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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में मोलनुपिरवीर दवा (Molnupiravir medicine) के इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है. बाजार में इसकी कीमत 2490 रुपये है.
पिछले कुछ दिनों में अचानक से बढ़े कोरोना के मामलों के बाद दवाओं की मांग बड़ी तेजी से बढ़ रही है. आल इंडिया कैमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के सदस्य प्रियांस गुप्ता ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि पिछली बार की तरह इस बार भी दवाओं की बड़ी मांग शुरू हो गयी है. कुछ दवाएं नई हैं, जो बाजार में आयी हैं. उन्होंने कहा कि जिस हिसाब से केस बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में दवाओं की किल्लत हो सकती है.
प्रियांस ने बताया कि इस बार दो दवाओं की सबसे अधिक मांग है. उनमें से एक है कोविड किट. कोविड किट (Covid Kit) के माध्यम से आप घर बैठे महज दस मिनट में अपना कोविड का टेस्ट कर सकते हैं. हाल ही में इस किट को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) ने लांच किया है. इस किट की डिमांड सबसे अधिक है. इससे लोगों को अस्पताल जाने की नौबत नहीं आ रही है.
डॉक्टरों ने इस बात का दावा किया है कि यदि कोई मरीज कोरोना से संक्रमित होता है तो एक ऐसी दवा है जिसके सेवन से मरीज जल्द ही निगेटिव हो जाता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में मोलनुपिरवीर दवा (Molnupiravir medicine) के इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है. बाजार में इसकी कीमत 2490 रुपये है. दावा यह किया जा रहा है कि जैसे ही मरीज में कोरोना के संक्रमण का पता चले फौरन उसे मोलनुपिरवीर दवा दी जाए तो मरीज जल्द ही निगेटिव हो जाता है.
प्रियांस गुप्ता ने बताया कि पिछले 6 दिनों से अचानक से दवाओं की मांग बढ़ी है. उन्होंने कहा कि फिलहाल तो अधिकतर दवाएं स्टॉक में हैं, लेकिन जिस तरह से दवाओं की मांग बढ़ रही है उसे देखकर ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि दवाओं की कहीं कमी ना हो जाए. दिल्ली में बहुत ही तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं.
प्रियांस ने बताया कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जिन दवाओं की सबसे अधिक मांग थी, उनमें रेमडेसिवीर दवा शामिल थी, जो कि एंटीवायरल दवा है. इसे सबसे पहले 2014 में इबोला के इलाज में इस्तेमाल किया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ट्रायल में इस दवा को कोविड-19 के खिलाफ कारगर इलाज माना था. हालांकि भारत में इसे अस्पतालों तक ही सीमित किया गया था. दूसरी दवा टोसिलीजुमाब और फेवीपिरवीर थी. प्रियांस ने बताया कि इस बार फेवीपिरवीर, टोसिलीजुमाब और रेमडेसिवीर की डिमांड अभी नहीं है. लेकिन डॉक्सीसाइक्लिन, आइवरमेक्टिन, पारासीटामोल, विटामिन सी और मल्टीविटामिन की दवा की मांग अभी भी है.
| केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में मोलनुपिरवीर दवा के इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है. बाजार में इसकी कीमत दो हज़ार चार सौ नब्बे रुपयापये है. पिछले कुछ दिनों में अचानक से बढ़े कोरोना के मामलों के बाद दवाओं की मांग बड़ी तेजी से बढ़ रही है. आल इंडिया कैमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के सदस्य प्रियांस गुप्ता ने टीवीनौ भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि पिछली बार की तरह इस बार भी दवाओं की बड़ी मांग शुरू हो गयी है. कुछ दवाएं नई हैं, जो बाजार में आयी हैं. उन्होंने कहा कि जिस हिसाब से केस बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में दवाओं की किल्लत हो सकती है. प्रियांस ने बताया कि इस बार दो दवाओं की सबसे अधिक मांग है. उनमें से एक है कोविड किट. कोविड किट के माध्यम से आप घर बैठे महज दस मिनट में अपना कोविड का टेस्ट कर सकते हैं. हाल ही में इस किट को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लांच किया है. इस किट की डिमांड सबसे अधिक है. इससे लोगों को अस्पताल जाने की नौबत नहीं आ रही है. डॉक्टरों ने इस बात का दावा किया है कि यदि कोई मरीज कोरोना से संक्रमित होता है तो एक ऐसी दवा है जिसके सेवन से मरीज जल्द ही निगेटिव हो जाता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में मोलनुपिरवीर दवा के इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है. बाजार में इसकी कीमत दो हज़ार चार सौ नब्बे रुपयापये है. दावा यह किया जा रहा है कि जैसे ही मरीज में कोरोना के संक्रमण का पता चले फौरन उसे मोलनुपिरवीर दवा दी जाए तो मरीज जल्द ही निगेटिव हो जाता है. प्रियांस गुप्ता ने बताया कि पिछले छः दिनों से अचानक से दवाओं की मांग बढ़ी है. उन्होंने कहा कि फिलहाल तो अधिकतर दवाएं स्टॉक में हैं, लेकिन जिस तरह से दवाओं की मांग बढ़ रही है उसे देखकर ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि दवाओं की कहीं कमी ना हो जाए. दिल्ली में बहुत ही तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं. प्रियांस ने बताया कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जिन दवाओं की सबसे अधिक मांग थी, उनमें रेमडेसिवीर दवा शामिल थी, जो कि एंटीवायरल दवा है. इसे सबसे पहले दो हज़ार चौदह में इबोला के इलाज में इस्तेमाल किया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ट्रायल में इस दवा को कोविड-उन्नीस के खिलाफ कारगर इलाज माना था. हालांकि भारत में इसे अस्पतालों तक ही सीमित किया गया था. दूसरी दवा टोसिलीजुमाब और फेवीपिरवीर थी. प्रियांस ने बताया कि इस बार फेवीपिरवीर, टोसिलीजुमाब और रेमडेसिवीर की डिमांड अभी नहीं है. लेकिन डॉक्सीसाइक्लिन, आइवरमेक्टिन, पारासीटामोल, विटामिन सी और मल्टीविटामिन की दवा की मांग अभी भी है. |
तीसरा अध्याय
शिक्षा : भारतीय समाज की संरक्षणात्मक एवं सर्जनात्मक शक्ति
प्रथम खण्ड के पहले और दूसरे अध्याय में भारतीय समाज के सामाजिक परिदृश्य का - उसके अतीत का और वर्तमान का चित्रण किया गया है। इस अध्याय में हमने स्वतंत्र भारत के शैक्षिक लक्ष्यों की विवेचना तीन संदर्भों में करने का प्रयास किया है - ( 1 ) वैयक्तिक वृद्धि एवं विकास; (2) अपनी सीमाओं में तथा व्यापक दायरे में समाज की गतिशील एवं परिवर्तनशील भूमिका; और (3) परिवर्तन के परिणाम एवं घटक के रूप में व्यक्ति एवं समाज के बीच होने वाली पारस्परिक अंतः क्रियाएँ । निश्चय ही इससे सामान्यतः सभी शिक्षकों और विशेषकर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की मनोवृत्ति और कार्य में प्रचर परिवर्तन आएगा क्योंकि प्रत्येक शिक्षक को शैक्षिक समस्याओं, व्यवहारों और निर्णयों से संबद्ध प्रश्नों के हल मालूम करने पड़ेंगे। इस बात को ध्यान में रखकर इस अध्याय को अनेक इकाइयों में बाँटा गया है। इक़ाई 3.1 में शिक्षा की संकल्पना को स्पष्ट किया गया है। इकाई 3.2 में शिक्षा की उक्त संकल्पना के संबंध में शिक्षा के लक्ष्यों का उल्लेख । उप- इकाइयों 3.2.1., 3.2.2, 3.2.3 और 3.2.4 में निम्नलिखित तथ्यों के संबंध में शिक्षा के इन उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया हैः
1. परंपराओं की निरंतरता को बनाए रखना, 2. राष्ट्रीय ध्येयों को प्राप्त करना,
3. समकालीन समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करना; और 4. अनिश्चित भविष्य की चुनौतियों का
सामना करना ।
ये उद्देश्य एक दूसरे से एकदम विलग नहीं हैं किन्तु इनकी मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट करने के लिए इनका वर्णन अलग-अलग किया गया है ।
इकाई 3.3 में प्रारंभिक शिक्षा के 'शैक्षिक लक्ष्यों का उल्लेख है। शिक्षा प्रणाली की सफलता का मूल्यांकन सदा शैक्षिक उद्देश्यों के संदर्भ में होता है, अर्थात् सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि किस सीमा तक शिक्षा अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर पाती है। इस प्रकार शिक्षा के परिणामों का शिक्षा के लक्ष्यों के साथ निकट का संबंध है। इकाई 3.4 में इन उद्देश्यों के संबंध में शिक्षा के परिणामों का विश्लेषण किया गया है। इकाई 3.5 में इस बात की व्याख्या की गई है कि इन लक्ष्यों के अनुसार शैक्षिक समस्याओं के समाधान में शिक्षक अपने व्यावसायिक दर्शन और अपनी कार्य योजना को क्यों और कैसे विकसित करता है। अपने व्यावसायिक दर्शन के साथ-साथ शिक्षक को विद्यार्थियों, माता-पिताओं, सहयोगियों और समुदाय तथा अपने कार्य से संबद्ध संस्थाओं के साथ अपने संबंध निर्धारित करने के लिए एक व्यावसायिक आचार संहिता भी चाहिए। यह | तीसरा अध्याय शिक्षा : भारतीय समाज की संरक्षणात्मक एवं सर्जनात्मक शक्ति प्रथम खण्ड के पहले और दूसरे अध्याय में भारतीय समाज के सामाजिक परिदृश्य का - उसके अतीत का और वर्तमान का चित्रण किया गया है। इस अध्याय में हमने स्वतंत्र भारत के शैक्षिक लक्ष्यों की विवेचना तीन संदर्भों में करने का प्रयास किया है - वैयक्तिक वृद्धि एवं विकास; अपनी सीमाओं में तथा व्यापक दायरे में समाज की गतिशील एवं परिवर्तनशील भूमिका; और परिवर्तन के परिणाम एवं घटक के रूप में व्यक्ति एवं समाज के बीच होने वाली पारस्परिक अंतः क्रियाएँ । निश्चय ही इससे सामान्यतः सभी शिक्षकों और विशेषकर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की मनोवृत्ति और कार्य में प्रचर परिवर्तन आएगा क्योंकि प्रत्येक शिक्षक को शैक्षिक समस्याओं, व्यवहारों और निर्णयों से संबद्ध प्रश्नों के हल मालूम करने पड़ेंगे। इस बात को ध्यान में रखकर इस अध्याय को अनेक इकाइयों में बाँटा गया है। इक़ाई तीन.एक में शिक्षा की संकल्पना को स्पष्ट किया गया है। इकाई तीन.दो में शिक्षा की उक्त संकल्पना के संबंध में शिक्षा के लक्ष्यों का उल्लेख । उप- इकाइयों तीन.दो.एक., तीन.दो.दो, तीन.दो.तीन और तीन.दो.चार में निम्नलिखित तथ्यों के संबंध में शिक्षा के इन उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया हैः एक. परंपराओं की निरंतरता को बनाए रखना, दो. राष्ट्रीय ध्येयों को प्राप्त करना, तीन. समकालीन समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करना; और चार. अनिश्चित भविष्य की चुनौतियों का सामना करना । ये उद्देश्य एक दूसरे से एकदम विलग नहीं हैं किन्तु इनकी मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट करने के लिए इनका वर्णन अलग-अलग किया गया है । इकाई तीन.तीन में प्रारंभिक शिक्षा के 'शैक्षिक लक्ष्यों का उल्लेख है। शिक्षा प्रणाली की सफलता का मूल्यांकन सदा शैक्षिक उद्देश्यों के संदर्भ में होता है, अर्थात् सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि किस सीमा तक शिक्षा अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर पाती है। इस प्रकार शिक्षा के परिणामों का शिक्षा के लक्ष्यों के साथ निकट का संबंध है। इकाई तीन.चार में इन उद्देश्यों के संबंध में शिक्षा के परिणामों का विश्लेषण किया गया है। इकाई तीन.पाँच में इस बात की व्याख्या की गई है कि इन लक्ष्यों के अनुसार शैक्षिक समस्याओं के समाधान में शिक्षक अपने व्यावसायिक दर्शन और अपनी कार्य योजना को क्यों और कैसे विकसित करता है। अपने व्यावसायिक दर्शन के साथ-साथ शिक्षक को विद्यार्थियों, माता-पिताओं, सहयोगियों और समुदाय तथा अपने कार्य से संबद्ध संस्थाओं के साथ अपने संबंध निर्धारित करने के लिए एक व्यावसायिक आचार संहिता भी चाहिए। यह |
नई दिल्लीः पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू और कश्मीर के बारामूला में मुठभेड़ के दौरान दो आतंकवादी मारे गए.
अधिकारी के मुताबिक उनके पास से 1 एकेएस-74यू और 3 मैगजीन, 1 पिस्टल और उसकी मैगजीन और 2 गोलियां बरामद की गई हैं.
पुलिस ने इलाके के लोगों से सावधान रहने की अपील की है.
इससे पहले, शुक्रवार की तड़के बारामूला में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ के बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो आतंकवादी मारे गए थे. मुठभेड़ बारामूला के येदिपोरा, पट्टन इलाके में हुई.
| नई दिल्लीः पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू और कश्मीर के बारामूला में मुठभेड़ के दौरान दो आतंकवादी मारे गए. अधिकारी के मुताबिक उनके पास से एक एकेएस-चौहत्तरयू और तीन मैगजीन, एक पिस्टल और उसकी मैगजीन और दो गोलियां बरामद की गई हैं. पुलिस ने इलाके के लोगों से सावधान रहने की अपील की है. इससे पहले, शुक्रवार की तड़के बारामूला में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ के बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो आतंकवादी मारे गए थे. मुठभेड़ बारामूला के येदिपोरा, पट्टन इलाके में हुई. |
Gold Loan : एक व्यक्ति किसी भी समय गोल्ड लोन पर निर्भर हो सकता है, चाहे उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता हो, स्कूल के खर्चों का भुगतान करना हो.
Gold Loan Interest Rate : अगर आप गोल्ड लोन लेना चाहते हैं तो सबसे पहले उसकी ब्याज दरों के बारे में मालूम करना चाहिए ताकि आपको ज्यादा ब्याज न देना पड़े. अगर लोगों को अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो ऐसे में लोग गोल्ड या फिर गहने (आभूषण) को गिरवी रखकर लोन ले लेते हैं. जब तक लोन का पैसा चुकता नहीं हो जाता है. तब तक गोल्ड बैंक के पास गिरवी रहता है. लोन क्लियर होने के बाद ही बैंक आपको गिरवी रखा हुआ गोल्ड वापस करेगा. बता दें कि एक व्यक्ति किसी भी समय गोल्ड लोन पर निर्भर हो सकता है, चाहे उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता हो, स्कूल के खर्चों का भुगतान करना हो, चिकित्सा आपात स्थिति को कवर करना हो या कृषि मांगों को पूरा करना हो.
एक बैंक की वेबसाइट के अनुसार कि गोल्ड लोन या गोल्ड के बदले लोन बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली एक सुरक्षित क्रेडिट सुविधा है, जिससे आप धन के बदले में अपने सोने के आभूषण या गहने गिरवी रख सकते हैं. गोल्ड लोन पर ब्याज दरें प्रत्येक बैंक के साथ अलग-अलग होती हैं. साथ ही बैंक को चुनने से पहले ब्याज दरों को अवश्य देख लेना चाहिए. यहां 10 बैंक गोल्ड लोन पर सर्वोत्तम ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं. अगर आप भी गोल्ड लोन ले रहे हैं तो सबसे पहले ब्याज दरें चेक कर लें.
आपके गोल्ड लोन में देरी या भुगतान न करने के कारण आपका सोना चला जाता है. यह आपके क्रेडिट स्कोर को भी काफी कम कर देता है. गोल्ड लोन के कई फायदे हैं, और एक के लिए आवेदन करना सरल है, लेकिन आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप इसे पूरी तरह से और समय पर चुका दें. यदि आप कई रिमाइंडर के बाद भी कर्ज चुकाने में विफल रहते हैं, तो ऋणदाता को लोन से हुए नुकसान की भरपाई या संतुलन के प्रयास में आपका सोना नीलामी में बेचना होगा. आमतौर पर नीलामी से दो हफ्ते पहले, ऋणदाता आपको नीलामी की तारीख से दो हफ्ते पहले इसकी नीलामी के बारे में बताएंगे.
| Gold Loan : एक व्यक्ति किसी भी समय गोल्ड लोन पर निर्भर हो सकता है, चाहे उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता हो, स्कूल के खर्चों का भुगतान करना हो. Gold Loan Interest Rate : अगर आप गोल्ड लोन लेना चाहते हैं तो सबसे पहले उसकी ब्याज दरों के बारे में मालूम करना चाहिए ताकि आपको ज्यादा ब्याज न देना पड़े. अगर लोगों को अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो ऐसे में लोग गोल्ड या फिर गहने को गिरवी रखकर लोन ले लेते हैं. जब तक लोन का पैसा चुकता नहीं हो जाता है. तब तक गोल्ड बैंक के पास गिरवी रहता है. लोन क्लियर होने के बाद ही बैंक आपको गिरवी रखा हुआ गोल्ड वापस करेगा. बता दें कि एक व्यक्ति किसी भी समय गोल्ड लोन पर निर्भर हो सकता है, चाहे उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता हो, स्कूल के खर्चों का भुगतान करना हो, चिकित्सा आपात स्थिति को कवर करना हो या कृषि मांगों को पूरा करना हो. एक बैंक की वेबसाइट के अनुसार कि गोल्ड लोन या गोल्ड के बदले लोन बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली एक सुरक्षित क्रेडिट सुविधा है, जिससे आप धन के बदले में अपने सोने के आभूषण या गहने गिरवी रख सकते हैं. गोल्ड लोन पर ब्याज दरें प्रत्येक बैंक के साथ अलग-अलग होती हैं. साथ ही बैंक को चुनने से पहले ब्याज दरों को अवश्य देख लेना चाहिए. यहां दस बैंक गोल्ड लोन पर सर्वोत्तम ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं. अगर आप भी गोल्ड लोन ले रहे हैं तो सबसे पहले ब्याज दरें चेक कर लें. आपके गोल्ड लोन में देरी या भुगतान न करने के कारण आपका सोना चला जाता है. यह आपके क्रेडिट स्कोर को भी काफी कम कर देता है. गोल्ड लोन के कई फायदे हैं, और एक के लिए आवेदन करना सरल है, लेकिन आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप इसे पूरी तरह से और समय पर चुका दें. यदि आप कई रिमाइंडर के बाद भी कर्ज चुकाने में विफल रहते हैं, तो ऋणदाता को लोन से हुए नुकसान की भरपाई या संतुलन के प्रयास में आपका सोना नीलामी में बेचना होगा. आमतौर पर नीलामी से दो हफ्ते पहले, ऋणदाता आपको नीलामी की तारीख से दो हफ्ते पहले इसकी नीलामी के बारे में बताएंगे. |
सूरजकुंड रोड स्थित ओमेक्स फॉरेस्ट स्पा और हिल्स-2 सोसायटी जिले की बड़ी सोसायटियों में शुमार हैं। ओमेक्स फॉरेस्ट स्पा में 330 और हिल्स-2 में 226 फ्लैट्स हैं। दोनों सोसायटी में पानी का कनेक्शन एक ही है। सोसायटी वासियों को पजेशन मिलने के साथ ही पानी की दिक्कत शुरू हो गई है। एफएमडीए को पानी का कनेक्शन हैंडओवर होने के बाद भी डिमांड के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा है। यहां के निवासियों ने बताया कि करीब साढ़े 3 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन डेढ़ से 2 लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। गर्मियों में स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। रोज सुबह टैंकरों से पानी पहुंचाया जाता है।
सोसायटी वासियों ने बताया कि एफएमडीए की ओर से ठीक से पानी की सप्लाई न होने के कारण लोगों को प्राइवेट टैंकरों से पानी खरीद कर पीना पड़ता है। इसपर हर महीने करीब 12 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। लोगों ने कहा कि 6 माह पहले एफएमडीए की अतिरिक्त सीईओ डॉ. गरिमा मित्तल सोसायटी में आई थीं। उन्होंने लोगों को बेहतर पेयजल आपूर्ति का आश्वासन दिया था। इस आधार पर एफएमडीए से कनेक्शन भी ले लिए, लेकिन समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
हाईराइज सोसायटियों के अलावा सेक्टरों में पानी की दिक्कत बनी हुई है। सेक्टर 19 में निगम की ओर से पानी आने के समय में बिना सूचना दिए बदलाव कर दिया गया है। जिससे लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। लोगों ने बताया कि सुबह कुछ घंटों के लिए ही पानी आता है। ऐसे में पानी की दिक्कत बनी रहती है। निगम अधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन भी दिया गया, जिस पर विभाग की ओर से समस्या का समाधान करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा गया है।
सोसायटी में पानी की दिक्कत है। हम लोग मेंटिनेंस खर्च देने के बाद भी टैंकरों के लिए अलग से पैसे दे रहे हैं। हर जगह शिकायत कर ली, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए।
| सूरजकुंड रोड स्थित ओमेक्स फॉरेस्ट स्पा और हिल्स-दो सोसायटी जिले की बड़ी सोसायटियों में शुमार हैं। ओमेक्स फॉरेस्ट स्पा में तीन सौ तीस और हिल्स-दो में दो सौ छब्बीस फ्लैट्स हैं। दोनों सोसायटी में पानी का कनेक्शन एक ही है। सोसायटी वासियों को पजेशन मिलने के साथ ही पानी की दिक्कत शुरू हो गई है। एफएमडीए को पानी का कनेक्शन हैंडओवर होने के बाद भी डिमांड के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा है। यहां के निवासियों ने बताया कि करीब साढ़े तीन लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, लेकिन डेढ़ से दो लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। गर्मियों में स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। रोज सुबह टैंकरों से पानी पहुंचाया जाता है। सोसायटी वासियों ने बताया कि एफएमडीए की ओर से ठीक से पानी की सप्लाई न होने के कारण लोगों को प्राइवेट टैंकरों से पानी खरीद कर पीना पड़ता है। इसपर हर महीने करीब बारह लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। लोगों ने कहा कि छः माह पहले एफएमडीए की अतिरिक्त सीईओ डॉ. गरिमा मित्तल सोसायटी में आई थीं। उन्होंने लोगों को बेहतर पेयजल आपूर्ति का आश्वासन दिया था। इस आधार पर एफएमडीए से कनेक्शन भी ले लिए, लेकिन समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। हाईराइज सोसायटियों के अलावा सेक्टरों में पानी की दिक्कत बनी हुई है। सेक्टर उन्नीस में निगम की ओर से पानी आने के समय में बिना सूचना दिए बदलाव कर दिया गया है। जिससे लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। लोगों ने बताया कि सुबह कुछ घंटों के लिए ही पानी आता है। ऐसे में पानी की दिक्कत बनी रहती है। निगम अधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन भी दिया गया, जिस पर विभाग की ओर से समस्या का समाधान करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा गया है। सोसायटी में पानी की दिक्कत है। हम लोग मेंटिनेंस खर्च देने के बाद भी टैंकरों के लिए अलग से पैसे दे रहे हैं। हर जगह शिकायत कर ली, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए। |
Renault Triber RXE, RXL, RXT, और RXZ वेरिएंट में आती है। कंपनी ने इस MPV पर 60 हजार रुपये तक का डिस्काउंट ऑफर किया है। इसकी शुरुआती कीमत 5. 5 लाख रुपये है। इसका टॉप वेरिएंट की कीमत 7. 95 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) है। वहीं रेनो क्विड पर 35,000 रुपये का डिस्काउंट बेनेफिट दिए जा रहे हैं।
| Renault Triber RXE, RXL, RXT, और RXZ वेरिएंट में आती है। कंपनी ने इस MPV पर साठ हजार रुपये तक का डिस्काउंट ऑफर किया है। इसकी शुरुआती कीमत पाँच. पाँच लाख रुपये है। इसका टॉप वेरिएंट की कीमत सात. पचानवे लाख रुपये है। वहीं रेनो क्विड पर पैंतीस,शून्य रुपयापये का डिस्काउंट बेनेफिट दिए जा रहे हैं। |
पश्चिम बंगाल सरकार के आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में प्रधान सचिव से अतिरिक्त टीमों की तैनाती के लिए लिखित अनुरोध प्राप्त होने पर एनडीआरएफ की दस अतिरिक्त टीमों की व्यवस्था करने के बाद उन्हें जल्द से जल्द पश्चिम बंगाल के बाहर स्थित एनडीआरएफ स्थानों या केंद्रों से रवाना किया जा रहा है। इन टीमों के आज देर रात तक कोलकाता पहुंच जाने की संभावना है।
वर्तमान में एनडीआरएफ की 26 टीमें पश्चिम बंगाल के चक्रवाती तूफान प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न सेवाओं की बहाली से जुड़े कार्यों के लिए तैनात हैं। 10 अतिरिक्त टीमों की तैनाती से चक्रवाती तूफान अम्फान से प्रभावित पश्चिम बंगाल के 6 जिलों में एनडीआरएफ की कुल 36 टीमों की तैनाती सुनिश्चित हो जाएगी।
| पश्चिम बंगाल सरकार के आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में प्रधान सचिव से अतिरिक्त टीमों की तैनाती के लिए लिखित अनुरोध प्राप्त होने पर एनडीआरएफ की दस अतिरिक्त टीमों की व्यवस्था करने के बाद उन्हें जल्द से जल्द पश्चिम बंगाल के बाहर स्थित एनडीआरएफ स्थानों या केंद्रों से रवाना किया जा रहा है। इन टीमों के आज देर रात तक कोलकाता पहुंच जाने की संभावना है। वर्तमान में एनडीआरएफ की छब्बीस टीमें पश्चिम बंगाल के चक्रवाती तूफान प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न सेवाओं की बहाली से जुड़े कार्यों के लिए तैनात हैं। दस अतिरिक्त टीमों की तैनाती से चक्रवाती तूफान अम्फान से प्रभावित पश्चिम बंगाल के छः जिलों में एनडीआरएफ की कुल छत्तीस टीमों की तैनाती सुनिश्चित हो जाएगी। |
बहादुरगढ़, 23 मई ग्रामीण व शहरी विकास योजनाओं को मूर्त रूप देने व जनसमस्याओं के स्थाई समाधान के लिए मौजूदा सरकार प्रयासरत है और अब निकाय चुनाव के उपरांत विकास का नया स्वरूप बहादुरगढ़ क्षेत्र में देखने को मिलेगा।
यह बात बहादुरगढ़ से विधायक नरेश कौशिक ने कही। वे सोमवार को अपने कार्यालय में क्षेत्र के लोगों से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने बहादुरगढ़ नगरपरिषद् के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें शहरी क्षेत्र के विकास में भागीदार बनने का आह्वान भी किया।
विधायक कौशिक ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में बहादुरगढ़ शहर की जनता ने जो सौहार्दपूर्ण व शांति व्यवस्था कायम रखते हुए चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई है, उसके लिए वे शहरवासियों का आभार जताते हैं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद् चुनाव के साथ ही नवनिर्वाचित पार्षदों के सहयोग से बहादुरगढ़ शहरी क्षेत्र में विकास की नई परियोजनाओं को सरकार की ओर से क्रियांवित किया जाएगा।
क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को हर संभव सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से कारगर कदम उठाए जा रहे हैं और अनेक जन कल्याणकारी नीतियों के बलबूते क्षेत्र के उत्थान में हर वर्ग की सक्रिय सहभागिता रहेगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से आर्थिक रूप से कमी नहीं रहने दी जाएगी और निर्धारित समय सीमा में ही विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा जिससे क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिल सके।
विधायक कौशिक ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्र से आए लोगों से रूबरू होते हुए उनकी समस्याओं को सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए अधिकारी सक्रियता बरतें ताकि लोगों को तत्परता से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आमजन की सुविधा के लिए सुशासन दिया जा रहा है और लोगों की मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
| बहादुरगढ़, तेईस मई ग्रामीण व शहरी विकास योजनाओं को मूर्त रूप देने व जनसमस्याओं के स्थाई समाधान के लिए मौजूदा सरकार प्रयासरत है और अब निकाय चुनाव के उपरांत विकास का नया स्वरूप बहादुरगढ़ क्षेत्र में देखने को मिलेगा। यह बात बहादुरगढ़ से विधायक नरेश कौशिक ने कही। वे सोमवार को अपने कार्यालय में क्षेत्र के लोगों से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने बहादुरगढ़ नगरपरिषद् के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें शहरी क्षेत्र के विकास में भागीदार बनने का आह्वान भी किया। विधायक कौशिक ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में बहादुरगढ़ शहर की जनता ने जो सौहार्दपूर्ण व शांति व्यवस्था कायम रखते हुए चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई है, उसके लिए वे शहरवासियों का आभार जताते हैं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद् चुनाव के साथ ही नवनिर्वाचित पार्षदों के सहयोग से बहादुरगढ़ शहरी क्षेत्र में विकास की नई परियोजनाओं को सरकार की ओर से क्रियांवित किया जाएगा। क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को हर संभव सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से कारगर कदम उठाए जा रहे हैं और अनेक जन कल्याणकारी नीतियों के बलबूते क्षेत्र के उत्थान में हर वर्ग की सक्रिय सहभागिता रहेगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से आर्थिक रूप से कमी नहीं रहने दी जाएगी और निर्धारित समय सीमा में ही विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा जिससे क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिल सके। विधायक कौशिक ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्र से आए लोगों से रूबरू होते हुए उनकी समस्याओं को सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए अधिकारी सक्रियता बरतें ताकि लोगों को तत्परता से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आमजन की सुविधा के लिए सुशासन दिया जा रहा है और लोगों की मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। |
Highlightsपश्चिम की टीम अब भी दक्षिण क्षेत्र से 84 रन से पिछड़ रही है। विद्वत कावेरप्पा की गुडलेंथ गेंद पर हनुमा विहारी के हाथों कैच आउट हुआ। सरफराज खान को पगबाधा आउट किया जो खाता भी नहीं खोल सके।
Duleep Trophy Final West Zone vs South Zone, Final 2023: दक्षिण क्षेत्र के तेज गेंदबाजों ने गुरुवार को यहां दलीप ट्राफी फाइनल के दूसरे दिन पश्चिम क्षेत्र के स्टंप तक 129 रन के स्कोर पर सात विकेट झटककर पहले दिन टीम के खराब प्रदर्शन की भरपायी करने में मदद की। पश्चिम की टीम अब भी दक्षिण क्षेत्र से 84 रन से पिछड़ रही है।
इससे पहले दक्षिण क्षेत्र की टीम पहली पारी में 213 रन पर सिमट गयी थी जिसने सुबह सात विकेट पर 182 रन से खेलना शुरू किया था। पृथ्वी साव और हार्विक देसाई ने पश्चिम क्षेत्र को एक विकेट पर 97 रन के स्कोर तक पहुंचाया। साव ने अपनी 65 रन की पारी के दौरान कुछ शानदार शॉट लगाये।
साव बड़ी पारी की ओर बढ़ रहे थे और साफ दिख रहा था कि दक्षिण के गेंदबाजों को दूसरे विकेट की साझेदारी तोड़ने के लिए कुछ विशेष करना होगा। और यह काम शायद 65 मिनट के बारिश के ब्रेक ने कर दिया जो दूसरे सत्र में आयी। इससे दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने का समय भी मिल गया।
ब्रेक के बाद मैदान पर उनके गेंदबाजों के बदले रवैये को स्पष्ट देखा जा सकता था। वी विजयकुमार ने साव और हार्विक देसाई (21 रन) को अपनी शॉर्ट पिच गेंदबाजी से परेशान किया। विद्वत कावेरप्पा ने हार्विक देसाई को आउट कर यह भागीदारी तोड़ी। वी विजयकुमार ने साव को अपर कट शॉट खेलने के लिए बाध्य किया और यह थर्ड मैन पर खड़े विद्वत कावेरप्पा के हाथों में समा गया।
उन्होंने 101 गेंद की पारी के दौरान नौ बाउंड्री लगायी। सूर्यकुमार यादव (6 गेंद और 8 रन) ने अपने चिर परिचित टी20 क्रिकेट अंदाज में खेलना शुरू किया और इसी चक्कर में एक बार आउट होने से बचे। लेकिन जल्द ही उनकी पारी का अंत हो गया, मुंबई का यह बल्लेबाज विद्वत कावेरप्पा की गुडलेंथ गेंद पर हनुमा विहारी के हाथों कैच आउट हुआ।
विद्वत कावेरप्पा ने जल्द ही सरफराज खान को पगबाधा आउट किया जो खाता भी नहीं खोल सके। इससे आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी और अब जिम्मेदारी चेतेश्वर पुजारा (38 गेंद 9 रन) के कंधों पर थी लेकिन यह अनुभवी बल्लेबाज इस दफा इसे निभाने में असफल रहा। विद्वत कावेरप्पा की गेंद पर आर समर्थ के कैच ने पुजारा की पारी खत्म की।
| Highlightsपश्चिम की टीम अब भी दक्षिण क्षेत्र से चौरासी रन से पिछड़ रही है। विद्वत कावेरप्पा की गुडलेंथ गेंद पर हनुमा विहारी के हाथों कैच आउट हुआ। सरफराज खान को पगबाधा आउट किया जो खाता भी नहीं खोल सके। Duleep Trophy Final West Zone vs South Zone, Final दो हज़ार तेईस: दक्षिण क्षेत्र के तेज गेंदबाजों ने गुरुवार को यहां दलीप ट्राफी फाइनल के दूसरे दिन पश्चिम क्षेत्र के स्टंप तक एक सौ उनतीस रन के स्कोर पर सात विकेट झटककर पहले दिन टीम के खराब प्रदर्शन की भरपायी करने में मदद की। पश्चिम की टीम अब भी दक्षिण क्षेत्र से चौरासी रन से पिछड़ रही है। इससे पहले दक्षिण क्षेत्र की टीम पहली पारी में दो सौ तेरह रन पर सिमट गयी थी जिसने सुबह सात विकेट पर एक सौ बयासी रन से खेलना शुरू किया था। पृथ्वी साव और हार्विक देसाई ने पश्चिम क्षेत्र को एक विकेट पर सत्तानवे रन के स्कोर तक पहुंचाया। साव ने अपनी पैंसठ रन की पारी के दौरान कुछ शानदार शॉट लगाये। साव बड़ी पारी की ओर बढ़ रहे थे और साफ दिख रहा था कि दक्षिण के गेंदबाजों को दूसरे विकेट की साझेदारी तोड़ने के लिए कुछ विशेष करना होगा। और यह काम शायद पैंसठ मिनट के बारिश के ब्रेक ने कर दिया जो दूसरे सत्र में आयी। इससे दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने का समय भी मिल गया। ब्रेक के बाद मैदान पर उनके गेंदबाजों के बदले रवैये को स्पष्ट देखा जा सकता था। वी विजयकुमार ने साव और हार्विक देसाई को अपनी शॉर्ट पिच गेंदबाजी से परेशान किया। विद्वत कावेरप्पा ने हार्विक देसाई को आउट कर यह भागीदारी तोड़ी। वी विजयकुमार ने साव को अपर कट शॉट खेलने के लिए बाध्य किया और यह थर्ड मैन पर खड़े विद्वत कावेरप्पा के हाथों में समा गया। उन्होंने एक सौ एक गेंद की पारी के दौरान नौ बाउंड्री लगायी। सूर्यकुमार यादव ने अपने चिर परिचित टीबीस क्रिकेट अंदाज में खेलना शुरू किया और इसी चक्कर में एक बार आउट होने से बचे। लेकिन जल्द ही उनकी पारी का अंत हो गया, मुंबई का यह बल्लेबाज विद्वत कावेरप्पा की गुडलेंथ गेंद पर हनुमा विहारी के हाथों कैच आउट हुआ। विद्वत कावेरप्पा ने जल्द ही सरफराज खान को पगबाधा आउट किया जो खाता भी नहीं खोल सके। इससे आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी और अब जिम्मेदारी चेतेश्वर पुजारा के कंधों पर थी लेकिन यह अनुभवी बल्लेबाज इस दफा इसे निभाने में असफल रहा। विद्वत कावेरप्पा की गेंद पर आर समर्थ के कैच ने पुजारा की पारी खत्म की। |
हरियाणा सरकार ने अपने सहयोगी मंत्रियों के विभागों से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। जबकि प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज के दो विभाग वापस ले लिए हैं। परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा को उच्च विभाग सौंपा गया है।
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने करीब दो दर्जन सरकारी विभागों के आपस में विलय के बाद मंत्रियों के विभागों का नये सिरे से बंटवारा किया है। प्रदेश सरकार ने अपने सहयोगी दल जेजेपी कोटे के मंत्रियों के विभागों से ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की है। जेजेपी कोटे के मंत्री देवेंद्र बबली से एक विभाग वापस लिया गया है। प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज और शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
प्रदेश सरकार ने विज से दो विभाग वापस लिए हैं, जबकि कंवरपाल के शिक्षा विभाग को दो हिस्सों में बांटकर उन्हें सिर्फ स्कूल शिक्षा विभाग दिया गया है। परिवहन मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा को उच्च शिक्षा विभाग अलग से सौंपा गया है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक विभाग छोड़कर तीन नये विभाग अपने पास रखे हैं। कैबिनेट मंत्री डा. बनवारी लाल से अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग वापस लेकर मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है, लेकिन इसके बदले में उन्हें जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग मिला है। नया बदलाव इसलिए हुआ है, क्योंकि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में ही एससी-बीसी कल्याण मामले विभाग को मर्ज कर दिया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रहे ओमप्रकाश यादव के पास अब यह विभाग नहीं रहेगा। वह मुख्यमंत्री के साथ अटैच रहेंगे। सैनिक और अर्द्ध-सैनिक विभाग का स्वतंत्र प्रभार ओमप्रकाश यादव के पास पहले की तरह बना रहेगा। दुष्यंत चौटाला के विभागों में कोई बड़ी छेड़छाड़ नहीं हुई है। हालांकि गिनती में दुष्यंत के पास अब आठ की बजाय सात विभाग रहेंगे, लेकिन सरकारी विभागों के विलय की वजह से ऐसा हुआ है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में ही फायर ब्रिगेड को भी मर्ज कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास कुल 14 विभाग रहेंगे। इसके अलावा जो विभाग किसी भी मंत्री को अलाट नहीं हुए हैं, उनका कामकाज भी सीएम देखेंगे। सीएम के पास वित्त एवं संस्थागत वित्त, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, सिंचाई एवं जल संसाधन, प्लानिंग, न्याय प्रशासन, आर्किटेक्चर, सामान्य प्रशासन, सीआईडी, पर्सोनल एंड ट्रेनिंग, राज भवन मामले, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा कल्याण मामले, युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति तथा खेल विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग छोड़ा है, जबकि सामाजिक न्याय, युवा सशक्तीकरण और खेल उनके पास नये विभाग के रूप में शामिल हुए हैं।
| हरियाणा सरकार ने अपने सहयोगी मंत्रियों के विभागों से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। जबकि प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज के दो विभाग वापस ले लिए हैं। परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा को उच्च विभाग सौंपा गया है। अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने करीब दो दर्जन सरकारी विभागों के आपस में विलय के बाद मंत्रियों के विभागों का नये सिरे से बंटवारा किया है। प्रदेश सरकार ने अपने सहयोगी दल जेजेपी कोटे के मंत्रियों के विभागों से ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की है। जेजेपी कोटे के मंत्री देवेंद्र बबली से एक विभाग वापस लिया गया है। प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज और शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार ने विज से दो विभाग वापस लिए हैं, जबकि कंवरपाल के शिक्षा विभाग को दो हिस्सों में बांटकर उन्हें सिर्फ स्कूल शिक्षा विभाग दिया गया है। परिवहन मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा को उच्च शिक्षा विभाग अलग से सौंपा गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक विभाग छोड़कर तीन नये विभाग अपने पास रखे हैं। कैबिनेट मंत्री डा. बनवारी लाल से अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग वापस लेकर मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है, लेकिन इसके बदले में उन्हें जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग मिला है। नया बदलाव इसलिए हुआ है, क्योंकि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में ही एससी-बीसी कल्याण मामले विभाग को मर्ज कर दिया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रहे ओमप्रकाश यादव के पास अब यह विभाग नहीं रहेगा। वह मुख्यमंत्री के साथ अटैच रहेंगे। सैनिक और अर्द्ध-सैनिक विभाग का स्वतंत्र प्रभार ओमप्रकाश यादव के पास पहले की तरह बना रहेगा। दुष्यंत चौटाला के विभागों में कोई बड़ी छेड़छाड़ नहीं हुई है। हालांकि गिनती में दुष्यंत के पास अब आठ की बजाय सात विभाग रहेंगे, लेकिन सरकारी विभागों के विलय की वजह से ऐसा हुआ है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में ही फायर ब्रिगेड को भी मर्ज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास कुल चौदह विभाग रहेंगे। इसके अलावा जो विभाग किसी भी मंत्री को अलाट नहीं हुए हैं, उनका कामकाज भी सीएम देखेंगे। सीएम के पास वित्त एवं संस्थागत वित्त, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, सिंचाई एवं जल संसाधन, प्लानिंग, न्याय प्रशासन, आर्किटेक्चर, सामान्य प्रशासन, सीआईडी, पर्सोनल एंड ट्रेनिंग, राज भवन मामले, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा कल्याण मामले, युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति तथा खेल विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग छोड़ा है, जबकि सामाजिक न्याय, युवा सशक्तीकरण और खेल उनके पास नये विभाग के रूप में शामिल हुए हैं। |
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))
तिरुवनंतपुरमः
केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य गंभीर वित्तीय संकट में है और केंद्र तत्काल हस्तक्षेप करे।
बालगोपाल ने कहा, राज्य की वित्तीय स्थिति इस साल लगभग 7,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे के अनुदान में कमी और लगभग 12,000 करोड़ रुपये के जीएसटी मुआवजे को रोकने के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय ने मनमाने ढंग से ऑफ-बजट उधारी के नाम पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये की राज्य की शुद्ध उधार सीमा में कमी की है।
उन्होंने पत्र में लिखा है, कुल मिलाकर, राज्य सरकार को चालू वित्त वर्ष में बजट के वित्तपोषण के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों में 23,000 करोड़ रुपये की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
बालगोपाल ने आगे कहा, राज्य सरकार गरीबों के लिए आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बनाए रखने में एक गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। राज्य कोविड महामारी से पैदा हुई आर्थिक कमजोरी से उभरने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार ने काफी मुश्किल से पिछले कई दशकों में जो निर्माण किया है वह खतरे में पड़ जाएगा।
बालगोपाल ने आगे बताया कि पिछले 25 वर्षो में राज्य सरकारों की वित्तीय देनदारियों की संरचना में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा, केंद्र से ऋण और अग्रिम की हिस्सेदारी 2005 में 15. 8 प्रतिशत से घटकर 2020 में 3 प्रतिशत हो गई है। केरल इस प्रवृत्ति का अपवाद नहीं है। केंद्र से केरल को बकाया ऋण और अग्रिम 2005 में 12. 4 प्रतिशत से घटकर 2020 में 3. 3 प्रतिशत हो गया है।
वह आगे बताते हैं कि पिछले पांच वर्षो में, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की कुछ कार्रवाइयों ने राज्य की शुद्ध उधार सीमा तय करते हुए राज्य सरकारों के लिए कुछ गंभीर चिंताएं पैदा की हैं और केंद्र को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
जानकारों का कहना है कि अगर बालगोपाल की आशंकाओं और चिंताओं के संबंध में राज्य की महसूस की गई मांगों और जरूरतों के प्रति विचारशील दृष्टिकोण नहीं लिया जाता है, तो आने वाले महीनों में राज्य को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
| ) तिरुवनंतपुरमः केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य गंभीर वित्तीय संकट में है और केंद्र तत्काल हस्तक्षेप करे। बालगोपाल ने कहा, राज्य की वित्तीय स्थिति इस साल लगभग सात,शून्य करोड़ रुपये के राजस्व घाटे के अनुदान में कमी और लगभग बारह,शून्य करोड़ रुपये के जीएसटी मुआवजे को रोकने के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय ने मनमाने ढंग से ऑफ-बजट उधारी के नाम पर लगभग चार,शून्य करोड़ रुपये की राज्य की शुद्ध उधार सीमा में कमी की है। उन्होंने पत्र में लिखा है, कुल मिलाकर, राज्य सरकार को चालू वित्त वर्ष में बजट के वित्तपोषण के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों में तेईस,शून्य करोड़ रुपये की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बालगोपाल ने आगे कहा, राज्य सरकार गरीबों के लिए आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बनाए रखने में एक गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। राज्य कोविड महामारी से पैदा हुई आर्थिक कमजोरी से उभरने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार ने काफी मुश्किल से पिछले कई दशकों में जो निर्माण किया है वह खतरे में पड़ जाएगा। बालगोपाल ने आगे बताया कि पिछले पच्चीस वर्षो में राज्य सरकारों की वित्तीय देनदारियों की संरचना में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा, केंद्र से ऋण और अग्रिम की हिस्सेदारी दो हज़ार पाँच में पंद्रह. आठ प्रतिशत से घटकर दो हज़ार बीस में तीन प्रतिशत हो गई है। केरल इस प्रवृत्ति का अपवाद नहीं है। केंद्र से केरल को बकाया ऋण और अग्रिम दो हज़ार पाँच में बारह. चार प्रतिशत से घटकर दो हज़ार बीस में तीन. तीन प्रतिशत हो गया है। वह आगे बताते हैं कि पिछले पांच वर्षो में, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की कुछ कार्रवाइयों ने राज्य की शुद्ध उधार सीमा तय करते हुए राज्य सरकारों के लिए कुछ गंभीर चिंताएं पैदा की हैं और केंद्र को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। जानकारों का कहना है कि अगर बालगोपाल की आशंकाओं और चिंताओं के संबंध में राज्य की महसूस की गई मांगों और जरूरतों के प्रति विचारशील दृष्टिकोण नहीं लिया जाता है, तो आने वाले महीनों में राज्य को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी. |
प्रेमिका 25 फरवरी को वापस मायके आई थी, तब से वह मायके में ही थी। घर से खेत की तरफ जाने की बात कहकर निकली और प्रेमी से मिली। प्यार में हारे इस प्रेमी युगल ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला ले लिया। युवती और उसका प्रेमी बेहोशी की हालत में गांव के बाहर गेहूं की खेत में पड़े मिले।
बांदा (Uttar Pradesh) एक माह पहले वैलेंटाइन डे के दिन हुई शादी के बाद ससुराल से पहली बार मायके आई युवती अपने अविवाहित प्रेमी से मिलने निकल पड़ी। प्यार में हारे दोनों प्रेमी युगल मिले तो अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला ले लिया और एक साथ जहर खा लिया। गांव के बाहर खेत में दोनों बेहोश अवस्था में मिले। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं, नवविवाहिता की मां ने युवक पर बेटी को जबरन कोई जहरीली दवा खिलाने का आरोप लगाया है। घटना बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
21 साल की युवती का पड़ोसी गांव के ही एक 28 वर्षीय युवक से दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवती की पिछले माह 14 फरवरी को चित्रकूट जनपद के कर्वी में शादी हुई थी। शादी दूसरी जगह होने के बाद भी प्रेमी से उसका संपर्क और प्रेम बरकरार रहा। प्रेमी भी मजदूर पेशा बताया गया है। विदाई के बाद वह 25 फरवरी को वापस मायके आई, तब से वह मायके में ही थी। घर से खेत की तरफ जाने की बात कहकर निकली। लेकिन वापस नहीं लौटी। प्यार में हारे इस प्रेमी युगल ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला ले लिया। मंगलवार को युवती और उसका प्रेमी बेहोशी की हालत में गांव के बाहर गेहूं की खेत में पड़े मिले।
युवक अविवाहित है। परिजनों ने पुलिस की मदद से 108 एंबुलेंस से दोनों को अतर्रा सीएचसी पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लमेहटा चौकी इंचार्ज राजेश वर्मा भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। जिला अस्पताल में युवती की मां ने युवक पर बेटी को जबरन कोई जहरीली दवा खिलाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों के रिश्तेदारों से भी बातचीत की। ग्रामीणों के मुताबिक युवक अपने घर से 13 मार्च से लापता था।
(प्रतीकात्मक फोटो)
| प्रेमिका पच्चीस फरवरी को वापस मायके आई थी, तब से वह मायके में ही थी। घर से खेत की तरफ जाने की बात कहकर निकली और प्रेमी से मिली। प्यार में हारे इस प्रेमी युगल ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला ले लिया। युवती और उसका प्रेमी बेहोशी की हालत में गांव के बाहर गेहूं की खेत में पड़े मिले। बांदा एक माह पहले वैलेंटाइन डे के दिन हुई शादी के बाद ससुराल से पहली बार मायके आई युवती अपने अविवाहित प्रेमी से मिलने निकल पड़ी। प्यार में हारे दोनों प्रेमी युगल मिले तो अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला ले लिया और एक साथ जहर खा लिया। गांव के बाहर खेत में दोनों बेहोश अवस्था में मिले। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं, नवविवाहिता की मां ने युवक पर बेटी को जबरन कोई जहरीली दवा खिलाने का आरोप लगाया है। घटना बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इक्कीस साल की युवती का पड़ोसी गांव के ही एक अट्ठाईस वर्षीय युवक से दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवती की पिछले माह चौदह फरवरी को चित्रकूट जनपद के कर्वी में शादी हुई थी। शादी दूसरी जगह होने के बाद भी प्रेमी से उसका संपर्क और प्रेम बरकरार रहा। प्रेमी भी मजदूर पेशा बताया गया है। विदाई के बाद वह पच्चीस फरवरी को वापस मायके आई, तब से वह मायके में ही थी। घर से खेत की तरफ जाने की बात कहकर निकली। लेकिन वापस नहीं लौटी। प्यार में हारे इस प्रेमी युगल ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला ले लिया। मंगलवार को युवती और उसका प्रेमी बेहोशी की हालत में गांव के बाहर गेहूं की खेत में पड़े मिले। युवक अविवाहित है। परिजनों ने पुलिस की मदद से एक सौ आठ एंबुलेंस से दोनों को अतर्रा सीएचसी पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लमेहटा चौकी इंचार्ज राजेश वर्मा भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। जिला अस्पताल में युवती की मां ने युवक पर बेटी को जबरन कोई जहरीली दवा खिलाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों के रिश्तेदारों से भी बातचीत की। ग्रामीणों के मुताबिक युवक अपने घर से तेरह मार्च से लापता था। |
द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट.
दिल्ली कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी सिर्फ एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, किसी हिंसा में शामिल नहीं थे.
कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र हुए लॉकडाउन के बाद राजस्थान में खानें भी बंद हो गई थीं. अप्रैल से राज्य सरकार ने खनन कार्य की अनुमति दी थी, लेकिन अधिकतर मज़दूर घर लौट गए हैं या फिर उनके पास खान तक पहुंचने का साधन नहीं है.
दुनिया भर में कोरोना वायरस महामारी से अब तक 3. 41 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संक्रमण के मामले बढ़कर 53 लाख से अधिक हो चुके हैं. भारत में लगातार तीसरे दिन संक्रमण के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई, यहां अब तक 3,867 लोग जान गंवा चुके हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कोविड अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर पाबंदी इसलिए लगाई गई है ताकि अस्पतालों की दुर्दशा का सच जनता तक ना पहुंचे.
एक अन्य मामले में पंजाब के एक मंत्री के ज्योतिष के प्रति रुझानों को लेकर रिपोर्ट लिखने पर एक पत्रकार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.
एक वीडियो संदेश में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार ने थोड़ी मदद की है लेकिन वह कोई राजनीतिक छींटाकशी नहीं करेंगे.
गुजरात देश में सबसे ज्यादा कोरोना मौतों वाले राज्यों में से एक है, जिसमें से सिविल अस्पताल में 377 मौतें हुई हैं जो कि राज्य की कुल मौतों का लगभग 45 फीसदी है.
गिरफ़्तार की गईं दोनों कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कलीता जेएनयू की छात्राएं हैं. पिंजरा तोड़ संगठन की ओर से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने बीते कुछ महीनों में कई छात्रों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. हम इसकी पुरज़ोर निंदा करते हैं.
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सभी धार्मिक स्थलों को खोलने और कोरोना संक्रमण के चलते धार्मिक प्रतिष्ठानों पर लगाए गए प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई थी.
| द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट. दिल्ली कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी सिर्फ एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, किसी हिंसा में शामिल नहीं थे. कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र हुए लॉकडाउन के बाद राजस्थान में खानें भी बंद हो गई थीं. अप्रैल से राज्य सरकार ने खनन कार्य की अनुमति दी थी, लेकिन अधिकतर मज़दूर घर लौट गए हैं या फिर उनके पास खान तक पहुंचने का साधन नहीं है. दुनिया भर में कोरोना वायरस महामारी से अब तक तीन. इकतालीस लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संक्रमण के मामले बढ़कर तिरेपन लाख से अधिक हो चुके हैं. भारत में लगातार तीसरे दिन संक्रमण के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई, यहां अब तक तीन,आठ सौ सरसठ लोग जान गंवा चुके हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कोविड अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर पाबंदी इसलिए लगाई गई है ताकि अस्पतालों की दुर्दशा का सच जनता तक ना पहुंचे. एक अन्य मामले में पंजाब के एक मंत्री के ज्योतिष के प्रति रुझानों को लेकर रिपोर्ट लिखने पर एक पत्रकार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. एक वीडियो संदेश में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार ने थोड़ी मदद की है लेकिन वह कोई राजनीतिक छींटाकशी नहीं करेंगे. गुजरात देश में सबसे ज्यादा कोरोना मौतों वाले राज्यों में से एक है, जिसमें से सिविल अस्पताल में तीन सौ सतहत्तर मौतें हुई हैं जो कि राज्य की कुल मौतों का लगभग पैंतालीस फीसदी है. गिरफ़्तार की गईं दोनों कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कलीता जेएनयू की छात्राएं हैं. पिंजरा तोड़ संगठन की ओर से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने बीते कुछ महीनों में कई छात्रों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. हम इसकी पुरज़ोर निंदा करते हैं. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सभी धार्मिक स्थलों को खोलने और कोरोना संक्रमण के चलते धार्मिक प्रतिष्ठानों पर लगाए गए प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई थी. |
बॉलीवुड के मल्टी टैलेंटेड एक्टर फरहान अख्तर को लेकर अब एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस खबर को सुनने के बाद उनके फैंस का दिल टूट सकता है। अब एक्टर ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी अनाउंसमेंट की है जिसके बाद सब लोग टेंशन में आ गए हैं। दरअसल, हाल ही में किए अपने एक पोस्ट में फरहान लोगों ने माफी मांगते दिखे। लेकिन सवाल ये उठता है कि उन्होंने ऐसा क्या कर दिया कि अब उन्हें सरेआम माफी मांगनी पड़ी।
सबसे पहले तो आपको बता दें, फरहान अख्तर एक एक्टर होने के साथ-साथ बेहतरीन लेखक और गायक भी हैं। वो अक्सर कॉन्सर्ट में गाने गाते और धूम मचाते नज़र आते हैं। लेकिन अब फरहान अपने एक पोस्ट के चलते सुर्खियों में छा गए हैं। उन्होंने एक ऐसा पोस्ट किया है, जिससे उनके फैंस का दिल टूट सकता है। आपको बता दें, ये पोस्ट ने उनके ऑस्ट्रेलियन फैंस से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, अब फरहान अख्तर ने अपने इंस्टाग्राम पर ऑस्ट्रेलियन टूर को लेकर एक ज़रूरी अनाउंसमेंट की है। इस पोस्ट में फरहान ने इस महीने होने वाले ऑस्ट्रेलिया दौरे के कैसिंल होने की जानकारी दी। एक्टर ने लिखा, 'ये जानकारी ऑस्ट्रेलिया में मेरे फैंस के लिए है, अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण हमारे बैंड फरहान लाइव को अपना ऑस्ट्रेलिया दौरा रद्द करना पड़ा है। हम इस आने वाले वीकएंड में सिडनी और मेलबर्न की यात्रा नहीं कर पाएंगे। '
एक्टर ने आगे लिखा, 'मैं सच में इस चीज से बहुत निराश हूं। हालांकि, जल्द ही मैं आपके खूबसूरत देश में आने और आपके लिए लाइव परफॉर्मेंस करने की उम्मीद कर रहा हूं। ' आपको बता दें, जैसे ही फरहान ने पोस्ट शेयर किया वैसे ही फैंस शो रद्द होने पर अपना रिएक्शन देने लगे। कुछ लोगों ने कमेंट कर उनसे इसकी वजह भी मांगी। तो कुछ लोग अफ़सोस जताते दिखे।
वहीं, कुछ यूजर्स ने पैसे रिफंड करने की बात कही। अब कुछ ईसिस तरह से लोगों के रिएक्शन सामने आ रहे हैं।
अब ऐसा लग रहा है कि सबकी एक्साइटमेंट पर पानी फिर गया है। वहीं, बात अगर उनके वर्कफ्रंट की करें तो फरहान निर्देशक के तौर पर फिल्म 'जी ले जरा' में काम करते दिखाई देंगे।
| बॉलीवुड के मल्टी टैलेंटेड एक्टर फरहान अख्तर को लेकर अब एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस खबर को सुनने के बाद उनके फैंस का दिल टूट सकता है। अब एक्टर ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी अनाउंसमेंट की है जिसके बाद सब लोग टेंशन में आ गए हैं। दरअसल, हाल ही में किए अपने एक पोस्ट में फरहान लोगों ने माफी मांगते दिखे। लेकिन सवाल ये उठता है कि उन्होंने ऐसा क्या कर दिया कि अब उन्हें सरेआम माफी मांगनी पड़ी। सबसे पहले तो आपको बता दें, फरहान अख्तर एक एक्टर होने के साथ-साथ बेहतरीन लेखक और गायक भी हैं। वो अक्सर कॉन्सर्ट में गाने गाते और धूम मचाते नज़र आते हैं। लेकिन अब फरहान अपने एक पोस्ट के चलते सुर्खियों में छा गए हैं। उन्होंने एक ऐसा पोस्ट किया है, जिससे उनके फैंस का दिल टूट सकता है। आपको बता दें, ये पोस्ट ने उनके ऑस्ट्रेलियन फैंस से जुड़ा हुआ है। दरअसल, अब फरहान अख्तर ने अपने इंस्टाग्राम पर ऑस्ट्रेलियन टूर को लेकर एक ज़रूरी अनाउंसमेंट की है। इस पोस्ट में फरहान ने इस महीने होने वाले ऑस्ट्रेलिया दौरे के कैसिंल होने की जानकारी दी। एक्टर ने लिखा, 'ये जानकारी ऑस्ट्रेलिया में मेरे फैंस के लिए है, अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण हमारे बैंड फरहान लाइव को अपना ऑस्ट्रेलिया दौरा रद्द करना पड़ा है। हम इस आने वाले वीकएंड में सिडनी और मेलबर्न की यात्रा नहीं कर पाएंगे। ' एक्टर ने आगे लिखा, 'मैं सच में इस चीज से बहुत निराश हूं। हालांकि, जल्द ही मैं आपके खूबसूरत देश में आने और आपके लिए लाइव परफॉर्मेंस करने की उम्मीद कर रहा हूं। ' आपको बता दें, जैसे ही फरहान ने पोस्ट शेयर किया वैसे ही फैंस शो रद्द होने पर अपना रिएक्शन देने लगे। कुछ लोगों ने कमेंट कर उनसे इसकी वजह भी मांगी। तो कुछ लोग अफ़सोस जताते दिखे। वहीं, कुछ यूजर्स ने पैसे रिफंड करने की बात कही। अब कुछ ईसिस तरह से लोगों के रिएक्शन सामने आ रहे हैं। अब ऐसा लग रहा है कि सबकी एक्साइटमेंट पर पानी फिर गया है। वहीं, बात अगर उनके वर्कफ्रंट की करें तो फरहान निर्देशक के तौर पर फिल्म 'जी ले जरा' में काम करते दिखाई देंगे। |
अंबिकापुर शहर के नमनाकला में 2 नाबालिगों को बंधक बनाकर उनकी बेदम पिटाई करने के मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है, वहीं 4 नाबालिग आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है।
बता दें कि रविवार को अंबिकापुर के ही 2 नाबालिग दोस्त स्कूटी से घूमने निकले थे। इस दौरान शहर के नमनाकला के पास 4-5 बाइक में 2 युवक और 5 नाबालिग पहुंचे। आपसी वर्चस्व की लड़ाई में सातों लोग स्कूटी सवार दोनों नाबालिगों को जबरन पिल्खा पहाड़ ले गए। वहां इन सातों आरोपियों ने मिलकर दोनों नाबालिगों की रॉड और बेसबॉल स्टिक से बेदम पिटाई कर दी।
इस दौरान एक नाबालिग आरोपी ने हत्या करने की नीयत से एक नाबालिग का गला भी दबाया। पिटाई के बाद चंगुल से छूटे दोनों नाबालिगों ने परिजनों को पूरी बात बताई और गांधीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में 2 युवकों और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 4 नाबालिग आरोपी फरार हैं। पुलिस ने आरोपी मुकेश यादव, लल्ला यादव और 5 नाबालिग आरोपियों के खिलाफ धारा 341, 365, 307, 323, 294, 506, 120 (बी) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने घटना में शामिल अंबिकापुर निवासी लल्ला यादव, मुकेश यादव और एक अपचारी बालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने मारपीट करने की बात स्वीकार कर ली है। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर जेल दाखिल कर दिया है। वहीं अपचारी बालक को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।
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| अंबिकापुर शहर के नमनाकला में दो नाबालिगों को बंधक बनाकर उनकी बेदम पिटाई करने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है, वहीं चार नाबालिग आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। बता दें कि रविवार को अंबिकापुर के ही दो नाबालिग दोस्त स्कूटी से घूमने निकले थे। इस दौरान शहर के नमनाकला के पास चार-पाँच बाइक में दो युवक और पाँच नाबालिग पहुंचे। आपसी वर्चस्व की लड़ाई में सातों लोग स्कूटी सवार दोनों नाबालिगों को जबरन पिल्खा पहाड़ ले गए। वहां इन सातों आरोपियों ने मिलकर दोनों नाबालिगों की रॉड और बेसबॉल स्टिक से बेदम पिटाई कर दी। इस दौरान एक नाबालिग आरोपी ने हत्या करने की नीयत से एक नाबालिग का गला भी दबाया। पिटाई के बाद चंगुल से छूटे दोनों नाबालिगों ने परिजनों को पूरी बात बताई और गांधीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में दो युवकों और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार नाबालिग आरोपी फरार हैं। पुलिस ने आरोपी मुकेश यादव, लल्ला यादव और पाँच नाबालिग आरोपियों के खिलाफ धारा तीन सौ इकतालीस, तीन सौ पैंसठ, तीन सौ सात, तीन सौ तेईस, दो सौ चौरानवे, पाँच सौ छः, एक सौ बीस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटना में शामिल अंबिकापुर निवासी लल्ला यादव, मुकेश यादव और एक अपचारी बालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने मारपीट करने की बात स्वीकार कर ली है। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर जेल दाखिल कर दिया है। वहीं अपचारी बालक को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मध्यकालीन फ्रांसीसी शब्द 'उपनाम' से आने वाले "उपर्युक्त नाम" के रूप में अनुवाद करते हुए, उपनाम या वर्णनात्मक नाम फ्रांस में 11 वीं शताब्दी में उनके उपयोग का पता लगाते हैं, जब पहली बार व्यक्तियों के बीच अंतर करने के लिए दूसरा नाम जोड़ना आवश्यक हो गया वही दिया गया नाम। हालांकि, कई शताब्दियों के लिए उपनामों का उपयोग करने की परंपरा आम नहीं हुई।
अधिकांश फ्रांसीसी उपनामों को इन चार प्रकारों में से एक में वापस देखा जा सकता हैः
माता-पिता के नाम के आधार पर, यह फ्रेंच अंतिम नामों की सबसे आम श्रेणी है। पेट्रोनेरिक उपनाम माता के नाम पर पिता के नाम और परिपक्व उपनामों पर आधारित होते हैं। मां का नाम आमतौर पर तभी प्रयोग किया जाता था जब पिता का नाम अज्ञात था।
फ्रांस में पेट्रोनेरिक और मैट्रोनिक उपनाम कई अलग-अलग तरीकों से गठित किए गए थे। एक उपसर्ग या प्रत्यय को जोड़ने का सामान्य रूप जिसका अर्थ है "बेटा" (उदाहरण के लिए डी, डेस, डु, लु, या नॉर्मन फिट्ज ) किसी दिए गए नाम पर फ्रांस में कम आम था, लेकिन कई यूरोपीय देशों में, लेकिन अभी भी प्रचलित है। उदाहरणों में जीन डी गॉल, जिसका अर्थ है "जॉन, गॉल के बेटे," या टॉमस फिट्जरोबर्ट, या "रॉबर्ट के बेटे टॉमस"। प्रत्यय का अर्थ है "छोटे बेटे" (-उउ, -लेट, -लीन, एले, ईलेट, आदि) का भी उपयोग किया जा सकता है।
फ्रांसीसी पेट्रोनेमिक और मैट्रोनिक उपनामों के बहुमत में कोई पहचान करने वाला उपसर्ग नहीं है, हालांकि, रॉबर्ट के बेटे टॉमस के लिए "अगस्त, लैंड्री के बेटे" या टॉमस रॉबर्ट के लिए अगस्त लैंड्री जैसे माता-पिता के दिए गए नाम का प्रत्यक्ष व्युत्पन्न होना। "
फ्रेंच उपनामों के बीच भी बहुत आम है, व्यावसायिक अंतिम व्यक्ति व्यक्ति के काम या व्यापार, जैसे पियरे बोउलेंजर [बेकर], या "पियरे, बेकर" पर आधारित हैं। फ्रांसीसी उपनामों के रूप में प्रचलित कई आम व्यवसायों में बर्गर ( चरवाहा ), बिसेट ( वीवर ), बाउचर ( कसाई ), कैरॉन ( कार्टवाइट ), चारपेंटर ( बढ़ई ), फैब्रॉन ( लोहार ), फोरियर ( बेकर ), गैगने ( किसान ), लेफेब्रे ( शिल्पकार या लोहार ), मार्चैंड ( व्यापारी ) और पेलेटियर ( फर व्यापारी )।
व्यक्ति की अनूठी गुणवत्ता के आधार पर, वर्णनात्मक फ्रांसीसी उपनाम अक्सर जैक्स के लिए जैक्स लेग्रैंड जैसे उपनाम या पालतू नामों से विकसित होते हैं, "बड़ा"। अन्य आम उदाहरणों में पेटिट ( छोटा ), लेब्लैंक ( गोरा बाल या मेला रंग ) शामिल है। , ब्रून ( भूरा बाल या गहरा रंग ) और रॉक्स ( लाल बाल या कठोर रंग )।
भौगोलिक या habitational फ्रेंच उपनाम एक व्यक्ति के निवास पर आधारित हैं, अक्सर एक पूर्व निवास (उदाहरण के लिए Yvonne मार्सेल - मार्सेल के गांव से Yvonne)। वे गांव या शहर के भीतर व्यक्ति के विशिष्ट स्थान का वर्णन भी कर सकते हैं, जैसे मिशेल लेग्लिस ( चर्च) , जो चर्च के बगल में रहते थे। उपसर्ग "डी," "डेस," "डु," और "ले" जो "ऑफ़" के रूप में अनुवाद करते हैं, भौगोलिक फ्रांसीसी उपनामों में भी उपयोग किए जा सकते हैं।
फ्रांस के कुछ क्षेत्रों में, एक दूसरे उपनाम को उसी परिवार की विभिन्न शाखाओं के बीच अंतर करने के लिए अपनाया जा सकता है, खासकर जब परिवार पीढ़ियों के लिए उसी शहर में बने रहे। इन उपनाम उपनाम अक्सर "dit" शब्द से पहले पाए जा सकते हैं। कभी-कभी एक व्यक्ति ने परिवार के नाम के रूप में भी नाम का नाम अपनाया, और मूल उपनाम छोड़ दिया।
फ्रांस में सैनिकों और नाविकों के बीच यह अभ्यास सबसे आम था।
चूंकि कई फ्रांसीसी उपनाम पहले नामों से प्राप्त किए गए हैं, इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि कई सामान्य फ्रांसीसी प्रथम नामों में जर्मनिक मूल हैं , जो जर्मन आक्रमणों के दौरान फ्रांस में आते हैं। इसलिए, जर्मनिक उत्पत्ति के साथ एक नाम होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास जर्मन पूर्वजों हैं !
