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भारत और ऑस्ट्रेलिया (IND vs AUS) के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023 (WTC 2023) का फाइनल लॉर्ड्स के मैदान पर 7 से 11 जून तक खेला जाएगा। इस बड़े टूर्नामेंट के फाइनल से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के बाएं हाथ के गेंदबाज़ जयदेव उनादकट चोटिल हो चुके हैं। अगर वह अपनी इंजरी के कारण WTC फाइनल से बाहर हो जाते हैं तो ऐसे में यह तीन खिलाड़ी उन्हें इंडियन टीम में रिप्लेस कर सकते हैं। 1. भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar)
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप दो हज़ार तेईस का फाइनल लॉर्ड्स के मैदान पर सात से ग्यारह जून तक खेला जाएगा। इस बड़े टूर्नामेंट के फाइनल से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के बाएं हाथ के गेंदबाज़ जयदेव उनादकट चोटिल हो चुके हैं। अगर वह अपनी इंजरी के कारण WTC फाइनल से बाहर हो जाते हैं तो ऐसे में यह तीन खिलाड़ी उन्हें इंडियन टीम में रिप्लेस कर सकते हैं। एक. भुवनेश्वर कुमार
शनिवार को जब अखिलेश यादव से पूछा गया कि बिलावल भुट्टो के बयान पर आप क्या कहना चाहते हैं तो वह बोले, इन बातों में मत उलझें, हम इतनी दूर नहीं जाते। भारतीय जनता पार्टी अपनी नाकामी छिपाने के लिए पाकिस्तान और रंग जैसे मुद्दों को लाती है। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी वादे करने में तो बहुत आगे है, इनकी बड़ी-बड़ी बाते हैं लेकिन जमीन पर जब हम देखते हैं तो सब शून्य दिखाई देता है। जो जो घोषणाएं भारतीय जनता पार्टी ने की आज हमें उन वादों का आंकलन करना चाहिए, देखना चाहिए कि क्या दिल्ली और लखनऊ की सरकार ने जनता से जो वादा किया है वह पूरा कर पाए। 'महंगाई और बेरोजगारी चरम पर'अखिलेश ने आगे कहा, आज महंगाई और बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। हालत ऐसे पैदा कर दिया है कि न्याय नहीं मिल सकता। इस सरकार में न्याय की उम्मीदें मत करिए। अधिकारी और कई ऐसे लोग हैं जो कुर्सियों पर बैठकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बनकर फैसला ले रहे हैं। हाल ही में आपने देखा होगा कानपुर पुलिस पर स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का दबाव रहा। इस कारण पुलिस ने किस तरीके से पुलिस थाने के अंदर मारपीट की और बाद में उसकी जान चली गई। इसी तरह की घटना कन्नौज में हुई है। कन्नौज में जो घटना हुई है उसका अगर कोई दोषी है तो वह है विधायक और जिलाधिकारी। 'आरक्षण तय होते ही पूरे दमखम से लड़ेंगे निकाय चुनाव'निकाय चुनाव के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा, जैसे ही आरक्षण तय होता है समाजवादी पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनाव में उतरेगी। समाजवादी पार्टी पूरी तरीके से तैयार है जनता के बीच जाएगी, क्योंकि कूड़े की समस्या, नाली की समस्या से जनता परेशान है। जिस तरह से जीएसटी से व्यापारियों को परेशान करने के लिए जीएसटी की टीमें निकल पड़ी हैं, मैं व्यापारियों को सावधान करना चाहता हूं कि ये केवल चुनाव के लिए छापे रोके गए हैं, चुनाव के बाद आप देखना सबसे ज्यादा छापे व्यापारियों पर पड़ने जा रहे हैं। बेशर्म रंग विवाद पर भी बोले अखिलेशशाहरुख की फिल्म पठान के एक गाने में पहने गए कपड़ों के रंग को लेकर उठे विवाद पर अखिलेश यादव ने कहा, आप लोग जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ध्यान हटाने के लिए, अपनी नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बहस छेड़ती है। हर रंग का अपना एक अलग महत्व है, अगर इस रंग का महत्व है तो कोई ऐसा नहीं है कि उस रंग का सम्मान ना करता हो। लेकिन सिर्फ इसलिए टारगेट करना क्योंकि वह एक धर्म विशेष से जुड़े एक्टर हैं यह भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति है। वह रंग, जाति और धर्म के मुद्दे नाकामी छिपाने के लिए लाती है। पर अब बीजेपी एक्सपोज हो चुकी है। मंत्रियों की विदेश यात्रा पर तंजतमाम लोग जो विदेश यात्रा पर गए हैं मुझे उम्मीद है ये मंत्री जब विदेश यात्रा से लौटेंगे तो उम्मीद है कि अपनी रिपोर्ट विधानसभा में टेबल पर पेश करेंगे। भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जितने भी सच्चे समाजवादी लोग होंगे और जो निष्पक्ष पत्रकार होगे वे भारतीय जनता पार्टी के टारगेट होंगे। प्रदेश में हो रहे निवेश पर अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जितने मंत्री विदेश घूमने गए हुए हैं ये बुलाने गए है लोगों को उद्योगपतियों को न्योता देने गए, एमओयू साइन हो रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि पहले जो साइन किए गए वे कितने जमीन पर उतरे। एक सवाल में पूछा गया कि अरुण राजभर ने कहा ओबीसी आरक्षण 52 पर्सेंट किया जाना चाहिए। इस पर अखिलेश ने कहा, आप इस चक्कर में न पड़ें। यह पहचानने की कोशिश करें कि बीजेपी के लिए कौन काम कर रहा है। बीजेपी संविधान के पक्ष में नहीं है, बाबा साहेब ने जो अधिकार दिए उसके पक्ष में नहीं है, महंगाई, बेरोजगारी चरम सीमा पर है। बहुत जल्द बीजेपी वोट डालने के अधिकार छीन लेगी। आपने रामपुर में नहीं देखा यह। (रिपोर्टः मधुर शर्मा)
शनिवार को जब अखिलेश यादव से पूछा गया कि बिलावल भुट्टो के बयान पर आप क्या कहना चाहते हैं तो वह बोले, इन बातों में मत उलझें, हम इतनी दूर नहीं जाते। भारतीय जनता पार्टी अपनी नाकामी छिपाने के लिए पाकिस्तान और रंग जैसे मुद्दों को लाती है। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी वादे करने में तो बहुत आगे है, इनकी बड़ी-बड़ी बाते हैं लेकिन जमीन पर जब हम देखते हैं तो सब शून्य दिखाई देता है। जो जो घोषणाएं भारतीय जनता पार्टी ने की आज हमें उन वादों का आंकलन करना चाहिए, देखना चाहिए कि क्या दिल्ली और लखनऊ की सरकार ने जनता से जो वादा किया है वह पूरा कर पाए। 'महंगाई और बेरोजगारी चरम पर'अखिलेश ने आगे कहा, आज महंगाई और बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। हालत ऐसे पैदा कर दिया है कि न्याय नहीं मिल सकता। इस सरकार में न्याय की उम्मीदें मत करिए। अधिकारी और कई ऐसे लोग हैं जो कुर्सियों पर बैठकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बनकर फैसला ले रहे हैं। हाल ही में आपने देखा होगा कानपुर पुलिस पर स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का दबाव रहा। इस कारण पुलिस ने किस तरीके से पुलिस थाने के अंदर मारपीट की और बाद में उसकी जान चली गई। इसी तरह की घटना कन्नौज में हुई है। कन्नौज में जो घटना हुई है उसका अगर कोई दोषी है तो वह है विधायक और जिलाधिकारी। 'आरक्षण तय होते ही पूरे दमखम से लड़ेंगे निकाय चुनाव'निकाय चुनाव के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा, जैसे ही आरक्षण तय होता है समाजवादी पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनाव में उतरेगी। समाजवादी पार्टी पूरी तरीके से तैयार है जनता के बीच जाएगी, क्योंकि कूड़े की समस्या, नाली की समस्या से जनता परेशान है। जिस तरह से जीएसटी से व्यापारियों को परेशान करने के लिए जीएसटी की टीमें निकल पड़ी हैं, मैं व्यापारियों को सावधान करना चाहता हूं कि ये केवल चुनाव के लिए छापे रोके गए हैं, चुनाव के बाद आप देखना सबसे ज्यादा छापे व्यापारियों पर पड़ने जा रहे हैं। बेशर्म रंग विवाद पर भी बोले अखिलेशशाहरुख की फिल्म पठान के एक गाने में पहने गए कपड़ों के रंग को लेकर उठे विवाद पर अखिलेश यादव ने कहा, आप लोग जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ध्यान हटाने के लिए, अपनी नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बहस छेड़ती है। हर रंग का अपना एक अलग महत्व है, अगर इस रंग का महत्व है तो कोई ऐसा नहीं है कि उस रंग का सम्मान ना करता हो। लेकिन सिर्फ इसलिए टारगेट करना क्योंकि वह एक धर्म विशेष से जुड़े एक्टर हैं यह भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति है। वह रंग, जाति और धर्म के मुद्दे नाकामी छिपाने के लिए लाती है। पर अब बीजेपी एक्सपोज हो चुकी है। मंत्रियों की विदेश यात्रा पर तंजतमाम लोग जो विदेश यात्रा पर गए हैं मुझे उम्मीद है ये मंत्री जब विदेश यात्रा से लौटेंगे तो उम्मीद है कि अपनी रिपोर्ट विधानसभा में टेबल पर पेश करेंगे। भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जितने भी सच्चे समाजवादी लोग होंगे और जो निष्पक्ष पत्रकार होगे वे भारतीय जनता पार्टी के टारगेट होंगे। प्रदेश में हो रहे निवेश पर अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जितने मंत्री विदेश घूमने गए हुए हैं ये बुलाने गए है लोगों को उद्योगपतियों को न्योता देने गए, एमओयू साइन हो रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि पहले जो साइन किए गए वे कितने जमीन पर उतरे। एक सवाल में पूछा गया कि अरुण राजभर ने कहा ओबीसी आरक्षण बावन पर्सेंट किया जाना चाहिए। इस पर अखिलेश ने कहा, आप इस चक्कर में न पड़ें। यह पहचानने की कोशिश करें कि बीजेपी के लिए कौन काम कर रहा है। बीजेपी संविधान के पक्ष में नहीं है, बाबा साहेब ने जो अधिकार दिए उसके पक्ष में नहीं है, महंगाई, बेरोजगारी चरम सीमा पर है। बहुत जल्द बीजेपी वोट डालने के अधिकार छीन लेगी। आपने रामपुर में नहीं देखा यह।
एलिजाबेथ टेलर हिंदुस्तान में नहीं रहती थीं, उस बिहार और उत्तर प्रदेश में तो कत्तई नहीं रहती थीं जहाँ का मैं रहने वाला हूँ या जहां मेरा ज्यादातर समय बीता है. वे भारत भी शायद ही कभी आई हों, और अगर आई भी होंगी तो मैं तो उनसे नहीं ही मिला हूँ. पर इसके बाद भी मैं जानता हूँ और दावे से कह सकता हूँ कि मैं एलिजाबेथ टेलर को जानता हूँ. जी हाँ, मेरी और एलिजाबेथ टेलर की अच्छी खासी दोस्ती थी, कम से कम मेरी तरफ से तो पूरी तरह. मैंने एलिजाबेथ से कई बार बातें भी की थीं और उनको कई बार देखा भी था. साथ ही यह भी बता दूँ कि मैंने उनकी कोई पिक्चर नहीं देखी है, आज तक नहीं. ठीक उसी प्रकार से जैसे मैंने मर्लिन मुनरो को ना तो कभी देखा है और ना ही उस मशहूर अदाकारा की कोई पिक्चर ही देखी है. इस रूप में आज अभी जब यह खबर मिली कि एलिजाबेथ टेलर नहीं रहीं तो अकस्मात तकलीफ सी हुई, कुछ अजीब सा लगा, कुछ खालीपन सा भी. मैं यह नहीं कहूँगा कि यह भावना अपने किसी नजदीकी की मौत की तरह की भावना है, ना ही मैं इसकी तुलना अभी तीन दिन पहले हमें धोखा दे कर जाने वाले आलोक तोमर जी की आकस्मिक मृत्यु से करूँगा. लेकिन यह जरूर है कि ह्रदय के किसी कोने में एक हलकी सी थरथराहट जरूर हुई, शरीर में थोड़ी झुनझुनाहट तो हुई ही है. इस बात को लेकर एक कसक सी हुई कि एलिजाबेथ टेलर अब नहीं रहीं. मेरा और एलिजाबेथ का क्या नाता था, हमारे बीच क्या रिश्ता था? यह एक बड़ा ही विचित्र सम्बन्ध है जो लाखों-करोड़ों लोगों का ऐसे कई लोगों के प्रति होता है. तभी तो नाथूराम गोडसे महात्मा गाँधी की हत्या कर देते हैं और रोता सारा संसार है, जैसे हर रोने वाले का अपना कोई सगा चला गया हो. इसी प्रकार से एक ख्यातिप्राप्त फुटबॉलर या मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी की मौत भी ना जाने कितने ही लोगों को रुला देती है. यह अनजाना रिश्ता, यह एकपक्षीय सम्बन्ध, यह दिल के तारों का बंधन इंसानी फितरत की एक और विचित्र मिसाल है, जिसे बहुत सीधी-सरल भाषा में ना तो समझा जा सकता है और ना ही उतनी सरलता से समझाया जा सकता है. आज मेरी उम्र बयालीस साल है. जब मैं छोटी अवस्था का था, उस समय भी वे लगभग चालीस साल की रही होंगी. पर फिर भी मैं उनका फैन था, उनका दीवाना था. अब कोई फैन है, दीवाना है और अपने मन में इस तरह की दीवानगी पाले हुए है तो दूसरा आदमी क्या कर सकता है? सात समुन्दर पार बैठी एलिजाबेथ हिंदुस्तान के बोकारो शहर में कक्षा पांच में पढ़ रहे अमिताभ ठाकुर की दीवानगी के जोर से अपने आप को कैसे बचा सकती हैं? ना तो उन्हें खबर होनी है, ना तो उन्हें इससे कोई वास्ता है या कभी वास्ता पड़ना है पर फिर भी अमिताभ बाबू है कि अपने दिल के पोरों में एलिजाबेथ टेलर की सम्मोहन मुस्कान और मोहिनी मूरत लिए यहाँ-वहाँ घूम रहे हैं. कभी एलिजाबेथ टेलर की किसी चर्चित फिल्म का कोई पोस्टर या तस्वीर देख कर खुश हो जा रहे हैं तो कभी उनकी और रिचर्ड बर्टन की साथ-साथ की फोटोग्राफ देख कर उनपर सम्मोहित हैं. मैं समझता हूँ इस तरह के मामले इस संसार में एक-दो नहीं, कई करोड़ होंगे जब एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का एक पक्षीय दीवाना बना हुआ है, उसकी पूरी जानकारी रखे हुए है, उसके जीवन के छोटे-मोटे डिटेल्स इकठ्ठा कर रहा है, उस पर एक प्रकार से शोध ही कर रहा है और इस प्रक्रिया से इतना अधिक गुजार जा रहा है कि अंत में वह यह हक भी जाहिर करने लगता है कि "मैं फलां को जानता हूँ. " अक्सर ऐसी बातें बचपन में होती हैं पर ऐसा नहीं कि जवानी और बुढ़ापा इससे बिलकुल विलग हो. फिर भी मुझे यही लगता है कि बचपन की ऐसी मोहब्बत या ऐसे वास्ते जीवन भर दिल में कहीं ना कहीं बसे होते हैं. मैंने एलिजाबेथ टेलर या मर्लिन मुनरो को ही क्यों चाहा या उनके प्रति ही मेरा क्यों लगाव हुआ, या आपके अंदर किसी दूसरे के प्रति ही ऐसी भावना क्यों जगी इसके पीछे आकर्षण का एक पूरा मनोविज्ञान काम करता होगा. सम्मोहन और आकर्षण ऐसे गुण हैं जो चाह कर भी हर किसी में नहीं हो सकते. यह किसी-किसी के व्यक्तित्व की खासियत होती है. मैं दावे से कह सकता हूँ कि एलिजाबेथ टेलर एक ऐसी ही शख्सियत थीं जिनमे आकर्षण और सम्मोहन की कोई कमी नहीं थी. उनके राजसी व्यक्तित्व, चित्ताकर्षक चेहरे-मोहरे, अनन्य अदाएं, सम्मोहक मुस्कान और उनकी भव्यता में ऐसा कुछ था कि हर व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर उनकी ओर खींचा चला जाता था. हॉलीवुड की महानायिकाओं के एक मानी जाने वाली एलिजाबेथ हॉलीवुड के स्वर्णयुग की महानतम प्रतीकों और प्रतिनिधियों में एक हैं. इस पर यदि उनके हर साल कैलेण्डर की तरह पतिदेव बदलने का अंदाज़ जोड़ दिया जाए जो तो चरित्र सामने उभर कर आता था वह था एलिजाबेथ टेलर नामक विश्वसुन्दरी और हॉलीवुड की महासम्राज्ञी का. लेकिन इन सारी सच्चाईयों से बड़ी सच्चाई तो एक ही है कि समय के सामने सब छोटे हैं, बहुत ही बौने. राजा और रंक का एक ही घाट है, उनकी एक ही परिणति है. जो आज एलिजाबेथ टेलर की हुई है, कल किसी और की बारी है. पर इतना जरूर है कि जिस एलिजाबेथ को मैं जानता था, उन्होंने एक अविस्मरणीय जीवन जी कर विश्वफलक पर अपने लिए एक ऐसा वितान खींच डाला जो इतनी जल्दी समयरुपी रेत पर ओझल नहीं हो पायेगा. लेखक अमिताभ ठाकुर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं. इन दिनों मेरठ में पदस्थ हैं.
एलिजाबेथ टेलर हिंदुस्तान में नहीं रहती थीं, उस बिहार और उत्तर प्रदेश में तो कत्तई नहीं रहती थीं जहाँ का मैं रहने वाला हूँ या जहां मेरा ज्यादातर समय बीता है. वे भारत भी शायद ही कभी आई हों, और अगर आई भी होंगी तो मैं तो उनसे नहीं ही मिला हूँ. पर इसके बाद भी मैं जानता हूँ और दावे से कह सकता हूँ कि मैं एलिजाबेथ टेलर को जानता हूँ. जी हाँ, मेरी और एलिजाबेथ टेलर की अच्छी खासी दोस्ती थी, कम से कम मेरी तरफ से तो पूरी तरह. मैंने एलिजाबेथ से कई बार बातें भी की थीं और उनको कई बार देखा भी था. साथ ही यह भी बता दूँ कि मैंने उनकी कोई पिक्चर नहीं देखी है, आज तक नहीं. ठीक उसी प्रकार से जैसे मैंने मर्लिन मुनरो को ना तो कभी देखा है और ना ही उस मशहूर अदाकारा की कोई पिक्चर ही देखी है. इस रूप में आज अभी जब यह खबर मिली कि एलिजाबेथ टेलर नहीं रहीं तो अकस्मात तकलीफ सी हुई, कुछ अजीब सा लगा, कुछ खालीपन सा भी. मैं यह नहीं कहूँगा कि यह भावना अपने किसी नजदीकी की मौत की तरह की भावना है, ना ही मैं इसकी तुलना अभी तीन दिन पहले हमें धोखा दे कर जाने वाले आलोक तोमर जी की आकस्मिक मृत्यु से करूँगा. लेकिन यह जरूर है कि ह्रदय के किसी कोने में एक हलकी सी थरथराहट जरूर हुई, शरीर में थोड़ी झुनझुनाहट तो हुई ही है. इस बात को लेकर एक कसक सी हुई कि एलिजाबेथ टेलर अब नहीं रहीं. मेरा और एलिजाबेथ का क्या नाता था, हमारे बीच क्या रिश्ता था? यह एक बड़ा ही विचित्र सम्बन्ध है जो लाखों-करोड़ों लोगों का ऐसे कई लोगों के प्रति होता है. तभी तो नाथूराम गोडसे महात्मा गाँधी की हत्या कर देते हैं और रोता सारा संसार है, जैसे हर रोने वाले का अपना कोई सगा चला गया हो. इसी प्रकार से एक ख्यातिप्राप्त फुटबॉलर या मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी की मौत भी ना जाने कितने ही लोगों को रुला देती है. यह अनजाना रिश्ता, यह एकपक्षीय सम्बन्ध, यह दिल के तारों का बंधन इंसानी फितरत की एक और विचित्र मिसाल है, जिसे बहुत सीधी-सरल भाषा में ना तो समझा जा सकता है और ना ही उतनी सरलता से समझाया जा सकता है. आज मेरी उम्र बयालीस साल है. जब मैं छोटी अवस्था का था, उस समय भी वे लगभग चालीस साल की रही होंगी. पर फिर भी मैं उनका फैन था, उनका दीवाना था. अब कोई फैन है, दीवाना है और अपने मन में इस तरह की दीवानगी पाले हुए है तो दूसरा आदमी क्या कर सकता है? सात समुन्दर पार बैठी एलिजाबेथ हिंदुस्तान के बोकारो शहर में कक्षा पांच में पढ़ रहे अमिताभ ठाकुर की दीवानगी के जोर से अपने आप को कैसे बचा सकती हैं? ना तो उन्हें खबर होनी है, ना तो उन्हें इससे कोई वास्ता है या कभी वास्ता पड़ना है पर फिर भी अमिताभ बाबू है कि अपने दिल के पोरों में एलिजाबेथ टेलर की सम्मोहन मुस्कान और मोहिनी मूरत लिए यहाँ-वहाँ घूम रहे हैं. कभी एलिजाबेथ टेलर की किसी चर्चित फिल्म का कोई पोस्टर या तस्वीर देख कर खुश हो जा रहे हैं तो कभी उनकी और रिचर्ड बर्टन की साथ-साथ की फोटोग्राफ देख कर उनपर सम्मोहित हैं. मैं समझता हूँ इस तरह के मामले इस संसार में एक-दो नहीं, कई करोड़ होंगे जब एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का एक पक्षीय दीवाना बना हुआ है, उसकी पूरी जानकारी रखे हुए है, उसके जीवन के छोटे-मोटे डिटेल्स इकठ्ठा कर रहा है, उस पर एक प्रकार से शोध ही कर रहा है और इस प्रक्रिया से इतना अधिक गुजार जा रहा है कि अंत में वह यह हक भी जाहिर करने लगता है कि "मैं फलां को जानता हूँ. " अक्सर ऐसी बातें बचपन में होती हैं पर ऐसा नहीं कि जवानी और बुढ़ापा इससे बिलकुल विलग हो. फिर भी मुझे यही लगता है कि बचपन की ऐसी मोहब्बत या ऐसे वास्ते जीवन भर दिल में कहीं ना कहीं बसे होते हैं. मैंने एलिजाबेथ टेलर या मर्लिन मुनरो को ही क्यों चाहा या उनके प्रति ही मेरा क्यों लगाव हुआ, या आपके अंदर किसी दूसरे के प्रति ही ऐसी भावना क्यों जगी इसके पीछे आकर्षण का एक पूरा मनोविज्ञान काम करता होगा. सम्मोहन और आकर्षण ऐसे गुण हैं जो चाह कर भी हर किसी में नहीं हो सकते. यह किसी-किसी के व्यक्तित्व की खासियत होती है. मैं दावे से कह सकता हूँ कि एलिजाबेथ टेलर एक ऐसी ही शख्सियत थीं जिनमे आकर्षण और सम्मोहन की कोई कमी नहीं थी. उनके राजसी व्यक्तित्व, चित्ताकर्षक चेहरे-मोहरे, अनन्य अदाएं, सम्मोहक मुस्कान और उनकी भव्यता में ऐसा कुछ था कि हर व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर उनकी ओर खींचा चला जाता था. हॉलीवुड की महानायिकाओं के एक मानी जाने वाली एलिजाबेथ हॉलीवुड के स्वर्णयुग की महानतम प्रतीकों और प्रतिनिधियों में एक हैं. इस पर यदि उनके हर साल कैलेण्डर की तरह पतिदेव बदलने का अंदाज़ जोड़ दिया जाए जो तो चरित्र सामने उभर कर आता था वह था एलिजाबेथ टेलर नामक विश्वसुन्दरी और हॉलीवुड की महासम्राज्ञी का. लेकिन इन सारी सच्चाईयों से बड़ी सच्चाई तो एक ही है कि समय के सामने सब छोटे हैं, बहुत ही बौने. राजा और रंक का एक ही घाट है, उनकी एक ही परिणति है. जो आज एलिजाबेथ टेलर की हुई है, कल किसी और की बारी है. पर इतना जरूर है कि जिस एलिजाबेथ को मैं जानता था, उन्होंने एक अविस्मरणीय जीवन जी कर विश्वफलक पर अपने लिए एक ऐसा वितान खींच डाला जो इतनी जल्दी समयरुपी रेत पर ओझल नहीं हो पायेगा. लेखक अमिताभ ठाकुर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं. इन दिनों मेरठ में पदस्थ हैं.
'संदिग्ध लोग भारत को नहीं सौंपे जाएँगे' पाकिस्तान ने कहा है कि हाल ही में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के सिलसिले में उसने अपने जिन नागरिकों को गिरफ़्तार किया है, उन्हें भारत को नहीं सौंपा जाएगा. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के मुताबिक ये गिरफ़्तारियाँ पाकिस्तान अपने स्तर पर जाँच के लिए कर रहा है. उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरी हुआ तो वे पाकिस्तान की स्थिति के बारे में स्पष्टिकरण देने भारत जाएँगे. मुंबई में हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने कई ठिकानों पर छापे मारकर कुछ लोगों को पकड़ा है. ख़बरों के मुताबिक पकड़े गए लोगों में लश्कर ए तैयबा से जुड़े लोग भी शामिल हैं. पीटीआई के मुताबिक मुल्तान में पत्रकारों से बात करते हुए क़ुरैशी ने कहा, "मुंबई हमलों की जाँच में भारत पाकिस्तान के साथ पूरा सहयोग करेगा लेकिन इस हमले से जुडे किसी भी पाकिस्तानी नागरिक का मुकदमा पाकिस्तानी अदालत में ही चलेगा. " पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा के एक कैंप पर धावा बोला था. माना जा रहा है कि मुंबई में चरमपंथी हमलों के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में ये क़दम उठाया है. इससे पहले वाशिंगटन पोस्ट ने ख़बर दी थी कि अमरीका और भारत ने पाकिस्तान को लश्कर पर कार्रवाई के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी है. मुंबई में कई जगह 26 नवंबर की देर शाम चरमपंथी हमले हुए थे. इन हमलों में 180 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोग घायल हुए थे. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ करीब 59 घंटों तक कमांडो कार्रवाई चली थी. पुलिस ने एक चरमपंथी अजमल अमीर कसाब को जीवित पकड़ने में सफलता हासिल की थी जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो पाकिस्तान का रहने वाला है. अमरीका ने पाकिस्तान द्वारा चरमपंथी ठिकानों पर छापे मारने के क़दम की सराहना की है. 'भारत के साथ सहयोग करे पाकिस्तान' मुंबई हमलों का 'संदिग्ध ' गिरफ़्तार? 'भारत ने पाकिस्तान को धमकी दी थी'
'संदिग्ध लोग भारत को नहीं सौंपे जाएँगे' पाकिस्तान ने कहा है कि हाल ही में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के सिलसिले में उसने अपने जिन नागरिकों को गिरफ़्तार किया है, उन्हें भारत को नहीं सौंपा जाएगा. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के मुताबिक ये गिरफ़्तारियाँ पाकिस्तान अपने स्तर पर जाँच के लिए कर रहा है. उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरी हुआ तो वे पाकिस्तान की स्थिति के बारे में स्पष्टिकरण देने भारत जाएँगे. मुंबई में हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने कई ठिकानों पर छापे मारकर कुछ लोगों को पकड़ा है. ख़बरों के मुताबिक पकड़े गए लोगों में लश्कर ए तैयबा से जुड़े लोग भी शामिल हैं. पीटीआई के मुताबिक मुल्तान में पत्रकारों से बात करते हुए क़ुरैशी ने कहा, "मुंबई हमलों की जाँच में भारत पाकिस्तान के साथ पूरा सहयोग करेगा लेकिन इस हमले से जुडे किसी भी पाकिस्तानी नागरिक का मुकदमा पाकिस्तानी अदालत में ही चलेगा. " पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा के एक कैंप पर धावा बोला था. माना जा रहा है कि मुंबई में चरमपंथी हमलों के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में ये क़दम उठाया है. इससे पहले वाशिंगटन पोस्ट ने ख़बर दी थी कि अमरीका और भारत ने पाकिस्तान को लश्कर पर कार्रवाई के लिए अड़तालीस घंटाटे की समयसीमा दी है. मुंबई में कई जगह छब्बीस नवंबर की देर शाम चरमपंथी हमले हुए थे. इन हमलों में एक सौ अस्सी से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोग घायल हुए थे. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ करीब उनसठ घंटाटों तक कमांडो कार्रवाई चली थी. पुलिस ने एक चरमपंथी अजमल अमीर कसाब को जीवित पकड़ने में सफलता हासिल की थी जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो पाकिस्तान का रहने वाला है. अमरीका ने पाकिस्तान द्वारा चरमपंथी ठिकानों पर छापे मारने के क़दम की सराहना की है. 'भारत के साथ सहयोग करे पाकिस्तान' मुंबई हमलों का 'संदिग्ध ' गिरफ़्तार? 'भारत ने पाकिस्तान को धमकी दी थी'
नव हदीस में इसकी बहुत ताकीद आई। जो नमाज़ को फ़र्ज़ न माने या हल्का जाने वह काफ़िर है और जो न पढ़े बड़ा गुनाहगार । आखेरत ॥श्रम में डाला जायेगा बादशाहे इस्लाम उसको क़त्ल कर दे। मसला-बच्चा जब सात बरस का हो जाये तो उसे नमाज़ पढ़ना बताया आगे और जब दस बरस का हो तो मार कर पढ़वाई जाये। कब्ल इसके कि हम नमाज पढ़ने का तरीका बतायें उन छः बातों को बताते हैं जिनके नमाज शुरू नहीं हो सकती इन छों बातों को शराएते नमाज़ कहते शराएते नमाज़ १-तहारत, २- सतरे औरत, ५ नीयत, ६-तकबीरे तहरीमा । ३-वक़्त, ४- इस्तेक़बाले किबला, ३ वर पहली शर्त यानी तहारत इसका मतलब यह है कि नमाज़ी के बंदन, Powermiss कपड़े और नमाज़ की जगह पर कोई नजासत जैसे पेशाब, पाखाना, खून, शराब, गोबर, लीद, मुर्गा की बीट वगैरह न लगी हो नमाज़ी बे गुस्ल, भी न हो। दूसरी शर्त सतरे औरत यानी मर्द का बदन नाफ़ से लेकर भुटनों तक ढका हो घुटने खुले न रहें और औरत का तमाम बदन ढका हो सिवाए मुंह और हथेली के और टखनों तक पैर के और टखने भी ढके रहें । तीसरी शर्त वक्त यानी जिस नमाज के लिये जो वक्त मोक़रर्र है वह नमाज़ उसी वक़्त में पढ़ी जाये जैसे फज्र की नमाज़ सुबह सादिक़ से लेकर सूरज निकलने से पहले तक पढ़ी जाये और जोहर की सूरज ढलने के बाद से हर बीज के साया के दुगने होने तक अलावा इसके साथा असली के । और असर की साया दुगना होने के बाद से सूरज डूबते तक और मगरिब की सूरज डूबने के बाद से सफ़ेदर्दी गायब होने तक और एशा की सफेदी गायब होने के बाद से सुबह सादिक़ शारु होने से पहले तक । चौथी शर्त इस्तेक़बाल क़िबला यानी काबा शरीफ़ की तरफ़ मुंह करना। पाँचवी शर्त नीयत यानी जिस वक़्त की जो नमाज़ फ़र्ज या बाजिब या सुन्नत या नफिल या कज़ा पढ़ना हो दिल में उसका पक्का इरादा करना कि यह नमाज़ पढ रहा हुँ । छठी शर्त तकबीरे तहरीमा यानी अल्लाहो अकबर कहना यह आखीर शर्त है कि इसके कहते ही नमाज़ शुरु हो गई अब अगर किसी से बोला या कुछ खाया पीया या कोई काम खेलाफ़ नमाज़ के किया तो नमाज़ टूट जायेगी पहली पाँच शर्तो का तकबीरे तहरीमा से पहले और ख़्म नमाज तक मौजूद रहना जरुरी वरना नमाज न होगी। नमाज़ की पहली शर्त यानी तहारत का बयान, वज़ू का तरीका जब वज़ू करना हो तो दिल में वज़ू करने का इरादा करके बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कहके दोनों हाथ गट्टों तक घोये फिर मिस्वाक करे दाहिने हाथ से फिर तीन बार कुल्ली करे खूब अच्छी तरह कि हलक तक दांतों की जड़, जबान के नीचे पानी पहुंचे अगर दाँत या तालू में कोई चीज़ चिपकी अटकी हो तो छुड़ाये फिर दाहिने हाथ से तीन बार नाक में पानी चढ़ाये कि अन्दर नाक की हडडी तक पानी पहुंचे और बायें हाथ से नाक साफ़ करे इसकी छोटी उंगली नाक के अन्दर डाल कर फिर दोनों हाथों में पानी लेकर तीन बार मुंह घोये इस तरह कि बाल जमने की जगह से लेकर ठूढ़ी तक और दाहिनी कनपटी से बायीं तक कोई जगह छुटने न पाये और दाढ़ी हो तो उसे भी घोये और इसमें खेलाल भी करे लेकिन एहराम बांघे हो तो खेलाल न करे फिर कुहनियों तक कुहनियों समेत कुछ ऊपर तक दोनों हाथ तीन-तीन बार घोयें फिर एक बार मसह करें इस तरह पर की दानों हाथ तर करके अंगूठे और कलमा की उंगली छोड़कर दोनों हाथों की तीन-तीन उंगलियों की नोक एक दूसरे से मिलाये और इन छतों उंगलियों
नव हदीस में इसकी बहुत ताकीद आई। जो नमाज़ को फ़र्ज़ न माने या हल्का जाने वह काफ़िर है और जो न पढ़े बड़ा गुनाहगार । आखेरत ॥श्रम में डाला जायेगा बादशाहे इस्लाम उसको क़त्ल कर दे। मसला-बच्चा जब सात बरस का हो जाये तो उसे नमाज़ पढ़ना बताया आगे और जब दस बरस का हो तो मार कर पढ़वाई जाये। कब्ल इसके कि हम नमाज पढ़ने का तरीका बतायें उन छः बातों को बताते हैं जिनके नमाज शुरू नहीं हो सकती इन छों बातों को शराएते नमाज़ कहते शराएते नमाज़ एक-तहारत, दो- सतरे औरत, पाँच नीयत, छः-तकबीरे तहरीमा । तीन-वक़्त, चार- इस्तेक़बाले किबला, तीन वर पहली शर्त यानी तहारत इसका मतलब यह है कि नमाज़ी के बंदन, Powermiss कपड़े और नमाज़ की जगह पर कोई नजासत जैसे पेशाब, पाखाना, खून, शराब, गोबर, लीद, मुर्गा की बीट वगैरह न लगी हो नमाज़ी बे गुस्ल, भी न हो। दूसरी शर्त सतरे औरत यानी मर्द का बदन नाफ़ से लेकर भुटनों तक ढका हो घुटने खुले न रहें और औरत का तमाम बदन ढका हो सिवाए मुंह और हथेली के और टखनों तक पैर के और टखने भी ढके रहें । तीसरी शर्त वक्त यानी जिस नमाज के लिये जो वक्त मोक़रर्र है वह नमाज़ उसी वक़्त में पढ़ी जाये जैसे फज्र की नमाज़ सुबह सादिक़ से लेकर सूरज निकलने से पहले तक पढ़ी जाये और जोहर की सूरज ढलने के बाद से हर बीज के साया के दुगने होने तक अलावा इसके साथा असली के । और असर की साया दुगना होने के बाद से सूरज डूबते तक और मगरिब की सूरज डूबने के बाद से सफ़ेदर्दी गायब होने तक और एशा की सफेदी गायब होने के बाद से सुबह सादिक़ शारु होने से पहले तक । चौथी शर्त इस्तेक़बाल क़िबला यानी काबा शरीफ़ की तरफ़ मुंह करना। पाँचवी शर्त नीयत यानी जिस वक़्त की जो नमाज़ फ़र्ज या बाजिब या सुन्नत या नफिल या कज़ा पढ़ना हो दिल में उसका पक्का इरादा करना कि यह नमाज़ पढ रहा हुँ । छठी शर्त तकबीरे तहरीमा यानी अल्लाहो अकबर कहना यह आखीर शर्त है कि इसके कहते ही नमाज़ शुरु हो गई अब अगर किसी से बोला या कुछ खाया पीया या कोई काम खेलाफ़ नमाज़ के किया तो नमाज़ टूट जायेगी पहली पाँच शर्तो का तकबीरे तहरीमा से पहले और ख़्म नमाज तक मौजूद रहना जरुरी वरना नमाज न होगी। नमाज़ की पहली शर्त यानी तहारत का बयान, वज़ू का तरीका जब वज़ू करना हो तो दिल में वज़ू करने का इरादा करके बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कहके दोनों हाथ गट्टों तक घोये फिर मिस्वाक करे दाहिने हाथ से फिर तीन बार कुल्ली करे खूब अच्छी तरह कि हलक तक दांतों की जड़, जबान के नीचे पानी पहुंचे अगर दाँत या तालू में कोई चीज़ चिपकी अटकी हो तो छुड़ाये फिर दाहिने हाथ से तीन बार नाक में पानी चढ़ाये कि अन्दर नाक की हडडी तक पानी पहुंचे और बायें हाथ से नाक साफ़ करे इसकी छोटी उंगली नाक के अन्दर डाल कर फिर दोनों हाथों में पानी लेकर तीन बार मुंह घोये इस तरह कि बाल जमने की जगह से लेकर ठूढ़ी तक और दाहिनी कनपटी से बायीं तक कोई जगह छुटने न पाये और दाढ़ी हो तो उसे भी घोये और इसमें खेलाल भी करे लेकिन एहराम बांघे हो तो खेलाल न करे फिर कुहनियों तक कुहनियों समेत कुछ ऊपर तक दोनों हाथ तीन-तीन बार घोयें फिर एक बार मसह करें इस तरह पर की दानों हाथ तर करके अंगूठे और कलमा की उंगली छोड़कर दोनों हाथों की तीन-तीन उंगलियों की नोक एक दूसरे से मिलाये और इन छतों उंगलियों
2024 के लोकसभा चुनाव को अब 1 साल का समय बचा हुआ है. लेकिन क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में मुसलमान बीजेपी को वोट करेगा. बीजेपी सरकार मुसलमान को ध्यान में रखकर बना रही है योजना. मोदी के मुरीद हो रहे है मुसलमान.
दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव को अब एक साल का समय बचा हुआ है. लेकिन क्या दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में मुसलमान बीजेपी को वोट करेगा. बीजेपी सरकार मुसलमान को ध्यान में रखकर बना रही है योजना. मोदी के मुरीद हो रहे है मुसलमान.
मुंबई । बॉलीवुड के सुपर स्टार शाहरुख़ खान की फिल्म "फैन" का रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म की समानता हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ट डी नीरो की 'द फैन' से होने लगी। फिल्म को हॉलीवुड की 'द फैन' की कॉपी कहा जा रहा था। शाहरुख़ खान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की दोनों फिल्में बिलकुल अलग हैं। हॉलीवुड की 'द फैन' 1996 में रिलीज हुई थी। शाहरुख ने कहा कि, उनकी फिल्म बहुत ही अलग है। उन्होंने काफी पहले 'द फैन' देखी थी। दोनों फिल्मों में कोई समानता नहीं है। "द फैन" हमारी फिल्म के करीब तक नहीं है। फिल्म के निर्देशक मनीष शर्मा का कहना है "फैन" और "द फैन" के ट्रेलर में लोगो को भले ही समानता लगी हो फिल्म देखने के बाद उनकी सोच बदल जाएगी। 'फैन' 15 अप्रैल को रिलीज हो रही है।
मुंबई । बॉलीवुड के सुपर स्टार शाहरुख़ खान की फिल्म "फैन" का रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म की समानता हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ट डी नीरो की 'द फैन' से होने लगी। फिल्म को हॉलीवुड की 'द फैन' की कॉपी कहा जा रहा था। शाहरुख़ खान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की दोनों फिल्में बिलकुल अलग हैं। हॉलीवुड की 'द फैन' एक हज़ार नौ सौ छियानवे में रिलीज हुई थी। शाहरुख ने कहा कि, उनकी फिल्म बहुत ही अलग है। उन्होंने काफी पहले 'द फैन' देखी थी। दोनों फिल्मों में कोई समानता नहीं है। "द फैन" हमारी फिल्म के करीब तक नहीं है। फिल्म के निर्देशक मनीष शर्मा का कहना है "फैन" और "द फैन" के ट्रेलर में लोगो को भले ही समानता लगी हो फिल्म देखने के बाद उनकी सोच बदल जाएगी। 'फैन' पंद्रह अप्रैल को रिलीज हो रही है।
Firozabad News: फिरोजाबाद का प्राइवेट ट्रामा सेंटर में महिला गार्डों ने की मरीज की तीमारदार महिला की जमकर पिटाई कर दी है। महिला को आई काफी चोट महिला पहुंची थाना उत्तर पुलिस ने महिला को मेडिकल के लिए भेजा। Firozabad News: फिरोजाबाद के प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर में सिक्योरिटी की आड़ में गुंडागर्दी देखने को मिल रही है। दरअसल पूरा मामला विमल कुमार जैन सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर का है जहां आज दोपहर चरण सिंह नाम के पेशेंट को उसके परिवार वालों ने भर्ती किया था। जब उनकी बेटी विनीता अपने पिता से मिलने आईसीयू में जाने के लिए गार्डो से कहा तो वहां मौजूद महिला गार्डों ने उसे रोक लिया और उसके साथ बदतमीजी करने लगी और महिला गार्ड ने अपने अन्य साथिय गार्डों को बुला लिया और भर्ती मरीज चरण सिंह की बेटी विनीता के साथ जमकर मारपीट की है। जिससे उसके बहुत चोट आई है। वही महिला के साथ मारपीट को लेकर महिला विनीता ने थाना उत्तर में शिकायत की है। तो वही शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला का मेडिकल कराया और इस बारे में ट्रामा सेंटर के संचालक पीके जिंदल का कहना है कि जिन गार्डों ने मारपीट की है उनको हमने नौकरी से निकाल दिया है। जिनके साथ मारपीट हुई है वह पुलिस से शिकायत करके कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं घायल महिला का कहना है कि मेरे साथ तो मारपीट की ही है मेरी बड़ी बहन के साथ भी मारपीट की है।
Firozabad News: फिरोजाबाद का प्राइवेट ट्रामा सेंटर में महिला गार्डों ने की मरीज की तीमारदार महिला की जमकर पिटाई कर दी है। महिला को आई काफी चोट महिला पहुंची थाना उत्तर पुलिस ने महिला को मेडिकल के लिए भेजा। Firozabad News: फिरोजाबाद के प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर में सिक्योरिटी की आड़ में गुंडागर्दी देखने को मिल रही है। दरअसल पूरा मामला विमल कुमार जैन सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर का है जहां आज दोपहर चरण सिंह नाम के पेशेंट को उसके परिवार वालों ने भर्ती किया था। जब उनकी बेटी विनीता अपने पिता से मिलने आईसीयू में जाने के लिए गार्डो से कहा तो वहां मौजूद महिला गार्डों ने उसे रोक लिया और उसके साथ बदतमीजी करने लगी और महिला गार्ड ने अपने अन्य साथिय गार्डों को बुला लिया और भर्ती मरीज चरण सिंह की बेटी विनीता के साथ जमकर मारपीट की है। जिससे उसके बहुत चोट आई है। वही महिला के साथ मारपीट को लेकर महिला विनीता ने थाना उत्तर में शिकायत की है। तो वही शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला का मेडिकल कराया और इस बारे में ट्रामा सेंटर के संचालक पीके जिंदल का कहना है कि जिन गार्डों ने मारपीट की है उनको हमने नौकरी से निकाल दिया है। जिनके साथ मारपीट हुई है वह पुलिस से शिकायत करके कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं घायल महिला का कहना है कि मेरे साथ तो मारपीट की ही है मेरी बड़ी बहन के साथ भी मारपीट की है।
DESK : अपने पार्टनर को लेकर कई लोग चिंतित होते हैं। कई लोगों को ऐसा लगता है कि उनका पार्टनर उन्हें धोखा दे रहा है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं अपने पार्टनर की गलती जानते हुए भी उन्हें दूसरा मौका दे देते हैं। इसी को जानने के लिए एक्स्ट्रा मेरिटल डेटिंग ऐप ग्लीडेन ने हाल ही में भारतीयों पर एक सर्वे किया। 34-49 साल के करीब 1000 लोगों पर यह सर्वे किया गया। इस सर्वे में मुंबई, दिल्ली, एनसीआर, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद के लोगों ने हिस्सा लिया।
DESK : अपने पार्टनर को लेकर कई लोग चिंतित होते हैं। कई लोगों को ऐसा लगता है कि उनका पार्टनर उन्हें धोखा दे रहा है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं अपने पार्टनर की गलती जानते हुए भी उन्हें दूसरा मौका दे देते हैं। इसी को जानने के लिए एक्स्ट्रा मेरिटल डेटिंग ऐप ग्लीडेन ने हाल ही में भारतीयों पर एक सर्वे किया। चौंतीस-उनचास साल के करीब एक हज़ार लोगों पर यह सर्वे किया गया। इस सर्वे में मुंबई, दिल्ली, एनसीआर, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद के लोगों ने हिस्सा लिया।
Posted On: युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in/ के माध्यम से 15 अक्टूबर, 2022 से लेकर 6 नवंबर 2022 तक 'राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2020-21' के लिए नामांकन आमंत्रित किए हैं। इस पुरस्कार के लिए दिशा-निर्देश उपर्युक्त पोर्टल पर उपलब्ध हैं। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार हर साल 25 व्यक्तियों और 10 स्वैच्छिक संगठनों को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार (एनवाईए) प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य युवा व्यक्तियों (15 से 29 वर्ष के बीच की आयु) को राष्ट्र के विकास या समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है; युवाओं को समुदाय के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना एवं इस तरह से अच्छे नागरिक के रूप में उनकी व्यक्तिगत क्षमता को बेहतर करना है; और इसके साथ ही राष्ट्र के विकास और/या समाज सेवा के लिए युवाओं के साथ काम कर रहे स्वैच्छिक संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करना है। यह पुरस्कार विकास संबंधी गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक सेवा जैसे कि स्वास्थ्य, अनुसंधान एवं नवाचार, संस्कृति, मानवाधिकारों का प्रचार-प्रसार करने, कला व साहित्य, पर्यटन, पारंपरिक चिकित्सा, सक्रिय नागरिकता, सामुदायिक सेवा, खेल और अकादमिक उत्कृष्टता एवं स्मार्ट शिक्षण में युवाओं को सराहनीय उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में निम्नलिखित शामिल हैंः • व्यक्तिः एक पदक, एक प्रमाण पत्र और 1,00,000 रुपये की पुरस्कार राशि। • स्वैच्छिक संगठनः एक पदक, एक प्रमाण पत्र और 3,00,000 रुपये की पुरस्कार राशि।
Posted On: युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in/ के माध्यम से पंद्रह अक्टूबर, दो हज़ार बाईस से लेकर छः नवंबर दो हज़ार बाईस तक 'राष्ट्रीय युवा पुरस्कार दो हज़ार बीस-इक्कीस' के लिए नामांकन आमंत्रित किए हैं। इस पुरस्कार के लिए दिशा-निर्देश उपर्युक्त पोर्टल पर उपलब्ध हैं। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार हर साल पच्चीस व्यक्तियों और दस स्वैच्छिक संगठनों को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य युवा व्यक्तियों को राष्ट्र के विकास या समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है; युवाओं को समुदाय के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना एवं इस तरह से अच्छे नागरिक के रूप में उनकी व्यक्तिगत क्षमता को बेहतर करना है; और इसके साथ ही राष्ट्र के विकास और/या समाज सेवा के लिए युवाओं के साथ काम कर रहे स्वैच्छिक संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करना है। यह पुरस्कार विकास संबंधी गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक सेवा जैसे कि स्वास्थ्य, अनुसंधान एवं नवाचार, संस्कृति, मानवाधिकारों का प्रचार-प्रसार करने, कला व साहित्य, पर्यटन, पारंपरिक चिकित्सा, सक्रिय नागरिकता, सामुदायिक सेवा, खेल और अकादमिक उत्कृष्टता एवं स्मार्ट शिक्षण में युवाओं को सराहनीय उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में निम्नलिखित शामिल हैंः • व्यक्तिः एक पदक, एक प्रमाण पत्र और एक,शून्य,शून्य रुपयापये की पुरस्कार राशि। • स्वैच्छिक संगठनः एक पदक, एक प्रमाण पत्र और तीन,शून्य,शून्य रुपयापये की पुरस्कार राशि।
Dharavi Bank के Teaser में इस अंदाज में दिखें Sunil Shetty (Photo Credit: Social Media) New Delhi: Dharavi Bank Teaser: बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी (Sunil Shetty) के देश भर में काफी फैंस हैं, और अब एक्टर अपने फैंस के लिए एक खुशखबरी लेकर आए हैं. जी हां आपने सही सुना, सुनील शेट्टी एक वेब सीरीज में नजर आने वाले हैं, जिसका नाम है 'धारावी बैंक' (Dharavi Bank). स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर (MX Player) ने अपनी आने वाली वेब सीरीज धारावी बैंक का टीजर जारी कर दिया है. इस सीरीज में सुनील शेट्टी के साथ-साथ विवेक ओबेरॉय (Vivek Oberoi) भी लीड रोल में हैं. यह सीरीज एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्तियों में से एक धारावी पर बेस्ड कहानी है, जो मुंबई में स्थित है. दरअसल, टीजर की शुरुआत एक नैरेशन से होती है जो यह संकेत देता है कि सीरीज अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से परे धारावी की गलियों की कहानी है. वीडियो के अनुसार धारावी अपने आप में एक इंडस्ट्री है. इसके बाद, हमें सुनील शेट्टी के किरदार 'थलाइवन' से मिलवाया जाता है जो धारावी में क्राइम के किंग है. विवेक ओबेरॉय इस सीरीज में जेसीपी 'जयंत गावस्कर' की भूमिका निभा रहे हैं जो किसी व्यक्ति को मारता पहले है और उसके अपराध का फैसला बाद में करता है. इसके अलावा, विवेक ओबेरॉय और सुनील शेट्टी के साथ, 'धारावी बैंक' में सोनाली कुलकर्णी (Sonali Kulkarni), ल्यूक केनी (luke kenny), फ्रेडी दारूवाला (Freddy Daruwala), शांति प्रिया (Shanti Priya), संतोष जुवेकर (Santosh Juvekar), नागेश भोसले (Nagesh Bhosle), सिद्धार्थ मेनन (Siddharth Menon), हितेश भोजराज (Hitesh Bhojraj), रोहित पाठक (Rohit Pathak), जयवंत वाडकर (Jayant Vadkar), चिन्मय मंडलेकर (Chinmay Mandelkar), भावना राव (Bhavna Raj) और समित कक्कड़ (Samit Kakkad) जैसे कई एक्टर्स भी शामिल हैं. आपको बता दें की यह सीरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुनील शेट्टी की शुरुआत का प्रतीक है.
Dharavi Bank के Teaser में इस अंदाज में दिखें Sunil Shetty New Delhi: Dharavi Bank Teaser: बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी के देश भर में काफी फैंस हैं, और अब एक्टर अपने फैंस के लिए एक खुशखबरी लेकर आए हैं. जी हां आपने सही सुना, सुनील शेट्टी एक वेब सीरीज में नजर आने वाले हैं, जिसका नाम है 'धारावी बैंक' . स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर ने अपनी आने वाली वेब सीरीज धारावी बैंक का टीजर जारी कर दिया है. इस सीरीज में सुनील शेट्टी के साथ-साथ विवेक ओबेरॉय भी लीड रोल में हैं. यह सीरीज एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्तियों में से एक धारावी पर बेस्ड कहानी है, जो मुंबई में स्थित है. दरअसल, टीजर की शुरुआत एक नैरेशन से होती है जो यह संकेत देता है कि सीरीज अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से परे धारावी की गलियों की कहानी है. वीडियो के अनुसार धारावी अपने आप में एक इंडस्ट्री है. इसके बाद, हमें सुनील शेट्टी के किरदार 'थलाइवन' से मिलवाया जाता है जो धारावी में क्राइम के किंग है. विवेक ओबेरॉय इस सीरीज में जेसीपी 'जयंत गावस्कर' की भूमिका निभा रहे हैं जो किसी व्यक्ति को मारता पहले है और उसके अपराध का फैसला बाद में करता है. इसके अलावा, विवेक ओबेरॉय और सुनील शेट्टी के साथ, 'धारावी बैंक' में सोनाली कुलकर्णी , ल्यूक केनी , फ्रेडी दारूवाला , शांति प्रिया , संतोष जुवेकर , नागेश भोसले , सिद्धार्थ मेनन , हितेश भोजराज , रोहित पाठक , जयवंत वाडकर , चिन्मय मंडलेकर , भावना राव और समित कक्कड़ जैसे कई एक्टर्स भी शामिल हैं. आपको बता दें की यह सीरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुनील शेट्टी की शुरुआत का प्रतीक है.
इस महीने की शुरुआत में व्हाट्सएप ने बीटा यूजर्स के लिए इमोजी बार को दोबारा डिजाइन करते हुए इमोजी बार में कई बदलाव किए थे। अब मेटा के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप ने अपने एंड्रॉइड यूजर्स के लिए इस फीचर को रोल आउट करना शुरू कर दिया है। नए फीचर के साथ, उपयोगकर्ता व्हाट्सएप के इमोजी बार पर स्क्रॉल कर सकेंगे, जिससे उन्हें व्यापक दृश्य मिलेगा। इसके साथ ही यूजर्स को GIF, स्टिकर और अवतार सेक्शन के लिए अलग-अलग टैब मिलेंगे। नए अपडेट में मीडिया शेयरिंग और इमोजी बटन को भी दोबारा व्यवस्थित किया गया है। व्हाट्सएप के नए फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको अपना ऐप अपडेट करना होगा। कैसे काम करेगा ये फीचर? इस नए फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको मैसेज बॉक्स में दिख रहे इमोजी आइकन पर क्लिक करना होगा। फिर आप व्यापक दृश्य के लिए इमोजी स्क्रीन पर स्क्रॉल कर सकते हैं। इससे आपको स्क्रीन पर अधिक इमोजी दिखाई देंगे। पहले, इमोजी बार का आकार आपके कीबोर्ड के समान होता था। इससे पहले व्हाट्सएप ने इस फीचर को अपने बीटा यूजर्स के लिए रोलआउट किया था। अब कंपनी ने इस फीचर का स्टेबल अपडेट Google Play Store पर जारी किया है, जो धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंच रहा है। अगर आपको अभी तक ये फीचर नहीं मिला है तो आपको थोड़ा इंतजार करना होगा. व्हाट्सएप अपने यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर्स पेश करता रहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 'मैसेज पिन ड्यूरेशन' नाम के एक नए फीचर पर काम कर रही है। इस फीचर की मदद से यूजर्स किसी मैसेज को एक निश्चित समय के लिए पिन कर पाएंगे। यह फीचर यूजर्स को चैट पर मैसेज पिन करने के लिए 24 घंटे, 7 दिन या 30 दिन जैसी समय सीमा चुनने का विकल्प देगा। साथ ही यूजर्स समय सीमा खत्म होने से पहले मैसेज को अनपिन भी कर सकते हैं।
इस महीने की शुरुआत में व्हाट्सएप ने बीटा यूजर्स के लिए इमोजी बार को दोबारा डिजाइन करते हुए इमोजी बार में कई बदलाव किए थे। अब मेटा के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप ने अपने एंड्रॉइड यूजर्स के लिए इस फीचर को रोल आउट करना शुरू कर दिया है। नए फीचर के साथ, उपयोगकर्ता व्हाट्सएप के इमोजी बार पर स्क्रॉल कर सकेंगे, जिससे उन्हें व्यापक दृश्य मिलेगा। इसके साथ ही यूजर्स को GIF, स्टिकर और अवतार सेक्शन के लिए अलग-अलग टैब मिलेंगे। नए अपडेट में मीडिया शेयरिंग और इमोजी बटन को भी दोबारा व्यवस्थित किया गया है। व्हाट्सएप के नए फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको अपना ऐप अपडेट करना होगा। कैसे काम करेगा ये फीचर? इस नए फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको मैसेज बॉक्स में दिख रहे इमोजी आइकन पर क्लिक करना होगा। फिर आप व्यापक दृश्य के लिए इमोजी स्क्रीन पर स्क्रॉल कर सकते हैं। इससे आपको स्क्रीन पर अधिक इमोजी दिखाई देंगे। पहले, इमोजी बार का आकार आपके कीबोर्ड के समान होता था। इससे पहले व्हाट्सएप ने इस फीचर को अपने बीटा यूजर्स के लिए रोलआउट किया था। अब कंपनी ने इस फीचर का स्टेबल अपडेट Google Play Store पर जारी किया है, जो धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंच रहा है। अगर आपको अभी तक ये फीचर नहीं मिला है तो आपको थोड़ा इंतजार करना होगा. व्हाट्सएप अपने यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर्स पेश करता रहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 'मैसेज पिन ड्यूरेशन' नाम के एक नए फीचर पर काम कर रही है। इस फीचर की मदद से यूजर्स किसी मैसेज को एक निश्चित समय के लिए पिन कर पाएंगे। यह फीचर यूजर्स को चैट पर मैसेज पिन करने के लिए चौबीस घंटाटे, सात दिन या तीस दिन जैसी समय सीमा चुनने का विकल्प देगा। साथ ही यूजर्स समय सीमा खत्म होने से पहले मैसेज को अनपिन भी कर सकते हैं।
- 10 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 10 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? कुछ अभिनेता लोगों के ऊपर अपनी ऐसी छाप छोड़ते हैं, जिन्हें भुलाए नहीं भुलाया जा सकता है। वेटेरन कलाकार ओम पुरी भी उन्हीं में शामिल हैं। शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से 66 साल के ओम पुरी जी का निधन हो गया, जिससे बॉलीवुड जगत के साथ आम लोग भी सदमे में हैं। बॉलीवुड की बात की जाए ओम पुरी को अंतिम बार हमने फिल्म घायल वन्स अगेन में देखा है। जबकि फिल्म द जंगल बुक में उन्होंने बघीरा की आवाज दी थी। एक्टर रजा मुराद, अनुपम खेर, मधुर भंडारकर, रितेश देशमुख व अन्य कलाकारों ने ट्विटर पर अफसोस जताया है। बता दें, ओम पुरी भारतीय, पाकिस्तानी और हॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित ओम पुरी ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत मराठी नाटक पर आधारित फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की थी। वहीं, ये कई पॉपुलर बॉलीवुड फिल्मों (मिर्च मसाला, माचिस, घायल, मकबूल, जाने भी दो यारों) का हिस्सा भी रहे हैं।
- दस hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - दस hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? कुछ अभिनेता लोगों के ऊपर अपनी ऐसी छाप छोड़ते हैं, जिन्हें भुलाए नहीं भुलाया जा सकता है। वेटेरन कलाकार ओम पुरी भी उन्हीं में शामिल हैं। शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से छयासठ साल के ओम पुरी जी का निधन हो गया, जिससे बॉलीवुड जगत के साथ आम लोग भी सदमे में हैं। बॉलीवुड की बात की जाए ओम पुरी को अंतिम बार हमने फिल्म घायल वन्स अगेन में देखा है। जबकि फिल्म द जंगल बुक में उन्होंने बघीरा की आवाज दी थी। एक्टर रजा मुराद, अनुपम खेर, मधुर भंडारकर, रितेश देशमुख व अन्य कलाकारों ने ट्विटर पर अफसोस जताया है। बता दें, ओम पुरी भारतीय, पाकिस्तानी और हॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित ओम पुरी ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत मराठी नाटक पर आधारित फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की थी। वहीं, ये कई पॉपुलर बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा भी रहे हैं।
Halloween in Saudi Arabia: सऊदी अरब अपनी रूढ़िवादी छवि को खत्म करने की हर संभव कोशिश कर रहा है। उसके इन प्रयासों का बहुत बार दुनिया के मुसलमान तक विरोध करने लगते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। इतिहास में पहली बार सऊदी अरब में हैलोवीन का त्योहार मनाया गया है। जिसमें लोगों ने डरावने कपड़े पहनकर मस्ती की। वह राजधानी रियाद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। यह त्योहार गुरुवार और शुक्रवार को मनाया गया था, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। लेकिन लोग इन तस्वीरों को देखकर खुश नहीं हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। हैलोवीन परेड में शामिल अब्दुलरहमान ने एक पौराणिक उत्तर अमेरिकी वेंडीग की पोशाक पहनी थी। उन्होंने देश में पहली बार हैलोवीन का त्योहार मनाया। अरब न्यूज के मुताबिक, उन्होंने कहा, 'यह एक बड़ा त्योहार है, सच कहूं तो मैं हराम या हलाल के बारे में नहीं जानता, लेकिन यहां हर कोई खुश है। हम इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए मना रहे हैं और कुछ नहीं। हम किसी बात पर विश्वास नहीं करते। इस कार्यक्रम में आए खालिद ने कहा, 'कर्म इरादे दिखाता है। मैं यहां सिर्फ मस्ती करने आया हूं। ' सऊदी अरब के जनरल एंटरटेनमेंट अथॉरिटी ने हैलोवीन के पहले और सबसे बड़े सार्वजनिक उत्सव की योजना बनाई थी। जनरल अथॉरिटी फॉर एंटरटेनमेंट के प्रमुख तुर्की अल-शेख, सऊदी रॉयल कोर्ट के सलाहकार ने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से कहा कि वीकेंड में अच्चा खासा माहौल था। रियाद में इस त्योहार को मनाना एक बदलाव को दिखाता है। क्राउन प्रिंस बनने के बाद, यह इस्लामी रीति-रिवाजों और देश में मोहम्मद बिन सलमान द्वारा किए गए आधुनिक परिवर्तन का प्रमाण है। सऊदी अरब में हैलोवीन मनाए जाने को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ लोगों ने कहा कि सऊदी अरब इस ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। वहीं कुछ लोगों ने नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, 'मैंने इस साल बहुत सारे मुसलमानों को हैलोवीन मनाते हुए देखा है। मुसलमानों को हैलोवीन मनाने की मनाही है। अल्लाह सही रास्ता दिखाए और हमें माफ करे। ' एक अन्य यूजर ने कहा कि सऊदी अरब में हैलोवीन मनाना दर्शाता है कि कयामत दूर नहीं है। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि मूर्तिपूजक की पारंपरिक पोशाक पर राक्षसी मुखौटा पहना जा रहा है। यह कोई मजाक नहीं है।
Halloween in Saudi Arabia: सऊदी अरब अपनी रूढ़िवादी छवि को खत्म करने की हर संभव कोशिश कर रहा है। उसके इन प्रयासों का बहुत बार दुनिया के मुसलमान तक विरोध करने लगते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। इतिहास में पहली बार सऊदी अरब में हैलोवीन का त्योहार मनाया गया है। जिसमें लोगों ने डरावने कपड़े पहनकर मस्ती की। वह राजधानी रियाद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। यह त्योहार गुरुवार और शुक्रवार को मनाया गया था, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। लेकिन लोग इन तस्वीरों को देखकर खुश नहीं हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। हैलोवीन परेड में शामिल अब्दुलरहमान ने एक पौराणिक उत्तर अमेरिकी वेंडीग की पोशाक पहनी थी। उन्होंने देश में पहली बार हैलोवीन का त्योहार मनाया। अरब न्यूज के मुताबिक, उन्होंने कहा, 'यह एक बड़ा त्योहार है, सच कहूं तो मैं हराम या हलाल के बारे में नहीं जानता, लेकिन यहां हर कोई खुश है। हम इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए मना रहे हैं और कुछ नहीं। हम किसी बात पर विश्वास नहीं करते। इस कार्यक्रम में आए खालिद ने कहा, 'कर्म इरादे दिखाता है। मैं यहां सिर्फ मस्ती करने आया हूं। ' सऊदी अरब के जनरल एंटरटेनमेंट अथॉरिटी ने हैलोवीन के पहले और सबसे बड़े सार्वजनिक उत्सव की योजना बनाई थी। जनरल अथॉरिटी फॉर एंटरटेनमेंट के प्रमुख तुर्की अल-शेख, सऊदी रॉयल कोर्ट के सलाहकार ने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से कहा कि वीकेंड में अच्चा खासा माहौल था। रियाद में इस त्योहार को मनाना एक बदलाव को दिखाता है। क्राउन प्रिंस बनने के बाद, यह इस्लामी रीति-रिवाजों और देश में मोहम्मद बिन सलमान द्वारा किए गए आधुनिक परिवर्तन का प्रमाण है। सऊदी अरब में हैलोवीन मनाए जाने को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ लोगों ने कहा कि सऊदी अरब इस ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। वहीं कुछ लोगों ने नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, 'मैंने इस साल बहुत सारे मुसलमानों को हैलोवीन मनाते हुए देखा है। मुसलमानों को हैलोवीन मनाने की मनाही है। अल्लाह सही रास्ता दिखाए और हमें माफ करे। ' एक अन्य यूजर ने कहा कि सऊदी अरब में हैलोवीन मनाना दर्शाता है कि कयामत दूर नहीं है। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि मूर्तिपूजक की पारंपरिक पोशाक पर राक्षसी मुखौटा पहना जा रहा है। यह कोई मजाक नहीं है।
जयपुर में सोमवार रात करीब 1. 30 बजे बाइक सवार को बचाने के चक्कर में एक कार डिवाइडर पार कर दूसरी कार से भिड़ गई। दोनों कार में सवार पांच लोगों को मामूली चोट लगी। जीप में सवार एक युवक गम्भीर घायल हुआ। इसे स्थानीय लोगों ने निजी वाहन से जयपुरिया में भर्ती कराया। घायल की पहचान शिवदासपुरा निवासी विशाल चौधरी के रूप में हुई हैं। हादसा महल रोड स्थित चौराहे पर हुआ। रामनगरिया थाना पुलिस ने बताया- रात करीब डेढ़ बजे जगतपुरा से सांगानेर की तरफ तेज स्पीड से जा रही कार जैसे ही अक्षय पात्र चौराहा पार करने लगी तभी प्रताप नगर की तरफ से आ रहे एक बाइक सवार सामने आ गया। बाइक सवार को बचाने के चक्कर में आगे चल रही दूसरी कार को टक्कर मार दी। इससे कार बेकाबू हो गई। सड़क के बीच में लगी रेलिंग व डिवाइडर से टकरा गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी की लोहे की 30 फीट लम्बी एंगल कार के गेट से होते हुए सनरूफ को तोड़ती हुई बाहर निकल गई। दुर्घटना में दोनों कार लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। दोनों कार में बैठे हुए पांच लोगों में से एक भर्ती है। बाकी सभी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। किसी भी पक्ष की ओर से किसी भी प्रकार की शिकायत अभी तक नहीं कराई गई हैं। दुर्घटना की आवाज सुन कर लोग दौड़ते हुए कार की तरफ भागे। इस दौरान दोनों कार में बैठे 5 युवकों को बड़ी मशक्कत के बाद कार से बाहर निकाला गया। थोड़ी देर में पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस की सहायता से जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया। क्षतिग्रस्त दोनों कारों को रामनगरिया थाने में रखवाय दिया गया हैं. This website follows the DNPA Code of Ethics.
जयपुर में सोमवार रात करीब एक. तीस बजे बाइक सवार को बचाने के चक्कर में एक कार डिवाइडर पार कर दूसरी कार से भिड़ गई। दोनों कार में सवार पांच लोगों को मामूली चोट लगी। जीप में सवार एक युवक गम्भीर घायल हुआ। इसे स्थानीय लोगों ने निजी वाहन से जयपुरिया में भर्ती कराया। घायल की पहचान शिवदासपुरा निवासी विशाल चौधरी के रूप में हुई हैं। हादसा महल रोड स्थित चौराहे पर हुआ। रामनगरिया थाना पुलिस ने बताया- रात करीब डेढ़ बजे जगतपुरा से सांगानेर की तरफ तेज स्पीड से जा रही कार जैसे ही अक्षय पात्र चौराहा पार करने लगी तभी प्रताप नगर की तरफ से आ रहे एक बाइक सवार सामने आ गया। बाइक सवार को बचाने के चक्कर में आगे चल रही दूसरी कार को टक्कर मार दी। इससे कार बेकाबू हो गई। सड़क के बीच में लगी रेलिंग व डिवाइडर से टकरा गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी की लोहे की तीस फीट लम्बी एंगल कार के गेट से होते हुए सनरूफ को तोड़ती हुई बाहर निकल गई। दुर्घटना में दोनों कार लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। दोनों कार में बैठे हुए पांच लोगों में से एक भर्ती है। बाकी सभी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। किसी भी पक्ष की ओर से किसी भी प्रकार की शिकायत अभी तक नहीं कराई गई हैं। दुर्घटना की आवाज सुन कर लोग दौड़ते हुए कार की तरफ भागे। इस दौरान दोनों कार में बैठे पाँच युवकों को बड़ी मशक्कत के बाद कार से बाहर निकाला गया। थोड़ी देर में पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस की सहायता से जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया। क्षतिग्रस्त दोनों कारों को रामनगरिया थाने में रखवाय दिया गया हैं. This website follows the DNPA Code of Ethics.
जबलपुर (Jabalpur News in Hindi): भगवान का रूप माने जाने वाले डाक्टर एक ओर दिन रात मेहनत कर कोरोना रोगियों की सेवा कर रहे हैं। तो वहीं जबलपुर में एक डक्टर ऐसे भी हैं जिनकी ड्यिूटी के दौरान नीद में खलल पड़ गई तो वह भडक उठे। रोगी को देखने बजाय वह रोगी के परिजनों को धमकाने लगे। किसी को फोन कर बुलाने की बात कहते रहे। इसी दौरान परिजन रोगी को देखने डाक्टर से गिड़गिडाते रहे लेकिन अपने रौब में गाजियां बकता रहा। मिली जानकारी के अनुसार बीती रात जबलपुर के विक्टोरिया जिला अस्पताल में डाक्टर ने परिजनों ने विवाद कर दिया। विवाद का कारण गभीर रोग को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। काफी खेज बीन के पता चला कि डाक्टर अपने रेस्ट रूम में हंै। लोगों ने उन्हे जगा दिया। जिसके बाद बात बिगड गई। रोगी के परिजनों ने बताया कि जब डाक्टर को जगाया तभी वह भड़क गये। किसी तरह बाहर एम्बुलेंस तक आये भी लेकिन इसी दौरान बात चीत में किसी ने कहा दिया आपको आधे घंटे से ढूंढा जा रहा था आपने देर कर दिया। वही मौजूद रोगी के परिजनों के मुख से जैसे ही डाक्टर ने सुना कि आप देर से आये हैं। डाक्टर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बताया जाता है कि डाक्टर इतने उतावले हो गये कि वह कोरोना प्रोटोकाल भी भूल गये। मस्क आदि सुरक्षा के पीपीई किट उतारने लगे। और फोन लगाने लगे यह कहते हुए की अभी सब को देख लेता हूं। पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियांे बना लिया और इसे वायरल कर दिया। वडियो ंमें डाक्टर को धमकाते हुए तो परिजनो को रोगी का इलाज करने के लिए कहते गिड़गिड़ाते हुए देखा जा सकता है। डॉक्टर को उनकी छोटी सी बात इतनी बुरी लग गई कि वो उन्हें गालियां देना शुरू कर देता है।
जबलपुर : भगवान का रूप माने जाने वाले डाक्टर एक ओर दिन रात मेहनत कर कोरोना रोगियों की सेवा कर रहे हैं। तो वहीं जबलपुर में एक डक्टर ऐसे भी हैं जिनकी ड्यिूटी के दौरान नीद में खलल पड़ गई तो वह भडक उठे। रोगी को देखने बजाय वह रोगी के परिजनों को धमकाने लगे। किसी को फोन कर बुलाने की बात कहते रहे। इसी दौरान परिजन रोगी को देखने डाक्टर से गिड़गिडाते रहे लेकिन अपने रौब में गाजियां बकता रहा। मिली जानकारी के अनुसार बीती रात जबलपुर के विक्टोरिया जिला अस्पताल में डाक्टर ने परिजनों ने विवाद कर दिया। विवाद का कारण गभीर रोग को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। काफी खेज बीन के पता चला कि डाक्टर अपने रेस्ट रूम में हंै। लोगों ने उन्हे जगा दिया। जिसके बाद बात बिगड गई। रोगी के परिजनों ने बताया कि जब डाक्टर को जगाया तभी वह भड़क गये। किसी तरह बाहर एम्बुलेंस तक आये भी लेकिन इसी दौरान बात चीत में किसी ने कहा दिया आपको आधे घंटे से ढूंढा जा रहा था आपने देर कर दिया। वही मौजूद रोगी के परिजनों के मुख से जैसे ही डाक्टर ने सुना कि आप देर से आये हैं। डाक्टर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बताया जाता है कि डाक्टर इतने उतावले हो गये कि वह कोरोना प्रोटोकाल भी भूल गये। मस्क आदि सुरक्षा के पीपीई किट उतारने लगे। और फोन लगाने लगे यह कहते हुए की अभी सब को देख लेता हूं। पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियांे बना लिया और इसे वायरल कर दिया। वडियो ंमें डाक्टर को धमकाते हुए तो परिजनो को रोगी का इलाज करने के लिए कहते गिड़गिड़ाते हुए देखा जा सकता है। डॉक्टर को उनकी छोटी सी बात इतनी बुरी लग गई कि वो उन्हें गालियां देना शुरू कर देता है।
TATA IPl 2023 Closing Ceremony: आईपीएल के 16वें सीजन का खिताबी मुकाबला 28 मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। मुकाबले से क्लोजिंग सेरेमनी का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत शाम 4 बजे से होगी। इस दौरान कई पॉप सिंगर परफॉर्म करेंगे। आईपीएल के क्लोजिंग सेरेमनी में पॉप स्टार करेंगे परफॉर्म। (फोटो- IPL Twitter) पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' PoK पर CM Yogi Adityanath से बयान से Pakistan में भूचाल! Prashant Kishor ने PM Modi को चुनौती के सवाल पर Tejashwi Yadav की लगाई क्लास! दिल्ली हत्याकांड पर Sakshi के पिता का आया बयान- 'Sahil को फांसी होनी चाहिए' कलावा, रुद्राक्ष. . 'लव जिहाद' के साक्ष्य?
TATA IPl दो हज़ार तेईस Closing Ceremony: आईपीएल के सोलहवें सीजन का खिताबी मुकाबला अट्ठाईस मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। मुकाबले से क्लोजिंग सेरेमनी का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत शाम चार बजे से होगी। इस दौरान कई पॉप सिंगर परफॉर्म करेंगे। आईपीएल के क्लोजिंग सेरेमनी में पॉप स्टार करेंगे परफॉर्म। पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' PoK पर CM Yogi Adityanath से बयान से Pakistan में भूचाल! Prashant Kishor ने PM Modi को चुनौती के सवाल पर Tejashwi Yadav की लगाई क्लास! दिल्ली हत्याकांड पर Sakshi के पिता का आया बयान- 'Sahil को फांसी होनी चाहिए' कलावा, रुद्राक्ष. . 'लव जिहाद' के साक्ष्य?
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री पद के धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार को लेकर जेडीयू और भाजपा के बीच उठा विवाद समाप्त हो चुका है और दोनों पक्षों के नेताओं को संयम बरतने की दरकार है. प्रदेश अध्यक्ष ने संवाददाताओं से कहा, 'धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार को लेकर बिहार में जेडीयू और भाजपा के बीच तनातनी का दौर समाप्त हो चुका है. दोनों दलों के नेताओं को संयम से काम लेने की जरूरत है. ' उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया है कि बिना नेताओं से परामर्श किये हुए बयानबाजी नहीं करनी है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव भी इस संबंध में काफी कुछ कह चुके हैं. सिंह ने कहा कि बिहार के विकास के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अकेले जिम्मेदार हैं. बीते छह वर्ष के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने सूक्ष्मता से अपनी नीतियों का क्रियान्वयन किया है और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना सुनिश्चित किया है. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश कुमार ने परियोजनाओं के लिए संसाधन की व्यवस्था की है और उनके पूरा होने का समय सुनिश्चित किया है. राजग के कार्यकाल में बिहार के विकास के लिए श्रेय लेने पर भाजपा के एक वर्ग के असहज महसूस करने संबंधी एक प्रश्न के जवाब में सिंह ने कहा, 'राजग के नेताओं में शीर्ष स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कोई मतभेद नहीं है. नीतीश कुमार का उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ तालमेल बहुत अच्छा है. ' इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष ने राजद की महिला मोर्चा की अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव और मधुबनी जिला अध्यक्ष लक्ष्मेश्वर देव को जेडीयू की सदस्यता दिलाई और उनका अभिनंदन किया.
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री पद के धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार को लेकर जेडीयू और भाजपा के बीच उठा विवाद समाप्त हो चुका है और दोनों पक्षों के नेताओं को संयम बरतने की दरकार है. प्रदेश अध्यक्ष ने संवाददाताओं से कहा, 'धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार को लेकर बिहार में जेडीयू और भाजपा के बीच तनातनी का दौर समाप्त हो चुका है. दोनों दलों के नेताओं को संयम से काम लेने की जरूरत है. ' उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया है कि बिना नेताओं से परामर्श किये हुए बयानबाजी नहीं करनी है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव भी इस संबंध में काफी कुछ कह चुके हैं. सिंह ने कहा कि बिहार के विकास के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अकेले जिम्मेदार हैं. बीते छह वर्ष के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने सूक्ष्मता से अपनी नीतियों का क्रियान्वयन किया है और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना सुनिश्चित किया है. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश कुमार ने परियोजनाओं के लिए संसाधन की व्यवस्था की है और उनके पूरा होने का समय सुनिश्चित किया है. राजग के कार्यकाल में बिहार के विकास के लिए श्रेय लेने पर भाजपा के एक वर्ग के असहज महसूस करने संबंधी एक प्रश्न के जवाब में सिंह ने कहा, 'राजग के नेताओं में शीर्ष स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कोई मतभेद नहीं है. नीतीश कुमार का उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ तालमेल बहुत अच्छा है. ' इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष ने राजद की महिला मोर्चा की अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव और मधुबनी जिला अध्यक्ष लक्ष्मेश्वर देव को जेडीयू की सदस्यता दिलाई और उनका अभिनंदन किया.
शुरुआती उलटफेर के बाद दुनिया के नंबर वन नोवाक जोकोविच और गत चैंपियन सेरेना विलियम्स विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप के चौथे दौर में पहुंच गए हैं। खिताब के प्रबल दावेदार जोकोविच ने शनिवार को तीसरे दौर में फ्रांस के जेरेमी चार्डी को लगातार सेटों में 6-3, 6-2, 6-2 से हराया। रोजर फेडरर और फ्रेंच ओपन चैंपियन स्पेन के राफेल नडाल के बाहर होने के बाद खिताब के प्रवल दावेदार माने जा रहे सर्बिया के जोकोविच ने अब तक टूर्नामेंट में एक भी सर्विस गेम नहीं गंवाया है। अगले दौर में उनका मुकाबला जर्मनी के टॉमी हास से होगा। जोकोविच के अलावा पुरुष एकल में चौथी सीड और फ्रेंच ओपन के उपविजेता स्पेन के डेविड फेरर को तीसरे दौर में यूक्रेन के अलेक्सांद, दोल्गोपोलोव के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए पांच सेटों तक पसीना बहाना पड़ा। साल 2010 के टूर्नामेंट के उपविजेता और सातवीं वरीयता प्राप्त चेक गणराज्य के थामस बर्डिच और आठवीं सीड अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोत्रो भी चौथे दौर में पहुंचने में सफल रहे। हालांकि नौंवी सीड और ग्रास कोर्ट के विशेषज्ञ माने जाने वाले फ्रांस के रिचर्ड गास्के के अलावा एशिया के शीर्ष खिलाड़ी 12वीं सीड जापान के केई निशिकोरी तीसरे ही दौर में हार गए। गास्के को ऑस्ट्रेलिया के 20 वर्षीय गैर वरीय खिलाडी बर्नार्ड टोमिच ने 7-6, 5-7, 7-5, 7-6 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया। गत चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए विंबलडन के चौथे दौर में जगह बना ली। सेरेना ने महिला एकल में सबसे उम्रदराज महिला जापान की किमिको दाते क्रूम पर कोई नरमी दिखाई और सीधे सेटों में 6-2, 6-0 से जीत दर्ज करते हुए चौथे दौर का टिकट कटा लिया। सेरेना की यह लगातार 34वीं जीत है। सेरेना के अलावा महिला एकल में भी शीर्ष 16 खिलाड़ियों में से केवल छह ही चौथे दौर में पहुंचने में सफल रहीं। चौथे दौर में पहुंची महिला खिलाड़ियों में से नौ की उम, 30 से अधिक है जो कि टेनिस के आधुनिक दौर में विंबलडन के रिकॉर्ड की बराबरी है। सेरेना के साथ गत उपविजेता पोलैंड की एग्निस्जका रदवांस्का और पूर्व चैंपियन चेक गणराज्य की पेत्रा क्वितोवा भी चौथे दौर में पहुंचने में कामयाब रहीं। हालांकि 14वीं वरीयता प्राप्त ऑस्ट्रेलिया की सामंता स्तोसुर को जर्मनी की सबाइन लेसिकी के हाथों उलटफेर का शिकार होना पड़ा।
शुरुआती उलटफेर के बाद दुनिया के नंबर वन नोवाक जोकोविच और गत चैंपियन सेरेना विलियम्स विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप के चौथे दौर में पहुंच गए हैं। खिताब के प्रबल दावेदार जोकोविच ने शनिवार को तीसरे दौर में फ्रांस के जेरेमी चार्डी को लगातार सेटों में छः-तीन, छः-दो, छः-दो से हराया। रोजर फेडरर और फ्रेंच ओपन चैंपियन स्पेन के राफेल नडाल के बाहर होने के बाद खिताब के प्रवल दावेदार माने जा रहे सर्बिया के जोकोविच ने अब तक टूर्नामेंट में एक भी सर्विस गेम नहीं गंवाया है। अगले दौर में उनका मुकाबला जर्मनी के टॉमी हास से होगा। जोकोविच के अलावा पुरुष एकल में चौथी सीड और फ्रेंच ओपन के उपविजेता स्पेन के डेविड फेरर को तीसरे दौर में यूक्रेन के अलेक्सांद, दोल्गोपोलोव के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए पांच सेटों तक पसीना बहाना पड़ा। साल दो हज़ार दस के टूर्नामेंट के उपविजेता और सातवीं वरीयता प्राप्त चेक गणराज्य के थामस बर्डिच और आठवीं सीड अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोत्रो भी चौथे दौर में पहुंचने में सफल रहे। हालांकि नौंवी सीड और ग्रास कोर्ट के विशेषज्ञ माने जाने वाले फ्रांस के रिचर्ड गास्के के अलावा एशिया के शीर्ष खिलाड़ी बारहवीं सीड जापान के केई निशिकोरी तीसरे ही दौर में हार गए। गास्के को ऑस्ट्रेलिया के बीस वर्षीय गैर वरीय खिलाडी बर्नार्ड टोमिच ने सात-छः, पाँच-सात, सात-पाँच, सात-छः से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया। गत चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए विंबलडन के चौथे दौर में जगह बना ली। सेरेना ने महिला एकल में सबसे उम्रदराज महिला जापान की किमिको दाते क्रूम पर कोई नरमी दिखाई और सीधे सेटों में छः-दो, छः-शून्य से जीत दर्ज करते हुए चौथे दौर का टिकट कटा लिया। सेरेना की यह लगातार चौंतीसवीं जीत है। सेरेना के अलावा महिला एकल में भी शीर्ष सोलह खिलाड़ियों में से केवल छह ही चौथे दौर में पहुंचने में सफल रहीं। चौथे दौर में पहुंची महिला खिलाड़ियों में से नौ की उम, तीस से अधिक है जो कि टेनिस के आधुनिक दौर में विंबलडन के रिकॉर्ड की बराबरी है। सेरेना के साथ गत उपविजेता पोलैंड की एग्निस्जका रदवांस्का और पूर्व चैंपियन चेक गणराज्य की पेत्रा क्वितोवा भी चौथे दौर में पहुंचने में कामयाब रहीं। हालांकि चौदहवीं वरीयता प्राप्त ऑस्ट्रेलिया की सामंता स्तोसुर को जर्मनी की सबाइन लेसिकी के हाथों उलटफेर का शिकार होना पड़ा।
वाशिंगटन (भाषा)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए स्वास्थ्य सेवा विधेयक को प्रतिनिधि सभा में पारित नहीं करवा पाने की वजह से निराशा जाहिर की है। वह ओबामाकेयर को निरस्त कर उसकी जगह नए विधेयक को लाना चाहते थे, लेकिन प्रतिनिधि सभा में इस पक्ष में मिले कम वोट की वजह से विधयेक पारित नहीं हो सका। ट्रंप को तब निराशा हुई जब प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष पॉल रियान नए स्वास्थ्यसेवा विधेयक को पारित कराने के लिए बहुमत नहीं जुटा पाए। ट्रंप प्रशासन के इस विधेयक के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा पाने की वजह से राष्ट्रपति ने अपने रिपब्लिकन साथियों को अल्टिमेटम जारी किया है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा भारत की लोकसभा की तरह है। यहां कुल 435 सदस्य हैं। इस सभा में रिपब्लिकन पार्टी 235 सदस्य के साथ बहुमत में हैं। अपने ही कुछ सांसदों के विरोध के कारण रिपब्लिकन पार्टी इस विधेयक को पारित कराने के लिए 215 वोट नहीं जुटा पाई। पार्टी के कुछ सांसदों ने खुद को फ्रीडम कॉकस के बैनर के तले संगठित कर लिया था। हार के अपमान से बचने के लिए रियान ने अर्फोडेबल केयर एक्ट (ओबामाकेयर) पर वोट कराने का कदम वापस ले लिया। विधेयक पारित नहीं होने का दोष विपक्ष पर लगाते हुए ट्रंप ने कहा कि अब अबोमाकेयर बना रहने जा रहा है और लोगों को अपने बीमा प्रीमियम में एकाएक इजाफा देखने को मिलेगा। विधयेक को वापस लेने के बाद ट्रंप ने संवाददाताओें से कहा, "यह होने जा रहा है। आप इसमें कोई मदद नहीं कर सकते। खराब चीजें होने जा रही हैं। आप इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। मैं इस बात को डेढ साल से ज्यादा समय से कह रहा हूं। यह टिकाऊ नहीं है।" ट्रंप ने कहा कि वह विधेयक को पारित कराने के बहुत करीब थे लेकिन 10-15 वोट कम रह गए। राष्ट्रपति ने कहा कि अब वह कर सुधारों पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा, "हम कर सुधार करने जा रहे हैं। हम इसे पहले भी कर सकते थे लेकिन हमारे पास डेमोके्रट सदस्यों का समर्थन होता तो और भी अच्छा होता। याद रखिए हमें डेमोक्रेट पार्टी का समर्थन नहीं मिला था। इसलिए अब हम कर सुधार करने जा रहे हैं।" जब राष्ट्रपति से यह पूछा गया कि क्या उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के भीतर फ्रीडम कॉकस ने धोखा दिया है तो उनका जवाब था, "मेरे साथ विश्वासघात नहीं हुआ। वह मेरे दोस्त हैं। मैं निराश हूं क्योंकि विधेयक पारित नहीं हो पाया। मैं हैरत में था। हम उसे पारित कराने जा रहे थे और सब कुछ ठीक था।" ट्रंप ने कहा, "ओबामा केयर में कुछ ऐसी चीजें थी, जो मुझे पसंद नहीं आई। लेकिन दोनों पार्टियां साथ बैठ सकती हैं और वास्तविक स्वास्थ्य सेवा ला सकती हैं।" ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
वाशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए स्वास्थ्य सेवा विधेयक को प्रतिनिधि सभा में पारित नहीं करवा पाने की वजह से निराशा जाहिर की है। वह ओबामाकेयर को निरस्त कर उसकी जगह नए विधेयक को लाना चाहते थे, लेकिन प्रतिनिधि सभा में इस पक्ष में मिले कम वोट की वजह से विधयेक पारित नहीं हो सका। ट्रंप को तब निराशा हुई जब प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष पॉल रियान नए स्वास्थ्यसेवा विधेयक को पारित कराने के लिए बहुमत नहीं जुटा पाए। ट्रंप प्रशासन के इस विधेयक के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा पाने की वजह से राष्ट्रपति ने अपने रिपब्लिकन साथियों को अल्टिमेटम जारी किया है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा भारत की लोकसभा की तरह है। यहां कुल चार सौ पैंतीस सदस्य हैं। इस सभा में रिपब्लिकन पार्टी दो सौ पैंतीस सदस्य के साथ बहुमत में हैं। अपने ही कुछ सांसदों के विरोध के कारण रिपब्लिकन पार्टी इस विधेयक को पारित कराने के लिए दो सौ पंद्रह वोट नहीं जुटा पाई। पार्टी के कुछ सांसदों ने खुद को फ्रीडम कॉकस के बैनर के तले संगठित कर लिया था। हार के अपमान से बचने के लिए रियान ने अर्फोडेबल केयर एक्ट पर वोट कराने का कदम वापस ले लिया। विधेयक पारित नहीं होने का दोष विपक्ष पर लगाते हुए ट्रंप ने कहा कि अब अबोमाकेयर बना रहने जा रहा है और लोगों को अपने बीमा प्रीमियम में एकाएक इजाफा देखने को मिलेगा। विधयेक को वापस लेने के बाद ट्रंप ने संवाददाताओें से कहा, "यह होने जा रहा है। आप इसमें कोई मदद नहीं कर सकते। खराब चीजें होने जा रही हैं। आप इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। मैं इस बात को डेढ साल से ज्यादा समय से कह रहा हूं। यह टिकाऊ नहीं है।" ट्रंप ने कहा कि वह विधेयक को पारित कराने के बहुत करीब थे लेकिन दस-पंद्रह वोट कम रह गए। राष्ट्रपति ने कहा कि अब वह कर सुधारों पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा, "हम कर सुधार करने जा रहे हैं। हम इसे पहले भी कर सकते थे लेकिन हमारे पास डेमोके्रट सदस्यों का समर्थन होता तो और भी अच्छा होता। याद रखिए हमें डेमोक्रेट पार्टी का समर्थन नहीं मिला था। इसलिए अब हम कर सुधार करने जा रहे हैं।" जब राष्ट्रपति से यह पूछा गया कि क्या उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के भीतर फ्रीडम कॉकस ने धोखा दिया है तो उनका जवाब था, "मेरे साथ विश्वासघात नहीं हुआ। वह मेरे दोस्त हैं। मैं निराश हूं क्योंकि विधेयक पारित नहीं हो पाया। मैं हैरत में था। हम उसे पारित कराने जा रहे थे और सब कुछ ठीक था।" ट्रंप ने कहा, "ओबामा केयर में कुछ ऐसी चीजें थी, जो मुझे पसंद नहीं आई। लेकिन दोनों पार्टियां साथ बैठ सकती हैं और वास्तविक स्वास्थ्य सेवा ला सकती हैं।" ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
लखनऊ (आईएएनएस)। चिकित्सा स्वास्थ्य कार्यालय के महानिदेशक (डीजी) ने एक निर्देश जारी कर कहा है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से जुड़े डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टी मंजूर नहीं की जानी चाहिए। ऐसा डेंगू के प्रकोप और आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए किया गया है। डीजी द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, अतिरिक्त निदेशकों और सभी सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को भेजे गए एक पत्र में कहा गया है, "डेंगू के मामलों और आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को छुट्टी की अनुमति तब तक नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि परिस्थितियां अपरिहार्य न हों। " उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जिनके पास स्वास्थ्य विभाग भी है, ने स्वास्थ्य अधिकारियों से बुखार की शिकायत करने वाले रोगियों को संभालने के लिए डेस्क स्थापित करने को कहा है। उन्होंने कहा, "बुखार के मामलों पर अलग से ध्यान दिया जाना चाहिए। ऐसे मरीजों को लंबी कतारों में नहीं लगना चाहिए। " मंत्री ने अधिकारियों को बुखार के मामलों के लिए आसान पंजीकरण और जांच की सुविधा प्रदान करने और ऐसे रोगियों को जरूरत के अनुसार सात से 15 दिनों की दवाएं उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में पिछले साल की तुलना में इस साल डेंगू के मामले कम दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया, अस्पतालों में डेंगू के मामलों के लिए बिस्तर आरक्षित हैं। मच्छर जनित बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सभी उपाय किए जाने चाहिए। इससे पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय टीम को फिरोजाबाद, आगरा और इटावा जिलों में डेंगू प्रबंधन के संबंध में उपाय करने के लिए उत्तर प्रदेश भेजा गया था। केंद्र की टीम डेंगू के मामलों की जांच के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय करने में राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है।
लखनऊ । चिकित्सा स्वास्थ्य कार्यालय के महानिदेशक ने एक निर्देश जारी कर कहा है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से जुड़े डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टी मंजूर नहीं की जानी चाहिए। ऐसा डेंगू के प्रकोप और आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए किया गया है। डीजी द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, अतिरिक्त निदेशकों और सभी सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को भेजे गए एक पत्र में कहा गया है, "डेंगू के मामलों और आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को छुट्टी की अनुमति तब तक नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि परिस्थितियां अपरिहार्य न हों। " उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जिनके पास स्वास्थ्य विभाग भी है, ने स्वास्थ्य अधिकारियों से बुखार की शिकायत करने वाले रोगियों को संभालने के लिए डेस्क स्थापित करने को कहा है। उन्होंने कहा, "बुखार के मामलों पर अलग से ध्यान दिया जाना चाहिए। ऐसे मरीजों को लंबी कतारों में नहीं लगना चाहिए। " मंत्री ने अधिकारियों को बुखार के मामलों के लिए आसान पंजीकरण और जांच की सुविधा प्रदान करने और ऐसे रोगियों को जरूरत के अनुसार सात से पंद्रह दिनों की दवाएं उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में पिछले साल की तुलना में इस साल डेंगू के मामले कम दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया, अस्पतालों में डेंगू के मामलों के लिए बिस्तर आरक्षित हैं। मच्छर जनित बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सभी उपाय किए जाने चाहिए। इससे पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय टीम को फिरोजाबाद, आगरा और इटावा जिलों में डेंगू प्रबंधन के संबंध में उपाय करने के लिए उत्तर प्रदेश भेजा गया था। केंद्र की टीम डेंगू के मामलों की जांच के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय करने में राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है।
India vs West Indies 2nd ODI Match Preview: टीम इंडिया का कमाल होगा, सीरीज पर भारत का नाम पक्का, विंडीज को मिलेगी मायूसी! IND Vs WI Todays Match Highlights: भारत ने पहले मैच में हर एरिया में दमदार खेल खेला और जीत हासिल करते हुए सीरीज में बढ़त ले ली. पोर्ट ऑफ स्पेनःभारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मैच में शानदार खेल दिखाते हुए जीत हासिल की है और अब उसकी नजरें सीरीज अपने नाम करने पर हैं. ये दोनों टीमें रविवार को दूसरे वनडे मैच में आमने-सामने होंगी. इस मैच में भारत की कोशिश सीरीज में अजेय बढ़त लेने पर होंगी तो वहीं मेजबान टीम की नजरें वापसी करने पर होंगी. निकोलस पूरनी की कप्तानी वाली विंडीज के लिए सीरीज में वापसी करने का ये आखिरी मौका है. भारतीय टीम ने पहला वनडे तीन रन से जीता था और एक और जीत से भारत कैरेबियाई सरजमीं पर लगातार दूसरी वनडे सीरीज जीत लेगा. भारतीय टीम ने शुक्रवार को पहले वनडे में हर विभाग में अच्छा प्रदर्शन किया और तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त बनाई जिसमें धवन और वापसी करने वाले शुभमन गिल के बीच आक्रामक सलामी साझेदारी तथा मोहम्मद सिराज का अनुभवी मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में गेंदबाजी आक्रमण की सुघड़ता से अगुआई करना शामिल है. गिल 19 से ज्यादा महीने के समय बाद वनडे टीम में वापसी कर रहे हैं और उन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाकर 64 रन से अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली. ऋतुराज गायकवाड़ और ईशान किशन पर तरजीह देकर चुने गए गिल जब क्वींस पार्क ओवल की पिच पर बल्लेबाजी कर रहे थे तो यह काफी आसान दिख रही थी जबकि ज्यादातर खिलाड़ी इस पर जूझते दिख रहे थे. पूरी पारी के दौरान उन्होंने जितनी गेंद खेलीं, उतने ही रन जुटाए और छह बाउंड्री के अलावा दो छक्के भी लगाए. पर उनकी पारी का अंत रन आउट से हुआ. अब गिल पर निर्भर करता है कि वह शानदार शुरुआत को बड़ी पारियों में बदल पाते हैं या नहीं. और वह टीम में अपना स्थान पक्का करने के लिए निश्चित रूप से ऐसा करना चाहेंगे.धवन ने भी दूसरे जोड़ीदार की भूमिका बेहतरीन ढंग से निभाई, उन्होंने और गिल ने 106 गेंद में 119 रन की साझेदारी बनाई, लेकिन सीनियर बल्लेबाज अपने 18वें शतक से चूक गए. टीम इंडिया चाहेगी कि गिल और धवन की जोड़ी एक बार फिर यही कमाल दोहराए और टीम को अच्छी शुरुआत दे ताकि टीम इस बार एक बड़ा स्कोर खड़ा कर सके. श्रेयस अय्यर ने भी अर्धशतक जमाकर फॉर्म में वापसी की जिससे भारतीय टीम में शीर्ष तीन खिलाड़ियों ने परफेक्ट शुरुआत दिलाई।, लेकिन मध्यक्रम के लड़खड़ाने से भारतीय टीम सात विकेट पर 308 रन ही बना सकी जबकि एक समय वह 350 रन से आगे पहुंचने की ओर बढ़ रही थी. मध्यक्रम में संजू सैमसन एक बार फिर इस स्तर पर मिले मौके का इस्तेमाल करने में विफल रहे, उन्होंने 18 गेंद में 12 रन बनाए. केरल के इस विकेटकीपर ने हालांकि बल्ले की नाकामी की कमी डेथ ओवर में एक शानदार बाउंड्री बचाकर पूरी की जिसकी बदौलत भारतीय टीम मैच की अंतिम गेंद पर जीतने में सफल रही. इस ओवर में मोहम्मद सिराज 15 रन का बचाव कर रहे थे.रविवार को सूर्यकुमार यादव, सैमसन, दीपक हुड्डा और अक्षर पटेल अच्छा योगदान देना चाहेंगे. धवन ने चोटिल रविंद्र जडेजा की अनुपस्थिति में एक हैरानी भरा फैसला किया, उन्होंने पहले 20 ओवर में विशेषज्ञ युजवेंद्र चहल से पहले कामचलाऊ स्पिनर दीपक हुड्डा से गेंदबाजी कराई. चहल कोई विकेट नहीं झटक सके लेकिन वह भारतीयों के लिए सबसे किफायती (4.40) गेंदबाज रहे, उन्होंने पांच ओवर में बिना विकेट झटके 22 रन दिए. सिराज ने तेज गेंदबाजी की अगुआई अच्छे तरीके से की और मध्य ओवरों में निकोलस पूरन के आउट करने के बाद अपने परफेक्ट यॉर्कर से डेथ ओवर में वापसी की. वेस्टइंडीज की टीम वनडे में लगातार हारने का सिलसिला तोड़ना चाहेगी जो अब सात मैचों का हो गया है जिसमें इस सीरीज से पहले बांग्लादेश से मिली 0-3 की हार भी शामिल है. यह सीरीज आईसीसी विश्व कप सुपर लीग का हिस्सा नहीं है और वेस्टइंडीज के पास बिना दबाव के खेलने का मौका है. पिछली बार जब भारतीय टीम ने वनडे सीरीज के लिए वेस्टइंडीज का दौरा किया था तो मेहमान टीम ने 2-0 से सीरीज जीती थी जिसमें एक मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था. टीम इस प्रकार हैंः भारतः शिखर धवन (कप्तान), ऋतुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, दीपक हुड्डा, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शार्दुल ठाकुर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, आवेश खान, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह. वेस्टइंडीजः निकोलस पूरन (कप्तान), शे होप (उप-कप्तान), शमराह ब्रूक्स, कीसी कार्टी, जेसन होल्डर, अकील हुसैन, अल्जारी जोसेफ, ब्रैंडन किंग, काइल मेयर्स, गुडकेश मोती, कीमो पॉल, रोवमैन पॉवेल और जेडन सील्स.
