग्रवाल की भूमिका निभाने वाली श्वेता क्वात्रा तो आपको याद होंगी ही। इस अभिनेत्री एकता कपूर के इस सीरियल में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। श्वेता, पार्वती अग्रवाल की भूमिका निभाने वाली साक्षी तंवर की देवरानी पल्लवी अग्रवाल के किरदार में नजर आईं थी। इस शो के हर किरदार ने दर्शकों के दिलों में एक अलग ही जगह बनाई। 'कहानी घर-घर की' के बाद श्वेता क्वात्रा सीआईडी, कृष्णा अर्जुन और कुसुम जैसे सीरियल का हिस्सा बनीं। लेकिन पिछले काफी समय से श्वेता छोटे परदे पर नजर नहीं आई हैं। श्वेता ने टीवी अभिनेता मानव गोहिल से शादी की। दोनों की एक बेटी भी है। 1999 में सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाला शो 'कन्यादान' 90 के दर्शक का बेहद पॉपुलर सीरियल था। इससे टेलीविजन के कई कलाकारों को बेशुमार शोहरत मिली। इस शो में किरण खेर और जयती भाटिया के अलावा अभिनेत्री पूनम नरूला मुख्य भूमिका में नजर आई थी। इस शो के अलावा उन्होंने एकता कपूर के सीरियल 'कसौटी जिंदगी की' में अनुराग बासु की बहन निवेदिता बासु की भूमिका निभाई थी। ये अभिनेत्री टेलीविजन के जाने-माने चेहरों में से एक थी। पूनम ने कई सहायक किरदार भी निभाए लेकिन साल 2010 के बाद पूनम को छोटे परदे पर नहीं देखा गया।
फिल्म जगत एक ऐसी जगह है जहां हजारों लोग संघर्ष करने आते हैं, कुछ यहां सफल हो जाते हैं और कई टेलीविजन और बॉलीवुड दुनिया को अलविदा कह देते हैं। यहां कुछ ऐसे सितारे भी हैं जिन्हें उनके एक ही धारावाहिक से खूब शोहरत मिल जाती है और वो बड़े सितारे बन जाते हैं। लेकिन उसके बाद वो गुमनामी के अंधेरों में खो जाते हैं। आज हम आपको टेलीविजन की दुनिया की दस ऐसी अभिनेत्रियों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें टेलीविजन में एक शो ने रातों-रात जगमगाता सितारा बना दिया लेकिन आज वो छोटे परदे से गायब हैं। वर्ष दो हज़ार पाँच में जीटीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल 'सात फेरे' में सलोनी का किरदार निभाने वाली राजश्री ठाकुर तो आपको निश्चित रूप से याद होंगी। इस सीरियल ने राजश्री को टेलीविजन का एक जगमाता सितारा बना दिया था। शो में अपने सांवले रंग को लेकर उन्हें समाज की उपेक्षा का सामना करना पड़ता था। लेकिन असल जिंदगी में सीधी-साधी बहु के रूप में दर्शकों के दिलों में इस कलाकार ने अपनी खास जगह बनाई थी। इस किरदार को राजश्री ने पूरी तरह जिया था। लेकिन शो का सफर खत्म होने के बाद राजश्री का करियर भी टेलीविजन में फीका पड़ गया। सात फेरे खत्म होने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में काम किया। कुछ समय के बाद उन्होंने सीरियल 'महाराण प्रताप' से अपनी वापसी की और सपोर्टिंग भूमिका निभाई, लेकिन मुख्य कलाकार के रूप में टेलीविजन में वो अपनी जगह बनाने में नाकामयाब हुईं। सोनी सब का शो 'कुसुम' बेहद पॉपुलर सीरियल था। एकता कपूर के बैनर 'बालाजी टेलीफिल्म्स' में बना यह शो चार साल तक चला था। इसमें नौशीन अली सरदार ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसके बाद वह हर घर में जाना-माना नाम बन गईं थी। कुसुम के रूप में नौशीन को काफी पसंद किया गया था। दर्शक उन्हें इस शो में इतना ज्यादा पसंद करते थे कि वह उनका असली नाम भूल उन्हें कुसुम के नाम से ही बुलाया करते थे। लेकिन इस शो के बाद कुसुम छोटे परदे से गायब हो गईं। शो के बाद उन्होंने टेलीविजन पर मुख्य कलाकार के तौर पर वापसी करनी चाही लेकिन नाकामयाब रहीं। नौशीन ने कुसुम के बाद कई रियलिटी शो और एपिसोडिक शो किए, यहां तक कि बॉलीवुड में भी उन्होंने अपना हाथ आजमाया लेकिन कुसुम के बाद उन्हें वो सफलता हासिल नहीं हुई जो वो चाहती थी। अंतिम बार उन्होंने साल दो हज़ार अट्ठारह में सीरियल अलादीनः नाम तो सुना होगा में एक कैमियो किया था। एकता कपूर के शो 'कहानी घर-घर की' में पल्ल्वी अग्रवाल की भूमिका निभाने वाली श्वेता क्वात्रा तो आपको याद होंगी ही। इस अभिनेत्री एकता कपूर के इस सीरियल में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। श्वेता, पार्वती अग्रवाल की भूमिका निभाने वाली साक्षी तंवर की देवरानी पल्लवी अग्रवाल के किरदार में नजर आईं थी। इस शो के हर किरदार ने दर्शकों के दिलों में एक अलग ही जगह बनाई। 'कहानी घर-घर की' के बाद श्वेता क्वात्रा सीआईडी, कृष्णा अर्जुन और कुसुम जैसे सीरियल का हिस्सा बनीं। लेकिन पिछले काफी समय से श्वेता छोटे परदे पर नजर नहीं आई हैं। श्वेता ने टीवी अभिनेता मानव गोहिल से शादी की। दोनों की एक बेटी भी है। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाला शो 'कन्यादान' नब्बे के दर्शक का बेहद पॉपुलर सीरियल था। इससे टेलीविजन के कई कलाकारों को बेशुमार शोहरत मिली। इस शो में किरण खेर और जयती भाटिया के अलावा अभिनेत्री पूनम नरूला मुख्य भूमिका में नजर आई थी। इस शो के अलावा उन्होंने एकता कपूर के सीरियल 'कसौटी जिंदगी की' में अनुराग बासु की बहन निवेदिता बासु की भूमिका निभाई थी। ये अभिनेत्री टेलीविजन के जाने-माने चेहरों में से एक थी। पूनम ने कई सहायक किरदार भी निभाए लेकिन साल दो हज़ार दस के बाद पूनम को छोटे परदे पर नहीं देखा गया।
मुरैना, संजय दीक्षित। मुरैना (Morena Police) जिले के नूराबाद थाना पुलिस ने गुड्डा गुर्जर के दो आश्रय दाताओं को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है बता दें कि नूराबाद थाने को सूचना मिली कि डकैत गुड्डा गुर्जर अपने पैतृक गांव लोहगढ़ के आसपास देखा गया है। सूचना के बाद जंगल में सर्चिंग को उतरी नूराबाद पुलिस को लोहगढ़ के जंगल की पहाड़ी के पीछे दो संदिग्ध दिखाई दिए। दोनों ने पुलिस को देखते ही भागने का प्रयास किया, लेकिन घेराबंदी करके पुलिसकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया। दोनों के पास मिले बैगो की तलाशी ली गयी तो आटा, दाल, नमक, बीड़ी के बंडल, माचिव का पैकेट, तेल आदि रखे हुए थे। पकड़े गए आरोपियों के नाम जरदान सिंह का पुरा सुरहेला, ग्वालियर निवासी रिंकू पुत्र बुलाखी गुर्जर और भूपेन्द्र उर्फ रामसेवक पुत्र रामऔतार गुर्जर बताए गए हैं। दाेनों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह डकैत गुड्डा के लिए यह सामग्री लेकर जा रहे थे। इसके बाद पुलिस टीम ने लोहगढ़ के आसपास देर शाम तक सर्चिंग की, लेकिन डकैत गुड्डा हाथ नहीं लगा। नूराबाद थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि यह दोनों आरोपी लंबे समय से डकैत गुड्डा के लिए रसद देने का काम रहे थे। डकैत को शरण देने से लेकर उसे रसद पहुंचाने तक का काम करते हैं, इसलिए दोनों पर डकैती एक्ट के अलावा धारा 212 व 216 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
मुरैना, संजय दीक्षित। मुरैना जिले के नूराबाद थाना पुलिस ने गुड्डा गुर्जर के दो आश्रय दाताओं को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है बता दें कि नूराबाद थाने को सूचना मिली कि डकैत गुड्डा गुर्जर अपने पैतृक गांव लोहगढ़ के आसपास देखा गया है। सूचना के बाद जंगल में सर्चिंग को उतरी नूराबाद पुलिस को लोहगढ़ के जंगल की पहाड़ी के पीछे दो संदिग्ध दिखाई दिए। दोनों ने पुलिस को देखते ही भागने का प्रयास किया, लेकिन घेराबंदी करके पुलिसकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया। दोनों के पास मिले बैगो की तलाशी ली गयी तो आटा, दाल, नमक, बीड़ी के बंडल, माचिव का पैकेट, तेल आदि रखे हुए थे। पकड़े गए आरोपियों के नाम जरदान सिंह का पुरा सुरहेला, ग्वालियर निवासी रिंकू पुत्र बुलाखी गुर्जर और भूपेन्द्र उर्फ रामसेवक पुत्र रामऔतार गुर्जर बताए गए हैं। दाेनों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह डकैत गुड्डा के लिए यह सामग्री लेकर जा रहे थे। इसके बाद पुलिस टीम ने लोहगढ़ के आसपास देर शाम तक सर्चिंग की, लेकिन डकैत गुड्डा हाथ नहीं लगा। नूराबाद थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि यह दोनों आरोपी लंबे समय से डकैत गुड्डा के लिए रसद देने का काम रहे थे। डकैत को शरण देने से लेकर उसे रसद पहुंचाने तक का काम करते हैं, इसलिए दोनों पर डकैती एक्ट के अलावा धारा दो सौ बारह व दो सौ सोलह के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
सीमित संसाधनों के बावजूद यू तिरोत सिंह चार सालों तक अंग्रेजों से लड़ते रहे। जख्मी होने के बावजूद झुके नहीं। कॉन्ग्रेस के सस्ते ध्रुव राठी (जो स्वंय ही सस्ता है) बन कर रह गए हैं राहुल गाँधी! जिस राहुल गाँधी को अपने पार्टी के भीतर ही आए दिन खिसक रहे विधायकों की कानों कान खबर नहीं लगती, वह भी रोज विदेश नीति और फॉरेन पॉलिसी पर ज्ञान दे रहे हैं। बिंदी का सरोकार भारतीय पृष्ठभूमि से हैः 'लोगो' हटाने से पहले 'स्कॉच ब्राइट' ये तो बताएँ ये रिग्रेसिव कैसे हुई? इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कई लोगों ने स्कॉच ब्राइट नामक उत्पाद बनाने वाली कंपनी 3M को आड़े हाथों लिया है। लोगों ने पूछा कि वो अपना 'लोगो' बदलने से पहले बता सकती है कि बिंदी रिग्रेसिव कैसे है? ज़कारिया खान ने भाई तारू सिंह से कहा, "तारू सिंह... तुमने जो किया वह माफी के लायक बिलकुल नहीं है, लेकिन मैं तुम्हें एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ। तुम इस्लाम कबूल कर लो, हमारे मित्र बन जाओ. . . . . . . . " मेवात के उलेटा गाँव के सरपंच अलीम पुत्र मकसूद पर आरोप है कि उसने अपने गाँव के दलितों व गरीब तबके के लोगों के साथ उनका फर्जी जॉब कार्ड बनाकर धोखाधड़ी की। "मैं इस मामले में सीबीआई जाँच के लिए आपसे अनुरोध करती हूँ। मैं जानना चाहती हूँ कि किस दबाव में सुशांत ने ये कदम उठाया। " इस किट की कीमत वर्तमान में मार्केट में मौजूद किट्स की कीमत की तुलना में कम ही रहेगी। IIT दिल्ली का यह COVID-19 टेस्ट किट 3 घंटे के अंदर रिजल्ट दे सकता है। शिकायत के अनुसार, समित ठक्कर ने एक ट्वीट में महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को औरंगज़ेब और उनके बेटे आदित्य ठाकरे को 'बेबी पेंग्विन' कहा था।
सीमित संसाधनों के बावजूद यू तिरोत सिंह चार सालों तक अंग्रेजों से लड़ते रहे। जख्मी होने के बावजूद झुके नहीं। कॉन्ग्रेस के सस्ते ध्रुव राठी बन कर रह गए हैं राहुल गाँधी! जिस राहुल गाँधी को अपने पार्टी के भीतर ही आए दिन खिसक रहे विधायकों की कानों कान खबर नहीं लगती, वह भी रोज विदेश नीति और फॉरेन पॉलिसी पर ज्ञान दे रहे हैं। बिंदी का सरोकार भारतीय पृष्ठभूमि से हैः 'लोगो' हटाने से पहले 'स्कॉच ब्राइट' ये तो बताएँ ये रिग्रेसिव कैसे हुई? इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कई लोगों ने स्कॉच ब्राइट नामक उत्पाद बनाने वाली कंपनी तीनM को आड़े हाथों लिया है। लोगों ने पूछा कि वो अपना 'लोगो' बदलने से पहले बता सकती है कि बिंदी रिग्रेसिव कैसे है? ज़कारिया खान ने भाई तारू सिंह से कहा, "तारू सिंह... तुमने जो किया वह माफी के लायक बिलकुल नहीं है, लेकिन मैं तुम्हें एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ। तुम इस्लाम कबूल कर लो, हमारे मित्र बन जाओ. . . . . . . . " मेवात के उलेटा गाँव के सरपंच अलीम पुत्र मकसूद पर आरोप है कि उसने अपने गाँव के दलितों व गरीब तबके के लोगों के साथ उनका फर्जी जॉब कार्ड बनाकर धोखाधड़ी की। "मैं इस मामले में सीबीआई जाँच के लिए आपसे अनुरोध करती हूँ। मैं जानना चाहती हूँ कि किस दबाव में सुशांत ने ये कदम उठाया। " इस किट की कीमत वर्तमान में मार्केट में मौजूद किट्स की कीमत की तुलना में कम ही रहेगी। IIT दिल्ली का यह COVID-उन्नीस टेस्ट किट तीन घंटाटे के अंदर रिजल्ट दे सकता है। शिकायत के अनुसार, समित ठक्कर ने एक ट्वीट में महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को औरंगज़ेब और उनके बेटे आदित्य ठाकरे को 'बेबी पेंग्विन' कहा था।
अनसूया - आसन तो इसी पहाड़ी पर है परन्तु समाधिस्थ स्वामी की सेवा मे ऐसी तल्लीन थी कि समय तक का भान न हुआ, मुद्दत से वर्षा नहीं हुई है इसका भी ज्ञान न हुआ पती-सेवा के सागर मे मेरा मन इस कदर डूवा न जाना यह कि सूरजभी किधर निकला किधर डूवा तुम्हारा नाम क्या है ? रेवा-- रेवा अनसूया प्रसन्न मूर्ति रेवा । भला इस निर्जल खंड मे तुम अपना जीवन किस तरह व्यतीत कर रही हो ? रेवा- योग के आधार से, आप को क्या मालूम नही है, "कंठ कूपे क्षुत्पिपासा निवृत्तिः" धूनी को भस्मी से स्नान कर लेती हूं, प्यास लगती है तो जकार और लकार का ध्यान कर लेती हू अनसूया - तो हे योग पुष्प की कली । इस युवावस्था मे सांसारिक सुखो का त्याग, भोगने से पहले ही पदार्थों से बैराग ? रेवा- इसलिये कि संसार के जितने पदार्थ है सब मे भय भरा हुआ है। भोग में रोग का भय, उच्च कुल मे पतित होने का भय, धन मे चोर का भय, रूप मे बुढ़ापे का भय, गुणों मे दुर्जनो की ईर्षा का भय और काया मे यमदूतो का भय । सारांश संसार की हर एक चीज़ भय
अनसूया - आसन तो इसी पहाड़ी पर है परन्तु समाधिस्थ स्वामी की सेवा मे ऐसी तल्लीन थी कि समय तक का भान न हुआ, मुद्दत से वर्षा नहीं हुई है इसका भी ज्ञान न हुआ पती-सेवा के सागर मे मेरा मन इस कदर डूवा न जाना यह कि सूरजभी किधर निकला किधर डूवा तुम्हारा नाम क्या है ? रेवा-- रेवा अनसूया प्रसन्न मूर्ति रेवा । भला इस निर्जल खंड मे तुम अपना जीवन किस तरह व्यतीत कर रही हो ? रेवा- योग के आधार से, आप को क्या मालूम नही है, "कंठ कूपे क्षुत्पिपासा निवृत्तिः" धूनी को भस्मी से स्नान कर लेती हूं, प्यास लगती है तो जकार और लकार का ध्यान कर लेती हू अनसूया - तो हे योग पुष्प की कली । इस युवावस्था मे सांसारिक सुखो का त्याग, भोगने से पहले ही पदार्थों से बैराग ? रेवा- इसलिये कि संसार के जितने पदार्थ है सब मे भय भरा हुआ है। भोग में रोग का भय, उच्च कुल मे पतित होने का भय, धन मे चोर का भय, रूप मे बुढ़ापे का भय, गुणों मे दुर्जनो की ईर्षा का भय और काया मे यमदूतो का भय । सारांश संसार की हर एक चीज़ भय
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
"यह तुम नही बोल रहे हो, तुम्हारे अदर वाली कायरता और हीनभावना बोल रही है । इस वायरता और हीन भावना को तुम्हे दूर करना होगा । त्रिभुवन मेहता ने हम लोगो के टिक्ट ले लेने का वादा कर लिया है, तुम अगर न चलोगे तो एक टिक्ट बेकार जाएगा। फिर वे लोग तुम्हारे सम्बन्ध मे क्या सोचेंगे ? अभी थोडी देर पहले उन लोगो के सामने तुम चलने को तैयार थे, तुमने किसी तरह का इनकार नहीं किया था । इतनी जल्दी तो कायक्रम नहीं बदला जाता । तुम तो बुद्धि पर विश्वास करने वाले प्राणो हो, क्षणिक आवेश के वशीभूत तुम कैसे हो गए ? जाओ, अपनी तैयारी वरों जावर, साढे सात बजे शाम को मैं तुम्ह तुम्हारे कमरे से ले लूगा ।" पराजय और विवशता की एक गहरी सास लेकर जगतप्रकाश ने कहा, "अच्छी बात है, मैं तैयारी करता हूँ जाकर । लेकिन एक शत है, जबलपुर चलने और वहा रहने का सच मैं स्वय दूगा। मैं तुम लोगों के साथ रहकर अपने को होन नही अनुभव करना चाहता हूँ । इसी शत पर मैं चलूगा ।" कमलाकान्त ने सतोष की एक सास ली, "तुम्हारी यह शत मुझे स्वीकार है। लेकिन टिक्ट और वहाँ के सच का हिसाब किताब रास्ते में हो जाएगा।" रात वे समय जब कमलाकान्त के साथ जगतप्रकाश स्टेशन पहुँचा, उम समय त्रिभुवन मेहता और जसवन्त कपूर चिन्तित मुद्रा म एक इटर क्लास चम्पाटमेट वे सामने सडे थे जो बिलकुल खाली था और उनके साथ वाली दो एडविया में एक ऊँचे स्वर मे वह रही थी, "इसमे कुल पाच वर्षे हैं और हम लोग छ हैं। और ऊपर की दो वर्षों पर कोई गद्दा नही-अस बाव रसन के पटरे-भर है तो उन पर सोएगा कौन? फिर मान लो रास्ते मे और भुमाफिर आ जाएं तो झगडा ही हागान तुम्हें त्रिभुवन मेहता, नम नहीं आती हम लोगा से यह कहते हुए कि हम दाना लेडीज कम्पाटमेण्ट में सफर करें।" जगवन्त कपूर कुछ अलग सड़ा हुआ सिगरेट पी रहा था, उन दो एडवियो में उल्पा हुआ या त्रिभुवन भहना जमवत इन दोना के पास आकर बोला, "अरे बाप रे, बडो तुरमिजाज ट है यह मारतो मनुभाई, इसने तो विभुषा तो बद वर रसी है।" २४ / मोघी गच्ची बातें
"यह तुम नही बोल रहे हो, तुम्हारे अदर वाली कायरता और हीनभावना बोल रही है । इस वायरता और हीन भावना को तुम्हे दूर करना होगा । त्रिभुवन मेहता ने हम लोगो के टिक्ट ले लेने का वादा कर लिया है, तुम अगर न चलोगे तो एक टिक्ट बेकार जाएगा। फिर वे लोग तुम्हारे सम्बन्ध मे क्या सोचेंगे ? अभी थोडी देर पहले उन लोगो के सामने तुम चलने को तैयार थे, तुमने किसी तरह का इनकार नहीं किया था । इतनी जल्दी तो कायक्रम नहीं बदला जाता । तुम तो बुद्धि पर विश्वास करने वाले प्राणो हो, क्षणिक आवेश के वशीभूत तुम कैसे हो गए ? जाओ, अपनी तैयारी वरों जावर, साढे सात बजे शाम को मैं तुम्ह तुम्हारे कमरे से ले लूगा ।" पराजय और विवशता की एक गहरी सास लेकर जगतप्रकाश ने कहा, "अच्छी बात है, मैं तैयारी करता हूँ जाकर । लेकिन एक शत है, जबलपुर चलने और वहा रहने का सच मैं स्वय दूगा। मैं तुम लोगों के साथ रहकर अपने को होन नही अनुभव करना चाहता हूँ । इसी शत पर मैं चलूगा ।" कमलाकान्त ने सतोष की एक सास ली, "तुम्हारी यह शत मुझे स्वीकार है। लेकिन टिक्ट और वहाँ के सच का हिसाब किताब रास्ते में हो जाएगा।" रात वे समय जब कमलाकान्त के साथ जगतप्रकाश स्टेशन पहुँचा, उम समय त्रिभुवन मेहता और जसवन्त कपूर चिन्तित मुद्रा म एक इटर क्लास चम्पाटमेट वे सामने सडे थे जो बिलकुल खाली था और उनके साथ वाली दो एडविया में एक ऊँचे स्वर मे वह रही थी, "इसमे कुल पाच वर्षे हैं और हम लोग छ हैं। और ऊपर की दो वर्षों पर कोई गद्दा नही-अस बाव रसन के पटरे-भर है तो उन पर सोएगा कौन? फिर मान लो रास्ते मे और भुमाफिर आ जाएं तो झगडा ही हागान तुम्हें त्रिभुवन मेहता, नम नहीं आती हम लोगा से यह कहते हुए कि हम दाना लेडीज कम्पाटमेण्ट में सफर करें।" जगवन्त कपूर कुछ अलग सड़ा हुआ सिगरेट पी रहा था, उन दो एडवियो में उल्पा हुआ या त्रिभुवन भहना जमवत इन दोना के पास आकर बोला, "अरे बाप रे, बडो तुरमिजाज ट है यह मारतो मनुभाई, इसने तो विभुषा तो बद वर रसी है।" चौबीस / मोघी गच्ची बातें
ALLAHABAD: अगर आपके घर में अगले कुछ महीनों में शादी होने वाली है और आप बारात घर या उत्सव भवन करने जा रहे हैं तो बुकिंग से पहले एनओसी जरूर देख लें। कहीं ऐसा न हो बारात के दिन बारात घर सील मिले और आपके मंगल में अमंगल हो जाए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि एडीए ने शहर के करीब तीन दर्जन से अधिक बारात घरों को नोटिस जारी करने के साथ ही सील करने की कार्रवाई की है। यह सिलसिला आगे भी चलेगा। शहर के हर एरिया में बड़े-बड़े बारात घर हर लगन में लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। लेकिन लोगों को ये पता ही नहीं है कि 60 प्रतिशत से अधिक बारात घर अवैध तरीके से चलाए जा रहे हैं। इन्होंने न एडीए से अनुमति ली है और न ही नक्शा पास कराया है। मनमाने तरीके से बारात घर चालू कर बुकिंग शुरू कर दी है। अवैध बारात घरों पर शिकंजा कसने के लिए एडीए ने अभियान चला रखा है। सिविल लाइंस, धूमनगंज, करेली, कटरा के साथ ही पुराने शहर के करीब तीन दर्जन से अधिक बारात घरों को सील किया जा चुका है। ज्यादातर ने फरवरी तक के लगन की बुकिंग कर रखी थी। लोगों से एडवांस ले रखा था, इसलिए केवल लगन तक की इन्हें छूट दी गई। जैसे ही बुकिंग खत्म होगी, एडीए हल्ला बोल देगा। बारात घर मालिक या तो एडीए के नियमों का पालन करें या बारात घर बंद करें। अभी तो केवल सील करने की कार्रवाई हुई है। ठंड का लग्न समाप्त होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होगी। सील करने से पहले जिन लोगों ने बुकिंग करा रखी थी, केवल उन्हीं को छूट दी गई है। नई बुकिंग की तो खुद जिम्मेदार होंगे। 30 मीटर से कम चौड़े मार्ग पर स्थित भवनों की अधिकतम ऊंचाई सड़क की वर्तमान चौड़ाई, फ्रंट सेट बैक के योग के डेढ़ गुना से अधिक नहीं होगी। 30 मीटर व उससे अधिक चौड़े मार्गो पर स्थित भवनों के लिए यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। भवन की ऊंचाई संरक्षित हेरीटेज स्थल से दूरी, एयरपोर्ट जोन व स्टेटयुटरी प्रतिबंधों से भी नियंत्रित होगी। प्रत्येक सौ वर्ग मीटर तल क्षेत्रफल पर 20 समान कार स्थल की व्यवस्था, भूखण्ड के अंदर करनी होगी। पार्किंग की गणना भूखण्ड में अधिकतम अनुमन्य तल क्षेत्रफल पर की जाएगी। बेसमेंट की अनुमन्यता भवन उपविधि के प्रस्तर 3. 9 के अनुसार होगी। नई योजना व अनुमोदित होने वाले ले आउट प्लान में बारात घर भवन के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार पहले अपेक्षित संख्या में भूखण्डों का चिन्हीकरण किया जाएगा। बारात घर के निर्माण की अनुज्ञा केवल इस प्रयोजन के लिए चिह्नित आरक्षित भूखण्डों पर ही दी जाएगी। विद्यमान विकसित कॉलोनियों क्षेत्रों में अनुज्ञा प्रदान करने के लिए प्रस्तावित स्थल के सम्बंध में न्यूनतम एक माह की अवधि प्रदान करते हुए जनता से आपत्ति, सुझाव मांगा जाएगा। निस्तारण के बाद ही मानचित्र स्वीकृति की कार्रवाई की जाएगी। बारात घर अनुमन्य किए जाने पर आवेदक से जोनिंग रेगुलेशन के आधार पर प्रभाव शुल्क लिया जाएगा।
ALLAHABAD: अगर आपके घर में अगले कुछ महीनों में शादी होने वाली है और आप बारात घर या उत्सव भवन करने जा रहे हैं तो बुकिंग से पहले एनओसी जरूर देख लें। कहीं ऐसा न हो बारात के दिन बारात घर सील मिले और आपके मंगल में अमंगल हो जाए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि एडीए ने शहर के करीब तीन दर्जन से अधिक बारात घरों को नोटिस जारी करने के साथ ही सील करने की कार्रवाई की है। यह सिलसिला आगे भी चलेगा। शहर के हर एरिया में बड़े-बड़े बारात घर हर लगन में लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। लेकिन लोगों को ये पता ही नहीं है कि साठ प्रतिशत से अधिक बारात घर अवैध तरीके से चलाए जा रहे हैं। इन्होंने न एडीए से अनुमति ली है और न ही नक्शा पास कराया है। मनमाने तरीके से बारात घर चालू कर बुकिंग शुरू कर दी है। अवैध बारात घरों पर शिकंजा कसने के लिए एडीए ने अभियान चला रखा है। सिविल लाइंस, धूमनगंज, करेली, कटरा के साथ ही पुराने शहर के करीब तीन दर्जन से अधिक बारात घरों को सील किया जा चुका है। ज्यादातर ने फरवरी तक के लगन की बुकिंग कर रखी थी। लोगों से एडवांस ले रखा था, इसलिए केवल लगन तक की इन्हें छूट दी गई। जैसे ही बुकिंग खत्म होगी, एडीए हल्ला बोल देगा। बारात घर मालिक या तो एडीए के नियमों का पालन करें या बारात घर बंद करें। अभी तो केवल सील करने की कार्रवाई हुई है। ठंड का लग्न समाप्त होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होगी। सील करने से पहले जिन लोगों ने बुकिंग करा रखी थी, केवल उन्हीं को छूट दी गई है। नई बुकिंग की तो खुद जिम्मेदार होंगे। तीस मीटर से कम चौड़े मार्ग पर स्थित भवनों की अधिकतम ऊंचाई सड़क की वर्तमान चौड़ाई, फ्रंट सेट बैक के योग के डेढ़ गुना से अधिक नहीं होगी। तीस मीटर व उससे अधिक चौड़े मार्गो पर स्थित भवनों के लिए यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। भवन की ऊंचाई संरक्षित हेरीटेज स्थल से दूरी, एयरपोर्ट जोन व स्टेटयुटरी प्रतिबंधों से भी नियंत्रित होगी। प्रत्येक सौ वर्ग मीटर तल क्षेत्रफल पर बीस समान कार स्थल की व्यवस्था, भूखण्ड के अंदर करनी होगी। पार्किंग की गणना भूखण्ड में अधिकतम अनुमन्य तल क्षेत्रफल पर की जाएगी। बेसमेंट की अनुमन्यता भवन उपविधि के प्रस्तर तीन. नौ के अनुसार होगी। नई योजना व अनुमोदित होने वाले ले आउट प्लान में बारात घर भवन के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार पहले अपेक्षित संख्या में भूखण्डों का चिन्हीकरण किया जाएगा। बारात घर के निर्माण की अनुज्ञा केवल इस प्रयोजन के लिए चिह्नित आरक्षित भूखण्डों पर ही दी जाएगी। विद्यमान विकसित कॉलोनियों क्षेत्रों में अनुज्ञा प्रदान करने के लिए प्रस्तावित स्थल के सम्बंध में न्यूनतम एक माह की अवधि प्रदान करते हुए जनता से आपत्ति, सुझाव मांगा जाएगा। निस्तारण के बाद ही मानचित्र स्वीकृति की कार्रवाई की जाएगी। बारात घर अनुमन्य किए जाने पर आवेदक से जोनिंग रेगुलेशन के आधार पर प्रभाव शुल्क लिया जाएगा।
चमन सीमा पर पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में 15 लोगों की मौत हो गई। 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए। ज्यादातर पश्तून मजदूर हैं। निधान सिंह को तालिबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान के एक गुरुद्वारे से अगवा कर लिया था। उनके साथ 11 सिख भारत लाए गए हैं। अफगानिस्तान में गृह युद्ध की शुरुआत के साथ ही इकबाल सिंह परिवार के साथ भारत आ गए थे। उन्होंने अपनी मुश्किलों और भारत में ठौर मिलने पर विस्तार से बात की है। काबुल के शोर बाजार में स्थित गुरुद्वारे पर हुए इस्लामिक स्टेट के हमले के चार महीने बाद भारतीय दूतावास ने अफगानिस्तान के 11 सिखों को शॉर्ट टर्म वीजा दिया है। आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है। "पूर्वी अफगानिस्तान में खोस्त से जलालाबाद के बीच और कंधार प्रांत में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में भी जैश कैडर को तालिबान इकाइयों के. . . . . "
चमन सीमा पर पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में पंद्रह लोगों की मौत हो गई। अस्सी से ज्यादा लोग घायल हो गए। ज्यादातर पश्तून मजदूर हैं। निधान सिंह को तालिबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान के एक गुरुद्वारे से अगवा कर लिया था। उनके साथ ग्यारह सिख भारत लाए गए हैं। अफगानिस्तान में गृह युद्ध की शुरुआत के साथ ही इकबाल सिंह परिवार के साथ भारत आ गए थे। उन्होंने अपनी मुश्किलों और भारत में ठौर मिलने पर विस्तार से बात की है। काबुल के शोर बाजार में स्थित गुरुद्वारे पर हुए इस्लामिक स्टेट के हमले के चार महीने बाद भारतीय दूतावास ने अफगानिस्तान के ग्यारह सिखों को शॉर्ट टर्म वीजा दिया है। आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है। "पूर्वी अफगानिस्तान में खोस्त से जलालाबाद के बीच और कंधार प्रांत में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में भी जैश कैडर को तालिबान इकाइयों के. . . . . "
जागरण संवाददाता, झज्जर : यादव सभा के प्रधान वीरेंद्र दरोगा ने कहा कि शिक्षा एवं संगठन से ही कोई इंसान मजबूत होता हैं । गांव की बेटी निशा ने जो समाज एवं गांव का नाम रोशन किया हैं, उससे आने वाली पीढ़ी के लिए मील का पत्थर साबित होगा तथा हमारी बेटियां भी उच्च पदों पर आसीन होने लगी हैं। यादव सभा के पूर्व प्रधान महिपाल यादव ने मंच संचालन करते हुए कहा कि आज खेड़ी खुम्मार की सभी महिलाएं एवं पुरुष जोश में है और खुशी देखने लायक है। नौजवान एवं बच्चों में भी उत्साह है। डीएसपी नरेश ने कहा कि बेटियों ने देश की तरक्की की राह दिखाई है । निशा को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए आयोजक संजय मास्टर, हेल्पिग हेड सोसायटी सुभाष मास्टर, अख्तर सरपंच, साधुराम, दीवान, एडवोकेट बलजीत, उमेद सहित अन्य ग्रामीणों को शुभकामनाएं दी। बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित नतीजों में खेड़ी खुम्मार की बेटी ने अपना चयन करवा कर पूरे गांव एवं समाज का नाम पूरे देश में रोशन किया हैं। इस खास मौके पर निशा अपने ग्रामवासियों एवं समाज का सम्मान पाकर भाव विभोर हो उठी। राव उदयभान, प्रिसिपल एच एस यादव , देवेंद्र, दलपत, सहित अलवर के सांसद महंत बालकनाथ द्वारा भेजा गया शुभकामनाओं का संदेश प्रसारित किया । इस मौके पर निशा के पिता अजय, माता लवा यादव, दादाजी दुलीचंद समाज के आदर सत्कार से भाव विभोर हो उठे। इस मौके पर मुख्य रूप से अत्तर सिंह यादव, खातीवास के राजकुमार, राजवीर, पलड़ा के सरपंच बलवान, रतन, चमनपुरा के सरपंच रामे, मुकेश, रामपुरा के सरपंच विकास , नंबरदार संतराम, छुछकवास के सरपंच महेंद्र, ज्ञानी, नंबरदार बिरहड़ के युद्धवीर, सुनील, जहाजगढ़ के पूर्व सरपंच उदय, ब्लाक समिति मेंबर देवेंद्र आदि मौजूद रहे। अंत में महिपाल यादव ने सभी का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि वीरेंद्र दरोगा के नेतृत्व में यादव सभा होनहारों का सम्मान करती रहेगी और हमारी बेटियां इसी प्रकार नाम रोशन करती रहेगी।
जागरण संवाददाता, झज्जर : यादव सभा के प्रधान वीरेंद्र दरोगा ने कहा कि शिक्षा एवं संगठन से ही कोई इंसान मजबूत होता हैं । गांव की बेटी निशा ने जो समाज एवं गांव का नाम रोशन किया हैं, उससे आने वाली पीढ़ी के लिए मील का पत्थर साबित होगा तथा हमारी बेटियां भी उच्च पदों पर आसीन होने लगी हैं। यादव सभा के पूर्व प्रधान महिपाल यादव ने मंच संचालन करते हुए कहा कि आज खेड़ी खुम्मार की सभी महिलाएं एवं पुरुष जोश में है और खुशी देखने लायक है। नौजवान एवं बच्चों में भी उत्साह है। डीएसपी नरेश ने कहा कि बेटियों ने देश की तरक्की की राह दिखाई है । निशा को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए आयोजक संजय मास्टर, हेल्पिग हेड सोसायटी सुभाष मास्टर, अख्तर सरपंच, साधुराम, दीवान, एडवोकेट बलजीत, उमेद सहित अन्य ग्रामीणों को शुभकामनाएं दी। बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित नतीजों में खेड़ी खुम्मार की बेटी ने अपना चयन करवा कर पूरे गांव एवं समाज का नाम पूरे देश में रोशन किया हैं। इस खास मौके पर निशा अपने ग्रामवासियों एवं समाज का सम्मान पाकर भाव विभोर हो उठी। राव उदयभान, प्रिसिपल एच एस यादव , देवेंद्र, दलपत, सहित अलवर के सांसद महंत बालकनाथ द्वारा भेजा गया शुभकामनाओं का संदेश प्रसारित किया । इस मौके पर निशा के पिता अजय, माता लवा यादव, दादाजी दुलीचंद समाज के आदर सत्कार से भाव विभोर हो उठे। इस मौके पर मुख्य रूप से अत्तर सिंह यादव, खातीवास के राजकुमार, राजवीर, पलड़ा के सरपंच बलवान, रतन, चमनपुरा के सरपंच रामे, मुकेश, रामपुरा के सरपंच विकास , नंबरदार संतराम, छुछकवास के सरपंच महेंद्र, ज्ञानी, नंबरदार बिरहड़ के युद्धवीर, सुनील, जहाजगढ़ के पूर्व सरपंच उदय, ब्लाक समिति मेंबर देवेंद्र आदि मौजूद रहे। अंत में महिपाल यादव ने सभी का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि वीरेंद्र दरोगा के नेतृत्व में यादव सभा होनहारों का सम्मान करती रहेगी और हमारी बेटियां इसी प्रकार नाम रोशन करती रहेगी।
ऑफिस ऑफ़ द यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने खुलासा किया कि भारत और 26 अन्य देश वाशिंगटन के उन देशों की सूची में हैं, जिन पर बौद्धिक संपदा संरक्षण के मुद्दों की निगरानी की जानी चाहिए। अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि चीन और रूस सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में ट्रेडिंग पार्टनर इस साल अपर्याप्त आईपी सुरक्षा या प्रवर्तन या कार्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चिंताएं पेश करते हैं जो अन्यथा बौद्धिक संपदा संरक्षण पर निर्भर व्यक्तियों के लिए बाजार तक सीमित पहुंच रखते हैं। अमेरिका ने 27 व्यापारिक साझेदारों को आईपी सुरक्षा मुद्दों के रूप में नामित किया और "प्राथमिकता निगरानी सूची" में डाल दिया, उनमें से सात अर्जेंटीना, चिली, भारत, चीन, इंडोनेशिया, रूस और वेनेजुएला शामिल हैं। स्पुतनिक के अनुसार, रिपोर्ट काफी हद तक चीन पर केंद्रित है, जिसका 88-पृष्ठ के दस्तावेज़ में 100 से अधिक बार उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि "फेज वन" व्यापार समझौते के अनुसार अमेरिका और चीन ने 2020 में हस्ताक्षर किए, बीजिंग ने व्यापार रहस्य, पेटेंट, दवा से संबंधित आईपी, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, भौगोलिक क्षेत्रों में कई लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। संकेत, और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण। बिडेन प्रशासन ने कहा, "यह देखा जाना बाकी है" कि क्या बीजिंग द्वारा इन चिंताओं से संबंधित प्रतिबद्धताओं से बौद्धिक संपदा की सुरक्षा में सुधार होगा।
ऑफिस ऑफ़ द यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने खुलासा किया कि भारत और छब्बीस अन्य देश वाशिंगटन के उन देशों की सूची में हैं, जिन पर बौद्धिक संपदा संरक्षण के मुद्दों की निगरानी की जानी चाहिए। अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि चीन और रूस सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में ट्रेडिंग पार्टनर इस साल अपर्याप्त आईपी सुरक्षा या प्रवर्तन या कार्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चिंताएं पेश करते हैं जो अन्यथा बौद्धिक संपदा संरक्षण पर निर्भर व्यक्तियों के लिए बाजार तक सीमित पहुंच रखते हैं। अमेरिका ने सत्ताईस व्यापारिक साझेदारों को आईपी सुरक्षा मुद्दों के रूप में नामित किया और "प्राथमिकता निगरानी सूची" में डाल दिया, उनमें से सात अर्जेंटीना, चिली, भारत, चीन, इंडोनेशिया, रूस और वेनेजुएला शामिल हैं। स्पुतनिक के अनुसार, रिपोर्ट काफी हद तक चीन पर केंद्रित है, जिसका अठासी-पृष्ठ के दस्तावेज़ में एक सौ से अधिक बार उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि "फेज वन" व्यापार समझौते के अनुसार अमेरिका और चीन ने दो हज़ार बीस में हस्ताक्षर किए, बीजिंग ने व्यापार रहस्य, पेटेंट, दवा से संबंधित आईपी, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, भौगोलिक क्षेत्रों में कई लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। संकेत, और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण। बिडेन प्रशासन ने कहा, "यह देखा जाना बाकी है" कि क्या बीजिंग द्वारा इन चिंताओं से संबंधित प्रतिबद्धताओं से बौद्धिक संपदा की सुरक्षा में सुधार होगा।
Pakur : श्रावण माह की प्रथम सोमवारी से ही सत्य सनातन संस्था नगर के विभिन्न मंदिरों में शिविर लगाकर शिवभक्तों के बीच बेलपत्र, गंगा जल, कच्चा दूध, पुष्प आदि का वितरण कर रही है. संस्था के राहुल सिंह के नेतृत्व में कई सनातनियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. संस्था के उपाध्यक्ष सागर चौधरी ने कहा कि संस्था विगत पांच वर्षो से हर सावन में यह कार्य कर रही है. इस वर्ष भी नगर के बिजली कॉलोनी में अजय भगत के माध्यम से, भगतपाड़ा शिव मंदिर में सत्यम भगत के माध्यम से, बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर कुड़ापाड़ा में, सत्यम कृष्णा के माध्यम से, मुख्य सड़क स्थित दूधनाथ मंदिर में पुरोहित रोहित दास के माध्यम से, रेलवे कॉलोनी शिव मंदिर में सानू रजक, अमित साहा, गौतम कुमार, विक्की श्रीवास्तव व अन्य के माध्यम तथा शिवपुरी कॉलोनी (तलवाड़ंगा) स्थित महाकाल शक्ति पीठ में विशाल भगत, बिष्णु गुप्ता व अन्य के माध्यम से श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री का वितरण किया जा रहा है. गोकुलपुर मंदिर व शहारकोल शिव मंदिर में विश्वजीत सिंह व अन्य के सहयोग से शिविर लगा कर बेलपत्र, गंगाजल, दूध, पुष्प आदि का वितरण किया जा रहा है.