1474 में शुरू होने वाले, जो भी अपना नाम बदलना चाहता था उसे राजा से अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता थी। इन आधिकारिक नाम परिवर्तनों को अनुक्रमित किया जा सकता हैः
एल 'आर्किविस्ट जेरोम। डिक्शनरीयर डेस चेंगमेंट्स डे नोम्स डी 1803-1956 (1803 से 1 9 56 तक बदले गए नामों का शब्दकोश)। पेरिसः लिब्राइरी फ्रैंसेज, 1 9 74।
| मध्यकालीन फ्रांसीसी शब्द 'उपनाम' से आने वाले "उपर्युक्त नाम" के रूप में अनुवाद करते हुए, उपनाम या वर्णनात्मक नाम फ्रांस में ग्यारह वीं शताब्दी में उनके उपयोग का पता लगाते हैं, जब पहली बार व्यक्तियों के बीच अंतर करने के लिए दूसरा नाम जोड़ना आवश्यक हो गया वही दिया गया नाम। हालांकि, कई शताब्दियों के लिए उपनामों का उपयोग करने की परंपरा आम नहीं हुई। अधिकांश फ्रांसीसी उपनामों को इन चार प्रकारों में से एक में वापस देखा जा सकता हैः माता-पिता के नाम के आधार पर, यह फ्रेंच अंतिम नामों की सबसे आम श्रेणी है। पेट्रोनेरिक उपनाम माता के नाम पर पिता के नाम और परिपक्व उपनामों पर आधारित होते हैं। मां का नाम आमतौर पर तभी प्रयोग किया जाता था जब पिता का नाम अज्ञात था। फ्रांस में पेट्रोनेरिक और मैट्रोनिक उपनाम कई अलग-अलग तरीकों से गठित किए गए थे। एक उपसर्ग या प्रत्यय को जोड़ने का सामान्य रूप जिसका अर्थ है "बेटा" किसी दिए गए नाम पर फ्रांस में कम आम था, लेकिन कई यूरोपीय देशों में, लेकिन अभी भी प्रचलित है। उदाहरणों में जीन डी गॉल, जिसका अर्थ है "जॉन, गॉल के बेटे," या टॉमस फिट्जरोबर्ट, या "रॉबर्ट के बेटे टॉमस"। प्रत्यय का अर्थ है "छोटे बेटे" का भी उपयोग किया जा सकता है। फ्रांसीसी पेट्रोनेमिक और मैट्रोनिक उपनामों के बहुमत में कोई पहचान करने वाला उपसर्ग नहीं है, हालांकि, रॉबर्ट के बेटे टॉमस के लिए "अगस्त, लैंड्री के बेटे" या टॉमस रॉबर्ट के लिए अगस्त लैंड्री जैसे माता-पिता के दिए गए नाम का प्रत्यक्ष व्युत्पन्न होना। " फ्रेंच उपनामों के बीच भी बहुत आम है, व्यावसायिक अंतिम व्यक्ति व्यक्ति के काम या व्यापार, जैसे पियरे बोउलेंजर [बेकर], या "पियरे, बेकर" पर आधारित हैं। फ्रांसीसी उपनामों के रूप में प्रचलित कई आम व्यवसायों में बर्गर , बिसेट , बाउचर , कैरॉन , चारपेंटर , फैब्रॉन , फोरियर , गैगने , लेफेब्रे , मार्चैंड और पेलेटियर । व्यक्ति की अनूठी गुणवत्ता के आधार पर, वर्णनात्मक फ्रांसीसी उपनाम अक्सर जैक्स के लिए जैक्स लेग्रैंड जैसे उपनाम या पालतू नामों से विकसित होते हैं, "बड़ा"। अन्य आम उदाहरणों में पेटिट , लेब्लैंक शामिल है। , ब्रून और रॉक्स । भौगोलिक या habitational फ्रेंच उपनाम एक व्यक्ति के निवास पर आधारित हैं, अक्सर एक पूर्व निवास । वे गांव या शहर के भीतर व्यक्ति के विशिष्ट स्थान का वर्णन भी कर सकते हैं, जैसे मिशेल लेग्लिस , जो चर्च के बगल में रहते थे। उपसर्ग "डी," "डेस," "डु," और "ले" जो "ऑफ़" के रूप में अनुवाद करते हैं, भौगोलिक फ्रांसीसी उपनामों में भी उपयोग किए जा सकते हैं। फ्रांस के कुछ क्षेत्रों में, एक दूसरे उपनाम को उसी परिवार की विभिन्न शाखाओं के बीच अंतर करने के लिए अपनाया जा सकता है, खासकर जब परिवार पीढ़ियों के लिए उसी शहर में बने रहे। इन उपनाम उपनाम अक्सर "dit" शब्द से पहले पाए जा सकते हैं। कभी-कभी एक व्यक्ति ने परिवार के नाम के रूप में भी नाम का नाम अपनाया, और मूल उपनाम छोड़ दिया। फ्रांस में सैनिकों और नाविकों के बीच यह अभ्यास सबसे आम था। चूंकि कई फ्रांसीसी उपनाम पहले नामों से प्राप्त किए गए हैं, इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि कई सामान्य फ्रांसीसी प्रथम नामों में जर्मनिक मूल हैं , जो जर्मन आक्रमणों के दौरान फ्रांस में आते हैं। इसलिए, जर्मनिक उत्पत्ति के साथ एक नाम होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास जर्मन पूर्वजों हैं ! एक हज़ार चार सौ चौहत्तर में शुरू होने वाले, जो भी अपना नाम बदलना चाहता था उसे राजा से अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता थी। इन आधिकारिक नाम परिवर्तनों को अनुक्रमित किया जा सकता हैः एल 'आर्किविस्ट जेरोम। डिक्शनरीयर डेस चेंगमेंट्स डे नोम्स डी एक हज़ार आठ सौ तीन-एक हज़ार नौ सौ छप्पन । पेरिसः लिब्राइरी फ्रैंसेज, एक नौ चौहत्तर। |
समलैंगिक विवाह भारतीय संस्कृति खिलाफ है। यह कहते हुए गुरुवार को दुर्गा वाहिनी संगठन के बैनर तले मातृशक्ति ने विरोध स्वरूप दौसा कलेक्ट्रेट में सीजेआई और भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा है।
दुर्गा वाहिनी ने दौसा कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन देकर कहा कि समलैंगिक विवाह की बात करना हमारी संस्कृति पर आघात है। दुर्गा वाहिनी समूह की संयोजिका पुष्पा डंगायच ने कहा कि समलैंगिक विवाह भारतीय विवाह संस्कार पर आघात है। भारत में विवाह दो व्यक्ति और दो परिवारों के बीच एक सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक मिलन है।
दुर्गा वाहिनी ने कहा कि समलैंगिक विवाह के अनेक नकारात्मक प्रभाव हैं। इसे मान्यता देने से सांस्कृतिक मूल्यों का हनन होगा। समूह में उपस्थित एडवोकेट रेनू चौधरी ने कहा कि भारत के सामाजिक ढांचे में विवाह एक पवित्र संस्कार है और उसका उद्देश्य मानव जाति का उत्थान है। इसमें पुरुष और महिला के मध्य ही विवाह को मान्यता दी गई है। ज्ञापन के समय मौजूद महिलाओं का कहना था कि यदि समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली, तो यह भारत की संस्कृति को समाप्त करेगा और भारत में जिस प्रकार से सामाजिक ताना-बाना है, उस ताने-बाने और सभी संबंधों पर कुठाराघात करेगा और जो हमारी सामाजिक व्यवस्था पूरे विश्व में प्रचलित है, वह पाश्चात्य करण की तरफ चली जाएगी। हमारी मानवता और संस्कार नष्ट हो जाएंगे।
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| समलैंगिक विवाह भारतीय संस्कृति खिलाफ है। यह कहते हुए गुरुवार को दुर्गा वाहिनी संगठन के बैनर तले मातृशक्ति ने विरोध स्वरूप दौसा कलेक्ट्रेट में सीजेआई और भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा है। दुर्गा वाहिनी ने दौसा कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन देकर कहा कि समलैंगिक विवाह की बात करना हमारी संस्कृति पर आघात है। दुर्गा वाहिनी समूह की संयोजिका पुष्पा डंगायच ने कहा कि समलैंगिक विवाह भारतीय विवाह संस्कार पर आघात है। भारत में विवाह दो व्यक्ति और दो परिवारों के बीच एक सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक मिलन है। दुर्गा वाहिनी ने कहा कि समलैंगिक विवाह के अनेक नकारात्मक प्रभाव हैं। इसे मान्यता देने से सांस्कृतिक मूल्यों का हनन होगा। समूह में उपस्थित एडवोकेट रेनू चौधरी ने कहा कि भारत के सामाजिक ढांचे में विवाह एक पवित्र संस्कार है और उसका उद्देश्य मानव जाति का उत्थान है। इसमें पुरुष और महिला के मध्य ही विवाह को मान्यता दी गई है। ज्ञापन के समय मौजूद महिलाओं का कहना था कि यदि समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली, तो यह भारत की संस्कृति को समाप्त करेगा और भारत में जिस प्रकार से सामाजिक ताना-बाना है, उस ताने-बाने और सभी संबंधों पर कुठाराघात करेगा और जो हमारी सामाजिक व्यवस्था पूरे विश्व में प्रचलित है, वह पाश्चात्य करण की तरफ चली जाएगी। हमारी मानवता और संस्कार नष्ट हो जाएंगे। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
पिछली खबरों में NEET 2017 परीक्षा को लेकर काफी चर्चा हुई, जिसकी जानकारी आपको हासिल हो ही चुकी होगी, अब हाल ही में यह जानकारी प्राप्त हुई है की मेडिकल और डेंटल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा NEET 2017 के एडमिट कार्ड आज जारी किए जाएंगे. जिन अभ्यार्थीयों ने आवेदन किए है वे अपना एडमिट कार्ड इसकी आधिकारिक वेबसाइट में जाकर डाऊनलोड कर सकेगें.
एडमिट कार्ड डेरी से जारी करने का कारण कोर्ट का आदेश मिलना था, 'सुप्रीम कोर्ट द्वारा 25 साल से ज्यादा उम्र वाले अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार करने के आदेश के बाद अब एडमिट कार्ड 22. 04. 2017 को जारी किए जा रहे है. गौरतलब है कि बोर्ड ने इससे पहले 15 अप्रैल को प्रवेश पत्र जारी करने की घोषणा की थी. जो की आज 22 अप्रैल को जारी किए जाएगें.
NEET परीक्षा का आयोजन 7 मई 2017 को किया जाएगा. बताया जा रहा है की इस साल NEET परीक्षा 103 शहरों में सम्पन्न कराई जाएगी.
इस साल प्रवेश परीक्षा के लिए 11. 35 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है,
नीट परीक्षा 10 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, ओडिया, बांग्ला, असमी, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ में आयोजित कराई जाएगी.
| पिछली खबरों में NEET दो हज़ार सत्रह परीक्षा को लेकर काफी चर्चा हुई, जिसकी जानकारी आपको हासिल हो ही चुकी होगी, अब हाल ही में यह जानकारी प्राप्त हुई है की मेडिकल और डेंटल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा NEET दो हज़ार सत्रह के एडमिट कार्ड आज जारी किए जाएंगे. जिन अभ्यार्थीयों ने आवेदन किए है वे अपना एडमिट कार्ड इसकी आधिकारिक वेबसाइट में जाकर डाऊनलोड कर सकेगें. एडमिट कार्ड डेरी से जारी करने का कारण कोर्ट का आदेश मिलना था, 'सुप्रीम कोर्ट द्वारा पच्चीस साल से ज्यादा उम्र वाले अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार करने के आदेश के बाद अब एडमिट कार्ड बाईस. चार. दो हज़ार सत्रह को जारी किए जा रहे है. गौरतलब है कि बोर्ड ने इससे पहले पंद्रह अप्रैल को प्रवेश पत्र जारी करने की घोषणा की थी. जो की आज बाईस अप्रैल को जारी किए जाएगें. NEET परीक्षा का आयोजन सात मई दो हज़ार सत्रह को किया जाएगा. बताया जा रहा है की इस साल NEET परीक्षा एक सौ तीन शहरों में सम्पन्न कराई जाएगी. इस साल प्रवेश परीक्षा के लिए ग्यारह. पैंतीस लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, नीट परीक्षा दस भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, ओडिया, बांग्ला, असमी, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ में आयोजित कराई जाएगी. |
गिरिबाला के पेट में हल्का-सा मरोड़ उठा। माथे पर पसीने की बूंदे छलक आईं । बड़ी ने आंचल से गिरिबाला का मुंह पोंछ दिया और पंखें से हवा करने लगीं।
फिर बोलीं, "देखो तो इस लड़की का तमाशा : ओ चम्पा, एक लोटा पानी ले आ और फूली की मां को बोल, यहां सफाई कर जाए । बूड़ी, डर मत, वह सब गंदगी मैं तुझे भला क्यों पिलाऊंगी ?"
अब कहीं गिरिवाला की जान में जान आई। एक अज्ञात आतंक से उसकी शिराएं की तरह तनी हुई थीं । अब वे शिथिल हो आईं । चम्पा पानी ले आई। बड़ी बहू ने थोड़ा-थोड़ा पानी हाथ में लेकर गिरिबाला का मुंह, आंखें, माथा, गर्दन और कानों के पीछे धो दिया । फूली की मां आकर कमरा साफ कर गईं ।
बड़ी बहू ने पूछा, "ओ फूली की मां, रसोई बन गई ?"
फूली की मां ने गर्दन हिलाकर 'हां' कही ।
"तो फिर जाओ, मझले मालिक को खाने को बोलो । छोटी बहू को स्नान कराने को कह देना । एक मिनट रुको, अपनी तंबाकू की डिबिया जरा दिखाना।"
फूली की मां ने पिसी हुई तंबाकू की डिबिया आंचल से खोलकर बड़ी बहू की ओर बढ़ाई। बड़ी बहू ने थोड़ा-सा तंबाकू लेकर दांतों को अच्छी तरह मला, फिर आंगन में थूक आई। फिर तंबाकू की डिबिया फूली की मां के हाथ में थमाकर गिरिबाला के पास आ बैठीं और बड़े प्यार से चम्पा को पुकारा-
"रानी बेटी, जाओ, नहा लो । आज तुम्हें अपने मन से नहाना होगा, समझी न? दीदी की तबीयत खराब है। मैं अभी इसके पास ही बैठती हूं।"
बड़ी बहू बोल रही थीं तो तंबाकू का चूरा फुस-फुस करके उनके मुंह से उड़
यह देखकर खिलखिलाती हुई चम्पा बोली, "बड़ी मां, बात मत करो, नहीं तो तुम्हारे मुंह से तंबाकू उड़कर बड़ी दीदी की आंख में पड़ जाएगा ।"
बड़ी बहू एक पल को शरमाई, फिर हंस पड़ीं और बोलीं, "दिन पर दिन यह लड़की बड़ी सयानी होती जा रही है। फालतू बात छोड़ और जो कह रही हूं उसे ध्यान से सुन । पूरी देह में अच्छी तरह तेल लगाना, समझी? तेल लगाकर पहले मुझे दिखाना, फिर नहाने
बड़ी बहू की बातें खत्म होते ही चम्पा वहां से चटपट खिसक गई। बड़ी बहू का मन भीतर ही भीतर कसमसाने लगा। पता नहीं, यह लड़की ठीक से तेल लगाएगी या नहीं ? तेल और पानी से ही तो यह शरीर स्वच्छ होता है । इत्ती-सी तो लड़की है। वह भला अपने आप तेल कहां लगा पाएगी?
बड़ी बहू ने पुकारा, "ओ चम्पा, तू मेरे पास ही आ जा । तेल की बोतल भी ले आ ।"
बेचारी चम्पा ! सोचा था, आज के दिन बड़ी मां के हाथों से रिहाई मिली, मगर बड़ी मां कहां छोड़ने वाली हैं। उनका हुक्म सुनकर मुंह बिदकाए हाथ में तेल की बोतल लिए चम्पा हाजिर हुई । गिरिबाला लेटी- लेटी यह तमाशा देख रही थी । बड़ी मां के हाथों से तेल लगवाना कितनी बड़ी सजा है, यह बात गिरिबाला अच्छी तरह जानती हैं। बड़े भैया भी जानते हैं। मगर बड़े भैया तो कलकत्ते जाकर बच गए हैं। ससुराल जाकर वह भी बच जाएगी । तब सारा छार-भार चम्पा पर आ पड़ेगा।
बड़ी मुश्किल से इस बीच बड़ी बहू ने चम्पा की चोटी खोल डाली थी। उसके बालों में कंघी कर रही थीं । मुंह फुलाए और उसे दोनों घुटनों पर टिकाए चम्पा बैठी थी । गिरिबाला को हंसी आ रही थी ।
बोली, "ओ चम्पा, चेहरा बैंगन - जैसा क्यों बना रखा है?"
उसकी बात का जवाब न देकर चम्पा चीख उठी, "ओ बड़ी मां, बड़ा दुख रहा है ।" चम्पा की हालत देखकर गिरिबाला को मन ही मन हंसी आ रही थी ।
चम्पा को चिढ़ाने के लिए उसने कहा, "दुख-उख कुछ नहीं रहा है। इस लड़की को तो फूल मारने से भी मुरछा आती है।"
चम्पा गुस्से से बोल पड़ी, "देखो बड़ी दीदी, तुम बीमार हो, बीमार की तरह रहो । ज्यादा फुटानी झाड़ने की जरूरत नहीं है, समझी?"
बड़ी बहू ने उसे धमकाया, "अरे चुप कर । देखो तो लड़की की बातें ! वह भला रोगी क्यों होने लगी ?"
चम्पा चुप लगा गई। गिरिबाला आंचल में मुंह ढक कर हंसने लगी । इन बातों की ओर ध्यान न देकर बड़ी बहू चम्पा के बालों की लटें छुड़ाती रहीं। कंघी के कई दांत टूटे हुए थे। थे। कभी-कभी कंघी बालों में फंस जाती थी और खींचने पर पट्-पट् कर बाल टूटने लगते थे। दर्द होने पर भी मारे गुस्से के चम्पा मुंह बंद किए बैठी रही। ऊह भी नहीं की। जानती है, उसका कोई फायदा नहीं । बाघ भी पकड़ ले तो कभी-कभी आदमी को मुक्ति मिल जाती है, मगर बड़ी मां के चंगुल से छूटने का कोई उपाय नहीं । चम्पा जानती है कि अभी पूरे शरीर में अच्छी तरह तेल घिसा जाएगा। इसके बाद बेसन और हल्दी से घिस-घिसकर उसे छुड़ाना होगा। इसके बाद पोखरे के पानी में उतर कर दो तीन डुबकियां लगानी होंगी, बस। देह पर जितना मर्जी पानी डालो, घंटा आधा घंटा गले तक पानी में डूबे रहो, मगर सिर पर ज्यादा पानी नहीं डाला जा सकता । बालों में जो तेल लगा है, उसे धोने की इजाजत नहीं है । सिर रूखा होने से बालों का रंग उड़ जाएगा। वह बाल ही क्या जो एकदम काला न हो? छोटे-छोटे बालों को तो बड़ी बहू बाल ही नहीं मानतीं, गले की फांसी कहती हैं । इन चीजों की तरफ वे कड़ी नजर रखती हैं । | गिरिबाला के पेट में हल्का-सा मरोड़ उठा। माथे पर पसीने की बूंदे छलक आईं । बड़ी ने आंचल से गिरिबाला का मुंह पोंछ दिया और पंखें से हवा करने लगीं। फिर बोलीं, "देखो तो इस लड़की का तमाशा : ओ चम्पा, एक लोटा पानी ले आ और फूली की मां को बोल, यहां सफाई कर जाए । बूड़ी, डर मत, वह सब गंदगी मैं तुझे भला क्यों पिलाऊंगी ?" अब कहीं गिरिवाला की जान में जान आई। एक अज्ञात आतंक से उसकी शिराएं की तरह तनी हुई थीं । अब वे शिथिल हो आईं । चम्पा पानी ले आई। बड़ी बहू ने थोड़ा-थोड़ा पानी हाथ में लेकर गिरिबाला का मुंह, आंखें, माथा, गर्दन और कानों के पीछे धो दिया । फूली की मां आकर कमरा साफ कर गईं । बड़ी बहू ने पूछा, "ओ फूली की मां, रसोई बन गई ?" फूली की मां ने गर्दन हिलाकर 'हां' कही । "तो फिर जाओ, मझले मालिक को खाने को बोलो । छोटी बहू को स्नान कराने को कह देना । एक मिनट रुको, अपनी तंबाकू की डिबिया जरा दिखाना।" फूली की मां ने पिसी हुई तंबाकू की डिबिया आंचल से खोलकर बड़ी बहू की ओर बढ़ाई। बड़ी बहू ने थोड़ा-सा तंबाकू लेकर दांतों को अच्छी तरह मला, फिर आंगन में थूक आई। फिर तंबाकू की डिबिया फूली की मां के हाथ में थमाकर गिरिबाला के पास आ बैठीं और बड़े प्यार से चम्पा को पुकारा- "रानी बेटी, जाओ, नहा लो । आज तुम्हें अपने मन से नहाना होगा, समझी न? दीदी की तबीयत खराब है। मैं अभी इसके पास ही बैठती हूं।" बड़ी बहू बोल रही थीं तो तंबाकू का चूरा फुस-फुस करके उनके मुंह से उड़ यह देखकर खिलखिलाती हुई चम्पा बोली, "बड़ी मां, बात मत करो, नहीं तो तुम्हारे मुंह से तंबाकू उड़कर बड़ी दीदी की आंख में पड़ जाएगा ।" बड़ी बहू एक पल को शरमाई, फिर हंस पड़ीं और बोलीं, "दिन पर दिन यह लड़की बड़ी सयानी होती जा रही है। फालतू बात छोड़ और जो कह रही हूं उसे ध्यान से सुन । पूरी देह में अच्छी तरह तेल लगाना, समझी? तेल लगाकर पहले मुझे दिखाना, फिर नहाने बड़ी बहू की बातें खत्म होते ही चम्पा वहां से चटपट खिसक गई। बड़ी बहू का मन भीतर ही भीतर कसमसाने लगा। पता नहीं, यह लड़की ठीक से तेल लगाएगी या नहीं ? तेल और पानी से ही तो यह शरीर स्वच्छ होता है । इत्ती-सी तो लड़की है। वह भला अपने आप तेल कहां लगा पाएगी? बड़ी बहू ने पुकारा, "ओ चम्पा, तू मेरे पास ही आ जा । तेल की बोतल भी ले आ ।" बेचारी चम्पा ! सोचा था, आज के दिन बड़ी मां के हाथों से रिहाई मिली, मगर बड़ी मां कहां छोड़ने वाली हैं। उनका हुक्म सुनकर मुंह बिदकाए हाथ में तेल की बोतल लिए चम्पा हाजिर हुई । गिरिबाला लेटी- लेटी यह तमाशा देख रही थी । बड़ी मां के हाथों से तेल लगवाना कितनी बड़ी सजा है, यह बात गिरिबाला अच्छी तरह जानती हैं। बड़े भैया भी जानते हैं। मगर बड़े भैया तो कलकत्ते जाकर बच गए हैं। ससुराल जाकर वह भी बच जाएगी । तब सारा छार-भार चम्पा पर आ पड़ेगा। बड़ी मुश्किल से इस बीच बड़ी बहू ने चम्पा की चोटी खोल डाली थी। उसके बालों में कंघी कर रही थीं । मुंह फुलाए और उसे दोनों घुटनों पर टिकाए चम्पा बैठी थी । गिरिबाला को हंसी आ रही थी । बोली, "ओ चम्पा, चेहरा बैंगन - जैसा क्यों बना रखा है?" उसकी बात का जवाब न देकर चम्पा चीख उठी, "ओ बड़ी मां, बड़ा दुख रहा है ।" चम्पा की हालत देखकर गिरिबाला को मन ही मन हंसी आ रही थी । चम्पा को चिढ़ाने के लिए उसने कहा, "दुख-उख कुछ नहीं रहा है। इस लड़की को तो फूल मारने से भी मुरछा आती है।" चम्पा गुस्से से बोल पड़ी, "देखो बड़ी दीदी, तुम बीमार हो, बीमार की तरह रहो । ज्यादा फुटानी झाड़ने की जरूरत नहीं है, समझी?" बड़ी बहू ने उसे धमकाया, "अरे चुप कर । देखो तो लड़की की बातें ! वह भला रोगी क्यों होने लगी ?" चम्पा चुप लगा गई। गिरिबाला आंचल में मुंह ढक कर हंसने लगी । इन बातों की ओर ध्यान न देकर बड़ी बहू चम्पा के बालों की लटें छुड़ाती रहीं। कंघी के कई दांत टूटे हुए थे। थे। कभी-कभी कंघी बालों में फंस जाती थी और खींचने पर पट्-पट् कर बाल टूटने लगते थे। दर्द होने पर भी मारे गुस्से के चम्पा मुंह बंद किए बैठी रही। ऊह भी नहीं की। जानती है, उसका कोई फायदा नहीं । बाघ भी पकड़ ले तो कभी-कभी आदमी को मुक्ति मिल जाती है, मगर बड़ी मां के चंगुल से छूटने का कोई उपाय नहीं । चम्पा जानती है कि अभी पूरे शरीर में अच्छी तरह तेल घिसा जाएगा। इसके बाद बेसन और हल्दी से घिस-घिसकर उसे छुड़ाना होगा। इसके बाद पोखरे के पानी में उतर कर दो तीन डुबकियां लगानी होंगी, बस। देह पर जितना मर्जी पानी डालो, घंटा आधा घंटा गले तक पानी में डूबे रहो, मगर सिर पर ज्यादा पानी नहीं डाला जा सकता । बालों में जो तेल लगा है, उसे धोने की इजाजत नहीं है । सिर रूखा होने से बालों का रंग उड़ जाएगा। वह बाल ही क्या जो एकदम काला न हो? छोटे-छोटे बालों को तो बड़ी बहू बाल ही नहीं मानतीं, गले की फांसी कहती हैं । इन चीजों की तरफ वे कड़ी नजर रखती हैं । |
नई दिल्ली। आतंकवादियों को पनाह देने और उनके जरिए घाटी में अशांति पैदा करने के पाकिस्तानी मंसूबों पर भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिस तरह से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई लगातार भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए आतंकवादियों को सीमा पार से जम्मू - कश्मीर में भेज रही है और जिस तरह से वे आतंकी बर्बरता ने हमारे सैनिकों की हत्या कर रहे हैं, उससे अब भारत की सहनशीलता चुक गई है। भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इशारों - इशारों में पाकिस्तान पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक की बात कह दी है।
हाल ही में जब जनरल रावत से पत्रकारों ने हाल ही में सुरक्षाबलों पर आतंकियों के हमले और जवानों की निर्ममता से हत्या को लेकर पूछा गया कि क्या सेना पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करेगा, तो उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक एक सरप्राइज है और इसे सरप्राइज ही रहने दें। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। उनके इस बयान को देखकर तो यही लगता है कि भारत जल्द ही पाकिस्तान को 2016 वाला नजारा दिखाएगा।
सूत्रों से भी ऐसी जानकारी मिली है कि भारतीय सेना एक बार फिर से पाकिस्तान को तबाह करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती है। हालांकि अभी इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गई है और सेना ने इसे गोपनीय रखा है, लेकिन जिस तरह से जवानों की हत्या को लेकर लोगों और सेना के जवानों में आक्रोश है, उसे देखकर यही लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसा कदम उठाया जा सकता है।
29 सितंबर 2016 को भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तानी सीमा में घुसकर 7 आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया था। इस हमले में 38 आतंकी भी मारे गए थे। यह स्ट्राइक आधी रात को की गई थी और हमारे सैनिक पाकिस्तानी सीमा में कई किलोमीटर भीतर तक पहुंचकर हमला कर सुरक्षित वापस भी आ गए थे।
सर्जिकल स्ट्राइक एक सैन्य कार्रवाई है, जिसमें सेना दुश्मन के एक से अधिक ठिकानों पर हमला कर तुरंत वापस लौट आती है। सर्जिकल स्ट्राइक के तहत जहां पर हमला करना है, उसके आस - पास की जगहों को कम से कम नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
विदेश मंत्रियों के बीच बैठक रद्द, अब फाइनल सर्जिकल स्ट्राइक करेगा भारत !
| नई दिल्ली। आतंकवादियों को पनाह देने और उनके जरिए घाटी में अशांति पैदा करने के पाकिस्तानी मंसूबों पर भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिस तरह से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई लगातार भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए आतंकवादियों को सीमा पार से जम्मू - कश्मीर में भेज रही है और जिस तरह से वे आतंकी बर्बरता ने हमारे सैनिकों की हत्या कर रहे हैं, उससे अब भारत की सहनशीलता चुक गई है। भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इशारों - इशारों में पाकिस्तान पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक की बात कह दी है। हाल ही में जब जनरल रावत से पत्रकारों ने हाल ही में सुरक्षाबलों पर आतंकियों के हमले और जवानों की निर्ममता से हत्या को लेकर पूछा गया कि क्या सेना पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करेगा, तो उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक एक सरप्राइज है और इसे सरप्राइज ही रहने दें। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। उनके इस बयान को देखकर तो यही लगता है कि भारत जल्द ही पाकिस्तान को दो हज़ार सोलह वाला नजारा दिखाएगा। सूत्रों से भी ऐसी जानकारी मिली है कि भारतीय सेना एक बार फिर से पाकिस्तान को तबाह करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती है। हालांकि अभी इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गई है और सेना ने इसे गोपनीय रखा है, लेकिन जिस तरह से जवानों की हत्या को लेकर लोगों और सेना के जवानों में आक्रोश है, उसे देखकर यही लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसा कदम उठाया जा सकता है। उनतीस सितंबर दो हज़ार सोलह को भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तानी सीमा में घुसकर सात आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया था। इस हमले में अड़तीस आतंकी भी मारे गए थे। यह स्ट्राइक आधी रात को की गई थी और हमारे सैनिक पाकिस्तानी सीमा में कई किलोमीटर भीतर तक पहुंचकर हमला कर सुरक्षित वापस भी आ गए थे। सर्जिकल स्ट्राइक एक सैन्य कार्रवाई है, जिसमें सेना दुश्मन के एक से अधिक ठिकानों पर हमला कर तुरंत वापस लौट आती है। सर्जिकल स्ट्राइक के तहत जहां पर हमला करना है, उसके आस - पास की जगहों को कम से कम नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। विदेश मंत्रियों के बीच बैठक रद्द, अब फाइनल सर्जिकल स्ट्राइक करेगा भारत ! |
मनी लॉन्ड्रिंग केस में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस बीच शुक्रवार को AAP ने दावा किया कि वो जेल के वॉशरूम में बेहोश हो गए थे। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालांकि बाद में उनकी हालत को देखते हुए उन्हें LNJP अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। वो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।
पिछले एक हफ्ते में ये दूसरी बार है, जब जैन को स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के चलते अस्पताल ले जाया गया है। हाल ही में AAP ने दावा किया था कि गिरफ्तारी के बाद जैन का करीब 35 किलोग्राम वजन कम हो गया है।
बीते सोमवार को रीढ़ की समस्या के चलते उनको तिहाड़ जेल की टीम सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। वहां पर उनकी जांच की गई। इसके बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
वहीं दूसरी ओर सफदरजंग से जैन की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वो काफी कमजोर दिख रहे थे। उनके साथ दो पुलिसकर्मी भी थे। इस तस्वीर को ट्वीट कर सीएम केजरीवाल ने लिखा था कि मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना करता हूं। दिल्ली के लोग बीजेपी के अहंकार और अत्याचार को देख रहे हैं। यहां तक कि भगवान भी इन अत्याचारियों को माफ नहीं करेंगे।
उन्होंने आगे लिखा कि इस संघर्ष में जनता और भगवान हमारे साथ हैं। हम भगत सिंह के अनुयायी हैं। दमन, अन्याय और तानाशाही के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद वो सुप्रीम कोर्ट गए। वहां पर उन्होंने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांगी है। उनकी ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जैन का वजन 35 किलो तक गिर गया है। वो कंकाल की तरह दिख रहे। उन्हें कई बीमारियां हैं, ऐसे में जमानत मंजूर कर दी जाए। इस पर वैकेशन बेंच 26 मई को सुनवाई करेगी।
2024 में दक्षिण भारत से भी चुनाव लड़ सकते हैं पीएम मोदी, 'सुरक्षित' सीट की तलाश?
| मनी लॉन्ड्रिंग केस में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस बीच शुक्रवार को AAP ने दावा किया कि वो जेल के वॉशरूम में बेहोश हो गए थे। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालांकि बाद में उनकी हालत को देखते हुए उन्हें LNJP अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। वो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। पिछले एक हफ्ते में ये दूसरी बार है, जब जैन को स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के चलते अस्पताल ले जाया गया है। हाल ही में AAP ने दावा किया था कि गिरफ्तारी के बाद जैन का करीब पैंतीस किलोग्रामग्राम वजन कम हो गया है। बीते सोमवार को रीढ़ की समस्या के चलते उनको तिहाड़ जेल की टीम सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। वहां पर उनकी जांच की गई। इसके बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। वहीं दूसरी ओर सफदरजंग से जैन की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वो काफी कमजोर दिख रहे थे। उनके साथ दो पुलिसकर्मी भी थे। इस तस्वीर को ट्वीट कर सीएम केजरीवाल ने लिखा था कि मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना करता हूं। दिल्ली के लोग बीजेपी के अहंकार और अत्याचार को देख रहे हैं। यहां तक कि भगवान भी इन अत्याचारियों को माफ नहीं करेंगे। उन्होंने आगे लिखा कि इस संघर्ष में जनता और भगवान हमारे साथ हैं। हम भगत सिंह के अनुयायी हैं। दमन, अन्याय और तानाशाही के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद वो सुप्रीम कोर्ट गए। वहां पर उन्होंने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांगी है। उनकी ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जैन का वजन पैंतीस किलो तक गिर गया है। वो कंकाल की तरह दिख रहे। उन्हें कई बीमारियां हैं, ऐसे में जमानत मंजूर कर दी जाए। इस पर वैकेशन बेंच छब्बीस मई को सुनवाई करेगी। दो हज़ार चौबीस में दक्षिण भारत से भी चुनाव लड़ सकते हैं पीएम मोदी, 'सुरक्षित' सीट की तलाश? |
Himachal Travel Destination अगर आप एक से दो दिन की छुट्टियों में घूमने के लिए आसपास शांत और खूबसूरत जगह की तलाश कर रहे हैं तो हिमाचल प्रदेश का परवाणू है इसके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन। यहां घूमने वाली जगहों की कोई कमी नहीं। फैमिली से लेकर फ्रेंड्स हर किसी के साथ यहां आकर कर सकते हैं जमकर मौज-मस्ती। तो जान लें इस जगह के बारे में जो यहां घूमने- फिरने में आएंगे काम।
Himachal Travel Destination: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित परवाणू बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। जो अपने मनमोहक नजारों के साथ सेब और आडू के बागानों के लिए मशहूर है। नेचर से लेकर एडवेंचर लवर्स तक के लिए ये जगह बेस्ट है। इस जगह आकर आप ट्रैकिंग, हाइकिंग जैसी कई एक्टिविटीज के मजे ले सकते हैं। इसके अलावा बहुत सारी ऐसी जगहें, जो आपके ट्रैवल एक्सपीरियंस को खास बना सकती हैं। तो आइए जानते हैं परवाणू में घूमने वाली कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में।
यहां का बहुत ही मशहूर टूरिस्ट अट्रैक्शन है कैक्टस गार्डन। यह एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन है, जिसमें कैक्टस की लगभग 3500 से ज्यादा वैराइटीज़ देखने को मिलती हैं।
यह गार्डन पंचकूला से 15 किमी की दूरी पर स्थित है, जो 100 एकड़ के क्षेत्र में फैला है। माना जाता है कि इस गार्डन को बनाने का काम 17वीं शताब्दी में ही शुरू हो गया था। बैसाख के महीने में इस गार्डन में मैंगो फेस्टिवल का आयोजन होता है। तो अगर परवाणू आएं, तो इस ऐतिहासिक जगह को भी देखें।
टिंबर ट्रेल वाली जगह हमेशा ही भीड़ नजर आती है। यहां आकर टिंबर ट्रेल देखने के लिए वक्त जरूर निकालें। यहां का खास अट्रैक्शन रोप वे सवारी है। एक ट्रिप में इस केबल कार में 12 लोग बैठ सकते हैं। इस सफर के दौरान आप हिमाचल की खूबसूरत वादियों का दीदार कर सकते हैं।
परवाणू आकर यहां फलों का बागान देखना मिस न करें, जो बहुत ही अलग तरह का एक्सपीरियंस है। शिवालिक रेंज की गोद में बसी इस जगह का मौसम ज्यादातर सुहावना रहता है, इस वजह से यहां सेब और आड़ू की खेती बहुत ज्यादा होती है। इसके साथ ही यहां से अचार, जैम, जेली और दूसरे फ्रूट्स से बने प्रोडक्ट्स भी बहुत मशहूर हैं।
कैसे पहुंचे?
फ्लाइट से- परवाणू में कोई एयरपोर्ट नहीं है। तो अगर आप यहां फ्लाइट से आने की सोच रहे हैं, तो सबसे निकटतम चंडीगढ़ एयरपोर्ट है, जो यहां से 30 किमी दूर है।
ट्रेन से- आप कालका से यहां के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं। जहां से परवाणू सिर्फ 2 किमी दूर है।
बस से- चंडीगढ़ और अंबाला से परवाणू तक के लिए आसानी से बस मिल जाएगी।
| Himachal Travel Destination अगर आप एक से दो दिन की छुट्टियों में घूमने के लिए आसपास शांत और खूबसूरत जगह की तलाश कर रहे हैं तो हिमाचल प्रदेश का परवाणू है इसके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन। यहां घूमने वाली जगहों की कोई कमी नहीं। फैमिली से लेकर फ्रेंड्स हर किसी के साथ यहां आकर कर सकते हैं जमकर मौज-मस्ती। तो जान लें इस जगह के बारे में जो यहां घूमने- फिरने में आएंगे काम। Himachal Travel Destination: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित परवाणू बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। जो अपने मनमोहक नजारों के साथ सेब और आडू के बागानों के लिए मशहूर है। नेचर से लेकर एडवेंचर लवर्स तक के लिए ये जगह बेस्ट है। इस जगह आकर आप ट्रैकिंग, हाइकिंग जैसी कई एक्टिविटीज के मजे ले सकते हैं। इसके अलावा बहुत सारी ऐसी जगहें, जो आपके ट्रैवल एक्सपीरियंस को खास बना सकती हैं। तो आइए जानते हैं परवाणू में घूमने वाली कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में। यहां का बहुत ही मशहूर टूरिस्ट अट्रैक्शन है कैक्टस गार्डन। यह एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन है, जिसमें कैक्टस की लगभग तीन हज़ार पाँच सौ से ज्यादा वैराइटीज़ देखने को मिलती हैं। यह गार्डन पंचकूला से पंद्रह किमी की दूरी पर स्थित है, जो एक सौ एकड़ के क्षेत्र में फैला है। माना जाता है कि इस गार्डन को बनाने का काम सत्रहवीं शताब्दी में ही शुरू हो गया था। बैसाख के महीने में इस गार्डन में मैंगो फेस्टिवल का आयोजन होता है। तो अगर परवाणू आएं, तो इस ऐतिहासिक जगह को भी देखें। टिंबर ट्रेल वाली जगह हमेशा ही भीड़ नजर आती है। यहां आकर टिंबर ट्रेल देखने के लिए वक्त जरूर निकालें। यहां का खास अट्रैक्शन रोप वे सवारी है। एक ट्रिप में इस केबल कार में बारह लोग बैठ सकते हैं। इस सफर के दौरान आप हिमाचल की खूबसूरत वादियों का दीदार कर सकते हैं। परवाणू आकर यहां फलों का बागान देखना मिस न करें, जो बहुत ही अलग तरह का एक्सपीरियंस है। शिवालिक रेंज की गोद में बसी इस जगह का मौसम ज्यादातर सुहावना रहता है, इस वजह से यहां सेब और आड़ू की खेती बहुत ज्यादा होती है। इसके साथ ही यहां से अचार, जैम, जेली और दूसरे फ्रूट्स से बने प्रोडक्ट्स भी बहुत मशहूर हैं। कैसे पहुंचे? फ्लाइट से- परवाणू में कोई एयरपोर्ट नहीं है। तो अगर आप यहां फ्लाइट से आने की सोच रहे हैं, तो सबसे निकटतम चंडीगढ़ एयरपोर्ट है, जो यहां से तीस किमी दूर है। ट्रेन से- आप कालका से यहां के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं। जहां से परवाणू सिर्फ दो किमी दूर है। बस से- चंडीगढ़ और अंबाला से परवाणू तक के लिए आसानी से बस मिल जाएगी। |
निरंतर पर्व मनाना कोई हिंदुस्तानियों से सीखे। पर्व यानी प्रवाहित होते काल के किसी खास पड़ाव का महोत्सव। और सावन में जब देवशयनी एकादशी के साथ लगभग सारे देवता सोने चले जाते हैं, तो अविनाशी काल के प्रतीक भोलेनाथ के भक्तों की बम बम हो जाती है।
निरंतर पर्व मनाना कोई हिंदुस्तानियों से सीखे। पर्व यानी प्रवाहित होते काल के किसी खास पड़ाव का महोत्सव। और सावन में जब देवशयनी एकादशी के साथ लगभग सारे देवता सोने चले जाते हैं, तो अविनाशी काल के प्रतीक भोलेनाथ के भक्तों की बम बम हो जाती है। शिव की प्रिय नदी है गंगा जिसे उन्होने गंगा के धरती पर उतरने के वक्त अपनी जटाओं में धारण किया और उसका पानी उनको बहुत प्रिय माना गया। लिहाज़ा शिव के प्रिय महीने श्रावण में सप्ताह में शिव के प्रिय दिन सोमवार को किसी तीर्थ से गंगाजल ला कर शिव का अभिषेक कराना शिवभक्तों का प्रिय उत्सव बना।
माना जाता है कि अपने कंधों पर गंगाजल और शिव का ज्योतिर्लिंग एक कांवड़ पर ला कर रावण (जी हां शिव के वे त्रेतायुगीन भक्तों में सबसे सीनियर रहे) ने झारखंड के वैद्यनाथ धाम और कर्नाटक के गोकर्ण में शिवलिंग पर चढ़ाया और शिव को प्रसन्न किया। पर बेचारे का नसीब कुछ खोटा था। दोनो बार भारत भूमि से उड़ा कर लाये शिवलिंग को दशानन भारत से लंका न ले जा पाये। तनिक सा आराम करने को शिवलिंग की कांवड़ धरती पर रखी तो शिवलिंग वहीं जम गया। पहली बार वैद्यनाथ धाम में, दोबारा कर्नाटक में। लोकल्लो बात ! रावण ने अपने दसों सर काट कर वैद्यनाथ धाम को चढ़ाए। शिव ने वैद्य बन कर उनको फिर जोड़ दिया। इससे शिव का वह धाम वैद्यनाथ (उर्फ बैजनाथ धाम ) तो कहलाया पर शिव न हिले तो न हिले। यही कर्नाटक में रिपीट हुआ। रावण ने ज़ोर से खींचा तो शिवलिंग गाय के कान जैसा हो गया पर उठाया न गया। सो वह धाम गोकर्ण तीर्थ बन गया।
कलियुग में पाप तेज़ी बढे और भक्त भी। हर सावन में श्रद्धालु कंधो पर बहंगी या कांवड़ में गंगाजल के पात्र उठा कर चल पड़ते हैं। उनका लक्ष्य है देश के कोने कोने से श्रावणी सोमवार तक किसी पवित्र शिव मंदिर या ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल चढ़ाना। पहले कांवड़ियों के जत्थे मुख्यतः उत्तर प्रदेश (हरिद्वार या काशी के लिये), या झारखंड स्थित बैजनाथ धाम या देवघर को निकलते थे। पर 80 के दशक से बम बम करती, लगातार अधिक हो हल्ला मचाती और अधिक रंगारंग बनती ऐसी टोलियाँ सारे उत्तरभारत में निकलने लगी हैं। 90 के दशक से इन तीर्थ यात्रियों के लिए सड़क किनारे शिविर लगने और लंगर खुलने लगे तब तो महीना भर जल ले कर यात्रा करते कांवड़ियों की भीड़ ही उमड़ पड़ी। गाना बजाना, डी जे, भंग छानना यह सब भी शुरू हो गया। पुलिस थानेवालों का कहना था कि चूंकि अधिकतर युवा उत्पाती इस महीने काँवड़िये बन जाते हैं अपराध कम होते हैं। पर जब राजनैतिक दलों ने तामझाम भरे एयरकंडीशन्ड शिविर लगा कर हलवा पूरी का भोज कराना चालू कर दिया तब तो राजमार्गों पर भी जाम लगने लगे। और नशेबाज़ों की हुड़दंग, रोड रेज और मार पीट की भी खबरें आने लगीं।
इस बरस 18 जुलाय से यह यात्रायें फिर शुरू हो रही हैं। बताया जा रहा है कि हरिद्वार प्रशासन गंगाजल लेजाने लाने वाले एक करोड़ बीस लाख के लगभग भक्तों के शहर में आने की उम्मीद कर रहा है। इससे कई पुजारी पंडों, कांवड़ निर्माताओं की चाँदी तो होगी पर लोकल जीवन पर भी काफी दिक्कत आ जायेगी। वैसे बताया गया है कि पुलिसिया इंतज़ाम तगड़ा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी और उत्तर प्रदेश में भी। उत्तर प्रदेश ने तो कोविड काल में भी यात्रा रोकने से इनकार कर दिया था पर सर्वोच्च न्यायालय तक मामला गया तो जनस्वास्थ्य को खतरा देखते हुए इन पर रोक लग सकी। इस साल खुला खेल बम बम है। बिना कानूनी रोक टोक के लगातार प्रदर्शनप्रिय, उग्र और बहसंख्यवादी बन चले हिंदुत्ववादी भक्त, गोदी मीडिया की पनाह पा कर कुछ अनहोनी अधार्मिक हरकतें न करें इसके लिये भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना ही की जा सकती है।
| निरंतर पर्व मनाना कोई हिंदुस्तानियों से सीखे। पर्व यानी प्रवाहित होते काल के किसी खास पड़ाव का महोत्सव। और सावन में जब देवशयनी एकादशी के साथ लगभग सारे देवता सोने चले जाते हैं, तो अविनाशी काल के प्रतीक भोलेनाथ के भक्तों की बम बम हो जाती है। निरंतर पर्व मनाना कोई हिंदुस्तानियों से सीखे। पर्व यानी प्रवाहित होते काल के किसी खास पड़ाव का महोत्सव। और सावन में जब देवशयनी एकादशी के साथ लगभग सारे देवता सोने चले जाते हैं, तो अविनाशी काल के प्रतीक भोलेनाथ के भक्तों की बम बम हो जाती है। शिव की प्रिय नदी है गंगा जिसे उन्होने गंगा के धरती पर उतरने के वक्त अपनी जटाओं में धारण किया और उसका पानी उनको बहुत प्रिय माना गया। लिहाज़ा शिव के प्रिय महीने श्रावण में सप्ताह में शिव के प्रिय दिन सोमवार को किसी तीर्थ से गंगाजल ला कर शिव का अभिषेक कराना शिवभक्तों का प्रिय उत्सव बना। माना जाता है कि अपने कंधों पर गंगाजल और शिव का ज्योतिर्लिंग एक कांवड़ पर ला कर रावण ने झारखंड के वैद्यनाथ धाम और कर्नाटक के गोकर्ण में शिवलिंग पर चढ़ाया और शिव को प्रसन्न किया। पर बेचारे का नसीब कुछ खोटा था। दोनो बार भारत भूमि से उड़ा कर लाये शिवलिंग को दशानन भारत से लंका न ले जा पाये। तनिक सा आराम करने को शिवलिंग की कांवड़ धरती पर रखी तो शिवलिंग वहीं जम गया। पहली बार वैद्यनाथ धाम में, दोबारा कर्नाटक में। लोकल्लो बात ! रावण ने अपने दसों सर काट कर वैद्यनाथ धाम को चढ़ाए। शिव ने वैद्य बन कर उनको फिर जोड़ दिया। इससे शिव का वह धाम वैद्यनाथ तो कहलाया पर शिव न हिले तो न हिले। यही कर्नाटक में रिपीट हुआ। रावण ने ज़ोर से खींचा तो शिवलिंग गाय के कान जैसा हो गया पर उठाया न गया। सो वह धाम गोकर्ण तीर्थ बन गया। कलियुग में पाप तेज़ी बढे और भक्त भी। हर सावन में श्रद्धालु कंधो पर बहंगी या कांवड़ में गंगाजल के पात्र उठा कर चल पड़ते हैं। उनका लक्ष्य है देश के कोने कोने से श्रावणी सोमवार तक किसी पवित्र शिव मंदिर या ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल चढ़ाना। पहले कांवड़ियों के जत्थे मुख्यतः उत्तर प्रदेश , या झारखंड स्थित बैजनाथ धाम या देवघर को निकलते थे। पर अस्सी के दशक से बम बम करती, लगातार अधिक हो हल्ला मचाती और अधिक रंगारंग बनती ऐसी टोलियाँ सारे उत्तरभारत में निकलने लगी हैं। नब्बे के दशक से इन तीर्थ यात्रियों के लिए सड़क किनारे शिविर लगने और लंगर खुलने लगे तब तो महीना भर जल ले कर यात्रा करते कांवड़ियों की भीड़ ही उमड़ पड़ी। गाना बजाना, डी जे, भंग छानना यह सब भी शुरू हो गया। पुलिस थानेवालों का कहना था कि चूंकि अधिकतर युवा उत्पाती इस महीने काँवड़िये बन जाते हैं अपराध कम होते हैं। पर जब राजनैतिक दलों ने तामझाम भरे एयरकंडीशन्ड शिविर लगा कर हलवा पूरी का भोज कराना चालू कर दिया तब तो राजमार्गों पर भी जाम लगने लगे। और नशेबाज़ों की हुड़दंग, रोड रेज और मार पीट की भी खबरें आने लगीं। इस बरस अट्ठारह जुलाय से यह यात्रायें फिर शुरू हो रही हैं। बताया जा रहा है कि हरिद्वार प्रशासन गंगाजल लेजाने लाने वाले एक करोड़ बीस लाख के लगभग भक्तों के शहर में आने की उम्मीद कर रहा है। इससे कई पुजारी पंडों, कांवड़ निर्माताओं की चाँदी तो होगी पर लोकल जीवन पर भी काफी दिक्कत आ जायेगी। वैसे बताया गया है कि पुलिसिया इंतज़ाम तगड़ा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी और उत्तर प्रदेश में भी। उत्तर प्रदेश ने तो कोविड काल में भी यात्रा रोकने से इनकार कर दिया था पर सर्वोच्च न्यायालय तक मामला गया तो जनस्वास्थ्य को खतरा देखते हुए इन पर रोक लग सकी। इस साल खुला खेल बम बम है। बिना कानूनी रोक टोक के लगातार प्रदर्शनप्रिय, उग्र और बहसंख्यवादी बन चले हिंदुत्ववादी भक्त, गोदी मीडिया की पनाह पा कर कुछ अनहोनी अधार्मिक हरकतें न करें इसके लिये भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना ही की जा सकती है। |
बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने साल 2012 में एक्टर सैफ अली खान से शादी की थी और आज दोनों फिल्म इंडस्ट्री के सबसे पसंदीदा कपल्स में से एक हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब करीना का नाम एक्टर ऋतिक रोशन के साथ जुड़ रहा था।
करीना ने अपने करियर के शुरुआती दौर में ऋतिक रोशन के साथ कई फिल्मों में काम किया था जिसमें कभी खुशी कभी गम, यादें और मैं प्रेम की दीवानी हूं जैसी फिल्में शामिल हैं। दोनों की जोड़ी को दर्शक बहुत पसंद भी कर रहे थे। इस दौरान दोनों को लेकर खबरें आने लगी कि वो सीक्रेट रिलेशनशिप में हैं। कुछ रिपोर्ट्स में तो यह तक कहा गया कि ऋतिक के साथ रहने के लिए करीना अपना करियर तक छोड़ने को तैयार हैं तो वहीं दूसरी तरफ खबरें यह भी थीं कि ऋतिक के परिवार ने करीना को उनसे दूर रहने के लिए कहा है। मालूम हो इस समय ऋतिक की शादी सुजैन खान से हो गई थी।
ऋतिक रोशन संग लिंकअप की खबरों पर प्रतिक्रिया दी थी। साल 2002 में जब करीना से उनके और ऋतिक के लिंकअप के बारे में पूछा गया तो एक्ट्रेस ने कहा था, 'मैं परेशान थी कि इसका असर उनकी शादी पर पड़ेगा। मेरे लिए यह प्रोफेशनल परेशानी थी। अभी यह ऋतिक थे कल को कोई और हो सकता है। जब तक मुझे सच्चाई पता है, तब तक मैं ठीक हूं। '
इस इंटरव्यू में करीना ने उस खबर पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा, 'ऋतिक से मेरे लिंक अप के आर्टिकल में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा था कि मैं उनके लिए अपना करियर छोड़ने वाली थी। प्लीज! कभी नहीं! किसी पुरुष के लिए नहीं। ' करीना ने आगे कहा कि अगर कभी उनका पार्टनर उन्हें करियर छोड़ने के लिए कहता है तो वो उसे लात मारकर जानें को कहेंगी। करीना ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा था कि वो कभी शादीशुदा पुरुष को डेट नहीं करेंगी क्योंकि वो उनके करियर के लिए हानिकारक होंगे।
मालूम हो कि करीना ने साल 2012 में एक्टर सैफ अली खान से शादी की थी। इसके बाद साल 2016 में दोनों पहली बार पेरेंट्स बने और उनके बेटे तैमूर अली खान का जन्म हुआ। अब एक बार फिर करीना प्रेग्नेंट हैं और जल्द ही दोनों पेरेंट्स बनने वाले हैं।
Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
| बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने साल दो हज़ार बारह में एक्टर सैफ अली खान से शादी की थी और आज दोनों फिल्म इंडस्ट्री के सबसे पसंदीदा कपल्स में से एक हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब करीना का नाम एक्टर ऋतिक रोशन के साथ जुड़ रहा था। करीना ने अपने करियर के शुरुआती दौर में ऋतिक रोशन के साथ कई फिल्मों में काम किया था जिसमें कभी खुशी कभी गम, यादें और मैं प्रेम की दीवानी हूं जैसी फिल्में शामिल हैं। दोनों की जोड़ी को दर्शक बहुत पसंद भी कर रहे थे। इस दौरान दोनों को लेकर खबरें आने लगी कि वो सीक्रेट रिलेशनशिप में हैं। कुछ रिपोर्ट्स में तो यह तक कहा गया कि ऋतिक के साथ रहने के लिए करीना अपना करियर तक छोड़ने को तैयार हैं तो वहीं दूसरी तरफ खबरें यह भी थीं कि ऋतिक के परिवार ने करीना को उनसे दूर रहने के लिए कहा है। मालूम हो इस समय ऋतिक की शादी सुजैन खान से हो गई थी। ऋतिक रोशन संग लिंकअप की खबरों पर प्रतिक्रिया दी थी। साल दो हज़ार दो में जब करीना से उनके और ऋतिक के लिंकअप के बारे में पूछा गया तो एक्ट्रेस ने कहा था, 'मैं परेशान थी कि इसका असर उनकी शादी पर पड़ेगा। मेरे लिए यह प्रोफेशनल परेशानी थी। अभी यह ऋतिक थे कल को कोई और हो सकता है। जब तक मुझे सच्चाई पता है, तब तक मैं ठीक हूं। ' इस इंटरव्यू में करीना ने उस खबर पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा, 'ऋतिक से मेरे लिंक अप के आर्टिकल में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा था कि मैं उनके लिए अपना करियर छोड़ने वाली थी। प्लीज! कभी नहीं! किसी पुरुष के लिए नहीं। ' करीना ने आगे कहा कि अगर कभी उनका पार्टनर उन्हें करियर छोड़ने के लिए कहता है तो वो उसे लात मारकर जानें को कहेंगी। करीना ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा था कि वो कभी शादीशुदा पुरुष को डेट नहीं करेंगी क्योंकि वो उनके करियर के लिए हानिकारक होंगे। मालूम हो कि करीना ने साल दो हज़ार बारह में एक्टर सैफ अली खान से शादी की थी। इसके बाद साल दो हज़ार सोलह में दोनों पहली बार पेरेंट्स बने और उनके बेटे तैमूर अली खान का जन्म हुआ। अब एक बार फिर करीना प्रेग्नेंट हैं और जल्द ही दोनों पेरेंट्स बनने वाले हैं। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें । |
आरोग्य भारती काशी प्रांत की प्रयागराज इकाई द्वारा बुधवार को शंभुनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एण्ड साइंस, झलवा में 'कोरोना प्रबंधन एवं जीवनशैली' विषय पर स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसका उद्घाटन आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वाष्र्णेय ने चीफगेस्ट के रूप में किया। डॉ वाष्र्णेय बताया कि स्वस्थ जीवन शैली व सकारात्मक सोच से अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं, जो कोरोना को मात देने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि तनाव से शरीर की इम्युनिटी कम होती है।
स्पेशल गेस्ट राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, हण्डिया, प्रयागराज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) जी एस तोमर ने कहा कि आयुर्वेद में आहार, आचार एवं औषध तीन साधन निíदष्ट हैं जिनके परिपालन से हम न केवल कोरोना जैसी संक्रामक महामारी का सामना कर सकते हैं अपितु गंभीर रोगों का भी उपचार सफलतापूर्वक कर सकते हैं। आरोग्य भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश संयोजक गोविंद ने निरंतर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आरोग्य भारती काशी प्रांत उपाध्यक्ष नागेन्द्र ने कहा कि जब भी बाजार जाएं मास्क जरूर लगाएं। अध्यक्षीय उद्बोधन में उत्थान के सचिव डॉ के के तिवारी व कार्यक्रम का संचालन आरोग्य भारती काशी प्रांत सहसचिव डॉ अवनीश पाण्डेय द्वारा किया गया।
| आरोग्य भारती काशी प्रांत की प्रयागराज इकाई द्वारा बुधवार को शंभुनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एण्ड साइंस, झलवा में 'कोरोना प्रबंधन एवं जीवनशैली' विषय पर स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसका उद्घाटन आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वाष्र्णेय ने चीफगेस्ट के रूप में किया। डॉ वाष्र्णेय बताया कि स्वस्थ जीवन शैली व सकारात्मक सोच से अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं, जो कोरोना को मात देने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि तनाव से शरीर की इम्युनिटी कम होती है। स्पेशल गेस्ट राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, हण्डिया, प्रयागराज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रोफेसर जी एस तोमर ने कहा कि आयुर्वेद में आहार, आचार एवं औषध तीन साधन निíदष्ट हैं जिनके परिपालन से हम न केवल कोरोना जैसी संक्रामक महामारी का सामना कर सकते हैं अपितु गंभीर रोगों का भी उपचार सफलतापूर्वक कर सकते हैं। आरोग्य भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश संयोजक गोविंद ने निरंतर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आरोग्य भारती काशी प्रांत उपाध्यक्ष नागेन्द्र ने कहा कि जब भी बाजार जाएं मास्क जरूर लगाएं। अध्यक्षीय उद्बोधन में उत्थान के सचिव डॉ के के तिवारी व कार्यक्रम का संचालन आरोग्य भारती काशी प्रांत सहसचिव डॉ अवनीश पाण्डेय द्वारा किया गया। |
Karnataka UGCET 2019 Allotment Result: कर्नाटक यूजीसीईटी 2019 का आवंटन रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। उम्मीदवार केईए की ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर जाकर चेक कर सकते हैं।
Karnataka UGCET 2019 Allotment Result: कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने कर्नाटक यूजीसीईटी 2019 का आवंटन रिजल्ट (Karnataka UGCET 2019 Allotment Result) अपनी ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर घोषित कर दिया है। उम्मीदवार कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण की ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर जाकर अपना रिजल्ट यूजीसीईटी आवंटन रिजल्ट 2019 (Karnataka UGCET Allotment Result 2019) डाउनलोड कर सकते हैं।
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण ने ऑनलाइन आवेदन और विकल्प चुनने के लिए अपनी ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर 16 अगस्त, 2019 से लेकर 19 अगस्त 2019 तक लिंक एक्टिव किया था। केईए ने अब तक ने यूजीसीईटी परीक्षा 2019 के लिए आवंटन रिजल्ट के दूसरे राउंड की घोषणा की है।
इंडिया टूडे के मुताबिक यूजीसीईटी परीक्षा 2019 में सफल उम्मीदवार शैक्षणिक सत्र 2018 में फार्मेसी, आर्किटेक्चर, फार्म साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आयुष (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी), दंत चिकित्सा और मेडिसिन में पहले सेमेस्टर कोर्सों में एडमिशन के लिए पात्र होंगे।
चरण 1: सबसे पहले उम्मीदवार KEA की ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर जाएं।
स्टेप 2: वेबसाइट पर दिख रहे 'UGCET 2019 Special Round Allotment Result'लिंक पर क्लिक करें।
चरण 3: लिंक पर क्लिक करन पर नया पेज खुलेगा, उसमें उम्मीदवार अपनी मांगी हुई जानकारी डालकर समबिट बटन पर क्लिक करें।
चरण 4: आपका कर्नाटक यूजीसीईटी आवंटन रिजल्ट 2019' स्क्रीन पर आ जाएगा।
चरण 5: उम्मीदवार रिजल्ट को डाउनलोड कर भविष्य के लिए प्रिंटआउट लें।
आपका बता दें कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (KCET) का आयोजन किया जाता है। मेडिकल और डेंटल उम्मीदवारों के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा (NEET) 2019 में पास होना आवश्यक होगा। इसके अलावा, आर्किटेक्चर उम्मीदवारों को संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) के पेपर 2 या नेशनल काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (एनएटीए) में आर्किटेक्चर काउंसिल के लिए उपस्थित होना आवश्यक होगा।
| Karnataka UGCET दो हज़ार उन्नीस Allotment Result: कर्नाटक यूजीसीईटी दो हज़ार उन्नीस का आवंटन रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। उम्मीदवार केईए की ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर जाकर चेक कर सकते हैं। Karnataka UGCET दो हज़ार उन्नीस Allotment Result: कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण ने कर्नाटक यूजीसीईटी दो हज़ार उन्नीस का आवंटन रिजल्ट अपनी ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर घोषित कर दिया है। उम्मीदवार कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण की ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर जाकर अपना रिजल्ट यूजीसीईटी आवंटन रिजल्ट दो हज़ार उन्नीस डाउनलोड कर सकते हैं। कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण ने ऑनलाइन आवेदन और विकल्प चुनने के लिए अपनी ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर सोलह अगस्त, दो हज़ार उन्नीस से लेकर उन्नीस अगस्त दो हज़ार उन्नीस तक लिंक एक्टिव किया था। केईए ने अब तक ने यूजीसीईटी परीक्षा दो हज़ार उन्नीस के लिए आवंटन रिजल्ट के दूसरे राउंड की घोषणा की है। इंडिया टूडे के मुताबिक यूजीसीईटी परीक्षा दो हज़ार उन्नीस में सफल उम्मीदवार शैक्षणिक सत्र दो हज़ार अट्ठारह में फार्मेसी, आर्किटेक्चर, फार्म साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आयुष , दंत चिकित्सा और मेडिसिन में पहले सेमेस्टर कोर्सों में एडमिशन के लिए पात्र होंगे। चरण एक: सबसे पहले उम्मीदवार KEA की ऑफिशियल वेबसाइट kea. kar. nic. in पर जाएं। स्टेप दो: वेबसाइट पर दिख रहे 'UGCET दो हज़ार उन्नीस Special Round Allotment Result'लिंक पर क्लिक करें। चरण तीन: लिंक पर क्लिक करन पर नया पेज खुलेगा, उसमें उम्मीदवार अपनी मांगी हुई जानकारी डालकर समबिट बटन पर क्लिक करें। चरण चार: आपका कर्नाटक यूजीसीईटी आवंटन रिजल्ट दो हज़ार उन्नीस' स्क्रीन पर आ जाएगा। चरण पाँच: उम्मीदवार रिजल्ट को डाउनलोड कर भविष्य के लिए प्रिंटआउट लें। आपका बता दें कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन किया जाता है। मेडिकल और डेंटल उम्मीदवारों के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा दो हज़ार उन्नीस में पास होना आवश्यक होगा। इसके अलावा, आर्किटेक्चर उम्मीदवारों को संयुक्त प्रवेश परीक्षा के पेपर दो या नेशनल काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में आर्किटेक्चर काउंसिल के लिए उपस्थित होना आवश्यक होगा। |
New Delhi. भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री Abhijeet Banerjee को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। वैश्विक गरीबी और भुखमरी को दूर करने में किए गए योगदान के लिए सामूहिक रूप से ये पुरस्कार दिया गया है। एस्थर डुफलो, Abhijeet Banerjee की पत्नी हैं।
स्वीडिश अकादमी ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि अपने प्रयोगात्मक दृष्टिकोण से इन्होंने वैश्विक गरीबी को कम करने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
भारत में जन्मे Abhijeet Banerjee अमेरिकी नागरिक हैं। एस्थर डुफलो फ्रेंच-अमेरिकी हैं और माइकेल क्रेमर भी अमेरिकी हैं।
अमेरिका की एमआईटी Abhijeet Banerjee अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले दूसरे भारतीय इकोनॉमिस्ट हैं। इससे पहले अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
Abhijeet Banerjee ने कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज और उसके बाद दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से शिक्षा ग्रहण की है।
| New Delhi. भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री Abhijeet Banerjee को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। वैश्विक गरीबी और भुखमरी को दूर करने में किए गए योगदान के लिए सामूहिक रूप से ये पुरस्कार दिया गया है। एस्थर डुफलो, Abhijeet Banerjee की पत्नी हैं। स्वीडिश अकादमी ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि अपने प्रयोगात्मक दृष्टिकोण से इन्होंने वैश्विक गरीबी को कम करने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। भारत में जन्मे Abhijeet Banerjee अमेरिकी नागरिक हैं। एस्थर डुफलो फ्रेंच-अमेरिकी हैं और माइकेल क्रेमर भी अमेरिकी हैं। अमेरिका की एमआईटी Abhijeet Banerjee अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले दूसरे भारतीय इकोनॉमिस्ट हैं। इससे पहले अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। Abhijeet Banerjee ने कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज और उसके बाद दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से शिक्षा ग्रहण की है। |
कोलकाता। दुनिया में गुलाबी गेंद से टेस्ट मैचों की शुरुआत हो गई है और भारत में दुलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट गुलाबी गेंद से खेला जा चुका है लेकिन टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक टीम इंडिया फिलहाल डे नाइट टेस्ट नहीं खेल पाएगी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारियों की बैठक में विश्व कप 2019 के कार्यक्रम के अलावा 2019-23 के पांच साल के लिए भविष्य दौरा कार्यक्रम (एफटीपी) के मैचों पर भी चर्चा हुई।
भारत इस दौरान क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में अधिकतम 309 दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलेगा जो पिछले पांच वर्षों के चक्र से 92 दिन कम है। भारत के घरेलू टेस्ट मैचों की संख्या बढ़ाकर 15 से 19 कर दी गई है और ये सभी टेस्ट विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा होंगे।
आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के सभी मैच दिन में और लाल गेंद से खेले जाएंगे इसलिए भारत अभी गुलाबी गेंद से टेस्ट मैच नहीं खेल पाएगा। बैठक में आईसीसी के चेयरमैन के चुनाव पर भी चर्चा हुई। यदि चुनाव होते हैं तो तो यह जून की समाप्ति पर वार्षिक सम्मलेन के साथ होंगे और आईसीसी बोर्ड इसकी प्रक्रिया निर्धारित करेगा।
इंग्लैंड के जाइल्स क्लार्क इस पद के दावेदार हैं लेकिन निवर्तमान चेयरमैन शशांक मनोहर को भी विस्तार मिल सकता है। यदि मनोहर प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं तो फिर चुनाव की जरूरत नहीं रहेगी। बीसीसीआई के सदस्य मनोहर के फिर चुने जाने का विरोध कर सकते हैं लेकिन मनोहर के पास चुने जाने के लिए पर्याप्त संख्या है। (वार्ता)
| कोलकाता। दुनिया में गुलाबी गेंद से टेस्ट मैचों की शुरुआत हो गई है और भारत में दुलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट गुलाबी गेंद से खेला जा चुका है लेकिन टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक टीम इंडिया फिलहाल डे नाइट टेस्ट नहीं खेल पाएगी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के मुख्य कार्यकारियों की बैठक में विश्व कप दो हज़ार उन्नीस के कार्यक्रम के अलावा दो हज़ार उन्नीस-तेईस के पांच साल के लिए भविष्य दौरा कार्यक्रम के मैचों पर भी चर्चा हुई। भारत इस दौरान क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में अधिकतम तीन सौ नौ दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलेगा जो पिछले पांच वर्षों के चक्र से बानवे दिन कम है। भारत के घरेलू टेस्ट मैचों की संख्या बढ़ाकर पंद्रह से उन्नीस कर दी गई है और ये सभी टेस्ट विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा होंगे। आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के सभी मैच दिन में और लाल गेंद से खेले जाएंगे इसलिए भारत अभी गुलाबी गेंद से टेस्ट मैच नहीं खेल पाएगा। बैठक में आईसीसी के चेयरमैन के चुनाव पर भी चर्चा हुई। यदि चुनाव होते हैं तो तो यह जून की समाप्ति पर वार्षिक सम्मलेन के साथ होंगे और आईसीसी बोर्ड इसकी प्रक्रिया निर्धारित करेगा। इंग्लैंड के जाइल्स क्लार्क इस पद के दावेदार हैं लेकिन निवर्तमान चेयरमैन शशांक मनोहर को भी विस्तार मिल सकता है। यदि मनोहर प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं तो फिर चुनाव की जरूरत नहीं रहेगी। बीसीसीआई के सदस्य मनोहर के फिर चुने जाने का विरोध कर सकते हैं लेकिन मनोहर के पास चुने जाने के लिए पर्याप्त संख्या है। |
लखनऊः राहुल गांधी के अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेना के बीच हुई झड़प में दिए बयान पर देश में सियासी घमासान मच गया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ सहित डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी राहुल गांधी के सेना के जवानों पर दिए गए बयान को अपमानजनक बताया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी का बयान अपमानजनक है और राष्ट्र विरोधी तत्वों को प्रेरित करता है।
सीएम योगी ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और भारतीय सेना का अपमान करने वाला है। हम इसकी निंदा करते हैं। डोकलाम घटना के दौरान हमारे सैनिकों का सम्मान करने के बजाय उनका चरित्र स्पष्ट दिखा। हम चाहते हैं कि कांग्रेस और राहुल गांधी देश के जवानों और लोगों से माफी मांगें और उन्हें देश को बार-बार संकट में डालने की हरकत से बचना चाहिए।
बता दे कि राहुल गांधी ने एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान चीन-भारत के सैनिकों के बीच झड़प के मसले पर मोदी सरकार को घेरा था। राहुल ने कहा था कि चीन के मामले पर सरकार कुछ छिपा रही है। हिंदुस्तान की सरकार सोई हुई है और चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है।
| लखनऊः राहुल गांधी के अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेना के बीच हुई झड़प में दिए बयान पर देश में सियासी घमासान मच गया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ सहित डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी राहुल गांधी के सेना के जवानों पर दिए गए बयान को अपमानजनक बताया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी का बयान अपमानजनक है और राष्ट्र विरोधी तत्वों को प्रेरित करता है। सीएम योगी ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और भारतीय सेना का अपमान करने वाला है। हम इसकी निंदा करते हैं। डोकलाम घटना के दौरान हमारे सैनिकों का सम्मान करने के बजाय उनका चरित्र स्पष्ट दिखा। हम चाहते हैं कि कांग्रेस और राहुल गांधी देश के जवानों और लोगों से माफी मांगें और उन्हें देश को बार-बार संकट में डालने की हरकत से बचना चाहिए। बता दे कि राहुल गांधी ने एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान चीन-भारत के सैनिकों के बीच झड़प के मसले पर मोदी सरकार को घेरा था। राहुल ने कहा था कि चीन के मामले पर सरकार कुछ छिपा रही है। हिंदुस्तान की सरकार सोई हुई है और चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है। |
जिला स्पोटर्स स्टेडियम में जारी पुलिस मार्टियर्स टी 20 क्रिकेट प्रतियोगिता में खेलते खिलाड़ी। स?