India vs West Indies दोnd ODI Match Preview: टीम इंडिया का कमाल होगा, सीरीज पर भारत का नाम पक्का, विंडीज को मिलेगी मायूसी! IND Vs WI Todays Match Highlights: भारत ने पहले मैच में हर एरिया में दमदार खेल खेला और जीत हासिल करते हुए सीरीज में बढ़त ले ली. पोर्ट ऑफ स्पेनःभारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मैच में शानदार खेल दिखाते हुए जीत हासिल की है और अब उसकी नजरें सीरीज अपने नाम करने पर हैं. ये दोनों टीमें रविवार को दूसरे वनडे मैच में आमने-सामने होंगी. इस मैच में भारत की कोशिश सीरीज में अजेय बढ़त लेने पर होंगी तो वहीं मेजबान टीम की नजरें वापसी करने पर होंगी. निकोलस पूरनी की कप्तानी वाली विंडीज के लिए सीरीज में वापसी करने का ये आखिरी मौका है. भारतीय टीम ने पहला वनडे तीन रन से जीता था और एक और जीत से भारत कैरेबियाई सरजमीं पर लगातार दूसरी वनडे सीरीज जीत लेगा. भारतीय टीम ने शुक्रवार को पहले वनडे में हर विभाग में अच्छा प्रदर्शन किया और तीन मैचों की सीरीज में एक-शून्य से बढ़त बनाई जिसमें धवन और वापसी करने वाले शुभमन गिल के बीच आक्रामक सलामी साझेदारी तथा मोहम्मद सिराज का अनुभवी मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में गेंदबाजी आक्रमण की सुघड़ता से अगुआई करना शामिल है. गिल उन्नीस से ज्यादा महीने के समय बाद वनडे टीम में वापसी कर रहे हैं और उन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाकर चौंसठ रन से अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली. ऋतुराज गायकवाड़ और ईशान किशन पर तरजीह देकर चुने गए गिल जब क्वींस पार्क ओवल की पिच पर बल्लेबाजी कर रहे थे तो यह काफी आसान दिख रही थी जबकि ज्यादातर खिलाड़ी इस पर जूझते दिख रहे थे. पूरी पारी के दौरान उन्होंने जितनी गेंद खेलीं, उतने ही रन जुटाए और छह बाउंड्री के अलावा दो छक्के भी लगाए. पर उनकी पारी का अंत रन आउट से हुआ. अब गिल पर निर्भर करता है कि वह शानदार शुरुआत को बड़ी पारियों में बदल पाते हैं या नहीं. और वह टीम में अपना स्थान पक्का करने के लिए निश्चित रूप से ऐसा करना चाहेंगे.धवन ने भी दूसरे जोड़ीदार की भूमिका बेहतरीन ढंग से निभाई, उन्होंने और गिल ने एक सौ छः गेंद में एक सौ उन्नीस रन की साझेदारी बनाई, लेकिन सीनियर बल्लेबाज अपने अट्ठारहवें शतक से चूक गए. टीम इंडिया चाहेगी कि गिल और धवन की जोड़ी एक बार फिर यही कमाल दोहराए और टीम को अच्छी शुरुआत दे ताकि टीम इस बार एक बड़ा स्कोर खड़ा कर सके. श्रेयस अय्यर ने भी अर्धशतक जमाकर फॉर्म में वापसी की जिससे भारतीय टीम में शीर्ष तीन खिलाड़ियों ने परफेक्ट शुरुआत दिलाई।, लेकिन मध्यक्रम के लड़खड़ाने से भारतीय टीम सात विकेट पर तीन सौ आठ रन ही बना सकी जबकि एक समय वह तीन सौ पचास रन से आगे पहुंचने की ओर बढ़ रही थी. मध्यक्रम में संजू सैमसन एक बार फिर इस स्तर पर मिले मौके का इस्तेमाल करने में विफल रहे, उन्होंने अट्ठारह गेंद में बारह रन बनाए. केरल के इस विकेटकीपर ने हालांकि बल्ले की नाकामी की कमी डेथ ओवर में एक शानदार बाउंड्री बचाकर पूरी की जिसकी बदौलत भारतीय टीम मैच की अंतिम गेंद पर जीतने में सफल रही. इस ओवर में मोहम्मद सिराज पंद्रह रन का बचाव कर रहे थे.रविवार को सूर्यकुमार यादव, सैमसन, दीपक हुड्डा और अक्षर पटेल अच्छा योगदान देना चाहेंगे. धवन ने चोटिल रविंद्र जडेजा की अनुपस्थिति में एक हैरानी भरा फैसला किया, उन्होंने पहले बीस ओवर में विशेषज्ञ युजवेंद्र चहल से पहले कामचलाऊ स्पिनर दीपक हुड्डा से गेंदबाजी कराई. चहल कोई विकेट नहीं झटक सके लेकिन वह भारतीयों के लिए सबसे किफायती गेंदबाज रहे, उन्होंने पांच ओवर में बिना विकेट झटके बाईस रन दिए. सिराज ने तेज गेंदबाजी की अगुआई अच्छे तरीके से की और मध्य ओवरों में निकोलस पूरन के आउट करने के बाद अपने परफेक्ट यॉर्कर से डेथ ओवर में वापसी की. वेस्टइंडीज की टीम वनडे में लगातार हारने का सिलसिला तोड़ना चाहेगी जो अब सात मैचों का हो गया है जिसमें इस सीरीज से पहले बांग्लादेश से मिली शून्य-तीन की हार भी शामिल है. यह सीरीज आईसीसी विश्व कप सुपर लीग का हिस्सा नहीं है और वेस्टइंडीज के पास बिना दबाव के खेलने का मौका है. पिछली बार जब भारतीय टीम ने वनडे सीरीज के लिए वेस्टइंडीज का दौरा किया था तो मेहमान टीम ने दो-शून्य से सीरीज जीती थी जिसमें एक मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था. टीम इस प्रकार हैंः भारतः शिखर धवन , ऋतुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, दीपक हुड्डा, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन , संजू सैमसन , शार्दुल ठाकुर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, आवेश खान, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह. वेस्टइंडीजः निकोलस पूरन , शे होप , शमराह ब्रूक्स, कीसी कार्टी, जेसन होल्डर, अकील हुसैन, अल्जारी जोसेफ, ब्रैंडन किंग, काइल मेयर्स, गुडकेश मोती, कीमो पॉल, रोवमैन पॉवेल और जेडन सील्स.
घाट-84 "रिश्तों का पोस्टमार्टम" (भाग-3) नहीं-नहीं वो ऐसा नहीं कर सकती वो तो कितनी प्यारी है, लेकिन ? मेरे मन में फिर से सवालों का ज्वार-भाटा उठने लगा । अरे काशी विश्वनाथ जी कैसा स्वागत करे हो अपनी नगरी में! मैंने आसमान की तरफ देखकर मन में कहा । फिर जल्दी से डायरी को बैग में रखने लगा तो हाथ सेे कुछ टकराया । बैग को अच्छे से टटोला तो नोकिया 1100 के पीछे का कवर हाथ लगा । अरे ये तो मेरे फोन का है । मैंनेे बुदबुदाते हुए बैग को फिर अच्छे से चेक किया तो मेरा फोन उसी में मिला जिसकी बैटरी खुल चुकी थी साथ ही मेरा बटुआ भी उसी में कपड़ों के बीच मिल गया । ख़ुशी के कारण मैं चीख पड़ा । दुकानदार ने घूरते हुए देखा और बोला- "का बे गाँव से आये हो का, चिल्ला काहे रहे होे ?" सुनकर मैं चुप हो गया और मैंने उससे पूछा- "कानपुर के हो का-- ? "हाँ तो--- ?" उसने प्रश्न के जवाब में फिर प्रश्न किया । फोन की बैटरी लगाकर मैंने जैसे ही फोन ऑन किया तो धड़ाधड़ मेसेज आने लगे, पैंतीस मिस्ड कॉल, जो पापा और मम्मी के थे । इससे पहले मैं उन्हें फोन करता पापा का फोन आ गया । "हाँ तो तुम्हाआ फोन काहे बंद हतो ?" उधर से आवाज आयी (मेरे पापा आज भी अपनी मातृभाषा में बात करते हैं जो जिला जालौन की है) । "कौन शर्मा अंकल ?" मैंनेे पूछा । "अरे बेई जिनकी मोड़ी (बेटी) तुम्हाये संघे पढ़त ती ।" मैं "जी" से ज्यादा कुछ नहीं बोल सका । "अब फोन न बंद करियो । बे तुम्हें फोन करहैं ।" "हौ ।" मैंने कहा ही था कि फोन कट गया । मेरी हालत ठीक वैसी ही थी जैसे एक साधारण परिवार के लड़के की बाप की डाँट खाने के बाद होती है । ख़ैर मैंने कपड़े बदले और चल पड़ा मिशन एडमिशन पर । कहते हैं जिस दिन किस्मत आपकी एक बार अच्छे से बजा चुकी होती है उस दिन ज्यादा दिक्कत नहीं होती इसलिए एडमिशन की सारी औपचारिकताएँ आसानी से पूरी हो गयीं । शाम के 4ः25 हो रहे थे, मैं ऑफिस बिल्डिंग से निकलकर बीएचयू स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर की दुकान से समोसे लेकर अपनी भूख मिटाने की कोशिश कर रहा था तभी सामने नजर पड़ी । काली शॉर्ट कुर्र्ती, लाल पैजामी और धानी रंग की चुन्नी ओढ़े एक बेहद खूबसूरत लड़की सामने से आती दिखी । समोसा आधा मुँह के भीतर और आधा बाहर, आँखें खुली की खुली, बिना पलक झपकाये मैं उसे देखे जा रहा था । "ज्यादा घूरो मत, कूट दिये जाओगे! पंडित जी के पीछे की पलटन नहीं दिख रही क्या ?" किसी ने बड़े प्यार से मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा । मैंने जल्दी से ख़ुद को संम्भाला । वो सीधे मेरी ही ओर आ रही थी, उसके पीछे 12-15 लड़के 6-7 लड़कियाँ भी थीं । मुझे डर भी लग रहा था और निशा को देखने की ख़ुशी भी हो रही थी । बहुत कुछ था जो मुझे उससे जानना था । एक-एक करके सारे सवाल मन में धमाचैकड़ी कर रहे थे पर इतनी बड़ी पलटन के सामने मेरे हाथ पैर काँपनें लगे । "ओह सौरभ! कैसे हो, हो गया एडमिशन ?" निशा ने मेरे पास आकर पूछा । "जी ।" के सिवा कुछ और मेरे मुँह से न निकल सका । "ये है सौरभ, आज ही एडमिशन लिया है और ये मेरी टीम- रश्मी, पिंकी, श्वेता, राकेश, जतिन, टुईं और ये शक्ति शिकारी! चैंको मत इनके नाम की अलग कहानी है, धीरे-धीरे पता चल जायेगी ।" परिचय कराते हुए निशा ने कहा । "मुझे आज शाम दिल्ली निकलना होगा । शक्ति! सौरभ को कोई जरूरत हो तो देख लेना यार ।" बोलकर निशा आगे निकल गयी । टुईं, शक्ति शिकारी----ये क्या नाम हैं ? मैं सोच रहा था तभी मेरा फोन बजा । "दिल के टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिये---" सुनकर सभी जोर से हँस पड़े, निशा ने भी पलटकर एक नज़र मुझे देखा और मुस्कुरायी । फोन उठते ही उधर से आवाज़ आयी । "जी ।" मैंने उत्तर दिया । "तो शाम 6, साढ़े 6 बजे लंका चैराहे पर मिलो ।" मेरे "जी अंकल" बोलते ही फोन कट गया । रश्मी ने कहा- "यार सौरभ! रिंगटोन तो बहुत बढ़िया लगायी है ।" सुनकर सब खिलखिलाकर हँसने लगे । "वो कोई गाना नहींं मिल रहा था तो बस, ऐसे ही लग गयी ।" मैंने झेंपते हुए कहा । "हॉस्टल के लिए ट्राई क्योंं नहीं किया ?" मेरी बात को रोकते हुए पिंकी ने कहा । "बस ऐसे ही--"मैंनेे उत्तर दिया । "चल ठीक फिर मिलते हैं ।" शक्ति शिकारी ने कहा फिर हमने अपने फोन नंबर बदले और वो लोग आपस मैं हँसी ठिठोली करते हुए जाने लगे । "दिल के टुकड़े-टुकड़े---- हाहाहा---" मुझे उनकी धीमी-धीमी आवाज़ आ रही थी । मैं बीएचयू से बाहर आया । चैराहे के पास रोड के दोनोंेंं ओर खाने-पीने की चीजों की बहुत सी दुकानें और ठेले लगे थे । मैं कुछ खाने का प्लान बना ही रहा था तभी मेरा फोन बजा । अब मैंनेे नोकिया की डिफॉल्ट टोन लगा ली थी । "हाँ सौरभ! कहाँ हो-- ? उधर से आवाज़ आयी । "जी अंकल! महामना की मूर्र्ती के पास ही हूँ ।" ठीक बोलकर फोन कट गया । अबे क्या आदमी है ये ? पूरी बात भी नहीं सुनते । मैंनेे ख़ुद से कहा । "तुम्हारी आँटी थोड़ी मॉडर्न है ।" जी में सिर हिलाकर मैं उनके पीछे चल दिया । एक घर पर जाकर अंकल ने डोरबेल बजायी । अन्दर से एक 32-33 वर्ष की महिला ने आकर दरवाजा खोला । जिसने हल्के हरे रंग का सिंगलपीस गाउन पहना हुआ था जो काफ़ी पतला दिख रहा था । "ये तुम्हारी आँटी हैं ।" शर्मा अंकल कहते हुए कुर्र्सी पर बैठ गये और अपने जूते खोलने लगे । आँटी तो सच मैं कुछ ज्यादा ही मॉर्डन हैं । मैंने बुदबुदाते हुए ख़ुद से कहा । हालांकि मुझे शर्म से ऊपर देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी पर मैंने गौर किया कि आँटी ऐसे देख रहीं थी जैसे निगाहों से ही मेरा एक्सरे करने वाली हैं । "तो तुम सांडिल्य जी के बेटे सौरभ हो ?" उन्होंने मुझे घूरते हुए पूछा । मैंने नमस्ते करके जी में सर हिलाया । "आँटी भी गजब ही हैं ।" मैं बुदबुदाया और हाथ धुलने लगा । आलू मटर की सूखी सब्जी, अरहर दाल के साथ चपाती, अच्छे से सजाया हुआ सलाद, नमक और अचार डाइनिंग टेबल के बीच लगाया जा चुका था । मैं दो दिन बाद सुकून से खाने बैठा था । हम खाना शुरू करने ही वाले थे तभी आँटी भी हमारे साथ खाना खाने के लिए बिल्कुल मेरे बगल वाली कुर्र्सी पर बैठ गयीं । "तो सौरभ क्या करने आये हो बनारस ?" आँटी ने पूछा ।
घाट-चौरासी "रिश्तों का पोस्टमार्टम" नहीं-नहीं वो ऐसा नहीं कर सकती वो तो कितनी प्यारी है, लेकिन ? मेरे मन में फिर से सवालों का ज्वार-भाटा उठने लगा । अरे काशी विश्वनाथ जी कैसा स्वागत करे हो अपनी नगरी में! मैंने आसमान की तरफ देखकर मन में कहा । फिर जल्दी से डायरी को बैग में रखने लगा तो हाथ सेे कुछ टकराया । बैग को अच्छे से टटोला तो नोकिया एक हज़ार एक सौ के पीछे का कवर हाथ लगा । अरे ये तो मेरे फोन का है । मैंनेे बुदबुदाते हुए बैग को फिर अच्छे से चेक किया तो मेरा फोन उसी में मिला जिसकी बैटरी खुल चुकी थी साथ ही मेरा बटुआ भी उसी में कपड़ों के बीच मिल गया । ख़ुशी के कारण मैं चीख पड़ा । दुकानदार ने घूरते हुए देखा और बोला- "का बे गाँव से आये हो का, चिल्ला काहे रहे होे ?" सुनकर मैं चुप हो गया और मैंने उससे पूछा- "कानपुर के हो का-- ? "हाँ तो--- ?" उसने प्रश्न के जवाब में फिर प्रश्न किया । फोन की बैटरी लगाकर मैंने जैसे ही फोन ऑन किया तो धड़ाधड़ मेसेज आने लगे, पैंतीस मिस्ड कॉल, जो पापा और मम्मी के थे । इससे पहले मैं उन्हें फोन करता पापा का फोन आ गया । "हाँ तो तुम्हाआ फोन काहे बंद हतो ?" उधर से आवाज आयी । "कौन शर्मा अंकल ?" मैंनेे पूछा । "अरे बेई जिनकी मोड़ी तुम्हाये संघे पढ़त ती ।" मैं "जी" से ज्यादा कुछ नहीं बोल सका । "अब फोन न बंद करियो । बे तुम्हें फोन करहैं ।" "हौ ।" मैंने कहा ही था कि फोन कट गया । मेरी हालत ठीक वैसी ही थी जैसे एक साधारण परिवार के लड़के की बाप की डाँट खाने के बाद होती है । ख़ैर मैंने कपड़े बदले और चल पड़ा मिशन एडमिशन पर । कहते हैं जिस दिन किस्मत आपकी एक बार अच्छे से बजा चुकी होती है उस दिन ज्यादा दिक्कत नहीं होती इसलिए एडमिशन की सारी औपचारिकताएँ आसानी से पूरी हो गयीं । शाम के चारःपच्चीस हो रहे थे, मैं ऑफिस बिल्डिंग से निकलकर बीएचयू स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर की दुकान से समोसे लेकर अपनी भूख मिटाने की कोशिश कर रहा था तभी सामने नजर पड़ी । काली शॉर्ट कुर्र्ती, लाल पैजामी और धानी रंग की चुन्नी ओढ़े एक बेहद खूबसूरत लड़की सामने से आती दिखी । समोसा आधा मुँह के भीतर और आधा बाहर, आँखें खुली की खुली, बिना पलक झपकाये मैं उसे देखे जा रहा था । "ज्यादा घूरो मत, कूट दिये जाओगे! पंडित जी के पीछे की पलटन नहीं दिख रही क्या ?" किसी ने बड़े प्यार से मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा । मैंने जल्दी से ख़ुद को संम्भाला । वो सीधे मेरी ही ओर आ रही थी, उसके पीछे बारह-पंद्रह लड़के छः-सात लड़कियाँ भी थीं । मुझे डर भी लग रहा था और निशा को देखने की ख़ुशी भी हो रही थी । बहुत कुछ था जो मुझे उससे जानना था । एक-एक करके सारे सवाल मन में धमाचैकड़ी कर रहे थे पर इतनी बड़ी पलटन के सामने मेरे हाथ पैर काँपनें लगे । "ओह सौरभ! कैसे हो, हो गया एडमिशन ?" निशा ने मेरे पास आकर पूछा । "जी ।" के सिवा कुछ और मेरे मुँह से न निकल सका । "ये है सौरभ, आज ही एडमिशन लिया है और ये मेरी टीम- रश्मी, पिंकी, श्वेता, राकेश, जतिन, टुईं और ये शक्ति शिकारी! चैंको मत इनके नाम की अलग कहानी है, धीरे-धीरे पता चल जायेगी ।" परिचय कराते हुए निशा ने कहा । "मुझे आज शाम दिल्ली निकलना होगा । शक्ति! सौरभ को कोई जरूरत हो तो देख लेना यार ।" बोलकर निशा आगे निकल गयी । टुईं, शक्ति शिकारी----ये क्या नाम हैं ? मैं सोच रहा था तभी मेरा फोन बजा । "दिल के टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिये---" सुनकर सभी जोर से हँस पड़े, निशा ने भी पलटकर एक नज़र मुझे देखा और मुस्कुरायी । फोन उठते ही उधर से आवाज़ आयी । "जी ।" मैंने उत्तर दिया । "तो शाम छः, साढ़े छः बजे लंका चैराहे पर मिलो ।" मेरे "जी अंकल" बोलते ही फोन कट गया । रश्मी ने कहा- "यार सौरभ! रिंगटोन तो बहुत बढ़िया लगायी है ।" सुनकर सब खिलखिलाकर हँसने लगे । "वो कोई गाना नहींं मिल रहा था तो बस, ऐसे ही लग गयी ।" मैंने झेंपते हुए कहा । "हॉस्टल के लिए ट्राई क्योंं नहीं किया ?" मेरी बात को रोकते हुए पिंकी ने कहा । "बस ऐसे ही--"मैंनेे उत्तर दिया । "चल ठीक फिर मिलते हैं ।" शक्ति शिकारी ने कहा फिर हमने अपने फोन नंबर बदले और वो लोग आपस मैं हँसी ठिठोली करते हुए जाने लगे । "दिल के टुकड़े-टुकड़े---- हाहाहा---" मुझे उनकी धीमी-धीमी आवाज़ आ रही थी । मैं बीएचयू से बाहर आया । चैराहे के पास रोड के दोनोंेंं ओर खाने-पीने की चीजों की बहुत सी दुकानें और ठेले लगे थे । मैं कुछ खाने का प्लान बना ही रहा था तभी मेरा फोन बजा । अब मैंनेे नोकिया की डिफॉल्ट टोन लगा ली थी । "हाँ सौरभ! कहाँ हो-- ? उधर से आवाज़ आयी । "जी अंकल! महामना की मूर्र्ती के पास ही हूँ ।" ठीक बोलकर फोन कट गया । अबे क्या आदमी है ये ? पूरी बात भी नहीं सुनते । मैंनेे ख़ुद से कहा । "तुम्हारी आँटी थोड़ी मॉडर्न है ।" जी में सिर हिलाकर मैं उनके पीछे चल दिया । एक घर पर जाकर अंकल ने डोरबेल बजायी । अन्दर से एक बत्तीस-तैंतीस वर्ष की महिला ने आकर दरवाजा खोला । जिसने हल्के हरे रंग का सिंगलपीस गाउन पहना हुआ था जो काफ़ी पतला दिख रहा था । "ये तुम्हारी आँटी हैं ।" शर्मा अंकल कहते हुए कुर्र्सी पर बैठ गये और अपने जूते खोलने लगे । आँटी तो सच मैं कुछ ज्यादा ही मॉर्डन हैं । मैंने बुदबुदाते हुए ख़ुद से कहा । हालांकि मुझे शर्म से ऊपर देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी पर मैंने गौर किया कि आँटी ऐसे देख रहीं थी जैसे निगाहों से ही मेरा एक्सरे करने वाली हैं । "तो तुम सांडिल्य जी के बेटे सौरभ हो ?" उन्होंने मुझे घूरते हुए पूछा । मैंने नमस्ते करके जी में सर हिलाया । "आँटी भी गजब ही हैं ।" मैं बुदबुदाया और हाथ धुलने लगा । आलू मटर की सूखी सब्जी, अरहर दाल के साथ चपाती, अच्छे से सजाया हुआ सलाद, नमक और अचार डाइनिंग टेबल के बीच लगाया जा चुका था । मैं दो दिन बाद सुकून से खाने बैठा था । हम खाना शुरू करने ही वाले थे तभी आँटी भी हमारे साथ खाना खाने के लिए बिल्कुल मेरे बगल वाली कुर्र्सी पर बैठ गयीं । "तो सौरभ क्या करने आये हो बनारस ?" आँटी ने पूछा ।
Posted On: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने ग्रीनफॉरेस्ट न्यू एनर्जीज बिडको लिमिटेड द्वारा टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड में हिस्सेदारी के अधिग्रहण को मंजूरी दी। प्रस्तावित संयोजन टीपीआरईएल के आंतरिक पुनर्गठन और ग्रीनफॉरेस्ट द्वारा टीपीआरईएल की इक्विटी शेयर पूंजी के 11.43% तक के अधिग्रहण से संबंधित है। ग्रीनफॉरेस्ट न्यू एनर्जीज बिडको लिमिटेड (ग्रीनफॉरेस्ट) एक निवेश कंपनी है, जिसे ब्लैकरॉक अल्टरनेटिव्स मैनेजमेंट, एलएलसी (बीएएम) और मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी पीजेएससी (एमआईसी) द्वारा प्रस्तावित संयोजन के लिए अप्रत्यक्ष रूप से निगमित किया गया है। बीएएम ब्लैकरॉक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। ब्लैकरॉक एक अमेरिकी सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जो संस्थागत और व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए वैश्विक निवेश प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन और सलाहकार सेवाओं के क्षेत्र में सक्रिय है। ब्लैकरॉक कंपनी दुनिया भर में संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशकों की ओर से संपत्ति का प्रबंधन करती है। एमआईसी अबू धाबी सरकार की एक निवेश कंपनी है। यह ऊर्जा, उपयोगिता और अचल संपत्ति सहित विभिन्न उद्योगों में निवेश और विकास का प्रबंधन करती है। टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (टीपीआरईएल) टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (टीपीसीएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जिसके माध्यम से टीपीसीएल भारत में अपना अक्षय ऊर्जा का कारोबार करती है। टीपीआरईएल का प्रमुख कारोबार ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से बिजली उत्पादन करना है। सीसीआई का विस्तृत आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा।
Posted On: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने ग्रीनफॉरेस्ट न्यू एनर्जीज बिडको लिमिटेड द्वारा टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड में हिस्सेदारी के अधिग्रहण को मंजूरी दी। प्रस्तावित संयोजन टीपीआरईएल के आंतरिक पुनर्गठन और ग्रीनफॉरेस्ट द्वारा टीपीआरईएल की इक्विटी शेयर पूंजी के ग्यारह.तैंतालीस% तक के अधिग्रहण से संबंधित है। ग्रीनफॉरेस्ट न्यू एनर्जीज बिडको लिमिटेड एक निवेश कंपनी है, जिसे ब्लैकरॉक अल्टरनेटिव्स मैनेजमेंट, एलएलसी और मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी पीजेएससी द्वारा प्रस्तावित संयोजन के लिए अप्रत्यक्ष रूप से निगमित किया गया है। बीएएम ब्लैकरॉक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। ब्लैकरॉक एक अमेरिकी सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जो संस्थागत और व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए वैश्विक निवेश प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन और सलाहकार सेवाओं के क्षेत्र में सक्रिय है। ब्लैकरॉक कंपनी दुनिया भर में संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशकों की ओर से संपत्ति का प्रबंधन करती है। एमआईसी अबू धाबी सरकार की एक निवेश कंपनी है। यह ऊर्जा, उपयोगिता और अचल संपत्ति सहित विभिन्न उद्योगों में निवेश और विकास का प्रबंधन करती है। टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जिसके माध्यम से टीपीसीएल भारत में अपना अक्षय ऊर्जा का कारोबार करती है। टीपीआरईएल का प्रमुख कारोबार ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से बिजली उत्पादन करना है। सीसीआई का विस्तृत आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा।
लोकसभा चुनाव को अब कुछ ही दिन बांकी हैं, उससे पहले बिहार में प्रशासनिक तबादलों का दौर जारी है। इसी क्रम में आज आज भी चार IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, कई जिलों के एसपी को भी बदला गया है। भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी दीपक बर्णवाल को औरंगाबाद और सत्यप्रकाश को मधुबनी के पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं, IPS अधिकारी राकेश कुमार को बीएमपी बेगूसराय का कमांडेंट बनाया गया और रमन कुमार चौधरी आईजी के सहायक की जिम्मेवारी दी गई है। खबर लिखते वक्त ये जानकारी मिल रही है कि सूबे में 41 BDO और 99 CO का भी तबादला कर दिया गया है। शिवजी कुमार भट्ट किशनगंज के टेढ़ागाछ अंचलाधिकारी बने हैं। अर्जुन कुमार विश्वास बनमनखी के सीओ, दीपक कुमार पूर्णिया ईस्ट के सीओ, अरविंद कुमार अजीत जोकीहाट के सीओ, अनुज कुमार पूर्णिया के नगर के सीओ होंगे। आपको बता दें की बीते दिनों में राज्य सरकार के ओर से पुलिस महकमे में कई सारे फेरबदल किए गए थे। इनमें पुलिस अधीक्षक से पुलिस उप-महानिरीक्षक श्रेणी में प्रोन्नत दो आईपीएस अधिकारियों को मिली पोस्टिंग भी शामिल है। इसके अलावा पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों को बदला गया है। पटना के पूर्व में ट्रैफिक एसपी रहे पीके दास को वापस राजधानी बुलाकर सिटी एसपी (मध्य) का प्रभार दिया गया है। इससे पहले सोमवार को बिहार के पांच प्रमंडलों के प्रमंडलीय आयुक्त भी बदले गए हैं। इनमें भागलपुर, पूर्णिया, तिरहुत, सारण और कोशी प्रमंडल शामिल हैं।
लोकसभा चुनाव को अब कुछ ही दिन बांकी हैं, उससे पहले बिहार में प्रशासनिक तबादलों का दौर जारी है। इसी क्रम में आज आज भी चार IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, कई जिलों के एसपी को भी बदला गया है। भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी दीपक बर्णवाल को औरंगाबाद और सत्यप्रकाश को मधुबनी के पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं, IPS अधिकारी राकेश कुमार को बीएमपी बेगूसराय का कमांडेंट बनाया गया और रमन कुमार चौधरी आईजी के सहायक की जिम्मेवारी दी गई है। खबर लिखते वक्त ये जानकारी मिल रही है कि सूबे में इकतालीस BDO और निन्यानवे CO का भी तबादला कर दिया गया है। शिवजी कुमार भट्ट किशनगंज के टेढ़ागाछ अंचलाधिकारी बने हैं। अर्जुन कुमार विश्वास बनमनखी के सीओ, दीपक कुमार पूर्णिया ईस्ट के सीओ, अरविंद कुमार अजीत जोकीहाट के सीओ, अनुज कुमार पूर्णिया के नगर के सीओ होंगे। आपको बता दें की बीते दिनों में राज्य सरकार के ओर से पुलिस महकमे में कई सारे फेरबदल किए गए थे। इनमें पुलिस अधीक्षक से पुलिस उप-महानिरीक्षक श्रेणी में प्रोन्नत दो आईपीएस अधिकारियों को मिली पोस्टिंग भी शामिल है। इसके अलावा पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों को बदला गया है। पटना के पूर्व में ट्रैफिक एसपी रहे पीके दास को वापस राजधानी बुलाकर सिटी एसपी का प्रभार दिया गया है। इससे पहले सोमवार को बिहार के पांच प्रमंडलों के प्रमंडलीय आयुक्त भी बदले गए हैं। इनमें भागलपुर, पूर्णिया, तिरहुत, सारण और कोशी प्रमंडल शामिल हैं।
सेहतमंद रहने के लिए जितना हेल्दी खाना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि आपका ब्लड प्रेशर का सही रहना है। वैसे लोग लो या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझते हैं, वो अक्सर कई बीमारियों के शिकार होते रहते हैं। (लो ब्लड प्रेशर) Low Blood Pressure यानी हाइपरटेंशन, यह एक ऐसी परेशानी है जो किसी को भी हो सकती है और अगर समय रहते इस समस्या को कंट्रोल न किया जाए तो यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे लो ब्लड प्रेशर के लक्षण और इससे निजात पाने के कुछ तरीके जिनकी मदद से आप लो ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं। लो ब्लड प्रेशर का सबसे पहला लक्षण घबराहट होना हो सकता है। अगर आपको बैचेनी या घबराहट हो रही है तो यह लो ब्लड प्रेशर का संकेत है। अगर आपको अचानक चक्कर आने लगे हैं तो यह भी ब्लड प्रेशर लो होने का संकेत हो सकता है। अगर धीरे धीरे बेहोशी सी छा रही है, उठा नहीं जा रहा तो हो सकता है कि आपका ब्लड प्रेशर कम हो रहा है। क्योंकि अक्सर ब्लड प्रेशर लो में बेहोशी की समस्या देखी जाती है। अगर आपको चक्कर आने के साथ-साथ धुंधला दिखाई दे रहा है तो ये भी लो ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। बीपी लो होने पर आंखों पर असर पड़ता है। हालांकि ब्लड प्रेशर सामान्य होने पर ये समस्या ठीक हो जाता है। यदि आपको बिना कोई काम किए ही थकान महसूस हो रही है तो इसका संकेत होता है कि आपका बीपी लो हो रहा है। जब ब्लड प्रेशर लो होता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो ये लो ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। नमक, बीपी को कंट्रोल करने में काफी मददगार होता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी में थोड़ा नमक मिलाकर पी लें। इससे बीपी कंट्रोल होगी। अक्सर देखा जाता है कि व्रत या डाइटिंग के दौरान लो बीपी की समस्या हो जाती है। क्योंकि कम खाना खाने या भूखे रहने से भी ब्लड प्रेशर लो हो सकता है इसलिए जब भी ऐसा लगे तो तुरंत कुछ खा लें। इसके लिए एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर आधा चम्मच नमक मिलाएं और फिर इसे पी लें। नींबू-पानी के सेवन से बीपी लो होने की समस्या खत्म तो नहीं होगी लेकिन कुछ देर के लिए आपको आराम जरूर मिल सकता है। बीपी लो होने पर आप इलेक्ट्रोल का घोल बनाकर भी पी सकते हैं। इससे आराम मिल सकता है। कुछ मीठा जैसे टॉफी, चॉकलेट आदि का भी सेवन कर सकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर को सामान्य करने में मदद मिलेगी। हालांकि डायबिटीज या अन्य बीमारियां जिसमें मीठा कम खाना चाहिए, ऐसे लोग पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
सेहतमंद रहने के लिए जितना हेल्दी खाना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि आपका ब्लड प्रेशर का सही रहना है। वैसे लोग लो या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझते हैं, वो अक्सर कई बीमारियों के शिकार होते रहते हैं। Low Blood Pressure यानी हाइपरटेंशन, यह एक ऐसी परेशानी है जो किसी को भी हो सकती है और अगर समय रहते इस समस्या को कंट्रोल न किया जाए तो यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे लो ब्लड प्रेशर के लक्षण और इससे निजात पाने के कुछ तरीके जिनकी मदद से आप लो ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं। लो ब्लड प्रेशर का सबसे पहला लक्षण घबराहट होना हो सकता है। अगर आपको बैचेनी या घबराहट हो रही है तो यह लो ब्लड प्रेशर का संकेत है। अगर आपको अचानक चक्कर आने लगे हैं तो यह भी ब्लड प्रेशर लो होने का संकेत हो सकता है। अगर धीरे धीरे बेहोशी सी छा रही है, उठा नहीं जा रहा तो हो सकता है कि आपका ब्लड प्रेशर कम हो रहा है। क्योंकि अक्सर ब्लड प्रेशर लो में बेहोशी की समस्या देखी जाती है। अगर आपको चक्कर आने के साथ-साथ धुंधला दिखाई दे रहा है तो ये भी लो ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। बीपी लो होने पर आंखों पर असर पड़ता है। हालांकि ब्लड प्रेशर सामान्य होने पर ये समस्या ठीक हो जाता है। यदि आपको बिना कोई काम किए ही थकान महसूस हो रही है तो इसका संकेत होता है कि आपका बीपी लो हो रहा है। जब ब्लड प्रेशर लो होता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो ये लो ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। नमक, बीपी को कंट्रोल करने में काफी मददगार होता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी में थोड़ा नमक मिलाकर पी लें। इससे बीपी कंट्रोल होगी। अक्सर देखा जाता है कि व्रत या डाइटिंग के दौरान लो बीपी की समस्या हो जाती है। क्योंकि कम खाना खाने या भूखे रहने से भी ब्लड प्रेशर लो हो सकता है इसलिए जब भी ऐसा लगे तो तुरंत कुछ खा लें। इसके लिए एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर आधा चम्मच नमक मिलाएं और फिर इसे पी लें। नींबू-पानी के सेवन से बीपी लो होने की समस्या खत्म तो नहीं होगी लेकिन कुछ देर के लिए आपको आराम जरूर मिल सकता है। बीपी लो होने पर आप इलेक्ट्रोल का घोल बनाकर भी पी सकते हैं। इससे आराम मिल सकता है। कुछ मीठा जैसे टॉफी, चॉकलेट आदि का भी सेवन कर सकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर को सामान्य करने में मदद मिलेगी। हालांकि डायबिटीज या अन्य बीमारियां जिसमें मीठा कम खाना चाहिए, ऐसे लोग पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
इस मौके पर टेक्निकल इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स के लिए कई तरह के कांपटीटिव टेस्ट आर्गनाइज की गई, जिसमें स्टूडेंट्स ने टेस्ट के बाद अपनी एबिलिटी को जाना। टेक्सप्लोर का शुभारंभ गेस्ट ऑफ ऑनर पद्मश्री और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, कोलकाता के एक्स डायरेक्टर संकर कुमार पाल ने की। उन्होंने कहा कि हार्ड वर्क का कोई अल्टरनेटिव नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कॉलेज का सबसे बड़ा दायित्व नॉलेज देना है, न कि प्लेसमेंट। अच्छे कॉलेज का आंकलन उसके नॉलेज सिस्टम से ही होना चाहिए। टेक्निोलॉजी के एज में यूथ को अपडेट रहना बेहद जरूरी है। इसी फोकस के साथ आईआईटी पटना में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिक एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स यानी आई ट्रिपल ई की स्टूडेंट ब्रांच खोली गई है। इसके चेयरमैन विक्रम सिंह ने बताया कि टेक्सप्लोर का पर्पस है बिहार रीजन में टेक्निकल नॉलेज के प्रति स्टॅूडेंट्स का पार्टिसिपेशन बढ़ाना। वर्कशॉप के बाद उन्होंने बताया कि इसमें एनआईटी, बीआईटी, पटना यूनिवर्सिटी, मगध महिला कॉलेज, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ बिहार सहित पटना से बाहर के भी कई कॉलेजों के टेक्निकल कोर्सेज के करीब दो सौ से अधिक स्टूडेंट्स ने पार्टिसिपेट किया। हर टीम में दो स्टूडेंट्स थे, इसमें करीब सौ टीमों ने हिस्सा लिया। -कोर कोड-यह कम्प्यूटर लैंगवेज पर बेस्ट था। -नेरॉन टविस्टर्ज- इसमेंं साइंस इसूज पर जीके था। -क्वेस्ट टू ग्लोरी- यह बेसिकली इंटरनेट के यूआरएल एड्रेस पर पजल गेम था। -स्पेलूनियर- कैंपस के अलग-अलग हिस्सों में चॉकलेट और कुछ अदर चीजें हाइड की गई थीं। स्टूडेंट्स को इसे सर्च करना था। लाइनेक्स वर्कशॉप- इसमें लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकारी दी गई। इस फेस्ट में पार्टिसिपेट करने वाले स्टूडेंट्स कई कॉलेजों के थे। टेस्ट के बाद कई स्टूडेंट्स ने अपनी एक्सपीरिएंस शेयर की। सबके एक्सपीरिएंस में सबसे कॉमन बात रही कि टेस्ट का अच्छा स्टैंडर्ड था। मैक्सिमम क्वेश्चन प्वांइर और स्ट्रक्चर से था। टेस्ट से पता चला कि हमें अपने नॉलेज में और डेप्थ लाने की जरूरत है। इससे हमें काम्पटीटिव एग्जाम में भी हेल्प मिलेगी। क्वेश्चन टफ था। हमलोग टीम में डिस्कस करके टेस्ट दे रहे थे। मैं तो अभी और तैयारी करूंगी। प्रज्ञा भारती, बीसीए पार्ट वन, मगध महिला कॉलेज। इस टेस्ट में सीखने को बहुत कुछ मिला। आगे एग्जाम देने के लिए इससे हेल्प मिलेगी। शुभाकर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पार्ट वन, आईआईटीपी, इस टेस्ट में वेराइटी थी, पर गेट जैसे एग्जाम के लिए यह अच्छा रिहर्सल था। इसे और इम्प्रूव करने की कोशिश करूंगा।
इस मौके पर टेक्निकल इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स के लिए कई तरह के कांपटीटिव टेस्ट आर्गनाइज की गई, जिसमें स्टूडेंट्स ने टेस्ट के बाद अपनी एबिलिटी को जाना। टेक्सप्लोर का शुभारंभ गेस्ट ऑफ ऑनर पद्मश्री और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, कोलकाता के एक्स डायरेक्टर संकर कुमार पाल ने की। उन्होंने कहा कि हार्ड वर्क का कोई अल्टरनेटिव नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कॉलेज का सबसे बड़ा दायित्व नॉलेज देना है, न कि प्लेसमेंट। अच्छे कॉलेज का आंकलन उसके नॉलेज सिस्टम से ही होना चाहिए। टेक्निोलॉजी के एज में यूथ को अपडेट रहना बेहद जरूरी है। इसी फोकस के साथ आईआईटी पटना में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिक एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स यानी आई ट्रिपल ई की स्टूडेंट ब्रांच खोली गई है। इसके चेयरमैन विक्रम सिंह ने बताया कि टेक्सप्लोर का पर्पस है बिहार रीजन में टेक्निकल नॉलेज के प्रति स्टॅूडेंट्स का पार्टिसिपेशन बढ़ाना। वर्कशॉप के बाद उन्होंने बताया कि इसमें एनआईटी, बीआईटी, पटना यूनिवर्सिटी, मगध महिला कॉलेज, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ बिहार सहित पटना से बाहर के भी कई कॉलेजों के टेक्निकल कोर्सेज के करीब दो सौ से अधिक स्टूडेंट्स ने पार्टिसिपेट किया। हर टीम में दो स्टूडेंट्स थे, इसमें करीब सौ टीमों ने हिस्सा लिया। -कोर कोड-यह कम्प्यूटर लैंगवेज पर बेस्ट था। -नेरॉन टविस्टर्ज- इसमेंं साइंस इसूज पर जीके था। -क्वेस्ट टू ग्लोरी- यह बेसिकली इंटरनेट के यूआरएल एड्रेस पर पजल गेम था। -स्पेलूनियर- कैंपस के अलग-अलग हिस्सों में चॉकलेट और कुछ अदर चीजें हाइड की गई थीं। स्टूडेंट्स को इसे सर्च करना था। लाइनेक्स वर्कशॉप- इसमें लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकारी दी गई। इस फेस्ट में पार्टिसिपेट करने वाले स्टूडेंट्स कई कॉलेजों के थे। टेस्ट के बाद कई स्टूडेंट्स ने अपनी एक्सपीरिएंस शेयर की। सबके एक्सपीरिएंस में सबसे कॉमन बात रही कि टेस्ट का अच्छा स्टैंडर्ड था। मैक्सिमम क्वेश्चन प्वांइर और स्ट्रक्चर से था। टेस्ट से पता चला कि हमें अपने नॉलेज में और डेप्थ लाने की जरूरत है। इससे हमें काम्पटीटिव एग्जाम में भी हेल्प मिलेगी। क्वेश्चन टफ था। हमलोग टीम में डिस्कस करके टेस्ट दे रहे थे। मैं तो अभी और तैयारी करूंगी। प्रज्ञा भारती, बीसीए पार्ट वन, मगध महिला कॉलेज। इस टेस्ट में सीखने को बहुत कुछ मिला। आगे एग्जाम देने के लिए इससे हेल्प मिलेगी। शुभाकर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पार्ट वन, आईआईटीपी, इस टेस्ट में वेराइटी थी, पर गेट जैसे एग्जाम के लिए यह अच्छा रिहर्सल था। इसे और इम्प्रूव करने की कोशिश करूंगा।
कश्मीर में आम लोगों से बात करना जरूरी है, न कि हुर्रियत से। घाटी में हुर्रियत और अलगाववादियों का कोई वजूद नहीं है। यह बात घाटी पहुंचे सिविल सोसाइटी के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कही। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
कश्मीर में आम लोगों से बात करना जरूरी है, न कि हुर्रियत से। घाटी में हुर्रियत और अलगाववादियों का कोई वजूद नहीं है। यह बात घाटी पहुंचे सिविल सोसाइटी के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कही। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
न्यूयार्क। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और चयन समिति के प्रमुख रहे कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा कि मौजूदा कप्तान विराट कोहली कभी जिम्मेदारी से भागता नहीं जो अच्छे कप्तान के लक्षण हैं और वह महेंद्र सिंह धोनी के साथ मिलकर भारत को विश्व कप दिला सकते हैं। भारत की 1983 विश्व कप विजेता टीम के अहम सदस्य रहे श्रीकांत 2011 में चयन समिति के भी प्रमुख थे जब भारत ने 28 साल बाद विश्व कप जीता। उनका मानना है कि कोहली की आक्रामकता और महेंद्र सिंह धोनी का शांतचित्त रवैया भारत को फिर विश्व कप दिला सकता है। उन्होंने कहा की हमारे पास विराट कोहली के रूप में शानदार कप्तान है जो मोर्चे से अगुवाई करता है। उसके बारे में अच्छी बात यह है कि वह जिम्मेदारी लेता है। किंग कोहली और कूल धोनी मिलकर भारत को फिर विश्व कप दिला सकते हैं। श्रीकांत ने विश्व कप के लिये भारत की 15 सदस्यीय टीम पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह टीम खिताब जीतने का माद्दा रखती है। उन्होंने कहा की यह जुनून, शांतचित्त रवैया और दबाव को झेलने की ताकत सब कुछ रखती है। भारतीय टीम को खुद पर भरोसा रखकर बिना किसी दबाव के खेलना चाहिये। उन्होंने कहा की जब आत्मविश्वास की बात करते हैं तो कपिल देव याद आते हैं, जुनून के लिये सचिन तेंदुलकर, आक्रामकता के लिये विराट कोहली और दृढता के लिये एम एस धोनी। श्रीकांत यहां यूनिसेफ के साथ आईसीसी के क्रिकेट फोर गुड कार्यक्रम 'वन डे फोर चिल्ड्रन' के लिये मौजूद थे।
न्यूयार्क। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और चयन समिति के प्रमुख रहे कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा कि मौजूदा कप्तान विराट कोहली कभी जिम्मेदारी से भागता नहीं जो अच्छे कप्तान के लक्षण हैं और वह महेंद्र सिंह धोनी के साथ मिलकर भारत को विश्व कप दिला सकते हैं। भारत की एक हज़ार नौ सौ तिरासी विश्व कप विजेता टीम के अहम सदस्य रहे श्रीकांत दो हज़ार ग्यारह में चयन समिति के भी प्रमुख थे जब भारत ने अट्ठाईस साल बाद विश्व कप जीता। उनका मानना है कि कोहली की आक्रामकता और महेंद्र सिंह धोनी का शांतचित्त रवैया भारत को फिर विश्व कप दिला सकता है। उन्होंने कहा की हमारे पास विराट कोहली के रूप में शानदार कप्तान है जो मोर्चे से अगुवाई करता है। उसके बारे में अच्छी बात यह है कि वह जिम्मेदारी लेता है। किंग कोहली और कूल धोनी मिलकर भारत को फिर विश्व कप दिला सकते हैं। श्रीकांत ने विश्व कप के लिये भारत की पंद्रह सदस्यीय टीम पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह टीम खिताब जीतने का माद्दा रखती है। उन्होंने कहा की यह जुनून, शांतचित्त रवैया और दबाव को झेलने की ताकत सब कुछ रखती है। भारतीय टीम को खुद पर भरोसा रखकर बिना किसी दबाव के खेलना चाहिये। उन्होंने कहा की जब आत्मविश्वास की बात करते हैं तो कपिल देव याद आते हैं, जुनून के लिये सचिन तेंदुलकर, आक्रामकता के लिये विराट कोहली और दृढता के लिये एम एस धोनी। श्रीकांत यहां यूनिसेफ के साथ आईसीसी के क्रिकेट फोर गुड कार्यक्रम 'वन डे फोर चिल्ड्रन' के लिये मौजूद थे।
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि किसी लाचारी की हालत में बच्चियों ने जिस जगह पर आश्रय लिया हुआ था, वह उनके लिए शोषण और यातना का नया स्थल साबित होगी! खासतौर पर जब वह आश्रय स्थल सरकारी मदद से चल रहा हो तो यह सवाल ज्यादा गंभीर हो जाता है। बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकारी मदद से संचालित 'बालिका गृह' में सैंतालीस बच्चियां रह रही थीं और वहां उनमें से ज्यादातर से बलात्कार किया गया और यातनाएं दी गर्इं। खबरों के मुताबिक अगर किसी बच्ची ने कभी विरोध किया तो उसे बेरहमी से पीटा गया और आरोप यहां तक आए हैं कि एक बच्ची की हत्या करके वहीं दफना दिया गया। कई बच्चियों के शरीर पर जलने के निशान हैं। पुलिस की जांच में छह बच्चियों के गायब होने की भी खबर सामने आई है। अपने हालात से लड़ती बच्चियों के साथ यह अत्याचार शायद चुपचाप चलता रहता, अगर 'टिस' यानी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने उस बालिका गृह का सोशल ऑडिट नहीं किया होता। यानी उसी जांच के दौरान वहां की बच्चियों ने अपने यौन शोषण और अत्याचार के बारे में जानकारी साझा की। उससे पहले तक उन्हें डरा-धमका कर चुप रखा गया था। गौरतलब है कि बिहार सरकार के समाज कल्याण महकमे की ओर से 'टिस' राज्य में महिलाओं और बच्चियों के लिए बनाए गए सभी एक सौ दस आश्रय स्थलों का सोशल ऑडिट कर रहा था। सरकारी मदद से चलने वाले किसी संगठन या आश्रय स्थल में यह कैसी व्यवस्था है कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चियों के खिलाफ अपराध होता रहा और उसके बारे में किसी को खबर तक नहीं हुई? मई महीने में ही इंस्टीट्यूट ने जांच में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका-गृह में बड़े पैमाने पर यौन शोषण के मामले दर्ज किए थे। उसके बाद बालिका गृह को बंद कर दिया गया था और उसमें रह रही बच्चियों को दूसरे आश्रय स्थलों में भेज दिया गया था। लेकिन जिस तरह की खबरें आई हैं, उनके मुताबिक 'टिस' की रिपोर्ट में राज्य में स्थित अलग-अलग आश्रय स्थलों में रहने वाली महिलाओं या बच्चियों के यौन शोषण के आरोप सामने आए हैं। फिर क्या गारंटी है कि नए आश्रय स्थलों में बच्चियां सुरक्षित होंगी? जाहिर है, यह न केवल संचालकों की मिलीभगत से चलने वाला संगठित अपराध लगता है, बल्कि प्रशासन और संबंधित महकमे की घोर लापरवाही भी कि इतने वक्त से उस आश्रय स्थल में बच्चियों का बलात्कार हो रहा था और सारे मामले दबाए जाते रहे। आखिर किस स्तर से ऐसी भयानक लापरवाही बरती गई कि बच्चियों ने जहां शरण ली हुई थी, वही उनके लिए खौफ की नई जगह बन गई। यह समझना मुश्किल है कि जिन बच्चियों और महिलाओं को अपने जीवन की मुश्किल स्थितियों का सामना करने के लिए सरकारी मदद से चलने वाले आश्रय स्थलों में रखा जाता है, उन्हें नई त्रासदी में कैसे झोंक दिया गया! अब अगर सरकार पर ऐसे आरोप लग रहे हैं कि वह इस समूची घटना में शामिल रसूख वाले लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है तो इसकी क्या वजह है? बिहार की मौजूदा सरकार ने अक्सर कानून और व्यवस्था के मोर्चे पर कोई समझौता नहीं करने का दावा किया है। लेकिन पिछले कुछ समय से बिहार में अपराधों का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा है, उससे उन दावों की हकीकत साफ नजर आती है। मुजफ्फरपुर की घटना से यह साफ है कि आश्रय स्थलों को लेकर एक सुगठित तंत्र के साथ निगरानी की नियमित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वहां रह रही बच्चियां या महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें!
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि किसी लाचारी की हालत में बच्चियों ने जिस जगह पर आश्रय लिया हुआ था, वह उनके लिए शोषण और यातना का नया स्थल साबित होगी! खासतौर पर जब वह आश्रय स्थल सरकारी मदद से चल रहा हो तो यह सवाल ज्यादा गंभीर हो जाता है। बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकारी मदद से संचालित 'बालिका गृह' में सैंतालीस बच्चियां रह रही थीं और वहां उनमें से ज्यादातर से बलात्कार किया गया और यातनाएं दी गर्इं। खबरों के मुताबिक अगर किसी बच्ची ने कभी विरोध किया तो उसे बेरहमी से पीटा गया और आरोप यहां तक आए हैं कि एक बच्ची की हत्या करके वहीं दफना दिया गया। कई बच्चियों के शरीर पर जलने के निशान हैं। पुलिस की जांच में छह बच्चियों के गायब होने की भी खबर सामने आई है। अपने हालात से लड़ती बच्चियों के साथ यह अत्याचार शायद चुपचाप चलता रहता, अगर 'टिस' यानी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने उस बालिका गृह का सोशल ऑडिट नहीं किया होता। यानी उसी जांच के दौरान वहां की बच्चियों ने अपने यौन शोषण और अत्याचार के बारे में जानकारी साझा की। उससे पहले तक उन्हें डरा-धमका कर चुप रखा गया था। गौरतलब है कि बिहार सरकार के समाज कल्याण महकमे की ओर से 'टिस' राज्य में महिलाओं और बच्चियों के लिए बनाए गए सभी एक सौ दस आश्रय स्थलों का सोशल ऑडिट कर रहा था। सरकारी मदद से चलने वाले किसी संगठन या आश्रय स्थल में यह कैसी व्यवस्था है कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चियों के खिलाफ अपराध होता रहा और उसके बारे में किसी को खबर तक नहीं हुई? मई महीने में ही इंस्टीट्यूट ने जांच में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका-गृह में बड़े पैमाने पर यौन शोषण के मामले दर्ज किए थे। उसके बाद बालिका गृह को बंद कर दिया गया था और उसमें रह रही बच्चियों को दूसरे आश्रय स्थलों में भेज दिया गया था। लेकिन जिस तरह की खबरें आई हैं, उनके मुताबिक 'टिस' की रिपोर्ट में राज्य में स्थित अलग-अलग आश्रय स्थलों में रहने वाली महिलाओं या बच्चियों के यौन शोषण के आरोप सामने आए हैं। फिर क्या गारंटी है कि नए आश्रय स्थलों में बच्चियां सुरक्षित होंगी? जाहिर है, यह न केवल संचालकों की मिलीभगत से चलने वाला संगठित अपराध लगता है, बल्कि प्रशासन और संबंधित महकमे की घोर लापरवाही भी कि इतने वक्त से उस आश्रय स्थल में बच्चियों का बलात्कार हो रहा था और सारे मामले दबाए जाते रहे। आखिर किस स्तर से ऐसी भयानक लापरवाही बरती गई कि बच्चियों ने जहां शरण ली हुई थी, वही उनके लिए खौफ की नई जगह बन गई। यह समझना मुश्किल है कि जिन बच्चियों और महिलाओं को अपने जीवन की मुश्किल स्थितियों का सामना करने के लिए सरकारी मदद से चलने वाले आश्रय स्थलों में रखा जाता है, उन्हें नई त्रासदी में कैसे झोंक दिया गया! अब अगर सरकार पर ऐसे आरोप लग रहे हैं कि वह इस समूची घटना में शामिल रसूख वाले लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है तो इसकी क्या वजह है? बिहार की मौजूदा सरकार ने अक्सर कानून और व्यवस्था के मोर्चे पर कोई समझौता नहीं करने का दावा किया है। लेकिन पिछले कुछ समय से बिहार में अपराधों का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा है, उससे उन दावों की हकीकत साफ नजर आती है। मुजफ्फरपुर की घटना से यह साफ है कि आश्रय स्थलों को लेकर एक सुगठित तंत्र के साथ निगरानी की नियमित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वहां रह रही बच्चियां या महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें!
इसके सिवा प्रथम श्लोककी व्याख्या करते हुए जहाँ 'ताः' शब्दसे ज्ञानीरूपा प्रजा ग्रहण की गयी है, वहाँपर यह समझना चाहिये कि जिस समय भगवान् श्रीकृष्णने ज्ञानियोंके विवेकी अन्तःकरणरूप अरण्यमें रमण करनेकी इच्छा की 'तदैव' - उसी समय 'उडुराजः ' परमात्मारूप चन्द्रका उनके विवेकी अन्तःकरणरूप वृन्दारण्यमें श्रुतिरूपा व्रजांगनाओंके साथ रमण करनेके लिये उदय हुआ । यहाँ 'उडुराजः ' शब्दका तात्पर्य ऐसा समझना चाहिये - 'उडुस्थानीयेषु परिमितज्ञानक्रियादिशक्तिशीलेषु जीवेषु राजते इति उडुराजः' अर्थात् परमात्मारूप चन्द्र उडुस्थानीय परिमित ज्ञानक्रियादिशील जीवोंमें राजमान हैं, इसलिये उडुराज हैं। जीवोंकी उपाधि मलिन है, इसीसे उनकी ज्ञान-शक्ति और क्रिया - शक्ति अभिभूत रहती है। उनकी शक्ति परिच्छिन्न है । अतः उन्हें विषयके साथ इन्द्रियोंका सन्निकर्ष होनेपर ही कुछ ज्ञान होता है। प्रमाण-निरपेक्ष ज्ञान नहीं होता; क्योंकि सारे प्रमाण आवरणके अभिभावक हैं। किंतु परमात्माकी ज्ञानशक्ति और क्रिया-शक्ति अपरिच्छिन्न हैं, उनकी उपाधिभूता लीलाशक्ति भी परम विशुद्धा है। अतः वह अपने आश्रय परमात्माका आवरण नहीं करती; इसलिये परमात्माकी स्वाभाविकी ज्ञानशक्ति और क्रिया-शक्ति अपनी उपाधिसे अनभिभूता होनेके कारण किसी प्रकारके प्रमाणकी अपेक्षा नहीं रखती। इस प्रकार प्रमाणानपेक्ष ज्ञान क्रियावान् होनेके कारण ही परमात्मा अन्य जीवोंकी अपेक्षा अधिक राजमान (शोभाशाली) है और इसीसे जीवरूप उडुओंकी अपेक्षासे उसे उडुराज कहा है। अथवा यों समझो कि घटाकाशस्थानीय जीव उडुके समान हैं और महाकाशरूप परमात्मा नियन्तृत्वेन जीवोंमें विराजमान है। यह नियन्तृत्व ऐसा है कि जैसे घटाकाश महाकाशके अधीन है, उसी प्रकार अन्तःकरणावच्छिन्न चैतन्य परमेश्वरके अधीन है। इसीसे अभेद होते हुए भी नियमन बन जाता है अथवा जैसे प्रतिबिम्ब बिम्बाधीन हैं, उसी प्रकार जीव ईश्वरके अधीन हैं। इस प्रकार भी वह उडुराज है। अथवा 'रलयोः डलयोश्चैव' आदि नियमके अनुसार 'उडुराजः ' के स्थानमें 'उरुराजः' मानें तो यों समझना चाहिये - 'उरुधा जीवेशादिरूपेण बहुधा राजत इति 'उरुराजः' अर्थात् जीव-ईश्वरादिरूपसे अनेक प्रकार राजमान है, इसलिये परमात्मा उरुराज है; जैसे कि कहा है- 'इन्द्रो मायाभिः पुरुरूप ईयते ।' (बृहदारण्यक० २।५ । १९) अथवा सगुणनिर्गुणरूपसे अनेक प्रकार राजमान है, इसलिये उरुराज है; या जायमान और अजायमानरूपसे राजमान है, इसलिये उरुराज है; जैसा कि श्रुति कहती है'अजायमानो बहुधा विजायते' (मुद्गलोपनिषद् २) अर्थात् अजन्मा होनेपर भी परमात्मा महदादिरूपसे अनेक प्रकार उत्पन्न हुआ है अथवा रासलीलामें वे अनेक रूपसे राजमान हुए थे, इसलिये उरुराज हैं। श्रुति भी कहती है - 'स एकधा भवति दशधा भवति शतधा सहस्रधा भवति' इत्यादि । अथवा बहुतसे विभक्त पदार्थोंमें अविभक्तरूपसे अकेला ही विराजमान है, इसलिये परमात्मा उरुराज है। 'अविभक्तं विभक्तेषु' अर्थात् विभक्त जो कार्यवर्ग उसमें परमात्मा अविभक्त यानी कारणरूपसे स्थित है; अथवा विभक्त जो साक्ष्यवर्ग उसमें वह अविभक्त यानी साक्षीरूपसे स्थित है; या ऐसा समझो कि विभक्त जो काल्पनिक प्रपंच उसमें वह अधिष्ठानरूपसे ओतप्रोत है। इन्हीं सब कारणोंसे परमात्मा उरुराज यानी उडुराज है । वह स्वप्रकाश पूर्ण परब्रह्म परमात्मा, जो सबका महाकारण और स्वरूपतः कार्यकारणातीत है, ज्ञानियों के विवेकी अन्तःकरणरूप अरण्यमें रमण करनेके लिये आविर्भूत हुआ। यहाँ 'रमण' का अर्थ है 'तत्' पदार्थके साथ 'त्वं' पदार्थका ऐक्य हो जाना । जो अन्तःकरण विवेकचन्द्रकी शीतल सुकोमल अमृतमय किरणोंसे सुशोभित है, उस अन्तःकरणरूप वृन्दारण्यमें यह 'तत्' पदार्थरूप भगवान् 'त्वं' पदके अर्थभूत अनन्त जीवरूप व्रजांगनाओंके साथ रमण करनेको अर्थात्
इसके सिवा प्रथम श्लोककी व्याख्या करते हुए जहाँ 'ताः' शब्दसे ज्ञानीरूपा प्रजा ग्रहण की गयी है, वहाँपर यह समझना चाहिये कि जिस समय भगवान् श्रीकृष्णने ज्ञानियोंके विवेकी अन्तःकरणरूप अरण्यमें रमण करनेकी इच्छा की 'तदैव' - उसी समय 'उडुराजः ' परमात्मारूप चन्द्रका उनके विवेकी अन्तःकरणरूप वृन्दारण्यमें श्रुतिरूपा व्रजांगनाओंके साथ रमण करनेके लिये उदय हुआ । यहाँ 'उडुराजः ' शब्दका तात्पर्य ऐसा समझना चाहिये - 'उडुस्थानीयेषु परिमितज्ञानक्रियादिशक्तिशीलेषु जीवेषु राजते इति उडुराजः' अर्थात् परमात्मारूप चन्द्र उडुस्थानीय परिमित ज्ञानक्रियादिशील जीवोंमें राजमान हैं, इसलिये उडुराज हैं। जीवोंकी उपाधि मलिन है, इसीसे उनकी ज्ञान-शक्ति और क्रिया - शक्ति अभिभूत रहती है। उनकी शक्ति परिच्छिन्न है । अतः उन्हें विषयके साथ इन्द्रियोंका सन्निकर्ष होनेपर ही कुछ ज्ञान होता है। प्रमाण-निरपेक्ष ज्ञान नहीं होता; क्योंकि सारे प्रमाण आवरणके अभिभावक हैं। किंतु परमात्माकी ज्ञानशक्ति और क्रिया-शक्ति अपरिच्छिन्न हैं, उनकी उपाधिभूता लीलाशक्ति भी परम विशुद्धा है। अतः वह अपने आश्रय परमात्माका आवरण नहीं करती; इसलिये परमात्माकी स्वाभाविकी ज्ञानशक्ति और क्रिया-शक्ति अपनी उपाधिसे अनभिभूता होनेके कारण किसी प्रकारके प्रमाणकी अपेक्षा नहीं रखती। इस प्रकार प्रमाणानपेक्ष ज्ञान क्रियावान् होनेके कारण ही परमात्मा अन्य जीवोंकी अपेक्षा अधिक राजमान है और इसीसे जीवरूप उडुओंकी अपेक्षासे उसे उडुराज कहा है। अथवा यों समझो कि घटाकाशस्थानीय जीव उडुके समान हैं और महाकाशरूप परमात्मा नियन्तृत्वेन जीवोंमें विराजमान है। यह नियन्तृत्व ऐसा है कि जैसे घटाकाश महाकाशके अधीन है, उसी प्रकार अन्तःकरणावच्छिन्न चैतन्य परमेश्वरके अधीन है। इसीसे अभेद होते हुए भी नियमन बन जाता है अथवा जैसे प्रतिबिम्ब बिम्बाधीन हैं, उसी प्रकार जीव ईश्वरके अधीन हैं। इस प्रकार भी वह उडुराज है। अथवा 'रलयोः डलयोश्चैव' आदि नियमके अनुसार 'उडुराजः ' के स्थानमें 'उरुराजः' मानें तो यों समझना चाहिये - 'उरुधा जीवेशादिरूपेण बहुधा राजत इति 'उरुराजः' अर्थात् जीव-ईश्वरादिरूपसे अनेक प्रकार राजमान है, इसलिये परमात्मा उरुराज है; जैसे कि कहा है- 'इन्द्रो मायाभिः पुरुरूप ईयते ।' अथवा सगुणनिर्गुणरूपसे अनेक प्रकार राजमान है, इसलिये उरुराज है; या जायमान और अजायमानरूपसे राजमान है, इसलिये उरुराज है; जैसा कि श्रुति कहती है'अजायमानो बहुधा विजायते' अर्थात् अजन्मा होनेपर भी परमात्मा महदादिरूपसे अनेक प्रकार उत्पन्न हुआ है अथवा रासलीलामें वे अनेक रूपसे राजमान हुए थे, इसलिये उरुराज हैं। श्रुति भी कहती है - 'स एकधा भवति दशधा भवति शतधा सहस्रधा भवति' इत्यादि । अथवा बहुतसे विभक्त पदार्थोंमें अविभक्तरूपसे अकेला ही विराजमान है, इसलिये परमात्मा उरुराज है। 'अविभक्तं विभक्तेषु' अर्थात् विभक्त जो कार्यवर्ग उसमें परमात्मा अविभक्त यानी कारणरूपसे स्थित है; अथवा विभक्त जो साक्ष्यवर्ग उसमें वह अविभक्त यानी साक्षीरूपसे स्थित है; या ऐसा समझो कि विभक्त जो काल्पनिक प्रपंच उसमें वह अधिष्ठानरूपसे ओतप्रोत है। इन्हीं सब कारणोंसे परमात्मा उरुराज यानी उडुराज है । वह स्वप्रकाश पूर्ण परब्रह्म परमात्मा, जो सबका महाकारण और स्वरूपतः कार्यकारणातीत है, ज्ञानियों के विवेकी अन्तःकरणरूप अरण्यमें रमण करनेके लिये आविर्भूत हुआ। यहाँ 'रमण' का अर्थ है 'तत्' पदार्थके साथ 'त्वं' पदार्थका ऐक्य हो जाना । जो अन्तःकरण विवेकचन्द्रकी शीतल सुकोमल अमृतमय किरणोंसे सुशोभित है, उस अन्तःकरणरूप वृन्दारण्यमें यह 'तत्' पदार्थरूप भगवान् 'त्वं' पदके अर्थभूत अनन्त जीवरूप व्रजांगनाओंके साथ रमण करनेको अर्थात्
गोंडा. वैसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की लापरवाहियों के कई किस्से आपने पहले सुन रखे होंगे। लेकिन अवध विश्वविद्यालय ने जो कारनामा इस बार किया है उससे तो खुद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल विश्वविद्यालय की तरफ से एक छात्र को परीक्षा के लिए जो एडमिट कार्ड जारी किया गया है उसमें उसकी फोटो नहीं, बल्कि उसकी जगह अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगा दी। अवध विश्वविद्यालय का यह अजब गजब कारनामा मीडिया की जानकारी में आने के बाद चारों तरफ चर्चा का विषय बन गया। दरअसल ये पूरा मामला डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से संबद्ध रवींद्र सिंह स्मारक महाविद्यालय, गोंडा जे जुड़ा है। जहां बी. एड. सेकेंड ईयर के छात्र अमित कुमार द्विवेदी को परीक्षा के लिए जो एडमिट कार्ड मिला है उसमें उसकी जगह अमिताभ बच्चन की फोटो लगी है। अमिताभ की फोटो लगा एडमिट कार्ड देखने के बाद छात्र भी हैरान रह गया और उसने आनन-फानन में इसकी जानकारी अपने कॉलेज प्रबंधन को दी। वहीं छात्र अमित कुमार द्विवेदी की परीक्षा न छूटे इसके लिए वहीं कॉलेज प्रबंधन ने अवध विश्वविद्यालय को एक पत्र भेजकर इस लापरवाही की जानकारी दी। जिसके बाद अवध विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया। अवध विश्वविद्यालय और केन्द्र प्रभारी ने समस्या देखते हुए अमित को परीक्षा देने की अनुमति दी। जिसके बाद अमित कुमार द्विवेदी बीएड सेकेंड ईयर का एग्जाम दे सका। वहीं छात्र को डर है कि उसके ऐडमिट कार्ड की तरह कहीं मार्कशीट और दूसरे प्रमाणपत्रों में भी अमिताभ बच्चन खी फोटो न लग जाए। वहीं छात्र अमित कुमार द्विवेदी के एडमिट कार्ड पर अमिताभ बच्चन की फोटो आना चारों तरफ चर्चा बना रहा और लोगों ने इसको लेकर काफी मजाक भी बनाया। वहीं विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने इसे क्लर्क लेवेल की चूक बताकर मामले से पल्ला झाड़ लिया है। वहीं छात्र अमित कुमार द्विवेदी ने बताया कि ने बताया कि 1 सितम्बर से उसके बीएड के एग्जाम होने थे। परीक्षा केंद्र लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय गोण्डा में था, लेकिन मेरे एडमिट कार्ड पर फोटो और सिग्नेचर की जगह अमिताभ बच्चन की फोटो थी। जिसको लेकर वह काफी डरा और हैरान था।
गोंडा. वैसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद की लापरवाहियों के कई किस्से आपने पहले सुन रखे होंगे। लेकिन अवध विश्वविद्यालय ने जो कारनामा इस बार किया है उससे तो खुद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल विश्वविद्यालय की तरफ से एक छात्र को परीक्षा के लिए जो एडमिट कार्ड जारी किया गया है उसमें उसकी फोटो नहीं, बल्कि उसकी जगह अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगा दी। अवध विश्वविद्यालय का यह अजब गजब कारनामा मीडिया की जानकारी में आने के बाद चारों तरफ चर्चा का विषय बन गया। दरअसल ये पूरा मामला डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से संबद्ध रवींद्र सिंह स्मारक महाविद्यालय, गोंडा जे जुड़ा है। जहां बी. एड. सेकेंड ईयर के छात्र अमित कुमार द्विवेदी को परीक्षा के लिए जो एडमिट कार्ड मिला है उसमें उसकी जगह अमिताभ बच्चन की फोटो लगी है। अमिताभ की फोटो लगा एडमिट कार्ड देखने के बाद छात्र भी हैरान रह गया और उसने आनन-फानन में इसकी जानकारी अपने कॉलेज प्रबंधन को दी। वहीं छात्र अमित कुमार द्विवेदी की परीक्षा न छूटे इसके लिए वहीं कॉलेज प्रबंधन ने अवध विश्वविद्यालय को एक पत्र भेजकर इस लापरवाही की जानकारी दी। जिसके बाद अवध विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया। अवध विश्वविद्यालय और केन्द्र प्रभारी ने समस्या देखते हुए अमित को परीक्षा देने की अनुमति दी। जिसके बाद अमित कुमार द्विवेदी बीएड सेकेंड ईयर का एग्जाम दे सका। वहीं छात्र को डर है कि उसके ऐडमिट कार्ड की तरह कहीं मार्कशीट और दूसरे प्रमाणपत्रों में भी अमिताभ बच्चन खी फोटो न लग जाए। वहीं छात्र अमित कुमार द्विवेदी के एडमिट कार्ड पर अमिताभ बच्चन की फोटो आना चारों तरफ चर्चा बना रहा और लोगों ने इसको लेकर काफी मजाक भी बनाया। वहीं विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने इसे क्लर्क लेवेल की चूक बताकर मामले से पल्ला झाड़ लिया है। वहीं छात्र अमित कुमार द्विवेदी ने बताया कि ने बताया कि एक सितम्बर से उसके बीएड के एग्जाम होने थे। परीक्षा केंद्र लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय गोण्डा में था, लेकिन मेरे एडमिट कार्ड पर फोटो और सिग्नेचर की जगह अमिताभ बच्चन की फोटो थी। जिसको लेकर वह काफी डरा और हैरान था।
को बढ़ाओ और परिपक्क चोर्यो से सन्तान उत्पन्न करो । श्राप लोग ( सोमस्य ) सोम अर्थात् राजा के पद को ( दात्रम् ) प्रदान करने में समर्थ (स ) हो । ( स्वाहा ) इसी कारण अपने इस सत्याचरण और व्यवहार से आप ( राजस्व ) राजा को उत्पन्न करने में समर्थ हो । राजा, स्त्री पुरुष दोनों प्रजाओं को उन्नत करे। दोनों तपश्चर्या करें, बल बढ़ावें और राज्य कार्यों में भाग लें, दोनों राजा का अभिषेक करें । स॒ध॒मादो॑ द्यु॒म्नती॒राप॑ऽए॒ताऽअना॑घृाऽअप॒स्यो वसा॑नाः । प्रस्त्यासु चक्रे वरु॑णः स॒धस्थ॑म॒पा& शिशु॑र्मातृत॑मास्व॒न्तः ॥७॥ वरुणश्च देवता । विराडार्षी त्रिष्टुप् । धैवत । भा० - ( एता ) ये ( ) प्रजाए ( सधमाद ) समस्त, एक साथ ही प्रानन्द अनुभव करनेहारी और ( युनिनी ) धन ऐश्वर्य और बलवीर्य वाली हॉ । वे (स्य ) उत्तम कर्म करने में कुशल, ( अनाष्टष्टा ) शत्रुओं से धर्षित और पीड़ित न होकर, एक ही राष्ट्र में ( वसाना ) रहती हैं । उन ( पस्त्यासु ) गृह बनाकर रहनेवाली प्रजाओं में ( वरुणः ) उन द्वारा वरण करने योग्य सर्वोत्तम राजा ( श्रपा शिशु ) जलों के भीतर व्यापक अग्नि के समान और ( मातृतमासु अन्त ) उत्तम माताओं के भीतर जिस प्रकार बालक निर्भय होकर रहता और पालन पोषण पाता है उसी प्रकार राजा उन ( मातृतमासु ) राजा को सर्वोत्तम रूप से माता के समान मान करनेहारी प्रजाओं के बीच ( शिशु. ) व्यापकरूप से रहकर उनमें ही ( सधस्थम् ) अपना आश्रय स्थान ( चक्रे ) बनाता है और उनके साथ ही रमता है । शत० ५।३ ।५१६ ॥ स॒त्रस्य॒ोल्व॑मसि च॒त्रस्य॑ ज॒रान्व॑सि क्ष॒त्रस्य॒ योनि॑रसि च॒न्त्रस्य॒ नाभि॑र॒सीन्द्र॑स्य॒ वाघ्नमसि मि॒त्रस्या॑सि॒ वरु॑णस्यासि॒ि त्वायं
को बढ़ाओ और परिपक्क चोर्यो से सन्तान उत्पन्न करो । श्राप लोग सोम अर्थात् राजा के पद को प्रदान करने में समर्थ हो । इसी कारण अपने इस सत्याचरण और व्यवहार से आप राजा को उत्पन्न करने में समर्थ हो । राजा, स्त्री पुरुष दोनों प्रजाओं को उन्नत करे। दोनों तपश्चर्या करें, बल बढ़ावें और राज्य कार्यों में भाग लें, दोनों राजा का अभिषेक करें । स॒ध॒मादो॑ द्यु॒म्नती॒राप॑ऽए॒ताऽअना॑घृाऽअप॒स्यो वसा॑नाः । प्रस्त्यासु चक्रे वरु॑णः स॒धस्थ॑म॒पा& शिशु॑र्मातृत॑मास्व॒न्तः ॥सात॥ वरुणश्च देवता । विराडार्षी त्रिष्टुप् । धैवत । भाशून्य - ये प्रजाए समस्त, एक साथ ही प्रानन्द अनुभव करनेहारी और धन ऐश्वर्य और बलवीर्य वाली हॉ । वे उत्तम कर्म करने में कुशल, शत्रुओं से धर्षित और पीड़ित न होकर, एक ही राष्ट्र में रहती हैं । उन गृह बनाकर रहनेवाली प्रजाओं में उन द्वारा वरण करने योग्य सर्वोत्तम राजा जलों के भीतर व्यापक अग्नि के समान और उत्तम माताओं के भीतर जिस प्रकार बालक निर्भय होकर रहता और पालन पोषण पाता है उसी प्रकार राजा उन राजा को सर्वोत्तम रूप से माता के समान मान करनेहारी प्रजाओं के बीच व्यापकरूप से रहकर उनमें ही अपना आश्रय स्थान बनाता है और उनके साथ ही रमता है । शतशून्य पाँच।तीन ।पाँच सौ सोलह ॥ स॒त्रस्य॒ोल्व॑मसि च॒त्रस्य॑ ज॒रान्व॑सि क्ष॒त्रस्य॒ योनि॑रसि च॒न्त्रस्य॒ नाभि॑र॒सीन्द्र॑स्य॒ वाघ्नमसि मि॒त्रस्या॑सि॒ वरु॑णस्यासि॒ि त्वायं
श्रीनगरः पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में भगदड़ मच गई है। रोज़ाना बड़े पैमाने पर कांग्रेस नेता पार्टी छोड़कर गुलाम नबी आजाद की टीम में शामिल हो रहे हैं। इससे कांग्रेस को लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं। मंगलवार को कांग्रेस के उस समय एक और बड़ा झटका लगा, जब जम्मू कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम ताराचंद सहित जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के 64 नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के समर्थन में पार्टी से इस्तीफे की घोषणा कर दी। तारा चंद के अतिरिक्त, पूर्व मंत्री माजिद वानी, डॉक्टर मनोहर लाल शर्मा, चौधरी घरू राम और पूर्व MLA ठाकुर बलवान सिंह, पूर्व महासचिव विनोद मिश्रा कांग्रेस छोड़ने वाले कुछ हाई प्रोफाइल नाम हैं। कांग्रेस से त्यागपत्र देने वाले इन सभी 64 नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाले समूह में शामिल होने का ऐलान किया है। इन सभी ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक संयुक्त इस्तीफा भेजा है। 64 नेताओं के सामूहिक इस्तीफे से कांग्रेस अंदर तक हिल गई है, वहीं आजाद ने कांग्रेस को अभी और बड़े झटके देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि, 'सभी नेताओं ने मेरे लिए इस्तीफा दिया है और ये सभी मेरे साथ हैं। कांग्रेस को अभी और कई झटके लगेंगे। ' बता दें कि कांग्रेस छोड़ने के बाद आजाद ने जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का गठन करने का ऐलान किया है । उनके इस ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर के कई पूर्व मंत्री और विधायकों समेत एक दर्जन से अधिक प्रमुख कांग्रेस नेता, सैकड़ों पंचायती राज संस्थान (PRI) के सदस्यों के अलावा, नगर निगम के नगर सेवक और जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं ने पहले ही आजाद की पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। सोशल मीडिया पर फिर मची 'योगिराज' की धूम, वजह जानकर आप भी कहेंगे 'वाह'
श्रीनगरः पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में भगदड़ मच गई है। रोज़ाना बड़े पैमाने पर कांग्रेस नेता पार्टी छोड़कर गुलाम नबी आजाद की टीम में शामिल हो रहे हैं। इससे कांग्रेस को लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं। मंगलवार को कांग्रेस के उस समय एक और बड़ा झटका लगा, जब जम्मू कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम ताराचंद सहित जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के चौंसठ नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के समर्थन में पार्टी से इस्तीफे की घोषणा कर दी। तारा चंद के अतिरिक्त, पूर्व मंत्री माजिद वानी, डॉक्टर मनोहर लाल शर्मा, चौधरी घरू राम और पूर्व MLA ठाकुर बलवान सिंह, पूर्व महासचिव विनोद मिश्रा कांग्रेस छोड़ने वाले कुछ हाई प्रोफाइल नाम हैं। कांग्रेस से त्यागपत्र देने वाले इन सभी चौंसठ नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाले समूह में शामिल होने का ऐलान किया है। इन सभी ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक संयुक्त इस्तीफा भेजा है। चौंसठ नेताओं के सामूहिक इस्तीफे से कांग्रेस अंदर तक हिल गई है, वहीं आजाद ने कांग्रेस को अभी और बड़े झटके देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि, 'सभी नेताओं ने मेरे लिए इस्तीफा दिया है और ये सभी मेरे साथ हैं। कांग्रेस को अभी और कई झटके लगेंगे। ' बता दें कि कांग्रेस छोड़ने के बाद आजाद ने जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का गठन करने का ऐलान किया है । उनके इस ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर के कई पूर्व मंत्री और विधायकों समेत एक दर्जन से अधिक प्रमुख कांग्रेस नेता, सैकड़ों पंचायती राज संस्थान के सदस्यों के अलावा, नगर निगम के नगर सेवक और जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं ने पहले ही आजाद की पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। सोशल मीडिया पर फिर मची 'योगिराज' की धूम, वजह जानकर आप भी कहेंगे 'वाह'
विशेषज्ञों के अनुसार मास्क पहनने का बाद भी वायु प्रदूषण से खतरा हो सकता है। एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कमजोर दिल वालों के लिए वायु प्रदूषण नुकसानदायक साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों की जान भी ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में वायु प्रदूषण का शिकार होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस अध्ययन के लिए दि लैंसट को वित्तीय सहायता देने वाले ब्रिटिश हेल्थ फाउंडेशन ने कहा है कि इंग्लैंड को अपने कई शहरों के वायु प्रदूषण से छुटकारा पाना ही होगा। इन शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर यूरोपीय संघ के सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। ब्रितानी सरकार ने पहले ही यह स्वीकार किया है कि 2020 तक ब्रिटेन के 15 क्षेत्रों में वायु प्रदूषण यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप नहीं होगा। लेकिन डेफा (ब्रितानी प्रदूषण, खाद्य एवं ग्रामीण मंत्रालय) ने कहा कि वह ब्रिटेन में वायु को स्वच्छ और यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ है जिसे पहले से ही हृदयाघात का एक कारण माना जाता रहा है लेकिन इसे हृदयगति रुक जाने का कारण नहीं माना जाता। हृदयाघात हृदय की माँस-पेशियों के कमजोर और शरीर में रक्तसंचार में अक्षम होते जाने से होता है। इंग्लैंड में हर साल लगभग साढ़े सात लाख लोग हृदयाघात के शिकार होते हैं। इंग्लैंड में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, खासकर सड़क यातायात से और इसके प्रति सरकार का रवैया बद से बदतर होता जा रहा है। लैंसट शोध में इंग्लैंड, अमरीका और चीन जैसे बारह देशों के हजारों मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण कार्बन मोनोआक्साइड और नाइट्रोजन जैसी गैसें हैं। साथ ही बसों, टैक्सियों और लॉरियों से निकलने वालों धुएं के महीन कण भी इसका एक बड़ा कारण हैं। यह गैसें और यह कण आदमी के फेफड़ों के रास्ते से रक्त में चले जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते हैं। जिन लोगों को पहले से ही हृदय की बीमारी है, व्यस्त सड़कों के किनारे रहने वाले ग्रस्त हैं। -नरेश शर्मा, आजादपुर, दिल्ली।
विशेषज्ञों के अनुसार मास्क पहनने का बाद भी वायु प्रदूषण से खतरा हो सकता है। एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कमजोर दिल वालों के लिए वायु प्रदूषण नुकसानदायक साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों की जान भी ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में वायु प्रदूषण का शिकार होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस अध्ययन के लिए दि लैंसट को वित्तीय सहायता देने वाले ब्रिटिश हेल्थ फाउंडेशन ने कहा है कि इंग्लैंड को अपने कई शहरों के वायु प्रदूषण से छुटकारा पाना ही होगा। इन शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर यूरोपीय संघ के सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। ब्रितानी सरकार ने पहले ही यह स्वीकार किया है कि दो हज़ार बीस तक ब्रिटेन के पंद्रह क्षेत्रों में वायु प्रदूषण यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप नहीं होगा। लेकिन डेफा ने कहा कि वह ब्रिटेन में वायु को स्वच्छ और यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ है जिसे पहले से ही हृदयाघात का एक कारण माना जाता रहा है लेकिन इसे हृदयगति रुक जाने का कारण नहीं माना जाता। हृदयाघात हृदय की माँस-पेशियों के कमजोर और शरीर में रक्तसंचार में अक्षम होते जाने से होता है। इंग्लैंड में हर साल लगभग साढ़े सात लाख लोग हृदयाघात के शिकार होते हैं। इंग्लैंड में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, खासकर सड़क यातायात से और इसके प्रति सरकार का रवैया बद से बदतर होता जा रहा है। लैंसट शोध में इंग्लैंड, अमरीका और चीन जैसे बारह देशों के हजारों मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण कार्बन मोनोआक्साइड और नाइट्रोजन जैसी गैसें हैं। साथ ही बसों, टैक्सियों और लॉरियों से निकलने वालों धुएं के महीन कण भी इसका एक बड़ा कारण हैं। यह गैसें और यह कण आदमी के फेफड़ों के रास्ते से रक्त में चले जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते हैं। जिन लोगों को पहले से ही हृदय की बीमारी है, व्यस्त सड़कों के किनारे रहने वाले ग्रस्त हैं। -नरेश शर्मा, आजादपुर, दिल्ली।
उन्होंने कहा, "मैंने विशाल से कहा कि मैं कोलकाता के एक युवा लड़के से मिला हूं, वह बहुत प्रतिभाशाली है और उसने मुझे उसे फोन करने के लिए कहा। वह (बप्पी लाहिड़ी) उस समय अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे। उन्होंने आकर कुछ धुनें बजाईं और हमें यह पसंद आया। " गीतकार अमित खन्ना ने याद करते हुए कहा कि लाहिड़ी जैसे ही कुछ धुनें बजाकर सुनाते, इसके कुछ ही मिनटों के बाद वह गीत लिख दिया करते थे। 'चलते चलते' के गानों की लोकप्रियता के बारे में पूछे जाने पर अमित खन्ना ने कहा कि कुछ गानों में लोगों के जीवन को छूने का गुण होता है। उन्होंने कहा, "जब आप गानों की धुन बनाते हैं और उन्हें लिखते हैं तो आप चाहते हैं कि हर गाना हिट हो। लेकिन कुछ गाने वास्तव में सभी के दिलों को छूते हैं और हमेशा याद रहते हैं। जब हमने इस गाने को रिकॉर्ड किया, तो मुझे याद है कि किशोर दा ने कहा था कि कई वर्षों में यह उनके द्वारा गाया गया सबसे अच्छा गाना है। वह इस गाने से बहुत खुश थे। वह हमेशा इसे लगातार गाया करते थे। " 'चलते चलते' फिल्म और इसके गीतों ने बप्पी लाहिड़ी के करियर को काफी ऊंचाईयां दीं और बाद में उन्होंने राजेश खन्ना की 'नया कदम', राकेश रोशन अभिनीत 'आंगन की कली', मिथुन चक्रवर्ती की 'डिस्को डांसर' के लिए संगीत दिया। उन्होंने अमिताभ बच्चन अभिनीत 'नमक हलाल', जितेंद्र की 'हिम्मतवाला' और कई अन्य लोकप्रिय फिल्मों में भी संगीत दिया। (bhasha)
उन्होंने कहा, "मैंने विशाल से कहा कि मैं कोलकाता के एक युवा लड़के से मिला हूं, वह बहुत प्रतिभाशाली है और उसने मुझे उसे फोन करने के लिए कहा। वह उस समय अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे। उन्होंने आकर कुछ धुनें बजाईं और हमें यह पसंद आया। " गीतकार अमित खन्ना ने याद करते हुए कहा कि लाहिड़ी जैसे ही कुछ धुनें बजाकर सुनाते, इसके कुछ ही मिनटों के बाद वह गीत लिख दिया करते थे। 'चलते चलते' के गानों की लोकप्रियता के बारे में पूछे जाने पर अमित खन्ना ने कहा कि कुछ गानों में लोगों के जीवन को छूने का गुण होता है। उन्होंने कहा, "जब आप गानों की धुन बनाते हैं और उन्हें लिखते हैं तो आप चाहते हैं कि हर गाना हिट हो। लेकिन कुछ गाने वास्तव में सभी के दिलों को छूते हैं और हमेशा याद रहते हैं। जब हमने इस गाने को रिकॉर्ड किया, तो मुझे याद है कि किशोर दा ने कहा था कि कई वर्षों में यह उनके द्वारा गाया गया सबसे अच्छा गाना है। वह इस गाने से बहुत खुश थे। वह हमेशा इसे लगातार गाया करते थे। " 'चलते चलते' फिल्म और इसके गीतों ने बप्पी लाहिड़ी के करियर को काफी ऊंचाईयां दीं और बाद में उन्होंने राजेश खन्ना की 'नया कदम', राकेश रोशन अभिनीत 'आंगन की कली', मिथुन चक्रवर्ती की 'डिस्को डांसर' के लिए संगीत दिया। उन्होंने अमिताभ बच्चन अभिनीत 'नमक हलाल', जितेंद्र की 'हिम्मतवाला' और कई अन्य लोकप्रिय फिल्मों में भी संगीत दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल में जीत के लिये 444 रन का रिकॉर्ड लक्ष्य दिया.ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी आठ विकेट पर 270 रन के स्कोर पर घोषित की. एलेक्स कैरी ने 105 गेंद में 66 और मिचेल स्टार्क ने 47 गेंद में 51 रन बनाये. दोनों ने सातवें विकेट के लिये 120 गेंद में 93 रन की साझेदारी की. ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 444 रनों के विशाल टारगेट के जवाब में भारत ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में 4 विकेट खोकर 164 रन स्कोरबोर्ड पर लगा दिए हैं. विराट कोहली 60 गेंदों पर 7 चौकों की मदद से 44 रन बनाकर नाबाद लौटे. अजिंक्य रहाणे भी 20 रन बनाकर क्रीज पर हैं. विराट कोहली ने अपनी इस 44 रनों की पारी के दौरान रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी. विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीनों फॉर्मेट में कुल मिलाकर 5000 रन बनाने का कारनामा कर दिया है. ऐसा करने वाले वह सिर्फ दूसरे बल्लेबाज हैं. कोहली से पहले सचिन ने ये मुकाम हासिल किया था. कोहली एक टीम के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में 5 हजार रन का आंकड़ा छूने वाले सिर्फ तीसरे बल्लेबाज हैं. कोहली से पहले डॉन ब्रैडमैन ने ऑस्ट्रेलिया केे खिलाफ जबकि सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ ये बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. - डॉन ब्रैडमैन बनाम इंग्लैंड (5028) - सचिन तेंदुलकर बनाम ऑस्ट्रेलिया (6707) - सचिन तेंदुलकर बनाम श्रीलंका (5108) - विराट कोहली बनाम ऑस्ट्रेलिया (5003*) यही नहीं, कोहली अब ICC नॉकआउट मैचों में भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने महान सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट और वनडे दोनों में 2000 रन बनाने वाले दुनिया के चौथे बल्लेबाज भी बन गए हैं. इससे पहले ये मुकाम विवियन रिचर्ड्स, डेसमंड हेन्स और सचिन तेंदुलकर ने हासिल किया था. - 657 - सचिन तेंदुलकर (14) - 620 - रोहित शर्मा (17) - 514 - सौरव गांगुली (8) - 458 - युवराज सिंह (14)
ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल में जीत के लिये चार सौ चौंतालीस रन का रिकॉर्ड लक्ष्य दिया.ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी आठ विकेट पर दो सौ सत्तर रन के स्कोर पर घोषित की. एलेक्स कैरी ने एक सौ पाँच गेंद में छयासठ और मिचेल स्टार्क ने सैंतालीस गेंद में इक्यावन रन बनाये. दोनों ने सातवें विकेट के लिये एक सौ बीस गेंद में तिरानवे रन की साझेदारी की. ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए चार सौ चौंतालीस रनों के विशाल टारगेट के जवाब में भारत ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में चार विकेट खोकर एक सौ चौंसठ रन स्कोरबोर्ड पर लगा दिए हैं. विराट कोहली साठ गेंदों पर सात चौकों की मदद से चौंतालीस रन बनाकर नाबाद लौटे. अजिंक्य रहाणे भी बीस रन बनाकर क्रीज पर हैं. विराट कोहली ने अपनी इस चौंतालीस रनों की पारी के दौरान रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी. विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीनों फॉर्मेट में कुल मिलाकर पाँच हज़ार रन बनाने का कारनामा कर दिया है. ऐसा करने वाले वह सिर्फ दूसरे बल्लेबाज हैं. कोहली से पहले सचिन ने ये मुकाम हासिल किया था. कोहली एक टीम के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में पाँच हजार रन का आंकड़ा छूने वाले सिर्फ तीसरे बल्लेबाज हैं. कोहली से पहले डॉन ब्रैडमैन ने ऑस्ट्रेलिया केे खिलाफ जबकि सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ ये बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. - डॉन ब्रैडमैन बनाम इंग्लैंड - सचिन तेंदुलकर बनाम ऑस्ट्रेलिया - सचिन तेंदुलकर बनाम श्रीलंका - विराट कोहली बनाम ऑस्ट्रेलिया यही नहीं, कोहली अब ICC नॉकआउट मैचों में भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने महान सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट और वनडे दोनों में दो हज़ार रन बनाने वाले दुनिया के चौथे बल्लेबाज भी बन गए हैं. इससे पहले ये मुकाम विवियन रिचर्ड्स, डेसमंड हेन्स और सचिन तेंदुलकर ने हासिल किया था. - छः सौ सत्तावन - सचिन तेंदुलकर - छः सौ बीस - रोहित शर्मा - पाँच सौ चौदह - सौरव गांगुली - चार सौ अट्ठावन - युवराज सिंह
नई दिल्ली। राजस्थान में बीजेपी के अध्यक्ष पद को लेकर मामला लगातार गरमाता ही जा रहा है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं लेकिन बीजेपी का अध्यक्ष पद कौन संभालेगा इस पर सस्पेंस लगातार बरकरार है। बता दे कि राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम तय माना जा रहा है लेकिन वसुंधरा खेमे की ओर से गजेंद्र सिंह के नाम का विरोध लगातार हो रहा है। बता दे कि वसुंधरा राजे के समर्थक की ओर से गजेंद्र सिंह इसका विरोध किया जा रहा है और लगातार इस नाम पर विचार करने की बात उठ रही है इसी सिलसिले में राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगी और किसी और नाम पर विचार किया जाएगा। बता दे कि जस्थान के मंत्री राव राजेंद्र सिंह, हेम सिंह भड़ाना, काली चरण सर्राफ और जसवंत सिंह बुधवार रात को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। दरअसल, वसुंधरा राजे और उनके समर्थन में खड़े मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनने देना चाहते हैं। शेखावत के नाम पर वसुंधरा राजे पहले ही अपनी असहमति जाहिर कर चुकी हैं। अब देखना ये होगा कि वसुंधरा राजे और अमित शाह की मुलाकात क्या राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष लेकर आ पाएगी या इस फिर से सस्पेंस बरकरार रहेगा।
नई दिल्ली। राजस्थान में बीजेपी के अध्यक्ष पद को लेकर मामला लगातार गरमाता ही जा रहा है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं लेकिन बीजेपी का अध्यक्ष पद कौन संभालेगा इस पर सस्पेंस लगातार बरकरार है। बता दे कि राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम तय माना जा रहा है लेकिन वसुंधरा खेमे की ओर से गजेंद्र सिंह के नाम का विरोध लगातार हो रहा है। बता दे कि वसुंधरा राजे के समर्थक की ओर से गजेंद्र सिंह इसका विरोध किया जा रहा है और लगातार इस नाम पर विचार करने की बात उठ रही है इसी सिलसिले में राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगी और किसी और नाम पर विचार किया जाएगा। बता दे कि जस्थान के मंत्री राव राजेंद्र सिंह, हेम सिंह भड़ाना, काली चरण सर्राफ और जसवंत सिंह बुधवार रात को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। दरअसल, वसुंधरा राजे और उनके समर्थन में खड़े मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनने देना चाहते हैं। शेखावत के नाम पर वसुंधरा राजे पहले ही अपनी असहमति जाहिर कर चुकी हैं। अब देखना ये होगा कि वसुंधरा राजे और अमित शाह की मुलाकात क्या राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष लेकर आ पाएगी या इस फिर से सस्पेंस बरकरार रहेगा।
पटना. वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए विभिन्न दलों ने अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. एक तरफ जहां बिहार के सीएम नीतीश कुमार मिशन 2024 के लिए दिल्ली यात्रा पर गए थे. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत जोड़ों यात्रा कर रहे हैं. इसी क्रम में अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने भी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इसी को लेकर पार्टी अब 16 नवम्बर को जंबों कमिटी की बैठक करने जा रही है. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (से०) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव डॉ दानिश रिजवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हमारी पार्टी अभी से ही आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 20 सीटों पर संगठनात्मक मजबूती को लेकर तैयारी कर रही है. अब यह तो आने वाले समय में ही तय होगा की हम पार्टी कितने सीटों और किन सीटों पर चुनाव लड़ेगा. पार्टी के प्रधान महासचिव डॉ दानिश रिजवान ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिहार में अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण के मंत्री डॉ० संतोष कुमार सुमन के निर्देश पर 16 नवंबर को सभी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय एवं प्रदेश अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों, प्रभारियों के साथ पार्टी प्रवक्ताओं की बैठक बुलाई है. डॉ दानिश रिजवान ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी काफी गंभीर है. लोकसभा चुनाव में पार्टी की आगे की संगठनात्मक रणनीति पर मंथन को लेकर प्रकोष्ठ के अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों के साथ पार्टी के प्रवक्ताओं की बैठक बुलाई गई है. प्रकोष्ठ अध्यक्षों के साथ प्रवक्ताओं की होने वाली बैठक पटना के 12 एम स्ट्रैण्ड रोड स्थित कार्यालय में 11 बजे बुलाई गई है.