Pakur : श्रावण माह की प्रथम सोमवारी से ही सत्य सनातन संस्था नगर के विभिन्न मंदिरों में शिविर लगाकर शिवभक्तों के बीच बेलपत्र, गंगा जल, कच्चा दूध, पुष्प आदि का वितरण कर रही है. संस्था के राहुल सिंह के नेतृत्व में कई सनातनियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. संस्था के उपाध्यक्ष सागर चौधरी ने कहा कि संस्था विगत पांच वर्षो से हर सावन में यह कार्य कर रही है. इस वर्ष भी नगर के बिजली कॉलोनी में अजय भगत के माध्यम से, भगतपाड़ा शिव मंदिर में सत्यम भगत के माध्यम से, बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर कुड़ापाड़ा में, सत्यम कृष्णा के माध्यम से, मुख्य सड़क स्थित दूधनाथ मंदिर में पुरोहित रोहित दास के माध्यम से, रेलवे कॉलोनी शिव मंदिर में सानू रजक, अमित साहा, गौतम कुमार, विक्की श्रीवास्तव व अन्य के माध्यम तथा शिवपुरी कॉलोनी स्थित महाकाल शक्ति पीठ में विशाल भगत, बिष्णु गुप्ता व अन्य के माध्यम से श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री का वितरण किया जा रहा है. गोकुलपुर मंदिर व शहारकोल शिव मंदिर में विश्वजीत सिंह व अन्य के सहयोग से शिविर लगा कर बेलपत्र, गंगाजल, दूध, पुष्प आदि का वितरण किया जा रहा है.
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारका (Guru Gobind Singh Indraprastha University Dwarka) ने University में कुछ पदों की भर्ती के लिए Notification जारी किया है। 2021 के academic year के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद के लिए नौकरियां आई हैं। योग्य उम्मीदवार 30 नवंबर 2021 के भीतर डाक द्वारा आवेदन कर सकते हैं। आर्किटेक्चर में बैचलर की डिग्री या B. Arch. के समकक्ष और आर्किटेक्चर में मास्टर डिग्री या किसी भी स्तर पर आर्किटेक्चर से संबद्ध विषयों में डिग्री मिनिमम 60 प्रतिशत अंकों के साथ और टीचिंग/ रिसर्च / प्रोफेशनल वर्क में आठ साल का अनुभव जिसमें से मिनिमम तीन साल का फुल टाइम टीचिंग एक्सपीरियंस। आर्किटेक्चर में बैचलर की डिग्री या B. Arch. के समकक्ष और आर्किटेक्चर में मास्टर डिग्री या किसी भी स्तर पर आर्किटेक्चर के संबद्ध विषयों में मिनिमम 60 प्रतिशत अंकों के साथ और टीचिंग/ रिसर्च / प्रोफेशनल वर्क में चौदह साल का अनुभव जिसमें से मिनिमम पांच साल का फुल टाइम टीचिंग एक्सपीरियंस। डिजायरेबलः आर्किटेक्चर में पीएच. डी. आवेदन कैसे करें? आवेदन विश्वविद्यालय में जमा किए जाने चाहिए या स्पीड-पोस्ट द्वारा भेजे जाने चाहिए ताकि 30 नवंबर 2021 को शाम 5. 00 बजे तक डिप्टी रजिस्ट्रार तक पहुंच सकें। आवेदन पत्र के साथ सभी शैक्षिक और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन, एक्सपीरियंस का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र / पीडब्ल्यूडी प्रमाण पत्र सत्यापित प्रतियों के साथ होना चाहिए। किसी भी डाक विलम्ब या हानि के लिए विश्वविद्यालय जिम्मेदार नहीं होगा। आवेदन वाले लिफाफे के ऊपर "यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग (यूएसएपी) के लिए बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर के discipline में अनुबंध के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर / एसोसिएट प्रोफेसर / प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन" लिखा होना चाहिए।
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारका ने University में कुछ पदों की भर्ती के लिए Notification जारी किया है। दो हज़ार इक्कीस के academic year के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद के लिए नौकरियां आई हैं। योग्य उम्मीदवार तीस नवंबर दो हज़ार इक्कीस के भीतर डाक द्वारा आवेदन कर सकते हैं। आर्किटेक्चर में बैचलर की डिग्री या B. Arch. के समकक्ष और आर्किटेक्चर में मास्टर डिग्री या किसी भी स्तर पर आर्किटेक्चर से संबद्ध विषयों में डिग्री मिनिमम साठ प्रतिशत अंकों के साथ और टीचिंग/ रिसर्च / प्रोफेशनल वर्क में आठ साल का अनुभव जिसमें से मिनिमम तीन साल का फुल टाइम टीचिंग एक्सपीरियंस। आर्किटेक्चर में बैचलर की डिग्री या B. Arch. के समकक्ष और आर्किटेक्चर में मास्टर डिग्री या किसी भी स्तर पर आर्किटेक्चर के संबद्ध विषयों में मिनिमम साठ प्रतिशत अंकों के साथ और टीचिंग/ रिसर्च / प्रोफेशनल वर्क में चौदह साल का अनुभव जिसमें से मिनिमम पांच साल का फुल टाइम टीचिंग एक्सपीरियंस। डिजायरेबलः आर्किटेक्चर में पीएच. डी. आवेदन कैसे करें? आवेदन विश्वविद्यालय में जमा किए जाने चाहिए या स्पीड-पोस्ट द्वारा भेजे जाने चाहिए ताकि तीस नवंबर दो हज़ार इक्कीस को शाम पाँच. शून्य बजे तक डिप्टी रजिस्ट्रार तक पहुंच सकें। आवेदन पत्र के साथ सभी शैक्षिक और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन, एक्सपीरियंस का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र / पीडब्ल्यूडी प्रमाण पत्र सत्यापित प्रतियों के साथ होना चाहिए। किसी भी डाक विलम्ब या हानि के लिए विश्वविद्यालय जिम्मेदार नहीं होगा। आवेदन वाले लिफाफे के ऊपर "यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग के लिए बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर के discipline में अनुबंध के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर / एसोसिएट प्रोफेसर / प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन" लिखा होना चाहिए।
उधमपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर कॉलेज की तरफ से वर्चुअल निबंध लेखन, स्लोगन और पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें काफी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर शिक्षकों के महत्व के बारे में बताया। महिला कॉलेज में संगीत विभाग की तरफ से हुए कार्यक्रम में प्रिंसिपल मीनू महाजन मुख्य मेहमान थीं। प्रतियोगिताओं में कालेज की 39 छात्राओं ने हिस्सा लिया। पोस्टर बनाकर और स्लोगन प्रतियोगिता में खुशी शर्मा ने पहला, श्वेता ठाकुर ने दूसरा और ज्योति कौशल और मनीशा ठाकुर ने संयुक्त रूप में तीसरा स्थान हासिल किया। पिंकी देवी, छाया शर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। प्रिंसिपल ने भी शिक्षक दिवस के महत्व पर रोशनी डाली। इस दौरान अक्रम खान, सुरेश कुमार, प्रो. केवल कुमार, एचओडी उर्दू मूल राज व अन्य मौजूद थे। डिग्री कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें भी काफी संख्या में छात्र व छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसमें अंतरिक्ष ने पहला स्थान हासिल किया। राहुल शर्मा ने दूसरा और रानी ने तीसरा स्थान हासिल किया। प्रिंसिपल सुभाष चंद्र ने सभी को शिक्षक दिवस की बधाई दी। इस मौके पर डॉ. नरेश कुमार, डॉ. पंकज शर्मा, प्रो. पूजा धीमान, डॉ. यशपाल, प्रो. संजीव कुमार व अन्य मौजूद रहे।
उधमपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर कॉलेज की तरफ से वर्चुअल निबंध लेखन, स्लोगन और पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें काफी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर शिक्षकों के महत्व के बारे में बताया। महिला कॉलेज में संगीत विभाग की तरफ से हुए कार्यक्रम में प्रिंसिपल मीनू महाजन मुख्य मेहमान थीं। प्रतियोगिताओं में कालेज की उनतालीस छात्राओं ने हिस्सा लिया। पोस्टर बनाकर और स्लोगन प्रतियोगिता में खुशी शर्मा ने पहला, श्वेता ठाकुर ने दूसरा और ज्योति कौशल और मनीशा ठाकुर ने संयुक्त रूप में तीसरा स्थान हासिल किया। पिंकी देवी, छाया शर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। प्रिंसिपल ने भी शिक्षक दिवस के महत्व पर रोशनी डाली। इस दौरान अक्रम खान, सुरेश कुमार, प्रो. केवल कुमार, एचओडी उर्दू मूल राज व अन्य मौजूद थे। डिग्री कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें भी काफी संख्या में छात्र व छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसमें अंतरिक्ष ने पहला स्थान हासिल किया। राहुल शर्मा ने दूसरा और रानी ने तीसरा स्थान हासिल किया। प्रिंसिपल सुभाष चंद्र ने सभी को शिक्षक दिवस की बधाई दी। इस मौके पर डॉ. नरेश कुमार, डॉ. पंकज शर्मा, प्रो. पूजा धीमान, डॉ. यशपाल, प्रो. संजीव कुमार व अन्य मौजूद रहे।
हरियाणा की राजनीति में वर्तमान समय में बिखरे चौटाला परिवार और उसके प्रभाव वाली जींद सीट पर अजय और अभय चौटाला ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जींद विधानसभा सीट इनेलो के विधायक के निधन से खाली हुई है। भाजपा को लेकर जाटों में नाराजगी बताई जाती है लिहाजा कांग्रेस इस मौके को चूकना नहीं चाहती है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष के पास जींद सीट के लिए बेहतर चेहरा न होने के साथ सीमित विकल्प थे। बताते हैं कि पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव लड़ने की पेशकश की गई लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और न ही प्रदेश अध्यक्ष कोई मजबूत नाम सुझा पाए। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संदेश देने के लिए ये चुनाव हर हाल में जीतना चाहता है और जींद से किसी जाट को ही उम्मीदवार बनाया जाना था। लिहाजा हरियाणा की राजनीति में महत्वपूर्ण इस केंद्र से कोई बड़ा नाम न होने पर रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतारा गया। कांग्रेस को डर है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा हरियाणा में फिर से जाट बनाम अन्य जातियों का चुनाव बनाना चाहेगी। ऐेसे में सुरजेवाला ऐसा चेहरा है जिसकी पहचान अन्य बिरादरियों में भी है। राज्य में अलग-थलग पड़े प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर भी सुरजेवाला के साथ हो लिए हैं। हुड्डा एंड फैमिली के साथ उनके खराब संबंध जगजाहिर हैं और इसका नुकसान पार्टी संगठन में भी हुआ है।
हरियाणा की राजनीति में वर्तमान समय में बिखरे चौटाला परिवार और उसके प्रभाव वाली जींद सीट पर अजय और अभय चौटाला ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जींद विधानसभा सीट इनेलो के विधायक के निधन से खाली हुई है। भाजपा को लेकर जाटों में नाराजगी बताई जाती है लिहाजा कांग्रेस इस मौके को चूकना नहीं चाहती है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष के पास जींद सीट के लिए बेहतर चेहरा न होने के साथ सीमित विकल्प थे। बताते हैं कि पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव लड़ने की पेशकश की गई लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और न ही प्रदेश अध्यक्ष कोई मजबूत नाम सुझा पाए। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संदेश देने के लिए ये चुनाव हर हाल में जीतना चाहता है और जींद से किसी जाट को ही उम्मीदवार बनाया जाना था। लिहाजा हरियाणा की राजनीति में महत्वपूर्ण इस केंद्र से कोई बड़ा नाम न होने पर रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतारा गया। कांग्रेस को डर है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा हरियाणा में फिर से जाट बनाम अन्य जातियों का चुनाव बनाना चाहेगी। ऐेसे में सुरजेवाला ऐसा चेहरा है जिसकी पहचान अन्य बिरादरियों में भी है। राज्य में अलग-थलग पड़े प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर भी सुरजेवाला के साथ हो लिए हैं। हुड्डा एंड फैमिली के साथ उनके खराब संबंध जगजाहिर हैं और इसका नुकसान पार्टी संगठन में भी हुआ है।
विद्युत आवेश कुछ उपपरमाणवीय कणों में एक मूल गुण है जो विद्युतचुम्बकत्व का महत्व है। आवेशित पदार्थ को विद्युत क्षेत्र का असर पड़ता है और वह ख़ुद एक विद्युत क्षेत्र का स्रोत हो सकता है। आवेश पदार्थ का एक गुण है! पदार्थो को आपस में रगड़ दिया जाये तो उनमें परस्पर इलेक्ट्रोनों के आदान प्रदान के फलस्वरूप आकर्षण का गुण आ जाता है।
विद्युत आवेश कुछ उपपरमाणवीय कणों में एक मूल गुण है जो विद्युतचुम्बकत्व का महत्व है। आवेशित पदार्थ को विद्युत क्षेत्र का असर पड़ता है और वह ख़ुद एक विद्युत क्षेत्र का स्रोत हो सकता है। आवेश पदार्थ का एक गुण है! पदार्थो को आपस में रगड़ दिया जाये तो उनमें परस्पर इलेक्ट्रोनों के आदान प्रदान के फलस्वरूप आकर्षण का गुण आ जाता है।
कोई विधि अथवा निषेध करते समय उसका कारण उसी समय बताना जरूरी नही है। कारण की भीमासा आवश्यकतानुसार आगे-पीछे या साथ-साथ कर सकते है, पर वह हो अवश्य, इतना ही मुझे कहना है । सिखाने की पद्धति ऐसी हो कि विद्याथियो के दिल में प्रश्न उठते जायें और वे स्वयं उन्हें शिक्षको के सामने रखते जायँ । अवसर देखकर शिक्षक स्वय भी प्रश्न करें मौर विद्यार्थी उनके सवध में चर्चा करें । जिन प्रश्नो को मामूली तौर पर कोई न पूछे, ऐसे प्रश्न भी पैदा किये जायँ । उदाहरणार्थ, चरखे का चक्र चौखूंटा क्यो न हो ? इस तरह का प्रश्न मामूली तौर पर कोई नही पूछता । अगर किसीने पूछा भी, तो लोग उसे मूर्ख समझेंगे । किंतु हम तो उसे चतुर समझेंगे । इतना ही नहीं, बल्कि हम स्वय ऐसा प्रश्न उपस्थित करेंगे और उसका शास्त्रीय उत्तर तर्क द्वारा निकलवायेगे । परिश्रम अलग चीज है और परिश्रम-निष्ठा, परिश्रम के प्रति आदर और प्रेम अलग चीज । ससार में ज्यादातर लोग शारीरिक परिश्रम (मेहनत ) करनेवाले ही है । परतु वे अक्सर मजबूर होकर मेहनत करते है। बहुत से लोग तो मेहनत के कामो से यदि वच सकें, तो बचना ही चाहेंगे। कुछ लोग तो शारीरिक परिश्रम से वचकर अर्थात् उसका भार दूसरो पर लादकर भी प्रतिष्ठित वने बैठे है । इसीसे साम्राज्यवाद, पूंजीवाद, युद्ध, विषमता (छोटे-वडे भेद, ऊंच-नीच आदि भेद) आदि की उत्पत्ति हुई है । इन सबका केवल एक ही इलाज है,
कोई विधि अथवा निषेध करते समय उसका कारण उसी समय बताना जरूरी नही है। कारण की भीमासा आवश्यकतानुसार आगे-पीछे या साथ-साथ कर सकते है, पर वह हो अवश्य, इतना ही मुझे कहना है । सिखाने की पद्धति ऐसी हो कि विद्याथियो के दिल में प्रश्न उठते जायें और वे स्वयं उन्हें शिक्षको के सामने रखते जायँ । अवसर देखकर शिक्षक स्वय भी प्रश्न करें मौर विद्यार्थी उनके सवध में चर्चा करें । जिन प्रश्नो को मामूली तौर पर कोई न पूछे, ऐसे प्रश्न भी पैदा किये जायँ । उदाहरणार्थ, चरखे का चक्र चौखूंटा क्यो न हो ? इस तरह का प्रश्न मामूली तौर पर कोई नही पूछता । अगर किसीने पूछा भी, तो लोग उसे मूर्ख समझेंगे । किंतु हम तो उसे चतुर समझेंगे । इतना ही नहीं, बल्कि हम स्वय ऐसा प्रश्न उपस्थित करेंगे और उसका शास्त्रीय उत्तर तर्क द्वारा निकलवायेगे । परिश्रम अलग चीज है और परिश्रम-निष्ठा, परिश्रम के प्रति आदर और प्रेम अलग चीज । ससार में ज्यादातर लोग शारीरिक परिश्रम करनेवाले ही है । परतु वे अक्सर मजबूर होकर मेहनत करते है। बहुत से लोग तो मेहनत के कामो से यदि वच सकें, तो बचना ही चाहेंगे। कुछ लोग तो शारीरिक परिश्रम से वचकर अर्थात् उसका भार दूसरो पर लादकर भी प्रतिष्ठित वने बैठे है । इसीसे साम्राज्यवाद, पूंजीवाद, युद्ध, विषमता आदि की उत्पत्ति हुई है । इन सबका केवल एक ही इलाज है,
Kumkum Bhagya zee tv show : ZEE TV शो 'कुमकुम भाग्य' में पिछले कुछ हफ्तों में काफी ड्रामा देखा गया है. कहानी के मुताबिक, प्राची को फिरौती का नोट मिलता है जिससे मिहिका की जान को खतरा है. प्राची सिड से शादी करने के लिए दृढ़ है और भविष्य में उसके साथ क्या होगा, इस पर नियति के खेल का भी परीक्षण करना चाहती है. प्राची दुल्हन के रूप में तैयार हो जाती है. रणबीर उसे मंडप में ले जाता है और उसे सिड के पास बैठाता है. शाहाना और आर्यन ने शादी रोकने की योजना बनाती है. वे मंडप को धक्का देने की कोशिश करते हैं ताकि वह गिर जाए. जल्द ही मंडप गिर जाता है और रिया घायल हो जाती है. प्राची रिया की मदद के लिए दौड़ती है और शादी रुक जाती है. परिजन रिया को अस्पताल भी ले जाते हैं. अब आने वाले एपिसोड में, अस्पताल में सहाना, प्राची और सिद्धार्थ रणबीर को उकसाने का फैसला करते हैं ताकि वह रिया को डीएनए रिपोर्ट करने के लिए मजबूर कर सके. जल्द ही, वे इसे निष्पादित करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ते हैं. सिद्धार्थ रणबीर को उकसाने में कामयाब हो जाता है और वह रिया को एक और डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहता है, जिससे उसे और आलिया को चिंता होती है.
Kumkum Bhagya zee tv show : ZEE TV शो 'कुमकुम भाग्य' में पिछले कुछ हफ्तों में काफी ड्रामा देखा गया है. कहानी के मुताबिक, प्राची को फिरौती का नोट मिलता है जिससे मिहिका की जान को खतरा है. प्राची सिड से शादी करने के लिए दृढ़ है और भविष्य में उसके साथ क्या होगा, इस पर नियति के खेल का भी परीक्षण करना चाहती है. प्राची दुल्हन के रूप में तैयार हो जाती है. रणबीर उसे मंडप में ले जाता है और उसे सिड के पास बैठाता है. शाहाना और आर्यन ने शादी रोकने की योजना बनाती है. वे मंडप को धक्का देने की कोशिश करते हैं ताकि वह गिर जाए. जल्द ही मंडप गिर जाता है और रिया घायल हो जाती है. प्राची रिया की मदद के लिए दौड़ती है और शादी रुक जाती है. परिजन रिया को अस्पताल भी ले जाते हैं. अब आने वाले एपिसोड में, अस्पताल में सहाना, प्राची और सिद्धार्थ रणबीर को उकसाने का फैसला करते हैं ताकि वह रिया को डीएनए रिपोर्ट करने के लिए मजबूर कर सके. जल्द ही, वे इसे निष्पादित करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ते हैं. सिद्धार्थ रणबीर को उकसाने में कामयाब हो जाता है और वह रिया को एक और डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहता है, जिससे उसे और आलिया को चिंता होती है.
वको यह धर्म है, तो उत्तम समिग्री होय सो श्रीठकुरजी को समपें, और अपने पास द्रव्य न होय तो मनमें ताप करिके कहेजो यह तो प्रभुन के लायक हे और जहां तहां तांई बने तहां तांई उत्तम सामिग्री तथा नूतन वस्त्र और फलफूल थोरोहु बने तो अवश्य लावनों, सो मेहेंगे सेंगे को विचार नाहीं कर नों. श्रीठाकुरजीकु तो स्नेह अत्यंत प्रीय हे, सो श्री ठाकुरजी को उत्तम वस्तु जहां तांइ बने तहां तांइ अंगीकार करावनों और श्रीठाकुरजी को सुगंधादिक अत्यंत प्रिय हे, सो यथाशक्ति समर्पे और सुगंध नित्य न बने तो उत्सव में समर्पे. द्रव्य के [प्रभावसों भृतिदेवने मृतिका में पानी डारके सुगंध के भावसों प्रभु को समप्यों हुतो. सो एसें भावतें सघरी बात सिद्ध होय. और श्रीठाकुरजी को तुलसी अत्यं त प्रीय है. सो श्रीठाकुरजी के चरणारविंद में नित्य नेमस विधिपूर्वक समर्पनी और तुलसी समर्पती विरियां गद्यको पाठ करनों, सो श्रीठाकुरजी के चरपारविंद को संबंध श्री आचार्य महाप्रभुजी द्वारा
वको यह धर्म है, तो उत्तम समिग्री होय सो श्रीठकुरजी को समपें, और अपने पास द्रव्य न होय तो मनमें ताप करिके कहेजो यह तो प्रभुन के लायक हे और जहां तहां तांई बने तहां तांई उत्तम सामिग्री तथा नूतन वस्त्र और फलफूल थोरोहु बने तो अवश्य लावनों, सो मेहेंगे सेंगे को विचार नाहीं कर नों. श्रीठाकुरजीकु तो स्नेह अत्यंत प्रीय हे, सो श्री ठाकुरजी को उत्तम वस्तु जहां तांइ बने तहां तांइ अंगीकार करावनों और श्रीठाकुरजी को सुगंधादिक अत्यंत प्रिय हे, सो यथाशक्ति समर्पे और सुगंध नित्य न बने तो उत्सव में समर्पे. द्रव्य के [प्रभावसों भृतिदेवने मृतिका में पानी डारके सुगंध के भावसों प्रभु को समप्यों हुतो. सो एसें भावतें सघरी बात सिद्ध होय. और श्रीठाकुरजी को तुलसी अत्यं त प्रीय है. सो श्रीठाकुरजी के चरणारविंद में नित्य नेमस विधिपूर्वक समर्पनी और तुलसी समर्पती विरियां गद्यको पाठ करनों, सो श्रीठाकुरजी के चरपारविंद को संबंध श्री आचार्य महाप्रभुजी द्वारा
चर्चा में क्यों? हाल ही में आगरा रेल मंडल के वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि आगरा कैंट स्टेशन, डीआरएम ऑफिस और रेलवे अस्पताल को हरियाली, कूड़ा प्रबंधन व सफाई के मामले में आईजीबीसी की ओर से ग्रीन रेटिंग दी गई है। - आगरा कैंट स्टेशन परिसर को हरा-भरा बनाने के प्रयास पिछले दो साल से चल रहे हैं। स्टेशन के रनिंग रूम के मेस में लोको पायलट और गार्डों के लिये भोजन बायोगैस प्लांट पर बनाया जाता है। यहाँ स्टेशन से एकत्रित कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह रेलवे अधिकारियों के यमुना रेस्ट हाउस में भी बायोगैस प्लांट संचालित है। स्टेशन पर सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होता है। - स्टेशन परिसर से लेकर डीआरएम ऑफिस तक सोलर पैनल से 1588.40 किलोवाट बिजली का उत्पादन होता है, जिससे स्टेशन व अन्य परिसर की ज़रूरतों को पूरा किया जाता है। - स्टेशन पर प्रतिदिन एक हज़ार से ज़्यादा रेल नीर समेत अन्य पानी की बोतलों की खपत होती है। इन्हें नष्ट करने के लिये बोतल क्रश मशीनें लगी हुई हैं। - रेलवे की ऑफिसर्स कॉलोनी से लेकर डीआरएम ऑफिस व अन्य परिसरों को हरियाली से आच्छादित किया गया है। वर्ष 2021-22 में डेढ़ लाख पौधे लगाए गए थे। इनमें से बड़ी संख्या में अब फल-फूल गए हैं। वर्तमान में केवल स्टेशन परिसर में 100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी देखभाल का दायित्व स्टेशन अधीक्षक का है। - स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर छह पर एसटीपी संचालित है। इसे पानी का ट्रीटमेंट करके पटरियों की धुलाई में उपयोग किया जाता है। - स्टेशन पर वार्ड के समीप कोच वाशिंग प्लांट से ट्रेनों के कोचों की धुलाई की जाती है। धुलाई के पानी को बर्बाद नहीं होने दिया जाता है। इसे अनेक चैनलों से गुज़ार कर पौधों में दिया जाता है। - कूड़े के प्रबंधन के लिये रेलवे ने नगर निगम के साथ करार किया है। इसमें कूड़े की छँटाई के बाद इसके निस्तारण का कार्य नगर निगम की टीम करती है।
चर्चा में क्यों? हाल ही में आगरा रेल मंडल के वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि आगरा कैंट स्टेशन, डीआरएम ऑफिस और रेलवे अस्पताल को हरियाली, कूड़ा प्रबंधन व सफाई के मामले में आईजीबीसी की ओर से ग्रीन रेटिंग दी गई है। - आगरा कैंट स्टेशन परिसर को हरा-भरा बनाने के प्रयास पिछले दो साल से चल रहे हैं। स्टेशन के रनिंग रूम के मेस में लोको पायलट और गार्डों के लिये भोजन बायोगैस प्लांट पर बनाया जाता है। यहाँ स्टेशन से एकत्रित कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह रेलवे अधिकारियों के यमुना रेस्ट हाउस में भी बायोगैस प्लांट संचालित है। स्टेशन पर सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होता है। - स्टेशन परिसर से लेकर डीआरएम ऑफिस तक सोलर पैनल से एक हज़ार पाँच सौ अठासी दशमलव चालीस किलोग्रामवाट बिजली का उत्पादन होता है, जिससे स्टेशन व अन्य परिसर की ज़रूरतों को पूरा किया जाता है। - स्टेशन पर प्रतिदिन एक हज़ार से ज़्यादा रेल नीर समेत अन्य पानी की बोतलों की खपत होती है। इन्हें नष्ट करने के लिये बोतल क्रश मशीनें लगी हुई हैं। - रेलवे की ऑफिसर्स कॉलोनी से लेकर डीआरएम ऑफिस व अन्य परिसरों को हरियाली से आच्छादित किया गया है। वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में डेढ़ लाख पौधे लगाए गए थे। इनमें से बड़ी संख्या में अब फल-फूल गए हैं। वर्तमान में केवल स्टेशन परिसर में एक सौ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी देखभाल का दायित्व स्टेशन अधीक्षक का है। - स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर छह पर एसटीपी संचालित है। इसे पानी का ट्रीटमेंट करके पटरियों की धुलाई में उपयोग किया जाता है। - स्टेशन पर वार्ड के समीप कोच वाशिंग प्लांट से ट्रेनों के कोचों की धुलाई की जाती है। धुलाई के पानी को बर्बाद नहीं होने दिया जाता है। इसे अनेक चैनलों से गुज़ार कर पौधों में दिया जाता है। - कूड़े के प्रबंधन के लिये रेलवे ने नगर निगम के साथ करार किया है। इसमें कूड़े की छँटाई के बाद इसके निस्तारण का कार्य नगर निगम की टीम करती है।
बार्सिलोना और अर्जेंटीना के सुपरस्टार फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी के साथ कम ही होता है कि वे फुटबाल मैच ना देखें या फिर उसका हिस्सा ना रहें. लेकिन वे इस शनिवार वो मालागा इन ला लीगा ट्रिप छोड़कर अपनी तीसरी संतान के जन्म पर अस्पताल में दिखे. आखिर क्यों ढह रहा है बॉलीवुड, बड़े-बड़े स्टारों की चमक हो चुकी है फीकी? Bigg Boss OTT 2 Written Update 12 July 2023: 'मिसेस सचदेव' सुनकर भड़क गईं फलक नाज, जिया ने जद हदीद को दिया धोखा?
बार्सिलोना और अर्जेंटीना के सुपरस्टार फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी के साथ कम ही होता है कि वे फुटबाल मैच ना देखें या फिर उसका हिस्सा ना रहें. लेकिन वे इस शनिवार वो मालागा इन ला लीगा ट्रिप छोड़कर अपनी तीसरी संतान के जन्म पर अस्पताल में दिखे. आखिर क्यों ढह रहा है बॉलीवुड, बड़े-बड़े स्टारों की चमक हो चुकी है फीकी? Bigg Boss OTT दो Written Update बारह जुलाईy दो हज़ार तेईस: 'मिसेस सचदेव' सुनकर भड़क गईं फलक नाज, जिया ने जद हदीद को दिया धोखा?
23 सेक्टर असम राइफल्स की लुंगी बटालियन ने मिजोरम में जॉन विलियम्स अस्पताल और लुंगलेई के जिला अस्पताल में कोविड-19 पर एक संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया है। कार्यक्रम के दौरान असम राइफल्स के कर्मियों की एक टीम ने अस्पताल पहुंचने वाले लोगों के साथ बातचीत की और उन्हें उन सावधानियों पर शिक्षित किया, जिन्हें उन्हें कोरोनो वायरस से संक्रमित होने से रोकने की आवश्यकता है। राइफल्स टीम ने जनता से कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की है। राइफल्स टीम ने मास्क पहनना, हाथों की नियमित धुलाई, हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करना और सामाजिक दूरी बनाए रखने को कहा और साथ ही लोगों को कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण करवाने का भी आग्रह किया। असम राइफल्स टीम ने इस अवसर पर लोगों के बीच दवाइयां और अन्य चिकित्सा उत्पाद भी वितरित किए। मिजोरम में पिछले 24 घंटों के दौरान कोविड-19 के लिए कुल 9 लोगों ने सकारात्मक परीक्षण किया है, जो राज्य की रैली को 4,500 तक ले गए हैं। वर्तमान में राज्य में 44 सक्रिय मामले हैं, जबकि 4,445 लोग वायरस से उबर चुके हैं। इस बीमारी ने राज्य में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। मिजोरम सरकार ने स्थानीय स्वयंसेवकों को कोरोना के कारण मृत्यु हो जाने पर प्रत्येक को 20 लाख रुपये का भुगतान करने का फैसला किया है।
तेईस सेक्टर असम राइफल्स की लुंगी बटालियन ने मिजोरम में जॉन विलियम्स अस्पताल और लुंगलेई के जिला अस्पताल में कोविड-उन्नीस पर एक संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया है। कार्यक्रम के दौरान असम राइफल्स के कर्मियों की एक टीम ने अस्पताल पहुंचने वाले लोगों के साथ बातचीत की और उन्हें उन सावधानियों पर शिक्षित किया, जिन्हें उन्हें कोरोनो वायरस से संक्रमित होने से रोकने की आवश्यकता है। राइफल्स टीम ने जनता से कोविड-उन्नीस प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की है। राइफल्स टीम ने मास्क पहनना, हाथों की नियमित धुलाई, हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करना और सामाजिक दूरी बनाए रखने को कहा और साथ ही लोगों को कोविड-उन्नीस के खिलाफ टीकाकरण करवाने का भी आग्रह किया। असम राइफल्स टीम ने इस अवसर पर लोगों के बीच दवाइयां और अन्य चिकित्सा उत्पाद भी वितरित किए। मिजोरम में पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान कोविड-उन्नीस के लिए कुल नौ लोगों ने सकारात्मक परीक्षण किया है, जो राज्य की रैली को चार,पाँच सौ तक ले गए हैं। वर्तमान में राज्य में चौंतालीस सक्रिय मामले हैं, जबकि चार,चार सौ पैंतालीस लोग वायरस से उबर चुके हैं। इस बीमारी ने राज्य में ग्यारह लोगों की मौत हो चुकी है। मिजोरम सरकार ने स्थानीय स्वयंसेवकों को कोरोना के कारण मृत्यु हो जाने पर प्रत्येक को बीस लाख रुपये का भुगतान करने का फैसला किया है।
आम के टेस्ट के बारे में सभी जानते हैं लेकिन बहुत दुख की बात है कि हम इस रसीले और टेस्टी फ्रूट के बारे में यह नहीं जानते हैं कि यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है। गर्मियां आते ही चारों ओर आम ही आम दिखाई देता है। जी हां फलों का राजा के रूप में जाना जाने वाला आम बहुत ही रिफ्रेशिंग और फ्रेश फ्रूट होता है जो गर्मी के दिनों में आपको ठंडा रखने में हेल्प करता है। मुझे अपने बचपन के वह दिन याद है जब मेरी बहन और मैं फ्रिज में रखे हुए आम को एक दूसरे के साथ पहले खत्म करना चाहती थी। लेकिन बहुत दुख की बात है कि हम इस रसीले और टेस्टी फ्रूट के बारे में यह नहीं जानते हैं कि यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है। जी हां आम में पोषक तत्वों की भरमार है। इस फल में विटामिन, मिनरल और एंजाइम भरपूर मात्रा में होते है। सिर्फ इतना ही नहीं आम एंटीऑक्सीडेंट और भरपूर से भी भरपूर होता है। एंटीऑक्सीडेंट बीटा कैरोटीन और विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने, आंखों की सेहत और अपच को रोकने और बॉडी को फ्री रेडिकल्स से बचाने में हेल्प करता है। इसलिए अगर आपको कुकीज खाने की बजाय आम खाने पर विचार करना चाहिए। आइए जानें आम के पौष्टिक गुणों और फायदों के बारे में जानें। यह तो सभी जानते हैं कि वजन कम करने के लिए फाइबर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आम फाइबर से भरपूर होता है। आम के प्रति 100 ग्राम में 1. 6 ग्राम डायटरी फाइबर होता है। आम खाने से आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। लेकिन याद रहें कि इसे मॉडरेशन की असली कुंजी है। गर्मियों में, खुद को हाइड्रेटेड रखना बहुत महत्वपूर्ण है। पानी हमें हाइड्रेटेड और कूल रखता है। पानी से भरपूर ड्रिंक्स और फूड स्रोत डिहाइड्रेशन से बचाने केसाथ ही आम आपको लंबे समय तक भरे हुए का अहसास दिलाता है। जिसका मतलब है कि हम समय-समय पर अनहेल्दी चीजों को खाने से बच जाते है। आम के प्रति 100 ग्राम में 83. 46 ग्राम पानी होता है। आम को ए, सी, और के जैसे विटामिन से भरपूर होता है। जबकि, विटामिन के अच्छे स्तर हमारी बोन हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं और विटामिन ए अच्छी आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। आम में विटामिन सी का 36. 4 मिलीग्राम, विटामिन के 4. 2 माइक्रोग्राम और प्रति 100 ग्राम प्रति 1082 आईयू शामिल है। आम विटामिन सी के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है यह विटामिन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक है। आम डाइजेशन से जुड़ी प्रॉब्लम्स जैसे अपच और गैस आदि को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम में डाइजेस्टिव एंजाइम होते हैं जो नेचुरल और अच्छे डाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। यह एंजाइम प्रोटीन और फाइबर को टूटने और डायजेशन में हेल्प करते हैं। आम में मौजूद डायटरी फाइबर से कई दीर्घकालिक लाभ मिलते है, जो टाइप-2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज और डायवर्टिकुलर बीमारियों जैसी कई लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। आम बीटा कैरोटीन से भरपूर होता हैं, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है और आंखों और स्किन सहित हमारी बॉडी में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, आम हमारे शरीर को विटामिन ए की न्यूनतम आवश्यकता प्रदान करता है, जो आंखों के लिए अच्छा होता है, नाइट ब्लाइंडनेस और ड्राई आंखों से बचाता है। आम हमारी बॉडी में विटामिन सी और विटामिन ए की आवश्यकता को पूरा करता है और इम्यूनिटी को हेल्दी और मजबूत रखता है। विटामिन सी कोल्ड और फ्लू से बचाने में हेल्प करता है, जबकि विटामिन ए हमें हमारे आंतरिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। Read more: अपने मनपसंद रसीले फल आम को खाने से क्या बढ़ जाता है आपका वजन? आम नेचुरल एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकते हैं; सभी विटामिन ए और सी के लिए धन्यवाद जो आमों में बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं। ये विटामिन बॉडी के भीतर कोलेजन प्रोटीन का उत्पादन करने में मदद करते हैं जो ब्लड वेसल्स और बॉडी संयोजी ऊतक की रक्षा करके स्किन की नेचुरल एजिंग प्रॉसेस को धीमा करने के लिए जाने जाते हैं। आम एक स्नैक के रूप में सभी अच्छी पसंद हो सकता हैं। आमों की विभिन्न किस्में हैं, और सभी समान रूप से स्वादिष्ट और पौष्टिक हैं। वे पाचन में सुधार करते हैं, डायबिटीज को कंट्रोल करते हैं, इम्यूनिटी को बढ़ावा देते हैं, और इसे एक आदर्श स्नैक बनाते हैं। इसलिए डोनट या वफ़ल खाने की बजाय आपको हेल्दी आम खाने पर विचार करना चाहिए। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
आम के टेस्ट के बारे में सभी जानते हैं लेकिन बहुत दुख की बात है कि हम इस रसीले और टेस्टी फ्रूट के बारे में यह नहीं जानते हैं कि यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है। गर्मियां आते ही चारों ओर आम ही आम दिखाई देता है। जी हां फलों का राजा के रूप में जाना जाने वाला आम बहुत ही रिफ्रेशिंग और फ्रेश फ्रूट होता है जो गर्मी के दिनों में आपको ठंडा रखने में हेल्प करता है। मुझे अपने बचपन के वह दिन याद है जब मेरी बहन और मैं फ्रिज में रखे हुए आम को एक दूसरे के साथ पहले खत्म करना चाहती थी। लेकिन बहुत दुख की बात है कि हम इस रसीले और टेस्टी फ्रूट के बारे में यह नहीं जानते हैं कि यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है। जी हां आम में पोषक तत्वों की भरमार है। इस फल में विटामिन, मिनरल और एंजाइम भरपूर मात्रा में होते है। सिर्फ इतना ही नहीं आम एंटीऑक्सीडेंट और भरपूर से भी भरपूर होता है। एंटीऑक्सीडेंट बीटा कैरोटीन और विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने, आंखों की सेहत और अपच को रोकने और बॉडी को फ्री रेडिकल्स से बचाने में हेल्प करता है। इसलिए अगर आपको कुकीज खाने की बजाय आम खाने पर विचार करना चाहिए। आइए जानें आम के पौष्टिक गुणों और फायदों के बारे में जानें। यह तो सभी जानते हैं कि वजन कम करने के लिए फाइबर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आम फाइबर से भरपूर होता है। आम के प्रति एक सौ ग्राम में एक. छः ग्राम डायटरी फाइबर होता है। आम खाने से आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। लेकिन याद रहें कि इसे मॉडरेशन की असली कुंजी है। गर्मियों में, खुद को हाइड्रेटेड रखना बहुत महत्वपूर्ण है। पानी हमें हाइड्रेटेड और कूल रखता है। पानी से भरपूर ड्रिंक्स और फूड स्रोत डिहाइड्रेशन से बचाने केसाथ ही आम आपको लंबे समय तक भरे हुए का अहसास दिलाता है। जिसका मतलब है कि हम समय-समय पर अनहेल्दी चीजों को खाने से बच जाते है। आम के प्रति एक सौ ग्राम में तिरासी. छियालीस ग्राम पानी होता है। आम को ए, सी, और के जैसे विटामिन से भरपूर होता है। जबकि, विटामिन के अच्छे स्तर हमारी बोन हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं और विटामिन ए अच्छी आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। आम में विटामिन सी का छत्तीस. चार मिलीग्राम, विटामिन के चार. दो माइक्रोग्राम और प्रति एक सौ ग्राम प्रति एक हज़ार बयासी आईयू शामिल है। आम विटामिन सी के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है यह विटामिन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक है। आम डाइजेशन से जुड़ी प्रॉब्लम्स जैसे अपच और गैस आदि को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम में डाइजेस्टिव एंजाइम होते हैं जो नेचुरल और अच्छे डाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। यह एंजाइम प्रोटीन और फाइबर को टूटने और डायजेशन में हेल्प करते हैं। आम में मौजूद डायटरी फाइबर से कई दीर्घकालिक लाभ मिलते है, जो टाइप-दो डायबिटीज, हार्ट डिजीज और डायवर्टिकुलर बीमारियों जैसी कई लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। आम बीटा कैरोटीन से भरपूर होता हैं, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है और आंखों और स्किन सहित हमारी बॉडी में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, आम हमारे शरीर को विटामिन ए की न्यूनतम आवश्यकता प्रदान करता है, जो आंखों के लिए अच्छा होता है, नाइट ब्लाइंडनेस और ड्राई आंखों से बचाता है। आम हमारी बॉडी में विटामिन सी और विटामिन ए की आवश्यकता को पूरा करता है और इम्यूनिटी को हेल्दी और मजबूत रखता है। विटामिन सी कोल्ड और फ्लू से बचाने में हेल्प करता है, जबकि विटामिन ए हमें हमारे आंतरिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। Read more: अपने मनपसंद रसीले फल आम को खाने से क्या बढ़ जाता है आपका वजन? आम नेचुरल एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकते हैं; सभी विटामिन ए और सी के लिए धन्यवाद जो आमों में बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं। ये विटामिन बॉडी के भीतर कोलेजन प्रोटीन का उत्पादन करने में मदद करते हैं जो ब्लड वेसल्स और बॉडी संयोजी ऊतक की रक्षा करके स्किन की नेचुरल एजिंग प्रॉसेस को धीमा करने के लिए जाने जाते हैं। आम एक स्नैक के रूप में सभी अच्छी पसंद हो सकता हैं। आमों की विभिन्न किस्में हैं, और सभी समान रूप से स्वादिष्ट और पौष्टिक हैं। वे पाचन में सुधार करते हैं, डायबिटीज को कंट्रोल करते हैं, इम्यूनिटी को बढ़ावा देते हैं, और इसे एक आदर्श स्नैक बनाते हैं। इसलिए डोनट या वफ़ल खाने की बजाय आपको हेल्दी आम खाने पर विचार करना चाहिए। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
अक्सर लोग प्याज का इस्तेमाल खाने में करते है। लेकिन आपको बता दे की प्याज में मौजूद सल्फर बालों की जड़ों को पोषण देता है जिससे बालों के विकास में मदद मिलती है। इसलिए बहुत से लोग बालों की लंबाई बढ़ाने के लिए प्याज का रस लगाते हैं। प्याज में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण के कारण इसका रस बालों में लगाने से गिरते बालों को रोकने, रूसी और सिर के संक्रमण आदि को दूर करने में मदद मिलती है। तो आइये जानते है कुछ ऐसे ही आसानी से बनाए जाने वाले प्याज के पैक के बारे में। प्याज का रस निकालकर इसे अपने सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर लगाकर 25-30 मिनट के लिए छोड़ दें। साथ ही अपने सिर पर तौलिये को लपेट लें ताकी बालों के रोम इसे अवशोषित कर लें। फिर शैंपू से बालों को अच्छी तरह से धो लें। बीयर आपके बालों को प्राकृतिक रुप से चमकदार बनाती है। प्याज के रस को बीयर में मिक्स करके लगाने से बालों की ग्रोथ होने के साथ बाल कंडीशन भी होते हैं। बाल को बढ़ाने के लिए इस उपाय को एक सप्ताह में दो बार करें। बालों के विकास के लिए प्याज के रस का प्रयोग सबसे आसान तरीका है। इसके लिए रातभर आपको रम के एक गिलास में घिसी हुई प्याज को डाल कर रखना होगा। सुबह इस मिश्रण को छान कर अपने सिर की मसाज करें। इससे आपके बालों को मजबूती मिलेगी और जल्द से जल्द बाल बढ़ने शुरु हो जाएगें।
अक्सर लोग प्याज का इस्तेमाल खाने में करते है। लेकिन आपको बता दे की प्याज में मौजूद सल्फर बालों की जड़ों को पोषण देता है जिससे बालों के विकास में मदद मिलती है। इसलिए बहुत से लोग बालों की लंबाई बढ़ाने के लिए प्याज का रस लगाते हैं। प्याज में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण के कारण इसका रस बालों में लगाने से गिरते बालों को रोकने, रूसी और सिर के संक्रमण आदि को दूर करने में मदद मिलती है। तो आइये जानते है कुछ ऐसे ही आसानी से बनाए जाने वाले प्याज के पैक के बारे में। प्याज का रस निकालकर इसे अपने सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर लगाकर पच्चीस-तीस मिनट के लिए छोड़ दें। साथ ही अपने सिर पर तौलिये को लपेट लें ताकी बालों के रोम इसे अवशोषित कर लें। फिर शैंपू से बालों को अच्छी तरह से धो लें। बीयर आपके बालों को प्राकृतिक रुप से चमकदार बनाती है। प्याज के रस को बीयर में मिक्स करके लगाने से बालों की ग्रोथ होने के साथ बाल कंडीशन भी होते हैं। बाल को बढ़ाने के लिए इस उपाय को एक सप्ताह में दो बार करें। बालों के विकास के लिए प्याज के रस का प्रयोग सबसे आसान तरीका है। इसके लिए रातभर आपको रम के एक गिलास में घिसी हुई प्याज को डाल कर रखना होगा। सुबह इस मिश्रण को छान कर अपने सिर की मसाज करें। इससे आपके बालों को मजबूती मिलेगी और जल्द से जल्द बाल बढ़ने शुरु हो जाएगें।
अलीगढ़ के एसपी सिटी अभिषेक ने कहा कि "हमें यह सूचना मिली थी कि एक युवक जो शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए कोर्ट पहुंचा था उसकी पिटाई की गई. मामले की छानबीन करने पर पता चला कि लड़की के परिजनों ने युवक पर अपहरण का मुकदमा पंजाब में दर्ज कराया था." उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की अदालत में एक मुस्लिम युवक हिंदू लड़की से शादी करने के लिए कोर्ट पहुंचा था जहां लोगों ने उसकी पिटाई कर दी. बताया जा रहा है कि युवक इंटरफेथ मैरिज के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचा था. पुलिस के मुताबिक लड़का अलीगढ़ का रहने वाला है और लड़की नाबालिग है और पंजाब के मोहाली की रहने वाली है. पुलिस के मुताबिक दोनों एक दिसंबर को जिला अदालत में विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपनी शादी का पंजीकरण कराने अलीगढ़ आए थे. पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि जिस व्यक्ति की पहचान सोनू मलिक के रूप में हुई है, वह मुस्लिम धर्म का है और कथित तौर पर हिंदू होने का ढोंग कर रहा था. जानकारी के मुताबिक जब ये दोनों शादी के लिए पहुंचे तो वहां लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया. आरोप है कि लोगों ने इन दोनों को पकड़ लिया. लोगों ने कोर्ट परिसर में ही मुस्लिम युवक की जमकर धुनाई कर दी. बाद में इन दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया. एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सोनू को पुलिस कोर्ट से खींच कर ला रही है. लड़की के पिता ने नाबालिग बेटी के अपहरण के मामले में नयागांव पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया है. लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि उसकी बेटी हाईस्कूल में पढ़ती है और नाबालिग है. वह 29 तारीख से घर नहीं आई है. पुलिस ने अज्ञात पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया है. पंजाब पुलिस ने पिता की शिकायत पर अज्ञात पर धारा 363 और 366-A के तहत केस दर्ज किया है. नयागांव के SHO सब इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने कहा कि यूपी पुलिस से सूचना मिलने के बाद लड़की की बरामदगी कर ली गई है.