कठुआ। शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम कठुआ में 11वीं पुलिस मार्टियर्स टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप का आयोजन जारी है। प्रतियोगिता के चौथे दिन ग्रुप बी के मुकाबलों का आगाज हो गया है। जिसमें पहला मैच डीपीएस हिमाचल और जीएसआई टाइगर श्रीनगर के बीच खेला गया। जिसमें जीएसआई टाइगर श्रीनगर ने जीत हासिल कर ली है। जबकि दूसरा मैच केकेआर मढ़ीन क्रिकेट क्लब और एलबी शास्त्री क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। जिसमें एलबी शास्त्री की टीम ने जीत हासिल की।
टूर्नामेंट के चौथे दिन सुबह के सत्र में पहला मैच डीपीएस हिमाचल और जीएसआई टाइगर श्रीनगर के बीच खेला गया। जिसमें टास जीत कर पहले बल्लेबाजी करने उतरी डीपीएस हिमाचल की टीम ने 20 ओवर में 09 विकेट के नुकसान पर मात्र 93 रन बनाए। छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए जीएसआई टाइगर श्रीनगर ने वैभव की 24 गेंदों में 08 चौकों की मदद से 39 रनों की पारी की बदौलत आसानी से 10. 1 ओवर में 02 विकेट के नुकसान पर 84 रन बनाते हुए मैच आठ विकेटों से अपने नाम कर लिया। टीम के शीर्ष स्कोरर वैभव को उनकी 24 गेंदों में 39 रनों की शानदार पारी के लिए मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। जबकि दूसरा मैच केकेआर मढ़ीन क्रिकेट क्लब और एलबी शास्त्री क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। टास जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी केकेआर मढ़ीन क्रिकेट क्लब की टीम ने 20 ओवर में 09 विकेट के नुकसान पर 133 रन बनाए। 134 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एलबी शास्त्री ने 19 ओवर में 07 विकेट के नुकसान पर आसानी से दिए गए लक्ष्य को प्राप्त कर लिया और मढीन की टीम को तीन विकेट से मात दी। जिसमें शीर्ष स्कोरर तेजस दहिया रहे जिन्होंने 45 गेंदों में 02 छक्कों और 05 चौकों की मदद से 56 रन बनाए और अर्जुन ने 24 गेंदों में 01 रन बनाकर 29 रन बनाए। तेजस दहिया को उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
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| जिला स्पोटर्स स्टेडियम में जारी पुलिस मार्टियर्स टी बीस क्रिकेट प्रतियोगिता में खेलते खिलाड़ी। स? कठुआ। शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम कठुआ में ग्यारहवीं पुलिस मार्टियर्स टी-बीस क्रिकेट चैंपियनशिप का आयोजन जारी है। प्रतियोगिता के चौथे दिन ग्रुप बी के मुकाबलों का आगाज हो गया है। जिसमें पहला मैच डीपीएस हिमाचल और जीएसआई टाइगर श्रीनगर के बीच खेला गया। जिसमें जीएसआई टाइगर श्रीनगर ने जीत हासिल कर ली है। जबकि दूसरा मैच केकेआर मढ़ीन क्रिकेट क्लब और एलबी शास्त्री क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। जिसमें एलबी शास्त्री की टीम ने जीत हासिल की। टूर्नामेंट के चौथे दिन सुबह के सत्र में पहला मैच डीपीएस हिमाचल और जीएसआई टाइगर श्रीनगर के बीच खेला गया। जिसमें टास जीत कर पहले बल्लेबाजी करने उतरी डीपीएस हिमाचल की टीम ने बीस ओवर में नौ विकेट के नुकसान पर मात्र तिरानवे रन बनाए। छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए जीएसआई टाइगर श्रीनगर ने वैभव की चौबीस गेंदों में आठ चौकों की मदद से उनतालीस रनों की पारी की बदौलत आसानी से दस. एक ओवर में दो विकेट के नुकसान पर चौरासी रन बनाते हुए मैच आठ विकेटों से अपने नाम कर लिया। टीम के शीर्ष स्कोरर वैभव को उनकी चौबीस गेंदों में उनतालीस रनों की शानदार पारी के लिए मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। जबकि दूसरा मैच केकेआर मढ़ीन क्रिकेट क्लब और एलबी शास्त्री क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। टास जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी केकेआर मढ़ीन क्रिकेट क्लब की टीम ने बीस ओवर में नौ विकेट के नुकसान पर एक सौ तैंतीस रन बनाए। एक सौ चौंतीस रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एलबी शास्त्री ने उन्नीस ओवर में सात विकेट के नुकसान पर आसानी से दिए गए लक्ष्य को प्राप्त कर लिया और मढीन की टीम को तीन विकेट से मात दी। जिसमें शीर्ष स्कोरर तेजस दहिया रहे जिन्होंने पैंतालीस गेंदों में दो छक्कों और पाँच चौकों की मदद से छप्पन रन बनाए और अर्जुन ने चौबीस गेंदों में एक रन बनाकर उनतीस रन बनाए। तेजस दहिया को उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
आप दिल्ली में भी अफगानी खानपान का स्वाद ले सकते हैं। यहां आपको अफगानी जलेबी ही नहीं बल्कि अफगानी आलू पराठा भी मिल जाएगा। बस इसके लिए आपको दिल्ली की सैर करने की जरूरत है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो वीकेंड में दिल्ली में अफगानी खाने का स्वाद ले सकते हैं। आपको बता दें कि दिल्ली के लाजपत नगर में हजारों की संख्या में अफगानी नागरिक रहते हैं। यहां आपको अफगानिस्तान के स्वाद की कई दुकानें मिलेंगी। आइए जानते हैं कि आप कहां कौन-से अफगानी खाने का मजा ले सकते हैं।
आप दिल्ली में अफगानी बर्गर का स्वाद ले सकते हैं। विनोभा पुरी गली में अफगानी बर्गर की कई दुकानें हैं। यहां आपको अफगानी बर्गर खाने को मिलेगा। इस बर्गर में चिकन, फ्राई आलू और सॉसेस रहती हैं। यह बर्गर अफगानी रोटी से वार्प रहता है। अफगानी बर्गर आपको 60 रुपए में मिल जाएगा। आप इसका स्वाद जरूर चखें।
जलेबी भारतीयों की फेवरेट होती है। कोई भी आयोजन क्यों न हो जलेबी जरूर बनती है। लेकिन क्या आपने कभी अफगानी जलेबी खाई है। आफ अगर अफगानी जलेबी का स्वाद लेना चाहते हैं तो आपको लाजपत नगर की सैर करनी पड़ेगी। यहां आपको अफगानी जलेबी मिल जाएगी। इसके लिए आपको करीब 100 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। अफगानी जलेबी का स्वाद भारतीय जलेबी से एकदम अलग है।
अफगानी आलू पराठा भी आपको लाजपत नगर में मिलेगा। इसे बोलनी कहते हैं। अफगानी आलू पराठा आपको 20 रुपए में मिल जाएगा। यह नॉर्मल आलू पराठा की तरह होता है। इसमें कुछ चीजें आलू पराठें सेअलग होती हैं।
अफगानी रोटी का स्वाद लेना है तो आपको लाजपत नगर जाना होगा। अफगानी रोटी खिमरी रोटी की तरह होती है। अफगानी रोटी मीठे ब्रेड की होती है। यह आपको लाजपत नगर में 20 रुपए में मिलेगी।
| आप दिल्ली में भी अफगानी खानपान का स्वाद ले सकते हैं। यहां आपको अफगानी जलेबी ही नहीं बल्कि अफगानी आलू पराठा भी मिल जाएगा। बस इसके लिए आपको दिल्ली की सैर करने की जरूरत है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो वीकेंड में दिल्ली में अफगानी खाने का स्वाद ले सकते हैं। आपको बता दें कि दिल्ली के लाजपत नगर में हजारों की संख्या में अफगानी नागरिक रहते हैं। यहां आपको अफगानिस्तान के स्वाद की कई दुकानें मिलेंगी। आइए जानते हैं कि आप कहां कौन-से अफगानी खाने का मजा ले सकते हैं। आप दिल्ली में अफगानी बर्गर का स्वाद ले सकते हैं। विनोभा पुरी गली में अफगानी बर्गर की कई दुकानें हैं। यहां आपको अफगानी बर्गर खाने को मिलेगा। इस बर्गर में चिकन, फ्राई आलू और सॉसेस रहती हैं। यह बर्गर अफगानी रोटी से वार्प रहता है। अफगानी बर्गर आपको साठ रुपयापए में मिल जाएगा। आप इसका स्वाद जरूर चखें। जलेबी भारतीयों की फेवरेट होती है। कोई भी आयोजन क्यों न हो जलेबी जरूर बनती है। लेकिन क्या आपने कभी अफगानी जलेबी खाई है। आफ अगर अफगानी जलेबी का स्वाद लेना चाहते हैं तो आपको लाजपत नगर की सैर करनी पड़ेगी। यहां आपको अफगानी जलेबी मिल जाएगी। इसके लिए आपको करीब एक सौ रुपयापए खर्च करने पड़ेंगे। अफगानी जलेबी का स्वाद भारतीय जलेबी से एकदम अलग है। अफगानी आलू पराठा भी आपको लाजपत नगर में मिलेगा। इसे बोलनी कहते हैं। अफगानी आलू पराठा आपको बीस रुपयापए में मिल जाएगा। यह नॉर्मल आलू पराठा की तरह होता है। इसमें कुछ चीजें आलू पराठें सेअलग होती हैं। अफगानी रोटी का स्वाद लेना है तो आपको लाजपत नगर जाना होगा। अफगानी रोटी खिमरी रोटी की तरह होती है। अफगानी रोटी मीठे ब्रेड की होती है। यह आपको लाजपत नगर में बीस रुपयापए में मिलेगी। |
भिंड। Bhind News आपने गलती से सिक्का, पिन आदि गलती से निगल लेने की खबरें तो बहुत सुनी होंगी। पर इस बात मामला कुछ अलग है इस बार एक लड़की ने एक कीपैड फोन ही निगल लिया। वो भी कोई भूलवश नहीं बल्कि जानबूझ कर। आपको बता दें मामला भिंड से आया है। जहां एक भाई - बहन के झगड़े में बहन इतनी गुस्सा गई। कि उसमें हाथ में लिया मोबाइल ही निगल लिया।
दरअसल गुस्से में आई लड़की ने हाथ में लिए की पैड फोन को निगल लिया। इसके बाद जब लड़की को पेट में असहनीय दर्द होने लगा। तो उसके बाद इस मामले की जानकारी परिवार वालों को दी गई। जिसके बाद उसे को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया है। उसके पेट से फोन को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी सर्जरी की गई है। इस घटना से परिवार के लोग हैरान हैं। अस्पताल पहुंचने पर डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ प्रशांत पिपरिया और डॉ नवीन कुशवाहा के नेतृत्व में कुशल डॉक्टरों की टीम हरकत में आई।
मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार ये बड़ी बात है कि हमें कभी भी माइंड को फोकस करना सिखाया ही नहीं जाता। इस वजह से हम अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। जरूरत है कि घर परिवार में इमोशन को कंट्रोल करने पर बात की जाए।
| भिंड। Bhind News आपने गलती से सिक्का, पिन आदि गलती से निगल लेने की खबरें तो बहुत सुनी होंगी। पर इस बात मामला कुछ अलग है इस बार एक लड़की ने एक कीपैड फोन ही निगल लिया। वो भी कोई भूलवश नहीं बल्कि जानबूझ कर। आपको बता दें मामला भिंड से आया है। जहां एक भाई - बहन के झगड़े में बहन इतनी गुस्सा गई। कि उसमें हाथ में लिया मोबाइल ही निगल लिया। दरअसल गुस्से में आई लड़की ने हाथ में लिए की पैड फोन को निगल लिया। इसके बाद जब लड़की को पेट में असहनीय दर्द होने लगा। तो उसके बाद इस मामले की जानकारी परिवार वालों को दी गई। जिसके बाद उसे को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया है। उसके पेट से फोन को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी सर्जरी की गई है। इस घटना से परिवार के लोग हैरान हैं। अस्पताल पहुंचने पर डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ प्रशांत पिपरिया और डॉ नवीन कुशवाहा के नेतृत्व में कुशल डॉक्टरों की टीम हरकत में आई। मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार ये बड़ी बात है कि हमें कभी भी माइंड को फोकस करना सिखाया ही नहीं जाता। इस वजह से हम अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। जरूरत है कि घर परिवार में इमोशन को कंट्रोल करने पर बात की जाए। |
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मेरी सरकार के समय भी सीडी सामने आई थीं लेकिन मैं नहीं चाहता की मप्र बदनाम हो और मध्य प्रदेश की छवि देश और दुनिया के सामने खराब हो, इसलिए पहले उनकी जांच का निर्णय लिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के पास सीडी होने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैंने भी सीडी देखी हैं, पहले जांच कराएंगे, इसके बाद अगला कदम उठाएंगे। सतना पहुंचे कमलनाथ मीडिया से बात कर रहे थे।
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मेरी सरकार के समय भी सीडी सामने आई थीं लेकिन मैं नहीं चाहता की मप्र बदनाम हो और मध्य प्रदेश की छवि देश और दुनिया के सामने खराब हो, इसलिए पहले उनकी जांच का निर्णय लिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के पास सीडी होने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैंने भी सीडी देखी हैं, पहले जांच कराएंगे, इसके बाद अगला कदम उठाएंगे। सतना पहुंचे कमलनाथ मीडिया से बात कर रहे थे।
कमलनाथ ने कहा कि सतना विंध्य का द्वार माना जाता है ,सतना का इतिहास कई साल पुराना है सतना हिंदू धर्म से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है। रामायण काल में भगवान राम का आगमन चित्रकूट में हुआ था। हमने राम गमन पथ की शुरुआत की थी। हमारी सरकार ने राम गमन पथ के लिए 22 करोड़ रुपए आवंटित किए थे । मुझे दुख है यह 22 करोड़ रुपए कहां गए, इसका कोई हिसाब किताब वर्तमान सरकार के पास नहीं है।
कमलनाथ ने कहा कि आज सुबह ही मैंने प्रमुख अखबार की हेडलाइन में पड़ा कि शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि भाषण से इन्वेस्टमेंट नहीं आता, मतलब उन्हें आज 18 वर्ष बाद यह पता चला कि भाषण से इन्वेस्टमेंट या निवेश नहीं आता है। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं कि मुह चलाने में और सरकार चलाने में बहुत फर्क होता है।
कमलनाथ ने कहा कि हमारा देश एक महान देश है। विश्व में ऐसा कोई देश नहीं जहां पर इतनी जातियां और इतने धर्म एक साथ सामंजस्य के साथ रहते हों। इसलिए हमारी संस्कृति जोड़ने की संस्कृति है और मैं भी सभी जातियों के सम्मेलनों में जाता हूं और सभी धर्म और जातियों को अपना मानता हूं।
| मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मेरी सरकार के समय भी सीडी सामने आई थीं लेकिन मैं नहीं चाहता की मप्र बदनाम हो और मध्य प्रदेश की छवि देश और दुनिया के सामने खराब हो, इसलिए पहले उनकी जांच का निर्णय लिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के पास सीडी होने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैंने भी सीडी देखी हैं, पहले जांच कराएंगे, इसके बाद अगला कदम उठाएंगे। सतना पहुंचे कमलनाथ मीडिया से बात कर रहे थे। भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मेरी सरकार के समय भी सीडी सामने आई थीं लेकिन मैं नहीं चाहता की मप्र बदनाम हो और मध्य प्रदेश की छवि देश और दुनिया के सामने खराब हो, इसलिए पहले उनकी जांच का निर्णय लिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के पास सीडी होने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैंने भी सीडी देखी हैं, पहले जांच कराएंगे, इसके बाद अगला कदम उठाएंगे। सतना पहुंचे कमलनाथ मीडिया से बात कर रहे थे। कमलनाथ ने कहा कि सतना विंध्य का द्वार माना जाता है ,सतना का इतिहास कई साल पुराना है सतना हिंदू धर्म से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है। रामायण काल में भगवान राम का आगमन चित्रकूट में हुआ था। हमने राम गमन पथ की शुरुआत की थी। हमारी सरकार ने राम गमन पथ के लिए बाईस करोड़ रुपए आवंटित किए थे । मुझे दुख है यह बाईस करोड़ रुपए कहां गए, इसका कोई हिसाब किताब वर्तमान सरकार के पास नहीं है। कमलनाथ ने कहा कि आज सुबह ही मैंने प्रमुख अखबार की हेडलाइन में पड़ा कि शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि भाषण से इन्वेस्टमेंट नहीं आता, मतलब उन्हें आज अट्ठारह वर्ष बाद यह पता चला कि भाषण से इन्वेस्टमेंट या निवेश नहीं आता है। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं कि मुह चलाने में और सरकार चलाने में बहुत फर्क होता है। कमलनाथ ने कहा कि हमारा देश एक महान देश है। विश्व में ऐसा कोई देश नहीं जहां पर इतनी जातियां और इतने धर्म एक साथ सामंजस्य के साथ रहते हों। इसलिए हमारी संस्कृति जोड़ने की संस्कृति है और मैं भी सभी जातियों के सम्मेलनों में जाता हूं और सभी धर्म और जातियों को अपना मानता हूं। |
CG BREAKING : गार्डन के झूले में फंदे से लटकी मिली युवक की लाश, हत्या या आत्महत्या?
धमतरीः जिले में आज तड़के सुबह एक युवक का शव संदिग्ध हालत में गार्डन में झूले से लटका हुआ मिला। सुबह लोग morning walk के लिए पहुंचे तो पता चला। जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों ने सुबह अज्ञात युवक की फांसी के फंदे पर लटकी लाश देखी तो तुरंत कोतवाली पुलिस को सुचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर घटना स्थल पहुंची पुलिस ने शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। अब तक युवक की पहचान नहीं हो सकी है। कोतवाली पुलिस युवक की शिनाख्ती की कोशिश कर रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, मामला धमतरी के नेहरू गार्डन का है। जहां बताया जा रहा है कि रोज की तरह लोग शनिवार को भी morning walk के लिए वहां पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि एक युवक का शव झूले में गमछे के सहारे फंदे से लटक रहा है। इस पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। तलाशी के दौरान युवक के पास से कोई ऐसा दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।
| CG BREAKING : गार्डन के झूले में फंदे से लटकी मिली युवक की लाश, हत्या या आत्महत्या? धमतरीः जिले में आज तड़के सुबह एक युवक का शव संदिग्ध हालत में गार्डन में झूले से लटका हुआ मिला। सुबह लोग morning walk के लिए पहुंचे तो पता चला। जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों ने सुबह अज्ञात युवक की फांसी के फंदे पर लटकी लाश देखी तो तुरंत कोतवाली पुलिस को सुचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर घटना स्थल पहुंची पुलिस ने शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। अब तक युवक की पहचान नहीं हो सकी है। कोतवाली पुलिस युवक की शिनाख्ती की कोशिश कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार, मामला धमतरी के नेहरू गार्डन का है। जहां बताया जा रहा है कि रोज की तरह लोग शनिवार को भी morning walk के लिए वहां पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि एक युवक का शव झूले में गमछे के सहारे फंदे से लटक रहा है। इस पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। तलाशी के दौरान युवक के पास से कोई ऐसा दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके। |
Salman Khan planning to build Hotel: टाइगर 3 एक्टर सलमान खान अब होटल बिजनेस में उतर गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बांद्रा में कार्टर रोड पर होटल बनाने का प्लान कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सलमान खान ने बांद्रा में कार्टर रोड पर एक प्रॉपर्टी खरीदी थी। उनका पहले वहां घर बनाने का मन था लेकिन अब सलमान खान ने प्लान चेंज कर लिया है। E Times की रिपोर्ट की मुताबिक भाईजान अब वहां 19 माले का होटल बनाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक बीएमसी ने सलमान खान को बिल्डिंग बनाने की इजाजत भी दे दी है। खास बात तो यह है कि इस होटल से समंदर का नजारा दिखेगा। सलमान खान एंड फैमिली की ओर से आर्किटेक्ट को जो दिया दिया गया है कि उसके मुताबिक यह इमारत 69.90 की मोटर की होगी। बिल्डिंग के प्लान में होटल के लिए सातवीं से 19 वीं मंजिल रखी गई है।
बताते चलें कि सलमान खान की फिल्म किसी का भाई किसी की जान के रिलीज होने के बाद सभी को अब टाइगर 3 का बेसब्री से इंताजर हैं। इस मूवी सलमान के साथ कटरीना कैफ और इमरान हाशमी नजर आएंगे। बताया जा रहा है कि फिल्म में शाहरुख खान भी कैमियो करने वाले हैं। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि सलमान खान की टाइगर बॉक्स ऑफिस पर कैसा परफॉर्म करती है।
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| Salman Khan planning to build Hotel: टाइगर तीन एक्टर सलमान खान अब होटल बिजनेस में उतर गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बांद्रा में कार्टर रोड पर होटल बनाने का प्लान कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सलमान खान ने बांद्रा में कार्टर रोड पर एक प्रॉपर्टी खरीदी थी। उनका पहले वहां घर बनाने का मन था लेकिन अब सलमान खान ने प्लान चेंज कर लिया है। E Times की रिपोर्ट की मुताबिक भाईजान अब वहां उन्नीस माले का होटल बनाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक बीएमसी ने सलमान खान को बिल्डिंग बनाने की इजाजत भी दे दी है। खास बात तो यह है कि इस होटल से समंदर का नजारा दिखेगा। सलमान खान एंड फैमिली की ओर से आर्किटेक्ट को जो दिया दिया गया है कि उसके मुताबिक यह इमारत उनहत्तर.नब्बे की मोटर की होगी। बिल्डिंग के प्लान में होटल के लिए सातवीं से उन्नीस वीं मंजिल रखी गई है। बताते चलें कि सलमान खान की फिल्म किसी का भाई किसी की जान के रिलीज होने के बाद सभी को अब टाइगर तीन का बेसब्री से इंताजर हैं। इस मूवी सलमान के साथ कटरीना कैफ और इमरान हाशमी नजर आएंगे। बताया जा रहा है कि फिल्म में शाहरुख खान भी कैमियो करने वाले हैं। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि सलमान खान की टाइगर बॉक्स ऑफिस पर कैसा परफॉर्म करती है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
श्रम विभाग
अर्थशास्त्र समाजमें होनेवाली बातोंका वर्णन और प्रभावशाली वर्ग के हितार्थ उनका समर्थन कर देनाभर अपना कर्तव्य समझता है । इसलिए उसका फैसला उद्योग-धंधों में श्रम-विभागके पक्ष में है। पूंजीपतियों के लिए लाभदायक देखकर उसने इसे सिद्धांतका रूप देदिया है ।
आधुनिक अर्थशास्त्रके जन्मदाता एडम स्मिथने गांवके एक लुहार की मिसाल दी है। अगर उसे कीलें बनानेका अभ्यास नहीं है तो वह बड़ी मेहनतसे दिन भरमें मुश्किलसे दो या तीन सौ कीलें बना पायेगा, फिर भी वे अच्छी न होंगी। पर यदि उस लुहारने जन्मभर केवल कीलें ही बनायी हों तो वह एक दिनमें दो हजार कीर्ले बना देगा। इससे उन्होंने यह नतीजा निकाला है - "श्रमका विभाग करो, विशेषीकरण ( Specialisation ) करो, विशेषीकरणकी ओर बढ़ते जाओ। हमारे पास ऐसे लुहार हों जिन्हें कीलोंके सिरे या नोकें ही बनाना भाता हो। इससे हम ज्यादा माल पैदा करेंगे और धनी हो जायंगे ।"
सोचा कि जिस आदमीको जिंदगीभर केवल उसे अपने कार्य में दिलचस्पी न रह जायगी, जब वह केवल यही काम जानता होगा तब उसकी जीविका सोलहो आने कारखानेदारकी दयापर अवलंबित होगी, वह बारहमें चार महीने बेकार रहेगा, और जब कोई उम्मेदवार उसकी जगह काम करनेको मिल जायगा तब उसकी मजदूरी बहुत कम हो जायगी। इन सब बातोंपर विचार किये बिना ही वह हर्षातिरेकसे चिल्ला उठे - "श्रमविभाग जुग-जुग जिये ! इसी सोनेकी खानसे राष्ट्र समृद्ध होगा!" और इस नारेमें सबने उसका साथ दिया। | श्रम विभाग अर्थशास्त्र समाजमें होनेवाली बातोंका वर्णन और प्रभावशाली वर्ग के हितार्थ उनका समर्थन कर देनाभर अपना कर्तव्य समझता है । इसलिए उसका फैसला उद्योग-धंधों में श्रम-विभागके पक्ष में है। पूंजीपतियों के लिए लाभदायक देखकर उसने इसे सिद्धांतका रूप देदिया है । आधुनिक अर्थशास्त्रके जन्मदाता एडम स्मिथने गांवके एक लुहार की मिसाल दी है। अगर उसे कीलें बनानेका अभ्यास नहीं है तो वह बड़ी मेहनतसे दिन भरमें मुश्किलसे दो या तीन सौ कीलें बना पायेगा, फिर भी वे अच्छी न होंगी। पर यदि उस लुहारने जन्मभर केवल कीलें ही बनायी हों तो वह एक दिनमें दो हजार कीर्ले बना देगा। इससे उन्होंने यह नतीजा निकाला है - "श्रमका विभाग करो, विशेषीकरण करो, विशेषीकरणकी ओर बढ़ते जाओ। हमारे पास ऐसे लुहार हों जिन्हें कीलोंके सिरे या नोकें ही बनाना भाता हो। इससे हम ज्यादा माल पैदा करेंगे और धनी हो जायंगे ।" सोचा कि जिस आदमीको जिंदगीभर केवल उसे अपने कार्य में दिलचस्पी न रह जायगी, जब वह केवल यही काम जानता होगा तब उसकी जीविका सोलहो आने कारखानेदारकी दयापर अवलंबित होगी, वह बारहमें चार महीने बेकार रहेगा, और जब कोई उम्मेदवार उसकी जगह काम करनेको मिल जायगा तब उसकी मजदूरी बहुत कम हो जायगी। इन सब बातोंपर विचार किये बिना ही वह हर्षातिरेकसे चिल्ला उठे - "श्रमविभाग जुग-जुग जिये ! इसी सोनेकी खानसे राष्ट्र समृद्ध होगा!" और इस नारेमें सबने उसका साथ दिया। |
7 संबंधोंः धर्मशाला, शिव, श्रावस्ती, हिमालय, जैन धर्म, विष्णु, कुणाल।
स्वर्णकारों की धर्मधाला (रेलवे मार्ग, हरिद्वार) उन घरों या स्थानों को धर्मशाला कहते हैं जहाँ तीर्थयात्रियों को निःशुल्क या अत्यन्त कम शुल्क पर ठहरने की व्यवस्था होती है। प्राचीन काल से ये भारत में प्रचलित हैं। श्रेणीःहिन्दू धर्म श्रेणीःभारतीय संस्कृति.
शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ,गंगाधार के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है। भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। राम, रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है। शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें महादेव कहा जाता है। .
भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश प्रांत के गोंडा-बहराइच जिलों की सीमा पर यह प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थान है। गोंडा-बलरामपुर से १२ मील पश्चिम में आज का सहेत-महेत गाँव ही श्रावस्ती है। प्राचीन काल में यह कौशल देश की दूसरी राजधानी थी। भगवान राम के पुत्र लव ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। श्रावस्ती बौद्ध व जैन दोनों का तीर्थ स्थान है। तथागत दीर्घ काल तक श्रावस्ती में रहे थे। यहाँ के श्रेष्ठी अनाथपिण्डिक असंख्य स्वर्ण मुद्राएँ व्यय करके भगवान बुद्ध के लिए जेतवन बिहार बनवाया था। अब यहाँ बौद्ध धर्मशाला, मठ और मन्दिर हैं। .
हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग 2400 कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 7200 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान 650 लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान 450 लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है (गीताः10.25)। .
जैन ध्वज जैन धर्म भारत के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। 'जैन धर्म' का अर्थ है - 'जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म'। जो 'जिन' के अनुयायी हों उन्हें 'जैन' कहते हैं। 'जिन' शब्द बना है 'जि' धातु से। 'जि' माने - जीतना। 'जिन' माने जीतने वाला। जिन्होंने अपने मन को जीत लिया, अपनी वाणी को जीत लिया और अपनी काया को जीत लिया और विशिष्ट ज्ञान को पाकर सर्वज्ञ या पूर्णज्ञान प्राप्त किया उन आप्त पुरुष को जिनेश्वर या 'जिन' कहा जाता है'। जैन धर्म अर्थात 'जिन' भगवान् का धर्म। अहिंसा जैन धर्म का मूल सिद्धान्त है। जैन दर्शन में सृष्टिकर्ता कण कण स्वतंत्र है इस सॄष्टि का या किसी जीव का कोई कर्ता धर्ता नही है।सभी जीव अपने अपने कर्मों का फल भोगते है।जैन धर्म के ईश्वर कर्ता नही भोगता नही वो तो जो है सो है।जैन धर्म मे ईश्वरसृष्टिकर्ता इश्वर को स्थान नहीं दिया गया है। जैन ग्रंथों के अनुसार इस काल के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आदिनाथ द्वारा जैन धर्म का प्रादुर्भाव हुआ था। जैन धर्म की अत्यंत प्राचीनता करने वाले अनेक उल्लेख अ-जैन साहित्य और विशेषकर वैदिक साहित्य में प्रचुर मात्रा में हैं। .
वैदिक समय से ही विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं। हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा और शिव को माना जाता है। ब्रह्मा को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, वहीं शिव को संहारक माना गया है। मूलतः विष्णु और शिव तथा ब्रह्मा भी एक ही हैं यह मान्यता भी बहुशः स्वीकृत रही है। न्याय को प्रश्रय, अन्याय के विनाश तथा जीव (मानव) को परिस्थिति के अनुसार उचित मार्ग-ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों में अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप में विष्णु मान्य रहे हैं। पुराणानुसार विष्णु की पत्नी लक्ष्मी हैं। कामदेव विष्णु जी का पुत्र था। विष्णु का निवास क्षीर सागर है। उनका शयन शेषनाग के ऊपर है। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित हैं। वह अपने नीचे वाले बाएँ हाथ में पद्म (कमल), अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा (कौमोदकी),ऊपर वाले बाएँ हाथ में शंख (पाञ्चजन्य) और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र(सुदर्शन) धारण करते हैं। शेष शय्या पर आसीन विष्णु, लक्ष्मी व ब्रह्मा के साथ, छंब पहाड़ी शैली के एक लघुचित्र में। .
क़ुणाल (तीसरी शताब्दी ई. पू.) सम्राट अशोक तथा रानी पद्मावती के सुपुत्र थे। दिव्यावदान के अशोकावदान और कुणालावदान में कुणाल के जीवन से संबंधित अनेक कहानियां हैं। सर्वप्रसिद्ध कथा है कि अशोक की एक रानी तिष्यरक्षिता (पालि साहित्य की तिस्सरक्खिता) थी, जो सम्राट् से अवस्था में बहुत ही कम और स्वभाव से अत्यंत कामातुर थी। कुणाल की सुंदर आँखों पर मुग्ध होकर उसने उससे प्रणप्रस्ताव किया। उसके पुत्रकक्ष कुणाल के लिए उस प्रस्ताव को ठुकरा देना अत्यंत स्वाभाविक था। पर तिष्यरक्षिता इसे भुला न सकी। जब एक बार अशोक बीमार पड़ा तब तिष्यरक्षिता ने उसकी भरपूर सेवा करके मुँहमागा वर प्राप्त करने का वचन उससे ले लिया। तक्षशिला में विद्रोह होने पर जब कुणाल उसे दबाने के लिए भेजा गया तब तिष्यरक्षियता ने अपने वरण में सम्राट, अशोक की राजमुद्रा प्राप्तकर तक्षशिला के मंत्रियों को कुणाल की आँखें निकाल लेने तथा उसे मार डालने की मुद्रांकित आज्ञा लिख भेजी। शक्तिशाली किंतु अनिच्छुक मंत्रियों ने जनप्रिय कुणाल की आँखें तो निकलवा ली परंतु उसके प्राण छोड़ दिए। अशोक को जब इसका पता चला तो उसने तिष्यरक्षिता को दंडस्वरूप जीवित जला देने की आज्ञा दी। किंतु कुछ विद्वान् इस कथा को ऐतिहासिक नहीं मानते। प्रसिद्ध विद्वान् प्रजीलुस्की ने कुणाल सूत्र के चीनी रूपांतर को प्रस्तुत किया है। इस सूत्र के अनुसार तक्षशिला में कोई विद्रोह ही नहीं हुआ था। वस्तुतः कुणाल वहाँ की जनता की माँग पर अशोक द्वारा एक स्वतंत्र राजा के रूप में नियुक्त किया गया था। संभव है, आगे चलकर वहाँ के गांधार प्रदेश में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना हो गई हो। कुणाल का संबंध कश्मीर और पामीरवर्ती प्रदेशों से भी रहा है जो अनेक प्रमाणों से सिद्ध है। कुछ पुराणों (वायु, बह्मांड) में कुणाल को अशोक का उत्तराधिकारी भी बताया गया है। .
| सात संबंधोंः धर्मशाला, शिव, श्रावस्ती, हिमालय, जैन धर्म, विष्णु, कुणाल। स्वर्णकारों की धर्मधाला उन घरों या स्थानों को धर्मशाला कहते हैं जहाँ तीर्थयात्रियों को निःशुल्क या अत्यन्त कम शुल्क पर ठहरने की व्यवस्था होती है। प्राचीन काल से ये भारत में प्रचलित हैं। श्रेणीःहिन्दू धर्म श्रेणीःभारतीय संस्कृति. शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ,गंगाधार के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है। भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। राम, रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है। शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें महादेव कहा जाता है। . भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश प्रांत के गोंडा-बहराइच जिलों की सीमा पर यह प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थान है। गोंडा-बलरामपुर से बारह मील पश्चिम में आज का सहेत-महेत गाँव ही श्रावस्ती है। प्राचीन काल में यह कौशल देश की दूसरी राजधानी थी। भगवान राम के पुत्र लव ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। श्रावस्ती बौद्ध व जैन दोनों का तीर्थ स्थान है। तथागत दीर्घ काल तक श्रावस्ती में रहे थे। यहाँ के श्रेष्ठी अनाथपिण्डिक असंख्य स्वर्ण मुद्राएँ व्यय करके भगवान बुद्ध के लिए जेतवन बिहार बनवाया था। अब यहाँ बौद्ध धर्मशाला, मठ और मन्दिर हैं। . हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग दो हज़ार चार सौ कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के एक सौ सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में एक सौ से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो सात हज़ार दो सौ मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में पंद्रह हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो बारह हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। बहत्तर किलोग्राममीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान छः सौ पचास लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान चार सौ पचास लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है । . जैन ध्वज जैन धर्म भारत के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। 'जैन धर्म' का अर्थ है - 'जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म'। जो 'जिन' के अनुयायी हों उन्हें 'जैन' कहते हैं। 'जिन' शब्द बना है 'जि' धातु से। 'जि' माने - जीतना। 'जिन' माने जीतने वाला। जिन्होंने अपने मन को जीत लिया, अपनी वाणी को जीत लिया और अपनी काया को जीत लिया और विशिष्ट ज्ञान को पाकर सर्वज्ञ या पूर्णज्ञान प्राप्त किया उन आप्त पुरुष को जिनेश्वर या 'जिन' कहा जाता है'। जैन धर्म अर्थात 'जिन' भगवान् का धर्म। अहिंसा जैन धर्म का मूल सिद्धान्त है। जैन दर्शन में सृष्टिकर्ता कण कण स्वतंत्र है इस सॄष्टि का या किसी जीव का कोई कर्ता धर्ता नही है।सभी जीव अपने अपने कर्मों का फल भोगते है।जैन धर्म के ईश्वर कर्ता नही भोगता नही वो तो जो है सो है।जैन धर्म मे ईश्वरसृष्टिकर्ता इश्वर को स्थान नहीं दिया गया है। जैन ग्रंथों के अनुसार इस काल के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आदिनाथ द्वारा जैन धर्म का प्रादुर्भाव हुआ था। जैन धर्म की अत्यंत प्राचीनता करने वाले अनेक उल्लेख अ-जैन साहित्य और विशेषकर वैदिक साहित्य में प्रचुर मात्रा में हैं। . वैदिक समय से ही विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं। हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा और शिव को माना जाता है। ब्रह्मा को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, वहीं शिव को संहारक माना गया है। मूलतः विष्णु और शिव तथा ब्रह्मा भी एक ही हैं यह मान्यता भी बहुशः स्वीकृत रही है। न्याय को प्रश्रय, अन्याय के विनाश तथा जीव को परिस्थिति के अनुसार उचित मार्ग-ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों में अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप में विष्णु मान्य रहे हैं। पुराणानुसार विष्णु की पत्नी लक्ष्मी हैं। कामदेव विष्णु जी का पुत्र था। विष्णु का निवास क्षीर सागर है। उनका शयन शेषनाग के ऊपर है। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित हैं। वह अपने नीचे वाले बाएँ हाथ में पद्म , अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा ,ऊपर वाले बाएँ हाथ में शंख और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र धारण करते हैं। शेष शय्या पर आसीन विष्णु, लक्ष्मी व ब्रह्मा के साथ, छंब पहाड़ी शैली के एक लघुचित्र में। . क़ुणाल सम्राट अशोक तथा रानी पद्मावती के सुपुत्र थे। दिव्यावदान के अशोकावदान और कुणालावदान में कुणाल के जीवन से संबंधित अनेक कहानियां हैं। सर्वप्रसिद्ध कथा है कि अशोक की एक रानी तिष्यरक्षिता थी, जो सम्राट् से अवस्था में बहुत ही कम और स्वभाव से अत्यंत कामातुर थी। कुणाल की सुंदर आँखों पर मुग्ध होकर उसने उससे प्रणप्रस्ताव किया। उसके पुत्रकक्ष कुणाल के लिए उस प्रस्ताव को ठुकरा देना अत्यंत स्वाभाविक था। पर तिष्यरक्षिता इसे भुला न सकी। जब एक बार अशोक बीमार पड़ा तब तिष्यरक्षिता ने उसकी भरपूर सेवा करके मुँहमागा वर प्राप्त करने का वचन उससे ले लिया। तक्षशिला में विद्रोह होने पर जब कुणाल उसे दबाने के लिए भेजा गया तब तिष्यरक्षियता ने अपने वरण में सम्राट, अशोक की राजमुद्रा प्राप्तकर तक्षशिला के मंत्रियों को कुणाल की आँखें निकाल लेने तथा उसे मार डालने की मुद्रांकित आज्ञा लिख भेजी। शक्तिशाली किंतु अनिच्छुक मंत्रियों ने जनप्रिय कुणाल की आँखें तो निकलवा ली परंतु उसके प्राण छोड़ दिए। अशोक को जब इसका पता चला तो उसने तिष्यरक्षिता को दंडस्वरूप जीवित जला देने की आज्ञा दी। किंतु कुछ विद्वान् इस कथा को ऐतिहासिक नहीं मानते। प्रसिद्ध विद्वान् प्रजीलुस्की ने कुणाल सूत्र के चीनी रूपांतर को प्रस्तुत किया है। इस सूत्र के अनुसार तक्षशिला में कोई विद्रोह ही नहीं हुआ था। वस्तुतः कुणाल वहाँ की जनता की माँग पर अशोक द्वारा एक स्वतंत्र राजा के रूप में नियुक्त किया गया था। संभव है, आगे चलकर वहाँ के गांधार प्रदेश में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना हो गई हो। कुणाल का संबंध कश्मीर और पामीरवर्ती प्रदेशों से भी रहा है जो अनेक प्रमाणों से सिद्ध है। कुछ पुराणों में कुणाल को अशोक का उत्तराधिकारी भी बताया गया है। . |
जम्मू-कश्मीर लगातार आतंकियों के साये से गिरा हुआ है। हाल ही में कश्मीर में आतंकी हमले की साजिश को लेकर बड़ा खुसाला किया है। खुफिया एजेंसियों ने एक बार फिर प्रदेश आतंकी हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है। 5 से 9 अप्रैल के बीच कश्मीर घाटी में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी पाकिस्तान की मदद से बड़ा हमला करने की फ़िराक में है। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान आतंकियों ने हमले के लिए तीन टीमें बनाई हैंइसलिए लोकसभा चुनाव के दौरान आतंकियों ने हमले के लिए तीन टीमें बनाई हैं। इनमें अफगानिस्तान के बम एक्सपर्ट भी शामिल हैं। 11 अप्रैल से पुरे देश में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं, जिसके चलते आंतकी कुछ बड़ा धमाका कर सकते हैं। इसके मद्देनजर सेना और सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश रच रहा है जिसके चलते वो आतंकियों के साथ मिलकर 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले जैसा बड़ा हमला कर सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर कहा कि आतंकी संगठन दिल्ली में बड़ा हमला कर सकते हैं। अलर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में छुपे आतंकी ग्रुप अब जम्मू-कश्मीर के अलावा हाई वैल्यू टारगेट पर हमला करना चाहते हैं।
आपको बता दें कि पिछले दिनों में सुरक्षा एजेंसियों ने जैश के आतंकियों को पकड़ा था। आतंकियों से पूछताछ के आधार पर ही ये अलर्ट जारी किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि देश के नामी और बड़े नेता, रेलवे लाइन, तेल के डिपो, दक्षिणपंथी नेता और एक्टिविस्ट आतंकियों के निशाने पर हैं।
पाकिस्तान आतंकियों की आड़ में रहकर भारत पर हमले साजिश करता रहा है। कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में बीते कई दिनों से अब तक कई मुठभेड़ हो चुके हैं। इसमें सुरक्षा बल कई आतंकियों का सफाया कर चुके हैं।
| जम्मू-कश्मीर लगातार आतंकियों के साये से गिरा हुआ है। हाल ही में कश्मीर में आतंकी हमले की साजिश को लेकर बड़ा खुसाला किया है। खुफिया एजेंसियों ने एक बार फिर प्रदेश आतंकी हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है। पाँच से नौ अप्रैल के बीच कश्मीर घाटी में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी पाकिस्तान की मदद से बड़ा हमला करने की फ़िराक में है। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान आतंकियों ने हमले के लिए तीन टीमें बनाई हैंइसलिए लोकसभा चुनाव के दौरान आतंकियों ने हमले के लिए तीन टीमें बनाई हैं। इनमें अफगानिस्तान के बम एक्सपर्ट भी शामिल हैं। ग्यारह अप्रैल से पुरे देश में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं, जिसके चलते आंतकी कुछ बड़ा धमाका कर सकते हैं। इसके मद्देनजर सेना और सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के दौरान जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश रच रहा है जिसके चलते वो आतंकियों के साथ मिलकर चौदह फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले जैसा बड़ा हमला कर सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर कहा कि आतंकी संगठन दिल्ली में बड़ा हमला कर सकते हैं। अलर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में छुपे आतंकी ग्रुप अब जम्मू-कश्मीर के अलावा हाई वैल्यू टारगेट पर हमला करना चाहते हैं। आपको बता दें कि पिछले दिनों में सुरक्षा एजेंसियों ने जैश के आतंकियों को पकड़ा था। आतंकियों से पूछताछ के आधार पर ही ये अलर्ट जारी किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि देश के नामी और बड़े नेता, रेलवे लाइन, तेल के डिपो, दक्षिणपंथी नेता और एक्टिविस्ट आतंकियों के निशाने पर हैं। पाकिस्तान आतंकियों की आड़ में रहकर भारत पर हमले साजिश करता रहा है। कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में बीते कई दिनों से अब तक कई मुठभेड़ हो चुके हैं। इसमें सुरक्षा बल कई आतंकियों का सफाया कर चुके हैं। |
रीवा। जाने-माने पत्रकार एवं रीवा रियासत वेब पोर्टल के संस्थापक प्रदीप द्विवेदी का 54 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वे फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। जिन्हें बीते दिनों रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार होता न देख डाॅक्टरों ने उन्हें बाहर ले जाने की सलाह दी थी। डाॅक्टरों की सलाह पर परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल भोपाल स्थित चिरायु अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया।
जहां तकरीबन एक हफ्ते से ज्यादा चले इलाज के दौरान सोमवार की सुबह तकरीबन साढ़े 8 बजे उनका निधन हो गया। उनकी कोरोना रिपोर्ट पूरी तरह से निगेटिव थी। उन्हें मुखाग्नि उनके बड़े बेटे पुनीत द्विवेदी आर्यन ने दी हैं। पुनीत द्विवेदी पिता प्रदीप द्विवेदी का अस्थि कलश लेकर मंगलवार की सुबह ग्राम लोही पहुंचेगे।
पत्रकार प्रदीप द्विवेदी जी का जन्म 1 जुलाई 1966 को शहर से सटे ग्राम लोही में हुआ। उनके पिता जी का नाम राममनोहर द्विवेदी एवं मां का नाम कलावती द्विवेदी है। राममनोहर द्विवेदी जी के कुल 5 संताने है। जिसमें तीन बेटियां एवं दो बेटे शामिल हैं। प्रदीप द्विवेदी जी का जन्म राममनोहर द्विवेदी के घर दूसरे बेटे के रूप में हुआ था। प्रदीप द्विवेदी जी ने स्कूली शिक्षा जेल मार्ग स्थित सरास्वती स्कूल से पूरी की। जबकि उन्होंने अपना ग्रेज्युएशन माॅडल साइंस स्कूल से पूरा किया।
प्रदीप द्विवेदी जी मिनी पीएससी क्वालीफाई थे। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में बैन लग जाने के कारण उन्हें वह नौकरी नहीं मिल सकी, जिसके वह असल में हकदार थे। बावजूद इसके उन्होंने जीवन में कभी हार नहीं मानी। वह लेखनी के काफी धनी व्यक्ति थे। कहा जाता है कि प्रदीप द्विवेदी जी की हेड राईटिंग काफी कमाल की थी। उनकी लेखन की शैली को देखकर सहज ही लोग उनकी ओर अकर्षित हो जाते थे। अपनी शानदार लेखन शैली एवं साफ-सुथरी हेड राईटिंग के चलते उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा था।
प्रदीप द्विवेदी ने पत्रकारिता को लगभग 25 साल दिए। इस दौरान उन्होंने कई न्यूज पेपरों में काम किया। जिसमें क्रीर्ति क्रांति, हरिभूमि जैसे न्यूज पेपर शामिल हैं। साल 2012 में उन्होंने अपने न्यूज वेबपोर्टल रीवा रियासत डाॅट काॅम की शुरूआत की। अपनी कड़ी मेहनत एवं अच्छी लेखनी के चलते उन्होंने इस पोर्टल को जल्द ही प्रदेश के टाॅप के पोर्टल शुमार कर दिया। रीवा रियासत वेब पोर्टल में आज डेली मिलियंस में व्यूज आते हैं। यह पोर्टल विंध्य सहित मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली जैसे देश कि कई बड़े शहरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पोर्टल में से एक है।
पत्रकार स्व. प्रदीप द्विवेदी जी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे एवं एक बैटी है। प्रदीप द्विवेदी जी के बड़े बेटे पुनीत द्विवेदी आर्यन हैं। जबकि दूसरे बेटे शशांक द्विवेदी हंैं। दोनों बेटों की शादियां हो चुकी हैं। जबकि बेटी की शादी हाल ही में दिसम्बर माह में होने वाली थी। दोनों बेटे रीवा रियासत वेब पोर्टल का पूरी तरह से संचालन एवं देख-रेख करते हैं।
प्रदीप द्विवेदी जी दो बेटों एवं एक बेटी के पिता थे। दोनों बेटों की उन्होंने बड़े धूमधाम से शादी कर डाली थी। लेकिन बेटी की शादी करने का सपना उनका अधूरा रह गया। उनकी दिली इच्छा थी कि वह अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी की शादी कर डाले। शादी उन्होनें तय भी कर रखी थी। दिसम्बर महीने में शादी की डेट भी फिक्स थी। बेटी की शादी को लेकर पूरी तरह से तैयारियां भी शुरू थी, लेकिन किश्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। हल्के बुखार से शुरू हुई बीमारी फेफड़ों के इंफेक्शन तक जा पहुंची और 30 दिसम्बर की सुबह उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप द्विवेदी के निधन की जानकारी जैसे ही स्थानीय लोगों, समाज सेवियों, राजनीतिक लोगों एवं जनप्रतिनिधियों को लगी सभी उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। पूर्व मंत्री एवं विधायक रीवा राजेन्द्र शुक्ल ने पत्रकार श्री द्विवेदी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रंद्धाजलि आर्पित करते हुए कहा कि हमने बेबाकी से अपनी बात रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को खो दिया है। इसकी भरपाई संभव नहीं है। ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे। संभागीय जनसंपर्क कार्यालय में भी शोक सभा आयोजित कर दिवंगत आत्मा को श्रंद्धाजलि आर्पित की गयी।
पत्रकारिता जगत में अलग मुकाम रखने वाले मिलनसार प्रदीप द्विवेदी के निधन की दुखद समाचार प्राप्त होते ही रीवा जिले में शोक की लहर दौड़ गई। रेवांचल बस स्टैंड व्यापारी संघ परिवार यह खबर सुन गमगीन हो गया है। इस दुख की घड़ी में संघ के संरक्षक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित चंद्र कांत शुक्ला, अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल, उपाध्यक्ष निक्की मोदनवाल, परम लाल गुप्ता, सचिव गौतम इसरानी, कोषाध्यक्ष गोविंद पुरवार प्रिंस सहित अन्य लोगों ने शोक संतृप्त परिवार यह दुख सहने भगवान से शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
| रीवा। जाने-माने पत्रकार एवं रीवा रियासत वेब पोर्टल के संस्थापक प्रदीप द्विवेदी का चौवन वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वे फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। जिन्हें बीते दिनों रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार होता न देख डाॅक्टरों ने उन्हें बाहर ले जाने की सलाह दी थी। डाॅक्टरों की सलाह पर परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल भोपाल स्थित चिरायु अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। जहां तकरीबन एक हफ्ते से ज्यादा चले इलाज के दौरान सोमवार की सुबह तकरीबन साढ़े आठ बजे उनका निधन हो गया। उनकी कोरोना रिपोर्ट पूरी तरह से निगेटिव थी। उन्हें मुखाग्नि उनके बड़े बेटे पुनीत द्विवेदी आर्यन ने दी हैं। पुनीत द्विवेदी पिता प्रदीप द्विवेदी का अस्थि कलश लेकर मंगलवार की सुबह ग्राम लोही पहुंचेगे। पत्रकार प्रदीप द्विवेदी जी का जन्म एक जुलाई एक हज़ार नौ सौ छयासठ को शहर से सटे ग्राम लोही में हुआ। उनके पिता जी का नाम राममनोहर द्विवेदी एवं मां का नाम कलावती द्विवेदी है। राममनोहर द्विवेदी जी के कुल पाँच संताने है। जिसमें तीन बेटियां एवं दो बेटे शामिल हैं। प्रदीप द्विवेदी जी का जन्म राममनोहर द्विवेदी के घर दूसरे बेटे के रूप में हुआ था। प्रदीप द्विवेदी जी ने स्कूली शिक्षा जेल मार्ग स्थित सरास्वती स्कूल से पूरी की। जबकि उन्होंने अपना ग्रेज्युएशन माॅडल साइंस स्कूल से पूरा किया। प्रदीप द्विवेदी जी मिनी पीएससी क्वालीफाई थे। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में बैन लग जाने के कारण उन्हें वह नौकरी नहीं मिल सकी, जिसके वह असल में हकदार थे। बावजूद इसके उन्होंने जीवन में कभी हार नहीं मानी। वह लेखनी के काफी धनी व्यक्ति थे। कहा जाता है कि प्रदीप द्विवेदी जी की हेड राईटिंग काफी कमाल की थी। उनकी लेखन की शैली को देखकर सहज ही लोग उनकी ओर अकर्षित हो जाते थे। अपनी शानदार लेखन शैली एवं साफ-सुथरी हेड राईटिंग के चलते उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा था। प्रदीप द्विवेदी ने पत्रकारिता को लगभग पच्चीस साल दिए। इस दौरान उन्होंने कई न्यूज पेपरों में काम किया। जिसमें क्रीर्ति क्रांति, हरिभूमि जैसे न्यूज पेपर शामिल हैं। साल दो हज़ार बारह में उन्होंने अपने न्यूज वेबपोर्टल रीवा रियासत डाॅट काॅम की शुरूआत की। अपनी कड़ी मेहनत एवं अच्छी लेखनी के चलते उन्होंने इस पोर्टल को जल्द ही प्रदेश के टाॅप के पोर्टल शुमार कर दिया। रीवा रियासत वेब पोर्टल में आज डेली मिलियंस में व्यूज आते हैं। यह पोर्टल विंध्य सहित मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली जैसे देश कि कई बड़े शहरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पोर्टल में से एक है। पत्रकार स्व. प्रदीप द्विवेदी जी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे एवं एक बैटी है। प्रदीप द्विवेदी जी के बड़े बेटे पुनीत द्विवेदी आर्यन हैं। जबकि दूसरे बेटे शशांक द्विवेदी हंैं। दोनों बेटों की शादियां हो चुकी हैं। जबकि बेटी की शादी हाल ही में दिसम्बर माह में होने वाली थी। दोनों बेटे रीवा रियासत वेब पोर्टल का पूरी तरह से संचालन एवं देख-रेख करते हैं। प्रदीप द्विवेदी जी दो बेटों एवं एक बेटी के पिता थे। दोनों बेटों की उन्होंने बड़े धूमधाम से शादी कर डाली थी। लेकिन बेटी की शादी करने का सपना उनका अधूरा रह गया। उनकी दिली इच्छा थी कि वह अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी की शादी कर डाले। शादी उन्होनें तय भी कर रखी थी। दिसम्बर महीने में शादी की डेट भी फिक्स थी। बेटी की शादी को लेकर पूरी तरह से तैयारियां भी शुरू थी, लेकिन किश्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। हल्के बुखार से शुरू हुई बीमारी फेफड़ों के इंफेक्शन तक जा पहुंची और तीस दिसम्बर की सुबह उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप द्विवेदी के निधन की जानकारी जैसे ही स्थानीय लोगों, समाज सेवियों, राजनीतिक लोगों एवं जनप्रतिनिधियों को लगी सभी उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। पूर्व मंत्री एवं विधायक रीवा राजेन्द्र शुक्ल ने पत्रकार श्री द्विवेदी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रंद्धाजलि आर्पित करते हुए कहा कि हमने बेबाकी से अपनी बात रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को खो दिया है। इसकी भरपाई संभव नहीं है। ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे। संभागीय जनसंपर्क कार्यालय में भी शोक सभा आयोजित कर दिवंगत आत्मा को श्रंद्धाजलि आर्पित की गयी। पत्रकारिता जगत में अलग मुकाम रखने वाले मिलनसार प्रदीप द्विवेदी के निधन की दुखद समाचार प्राप्त होते ही रीवा जिले में शोक की लहर दौड़ गई। रेवांचल बस स्टैंड व्यापारी संघ परिवार यह खबर सुन गमगीन हो गया है। इस दुख की घड़ी में संघ के संरक्षक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित चंद्र कांत शुक्ला, अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल, उपाध्यक्ष निक्की मोदनवाल, परम लाल गुप्ता, सचिव गौतम इसरानी, कोषाध्यक्ष गोविंद पुरवार प्रिंस सहित अन्य लोगों ने शोक संतृप्त परिवार यह दुख सहने भगवान से शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। |
Garhwa : ट्रिपल हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर लिया है. पति सत्यदेव रजक ने अपनी पत्नी और दोनों बच्चे की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी. पति सत्यदेव रजक का पत्नी से रुपये को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद उसने बाद पत्नी और अपने दो बच्चों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी. गौरतलब है कि सदर थाना क्षेत्र के जाटा गांव में बीते 19 अप्रैल को मां और दो बच्चों की हत्या कर दी गई थी.