पटना. वर्ष दो हज़ार चौबीस में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए विभिन्न दलों ने अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. एक तरफ जहां बिहार के सीएम नीतीश कुमार मिशन दो हज़ार चौबीस के लिए दिल्ली यात्रा पर गए थे. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत जोड़ों यात्रा कर रहे हैं. इसी क्रम में अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने भी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इसी को लेकर पार्टी अब सोलह नवम्बर को जंबों कमिटी की बैठक करने जा रही है. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव डॉ दानिश रिजवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हमारी पार्टी अभी से ही आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बीस सीटों पर संगठनात्मक मजबूती को लेकर तैयारी कर रही है. अब यह तो आने वाले समय में ही तय होगा की हम पार्टी कितने सीटों और किन सीटों पर चुनाव लड़ेगा. पार्टी के प्रधान महासचिव डॉ दानिश रिजवान ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिहार में अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण के मंत्री डॉशून्य संतोष कुमार सुमन के निर्देश पर सोलह नवंबर को सभी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय एवं प्रदेश अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों, प्रभारियों के साथ पार्टी प्रवक्ताओं की बैठक बुलाई है. डॉ दानिश रिजवान ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी काफी गंभीर है. लोकसभा चुनाव में पार्टी की आगे की संगठनात्मक रणनीति पर मंथन को लेकर प्रकोष्ठ के अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों के साथ पार्टी के प्रवक्ताओं की बैठक बुलाई गई है. प्रकोष्ठ अध्यक्षों के साथ प्रवक्ताओं की होने वाली बैठक पटना के बारह एम स्ट्रैण्ड रोड स्थित कार्यालय में ग्यारह बजे बुलाई गई है.
न्यूजीलैंड के आलराउंडर क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस बुधवार को ताज के सौंदर्य में मुग्ध नजर आए। पत्नी और बेटी के साथ ताज के दीदार को पहुंचे स्टाइरिस करीब सवा घंटे तक रुके। जासं, आगरा। न्यूजीलैंड के आलराउंडर क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस बुधवार को ताज के सौंदर्य में मुग्ध नजर आए। पत्नी और बेटी के साथ ताज के दीदार को पहुंचे स्टाइरिस करीब सवा घंटे तक रुके। स्टाइरिस अपने परिवार के साथ बुधवार सुबह करीब 10 बजे ताजमहल पहुंचे। उन्होंने गाइड पीएस दुबे से स्मारक के निर्माण, इतिहास, वास्तुकला और स्थापत्य कला आदि के बारे में काफी जानकारी जुटाई। ताज की बेमिसाल पच्चीकारी ने उन्हें सर्वाधिक प्रभावित किया। कैलीग्राफी के बारे में जब उन्हें बताया गया, तो उन्होंने पूछा कि ताज के अलावा और किन स्मारकों में कैलीग्राफी हुई है। हाल में ताज देखने वाले प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की यात्रा से जुड़ी जानकारी भी उन्होंने गाइड से की।
न्यूजीलैंड के आलराउंडर क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस बुधवार को ताज के सौंदर्य में मुग्ध नजर आए। पत्नी और बेटी के साथ ताज के दीदार को पहुंचे स्टाइरिस करीब सवा घंटे तक रुके। जासं, आगरा। न्यूजीलैंड के आलराउंडर क्रिकेटर स्कॉट स्टाइरिस बुधवार को ताज के सौंदर्य में मुग्ध नजर आए। पत्नी और बेटी के साथ ताज के दीदार को पहुंचे स्टाइरिस करीब सवा घंटे तक रुके। स्टाइरिस अपने परिवार के साथ बुधवार सुबह करीब दस बजे ताजमहल पहुंचे। उन्होंने गाइड पीएस दुबे से स्मारक के निर्माण, इतिहास, वास्तुकला और स्थापत्य कला आदि के बारे में काफी जानकारी जुटाई। ताज की बेमिसाल पच्चीकारी ने उन्हें सर्वाधिक प्रभावित किया। कैलीग्राफी के बारे में जब उन्हें बताया गया, तो उन्होंने पूछा कि ताज के अलावा और किन स्मारकों में कैलीग्राफी हुई है। हाल में ताज देखने वाले प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की यात्रा से जुड़ी जानकारी भी उन्होंने गाइड से की।
नेटो ने नार्वे में सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास आरंभ किया है। रोएटर के अनुसार शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद नेटो ने गुरूवार को नार्वे में अपना सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास आरंभ किया है। नेटो के इस सैन्य अभ्यास में 29 देशों के लगभग 50000 सैनिक, 10000 सैन्य वाहन, 250 युद्धक विमान और 65 युद्धक नौकाएं भाग ले रही हैं। नेटो के इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य, सदस्य देशों को प्रशिक्षित करना है। नार्वे में आरंभ होने वाला यह सैन्य अभ्यास लगभग 2 सप्ताहों तक चलेगा। नेटो के महासचिव स्टोलटेनबर्ग ने कहा है कि हालिया कुछ वर्षों के दौरान यूरोप में शांति एवं सुरक्षा में कमी होती देखी गई है। नार्वे में आरंभ होने वाले नेटो के सैन्य अभ्यास की रूस ने आलोचना की है। रूस के रक्षामंत्री सरगेई शोयगू ने कहा है कि यह सैन्य अभ्यास, शत्रुतापूर्ण सैन्य कार्यवाही जैसा है। ज्ञात रहे कि शीतयुद्ध के बाद रूस की सीमा पर नेटो की सैन्य गतिवधियों में तेज़ी से वृद्धि हुई है जिसका रूस विरोध करता रहा है। इसपर माॅस्को कई बार प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर चुका है।
नेटो ने नार्वे में सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास आरंभ किया है। रोएटर के अनुसार शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद नेटो ने गुरूवार को नार्वे में अपना सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास आरंभ किया है। नेटो के इस सैन्य अभ्यास में उनतीस देशों के लगभग पचास हज़ार सैनिक, दस हज़ार सैन्य वाहन, दो सौ पचास युद्धक विमान और पैंसठ युद्धक नौकाएं भाग ले रही हैं। नेटो के इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य, सदस्य देशों को प्रशिक्षित करना है। नार्वे में आरंभ होने वाला यह सैन्य अभ्यास लगभग दो सप्ताहों तक चलेगा। नेटो के महासचिव स्टोलटेनबर्ग ने कहा है कि हालिया कुछ वर्षों के दौरान यूरोप में शांति एवं सुरक्षा में कमी होती देखी गई है। नार्वे में आरंभ होने वाले नेटो के सैन्य अभ्यास की रूस ने आलोचना की है। रूस के रक्षामंत्री सरगेई शोयगू ने कहा है कि यह सैन्य अभ्यास, शत्रुतापूर्ण सैन्य कार्यवाही जैसा है। ज्ञात रहे कि शीतयुद्ध के बाद रूस की सीमा पर नेटो की सैन्य गतिवधियों में तेज़ी से वृद्धि हुई है जिसका रूस विरोध करता रहा है। इसपर माॅस्को कई बार प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर चुका है।
Jamshedpur (Rohit Kumar) : सोनारी थाना अंतर्गत डोबो पुल के पास स्वर्णरेखा नदी में रविवार दोपहर एक व्यक्ति का शव पाया गया. स्थानीय लोगों ने शव मिलने की सूचना पुलिस को दी. सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव की पहचान में जुट गई. मृतक की पहचान सोनारी कागलनगर निवासी 45 वर्षीय राहुल धीवर के रूप में की गई. शव की पहचान मृतक की बेटी पूजा ने की. पंचनामा करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. परिजनों ने पुलिस को बताया कि राहुल राज मिस्त्री का काम करता था. वह 18 जून से ही लापता था. लापता होने की सूचना थाना में भी दी गई थी. पुलिस ने बताया कि राहुल का शव नदी से बरामद किया गया है. परिजनों ने आशंका जताई है कि नहाने के क्रम में डूबने से उसकी मौत हुई है.
Jamshedpur : सोनारी थाना अंतर्गत डोबो पुल के पास स्वर्णरेखा नदी में रविवार दोपहर एक व्यक्ति का शव पाया गया. स्थानीय लोगों ने शव मिलने की सूचना पुलिस को दी. सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव की पहचान में जुट गई. मृतक की पहचान सोनारी कागलनगर निवासी पैंतालीस वर्षीय राहुल धीवर के रूप में की गई. शव की पहचान मृतक की बेटी पूजा ने की. पंचनामा करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. परिजनों ने पुलिस को बताया कि राहुल राज मिस्त्री का काम करता था. वह अट्ठारह जून से ही लापता था. लापता होने की सूचना थाना में भी दी गई थी. पुलिस ने बताया कि राहुल का शव नदी से बरामद किया गया है. परिजनों ने आशंका जताई है कि नहाने के क्रम में डूबने से उसकी मौत हुई है.
BEGUSARAI : जिले से एक बड़ी घटना सामने आई है। जहां चलती ट्रेन में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। वहीं उसका पति गंभीर रुप से घायल है। जिसका इलाज पटना के पीएमसीएच में चल रहा है। घटना के संबंध में बताया गया है कि कटिहारसे दिल्ली के आनंद विहार जा रही सीमांचल एक्सप्रेस (12487) में देर रात अपराधियों ने ट्रेन में सफर कर रहे कटिहार निवासी कंचन देवी नामक महिला को गोली मार दी। वहीं जब उसके पति ने इसका विरोध किया तो उसे भी गोली मार दी। इस घटना में जहां महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पति गंभीर रुप से घायल है जिसका पटना के पीएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि दंपती के साथ उनका छह साल का बेटा भी था जो घटना के बाद से लापता है। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने बरौनी जंक्शन से ट्रेन खुलने के दौरान वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद से परिजनों में दहशत का माहौल है। मृतिका की सास ने बताया कि एक महीना पहले भी कंचन को गांव में ही जान से मारने की कोशिश की गई थी।
BEGUSARAI : जिले से एक बड़ी घटना सामने आई है। जहां चलती ट्रेन में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। वहीं उसका पति गंभीर रुप से घायल है। जिसका इलाज पटना के पीएमसीएच में चल रहा है। घटना के संबंध में बताया गया है कि कटिहारसे दिल्ली के आनंद विहार जा रही सीमांचल एक्सप्रेस में देर रात अपराधियों ने ट्रेन में सफर कर रहे कटिहार निवासी कंचन देवी नामक महिला को गोली मार दी। वहीं जब उसके पति ने इसका विरोध किया तो उसे भी गोली मार दी। इस घटना में जहां महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पति गंभीर रुप से घायल है जिसका पटना के पीएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि दंपती के साथ उनका छह साल का बेटा भी था जो घटना के बाद से लापता है। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने बरौनी जंक्शन से ट्रेन खुलने के दौरान वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद से परिजनों में दहशत का माहौल है। मृतिका की सास ने बताया कि एक महीना पहले भी कंचन को गांव में ही जान से मारने की कोशिश की गई थी।
लोगों में हृदय रोग की समस्या बढ़ती जा रही है। इस वजह से हृदय रोग से होने वाली मृत्यु दर भी तेजी से बढ़ रही है। आहार और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ और पौष्टिक आहार हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है। वैज्ञानिकों की एक टीम ने आहार को हृदय रोग को कम करने में भी मददगार पाया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मूंगफली का दैनिक इसके सेवन से हृदय रोग का खतरा कम होता है। मूंगफली हृदय रोग के खतरे को रोकने में कारगर है। जापान में लोगों पर की गई एक स्टडी के नतीजों के आधार पर यह भी दावा किया गया कि जो लोग रोजाना मूंगफली खाते हैं उनका दिल दूसरों के मुकाबले ज्यादा स्वस्थ होता है। इससे पहले अमेरिका में हुए एक शोध में भी कहा गया था कि मूंगफली के सेवन से दिल मजबूत होता है। अध्ययन के निष्कर्ष अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल 'स्ट्रोक' में प्रकाशित हुए थे। आइए जानें कि हृदय रोगियों के लिए मूंगफली किस प्रकार अच्छी होती है। अध्ययन में पाया गया है कि मूंगफली का सेवन इस्केमिक स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि मूंगफली को अपने आहार में शामिल करने से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है। इस्केमिक स्ट्रोक मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रक्त के थक्कों के बनने के कारण होने वाली एक गंभीर और जानलेवा समस्या है। इस अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने मूंगफली के सेवन के कई स्तरों से हृदय रोग के जोखिम में कमी की जांच की। वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रतिदिन सिर्फ 4-5 मूंगफली खाने से इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं सामान्य स्ट्रोक के खतरे को 16 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। मूंगफली हृदय रोग के खतरे को 13 प्रतिशत तक कम कर सकती है। मूंगफली अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड, खनिज, विटामिन और आहार फाइबर शामिल हैं। ये सभी पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकते हैं, साथ ही उच्च रक्तचाप और पुरानी सूजन के जोखिम को कम कर सकते हैं। जो स्वाभाविक रूप से दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
लोगों में हृदय रोग की समस्या बढ़ती जा रही है। इस वजह से हृदय रोग से होने वाली मृत्यु दर भी तेजी से बढ़ रही है। आहार और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ और पौष्टिक आहार हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है। वैज्ञानिकों की एक टीम ने आहार को हृदय रोग को कम करने में भी मददगार पाया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मूंगफली का दैनिक इसके सेवन से हृदय रोग का खतरा कम होता है। मूंगफली हृदय रोग के खतरे को रोकने में कारगर है। जापान में लोगों पर की गई एक स्टडी के नतीजों के आधार पर यह भी दावा किया गया कि जो लोग रोजाना मूंगफली खाते हैं उनका दिल दूसरों के मुकाबले ज्यादा स्वस्थ होता है। इससे पहले अमेरिका में हुए एक शोध में भी कहा गया था कि मूंगफली के सेवन से दिल मजबूत होता है। अध्ययन के निष्कर्ष अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल 'स्ट्रोक' में प्रकाशित हुए थे। आइए जानें कि हृदय रोगियों के लिए मूंगफली किस प्रकार अच्छी होती है। अध्ययन में पाया गया है कि मूंगफली का सेवन इस्केमिक स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि मूंगफली को अपने आहार में शामिल करने से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है। इस्केमिक स्ट्रोक मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रक्त के थक्कों के बनने के कारण होने वाली एक गंभीर और जानलेवा समस्या है। इस अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने मूंगफली के सेवन के कई स्तरों से हृदय रोग के जोखिम में कमी की जांच की। वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रतिदिन सिर्फ चार-पाँच मूंगफली खाने से इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा बीस प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं सामान्य स्ट्रोक के खतरे को सोलह प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। मूंगफली हृदय रोग के खतरे को तेरह प्रतिशत तक कम कर सकती है। मूंगफली अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड, खनिज, विटामिन और आहार फाइबर शामिल हैं। ये सभी पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकते हैं, साथ ही उच्च रक्तचाप और पुरानी सूजन के जोखिम को कम कर सकते हैं। जो स्वाभाविक रूप से दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल में परवाणू के एकमात्र तालाब में पानी की कमी की खबर छपते ही नप परवाणू व कई सामाजिक संस्थाएं हरकत में आ गई हैं। तालाब में मर रही मछलियों के जीवन को बचाने के लिए संस्थाएं आगे आई हैं और उन्होंने अपने स्तर पर टैंकरों के जरिए तालाब में पानी डलवाकर मछलियों को बचाने का प्रयास कर रही है। हालांकि प्रशासन के पास कोई स्थायी समाधान न होने के चलते धीरे धीरे इस तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि ऊंचा परवाणू में एकमात्र तालाब है जहां सैकड़ों मछलियां विचरण करती नजर आती है, वहीं बेसहारा पशु व पक्षी भी इस तालाब के ज़रिए अपनी प्यास बुझाते है। लेकिन गर्मी के चलते इस तालाब का पानी सूखता जा रहा है। तालाब का पानी सूखने से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है, जिसके चलते एक एक करके मछलियां मरती जा रही है। 'दिव्य हिमाचल की खबर का असर यह हुआ की उन्हें बचाने के लिए वीरवार को तालाब में हजारों लीटर पानी के टैंकर और ऑक्सीजन की गोलियां डाली गई जिसकी वजह से तालाब में पानी व ऑक्सीजन की कमी को कुछ हद तक दूर किया गया। तालाब के निजी जमीन पर स्थित होने व टीसीपी के अधिकार क्षेत्र में होने के चलते नगर परिषद परवाणू चाह कर भी इस तालाब का संरक्षण नहीं कर पा रही है। परवाणू के समाजसेवी व सामाजिक संस्थाए अपने स्तर पर तालाब में पानी डलवाकर मछलियों की जान बचाने के लिए अभी तक प्रयासरत है। बीडीओ धर्मपुर सुभाष धीमान से पूछे जाने पर उन्होंने कहा की उनके संज्ञान में ये मामला नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि वह जमीन हमारे अधीन है तो स्थानीय पंचायत व सेक्रेटरी को इस मामले की जांच के आदेश दिए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो स्वयं मौके पर जा कर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। हमारे अधिकार के अंतर्गत होगा तो तालाब के जीर्णोद्धार की पूरी व्यवस्था की जाएगी। (एचडीएम) नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अनुभव शर्मा ने बताया कागजातों की पड़ताल से पता चला है की यह तालाब निजी भूमि पर स्थित है, साथ ही नगर परिषद की परिधि से भी बाहर है, ऐसे में नगर परिषद चाह कर भी इस तालाब का संरक्षण नहीं कर पा रही है। उन्होंने बताया की नगर परिषद द्वारा तालाब में पानी के टैंकरों के जरिए पानी डलवाया जा रहा है।
प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल में परवाणू के एकमात्र तालाब में पानी की कमी की खबर छपते ही नप परवाणू व कई सामाजिक संस्थाएं हरकत में आ गई हैं। तालाब में मर रही मछलियों के जीवन को बचाने के लिए संस्थाएं आगे आई हैं और उन्होंने अपने स्तर पर टैंकरों के जरिए तालाब में पानी डलवाकर मछलियों को बचाने का प्रयास कर रही है। हालांकि प्रशासन के पास कोई स्थायी समाधान न होने के चलते धीरे धीरे इस तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि ऊंचा परवाणू में एकमात्र तालाब है जहां सैकड़ों मछलियां विचरण करती नजर आती है, वहीं बेसहारा पशु व पक्षी भी इस तालाब के ज़रिए अपनी प्यास बुझाते है। लेकिन गर्मी के चलते इस तालाब का पानी सूखता जा रहा है। तालाब का पानी सूखने से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है, जिसके चलते एक एक करके मछलियां मरती जा रही है। 'दिव्य हिमाचल की खबर का असर यह हुआ की उन्हें बचाने के लिए वीरवार को तालाब में हजारों लीटर पानी के टैंकर और ऑक्सीजन की गोलियां डाली गई जिसकी वजह से तालाब में पानी व ऑक्सीजन की कमी को कुछ हद तक दूर किया गया। तालाब के निजी जमीन पर स्थित होने व टीसीपी के अधिकार क्षेत्र में होने के चलते नगर परिषद परवाणू चाह कर भी इस तालाब का संरक्षण नहीं कर पा रही है। परवाणू के समाजसेवी व सामाजिक संस्थाए अपने स्तर पर तालाब में पानी डलवाकर मछलियों की जान बचाने के लिए अभी तक प्रयासरत है। बीडीओ धर्मपुर सुभाष धीमान से पूछे जाने पर उन्होंने कहा की उनके संज्ञान में ये मामला नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि वह जमीन हमारे अधीन है तो स्थानीय पंचायत व सेक्रेटरी को इस मामले की जांच के आदेश दिए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो स्वयं मौके पर जा कर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। हमारे अधिकार के अंतर्गत होगा तो तालाब के जीर्णोद्धार की पूरी व्यवस्था की जाएगी। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अनुभव शर्मा ने बताया कागजातों की पड़ताल से पता चला है की यह तालाब निजी भूमि पर स्थित है, साथ ही नगर परिषद की परिधि से भी बाहर है, ऐसे में नगर परिषद चाह कर भी इस तालाब का संरक्षण नहीं कर पा रही है। उन्होंने बताया की नगर परिषद द्वारा तालाब में पानी के टैंकरों के जरिए पानी डलवाया जा रहा है।
यतीन्द्र शहीद हुए, अन्य को फाँसी कारियों के सामने आते हैं तो वे रो देते हैं। एक पुलिस अफसर मनोरञ्जन को रोककर स्वय पानी लेने गया । खिर व हिंदुस्तानी ही था. एक क्षण के लिये उसे जोश आ गया, किंतु साम्राज्यवाद तो एक पद्धति है, उनमें भला दया की गुञ्जाइश कहां है ? वह तो ऐसे मौकों पर और भी क्रूर हो जाता है । इस क्रूरता का नाम ब्रिटिश न्याय है । यतीन्द्र शहीद हुए, अन्य को फाँसी यतीन्द्र मुकर्जी को उठा कर कटक के अताल ले जाया गया, वहीं पर उनकी मृत्यु हुई । मनोरञ्जन और नरेन्द्र को फांसी दे दी गई, ज्योतिष पागल हो गये थे, इसलिये पागलखाने भेज दिये गये, वही वे वर्षो के बाद मर गये। कैसा सुन्दर पुरस्कार था, इन परम देशभक्तों की कैसा परिणति हुई ? फिर भी जो लोग ब्रिटिश साम्राज्यवाद से उदारता की अशा रखते हैं धिक्कार है उन पर, ऐसे गुलामों को अन्धता पर शर्म आती है। पहिले ही कहा जा चुका है कि जर्मनी दिब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध शक्तियों से भारत की स्वाधीनता के लिये सहायता प्राप्त करने के षडयंत्र में यतीन्द्र का बहुत बड़ा हाथ था । १२ फरवरी १६१४ को गार्डन राच मे जा मोटर डकैती हुई उसके नेता भी यतीन्द्र मुकर्जी थे, मोटर डकैती के वे विशेषज्ञ समझे जाते थे। उन्होंने कई लाख रुपया इस प्रकार क्रानिकारियों के खजाने में दिया। इसके अतिरिक्त कई एक खून मे भा यतीद्र ने भाग लिया था ऐसा समझा जाता है। इन्हीं सब गुणों के कारण यतींद्र एक बहुत ही खतरनाक क्रांतिकारी समझे जाते थे, उनकी हत्या से ब्रिटिश सिंहासन का एक कांटा दूर हुआ । जिस दिन यतींद्र मुकर्जी मरे, उस दिन ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने आराम की एक गहरी सांस ली, एक खतरनाक दुश्मन मरा, किन्तु ब्रिटिश साम्राज्यवाद की यह हिमाकत थी । शहीदों का वंश कभी निर्बंश नहीं होता, वह तो हमेशा हरा भरा रहता है। मैजिनी के वचन
यतीन्द्र शहीद हुए, अन्य को फाँसी कारियों के सामने आते हैं तो वे रो देते हैं। एक पुलिस अफसर मनोरञ्जन को रोककर स्वय पानी लेने गया । खिर व हिंदुस्तानी ही था. एक क्षण के लिये उसे जोश आ गया, किंतु साम्राज्यवाद तो एक पद्धति है, उनमें भला दया की गुञ्जाइश कहां है ? वह तो ऐसे मौकों पर और भी क्रूर हो जाता है । इस क्रूरता का नाम ब्रिटिश न्याय है । यतीन्द्र शहीद हुए, अन्य को फाँसी यतीन्द्र मुकर्जी को उठा कर कटक के अताल ले जाया गया, वहीं पर उनकी मृत्यु हुई । मनोरञ्जन और नरेन्द्र को फांसी दे दी गई, ज्योतिष पागल हो गये थे, इसलिये पागलखाने भेज दिये गये, वही वे वर्षो के बाद मर गये। कैसा सुन्दर पुरस्कार था, इन परम देशभक्तों की कैसा परिणति हुई ? फिर भी जो लोग ब्रिटिश साम्राज्यवाद से उदारता की अशा रखते हैं धिक्कार है उन पर, ऐसे गुलामों को अन्धता पर शर्म आती है। पहिले ही कहा जा चुका है कि जर्मनी दिब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध शक्तियों से भारत की स्वाधीनता के लिये सहायता प्राप्त करने के षडयंत्र में यतीन्द्र का बहुत बड़ा हाथ था । बारह फरवरी एक हज़ार छः सौ चौदह को गार्डन राच मे जा मोटर डकैती हुई उसके नेता भी यतीन्द्र मुकर्जी थे, मोटर डकैती के वे विशेषज्ञ समझे जाते थे। उन्होंने कई लाख रुपया इस प्रकार क्रानिकारियों के खजाने में दिया। इसके अतिरिक्त कई एक खून मे भा यतीद्र ने भाग लिया था ऐसा समझा जाता है। इन्हीं सब गुणों के कारण यतींद्र एक बहुत ही खतरनाक क्रांतिकारी समझे जाते थे, उनकी हत्या से ब्रिटिश सिंहासन का एक कांटा दूर हुआ । जिस दिन यतींद्र मुकर्जी मरे, उस दिन ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने आराम की एक गहरी सांस ली, एक खतरनाक दुश्मन मरा, किन्तु ब्रिटिश साम्राज्यवाद की यह हिमाकत थी । शहीदों का वंश कभी निर्बंश नहीं होता, वह तो हमेशा हरा भरा रहता है। मैजिनी के वचन
तीसरी पीढ़ी की Hyundai i20 में 2020 में लॉन्च होने के बाद से इसके वेरिएंट लाइनअप में मामूली अपडेट और संशोधित उत्सर्जन और सुरक्षा नियमों के आवश्यक अनुपालन के अलावा बहुत कुछ नहीं बदला है। हालांकि, रिपोर्ट बताती हैं कि कंपनी i20 के फेसलिफ्टेड संस्करण पर काम कर रही है, जिसके आने वाले हफ्तों में भारत पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, इस अपकमिंग फेसलिफ़्टेड Hyundai i20 की तस्वीरें कोरियन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म AutoSpy पर लीक हुई हैं, जो प्रोडक्शन के लिए तैयार हैं और इनमें कुछ बदलाव भी नज़र आए। एक्सटीरियर के मामले में, यह फेसलिफ़्टेड i20 मौजूदा मॉडल की तुलना में कोई बड़ा मेकओवर नहीं है। हेडलैम्प्स को घुमावदार बाहरी किनारों के साथ थोड़ा ट्वीक किया गया है और नई चौथी पीढ़ी के Verna के हेडलैम्प्स के जैसे ऑल-एलईडी रोशनी की सुविधा है। ग्रिल पहले की तरह ही दिखता है, फ्रंट बम्पर बूमरैंग के आकार के एयर कर्टन्स और एक स्पोर्टियर दिखने वाले फ्रंट स्प्लिटर के साथ नया दिख रहा है। फेसलिफ्टेड Hyundai i20 साइड से पहले जैसी दिखती है, लेकिन कार में अलॉय व्हील्स का एक नया सेट मिलता है। पीछे की तरफ, Z-शेप के LED इन्सर्ट और बूट लिड के साथ LED टेल लैंप्स का डिज़ाइन मौजूदा मॉडल जैसा ही दिखता है। हालांकि, रियर बम्पर को नए रिफ्लेक्टर हाउसिंग के साथ अपडेट किया गया है और रियर डिफ्यूज़र के लिए सिल्वर गार्निश के साथ एक नया डिज़ाइन दिया गया है। फेसलिफ्टेड Hyundai i20 के इंटीरियर की एक सिंगल इमेज भी लीक हुई है, जिससे पता चलता है कि केबिन लेआउट को उसी ऑल-ब्लैक थीम के साथ बरकरार रखा गया है। हालांकि, इस ताज़ा i20 में सबसे प्रमुख बदलाव नया फुल-टीएफटी इंस्ट्रूमेंट कंसोल है, जो Alcazar के जैसा दिखता है। इसके अलावा, केबिन 10.25-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, फोर-स्पोक मल्टी-फंक्शनल स्टीयरिंग व्हील और वायरलेस चार्जर जैसी सुविधाओं की मौजूदा सूची को बरकरार रखता है। यह भी उम्मीद की जाती है, कि नई i20 में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स जैसी कुछ नई सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं। इतना ही नहीं, Hyundai ने हाल ही में i20 के डीजल वेरिएंट को बंद कर दिया है और हैचबैक अब केवल पेट्रोल-ओनली फॉर्म में उपलब्ध होगी। इसका मतलब है, कि नई फेसलिफ़्टेड i20 में मौजूदा वर्ज़न वाला 1.2-liter चार-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड 83 PS पेट्रोल इंजन और 1.0-liter तीन-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड 120 PS पेट्रोल इंजन बरकरार रहेगा। गौरतलब है, कि Hyundai i20 का नया संस्करण सबसे पहले दक्षिण कोरिया के अपने घरेलू बाजार में लॉन्च होगा, इसके बाद भारत सहित अन्य प्रमुख बाजारों में लॉन्च किया जाएगा। इसके बावजूद नई i20 Maruti Suzuki Baleno, Toyota Glanza और Tata Altroz को टक्कर देना जारी रखेगी।
तीसरी पीढ़ी की Hyundai iबीस में दो हज़ार बीस में लॉन्च होने के बाद से इसके वेरिएंट लाइनअप में मामूली अपडेट और संशोधित उत्सर्जन और सुरक्षा नियमों के आवश्यक अनुपालन के अलावा बहुत कुछ नहीं बदला है। हालांकि, रिपोर्ट बताती हैं कि कंपनी iबीस के फेसलिफ्टेड संस्करण पर काम कर रही है, जिसके आने वाले हफ्तों में भारत पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, इस अपकमिंग फेसलिफ़्टेड Hyundai iबीस की तस्वीरें कोरियन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म AutoSpy पर लीक हुई हैं, जो प्रोडक्शन के लिए तैयार हैं और इनमें कुछ बदलाव भी नज़र आए। एक्सटीरियर के मामले में, यह फेसलिफ़्टेड iबीस मौजूदा मॉडल की तुलना में कोई बड़ा मेकओवर नहीं है। हेडलैम्प्स को घुमावदार बाहरी किनारों के साथ थोड़ा ट्वीक किया गया है और नई चौथी पीढ़ी के Verna के हेडलैम्प्स के जैसे ऑल-एलईडी रोशनी की सुविधा है। ग्रिल पहले की तरह ही दिखता है, फ्रंट बम्पर बूमरैंग के आकार के एयर कर्टन्स और एक स्पोर्टियर दिखने वाले फ्रंट स्प्लिटर के साथ नया दिख रहा है। फेसलिफ्टेड Hyundai iबीस साइड से पहले जैसी दिखती है, लेकिन कार में अलॉय व्हील्स का एक नया सेट मिलता है। पीछे की तरफ, Z-शेप के LED इन्सर्ट और बूट लिड के साथ LED टेल लैंप्स का डिज़ाइन मौजूदा मॉडल जैसा ही दिखता है। हालांकि, रियर बम्पर को नए रिफ्लेक्टर हाउसिंग के साथ अपडेट किया गया है और रियर डिफ्यूज़र के लिए सिल्वर गार्निश के साथ एक नया डिज़ाइन दिया गया है। फेसलिफ्टेड Hyundai iबीस के इंटीरियर की एक सिंगल इमेज भी लीक हुई है, जिससे पता चलता है कि केबिन लेआउट को उसी ऑल-ब्लैक थीम के साथ बरकरार रखा गया है। हालांकि, इस ताज़ा iबीस में सबसे प्रमुख बदलाव नया फुल-टीएफटी इंस्ट्रूमेंट कंसोल है, जो Alcazar के जैसा दिखता है। इसके अलावा, केबिन दस.पच्चीस-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, फोर-स्पोक मल्टी-फंक्शनल स्टीयरिंग व्हील और वायरलेस चार्जर जैसी सुविधाओं की मौजूदा सूची को बरकरार रखता है। यह भी उम्मीद की जाती है, कि नई iबीस में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स जैसी कुछ नई सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं। इतना ही नहीं, Hyundai ने हाल ही में iबीस के डीजल वेरिएंट को बंद कर दिया है और हैचबैक अब केवल पेट्रोल-ओनली फॉर्म में उपलब्ध होगी। इसका मतलब है, कि नई फेसलिफ़्टेड iबीस में मौजूदा वर्ज़न वाला एक.दो-liter चार-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड तिरासी PS पेट्रोल इंजन और एक.शून्य-liter तीन-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड एक सौ बीस PS पेट्रोल इंजन बरकरार रहेगा। गौरतलब है, कि Hyundai iबीस का नया संस्करण सबसे पहले दक्षिण कोरिया के अपने घरेलू बाजार में लॉन्च होगा, इसके बाद भारत सहित अन्य प्रमुख बाजारों में लॉन्च किया जाएगा। इसके बावजूद नई iबीस मार्चuti Suzuki Baleno, Toyota Glanza और Tata Altroz को टक्कर देना जारी रखेगी।
दुबई सरकारी मीडिया कार्यालय ने बूम को स्पष्ट किया कि दुबई में एक क्षेत्र का हिंद सिटी के रूप में नामकरण किसी भी देश को संदर्भित नहीं करता है. भारत और हिंदुओं द्वारा मानवता के लिए किए गए योगदान के सम्मान में दुबई के अल मिनहाद ज़िले का नाम बदलकर 'हिंद सिटी' करने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि दुबई के शासक और UAE के पीएम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने आदेश दिया है मानवता के प्रति भारत और हिंदुओं के योगदान का सम्मान करने के लिए अल मिनहाद और इसके आसपास के 84 वर्ग किमी क्षेत्र को अब "हिंद सिटी" के रूप में जाना जाएगा. बूम ने दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय से संपर्क किया जिसने एक बयान में स्पष्ट किया कि नाम बदलने का किसी अन्य देश से कोई लेना-देना नहीं है. इस भ्रामक ट्वीट को अब तक 1. 5 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है. ट्वीट का आर्काइव वर्ज़न यहां देखें. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और सांसद अनिल बुलानी ने दावा किया कि नाम बदलना मोदी के नेतृत्व में विश्व मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत है. ट्वीट का आर्काइव वर्ज़न यहां देखें. पोस्ट यहां देखें. कई मेनस्ट्रीम इंडियन न्यूज़ आउटलेट्स की रिपोर्ट में बताया गया कि दुबई के शासक, संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधान मंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने जनवरी में अल मिनहाद और इसके आसपास के क्षेत्रों का नाम बदलकर "हिंद सिटी" कर दिया है. इस सिटी में चार क्षेत्र शामिल हैं- हिंद 1, हिंद 2, हिंद 3 और हिंद 4- और यह 83. 9 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है. नाम बदलने की जानकारी देने वाले न्यूज़ आउटलेट्स में एएनआई, न्यूज़18, न्यूज़18हिंदी और इंडिया टुडे शामिल हैं. न्यूज़ आउटलेट्स ने 'हिंद सिटी' नाम के अर्थ को स्पष्ट नहीं किया; यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि आमतौर पर भारतीय मीडिया अन्य देशों में क्षेत्रों के नाम बदलने के बारे में तब तक रिपोर्ट नहीं करता जब तक कि यह पाठकों के लिए महत्वपूर्ण न हो. बूम ने वायरल दावे की सत्यता जांचने के लिए खोजबीन शुरू की. इस दौरान हम दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय की वेबसाइट पर पहुंचे, जहां नाम बदलने का विवरण है. हमने पाया कि इसमें भारत या हिंदुओं या भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का कोई ज़िक्र नहीं है. घोषणा यहां पढ़ें. बूम ने दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय से संपर्क किया जिसने वायरल दावे का खंडन किया और कहा, "हिंद एक अरबी नाम है जिसकी जड़ें इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता में हैं. दुबई में एक क्षेत्र का हिंद सिटी के रूप में नामकरण किसी भी देश का संदर्भ नहीं देता है. " हमने दुबई के शासक के सोशल मीडिया अकाउंट भी चेक किया. शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट में इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नाम बदलने के बारे में कोई ट्वीट नहीं किया गया था. इसके अलावा, हिंद एक पुराना अरबी नाम है. हिंद बिन्त मकतूम अल मकतूम शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की पत्नी हैं. दुबई स्थित अंग्रेजी दैनिक गल्फ़ न्यूज़ जिसने इस घोषणा की सूचना दी, ने भी अपनी रिपोर्ट में भारत या हिन्दुओं का कोई ज़िक्र नहीं किया.
दुबई सरकारी मीडिया कार्यालय ने बूम को स्पष्ट किया कि दुबई में एक क्षेत्र का हिंद सिटी के रूप में नामकरण किसी भी देश को संदर्भित नहीं करता है. भारत और हिंदुओं द्वारा मानवता के लिए किए गए योगदान के सम्मान में दुबई के अल मिनहाद ज़िले का नाम बदलकर 'हिंद सिटी' करने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि दुबई के शासक और UAE के पीएम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने आदेश दिया है मानवता के प्रति भारत और हिंदुओं के योगदान का सम्मान करने के लिए अल मिनहाद और इसके आसपास के चौरासी वर्ग किमी क्षेत्र को अब "हिंद सिटी" के रूप में जाना जाएगा. बूम ने दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय से संपर्क किया जिसने एक बयान में स्पष्ट किया कि नाम बदलने का किसी अन्य देश से कोई लेना-देना नहीं है. इस भ्रामक ट्वीट को अब तक एक. पाँच मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है. ट्वीट का आर्काइव वर्ज़न यहां देखें. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और सांसद अनिल बुलानी ने दावा किया कि नाम बदलना मोदी के नेतृत्व में विश्व मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत है. ट्वीट का आर्काइव वर्ज़न यहां देखें. पोस्ट यहां देखें. कई मेनस्ट्रीम इंडियन न्यूज़ आउटलेट्स की रिपोर्ट में बताया गया कि दुबई के शासक, संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधान मंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने जनवरी में अल मिनहाद और इसके आसपास के क्षेत्रों का नाम बदलकर "हिंद सिटी" कर दिया है. इस सिटी में चार क्षेत्र शामिल हैं- हिंद एक, हिंद दो, हिंद तीन और हिंद चार- और यह तिरासी. नौ किलोग्राममीटर के क्षेत्र में फैला है. नाम बदलने की जानकारी देने वाले न्यूज़ आउटलेट्स में एएनआई, न्यूज़अट्ठारह, न्यूज़अट्ठारहहिंदी और इंडिया टुडे शामिल हैं. न्यूज़ आउटलेट्स ने 'हिंद सिटी' नाम के अर्थ को स्पष्ट नहीं किया; यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि आमतौर पर भारतीय मीडिया अन्य देशों में क्षेत्रों के नाम बदलने के बारे में तब तक रिपोर्ट नहीं करता जब तक कि यह पाठकों के लिए महत्वपूर्ण न हो. बूम ने वायरल दावे की सत्यता जांचने के लिए खोजबीन शुरू की. इस दौरान हम दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय की वेबसाइट पर पहुंचे, जहां नाम बदलने का विवरण है. हमने पाया कि इसमें भारत या हिंदुओं या भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का कोई ज़िक्र नहीं है. घोषणा यहां पढ़ें. बूम ने दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय से संपर्क किया जिसने वायरल दावे का खंडन किया और कहा, "हिंद एक अरबी नाम है जिसकी जड़ें इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता में हैं. दुबई में एक क्षेत्र का हिंद सिटी के रूप में नामकरण किसी भी देश का संदर्भ नहीं देता है. " हमने दुबई के शासक के सोशल मीडिया अकाउंट भी चेक किया. शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट में इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नाम बदलने के बारे में कोई ट्वीट नहीं किया गया था. इसके अलावा, हिंद एक पुराना अरबी नाम है. हिंद बिन्त मकतूम अल मकतूम शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की पत्नी हैं. दुबई स्थित अंग्रेजी दैनिक गल्फ़ न्यूज़ जिसने इस घोषणा की सूचना दी, ने भी अपनी रिपोर्ट में भारत या हिन्दुओं का कोई ज़िक्र नहीं किया.
पूछा, "वाह ! वाह ! एकदम बड़े आदमी जैसा बर्ताव करने लगा है। ये सब कहाँ से सीखा बेटेऽऽ ?" "जीजा माता के पास ! और कहाँ ?" महाराज ने निश्चय कर लिया कि चाहे जान भले ही चली जाय किन्तु औरंगजेब के अपमानजनक दरबार का मुँह वे दुबारा नहीं देखेंगे। किन्तु यह भी निश्चित था कि ऐसी अहंकारी भाषा और किसी का ऐसा गुरूर औरंगजेब कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उसके सन्तोष के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। इस प्रकार आग्रह करते हुए रामसिंह महाराज के पास बैठे रहे। अन्त में उन दोनों ने एक उपाय ढूँढ़ निकाला। तय हुआ कि शिवाजी महाराज बीमार हो जाने का बहाना करें और उनके स्थान पर छोटे संभाजी राजा औरंगजेब के दरबार में उपस्थित हों । पहले दिन जब संभाजी दरबार में जाने लगे तो शिवाजी ने स्वयं उन्हें तैयार किया। अन्त में उन्होंने उनके गोरे-गोरे मस्तक पर केसर चन्दन का टीका लगाया। संभाजी के गोल-मटोल चेहरे को देखकर महाराज का मन भर आया। उन्होंने बड़ी ममता से संभाजी के गालों पर, पीठ पर हाथ फेरा । शम्भूराजा हँस पड़े। अपने छोटे से हाथ में महाराज के हाथ को कसने का प्रयास करते हुए संभाजी बोले, "पिताजी, आप इस तरह पेरशान मत होइए । जहाँजहाँ भी आप उपस्थित नहीं रह सकेंगे, उस जगह को भरने का प्रयास यह शम्भू अवश्य करेगा।" सवेरे ही बड़े महाराज का सन्देश आया। उन्होंने सवेरे ही शम्भूराजा को गढ़ पर महालक्ष्मी के मन्दिर में बुलाया था। उनके आगमन के लिए महापूजा का संकल्प किया गया था। विधिवत पूजा समाप्त होते होते बहुत समय निकल गया। अन्ततः पिता-पुत्र दोपहर को ही एकान्त में मिल पाये । बड़े महाराज ने हँसते-हँसते कहा, "शम्भूराजा! मुसलमानों का साथ छोड़ देने पर भी आप स्वराज्य में वापस लौटेंगे इसमें मुझे शक था और इस चिन्ता ने हमें बेचैन कर दिया था। मुझे लगता था कि वहाँ आने में आप संकोच करेंगे। हो सकता था कि किसी दूसरी जगह चले जाते। " "पिताजी, बहुत दुनिया देखी। अँधेरे में रास्ता चलते-चलते अटक गये। किन्तु फिर अपने ही हाथों से अपना फटा हुआ कलेजा जोड़ लिया। सोचा, सूर्यदेव की ओर ही जाना है तो डरना क्यों ?" शम्भूराजा ने कहा । "शम्भू, मैं कहता हूँ कि पहले आप कवि हैं, बाद में युवराज । " शिवाजी महाराज ने बड़े प्यार से कहा। संभाजी राजा को शिवाजी महाराज अपनी आँखों में समा लेने का प्रयास कर रहे थे। एकाएक उनकी आँखों से गालों पर मोती झर पड़े ये । भरे गले से वे दुखी सम्भाजी :: 153 स्वर में बोले, "तो शम्भूराजा आप अकेले ही वापस आये ?" "क्षमा करें पिताजी ।" शिवाजी महाराज के प्रश्न पूछने पर संभाजी का हृदय विदीर्ण हो गया। पिता पुत्र दोनों ही बहुत दुखी हो गये थे। संभाजी बोले, "पिताजी, दुर्गा और राणू दीदी से मैंने साथ निकलने के लिए बहुत आग्रह किया। जी जान लगाकर प्रार्थना की। किन्तु उन्होंने सुना ही नहीं।" "नहीं, नहीं शम्भू बेटे । उन बेटियों का सोचना ही ठीक था । उनको साथ ले आने की कोशिश में आप स्वयं वहाँ हमेशा के लिए अटक जाते। ठीक है शम्भू बेटे ! आज नहीं तो कल, माँ भवानी आपके हाथ में शक्ति देंगी । तब अपने मजबूत हाथों से दोनों को छुड़ाकर ले आना चम।" अपने होनहार पुत्र पर दृष्टि डालते हुए शिवाजी महाराज ने कहा, "शम्भु बजे कर्नाटक युद्ध पर आपको अपने साथ न ले जाकर मैंने आपके साथ बड़ा अन्याय किया। आप ऐसा ही समझते हैं न?" शम्भृमहाराज कुछ हिचकिचाए अवश्य, किन्तु चुप्पी तोड़कर बोले, "क्यों न समझँ पिताजी। मैं जब केवल नौ वर्ष का था तब भी आपने मुझे दूर रखा । पुरन्दर की सन्धि के अनुसार मिर्जाराजा जयसिंह के पास मुझे गिरती रखा । " " शम्भू बेटे । वे सभी बातें मुझे स्मरण हैं।" शिवाजी महाराज ने कहा। और थोड़ी याद दिलाता हूँ, पिताजी।" युवराज आगे कहने लगे, औरंगजेब के शहजादे, तेज तर्रार मुअज्जम को फोड़कर पिना औरंगजेब में बगावत कराने का काम आपने मुझे मौंपा था। आपने कहा था कि बगावत के लिए मैं उसे मजबूर करूँ। " उस बात को याद करके शिवाजा मन्द मन्द मुस्कराये। शिवाजी महाराज की प्रसन्न मुद्रा को देखकर शंम्भृराज ने बान को आगे बढ़ाया। "क्यों पिताजी ? प्रयत्न करने पर भी मुझे उस कार्य में सफलता नहीं मिली। किन्तु केवल ग्यारह बारह वर्ष की उम उम्र में आपने जिस युवराज पर, औरंगजेब के शहजादे को बाप से अलग करने का जोखिम भग दायित्व सौंपा था, वहीं आपका पुत्र बीस वर्ष की उम्र में अपने पिता की उँगली पकड़कर मुहिम पर जाने के लिए अयोग्य कैसे हो गया " शिवाजी महाराज का चेहरा खिन्न हो गया। उन्होंने कहा, "शम्भू ! कर्नाटक की मुहिम पर साथ न ले जाने की घटना मेरे जीवन के लिए एक कडुआ अहसास है। आप जब छत्रपति बनेंगे तभी मेरे दर्द को ठीक ठीक समझ पाएँगे। कभी कभी राज्य की, समाज की भलाई के लिए अपने प्रियजनो से जानबूझकर अन्याय करना पड़ता है। क्या उतना भी अधिकार आप पर नहीं था मेरा, शम्भू बेटे " 'परन्तु रायगढ़ में तो हमें मुख मे रहने दे सकते थे )" रायगढ़ का नाम सुनते ही शिवाजी महाराज चुप हो गये। एक लम्बी आह
पूछा, "वाह ! वाह ! एकदम बड़े आदमी जैसा बर्ताव करने लगा है। ये सब कहाँ से सीखा बेटेऽऽ ?" "जीजा माता के पास ! और कहाँ ?" महाराज ने निश्चय कर लिया कि चाहे जान भले ही चली जाय किन्तु औरंगजेब के अपमानजनक दरबार का मुँह वे दुबारा नहीं देखेंगे। किन्तु यह भी निश्चित था कि ऐसी अहंकारी भाषा और किसी का ऐसा गुरूर औरंगजेब कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उसके सन्तोष के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। इस प्रकार आग्रह करते हुए रामसिंह महाराज के पास बैठे रहे। अन्त में उन दोनों ने एक उपाय ढूँढ़ निकाला। तय हुआ कि शिवाजी महाराज बीमार हो जाने का बहाना करें और उनके स्थान पर छोटे संभाजी राजा औरंगजेब के दरबार में उपस्थित हों । पहले दिन जब संभाजी दरबार में जाने लगे तो शिवाजी ने स्वयं उन्हें तैयार किया। अन्त में उन्होंने उनके गोरे-गोरे मस्तक पर केसर चन्दन का टीका लगाया। संभाजी के गोल-मटोल चेहरे को देखकर महाराज का मन भर आया। उन्होंने बड़ी ममता से संभाजी के गालों पर, पीठ पर हाथ फेरा । शम्भूराजा हँस पड़े। अपने छोटे से हाथ में महाराज के हाथ को कसने का प्रयास करते हुए संभाजी बोले, "पिताजी, आप इस तरह पेरशान मत होइए । जहाँजहाँ भी आप उपस्थित नहीं रह सकेंगे, उस जगह को भरने का प्रयास यह शम्भू अवश्य करेगा।" सवेरे ही बड़े महाराज का सन्देश आया। उन्होंने सवेरे ही शम्भूराजा को गढ़ पर महालक्ष्मी के मन्दिर में बुलाया था। उनके आगमन के लिए महापूजा का संकल्प किया गया था। विधिवत पूजा समाप्त होते होते बहुत समय निकल गया। अन्ततः पिता-पुत्र दोपहर को ही एकान्त में मिल पाये । बड़े महाराज ने हँसते-हँसते कहा, "शम्भूराजा! मुसलमानों का साथ छोड़ देने पर भी आप स्वराज्य में वापस लौटेंगे इसमें मुझे शक था और इस चिन्ता ने हमें बेचैन कर दिया था। मुझे लगता था कि वहाँ आने में आप संकोच करेंगे। हो सकता था कि किसी दूसरी जगह चले जाते। " "पिताजी, बहुत दुनिया देखी। अँधेरे में रास्ता चलते-चलते अटक गये। किन्तु फिर अपने ही हाथों से अपना फटा हुआ कलेजा जोड़ लिया। सोचा, सूर्यदेव की ओर ही जाना है तो डरना क्यों ?" शम्भूराजा ने कहा । "शम्भू, मैं कहता हूँ कि पहले आप कवि हैं, बाद में युवराज । " शिवाजी महाराज ने बड़े प्यार से कहा। संभाजी राजा को शिवाजी महाराज अपनी आँखों में समा लेने का प्रयास कर रहे थे। एकाएक उनकी आँखों से गालों पर मोती झर पड़े ये । भरे गले से वे दुखी सम्भाजी :: एक सौ तिरेपन स्वर में बोले, "तो शम्भूराजा आप अकेले ही वापस आये ?" "क्षमा करें पिताजी ।" शिवाजी महाराज के प्रश्न पूछने पर संभाजी का हृदय विदीर्ण हो गया। पिता पुत्र दोनों ही बहुत दुखी हो गये थे। संभाजी बोले, "पिताजी, दुर्गा और राणू दीदी से मैंने साथ निकलने के लिए बहुत आग्रह किया। जी जान लगाकर प्रार्थना की। किन्तु उन्होंने सुना ही नहीं।" "नहीं, नहीं शम्भू बेटे । उन बेटियों का सोचना ही ठीक था । उनको साथ ले आने की कोशिश में आप स्वयं वहाँ हमेशा के लिए अटक जाते। ठीक है शम्भू बेटे ! आज नहीं तो कल, माँ भवानी आपके हाथ में शक्ति देंगी । तब अपने मजबूत हाथों से दोनों को छुड़ाकर ले आना चम।" अपने होनहार पुत्र पर दृष्टि डालते हुए शिवाजी महाराज ने कहा, "शम्भु बजे कर्नाटक युद्ध पर आपको अपने साथ न ले जाकर मैंने आपके साथ बड़ा अन्याय किया। आप ऐसा ही समझते हैं न?" शम्भृमहाराज कुछ हिचकिचाए अवश्य, किन्तु चुप्पी तोड़कर बोले, "क्यों न समझँ पिताजी। मैं जब केवल नौ वर्ष का था तब भी आपने मुझे दूर रखा । पुरन्दर की सन्धि के अनुसार मिर्जाराजा जयसिंह के पास मुझे गिरती रखा । " " शम्भू बेटे । वे सभी बातें मुझे स्मरण हैं।" शिवाजी महाराज ने कहा। और थोड़ी याद दिलाता हूँ, पिताजी।" युवराज आगे कहने लगे, औरंगजेब के शहजादे, तेज तर्रार मुअज्जम को फोड़कर पिना औरंगजेब में बगावत कराने का काम आपने मुझे मौंपा था। आपने कहा था कि बगावत के लिए मैं उसे मजबूर करूँ। " उस बात को याद करके शिवाजा मन्द मन्द मुस्कराये। शिवाजी महाराज की प्रसन्न मुद्रा को देखकर शंम्भृराज ने बान को आगे बढ़ाया। "क्यों पिताजी ? प्रयत्न करने पर भी मुझे उस कार्य में सफलता नहीं मिली। किन्तु केवल ग्यारह बारह वर्ष की उम उम्र में आपने जिस युवराज पर, औरंगजेब के शहजादे को बाप से अलग करने का जोखिम भग दायित्व सौंपा था, वहीं आपका पुत्र बीस वर्ष की उम्र में अपने पिता की उँगली पकड़कर मुहिम पर जाने के लिए अयोग्य कैसे हो गया " शिवाजी महाराज का चेहरा खिन्न हो गया। उन्होंने कहा, "शम्भू ! कर्नाटक की मुहिम पर साथ न ले जाने की घटना मेरे जीवन के लिए एक कडुआ अहसास है। आप जब छत्रपति बनेंगे तभी मेरे दर्द को ठीक ठीक समझ पाएँगे। कभी कभी राज्य की, समाज की भलाई के लिए अपने प्रियजनो से जानबूझकर अन्याय करना पड़ता है। क्या उतना भी अधिकार आप पर नहीं था मेरा, शम्भू बेटे " 'परन्तु रायगढ़ में तो हमें मुख मे रहने दे सकते थे )" रायगढ़ का नाम सुनते ही शिवाजी महाराज चुप हो गये। एक लम्बी आह
FIR फेम टीवी के पॉपुलर एक्टर विपुल रॉय ने सभी को चौंका दिया है। एक्टर से जुडी एक ऐसी खबर सामने आई है जिसपर किसी को भी विश्वास नहीं होगा। दरअसल, खबर है की एक्टर ने चोरी- छिपे शादी कर ली है। खबर आ रही थी कि वो अपनी यूएस-बेस्ड मंगेतक मेलिस एटिसी के साथ 13 फरवरी को सात फेरे लेंगे। हालांकि इस योजना को फेल करते हुए उन्होंने 27 दिसंबर 2021 को ही शादी रचा ली। दरअसल मेलिस एटिसी अपनी शादी को लेकर काफी एक्साइटेड थीं। यही कारण था कि वो दिसंबर के महीने में ही अपने देश से मुंबई आ गईं। ऐसे में 27 दिसंबर 2021 को इस कपल ने सात जन्म साथ रहने की कस्में खाईं। विपुल और मेलिस ने नए साल का स्वागत पति-पत्नी के रूप में किया। इन दोनों ने जुहू इस्कॉन मंदिर में शादी की। विपुल और मेलिस की शादी में सिर्फ उनके परिवार और दोस्त ही शामिल हुए थे। इस शादी में दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया, रवि दुबे, राजीव अदतिया, कीकू शारदा, वाहबिज दोराबजी और रोहित वर्मा शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो परिवार और दोस्तों की उपस्थिति में ये शादी हुई। मेहमानों को सलाह दी गई थी कि वो अपने फोन दूर रखें और कपल की शादी की कोई फोटो पोस्ट ना करें। वैसे मेलिस और विपुल पहले से डेस्टिनेशन वेडिंग करने की प्लानिंग कर रहे थे और सबकुछ लगभग फाइनल भी हो चुका था। फैशन डिजाइनर रोहित वर्मा ने बीते दिनों बताया था कि मेलिस की शादी की ड्रेस उन्होंने डिजाइन की है। इस आउटफिट को भारतीय शादी और दुल्हन की वेस्टर्न बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था। रोहित का कहना था कि मेलिस नहीं चाहती थीं कि उनका लहंगा बहुत ज्यादा भारी हो, मेलिस का लहंगा वृंदावन गाथा से इंस्पायर था। विपुल और मेलिस ने एक दूसरे को पांच साल तक डेट करने के बाद साल 2019 के अगस्त में सगाई की थी। 2020 में ही इस कपल ने शादी करने की योजना बनाई थी लेकिन कोरोना के कारण ये संभव नहीं हो पाया।
FIR फेम टीवी के पॉपुलर एक्टर विपुल रॉय ने सभी को चौंका दिया है। एक्टर से जुडी एक ऐसी खबर सामने आई है जिसपर किसी को भी विश्वास नहीं होगा। दरअसल, खबर है की एक्टर ने चोरी- छिपे शादी कर ली है। खबर आ रही थी कि वो अपनी यूएस-बेस्ड मंगेतक मेलिस एटिसी के साथ तेरह फरवरी को सात फेरे लेंगे। हालांकि इस योजना को फेल करते हुए उन्होंने सत्ताईस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को ही शादी रचा ली। दरअसल मेलिस एटिसी अपनी शादी को लेकर काफी एक्साइटेड थीं। यही कारण था कि वो दिसंबर के महीने में ही अपने देश से मुंबई आ गईं। ऐसे में सत्ताईस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को इस कपल ने सात जन्म साथ रहने की कस्में खाईं। विपुल और मेलिस ने नए साल का स्वागत पति-पत्नी के रूप में किया। इन दोनों ने जुहू इस्कॉन मंदिर में शादी की। विपुल और मेलिस की शादी में सिर्फ उनके परिवार और दोस्त ही शामिल हुए थे। इस शादी में दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया, रवि दुबे, राजीव अदतिया, कीकू शारदा, वाहबिज दोराबजी और रोहित वर्मा शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो परिवार और दोस्तों की उपस्थिति में ये शादी हुई। मेहमानों को सलाह दी गई थी कि वो अपने फोन दूर रखें और कपल की शादी की कोई फोटो पोस्ट ना करें। वैसे मेलिस और विपुल पहले से डेस्टिनेशन वेडिंग करने की प्लानिंग कर रहे थे और सबकुछ लगभग फाइनल भी हो चुका था। फैशन डिजाइनर रोहित वर्मा ने बीते दिनों बताया था कि मेलिस की शादी की ड्रेस उन्होंने डिजाइन की है। इस आउटफिट को भारतीय शादी और दुल्हन की वेस्टर्न बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था। रोहित का कहना था कि मेलिस नहीं चाहती थीं कि उनका लहंगा बहुत ज्यादा भारी हो, मेलिस का लहंगा वृंदावन गाथा से इंस्पायर था। विपुल और मेलिस ने एक दूसरे को पांच साल तक डेट करने के बाद साल दो हज़ार उन्नीस के अगस्त में सगाई की थी। दो हज़ार बीस में ही इस कपल ने शादी करने की योजना बनाई थी लेकिन कोरोना के कारण ये संभव नहीं हो पाया।
Recent report on impact of China: वैश्विक महाशक्ति बनने की चाह में अपनी मनमानी कर रहे चीन को झटके लगने शुरू हो गए हैं. भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका में उसके प्रति नकारात्मक अवधारणा बढ़ती जा रही है. Recent report by Pew Research Center on impact of China: दुनिया में अपने पैसे और सैन्यबल के दम पर धौंस जमाने की कोशिश कर रहे चीन को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. उसके विस्तारवादी रवैये की वजह से दुनिया में उसके खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है. बुधवार को जारी हुए प्यू रिसर्च सेंटर की एक स्टडी से पता चला है कि ब्रिक्स समूह के दो बड़े देशों में भारत और ब्राजील में चीन के प्रति नफरत बढ़ती जा रही है. सर्वे में पता चला है कि दोनों देशों के अधिकतर लोगों के चीन के बारे में विचार नकारात्मक है और उसे नापसंद करने वाले लोगों की संख्या अब 21 पर्सेंट बढ़ गई है. वहीं दक्षिण अफ्रीका के लोगों में भी चीन के प्रति नकारात्मक रेटिंग बढ़ी है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक वाशिंगटन के थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर की ओर फरवरी और अप्रैल के बीच यह स्टडी (Recent Study on impact of China) की गई थी. इस सर्वे में 24 देशों के 30 हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था. इनमें भारत से 2611, ब्राजील से 1044 और दक्षिण अफ्रीका से 1502 लोग शामिल हुए थे. सर्वे में शामिल हुए ब्राजील के लगभग आधे लोगों यानी 48 प्रतिशत ने चीन के बारे में नकारात्मक रेटिंग थी. यह वर्ष 2019 में किए सर्वे से 27 प्रतिशत ज्यादा है. भारत की बात करें तो सर्वे में शामिल हुए 67 प्रतिशत भारतीयों ने चीन (Recent Study on impact of China) को अपने देश के लिए खतरा बताया. वर्ष 2019 में ऐसी राय प्रकट करने वाले भारतीयों की संख्या 46 प्रतिशत थी. जबकि दक्षिण अफ्रीका में इसी अवधि में चीन को नापसंद करने वाले लोगों की संख्या 35 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है. प्यू रिसर्च सेंटर की ओर से यह सर्वे लौरा सिल्वर Laura Silver ने किया था. Laura Silver के मुताबिक भारत और दक्षिण अफ्रीका में उन लोगों की संख्या पिछले एक दशक में काफी बढ़ गई है, जिन्हें लगता है कि चीन ने उनके राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की है. सर्वे में सामने आया कि ब्राजील और भारत के लोग वैश्विक शांति और स्थिरता में चीन (Recent Study on impact of China) के योगदान के प्रति ज्यादा सशंकित दिखाई दिए. ब्राजील के 62 प्रतिशत और भारत के 56 प्रतिशत लोगों ने विचार व्यक्त किया कि चीन विश्व शांति के लिए खतरा है. वही दक्षिण अफ़्रीकी के अधिकतर लोग चीन के प्रति आशावादी दिखाई दिए. दक्षिण अफ्रीका के 47 प्रतिशत लोगों ने ने बीजिंग की भूमिका को दुनिया के लिए अनुकूल बताया. सर्वे में शामिल हुए 67 फीसदी भारतीयों और 57 फीसदी ब्राजीलियाई लोगों ने चीनी (Recent Study on impact of China) नेता शी जिनपिंग की सही निर्णय लेने की क्षमता पर शक जताया. वही वहीं 47 फीसदी दक्षिण अफ्रीकी लोगों को उन पर भरोसा था. सर्वे में सामने आया कि दुनिया के दूसरे देशों के प्रति दबंग वाली प्रवृति, कर्ज कूटनीति और मानवाधिकारों की गंभीर स्थिति चीन को वैश्विक व्यवस्था में नीचे गिरा रही है.
Recent report on impact of China: वैश्विक महाशक्ति बनने की चाह में अपनी मनमानी कर रहे चीन को झटके लगने शुरू हो गए हैं. भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका में उसके प्रति नकारात्मक अवधारणा बढ़ती जा रही है. Recent report by Pew Research Center on impact of China: दुनिया में अपने पैसे और सैन्यबल के दम पर धौंस जमाने की कोशिश कर रहे चीन को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. उसके विस्तारवादी रवैये की वजह से दुनिया में उसके खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है. बुधवार को जारी हुए प्यू रिसर्च सेंटर की एक स्टडी से पता चला है कि ब्रिक्स समूह के दो बड़े देशों में भारत और ब्राजील में चीन के प्रति नफरत बढ़ती जा रही है. सर्वे में पता चला है कि दोनों देशों के अधिकतर लोगों के चीन के बारे में विचार नकारात्मक है और उसे नापसंद करने वाले लोगों की संख्या अब इक्कीस पर्सेंट बढ़ गई है. वहीं दक्षिण अफ्रीका के लोगों में भी चीन के प्रति नकारात्मक रेटिंग बढ़ी है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक वाशिंगटन के थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर की ओर फरवरी और अप्रैल के बीच यह स्टडी की गई थी. इस सर्वे में चौबीस देशों के तीस हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था. इनमें भारत से दो हज़ार छः सौ ग्यारह, ब्राजील से एक हज़ार चौंतालीस और दक्षिण अफ्रीका से एक हज़ार पाँच सौ दो लोग शामिल हुए थे. सर्वे में शामिल हुए ब्राजील के लगभग आधे लोगों यानी अड़तालीस प्रतिशत ने चीन के बारे में नकारात्मक रेटिंग थी. यह वर्ष दो हज़ार उन्नीस में किए सर्वे से सत्ताईस प्रतिशत ज्यादा है. भारत की बात करें तो सर्वे में शामिल हुए सरसठ प्रतिशत भारतीयों ने चीन को अपने देश के लिए खतरा बताया. वर्ष दो हज़ार उन्नीस में ऐसी राय प्रकट करने वाले भारतीयों की संख्या छियालीस प्रतिशत थी. जबकि दक्षिण अफ्रीका में इसी अवधि में चीन को नापसंद करने वाले लोगों की संख्या पैंतीस प्रतिशत से बढ़कर चालीस प्रतिशत हो गई है. प्यू रिसर्च सेंटर की ओर से यह सर्वे लौरा सिल्वर Laura Silver ने किया था. Laura Silver के मुताबिक भारत और दक्षिण अफ्रीका में उन लोगों की संख्या पिछले एक दशक में काफी बढ़ गई है, जिन्हें लगता है कि चीन ने उनके राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की है. सर्वे में सामने आया कि ब्राजील और भारत के लोग वैश्विक शांति और स्थिरता में चीन के योगदान के प्रति ज्यादा सशंकित दिखाई दिए. ब्राजील के बासठ प्रतिशत और भारत के छप्पन प्रतिशत लोगों ने विचार व्यक्त किया कि चीन विश्व शांति के लिए खतरा है. वही दक्षिण अफ़्रीकी के अधिकतर लोग चीन के प्रति आशावादी दिखाई दिए. दक्षिण अफ्रीका के सैंतालीस प्रतिशत लोगों ने ने बीजिंग की भूमिका को दुनिया के लिए अनुकूल बताया. सर्वे में शामिल हुए सरसठ फीसदी भारतीयों और सत्तावन फीसदी ब्राजीलियाई लोगों ने चीनी नेता शी जिनपिंग की सही निर्णय लेने की क्षमता पर शक जताया. वही वहीं सैंतालीस फीसदी दक्षिण अफ्रीकी लोगों को उन पर भरोसा था. सर्वे में सामने आया कि दुनिया के दूसरे देशों के प्रति दबंग वाली प्रवृति, कर्ज कूटनीति और मानवाधिकारों की गंभीर स्थिति चीन को वैश्विक व्यवस्था में नीचे गिरा रही है.
लाइव हिंदी खबर :-बहुत से लोगों को मालूम होगा कि भगवान शिव और माता पार्वती की दो संताने हैं लेकिन ये सच नहीं है। कार्तिकेय और गणेश के अलावा उनकी एक पुत्री भी थी। यानी उनकी तीन संताने थी। जिनके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम होगा। भगवान शिव की पुत्री का जिक्र पद्मपुराण में किया गया है। इनका नाम अशोक सुंदरी थी। आज हम आपको भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री के बारे में बताएंगे। जिनके पीछे एक रोचक किंवदंती है। पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान शिव व पार्वती अशोक सुंदरी एक देव कन्या थी जो बेहद ही सुंदर थी। जैसा कि शिव और पार्वती की इस पुत्री का वर्णन पद्मपुराण में है। पुराण के मुताबिक एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से संसार के सबसे सुंदर उद्यान में घूमने का आग्रह किया। उनकी इच्छानुसार भगवान शिव ने उन्हें नंदनवन ले गए जहाँ माता पार्वती को कल्पवृक्ष नामक एक पेड़ से मन को भा गया। कल्पवृक्ष मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला वृक्ष था अतः माता उसे अपने साथ कैलाश ले आयी और एक उद्यान में स्थापित किया। एक दिन माता अकेले ही अपने उद्यान में विचरण कर रही थी और भगवान शिव लीन थे। माता को अकेलापन महसूस होने लगा इसलिए अपना अकेलापन दूर करने के लिए उन्होंने एक पुत्री की इच्छा व्यक्त की। तभी माता को कल्पवृक्ष का ध्यान आया जिसके पश्चात वह उसके पास गयीं और एक पुत्री की कामना की। चूँकि कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ति करने वाला वृक्ष था इसलिए उसने तुरंत ही माता की इच्छा पूरी कर दी जिसके फलस्वरूप उन्हें एक सुन्दर कन्या मिली जिसका नाम उन्होंने अशोक सुंदरी रखा। उसे सुंदरी इसलिए कहा गया क्योंकि वह बेहद खूबसूरत थी। माता पार्वती अपनी पुत्री को प्राप्त कर बहुत ही प्रसन्न थी इसलिए माता ने अशोक सुंदरी को यह वरदान दिया था कि उसका विवाह देवराज इंद्र जितने शक्तिशाली युवक से होगा। ऐसा माना जाता है कि अशोक सुंदरी का विवाह चंद्रवंशीय ययाति के पौत्र नहुष के साथ होना तय था। एक बार अशोक सुंदरी अपनी सखियों के संग नंदनवन में विचरण कर रहीं थीं तभी वहां हुंड नामक एक राक्षस आया। वह अशोक सुंदरी की सुन्दरता से इतना मोहित हो गया कि उससे विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया। अशोक सुंदरी ने विवाह से मना कर दिया। यह सुनकर हुंड क्रोधित हो उठा और उसने कहा कि वह नहुष का वध करके उससे विवाह करेगा। राक्षस की दृढ़ता देखकर अशोक सुंदरी ने उसे श्राप दिया कि उसकी मृत्यु उसके पति के हाथों ही होगी। तब उस दुष्ट राक्षस ने नहुष को ढूंढ निकाला और उसका अपहरण कर लिया। जिस समय हुंड ने नहुष को अगवा किया था उस वक़्त वह बालक थे। राक्षस की एक दासी ने किसी तरह राजकुमार को बचाया और ऋषि विशिष्ठ के आश्रम ले आयी जहां उनका पालन पोषण हुआ । जब राजकुमार बड़े हुए तब उन्होंने हुंड का वध कर दिया जिसके पश्चात माता पार्वती और भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनका विवाह अशोक सुंदरी के साथ संपन्न हुआ। बाद में अशोक सुंदरी को ययाति जैसा वीर पुत्र और सौ रूपवान कन्याओ की प्राप्ति हुई। इंद्र के घमंड के कारण उसे श्राप मिला तथा जिससे उसका पतन हुआ। उसके अभाव में नहूष को आस्थायी रूप से उसकी गद्दी दे दी गयी थी जिसे बाद में इंद्रा ने पुनः ग्रहण कर लिया था।
लाइव हिंदी खबर :-बहुत से लोगों को मालूम होगा कि भगवान शिव और माता पार्वती की दो संताने हैं लेकिन ये सच नहीं है। कार्तिकेय और गणेश के अलावा उनकी एक पुत्री भी थी। यानी उनकी तीन संताने थी। जिनके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम होगा। भगवान शिव की पुत्री का जिक्र पद्मपुराण में किया गया है। इनका नाम अशोक सुंदरी थी। आज हम आपको भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री के बारे में बताएंगे। जिनके पीछे एक रोचक किंवदंती है। पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान शिव व पार्वती अशोक सुंदरी एक देव कन्या थी जो बेहद ही सुंदर थी। जैसा कि शिव और पार्वती की इस पुत्री का वर्णन पद्मपुराण में है। पुराण के मुताबिक एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से संसार के सबसे सुंदर उद्यान में घूमने का आग्रह किया। उनकी इच्छानुसार भगवान शिव ने उन्हें नंदनवन ले गए जहाँ माता पार्वती को कल्पवृक्ष नामक एक पेड़ से मन को भा गया। कल्पवृक्ष मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला वृक्ष था अतः माता उसे अपने साथ कैलाश ले आयी और एक उद्यान में स्थापित किया। एक दिन माता अकेले ही अपने उद्यान में विचरण कर रही थी और भगवान शिव लीन थे। माता को अकेलापन महसूस होने लगा इसलिए अपना अकेलापन दूर करने के लिए उन्होंने एक पुत्री की इच्छा व्यक्त की। तभी माता को कल्पवृक्ष का ध्यान आया जिसके पश्चात वह उसके पास गयीं और एक पुत्री की कामना की। चूँकि कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ति करने वाला वृक्ष था इसलिए उसने तुरंत ही माता की इच्छा पूरी कर दी जिसके फलस्वरूप उन्हें एक सुन्दर कन्या मिली जिसका नाम उन्होंने अशोक सुंदरी रखा। उसे सुंदरी इसलिए कहा गया क्योंकि वह बेहद खूबसूरत थी। माता पार्वती अपनी पुत्री को प्राप्त कर बहुत ही प्रसन्न थी इसलिए माता ने अशोक सुंदरी को यह वरदान दिया था कि उसका विवाह देवराज इंद्र जितने शक्तिशाली युवक से होगा। ऐसा माना जाता है कि अशोक सुंदरी का विवाह चंद्रवंशीय ययाति के पौत्र नहुष के साथ होना तय था। एक बार अशोक सुंदरी अपनी सखियों के संग नंदनवन में विचरण कर रहीं थीं तभी वहां हुंड नामक एक राक्षस आया। वह अशोक सुंदरी की सुन्दरता से इतना मोहित हो गया कि उससे विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया। अशोक सुंदरी ने विवाह से मना कर दिया। यह सुनकर हुंड क्रोधित हो उठा और उसने कहा कि वह नहुष का वध करके उससे विवाह करेगा। राक्षस की दृढ़ता देखकर अशोक सुंदरी ने उसे श्राप दिया कि उसकी मृत्यु उसके पति के हाथों ही होगी। तब उस दुष्ट राक्षस ने नहुष को ढूंढ निकाला और उसका अपहरण कर लिया। जिस समय हुंड ने नहुष को अगवा किया था उस वक़्त वह बालक थे। राक्षस की एक दासी ने किसी तरह राजकुमार को बचाया और ऋषि विशिष्ठ के आश्रम ले आयी जहां उनका पालन पोषण हुआ । जब राजकुमार बड़े हुए तब उन्होंने हुंड का वध कर दिया जिसके पश्चात माता पार्वती और भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनका विवाह अशोक सुंदरी के साथ संपन्न हुआ। बाद में अशोक सुंदरी को ययाति जैसा वीर पुत्र और सौ रूपवान कन्याओ की प्राप्ति हुई। इंद्र के घमंड के कारण उसे श्राप मिला तथा जिससे उसका पतन हुआ। उसके अभाव में नहूष को आस्थायी रूप से उसकी गद्दी दे दी गयी थी जिसे बाद में इंद्रा ने पुनः ग्रहण कर लिया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घनिष्ठता जगजाहिर है। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि अगर आगामी अमेरिकी चुनाव ट्रंप हार जाते हैं तो भारत-अमेरिका के रिश्ते का क्या होगा। अब इस सवाल का जवाब मिल गया है। चुनाव में किसी की भी जीत हो, भारत से अमेरिका के रिश्ते सुदृढ़ ही रहेंगे। अमेरिका चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टीसे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने शनिवार को कहा कि उनका प्रशासन भारत-अमेरिका संबंधों को लगातार मजबूत करने को 'टॉप प्रायोरिटी' देगा. बाइडेन के प्रचार अभियान ने कहा कि उनका मानना है कि दक्षिण एशिया में, एक देश की सीमा से दूसरे देश में या किसी अन्य रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घनिष्ठता जगजाहिर है। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि अगर आगामी अमेरिकी चुनाव ट्रंप हार जाते हैं तो भारत-अमेरिका के रिश्ते का क्या होगा। अब इस सवाल का जवाब मिल गया है। चुनाव में किसी की भी जीत हो, भारत से अमेरिका के रिश्ते सुदृढ़ ही रहेंगे। अमेरिका चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टीसे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने शनिवार को कहा कि उनका प्रशासन भारत-अमेरिका संबंधों को लगातार मजबूत करने को 'टॉप प्रायोरिटी' देगा. बाइडेन के प्रचार अभियान ने कहा कि उनका मानना है कि दक्षिण एशिया में, एक देश की सीमा से दूसरे देश में या किसी अन्य रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
सीफ्रीएक्सोन की उत्पत्ति कैसे करें? यह सवाल अक्सर उन लोगों के हित में होता है जो घर पर स्वयं या अपने प्रियजनों को इंजेक्शन बनाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टर के बारे में बताए बिना करें। सब के बाद, यह एंटीबायोटिक, जो केवल कुछ रोगों के लिए निर्धारित है, गंभीर जटिलताओं के विकास के लिए नेतृत्व कर सकते हैं, जिसमें एनाफिलेक्टिक झटका शामिल है। केवल यह डॉक्टर जो इस दवा को निर्धारित करता है वह जानता है कि "सेफ्रिएक्सोन" को क्या और कैसे पतला करना है, और यह भी हमेशा इंगित करता है कि उसे किस दवा की आवश्यकता होती है और यह कितनी बार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ऐसी दवा में कई मतभेद और साइड इफेक्ट होते हैं, जो चिकित्सक को अपने मरीज को सूचित करना चाहिए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कोई भी मामला नहीं हो सकतापतला तैयारी "सेफ्त्रियाक्सोन" को 6 घंटे से अधिक समय तक संग्रहीत किया जाना चाहिए। यह इस तथ्य के कारण है कि लंबे समय तक भंडारण के साथ, एंटीबायोटिक एजेंट नष्ट हो जाता है, और इसकी गतिविधि काफी कम होती है। सीफ्रीएक्सोन की उत्पत्ति कैसे करें? उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देने से पहले, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी भी अन्य एंटीबायोटिक दवाओं के समाधान के साथ प्रस्तुत तैयारी के समाधान को मिलाकर सख्ती से मना किया गया है। यदि आप इस सलाह की उपेक्षा करते हैं, तो दवाओं को स्फटिक करना संभव है, और भविष्य में और गंभीर एलर्जी विकसित करने का खतरा बढ़ सकता है।
सीफ्रीएक्सोन की उत्पत्ति कैसे करें? यह सवाल अक्सर उन लोगों के हित में होता है जो घर पर स्वयं या अपने प्रियजनों को इंजेक्शन बनाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टर के बारे में बताए बिना करें। सब के बाद, यह एंटीबायोटिक, जो केवल कुछ रोगों के लिए निर्धारित है, गंभीर जटिलताओं के विकास के लिए नेतृत्व कर सकते हैं, जिसमें एनाफिलेक्टिक झटका शामिल है। केवल यह डॉक्टर जो इस दवा को निर्धारित करता है वह जानता है कि "सेफ्रिएक्सोन" को क्या और कैसे पतला करना है, और यह भी हमेशा इंगित करता है कि उसे किस दवा की आवश्यकता होती है और यह कितनी बार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ऐसी दवा में कई मतभेद और साइड इफेक्ट होते हैं, जो चिकित्सक को अपने मरीज को सूचित करना चाहिए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कोई भी मामला नहीं हो सकतापतला तैयारी "सेफ्त्रियाक्सोन" को छः घंटाटे से अधिक समय तक संग्रहीत किया जाना चाहिए। यह इस तथ्य के कारण है कि लंबे समय तक भंडारण के साथ, एंटीबायोटिक एजेंट नष्ट हो जाता है, और इसकी गतिविधि काफी कम होती है। सीफ्रीएक्सोन की उत्पत्ति कैसे करें? उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देने से पहले, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी भी अन्य एंटीबायोटिक दवाओं के समाधान के साथ प्रस्तुत तैयारी के समाधान को मिलाकर सख्ती से मना किया गया है। यदि आप इस सलाह की उपेक्षा करते हैं, तो दवाओं को स्फटिक करना संभव है, और भविष्य में और गंभीर एलर्जी विकसित करने का खतरा बढ़ सकता है।
राकेश मैती/ हावड़ा। आप इस जादुई फल (Miracle Fruit) के बारे में क्या जानते हैं? खट्टे को मीठे में बदलने वाला यह फल काफी कमाल का है। जब यह पक जाता है तो सुर्ख लाल रंग का दिखता है। आकार में छोटे-से इस फल की खूबियों के बारे में बहुत कुछ अब तक पता चल चुका है और बहुत कुछ अब भी रहस्य है। पकने पर इसका स्वाद मीठा होता है। हालांकि इसके स्वाद (Miracle Fruit Taste) को लेकर उलझन बनी हुई है पर यह कुछ रोगों में कारगर भी है। सपोटेसी फैमिली (Sapotaceae family) के इस फल को 'मिरैकल फ्रूट' (Synsepalum Dulcificum) बोला जाता है। असल में, अफ्रीकी मूल का यह फल रेड बेरी प्रजाति का है। इस फल में मिरैकुलिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो ग्लाइकोप्रोटीन का एक प्रकार है। इस तत्व से होता यह है कि खाने पर आपकी स्वाद ग्रंथि यानी टेस्ट बड पर इसका खासा असर पड़ता है। इसी तत्व के कारण आपकी जीभ का स्वाद कुछ असामान्य हो जाता है। नींबू जैसे फलों जैसे स्वाद वाला यह फल आपकी टेस्ट बड्स को 1 से 2 घंटे तक के लिए असामान्य कर देता है। आइए आपको इस जादुई फल से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट (इंटरनेट की जानकारियों के आधार पर) बताएं। - बेनिन में मिरैकल फ्रूट का उपयोग डायबिटीज़, हाइपरथर्मिया जैसे रोगों के उपचार में किया जाता है। - नाइजीरिया में डायबिटीज़, अस्थमा ठीक करने में इसका इस्तेमाल होता है और कैंसर और पुरुष नपुंसकता के उपचार में इस फल की सहायता ली जाती है। - अफ्रीका के कई राष्ट्रों समेत मलेशिया में भी यह औषधि की तरह उपयोग किया जाता है। - इसकी पत्तियों के साथ ही डालियां उपयोगी हैं। पतली डालियां टूथब्रथ की तरह इस्तेमाल में लाई जाती है। - इस फल का मुख्य तत्व 'मिरैकुलिन' है, जिससे इसका नाम मिरैकल फ्रूट पड़ा। जापान ने इस तत्व को फूड एडिक्टिव माना है, हालांकि अमेरिका अभी इसे लेकर किसी फैसला पर नहीं पहुंचा। हावड़ा में कैसे हैरान कर रहा यह फ्रूट?
राकेश मैती/ हावड़ा। आप इस जादुई फल के बारे में क्या जानते हैं? खट्टे को मीठे में बदलने वाला यह फल काफी कमाल का है। जब यह पक जाता है तो सुर्ख लाल रंग का दिखता है। आकार में छोटे-से इस फल की खूबियों के बारे में बहुत कुछ अब तक पता चल चुका है और बहुत कुछ अब भी रहस्य है। पकने पर इसका स्वाद मीठा होता है। हालांकि इसके स्वाद को लेकर उलझन बनी हुई है पर यह कुछ रोगों में कारगर भी है। सपोटेसी फैमिली के इस फल को 'मिरैकल फ्रूट' बोला जाता है। असल में, अफ्रीकी मूल का यह फल रेड बेरी प्रजाति का है। इस फल में मिरैकुलिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो ग्लाइकोप्रोटीन का एक प्रकार है। इस तत्व से होता यह है कि खाने पर आपकी स्वाद ग्रंथि यानी टेस्ट बड पर इसका खासा असर पड़ता है। इसी तत्व के कारण आपकी जीभ का स्वाद कुछ असामान्य हो जाता है। नींबू जैसे फलों जैसे स्वाद वाला यह फल आपकी टेस्ट बड्स को एक से दो घंटाटे तक के लिए असामान्य कर देता है। आइए आपको इस जादुई फल से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट बताएं। - बेनिन में मिरैकल फ्रूट का उपयोग डायबिटीज़, हाइपरथर्मिया जैसे रोगों के उपचार में किया जाता है। - नाइजीरिया में डायबिटीज़, अस्थमा ठीक करने में इसका इस्तेमाल होता है और कैंसर और पुरुष नपुंसकता के उपचार में इस फल की सहायता ली जाती है। - अफ्रीका के कई राष्ट्रों समेत मलेशिया में भी यह औषधि की तरह उपयोग किया जाता है। - इसकी पत्तियों के साथ ही डालियां उपयोगी हैं। पतली डालियां टूथब्रथ की तरह इस्तेमाल में लाई जाती है। - इस फल का मुख्य तत्व 'मिरैकुलिन' है, जिससे इसका नाम मिरैकल फ्रूट पड़ा। जापान ने इस तत्व को फूड एडिक्टिव माना है, हालांकि अमेरिका अभी इसे लेकर किसी फैसला पर नहीं पहुंचा। हावड़ा में कैसे हैरान कर रहा यह फ्रूट?
मोरवा, निज संवाददाता। पदयात्रा के क्रम में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का मोरवा प्रखंड में जगह जगह लोगों ने स्वागत किया। प्रखंड के ररियाही, कचमैया, रघुनाथपुर, मरिचा, हुसैनीपुर, केशो नारायणपुर आदि जगह पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूल मालाओं से लाद दिया। इस दौरान प्रशांत किशोर ने आधा दर्जन सभाओं को भी संबोधित किया। मौके पर जिला पार्षद कैलाशी देवी, मुखिया सीताराम राय, पूर्व मुखिया फूलन कुमार सिंह, सुरेंद्र राय अटल, पंचायत समिति सदस्य रजनीश कुमार, सरपंच चंदेश्वर साह, संदीप कुमार झा, पुरुषोत्तम कुमार, शिवनाथ राय आदि मौजूद थे। ग्रामीणों ने इस दौरान प्रशांत किशोर को स्थानीय समस्याओं से भी अवगत कराया। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
मोरवा, निज संवाददाता। पदयात्रा के क्रम में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का मोरवा प्रखंड में जगह जगह लोगों ने स्वागत किया। प्रखंड के ररियाही, कचमैया, रघुनाथपुर, मरिचा, हुसैनीपुर, केशो नारायणपुर आदि जगह पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूल मालाओं से लाद दिया। इस दौरान प्रशांत किशोर ने आधा दर्जन सभाओं को भी संबोधित किया। मौके पर जिला पार्षद कैलाशी देवी, मुखिया सीताराम राय, पूर्व मुखिया फूलन कुमार सिंह, सुरेंद्र राय अटल, पंचायत समिति सदस्य रजनीश कुमार, सरपंच चंदेश्वर साह, संदीप कुमार झा, पुरुषोत्तम कुमार, शिवनाथ राय आदि मौजूद थे। ग्रामीणों ने इस दौरान प्रशांत किशोर को स्थानीय समस्याओं से भी अवगत कराया। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
आज शायद ही कोई ऐसा शख़्स होगा, जिसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सेल्फ़ी न डाली हो. सेल्फ़ी को ले कर लोगों के अंदर ऐसा क्रेज़ बन गया है कि वो सेल्फ़ी लेने का कोई मौका नहीं छोड़ते. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं और सोचते हैं कि हर कोई सेल्फ़ी का दीवाना है, तो दोस्त आपका सोचना बहुत गलत है. अब जैसे इन्हीं फ़ोटोज़ को देख लीजिये, जिनमें मासूम-सी बिल्लियों पर सेल्फ़ी नाम का अत्याचार किया गया. ये बच्चे के साथ ज़बरदस्ती है जी. इसकी जांच होनी चाहिए. इसे कहते हैं ढिंचैक पूजा स्टाइल सेल्फ़ी. कोई समझाओ इसे मैं बिल्ली हूं कोई बंदर नहीं. नहीं, नहीं मैंने नहीं खिंचवानी फ़ोटू. कोई इस पागल से मुझे बचाओ. अब ये चाहता है हम भी अपना दांत ऐसे ही दिखाऊं. आंटी नो सेल्फ़ी प्लीज़. सेल्फ़ी मैंने लेली आज, सिर पर मेरे रहता ताज. अबे सेल्फ़ी ले, बच्चे की जान क्यों ले रही है. पहले ही मना किया था न! अपुन को ये सेल्फ़ी-सुल्फ़ी पसंद नहीं. अबे सेल्फ़ी ही ले रही है न! लगता है दोनों ने कुछ गलत देख लिया. बेटा बिना पूछे किसी की फ़ोटो नहीं लिया करते. रुको, पहले मुझे भी ब्यूटी पार्लर जाना है. नहीं, नहीं, नहीं ऐसे नहीं. रुक आज मैं लेता हूं ये सेल्फ़ी. अबे छोड़ मेरी बंदी आ रही है. अबे कुछ तो शर्म कर मैं वो नहीं, जो तू समझ रहा है. ये लड़की नहीं सुधरेगी. ऐसे देखना है क्या? स्माइल प्लीज़. No फ़ोटो प्लीज़. It's My Attitude Babes. बचाओ, बचाओ कोई, तो मुझे इस चेपू से बचाओ. बस इसकी कमी रह गई थी. इससे अच्छा, तो अपुन सिंगल ही ठीक था. मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? भगवान के लिए मुझे छोड़ दो. जाने क्यों लोग सेल्फ़ी लिया करते हैं? तू क्यों पीछे रह गया, ले ले तू भी ले ले. कोई बचा ले रे बाबा. ये अपुन की बंदी है इसके बारे में सोचना भी नहीं. आजा तू भी आजा. मैडम स्माइल प्लीज़. बताओ लौंडों को भी इसका शौक चढ़ गया. बेटा कुछ भी कर ले आज अपुन ऐसे ही रहेगा. इसकी सेल्फ़ी एक दिन अपनी जान ले कर ही मानेगी. बस करो यार अब बर्दाश्त नहीं होता. इसके So Cute के चक्कर में अपनी बैंड बज जाएगी एक दिन. अपुन कुछ गलत काम नहीं कर रहा था. धत तेरी की, ये सेल्फ़ी लेने वाली औरतें. भाई मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है? मुझे, तो छोड़ दे. ये सेल्फ़ी लेने वाले लोग किसी के सगे नहीं होते. भाई तुझसे ये उम्मीद नहीं थी. एक दिन मैं इससे इसका बदला लूंगा. आह तुम भी? सो गया ये जहां, सो गया आसमान. अपनी जान निकल रही है और इसे हंसी आ रही है. काश कि इन सेल्फ़ी लेने वालों की एक अलग दुनिया होती. क्यूट है न! तो तुम ले जाओ, पर मेरी जान बचाओ. इन लौंडों का कुछ कराओ यार नहीं, तो अपनी इज्ज़त खतरे में पड़ जाएगी. आज इसकी सेल्फ़ी न बिगाड़ दी, तो अपुन का नाम भी बिल्ला नहीं. क्या इस दुनिया में इंसानियत नाम की चीज़ नहीं है? ले जा, ले जा रे कोई इस सेल्फ़ी लेने वाली को भी ले जा. ये करना क्या चाहती है? लड़की है इसलिए पप्पी दे रहा हूं. कोई और होता न, तो उसकी बैंड बजा देता. ये पक्का कुछ करवा के ही मानेगी. सिंगल लौंडों का भगवान ही मालिक है. खिसयाई बिल्ली. छी... कितनी चुम्मियां लेगी ये. सुहागरात है घुंघट उठा रहा हूं मैं. देख आज अपना दिमाग बहुत ख़राब है, कोई बक-बक नहीं चाहिए अपन को. जा बेवफ़ा जा, तुझे प्यार नहीं करना. इसके बारे में तुम ही कहो. इसकी सेल्फ़ी ने आज अपुन को बहुत थका दिया है मामू. हां, तो मित्रों मज़ा आया न? सोचो मत जल्दी से लाइक, कमेंट करो और सेल्फ़ी देखनी है कि नहीं?