अलीगढ़ के एसपी सिटी अभिषेक ने कहा कि "हमें यह सूचना मिली थी कि एक युवक जो शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए कोर्ट पहुंचा था उसकी पिटाई की गई. मामले की छानबीन करने पर पता चला कि लड़की के परिजनों ने युवक पर अपहरण का मुकदमा पंजाब में दर्ज कराया था." उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की अदालत में एक मुस्लिम युवक हिंदू लड़की से शादी करने के लिए कोर्ट पहुंचा था जहां लोगों ने उसकी पिटाई कर दी. बताया जा रहा है कि युवक इंटरफेथ मैरिज के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचा था. पुलिस के मुताबिक लड़का अलीगढ़ का रहने वाला है और लड़की नाबालिग है और पंजाब के मोहाली की रहने वाली है. पुलिस के मुताबिक दोनों एक दिसंबर को जिला अदालत में विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपनी शादी का पंजीकरण कराने अलीगढ़ आए थे. पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि जिस व्यक्ति की पहचान सोनू मलिक के रूप में हुई है, वह मुस्लिम धर्म का है और कथित तौर पर हिंदू होने का ढोंग कर रहा था. जानकारी के मुताबिक जब ये दोनों शादी के लिए पहुंचे तो वहां लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया. आरोप है कि लोगों ने इन दोनों को पकड़ लिया. लोगों ने कोर्ट परिसर में ही मुस्लिम युवक की जमकर धुनाई कर दी. बाद में इन दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया. एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सोनू को पुलिस कोर्ट से खींच कर ला रही है. लड़की के पिता ने नाबालिग बेटी के अपहरण के मामले में नयागांव पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया है. लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि उसकी बेटी हाईस्कूल में पढ़ती है और नाबालिग है. वह उनतीस तारीख से घर नहीं आई है. पुलिस ने अज्ञात पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया है. पंजाब पुलिस ने पिता की शिकायत पर अज्ञात पर धारा तीन सौ तिरेसठ और तीन सौ छयासठ-A के तहत केस दर्ज किया है. नयागांव के SHO सब इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने कहा कि यूपी पुलिस से सूचना मिलने के बाद लड़की की बरामदगी कर ली गई है.
हिमाचल के मंडी जिले में माता शिकारी देवी जाने पर प्रतिबंध के साथ अब क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है। अब नियमों को ठेंगा दिखाकर मंदिर जाने वालों को पुलिस गिरफ्तार करेगी। जिला प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह आदेश जारी किए गए हैं। हिमपात को देखते हुए शिकारी माता मंदिर नवंबर से मार्च तक बंद कर दिया जाता है। आगामी दिनों में भारी हिमपात होने की संभावना है। प्रशासन ने पहले से ही मंदिर जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। भुलाह रायगढ़ मार्ग पूरी तरह से बंद है, लेकिन मौसम अनुकूल न होने के बावजूद लोग वहां जा रहे थे। इसकी शिकायतें मिलने के बाद अब प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है। खराब मौसम को देखते हुए रायगढ़ से शिकारी माता मंदिर और गोहर व करसोग के ऊंचाई वाले इलाकों से मंदिर आने वाले रास्ते पूरी तरह से बंद रहेंगे। बता दें कि 2017 में 2 छात्राओं की मौत यहां फंसने के कारण हो चुकी है। ADM मंडी अश्वनी कुमार ने बताया है कि मौसम विपरीत रहने के बावजूद लोगों के शिकारी माता मंदिर जाने की शिकायतें मिल रही हैं। इसके चलते अब धारा 144 लागू की गई है। नियम न मानने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल के मंडी जिले में माता शिकारी देवी जाने पर प्रतिबंध के साथ अब क्षेत्र में धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दी गई है। अब नियमों को ठेंगा दिखाकर मंदिर जाने वालों को पुलिस गिरफ्तार करेगी। जिला प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह आदेश जारी किए गए हैं। हिमपात को देखते हुए शिकारी माता मंदिर नवंबर से मार्च तक बंद कर दिया जाता है। आगामी दिनों में भारी हिमपात होने की संभावना है। प्रशासन ने पहले से ही मंदिर जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। भुलाह रायगढ़ मार्ग पूरी तरह से बंद है, लेकिन मौसम अनुकूल न होने के बावजूद लोग वहां जा रहे थे। इसकी शिकायतें मिलने के बाद अब प्रशासन ने धारा एक सौ चौंतालीस लगा दी है। खराब मौसम को देखते हुए रायगढ़ से शिकारी माता मंदिर और गोहर व करसोग के ऊंचाई वाले इलाकों से मंदिर आने वाले रास्ते पूरी तरह से बंद रहेंगे। बता दें कि दो हज़ार सत्रह में दो छात्राओं की मौत यहां फंसने के कारण हो चुकी है। ADM मंडी अश्वनी कुमार ने बताया है कि मौसम विपरीत रहने के बावजूद लोगों के शिकारी माता मंदिर जाने की शिकायतें मिल रही हैं। इसके चलते अब धारा एक सौ चौंतालीस लागू की गई है। नियम न मानने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उत्तराखंड पुलिस द्वारा आयोजित 11वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी चैंपियनशिप का हुआ आगाज। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और डीजीपी अशोक कुमार ने चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। बता दें कि चैंपियनशिप में 26 राज्यों के खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। इसमें जम्मू कश्मीर के खिलाड़ी भी शामिल हैं। पुलिस लाइन में आयोजित इस चैंपियनशिप में दर्शकों ने खिलाड़ियों का स्वागत किया। डीजीपी अशोक कुमार ने सीएम से अनुरोध किया की खेल कोटे से होने वाली भर्ती 2011 से बंद है। जिसके चलते पुलिस खिलाड़ी कम गोल्ड मेडल ला रहे हैं। उन्होंने इस कोटे से भर्ती प्रक्रिया खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि पॉलिस बन गई है जिसपर जल्द काम करना है। वहीं सीएम ने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि खेल कोटा से जल्द भर्ती शुरू की जाएगी। 11 साल बाद खेल कोटे से भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। 2011 से खेल कोटे से भर्ती बंद थी। सीएम ने अब जल्द भर्ती शुरू किए जाने के बात कही है।
उत्तराखंड पुलिस द्वारा आयोजित ग्यारहवीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी चैंपियनशिप का हुआ आगाज। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और डीजीपी अशोक कुमार ने चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। बता दें कि चैंपियनशिप में छब्बीस राज्यों के खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। इसमें जम्मू कश्मीर के खिलाड़ी भी शामिल हैं। पुलिस लाइन में आयोजित इस चैंपियनशिप में दर्शकों ने खिलाड़ियों का स्वागत किया। डीजीपी अशोक कुमार ने सीएम से अनुरोध किया की खेल कोटे से होने वाली भर्ती दो हज़ार ग्यारह से बंद है। जिसके चलते पुलिस खिलाड़ी कम गोल्ड मेडल ला रहे हैं। उन्होंने इस कोटे से भर्ती प्रक्रिया खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि पॉलिस बन गई है जिसपर जल्द काम करना है। वहीं सीएम ने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि खेल कोटा से जल्द भर्ती शुरू की जाएगी। ग्यारह साल बाद खेल कोटे से भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। दो हज़ार ग्यारह से खेल कोटे से भर्ती बंद थी। सीएम ने अब जल्द भर्ती शुरू किए जाने के बात कही है।
दुमका, (एजेंसी/वार्ता): झारखंड में दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र में दुमका-भागलपुर मुख्य मार्ग पर कटनिया गांव के पास गुरुवार की देर शाम अज्ञात वाहन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गयी। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि मोटरसाइकिल पर सवार होकर भाजपा के दो कार्यकर्ता गुरुवार की देर शाम दुमका से अपने घर सरैयाहाट की ओर जा रहे थे। इस बीच विपरीत दिशा में आकर अज्ञात वाहन ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दी जिससे दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। मृतक की पहचान भाजपा के सरैयाहाट प्रखंड के मंडल अध्यक्ष बलराय राय और पार्टी कार्यकर्ता दिगम्बर सिंह के रूप में हुई है। हादसे के बाद जामा के थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हादसे से घटना स्थल पर थोड़ी देर के लिये जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ेंः-नहीं बरते सर्दी में ये लापरवाही, हो सकती है ये समस्या!
दुमका, : झारखंड में दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र में दुमका-भागलपुर मुख्य मार्ग पर कटनिया गांव के पास गुरुवार की देर शाम अज्ञात वाहन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गयी। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि मोटरसाइकिल पर सवार होकर भाजपा के दो कार्यकर्ता गुरुवार की देर शाम दुमका से अपने घर सरैयाहाट की ओर जा रहे थे। इस बीच विपरीत दिशा में आकर अज्ञात वाहन ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दी जिससे दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। मृतक की पहचान भाजपा के सरैयाहाट प्रखंड के मंडल अध्यक्ष बलराय राय और पार्टी कार्यकर्ता दिगम्बर सिंह के रूप में हुई है। हादसे के बाद जामा के थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हादसे से घटना स्थल पर थोड़ी देर के लिये जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी। - यह भी पढ़ेंः-नहीं बरते सर्दी में ये लापरवाही, हो सकती है ये समस्या!
महासति हय्यँले --एक वीर सामन्त - एक वीर सामन्त की पत्नी थी और उसका सुपुत्र बूवयनायक भी वीर सामन्त था । उसका निवास स्थान करडालु था जहाँ उसने जिनालय बनवाया, जो अब ध्वस्त है । उस ध्वस्त बसदि के ११७४ ई. के लगभग के स्तम्भलेख के अनुसार 'अनुपम पुण्यभाजन, जिनेन्द्र पदाब्जविलीन-चित्त, पावन-सुचरित्रमहासति' हयले ने अपना अन्त समय निकट आने पर अपने प्रिय सुपुत्र बूवय-नायक को अपने पास बुलाकर कहा, "वत्स ! स्वप्न में भी मेरा ध्यान न करना, अपितु धर्म में चित्त लगाना । उसी का सदैव चिन्तवन करना और सदैव धर्मकार्य करते रहना । ऐसा करने से ही नरेन्द्र, सुरेन्द्र, फणीन्द्र आदि के राज्य-वैभव और सुख तथा अन्त में मोक्षलक्ष्मी की प्राप्ति होगी। ऐसा निश्चय करके हे सत्यनिधि बूवयनायक, तू धर्म और दान में चित्त लगा । पुण्य की अनुमोदना से भी असीम पुण्य प्राप्त होता है। अतएव हे धर्मधुरीण बुविदेव, अपने और मेरे पुण्य के हेतु तू जिनमन्दिरो का निर्माण कराना। मेरे देव ( स्वर्गीय पति ) के मित्रो का सदैव आदर करना और अपने छोटे ( बालक ) चाचा का सदैव ध्यान रखना।" पुत्र को यह अन्तिम उपदेश देने के पश्चात् धर्मात्मा रानी ने जिनेन्द्र भगवान् का अभिषेक किया और इस दृढ विश्वास के साथ कि भगवान् का पवित्र गन्धोदक उसके समस्त पापो को घो देगा, उसे भक्तिपूर्वक मस्तक पर चढाया। तदनन्तर भगवान् जिनेन्द्रचन्द्र के चरणो के सान्निष्य मे, सदैव अपने स्मरण में रहनेवाले पंच- मंगल महापद (पंच-नमस्कार-मन्त्र ) का उच्च स्वर से उच्चारण करते हुए और जिस मोहपाश से वह अबतक घिरी हुई थी उसे छिन्न-भिन्न करते हुए, धर्मात्मा महासति हयले ने विधिपूर्वक समाधिमरण किया और परिणामस्वरूप 'इन्द्रलोक में प्रवेश किया । सुरेन्द्रलोक की देवियो ने वहीं इस महानुभाव महिलारत्न का गीत वाद्य-नृत्य आदि से महोत्सवपूर्वक भव्य स्वागत किया।' इस सामन्त - पत्नी और सामन्त-जननी महासती रानी हर्म्यलेदेवी का उक्त सुमरण मृत्यु पर विजय प्राप्त करनेवाले धर्मात्माजनो के लिए आदर्श है। यह महासती हर्म्यले, हरियलदेवी या हरिहरदेवी कोण्डकुन्दान्वय के चान्द्रायणदेव की गृहस्थ-शिष्या थी । ईचण और सोवलदेवी-वीर बल्लाल का मन्त्री ईचण और उसकी रूपवती एवं गुणवती भार्या सोबलदेवी, दोनो परम जिन-भक्त थे। इस दम्पति ने गोग्ग नामक स्थान में वीरभद्र नामक सुन्दर जिनालय निर्माण कराया था। वैसा जिनालय पूरे चेलगवत्तिनाह में दूसरा नहीं था। इस सुन्दर जिनालय के निर्माण द्वारा उस प्रदेश को ईंचण मन्त्री और सोवलदेवी ने मानो दूसरा कोप्पण ही बना दिया था। यह मन्दिर १२०५ ई. के लगभग बना था। इस सोवलदेवी ने १२०७ ई में उसी मन्दिर के लिए अनेक प्रकार के धान्य का तथा अन्य दान पादप्रक्षालनपूर्वक स्वगुरु वासुपूज्यदेव को दिये थे। उसने इस अवसर पर एक कन्यादान भी किया था - अर्थात् एक निर्धन कन्या का विवाह स्वयं सम्पन्न कराया था। विरुपय्य नामक व्यक्ति ने भी मन्दिर के लिए भूमिदान दिया था । नागगौड को उक्त पुण्य की रक्षा का भार सौपा गया था । होयसळ राजवंश
महासति हय्यँले --एक वीर सामन्त - एक वीर सामन्त की पत्नी थी और उसका सुपुत्र बूवयनायक भी वीर सामन्त था । उसका निवास स्थान करडालु था जहाँ उसने जिनालय बनवाया, जो अब ध्वस्त है । उस ध्वस्त बसदि के एक हज़ार एक सौ चौहत्तर ई. के लगभग के स्तम्भलेख के अनुसार 'अनुपम पुण्यभाजन, जिनेन्द्र पदाब्जविलीन-चित्त, पावन-सुचरित्रमहासति' हयले ने अपना अन्त समय निकट आने पर अपने प्रिय सुपुत्र बूवय-नायक को अपने पास बुलाकर कहा, "वत्स ! स्वप्न में भी मेरा ध्यान न करना, अपितु धर्म में चित्त लगाना । उसी का सदैव चिन्तवन करना और सदैव धर्मकार्य करते रहना । ऐसा करने से ही नरेन्द्र, सुरेन्द्र, फणीन्द्र आदि के राज्य-वैभव और सुख तथा अन्त में मोक्षलक्ष्मी की प्राप्ति होगी। ऐसा निश्चय करके हे सत्यनिधि बूवयनायक, तू धर्म और दान में चित्त लगा । पुण्य की अनुमोदना से भी असीम पुण्य प्राप्त होता है। अतएव हे धर्मधुरीण बुविदेव, अपने और मेरे पुण्य के हेतु तू जिनमन्दिरो का निर्माण कराना। मेरे देव के मित्रो का सदैव आदर करना और अपने छोटे चाचा का सदैव ध्यान रखना।" पुत्र को यह अन्तिम उपदेश देने के पश्चात् धर्मात्मा रानी ने जिनेन्द्र भगवान् का अभिषेक किया और इस दृढ विश्वास के साथ कि भगवान् का पवित्र गन्धोदक उसके समस्त पापो को घो देगा, उसे भक्तिपूर्वक मस्तक पर चढाया। तदनन्तर भगवान् जिनेन्द्रचन्द्र के चरणो के सान्निष्य मे, सदैव अपने स्मरण में रहनेवाले पंच- मंगल महापद का उच्च स्वर से उच्चारण करते हुए और जिस मोहपाश से वह अबतक घिरी हुई थी उसे छिन्न-भिन्न करते हुए, धर्मात्मा महासति हयले ने विधिपूर्वक समाधिमरण किया और परिणामस्वरूप 'इन्द्रलोक में प्रवेश किया । सुरेन्द्रलोक की देवियो ने वहीं इस महानुभाव महिलारत्न का गीत वाद्य-नृत्य आदि से महोत्सवपूर्वक भव्य स्वागत किया।' इस सामन्त - पत्नी और सामन्त-जननी महासती रानी हर्म्यलेदेवी का उक्त सुमरण मृत्यु पर विजय प्राप्त करनेवाले धर्मात्माजनो के लिए आदर्श है। यह महासती हर्म्यले, हरियलदेवी या हरिहरदेवी कोण्डकुन्दान्वय के चान्द्रायणदेव की गृहस्थ-शिष्या थी । ईचण और सोवलदेवी-वीर बल्लाल का मन्त्री ईचण और उसकी रूपवती एवं गुणवती भार्या सोबलदेवी, दोनो परम जिन-भक्त थे। इस दम्पति ने गोग्ग नामक स्थान में वीरभद्र नामक सुन्दर जिनालय निर्माण कराया था। वैसा जिनालय पूरे चेलगवत्तिनाह में दूसरा नहीं था। इस सुन्दर जिनालय के निर्माण द्वारा उस प्रदेश को ईंचण मन्त्री और सोवलदेवी ने मानो दूसरा कोप्पण ही बना दिया था। यह मन्दिर एक हज़ार दो सौ पाँच ई. के लगभग बना था। इस सोवलदेवी ने एक हज़ार दो सौ सात ई में उसी मन्दिर के लिए अनेक प्रकार के धान्य का तथा अन्य दान पादप्रक्षालनपूर्वक स्वगुरु वासुपूज्यदेव को दिये थे। उसने इस अवसर पर एक कन्यादान भी किया था - अर्थात् एक निर्धन कन्या का विवाह स्वयं सम्पन्न कराया था। विरुपय्य नामक व्यक्ति ने भी मन्दिर के लिए भूमिदान दिया था । नागगौड को उक्त पुण्य की रक्षा का भार सौपा गया था । होयसळ राजवंश
बॉलीवुड अभिनेता श्रेयस तलपड़े (Shreyas Talpade) की फिल्म का एक सीन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस फिल्म का नाम 'कमाल धमाल मालामाल' है। डायरेक्टर प्रियदर्शन के निर्देशन में बनने वाली यह कॉमेडी फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई थी। इसमें श्रेयस तलपड़े ने जॉनी नाम के शख्स का किरदार निभाया था। उनके अलावा इस फिल्म में नाना पाटेकर, ओम पुरी, असरानी ने भी मुख्य भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीन में श्रेयस तलपड़े हिंदुओं के पवित्र धार्मिक प्रतीक ॐ पर पैर रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को 'जेम्स ऑफ बॉलीवुड फैन' ने 13 फरवरी, 2023 को शेयर किया है। वीडियो में लिखा गया है कि एक क्रिश्चियन व्यक्ति ने ॐ पर पैर रखा हुआ है। उर्दूवुड में किसी अन्य धर्म का इस तरह से अपमान होते हुए देखा है क्या? वीडियो सामने आने के बाद अभिनेता ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर कर इसके लिए माफी माँगी है। एक और यूजर लिखते हैं कि गलती स्वीकार करने के लिए धन्यवाद। उम्मीद है कि आप जिस इंडस्ट्री में काम करते हैं, उसमें अपने सहयोगियों को भी शिक्षित करेंगे। उन्हें बताएँगे कि यह घृणित है। एक अन्य ने लिखा कि कम से कम आपको एहसास हुआ। सावधान रहें और अगली बार शूटिंग से पहले हर चीज को बारीकी से देखें।
बॉलीवुड अभिनेता श्रेयस तलपड़े की फिल्म का एक सीन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस फिल्म का नाम 'कमाल धमाल मालामाल' है। डायरेक्टर प्रियदर्शन के निर्देशन में बनने वाली यह कॉमेडी फिल्म साल दो हज़ार बारह में रिलीज हुई थी। इसमें श्रेयस तलपड़े ने जॉनी नाम के शख्स का किरदार निभाया था। उनके अलावा इस फिल्म में नाना पाटेकर, ओम पुरी, असरानी ने भी मुख्य भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीन में श्रेयस तलपड़े हिंदुओं के पवित्र धार्मिक प्रतीक ॐ पर पैर रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को 'जेम्स ऑफ बॉलीवुड फैन' ने तेरह फरवरी, दो हज़ार तेईस को शेयर किया है। वीडियो में लिखा गया है कि एक क्रिश्चियन व्यक्ति ने ॐ पर पैर रखा हुआ है। उर्दूवुड में किसी अन्य धर्म का इस तरह से अपमान होते हुए देखा है क्या? वीडियो सामने आने के बाद अभिनेता ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर कर इसके लिए माफी माँगी है। एक और यूजर लिखते हैं कि गलती स्वीकार करने के लिए धन्यवाद। उम्मीद है कि आप जिस इंडस्ट्री में काम करते हैं, उसमें अपने सहयोगियों को भी शिक्षित करेंगे। उन्हें बताएँगे कि यह घृणित है। एक अन्य ने लिखा कि कम से कम आपको एहसास हुआ। सावधान रहें और अगली बार शूटिंग से पहले हर चीज को बारीकी से देखें।
इटावा जिला अस्पताल में महिला की मौत हो गई। दरअसल, महिला की बच्चेदानी का आपरेशन किया गया था। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। साथ ही इलाज के लिए एक लाख रुपए घूस लेने का आरोप लगाया। सीएमओ ने मामले पर जांच के आदेश दिए है। वहीं पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। बकेवर इलाके के मानपुरा के राम सिंह ने बताया कि उसने अपनी 55 साल की पत्नी राम केसरी को जिला अस्पताल के एक सर्जन को दिखाया था। पत्नी की थोड़ी बच्चादानी बाहर निकलने की शिकायत थी। सर्जन ने सारे चेकअप जिला अस्पताल में करवाए। यहां सर्जन ने उनसे एक लाख रुपये की मांग की। रुपये जमा करने में देरी होने पर डॉक्टरों ने दो दिन बाद सोमवार शाम ऑपरेशन किया। आपरेशन के बाद पत्नी का स्वास्थ्य धीरे-धीरे बिगड़ता गया। शुक्रवार की सुबह जब स्वास्थ्य अधिक बिगड़ गया तो जिला अस्पताल के सर्जन को फोन किया। सर्जन महिला इमरजेंसी वार्ड में महिला को लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पीड़ित राम सिंह ने सर्जन के खिलाफ सिविल लाइन थाने तथा स्वास्थ्य विभाग को लिखित शिकायती पत्र दिया है। पुलिस पूरे मामले को लेकर मेडिको लीगल प्रकिया के तहत कार्यवाही करने मे जुटी है। वहीं सीएमओ भगवान दास ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। सीएमएस से इस पूरे मामले की जांच करवाने के लिए बोला गया है। महिला का पोस्टमार्टम हुआ रिपोर्ट अभी नही आई है जो भी तथ्य सामने आएंगे उस पर कार्यवाही की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इटावा जिला अस्पताल में महिला की मौत हो गई। दरअसल, महिला की बच्चेदानी का आपरेशन किया गया था। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। साथ ही इलाज के लिए एक लाख रुपए घूस लेने का आरोप लगाया। सीएमओ ने मामले पर जांच के आदेश दिए है। वहीं पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। बकेवर इलाके के मानपुरा के राम सिंह ने बताया कि उसने अपनी पचपन साल की पत्नी राम केसरी को जिला अस्पताल के एक सर्जन को दिखाया था। पत्नी की थोड़ी बच्चादानी बाहर निकलने की शिकायत थी। सर्जन ने सारे चेकअप जिला अस्पताल में करवाए। यहां सर्जन ने उनसे एक लाख रुपये की मांग की। रुपये जमा करने में देरी होने पर डॉक्टरों ने दो दिन बाद सोमवार शाम ऑपरेशन किया। आपरेशन के बाद पत्नी का स्वास्थ्य धीरे-धीरे बिगड़ता गया। शुक्रवार की सुबह जब स्वास्थ्य अधिक बिगड़ गया तो जिला अस्पताल के सर्जन को फोन किया। सर्जन महिला इमरजेंसी वार्ड में महिला को लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पीड़ित राम सिंह ने सर्जन के खिलाफ सिविल लाइन थाने तथा स्वास्थ्य विभाग को लिखित शिकायती पत्र दिया है। पुलिस पूरे मामले को लेकर मेडिको लीगल प्रकिया के तहत कार्यवाही करने मे जुटी है। वहीं सीएमओ भगवान दास ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। सीएमएस से इस पूरे मामले की जांच करवाने के लिए बोला गया है। महिला का पोस्टमार्टम हुआ रिपोर्ट अभी नही आई है जो भी तथ्य सामने आएंगे उस पर कार्यवाही की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते अरुण गांधी का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में देहांत हो गया. वह 89 साल के थे और कुछ अरसे से बीमार चल रहे थे. अरुण गांधी के बेटे तुषार गांधी ने बताया कि लेखक और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अरुण गांधी का अंतिम संस्कार मंगलवार को कोल्हापुर में किया जाएगा. अरुण गांधी का जन्म डरबन में 14 अप्रैल 1934 को हुआ था. वह मणिलाल गांधी और सुशीला मशरुवाला के बेटे थे. अरुण गांधी अपने दादा के पदचिह्नों पर चलते हुए एक सामाजिक कार्यकर्ता बने. अरुण गांधी खुद को एक हिंदू मानते थे, लेकिन वह एक सार्वभौमिक विचार वाले इंसान थे. अरुण गांधी ने ईसाई पुजारियों के साथ मिलकर काम किया था और उनके दर्शन बौद्ध, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई अवधारणाओं से काफी प्रभावित थे. अपने दादा की तरह, वह भी 'अहिंसा' की अवधारणा में विश्वास करते थे. अरुण गांधी एक अस्पताल में नर्स सुरनंदा से मिले और उन्होंने 1957 में उनसे शादी कर ली. इस दंपति के 2 बच्चे थे, तुषार, जिनका जन्म 17 जनवरी, 1960 को हुआ था और अर्चना. अरुण गांधी की पत्नी सुरनंदा का 21 फरवरी, 2007 देहांत हो गया था. 2016 तक, गांधी रोचेस्टर, न्यूयॉर्क में रहते थे. 1987 में, अरुण गांधी मिसिसिपी विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए अपनी पत्नी सुनंदा के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए थे. वहां उन्होंने कैथोलिक शैक्षणिक संस्थान क्रिश्चियन ब्रदर्स यूनिवर्सिटी के सहयोग से अहिंसा पर काम करने वाली एम. के. गांधी संस्थान की स्थापना की थी. यह संस्थान स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर अहिंसा के सिद्धांतों को लागू करने के लिए समर्पित है. गांधी की विरासत को अमेरिका में लाने के लिए उन्हें पीस एबे करेज ऑफ कॉन्शियस अवार्ड से नवाजा गया जो बोस्टन में जॉन एफ कैनेडी लाइब्रेरी द्वारा प्रदान किया जाता है. अरुण गांधी कई किताबों के लेखक रह चुके हैं.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते अरुण गांधी का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में देहांत हो गया. वह नवासी साल के थे और कुछ अरसे से बीमार चल रहे थे. अरुण गांधी के बेटे तुषार गांधी ने बताया कि लेखक और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अरुण गांधी का अंतिम संस्कार मंगलवार को कोल्हापुर में किया जाएगा. अरुण गांधी का जन्म डरबन में चौदह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ चौंतीस को हुआ था. वह मणिलाल गांधी और सुशीला मशरुवाला के बेटे थे. अरुण गांधी अपने दादा के पदचिह्नों पर चलते हुए एक सामाजिक कार्यकर्ता बने. अरुण गांधी खुद को एक हिंदू मानते थे, लेकिन वह एक सार्वभौमिक विचार वाले इंसान थे. अरुण गांधी ने ईसाई पुजारियों के साथ मिलकर काम किया था और उनके दर्शन बौद्ध, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई अवधारणाओं से काफी प्रभावित थे. अपने दादा की तरह, वह भी 'अहिंसा' की अवधारणा में विश्वास करते थे. अरुण गांधी एक अस्पताल में नर्स सुरनंदा से मिले और उन्होंने एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में उनसे शादी कर ली. इस दंपति के दो बच्चे थे, तुषार, जिनका जन्म सत्रह जनवरी, एक हज़ार नौ सौ साठ को हुआ था और अर्चना. अरुण गांधी की पत्नी सुरनंदा का इक्कीस फरवरी, दो हज़ार सात देहांत हो गया था. दो हज़ार सोलह तक, गांधी रोचेस्टर, न्यूयॉर्क में रहते थे. एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में, अरुण गांधी मिसिसिपी विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए अपनी पत्नी सुनंदा के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए थे. वहां उन्होंने कैथोलिक शैक्षणिक संस्थान क्रिश्चियन ब्रदर्स यूनिवर्सिटी के सहयोग से अहिंसा पर काम करने वाली एम. के. गांधी संस्थान की स्थापना की थी. यह संस्थान स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर अहिंसा के सिद्धांतों को लागू करने के लिए समर्पित है. गांधी की विरासत को अमेरिका में लाने के लिए उन्हें पीस एबे करेज ऑफ कॉन्शियस अवार्ड से नवाजा गया जो बोस्टन में जॉन एफ कैनेडी लाइब्रेरी द्वारा प्रदान किया जाता है. अरुण गांधी कई किताबों के लेखक रह चुके हैं.
Gurabandha : गुड़ाबांदा प्रखंड की बालीजुड़ी पंचायत मंडप में बुधवार को "आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार" कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस कार्यक्रम में सभी विभाग के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे. जनता को योजनाओं की जानकारी देने के लिए नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किए गए. इस दौरान मुख्य रूप से उप निर्वाचन पदाधिकारी कान्हु राम नाग, सहयोगी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर और प्रखंड विकास पदाधिकारी स्मिता नागेसिया उपस्थित थे. इन अधिकारियों की देखरेख में कार्यक्रम संपन्न हुआ. कार्यक्रम में पंचायत के विभिन्न गांव से काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे. इस दौरान वृद्धा पेंशन योजना के चार, सावित्री बाई किशोरी समृद्धि योजना के 59, वन अधिकार के तीन, वैक्सीनेशन के 20, मनरेगा योजना के एक, मनरेगा जॉब कार्ड के सात, फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के पांच और केसीसी के लिए छह आवेदन प्राप्त हुए. कार्यक्रम में पंचायत के मुखिया करिया हेंब्रम समेत पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे.
Gurabandha : गुड़ाबांदा प्रखंड की बालीजुड़ी पंचायत मंडप में बुधवार को "आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार" कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस कार्यक्रम में सभी विभाग के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे. जनता को योजनाओं की जानकारी देने के लिए नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किए गए. इस दौरान मुख्य रूप से उप निर्वाचन पदाधिकारी कान्हु राम नाग, सहयोगी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर और प्रखंड विकास पदाधिकारी स्मिता नागेसिया उपस्थित थे. इन अधिकारियों की देखरेख में कार्यक्रम संपन्न हुआ. कार्यक्रम में पंचायत के विभिन्न गांव से काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे. इस दौरान वृद्धा पेंशन योजना के चार, सावित्री बाई किशोरी समृद्धि योजना के उनसठ, वन अधिकार के तीन, वैक्सीनेशन के बीस, मनरेगा योजना के एक, मनरेगा जॉब कार्ड के सात, फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के पांच और केसीसी के लिए छह आवेदन प्राप्त हुए. कार्यक्रम में पंचायत के मुखिया करिया हेंब्रम समेत पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे.