सत्यदेव रजक को पीएफ के आठ लाख रुपये मिला था. इसमें से उसकी पत्नी ने ढाई लाख रुपए अपने मायके में दे दिया था. इसी बात पर अक्सर विवाद हुआ करता था. इसी दौरान 19 अप्रैल को भी इसी बात पर झगड़ा हुआ और पति ने कुल्हाड़ी से काट कर तीनों की हत्या कर दी.
19 अप्रैल को सत्यदेव रजक के घर में ही पत्नी शोभा देवी (30), रंजीत रजक (8) व अभिषेक रजक (6) शव मिला था. इसके बाद सत्यदेव रजक उर्फ बबलू रजक ने बताया था कि वे लोग जाटा गांव के उच्च विद्यालय के पास नया घर बना रहे हैं. पत्नी और बच्चों को छोड़ घर के सभी लोग वहीं गए थे. शाम को लौटे तो सबसे पहले उसकी मां दौलतिया देवी ने घर में खून से लथपथ बहू का शव देखा. चीखते हुए जब वह अंदर गई तो कमरे में अपने पोता रंजीत का क्षत-विक्षत शव पड़ा देखा. दूसरे कमरे में छोटे पोते अभिषेक रजक का भी शव पड़ा हुआ था.
आरोपी ने पुलिस को बताया कि जिस कंपनी में वह काम करता था, वहां से पीएफ के 8 लाख रुपए मिले थे,लेकिन पत्नी बिना पूछे ही ढाई लाख रुपए अपने मायके वाले को दे दी, जिसके कारण हमेशा विवाद हुआ करता था. 19 अप्रैल को भी विवाद हुआ. इसके बाद आक्रोशित होकर घर में रखी कुल्हाड़ी से आरोपी ने पत्नी को काट दिया. उसके छोटे बेटे ने यह कांड देख लिया और बोला कि पापा ने मम्मी को मार दिया, फिर उसी कुल्हाड़ी से उसने अपने बेटे को भी काट दिया. बड़ा बेटा सोया हुआ था, पर गुस्से में आकर आरोपी ने उसकी भी हत्या कर दी.
| Garhwa : ट्रिपल हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर लिया है. पति सत्यदेव रजक ने अपनी पत्नी और दोनों बच्चे की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी. पति सत्यदेव रजक का पत्नी से रुपये को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद उसने बाद पत्नी और अपने दो बच्चों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी. गौरतलब है कि सदर थाना क्षेत्र के जाटा गांव में बीते उन्नीस अप्रैल को मां और दो बच्चों की हत्या कर दी गई थी. सत्यदेव रजक को पीएफ के आठ लाख रुपये मिला था. इसमें से उसकी पत्नी ने ढाई लाख रुपए अपने मायके में दे दिया था. इसी बात पर अक्सर विवाद हुआ करता था. इसी दौरान उन्नीस अप्रैल को भी इसी बात पर झगड़ा हुआ और पति ने कुल्हाड़ी से काट कर तीनों की हत्या कर दी. उन्नीस अप्रैल को सत्यदेव रजक के घर में ही पत्नी शोभा देवी , रंजीत रजक व अभिषेक रजक शव मिला था. इसके बाद सत्यदेव रजक उर्फ बबलू रजक ने बताया था कि वे लोग जाटा गांव के उच्च विद्यालय के पास नया घर बना रहे हैं. पत्नी और बच्चों को छोड़ घर के सभी लोग वहीं गए थे. शाम को लौटे तो सबसे पहले उसकी मां दौलतिया देवी ने घर में खून से लथपथ बहू का शव देखा. चीखते हुए जब वह अंदर गई तो कमरे में अपने पोता रंजीत का क्षत-विक्षत शव पड़ा देखा. दूसरे कमरे में छोटे पोते अभिषेक रजक का भी शव पड़ा हुआ था. आरोपी ने पुलिस को बताया कि जिस कंपनी में वह काम करता था, वहां से पीएफ के आठ लाख रुपए मिले थे,लेकिन पत्नी बिना पूछे ही ढाई लाख रुपए अपने मायके वाले को दे दी, जिसके कारण हमेशा विवाद हुआ करता था. उन्नीस अप्रैल को भी विवाद हुआ. इसके बाद आक्रोशित होकर घर में रखी कुल्हाड़ी से आरोपी ने पत्नी को काट दिया. उसके छोटे बेटे ने यह कांड देख लिया और बोला कि पापा ने मम्मी को मार दिया, फिर उसी कुल्हाड़ी से उसने अपने बेटे को भी काट दिया. बड़ा बेटा सोया हुआ था, पर गुस्से में आकर आरोपी ने उसकी भी हत्या कर दी. |
हमीरपुर - 'दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप' के लोकप्रिय इवेंट 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन के लिए हमीरपुर शहर छोटा पड़ गया। हमीरपुर के अंतरिक्ष मॉल में सोमवार को ऑडिशन के पहले दिन रिकार्ड तोड़ 500 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसमें कुल 188 प्रस्तुतियों का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। ऑडिशन सुबह नौ बजे से लेकर शाम नौ बजे तक चला। इसमें 161 सोलो और 25 ग्रुप शामिल हैं, जिन्होंने अपनी अलग-अलग प्रस्तुतियां दर्ज करवाई हैं। गु्रप में अधिकतर आठ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बुधवार को भी अंतरिक्ष मॉल में ऑडिशन होंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी बीआर धीमान ने किया। विशेष अतिथि के तौर पर चीफ इंजीनियर आईपीएच सुमन सिक्रांत उपस्थित रहे। एसई पीडब्ल्यूडी नरेंद्र पाल सिंह, एसई आईपीएच एएस चड्ढा, डा. विनोद कुमार शर्मा उपनिदेशक कृषि विभाग, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी एनपीएस चौहान, देवानंद एक्सईएन पीडब्ल्यूडी डिजाइन, एनके धीमान जिला परियोजना अधिकारी जायका इस शानदार आयोजन का गवाह बने। इसके अलावा कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने ऑडिशन में पहुंचकर हिमाचली प्रतिभाआें की हौसला अफजाई की। समारोह में अंतरिक्ष मॉल की एमडी पूजा ढटवालिया, वीएलसीसी से विवेक राणा व विकास दीक्षित ऑडिशन एवं मेकअप पार्टनर, नैना लखनपाल एमडी हिम अकादमी, घनश्याम चौधरी एमडी हमीरपुर पब्लिक स्कूल, एमडी कौटिल्य कोचिंग क्लासेज शिवानी त्रेहन शर्मा व सुनील शर्मा, सुपर मैग्नेट के डायरेक्टर शगुन दत्त शर्मा, सूरज स्वीट रेस्तरां के एमडी अशोक धमीजा तथा प्रवेश ठाकुर सहित शहर की कई हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को मोमेंटो, शाल व टोपी देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि ने नन्ही छात्रा शगुन शर्मा को टैग नंबर एक लगाकर किया। इसके बाद छात्रों के सोलो और ग्रु्रप डांस ने दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। निर्णायक मंडल में नवीन पाल जॉनी व अनीता शर्मा ने अपनी भूमिका निभाई। प्रतिभागियों ने स्टेज पर पंजाबी, हिंदी, पहाड़ी, पॉप व इंग्लिश गानों पर खूब धमाल मचाई।
नन्हे बच्चों ने सोलो व गु्रप डांस में प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। प्रतिभागियों ने प्रेम रत्न धन पायो, झूमका गिरा रे, चिट्टियां कलाइयां वे, हेट गर्ल्स, बेबी डोल मैं सोने दी, डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो, यह इश्क हाय, जट्ट दा पजामा ऊचा हो गया आदि गानों पर जमकर डांस किया। 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन में जूनियर ग्रुप में सोलो और गु्रप व सीनियर ग्रुप में सोलो परफार्मेंस में प्रतिभागियों ने अपना भाग्य आजमाया।
प्रतिभागी मॉल के किसी न किसी कोने में अपनी बारी के इंतजार के दौरान रिहर्सल करते हुए देखे गए। ऑडिशन में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों में इतना उत्साह था कि उन्होंने खाना तक भी नहीं खाया। बच्चों के अभिभावक भी अपने लाड़लों की परफार्मेंस देखकर भावुक हो उठे। स्टेज पर प्रतिभागियों की परफार्मेंस को उनके अभिभावकों व टीचर्ज ने मोबाइल में भी कैद किया। अपने बच्चों का टेलेंट देखने के लिए अभिभावक घंटों कुर्सी पर बैठे रहे।
'डांस हिमाचल डांस' के मंच पर पांच साल की अनविका ने भी परफार्मेंस दी। हालांकि जूनियर ग्रुप के लिए उम्र आठ से 16 साल निर्धारित थी। बावजूद इसके यह नन्ही प्रतिभागी प्रस्तुति देने के लिए गुरु सहित मंच पर पहुंची। टीचर व स्टूडेंट ने एक साथ परफार्मेंस देकर जजमेंट पैनल की खबू वाहवाही लूटी।
'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन में 77 वर्षीय महिला कौशल्या देवी अपनी पोती पायल को लेकर पहुंची थीं। कुठेड़ा निवासी महिला सुबह ही ऑडिशन स्थल पर पहुंच गई थीं। महिला ने बताया कि उसकी पोती पायल बहुत अच्छा डांस करती है। पोती के लिए वह ऑडिशन स्थल पर आई हैं।
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| हमीरपुर - 'दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप' के लोकप्रिय इवेंट 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन के लिए हमीरपुर शहर छोटा पड़ गया। हमीरपुर के अंतरिक्ष मॉल में सोमवार को ऑडिशन के पहले दिन रिकार्ड तोड़ पाँच सौ से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसमें कुल एक सौ अठासी प्रस्तुतियों का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। ऑडिशन सुबह नौ बजे से लेकर शाम नौ बजे तक चला। इसमें एक सौ इकसठ सोलो और पच्चीस ग्रुप शामिल हैं, जिन्होंने अपनी अलग-अलग प्रस्तुतियां दर्ज करवाई हैं। गु्रप में अधिकतर आठ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बुधवार को भी अंतरिक्ष मॉल में ऑडिशन होंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी बीआर धीमान ने किया। विशेष अतिथि के तौर पर चीफ इंजीनियर आईपीएच सुमन सिक्रांत उपस्थित रहे। एसई पीडब्ल्यूडी नरेंद्र पाल सिंह, एसई आईपीएच एएस चड्ढा, डा. विनोद कुमार शर्मा उपनिदेशक कृषि विभाग, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी एनपीएस चौहान, देवानंद एक्सईएन पीडब्ल्यूडी डिजाइन, एनके धीमान जिला परियोजना अधिकारी जायका इस शानदार आयोजन का गवाह बने। इसके अलावा कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने ऑडिशन में पहुंचकर हिमाचली प्रतिभाआें की हौसला अफजाई की। समारोह में अंतरिक्ष मॉल की एमडी पूजा ढटवालिया, वीएलसीसी से विवेक राणा व विकास दीक्षित ऑडिशन एवं मेकअप पार्टनर, नैना लखनपाल एमडी हिम अकादमी, घनश्याम चौधरी एमडी हमीरपुर पब्लिक स्कूल, एमडी कौटिल्य कोचिंग क्लासेज शिवानी त्रेहन शर्मा व सुनील शर्मा, सुपर मैग्नेट के डायरेक्टर शगुन दत्त शर्मा, सूरज स्वीट रेस्तरां के एमडी अशोक धमीजा तथा प्रवेश ठाकुर सहित शहर की कई हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को मोमेंटो, शाल व टोपी देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि ने नन्ही छात्रा शगुन शर्मा को टैग नंबर एक लगाकर किया। इसके बाद छात्रों के सोलो और ग्रु्रप डांस ने दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। निर्णायक मंडल में नवीन पाल जॉनी व अनीता शर्मा ने अपनी भूमिका निभाई। प्रतिभागियों ने स्टेज पर पंजाबी, हिंदी, पहाड़ी, पॉप व इंग्लिश गानों पर खूब धमाल मचाई। नन्हे बच्चों ने सोलो व गु्रप डांस में प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। प्रतिभागियों ने प्रेम रत्न धन पायो, झूमका गिरा रे, चिट्टियां कलाइयां वे, हेट गर्ल्स, बेबी डोल मैं सोने दी, डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो, यह इश्क हाय, जट्ट दा पजामा ऊचा हो गया आदि गानों पर जमकर डांस किया। 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन में जूनियर ग्रुप में सोलो और गु्रप व सीनियर ग्रुप में सोलो परफार्मेंस में प्रतिभागियों ने अपना भाग्य आजमाया। प्रतिभागी मॉल के किसी न किसी कोने में अपनी बारी के इंतजार के दौरान रिहर्सल करते हुए देखे गए। ऑडिशन में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों में इतना उत्साह था कि उन्होंने खाना तक भी नहीं खाया। बच्चों के अभिभावक भी अपने लाड़लों की परफार्मेंस देखकर भावुक हो उठे। स्टेज पर प्रतिभागियों की परफार्मेंस को उनके अभिभावकों व टीचर्ज ने मोबाइल में भी कैद किया। अपने बच्चों का टेलेंट देखने के लिए अभिभावक घंटों कुर्सी पर बैठे रहे। 'डांस हिमाचल डांस' के मंच पर पांच साल की अनविका ने भी परफार्मेंस दी। हालांकि जूनियर ग्रुप के लिए उम्र आठ से सोलह साल निर्धारित थी। बावजूद इसके यह नन्ही प्रतिभागी प्रस्तुति देने के लिए गुरु सहित मंच पर पहुंची। टीचर व स्टूडेंट ने एक साथ परफार्मेंस देकर जजमेंट पैनल की खबू वाहवाही लूटी। 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन में सतहत्तर वर्षीय महिला कौशल्या देवी अपनी पोती पायल को लेकर पहुंची थीं। कुठेड़ा निवासी महिला सुबह ही ऑडिशन स्थल पर पहुंच गई थीं। महिला ने बताया कि उसकी पोती पायल बहुत अच्छा डांस करती है। पोती के लिए वह ऑडिशन स्थल पर आई हैं। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें ! |
राजस्थान न्यूजः जैसलमेर ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर नाइट टूरिज्म का हब बनेगा.सीएम की बजट घोषणा के बाद डैवलपमेंट के लिए 19.65 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है.
जैसलमेर न्यूजः जैसलमेर में नाइट टूरिज्म में पहला अध्याय जुड़ने जा रहा है. जैसलमेर की गड़ीसर लेक पर सीएम की बजट घोषणा के बाद डेवलपमेंट के लिए 19.65 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है. अब गड़ीसर लेक पर सैलानियों और स्थानीय निवासियों को कई सुविधाओं और नए पर्यटन स्थल की झलक आने लगेगी.
जैसलमेर नगर परिषद के सभापति हरिवल्लभ कल्ला ने जानकारी देते बताया कि जैसलमेर के मुख्य पर्यटन स्थल गड़ीसर लेक की पाल क्षतिग्रस्त है. अब उस पर एक शानदार वॉकिंग ट्रैक निर्माण करवाया जाएगा. इसके साथ ही गड़ीसर लेक में एंट्री की जगह एक भव्य गेट भी पीले पत्थरों से बनाया जाएगा.
इस तरह से गड़ीसर लेक एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में एक नया रूप लिए लोगों के सामने आएगा जहां सैलानियों और स्थानीय निवासियों के लिए कई सुविधाओं को डेवलप किया जाएगा. ताकि जैसलमेर आने वाले सैलानियों को नाइट में एक शानदार टूरिस्ट प्लेस मिले जहां वे अपनी शाम गुजार सकें. नगर परिषद सभापति हरिवल्ल्भ कल्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री बजट घोषणा में जैसलमेर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गड़ीसर लेक को डेवलप करने के लिए योजना बनाई गई और कुल 66 करोड़ की डीपीआर बनाई गई.
इसके तहत पहले फेज में 22 करोड़ की मंजूरी हुई जिसमें भव्य गेट, वॉकिंग ट्रैक, पार्किंग एरिया, शानदार रोशनी और भी बहुत कुछ सुविधाएं मुहैया होंगी. इसके तहत 19.65 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है. अब बहुत जल्द इसका काम शुरू होगा और गड़ीसर लेक का एक अलग ही लुक लोगों को नजर आएगा और वो सबको आकर्षित करेगा.
इस साल बारिश के बाद से गड़ीसर लेक के बुरे हाल हैं. इसकी कई ऐतिहासिक इमारतें जर्जर हालत में हैं. साथ ही इसकी बाउंड्री भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है. हरिवल्लभ कल्ला ने बताया कि पहले फेज में ये सब निर्माण होगा उसके बाद दूसरे फेज में भी कई चीजों को शामिल किया जाएगा. इस तरह धीरे धीरे इस ऐतिहासिक इमारत को बढ़िया बनाने के साथ साथ नाइट टूरिज्म के लिए भी प्रचार प्रसार किया जाएगा.
| राजस्थान न्यूजः जैसलमेर ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर नाइट टूरिज्म का हब बनेगा.सीएम की बजट घोषणा के बाद डैवलपमेंट के लिए उन्नीस.पैंसठ करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है. जैसलमेर न्यूजः जैसलमेर में नाइट टूरिज्म में पहला अध्याय जुड़ने जा रहा है. जैसलमेर की गड़ीसर लेक पर सीएम की बजट घोषणा के बाद डेवलपमेंट के लिए उन्नीस.पैंसठ करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है. अब गड़ीसर लेक पर सैलानियों और स्थानीय निवासियों को कई सुविधाओं और नए पर्यटन स्थल की झलक आने लगेगी. जैसलमेर नगर परिषद के सभापति हरिवल्लभ कल्ला ने जानकारी देते बताया कि जैसलमेर के मुख्य पर्यटन स्थल गड़ीसर लेक की पाल क्षतिग्रस्त है. अब उस पर एक शानदार वॉकिंग ट्रैक निर्माण करवाया जाएगा. इसके साथ ही गड़ीसर लेक में एंट्री की जगह एक भव्य गेट भी पीले पत्थरों से बनाया जाएगा. इस तरह से गड़ीसर लेक एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में एक नया रूप लिए लोगों के सामने आएगा जहां सैलानियों और स्थानीय निवासियों के लिए कई सुविधाओं को डेवलप किया जाएगा. ताकि जैसलमेर आने वाले सैलानियों को नाइट में एक शानदार टूरिस्ट प्लेस मिले जहां वे अपनी शाम गुजार सकें. नगर परिषद सभापति हरिवल्ल्भ कल्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री बजट घोषणा में जैसलमेर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गड़ीसर लेक को डेवलप करने के लिए योजना बनाई गई और कुल छयासठ करोड़ की डीपीआर बनाई गई. इसके तहत पहले फेज में बाईस करोड़ की मंजूरी हुई जिसमें भव्य गेट, वॉकिंग ट्रैक, पार्किंग एरिया, शानदार रोशनी और भी बहुत कुछ सुविधाएं मुहैया होंगी. इसके तहत उन्नीस.पैंसठ करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है. अब बहुत जल्द इसका काम शुरू होगा और गड़ीसर लेक का एक अलग ही लुक लोगों को नजर आएगा और वो सबको आकर्षित करेगा. इस साल बारिश के बाद से गड़ीसर लेक के बुरे हाल हैं. इसकी कई ऐतिहासिक इमारतें जर्जर हालत में हैं. साथ ही इसकी बाउंड्री भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है. हरिवल्लभ कल्ला ने बताया कि पहले फेज में ये सब निर्माण होगा उसके बाद दूसरे फेज में भी कई चीजों को शामिल किया जाएगा. इस तरह धीरे धीरे इस ऐतिहासिक इमारत को बढ़िया बनाने के साथ साथ नाइट टूरिज्म के लिए भी प्रचार प्रसार किया जाएगा. |
सत्याग्रह : असहयोग अन्याययुक्त नियमों में भी वह भेद करे । फिर इसमें भी निजी अन्यायों को वह दिल कड़ा करके सहन कर लेगा। क्योंकि मनुष्य जब जान-बूझ कर अन्याय को सहन करता है तब उसकी सत्वहानि नहीं होती। परन्तु जब दीनता, भय अथवा जीवन के लोभ से वह न्याय को सहता है तभी उसको सत्वहानि होती है।
९ सत्याग्रह - शस्त्र का अवलंबन संघ वल पर नहीं है - हा संघ-बल उसकी शक्ति को बढ़ा अवश्य सकता है । परन्तु
उपवास रूपी सत्याग्रह कभी संघ-वल के भरोसे न कर बैठना चाहिए । दो या अधिक आदमी मिल कर यदि उपवास ठान लें तो इसे सत्याग्रह नहीं कह सकते, वल्कि हठधर्मी कहते हैं ।
अपने मित्रों के अथवा साथियों के दोपों के प्रायश्चित्त के रूप में, अथवा मित्र या साथियों को उनकी शुद्ध प्रतिज्ञा पर दृढ़ रखने के लिए, उपवास करना इस प्रकरण के अर्थ में सत्याग्रह नहीं, बल्कि तपश्चर्या है । विवेक-पूर्वक की गई ऐसी तपश्चर्या के लिए जीवन में स्थान है। परन्तु उसकी चर्चा यहाँ आवश्यक नहीं है।
१ जहाँ पहले दोनों पक्षों में सहयोग होता चला आया हो वहीं असहयोग रूपी · सत्याग्रह आजमाया जा सकता है।"
२. इसमें जहाँ विपक्षी का काम असंहयोगी की सहायता के बिना भी चल सकता है वहाँ असहयोग का अर्थ सिर्फ दूसरे पक्ष का त्याग अथवा अपनी शुद्धि इतना ही हो सकता है । इसके लिए भी सत्याग्रह में जगह है। जैसे कि मालिक को दूसरे नौकर मिल सकते हैं, फिर भी जो नौकर उसके अधर्म में हाथ बटाने की इच्छा न रखता हो वह अपना इस्तीफा दे दे अथवा दूसरे लोग शराब की दूकान चलाने को तैयार बैठे हों फिर भी कोई शराब का दूकानदार अपना पेशा छोड़ दे, तो यह पूर्वोक्त प्रकार का असहयोग हुआ । इस प्रकार जो कुटुम्बी, मित्र इत्यादि हठ करके अधर्म करते हों उनका त्याग भी ऐसा ही सत्याग्रह है।
३. जहाँ ऐसी स्थिति हो कि हमारी मदद के बिना दूसरे पक्ष का व्यवहार चल ही नहीं सकता वहाँ असहयोग को बहुत उम्र सत्याग्रह कहना चाहिए । इस कारण उसे आरंभ करने के पहले, सत्याग्रही को देख लेना चाहिए कि स्पष्ट रूप से यह मेरा धर्म हो गया है या नहीं। इसमें सत्याग्रही इस बात को कभी नहीं भूलता कि विपक्षी का काम मेरे बिना नहीं चल सकता है और इस वस्तुस्थिति में उसे अपना बल दिखाई देता है । इस कारण यह आंशका रहती है कि इसका उपयोग विपक्षी को सताने के लिए भी किया जाय । ४. जब यह प्रतीत हो कि विपक्षी तो हमारे सहयोग का बिल्कुल दुरुपयोग ही कर रहा है और उसके द्वारा निर्दोषों | सत्याग्रह : असहयोग अन्याययुक्त नियमों में भी वह भेद करे । फिर इसमें भी निजी अन्यायों को वह दिल कड़ा करके सहन कर लेगा। क्योंकि मनुष्य जब जान-बूझ कर अन्याय को सहन करता है तब उसकी सत्वहानि नहीं होती। परन्तु जब दीनता, भय अथवा जीवन के लोभ से वह न्याय को सहता है तभी उसको सत्वहानि होती है। नौ सत्याग्रह - शस्त्र का अवलंबन संघ वल पर नहीं है - हा संघ-बल उसकी शक्ति को बढ़ा अवश्य सकता है । परन्तु उपवास रूपी सत्याग्रह कभी संघ-वल के भरोसे न कर बैठना चाहिए । दो या अधिक आदमी मिल कर यदि उपवास ठान लें तो इसे सत्याग्रह नहीं कह सकते, वल्कि हठधर्मी कहते हैं । अपने मित्रों के अथवा साथियों के दोपों के प्रायश्चित्त के रूप में, अथवा मित्र या साथियों को उनकी शुद्ध प्रतिज्ञा पर दृढ़ रखने के लिए, उपवास करना इस प्रकरण के अर्थ में सत्याग्रह नहीं, बल्कि तपश्चर्या है । विवेक-पूर्वक की गई ऐसी तपश्चर्या के लिए जीवन में स्थान है। परन्तु उसकी चर्चा यहाँ आवश्यक नहीं है। एक जहाँ पहले दोनों पक्षों में सहयोग होता चला आया हो वहीं असहयोग रूपी · सत्याग्रह आजमाया जा सकता है।" दो. इसमें जहाँ विपक्षी का काम असंहयोगी की सहायता के बिना भी चल सकता है वहाँ असहयोग का अर्थ सिर्फ दूसरे पक्ष का त्याग अथवा अपनी शुद्धि इतना ही हो सकता है । इसके लिए भी सत्याग्रह में जगह है। जैसे कि मालिक को दूसरे नौकर मिल सकते हैं, फिर भी जो नौकर उसके अधर्म में हाथ बटाने की इच्छा न रखता हो वह अपना इस्तीफा दे दे अथवा दूसरे लोग शराब की दूकान चलाने को तैयार बैठे हों फिर भी कोई शराब का दूकानदार अपना पेशा छोड़ दे, तो यह पूर्वोक्त प्रकार का असहयोग हुआ । इस प्रकार जो कुटुम्बी, मित्र इत्यादि हठ करके अधर्म करते हों उनका त्याग भी ऐसा ही सत्याग्रह है। तीन. जहाँ ऐसी स्थिति हो कि हमारी मदद के बिना दूसरे पक्ष का व्यवहार चल ही नहीं सकता वहाँ असहयोग को बहुत उम्र सत्याग्रह कहना चाहिए । इस कारण उसे आरंभ करने के पहले, सत्याग्रही को देख लेना चाहिए कि स्पष्ट रूप से यह मेरा धर्म हो गया है या नहीं। इसमें सत्याग्रही इस बात को कभी नहीं भूलता कि विपक्षी का काम मेरे बिना नहीं चल सकता है और इस वस्तुस्थिति में उसे अपना बल दिखाई देता है । इस कारण यह आंशका रहती है कि इसका उपयोग विपक्षी को सताने के लिए भी किया जाय । चार. जब यह प्रतीत हो कि विपक्षी तो हमारे सहयोग का बिल्कुल दुरुपयोग ही कर रहा है और उसके द्वारा निर्दोषों |
नई दिल्ली : अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शरणार्थी नीति में बदलाव करने पर सबसे कम उम्र की नोबल विजेता मलाला यूसुफजई ने कहा है कि उनके इस फैसले से मेरा दिल टूट गया है. उन्होनें इसपर दुख जताया है. मलाला ने ट्रंप से अनुरोध किया है कि वे दुनिया के सबसे असुरक्षित लोगों को अकेला न छोड़ें.
मलाला यूसुफजई ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हिंसा से परेशान उन बच्चों और माता पिता के अंदर पल रही उम्मीदों के दरवाजे बंद कर दिए हैं. हिंसा और युद्ध के इलाकों को छोड़कर भाग रहे माता-पिताओं के लिए दरवाजे बंद होने से मलाला बहुत चिंतित हैं.
मलाला यूसुफजई शुरु से ही पाकिस्तान में लड़कियों के शिक्षा की वकालत करती रही हैं. 2012 में तालिबानी आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी थी. बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता कैलाश सत्यार्थी के साथ उन्हें नोबल शांति पुरस्कार भी मिला था.
मलाला यूसुफजई ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दुनिया के सबसे असहाय बच्चों और परिवारों से मुह न मोड़ने की अपील की है. वे इस समय इंग्लैंड में रह रही हैं. मलाला ने कहा है कि मैं बहुत दुखी हुं कि अमेरिका अपने गौरवाशाली इतिहास को पीछे छोड़ रहा है. उन्होनें कहा है कि इन्हीं लोगों ने अमेरिका को आगे ले जाने में मदद की.
| नई दिल्ली : अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शरणार्थी नीति में बदलाव करने पर सबसे कम उम्र की नोबल विजेता मलाला यूसुफजई ने कहा है कि उनके इस फैसले से मेरा दिल टूट गया है. उन्होनें इसपर दुख जताया है. मलाला ने ट्रंप से अनुरोध किया है कि वे दुनिया के सबसे असुरक्षित लोगों को अकेला न छोड़ें. मलाला यूसुफजई ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हिंसा से परेशान उन बच्चों और माता पिता के अंदर पल रही उम्मीदों के दरवाजे बंद कर दिए हैं. हिंसा और युद्ध के इलाकों को छोड़कर भाग रहे माता-पिताओं के लिए दरवाजे बंद होने से मलाला बहुत चिंतित हैं. मलाला यूसुफजई शुरु से ही पाकिस्तान में लड़कियों के शिक्षा की वकालत करती रही हैं. दो हज़ार बारह में तालिबानी आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी थी. बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता कैलाश सत्यार्थी के साथ उन्हें नोबल शांति पुरस्कार भी मिला था. मलाला यूसुफजई ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दुनिया के सबसे असहाय बच्चों और परिवारों से मुह न मोड़ने की अपील की है. वे इस समय इंग्लैंड में रह रही हैं. मलाला ने कहा है कि मैं बहुत दुखी हुं कि अमेरिका अपने गौरवाशाली इतिहास को पीछे छोड़ रहा है. उन्होनें कहा है कि इन्हीं लोगों ने अमेरिका को आगे ले जाने में मदद की. |
बटाला (पंजाब), 20 अक्टूबर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बुधवार को शहीद नायक मनदीप सिंह की याद में एक स्मारक द्वार और स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की।
मनदीप सिंह उन पांच सैन्यकर्मियों में शामिल थे जो 11 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकवादियों के साथ भीषण मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। मुख्यमंत्री ने पंजाब विधानसभा अध्यक्ष के. पी. सिंह और ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के साथ बुधवार को मनदीप सिंह के परिवार से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की।
एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार चन्नी ने मनदीप सिंह को श्रद्धांजलि दी और अभियान के दौरान अपने प्राण न्यौछावर करने के लिए उनकी वीरता को याद किया। उन्होंने बताया कि वीरों का सर्वोच्च बलिदान आगामी पीढ़ियों को देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरित करेगा।
चन्नी ने कहा कि नायक मनदीप सिंह के अभूतपूर्व बलिदान ने सभी देशवासियों को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरा देश शहीद और उनके परिवार का ऋणी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनदीप सिंह के महान बलिदान की याद में पंजाब सरकार उनकी स्मृति में एक स्मारक द्वार और एक स्टेडियम का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि यह स्मारक द्वार और स्टेडियम आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| बटाला , बीस अक्टूबर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बुधवार को शहीद नायक मनदीप सिंह की याद में एक स्मारक द्वार और स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की। मनदीप सिंह उन पांच सैन्यकर्मियों में शामिल थे जो ग्यारह अक्टूबर को जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकवादियों के साथ भीषण मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। मुख्यमंत्री ने पंजाब विधानसभा अध्यक्ष के. पी. सिंह और ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के साथ बुधवार को मनदीप सिंह के परिवार से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार चन्नी ने मनदीप सिंह को श्रद्धांजलि दी और अभियान के दौरान अपने प्राण न्यौछावर करने के लिए उनकी वीरता को याद किया। उन्होंने बताया कि वीरों का सर्वोच्च बलिदान आगामी पीढ़ियों को देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरित करेगा। चन्नी ने कहा कि नायक मनदीप सिंह के अभूतपूर्व बलिदान ने सभी देशवासियों को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरा देश शहीद और उनके परिवार का ऋणी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनदीप सिंह के महान बलिदान की याद में पंजाब सरकार उनकी स्मृति में एक स्मारक द्वार और एक स्टेडियम का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि यह स्मारक द्वार और स्टेडियम आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
उत्तर प्रदेश में एक महीने पहले जीएसटी को लेकर हुई छापेमारी से व्यापारियों में हडक़ंप मचा था। अब महँगाई को लेकर जनता में हाहाकार मचा हुआ है। व्यापारियों तथा दुकानदारों ने जीएसटी के नाम पर कई उपयोगी वस्तुओं के भाव बढ़ा दिये हैं। दुकानदारों का कहना है कि ऊपर से ही महँगाई बढ़ गयी है। उपभोक्ता क्या करे उसे तो रोटी खानी ही पड़ेगी। महँगाई के चलते एक आम उपभोक्ता की थाली से धीरे-धीरे पौष्टिक आहार छिनते जा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ जनपदों में अभी भी जीएसटी टीमें अचानक छापेमारी करने पहुँच रही हैं। जनवरी के पहले सप्ताह में मकरंदापुर मधवापुर में अचानक जीएसटी टीमों की छापेमारी से खलबली मच गयी। दुकानदारों ने फटाफट दुकानों के शटर बन्द कर दिये। जीएसटी टीमें किसी भी प्रकार के व्यापारियों को नहीं छोड़ रही हैं, चाहे वो एमआरपी वाली वस्तुओं का विक्रेता हो, चाहे खुली वस्तुओं का विक्रेता हो। यहाँ तक कि लकड़ी तथा कोयला बेचने वालों को, टेंट की दुकान चलाने वालों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस डर से खोखे तथा खोमचे वाले भी सहमे रहते हैं।
उत्तर प्रदेश में बिजली सप्लाई की दो व्यवस्थाएँ हैं। नगरीय व्यवस्था तथा ग्रामीण व्यवस्था। नगरों में बिजली कटौती कम होती है, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती बड़े पैमाने पर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सात से बाहर घंटे ही बिजली रहती है। इस समय में बिजली के बार बार लगते कट परेशान किये रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बिजली महँगी भी बहुत है।
अब खलबली इस बात को लेकर मची है कि बिजली और अधिक महँगी होने जा रही है। उत्तर प्रदेश की बिजली कम्पनियों ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बिजली दरों में औसतन 15. 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास भेजा है। अगर इस प्रस्ताव को राज्य विद्युत नियामक आयोग मान लेता है तथा विधानसभा में भी इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाती है, तो बिजली बिलों में 18 से 23 प्रतिशत तक बढ़ोतरी निश्चित है। इसमें उद्योगों की बिजली दरों में 16 प्रतिशत तथा कृषि उपयोग के लिए बिजली की दरों में 10 से 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी।
इस बढ़ोतरी से बिजली कम्पनियों को इस वित्त वर्ष की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में लगभग 9,140 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इस वित्त वर्ष में बिजली कम्पनियों को बिल के माध्यम से लगभग 65,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलना चाहिए, जो कि सरकार द्वारा अनुमति ज्ञापित है।
इस आधार पर वित्त वर्ष 2022-23 में बिजली कम्पनियों को लगभग 74,140 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। बिजली कम्पनियों ने अपने प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2023-24 के कुल $खर्चों के लिए वार्षिक राजस्व की आवश्यकता 92,547 करोड़ रुपये बतायी है। प्रस्ताव में वार्षिक राजस्व की आवश्यकता के ब्योरे में एक वित्त वर्ष का नुक़सान 14. 90 प्रतिशत दिखाया गया है,। इसका अर्थ यह है कि राजस्व में लगभग 9,140 करोड़ रुपये घाटा बिजली कम्पनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को बताया है।
जानकारी के अनुसार, बिजली कम्पनियों का उपभोक्ताओं पर लगभग 25,133 करोड़ रुपये शेष हैं। भौजीपुरा निवासी सत्यवीर का कहना है कि बिजली तो पहले से ही बहुत महँगी है। अब अगर बिजली और महँगी की जाएगी, तो महँगाई के इस दौर में आम जनता पिस जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आम जनता का दर्द समझना चाहिए। विदित हो प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2014-15 में हुई थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2017-18 में फिर अन्तिम बार वित्त वर्ष 2019-20 में बिजली बिलों में बढ़ोतरी हुई थी। कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता,समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह बिजली दलों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। विदित हो बीते चुनाव में भाजपा ने किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली देने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया था, मगर अब वह तरह तरह से महँगाई बढ़ाकर किसानों की आर्थिक दशा बिगाडऩे पर तुली हुई है।
| उत्तर प्रदेश में एक महीने पहले जीएसटी को लेकर हुई छापेमारी से व्यापारियों में हडक़ंप मचा था। अब महँगाई को लेकर जनता में हाहाकार मचा हुआ है। व्यापारियों तथा दुकानदारों ने जीएसटी के नाम पर कई उपयोगी वस्तुओं के भाव बढ़ा दिये हैं। दुकानदारों का कहना है कि ऊपर से ही महँगाई बढ़ गयी है। उपभोक्ता क्या करे उसे तो रोटी खानी ही पड़ेगी। महँगाई के चलते एक आम उपभोक्ता की थाली से धीरे-धीरे पौष्टिक आहार छिनते जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ जनपदों में अभी भी जीएसटी टीमें अचानक छापेमारी करने पहुँच रही हैं। जनवरी के पहले सप्ताह में मकरंदापुर मधवापुर में अचानक जीएसटी टीमों की छापेमारी से खलबली मच गयी। दुकानदारों ने फटाफट दुकानों के शटर बन्द कर दिये। जीएसटी टीमें किसी भी प्रकार के व्यापारियों को नहीं छोड़ रही हैं, चाहे वो एमआरपी वाली वस्तुओं का विक्रेता हो, चाहे खुली वस्तुओं का विक्रेता हो। यहाँ तक कि लकड़ी तथा कोयला बेचने वालों को, टेंट की दुकान चलाने वालों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस डर से खोखे तथा खोमचे वाले भी सहमे रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बिजली सप्लाई की दो व्यवस्थाएँ हैं। नगरीय व्यवस्था तथा ग्रामीण व्यवस्था। नगरों में बिजली कटौती कम होती है, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती बड़े पैमाने पर होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सात से बाहर घंटे ही बिजली रहती है। इस समय में बिजली के बार बार लगते कट परेशान किये रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बिजली महँगी भी बहुत है। अब खलबली इस बात को लेकर मची है कि बिजली और अधिक महँगी होने जा रही है। उत्तर प्रदेश की बिजली कम्पनियों ने वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के लिए बिजली दरों में औसतन पंद्रह. पचासी प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास भेजा है। अगर इस प्रस्ताव को राज्य विद्युत नियामक आयोग मान लेता है तथा विधानसभा में भी इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाती है, तो बिजली बिलों में अट्ठारह से तेईस प्रतिशत तक बढ़ोतरी निश्चित है। इसमें उद्योगों की बिजली दरों में सोलह प्रतिशत तथा कृषि उपयोग के लिए बिजली की दरों में दस से बारह प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। इस बढ़ोतरी से बिजली कम्पनियों को इस वित्त वर्ष की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में लगभग नौ,एक सौ चालीस करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इस वित्त वर्ष में बिजली कम्पनियों को बिल के माध्यम से लगभग पैंसठ,शून्य करोड़ रुपये का राजस्व मिलना चाहिए, जो कि सरकार द्वारा अनुमति ज्ञापित है। इस आधार पर वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में बिजली कम्पनियों को लगभग चौहत्तर,एक सौ चालीस करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। बिजली कम्पनियों ने अपने प्रस्ताव में वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के कुल $खर्चों के लिए वार्षिक राजस्व की आवश्यकता बानवे,पाँच सौ सैंतालीस करोड़ रुपये बतायी है। प्रस्ताव में वार्षिक राजस्व की आवश्यकता के ब्योरे में एक वित्त वर्ष का नुक़सान चौदह. नब्बे प्रतिशत दिखाया गया है,। इसका अर्थ यह है कि राजस्व में लगभग नौ,एक सौ चालीस करोड़ रुपये घाटा बिजली कम्पनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को बताया है। जानकारी के अनुसार, बिजली कम्पनियों का उपभोक्ताओं पर लगभग पच्चीस,एक सौ तैंतीस करोड़ रुपये शेष हैं। भौजीपुरा निवासी सत्यवीर का कहना है कि बिजली तो पहले से ही बहुत महँगी है। अब अगर बिजली और महँगी की जाएगी, तो महँगाई के इस दौर में आम जनता पिस जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आम जनता का दर्द समझना चाहिए। विदित हो प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी वित्त वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह में हुई थी। इसके बाद वित्त वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में फिर अन्तिम बार वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में बिजली बिलों में बढ़ोतरी हुई थी। कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता,समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह बिजली दलों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। विदित हो बीते चुनाव में भाजपा ने किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली देने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया था, मगर अब वह तरह तरह से महँगाई बढ़ाकर किसानों की आर्थिक दशा बिगाडऩे पर तुली हुई है। |
और (य - आ) खण्ड हैं। अथवा समीकार का रूप
(य - भ) (य - श्रा) = ० होगा । अथवा य - (अ+ आ ) य + अX आ = 0 अतः जिस समीकार के मूल दिए हों उसका रूप यह होता हैय - (मूलों का योग) य+ (मूलों का गुणनफल) =9 अब जिसके मूल दिए गए हों वह समीकार बनाया जा सकता है ।
उदाहरण १-ऐसा समीकार पनाओ जिसके मूल २ तथा हों।
अपेक्षित समोकार (य - २) (य+2) = ० है । य' -े य-१८०
अथवा समीकार इस रीति से भी प्राप्त किया जा सकता
मूलों का योग =२-२३२ = ३ मूलों का गुणनफल ==२ (−) | और खण्ड हैं। अथवा समीकार का रूप = शून्य होगा । अथवा य - य + अX आ = शून्य अतः जिस समीकार के मूल दिए हों उसका रूप यह होता हैय - य+ =नौ अब जिसके मूल दिए गए हों वह समीकार बनाया जा सकता है । उदाहरण एक-ऐसा समीकार पनाओ जिसके मूल दो तथा हों। अपेक्षित समोकार = शून्य है । य' -े य-एक सौ अस्सी अथवा समीकार इस रीति से भी प्राप्त किया जा सकता मूलों का योग =दो-दो सौ बत्तीस = तीन मूलों का गुणनफल ==दो |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
Jharkhand News: टेरर फंडिंग मामले में एनआईए छापामारी कर रही है. झारखंड के चतरा जिले के पिपरवार थाना क्षेत्र में एक साथ छह स्थानों पर रेड की जा रही है. बताया जा रहा है कि एनआईए की टीम सुबह पांच बजे चतरा के पिपरवार थाना क्षेत्र पहुंची. इसके बाद से रेड कर रही है. पिपरवार थाना क्षेत्र के बिलारी एवं बेती समेत कुल छह जगहों पर छापामारी जारी है. जानकी महतो, बबलू मुंडा, नागेश्वर गंझू, रोहन गंझू एवं महेंद्र गंझू समेत अन्य के यहां एनआईए की टीम छापामारी कर रही है.
झारखंड में एनआईए की टीम आज सुबह से ही छापामारी कर रही है. टेरर फंडिंग मामले में एनआईए रेड कर रही है. चतरा जिले के पिपरवार थाना क्षेत्र के बिलारी एवं बेती समेत कुल छह जगहों पर एनआईए की छापामारी जारी है. एनआईए द्वारा बिलारी में दो जगहों पर रेड की जा रही है और बेती में तीन जगहों समेत छह स्थानों पर रेड की जा रही है. जानकारी के अनुसार टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में एनआईए की टीम रेड करने सुबह 5 बजे चतरा के पिपरवार पहुंची.
बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले नक्सली संगठन जेएसपीसी का जोनल कमांडर भिखन गंझू गिरफ्तार हुआ था. इसमें उसने बयान दिया था. इसी आधार पर एनआईए रेड कर रही है. टेरर फंडिंग के साथ अवैध वसूली मामले में भी एनआईए द्वारा रेड की जा रही है. प्राप्त सूचना के अनुसार जानकी महतो, बबलू मुंडा, नागेश्वर गंझू, रोहन गंझू एवं महेंद्र गंझू समेत अन्य के यहां एनआईए की टीम छापामारी कर रही है.
| Jharkhand News: टेरर फंडिंग मामले में एनआईए छापामारी कर रही है. झारखंड के चतरा जिले के पिपरवार थाना क्षेत्र में एक साथ छह स्थानों पर रेड की जा रही है. बताया जा रहा है कि एनआईए की टीम सुबह पांच बजे चतरा के पिपरवार थाना क्षेत्र पहुंची. इसके बाद से रेड कर रही है. पिपरवार थाना क्षेत्र के बिलारी एवं बेती समेत कुल छह जगहों पर छापामारी जारी है. जानकी महतो, बबलू मुंडा, नागेश्वर गंझू, रोहन गंझू एवं महेंद्र गंझू समेत अन्य के यहां एनआईए की टीम छापामारी कर रही है. झारखंड में एनआईए की टीम आज सुबह से ही छापामारी कर रही है. टेरर फंडिंग मामले में एनआईए रेड कर रही है. चतरा जिले के पिपरवार थाना क्षेत्र के बिलारी एवं बेती समेत कुल छह जगहों पर एनआईए की छापामारी जारी है. एनआईए द्वारा बिलारी में दो जगहों पर रेड की जा रही है और बेती में तीन जगहों समेत छह स्थानों पर रेड की जा रही है. जानकारी के अनुसार टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में एनआईए की टीम रेड करने सुबह पाँच बजे चतरा के पिपरवार पहुंची. बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले नक्सली संगठन जेएसपीसी का जोनल कमांडर भिखन गंझू गिरफ्तार हुआ था. इसमें उसने बयान दिया था. इसी आधार पर एनआईए रेड कर रही है. टेरर फंडिंग के साथ अवैध वसूली मामले में भी एनआईए द्वारा रेड की जा रही है. प्राप्त सूचना के अनुसार जानकी महतो, बबलू मुंडा, नागेश्वर गंझू, रोहन गंझू एवं महेंद्र गंझू समेत अन्य के यहां एनआईए की टीम छापामारी कर रही है. |
कहते हैं मारने से बचाने वाला बड़ा होता है. . . ऐसा ही एक मामला फिरोजाबाद के टूंडला में नगला सिंघी थाना इलाके में सामने आया है। गांव बासदानी की घटना के बाद ग्रामीण ईश्वर का धन्यवाद देते नहीं थक रहे हैं। दरअसल गांव निवासी देवेंद्र सिंह की ढाई साल की बेटी रविवार शाम से लापता थी, परिजन उसे तलाश रहे थे। कहीं भी पता नहीं चलने पर सबकी सांसें अटकी हुईं थीं, लेकिन उधर, सूखे कुएं में पसरे घुप अंधेरे में उस मासूम की सांसें चल रही थीं। आखिर करीब 40 घंटे बाद मंगलवार सुबह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं तक जाकर बच्ची की तलाश पूरी हुई। पुलिस ने बच्ची को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उसे स्वस्थ बताया गया। रविवार शाम साढ़े पांच बजे देवेंद्र घर से सब्जी लेने के लिए निकले। इसी दौरान घर के बाहर खेल रही सबसे छोटी बेटी ढाई साल की प्रेमलता पीछे-पीछे चली गई। इसकी जानकारी न तो देवेंद्र को हुई और न किसी परिजन को।
बच्ची को न पाकर परिजन चिंतित हो गए और इधर-उधर तलाश शुरू की, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं लगा। बच्ची के लापता होने की खबर से गांव में दिवाली की खुशियों पर ग्रहण लग गया। इसके बाद देवेंद्र ने पुलिस को बच्ची के लापता होने की जानकारी दी।
सोमवार को पुलिस ने गांव स्थित तालाब को खाली कराकर उसमें बच्ची की खोज शुरू की। यहां भी कुछ नहीं मिला। आसपास के गांवों में भी पता करवाया।
मंगलवार को सुबह करीब सात बजे परिजन बच्ची की तलाश करते हुए गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं पर पहुंचे।
यहां बच्ची के रोने की आवाज सुनकर कुछ उम्मीद जगी। तत्काल पुलिस को बुलवाया गया। कुछ ही देर बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू हो गया। एक व्यक्ति को कुएं में उतारा गया तो देखा कि प्रेमलता रो-रोकर निढ़ाल हो चुकी थी।
उसे तत्काल रस्सी की मदद से बाहर निकाला गया और स्वास्थ परीक्षण के लिए अस्पताल भिजवाया। बच्ची को सुरक्षित पाकर परिजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद गांव में दिवाली मनाई गई।
| कहते हैं मारने से बचाने वाला बड़ा होता है. . . ऐसा ही एक मामला फिरोजाबाद के टूंडला में नगला सिंघी थाना इलाके में सामने आया है। गांव बासदानी की घटना के बाद ग्रामीण ईश्वर का धन्यवाद देते नहीं थक रहे हैं। दरअसल गांव निवासी देवेंद्र सिंह की ढाई साल की बेटी रविवार शाम से लापता थी, परिजन उसे तलाश रहे थे। कहीं भी पता नहीं चलने पर सबकी सांसें अटकी हुईं थीं, लेकिन उधर, सूखे कुएं में पसरे घुप अंधेरे में उस मासूम की सांसें चल रही थीं। आखिर करीब चालीस घंटाटे बाद मंगलवार सुबह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं तक जाकर बच्ची की तलाश पूरी हुई। पुलिस ने बच्ची को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उसे स्वस्थ बताया गया। रविवार शाम साढ़े पांच बजे देवेंद्र घर से सब्जी लेने के लिए निकले। इसी दौरान घर के बाहर खेल रही सबसे छोटी बेटी ढाई साल की प्रेमलता पीछे-पीछे चली गई। इसकी जानकारी न तो देवेंद्र को हुई और न किसी परिजन को। बच्ची को न पाकर परिजन चिंतित हो गए और इधर-उधर तलाश शुरू की, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं लगा। बच्ची के लापता होने की खबर से गांव में दिवाली की खुशियों पर ग्रहण लग गया। इसके बाद देवेंद्र ने पुलिस को बच्ची के लापता होने की जानकारी दी। सोमवार को पुलिस ने गांव स्थित तालाब को खाली कराकर उसमें बच्ची की खोज शुरू की। यहां भी कुछ नहीं मिला। आसपास के गांवों में भी पता करवाया। मंगलवार को सुबह करीब सात बजे परिजन बच्ची की तलाश करते हुए गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं पर पहुंचे। यहां बच्ची के रोने की आवाज सुनकर कुछ उम्मीद जगी। तत्काल पुलिस को बुलवाया गया। कुछ ही देर बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू हो गया। एक व्यक्ति को कुएं में उतारा गया तो देखा कि प्रेमलता रो-रोकर निढ़ाल हो चुकी थी। उसे तत्काल रस्सी की मदद से बाहर निकाला गया और स्वास्थ परीक्षण के लिए अस्पताल भिजवाया। बच्ची को सुरक्षित पाकर परिजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद गांव में दिवाली मनाई गई। |
यूपी बोर्ड की ओर से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा-2019 का परिणाम एक साथ बोर्ड मुख्यालय से घोषित किया जाएगा। शनिवार को 12. 30 बजे होने वाली पत्रकार वार्ता में परिषद के सभापति विनय कुमार पांडेय एवं सचिव नीना श्रीवास्तव परिणाम की घोषणा करेंगे।
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना साहिब लोकसभा सीट से नामांकन किया। इस मौके पर उनसे खास बातचीत की अमर उजाला के संवाददाता विवेक शुक्ला ने। देखिए रविशंकर प्रसाद का ये EXCLUSIVE इंटरव्यू।
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने ईस्टर पर हुए आत्मघाती हमलों को रोकने में विफल रहने की बात मानते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। देश के पुलिस प्रमुख पुजिथ जयसंदुरा और रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो ने खुफिया जानकारी होने के बावजूद विस्फोटों को रोकने में अपनी विफलता पर इस्तीफा दे दिया है।
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (एमआरयूसी) द्वारा प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को समझने के लिए उपभोक्ताओं से जुड़े एक सर्वे में कुछ रोचक बातें सामने आई हैं। शुक्रवार को इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) शीर्षक से 2019 के पहले क्वार्टर की रिपोर्ट के अनुसार आज देश में 31 करोड़ परिवार हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत घरों में बिजली और 72 प्रतिशत में रसोई गैस है पहुंच गई है।
सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के सात सरकारी चीनी मिलों के विनिवेश में कथित घोटाले के मामले में एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा एजेंसी ने 14 अन्य मिलों के मामले में हुई अनियमितता की जांच के लिए छह प्रिलिमनरी इनक्वायरी (पीई) भी दर्ज की है। 2010-11 में जब विनिवेश की प्रक्रिया हुई थी, तब मायावती मुख्यमंत्री थीं।
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| यूपी बोर्ड की ओर से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा-दो हज़ार उन्नीस का परिणाम एक साथ बोर्ड मुख्यालय से घोषित किया जाएगा। शनिवार को बारह. तीस बजे होने वाली पत्रकार वार्ता में परिषद के सभापति विनय कुमार पांडेय एवं सचिव नीना श्रीवास्तव परिणाम की घोषणा करेंगे। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना साहिब लोकसभा सीट से नामांकन किया। इस मौके पर उनसे खास बातचीत की अमर उजाला के संवाददाता विवेक शुक्ला ने। देखिए रविशंकर प्रसाद का ये EXCLUSIVE इंटरव्यू। श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने ईस्टर पर हुए आत्मघाती हमलों को रोकने में विफल रहने की बात मानते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। देश के पुलिस प्रमुख पुजिथ जयसंदुरा और रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो ने खुफिया जानकारी होने के बावजूद विस्फोटों को रोकने में अपनी विफलता पर इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल द्वारा प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को समझने के लिए उपभोक्ताओं से जुड़े एक सर्वे में कुछ रोचक बातें सामने आई हैं। शुक्रवार को इंडियन रीडरशिप सर्वे शीर्षक से दो हज़ार उन्नीस के पहले क्वार्टर की रिपोर्ट के अनुसार आज देश में इकतीस करोड़ परिवार हैं, जिनमें से पचानवे प्रतिशत घरों में बिजली और बहत्तर प्रतिशत में रसोई गैस है पहुंच गई है। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के सात सरकारी चीनी मिलों के विनिवेश में कथित घोटाले के मामले में एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा एजेंसी ने चौदह अन्य मिलों के मामले में हुई अनियमितता की जांच के लिए छह प्रिलिमनरी इनक्वायरी भी दर्ज की है। दो हज़ार दस-ग्यारह में जब विनिवेश की प्रक्रिया हुई थी, तब मायावती मुख्यमंत्री थीं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
रायपुर (राज्य ब्यूरो)। स्वामी आत्मानंद स्कूलों के बाद नौनिहालों के लिए खुलने वाली बालवाड़ियों में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक ही पढ़ाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच नौनिहालों को पढ़ाने के मसले पर चल रहे असमंजस को टास्क फोर्स कमेटी ने खत्म कर दिया है।
प्रदेश के सभी जिलों में 16 जून से 6,536 बालवाड़ी शुरू होने जा रही है। इनमें पांच से छह साल तक के बच्चों को दाखिला देकर उनके बौद्धिक विकास के लिए काम किया जाएगा। पहली बार राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से नौनिहालों को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। बालवाड़ियों की निगरानी के लिए राज्य सरकार ने महिला बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति एवं जनजाति विकास विभाग के विभागाध्यक्षों व सचिवों की संयुक्त टास्क फोर्स कमेटी गठित की है।
बालवाड़ी में आंगनबाड़ी के कार्यकर्ता पढ़ाएंगे या प्राइमरी स्कूल के शिक्षक, इस सवाल का कोई ठोस उत्तर अब तक नहीं मिल पा रहा था। टास्क फोर्स कमेटी ने इस मामले में तस्वीर साफ कर दी है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले नौनिहालों के खाने-पीने और खेलने-कूदने की व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग के पास होगी। बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग और पठन-पाठन की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति विकास विभाग के जिम्मे होगी।
नई शिक्षा नीति के तहत राज्य सरकार ने बालवाड़ी की स्थापना की पहल की है। इनमें केंद्रों में बच्चों को प्ले स्कूल की तरह ही खेल आधारित गतिविधियों के जरिए सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के अंतर्गत पांच से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए ऐसे स्थानों पर बालवाड़ी स्थापित की जाएगी, जहां आंगनबाड़ी और प्राइमरी स्कूल एक ही परिसर में हों।
स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने कहा, टास्क फोर्स कमेटी ने तय किया है कि प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ही पास के लगे आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे। वह चाहें तो बच्चों को स्कूल में भी ला सकते हैं।
| रायपुर । स्वामी आत्मानंद स्कूलों के बाद नौनिहालों के लिए खुलने वाली बालवाड़ियों में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक ही पढ़ाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच नौनिहालों को पढ़ाने के मसले पर चल रहे असमंजस को टास्क फोर्स कमेटी ने खत्म कर दिया है। प्रदेश के सभी जिलों में सोलह जून से छः,पाँच सौ छत्तीस बालवाड़ी शुरू होने जा रही है। इनमें पांच से छह साल तक के बच्चों को दाखिला देकर उनके बौद्धिक विकास के लिए काम किया जाएगा। पहली बार राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से नौनिहालों को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। बालवाड़ियों की निगरानी के लिए राज्य सरकार ने महिला बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति एवं जनजाति विकास विभाग के विभागाध्यक्षों व सचिवों की संयुक्त टास्क फोर्स कमेटी गठित की है। बालवाड़ी में आंगनबाड़ी के कार्यकर्ता पढ़ाएंगे या प्राइमरी स्कूल के शिक्षक, इस सवाल का कोई ठोस उत्तर अब तक नहीं मिल पा रहा था। टास्क फोर्स कमेटी ने इस मामले में तस्वीर साफ कर दी है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले नौनिहालों के खाने-पीने और खेलने-कूदने की व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग के पास होगी। बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग और पठन-पाठन की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति विकास विभाग के जिम्मे होगी। नई शिक्षा नीति के तहत राज्य सरकार ने बालवाड़ी की स्थापना की पहल की है। इनमें केंद्रों में बच्चों को प्ले स्कूल की तरह ही खेल आधारित गतिविधियों के जरिए सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के अंतर्गत पांच से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए ऐसे स्थानों पर बालवाड़ी स्थापित की जाएगी, जहां आंगनबाड़ी और प्राइमरी स्कूल एक ही परिसर में हों। स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने कहा, टास्क फोर्स कमेटी ने तय किया है कि प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ही पास के लगे आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे। वह चाहें तो बच्चों को स्कूल में भी ला सकते हैं। |
आज साधारण सुखों पर ध्यान दें। ऐसा महसूस न करें कि खुशी और शांति पाने के लिए आपको दूर देशों में जाना होगा या महंगी मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होना होगा। एहसास करें कि आपको जो कुछ भी चाहिए वह अंदर है।
आज अपने रचनात्मक दिमाग पर ध्यान दें। यह बीज बोने का एक सही समय है जो निश्चित रूप से स्वस्थ और मजबूत होगा। आपके पास अब समृद्ध होने की क्षमता है, लेकिन यह आसानी से नहीं आएगी।
आज प्रेरणा भीतर से आनी चाहिए। एकमात्र चीज जो आपको बिस्तर से बाहर खींच सकती है वह आपकी आंतरिक प्रेरणा है। बहुत ज्यादा पार्टी करना आपको इस हद तक बर्बाद कर सकता है कि आप आगे बढ़ना भी नहीं चाहेंगे। चीजों को संयमित रखना याद रखें।
आज आपका मन स्पष्ट होना चाहिए और संचार बहुत अच्छा होना चाहिए। अपनी बात कहने के लिए बहुत कम शब्दों की जरूरत पड़ेगी। आप कई स्तरों पर लोगों से जुड़ेंगे।
मजबूत ताकतें आज सक्रिय हो सकती हैं और आपको सामान्य से थोड़ा सीधा खड़े होने के लिए कह सकती हैं। अपने कंधों को पीछे रखें और गर्व करें। सिर्फ इसलिए कि आप और दूसरों के बीच असहमति है। अपने आप को किसी से कम मत समझिए।
आज का दिन काफी खास हो सकता है। लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। इसके साथ ही भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, जिससे हर क्षेत्र में सफलता हासिल हो सकती है।
आज आपकी सोच स्थिर और आरक्षित है। आपका दिमाग आपके अहंकार के बिल्कुल अनुरूप है और आप अपने अंदर क्या चल रहा है। उसे सटीक रूप से बताने में सक्षम होंगे। आप लोगों को कितना कुछ बताते हैं। इसे लेकर आप थोड़े संकोची हो सकते हैं।
आप कैसा महसूस करते हैं। यह बताने के लिए आज का दिन बहुत अच्छा है। आपकी सोच तीव्र एवं स्पष्ट है. एक बार जब आप बात करना शुरू करते हैं, तो आप कभी नहीं रुक सकते। लोग आपकी बातों को अतिरिक्त ध्यान से सुनेंगे।
आप पा सकते हैं कि आप का दिमाग आज धीमी गति से चल रहा है। यह ब्रेकडाउन लेन की ओर भी रेंग सकता है। आपको लग सकता है कि बातचीत में अपने मजाकिया खंडन करना थोड़ा कठिन है।
आज बात को संप्रेषित करने के लिए शब्द सबसे अच्छा तरीका नहीं हो सकते हैं। शारीरिक भाषा, स्पर्श और स्वाद अधिक प्रभावी होंगे। आप पाएंगे कि आपकी इंद्रियां तेज हो गई हैं।
आज चीज़ें काफी तीव्र हो सकती हैं। आपके पास बहुत सारी जानकारी आएगी। लेकिन हो सकता है कि सब कुछ उतना अच्छा न हो। ऐसा लगता है कि कोई आपके रास्ते में रोड़ा डाल रहा है, जिससे आपका गुजरना मुश्किल हो रहा है।
आज आपका दिमाग गतिविधि से गूंज सकता है। अचानक ऐसा लगता है जैसे स्पॉटलाइट चालू कर दी गई है। आप मंच पर हैं और आपकी दिमागी शक्ति का परीक्षण किया जा रहा है। क्या आप चुनौती के लिए तैयार हैं?