आज शायद ही कोई ऐसा शख़्स होगा, जिसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सेल्फ़ी न डाली हो. सेल्फ़ी को ले कर लोगों के अंदर ऐसा क्रेज़ बन गया है कि वो सेल्फ़ी लेने का कोई मौका नहीं छोड़ते. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं और सोचते हैं कि हर कोई सेल्फ़ी का दीवाना है, तो दोस्त आपका सोचना बहुत गलत है. अब जैसे इन्हीं फ़ोटोज़ को देख लीजिये, जिनमें मासूम-सी बिल्लियों पर सेल्फ़ी नाम का अत्याचार किया गया. ये बच्चे के साथ ज़बरदस्ती है जी. इसकी जांच होनी चाहिए. इसे कहते हैं ढिंचैक पूजा स्टाइल सेल्फ़ी. कोई समझाओ इसे मैं बिल्ली हूं कोई बंदर नहीं. नहीं, नहीं मैंने नहीं खिंचवानी फ़ोटू. कोई इस पागल से मुझे बचाओ. अब ये चाहता है हम भी अपना दांत ऐसे ही दिखाऊं. आंटी नो सेल्फ़ी प्लीज़. सेल्फ़ी मैंने लेली आज, सिर पर मेरे रहता ताज. अबे सेल्फ़ी ले, बच्चे की जान क्यों ले रही है. पहले ही मना किया था न! अपुन को ये सेल्फ़ी-सुल्फ़ी पसंद नहीं. अबे सेल्फ़ी ही ले रही है न! लगता है दोनों ने कुछ गलत देख लिया. बेटा बिना पूछे किसी की फ़ोटो नहीं लिया करते. रुको, पहले मुझे भी ब्यूटी पार्लर जाना है. नहीं, नहीं, नहीं ऐसे नहीं. रुक आज मैं लेता हूं ये सेल्फ़ी. अबे छोड़ मेरी बंदी आ रही है. अबे कुछ तो शर्म कर मैं वो नहीं, जो तू समझ रहा है. ये लड़की नहीं सुधरेगी. ऐसे देखना है क्या? स्माइल प्लीज़. No फ़ोटो प्लीज़. It's My Attitude Babes. बचाओ, बचाओ कोई, तो मुझे इस चेपू से बचाओ. बस इसकी कमी रह गई थी. इससे अच्छा, तो अपुन सिंगल ही ठीक था. मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? भगवान के लिए मुझे छोड़ दो. जाने क्यों लोग सेल्फ़ी लिया करते हैं? तू क्यों पीछे रह गया, ले ले तू भी ले ले. कोई बचा ले रे बाबा. ये अपुन की बंदी है इसके बारे में सोचना भी नहीं. आजा तू भी आजा. मैडम स्माइल प्लीज़. बताओ लौंडों को भी इसका शौक चढ़ गया. बेटा कुछ भी कर ले आज अपुन ऐसे ही रहेगा. इसकी सेल्फ़ी एक दिन अपनी जान ले कर ही मानेगी. बस करो यार अब बर्दाश्त नहीं होता. इसके So Cute के चक्कर में अपनी बैंड बज जाएगी एक दिन. अपुन कुछ गलत काम नहीं कर रहा था. धत तेरी की, ये सेल्फ़ी लेने वाली औरतें. भाई मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है? मुझे, तो छोड़ दे. ये सेल्फ़ी लेने वाले लोग किसी के सगे नहीं होते. भाई तुझसे ये उम्मीद नहीं थी. एक दिन मैं इससे इसका बदला लूंगा. आह तुम भी? सो गया ये जहां, सो गया आसमान. अपनी जान निकल रही है और इसे हंसी आ रही है. काश कि इन सेल्फ़ी लेने वालों की एक अलग दुनिया होती. क्यूट है न! तो तुम ले जाओ, पर मेरी जान बचाओ. इन लौंडों का कुछ कराओ यार नहीं, तो अपनी इज्ज़त खतरे में पड़ जाएगी. आज इसकी सेल्फ़ी न बिगाड़ दी, तो अपुन का नाम भी बिल्ला नहीं. क्या इस दुनिया में इंसानियत नाम की चीज़ नहीं है? ले जा, ले जा रे कोई इस सेल्फ़ी लेने वाली को भी ले जा. ये करना क्या चाहती है? लड़की है इसलिए पप्पी दे रहा हूं. कोई और होता न, तो उसकी बैंड बजा देता. ये पक्का कुछ करवा के ही मानेगी. सिंगल लौंडों का भगवान ही मालिक है. खिसयाई बिल्ली. छी... कितनी चुम्मियां लेगी ये. सुहागरात है घुंघट उठा रहा हूं मैं. देख आज अपना दिमाग बहुत ख़राब है, कोई बक-बक नहीं चाहिए अपन को. जा बेवफ़ा जा, तुझे प्यार नहीं करना. इसके बारे में तुम ही कहो. इसकी सेल्फ़ी ने आज अपुन को बहुत थका दिया है मामू. हां, तो मित्रों मज़ा आया न? सोचो मत जल्दी से लाइक, कमेंट करो और सेल्फ़ी देखनी है कि नहीं?
लोगों को जागरूक करने के लिए सड़कों पर दौड़ेगी 'कोरोना कार' हैदराबाद के रहने वाले के. सुधाकर को अकल्पनीय आकार और रूपों वाली अजीब कारों को बनाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अब खतरनाक वायरस के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कोरोनो वायरस मॉडल की कार बनाई है। सुधा कार नाम का एक विचित्र संग्रहालय चलाने वाले सुधाकर ने बुधवार को इस नई कार का अनावरण किया। सुधाकर ने बताया, "कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता लाने और लोगों को अपने घर में रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, मैंने कोरोना वायरस कार बनाई है। मैं लोगों को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि वे अपने घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित रहें। " सिंगल सीट की इस 100 सीसी इंजन वाली कार में छह पहिए और एक फाइबर बॉडी है। सुधाकर ने कहा, "इस कार को बनाने में 10 दिन का समय लगा है जो अधिकतम 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार को छू सकती है। " वह कोविड-19 के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद करने के लिए हैदराबाद पुलिस को यह कार दान करने की योजना बना रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा ट्राइसाइकिल डिजाइन करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रखने वाले सुधाकर के लिए सामाजिक संदेश देने वाली कारों का निर्माण करना कोई नई बात नहीं है। सुधाकर ने कहा, "हमने हमेशा समाज को अपने तरीके से कुछ लौटाने के लिए विभिन्न तरीकों और कारणों से कारें बनाई हैं। " पहले उन्होंने एक पिंजरे वाली कार बनाई थी ताकि लोगों को संदेश दे सकें कि वे पक्षियों को पिंजरे में न रखें। इसी तरह एड्स के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए कंडोम बाइक और स्टॉप स्मोकिंग मैसेज के लिए एक सिगरेट बाइक बनाई थी। वे हेलमेट कार बनाकर रोड सेफ्टी का संदेश भी दे चुके हैं। खराब और अनुपयोगी ऑटोमोबाइल भागों का उपयोग करते हुए, सुधाकर ऑफबीट कार बनाते हैं, जिन्हें धीमी गति से चलाया जा सकता है। नेहरू प्राणी उद्यान के पास उनका अपना संग्रहालय है, जिसमें ये गाड़ियां प्रदर्शन में रखी गई हैं। उन्होंने बर्गर, स्टिलेटो, बैग, कैमरा, फुटबॉल और कंप्यूटर के आकार में भी कारें बनाई हैं।
लोगों को जागरूक करने के लिए सड़कों पर दौड़ेगी 'कोरोना कार' हैदराबाद के रहने वाले के. सुधाकर को अकल्पनीय आकार और रूपों वाली अजीब कारों को बनाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अब खतरनाक वायरस के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कोरोनो वायरस मॉडल की कार बनाई है। सुधा कार नाम का एक विचित्र संग्रहालय चलाने वाले सुधाकर ने बुधवार को इस नई कार का अनावरण किया। सुधाकर ने बताया, "कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता लाने और लोगों को अपने घर में रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, मैंने कोरोना वायरस कार बनाई है। मैं लोगों को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि वे अपने घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित रहें। " सिंगल सीट की इस एक सौ सीसी इंजन वाली कार में छह पहिए और एक फाइबर बॉडी है। सुधाकर ने कहा, "इस कार को बनाने में दस दिन का समय लगा है जो अधिकतम चालीस किमी प्रति घंटे की रफ्तार को छू सकती है। " वह कोविड-उन्नीस के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद करने के लिए हैदराबाद पुलिस को यह कार दान करने की योजना बना रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा ट्राइसाइकिल डिजाइन करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रखने वाले सुधाकर के लिए सामाजिक संदेश देने वाली कारों का निर्माण करना कोई नई बात नहीं है। सुधाकर ने कहा, "हमने हमेशा समाज को अपने तरीके से कुछ लौटाने के लिए विभिन्न तरीकों और कारणों से कारें बनाई हैं। " पहले उन्होंने एक पिंजरे वाली कार बनाई थी ताकि लोगों को संदेश दे सकें कि वे पक्षियों को पिंजरे में न रखें। इसी तरह एड्स के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए कंडोम बाइक और स्टॉप स्मोकिंग मैसेज के लिए एक सिगरेट बाइक बनाई थी। वे हेलमेट कार बनाकर रोड सेफ्टी का संदेश भी दे चुके हैं। खराब और अनुपयोगी ऑटोमोबाइल भागों का उपयोग करते हुए, सुधाकर ऑफबीट कार बनाते हैं, जिन्हें धीमी गति से चलाया जा सकता है। नेहरू प्राणी उद्यान के पास उनका अपना संग्रहालय है, जिसमें ये गाड़ियां प्रदर्शन में रखी गई हैं। उन्होंने बर्गर, स्टिलेटो, बैग, कैमरा, फुटबॉल और कंप्यूटर के आकार में भी कारें बनाई हैं।
Medininagar: पलामू जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया. लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर 141 मामले का निस्तारण हुआ. एमएसीटी के दो मामले में पलामू के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार चौबे ने 13 लाख रुपये का चेक पीड़ित परिवारों के बीच वितरण किया. मामले के निस्तारण को लेकर 9 पीठों का गठन किया गया था. प्रथम पीठ में पारिवारिक विवाद निपटारे के लिए बनाया गया था. इस पीठ में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मार्तण्ड प्रताप मिश्रा व अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा मामले का निस्तारण कर रहे थे. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. पीठ संख्या दो में सभी सत्र न्यायाधीश के न्यायालय के मामले क्रिमिनल अपील, सिविल अपील, रिवीजन, बिजली विभाग इत्यादि का निपटारा जिला और सत्र न्यायाधीश प्रथम संतोष कुमार व अधिवक्ता प्रदीप कुमार कर रहे थे. इस पीठ में बिजली विभाग के 31 मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या तीन में आपराधिक मामले का निस्तारण सीजेएम निरुपम कुमार व अधिवक्ता शशि भूषण ने किया. इस पीठ में 71 मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या चार में सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट के मामले का निस्तारण संदीप निशित बारा सिविल जज सीनियर डिवीजन पंचम व अधिवक्ता हुसैन वारिस ने किया. इस पीठ में चार सिविल मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या पांच में सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट के मामले का निस्तारण मिस रूबी जेएम प्रथम श्रेणी व अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने किया. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. पीठ संख्या छह में जेजे बोर्ड के मामले का निस्तारण रीतू कुजूर जेएम प्रथम श्रेणी व अधिवक्ता सतीश कुमार दुबे ने किया. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. पीठ संख्या सात में रेलवे कोर्ट से संबंधित मामले का निस्तारण रेलवे जेएम मनोज कुमार व अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा कर रहे थे. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नहीँ किया गया. पीठ संख्या आठ में प्री लिटिगेशन मामले का निस्तारण स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष कमल नयन पांडेय व सदस्य महिमा श्रीवास्तव ने किया. इस पीठ में 11 मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या नौ में एक्जक्यूटिव व रेवेन्यू मामले का निस्तारण कार्यपालक दंडाधिकारी विक्रम आनंद व अधिवक्ता बिना मिश्रा ने किया. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. बता दें कि प्री लिटिगेशन के 30 व कोर्ट में लंबित 141 मामले का निस्तारण किया गया. वही 22 लाख 15 हजार 144 रुपये का मामला सेटल हुआ. वहीं एक हेल्प डेस्क बनाया गया था जिसमें सहयोग अधिवक्ता सतीश कुमार व पीएलवी मुनेश्वर राम कर रहे थे. चेक बुक वितरण के मौके पर डीजे पंचम अभिमन्यु कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अर्पित श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार अमित गुप्ता, पीड़ित परिवार व उनके विद्वान अधिवक्ता उपस्थित थे.
Medininagar: पलामू जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया. लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर एक सौ इकतालीस मामले का निस्तारण हुआ. एमएसीटी के दो मामले में पलामू के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार चौबे ने तेरह लाख रुपये का चेक पीड़ित परिवारों के बीच वितरण किया. मामले के निस्तारण को लेकर नौ पीठों का गठन किया गया था. प्रथम पीठ में पारिवारिक विवाद निपटारे के लिए बनाया गया था. इस पीठ में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मार्तण्ड प्रताप मिश्रा व अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा मामले का निस्तारण कर रहे थे. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. पीठ संख्या दो में सभी सत्र न्यायाधीश के न्यायालय के मामले क्रिमिनल अपील, सिविल अपील, रिवीजन, बिजली विभाग इत्यादि का निपटारा जिला और सत्र न्यायाधीश प्रथम संतोष कुमार व अधिवक्ता प्रदीप कुमार कर रहे थे. इस पीठ में बिजली विभाग के इकतीस मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या तीन में आपराधिक मामले का निस्तारण सीजेएम निरुपम कुमार व अधिवक्ता शशि भूषण ने किया. इस पीठ में इकहत्तर मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या चार में सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट के मामले का निस्तारण संदीप निशित बारा सिविल जज सीनियर डिवीजन पंचम व अधिवक्ता हुसैन वारिस ने किया. इस पीठ में चार सिविल मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या पांच में सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट के मामले का निस्तारण मिस रूबी जेएम प्रथम श्रेणी व अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने किया. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. पीठ संख्या छह में जेजे बोर्ड के मामले का निस्तारण रीतू कुजूर जेएम प्रथम श्रेणी व अधिवक्ता सतीश कुमार दुबे ने किया. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. पीठ संख्या सात में रेलवे कोर्ट से संबंधित मामले का निस्तारण रेलवे जेएम मनोज कुमार व अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा कर रहे थे. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नहीँ किया गया. पीठ संख्या आठ में प्री लिटिगेशन मामले का निस्तारण स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष कमल नयन पांडेय व सदस्य महिमा श्रीवास्तव ने किया. इस पीठ में ग्यारह मामले का निस्तारण किया गया. पीठ संख्या नौ में एक्जक्यूटिव व रेवेन्यू मामले का निस्तारण कार्यपालक दंडाधिकारी विक्रम आनंद व अधिवक्ता बिना मिश्रा ने किया. इस पीठ में एक भी मामले का निस्तारण नही हो सका. बता दें कि प्री लिटिगेशन के तीस व कोर्ट में लंबित एक सौ इकतालीस मामले का निस्तारण किया गया. वही बाईस लाख पंद्रह हजार एक सौ चौंतालीस रुपयापये का मामला सेटल हुआ. वहीं एक हेल्प डेस्क बनाया गया था जिसमें सहयोग अधिवक्ता सतीश कुमार व पीएलवी मुनेश्वर राम कर रहे थे. चेक बुक वितरण के मौके पर डीजे पंचम अभिमन्यु कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अर्पित श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार अमित गुप्ता, पीड़ित परिवार व उनके विद्वान अधिवक्ता उपस्थित थे.
-पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर था नाराज रतलाम। मुंबई रेल मार्ग पर शनिवार सुबह ईश्वरनगर रेलवे फाटक से करीब एक किमी दूर वृद्ध ने यात्री ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। देर शाम उसकी शिनाख्त बारदान व्यापारी अभय पिता र. . . madhya pradeshSat, 09 Nov 2013 10:43 PM (IST)
-पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर था नाराज रतलाम। मुंबई रेल मार्ग पर शनिवार सुबह ईश्वरनगर रेलवे फाटक से करीब एक किमी दूर वृद्ध ने यात्री ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। देर शाम उसकी शिनाख्त बारदान व्यापारी अभय पिता र. . . madhya pradeshSat, नौ नवंबर दो हज़ार तेरह दस:तैंतालीस PM
उत्तराखंड में कृष्ण जन्मोत्सव पर हर्षित के हरे कृष्ण भजन की धूम,पढ़ें रिपोर्ट। इंद्र आर्य के नए गीत की शूटिंग पूरी,जल्द रिलीज़ होगा वीडियो। बुडड़ी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल,पन्नू के इस किरदार को दर्शकों ने किया पसंद। अपडेटः आज फिर बदलेगा मौसम का हाल !
उत्तराखंड में कृष्ण जन्मोत्सव पर हर्षित के हरे कृष्ण भजन की धूम,पढ़ें रिपोर्ट। इंद्र आर्य के नए गीत की शूटिंग पूरी,जल्द रिलीज़ होगा वीडियो। बुडड़ी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल,पन्नू के इस किरदार को दर्शकों ने किया पसंद। अपडेटः आज फिर बदलेगा मौसम का हाल !
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने छह महीने में खोले गए संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया। हालांकि डिनोटिफाई किए जा रहे संस्थानों में शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य संस्थानों को बाहर रखा गया था। प्रदेश सरकार ने अधिकारियों से इस बाबत रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट आने के बाद अब प्रदेश सरकार ने 19 कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा रविवार को 1 अप्रैल 2022 के बाद अपग्रेड किए गए 286 मिडिल, हाई और सेकेंडरी स्कूलों को पहले ही डिनोटिफाई किया जा चुका है। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है। राजकीय महाविद्यालय स्वारघाट, राजकीय महाविद्यालय बलहसीना, राजकीय महाविद्यालय मसरूंद, राजकीय महाविद्यालय गलोड़, राजकीय महाविद्यालय लम्बलू, गवर्नमेंट कॉलेज ब्रांदा, गवर्नमेंट कॉलेज कोटला, राजकीय महाविद्यालय रिर्कमार, राजकीय महाविद्यालय चढ़ियार, राजकीय महाविद्यालय पांगना, राजकीय महाविद्यालय पंडोह, गवर्नमेंट कॉलेज बागा चनोगी, गवर्नमेंट कॉलेज जलोग, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सिंहला, राजकीय महाविद्यालय सतौन, राजकीय महाविद्यालय ममलीग, राजकीय महाविद्यालय चंडी, गवर्नमेंट कॉलेज बरूना और राजकीय संस्कृत महाविद्यालय जगतसुख। प्रदेश सरकार का तर्क है कि बेवजह खोले गए संस्थानों से अर्थव्यवस्था पर 5 हजार करोड़ का बोझ पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर पहले ही 75 हजार करोड़ रुपए का बोझ है।
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने छह महीने में खोले गए संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया। हालांकि डिनोटिफाई किए जा रहे संस्थानों में शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य संस्थानों को बाहर रखा गया था। प्रदेश सरकार ने अधिकारियों से इस बाबत रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट आने के बाद अब प्रदेश सरकार ने उन्नीस कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा रविवार को एक अप्रैल दो हज़ार बाईस के बाद अपग्रेड किए गए दो सौ छियासी मिडिल, हाई और सेकेंडरी स्कूलों को पहले ही डिनोटिफाई किया जा चुका है। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है। राजकीय महाविद्यालय स्वारघाट, राजकीय महाविद्यालय बलहसीना, राजकीय महाविद्यालय मसरूंद, राजकीय महाविद्यालय गलोड़, राजकीय महाविद्यालय लम्बलू, गवर्नमेंट कॉलेज ब्रांदा, गवर्नमेंट कॉलेज कोटला, राजकीय महाविद्यालय रिर्कमार, राजकीय महाविद्यालय चढ़ियार, राजकीय महाविद्यालय पांगना, राजकीय महाविद्यालय पंडोह, गवर्नमेंट कॉलेज बागा चनोगी, गवर्नमेंट कॉलेज जलोग, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सिंहला, राजकीय महाविद्यालय सतौन, राजकीय महाविद्यालय ममलीग, राजकीय महाविद्यालय चंडी, गवर्नमेंट कॉलेज बरूना और राजकीय संस्कृत महाविद्यालय जगतसुख। प्रदेश सरकार का तर्क है कि बेवजह खोले गए संस्थानों से अर्थव्यवस्था पर पाँच हजार करोड़ का बोझ पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर पहले ही पचहत्तर हजार करोड़ रुपए का बोझ है।
महिलाओं की ख़ूबसूरती बढ़ाने में नाखूनों की भी अहम भूमिका होती है। ख़ूबसूरत और चमकदार नाख़ून किसी को भी अपनी तरफ़ आकर्षित कर लेते हैं। कई लोगों में नाख़ून न बढ़ने और बढ़ते ही टूटने की समस्या होती है। नाखूनों के टूटने की वजह कैल्शियम की कमी होती है, जिसे खान-पान में कैल्शियम युक्त चीज़ें शामिल करके दूर किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ घरेलू उपायों से भी नाखूनों की समस्या को दूर किया जा सकता है। आइए जानें। आपके नाख़ून बार-बार टूटते हैं, तो एक चम्मच ज़ैतून के तेल में 7-8 बूँद नींबू का रस मिलाएँ और इससे नाखूनों की मालिश करें। यह बहुत ही कारगर नुस्ख़ा है, जिससे नाख़ून मज़बूत होने के साथ ही चमकदार बनते हैं। नाखूनों की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए रात को सोने से पहले पेट्रोलियम जेली से 4-5 मिनट तक मालिश करें। इससे नाख़ून दूध जैसे चमकदार हो जाएँगे और टूटने की समस्या भी दूर हो जाएगी। नाखूनों को ख़ूबसूरत और मज़बूत बनाने के लिए एक कप गर्म पानी में एक छोटा चम्मच पुदीना और गुलाब की पत्तियों को एक घंटे के लिए भिगो दें। बाद में पानी छानकर उसमें ज़ैतून का तेल और दो चम्मच गेहूँ का आटा डालकर अच्छे से मिलाएँ। तैयार हुए लेप को नाखूनों पर लगाएँ और थोड़ी देर ऐसे ही रहने दें। बाद में साफ़ पानी से धो लें। ऐसा आप नियमित सप्ताह में दो बार करें। नाखूनों को मज़बूत और चमकदार बनाने के लिए दो चम्मच नमक में दो बूँद नींबू का रस और सरसों का तेल मिलाकर गुनगुने पानी में डालें। इस पानी में 10-15 मिनट के लिए हाथ रखें और बाद में साफ़ पानी से धोकर मॉइश्चराइजर लगाएँ। अंडा सेहत के साथ ही नाखूनों को भी स्वस्थ रखता है। नाखूनों को मज़बूत बनाने के लिए दूध में अंडे की ज़र्दी डालकर नाखूनों की मालिश करें। सप्ताह में 3-4 बार ऐसे ही करें। इससे नाख़ून मज़बूत बनते हैं। इसके अलावा नाखूनों को मज़बूत बनाने के लिए बेकिंग सोडा भी फ़ायदेमंद है। इसके लिए बेकिंग सोडा को टूथब्रश पर लगाकर नाखूनों पर रगड़ें। इसमें आप नींबू का रस भी मिला सकती हैं। इससे पीले नाखूनों से भी छुटकारा मिलता है।
महिलाओं की ख़ूबसूरती बढ़ाने में नाखूनों की भी अहम भूमिका होती है। ख़ूबसूरत और चमकदार नाख़ून किसी को भी अपनी तरफ़ आकर्षित कर लेते हैं। कई लोगों में नाख़ून न बढ़ने और बढ़ते ही टूटने की समस्या होती है। नाखूनों के टूटने की वजह कैल्शियम की कमी होती है, जिसे खान-पान में कैल्शियम युक्त चीज़ें शामिल करके दूर किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ घरेलू उपायों से भी नाखूनों की समस्या को दूर किया जा सकता है। आइए जानें। आपके नाख़ून बार-बार टूटते हैं, तो एक चम्मच ज़ैतून के तेल में सात-आठ बूँद नींबू का रस मिलाएँ और इससे नाखूनों की मालिश करें। यह बहुत ही कारगर नुस्ख़ा है, जिससे नाख़ून मज़बूत होने के साथ ही चमकदार बनते हैं। नाखूनों की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए रात को सोने से पहले पेट्रोलियम जेली से चार-पाँच मिनट तक मालिश करें। इससे नाख़ून दूध जैसे चमकदार हो जाएँगे और टूटने की समस्या भी दूर हो जाएगी। नाखूनों को ख़ूबसूरत और मज़बूत बनाने के लिए एक कप गर्म पानी में एक छोटा चम्मच पुदीना और गुलाब की पत्तियों को एक घंटे के लिए भिगो दें। बाद में पानी छानकर उसमें ज़ैतून का तेल और दो चम्मच गेहूँ का आटा डालकर अच्छे से मिलाएँ। तैयार हुए लेप को नाखूनों पर लगाएँ और थोड़ी देर ऐसे ही रहने दें। बाद में साफ़ पानी से धो लें। ऐसा आप नियमित सप्ताह में दो बार करें। नाखूनों को मज़बूत और चमकदार बनाने के लिए दो चम्मच नमक में दो बूँद नींबू का रस और सरसों का तेल मिलाकर गुनगुने पानी में डालें। इस पानी में दस-पंद्रह मिनट के लिए हाथ रखें और बाद में साफ़ पानी से धोकर मॉइश्चराइजर लगाएँ। अंडा सेहत के साथ ही नाखूनों को भी स्वस्थ रखता है। नाखूनों को मज़बूत बनाने के लिए दूध में अंडे की ज़र्दी डालकर नाखूनों की मालिश करें। सप्ताह में तीन-चार बार ऐसे ही करें। इससे नाख़ून मज़बूत बनते हैं। इसके अलावा नाखूनों को मज़बूत बनाने के लिए बेकिंग सोडा भी फ़ायदेमंद है। इसके लिए बेकिंग सोडा को टूथब्रश पर लगाकर नाखूनों पर रगड़ें। इसमें आप नींबू का रस भी मिला सकती हैं। इससे पीले नाखूनों से भी छुटकारा मिलता है।
जाने माने आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को कथित तौर पर खुद को गोली मार ली. उन्हें घायल अवस्था में इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. लेकिन उनकी मौत हो गई. उन्हें कुछ माह पहले ही मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भय्यूजी महाराज की मौत पर शोक व्यक्ति किया. भय्यू जी महाराज पहली बार राष्ट्रीय चर्चा में तब आए थे जब अन्ना हजारे के आंदोलन को खत्म कराने में उन्होंने वार्ता में महत्वपूर्व भूमिका निभाई थी. पुलिस की फॉरेंसिक टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है. भय्यू जी महाराज को गोली लगने की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में उनके अनुयायी बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंच गए. भय्यूजी महाराज का मूल नाम उदयसिंह देशमुख है. वह पहले फैशन डिजाइनर थे और बाद में अध्यात्म की ओर मुड़ गए थे. इंदौर में बापट चौराहे पर उनका आश्रम है. यहीं से वे अपने सामाजिक गतिविधियां चलाते थे और ट्रस्ट के कार्यों का संचालन करते थे. भय्यूजी महाराज की पहली पत्नी माधवी का निधन हो चुका है. माधवी से उन्हें एक बेटी हुई जिसका नाम कुहू है जो फिलहाल पुणे में पढ़ाई कर रही है. भय्यूजी महाराज ने दूसरी शादी डॉक्टर आयुषी से की. आयुषी उनके आश्रम में कई सालों से सेवाओं में समर्पित हैं.
जाने माने आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को कथित तौर पर खुद को गोली मार ली. उन्हें घायल अवस्था में इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. लेकिन उनकी मौत हो गई. उन्हें कुछ माह पहले ही मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भय्यूजी महाराज की मौत पर शोक व्यक्ति किया. भय्यू जी महाराज पहली बार राष्ट्रीय चर्चा में तब आए थे जब अन्ना हजारे के आंदोलन को खत्म कराने में उन्होंने वार्ता में महत्वपूर्व भूमिका निभाई थी. पुलिस की फॉरेंसिक टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है. भय्यू जी महाराज को गोली लगने की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में उनके अनुयायी बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंच गए. भय्यूजी महाराज का मूल नाम उदयसिंह देशमुख है. वह पहले फैशन डिजाइनर थे और बाद में अध्यात्म की ओर मुड़ गए थे. इंदौर में बापट चौराहे पर उनका आश्रम है. यहीं से वे अपने सामाजिक गतिविधियां चलाते थे और ट्रस्ट के कार्यों का संचालन करते थे. भय्यूजी महाराज की पहली पत्नी माधवी का निधन हो चुका है. माधवी से उन्हें एक बेटी हुई जिसका नाम कुहू है जो फिलहाल पुणे में पढ़ाई कर रही है. भय्यूजी महाराज ने दूसरी शादी डॉक्टर आयुषी से की. आयुषी उनके आश्रम में कई सालों से सेवाओं में समर्पित हैं.
नई दिल्लीः भारत में कोरोना वायरस (Cornavirus in India) के बढ़ते प्रकोप के बीच न्यूजीलैंड ने 11 अप्रैल से भारत से आने वाले यात्रियों पर अस्थाई रूप से बैन लगा दिया है. बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और पिछले तीन दिनों में दो दिन 1 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न (Jacinda Ardern) ने भारत से आने वाले सभी यात्रियों के लिए प्रवेश पर रोक लगा दी है. इसमें न्यूजीलैंड के नागरिक भी शामिल हैं, जो भारत से अपने देश लौट रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, यह रोक 11 अप्रैल से शुरू होगी और 228 अप्रैल तक लागू रहेगी. ये भी पढ़ें- भारत में सिर्फ हरियाणा के कौन से गांव में मिलता है "हिलना पत्थर" ? देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और बुधवार को अब के सर्वाधिक 1,15,736 नए मामले सामने आए. नए मामलों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की भागीदारी 80.70 प्रतिशत थी. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 55,469 मामले सामने आए. वहीं छत्तीसगढ़ में 9,921 और कर्नाटक में 6150 मामले आए. देशभर मे एक्टिव मरीजों की संख्या भी 8,43,473 हो गई है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 6.59 प्रतिशत है.
नई दिल्लीः भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच न्यूजीलैंड ने ग्यारह अप्रैल से भारत से आने वाले यात्रियों पर अस्थाई रूप से बैन लगा दिया है. बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और पिछले तीन दिनों में दो दिन एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने भारत से आने वाले सभी यात्रियों के लिए प्रवेश पर रोक लगा दी है. इसमें न्यूजीलैंड के नागरिक भी शामिल हैं, जो भारत से अपने देश लौट रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, यह रोक ग्यारह अप्रैल से शुरू होगी और दो सौ अट्ठाईस अप्रैल तक लागू रहेगी. ये भी पढ़ें- भारत में सिर्फ हरियाणा के कौन से गांव में मिलता है "हिलना पत्थर" ? देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और बुधवार को अब के सर्वाधिक एक,पंद्रह,सात सौ छत्तीस नए मामले सामने आए. नए मामलों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की भागीदारी अस्सी.सत्तर प्रतिशत थी. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा पचपन,चार सौ उनहत्तर मामले सामने आए. वहीं छत्तीसगढ़ में नौ,नौ सौ इक्कीस और कर्नाटक में छः हज़ार एक सौ पचास मामले आए. देशभर मे एक्टिव मरीजों की संख्या भी आठ,तैंतालीस,चार सौ तिहत्तर हो गई है, जो संक्रमण के कुल मामलों का छः.उनसठ प्रतिशत है.
सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल पीएयू ने भर्ती (Punjab Agriculture University Vacancy) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. जिसका यूनिवर्सिटी ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. योग्य व इच्छुक उम्मीदवार आवेदन करने से पहले इसकी ऑफिशियल वेबसाइट (Official website) पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवेदन करें. इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 7 सितंबर, 2020 तय की गई है. शैक्षणिक योग्यता (Education Eligibility) उम्मीदवार के पास 8वीं (Middle Class) पास होने के साथ पंजाबी भाषा का पूरा ज्ञान होना चाहिए. आयु सीमा (Age Limit) इन पदों के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से अधिकतम 63 वर्ष निर्धारित की गई है. चयन प्रक्रिया (Selection Process) उम्मीदवारों का चयन या तो लिखित परीक्षा या साक्षात्कार के आधार पर होगा. आवेदन कैसे करें (How to Apply) भर्ती सम्बंधित अधिक जानकारी पाने के लिए यूनिवर्सिटी की वेबसाइट https://www. pau. edu/ पर जाएं. उम्मीदवारों को अपना आवेदन सभी पंजाब कृषि विश्वविद्यालय मृदा विज्ञान (Soil Science) लुधियाना के विभाग में 7 सितंबर, 2020 तक या उससे पहले भेजना होगा. आपका आवेदन पत्र नाम, पता, आयु, शैक्षिक योग्यता, अनुभव आदि के साथ सादे कागज पर लिखा जाना चाहिए. इसके साथ ही कॉम्पट्रोलर, पीएयू, लुधियाना के पक्ष में 100 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजना होता है.
सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल पीएयू ने भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. जिसका यूनिवर्सिटी ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. योग्य व इच्छुक उम्मीदवार आवेदन करने से पहले इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवेदन करें. इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख सात सितंबर, दो हज़ार बीस तय की गई है. शैक्षणिक योग्यता उम्मीदवार के पास आठवीं पास होने के साथ पंजाबी भाषा का पूरा ज्ञान होना चाहिए. आयु सीमा इन पदों के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष से अधिकतम तिरेसठ वर्ष निर्धारित की गई है. चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन या तो लिखित परीक्षा या साक्षात्कार के आधार पर होगा. आवेदन कैसे करें भर्ती सम्बंधित अधिक जानकारी पाने के लिए यूनिवर्सिटी की वेबसाइट https://www. pau. edu/ पर जाएं. उम्मीदवारों को अपना आवेदन सभी पंजाब कृषि विश्वविद्यालय मृदा विज्ञान लुधियाना के विभाग में सात सितंबर, दो हज़ार बीस तक या उससे पहले भेजना होगा. आपका आवेदन पत्र नाम, पता, आयु, शैक्षिक योग्यता, अनुभव आदि के साथ सादे कागज पर लिखा जाना चाहिए. इसके साथ ही कॉम्पट्रोलर, पीएयू, लुधियाना के पक्ष में एक सौ रुपयापए का डिमांड ड्राफ्ट भेजना होता है.
ट्राब्ज़न मेट्रोपॉलिटन नगरपालिका के मेयर मूरत ज़ोरलुओलु ने आधुनिकीकरण कार्यों में अराजक परंपरावादियों की आवाज़ सुनी, जो उन्होंने जनता के लिए सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए किया था। लगभग एक साल से जारी कोरोनोवायरस महामारी के कारण ट्रेडमेन की स्थिति को समझते हुए, राष्ट्रपति ज़ोरलूओलू ने समय सीमा बढ़ा दी, जिसे 1 मार्च, 2021 से 31 दिसंबर, 2021 तक के लिए निर्धारित किया गया था। मेट्रोपॉलिटन नगरपालिका के मेयर मूरत ज़ोरलुओलु ने मिनीबस के लिए रूपांतरित करने का फैसला किया, जिसके बारे में उन्होंने सोचा कि अपने साथी शहरवासियों को आरामदायक परिवहन प्रदान नहीं करते हैं, और 2 मार्च, 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी परियोजना को जनता के साथ साझा किया। लेकिन मार्च के मध्य में तुर्की में देखा गया था और दुकानदारों में कोरोनोवायरस के प्रकोप के प्रभाव को महसूस करते हुए वह लगभग एक साल से समाप्त हो गया था। अध्यक्ष Zorluoğlu, जो मिनीबस ट्रेडमैन की मांगों के प्रति उदासीन नहीं थे, ने आज withmer हक्सन उस्ता, ट्रैबज़ोन चैंबर ऑफ़ ड्राइवर्स एंड कार्स के अध्यक्ष और उनके प्रबंधन के साथ मुलाकात की। बैठक में, जहां 31 दिसंबर, 2021 तक परिवर्तन कार्यों का विस्तार करने का निर्णय लिया गया था, महानगर पालिका के महासचिव अहमत अदनूर, तुला के महाप्रबंधक समेट अली यिलदेज़ और संबंधित विभाग प्रमुख भी उपस्थित थे। मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के मेयर मूरत ज़ोरलुओलु ने बैठक के बाद परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में जनता को सूचित करते हुए बयान दिए। राष्ट्रपति ज़ोरुलोउल्लु ने कहा कि ट्रेड्समैन द्वारा अनुभव की गई समस्याओं ने उन्हें उस दिन से अवगत करा दिया है जब से उन्होंने अपना कर्तव्य शुरू किया और कहा, "न केवल ट्रबज़ोन केंद्र, बल्कि कई बिंदुओं पर दुकानदारों की समस्याओं को भी हमारे दोनों चैंबर द्वारा हमें सूचित किया गया था नेताओं और हमारे सहकारी प्रमुखों। Ortahisar से शुरू करके, हमने अधिक आरामदायक बुनियादी ढांचे का निर्माण करके Akçaabat और अन्य जिलों में परिवहन के मुद्दे का हल खोजने की कोशिश की। इस संदर्भ में, हम बहुत लंबे समय से हमारे ओरतासार क्षेत्र में 729 मिनीबस से संबंधित कार्य कर रहे हैं। मेयर ज़ोरलुओलु ने कहा कि उन्होंने समाधान को जनता के साथ साझा किया, समझौते के परिणामस्वरूप वे ट्रैबज़ोन चैंबर ऑफ ड्राइवर्स एंड ऑटोमोबाइल ओनर्स के साथ पहुंचे, जो मिनीबस परिवर्तन के पते हैं, और कहा, "इस संदर्भ में, 729 के संदर्भ में 40 मिनीबस ने 80 टैक्सियों में परिवर्तित होकर अपनी गतिविधियाँ शुरू कीं। हमारे पास 689 मिनीबस बचे हैं। इनमें से कुछ मिनीबस में, हमने स्टॉप के बीच मार्ग प्रदान करने के लिए UKOME निर्णय लिया है। बेशक, ये अध्ययन एक ओर जारी हैं। हमारे नागरिक वर्तमान में 10 सीटों वाले मिनीबस में यात्रा कर रहे हैं। हमारे नए फैसले के अनुसार, हमने इसे 12 सीटों तक बढ़ा दिया। हमने अपने विकलांग नागरिकों के लिए 689 मिनीबस को अधिक आरामदायक, सुरक्षित, नया, सौंदर्य और उपयुक्त बनाने का निर्णय लिया। इस संदर्भ में, मुझे संतोष व्यक्त करना चाहिए कि 115 मिनीबस को उन मानकों के अनुरूप रूपांतरित किया गया है जिन्हें हम खोज रहे हैं। राष्ट्रपति ज़ोरलुओलु ने इस बात पर जोर दिया कि 689 मिनीबसों में से 115 मिनीबस के रूपांतरण को पूरा करने में कुछ समय लगता है, लेकिन महामारी की स्थिति को देखते हुए, राष्ट्रपति ज़ोरलूज़लू ने कहा, "इस अर्थ में, मैं अपने मिनीबस ट्रेडमैन को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने अपना हाथ रखा। बोझ के नीचे। "हमारे नए मिनीबस वास्तव में हमारे नागरिकों द्वारा उनके डिजाइन और आंतरिक आराम दोनों के संदर्भ में पसंद किए गए थे, और वे समय-समय पर विभिन्न तरीकों से अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हैं।" आम तौर पर ज़ोरलुओल राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने मार्च तक सभी के रूपांतरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा है, "हालांकि, तुर्की और पूरी दुनिया एक बड़े प्रकोप से जूझ रही है। इस महामारी ने सभी क्षेत्रों और सभी सामाजिक क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है, और इसे प्रभावित करना जारी है। इस संदर्भ में, हमारे मिनीबस शॉप ट्रेडों में से एक इस प्रक्रिया से सबसे अधिक नकारात्मक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। लंबे समय से सप्ताहांत पर कर्फ्यू लगाया गया है, वे काम नहीं करते हैं। फिर से, शाम को 21.00:50 बजे के बाद लागू किए गए कर्फ्यू प्रतिबंधों के कारण, उन्हें दिन जल्दी खत्म करना होगा। महामारी के कारण पहले की तुलना में कम यात्रियों को परिवहन की आवश्यकता महसूस होती है। इस कारण से, यह निर्धारित किया गया था कि ट्रैबज़ॉन चैंबर ऑफ़ ड्राइवर्स एंड कैरियर्स द्वारा किए गए अध्ययन में यात्रियों की संख्या में लगभग 1 प्रतिशत की कमी आई है। हमारा डेटा भी इसके करीब है। इसलिए, महानगर पालिका के रूप में, हम फिर से एक साथ आए क्योंकि हम एक ऐसी संस्था हैं जो हमेशा पार्टियों के परामर्श से निर्णय लेते हैं। 2021 मार्च, 2021 परिवर्तन में हमारी समय सीमा थी। हालाँकि, हमने अभी-अभी जिन महामारी स्थितियों का उल्लेख किया है, उनके कारण हमने अपने चैंबर ऑफ ड्राइवर्स एंड ऑटोमोबाइल के अध्यक्ष और प्रबंधन के साथ मिलकर एक पुनर्मूल्यांकन किया। हमने आपसी सद्भाव में फैसला किया। इस निर्णय के अनुरूप, हम 1 में मिनीबस रूपांतरण पूरा करने के लिए सहमत हुए। दूसरे शब्दों में, हमने समय सीमा को बढ़ा दिया है, जो 2021 मार्च 31 से 2021 दिसंबर, XNUMX तक है। यह कहते हुए कि वे एक द्विपक्षीय संतुलन हासिल करना चाहते हैं, राष्ट्रपति ज़ोरलुओलु ने कहा, "हमारी इच्छा हमारे नागरिकों को नए, आरामदायक और सुरक्षित मिनीबस में यात्रा करने में सक्षम बनाना है, लेकिन दूसरी ओर, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे मिनीबस ट्रेडमेन, जो रहे हैं इस प्रक्रिया से नकारात्मक रूप से प्रभावित, इन कारों को बदलने की शक्ति रखते हैं। यह दो तरफा संतुलन है। हम अपने नागरिकों से अपने वादे के पीछे खड़े हैं। इस बिंदु पर, हमारे ड्राइवर और ऑटोमोबाइल चैंबर एक समझ के साथ हमारे साथ चलते हैं जो शुरुआत से ही अपने हाथों को बोझ के नीचे रखता है। मैं उन्हें भी धन्यवाद देता हूं। चैंबर के हमारे प्रमुख ने इस मुद्दे पर हमारे प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्त किया "। यह स्पष्ट रूप से जोर देते हुए कि 31 दिसंबर, 2021 को मिनीबस के परिवर्तन की समय सीमा है, राष्ट्रपति ज़ोरलुओलु ने कहा, "जब तक कुछ भी असाधारण नहीं होता है, हम अपने शेष मिनीबस को बदलने की उम्मीद करते हैं। इस बिंदु पर, हम अपने मिनीबस शॉप ट्रेड को भी कहते हैं। कृपया उन्हें इस समय का अधिकतम लाभ उठाने दें। मैं जनता के साथ साझा करना चाहूंगा कि इस अवधि के अंत में फिर से कोई विस्तार नहीं होगा। यह समय सीमा है। मैं स्पष्ट रूप से बताना चाहूंगा कि हम अपने उन व्यापारियों को अनुमति नहीं देंगे जो अभी भी इस तिथि के बाद पुराने मिनीबस के साथ यात्रियों को ले जाना चाहते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि हमारे ट्रेडमैन का काफी हिस्सा इस तारीख का इंतजार नहीं करेगा। इस प्रक्रिया में, हमने 31 दिसंबर से पहले डोलमस परिवर्तन को पूरा कर लिया है, अपनी शक्तियों के अनुसार योजना बनाकर, आज से साल के अंत तक, उम्मीद है, "उन्होंने कहा। यह कहते हुए कि महानगर पालिका के रूप में वे हमेशा मिनीबस ट्रेडमेन को आवश्यक सहयोग देते हैं, मेयर जोरलुओलु ने कहा, "हम अभी से ऐसा करना जारी रखेंगे। मुझे अपने नागरिकों की संस्कृति के बारे में परवाह है कि वे मिनीबस से कहीं जाएं। यह Trabzon के लिए अद्वितीय एक परिवहन मॉडल है। मुझे उम्मीद है कि यह मिनीबस प्रणाली अधिक आरामदायक तरीके से कई वर्षों तक ट्राबजोन की सेवा जारी रखेगी। हम शुभकामनाएं देते हैं और पार्टियों को फिर से धन्यवाद देते हैं। मैं राष्ट्रपति और ट्रैबज़ॉन चैंबर ऑफ ड्राइवर्स एंड कार्स के प्रबंधन को धन्यवाद देना चाहता हूं। हम इस मुद्दे को बहुत ही संजीदगी से और सतत रचनात्मक समझ के साथ मिलकर प्रबंधित करते हैं। मुझे उम्मीद है कि हम उन सभी को सहन करेंगे "उन्होंने कहा। मेयर ज़ोरुलोउलू, जो यह भी चाहते थे कि गलत धारणा न बने, क्योंकि परिवर्तन को छोड़ दिया गया था, ने कहा, "मैं आपको बता दूं कि कोई गलतफहमी नहीं है, हमने डोलमुएस परिवर्तन पर हार नहीं मानी है। हमने किसी दबाव या इसी तरह की समस्याओं के कारण इस तारीख को स्थगित नहीं किया है। यहां सभी को पता होना चाहिए कि महामारी प्रक्रिया के नकारात्मक प्रभावों के कारण हमें इस प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा। अन्यथा, यदि कोई महामारी नहीं थी, तो यह परिवर्तन अब तक हो चुका होगा। हमारे मिनीबस शॉप ट्रेड पहले से ही इस संबंध में उत्सुक हैं। हम अपने ट्रेडमेन को कुछ भी मेटाज़ोरी नहीं करते हैं। वे यह भी जानते हैं कि वे इन मिनीबस के साथ परिवहन नहीं कर सकते हैं। और उन्होंने हमेशा परिवर्तन का समर्थन किया है जितना वे कर सकते हैं, और आगे भी करते रहेंगे "। दूसरी ओर, ट्राबज़ोन चैंबर ऑफ ड्राइवर्स और ऑटोमोबाइल ड्राइवर्स anmer हकन उस्ता ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से मिनीबस ट्रांसफॉर्मेशन कार्यों का समर्थन किया है और कहा है, "हम मिनीबस ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिस पर हम लंबे समय से काम कर रहे हैं। । प्रक्रिया के दौरान, हम अपने महानगर के मेयर के साथ कई बार मिले। हमारे अध्यक्ष के योगदान और प्रयास हमेशा चालक ट्रेडों के पक्ष में रहे हैं। लेकिन इस काम के अंत में, दुनिया में और हमारे देश में महामारी के कारण हमारे राष्ट्रपति के समर्थन से समय सीमा बढ़ा दी गई थी। मुझे उम्मीद है कि नए साल तक डॉल्मु के परिवर्तन के लिए जो भी आवश्यक होगा हम करेंगे। मैं श्री मूरत ज़ोरलुओलु को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने हमें इस समय तक समर्थन दिया और मैं अपना सम्मान प्रस्तुत करता हूं।
ट्राब्ज़न मेट्रोपॉलिटन नगरपालिका के मेयर मूरत ज़ोरलुओलु ने आधुनिकीकरण कार्यों में अराजक परंपरावादियों की आवाज़ सुनी, जो उन्होंने जनता के लिए सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए किया था। लगभग एक साल से जारी कोरोनोवायरस महामारी के कारण ट्रेडमेन की स्थिति को समझते हुए, राष्ट्रपति ज़ोरलूओलू ने समय सीमा बढ़ा दी, जिसे एक मार्च, दो हज़ार इक्कीस से इकतीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस तक के लिए निर्धारित किया गया था। मेट्रोपॉलिटन नगरपालिका के मेयर मूरत ज़ोरलुओलु ने मिनीबस के लिए रूपांतरित करने का फैसला किया, जिसके बारे में उन्होंने सोचा कि अपने साथी शहरवासियों को आरामदायक परिवहन प्रदान नहीं करते हैं, और दो मार्च, दो हज़ार बीस को एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी परियोजना को जनता के साथ साझा किया। लेकिन मार्च के मध्य में तुर्की में देखा गया था और दुकानदारों में कोरोनोवायरस के प्रकोप के प्रभाव को महसूस करते हुए वह लगभग एक साल से समाप्त हो गया था। अध्यक्ष Zorluoğlu, जो मिनीबस ट्रेडमैन की मांगों के प्रति उदासीन नहीं थे, ने आज withmer हक्सन उस्ता, ट्रैबज़ोन चैंबर ऑफ़ ड्राइवर्स एंड कार्स के अध्यक्ष और उनके प्रबंधन के साथ मुलाकात की। बैठक में, जहां इकतीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस तक परिवर्तन कार्यों का विस्तार करने का निर्णय लिया गया था, महानगर पालिका के महासचिव अहमत अदनूर, तुला के महाप्रबंधक समेट अली यिलदेज़ और संबंधित विभाग प्रमुख भी उपस्थित थे। मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के मेयर मूरत ज़ोरलुओलु ने बैठक के बाद परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में जनता को सूचित करते हुए बयान दिए। राष्ट्रपति ज़ोरुलोउल्लु ने कहा कि ट्रेड्समैन द्वारा अनुभव की गई समस्याओं ने उन्हें उस दिन से अवगत करा दिया है जब से उन्होंने अपना कर्तव्य शुरू किया और कहा, "न केवल ट्रबज़ोन केंद्र, बल्कि कई बिंदुओं पर दुकानदारों की समस्याओं को भी हमारे दोनों चैंबर द्वारा हमें सूचित किया गया था नेताओं और हमारे सहकारी प्रमुखों। Ortahisar से शुरू करके, हमने अधिक आरामदायक बुनियादी ढांचे का निर्माण करके Akçaabat और अन्य जिलों में परिवहन के मुद्दे का हल खोजने की कोशिश की। इस संदर्भ में, हम बहुत लंबे समय से हमारे ओरतासार क्षेत्र में सात सौ उनतीस मिनीबस से संबंधित कार्य कर रहे हैं। मेयर ज़ोरलुओलु ने कहा कि उन्होंने समाधान को जनता के साथ साझा किया, समझौते के परिणामस्वरूप वे ट्रैबज़ोन चैंबर ऑफ ड्राइवर्स एंड ऑटोमोबाइल ओनर्स के साथ पहुंचे, जो मिनीबस परिवर्तन के पते हैं, और कहा, "इस संदर्भ में, सात सौ उनतीस के संदर्भ में चालीस मिनीबस ने अस्सी टैक्सियों में परिवर्तित होकर अपनी गतिविधियाँ शुरू कीं। हमारे पास छः सौ नवासी मिनीबस बचे हैं। इनमें से कुछ मिनीबस में, हमने स्टॉप के बीच मार्ग प्रदान करने के लिए UKOME निर्णय लिया है। बेशक, ये अध्ययन एक ओर जारी हैं। हमारे नागरिक वर्तमान में दस सीटों वाले मिनीबस में यात्रा कर रहे हैं। हमारे नए फैसले के अनुसार, हमने इसे बारह सीटों तक बढ़ा दिया। हमने अपने विकलांग नागरिकों के लिए छः सौ नवासी मिनीबस को अधिक आरामदायक, सुरक्षित, नया, सौंदर्य और उपयुक्त बनाने का निर्णय लिया। इस संदर्भ में, मुझे संतोष व्यक्त करना चाहिए कि एक सौ पंद्रह मिनीबस को उन मानकों के अनुरूप रूपांतरित किया गया है जिन्हें हम खोज रहे हैं। राष्ट्रपति ज़ोरलुओलु ने इस बात पर जोर दिया कि छः सौ नवासी मिनीबसों में से एक सौ पंद्रह मिनीबस के रूपांतरण को पूरा करने में कुछ समय लगता है, लेकिन महामारी की स्थिति को देखते हुए, राष्ट्रपति ज़ोरलूज़लू ने कहा, "इस अर्थ में, मैं अपने मिनीबस ट्रेडमैन को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने अपना हाथ रखा। बोझ के नीचे। "हमारे नए मिनीबस वास्तव में हमारे नागरिकों द्वारा उनके डिजाइन और आंतरिक आराम दोनों के संदर्भ में पसंद किए गए थे, और वे समय-समय पर विभिन्न तरीकों से अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हैं।" आम तौर पर ज़ोरलुओल राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने मार्च तक सभी के रूपांतरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा है, "हालांकि, तुर्की और पूरी दुनिया एक बड़े प्रकोप से जूझ रही है। इस महामारी ने सभी क्षेत्रों और सभी सामाजिक क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है, और इसे प्रभावित करना जारी है। इस संदर्भ में, हमारे मिनीबस शॉप ट्रेडों में से एक इस प्रक्रिया से सबसे अधिक नकारात्मक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। लंबे समय से सप्ताहांत पर कर्फ्यू लगाया गया है, वे काम नहीं करते हैं। फिर से, शाम को इक्कीस.शून्य:पचास बजे के बाद लागू किए गए कर्फ्यू प्रतिबंधों के कारण, उन्हें दिन जल्दी खत्म करना होगा। महामारी के कारण पहले की तुलना में कम यात्रियों को परिवहन की आवश्यकता महसूस होती है। इस कारण से, यह निर्धारित किया गया था कि ट्रैबज़ॉन चैंबर ऑफ़ ड्राइवर्स एंड कैरियर्स द्वारा किए गए अध्ययन में यात्रियों की संख्या में लगभग एक प्रतिशत की कमी आई है। हमारा डेटा भी इसके करीब है। इसलिए, महानगर पालिका के रूप में, हम फिर से एक साथ आए क्योंकि हम एक ऐसी संस्था हैं जो हमेशा पार्टियों के परामर्श से निर्णय लेते हैं। दो हज़ार इक्कीस मार्च, दो हज़ार इक्कीस परिवर्तन में हमारी समय सीमा थी। हालाँकि, हमने अभी-अभी जिन महामारी स्थितियों का उल्लेख किया है, उनके कारण हमने अपने चैंबर ऑफ ड्राइवर्स एंड ऑटोमोबाइल के अध्यक्ष और प्रबंधन के साथ मिलकर एक पुनर्मूल्यांकन किया। हमने आपसी सद्भाव में फैसला किया। इस निर्णय के अनुरूप, हम एक में मिनीबस रूपांतरण पूरा करने के लिए सहमत हुए। दूसरे शब्दों में, हमने समय सीमा को बढ़ा दिया है, जो दो हज़ार इक्कीस मार्च इकतीस से दो हज़ार इक्कीस दिसंबर, XNUMX तक है। यह कहते हुए कि वे एक द्विपक्षीय संतुलन हासिल करना चाहते हैं, राष्ट्रपति ज़ोरलुओलु ने कहा, "हमारी इच्छा हमारे नागरिकों को नए, आरामदायक और सुरक्षित मिनीबस में यात्रा करने में सक्षम बनाना है, लेकिन दूसरी ओर, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे मिनीबस ट्रेडमेन, जो रहे हैं इस प्रक्रिया से नकारात्मक रूप से प्रभावित, इन कारों को बदलने की शक्ति रखते हैं। यह दो तरफा संतुलन है। हम अपने नागरिकों से अपने वादे के पीछे खड़े हैं। इस बिंदु पर, हमारे ड्राइवर और ऑटोमोबाइल चैंबर एक समझ के साथ हमारे साथ चलते हैं जो शुरुआत से ही अपने हाथों को बोझ के नीचे रखता है। मैं उन्हें भी धन्यवाद देता हूं। चैंबर के हमारे प्रमुख ने इस मुद्दे पर हमारे प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्त किया "। यह स्पष्ट रूप से जोर देते हुए कि इकतीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस को मिनीबस के परिवर्तन की समय सीमा है, राष्ट्रपति ज़ोरलुओलु ने कहा, "जब तक कुछ भी असाधारण नहीं होता है, हम अपने शेष मिनीबस को बदलने की उम्मीद करते हैं। इस बिंदु पर, हम अपने मिनीबस शॉप ट्रेड को भी कहते हैं। कृपया उन्हें इस समय का अधिकतम लाभ उठाने दें। मैं जनता के साथ साझा करना चाहूंगा कि इस अवधि के अंत में फिर से कोई विस्तार नहीं होगा। यह समय सीमा है। मैं स्पष्ट रूप से बताना चाहूंगा कि हम अपने उन व्यापारियों को अनुमति नहीं देंगे जो अभी भी इस तिथि के बाद पुराने मिनीबस के साथ यात्रियों को ले जाना चाहते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि हमारे ट्रेडमैन का काफी हिस्सा इस तारीख का इंतजार नहीं करेगा। इस प्रक्रिया में, हमने इकतीस दिसंबर से पहले डोलमस परिवर्तन को पूरा कर लिया है, अपनी शक्तियों के अनुसार योजना बनाकर, आज से साल के अंत तक, उम्मीद है, "उन्होंने कहा। यह कहते हुए कि महानगर पालिका के रूप में वे हमेशा मिनीबस ट्रेडमेन को आवश्यक सहयोग देते हैं, मेयर जोरलुओलु ने कहा, "हम अभी से ऐसा करना जारी रखेंगे। मुझे अपने नागरिकों की संस्कृति के बारे में परवाह है कि वे मिनीबस से कहीं जाएं। यह Trabzon के लिए अद्वितीय एक परिवहन मॉडल है। मुझे उम्मीद है कि यह मिनीबस प्रणाली अधिक आरामदायक तरीके से कई वर्षों तक ट्राबजोन की सेवा जारी रखेगी। हम शुभकामनाएं देते हैं और पार्टियों को फिर से धन्यवाद देते हैं। मैं राष्ट्रपति और ट्रैबज़ॉन चैंबर ऑफ ड्राइवर्स एंड कार्स के प्रबंधन को धन्यवाद देना चाहता हूं। हम इस मुद्दे को बहुत ही संजीदगी से और सतत रचनात्मक समझ के साथ मिलकर प्रबंधित करते हैं। मुझे उम्मीद है कि हम उन सभी को सहन करेंगे "उन्होंने कहा। मेयर ज़ोरुलोउलू, जो यह भी चाहते थे कि गलत धारणा न बने, क्योंकि परिवर्तन को छोड़ दिया गया था, ने कहा, "मैं आपको बता दूं कि कोई गलतफहमी नहीं है, हमने डोलमुएस परिवर्तन पर हार नहीं मानी है। हमने किसी दबाव या इसी तरह की समस्याओं के कारण इस तारीख को स्थगित नहीं किया है। यहां सभी को पता होना चाहिए कि महामारी प्रक्रिया के नकारात्मक प्रभावों के कारण हमें इस प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा। अन्यथा, यदि कोई महामारी नहीं थी, तो यह परिवर्तन अब तक हो चुका होगा। हमारे मिनीबस शॉप ट्रेड पहले से ही इस संबंध में उत्सुक हैं। हम अपने ट्रेडमेन को कुछ भी मेटाज़ोरी नहीं करते हैं। वे यह भी जानते हैं कि वे इन मिनीबस के साथ परिवहन नहीं कर सकते हैं। और उन्होंने हमेशा परिवर्तन का समर्थन किया है जितना वे कर सकते हैं, और आगे भी करते रहेंगे "। दूसरी ओर, ट्राबज़ोन चैंबर ऑफ ड्राइवर्स और ऑटोमोबाइल ड्राइवर्स anmer हकन उस्ता ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से मिनीबस ट्रांसफॉर्मेशन कार्यों का समर्थन किया है और कहा है, "हम मिनीबस ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिस पर हम लंबे समय से काम कर रहे हैं। । प्रक्रिया के दौरान, हम अपने महानगर के मेयर के साथ कई बार मिले। हमारे अध्यक्ष के योगदान और प्रयास हमेशा चालक ट्रेडों के पक्ष में रहे हैं। लेकिन इस काम के अंत में, दुनिया में और हमारे देश में महामारी के कारण हमारे राष्ट्रपति के समर्थन से समय सीमा बढ़ा दी गई थी। मुझे उम्मीद है कि नए साल तक डॉल्मु के परिवर्तन के लिए जो भी आवश्यक होगा हम करेंगे। मैं श्री मूरत ज़ोरलुओलु को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने हमें इस समय तक समर्थन दिया और मैं अपना सम्मान प्रस्तुत करता हूं।
रियासत में तापमान के चढ़ने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान रहे। राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन का पारा सामान्य से 7-8 डिग्री ऊपर चल रहा है। सामान्य से पांच डिग्री अधिक पारे के साथ जम्मू 36. 7 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक हफ्ते तक राहत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। जम्मू के साथ घाटी के अधिकांश इलाके भी तप रहे हैं। श्रीनगर, पहलगाम, गुलमर्ग जैसे इलाकों में पारे में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
रियासत में तापमान के चढ़ने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान रहे। राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन का पारा सामान्य से सात-आठ डिग्री ऊपर चल रहा है। सामान्य से पांच डिग्री अधिक पारे के साथ जम्मू छत्तीस. सात डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक हफ्ते तक राहत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। जम्मू के साथ घाटी के अधिकांश इलाके भी तप रहे हैं। श्रीनगर, पहलगाम, गुलमर्ग जैसे इलाकों में पारे में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
संभल। हिंदू जागृति मंच ने संत रैदास को संत शिरोमणि एवं समाज सुधारक कहकर उनकी जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित कर संत रविदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण किया। मोहल्ला कोट पूर्वी में स्थित सुभाष चंद्र मोगिया के निवास पर संत रविदास जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें संत रविदास के चित्र के समक्ष मनमोहन गुप्ता तथा ध्रुव अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। विष्णु कुमार ने मोरा मन दर्पण कहलाए नामक भजन गाकर आध्यात्मिक वातावरण बनाया तो वहीं मुख्य वक्ता के रूप में रानी मोंगिया ने संत रविदास को संत शिरोमणि कहकर सच्चा समाज सुधारक बताकर उनके जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। साथ ही मार्मिक प्रसंग सुनाकर संत रविदास के बनाए, दिखाए मार्ग पर सतत चलने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि संत रविदास द्वारा रचित पद एवं गीत गुरु ग्रंथ साहब में अंकित हैं। जिनका गायन वाचन करके सिख समाज आनंदित ही नहीं गर्व और गौरव का अनुभव करता है। पलक छाबड़ा ने कहा कि संत रविदास ने अपने मन को स्वस्थ और लक्ष्य को सदैव ऊंचा बनाए रखने की नसीहत दी। कोई कर्म छोटा या बड़ा नहीं होता है ऐसा आम जनमानस को सिखा कर उन्होंने अपने कार्य और व्यवहार से समाज को उपदेश दिया। इसलिए उन्हें सच्चा समाज सुधारक माना जाता है। उन्होंने राजघराने की बहू मीराबाई को अपना शिष्यत्व प्रदान करके भगवान श्री कृष्ण की भक्ति का ऐसा रसपान कराया जो आज तक एक उदाहरण है। अर्थात हिंदू समाज के सच्चे समाज सुधारक वही हैं जो छुआछूत, भेदभाव, ऊंच-नीच के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करते हैं और सामाजिक समरसता का संदेश बोलकर नहीं बल्कि अपने व्यवहार और कार्य से समाज को देते हैं। इस अवसर पर सुबोध कुमार गुप्ता, विकास कुमार वर्मा, अरुण कुमार अग्रवाल, रमेश छाबड़ा, सुभाष चंद्र शर्मा, अतुल कुमार शर्मा, ध्रुव अग्रवाल, मनमोहन गुप्ता, पूनम छाबड़ा, विष्णु कुमार, अजय गुप्ता सर्राफ, आशा गुप्ता आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता सुभाष चंद्र मोंगिया ने की तथा संचालन ध्रुव अग्रवाल ने किया। संभल। हिंदू जागृति मंच ने संत रैदास को संत शिरोमणि एवं समाज सुधारक कहकर उनकी जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित कर संत रविदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण किया।
संभल। हिंदू जागृति मंच ने संत रैदास को संत शिरोमणि एवं समाज सुधारक कहकर उनकी जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित कर संत रविदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण किया। मोहल्ला कोट पूर्वी में स्थित सुभाष चंद्र मोगिया के निवास पर संत रविदास जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें संत रविदास के चित्र के समक्ष मनमोहन गुप्ता तथा ध्रुव अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। विष्णु कुमार ने मोरा मन दर्पण कहलाए नामक भजन गाकर आध्यात्मिक वातावरण बनाया तो वहीं मुख्य वक्ता के रूप में रानी मोंगिया ने संत रविदास को संत शिरोमणि कहकर सच्चा समाज सुधारक बताकर उनके जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। साथ ही मार्मिक प्रसंग सुनाकर संत रविदास के बनाए, दिखाए मार्ग पर सतत चलने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि संत रविदास द्वारा रचित पद एवं गीत गुरु ग्रंथ साहब में अंकित हैं। जिनका गायन वाचन करके सिख समाज आनंदित ही नहीं गर्व और गौरव का अनुभव करता है। पलक छाबड़ा ने कहा कि संत रविदास ने अपने मन को स्वस्थ और लक्ष्य को सदैव ऊंचा बनाए रखने की नसीहत दी। कोई कर्म छोटा या बड़ा नहीं होता है ऐसा आम जनमानस को सिखा कर उन्होंने अपने कार्य और व्यवहार से समाज को उपदेश दिया। इसलिए उन्हें सच्चा समाज सुधारक माना जाता है। उन्होंने राजघराने की बहू मीराबाई को अपना शिष्यत्व प्रदान करके भगवान श्री कृष्ण की भक्ति का ऐसा रसपान कराया जो आज तक एक उदाहरण है। अर्थात हिंदू समाज के सच्चे समाज सुधारक वही हैं जो छुआछूत, भेदभाव, ऊंच-नीच के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करते हैं और सामाजिक समरसता का संदेश बोलकर नहीं बल्कि अपने व्यवहार और कार्य से समाज को देते हैं। इस अवसर पर सुबोध कुमार गुप्ता, विकास कुमार वर्मा, अरुण कुमार अग्रवाल, रमेश छाबड़ा, सुभाष चंद्र शर्मा, अतुल कुमार शर्मा, ध्रुव अग्रवाल, मनमोहन गुप्ता, पूनम छाबड़ा, विष्णु कुमार, अजय गुप्ता सर्राफ, आशा गुप्ता आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता सुभाष चंद्र मोंगिया ने की तथा संचालन ध्रुव अग्रवाल ने किया। संभल। हिंदू जागृति मंच ने संत रैदास को संत शिरोमणि एवं समाज सुधारक कहकर उनकी जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित कर संत रविदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण किया।
चांदूर बाजार/दि. 17 - तहसील अंतर्गत आनेवाले सेवा सहकारी सोसायटियों के दूसरे चरण के चुनाव में पांच सेवा सहकारी सोसायटी के चुनाव 13 फरवरी को संपन्न हुए थे. जिसमें से चार सहकारी सोसायटियों के चुनाव निर्विरोध हुए केवल एक सोसायटी के लिए मतदान करवाया गया. निर्विरोध हुई सोसायटी में बेलोरा, सोनोरी, लाखनवाडी, खरपी का समावेश है तथा मासोद सेवा सहकारी सोसायटी का चुनाव करवाया गया. बेलोरा सहकारी सोसायटी में कर्जदार गुट से भास्कर चौधरी, मंगेश देशमुख, राजेश देशमुख, धनंजय पावडे, मो. युसूफ मो. याकूब, सुधाकर वाकपैंजन, शेख लुकमान शेख इस्माइल, मनोहर देशमुख तथा महिला गुट से आशा झगडे, वंदना खेरडे अन्य पिछडा प्रवर्ग से शिरीष देशमुख, अनुसूचित जाति- जमाति प्रवर्ग से किशोर घोडेस्वार, भटक्या विमुक्त जाति-जमाती प्रवर्ग से प्रदीप आष्टीकर चुने गए. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी के तौर पर सहायक सहकार अधिकारी शिल्पा कोल्हे उपस्थित थी. सोनोरी सेवा सहकारी सोसायटी के चुनाव में कर्जदार गुट से रावसाहब इंगोले, अनिल गणोरकर, प्रकाश देशमुख, श्रीकांत देशमुख, विजय देशमुख, सुधाकर देशमुख, प्रमोद मडघे, अशोक राउत, महिला आरक्षित प्रवर्ग से सीमा अशोक देशमुख, माईबाई शंकरराव कुकडे, अनुसूचित जाति-जमाती प्रवर्ग से पंकज गेडाम, विमुक्त भट्क्या जाति-जमाती प्रवर्ग से पंडीत पाटिल निर्विरोध रहे. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी के तौर पर साहयक सहकार अधिकारी नंदकुमार हंबर्डे ने कामकाज देखा. लाखनवाडी सोसायटी के कर्जदार गुट से हरिभाऊ इंगले, हरिश काजे, जीतेंद्र खडसे, दिलीप खडसे, देवका रामदास डांगे, निलेश डांगे, वर्षा सतीश देशमुख, विलास देशमुख, महिला आरक्षित गुट से सुनीता गणेश काजे, वंदना राजेंद्र देशमुख अन्य पिछडा वर्ग प्रवर्ग से विशाल देशमुख, अनुसूचित जाति-जमाती प्रवर्ग से मधुकर वानखडे चुनाव जीते. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी के रुप में मुख्य लिपिक प्रदीप वर्धेकर उपस्थित थे. खरपी सेवा सहकार सोसायटी कर्जदार गुट से अफरोज खान, सचिन क्षिरसागर, दिनकर पोहोकार, योगेश भौसले, मकसूद खान, शेख जहूर, सलीम खान, रमेश सुआरे, महिला आरक्षित प्रवर्ग से राजकन्या, भीमराव ढवले, नजमुन्नीसा शेख अजीज अन्य पिछडा वर्ग गुट से संजय भगत, अनुसूचित जमाती गुट से रमेश जांभे, विमुक्त जाति-जमाती गुट से दिनकर पवार चुने गए. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी, लेखा अधिकारी श्रेणी 2 रविेंद्र उंबरकर उपस्थित थे. चारों ही सोसायाटियो के चुनाव निर्विरोध किए जाने के लिए ग्रामवासियों ने अथक प्रयास किए.
चांदूर बाजार/दि. सत्रह - तहसील अंतर्गत आनेवाले सेवा सहकारी सोसायटियों के दूसरे चरण के चुनाव में पांच सेवा सहकारी सोसायटी के चुनाव तेरह फरवरी को संपन्न हुए थे. जिसमें से चार सहकारी सोसायटियों के चुनाव निर्विरोध हुए केवल एक सोसायटी के लिए मतदान करवाया गया. निर्विरोध हुई सोसायटी में बेलोरा, सोनोरी, लाखनवाडी, खरपी का समावेश है तथा मासोद सेवा सहकारी सोसायटी का चुनाव करवाया गया. बेलोरा सहकारी सोसायटी में कर्जदार गुट से भास्कर चौधरी, मंगेश देशमुख, राजेश देशमुख, धनंजय पावडे, मो. युसूफ मो. याकूब, सुधाकर वाकपैंजन, शेख लुकमान शेख इस्माइल, मनोहर देशमुख तथा महिला गुट से आशा झगडे, वंदना खेरडे अन्य पिछडा प्रवर्ग से शिरीष देशमुख, अनुसूचित जाति- जमाति प्रवर्ग से किशोर घोडेस्वार, भटक्या विमुक्त जाति-जमाती प्रवर्ग से प्रदीप आष्टीकर चुने गए. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी के तौर पर सहायक सहकार अधिकारी शिल्पा कोल्हे उपस्थित थी. सोनोरी सेवा सहकारी सोसायटी के चुनाव में कर्जदार गुट से रावसाहब इंगोले, अनिल गणोरकर, प्रकाश देशमुख, श्रीकांत देशमुख, विजय देशमुख, सुधाकर देशमुख, प्रमोद मडघे, अशोक राउत, महिला आरक्षित प्रवर्ग से सीमा अशोक देशमुख, माईबाई शंकरराव कुकडे, अनुसूचित जाति-जमाती प्रवर्ग से पंकज गेडाम, विमुक्त भट्क्या जाति-जमाती प्रवर्ग से पंडीत पाटिल निर्विरोध रहे. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी के तौर पर साहयक सहकार अधिकारी नंदकुमार हंबर्डे ने कामकाज देखा. लाखनवाडी सोसायटी के कर्जदार गुट से हरिभाऊ इंगले, हरिश काजे, जीतेंद्र खडसे, दिलीप खडसे, देवका रामदास डांगे, निलेश डांगे, वर्षा सतीश देशमुख, विलास देशमुख, महिला आरक्षित गुट से सुनीता गणेश काजे, वंदना राजेंद्र देशमुख अन्य पिछडा वर्ग प्रवर्ग से विशाल देशमुख, अनुसूचित जाति-जमाती प्रवर्ग से मधुकर वानखडे चुनाव जीते. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी के रुप में मुख्य लिपिक प्रदीप वर्धेकर उपस्थित थे. खरपी सेवा सहकार सोसायटी कर्जदार गुट से अफरोज खान, सचिन क्षिरसागर, दिनकर पोहोकार, योगेश भौसले, मकसूद खान, शेख जहूर, सलीम खान, रमेश सुआरे, महिला आरक्षित प्रवर्ग से राजकन्या, भीमराव ढवले, नजमुन्नीसा शेख अजीज अन्य पिछडा वर्ग गुट से संजय भगत, अनुसूचित जमाती गुट से रमेश जांभे, विमुक्त जाति-जमाती गुट से दिनकर पवार चुने गए. यहां चुनाव निर्णय अधिकारी, लेखा अधिकारी श्रेणी दो रविेंद्र उंबरकर उपस्थित थे. चारों ही सोसायाटियो के चुनाव निर्विरोध किए जाने के लिए ग्रामवासियों ने अथक प्रयास किए.
सत्या राजपूत, रायपुर. छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड व बीएड संघ के नेतृत्व में 9 अप्रैल को प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन रायपुर के बूढ़ा तालाब में आयोजित किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के बेरोजगार युवा अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाएंगे. छत्तीसगढ़ में रुकी हुई सभी शासकीय भर्ती को जल्द जारी करने के लिए सरकार का ध्यानाकर्षण करेंगे. संघ के प्रदेश अध्यक्ष दाऊद खान ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार आरक्षण मामले को हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताकर पिछले एक सालों से शिक्षक सहित समस्त विभाग के भर्ती को रोक रखी है. शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, छात्रावास अधीक्षक, ADO, लाइब्रेरियन, पटवारी, एसआई, सहकारिता जैसे बड़े-बड़े विभाग के पद हैं, जिसमें हजारो की संख्या में पद रिक्त है, जिसमें भर्ती का इंतजार छत्तीसगढ़ का युवा बेरोजगार पिछले एक साल से कर रहे. इन पदों पर भर्ती न होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड बीएड संघ के सचिव ललित कुमार साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओ को बेरोजगारी भत्ता की नहीं, उचित रोजगार की आवश्यकता है. छग विधानसभा में मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के 60 हजार से अधिक पदों की रिक्तता से सम्बन्धी जानकारी पेश की है. इसके साथ-साथ छत्तीसगढ़ के समस्त विभाग में लाखों की संख्या में पद रिक्त है, जिस पर सरकार को तुरंत नोटिफिकेशन जारी कर भर्ती करनी चाहिए, ताकि सभी पदों पर जल्द भर्ती होने से युवाओ को उचित रोजगार प्राप्त हो सकें. मामला कोर्ट में है, लेकिन 50% राज्य सरकार के हाथ में है. ऐसे में विभिन्न विभागों में लाखों पद ख़ाली है. ऐसे में 50% आरक्षण रोस्टर लागू कर परेशान बेरोज़गार युवाओं की परेशानी दूर करें. कर्ज़ लेकर, लोन लेकर, मां-बाप की गाढ़ी कमाई को लगाकर इन युवाओं ने पढ़ाई की, लेकिन नौकरी के इंतज़ार में अब इनका उम्र का बंधन पार हो जाएगा. ऐसे में उनकी मेहनत और पैसा दोनों ख़राब हो जाएगा. अगर तीन चार महीनों में भर्ती नहीं की गई तो इन युवाओं के अयोग्य होने के लिए ज़िम्मेदार सरकार होगी. बेरोजगार युवाओं का कहना है कि पढ़ लिखकर बेरोज़गार बैठे युवा इन दिनों आर्थिक समस्या तो जूझ रहे हैं. साथ ही आसपास के लोगों, परिजनों के ताना और तंज से भी परेशान है. कहा जा रहा है कि पढ़ लिखकर क्या कर लिए ? बेरोज़गार बैठे हो ? क़ब नौकरी मिलेंगी ? बाज़ू वाला मज़दूरी में जा रहा है तुम भी जाओ ? इस तरह बात सुनने के लिए हम लोगों ने पढ़ाई नहीं की है, लेकिन सरकार ने ये हालात पैदा कर दी है इसलिए सुनना पड़ रहा है.
सत्या राजपूत, रायपुर. छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड व बीएड संघ के नेतृत्व में नौ अप्रैल को प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन रायपुर के बूढ़ा तालाब में आयोजित किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के बेरोजगार युवा अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाएंगे. छत्तीसगढ़ में रुकी हुई सभी शासकीय भर्ती को जल्द जारी करने के लिए सरकार का ध्यानाकर्षण करेंगे. संघ के प्रदेश अध्यक्ष दाऊद खान ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार आरक्षण मामले को हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताकर पिछले एक सालों से शिक्षक सहित समस्त विभाग के भर्ती को रोक रखी है. शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, छात्रावास अधीक्षक, ADO, लाइब्रेरियन, पटवारी, एसआई, सहकारिता जैसे बड़े-बड़े विभाग के पद हैं, जिसमें हजारो की संख्या में पद रिक्त है, जिसमें भर्ती का इंतजार छत्तीसगढ़ का युवा बेरोजगार पिछले एक साल से कर रहे. इन पदों पर भर्ती न होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड बीएड संघ के सचिव ललित कुमार साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओ को बेरोजगारी भत्ता की नहीं, उचित रोजगार की आवश्यकता है. छग विधानसभा में मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के साठ हजार से अधिक पदों की रिक्तता से सम्बन्धी जानकारी पेश की है. इसके साथ-साथ छत्तीसगढ़ के समस्त विभाग में लाखों की संख्या में पद रिक्त है, जिस पर सरकार को तुरंत नोटिफिकेशन जारी कर भर्ती करनी चाहिए, ताकि सभी पदों पर जल्द भर्ती होने से युवाओ को उचित रोजगार प्राप्त हो सकें. मामला कोर्ट में है, लेकिन पचास% राज्य सरकार के हाथ में है. ऐसे में विभिन्न विभागों में लाखों पद ख़ाली है. ऐसे में पचास% आरक्षण रोस्टर लागू कर परेशान बेरोज़गार युवाओं की परेशानी दूर करें. कर्ज़ लेकर, लोन लेकर, मां-बाप की गाढ़ी कमाई को लगाकर इन युवाओं ने पढ़ाई की, लेकिन नौकरी के इंतज़ार में अब इनका उम्र का बंधन पार हो जाएगा. ऐसे में उनकी मेहनत और पैसा दोनों ख़राब हो जाएगा. अगर तीन चार महीनों में भर्ती नहीं की गई तो इन युवाओं के अयोग्य होने के लिए ज़िम्मेदार सरकार होगी. बेरोजगार युवाओं का कहना है कि पढ़ लिखकर बेरोज़गार बैठे युवा इन दिनों आर्थिक समस्या तो जूझ रहे हैं. साथ ही आसपास के लोगों, परिजनों के ताना और तंज से भी परेशान है. कहा जा रहा है कि पढ़ लिखकर क्या कर लिए ? बेरोज़गार बैठे हो ? क़ब नौकरी मिलेंगी ? बाज़ू वाला मज़दूरी में जा रहा है तुम भी जाओ ? इस तरह बात सुनने के लिए हम लोगों ने पढ़ाई नहीं की है, लेकिन सरकार ने ये हालात पैदा कर दी है इसलिए सुनना पड़ रहा है.
जिज्ञासा संज्ञा स्त्रीलिंग जानने की इच्छा । ज्ञान प्राप्त करने की कामना । 2. पूछताछ । प्रश्न । परिप्रश्न । तहकीकात । क्रि॰ प्र॰ - करना । जिज्ञासा या उत्सुकता जानने की इच्छा को कहते हैं। इसका ज़ाहिर करने, जांच करने, और सीखने के व्यवहार में होता है। यह इंसान और बहुत सारे जानवरों का जन्मजात लक्षण है। वैज्ञानिक खोज और अन्य पढ़ाइयों के पीछे उत्सुकता एक प्रमुख वजह और ताक़त है। Hindi Dictionary. Devnagari to roman Dictionary. हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा शब्दकोष। देवनागरी और रोमन लिपि में। एक लाख शब्दों का संकलन। स्थानीय और सरल भाषा में व्याख्या। Jigyasa के पर्यायवाचीः Jigyasa, Jigyasa meaning in English. Jigyasa in english. Jigyasa in english language. What is meaning of Jigyasa in English dictionary? Jigyasa ka matalab english me kya hai (Jigyasa का अंग्रेजी में मतलब ). Jigyasa अंग्रेजी मे मीनिंग. English definition of Jigyasa. English meaning of Jigyasa. Jigyasa का मतलब (मीनिंग) अंग्रेजी में जाने। Jigyasa kaun hai? Jigyasa kahan hai? Jigyasa kya hai? Jigyasa kaa arth. Hindi to english dictionary(शब्दकोश).जिज्ञासा को अंग्रेजी में क्या कहते हैं. इस श्रेणी से मिलते जुलते शब्दः ये शब्द भी देखेंः synonyms of Jigyasa in Hindi Jigyasa ka Samanarthak kya hai? Jigyasa Samanarthak, Jigyasa synonyms in Hindi, Paryay of Jigyasa, Jigyasa ka Paryay, In "gkexams" you will find the word synonym of the Jigyasa And along with the derivation of the word Jigyasa is also given here for your enlightenment. Paryay and Samanarthak both reveal the same expressions. What is the synonym of Jigyasa in Hindi?
जिज्ञासा संज्ञा स्त्रीलिंग जानने की इच्छा । ज्ञान प्राप्त करने की कामना । दो. पूछताछ । प्रश्न । परिप्रश्न । तहकीकात । क्रि॰ प्र॰ - करना । जिज्ञासा या उत्सुकता जानने की इच्छा को कहते हैं। इसका ज़ाहिर करने, जांच करने, और सीखने के व्यवहार में होता है। यह इंसान और बहुत सारे जानवरों का जन्मजात लक्षण है। वैज्ञानिक खोज और अन्य पढ़ाइयों के पीछे उत्सुकता एक प्रमुख वजह और ताक़त है। Hindi Dictionary. Devnagari to roman Dictionary. हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा शब्दकोष। देवनागरी और रोमन लिपि में। एक लाख शब्दों का संकलन। स्थानीय और सरल भाषा में व्याख्या। Jigyasa के पर्यायवाचीः Jigyasa, Jigyasa meaning in English. Jigyasa in english. Jigyasa in english language. What is meaning of Jigyasa in English dictionary? Jigyasa ka matalab english me kya hai . Jigyasa अंग्रेजी मे मीनिंग. English definition of Jigyasa. English meaning of Jigyasa. Jigyasa का मतलब अंग्रेजी में जाने। Jigyasa kaun hai? Jigyasa kahan hai? Jigyasa kya hai? Jigyasa kaa arth. Hindi to english dictionary.जिज्ञासा को अंग्रेजी में क्या कहते हैं. इस श्रेणी से मिलते जुलते शब्दः ये शब्द भी देखेंः synonyms of Jigyasa in Hindi Jigyasa ka Samanarthak kya hai? Jigyasa Samanarthak, Jigyasa synonyms in Hindi, Paryay of Jigyasa, Jigyasa ka Paryay, In "gkexams" you will find the word synonym of the Jigyasa And along with the derivation of the word Jigyasa is also given here for your enlightenment. Paryay and Samanarthak both reveal the same expressions. What is the synonym of Jigyasa in Hindi?
लखनऊ. अब से 31 साल पहले 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या आंदोलन के दौरान कारसेवकों को जान गंवानी पड़ी थी. सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उस दिन अयोध्या में भगवान राम का नाम ले रहे निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलवाई थी. तो अर्द्ध सैनिकों की गोली से राम मंदिर के गुंबद पर झंडा फहराते हुए पांच कारसेवकों की मौत हुई थी, जबकि पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से करीब चालीस कारसेवक पुलिस के लाठीचार्ज और गोलीबारी से घायल हुए थे. इस घटना के चलते ही मुलायम सिंह यादव देश भर में "मौलाना मुलायम" कहे जाने लगे. उनकी यह हिंदू विरोधी छवि अब तक मुलायम सिंह यादव और उनकी समाजवादी पार्टी से हटी नहीं है. वही दूसरी तरफ 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों के खिलाफ तत्कालीन सरकार के दमनकारी प्रयास ही मंदिर निर्माण की खाद बन गए. अयोध्या का मंदिर आंदोलन जन आंदोलन में तब्दील हो गया और देखते ही देखते बीजेपी राज्य और केंद्र की सत्ता पर काबिज हो गई. जिन अफसर, नेता और पत्रकारों ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों और तत्कालीन सरकार के बीच हुए संघर्ष को देखा था, उनका यह कहना है. लखनऊ में ऐसे तमाम पत्रकार, अधिकारी और नेता मौजूद हैं, जिन्होंने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या जो कुछ हुआ था उसे देखा था. इन लोगों के अनुसार, अयोध्या आंदोलन के क्रम में विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू साधु-संतों द्वारा अयोध्या में कारसेवा करने का ऐलान किया था. जिसके तहत देश भर के साधु संत और श्रद्धालुओं को अयोध्या कूच करने को कहा गया. विहिप के इस कार्यक्रम को फ्लॉप करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने यह ऐलान किया गया कि सरकार के सुरक्षा प्रबंधों के चलते अयोध्या में कोई परिंदा पर भी नहीं मार सकता है. उनके इस ऐलान के बाद भी देशभर से लाखों की संख्या में कारसेवक सुरक्षा प्रबंधों को धत्ता बताते हुए चोरी छुपे अयोध्या पहुंच गए. अयोध्या में 31 साल पहले कैसे उस दिन (30 अक्टूबर) लाठीचार्ज, आंसूगैस और गोलीबारी के बीच कारसेवकों ने मंदिर परिसर में पहुचकर कारसेवा की थी, उसे सैंकड़ो पत्रकारों और अफसरों ने देखा था. यहीं नहीं उस दिन कैसे जयश्री राम का नारा लगाते हुए कारसेवकों ने सरकार को फेल किया था, यह भी उक्त घटना को कवर करने वाले पत्रकार भूले नहीं हैं. उस दिन सरकार के तमाम सुरक्षा प्रबंधों को नेस्तानाबूद करते हुए लाखों कारसेवक अयोध्या पहुंच थे. विश्वहिंदू परिषद के तत्कालीन महामंत्री अशोक सिंघल की अगुवाई में सुबह हजारों कारसेवकों ने जब राममंदिर की तरफ बढ़ाना शुरू किया तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया. अशोक सिंघल के सर पर पुलिस की लाठी पड़ी, उनका सर फटा, सर से खून निकला. तो कारसेवकों में राममंदिर पहुंचने का जूनून सवार हो गया. फिर देखते ही देखते अयोध्या में गली -गली से कारसेवकों के जत्थे निकलने लगे और सब लोग रामजन्मभूमि मंदिर की ओर चल पड़े. कारसेवकों को रोकने के लिए बनाए गए वैरीकेट एक-एक कर ध्वस्त होने लगे. पुलिस और कारसेवकों के बीच करीब छह घंटे तक हुए संघर्ष में लाखों कारसेवक रामजन्मभूमि परिसर के समीप तक पहुचने में सफल हो गए. इनमें से सैंकड़ों कारसेवकों ने सरकार के सुरक्षा इंतजामों को फेल करते हुए विवादित ढ़ांचे के गुंबद पर झंडा फहरा दिया. गुंबद, दीवार, खिडकियों को कारसेवकों ने क्षतिग्रस्त किया गया तो अर्द्धसैनिक बलों ने तीन बार गोलियां चलाकर कारसेवकों को रोकने की कोशिश की. तो गुंबद पर झंडा फहराते हुए दो कारसेवक मरे. तीन नींव खोदते हुए मरे. तीस से अधिक कारसेवक घायल हुए. अयोध्या में घटी इस घटना का अब आकलन करें तो यह पता चलता है कि उक्त घटना से उत्तर प्रदेश से लेकर देश की सियासत बहुत बदल हुए. इस घटना के बाद से ही मुलायम सिंह यादव को हिंदू विरोधी कहा गया. फिर धीरे -धीरे कारसेवकों पर गोली चलवाने को लेकर मुलायम सिंह यादव को 'मुल्ला मुलायम' कहा जाने लगा. तमाम हिंदूवादी संगठनों ने उन्हें हिंदू विरोधी और मुस्लिम परस्त नेता भी कहा. जिसका नुकसान मुलायम सिंह को हुआ. वर्ष 1991 में हुए विधानसभा चुनावों में मुलायम सिंह बुरी तरह हारे और बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल हुई. कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य हो रहा है. जबकि अयोध्या में घटी 31 साल पहले की उक्त घटना के बाद भी मुलायम सिंह जनता की बीच बनी अपनी इस छवि पूरी तरह तोड़ नहीं सके हैं. अब तो मुलायम सिंह यादव राजनीति में पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं, फिर भी लोगों के मन में मुलायम सिंह यादव की इमेज बदल नहीं रही है. वहीं अयोध्या का राममंदिर बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हुआ है. मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों का यह कहते भी हैं. इस आंदोलन को वर्षों से कवर करने वाले हरिशंकर व्यास के अनुसार वर्ष 1980 में बीजेपी का गठन हुआ और पार्टी के बनने के बाद ही उसने खुलकर राम मंदिर आंदोलन का मोर्चा संभाला. बीजेपी के गठन के 4 साल बाद चुनाव हुए तो पार्टी के केवल दो सांसद जीते. 1989 में बीजेपी ने पालमपुर अधिवेशन में राम मंदिर आंदोलन को धार देने का फैसला किया गया. तो दूसरी तरफ राजीव गांधी ने विवादित स्थल के पास राम मंदिर का शिलान्यास करने की इजाजत दे दी. इसका फायदा भी बीजेपी को मिला और बीजेपी वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में 2 सीट से बढ़कर 85 पर पहुंच गई. फिर उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी सत्ता पर काबिज हो गई. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जबरदस्त राजनीतिक फायदा मिला और बीजेपी 85 सीट से बढ़कर 120 पर पहुंच गई. इसके बाद 1996 में चुनाव में हुए तो केंद्र में बीजेपी सरकार बनी हालांकि ये महज 13 दिन चली. इसके बाद 1998 और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी, जो 2004 तक चली. वर्ष 2014 में बीजेपी केंद्र और वर्ष 2017 में यूपी की सत्ता पर काबिज हुई. अब केंद्र तथा राज्य की देखरेख में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है. जबकि केजरीवाल सहित तमाम राजनीतिक दल अयोध्या जाकर राम मंदिर में पूजा कर अपने को हिंदू नेता साबित करने में जुटे हैं. वही कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले मुलायम सिंह यादव के पुत्र और प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके अखिलेश यादव भी अब अपने को राम भक्त कह रहें हैं. 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लखनऊ. अब से इकतीस साल पहले तीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को अयोध्या आंदोलन के दौरान कारसेवकों को जान गंवानी पड़ी थी. सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उस दिन अयोध्या में भगवान राम का नाम ले रहे निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलवाई थी. तो अर्द्ध सैनिकों की गोली से राम मंदिर के गुंबद पर झंडा फहराते हुए पांच कारसेवकों की मौत हुई थी, जबकि पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से करीब चालीस कारसेवक पुलिस के लाठीचार्ज और गोलीबारी से घायल हुए थे. इस घटना के चलते ही मुलायम सिंह यादव देश भर में "मौलाना मुलायम" कहे जाने लगे. उनकी यह हिंदू विरोधी छवि अब तक मुलायम सिंह यादव और उनकी समाजवादी पार्टी से हटी नहीं है. वही दूसरी तरफ तीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों के खिलाफ तत्कालीन सरकार के दमनकारी प्रयास ही मंदिर निर्माण की खाद बन गए. अयोध्या का मंदिर आंदोलन जन आंदोलन में तब्दील हो गया और देखते ही देखते बीजेपी राज्य और केंद्र की सत्ता पर काबिज हो गई. जिन अफसर, नेता और पत्रकारों ने तीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को अयोध्या में कारसेवकों और तत्कालीन सरकार के बीच हुए संघर्ष को देखा था, उनका यह कहना है. लखनऊ में ऐसे तमाम पत्रकार, अधिकारी और नेता मौजूद हैं, जिन्होंने तीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को अयोध्या जो कुछ हुआ था उसे देखा था. इन लोगों के अनुसार, अयोध्या आंदोलन के क्रम में विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू साधु-संतों द्वारा अयोध्या में कारसेवा करने का ऐलान किया था. जिसके तहत देश भर के साधु संत और श्रद्धालुओं को अयोध्या कूच करने को कहा गया. विहिप के इस कार्यक्रम को फ्लॉप करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने यह ऐलान किया गया कि सरकार के सुरक्षा प्रबंधों के चलते अयोध्या में कोई परिंदा पर भी नहीं मार सकता है. उनके इस ऐलान के बाद भी देशभर से लाखों की संख्या में कारसेवक सुरक्षा प्रबंधों को धत्ता बताते हुए चोरी छुपे अयोध्या पहुंच गए. अयोध्या में इकतीस साल पहले कैसे उस दिन लाठीचार्ज, आंसूगैस और गोलीबारी के बीच कारसेवकों ने मंदिर परिसर में पहुचकर कारसेवा की थी, उसे सैंकड़ो पत्रकारों और अफसरों ने देखा था. यहीं नहीं उस दिन कैसे जयश्री राम का नारा लगाते हुए कारसेवकों ने सरकार को फेल किया था, यह भी उक्त घटना को कवर करने वाले पत्रकार भूले नहीं हैं. उस दिन सरकार के तमाम सुरक्षा प्रबंधों को नेस्तानाबूद करते हुए लाखों कारसेवक अयोध्या पहुंच थे. विश्वहिंदू परिषद के तत्कालीन महामंत्री अशोक सिंघल की अगुवाई में सुबह हजारों कारसेवकों ने जब राममंदिर की तरफ बढ़ाना शुरू किया तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया. अशोक सिंघल के सर पर पुलिस की लाठी पड़ी, उनका सर फटा, सर से खून निकला. तो कारसेवकों में राममंदिर पहुंचने का जूनून सवार हो गया. फिर देखते ही देखते अयोध्या में गली -गली से कारसेवकों के जत्थे निकलने लगे और सब लोग रामजन्मभूमि मंदिर की ओर चल पड़े. कारसेवकों को रोकने के लिए बनाए गए वैरीकेट एक-एक कर ध्वस्त होने लगे. पुलिस और कारसेवकों के बीच करीब छह घंटे तक हुए संघर्ष में लाखों कारसेवक रामजन्मभूमि परिसर के समीप तक पहुचने में सफल हो गए. इनमें से सैंकड़ों कारसेवकों ने सरकार के सुरक्षा इंतजामों को फेल करते हुए विवादित ढ़ांचे के गुंबद पर झंडा फहरा दिया. गुंबद, दीवार, खिडकियों को कारसेवकों ने क्षतिग्रस्त किया गया तो अर्द्धसैनिक बलों ने तीन बार गोलियां चलाकर कारसेवकों को रोकने की कोशिश की. तो गुंबद पर झंडा फहराते हुए दो कारसेवक मरे. तीन नींव खोदते हुए मरे. तीस से अधिक कारसेवक घायल हुए. अयोध्या में घटी इस घटना का अब आकलन करें तो यह पता चलता है कि उक्त घटना से उत्तर प्रदेश से लेकर देश की सियासत बहुत बदल हुए. इस घटना के बाद से ही मुलायम सिंह यादव को हिंदू विरोधी कहा गया. फिर धीरे -धीरे कारसेवकों पर गोली चलवाने को लेकर मुलायम सिंह यादव को 'मुल्ला मुलायम' कहा जाने लगा. तमाम हिंदूवादी संगठनों ने उन्हें हिंदू विरोधी और मुस्लिम परस्त नेता भी कहा. जिसका नुकसान मुलायम सिंह को हुआ. वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में हुए विधानसभा चुनावों में मुलायम सिंह बुरी तरह हारे और बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल हुई. कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य हो रहा है. जबकि अयोध्या में घटी इकतीस साल पहले की उक्त घटना के बाद भी मुलायम सिंह जनता की बीच बनी अपनी इस छवि पूरी तरह तोड़ नहीं सके हैं. अब तो मुलायम सिंह यादव राजनीति में पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं, फिर भी लोगों के मन में मुलायम सिंह यादव की इमेज बदल नहीं रही है. वहीं अयोध्या का राममंदिर बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हुआ है. मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों का यह कहते भी हैं. इस आंदोलन को वर्षों से कवर करने वाले हरिशंकर व्यास के अनुसार वर्ष एक हज़ार नौ सौ अस्सी में बीजेपी का गठन हुआ और पार्टी के बनने के बाद ही उसने खुलकर राम मंदिर आंदोलन का मोर्चा संभाला. बीजेपी के गठन के चार साल बाद चुनाव हुए तो पार्टी के केवल दो सांसद जीते. एक हज़ार नौ सौ नवासी में बीजेपी ने पालमपुर अधिवेशन में राम मंदिर आंदोलन को धार देने का फैसला किया गया. तो दूसरी तरफ राजीव गांधी ने विवादित स्थल के पास राम मंदिर का शिलान्यास करने की इजाजत दे दी. इसका फायदा भी बीजेपी को मिला और बीजेपी वर्ष एक हज़ार नौ सौ नवासी के लोकसभा चुनाव में दो सीट से बढ़कर पचासी पर पहुंच गई. फिर उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी सत्ता पर काबिज हो गई. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जबरदस्त राजनीतिक फायदा मिला और बीजेपी पचासी सीट से बढ़कर एक सौ बीस पर पहुंच गई. इसके बाद एक हज़ार नौ सौ छियानवे में चुनाव में हुए तो केंद्र में बीजेपी सरकार बनी हालांकि ये महज तेरह दिन चली. इसके बाद एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे और एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी, जो दो हज़ार चार तक चली. वर्ष दो हज़ार चौदह में बीजेपी केंद्र और वर्ष दो हज़ार सत्रह में यूपी की सत्ता पर काबिज हुई. अब केंद्र तथा राज्य की देखरेख में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है. जबकि केजरीवाल सहित तमाम राजनीतिक दल अयोध्या जाकर राम मंदिर में पूजा कर अपने को हिंदू नेता साबित करने में जुटे हैं. वही कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले मुलायम सिंह यादव के पुत्र और प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके अखिलेश यादव भी अब अपने को राम भक्त कह रहें हैं. Copyright @ दो हज़ार उन्नीस All Right Reserved । Powred by eMag Technologies Pvt. Ltd.