ज़्यादा बेहतर है, ब निस्बत दूसरी इबादात के । इब्ने रजब रह० कहते हैं कि सिर्फ दुआ नहीं, बल्कि मुखतलिफ़ इबादात में जमा करना अफ़ज़ल है। मसलन तिलावत, नमाज़, दुआ, और मुराक़बा वगैरह। इसलिए कि नबी-ए-करीम सल्ल० से यह सब उमूर मन्कूल हैं। यही कौल ज्यादा अकरब है कि साबिका अहादीस में नमाज़, ज़िक्र वगैरह कई चीज़ों की फजीलत गुज़र चुकी है। फ़स्ले सालिस एतिकाफ़ के बयान में एतिकाफ़ कहते हैं, मस्जिद में एतिकाफ़ की नीयत कर के ठहरने को । हनफीया के नजदीक इस की तीन किस्में हैं एक वाजिब, जो मन्नत और नज्र की वजह से हो । जैसे यह कहे कि अगर मेरा फ्लां काम हो गया, तो इतने दिनों का एतिकाफ़ करूंगा था बगैर किसी काम पर मौकूफ़ करने के, योंही कह ले कि मैंने इतने दिनों का एतिकाफ़ अपने ऊपर लाज़िम कर लिया, वह वाजिब होता है और जितने दिनों की नीयत की है, उसका पूरा करना ज़रूरी है । दूसरी किस्म, सुन्नत है जो रमज़ानुल मुबारक के अख़ीर अशरे का है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की आदते शरीफ़ा इन अय्याम' के एतिकाफ़ फ़र्माने की थी । 1 दिनों, तीसरा एतिकाफ़ नफ़्ल है, जिसके लिए न कोई वक़्त, न अय्याम की मिक्दार, जितने दिन का जी चाहे कर ले । हत्ताकि कोई शख़्स अगर तमाम उम्र के एतिकाफ़ की नीयत कर ले, तब भी जायज़ है। अलबत्ता कमी में तख्तिलाफ़ है
ज़्यादा बेहतर है, ब निस्बत दूसरी इबादात के । इब्ने रजब रहशून्य कहते हैं कि सिर्फ दुआ नहीं, बल्कि मुखतलिफ़ इबादात में जमा करना अफ़ज़ल है। मसलन तिलावत, नमाज़, दुआ, और मुराक़बा वगैरह। इसलिए कि नबी-ए-करीम सल्लशून्य से यह सब उमूर मन्कूल हैं। यही कौल ज्यादा अकरब है कि साबिका अहादीस में नमाज़, ज़िक्र वगैरह कई चीज़ों की फजीलत गुज़र चुकी है। फ़स्ले सालिस एतिकाफ़ के बयान में एतिकाफ़ कहते हैं, मस्जिद में एतिकाफ़ की नीयत कर के ठहरने को । हनफीया के नजदीक इस की तीन किस्में हैं एक वाजिब, जो मन्नत और नज्र की वजह से हो । जैसे यह कहे कि अगर मेरा फ्लां काम हो गया, तो इतने दिनों का एतिकाफ़ करूंगा था बगैर किसी काम पर मौकूफ़ करने के, योंही कह ले कि मैंने इतने दिनों का एतिकाफ़ अपने ऊपर लाज़िम कर लिया, वह वाजिब होता है और जितने दिनों की नीयत की है, उसका पूरा करना ज़रूरी है । दूसरी किस्म, सुन्नत है जो रमज़ानुल मुबारक के अख़ीर अशरे का है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की आदते शरीफ़ा इन अय्याम' के एतिकाफ़ फ़र्माने की थी । एक दिनों, तीसरा एतिकाफ़ नफ़्ल है, जिसके लिए न कोई वक़्त, न अय्याम की मिक्दार, जितने दिन का जी चाहे कर ले । हत्ताकि कोई शख़्स अगर तमाम उम्र के एतिकाफ़ की नीयत कर ले, तब भी जायज़ है। अलबत्ता कमी में तख्तिलाफ़ है
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार को ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय में राज्य के विद्या समीक्षा केन्द्र का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्य के 141 पी.एम.श्री विद्यालयों एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने राज्य में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा मेधावी छात्रवृत्ति योजना एवं मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का शुभारंभ भी किया। कार्यक्रम में एन.डी.ए एवं आई.एम.ए में चयनित कैडेट को पुरस्कार की धनराशि भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज राज्य में केंद्र सरकार सहायतित "विद्या समीक्षा केन्द्र" एवं "पीएम श्री योजना" का शुभारंभ किया गया है, यह प्रदेश के लिए हर्ष का विषय है। इसके लिए उन्होंने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द प्रधान का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र विद्यालय, छात्रों एवं अध्यापकों से संबंधित सभी आंकड़ों को रियल टाइम आधार पर संकलित करेगा तथा छात्र आकलन के आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए सभी का मार्गदर्शन करेगा। इस केंद्र में आज से अध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं की रियल टाइम ऑनलाइन उपस्थिति प्रारम्भ भी हो गई है। इस केंद्र का उपयोग शीघ्र ही शिक्षा विभाग से सम्बन्धित मानव संसाधन पोर्टल, विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के ऑनलाइन रख-रखाव, ऑनलाइन स्थानान्तरण, ऑनलाइन नियुक्ति, ऑनलाइन मॉनिटरिंग आदि के लिए भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अग्रणी राज्यों में से है, जहां केन्द्र सरकार द्वारा समय-समय पर प्रारम्भ की गई योजनाओं को जनहित में सबसे पहले क्रियान्वित किया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का शुभारंभ उत्तराखण्ड ने सबसे पहले किया। पीएम श्री योजना के तहत राज्य में 141 स्कूल इस योजना के अन्तर्गत विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार द्वारा 72 करोड़ की धनराशि स्वीकृत भी की गई है। इस सहयोग के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए अनेक कार्य किये जा रहे है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में बालिकाओं के लिए 40 कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास संचालित हैं, जिनमें सभी सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विद्या समीक्षा केन्द्र के गुजरात मॉडल को लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखण्ड है। जिसमें अभी 05 हजार स्कूल जोड़े गये हैं। उन्होंने कहा कि अक्टूबर-नवम्बर तक प्रदेश के सभी 22 हजार स्कूलों को सभी डाटा के साथ जोड़ने के अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं। राज्य के कक्षा 01 से 12वीं तक के लगभग 23 लाख 50 हजार विद्यार्थी इस विद्या समीक्षा केन्द्र से जुड़ेंगे। राज्य के 01 लाख 22 हजार से अधिक शिक्षकों का डाटा भी इसमें रहेगा। विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से बच्चों एवं शिक्षकों की प्रतिदिन की उपस्थिति का पता चलेगा। दीक्षा टीवी एवं इन्टरनेट के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था विद्या समीक्षा केन्द्र में रहेगी। राज्य के सभी डायट, को जोड़ने एवं शिक्षकों की कैपिसिटी बढ़ाने की व्यवस्था इसमें बनाई जा रही है। स्कूली शिक्षा की सभी जानकारी विद्या समीक्षा केन्द्र में रहेगी। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 दार्शनिक तत्व है। 21वीं सदी की भारत की नई पीढ़ी ज्ञान के आधार पर विश्व का नेतृत्व करने वाली है। राज्य में मॉडल स्कूल के रूप में प्रारंभिक चरण में पी.एम.श्री के तहत 141 स्कूलों का चयन किया गया है। उच्च शिक्षा में राज्य में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना और मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना शुरू करने का सराहनीय कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि जी 20 के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की ग्लोबल मॉडल के रूप में स्वीकृति करा दी। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल भारत के 30 करोड़ विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, विश्व के विकसित देशों के विद्यार्थियों के लिए नया बैंचमार्क बना रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रसार के लिए केन्द्र सरकार की ओर से राज्य को पूरा सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड उन्हें अपने गृह राज्य की तरह ही प्रिय है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड विद्या समीक्षा केन्द्र का शुभारंभ करने वाला गुजरात के बाद देश का दूसरा राज्य है। माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने वाला देश का पहला राज्य उत्तराखण्ड बना। राज्य में शुरू की गई उच्च शिक्षा मेधावी छात्रवृत्ति योजना में विभिन्न संकायों में स्नातक स्तर पर छात्र-छात्राओं को प्रतिवर्ष महाविद्यालय स्तर / विश्वविद्यालय परिसर स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः 03 हजार रुपये, 02 हजार रुपये एवं 1500 प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जायेगी। स्नातक अंतिम वर्ष के उपरान्त प्रथम स्थान, द्वितीय स्थान तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने पर एकमुश्त पुरस्कार राशि के रूप में क्रमशः 35 हजार रुपये, 25 हजार रुपये एवं 18 हजार रुपये दिये जायेंगे। विभिन्न संकायों में विषयवार स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत छात्र-छात्राओं प्रतिवर्ष महाविद्यालय स्तर / विश्वविद्यालय परिसर स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने पर क्रमशः 05 हजार रुपये, 03 हजार रुपये एवं 02 हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जायेगी। परा स्नातक अंतिम वर्ष के उपरान्त प्रथम स्थान, द्वितीय स्थान तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने पर एकमुश्त पुरस्कार राशि के रूप में क्रमशः 60 हजार रुपये, 35 हजार रुपये तथा 25 हजार रुपये की धनराशि दी जायेगी। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध / अन्वेषण एवं नवाचार के वातावरण का सृजन करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों और मूल्यों के अनुरूप उत्कृष्ट शिक्षा और शोध के केन्द्र के रूप में संस्थाओं को विकसित करते हुए शिक्षकों एवं छात्रों को शोध एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, भारत सरकार के अपर शिक्षा सचिव श्री विपिन कुमार, उच्च शिक्षा सचिव श्री शैलेश बगोली, विद्यालयी शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन, महानिदेशक शिक्षा श्री बंशीधर तिवारी एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार को ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय में राज्य के विद्या समीक्षा केन्द्र का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्य के एक सौ इकतालीस पी.एम.श्री विद्यालयों एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने राज्य में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा मेधावी छात्रवृत्ति योजना एवं मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का शुभारंभ भी किया। कार्यक्रम में एन.डी.ए एवं आई.एम.ए में चयनित कैडेट को पुरस्कार की धनराशि भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज राज्य में केंद्र सरकार सहायतित "विद्या समीक्षा केन्द्र" एवं "पीएम श्री योजना" का शुभारंभ किया गया है, यह प्रदेश के लिए हर्ष का विषय है। इसके लिए उन्होंने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द प्रधान का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र विद्यालय, छात्रों एवं अध्यापकों से संबंधित सभी आंकड़ों को रियल टाइम आधार पर संकलित करेगा तथा छात्र आकलन के आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए सभी का मार्गदर्शन करेगा। इस केंद्र में आज से अध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं की रियल टाइम ऑनलाइन उपस्थिति प्रारम्भ भी हो गई है। इस केंद्र का उपयोग शीघ्र ही शिक्षा विभाग से सम्बन्धित मानव संसाधन पोर्टल, विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के ऑनलाइन रख-रखाव, ऑनलाइन स्थानान्तरण, ऑनलाइन नियुक्ति, ऑनलाइन मॉनिटरिंग आदि के लिए भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अग्रणी राज्यों में से है, जहां केन्द्र सरकार द्वारा समय-समय पर प्रारम्भ की गई योजनाओं को जनहित में सबसे पहले क्रियान्वित किया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस का शुभारंभ उत्तराखण्ड ने सबसे पहले किया। पीएम श्री योजना के तहत राज्य में एक सौ इकतालीस स्कूल इस योजना के अन्तर्गत विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार द्वारा बहत्तर करोड़ की धनराशि स्वीकृत भी की गई है। इस सहयोग के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए अनेक कार्य किये जा रहे है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में बालिकाओं के लिए चालीस कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास संचालित हैं, जिनमें सभी सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विद्या समीक्षा केन्द्र के गुजरात मॉडल को लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखण्ड है। जिसमें अभी पाँच हजार स्कूल जोड़े गये हैं। उन्होंने कहा कि अक्टूबर-नवम्बर तक प्रदेश के सभी बाईस हजार स्कूलों को सभी डाटा के साथ जोड़ने के अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं। राज्य के कक्षा एक से बारहवीं तक के लगभग तेईस लाख पचास हजार विद्यार्थी इस विद्या समीक्षा केन्द्र से जुड़ेंगे। राज्य के एक लाख बाईस हजार से अधिक शिक्षकों का डाटा भी इसमें रहेगा। विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से बच्चों एवं शिक्षकों की प्रतिदिन की उपस्थिति का पता चलेगा। दीक्षा टीवी एवं इन्टरनेट के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था विद्या समीक्षा केन्द्र में रहेगी। राज्य के सभी डायट, को जोड़ने एवं शिक्षकों की कैपिसिटी बढ़ाने की व्यवस्था इसमें बनाई जा रही है। स्कूली शिक्षा की सभी जानकारी विद्या समीक्षा केन्द्र में रहेगी। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस दार्शनिक तत्व है। इक्कीसवीं सदी की भारत की नई पीढ़ी ज्ञान के आधार पर विश्व का नेतृत्व करने वाली है। राज्य में मॉडल स्कूल के रूप में प्रारंभिक चरण में पी.एम.श्री के तहत एक सौ इकतालीस स्कूलों का चयन किया गया है। उच्च शिक्षा में राज्य में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना और मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना शुरू करने का सराहनीय कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि जी बीस के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की ग्लोबल मॉडल के रूप में स्वीकृति करा दी। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल भारत के तीस करोड़ विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, विश्व के विकसित देशों के विद्यार्थियों के लिए नया बैंचमार्क बना रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रसार के लिए केन्द्र सरकार की ओर से राज्य को पूरा सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड उन्हें अपने गृह राज्य की तरह ही प्रिय है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड विद्या समीक्षा केन्द्र का शुभारंभ करने वाला गुजरात के बाद देश का दूसरा राज्य है। माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस को लागू करने वाला देश का पहला राज्य उत्तराखण्ड बना। राज्य में शुरू की गई उच्च शिक्षा मेधावी छात्रवृत्ति योजना में विभिन्न संकायों में स्नातक स्तर पर छात्र-छात्राओं को प्रतिवर्ष महाविद्यालय स्तर / विश्वविद्यालय परिसर स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः तीन हजार रुपये, दो हजार रुपये एवं एक हज़ार पाँच सौ प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जायेगी। स्नातक अंतिम वर्ष के उपरान्त प्रथम स्थान, द्वितीय स्थान तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने पर एकमुश्त पुरस्कार राशि के रूप में क्रमशः पैंतीस हजार रुपये, पच्चीस हजार रुपये एवं अट्ठारह हजार रुपये दिये जायेंगे। विभिन्न संकायों में विषयवार स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत छात्र-छात्राओं प्रतिवर्ष महाविद्यालय स्तर / विश्वविद्यालय परिसर स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने पर क्रमशः पाँच हजार रुपये, तीन हजार रुपये एवं दो हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जायेगी। परा स्नातक अंतिम वर्ष के उपरान्त प्रथम स्थान, द्वितीय स्थान तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने पर एकमुश्त पुरस्कार राशि के रूप में क्रमशः साठ हजार रुपये, पैंतीस हजार रुपये तथा पच्चीस हजार रुपये की धनराशि दी जायेगी। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध / अन्वेषण एवं नवाचार के वातावरण का सृजन करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के प्रावधानों और मूल्यों के अनुरूप उत्कृष्ट शिक्षा और शोध के केन्द्र के रूप में संस्थाओं को विकसित करते हुए शिक्षकों एवं छात्रों को शोध एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, भारत सरकार के अपर शिक्षा सचिव श्री विपिन कुमार, उच्च शिक्षा सचिव श्री शैलेश बगोली, विद्यालयी शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन, महानिदेशक शिक्षा श्री बंशीधर तिवारी एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
संधिशोथ सभी अंगों और मानव शरीर की प्रणालियों के संयोजी ऊतक की एक बीमारी है। खासकर बीमारियों के इस समूह में, विशेष रूप से संधिशोथ को प्रतिष्ठित किया जाता है। जोड़ों का संधिशोथ स्ट्रेप्टोकोकल से विकसित होता हैसंक्रमण। इस मामले में, मानव शरीर की musculoskeletal प्रणाली के सबसे बड़े जोड़ मुख्य रूप से प्रभावित होते हैं। चलते समय दर्द और कठोरता होती है। हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन हो रही है। अब यह आमतौर पर स्वीकार किया जाता है कि संधिवादजोड़ हमारे दादा दादी की एक बीमारी है। अध्ययनों से पता चला है कि इस बीमारी के लिए पहले की उम्र में लोगों के विकास की प्रवृत्ति है। जोखिम समूह, पहली जगह में, उन लोगों को शामिल करना चाहिए जिनके करीबी रिश्तेदार हैं संयुक्त संधिवाद। किशोरावस्था में 8 से 16 साल के लक्षण अक्सर देखे जाते हैं। जो लोग अक्सर नासोफैरेनजीज बीमारी से ग्रस्त हैं, वे भी जोखिम में हैं, जिनके समूह समूह में दुर्लभ और विशिष्ट प्रोटीन है। महिलाओं में सबसे आम बीमारी। कई के परिणामस्वरूपअध्ययन, वैज्ञानिकों ने पाया है कि एलर्जी जीव की (स्त्रेप्तोकोच्कल संक्रमण रोगों (तीव्र तोंसिल्लितिस, स्कार्लेट ज्वर, जीर्ण ग्रसनीशोथ, ओटिटिस मीडिया), जोड़दार गठिया के साथ बीमार रोगियों के 3% की अवधि के दौरान बीटा रक्तलायी स्ट्रेप्टोकोकस समूह ए के संक्रमण के लिए प्रतिक्रिया गठिया के साथ जुड़े रोग की घटना )। जब संक्रमण मानव शरीर में प्रवेश करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली विशिष्ट एंटीबॉडी पैदा करती है। ये एंटीबॉडी विशिष्ट अणुओं द्वारा स्ट्रेप्टोकोकस को पहचानते हैं। मानव शरीर में समान अणु मौजूद हैं। इसलिए, आपके अपने जीव पर एंटीबॉडी का हमला होता है। इस प्रक्रिया के ऊतकों, अधिमानतः जोड़ों में सूजन का गठन किया जाता है। रोग के दौरान भड़काऊ प्रक्रिया पैरों की सभी जोड़ों के लिए प्रदान, शायद ही कभी रीढ़ की हड्डी के जोड़ों पर है। अक्सर, रोग ठंड के मौसम में प्रकट होता - हाइपोथर्मिया तथ्य के लिए योगदान जोड़दार गठिया, जिसका लक्षण गंभीर हैं विकासशील कि। वे एक से थोड़ा स्पष्ट और जोड़दार गठिया हो सकता है, लक्षण और रोग के दौरान आम सर्दी और सार्स के लक्षण के लिए गलत हो सकता है। सामान्य मलिनता, हड्डियों में दर्द, वृद्धितापमान, पसीना। यदि आपके पास ऐसे लक्षणों के साथ एंटी-भड़काऊ थेरेपी है, तो संयुक्त दर्द कुछ घंटों के बाद बंद हो जाता है। विशिष्ट उपचार के बिना, संयुक्त दर्द सप्ताहों का मामला हो सकता है। अक्सर त्वचा दिखाई लाली या चमड़े के नीचे आमवाती पिंड मांसपेशी हिल, समन्वय की कमी, पेशी प्रणाली की कमजोरी मनाया। इस बीमारी की शुरुआत में ही धीरे-धीरे प्रकट होता हैः सुबह में वृद्धि कठोरता, जोड़ों का दर्द जब चलती, मामूली सूजन होती है। लंबे समय तक सूजन प्रक्रिया के साथ, संयुक्त विकृति विकसित होती है। सबसे पहले, छोटे हाथ जोड़ों, कलाई और घुटनों को प्रभावित किया जाता है, सूजन के बाद मांसपेशियों के tendons में गुजरता है। यह सूजन संयुक्त के पास मांसपेशी द्रव्यमान में कमी के साथ ध्यान देने योग्य हो जाता है। आमवाती बुखार के रूप में इस तरह के रोगों के निदान का आयोजन प्रयोगशाला सहायक विधिः ईसीजी, स्ट्रेप्टोकोकस पढ़ाई की उपस्थिति के लिए रक्त के नमूने, एंटीबायोटिक, इकोकार्डियोग्राफी, छाती का एक्सरे और जोड़ों के लिए अपनी संवेदनशीलता की परिभाषा।
संधिशोथ सभी अंगों और मानव शरीर की प्रणालियों के संयोजी ऊतक की एक बीमारी है। खासकर बीमारियों के इस समूह में, विशेष रूप से संधिशोथ को प्रतिष्ठित किया जाता है। जोड़ों का संधिशोथ स्ट्रेप्टोकोकल से विकसित होता हैसंक्रमण। इस मामले में, मानव शरीर की musculoskeletal प्रणाली के सबसे बड़े जोड़ मुख्य रूप से प्रभावित होते हैं। चलते समय दर्द और कठोरता होती है। हाथों और पैरों के जोड़ों में सूजन हो रही है। अब यह आमतौर पर स्वीकार किया जाता है कि संधिवादजोड़ हमारे दादा दादी की एक बीमारी है। अध्ययनों से पता चला है कि इस बीमारी के लिए पहले की उम्र में लोगों के विकास की प्रवृत्ति है। जोखिम समूह, पहली जगह में, उन लोगों को शामिल करना चाहिए जिनके करीबी रिश्तेदार हैं संयुक्त संधिवाद। किशोरावस्था में आठ से सोलह साल के लक्षण अक्सर देखे जाते हैं। जो लोग अक्सर नासोफैरेनजीज बीमारी से ग्रस्त हैं, वे भी जोखिम में हैं, जिनके समूह समूह में दुर्लभ और विशिष्ट प्रोटीन है। महिलाओं में सबसे आम बीमारी। कई के परिणामस्वरूपअध्ययन, वैज्ञानिकों ने पाया है कि एलर्जी जीव की , जोड़दार गठिया के साथ बीमार रोगियों के तीन% की अवधि के दौरान बीटा रक्तलायी स्ट्रेप्टोकोकस समूह ए के संक्रमण के लिए प्रतिक्रिया गठिया के साथ जुड़े रोग की घटना )। जब संक्रमण मानव शरीर में प्रवेश करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली विशिष्ट एंटीबॉडी पैदा करती है। ये एंटीबॉडी विशिष्ट अणुओं द्वारा स्ट्रेप्टोकोकस को पहचानते हैं। मानव शरीर में समान अणु मौजूद हैं। इसलिए, आपके अपने जीव पर एंटीबॉडी का हमला होता है। इस प्रक्रिया के ऊतकों, अधिमानतः जोड़ों में सूजन का गठन किया जाता है। रोग के दौरान भड़काऊ प्रक्रिया पैरों की सभी जोड़ों के लिए प्रदान, शायद ही कभी रीढ़ की हड्डी के जोड़ों पर है। अक्सर, रोग ठंड के मौसम में प्रकट होता - हाइपोथर्मिया तथ्य के लिए योगदान जोड़दार गठिया, जिसका लक्षण गंभीर हैं विकासशील कि। वे एक से थोड़ा स्पष्ट और जोड़दार गठिया हो सकता है, लक्षण और रोग के दौरान आम सर्दी और सार्स के लक्षण के लिए गलत हो सकता है। सामान्य मलिनता, हड्डियों में दर्द, वृद्धितापमान, पसीना। यदि आपके पास ऐसे लक्षणों के साथ एंटी-भड़काऊ थेरेपी है, तो संयुक्त दर्द कुछ घंटों के बाद बंद हो जाता है। विशिष्ट उपचार के बिना, संयुक्त दर्द सप्ताहों का मामला हो सकता है। अक्सर त्वचा दिखाई लाली या चमड़े के नीचे आमवाती पिंड मांसपेशी हिल, समन्वय की कमी, पेशी प्रणाली की कमजोरी मनाया। इस बीमारी की शुरुआत में ही धीरे-धीरे प्रकट होता हैः सुबह में वृद्धि कठोरता, जोड़ों का दर्द जब चलती, मामूली सूजन होती है। लंबे समय तक सूजन प्रक्रिया के साथ, संयुक्त विकृति विकसित होती है। सबसे पहले, छोटे हाथ जोड़ों, कलाई और घुटनों को प्रभावित किया जाता है, सूजन के बाद मांसपेशियों के tendons में गुजरता है। यह सूजन संयुक्त के पास मांसपेशी द्रव्यमान में कमी के साथ ध्यान देने योग्य हो जाता है। आमवाती बुखार के रूप में इस तरह के रोगों के निदान का आयोजन प्रयोगशाला सहायक विधिः ईसीजी, स्ट्रेप्टोकोकस पढ़ाई की उपस्थिति के लिए रक्त के नमूने, एंटीबायोटिक, इकोकार्डियोग्राफी, छाती का एक्सरे और जोड़ों के लिए अपनी संवेदनशीलता की परिभाषा।
उन्होंने कहा, "हम राज्य भर के 450 स्कूलों में शौचालय का निर्माण करवाएगे। अगले तीन-चार महीने में यह निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। हमने अपना प्रस्ताव शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास निगम (डब्ल्यूडीसी) को भेज दिया है। "डब्ल्यूडीसी अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरजोत कौर बमराह ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि बीआईएनएस कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत शौचालयों का निर्माण करवा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा डब्ल्यूडीसी शिक्षा विभाग के सहयोग से स्कूलों में सैनिटरी पैड डिस्पेंसर भी स्थापित कर रहा है। बमराह ने बताया कि वर्ष 2016 से एक योजना लागू है जिसके तहत लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता बनाए रखने के लिए 300 रुपये दिए जाते हैं। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि इस संबंध में बीआईएनएस से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और उन्होंने शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में उन स्कूलों की सूची उपलब्ध कराएं जहां छात्राओं के लिए शौचालयों का निर्माण या नवीनीकरण किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बीआईएनएस की यह पहल सराहनीय है।
उन्होंने कहा, "हम राज्य भर के चार सौ पचास स्कूलों में शौचालय का निर्माण करवाएगे। अगले तीन-चार महीने में यह निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। हमने अपना प्रस्ताव शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास निगम को भेज दिया है। "डब्ल्यूडीसी अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरजोत कौर बमराह ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि बीआईएनएस कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत शौचालयों का निर्माण करवा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा डब्ल्यूडीसी शिक्षा विभाग के सहयोग से स्कूलों में सैनिटरी पैड डिस्पेंसर भी स्थापित कर रहा है। बमराह ने बताया कि वर्ष दो हज़ार सोलह से एक योजना लागू है जिसके तहत लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता बनाए रखने के लिए तीन सौ रुपयापये दिए जाते हैं। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि इस संबंध में बीआईएनएस से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और उन्होंने शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में उन स्कूलों की सूची उपलब्ध कराएं जहां छात्राओं के लिए शौचालयों का निर्माण या नवीनीकरण किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बीआईएनएस की यह पहल सराहनीय है।
'बिग बॉस 13' (Bigg Boss 13) के घर में पिछले तीन दिनों से सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज़ के बीच खूब लड़ाई हो रही है। इसी बीच शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) ने जुबानी जंग करती दिखाई दी। बिग बॉस 13 का घर पिछले कुछ दिनों से सभी के ध्यान का केंद्र बन गया है। पिछले तीन दिनों से सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज़ के बीच जारी है। दोनों सेलेब्स के प्रशंसक ट्विटर पर आप में जमकर लड़ाई करते भी नजर आए। लेकिन अब इसी बीच बिग बॉस के घर में दर्शकों को एक और लड़ाई देखने मिलेगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) की। 'बिग बॉस 13' (Bigg Boss 13) के पिछले एपिसोड में दिखाई दिया था कि शहनाज गिल और हिमांशी खुराना के बीच की दूरियां धीरे- धीरे मिट रही है लेकिन हम अपने दर्शकों को बता दें ऐसा बिलकुल भी नहीं है। वैसे आपको बात दें, 'बिग बॉस 13' (Bigg Boss 13) के घर में इस समय कप्तानी बनने के लिए घर में मौजूद कंटेस्टेंट पास में लड़ते दिखाई दे रहे हैं। कप्तानी के 4 दावेदार है जिसमें सिद्धार्थ शुक्ला, हिमांशी, शहनाज और हिंदुस्तानी भाऊ है। इसके साथ ही बिग बॉस के घर में सिद्धार्थ शुक्ला और आसिम रियाज बेकाबू होते जा रहे हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
'बिग बॉस तेरह' के घर में पिछले तीन दिनों से सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज़ के बीच खूब लड़ाई हो रही है। इसी बीच शहनाज गिल और हिमांशी खुराना ने जुबानी जंग करती दिखाई दी। बिग बॉस तेरह का घर पिछले कुछ दिनों से सभी के ध्यान का केंद्र बन गया है। पिछले तीन दिनों से सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज़ के बीच जारी है। दोनों सेलेब्स के प्रशंसक ट्विटर पर आप में जमकर लड़ाई करते भी नजर आए। लेकिन अब इसी बीच बिग बॉस के घर में दर्शकों को एक और लड़ाई देखने मिलेगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं शहनाज गिल और हिमांशी खुराना की। 'बिग बॉस तेरह' के पिछले एपिसोड में दिखाई दिया था कि शहनाज गिल और हिमांशी खुराना के बीच की दूरियां धीरे- धीरे मिट रही है लेकिन हम अपने दर्शकों को बता दें ऐसा बिलकुल भी नहीं है। वैसे आपको बात दें, 'बिग बॉस तेरह' के घर में इस समय कप्तानी बनने के लिए घर में मौजूद कंटेस्टेंट पास में लड़ते दिखाई दे रहे हैं। कप्तानी के चार दावेदार है जिसमें सिद्धार्थ शुक्ला, हिमांशी, शहनाज और हिंदुस्तानी भाऊ है। इसके साथ ही बिग बॉस के घर में सिद्धार्थ शुक्ला और आसिम रियाज बेकाबू होते जा रहे हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
बढ़ती है । ग़ैर - - यूरोपियनों का बहिष्कार एक जातीय कारण से ज्यादा होता है, बनस्बित इस वजह के कि वे लोग जिनकी संस्कृति एक सी है फुर्सत के वक़्त में मनोरंजन या सामाजिक मेल-जोल के मौक़े पर बाहरी लोगों का दखल नहीं चाहते। मुझे खुद इस बात में कोई आपत्ति नहीं कि विशुद्ध अंग्रेज़ी या यूरोपियन क्लब हों और शायद ही कोई हिंदुस्तानी उनम घुसना चाहे । लेकिन जब इस सामाजिक बहिष्कार की बुनियाद साफ़ तौर से जातीयता पर होती है, और जब कि शासक वर्ग अपनी श्रेष्ठता का दिखावा करता है तो इसका दूसरा पहलू हो जाता है । बम्बई मे एक मशहूर क्लब है, जिसमें (सिवाय एक नौकर की हैसियत से) किसी भी हिंदुस्तानी को, चाहे वह किसी देशी रियासत का राजा ही क्यों न हो, या बड़ा उद्योगपति ही क्यों न हो, दर्शकों के कमरे तक में जाने पर प्रतिबंध था । जहां तक मुझे पता है उस क्लब में इस तरह का प्रतिबंध अब भी है । हिंदुस्तान म भेद-भाव अंग्रेज़ बनाम हिंदुस्तानी के रूप म नहीं है यह ऐसा है कि एक तरफ़ यूरोपियन हैं; और दूसरी तरफ़ एशियाई । हिंदुस्तान में हर एक यूरोपियन, चाहे वह जर्मन हो, पोल हो या रूमानियन, खुदबखुद शासक जाति का मेम्बर बन जाता है। रेल के डिब्बों पर, स्टेशन पर ठहरने के कमरों पर, पार्कों में, बैचों पर लिखा होता है, "सिर्फ़ यूरोपियनों के लिए" । दक्षिण अफ्रीका में या दूसरी जगहों में ही यह कोई कम बुरी चीज़ नहीं है लेकिन खुद अपने ही देश में यह चीज बहुत ज्यादा अपमानजनक है, और अपनी गुलामी की याद दिलाती है । यह सच है कि जातीय श्रेष्ठता और शाही अहंकार के इस ऊपरी दिखावे में धीरे-धीरे तब्दीली होती जा रही है, लेकिन रफ्तार बहुत धीमी है, और अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जिनसे पता लगता है कि यह तब्दीली सतही है । राजनीतिक दबाव और लड़ाकू राष्ट्रीयता के उत्थान से लाज़िमी तौर पर तब्दीली होती है और पुराने भेद-भावों और ज्यादतियों को इरादतन कम करने की कोशिश होती है; लेकिन फिर जब वह राजनीतिक आंदोलन एक विकट स्थिति में पहुंच जाता है और तब उसको कुचला जाता है, तो फिर वही पुराना साम्राज्यवादी और जातीय अक्खड़पन पूरा तौर पर भर पड़ता है। अंग्रेज़ सजग और समझदार होते हैं, लेकिन जब वह दूसरे देशों में जाते हैं तो उनमें अपने चारों तरफ़ की जानकारी का एक विचित्र प्रभाव होता है । हिंदुस्तान में जहां शासक-शासित संबंध की वजह से, असला समझदारी मुश्किल होती है, इस जानकारी का अभाव खास तौर से दिखाई देता है। ऐसा मालूम होता है कि यह सब इरादतन है ताकि वह सिर्फ़ वही देखें जो कि वह देखना चाहते हैं, और बाक़ी सबके लिए आखें बंद रखें। लेकिन निगाह बचाने से सचाई ग़ायब तो हो नहीं जाता और जब वह जबर्दस्ती ध्यान खींचती है, तो इस अप्रत्याशित घटना से इस तरह नाराज़गी और भुंझलाहट होती है मानो कोई चाल चली गई हो । इस वर्ण व्यवस्था के देश में, अंग्रेज़ों ने, ख़ास तौर से इंडियन सिविल सविस वालों ने एक जाति बनाई है जो बहुत सख्त है और सबसे अलग-थलग रहने वाली है। यहां तक कि उस जाति में सिविल सर्विस के हिंदुस्तानी सदस्य भी अस्लियत में शामिल नहीं हैं हालांकि वे उसी का बिल्ला पहने रहते हैं और उसके नियमों का पालन करते है । उस जाति में अपनी निजी ज़बर्दस्त ग्रहमियत के बारे में धार्मिक निष्ठा की-सी भावना बन गई है और उस निष्ठा के गिर्द अपना एक पुराण तयार हो गया है जो उसे बनाए रखता है। स्थापित स्वार्थों और निष्ठा का गठ बंधन बहुत ताक़तवर होता है और अगर उसे कोई चुनौती दी जाय तो उससे बड़ी ताखी नफ़रत और नाराज़गी पैदा हो जाती है । २ : बंगाल की लूट से इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति को मदद सत्रहवीं सदी के शुरू में ईस्ट इंडिया कम्पनी को मुग़ल सम्राट से सूरत में एक फ़ैक्टरी चालू करने की इजाजत मिल गई थी। कुछ साल बाद उन्होंने दक्खिन में कुछ ज़मीन खरीदी, और मद्रास की बुनियाद डाली । सन् १६६२ में पुर्तगाल की तरफ़ से दहेज़ की शक्ल म इंग्लैंड के चार्ल्स द्वितीय को बम्बई का टापू भेंट किया गया और उसने उसे कम्पनी को दे दिया । सन् १६६० में कलकत्ते की बुनियाद पड़ी । इस तरह सत्रहवीं सदी के आखिर तक अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान में पैर रखने की कई जगहें मिल गई थीं, और उन्होंने हिंदुस्तानी समुद्र तट पर अपने कई अड्डे क़ायम कर लिए थे । वे अंदर की तरफ़ धीरे-धीरे बढ़े । सन् १७५७ म प्लासी की लड़ाई से पहली बार उनके कब्ज़े में एक बहुत बड़ा प्रदेश आया और कुछ ही बरसों म बंगाल, बिहार, उड़ीसा, और पूर्वी तट उनके कब्ज़े में आ गया। दूसरा बड़ा क़दम, करीब चालास साल बाद, उन्नीसवीं सदी के शुरू में उठाया गया । और इससे वे दिल्ली के दरवाजे तक आ पहुंचे । तीसरा अगला बड़ा क़दम १८१८ में, मराठों की आखिरी हार के बाद था; और सिख यद्ध के बाद १८४६ में चौथे क़दम से तस्वीर ही पूरी हो गई । इस तरह अंग्रेज़ मद्रास के शहर में २०० बरसों से हैं; बंगाल, बिहार वग़ैरह पर उनकी हुकूमत को १८७ बरस होगए; दक्खिन की तरफ उन्होंने अपना राज्य करीब १४५ बरस पहले बढ़ाया । संयुक्त प्रान्त, मध्यहिंदुस्तान और पच्छिमी हिंदुस्तान में जमे हुए उन्हें करीब १२५ साल हुए; और पंजाब म वे ६५ बरस पहले जमे । (यह हिसाब, जून १९४४ से जब कि यह किताब लिखी जा रही है, लगाया गया है) मद्रास का शहर एक बहुत छोटासा हिस्सा है और अगर उसे छोड़ दें तो बंगाल और पंजाब के कब्जे के बीच में सिर्फ १०० साल का फ़र्क है । इस दौरान में ब्रिटिश नीति और हुकूमती ढंग में बार-बार तब्दीलियां होती रहीं । ये रद्दो- बदल इंग्लैंड की नई तब्दीलियों और हिंदुस्तान में ब्रिटिश राज्य के सुसंगठन को, ख्याल में रखते हुए, हुई । हर नये जीते हुए हिस्से के साथ व्यवहार इन तब्दीलियों के मुताबिक अलगअलग होता और साथ ही वह इस बात पर भी निर्भर होता कि जिस शासक समुदाय को अंग्रेजों ने हराया था वह किस ढंग का था । इस तरह बंगाल में, जहां जीत बहुत आसानी से हुई, मुस्लिम जमींदारों को शासक वर्ग समझा गया और ऐसी नीति अपनाई गई कि उनकी ताक़त टूट जाय। दूसरी तरफ पंजाब में ताक़त सिखों से छीनी गई थी और वहां अंग्रेज़ों और मुसलमानों में कोई बुनियादी झगड़ा नहीं था। हिंदुस्तान के ज्यादातर हिस्से में अंग्रेजों के विरोधी मराठे रहे थ । एक खास ध्यान देने की बात यह है कि हिंदुस्तान के वे हिस्से जो अंग्रेज़ों के कब्ज़े में सबसे ज्यादा अस से रहे हैं आज सबसे ज्यादा ग़रीब है । अस्ल में एक में ऐसा नक़्शा तैयार किया जा सकता है जिससे ब्रिटिश राज्य-काल के माप और क्रमशः निर्धनता की वृद्धि का घनिष्ठ संबंध प्रकट हो । कुछ बड़े शहरों से या कुछ नए औद्योगिक प्रदेशों से इस जांच में कोई बुनियादी फ़र्क़ नहीं आता। जो बात ध्यान देने की है वह यह है कि कुल मिलाकर आम जनता की हालत क्या है, और इस बात में कोई शक नहीं है कि हिंदुस्तान के सबसे ज्यादा ग़रीब हिस्से बंगाल, बिहार, उड़ीसा और मद्रास प्रेसीडेंसी के हिस्से हैं । रहन-सहन का सबसे अच्छा मापदंड पंजाब में है। अंग्रेज़ों के आने से पहले बंगाल निश्चित रूप से एक धनी और समृद्धिशाली प्रांत था । इन विषमताओं के कई कारण हो सकते हैं । लेकिन यह बात समझ पाना मुश्किल है कि बंगाल, जो इतना धनी और समृद्धिशाली था, ब्रिटिश शासन के १८७ वर्षों में, अंग्रेज़ों द्वारा उसकी दशा सुधारने और वहां की जनता को खुदमुख्तारी की कला सिखाने की ज़बर्दस्त कोशिशों के बावजूद, आज ग़रीब, भूखे और मरते हुए लोगों का भयानक समूह है । हिंदुस्तान में ब्रिटिश शासन का पहला पूरा तजुर्बा बंगाल को हुआ। उस राज्य की शुरुआत खुल्लम-खुल्ला लूट-मार से हुई, और उसमें ज्यादा-सेज्यादा ज़मीन का लगान सिर्फ़ ज़िंदा किसान से ही नहीं, बल्कि उसके मरने पर भी बसूल किया जाता था। हिंदुस्तान के अंग्रेज़ इतिहासकार एडवर्ड टामसम और जी. टी. गैरट हमको बताते हैं कि, "अंग्रेजों के दिमाग में दौलत के लिए इतना जबर्दस्त लालच भरा हुआ था कि कोर्टेज प्रोर पिजारो के के स्पेनयुग वासियों के समय से लेकर आज तक उसकी मिसाल नहीं मिल सकती। खास तौर से बंगाल में तो उस वक़्त तक शांति नहीं हो सकती थी जब तक कि वह चूसते - चूसते खोखला न रह जाय ।" "इस के बाद कितने ही वर्षों तक अंग्रेज़ी व्यवहार की भयंकर अता के लिए क्लाइव खास तौर से ज़िम्मेदार था " - वही क्लाइव, वही साम्राज्य निर्माता, जिसकी मूर्ति लंदन में इंडिया फस के सामने खड़ी है । यह तो खुली हुई लूट थी । 'पैगोडा वृक्ष' को बारबार हिलाया गया। यहां तक कि वह वक़्त या कि बंगाल को अत्यंत भयंकर अकालों ने बरबाद कर दिया। बाद में इस ढर्रे को तिज़ारत बताया गया, लेकिन उससे क्या असर होता है। इस तिज़ारत को सरकार का नाम दिया गया, और तिजारत क्या थी खुली लूट थी । इस ढंग की मिसाल इतिहास में नहीं हैं । और यहां यह बात ध्यान में रखने की है यह चीज़ अलग-अलग नामों में और अलग-अलग शक्लों में कुछ वर्षों तक ही नहीं बल्कि कई पीढ़ियों तक चलती रही । खुली और सीधी लूट-मार की जगह कानूनी हुलिया में, शोषण ने ले ली, और हालाकि उसकी वजह से खुलापन कम हो गया लेकिन हालत बदतर हो गई । हिंदुस्तान में शुरू की पीढ़ियों में ब्रिटिश राज्य में जो हिंसा, धनलोलुपता, पक्षपात और अनैतिकता थी, उसका अंदाज़ भी लगाना मुश्किल है । एक बात ध्यान देने की है कि एक हिंदुस्तानी लफ्ज़, जो अंग्रेज़ी भाषा में शामिल हो गया है, 'लूट' है। एडवर्ड टामसन ने कहा है और यह बात सिर्फ़ बंगाल के हवाले में ही नहीं कही गई है "ब्रिटिश हिंदुस्तान के शुरू के इतिहास का ध्यान आता है, जो कि शायद दुनिया भर में, राजनीतिक छल की सबसे बड़ी मिसाल है । " इस सब का नतीजा, यहाँ तक कि शुरू के बरसों में ही इसका नतीज़ा यह हुआ कि १७७० का अकाल पड़ा जिसने बंगाल और बिहार की क़रीब एक तिहाई आबादी को खत्म कर दिया। लेकिन यह सब प्रगति के हक़ में हुआ था और बंगाल इस बात पर घमंड कर सकता है कि इंग्लैंड में प्रौद्योगिक क्रांति को जन्म देने में उसने बहुत मदद की, अमेरिकन लेखक ब्रुक ऐडम्स हमको बताता है -- कि यह किस तरह हुआ, "हिंदुस्तानी दौलत के (इंगलैंड में ) प्राने से और राष्ट्र की पूंजी में बहुत बड़ी बढ़वार हो जाने से, सिर्फ़ उसकी ताक़त का भंडार ही नहीं बढ़ा बल्कि उससे उसकी गति में लचीलेपन के साथ-साथ बहुत तेजी भी आई । प्लासी के बाद बहुत जल्दी ही बंगाल की लूट १. एडवर्ड टामसम और जो. टी. गॅरेट; 'राइज एंड फुलफिलमेंट अब् ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (लंबन, १९३५ )