(साई फीचर्स)
| आज साधारण सुखों पर ध्यान दें। ऐसा महसूस न करें कि खुशी और शांति पाने के लिए आपको दूर देशों में जाना होगा या महंगी मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होना होगा। एहसास करें कि आपको जो कुछ भी चाहिए वह अंदर है। आज अपने रचनात्मक दिमाग पर ध्यान दें। यह बीज बोने का एक सही समय है जो निश्चित रूप से स्वस्थ और मजबूत होगा। आपके पास अब समृद्ध होने की क्षमता है, लेकिन यह आसानी से नहीं आएगी। आज प्रेरणा भीतर से आनी चाहिए। एकमात्र चीज जो आपको बिस्तर से बाहर खींच सकती है वह आपकी आंतरिक प्रेरणा है। बहुत ज्यादा पार्टी करना आपको इस हद तक बर्बाद कर सकता है कि आप आगे बढ़ना भी नहीं चाहेंगे। चीजों को संयमित रखना याद रखें। आज आपका मन स्पष्ट होना चाहिए और संचार बहुत अच्छा होना चाहिए। अपनी बात कहने के लिए बहुत कम शब्दों की जरूरत पड़ेगी। आप कई स्तरों पर लोगों से जुड़ेंगे। मजबूत ताकतें आज सक्रिय हो सकती हैं और आपको सामान्य से थोड़ा सीधा खड़े होने के लिए कह सकती हैं। अपने कंधों को पीछे रखें और गर्व करें। सिर्फ इसलिए कि आप और दूसरों के बीच असहमति है। अपने आप को किसी से कम मत समझिए। आज का दिन काफी खास हो सकता है। लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। इसके साथ ही भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, जिससे हर क्षेत्र में सफलता हासिल हो सकती है। आज आपकी सोच स्थिर और आरक्षित है। आपका दिमाग आपके अहंकार के बिल्कुल अनुरूप है और आप अपने अंदर क्या चल रहा है। उसे सटीक रूप से बताने में सक्षम होंगे। आप लोगों को कितना कुछ बताते हैं। इसे लेकर आप थोड़े संकोची हो सकते हैं। आप कैसा महसूस करते हैं। यह बताने के लिए आज का दिन बहुत अच्छा है। आपकी सोच तीव्र एवं स्पष्ट है. एक बार जब आप बात करना शुरू करते हैं, तो आप कभी नहीं रुक सकते। लोग आपकी बातों को अतिरिक्त ध्यान से सुनेंगे। आप पा सकते हैं कि आप का दिमाग आज धीमी गति से चल रहा है। यह ब्रेकडाउन लेन की ओर भी रेंग सकता है। आपको लग सकता है कि बातचीत में अपने मजाकिया खंडन करना थोड़ा कठिन है। आज बात को संप्रेषित करने के लिए शब्द सबसे अच्छा तरीका नहीं हो सकते हैं। शारीरिक भाषा, स्पर्श और स्वाद अधिक प्रभावी होंगे। आप पाएंगे कि आपकी इंद्रियां तेज हो गई हैं। आज चीज़ें काफी तीव्र हो सकती हैं। आपके पास बहुत सारी जानकारी आएगी। लेकिन हो सकता है कि सब कुछ उतना अच्छा न हो। ऐसा लगता है कि कोई आपके रास्ते में रोड़ा डाल रहा है, जिससे आपका गुजरना मुश्किल हो रहा है। आज आपका दिमाग गतिविधि से गूंज सकता है। अचानक ऐसा लगता है जैसे स्पॉटलाइट चालू कर दी गई है। आप मंच पर हैं और आपकी दिमागी शक्ति का परीक्षण किया जा रहा है। क्या आप चुनौती के लिए तैयार हैं? |
दी है। यह संबंध समवाय संबंध से कथमपि साम्य रखने पर भी उससे भिन्न है । समवाय बाह्य सम्बंध है, परंतु अपृथक् सिद्धि आन्तर सम्बन्ध है । आत्मा तथा शरीर के साथ जो संबंध रहता है वही ईश्वर तथा चिचिद् में रहता है। शरीर वही है जो आत्मा के लिए नियमेन आधेयत्व, नियमेन विधेयत्व तथा नियमेन शेषत्व हो अर्थात् शरीर वही वस्तु है जिसे आत्मा नियमतः धारण करता है तथा अपनी कार्यसिद्धि के लिए कार्य में प्रवृत्त करता है।' इसी प्रकार ईश्वर चिचिको ति करता है, नियमन करता है तथा कार्य में प्रवृत्त करता है। नियामक होने से ईश्वर प्रधान तथा विशेष्य कहलाता है। नियम्य तथा अप्रधान होने से जीव-जगत् विशेषण कहलाते हैं। विशेष्य की सत्ता पृथक् रूप से सिद्ध है, परंतु विशेषण विशेष्य के साथ ही सदा संबद्ध होने के कारण पृथक् रूप से स्वयं सिद्ध है । अतः त्रिविध तत्त्व के मानने पर भी रामानुज अद्वैतवादी ही हैं। वे विशेषणों से युक्त विशेषय की एकता स्वीकार करते हैं। अंगभूत चिचिद् की अंगीभूत ईश्वर से पृथक् सत्ता न होने के कारण ब्रह्म अद्वैतरूप है । इसी वैलक्षण्य के कारण यह संप्रदाय विशिष्टाद्वैत के नाम से प्रसिद्ध हैं ।
ईश्वर - ईश्वर समस्त जगत् का निमित्त कारण होते हुए भी उपादान कारण है । जगत् की सृष्टि भगवान् की लीला से ही उत्पन्न है । सृष्टि में वह सृष्ट पदार्थों के साथ लीला किया करता है । उसी प्रकार संहृति भी उसकी एक विशिष्ट लीला ही है, क्योंकि इस व्यापार में ईश्वर आनंद का अनुभव करता है । जीव तथा
१ सर्व पुरमपुरुषेण सर्वात्मना स्वायें नियाम्यं घार्य तच्छेषतैकस्वरूपमिति सर्व चेतनाचेतनं तस्य स्वरूपम् । - श्रीभाष्य ( २।१।६ ) | दी है। यह संबंध समवाय संबंध से कथमपि साम्य रखने पर भी उससे भिन्न है । समवाय बाह्य सम्बंध है, परंतु अपृथक् सिद्धि आन्तर सम्बन्ध है । आत्मा तथा शरीर के साथ जो संबंध रहता है वही ईश्वर तथा चिचिद् में रहता है। शरीर वही है जो आत्मा के लिए नियमेन आधेयत्व, नियमेन विधेयत्व तथा नियमेन शेषत्व हो अर्थात् शरीर वही वस्तु है जिसे आत्मा नियमतः धारण करता है तथा अपनी कार्यसिद्धि के लिए कार्य में प्रवृत्त करता है।' इसी प्रकार ईश्वर चिचिको ति करता है, नियमन करता है तथा कार्य में प्रवृत्त करता है। नियामक होने से ईश्वर प्रधान तथा विशेष्य कहलाता है। नियम्य तथा अप्रधान होने से जीव-जगत् विशेषण कहलाते हैं। विशेष्य की सत्ता पृथक् रूप से सिद्ध है, परंतु विशेषण विशेष्य के साथ ही सदा संबद्ध होने के कारण पृथक् रूप से स्वयं सिद्ध है । अतः त्रिविध तत्त्व के मानने पर भी रामानुज अद्वैतवादी ही हैं। वे विशेषणों से युक्त विशेषय की एकता स्वीकार करते हैं। अंगभूत चिचिद् की अंगीभूत ईश्वर से पृथक् सत्ता न होने के कारण ब्रह्म अद्वैतरूप है । इसी वैलक्षण्य के कारण यह संप्रदाय विशिष्टाद्वैत के नाम से प्रसिद्ध हैं । ईश्वर - ईश्वर समस्त जगत् का निमित्त कारण होते हुए भी उपादान कारण है । जगत् की सृष्टि भगवान् की लीला से ही उत्पन्न है । सृष्टि में वह सृष्ट पदार्थों के साथ लीला किया करता है । उसी प्रकार संहृति भी उसकी एक विशिष्ट लीला ही है, क्योंकि इस व्यापार में ईश्वर आनंद का अनुभव करता है । जीव तथा एक सर्व पुरमपुरुषेण सर्वात्मना स्वायें नियाम्यं घार्य तच्छेषतैकस्वरूपमिति सर्व चेतनाचेतनं तस्य स्वरूपम् । - श्रीभाष्य |
2012 में, आरक्षित और सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए पेंशन में वृद्धि की गई। तब अपनाए गए निर्णय के अनुसार, उन्हें कानून द्वारा स्थापित आकार तक पहुंचने तक सालाना दो प्रतिशत की वृद्धि करनी थी। लेकिन इन दायित्वों को राज्य द्वारा पूरा नहीं किया जाता है, और प्रचंड कीमत बढ़ जाती है, मुद्रास्फीति पहले से बने भत्ते को भी खा जाती है। विधायक और सरकार धारा 2 कला का व्यवस्थित रूप से उल्लंघन करते हैं। रूसी संघ के संविधान का 19। वास्तव में, हम सैन्य सेवा से संबंधित सामाजिक आधार पर पेंशनभोगियों के खिलाफ भेदभाव के बारे में बात कर रहे हैं।
कानून ने निर्धारित किया कि जनवरी 1 से जनवरी 2012 तक, मौद्रिक भत्ता खाते में लिया जाता है, जब वेतन के 54 प्रतिशत की राशि में पेंशन की गणना की जाती है, और जनवरी 1 से 2013 तक सालाना दो प्रतिशत की वृद्धि होगी जब तक कि 100 प्रतिशत अपने आकार (इंडेक्स) तक नहीं पहुंच जाता।
कानून "2017 वर्ष के लिए संघीय बजट पर और 2018 और 2019 वर्ष की योजना अवधि" पहले के फैसले जनवरी 1 2018 वर्ष तक निलंबित कर दिए गए थे। लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पेंशन प्रतिबंध लंबे समय तक नहीं रहेगा। यह उन लोगों पर भी लागू होता है, जिन्होंने सशस्त्र बलों, आंतरिक मामलों के विभाग, राज्य अग्निशमन सेवा, औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों, संस्थानों और प्रायद्वीपीय प्रणाली, रूसी रक्षक और इन लोगों के परिवारों में सेवा की।
आंशिक रूप से, सरकारी अधिकारियों को समझा जा सकता हैः एंटी-रूसी प्रतिबंध, उत्पादन में गिरावट, कर संग्रह के साथ समस्याएं। लेकिन फिर सभी पेंशनर्स को बोझ उठाना चाहिए। हालांकि, कुछ विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति में थे। इंडेक्सेशन फ्रीज और एक कमी गुणांक की शुरूआत ने सैन्य पेंशनरों की निम्न श्रेणियों को प्रभावित नहीं किया, जिसमें उनके परिवार के सदस्य शामिल हैंः
रूसी संघ और सैन्य अदालतों के सर्वोच्च न्यायालय के सैन्य कॉलेजियम के न्यायाधीश;
अभियोजन पक्ष (सैन्य अभियोजन अधिकारियों से);
रूसी संघ की जांच समिति के कर्मचारी (आरएफ आईसी के सैन्य खोजी निकाय सहित);
संघीय सरकार के सिविल सेवक।
विधायकों की ऐसी चयनात्मकता, सैन्य पेंशनरों और उनके समान व्यक्तियों के संबंध में रूसी संघ की सरकार कला द्वारा स्थापित समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। रूसी संघ के संविधान के 19 और रूसी संघ के संवैधानिक न्यायालय के डिक्री ने वर्ष के 16 के 2007 दिनांक सं। और समान श्रेणी (समान या समान स्थितियों में व्यक्तियों के विभिन्न उपचारों का निषेध)। " लेकिन संवैधानिक न्यायालय के फैसले सभी प्रतिनिधि, कार्यकारी और न्यायिक अधिकारियों, स्थानीय सरकारों, उद्यमों, संस्थानों, संगठनों, अधिकारियों, नागरिकों और उनके संघों के लिए रूसी संघ के पूरे क्षेत्र पर बाध्यकारी हैं।
विधायक और रूसी संघ की सरकार एक लंबे समय से सेवा और टैरिफ श्रेणियों के लिए घटते गुणांक, कम प्रतिशत के रूप में विभिन्न प्रतिबंधों को लागू कर रहे हैं, केवल एक एडिटिव की स्थापना, पेंशन की गणना करते समय ध्यान में रखते हुए, 2012-2013 वर्षों के इंडेक्सेशन के निलंबन केवल सैन्य कर्मियों और उनके समकक्ष व्यक्तियों पर लागू होते हैं?
विधायी कृत्यों के पत्र से यह इस प्रकार है कि इस तरह के प्रतिबंध पूरी तरह से राष्ट्रपति के प्रशासन के संघीय राज्य सिविल सेवकों और रूसी संघ की सरकार पर लागू होना चाहिए, संघीय स्तर के लोगों की तैनाती, राज्य निगमों के अधिकारी। हालाँकि, यह नहीं है। इसके अलावा, वर्ष 2 के 2012 के राष्ट्रपति डिक्री द्वारा 1100 पर "रूसी संघ के राष्ट्रपति के प्रशासन के संघीय राज्य सिविल सेवकों के पारिश्रमिक में सुधार" पर, संघीय राज्य सिविल सेवकों की मौद्रिक सामग्री को बढ़ाया गया और सैन्य कर्मियों के मौद्रिक सामग्री के बराबर किया गया। उसी समय, कानूनविद अपने पेंशनरों की गणना करने के लिए उनमें कमी कारक लागू करने के लिए "भूल गए", हालांकि, सैन्य जांचकर्ताओं, अभियोजकों और न्यायाधीशों के लिए। और यह इस तथ्य के बावजूद है कि ये सभी श्रेणियां एक ही प्रकार की संघीय सार्वजनिक सेवा से संबंधित हैं। एक समस्या!
सही ढंग से, दिग्गजों ने सुप्रीम कमांडर-इन-चीफ, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक पत्र में सवाल उठाया हैः यदि, अनुच्छेद 1, कला के अनुसार। रूसी संघ के संविधान का 7 हम एक सामाजिक राज्य में रहते हैं, फिर न्याय कहां है? संघीय लोक सेवकों के एक ही समूह में पेंशन फार्मूला लागू करने में यह स्तरीकरण और चयनात्मकता क्यों है?
इस मामले में, विधायकों, रूसी संघ की सरकार ने कला के अनुभाग 2 का घोर उल्लंघन किया। रूसी संघ के संविधान का 19, जहां यह कहा गया हैः "राज्य लिंग, जाति, राष्ट्रीयता, भाषा, मूल, संपत्ति और आधिकारिक स्थिति, निवास स्थान, धर्म, मान्यताओं, सार्वजनिक संगठनों में सदस्यता, और की परवाह किए बिना मानव और नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता की समानता की गारंटी देता है। " अन्य परिस्थितियां। सामाजिक, नस्लीय, राष्ट्रीय, भाषाई या धार्मिक संबद्धता के आधार पर नागरिकों के अधिकारों को प्रतिबंधित करने का कोई भी तरीका निषिद्ध है। "
कला के अनुसार। एक्सएनयूएमएक्स के आरएफ कानून के एक्सएनयूएमएक्स फरवरी वर्ष के एक्सएनयूएमएक्स पर नहीं। एक्सएनयूएमएक्स-एक्सएनयूएमएक्स (जुलाई एक्सएनयूएमएक्स पर एक्सएनयूएमएक्स पर संशोधित के रूप में, एक्सएनयूएमएक्स पर दिसंबर एक्सएनयूएमएक्स में संशोधन के रूप में) "सैन्य मामलों में सेवा देने वाले व्यक्तियों के पेंशन प्रावधान पर, आंतरिक मामलों मेंः मादक पदार्थों के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए . . . "जब सैनिकों और व्यक्तियों के लिए पेंशन की गणना वेतन के लिए, सैन्य पदों और सैन्य रैंक के लिए वेतन और केवल एक मासिक भत्ता (लंबी सेवा के लिए) को ध्यान में रखा जाता है। नकद सहायता के लिए अन्य भत्तों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
और संघीय कर्मचारियों के लिए जनवरी के 1 के 2017 से खंड 2 के खंड और 3 के RF सरकार के खंड 17. 10. 2009 के अनुसार, 818 की सेवा पेंशन की लंबाई की गणना उनके औसत मासिक वेतन से की जाती है। इसे निर्धारित करने के लिए, निम्नलिखित भुगतानों से मिलकर सिविल सेवकों की मौद्रिक सामग्री को ध्यान में रखा जाता हैः
संघीय राज्य सिविल सेवा के निर्दिष्ट वर्ग रैंक के अनुसार मासिक वेतन;
संघीय राज्य सिविल सेवा में सेवा के वर्षों के लिए आधिकारिक वेतन के लिए एक मासिक बोनस;
सेवा की विशेष शर्तों के लिए आधिकारिक वेतन का मासिक बोनस;
एक राज्य गुप्त बनाने की जानकारी के साथ काम के लिए आधिकारिक वेतन का मासिक प्रतिशत बोनस;
मासिक नकद इनाम;
विशेष रूप से महत्वपूर्ण और कठिन कार्य करने के लिए बोनस;
सिविल सेवकों के पेरोल फंड की कीमत पर भुगतान किए गए वार्षिक भुगतान अवकाश और सामग्री सहायता के प्रावधान में एकमुश्त भुगतान।
प्रासंगिक संघीय कानूनों और नियमों द्वारा प्रदान किए गए अन्य भुगतान भी जोड़े जाते हैं। दूसरे शब्दों में, सिविल सेवकों के लिए सेवा पेंशन की लंबाई की गणना उनकी सभी आय से की जाती है।
यदि सशस्त्र बलों में सेवा संघीय सार्वजनिक सेवा की एकल प्रणाली का हिस्सा है, तो सैन्य और समकक्ष व्यक्तियों के लिए क्यों जब पेंशन की गणना केवल एक मासिक भत्ते को ध्यान में रखते हुए की जाती है, लेकिन संघीय सिविल सेवकों के लिए - सब कुछ? इस मामले में, विधायकों, रूसी संघ की सरकार, हम देखते हैं, पेंशन प्रावधान के क्षेत्र में समानता के सिद्धांत का उल्लंघन किया है, एक ही श्रेणी से संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों में अंतर की शुरूआत को रोकते हैं, जिनका कोई उद्देश्य, उचित स्पष्टीकरण नहीं है, जो संवैधानिक न्यायालय के उक्त निर्णय द्वारा स्थापित है। और उनके फैसले पूरे रूसी संघ के लिए बाध्यकारी हैं। ऐसा लगता है कि अधिकारियों के लिए हमारे देश की रक्षा क्षमताओं की चिंता कहीं न कहीं पृष्ठभूमि में है।
संघीय नागरिक सेवकों के लिए वरिष्ठता (तालिका 15. 12. 2001) की गणना पर परिशिष्ट के अनुसार, 166 नंबर 1-State "रूसी संघ में राज्य पेंशन प्रावधान" का कानून, सार्वजनिक सेवा अनुभव (20 वर्ष) की एक लंबी अवधि के लिए संक्रमण की दस साल की प्रक्रिया स्थापित करता है, जो उन्हें प्राप्त करने (नियुक्ति) की अनुमति देता है। सेवा पेंशन। इसका मतलब यह है कि संघीय राज्य सिविल सेवकों (20 वर्ष) द्वारा एक वरिष्ठ नागरिकता पेंशन प्राप्त करने के लिए आवश्यक सेवा की न्यूनतम लंबाई केवल 10 वर्षों के बाद सैन्य कर्मियों के लिए स्थापित के बराबर होगी। यह "उत्थान" अधिकारियों को राज्य की आर्थिक और वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद, उच्च पेंशन और पूर्व सेवानिवृत्ति के अधिकार को बनाए रखने की अनुमति देता है, जिसे सेना 10 वर्षों तक बर्दाश्त नहीं कर सकती है। क्या वास्तव में जीवन का जोखिम, कठिनाइयों और सेवा से वंचित होना, काम की जटिलता और अलमारियाँ की चुप्पी में जिम्मेदारी है?
समान कानून (15. 12. 2001 सं। 166-X पर संघीय कानून) सेवा की लंबाई (तालिका संख्या 2) के आधार पर संघीय लोक सेवक द्वारा प्राप्त पेंशन का प्रतिशत स्थापित करता है।
यह 2 तालिका का अनुसरण करता है जो संघीय राज्य सिविल सेवकों दोनों को प्राप्त हुआ है और सैन्य कर्मियों और उनके लिए समान (60%) के लिए कानून द्वारा स्थापित है, की तुलना में अन्य पांच वर्षों के लिए उच्च पेंशन (51 से 50% तक) प्राप्त करना जारी रखेगा। सेवा के वर्ष। और इसके लिए पैसा संघीय बजट में है।
लेकिन फिर कैसे राज्य के लोगों और उनके प्रतिनिधियों को बचाने, सामाजिक गारंटी को कम करने की आवश्यकता, बेल्ट को कसने, अनुक्रमण को रद्द करने, आदि के बारे में कई अपील को समझने के लिए? यह सब संघीय राज्य सिविल सेवकों पर लागू क्यों नहीं होता? यह पता चला है कि उनके पास सबसे कठिन और गहन मार्ग है। इसलिए, वे सैन्य कर्मियों और व्यक्तियों के समान सामाजिक रूप से अधिक संरक्षित हैं। यद्यपि जीवन और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिमों से जुड़े लोगों सहित किसी भी स्थिति में कार्य करने की आवश्यकता है, सैन्य विशेष सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने के लिए राज्य के दायित्व को बाध्य करता है। वास्तव में, यह विपरीत निकला।
07. 11. 2011 सं 306-On के संघीय कानून में "सैनिकों के मौद्रिक भत्ता और उन पर अलग से भुगतान के प्रावधान" पर, 13 कला को खंडित करें। 2 सैलरी की सैलरी के लिए मासिक लॉन्ग-टर्म अलाउंस स्थापित करता है, जो दो साल की सेवा के बाद ही प्रभावी हो जाता है।
इसी समय, 27. 07. 2004 नंबर 79-time "रूसी संघ की राज्य सिविल सेवा पर" के कानून के अनुसार, सिविल सेवा में सेवा के वर्षों के लिए आधिकारिक वेतन का मासिक बोनस सेवा के वर्ष के 1 (उप-अनुच्छेद 1, अनुच्छेद 5, कला) के 50 से प्रभावी होना शुरू होता है। )।
सवाल यह है कि सैन्य कर्मियों को दो साल बाद ही बोनस क्यों मिलता है? क्या वे इस समय सीमा से पहले युद्ध ड्यूटी नहीं करते हैं, सैन्य संघर्षों में भाग नहीं लेते हैं और वहां नहीं मर सकते हैं? क्या इसका मतलब यह है कि सैन्य कर्मियों को उनकी सेवा के पहले दो वर्षों के लिए शपथ से छूट दी गई है।
अगली बकवास। 21. 12. 2011 नंबर 1073 के रूसी संघ की सरकार का फरमान "सैन्य सेवकों के लिए सैन्य सेवा की विशेष शर्तों के अनुबंध के तहत मासिक भत्ता का भुगतान करने की प्रक्रिया पर" आयोजित सैन्य पद के अनुसार मासिक वेतन के XVUMX प्रतिशत तक अधिकतम मासिक भत्ता स्थापित किया। और सिविल सेवा की विशेष शर्तों के लिए 100 प्रतिशत तक (एक अन्य विधायी अधिनियम के अनुसार) भुगतान किया जाता है।
या ऐसा तथ्य। फरवरी 2017 में, बीमा (सिविल लेबर) पेंशन का इंडेक्स 5,4 प्रतिशत की रोजस्टैट द्वारा अनुमोदित मुद्रास्फीति, और सेना के चार प्रतिशत द्वारा अनुक्रमित किया गया था।
यदि सशस्त्र बलों में सेवा वास्तव में एक विशेष प्रकार की संघीय सिविल सेवा है और राज्य की बाध्यता को बढ़ाती है ताकि सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जा सके, तो विधायक और रूसी संघ की सरकार ने मासिक भत्ते की इतनी अधिक मात्रा निर्धारित करके सेना के अधिकारों का उल्लंघन क्यों किया? कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पेंशनर्स जी। ज़ावालोव, एल। ग्रिशिन, वी। रसाकोव, ए। इफ़्रेमोव, ई। विन्नीत्स्की, वी। करबानोव, ए। बंककोवस्की, आई। श्वेत, और कई अन्य लोग यह सवाल पूछ रहे हैं।
सेना के साथ तुलना में संघीय राज्य सिविल सेवकों की गतिविधियों को विनियमित करने वाले केवल कुछ मानक कानूनी कृत्यों के विश्लेषण के परिणामस्वरूप, आप निम्नलिखित निष्कर्ष पर आते हैंः
कानूनविदों और रूसी संघ की सरकार ने खंड 2 आर्ट का सीधा उल्लंघन किया। रूसी संघ के संविधान का 19, रूसी संघ के संवैधानिक न्यायालय के फैसले, अन्य विधायी कार्य और सिविल सेवकों को बहुत अधिक विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति में डालते हैं। सिविल सेवकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के स्थापित उपायों की गुंजाइश और सामग्री उनकी स्थिति, सेवा की प्रकृति, नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं है;
इन कार्यों के द्वारा, विधायकों, रूसी संघ की सरकार ने रूसी संघ के संविधान द्वारा स्थापित सैन्य सेवा की भूमिका और विशेष स्थिति को कम कर दिया, और इस प्रकार सैन्य पेंशनरों और व्यक्तियों के भेदभाव को उनके सामाजिक जुड़ाव के आधार पर उनके लिए अनुमति दी;
कानून निर्माताओं और रूसी संघ की सरकार ने संघीय राज्य सिविल सेवा के प्रतिनिधियों के लिए काफी हद तक उच्च सामाजिक लाभ जो कि उचित सीमा से अधिक है, सभी प्रकार की सिविल सेवा, इसके निर्माण और कामकाज के सिद्धांतों के परस्पर संबंध की प्रणाली को कमजोर करती है;
परिणामी कानूनी संघर्ष को हल करने में और देरी ने रूसी कानूनों के न्याय में, मातृभूमि, दिग्गजों और उनके परिवारों के सदस्यों को राज्य के अधिकारियों, उच्च कमान में विश्वास के रक्षक को कमजोर कर दिया। अधिकारियों के बारे में नकारात्मक भावनाएं तेज हो जाती हैं, आम नागरिकों को सेना में बेटों को नहीं भेजने के निर्णय पर धकेल दिया जाता है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि "प्रभावी प्रबंधक" होना मातृभूमि की रक्षा करने की तुलना में अधिक लाभदायक और प्रतिष्ठित है;
सिविल सेवकों द्वारा किए गए कार्यों के महत्व को कम किए बिना, सशस्त्र बलों के दिग्गजों का मानना है कि उनके लिए राज्य द्वारा स्थापित सामाजिक गारंटी और सैन्य सेवा के प्रतिनिधि वर्तमान में देश में कठिन वित्तीय और आर्थिक स्थिति के अनुरूप नहीं हैं, राज्य की क्षमताओं और समायोजित करने की आवश्यकता है।
С учетом вышеизложенного ветераны армии и флота, других силовых структур предлагают:
1। रूसी संघ के संविधान के प्रावधानों और मानदंडों, अन्य विधायी कृत्यों के अनुपालन के लिए संघीय राज्य सिविल सेवकों, सैन्य कर्मियों और उनके साथ जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों को विनियमित करने के लिए पहले से अपनाई गई विनियामक कानूनी कृत्यों की एक कानूनी परीक्षा आयोजित करें।
2। यदि आवश्यक हो, तो संबंधित सार्वजनिक प्राधिकारियों को नियामक ढांचे में परिवर्तन (परिवर्धन) तैयार करने और करने के लिए बाध्य करें। रूसी संघ की सरकार को कम से कम दो प्रतिशत सैन्य सेवा से छुट्टी पाने वाले नागरिकों के लिए पेंशन की वार्षिक वृद्धि सुनिश्चित करनी चाहिए।
3। सैन्य सेवा से संबंधित सामाजिक आधार पर पेंशनरों के भेदभाव को रोकने के उपाय करें।
केवल निराशा ही सच्चाई और न्याय की तलाश में उच्च अधिकारियों के लिए दिग्गजों को प्रोत्साहित करती है। जैसा कि रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय के लिए, यह निश्चित रूप से सैन्य कर्मियों के अधिकारों के लिए लड़ता है, लेकिन अब सीरिया और पूर्वी यूक्रेन में स्थिति के संबंध में, यह इसके ऊपर नहीं है। इसके अलावा, इसके कुछ प्रतिनिधि बीमा (उम्र के अनुसार सिविल श्रम) के साथ विभागीय पेंशन की तुलना करते हैं, जो सच नहीं है। तुलना के लिए, आपको संघीय सिविल सेवकों की पेंशन लेने की आवश्यकता है।
और आखिरी वाला। श्रम और सामाजिक सुरक्षा मंत्री मैक्सिम टोपिलिन के अनुसार, अगले तीन वर्षों में रूस में पेंशन का वास्तविक आकार घट जाएगा। और इसका मतलब है कि सामाजिक तनाव में वृद्धि, जिसके कारण सरकार चाहे या नहीं, इस पर ध्यान देना होगा। खासकर 2018 राष्ट्रपति चुनाव की पूर्व संध्या पर।
| दो हज़ार बारह में, आरक्षित और सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए पेंशन में वृद्धि की गई। तब अपनाए गए निर्णय के अनुसार, उन्हें कानून द्वारा स्थापित आकार तक पहुंचने तक सालाना दो प्रतिशत की वृद्धि करनी थी। लेकिन इन दायित्वों को राज्य द्वारा पूरा नहीं किया जाता है, और प्रचंड कीमत बढ़ जाती है, मुद्रास्फीति पहले से बने भत्ते को भी खा जाती है। विधायक और सरकार धारा दो कला का व्यवस्थित रूप से उल्लंघन करते हैं। रूसी संघ के संविधान का उन्नीस। वास्तव में, हम सैन्य सेवा से संबंधित सामाजिक आधार पर पेंशनभोगियों के खिलाफ भेदभाव के बारे में बात कर रहे हैं। कानून ने निर्धारित किया कि जनवरी एक से जनवरी दो हज़ार बारह तक, मौद्रिक भत्ता खाते में लिया जाता है, जब वेतन के चौवन प्रतिशत की राशि में पेंशन की गणना की जाती है, और जनवरी एक से दो हज़ार तेरह तक सालाना दो प्रतिशत की वृद्धि होगी जब तक कि एक सौ प्रतिशत अपने आकार तक नहीं पहुंच जाता। कानून "दो हज़ार सत्रह वर्ष के लिए संघीय बजट पर और दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार उन्नीस वर्ष की योजना अवधि" पहले के फैसले जनवरी एक दो हज़ार अट्ठारह वर्ष तक निलंबित कर दिए गए थे। लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पेंशन प्रतिबंध लंबे समय तक नहीं रहेगा। यह उन लोगों पर भी लागू होता है, जिन्होंने सशस्त्र बलों, आंतरिक मामलों के विभाग, राज्य अग्निशमन सेवा, औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों, संस्थानों और प्रायद्वीपीय प्रणाली, रूसी रक्षक और इन लोगों के परिवारों में सेवा की। आंशिक रूप से, सरकारी अधिकारियों को समझा जा सकता हैः एंटी-रूसी प्रतिबंध, उत्पादन में गिरावट, कर संग्रह के साथ समस्याएं। लेकिन फिर सभी पेंशनर्स को बोझ उठाना चाहिए। हालांकि, कुछ विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति में थे। इंडेक्सेशन फ्रीज और एक कमी गुणांक की शुरूआत ने सैन्य पेंशनरों की निम्न श्रेणियों को प्रभावित नहीं किया, जिसमें उनके परिवार के सदस्य शामिल हैंः रूसी संघ और सैन्य अदालतों के सर्वोच्च न्यायालय के सैन्य कॉलेजियम के न्यायाधीश; अभियोजन पक्ष ; रूसी संघ की जांच समिति के कर्मचारी ; संघीय सरकार के सिविल सेवक। विधायकों की ऐसी चयनात्मकता, सैन्य पेंशनरों और उनके समान व्यक्तियों के संबंध में रूसी संघ की सरकार कला द्वारा स्थापित समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। रूसी संघ के संविधान के उन्नीस और रूसी संघ के संवैधानिक न्यायालय के डिक्री ने वर्ष के सोलह के दो हज़ार सात दिनांक सं। और समान श्रेणी । " लेकिन संवैधानिक न्यायालय के फैसले सभी प्रतिनिधि, कार्यकारी और न्यायिक अधिकारियों, स्थानीय सरकारों, उद्यमों, संस्थानों, संगठनों, अधिकारियों, नागरिकों और उनके संघों के लिए रूसी संघ के पूरे क्षेत्र पर बाध्यकारी हैं। विधायक और रूसी संघ की सरकार एक लंबे समय से सेवा और टैरिफ श्रेणियों के लिए घटते गुणांक, कम प्रतिशत के रूप में विभिन्न प्रतिबंधों को लागू कर रहे हैं, केवल एक एडिटिव की स्थापना, पेंशन की गणना करते समय ध्यान में रखते हुए, दो हज़ार बारह-दो हज़ार तेरह वर्षों के इंडेक्सेशन के निलंबन केवल सैन्य कर्मियों और उनके समकक्ष व्यक्तियों पर लागू होते हैं? विधायी कृत्यों के पत्र से यह इस प्रकार है कि इस तरह के प्रतिबंध पूरी तरह से राष्ट्रपति के प्रशासन के संघीय राज्य सिविल सेवकों और रूसी संघ की सरकार पर लागू होना चाहिए, संघीय स्तर के लोगों की तैनाती, राज्य निगमों के अधिकारी। हालाँकि, यह नहीं है। इसके अलावा, वर्ष दो के दो हज़ार बारह के राष्ट्रपति डिक्री द्वारा एक हज़ार एक सौ पर "रूसी संघ के राष्ट्रपति के प्रशासन के संघीय राज्य सिविल सेवकों के पारिश्रमिक में सुधार" पर, संघीय राज्य सिविल सेवकों की मौद्रिक सामग्री को बढ़ाया गया और सैन्य कर्मियों के मौद्रिक सामग्री के बराबर किया गया। उसी समय, कानूनविद अपने पेंशनरों की गणना करने के लिए उनमें कमी कारक लागू करने के लिए "भूल गए", हालांकि, सैन्य जांचकर्ताओं, अभियोजकों और न्यायाधीशों के लिए। और यह इस तथ्य के बावजूद है कि ये सभी श्रेणियां एक ही प्रकार की संघीय सार्वजनिक सेवा से संबंधित हैं। एक समस्या! सही ढंग से, दिग्गजों ने सुप्रीम कमांडर-इन-चीफ, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक पत्र में सवाल उठाया हैः यदि, अनुच्छेद एक, कला के अनुसार। रूसी संघ के संविधान का सात हम एक सामाजिक राज्य में रहते हैं, फिर न्याय कहां है? संघीय लोक सेवकों के एक ही समूह में पेंशन फार्मूला लागू करने में यह स्तरीकरण और चयनात्मकता क्यों है? इस मामले में, विधायकों, रूसी संघ की सरकार ने कला के अनुभाग दो का घोर उल्लंघन किया। रूसी संघ के संविधान का उन्नीस, जहां यह कहा गया हैः "राज्य लिंग, जाति, राष्ट्रीयता, भाषा, मूल, संपत्ति और आधिकारिक स्थिति, निवास स्थान, धर्म, मान्यताओं, सार्वजनिक संगठनों में सदस्यता, और की परवाह किए बिना मानव और नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता की समानता की गारंटी देता है। " अन्य परिस्थितियां। सामाजिक, नस्लीय, राष्ट्रीय, भाषाई या धार्मिक संबद्धता के आधार पर नागरिकों के अधिकारों को प्रतिबंधित करने का कोई भी तरीका निषिद्ध है। " कला के अनुसार। एक्सएनयूएमएक्स के आरएफ कानून के एक्सएनयूएमएक्स फरवरी वर्ष के एक्सएनयूएमएक्स पर नहीं। एक्सएनयूएमएक्स-एक्सएनयूएमएक्स "सैन्य मामलों में सेवा देने वाले व्यक्तियों के पेंशन प्रावधान पर, आंतरिक मामलों मेंः मादक पदार्थों के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए . . . "जब सैनिकों और व्यक्तियों के लिए पेंशन की गणना वेतन के लिए, सैन्य पदों और सैन्य रैंक के लिए वेतन और केवल एक मासिक भत्ता को ध्यान में रखा जाता है। नकद सहायता के लिए अन्य भत्तों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। और संघीय कर्मचारियों के लिए जनवरी के एक के दो हज़ार सत्रह से खंड दो के खंड और तीन के RF सरकार के खंड सत्रह. दस. दो हज़ार नौ के अनुसार, आठ सौ अट्ठारह की सेवा पेंशन की लंबाई की गणना उनके औसत मासिक वेतन से की जाती है। इसे निर्धारित करने के लिए, निम्नलिखित भुगतानों से मिलकर सिविल सेवकों की मौद्रिक सामग्री को ध्यान में रखा जाता हैः संघीय राज्य सिविल सेवा के निर्दिष्ट वर्ग रैंक के अनुसार मासिक वेतन; संघीय राज्य सिविल सेवा में सेवा के वर्षों के लिए आधिकारिक वेतन के लिए एक मासिक बोनस; सेवा की विशेष शर्तों के लिए आधिकारिक वेतन का मासिक बोनस; एक राज्य गुप्त बनाने की जानकारी के साथ काम के लिए आधिकारिक वेतन का मासिक प्रतिशत बोनस; मासिक नकद इनाम; विशेष रूप से महत्वपूर्ण और कठिन कार्य करने के लिए बोनस; सिविल सेवकों के पेरोल फंड की कीमत पर भुगतान किए गए वार्षिक भुगतान अवकाश और सामग्री सहायता के प्रावधान में एकमुश्त भुगतान। प्रासंगिक संघीय कानूनों और नियमों द्वारा प्रदान किए गए अन्य भुगतान भी जोड़े जाते हैं। दूसरे शब्दों में, सिविल सेवकों के लिए सेवा पेंशन की लंबाई की गणना उनकी सभी आय से की जाती है। यदि सशस्त्र बलों में सेवा संघीय सार्वजनिक सेवा की एकल प्रणाली का हिस्सा है, तो सैन्य और समकक्ष व्यक्तियों के लिए क्यों जब पेंशन की गणना केवल एक मासिक भत्ते को ध्यान में रखते हुए की जाती है, लेकिन संघीय सिविल सेवकों के लिए - सब कुछ? इस मामले में, विधायकों, रूसी संघ की सरकार, हम देखते हैं, पेंशन प्रावधान के क्षेत्र में समानता के सिद्धांत का उल्लंघन किया है, एक ही श्रेणी से संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों में अंतर की शुरूआत को रोकते हैं, जिनका कोई उद्देश्य, उचित स्पष्टीकरण नहीं है, जो संवैधानिक न्यायालय के उक्त निर्णय द्वारा स्थापित है। और उनके फैसले पूरे रूसी संघ के लिए बाध्यकारी हैं। ऐसा लगता है कि अधिकारियों के लिए हमारे देश की रक्षा क्षमताओं की चिंता कहीं न कहीं पृष्ठभूमि में है। संघीय नागरिक सेवकों के लिए वरिष्ठता की गणना पर परिशिष्ट के अनुसार, एक सौ छयासठ नंबर एक-State "रूसी संघ में राज्य पेंशन प्रावधान" का कानून, सार्वजनिक सेवा अनुभव की एक लंबी अवधि के लिए संक्रमण की दस साल की प्रक्रिया स्थापित करता है, जो उन्हें प्राप्त करने की अनुमति देता है। सेवा पेंशन। इसका मतलब यह है कि संघीय राज्य सिविल सेवकों द्वारा एक वरिष्ठ नागरिकता पेंशन प्राप्त करने के लिए आवश्यक सेवा की न्यूनतम लंबाई केवल दस वर्षों के बाद सैन्य कर्मियों के लिए स्थापित के बराबर होगी। यह "उत्थान" अधिकारियों को राज्य की आर्थिक और वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद, उच्च पेंशन और पूर्व सेवानिवृत्ति के अधिकार को बनाए रखने की अनुमति देता है, जिसे सेना दस वर्षों तक बर्दाश्त नहीं कर सकती है। क्या वास्तव में जीवन का जोखिम, कठिनाइयों और सेवा से वंचित होना, काम की जटिलता और अलमारियाँ की चुप्पी में जिम्मेदारी है? समान कानून सेवा की लंबाई के आधार पर संघीय लोक सेवक द्वारा प्राप्त पेंशन का प्रतिशत स्थापित करता है। यह दो तालिका का अनुसरण करता है जो संघीय राज्य सिविल सेवकों दोनों को प्राप्त हुआ है और सैन्य कर्मियों और उनके लिए समान के लिए कानून द्वारा स्थापित है, की तुलना में अन्य पांच वर्षों के लिए उच्च पेंशन प्राप्त करना जारी रखेगा। सेवा के वर्ष। और इसके लिए पैसा संघीय बजट में है। लेकिन फिर कैसे राज्य के लोगों और उनके प्रतिनिधियों को बचाने, सामाजिक गारंटी को कम करने की आवश्यकता, बेल्ट को कसने, अनुक्रमण को रद्द करने, आदि के बारे में कई अपील को समझने के लिए? यह सब संघीय राज्य सिविल सेवकों पर लागू क्यों नहीं होता? यह पता चला है कि उनके पास सबसे कठिन और गहन मार्ग है। इसलिए, वे सैन्य कर्मियों और व्यक्तियों के समान सामाजिक रूप से अधिक संरक्षित हैं। यद्यपि जीवन और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिमों से जुड़े लोगों सहित किसी भी स्थिति में कार्य करने की आवश्यकता है, सैन्य विशेष सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने के लिए राज्य के दायित्व को बाध्य करता है। वास्तव में, यह विपरीत निकला। सात. ग्यारह. दो हज़ार ग्यारह सं तीन सौ छः-On के संघीय कानून में "सैनिकों के मौद्रिक भत्ता और उन पर अलग से भुगतान के प्रावधान" पर, तेरह कला को खंडित करें। दो सैलरी की सैलरी के लिए मासिक लॉन्ग-टर्म अलाउंस स्थापित करता है, जो दो साल की सेवा के बाद ही प्रभावी हो जाता है। इसी समय, सत्ताईस. सात. दो हज़ार चार नंबर उन्यासी-time "रूसी संघ की राज्य सिविल सेवा पर" के कानून के अनुसार, सिविल सेवा में सेवा के वर्षों के लिए आधिकारिक वेतन का मासिक बोनस सेवा के वर्ष के एक के पचास से प्रभावी होना शुरू होता है। )। सवाल यह है कि सैन्य कर्मियों को दो साल बाद ही बोनस क्यों मिलता है? क्या वे इस समय सीमा से पहले युद्ध ड्यूटी नहीं करते हैं, सैन्य संघर्षों में भाग नहीं लेते हैं और वहां नहीं मर सकते हैं? क्या इसका मतलब यह है कि सैन्य कर्मियों को उनकी सेवा के पहले दो वर्षों के लिए शपथ से छूट दी गई है। अगली बकवास। इक्कीस. बारह. दो हज़ार ग्यारह नंबर एक हज़ार तिहत्तर के रूसी संघ की सरकार का फरमान "सैन्य सेवकों के लिए सैन्य सेवा की विशेष शर्तों के अनुबंध के तहत मासिक भत्ता का भुगतान करने की प्रक्रिया पर" आयोजित सैन्य पद के अनुसार मासिक वेतन के XVUMX प्रतिशत तक अधिकतम मासिक भत्ता स्थापित किया। और सिविल सेवा की विशेष शर्तों के लिए एक सौ प्रतिशत तक भुगतान किया जाता है। या ऐसा तथ्य। फरवरी दो हज़ार सत्रह में, बीमा पेंशन का इंडेक्स पाँच,चार प्रतिशत की रोजस्टैट द्वारा अनुमोदित मुद्रास्फीति, और सेना के चार प्रतिशत द्वारा अनुक्रमित किया गया था। यदि सशस्त्र बलों में सेवा वास्तव में एक विशेष प्रकार की संघीय सिविल सेवा है और राज्य की बाध्यता को बढ़ाती है ताकि सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जा सके, तो विधायक और रूसी संघ की सरकार ने मासिक भत्ते की इतनी अधिक मात्रा निर्धारित करके सेना के अधिकारों का उल्लंघन क्यों किया? कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पेंशनर्स जी। ज़ावालोव, एल। ग्रिशिन, वी। रसाकोव, ए। इफ़्रेमोव, ई। विन्नीत्स्की, वी। करबानोव, ए। बंककोवस्की, आई। श्वेत, और कई अन्य लोग यह सवाल पूछ रहे हैं। सेना के साथ तुलना में संघीय राज्य सिविल सेवकों की गतिविधियों को विनियमित करने वाले केवल कुछ मानक कानूनी कृत्यों के विश्लेषण के परिणामस्वरूप, आप निम्नलिखित निष्कर्ष पर आते हैंः कानूनविदों और रूसी संघ की सरकार ने खंड दो आर्ट का सीधा उल्लंघन किया। रूसी संघ के संविधान का उन्नीस, रूसी संघ के संवैधानिक न्यायालय के फैसले, अन्य विधायी कार्य और सिविल सेवकों को बहुत अधिक विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति में डालते हैं। सिविल सेवकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के स्थापित उपायों की गुंजाइश और सामग्री उनकी स्थिति, सेवा की प्रकृति, नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं है; इन कार्यों के द्वारा, विधायकों, रूसी संघ की सरकार ने रूसी संघ के संविधान द्वारा स्थापित सैन्य सेवा की भूमिका और विशेष स्थिति को कम कर दिया, और इस प्रकार सैन्य पेंशनरों और व्यक्तियों के भेदभाव को उनके सामाजिक जुड़ाव के आधार पर उनके लिए अनुमति दी; कानून निर्माताओं और रूसी संघ की सरकार ने संघीय राज्य सिविल सेवा के प्रतिनिधियों के लिए काफी हद तक उच्च सामाजिक लाभ जो कि उचित सीमा से अधिक है, सभी प्रकार की सिविल सेवा, इसके निर्माण और कामकाज के सिद्धांतों के परस्पर संबंध की प्रणाली को कमजोर करती है; परिणामी कानूनी संघर्ष को हल करने में और देरी ने रूसी कानूनों के न्याय में, मातृभूमि, दिग्गजों और उनके परिवारों के सदस्यों को राज्य के अधिकारियों, उच्च कमान में विश्वास के रक्षक को कमजोर कर दिया। अधिकारियों के बारे में नकारात्मक भावनाएं तेज हो जाती हैं, आम नागरिकों को सेना में बेटों को नहीं भेजने के निर्णय पर धकेल दिया जाता है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि "प्रभावी प्रबंधक" होना मातृभूमि की रक्षा करने की तुलना में अधिक लाभदायक और प्रतिष्ठित है; सिविल सेवकों द्वारा किए गए कार्यों के महत्व को कम किए बिना, सशस्त्र बलों के दिग्गजों का मानना है कि उनके लिए राज्य द्वारा स्थापित सामाजिक गारंटी और सैन्य सेवा के प्रतिनिधि वर्तमान में देश में कठिन वित्तीय और आर्थिक स्थिति के अनुरूप नहीं हैं, राज्य की क्षमताओं और समायोजित करने की आवश्यकता है। С учетом вышеизложенного ветераны армии и флота, других силовых структур предлагают: एक। रूसी संघ के संविधान के प्रावधानों और मानदंडों, अन्य विधायी कृत्यों के अनुपालन के लिए संघीय राज्य सिविल सेवकों, सैन्य कर्मियों और उनके साथ जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों को विनियमित करने के लिए पहले से अपनाई गई विनियामक कानूनी कृत्यों की एक कानूनी परीक्षा आयोजित करें। दो। यदि आवश्यक हो, तो संबंधित सार्वजनिक प्राधिकारियों को नियामक ढांचे में परिवर्तन तैयार करने और करने के लिए बाध्य करें। रूसी संघ की सरकार को कम से कम दो प्रतिशत सैन्य सेवा से छुट्टी पाने वाले नागरिकों के लिए पेंशन की वार्षिक वृद्धि सुनिश्चित करनी चाहिए। तीन। सैन्य सेवा से संबंधित सामाजिक आधार पर पेंशनरों के भेदभाव को रोकने के उपाय करें। केवल निराशा ही सच्चाई और न्याय की तलाश में उच्च अधिकारियों के लिए दिग्गजों को प्रोत्साहित करती है। जैसा कि रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय के लिए, यह निश्चित रूप से सैन्य कर्मियों के अधिकारों के लिए लड़ता है, लेकिन अब सीरिया और पूर्वी यूक्रेन में स्थिति के संबंध में, यह इसके ऊपर नहीं है। इसके अलावा, इसके कुछ प्रतिनिधि बीमा के साथ विभागीय पेंशन की तुलना करते हैं, जो सच नहीं है। तुलना के लिए, आपको संघीय सिविल सेवकों की पेंशन लेने की आवश्यकता है। और आखिरी वाला। श्रम और सामाजिक सुरक्षा मंत्री मैक्सिम टोपिलिन के अनुसार, अगले तीन वर्षों में रूस में पेंशन का वास्तविक आकार घट जाएगा। और इसका मतलब है कि सामाजिक तनाव में वृद्धि, जिसके कारण सरकार चाहे या नहीं, इस पर ध्यान देना होगा। खासकर दो हज़ार अट्ठारह राष्ट्रपति चुनाव की पूर्व संध्या पर। |
जल्द ही सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर 'कुबूल है 2' के जरिए फैंस का मनोरंजन करने आ रहे हैं। फैंस 'कुबूल है 2' को जी 5 पर देख सकेंगे।
कोरोना कहर के बीच टीवी जगत अपने चाहने वालों के मनोरंजन में कोई कमर नहीं छोड़ रहे हैं। बीते कुछ समय में कई पुराने टीवी शोज अपने नए सीजन्स के साथ छोटे पर्दे पर दस्तक दे चुके हैं। 'नागिन 5', 'जमाई राजा 2', 'साथ निभाना साथिया 2', 'इश्क में मर जावां 2' जैसे शो इस बात का शानदार उदाहरण है। अब इस लिस्ट में एक नाम और शामिल होने जा रहा है। यहां हम बात कर रहे हैं जी टीवी के सुपरहिट सीरियल 'कुबूल है' की... जिसमें सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर की जोड़ी देखने के मिली थी।
एक एक बार फिर से सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर (Karan Singh Grover) की जोड़ी फैंस का मनोरंजन करने के लिए आ रही है। कुछ समय पहले ही हमने आपको जानकारी दी थी कि मेकर्स अब 'कुबूल है 2' (Qubool Hai 2) बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। इसी बीच करण सिंह ग्रोवर ने 'कुबूल है 2' का लोगो फैंस के साथ साझा कर दिया है। कुछ समय पहले ही करण सिंह ग्रोवर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है।
इस पोस्ट में करण सिंह ग्रोवर ने 'कुबूल है 2' के लोगो को शेयर करते हुए लिखा है, 'बहुत जल्द ही लौट रहा है प्यार भरा मौसम... तैयार हो जाइए असद और जोया वापस आ रहे हैं।' फैंस 'कुबूल है 2' के एपिसोड जी5 पर देख सकेंगे। 'कुबूल है 2' की कहानी 10 एपिसोड्स में दिखाई जाएगी। गौरतलब है कि 'कुबूल है' में सुरभि ज्योति जोया और करण सिंह ग्रोवर, असद के किरदार में नजर आए थे। इस टीवी शो ने साल 2012 से लेकर साल 2016 तक टीवी की दुनिया पर राज किया है।
'कुबूल है' में काम करके सुरभि ज्योति रातों रात फेमस हो गई थीं। वहीं करण सिंह ग्रोवर की फैन फॉलोइंग में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 'कुबूल है 2' में भी असद और जोया बनकर सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर फैंस का दिल जीत लेंगे। 'कुबूल है 2' के जरिए करण सिंह ग्रोवर एक बार फिर से वापसी करने जा रहे हैं। इससे पहले करण सिंह ग्रोवर ने सीरियल कसौटी जिंदगी के 2 में मिस्टर बजाज का रोल प्ले किया था।
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| जल्द ही सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर 'कुबूल है दो' के जरिए फैंस का मनोरंजन करने आ रहे हैं। फैंस 'कुबूल है दो' को जी पाँच पर देख सकेंगे। कोरोना कहर के बीच टीवी जगत अपने चाहने वालों के मनोरंजन में कोई कमर नहीं छोड़ रहे हैं। बीते कुछ समय में कई पुराने टीवी शोज अपने नए सीजन्स के साथ छोटे पर्दे पर दस्तक दे चुके हैं। 'नागिन पाँच', 'जमाई राजा दो', 'साथ निभाना साथिया दो', 'इश्क में मर जावां दो' जैसे शो इस बात का शानदार उदाहरण है। अब इस लिस्ट में एक नाम और शामिल होने जा रहा है। यहां हम बात कर रहे हैं जी टीवी के सुपरहिट सीरियल 'कुबूल है' की... जिसमें सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर की जोड़ी देखने के मिली थी। एक एक बार फिर से सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर की जोड़ी फैंस का मनोरंजन करने के लिए आ रही है। कुछ समय पहले ही हमने आपको जानकारी दी थी कि मेकर्स अब 'कुबूल है दो' बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। इसी बीच करण सिंह ग्रोवर ने 'कुबूल है दो' का लोगो फैंस के साथ साझा कर दिया है। कुछ समय पहले ही करण सिंह ग्रोवर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में करण सिंह ग्रोवर ने 'कुबूल है दो' के लोगो को शेयर करते हुए लिखा है, 'बहुत जल्द ही लौट रहा है प्यार भरा मौसम... तैयार हो जाइए असद और जोया वापस आ रहे हैं।' फैंस 'कुबूल है दो' के एपिसोड जीपाँच पर देख सकेंगे। 'कुबूल है दो' की कहानी दस एपिसोड्स में दिखाई जाएगी। गौरतलब है कि 'कुबूल है' में सुरभि ज्योति जोया और करण सिंह ग्रोवर, असद के किरदार में नजर आए थे। इस टीवी शो ने साल दो हज़ार बारह से लेकर साल दो हज़ार सोलह तक टीवी की दुनिया पर राज किया है। 'कुबूल है' में काम करके सुरभि ज्योति रातों रात फेमस हो गई थीं। वहीं करण सिंह ग्रोवर की फैन फॉलोइंग में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 'कुबूल है दो' में भी असद और जोया बनकर सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर फैंस का दिल जीत लेंगे। 'कुबूल है दो' के जरिए करण सिंह ग्रोवर एक बार फिर से वापसी करने जा रहे हैं। इससे पहले करण सिंह ग्रोवर ने सीरियल कसौटी जिंदगी के दो में मिस्टर बजाज का रोल प्ले किया था। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
हॉट बाथ टब में सेक्स करना भले ही कुछ लोग रोमांचक समझते हों। लेकिन इस पॉप्युलर सेक्स स्टाइल के साथ कई तरह के खतरे भी जुड़े हुए हैं। फिल्मी पर्दे पर यह स्टाइल चाहे कितना ही रोमांटिक क्यों न लगे, लेकिन जब आप इस तरह के सेक्स से होने वाले नुकसान के बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। साल 2015 में एक मामला सामने आया था जिसमें एक कपल की हॉट टब में सेक्स के दौरान मौत हो गई थी। (फोटो साभारः getty)
| हॉट बाथ टब में सेक्स करना भले ही कुछ लोग रोमांचक समझते हों। लेकिन इस पॉप्युलर सेक्स स्टाइल के साथ कई तरह के खतरे भी जुड़े हुए हैं। फिल्मी पर्दे पर यह स्टाइल चाहे कितना ही रोमांटिक क्यों न लगे, लेकिन जब आप इस तरह के सेक्स से होने वाले नुकसान के बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। साल दो हज़ार पंद्रह में एक मामला सामने आया था जिसमें एक कपल की हॉट टब में सेक्स के दौरान मौत हो गई थी। |
Ranchi: एचईसी के द्वारा सप्लाई मजदूरों को सुरक्षा प्रहरी बनाने का विरोध शुरू हो गया है. यूनियन का कहना है कि यह नियम संगत नहीं है. इसको लेकर शनिवार को एचईसी मजदूर यूनियन (एटक) के अध्यक्ष भवन सिंह की अध्यक्षता में सुरक्षा प्रहरियों की बैठक हुई. बैठक में भवन सिंह ने कहा कि सप्लाई मजदूरों को जो सुरक्षा प्रहरी बनाया जा रहा है वह नियम संगत नहीं है. जिन सप्लाई मजदूरों का सेवाकाल महज चार माह बाकी है, उसे भी गार्ड में भेजा रहा है. यूनियन का आरोप है कि मनमानी तरीके गार्ड की नियुक्ति कर अफसर अपने चमचों को बचा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि तकनीकी कामगारों को भी धड़ल्ले से बाहर किया जा रहा है. सप्लाई में तकनीकी और मजदूरों की बहाली कारखाना में काम करने के लिए किया गया था, नहीं की गार्ड की ड्यूटी के लिए. बिना हेल्थ का ख्याल रखे ही गार्ड की ड्यूटी में लगा दिया गया. यह सरासर गलत है. उन्हें पुराने जगह पर ही रखा जाये. इन सारी बिन्दुओं पर विचार करते हुए यह फैसला लिया गया कि सोमवार को पुनः एक बैठक एफएफपी शेड में दिन के एक बजे से किया जायेगा. बैठक में मुख्य रूप से एटक यूनियन के लालदेव सिंह, सीटू यूनियन के हरेंद्र प्रसाद यादव आदि मौजूद रहे.
| Ranchi: एचईसी के द्वारा सप्लाई मजदूरों को सुरक्षा प्रहरी बनाने का विरोध शुरू हो गया है. यूनियन का कहना है कि यह नियम संगत नहीं है. इसको लेकर शनिवार को एचईसी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष भवन सिंह की अध्यक्षता में सुरक्षा प्रहरियों की बैठक हुई. बैठक में भवन सिंह ने कहा कि सप्लाई मजदूरों को जो सुरक्षा प्रहरी बनाया जा रहा है वह नियम संगत नहीं है. जिन सप्लाई मजदूरों का सेवाकाल महज चार माह बाकी है, उसे भी गार्ड में भेजा रहा है. यूनियन का आरोप है कि मनमानी तरीके गार्ड की नियुक्ति कर अफसर अपने चमचों को बचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि तकनीकी कामगारों को भी धड़ल्ले से बाहर किया जा रहा है. सप्लाई में तकनीकी और मजदूरों की बहाली कारखाना में काम करने के लिए किया गया था, नहीं की गार्ड की ड्यूटी के लिए. बिना हेल्थ का ख्याल रखे ही गार्ड की ड्यूटी में लगा दिया गया. यह सरासर गलत है. उन्हें पुराने जगह पर ही रखा जाये. इन सारी बिन्दुओं पर विचार करते हुए यह फैसला लिया गया कि सोमवार को पुनः एक बैठक एफएफपी शेड में दिन के एक बजे से किया जायेगा. बैठक में मुख्य रूप से एटक यूनियन के लालदेव सिंह, सीटू यूनियन के हरेंद्र प्रसाद यादव आदि मौजूद रहे. |
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5. भूटान में भारत के अगले राजदूत के रूप में किसे नियुक्त किया गया है?