Don't Miss! अक्षय कुमार बैक टू बैक फिल्में साइन करते हैं, यह तो सभी जानते हैं। लेकिन खास बात है कि इस वक्त उनके पास सीक्वल फिल्मों की लाइन लगी हुई है। हाउसफुल 4 से लेकर हेरा फेरी 3.. वहीं, रिपोर्ट्स की मानें तो अक्षय कुमार की सुपरहिट फिल्म राउडी राथौड़ की सीक्वल फिल्म राउडी राथौड़ 2 की स्क्रिप्ट पर काम तेजी से चल रहा है। फिल्म के को प्रोड्यूसर सबीना खान का कहना है कि राउडी राथौड़ की स्क्रिप्ट तैयार है, बस संजय लीला भंसाली के हां कहने की जरूरत है। फिर फिल्म पर आगे काम शुरु कर दिया जाएगा। बता दें, अक्षय- सोनाक्षी की यह 2012 में आई फिल्म राउडी राथौड़ सुपरहिट थी। फिल्म ने 100 करोड़ से ऊपर की कमाई की थी। यह एक्शन- कॉमेडी फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई थी। काफी समय से इसके सीक्वल की चर्चा थी। लिहाजा, यह खबर अक्षय कुमार फैंस के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं। 2019 में फिल्म फ्लोर पर जा सकती है।
Don't Miss! अक्षय कुमार बैक टू बैक फिल्में साइन करते हैं, यह तो सभी जानते हैं। लेकिन खास बात है कि इस वक्त उनके पास सीक्वल फिल्मों की लाइन लगी हुई है। हाउसफुल चार से लेकर हेरा फेरी तीन.. वहीं, रिपोर्ट्स की मानें तो अक्षय कुमार की सुपरहिट फिल्म राउडी राथौड़ की सीक्वल फिल्म राउडी राथौड़ दो की स्क्रिप्ट पर काम तेजी से चल रहा है। फिल्म के को प्रोड्यूसर सबीना खान का कहना है कि राउडी राथौड़ की स्क्रिप्ट तैयार है, बस संजय लीला भंसाली के हां कहने की जरूरत है। फिर फिल्म पर आगे काम शुरु कर दिया जाएगा। बता दें, अक्षय- सोनाक्षी की यह दो हज़ार बारह में आई फिल्म राउडी राथौड़ सुपरहिट थी। फिल्म ने एक सौ करोड़ से ऊपर की कमाई की थी। यह एक्शन- कॉमेडी फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई थी। काफी समय से इसके सीक्वल की चर्चा थी। लिहाजा, यह खबर अक्षय कुमार फैंस के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं। दो हज़ार उन्नीस में फिल्म फ्लोर पर जा सकती है।
वर्चुअल लैन क्या है? (vlan in hindi) वर्चुअल LAN या VLAN एक ऐसा कांसेप्ट है जिसके द्वारा हम लेयर दो यानी डाटा लिंक लेयर पर डिवाइस को दोगिकाल्ली विभाजित कर सकते हैं। सामान्यतः ब्रॉडकास्ट डोमेन को लेवल 3 लेयर विभाजित करता है लेकिन यहाँ भी हम VLANs के कांसेप्ट से स्विचों का प्रयोग कर के ऐसा कर सकते हैं। ब्रॉडकास्ट डोमेन एक ऐसा नेटवर्क सेगमेंट है जिसमे अगर डिवाइस किसी पैकेट को ब्रॉडकास्ट करता है उस समान ब्रॉडकास्ट डोमेन के सभी डिवाइस उसे प्राप्त करेंगे। समान ब्रॉडकास्ट डोमेन में होने वाले सभी डिवाइस सारे ब्रॉडकास्ट पैकेट्स को प्राप्त करेंगे लेकिन वो स्विचों तक ही लिमिटेड है क्योंकि routers ब्रॉडकास्ट पैकेट्स को बाहर फॉरवर्ड नही करता। इसीलिए पैकेट्स को अलग VLAN में फॉरवर्ड करने के लिए (एक VLAN से दूसरे VLAN में) या फिर डोमेन को ब्रॉडकास्ट करने के लिए, इंटर VLAN routing कि जरूरत पड़ती है। VLAN के द्वारा विभिन्न छोटे-छोटे आकार के सब-नेटवर्क को बनाया जाता है जिन्हें हैंडल करना तुलनात्मक रूप से आसान रहता है। VLANs और उनके रेंज को समझने के लिए इस तालिका को ध्यान से देखेंः वर्चुअल लेन का कॉन्फ़िगरेशन (vlan configuration in hindi) अगर आपको VLAN क्रिएट करना है तो सीधा नाम और id देकर ऐसा कर सकते हैंः यहाँ पर 2 इस VLAN कि id है और vlan name इसका अकाउंट नाम है। अब VLAN को स्विच पोर्ट कैसे असाइन करते हैं वो नीचे देखेंः अब स्विचपोर्ट का रेंज भी जिस VLAN को चाहें उसे असाइन कर सकते हैंः अब vlan2 को स्विचपोर्ट fa0/0,fa0/1,fa0-2 असाइन हो जाएगा। VLAN के फायदे (Advantages of vlan in hindi) अब हम आपको VLAN के कुछ लाभ बता रहे हैं जो कि निम्नलिखित हैंः - परफॉरमेंस- नेटवर्क ट्रैफिक ब्रॉडकास्ट और मल्टीकास्ट से भरे होते हैं। VLAN हमे ऐसे ट्रैफिक को जहां जरूरत नही है वैसे लोकेशन पर भेजने की जरूरत को समाप्त कर देता है। जैसे कि उदाहरण के रूप में मान लीजिये कि ट्रैफिक को दो डिवाइस के लिए तैयार किया गया है लेकिन उसी ब्रॉडकास्ट डोमेन में दस डिवाइस हैं तो ट्रैफिक हर जगह पहुंचेगा और इस से बैंडविड्थ कि बर्बादी होगी। लेकिन वहीं अगर हम VLAN बना लेते हैं तो मल्टीकास्ट और ब्रॉडकास्ट पैकेट उन्ही डिवाइस में जाएगा जहां हम भेजना चाहते हैं। - वर्चुअल ग्रुप्स का बनना- जैसे सभी संस्था या कम्पनी में सेल्स, मैनेजमेंट इत्यादि कई तरह के डिपार्टमेंट होते हैं वैसे ही VLAN devices को उनके जरूरत और डिपार्टमेंट के हिसाब से अलग-अलग logically बनाये गये समूह में डाल सकता है। - सिक्यूरिटी- समान नेटवर्क में अगर सेंसिटिव डाटा ब्रॉडकास्ट हुआ तो कोई बाहरी उसे एक्सेस कर सकता है लेकिन VLAN बनाने के बाद हम ब्रॉडकास्ट डोमेन को नियंत्रित कर सकते हैं और फ़ायरवॉल बना कर एक्सेस भी रेस्ट्रिक्ट कर सकते हैं। यही नही, ये नेटवर्क के मेनेजर को किसी भी प्रकार के बाहरी एक्सेस कि सूचना देने में भी सक्षम है। इसीलिए VLAN नेटवर्क सिक्यूरिटी को भी बढाता है। - फ्लेक्सिबिलिटी- ये हमे होस्ट कि संख्या बढाने घटाने कि भी छूट देता है। - कोस्ट-रिडक्शन- VLAN के प्रयोग से ऐसे ब्रॉडकास्ट डोमेन भी बनाये जा सकते हैं जिसमे महंगे routers की जरूरत नही पड़ती। इसके अलावा VLAN का प्रयोग कर के छोटे आकार के ब्रॉडकास्ट डोमेन कि संख्या बढाई भी जा सकती है जो कि बड़े ब्रॉडकास्ट डोमेन के मुकाबले हैंडल करने में आसान होता है। इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।
वर्चुअल लैन क्या है? वर्चुअल LAN या VLAN एक ऐसा कांसेप्ट है जिसके द्वारा हम लेयर दो यानी डाटा लिंक लेयर पर डिवाइस को दोगिकाल्ली विभाजित कर सकते हैं। सामान्यतः ब्रॉडकास्ट डोमेन को लेवल तीन लेयर विभाजित करता है लेकिन यहाँ भी हम VLANs के कांसेप्ट से स्विचों का प्रयोग कर के ऐसा कर सकते हैं। ब्रॉडकास्ट डोमेन एक ऐसा नेटवर्क सेगमेंट है जिसमे अगर डिवाइस किसी पैकेट को ब्रॉडकास्ट करता है उस समान ब्रॉडकास्ट डोमेन के सभी डिवाइस उसे प्राप्त करेंगे। समान ब्रॉडकास्ट डोमेन में होने वाले सभी डिवाइस सारे ब्रॉडकास्ट पैकेट्स को प्राप्त करेंगे लेकिन वो स्विचों तक ही लिमिटेड है क्योंकि routers ब्रॉडकास्ट पैकेट्स को बाहर फॉरवर्ड नही करता। इसीलिए पैकेट्स को अलग VLAN में फॉरवर्ड करने के लिए या फिर डोमेन को ब्रॉडकास्ट करने के लिए, इंटर VLAN routing कि जरूरत पड़ती है। VLAN के द्वारा विभिन्न छोटे-छोटे आकार के सब-नेटवर्क को बनाया जाता है जिन्हें हैंडल करना तुलनात्मक रूप से आसान रहता है। VLANs और उनके रेंज को समझने के लिए इस तालिका को ध्यान से देखेंः वर्चुअल लेन का कॉन्फ़िगरेशन अगर आपको VLAN क्रिएट करना है तो सीधा नाम और id देकर ऐसा कर सकते हैंः यहाँ पर दो इस VLAN कि id है और vlan name इसका अकाउंट नाम है। अब VLAN को स्विच पोर्ट कैसे असाइन करते हैं वो नीचे देखेंः अब स्विचपोर्ट का रेंज भी जिस VLAN को चाहें उसे असाइन कर सकते हैंः अब vlanदो को स्विचपोर्ट faशून्य/शून्य,faशून्य/एक,faशून्य-दो असाइन हो जाएगा। VLAN के फायदे अब हम आपको VLAN के कुछ लाभ बता रहे हैं जो कि निम्नलिखित हैंः - परफॉरमेंस- नेटवर्क ट्रैफिक ब्रॉडकास्ट और मल्टीकास्ट से भरे होते हैं। VLAN हमे ऐसे ट्रैफिक को जहां जरूरत नही है वैसे लोकेशन पर भेजने की जरूरत को समाप्त कर देता है। जैसे कि उदाहरण के रूप में मान लीजिये कि ट्रैफिक को दो डिवाइस के लिए तैयार किया गया है लेकिन उसी ब्रॉडकास्ट डोमेन में दस डिवाइस हैं तो ट्रैफिक हर जगह पहुंचेगा और इस से बैंडविड्थ कि बर्बादी होगी। लेकिन वहीं अगर हम VLAN बना लेते हैं तो मल्टीकास्ट और ब्रॉडकास्ट पैकेट उन्ही डिवाइस में जाएगा जहां हम भेजना चाहते हैं। - वर्चुअल ग्रुप्स का बनना- जैसे सभी संस्था या कम्पनी में सेल्स, मैनेजमेंट इत्यादि कई तरह के डिपार्टमेंट होते हैं वैसे ही VLAN devices को उनके जरूरत और डिपार्टमेंट के हिसाब से अलग-अलग logically बनाये गये समूह में डाल सकता है। - सिक्यूरिटी- समान नेटवर्क में अगर सेंसिटिव डाटा ब्रॉडकास्ट हुआ तो कोई बाहरी उसे एक्सेस कर सकता है लेकिन VLAN बनाने के बाद हम ब्रॉडकास्ट डोमेन को नियंत्रित कर सकते हैं और फ़ायरवॉल बना कर एक्सेस भी रेस्ट्रिक्ट कर सकते हैं। यही नही, ये नेटवर्क के मेनेजर को किसी भी प्रकार के बाहरी एक्सेस कि सूचना देने में भी सक्षम है। इसीलिए VLAN नेटवर्क सिक्यूरिटी को भी बढाता है। - फ्लेक्सिबिलिटी- ये हमे होस्ट कि संख्या बढाने घटाने कि भी छूट देता है। - कोस्ट-रिडक्शन- VLAN के प्रयोग से ऐसे ब्रॉडकास्ट डोमेन भी बनाये जा सकते हैं जिसमे महंगे routers की जरूरत नही पड़ती। इसके अलावा VLAN का प्रयोग कर के छोटे आकार के ब्रॉडकास्ट डोमेन कि संख्या बढाई भी जा सकती है जो कि बड़े ब्रॉडकास्ट डोमेन के मुकाबले हैंडल करने में आसान होता है। इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।
Aaj Samaj (आज समाज),MLA Randhir Golan, मनोज वर्मा कैथल : विधायक रणधीर गोलन ने कहा कि हलके के हर घर तक पीने का स्वच्छ पानी पंहुचाएगे। इसी के मद्देनजर पूण्डरी शहर में पंचपीर मोहल्ला, ग्यारह रुद्री मंदिर के पास और आदर्श नगर में पानी के नए बोरवेल लगाए गए। पूण्डरी हल्के की प्रगति में हर दिन एक नया अध्याय जुड़ रहा है और निश्चित तौर पर पूण्डरी हलका नंबर वन हलका बनेगा। गोलन रविवार को पूण्डरी में 56 लाख रुपये की लागत से तीन नए टयूबवैलो का उद्घाटन करने के उपरांत बोल रहे थे। विधायक गोलन ने कहा कि हर वर्ग को साथ लेकर और पूरा मान-सम्मान देकर एक समान विकास करने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। क्षेत्र के समूचित विकास हेतू करोड़ों रुपये की धनराशि मंजूर करवाई गई है।
Aaj Samaj ,MLA Randhir Golan, मनोज वर्मा कैथल : विधायक रणधीर गोलन ने कहा कि हलके के हर घर तक पीने का स्वच्छ पानी पंहुचाएगे। इसी के मद्देनजर पूण्डरी शहर में पंचपीर मोहल्ला, ग्यारह रुद्री मंदिर के पास और आदर्श नगर में पानी के नए बोरवेल लगाए गए। पूण्डरी हल्के की प्रगति में हर दिन एक नया अध्याय जुड़ रहा है और निश्चित तौर पर पूण्डरी हलका नंबर वन हलका बनेगा। गोलन रविवार को पूण्डरी में छप्पन लाख रुपये की लागत से तीन नए टयूबवैलो का उद्घाटन करने के उपरांत बोल रहे थे। विधायक गोलन ने कहा कि हर वर्ग को साथ लेकर और पूरा मान-सम्मान देकर एक समान विकास करने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। क्षेत्र के समूचित विकास हेतू करोड़ों रुपये की धनराशि मंजूर करवाई गई है।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि बृहस्पतिवार रात से पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगाने का "विवेकपूर्ण" निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब राजनीतिक दलों को अचानक से वोट मांगने के अधिकार से रोकना नहीं था बल्कि हम नहीं चाहते थे कि मई 19 के चुनाव की समाप्ति हिंसा से हो। राज्य की नौ लोकसभा सीटों पर प्रचार को बृहस्पतिवार सुबह से नहीं थामने को लेकर आयोग पर राजनीतिक दलों का हमला जारी है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों के लिए ऐसा किया गया है। पश्चिम बंगाल में प्रचार बृहस्पतिवार रात दस बजे थम गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह शुक्रवार शाम छह बजे तक चलता।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि बृहस्पतिवार रात से पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगाने का "विवेकपूर्ण" निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब राजनीतिक दलों को अचानक से वोट मांगने के अधिकार से रोकना नहीं था बल्कि हम नहीं चाहते थे कि मई उन्नीस के चुनाव की समाप्ति हिंसा से हो। राज्य की नौ लोकसभा सीटों पर प्रचार को बृहस्पतिवार सुबह से नहीं थामने को लेकर आयोग पर राजनीतिक दलों का हमला जारी है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों के लिए ऐसा किया गया है। पश्चिम बंगाल में प्रचार बृहस्पतिवार रात दस बजे थम गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह शुक्रवार शाम छह बजे तक चलता।
खेलने के कारण ही पाण्डवों पर विपत्ति आयी थी। इसी तरह परस्त्री-हरण के कारण राबंण का वंश नष्ट हुआ। इन महापापों से प्रत्येक गृहस्व को बचवा चाहिए। श्रावकों के ऊपर ही सुनिधर्म निर्भर है। यदि भावक ठीक न हों तो मुविधर्म भी ठीक रूप में नहीं पल सकता, क्योंकि मुनियों का आहार-विहार श्रावकों पर ही निर्भर है। अतः आवकधर्म ही धर्म की रीढ़ है। जैन साधु के लिए पुराना नाम श्रमण था। आचार्य कुन्दकुन्द ने इसी शब्द का प्रयोग विशेष रूप से किया है । 'प्रवचनसार' के अन्त में चरणानुयोगसूचक चूलिका का प्रारम्भ करते हुए उन्होंने कहा है यदि दुःखों से छूटना चाहते हो तो श्रामण्य को धारण करो। जो श्रमण होना चाहता है उसे सबसे प्रथम बन्धुवर्ग से स्वीकारता लेनी चाहिए और माता-पिता, स्त्री, पुत्रादि से मुक्त होकर श्रामण्य धारण करना चाहिए। यदि किसी के माता-पिता आदि न हों तब तो उनसे पूछने का कोई प्रश्न ही नहीं है। जो किसी का कर्जदार हो या राजकीय अपराधी हो, दुराचारी हो वह जिनदीक्षा के अयोग्य माना गया है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इन तीनों वर्णों में से किसी एक वर्ण का हो, रोगी न हो, तप करने में तथा भूख-प्यास की बाधा सहने में समर्थ हो, अति बाल या अति वृद्ध न हो, विकलांग न हो, लोक में बदनाम न हो, ऐसा पुरुष ही जिनदीक्षा के योग्य होता है। वह आमव्य का इच्छुक पुरुष गुणवान् आचार्य के पास जाकर प्रार्थना करता है। दूरदर्शी आचार्य उसकी परीक्षा करके ही उसे साधुपद की दीक्षा देते हैं। और फिर, वह 'न मैं किसी का हूँ, न कोई मेरा है' 'इस लोक में कुछ भी मेरा नहीं है, ऐसा निश्चय करके समस्त परिग्रह को त्याग नग्न दिगम्बर हो जाता है। अपने हाथों से अपने सिर और दाढ़ी के बालों का लोंच करता है। उसके पास केवल दो ही उपकरण रहते हैं - जीवरक्षा के लिए मोर के पंखों से बनी पीछी बौर शुद्धि के लिए आवश्यक जलपात्र कमण्डलु। यह उसका बाह्य लिंग है। बन्तरंग में मोह, रागद्वेष का अभाव, ममत्व भाव और आरम्भ का असाव तथा उपयोग और योग की विशुद्धि अन्तरंग लिंग है। गुरु के द्वारा इन बन्तरंग और बहिरंग लिंग को धारण करके उन्हें नमस्कार करता है और व्रत तथा क्रिया को सुनता है। इस प्रकार सामायिक संयम को धारण करके वह श्रमण हो जाता है । श्रमण के २८ मूलगुण इस प्रकार हैं-अहिंसा महावत, सत्य महाव्रत, अकोर्स महावत, महाचर्य महाव्रत और अपरिग्रह महाव्रत-ये पांच महाव्रत हैं। इनके साथ पाँच समितियाँ है-ई समिति, भावा समिति, एममा समिति, नादाननिक्षेपण समिति, उत्सर्ग समिति । तीन प्ति-मनोवृप्ति, वचनगुप्ति, कामगुप्ति पूर्वक पाँच इन्द्रियों को वश में करना । छह आवश्यक-सामायिक, बन्दना, तब, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान, कायोत्सर्ग । नग्नता, स्नान न करता, भूमि पर सोना, दन्तघावन न करना, बड़े होकर भोकन करना और दिन में ही एक बार भोजन यदि श्रमण के संयम में छेद हो जाता है तो वह छेद दो प्रकार का है हि रंग और अन्त रंग । मात्र कायचेष्टा सम्बन्धी छेद बहिरंग है उसकी शुद्धि मात्र आलोचना क्रिया से हो जाती है। किन्तु अन्तरंग छेद होता है तो अवश्चित्त शास्त्र में कुशल श्रमण के पास जाकर उनके सामने अपने दोनों की आलोचना की जाती है और वह जी प्रतिकार बतलाते हैं वह करना होता है। यहाँ यह स्पष्ट करना उचित होगा कि जो दीक्षा देते हैं वह तो गुरु होते हैं, और जो संयम में छेद होने पर उसका शोधन करते हैं उन श्रमणों को निर्यापक कहते हैं। श्रमणों का आवारण छेदरहित होना चाहिए। अतः श्रमण को नित्य अपने शुद्ध आत्मद्रव्य में स्थित रहना चाहिए। जो श्रमण सदा लाभ-अलाभ आदि में समभाव रखता है, वीतरागप्रणीत परमागम के ज्ञान में अथवा उसके फलभूत स्वसंवेद ज्ञान में, तथा तत्त्वार्थ श्रद्धान में अथवा उसके फलभूत उपादेय अपनी शुद्ध आत्मा (वही उपादेय है) अतः रुचिरूप निश्चय सम्यक्त्व में नित्य विचरण करता है, मूलगुणों में तत्पर रहता है उसी का काम पूर्ण होता है। ऐसा श्रमण शरीर की स्थिति में कारण आबुक बाहार में, अनशन में, बिहार में, आवास में, शरीर आदि परिग्रह में तथा अपने साथी श्रमणों में, रागवर्धक कथाओं में भी ममत्व नहीं करता। सारांब यह है कि आगम विरुद्ध आहार-विहार आदि का त्याग तो वह पहले ही कर देता है, योग्य आहार-विहार आदि में भी उसे ममत्व नहीं रह जाता। शयन, आसन, खड़े होना, गमन करना आदि में असावधानता का नाम छेद क्योंकि वह हिंसा का कारण है। अंतः अमण इस लोक से निरपेक्ष होने के साथ परलोक से भी निरपेक्ष होता उसे परलोक में भी सांसारिक सुख की आकांक्षा नहीं होती। उसका आहारबिहार योग्य होता है और योग्य आहार-विहार एक तरह से मनाहार और अविहार के समान है। क्योंकि श्रमण के पास परिग्रह के रूप में केवल शरीर होता है, उसमें भी बह ममत्व नहीं रखता, उसकी भी साज-सम्हाल नहीं करता और सिद्धस्स / 189 अपनी शक्ति की में छिपाकर शरीर से तपस्या करता है। इसी से शरीर की स्थिति के लिए दिन में एकबार मिक्षावृत्ति के द्वारा जी कुछ रूंखा-सूखा भोजन मिलता है उसे ग्रहण कर लेता है। भोजन में दूध, घी आदि रसों की अपेक्षा नहीं करता, मद्य, मांस का तो वहाँ कोई प्रश्न ही नहीं है। ऐसा आहार ही युक्ताहार है और युक्ताहार अमाहार के समान है। साधु को उत्सर्ग और अपवाद की मैत्री पूर्वक अपना आचरण करना चाहिए ऐसा आगम का विधान है। न उसे अत्यन्त कठोर आचरण करना चाहिए और न ही अति मृदु आचरण करना चाहिए । अपने शुद्ध आत्मा के अतिरिक्त अन्य सब बाह्य और आभ्यन्तर परिग्रह त्याज्य है। यह उत्सर्ग है। इसे ही निश्चयनय, सर्वत्याग, परम उपेक्षा संयम, वीतराग चारित्र और शुद्धोपयोग कहते हैं। जो साधु उसमें असमर्थ होता है वह शुद्धात्मा के लिए सहायक प्रासुक आहार और ज्ञान के उपकरण शास्त्रादि स्वीकार करता है। यह अपवाद है। इसे ही व्यवहारनय एकदेश त्याग, अपहृत संयम, सरागचारित्र और शुभोपयोग कहते हैं। शुद्धात्म भावना के निमित्त सर्वत्यागलक्षण उत्सर्ग में प्रवर्तमान साधु शुद्धात्मा का साधक होने से मूलभूत संयम का तथा संयम का साधक होने से मूभूत शरीर का विनाश न हो, इसलिए प्रासुक आहार आदि ग्रहण करता है। इसको अपवाद सापेक्ष उत्सर्ग कहते हैं । जब साधु अपवाद मार्गरूप अपहृत संयम में प्रवृत्त होता है तब भी शुद्ध आत्मतत्त्व का साधक होने से मूलभूत संयम का और संयम का साधक होने से मूलभूत शरीर का विनाश न हो उस प्रकार उत्सर्ग की अपेक्षा रखते प्रवृत्त होता है। अतः जिस प्रकार संयम की विराधना न हो उस प्रकार उत्सर्ग सापेक्ष अपवाद होना चाहिए किन्तु अपवाद निरपेक्ष उत्सर्ग और उत्सगं निरपेक्ष अपवाद नहीं होना चाहिए। जैसे कोई साधु दुर्धर अनुष्ठान रूप उत्सर्ग मार्ग में प्रवृत्त होता है और थोड़े से भी पाप के भव से प्रासुक आहार आदि भी ग्रहण नही करता तब आर्तध्यानपूर्वक मरण करके पूर्वोपार्जित पुण्य से देवलोक में जन्म लेता है। वहीं संयम का अभाव होने से महान् कर्मबन्ध होता है। इसी से वह अपवाद निरपेक्ष उत्सर्ग का त्याग करता है। और जिसमें अल्प हानि किन्तु बहुत लाभ है ऐसे अपवाद सापेक्ष उत्सर्ग को, जो कि शुद्धात्म भावना का साधक है, स्वीकार करता है। उसी प्रकार वह साधु अपहृत संयम नाम से कहे जानेवाले अपवाद मार्ग में प्रवृत्त होता है। उसमें प्रवृत्त होता हुआ वह साधु यदि पाप के भय से व्याधि आदि का इलाज न करके शुद्धात्मभावना को नहीं करता तो उसे महान कर्मबन्ध होता है। अथवा व्याधि का इलाज कराते हुए यदि इन्द्रिय सुख की लम्पटता या संयम की विराधना करता है तब भी महान् कर्मबन्ध होता है। अतः 190 / जैन सिद्धान्त
खेलने के कारण ही पाण्डवों पर विपत्ति आयी थी। इसी तरह परस्त्री-हरण के कारण राबंण का वंश नष्ट हुआ। इन महापापों से प्रत्येक गृहस्व को बचवा चाहिए। श्रावकों के ऊपर ही सुनिधर्म निर्भर है। यदि भावक ठीक न हों तो मुविधर्म भी ठीक रूप में नहीं पल सकता, क्योंकि मुनियों का आहार-विहार श्रावकों पर ही निर्भर है। अतः आवकधर्म ही धर्म की रीढ़ है। जैन साधु के लिए पुराना नाम श्रमण था। आचार्य कुन्दकुन्द ने इसी शब्द का प्रयोग विशेष रूप से किया है । 'प्रवचनसार' के अन्त में चरणानुयोगसूचक चूलिका का प्रारम्भ करते हुए उन्होंने कहा है यदि दुःखों से छूटना चाहते हो तो श्रामण्य को धारण करो। जो श्रमण होना चाहता है उसे सबसे प्रथम बन्धुवर्ग से स्वीकारता लेनी चाहिए और माता-पिता, स्त्री, पुत्रादि से मुक्त होकर श्रामण्य धारण करना चाहिए। यदि किसी के माता-पिता आदि न हों तब तो उनसे पूछने का कोई प्रश्न ही नहीं है। जो किसी का कर्जदार हो या राजकीय अपराधी हो, दुराचारी हो वह जिनदीक्षा के अयोग्य माना गया है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इन तीनों वर्णों में से किसी एक वर्ण का हो, रोगी न हो, तप करने में तथा भूख-प्यास की बाधा सहने में समर्थ हो, अति बाल या अति वृद्ध न हो, विकलांग न हो, लोक में बदनाम न हो, ऐसा पुरुष ही जिनदीक्षा के योग्य होता है। वह आमव्य का इच्छुक पुरुष गुणवान् आचार्य के पास जाकर प्रार्थना करता है। दूरदर्शी आचार्य उसकी परीक्षा करके ही उसे साधुपद की दीक्षा देते हैं। और फिर, वह 'न मैं किसी का हूँ, न कोई मेरा है' 'इस लोक में कुछ भी मेरा नहीं है, ऐसा निश्चय करके समस्त परिग्रह को त्याग नग्न दिगम्बर हो जाता है। अपने हाथों से अपने सिर और दाढ़ी के बालों का लोंच करता है। उसके पास केवल दो ही उपकरण रहते हैं - जीवरक्षा के लिए मोर के पंखों से बनी पीछी बौर शुद्धि के लिए आवश्यक जलपात्र कमण्डलु। यह उसका बाह्य लिंग है। बन्तरंग में मोह, रागद्वेष का अभाव, ममत्व भाव और आरम्भ का असाव तथा उपयोग और योग की विशुद्धि अन्तरंग लिंग है। गुरु के द्वारा इन बन्तरंग और बहिरंग लिंग को धारण करके उन्हें नमस्कार करता है और व्रत तथा क्रिया को सुनता है। इस प्रकार सामायिक संयम को धारण करके वह श्रमण हो जाता है । श्रमण के अट्ठाईस मूलगुण इस प्रकार हैं-अहिंसा महावत, सत्य महाव्रत, अकोर्स महावत, महाचर्य महाव्रत और अपरिग्रह महाव्रत-ये पांच महाव्रत हैं। इनके साथ पाँच समितियाँ है-ई समिति, भावा समिति, एममा समिति, नादाननिक्षेपण समिति, उत्सर्ग समिति । तीन प्ति-मनोवृप्ति, वचनगुप्ति, कामगुप्ति पूर्वक पाँच इन्द्रियों को वश में करना । छह आवश्यक-सामायिक, बन्दना, तब, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान, कायोत्सर्ग । नग्नता, स्नान न करता, भूमि पर सोना, दन्तघावन न करना, बड़े होकर भोकन करना और दिन में ही एक बार भोजन यदि श्रमण के संयम में छेद हो जाता है तो वह छेद दो प्रकार का है हि रंग और अन्त रंग । मात्र कायचेष्टा सम्बन्धी छेद बहिरंग है उसकी शुद्धि मात्र आलोचना क्रिया से हो जाती है। किन्तु अन्तरंग छेद होता है तो अवश्चित्त शास्त्र में कुशल श्रमण के पास जाकर उनके सामने अपने दोनों की आलोचना की जाती है और वह जी प्रतिकार बतलाते हैं वह करना होता है। यहाँ यह स्पष्ट करना उचित होगा कि जो दीक्षा देते हैं वह तो गुरु होते हैं, और जो संयम में छेद होने पर उसका शोधन करते हैं उन श्रमणों को निर्यापक कहते हैं। श्रमणों का आवारण छेदरहित होना चाहिए। अतः श्रमण को नित्य अपने शुद्ध आत्मद्रव्य में स्थित रहना चाहिए। जो श्रमण सदा लाभ-अलाभ आदि में समभाव रखता है, वीतरागप्रणीत परमागम के ज्ञान में अथवा उसके फलभूत स्वसंवेद ज्ञान में, तथा तत्त्वार्थ श्रद्धान में अथवा उसके फलभूत उपादेय अपनी शुद्ध आत्मा अतः रुचिरूप निश्चय सम्यक्त्व में नित्य विचरण करता है, मूलगुणों में तत्पर रहता है उसी का काम पूर्ण होता है। ऐसा श्रमण शरीर की स्थिति में कारण आबुक बाहार में, अनशन में, बिहार में, आवास में, शरीर आदि परिग्रह में तथा अपने साथी श्रमणों में, रागवर्धक कथाओं में भी ममत्व नहीं करता। सारांब यह है कि आगम विरुद्ध आहार-विहार आदि का त्याग तो वह पहले ही कर देता है, योग्य आहार-विहार आदि में भी उसे ममत्व नहीं रह जाता। शयन, आसन, खड़े होना, गमन करना आदि में असावधानता का नाम छेद क्योंकि वह हिंसा का कारण है। अंतः अमण इस लोक से निरपेक्ष होने के साथ परलोक से भी निरपेक्ष होता उसे परलोक में भी सांसारिक सुख की आकांक्षा नहीं होती। उसका आहारबिहार योग्य होता है और योग्य आहार-विहार एक तरह से मनाहार और अविहार के समान है। क्योंकि श्रमण के पास परिग्रह के रूप में केवल शरीर होता है, उसमें भी बह ममत्व नहीं रखता, उसकी भी साज-सम्हाल नहीं करता और सिद्धस्स / एक सौ नवासी अपनी शक्ति की में छिपाकर शरीर से तपस्या करता है। इसी से शरीर की स्थिति के लिए दिन में एकबार मिक्षावृत्ति के द्वारा जी कुछ रूंखा-सूखा भोजन मिलता है उसे ग्रहण कर लेता है। भोजन में दूध, घी आदि रसों की अपेक्षा नहीं करता, मद्य, मांस का तो वहाँ कोई प्रश्न ही नहीं है। ऐसा आहार ही युक्ताहार है और युक्ताहार अमाहार के समान है। साधु को उत्सर्ग और अपवाद की मैत्री पूर्वक अपना आचरण करना चाहिए ऐसा आगम का विधान है। न उसे अत्यन्त कठोर आचरण करना चाहिए और न ही अति मृदु आचरण करना चाहिए । अपने शुद्ध आत्मा के अतिरिक्त अन्य सब बाह्य और आभ्यन्तर परिग्रह त्याज्य है। यह उत्सर्ग है। इसे ही निश्चयनय, सर्वत्याग, परम उपेक्षा संयम, वीतराग चारित्र और शुद्धोपयोग कहते हैं। जो साधु उसमें असमर्थ होता है वह शुद्धात्मा के लिए सहायक प्रासुक आहार और ज्ञान के उपकरण शास्त्रादि स्वीकार करता है। यह अपवाद है। इसे ही व्यवहारनय एकदेश त्याग, अपहृत संयम, सरागचारित्र और शुभोपयोग कहते हैं। शुद्धात्म भावना के निमित्त सर्वत्यागलक्षण उत्सर्ग में प्रवर्तमान साधु शुद्धात्मा का साधक होने से मूलभूत संयम का तथा संयम का साधक होने से मूभूत शरीर का विनाश न हो, इसलिए प्रासुक आहार आदि ग्रहण करता है। इसको अपवाद सापेक्ष उत्सर्ग कहते हैं । जब साधु अपवाद मार्गरूप अपहृत संयम में प्रवृत्त होता है तब भी शुद्ध आत्मतत्त्व का साधक होने से मूलभूत संयम का और संयम का साधक होने से मूलभूत शरीर का विनाश न हो उस प्रकार उत्सर्ग की अपेक्षा रखते प्रवृत्त होता है। अतः जिस प्रकार संयम की विराधना न हो उस प्रकार उत्सर्ग सापेक्ष अपवाद होना चाहिए किन्तु अपवाद निरपेक्ष उत्सर्ग और उत्सगं निरपेक्ष अपवाद नहीं होना चाहिए। जैसे कोई साधु दुर्धर अनुष्ठान रूप उत्सर्ग मार्ग में प्रवृत्त होता है और थोड़े से भी पाप के भव से प्रासुक आहार आदि भी ग्रहण नही करता तब आर्तध्यानपूर्वक मरण करके पूर्वोपार्जित पुण्य से देवलोक में जन्म लेता है। वहीं संयम का अभाव होने से महान् कर्मबन्ध होता है। इसी से वह अपवाद निरपेक्ष उत्सर्ग का त्याग करता है। और जिसमें अल्प हानि किन्तु बहुत लाभ है ऐसे अपवाद सापेक्ष उत्सर्ग को, जो कि शुद्धात्म भावना का साधक है, स्वीकार करता है। उसी प्रकार वह साधु अपहृत संयम नाम से कहे जानेवाले अपवाद मार्ग में प्रवृत्त होता है। उसमें प्रवृत्त होता हुआ वह साधु यदि पाप के भय से व्याधि आदि का इलाज न करके शुद्धात्मभावना को नहीं करता तो उसे महान कर्मबन्ध होता है। अथवा व्याधि का इलाज कराते हुए यदि इन्द्रिय सुख की लम्पटता या संयम की विराधना करता है तब भी महान् कर्मबन्ध होता है। अतः एक सौ नब्बे / जैन सिद्धान्त
आप एक शुरुआती उद्यमी बनें जो खुद "एक निदेशक, एक एकाउंटेंट और एक प्रबंधक "या एक किराए पर कार्यकर्ता की कल्पना करें, चाहे आप एक बड़ी फर्म या अकेले सेवाएं कर रहे हों - आप वाणिज्यिक दस्तावेज के रूप में ऐसे दस्तावेज़ के बिना नहीं कर सकते हैं। इसकी तैयारी और सामान्य गलतियों में सफल निर्णयों के उदाहरण, हम संक्षेप में रूपरेखा करने की कोशिश करेंगे। यह कोई रहस्य नहीं है कि हम में से कई भी पसंद नहीं करते हैंदस्तावेजों के साथ खुले तौर पर नफरत "लिपिक झगड़ा"। ऐसा लगता है कि यह समय बर्बाद है, क्योंकि आप फोन या व्यक्तिगत रूप से सबकुछ ढूंढ सकते हैं। लेकिन किसी कंपनी को किसी कॉल के जवाब में कितनी बार आप माल या सेवाओं को बेचना चाहते हैं, आपने सुना हैः "कृपया एक वाणिज्यिक प्रस्ताव भेजें"? ये आवश्यक शर्तें हैं जो होना चाहिएनिष्पादित किया जाता है कि आपके प्रस्ताव पर ध्यान दिया गया है और इसे कूड़े की टोकरी में नहीं फेंक दिया है। डिजाइन के बारे में आप क्या कह सकते हैं? योग्यतापूर्वक तैयार वाणिज्यिक प्रस्ताव (प्रतिष्ठित फर्मों के दस्तावेजों के उदाहरण - उस पावती के लिए) आरक्षित और सुरुचिपूर्ण दिखना चाहिए। इसका क्या मतलब है? अनावश्यक ग्राफिक्स के साथ, पृष्ठभूमि के साथ अधिक मत करो। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप चित्रों या तस्वीरों को कितनी सुंदर लग सकते हैं, प्रस्ताव में पर्याप्त लोगो और एक या दो उत्पाद छवियां हैं (यदि आवश्यक हो)। पाठ साफ दिखना चाहिए। आवंटन की अनुमति है, सूचियां भी हैं, लेकिन अवांछित विविधता। एक फ़ॉन्ट और अधिकतम दो या तीन रंगों पर रोकें। प्रस्तुति और सामग्री की शैली के बारे में आप क्या कह सकते हैं? एक वाणिज्यिक प्रस्ताव तैयार करने के साथ हर कर्मचारी पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता है। एक असफल लिखित दस्तावेज़ (त्रुटियों के साथ, लापरवाही से) फर्म की प्रतिष्ठा को क्षतिग्रस्त करने के उदाहरण असामान्य नहीं हैं। इसके बारे में सोचेंः क्या आप ऐसी कंपनी के साथ सहयोग करना चाहेंगे जिसमें अशिक्षित प्रबंधक काम करते हैं? सामग्री के लिए, वाणिज्यिक प्रस्ताव लिखने के तरीके पर विशेष सिफारिशें हैं।
आप एक शुरुआती उद्यमी बनें जो खुद "एक निदेशक, एक एकाउंटेंट और एक प्रबंधक "या एक किराए पर कार्यकर्ता की कल्पना करें, चाहे आप एक बड़ी फर्म या अकेले सेवाएं कर रहे हों - आप वाणिज्यिक दस्तावेज के रूप में ऐसे दस्तावेज़ के बिना नहीं कर सकते हैं। इसकी तैयारी और सामान्य गलतियों में सफल निर्णयों के उदाहरण, हम संक्षेप में रूपरेखा करने की कोशिश करेंगे। यह कोई रहस्य नहीं है कि हम में से कई भी पसंद नहीं करते हैंदस्तावेजों के साथ खुले तौर पर नफरत "लिपिक झगड़ा"। ऐसा लगता है कि यह समय बर्बाद है, क्योंकि आप फोन या व्यक्तिगत रूप से सबकुछ ढूंढ सकते हैं। लेकिन किसी कंपनी को किसी कॉल के जवाब में कितनी बार आप माल या सेवाओं को बेचना चाहते हैं, आपने सुना हैः "कृपया एक वाणिज्यिक प्रस्ताव भेजें"? ये आवश्यक शर्तें हैं जो होना चाहिएनिष्पादित किया जाता है कि आपके प्रस्ताव पर ध्यान दिया गया है और इसे कूड़े की टोकरी में नहीं फेंक दिया है। डिजाइन के बारे में आप क्या कह सकते हैं? योग्यतापूर्वक तैयार वाणिज्यिक प्रस्ताव आरक्षित और सुरुचिपूर्ण दिखना चाहिए। इसका क्या मतलब है? अनावश्यक ग्राफिक्स के साथ, पृष्ठभूमि के साथ अधिक मत करो। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप चित्रों या तस्वीरों को कितनी सुंदर लग सकते हैं, प्रस्ताव में पर्याप्त लोगो और एक या दो उत्पाद छवियां हैं । पाठ साफ दिखना चाहिए। आवंटन की अनुमति है, सूचियां भी हैं, लेकिन अवांछित विविधता। एक फ़ॉन्ट और अधिकतम दो या तीन रंगों पर रोकें। प्रस्तुति और सामग्री की शैली के बारे में आप क्या कह सकते हैं? एक वाणिज्यिक प्रस्ताव तैयार करने के साथ हर कर्मचारी पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता है। एक असफल लिखित दस्तावेज़ फर्म की प्रतिष्ठा को क्षतिग्रस्त करने के उदाहरण असामान्य नहीं हैं। इसके बारे में सोचेंः क्या आप ऐसी कंपनी के साथ सहयोग करना चाहेंगे जिसमें अशिक्षित प्रबंधक काम करते हैं? सामग्री के लिए, वाणिज्यिक प्रस्ताव लिखने के तरीके पर विशेष सिफारिशें हैं।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के गाजोल में एक मछुआरे के घर पर रविवार को सीआईडी ने छापा मारा, जहां से 1. 4 लाख रुपए बरामद हुए। सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर सीआईडी की टीम ने यह कार्रवाई की। रुपये गिनने के लिए बैंक से मशीन मंगवानी पड़ी। मछली व्यवसायी की पहचान जयप्रकाश साहा के रूप में हुई है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के गाजोल में एक मछुआरे के घर पर रविवार को सीआईडी ने छापा मारा, जहां से एक. चार लाख रुपए बरामद हुए। सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर सीआईडी की टीम ने यह कार्रवाई की। रुपये गिनने के लिए बैंक से मशीन मंगवानी पड़ी। मछली व्यवसायी की पहचान जयप्रकाश साहा के रूप में हुई है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
Nandamuri Balakrishna: टॉलीवुड एक्टर नंदामुरी बालकृष्ण (Nandamuri Balakrishna) ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के नारावारिपल्ली गांव में अपने परिवार के सदस्यों के साथ संक्रांति प्रोग्रीाम में भाग लिया. एक्टर अपनी शानदार फिल्मों के लिए तो जाते ही जाते हैं. इसके अलावा वो आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी हैं. बीते दिन एक्टर ने अपने बहनोई और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (N. Chandrababu Naidu ) के परिवार के साथ उनके पैतृक गांव में संक्रांति का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया. आखिर क्यों लोग हैरान? दरअसल, फेमस एक्टर ने गांव में सुबह की सैर पर जाकर सभी को सरप्राइज कर दिया. उन्होंने अपने फैंस के रिक्वेस्ट का जवाब भी काफी शालीनता से दिया. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के घर के पास भोगी में भी हिस्सा लिया . मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने संक्रांति के अवसर पर दुनिया भर के तेलुगु लोगों को बधाई दी. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि ये त्योहार लोगों के लिए ढेर सारी खुशियां और समृद्धि लेकर आएगा. एक्टर ने फिल्म 'वीरा सिम्हा रेड्डी' को एक बड़ी हिट बनाने के लिए दर्शकों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, 'जब भी कोई अच्छी फिल्म बनती है, तेलुगु दर्शक उसका स्पोर्ट खुलकर करते हैं. फिल्म वीरा सिम्हा रेड्डी को भी उनका समर्थन मिला और इस फिल्म को तीन दिन पहले ही रिलीज किया गया था. वहीं फिल्म में पारिवारिक भावनाएं भी देखने को मिला हैं. ' जिसके बाद एक्टर ने पूरी फिल्म टीम को धन्यवाद दिया . उन्होंने आगे कहा,' फिल्म डायरेक्टर गोपीचंद मलिनेनी के साथ काम करने का मुझे अवसर मिला है और वो दर्शकों की पसंद को काफी अच्छे से जानते हैं. उन्होंने वही फिल्म बनाई है जो उन्हें पसंद है. '
Nandamuri Balakrishna: टॉलीवुड एक्टर नंदामुरी बालकृष्ण ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के नारावारिपल्ली गांव में अपने परिवार के सदस्यों के साथ संक्रांति प्रोग्रीाम में भाग लिया. एक्टर अपनी शानदार फिल्मों के लिए तो जाते ही जाते हैं. इसके अलावा वो आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी हैं. बीते दिन एक्टर ने अपने बहनोई और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के परिवार के साथ उनके पैतृक गांव में संक्रांति का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया. आखिर क्यों लोग हैरान? दरअसल, फेमस एक्टर ने गांव में सुबह की सैर पर जाकर सभी को सरप्राइज कर दिया. उन्होंने अपने फैंस के रिक्वेस्ट का जवाब भी काफी शालीनता से दिया. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के घर के पास भोगी में भी हिस्सा लिया . मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने संक्रांति के अवसर पर दुनिया भर के तेलुगु लोगों को बधाई दी. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि ये त्योहार लोगों के लिए ढेर सारी खुशियां और समृद्धि लेकर आएगा. एक्टर ने फिल्म 'वीरा सिम्हा रेड्डी' को एक बड़ी हिट बनाने के लिए दर्शकों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, 'जब भी कोई अच्छी फिल्म बनती है, तेलुगु दर्शक उसका स्पोर्ट खुलकर करते हैं. फिल्म वीरा सिम्हा रेड्डी को भी उनका समर्थन मिला और इस फिल्म को तीन दिन पहले ही रिलीज किया गया था. वहीं फिल्म में पारिवारिक भावनाएं भी देखने को मिला हैं. ' जिसके बाद एक्टर ने पूरी फिल्म टीम को धन्यवाद दिया . उन्होंने आगे कहा,' फिल्म डायरेक्टर गोपीचंद मलिनेनी के साथ काम करने का मुझे अवसर मिला है और वो दर्शकों की पसंद को काफी अच्छे से जानते हैं. उन्होंने वही फिल्म बनाई है जो उन्हें पसंद है. '
कोरिया,सुरेश मिनोचा कोरिया। जिलापंचायत के द्वारा दिनांक 4. 12. 2020 को पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की सूचि जारी कर दी गई थी किंतु आज दिनांक 17. 12 . 2020 तक मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के द्वारा ग्राम पंचायतों के सचिवों को नवीन पदस्थापना स्थानों पर उन्हें पदभार ग्रहण करने अभी तक कोई आदेश नहीं दिया गया। वहीं दूसरी तरफ कई पंचायत सचिव अपने नवीन पदस्थापना स्थल को बदलवाने के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से अपने मनचाहे पंचायत स्थल पाने के जुगाड़ में हैं,चूंकी ग्राम पंचायतों में भारी भ्रष्टाचार की कहानी किसी से छुपी नहीं है एैसे समय में तबादला आदेश उनके लिये सर दद॔ बन गया है।
कोरिया,सुरेश मिनोचा कोरिया। जिलापंचायत के द्वारा दिनांक चार. बारह. दो हज़ार बीस को पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की सूचि जारी कर दी गई थी किंतु आज दिनांक सत्रह. बारह . दो हज़ार बीस तक मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के द्वारा ग्राम पंचायतों के सचिवों को नवीन पदस्थापना स्थानों पर उन्हें पदभार ग्रहण करने अभी तक कोई आदेश नहीं दिया गया। वहीं दूसरी तरफ कई पंचायत सचिव अपने नवीन पदस्थापना स्थल को बदलवाने के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से अपने मनचाहे पंचायत स्थल पाने के जुगाड़ में हैं,चूंकी ग्राम पंचायतों में भारी भ्रष्टाचार की कहानी किसी से छुपी नहीं है एैसे समय में तबादला आदेश उनके लिये सर दद॔ बन गया है।
प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती (69000 Assistatnt Teachers Recruitment) मामले में अभ्यर्थियों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. हाईकोर्ट ने कहा नियुक्तियां याचिका के अंतिम निर्णय की विषय वस्तु होगी. कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार से 3 हफ्ते में जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी. कोर्ट ने रोहित, अंशू सिंह सहित दर्जनों याचिकाओं पर ये आदेश दिया है. याचिकाओं में चयन परिणाम रद्द करने मांग की गई है. जस्टिस प्रकाश पाडिया की एकल पीठ में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट देखने और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद ये आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब आना जरूरी है. याचियों को प्रत्युत्तर दाखिल करने का कोर्ट ने 2 सप्ताह का समय दिया है. बता दें उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती का परिणाम घोषित होने के बाद प्रश्नों के उत्तर विकल्प गलत होने को लेकर 1 या 2 अंक से पीछे रह गए हजारों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है. अमरेंद्र कुमार सिंह व 706 अन्य, मनोज कुमार यादव व 36 अन्य, अंशुल सिंह व 29 अन्य और सुनीता व 35 अन्य की याचिकाएं हैं. याचियों का कहना है कि कई सवालों के उत्तर विकल्प गलत होने के कारण, सही जवाब देने के बावजूद उन्हें मेरिट में स्थान नहींं दिया गया है. गलत उत्तर देने वालों को चयनित कर दिया गया है. याचिकाओं में मांग की गई है कि गलत उत्तर वाले प्रश्न हटाकर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाई जाए और घोषित परिणाम रद्द किया जाए. याचिकाओं में अन्य कानूनी मुद्दे भी उठाये गए हैं. गौरतलब है कि 18 मई से इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. बेसिक शिक्षा परिषद परीक्षा में सफल व्यक्तियों से आवेदन ले रहा है. आवेदन के बाद मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है. ये भी पढ़ेंः .
प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनहत्तर हज़ार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में अभ्यर्थियों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. हाईकोर्ट ने कहा नियुक्तियां याचिका के अंतिम निर्णय की विषय वस्तु होगी. कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई छः जुलाई को होगी. कोर्ट ने रोहित, अंशू सिंह सहित दर्जनों याचिकाओं पर ये आदेश दिया है. याचिकाओं में चयन परिणाम रद्द करने मांग की गई है. जस्टिस प्रकाश पाडिया की एकल पीठ में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट देखने और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद ये आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब आना जरूरी है. याचियों को प्रत्युत्तर दाखिल करने का कोर्ट ने दो सप्ताह का समय दिया है. बता दें उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में उनहत्तर हज़ार सहायक अध्यापकों की भर्ती का परिणाम घोषित होने के बाद प्रश्नों के उत्तर विकल्प गलत होने को लेकर एक या दो अंक से पीछे रह गए हजारों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है. अमरेंद्र कुमार सिंह व सात सौ छः अन्य, मनोज कुमार यादव व छत्तीस अन्य, अंशुल सिंह व उनतीस अन्य और सुनीता व पैंतीस अन्य की याचिकाएं हैं. याचियों का कहना है कि कई सवालों के उत्तर विकल्प गलत होने के कारण, सही जवाब देने के बावजूद उन्हें मेरिट में स्थान नहींं दिया गया है. गलत उत्तर देने वालों को चयनित कर दिया गया है. याचिकाओं में मांग की गई है कि गलत उत्तर वाले प्रश्न हटाकर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाई जाए और घोषित परिणाम रद्द किया जाए. याचिकाओं में अन्य कानूनी मुद्दे भी उठाये गए हैं. गौरतलब है कि अट्ठारह मई से इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. बेसिक शिक्षा परिषद परीक्षा में सफल व्यक्तियों से आवेदन ले रहा है. आवेदन के बाद मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है. ये भी पढ़ेंः .
बीते 1 सप्ताह से पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. अब आम आदमी के ऊपर एक और महंगाई की मार पड़ने वाली है. बताया जा रहा है कि एलपीजी सिलेंडर के दाम 50 बढ़ गए हैं पहले जहां गैर- सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम 719 था अब वह दाम बढ़कर के 796 हो गया हैं. आपको बता दें कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अभी 98 के करीब है. वही, देश में कई शहर ऐसे भी हैं जहां पेट्रोल के दाम 100 के करीब आते दिख रहे हैं.
बीते एक सप्ताह से पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. अब आम आदमी के ऊपर एक और महंगाई की मार पड़ने वाली है. बताया जा रहा है कि एलपीजी सिलेंडर के दाम पचास बढ़ गए हैं पहले जहां गैर- सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम सात सौ उन्नीस था अब वह दाम बढ़कर के सात सौ छियानवे हो गया हैं. आपको बता दें कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अभी अट्ठानवे के करीब है. वही, देश में कई शहर ऐसे भी हैं जहां पेट्रोल के दाम एक सौ के करीब आते दिख रहे हैं.
Rajasthan News: अजमेर. कोटड़ा स्थित सम्पत्ति के विवाद में क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अनुज टंडन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई है. पुलिस के अनुसार रामनगर पुष्कर रोड निवासी शकूर अली ने रिपोर्ट में बताया कि कोटड़ा में उसकी पुश्तैनी आवासीय सम्पत्ति है. इस पर पिता मोहम्मद उस्मान 1975 के पूर्व से काबिज थे, तब से वह यहां निवास करते आ रहे हैं. कब्जे के आधार पर 14 दिसम्बर 1975 को ग्राम पंचायत चौरसियावास ने उन्हें पट्टा दे रखा है. वसीयत के आधार पर पिता की सम्पत्ति 24 जुलाई 1998 को उसके नाम कर दी. पिता मोहम्मद उस्मान की मृत्यु 30 मई 2010 को हो गई. वसीयत के आधार पर वह सम्पत्ति का एकमात्र मालिक है. उसने सम्पत्ति 15 साल पहले अनिल साहू को किराए पर दे दी, तब से किराए पर चली आ रही थी. उसने 20 फरवरी 2016 को नगर निगम से नक्शा स्वीकृत करा लिया और 2005 से 2017 तक गृहकर राशि जमा करा रहा है. गत 23 दिसम्बर को साहू ने सूचना दी कि सम्पत्ति पर अनुज टंडन व 10-15 अन्य कब्जा करना चाहते हैं. वह पहुंचा तो आरोपितों ने धमकी देते हुए अपशब्द कहे. उसके भाई ने क्रिश्चियनगंज थाने में रिपोर्ट दी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. फिर 25 दिसम्बर को टंडन 10-15 जनों के साथ मिलकर जमीन पर बना कमरा तोड़ गया. उसने 26 दिसम्बर को एसपी को शिकायत दी, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उसकी सम्पत्ति में तोड़फोड़ कर उसे प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है. आरोपित मौके पर निर्माण कराने पर आमादा है.
Rajasthan News: अजमेर. कोटड़ा स्थित सम्पत्ति के विवाद में क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अनुज टंडन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई है. पुलिस के अनुसार रामनगर पुष्कर रोड निवासी शकूर अली ने रिपोर्ट में बताया कि कोटड़ा में उसकी पुश्तैनी आवासीय सम्पत्ति है. इस पर पिता मोहम्मद उस्मान एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के पूर्व से काबिज थे, तब से वह यहां निवास करते आ रहे हैं. कब्जे के आधार पर चौदह दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को ग्राम पंचायत चौरसियावास ने उन्हें पट्टा दे रखा है. वसीयत के आधार पर पिता की सम्पत्ति चौबीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे को उसके नाम कर दी. पिता मोहम्मद उस्मान की मृत्यु तीस मई दो हज़ार दस को हो गई. वसीयत के आधार पर वह सम्पत्ति का एकमात्र मालिक है. उसने सम्पत्ति पंद्रह साल पहले अनिल साहू को किराए पर दे दी, तब से किराए पर चली आ रही थी. उसने बीस फरवरी दो हज़ार सोलह को नगर निगम से नक्शा स्वीकृत करा लिया और दो हज़ार पाँच से दो हज़ार सत्रह तक गृहकर राशि जमा करा रहा है. गत तेईस दिसम्बर को साहू ने सूचना दी कि सम्पत्ति पर अनुज टंडन व दस-पंद्रह अन्य कब्जा करना चाहते हैं. वह पहुंचा तो आरोपितों ने धमकी देते हुए अपशब्द कहे. उसके भाई ने क्रिश्चियनगंज थाने में रिपोर्ट दी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. फिर पच्चीस दिसम्बर को टंडन दस-पंद्रह जनों के साथ मिलकर जमीन पर बना कमरा तोड़ गया. उसने छब्बीस दिसम्बर को एसपी को शिकायत दी, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उसकी सम्पत्ति में तोड़फोड़ कर उसे प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है. आरोपित मौके पर निर्माण कराने पर आमादा है.
नई दिल्ली॥ एप्पल जल्द ही अपनी नई सीरीज यानी की आइफोन 12 को शुरू करने जा रहा है। अगर आप भी एप्पल की इस सीरीज का इंतजार कर रहे हैं, तो आपका इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। कंपनी तेजी से इस सीरीज पर काम कर रही है। आईफोन 12 के बेस मॉडल की कीमत का खुलासा हुआ है. माना जा रहा है कि नए एंट्री-लेवल आईफोन 12 की कीमत पुरानी जेनरेशन वाले मॉडल से 50 डॉलर ज्यादा होगी. रिपोर्ट की मानें तो आईफोन 12 के बेस-मॉडल की कीमत 749 डॉलर यानी करीब 54,800 रुपये तक हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आईफोन 12 की सीरीज के साथ बहुत कुछ बदल सकता है. जैसे कि इस सीरीज के साथ एप्पल इयरपॉड्स और चार्जर देना बंद कर देगा। जी हां आईफोन 12 के लिए आपको अलग से एयरपॉड्स और चार्जर खरीदना होगा। आपको बता दें कि एप्पल इस सीरीज के तहत चार मॉडल्स लॉन्च करेगी. इसमें आईफोन 12, आईफोन 12 मैक्स, आईफोन 12 प्रो, आईफोन 12 प्रो मैक्स शामिल है। ये मॉडल्स 5. 4 इंच, 6. 1 इंच और 6. 7 इंच के होंगे. आईफोन 12, आईफोन 12 मैक्स में ड्यूल कैमरा सेटअप दिया जा सकता है, वहीं आईफोन 12 प्रो, आईफोन 12 प्रो मैक्स को ट्रिपल कैमरा सेटअप के साथ लॉन्च किया जा सकता है।
नई दिल्ली॥ एप्पल जल्द ही अपनी नई सीरीज यानी की आइफोन बारह को शुरू करने जा रहा है। अगर आप भी एप्पल की इस सीरीज का इंतजार कर रहे हैं, तो आपका इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। कंपनी तेजी से इस सीरीज पर काम कर रही है। आईफोन बारह के बेस मॉडल की कीमत का खुलासा हुआ है. माना जा रहा है कि नए एंट्री-लेवल आईफोन बारह की कीमत पुरानी जेनरेशन वाले मॉडल से पचास डॉलर ज्यादा होगी. रिपोर्ट की मानें तो आईफोन बारह के बेस-मॉडल की कीमत सात सौ उनचास डॉलर यानी करीब चौवन,आठ सौ रुपयापये तक हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आईफोन बारह की सीरीज के साथ बहुत कुछ बदल सकता है. जैसे कि इस सीरीज के साथ एप्पल इयरपॉड्स और चार्जर देना बंद कर देगा। जी हां आईफोन बारह के लिए आपको अलग से एयरपॉड्स और चार्जर खरीदना होगा। आपको बता दें कि एप्पल इस सीरीज के तहत चार मॉडल्स लॉन्च करेगी. इसमें आईफोन बारह, आईफोन बारह मैक्स, आईफोन बारह प्रो, आईफोन बारह प्रो मैक्स शामिल है। ये मॉडल्स पाँच. चार इंच, छः. एक इंच और छः. सात इंच के होंगे. आईफोन बारह, आईफोन बारह मैक्स में ड्यूल कैमरा सेटअप दिया जा सकता है, वहीं आईफोन बारह प्रो, आईफोन बारह प्रो मैक्स को ट्रिपल कैमरा सेटअप के साथ लॉन्च किया जा सकता है।
पक्षकार बनने के लिए हाईकोर्ट में दिया प्रार्थना पत्र, स्वीकार.... रुड़की। किशनपुर निवासी पत्रकार मोहम्मद तहसीन ने नैनीताल हाईकोर्ट में हरिद्वार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर विचाराधीन याचिका में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र दिया जो कि हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है। दरअसल,शमशेर की ओर से दायर याचिका पर मई माह में निर्वाचन आयोग के वकील ने अपना जवाब दिया था, जिसमें कहा था कि परिसीमन हो चुका है । मतदाता सूची बन चुकी है । अब अधिसूचना जारी होनी है। लेकिन इसके बाद इस याचिका पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी । याचिका अनडेटेड हो गई। दूसरे शासन की ओर से भी पंचायत चुनाव को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई। हालांकि दो दिन पहले विधि न्याय विभाग ने शासन द्वारा मांगी गई लीगल एडवाइजर में कहा था कि जब प्रशासक का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में हरिद्वार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करा दिए जाने चाहिए।
पक्षकार बनने के लिए हाईकोर्ट में दिया प्रार्थना पत्र, स्वीकार.... रुड़की। किशनपुर निवासी पत्रकार मोहम्मद तहसीन ने नैनीताल हाईकोर्ट में हरिद्वार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर विचाराधीन याचिका में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र दिया जो कि हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है। दरअसल,शमशेर की ओर से दायर याचिका पर मई माह में निर्वाचन आयोग के वकील ने अपना जवाब दिया था, जिसमें कहा था कि परिसीमन हो चुका है । मतदाता सूची बन चुकी है । अब अधिसूचना जारी होनी है। लेकिन इसके बाद इस याचिका पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी । याचिका अनडेटेड हो गई। दूसरे शासन की ओर से भी पंचायत चुनाव को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई। हालांकि दो दिन पहले विधि न्याय विभाग ने शासन द्वारा मांगी गई लीगल एडवाइजर में कहा था कि जब प्रशासक का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में हरिद्वार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करा दिए जाने चाहिए।
यह काल्पनिक कथा है। इसके चरित्र, स्थान, घटनाएँ, मंतव्य सभी कुछ काल्पनिक हैं। उनका वास्तविक जीवन से कोई भी सम्बंध नहीं है। सरोज जिस दिन पैदा हुई थी, विष्णु दत्त पांडेय ने चार बीघे खेत का मुकदमा जीता था। उसी के हफ्ते-भर बाद उनकी पुरानी गठिया की बीमारी में फायदा होना शुरू हुआ था और जब साल-भर के भीतर ही गाय ने बछड़ा जना, तब उनको लगा था कि सरोज बेटी भाग्योदय बनकर आई है। सरोज आठ महीने में चलने लगी थी। एक वर्ष दो महीने की हुई, तो बोलना चालू हो गया था। उसने एक दिन अपने आप भगवान जी वाला चंदन माथे पर लगा लिया था। विष्णु दत्त पूजा करने लगते, तो वह उनकी गोद में आकर बैठ जाती और अपने भी हाथ जोड़ लेती। उन्हें लगा था कि हो न हो यह कोई विलक्षण कन्या है। संभवतः इसीलिए वह इकलौते पुत्र राधेश्याम से भी ज़्यादा उसकी परवाह करते। वह थी भी कितनी प्यारी और चंचल। थोड़ी बड़ी हुई, तो कैसी-कैसी मोहिनी शरारतें करने लगी थी। राधेश्याम के कपड़े पहनकर कभी-कभी लड़का बन जाती। उसे गोया, लड़का बनने का शौक था, माँ के कजरौटे से काजल निकालकर दाढ़ी-मूँछ बना लेती। विष्णु दत्त अचानक रोने लगे, "सरोज की अम्मा, हमने सरोज का क्या बिगाड़ा था, जो उसने हमारी नाक कटाई..." सरोज की अम्मा कुछ कहने के बजाय विष्णु दत्त से भी अधिक तेज रुदन करने लगीं। चंपा की कुछ समझ में नहीं आ रहा था। कभी रोते हुए सास-ससुर को देखती, तो कभी पति राधेश्याम को, जो अपने हाथ की टॉर्च को जल्दी-जल्दी जला-बुझा रहा था। उससे कुछ पूछने की हिम्मत चंपा की नहीं हो पा रही थी, लेकिन उसने पूछा, "क्या हुआ?" "भाग गई कुतिया। रंडी अपने आशिक छैलबिहारी के साथ भाग गई." विष्णु दत्त और जानकी के विलाप में आर्तनाद अथवा चीख अथवा हिचकी जैसी कोई चीज शामिल हो गई. छैलबिहारी चैबे गाँव में इंटरमीडिएट फेल लड़का था। उसकी विशेषता थी कि गाँव में उसके जैसे गोरे रंगवाला कोई न था। दूसरी बात, वह सबसे ज़्यादा बीड़ी पीनेवाला था। अत्यधिक बीड़ी पीने से उसके दाँत काले पड़ने लगे थे और होंठ बैगनी। सरोज को उससे घोर घृणा थी। यदि वह किसी का हार्दिक रूप से अनिष्ट चाहती थी, तो वह छैलबिहारी ही था। अक्सर वह उसे रास्ते में खड़ा मिलता था। करीब आता देखकर वह नाक से धुआँ उड़ाते हुए धीमे कदमों से सरोज की तरफ बढ़ता। निकट आकर कहता, "तुम मुझको बहुत बढ़िया लगती हो।" छैलबिहारी की तकदीर तब पलटी, जब गाँव की नाटक-मंडली में नायक का पार्ट करनेवाला युवक लोहे के कबाड़ का कारोबार करने कलकत्ता चला गया। रामलीला सिर पर थी, बड़ी तेजी से नायक के लिए यथोचित की तलाश हुई. अंततः अपने रंग-रूप और निखट्टूपन के गुणों के कारण छैलबिहारी सर्वथा उपयुक्त पाया गया। भए प्रकट कृपाला दीन दयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप निहारी। लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज धारी। भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभा सिंधु खरारी। सरोज की आँखें फटी रह गईं। अरे! अरे! यह तो छैलबिहारी है। छैलबिहारी के सिर पर बड़ा-सा सुंदर मुकुट सुशोभित हो रहा था। अद्भुत रूप था उसका। उसके वस्त्रों में सलमे-सितारे और शीशे जड़े हुए जगमगा रहे थे। दप-दप कर रहा था उसका मुख-मंडल, गालों पर गेरू और पाउडर मला हुआ था तथा नेत्रों के इर्द-गिर्द मुर्दाशंख की बिंदियाँ उसकी सुंदरता को वर्णनातीत बना रही थीं। उसके दो हाथों में चक्र और गदा सरीखे हथियार थे। उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में काजल लगा हुआ था और आँखों के किनारों से निकली मेखलाएँ कानों तक खिंची हुई थीं। वह मुस्कराई, "यह छैलबिहारी है, जो मेरे पीछे पगलाया रहता है।" वह हँस पड़ी। अगले दिन जब छैलबिहारी ने बीड़ी फूँकते हुए रास्ते में उससे छेड़छाड़ की, तो उसे पहले की तरह नफरत नहीं महसूस हुई. वैसे, छैलबिहारी को तो यह भी लगा कि वह जरा-सी हँसी है। यह उसका वहम भी हो सकता था, मगर इतना तो हुआ ही कि इसके बाद से छैलबिहारी के अभिनय का उस पर अन्य दर्शकों की तुलना में कुछ ज़्यादा असर होने लगा था। राम के वन-गमन के अवसर पर वह फूट-फूटकर रो पड़ी थी। हालाँकि लक्ष्मण भी नंगे बदन वन को जा रहे थे, पर सरोज के दुख की वजह यह थी कि जाड़े की रात में नंगे बदन छैलबिहारी को कितना जाड़ा लग रहा होगा। इसी तरह लक्ष्मण को मूर्छा लगने पर विलाप करता छैलबिहारी तेज-तेज अपने बाल नोचने लगा, तो सरोज ने चिहुँक कर बगल में बैठी सहेली की कलाई पकड़ ली थी, जैसे वह अपने ही बाल नोच रहे छैलबिहारी का हाथ वैसा करने से रोक रही हो, लेकिन जब छैलबिहारी ने सीता-स्वयंवर में शिवजी का धनुष तोड़ा था और शेष राजाओं की सूरतें खिसियाई हुई हो गई थीं, तब सरोज को बड़ी प्रसन्नता हुई थी। हाँ, छैलबिहारी के गले में जयमाला डालने के लिए ठिठक-ठिठक कर आती हुई सीता जी पर उसे एक पल के लिए गुस्सा आया था, किंतु अगले ही क्षण वह यह देखकर प्रफुल्लित हो गई थी कि सीता का पार्ट गाँव का लड़का विनोद कुमार श्रीवास्तव कर रहा था, जिसे कि उन्नीस साल का हो जाने के बावजूद अभी दाढ़ी-मूँछ नहीं आई थी। इसी प्रकार जब सीता-हरण के दिन छैलबिहारी ने अचानक अपना सिर रंगमंच बने तख्ते पर जो़र से पटका, तो आवाज सरोज के वक्ष में हुई. वह व्याकुल हो गई, कितनी चोट लगी होगी छैलबिहारी को। इसके बाद दो बार छैलबिहारी सीता के वियोग में तख्ते पर खड़े-खड़े गिरा और कई बार माथा पटका, तो रुलाई से सरोज की हिचकियाँ बँध गईं। उस रात घर लौट आने पर वह सोई नहीं। सुबह जब वह दिशा-मैदान से लौट रही थी, तो देखा, छैलबिहारी तहमद लपेटे दातौन कर रहा है, उसे देखते ही उसने मुँह का थूक उगला और दातौन तहमद में खोंस ली। उसने कहाः इंतजार में खड़ा हूँ अब हुस्न का दीदार होने जा रहा है। सदियों से तड़पने के बाद अब प्यार होने जा रहा है। इसके बाद उसने कुछ अन्य शेर सुनाए, जो क्रमशः इस प्रकार हैंः बाल तुम्हारे नागिन जैसे, गाल गुलाबी नैन शराबी. मतवाला हो उठता हूँ, जब कमर तेरी बल खाती। फिर नखरे, फिर मान जाती हैं। और फिर पहचान जाती हैं। इश्क में अगर और मगर कैसा। प्यार कर लिया है तो डर कैसा। ओ मेरे दिल की धड़कन तेरा चेहरा है नूरानी। देर भले ही लग जाए पर तुम्हीं बनोगी मेरे प्यार की रानी। उपर्युक्त पंक्तियों को सुनकर सरोज मुस्कराती जा रही थी कि एकाएक रुकी और पलटकर बोली, "हे छैलबिहारी, तख्ता पर इतनी जोर-जोर से न गिरा करो रामलीला में और कभी यदि गिरना बहुत ज़रूरी हुआ, तो गिर जाओ, मगर तख्ता पर अपना सिर तो कतई न पटका करो।" "क्यों न गिरें हम तख्ता पर? क्यूँ न सिर पटकें हम तख्ता पर?" छैलबिहारी ने पूछा। सरोज ने मुँह चिढ़ाकर कहा, "क्यूँ क्या, हमको अच्छा नहीं लगता, इसलिए." वह हँसती हुई तेज-तेज चलती हुई ओझल हो गई. छैलबिहारी ने उसे गया हुआ देखकर आह भरी और गुनगुनायाः जानम जो तुम इस तरह से यूँ हँसकर जा रही हो। देख दुनिया कहेगी कि दीवाने से फँसकर आ रही हो। इस तरह सरोज और छैलबिहारी का प्रेम प्रारंभ हुआ था, जो थोड़े ही दिनों के बाद बहुचर्चित होने लगा था। सरोज ने चलते-चलते छैलबिहारी की शायरी सुन ली थी और डर गई थी, "क्या वाकई मुझको देखकर लोग जान जाएँगे कि मैं प्रेम करने लगी हूँ? क्या वाकई ऐसा होता है कि इश्क में डूबे पहचान लिए जाते हैं।" घर पहुँची, तो उसे रुलाई आने लगी। उसने मुँह में दुपट्टा ठूँस लिया। फिर न जाने क्या हुआ कि माँ के गले से लगकर फूट-फूट कर रोने लगी। घरवाले हैरत में पड़ गए कि क्या हुआ सरोज को। तुरंत माँ-पिता-भाई-भाभी की धड़कनें बढ़ गईं कि सरोज के साथ कुछ उल्टा-सीधा तो नहीं हो गया। सिर के बालों से लेकर पैर की एड़ियों तक, सरोज का मुआयना किया गया। जब हर प्रकार से दरियाफ्त करके जान लिया गया कि वैसा कुछ नहीं घटित हुआ है, तब उन लोगों ने तसल्ली का अनुभव करते हुए लंबी साँस छोड़ी, मगर उन्हें इस बात की हैरत तो थी ही कि सरोज इस तरह जार-जार रो क्यों रही है। बहरहाल, सरोज ने जिस दुपट्टे को थोड़ी देर पहले मुँह में ठूँसा था, उसी से आँसू पोंछा और सुबकना भी बंद कर दिया। पानी पीने के बाद वह मन में ठान रही थी कि ज़िन्दगी में कभी भी छैलबिहारी की तरफ आँखें उठाकर देखेगी तक नहीं, लेकिन उसका यह दृढ़ निश्चय उस समय अधमरा हो गया था, जब रात में बिस्तर पर लेटी हुई करवटें बदल रही थी। उसके मन में बार-बार छैलबिहारी की मोहिनी मूरत आती और वह फिदा हो जाती। वह मौन ही मौन में फुसफुसाई, "छैलबिहारी।" और उसकी बड़ी-बड़ी आँखें भर आईं। यह दुख नहीं, प्रेम की उत्कटता का द्रव था। वह फिर फुसफुसाई, "छैलबिहारी, तुमने हम पर क्या किया है। जाने क्यों मेरा मन चाहता है, छैलबिहारी कि मैं तुम्हारे सीने पर चेहरा टिकाकर खूब रोऊँ-खूब रोऊँ। मुझको अपनी बाँहों में भर लो, छैल।" मगर जब दो दिनों बाद छैलबिहारी ने अँधेरे में उसकी कलाई पकड़कर खींचा था, तो वह काँपकर दूर हट गई थी, "देखो छैलबिहारी, हमारा प्यार दो आत्माओं का मिलन है, न कि दो शरीरों का।" छैलबिहारी को शारीरिक मिलन-विरोधी विचारों से घनघोर चिढ़ थी, क्योंकि अन्य लड़कियों की तुलना में सरोज उसकी दृष्टि में महज इसलिए श्रेष्ठ थी कि सरोज के वक्ष और नितंब उनसे भारी थे तथा शेष शरीर उनसे बहुत हल्का। अन्य लड़कियाँ आभूषण पहनने से अधिक सुंदर हो जाती थीं, जबकि सरोज द्वारा आभूषण धारण किए जाने पर स्वयं आभूषणों की सुंदरता में वृद्धि होती थी। कान का बाला दूसरी लड़कियों के कानों में लटकता रहता था, किंतु जब सरोज पहनती थी, तो दोनों कानों के बाले जगमग-जगमग करने लगते थे। हवा चलने पर या सरोज का चेहरा जब चंचल होता था, तो वे बाले हिलते थे और उन हिलते हुए दो बालों को देखकर छैलबिहारी को ऐसा अनुभव होता था कि पेड़, पौधे, घर, आसमान, सब गति कर रहे हैं। वे दोनों जैसे कामदेव के प्रक्षेपास्त्र हों कि देखनेवाला छैलबिहारी कामातुर हो जाता था। हालाँकि वह लोगों के बीच प्रतिक्रिया बिल्कुल उलटे तरीके से देता था। बतलाता था कि सरोज में कौन सुर्खाब के पर लगे हुए हैं। उस जैसी बीसियों को वह खेल-खा चुका है। पर क्या करे, सरोज ससुरी खुद ही उसके पीछे लग गई. गाँव के लुच्चे-लफंगे और अनेक संभ्रांत भी उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुनते। उसने कहा, "एक दिन मुझसे सरोज बोली कि हे...हे छैलबिहारी, हमारा चुम्मा ले लो न। अब मैं क्या करता? लिया चुम्मा।" कुछ लोगों ने छैलबिहारी-सरोज को अकेले में मिलते-जुलते, हँसते-बोलते हुए देख भी लिया था और यह भी देखा था कि सायँकाल के धुँधलके में या भोर के कोहरे में छैलबिहारी इंतजार में खड़ा-खड़ा, बीड़ी फूँक रहा है और सरोज सहमी-चौकन्नी-सी दबे पाँवों, उससे मिलने आ रही है। कुछ लोगों ने यहाँ तक सुन लिया था कि वह कह रही है, "छैलबिहारी, मैं तुम्हारे लिए स्वेटर बुनना चाहती हूँ, तुम्हें कढ़ाई करके रूमाल देना चाहती हूँ, पर क्या करूँ, घरवालों के सामने कैसे करूँ?" अतः जब छैलबिहारी ने इस बात को कहा कि सरोज खुद उसके पीछे लग गई है, उसने उससे चूमने के लिए कहा, तो श्रोताओं को सत्य अनुभव हुआ। गाँव में छैलबिहारी के दो खास दोस्त थे, भोला और परमू। तीनों की गहरी मित्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक समय में तीनों साथ-साथ पेशाब करते थे और अपनी-अपनी पेशाब की धारों को आपस में लड़ाते थे। परमू और भोला के अलग जीवन-स्थितियों में चले जाने के बावजूद उनकी दोस्ती में फर्क नहीं आया था। परमू प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष गोरखनाथ का कृपापात्र था। बम फेंकने और चाकू़ चलाने में उसे दक्षता थी। कई बार इस विद्या का निपुण प्रदर्शन करने के कारण गोरखनाथ की मंडली में जल्द ही उसे प्रमुखता प्राप्त हो गई थी। उसी ने अध्यक्ष जी से फरियाद करके अपने मित्र भोला को बिजली विभाग का सफल ठेकेदार बनवा दिया था। बाद में भोला और परमू ने संयुक्त रूप से एक जीप खरीदी, जो अध्यक्ष जी के सौजन्य से वन-विभाग में किराए पर चल रही थी। इस प्रकार दोनों ने ही जीवन में सफलता प्राप्त कर ली थी और उनके आगे भी सफल होते जाने की संभावनाएँ थीं। वे दोनों अक्सर गाँव आते और छैलबिहारी को साथ लेकर मटरगश्ती करते। परमू-भोला छैलबिहारी को बढ़-चढ़कर शहर के किस्से सुनाते। वे अध्यक्ष जी की ताकत और उनके दरबार में अपने विशेष स्थान का रोमांचक बखान करते थे। उनके द्वारा जब शहर के वैभव, ऐश्वर्य और सुख की चर्चा की जाती, तो छैलबिहारी चकित तथा उदास हो जाता था। कहता था, "तुम लोग वहाँ गुलछर्रे उड़ा रहे हो और तुम्हारा यह दोस्त यहाँ गाँव में पड़ा-पड़ा सड़ रहा है।" परमू और भोला सांत्वना देते, "अध्यक्ष जी से बात हो चुकी है। जल्दी ही तुमको किसी ऑफिस में फिट करा देंगे।" छैलबिहारी नाराज हो जाता, "फिट नहीं, घंटा करा देंगे। करा तो रहे हैं एक साल से फिट।" "सही बात यह है कि तुम खुद गाँव छोड़ना नहीं चाहते। सरोज जैसी जिससे फँसी हो, वह नौकरी की फिक्र क्यों करने लगे।" परमू बोला था। भोला ने प्रश्न किया, "अच्छा छैलबिहारी, यह बताओ कि सरोज के साथ तुमने क्या-क्या किया अब तक?" छैलबिहारी उत्साहित हो गया। बीड़ी जलाकर कश खींचा और मुस्कराया, "क्या करूँ, वह प्यासी है, तो मुझे ध्यान देना ही पड़ता है।" भोला और परमू ने जुगलबंदी की, "कुछ हमारा भी ख्याल रखो, छैलबिहारी।" छैलबिहारी बोला, " हो जाएगा काम, मगर तब, जब मेरी नौकरी लगवा दोगे, जिस दिन पहली तनख्वाह पाऊँगा, उस रात सरोज तुम लोगों की न हो, तो मेरा नाम छैलबिहारी नहीं। "नौकरी तो समझो, पक्की। रही बात पहली तनख्वाह की, तो ये लो, अभी देता हूँ।" भोला ने रुपए छैलबिहारी के सामने रख दिए, "लो रख लो।" छैलबिहारी ने रुपए ले लिए, लेकिन जब वह बाहर खुले आसमान, खुली हवा में आया और कुछ दूर चला, तो हैरत में पड़ गया, "मैंने यह क्या किया। कैसे मुमकिन है यह। वह साली तो सीता-सावित्री की अवतार बनी फिरती है। दुनिया को मारो गोली, मैं तो उसके गाल तक नहीं छू पाया हूँ।" वह अपने भाग्य की विडंबना पर हँसा, "गाल छूने की पड़ी है मुझे। कलाई तक तो पकड़ने नहीं दिया उसने कभी। छटपटाकर छुड़ा लेती है।" वह निराश-सा लौट आया, "दोस्तो, मुझको माफ कर दो।" उसने रुपए निकालकर जमीन पर रख दिए. हाथ जोड़ा, "अपने पैसे रख लो। दरअसल वे बातें मैं झोंक में बोल गया था।" "बहाना मत बनाओ, छैलबिहारी। मैं कहता हूँ कि इसी बात पर दोस्ती टूट जाएगी।" परमू ने धमकी दी। छैलबिहारी गिड़गिड़ाया, "माँ कसम, सही कह रहा हूँ कि मैंने सरोज के बारे में जो कुछ कहा था, झूठ था, हकीकत यह है कि हरामजादी कहती है कि प्यार दो आत्माओं का मिलन होता है।" उसकी आँखों में आँसू आ गए, "वह बदचलन यह भी कहती है कि विवाह से पहले वासना, पाप है। कुँआरी कन्या की दुम हत्थे नहीं चढ़ती। मैं तो कहता हूँ कि कोई ऐसी तरकीब भिड़ाओ कि हम तीनों ही कामयाब हो सकें..." छैलबिहारी द्वारा सरोज से विवाह का प्रस्ताव और इसके लिए उसे राजी करना-गाँव में विवाह संभव नहीं, इसलिए गाँव से भागना-शहर पहुँचकर मंदिर में छैलबिहारी-सरोज की शादी-रुकने के लिए अध्यक्ष जी की कोठी में व्यवस्था-कोठी पर ही रात में सरोज को इस बात के लिए धन-दौलत-खौफ के जरिए सहमत करना कि वह तीनों को अपना शरीर सुपुर्द करे-सहमत न हुई, तो उसके साथ सामूहिक बलात्कार। इस व्यूह-रचना पर छैलबिहारी ने कुछ आपत्तियाँ कीं। उसने कहा कि उसका सरोज से शादी करना ठीक नहीं रहेगा। कहीं माँ-बाप तय करेंगे, तो टी.वी., स्कूटर, भैंस और थोड़ा नकद मिलेगा। इस रंडी से शादी करके क्या पाऊँगा। दूसरी बात, अपनी बीवी को पराए मर्दों के हाथ कैसे सौंपा जा सकता है। इसी को इस तरह भी कहा जा सकता है कि दो पराए मर्दों द्वारा गंदी की गई औरत को वह कैसे पत्नी के रूप में स्वीकार करेगा। "तुम पक्के घोंघाबसंत हो, छैलबिहारी।" भोला बोला, "मंदिर की शादी के गवाह कौन होंगे। हम लोग न! हम लोग क्यों कहने जाएँगे कि तुम्हारी शादी हुई है। उस ससुरी को भी इज्जत प्यारी होगी, तो किसी से कुछ बताएगी नहीं।" "मान लो, वह कहीं न जाए, कहे कि इस सबके बाद भी पत्नी बनकर मेरे साथ रहने के लिए तैयार है। तब?" "तब हम उसको नदी में डुबोकर मार देंगे। या मारकर रेल की पटरी पर फेंक देंगे।" परमू ने जवाब दिया। अब जाकर छैलबिहारी संतुष्ट हुआ और उसका भरोसा बना कि उसके दोनों मित्र पर्याप्त सामर्थ्यवान और समझदार हैं। वह भावुक हो गया। करुण स्वर में बोला, "भैया, तुम लोगों के हाथों में अपनी नैया की पतवार सौंप रहा हूँ।" सरोज ने 'हाँ' कह दी। वह गाँव से भाग चलने के लिए तैयार हो गई. वह जानती थी कि गाँव में रहते किसी भी प्रकार छैलबिहारी से उसकी शादी नहीं हो सकती और वह छैलबिहारी के बिना हकीकत या सपना-कुछ भी नहीं बुनती थी। वह नींद, सपनों और विचारों में हमेशा छैलबिहारी को साथ रखती थी, लेकिन उसमें प्राचीन समय से स्त्री के भीतर मौजूद रहनेवाला अज्ञात भय भी स्वाभाविक रूप से था। इसलिए छैलबिहारी के प्रस्ताव की उस पर पहली प्रतिक्रिया यह हुई कि वह थरथराने लगी और उसके चेहरे की चपलता को जैसे ग्रहण लग गया। देर तक उसकी आँखें जमीन पर टहलती रहीं और भर आईं। उसने आँसुओं से डूबी अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को उठाकर छैलबिहारी को देखा। वह रो पड़ी, "छैलबिहारी! मैं तुमको बहुत चाहती हूँ।" उसका सिर छैलबिहारी की छाती पर टिक गया। सरोज का इस प्रकार का स्पर्श छैलबिहारी को पहली बार हासिल हुआ था, वह पुलकित हो गया। सरोज रोती हुई बोली, "छैलबिहारी, मैं अपने माँ, बाप, भाई, भाभी और उनके पेट में पल रहे भतीजे को, ये घर, ये गाँव, ये खेत, ये खलिहान, ये भुतहा खंडहर, जिसमें हम खड़े हैं, सब छोड़कर तुम्हारे साथ चलूँगी। मेरा साथ निभाना। मुझे धोखा मत देना, छैलबिहारी! नहीं तो तुम्हारी कसम, जिंदा नहीं पाओगे अपनी सरोज को।" छैलबिहारी ने इस अवसर पर एक कवित्त सुनायाः मर जाऊँगा, मिट जाऊँगा, चाक-चाक हो जाऊँगा। मेरे प्रियतम अंतिम दम तेरा साथ निभाऊँगा। उक्त कवित्त पूरा होने पर सरोज ने उसके सीने पर रखे अपने चेहरे को हल्का-सा दबाया और फिर उठाकर उसे देखा, "अच्छा, अब मैं चलती हूँ।" वह घर आई, तो घर उसे पराया-सा महसूस हुआ। ऐसा लग रहा था कि जैसे घर थोड़ा बड़ा हो गया हो। चूल्हे का मुँह घूम गया हो। अलगनी अधिक नीचे हो गई हो। उसे घर हल्का-सा हिलता हुआ भी अनुभव हो रहा था। उसे समझ में नहीं आया कि इस समय वह घर में क्या करे। वह जाकर बिस्तर पर आराम से लेट गई, मगर जल्दी ही बिस्तर पर पालथी मारकर बैठ गई. ऐसे भी नहीं रहा गया, तो उठ खड़ी हुई. तभी न जाने क्या हुआ कि तकिए में चेहरा धँसाकर रोने लगी। जल्दी ही रोना बंद करके मुस्कराने लगी। भाभी के पास आकर मजाक किया, "भाभी, तैयारी करती जाओ, भतीजा होने पर कंगन लूँगी।" भाभी अपने पेट पर हाथ फेरते हुए, बोलीं, "आपके भइया और बाबूजी कोशिश में लगे हैं। जल्दी ही आप भी ससुराल जाएँगी, तब कुछ दिनों बाद आपको भी वहाँ कंगन बनवाकर ननदों को देने पड़ेंगे।" सरोज सोच में डूब गई, "छैलबिहारी को तो कोई बहन है नहीं, वह किसे कंगन देगी।" वह उदास हो गई. तभी न जाने उसके भीतर क्या रासायनिक क्रिया हुई कि वह उत्साहित होकर उठी और बाबू-भाई के सारे गंदे कपड़े लेकर धोने लगी। बाद में इस काम से फुर्सत मिलने पर उसने घोषणा की, "आज घर का पूरा खाना मैं बनाऊँगी।" उसने रोज से ज़्यादा घी-तेल-मसालों का प्रयोग करके भोजन को सुस्वादु बनाया। भइया से दो रोटी अधिक खाने के लिए इसरार करने लगी। बीच में पड़ोस में जाकर वह बच्चों को चिढ़ा आई. कुल मिलाकर बहुत खुश दिख रही थी, लेकिन बीच-बीच में सोचती, "मैं क्यों इतना खुश हूँ? क्या यह छैलबिहारी के साथ ज़िन्दगी की शुरुआत करने की उमंग है? या यह घर त्यागने के पहले घरवालों पर उमड़ पड़ा प्यार है? या कहीं वह इतना खुश दिखकर घरवालों को चकमा दे रही है?" उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया, न ही वह किसी नतीजे पर पहुँची। उसे तीनों ही बातें थोड़ी-थोड़ी सही लग रही थीं मगर वह यकीन नहीं कर पा रही थी कि कैसे तीनों बातें एक साथ सही हो सकती हैं। उसकी दशा अजीब हो गई थी। खुश होकर चहकती रहती कि अचानक किसी सुरक्षित एकांत में जाकर रोने लगती, पर कुछ ही वक्त बाद आँखें पोंछकर हँसती हुई बाहर आती। वह कभी अतिरेक में आकर माँ के गले लगकर झूल जाती, तो कभी भाभी के पेट पर कान सटाकर चुहल करती, "भाभी...भाभी... सुनो, बच्चा बुआ...