बढ़ती है । ग़ैर - - यूरोपियनों का बहिष्कार एक जातीय कारण से ज्यादा होता है, बनस्बित इस वजह के कि वे लोग जिनकी संस्कृति एक सी है फुर्सत के वक़्त में मनोरंजन या सामाजिक मेल-जोल के मौक़े पर बाहरी लोगों का दखल नहीं चाहते। मुझे खुद इस बात में कोई आपत्ति नहीं कि विशुद्ध अंग्रेज़ी या यूरोपियन क्लब हों और शायद ही कोई हिंदुस्तानी उनम घुसना चाहे । लेकिन जब इस सामाजिक बहिष्कार की बुनियाद साफ़ तौर से जातीयता पर होती है, और जब कि शासक वर्ग अपनी श्रेष्ठता का दिखावा करता है तो इसका दूसरा पहलू हो जाता है । बम्बई मे एक मशहूर क्लब है, जिसमें किसी भी हिंदुस्तानी को, चाहे वह किसी देशी रियासत का राजा ही क्यों न हो, या बड़ा उद्योगपति ही क्यों न हो, दर्शकों के कमरे तक में जाने पर प्रतिबंध था । जहां तक मुझे पता है उस क्लब में इस तरह का प्रतिबंध अब भी है । हिंदुस्तान म भेद-भाव अंग्रेज़ बनाम हिंदुस्तानी के रूप म नहीं है यह ऐसा है कि एक तरफ़ यूरोपियन हैं; और दूसरी तरफ़ एशियाई । हिंदुस्तान में हर एक यूरोपियन, चाहे वह जर्मन हो, पोल हो या रूमानियन, खुदबखुद शासक जाति का मेम्बर बन जाता है। रेल के डिब्बों पर, स्टेशन पर ठहरने के कमरों पर, पार्कों में, बैचों पर लिखा होता है, "सिर्फ़ यूरोपियनों के लिए" । दक्षिण अफ्रीका में या दूसरी जगहों में ही यह कोई कम बुरी चीज़ नहीं है लेकिन खुद अपने ही देश में यह चीज बहुत ज्यादा अपमानजनक है, और अपनी गुलामी की याद दिलाती है । यह सच है कि जातीय श्रेष्ठता और शाही अहंकार के इस ऊपरी दिखावे में धीरे-धीरे तब्दीली होती जा रही है, लेकिन रफ्तार बहुत धीमी है, और अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जिनसे पता लगता है कि यह तब्दीली सतही है । राजनीतिक दबाव और लड़ाकू राष्ट्रीयता के उत्थान से लाज़िमी तौर पर तब्दीली होती है और पुराने भेद-भावों और ज्यादतियों को इरादतन कम करने की कोशिश होती है; लेकिन फिर जब वह राजनीतिक आंदोलन एक विकट स्थिति में पहुंच जाता है और तब उसको कुचला जाता है, तो फिर वही पुराना साम्राज्यवादी और जातीय अक्खड़पन पूरा तौर पर भर पड़ता है। अंग्रेज़ सजग और समझदार होते हैं, लेकिन जब वह दूसरे देशों में जाते हैं तो उनमें अपने चारों तरफ़ की जानकारी का एक विचित्र प्रभाव होता है । हिंदुस्तान में जहां शासक-शासित संबंध की वजह से, असला समझदारी मुश्किल होती है, इस जानकारी का अभाव खास तौर से दिखाई देता है। ऐसा मालूम होता है कि यह सब इरादतन है ताकि वह सिर्फ़ वही देखें जो कि वह देखना चाहते हैं, और बाक़ी सबके लिए आखें बंद रखें। लेकिन निगाह बचाने से सचाई ग़ायब तो हो नहीं जाता और जब वह जबर्दस्ती ध्यान खींचती है, तो इस अप्रत्याशित घटना से इस तरह नाराज़गी और भुंझलाहट होती है मानो कोई चाल चली गई हो । इस वर्ण व्यवस्था के देश में, अंग्रेज़ों ने, ख़ास तौर से इंडियन सिविल सविस वालों ने एक जाति बनाई है जो बहुत सख्त है और सबसे अलग-थलग रहने वाली है। यहां तक कि उस जाति में सिविल सर्विस के हिंदुस्तानी सदस्य भी अस्लियत में शामिल नहीं हैं हालांकि वे उसी का बिल्ला पहने रहते हैं और उसके नियमों का पालन करते है । उस जाति में अपनी निजी ज़बर्दस्त ग्रहमियत के बारे में धार्मिक निष्ठा की-सी भावना बन गई है और उस निष्ठा के गिर्द अपना एक पुराण तयार हो गया है जो उसे बनाए रखता है। स्थापित स्वार्थों और निष्ठा का गठ बंधन बहुत ताक़तवर होता है और अगर उसे कोई चुनौती दी जाय तो उससे बड़ी ताखी नफ़रत और नाराज़गी पैदा हो जाती है । दो : बंगाल की लूट से इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति को मदद सत्रहवीं सदी के शुरू में ईस्ट इंडिया कम्पनी को मुग़ल सम्राट से सूरत में एक फ़ैक्टरी चालू करने की इजाजत मिल गई थी। कुछ साल बाद उन्होंने दक्खिन में कुछ ज़मीन खरीदी, और मद्रास की बुनियाद डाली । सन् एक हज़ार छः सौ बासठ में पुर्तगाल की तरफ़ से दहेज़ की शक्ल म इंग्लैंड के चार्ल्स द्वितीय को बम्बई का टापू भेंट किया गया और उसने उसे कम्पनी को दे दिया । सन् एक हज़ार छः सौ साठ में कलकत्ते की बुनियाद पड़ी । इस तरह सत्रहवीं सदी के आखिर तक अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान में पैर रखने की कई जगहें मिल गई थीं, और उन्होंने हिंदुस्तानी समुद्र तट पर अपने कई अड्डे क़ायम कर लिए थे । वे अंदर की तरफ़ धीरे-धीरे बढ़े । सन् एक हज़ार सात सौ सत्तावन म प्लासी की लड़ाई से पहली बार उनके कब्ज़े में एक बहुत बड़ा प्रदेश आया और कुछ ही बरसों म बंगाल, बिहार, उड़ीसा, और पूर्वी तट उनके कब्ज़े में आ गया। दूसरा बड़ा क़दम, करीब चालास साल बाद, उन्नीसवीं सदी के शुरू में उठाया गया । और इससे वे दिल्ली के दरवाजे तक आ पहुंचे । तीसरा अगला बड़ा क़दम एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में, मराठों की आखिरी हार के बाद था; और सिख यद्ध के बाद एक हज़ार आठ सौ छियालीस में चौथे क़दम से तस्वीर ही पूरी हो गई । इस तरह अंग्रेज़ मद्रास के शहर में दो सौ बरसों से हैं; बंगाल, बिहार वग़ैरह पर उनकी हुकूमत को एक सौ सत्तासी बरस होगए; दक्खिन की तरफ उन्होंने अपना राज्य करीब एक सौ पैंतालीस बरस पहले बढ़ाया । संयुक्त प्रान्त, मध्यहिंदुस्तान और पच्छिमी हिंदुस्तान में जमे हुए उन्हें करीब एक सौ पच्चीस साल हुए; और पंजाब म वे पैंसठ बरस पहले जमे । मद्रास का शहर एक बहुत छोटासा हिस्सा है और अगर उसे छोड़ दें तो बंगाल और पंजाब के कब्जे के बीच में सिर्फ एक सौ साल का फ़र्क है । इस दौरान में ब्रिटिश नीति और हुकूमती ढंग में बार-बार तब्दीलियां होती रहीं । ये रद्दो- बदल इंग्लैंड की नई तब्दीलियों और हिंदुस्तान में ब्रिटिश राज्य के सुसंगठन को, ख्याल में रखते हुए, हुई । हर नये जीते हुए हिस्से के साथ व्यवहार इन तब्दीलियों के मुताबिक अलगअलग होता और साथ ही वह इस बात पर भी निर्भर होता कि जिस शासक समुदाय को अंग्रेजों ने हराया था वह किस ढंग का था । इस तरह बंगाल में, जहां जीत बहुत आसानी से हुई, मुस्लिम जमींदारों को शासक वर्ग समझा गया और ऐसी नीति अपनाई गई कि उनकी ताक़त टूट जाय। दूसरी तरफ पंजाब में ताक़त सिखों से छीनी गई थी और वहां अंग्रेज़ों और मुसलमानों में कोई बुनियादी झगड़ा नहीं था। हिंदुस्तान के ज्यादातर हिस्से में अंग्रेजों के विरोधी मराठे रहे थ । एक खास ध्यान देने की बात यह है कि हिंदुस्तान के वे हिस्से जो अंग्रेज़ों के कब्ज़े में सबसे ज्यादा अस से रहे हैं आज सबसे ज्यादा ग़रीब है । अस्ल में एक में ऐसा नक़्शा तैयार किया जा सकता है जिससे ब्रिटिश राज्य-काल के माप और क्रमशः निर्धनता की वृद्धि का घनिष्ठ संबंध प्रकट हो । कुछ बड़े शहरों से या कुछ नए औद्योगिक प्रदेशों से इस जांच में कोई बुनियादी फ़र्क़ नहीं आता। जो बात ध्यान देने की है वह यह है कि कुल मिलाकर आम जनता की हालत क्या है, और इस बात में कोई शक नहीं है कि हिंदुस्तान के सबसे ज्यादा ग़रीब हिस्से बंगाल, बिहार, उड़ीसा और मद्रास प्रेसीडेंसी के हिस्से हैं । रहन-सहन का सबसे अच्छा मापदंड पंजाब में है। अंग्रेज़ों के आने से पहले बंगाल निश्चित रूप से एक धनी और समृद्धिशाली प्रांत था । इन विषमताओं के कई कारण हो सकते हैं । लेकिन यह बात समझ पाना मुश्किल है कि बंगाल, जो इतना धनी और समृद्धिशाली था, ब्रिटिश शासन के एक सौ सत्तासी वर्षों में, अंग्रेज़ों द्वारा उसकी दशा सुधारने और वहां की जनता को खुदमुख्तारी की कला सिखाने की ज़बर्दस्त कोशिशों के बावजूद, आज ग़रीब, भूखे और मरते हुए लोगों का भयानक समूह है । हिंदुस्तान में ब्रिटिश शासन का पहला पूरा तजुर्बा बंगाल को हुआ। उस राज्य की शुरुआत खुल्लम-खुल्ला लूट-मार से हुई, और उसमें ज्यादा-सेज्यादा ज़मीन का लगान सिर्फ़ ज़िंदा किसान से ही नहीं, बल्कि उसके मरने पर भी बसूल किया जाता था। हिंदुस्तान के अंग्रेज़ इतिहासकार एडवर्ड टामसम और जी. टी. गैरट हमको बताते हैं कि, "अंग्रेजों के दिमाग में दौलत के लिए इतना जबर्दस्त लालच भरा हुआ था कि कोर्टेज प्रोर पिजारो के के स्पेनयुग वासियों के समय से लेकर आज तक उसकी मिसाल नहीं मिल सकती। खास तौर से बंगाल में तो उस वक़्त तक शांति नहीं हो सकती थी जब तक कि वह चूसते - चूसते खोखला न रह जाय ।" "इस के बाद कितने ही वर्षों तक अंग्रेज़ी व्यवहार की भयंकर अता के लिए क्लाइव खास तौर से ज़िम्मेदार था " - वही क्लाइव, वही साम्राज्य निर्माता, जिसकी मूर्ति लंदन में इंडिया फस के सामने खड़ी है । यह तो खुली हुई लूट थी । 'पैगोडा वृक्ष' को बारबार हिलाया गया। यहां तक कि वह वक़्त या कि बंगाल को अत्यंत भयंकर अकालों ने बरबाद कर दिया। बाद में इस ढर्रे को तिज़ारत बताया गया, लेकिन उससे क्या असर होता है। इस तिज़ारत को सरकार का नाम दिया गया, और तिजारत क्या थी खुली लूट थी । इस ढंग की मिसाल इतिहास में नहीं हैं । और यहां यह बात ध्यान में रखने की है यह चीज़ अलग-अलग नामों में और अलग-अलग शक्लों में कुछ वर्षों तक ही नहीं बल्कि कई पीढ़ियों तक चलती रही । खुली और सीधी लूट-मार की जगह कानूनी हुलिया में, शोषण ने ले ली, और हालाकि उसकी वजह से खुलापन कम हो गया लेकिन हालत बदतर हो गई । हिंदुस्तान में शुरू की पीढ़ियों में ब्रिटिश राज्य में जो हिंसा, धनलोलुपता, पक्षपात और अनैतिकता थी, उसका अंदाज़ भी लगाना मुश्किल है । एक बात ध्यान देने की है कि एक हिंदुस्तानी लफ्ज़, जो अंग्रेज़ी भाषा में शामिल हो गया है, 'लूट' है। एडवर्ड टामसन ने कहा है और यह बात सिर्फ़ बंगाल के हवाले में ही नहीं कही गई है "ब्रिटिश हिंदुस्तान के शुरू के इतिहास का ध्यान आता है, जो कि शायद दुनिया भर में, राजनीतिक छल की सबसे बड़ी मिसाल है । " इस सब का नतीजा, यहाँ तक कि शुरू के बरसों में ही इसका नतीज़ा यह हुआ कि एक हज़ार सात सौ सत्तर का अकाल पड़ा जिसने बंगाल और बिहार की क़रीब एक तिहाई आबादी को खत्म कर दिया। लेकिन यह सब प्रगति के हक़ में हुआ था और बंगाल इस बात पर घमंड कर सकता है कि इंग्लैंड में प्रौद्योगिक क्रांति को जन्म देने में उसने बहुत मदद की, अमेरिकन लेखक ब्रुक ऐडम्स हमको बताता है -- कि यह किस तरह हुआ, "हिंदुस्तानी दौलत के प्राने से और राष्ट्र की पूंजी में बहुत बड़ी बढ़वार हो जाने से, सिर्फ़ उसकी ताक़त का भंडार ही नहीं बढ़ा बल्कि उससे उसकी गति में लचीलेपन के साथ-साथ बहुत तेजी भी आई । प्लासी के बाद बहुत जल्दी ही बंगाल की लूट एक. एडवर्ड टामसम और जो. टी. गॅरेट; 'राइज एंड फुलफिलमेंट अब् ब्रिटिश रूल इन इंडिया'
Mumbai Fake Currency: देश में आए दिन नकली नोट से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। हालांकि पुलिस ऐसी घटना को रोकने के लिए हर तरह की कार्रवाई करती रहती हैं और आरोपियों को गिरफ्तार करती है, ताकि आम लोगों को नकली करेंसी का सामना न करना पड़े। अब मुंबई पुलिस ने नकली नोट के साथ एक गिरोह का भांडा फोड़ किया है। इस आरोप में पुलिस ने पांच शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिसमें दो ऑटो रिक्शा ड्राइवर भी हैं। मामला महाराष्ट्र के कल्याण बाजार का है। पुलिस ने दो लाख रुपये के नकली नोटों के साथ दो ऑटो रिक्शा ड्राइवर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। महात्मा फुले पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर आरोपियों के खिलाफ छापेमारी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार करने में कामयाब रही। महात्मा फुले पुलिस की ओर से मिली जानकारी के अनुसार नकली नोट के मामले में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान मोहम्मद आरिफ, सूरत पुजारी और करण रजक के रूप में हुई है। इन तीनों आरोपियों को पुलिस ने कल्याण के एक लॉज से गिरफ्तार किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तीनों आरोपी दिल्ली से मुंबई नकली नोट लेकर आए थे और वह दुकानदारों से कुछ खरीदारी कर इसका इस्तेमाल करने की योजना बना रहे थे। महात्मा फुले पुलिस को शुरुआत जांच में पता चला था कि आरोपी 200 रुपये के नकली नोट दिल्ली से लाए थे, और आगे की जांच जारी है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अशोक होनमाने ने मामले की जानकारी देते हुए कहा है कि, एपीआई दीपक सरोदे को पता चला कि, कुछ आरोपी कल्याण बाजार के अनिल पैलेस लॉज के अंदर छिपे हुए थे। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए, सरोदे और उनकी टीम ने जाल बिछाया और नकली नोटों के साथ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
Mumbai Fake Currency: देश में आए दिन नकली नोट से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। हालांकि पुलिस ऐसी घटना को रोकने के लिए हर तरह की कार्रवाई करती रहती हैं और आरोपियों को गिरफ्तार करती है, ताकि आम लोगों को नकली करेंसी का सामना न करना पड़े। अब मुंबई पुलिस ने नकली नोट के साथ एक गिरोह का भांडा फोड़ किया है। इस आरोप में पुलिस ने पांच शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिसमें दो ऑटो रिक्शा ड्राइवर भी हैं। मामला महाराष्ट्र के कल्याण बाजार का है। पुलिस ने दो लाख रुपये के नकली नोटों के साथ दो ऑटो रिक्शा ड्राइवर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। महात्मा फुले पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर आरोपियों के खिलाफ छापेमारी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार करने में कामयाब रही। महात्मा फुले पुलिस की ओर से मिली जानकारी के अनुसार नकली नोट के मामले में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान मोहम्मद आरिफ, सूरत पुजारी और करण रजक के रूप में हुई है। इन तीनों आरोपियों को पुलिस ने कल्याण के एक लॉज से गिरफ्तार किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तीनों आरोपी दिल्ली से मुंबई नकली नोट लेकर आए थे और वह दुकानदारों से कुछ खरीदारी कर इसका इस्तेमाल करने की योजना बना रहे थे। महात्मा फुले पुलिस को शुरुआत जांच में पता चला था कि आरोपी दो सौ रुपयापये के नकली नोट दिल्ली से लाए थे, और आगे की जांच जारी है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अशोक होनमाने ने मामले की जानकारी देते हुए कहा है कि, एपीआई दीपक सरोदे को पता चला कि, कुछ आरोपी कल्याण बाजार के अनिल पैलेस लॉज के अंदर छिपे हुए थे। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए, सरोदे और उनकी टीम ने जाल बिछाया और नकली नोटों के साथ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच 6 दिसम्बर से चार टेस्ट मैचों के सीरीज की शुरुआत हो रही है। ऑस्ट्रेलिया की टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वार्नर पर एक साल का बैन लगा हुआ है। इसी वजह से वह इस सीरीज में भी ऑस्ट्रेलिया टीम का हिस्सा नहीं रहेंगे। उन्हें न होने की वजह से भारत के पास सीरीज जीतने का अच्छा मौका रहेगा। भारत को पिछले दो दौरे पर ऑस्ट्रेलिया में एक भी मैच में जीत नहीं मिली है। इस सीरीज में भारतीय टीम को फेवरेट माना जा रहा है। कई बड़े दिग्गजों ने इस बात पर मुहर लगा दी है। अब पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने भी भारत को इस सीरीज में जीतने का प्रबल दावेदार माना है। किसी भी बड़े टूर्नामेंट का सीरीज का पहला मैच हमेशा महत्वपूर्ण होता है। उस मैच में अच्छे प्रदर्शन के बाद किसी भी टीम का आत्मविश्वास काफी बेहतर हो जाता है। वहीं पहले मैच में खराब प्रदर्शन या फिर हार मिलने के बाद उनका असर पूरी सीरीज पर दिखता है। भारतीय टीम इस साल की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गयी थी और वहां अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें सीरीज में 2-1 से हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जरूरी मौकों पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने की वजह से टीम को हार मिली। अगर आपकों हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें।
ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच छः दिसम्बर से चार टेस्ट मैचों के सीरीज की शुरुआत हो रही है। ऑस्ट्रेलिया की टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वार्नर पर एक साल का बैन लगा हुआ है। इसी वजह से वह इस सीरीज में भी ऑस्ट्रेलिया टीम का हिस्सा नहीं रहेंगे। उन्हें न होने की वजह से भारत के पास सीरीज जीतने का अच्छा मौका रहेगा। भारत को पिछले दो दौरे पर ऑस्ट्रेलिया में एक भी मैच में जीत नहीं मिली है। इस सीरीज में भारतीय टीम को फेवरेट माना जा रहा है। कई बड़े दिग्गजों ने इस बात पर मुहर लगा दी है। अब पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने भी भारत को इस सीरीज में जीतने का प्रबल दावेदार माना है। किसी भी बड़े टूर्नामेंट का सीरीज का पहला मैच हमेशा महत्वपूर्ण होता है। उस मैच में अच्छे प्रदर्शन के बाद किसी भी टीम का आत्मविश्वास काफी बेहतर हो जाता है। वहीं पहले मैच में खराब प्रदर्शन या फिर हार मिलने के बाद उनका असर पूरी सीरीज पर दिखता है। भारतीय टीम इस साल की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गयी थी और वहां अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें सीरीज में दो-एक से हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जरूरी मौकों पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने की वजह से टीम को हार मिली। अगर आपकों हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। Uttar Pradesh के Kanpur में Zika virus का हमला तेज होता जा रहा है। बुधवार को जीका वायरस संक्रमण के 25 नए मामले सामने आए हैं। सभी संक्रमित चकेरी क्षेत्र के हैं, जिसके बाद क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। कानपुर नगर के CMO Dr. Nepal Singh ने बताया कि शहर में अब जीका संक्रमितों की कुल संख्या 36 हो गई है।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। Uttar Pradesh के Kanpur में Zika virus का हमला तेज होता जा रहा है। बुधवार को जीका वायरस संक्रमण के पच्चीस नए मामले सामने आए हैं। सभी संक्रमित चकेरी क्षेत्र के हैं, जिसके बाद क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। कानपुर नगर के CMO Dr. Nepal Singh ने बताया कि शहर में अब जीका संक्रमितों की कुल संख्या छत्तीस हो गई है।
राज्यसभा में आज गृहमंत्री अमित साह ने संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 'ए' को हटाने संबंधी प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव में लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करने का प्रावधान रखा गया है. इसके तहत जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे. जम्मू कश्मीर विधानसभा वाला केन्द्रशासित प्रदेश होगा जबकि लद्दाख बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश होगा. 27 मई 1949 को संविधान सभा द्वारा अनुच्छेद 370 को पारित किया गया था. संविधान के भाग 21 का पहला अनुच्छेद हैं 370. जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार दिए गए. जम्मू कश्मीर का अपना एक अलग संविधान है जो 26 जनवरी, 1957 को लागू किया गया. अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, रक्षा, विदेश नीति और संचार मामलों को छोड़कर किसी अन्य मामले से जुड़ा क़ानून बनाने और लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की अनुमति चाहिए. जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा होता है. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है. जम्मू कश्मीर की विधानसभा में राज्यपाल दो महिला सदस्यों को भी मनोनीत कर सकता है. अनुच्छेद 35 'ए' अनुच्छेद 370 से ही निकला है. 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से इसे शामिल किया गया था. अनुच्छेद 35 'ए' के तहत राज्य में जमीन खरीदने से संबंधित कुछ विशेषाधिकार वहां के नागरिकों को दिए गए हैं. वर्तमान में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन है. अतः केंद्र सरकार का मानना है कि राज्य के संबंध में कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है और इसी के तहत संसद 370 को समाप्त कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार बिना जम्मू कश्मीर के चुने हुये प्रतिनिधियों से बातचीत के ही यह कानून पास कर रही है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का कहना है कि हम धारा 370 को हटाने का विरोध नहीं करते हैं लेकिन बिना कश्मरियों की सहमति के इसे हटाना गलत है. विपक्ष का कहना है की केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को इसतरह से हटाना भारत में सहमति की पहली हत्या है. मैं खुश हूं की सरकार ने आर्टिकल 370 को हटाने का फैसला किया है. मेरा मानना है कि ये एक साहसिक कदम है जो राष्ट्रीय एकता के लिए बड़ा कदम होगा. जन संघ के दिनों से ही धारा 370 को हटाना भाजपा के मूल विचारधारा का अंग था. मैं प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई देता हूं. मैं जम्मू कश्मीर और लद्दाख में शांति, संमृद्धि और प्रगति की कामना कर रहा हूं.
राज्यसभा में आज गृहमंत्री अमित साह ने संविधान के अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और अनुच्छेद पैंतीस 'ए' को हटाने संबंधी प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव में लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करने का प्रावधान रखा गया है. इसके तहत जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे. जम्मू कश्मीर विधानसभा वाला केन्द्रशासित प्रदेश होगा जबकि लद्दाख बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश होगा. सत्ताईस मई एक हज़ार नौ सौ उनचास को संविधान सभा द्वारा अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को पारित किया गया था. संविधान के भाग इक्कीस का पहला अनुच्छेद हैं तीन सौ सत्तर. जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार दिए गए. जम्मू कश्मीर का अपना एक अलग संविधान है जो छब्बीस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन को लागू किया गया. अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के प्रावधानों के अनुसार, रक्षा, विदेश नीति और संचार मामलों को छोड़कर किसी अन्य मामले से जुड़ा क़ानून बनाने और लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की अनुमति चाहिए. जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा होता है. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल छः वर्षों का होता है. जम्मू कश्मीर की विधानसभा में राज्यपाल दो महिला सदस्यों को भी मनोनीत कर सकता है. अनुच्छेद पैंतीस 'ए' अनुच्छेद तीन सौ सत्तर से ही निकला है. एक हज़ार नौ सौ चौवन में राष्ट्रपति के आदेश से इसे शामिल किया गया था. अनुच्छेद पैंतीस 'ए' के तहत राज्य में जमीन खरीदने से संबंधित कुछ विशेषाधिकार वहां के नागरिकों को दिए गए हैं. वर्तमान में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन है. अतः केंद्र सरकार का मानना है कि राज्य के संबंध में कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है और इसी के तहत संसद तीन सौ सत्तर को समाप्त कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार बिना जम्मू कश्मीर के चुने हुये प्रतिनिधियों से बातचीत के ही यह कानून पास कर रही है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का कहना है कि हम धारा तीन सौ सत्तर को हटाने का विरोध नहीं करते हैं लेकिन बिना कश्मरियों की सहमति के इसे हटाना गलत है. विपक्ष का कहना है की केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को इसतरह से हटाना भारत में सहमति की पहली हत्या है. मैं खुश हूं की सरकार ने आर्टिकल तीन सौ सत्तर को हटाने का फैसला किया है. मेरा मानना है कि ये एक साहसिक कदम है जो राष्ट्रीय एकता के लिए बड़ा कदम होगा. जन संघ के दिनों से ही धारा तीन सौ सत्तर को हटाना भाजपा के मूल विचारधारा का अंग था. मैं प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई देता हूं. मैं जम्मू कश्मीर और लद्दाख में शांति, संमृद्धि और प्रगति की कामना कर रहा हूं.
पंजाब के खेल एवं युवा सेवाएं मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने आज पंजाब सिविल सचिवालय-1 स्थित अपने कार्यालय में टोक्यो ओलम्पिक्स में डिस्कस थ्रो के फ़ाईनल मुकाबले का सीधा प्रसारण देखते हुए कमलप्रीत कौर का मनोबल बढ़ाया। इस मौके पर उनके साथ दूसरों के अलावा मुख्य सचिव श्री राज कमल चौधरी और डायरैक्टर खेल श्री डी. पी. एस. खरबन्दा और संयुक्त डायरैक्टर श्री करतार सिंह मौजूद थे। कमलप्रीत कौर का मुकाबला देखते हुए राणा सोढी कई बार भावुक हुए और कहा, "हालाँकि कमलप्रीत कौर फ़ाईनल में अपना सर्वोत्तम थ्रो फेंकने से चूक गई परन्तु फिर भी उसने कुल 12 फाईनलिस्टों में 6वें रैंक के साथ भारत का सर्वोत्तम स्थान हासिल किया है। उसने 6वां स्थान हासिल करके थ्रो के तीन और मौके हासिल किये। "टोक्यो में कमलप्रीत कौर के फ़ाईनल मुकाबले से पहले गाँव कबरवाला (मलोट) में रहते उसके माता-पिता के साथ ऑनलाइन बातचीत करते हुए राणा सोढी ने उनको इस ऐतिहासिक पल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, "हर पंजाबी को गर्व है कि कमलप्रीत कौर ने पंजाब और भारत का नाम विश्वभर में रौशन किया है।
पंजाब के खेल एवं युवा सेवाएं मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने आज पंजाब सिविल सचिवालय-एक स्थित अपने कार्यालय में टोक्यो ओलम्पिक्स में डिस्कस थ्रो के फ़ाईनल मुकाबले का सीधा प्रसारण देखते हुए कमलप्रीत कौर का मनोबल बढ़ाया। इस मौके पर उनके साथ दूसरों के अलावा मुख्य सचिव श्री राज कमल चौधरी और डायरैक्टर खेल श्री डी. पी. एस. खरबन्दा और संयुक्त डायरैक्टर श्री करतार सिंह मौजूद थे। कमलप्रीत कौर का मुकाबला देखते हुए राणा सोढी कई बार भावुक हुए और कहा, "हालाँकि कमलप्रीत कौर फ़ाईनल में अपना सर्वोत्तम थ्रो फेंकने से चूक गई परन्तु फिर भी उसने कुल बारह फाईनलिस्टों में छःवें रैंक के साथ भारत का सर्वोत्तम स्थान हासिल किया है। उसने छःवां स्थान हासिल करके थ्रो के तीन और मौके हासिल किये। "टोक्यो में कमलप्रीत कौर के फ़ाईनल मुकाबले से पहले गाँव कबरवाला में रहते उसके माता-पिता के साथ ऑनलाइन बातचीत करते हुए राणा सोढी ने उनको इस ऐतिहासिक पल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, "हर पंजाबी को गर्व है कि कमलप्रीत कौर ने पंजाब और भारत का नाम विश्वभर में रौशन किया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लोक भवन, लखनऊ में टीम-11 के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की तथा कोविड वैक्सीनेशन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा की कोविड वैक्सीन बहुमूल्य है। एक भी वैक्सीन डोज बेकार न हो, इसका हम सभी को ध्यान रखना होगा। वैक्सीन वेस्टेज पर आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी चिंता जताई है। टीकाकरण की तय तिथि पर संबंधित नागरिक का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कोविड संक्रमण में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह हमारे लिए चेतावनी है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टेशन आदि पर एंटीजन टेस्ट अनिवार्य किया जाए। RT-PCR टेस्ट की संख्या भी बढ़ाई जाए। सभी जनपदों में डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल को एक्टिव रखें। सीएम योगी ने कहा कि कोविड वैक्सीनेशन की प्रक्रिया प्रदेश में सुचारु रूप से संचालित हो रही है। 33 लाख वैक्सीनेशन करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है। इस स्थिति को और बेहतर किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दशा में कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। पंचायत चुनाव और पर्व/त्योहारों के दृष्टिगत हमें विशेष सतर्कता बरतनी होगी। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को तेज और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लोक भवन, लखनऊ में टीम-ग्यारह के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की तथा कोविड वैक्सीनेशन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा की कोविड वैक्सीन बहुमूल्य है। एक भी वैक्सीन डोज बेकार न हो, इसका हम सभी को ध्यान रखना होगा। वैक्सीन वेस्टेज पर आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी चिंता जताई है। टीकाकरण की तय तिथि पर संबंधित नागरिक का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कोविड संक्रमण में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह हमारे लिए चेतावनी है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टेशन आदि पर एंटीजन टेस्ट अनिवार्य किया जाए। RT-PCR टेस्ट की संख्या भी बढ़ाई जाए। सभी जनपदों में डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल को एक्टिव रखें। सीएम योगी ने कहा कि कोविड वैक्सीनेशन की प्रक्रिया प्रदेश में सुचारु रूप से संचालित हो रही है। तैंतीस लाख वैक्सीनेशन करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है। इस स्थिति को और बेहतर किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दशा में कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। पंचायत चुनाव और पर्व/त्योहारों के दृष्टिगत हमें विशेष सतर्कता बरतनी होगी। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को तेज और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
DEHRADUN : लगातार हो रही बारिश के कारण देहरादून जिले की क्ख् सड़कें अब भी बंद हैं। एलकेडी, कार्लीगाढ सरोना, गौहरीमाफी से रायवाला एवं टिहरी फार्म बिड़ला मन्दिर मोटर मार्ग और सहस्त्रधारा चामासारी मोटर मार्ग बरसात के शुरुआती दौर से अभी तक बंद पड़े हुए हैं। इसके अलावा मनोर-रडू, कालसी चकराता, हरिपुर-इछाड़ु, क्वानू-मीनस, सहिया-क्वानू, कालसी बैराठखई, बौसान बैण्ड से बौसान गांव, डांडवा कितरौली, मुशींघाटी देउ, शम्बू की चैकी पंजिया, लेल्टा लिंक मुन्डोली, कोठा तारली-उभरे बंद पड़े हुए हैं। इस बीच मौसम विभाग ने देहरादून सहित छह जिलों में अगले ब्8 घंटों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। मौसम विभाग की इस चेतावनी को देखते हुए दून जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को भारी बारिश की स्थिति में पूरी तरह से सतर्क रहने के लिए कहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व बीर सिंह बुदियाल ने विभिन्न सरकारी विभागों और निजी कंपनियों से कहा है कि यदि वे सीवर लाइन, पाईप लाइन, ओएफसी केबल जैसे कार्यो के लिए सड़क की खुदाई कर रहे हैं तो सड़क की तुरन्त मरम्मत भी करें। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को इस बारे में तुरन्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं।
DEHRADUN : लगातार हो रही बारिश के कारण देहरादून जिले की क्ख् सड़कें अब भी बंद हैं। एलकेडी, कार्लीगाढ सरोना, गौहरीमाफी से रायवाला एवं टिहरी फार्म बिड़ला मन्दिर मोटर मार्ग और सहस्त्रधारा चामासारी मोटर मार्ग बरसात के शुरुआती दौर से अभी तक बंद पड़े हुए हैं। इसके अलावा मनोर-रडू, कालसी चकराता, हरिपुर-इछाड़ु, क्वानू-मीनस, सहिया-क्वानू, कालसी बैराठखई, बौसान बैण्ड से बौसान गांव, डांडवा कितरौली, मुशींघाटी देउ, शम्बू की चैकी पंजिया, लेल्टा लिंक मुन्डोली, कोठा तारली-उभरे बंद पड़े हुए हैं। इस बीच मौसम विभाग ने देहरादून सहित छह जिलों में अगले ब्आठ घंटाटों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। मौसम विभाग की इस चेतावनी को देखते हुए दून जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को भारी बारिश की स्थिति में पूरी तरह से सतर्क रहने के लिए कहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व बीर सिंह बुदियाल ने विभिन्न सरकारी विभागों और निजी कंपनियों से कहा है कि यदि वे सीवर लाइन, पाईप लाइन, ओएफसी केबल जैसे कार्यो के लिए सड़क की खुदाई कर रहे हैं तो सड़क की तुरन्त मरम्मत भी करें। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को इस बारे में तुरन्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं।
हालाकि चुनाव परिणाम आने में थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा लेकिन इतना तय है कि जब सूरत बदलती तो लोग अनायास ही उस ओर देखने को विवश हो जाते है। आज कुछ देर पहले विहार विधान सभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव का फेस बुक पर एक अपील जनता के नाम पढ़ा इसमें उन्होंने नारा दिया है पूरी करेगी सब जन सरोकार आने वाली है जनता सरकार। यह नारा आरजेडी के पिछले नारों से तो अलग है ही अपनी अपील में तेजस्वी ने बिहार में जात पात से उपर उठकर मुद्दों पर आधारित राजनीति करने का दावा किया है।इसके पहले जब कभी भी आरजेडी का चुनावी नारा लालू और राबड़ी से शुरू होकर उसी से अंत होता था। मुझे पूरी तरह याद है। पूर्व ऊर्जा मंत्री शकील अहमद जी आरजेडी छोड़कर जदयू में शामिल हुए थे। इस अवसर पर सीएम नीतीश कुमार खुद मौजूद थे। प्रेस बालों से बात चीत के क्रम में हमने नीतीश जी से पूछा था कि क्या बात है कि आरजेडी के जो सभी मुख्य प्रवक्ता रहे उनको आपने जदयू में शामिल कर लिया है। यानी शिवानंद तिवारी श्याम रजक डॉक्टर राम वचन रॉय शकील अहमद समेत लालू के सभी बड़े करीबी नेताओं को आपने अपने साथ लिया है। नीतीश जी मुस्कुराइए और बोले जब उस पार्टी में बोलने वाला ही नहीं रहेगा तो फिर पार्टी की हैसियत क्या रह जाएगा ।तेजस्वी के जमाने में जमाना बदला है। शकील साहब तो दुनिया में नहीं रहे।आज शिवानंद तिवारी श्याम रजक उदय नारायण चौधरी प्रेम कुमार मणि जैसे नीतीश के पुराने सहयोगी अब आरजेडी में है तो मनोज झा जैसे नए लोग भी। अभी आरजेडी में प्रदेश स्तर में 14 प्रवक्ता है। जिसमें तेज तर्रार मृतुन्जय तिवारी भाई विरेंद्र शक्ति सिंह यादव और प्रोफेसर एज्या यादव लोग है तो नेपथ्य में रहकर दिलीप मंडल जय शंकर गुप्त संकर्षण ठाकुर जैसे बुद्धि जीबी और पत्रकार भी देश की राजधानी दिल्ली हो या अन्य जगहों से तेजस्वी को सहयोग कर रहे है। दिल्ली में तो मनोज झा ने कमान ही संभाल रखी है। इतना ही नहीं कभी अराजक दिखने वाले आरजेडी के कार्यालय का काया कल्प हो चुका है। महान विभूतियों की तस्वीरों से दीवाल सज चके है तो जगदानंद सिंह ने अनुशासन की छड़ी को मजबूती से लागू किया है। जंगल राज और जातिवादी राजनीति का पर्याय बन चुकी आरजेडी के परिवर्तन का कमाल है कि हमेशा बैंक फुट पर रहने वाली आरजेडी अब फ्रंट फुट पर खेलने लगी है और गुरुवार को आरजेडी के दलित नेताओं के आरोप का जवाब देने के लिए शनिवार को जदयू के मंत्रियों को आगे आना पड़ता है। निश्चित रूप से आरजेडी के इस बदलते सूरत में तेजस्वी का चेहरा दिखने लगा है।हो सकता है इसका तुरंत लाभ इस चुनाव में पार्टी को ना मिले लेकिन असर तो होगा ही। हालाकि चुनाव परिणाम आने में थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा लेकिन इतना तय है कि जब सूरत बदलती तो लोग अनायास ही उस ओर देखने को विवश हो जाते है। तेजस्वी की टीम को बधाई।
हालाकि चुनाव परिणाम आने में थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा लेकिन इतना तय है कि जब सूरत बदलती तो लोग अनायास ही उस ओर देखने को विवश हो जाते है। आज कुछ देर पहले विहार विधान सभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव का फेस बुक पर एक अपील जनता के नाम पढ़ा इसमें उन्होंने नारा दिया है पूरी करेगी सब जन सरोकार आने वाली है जनता सरकार। यह नारा आरजेडी के पिछले नारों से तो अलग है ही अपनी अपील में तेजस्वी ने बिहार में जात पात से उपर उठकर मुद्दों पर आधारित राजनीति करने का दावा किया है।इसके पहले जब कभी भी आरजेडी का चुनावी नारा लालू और राबड़ी से शुरू होकर उसी से अंत होता था। मुझे पूरी तरह याद है। पूर्व ऊर्जा मंत्री शकील अहमद जी आरजेडी छोड़कर जदयू में शामिल हुए थे। इस अवसर पर सीएम नीतीश कुमार खुद मौजूद थे। प्रेस बालों से बात चीत के क्रम में हमने नीतीश जी से पूछा था कि क्या बात है कि आरजेडी के जो सभी मुख्य प्रवक्ता रहे उनको आपने जदयू में शामिल कर लिया है। यानी शिवानंद तिवारी श्याम रजक डॉक्टर राम वचन रॉय शकील अहमद समेत लालू के सभी बड़े करीबी नेताओं को आपने अपने साथ लिया है। नीतीश जी मुस्कुराइए और बोले जब उस पार्टी में बोलने वाला ही नहीं रहेगा तो फिर पार्टी की हैसियत क्या रह जाएगा ।तेजस्वी के जमाने में जमाना बदला है। शकील साहब तो दुनिया में नहीं रहे।आज शिवानंद तिवारी श्याम रजक उदय नारायण चौधरी प्रेम कुमार मणि जैसे नीतीश के पुराने सहयोगी अब आरजेडी में है तो मनोज झा जैसे नए लोग भी। अभी आरजेडी में प्रदेश स्तर में चौदह प्रवक्ता है। जिसमें तेज तर्रार मृतुन्जय तिवारी भाई विरेंद्र शक्ति सिंह यादव और प्रोफेसर एज्या यादव लोग है तो नेपथ्य में रहकर दिलीप मंडल जय शंकर गुप्त संकर्षण ठाकुर जैसे बुद्धि जीबी और पत्रकार भी देश की राजधानी दिल्ली हो या अन्य जगहों से तेजस्वी को सहयोग कर रहे है। दिल्ली में तो मनोज झा ने कमान ही संभाल रखी है। इतना ही नहीं कभी अराजक दिखने वाले आरजेडी के कार्यालय का काया कल्प हो चुका है। महान विभूतियों की तस्वीरों से दीवाल सज चके है तो जगदानंद सिंह ने अनुशासन की छड़ी को मजबूती से लागू किया है। जंगल राज और जातिवादी राजनीति का पर्याय बन चुकी आरजेडी के परिवर्तन का कमाल है कि हमेशा बैंक फुट पर रहने वाली आरजेडी अब फ्रंट फुट पर खेलने लगी है और गुरुवार को आरजेडी के दलित नेताओं के आरोप का जवाब देने के लिए शनिवार को जदयू के मंत्रियों को आगे आना पड़ता है। निश्चित रूप से आरजेडी के इस बदलते सूरत में तेजस्वी का चेहरा दिखने लगा है।हो सकता है इसका तुरंत लाभ इस चुनाव में पार्टी को ना मिले लेकिन असर तो होगा ही। हालाकि चुनाव परिणाम आने में थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा लेकिन इतना तय है कि जब सूरत बदलती तो लोग अनायास ही उस ओर देखने को विवश हो जाते है। तेजस्वी की टीम को बधाई।