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वन विभाग की टीम ने पांवटा साहिब वन मंडल के पांवटा परिक्षेत्र की टीम ने लाई-टोका के वन क्षेत्र में अवैध शराब की तीन भटियां को नष्ट किया। इस दौरान छह ड्रमों में रखे 800 लीटर लाहण को भी मौके पर बहाया गया व लोहे के ड्रमों को काटकर नष्ट किया गया। जानकारी के अनुसार भारतीय वन सेवा वन खंड अधिकारी सुमंत कुमार के नेतृत्व में पांवटा साहिब वन मंडल के पांवटा परिक्षेत्र की टीम ने लाई-टोका के वन क्षेत्र में अवैध शराब की तीन भटियांको नष्ट किया। इस दौरान छह ड्रमों में रखे 800 लीटर लाहण को बहाया गया व लोहे के ड्रमों को काटकर नष्ट किया गया।
इस दौरान वन विभाग की टीम में वनरक्षक रणवीर, मुद्दसिर, अनिल, रतन, संदीप व वन कर्मी हरि चंद शामिल रहे। इस दौरान डीएफओ पांवटा कुणाल अंग्रिश ने बताया कि वन विभाग द्वारा छापामारी के दौरान लाई-टोका जंगल में 800 लीटर लाहण व कच्ची शराब नष्ट की। उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान सभी आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से कार्रवाई जारी रहेगी।
| वन विभाग की टीम ने पांवटा साहिब वन मंडल के पांवटा परिक्षेत्र की टीम ने लाई-टोका के वन क्षेत्र में अवैध शराब की तीन भटियां को नष्ट किया। इस दौरान छह ड्रमों में रखे आठ सौ लीटरटर लाहण को भी मौके पर बहाया गया व लोहे के ड्रमों को काटकर नष्ट किया गया। जानकारी के अनुसार भारतीय वन सेवा वन खंड अधिकारी सुमंत कुमार के नेतृत्व में पांवटा साहिब वन मंडल के पांवटा परिक्षेत्र की टीम ने लाई-टोका के वन क्षेत्र में अवैध शराब की तीन भटियांको नष्ट किया। इस दौरान छह ड्रमों में रखे आठ सौ लीटरटर लाहण को बहाया गया व लोहे के ड्रमों को काटकर नष्ट किया गया। इस दौरान वन विभाग की टीम में वनरक्षक रणवीर, मुद्दसिर, अनिल, रतन, संदीप व वन कर्मी हरि चंद शामिल रहे। इस दौरान डीएफओ पांवटा कुणाल अंग्रिश ने बताया कि वन विभाग द्वारा छापामारी के दौरान लाई-टोका जंगल में आठ सौ लीटरटर लाहण व कच्ची शराब नष्ट की। उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान सभी आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से कार्रवाई जारी रहेगी। |
भी यह यक़ीन है कि अनिच्छित तथा बाधित समझौते से शासनकार्य में बड़ी अड़चनें आवेंगी ।
अल्पसंख्यक जातियों का दावा
" मेरे बहुत से अल्प-संख्यक जातियों के दोस्तों ने अपने अधि कारों का दावा पेश किया है। मैं उनसे कह देना चाहता हूँ कि यह सभा पार्लियामेंट नहीं । हम क़ानून नहीं बना रहे । हम तो केवल अधिकारों की घोषणा कर सकते हैं, और यह देख सकते हैं कि किसी के साथ अन्याय न हो। आप विश्वास रक्खें कि ऐसी बातों का आखिरी फ़ैसला आप लोगों की संघशक्ति तथा इच्छा शक्ति और नेताओं की कार्य-शक्ति पर निर्भर है। फ़िडरेशन
" शासन - विधान के संबंध में तो सभी ने राय दी है कि फ़िडरेशन हो । श्रीमान् नरेश ने आप लोगों की प्रशंसा में जो कुछ कहा है, मैं उसमें कुछ बढ़ाने की गुंजायश नहीं देखता । आप लोगों के यहाँ आने से पूर्व भारत की शासन प्रणाली का रूप संदिग्ध था। आप लोगों की दूरदर्शिता और देश-भक्ति ने उसे निश्चित रूप दे दिया, जिसके लिये अँगरेज और हिंदो-स्तानी सभी आपके कृतज्ञ हैं।
"शासन-विधान को तैयार करते हुए कुछ बहुत वाहियात चीजें हमारे सामने आई हैं। उनमें से एक चीज प्रतिबंध है। मैं इस शब्द से घृणा करता हूँ। ( हास्य ) मैं समझता हूँ, यह | भी यह यक़ीन है कि अनिच्छित तथा बाधित समझौते से शासनकार्य में बड़ी अड़चनें आवेंगी । अल्पसंख्यक जातियों का दावा " मेरे बहुत से अल्प-संख्यक जातियों के दोस्तों ने अपने अधि कारों का दावा पेश किया है। मैं उनसे कह देना चाहता हूँ कि यह सभा पार्लियामेंट नहीं । हम क़ानून नहीं बना रहे । हम तो केवल अधिकारों की घोषणा कर सकते हैं, और यह देख सकते हैं कि किसी के साथ अन्याय न हो। आप विश्वास रक्खें कि ऐसी बातों का आखिरी फ़ैसला आप लोगों की संघशक्ति तथा इच्छा शक्ति और नेताओं की कार्य-शक्ति पर निर्भर है। फ़िडरेशन " शासन - विधान के संबंध में तो सभी ने राय दी है कि फ़िडरेशन हो । श्रीमान् नरेश ने आप लोगों की प्रशंसा में जो कुछ कहा है, मैं उसमें कुछ बढ़ाने की गुंजायश नहीं देखता । आप लोगों के यहाँ आने से पूर्व भारत की शासन प्रणाली का रूप संदिग्ध था। आप लोगों की दूरदर्शिता और देश-भक्ति ने उसे निश्चित रूप दे दिया, जिसके लिये अँगरेज और हिंदो-स्तानी सभी आपके कृतज्ञ हैं। "शासन-विधान को तैयार करते हुए कुछ बहुत वाहियात चीजें हमारे सामने आई हैं। उनमें से एक चीज प्रतिबंध है। मैं इस शब्द से घृणा करता हूँ। मैं समझता हूँ, यह |
उत्तराखंड में भर्ती घपले पर घमासान मचा हुआ है। भर्ती घपलों की सीबीआई जांच कराने को लेकर आज मंगलवार को कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
उत्तराखंड में भर्ती घपले पर घमासान मचा हुआ है। भर्ती घपलों की सीबीआई जांच कराने को लेकर आज मंगलवार को कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार से सभी भर्ती घपलों की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। सीबीआई जांच की मांग को लेकर यूथ कांग्रेस ने सीएम आवास कूच किया।
नोकझोंक भी हुई। बैरिकेडिंग पर चढ़ कांग्रेस नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
| उत्तराखंड में भर्ती घपले पर घमासान मचा हुआ है। भर्ती घपलों की सीबीआई जांच कराने को लेकर आज मंगलवार को कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उत्तराखंड में भर्ती घपले पर घमासान मचा हुआ है। भर्ती घपलों की सीबीआई जांच कराने को लेकर आज मंगलवार को कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार से सभी भर्ती घपलों की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। सीबीआई जांच की मांग को लेकर यूथ कांग्रेस ने सीएम आवास कूच किया। नोकझोंक भी हुई। बैरिकेडिंग पर चढ़ कांग्रेस नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। |
दो करोड़ इकसठ लाख दो हज़ार बीस प्रादेशिक समाचार बुलेटिन 1945बजे आज के मुख्य समाचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया एनर्जी फोरम का किया उद्घाटन
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग को आइसोलेशन में रह रहे लोगों की स्वास्थ्य जांच के दिए निर्देश
कृषि विधेयकों के बारे में किसानों को दो लाख पत्रक बांटकर जागरूक करेगा भाजपा किसान मोर्चा
लाहौल स्पीति ज़िले की ऊंची चोटियों पर हल्के हिमपात से ठंड बढ़ी जमाव बिंदु से नीचे लुढ़का पारा
कोविड संकल्प कोविड19 महामारी के खिलाफ देश एकजुट होकर लड़ रहा है
आप भी हमारे साथ सुरक्षा और बचाव के तीन आसान एहतियाती उपायों का संकल्प लें
अब समाचार विस्तार से पीएम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शाम इंडिया एनर्जी फोरम का उद्घाटन किया
इसका आयोजन नीति आयोग और पैट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया गया
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने प्रमुख गैस व तेल कम्पनियों के पैंतालीस मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से भी बातचीत की
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत अपने ऊर्जा के उपभोग को दोगुना करने वाला है और भारत ऊर्जा के एक बहुत बड़े उपभोक्ता के रूप में उभरेगा
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले छः वर्षों में छत्तीस करोड़ से अधिक एलईडी बल्बों का वितरण किया गया और इन बल्बों की कीमतों में भी काफी कमी आई है
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग को घर पर आइसोलेशन में रह रहे सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश दिए हैं
शिमला में आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपायुक्तों पुलिस अधीक्षकों मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और मैडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये महसूस किया गया है कि घर में आइसोलेशन में रह रहे लोग उस समय अस्पताल जाते हैं जब उनकी तबीयत खराब हो जाती है
जयराम ठाकुर ने कहा कि शिक्षा सूचना और संचार पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है ताकि कोरोना जैसे लक्षण सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति अस्पताल जाकर अपनी जांच करवा सकें
जयराम ठाकुर ने कहा कि केन्द्र सरकार के मास्कअप अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष प्रयास करने की ज़रूरत है
उन्होंने वरिष्ठ चिकित्सकों को अस्पतालों में दाखिल कोरोना मरीजों से मिलने को कहा ताकि उनके अंदर सुरक्षा की भावना पैदा हो
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कोरोना देखभाल केन्द्रों में भर्ती रोगियों को गर्म पानी और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए
स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लिया
गोविंद ठाकुर शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने आज कुल्लू में देव समाज कारदार संघ की बैठक की अध्यक्षता की
उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने का संस्कृति एक सशक्त माध्यम है और मेले व त्योहार इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
उन्होंने संस्कृति के संवर्द्धन व संरक्षण के लिए मिलजुल कर प्रयास करने का आह्वान किया
बैठक में देव समाज से संबंधित विभिन्न मुददों पर चर्चा की गई
कारदार संघ के प्रतिनिधियों ने मंदिरों के रखरखाव के लिए रिवॉल्विंग फंड को पंचायत या बीडीओ के बजाए सीधे कारदार संघ को देने की मांग की
गोविंद ठाकुर ने कहा कि कारदार संघ की सभी मांगों पर चर्चा के लिए अगले महीने शिमला में बैठक होगी
सरवीण चौधरी सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने कांगड़ा जिले के खड़ीवही में सामुदायिक भवन का उदघाटन किया
उन्होंने कहा कि सरकार ने लोगों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई हैं और उन्हें प्रभावी ढंग से पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है
उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों व महिलाओं का उत्थान सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं
राजेन्द्र गर्ग बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत पचासी करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे
खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेन्द्र गर्ग ने आज चैखणाधार में पेयजल योजना के भूमि पूजन के अवसर पर बताया कि हर घर में नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है
राजेन्द्र गर्ग ने कहा कि छदोह गांव में तीन लाख बत्तीस हजार लीटर क्षमता का जल भण्डारण टैंक बनाया जाएगा
बिक्रम सिंह उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने पूर्व सांसद राजन सुशांत पर निजी स्वार्थों के लिए राज्य सरकार के खिलाफ भ्रामक व झूठी बयानबाजी करने का आरोप लगाया है
शिमला से जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी ईमानदारी से लोगों के कल्याण के लिए काम कर रही है और कई योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है
बिक्रम ठाकुर ने राजन सुशांत पर अवसरवादी होने का आरोप भी लगाया
किसान मोर्चा संसद में हाल ही में पारित कृषि सुधार विधेयकों के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा राज्य भर में दो लाख पत्रक बांटेगा
चंबा में आज एक पत्रकार वार्ता में किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि इस दौरान किसानों के हस्ताक्षर करवाकर इन विधेयकों को पारित करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया जाएगा
उन्होंने कहा कि इन विधेयकों से कृषि क्षेत्र में कांति आएगी और किसानों को लाभ होगा
कोरोना अपडेट प्रदेश एक प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर बीस हजार चार सौ बाईस हो गई है
राज्य में आज अभी तक कोरोना के बावन नए मामले आए हैं जबकि अभी तक नवासी लोगों ने कोरोना से जंग जीती है
शिमला जिले में अट्ठाईस बिलासपुर व सोलन में छयासठ कांगड़ा में पाँच ऊना में तीन और चंबा व किन्नौर जिले में आज बाईस नए मामले आए हैं
प्रदेश में इस समय कोरोना के दो हजार चार सौ पचास सक्रिय मामले जबकि सत्रह हजार छः सौ सत्तावन लोग उपचार के बाद ठीक हो गए है
प्रदेश में अब तक कोरोना से दो सौ अठासी लोगों की मौत हो चुकी है
बस सेवा कांग्रेस पार्टी ने रविवार के दिन ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य परिवहन निगम की बसें न चलाने पर एतराज जताया है
कांग्रेस सचिव हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से परिवहन निगम की अव्यवस्था के चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और रविवार के दिन अधिकतर बसें नहीं चलती
उन्होंने राज्य सरकार और परिवहन निगम से ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवाएं सुचारू बनाने का आग्रह किया है
मौसम लाहौलस्पीति की ऊंची चोटियों पर बीती रात हल्का हिमपात होने से जिले में ठंड बढ़ गई है
जिले के रिहायशी इलाकों पर भी इस मौसम का पहला हिमपात हुआ है
रोहतांग दर्रा बारालाचा दर्रा और लेडी ऑफ केलंग सहित अन्य सभी ऊंची पहाड़ियों पर बर्फ की चादर बिछ गई है
इन इलाकों में एक से दो इंच तक बर्फबारी हुई है
इस बर्फबारी के बाद कोक्सर और दारचा में न्यून्तम तापमान माइनस चार डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है
राज्य के अन्य भागों में भी सुबह शाम के तापमान में लगातार गिरावट जारी है
पैराग्लाइडिंग मंडी जिले में सराज क्षेत्र के सपेणीधार में जल्द ही पैराग्लाइडिंग शुरू होगी
वन विभाग की तकनीकी समिति ने सपेणीधार को पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त पाया है और बीड़बीलिंग की तरह यहां भी साहसिक गतिविधियां शुरू होंगी
पर्यटन व नागरिक उड्डयन विभाग के उपनिदेशक पंकज शर्मा ने मंडी में बताया कि अब ये मामला मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है
गणेशदत्त हिमफैड के अध्यक्ष गणेशदत्त ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों पर किसान आंदोलन के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा किसानों को रेल पटरियों पर बिठा कर रेल मार्ग बाधित करवाया जा रहा है जिससे हिमाचल सहित अन्य राज्यों में खाद की कमी सामने आ रही है
गणेशदत्त ने कहा कि खाद की खेप बीच रास्तों में ही रूकी हुई हैं
कीमत प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने केंद्र व राज्य सरकार से सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने की मांग की है
पार्टी के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्याज आलू और टमाटर की कीमतों में काफी वृद्धि हुई हैं जिससे गरीब तबके के लोग प्रभावित हुए हैं
उन्होंने कहा कि खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए
नमस्कार | दो करोड़ इकसठ लाख दो हज़ार बीस प्रादेशिक समाचार बुलेटिन एक हज़ार नौ सौ पैंतालीसबजे आज के मुख्य समाचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया एनर्जी फोरम का किया उद्घाटन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग को आइसोलेशन में रह रहे लोगों की स्वास्थ्य जांच के दिए निर्देश कृषि विधेयकों के बारे में किसानों को दो लाख पत्रक बांटकर जागरूक करेगा भाजपा किसान मोर्चा लाहौल स्पीति ज़िले की ऊंची चोटियों पर हल्के हिमपात से ठंड बढ़ी जमाव बिंदु से नीचे लुढ़का पारा कोविड संकल्प कोविडउन्नीस महामारी के खिलाफ देश एकजुट होकर लड़ रहा है आप भी हमारे साथ सुरक्षा और बचाव के तीन आसान एहतियाती उपायों का संकल्प लें अब समाचार विस्तार से पीएम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शाम इंडिया एनर्जी फोरम का उद्घाटन किया इसका आयोजन नीति आयोग और पैट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया गया इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने प्रमुख गैस व तेल कम्पनियों के पैंतालीस मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से भी बातचीत की इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत अपने ऊर्जा के उपभोग को दोगुना करने वाला है और भारत ऊर्जा के एक बहुत बड़े उपभोक्ता के रूप में उभरेगा नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले छः वर्षों में छत्तीस करोड़ से अधिक एलईडी बल्बों का वितरण किया गया और इन बल्बों की कीमतों में भी काफी कमी आई है मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग को घर पर आइसोलेशन में रह रहे सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश दिए हैं शिमला में आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपायुक्तों पुलिस अधीक्षकों मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और मैडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये महसूस किया गया है कि घर में आइसोलेशन में रह रहे लोग उस समय अस्पताल जाते हैं जब उनकी तबीयत खराब हो जाती है जयराम ठाकुर ने कहा कि शिक्षा सूचना और संचार पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है ताकि कोरोना जैसे लक्षण सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति अस्पताल जाकर अपनी जांच करवा सकें जयराम ठाकुर ने कहा कि केन्द्र सरकार के मास्कअप अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष प्रयास करने की ज़रूरत है उन्होंने वरिष्ठ चिकित्सकों को अस्पतालों में दाखिल कोरोना मरीजों से मिलने को कहा ताकि उनके अंदर सुरक्षा की भावना पैदा हो मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कोरोना देखभाल केन्द्रों में भर्ती रोगियों को गर्म पानी और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लिया गोविंद ठाकुर शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने आज कुल्लू में देव समाज कारदार संघ की बैठक की अध्यक्षता की उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने का संस्कृति एक सशक्त माध्यम है और मेले व त्योहार इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उन्होंने संस्कृति के संवर्द्धन व संरक्षण के लिए मिलजुल कर प्रयास करने का आह्वान किया बैठक में देव समाज से संबंधित विभिन्न मुददों पर चर्चा की गई कारदार संघ के प्रतिनिधियों ने मंदिरों के रखरखाव के लिए रिवॉल्विंग फंड को पंचायत या बीडीओ के बजाए सीधे कारदार संघ को देने की मांग की गोविंद ठाकुर ने कहा कि कारदार संघ की सभी मांगों पर चर्चा के लिए अगले महीने शिमला में बैठक होगी सरवीण चौधरी सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने कांगड़ा जिले के खड़ीवही में सामुदायिक भवन का उदघाटन किया उन्होंने कहा कि सरकार ने लोगों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई हैं और उन्हें प्रभावी ढंग से पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों व महिलाओं का उत्थान सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं राजेन्द्र गर्ग बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत पचासी करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेन्द्र गर्ग ने आज चैखणाधार में पेयजल योजना के भूमि पूजन के अवसर पर बताया कि हर घर में नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है राजेन्द्र गर्ग ने कहा कि छदोह गांव में तीन लाख बत्तीस हजार लीटर क्षमता का जल भण्डारण टैंक बनाया जाएगा बिक्रम सिंह उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने पूर्व सांसद राजन सुशांत पर निजी स्वार्थों के लिए राज्य सरकार के खिलाफ भ्रामक व झूठी बयानबाजी करने का आरोप लगाया है शिमला से जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी ईमानदारी से लोगों के कल्याण के लिए काम कर रही है और कई योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है बिक्रम ठाकुर ने राजन सुशांत पर अवसरवादी होने का आरोप भी लगाया किसान मोर्चा संसद में हाल ही में पारित कृषि सुधार विधेयकों के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा राज्य भर में दो लाख पत्रक बांटेगा चंबा में आज एक पत्रकार वार्ता में किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि इस दौरान किसानों के हस्ताक्षर करवाकर इन विधेयकों को पारित करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया जाएगा उन्होंने कहा कि इन विधेयकों से कृषि क्षेत्र में कांति आएगी और किसानों को लाभ होगा कोरोना अपडेट प्रदेश एक प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर बीस हजार चार सौ बाईस हो गई है राज्य में आज अभी तक कोरोना के बावन नए मामले आए हैं जबकि अभी तक नवासी लोगों ने कोरोना से जंग जीती है शिमला जिले में अट्ठाईस बिलासपुर व सोलन में छयासठ कांगड़ा में पाँच ऊना में तीन और चंबा व किन्नौर जिले में आज बाईस नए मामले आए हैं प्रदेश में इस समय कोरोना के दो हजार चार सौ पचास सक्रिय मामले जबकि सत्रह हजार छः सौ सत्तावन लोग उपचार के बाद ठीक हो गए है प्रदेश में अब तक कोरोना से दो सौ अठासी लोगों की मौत हो चुकी है बस सेवा कांग्रेस पार्टी ने रविवार के दिन ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य परिवहन निगम की बसें न चलाने पर एतराज जताया है कांग्रेस सचिव हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से परिवहन निगम की अव्यवस्था के चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और रविवार के दिन अधिकतर बसें नहीं चलती उन्होंने राज्य सरकार और परिवहन निगम से ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवाएं सुचारू बनाने का आग्रह किया है मौसम लाहौलस्पीति की ऊंची चोटियों पर बीती रात हल्का हिमपात होने से जिले में ठंड बढ़ गई है जिले के रिहायशी इलाकों पर भी इस मौसम का पहला हिमपात हुआ है रोहतांग दर्रा बारालाचा दर्रा और लेडी ऑफ केलंग सहित अन्य सभी ऊंची पहाड़ियों पर बर्फ की चादर बिछ गई है इन इलाकों में एक से दो इंच तक बर्फबारी हुई है इस बर्फबारी के बाद कोक्सर और दारचा में न्यून्तम तापमान माइनस चार डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है राज्य के अन्य भागों में भी सुबह शाम के तापमान में लगातार गिरावट जारी है पैराग्लाइडिंग मंडी जिले में सराज क्षेत्र के सपेणीधार में जल्द ही पैराग्लाइडिंग शुरू होगी वन विभाग की तकनीकी समिति ने सपेणीधार को पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त पाया है और बीड़बीलिंग की तरह यहां भी साहसिक गतिविधियां शुरू होंगी पर्यटन व नागरिक उड्डयन विभाग के उपनिदेशक पंकज शर्मा ने मंडी में बताया कि अब ये मामला मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है गणेशदत्त हिमफैड के अध्यक्ष गणेशदत्त ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों पर किसान आंदोलन के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा किसानों को रेल पटरियों पर बिठा कर रेल मार्ग बाधित करवाया जा रहा है जिससे हिमाचल सहित अन्य राज्यों में खाद की कमी सामने आ रही है गणेशदत्त ने कहा कि खाद की खेप बीच रास्तों में ही रूकी हुई हैं कीमत प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने केंद्र व राज्य सरकार से सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने की मांग की है पार्टी के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्याज आलू और टमाटर की कीमतों में काफी वृद्धि हुई हैं जिससे गरीब तबके के लोग प्रभावित हुए हैं उन्होंने कहा कि खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए नमस्कार |
खामगांवः चार व्यक्तियो ने घर में प्रवेश कर एक व्यक्ति से मारपीट कर महिला के साथ छेड़खानी करने की घटना तहसील के बोरी अडगांव में घटी. प्रकरण में शिकायत के आधार पर पुलिस ने उक्त आरोपी के खिलाफ विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया हैं. 25 वर्षिय महिला ने ग्रामीण पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई कि, पुराने विवाद के चलते स्वप्निल सुरवाडे, गौतम सुरवाडे, सुकेशनी वानखडे व छाया सुरवाडे ने शिकायतकर्ता महिला के घर में प्रवेश कर विवाद करते हुए शिकायतकर्ता के पति के साथ लोहे की सलाई से मारपीट कर घायल किया एवं शिकायतकर्ता के साथ छेड़खानी की. उक्त शिकायत के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियो के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया हैं. आगे की जांच पुलिस कर रही हैं.
| खामगांवः चार व्यक्तियो ने घर में प्रवेश कर एक व्यक्ति से मारपीट कर महिला के साथ छेड़खानी करने की घटना तहसील के बोरी अडगांव में घटी. प्रकरण में शिकायत के आधार पर पुलिस ने उक्त आरोपी के खिलाफ विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया हैं. पच्चीस वर्षिय महिला ने ग्रामीण पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई कि, पुराने विवाद के चलते स्वप्निल सुरवाडे, गौतम सुरवाडे, सुकेशनी वानखडे व छाया सुरवाडे ने शिकायतकर्ता महिला के घर में प्रवेश कर विवाद करते हुए शिकायतकर्ता के पति के साथ लोहे की सलाई से मारपीट कर घायल किया एवं शिकायतकर्ता के साथ छेड़खानी की. उक्त शिकायत के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियो के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया हैं. आगे की जांच पुलिस कर रही हैं. |
बिलासपुर - सदर हलके के विधायक बंबर ठाकुर ने क्षेत्र की जनता को लोहड़ी पर्व की शुभकामनाएं दीं। शुक्रवार को परिधि गृह में विधायक बंबर ठाकुर ने उपस्थित जनता को शुभकामनाएं देते हुए मूंगफली, गजक और रेवडि़यां बांटी। उन्होंने कहा कि लोहड़ी खुशी का पर्व है। भगवान से कामना करता हूं कि सभी के घर में खुशियां आएं और सुख संपत्ति एवं स्मृद्धि हो। सबको भगवान सदबुद्धि दे और अगले साल भी इस पर्व को सभी खुशी खुशी मनाएं इसकी कामना करता हूं। इस मौके पर सदर क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से आए जनप्रतिनिधि और कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं ने विधायक के साथ लोहड़ी पर्व की खुशी का इजहार किया और एक दूसरे को बधाई दी। विधायक बंबर ठाकुर ने इस अवसर पर बताया कि पहली फरवरी को शहर की मेन मार्केट में एक भव्य जनसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भाजपा नेताओं की कारगुजारियों के साथ-साथ उनके काले कारनामों के चिट्ठे खोल जाएंगे। उन्होंने समस्त जनता से जनसभा में उपस्थिति दर्ज करवाने का आह्वान किया है।
| बिलासपुर - सदर हलके के विधायक बंबर ठाकुर ने क्षेत्र की जनता को लोहड़ी पर्व की शुभकामनाएं दीं। शुक्रवार को परिधि गृह में विधायक बंबर ठाकुर ने उपस्थित जनता को शुभकामनाएं देते हुए मूंगफली, गजक और रेवडि़यां बांटी। उन्होंने कहा कि लोहड़ी खुशी का पर्व है। भगवान से कामना करता हूं कि सभी के घर में खुशियां आएं और सुख संपत्ति एवं स्मृद्धि हो। सबको भगवान सदबुद्धि दे और अगले साल भी इस पर्व को सभी खुशी खुशी मनाएं इसकी कामना करता हूं। इस मौके पर सदर क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से आए जनप्रतिनिधि और कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं ने विधायक के साथ लोहड़ी पर्व की खुशी का इजहार किया और एक दूसरे को बधाई दी। विधायक बंबर ठाकुर ने इस अवसर पर बताया कि पहली फरवरी को शहर की मेन मार्केट में एक भव्य जनसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भाजपा नेताओं की कारगुजारियों के साथ-साथ उनके काले कारनामों के चिट्ठे खोल जाएंगे। उन्होंने समस्त जनता से जनसभा में उपस्थिति दर्ज करवाने का आह्वान किया है। |
पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी डिग्री कॉलेजों को शिक्षकों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। सरकार मानकों के मुताबिक कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती करेगी।
देहरादून, राज्य ब्यूरो। पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी डिग्री कॉलेजों को शिक्षकों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। सरकार मानकों के मुताबिक कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती करेगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए जल्द राज्य लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। शासन ने उच्च शिक्षा निदेशक को रिक्त पदों का ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों की भर्तियां यूजीसी रेगुलेशन-2018 के तहत होंगी। नियमित भर्ती होने तक संविदा पर भी शिक्षकों की नियुक्तियां की जाएंगी।
प्रदेश में सरकारी डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़कर 104 हो चुकी है। नए खोले गए कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती करनी है। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों के कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है। इन कॉलेजों में पठन-पाठन दुरुस्त करने के लिए अन्य कॉलेजों से सरप्लस शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। सरप्लस शिक्षकों के संबंध में उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से रिपोर्ट शासन को मुहैया कराई गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सरप्लस शिक्षकों को जरूरतमंद कॉलेजों में तैनात किया जाएगा।
राज्य लोक सेवा आयोग से 877 शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में बाधा बनी हुई है। इस संबंध में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जवाब दाखिल किया जा चुका है। नई नियुक्तियों के संबंध में शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय को रिक्त पदों को ब्योरा देने को कहा है।
उच्च शिक्षा सचिव अशोक कुमार ने बताया कि यूजीसी रेगुलेशन-2018 को राज्य सरकार कुछ संशोधनों के साथ लागू कर चुकी है। नई नियुक्तियां इसके मुताबिक होंगी। नई व्यवस्था के तहत नियुक्तियों में दिक्कतें भी पेश नहीं आएंगी। हालांकि, नियमित नियुक्तियों में लंबा समय लगने की वजह से संविदा पर शिक्षकों की नियुक्तियां करने पर मंथन चल रहा है। पंचायत चुनाव निपटने के बाद इस कार्य को तेजी से अंजाम दिया जाएगा।
| पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी डिग्री कॉलेजों को शिक्षकों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। सरकार मानकों के मुताबिक कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती करेगी। देहरादून, राज्य ब्यूरो। पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी डिग्री कॉलेजों को शिक्षकों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। सरकार मानकों के मुताबिक कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती करेगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए जल्द राज्य लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। शासन ने उच्च शिक्षा निदेशक को रिक्त पदों का ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों की भर्तियां यूजीसी रेगुलेशन-दो हज़ार अट्ठारह के तहत होंगी। नियमित भर्ती होने तक संविदा पर भी शिक्षकों की नियुक्तियां की जाएंगी। प्रदेश में सरकारी डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़कर एक सौ चार हो चुकी है। नए खोले गए कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती करनी है। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों के कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है। इन कॉलेजों में पठन-पाठन दुरुस्त करने के लिए अन्य कॉलेजों से सरप्लस शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। सरप्लस शिक्षकों के संबंध में उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से रिपोर्ट शासन को मुहैया कराई गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सरप्लस शिक्षकों को जरूरतमंद कॉलेजों में तैनात किया जाएगा। राज्य लोक सेवा आयोग से आठ सौ सतहत्तर शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में बाधा बनी हुई है। इस संबंध में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जवाब दाखिल किया जा चुका है। नई नियुक्तियों के संबंध में शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय को रिक्त पदों को ब्योरा देने को कहा है। उच्च शिक्षा सचिव अशोक कुमार ने बताया कि यूजीसी रेगुलेशन-दो हज़ार अट्ठारह को राज्य सरकार कुछ संशोधनों के साथ लागू कर चुकी है। नई नियुक्तियां इसके मुताबिक होंगी। नई व्यवस्था के तहत नियुक्तियों में दिक्कतें भी पेश नहीं आएंगी। हालांकि, नियमित नियुक्तियों में लंबा समय लगने की वजह से संविदा पर शिक्षकों की नियुक्तियां करने पर मंथन चल रहा है। पंचायत चुनाव निपटने के बाद इस कार्य को तेजी से अंजाम दिया जाएगा। |
रात्रि गश्त के दौरान नवाबगंज पुलिस से 25 हजार के इनामी बदमाश व वांछित अन्तर्राज्जीय गौ तस्कर सलीम से आमने सामने मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान नवाबगंज थाना प्रभारी के बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और बाल-बाल बच गए। पुलिस वाहन गाड़ी के शीशे भी टूट गए।
गोंडाः बीती रात गोंडा के थाना नवाबगंज पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। रात्रि गश्त के दौरान नवाबगंज पुलिस से 25 हजार के इनामी बदमाश व वांछित अन्तर्राज्जीय गौ तस्कर सलीम से आमने सामने मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान नवाबगंज थाना प्रभारी के बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और बाल-बाल बच गए। पुलिस वाहन गाड़ी के शीशे भी टूट गए।
पुलिस मुठभेड़ के दौरान 25000 के ईनामी व वांछित गौ तस्कर सलीम के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। और अन्य वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है। पकड़ा गया वांछित गौ तस्कर थाना रोहानी जनपद अयोध्या का रहने वाला है। अभियुक्त के पास से एक अवैध तमंचा दो अवैध कारतूस तीन बांका और 06 गोवंश बरामद हुए है। मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया आरोपी सलीम अपने गैंग के सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित कई राज्यों में करते हैं पशु तस्करी।
| रात्रि गश्त के दौरान नवाबगंज पुलिस से पच्चीस हजार के इनामी बदमाश व वांछित अन्तर्राज्जीय गौ तस्कर सलीम से आमने सामने मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान नवाबगंज थाना प्रभारी के बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और बाल-बाल बच गए। पुलिस वाहन गाड़ी के शीशे भी टूट गए। गोंडाः बीती रात गोंडा के थाना नवाबगंज पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। रात्रि गश्त के दौरान नवाबगंज पुलिस से पच्चीस हजार के इनामी बदमाश व वांछित अन्तर्राज्जीय गौ तस्कर सलीम से आमने सामने मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान नवाबगंज थाना प्रभारी के बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और बाल-बाल बच गए। पुलिस वाहन गाड़ी के शीशे भी टूट गए। पुलिस मुठभेड़ के दौरान पच्चीस हज़ार के ईनामी व वांछित गौ तस्कर सलीम के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। और अन्य वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है। पकड़ा गया वांछित गौ तस्कर थाना रोहानी जनपद अयोध्या का रहने वाला है। अभियुक्त के पास से एक अवैध तमंचा दो अवैध कारतूस तीन बांका और छः गोवंश बरामद हुए है। मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया आरोपी सलीम अपने गैंग के सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित कई राज्यों में करते हैं पशु तस्करी। |
आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ बॉलीवुड में करीबी दोस्तों में मानी जाती हैं। इन दोनों की बॉन्डिंग आपने कई इवेंट या अवॉर्ड शो में देखी होगी। लेकिन जबसे आलिया भट्ट और रणवीर कपूर ने अपने रिलेशनशिप की बात कबूली थी, तबसे ये अटकलें लगाई जा रही थी कि इस वजह से कैटरीना और आलिया की दोस्ती में दरार आ गया है। लेकिन आलिया के बर्थडे के वक्त कैटरीना ने इंस्टाग्राम पर प्यारा सा बर्थडे विश पोस्ट कर इन अफवाहों पर विराम लगा दिया। अब एक बार और कैटरीना ने आलिया के लिए अपना प्यार दिखाया है और उनकी तारीफ की।
जी हां, आलिया की आने वाली फिल्म 'कलंक' का गाना रिलीज हुआ है। इसमें उनके साथ माधुरी दीक्षित नजर आ रही हैं। इसी गाने को लेकर कैटरीना ने एक प्यारा कमेंट किया। आप भी जानिए कैटरीना ने आलिया को क्या कमेंट करके तारीफ की है।
'कलंक' फिल्म का गाना रिलीज होने के बाद आलिया भट्ट ने इसे अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। इस पोस्ट पर उनके फैंस और करीबियों के काफी कमेंट्स आए। इन्हीं में से एक कमेंट था कैटरीना कैफ का। इस एक्ट्रेस ने आलिया के इस गाने पर 'वेल डन आलू' लिखकर तीन दिल वाले इमोजी बनाए हैं। कैटरीना का उनके लिए ये प्यार देखकर साफ है कि इन दोनों एक्ट्रेस के बीच सबकुछ नॉर्मल है और अब भी उनकी बॉन्डिंग पहले की तरह ही है।
अभी कुछ वक्त पहले ही इस फिल्म का टीजर लॉन्च हुआ था जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। अब इसका पहला गाना 'घर मोरे परदेसिया' आ चुका है। इस फिल्म में आलिया के अलावा वरुण धवन, संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर नजर आएंगे। ये फिल्म 17 अप्रैल को रिलीज होगी। आलिया की ये पहली पीरियडिक फिल्म होगी। इसे अभिषेक वर्मान ने डायरेक्ट और करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है।
| आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ बॉलीवुड में करीबी दोस्तों में मानी जाती हैं। इन दोनों की बॉन्डिंग आपने कई इवेंट या अवॉर्ड शो में देखी होगी। लेकिन जबसे आलिया भट्ट और रणवीर कपूर ने अपने रिलेशनशिप की बात कबूली थी, तबसे ये अटकलें लगाई जा रही थी कि इस वजह से कैटरीना और आलिया की दोस्ती में दरार आ गया है। लेकिन आलिया के बर्थडे के वक्त कैटरीना ने इंस्टाग्राम पर प्यारा सा बर्थडे विश पोस्ट कर इन अफवाहों पर विराम लगा दिया। अब एक बार और कैटरीना ने आलिया के लिए अपना प्यार दिखाया है और उनकी तारीफ की। जी हां, आलिया की आने वाली फिल्म 'कलंक' का गाना रिलीज हुआ है। इसमें उनके साथ माधुरी दीक्षित नजर आ रही हैं। इसी गाने को लेकर कैटरीना ने एक प्यारा कमेंट किया। आप भी जानिए कैटरीना ने आलिया को क्या कमेंट करके तारीफ की है। 'कलंक' फिल्म का गाना रिलीज होने के बाद आलिया भट्ट ने इसे अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। इस पोस्ट पर उनके फैंस और करीबियों के काफी कमेंट्स आए। इन्हीं में से एक कमेंट था कैटरीना कैफ का। इस एक्ट्रेस ने आलिया के इस गाने पर 'वेल डन आलू' लिखकर तीन दिल वाले इमोजी बनाए हैं। कैटरीना का उनके लिए ये प्यार देखकर साफ है कि इन दोनों एक्ट्रेस के बीच सबकुछ नॉर्मल है और अब भी उनकी बॉन्डिंग पहले की तरह ही है। अभी कुछ वक्त पहले ही इस फिल्म का टीजर लॉन्च हुआ था जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। अब इसका पहला गाना 'घर मोरे परदेसिया' आ चुका है। इस फिल्म में आलिया के अलावा वरुण धवन, संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर नजर आएंगे। ये फिल्म सत्रह अप्रैल को रिलीज होगी। आलिया की ये पहली पीरियडिक फिल्म होगी। इसे अभिषेक वर्मान ने डायरेक्ट और करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है। |
जगदलपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। बस्तर के आदिवासी पतिवर्ष छह करोड़ रूपये की शराब गटक जाते हैं। यदि उन्हें घर पर ही शराब बनाने की छूट दी जाये तो यह राशि उनके परिवार पर ही खर्च होगी। इस हेतु 1975 में आदिवासियों को महुये की शराब बनाकर पीने की छूट दी गई थी, लेकिन 35 सालों में पेंद और राज्य सरकारों ने इस छूट का विश्लेषण करने की कोशिश नहीं की सामाजिक चेतना के आधार पर छूट पर पतिबंध लगाने की बात जन पतिनिधियों और आदिवासी नेताओं ने कही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने शराबबंदी की दशा में सकारात्मक कार्रवाई करते हुए पिछले दो वर्षों में 203 शराब दुकानों को बंद करवाया है। वहीं भारत माता वाहिनी भी इस दिशा में पयासरत है। आदिवासी क्षेत्रों में किराना दुकान से लेकर हाट-बाजारों में घटिया स्तर की अंग्रेजी शराब भी खुलेआम बिक रही है। ठेकेदार ज्यादा से ज्यादा कारोबार करने के उद्देश्य से ग्रामीणों को इस कार्य में लगाये हुए है। यहां तक की स्कूली बच्चें भी बाजार में शराब बेच रहे हैं। जगह-जगह पोस्टर लगाकर नक्सली भी ग्रामीणों को शराब त्यागने की अपील कर रहे हें पर इसका भी कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। बस्तर में शराब ठेवे दारों पर आदिवासी के आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए 1975 में 19 लीटर तक मुहुये की शराब बनाकर सेव करने की छूट आदिवासियों को दी गई थी तथा यह पतिबंध भी लगाया गया था कि वे इस शराब को बेचेंगे नहीं, लेकिन पूरे बस्तर में शराब का खुलेआम कारोबार चल रहा है और इस छूट का फायदा गैरआदिवासी अधिक उठा रहे है। संभाग के सप्ताहिक बाजारों और मुर्गा बाजार में खुलेआम शराब की दुकान सजती हैं। सांसद बस्तर दिनेश कश्यप ने कहा है कि आदिवासियों को जो शराब बनाने की छूट दी गई थी। इसे शासकीय स्तर पर नहीं वरन सामाजिक चेतना के आधार पर ही पतिबंध लगना चाहिए। कोंटा विधायक कवासी लखमा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के 31 तथा अनुसूचित जाति के 8 विधायक हैं। इन्हें विधानसभा में पस्ताव रखकर छूट की मात्रा कम करने अथवा छू पर पतिबंध लगवाने की बात रखना चाहिए। सीपीआई नेता मनीष पुंजाम ने कहा कि आदिवासियों को मिली महुये की शराब बनाने की छूट पर पतिबंध लगाने से पहले बस्तर में संचालित सभी अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानों को बंद करना चाहिए। ��ा l�� x�8 ��5 �ल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में गरीबों को सस्ते और पर्याप्त अनाज की गारंटी देने वाला खाद्य सुरक्षा कानून अब तक नहीं बन पाया, जबकि छत्तीसगढ़ ने पिछले महीने अपनी विधानसभा में इस कानून का निर्माण कर राज्य के 42 लाख गरीब परिवारों को भोजन के अधिकार की कानूनी गारंटी दी है। नया राज्य होने के बावजूद छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा कानून बनाने वाला पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर जिले के विकास के लिए लगभग 331 करोड़ रूपए के 172 निर्माण कार्यो का लोकार्पण, भूमिपूजन और शिलान्यास करते हुए कहा कि यह जिले के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जब इतनी बड़ी राशि से एक साथ इतनी अधिक संख्या में निर्माण कार्यो का शुभारंभ और लोकार्पण हो रहा है। डॉ. सिंह जनता को विश्वास दिलाया कि सबके सहयोग से नये जिले की यह विकास यात्रा लगातार जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिला मुख्यालय बलरामपुर में टाउन हाल निर्माण के लिए एक करोड़ रूपए और शासकीय कर्मचारियों के आवास गृहों के निर्माण के लिए दस करोड़ रूपए की धन राशि मंजूर करने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि निकटवर्ती ग्राम पस्ता की पुलिस चौकी का उन्नयन पुलिस थाने के रूप में किया जाएगा। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नये जिलों में जनता को सभी बुनियादी सुविधाएं तेजी से उपलब्ध करायी जा रही हैं। आज बलरामपुर में 12 करोड़ रूपए की लागत से संयुक्प जिला कार्यालय भवन का भूमि पूजन हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भवन में सभी विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय एक साथ संचालित होंगे। इससे आम जनता को अपने कार्यो के लिए अलग-अलग जगह में चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लोगों के समय की भी बचत होगी। इसी तरह पत्येक नये जिला मुख्यालय में पांच करोड़ 18 लाख रूपए की लागत से एक सौ बिस्तर वाले शासकीय जिला अस्पताल भवन का भी भूमि पूजन हो रहा है। जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन द्वारा गांवों के विकास के लिए पंचायतों को भरपूर धनराशि दी जा रही है। ग्राम गौरव पथ और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना का संचालन किया जा रहा है। ग्राम गौरव पथ योजना में इस वर्ष लगभग ढाई सौ करोड़ रूपए की लागत से गांवों में सीमेन्ट कांत्रढाrट सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है। अगले वर्ष इस योजना में हम तीन सौ से चार सौ करोड़ रूपए तक खर्च करेंगे। गांवों में जनता को अच्छी सड़कों पर चलने की सुविधा मिलेगी। सी. सी. रोड बन जाने पर लोगों को बरसात में कीचड़ की समस्या भी नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने नये बलरापुर-रामानुजगंज जिले के विकास के लिए गृह मंत्री और जिले के पभारी ननकीराम कंवर तथा उच्च शिक्षा और जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम सहित सभी जनपतिनिधियों के सहयोग की भी पशंसा की। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नये जिले के विकास को लेकर जनता में भी भारी उत्साह है और जिले के सभी नागरिकों का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है। जनसभा को गृह, जेल और सहकारिता मंत्री ननकीराम कंवर, जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम और संसदीय सचिव सिध्दनाथ पैकरा और लोकसभा सांसद मुरारी लाल सिंह ने भी सम्बोधित किया।
| जगदलपुर, । बस्तर के आदिवासी पतिवर्ष छह करोड़ रूपये की शराब गटक जाते हैं। यदि उन्हें घर पर ही शराब बनाने की छूट दी जाये तो यह राशि उनके परिवार पर ही खर्च होगी। इस हेतु एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में आदिवासियों को महुये की शराब बनाकर पीने की छूट दी गई थी, लेकिन पैंतीस सालों में पेंद और राज्य सरकारों ने इस छूट का विश्लेषण करने की कोशिश नहीं की सामाजिक चेतना के आधार पर छूट पर पतिबंध लगाने की बात जन पतिनिधियों और आदिवासी नेताओं ने कही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने शराबबंदी की दशा में सकारात्मक कार्रवाई करते हुए पिछले दो वर्षों में दो सौ तीन शराब दुकानों को बंद करवाया है। वहीं भारत माता वाहिनी भी इस दिशा में पयासरत है। आदिवासी क्षेत्रों में किराना दुकान से लेकर हाट-बाजारों में घटिया स्तर की अंग्रेजी शराब भी खुलेआम बिक रही है। ठेकेदार ज्यादा से ज्यादा कारोबार करने के उद्देश्य से ग्रामीणों को इस कार्य में लगाये हुए है। यहां तक की स्कूली बच्चें भी बाजार में शराब बेच रहे हैं। जगह-जगह पोस्टर लगाकर नक्सली भी ग्रामीणों को शराब त्यागने की अपील कर रहे हें पर इसका भी कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। बस्तर में शराब ठेवे दारों पर आदिवासी के आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में उन्नीस लीटरटर तक मुहुये की शराब बनाकर सेव करने की छूट आदिवासियों को दी गई थी तथा यह पतिबंध भी लगाया गया था कि वे इस शराब को बेचेंगे नहीं, लेकिन पूरे बस्तर में शराब का खुलेआम कारोबार चल रहा है और इस छूट का फायदा गैरआदिवासी अधिक उठा रहे है। संभाग के सप्ताहिक बाजारों और मुर्गा बाजार में खुलेआम शराब की दुकान सजती हैं। सांसद बस्तर दिनेश कश्यप ने कहा है कि आदिवासियों को जो शराब बनाने की छूट दी गई थी। इसे शासकीय स्तर पर नहीं वरन सामाजिक चेतना के आधार पर ही पतिबंध लगना चाहिए। कोंटा विधायक कवासी लखमा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के इकतीस तथा अनुसूचित जाति के आठ विधायक हैं। इन्हें विधानसभा में पस्ताव रखकर छूट की मात्रा कम करने अथवा छू पर पतिबंध लगवाने की बात रखना चाहिए। सीपीआई नेता मनीष पुंजाम ने कहा कि आदिवासियों को मिली महुये की शराब बनाने की छूट पर पतिबंध लगाने से पहले बस्तर में संचालित सभी अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानों को बंद करना चाहिए। ��ा l�� x�आठ ��पाँच �ल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में गरीबों को सस्ते और पर्याप्त अनाज की गारंटी देने वाला खाद्य सुरक्षा कानून अब तक नहीं बन पाया, जबकि छत्तीसगढ़ ने पिछले महीने अपनी विधानसभा में इस कानून का निर्माण कर राज्य के बयालीस लाख गरीब परिवारों को भोजन के अधिकार की कानूनी गारंटी दी है। नया राज्य होने के बावजूद छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा कानून बनाने वाला पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर जिले के विकास के लिए लगभग तीन सौ इकतीस करोड़ रूपए के एक सौ बहत्तर निर्माण कार्यो का लोकार्पण, भूमिपूजन और शिलान्यास करते हुए कहा कि यह जिले के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जब इतनी बड़ी राशि से एक साथ इतनी अधिक संख्या में निर्माण कार्यो का शुभारंभ और लोकार्पण हो रहा है। डॉ. सिंह जनता को विश्वास दिलाया कि सबके सहयोग से नये जिले की यह विकास यात्रा लगातार जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिला मुख्यालय बलरामपुर में टाउन हाल निर्माण के लिए एक करोड़ रूपए और शासकीय कर्मचारियों के आवास गृहों के निर्माण के लिए दस करोड़ रूपए की धन राशि मंजूर करने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि निकटवर्ती ग्राम पस्ता की पुलिस चौकी का उन्नयन पुलिस थाने के रूप में किया जाएगा। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नये जिलों में जनता को सभी बुनियादी सुविधाएं तेजी से उपलब्ध करायी जा रही हैं। आज बलरामपुर में बारह करोड़ रूपए की लागत से संयुक्प जिला कार्यालय भवन का भूमि पूजन हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भवन में सभी विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय एक साथ संचालित होंगे। इससे आम जनता को अपने कार्यो के लिए अलग-अलग जगह में चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लोगों के समय की भी बचत होगी। इसी तरह पत्येक नये जिला मुख्यालय में पांच करोड़ अट्ठारह लाख रूपए की लागत से एक सौ बिस्तर वाले शासकीय जिला अस्पताल भवन का भी भूमि पूजन हो रहा है। जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन द्वारा गांवों के विकास के लिए पंचायतों को भरपूर धनराशि दी जा रही है। ग्राम गौरव पथ और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना का संचालन किया जा रहा है। ग्राम गौरव पथ योजना में इस वर्ष लगभग ढाई सौ करोड़ रूपए की लागत से गांवों में सीमेन्ट कांत्रढाrट सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है। अगले वर्ष इस योजना में हम तीन सौ से चार सौ करोड़ रूपए तक खर्च करेंगे। गांवों में जनता को अच्छी सड़कों पर चलने की सुविधा मिलेगी। सी. सी. रोड बन जाने पर लोगों को बरसात में कीचड़ की समस्या भी नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने नये बलरापुर-रामानुजगंज जिले के विकास के लिए गृह मंत्री और जिले के पभारी ननकीराम कंवर तथा उच्च शिक्षा और जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम सहित सभी जनपतिनिधियों के सहयोग की भी पशंसा की। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नये जिले के विकास को लेकर जनता में भी भारी उत्साह है और जिले के सभी नागरिकों का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है। जनसभा को गृह, जेल और सहकारिता मंत्री ननकीराम कंवर, जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम और संसदीय सचिव सिध्दनाथ पैकरा और लोकसभा सांसद मुरारी लाल सिंह ने भी सम्बोधित किया। |
हसन राजा :
हसन राजा ने सिर्फ 14 साल की उम्र में ही पाकिस्तान के लिए अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत कर दी थी. अपनी टीम के लिए वह सबसे पहले ज़िम्बाब्वे के खिलाफ खेले जिसमे उन्होंने 48 गेंदों पर 27 रन बनाये थे. उन्होंने अपने करियर में 7 टेस्ट मैच खेले और 235 रन बनाए थे.
मुश्ताक मोहम्मद :
लाहौर में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पाकिस्तान के लिए इन्होने 16 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत कर दी थी. अपने पहले मैच में ये कुछ ख़ास नहीं कर पाये थे और न ही गेंदबाज़ी में कोई सफलता हाथ लगी थी. मुश्ताक मोहम्मद ने अपने कैरियर में 79 विकेट लिए हैं. 1979 में पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इन्होने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला.
आकिब जावेद :
पाकिस्तान के एक और खिलाडी आकिब जावेद ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 17 वर्ष की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी. वह दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज थे. अपने 22 टेस्ट मैचों के कैरियर में इन्होने कुल 54 विकेट लिए हैं. 1998 में जिम्बाब्वे के खिलाफ इन्होने अपने करियर का आखिरी मैच खेला.
सचिन रमेश तेंदुलकर :
भारत के दिग्गज खिलाडी सचिन तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी. इन्होने 53. 78 की बल्लेबाजी औसत के साथ 200 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान 46 विकेट लिए. वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के बाद 2013 में सचिन ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
आफताब बलूच :
पाकिस्तान टीम के एक और दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज आफताब ने 16 वर्ष की आयु में 1969 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने करियर की शुरुआत की और केवल दो टेस्ट मैच ही खेले. 1975 में लाहौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ इन्होने अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला.
| हसन राजा : हसन राजा ने सिर्फ चौदह साल की उम्र में ही पाकिस्तान के लिए अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत कर दी थी. अपनी टीम के लिए वह सबसे पहले ज़िम्बाब्वे के खिलाफ खेले जिसमे उन्होंने अड़तालीस गेंदों पर सत्ताईस रन बनाये थे. उन्होंने अपने करियर में सात टेस्ट मैच खेले और दो सौ पैंतीस रन बनाए थे. मुश्ताक मोहम्मद : लाहौर में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पाकिस्तान के लिए इन्होने सोलह साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत कर दी थी. अपने पहले मैच में ये कुछ ख़ास नहीं कर पाये थे और न ही गेंदबाज़ी में कोई सफलता हाथ लगी थी. मुश्ताक मोहम्मद ने अपने कैरियर में उन्यासी विकेट लिए हैं. एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इन्होने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला. आकिब जावेद : पाकिस्तान के एक और खिलाडी आकिब जावेद ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सत्रह वर्ष की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी. वह दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज थे. अपने बाईस टेस्ट मैचों के कैरियर में इन्होने कुल चौवन विकेट लिए हैं. एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में जिम्बाब्वे के खिलाफ इन्होने अपने करियर का आखिरी मैच खेला. सचिन रमेश तेंदुलकर : भारत के दिग्गज खिलाडी सचिन तेंदुलकर ने सोलह साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी. इन्होने तिरेपन. अठहत्तर की बल्लेबाजी औसत के साथ दो सौ टेस्ट मैच खेले और इस दौरान छियालीस विकेट लिए. वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के बाद दो हज़ार तेरह में सचिन ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया. आफताब बलूच : पाकिस्तान टीम के एक और दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज आफताब ने सोलह वर्ष की आयु में एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने करियर की शुरुआत की और केवल दो टेस्ट मैच ही खेले. एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में लाहौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ इन्होने अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने भारतीय क्रिकेट टीम को वनडे सीरीज में 2-1 से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया वनडे में दुनिया की नंबर एक टीम भी बन गई है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के रेटिंग अंक समान हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने पहला स्थान हासिल कर लिया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के पास 113-113 अंक हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम 111 अंक के साथ तीसरे और इंग्लैंड समान अंक के साथ चौथे स्थान पर है।
कंगारू टीम टेस्ट में पहले से ही दुनिया की नंबर एक टीम बनी हुई है। 122 रेटिंग अंकों के साथ वे पहले स्थान पर बने हुए हैं। भारत 119 रेटिंग अंकों के साथ यहां दूसरे स्थान पर है। टी-20 अंतरराष्ट्रीय में भारत 267 रेटिंग अंकों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया यहां छठे स्थान पर है और उनके पास 251 अंक हैं। इंग्लैंड 261 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है।
| ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने भारतीय क्रिकेट टीम को वनडे सीरीज में दो-एक से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया वनडे में दुनिया की नंबर एक टीम भी बन गई है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के रेटिंग अंक समान हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने पहला स्थान हासिल कर लिया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के पास एक सौ तेरह-एक सौ तेरह अंक हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम एक सौ ग्यारह अंक के साथ तीसरे और इंग्लैंड समान अंक के साथ चौथे स्थान पर है। कंगारू टीम टेस्ट में पहले से ही दुनिया की नंबर एक टीम बनी हुई है। एक सौ बाईस रेटिंग अंकों के साथ वे पहले स्थान पर बने हुए हैं। भारत एक सौ उन्नीस रेटिंग अंकों के साथ यहां दूसरे स्थान पर है। टी-बीस अंतरराष्ट्रीय में भारत दो सौ सरसठ रेटिंग अंकों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया यहां छठे स्थान पर है और उनके पास दो सौ इक्यावन अंक हैं। इंग्लैंड दो सौ इकसठ अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। |
आप सभी जानते ही होंगे आश्विन माह की अमावस्या को महालय अमावस्या कहा जाता है। जी दरअसल यह पितृ पक्ष के अंतिम दिन मनाते हैं जो कल यानी 17 सितंबर को थी। अब आज से यानी 18 सितंबर से मलमास आरम्भ हो गया है जो 16 अक्टूबर तक चलने वाला है। वहीं इस बार 22 अक्टूबर को षष्ठी और 26 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाने वाली है। अब बात करें मलमास के बारे में तो इस दौरान ना तो कोई त्योहार मनाया जाता है और ना ही कोई भी शुभ कार्य किया जाता है।
जी दरअसल बंगाली महीना आश्विन एक चंद्र महीना है, इस कारण दुर्गा पूजा इसके खत्म होने के बाद ही शुरू की जाती है। वैसे मलमास को अधिकमास और पुरुषोत्तम मास भी कहते है। कहा जाता है सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। वहीं इन दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है और हर साल घटने वाले इन 11 दिनों को जोड़ा जाए तो ये एक माह के बराबर होते हैं।
यही अंतर होता है जिसे पूरा करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आ जाता है, जिसे मलमास कहा जाता है। आपको बता दें कि आखिरी बार ऐसा साल 2001 में हुआ था और अब साल 2020 में हो रहा है। जी दरअसल इस बार 17 अक्टूबर से दुर्गा पूजा मनाई जाएगी यानी शारदीय नवरात्र आरम्भ होंगे।
कृति सेनन की नयी पोस्ट ने मचाया हंगामा, यूजर्स बोले- 'कुछ किया है नहीं और भाषण दे रही हो'
| आप सभी जानते ही होंगे आश्विन माह की अमावस्या को महालय अमावस्या कहा जाता है। जी दरअसल यह पितृ पक्ष के अंतिम दिन मनाते हैं जो कल यानी सत्रह सितंबर को थी। अब आज से यानी अट्ठारह सितंबर से मलमास आरम्भ हो गया है जो सोलह अक्टूबर तक चलने वाला है। वहीं इस बार बाईस अक्टूबर को षष्ठी और छब्बीस अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाने वाली है। अब बात करें मलमास के बारे में तो इस दौरान ना तो कोई त्योहार मनाया जाता है और ना ही कोई भी शुभ कार्य किया जाता है। जी दरअसल बंगाली महीना आश्विन एक चंद्र महीना है, इस कारण दुर्गा पूजा इसके खत्म होने के बाद ही शुरू की जाती है। वैसे मलमास को अधिकमास और पुरुषोत्तम मास भी कहते है। कहा जाता है सूर्य वर्ष तीन सौ पैंसठ दिन और छः घंटाटे का होता है और चंद्र वर्ष तीन सौ चौवन दिनों का माना जाता है। वहीं इन दोनों वर्षों के बीच लगभग ग्यारह दिनों का अंतर होता है और हर साल घटने वाले इन ग्यारह दिनों को जोड़ा जाए तो ये एक माह के बराबर होते हैं। यही अंतर होता है जिसे पूरा करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आ जाता है, जिसे मलमास कहा जाता है। आपको बता दें कि आखिरी बार ऐसा साल दो हज़ार एक में हुआ था और अब साल दो हज़ार बीस में हो रहा है। जी दरअसल इस बार सत्रह अक्टूबर से दुर्गा पूजा मनाई जाएगी यानी शारदीय नवरात्र आरम्भ होंगे। कृति सेनन की नयी पोस्ट ने मचाया हंगामा, यूजर्स बोले- 'कुछ किया है नहीं और भाषण दे रही हो' |
६२ ] त्रिपष्टि शलाका पुरुष- चरित्रः पर्व १. सर्ग १.
फिर भक्तिभरे मनवाले उस ललितांगदेवने वहाँसे उठकर चैत्यमें जा शास्वती अप्रतिमाकी पूजा की और तीन ग्राम ( सप्तक ) के स्वरोंसे मधुर और मंगलमय गायनोंके साथ विविध स्तोत्रोंसे जिनेश्वरकी स्तुति की; ज्ञानके लिए दीपकके समान ग्रंथ पढ़े और मंडपके खंभेमें रखी हुई रहती की अर्चना पूजा की । ( ४६६-४६७ )
फिरपत्र ( छत्र ) धारण करनेसे पूर्णिमाके चंद्रकी तरह प्रकाशमान होकर वह क्रीड़ाभुवन में गया । अपनी प्रभासे बिजलीकी प्रभाको भी लज्जित करनेवाली स्वयंप्रभा नामकी देवीको उसने वहाँ देखा। उसके नेत्र, मुख और धरण बहुत कोमल थे, उनसे वह ऐसी मालूम होती थी मानों वह लावण्यसिंधु ( सुंदरता के समुद्र ) में कमलबाटिका (वाड़ी ) है । अनुक्रमसे स्थूल और गोल जाँघोंसे वह ऐसी जान पड़ती थी मानों कामदेवने अपना माथा वहाँ रखा है। स्वच्छ वस्त्रोंसे ढके हुए नितंबोंसे वह ऐसे शोभती थी जैसे राजहंसोंसे व्याप्त किनारोंसे नदी शोभती है। पुष्ट और उन्नतस्तनका भार उठानेसे कृश बना हुआ उदर ( उदर और कमर ) वज्यके मध्यभागके समान मालूम होता था, जिसने उसकी मनोहरताको बढ़ा दिया था। उसका तीन रेखाओंवाला और मधुर स्वर बोलनेवाला कंठ कामदेवके विजयकी घोषणा करनेवाले शखके जैसा
लगता था। विवफलका तिरस्कार करनेवाले होठोंसे और नेत्रप्पी कमलकी नालकी लीलाको ग्रहण करनेवाली नासिकासे वह बहुत ही सुंदर दिखाई देती थी। पूर्णिमाके आधे किए हुए चंद्रमाकी सारी लक्ष्मीका हरण करनेवाले उसके स्निग्ध और सुंदर ललाटसे यह मनको मोह लेनी थी। उसके कान कामदेवके भूलेकी लीलाको हरनेवाले थे। पुष्पयाणके धनुपकी शोभाको हरनेवाली उसकी भ्रकुटी थी। मुसरूपी कमलके पीछे फिरनेवाले भ्रमरममूहकी तरह और स्निन काजलके समान उसके केश थे । सारे शरीर में धारण किए हुए रत्न जटित आभूपोंकी रचनासे वह चलती-फिरती कामलतासो मालूम होती थी; और मनोहर मुखकमलवाली हजारों अप्सराओंसे घिरी हुई वह अनेक नदियोंसे वेष्टित गंगाके समान जान पड़ती थी। (४६८-५१०)
ललितांगदेवको अपने पास आते देख, उसने स्नेह-युक्तिसे खड़े होकर उसका सत्कार किया। वह श्रीप्रभ विमानका स्वामी स्वयंप्रभा के साथ जाकर पलंगपर बैठा। वे इस तरह शोमने लगे जैसे एक आलवाल (थाले) में वृक्ष और लता (पेड़ और बेल ) शोभते हैं। एकड़ी बेड़ीसे बँधे हुए ( दो आदमी एकत्रित रहते हैं पैसे ) नियिह रागसे ( बहुत प्रेमसे ) बँधे हुए उनके चित्त एक दूसरे में लीन हो गए। जिसके प्रेमकी सुगन्ध अविच्छिन्न है ( कभी मिटती नहीं है। ऐसे श्रीप्रभ विमानके प्रभुने देवी स्वयंप्रभाके साथ क्रीडा करते हुए, बहुतसा काल बिताया जो एक कलोके समान मालूम हुआ। फिर जैसे वृक्षसे पत्ता गिर
१. मला समयका प्रमाए ओ १ मिनिट ३६ सेक्डके बराबर होता है ।
६४ ] त्रिषष्टि शलाका पुरुष - चरित्रः पर्व १. सर्ग १.
पड़ता है वैसेही, आयु पूर्ण होनेसे, स्वयंप्रभा देवीका यहाँ से च्यवन हो गया - देवगतिसे किसी दूसरी गतिमें चली गई । कहा है कि"आयुःकर्मणि हि क्षीणे, नेंद्रोऽपि स्थातुमीश्वरः ।"
। आयुकर्मके समाप्त होजानेपर इंद्र भी रहनेमें समर्थ नहीं होता । ] ( ५११-५१५ )
प्रियाके वियोगन्दु खसे ललितांगदेव इस तरह गिरकर मूच्छित हो गया, मानो वह पर्वतसे गिरा हो या वयके आघातसे गिरा हो । थोड़ी देरसे जब वह होश आया तब वह जार ज़ार रोने लगा। उसकी प्रतिध्वनि ऐसे जान पड़ती थी मानों सारा श्रीप्रभ विमान रो रहा है। बाग-बगीचोंमें उसका मन न लगा, वापिकाओके (ठंडे पानीसे) उसका मन ठंडा न हुआ, क्रीडापर्वत में उसे शांति न मिली और नन्दनवनसे भी उसको खुशी न हुई। हा प्रिये ! तू कहाँ है ? हा प्रिये ! हा प्रिये ! पुकारता और रोता, वह सारी दुनियाको, स्वयंप्रभामय देखता, चारों तरफ फिरने लगा। (५१६-५२६)
उधर स्वयंबुद्ध मंत्रीको भी अपने स्वामी की मौतसे वैराग्य पैदा हुआ। और उसने श्रीसिद्धाचार्य नामक दीक्षा लेलो । वह बहुत वर्षों तक निरतिचार दीक्षा पाल, आयु पूर्णकर, ईशान देवलोक में इंद्रका 'धर्मा' नामक सामानिकदेव हुआ । ( ५२०५२१ )
उस उदारबुद्धिवाले देवके मनमे पूर्वभव के संबंधसे, बंधुकासा प्रेम हुआ। वह अपने विमानसे) ललितांगदेव के पास | बासठ ] त्रिपष्टि शलाका पुरुष- चरित्रः पर्व एक. सर्ग एक. फिर भक्तिभरे मनवाले उस ललितांगदेवने वहाँसे उठकर चैत्यमें जा शास्वती अप्रतिमाकी पूजा की और तीन ग्राम के स्वरोंसे मधुर और मंगलमय गायनोंके साथ विविध स्तोत्रोंसे जिनेश्वरकी स्तुति की; ज्ञानके लिए दीपकके समान ग्रंथ पढ़े और मंडपके खंभेमें रखी हुई रहती की अर्चना पूजा की । फिरपत्र धारण करनेसे पूर्णिमाके चंद्रकी तरह प्रकाशमान होकर वह क्रीड़ाभुवन में गया । अपनी प्रभासे बिजलीकी प्रभाको भी लज्जित करनेवाली स्वयंप्रभा नामकी देवीको उसने वहाँ देखा। उसके नेत्र, मुख और धरण बहुत कोमल थे, उनसे वह ऐसी मालूम होती थी मानों वह लावण्यसिंधु में कमलबाटिका है । अनुक्रमसे स्थूल और गोल जाँघोंसे वह ऐसी जान पड़ती थी मानों कामदेवने अपना माथा वहाँ रखा है। स्वच्छ वस्त्रोंसे ढके हुए नितंबोंसे वह ऐसे शोभती थी जैसे राजहंसोंसे व्याप्त किनारोंसे नदी शोभती है। पुष्ट और उन्नतस्तनका भार उठानेसे कृश बना हुआ उदर वज्यके मध्यभागके समान मालूम होता था, जिसने उसकी मनोहरताको बढ़ा दिया था। उसका तीन रेखाओंवाला और मधुर स्वर बोलनेवाला कंठ कामदेवके विजयकी घोषणा करनेवाले शखके जैसा लगता था। विवफलका तिरस्कार करनेवाले होठोंसे और नेत्रप्पी कमलकी नालकी लीलाको ग्रहण करनेवाली नासिकासे वह बहुत ही सुंदर दिखाई देती थी। पूर्णिमाके आधे किए हुए चंद्रमाकी सारी लक्ष्मीका हरण करनेवाले उसके स्निग्ध और सुंदर ललाटसे यह मनको मोह लेनी थी। उसके कान कामदेवके भूलेकी लीलाको हरनेवाले थे। पुष्पयाणके धनुपकी शोभाको हरनेवाली उसकी भ्रकुटी थी। मुसरूपी कमलके पीछे फिरनेवाले भ्रमरममूहकी तरह और स्निन काजलके समान उसके केश थे । सारे शरीर में धारण किए हुए रत्न जटित आभूपोंकी रचनासे वह चलती-फिरती कामलतासो मालूम होती थी; और मनोहर मुखकमलवाली हजारों अप्सराओंसे घिरी हुई वह अनेक नदियोंसे वेष्टित गंगाके समान जान पड़ती थी। ललितांगदेवको अपने पास आते देख, उसने स्नेह-युक्तिसे खड़े होकर उसका सत्कार किया। वह श्रीप्रभ विमानका स्वामी स्वयंप्रभा के साथ जाकर पलंगपर बैठा। वे इस तरह शोमने लगे जैसे एक आलवाल में वृक्ष और लता शोभते हैं। एकड़ी बेड़ीसे बँधे हुए नियिह रागसे बँधे हुए उनके चित्त एक दूसरे में लीन हो गए। जिसके प्रेमकी सुगन्ध अविच्छिन्न है प्रियाके वियोगन्दु खसे ललितांगदेव इस तरह गिरकर मूच्छित हो गया, मानो वह पर्वतसे गिरा हो या वयके आघातसे गिरा हो । थोड़ी देरसे जब वह होश आया तब वह जार ज़ार रोने लगा। उसकी प्रतिध्वनि ऐसे जान पड़ती थी मानों सारा श्रीप्रभ विमान रो रहा है। बाग-बगीचोंमें उसका मन न लगा, वापिकाओके उसका मन ठंडा न हुआ, क्रीडापर्वत में उसे शांति न मिली और नन्दनवनसे भी उसको खुशी न हुई। हा प्रिये ! तू कहाँ है ? हा प्रिये ! हा प्रिये ! पुकारता और रोता, वह सारी दुनियाको, स्वयंप्रभामय देखता, चारों तरफ फिरने लगा। उधर स्वयंबुद्ध मंत्रीको भी अपने स्वामी की मौतसे वैराग्य पैदा हुआ। और उसने श्रीसिद्धाचार्य नामक दीक्षा लेलो । वह बहुत वर्षों तक निरतिचार दीक्षा पाल, आयु पूर्णकर, ईशान देवलोक में इंद्रका 'धर्मा' नामक सामानिकदेव हुआ । उस उदारबुद्धिवाले देवके मनमे पूर्वभव के संबंधसे, बंधुकासा प्रेम हुआ। वह अपने विमानसे) ललितांगदेव के पास |
नई दिल्लीः भारत में पर्व-त्यौहार के दौरान काफी पकवान बनते हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के भोजन और मिठाइयां होती हैं। दरअसल दिवाली हो या होली इस दौरान नमकीन और मीठे पकवानों की भरमार होती है। दिवाली पांच पर्वों की पुनीत परंपरा है इसलिए इस दौरान मिठाईयों की खूब खपत होती है। ज्यादातर लोग गिफ्ट के तौर पर मिठाई देते हैं। इस दौरान मिठाईयां भी लोग जमकर खाते हैं इसलिए जरूरी है कि इस दौरान पर्व खत्म होने के बाद शरीर की बेहतरी के लिए डिटॉक्स किया जाए। त्योहारी सीजन के बाद आप कैसे जल्दी से डिटॉक्स कर सकते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें।
आपके लिए यह जरूरी है कि पर्व-त्यौहार के बाद आपका खानपान बहुत हल्का हो। क्योंकि पिछले दिनों आपने भारी और मीठा भोजन किया है। मिठाई और सेवई खाने के बाद, पेट को जरूरी ब्रेक देने की आवश्यकता होती है। डिटॉक्स करने का सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि आप अपने शरीर को अंदर से साफ करें। आप प्याज और लहसुन के बिना व्यंजनों का विकल्प चुन सकते हैं और कुजछ मांस खाने से बच सकते हैं। साधारण दाल और चावल या दाल और रोटी और एक साधारण सब्ज़ी के साथ पंच फ़ोरन, एक मसाला मिश्रण का सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। आपको कुछ दिनों के लिए अपना आहार हल्का रखना है और गरिष्ठ भोजन से बचना है।
अगर आपको लगता है कि आप त्योहारी सीजन के दौरान जमकर खाया है , तो आप फल और सलाद आहार ले सकते हैं। उपवास में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इस दौरान आप फलाहार और जूस लें, सलाद का सेवन भी सहीं रहेगा। वास्तव में, व्यावहारिक रूप से उपवास शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है। अपने भोजन के स्थान पर फल, सलाद और फलों का रस लें। आप महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के साथ अपने शरीर को डिटॉक्स करने में सक्षम होंगे।
अपने नियमित चाय या कॉफी को छोड़ दें और इसके बजाय हर्बल या ग्रीन टी का आनंद लें। आपके पाचन तंत्र को इससे आराम मिलेगा। इसलिए, नियमित पेय पदार्थों से बचें। उसकी जगह ग्रीन टी या काढ़ा का सेवन सहीं रहेगा।
थकान, पीठ या गर्दन के दर्द से राहत पाने के लिए सरल योग आसनों का अभ्यास करें। प्राणायाम और योग के आसनों को करना आपके लिए सही रहेगा।
कृपया सुनिश्चित करें कि आपको अच्छी नींद आती है क्योंकि यह डिटॉक्स करने का सबसे सरल तरीका है। लगभग आठ घंटे तक सोने के बाद आप अपने शरीर को इसके तनाव और परेशानी से राहत दिला पाएंगे।
(डिस्क्लेमरः प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। )
| नई दिल्लीः भारत में पर्व-त्यौहार के दौरान काफी पकवान बनते हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के भोजन और मिठाइयां होती हैं। दरअसल दिवाली हो या होली इस दौरान नमकीन और मीठे पकवानों की भरमार होती है। दिवाली पांच पर्वों की पुनीत परंपरा है इसलिए इस दौरान मिठाईयों की खूब खपत होती है। ज्यादातर लोग गिफ्ट के तौर पर मिठाई देते हैं। इस दौरान मिठाईयां भी लोग जमकर खाते हैं इसलिए जरूरी है कि इस दौरान पर्व खत्म होने के बाद शरीर की बेहतरी के लिए डिटॉक्स किया जाए। त्योहारी सीजन के बाद आप कैसे जल्दी से डिटॉक्स कर सकते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें। आपके लिए यह जरूरी है कि पर्व-त्यौहार के बाद आपका खानपान बहुत हल्का हो। क्योंकि पिछले दिनों आपने भारी और मीठा भोजन किया है। मिठाई और सेवई खाने के बाद, पेट को जरूरी ब्रेक देने की आवश्यकता होती है। डिटॉक्स करने का सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि आप अपने शरीर को अंदर से साफ करें। आप प्याज और लहसुन के बिना व्यंजनों का विकल्प चुन सकते हैं और कुजछ मांस खाने से बच सकते हैं। साधारण दाल और चावल या दाल और रोटी और एक साधारण सब्ज़ी के साथ पंच फ़ोरन, एक मसाला मिश्रण का सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। आपको कुछ दिनों के लिए अपना आहार हल्का रखना है और गरिष्ठ भोजन से बचना है। अगर आपको लगता है कि आप त्योहारी सीजन के दौरान जमकर खाया है , तो आप फल और सलाद आहार ले सकते हैं। उपवास में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इस दौरान आप फलाहार और जूस लें, सलाद का सेवन भी सहीं रहेगा। वास्तव में, व्यावहारिक रूप से उपवास शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है। अपने भोजन के स्थान पर फल, सलाद और फलों का रस लें। आप महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के साथ अपने शरीर को डिटॉक्स करने में सक्षम होंगे। अपने नियमित चाय या कॉफी को छोड़ दें और इसके बजाय हर्बल या ग्रीन टी का आनंद लें। आपके पाचन तंत्र को इससे आराम मिलेगा। इसलिए, नियमित पेय पदार्थों से बचें। उसकी जगह ग्रीन टी या काढ़ा का सेवन सहीं रहेगा। थकान, पीठ या गर्दन के दर्द से राहत पाने के लिए सरल योग आसनों का अभ्यास करें। प्राणायाम और योग के आसनों को करना आपके लिए सही रहेगा। कृपया सुनिश्चित करें कि आपको अच्छी नींद आती है क्योंकि यह डिटॉक्स करने का सबसे सरल तरीका है। लगभग आठ घंटे तक सोने के बाद आप अपने शरीर को इसके तनाव और परेशानी से राहत दिला पाएंगे। |
कानपुर देहात के रसूलाबाद बाद में उस समय हड़कम्प मच गया जब एक युवती अपने प्रेमी से नाराज होकर रसूलाबाद थाने के बाहर पहुंची। लड़की की हरकर देख वहां मौजूद हर व्यक्ति इधर-उधर दौड़ने लगा।
दरअसल, इस युवती के हाथ में तमंचा था जिसे देख लोग घबरा गए। वहां मौजूद लोगों के सामने ही तमंचा निकाल कर उसने अपने माथे पर रख लिया। बस फिर क्या था अचानक जबरदस्त शौर मच गया। थाने के करीब हंगामा की आवाज सुन पुलिस भी वहां पहुंच गई।
किसी तरह युवती के हाथ से तमंचा छीना गया। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में लेते हुए युवती से पूछताछ की। पता चला उसके प्रेमी ने शादी से इनकार कर दिया था।
प्रेमिका ने कहा कि अगर शादी नही करोगे तो जान दे दूंगी इस पर प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को तमंचा देते हुए बोला ये लो मार लो गोली। वही युवती थाने के बाहर जैसे ही तमंचा लेकर पहुंची तो लोगो ने शोर मचाया मौके पर पहुंची पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद युवती से तमंचा छीना।
| कानपुर देहात के रसूलाबाद बाद में उस समय हड़कम्प मच गया जब एक युवती अपने प्रेमी से नाराज होकर रसूलाबाद थाने के बाहर पहुंची। लड़की की हरकर देख वहां मौजूद हर व्यक्ति इधर-उधर दौड़ने लगा। दरअसल, इस युवती के हाथ में तमंचा था जिसे देख लोग घबरा गए। वहां मौजूद लोगों के सामने ही तमंचा निकाल कर उसने अपने माथे पर रख लिया। बस फिर क्या था अचानक जबरदस्त शौर मच गया। थाने के करीब हंगामा की आवाज सुन पुलिस भी वहां पहुंच गई। किसी तरह युवती के हाथ से तमंचा छीना गया। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में लेते हुए युवती से पूछताछ की। पता चला उसके प्रेमी ने शादी से इनकार कर दिया था। प्रेमिका ने कहा कि अगर शादी नही करोगे तो जान दे दूंगी इस पर प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को तमंचा देते हुए बोला ये लो मार लो गोली। वही युवती थाने के बाहर जैसे ही तमंचा लेकर पहुंची तो लोगो ने शोर मचाया मौके पर पहुंची पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद युवती से तमंचा छीना। |
मामला खंडवा के मुंदी थाना क्षेत्र के बंगारदा का बताया जा रहा है.