बुआ... कह रहा है।" घर के लोगों को उसका यह बदला हुआ रंग-ढंग अनोखा तो लग रहा था। किंतु इतना अस्वाभाविक नहीं कि वे उस पर संदेह करने लगें। या उस पर निगाह रखने की आवश्यकता महसूस करें। बस, केवल माँ जानकी देवी थीं, जो बीच-बीच में उसको गौर से देखने लगती थीं। बेटी जब भी उनसे अधिक प्रेम जताती, तो वह चिंतित हो उठती थीं। उन्हें लगने लगता था कि बेटी के मन में कुछ और है, वह कपट कर रही है। रात को सरोज अपने बिस्तर से उठकर माँ के पास चली आई और बच्चों की तरह सटकर लेट गई, "माँ, अब से मैं तुम्हारे साथ सोया करूँगी।" माँ आहिस्ता-आहिस्ता सरोज के बाल सहलाती रही, फिर बुदबुदाई, "बिटिया, इधर-उधर का कदम मत उठा लेना।" माँ का वाक्य सुनकर सरोज काँप गई. शव की तरह निस्पंद हो उठी, मगर मामूली-से अंतराल के बाद खिल गई. उस दिन अँधेरा भी हो गया, लेकिन सरोज स्कूल से नहीं लौटी, तो सबसे पहले जानकी देवी ने ही अपनी चिंता प्रकट की, "सरोज नहीं आई अभी तक, मेरा दिल बहुत घबरा रहा है राधेश्याम के बाबू।" सभी के चेहरे पर भय, चिंता और अपशकुन के पंजे मँडराने लगे। ऐसा लगा कि विष्णु दत्त जैसे अभी-अभी और बूढ़े हो गए हों। वह कराहते हुए से बोले, "बेटा, राधेश्याम! चलो, हम ढूँढ़ते हैं।" दोनों जब लौटकर वापस आए, तो घर में बहू और सास थीं। अँधेरा था, तंता था। बहू के गर्भ में शिशु था और भय, चिंता, अपशकुन के मँडराते पंजे थे। घर में घुसते ही विष्णु दत्त अचानक रोने लगे थे। गाँव में विष्णु दत्त को सलाह मिली कि फौरन थाने चलकर बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखानी चाहिए, लेकिन दूसरे प्रकार के लोगों का मत था कि ऐसा नितांत अनुचित होगा। कन्या की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी गई, बात थाना-कचहरी तक गई तो इज्जत विष्णु दत्त की डूबेगी-इस गाँव की डूबेगी-सबसे बड़ी बात-बरामदगी के बाद सरोज का जीवन नरक हो जाएगा। "लेकिन समस्या यह है।" पहले पक्ष के लोगों ने कहा कि सरोज के आसानी से मिल सकने के आसार नहीं दिख रहे हैं। जहाँ-जहाँ मुमकिन था, ढूँढ़ा गया। अब वह आसमान से तो टपक नहीं पड़ेगी। नहीं मिल रही है, तो यही अच्छा होगा कि पुलिस में रिपोर्ट लिखाई जाए. सबसे भिन्न तीसरी धारा राधेश्याम की थी। उसका कथन था, "सरोज दो घंटे में मिल सकती है।" इसके लिए उसने उपाय बताया कि छैलबिहारी की माँ को तथा परमू और भोला की बहनों को निर्वस्त्र करके गाँव में घसीटा जाए. " लेकिन किसी ने उसके विचारों को गंभीरतापर्वूक ग्रहण नहीं किया। अंततः यही निश्चय किया गया कि दो-तीन दिन इंतजार कर लिया जाए. फिर भी सरोज न मिली, तो रिपोर्ट लिखाने में हर्ज नहीं। हालाँकि विष्णु दत्त यह समझ रहे थे कि रिपोर्ट के लिए जोर देनेवालों में कुछ ऐसे भी थे जो चाहते थे कि थाना-कचहरी के चलते उनकी और उनकी बेटी की फजीहत हो। इसी तरह कुछ लोगों द्वारा रिपोर्ट न लिखाने के लिए दबाव डालने की वजह थी कि वह चाहते थे कि सरोज हमेशा गायब रहे और उनको राय-मशविरा देने का अवसर प्राप्त होता रहे। तीन दिन बीत गए थे, रिपोर्ट दर्ज कराने के अतिरिक्त दूसरा कुछ सूझ नहीं रहा था विष्णु दत्त को। अगले दिन शाम को वह और राधेश्याम तीन-चार ग्रामवासियों को लेकर थाना पहुँच गए. इन ग्रामवासियों का कहना था कि रिपोर्ट में अभियुक्तों द्वारा सरोज को ले जाने की बात के साथ यह भी दर्ज कराया जाए कि वे उनके घर से चार हजार नकद और करीब 25, 000 के जेवरात भी ले भागे हैं। इस पर विष्णु दत्त ने दबी जबान से प्रतिवाद किया, "पर यह हकीकत नहीं है।" राधेश्याम भड़क गया, "बड़े हकीकत के बाप बनने चले हैं आप! हकीकत तो यह है कि वह रंडी खुद भागी है, तो क्या ऐसे ही रिपोर्ट में कहा जाए?" थाने का दरोगा कहीं तफ्तीश पर गया था और हेड मुहर्रिर जूस पीने, लेकिन संयोग ही था कि ज़्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, जल्द ही हेड मुहर्रिर मुँह पोंछता हुआ ड्यूटी पर बैठ गया, "क्या हुआ, लौंडिया भाग गई न?" वे इस भाव से कि 'उसको कैसे मालूम' हेड मुहर्रिर को देखने लगे। तभी वह कड़क उठा, "लानत है तुम लोगों पर कि रिपोर्ट लिखाने आए हो। अरे, मेरी बहन-बेटी होती, तो आकाश-पाताल जहाँ भी होती, ढूँढ़कर लाता और इस करतूत पर उसकी बोटी-बोटी करके चील-कौवों के सामने फेंक देता।" बहरहाल, विष्णु दत्त ऐसे पराक्रमी नहीं थे, इसलिए वह दो कागजों के बीच कार्बन लगाकर प्राथमिक सूचना रिपोर्ट का लेखन करने लगे। वह नामजद प्राथमिक सूचना रिपोर्ट लिख रहे थे। उन्होंने अभियुक्तों के रूप में छैलबिहारी, परमू और भोला को नामांकित किया। थाने से लौटते-लौटते अँधेरा होने लगा। सभी चुपचाप चल रहे थे। जैसे उनके साथ-साथ मौन भी चल रहा हो। वे गाँव में आ गए, तब भी चुप थे। एकदम खामोश। लेकिन जैसे ही रास्ते में छैलबिहारी का घर पड़ा, राधेश्याम बड़ी तेज आवाज में चिल्लाने लगा, "मैं प्रतिज्ञा कर रहा हूँ... मैं प्रतिज्ञा नहीं, भीष्म प्रतिज्ञा कर रहा हूँ कि यदि मैंने छैलबिहारी की माँ की इज्जत न लूटी, तो राधेश्याम मेरा नाम नहीं।" इतना कहकर उसने चारों तरफ अभिमान से देखा, जिस प्रकार नौटंकी में कोई अभिनेता कड़क संवाद बोलकर वाहवाही के लिए दर्शकों पर निगाह डालता है। विष्णु और राधेश्याम घर आए, तो विष्णु बहुत थके थे, राधेश्याम बहुत उद्वेलित। बहू ने जल्दी ही खाना परोस दिया। दोनों खाने लगे। बहू ने ससुर की थाली में रोटी डालते हुए कहा, "हमारे चाचा के लड़का श्याम नारायण नेता हैं, वह किसी काम आ सकते हों तो बुला लिया जाए." राधेश्याम गरजा, "चोप्प साली। अब नेतागिरी नहीं होगी, खून बहेगा। मैं कह रहा हूँ लाशें गिरेंगी!" इसके बाद खाना छोड़कर वह कूद-फाँद करने लगा। विष्णु और जानकी देवी उसे परेशानी और कोफ्त से देखने लगे। जब वह चौकड़ी भरता हुआ बाहर निकल गया, तो विष्णु बहू से बोले। बहू घूँघट थोड़ा-सा आगे खिसकाकर सुनने लगी, "ऐसा है दुलहिन, अभी रुक जाओ, बात दूर-दूर तक फैले, क्या फायदा। कुछ रोज देखते हैं। सरोज हमें तब तक न मिली, तो नेता श्याम नारायण को बुलवाएँगे।" श्याम नारायण नेता, एक पार्टी की युवा शाखा के जुझारू सदस्य थे। अभाव और विपन्नता उनके व्यक्तित्व से टपकती रहती थी, किंतु दो मामलों में वह शानदार थे। एक नारा लगाने में, पता नहीं कहाँ से उनके कृशकाय शरीर में बहुत जोर से बहुत देर तक गर्जना करने की शक्ति थी। उनके शानदार होने का दूसरा क्षेत्र था प्रेमातुरता। वह प्रायः किसी कन्या को देखकर रीझ जाते थे और प्रणय-निवेदन कर बैठते थे। एक बार उनकी प्रेमातुरता कामातुरता में परिवर्तित हो गई थी। समक्ष खड़ी लड़की पर संकट के मेघ मँडराने लगे थे। वह तो ईश्वर उसका रक्षक था कि श्याम नारायण के पायजामे के इजारबंद में उल्टी गाँठ लग गई, जो उनके लाख प्रयत्न करने पर भी उस समय नहीं खुली थी, पर कामातुरता उनकी मूल प्रवृत्ति नहीं थी। अमूमन वह रीझते भर थे। सरोज पर भी कुछ बार रीझ चुके थे। जब-जब वह अपनी भाभी के मायके में आई थी, तब-तब नेता उसे देखकर व्याकुल हुए थे। उनके द्वारा भाँति-भाँति से प्रेम-भाव को प्रगट किए जाने के बाद भी जब सरोज ने अनुकूल प्रतिक्रिया न दिखलाई थी तो उन्होंने एक दिन उसकी कलाई पकड़ ली थी। सरोज उनकी कलाई पर दाँत काटकर अपनी कलाई छुड़ाने के बाद धमकाते हुए जाने लगी कि उनकी करतूत वह सभी को बता देगी। इस पर नेता श्याम नारायण ने पहले विनती की कि सरोज ऐसा कतई न करे, पर सरोज को सहमत होता न देखकर वह हँसने लगे, "अरे, मेरा तो तुमसे हँसी-मजाक का रिश्ता है और तुमने मेरे मजाक को भी सच मान लिया क्या..." श्याम नारायण को जब छैलबिहारी के साथ सरोज के भाग जाने की सूचना प्राप्त हुई, तो उनके हृदय में तीन तरह के विचार उठे। एक विचार हैरत का था कि अरे, यह क्या हो गया। दूसरा विचार था विचारधारा का, जिसके अनुसार उन्होंने इस प्रकरण को रूढ़ियों के खिलाफ एक लड़की की बगावत माना और सोचा कि हर युवक-युवती को अपनी पसंद से प्रेमी अथवा जीवन-साथी चुनने का अधिकार है। अंत में जाकर तीसरा विचार उठा। यह विचार अपेक्षाकृत अधिक तीव्र, मर्मांतक, असरकारी और संश्लिष्ट था। इसके उठने पर उन्होंने अपनी कलाई को सहलाया, "यहीं पर दाँत गड़ाए थे उसने।" उन्हें लगा कि छैलबिहारी के साथ भागकर सरोज ने उनको अपमानित, आहत और दुखी किया है। वह दुखी हुए, "सरोज ने यह क्या कर डाला। उसकी जैसी सुंदर लड़की को किसी योग्य व्यक्ति से प्रेम करना चाहिए था।" उन्होंने विश्लेषण किया और इस नतीजे पर पहुँचे कि सरोज को छैलबिहारी से प्रेम नहीं करना चाहिए था। वस्तुतः यह प्रेम था ही नहीं। अर्द्धसामंती, अर्द्धपूँजीवादी समाज में जिस प्रकार मजदूर-किसान शोषक शक्तियों के झाँसे में आकर उन्हीं को अपना उद्धारक मान लेते हैं, उसी तरह सरोज छैलबिहारी को अपना मुक्ति-दाता मानकर प्रेम कर बैठी। अतः उसका यह कृत्य प्रेम और सामंती मूल्यों को चोट पहुँचाने का प्रयास नहीं, बल्कि शोषित-पीड़ित स्त्री की दिग्भ्रमित चेतना की त्रासदी का मामला है। उन्हें महसूस हुआ कि विपत्ति में निहत्थी फँसी सरोज चीत्कार कर रही है और संघर्ष का एक अन्य क्षेत्र उन्हें आहूत कर रहा है। उन्होंने झोला उठाया और विष्णु दत्त-राधेश्याम से मिलने चल दिए. उनको सामने खड़ा देखकर विष्णु दत्त चकित हुए. जब श्याम नारायण ने बताया कि उन्हें मुसीबत में फँसा सुनकर वह दौड़े चले आए हैं, तो विष्णु दत्त के मन में उनके लिए अत्यंत आदर का भाव पैदा हुआ। चटपट राधे की औरत से बोले, "अरे, अपने भइया के लिए कुछ चाय-वाय बनाओ जल्दी।" चाय पीने के बाद श्याम नारायण ने बिलकुल विलंब नहीं किया, मुँह पोंछते हुए कहा, "तो बाउजी, आप और जीजा तैयार हो जाएँ और चलें मेरे साथ।" नेता श्याम नारायण, विष्णु और राधेश्याम को लेकर जिला मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक के बँगले पर पहुँचे। उन्होंने विष्णु दत्त की तरफ से एक प्रार्थना-पत्र पुलिस अधीक्षक के नाम लिख रखा था, पुलिस अधीक्षक को दिया। उक्त प्रार्थना-पत्र में निवेदन किया गया था कि माननीय महोदय, अपनी बेटी सरोज के अपहरण की प्राथमिक सूचना रिपोर्ट मैंने गत 15 जनवरी, 95 को थाना श्याम सराय में लिखाई थी। उसमें मैंने अभियुक्तों के नाम का भी उल्लेख किया था। छैलबिहारी, परमू और भोला। माननीय महोदय जी से निवेदन है कि पुलिस अभी तक अभियुक्तों को पकड़कर इस अभागे पिता को उसकी पुत्री वापस दिलाने में नाकाम रही है। हमें इस बात की भी आशंका है कि स्थानीय पुलिस जाँच-कार्य में शिथिलता बरत रही है। अतः आपसे अनुरोध है कि आप उचित कार्यवाही हेतु अविलंब आवश्यक दिशा-निर्देश देकर इस परम दुखी पिता को न्याय दिलाने की कृपा करें। पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में ही थोड़ा फेरबदल करके नेता श्याम नारायण ने एक पत्र प्रदेश के गृहमंत्री के नाम और एक पत्र देश के गृहमंत्री के नाम भेजा। उन्होंने एक पत्र देश के लोकसभा अध्यक्ष के नाम भी प्रेषित किया। श्याम नारायण के इन क्रियाकलापों से विष्णु तथा राधेश्याम अभिभूत थे। उन्हें अपने इस रिश्तेदार पर गर्व हो रहा था। दोनों ने ही श्रद्धावनत होकर हाथ जोड़ लिए, "धन्य हैं आप भइया श्याम नारायण ईश्वर आपको दीर्घायु करें।" दोनों ने ही पूछा, "अब आगे क्या किया जाए?" श्याम नारायण बोले, "आगे यह किया जाए कि आप लोग घर लौट जाएँ और मुझको अब अपने तरीके से खोज-बीन करने दें। हमारे हाथ पुलिस से भी ज़्यादा लंबे हैं, आप सब फिक्र न करें। हाँ, कुछ रुपए हों तो देते जाइए, क्योंकि दौड़-भाग में खर्चा तो होगा ही।" पिता-पुत्र के जाने और जेब में कुछ धन आने के बाद नेता श्याम नारायण में एक भारतीय जेम्स बॉण्ड का अभ्युदय होने लगा। उन्होंने एक पैकेट सिगरेट खरीदी। एक सिगरेट जलाकर कश लिया, "कहाँ से शुरू की जाए तफ्तीश।" उनकी उँगलियाँ दूसरे हाथ की कलाई पर चली गईं और अचानक उनके सामने सरोज का चेहरा जगमगा उठा। वह कल्पना-लोक में देखने लगे कि सरोज आँसुओं में डूबी हुई सिसक रही है। 'मुझे हर हाल में ठोस कुछ करना पड़ेगा।' उन्होंने सोचा और सिगरेट चप्पल से कुचलकर आगे बढ़ गए. इस वक्त उनके अंदर फुर्तीला जेम्स बॉण्ड, भावुकविरही, जोशीला कॉमरेड एक साथ सक्रिय हो चुके थे। उनके कंधे से लटका हुआ झोला एक दृष्टि से देखने पर लगता था कि वह कोई सिद्धहस्त अय्यार या जासूस हैं, जिसके इस पोटले में अनेक हैरतअंगेज चीजें भरी हुई हैं, तो दूसरी दृष्टि से देखने पर लगता था कि वह आदिकाल के कोई योद्धा हैं, जिसके झोले में जानलेवा आयुध भरे हुए हों। तीसरी दृष्टि से देखने पर लगता, वह संत विनोबा भावे अथवा जयप्रकाश जी की परंपरा के सर्वोदयी हैं, जिनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर भूमि माफिया भूदान कर देंगे और डकैत आत्मसमर्पण। चप्पल फटकारते चले जा रहे थे श्याम नारायण, जो इस समय शरीर से दुबले पर भावनाओं से बली थे। वह दृढ़प्रतिज्ञ थे कि सरोज कांड की एक-एक बात, राई-रत्ती, छोटी-बड़ी सारी चीजें ज्ञात करके रहेंगे। नेता श्याम नारायण ने दौड़-भाग के बाद पाया कि सरोज के गायब होने को लेकर कई तरह की कहानियाँ थीं, जो परस्पर एक-दूसरे से जु़दा थीं और कुछ मायनों में आपस में समानता भी रखती थीं। गाँव से सरोज, छैलबिहारी, परमू, भोला सफेद रंग की कार से भागे थे। यह कार किसकी थी, इसके बारे में उसे कोई एक पहुँचे हुए रईस की बताता था, तो कोई कहता था कि एक बहुत बड़े ठेकेदार ने कुछ ही दिन पहले खरीदी थी। यह भी चर्चा थी कि कार हीरों के एक व्यापारी का लड़का चलाता था, जिसे भोला ने धमकाकर छीन ली थी। कहीं-कहीं सुनाई देता कि वह कार किसी अन्य की नहीं, स्वयं परमू की है, जिसे उसने अफीम की तस्करी से प्राप्त धन से खरीदा था और शहर में ही चलाता था। वैसे, कुछ अनुमान यह भी था कि कार गोरखनाथ की है, परमू और भोला उनसे माँगकर लाए थे। बहरहाल, कार से जब सरोज सहित चारों लोग जा रहे थे, तो कार बड़ी तेज दौड़ रही थी। उसकी स्पीड के बारे में लेकर 80 किलोमीटर से लेकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक के अनुमान लगाए जा रहे थे। बीच में कार दुर्गापुर कस्बे में रुकी थी, जहाँ उन लोगों ने कोकाकोला पिया था, लेकिन एक हिस्से को एतराज था कि कोकाकोला पीने की बात सच नहीं है, जनवरी महीने में, वह भी रात को वे कोकाकोला क्यों पीने लगेंगे। दरअसल वे चाय पी रहे होंगे। इस पर कोकाकोला वालों का कहना था कि देखनेवालों की आँखें अंधी नहीं थीं कि चाय के गिलास या कुल्हड़ को कोकाकोला की बोतल समझ लें। इस वाद-विवाद में एक तीसरी धारणा सामने आई, जिस पर कमोबेश सभी ने विश्वास किया। इसके अनुसार वे न चाय पी रहे थे, न कोकाकोला। वे कोकाकोला की बोतल में शराब पी रहे थे। किसी ने पुष्टि करते हुए बताया कि उसे पता है कि दुकान पर सरोज की आँखें लाल थीं और वह झूम रही थी। इसकी भी काट प्रस्तुत की गई कि आँखें लाल होने का कारण सरोज का रोना हो सकता है। रही बात झूमने की, तो कौन-सी शराब थी कि चखते ही झुमाने लगी थी। उपरोक्त बिंदु तक जानकारों की सूचनाओं में मामूली भिन्नताएँ थीं, किंतु मोटे तौर पर सादृश्य भी था। जैसे कि कार किसकी थी, कार किस स्पीड में चल रही थी या दुकान पर वे चारों क्या पी रहे थे, इन मुद्दों पर तीव्र मतभेद थे, लेकिन वे कार से गए, कार बहुत तेज दौड़ रही थी और बीच में दुर्गापुर कस्बे की दुकान पर रुककर उन लोगों ने कुछ पिया, इन बातों पर जानकारों के बीच पूरी सहमति थी। मुश्किल यह आ पड़ी कि दुर्गापुर कस्बे की दुकान के बाद क्या-क्या हुआ, इसको लेकर एकदम से अलग-अलग किस्से सामने आने लगे। इन किस्सों में सरोज के घर से भागने और कोकाकोला की बोतल से कुछ पीकर चल देने के बाद की रामकहानी भिन्न-भिन्न तरीके से बयान की गई थी। घटनाएँ, वातावरण, कथोपकथन, मनोरथ और परिणतियों तक में अंतर था। अब चूँकि उक्त समस्त स्वरूपों को स्वतंत्र ढंग से प्रस्तुत करने का स्थान और अवसर नहीं है, अतः उन सभी का अवलोकन करके उनके विश्वसनीय अंशों को पहले अलग-अलग किया गया, फिर सभी के उन चुने गए विश्वसनीय लगनेवाले अंशों को आपस में सुसंगत तरीके से यथायोग्य जोड़ दिया गया। फलस्वरूप एक अधिक प्रामाणिक वृत्तांत सामने आया जो इस प्रकार हैः कार जब गोरखनाथ के आलीशान मकान के सामने रुकी, तो रात के नौ बज रहे थे। वैसे, इस समय यहाँ चहल-पहल रहती थी, लेकिन इत्तेफाक की बात है कि उस दिन सन्नाटा था, क्योंकि गोरखनाथ शराब किंग माताराम जायसवाल के घर रात्रि-भोज पर गए थे। शायद इसलिए कि मार्च का महीना आनेवाला था और किंग को खतरा था कि अबकी बार कहीं उसके हाथ से ठेके निकल न जाएँ। सन्नाटा देखकर वे चारों उतरे और भीतर पहुँचकर सीढ़ियाँ चढ़ गए. ऊपर एक कमरे में पहुँचकर ही उन्होंने इत्मीनान की साँस ली। परमू और भोला खाने-पीने के इंतजाम के लिए बाहर निकल पड़े। उनके जाते ही छैलबिहारी सरोज पर लुढ़ककर कहने लगा, "हाय मेरी प्राणप्यारी, अब तो न तड़पाओ." सरोज ने उसे ठेलकर आराम से बिठाया और खुद खड़ी हो गई, "देखो छैलबिहारी, जब तक मैं तुम्हारी सुहागन नहीं बन जाती, मुझे छूना मत। नहीं तो जान दे दूँगी, अम्मा की कसम।" अम्मा की कसम खाते ही उसे अम्मा की याद आ गई. वह सुबकने लगी। छैलबिहारी भुनभुनाता हुआ बाहर निकलकर नीचे आ गया। नीचे आकर देखा कि अध्यक्ष जी आ गए हैं और भोला-परमू को डाँट रहे हैं। वह वहीं छिपकर डाँट वार्ता सुनने लगा। अध्यक्ष जी बोले, "अरे हरामियो मेरे घर लेकर आने की क्या ज़रूरत थी।" उन्होंने कुछ अन्य फूहड़ किस्म की गालियाँ दी और अंत में कहा, "ऐसा करो, महंत जी के यहाँ चले जाओ, मैं फोन कर देता हूँ।" दोनों जाने के लिए मुड़े कि अध्यक्ष जी फिर बोले, "अरे हाँ, लौंडिया की उम्र कितनी है?" "सोलह साल।" परमू ने जवाब दिया। "सोलह साल की दुम, मरोगे ससुरो। अबे, बालिग तो हो जाने दिया होता। अच्छा कल मेरे साथ कचहरी चलना। मैं एक फर्जी बालिग प्रमाण-पत्र बनवा दूँगा। बाद में कोई लफड़ा होने पर काम देगा।" छैलबिहारी उलटे पाँव लौट गया और कमरे के बाहर खड़ा हो गया। उन दोनों को देखते ही नकनकाते हुए कहा, "सरोज कुमारी से दिक्कतें आएँगी। सती सावित्री लच्छन दिखा रही है। कह रही है कि शादी के पहले छुआ, तो खुदकुशी कर लेगी।" उसकी नकनकाहट कुछ कम हुई, "एक बात मुझे पक्की लगने लगी है कि यह समझाने से समझनेवाली नहीं है।" "चुप साले बड़बड़ किए जा रहा है।" परमू गुस्सा गया, "साले तुमको उल्टा ही सूझता है। खैर, अभी तो इसको लेकर महंत जी के यहाँ चलना है।" छैलबिहारी रुआँसा हो गया, "पर तुम लोगों ने तो अध्यक्ष जी के यहाँ के लिए कहा था। ये महंत-साधू के यहाँ पुलिस पहुँच गई, तो क्या होगा?" "अबे, तुम रहोगे देहाती भुच्चड़।" भोला समझाने लगा, "अध्यक्ष जी के यहाँ तो फिर भी एक बार पुलिस आ सकती है, पर महंत जी के यहाँ किसकी हिम्मत है। अध्यक्ष जी जैसे बाईस उनकी जेब में है।" महंत जी का आवास एक विशाल मंदिर था। जिसके नीचे की मंजिल में पूजा-पाठ होता था। मंदिर का गर्भगृह था, कीर्तन मंडप था, यज्ञशाला थी और करीब दो दर्जन रिहायशी कोठरियाँ थीं, जिनमें ज्यादातर तीर्थयात्री और मंदिर के सेवक रहते थे। ऊपर की मंजिल महात्मा जी का आवास था और यह भव्य था। कई कमरे वातानुकूलित थे। सभी में रंगीन टी.वी. था। कुछ में वी.सी.आर. भी था। फर्श पर बढ़िया कालीन बिछी हुई, महँगे पर्दे और आरामदेह फर्नीचर। दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरों के अतिरिक्त शेष सितारा होटल जैसा था। ऐसे ही एक कमरे में सरोज, परमू, भोला, छैलबिहारी पहुँचाए गए, तो आनंदातिरेक और आश्चर्य के कारण उनकी वाणी मूक हो चली। उनमें से हर कोई कमरे को देखता, फिर अपने लोगों को देखने लगता था। जैसे वे परस्पर एक-दूसरे के भाग्य की सराहना कर रहे हों। वे विभोर थे। उन्हें कक्ष सुखद सपना लग रहा था। वह खड़े ही थे, बैठ नहीं रहे थे कि सपना टूट न जाए. सरोज चमत्कृत थी। टी.वी. के धारावाहिकों में जैसा कमरा देखा करती थी, वैसा ही था यह। वह अपनी किस्मत को सराह रही थी और भगवान को धन्यवाद दे रही थी कि छैलबिहारी जैसा काबिल वर मिला उसको, जिसके इतनी पहुँचवाले दोस्त थे। उसने प्यार से छैलबिहारी को देखा। उसकी चितवन में प्यार, प्रशंसा, धन्यवाद, शुभकामना आदि कई तत्व शामिल थे। एक क्षण के लिए उसके मन में यह ख्याल भी कौंधा कि बेचारा मेरे लिए इतना आतुर है, तो क्यों न आज ही खुद को समर्पित करके इसे खुश कर दूँ। आखिर कल तो शादी हो ही जाएगी। पर यह ख्याल क्षणों में ही था। जल्दी ही वह चौंककर सिहर उठी और सामान्य हो गई. छैलबिहारी बीड़ी निकालकर सुलगाने लगा तो परमू ने हाथ के इशारे से मना किया और भोला ने बताया, "ये ए.सी. कमरा है। इसमें बीड़ी-सिगरेट पीना मना है। चलो बाहर चलकर पीते हैं।" बाहर नाक से धुँआ उगलते हुए वे तीनों सोचने लगे थे कुछ। थोड़ी देर बाद परमू ने भोला से पूछा, "टाइम क्या हुआ?" "दस बजे हैं।" भोला ने बताया। परमू ने अपनी सिगरेट को बुझा दिया, "तो दोस्तो! नीचे ही मंदिर है। चलो दोनों की शादी वहीं करा देते हैं।" भोला बोला, "ठीक है, पर पहले पता कर लिया जाए कि इतनी रात में शादी हो पाएगी या नहीं।" "अरे, करना क्या है।" छैलबिहारी उत्साह में आ गया, "उसकी माँग में सिंदूर लगा दूँगा और माला वह पहना देगी, एक मैं उसको पहना दूँगा। फेरे और मंत्र-वंत्र के चक्कर में न पड़ना है, भोला भइया।" मगर जब वह भीतर आए, तो योजना गड्डमड्ड हो गई, क्योंकि फोन की घंटी बजने लगी थी। परमू ने फोन उठाया, तो उधर अध्यक्ष जी थे। कह रहे थे, "साले, तुम लोग आज कोई हरकत न करना, वरना महंत जी तुम लोगों की लाशें बिछा देंगे। इसके लिए खुद मुझको उनसे मिलकर परमीशन दिलानी होगी।" सुबह होने पर परमू ने दिशा-निर्देश हेतु अध्यक्ष जी को फोन मिलाया और विनयपूर्वक आवेदन किया, "बालिग प्रमाण-पत्र का झमेला यदि छोड़ दिया जाए, तो कोई खास नुकसान हो जाएगा क्या?" इस पर अध्यक्ष जी ने उसे बहन की गाली दी और डाँटा, "मरना चाहते हो, तो मरो! अरे, सर्टीफिकेट रहेगा, तो काटेगा नहीं। मान लो, बाद में वह ससुरी कोर्ट चली गई तुम सबके खिलाफ। तब यही कहोगे न, वह छैलबिहारी की ब्याहता है और प्रस्तुत साक्ष्य बलात्कार के नहीं, छैलबिहारी द्वारा उसके पति की हैसियत से किए गए सहवास के हैं और तुम सब बेगुनाह हो।" "हमको मालूम नहीं था कि इसमें इतना लफड़ा होगा, कहाँ फँसे हम। वैसे अध्यक्ष जी, आपसे कह रहा हूँ कि कार्यक्रम करने के बाद उसको मार डालें या कलकत्ता, बंबई में रंडी के चकले में छोड़ आएँ तो हर्ज है?" "साले, जो कह रहा हूँ, उसको करो। ग्यारह बजे कचहरी पहुँचो डी.एम. ऑफिस के सामने।" "मगर अध्यक्ष जी, कचहरी में हमारे गाँव-ज्वार के लोग भी आए होंगे। बड़ा खतरा है वहाँ। कहीं धर न लिए जाएँ।" वह बड़बड़ाया, "एक छोकरी के झमेले में कहाँ फँस गए, भगवान!" अध्यक्ष जी का दिमाग भन्ना गया। फोन पर ही चिल्लाए, "रोओ मत छिनरो, गाड़ी भेज रहे हैं। उसमें बैठ के पहले मेरे यहाँ आ जाओ." लगभग दो घंटे बाद कार अध्यक्ष जी के बँगले के मैदान में खड़ी थी। अध्यक्ष जी लोगों से घिरे हुए चलते जा रहे थे। कार के भीतर बैठी सरोज के मुँह से निकल गया, "वही अध्यक्ष जी हैं न।" तीनों चौंक पड़े, "तुमको कैसे मालूम?" "इलेक्शन में उनकी फोटोवाले पोस्टर जो लगे थे गाँव में, हमारे कॉलेज की दीवारों पर। हमारे बाबू-भइया सब इनकी ही पार्टी को वोट दिए थे।" अनेक लोग अध्यक्ष जी का पैर छू रहे थे। पुलिस का एक बड़ा अधिकारी, दो वकील भी अपनी वर्दियों में अध्यक्ष जी के चरणों में झुक रहे थे। इस दृश्य को देखकर सरोज कृत-कृत्य हो रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि वह सुरक्षित हाथों में पहुँच गई है। उसने बगल में बैठे छैलबिहारी के कंधे पर सिर रख दिया। उसके केश छैलबिहारी के चेहरे को स्पर्श करने लगे। अध्यक्ष जी अपनी कार में आकर बैठे। उनकी कार के पीछे इन लोगों की कार चल दी। कचहरी पहुँचने पर दोनों कारें रुकीं और सब बाहर निकले। सबसे अंत में सरोज निकली। अध्यक्ष जी ने उसे देखा, तो भौंचक्का रह गए. उनके मन में विचार उभरा, "यह तो पूरी अप्सरा है।" उन्होंने बिना वक्त गँवाए सरोज के चेहरे को, वक्ष को, कटि को, जंघाओं को देखा और सोचा, ' बला की खूबसूरत यह, कहाँ चूतियों के चक्कर में फँसी है। इसके लिए सर्वथा उपयुक्त तो मैं ही हूँ। " वह उत्साह में आ गए थे। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्होंने जल्द ही सरोज का बालिग प्रमाण-पत्र बनवा दिया। बोले, "चलो, झटपट शादी भी संपन्न कराओ." आखिर सरोज का प्रतीक्षित अवसर आ ही गया। लाल जोड़ा, जेवर, मेंहदी वगैरह से वह वंचित रही थी, किंतु हाथों में उसने चूड़ियाँ खूब पहनी थीं। चटख लाल रंग की साड़ी पहनकर उसने बड़ा-सा गोल जूड़ा बनाया था। उसके मस्तक पर गोल बिंदी थी और माँग में सिंदूर भरा था। मंदिर के कमरे में बैठी वह बार-बार दरवाजे को देखने लगती थी कि छैलबिहारी आया क्या! और जब दरवाजा खुला, तो छैलबिहारी नहीं, अध्यक्ष जी अंदर आए. वह पान खाए हुए थे। सरोज के पास बैठकर उन्होंने हँसते हुए रोमांटिक कथन किया, "देखो, मेरा मुँह कितना लाल हो गया है।" उन्होंने अपनी जीभ निकालकर अंदर की, "जिसको पान बहुत चढ़ता है, जानती हो, औरतें उसको बहुत चाहती हैं।" वह थोड़ी देर सरोज को देखते रहे, फिर बात आगे बढ़ाई, "तुम भी मुझको बहुत चाहती हो न?" सरोज चौंक पड़ी और बिस्तर से उतरकर खड़ी हो गई. अध्यक्ष जी ने कहा, "बैठो... बैठो न। हमारी बात का बुरा नहीं माना जाता। हम बहुत बड़े आदमी हैं। कोई ठीक नहीं कि मुझे किसी दिन प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया जाए. मुख्यमंत्री लॉबी का वरदहस्त है मुझ पर।" इतना कह चुकने के बाद उन्होंने अत्यंत इत्मीनान से सरोज के कंधों को पकड़ा। तभी दरवाजे पर थपथपाने की आवाजें आईं। गोरखनाथ ने उठकर किवाड़ खोले। महंत जी कमरे में आए. सरोज ने विपत्ति की घड़ी में देवदूत की तरह पहुँचे आगंतुक को देखा। वह लँगोट पहने थे और सोने की मूठवाली छड़ी लिए हुए खड़े थे। उनकी दाढ़ी उनके ढेर सारा निकल आए पेट पर टिकी हुई थी। जटा-जूट खिचड़ी थे। लँगोट मात्र पहने हुए उनका व्यक्तित्व भीषण रूप से रौद्र लग रहा था। चारों तरफ देखने के बाद वह अध्यक्ष जी से बोले, "व्यवस्था टनाटन्न है न?" "सब आपकी कृपा है, प्रभु!" "बाहर हम हैं, चिंता मत करिएगा।" "आपके किले में हम, क्यों चिंता करें भगवन्।" महंत जी ने हँसकर आँख मारी, "मौज करो।" और वह संस्कृत का कोई श्लोक कहते हुए बाहर निकल गए. मौका देखकर सरोज ने भी बाहर निकलना चाहा। वह बीच दरवाजे में ही थी कि गोरखनाथ ने पीछे से उसके बालों को पकड़ लिया और खींचकर उसे बिस्तर पर पटक दिया, "साली चवन्नी छाप रंडी, चली है हमसे नखरे करने।" सरोज ने उसके पैर पकड़ लिए, "मुझ पर दया करिए. मैं आपके ही आदमी छैलबिहारी की ब्याहता हूँ।" वह हँसने लगे, "तुम तो बड़ी भोली लग रही हो।" उन्होंने फोन उठाया। पाँच मिनट बाद ही छैलबिहारी, भोला और परमू कमरे में थे। छैलबिहारी ने पुचकारा, "नाहक रो रही है। एक बार की ही तो बात है। फिर रहना मेरे साथ।" सरोज ने इतना दुख, घृणा, जुगुप्सा और क्रोध कभी नहीं अनुभव किया था। वह फूट-फूटकर रोने लगी। रोते हुए ही उसने छैलबिहारी को गाली दी और चिल्लाने लगी। परमू ने लपककर उसका मुँह बंद कर दिया, " चुप्प छिनाल। परमू के हाथ में पिस्तौल एवं फालवाला चाकू था, जिसकी नोक सरोज की सुडौल गर्दन पर हल्की-सी दबी हुई थी। रो वह अभी भी रही थी, लेकिन उसके रुदन की आवाज बदल गई थी। कुछ-कुछ घिघियाने जैसी. थोड़ी-सी मर्दानी आवाज। ऐसी ध्वनियाँ उसके कंठ से पहले कभी नहीं निकली थीं। उसने उसी तरह रोते और घिघियाते हुए आँखें उठाकर छैलबिहारी को देखा। छैलबिहारी भाँप न सका कि सरोज की आँखों में क्या था-नफरत, लाचारी, मदद की पुकार या अन्य कुछ। वह बड़े प्यार से बोला, "तुमने तो देखी थी नौटंकी। द्रौपदी के पाँच पति थे कि नहीं। आँय! फिर तुम्हारे तो चार ही होंगे। दूसरे, जब राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं, तो तुम्हारे चार पति क्यों नहीं? यही समझ लो कि अध्यक्ष जी तुम्हारे सबसे बड़े पति हैं..." सरोज ने दुबारा गोरखनाथ के पाँव पकड़ लिए और जोर-जोर से रोने लगी, "ऐसा जुल्म मत करिए हुजूर... मुझे जाने दें मालिक... मैं शादीशुदा हूँ, रहम करिए." भोला ने पिस्तौल सरोज की तरफ तान दी। सरोज चिल्लाने लगी, "मारो...मुझे मार डालो..." "तू अनायास ताव खा रही है।" छैलबिहारी ने उसे शांत करने का एक प्रयत्न और किया, "कुंती ने नहीं सूर्य से सम्बंध बनाया था। अहल्या को नहीं इंद्र ने हासिल किया था। फिर सबसे बड़ी बात, तुम्हारा तो पति तुमको ऐसा करने की आज्ञा दे रहा है।" सरोज की आँखों में आँसू और खून एक साथ उतरे, वह छैलबिहारी की तरफ झपटी. परमू का चाकू उसकी गर्दन में हल्का-सा धँस गया, खून छलक आया। भोला सरोज के पीछे गया और उसकी बाँहें मरोड़कर मुश्कें कस दीं। छैलबिहारी आवेश में गरजा, " अध्यक्ष जी, इस हरामजादी के हाथ-पाँव बाँध दें। श्याम नारायण को जब पूर्वलिखित वास्तविकता, सूचनाओं और जानकारियों की शक्ल में इधर-उधर से, अपने और पराए स्रोतों से उपलब्ध हुई, तो उनके हृदय में दुख तथा गुस्से का तेज जलजला पैदा हुआ। उनके भीतर सरोज के लिए हमदर्दी का समुद्र उफनने लगा। पराक्रम दिखाने की इच्छा से उनके दाँत किटकिटाने लगे। उन्होंने निश्चय किया-"मैं गोरखनाथ की ईंट से ईंट बजा दूँगा।" वह यह भी बुदबुदाए, "जब तक मैं गोरखनाथ को जेल नहीं भिजवा दूँगा, चैन की साँस हराम है। मैं आकाश-पाताल एक कर दूँगा।" आकाश-पाताल एक करने के लिए यानी दौड़-धूप करने के लिए, यहाँ-वहाँ संपर्क करने के लिए जेब में पैसे होने चाहिए थे, जबकि विष्णु दत्त से मिले रुपए भी अब समाप्त हो चुके थे। फिर भी उन्होंने धनाभाव की परवाह नहीं की और प्रदेश की राजधानी जानेवाली ट्रेन पर बेटिकट सवार हो गए. जैसा कि कई बार हुआ था, बेटिकट होते हुए भी वह सही-सलामत सुरक्षित अपने वांछित रेलवे स्टेशन लखनऊ पहुँच गए. स्टेशन से बाहर आ जाने पर उन्हें महसूस हुआ कि बड़ी तेज भूख लगी है। हल्की प्यास भी लगी थी, लेकिन एक तो उनकी जेब में मुद्रा का अभाव था, दूसरे-उन पर धुन सवार थी। वह बिना कुछ खाए-कुछ पिए पैदल ही चल पड़े। चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित पार्टी ऑफिस में जब वह प्रदेश सचिव के कमरे में घुसे, तो हाँफ रहे थे। सचिव उस वक्त खटिया पर लेटे चाय सुड़क रहे थे। चाय खत्म करके वह श्याम नारायण की तरफ मुखातिब होकर बोले, "क्या बात है, बहुत परेशान दिख रहे हो।" श्याम नारायण के फेफड़ों को अब थोड़ा आराम मिल चुका था, फिर भी श्याम नारायण उत्तेजित थे। उन्होंने प्रदेश सचिव के अधिक निकट होते हुए कहा, "आंदोलन का बहुत बड़ा मुद्दा लेकर आया हूँ।" उन्होंने सरोज पांडेय के साथ घटित हुए अत्याचार की पूरी कथा कही और निवेदन किया, "सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष गोरखनाथ के विरुद्ध हमें प्रदेश-व्यापी आंदोलन छेड़ना चाहिए. इससे हम सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ जनसंघर्ष खड़ा कर सकेंगे, जिसमें जनता पूरी तरह लामबंद होगी।" सचिव दियासलाई की तीली से दाँत खोदने लगे, जिससे यह पता चलता था कि चाय पीने के पहले उन्होंने कुछ खाया भी था। दाँत से कुछ निकाल चुकने के बाद वह सोचते रहे, फिर रुक-रुककर कहने लगे, "इस मुद्दे पर आंदोलन नहीं खड़ा किया जा सकता। आखिर इसका जनता की बुनियादी समस्याओं से क्या वास्ता है। सरोज के साथ बलात्कार का हादसा कोई राजनीतिक संदर्भ भी नहीं रखता है। एक समझदार कार्यकर्ता होने के नाते आपको मालूम होना चाहिए कि आर्थिक या बहुत अहम राजनीतिक मसलों पर ही बड़ी लड़ाइयाँ लड़ी जाती हैं, जबकि सरोज पांडेय के प्रसंग में दोनों ही बातें नहीं हैं।" श्याम नारायण प्रत्युत्तर में कुछ कहते कि सचिव अपनी पार्टी का मुखपत्र उनके और अपने सामने करके पढ़ने लगे। श्याम नारायण क्या करते? पार्टी ऑफिस के बाहर निकल आए. बाहर परिसर में नीम का एक पुराना पेड़ था, उसी के नीचे खड़े हो गए, सोचने लगे कि अब क्या किया जाए. उनकी चेतना में पुनः सरोज आकर सिसकने लगी। वह विह्वल हो गए. उनकी तीव्र इच्छा हो रही थी कि उनकी कलाई पर सरोज ने जहाँ दाँत गड़ाया था, उस स्थान को कुचल डालें। उनमें जोर की हिलोर उठी कि सरोज के चरणों पर गिरकर रोएँ। खैर, किसी तरह सँभाला, वैसे, उनको शर्म भी आ रही थी कि राजनीतिक व्यक्ति होने के बावजूद वह अभी तक आँसुओं को नहीं जीत सके थे। बीड़ी जलाकर वह विचारमग्न हो गए. विचार करते-करते इस उधेड़बुन में उलझ गए कि सरोज को कैसे आजाद कराएँ। पार्टी सचिव ने तो फलसफा बघार दिया। अचानक उनके दिमाग में मीरा यादव का नाम कौंधा। वह उनके ही जिले की थीं और प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी से विधान परिषद् की सदस्य थीं। श्याम नारायण उनसे कभी न चुकानेवाला उधार तथा संगठन-कार्य हेतु चंदा पहले कई बार प्राप्त कर चुके थे। उन्हें उम्मीद की अच्छी-खासी किरणें दिखीं, क्योंकि वह गोरखनाथ की पार्टी को तगड़ी टक्कर देनेवाली विपक्षी पार्टी की नेता थीं, दूसरे औरत थीं। श्याम नारायण का विश्वास मजबूत हुआ कि मीरा यादव सरोज की मदद के लिए निश्चय ही आगे बढ़ेंगी और संघर्ष में उनका साथ देंगी। अब जाकर उन्हें भयंकर भूख महसूस हुई और प्यास भी। वह दुखी हुए कि वह पार्टी के जुझारू कार्यकर्ता हैं, इतनी दूर से चलकर आए हैं और पार्टी के नेता ने एक गिलास पानी के लिए भी नहीं पूछा। फिर यह दलील देकर अपने को तसल्ली दी कि उनको क्या पता रहा होगा कि मुझे प्यास लगी है, कौन प्रचंड गर्मी का सीजन है। उन्होंने समय बर्बाद नहीं किया, मीरा यादव के बँगले की तरफ चल पड़े, वह सड़क पर बीच-बीच में घड़ीवालों से टाइम पूछते जाते थे, चलते जाते थे। अंततः 45 मिनट की यात्रा के बाद मीरा यादव के सरकारी आवास में नमूदार हुए. उस समय मीरा यादव अपनी पार्टी की मुखिया के यहाँ हाजिरी देने गई थीं। इन दिनों मुसीबत में थीं, दो महीने बाद उनकी विधान परिषद् की सदस्यता का कार्यकाल समाप्त होनेवाला था, जबकि राजनीति के गलियारों में चर्चा थी कि मुखिया इस बार उनको प्रत्याशी नहीं बनाएँगे। उनकी जगह पर एक मशहूर बिल्डर को टिकट देंगे। इस बात से मीरा यादव की नींद उड़ गई थी और वह रोज मुखिया के दरबार में हाजिरी देने जाती थीं। यहाँ तक कि मुखिया न रहते, तब भी। आज भी ऐसा था। मुखिया नहीं थे, तब भी मीरा यादव उनकी ड्योढ़ी पर मत्था टेकने गई थीं। श्याम नारायण को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। मीरा यादव आ गईं। वह काफी थकी हुई दिख रही थीं। श्याम नारायण को देखकर जल-भुन गईं, अब यह भुक्खड़ सौ-पचास लिए बिना पिंड नहीं छोड़ेगा। उन्होंने बेरुखी से श्याम नारायण को देखा, मगर वह इस प्रकार के अनादर के अभ्यस्त थे। परवाह नहीं करते हुए बोले, "आपसे सहयोग की ज़रूरत है।" "हो नहीं सकेगा। मैं भूल गई थी। आज शनिवार है, बारह बजे ही बैंक बंद हो गया था। मैं पैसा नहीं निकाल सकी।" "मैं पैसे नहीं माँग रहा हूँ, वह तो कल ले लूँगा। दरअसल मैं आपके पास गोरखनाथ के खिलाफ आंदोलन छेड़ने में मदद के लिए आया हूँ।" "क्या किया गोरखनाथ ने?" "बलात्कार! मेरी रिश्तेदार सरोज के साथ गोरखनाथ और उसके तीन साथियों ने बलात्कार किया है। बल्कि दो महीनों से उसके साथ बलात्कार किया जा रहा है। वह अभी भी उनके कब्जे में है।" मीरा यादव की बाँछें खिल गईं। उनके बुझे-बुझे चेहरे पर अब प्रसन्नता की तरंगें नाच-कूद रही थीं, "पर आपके पास जानकारी पक्की है न?" श्याम नारायण आहत हुए. अत्यंत आर्त स्वर में उन्होंने कहा, "इतने दिनों से जानकारी ही तो इकट्ठी कर रहा हूँ। खाने-पीने-सोने की चिंता नहीं की, जगह-जगह की खाक छानता रहा। अब तो मुझे यह भी मालूम हो गया है कि कहाँ पर कैद की गई है सरोज।" "कहाँ पर?" चौंक पड़ी मीरा यादव। "वह जौनपुर के खैराबाद मुहल्ले के 1426 नंबर मकान में छैलबिहारी नाम के आदमी के साथ है। गोरखनाथ के दूसरे दो आदमी परमू और भोला बाहर गए हैं। ऐसी सूचना है कि वह सरोज की बिक्री का सौदा करने गए हैं। ऐसी भी आशंका प्रकट की जा रही है कि यदि वे सरोज को बेच न पाए, तो उसका कत्ल कर देंगे।" "तो आप गए क्यों नहीं जौनपुर उसे छुड़ाने के लिए?" "गया था, पर लौट आया। वहाँ गोरखनाथ के पंद्रह-बीस गुंडे असलहों के साथ पहरा दे रहे हैं।" "पंद्रह-बीस।" मीरा यादव मुस्कराई, फिर श्याम नारायण से कहा, "अच्छा, आप कुछ खाइए-पीजिए और फिर चले जाइए सरोज के गाँव। वहाँ से उसके पिता वगैरह को लेकर आइए. तब तक हम चलते हैं जौनपुर और देखते हैं, जोर कितना गोरखनाथ के बाजुओं में है।" खाद्य सामग्री आई, तो श्याम नारायण टूट पड़े। वह कुछ बोल भी रहे थे। वह खाते हुए बोल रहे थे कि बोलते हुए खा रहे थे, ठीक-ठीक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था। इस संदर्भ में निश्चयपूर्वक कहा जा सकता था, तो यही कि उनका बोलना और खाना दोनों ही बेहद मार्मिक था। वह पानी पीने लगे, तो लगा कि जैसे शंकर जी गरल पी रहे हैं। वह कुर्ते की बाँह से मुँह पोंछकर जाने के लिए खड़े हुए, तो मीरा यादव ने उनको एक हजार रुपए दिए, "रख लीजिए, काम आएँगे।" प्रदेश की राजधानी से प्रकाशित होनेवाले समाचार-पत्र 'लोक-जागरण' में संवाददाता ललित जोशी के हवाले से विस्फोटक समाचार छपा कि सत्तारूढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोरखनाथ ने जनपद हरदोई के थाना श्याम सराय की किशोरी सरोज पांडेय का अपहरण किया और करीब दो माह तक बंधक बनाकर उसके साथ अपने तीन साथियों सहित बलात्कार किया। इस संदर्भ में विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त अदालत में दिए गए सरोज पांडेय के 164 के बयान का भी हवाला था, जिसमें उसने उपर्युक्त तथ्य न्यायाधीश के समक्ष स्वीकार किए थे। वैसे, संवाददाता सरोज पांडेय से मिल चुका था और उसने स्वयं सरोज से बातचीत की थी। 1. सरोज पांडेय-सरोज पांडेय के अनुसार गोरखनाथ, दियरा चौकी के दरोगा एम.पी. सिंह, छैलबिहारी, परमू और भोला ने उसके साथ बलात्कार किया। सरोज ने बताया, "मैं गोरखनाथ के सामने रोई, गिड़गिड़ाई, चीखी, चिल्लाई, उनके पैरों पर गिर पड़ी कि मुझे छोड़ दिया जाए, मगर वह गुस्सा होकर यही कहते कि चुप हो जाओ, नहीं तो गोली मार दूँगा।" 2. दूसरा वक्तव्य गोरखनाथ का था, जिनका कथन था, "यह विरोधी पार्टियों का घिनौना षड्यंत्र है। जनता के बीच तथा मेरी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उन्होंने यह जाल बुना है। इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। सरोज पांडेय अन्य कुछ नहीं, बस राष्ट्रप्रेमी शक्तियों से घबरा जानेवाली ताकतों के हाथों खेलनेवाली कठपुतली है।" तीसरे वक्तव्य पर आने से पूर्व प्रदेश के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति मुख्यमंत्री के विचारों से अवगत होना दिलचस्प होगा। मुख्यमंत्री ने विचार व्यक्त किया, "मुझे इस खबर पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा है। आदर्श व्यक्तित्व के धनी गोरखनाथ के बारे में ऐसा कल्पना में भी नहीं सोचा जा सकता। वैसे, मुख्यमंत्री होने के नाते सारे मामले की जाँच-पड़ताल के बाद ही कोई मत दे सकूँगा।" मुख्यमंत्री के उक्त कथन का भाष्य यह किया जा रहा था कि वह गोरखनाथ पर पड़ी वर्तमान विपत्ति से खुश हैं, क्योंकि उद्दंड-आक्रामक शैली के चलते गोरखनाथ की लोकप्रियता बढ़ी थी और जैसा कि चर्चा में था, केंद्रीय नेतृत्व में मुख्यमंत्री-विरोधी लॉबी गोरखनाथ को उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाने की गुपचुप मुहिम चलाए हुए थी। अतः मुख्यमंत्री के लिए यह वरदान ही था कि उनके प्रतिद्वंद्वी गोरखनाथ का राजनीतिक भविष्य सरोज पांडेय के साथ बलात्कार के आरोप में फँसकर बर्बाद हो रहा था। वक्तव्य देनेवाली अगली शख्सियत मीरा यादव केंद्र बिंदु बनी थीं। क्योंकि वही सरोज को आजाद कराकर ले आई थीं और सरोज इस समय राजधानी स्थित उनके ही आवास में ठहरी थी। मीरा यादव का कहना था, "गोरखनाथ बलात्कारी हैं, उनको इस जघन्य कृत्य के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उनकी इस करतूत पर उनकी पार्टी की खामोशी बताती है कि इस कांड में उसकी भी मिलीभगत है।" अखबार में 'मीरा यादव की भीष्म प्रतिज्ञा' सुर्खी के अंतर्गत यह भी छपा था कि मीरा यादव ने प्रतिज्ञा की है कि सरोज पांडेय के न्याय की लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ेंगी और अपराधियों को उनके गुनाह की सजा दिलाकर ही मानेंगी। उसी सुबह शहर के प्रमुख मार्गों, विशेष रूप से विधानसभा तथा उसके आस-पास के क्षेत्रों में दीवारों पर नारे और पोस्टर चिपके हुए देखे गए. उनकी इबारत थी, 'गोरखनाथ बलात्कारी है,' 'गोरखनाथ को फाँसी दो! फाँसी दो!' 'नारी का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान,' 'सरोज तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं।' अखबार 'लोक जागरण' की प्रतियाँ दो घंटे के भीतर ही गायब हो गई थीं। शहर में ढेर सारे लोग 'लोक जागरण' को खोज रहे थे। उसका संवाददाता ललित जोशी अन्य अखबारों के संवाददाताओं को फोन करके कहता, "बॉस, कैसी लगी बलात्कारवाली रिपोर्ट? मैं गोरखनाथ को जेल भिजवाकर मानूँगा। उसकी राजनीति के ताबूत में आखिरी कील सिद्ध होगी मेरी रिपोर्ट।" दरअसल वह अपना रोब गालिब करने के साथ-साथ अन्य संवाददाताओं को चिढ़ा रहा था कि वे और उनके अखबार नाकारा हैं, जो इस खबर को नहीं छाप सके. इससे निश्चय ही वे स्वयं को बेइज्जत अनुभव कर रहे थे। कुछ इसलिए भी कि उनके अपने संपादक ने आज सुबह की मीटिंग में 'लोक-जागरण' की प्रति पटककर तमतमाते हुए फटकारा था, "आप लोग क्या कर रहे थे कल।" एक संपादक तो इतना क्रुद्ध हो गया कि कहने लगा, "प्रेस क्लब में दारू पीने और मुर्गे की टाँग ठूँसने से फुर्सत ही नहीं मिलेगी, खबर क्या लिखेंगे।" जिन्हें इस प्रकरण पर फॉलोअप की जिम्मेदारी सौंपी गई, वे झुँझलाए हुए संपादक के केबिन से निकले और विधान परिषद् की सदस्य मीरा यादव को फोन मिला दिया, "क्या विधायिका जी, यही करेंगी आप। आखिर हमको आपने यह खबर क्यों नहीं दी।" "बुरा मत मानिए... बुरा मत मानिए. दरअसल हुआ यह कि कल जब सरोज पांडेय हमारे घर पहुँची, तो किसी दूसरे काम से आए ललित जोशी पहले से मौजूद थे, मगर आप फिक्र मत करें, आपको भी मिलेगा मैटर। आज शाम को मेरे घर पर सरोज की प्रेस कॉन्फ्रेंस है, आपको ज़रूर पहुँचना है। बहुत धमाकेदार मसाला मिलेगा।" "पर मुझको अलग से कुछ स्पेशल भी दीजिए." "मिलेगा... सब मिलेगा, पर पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइए न!" शाम को मीरा यादव के घर का ड्राइंग-रूम प्रेस कॉन्फ्रेस के लिए तैयार था। एक तरफ दो कुर्सियाँ मीरा यादव और सरोज के लिए थीं। सामने पत्रकारों के लिए बैठने का इंतजाम था। कुछ पत्रकार आ चुके थे। वे बाहर खड़े होकर मीरा यादव के साथ अनौपचारिक वार्ता कर रहे थे। इस तरह थोड़ी देर बीता होगा कि उनमें से कई ने घड़ी देखते हुए कहा, "अब शुरू कीजिए." "अभी आपके दो-चार साथी नहीं आए हैं। उनका थोड़ा इंतजार कर लिया जाए न!" "अच्छा, तब तक मोहतरमा को बुलाइए, उनका दीदार तो करें।" मीरा यादव बाई आँख दबाकर वीभत्स तरीके से हँसने लगीं, "जरा सब्र करें, सब्र करें..." वह भीतर चली गईं। जब कुछ और पत्रकार भी आ गए, तब मीरा यादव बाहर निकलीं। इस बार वह अकेली नहीं थीं, साथ में सरोज भी थी। सरोज हल्के हरे रंग का सलवार-कुर्ता पहनी हुई थी। दुपट्टा सफेद था। उसके लंबे घने काले बाल तेल पुते थे। उसका शरीर सूजा हुआ था। सीप की तरह सुंदर-विशाल उसकी आँखें लाल थीं और छुपती फिर रही थीं। गौर वर्ण के उसके चेहरे पर जगह-जगह आँसुओं के धब्बे थे। मीरा यादव ने उसे एक कुर्सी पर बैठाया और बगल में स्वयं बैठ गईं। वह सामने बैठे पत्रकारों को सम्बोधित करने लगीं। वह बतलाने लगीं कि किस प्रकार हरदोई जनपद के गाँव परसपट्टी से सरोज अपहृत की गई. कहाँ-कहाँ ले जाई गई. वहाँ उसके साथ क्या-क्या सलूक हुआ। बोलते-बोलते मीरा यादव ने कई बार आँसू पोंछे। दो-चार बार नाक सुड़की। सरोज का सिर सहलाकर 'बेचारी,' 'अभागिन' कहा। भाषण समाप्त करने के बाद नौकर को नाश्ता-पानी ले आने का इशारा किया। नाश्ते की व्यवस्था एक तरह से इंटरवल थी, जिसके बाद पत्रकार-वार्ता को क्लाइमेक्स की तरफ आगे बढ़ना था। पत्रकार नाश्ता समाप्त करने के बाद मुँह पोंछकर तैयार हुए. मीरा यादव ने सरोज की पीठ पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाया। एक पत्रकार ने पूछा, "सबसे पहली बार गोरखनाथ ने आपके साथ बलात्कार कब और कहाँ किया?" सरोज का चेहरा जैसे रास्ता भटक गया। कुर्सी के हत्थों पर पड़े उसके हाथ इस तरह काँपने लगे, जैसे थाप दे रहे हों। उसके होंठ बोलने के लिए खुलते, लेकिन आवाज निकलने के पहले ही ऐंठ जाते। पत्रकार ने अपना प्रश्न दुबारा दागा। मीरा यादव सरोज को ढ़ाँढ़स देने लगीं, "घबराओ मत सरोज। हिम्मत करके सारी बातें बता दो। डॉक्टर और पत्रकार से बात छुपाने पर अपना ही नुकसान होता है... हाँ... सरोज..." "28 जनवरी को गोरखनाथ ने पहली बार मेरे साथ गंदा काम किया था, अयोध्या के एक मंदिर की ऊपरवाली मंजिल के कमरे में। यह किसी बहुत बड़े महंत का डेरा है। महंत की दाढ़ी उनके पेट पर लटकी रहती है।" "आपने गोरखनाथ जी को कैसे पहचाना? कैसे जाना कि वह गोरखनाथ ही हैं।" "हम उनको पहचानते थे अच्छी तरह से। इलेक्शन में उनकी फोटोवाले पोस्टर हमारे गाँव में लगे थे। एक पोस्टर तो हमारे घर की दीवार पर भी चिपका था। बाबू ने, अम्मा ने... भाभी ने उनकी पार्टी को ही वोट दिया था... भइया भी उनको वोट देने गए थे। पर उनका वोट पहले ही पड़ गया था... हम तभी से गोरखनाथ को पहचानते थे।" "आपने कुछ और लोगों पर भी बलात्कार का आरोप लगाया है और कहा है कि वे गोरखनाथ के खास आदमी हैं। इसका क्या कोई सबूत है आपके पास?" "हाँ, परमू और भोला ने भी मेरे साथ बदमाशी की... ये दोनों पहले मेरे मुँह में कपड़ा ठूँस देते थे। ये गोरखनाथ के खास आदमी हैं-यह इससे पता लगा कि यही हमको ले आए गोरखनाथ के यहाँ। इसके अलावा ये इलेक्शन में गोरखनाथ की पार्टी की पर्ची काट रहे थे।" "और दरोगा एम.पी. सिंह के बारे में क्या कहना है आपका?" "वो तो मुझको मारे भी थे... बाल पकड़कर थाने में घसीटा था, फिर बंदूक के कुंदे से ठेलते हुए भीतर ले गए और गंदा काम किया। अगर वह गोरखनाथ के आदमी न होते, तो मुझको बचाते, लेकिन उन्होंने तो फिर हमें उन्हीं जालिमों के हवाले कर दिया था... उन्हीं भोला, परमू, छलिया के हवाले।" "हाँ, छैलबिहारी। उसके बारे में कुछ नहीं बताया आपने?" सरोज चुप रही। उसे लगा, उसके भीतर बहुत सारी साँस भर गई है। वह साँस को बाहर नहीं निकाल पा रही है। मत्थे पर पसीना उभरने लगा था। पत्रकार दहाड़ा, "मेरा सवाल है कि छैलबिहारी के बारे में आपके क्या अनुभव हैं?" सरोज की पलकें फड़फड़ाईं। वह चिल्ला पड़ी, "हाँ, छैलबिहारी ने भी मेरे साथ बलात्कार किया है..." वह फूट-फूटकर रोने लगी। रोते हुए ही भीतर चली गई. मीरा यादव ने हाथ जोड़े, "आज के लिए बस, इतना ही।" एक पत्रकार ने नाराजगी प्रकट की, "पर हमको डिटेल्स नहीं मिले अभी।" "सब मिलेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस का सिलसिला तो अभी आगे भी चलना है।" मीरा यादव पत्रकारों के बीच में आ गईं और धीरे-धीरे चलने लगीं, कमरे से बाहर निकलने पर एक पत्रकार ने कहा, "पर आप पत्रकारों की सेवा करना नहीं जानती हैं। ये शाम-रात का वक्त और आपने बस, समोसा-कॉफी से टरका दिया।" "तो जो चाहिए, बताइए." मीरा यादव हौसले से बोलीं। "जो चाहेंगे, आप देंगी?" यह एक समाचार एजेन्सी का वरिष्ठ संवाददाता था। "हाँ, बिल्कुल दूँगी।" वह मुस्कराई, "पर सरोज पांडेय को नहीं दूँगी।" सभी हँस पड़े। एक पाक्षिक का ब्यूरो चीफ हँसते हुए बोला, "बहुत खलीफा हैं आप विधायिका जी." मीरा यादव के यहाँ उनकी पार्टी के मुखिया के निजी सचिव गोवर्धन लाल का फोन आया, "नेताजी ने तुरंत बुलाया है।" वह खुश हो गईं, "इसी समय का तो मैं इंतजार कर रही थी।" उन्होंने चटपट खादी सिल्क की साड़ी पहन ली और बाहर निकलने से पहले सरोज से मिलने दूसरे कमरे में चली गईं। वहाँ बिस्तर पर लेटी सरोज दुपट्टे से मुँह ढँके रो रही थी। मीरा यादव ने आवाज दी, "सरोज!" सरोज रोती हुई उठी, "मुझको मेरे घर क्यों नहीं भेज रही हैं आप?" "मान लो, तुम घर जाओ और तुम्हें वहाँ घुसने न दिया जाए. घरवाले तुम्हें धक्के देकर खदेड़ दें, तब! आखिर इज्जत लुटा चुकी लड़की का बोझ उठाना आसान है क्या! इसीलिए मैंने तुम्हारे पिताजी को यहीं बुलाया है कि देखूँ, उनका रुख क्या है। मैंने तुमको अपनी छोटी बहन बनाया है, ऐसे कैसे नरक भोगने के लिए वहाँ भेज दूँ।" "पर दीदी, आप खुद चलकर मुझे छोड़ आइए गाँव। वहाँ अगर मेरे अम्मा-बाबू, भइया-भाभी ने मुझे स्वीकार नहीं किया, तो मैं आपके साथ लौट आऊँगी।" "जिंदा बचोगी, तब लौटोगी न। समझती क्या हो, गोरखनाथ और उसके आदमी हाथ में मेंहदी लगाकर बैठे हैं! देखो, तुम बाहर निकली नहीं कि हमला हुआ। तुम्हारे 164 के बयान के बाद गोरखनाथ पगला गया है। उसके गुंडे तुमको ट्रक से कुचलकर मार सकते हैं। बम से उड़ा सकते हैं। चाकू घोंपकर तुम्हारा कत्ल कर सकते हैं। देखो सरोज, यदि ज़िन्दगी की सलामती प्यारी है, तो फिलहाल यहाँ से बाहर निकलने का नाम मत लो।" सरोज के आँसू अभी सूखे नहीं थे कि वह फिर रोने लगी। मीरा यादव ने उसका सिर सहलाया और बाहर आ गईं। ड्राइवर से बोलीं, "नेताजी के यहाँ।" ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट कर दी। गाड़ी के स्पीड पकड़ते ही वह मुस्कराईं, "लगता है, सरोज का तीर निशाने पर लगा है। नेताजी मुझे विधान-परिषद का उम्मीदवार दुबारा बनाने का मन बना चुके हैं शायद। तभी तो खुद फोन कराकर बुलाया है। नहीं तो कहाँ मुलाकात का टाइम पाने के लिए गिड़गिड़ाती रहती थी, लेकिन महोदय के कान पर जूँ नहीं रेंगती थी।" वह हल्का-सा हँस पड़ीं, "अब देखती हूँ उस उद्योगपति और बिल्डर मादर... को।" ड्राइवर ने पीछे मुड़कर देखा, "जी, आपने कुछ कहा।" "अबे, मुझे क्या देख रहा है, सामने देख।" वह बिगड़ उठीं, लेकिन जल्द ही मंद-मंद मुस्कराने लगीं, "यह सरोज भी ससुरी क्या चीज मिली है।" वह उस दिन को धन्यवाद देने लगीं, जब वह सरोज को जौनपुर से लेकर आई थीं। खैराबाद मुहल्ले के मकान नंबर 1426 को उनके आदमियों ने घेर लिया था। वहाँ पहरा दे रहे गोरखनाथ के पक्ष के गुंडों को बुरी तरह मारा गया और भीतर घुस लिया गया था। छैलबिहारी कहीं गया हुआ था। भीतर सरोज सिल पर मसाला पीस रही थी। मीरा यादव उसके पास पहुँची, "घबराओ मत। मैं तुम्हें इस नरक से आजाद कराने आई हूँ। मुझको अपनी बड़ी बहन समझो।" सरोज हड़बड़ाकर खड़ी हो गई थी। वह सुहागिन के बाने में थी, माँग में सिंदूर भरा हुआ था। कलाइयों में गझिन चूड़ियाँ थीं। पैर में मोटी पायलें थीं। मकान में बहुत-से राइफल, रिवॉल्वरवाले लोगों को घुस आया देखकर कि या कोई और बात थी, सरोज को चक्कर आ गया, वह बेहोश होकर गिर पड़ी, लेकिन यह वक्त बर्बाद करने का नहीं था। उसे उठाकर गाड़ी में लाद दिया गया था। फिर तो मीरा यादव का काफिला राजधानी स्थित उनके आवास पर ही आकर रुका था। बाद में होश आने पर सरोज ने बताया था कि लोगों को शक न हो, इसलिए उसे सुहागिन बनाकर छैलबिहारी की बीवी के रूप में रखा गया था। यहीं पर थोड़ी दूर के एक धर्मशाले में परमू और भोला भी छिपे थे, जो अँधेरा होने पर आ जाते थे। वे दोनों तथा छैलबिहारी उसे निचोड़ते रहते रात भर। अब तो वह विरोध भी नहीं करती थी। सरोज ने यह भी बताया था कि महंत जी के मंदिर में वह करीब एक हफ्ता रखी गई थी। उतने दिन उसे गोरखनाथ को सहना पड़ा था। बीच में एक दिन वह मुँह अँधेरे भाग निकली थी। दौड़ते-भागते-छिपते वह किसी तरह थाना पहुँची। उस समय दरोगा एम.पी. सिंह नहा-धोकर अलगनी पर अपनी लँगोट टाँग रहे थे। वह उनके पास जाकर अपनी आप-बीती सुनाने लगी। अभी भी अँधेरा पूरी तरह छँटा नहीं था और वह दरोगा का चेहरा ठीक से देख नहीं पा रही थी। दरोगा उसे भीतर ले जाकर बैठने के लिए बोले और खुद फोन मिलाने लगे। वह गोरखनाथ से बात कर रहे थे। उसी बातचीत में सरोज ने दरोगा का नाम जाना था। रिसीवर रखने के बाद एम.पी. सिंह ने लाइट जलाई और सरोज को देखकर मुस्कराए. उनकी आँखों के भाव को देखकर सरोज डर गई. वह आगे बढ़े तो डरकर बाहर भागी। लेकिन वह स्त्री थी और थकी हुई थी। बाहर थोड़ी ही दूर पर दरोगा ने पीछे से उसके बालों को पकड़ा। वह गिर पड़ी। दरोगा उसके बालों को पकड़े हुए ही पूरे मैदान में घसीटने लगे। वह दर्द से और डर से बिलबिला रही थी। घसीटी जाती हुई वह जब पहरा दे रहे सिपाही के पास पहुँची, तो झपटकर उसके पैरों को पकड़ लिया। दरोगा ने उसके बाल छोड़कर पहरेवाले सिपाही की बंदूक ले ली और उसकी मूठ से उसकी पीठ पर, वक्षों पर, नितंब पर मारने लगे। वह तड़प कर छिटक गई, तो उसने मूठ का तेज प्रहार उसकी योनि पर किया। वह बंदूक की मूठ से मारते हुए उसे भीतर ले गए थे। ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी। सामने पार्टी के मुखिया का बँगला था। मीरा यादव गाड़ी से उतरीं और रौब से चलने लगीं। वह निजी सचिव गोवर्धन लाल के कमरे में पहुँचीं, तो देखा कि कई अखबारों के संवाददाता वहाँ मौजूद थे। सभी ने हँस-हँसकर उन्हें अग्रिम में मुबारकबाद दी और ताना कसा, "टिकट पाने के बाद भी क्या आप सरोज के मामले में अपनी लड़ाई जारी रखेंगी?" "सरोज की लड़ाई को कृपया राजनीति से मत जोड़िए. मैं हजार बार कह चुकी हूँ कि उस मुद्दे का मेरे टिकट से कोई लेना-देना नहीं है। सरोज की लड़ाई को मैं एक धर्मयुद्ध की तरह लड़ रही हूँ।" अब तक निजी सचिव ने नेताजी से इंटरकॉम पर बात कर ली थी। उधर से मीरा यादव को भेजने का हुक्म हुआ था। कमरे में नेताजी अकेले बैठ थे। वह अभिवादन करके मुस्कराईं, पर तुरंत सहम गईं, नेताजी का मूड ठीक नहीं लग रहा था, क्योंकि उनका चेहरा फूला हुआ और लटका, दोनों लग रहा था। मीरा यादव ने सोचा, 'अब क्या करूँ? यहाँ रुकने पर मामला गड़बड़ हो सकता है और लौटा जा नहीं सकता।' उन्होंने अपने वक्ष से आँचल सरका दिया और हल्का-सा होंठ काटकर हँसते हुए नेताजी की तरफ बढ़ीं। नेताजी जहाँ बैठे थे, वहीं खड़े हो गए. नाटकीय तरीके से दोनों हाथों से इशारा करके मीरा यादव को इस प्रकार बुलाने लगे, "आ...आ...रंडी... आ...जा...रंडी." उन्होंने चुमकार कर पुनः पुकारा, "ऐ रंडी... आ...आ..." मीरा यादव को लग गया कि उनके साथ कुछ बहुत ही बुरा होनेवाला है, लेकिन वह समझ नहीं पा रही थीं कि ऐसा क्यों हो रहा है। वह नेताजी के पास आ गईं, तो बोलीं, "मुझसे क्या गलती हुई? मैं तो तन-मन-धन से आपकी सेवा में हाजिर रहती हूँ।" "हरामजादी, तू ये सरोज नाम की कौन-सी छिनाल लिए घूम रही है?" "नेताजी, वह छिनाल नहीं है। जुल्म की मारी हुई एक असहाय लड़की है। दूसरे, वह हमारे काम की है। उसके प्रकरण को उछालकर हम गोरखनाथ की पार्टी के वोट बैंक में कमी ला सकेंगे।" नेताजी ने अजीब तरह से मुँह बिचकाते हुए विभिन्न प्रकार की आवाजें निकालकर मीरा यादव को चिढ़ाया और बिफर पड़े, "तुम, एक तो चूतिया हो, दूसरे मेहरारू। मुझे वोट का गणित सिखाने चली हो। अरे, पता है, प्रदेश में गोरखनाथ की जाति के कितने वोट हैं। खुद मेरे चुनावी क्षेत्र में उसकी जाति के पैंतालीस हजार वोटर हैं। तुम्हारी इस करतूत से हम ये सारे के सारे वोट गँवा देंगे।" वह कमरे में चहलकदमी करने लगे। मीरा यादव ने कुछ कहना चाहा, तो उसे मना करते हुए वह रुक गए, "सफाई मत दे सूअरी। तुझे मालूम नहीं था क्या कि गोरखनाथ अपनी पार्टी में मुख्यमंत्री का विरोधी है और चुनावों में मुख्यमंत्री के उम्मीदवारों को हराने की कोशिश करता है।" मीरा यादव गिड़गिड़ा पड़ी, "नेताजी, मुझको ये सब बारीकी नहीं पता थी। मुझको माफ कर दीजिए और आदेश करिए कि मैं क्या करूँ?" "यही कि तू जल्दी भाग यहाँ से।" नेताजी मटककर बोले, "पूछ रही है कि मैं क्या करूँ।" वह फिर मीरा यादव की तरफ मुखातिब हुए, "भाग... चल निकल यहाँ से।" मीरा यादव डरीं कि नेताजी कहीं मार न बैठें। दरअसल उनकी जो शोहरत थी, उसको देखते हुए यह असंभव कार्य नहीं था। मीरा यादव डरी-दबी-सशंकित दरवाजा खोलकर बाहर निकलीं। कार में बैठते ही वह रो पड़ीं। ड्राइवर कौतूहल से शीशे में उनका प्रतिबिंब देखने लगा था। मीरा यादव के बह रहे थे आँसू, लेकिन वह रूमाल से पोंछ रही थीं नाक। वह कार की खिड़की से बाहर देखती हुई खामोश रोती जा रही थीं। उनका राजनीतिक भविष्य रसातल में चला गया था। जिस चीज को पाने के लिए उन्होंने इज्जत-अस्मत तक की परवाह नहीं की, जिन लोगों की शक्ल देखकर घिन आती थी, उनसे भी लिपट-सिपट गईं और मीठा-मीठा बोलीं। राजनीति में गहरा रसूख रखनेवाले एक नेता के कहने पर मुर्गा भी खा ली थीं और भ्रष्ट हो गई थीं, वह चीज आज नेताजी के कमरे में उनके पास से निकलकर दूर चली गई. वह सिसकीं, "सरोज मादर... ये सब तुम्हारे कारण हुआ।" इस बार ड्राइवर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, बल्कि बौखलाहट में गाड़ी की रफ्तार तेज कर दी। यह कोरा संयोग ही था कि इधर अपने मुखिया के दरबार में मीरा यादव अपमानित और आहत हुई थीं, तो दूसरी तरफ लगभग उसी वक्त जब मुखिया मीरा यादव को 'रंडी आ...आ...' कह-कहकर बुला रहे थे, मुख्यमंत्री प्रदेश शासन के प्रमुख गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को डाँट पिला रहे थे। हुआ यह था कि मुख्यमंत्री के पास केंद्रीय नेतृत्व के दो बड़े नेताओं ने नाराजगी जाहिर की थी कि वह अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते गोरखनाथ को फँसाकर ठीक नहीं कर रहे हैं। इससे पार्टी की उज्ज्वल छवि को धक्का पहुँच रहा है। अगर हालात दो दिनों के भीतर न संभले, तो केंद्रीय नेतृत्व चुप नहीं बैठेगा। मुख्यमंत्री इस धमकी से दुबले हो रहे थे कि उन्हें यह भनक भी लगी कि उनकी पार्टी के गोरखनाथ समर्थक 38 विधायक गोरखनाथ को नैतिक समर्थन देने के इरादे से सामूहिक इस्तीफा देने का मन बना रहे हैं। वह इतना विचलित हुए कि स्वयं फोन पर प्रमुख गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को, चाहे जिस स्थिति में हों, फौरन हाजिर होने का हुक्म दिया। और अब, जब दोनों सामने आए, तो वह भन्ना पड़े, "आप लोग एकदम निकम्मे हैं क्या?" "सर...सर..." दोनों अफसरों ने समवेत कहा। "हमारी पार्टी के अत्यंत महत्त्वपूर्ण नेता गोरखनाथ जी पर शरारती तत्व इस तरह प्रहार कर रहे हैं और आप लोग हाथ पर हाथ धरे चुप बैठे हैं। शर्म आनी चाहिए. उनकी मनोदशा का अनुमान लगाइए आप लोग। सोचिए, उस बेकसूर इनसान पर क्या गुजर रही होगी इन दिनों।" "सर...सर... आप निश्चिन्त रहिए... सब ठीक हो जाएगा... आज ही ठीक हो जाएगा सब।" "मैं आप लोगों से चापलूसी नहीं, नतीजे चाहता हूँ... जाइए, जुट जाइए जल्दी से। समय मत बर्बाद करिए, अपना और मेरा भी... जाइए..." यह भी संयोग की बात है कि उसी तिथि में एक अन्य महत्त्वपूर्ण वाकया हुआ। वह यह कि प्रदेश मंत्रिमंडल में गोरखनाथ के कट्टर समर्थक माने जानेवाले सूचना मंत्री ने अपने आवास पर दैनिक समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, समाचार एजेन्सियों के संपादकों-संवाददाताओं को रात्रिभोज पर बुलाया। ऐसा कहा जा रहा था कि सूचना मंत्री के गोरखनाथ समर्थक होने के बावजूद रात्रिभोज मुख्यमंत्री के निर्देश पर दिया जा रहा था। दावत में सूचना मंत्री ने समस्त अतिथियों को शराब में डुबो दिया था। वह उन्हें अधिक से अधिक शराब पीने के लिए प्रेरित कर रहा था। इसका अनुरोध था कि आज यहाँ उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति इतना अधिक पिए कि इस पीने को उसके जीवन में सबसे ज़्यादा पीने के कीर्तिमान के रूप में याद किया जाए. 'खूब पियो, बेफिक्री से पियो' के आह्वान के साथ वह और उसके अभिन्न जन बीच-बीच में 'गोरखनाथ को निरपराध फँसाए जा रहे' विषय पर संक्षिप्त, किंतु सारगर्भित भाषण भी कर रहे थे। रात्रिभोज को लेकर सुबह से ही चर्चा का बाज़ार गर्म था। एक तो यही हवा थी कि सूचना मंत्री की दावत में अफगानिस्तान से आए एक कुक के नेतृत्व में मांसाहारी व्यंजन तैयार किया जाएगा। सब कुछ इतना बेहतरीन और लजीज होगा कि सरोज कांड में गोरखनाथ का पलड़ा भारी हो जाएगा। मीरा यादव और सरोज को कोई ठिकाना नहीं मिलेगा। दूसरी बात, जिसको लेकर विशेष सनसनी थी कि सुना जा रहा था कि रात्रिभोज में सम्मिलित होनेवाले प्रत्येक पत्रकार को रंगीन टी.वी सेट दिए जाएँगे, जो राज्य सरकार के उपक्रम 'वीडियो विश्व' के उत्पाद होंगे। हालाँकि कुछ पत्रकारों ने मंत्री जी को यह इशारा भिजवाया था कि टीवी सेट दिए जाने की बात सच है, तो वह यह कहना चाहते हैं कि उनके घर में रंगीन टी.वी है। अतः उन्हें यदि राज्य सरकार के ही उपक्रम 'स्कूटर लैंड' का स्कूटर दे दिया जाए, तो कुछ ग़लत तो नहीं होगा। कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने नाराजगी भी प्रकट कर दी थी। उनका कहना था कि पब्लिक सेक्टर के उत्पाद उन्हें फूटी आँख नहीं सुहाते हैं। उनके बच्चे तो ऐसे सामान देखते ही तोड़ डालेंगे। संवाददाताओं को पता चला कि तीन दैनिक-पत्रों तथा एक समाचार एजेंसी के संपादकों को मारुति-1000 भेंट की जाएगी। अतः संवाददाता अपनी उपेक्षा से अप्रसन्न थे। वैसे, संपादक भी खास खुश नहीं थे। उनका मानना था कि मारुति-1000 मॉडल पुराना पड़ चुका है। राजधानी की सड़कों पर जब सेलो और स्टीम गाड़ियाँ धड़ल्ले से दौड़ रही हैं, तब मारुति-1000 से कैसी खुशी। तो इस प्रकार पार्टी के मुखिया द्वारा मीरा यादव को फटकार, मुख्यमंत्री द्वारा गोरखनाथ से वैर-भाव समाप्त करना और उनके समर्थन में खुलकर आना तथा मीडिया को अनुकूल करने के लिए सूचना मंत्री द्वारा आयोजित दावत-ये तीनों अचंभे में डाल देनेवाली ऐसी चीजें थीं, जिसकी कल्पना भी इस मामले में दिलचस्पी ले रहे लोगों ने नहीं की थी और यह तो सपने में भी नहीं सोचा जा सकता था कि इतनी अकल्पनीय तीन-तीन घटनाएँ एक ही दिनांक में घटित हो जाएँगी। हालाँकि श्याम नारायण मीरा यादव पर कुपित थे कि अखबारबाजी कराकर सरोज प्रकरण का सारा श्रेय वह ले रही है। इसीलिए उन्होंने मन-ही-मन मीरा यादव को 'बदजात कुतिया' और 'राजनीति की पतुरिया' भी कहा था, किंतु उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था कि वह सरोज के पिता विष्णु दत्त को लेकर मीरा यादव के यहाँ जाएँ, क्योंकि जहाँ तक उनकी पार्टी का सवाल है, तो वह सरोज के साथ हुए जुल्म को आम जनता को जुझारू संघर्ष के लिए लामबंद करनेवाला मुद्दा नहीं मानती थी। दूसरी, सबसे बड़ी बात कि सरोज मीरा यादव के ही पास थी। ऐसे में श्याम नारायण क्या करते, विष्णु दत्त को लेकर पहुँचे उसी मीरा यादव के घर, जिसके प्रति वह भयानक घृणा से ओत-प्रोत थे और जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, इस महिला बुर्जुआ नेता को वह बदजात कुतिया और राजनीति की पतुरिया से ज़्यादा कुछ नहीं समझते थे। मीरा यादव के घर श्याम नारायण और विष्णु दत्त पहुँचे, तो पता चला कि मीरा यादव हैं नहीं। पार्टी के मुखिया से उनकी मीटिंग है और मीटिंग कितनी देर चलेगी, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। घर के चारों तरफ मीरा यादव के आदमियों का पहरा था। इतनी रात आए इन दो आगंतुकों को पहरेदारों ने घूरा। श्याम नारायण बोले, "सरोज मेरे जीजा जी की बहन है और ये सरोज के पिता हैं। हमलोगों को सरोज के पास ले चलिए." पर पहरेदारों को यह स्वीकार्य नहीं था। उनका कथन था कि "विधायिका जी की आज्ञा के बिना सरोज के कमरे तक परिंदा भी पर नहीं मार सकता।" "भइया, हम परिंदा नहीं, सरोज के पिताजी हैं। हमको अपनी बेटी से मिलने दिया जाए." "पिता हो या कोई, जब तक हमें विधायिका जी की इजाजत नहीं मिलेगी, हम किसी को अंदर नहीं जाने देंगे।" एक पहरेदार ने सारे पहरेदारों की तरफ से कहा। दूसरे ने थोड़ी उदारता दिखाई, "तब तक आप ड्राइंगरूम में बैठें। बस, विधायिका जी आती होंगी।" वे दोनों ड्राइंगरूम में आए और बैठ गए. श्याम नारायण विष्णु दत्त के कान में फुसफुसाए, "हम लोग खूब जोर-जोर से बोलें, जिससे आवाज पहचानकर सरोज खुद ही बाहर आ जाए." वे जोर-जोर से बोलने लगे। खासतौर पर विष्णु दत्त तो लगभग चिल्लाकर अपने को व्यक्त कर रहे थे। रात के ग्यारह बजे थे। दोनों की आवाजें बाहर जाकर रात के अँधेरे में मँडरा रही थीं। फिर भी जब सरोज नहीं आई, तो वे निराश हुए. श्याम नारायण में निराशा फैल ही रही थी कि उन्हें मेज पर रखी एक पत्रिका के आवरण पर इन्सेट में सरोज की फोटो दिख गई. द्रुत गति से उनके हाथ ने पत्रिका उठा ली। सरोज प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट थी, लेकिन रिपार्ट में नया कुछ ज़्यादा नहीं था। अखबारों में छप चुकी चीजों का संकलन थी यह रिपोर्ट। हाँ, गोरखनाथ का एक इंटरव्यू और मामले के कानूनी पहलुओं पर एक बॉक्स ज़रूर विचारोत्तेजक और सनसनीखेज थे। बॉक्स लेखक ने अपनी टिप्पणी में गोरखनाथ के इंटरव्यू में कही गई कुछ बातों को भी शामिल करके टीका-टिप्पणी की थी। जैसे कि गोरखनाथ ने बयान दिया था कि सरोज पांडेय ने 164 का बयान मीरा यादव के उकसाने पर दिया है। मीरा यादव ने सरोज के पिता विष्णु दत्त को खामोश रहने के लिए अच्छी-खासी रकम मुहैया कराई है। इस पर बॉक्स लेखक का कहना था कि भारतीय समाज में कोई लड़की कभी भी अपने साथ चार लोगों द्वारा बलात्कार का आरोप नहीं लगाएगी, क्योंकि उसे और सभी को ज्ञात है कि इस बात से उसकी इतनी बदनामी होगी कि उसका समूचा जीवन बर्बाद हो जाएगा और जहाँ तक विष्णु दत्त को अच्छी-खासी रकम देकर अनुकूल करने का प्रश्न है, तो यह अविश्वसनीय है-इसलिए कि विष्णु दत्त के पास सोलह बीघे पक्के उपजाऊ खेत हैं और पक्का मकान है। यानी वह आर्थिक रूप से प्रताड़ित ऐसे विवश व्यक्ति नहीं हैं कि कुछ पैसों के लिए अपनी इज्जत और बेटी के भविष्य को सूली पर चढ़ा दें। लेखक ने उदाहरण दिया था कि बलात्कार के इसी प्रकार के मामले (दंड संहिता 1860, सेक्शन 376) में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन माननीय न्यायाधीश वी.जे. राजू ने कहा था, "पार्टीबंदी के कारण कोई भी व्यक्ति अपनी युवा पुत्री को बलात्कार के मुकदमे में डालकर उसके भविष्य को बर्बाद कर देगा, यह विश्वसनीय नहीं है।" (पैरा 8) । इस मुकदमे में बलात्कारी को सात साल के कारावास की सजा हुई थी। लेखक ने बेहद भावपूर्ण ढंग से लिखा था, " कुछ लोग कह रहे हैं कि सरोज के साथ बलात्कार नहीं हुआ है। अगर वैसा कुछ हुआ है, तो सरोज की मर्जी से हुआ है और उसे संभोग कहा जाना चाहिए, बलात्कार नहीं, क्योंकि बलात्कार के विरुद्ध तो स्त्री लड़ती है, संघर्ष करती है, किंतु सरोज के शरीर पर चोट या घाव के निशान नहीं है। इसके जवाब में मैं कहना चाहता हूँ कि कोई भी स्त्री दो माह तक लगातार कई-कई पुरुषों से लड़ती नहीं रह सकती। ऐसे लोगों से निवेदन है कि वे जान लें कि उड़ीसा उच्च न्यायालय में संहिता 1860 सेक्शन 376 के अंतर्गत लड़की की सहमति और शरीर पर किसी चोट की गैर-हाजिरी का मामला आया था, जिस पर विद्वान न्यायाधीश ने 'सहमति' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा था कि सहमति का अर्थ है-समुचित करार, विचारों और भावनाओं की समरूपता, प्रेम की उपस्थिति से होनेवाले कार्य, व्यापार के प्रति स्वेच्छापूर्ण भागीदारी, किसी भी तरह का प्रतिरोध नहीं, कैसा भी इनकार नहीं। यह 'सहमति' शब्द असहायता का समानार्थी कतई नहीं है (पैरा 6) । गोरखनाथ के प्रचार-तंत्र ने एक चर्चा यह चलाई थी कि सरोज तो स्वयं संदिग्ध चरित्रवाली है, नहीं तो वह अपने गाँव के तीन-तीन युवकों के साथ क्यों भाग निकलती। इसके जवाब में टिप्पणी में तर्क था कि यदि मान भी लिया जाए कि सरोज का चरित्र संदिग्ध है, तो क्या समाज के पुरुषों को संदिग्ध चरित्रवाली स्त्रिायों-लड़कियों से बलात्कार करने का कानूनी हक हासिल हो गया है? लेखक ने एक पृष्ठ के आलेख में अत्यंत निपुणता के साथ सरोज की पैरवी की थी। पढ़कर श्याम नारायण का हौसला बढ़ गया। उन्हें लगा कि वह अकेले नहीं हैं और लोग भी हैं, जो सरोज के साथ लड़ाई में शामिल हैं। एक क्षण के लिए तो उनको इतना जोश चढ़ा कि मन हुआ, खड़े होकर 'इन्कलाब जिंदाबाद' लगाने लगें, मगर कुछ देशकाल के संकोच ने, कुछ इस भावना ने कि भीतर मौजूद सरोज को कहीं उनकी यह चिल्ल-पों अच्छी न लगे, उनको नारेबाजी करने से रोका। उन्होंने विष्णु दत्त को वह लेख दिखाकर उसका भाव समझाया और कहा, "इस लड़ाई में सरोज की जीत निश्चित है।" विष्णु दत्त बोले, "भगवान हमारी मदद करे।" उनका यह उद्गार श्याम नारायण को नागवार लगा। भगवान, यानी सरोज के लिए उनके परिश्रम, भाग-दौड़ का कोई मतलब नहीं है। विष्णु दत्त को मुँहतोड़ जवाब देने में वह पूर्णतया सक्षम थे, लेकिन सरोज का पिता होने के नाते उन्होंने उनको बख्श दिया और चुप रह गए. थोड़ी देर तक चुप रहने की वजह से या कोई दूसरी वजह रही कि उनमें एकाएक आत्मालोचन का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे उनमें पार्टी सचिव की आत्मा उतरने लगी, वह विचार करने लगे, "मैं स्वयं कहाँ सच्चा कार्यकर्ता होने का परिचय दे रहा हूँ। सरोज शोषित वर्ग की है नहीं, दलित भी नहीं है कि उसकी पक्षधरता को व्यापक सामाजिक परिवर्तन के आलोक में देखा जा सके. फिर मैं क्यों इतने दिनों से मारा-मारा फिर रहा हूँ? आखिर मुझे हुआ क्या है, जो मैं इतना हलकान हुआ जा रहा हूँ।" वह आकंठ शर्म में डूब गए. उनको महसूस हुआ कि कहीं वह सरोज के प्रति अपनी पुरानी आसक्ति के चलते तो ये सब नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कलाई की वह जगह छुई, जहाँ सरोज ने दाँत गड़ाए थे और सोचने लगे, "मैं सरोज की मदद सरोज को अपमानित करने के लिए कर रहा हूँ क्या कि एक तुम थी, जिसने मुझे दाँत काट लिया था और देखो, मैं हूँ और मेरा प्रेम कितना महान है कि तुमसे चार-चार लोगों द्वारा बलात्कार करने के बाद भी तुम्हारे लिए हमदर्दी रखता हूँ।" "कब आएँगी विधायिका जी?" विष्णु दत्त ने ऊबकर पूछा और दीवार पर टँगी घड़ी देखने लगे, "इतनी देर तक वह कौन मीटिंग कर रही हैं।" इसी समय बाहर कार आने और रुकने की आवाज हुई. मीरा यादव कार से उतरीं और आगे बढ़ीं। वह भीतर आईं, तो देखा कि उनके ड्राइंगरूम में श्याम नारायण एक अधेड़ देहाती के साथ बैठे हैं। वह तुरंत समझ गईं। कोई और नहीं, सरोज पांडेय का बाप है। वह करीब पहुँचकर विष्णु दत्त के पाँव छूने लगीं। विष्णु दत्त इस आदर-प्रेम से विह्वल हो गए और मूसलधार रोने लगे। अजीब दृश्य था, ड्राइंगरूम में विष्णु दत्त रो रहे थे, मीरा यादव उन्हें दिलासा दे रही थीं और श्याम नारायण उजबक की तरह कभी विष्णु दत्त को और कभी मीरा यादव को देखे जा रहे थे। विष्णु दत्त रोते हुए ही बोले, "आप इतनी बड़ी नेता और मुझ गरीब का पैर छू लीं।" "मुझे नेता मत कहें बाबूजी, मैं सरोज की बड़ी बहन हूँ। मुझको आप अपनी बिटिया समझें। मेरे लायक कोई सेवा हो, तो कहें।" "इतने ही उपकार तुम्हारे क्या कम हैं। बस, अब मुझको सरोज से मिला दो।" "सरोज!" मीरा यादव चौंक पड़ी, "यहाँ किसी ने बताया नहीं? वह तो गाँव गई, आप लोगों के पास।" "मेरे ख्याल से, उधर आपलोग आए और इधर वह गई. लगातार इन बाबूजी की, अपनी माँ, भाई-भाभी का नाम ले-लेकर रोती रहती थी। मैंने सोचा कि वहीं रहे, कोई दिक्कत नहीं।" श्याम नारायण मीरा यादव को घूरने लगे। अब विष्णु दत्त कभी श्याम नारायण को तो कभी मीरा यादव को उजबक की तरह देखे जा रहे थे। मीरा यादव श्याम नारायण के कंधे पर हाथ रखकर मुस्कराईं, "चिंता मत करिए भाई, मैंने व्यवस्था से भिजवाया है अपनी छोटी बहन सरोज को। पूरी सुरक्षा के साथ। हमारे चार आदमी तो बाकायदा ए.के.