देवियों curvaceous कभी कभी पतलून सूट से बचने, लेकिन वे व्यर्थ में पूरी तरह से करते हैं। ठीक तरह से पैंट फिट और एक जैकेट या शीर्ष मूल नेत्रहीन आंकड़ा स्लिमर और स्लिमर बना सकते हैं। मुख्य बात - सही ढंग से प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits चयन करने के लिए सक्षम होने के लिए। एक सुडौल आकार के साथ एक औरत के लिए पोशाक के ऊपरी भाग शीर्ष, जैकेट, ब्लाउज या अंगरखा हो सकता है। मुख्य बात - जो चयनित आइटम की गरिमा पर जोर देती है आंकड़ा (एक सुंदर छिपाने - लाइन गर्दन, लंबी गर्दन), और पूर्ण कंधे या पेट। छुट्टियों, खेल, व्यापार, हर रोजः महिलाओं और कुछ अवसरों के लिए मोटा आंकड़ा के साथ लड़कियों के लिए वहाँ pantsuits। पैंट दोनों क्लासिक कटौती और भड़का हो सकता है, और लंबाई दोनों अधिक से अधिक और छोटा हो सकता है। प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits खरीदें, यह कभी कभी मुश्किल है। समस्या यह है कि एक अच्छा सूट बड़े आकार उत्कृष्ट फिट और कठोर शैली होना आवश्यक है, इसलिए जब एक पोशाक चुनने जैकेट की कटौती पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है, वास्तव में, वह नाजुक खामियों को छिपाने और उसके गरिमा का पूरा आंकड़ा उजागर करने के लिए सक्षम है। यह एक रूप-फिटिंग मॉडल लम्बी शैली, मुलायम सामग्री के बने चयन करने के लिए सबसे अच्छा है। जैकेट के उत्तम पूरक एक स्टाइलिश जैकेट हो सकता है। हालांकि, प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits - न केवल एक आदर्श बैठे है "ऊपर" क्योंकि बड़ी भूमिका द्वारा निभाई गई और कैसे इन पैंट सेटों में देखो। यह एक रंग के कपड़े की पतलून की क्लासिक कटौती पर बंद करने के लिए बेहतर है। सबसे अच्छा विकल्प - प्रत्यक्ष मॉडल के लिए मध्य जांघ से झुंड। क्लासिक कटौती पतलून हमेशा सबसे ऊपर और जैकेट के साथ पूरी तरह से फिट है, और यह आंकड़ा बढ़ नहीं करता है। पतलून सूट के लिए कपड़े की पसंद के बारे में, सर्दियों के लिए इस तरह के ऊन या ट्वीड के रूप में सही सामग्री है, लेकिन गर्मियों पतलून सूट फेफड़े के ऊतकों से या एक पतली डेनिम से सिले जा सकता है। इन पोशाकों की रंग योजना बहुत ही विविध किया जा सकता है, और एक सुडौल आकार के साथ महिलाओं सुस्त ग्रे रंगों पर ध्यान केन्द्रित करना आवश्यक नहीं है। हालांकि, अत्यधिक विपरीत भी पतलून के रंग और जैकेट भारी आकार के बीच अंतर के रूप में तेजी से, बचा जाना चाहिए और कूल्हों की ओर ध्यान खींचता है। यह पूर्ण महिलाओं के लिए pantsuits पर बहुत सामंजस्यपूर्ण लंबवत बार लग रहा है। यह नेत्रहीन सिल्हूट फैला है और यह आंकड़ा और अधिक सुरुचिपूर्ण बनाता है। एक सूट में खड़ी पट्टियों एक एकरंगा कपड़े ब्लाउज या शीर्ष के साथ जोड़ा जा सकता है। जब प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits के लिए जूते का चयन करके, ज्यादा से बचना चाहिए हाइ हील्स, स्टड भारी तलवों पर कुंद नाक के साथ और जूते। यह मध्यम ऊँची एड़ी के जूते के साथ आरामदायक जूते पर चुनाव रोकने के लिए बेहतर है। Pantsuit दिखावटी सामान के साथ पूरक किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, सुरुचिपूर्ण और स्टाइलिश ब्रोच गहने, आप सख्त व्यापार शैली में सूट करने के लिए चुन सकते हैं। अधिक उत्सव पोशाक मुक्त शैली उज्ज्वल गहने और मूल बैग के पूरक कर सकते हैं। आप सच है कि अधिकांश बहुत सनकी suiting की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक बड़े आकार वेशभूषा का चयन करें और एक नाजुक कपड़े धोने की आवश्यकता है। अगर कोई निश्चित है कि इस पोशाक हाथ धोने के बाद उपस्थिति खो देंगे है, यह ड्राई क्लीनिंग सेवाओं का उपयोग करने के लिए बेहतर है।
देवियों curvaceous कभी कभी पतलून सूट से बचने, लेकिन वे व्यर्थ में पूरी तरह से करते हैं। ठीक तरह से पैंट फिट और एक जैकेट या शीर्ष मूल नेत्रहीन आंकड़ा स्लिमर और स्लिमर बना सकते हैं। मुख्य बात - सही ढंग से प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits चयन करने के लिए सक्षम होने के लिए। एक सुडौल आकार के साथ एक औरत के लिए पोशाक के ऊपरी भाग शीर्ष, जैकेट, ब्लाउज या अंगरखा हो सकता है। मुख्य बात - जो चयनित आइटम की गरिमा पर जोर देती है आंकड़ा , और पूर्ण कंधे या पेट। छुट्टियों, खेल, व्यापार, हर रोजः महिलाओं और कुछ अवसरों के लिए मोटा आंकड़ा के साथ लड़कियों के लिए वहाँ pantsuits। पैंट दोनों क्लासिक कटौती और भड़का हो सकता है, और लंबाई दोनों अधिक से अधिक और छोटा हो सकता है। प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits खरीदें, यह कभी कभी मुश्किल है। समस्या यह है कि एक अच्छा सूट बड़े आकार उत्कृष्ट फिट और कठोर शैली होना आवश्यक है, इसलिए जब एक पोशाक चुनने जैकेट की कटौती पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है, वास्तव में, वह नाजुक खामियों को छिपाने और उसके गरिमा का पूरा आंकड़ा उजागर करने के लिए सक्षम है। यह एक रूप-फिटिंग मॉडल लम्बी शैली, मुलायम सामग्री के बने चयन करने के लिए सबसे अच्छा है। जैकेट के उत्तम पूरक एक स्टाइलिश जैकेट हो सकता है। हालांकि, प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits - न केवल एक आदर्श बैठे है "ऊपर" क्योंकि बड़ी भूमिका द्वारा निभाई गई और कैसे इन पैंट सेटों में देखो। यह एक रंग के कपड़े की पतलून की क्लासिक कटौती पर बंद करने के लिए बेहतर है। सबसे अच्छा विकल्प - प्रत्यक्ष मॉडल के लिए मध्य जांघ से झुंड। क्लासिक कटौती पतलून हमेशा सबसे ऊपर और जैकेट के साथ पूरी तरह से फिट है, और यह आंकड़ा बढ़ नहीं करता है। पतलून सूट के लिए कपड़े की पसंद के बारे में, सर्दियों के लिए इस तरह के ऊन या ट्वीड के रूप में सही सामग्री है, लेकिन गर्मियों पतलून सूट फेफड़े के ऊतकों से या एक पतली डेनिम से सिले जा सकता है। इन पोशाकों की रंग योजना बहुत ही विविध किया जा सकता है, और एक सुडौल आकार के साथ महिलाओं सुस्त ग्रे रंगों पर ध्यान केन्द्रित करना आवश्यक नहीं है। हालांकि, अत्यधिक विपरीत भी पतलून के रंग और जैकेट भारी आकार के बीच अंतर के रूप में तेजी से, बचा जाना चाहिए और कूल्हों की ओर ध्यान खींचता है। यह पूर्ण महिलाओं के लिए pantsuits पर बहुत सामंजस्यपूर्ण लंबवत बार लग रहा है। यह नेत्रहीन सिल्हूट फैला है और यह आंकड़ा और अधिक सुरुचिपूर्ण बनाता है। एक सूट में खड़ी पट्टियों एक एकरंगा कपड़े ब्लाउज या शीर्ष के साथ जोड़ा जा सकता है। जब प्लस आकार महिलाओं के लिए pantsuits के लिए जूते का चयन करके, ज्यादा से बचना चाहिए हाइ हील्स, स्टड भारी तलवों पर कुंद नाक के साथ और जूते। यह मध्यम ऊँची एड़ी के जूते के साथ आरामदायक जूते पर चुनाव रोकने के लिए बेहतर है। Pantsuit दिखावटी सामान के साथ पूरक किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, सुरुचिपूर्ण और स्टाइलिश ब्रोच गहने, आप सख्त व्यापार शैली में सूट करने के लिए चुन सकते हैं। अधिक उत्सव पोशाक मुक्त शैली उज्ज्वल गहने और मूल बैग के पूरक कर सकते हैं। आप सच है कि अधिकांश बहुत सनकी suiting की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक बड़े आकार वेशभूषा का चयन करें और एक नाजुक कपड़े धोने की आवश्यकता है। अगर कोई निश्चित है कि इस पोशाक हाथ धोने के बाद उपस्थिति खो देंगे है, यह ड्राई क्लीनिंग सेवाओं का उपयोग करने के लिए बेहतर है।
मिन्जू यूनिवर्सिटी, चीन की एक स्टडी इनदिनों वायरल हो रही है। इसमें रिसर्चर्स ने दावा किया है कि कोका-कोला और पेप्सी जैसी कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की हाई डोज लेने से पुरुषों के टेस्टिकल का साइज और टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ सकता है। यही नहीं पुरुषों के हेल्थ के लिए यह इतना कारगर है कि इससे प्रोस्टेट डिसफंक्शन और कैंसर होने का खतरा भी कम हो जाता है। आप सब से रिक्वेस्ट है कि इस तरह की वायरल सोशल मीडिया पोस्ट को पढ़कर विश्वास न करें। इसके चक्कर में अगर फंस गए तो सेहत को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। कई बार इस तरह की रिसर्च मार्केटिंग स्ट्रेटेजी का हिस्सा होती है, ताकि ग्राहक बहकावे में आकर उसे ज्यादा से ज्यादा खरीदें। सवालः कार्बोनेटेड वॉटर होता क्या है? जवाबः आप जिसे क्लब सोडा, सोडा वॉटर, सेल्टजर और फिजी वॉटर कहते हैं वह असल में कार्बोनेटेड वॉटर है। यह वह पानी है जिसे बोतल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस के प्रेशर में भरा जाता है। सेल्टजर पानी के अलावा, सभी तरह के कार्बोनेटेड पानी में आमतौर पर स्वाद को बेहतर बनाने के लिए नमक मिलाया जाता है। कभी-कभी इसमें कुछ मिनिरल्स भी डाले जाता है। सवालः क्या कार्बोनेटेड वॉटर में एसिड होता है? जवाबः कार्बन डाइऑक्साइड और पानी को रिएक्ट करवाया जाता है ताकि कार्बोनिक एसिड का उत्पादन हो सके। यह आपके मुंह में बर्निंग और सनसनाहट वाले सेंसेशन पैदा करता है। इससे कुछ लोग इरिटेट होते हैं और कुछ को इससे अच्छा महसूस होता है। कार्बोनेटेड पानी का पीएच 3-4 है, जिसका मतलब है कि यह थोड़ा अम्लीय है यानी इसमें एसिड की थोड़ी बहुत मात्रा मौजूद है। सवालः कोल्ड-ड्रिंक्स और कॉर्बोनेटेड वॉटर में अंतर क्या है? जवाबः यह एक ही है। कोल्ड ड्रिंक में आमतौर पर कार्बोनेटेड पानी होता है। इसमें टेस्ट को बढ़ाने के लिए स्वीटनर डाला जाता है। यह कई बार नेचुरल होता है तो कई बार आर्टिफिशियल। सवालः अच्छा क्या कार्बोनेटेड वॉटर या कोल्ड ड्रिंक्स डेली पी सकते हैं? जवाबः गर्मी आते ही लोग कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा पानी पीने लगते हैं। याद रखें, कि यह हाई कार्बोनेटेड ड्रिंक है। इसमें शुगर और कैलोरीज की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए इन्हें रेगुलर पीना या ज्यादा मात्रा में पीना आपको नुकसान देगा ही। सवालः तो क्या कोल्ड-ड्रिंक्स पीने से पुरुषों की सेक्शुअल हेल्थ बेहतर नहीं होती है? जवाबः बिल्कुल नहीं। सेक्शुअल हेल्थ के लिए कोल्ड-ड्रिंक अच्छी चीज नहीं है। लेकिन अगर 100-150 ML तक कभी-कभी पीते हैं तो ये इतना नुकसान नहीं करती है। रोजाना पीने वालों के लिए धीमे जहर की तरह काम करती है। जहां तक चीन में हुई रिसर्च की बात है इस तरह की कोई भी रिसर्च साइंटिफिक नहीं है। आप भूलें नहीं कि इससे पहले इस पर कई साइंटिफिक रिसर्च भी हो चुकी हैं, जिसमें बताया गया है कि ऐसे ड्रिंक्स पीने से मेल और फीमेल दोनों की सेक्स ड्राइव पर काफी गलत असर पड़ता है। साथ ही महिलाओं को बेबी कंसीव करने में भी बहुत प्रॉब्लम होती है। इसलिए मार्केट स्ट्रेटजी के जाल में फंसकर हेल्थ को खराब न करें। सवालः मेल फर्टिलिटी को बढ़ाने और इंप्रूव करने के क्या उपाय हैं? जवाबः रोज हेल्दी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाना खाने से फर्टिलिटी इंप्रूव होती है और स्पर्म काउंट बढ़ता है। जंक और प्रोसेस्ड फूड को अवॉइड करें। एक्सरसाइज रेगुलर करें। जो लोग ओवर वेट हैं वो इस पर कंट्रोल करें। सवालः कार्बोनेटेड वॉटर या कोल्ड ड्रिंक्स के साथ बर्गर, पिज्जा या तला हुआ खाना खाना कितना रिस्की है? जवाबः सवालः एसिडिटी अटैक होने पर लोग कार्बोनेटेड वॉटर या कोल्ड डिंक्स पीते हैं, यह कितना काम करता है? जवाबः जब आप इसे लेते हैं तो गैस थोड़ा सा रिलीज होता है। इसके बाद आपको फॉल्स सेंस ऑफ रिलैक्सेशन होता है। हकीकत में एसिडिटी बढ़ाती है। लंबे समय के लिए हानिकारक है। सवालः लोग कैलोरीज के चक्कर में जीरो कैलोरीज और नो शुगर वाली ड्रिंक पीते हैं, क्या यह वाकई हेल्दी है? जवाबः बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है। मेडिकली 16 साल से कम उम्र के बच्चों को नो शुगर और जीरो कैलोरी वाली डिंक्स अलाउड नहीं है। बच्चों में किडनी डैमेज के लिए ये जिम्मेदार है। पीने की लत होने पर मेमोरी लॉस की प्रॉब्लम होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मिन्जू यूनिवर्सिटी, चीन की एक स्टडी इनदिनों वायरल हो रही है। इसमें रिसर्चर्स ने दावा किया है कि कोका-कोला और पेप्सी जैसी कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की हाई डोज लेने से पुरुषों के टेस्टिकल का साइज और टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ सकता है। यही नहीं पुरुषों के हेल्थ के लिए यह इतना कारगर है कि इससे प्रोस्टेट डिसफंक्शन और कैंसर होने का खतरा भी कम हो जाता है। आप सब से रिक्वेस्ट है कि इस तरह की वायरल सोशल मीडिया पोस्ट को पढ़कर विश्वास न करें। इसके चक्कर में अगर फंस गए तो सेहत को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। कई बार इस तरह की रिसर्च मार्केटिंग स्ट्रेटेजी का हिस्सा होती है, ताकि ग्राहक बहकावे में आकर उसे ज्यादा से ज्यादा खरीदें। सवालः कार्बोनेटेड वॉटर होता क्या है? जवाबः आप जिसे क्लब सोडा, सोडा वॉटर, सेल्टजर और फिजी वॉटर कहते हैं वह असल में कार्बोनेटेड वॉटर है। यह वह पानी है जिसे बोतल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस के प्रेशर में भरा जाता है। सेल्टजर पानी के अलावा, सभी तरह के कार्बोनेटेड पानी में आमतौर पर स्वाद को बेहतर बनाने के लिए नमक मिलाया जाता है। कभी-कभी इसमें कुछ मिनिरल्स भी डाले जाता है। सवालः क्या कार्बोनेटेड वॉटर में एसिड होता है? जवाबः कार्बन डाइऑक्साइड और पानी को रिएक्ट करवाया जाता है ताकि कार्बोनिक एसिड का उत्पादन हो सके। यह आपके मुंह में बर्निंग और सनसनाहट वाले सेंसेशन पैदा करता है। इससे कुछ लोग इरिटेट होते हैं और कुछ को इससे अच्छा महसूस होता है। कार्बोनेटेड पानी का पीएच तीन-चार है, जिसका मतलब है कि यह थोड़ा अम्लीय है यानी इसमें एसिड की थोड़ी बहुत मात्रा मौजूद है। सवालः कोल्ड-ड्रिंक्स और कॉर्बोनेटेड वॉटर में अंतर क्या है? जवाबः यह एक ही है। कोल्ड ड्रिंक में आमतौर पर कार्बोनेटेड पानी होता है। इसमें टेस्ट को बढ़ाने के लिए स्वीटनर डाला जाता है। यह कई बार नेचुरल होता है तो कई बार आर्टिफिशियल। सवालः अच्छा क्या कार्बोनेटेड वॉटर या कोल्ड ड्रिंक्स डेली पी सकते हैं? जवाबः गर्मी आते ही लोग कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा पानी पीने लगते हैं। याद रखें, कि यह हाई कार्बोनेटेड ड्रिंक है। इसमें शुगर और कैलोरीज की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए इन्हें रेगुलर पीना या ज्यादा मात्रा में पीना आपको नुकसान देगा ही। सवालः तो क्या कोल्ड-ड्रिंक्स पीने से पुरुषों की सेक्शुअल हेल्थ बेहतर नहीं होती है? जवाबः बिल्कुल नहीं। सेक्शुअल हेल्थ के लिए कोल्ड-ड्रिंक अच्छी चीज नहीं है। लेकिन अगर एक सौ-एक सौ पचास ML तक कभी-कभी पीते हैं तो ये इतना नुकसान नहीं करती है। रोजाना पीने वालों के लिए धीमे जहर की तरह काम करती है। जहां तक चीन में हुई रिसर्च की बात है इस तरह की कोई भी रिसर्च साइंटिफिक नहीं है। आप भूलें नहीं कि इससे पहले इस पर कई साइंटिफिक रिसर्च भी हो चुकी हैं, जिसमें बताया गया है कि ऐसे ड्रिंक्स पीने से मेल और फीमेल दोनों की सेक्स ड्राइव पर काफी गलत असर पड़ता है। साथ ही महिलाओं को बेबी कंसीव करने में भी बहुत प्रॉब्लम होती है। इसलिए मार्केट स्ट्रेटजी के जाल में फंसकर हेल्थ को खराब न करें। सवालः मेल फर्टिलिटी को बढ़ाने और इंप्रूव करने के क्या उपाय हैं? जवाबः रोज हेल्दी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाना खाने से फर्टिलिटी इंप्रूव होती है और स्पर्म काउंट बढ़ता है। जंक और प्रोसेस्ड फूड को अवॉइड करें। एक्सरसाइज रेगुलर करें। जो लोग ओवर वेट हैं वो इस पर कंट्रोल करें। सवालः कार्बोनेटेड वॉटर या कोल्ड ड्रिंक्स के साथ बर्गर, पिज्जा या तला हुआ खाना खाना कितना रिस्की है? जवाबः सवालः एसिडिटी अटैक होने पर लोग कार्बोनेटेड वॉटर या कोल्ड डिंक्स पीते हैं, यह कितना काम करता है? जवाबः जब आप इसे लेते हैं तो गैस थोड़ा सा रिलीज होता है। इसके बाद आपको फॉल्स सेंस ऑफ रिलैक्सेशन होता है। हकीकत में एसिडिटी बढ़ाती है। लंबे समय के लिए हानिकारक है। सवालः लोग कैलोरीज के चक्कर में जीरो कैलोरीज और नो शुगर वाली ड्रिंक पीते हैं, क्या यह वाकई हेल्दी है? जवाबः बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है। मेडिकली सोलह साल से कम उम्र के बच्चों को नो शुगर और जीरो कैलोरी वाली डिंक्स अलाउड नहीं है। बच्चों में किडनी डैमेज के लिए ये जिम्मेदार है। पीने की लत होने पर मेमोरी लॉस की प्रॉब्लम होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
" अतिथि देवो भवः " के लिए प्रसिद्ध हरियाणा प्रदेश का शिक्षा विभाग जहां एक तरफ अतिथि अध्यापकों से छुटकारा पाने का रास्ता तलाश रहा है , वहीं प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत लगभग पन्द्रह हजार अतिथि अध्यापक "मान न मान मै तेरा मेहमान की शैली में आंदोलन का रुख अपनाये हुए हैं । दोंनो की इस रस्साकसी में पिस रहा है बेचारा छात्र । इन पन्द्रह हजार अध्यापकों को विभिन्न संवर्गों में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था । इनको जे बी टी , बीएड तथा पीजीटी अध्यापक के पदों पर नियमित अध्यापकों के समान वेतन देने की बजाए आधे वेतन पर कार्य करवाया जा रहा है । अतिथि अध्यापकों का कहना है कि उनसे नियमित अध्यापकों के बराबर कार्य लिया जा रहा है , परन्तु वेतन आधा दिया जा रहा है ,जबकि माननीय कोटोर्ं द्वारा कर्इ बार समान कार्य समान वेतन के सिद्धांत को मान्यता दी जा चुकी है । हालांकि अतिथि अध्यापकों का मानना है कि वे कम वेतन में भी नियमित अध्यापकों से बेहतर परीक्षा परिणाम दे रहे हैं ,परन्तु उन पर किसी भी समय नौकरी से हटाये जाने की लटकती तलवार के कारण उनका व्यकितगत एवं पारिवारिक जीवन संकट में पड़ गया है । उनकी सांप छछुंदर की गति हो गर्इ है । न नौकरी छोड़ते बनता है और न नौकरी का एक पल का भरोसा है । सरकार द्वारा हाल मे चलार्इ जा रही रेशनेलाइजेशन प्रकि्रया पर अतिथि अध्यापको का आरोप है कि सरकार रेशनेलाइजेशन के नाम पर अतिथि अध्यापकों को नौकरी से वंचित करना चाहती है । उनका कहना है कि सरकार कभी रिकितयों का तथा कभी पात्रता परिक्षाओं का बहाना बनाकर शिक्षा विभाग में अपने जीवन के कीमती आठ वर्ष न्योछावर करने वाले मेहनती अतिथि अध्यापकों को पुनः बेरोजगारों की पंकित में खड़ा करना चाहती है । अतिथि अध्यापक करो या मरो की नीति पर आंदोलन का रास्ता अखितयार किये हुए हैं । उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी नौकरी को स्थार्इ करने की गारंटी नहीं देगी , वे आंदोलन जारी रखेंगें । अतिथि अध्यापक विवाद पर सरकार तथा अध्यापक यूनियनों के पास अपने अपने पक्ष में चाहे कितने ही तर्क क्यो न हों , पर इतना तो सुनिशिचत है कि सरकार की इस ढुलमुल नीति के कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरावट की दिशा में अग्रसर है । यदि सरकार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के योग्य नहीं मानती है और सरकार का आंकलन यह है कि अतिथि अध्यापक स्थायी श्रेणी की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं तो क्यों इतने वर्षों से ऐसे अध्यापकों के माध्यम से प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगाया जाता रहा है ? क्या उन छात्रों का वह काल दोबारा लौटाया जा सकेगा ? यदि सरकार इन अतिथि अध्यापको को " नीम हकीम " मानकर कम वेतन देकर शिक्षा जैसे क्षेत्र में खानापूर्ति कर रही है तो यह सरकार का प्रदेश के छात्रों के साथ विश्वासघात है । और यदि सरकार इन अतिथि अध्यापकों को योग्य मानती है तो क्यो न सरकार इनको नियमित कर शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पड़े स्थानों पर इनको सेवा करने का मौका देना चाहती ? कारण जो भी हो सरकार को हठधर्मिता छोड़कर अपने द्वारा नियुक्त अतिथि अध्यापकों से अतिथि तुल्य सम्मान नहीं तो कम से कम अपने मातहत कर्मचारियों के समान व्यवहार तो करना ही चाहिए । प्रदेश एवं विधार्थियों के हित में यही है कि शीघ्रतम समस्या का सम्मानजनक हल निकाला जाये ताकि सितम्बर माह में मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस सार्थक हो सके ।
" अतिथि देवो भवः " के लिए प्रसिद्ध हरियाणा प्रदेश का शिक्षा विभाग जहां एक तरफ अतिथि अध्यापकों से छुटकारा पाने का रास्ता तलाश रहा है , वहीं प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत लगभग पन्द्रह हजार अतिथि अध्यापक "मान न मान मै तेरा मेहमान की शैली में आंदोलन का रुख अपनाये हुए हैं । दोंनो की इस रस्साकसी में पिस रहा है बेचारा छात्र । इन पन्द्रह हजार अध्यापकों को विभिन्न संवर्गों में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था । इनको जे बी टी , बीएड तथा पीजीटी अध्यापक के पदों पर नियमित अध्यापकों के समान वेतन देने की बजाए आधे वेतन पर कार्य करवाया जा रहा है । अतिथि अध्यापकों का कहना है कि उनसे नियमित अध्यापकों के बराबर कार्य लिया जा रहा है , परन्तु वेतन आधा दिया जा रहा है ,जबकि माननीय कोटोर्ं द्वारा कर्इ बार समान कार्य समान वेतन के सिद्धांत को मान्यता दी जा चुकी है । हालांकि अतिथि अध्यापकों का मानना है कि वे कम वेतन में भी नियमित अध्यापकों से बेहतर परीक्षा परिणाम दे रहे हैं ,परन्तु उन पर किसी भी समय नौकरी से हटाये जाने की लटकती तलवार के कारण उनका व्यकितगत एवं पारिवारिक जीवन संकट में पड़ गया है । उनकी सांप छछुंदर की गति हो गर्इ है । न नौकरी छोड़ते बनता है और न नौकरी का एक पल का भरोसा है । सरकार द्वारा हाल मे चलार्इ जा रही रेशनेलाइजेशन प्रकि्रया पर अतिथि अध्यापको का आरोप है कि सरकार रेशनेलाइजेशन के नाम पर अतिथि अध्यापकों को नौकरी से वंचित करना चाहती है । उनका कहना है कि सरकार कभी रिकितयों का तथा कभी पात्रता परिक्षाओं का बहाना बनाकर शिक्षा विभाग में अपने जीवन के कीमती आठ वर्ष न्योछावर करने वाले मेहनती अतिथि अध्यापकों को पुनः बेरोजगारों की पंकित में खड़ा करना चाहती है । अतिथि अध्यापक करो या मरो की नीति पर आंदोलन का रास्ता अखितयार किये हुए हैं । उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी नौकरी को स्थार्इ करने की गारंटी नहीं देगी , वे आंदोलन जारी रखेंगें । अतिथि अध्यापक विवाद पर सरकार तथा अध्यापक यूनियनों के पास अपने अपने पक्ष में चाहे कितने ही तर्क क्यो न हों , पर इतना तो सुनिशिचत है कि सरकार की इस ढुलमुल नीति के कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरावट की दिशा में अग्रसर है । यदि सरकार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के योग्य नहीं मानती है और सरकार का आंकलन यह है कि अतिथि अध्यापक स्थायी श्रेणी की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं तो क्यों इतने वर्षों से ऐसे अध्यापकों के माध्यम से प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगाया जाता रहा है ? क्या उन छात्रों का वह काल दोबारा लौटाया जा सकेगा ? यदि सरकार इन अतिथि अध्यापको को " नीम हकीम " मानकर कम वेतन देकर शिक्षा जैसे क्षेत्र में खानापूर्ति कर रही है तो यह सरकार का प्रदेश के छात्रों के साथ विश्वासघात है । और यदि सरकार इन अतिथि अध्यापकों को योग्य मानती है तो क्यो न सरकार इनको नियमित कर शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पड़े स्थानों पर इनको सेवा करने का मौका देना चाहती ? कारण जो भी हो सरकार को हठधर्मिता छोड़कर अपने द्वारा नियुक्त अतिथि अध्यापकों से अतिथि तुल्य सम्मान नहीं तो कम से कम अपने मातहत कर्मचारियों के समान व्यवहार तो करना ही चाहिए । प्रदेश एवं विधार्थियों के हित में यही है कि शीघ्रतम समस्या का सम्मानजनक हल निकाला जाये ताकि सितम्बर माह में मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस सार्थक हो सके ।
तेहरान : अमेरिकी हवाई हमले में मारे गए ईरान के सैन्य कमांडर कसिम सुलेमानी की यहां केरमन शहर में मंगलवार को अंतिम शव यात्रा के दौरान भगदड़ मचने से कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई और 48 अनय घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। इराक की राजधानी बगदाद में अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास पिछले शुक्रवार को हुए अमेरिकी हवाई हमले में सुलेमानी की मौत हो गई थी। अलजजीरा के अनुसार, ईरान के कुद्स फोर्स के प्रमुख सुलेमानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। ऑनलाइन पोस्ट किए गए शुरुआती वीडियो में लोगों को सड़क पर असहाय पड़े और अन्य कई लोगों को रोते हुए और उनकी सहायता करने का प्रयास करते हुए देखा गया है। ईरान की आपात चिकित्सा सेवा के प्रमुख पीरहुसैन कौलीवंद ने इससे पहले फोन पर देश की सरकारी टीवी से भगदड़ की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से अंतिम संस्कार के दौरान भगदड़ के कारण हमारे कुछ हमवतन साथी घायल हो गए और कुछ लोगों की मौत हो गई है। " तेहरान में इससे एक दिन पहले सड़कों पर जुलूस निकला था, जिसमें लगभग 10 लाख लोग शामिल हुए थे। इस दौरान तेहरान यूनिवर्सिटी के सामने नमाजे जनाजा की अगुआई कर रहे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी सबके सामने रोते हुए देखे गए थे। जैनब ने कहा कि अमेरिका व यहूदीवाद (जियोनिज्म) को समझना चाहिए कि मेरे पिता की शहादत ने प्रतिरोध के मोर्चे पर ज्यादा लोगों को जागरूक किया है। यह उनके लिए जीवन को दुस्वप्न बना देगा। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की मौजूदगी की संभावना के कारण यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तैनाती की गई थी और निवासियों को सड़कों से अपने वाहनों को हटाने के लिए पहले ही कह दिया गया था। खामनेई ने सुलेमानी की नमाज-ए-जनाजा पढ़ाई। उच्च रैकिंग के सरकारी व सैन्य अधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया।
तेहरान : अमेरिकी हवाई हमले में मारे गए ईरान के सैन्य कमांडर कसिम सुलेमानी की यहां केरमन शहर में मंगलवार को अंतिम शव यात्रा के दौरान भगदड़ मचने से कम से कम पैंतीस लोगों की मौत हो गई और अड़तालीस अनय घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। इराक की राजधानी बगदाद में अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास पिछले शुक्रवार को हुए अमेरिकी हवाई हमले में सुलेमानी की मौत हो गई थी। अलजजीरा के अनुसार, ईरान के कुद्स फोर्स के प्रमुख सुलेमानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। ऑनलाइन पोस्ट किए गए शुरुआती वीडियो में लोगों को सड़क पर असहाय पड़े और अन्य कई लोगों को रोते हुए और उनकी सहायता करने का प्रयास करते हुए देखा गया है। ईरान की आपात चिकित्सा सेवा के प्रमुख पीरहुसैन कौलीवंद ने इससे पहले फोन पर देश की सरकारी टीवी से भगदड़ की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से अंतिम संस्कार के दौरान भगदड़ के कारण हमारे कुछ हमवतन साथी घायल हो गए और कुछ लोगों की मौत हो गई है। " तेहरान में इससे एक दिन पहले सड़कों पर जुलूस निकला था, जिसमें लगभग दस लाख लोग शामिल हुए थे। इस दौरान तेहरान यूनिवर्सिटी के सामने नमाजे जनाजा की अगुआई कर रहे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी सबके सामने रोते हुए देखे गए थे। जैनब ने कहा कि अमेरिका व यहूदीवाद को समझना चाहिए कि मेरे पिता की शहादत ने प्रतिरोध के मोर्चे पर ज्यादा लोगों को जागरूक किया है। यह उनके लिए जीवन को दुस्वप्न बना देगा। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की मौजूदगी की संभावना के कारण यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तैनाती की गई थी और निवासियों को सड़कों से अपने वाहनों को हटाने के लिए पहले ही कह दिया गया था। खामनेई ने सुलेमानी की नमाज-ए-जनाजा पढ़ाई। उच्च रैकिंग के सरकारी व सैन्य अधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया।
भूत पुलिस (2021) *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
भूत पुलिस *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
ज्योति प्रसार व्याख्यान मे उन्होंने विधवा विवाह का विरोध नहीं किया। बल्कि अपने पत्र मे बावू सूरजभान और घावू भूमनलाल एम० ए० वकील के लेख विधवा-विवाह के पक्ष मे बराबर निकाले । चावू ऋषभदास विधवा-विवाह के आन्दोलन को असामयिक ( Untisnely ) समझते थे और उनका विचार था, कि विधवाओं की वृद्धि, वृद्ध-विवाह, बाल-विवाह आदि कारणों को रोका जाय तथा इस प्रश्न पर समाज की शक्ति को खराब न किया जाय। बाल-विधवाओं के विवाह के वे हृदय से पक्ष में थे, पर बाबू ऋषभदास जी ने अपने इस विचार को भी कभी साहस करके प्रगट नहीं किया, वरन् विधवा-विवाह का विरोध किया । बाबू ऋषभदास के ऐसे लेख भी 'जैन प्रदीप' मे बराबर निकलते रहे । बाबू ज्योति प्रसाद का ढंग और कार्य-नीति भी कुछ. ऐसी ही रही। उन्होंने भी बार-बार विधवा-वृद्धि के कारणों को दूर करने के लिये लिखा । पर वावू ऋषभदास के समान उन्होंने विधवा विवाह का विरोध कभी नहीं किया। बावू के चरित्र मे एक ख़ास बात 'लोकेपणा' थी यानी जनता मे प्रिय तथा प्रसिद्ध बनने की इच्छा थी और विधवा- बवाह का समर्थन या विरोध करने से उनके सच्चे भाव तो प्रगट हो जाते, पर वे एक पक्ष को अवश्य खो बैठते । यही उनकी कमजोरी थी। मैं इसको नीति कहने को तैयार नहीं, इसे उनकी बुजदिली कहना, अधिक ठीक होगा । उनके इस दुतर्फा व्यवहार के कारण दोनों पक्षों मे वे अप्रिय से बन गए। " ६, ७ मई सन १६२७ को. 'सनातन जैन, समाज' का प्रथम i www वार्षिक अधिवेशन घावू सूरजभान जी के सभापतित्व में अकोला में हुआ था । बाबू ज्योतीप्रसाद इस में जाना चाहते थे, परन्तु स्वास्थ्य अच्छा न होने के कारण वे आकोला की लम्बी यात्रा करने के योग्य न थे। पर सनातन जैन समाज के बारे में प्रदीप में उन का स्वलिखित नोट उन के हार्दिक भावों को अवश्य प्रकट करता है । उसका कुछ अंश पाठक देखेंः-"सनातन जैन समाज का उद्देश्य केवल विधवा विवाह का प्रचार करना ही नहीं है, बल्कि जैनधर्म का सच्चे रूप में प्रचार करना और समाज की हर तरह से चहवूदी ( उन्नति) और बहतराई के साधनो पर अमल करना भी है । सनातन जैन समाज का काम अगर इसही रफ्तार से चलता रहा, तो आशा है कि यह जरूर जैन समाज में समय के अनुसार परिवर्तन करदेगा । अगर समय के अनुसार परिवर्तन हो गया, तब जैन धर्म का सितारा भारत वर्षके आकाश मण्डल पर चमकता हुआ नजर आयेगा। इस सभा का मेम्बर ( सदस्य ) हरएक जैनी को होना चाहिये और सच्चे हृदय से काम करना चाहिए। ब्रह्मचारी जी ( त्र० सीतल प्रसाद जी ) अपने प्रयत्न मे सफल हों, ऐसी हमारी भावना है। बाबू सूरजभान सभापति का भाषण हमे मिल गया है । बडा ही दलेरी के साथ लिखा गया है । हमारा इरादा है, कि इस का उर्दु अनुवाद विचार के उद्देश्य से पाठकों के रूबरू पेश करे । " पर सन् १९२८ की २३ जनवरी को उन्होंने मुझे एक पत्र लिखा जिसमे एक वाक्य यह है "विधवा विवाह का मजमून जैन प्रदीप वर्ष १७, अंक ५, पृष्ट ३४ । (लेख) जैन प्रदीप में शाया ( प्रकाशित ) न करूंगा। इस के लिए अभी मुफी चाहता हूँ ।" इसके बाद जैन प्रदीप मे विधवा विवाह के समर्थन या विरोध मे मे कोई लेख नहीं मिलता। एक बार फिर इस प्रश्न पर कुछ लेख लिखवाने का आपका विचार हुआ था। परन्तु फिर जैन प्रदीप ही बन्द हो गया । ऊपर की बातों का यही सार है कि आप विधवा विवाह पक्ष मे जरूर थे, परन्तु प्रकट रूप से उसके अनुकूल बोलने, लिखने या अपने विचारों को अमली जामा पहिनने मे हिचकते थे। और अपनी किसी प्रतिष्ठा मे धक्का लगने की जोखम को उठाने को तैयार नहीं थे। ११ विरोध सुधार का मार्ग विरोध के दांतों मे से होकर गुजरता है। संसार में कौन ऐसा सुधार कार्य है, जिसका हंसी मजाक न उड़ाया गया हो और जिसका विरोध और दमन न किया गया हो शक्ति- पूर्ण प्रचार और हितकर प्रमाणित होने पर उन्ही सुधारों 1 को जनता ने देर या सवेर मे अपनाया है। जैन समाज के अन्य सुधारकों के समान बाबू ज्योतिप्रसाद भी विरोध से न बच सके। मध्यम मार्ग को ग्रहण करके और प्रेम पूर्ण स्वभाव रखते हुए भी, आपका सम्बन्ध बाबू सूरजभान की पार्टी से होने तथा वैसे ही विचारों का नरम शब्दो मे प्रचार करने के कारण आपका विरोध होना भी अनिवार्य था । "धर्म चला" "धर्म डूवा" "धर्म को मिटाया जा रहा है" इस प्रकार चिल्लाने वाले पण्डित दल की नजर आप पर कैसे न पड़ती १ यदि आपके पत्र हिन्दी मे होते, तो मेरे विचार में यह विरोध और तीव्र हो जाता। एक बार सम्पादक हिंदी जैन गज़ट ने आपकी समालोचना करते हुए आपको 'नास्तिक' लिख दियाथा। आपने पण्डित जी को रजिस्टर्ड नोटिस देकर नास्तिक होने का प्रमाण मांगा था । सहारनपुर मे जैनबालयोधिनी सभा के जलसे पर एक प्रस्ताव के द्वारा जैन प्रदीप में धर्म विरुद्ध (1) निकलने वाले लेखों का जचाव देने के लिये 'जैन पत्र समालोचक' कमेटी स्थापित की गई थी । जिसके कार्यकर्ता सहारनपुर के बडे बडे प्रतिष्ठित आदमी थे । पर इस सभा ने भी जैन प्रदीपक के किसी लेख का उत्तर किसी जैन पत्र या ट्रेक्टद्वारा नहीं दिया । हिंदी जैन गजट क ३५ (२३ जूलाई सन् १६२३ ) मे उसके प्रकाशक ने "पजाब प्रान्त के जैन भाई ध्यान दे ।" लेख मे पंजाब और सहारनपुर, फीरोजपुर, मेरठ आदि के जैनियों से अपील की थी, कि वे जैन प्रदीप को न पढौं क्योंकि यह (पत्र) जैन धर्म के विरुद्ध लेख लिखता है और उनके ( बाबू ज्योतिप्रसाद के ) विचार धर्म से गिरे हुये हैं x । इस प्रकार के दमन मय प्रचार से जैन समाज के कितने पत्रों और कार्यकर्ताओं को दवाने का प्रयत्न किया गया है, यह लिखते हुये हृदय कापता है । इस प्रकार के आन्दोलन का न बाबू ज्योतिप्रसाद पर और न जैन प्रदीप पर कुछ प्रभाव पड़ा, कारण कि जैन प्रदीप के पाठक अधिक उन्नति शील विचारों वाले थे। इस विरोध के बाद भी 'प्रदीप' सात आठ वर्ष चलता रहा और बा० ज्योति प्रसाद जैन समाज की सभाओं में सम्मानित रूप से रहे। विरोध और बायकाट की छाप लगजाने से निसन्देह आपका नाम सुधारकों की श्रेणी मे कुछ ऊ चा होगया है। जैन प्रदीप वपे १०, अक २१ - २२, पृष्ट ३१ । x जैन प्रदीप वर्ष ११, १२-१३, पृष्ठ ६
ज्योति प्रसार व्याख्यान मे उन्होंने विधवा विवाह का विरोध नहीं किया। बल्कि अपने पत्र मे बावू सूरजभान और घावू भूमनलाल एमशून्य एशून्य वकील के लेख विधवा-विवाह के पक्ष मे बराबर निकाले । चावू ऋषभदास विधवा-विवाह के आन्दोलन को असामयिक समझते थे और उनका विचार था, कि विधवाओं की वृद्धि, वृद्ध-विवाह, बाल-विवाह आदि कारणों को रोका जाय तथा इस प्रश्न पर समाज की शक्ति को खराब न किया जाय। बाल-विधवाओं के विवाह के वे हृदय से पक्ष में थे, पर बाबू ऋषभदास जी ने अपने इस विचार को भी कभी साहस करके प्रगट नहीं किया, वरन् विधवा-विवाह का विरोध किया । बाबू ऋषभदास के ऐसे लेख भी 'जैन प्रदीप' मे बराबर निकलते रहे । बाबू ज्योति प्रसाद का ढंग और कार्य-नीति भी कुछ. ऐसी ही रही। उन्होंने भी बार-बार विधवा-वृद्धि के कारणों को दूर करने के लिये लिखा । पर वावू ऋषभदास के समान उन्होंने विधवा विवाह का विरोध कभी नहीं किया। बावू के चरित्र मे एक ख़ास बात 'लोकेपणा' थी यानी जनता मे प्रिय तथा प्रसिद्ध बनने की इच्छा थी और विधवा- बवाह का समर्थन या विरोध करने से उनके सच्चे भाव तो प्रगट हो जाते, पर वे एक पक्ष को अवश्य खो बैठते । यही उनकी कमजोरी थी। मैं इसको नीति कहने को तैयार नहीं, इसे उनकी बुजदिली कहना, अधिक ठीक होगा । उनके इस दुतर्फा व्यवहार के कारण दोनों पक्षों मे वे अप्रिय से बन गए। " छः, सात मई सन एक हज़ार छः सौ सत्ताईस को. 'सनातन जैन, समाज' का प्रथम i www वार्षिक अधिवेशन घावू सूरजभान जी के सभापतित्व में अकोला में हुआ था । बाबू ज्योतीप्रसाद इस में जाना चाहते थे, परन्तु स्वास्थ्य अच्छा न होने के कारण वे आकोला की लम्बी यात्रा करने के योग्य न थे। पर सनातन जैन समाज के बारे में प्रदीप में उन का स्वलिखित नोट उन के हार्दिक भावों को अवश्य प्रकट करता है । उसका कुछ अंश पाठक देखेंः-"सनातन जैन समाज का उद्देश्य केवल विधवा विवाह का प्रचार करना ही नहीं है, बल्कि जैनधर्म का सच्चे रूप में प्रचार करना और समाज की हर तरह से चहवूदी और बहतराई के साधनो पर अमल करना भी है । सनातन जैन समाज का काम अगर इसही रफ्तार से चलता रहा, तो आशा है कि यह जरूर जैन समाज में समय के अनुसार परिवर्तन करदेगा । अगर समय के अनुसार परिवर्तन हो गया, तब जैन धर्म का सितारा भारत वर्षके आकाश मण्डल पर चमकता हुआ नजर आयेगा। इस सभा का मेम्बर हरएक जैनी को होना चाहिये और सच्चे हृदय से काम करना चाहिए। ब्रह्मचारी जी अपने प्रयत्न मे सफल हों, ऐसी हमारी भावना है। बाबू सूरजभान सभापति का भाषण हमे मिल गया है । बडा ही दलेरी के साथ लिखा गया है । हमारा इरादा है, कि इस का उर्दु अनुवाद विचार के उद्देश्य से पाठकों के रूबरू पेश करे । " पर सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस की तेईस जनवरी को उन्होंने मुझे एक पत्र लिखा जिसमे एक वाक्य यह है "विधवा विवाह का मजमून जैन प्रदीप वर्ष सत्रह, अंक पाँच, पृष्ट चौंतीस । जैन प्रदीप में शाया न करूंगा। इस के लिए अभी मुफी चाहता हूँ ।" इसके बाद जैन प्रदीप मे विधवा विवाह के समर्थन या विरोध मे मे कोई लेख नहीं मिलता। एक बार फिर इस प्रश्न पर कुछ लेख लिखवाने का आपका विचार हुआ था। परन्तु फिर जैन प्रदीप ही बन्द हो गया । ऊपर की बातों का यही सार है कि आप विधवा विवाह पक्ष मे जरूर थे, परन्तु प्रकट रूप से उसके अनुकूल बोलने, लिखने या अपने विचारों को अमली जामा पहिनने मे हिचकते थे। और अपनी किसी प्रतिष्ठा मे धक्का लगने की जोखम को उठाने को तैयार नहीं थे। ग्यारह विरोध सुधार का मार्ग विरोध के दांतों मे से होकर गुजरता है। संसार में कौन ऐसा सुधार कार्य है, जिसका हंसी मजाक न उड़ाया गया हो और जिसका विरोध और दमन न किया गया हो शक्ति- पूर्ण प्रचार और हितकर प्रमाणित होने पर उन्ही सुधारों एक को जनता ने देर या सवेर मे अपनाया है। जैन समाज के अन्य सुधारकों के समान बाबू ज्योतिप्रसाद भी विरोध से न बच सके। मध्यम मार्ग को ग्रहण करके और प्रेम पूर्ण स्वभाव रखते हुए भी, आपका सम्बन्ध बाबू सूरजभान की पार्टी से होने तथा वैसे ही विचारों का नरम शब्दो मे प्रचार करने के कारण आपका विरोध होना भी अनिवार्य था । "धर्म चला" "धर्म डूवा" "धर्म को मिटाया जा रहा है" इस प्रकार चिल्लाने वाले पण्डित दल की नजर आप पर कैसे न पड़ती एक यदि आपके पत्र हिन्दी मे होते, तो मेरे विचार में यह विरोध और तीव्र हो जाता। एक बार सम्पादक हिंदी जैन गज़ट ने आपकी समालोचना करते हुए आपको 'नास्तिक' लिख दियाथा। आपने पण्डित जी को रजिस्टर्ड नोटिस देकर नास्तिक होने का प्रमाण मांगा था । सहारनपुर मे जैनबालयोधिनी सभा के जलसे पर एक प्रस्ताव के द्वारा जैन प्रदीप में धर्म विरुद्ध निकलने वाले लेखों का जचाव देने के लिये 'जैन पत्र समालोचक' कमेटी स्थापित की गई थी । जिसके कार्यकर्ता सहारनपुर के बडे बडे प्रतिष्ठित आदमी थे । पर इस सभा ने भी जैन प्रदीपक के किसी लेख का उत्तर किसी जैन पत्र या ट्रेक्टद्वारा नहीं दिया । हिंदी जैन गजट क पैंतीस मे उसके प्रकाशक ने "पजाब प्रान्त के जैन भाई ध्यान दे ।" लेख मे पंजाब और सहारनपुर, फीरोजपुर, मेरठ आदि के जैनियों से अपील की थी, कि वे जैन प्रदीप को न पढौं क्योंकि यह जैन धर्म के विरुद्ध लेख लिखता है और उनके विचार धर्म से गिरे हुये हैं x । इस प्रकार के दमन मय प्रचार से जैन समाज के कितने पत्रों और कार्यकर्ताओं को दवाने का प्रयत्न किया गया है, यह लिखते हुये हृदय कापता है । इस प्रकार के आन्दोलन का न बाबू ज्योतिप्रसाद पर और न जैन प्रदीप पर कुछ प्रभाव पड़ा, कारण कि जैन प्रदीप के पाठक अधिक उन्नति शील विचारों वाले थे। इस विरोध के बाद भी 'प्रदीप' सात आठ वर्ष चलता रहा और बाशून्य ज्योति प्रसाद जैन समाज की सभाओं में सम्मानित रूप से रहे। विरोध और बायकाट की छाप लगजाने से निसन्देह आपका नाम सुधारकों की श्रेणी मे कुछ ऊ चा होगया है। जैन प्रदीप वपे दस, अक इक्कीस - बाईस, पृष्ट इकतीस । x जैन प्रदीप वर्ष ग्यारह, बारह-तेरह, पृष्ठ छः
नई दिल्ली : क्या कोई पिता अपनी ही बेटी को जिंदा मिट्टी में गाड़ सकता है? नहीं न, लेकिन एक पिता ने अपनी बेटी के साथ कुछ ऐसा ही किया है. बेटी कॉलेज से जब घर आई, तो उसके रिश्तेदारों ने उसे मिट्टी में गाड़ने के लिए कहा. उसके पिता ने ठीक वैसा ही किया और अपने घर के पास ही बगीचे में गाड़ दिया. हैरान करने वाली बात ये थी कि उसके आस-पास सभी लोग चुपचाप देखते रहे. अगर इतना पढ़कर आपका गुस्सा बढ़ गया, तो जरा अपने गुस्से पर काबू करिये और शांति से जानें कि आखिर ऐसा हुआ क्यों और पिता ने बेटी को मिट्टी में गाड़ा क्यों? दरअसल, जिस लड़की को पिता ने मिट्टी में गाड़ा है, उसका नाम ऐना बेलेस्ट्रोस है, जो 18 साल की है. उसे उसके पिता ने तीन दिन तक अपने ही बगीचे में गाड़े रखा. लेकिन सिर ऊपर था. मतलब गले तक उसकी मिट्टी थी. बेटी को मिट्टी में गले तक गाड़ने की वजह ये थी कि कॉलेज से लौटते वक्त लड़की बिजली की चपेट में आ गई थी. जैसे ही घर आई, उसकी हालत खराब लग रही थी. तभी उसके परिवार वालों ने रिश्तेदारों के एक इशारे पर उसे गाड़ दिया. उसे डॉक्टर के पास ले जाने से बेहतर रिश्तेदारों ने उसे मिट्टी में गाड़ना ही बेहतर समझा. जी हां, तीन दिन तक उस लड़की को मिट्टी में गाड़ कर ट्रीटमेंट किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि उनका मानना था कि बिजली के चपेट में आए हुए इंसान को अगर मिट्टी में कुछ समय के लिए गाड़े रखो तो सारा दर्द गायब हो जाता है और इंसान के बचने के चांसेज ज्यादा होते हैं क्योंकि मिट्टी से एनर्जी मिलती है.