खंडवा. मध्यप्रदेश के खंडवा में एक सिरफिरे युवक ने युवती को चाकुओं से गोद दिया और मौके से फरार हो गया. युवती का बस इतना कसूर था कि उसने आरोपी के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. इस बात से आरोपी के सिर पर इस कदर खून सवार हुआ कि उसने युवती को चाकुओं से गोद दिया. हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. युवती को खून से लथपथ हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उसका इलाज किया जा रहा है.
मामला खंडवा के मुंदी थाना क्षेत्र के बंगारदा का बताया जा रहा है. यहां एक सनकी युवक ने युवती के विवाह से इंकार किए जाने से युवती के घर में घुसकर चाकू से जोरदार हमला बोल दिया. सनकी युवक का नाम बबलू है और वह इस युवती से विवाह करना चाहता था. लेकिन युवती द्वारा मना करने पर वह आक्रोशित हो गया और मंगलवार को जब युवती अपने घर में अकेली थी तो उसने घर में घुसकर चाकू से उसके गले पर वार कर दिया.
युवती की बहन ने जब वहां शोर मचाना शुरू कर दिया तो आरोपी मौके से फरार हो गया. घायल युवती का नाम मनीषा बताया जा रहा है. युवती को मूंदी से खंडवा रेफर किया गया है. जहां खंडवा जिला अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है. इस मामले में अभी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. एसपी सिविल लाइंस खंडवा विवेक सिंह ने बताया कि लड़की का ऑपरेशन किया गया है लेकिन उसकी हालत अभी भी नाजुक है. आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए हमारी टीम प्रयासरत है.
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| मामला खंडवा के मुंदी थाना क्षेत्र के बंगारदा का बताया जा रहा है. खंडवा. मध्यप्रदेश के खंडवा में एक सिरफिरे युवक ने युवती को चाकुओं से गोद दिया और मौके से फरार हो गया. युवती का बस इतना कसूर था कि उसने आरोपी के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. इस बात से आरोपी के सिर पर इस कदर खून सवार हुआ कि उसने युवती को चाकुओं से गोद दिया. हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. युवती को खून से लथपथ हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उसका इलाज किया जा रहा है. मामला खंडवा के मुंदी थाना क्षेत्र के बंगारदा का बताया जा रहा है. यहां एक सनकी युवक ने युवती के विवाह से इंकार किए जाने से युवती के घर में घुसकर चाकू से जोरदार हमला बोल दिया. सनकी युवक का नाम बबलू है और वह इस युवती से विवाह करना चाहता था. लेकिन युवती द्वारा मना करने पर वह आक्रोशित हो गया और मंगलवार को जब युवती अपने घर में अकेली थी तो उसने घर में घुसकर चाकू से उसके गले पर वार कर दिया. युवती की बहन ने जब वहां शोर मचाना शुरू कर दिया तो आरोपी मौके से फरार हो गया. घायल युवती का नाम मनीषा बताया जा रहा है. युवती को मूंदी से खंडवा रेफर किया गया है. जहां खंडवा जिला अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है. इस मामले में अभी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. एसपी सिविल लाइंस खंडवा विवेक सिंह ने बताया कि लड़की का ऑपरेशन किया गया है लेकिन उसकी हालत अभी भी नाजुक है. आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए हमारी टीम प्रयासरत है. . |
मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में रखने की मांग की जा रही है। इस मामले में 9 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसको लेकर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था, केंद्र ने कहा हमारा जवाब तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग का जा रही है। मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने के लिए याचिका दी गई थी। इस याचिका पर 9 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में रखा जाए। CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस मामले में 9 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। इससे पहले कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को आदेश देते हुए 15 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य सभी पक्षों को भी तीन मार्च तक लिखित दलील दाखिल करने के आदेश दिए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी में आता है या फिर नहीं इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को परीक्षण करने के लिए कहा था। कोर्ट ने 16 सितंबर 2022 को केंद्र को आदेश देते हुए कहा कि केंद्र इस मामले को लेकर नोटिस जारी करे। इसको लेकर केंद्र सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले का बड़ा असर होने वाला है। उन्होंने कहा कि हमने कुछ महीने पहले सभी हितधारकों से मामले में विचार मांगे थे, ऐसे में लोगों के जवाब जानकर लग रहा है कि देश में मैरिटल रेप के फैसले का बड़ा असर पड़ने वाला है।
बता दें कि भारतीय कानून में मैरिटल रेप को कानूनी तौर पर अपराध नहीं माना जाता है, लेकिन कई संगठनों के लोग सुप्रीम कोर्ट से मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर लंबे समय से मांग चल रही है। वहीं, अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 मई को सुनवाई होगी।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से पहले यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा था। दिल्ली HC की दो जजों की बेंच ने 11 मई, 2022 को बंटा हुआ फैसला सुनाया था। इस मामले की सुनवाई में दोनों जजों की राय एक दूसरे से अलग थी। दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ की अध्यक्षता करने वाले जस्टिस राजीव शकधर ने मैरिटल रेप अपवाद को रद्द करने का समर्थन किया था, जबकि जस्टिस सी हरिशंकर ने मामले में कहा कि IPC के तहत अपवाद असंवैधानिक नहीं है। इसके बाद दोनों जजों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के पास प्रस्तावित कर दिया था।
| मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में रखने की मांग की जा रही है। इस मामले में नौ मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसको लेकर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था, केंद्र ने कहा हमारा जवाब तैयार है। सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग का जा रही है। मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने के लिए याचिका दी गई थी। इस याचिका पर नौ मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में रखा जाए। CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस मामले में नौ मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। इससे पहले कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को आदेश देते हुए पंद्रह फरवरी तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य सभी पक्षों को भी तीन मार्च तक लिखित दलील दाखिल करने के आदेश दिए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी में आता है या फिर नहीं इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को परीक्षण करने के लिए कहा था। कोर्ट ने सोलह सितंबर दो हज़ार बाईस को केंद्र को आदेश देते हुए कहा कि केंद्र इस मामले को लेकर नोटिस जारी करे। इसको लेकर केंद्र सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले का बड़ा असर होने वाला है। उन्होंने कहा कि हमने कुछ महीने पहले सभी हितधारकों से मामले में विचार मांगे थे, ऐसे में लोगों के जवाब जानकर लग रहा है कि देश में मैरिटल रेप के फैसले का बड़ा असर पड़ने वाला है। बता दें कि भारतीय कानून में मैरिटल रेप को कानूनी तौर पर अपराध नहीं माना जाता है, लेकिन कई संगठनों के लोग सुप्रीम कोर्ट से मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर लंबे समय से मांग चल रही है। वहीं, अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नौ मई को सुनवाई होगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से पहले यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा था। दिल्ली HC की दो जजों की बेंच ने ग्यारह मई, दो हज़ार बाईस को बंटा हुआ फैसला सुनाया था। इस मामले की सुनवाई में दोनों जजों की राय एक दूसरे से अलग थी। दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ की अध्यक्षता करने वाले जस्टिस राजीव शकधर ने मैरिटल रेप अपवाद को रद्द करने का समर्थन किया था, जबकि जस्टिस सी हरिशंकर ने मामले में कहा कि IPC के तहत अपवाद असंवैधानिक नहीं है। इसके बाद दोनों जजों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के पास प्रस्तावित कर दिया था। |
मुंबईःपॉपुलर शो बालिका वधू से अपने करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस अविका गोर अपनी अपकमिंग फिल्म कजाख को लेकर काफी चर्चाओं में हैं। वह तेलुगू प्रोजेक्ट्स में भी काम कर रही हैं।
अविका गोर ने कहा, मैंने कभी नहीं माना कि मैं किसी भी दौड़ का हिस्सा था। मैं बस वही करती रही, जो मेरा मन मुझसे करने के लिए कहा, मैंने हमेशा अपना रास्ता खुद चुना है। अपना करियर खुद बनाया है। मैं जो कर रही हूं, उससे मैं बहुत खुश हूं।
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि कई लोग ओटीटी और दूसरे कंटेंट प्लेटफॉर्म के ऑफर्स देते हैं, क्योंकि यहां कुछ साल पहले की तुलना में दर्शकों की संख्या ज्यादा है। मुझे खुशी है कि लोग अपने पसंदीदा मेकर्स पर भरोसा बनाए रखते हैं, जो उनके लिए शानदार शो के साथ आते हैं।
वह आगे कहती है, मैं निश्चित रूप से इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखती हूं। मैं मानती हूं कि अगर आप वास्तव में चाहते हैं तो आप अपने लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
| मुंबईःपॉपुलर शो बालिका वधू से अपने करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस अविका गोर अपनी अपकमिंग फिल्म कजाख को लेकर काफी चर्चाओं में हैं। वह तेलुगू प्रोजेक्ट्स में भी काम कर रही हैं। अविका गोर ने कहा, मैंने कभी नहीं माना कि मैं किसी भी दौड़ का हिस्सा था। मैं बस वही करती रही, जो मेरा मन मुझसे करने के लिए कहा, मैंने हमेशा अपना रास्ता खुद चुना है। अपना करियर खुद बनाया है। मैं जो कर रही हूं, उससे मैं बहुत खुश हूं। एक्ट्रेस ने आगे कहा कि कई लोग ओटीटी और दूसरे कंटेंट प्लेटफॉर्म के ऑफर्स देते हैं, क्योंकि यहां कुछ साल पहले की तुलना में दर्शकों की संख्या ज्यादा है। मुझे खुशी है कि लोग अपने पसंदीदा मेकर्स पर भरोसा बनाए रखते हैं, जो उनके लिए शानदार शो के साथ आते हैं। वह आगे कहती है, मैं निश्चित रूप से इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखती हूं। मैं मानती हूं कि अगर आप वास्तव में चाहते हैं तो आप अपने लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी. |
मेरठ न्यूज़ः बिना विद्युत कनेक्शन लिए किसानों द्वारा चलाए जाने वाले विद्युत उपकरणों को लेकर ऊर्जा निगम सख्ती करने जा रहा है। यदि कोई भी किसान बिना कनेक्शन लिए बिजली का प्रयोग करते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश जारी हुआ हैं। किसानों द्वारा कृषि में उपयोग होने वाले भरी भरकम विद्युत उपकरणों को बिना कनेक्शन लिए चलाने पर अब कार्रवाई होगी। मेरठ सहित पूरे वेस्ट यूपी में किसानों नें बिना कनेक्शन के कोल्हू व क्रेशर चलाया तो बिजली चोरी के जुर्म का जुर्माना भुगतना पड़ेगा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने किसानों से कोल्हू-क्रेशर चलाने के लिए अस्थायी कनेक्शन लेने का फरमान जारी किया है।
अस्थायी कनेक्शन ले सकते हैं किसानः पश्चिमांचल क्षेत्र में आनें वाले मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, सम्भल, अमरोहा, रामपुर व बिजनौर में यह नियम लागू होने जा रहा हैं। इन जिलों में किसान नजदीक के खंड-उपखंड कार्यालय में आवेदन देकर कोल्हू व केनक्रेशर के अस्थायी कनेक्शन ले सकते हैं।
बिना परेशानी के दिया जाए कनेक्शनः प्रबन्ध निदेशक अरविन्द मल्लप्पा बंगारी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है किसानों को बिना किसी परेशानी के विद्युत कनेक्शन जारी किए जाएं। विभाग के सभी अधिशासी अभियन्ता (वितरण) के लिए आदेश जारी किया गया है जिसमें कोल्हू व केनक्रेशर के अस्थायी संयोजन बिना किसी परेशानी के मीटर स्थापित लगवाकर दिए जाने की बात कही गई हैं।
अनुमति बिना मिला कनेक्शन तो होगी एफआईआरः बिजली विभाग का कहना है अगर कोई कोल्हू व क्रेशर बिना बिजली कनेक्शन की अनुमति के चलता मिला तो एफआईआर होगी। केनक्रेशर व कोल्हू के उपभोक्ताओं की रीडिंग हर महीनें एमआरआई से की जायेगी। बिल आॅनलाइन बिलिंग सिस्टम पर लेजराइज करके एमआरआई से प्राप्त रीडिंग और डिमांड के हिसाब से बनेंगे।
| मेरठ न्यूज़ः बिना विद्युत कनेक्शन लिए किसानों द्वारा चलाए जाने वाले विद्युत उपकरणों को लेकर ऊर्जा निगम सख्ती करने जा रहा है। यदि कोई भी किसान बिना कनेक्शन लिए बिजली का प्रयोग करते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश जारी हुआ हैं। किसानों द्वारा कृषि में उपयोग होने वाले भरी भरकम विद्युत उपकरणों को बिना कनेक्शन लिए चलाने पर अब कार्रवाई होगी। मेरठ सहित पूरे वेस्ट यूपी में किसानों नें बिना कनेक्शन के कोल्हू व क्रेशर चलाया तो बिजली चोरी के जुर्म का जुर्माना भुगतना पड़ेगा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने किसानों से कोल्हू-क्रेशर चलाने के लिए अस्थायी कनेक्शन लेने का फरमान जारी किया है। अस्थायी कनेक्शन ले सकते हैं किसानः पश्चिमांचल क्षेत्र में आनें वाले मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, सम्भल, अमरोहा, रामपुर व बिजनौर में यह नियम लागू होने जा रहा हैं। इन जिलों में किसान नजदीक के खंड-उपखंड कार्यालय में आवेदन देकर कोल्हू व केनक्रेशर के अस्थायी कनेक्शन ले सकते हैं। बिना परेशानी के दिया जाए कनेक्शनः प्रबन्ध निदेशक अरविन्द मल्लप्पा बंगारी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है किसानों को बिना किसी परेशानी के विद्युत कनेक्शन जारी किए जाएं। विभाग के सभी अधिशासी अभियन्ता के लिए आदेश जारी किया गया है जिसमें कोल्हू व केनक्रेशर के अस्थायी संयोजन बिना किसी परेशानी के मीटर स्थापित लगवाकर दिए जाने की बात कही गई हैं। अनुमति बिना मिला कनेक्शन तो होगी एफआईआरः बिजली विभाग का कहना है अगर कोई कोल्हू व क्रेशर बिना बिजली कनेक्शन की अनुमति के चलता मिला तो एफआईआर होगी। केनक्रेशर व कोल्हू के उपभोक्ताओं की रीडिंग हर महीनें एमआरआई से की जायेगी। बिल आॅनलाइन बिलिंग सिस्टम पर लेजराइज करके एमआरआई से प्राप्त रीडिंग और डिमांड के हिसाब से बनेंगे। |
गुरुग्राम. देश की सबसे बड़ी सिक्यूरिटी कम्पनी g4s ने कवि संजय कुमार गिरि को उनकी मेहनत और ईमानदारी से निरंतर 17 वर्ष तक g4s कम्पनी में कार्यरत होने पर सम्मानित किया। संजय गिरि ने इन 17 वर्षों में गुरुग्राम की कई बड़ी विदेशी कम्पनियों में सुपरवाईजर की पोस्ट पर अपनी सेवायें दी, जिनमे जेनपेक्ट,कारगिल इण्डिया,मेक्स न्यू आर्क,एचएसबीसी,फिडेलिटी इंडिया,एरिक्सन इंडिया आदि प्रमुख हैं। एरिया मनेजर सुहैल आलम एवं उनकी ड्यूटी पोस्ट कम्पनी एनआरएम इंटर नेशनल कम्पनी के मैनेजर संचित लूथरा के कर कमलों द्वारा सम्मानित किया गया। इस सुअवसर पर संचित लूथरा ने संजय गिरि को भविष्य के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
| गुरुग्राम. देश की सबसे बड़ी सिक्यूरिटी कम्पनी gचार सेकंड ने कवि संजय कुमार गिरि को उनकी मेहनत और ईमानदारी से निरंतर सत्रह वर्ष तक gचार सेकंड कम्पनी में कार्यरत होने पर सम्मानित किया। संजय गिरि ने इन सत्रह वर्षों में गुरुग्राम की कई बड़ी विदेशी कम्पनियों में सुपरवाईजर की पोस्ट पर अपनी सेवायें दी, जिनमे जेनपेक्ट,कारगिल इण्डिया,मेक्स न्यू आर्क,एचएसबीसी,फिडेलिटी इंडिया,एरिक्सन इंडिया आदि प्रमुख हैं। एरिया मनेजर सुहैल आलम एवं उनकी ड्यूटी पोस्ट कम्पनी एनआरएम इंटर नेशनल कम्पनी के मैनेजर संचित लूथरा के कर कमलों द्वारा सम्मानित किया गया। इस सुअवसर पर संचित लूथरा ने संजय गिरि को भविष्य के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। |
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यहां एपस्टीन बार वायरस में अंतर्जात रूप से व्यक्त किए गए आरवाईआर 1 उत्परिवर्तन के कार्यात्मक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले तरीकों ने मानव बी-लिम्फोसाइट्स को अमर कर दिया और मांसपेशियों की बायोप्सी व्युत्पन्न उपग्रह कोशिकाओं को मायोट्यूब में विभेदित किया गया।
यह प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रोगी सामग्री का उपयोग करता है। यदि रोगी को बीमारी है, तो उनकी कोशिकाओं का उपयोग करने से रोगी की जैविक प्रतिक्रिया को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करना चाहिए। यह तकनीक प्रदर्शन करने के लिए सरल है, सरल है, और परिष्कृत उपकरणों की आवश्यकता नहीं है।
इन विधियों का उपयोग निदान के लिए किया जा सकता है, उदाहरण के लिए, यह साबित करने के लिए कि एक RYR1 उत्परिवर्तन कार्यात्मक रूप से कैल्शियम होमियोस्टैसिस को बदलता है, साथ ही साथ एक यौगिक के संभावित चिकित्सीय कार्य का परीक्षण करने के लिए। व्यक्तिगत शोधकर्ता के ज्ञान और तकनीकी कौशल के आधार पर, वास्तविक रोगी नमूनों का उपयोग करने से पहले परीक्षण प्रयोग किए जाने चाहिए। ईबीवी-रूपांतरित बी लिम्फोसाइटों की इंट्रासेल्युलर कैल्शियम एकाग्रता में परिवर्तन की निगरानी करने के लिए, क्रेब्स रिंगर के समाधान में सातवीं कोशिकाओं के लिए एक बार 10 से सातवीं कोशिकाओं के लिए अमर बी कोशिकाओं को फिर से निलंबित कर दिया गया और फुरा -2 एएम 37 डिग्री सेल्सियस पर 30 मिनट के इनक्यूबेशन के लिए पांच माइक्रोमोलर की अंतिम एकाग्रता के लिए।
इनक्यूबेशन के अंत में, सेंट्रीफ्यूजेशन द्वारा कोशिकाओं को इकट्ठा करें, और ताजा क्रेब्स रिंगर के समाधान में छर्रे को दो बार 10 से लेकर छठी कोशिकाओं प्रति मिलीलीटर एकाग्रता में फिर से निलंबित करें। प्रयोग शुरू करने से ठीक पहले, कोशिकाओं को फिर से सेंट्रीफ्यूज करें, और जल्दी से क्रेब्स रिंगर के समाधान के 1.5 मिलीलीटर में कोशिकाओं को फिर से निलंबित कर दें, जो 0.5-मिलीमोलर ईजीटीए के साथ पूरक है, लेकिन कोई जोड़ा कैल्शियम नहीं है। कोशिकाओं को एक ग्लास, तीन-मिलीलीटर स्पेक्ट्रोफ्लोरोमीटर क्यूवेट में स्थानांतरित करें, और लगभग 30 सेकंड के लिए अधिकतम वेग और 37 डिग्री सेल्सियस पर एक चुंबकीय हलचल सेट से सुसज्जित स्पेक्ट्रोफ्लोरोमीटर पर प्रतिदीप्ति अनुपात रिकॉर्ड करें।
एकल कोशिकाओं में कैल्शियम रिलीज प्रतिक्रिया का आकलन करने के लिए, प्लेट एक बार 106 Fura-2 AM क्रेब्स रिंगर के समाधान के एक मिलीलीटर में लोड कोशिकाओं को अलग-अलग पॉली-एल-लाइसिन लेपित ग्लास कवर स्लिप पर एक-मिलीमोलर कैल्शियम क्लोराइड के साथ पूरक किया जाता है, और 30 मिनट के लिए एक ह्यूमिडिफाइड सेल कल्चर इनक्यूबेटर में 37 डिग्री सेल्सियस पर कवर स्लिप को इनक्यूबेट करता है। जब कोशिकाएं संलग्न हो जाती हैं, तो एक कवर स्लिप को एक परफ्यूजन चैंबर में रखें, और क्रेब्स रिंगर के समाधान के दो मिलीलीटर पर कोशिकाओं को परफ्यूज करना शुरू करें, जो प्रति मिनट एक-मिलीमोलर कैल्शियम प्रवाह दर के साथ पूरक है। 40 गुना तेल विसर्जन उद्देश्य और उपयुक्त फिल्टर से सुसज्जित एक उल्टे फ्लोरोसेंट माइक्रोस्कोप का उपयोग करके, एक निश्चित एक्सपोज़र समय पर एक सेकंड के अंतराल पर एक सॉफ्टवेयर-नियंत्रित, चार्ज-युग्मित डिवाइस कैमरा अनुलग्नक के साथ ऑनलाइन माप रिकॉर्ड करें।
सेल उत्तेजना प्राप्त करने के लिए, एगोनिस्ट की विभिन्न सांद्रता जोड़ने के लिए 12 वाल्वों के साथ एक सेल परफ्यूजन उत्तेजक का उपयोग करें। मानव मांसपेशी बायोप्सी से मायोट्यूब्स को अलग करने के लिए, पहले छोटे, 0.5 से एक मिलीमीटर के टुकड़ों में ऊतक को कम करने से पहले किसी भी अतिरिक्त रक्त को हटाने के लिए बाँझ पीबीएस के साथ बायोप्सी को कुल्ला करें। छह-अच्छी तरह से ऊतक संस्कृति प्लेट के प्रत्येक कुएं में अलग-अलग आवेषण में दो से तीन टुकड़े रखें, जिसमें प्रति अच्छी तरह से मानव मांसपेशियों के विकास माध्यम के 1.5 मिलीलीटर और प्रति सम्मिलित माध्यम के 500 माइक्रोलीटर होते हैं, और प्लेट को सेल संस्कृति इनक्यूबेटर में रखते हैं।
मानव मायोट्यूब में कैल्शियम अभिव्यक्ति में परिवर्तन को मापने के लिए, जब मल्टीन्यूक्लिएटेड मायोट्यूब देखे जा सकते हैं, तो मायोट्यूब संस्कृति supernatants को ताजा भेदभाव माध्यम के साथ प्रतिस्थापित करें, जो सेल संस्कृति इनक्यूबेटर में 30 मिनट के इनक्यूबेशन के लिए एक-मिलीमोलर फुरा -2 एएम के 10 माइक्रोलीटर के साथ पूरक है। इनक्यूबेशन के अंत में, परफ्यूजन चैंबर में एक ग्लास कवर स्लिप संस्कृति को स्थानांतरित करें, और क्रेब्स रिंगर के समाधान के साथ कोशिकाओं को कुल्ला करें जो दो-मिलीमोलर कैल्शियम क्लोराइड के साथ पूरक है। फिर ऑनलाइन कैल्शियम माप करें जैसा कि 20 बार पानी विसर्जन उद्देश्य का उपयोग करके प्रदर्शित किया गया है।
इस प्रतिनिधि विश्लेषण में, एगोनिस्ट के अलावा के बाद ईबीवी-अमर बी लिम्फोसाइट्स में कैल्शियम में तेजी से वृद्धि देखी गई थी जो धीरे-धीरे समय के साथ आराम के स्तर पर वापस आ गई थी। इसी तरह के एक प्रयोग में, 400-नैनोमोलर थाप्सिगन के अलावा एक बड़े कैल्शियम क्षणिक का कारण बना जो 2.4 मनमाने ढंग से इकाइयों के चरम प्रतिदीप्ति मूल्य तक पहुंच गया। इस प्रतिदीप्ति मान को 100% माना जाता था जब संबंधित खुराक प्रतिक्रिया वक्र का निर्माण किया गया था।
इस विश्लेषण में, अमर बी कोशिकाओं को 20 सेकंड के लिए पांच-मिलीमोलर कैफीन के साथ उत्तेजित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप 340 और 380-नैनोमीटर प्रतिदीप्ति अनुपात में तत्काल वृद्धि हुई थी। परीक्षण किए गए प्रत्येक कैफीन एकाग्रता के लिए, प्रतिदीप्ति के 380 नैनोमीटर द्वारा 340 के अनुपात में कैफीन-प्रेरित चोटी की गणना की गई थी और इसका उपयोग खुराक प्रतिक्रिया वक्र के निर्माण के लिए किया गया था। विभेदित मायोट्यूब से कैल्शियम रिलीज का मूल्यांकन पोटेशियम क्लोराइड, एगोनिस्ट की विभिन्न सांद्रता, और / या कैफीन के साथ फ्लशिंग के जवाब में भी किया जा सकता है, और सामान्य खुराक प्रतिक्रिया वक्र उत्पन्न किया जा सकता है।
यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि कोशिकाओं को फुरा -2 के साथ ठीक से लोड किया गया है और यह कि 340 और 380-नैनोमीटर तरंग दैर्ध्य दोनों एगोनिस्ट के अतिरिक्त का जवाब देते हैं। फ्लोरोसेंट कैल्शियम संकेतकों के साथ इंट्रासेल्युलर कैल्शियम माप की जांच अधिकांश स्तनधारी कोशिकाओं में की जा सकती है और विभिन्न उत्तेजनाओं के जवाब में इंट्रासेल्युलर कैल्शियम परिवर्तनों के अध्ययन के लिए लागू किया जा सकता है।
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Please note that all translations are automatically generated. यहां एपस्टीन बार वायरस में अंतर्जात रूप से व्यक्त किए गए आरवाईआर एक उत्परिवर्तन के कार्यात्मक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले तरीकों ने मानव बी-लिम्फोसाइट्स को अमर कर दिया और मांसपेशियों की बायोप्सी व्युत्पन्न उपग्रह कोशिकाओं को मायोट्यूब में विभेदित किया गया। यह प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रोगी सामग्री का उपयोग करता है। यदि रोगी को बीमारी है, तो उनकी कोशिकाओं का उपयोग करने से रोगी की जैविक प्रतिक्रिया को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करना चाहिए। यह तकनीक प्रदर्शन करने के लिए सरल है, सरल है, और परिष्कृत उपकरणों की आवश्यकता नहीं है। इन विधियों का उपयोग निदान के लिए किया जा सकता है, उदाहरण के लिए, यह साबित करने के लिए कि एक RYRएक उत्परिवर्तन कार्यात्मक रूप से कैल्शियम होमियोस्टैसिस को बदलता है, साथ ही साथ एक यौगिक के संभावित चिकित्सीय कार्य का परीक्षण करने के लिए। व्यक्तिगत शोधकर्ता के ज्ञान और तकनीकी कौशल के आधार पर, वास्तविक रोगी नमूनों का उपयोग करने से पहले परीक्षण प्रयोग किए जाने चाहिए। ईबीवी-रूपांतरित बी लिम्फोसाइटों की इंट्रासेल्युलर कैल्शियम एकाग्रता में परिवर्तन की निगरानी करने के लिए, क्रेब्स रिंगर के समाधान में सातवीं कोशिकाओं के लिए एक बार दस से सातवीं कोशिकाओं के लिए अमर बी कोशिकाओं को फिर से निलंबित कर दिया गया और फुरा -दो एएम सैंतीस डिग्री सेल्सियस पर तीस मिनट के इनक्यूबेशन के लिए पांच माइक्रोमोलर की अंतिम एकाग्रता के लिए। इनक्यूबेशन के अंत में, सेंट्रीफ्यूजेशन द्वारा कोशिकाओं को इकट्ठा करें, और ताजा क्रेब्स रिंगर के समाधान में छर्रे को दो बार दस से लेकर छठी कोशिकाओं प्रति मिलीलीटर एकाग्रता में फिर से निलंबित करें। प्रयोग शुरू करने से ठीक पहले, कोशिकाओं को फिर से सेंट्रीफ्यूज करें, और जल्दी से क्रेब्स रिंगर के समाधान के एक दशमलव पाँच मिलीलीटर में कोशिकाओं को फिर से निलंबित कर दें, जो शून्य.पाँच-मिलीमोलर ईजीटीए के साथ पूरक है, लेकिन कोई जोड़ा कैल्शियम नहीं है। कोशिकाओं को एक ग्लास, तीन-मिलीलीटर स्पेक्ट्रोफ्लोरोमीटर क्यूवेट में स्थानांतरित करें, और लगभग तीस सेकंड के लिए अधिकतम वेग और सैंतीस डिग्री सेल्सियस पर एक चुंबकीय हलचल सेट से सुसज्जित स्पेक्ट्रोफ्लोरोमीटर पर प्रतिदीप्ति अनुपात रिकॉर्ड करें। एकल कोशिकाओं में कैल्शियम रिलीज प्रतिक्रिया का आकलन करने के लिए, प्लेट एक बार एक सौ छः Fura-दो AM क्रेब्स रिंगर के समाधान के एक मिलीलीटर में लोड कोशिकाओं को अलग-अलग पॉली-एल-लाइसिन लेपित ग्लास कवर स्लिप पर एक-मिलीमोलर कैल्शियम क्लोराइड के साथ पूरक किया जाता है, और तीस मिनट के लिए एक ह्यूमिडिफाइड सेल कल्चर इनक्यूबेटर में सैंतीस डिग्री सेल्सियस पर कवर स्लिप को इनक्यूबेट करता है। जब कोशिकाएं संलग्न हो जाती हैं, तो एक कवर स्लिप को एक परफ्यूजन चैंबर में रखें, और क्रेब्स रिंगर के समाधान के दो मिलीलीटर पर कोशिकाओं को परफ्यूज करना शुरू करें, जो प्रति मिनट एक-मिलीमोलर कैल्शियम प्रवाह दर के साथ पूरक है। चालीस गुना तेल विसर्जन उद्देश्य और उपयुक्त फिल्टर से सुसज्जित एक उल्टे फ्लोरोसेंट माइक्रोस्कोप का उपयोग करके, एक निश्चित एक्सपोज़र समय पर एक सेकंड के अंतराल पर एक सॉफ्टवेयर-नियंत्रित, चार्ज-युग्मित डिवाइस कैमरा अनुलग्नक के साथ ऑनलाइन माप रिकॉर्ड करें। सेल उत्तेजना प्राप्त करने के लिए, एगोनिस्ट की विभिन्न सांद्रता जोड़ने के लिए बारह वाल्वों के साथ एक सेल परफ्यूजन उत्तेजक का उपयोग करें। मानव मांसपेशी बायोप्सी से मायोट्यूब्स को अलग करने के लिए, पहले छोटे, शून्य.पाँच से एक मिलीमीटर के टुकड़ों में ऊतक को कम करने से पहले किसी भी अतिरिक्त रक्त को हटाने के लिए बाँझ पीबीएस के साथ बायोप्सी को कुल्ला करें। छह-अच्छी तरह से ऊतक संस्कृति प्लेट के प्रत्येक कुएं में अलग-अलग आवेषण में दो से तीन टुकड़े रखें, जिसमें प्रति अच्छी तरह से मानव मांसपेशियों के विकास माध्यम के एक दशमलव पाँच मिलीलीटर और प्रति सम्मिलित माध्यम के पाँच सौ माइक्रोलीटर होते हैं, और प्लेट को सेल संस्कृति इनक्यूबेटर में रखते हैं। मानव मायोट्यूब में कैल्शियम अभिव्यक्ति में परिवर्तन को मापने के लिए, जब मल्टीन्यूक्लिएटेड मायोट्यूब देखे जा सकते हैं, तो मायोट्यूब संस्कृति supernatants को ताजा भेदभाव माध्यम के साथ प्रतिस्थापित करें, जो सेल संस्कृति इनक्यूबेटर में तीस मिनट के इनक्यूबेशन के लिए एक-मिलीमोलर फुरा -दो एएम के दस माइक्रोलीटर के साथ पूरक है। इनक्यूबेशन के अंत में, परफ्यूजन चैंबर में एक ग्लास कवर स्लिप संस्कृति को स्थानांतरित करें, और क्रेब्स रिंगर के समाधान के साथ कोशिकाओं को कुल्ला करें जो दो-मिलीमोलर कैल्शियम क्लोराइड के साथ पूरक है। फिर ऑनलाइन कैल्शियम माप करें जैसा कि बीस बार पानी विसर्जन उद्देश्य का उपयोग करके प्रदर्शित किया गया है। इस प्रतिनिधि विश्लेषण में, एगोनिस्ट के अलावा के बाद ईबीवी-अमर बी लिम्फोसाइट्स में कैल्शियम में तेजी से वृद्धि देखी गई थी जो धीरे-धीरे समय के साथ आराम के स्तर पर वापस आ गई थी। इसी तरह के एक प्रयोग में, चार सौ-नैनोमोलर थाप्सिगन के अलावा एक बड़े कैल्शियम क्षणिक का कारण बना जो दो.चार मनमाने ढंग से इकाइयों के चरम प्रतिदीप्ति मूल्य तक पहुंच गया। इस प्रतिदीप्ति मान को एक सौ% माना जाता था जब संबंधित खुराक प्रतिक्रिया वक्र का निर्माण किया गया था। इस विश्लेषण में, अमर बी कोशिकाओं को बीस सेकंड के लिए पांच-मिलीमोलर कैफीन के साथ उत्तेजित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप तीन सौ चालीस और तीन सौ अस्सी-नैनोमीटर प्रतिदीप्ति अनुपात में तत्काल वृद्धि हुई थी। परीक्षण किए गए प्रत्येक कैफीन एकाग्रता के लिए, प्रतिदीप्ति के तीन सौ अस्सी नैनोमीटर द्वारा तीन सौ चालीस के अनुपात में कैफीन-प्रेरित चोटी की गणना की गई थी और इसका उपयोग खुराक प्रतिक्रिया वक्र के निर्माण के लिए किया गया था। विभेदित मायोट्यूब से कैल्शियम रिलीज का मूल्यांकन पोटेशियम क्लोराइड, एगोनिस्ट की विभिन्न सांद्रता, और / या कैफीन के साथ फ्लशिंग के जवाब में भी किया जा सकता है, और सामान्य खुराक प्रतिक्रिया वक्र उत्पन्न किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि कोशिकाओं को फुरा -दो के साथ ठीक से लोड किया गया है और यह कि तीन सौ चालीस और तीन सौ अस्सी-नैनोमीटर तरंग दैर्ध्य दोनों एगोनिस्ट के अतिरिक्त का जवाब देते हैं। फ्लोरोसेंट कैल्शियम संकेतकों के साथ इंट्रासेल्युलर कैल्शियम माप की जांच अधिकांश स्तनधारी कोशिकाओं में की जा सकती है और विभिन्न उत्तेजनाओं के जवाब में इंट्रासेल्युलर कैल्शियम परिवर्तनों के अध्ययन के लिए लागू किया जा सकता है। |
उत्तराखंड के डांडा-2 पर्वत चोटी में हिमस्खलन (Avalanche) ने तबाही मचा दी है। हिमस्खलन होने से 20 प्रशिक्षार्थी बर्फ में फंस गए हैं। जबकि, दस प्रशिक्षार्थियों की मौत हो चुकी है। फिलहाल, घटना स्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) जारी है।
बता दें कि प्रशिक्षार्थियों को जल्द से जल्द सकुशल बाहर निकालने के लिए टीम के साथ जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और ITBP के जवानों द्वारा तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ट्रेनिंग में प्रशिक्षक व प्रशिक्षणार्थी सहित कुल 175 लोग थे। बताया जा रहा है कि एवलांच की चपेट में कुल 40 लोग आए हैं। जिनमें से 20 लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है। रेस्क्यू के लिए हैली की मदद भी ली जा रही है।
द्रौपदी का डांडा-2 पर्वत चोटी में हिमस्खलन में फंसे प्रशिक्षार्थियों को जल्द से जल्द सकुशल बाहर निकालने के लिए NIM की टीम के साथ जिला प्रशासन, NDRF, SDRF, सेना और ITBP के जवानों द्वारा तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
वहीं, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने की मदद मांगी है। उन्होंने फंसे प्रशिक्षार्थियों के लिए सेना की मदद के लिए अनुरोध किया है, जिसको लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता देने के लिए आश्वस्त किया है।
| उत्तराखंड के डांडा-दो पर्वत चोटी में हिमस्खलन ने तबाही मचा दी है। हिमस्खलन होने से बीस प्रशिक्षार्थी बर्फ में फंस गए हैं। जबकि, दस प्रशिक्षार्थियों की मौत हो चुकी है। फिलहाल, घटना स्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बता दें कि प्रशिक्षार्थियों को जल्द से जल्द सकुशल बाहर निकालने के लिए टीम के साथ जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और ITBP के जवानों द्वारा तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ट्रेनिंग में प्रशिक्षक व प्रशिक्षणार्थी सहित कुल एक सौ पचहत्तर लोग थे। बताया जा रहा है कि एवलांच की चपेट में कुल चालीस लोग आए हैं। जिनमें से बीस लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है। रेस्क्यू के लिए हैली की मदद भी ली जा रही है। द्रौपदी का डांडा-दो पर्वत चोटी में हिमस्खलन में फंसे प्रशिक्षार्थियों को जल्द से जल्द सकुशल बाहर निकालने के लिए NIM की टीम के साथ जिला प्रशासन, NDRF, SDRF, सेना और ITBP के जवानों द्वारा तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। वहीं, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने की मदद मांगी है। उन्होंने फंसे प्रशिक्षार्थियों के लिए सेना की मदद के लिए अनुरोध किया है, जिसको लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता देने के लिए आश्वस्त किया है। |
सलमान खान दो दिन तक मुजफ्फरनगर में शूटिंग करने के बाद दिल्ली लौट आए हैं। जिस फार्म हाउस में सलमान ठहरे थे, उसके करीब जूस बेचकर परिवार का पेट पालने वाले गरीब को सलमान ने बड़ा झटका दिया है। ये जूस वाला सबसे फरियाद कर रहा है कि सलमान और यूनिट के लोग कई हजार का जूस पी गए अब उसका पैसा दिलवाया जाए।
सलमान खान को फार्म हाउस में रहने के दौरान जूस की छोटी सी दुकान लगाने वाले राजपाल कश्यप ने जूस पिलाया। दो हजार रुपये का जूस पीकर सलमान और उनकी यूनिट के सदस्य चलते बने। जब राजपाल को ये पता चला कि सलमान जा रहे हैं तो उसने पुलिस से इस बात की इजाजत चाही कि वो सलमान से अपना पैसा ले ले। पुलिस ने उसकी बात सुन उसको डपट कर भगा दिया।
राजपाल के अनुसार जब वो पैसे मांगने गया तो पुलिस ने उसके साथ बदसलूकी की। सलमान के आ जाने पर अब गरीब परिवार दो हजार रुपये के लिए बॉलीवुड के सितारे को कोस रहा है। राजपाल का कहना है कि उनके लिए दो हजार हफ्ते भर की कमाई होती है, भले ही सलमान के लिए वो बहुत मामूली रकम हो।
सलमान खान अपनी फिल्म 'सुल्तान' की शूटिंग के लिए तीन दिन मुजफ्फरनगर में रहे। यह फिल्म ईद पर रिलीज होनी है। सलमान खान के साथ रोमानिया की मॉडल लूलिया वेंतूर भी आई थीं। हालांकि सलमान ने उनको किसी के सामने नहीं आने दिया।
सलमान इस समय दिन-रात 'सुल्तान' की शूटिंग कर रहे हैं। ईद पर फिल्म को रिलीज करने की घोषणा कर चुके सलमान और टीम को हर हाल में फिल्म को पूरा करना है।
| सलमान खान दो दिन तक मुजफ्फरनगर में शूटिंग करने के बाद दिल्ली लौट आए हैं। जिस फार्म हाउस में सलमान ठहरे थे, उसके करीब जूस बेचकर परिवार का पेट पालने वाले गरीब को सलमान ने बड़ा झटका दिया है। ये जूस वाला सबसे फरियाद कर रहा है कि सलमान और यूनिट के लोग कई हजार का जूस पी गए अब उसका पैसा दिलवाया जाए। सलमान खान को फार्म हाउस में रहने के दौरान जूस की छोटी सी दुकान लगाने वाले राजपाल कश्यप ने जूस पिलाया। दो हजार रुपये का जूस पीकर सलमान और उनकी यूनिट के सदस्य चलते बने। जब राजपाल को ये पता चला कि सलमान जा रहे हैं तो उसने पुलिस से इस बात की इजाजत चाही कि वो सलमान से अपना पैसा ले ले। पुलिस ने उसकी बात सुन उसको डपट कर भगा दिया। राजपाल के अनुसार जब वो पैसे मांगने गया तो पुलिस ने उसके साथ बदसलूकी की। सलमान के आ जाने पर अब गरीब परिवार दो हजार रुपये के लिए बॉलीवुड के सितारे को कोस रहा है। राजपाल का कहना है कि उनके लिए दो हजार हफ्ते भर की कमाई होती है, भले ही सलमान के लिए वो बहुत मामूली रकम हो। सलमान खान अपनी फिल्म 'सुल्तान' की शूटिंग के लिए तीन दिन मुजफ्फरनगर में रहे। यह फिल्म ईद पर रिलीज होनी है। सलमान खान के साथ रोमानिया की मॉडल लूलिया वेंतूर भी आई थीं। हालांकि सलमान ने उनको किसी के सामने नहीं आने दिया। सलमान इस समय दिन-रात 'सुल्तान' की शूटिंग कर रहे हैं। ईद पर फिल्म को रिलीज करने की घोषणा कर चुके सलमान और टीम को हर हाल में फिल्म को पूरा करना है। |
एक बेहतर रिलेशनशिप के लिए रिश्ते में बहुत सी बातों का ध्यान रखना होता है। आप अगर रिश्ते में छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखते हैं, तो आपस में प्यार बढ़ने लगता है और मनमुटाव नहीं रहता है। प्यार करना और रिश्ते में रहना जितना आसान है, उससे कहीं ज्यादा कठिन रिश्ते को बचाए रखना है। आइए जानते हैं वो टिप्स जिससे रिलेशनशिप में लड़ाई नहीॆ होती है और प्यार बढ़ने लगता है।
- एक बेहतरीन रिलेशनशिप के लिए पाटर्नर को भरपूर वक्त दें। अगर, आपकी शादी हो गई है तो परिवार और बच्चों को भरपूर वक्त दें। दरअसल, वक्त की कमी भी रिश्ते में आपकी कलेश की वजह बनती है। आप अपने परिवार को जितना वक्त देंगे आपके बीच का संबंध उतना ही मजबूत होता जाएगा। किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए, समय देना पड़ता है।
- रिश्ते में छोटी-छोटी चीजों को प्राथमिकता देनी पड़ती है। अगर आप चाहते हैं, आपका रिश्ता मजबूत हो तो छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज न करें। कभी- कभी ये छोटी-छोटी बातें ही रिश्तों में दूरियां पैदा कर देती हैं।
- रिलेशनशिप में इस बात का पूरा ख्याल रखें कि आपको अपने पार्टनर को पूरा सम्मान देना है, कई बार हम एक-दूसरे को उपेक्षित कर देते हैं जिसकी वजह से भी रिश्ते में तनाव पैदा हो जाता है और दूरियां बढ़ने लगती हैं। अगर आप इस बात का ख्याल रखेंगे तो आपके रिश्ते में कभी भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- रिलेशनशिप को मजबूत बनाने के लिए अपनी पत्नी और प्रेमिका से प्यार से बात करें। दरअसल, हमारा मिजाज भी कई बार रिश्ते में लड़ाई की वजह बनता है। अगर आप अपने मूड को हर वक्त ठीक रखेंगे और जल्द ही किसी बात को लेकर आवेशित होने की जगह प्यार से अपने पार्टनर से बात करेंगे तो आपके रिश्ते में आपसी तालमेल बैठा रहेगा और लड़ाई की संभावना बेहद कम हो जाएगी।
| एक बेहतर रिलेशनशिप के लिए रिश्ते में बहुत सी बातों का ध्यान रखना होता है। आप अगर रिश्ते में छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखते हैं, तो आपस में प्यार बढ़ने लगता है और मनमुटाव नहीं रहता है। प्यार करना और रिश्ते में रहना जितना आसान है, उससे कहीं ज्यादा कठिन रिश्ते को बचाए रखना है। आइए जानते हैं वो टिप्स जिससे रिलेशनशिप में लड़ाई नहीॆ होती है और प्यार बढ़ने लगता है। - एक बेहतरीन रिलेशनशिप के लिए पाटर्नर को भरपूर वक्त दें। अगर, आपकी शादी हो गई है तो परिवार और बच्चों को भरपूर वक्त दें। दरअसल, वक्त की कमी भी रिश्ते में आपकी कलेश की वजह बनती है। आप अपने परिवार को जितना वक्त देंगे आपके बीच का संबंध उतना ही मजबूत होता जाएगा। किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए, समय देना पड़ता है। - रिश्ते में छोटी-छोटी चीजों को प्राथमिकता देनी पड़ती है। अगर आप चाहते हैं, आपका रिश्ता मजबूत हो तो छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज न करें। कभी- कभी ये छोटी-छोटी बातें ही रिश्तों में दूरियां पैदा कर देती हैं। - रिलेशनशिप में इस बात का पूरा ख्याल रखें कि आपको अपने पार्टनर को पूरा सम्मान देना है, कई बार हम एक-दूसरे को उपेक्षित कर देते हैं जिसकी वजह से भी रिश्ते में तनाव पैदा हो जाता है और दूरियां बढ़ने लगती हैं। अगर आप इस बात का ख्याल रखेंगे तो आपके रिश्ते में कभी भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। - रिलेशनशिप को मजबूत बनाने के लिए अपनी पत्नी और प्रेमिका से प्यार से बात करें। दरअसल, हमारा मिजाज भी कई बार रिश्ते में लड़ाई की वजह बनता है। अगर आप अपने मूड को हर वक्त ठीक रखेंगे और जल्द ही किसी बात को लेकर आवेशित होने की जगह प्यार से अपने पार्टनर से बात करेंगे तो आपके रिश्ते में आपसी तालमेल बैठा रहेगा और लड़ाई की संभावना बेहद कम हो जाएगी। |
केरेडारी प्रखंड स्थित जय मां एचपी गैस एजेंसी वितरक ने उपभोक्ताताओं के साथ मंगलवार को बैठक की। जिसकी अध्यक्षता नागेश्वर महतो ने की। बैठक में उपभोक्ताओं का खाता खुलवाया गया। इस अवसर पर जय मां एचपी गैस एजेंसी के वितरक नागेश्वर महतो ने बताया कि कई गैस उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं जा रही थी। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के ब्रांच मैनेजर ने बताया कि दो मिनट के अंदर आधार के द्वारा अकाउंट खोला जाता है और तत्काल ही डिजिटल पासबुक निर्गत कर दिया गया है। वहीं गैस एजेंसी के अकाउंटेंट मैनेजर सोनू वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को निःशुल्क खाता खुलवाने से घर बैठे उन्हें सुविधा मिलेगी। इस मौके पर सोनू वर्मा, उदय कुमार, गोपाल महतो, सूरज कुमार, सोनम कुमारी, रितेश कुमार, रंजना देवी, रजिया बेगम, किरण देवी, सरस्वती देवी, गुलशन आरा, भारती देवी, सकीना खातून, वर्षा सिंह, गायत्री देवी सूरज कुमार, अर्जुन कुमार समेत दर्जनों उपभोक्ता मौजूद थे।
| केरेडारी प्रखंड स्थित जय मां एचपी गैस एजेंसी वितरक ने उपभोक्ताताओं के साथ मंगलवार को बैठक की। जिसकी अध्यक्षता नागेश्वर महतो ने की। बैठक में उपभोक्ताओं का खाता खुलवाया गया। इस अवसर पर जय मां एचपी गैस एजेंसी के वितरक नागेश्वर महतो ने बताया कि कई गैस उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं जा रही थी। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के ब्रांच मैनेजर ने बताया कि दो मिनट के अंदर आधार के द्वारा अकाउंट खोला जाता है और तत्काल ही डिजिटल पासबुक निर्गत कर दिया गया है। वहीं गैस एजेंसी के अकाउंटेंट मैनेजर सोनू वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को निःशुल्क खाता खुलवाने से घर बैठे उन्हें सुविधा मिलेगी। इस मौके पर सोनू वर्मा, उदय कुमार, गोपाल महतो, सूरज कुमार, सोनम कुमारी, रितेश कुमार, रंजना देवी, रजिया बेगम, किरण देवी, सरस्वती देवी, गुलशन आरा, भारती देवी, सकीना खातून, वर्षा सिंह, गायत्री देवी सूरज कुमार, अर्जुन कुमार समेत दर्जनों उपभोक्ता मौजूद थे। |
Airtel अपने कुछ प्लान्स में Disney+ Hotstar समेत कई OTT ऐप्स के फ्री सब्सक्रिप्शन देता है. प्लान की कीमत के हिसाब से इन OTT ऐप्स के बेनिफिट्स ग्राहकों को दिए जाते हैं. अब एयरटेल द्वारा Disney+ Hotstar का VIP सब्सक्रिप्शन उन ग्राहकों को भी दिया जाएगा जो कंपनी का सिम पहली बार खरीद रहे हैं और उसमें 499 रुपये का रिचार्ज करा रहे हैं.
यानी Disney+ Hotstar का फायदा उन ग्राहकों को दिया जाएगा, जो 499 रुपये का फर्स्ट रिचार्ज प्लान (FRC) खरीदेंगे. इस डेवलपमेंट को सबसे पहले टेलीकॉमटॉक ने नोटिस किया था.
कंपनी के 499 रुपये वाले FRC प्लान के बारे में बात करें तो ग्राहकों को इसमें रोज 3GB डेटा मिलेगा. साथ ही इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग और रोज 100SMS भी ग्राहकों को दिए जाएंगे. साथ ही इस प्लान में ग्राहकों को Disney+ Hotstar VIP का एनुअल सब्सक्रिप्शन भी दिया जाएगा. इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिन की होगी.
एयरटेल द्वारा 197 रुपये, 297 रुपये, 497 रुपये और 647 रुपये वाले FRC प्लान्स भी ऑफर किए जाते हैं. हालांकि, इनमें OTT ऐप्स के बेनिफिट्स नहीं मिलते.
एयरटेल के 197 रुपये वाले प्लान में ग्राहकों को 2GB डेटा, किसी भी नेटवर्क पर अनलिनिटेड कॉलिंग और 300 SMS दिए जाते हैं. इसकी वैलिडिटी 28 दिन की है. इसी तरह 297 रुपये वाले प्लान में रोज 1. 5GB डेली डेटा, फ्री कॉलिंग और रोज 100SMS दिए जाते हैं. ये प्लान भी 28 दिन की वैलिडिटी के साथ आता है.