-47 के साथ हैं।" "देखिए, साफ कहता हूँ, हमको आपकी बात पर यकीन नहीं आ रहा है। मुझे लग रहा है कि सरोज इस समय इसी मकान में कहीं है।" "आइए आप दोनों मेरे साथ।" वह चलने लगीं। विष्णु दत्त और श्याम नारायण भी उनके पीछे-पीछे हो लिए. पूरे घर का कोना-कोना देख लिया, कहीं नहीं थी सरोज। अब मीरा यादव एक आलमारी के सामने रुककर हँसी, "यकीन आया अब।" उन्होंने अलमारी खोली, "लीजिए, इसमें भी देख लीजिए." वहाँ भी नहीं मिली सरोज। मीरा यादव ने अलमारी का लॉकर खोला, दस हजार रुपए की एक गड्डी निकालकर विष्णु दत्त को दिया, "बाबूजी, यह छोटी बहन के लिए बड़ी बहन की तरफ से एक तुच्छ भेंट है।" विष्णु दत्त भकुआए खड़े थे, गड्डी को हाथ में पकड़े। "देर न करें आप। सरोज वहाँ राह देखेगी। मेरी गाड़ी आप लोगों को स्टेशन तक छोड़ देगी। आइए." उन्होंने विष्णु दत्त को और श्याम नारायण को घर से बाहर निकलने का इशारा किया। वह खुद भी बाहर निकलकर कार तक आईं। कार में बैठकर विष्णु दत्त ने मीरा यादव के प्रति कृतज्ञता में हाथ जोड़े, "हमलोगों पर आप अपनी कृपा सदैव बनाए रखिएगा।" मीरा यादव श्याम नारायण की तरफ देखीं, "फिर आइएगा, तो मिलिएगा।" श्याम नारायण ने उपेक्षा से चेहरा मोड़ लिया। वह खासे नाराज और उदास लग रहे थे। सरोज-गोरखनाथ प्रकरण एकाएक इस तरह का मोड़ ले लेगा, ऐसा अंदाज नहीं था। अभी कल तक जनता सरोज पर हुए अत्याचार से द्रवित थी और यह विश्वास कर रही थी कि गोरखनाथ की गिरफ्तारी यदि न भी हुई, तो इतना निश्चित है कि उनका राजनीतिक भविष्य चौपट होने से बच नहीं सकता है। विशेष रूप से कॉलेज में पढ़नेवाली लड़कियों में गोरखनाथ के खिलाफ भयंकर घृणा और गुस्सा था। वे पारस्परिक बातचीत में गोरखनाथ के लिए फाँसी से कम की सजा की पैरवी नहीं करती थीं और असंभव नहीं था कि ये लड़कियाँ जल्दी ही सड़कों पर निकल आतीं। लेकिन इस खबर ने लोगों को हैरत में डाल दिया कि सरोज पांडेय राजधानी छोड़कर अपने गाँव चली गई. इस बारे में मीरा यादव का वक्तव्य था कि उन्होंने सरोज को बार-बार समझाया कि उसकी लड़ाई, अकेली उसकी न होकर समाज की लड़ाई बन गई है, इसलिए मामले को इस तरह अधर में छोड़कर उसका जाना उचित नहीं रहेगा, पर सरोज ने एक न सुनी और अपने परिवारवालों के पास जाने की जिद पर अड़ी रही। उसने यहाँ तक कहा कि यदि उसे घर नहीं पहुँचाया गया, तो वह दुपट्टे को गले में कसकर मर जाएगी। अतः इन परिस्थितियों के मद्देनजर सरोज को उसके गाँव पहुँचा देने के अलावा मीरा यादव के पास कोई चारा न था। मीरा यादव ने यह उम्मीद प्रकट की थी कि जल्दी ही सरोज अपने परिवारवालों से मिलकर आ जाएगी। उसके आते ही गोरखनाथ के खिलाफ संघर्ष को फिर तेज किया जाएगा। कहने का मतलब मीरा यादव का संघर्ष रुका भर है, खत्म नहीं हुआ है। एक अखबार ने अपने संपादकीय में सरोज पांडेय के पलायन पर अफसोस जाहिर किया था और लिखा था कि सरोज द्वारा इस तरह एकाएक, बिना प्रेस को विश्वास में लिए चले जाने से संदेह की सुई उसकी तरफ भी घूमती है। उसके इस कदम से उन लोगों को मजबूती मिलेगी, जिनकी धारणा थी कि गोरखनाथ पर बलात्कार का आरोप बेबुनियाद है और सरोज किसी लोभ या मजबूरी के तहत तोहमत मढ़ रही है। अब सरोज ने अखबारवालों को मौका दे दिया था या अखबारवालों के विचारों में ही अकस्मात परिवर्तन आ गया था अथवा सूचना मंत्री के आवास पर हुई दावत का प्रभाव था, इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इतना तय है कि सरोज-गोरखनाथ प्रकरण में समाचार-तंत्र की धुरी बदल गई थी। 'लोक-जागरण' के संवाददाता ललित जोशी जो इस कांड का प्रथम उद्घाटनकर्ता था, से एन.टी.वी. ने एक विशेष भेंट प्रसारित की थी, जिसमें उसने कहा, "यह सच है कि सरोज बलात्कार कांड को सबसे पहले प्रेस के जरिए सामने लाने का सौभाग्य मुझे ही प्राप्त है और आज भी मैं अपनी रिपोर्ट पर कायम हूँ, लेकिन एक सवाल ज़रूर रह-रहकर मेरे भीतर कौंधता है कि गोरखनाथ को सरोज के साथ बलात्कार करने की क्या ज़रूरत थी, क्योंकि गोरखनाथ की जो हैसियत है, उनके पास जो धन, मान, प्रतिष्ठा और शक्ति है, उसको देखते हुए यदि गोरखनाथ चाहें, तो उन्हें वैसी ही लड़कियों की क्या कमी हो सकती है।" मीडिया जगत में सरगर्मी थी। प्रदेश के सबसे अधिक प्रसार-संख्यावाले समाचार-पत्र ने संपादकीय पृष्ठ पर 'बलात्कार कांडः कुछ प्रश्न' शीर्षक से अग्रलेख छापा, जिसमें कई शंकाएँ उठाई गई थीं। प्रमुख शंकाएँ इस प्रकार थींः (क) सरोज के पिता विष्णु दत्त ने सरोज के गायब होने के तीन दिन बाद क्यों प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई, इस अवधि में वह क्या करते रहे? (ख) प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में कहा गया था कि सरोज स्कूल जाने के बाद नहीं लौटी यानी रास्ते में ही उसका अपहरण हो गया, मगर ध्यान देने की बात है कि रिपोर्ट में यह भी लिखाया गया है कि अभियुक्त विष्णु दत्त के घर से चार हजार नकद और पच्चीस हजार के जेवरात भी लेकर भागे हैं। तो यदि स्कूल के रास्ते में अपहरण हुआ, तो फिर घर से चोरी कैसे हुई? इससे ऐसा संकेत मिलता है कि हो न हो, सरोज ही नकद तथा जे़वर ले गई हो और मामला अपहरण का न होकर सरोज द्वारा किसी अन्य कारणों से घर छोड़ जाने का हो। (ग) प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में जिन तीन लोगों का बतौर अभियुक्त उल्लेख किया गया है, उसमें गोरखनाथ का नाम नहीं है। गौरतलब है कि गोरखनाथ का नाम इस केस में तब जुड़ता है, जब सरोज प्रमुख विपक्षी दल की नेता मीरा यादव के पास पहुँच जाती है। हम यह नहीं कहते, कतई नहीं कहते कि सरोज की जबानी सरोज की कहानी असत्य है। यहाँ हम केवल इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में मौजूद उपर्युक्त गड़बड़ियाँ सरोज के बारे में यदि किसी के भीतर शुबहा पैदा करें, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. प्रदेश के सबसे पढ़े-लिखे और प्रखर संवाददाता ने अपने अखबार के प्रथम पृष्ठ पर लिखा, "सरोज कहती है कि कैद की अवधि में उसके साथ भयानक जुल्म किए जाते थे और उसे ठीक से खाना नहीं दिया जाता था। कभी-कभी उसे बिस्कुट जैसे मामूली खाद्य पदार्थों से ही संतोष करना पड़ता था, पर यह समझ से परे है कि जैसा कि सरोज के पूर्व परिचित भी कहते हैं कि फिर वह मोटी कैसे हो गई. हालाँकि इस संदर्भ में प्रश्न किए जाने पर सरोज ने कहा कि उसकी भी समझ में यह बात नहीं आ रही है। उसका कहना था कि हो सकता है कि ऐसा उन गर्भ-निरोधक गोलियों की वजह से हुआ हो, जो उसे उन दिनों खिलाई गई थीं।" उक्त संवाददाता की समझ में यह बात भी नहीं आती थी कि जब सरोज को जौनपुर के खै़राबाद मुहल्ले से मीरा यादव ले आईं, तो उसके हाथों में रंग-बिरंगी गझिन चूड़ियाँ और पैरों में पायल क्यों थीं। सरोज की दलील है कि उसे जबरन विवाहित के बाने में रखा गया था। ताकि लोगों को शक न हो, पर सवाल है कि वह क्यों चाहती थी कि लोगों को शक न हो, वह कम से कम अपनी चूड़ियाँ तो तोड़ सकती थी। या कम-से-कम आजाद होने के बाद वह चूड़ियाँ और पायल की बेड़ियों को उतार फेंक सकती थी। ललित जोशी ने अपने अखबार के मुखपृष्ठ पर पुनः ऐसी खबर दी, जो अन्य अखबारों में नहीं थी। उसने लिखा कि सरोज पांडेय कथित बलात्कार के समय बालिग थी या नाबालिग-इसको लेकर विवाद है, क्योंकि जहाँ सरोज की अवस्था स्कूल के और उसकी जन्मपत्री के हिसाब से 16 साल ठहरती है, वहीं मेडिकल रिपार्ट के मुताबिक वह करीब 'अठारह वर्ष' की है। द्रष्टव्य है कि मेडिकल रिपोर्ट की उम्र को दो साल आगे-पीछे खिसकाया जा सकता है। अतः सरोज बकौल मेडिकल रिपोर्ट, 20 वर्ष की हो सकती है यानी बालिग और ऐसी स्थिति में यदि यह सिद्ध हो गया कि वह घर से स्वेच्छा से भागी थी, तो उसका मुकदमा कमजोर हो जाएगा, क्योंकि कानून के अनुसार नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा होते हुए भी भगाना जुर्म है, किंतु बालिग होने पर ऐसा नहीं है। अतः कानूनविदों की राय में मुकदमे में मेडिकल रिपोर्ट की अहम भूमिका हो सकती है। उस स्थिति में तो और भी, जब शुरू-शुरू की मेडिकल रिपोर्ट में सरोज को 'पुरुष सहवास की अभ्यस्त' बताया जा चुका है। उसके बाद ललित जोशी ने कुछ विधि विशेषज्ञों के विचार प्रस्तुत किए थे, जो ललित जोशी की राय से लगभग इत्तिफाक रखते थे। एक नए, किंतु विचारोत्तेजक और निर्भीक राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक ने 'मुद्दा' स्तंभ के अंतर्गत लगभग पूरा पृष्ठ सरोज बलात्कार कांड पर केंद्रित किया। उसके केंद्रीय आलेख में बार-बार यह सवाल उठाया गया कि आखिर सरोज के बारे में सूचनाएँ मीरा यादव तक कैसे पहुँचीं। अखबार के अनुसार, इस गुत्थी को सुलझाए बिना मामले की तह तक पहुँचना मुश्किल है। वैसे, लेखक ने विभिन्न विश्वस्त सूत्रों से कुछ जानकारियाँ हासिल की थीं। एक सूत्र ने बताया था कि सरोज का अपने एक रिश्तेदार श्याम नारायण से गहरा प्रेम चल रहा था, लेकिन एकाएक पासा पलटा और सरोज श्याम नारायण को धता बताकर अपने ही गाँव के युवक छैलबिहारी से प्रेम करने लगी। श्याम नारायण सरोज के धोखे और बेवफाई से धधकता रहा और उसने बदला लेने की ठानी। वह सरोज को बदनामी के उस मुकाम तक पहुँचा देना चाहता था, जिससे सरोज को कोई भी अपना बना सकने की हिमाकत न करे। इस बात की पक्की जानकारियाँ हैं कि विधान परिषद् की सदस्य मीरा यादव से श्याम नारायण की निकटता है और यह भी ज्ञात हुआ है कि सरोज जिस दिन मीरा यादव के यहाँ आई, उसके ठीक एक दिन पहले दोपहर में श्याम नारायण ने मीरा यादव से उनके आवास पर गहन मंत्रणा की थी और यह भी उल्लेखनीय है कि जिस दिन सरोज पांडेय मीरा यादव के आवास से वापस गाँव गई, उस दिन भी श्याम नारायण मीरा यादव के घर पर आए थे और काफी देर तक रहे थे। संभवतः श्याम नारायण वाली खबर सरोज के मामले में अंतिम खबर लग रही थी। इसके प्रकाशन के कुछ दिनों बाद ही लोगों की स्मृति से सरोज पांडेय और गोरखनाथ धुँधलाने लगे, बल्कि थोड़े अंतराल के बाद तो यह भी जानने में आया कि गोरखनाथ ने दो महाविद्यालयों का उद्घाटन किया और कन्या पाठशाला की आधारशिला रखी। यह भी कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में, यहाँ तक कि सुदूर केरल प्रदेश के कोचीन नगर में भी उन्हें चाँदी के सिक्कों से तौलकर उनका अभिनंदन किया गया। उक्त अभिनंदन समारोह के बारे में कई निंदकों की राय थी कि अपने अभिवादन-कार्यक्रमों के प्रायोजक स्वयं गोरखनाथ थे। यदि नहीं, तो कम-से-कम इतना ज़रूर था कि वह आयोजकों के प्रेरणास्रोत निश्चय ही थे। इसके बाद काफी दिनों तक कुछ सुनने-पढ़ने-जानने में नहीं आया और ऐसा लगने लगा कि पिछले दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सनसनी पैदा कर देनेवाला, राजनीति में भारी उथल-पुथल करने की संभावनाओं से भरा हुआ यह वाकया अब दम तोड़ चुका है या ज्यादा-से-ज्यादा बहुत अल्प प्राणवायु शेष है और यही हुआ भी। लोगों की स्मृति से सरोज-गोरखनाथ घटनाक्रम का विलोप हो गया और मीडिया ऐसा कुछ उपस्थित नहीं कर रहा था कि उधर ध्यान जाता। मगर एक दिन यह खबर जोरदार ढंग से आई कि सरोज ने लखनऊ सेशन जज की अदालत में कहा, "माननीय गोरखनाथ जी ने मेरे साथ शीलभंग की कोई हरकत नहीं की है। मैं तो गोरखनाथ जी को पहचानती तक नहीं।" सरोज अपने 164 के कलमबंद बयान से साफ मुकर गई थी और अपने मौजूदा दाखिल हलफनामे में उसने दर्ज कराया था, "मुझे बरगलाकर गोरखनाथ के खिलाफ बयान दिलवाया गया था। अब मैं अपने उक्त 164 के बयान पर शर्मिंदा हूँ और उसे वापस लेती हूँ।" कहा जाता है कि सरोज हलफनामा देने अदालत आई, तो वह चॉकलेटी रंग की कंटेसा कार में सवार थी। उसकी कार के आगे-पीछे कई कारें और दुपहिया वाहन थे। वाहनों पर सवार लोगों के बारे में ऐसा माना जा रहा है कि वे गोरखनाथ के खास सिपहसालार थे। इस सेना का नेतृत्व परमू और भोला कर रहे थे। छैलबिहारी के बारे में कुछ चश्मदीदों का कथन है कि वह भी था और कंटेसा में सरोज के बगल में बैठा था, लेकिन कुछ का मानना है कि वह छैलबिहारी नहीं था, सरोज का भाई राधेश्याम था। एक राय यह भी है कि सरोज कंटेसा में ज़रूर आई थी, लेकिन उसके बगल में बैठा शख्स न छैलबिहारी था न राधेश्याम, दरअसल वह श्याम नारायण था और शेष सैन्य बल गोरखनाथ नहीं, मीरा यादव का था, लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि मीरा यादव को ऐसा करने की ज़रूरत क्यों आ पड़ी। ऐसा भी सुनने में आया कि इस तरह का कोई बयान सरोज ने दिया ही नहीं। गोरखनाथ ने अदालत में सरोज नहीं, सरोज की एक डुप्लीकेट लड़की भेजी थी और सरोज इस बात का खुलासा करने जल्द ही राजधानी आ रही है। उपरिलिखित तीन धारणाओं में कौन सही थी, कौन नहीं, इसके बारे में ठोस कुछ कहा नहीं जा सकता है या कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई भी सत्य न हो और न ही सत्य के नजदीक हो या हो सकता है कि तीनों ही सत्य के नजदीक हों और मिलकर पूरा सच गढ़ती हों। बहरहाल, मामला काफी उलझ चुका था और हकीकत का सामने आना काफी मुश्किल लग रहा था, क्योंकि पत्रकारों ने अब इसमें रुचि लेना बंद कर दिया था और पुलिस को किसी ने तफ्तीश का आदेश नहीं दिया था। वैसे भी, सरोज ने हलफनामा दे दिया था, तो वह किसके दबाव से आई और उसके साथ कौन लोग थे, इससे पुलिस क्यों वास्ता रखती? और व्यक्तिगत तौर पर आर्थिक रूप से समर्थ कोई व्यक्ति इतनी दिलचस्पी ले नहीं रहा था कि सच्चाई का पता लगाने का कार्य निजी जाँच एजेन्सी अथवा किसी कुशल प्राइवेट डिटेक्टिव को सौंप देता। हाँ, इतना ज़रूर था कि सरोज इस बात का खंडन करने राजधानी नहीं आई कि लखनऊ की अदालत में हलफनामा देनेवाली लड़की वह नहीं, उसकी डुप्लीकेट थी। पर सरोज के न आने के बावजूद उपर्युक्त मत के लोग अपनी बात पर कायम थे। उनका कहना था कि वह खंडन करने नहीं आई, तो क्या फर्क पड़ जाता है। यह अकाट्य है कि लखनऊ की अदालत में 164 के बयान को खारिज करके गोरखनाथ को निर्दोष करार देनेवाली लड़की सरोज की डुप्लीकेट थी। इनमें से कुछ दावा करते थे कि वे स्वयं वहाँ मौजूद थे और पूरे विश्वास से यह कह सकते हैं कि वह सरोज कतई नहीं थी। रही बात असली सरोज के राजधानी आकर खंडन न कर पाने की, तो सोचने की बात है कि जो लोग डुप्लीकेट सरोज पेश करके अदालत की धज्जियाँ उड़ा सकते हैं, उनके लिए सरोज को राजधानी आने से रोक लेना कौन-सी बड़ी बात है। इस पर विरुद्ध विचारवालों ने मुँहतोड़ उत्तर दिया कि वह सरोज थी या नहीं, इससे कोई समस्या नहीं पैदा होती। असल बात यह है कि सेशन जज ने उसे सरोज मानकर उसके हलफनामे को स्वीकार किया और उस पूरी कानूनी कार्यवाही पर एतराज करते हुए अभी तक किसी ने कोई चुनौती नहीं दी है। अतः फिलहाल यही सिद्ध है कि वह सरोज थी और गोरखनाथ पर मँडरा रहे बदनामी के बादल छँट गए हैं और असली सरोज को राजधानी पहुँचने से रोकने की बातें कही जा रही हैं, तो जो शक्ति अदालत को जेब में रख सकती है, सरोज को आने से रोक सकती है, वह क्या सरोज से अपने माफिक बात कहलाने के लिए सरोज को घसीटते हुए अदालत नहीं ले जा सकती थी? इसलिए यह कबूल करने में हर्ज क्या है कि अदालत में मौजूद सरोज असली ही थी! उसके डुप्लीकेट सरोज होने की अफवाहें कुछ शरारती तत्वों की साजिश है। मगर यह विवाद कोई इतना बड़ा मसला नहीं था, जो लंबे वक्त तक टिक पाता। सरोज की मृत पड़ चुकी दास्तान में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा के लिए संजीवनी बनने की क्षमता नहीं थी इसमें। अतः सरोज-प्रकरण के दूसरे प्रसंगों की तरह यह भी, बल्कि यह अन्य से ज़्यादा ही अल्पजीवी और क्षणभंगुर प्रमाणित हुआ। वैसे, आगे भी कहने को कुछ चीजें हो सकती हैं। आखिर सरोज और गोरखनाथ या परमू, भोला, छैलबिहारी के जीवन में कुछ-न-कुछ घटित हुआ ही होगा। मीरा यादव और श्याम नारायण भी कहीं-न-कहीं होंगे ही। यानी कहानी के चरित्र अभी जीवित हैं और कोशिश की जाए, कल्पना तथा गढ़ंत की थोड़ी मदद ली जाए, तो इन प्रमुख पात्रों की मदद से इस कहानी को आगे बढ़ाया जा सकता है, मगर निश्चय ही इससे ज़रा भी फायदा नहीं होगा। फिर वही हश्र होगा, जो अब हुआ है, शायद इससे भी बुरा हो, क्योंकि दिक्कत यह है कि जिस केंद्रीय वस्तु को लेकर कहानी शुरू हुई थी, वह अचानक लड़खड़ाकर ऐसी लुढ़की कि आगे सँभल न सकी और अंत के पहले ही उसने दम तोड़ दिया। संभवतः सुंदर लड़की, बलात्कार, गाँव, बड़े राजनीतिज्ञ, पुलिस, अदालत आदि तोप मसालों से संपन्न विषय-वस्तु वाली कहानी की ऐसी नीरस, निरुद्देश्य, गड़बड़ और अनुत्पादक परिणति विश्व में कभी नहीं हुई होगी। वह भी ऐसी दशा में, जबकि लेखक ने अपनी तरफ से विस्फोटक अंत के लिए कड़ी मशक्कत की हो। विचारणीय बिंदु है कि एक अत्यंत रोमांचक संभावनाओं वाली कथा का इतना अरुचिकर और फटीचर अंत क्यों हुआ। इन सबके अलावा यह दिक्कत भी पेश हुई कि कहानी में कई प्रसंगों का समुचित विकास नहीं हो सका था। पढ़ने के बाद कुछ ऐसे प्रश्न जन्म लेते थे, जो अनुत्तरित ही छोड़ दिए गए थे। जैसे मीरा यादव के घर से क्या सरोज वाकई चली गई थी अथवा अपनी पार्टी के मुखिया से डाँट खा लेने के बाद मीरा यादव ने ही उसे अपने घर से भगा दिया था! और मीरा यादव के घर से निकलने के बाद सरोज पर क्या गुजरी-यह सब कहानी नहीं कह सकी थी। अब इसका भी तो कोई ठिकाना नहीं था कि अदालत में हाजिर होनेवाली सरोज असली थी या नकली। नकली थी तो असली सरोज कहाँ है? किसके शिकंजे में है? जिंदा है या मुर्दा? कुल मिलाकर ऐसे अनेक स्थल थे कहानी में, जहाँ पर इस प्रकार की दुविधाएँ घेर लेती थीं, लेकिन आखिर समाधान भी था, तो क्या था! अंततः बहुत सोच-विचार के बाद एक निर्णायक, किंतु अद्भुत, बेमिसाल कोशिश की गई. कहानी को सरोज के पास भेज दिया गया। चूँकि सरोज कहाँ पर है, इसका निश्चित संज्ञान नहीं था। अतः कहानी की एक-एक टंकित प्रतिलिपि क्रमशः विष्णु दत्त, मीरा यादव, श्याम नारायण, गोरखनाथ, छैलबिहारी, महंत जी और कोई कसर न रहे, इस दृष्टिकोण से भोला और परमू को भी पंजीकृत डाक द्वारा भेज दी गई. लिफाफे में दो पत्र भी संलग्न थे। एक में सम्बंधित व्यक्ति से निवेदन था कि वह इस कहानी और उसके नाम लिखे गए पत्र को सरोज तक पहुँचाने का कष्ट करे, अति कृपा होगी और सरोज के नाम लिखे पत्र का सार यह था कि सबसे पहले उससे कुशल-क्षेम पूछा गया था, फिर कहानी पढ़ने का आग्रह करते हुए प्रार्थना की गई थी कि वह इस कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे। अंत में सत्रह प्रश्नों की एक तालिका थी, जिसमें कहानी पढ़कर जन्मनेवाले संशयों, जिज्ञासाओं, कौतूहलों का समाधान करनेवाले उत्तर माँगे गए थे। अंत में कष्ट देने के लिए क्षमा-याचना की गई थी और हमदर्दी प्रकट करते हुए कहा गया था कि यदि किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता पड़े, तो वह कहने में बिल्कुल संकोच न करे। पत्र समाप्त हो जाने के बाद 'पुनश्च' उपशीर्षक के अंतर्गत एक पंक्ति थीः "याद दिला रहा हूँ कि कहानी लंबी है, मगर पढ़िएगा ज़रूर। कहानी पर आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार मैंने अभी से शुरू कर दिया है। विश्वास करिए, अपनी कहानी पर आपकी राय पाकर बहुत कृतज्ञ होऊँगा।" और वाकई बारह दिन बाद सरोज का पत्र आया। कहानी उसे कैसे हासिल हुई, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। उसने चिट्ठी कहाँ से भेजी, यह भी स्पष्ट नहीं था, क्योंकि लिफाफे़ पर मुहर इतनी चटख थी कि अक्षर रोशनाई से पुत गए थे। अगर यह स्पष्ट होता कि चिट्ठी कहाँ से चली है, तो सरोज कहाँ पर है, इस बात का सुराग थोड़ा-ज्यादा लगाया जा सकता था। खै़र, सरोज जहाँ भी हो-अपने गाँव में, गोरखनाथ, महंत, मीरा यादव जिसके भी कब्जे में हो, उसका पत्र तो आया ही था। पत्र की हू-ब-हू नकल नीचे प्रस्तुत हैः आदरणीय लेखक जी, सादर प्रणाम! अत्र कुशलम् तत्रस्तु! आगे समाचार यह है कि मुझ पर कहानी लिखी, इसके लिए हमारी तरफ से कोटिशः धन्यवाद। आपने मेरी राय चाही है कहानी पर, तो मैं यही कहना चाहती हूँ कि मैं कहानी-वहानी के बारे में क्या कह सकती हूँ। न ज़्यादा पढ़ी-लिखी हूँ, न विद्वान हूँ, न समालोचक हूँ। शायद आपने इस प्रकार की मंशा इसलिए जाहिर की है कि चूँकि कहानी मुझे केंद्र में रखकर लिखी गई है, तो मुझे कैसी लगती है, यह जानना दिलचस्प होगा। अतः आपकी खुशी के लिए यही कह रही हूँ कि कहानी बहुत सुंदर है। काफी प्रभावशाली है। भाषा बड़ी सशक्त है और शिल्प भी अच्छा है, लेकिन मुझे लगता है कि कहानी में कई जगह आप कन्नी काट गए हैं। या तो उन बातों को आप लिखना नहीं चाहते हैं या उन्हें लिख सकने की काबिलियत आप में नहीं है। जैसे कि गोरखनाथ ने महंत जी के मकान में जब परमू-भोला-छैलबिहारी को भगाकर मेरे साथ बलात्कार किया, इस अत्याचार का कोई चित्रण आपकी कहानी में नहीं है। अपने को गोरखनाथ से बचाने के लिए मैंने जो संघर्ष किया, वह भी नहीं है। बलात्कार के बाद मेरी क्या मनःस्थिति थी, मेरे हृदय पर क्या गुजर रही थी, इन सबको क्या आप सामने ला सके हैं? ऐसे एक-दो नहीं, पूरे तेईस प्रसंग हैं, जहाँ आप सही बात कहने से चूक गए हैं। यदि आपकी इच्छा है कि आपकी कहानी सच्चाई का दर्पण बने, तो आपको उन तेईस प्रसंगों को सही-सही लिखना होगा। ऐसा करें कि आप मेरे पास आ जाएँ, मैं तेईस प्रसंगों के अतिरिक्त भी ऐसी कई चीजें बतलाऊँगी, जिन्हें कहानी में पिरोकर आप उसे अधिक उत्कृष्ट बना सकते हैं। जब आप मिलेंगे, तब मैं उन सत्रह सवालों के जवाब भी आपको दे दूँगी, जिनकी सूची मेरे पास प्रेषित की गई है। हाँ, मैं यह नहीं बताऊँगी कि मैं कहाँ हूँ, क्योंकि यदि मैं अपना पता-ठिकाना लिख देती हूँ तो हो सकता है कि यह खत आपके पास पहुँचने से पहले ही दुश्मनों के हाथ लग जाए. या कौन ठीक है कि आप भी हमारे दुश्मनों के साथ हों और कहानी का चक्कर 'मैं कहाँ हूँ' यह जानने के लिए चलाया गया हो। ऐसा भी हो सकता है कि अभी आप हमारे हमदर्द हों, लेकिन पता जान लेने के बाद किसी दबाव या लालच के वशीभूत होकर मेरे दुश्मनों से मिल जाएँ। यह भी तो मुमकिन है कि आप दुश्मन ही हों। अतः आपको स्वयं ढूँढ़ना पड़ेगा कि मैं कहाँ हूँ। हाँ, इतना तय समझिए कि बिना मुझसे मिले आपकी कहानी में कमियाँ बनी रहेंगी। मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि आपने अपनी कहानी के फटीचर अंत का जो रोना रोया है, उस दिशा में भी मिलने पर मैं मदद करूँगी। मैं आपको आगे की ऐसी बहुत-सी बातें बताऊँगी, इसमें आए हुए चरित्रों के बारे में कुछ एकदम नई जानकारियाँ दूँगी, उनके इधर के ऐसे समाचार दूँगी कि आप कहेंगे कि आपकी कहानी में अभी कुछ भी नहीं आया है। आपको निश्चय ही सशक्त अंत करने के लिए मैटर भी दूँगी मैं, बशर्ते आप मुझे ढूँढ़ पाएँ और मुझसे मिल सकें। सरोज के पत्र से मामला सुलझने के बजाय अधिक उलझ गया। सरोज ने बार-बार दुश्मनों का जिक्र किया है। कौन हैं उसके दुश्मन? यदि सेशन जज की अदालत में हलफनामा देनेवाली सरोज असली सरोज नहीं, डुप्लीकेट थी, तब तो गोरखनाथ, परमू, भोला और छैलबिहारी ही उसके दुश्मन हैं, लेकिन अगर वह असली सरोज थी, तो फिर कौन हो सकते हैं उसके दुश्मन। इसके अतिरिक्त कहानी से जुड़े सत्रह प्रश्न पहले की तरह ही अनुत्तरित थे और सरोज ने अपने पत्र में कहानी के अन्य तेईस प्रसंगों को कटघरे में खड़ा कर दिया था। ऊपर से कहानी के अंत के फटीचर होने की बात उसने भी स्वीकार की थी। अतः हर दृष्टि से यही उत्तम था कि सरोज से मुलाकात की जाए. यह कोई कठिन भी नहीं लग रहा था, क्योंकि जब सरोज तक कहानी और पत्र पहुँच सकते है, तो कोई इनसान क्यों नहीं पहुँच सकता? ज़्यादा से ज़्यादा उसे उन सभी पतों पर जाना पड़ेगा, जिन पर कहानीवाले लिफाफे की रजिस्ट्री की गई थी। ऐसा भी हो सकता है कि पहले या दूसरे संपर्क-सूत्र पर ही सरोज मिल जाए. लेकिन सरोज किसी भी पते पर नहीं मिली। गोरखनाथ और मीरा यादव ने सरोज का नाम सुनते ही गाली बकनी शुरू कर दी। भोला, परमू और छैलबिहारी मिले ही नहीं। उनके ठिकानों पर जाने पर ज्ञात हुआ कि वे वैष्णव देवी का दर्शन करने जम्मू गए हुए हैं। कुछ लोगों ने दबे स्वर में बतलाया कि वे तीनों भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी कर रहे हैं। तभी तो छैलबिहारी के पिताजी ने मकान की एक मंजिल और बनवा ली और चार बीघा खेत खरीद चुके हैं। श्याम नारायण ने कुछ कहा नहीं, अपना पूरा घर दिखा डाला और तब बोले, "आप ही बताइए, सरोज कहाँ है? नहीं है न! लेकिन सरोज है।" उन्होंने अपनी छाती ठोंककर कहा, "सरोज यहाँ है।" उनकी आँखें भर आईं और आवाज भर्रा उठी, "कहीं मिले, तो मेरा सलाम कहिएगा।" महंत जी ने भी अपना आवास दिखला दिया और मुस्कराए, "मेरा आवास मंदिर है या समझिए, मंदिर ही मेरा आवास है, मंदिर में देवियाँ, देवता और भक्त मिलते हैं, रंडियाँ-छिनालें नहीं।" सरोज के घरवालों ने भी निराश ही किया। विष्णु दत्त बताने लगे, "अपहरण के बाद से तो हमलोगों ने सरोज को देखा ही नहीं। मीरा यादव के यहाँ उससे मिलने गया था, तो मालूम हुआ कि वह उसी दिन गाँव के लिए चल दी थी। तब से अर्सा बीत गया, लेकिन वह गाँव नहीं आई. नामालूम कहाँ भटक रही है..." आगे उनसे बोलते नहीं बना। अदालत में 164 के बयान को खारिज करनेवाला हलफनामा देनेवाली सरोज असली थी या नकली? इस प्रश्न के उत्तर में सरोज के भाई राधेश्याम ने जवाब दिया, "जब मैं गया ही नहीं वहाँ, तो कैसे बता दूँ कि असली थी या नकली। मैं कोई महाभारत का संजय हूँ, जो यहाँ बैठे-बैठे अदालत का सीन देख लूँ?" "लेकिन चर्चा है कि वह जिस कंटेसा कार में अदालत गई थी, उसमें उसके बगल में आप बैठे थे?" "मैं बैठा होता, तो वह कुतिया कार से जिंदा नहीं उतरती। गला दबाकर मार डालता।" कुछ मिलाकर अन्जाम यह रहा कि लाख कोशिशों के बावजूद सरोज से मुलाकात नहीं हो सकी। अब चुप मारकर बैठे रहने के सिवा क्या चारा था। दो महीने बाद पुनः सरोज का एक खत आया, काफी लानत-मलामत के बाद लिखा गया था कि "कैसे वाहियात लेखक हैं आप कि आपकी कहानी का कैरेक्टर आपसे मिलना चाहता है और आप उसको ढूँढ़ नहीं पा रहे हैं। धिक्कार है आपको।" मुश्किल यह थी कि इस बार भी लिफाफे पर डाक विभाग की मुहर इतनी चटख लगी थी कि अक्षर पढ़ने में नहीं आ रहे थे।
यह काल्पनिक कथा है। इसके चरित्र, स्थान, घटनाएँ, मंतव्य सभी कुछ काल्पनिक हैं। उनका वास्तविक जीवन से कोई भी सम्बंध नहीं है। सरोज जिस दिन पैदा हुई थी, विष्णु दत्त पांडेय ने चार बीघे खेत का मुकदमा जीता था। उसी के हफ्ते-भर बाद उनकी पुरानी गठिया की बीमारी में फायदा होना शुरू हुआ था और जब साल-भर के भीतर ही गाय ने बछड़ा जना, तब उनको लगा था कि सरोज बेटी भाग्योदय बनकर आई है। सरोज आठ महीने में चलने लगी थी। एक वर्ष दो महीने की हुई, तो बोलना चालू हो गया था। उसने एक दिन अपने आप भगवान जी वाला चंदन माथे पर लगा लिया था। विष्णु दत्त पूजा करने लगते, तो वह उनकी गोद में आकर बैठ जाती और अपने भी हाथ जोड़ लेती। उन्हें लगा था कि हो न हो यह कोई विलक्षण कन्या है। संभवतः इसीलिए वह इकलौते पुत्र राधेश्याम से भी ज़्यादा उसकी परवाह करते। वह थी भी कितनी प्यारी और चंचल। थोड़ी बड़ी हुई, तो कैसी-कैसी मोहिनी शरारतें करने लगी थी। राधेश्याम के कपड़े पहनकर कभी-कभी लड़का बन जाती। उसे गोया, लड़का बनने का शौक था, माँ के कजरौटे से काजल निकालकर दाढ़ी-मूँछ बना लेती। विष्णु दत्त अचानक रोने लगे, "सरोज की अम्मा, हमने सरोज का क्या बिगाड़ा था, जो उसने हमारी नाक कटाई..." सरोज की अम्मा कुछ कहने के बजाय विष्णु दत्त से भी अधिक तेज रुदन करने लगीं। चंपा की कुछ समझ में नहीं आ रहा था। कभी रोते हुए सास-ससुर को देखती, तो कभी पति राधेश्याम को, जो अपने हाथ की टॉर्च को जल्दी-जल्दी जला-बुझा रहा था। उससे कुछ पूछने की हिम्मत चंपा की नहीं हो पा रही थी, लेकिन उसने पूछा, "क्या हुआ?" "भाग गई कुतिया। रंडी अपने आशिक छैलबिहारी के साथ भाग गई." विष्णु दत्त और जानकी के विलाप में आर्तनाद अथवा चीख अथवा हिचकी जैसी कोई चीज शामिल हो गई. छैलबिहारी चैबे गाँव में इंटरमीडिएट फेल लड़का था। उसकी विशेषता थी कि गाँव में उसके जैसे गोरे रंगवाला कोई न था। दूसरी बात, वह सबसे ज़्यादा बीड़ी पीनेवाला था। अत्यधिक बीड़ी पीने से उसके दाँत काले पड़ने लगे थे और होंठ बैगनी। सरोज को उससे घोर घृणा थी। यदि वह किसी का हार्दिक रूप से अनिष्ट चाहती थी, तो वह छैलबिहारी ही था। अक्सर वह उसे रास्ते में खड़ा मिलता था। करीब आता देखकर वह नाक से धुआँ उड़ाते हुए धीमे कदमों से सरोज की तरफ बढ़ता। निकट आकर कहता, "तुम मुझको बहुत बढ़िया लगती हो।" छैलबिहारी की तकदीर तब पलटी, जब गाँव की नाटक-मंडली में नायक का पार्ट करनेवाला युवक लोहे के कबाड़ का कारोबार करने कलकत्ता चला गया। रामलीला सिर पर थी, बड़ी तेजी से नायक के लिए यथोचित की तलाश हुई. अंततः अपने रंग-रूप और निखट्टूपन के गुणों के कारण छैलबिहारी सर्वथा उपयुक्त पाया गया। भए प्रकट कृपाला दीन दयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप निहारी। लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज धारी। भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभा सिंधु खरारी। सरोज की आँखें फटी रह गईं। अरे! अरे! यह तो छैलबिहारी है। छैलबिहारी के सिर पर बड़ा-सा सुंदर मुकुट सुशोभित हो रहा था। अद्भुत रूप था उसका। उसके वस्त्रों में सलमे-सितारे और शीशे जड़े हुए जगमगा रहे थे। दप-दप कर रहा था उसका मुख-मंडल, गालों पर गेरू और पाउडर मला हुआ था तथा नेत्रों के इर्द-गिर्द मुर्दाशंख की बिंदियाँ उसकी सुंदरता को वर्णनातीत बना रही थीं। उसके दो हाथों में चक्र और गदा सरीखे हथियार थे। उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में काजल लगा हुआ था और आँखों के किनारों से निकली मेखलाएँ कानों तक खिंची हुई थीं। वह मुस्कराई, "यह छैलबिहारी है, जो मेरे पीछे पगलाया रहता है।" वह हँस पड़ी। अगले दिन जब छैलबिहारी ने बीड़ी फूँकते हुए रास्ते में उससे छेड़छाड़ की, तो उसे पहले की तरह नफरत नहीं महसूस हुई. वैसे, छैलबिहारी को तो यह भी लगा कि वह जरा-सी हँसी है। यह उसका वहम भी हो सकता था, मगर इतना तो हुआ ही कि इसके बाद से छैलबिहारी के अभिनय का उस पर अन्य दर्शकों की तुलना में कुछ ज़्यादा असर होने लगा था। राम के वन-गमन के अवसर पर वह फूट-फूटकर रो पड़ी थी। हालाँकि लक्ष्मण भी नंगे बदन वन को जा रहे थे, पर सरोज के दुख की वजह यह थी कि जाड़े की रात में नंगे बदन छैलबिहारी को कितना जाड़ा लग रहा होगा। इसी तरह लक्ष्मण को मूर्छा लगने पर विलाप करता छैलबिहारी तेज-तेज अपने बाल नोचने लगा, तो सरोज ने चिहुँक कर बगल में बैठी सहेली की कलाई पकड़ ली थी, जैसे वह अपने ही बाल नोच रहे छैलबिहारी का हाथ वैसा करने से रोक रही हो, लेकिन जब छैलबिहारी ने सीता-स्वयंवर में शिवजी का धनुष तोड़ा था और शेष राजाओं की सूरतें खिसियाई हुई हो गई थीं, तब सरोज को बड़ी प्रसन्नता हुई थी। हाँ, छैलबिहारी के गले में जयमाला डालने के लिए ठिठक-ठिठक कर आती हुई सीता जी पर उसे एक पल के लिए गुस्सा आया था, किंतु अगले ही क्षण वह यह देखकर प्रफुल्लित हो गई थी कि सीता का पार्ट गाँव का लड़का विनोद कुमार श्रीवास्तव कर रहा था, जिसे कि उन्नीस साल का हो जाने के बावजूद अभी दाढ़ी-मूँछ नहीं आई थी। इसी प्रकार जब सीता-हरण के दिन छैलबिहारी ने अचानक अपना सिर रंगमंच बने तख्ते पर जो़र से पटका, तो आवाज सरोज के वक्ष में हुई. वह व्याकुल हो गई, कितनी चोट लगी होगी छैलबिहारी को। इसके बाद दो बार छैलबिहारी सीता के वियोग में तख्ते पर खड़े-खड़े गिरा और कई बार माथा पटका, तो रुलाई से सरोज की हिचकियाँ बँध गईं। उस रात घर लौट आने पर वह सोई नहीं। सुबह जब वह दिशा-मैदान से लौट रही थी, तो देखा, छैलबिहारी तहमद लपेटे दातौन कर रहा है, उसे देखते ही उसने मुँह का थूक उगला और दातौन तहमद में खोंस ली। उसने कहाः इंतजार में खड़ा हूँ अब हुस्न का दीदार होने जा रहा है। सदियों से तड़पने के बाद अब प्यार होने जा रहा है। इसके बाद उसने कुछ अन्य शेर सुनाए, जो क्रमशः इस प्रकार हैंः बाल तुम्हारे नागिन जैसे, गाल गुलाबी नैन शराबी. मतवाला हो उठता हूँ, जब कमर तेरी बल खाती। फिर नखरे, फिर मान जाती हैं। और फिर पहचान जाती हैं। इश्क में अगर और मगर कैसा। प्यार कर लिया है तो डर कैसा। ओ मेरे दिल की धड़कन तेरा चेहरा है नूरानी। देर भले ही लग जाए पर तुम्हीं बनोगी मेरे प्यार की रानी। उपर्युक्त पंक्तियों को सुनकर सरोज मुस्कराती जा रही थी कि एकाएक रुकी और पलटकर बोली, "हे छैलबिहारी, तख्ता पर इतनी जोर-जोर से न गिरा करो रामलीला में और कभी यदि गिरना बहुत ज़रूरी हुआ, तो गिर जाओ, मगर तख्ता पर अपना सिर तो कतई न पटका करो।" "क्यों न गिरें हम तख्ता पर? क्यूँ न सिर पटकें हम तख्ता पर?" छैलबिहारी ने पूछा। सरोज ने मुँह चिढ़ाकर कहा, "क्यूँ क्या, हमको अच्छा नहीं लगता, इसलिए." वह हँसती हुई तेज-तेज चलती हुई ओझल हो गई. छैलबिहारी ने उसे गया हुआ देखकर आह भरी और गुनगुनायाः जानम जो तुम इस तरह से यूँ हँसकर जा रही हो। देख दुनिया कहेगी कि दीवाने से फँसकर आ रही हो। इस तरह सरोज और छैलबिहारी का प्रेम प्रारंभ हुआ था, जो थोड़े ही दिनों के बाद बहुचर्चित होने लगा था। सरोज ने चलते-चलते छैलबिहारी की शायरी सुन ली थी और डर गई थी, "क्या वाकई मुझको देखकर लोग जान जाएँगे कि मैं प्रेम करने लगी हूँ? क्या वाकई ऐसा होता है कि इश्क में डूबे पहचान लिए जाते हैं।" घर पहुँची, तो उसे रुलाई आने लगी। उसने मुँह में दुपट्टा ठूँस लिया। फिर न जाने क्या हुआ कि माँ के गले से लगकर फूट-फूट कर रोने लगी। घरवाले हैरत में पड़ गए कि क्या हुआ सरोज को। तुरंत माँ-पिता-भाई-भाभी की धड़कनें बढ़ गईं कि सरोज के साथ कुछ उल्टा-सीधा तो नहीं हो गया। सिर के बालों से लेकर पैर की एड़ियों तक, सरोज का मुआयना किया गया। जब हर प्रकार से दरियाफ्त करके जान लिया गया कि वैसा कुछ नहीं घटित हुआ है, तब उन लोगों ने तसल्ली का अनुभव करते हुए लंबी साँस छोड़ी, मगर उन्हें इस बात की हैरत तो थी ही कि सरोज इस तरह जार-जार रो क्यों रही है। बहरहाल, सरोज ने जिस दुपट्टे को थोड़ी देर पहले मुँह में ठूँसा था, उसी से आँसू पोंछा और सुबकना भी बंद कर दिया। पानी पीने के बाद वह मन में ठान रही थी कि ज़िन्दगी में कभी भी छैलबिहारी की तरफ आँखें उठाकर देखेगी तक नहीं, लेकिन उसका यह दृढ़ निश्चय उस समय अधमरा हो गया था, जब रात में बिस्तर पर लेटी हुई करवटें बदल रही थी। उसके मन में बार-बार छैलबिहारी की मोहिनी मूरत आती और वह फिदा हो जाती। वह मौन ही मौन में फुसफुसाई, "छैलबिहारी।" और उसकी बड़ी-बड़ी आँखें भर आईं। यह दुख नहीं, प्रेम की उत्कटता का द्रव था। वह फिर फुसफुसाई, "छैलबिहारी, तुमने हम पर क्या किया है। जाने क्यों मेरा मन चाहता है, छैलबिहारी कि मैं तुम्हारे सीने पर चेहरा टिकाकर खूब रोऊँ-खूब रोऊँ। मुझको अपनी बाँहों में भर लो, छैल।" मगर जब दो दिनों बाद छैलबिहारी ने अँधेरे में उसकी कलाई पकड़कर खींचा था, तो वह काँपकर दूर हट गई थी, "देखो छैलबिहारी, हमारा प्यार दो आत्माओं का मिलन है, न कि दो शरीरों का।" छैलबिहारी को शारीरिक मिलन-विरोधी विचारों से घनघोर चिढ़ थी, क्योंकि अन्य लड़कियों की तुलना में सरोज उसकी दृष्टि में महज इसलिए श्रेष्ठ थी कि सरोज के वक्ष और नितंब उनसे भारी थे तथा शेष शरीर उनसे बहुत हल्का। अन्य लड़कियाँ आभूषण पहनने से अधिक सुंदर हो जाती थीं, जबकि सरोज द्वारा आभूषण धारण किए जाने पर स्वयं आभूषणों की सुंदरता में वृद्धि होती थी। कान का बाला दूसरी लड़कियों के कानों में लटकता रहता था, किंतु जब सरोज पहनती थी, तो दोनों कानों के बाले जगमग-जगमग करने लगते थे। हवा चलने पर या सरोज का चेहरा जब चंचल होता था, तो वे बाले हिलते थे और उन हिलते हुए दो बालों को देखकर छैलबिहारी को ऐसा अनुभव होता था कि पेड़, पौधे, घर, आसमान, सब गति कर रहे हैं। वे दोनों जैसे कामदेव के प्रक्षेपास्त्र हों कि देखनेवाला छैलबिहारी कामातुर हो जाता था। हालाँकि वह लोगों के बीच प्रतिक्रिया बिल्कुल उलटे तरीके से देता था। बतलाता था कि सरोज में कौन सुर्खाब के पर लगे हुए हैं। उस जैसी बीसियों को वह खेल-खा चुका है। पर क्या करे, सरोज ससुरी खुद ही उसके पीछे लग गई. गाँव के लुच्चे-लफंगे और अनेक संभ्रांत भी उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुनते। उसने कहा, "एक दिन मुझसे सरोज बोली कि हे...हे छैलबिहारी, हमारा चुम्मा ले लो न। अब मैं क्या करता? लिया चुम्मा।" कुछ लोगों ने छैलबिहारी-सरोज को अकेले में मिलते-जुलते, हँसते-बोलते हुए देख भी लिया था और यह भी देखा था कि सायँकाल के धुँधलके में या भोर के कोहरे में छैलबिहारी इंतजार में खड़ा-खड़ा, बीड़ी फूँक रहा है और सरोज सहमी-चौकन्नी-सी दबे पाँवों, उससे मिलने आ रही है। कुछ लोगों ने यहाँ तक सुन लिया था कि वह कह रही है, "छैलबिहारी, मैं तुम्हारे लिए स्वेटर बुनना चाहती हूँ, तुम्हें कढ़ाई करके रूमाल देना चाहती हूँ, पर क्या करूँ, घरवालों के सामने कैसे करूँ?" अतः जब छैलबिहारी ने इस बात को कहा कि सरोज खुद उसके पीछे लग गई है, उसने उससे चूमने के लिए कहा, तो श्रोताओं को सत्य अनुभव हुआ। गाँव में छैलबिहारी के दो खास दोस्त थे, भोला और परमू। तीनों की गहरी मित्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक समय में तीनों साथ-साथ पेशाब करते थे और अपनी-अपनी पेशाब की धारों को आपस में लड़ाते थे। परमू और भोला के अलग जीवन-स्थितियों में चले जाने के बावजूद उनकी दोस्ती में फर्क नहीं आया था। परमू प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष गोरखनाथ का कृपापात्र था। बम फेंकने और चाकू़ चलाने में उसे दक्षता थी। कई बार इस विद्या का निपुण प्रदर्शन करने के कारण गोरखनाथ की मंडली में जल्द ही उसे प्रमुखता प्राप्त हो गई थी। उसी ने अध्यक्ष जी से फरियाद करके अपने मित्र भोला को बिजली विभाग का सफल ठेकेदार बनवा दिया था। बाद में भोला और परमू ने संयुक्त रूप से एक जीप खरीदी, जो अध्यक्ष जी के सौजन्य से वन-विभाग में किराए पर चल रही थी। इस प्रकार दोनों ने ही जीवन में सफलता प्राप्त कर ली थी और उनके आगे भी सफल होते जाने की संभावनाएँ थीं। वे दोनों अक्सर गाँव आते और छैलबिहारी को साथ लेकर मटरगश्ती करते। परमू-भोला छैलबिहारी को बढ़-चढ़कर शहर के किस्से सुनाते। वे अध्यक्ष जी की ताकत और उनके दरबार में अपने विशेष स्थान का रोमांचक बखान करते थे। उनके द्वारा जब शहर के वैभव, ऐश्वर्य और सुख की चर्चा की जाती, तो छैलबिहारी चकित तथा उदास हो जाता था। कहता था, "तुम लोग वहाँ गुलछर्रे उड़ा रहे हो और तुम्हारा यह दोस्त यहाँ गाँव में पड़ा-पड़ा सड़ रहा है।" परमू और भोला सांत्वना देते, "अध्यक्ष जी से बात हो चुकी है। जल्दी ही तुमको किसी ऑफिस में फिट करा देंगे।" छैलबिहारी नाराज हो जाता, "फिट नहीं, घंटा करा देंगे। करा तो रहे हैं एक साल से फिट।" "सही बात यह है कि तुम खुद गाँव छोड़ना नहीं चाहते। सरोज जैसी जिससे फँसी हो, वह नौकरी की फिक्र क्यों करने लगे।" परमू बोला था। भोला ने प्रश्न किया, "अच्छा छैलबिहारी, यह बताओ कि सरोज के साथ तुमने क्या-क्या किया अब तक?" छैलबिहारी उत्साहित हो गया। बीड़ी जलाकर कश खींचा और मुस्कराया, "क्या करूँ, वह प्यासी है, तो मुझे ध्यान देना ही पड़ता है।" भोला और परमू ने जुगलबंदी की, "कुछ हमारा भी ख्याल रखो, छैलबिहारी।" छैलबिहारी बोला, " हो जाएगा काम, मगर तब, जब मेरी नौकरी लगवा दोगे, जिस दिन पहली तनख्वाह पाऊँगा, उस रात सरोज तुम लोगों की न हो, तो मेरा नाम छैलबिहारी नहीं। "नौकरी तो समझो, पक्की। रही बात पहली तनख्वाह की, तो ये लो, अभी देता हूँ।" भोला ने रुपए छैलबिहारी के सामने रख दिए, "लो रख लो।" छैलबिहारी ने रुपए ले लिए, लेकिन जब वह बाहर खुले आसमान, खुली हवा में आया और कुछ दूर चला, तो हैरत में पड़ गया, "मैंने यह क्या किया। कैसे मुमकिन है यह। वह साली तो सीता-सावित्री की अवतार बनी फिरती है। दुनिया को मारो गोली, मैं तो उसके गाल तक नहीं छू पाया हूँ।" वह अपने भाग्य की विडंबना पर हँसा, "गाल छूने की पड़ी है मुझे। कलाई तक तो पकड़ने नहीं दिया उसने कभी। छटपटाकर छुड़ा लेती है।" वह निराश-सा लौट आया, "दोस्तो, मुझको माफ कर दो।" उसने रुपए निकालकर जमीन पर रख दिए. हाथ जोड़ा, "अपने पैसे रख लो। दरअसल वे बातें मैं झोंक में बोल गया था।" "बहाना मत बनाओ, छैलबिहारी। मैं कहता हूँ कि इसी बात पर दोस्ती टूट जाएगी।" परमू ने धमकी दी। छैलबिहारी गिड़गिड़ाया, "माँ कसम, सही कह रहा हूँ कि मैंने सरोज के बारे में जो कुछ कहा था, झूठ था, हकीकत यह है कि हरामजादी कहती है कि प्यार दो आत्माओं का मिलन होता है।" उसकी आँखों में आँसू आ गए, "वह बदचलन यह भी कहती है कि विवाह से पहले वासना, पाप है। कुँआरी कन्या की दुम हत्थे नहीं चढ़ती। मैं तो कहता हूँ कि कोई ऐसी तरकीब भिड़ाओ कि हम तीनों ही कामयाब हो सकें..." छैलबिहारी द्वारा सरोज से विवाह का प्रस्ताव और इसके लिए उसे राजी करना-गाँव में विवाह संभव नहीं, इसलिए गाँव से भागना-शहर पहुँचकर मंदिर में छैलबिहारी-सरोज की शादी-रुकने के लिए अध्यक्ष जी की कोठी में व्यवस्था-कोठी पर ही रात में सरोज को इस बात के लिए धन-दौलत-खौफ के जरिए सहमत करना कि वह तीनों को अपना शरीर सुपुर्द करे-सहमत न हुई, तो उसके साथ सामूहिक बलात्कार। इस व्यूह-रचना पर छैलबिहारी ने कुछ आपत्तियाँ कीं। उसने कहा कि उसका सरोज से शादी करना ठीक नहीं रहेगा। कहीं माँ-बाप तय करेंगे, तो टी.वी., स्कूटर, भैंस और थोड़ा नकद मिलेगा। इस रंडी से शादी करके क्या पाऊँगा। दूसरी बात, अपनी बीवी को पराए मर्दों के हाथ कैसे सौंपा जा सकता है। इसी को इस तरह भी कहा जा सकता है कि दो पराए मर्दों द्वारा गंदी की गई औरत को वह कैसे पत्नी के रूप में स्वीकार करेगा। "तुम पक्के घोंघाबसंत हो, छैलबिहारी।" भोला बोला, "मंदिर की शादी के गवाह कौन होंगे। हम लोग न! हम लोग क्यों कहने जाएँगे कि तुम्हारी शादी हुई है। उस ससुरी को भी इज्जत प्यारी होगी, तो किसी से कुछ बताएगी नहीं।" "मान लो, वह कहीं न जाए, कहे कि इस सबके बाद भी पत्नी बनकर मेरे साथ रहने के लिए तैयार है। तब?" "तब हम उसको नदी में डुबोकर मार देंगे। या मारकर रेल की पटरी पर फेंक देंगे।" परमू ने जवाब दिया। अब जाकर छैलबिहारी संतुष्ट हुआ और उसका भरोसा बना कि उसके दोनों मित्र पर्याप्त सामर्थ्यवान और समझदार हैं। वह भावुक हो गया। करुण स्वर में बोला, "भैया, तुम लोगों के हाथों में अपनी नैया की पतवार सौंप रहा हूँ।" सरोज ने 'हाँ' कह दी। वह गाँव से भाग चलने के लिए तैयार हो गई. वह जानती थी कि गाँव में रहते किसी भी प्रकार छैलबिहारी से उसकी शादी नहीं हो सकती और वह छैलबिहारी के बिना हकीकत या सपना-कुछ भी नहीं बुनती थी। वह नींद, सपनों और विचारों में हमेशा छैलबिहारी को साथ रखती थी, लेकिन उसमें प्राचीन समय से स्त्री के भीतर मौजूद रहनेवाला अज्ञात भय भी स्वाभाविक रूप से था। इसलिए छैलबिहारी के प्रस्ताव की उस पर पहली प्रतिक्रिया यह हुई कि वह थरथराने लगी और उसके चेहरे की चपलता को जैसे ग्रहण लग गया। देर तक उसकी आँखें जमीन पर टहलती रहीं और भर आईं। उसने आँसुओं से डूबी अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को उठाकर छैलबिहारी को देखा। वह रो पड़ी, "छैलबिहारी! मैं तुमको बहुत चाहती हूँ।" उसका सिर छैलबिहारी की छाती पर टिक गया। सरोज का इस प्रकार का स्पर्श छैलबिहारी को पहली बार हासिल हुआ था, वह पुलकित हो गया। सरोज रोती हुई बोली, "छैलबिहारी, मैं अपने माँ, बाप, भाई, भाभी और उनके पेट में पल रहे भतीजे को, ये घर, ये गाँव, ये खेत, ये खलिहान, ये भुतहा खंडहर, जिसमें हम खड़े हैं, सब छोड़कर तुम्हारे साथ चलूँगी। मेरा साथ निभाना। मुझे धोखा मत देना, छैलबिहारी! नहीं तो तुम्हारी कसम, जिंदा नहीं पाओगे अपनी सरोज को।" छैलबिहारी ने इस अवसर पर एक कवित्त सुनायाः मर जाऊँगा, मिट जाऊँगा, चाक-चाक हो जाऊँगा। मेरे प्रियतम अंतिम दम तेरा साथ निभाऊँगा। उक्त कवित्त पूरा होने पर सरोज ने उसके सीने पर रखे अपने चेहरे को हल्का-सा दबाया और फिर उठाकर उसे देखा, "अच्छा, अब मैं चलती हूँ।" वह घर आई, तो घर उसे पराया-सा महसूस हुआ। ऐसा लग रहा था कि जैसे घर थोड़ा बड़ा हो गया हो। चूल्हे का मुँह घूम गया हो। अलगनी अधिक नीचे हो गई हो। उसे घर हल्का-सा हिलता हुआ भी अनुभव हो रहा था। उसे समझ में नहीं आया कि इस समय वह घर में क्या करे। वह जाकर बिस्तर पर आराम से लेट गई, मगर जल्दी ही बिस्तर पर पालथी मारकर बैठ गई. ऐसे भी नहीं रहा गया, तो उठ खड़ी हुई. तभी न जाने क्या हुआ कि तकिए में चेहरा धँसाकर रोने लगी। जल्दी ही रोना बंद करके मुस्कराने लगी। भाभी के पास आकर मजाक किया, "भाभी, तैयारी करती जाओ, भतीजा होने पर कंगन लूँगी।" भाभी अपने पेट पर हाथ फेरते हुए, बोलीं, "आपके भइया और बाबूजी कोशिश में लगे हैं। जल्दी ही आप भी ससुराल जाएँगी, तब कुछ दिनों बाद आपको भी वहाँ कंगन बनवाकर ननदों को देने पड़ेंगे।" सरोज सोच में डूब गई, "छैलबिहारी को तो कोई बहन है नहीं, वह किसे कंगन देगी।" वह उदास हो गई. तभी न जाने उसके भीतर क्या रासायनिक क्रिया हुई कि वह उत्साहित होकर उठी और बाबू-भाई के सारे गंदे कपड़े लेकर धोने लगी। बाद में इस काम से फुर्सत मिलने पर उसने घोषणा की, "आज घर का पूरा खाना मैं बनाऊँगी।" उसने रोज से ज़्यादा घी-तेल-मसालों का प्रयोग करके भोजन को सुस्वादु बनाया। भइया से दो रोटी अधिक खाने के लिए इसरार करने लगी। बीच में पड़ोस में जाकर वह बच्चों को चिढ़ा आई. कुल मिलाकर बहुत खुश दिख रही थी, लेकिन बीच-बीच में सोचती, "मैं क्यों इतना खुश हूँ? क्या यह छैलबिहारी के साथ ज़िन्दगी की शुरुआत करने की उमंग है? या यह घर त्यागने के पहले घरवालों पर उमड़ पड़ा प्यार है? या कहीं वह इतना खुश दिखकर घरवालों को चकमा दे रही है?" उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया, न ही वह किसी नतीजे पर पहुँची। उसे तीनों ही बातें थोड़ी-थोड़ी सही लग रही थीं मगर वह यकीन नहीं कर पा रही थी कि कैसे तीनों बातें एक साथ सही हो सकती हैं। उसकी दशा अजीब हो गई थी। खुश होकर चहकती रहती कि अचानक किसी सुरक्षित एकांत में जाकर रोने लगती, पर कुछ ही वक्त बाद आँखें पोंछकर हँसती हुई बाहर आती। वह कभी अतिरेक में आकर माँ के गले लगकर झूल जाती, तो कभी भाभी के पेट पर कान सटाकर चुहल करती, "भाभी...भाभी... सुनो, बच्चा बुआ...बुआ... कह रहा है।" घर के लोगों को उसका यह बदला हुआ रंग-ढंग अनोखा तो लग रहा था। किंतु इतना अस्वाभाविक नहीं कि वे उस पर संदेह करने लगें। या उस पर निगाह रखने की आवश्यकता महसूस करें। बस, केवल माँ जानकी देवी थीं, जो बीच-बीच में उसको गौर से देखने लगती थीं। बेटी जब भी उनसे अधिक प्रेम जताती, तो वह चिंतित हो उठती थीं। उन्हें लगने लगता था कि बेटी के मन में कुछ और है, वह कपट कर रही है। रात को सरोज अपने बिस्तर से उठकर माँ के पास चली आई और बच्चों की तरह सटकर लेट गई, "माँ, अब से मैं तुम्हारे साथ सोया करूँगी।" माँ आहिस्ता-आहिस्ता सरोज के बाल सहलाती रही, फिर बुदबुदाई, "बिटिया, इधर-उधर का कदम मत उठा लेना।" माँ का वाक्य सुनकर सरोज काँप गई. शव की तरह निस्पंद हो उठी, मगर मामूली-से अंतराल के बाद खिल गई. उस दिन अँधेरा भी हो गया, लेकिन सरोज स्कूल से नहीं लौटी, तो सबसे पहले जानकी देवी ने ही अपनी चिंता प्रकट की, "सरोज नहीं आई अभी तक, मेरा दिल बहुत घबरा रहा है राधेश्याम के बाबू।" सभी के चेहरे पर भय, चिंता और अपशकुन के पंजे मँडराने लगे। ऐसा लगा कि विष्णु दत्त जैसे अभी-अभी और बूढ़े हो गए हों। वह कराहते हुए से बोले, "बेटा, राधेश्याम! चलो, हम ढूँढ़ते हैं।" दोनों जब लौटकर वापस आए, तो घर में बहू और सास थीं। अँधेरा था, तंता था। बहू के गर्भ में शिशु था और भय, चिंता, अपशकुन के मँडराते पंजे थे। घर में घुसते ही विष्णु दत्त अचानक रोने लगे थे। गाँव में विष्णु दत्त को सलाह मिली कि फौरन थाने चलकर बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखानी चाहिए, लेकिन दूसरे प्रकार के लोगों का मत था कि ऐसा नितांत अनुचित होगा। कन्या की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी गई, बात थाना-कचहरी तक गई तो इज्जत विष्णु दत्त की डूबेगी-इस गाँव की डूबेगी-सबसे बड़ी बात-बरामदगी के बाद सरोज का जीवन नरक हो जाएगा। "लेकिन समस्या यह है।" पहले पक्ष के लोगों ने कहा कि सरोज के आसानी से मिल सकने के आसार नहीं दिख रहे हैं। जहाँ-जहाँ मुमकिन था, ढूँढ़ा गया। अब वह आसमान से तो टपक नहीं पड़ेगी। नहीं मिल रही है, तो यही अच्छा होगा कि पुलिस में रिपोर्ट लिखाई जाए. सबसे भिन्न तीसरी धारा राधेश्याम की थी। उसका कथन था, "सरोज दो घंटे में मिल सकती है।" इसके लिए उसने उपाय बताया कि छैलबिहारी की माँ को तथा परमू और भोला की बहनों को निर्वस्त्र करके गाँव में घसीटा जाए. " लेकिन किसी ने उसके विचारों को गंभीरतापर्वूक ग्रहण नहीं किया। अंततः यही निश्चय किया गया कि दो-तीन दिन इंतजार कर लिया जाए. फिर भी सरोज न मिली, तो रिपोर्ट लिखाने में हर्ज नहीं। हालाँकि विष्णु दत्त यह समझ रहे थे कि रिपोर्ट के लिए जोर देनेवालों में कुछ ऐसे भी थे जो चाहते थे कि थाना-कचहरी के चलते उनकी और उनकी बेटी की फजीहत हो। इसी तरह कुछ लोगों द्वारा रिपोर्ट न लिखाने के लिए दबाव डालने की वजह थी कि वह चाहते थे कि सरोज हमेशा गायब रहे और उनको राय-मशविरा देने का अवसर प्राप्त होता रहे। तीन दिन बीत गए थे, रिपोर्ट दर्ज कराने के अतिरिक्त दूसरा कुछ सूझ नहीं रहा था विष्णु दत्त को। अगले दिन शाम को वह और राधेश्याम तीन-चार ग्रामवासियों को लेकर थाना पहुँच गए. इन ग्रामवासियों का कहना था कि रिपोर्ट में अभियुक्तों द्वारा सरोज को ले जाने की बात के साथ यह भी दर्ज कराया जाए कि वे उनके घर से चार हजार नकद और करीब पच्चीस, शून्य के जेवरात भी ले भागे हैं। इस पर विष्णु दत्त ने दबी जबान से प्रतिवाद किया, "पर यह हकीकत नहीं है।" राधेश्याम भड़क गया, "बड़े हकीकत के बाप बनने चले हैं आप! हकीकत तो यह है कि वह रंडी खुद भागी है, तो क्या ऐसे ही रिपोर्ट में कहा जाए?" थाने का दरोगा कहीं तफ्तीश पर गया था और हेड मुहर्रिर जूस पीने, लेकिन संयोग ही था कि ज़्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, जल्द ही हेड मुहर्रिर मुँह पोंछता हुआ ड्यूटी पर बैठ गया, "क्या हुआ, लौंडिया भाग गई न?" वे इस भाव से कि 'उसको कैसे मालूम' हेड मुहर्रिर को देखने लगे। तभी वह कड़क उठा, "लानत है तुम लोगों पर कि रिपोर्ट लिखाने आए हो। अरे, मेरी बहन-बेटी होती, तो आकाश-पाताल जहाँ भी होती, ढूँढ़कर लाता और इस करतूत पर उसकी बोटी-बोटी करके चील-कौवों के सामने फेंक देता।" बहरहाल, विष्णु दत्त ऐसे पराक्रमी नहीं थे, इसलिए वह दो कागजों के बीच कार्बन लगाकर प्राथमिक सूचना रिपोर्ट का लेखन करने लगे। वह नामजद प्राथमिक सूचना रिपोर्ट लिख रहे थे। उन्होंने अभियुक्तों के रूप में छैलबिहारी, परमू और भोला को नामांकित किया। थाने से लौटते-लौटते अँधेरा होने लगा। सभी चुपचाप चल रहे थे। जैसे उनके साथ-साथ मौन भी चल रहा हो। वे गाँव में आ गए, तब भी चुप थे। एकदम खामोश। लेकिन जैसे ही रास्ते में छैलबिहारी का घर पड़ा, राधेश्याम बड़ी तेज आवाज में चिल्लाने लगा, "मैं प्रतिज्ञा कर रहा हूँ... मैं प्रतिज्ञा नहीं, भीष्म प्रतिज्ञा कर रहा हूँ कि यदि मैंने छैलबिहारी की माँ की इज्जत न लूटी, तो राधेश्याम मेरा नाम नहीं।" इतना कहकर उसने चारों तरफ अभिमान से देखा, जिस प्रकार नौटंकी में कोई अभिनेता कड़क संवाद बोलकर वाहवाही के लिए दर्शकों पर निगाह डालता है। विष्णु और राधेश्याम घर आए, तो विष्णु बहुत थके थे, राधेश्याम बहुत उद्वेलित। बहू ने जल्दी ही खाना परोस दिया। दोनों खाने लगे। बहू ने ससुर की थाली में रोटी डालते हुए कहा, "हमारे चाचा के लड़का श्याम नारायण नेता हैं, वह किसी काम आ सकते हों तो बुला लिया जाए." राधेश्याम गरजा, "चोप्प साली। अब नेतागिरी नहीं होगी, खून बहेगा। मैं कह रहा हूँ लाशें गिरेंगी!" इसके बाद खाना छोड़कर वह कूद-फाँद करने लगा। विष्णु और जानकी देवी उसे परेशानी और कोफ्त से देखने लगे। जब वह चौकड़ी भरता हुआ बाहर निकल गया, तो विष्णु बहू से बोले। बहू घूँघट थोड़ा-सा आगे खिसकाकर सुनने लगी, "ऐसा है दुलहिन, अभी रुक जाओ, बात दूर-दूर तक फैले, क्या फायदा। कुछ रोज देखते हैं। सरोज हमें तब तक न मिली, तो नेता श्याम नारायण को बुलवाएँगे।" श्याम नारायण नेता, एक पार्टी की युवा शाखा के जुझारू सदस्य थे। अभाव और विपन्नता उनके व्यक्तित्व से टपकती रहती थी, किंतु दो मामलों में वह शानदार थे। एक नारा लगाने में, पता नहीं कहाँ से उनके कृशकाय शरीर में बहुत जोर से बहुत देर तक गर्जना करने की शक्ति थी। उनके शानदार होने का दूसरा क्षेत्र था प्रेमातुरता। वह प्रायः किसी कन्या को देखकर रीझ जाते थे और प्रणय-निवेदन कर बैठते थे। एक बार उनकी प्रेमातुरता कामातुरता में परिवर्तित हो गई थी। समक्ष खड़ी लड़की पर संकट के मेघ मँडराने लगे थे। वह तो ईश्वर उसका रक्षक था कि श्याम नारायण के पायजामे के इजारबंद में उल्टी गाँठ लग गई, जो उनके लाख प्रयत्न करने पर भी उस समय नहीं खुली थी, पर कामातुरता उनकी मूल प्रवृत्ति नहीं थी। अमूमन वह रीझते भर थे। सरोज पर भी कुछ बार रीझ चुके थे। जब-जब वह अपनी भाभी के मायके में आई थी, तब-तब नेता उसे देखकर व्याकुल हुए थे। उनके द्वारा भाँति-भाँति से प्रेम-भाव को प्रगट किए जाने के बाद भी जब सरोज ने अनुकूल प्रतिक्रिया न दिखलाई थी तो उन्होंने एक दिन उसकी कलाई पकड़ ली थी। सरोज उनकी कलाई पर दाँत काटकर अपनी कलाई छुड़ाने के बाद धमकाते हुए जाने लगी कि उनकी करतूत वह सभी को बता देगी। इस पर नेता श्याम नारायण ने पहले विनती की कि सरोज ऐसा कतई न करे, पर सरोज को सहमत होता न देखकर वह हँसने लगे, "अरे, मेरा तो तुमसे हँसी-मजाक का रिश्ता है और तुमने मेरे मजाक को भी सच मान लिया क्या..." श्याम नारायण को जब छैलबिहारी के साथ सरोज के भाग जाने की सूचना प्राप्त हुई, तो उनके हृदय में तीन तरह के विचार उठे। एक विचार हैरत का था कि अरे, यह क्या हो गया। दूसरा विचार था विचारधारा का, जिसके अनुसार उन्होंने इस प्रकरण को रूढ़ियों के खिलाफ एक लड़की की बगावत माना और सोचा कि हर युवक-युवती को अपनी पसंद से प्रेमी अथवा जीवन-साथी चुनने का अधिकार है। अंत में जाकर तीसरा विचार उठा। यह विचार अपेक्षाकृत अधिक तीव्र, मर्मांतक, असरकारी और संश्लिष्ट था। इसके उठने पर उन्होंने अपनी कलाई को सहलाया, "यहीं पर दाँत गड़ाए थे उसने।" उन्हें लगा कि छैलबिहारी के साथ भागकर सरोज ने उनको अपमानित, आहत और दुखी किया है। वह दुखी हुए, "सरोज ने यह क्या कर डाला। उसकी जैसी सुंदर लड़की को किसी योग्य व्यक्ति से प्रेम करना चाहिए था।" उन्होंने विश्लेषण किया और इस नतीजे पर पहुँचे कि सरोज को छैलबिहारी से प्रेम नहीं करना चाहिए था। वस्तुतः यह प्रेम था ही नहीं। अर्द्धसामंती, अर्द्धपूँजीवादी समाज में जिस प्रकार मजदूर-किसान शोषक शक्तियों के झाँसे में आकर उन्हीं को अपना उद्धारक मान लेते हैं, उसी तरह सरोज छैलबिहारी को अपना मुक्ति-दाता मानकर प्रेम कर बैठी। अतः उसका यह कृत्य प्रेम और सामंती मूल्यों को चोट पहुँचाने का प्रयास नहीं, बल्कि शोषित-पीड़ित स्त्री की दिग्भ्रमित चेतना की त्रासदी का मामला है। उन्हें महसूस हुआ कि विपत्ति में निहत्थी फँसी सरोज चीत्कार कर रही है और संघर्ष का एक अन्य क्षेत्र उन्हें आहूत कर रहा है। उन्होंने झोला उठाया और विष्णु दत्त-राधेश्याम से मिलने चल दिए. उनको सामने खड़ा देखकर विष्णु दत्त चकित हुए. जब श्याम नारायण ने बताया कि उन्हें मुसीबत में फँसा सुनकर वह दौड़े चले आए हैं, तो विष्णु दत्त के मन में उनके लिए अत्यंत आदर का भाव पैदा हुआ। चटपट राधे की औरत से बोले, "अरे, अपने भइया के लिए कुछ चाय-वाय बनाओ जल्दी।" चाय पीने के बाद श्याम नारायण ने बिलकुल विलंब नहीं किया, मुँह पोंछते हुए कहा, "तो बाउजी, आप और जीजा तैयार हो जाएँ और चलें मेरे साथ।" नेता श्याम नारायण, विष्णु और राधेश्याम को लेकर जिला मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक के बँगले पर पहुँचे। उन्होंने विष्णु दत्त की तरफ से एक प्रार्थना-पत्र पुलिस अधीक्षक के नाम लिख रखा था, पुलिस अधीक्षक को दिया। उक्त प्रार्थना-पत्र में निवेदन किया गया था कि माननीय महोदय, अपनी बेटी सरोज के अपहरण की प्राथमिक सूचना रिपोर्ट मैंने गत पंद्रह जनवरी, पचानवे को थाना श्याम सराय में लिखाई थी। उसमें मैंने अभियुक्तों के नाम का भी उल्लेख किया था। छैलबिहारी, परमू और भोला। माननीय महोदय जी से निवेदन है कि पुलिस अभी तक अभियुक्तों को पकड़कर इस अभागे पिता को उसकी पुत्री वापस दिलाने में नाकाम रही है। हमें इस बात की भी आशंका है कि स्थानीय पुलिस जाँच-कार्य में शिथिलता बरत रही है। अतः आपसे अनुरोध है कि आप उचित कार्यवाही हेतु अविलंब आवश्यक दिशा-निर्देश देकर इस परम दुखी पिता को न्याय दिलाने की कृपा करें। पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में ही थोड़ा फेरबदल करके नेता श्याम नारायण ने एक पत्र प्रदेश के गृहमंत्री के नाम और एक पत्र देश के गृहमंत्री के नाम भेजा। उन्होंने एक पत्र देश के लोकसभा अध्यक्ष के नाम भी प्रेषित किया। श्याम नारायण के इन क्रियाकलापों से विष्णु तथा राधेश्याम अभिभूत थे। उन्हें अपने इस रिश्तेदार पर गर्व हो रहा था। दोनों ने ही श्रद्धावनत होकर हाथ जोड़ लिए, "धन्य हैं आप भइया श्याम नारायण ईश्वर आपको दीर्घायु करें।" दोनों ने ही पूछा, "अब आगे क्या किया जाए?" श्याम नारायण बोले, "आगे यह किया जाए कि आप लोग घर लौट जाएँ और मुझको अब अपने तरीके से खोज-बीन करने दें। हमारे हाथ पुलिस से भी ज़्यादा लंबे हैं, आप सब फिक्र न करें। हाँ, कुछ रुपए हों तो देते जाइए, क्योंकि दौड़-भाग में खर्चा तो होगा ही।" पिता-पुत्र के जाने और जेब में कुछ धन आने के बाद नेता श्याम नारायण में एक भारतीय जेम्स बॉण्ड का अभ्युदय होने लगा। उन्होंने एक पैकेट सिगरेट खरीदी। एक सिगरेट जलाकर कश लिया, "कहाँ से शुरू की जाए तफ्तीश।" उनकी उँगलियाँ दूसरे हाथ की कलाई पर चली गईं और अचानक उनके सामने सरोज का चेहरा जगमगा उठा। वह कल्पना-लोक में देखने लगे कि सरोज आँसुओं में डूबी हुई सिसक रही है। 'मुझे हर हाल में ठोस कुछ करना पड़ेगा।' उन्होंने सोचा और सिगरेट चप्पल से कुचलकर आगे बढ़ गए. इस वक्त उनके अंदर फुर्तीला जेम्स बॉण्ड, भावुकविरही, जोशीला कॉमरेड एक साथ सक्रिय हो चुके थे। उनके कंधे से लटका हुआ झोला एक दृष्टि से देखने पर लगता था कि वह कोई सिद्धहस्त अय्यार या जासूस हैं, जिसके इस पोटले में अनेक हैरतअंगेज चीजें भरी हुई हैं, तो दूसरी दृष्टि से देखने पर लगता था कि वह आदिकाल के कोई योद्धा हैं, जिसके झोले में जानलेवा आयुध भरे हुए हों। तीसरी दृष्टि से देखने पर लगता, वह संत विनोबा भावे अथवा जयप्रकाश जी की परंपरा के सर्वोदयी हैं, जिनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर भूमि माफिया भूदान कर देंगे और डकैत आत्मसमर्पण। चप्पल फटकारते चले जा रहे थे श्याम नारायण, जो इस समय शरीर से दुबले पर भावनाओं से बली थे। वह दृढ़प्रतिज्ञ थे कि सरोज कांड की एक-एक बात, राई-रत्ती, छोटी-बड़ी सारी चीजें ज्ञात करके रहेंगे। नेता श्याम नारायण ने दौड़-भाग के बाद पाया कि सरोज के गायब होने को लेकर कई तरह की कहानियाँ थीं, जो परस्पर एक-दूसरे से जु़दा थीं और कुछ मायनों में आपस में समानता भी रखती थीं। गाँव से सरोज, छैलबिहारी, परमू, भोला सफेद रंग की कार से भागे थे। यह कार किसकी थी, इसके बारे में उसे कोई एक पहुँचे हुए रईस की बताता था, तो कोई कहता था कि एक बहुत बड़े ठेकेदार ने कुछ ही दिन पहले खरीदी थी। यह भी चर्चा थी कि कार हीरों के एक व्यापारी का लड़का चलाता था, जिसे भोला ने धमकाकर छीन ली थी। कहीं-कहीं सुनाई देता कि वह कार किसी अन्य की नहीं, स्वयं परमू की है, जिसे उसने अफीम की तस्करी से प्राप्त धन से खरीदा था और शहर में ही चलाता था। वैसे, कुछ अनुमान यह भी था कि कार गोरखनाथ की है, परमू और भोला उनसे माँगकर लाए थे। बहरहाल, कार से जब सरोज सहित चारों लोग जा रहे थे, तो कार बड़ी तेज दौड़ रही थी। उसकी स्पीड के बारे में लेकर अस्सी किलोग्राममीटर से लेकर एक सौ दस किलोग्राममीटर प्रति घंटा तक के अनुमान लगाए जा रहे थे। बीच में कार दुर्गापुर कस्बे में रुकी थी, जहाँ उन लोगों ने कोकाकोला पिया था, लेकिन एक हिस्से को एतराज था कि कोकाकोला पीने की बात सच नहीं है, जनवरी महीने में, वह भी रात को वे कोकाकोला क्यों पीने लगेंगे। दरअसल वे चाय पी रहे होंगे। इस पर कोकाकोला वालों का कहना था कि देखनेवालों की आँखें अंधी नहीं थीं कि चाय के गिलास या कुल्हड़ को कोकाकोला की बोतल समझ लें। इस वाद-विवाद में एक तीसरी धारणा सामने आई, जिस पर कमोबेश सभी ने विश्वास किया। इसके अनुसार वे न चाय पी रहे थे, न कोकाकोला। वे कोकाकोला की बोतल में शराब पी रहे थे। किसी ने पुष्टि करते हुए बताया कि उसे पता है कि दुकान पर सरोज की आँखें लाल थीं और वह झूम रही थी। इसकी भी काट प्रस्तुत की गई कि आँखें लाल होने का कारण सरोज का रोना हो सकता है। रही बात झूमने की, तो कौन-सी शराब थी कि चखते ही झुमाने लगी थी। उपरोक्त बिंदु तक जानकारों की सूचनाओं में मामूली भिन्नताएँ थीं, किंतु मोटे तौर पर सादृश्य भी था। जैसे कि कार किसकी थी, कार किस स्पीड में चल रही थी या दुकान पर वे चारों क्या पी रहे थे, इन मुद्दों पर तीव्र मतभेद थे, लेकिन वे कार से गए, कार बहुत तेज दौड़ रही थी और बीच में दुर्गापुर कस्बे की दुकान पर रुककर उन लोगों ने कुछ पिया, इन बातों पर जानकारों के बीच पूरी सहमति थी। मुश्किल यह आ पड़ी कि दुर्गापुर कस्बे की दुकान के बाद क्या-क्या हुआ, इसको लेकर एकदम से अलग-अलग किस्से सामने आने लगे। इन किस्सों में सरोज के घर से भागने और कोकाकोला की बोतल से कुछ पीकर चल देने के बाद की रामकहानी भिन्न-भिन्न तरीके से बयान की गई थी। घटनाएँ, वातावरण, कथोपकथन, मनोरथ और परिणतियों तक में अंतर था। अब चूँकि उक्त समस्त स्वरूपों को स्वतंत्र ढंग से प्रस्तुत करने का स्थान और अवसर नहीं है, अतः उन सभी का अवलोकन करके उनके विश्वसनीय अंशों को पहले अलग-अलग किया गया, फिर सभी के उन चुने गए विश्वसनीय लगनेवाले अंशों को आपस में सुसंगत तरीके से यथायोग्य जोड़ दिया गया। फलस्वरूप एक अधिक प्रामाणिक वृत्तांत सामने आया जो इस प्रकार हैः कार जब गोरखनाथ के आलीशान मकान के सामने रुकी, तो रात के नौ बज रहे थे। वैसे, इस समय यहाँ चहल-पहल रहती थी, लेकिन इत्तेफाक की बात है कि उस दिन सन्नाटा था, क्योंकि गोरखनाथ शराब किंग माताराम जायसवाल के घर रात्रि-भोज पर गए थे। शायद इसलिए कि मार्च का महीना आनेवाला था और किंग को खतरा था कि अबकी बार कहीं उसके हाथ से ठेके निकल न जाएँ। सन्नाटा देखकर वे चारों उतरे और भीतर पहुँचकर सीढ़ियाँ चढ़ गए. ऊपर एक कमरे में पहुँचकर ही उन्होंने इत्मीनान की साँस ली। परमू और भोला खाने-पीने के इंतजाम के लिए बाहर निकल पड़े। उनके जाते ही छैलबिहारी सरोज पर लुढ़ककर कहने लगा, "हाय मेरी प्राणप्यारी, अब तो न तड़पाओ." सरोज ने उसे ठेलकर आराम से बिठाया और खुद खड़ी हो गई, "देखो छैलबिहारी, जब तक मैं तुम्हारी सुहागन नहीं बन जाती, मुझे छूना मत। नहीं तो जान दे दूँगी, अम्मा की कसम।" अम्मा की कसम खाते ही उसे अम्मा की याद आ गई. वह सुबकने लगी। छैलबिहारी भुनभुनाता हुआ बाहर निकलकर नीचे आ गया। नीचे आकर देखा कि अध्यक्ष जी आ गए हैं और भोला-परमू को डाँट रहे हैं। वह वहीं छिपकर डाँट वार्ता सुनने लगा। अध्यक्ष जी बोले, "अरे हरामियो मेरे घर लेकर आने की क्या ज़रूरत थी।" उन्होंने कुछ अन्य फूहड़ किस्म की गालियाँ दी और अंत में कहा, "ऐसा करो, महंत जी के यहाँ चले जाओ, मैं फोन कर देता हूँ।" दोनों जाने के लिए मुड़े कि अध्यक्ष जी फिर बोले, "अरे हाँ, लौंडिया की उम्र कितनी है?" "सोलह साल।" परमू ने जवाब दिया। "सोलह साल की दुम, मरोगे ससुरो। अबे, बालिग तो हो जाने दिया होता। अच्छा कल मेरे साथ कचहरी चलना। मैं एक फर्जी बालिग प्रमाण-पत्र बनवा दूँगा। बाद में कोई लफड़ा होने पर काम देगा।" छैलबिहारी उलटे पाँव लौट गया और कमरे के बाहर खड़ा हो गया। उन दोनों को देखते ही नकनकाते हुए कहा, "सरोज कुमारी से दिक्कतें आएँगी। सती सावित्री लच्छन दिखा रही है। कह रही है कि शादी के पहले छुआ, तो खुदकुशी कर लेगी।" उसकी नकनकाहट कुछ कम हुई, "एक बात मुझे पक्की लगने लगी है कि यह समझाने से समझनेवाली नहीं है।" "चुप साले बड़बड़ किए जा रहा है।" परमू गुस्सा गया, "साले तुमको उल्टा ही सूझता है। खैर, अभी तो इसको लेकर महंत जी के यहाँ चलना है।" छैलबिहारी रुआँसा हो गया, "पर तुम लोगों ने तो अध्यक्ष जी के यहाँ के लिए कहा था। ये महंत-साधू के यहाँ पुलिस पहुँच गई, तो क्या होगा?" "अबे, तुम रहोगे देहाती भुच्चड़।" भोला समझाने लगा, "अध्यक्ष जी के यहाँ तो फिर भी एक बार पुलिस आ सकती है, पर महंत जी के यहाँ किसकी हिम्मत है। अध्यक्ष जी जैसे बाईस उनकी जेब में है।" महंत जी का आवास एक विशाल मंदिर था। जिसके नीचे की मंजिल में पूजा-पाठ होता था। मंदिर का गर्भगृह था, कीर्तन मंडप था, यज्ञशाला थी और करीब दो दर्जन रिहायशी कोठरियाँ थीं, जिनमें ज्यादातर तीर्थयात्री और मंदिर के सेवक रहते थे। ऊपर की मंजिल महात्मा जी का आवास था और यह भव्य था। कई कमरे वातानुकूलित थे। सभी में रंगीन टी.वी. था। कुछ में वी.सी.आर. भी था। फर्श पर बढ़िया कालीन बिछी हुई, महँगे पर्दे और आरामदेह फर्नीचर। दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरों के अतिरिक्त शेष सितारा होटल जैसा था। ऐसे ही एक कमरे में सरोज, परमू, भोला, छैलबिहारी पहुँचाए गए, तो आनंदातिरेक और आश्चर्य के कारण उनकी वाणी मूक हो चली। उनमें से हर कोई कमरे को देखता, फिर अपने लोगों को देखने लगता था। जैसे वे परस्पर एक-दूसरे के भाग्य की सराहना कर रहे हों। वे विभोर थे। उन्हें कक्ष सुखद सपना लग रहा था। वह खड़े ही थे, बैठ नहीं रहे थे कि सपना टूट न जाए. सरोज चमत्कृत थी। टी.वी. के धारावाहिकों में जैसा कमरा देखा करती थी, वैसा ही था यह। वह अपनी किस्मत को सराह रही थी और भगवान को धन्यवाद दे रही थी कि छैलबिहारी जैसा काबिल वर मिला उसको, जिसके इतनी पहुँचवाले दोस्त थे। उसने प्यार से छैलबिहारी को देखा। उसकी चितवन में प्यार, प्रशंसा, धन्यवाद, शुभकामना आदि कई तत्व शामिल थे। एक क्षण के लिए उसके मन में यह ख्याल भी कौंधा कि बेचारा मेरे लिए इतना आतुर है, तो क्यों न आज ही खुद को समर्पित करके इसे खुश कर दूँ। आखिर कल तो शादी हो ही जाएगी। पर यह ख्याल क्षणों में ही था। जल्दी ही वह चौंककर सिहर उठी और सामान्य हो गई. छैलबिहारी बीड़ी निकालकर सुलगाने लगा तो परमू ने हाथ के इशारे से मना किया और भोला ने बताया, "ये ए.सी. कमरा है। इसमें बीड़ी-सिगरेट पीना मना है। चलो बाहर चलकर पीते हैं।" बाहर नाक से धुँआ उगलते हुए वे तीनों सोचने लगे थे कुछ। थोड़ी देर बाद परमू ने भोला से पूछा, "टाइम क्या हुआ?" "दस बजे हैं।" भोला ने बताया। परमू ने अपनी सिगरेट को बुझा दिया, "तो दोस्तो! नीचे ही मंदिर है। चलो दोनों की शादी वहीं करा देते हैं।" भोला बोला, "ठीक है, पर पहले पता कर लिया जाए कि इतनी रात में शादी हो पाएगी या नहीं।" "अरे, करना क्या है।" छैलबिहारी उत्साह में आ गया, "उसकी माँग में सिंदूर लगा दूँगा और माला वह पहना देगी, एक मैं उसको पहना दूँगा। फेरे और मंत्र-वंत्र के चक्कर में न पड़ना है, भोला भइया।" मगर जब वह भीतर आए, तो योजना गड्डमड्ड हो गई, क्योंकि फोन की घंटी बजने लगी थी। परमू ने फोन उठाया, तो उधर अध्यक्ष जी थे। कह रहे थे, "साले, तुम लोग आज कोई हरकत न करना, वरना महंत जी तुम लोगों की लाशें बिछा देंगे। इसके लिए खुद मुझको उनसे मिलकर परमीशन दिलानी होगी।" सुबह होने पर परमू ने दिशा-निर्देश हेतु अध्यक्ष जी को फोन मिलाया और विनयपूर्वक आवेदन किया, "बालिग प्रमाण-पत्र का झमेला यदि छोड़ दिया जाए, तो कोई खास नुकसान हो जाएगा क्या?" इस पर अध्यक्ष जी ने उसे बहन की गाली दी और डाँटा, "मरना चाहते हो, तो मरो! अरे, सर्टीफिकेट रहेगा, तो काटेगा नहीं। मान लो, बाद में वह ससुरी कोर्ट चली गई तुम सबके खिलाफ। तब यही कहोगे न, वह छैलबिहारी की ब्याहता है और प्रस्तुत साक्ष्य बलात्कार के नहीं, छैलबिहारी द्वारा उसके पति की हैसियत से किए गए सहवास के हैं और तुम सब बेगुनाह हो।" "हमको मालूम नहीं था कि इसमें इतना लफड़ा होगा, कहाँ फँसे हम। वैसे अध्यक्ष जी, आपसे कह रहा हूँ कि कार्यक्रम करने के बाद उसको मार डालें या कलकत्ता, बंबई में रंडी के चकले में छोड़ आएँ तो हर्ज है?" "साले, जो कह रहा हूँ, उसको करो। ग्यारह बजे कचहरी पहुँचो डी.एम. ऑफिस के सामने।" "मगर अध्यक्ष जी, कचहरी में हमारे गाँव-ज्वार के लोग भी आए होंगे। बड़ा खतरा है वहाँ। कहीं धर न लिए जाएँ।" वह बड़बड़ाया, "एक छोकरी के झमेले में कहाँ फँस गए, भगवान!" अध्यक्ष जी का दिमाग भन्ना गया। फोन पर ही चिल्लाए, "रोओ मत छिनरो, गाड़ी भेज रहे हैं। उसमें बैठ के पहले मेरे यहाँ आ जाओ." लगभग दो घंटे बाद कार अध्यक्ष जी के बँगले के मैदान में खड़ी थी। अध्यक्ष जी लोगों से घिरे हुए चलते जा रहे थे। कार के भीतर बैठी सरोज के मुँह से निकल गया, "वही अध्यक्ष जी हैं न।" तीनों चौंक पड़े, "तुमको कैसे मालूम?" "इलेक्शन में उनकी फोटोवाले पोस्टर जो लगे थे गाँव में, हमारे कॉलेज की दीवारों पर। हमारे बाबू-भइया सब इनकी ही पार्टी को वोट दिए थे।" अनेक लोग अध्यक्ष जी का पैर छू रहे थे। पुलिस का एक बड़ा अधिकारी, दो वकील भी अपनी वर्दियों में अध्यक्ष जी के चरणों में झुक रहे थे। इस दृश्य को देखकर सरोज कृत-कृत्य हो रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि वह सुरक्षित हाथों में पहुँच गई है। उसने बगल में बैठे छैलबिहारी के कंधे पर सिर रख दिया। उसके केश छैलबिहारी के चेहरे को स्पर्श करने लगे। अध्यक्ष जी अपनी कार में आकर बैठे। उनकी कार के पीछे इन लोगों की कार चल दी। कचहरी पहुँचने पर दोनों कारें रुकीं और सब बाहर निकले। सबसे अंत में सरोज निकली। अध्यक्ष जी ने उसे देखा, तो भौंचक्का रह गए. उनके मन में विचार उभरा, "यह तो पूरी अप्सरा है।" उन्होंने बिना वक्त गँवाए सरोज के चेहरे को, वक्ष को, कटि को, जंघाओं को देखा और सोचा, ' बला की खूबसूरत यह, कहाँ चूतियों के चक्कर में फँसी है। इसके लिए सर्वथा उपयुक्त तो मैं ही हूँ। " वह उत्साह में आ गए थे। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्होंने जल्द ही सरोज का बालिग प्रमाण-पत्र बनवा दिया। बोले, "चलो, झटपट शादी भी संपन्न कराओ." आखिर सरोज का प्रतीक्षित अवसर आ ही गया। लाल जोड़ा, जेवर, मेंहदी वगैरह से वह वंचित रही थी, किंतु हाथों में उसने चूड़ियाँ खूब पहनी थीं। चटख लाल रंग की साड़ी पहनकर उसने बड़ा-सा गोल जूड़ा बनाया था। उसके मस्तक पर गोल बिंदी थी और माँग में सिंदूर भरा था। मंदिर के कमरे में बैठी वह बार-बार दरवाजे को देखने लगती थी कि छैलबिहारी आया क्या! और जब दरवाजा खुला, तो छैलबिहारी नहीं, अध्यक्ष जी अंदर आए. वह पान खाए हुए थे। सरोज के पास बैठकर उन्होंने हँसते हुए रोमांटिक कथन किया, "देखो, मेरा मुँह कितना लाल हो गया है।" उन्होंने अपनी जीभ निकालकर अंदर की, "जिसको पान बहुत चढ़ता है, जानती हो, औरतें उसको बहुत चाहती हैं।" वह थोड़ी देर सरोज को देखते रहे, फिर बात आगे बढ़ाई, "तुम भी मुझको बहुत चाहती हो न?" सरोज चौंक पड़ी और बिस्तर से उतरकर खड़ी हो गई. अध्यक्ष जी ने कहा, "बैठो... बैठो न। हमारी बात का बुरा नहीं माना जाता। हम बहुत बड़े आदमी हैं। कोई ठीक नहीं कि मुझे किसी दिन प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया जाए. मुख्यमंत्री लॉबी का वरदहस्त है मुझ पर।" इतना कह चुकने के बाद उन्होंने अत्यंत इत्मीनान से सरोज के कंधों को पकड़ा। तभी दरवाजे पर थपथपाने की आवाजें आईं। गोरखनाथ ने उठकर किवाड़ खोले। महंत जी कमरे में आए. सरोज ने विपत्ति की घड़ी में देवदूत की तरह पहुँचे आगंतुक को देखा। वह लँगोट पहने थे और सोने की मूठवाली छड़ी लिए हुए खड़े थे। उनकी दाढ़ी उनके ढेर सारा निकल आए पेट पर टिकी हुई थी। जटा-जूट खिचड़ी थे। लँगोट मात्र पहने हुए उनका व्यक्तित्व भीषण रूप से रौद्र लग रहा था। चारों तरफ देखने के बाद वह अध्यक्ष जी से बोले, "व्यवस्था टनाटन्न है न?" "सब आपकी कृपा है, प्रभु!" "बाहर हम हैं, चिंता मत करिएगा।" "आपके किले में हम, क्यों चिंता करें भगवन्।" महंत जी ने हँसकर आँख मारी, "मौज करो।" और वह संस्कृत का कोई श्लोक कहते हुए बाहर निकल गए. मौका देखकर सरोज ने भी बाहर निकलना चाहा। वह बीच दरवाजे में ही थी कि गोरखनाथ ने पीछे से उसके बालों को पकड़ लिया और खींचकर उसे बिस्तर पर पटक दिया, "साली चवन्नी छाप रंडी, चली है हमसे नखरे करने।" सरोज ने उसके पैर पकड़ लिए, "मुझ पर दया करिए. मैं आपके ही आदमी छैलबिहारी की ब्याहता हूँ।" वह हँसने लगे, "तुम तो बड़ी भोली लग रही हो।" उन्होंने फोन उठाया। पाँच मिनट बाद ही छैलबिहारी, भोला और परमू कमरे में थे। छैलबिहारी ने पुचकारा, "नाहक रो रही है। एक बार की ही तो बात है। फिर रहना मेरे साथ।" सरोज ने इतना दुख, घृणा, जुगुप्सा और क्रोध कभी नहीं अनुभव किया था। वह फूट-फूटकर रोने लगी। रोते हुए ही उसने छैलबिहारी को गाली दी और चिल्लाने लगी। परमू ने लपककर उसका मुँह बंद कर दिया, " चुप्प छिनाल। परमू के हाथ में पिस्तौल एवं फालवाला चाकू था, जिसकी नोक सरोज की सुडौल गर्दन पर हल्की-सी दबी हुई थी। रो वह अभी भी रही थी, लेकिन उसके रुदन की आवाज बदल गई थी। कुछ-कुछ घिघियाने जैसी. थोड़ी-सी मर्दानी आवाज। ऐसी ध्वनियाँ उसके कंठ से पहले कभी नहीं निकली थीं। उसने उसी तरह रोते और घिघियाते हुए आँखें उठाकर छैलबिहारी को देखा। छैलबिहारी भाँप न सका कि सरोज की आँखों में क्या था-नफरत, लाचारी, मदद की पुकार या अन्य कुछ। वह बड़े प्यार से बोला, "तुमने तो देखी थी नौटंकी। द्रौपदी के पाँच पति थे कि नहीं। आँय! फिर तुम्हारे तो चार ही होंगे। दूसरे, जब राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं, तो तुम्हारे चार पति क्यों नहीं? यही समझ लो कि अध्यक्ष जी तुम्हारे सबसे बड़े पति हैं..." सरोज ने दुबारा गोरखनाथ के पाँव पकड़ लिए और जोर-जोर से रोने लगी, "ऐसा जुल्म मत करिए हुजूर... मुझे जाने दें मालिक... मैं शादीशुदा हूँ, रहम करिए." भोला ने पिस्तौल सरोज की तरफ तान दी। सरोज चिल्लाने लगी, "मारो...