नई दिल्ली : क्या कोई पिता अपनी ही बेटी को जिंदा मिट्टी में गाड़ सकता है? नहीं न, लेकिन एक पिता ने अपनी बेटी के साथ कुछ ऐसा ही किया है. बेटी कॉलेज से जब घर आई, तो उसके रिश्तेदारों ने उसे मिट्टी में गाड़ने के लिए कहा. उसके पिता ने ठीक वैसा ही किया और अपने घर के पास ही बगीचे में गाड़ दिया. हैरान करने वाली बात ये थी कि उसके आस-पास सभी लोग चुपचाप देखते रहे. अगर इतना पढ़कर आपका गुस्सा बढ़ गया, तो जरा अपने गुस्से पर काबू करिये और शांति से जानें कि आखिर ऐसा हुआ क्यों और पिता ने बेटी को मिट्टी में गाड़ा क्यों? दरअसल, जिस लड़की को पिता ने मिट्टी में गाड़ा है, उसका नाम ऐना बेलेस्ट्रोस है, जो अट्ठारह साल की है. उसे उसके पिता ने तीन दिन तक अपने ही बगीचे में गाड़े रखा. लेकिन सिर ऊपर था. मतलब गले तक उसकी मिट्टी थी. बेटी को मिट्टी में गले तक गाड़ने की वजह ये थी कि कॉलेज से लौटते वक्त लड़की बिजली की चपेट में आ गई थी. जैसे ही घर आई, उसकी हालत खराब लग रही थी. तभी उसके परिवार वालों ने रिश्तेदारों के एक इशारे पर उसे गाड़ दिया. उसे डॉक्टर के पास ले जाने से बेहतर रिश्तेदारों ने उसे मिट्टी में गाड़ना ही बेहतर समझा. जी हां, तीन दिन तक उस लड़की को मिट्टी में गाड़ कर ट्रीटमेंट किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि उनका मानना था कि बिजली के चपेट में आए हुए इंसान को अगर मिट्टी में कुछ समय के लिए गाड़े रखो तो सारा दर्द गायब हो जाता है और इंसान के बचने के चांसेज ज्यादा होते हैं क्योंकि मिट्टी से एनर्जी मिलती है.
चतुर्दशी, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, पष्ठी तथा द्वादशी इन तिथियों को पक्षरन्त्र तिथियाँ कहते हैं। इनमें विवाह करने से स्त्री विधवा होती है, उपनयन करने से वटु संस्कारहीन होता है, सीमन्त करने से गर्भ का नाश होता है तथा अन्नप्राशन करने से मरण होता है। इसमें जो कुछ कार्य किया जाता है उसका नाश होता है ॥ ४५-४६ ॥ एताषु वसुनन्देन्दुतत्त्वदिक्शरसम्मिताः । हेयाः स्युरादिमा नाङ्यः क्रमाच्छेषास्तु शोभनाः ॥ ४७ ॥ चतुर्थी को ८, षष्ठो को ३, अष्टमी को १४, नवमी को २५, द्वादशी को १० तथा चतुर्दशी को आदि की ५ घड़ियाँ वर्जित हैं शेष शुभ हैं ॥ ४७ ॥ चापान्त्यगे गोघटगे पतंगे कर्काजगे स्त्रीमिथुनस्थिते च । सिंहालिगे नक्रघटे समाः स्यु स्तिथ्यो द्वितीयाप्रमुखाश्च दग्धाः ॥ ४८ ॥ दग्धातिथिचक्रम् संक्रांति घन मीन वृ. कुं. कर्क मेप कं. मि. सिं.वृ. म. तु. धन, मीन आदि राशियों में सूर्य के स्थित रहते हुए द्वितीया आदि सम तिथियाँ दग्धसंज्ञक होती हैं अर्थात् धन, मीन के सूर्यो में द्वितीया; वृष, कुम्भ के सूर्यो में चतुर्थी, कर्क, मेष के सूर्यों में
चतुर्दशी, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, पष्ठी तथा द्वादशी इन तिथियों को पक्षरन्त्र तिथियाँ कहते हैं। इनमें विवाह करने से स्त्री विधवा होती है, उपनयन करने से वटु संस्कारहीन होता है, सीमन्त करने से गर्भ का नाश होता है तथा अन्नप्राशन करने से मरण होता है। इसमें जो कुछ कार्य किया जाता है उसका नाश होता है ॥ पैंतालीस-छियालीस ॥ एताषु वसुनन्देन्दुतत्त्वदिक्शरसम्मिताः । हेयाः स्युरादिमा नाङ्यः क्रमाच्छेषास्तु शोभनाः ॥ सैंतालीस ॥ चतुर्थी को आठ, षष्ठो को तीन, अष्टमी को चौदह, नवमी को पच्चीस, द्वादशी को दस तथा चतुर्दशी को आदि की पाँच घड़ियाँ वर्जित हैं शेष शुभ हैं ॥ सैंतालीस ॥ चापान्त्यगे गोघटगे पतंगे कर्काजगे स्त्रीमिथुनस्थिते च । सिंहालिगे नक्रघटे समाः स्यु स्तिथ्यो द्वितीयाप्रमुखाश्च दग्धाः ॥ अड़तालीस ॥ दग्धातिथिचक्रम् संक्रांति घन मीन वृ. कुं. कर्क मेप कं. मि. सिं.वृ. म. तु. धन, मीन आदि राशियों में सूर्य के स्थित रहते हुए द्वितीया आदि सम तिथियाँ दग्धसंज्ञक होती हैं अर्थात् धन, मीन के सूर्यो में द्वितीया; वृष, कुम्भ के सूर्यो में चतुर्थी, कर्क, मेष के सूर्यों में
प्रयागराज. एक बार फिर सूरज की किरणों ने रफ्तार पकड़ी है. आनेवाला सप्ताह भीषण गर्मी (scorching heat) के साथ लू से भरा होगा. ऐसे में जरूरी कार्य के लिए ही घर से बाहर निकलें. मौसम विभाग (Meteorological Department) ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों को हिदायत भी दी है. आईएमडी की मानें तो पारा 46 डिग्री के पार जा सकता है. बीते सोमवार को उमस भरे मौसम ने लोगों को खूब छकाया. शाम 5 बजे के बाद भी घर से बाहर निकलने पर पसीना चलता रहा. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मंगलवार से तापमान (temperature) में बढ़ोतरी का दौर शुरू हो जाएगा. बुधवार से लेकर शुक्रवार तक लू का प्रकोप रह सकता है. इन 3 दिनों के भीतर तापमान 44 से 46 डिग्री तक जाने के आसार हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के प्रोफेसर प्रोफेसर एआर सिद्दीकी ने बताया कि गर्म हवा की वजह से हवा में मौजूद नमी गायब हो जाएगी. 11 जून के बाद पूरब से चलने वाली हवा नमी साथ लेकर आएगी. इसकी वजह से उमस में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और आनेवाली गर्मी से जूझना भी पड़ सकता है. सोमवार को अधिकतम तापमान 42. 3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27. 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं आर्द्रता की बात करें तो या 28 फीसद दर्ज की गई.
प्रयागराज. एक बार फिर सूरज की किरणों ने रफ्तार पकड़ी है. आनेवाला सप्ताह भीषण गर्मी के साथ लू से भरा होगा. ऐसे में जरूरी कार्य के लिए ही घर से बाहर निकलें. मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों को हिदायत भी दी है. आईएमडी की मानें तो पारा छियालीस डिग्री के पार जा सकता है. बीते सोमवार को उमस भरे मौसम ने लोगों को खूब छकाया. शाम पाँच बजे के बाद भी घर से बाहर निकलने पर पसीना चलता रहा. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मंगलवार से तापमान में बढ़ोतरी का दौर शुरू हो जाएगा. बुधवार से लेकर शुक्रवार तक लू का प्रकोप रह सकता है. इन तीन दिनों के भीतर तापमान चौंतालीस से छियालीस डिग्री तक जाने के आसार हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के प्रोफेसर प्रोफेसर एआर सिद्दीकी ने बताया कि गर्म हवा की वजह से हवा में मौजूद नमी गायब हो जाएगी. ग्यारह जून के बाद पूरब से चलने वाली हवा नमी साथ लेकर आएगी. इसकी वजह से उमस में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और आनेवाली गर्मी से जूझना भी पड़ सकता है. सोमवार को अधिकतम तापमान बयालीस. तीन डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सत्ताईस. चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं आर्द्रता की बात करें तो या अट्ठाईस फीसद दर्ज की गई.
कुंवर कहे रख सामने, दर्पण कला सिखाय भेज दिया नृप खुश हुआ, फिर एक पत्र लिखाय ।। हुक्म हुआ वर वालु के, डोरे बट भिजवाय । कुवर नमूना की लिखी, सुण विस्मित नर राय ।।६।। (तर्ज-सखी छन्द) एक दिन फिर हुक्म सुनाया, नन्दी ग्राम का कूप मंगाया। सुन के लोक सभी घबराया, चली अभय कुंवर पै आया। कुंवर कहे तुम क्यों मन शंको, तुमरो बाल न करसी बांको । लिखो खेडा का कूप भड़कना, यह नहीं आता इसीसे है लिखना ।। एक कूप को भेजो वहां से उसे बांध के ठेले यहां से । बांची पत्र हुआ नृप राजी, जानी अभय कुंवर की बाजी ।।१०।। (तर्ज-मिलत) बुद्धिवंता के संकट टाले, पर उपकारी कुंवर सुजान। बिना अग्नि से खीर बनाके, भेजो हुक्म ऐसा वरणा सुन घबराने, कुंबर से अर्ज करे कैसा करना ।। अच्छे चांवल भीजा जलमें ले बरतन में भरना । गल जाने से, उसे सुखे चूने पे जा धरना ।।११।। (तर्ज - शेर) पीछे से दूध मिलाय के तैयार कर भेजी त्वर । चकित चित राजा विचारे, कुंवर बुद्धि से भरा ।। भेजा सुभट को देखिये कैसा जो लड़का हैं वहाँ । आते सुभट को देख चढ़ गये, जांबू तरु ऊपर जहां ।।१२।। यही प्रतिज्ञा मेरी पहिले, मुझे करो उसके बाद बताऊंगी मैं, बातें पूर्ण करूंगा मैं प्रण तेरा, रख पूरा अब मैं कहूँ परिचय अपना की युवति स्वीकार । सविस्तार ।।५६ ।। विश्वास । अरदास ।।६० ।। कहते रुपवती मुझ को मैं, पुरोहित की विद्याबल से किया सभी यह, चॉदी का इच्छित रजतमयी रचने की है, शक्ति भरपूर । अब तो प्रियतम आप, प्रिया मै हुई, करी भंजूर ।।६२ ।। सुख से रहे वहां पर दोनों बहुत परस्पर हेत। रजत काम करने का कीना, दंड मार संकेत ।।६३।। प्यारी तुम्हें पता हो तो बतलाओ, उसका धाम । जो कर सकती हो तेरे सम, सब सोने का काम । ॥६४ ।। नाथ ! पधारो दक्षिण मे मही अति दूर नजदीक । महल नजर आयेगा आगे, सुवर्ण का कनकावती सहेली मेरी, अद्भुत रूप पद्मसेन प्रयाण किया है, सुन प्यारी मुख सीधा उसी महल में पहुँचा, जिसमें मंजिल सात । प्रतिज्ञा पूरण करने की, कही कडकावती बात ।।६७ ।। सचिव सुता मैं जानुं विद्या, कंचन का निर्माण । करूं आपकी इच्छा जैसे, दंडा मार निशान ।।६८ ।। पद्मसेन खुश होकर बोला, वाक्य तेरा स्वीकार । इच्दित काम करे कोई ऐसी है मुक्तावली बार ।।६६ ।। (तर्ज-द्रोण ) कहे सुभट जम्बू फल पक्के हमें भी खिलाओ, म. पूछे गरम की शीतलजी । दो गरमा गरमी कहे मसल के डाले तरु तलजी, दे फूँक करी रज दूर सुभट फल खावे । महाराज बहुत क्या है गरमाईजी । पहचान कुंवर है यही गया दिलमें शरमाईजी ।।१३।। कीना दिलमें कुंवर ख्याल छलना नगर जन भूपाल, भाडे करके रथ विशाल संग सुभट लिया । दासी चाकर है भाड़े, रथ के अन्दर एक बैसाड़े, सरहद वख्त कोल कर ठाडे; दाम चूका दिया ।। १४ ।। बनके आये जवेरी सेठ, भूषण रत्न मणि के रेठ, पहुॅचे आय जवेरी पेठ, मिले बांह को पसार । पूछे कहो माल क्या लेना चाहिये रत्न जड़ित का गहणा । डब्बे खोल परख लेना, कहे कुंवर विचार ।।१५।। लेना जंचाय माल यह विचार हमारा । रथ देख कहे सेठ भरोसा है तुम्हारा ।। उठ दूसरी दुकान से ले माल उधारा । लेके अनुक्रम तुरत नन्दी ग्राम सिधारा तब ललना कर जोड़ वीनवे, सुनिए प्राणाधार । पूर्व दिशा में आप पधारो, सफल करो अवतार ।।७० ।। निर्धारित पथ गमन किया है, सत्वर राजकुमार । मुक्ता महल मनोहर देखा, विस्मित हुआ अपार ।।७१।। शीघ्र सातवें मंजिल पहुंचा, बैठी कन्या एक । मणिमुक्ता के भूषण तन पर धारण किये अनेक ।।७२ ।। परी उतर का आई मानो, स्वयं स्वर्ग से चाल । करे मनन है अजब विश्व में कर्मों की टकसाल ।।७३ ११ हे सुनयना ! कौन पिता मां, कौन नगर बीच वास । इस अटवी के मध्य महल में क्यों कर लिया निवास ।।७४।। मुक्तावली मधुर वचनों से, बोली बन गंभीर । पहिले अपना हाल कहो, हे कटिधारक शमशीर ।।७५ ।। देश कलिग कंचनपुर मांही, पृथ्वीसिंह नरेश । तस सुत पद्मसेन मैं आया, लेकर बात विशेष ।।७६ ।। बोली बाला राजकुंवर से, सुनना होकर शाँत । मेरी क्या घटना चारों की कह दूं आद्योपान्त ।।७७ ।। सिद्धपुर पाटण शिरोमणि, अरिमर्दन नृपाल । पूरण ज्ञाता न्याय नीति का, रय्यत का रखवाल ।।७८।। सुसज्जित हो एक दिवस में राजसमा में आई। पूज्य पिता ने सादर मुझको अपने पास विठाई ।।७६ ।। निमित्त ज्ञान का ज्ञाता इतने, सभी बीच में आया। कर सम्मान योग्यासन पर, महिपती उन्हें बिठाया ।।५० ।। रथ जाने लगा जब दिवस रहा है थोड़ा। पूछ व्यापारी सेठ कहो किस ठोरा ।। कहे सुभट कौन है सेठ को हम क्या जाने। दे दाम कौल कर लाया किराणे महाने ।।१७।। यो सुनवेजी व्यापारी हुए उदासी, देख रथ मे एक दासी । हस बोलीजी, हम नहीं किसे पिछाना, सून सेठ सभी घबराना। सब मिलके जी आये पास राजाके, कहे लूट गया ढंग आके । जग हांसीजा घर का माल गुमाया, ठग ऐसा नजर नहीं आया ।।१८।। (तर्ज-दोहा) पडह बजायो शहर में दोनों हुक्म सुनाय । जो कोई ठग ठावो करे, सम्माने तस राय ।। कोटवाल वडो गह्यो, धूर्त पकडने काज प्रसरी घुरमे वारतां हर्षित चित्त महाराज ।।१६।। (तर्ज-सखी छन्द) सुनी अभय कुंवर जन वाणी, कोटवाल ठगन चित्त ठानी। संग सुमट लेई पुर आया. सुन्दर वनिता का वेश बनाया ।। नौकरों को बिठाये दूरा, भूषण वसन सजे तन पूरा । मध्य निशा गांहे, रम झम करती, देखी कातवाल तिहां फिरती । देखी रूपने अचरज पायो, पूछन बात पास चल आयो । कौन किस काज कहां को जावा, छोडी शंका हमें बतलाओ ।।२०।। इस कन्या का बने कौन वर, कहिए पंडित राज । अनुभव द्वार देख मनन कर कहे सुनो सिरताज । ॥५१॥ वैश्य सचिव और पुरोहित पुत्री, चौथी राजदुलारी । इन चारों का बने एक वर, श्रेष्ठ पुरुष बलकारी ।।८२ ।। पिता स्वप्न को सफल बनाने, आवे एक युवान । कैसा स्वप्न उसे आयेगा उसका किया सुना हाल पंडित के मुख से, हमने किया सिद्ध कर विद्या काम सुधारे, ले उसका अटवी में यह महल बनाये, विद्या बल से चार ! देख रही हम राह आपको, प्रतिपल नयन पसार ।।६५ ।। मन में हमने जो प्रण ठाया, पूर्ण हुआ है आज । मिले दर्श शुभ आज आपका सफल हुआ सब काज ।।८६ ।। काम हमारे से लेना हो, करना दंड प्रहार । आप हमारे बीच समस्या गुप्त रहे सरकार ।।८७ ।। चारों ही कन्याएं मिल ले पद्मसेन को संग । आई है अपनी नगरी मे, दिल में धरी उमंग ।।८।। अपने अपने मात-पिता को, सारी बात बताई । श्रेष्ठ समय में राजकुंवर संग, चारों को परणाई ।।८६ ।। सुख पूर्वक प्रमदा संग रहता राजकुंवर ससुराल । स्वकृत शुभ कर्मोदय से, ही फली मनोरथ माल ।।१०।। एक समय रजनी के अन्दर, आई घर की याद । परिवार से मिलना करना, पितु इच्छा आबाद ।।६१।। (तर्ज - मिलत) देख क्रिया का रूप पुरुष परिणाम फिरे विसरे शुद्ध ज्ञान । मधुर वचन से कहे आज मुझको प्रीतम ने अपमानी ।। निकल चली हूँ, खास मरजाने को दिलमें ठानी। कोटवाल कहे चलो मेरे घर मौज करो तुम मनमानी । खुशी होय सो, हुक्म कीजै चाकर अपनो कर जानी ।।२१।। (तर्ज-शेर) घर पास खोड़ा देख के, पूछे कहोजी ये कहां । चोर व्यभिचारी पकड़ के पांव भर देते यहां ।। हमको भी तो दिखंलाइये, इसमें रह सकता किस तरह। पग घाल के दिखला दिया, कहे निकल जाता है अरे ।।२२।। खीली जमाय के हाथ मोगरी दीनी, महाराज ठीक मजबूत जमाकेजी। निज सुभट बुलाय पट बदल कहे गुल शोर मचाकेजी ।। कोई दौड़ो धूर्त को पकड़ लिया खोडे मे । महाराज ! लोक जितने सुन पायाजी । ले दंडे ताजने हाथ दौड़ पासे चल आयाजी ।।२३।। (तर्ज-तिकडिया) मिल गये सुभट लोक उस बारे, लाठी मुट्ठी लात प्रहारे, सिरपे पड़ते है पेजारे, बाजे फड़ा फड़ी। दुःख से रोवे जार जार, सुनत कोई नहीं पुकार, कीना कोतवाल की ख्वार हो गयी कुन्दी बड़ी
कुंवर कहे रख सामने, दर्पण कला सिखाय भेज दिया नृप खुश हुआ, फिर एक पत्र लिखाय ।। हुक्म हुआ वर वालु के, डोरे बट भिजवाय । कुवर नमूना की लिखी, सुण विस्मित नर राय ।।छः।। एक दिन फिर हुक्म सुनाया, नन्दी ग्राम का कूप मंगाया। सुन के लोक सभी घबराया, चली अभय कुंवर पै आया। कुंवर कहे तुम क्यों मन शंको, तुमरो बाल न करसी बांको । लिखो खेडा का कूप भड़कना, यह नहीं आता इसीसे है लिखना ।। एक कूप को भेजो वहां से उसे बांध के ठेले यहां से । बांची पत्र हुआ नृप राजी, जानी अभय कुंवर की बाजी ।।दस।। बुद्धिवंता के संकट टाले, पर उपकारी कुंवर सुजान। बिना अग्नि से खीर बनाके, भेजो हुक्म ऐसा वरणा सुन घबराने, कुंबर से अर्ज करे कैसा करना ।। अच्छे चांवल भीजा जलमें ले बरतन में भरना । गल जाने से, उसे सुखे चूने पे जा धरना ।।ग्यारह।। पीछे से दूध मिलाय के तैयार कर भेजी त्वर । चकित चित राजा विचारे, कुंवर बुद्धि से भरा ।। भेजा सुभट को देखिये कैसा जो लड़का हैं वहाँ । आते सुभट को देख चढ़ गये, जांबू तरु ऊपर जहां ।।बारह।। यही प्रतिज्ञा मेरी पहिले, मुझे करो उसके बाद बताऊंगी मैं, बातें पूर्ण करूंगा मैं प्रण तेरा, रख पूरा अब मैं कहूँ परिचय अपना की युवति स्वीकार । सविस्तार ।।छप्पन ।। विश्वास । अरदास ।।साठ ।। कहते रुपवती मुझ को मैं, पुरोहित की विद्याबल से किया सभी यह, चॉदी का इच्छित रजतमयी रचने की है, शक्ति भरपूर । अब तो प्रियतम आप, प्रिया मै हुई, करी भंजूर ।।बासठ ।। सुख से रहे वहां पर दोनों बहुत परस्पर हेत। रजत काम करने का कीना, दंड मार संकेत ।।तिरेसठ।। प्यारी तुम्हें पता हो तो बतलाओ, उसका धाम । जो कर सकती हो तेरे सम, सब सोने का काम । ॥चौंसठ ।। नाथ ! पधारो दक्षिण मे मही अति दूर नजदीक । महल नजर आयेगा आगे, सुवर्ण का कनकावती सहेली मेरी, अद्भुत रूप पद्मसेन प्रयाण किया है, सुन प्यारी मुख सीधा उसी महल में पहुँचा, जिसमें मंजिल सात । प्रतिज्ञा पूरण करने की, कही कडकावती बात ।।सरसठ ।। सचिव सुता मैं जानुं विद्या, कंचन का निर्माण । करूं आपकी इच्छा जैसे, दंडा मार निशान ।।अड़सठ ।। पद्मसेन खुश होकर बोला, वाक्य तेरा स्वीकार । इच्दित काम करे कोई ऐसी है मुक्तावली बार ।।छयासठ ।। कहे सुभट जम्बू फल पक्के हमें भी खिलाओ, म. पूछे गरम की शीतलजी । दो गरमा गरमी कहे मसल के डाले तरु तलजी, दे फूँक करी रज दूर सुभट फल खावे । महाराज बहुत क्या है गरमाईजी । पहचान कुंवर है यही गया दिलमें शरमाईजी ।।तेरह।। कीना दिलमें कुंवर ख्याल छलना नगर जन भूपाल, भाडे करके रथ विशाल संग सुभट लिया । दासी चाकर है भाड़े, रथ के अन्दर एक बैसाड़े, सरहद वख्त कोल कर ठाडे; दाम चूका दिया ।। चौदह ।। बनके आये जवेरी सेठ, भूषण रत्न मणि के रेठ, पहुॅचे आय जवेरी पेठ, मिले बांह को पसार । पूछे कहो माल क्या लेना चाहिये रत्न जड़ित का गहणा । डब्बे खोल परख लेना, कहे कुंवर विचार ।।पंद्रह।। लेना जंचाय माल यह विचार हमारा । रथ देख कहे सेठ भरोसा है तुम्हारा ।। उठ दूसरी दुकान से ले माल उधारा । लेके अनुक्रम तुरत नन्दी ग्राम सिधारा तब ललना कर जोड़ वीनवे, सुनिए प्राणाधार । पूर्व दिशा में आप पधारो, सफल करो अवतार ।।सत्तर ।। निर्धारित पथ गमन किया है, सत्वर राजकुमार । मुक्ता महल मनोहर देखा, विस्मित हुआ अपार ।।इकहत्तर।। शीघ्र सातवें मंजिल पहुंचा, बैठी कन्या एक । मणिमुक्ता के भूषण तन पर धारण किये अनेक ।।बहत्तर ।। परी उतर का आई मानो, स्वयं स्वर्ग से चाल । करे मनन है अजब विश्व में कर्मों की टकसाल ।।तिहत्तर ग्यारह हे सुनयना ! कौन पिता मां, कौन नगर बीच वास । इस अटवी के मध्य महल में क्यों कर लिया निवास ।।चौहत्तर।। मुक्तावली मधुर वचनों से, बोली बन गंभीर । पहिले अपना हाल कहो, हे कटिधारक शमशीर ।।पचहत्तर ।। देश कलिग कंचनपुर मांही, पृथ्वीसिंह नरेश । तस सुत पद्मसेन मैं आया, लेकर बात विशेष ।।छिहत्तर ।। बोली बाला राजकुंवर से, सुनना होकर शाँत । मेरी क्या घटना चारों की कह दूं आद्योपान्त ।।सतहत्तर ।। सिद्धपुर पाटण शिरोमणि, अरिमर्दन नृपाल । पूरण ज्ञाता न्याय नीति का, रय्यत का रखवाल ।।अठहत्तर।। सुसज्जित हो एक दिवस में राजसमा में आई। पूज्य पिता ने सादर मुझको अपने पास विठाई ।।छिहत्तर ।। निमित्त ज्ञान का ज्ञाता इतने, सभी बीच में आया। कर सम्मान योग्यासन पर, महिपती उन्हें बिठाया ।।पचास ।। रथ जाने लगा जब दिवस रहा है थोड़ा। पूछ व्यापारी सेठ कहो किस ठोरा ।। कहे सुभट कौन है सेठ को हम क्या जाने। दे दाम कौल कर लाया किराणे महाने ।।सत्रह।। यो सुनवेजी व्यापारी हुए उदासी, देख रथ मे एक दासी । हस बोलीजी, हम नहीं किसे पिछाना, सून सेठ सभी घबराना। सब मिलके जी आये पास राजाके, कहे लूट गया ढंग आके । जग हांसीजा घर का माल गुमाया, ठग ऐसा नजर नहीं आया ।।अट्ठारह।। पडह बजायो शहर में दोनों हुक्म सुनाय । जो कोई ठग ठावो करे, सम्माने तस राय ।। कोटवाल वडो गह्यो, धूर्त पकडने काज प्रसरी घुरमे वारतां हर्षित चित्त महाराज ।।सोलह।। सुनी अभय कुंवर जन वाणी, कोटवाल ठगन चित्त ठानी। संग सुमट लेई पुर आया. सुन्दर वनिता का वेश बनाया ।। नौकरों को बिठाये दूरा, भूषण वसन सजे तन पूरा । मध्य निशा गांहे, रम झम करती, देखी कातवाल तिहां फिरती । देखी रूपने अचरज पायो, पूछन बात पास चल आयो । कौन किस काज कहां को जावा, छोडी शंका हमें बतलाओ ।।बीस।। इस कन्या का बने कौन वर, कहिए पंडित राज । अनुभव द्वार देख मनन कर कहे सुनो सिरताज । ॥इक्यावन॥ वैश्य सचिव और पुरोहित पुत्री, चौथी राजदुलारी । इन चारों का बने एक वर, श्रेष्ठ पुरुष बलकारी ।।बयासी ।। पिता स्वप्न को सफल बनाने, आवे एक युवान । कैसा स्वप्न उसे आयेगा उसका किया सुना हाल पंडित के मुख से, हमने किया सिद्ध कर विद्या काम सुधारे, ले उसका अटवी में यह महल बनाये, विद्या बल से चार ! देख रही हम राह आपको, प्रतिपल नयन पसार ।।पैंसठ ।। मन में हमने जो प्रण ठाया, पूर्ण हुआ है आज । मिले दर्श शुभ आज आपका सफल हुआ सब काज ।।छियासी ।। काम हमारे से लेना हो, करना दंड प्रहार । आप हमारे बीच समस्या गुप्त रहे सरकार ।।सत्तासी ।। चारों ही कन्याएं मिल ले पद्मसेन को संग । आई है अपनी नगरी मे, दिल में धरी उमंग ।।आठ।। अपने अपने मात-पिता को, सारी बात बताई । श्रेष्ठ समय में राजकुंवर संग, चारों को परणाई ।।छियासी ।। सुख पूर्वक प्रमदा संग रहता राजकुंवर ससुराल । स्वकृत शुभ कर्मोदय से, ही फली मनोरथ माल ।।दस।। एक समय रजनी के अन्दर, आई घर की याद । परिवार से मिलना करना, पितु इच्छा आबाद ।।इकसठ।। देख क्रिया का रूप पुरुष परिणाम फिरे विसरे शुद्ध ज्ञान । मधुर वचन से कहे आज मुझको प्रीतम ने अपमानी ।। निकल चली हूँ, खास मरजाने को दिलमें ठानी। कोटवाल कहे चलो मेरे घर मौज करो तुम मनमानी । खुशी होय सो, हुक्म कीजै चाकर अपनो कर जानी ।।इक्कीस।। घर पास खोड़ा देख के, पूछे कहोजी ये कहां । चोर व्यभिचारी पकड़ के पांव भर देते यहां ।। हमको भी तो दिखंलाइये, इसमें रह सकता किस तरह। पग घाल के दिखला दिया, कहे निकल जाता है अरे ।।बाईस।। खीली जमाय के हाथ मोगरी दीनी, महाराज ठीक मजबूत जमाकेजी। निज सुभट बुलाय पट बदल कहे गुल शोर मचाकेजी ।। कोई दौड़ो धूर्त को पकड़ लिया खोडे मे । महाराज ! लोक जितने सुन पायाजी । ले दंडे ताजने हाथ दौड़ पासे चल आयाजी ।।तेईस।। मिल गये सुभट लोक उस बारे, लाठी मुट्ठी लात प्रहारे, सिरपे पड़ते है पेजारे, बाजे फड़ा फड़ी। दुःख से रोवे जार जार, सुनत कोई नहीं पुकार, कीना कोतवाल की ख्वार हो गयी कुन्दी बड़ी
कोर्ट ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जींद। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु गर्ग की अदालत ने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या करने के जुर्म में पत्नी तथा उसके प्रेमी को आजीवन कारावास तथा 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। गांव नगूरां निवासी राजेश ने तीन अगस्त 2019 को अलेवा थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसका भाई कर्मबीर रात को अपने घर की छत पर सोया हुआ था। मध्य रात्रि के बाद कर्मबीर की पत्नी पूजा ने शोर मचाया तो परिवार के लोग छत पर पहुंचे। कर्मबीर खून से लथपथ चारपाई से नीचे पड़ा था। सिर तथा छाती पर तेजधार हथियार के निशान थे। परिजनों द्वारा उसे सामान्य अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राजेश ने आरोप लगाया था कि उसकी भाभी पूजा ने किसी व्यक्ति के साथ मिल कर उसके भाई की हत्या कर दी है। पुलिस ने पूजा व एक अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने जब पूजा को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो सामने आया कि पूजा का गांव नेहला निवासी विक्रम के साथ अफेयर था। कर्मबीर तथा पूजा के बीच कहासुनी हुई थी। जिस पर कर्मबीर ने पूजा को थप्पड़ मार दिए थे। पूजा ने विक्रम को बुला लिया और फिर योजनाबद्ध तरीके से कर्मबीर की हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने विक्रम को भी गिरफ्तार कर लिया था। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु गर्ग की अदालत ने पूजा तथा विक्रम को आजीवन कारावास तथा 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट ने दोनों पर बीस-बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जींद। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु गर्ग की अदालत ने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या करने के जुर्म में पत्नी तथा उसके प्रेमी को आजीवन कारावास तथा बीस-बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। गांव नगूरां निवासी राजेश ने तीन अगस्त दो हज़ार उन्नीस को अलेवा थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसका भाई कर्मबीर रात को अपने घर की छत पर सोया हुआ था। मध्य रात्रि के बाद कर्मबीर की पत्नी पूजा ने शोर मचाया तो परिवार के लोग छत पर पहुंचे। कर्मबीर खून से लथपथ चारपाई से नीचे पड़ा था। सिर तथा छाती पर तेजधार हथियार के निशान थे। परिजनों द्वारा उसे सामान्य अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राजेश ने आरोप लगाया था कि उसकी भाभी पूजा ने किसी व्यक्ति के साथ मिल कर उसके भाई की हत्या कर दी है। पुलिस ने पूजा व एक अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने जब पूजा को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो सामने आया कि पूजा का गांव नेहला निवासी विक्रम के साथ अफेयर था। कर्मबीर तथा पूजा के बीच कहासुनी हुई थी। जिस पर कर्मबीर ने पूजा को थप्पड़ मार दिए थे। पूजा ने विक्रम को बुला लिया और फिर योजनाबद्ध तरीके से कर्मबीर की हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने विक्रम को भी गिरफ्तार कर लिया था। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु गर्ग की अदालत ने पूजा तथा विक्रम को आजीवन कारावास तथा बीस-बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों को दरकिनार करते हुए लंबी दूरी के रॉकेट का प्रक्षेपण किया। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न देशों ने इस टेस्ट को मिसाइल परीक्षण करार दिया है, जो कि अमेरिका तक वार करने की क्षमता रखता है। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने रविवार सुबह इस प्रक्षेपण की पुष्टि की। इससे पहले जनवरी में उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम के परीक्षण का दावा किया था। मौजूदा परीक्षण को वाशिंगटन और उसके सहयोगी देश उकसावे की कार्रवाई मा रहे हैं। इसके चलते संयुक्त राष्ट्र की ओर से उत्तर कोरिया पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस बीच एएफपी की एक खबर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र से जुड़े राजनयिकों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उत्तर कोरिया द्वारा किए गए लंबी दूरी के रॉकेट के प्रक्षेपण के मुद्दे पर रविवार को न्यूयॉर्क में आपात बैठक करेगी। दूसरी ओर अमेरिका ने उत्तर कोरिया के इस कदम को भड़काऊ करार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा, 'अमेरिका आज किए गए उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा करता है- जो बैलिस्टिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों का उल्लंघन है। ' उन्होंने कहा, 'एक महीने में यह दूसरी बार है, जब उत्तर कोरिया ने न सिर्फ कोरिया प्रायद्वीप की सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हुए, बल्कि उस क्षेत्र और अमेरिका की सुरक्षा को भी खतरा पहुंचाते हुए एक बड़ी भड़काऊ कार्रवाई का विकल्प चुना है। ' केरी ने कहा कि जापान सहित अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा। साउथ कोरिया ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चुनौती बताया है। आपको बता दें कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और अमेरिका ने भी नॉर्थ कोरिया से रॉकेट लॉन्च रोकने को कहा था। आबे ने कहा कि उनकी कैबिनेट यूएस और साउथ कोरिया के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है और वे इसका कड़ा जवाब देंगे। रविवार को जापानी पीएम ने कहा, "हम इसे मंजूर नहीं कर सकते हैं और इसकी निंदा करते हैं। " वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता लू कैंग ने भी इस पर गहरी चिंता जताई थी। लू ने कहा था, "हमें उम्मीद है कि नॉर्थ कोरिया की इस एक्सरसाइज से आसपास के इलाके में तनाव का माहौल नहीं पैदा करेगा। " साउथ कोरिया, जापान और अमेरिका ने इस टेस्ट को लेकर चेतावनी दी थी। कुछ महीने पहले नॉर्थ कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल के दो वर्जन दिखाए थे। बताया जाता है कि इनमें से एक मिसाइल जापान और साउथ कोरिया ही नहीं बल्कि अमेरिका के वेस्ट कोस्ट तक अटैक कर सकती है। हालांकि, नॉर्थ कोरिया बार-बार मिसाइल टेस्ट की बात से इनकार कर रहा है।
उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों को दरकिनार करते हुए लंबी दूरी के रॉकेट का प्रक्षेपण किया। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न देशों ने इस टेस्ट को मिसाइल परीक्षण करार दिया है, जो कि अमेरिका तक वार करने की क्षमता रखता है। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने रविवार सुबह इस प्रक्षेपण की पुष्टि की। इससे पहले जनवरी में उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम के परीक्षण का दावा किया था। मौजूदा परीक्षण को वाशिंगटन और उसके सहयोगी देश उकसावे की कार्रवाई मा रहे हैं। इसके चलते संयुक्त राष्ट्र की ओर से उत्तर कोरिया पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस बीच एएफपी की एक खबर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र से जुड़े राजनयिकों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उत्तर कोरिया द्वारा किए गए लंबी दूरी के रॉकेट के प्रक्षेपण के मुद्दे पर रविवार को न्यूयॉर्क में आपात बैठक करेगी। दूसरी ओर अमेरिका ने उत्तर कोरिया के इस कदम को भड़काऊ करार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा, 'अमेरिका आज किए गए उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा करता है- जो बैलिस्टिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों का उल्लंघन है। ' उन्होंने कहा, 'एक महीने में यह दूसरी बार है, जब उत्तर कोरिया ने न सिर्फ कोरिया प्रायद्वीप की सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हुए, बल्कि उस क्षेत्र और अमेरिका की सुरक्षा को भी खतरा पहुंचाते हुए एक बड़ी भड़काऊ कार्रवाई का विकल्प चुना है। ' केरी ने कहा कि जापान सहित अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा। साउथ कोरिया ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चुनौती बताया है। आपको बता दें कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और अमेरिका ने भी नॉर्थ कोरिया से रॉकेट लॉन्च रोकने को कहा था। आबे ने कहा कि उनकी कैबिनेट यूएस और साउथ कोरिया के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है और वे इसका कड़ा जवाब देंगे। रविवार को जापानी पीएम ने कहा, "हम इसे मंजूर नहीं कर सकते हैं और इसकी निंदा करते हैं। " वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता लू कैंग ने भी इस पर गहरी चिंता जताई थी। लू ने कहा था, "हमें उम्मीद है कि नॉर्थ कोरिया की इस एक्सरसाइज से आसपास के इलाके में तनाव का माहौल नहीं पैदा करेगा। " साउथ कोरिया, जापान और अमेरिका ने इस टेस्ट को लेकर चेतावनी दी थी। कुछ महीने पहले नॉर्थ कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल के दो वर्जन दिखाए थे। बताया जाता है कि इनमें से एक मिसाइल जापान और साउथ कोरिया ही नहीं बल्कि अमेरिका के वेस्ट कोस्ट तक अटैक कर सकती है। हालांकि, नॉर्थ कोरिया बार-बार मिसाइल टेस्ट की बात से इनकार कर रहा है।