कंपनी के 497 रुपये वाले प्लान की बात करें तो इसमें ग्राहकों को रोज 1. 5GB डेटा, किसी भी नेटवर्क पर फ्री कॉलिंग और रोज 100SMS दिए जाते हैं. इस प्लान की वैलिडिटी 56 दिन की है. अंत में 647 रुपये वाले प्लान के बारे में बात करें तो इसमें रोज 1. 5GB डेटा, अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग और रोज 100SMS दिए जाते हैं. ये प्लान 84 दिन की वैलिडिटी के साथ आता है.
| Airtel अपने कुछ प्लान्स में Disney+ Hotstar समेत कई OTT ऐप्स के फ्री सब्सक्रिप्शन देता है. प्लान की कीमत के हिसाब से इन OTT ऐप्स के बेनिफिट्स ग्राहकों को दिए जाते हैं. अब एयरटेल द्वारा Disney+ Hotstar का VIP सब्सक्रिप्शन उन ग्राहकों को भी दिया जाएगा जो कंपनी का सिम पहली बार खरीद रहे हैं और उसमें चार सौ निन्यानवे रुपयापये का रिचार्ज करा रहे हैं. यानी Disney+ Hotstar का फायदा उन ग्राहकों को दिया जाएगा, जो चार सौ निन्यानवे रुपयापये का फर्स्ट रिचार्ज प्लान खरीदेंगे. इस डेवलपमेंट को सबसे पहले टेलीकॉमटॉक ने नोटिस किया था. कंपनी के चार सौ निन्यानवे रुपयापये वाले FRC प्लान के बारे में बात करें तो ग्राहकों को इसमें रोज तीनGB डेटा मिलेगा. साथ ही इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग और रोज एक सौSMS भी ग्राहकों को दिए जाएंगे. साथ ही इस प्लान में ग्राहकों को Disney+ Hotstar VIP का एनुअल सब्सक्रिप्शन भी दिया जाएगा. इस प्लान की वैलिडिटी अट्ठाईस दिन की होगी. एयरटेल द्वारा एक सौ सत्तानवे रुपयापये, दो सौ सत्तानवे रुपयापये, चार सौ सत्तानवे रुपयापये और छः सौ सैंतालीस रुपयापये वाले FRC प्लान्स भी ऑफर किए जाते हैं. हालांकि, इनमें OTT ऐप्स के बेनिफिट्स नहीं मिलते. एयरटेल के एक सौ सत्तानवे रुपयापये वाले प्लान में ग्राहकों को दोGB डेटा, किसी भी नेटवर्क पर अनलिनिटेड कॉलिंग और तीन सौ SMS दिए जाते हैं. इसकी वैलिडिटी अट्ठाईस दिन की है. इसी तरह दो सौ सत्तानवे रुपयापये वाले प्लान में रोज एक. पाँचGB डेली डेटा, फ्री कॉलिंग और रोज एक सौSMS दिए जाते हैं. ये प्लान भी अट्ठाईस दिन की वैलिडिटी के साथ आता है. कंपनी के चार सौ सत्तानवे रुपयापये वाले प्लान की बात करें तो इसमें ग्राहकों को रोज एक. पाँचGB डेटा, किसी भी नेटवर्क पर फ्री कॉलिंग और रोज एक सौSMS दिए जाते हैं. इस प्लान की वैलिडिटी छप्पन दिन की है. अंत में छः सौ सैंतालीस रुपयापये वाले प्लान के बारे में बात करें तो इसमें रोज एक. पाँचGB डेटा, अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग और रोज एक सौSMS दिए जाते हैं. ये प्लान चौरासी दिन की वैलिडिटी के साथ आता है. |
निशदिन श्रीजिन मोहि अचार ॥टेक॥ जिनके चरन कमलके सेवत, संकट कंटल अपार ।। निशदिन ॥ जिनको वचन सुधारस-गर्भित, भेटत कुमति विकार ।। निशदिन ।। भव आताप बुझावत को है, महामेघ जलधार ।। निशदिन० ॥ जिनको भगति सहित नित सुरपत, पूजत अष्ट प्रकार ।। निशदिन० ॥ जिनको विरद वेद विद वरनत, दारुण दुःख हरतार ।। निशदिनः ।। भविक वृन्दकी विधा निवारो, अपनी ओर निहार ।। निशदिन ।।
धन घन श्री दीनदयाल ।। टेक० ॥
परम दिगम्बर सेवाधारी, जगजीवन प्रतिपाल ।
मूल अठाइस चौरासी लख, उत्तर गुण मनिभाल ।। घन० ॥ महाकवि वृन्दावनदासके चौबीसी पाठसे हर व्यक्ति परिचित है। आज उत्तर भारत में ही नहीं दक्षिण भारतमें भी इस पाठका पूरा प्रचार है। निश्च यतः कवि वृन्दावनदास जन सामान्यके कवि हैं।
हिन्दीके अन्य चर्चित कवि
हिन्दी में शताधिक छोटे-बड़े कवि हुए हैं। हमने पूर्व में प्रसिद्ध कवियोंका ही इतिवृत्त उपस्थित किया है। इनके अतिरिक्त लब्धप्रतिष्ठ अनेक कवि और लेखक भी विद्यमान हैं, पर उनके सम्बन्ध में विस्तृत परिचय देनेका अवसर नहीं है। अतएव संक्षेपमें हिन्दीके कुछ कवि और लेखकोंके सम्बन्धमें इतिवृत्त उपस्थित किया जाता है ।
जयसागर नामके दिगम्बर सम्प्रदाय में दो कवि हुए हैं। एक काष्ठा संघके नन्दी तटके गच्छसे सम्बन्धित हैं। इनकी गुरुपरम्परामें सोमकीति, विजयसेन यश कीत्ति, उदयसेन, त्रिभुवनकीति और रत्नभूषण के नाम आये हैं। रत्नभूषण ही जयसागरके गुरु हैं। इनका समय वि० सं० १६७४ है । जयसागर हिन्दी और संस्कृत दोनोंही भाषाओं में काव्यरचना करते थे। संस्कृतमें इनकी पाश्र्वपञ्चकल्याणक और हिन्दीमें ज्येष्ठजिनवरपूजा, विमलपुराण, रत्नभूषणस्तुति और तीर्थं जयमाला नामकी रचनाएँ हैं।
दूसरे जयसागर ब्रह्म जयसागर हैं। इनका समय वि० सं० की १८वीं शतीका प्रथम पाद है। ये मूलसंघ सरस्वतीगच्छ बलात्कारगणकी सूरत शाखामें ३०२ : तीथंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा | निशदिन श्रीजिन मोहि अचार ॥टेक॥ जिनके चरन कमलके सेवत, संकट कंटल अपार ।। निशदिन ॥ जिनको वचन सुधारस-गर्भित, भेटत कुमति विकार ।। निशदिन ।। भव आताप बुझावत को है, महामेघ जलधार ।। निशदिनशून्य ॥ जिनको भगति सहित नित सुरपत, पूजत अष्ट प्रकार ।। निशदिनशून्य ॥ जिनको विरद वेद विद वरनत, दारुण दुःख हरतार ।। निशदिनः ।। भविक वृन्दकी विधा निवारो, अपनी ओर निहार ।। निशदिन ।। धन घन श्री दीनदयाल ।। टेकशून्य ॥ परम दिगम्बर सेवाधारी, जगजीवन प्रतिपाल । मूल अठाइस चौरासी लख, उत्तर गुण मनिभाल ।। घनशून्य ॥ महाकवि वृन्दावनदासके चौबीसी पाठसे हर व्यक्ति परिचित है। आज उत्तर भारत में ही नहीं दक्षिण भारतमें भी इस पाठका पूरा प्रचार है। निश्च यतः कवि वृन्दावनदास जन सामान्यके कवि हैं। हिन्दीके अन्य चर्चित कवि हिन्दी में शताधिक छोटे-बड़े कवि हुए हैं। हमने पूर्व में प्रसिद्ध कवियोंका ही इतिवृत्त उपस्थित किया है। इनके अतिरिक्त लब्धप्रतिष्ठ अनेक कवि और लेखक भी विद्यमान हैं, पर उनके सम्बन्ध में विस्तृत परिचय देनेका अवसर नहीं है। अतएव संक्षेपमें हिन्दीके कुछ कवि और लेखकोंके सम्बन्धमें इतिवृत्त उपस्थित किया जाता है । जयसागर नामके दिगम्बर सम्प्रदाय में दो कवि हुए हैं। एक काष्ठा संघके नन्दी तटके गच्छसे सम्बन्धित हैं। इनकी गुरुपरम्परामें सोमकीति, विजयसेन यश कीत्ति, उदयसेन, त्रिभुवनकीति और रत्नभूषण के नाम आये हैं। रत्नभूषण ही जयसागरके गुरु हैं। इनका समय विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ चौहत्तर है । जयसागर हिन्दी और संस्कृत दोनोंही भाषाओं में काव्यरचना करते थे। संस्कृतमें इनकी पाश्र्वपञ्चकल्याणक और हिन्दीमें ज्येष्ठजिनवरपूजा, विमलपुराण, रत्नभूषणस्तुति और तीर्थं जयमाला नामकी रचनाएँ हैं। दूसरे जयसागर ब्रह्म जयसागर हैं। इनका समय विशून्य संशून्य की अट्ठारहवीं शतीका प्रथम पाद है। ये मूलसंघ सरस्वतीगच्छ बलात्कारगणकी सूरत शाखामें तीन सौ दो : तीथंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा |
लॉकडाउन में प्रयागराज से फोन के जरिए सूचना मिलने पर शहर के तीन दोस्तों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए रक्तदान करने ब्लड बैंक पहुंच गए। जरूरत दो यूनिट रक्त की थी। तीनों ने दोस्त की बहन की जान बचाने के लिए रक्त दिया।
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| लॉकडाउन में प्रयागराज से फोन के जरिए सूचना मिलने पर शहर के तीन दोस्तों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए रक्तदान करने ब्लड बैंक पहुंच गए। जरूरत दो यूनिट रक्त की थी। तीनों ने दोस्त की बहन की जान बचाने के लिए रक्त दिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
अंशमात्र भी राग विद्यमान है वह शास्त्रों को भले ही जानता हो, मगर आत्माको - अपने आपको नहीं पहचानता और चूँकि आत्माको नहीं जानता, अतएव अनात्मा को भी नहीं जानता। फेर उसे ज्ञानी किस प्रकार कहा जा सकता है ? ( स०१९७-२०२)
कर्मके निमित्तसे आत्मा में उत्पन्न होनेवाले समस्त विभावका याग करके, स्वभावभूत, चेतनरूप, नियत, स्थिर और एक भावको की महण करो। जहाँ मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान और केवलज्ञान--यह सच भेद हट जाते हैं और एक ही पद रोप रहता है, वही परमार्थ है। उसे पाकर मनुष्य निर्वृत्त होता है। किसी भी साधनका प्रयोग करके ज्ञानगुणविद्दीन पुरुष इस नदको नहीं पा सकते। तुम्हें अगर कर्मपरिमोक्षकी इच्छा है तो तुम उसी पदको स्वीकार करो। उसी पत्र में निरन्तर लीन रहो । नित्य सन्तुष्ट रहो। उसी में तृप्त रहो। ऐसा करनेसे तुम्हें उत्तम सुख प्राप्त होगा । आत्माको ही अपना निश्चित धन जानने ज्ञानी पर पदार्थको अपना क्यों कहेगा ? अगर पर-द्रव्य घाला मेरा होता तो मैं उसके समान जड़ बन जाता; मैं तो ज्ञाता ही हूँ, किसी भी परद्रव्यका परिग्रह मुझे नहीं होना चाहिए। भले ही उसका छेदन हो, भेदन हो, हरण हो, नाश हो या कहीं भी वह चला जाय, वह परद्रव्य मेरा तो है ही नहीं। ज्ञानी अपरिही तथा निरीह होने के कारण न धर्मको इच्छा करता है, न इच्छा करता है, न खानपानुकी इच्छा करता है और न अन्य किमी पदार्थकी(2 अपने ज्ञायक-स्वभाव में नियत | अंशमात्र भी राग विद्यमान है वह शास्त्रों को भले ही जानता हो, मगर आत्माको - अपने आपको नहीं पहचानता और चूँकि आत्माको नहीं जानता, अतएव अनात्मा को भी नहीं जानता। फेर उसे ज्ञानी किस प्रकार कहा जा सकता है ? कर्मके निमित्तसे आत्मा में उत्पन्न होनेवाले समस्त विभावका याग करके, स्वभावभूत, चेतनरूप, नियत, स्थिर और एक भावको की महण करो। जहाँ मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान और केवलज्ञान--यह सच भेद हट जाते हैं और एक ही पद रोप रहता है, वही परमार्थ है। उसे पाकर मनुष्य निर्वृत्त होता है। किसी भी साधनका प्रयोग करके ज्ञानगुणविद्दीन पुरुष इस नदको नहीं पा सकते। तुम्हें अगर कर्मपरिमोक्षकी इच्छा है तो तुम उसी पदको स्वीकार करो। उसी पत्र में निरन्तर लीन रहो । नित्य सन्तुष्ट रहो। उसी में तृप्त रहो। ऐसा करनेसे तुम्हें उत्तम सुख प्राप्त होगा । आत्माको ही अपना निश्चित धन जानने ज्ञानी पर पदार्थको अपना क्यों कहेगा ? अगर पर-द्रव्य घाला मेरा होता तो मैं उसके समान जड़ बन जाता; मैं तो ज्ञाता ही हूँ, किसी भी परद्रव्यका परिग्रह मुझे नहीं होना चाहिए। भले ही उसका छेदन हो, भेदन हो, हरण हो, नाश हो या कहीं भी वह चला जाय, वह परद्रव्य मेरा तो है ही नहीं। ज्ञानी अपरिही तथा निरीह होने के कारण न धर्मको इच्छा करता है, न इच्छा करता है, न खानपानुकी इच्छा करता है और न अन्य किमी पदार्थकी(दो अपने ज्ञायक-स्वभाव में नियत |
नई दिल्ली। सरकार और अर्थव्यवस्था के लिए यह खबर झटका देने वाली है। मई में आठ बुनियादी उद्योगों (कोर सेक्टर) की वृद्धि दर घटकर 2. 8 फीसदी रही है। पिछले साल समान महीने में यह दर 4. 4 फीसदी थी। देश के कुल इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में कोर सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी है। महीने दर महीने आधार पर मई में कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ घटी है। अप्रैल में कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ बढ़कर 8. 5 फीसदी पर पहुंच गई थी।
बिजली के उत्पादन में गिरावट आई है। महीने दर महीने आधार पर मई में बिजली उत्पादन 14. 7 फीसदी से घटकर 4. 6 फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में स्टील का उत्पादन 6. 1 फीसदी से घटकर 3. 2 फीसदी रहा है। मई में सीमेंट का उत्पादन भी महीने दर महीने आधार पर 4. 4 फीसदी से घटकर 2. 4 फीसदी रहा है। हालांकि कोयला उत्पादन की ग्रोथ बढ़ गई है। महीने दर महीने आधार पर मई में कोयले का उत्पादन -0. 9 फीसदी से बढ़कर 5. 5 फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में फर्टिलाइजर्स का उत्पादन भी 7. 8 फीसदी से बढ़कर 14. 8 फीसदी रहा है।
महीने दर महीने आधार पर मई में कच्चे तेल का उत्पादन -2. 3 फीसदी से घटकर -3. 3 फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में नैचुरल गैस का उत्पादन -6. 8 फीसदी से घटकर -6. 9 फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर अप्रैल में रिफाइनरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन 17. 9 फीसदी से घटकर 1. 2 फीसदी रहा है।
| नई दिल्ली। सरकार और अर्थव्यवस्था के लिए यह खबर झटका देने वाली है। मई में आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर घटकर दो. आठ फीसदी रही है। पिछले साल समान महीने में यह दर चार. चार फीसदी थी। देश के कुल इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में कोर सेक्टर की हिस्सेदारी करीब अड़तीस फीसदी है। महीने दर महीने आधार पर मई में कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ घटी है। अप्रैल में कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ बढ़कर आठ. पाँच फीसदी पर पहुंच गई थी। बिजली के उत्पादन में गिरावट आई है। महीने दर महीने आधार पर मई में बिजली उत्पादन चौदह. सात फीसदी से घटकर चार. छः फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में स्टील का उत्पादन छः. एक फीसदी से घटकर तीन. दो फीसदी रहा है। मई में सीमेंट का उत्पादन भी महीने दर महीने आधार पर चार. चार फीसदी से घटकर दो. चार फीसदी रहा है। हालांकि कोयला उत्पादन की ग्रोथ बढ़ गई है। महीने दर महीने आधार पर मई में कोयले का उत्पादन -शून्य. नौ फीसदी से बढ़कर पाँच. पाँच फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में फर्टिलाइजर्स का उत्पादन भी सात. आठ फीसदी से बढ़कर चौदह. आठ फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में कच्चे तेल का उत्पादन -दो. तीन फीसदी से घटकर -तीन. तीन फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर मई में नैचुरल गैस का उत्पादन -छः. आठ फीसदी से घटकर -छः. नौ फीसदी रहा है। महीने दर महीने आधार पर अप्रैल में रिफाइनरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन सत्रह. नौ फीसदी से घटकर एक. दो फीसदी रहा है। |
कोरोना वायरस से जंग जीतने के बाद बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने पॉपुलर क्विज रिएलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के 12वें सीजन की शूटिंग शुरू कर दी है। सेट पर सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हाल ही में बिग बी ने सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज शेयर की हैं और बताया कि उनके नए चश्मे की काफी तारीफ हो रही है।
अमिताभ बच्चन इस तस्वीर में अलग चश्मे में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा- "कुछ देवियां आज शूटिंग पे, मेरे चश्मे को देख कर बोलीं . . 'COOL' . . मैंने मन ही मन सोचा, चलो बच गए; वातावरण अनुकूल है! "
इससे पहले बिग बी ने अपनी एक फोटो शेयर कर लिखा- 'चश्मा बदल दिया। '
बिग बी ने हाल ही में अपने ब्लॉग में लिखा, "'केबीसी' के प्रोमो की शूटिंग शुरू करने के लिए काफी सारी तैयारियां की गई हैं और अधिकतम सुरक्षा उपायों के साथ इसे कैसे किया जाना है इसके लिए 'केबीसी' के अपने खुद के प्रोटोकॉल हैं। जिंदगी पहले की तरह तो अब नहीं होगी. . शायद. . महामारी के इस दौर में हमें ऐसे ही रहना है। "
इससे पहले मई में लॉकडाउन के बीच बिग बी ने 'केबीसी' के अगले सीजन के लिए शूटिंग की शुरूआत की थी जिस पर सुरक्षा की ²ष्टि से सवाल उठाए गए थे।
मुद्दे पर अपनी सफाई देते हुए उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा था, "हां मैंने काम किया है. इससे परेशानी है, तो इसे अपने तक ही सीमित रखें. लॉकडाउन की इस परिस्थिति में यहां कुछ कहने की कोशिश न करें. जितना संभव हो सके, पर्याप्त मात्रा में सावधानियां बरती गईं. दो दिन के काम को एक ही दिन में निबटा लिया गया. शाम के छह बजे काम शुरू किया गया है और कुछ ही देर में खत्म कर लिया गया है। "
(आईएएनएस इनपुट के साथ)
| कोरोना वायरस से जंग जीतने के बाद बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने पॉपुलर क्विज रिएलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के बारहवें सीजन की शूटिंग शुरू कर दी है। सेट पर सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हाल ही में बिग बी ने सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज शेयर की हैं और बताया कि उनके नए चश्मे की काफी तारीफ हो रही है। अमिताभ बच्चन इस तस्वीर में अलग चश्मे में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा- "कुछ देवियां आज शूटिंग पे, मेरे चश्मे को देख कर बोलीं . . 'COOL' . . मैंने मन ही मन सोचा, चलो बच गए; वातावरण अनुकूल है! " इससे पहले बिग बी ने अपनी एक फोटो शेयर कर लिखा- 'चश्मा बदल दिया। ' बिग बी ने हाल ही में अपने ब्लॉग में लिखा, "'केबीसी' के प्रोमो की शूटिंग शुरू करने के लिए काफी सारी तैयारियां की गई हैं और अधिकतम सुरक्षा उपायों के साथ इसे कैसे किया जाना है इसके लिए 'केबीसी' के अपने खुद के प्रोटोकॉल हैं। जिंदगी पहले की तरह तो अब नहीं होगी. . शायद. . महामारी के इस दौर में हमें ऐसे ही रहना है। " इससे पहले मई में लॉकडाउन के बीच बिग बी ने 'केबीसी' के अगले सीजन के लिए शूटिंग की शुरूआत की थी जिस पर सुरक्षा की ²ष्टि से सवाल उठाए गए थे। मुद्दे पर अपनी सफाई देते हुए उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा था, "हां मैंने काम किया है. इससे परेशानी है, तो इसे अपने तक ही सीमित रखें. लॉकडाउन की इस परिस्थिति में यहां कुछ कहने की कोशिश न करें. जितना संभव हो सके, पर्याप्त मात्रा में सावधानियां बरती गईं. दो दिन के काम को एक ही दिन में निबटा लिया गया. शाम के छह बजे काम शुरू किया गया है और कुछ ही देर में खत्म कर लिया गया है। " |
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में 6 मार्च को शनि उदय हुए हैं. अब 12 मार्च को शुक्र और राहु की युति होगी और फिर 15 मार्च को सूर्य और गुरु की युति होगी. ये चारों ही ग्रह तीन राशियों के लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचाने आ रहे हैं.
Zodiac Sign : वैदिक ज्योतिष में हमेशा से ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन पर नजर रखी जाती है. इस बार मार्च में चार ग्रहों के परिवर्तन से बन रहे संयोग के चलते तीन राशि के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी. खासतौर पर अब होली के बाद इन राशियों के लोगों का थोड़ा कठिन समय आने वाला है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में 6 मार्च को शनि उदय हुए हैं. अब 12 मार्च को शुक्र और राहु की युति होगी और फिर 15 मार्च को सूर्य और गुरु की युति होगी. ये चारों ही ग्रह तीन राशियों के लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचाने आ रहे हैं.
सेहत को लेकर विशेष हिदायत हैं.
हार्ट पेशेंट है तो ज्यादा ध्यान रखें.
परिवार में झगड़ें हो सकते हैं.
नौकरी को बदलने का विचार मन से निकाल दें.
किसी भी तरह के विवाद से बचें.
खासतौर पर भाई बहनों से झगड़ा ना करें.
मानसिक परेशानी महसूस कर सकते हैं.
लीवर या किडनी से जुड़ी परेशानी है तो ध्यान रखें.
लेन देन में लापरवाही ना करें.
गाड़ी चलाते समय सावधान रहें.
उच्च अधिकारी का सहयोग नहीं होने से परेशान हो सकते हैं.
बेकार की यात्रा कष्ट दे सकती हैं.
मन एक जगह नहीं लगेगा.
ससुराल में रूपयों के लेन देन से बचें.
लवमेट से ईमानदार रहें.
वरना भविष्य में परेशानी हो सकती है.
(डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है. जिसकी ZeeMedia पुष्टि नहीं करता है )
| वैदिक ज्योतिष के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में छः मार्च को शनि उदय हुए हैं. अब बारह मार्च को शुक्र और राहु की युति होगी और फिर पंद्रह मार्च को सूर्य और गुरु की युति होगी. ये चारों ही ग्रह तीन राशियों के लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचाने आ रहे हैं. Zodiac Sign : वैदिक ज्योतिष में हमेशा से ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन पर नजर रखी जाती है. इस बार मार्च में चार ग्रहों के परिवर्तन से बन रहे संयोग के चलते तीन राशि के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी. खासतौर पर अब होली के बाद इन राशियों के लोगों का थोड़ा कठिन समय आने वाला है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में छः मार्च को शनि उदय हुए हैं. अब बारह मार्च को शुक्र और राहु की युति होगी और फिर पंद्रह मार्च को सूर्य और गुरु की युति होगी. ये चारों ही ग्रह तीन राशियों के लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचाने आ रहे हैं. सेहत को लेकर विशेष हिदायत हैं. हार्ट पेशेंट है तो ज्यादा ध्यान रखें. परिवार में झगड़ें हो सकते हैं. नौकरी को बदलने का विचार मन से निकाल दें. किसी भी तरह के विवाद से बचें. खासतौर पर भाई बहनों से झगड़ा ना करें. मानसिक परेशानी महसूस कर सकते हैं. लीवर या किडनी से जुड़ी परेशानी है तो ध्यान रखें. लेन देन में लापरवाही ना करें. गाड़ी चलाते समय सावधान रहें. उच्च अधिकारी का सहयोग नहीं होने से परेशान हो सकते हैं. बेकार की यात्रा कष्ट दे सकती हैं. मन एक जगह नहीं लगेगा. ससुराल में रूपयों के लेन देन से बचें. लवमेट से ईमानदार रहें. वरना भविष्य में परेशानी हो सकती है. |
Adityapur : सोमवार को कांड्रा पंचायत सचिवालय में उप मुखिया पद के लिए चुनाव हुआ था. जो अब विवादों से घिर गया है. उप मुखिया पद के दूसरे प्रत्याशी अजीत सेन ने मंगलवार को जिले के डीसी अरवा राजकमल से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप कर पुनः मतगणना कराने की मांग की है. डीसी को दिए आवेदन में अजीत सेन ने कहा है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी की उपस्थिति में हुए इस चुनाव में कांड्रा पंचायत के कुल नौ वार्ड सदस्यों ने हिस्सा लिया था. जिनमें से पांच सदस्यों का मत उन्हें प्राप्त हुआ और दूसरे प्रत्याशी रीना मुखर्जी को चार मत मिले.
वोट देने के उपरांत गिनती के समय प्रखंड विकास पदाधिकारी ने एक मत को रद्द घोषित कर दिया. इसके पीछे वजह बताई गई कि निर्धारित कॉलम में वार्ड सदस्य ने सही का निशान नहीं लगाया था. इधर आवेदक अजीत सेन का कहना है कि मतपत्र में वार्ड सदस्य ने उनके नाम के सामने साफ-साफ सही का निशान लगाया है. ऐसे में इसे रद्द किया जाना युक्तिसंगत नहीं है. उन्होंने उपायुक्त से पूरे मामले की जांच कर पुनः मतगणना कराने की मांग की है. बता दें कि सोमवार को हुए चुनाव में नौ वार्ड सदस्यों ने हिस्सा लिया था, इनमें से एक का मत रद्द कर दिया गया था. ऐसे में दोनों ही उम्मीदवारों को चार-चार मत प्राप्त हुए. बाद में मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद मुखिया को भी मत देने को कहा गया, इसके बाद रीना मुखर्जी को उप मुखिया घोषित कर दिया गया. यहीं से विवाद शुरू हो गया जो मंगलवार को डीसी के ऑफिस तक पहुंच गया.
| Adityapur : सोमवार को कांड्रा पंचायत सचिवालय में उप मुखिया पद के लिए चुनाव हुआ था. जो अब विवादों से घिर गया है. उप मुखिया पद के दूसरे प्रत्याशी अजीत सेन ने मंगलवार को जिले के डीसी अरवा राजकमल से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप कर पुनः मतगणना कराने की मांग की है. डीसी को दिए आवेदन में अजीत सेन ने कहा है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी की उपस्थिति में हुए इस चुनाव में कांड्रा पंचायत के कुल नौ वार्ड सदस्यों ने हिस्सा लिया था. जिनमें से पांच सदस्यों का मत उन्हें प्राप्त हुआ और दूसरे प्रत्याशी रीना मुखर्जी को चार मत मिले. वोट देने के उपरांत गिनती के समय प्रखंड विकास पदाधिकारी ने एक मत को रद्द घोषित कर दिया. इसके पीछे वजह बताई गई कि निर्धारित कॉलम में वार्ड सदस्य ने सही का निशान नहीं लगाया था. इधर आवेदक अजीत सेन का कहना है कि मतपत्र में वार्ड सदस्य ने उनके नाम के सामने साफ-साफ सही का निशान लगाया है. ऐसे में इसे रद्द किया जाना युक्तिसंगत नहीं है. उन्होंने उपायुक्त से पूरे मामले की जांच कर पुनः मतगणना कराने की मांग की है. बता दें कि सोमवार को हुए चुनाव में नौ वार्ड सदस्यों ने हिस्सा लिया था, इनमें से एक का मत रद्द कर दिया गया था. ऐसे में दोनों ही उम्मीदवारों को चार-चार मत प्राप्त हुए. बाद में मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद मुखिया को भी मत देने को कहा गया, इसके बाद रीना मुखर्जी को उप मुखिया घोषित कर दिया गया. यहीं से विवाद शुरू हो गया जो मंगलवार को डीसी के ऑफिस तक पहुंच गया. |
द्वितीय विश्व युद्ध के एक खूनी और क्रूर था। कई यूरोपीय देशों से अपने बेरहम झटका मारा गया था। 35 हजार सैनिकों, नागरिकों की हजारों . . . जब सस्ते की तलाशः अपेक्षाकृत छोटे चेकोस्लोवाकिया की हानि विशाल आकार मारा श्रम, जर्मनी के जबरन बेगार करने के लिए जर्मनी में ले जाया गया, 550 000 युवा लोगों को। कार्पेथियन रस, सुडेटनलैण्ड एवं Tishinsky क्षेत्रः क्षेत्र के देश के बड़े टुकड़े से काट दिया। एक स्वतंत्र इकाई के रूप में राज्य अस्तित्व में रह गए, एक जर्मन उपनिवेश बनाः तथाकथित संरक्षित राज्य।
एक नहीं बल्कि बड़ी जर्मन समूह - युद्ध सेना चेकोस्लोवाकिया "केन्द्र" में तैनात किया गया था के अंत में। इसकी रचना एक लाख अधिकारियों और सैनिकों द्वारा गणना की गई थी। फील्ड मार्शल शेमर की कमान आक्रमणकारियों। वह दृढ़ता से विश्वास है कि चेक गणराज्य पूरी तरह से जर्मन राष्ट्र बन जाना चाहिए था। रिपोर्ट है कि रूस प्राग की मुक्ति की तैयारी, नाजियों हास्यास्पद और अवास्तविक माना थे। राजधानी के रूप में, मई 1945 में, यह छठा जर्मन सेना की लड़ाकू स्क्वाड्रनों के परीक्षण के लिए बन गया है। विशेष सावधानी आक्रमणकारियों हवाई क्षेत्र है, जहां उनके विमानों, साथ ही आसपास के क्षेत्र, बिल्ट-अप बैरकों सैनिकों वहाँ थे पहरा।
दिलचस्प है, लेकिन आज प्राग की मुक्ति बहस और चर्चा का एक बहुत कुछ है। इतिहासकारों तीन शिविरों में विभाजित कर रहे हैं। कुछ का मानना है कि नाजियों से शहर स्थानीय विद्रोहियों को मंजूरी दे दी है, जबकि अन्य प्रतिभाशाली आक्रामक Vlasov के बारे में कहना है, दूसरों के महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास पर जोर सोवियत सेना की। वहाँ भी एक संस्करण है कि रूसी प्राग के आने के पहले से ही मुक्त किया गया है। यह सच है? समझने की कोशिश करो।
दरअसल, शहर एक बहुत जारी करने के लिए योजना बनाई है। बेशक, आपरेशन योजना विकसित की है, लाल सेना। पहले से ही अप्रैल 1945 राजधानी के सावधानी से अध्ययन नक्शे के मुख्यालय में, एक टोही विमान बनायाः वे जर्मन पदों, उनके बंदूक स्थापन और गोला बारूद डिपो देख सकता था। इन सामरिक वस्तुओं खामियाजा तहत पाने के लिए था।
बहुत अंत में महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध (द्वितीय विश्व युद्ध) की, प्राग की मुक्ति और चेक राष्ट्रीय परिषद, 1945 में गठन किया तैयार करने के लिए शुरू कर दिया। कार्यालय, कम्युनिस्टों से मिलकर, एक जन विद्रोह, केन्द्रों जिनमें से हर अब और फिर देश में बाहर तोड़ दिया नेतृत्व करने के लिए इस अधिकार का दावा। लेकिन आपरेशन के संगठन के लिए समय राजधानी के झाडू नहीं खेला था में पीपीएच के इतने निर्णायक भूमिका नहीं थी।
एक ही समय में प्राग में 5 मई को Vlasov, आरओए पहले इन्फैंट्री डिवीजन के सैनिकों चला गया। लड़ाकू इकाई, मेजर जनरल Bunyachenko के नेतृत्व में चिह्नित मुक्ति की शुरुआत है। दिन के एक मामले में वे, शहर के पश्चिमी भाग को साफ करने के लिए इस प्रकार उसकी अंगूठी एसएस खोलने में सक्षम थे।
Vlasov नाजियों से प्राग की मुक्ति के लिए शुरू किया, वहीं दूसरी ओर जनरल पैटन के तहत अमेरिकी सैनिकों की राजधानी के लिए आया था। कार्लोवी वेरी - - Choske बुदजोवीस अमेरिकी राष्ट्रपति, वह लाइन प्लज़ेन की स्थिति आगे डाल करने के लिए निर्देश दिया गया था। अमेरिकियों विशेष रूप से जर्मनी के विरोध नहीं किया है, लेकिन लाल सेना, स्लोवाकिया से आ रही है, वे एक भयंकर प्रतिरोध दे दी है। कैदियों को अमेरिका के प्रति वफादारी के बारे में पता है, वे अपने हाथों में गिर अनुल्लंघनीय कम्युनिस्टों की तुलना में प्राथमिकता दी। इसलिए, मित्र राष्ट्रों की अग्रिम की दर अलग था।
जनरल पैटन प्लज़ेन ले लिया। शहर के निवासियों को भी युद्ध के बाद उसे एक स्मारक डाल दिया। इस में, अमेरिकियों बंद कर दियाः लाल सेना की ओर बढ़, इसलिए भ्रम से बचने के लिए, वे इंतजार करने का फैसला किया। हाँ, और यह चेकोस्लोवाकिया राजनीतिक उद्देश्य के लिए अमेरिकी सरकार विचार नहीं करता। एक परिणाम के रूप में, हम एक बार फिर से सैनिकों की जीवन को जोखिम में नहीं करने का फैसला। जब रूस ने महसूस किया कि सहयोगी दलों को अपने शब्द पर वापस चला गया, वे अकेले प्राग की मुक्ति के लिए जारी रखा।
आगे क्या हुआ?
इस बीच, शहर Vlasov पीछे हट के पश्चिमी भाग की मुक्ति के लिए एक सफल ऑपरेशन के बाद। इतिहासकारों का मानना है कि वे दो कारणों से प्राग को ले लिया हैः पहला, अमेरिकियों को प्रभावित करने, और दूसरी, जर्मन के साथ सक्रिय सहयोग के बाद आम माफी के लिए उम्मीद चाहता था। लेकिन पीपीएच के साथ संघ की स्थिति पर सहमत करने में नाकाम रहने के बाद, वे राजधानी छोड़ दिया है।
आप देख सकते हैं, प्राग की मुक्ति के लिए पूरी तरह से लाल सेना के कंधों पर गिर गया। शुरुआत आज्ञा मार्शल कोनेव। उनकी यूनिट बस बर्लिन की सफाई समाप्त किया था, के रूप में तुरंत चेक क्षेत्र में फेंक दिया गया। एक दिन आराम नहीं, सैनिकों शहर के माध्यम से तोड़ने के लिए शुरू कर दिया। युद्ध में और सक्रिय रूप से भाग सबसे पहले यूक्रेनी मोर्चा की बटालियनों ले लिया। अगले पुल वह गंभीर रूप से घायल हो गया था लेफ्टिनेंट इवान गोंचरेंको, जिसका नाम बाद में प्राग के सड़कों में से एक नामित किया गया था का सबसे गर्म लड़ाइयों में से एक में। मई 6 से 11 करने के लिएः प्राग की मुक्ति के लिए कई दिनों तक चली। यह यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम बड़ा ऑपरेशन किया गया था।
प्राग प्रतिरोध का अंतिम प्रमुख नाजी बड़ा केंद्र था। पर हस्ताक्षर किए आत्मसमर्पण के बावजूद, स्थानीय आक्रमणकारियों देने के लिए नहीं करना चाहती। इसके बजाय, वे जर्मनी के महान विभाजन, उपनाम मितला समूह के साथ पुनर्मिलन के लिए योजना बना रहे थे। दुश्मन इकाई सक्रिय लड़ाई का संचालन करने, हर मोड़ पर लड़ जारी रखा। दक्षिण मितला समूह की चपेट में आ नाजियों के कब्जे में चेकोस्लोवाकिया के साथ सेना में शामिल होने का फैसला किया। दुश्मन को मजबूत बनाने को रोकने के लिए हमारे सैनिकों लड़ाई में पहुंचे। इस स्थिति लो सम्मान और विवेक की बात बन गया है।
कैसे सोवियत सैनिकों ने प्राग की मुक्ति करता है? सबसे पहले, लाल सेना लगातार उन्हें पूरा करने के लिए क्या योजना बनाई गई थी से रोकने के लिए Schorner इकाई अपनाई। दांव टैंक पर किया जाता है, मछली पकड़ने और Lelyushenko जनरलों के आदेश के तहत है। यह इन साहसी लड़कों उन्हें पीछे में छोड़ रहा है, और इस तरह एसएस पुरुषों प्राग में गुप्त से काट पीछे हटते नाजियों की लाइन के माध्यम से तोड़ने के आदेश दिए थे, है। जब मितला समूह चेकोस्लोवाकिया की राजधानी तक पहुंच जाएगा, वहाँ पहले से ही रूसी सैनिकों हैंः योजना इस था। हमारे सेनानियों के लिए मुख्य समस्या सामने फांसी केवल खड़ी पहाड़ों थे। इस मील के पत्थर पार करने के लिए टैंकरों का मुख्य उद्देश्य था।
ऐतिहासिक आपरेशन पहले यूक्रेनी फ्रंट के टैंक रेजिमेंट शुरू कर दिया। वे संकीर्ण घुमावदार और खतरनाक पहाड़ गुजरता के माध्यम से अपना रास्ता बना लिया। रात क्रॉलर मशीनों की पिच अंधेरे में दुश्मन हर कदम पर जर्मनों द्वारा शुरू किया बाधाओं बह। जब एक जरूरत नहीं थी, कर्मचारियों टैंक छोड़ दियाः पुरुषों व्यक्तिगत रूप से बहाल पुलों, खानों को शांत।
अंत में, सभी बाधाओं को खारिज, इस्पात प्रौद्योगिकी लहर लकीरें के माध्यम से पारित और ढलान के नीचे लुढ़का है - सीधे चेक राजधानी के लिए। क्षितिज पर सोवियत टैंक की उपस्थिति एसएस है कि वे भी एक उचित प्रतिरोध नहीं था के लिए इतना अप्रत्याशित था। इसके विपरीत, भय के साथ पागल, जर्मन दहशत में बिना किसी उद्देश्य के भाग गए।
तो प्राग की मुक्ति के समाप्त हो गया। तिथि महत्वपूर्ण घटना - 11 मई को। इस दिन पर, चेकोस्लोवाकिया की राजधानी पूरी तरह से आक्रमणकारियों से मुक्त कर दिया। फासिस्टों के अलग समूहों हमारे टैंकों दो दिन, जिसके बाद सभी भगोड़ों के कैदियों, वे पूरा एक जिम्मेदार सैन्य मिशन के योग्य हैं के लिए और अधिक कोशिश करते रहे।
| द्वितीय विश्व युद्ध के एक खूनी और क्रूर था। कई यूरोपीय देशों से अपने बेरहम झटका मारा गया था। पैंतीस हजार सैनिकों, नागरिकों की हजारों . . . जब सस्ते की तलाशः अपेक्षाकृत छोटे चेकोस्लोवाकिया की हानि विशाल आकार मारा श्रम, जर्मनी के जबरन बेगार करने के लिए जर्मनी में ले जाया गया, पाँच सौ पचास शून्य युवा लोगों को। कार्पेथियन रस, सुडेटनलैण्ड एवं Tishinsky क्षेत्रः क्षेत्र के देश के बड़े टुकड़े से काट दिया। एक स्वतंत्र इकाई के रूप में राज्य अस्तित्व में रह गए, एक जर्मन उपनिवेश बनाः तथाकथित संरक्षित राज्य। एक नहीं बल्कि बड़ी जर्मन समूह - युद्ध सेना चेकोस्लोवाकिया "केन्द्र" में तैनात किया गया था के अंत में। इसकी रचना एक लाख अधिकारियों और सैनिकों द्वारा गणना की गई थी। फील्ड मार्शल शेमर की कमान आक्रमणकारियों। वह दृढ़ता से विश्वास है कि चेक गणराज्य पूरी तरह से जर्मन राष्ट्र बन जाना चाहिए था। रिपोर्ट है कि रूस प्राग की मुक्ति की तैयारी, नाजियों हास्यास्पद और अवास्तविक माना थे। राजधानी के रूप में, मई एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में, यह छठा जर्मन सेना की लड़ाकू स्क्वाड्रनों के परीक्षण के लिए बन गया है। विशेष सावधानी आक्रमणकारियों हवाई क्षेत्र है, जहां उनके विमानों, साथ ही आसपास के क्षेत्र, बिल्ट-अप बैरकों सैनिकों वहाँ थे पहरा। दिलचस्प है, लेकिन आज प्राग की मुक्ति बहस और चर्चा का एक बहुत कुछ है। इतिहासकारों तीन शिविरों में विभाजित कर रहे हैं। कुछ का मानना है कि नाजियों से शहर स्थानीय विद्रोहियों को मंजूरी दे दी है, जबकि अन्य प्रतिभाशाली आक्रामक Vlasov के बारे में कहना है, दूसरों के महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास पर जोर सोवियत सेना की। वहाँ भी एक संस्करण है कि रूसी प्राग के आने के पहले से ही मुक्त किया गया है। यह सच है? समझने की कोशिश करो। दरअसल, शहर एक बहुत जारी करने के लिए योजना बनाई है। बेशक, आपरेशन योजना विकसित की है, लाल सेना। पहले से ही अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस राजधानी के सावधानी से अध्ययन नक्शे के मुख्यालय में, एक टोही विमान बनायाः वे जर्मन पदों, उनके बंदूक स्थापन और गोला बारूद डिपो देख सकता था। इन सामरिक वस्तुओं खामियाजा तहत पाने के लिए था। बहुत अंत में महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध की, प्राग की मुक्ति और चेक राष्ट्रीय परिषद, एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में गठन किया तैयार करने के लिए शुरू कर दिया। कार्यालय, कम्युनिस्टों से मिलकर, एक जन विद्रोह, केन्द्रों जिनमें से हर अब और फिर देश में बाहर तोड़ दिया नेतृत्व करने के लिए इस अधिकार का दावा। लेकिन आपरेशन के संगठन के लिए समय राजधानी के झाडू नहीं खेला था में पीपीएच के इतने निर्णायक भूमिका नहीं थी। एक ही समय में प्राग में पाँच मई को Vlasov, आरओए पहले इन्फैंट्री डिवीजन के सैनिकों चला गया। लड़ाकू इकाई, मेजर जनरल Bunyachenko के नेतृत्व में चिह्नित मुक्ति की शुरुआत है। दिन के एक मामले में वे, शहर के पश्चिमी भाग को साफ करने के लिए इस प्रकार उसकी अंगूठी एसएस खोलने में सक्षम थे। Vlasov नाजियों से प्राग की मुक्ति के लिए शुरू किया, वहीं दूसरी ओर जनरल पैटन के तहत अमेरिकी सैनिकों की राजधानी के लिए आया था। कार्लोवी वेरी - - Choske बुदजोवीस अमेरिकी राष्ट्रपति, वह लाइन प्लज़ेन की स्थिति आगे डाल करने के लिए निर्देश दिया गया था। अमेरिकियों विशेष रूप से जर्मनी के विरोध नहीं किया है, लेकिन लाल सेना, स्लोवाकिया से आ रही है, वे एक भयंकर प्रतिरोध दे दी है। कैदियों को अमेरिका के प्रति वफादारी के बारे में पता है, वे अपने हाथों में गिर अनुल्लंघनीय कम्युनिस्टों की तुलना में प्राथमिकता दी। इसलिए, मित्र राष्ट्रों की अग्रिम की दर अलग था। जनरल पैटन प्लज़ेन ले लिया। शहर के निवासियों को भी युद्ध के बाद उसे एक स्मारक डाल दिया। इस में, अमेरिकियों बंद कर दियाः लाल सेना की ओर बढ़, इसलिए भ्रम से बचने के लिए, वे इंतजार करने का फैसला किया। हाँ, और यह चेकोस्लोवाकिया राजनीतिक उद्देश्य के लिए अमेरिकी सरकार विचार नहीं करता। एक परिणाम के रूप में, हम एक बार फिर से सैनिकों की जीवन को जोखिम में नहीं करने का फैसला। जब रूस ने महसूस किया कि सहयोगी दलों को अपने शब्द पर वापस चला गया, वे अकेले प्राग की मुक्ति के लिए जारी रखा। आगे क्या हुआ? इस बीच, शहर Vlasov पीछे हट के पश्चिमी भाग की मुक्ति के लिए एक सफल ऑपरेशन के बाद। इतिहासकारों का मानना है कि वे दो कारणों से प्राग को ले लिया हैः पहला, अमेरिकियों को प्रभावित करने, और दूसरी, जर्मन के साथ सक्रिय सहयोग के बाद आम माफी के लिए उम्मीद चाहता था। लेकिन पीपीएच के साथ संघ की स्थिति पर सहमत करने में नाकाम रहने के बाद, वे राजधानी छोड़ दिया है। आप देख सकते हैं, प्राग की मुक्ति के लिए पूरी तरह से लाल सेना के कंधों पर गिर गया। शुरुआत आज्ञा मार्शल कोनेव। उनकी यूनिट बस बर्लिन की सफाई समाप्त किया था, के रूप में तुरंत चेक क्षेत्र में फेंक दिया गया। एक दिन आराम नहीं, सैनिकों शहर के माध्यम से तोड़ने के लिए शुरू कर दिया। युद्ध में और सक्रिय रूप से भाग सबसे पहले यूक्रेनी मोर्चा की बटालियनों ले लिया। अगले पुल वह गंभीर रूप से घायल हो गया था लेफ्टिनेंट इवान गोंचरेंको, जिसका नाम बाद में प्राग के सड़कों में से एक नामित किया गया था का सबसे गर्म लड़ाइयों में से एक में। मई छः से ग्यारह करने के लिएः प्राग की मुक्ति के लिए कई दिनों तक चली। यह यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम बड़ा ऑपरेशन किया गया था। प्राग प्रतिरोध का अंतिम प्रमुख नाजी बड़ा केंद्र था। पर हस्ताक्षर किए आत्मसमर्पण के बावजूद, स्थानीय आक्रमणकारियों देने के लिए नहीं करना चाहती। इसके बजाय, वे जर्मनी के महान विभाजन, उपनाम मितला समूह के साथ पुनर्मिलन के लिए योजना बना रहे थे। दुश्मन इकाई सक्रिय लड़ाई का संचालन करने, हर मोड़ पर लड़ जारी रखा। दक्षिण मितला समूह की चपेट में आ नाजियों के कब्जे में चेकोस्लोवाकिया के साथ सेना में शामिल होने का फैसला किया। दुश्मन को मजबूत बनाने को रोकने के लिए हमारे सैनिकों लड़ाई में पहुंचे। इस स्थिति लो सम्मान और विवेक की बात बन गया है। कैसे सोवियत सैनिकों ने प्राग की मुक्ति करता है? सबसे पहले, लाल सेना लगातार उन्हें पूरा करने के लिए क्या योजना बनाई गई थी से रोकने के लिए Schorner इकाई अपनाई। दांव टैंक पर किया जाता है, मछली पकड़ने और Lelyushenko जनरलों के आदेश के तहत है। यह इन साहसी लड़कों उन्हें पीछे में छोड़ रहा है, और इस तरह एसएस पुरुषों प्राग में गुप्त से काट पीछे हटते नाजियों की लाइन के माध्यम से तोड़ने के आदेश दिए थे, है। जब मितला समूह चेकोस्लोवाकिया की राजधानी तक पहुंच जाएगा, वहाँ पहले से ही रूसी सैनिकों हैंः योजना इस था। हमारे सेनानियों के लिए मुख्य समस्या सामने फांसी केवल खड़ी पहाड़ों थे। इस मील के पत्थर पार करने के लिए टैंकरों का मुख्य उद्देश्य था। ऐतिहासिक आपरेशन पहले यूक्रेनी फ्रंट के टैंक रेजिमेंट शुरू कर दिया। वे संकीर्ण घुमावदार और खतरनाक पहाड़ गुजरता के माध्यम से अपना रास्ता बना लिया। रात क्रॉलर मशीनों की पिच अंधेरे में दुश्मन हर कदम पर जर्मनों द्वारा शुरू किया बाधाओं बह। जब एक जरूरत नहीं थी, कर्मचारियों टैंक छोड़ दियाः पुरुषों व्यक्तिगत रूप से बहाल पुलों, खानों को शांत। अंत में, सभी बाधाओं को खारिज, इस्पात प्रौद्योगिकी लहर लकीरें के माध्यम से पारित और ढलान के नीचे लुढ़का है - सीधे चेक राजधानी के लिए। क्षितिज पर सोवियत टैंक की उपस्थिति एसएस है कि वे भी एक उचित प्रतिरोध नहीं था के लिए इतना अप्रत्याशित था। इसके विपरीत, भय के साथ पागल, जर्मन दहशत में बिना किसी उद्देश्य के भाग गए। तो प्राग की मुक्ति के समाप्त हो गया। तिथि महत्वपूर्ण घटना - ग्यारह मई को। इस दिन पर, चेकोस्लोवाकिया की राजधानी पूरी तरह से आक्रमणकारियों से मुक्त कर दिया। फासिस्टों के अलग समूहों हमारे टैंकों दो दिन, जिसके बाद सभी भगोड़ों के कैदियों, वे पूरा एक जिम्मेदार सैन्य मिशन के योग्य हैं के लिए और अधिक कोशिश करते रहे। |
फिरोजाबाद। गायों में बढ़ रहा लंपी वायरस अब आम लोगों की चिंता भी बढ़ाने लगा है। गाय के दूध का प्रयोग सर्वाधिक नवजातों के पिलाने में होता है। लंपी के डर से अभिभावक अपने बच्चों को गाय के दूध की जगह पैकिंग में बिकने वाले दूध पाउडर को पिला रहे हैं। एक माह में पाउडर दूध की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। चिकित्सकों के अनुसार गाय के दूध का उबाल कर ही सेवन करें।
जिले के पशु पालन विभाग के आंकड़ों में 1300 से ज्यादा पशु लंपी का शिकार हैं। 12 गायों की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा सैकड़ों पशु ऐसे हैं, जिन तक पशु पालन विभाग की निगाह नहीं पहुंच सकी है। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, जिले में एक लाख 30 हजार लीटर गाय के दूध का उत्पादन होता है। जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि बीमार गायों के कारण अब दूध का उत्पादन घटकर 80 हजार लीटर के करीब हो गया है।
आसपास जनपद के मुकाबले फिरोजाबाद जिले में लंपी का प्रकोप ज्यादा है। लंपी के डर से लोग यहां दूध या दूध से बने उत्पादों को लेने से परहेज करने रहे हैं। लोग दूधवाली चाय की जगह अब लोग काली चाय पीने लगे हैं। पशु पालन विभाग के मुताबिक दूध को तय मानकों पर उबालकर पीने से वायरस का असर ना के बराबर है। जिले में एक लाख 60 हजार गाय हैं। लंपी के कारण दूध का उत्पादन घट गया है।
वैसे तो बीमार गाय का दूध पीने से बचा जाए। दूध को उबालकर पिया जाए तो उसमें कोई कमीं नहीं रह जाती है। हालांकि लंपी के डर के कारण कई माता, पिता डिब्बा बंद पाउडर का दूध बच्चों को पिलाने की जानकारी लेने आ रहे हैं। लोगों के एक प्रकार से डर है।
| फिरोजाबाद। गायों में बढ़ रहा लंपी वायरस अब आम लोगों की चिंता भी बढ़ाने लगा है। गाय के दूध का प्रयोग सर्वाधिक नवजातों के पिलाने में होता है। लंपी के डर से अभिभावक अपने बच्चों को गाय के दूध की जगह पैकिंग में बिकने वाले दूध पाउडर को पिला रहे हैं। एक माह में पाउडर दूध की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। चिकित्सकों के अनुसार गाय के दूध का उबाल कर ही सेवन करें। जिले के पशु पालन विभाग के आंकड़ों में एक हज़ार तीन सौ से ज्यादा पशु लंपी का शिकार हैं। बारह गायों की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा सैकड़ों पशु ऐसे हैं, जिन तक पशु पालन विभाग की निगाह नहीं पहुंच सकी है। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, जिले में एक लाख तीस हजार लीटर गाय के दूध का उत्पादन होता है। जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि बीमार गायों के कारण अब दूध का उत्पादन घटकर अस्सी हजार लीटर के करीब हो गया है। आसपास जनपद के मुकाबले फिरोजाबाद जिले में लंपी का प्रकोप ज्यादा है। लंपी के डर से लोग यहां दूध या दूध से बने उत्पादों को लेने से परहेज करने रहे हैं। लोग दूधवाली चाय की जगह अब लोग काली चाय पीने लगे हैं। पशु पालन विभाग के मुताबिक दूध को तय मानकों पर उबालकर पीने से वायरस का असर ना के बराबर है। जिले में एक लाख साठ हजार गाय हैं। लंपी के कारण दूध का उत्पादन घट गया है। वैसे तो बीमार गाय का दूध पीने से बचा जाए। दूध को उबालकर पिया जाए तो उसमें कोई कमीं नहीं रह जाती है। हालांकि लंपी के डर के कारण कई माता, पिता डिब्बा बंद पाउडर का दूध बच्चों को पिलाने की जानकारी लेने आ रहे हैं। लोगों के एक प्रकार से डर है। |
हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई ।
निचले सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई तो महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 'राष्ट्रपत्नी' कहकर उनका अपमान किया।
ईरानी ने कहा कि राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर विराजित मुर्मू का चौधरी ने 'सड़क पर जाकर' अपमान किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता के इस कृत्य को और 'महिला राष्ट्रपति के इस अपमान' को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की स्वीकृति थी ।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष देश से माफी मांगें।
उन्होंने कांग्रेस को महिला विरोधी, गरीब विरोधी और आदिवासी विरोधी करार दिया ।
इस दौरान सोनिया गांधी और चौधरी सदन में उपस्थित थे।
ईरानी के साथ भाजपा के अनेक सांसद और विशेष रूप से पार्टी की सभी महिला सांसद इस दौरान खड़े होकर कांग्रेस नेता की टिप्पणी का विरोध करते देखी गयीं।
भाजपा नेताओं के हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब 5 मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी ।
| हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दी गई । निचले सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न ग्यारह बजे शुरू हुई तो महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 'राष्ट्रपत्नी' कहकर उनका अपमान किया। ईरानी ने कहा कि राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर विराजित मुर्मू का चौधरी ने 'सड़क पर जाकर' अपमान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता के इस कृत्य को और 'महिला राष्ट्रपति के इस अपमान' को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की स्वीकृति थी । केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष देश से माफी मांगें। उन्होंने कांग्रेस को महिला विरोधी, गरीब विरोधी और आदिवासी विरोधी करार दिया । इस दौरान सोनिया गांधी और चौधरी सदन में उपस्थित थे। ईरानी के साथ भाजपा के अनेक सांसद और विशेष रूप से पार्टी की सभी महिला सांसद इस दौरान खड़े होकर कांग्रेस नेता की टिप्पणी का विरोध करते देखी गयीं। भाजपा नेताओं के हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब पाँच मिनट बाद ही दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दी । |
प्राप्त करना दुष्कर हो जाता है । परन्तु वर्तमान में कई यंत्र आ गये हैं जिनसे इन प्रक्रमों की क्रिया विधि का मापन आसानी से हो जाता है । करेण्ट मीटर से नदी का वेग ज्ञात किया जा सकता है । नदी वेग (v) एवं क्रास सेक्सनल क्षेत्र A के मापन के आधार पर नदी D विसर्जन मालूम किया जा सकता है
विसर्जन (D) = v xA
इसी तरह सागर तल पर रेत की गति का प्रति दोप्ति ट्रेसर से मापन कर लिया जा सकता है । हिमानी की गति का मापन क्लाइनो-मीटर से किया जाता है ।
(ii) कुछ स्थल रूपों में परिवर्तन इतनी मन्द गति से होता है कि एक मानव-जीवन-काल के अन्तर्गत उसका अवलोकन तथा मापन संभव नहीं हो पाता है ।
(iii) एक प्रक्रम का स्थल रूपों से सम्बन्ध स्थापित करना त्रुटिपूर्ण है क्योंकि किसी भी स्थल रुप के निर्माण में कई प्रक्रम मिलकर साथ-साथ काम करते हैं । ऐसी स्थिति में प्रयोगशाला में माडल के प्रयोग से कुछ सही निष्कर्ष निकाला जा सकता है ।
( iv ) संयुक्त उपगमन प्रादेशिक भू-आकारिकी के अध्ययन के समय उपर्युक्त उपगमन का सामूहिक रुप वांछित हो जाता है। इतना ही नहीं किसी स्थलरुप विशेष के अध्ययन में भी कई उपगमन का सहारा नितांत आवश्यक होता है । निष्कर्ष :- यदि स्थल रुपों के अध्ययन की विधियों और उपगमनों का विश्लेषरण किया जाय तो यह तथ्य उभर कर सामने आता है कि प्रत्येक उपगमन स्थल रुपों के निर्माण से सम्बन्धित किसी एक कारक से सम्बन्धित है । विकास उपगमन में संरचना तथा जलवायु कालानुक्रम उपगमन में विकासीय शृंखलायें तथा प्रक्रमरुप उपगमन में प्रक्रम को आधार माना जाता है । इस तरह स्पष्ट है कि स्थल-रूपों के अध्ययन में गणित का चाहे कितना ही प्रवेश क्यों न हो गया है । विषय कितना ही मात्रात्मक क्यों न हो परन्तु भू-आकृति - वेत्ता डेविस द्वारा प्रतिपादित "स्थल रुप, संरचना, प्रक्रम और अवस्था का प्रतिफल है" इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है ।
बी 21/109 मी, वाराणसी | प्राप्त करना दुष्कर हो जाता है । परन्तु वर्तमान में कई यंत्र आ गये हैं जिनसे इन प्रक्रमों की क्रिया विधि का मापन आसानी से हो जाता है । करेण्ट मीटर से नदी का वेग ज्ञात किया जा सकता है । नदी वेग एवं क्रास सेक्सनल क्षेत्र A के मापन के आधार पर नदी D विसर्जन मालूम किया जा सकता है विसर्जन = v xA इसी तरह सागर तल पर रेत की गति का प्रति दोप्ति ट्रेसर से मापन कर लिया जा सकता है । हिमानी की गति का मापन क्लाइनो-मीटर से किया जाता है । कुछ स्थल रूपों में परिवर्तन इतनी मन्द गति से होता है कि एक मानव-जीवन-काल के अन्तर्गत उसका अवलोकन तथा मापन संभव नहीं हो पाता है । एक प्रक्रम का स्थल रूपों से सम्बन्ध स्थापित करना त्रुटिपूर्ण है क्योंकि किसी भी स्थल रुप के निर्माण में कई प्रक्रम मिलकर साथ-साथ काम करते हैं । ऐसी स्थिति में प्रयोगशाला में माडल के प्रयोग से कुछ सही निष्कर्ष निकाला जा सकता है । संयुक्त उपगमन प्रादेशिक भू-आकारिकी के अध्ययन के समय उपर्युक्त उपगमन का सामूहिक रुप वांछित हो जाता है। इतना ही नहीं किसी स्थलरुप विशेष के अध्ययन में भी कई उपगमन का सहारा नितांत आवश्यक होता है । निष्कर्ष :- यदि स्थल रुपों के अध्ययन की विधियों और उपगमनों का विश्लेषरण किया जाय तो यह तथ्य उभर कर सामने आता है कि प्रत्येक उपगमन स्थल रुपों के निर्माण से सम्बन्धित किसी एक कारक से सम्बन्धित है । विकास उपगमन में संरचना तथा जलवायु कालानुक्रम उपगमन में विकासीय शृंखलायें तथा प्रक्रमरुप उपगमन में प्रक्रम को आधार माना जाता है । इस तरह स्पष्ट है कि स्थल-रूपों के अध्ययन में गणित का चाहे कितना ही प्रवेश क्यों न हो गया है । विषय कितना ही मात्रात्मक क्यों न हो परन्तु भू-आकृति - वेत्ता डेविस द्वारा प्रतिपादित "स्थल रुप, संरचना, प्रक्रम और अवस्था का प्रतिफल है" इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है । बी इक्कीस/एक सौ नौ मी, वाराणसी |
खास बात ये है कि उम्र गुजरने के साथ ही इस कपल का प्यार और मजबूत होता गया। अब इस बुजुर्ग कपल का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। बुजुर्ग कपल ने अपनी 72 साल की शादीशुदा जिंदगी के सीक्रेट को शेयर किया है।
घर के सदस्य रिश्ता पक्का कर देते थे और परिवार के लिए बच्चे भी खुशी खुशी अपना पूरा जीवन एक ऐसे इंसान के साथ बिता देते थे जिसे वे पहले से जानते ही नहीं। यहीं रिश्ता होता था शादी। लेकिन धीरे धीरे वक्त बदला और लोग लव मैरिज की तरफ झुकने लगे। एक साथ पढ़ना, साथ रहना अच्छे दोस्त और फिर तय होता है शादी का सफर।
रिलेशनशिप डेस्क। अभी तक दुनियाबर में पुरुषों के लिए गर्भनिरोध का सबसे प्रचलित और आसान तरीका कंडोम रहा है। हालांकि, इसे कई वजहों से कुछ लोग पसंद नहीं करते हैं। वहीं, अब पुरुषों के लिए बर्थ कंट्रोल के आसान और सस्ते उपायों की खोज में वैज्ञानिक लगातार रिसर्च में लगे रहे हैं। अब ब्रिटेन के एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी (University of Edinburg) के वैज्ञानिकों को इससे जुड़े एक रिसर्च में सफलता मिली है। यह गर्भनिरोधक एक जेल के रूप में होगा।
(फाइल फोटो)
अगर शादीशुदा हैं तो भी, सिंगल हैं तो भी, या फिर तलाकशुदा हैं, या फिर मां नहीं बन पा रहीं हैं ऐसे में कई बार आपको ना चाहते हुए भी समाज के तानों को सुनना पड़ता होगा। या फिर कोई आपको समझाने के बहाने नसीहत देने की कोशिश की जाती होगी।
अगर पड़ोसी अच्छे होते हैं तो किसी भी सुख दुख में आपके काम आ जाएंगे। लेकिन अगर झगड़ालू हैं तो वहीं आपके जीवन में कई सारी दिक्कतें आ सकती हैं। झगड़ालू पड़ोसियों से रोज की खट पट से परेशान हो गए हैं तो कुछ चीजों के जरिए आप उनसे दूरी बना सकते हैं।
रिलेशनशिप डेस्क। एक वक्त था जब कहते थे कि इस दुनिया में हर किसी की एक जोड़ी है। ईश्वर ने सबको जोड़ी के साथ भेजा है। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं। शादी करते हैं और फिर जीवनभर साथ रहने का फैसला लेते हैं। लेकिन दुनिया में अब अकेले रहने का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। लोग शादी से बचते नजर आ रहे हैं। शादी में घोखा खाने के बाद या फिर किसी अपने के विश्वास तोड़ने के बाद लोग अकेले रहना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि वे सिंगल रहकर ज्यादा खुश हैं। लेकिन आपको बताते हैं सिंगल रहने के फायदे और नुकसान क्या हैं?
इस रिश्ते को निभाने के लिए प्यार सम्मान और बराबरी तो जरूरी है ही साथ ही जरूरी है माफी। माफी से मतलब है कि अगर आपसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारें। पार्टनर को ये एहसास कराएं कि आप उनके लिए कितने खास हैं। उनकी गलतियों पर समझाएं और अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए माफी मांगे।
जब नई नई शादी होती है तो आपकी अकेली लाइफ में जब कोई दस्तख देता है तो जीवन पूरा बदल जाता है। नए जिम्मेदारियां नए तरीके नए लोग नयापन। अचानक बदली लाइफ में एडजस्ट होने की जरूरत होती है। कोई बहुत जल्दी तो कोई लंबे समय तक भी शादी में एडजस्ट नहीं हो पाता ऐसे में रिश्ते में खटास आने लगती है।
होली. . . एक ऐसा त्योहार जो खुशी है, हंसी है, उमंग है उल्लास है। जहां रंगों की फुहार है मस्ती है। हालांकि इस बार भी कोरोना होली के माहौल में भंग डाल रहा है। होली खेलने पर रोक है लेकिन आप अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ होली का मजा ले सकते हैं। लेकिन इसके साथ भी जरूरी है कि आप सावधानियां बरतें। वहीं अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
कहा जाता है कि बुरी नजर से बचाने के लिए बच्चों को काला टीका लगाया जाता है। लेकिन भारत में ज्यादातर महिलाएं नवजात शिशु को काला टीका लगा देतीं है और ये सुनिश्चित भी करती हैं कि अब बच्चे को नजर नहीं लगेगी।
| खास बात ये है कि उम्र गुजरने के साथ ही इस कपल का प्यार और मजबूत होता गया। अब इस बुजुर्ग कपल का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। बुजुर्ग कपल ने अपनी बहत्तर साल की शादीशुदा जिंदगी के सीक्रेट को शेयर किया है। घर के सदस्य रिश्ता पक्का कर देते थे और परिवार के लिए बच्चे भी खुशी खुशी अपना पूरा जीवन एक ऐसे इंसान के साथ बिता देते थे जिसे वे पहले से जानते ही नहीं। यहीं रिश्ता होता था शादी। लेकिन धीरे धीरे वक्त बदला और लोग लव मैरिज की तरफ झुकने लगे। एक साथ पढ़ना, साथ रहना अच्छे दोस्त और फिर तय होता है शादी का सफर। रिलेशनशिप डेस्क। अभी तक दुनियाबर में पुरुषों के लिए गर्भनिरोध का सबसे प्रचलित और आसान तरीका कंडोम रहा है। हालांकि, इसे कई वजहों से कुछ लोग पसंद नहीं करते हैं। वहीं, अब पुरुषों के लिए बर्थ कंट्रोल के आसान और सस्ते उपायों की खोज में वैज्ञानिक लगातार रिसर्च में लगे रहे हैं। अब ब्रिटेन के एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को इससे जुड़े एक रिसर्च में सफलता मिली है। यह गर्भनिरोधक एक जेल के रूप में होगा। अगर शादीशुदा हैं तो भी, सिंगल हैं तो भी, या फिर तलाकशुदा हैं, या फिर मां नहीं बन पा रहीं हैं ऐसे में कई बार आपको ना चाहते हुए भी समाज के तानों को सुनना पड़ता होगा। या फिर कोई आपको समझाने के बहाने नसीहत देने की कोशिश की जाती होगी। अगर पड़ोसी अच्छे होते हैं तो किसी भी सुख दुख में आपके काम आ जाएंगे। लेकिन अगर झगड़ालू हैं तो वहीं आपके जीवन में कई सारी दिक्कतें आ सकती हैं। झगड़ालू पड़ोसियों से रोज की खट पट से परेशान हो गए हैं तो कुछ चीजों के जरिए आप उनसे दूरी बना सकते हैं। रिलेशनशिप डेस्क। एक वक्त था जब कहते थे कि इस दुनिया में हर किसी की एक जोड़ी है। ईश्वर ने सबको जोड़ी के साथ भेजा है। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं। शादी करते हैं और फिर जीवनभर साथ रहने का फैसला लेते हैं। लेकिन दुनिया में अब अकेले रहने का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। लोग शादी से बचते नजर आ रहे हैं। शादी में घोखा खाने के बाद या फिर किसी अपने के विश्वास तोड़ने के बाद लोग अकेले रहना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि वे सिंगल रहकर ज्यादा खुश हैं। लेकिन आपको बताते हैं सिंगल रहने के फायदे और नुकसान क्या हैं? इस रिश्ते को निभाने के लिए प्यार सम्मान और बराबरी तो जरूरी है ही साथ ही जरूरी है माफी। माफी से मतलब है कि अगर आपसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारें। पार्टनर को ये एहसास कराएं कि आप उनके लिए कितने खास हैं। उनकी गलतियों पर समझाएं और अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए माफी मांगे। जब नई नई शादी होती है तो आपकी अकेली लाइफ में जब कोई दस्तख देता है तो जीवन पूरा बदल जाता है। नए जिम्मेदारियां नए तरीके नए लोग नयापन। अचानक बदली लाइफ में एडजस्ट होने की जरूरत होती है। कोई बहुत जल्दी तो कोई लंबे समय तक भी शादी में एडजस्ट नहीं हो पाता ऐसे में रिश्ते में खटास आने लगती है। होली. . . एक ऐसा त्योहार जो खुशी है, हंसी है, उमंग है उल्लास है। जहां रंगों की फुहार है मस्ती है। हालांकि इस बार भी कोरोना होली के माहौल में भंग डाल रहा है। होली खेलने पर रोक है लेकिन आप अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ होली का मजा ले सकते हैं। लेकिन इसके साथ भी जरूरी है कि आप सावधानियां बरतें। वहीं अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें। कहा जाता है कि बुरी नजर से बचाने के लिए बच्चों को काला टीका लगाया जाता है। लेकिन भारत में ज्यादातर महिलाएं नवजात शिशु को काला टीका लगा देतीं है और ये सुनिश्चित भी करती हैं कि अब बच्चे को नजर नहीं लगेगी। |
नीरज ने बताया कि पीएम ने पूछा कि कोविड के दौरान कोई परेशानी तो नहीं हुई। पेमेंट में कोई दिक्कत तो नहीं हुई। नीरज ने कहा कि वो अपने पूरे परिवार के साथ 26 जनवरी को पीएम के बुलावे पर दिल्ली आएंगे। 10 फरवरी 2021 से नीरज इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम ने खुद इनवाइट किया है और वे जरूर आएंगे। 12 घंटे रोज काम करते थे। नीरज का कहना है कि वो सेंट्रल विस्टा को अपना काम समझकर करते थे। अभी यहां कुछ दिन और काम करेंगे।
वहीं, बिहार के कटिहार के रहने वाले वासुदेव ने कहा कि देश के पीएम ने उनसे बात की। उनके बारे मे जाना। काम के अनुभव के बारे में पूछा, 26 जनवरी को इनवाइट किया,बहुत खुश मिली है। 19 साल के वासुदेव कुमार ने कहा कि उन्हें बहुत गर्व हो रहा कि देश के एतिहासिक प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिला है। उनका कहना है कि वे 26 जनवरी को जरूर आएंगे और परिवार को भी पीएम से मिलने का मौका मिलेगा। वासुदेव ने बताया कि जनपथ मानसिंह रोड पर बने लेबर कैंप में 16 लोग रहते थे। उन्हें ये प्रोजेक्ट जिंदगी भर याद रहेगा। सेंट्रल विस्टा श्रमिकों के दिल मे हमेशा रहेगा।
| नीरज ने बताया कि पीएम ने पूछा कि कोविड के दौरान कोई परेशानी तो नहीं हुई। पेमेंट में कोई दिक्कत तो नहीं हुई। नीरज ने कहा कि वो अपने पूरे परिवार के साथ छब्बीस जनवरी को पीएम के बुलावे पर दिल्ली आएंगे। दस फरवरी दो हज़ार इक्कीस से नीरज इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम ने खुद इनवाइट किया है और वे जरूर आएंगे। बारह घंटाटे रोज काम करते थे। नीरज का कहना है कि वो सेंट्रल विस्टा को अपना काम समझकर करते थे। अभी यहां कुछ दिन और काम करेंगे। वहीं, बिहार के कटिहार के रहने वाले वासुदेव ने कहा कि देश के पीएम ने उनसे बात की। उनके बारे मे जाना। काम के अनुभव के बारे में पूछा, छब्बीस जनवरी को इनवाइट किया,बहुत खुश मिली है। उन्नीस साल के वासुदेव कुमार ने कहा कि उन्हें बहुत गर्व हो रहा कि देश के एतिहासिक प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिला है। उनका कहना है कि वे छब्बीस जनवरी को जरूर आएंगे और परिवार को भी पीएम से मिलने का मौका मिलेगा। वासुदेव ने बताया कि जनपथ मानसिंह रोड पर बने लेबर कैंप में सोलह लोग रहते थे। उन्हें ये प्रोजेक्ट जिंदगी भर याद रहेगा। सेंट्रल विस्टा श्रमिकों के दिल मे हमेशा रहेगा। |
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