मुंबई - अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट आज गुरुवार रिया चक्रवर्ती की उस याचिका पर फैसला सुना सकता है। जिससे ये पता चलेगा कि इस केस की जांच मुंबई पुलिस या सीबीआई दोनों में से कौन करेगी। कोर्ट के निर्णय से पहले सुशांत की बड़ी बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर लोगों से CBI जांच की मांग को लेकर एकजुट रहने की अपील की है। वीडियो में श्वेता कहती हैं, मैं सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति हूं। मैं सभी से रिक्वेस्ट करती हूं कि हम सभी मिलकर सुशांत के लिए सीबीआई की मांग करें। हम सभी को सच्चाई जानने का हक है। पूरी दुनिया जानना चाहती है कि सच्चाई क्या है, नहीं तो हम शांति से नहीं जी पाएंगे। श्वेता ने इससे पहले सुशांत के एक इंटरव्यू का क्लिप शेयर किया। इस वीडियो में सुशांत बताते हैं कि वह अपने परिवार में सबसे ज्यादा करीब अपनी बहन प्रियंका के हैं। सुशांत कहते हैं, वैसे तो मैं अपने परिवार के सभी सदस्य के बहुत करीब हूं, लेकिन मैं सबसे ज्यादा अपनी बहन प्रियंका के करीब हूं क्योंकि वह मुझे समझती हैं और हम दोनों में कई चीजें एक जैसी हैं।
मुंबई - अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट आज गुरुवार रिया चक्रवर्ती की उस याचिका पर फैसला सुना सकता है। जिससे ये पता चलेगा कि इस केस की जांच मुंबई पुलिस या सीबीआई दोनों में से कौन करेगी। कोर्ट के निर्णय से पहले सुशांत की बड़ी बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर लोगों से CBI जांच की मांग को लेकर एकजुट रहने की अपील की है। वीडियो में श्वेता कहती हैं, मैं सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति हूं। मैं सभी से रिक्वेस्ट करती हूं कि हम सभी मिलकर सुशांत के लिए सीबीआई की मांग करें। हम सभी को सच्चाई जानने का हक है। पूरी दुनिया जानना चाहती है कि सच्चाई क्या है, नहीं तो हम शांति से नहीं जी पाएंगे। श्वेता ने इससे पहले सुशांत के एक इंटरव्यू का क्लिप शेयर किया। इस वीडियो में सुशांत बताते हैं कि वह अपने परिवार में सबसे ज्यादा करीब अपनी बहन प्रियंका के हैं। सुशांत कहते हैं, वैसे तो मैं अपने परिवार के सभी सदस्य के बहुत करीब हूं, लेकिन मैं सबसे ज्यादा अपनी बहन प्रियंका के करीब हूं क्योंकि वह मुझे समझती हैं और हम दोनों में कई चीजें एक जैसी हैं।
अल्कोहल का ठंडा बिंदु शराब के प्रकार और वायुमंडलीय दबाव पर निर्भर करता है। इथेनॉल या एथिल अल्कोहल (सी 2 एच 6 ओ) का ठंडा बिंदु लगभग -114 डिग्री सेल्सियस है; -173 डिग्री फारेनहाइट; 15 9 के। मेथनॉल या मिथाइल अल्कोहल (सीएच 3 ओएच) का ठंडा बिंदु लगभग -97. 6 डिग्री सेल्सियस है; -143. 7 डिग्री फारेनहाइट; 175. 6 के। आपको स्रोत के आधार पर ठंडक बिंदुओं के लिए थोड़ा अलग मूल्य मिलेंगे क्योंकि ठंडक बिंदु वायुमंडलीय दबाव से प्रभावित होता है। यदि शराब में कोई पानी है, तो ठंडक बिंदु बहुत अधिक होगा। मादक पेय पदार्थों में पानी के ठंडक बिंदु (0 डिग्री सेल्सियस, 32 डिग्री फारेनहाइट) और शुद्ध इथेनॉल (-114 डिग्री सेल्सियस; -173 डिग्री फारेनहाइट) के बीच ठंडक बिंदु होता है। अधिकांश मादक पेय पदार्थों में शराब की तुलना में अधिक पानी होता है, इसलिए कुछ घर फ्रीजर (जैसे बीयर और शराब) में जमा हो जाते हैं। उच्च प्रमाण शराब (अधिक शराब युक्त) एक घर फ्रीजर में जमा नहीं होगा (उदाहरण के लिए, वोदका, एवरक्लर)।
अल्कोहल का ठंडा बिंदु शराब के प्रकार और वायुमंडलीय दबाव पर निर्भर करता है। इथेनॉल या एथिल अल्कोहल का ठंडा बिंदु लगभग -एक सौ चौदह डिग्री सेल्सियस है; -एक सौ तिहत्तर डिग्री फारेनहाइट; पंद्रह नौ के। मेथनॉल या मिथाइल अल्कोहल का ठंडा बिंदु लगभग -सत्तानवे. छः डिग्री सेल्सियस है; -एक सौ तैंतालीस. सात डिग्री फारेनहाइट; एक सौ पचहत्तर. छः के। आपको स्रोत के आधार पर ठंडक बिंदुओं के लिए थोड़ा अलग मूल्य मिलेंगे क्योंकि ठंडक बिंदु वायुमंडलीय दबाव से प्रभावित होता है। यदि शराब में कोई पानी है, तो ठंडक बिंदु बहुत अधिक होगा। मादक पेय पदार्थों में पानी के ठंडक बिंदु और शुद्ध इथेनॉल के बीच ठंडक बिंदु होता है। अधिकांश मादक पेय पदार्थों में शराब की तुलना में अधिक पानी होता है, इसलिए कुछ घर फ्रीजर में जमा हो जाते हैं। उच्च प्रमाण शराब एक घर फ्रीजर में जमा नहीं होगा ।
वॉशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चालू वित्त वर्ष (2018-19) में भारत के लिए 7. 3% पर बरकरार रखा है। हालांकि, अगले साल (2019-20) के लिए भारत की विकास दर 7. 4% रहने की उम्मीद जताई है। आईएमएफ ने अप्रैल में 7. 5% का अनुमान जारी किया था। इसके मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के असर से उबर चुकी है। इसे आर्थिक सुधारों का फायदा होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वॉशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चालू वित्त वर्ष में भारत के लिए सात. तीन% पर बरकरार रखा है। हालांकि, अगले साल के लिए भारत की विकास दर सात. चार% रहने की उम्मीद जताई है। आईएमएफ ने अप्रैल में सात. पाँच% का अनुमान जारी किया था। इसके मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के असर से उबर चुकी है। इसे आर्थिक सुधारों का फायदा होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
घूमना, घूमना, और स्नोटिंग किसी भी उम्र में हड़ताल कर सकती है, कभी-कभी थोड़ी देर के लिए गायब हो जाती है, फिर जीवन में बाद में बदला लेने के साथ लौट आती है। तो आप एक दशक में घबराहट क्यों महसूस करते हैं, केवल आपके लक्षणों को अगले ही आसान बनाते हैं? यहां बताया गया है कि जीवन भर के दौरान घास का बुखार और इसी तरह की एलर्जी की स्थिति कैसे विकसित होती है- और आप उन्हें स्थायी स्थायी छूट में रखने के लिए क्या कर सकते हैं। आप एलर्जी क्यों प्राप्त करते हैं? उत्तरी कैरोलिना के डरहम में ड्यूक ओटोलरींगोलॉजी के डोना शार्प, एमडी कहते हैं, एलर्जी से पैदा नहीं हुआ कोई भी नहीं। लेकिन माँ और पिता एटॉपी नामक एक विशेषता को पार करते हैं, या एलर्जी विकसित करने के आनुवांशिक प्रवृत्ति को पार करते हैं। यदि आप भाग्यशाली प्राप्तकर्ताओं में से एक हैं, तो पराग, पशु डेंडर, धूल के काटने या मोल्ड के साथ आपका पहला मुकाबला आपकी प्राकृतिक सुरक्षा को ओवरड्राइव में भेजता है। बैलर में एलर्जी, इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी के प्रमुख डेविड कॉरी कहते हैं, इन एलर्जी की रासायनिक संरचना में संभवतः एक एंजाइम जिसे प्रोटीज़ कहा जाता है-आपके शरीर को खतरे के रूप में समझने का कारण बनता है। ह्यूस्टन में मेडिसिन कॉलेज। आपको शायद पहली बार कोई लक्षण नहीं लगेगा, लेकिन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली प्रत्येक कथित हमलावर से लड़ने के लिए इम्यूनोग्लोबुलिन ई, या आईजीई नामक एंटीबॉडी के प्रकार का उत्पादन शुरू करती है। ये आईजीई एंटीबॉडी अगले पराग मौसम या एक बिल्ली के साथ ब्रश तक इंतजार में झूठ बोलते हैं। फिर वे एक्जिमा से लक्षणों को ट्रिगर करते हैं-एक खुजली, चिड़चिड़ापन वाली धड़कन-स्नोट-भिगोना, लाल आंखों वाला घास बुखार जीवन-धमकी देने वाले एनाफिलैक्सिस तक। (इसके अलावा, आपकी सूखी आंखों की शिकायतों के लिए एलर्जी भी जिम्मेदार हो सकती है। पता लगाएं आपकी आंखें अभी किरकिरा सैंडपेपर की तरह क्यों लगती हैं.) ओहियो राज्य के वेक्सनर मेडिकल सेंटर में एलर्जी और इम्यूनोलॉजी विशेषज्ञ एमबीडी नाबेल फारूकी कहते हैं, "कुछ हद तक एक एलर्जी सीजन के माध्यम से - और" एकदम सही तूफान "के लिए एलर्जी का कारण बनता है, यह कुछ हद तक परिपक्व प्रतिरक्षा प्रणाली लेता है। ज्यादातर लोगों की तरह, आपने शायद 2 और 18 आयु के बीच अपने पहले लक्षण विकसित किए हैं। डॉ। फारूकी कहते हैं, शिशुओं और बच्चों के पास आमतौर पर त्वचा से संबंधित लक्षण होते हैं। एक्जिमा वाले लगभग 60 प्रतिशत बच्चे इस स्थिति को बढ़ा देंगे, लेकिन वे बाद में श्वसन संबंधी लक्षणों और यहां तक कि अस्थमा को उगाने का एक उच्च अवसर खड़े हैं। एलर्जी और क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी के जर्नल में एक अध्ययन के मुताबिक, एलर्जी संबंधी अस्थमा वाले लगभग 20 से 30 प्रतिशत लोगों को एक्जिमा था। नाक और अन्य श्वसन लक्षण 2 साल और उससे अधिक उम्र के किसी भी समय विकसित हो सकते हैं। अगर कैलिफ़ोर्निया के कोस्टा मेसा में मेमोरियलकेयर मेडिकल ग्रुप के मेडिकल डायरेक्टर एडम वास कहते हैं, तो वही प्रतिक्रिया ट्रिगर करने के लिए आवश्यक एलर्जी की थोड़ी सी मात्रा के साथ लक्षणों का ठीक से इलाज नहीं किया जाता है। इसका मतलब है कि आपको बंद करने के लिए आपको अपमानजनक एलर्जी की आवश्यकता होगी। जवाबी हमलाः बच्चों को इम्यूनोथेरेपी-शॉट्स या लोज़ेंजेस मिल सकते हैं जो आपको एलर्जी की खुराक बढ़ाने के लिए उजागर करते हैं जब तक कि आपका शरीर उन पर बाहर निकलने से रोकता है-उम्र 5 या 6 वर्ष की आयु के रूप में। चिंता न करें अगर आपके माता-पिता ने आपको तब तक नहीं पहुंचाया; अब भी आप अपने डॉक्टर से इलाज के बारे में पूछ सकते हैं। एलर्जी शॉट्स न केवल मौजूदा एलर्जी से लड़ते हैं, बल्कि वे आपको मिलने वाले नए एलर्जेंस पर प्रतिक्रिया करने से भी रोकते हैं, डॉ फारूकी कहते हैं। और अपने छींक को कम करने के अधिक पारंपरिक तरीकों को मत भूलना। जाहिर है, उन चीजों से बचें जिन्हें आप एलर्जी कर सकते हैं जब आप कर सकते हैं। फिर एंटीहिस्टामाइन जैसी दवाओं के साथ अपने लक्षणों से छुटकारा पाएं- जिनमें से कुछ ओवर-द-काउंटर-इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स उपलब्ध हैं, जिनके लिए एक पर्चे की आवश्यकता हो सकती है, डॉ। कॉरी कहते हैं। (इसकी जाँच पड़ताल करो एलर्जी के लिए सर्वश्रेष्ठ दवाएं.) डॉ। कॉरी का कहना है कि युवा वयस्कों में बहुत से लोग एलर्जी के लक्षणों का अनुभव करते हैं। एक बड़ा कारण यह है किः आपका हाईस्कूल प्रेमी और आपकी मासूमियत एकमात्र चीज नहीं है जिसे आप स्नातक स्तर के बाद पीछे छोड़ देते हैं। जो पराग आपको छींकते हैं और अपने पूरे जीवन को चकित करते हैं- दक्षिणी घास, मिडवेस्ट में पेड़-आपके कॉलेज परिसर के पास नहीं बढ़ सकते हैं। एक परिवार के कुत्ते से पालतू जानवर मुक्त छात्रावास या अपार्टमेंट में जाने से आपके लक्षण भी कम हो सकते हैं। बेशक, आप कहीं भी स्थानांतरित कर सकते हैं जो आपको और भी बुरा महसूस करता है, डॉ शार्प बताते हैं। पैसिफ़िक नॉर्थवेस्ट के प्रमुख और आप अल्सर या बर्च के लिए एलर्जी विकसित कर सकते हैं, जबकि पूर्वोत्तर और मध्यपश्चिमी पीड़ितों के साथ-साथ कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि वे जलवायु परिवर्तन के कारण केवल खराब हो रहे हैं। ध्यान रखें कि जब तक आप लगभग एक वर्ष तक नहीं रहते हैं तब तक आप नए लक्षणों को महसूस नहीं करना शुरू कर देंगे, क्योंकि आपको संवेदनशीलता प्रक्रिया होने के लिए कई एक्सपोजर की आवश्यकता होती है, वह कहती हैं। जवाबी हमलाः अपने पराग गिनती से कॉलेज-या सिर्फ एक नया शहर चुनने का छोटा, उस ताजा 15 को छोड़ना है। अतिरिक्त पाउंड आपके वायुमार्गों पर भारी वजन करते हैं, और मोटापा आपके पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती है। डॉ। फारूकी कहते हैं, इन दोनों कारकों में घास के बुखार और इसी तरह की स्थितियों के लक्षण खराब हो सकते हैं। और अच्छे के लिए धूम्रपान काट लेंः सिगरेट या मारिजुआना धूम्रपान से विशेष पदार्थ आपके वायुमार्ग में सूजन को बढ़ा देता है, एलर्जी संबंधी लक्षणों को खराब करता है, डॉ। कोर्री कहते हैं। डॉ। शार्प कहते हैं, भूगोल और रहने की स्थितियों में अधिक परिवर्तन लंबे समय से निष्क्रिय एलर्जी को पुनर्जीवित कर सकते हैं या यहां तक कि सभी नए लोगों को भी उछाल सकते हैं। आप एक अद्भुत नई महिला और उसकी दो बिल्लियों के साथ सो रहे हैं।आप मोल्ड और तिलचट्टे के उपद्रव के इतिहास के साथ उस पुराने फिक्सर-ऊपरी खरीदते हैं। या, आप अपने युवा परिवार को वापस अपने शहर में ले जाते हैं। यहां तक कि यदि आपने वर्षों से एलर्जेंस के उस विशेष मिश्रण को सांस नहीं लिया है, तो भी आप वही पुराने लक्षण विकसित करेंगेः "आपके शरीर की अच्छी याददाश्त है," डॉ शार्प कहते हैं, और उन परागकों के लिए विशिष्ट आईजीई एंटीबॉडी अभी भी पाठ्यक्रम आपके सिस्टम के माध्यम से। जवाबी हमलाः आपकी सबसे अच्छी शर्त है कि आप अपने डॉक्टर को नई एलर्जी या लक्षणों के बारे में देख सकें जिन्हें आप अतीत में आपके लिए काम करने वाले तरीकों से नियंत्रित नहीं कर सकते। एलर्जी परीक्षण आपको यह पहचानने में मदद कर सकता है कि अब आपके लक्षणों को किस प्रकार ट्रिगर कर रहा है, और आपको इससे कैसे बचें इस पर मार्गदर्शन करें। मिसाल के तौर पर, यदि आप दक्षिण में रहते हैं और घास एलर्जी है, तो आपको शायद किसी और को लॉन डालने के लिए कहें या कम से कम एक मुखौटा पहनें जब आप ऐसा करते हैं, डॉ। कॉरी कहते हैं। आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली उम्र के साथ कम आईजीई पैदा करती है, इसलिए आपके लक्षण खराब हो सकते हैं। डॉ। कॉरी कहते हैं, फिर भी, आप एक नई एलर्जी विकसित करने के लिए कभी भी बूढ़े नहीं हैं। स्नोबर्ड या जो लोग बाद में जीवन में गर्म, उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में स्थानांतरित होते हैं, वे एक बार फिर अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को संभावित परेशानियों के एक नए नए मिश्रण में उजागर कर सकते हैं। और उम्र से संबंधित शारीरिक परिवर्तन, जैसे आपकी नाक में कमजोर उपास्थि, इसका मतलब यह हो सकता है कि लक्षण श्वास के साथ अधिक हस्तक्षेप करते हैं। जवाबी हमलाः यहां तक कि यदि ओवर-द-काउंटर उपचार अब तक आपके स्नीफल्स को नियंत्रित करते हैं, तो अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से जांच करें कि क्या वे अभी भी सबसे अच्छे विकल्प हैं, खासकर यदि आप किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के लिए दवा पर हैं। जितना अधिक मेड आप लेते हैं, उतना ही अधिक संभावना है कि आप एक अवांछित दुष्प्रभाव या बातचीत कर सकें, लेकिन एक स्वास्थ्य पेशेवर होने के साथ-साथ वे एक साथ कैसे काम करते हैं, इसे रोकने में मदद मिल सकती है।
घूमना, घूमना, और स्नोटिंग किसी भी उम्र में हड़ताल कर सकती है, कभी-कभी थोड़ी देर के लिए गायब हो जाती है, फिर जीवन में बाद में बदला लेने के साथ लौट आती है। तो आप एक दशक में घबराहट क्यों महसूस करते हैं, केवल आपके लक्षणों को अगले ही आसान बनाते हैं? यहां बताया गया है कि जीवन भर के दौरान घास का बुखार और इसी तरह की एलर्जी की स्थिति कैसे विकसित होती है- और आप उन्हें स्थायी स्थायी छूट में रखने के लिए क्या कर सकते हैं। आप एलर्जी क्यों प्राप्त करते हैं? उत्तरी कैरोलिना के डरहम में ड्यूक ओटोलरींगोलॉजी के डोना शार्प, एमडी कहते हैं, एलर्जी से पैदा नहीं हुआ कोई भी नहीं। लेकिन माँ और पिता एटॉपी नामक एक विशेषता को पार करते हैं, या एलर्जी विकसित करने के आनुवांशिक प्रवृत्ति को पार करते हैं। यदि आप भाग्यशाली प्राप्तकर्ताओं में से एक हैं, तो पराग, पशु डेंडर, धूल के काटने या मोल्ड के साथ आपका पहला मुकाबला आपकी प्राकृतिक सुरक्षा को ओवरड्राइव में भेजता है। बैलर में एलर्जी, इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी के प्रमुख डेविड कॉरी कहते हैं, इन एलर्जी की रासायनिक संरचना में संभवतः एक एंजाइम जिसे प्रोटीज़ कहा जाता है-आपके शरीर को खतरे के रूप में समझने का कारण बनता है। ह्यूस्टन में मेडिसिन कॉलेज। आपको शायद पहली बार कोई लक्षण नहीं लगेगा, लेकिन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली प्रत्येक कथित हमलावर से लड़ने के लिए इम्यूनोग्लोबुलिन ई, या आईजीई नामक एंटीबॉडी के प्रकार का उत्पादन शुरू करती है। ये आईजीई एंटीबॉडी अगले पराग मौसम या एक बिल्ली के साथ ब्रश तक इंतजार में झूठ बोलते हैं। फिर वे एक्जिमा से लक्षणों को ट्रिगर करते हैं-एक खुजली, चिड़चिड़ापन वाली धड़कन-स्नोट-भिगोना, लाल आंखों वाला घास बुखार जीवन-धमकी देने वाले एनाफिलैक्सिस तक। ओहियो राज्य के वेक्सनर मेडिकल सेंटर में एलर्जी और इम्यूनोलॉजी विशेषज्ञ एमबीडी नाबेल फारूकी कहते हैं, "कुछ हद तक एक एलर्जी सीजन के माध्यम से - और" एकदम सही तूफान "के लिए एलर्जी का कारण बनता है, यह कुछ हद तक परिपक्व प्रतिरक्षा प्रणाली लेता है। ज्यादातर लोगों की तरह, आपने शायद दो और अट्ठारह आयु के बीच अपने पहले लक्षण विकसित किए हैं। डॉ। फारूकी कहते हैं, शिशुओं और बच्चों के पास आमतौर पर त्वचा से संबंधित लक्षण होते हैं। एक्जिमा वाले लगभग साठ प्रतिशत बच्चे इस स्थिति को बढ़ा देंगे, लेकिन वे बाद में श्वसन संबंधी लक्षणों और यहां तक कि अस्थमा को उगाने का एक उच्च अवसर खड़े हैं। एलर्जी और क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी के जर्नल में एक अध्ययन के मुताबिक, एलर्जी संबंधी अस्थमा वाले लगभग बीस से तीस प्रतिशत लोगों को एक्जिमा था। नाक और अन्य श्वसन लक्षण दो साल और उससे अधिक उम्र के किसी भी समय विकसित हो सकते हैं। अगर कैलिफ़ोर्निया के कोस्टा मेसा में मेमोरियलकेयर मेडिकल ग्रुप के मेडिकल डायरेक्टर एडम वास कहते हैं, तो वही प्रतिक्रिया ट्रिगर करने के लिए आवश्यक एलर्जी की थोड़ी सी मात्रा के साथ लक्षणों का ठीक से इलाज नहीं किया जाता है। इसका मतलब है कि आपको बंद करने के लिए आपको अपमानजनक एलर्जी की आवश्यकता होगी। जवाबी हमलाः बच्चों को इम्यूनोथेरेपी-शॉट्स या लोज़ेंजेस मिल सकते हैं जो आपको एलर्जी की खुराक बढ़ाने के लिए उजागर करते हैं जब तक कि आपका शरीर उन पर बाहर निकलने से रोकता है-उम्र पाँच या छः वर्ष की आयु के रूप में। चिंता न करें अगर आपके माता-पिता ने आपको तब तक नहीं पहुंचाया; अब भी आप अपने डॉक्टर से इलाज के बारे में पूछ सकते हैं। एलर्जी शॉट्स न केवल मौजूदा एलर्जी से लड़ते हैं, बल्कि वे आपको मिलने वाले नए एलर्जेंस पर प्रतिक्रिया करने से भी रोकते हैं, डॉ फारूकी कहते हैं। और अपने छींक को कम करने के अधिक पारंपरिक तरीकों को मत भूलना। जाहिर है, उन चीजों से बचें जिन्हें आप एलर्जी कर सकते हैं जब आप कर सकते हैं। फिर एंटीहिस्टामाइन जैसी दवाओं के साथ अपने लक्षणों से छुटकारा पाएं- जिनमें से कुछ ओवर-द-काउंटर-इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स उपलब्ध हैं, जिनके लिए एक पर्चे की आवश्यकता हो सकती है, डॉ। कॉरी कहते हैं। डॉ। कॉरी का कहना है कि युवा वयस्कों में बहुत से लोग एलर्जी के लक्षणों का अनुभव करते हैं। एक बड़ा कारण यह है किः आपका हाईस्कूल प्रेमी और आपकी मासूमियत एकमात्र चीज नहीं है जिसे आप स्नातक स्तर के बाद पीछे छोड़ देते हैं। जो पराग आपको छींकते हैं और अपने पूरे जीवन को चकित करते हैं- दक्षिणी घास, मिडवेस्ट में पेड़-आपके कॉलेज परिसर के पास नहीं बढ़ सकते हैं। एक परिवार के कुत्ते से पालतू जानवर मुक्त छात्रावास या अपार्टमेंट में जाने से आपके लक्षण भी कम हो सकते हैं। बेशक, आप कहीं भी स्थानांतरित कर सकते हैं जो आपको और भी बुरा महसूस करता है, डॉ शार्प बताते हैं। पैसिफ़िक नॉर्थवेस्ट के प्रमुख और आप अल्सर या बर्च के लिए एलर्जी विकसित कर सकते हैं, जबकि पूर्वोत्तर और मध्यपश्चिमी पीड़ितों के साथ-साथ कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि वे जलवायु परिवर्तन के कारण केवल खराब हो रहे हैं। ध्यान रखें कि जब तक आप लगभग एक वर्ष तक नहीं रहते हैं तब तक आप नए लक्षणों को महसूस नहीं करना शुरू कर देंगे, क्योंकि आपको संवेदनशीलता प्रक्रिया होने के लिए कई एक्सपोजर की आवश्यकता होती है, वह कहती हैं। जवाबी हमलाः अपने पराग गिनती से कॉलेज-या सिर्फ एक नया शहर चुनने का छोटा, उस ताजा पंद्रह को छोड़ना है। अतिरिक्त पाउंड आपके वायुमार्गों पर भारी वजन करते हैं, और मोटापा आपके पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती है। डॉ। फारूकी कहते हैं, इन दोनों कारकों में घास के बुखार और इसी तरह की स्थितियों के लक्षण खराब हो सकते हैं। और अच्छे के लिए धूम्रपान काट लेंः सिगरेट या मारिजुआना धूम्रपान से विशेष पदार्थ आपके वायुमार्ग में सूजन को बढ़ा देता है, एलर्जी संबंधी लक्षणों को खराब करता है, डॉ। कोर्री कहते हैं। डॉ। शार्प कहते हैं, भूगोल और रहने की स्थितियों में अधिक परिवर्तन लंबे समय से निष्क्रिय एलर्जी को पुनर्जीवित कर सकते हैं या यहां तक कि सभी नए लोगों को भी उछाल सकते हैं। आप एक अद्भुत नई महिला और उसकी दो बिल्लियों के साथ सो रहे हैं।आप मोल्ड और तिलचट्टे के उपद्रव के इतिहास के साथ उस पुराने फिक्सर-ऊपरी खरीदते हैं। या, आप अपने युवा परिवार को वापस अपने शहर में ले जाते हैं। यहां तक कि यदि आपने वर्षों से एलर्जेंस के उस विशेष मिश्रण को सांस नहीं लिया है, तो भी आप वही पुराने लक्षण विकसित करेंगेः "आपके शरीर की अच्छी याददाश्त है," डॉ शार्प कहते हैं, और उन परागकों के लिए विशिष्ट आईजीई एंटीबॉडी अभी भी पाठ्यक्रम आपके सिस्टम के माध्यम से। जवाबी हमलाः आपकी सबसे अच्छी शर्त है कि आप अपने डॉक्टर को नई एलर्जी या लक्षणों के बारे में देख सकें जिन्हें आप अतीत में आपके लिए काम करने वाले तरीकों से नियंत्रित नहीं कर सकते। एलर्जी परीक्षण आपको यह पहचानने में मदद कर सकता है कि अब आपके लक्षणों को किस प्रकार ट्रिगर कर रहा है, और आपको इससे कैसे बचें इस पर मार्गदर्शन करें। मिसाल के तौर पर, यदि आप दक्षिण में रहते हैं और घास एलर्जी है, तो आपको शायद किसी और को लॉन डालने के लिए कहें या कम से कम एक मुखौटा पहनें जब आप ऐसा करते हैं, डॉ। कॉरी कहते हैं। आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली उम्र के साथ कम आईजीई पैदा करती है, इसलिए आपके लक्षण खराब हो सकते हैं। डॉ। कॉरी कहते हैं, फिर भी, आप एक नई एलर्जी विकसित करने के लिए कभी भी बूढ़े नहीं हैं। स्नोबर्ड या जो लोग बाद में जीवन में गर्म, उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में स्थानांतरित होते हैं, वे एक बार फिर अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को संभावित परेशानियों के एक नए नए मिश्रण में उजागर कर सकते हैं। और उम्र से संबंधित शारीरिक परिवर्तन, जैसे आपकी नाक में कमजोर उपास्थि, इसका मतलब यह हो सकता है कि लक्षण श्वास के साथ अधिक हस्तक्षेप करते हैं। जवाबी हमलाः यहां तक कि यदि ओवर-द-काउंटर उपचार अब तक आपके स्नीफल्स को नियंत्रित करते हैं, तो अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से जांच करें कि क्या वे अभी भी सबसे अच्छे विकल्प हैं, खासकर यदि आप किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के लिए दवा पर हैं। जितना अधिक मेड आप लेते हैं, उतना ही अधिक संभावना है कि आप एक अवांछित दुष्प्रभाव या बातचीत कर सकें, लेकिन एक स्वास्थ्य पेशेवर होने के साथ-साथ वे एक साथ कैसे काम करते हैं, इसे रोकने में मदद मिल सकती है।
वीडियो डेस्क। गोरखपुर के भीमराव अंबेडकर पार्क में आज अंबेडकर जयंती के शुभ अवसर पर एबीएसएस के लोगों ने रैली निकाली। यह रैली अंबेडकर पार्क से होते हुए शहर के कई इलाके में जाती है और अंत में जाकर बुध भवन में इसे रोक दिया जाता है। वीडियो डेस्क। गोरखपुर के भीमराव अंबेडकर पार्क में आज अंबेडकर जयंती के शुभ अवसर पर एबीएसएस के लोगों ने रैली निकाली। यह रैली अंबेडकर पार्क से होते हुए शहर के कई इलाके में जाती है और अंत में जाकर बुध भवन में इसे रोक दिया जाता है। एबीएसएस का कहना है इस तरह की रैली हर साल अंबेडकर जयंती पर निकाली जाती है और बेहद शांतिपूर्ण तरीके से इस रैली को निकालते हैं। शहर में किसी तरह के जाम ना लगे इसका भी पूरा ध्यान रखते हैं। उनका कहना है कि समाज को वह बाबा साहब के दिए गए संवैधानिक अधिकार से समाज के लोगों को अवगत कराना चाहते हैं। एबीएसएस के लोग यह भी बताते हैं की हम लोग हर हफ्ते ग्रामीण क्षेत्रों में जाते हैं और वहां के जरूरतमंदों की मदद करते हैं और कभी भी हम जात पात का भेदभाव भी नहीं रखते।
वीडियो डेस्क। गोरखपुर के भीमराव अंबेडकर पार्क में आज अंबेडकर जयंती के शुभ अवसर पर एबीएसएस के लोगों ने रैली निकाली। यह रैली अंबेडकर पार्क से होते हुए शहर के कई इलाके में जाती है और अंत में जाकर बुध भवन में इसे रोक दिया जाता है। वीडियो डेस्क। गोरखपुर के भीमराव अंबेडकर पार्क में आज अंबेडकर जयंती के शुभ अवसर पर एबीएसएस के लोगों ने रैली निकाली। यह रैली अंबेडकर पार्क से होते हुए शहर के कई इलाके में जाती है और अंत में जाकर बुध भवन में इसे रोक दिया जाता है। एबीएसएस का कहना है इस तरह की रैली हर साल अंबेडकर जयंती पर निकाली जाती है और बेहद शांतिपूर्ण तरीके से इस रैली को निकालते हैं। शहर में किसी तरह के जाम ना लगे इसका भी पूरा ध्यान रखते हैं। उनका कहना है कि समाज को वह बाबा साहब के दिए गए संवैधानिक अधिकार से समाज के लोगों को अवगत कराना चाहते हैं। एबीएसएस के लोग यह भी बताते हैं की हम लोग हर हफ्ते ग्रामीण क्षेत्रों में जाते हैं और वहां के जरूरतमंदों की मदद करते हैं और कभी भी हम जात पात का भेदभाव भी नहीं रखते।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
गोविन्द माँगत है रोटी । माखन सहित देहु मेरी जननी सुभ्र सुकोमल मोटो । जो कछु मार्गों देहुँ सो मोहन काहे को प्रांगन लोटी । कर गहि उछंग लेत महतारी हाथ फिरावत चोटी ॥ मदन गोपाल स्यामघन सुन्दर छोड़ो यह मति खोटी । 'परमानन्ददास' को ठाकुर हाथ हाथ लकुटिया छोटी ॥ उठत प्रात मात जसोदा मंगल भोग देत दोऊ छोरा । माखन मिस्री मलाई दूध भरे दोउ कनक कटोरा ।। कछुक खात कछु मुख लपटावत देत दुराये मिलि करत निहोरा । 'परमानंद प्रभु' भबकि हग भरत लाल भुज फरत कलोला ।। भोजन भली भांति हरि कीनों । खट बिजन मठा सलौनों माँगि माँगि हरि लीनो ।। हंसत लसत परसत नन्दरानी बाल केलि रस भीनों । 'परमानंद' उबरचो पनवारो टेरि सुबल कों दीनौ ॥ ग्वाल के पद गोपाल माई खेलत है चक डोरी । लरिका पाँच सात संग लोने निपट साँकरी खोरी ॥ चढ़ि घर होरी झरोखा चितयो सखी लियो मन चोरी । बांए हाथ बलैया लीनी अपनो श्रंचर छोरी ॥ चारों नयन मिले जब संमुख रसिक हँसे मुख मोर । 'परमानन्ददास' रति नागर चितें लई रति चोर ॥ गोपाल फिरावत है वंगी । भीतर भवन भरे सब बालक नाना बिधि कछु रंगो ।। सहज सुभाव डोरी खेंचत है लेत उठाय करपै संगी । कबहुँक कर लै स्रवन सुनावत नाना भांत अधिक सुरंगी । कबहुंक डार देत है पथ मे मुखहि बजावत संगी । 'परमानंद स्वामी' मन मोहन खेल सर्यो चले सब संगी ॥ लाल श्राज खेलत सुरंग खिलौना । काम सबद उघटत है पपीहा बड़ी मधुर मिलौना ।। प्रेम धुमेड़े लेत है फिरकी भुझना मनहि सलौना । चहाबहा चौबत चकई हित जु सब हो करौना ।। भुमिरि भूमि भुकि बाट देखत हथबंगी मनु जौना । 'परमानद' ध्यान भगतन बस ब्रज केर तिरौना फिरौना ॥
गोविन्द माँगत है रोटी । माखन सहित देहु मेरी जननी सुभ्र सुकोमल मोटो । जो कछु मार्गों देहुँ सो मोहन काहे को प्रांगन लोटी । कर गहि उछंग लेत महतारी हाथ फिरावत चोटी ॥ मदन गोपाल स्यामघन सुन्दर छोड़ो यह मति खोटी । 'परमानन्ददास' को ठाकुर हाथ हाथ लकुटिया छोटी ॥ उठत प्रात मात जसोदा मंगल भोग देत दोऊ छोरा । माखन मिस्री मलाई दूध भरे दोउ कनक कटोरा ।। कछुक खात कछु मुख लपटावत देत दुराये मिलि करत निहोरा । 'परमानंद प्रभु' भबकि हग भरत लाल भुज फरत कलोला ।। भोजन भली भांति हरि कीनों । खट बिजन मठा सलौनों माँगि माँगि हरि लीनो ।। हंसत लसत परसत नन्दरानी बाल केलि रस भीनों । 'परमानंद' उबरचो पनवारो टेरि सुबल कों दीनौ ॥ ग्वाल के पद गोपाल माई खेलत है चक डोरी । लरिका पाँच सात संग लोने निपट साँकरी खोरी ॥ चढ़ि घर होरी झरोखा चितयो सखी लियो मन चोरी । बांए हाथ बलैया लीनी अपनो श्रंचर छोरी ॥ चारों नयन मिले जब संमुख रसिक हँसे मुख मोर । 'परमानन्ददास' रति नागर चितें लई रति चोर ॥ गोपाल फिरावत है वंगी । भीतर भवन भरे सब बालक नाना बिधि कछु रंगो ।। सहज सुभाव डोरी खेंचत है लेत उठाय करपै संगी । कबहुँक कर लै स्रवन सुनावत नाना भांत अधिक सुरंगी । कबहुंक डार देत है पथ मे मुखहि बजावत संगी । 'परमानंद स्वामी' मन मोहन खेल सर्यो चले सब संगी ॥ लाल श्राज खेलत सुरंग खिलौना । काम सबद उघटत है पपीहा बड़ी मधुर मिलौना ।। प्रेम धुमेड़े लेत है फिरकी भुझना मनहि सलौना । चहाबहा चौबत चकई हित जु सब हो करौना ।। भुमिरि भूमि भुकि बाट देखत हथबंगी मनु जौना । 'परमानद' ध्यान भगतन बस ब्रज केर तिरौना फिरौना ॥
नासिकः नासिक जिले (Nashik District) में लम्पी स्किन बीमारी (Lumpy Skin Disease) का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस बीमारी से पशुओं (Cattles) की मौत (Death) भी हो रही है। अब तक नाशिक जिले में आठ पशुओं की मौत हो गई है, वहीं 270 पशु लम्पी वायरस से पीड़ित हैं। 11 तहसीलों में लम्पी का सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। उपचार के बाद 150 पशुओं को जीवनदान मिला है। सिन्नर तहसील में सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। जिला परिषद की ओर से टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। अब तक 75 प्रतिशत टीकाकरण किया गया है। नासिक जिले के 244 अस्पतालों में टीकाकरण शुरू है। जिले में अब तक 8 पशुओं की मौत लम्पी स्किन बीमारी से हुई है। इसमें से 4 पशुपालकों को सरकार द्वारा घोषित किया गया अनुदान मिल गया है। अन्य 3 प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद अनुदान दिया जाएगा। जिले में सबसे अधिक लम्पी का प्रकोप सिन्नर में है। यहां के 133 पशुओं को यह बीमारी हुई है और दो पशुओं की मौत हो चुकी है। इगतपुरी में 45 पशुओं को यह बीमारी हुई है और दो की मौत हो गई है। बागलाण में 20 पशुओं को यह बीमारी हुई और तीन की मौत हो गई है। मालेगांव में 11 पशुओं को यह बीमारी हुई है, वहीं एक पशु की मौत हो चुकी है। चांदवड़ में 15, निफाड़ में 16, दिंडोरी में 12, पेठ में 6, नासिक में चार, येवला में चार और देवला में चार पशुओं को लम्पी की बीमारी हुई है।
नासिकः नासिक जिले में लम्पी स्किन बीमारी का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस बीमारी से पशुओं की मौत भी हो रही है। अब तक नाशिक जिले में आठ पशुओं की मौत हो गई है, वहीं दो सौ सत्तर पशु लम्पी वायरस से पीड़ित हैं। ग्यारह तहसीलों में लम्पी का सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। उपचार के बाद एक सौ पचास पशुओं को जीवनदान मिला है। सिन्नर तहसील में सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। जिला परिषद की ओर से टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। अब तक पचहत्तर प्रतिशत टीकाकरण किया गया है। नासिक जिले के दो सौ चौंतालीस अस्पतालों में टीकाकरण शुरू है। जिले में अब तक आठ पशुओं की मौत लम्पी स्किन बीमारी से हुई है। इसमें से चार पशुपालकों को सरकार द्वारा घोषित किया गया अनुदान मिल गया है। अन्य तीन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद अनुदान दिया जाएगा। जिले में सबसे अधिक लम्पी का प्रकोप सिन्नर में है। यहां के एक सौ तैंतीस पशुओं को यह बीमारी हुई है और दो पशुओं की मौत हो चुकी है। इगतपुरी में पैंतालीस पशुओं को यह बीमारी हुई है और दो की मौत हो गई है। बागलाण में बीस पशुओं को यह बीमारी हुई और तीन की मौत हो गई है। मालेगांव में ग्यारह पशुओं को यह बीमारी हुई है, वहीं एक पशु की मौत हो चुकी है। चांदवड़ में पंद्रह, निफाड़ में सोलह, दिंडोरी में बारह, पेठ में छः, नासिक में चार, येवला में चार और देवला में चार पशुओं को लम्पी की बीमारी हुई है।