मुझे मार डालो..." "तू अनायास ताव खा रही है।" छैलबिहारी ने उसे शांत करने का एक प्रयत्न और किया, "कुंती ने नहीं सूर्य से सम्बंध बनाया था। अहल्या को नहीं इंद्र ने हासिल किया था। फिर सबसे बड़ी बात, तुम्हारा तो पति तुमको ऐसा करने की आज्ञा दे रहा है।" सरोज की आँखों में आँसू और खून एक साथ उतरे, वह छैलबिहारी की तरफ झपटी. परमू का चाकू उसकी गर्दन में हल्का-सा धँस गया, खून छलक आया। भोला सरोज के पीछे गया और उसकी बाँहें मरोड़कर मुश्कें कस दीं। छैलबिहारी आवेश में गरजा, " अध्यक्ष जी, इस हरामजादी के हाथ-पाँव बाँध दें। श्याम नारायण को जब पूर्वलिखित वास्तविकता, सूचनाओं और जानकारियों की शक्ल में इधर-उधर से, अपने और पराए स्रोतों से उपलब्ध हुई, तो उनके हृदय में दुख तथा गुस्से का तेज जलजला पैदा हुआ। उनके भीतर सरोज के लिए हमदर्दी का समुद्र उफनने लगा। पराक्रम दिखाने की इच्छा से उनके दाँत किटकिटाने लगे। उन्होंने निश्चय किया-"मैं गोरखनाथ की ईंट से ईंट बजा दूँगा।" वह यह भी बुदबुदाए, "जब तक मैं गोरखनाथ को जेल नहीं भिजवा दूँगा, चैन की साँस हराम है। मैं आकाश-पाताल एक कर दूँगा।" आकाश-पाताल एक करने के लिए यानी दौड़-धूप करने के लिए, यहाँ-वहाँ संपर्क करने के लिए जेब में पैसे होने चाहिए थे, जबकि विष्णु दत्त से मिले रुपए भी अब समाप्त हो चुके थे। फिर भी उन्होंने धनाभाव की परवाह नहीं की और प्रदेश की राजधानी जानेवाली ट्रेन पर बेटिकट सवार हो गए. जैसा कि कई बार हुआ था, बेटिकट होते हुए भी वह सही-सलामत सुरक्षित अपने वांछित रेलवे स्टेशन लखनऊ पहुँच गए. स्टेशन से बाहर आ जाने पर उन्हें महसूस हुआ कि बड़ी तेज भूख लगी है। हल्की प्यास भी लगी थी, लेकिन एक तो उनकी जेब में मुद्रा का अभाव था, दूसरे-उन पर धुन सवार थी। वह बिना कुछ खाए-कुछ पिए पैदल ही चल पड़े। चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित पार्टी ऑफिस में जब वह प्रदेश सचिव के कमरे में घुसे, तो हाँफ रहे थे। सचिव उस वक्त खटिया पर लेटे चाय सुड़क रहे थे। चाय खत्म करके वह श्याम नारायण की तरफ मुखातिब होकर बोले, "क्या बात है, बहुत परेशान दिख रहे हो।" श्याम नारायण के फेफड़ों को अब थोड़ा आराम मिल चुका था, फिर भी श्याम नारायण उत्तेजित थे। उन्होंने प्रदेश सचिव के अधिक निकट होते हुए कहा, "आंदोलन का बहुत बड़ा मुद्दा लेकर आया हूँ।" उन्होंने सरोज पांडेय के साथ घटित हुए अत्याचार की पूरी कथा कही और निवेदन किया, "सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष गोरखनाथ के विरुद्ध हमें प्रदेश-व्यापी आंदोलन छेड़ना चाहिए. इससे हम सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ जनसंघर्ष खड़ा कर सकेंगे, जिसमें जनता पूरी तरह लामबंद होगी।" सचिव दियासलाई की तीली से दाँत खोदने लगे, जिससे यह पता चलता था कि चाय पीने के पहले उन्होंने कुछ खाया भी था। दाँत से कुछ निकाल चुकने के बाद वह सोचते रहे, फिर रुक-रुककर कहने लगे, "इस मुद्दे पर आंदोलन नहीं खड़ा किया जा सकता। आखिर इसका जनता की बुनियादी समस्याओं से क्या वास्ता है। सरोज के साथ बलात्कार का हादसा कोई राजनीतिक संदर्भ भी नहीं रखता है। एक समझदार कार्यकर्ता होने के नाते आपको मालूम होना चाहिए कि आर्थिक या बहुत अहम राजनीतिक मसलों पर ही बड़ी लड़ाइयाँ लड़ी जाती हैं, जबकि सरोज पांडेय के प्रसंग में दोनों ही बातें नहीं हैं।" श्याम नारायण प्रत्युत्तर में कुछ कहते कि सचिव अपनी पार्टी का मुखपत्र उनके और अपने सामने करके पढ़ने लगे। श्याम नारायण क्या करते? पार्टी ऑफिस के बाहर निकल आए. बाहर परिसर में नीम का एक पुराना पेड़ था, उसी के नीचे खड़े हो गए, सोचने लगे कि अब क्या किया जाए. उनकी चेतना में पुनः सरोज आकर सिसकने लगी। वह विह्वल हो गए. उनकी तीव्र इच्छा हो रही थी कि उनकी कलाई पर सरोज ने जहाँ दाँत गड़ाया था, उस स्थान को कुचल डालें। उनमें जोर की हिलोर उठी कि सरोज के चरणों पर गिरकर रोएँ। खैर, किसी तरह सँभाला, वैसे, उनको शर्म भी आ रही थी कि राजनीतिक व्यक्ति होने के बावजूद वह अभी तक आँसुओं को नहीं जीत सके थे। बीड़ी जलाकर वह विचारमग्न हो गए. विचार करते-करते इस उधेड़बुन में उलझ गए कि सरोज को कैसे आजाद कराएँ। पार्टी सचिव ने तो फलसफा बघार दिया। अचानक उनके दिमाग में मीरा यादव का नाम कौंधा। वह उनके ही जिले की थीं और प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी से विधान परिषद् की सदस्य थीं। श्याम नारायण उनसे कभी न चुकानेवाला उधार तथा संगठन-कार्य हेतु चंदा पहले कई बार प्राप्त कर चुके थे। उन्हें उम्मीद की अच्छी-खासी किरणें दिखीं, क्योंकि वह गोरखनाथ की पार्टी को तगड़ी टक्कर देनेवाली विपक्षी पार्टी की नेता थीं, दूसरे औरत थीं। श्याम नारायण का विश्वास मजबूत हुआ कि मीरा यादव सरोज की मदद के लिए निश्चय ही आगे बढ़ेंगी और संघर्ष में उनका साथ देंगी। अब जाकर उन्हें भयंकर भूख महसूस हुई और प्यास भी। वह दुखी हुए कि वह पार्टी के जुझारू कार्यकर्ता हैं, इतनी दूर से चलकर आए हैं और पार्टी के नेता ने एक गिलास पानी के लिए भी नहीं पूछा। फिर यह दलील देकर अपने को तसल्ली दी कि उनको क्या पता रहा होगा कि मुझे प्यास लगी है, कौन प्रचंड गर्मी का सीजन है। उन्होंने समय बर्बाद नहीं किया, मीरा यादव के बँगले की तरफ चल पड़े, वह सड़क पर बीच-बीच में घड़ीवालों से टाइम पूछते जाते थे, चलते जाते थे। अंततः पैंतालीस मिनट की यात्रा के बाद मीरा यादव के सरकारी आवास में नमूदार हुए. उस समय मीरा यादव अपनी पार्टी की मुखिया के यहाँ हाजिरी देने गई थीं। इन दिनों मुसीबत में थीं, दो महीने बाद उनकी विधान परिषद् की सदस्यता का कार्यकाल समाप्त होनेवाला था, जबकि राजनीति के गलियारों में चर्चा थी कि मुखिया इस बार उनको प्रत्याशी नहीं बनाएँगे। उनकी जगह पर एक मशहूर बिल्डर को टिकट देंगे। इस बात से मीरा यादव की नींद उड़ गई थी और वह रोज मुखिया के दरबार में हाजिरी देने जाती थीं। यहाँ तक कि मुखिया न रहते, तब भी। आज भी ऐसा था। मुखिया नहीं थे, तब भी मीरा यादव उनकी ड्योढ़ी पर मत्था टेकने गई थीं। श्याम नारायण को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। मीरा यादव आ गईं। वह काफी थकी हुई दिख रही थीं। श्याम नारायण को देखकर जल-भुन गईं, अब यह भुक्खड़ सौ-पचास लिए बिना पिंड नहीं छोड़ेगा। उन्होंने बेरुखी से श्याम नारायण को देखा, मगर वह इस प्रकार के अनादर के अभ्यस्त थे। परवाह नहीं करते हुए बोले, "आपसे सहयोग की ज़रूरत है।" "हो नहीं सकेगा। मैं भूल गई थी। आज शनिवार है, बारह बजे ही बैंक बंद हो गया था। मैं पैसा नहीं निकाल सकी।" "मैं पैसे नहीं माँग रहा हूँ, वह तो कल ले लूँगा। दरअसल मैं आपके पास गोरखनाथ के खिलाफ आंदोलन छेड़ने में मदद के लिए आया हूँ।" "क्या किया गोरखनाथ ने?" "बलात्कार! मेरी रिश्तेदार सरोज के साथ गोरखनाथ और उसके तीन साथियों ने बलात्कार किया है। बल्कि दो महीनों से उसके साथ बलात्कार किया जा रहा है। वह अभी भी उनके कब्जे में है।" मीरा यादव की बाँछें खिल गईं। उनके बुझे-बुझे चेहरे पर अब प्रसन्नता की तरंगें नाच-कूद रही थीं, "पर आपके पास जानकारी पक्की है न?" श्याम नारायण आहत हुए. अत्यंत आर्त स्वर में उन्होंने कहा, "इतने दिनों से जानकारी ही तो इकट्ठी कर रहा हूँ। खाने-पीने-सोने की चिंता नहीं की, जगह-जगह की खाक छानता रहा। अब तो मुझे यह भी मालूम हो गया है कि कहाँ पर कैद की गई है सरोज।" "कहाँ पर?" चौंक पड़ी मीरा यादव। "वह जौनपुर के खैराबाद मुहल्ले के एक हज़ार चार सौ छब्बीस नंबर मकान में छैलबिहारी नाम के आदमी के साथ है। गोरखनाथ के दूसरे दो आदमी परमू और भोला बाहर गए हैं। ऐसी सूचना है कि वह सरोज की बिक्री का सौदा करने गए हैं। ऐसी भी आशंका प्रकट की जा रही है कि यदि वे सरोज को बेच न पाए, तो उसका कत्ल कर देंगे।" "तो आप गए क्यों नहीं जौनपुर उसे छुड़ाने के लिए?" "गया था, पर लौट आया। वहाँ गोरखनाथ के पंद्रह-बीस गुंडे असलहों के साथ पहरा दे रहे हैं।" "पंद्रह-बीस।" मीरा यादव मुस्कराई, फिर श्याम नारायण से कहा, "अच्छा, आप कुछ खाइए-पीजिए और फिर चले जाइए सरोज के गाँव। वहाँ से उसके पिता वगैरह को लेकर आइए. तब तक हम चलते हैं जौनपुर और देखते हैं, जोर कितना गोरखनाथ के बाजुओं में है।" खाद्य सामग्री आई, तो श्याम नारायण टूट पड़े। वह कुछ बोल भी रहे थे। वह खाते हुए बोल रहे थे कि बोलते हुए खा रहे थे, ठीक-ठीक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था। इस संदर्भ में निश्चयपूर्वक कहा जा सकता था, तो यही कि उनका बोलना और खाना दोनों ही बेहद मार्मिक था। वह पानी पीने लगे, तो लगा कि जैसे शंकर जी गरल पी रहे हैं। वह कुर्ते की बाँह से मुँह पोंछकर जाने के लिए खड़े हुए, तो मीरा यादव ने उनको एक हजार रुपए दिए, "रख लीजिए, काम आएँगे।" प्रदेश की राजधानी से प्रकाशित होनेवाले समाचार-पत्र 'लोक-जागरण' में संवाददाता ललित जोशी के हवाले से विस्फोटक समाचार छपा कि सत्तारूढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोरखनाथ ने जनपद हरदोई के थाना श्याम सराय की किशोरी सरोज पांडेय का अपहरण किया और करीब दो माह तक बंधक बनाकर उसके साथ अपने तीन साथियों सहित बलात्कार किया। इस संदर्भ में विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त अदालत में दिए गए सरोज पांडेय के एक सौ चौंसठ के बयान का भी हवाला था, जिसमें उसने उपर्युक्त तथ्य न्यायाधीश के समक्ष स्वीकार किए थे। वैसे, संवाददाता सरोज पांडेय से मिल चुका था और उसने स्वयं सरोज से बातचीत की थी। एक. सरोज पांडेय-सरोज पांडेय के अनुसार गोरखनाथ, दियरा चौकी के दरोगा एम.पी. सिंह, छैलबिहारी, परमू और भोला ने उसके साथ बलात्कार किया। सरोज ने बताया, "मैं गोरखनाथ के सामने रोई, गिड़गिड़ाई, चीखी, चिल्लाई, उनके पैरों पर गिर पड़ी कि मुझे छोड़ दिया जाए, मगर वह गुस्सा होकर यही कहते कि चुप हो जाओ, नहीं तो गोली मार दूँगा।" दो. दूसरा वक्तव्य गोरखनाथ का था, जिनका कथन था, "यह विरोधी पार्टियों का घिनौना षड्यंत्र है। जनता के बीच तथा मेरी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उन्होंने यह जाल बुना है। इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। सरोज पांडेय अन्य कुछ नहीं, बस राष्ट्रप्रेमी शक्तियों से घबरा जानेवाली ताकतों के हाथों खेलनेवाली कठपुतली है।" तीसरे वक्तव्य पर आने से पूर्व प्रदेश के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति मुख्यमंत्री के विचारों से अवगत होना दिलचस्प होगा। मुख्यमंत्री ने विचार व्यक्त किया, "मुझे इस खबर पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा है। आदर्श व्यक्तित्व के धनी गोरखनाथ के बारे में ऐसा कल्पना में भी नहीं सोचा जा सकता। वैसे, मुख्यमंत्री होने के नाते सारे मामले की जाँच-पड़ताल के बाद ही कोई मत दे सकूँगा।" मुख्यमंत्री के उक्त कथन का भाष्य यह किया जा रहा था कि वह गोरखनाथ पर पड़ी वर्तमान विपत्ति से खुश हैं, क्योंकि उद्दंड-आक्रामक शैली के चलते गोरखनाथ की लोकप्रियता बढ़ी थी और जैसा कि चर्चा में था, केंद्रीय नेतृत्व में मुख्यमंत्री-विरोधी लॉबी गोरखनाथ को उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाने की गुपचुप मुहिम चलाए हुए थी। अतः मुख्यमंत्री के लिए यह वरदान ही था कि उनके प्रतिद्वंद्वी गोरखनाथ का राजनीतिक भविष्य सरोज पांडेय के साथ बलात्कार के आरोप में फँसकर बर्बाद हो रहा था। वक्तव्य देनेवाली अगली शख्सियत मीरा यादव केंद्र बिंदु बनी थीं। क्योंकि वही सरोज को आजाद कराकर ले आई थीं और सरोज इस समय राजधानी स्थित उनके ही आवास में ठहरी थी। मीरा यादव का कहना था, "गोरखनाथ बलात्कारी हैं, उनको इस जघन्य कृत्य के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उनकी इस करतूत पर उनकी पार्टी की खामोशी बताती है कि इस कांड में उसकी भी मिलीभगत है।" अखबार में 'मीरा यादव की भीष्म प्रतिज्ञा' सुर्खी के अंतर्गत यह भी छपा था कि मीरा यादव ने प्रतिज्ञा की है कि सरोज पांडेय के न्याय की लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ेंगी और अपराधियों को उनके गुनाह की सजा दिलाकर ही मानेंगी। उसी सुबह शहर के प्रमुख मार्गों, विशेष रूप से विधानसभा तथा उसके आस-पास के क्षेत्रों में दीवारों पर नारे और पोस्टर चिपके हुए देखे गए. उनकी इबारत थी, 'गोरखनाथ बलात्कारी है,' 'गोरखनाथ को फाँसी दो! फाँसी दो!' 'नारी का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान,' 'सरोज तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं।' अखबार 'लोक जागरण' की प्रतियाँ दो घंटे के भीतर ही गायब हो गई थीं। शहर में ढेर सारे लोग 'लोक जागरण' को खोज रहे थे। उसका संवाददाता ललित जोशी अन्य अखबारों के संवाददाताओं को फोन करके कहता, "बॉस, कैसी लगी बलात्कारवाली रिपोर्ट? मैं गोरखनाथ को जेल भिजवाकर मानूँगा। उसकी राजनीति के ताबूत में आखिरी कील सिद्ध होगी मेरी रिपोर्ट।" दरअसल वह अपना रोब गालिब करने के साथ-साथ अन्य संवाददाताओं को चिढ़ा रहा था कि वे और उनके अखबार नाकारा हैं, जो इस खबर को नहीं छाप सके. इससे निश्चय ही वे स्वयं को बेइज्जत अनुभव कर रहे थे। कुछ इसलिए भी कि उनके अपने संपादक ने आज सुबह की मीटिंग में 'लोक-जागरण' की प्रति पटककर तमतमाते हुए फटकारा था, "आप लोग क्या कर रहे थे कल।" एक संपादक तो इतना क्रुद्ध हो गया कि कहने लगा, "प्रेस क्लब में दारू पीने और मुर्गे की टाँग ठूँसने से फुर्सत ही नहीं मिलेगी, खबर क्या लिखेंगे।" जिन्हें इस प्रकरण पर फॉलोअप की जिम्मेदारी सौंपी गई, वे झुँझलाए हुए संपादक के केबिन से निकले और विधान परिषद् की सदस्य मीरा यादव को फोन मिला दिया, "क्या विधायिका जी, यही करेंगी आप। आखिर हमको आपने यह खबर क्यों नहीं दी।" "बुरा मत मानिए... बुरा मत मानिए. दरअसल हुआ यह कि कल जब सरोज पांडेय हमारे घर पहुँची, तो किसी दूसरे काम से आए ललित जोशी पहले से मौजूद थे, मगर आप फिक्र मत करें, आपको भी मिलेगा मैटर। आज शाम को मेरे घर पर सरोज की प्रेस कॉन्फ्रेंस है, आपको ज़रूर पहुँचना है। बहुत धमाकेदार मसाला मिलेगा।" "पर मुझको अलग से कुछ स्पेशल भी दीजिए." "मिलेगा... सब मिलेगा, पर पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइए न!" शाम को मीरा यादव के घर का ड्राइंग-रूम प्रेस कॉन्फ्रेस के लिए तैयार था। एक तरफ दो कुर्सियाँ मीरा यादव और सरोज के लिए थीं। सामने पत्रकारों के लिए बैठने का इंतजाम था। कुछ पत्रकार आ चुके थे। वे बाहर खड़े होकर मीरा यादव के साथ अनौपचारिक वार्ता कर रहे थे। इस तरह थोड़ी देर बीता होगा कि उनमें से कई ने घड़ी देखते हुए कहा, "अब शुरू कीजिए." "अभी आपके दो-चार साथी नहीं आए हैं। उनका थोड़ा इंतजार कर लिया जाए न!" "अच्छा, तब तक मोहतरमा को बुलाइए, उनका दीदार तो करें।" मीरा यादव बाई आँख दबाकर वीभत्स तरीके से हँसने लगीं, "जरा सब्र करें, सब्र करें..." वह भीतर चली गईं। जब कुछ और पत्रकार भी आ गए, तब मीरा यादव बाहर निकलीं। इस बार वह अकेली नहीं थीं, साथ में सरोज भी थी। सरोज हल्के हरे रंग का सलवार-कुर्ता पहनी हुई थी। दुपट्टा सफेद था। उसके लंबे घने काले बाल तेल पुते थे। उसका शरीर सूजा हुआ था। सीप की तरह सुंदर-विशाल उसकी आँखें लाल थीं और छुपती फिर रही थीं। गौर वर्ण के उसके चेहरे पर जगह-जगह आँसुओं के धब्बे थे। मीरा यादव ने उसे एक कुर्सी पर बैठाया और बगल में स्वयं बैठ गईं। वह सामने बैठे पत्रकारों को सम्बोधित करने लगीं। वह बतलाने लगीं कि किस प्रकार हरदोई जनपद के गाँव परसपट्टी से सरोज अपहृत की गई. कहाँ-कहाँ ले जाई गई. वहाँ उसके साथ क्या-क्या सलूक हुआ। बोलते-बोलते मीरा यादव ने कई बार आँसू पोंछे। दो-चार बार नाक सुड़की। सरोज का सिर सहलाकर 'बेचारी,' 'अभागिन' कहा। भाषण समाप्त करने के बाद नौकर को नाश्ता-पानी ले आने का इशारा किया। नाश्ते की व्यवस्था एक तरह से इंटरवल थी, जिसके बाद पत्रकार-वार्ता को क्लाइमेक्स की तरफ आगे बढ़ना था। पत्रकार नाश्ता समाप्त करने के बाद मुँह पोंछकर तैयार हुए. मीरा यादव ने सरोज की पीठ पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाया। एक पत्रकार ने पूछा, "सबसे पहली बार गोरखनाथ ने आपके साथ बलात्कार कब और कहाँ किया?" सरोज का चेहरा जैसे रास्ता भटक गया। कुर्सी के हत्थों पर पड़े उसके हाथ इस तरह काँपने लगे, जैसे थाप दे रहे हों। उसके होंठ बोलने के लिए खुलते, लेकिन आवाज निकलने के पहले ही ऐंठ जाते। पत्रकार ने अपना प्रश्न दुबारा दागा। मीरा यादव सरोज को ढ़ाँढ़स देने लगीं, "घबराओ मत सरोज। हिम्मत करके सारी बातें बता दो। डॉक्टर और पत्रकार से बात छुपाने पर अपना ही नुकसान होता है... हाँ... सरोज..." "अट्ठाईस जनवरी को गोरखनाथ ने पहली बार मेरे साथ गंदा काम किया था, अयोध्या के एक मंदिर की ऊपरवाली मंजिल के कमरे में। यह किसी बहुत बड़े महंत का डेरा है। महंत की दाढ़ी उनके पेट पर लटकी रहती है।" "आपने गोरखनाथ जी को कैसे पहचाना? कैसे जाना कि वह गोरखनाथ ही हैं।" "हम उनको पहचानते थे अच्छी तरह से। इलेक्शन में उनकी फोटोवाले पोस्टर हमारे गाँव में लगे थे। एक पोस्टर तो हमारे घर की दीवार पर भी चिपका था। बाबू ने, अम्मा ने... भाभी ने उनकी पार्टी को ही वोट दिया था... भइया भी उनको वोट देने गए थे। पर उनका वोट पहले ही पड़ गया था... हम तभी से गोरखनाथ को पहचानते थे।" "आपने कुछ और लोगों पर भी बलात्कार का आरोप लगाया है और कहा है कि वे गोरखनाथ के खास आदमी हैं। इसका क्या कोई सबूत है आपके पास?" "हाँ, परमू और भोला ने भी मेरे साथ बदमाशी की... ये दोनों पहले मेरे मुँह में कपड़ा ठूँस देते थे। ये गोरखनाथ के खास आदमी हैं-यह इससे पता लगा कि यही हमको ले आए गोरखनाथ के यहाँ। इसके अलावा ये इलेक्शन में गोरखनाथ की पार्टी की पर्ची काट रहे थे।" "और दरोगा एम.पी. सिंह के बारे में क्या कहना है आपका?" "वो तो मुझको मारे भी थे... बाल पकड़कर थाने में घसीटा था, फिर बंदूक के कुंदे से ठेलते हुए भीतर ले गए और गंदा काम किया। अगर वह गोरखनाथ के आदमी न होते, तो मुझको बचाते, लेकिन उन्होंने तो फिर हमें उन्हीं जालिमों के हवाले कर दिया था... उन्हीं भोला, परमू, छलिया के हवाले।" "हाँ, छैलबिहारी। उसके बारे में कुछ नहीं बताया आपने?" सरोज चुप रही। उसे लगा, उसके भीतर बहुत सारी साँस भर गई है। वह साँस को बाहर नहीं निकाल पा रही है। मत्थे पर पसीना उभरने लगा था। पत्रकार दहाड़ा, "मेरा सवाल है कि छैलबिहारी के बारे में आपके क्या अनुभव हैं?" सरोज की पलकें फड़फड़ाईं। वह चिल्ला पड़ी, "हाँ, छैलबिहारी ने भी मेरे साथ बलात्कार किया है..." वह फूट-फूटकर रोने लगी। रोते हुए ही भीतर चली गई. मीरा यादव ने हाथ जोड़े, "आज के लिए बस, इतना ही।" एक पत्रकार ने नाराजगी प्रकट की, "पर हमको डिटेल्स नहीं मिले अभी।" "सब मिलेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस का सिलसिला तो अभी आगे भी चलना है।" मीरा यादव पत्रकारों के बीच में आ गईं और धीरे-धीरे चलने लगीं, कमरे से बाहर निकलने पर एक पत्रकार ने कहा, "पर आप पत्रकारों की सेवा करना नहीं जानती हैं। ये शाम-रात का वक्त और आपने बस, समोसा-कॉफी से टरका दिया।" "तो जो चाहिए, बताइए." मीरा यादव हौसले से बोलीं। "जो चाहेंगे, आप देंगी?" यह एक समाचार एजेन्सी का वरिष्ठ संवाददाता था। "हाँ, बिल्कुल दूँगी।" वह मुस्कराई, "पर सरोज पांडेय को नहीं दूँगी।" सभी हँस पड़े। एक पाक्षिक का ब्यूरो चीफ हँसते हुए बोला, "बहुत खलीफा हैं आप विधायिका जी." मीरा यादव के यहाँ उनकी पार्टी के मुखिया के निजी सचिव गोवर्धन लाल का फोन आया, "नेताजी ने तुरंत बुलाया है।" वह खुश हो गईं, "इसी समय का तो मैं इंतजार कर रही थी।" उन्होंने चटपट खादी सिल्क की साड़ी पहन ली और बाहर निकलने से पहले सरोज से मिलने दूसरे कमरे में चली गईं। वहाँ बिस्तर पर लेटी सरोज दुपट्टे से मुँह ढँके रो रही थी। मीरा यादव ने आवाज दी, "सरोज!" सरोज रोती हुई उठी, "मुझको मेरे घर क्यों नहीं भेज रही हैं आप?" "मान लो, तुम घर जाओ और तुम्हें वहाँ घुसने न दिया जाए. घरवाले तुम्हें धक्के देकर खदेड़ दें, तब! आखिर इज्जत लुटा चुकी लड़की का बोझ उठाना आसान है क्या! इसीलिए मैंने तुम्हारे पिताजी को यहीं बुलाया है कि देखूँ, उनका रुख क्या है। मैंने तुमको अपनी छोटी बहन बनाया है, ऐसे कैसे नरक भोगने के लिए वहाँ भेज दूँ।" "पर दीदी, आप खुद चलकर मुझे छोड़ आइए गाँव। वहाँ अगर मेरे अम्मा-बाबू, भइया-भाभी ने मुझे स्वीकार नहीं किया, तो मैं आपके साथ लौट आऊँगी।" "जिंदा बचोगी, तब लौटोगी न। समझती क्या हो, गोरखनाथ और उसके आदमी हाथ में मेंहदी लगाकर बैठे हैं! देखो, तुम बाहर निकली नहीं कि हमला हुआ। तुम्हारे एक सौ चौंसठ के बयान के बाद गोरखनाथ पगला गया है। उसके गुंडे तुमको ट्रक से कुचलकर मार सकते हैं। बम से उड़ा सकते हैं। चाकू घोंपकर तुम्हारा कत्ल कर सकते हैं। देखो सरोज, यदि ज़िन्दगी की सलामती प्यारी है, तो फिलहाल यहाँ से बाहर निकलने का नाम मत लो।" सरोज के आँसू अभी सूखे नहीं थे कि वह फिर रोने लगी। मीरा यादव ने उसका सिर सहलाया और बाहर आ गईं। ड्राइवर से बोलीं, "नेताजी के यहाँ।" ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट कर दी। गाड़ी के स्पीड पकड़ते ही वह मुस्कराईं, "लगता है, सरोज का तीर निशाने पर लगा है। नेताजी मुझे विधान-परिषद का उम्मीदवार दुबारा बनाने का मन बना चुके हैं शायद। तभी तो खुद फोन कराकर बुलाया है। नहीं तो कहाँ मुलाकात का टाइम पाने के लिए गिड़गिड़ाती रहती थी, लेकिन महोदय के कान पर जूँ नहीं रेंगती थी।" वह हल्का-सा हँस पड़ीं, "अब देखती हूँ उस उद्योगपति और बिल्डर मादर... को।" ड्राइवर ने पीछे मुड़कर देखा, "जी, आपने कुछ कहा।" "अबे, मुझे क्या देख रहा है, सामने देख।" वह बिगड़ उठीं, लेकिन जल्द ही मंद-मंद मुस्कराने लगीं, "यह सरोज भी ससुरी क्या चीज मिली है।" वह उस दिन को धन्यवाद देने लगीं, जब वह सरोज को जौनपुर से लेकर आई थीं। खैराबाद मुहल्ले के मकान नंबर एक हज़ार चार सौ छब्बीस को उनके आदमियों ने घेर लिया था। वहाँ पहरा दे रहे गोरखनाथ के पक्ष के गुंडों को बुरी तरह मारा गया और भीतर घुस लिया गया था। छैलबिहारी कहीं गया हुआ था। भीतर सरोज सिल पर मसाला पीस रही थी। मीरा यादव उसके पास पहुँची, "घबराओ मत। मैं तुम्हें इस नरक से आजाद कराने आई हूँ। मुझको अपनी बड़ी बहन समझो।" सरोज हड़बड़ाकर खड़ी हो गई थी। वह सुहागिन के बाने में थी, माँग में सिंदूर भरा हुआ था। कलाइयों में गझिन चूड़ियाँ थीं। पैर में मोटी पायलें थीं। मकान में बहुत-से राइफल, रिवॉल्वरवाले लोगों को घुस आया देखकर कि या कोई और बात थी, सरोज को चक्कर आ गया, वह बेहोश होकर गिर पड़ी, लेकिन यह वक्त बर्बाद करने का नहीं था। उसे उठाकर गाड़ी में लाद दिया गया था। फिर तो मीरा यादव का काफिला राजधानी स्थित उनके आवास पर ही आकर रुका था। बाद में होश आने पर सरोज ने बताया था कि लोगों को शक न हो, इसलिए उसे सुहागिन बनाकर छैलबिहारी की बीवी के रूप में रखा गया था। यहीं पर थोड़ी दूर के एक धर्मशाले में परमू और भोला भी छिपे थे, जो अँधेरा होने पर आ जाते थे। वे दोनों तथा छैलबिहारी उसे निचोड़ते रहते रात भर। अब तो वह विरोध भी नहीं करती थी। सरोज ने यह भी बताया था कि महंत जी के मंदिर में वह करीब एक हफ्ता रखी गई थी। उतने दिन उसे गोरखनाथ को सहना पड़ा था। बीच में एक दिन वह मुँह अँधेरे भाग निकली थी। दौड़ते-भागते-छिपते वह किसी तरह थाना पहुँची। उस समय दरोगा एम.पी. सिंह नहा-धोकर अलगनी पर अपनी लँगोट टाँग रहे थे। वह उनके पास जाकर अपनी आप-बीती सुनाने लगी। अभी भी अँधेरा पूरी तरह छँटा नहीं था और वह दरोगा का चेहरा ठीक से देख नहीं पा रही थी। दरोगा उसे भीतर ले जाकर बैठने के लिए बोले और खुद फोन मिलाने लगे। वह गोरखनाथ से बात कर रहे थे। उसी बातचीत में सरोज ने दरोगा का नाम जाना था। रिसीवर रखने के बाद एम.पी. सिंह ने लाइट जलाई और सरोज को देखकर मुस्कराए. उनकी आँखों के भाव को देखकर सरोज डर गई. वह आगे बढ़े तो डरकर बाहर भागी। लेकिन वह स्त्री थी और थकी हुई थी। बाहर थोड़ी ही दूर पर दरोगा ने पीछे से उसके बालों को पकड़ा। वह गिर पड़ी। दरोगा उसके बालों को पकड़े हुए ही पूरे मैदान में घसीटने लगे। वह दर्द से और डर से बिलबिला रही थी। घसीटी जाती हुई वह जब पहरा दे रहे सिपाही के पास पहुँची, तो झपटकर उसके पैरों को पकड़ लिया। दरोगा ने उसके बाल छोड़कर पहरेवाले सिपाही की बंदूक ले ली और उसकी मूठ से उसकी पीठ पर, वक्षों पर, नितंब पर मारने लगे। वह तड़प कर छिटक गई, तो उसने मूठ का तेज प्रहार उसकी योनि पर किया। वह बंदूक की मूठ से मारते हुए उसे भीतर ले गए थे। ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी। सामने पार्टी के मुखिया का बँगला था। मीरा यादव गाड़ी से उतरीं और रौब से चलने लगीं। वह निजी सचिव गोवर्धन लाल के कमरे में पहुँचीं, तो देखा कि कई अखबारों के संवाददाता वहाँ मौजूद थे। सभी ने हँस-हँसकर उन्हें अग्रिम में मुबारकबाद दी और ताना कसा, "टिकट पाने के बाद भी क्या आप सरोज के मामले में अपनी लड़ाई जारी रखेंगी?" "सरोज की लड़ाई को कृपया राजनीति से मत जोड़िए. मैं हजार बार कह चुकी हूँ कि उस मुद्दे का मेरे टिकट से कोई लेना-देना नहीं है। सरोज की लड़ाई को मैं एक धर्मयुद्ध की तरह लड़ रही हूँ।" अब तक निजी सचिव ने नेताजी से इंटरकॉम पर बात कर ली थी। उधर से मीरा यादव को भेजने का हुक्म हुआ था। कमरे में नेताजी अकेले बैठ थे। वह अभिवादन करके मुस्कराईं, पर तुरंत सहम गईं, नेताजी का मूड ठीक नहीं लग रहा था, क्योंकि उनका चेहरा फूला हुआ और लटका, दोनों लग रहा था। मीरा यादव ने सोचा, 'अब क्या करूँ? यहाँ रुकने पर मामला गड़बड़ हो सकता है और लौटा जा नहीं सकता।' उन्होंने अपने वक्ष से आँचल सरका दिया और हल्का-सा होंठ काटकर हँसते हुए नेताजी की तरफ बढ़ीं। नेताजी जहाँ बैठे थे, वहीं खड़े हो गए. नाटकीय तरीके से दोनों हाथों से इशारा करके मीरा यादव को इस प्रकार बुलाने लगे, "आ...आ...रंडी... आ...जा...रंडी." उन्होंने चुमकार कर पुनः पुकारा, "ऐ रंडी... आ...आ..." मीरा यादव को लग गया कि उनके साथ कुछ बहुत ही बुरा होनेवाला है, लेकिन वह समझ नहीं पा रही थीं कि ऐसा क्यों हो रहा है। वह नेताजी के पास आ गईं, तो बोलीं, "मुझसे क्या गलती हुई? मैं तो तन-मन-धन से आपकी सेवा में हाजिर रहती हूँ।" "हरामजादी, तू ये सरोज नाम की कौन-सी छिनाल लिए घूम रही है?" "नेताजी, वह छिनाल नहीं है। जुल्म की मारी हुई एक असहाय लड़की है। दूसरे, वह हमारे काम की है। उसके प्रकरण को उछालकर हम गोरखनाथ की पार्टी के वोट बैंक में कमी ला सकेंगे।" नेताजी ने अजीब तरह से मुँह बिचकाते हुए विभिन्न प्रकार की आवाजें निकालकर मीरा यादव को चिढ़ाया और बिफर पड़े, "तुम, एक तो चूतिया हो, दूसरे मेहरारू। मुझे वोट का गणित सिखाने चली हो। अरे, पता है, प्रदेश में गोरखनाथ की जाति के कितने वोट हैं। खुद मेरे चुनावी क्षेत्र में उसकी जाति के पैंतालीस हजार वोटर हैं। तुम्हारी इस करतूत से हम ये सारे के सारे वोट गँवा देंगे।" वह कमरे में चहलकदमी करने लगे। मीरा यादव ने कुछ कहना चाहा, तो उसे मना करते हुए वह रुक गए, "सफाई मत दे सूअरी। तुझे मालूम नहीं था क्या कि गोरखनाथ अपनी पार्टी में मुख्यमंत्री का विरोधी है और चुनावों में मुख्यमंत्री के उम्मीदवारों को हराने की कोशिश करता है।" मीरा यादव गिड़गिड़ा पड़ी, "नेताजी, मुझको ये सब बारीकी नहीं पता थी। मुझको माफ कर दीजिए और आदेश करिए कि मैं क्या करूँ?" "यही कि तू जल्दी भाग यहाँ से।" नेताजी मटककर बोले, "पूछ रही है कि मैं क्या करूँ।" वह फिर मीरा यादव की तरफ मुखातिब हुए, "भाग... चल निकल यहाँ से।" मीरा यादव डरीं कि नेताजी कहीं मार न बैठें। दरअसल उनकी जो शोहरत थी, उसको देखते हुए यह असंभव कार्य नहीं था। मीरा यादव डरी-दबी-सशंकित दरवाजा खोलकर बाहर निकलीं। कार में बैठते ही वह रो पड़ीं। ड्राइवर कौतूहल से शीशे में उनका प्रतिबिंब देखने लगा था। मीरा यादव के बह रहे थे आँसू, लेकिन वह रूमाल से पोंछ रही थीं नाक। वह कार की खिड़की से बाहर देखती हुई खामोश रोती जा रही थीं। उनका राजनीतिक भविष्य रसातल में चला गया था। जिस चीज को पाने के लिए उन्होंने इज्जत-अस्मत तक की परवाह नहीं की, जिन लोगों की शक्ल देखकर घिन आती थी, उनसे भी लिपट-सिपट गईं और मीठा-मीठा बोलीं। राजनीति में गहरा रसूख रखनेवाले एक नेता के कहने पर मुर्गा भी खा ली थीं और भ्रष्ट हो गई थीं, वह चीज आज नेताजी के कमरे में उनके पास से निकलकर दूर चली गई. वह सिसकीं, "सरोज मादर... ये सब तुम्हारे कारण हुआ।" इस बार ड्राइवर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, बल्कि बौखलाहट में गाड़ी की रफ्तार तेज कर दी। यह कोरा संयोग ही था कि इधर अपने मुखिया के दरबार में मीरा यादव अपमानित और आहत हुई थीं, तो दूसरी तरफ लगभग उसी वक्त जब मुखिया मीरा यादव को 'रंडी आ...आ...' कह-कहकर बुला रहे थे, मुख्यमंत्री प्रदेश शासन के प्रमुख गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को डाँट पिला रहे थे। हुआ यह था कि मुख्यमंत्री के पास केंद्रीय नेतृत्व के दो बड़े नेताओं ने नाराजगी जाहिर की थी कि वह अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते गोरखनाथ को फँसाकर ठीक नहीं कर रहे हैं। इससे पार्टी की उज्ज्वल छवि को धक्का पहुँच रहा है। अगर हालात दो दिनों के भीतर न संभले, तो केंद्रीय नेतृत्व चुप नहीं बैठेगा। मुख्यमंत्री इस धमकी से दुबले हो रहे थे कि उन्हें यह भनक भी लगी कि उनकी पार्टी के गोरखनाथ समर्थक अड़तीस विधायक गोरखनाथ को नैतिक समर्थन देने के इरादे से सामूहिक इस्तीफा देने का मन बना रहे हैं। वह इतना विचलित हुए कि स्वयं फोन पर प्रमुख गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को, चाहे जिस स्थिति में हों, फौरन हाजिर होने का हुक्म दिया। और अब, जब दोनों सामने आए, तो वह भन्ना पड़े, "आप लोग एकदम निकम्मे हैं क्या?" "सर...सर..." दोनों अफसरों ने समवेत कहा। "हमारी पार्टी के अत्यंत महत्त्वपूर्ण नेता गोरखनाथ जी पर शरारती तत्व इस तरह प्रहार कर रहे हैं और आप लोग हाथ पर हाथ धरे चुप बैठे हैं। शर्म आनी चाहिए. उनकी मनोदशा का अनुमान लगाइए आप लोग। सोचिए, उस बेकसूर इनसान पर क्या गुजर रही होगी इन दिनों।" "सर...सर... आप निश्चिन्त रहिए... सब ठीक हो जाएगा... आज ही ठीक हो जाएगा सब।" "मैं आप लोगों से चापलूसी नहीं, नतीजे चाहता हूँ... जाइए, जुट जाइए जल्दी से। समय मत बर्बाद करिए, अपना और मेरा भी... जाइए..." यह भी संयोग की बात है कि उसी तिथि में एक अन्य महत्त्वपूर्ण वाकया हुआ। वह यह कि प्रदेश मंत्रिमंडल में गोरखनाथ के कट्टर समर्थक माने जानेवाले सूचना मंत्री ने अपने आवास पर दैनिक समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, समाचार एजेन्सियों के संपादकों-संवाददाताओं को रात्रिभोज पर बुलाया। ऐसा कहा जा रहा था कि सूचना मंत्री के गोरखनाथ समर्थक होने के बावजूद रात्रिभोज मुख्यमंत्री के निर्देश पर दिया जा रहा था। दावत में सूचना मंत्री ने समस्त अतिथियों को शराब में डुबो दिया था। वह उन्हें अधिक से अधिक शराब पीने के लिए प्रेरित कर रहा था। इसका अनुरोध था कि आज यहाँ उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति इतना अधिक पिए कि इस पीने को उसके जीवन में सबसे ज़्यादा पीने के कीर्तिमान के रूप में याद किया जाए. 'खूब पियो, बेफिक्री से पियो' के आह्वान के साथ वह और उसके अभिन्न जन बीच-बीच में 'गोरखनाथ को निरपराध फँसाए जा रहे' विषय पर संक्षिप्त, किंतु सारगर्भित भाषण भी कर रहे थे। रात्रिभोज को लेकर सुबह से ही चर्चा का बाज़ार गर्म था। एक तो यही हवा थी कि सूचना मंत्री की दावत में अफगानिस्तान से आए एक कुक के नेतृत्व में मांसाहारी व्यंजन तैयार किया जाएगा। सब कुछ इतना बेहतरीन और लजीज होगा कि सरोज कांड में गोरखनाथ का पलड़ा भारी हो जाएगा। मीरा यादव और सरोज को कोई ठिकाना नहीं मिलेगा। दूसरी बात, जिसको लेकर विशेष सनसनी थी कि सुना जा रहा था कि रात्रिभोज में सम्मिलित होनेवाले प्रत्येक पत्रकार को रंगीन टी.वी सेट दिए जाएँगे, जो राज्य सरकार के उपक्रम 'वीडियो विश्व' के उत्पाद होंगे। हालाँकि कुछ पत्रकारों ने मंत्री जी को यह इशारा भिजवाया था कि टीवी सेट दिए जाने की बात सच है, तो वह यह कहना चाहते हैं कि उनके घर में रंगीन टी.वी है। अतः उन्हें यदि राज्य सरकार के ही उपक्रम 'स्कूटर लैंड' का स्कूटर दे दिया जाए, तो कुछ ग़लत तो नहीं होगा। कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने नाराजगी भी प्रकट कर दी थी। उनका कहना था कि पब्लिक सेक्टर के उत्पाद उन्हें फूटी आँख नहीं सुहाते हैं। उनके बच्चे तो ऐसे सामान देखते ही तोड़ डालेंगे। संवाददाताओं को पता चला कि तीन दैनिक-पत्रों तथा एक समाचार एजेंसी के संपादकों को मारुति-एक हज़ार भेंट की जाएगी। अतः संवाददाता अपनी उपेक्षा से अप्रसन्न थे। वैसे, संपादक भी खास खुश नहीं थे। उनका मानना था कि मारुति-एक हज़ार मॉडल पुराना पड़ चुका है। राजधानी की सड़कों पर जब सेलो और स्टीम गाड़ियाँ धड़ल्ले से दौड़ रही हैं, तब मारुति-एक हज़ार से कैसी खुशी। तो इस प्रकार पार्टी के मुखिया द्वारा मीरा यादव को फटकार, मुख्यमंत्री द्वारा गोरखनाथ से वैर-भाव समाप्त करना और उनके समर्थन में खुलकर आना तथा मीडिया को अनुकूल करने के लिए सूचना मंत्री द्वारा आयोजित दावत-ये तीनों अचंभे में डाल देनेवाली ऐसी चीजें थीं, जिसकी कल्पना भी इस मामले में दिलचस्पी ले रहे लोगों ने नहीं की थी और यह तो सपने में भी नहीं सोचा जा सकता था कि इतनी अकल्पनीय तीन-तीन घटनाएँ एक ही दिनांक में घटित हो जाएँगी। हालाँकि श्याम नारायण मीरा यादव पर कुपित थे कि अखबारबाजी कराकर सरोज प्रकरण का सारा श्रेय वह ले रही है। इसीलिए उन्होंने मन-ही-मन मीरा यादव को 'बदजात कुतिया' और 'राजनीति की पतुरिया' भी कहा था, किंतु उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था कि वह सरोज के पिता विष्णु दत्त को लेकर मीरा यादव के यहाँ जाएँ, क्योंकि जहाँ तक उनकी पार्टी का सवाल है, तो वह सरोज के साथ हुए जुल्म को आम जनता को जुझारू संघर्ष के लिए लामबंद करनेवाला मुद्दा नहीं मानती थी। दूसरी, सबसे बड़ी बात कि सरोज मीरा यादव के ही पास थी। ऐसे में श्याम नारायण क्या करते, विष्णु दत्त को लेकर पहुँचे उसी मीरा यादव के घर, जिसके प्रति वह भयानक घृणा से ओत-प्रोत थे और जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, इस महिला बुर्जुआ नेता को वह बदजात कुतिया और राजनीति की पतुरिया से ज़्यादा कुछ नहीं समझते थे। मीरा यादव के घर श्याम नारायण और विष्णु दत्त पहुँचे, तो पता चला कि मीरा यादव हैं नहीं। पार्टी के मुखिया से उनकी मीटिंग है और मीटिंग कितनी देर चलेगी, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। घर के चारों तरफ मीरा यादव के आदमियों का पहरा था। इतनी रात आए इन दो आगंतुकों को पहरेदारों ने घूरा। श्याम नारायण बोले, "सरोज मेरे जीजा जी की बहन है और ये सरोज के पिता हैं। हमलोगों को सरोज के पास ले चलिए." पर पहरेदारों को यह स्वीकार्य नहीं था। उनका कथन था कि "विधायिका जी की आज्ञा के बिना सरोज के कमरे तक परिंदा भी पर नहीं मार सकता।" "भइया, हम परिंदा नहीं, सरोज के पिताजी हैं। हमको अपनी बेटी से मिलने दिया जाए." "पिता हो या कोई, जब तक हमें विधायिका जी की इजाजत नहीं मिलेगी, हम किसी को अंदर नहीं जाने देंगे।" एक पहरेदार ने सारे पहरेदारों की तरफ से कहा। दूसरे ने थोड़ी उदारता दिखाई, "तब तक आप ड्राइंगरूम में बैठें। बस, विधायिका जी आती होंगी।" वे दोनों ड्राइंगरूम में आए और बैठ गए. श्याम नारायण विष्णु दत्त के कान में फुसफुसाए, "हम लोग खूब जोर-जोर से बोलें, जिससे आवाज पहचानकर सरोज खुद ही बाहर आ जाए." वे जोर-जोर से बोलने लगे। खासतौर पर विष्णु दत्त तो लगभग चिल्लाकर अपने को व्यक्त कर रहे थे। रात के ग्यारह बजे थे। दोनों की आवाजें बाहर जाकर रात के अँधेरे में मँडरा रही थीं। फिर भी जब सरोज नहीं आई, तो वे निराश हुए. श्याम नारायण में निराशा फैल ही रही थी कि उन्हें मेज पर रखी एक पत्रिका के आवरण पर इन्सेट में सरोज की फोटो दिख गई. द्रुत गति से उनके हाथ ने पत्रिका उठा ली। सरोज प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट थी, लेकिन रिपार्ट में नया कुछ ज़्यादा नहीं था। अखबारों में छप चुकी चीजों का संकलन थी यह रिपोर्ट। हाँ, गोरखनाथ का एक इंटरव्यू और मामले के कानूनी पहलुओं पर एक बॉक्स ज़रूर विचारोत्तेजक और सनसनीखेज थे। बॉक्स लेखक ने अपनी टिप्पणी में गोरखनाथ के इंटरव्यू में कही गई कुछ बातों को भी शामिल करके टीका-टिप्पणी की थी। जैसे कि गोरखनाथ ने बयान दिया था कि सरोज पांडेय ने एक सौ चौंसठ का बयान मीरा यादव के उकसाने पर दिया है। मीरा यादव ने सरोज के पिता विष्णु दत्त को खामोश रहने के लिए अच्छी-खासी रकम मुहैया कराई है। इस पर बॉक्स लेखक का कहना था कि भारतीय समाज में कोई लड़की कभी भी अपने साथ चार लोगों द्वारा बलात्कार का आरोप नहीं लगाएगी, क्योंकि उसे और सभी को ज्ञात है कि इस बात से उसकी इतनी बदनामी होगी कि उसका समूचा जीवन बर्बाद हो जाएगा और जहाँ तक विष्णु दत्त को अच्छी-खासी रकम देकर अनुकूल करने का प्रश्न है, तो यह अविश्वसनीय है-इसलिए कि विष्णु दत्त के पास सोलह बीघे पक्के उपजाऊ खेत हैं और पक्का मकान है। यानी वह आर्थिक रूप से प्रताड़ित ऐसे विवश व्यक्ति नहीं हैं कि कुछ पैसों के लिए अपनी इज्जत और बेटी के भविष्य को सूली पर चढ़ा दें। लेखक ने उदाहरण दिया था कि बलात्कार के इसी प्रकार के मामले में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन माननीय न्यायाधीश वी.जे. राजू ने कहा था, "पार्टीबंदी के कारण कोई भी व्यक्ति अपनी युवा पुत्री को बलात्कार के मुकदमे में डालकर उसके भविष्य को बर्बाद कर देगा, यह विश्वसनीय नहीं है।" । इस मुकदमे में बलात्कारी को सात साल के कारावास की सजा हुई थी। लेखक ने बेहद भावपूर्ण ढंग से लिखा था, " कुछ लोग कह रहे हैं कि सरोज के साथ बलात्कार नहीं हुआ है। अगर वैसा कुछ हुआ है, तो सरोज की मर्जी से हुआ है और उसे संभोग कहा जाना चाहिए, बलात्कार नहीं, क्योंकि बलात्कार के विरुद्ध तो स्त्री लड़ती है, संघर्ष करती है, किंतु सरोज के शरीर पर चोट या घाव के निशान नहीं है। इसके जवाब में मैं कहना चाहता हूँ कि कोई भी स्त्री दो माह तक लगातार कई-कई पुरुषों से लड़ती नहीं रह सकती। ऐसे लोगों से निवेदन है कि वे जान लें कि उड़ीसा उच्च न्यायालय में संहिता एक हज़ार आठ सौ साठ सेक्शन तीन सौ छिहत्तर के अंतर्गत लड़की की सहमति और शरीर पर किसी चोट की गैर-हाजिरी का मामला आया था, जिस पर विद्वान न्यायाधीश ने 'सहमति' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा था कि सहमति का अर्थ है-समुचित करार, विचारों और भावनाओं की समरूपता, प्रेम की उपस्थिति से होनेवाले कार्य, व्यापार के प्रति स्वेच्छापूर्ण भागीदारी, किसी भी तरह का प्रतिरोध नहीं, कैसा भी इनकार नहीं। यह 'सहमति' शब्द असहायता का समानार्थी कतई नहीं है । गोरखनाथ के प्रचार-तंत्र ने एक चर्चा यह चलाई थी कि सरोज तो स्वयं संदिग्ध चरित्रवाली है, नहीं तो वह अपने गाँव के तीन-तीन युवकों के साथ क्यों भाग निकलती। इसके जवाब में टिप्पणी में तर्क था कि यदि मान भी लिया जाए कि सरोज का चरित्र संदिग्ध है, तो क्या समाज के पुरुषों को संदिग्ध चरित्रवाली स्त्रिायों-लड़कियों से बलात्कार करने का कानूनी हक हासिल हो गया है? लेखक ने एक पृष्ठ के आलेख में अत्यंत निपुणता के साथ सरोज की पैरवी की थी। पढ़कर श्याम नारायण का हौसला बढ़ गया। उन्हें लगा कि वह अकेले नहीं हैं और लोग भी हैं, जो सरोज के साथ लड़ाई में शामिल हैं। एक क्षण के लिए तो उनको इतना जोश चढ़ा कि मन हुआ, खड़े होकर 'इन्कलाब जिंदाबाद' लगाने लगें, मगर कुछ देशकाल के संकोच ने, कुछ इस भावना ने कि भीतर मौजूद सरोज को कहीं उनकी यह चिल्ल-पों अच्छी न लगे, उनको नारेबाजी करने से रोका। उन्होंने विष्णु दत्त को वह लेख दिखाकर उसका भाव समझाया और कहा, "इस लड़ाई में सरोज की जीत निश्चित है।" विष्णु दत्त बोले, "भगवान हमारी मदद करे।" उनका यह उद्गार श्याम नारायण को नागवार लगा। भगवान, यानी सरोज के लिए उनके परिश्रम, भाग-दौड़ का कोई मतलब नहीं है। विष्णु दत्त को मुँहतोड़ जवाब देने में वह पूर्णतया सक्षम थे, लेकिन सरोज का पिता होने के नाते उन्होंने उनको बख्श दिया और चुप रह गए. थोड़ी देर तक चुप रहने की वजह से या कोई दूसरी वजह रही कि उनमें एकाएक आत्मालोचन का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे उनमें पार्टी सचिव की आत्मा उतरने लगी, वह विचार करने लगे, "मैं स्वयं कहाँ सच्चा कार्यकर्ता होने का परिचय दे रहा हूँ। सरोज शोषित वर्ग की है नहीं, दलित भी नहीं है कि उसकी पक्षधरता को व्यापक सामाजिक परिवर्तन के आलोक में देखा जा सके. फिर मैं क्यों इतने दिनों से मारा-मारा फिर रहा हूँ? आखिर मुझे हुआ क्या है, जो मैं इतना हलकान हुआ जा रहा हूँ।" वह आकंठ शर्म में डूब गए. उनको महसूस हुआ कि कहीं वह सरोज के प्रति अपनी पुरानी आसक्ति के चलते तो ये सब नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कलाई की वह जगह छुई, जहाँ सरोज ने दाँत गड़ाए थे और सोचने लगे, "मैं सरोज की मदद सरोज को अपमानित करने के लिए कर रहा हूँ क्या कि एक तुम थी, जिसने मुझे दाँत काट लिया था और देखो, मैं हूँ और मेरा प्रेम कितना महान है कि तुमसे चार-चार लोगों द्वारा बलात्कार करने के बाद भी तुम्हारे लिए हमदर्दी रखता हूँ।" "कब आएँगी विधायिका जी?" विष्णु दत्त ने ऊबकर पूछा और दीवार पर टँगी घड़ी देखने लगे, "इतनी देर तक वह कौन मीटिंग कर रही हैं।" इसी समय बाहर कार आने और रुकने की आवाज हुई. मीरा यादव कार से उतरीं और आगे बढ़ीं। वह भीतर आईं, तो देखा कि उनके ड्राइंगरूम में श्याम नारायण एक अधेड़ देहाती के साथ बैठे हैं। वह तुरंत समझ गईं। कोई और नहीं, सरोज पांडेय का बाप है। वह करीब पहुँचकर विष्णु दत्त के पाँव छूने लगीं। विष्णु दत्त इस आदर-प्रेम से विह्वल हो गए और मूसलधार रोने लगे। अजीब दृश्य था, ड्राइंगरूम में विष्णु दत्त रो रहे थे, मीरा यादव उन्हें दिलासा दे रही थीं और श्याम नारायण उजबक की तरह कभी विष्णु दत्त को और कभी मीरा यादव को देखे जा रहे थे। विष्णु दत्त रोते हुए ही बोले, "आप इतनी बड़ी नेता और मुझ गरीब का पैर छू लीं।" "मुझे नेता मत कहें बाबूजी, मैं सरोज की बड़ी बहन हूँ। मुझको आप अपनी बिटिया समझें। मेरे लायक कोई सेवा हो, तो कहें।" "इतने ही उपकार तुम्हारे क्या कम हैं। बस, अब मुझको सरोज से मिला दो।" "सरोज!" मीरा यादव चौंक पड़ी, "यहाँ किसी ने बताया नहीं? वह तो गाँव गई, आप लोगों के पास।" "मेरे ख्याल से, उधर आपलोग आए और इधर वह गई. लगातार इन बाबूजी की, अपनी माँ, भाई-भाभी का नाम ले-लेकर रोती रहती थी। मैंने सोचा कि वहीं रहे, कोई दिक्कत नहीं।" श्याम नारायण मीरा यादव को घूरने लगे। अब विष्णु दत्त कभी श्याम नारायण को तो कभी मीरा यादव को उजबक की तरह देखे जा रहे थे। मीरा यादव श्याम नारायण के कंधे पर हाथ रखकर मुस्कराईं, "चिंता मत करिए भाई, मैंने व्यवस्था से भिजवाया है अपनी छोटी बहन सरोज को। पूरी सुरक्षा के साथ। हमारे चार आदमी तो बाकायदा ए.के.-सैंतालीस के साथ हैं।" "देखिए, साफ कहता हूँ, हमको आपकी बात पर यकीन नहीं आ रहा है। मुझे लग रहा है कि सरोज इस समय इसी मकान में कहीं है।" "आइए आप दोनों मेरे साथ।" वह चलने लगीं। विष्णु दत्त और श्याम नारायण भी उनके पीछे-पीछे हो लिए. पूरे घर का कोना-कोना देख लिया, कहीं नहीं थी सरोज। अब मीरा यादव एक आलमारी के सामने रुककर हँसी, "यकीन आया अब।" उन्होंने अलमारी खोली, "लीजिए, इसमें भी देख लीजिए." वहाँ भी नहीं मिली सरोज। मीरा यादव ने अलमारी का लॉकर खोला, दस हजार रुपए की एक गड्डी निकालकर विष्णु दत्त को दिया, "बाबूजी, यह छोटी बहन के लिए बड़ी बहन की तरफ से एक तुच्छ भेंट है।" विष्णु दत्त भकुआए खड़े थे, गड्डी को हाथ में पकड़े। "देर न करें आप। सरोज वहाँ राह देखेगी। मेरी गाड़ी आप लोगों को स्टेशन तक छोड़ देगी। आइए." उन्होंने विष्णु दत्त को और श्याम नारायण को घर से बाहर निकलने का इशारा किया। वह खुद भी बाहर निकलकर कार तक आईं। कार में बैठकर विष्णु दत्त ने मीरा यादव के प्रति कृतज्ञता में हाथ जोड़े, "हमलोगों पर आप अपनी कृपा सदैव बनाए रखिएगा।" मीरा यादव श्याम नारायण की तरफ देखीं, "फिर आइएगा, तो मिलिएगा।" श्याम नारायण ने उपेक्षा से चेहरा मोड़ लिया। वह खासे नाराज और उदास लग रहे थे। सरोज-गोरखनाथ प्रकरण एकाएक इस तरह का मोड़ ले लेगा, ऐसा अंदाज नहीं था। अभी कल तक जनता सरोज पर हुए अत्याचार से द्रवित थी और यह विश्वास कर रही थी कि गोरखनाथ की गिरफ्तारी यदि न भी हुई, तो इतना निश्चित है कि उनका राजनीतिक भविष्य चौपट होने से बच नहीं सकता है। विशेष रूप से कॉलेज में पढ़नेवाली लड़कियों में गोरखनाथ के खिलाफ भयंकर घृणा और गुस्सा था। वे पारस्परिक बातचीत में गोरखनाथ के लिए फाँसी से कम की सजा की पैरवी नहीं करती थीं और असंभव नहीं था कि ये लड़कियाँ जल्दी ही सड़कों पर निकल आतीं। लेकिन इस खबर ने लोगों को हैरत में डाल दिया कि सरोज पांडेय राजधानी छोड़कर अपने गाँव चली गई. इस बारे में मीरा यादव का वक्तव्य था कि उन्होंने सरोज को बार-बार समझाया कि उसकी लड़ाई, अकेली उसकी न होकर समाज की लड़ाई बन गई है, इसलिए मामले को इस तरह अधर में छोड़कर उसका जाना उचित नहीं रहेगा, पर सरोज ने एक न सुनी और अपने परिवारवालों के पास जाने की जिद पर अड़ी रही। उसने यहाँ तक कहा कि यदि उसे घर नहीं पहुँचाया गया, तो वह दुपट्टे को गले में कसकर मर जाएगी। अतः इन परिस्थितियों के मद्देनजर सरोज को उसके गाँव पहुँचा देने के अलावा मीरा यादव के पास कोई चारा न था। मीरा यादव ने यह उम्मीद प्रकट की थी कि जल्दी ही सरोज अपने परिवारवालों से मिलकर आ जाएगी। उसके आते ही गोरखनाथ के खिलाफ संघर्ष को फिर तेज किया जाएगा। कहने का मतलब मीरा यादव का संघर्ष रुका भर है, खत्म नहीं हुआ है। एक अखबार ने अपने संपादकीय में सरोज पांडेय के पलायन पर अफसोस जाहिर किया था और लिखा था कि सरोज द्वारा इस तरह एकाएक, बिना प्रेस को विश्वास में लिए चले जाने से संदेह की सुई उसकी तरफ भी घूमती है। उसके इस कदम से उन लोगों को मजबूती मिलेगी, जिनकी धारणा थी कि गोरखनाथ पर बलात्कार का आरोप बेबुनियाद है और सरोज किसी लोभ या मजबूरी के तहत तोहमत मढ़ रही है। अब सरोज ने अखबारवालों को मौका दे दिया था या अखबारवालों के विचारों में ही अकस्मात परिवर्तन आ गया था अथवा सूचना मंत्री के आवास पर हुई दावत का प्रभाव था, इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इतना तय है कि सरोज-गोरखनाथ प्रकरण में समाचार-तंत्र की धुरी बदल गई थी। 'लोक-जागरण' के संवाददाता ललित जोशी जो इस कांड का प्रथम उद्घाटनकर्ता था, से एन.टी.वी. ने एक विशेष भेंट प्रसारित की थी, जिसमें उसने कहा, "यह सच है कि सरोज बलात्कार कांड को सबसे पहले प्रेस के जरिए सामने लाने का सौभाग्य मुझे ही प्राप्त है और आज भी मैं अपनी रिपोर्ट पर कायम हूँ, लेकिन एक सवाल ज़रूर रह-रहकर मेरे भीतर कौंधता है कि गोरखनाथ को सरोज के साथ बलात्कार करने की क्या ज़रूरत थी, क्योंकि गोरखनाथ की जो हैसियत है, उनके पास जो धन, मान, प्रतिष्ठा और शक्ति है, उसको देखते हुए यदि गोरखनाथ चाहें, तो उन्हें वैसी ही लड़कियों की क्या कमी हो सकती है।" मीडिया जगत में सरगर्मी थी। प्रदेश के सबसे अधिक प्रसार-संख्यावाले समाचार-पत्र ने संपादकीय पृष्ठ पर 'बलात्कार कांडः कुछ प्रश्न' शीर्षक से अग्रलेख छापा, जिसमें कई शंकाएँ उठाई गई थीं। प्रमुख शंकाएँ इस प्रकार थींः सरोज के पिता विष्णु दत्त ने सरोज के गायब होने के तीन दिन बाद क्यों प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई, इस अवधि में वह क्या करते रहे? प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में कहा गया था कि सरोज स्कूल जाने के बाद नहीं लौटी यानी रास्ते में ही उसका अपहरण हो गया, मगर ध्यान देने की बात है कि रिपोर्ट में यह भी लिखाया गया है कि अभियुक्त विष्णु दत्त के घर से चार हजार नकद और पच्चीस हजार के जेवरात भी लेकर भागे हैं। तो यदि स्कूल के रास्ते में अपहरण हुआ, तो फिर घर से चोरी कैसे हुई? इससे ऐसा संकेत मिलता है कि हो न हो, सरोज ही नकद तथा जे़वर ले गई हो और मामला अपहरण का न होकर सरोज द्वारा किसी अन्य कारणों से घर छोड़ जाने का हो। प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में जिन तीन लोगों का बतौर अभियुक्त उल्लेख किया गया है, उसमें गोरखनाथ का नाम नहीं है। गौरतलब है कि गोरखनाथ का नाम इस केस में तब जुड़ता है, जब सरोज प्रमुख विपक्षी दल की नेता मीरा यादव के पास पहुँच जाती है। हम यह नहीं कहते, कतई नहीं कहते कि सरोज की जबानी सरोज की कहानी असत्य है। यहाँ हम केवल इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में मौजूद उपर्युक्त गड़बड़ियाँ सरोज के बारे में यदि किसी के भीतर शुबहा पैदा करें, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. प्रदेश के सबसे पढ़े-लिखे और प्रखर संवाददाता ने अपने अखबार के प्रथम पृष्ठ पर लिखा, "सरोज कहती है कि कैद की अवधि में उसके साथ भयानक जुल्म किए जाते थे और उसे ठीक से खाना नहीं दिया जाता था। कभी-कभी उसे बिस्कुट जैसे मामूली खाद्य पदार्थों से ही संतोष करना पड़ता था, पर यह समझ से परे है कि जैसा कि सरोज के पूर्व परिचित भी कहते हैं कि फिर वह मोटी कैसे हो गई. हालाँकि इस संदर्भ में प्रश्न किए जाने पर सरोज ने कहा कि उसकी भी समझ में यह बात नहीं आ रही है। उसका कहना था कि हो सकता है कि ऐसा उन गर्भ-निरोधक गोलियों की वजह से हुआ हो, जो उसे उन दिनों खिलाई गई थीं।" उक्त संवाददाता की समझ में यह बात भी नहीं आती थी कि जब सरोज को जौनपुर के खै़राबाद मुहल्ले से मीरा यादव ले आईं, तो उसके हाथों में रंग-बिरंगी गझिन चूड़ियाँ और पैरों में पायल क्यों थीं। सरोज की दलील है कि उसे जबरन विवाहित के बाने में रखा गया था। ताकि लोगों को शक न हो, पर सवाल है कि वह क्यों चाहती थी कि लोगों को शक न हो, वह कम से कम अपनी चूड़ियाँ तो तोड़ सकती थी। या कम-से-कम आजाद होने के बाद वह चूड़ियाँ और पायल की बेड़ियों को उतार फेंक सकती थी। ललित जोशी ने अपने अखबार के मुखपृष्ठ पर पुनः ऐसी खबर दी, जो अन्य अखबारों में नहीं थी। उसने लिखा कि सरोज पांडेय कथित बलात्कार के समय बालिग थी या नाबालिग-इसको लेकर विवाद है, क्योंकि जहाँ सरोज की अवस्था स्कूल के और उसकी जन्मपत्री के हिसाब से सोलह साल ठहरती है, वहीं मेडिकल रिपार्ट के मुताबिक वह करीब 'अठारह वर्ष' की है। द्रष्टव्य है कि मेडिकल रिपोर्ट की उम्र को दो साल आगे-पीछे खिसकाया जा सकता है। अतः सरोज बकौल मेडिकल रिपोर्ट, बीस वर्ष की हो सकती है यानी बालिग और ऐसी स्थिति में यदि यह सिद्ध हो गया कि वह घर से स्वेच्छा से भागी थी, तो उसका मुकदमा कमजोर हो जाएगा, क्योंकि कानून के अनुसार नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा होते हुए भी भगाना जुर्म है, किंतु बालिग होने पर ऐसा नहीं है। अतः कानूनविदों की राय में मुकदमे में मेडिकल रिपोर्ट की अहम भूमिका हो सकती है। उस स्थिति में तो और भी, जब शुरू-शुरू की मेडिकल रिपोर्ट में सरोज को 'पुरुष सहवास की अभ्यस्त' बताया जा चुका है। उसके बाद ललित जोशी ने कुछ विधि विशेषज्ञों के विचार प्रस्तुत किए थे, जो ललित जोशी की राय से लगभग इत्तिफाक रखते थे। एक नए, किंतु विचारोत्तेजक और निर्भीक राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक ने 'मुद्दा' स्तंभ के अंतर्गत लगभग पूरा पृष्ठ सरोज बलात्कार कांड पर केंद्रित किया। उसके केंद्रीय आलेख में बार-बार यह सवाल उठाया गया कि आखिर सरोज के बारे में सूचनाएँ मीरा यादव तक कैसे पहुँचीं। अखबार के अनुसार, इस गुत्थी को सुलझाए बिना मामले की तह तक पहुँचना मुश्किल है। वैसे, लेखक ने विभिन्न विश्वस्त सूत्रों से कुछ जानकारियाँ हासिल की थीं। एक सूत्र ने बताया था कि सरोज का अपने एक रिश्तेदार श्याम नारायण से गहरा प्रेम चल रहा था, लेकिन एकाएक पासा पलटा और सरोज श्याम नारायण को धता बताकर अपने ही गाँव के युवक छैलबिहारी से प्रेम करने लगी। श्याम नारायण सरोज के धोखे और बेवफाई से धधकता रहा और उसने बदला लेने की ठानी। वह सरोज को बदनामी के उस मुकाम तक पहुँचा देना चाहता था, जिससे सरोज को कोई भी अपना बना सकने की हिमाकत न करे। इस बात की पक्की जानकारियाँ हैं कि विधान परिषद् की सदस्य मीरा यादव से श्याम नारायण की निकटता है और यह भी ज्ञात हुआ है कि सरोज जिस दिन मीरा यादव के यहाँ आई, उसके ठीक एक दिन पहले दोपहर में श्याम नारायण ने मीरा यादव से उनके आवास पर गहन मंत्रणा की थी और यह भी उल्लेखनीय है कि जिस दिन सरोज पांडेय मीरा यादव के आवास से वापस गाँव गई, उस दिन भी श्याम नारायण मीरा यादव के घर पर आए थे और काफी देर तक रहे थे। संभवतः श्याम नारायण वाली खबर सरोज के मामले में अंतिम खबर लग रही थी। इसके प्रकाशन के कुछ दिनों बाद ही लोगों की स्मृति से सरोज पांडेय और गोरखनाथ धुँधलाने लगे, बल्कि थोड़े अंतराल के बाद तो यह भी जानने में आया कि गोरखनाथ ने दो महाविद्यालयों का उद्घाटन किया और कन्या पाठशाला की आधारशिला रखी। यह भी कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में, यहाँ तक कि सुदूर केरल प्रदेश के कोचीन नगर में भी उन्हें चाँदी के सिक्कों से तौलकर उनका अभिनंदन किया गया। उक्त अभिनंदन समारोह के बारे में कई निंदकों की राय थी कि अपने अभिवादन-कार्यक्रमों के प्रायोजक स्वयं गोरखनाथ थे। यदि नहीं, तो कम-से-कम इतना ज़रूर था कि वह आयोजकों के प्रेरणास्रोत निश्चय ही थे। इसके बाद काफी दिनों तक कुछ सुनने-पढ़ने-जानने में नहीं आया और ऐसा लगने लगा कि पिछले दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सनसनी पैदा कर देनेवाला, राजनीति में भारी उथल-पुथल करने की संभावनाओं से भरा हुआ यह वाकया अब दम तोड़ चुका है या ज्यादा-से-ज्यादा बहुत अल्प प्राणवायु शेष है और यही हुआ भी। लोगों की स्मृति से सरोज-गोरखनाथ घटनाक्रम का विलोप हो गया और मीडिया ऐसा कुछ उपस्थित नहीं कर रहा था कि उधर ध्यान जाता। मगर एक दिन यह खबर जोरदार ढंग से आई कि सरोज ने लखनऊ सेशन जज की अदालत में कहा, "माननीय गोरखनाथ जी ने मेरे साथ शीलभंग की कोई हरकत नहीं की है। मैं तो गोरखनाथ जी को पहचानती तक नहीं।" सरोज अपने एक सौ चौंसठ के कलमबंद बयान से साफ मुकर गई थी और अपने मौजूदा दाखिल हलफनामे में उसने दर्ज कराया था, "मुझे बरगलाकर गोरखनाथ के खिलाफ बयान दिलवाया गया था। अब मैं अपने उक्त एक सौ चौंसठ के बयान पर शर्मिंदा हूँ और उसे वापस लेती हूँ।" कहा जाता है कि सरोज हलफनामा देने अदालत आई, तो वह चॉकलेटी रंग की कंटेसा कार में सवार थी। उसकी कार के आगे-पीछे कई कारें और दुपहिया वाहन थे। वाहनों पर सवार लोगों के बारे में ऐसा माना जा रहा है कि वे गोरखनाथ के खास सिपहसालार थे। इस सेना का नेतृत्व परमू और भोला कर रहे थे। छैलबिहारी के बारे में कुछ चश्मदीदों का कथन है कि वह भी था और कंटेसा में सरोज के बगल में बैठा था, लेकिन कुछ का मानना है कि वह छैलबिहारी नहीं था, सरोज का भाई राधेश्याम था। एक राय यह भी है कि सरोज कंटेसा में ज़रूर आई थी, लेकिन उसके बगल में बैठा शख्स न छैलबिहारी था न राधेश्याम, दरअसल वह श्याम नारायण था और शेष सैन्य बल गोरखनाथ नहीं, मीरा यादव का था, लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि मीरा यादव को ऐसा करने की ज़रूरत क्यों आ पड़ी। ऐसा भी सुनने में आया कि इस तरह का कोई बयान सरोज ने दिया ही नहीं। गोरखनाथ ने अदालत में सरोज नहीं, सरोज की एक डुप्लीकेट लड़की भेजी थी और सरोज इस बात का खुलासा करने जल्द ही राजधानी आ रही है। उपरिलिखित तीन धारणाओं में कौन सही थी, कौन नहीं, इसके बारे में ठोस कुछ कहा नहीं जा सकता है या कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई भी सत्य न हो और न ही सत्य के नजदीक हो या हो सकता है कि तीनों ही सत्य के नजदीक हों और मिलकर पूरा सच गढ़ती हों। बहरहाल, मामला काफी उलझ चुका था और हकीकत का सामने आना काफी मुश्किल लग रहा था, क्योंकि पत्रकारों ने अब इसमें रुचि लेना बंद कर दिया था और पुलिस को किसी ने तफ्तीश का आदेश नहीं दिया था। वैसे भी, सरोज ने हलफनामा दे दिया था, तो वह किसके दबाव से आई और उसके साथ कौन लोग थे, इससे पुलिस क्यों वास्ता रखती? और व्यक्तिगत तौर पर आर्थिक रूप से समर्थ कोई व्यक्ति इतनी दिलचस्पी ले नहीं रहा था कि सच्चाई का पता लगाने का कार्य निजी जाँच एजेन्सी अथवा किसी कुशल प्राइवेट डिटेक्टिव को सौंप देता। हाँ, इतना ज़रूर था कि सरोज इस बात का खंडन करने राजधानी नहीं आई कि लखनऊ की अदालत में हलफनामा देनेवाली लड़की वह नहीं, उसकी डुप्लीकेट थी। पर सरोज के न आने के बावजूद उपर्युक्त मत के लोग अपनी बात पर कायम थे। उनका कहना था कि वह खंडन करने नहीं आई, तो क्या फर्क पड़ जाता है। यह अकाट्य है कि लखनऊ की अदालत में एक सौ चौंसठ के बयान को खारिज करके गोरखनाथ को निर्दोष करार देनेवाली लड़की सरोज की डुप्लीकेट थी। इनमें से कुछ दावा करते थे कि वे स्वयं वहाँ मौजूद थे और पूरे विश्वास से यह कह सकते हैं कि वह सरोज कतई नहीं थी। रही बात असली सरोज के राजधानी आकर खंडन न कर पाने की, तो सोचने की बात है कि जो लोग डुप्लीकेट सरोज पेश करके अदालत की धज्जियाँ उड़ा सकते हैं, उनके लिए सरोज को राजधानी आने से रोक लेना कौन-सी बड़ी बात है। इस पर विरुद्ध विचारवालों ने मुँहतोड़ उत्तर दिया कि वह सरोज थी या नहीं, इससे कोई समस्या नहीं पैदा होती। असल बात यह है कि सेशन जज ने उसे सरोज मानकर उसके हलफनामे को स्वीकार किया और उस पूरी कानूनी कार्यवाही पर एतराज करते हुए अभी तक किसी ने कोई चुनौती नहीं दी है। अतः फिलहाल यही सिद्ध है कि वह सरोज थी और गोरखनाथ पर मँडरा रहे बदनामी के बादल छँट गए हैं और असली सरोज को राजधानी पहुँचने से रोकने की बातें कही जा रही हैं, तो जो शक्ति अदालत को जेब में रख सकती है, सरोज को आने से रोक सकती है, वह क्या सरोज से अपने माफिक बात कहलाने के लिए सरोज को घसीटते हुए अदालत नहीं ले जा सकती थी? इसलिए यह कबूल करने में हर्ज क्या है कि अदालत में मौजूद सरोज असली ही थी! उसके डुप्लीकेट सरोज होने की अफवाहें कुछ शरारती तत्वों की साजिश है। मगर यह विवाद कोई इतना बड़ा मसला नहीं था, जो लंबे वक्त तक टिक पाता। सरोज की मृत पड़ चुकी दास्तान में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा के लिए संजीवनी बनने की क्षमता नहीं थी इसमें। अतः सरोज-प्रकरण के दूसरे प्रसंगों की तरह यह भी, बल्कि यह अन्य से ज़्यादा ही अल्पजीवी और क्षणभंगुर प्रमाणित हुआ। वैसे, आगे भी कहने को कुछ चीजें हो सकती हैं। आखिर सरोज और गोरखनाथ या परमू, भोला, छैलबिहारी के जीवन में कुछ-न-कुछ घटित हुआ ही होगा। मीरा यादव और श्याम नारायण भी कहीं-न-कहीं होंगे ही। यानी कहानी के चरित्र अभी जीवित हैं और कोशिश की जाए, कल्पना तथा गढ़ंत की थोड़ी मदद ली जाए, तो इन प्रमुख पात्रों की मदद से इस कहानी को आगे बढ़ाया जा सकता है, मगर निश्चय ही इससे ज़रा भी फायदा नहीं होगा। फिर वही हश्र होगा, जो अब हुआ है, शायद इससे भी बुरा हो, क्योंकि दिक्कत यह है कि जिस केंद्रीय वस्तु को लेकर कहानी शुरू हुई थी, वह अचानक लड़खड़ाकर ऐसी लुढ़की कि आगे सँभल न सकी और अंत के पहले ही उसने दम तोड़ दिया। संभवतः सुंदर लड़की, बलात्कार, गाँव, बड़े राजनीतिज्ञ, पुलिस, अदालत आदि तोप मसालों से संपन्न विषय-वस्तु वाली कहानी की ऐसी नीरस, निरुद्देश्य, गड़बड़ और अनुत्पादक परिणति विश्व में कभी नहीं हुई होगी। वह भी ऐसी दशा में, जबकि लेखक ने अपनी तरफ से विस्फोटक अंत के लिए कड़ी मशक्कत की हो। विचारणीय बिंदु है कि एक अत्यंत रोमांचक संभावनाओं वाली कथा का इतना अरुचिकर और फटीचर अंत क्यों हुआ। इन सबके अलावा यह दिक्कत भी पेश हुई कि कहानी में कई प्रसंगों का समुचित विकास नहीं हो सका था। पढ़ने के बाद कुछ ऐसे प्रश्न जन्म लेते थे, जो अनुत्तरित ही छोड़ दिए गए थे। जैसे मीरा यादव के घर से क्या सरोज वाकई चली गई थी अथवा अपनी पार्टी के मुखिया से डाँट खा लेने के बाद मीरा यादव ने ही उसे अपने घर से भगा दिया था! और मीरा यादव के घर से निकलने के बाद सरोज पर क्या गुजरी-यह सब कहानी नहीं कह सकी थी। अब इसका भी तो कोई ठिकाना नहीं था कि अदालत में हाजिर होनेवाली सरोज असली थी या नकली। नकली थी तो असली सरोज कहाँ है? किसके शिकंजे में है? जिंदा है या मुर्दा? कुल मिलाकर ऐसे अनेक स्थल थे कहानी में, जहाँ पर इस प्रकार की दुविधाएँ घेर लेती थीं, लेकिन आखिर समाधान भी था, तो क्या था! अंततः बहुत सोच-विचार के बाद एक निर्णायक, किंतु अद्भुत, बेमिसाल कोशिश की गई. कहानी को सरोज के पास भेज दिया गया। चूँकि सरोज कहाँ पर है, इसका निश्चित संज्ञान नहीं था। अतः कहानी की एक-एक टंकित प्रतिलिपि क्रमशः विष्णु दत्त, मीरा यादव, श्याम नारायण, गोरखनाथ, छैलबिहारी, महंत जी और कोई कसर न रहे, इस दृष्टिकोण से भोला और परमू को भी पंजीकृत डाक द्वारा भेज दी गई. लिफाफे में दो पत्र भी संलग्न थे। एक में सम्बंधित व्यक्ति से निवेदन था कि वह इस कहानी और उसके नाम लिखे गए पत्र को सरोज तक पहुँचाने का कष्ट करे, अति कृपा होगी और सरोज के नाम लिखे पत्र का सार यह था कि सबसे पहले उससे कुशल-क्षेम पूछा गया था, फिर कहानी पढ़ने का आग्रह करते हुए प्रार्थना की गई थी कि वह इस कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे। अंत में सत्रह प्रश्नों की एक तालिका थी, जिसमें कहानी पढ़कर जन्मनेवाले संशयों, जिज्ञासाओं, कौतूहलों का समाधान करनेवाले उत्तर माँगे गए थे। अंत में कष्ट देने के लिए क्षमा-याचना की गई थी और हमदर्दी प्रकट करते हुए कहा गया था कि यदि किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता पड़े, तो वह कहने में बिल्कुल संकोच न करे। पत्र समाप्त हो जाने के बाद 'पुनश्च' उपशीर्षक के अंतर्गत एक पंक्ति थीः "याद दिला रहा हूँ कि कहानी लंबी है, मगर पढ़िएगा ज़रूर। कहानी पर आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार मैंने अभी से शुरू कर दिया है। विश्वास करिए, अपनी कहानी पर आपकी राय पाकर बहुत कृतज्ञ होऊँगा।" और वाकई बारह दिन बाद सरोज का पत्र आया। कहानी उसे कैसे हासिल हुई, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। उसने चिट्ठी कहाँ से भेजी, यह भी स्पष्ट नहीं था, क्योंकि लिफाफे़ पर मुहर इतनी चटख थी कि अक्षर रोशनाई से पुत गए थे। अगर यह स्पष्ट होता कि चिट्ठी कहाँ से चली है, तो सरोज कहाँ पर है, इस बात का सुराग थोड़ा-ज्यादा लगाया जा सकता था। खै़र, सरोज जहाँ भी हो-अपने गाँव में, गोरखनाथ, महंत, मीरा यादव जिसके भी कब्जे में हो, उसका पत्र तो आया ही था। पत्र की हू-ब-हू नकल नीचे प्रस्तुत हैः आदरणीय लेखक जी, सादर प्रणाम! अत्र कुशलम् तत्रस्तु! आगे समाचार यह है कि मुझ पर कहानी लिखी, इसके लिए हमारी तरफ से कोटिशः धन्यवाद। आपने मेरी राय चाही है कहानी पर, तो मैं यही कहना चाहती हूँ कि मैं कहानी-वहानी के बारे में क्या कह सकती हूँ। न ज़्यादा पढ़ी-लिखी हूँ, न विद्वान हूँ, न समालोचक हूँ। शायद आपने इस प्रकार की मंशा इसलिए जाहिर की है कि चूँकि कहानी मुझे केंद्र में रखकर लिखी गई है, तो मुझे कैसी लगती है, यह जानना दिलचस्प होगा। अतः आपकी खुशी के लिए यही कह रही हूँ कि कहानी बहुत सुंदर है। काफी प्रभावशाली है। भाषा बड़ी सशक्त है और शिल्प भी अच्छा है, लेकिन मुझे लगता है कि कहानी में कई जगह आप कन्नी काट गए हैं। या तो उन बातों को आप लिखना नहीं चाहते हैं या उन्हें लिख सकने की काबिलियत आप में नहीं है। जैसे कि गोरखनाथ ने महंत जी के मकान में जब परमू-भोला-छैलबिहारी को भगाकर मेरे साथ बलात्कार किया, इस अत्याचार का कोई चित्रण आपकी कहानी में नहीं है। अपने को गोरखनाथ से बचाने के लिए मैंने जो संघर्ष किया, वह भी नहीं है। बलात्कार के बाद मेरी क्या मनःस्थिति थी, मेरे हृदय पर क्या गुजर रही थी, इन सबको क्या आप सामने ला सके हैं? ऐसे एक-दो नहीं, पूरे तेईस प्रसंग हैं, जहाँ आप सही बात कहने से चूक गए हैं। यदि आपकी इच्छा है कि आपकी कहानी सच्चाई का दर्पण बने, तो आपको उन तेईस प्रसंगों को सही-सही लिखना होगा। ऐसा करें कि आप मेरे पास आ जाएँ, मैं तेईस प्रसंगों के अतिरिक्त भी ऐसी कई चीजें बतलाऊँगी, जिन्हें कहानी में पिरोकर आप उसे अधिक उत्कृष्ट बना सकते हैं। जब आप मिलेंगे, तब मैं उन सत्रह सवालों के जवाब भी आपको दे दूँगी, जिनकी सूची मेरे पास प्रेषित की गई है। हाँ, मैं यह नहीं बताऊँगी कि मैं कहाँ हूँ, क्योंकि यदि मैं अपना पता-ठिकाना लिख देती हूँ तो हो सकता है कि यह खत आपके पास पहुँचने से पहले ही दुश्मनों के हाथ लग जाए. या कौन ठीक है कि आप भी हमारे दुश्मनों के साथ हों और कहानी का चक्कर 'मैं कहाँ हूँ' यह जानने के लिए चलाया गया हो। ऐसा भी हो सकता है कि अभी आप हमारे हमदर्द हों, लेकिन पता जान लेने के बाद किसी दबाव या लालच के वशीभूत होकर मेरे दुश्मनों से मिल जाएँ। यह भी तो मुमकिन है कि आप दुश्मन ही हों। अतः आपको स्वयं ढूँढ़ना पड़ेगा कि मैं कहाँ हूँ। हाँ, इतना तय समझिए कि बिना मुझसे मिले आपकी कहानी में कमियाँ बनी रहेंगी। मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि आपने अपनी कहानी के फटीचर अंत का जो रोना रोया है, उस दिशा में भी मिलने पर मैं मदद करूँगी। मैं आपको आगे की ऐसी बहुत-सी बातें बताऊँगी, इसमें आए हुए चरित्रों के बारे में कुछ एकदम नई जानकारियाँ दूँगी, उनके इधर के ऐसे समाचार दूँगी कि आप कहेंगे कि आपकी कहानी में अभी कुछ भी नहीं आया है। आपको निश्चय ही सशक्त अंत करने के लिए मैटर भी दूँगी मैं, बशर्ते आप मुझे ढूँढ़ पाएँ और मुझसे मिल सकें। सरोज के पत्र से मामला सुलझने के बजाय अधिक उलझ गया। सरोज ने बार-बार दुश्मनों का जिक्र किया है। कौन हैं उसके दुश्मन? यदि सेशन जज की अदालत में हलफनामा देनेवाली सरोज असली सरोज नहीं, डुप्लीकेट थी, तब तो गोरखनाथ, परमू, भोला और छैलबिहारी ही उसके दुश्मन हैं, लेकिन अगर वह असली सरोज थी, तो फिर कौन हो सकते हैं उसके दुश्मन। इसके अतिरिक्त कहानी से जुड़े सत्रह प्रश्न पहले की तरह ही अनुत्तरित थे और सरोज ने अपने पत्र में कहानी के अन्य तेईस प्रसंगों को कटघरे में खड़ा कर दिया था। ऊपर से कहानी के अंत के फटीचर होने की बात उसने भी स्वीकार की थी। अतः हर दृष्टि से यही उत्तम था कि सरोज से मुलाकात की जाए. यह कोई कठिन भी नहीं लग रहा था, क्योंकि जब सरोज तक कहानी और पत्र पहुँच सकते है, तो कोई इनसान क्यों नहीं पहुँच सकता? ज़्यादा से ज़्यादा उसे उन सभी पतों पर जाना पड़ेगा, जिन पर कहानीवाले लिफाफे की रजिस्ट्री की गई थी। ऐसा भी हो सकता है कि पहले या दूसरे संपर्क-सूत्र पर ही सरोज मिल जाए. लेकिन सरोज किसी भी पते पर नहीं मिली। गोरखनाथ और मीरा यादव ने सरोज का नाम सुनते ही गाली बकनी शुरू कर दी। भोला, परमू और छैलबिहारी मिले ही नहीं। उनके ठिकानों पर जाने पर ज्ञात हुआ कि वे वैष्णव देवी का दर्शन करने जम्मू गए हुए हैं। कुछ लोगों ने दबे स्वर में बतलाया कि वे तीनों भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी कर रहे हैं। तभी तो छैलबिहारी के पिताजी ने मकान की एक मंजिल और बनवा ली और चार बीघा खेत खरीद चुके हैं। श्याम नारायण ने कुछ कहा नहीं, अपना पूरा घर दिखा डाला और तब बोले, "आप ही बताइए, सरोज कहाँ है? नहीं है न! लेकिन सरोज है।" उन्होंने अपनी छाती ठोंककर कहा, "सरोज यहाँ है।" उनकी आँखें भर आईं और आवाज भर्रा उठी, "कहीं मिले, तो मेरा सलाम कहिएगा।" महंत जी ने भी अपना आवास दिखला दिया और मुस्कराए, "मेरा आवास मंदिर है या समझिए, मंदिर ही मेरा आवास है, मंदिर में देवियाँ, देवता और भक्त मिलते हैं, रंडियाँ-छिनालें नहीं।" सरोज के घरवालों ने भी निराश ही किया। विष्णु दत्त बताने लगे, "अपहरण के बाद से तो हमलोगों ने सरोज को देखा ही नहीं। मीरा यादव के यहाँ उससे मिलने गया था, तो मालूम हुआ कि वह उसी दिन गाँव के लिए चल दी थी। तब से अर्सा बीत गया, लेकिन वह गाँव नहीं आई. नामालूम कहाँ भटक रही है..." आगे उनसे बोलते नहीं बना। अदालत में एक सौ चौंसठ के बयान को खारिज करनेवाला हलफनामा देनेवाली सरोज असली थी या नकली? इस प्रश्न के उत्तर में सरोज के भाई राधेश्याम ने जवाब दिया, "जब मैं गया ही नहीं वहाँ, तो कैसे बता दूँ कि असली थी या नकली। मैं कोई महाभारत का संजय हूँ, जो यहाँ बैठे-बैठे अदालत का सीन देख लूँ?" "लेकिन चर्चा है कि वह जिस कंटेसा कार में अदालत गई थी, उसमें उसके बगल में आप बैठे थे?" "मैं बैठा होता, तो वह कुतिया कार से जिंदा नहीं उतरती। गला दबाकर मार डालता।" कुछ मिलाकर अन्जाम यह रहा कि लाख कोशिशों के बावजूद सरोज से मुलाकात नहीं हो सकी। अब चुप मारकर बैठे रहने के सिवा क्या चारा था। दो महीने बाद पुनः सरोज का एक खत आया, काफी लानत-मलामत के बाद लिखा गया था कि "कैसे वाहियात लेखक हैं आप कि आपकी कहानी का कैरेक्टर आपसे मिलना चाहता है और आप उसको ढूँढ़ नहीं पा रहे हैं। धिक्कार है आपको।" मुश्किल यह थी कि इस बार भी लिफाफे पर डाक विभाग की मुहर इतनी चटख लगी थी कि अक्षर पढ़ने में नहीं आ रहे थे।
कोलंबो - भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में श्रीलंका के खिलाफ 9-0 की क्लीन स्वीप के बाद ट्विटर पर टीम के लिए बधाइयों का तांता लग गया है। आखिरी ट्वेंटी-20 मैच में मैन ऑफ दि मैच रहे स्टार खिलाड़ी ने इसी के साथ 'चेज़ मास्टर' बनने की ख्याति भी हासिल कर ली है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने तो स्टार खिलाड़ी विराट को 'चेज़ मास्टर' का शीर्षक दे डाला है। वैश्विक क्रिकेट संस्था ने भारत की श्रीलंका दौरे में जबरदस्त कामयाबी पर बधाई देते हुए कहा कि चेज़ मास्टर विराट कोहली ने 82 रन की जबरदस्त पारी से भारत को कोलंबो में सात विकेट से ट्वेंटी-20 मैच में जीत दिला दी। भारत ने श्रीलंका दौरे में 3-0 से टेस्ट, 5-0 से वनडे और एकमात्र ट््वेंटी-20 जीता। भारत ने श्रीलंका के खिलाफ एकमात्र ट्वेंटी 20 में सात विकेट की जीत के साथ अपने करीब अढ़ाई महीने चले दौरे का समापन 9-0 से किया। कोलंबो - भारतीय चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने विराट कोहली की तारीफ करते हुए उन्हें खिलाडि़यों के लिए रोल मॉडल कप्तान बताया है। चाइनामैन गेंदबाज़ ने कहा कि विराट मैदान पर आपको वह सब देते हैं, जो आप चाहते हैं। जब मैं गेंदबाजी करता हूं तो वह आकर मुझसे पूछते हैं कि मुझे कैसी फील्ड चाहिए। एक गेंदबाज को यही चाहिए होता है। वह गेंदबाज को पूरी आजादी देते हैं। उन्होंने टेस्ट, वनडे और अब ट््वेंटी-20 में मेरा पूरा साथ दिया। मैदान पर उनकी प्रतिबद्धता बाकी अन्य खिलाडि़यों के लिए प्रेरणास्रोत है। दुबई - आस्ट्रेलियाई टीम बांग्लादेश के खिलाफ सात विकेट से जीत दर्ज कर दो मैचों की सीरीज 1-1 से ड्रा कराने के बावजूद गुरुवार को जारी ताजा टेस्ट टीम रैंकिंग में एक स्थान नीचे लुढ़क कर पांचवें नंबर पर खिसक गई, जबकि भारत अभी भी शीर्ष पर बरकरार है। भारत अभी भी 125 अंकों के साथ शीर्ष पर कायम है। श्रीलंका के सफाए के बाद टीम इंडिया घरेलू सीरीज में आस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरेगी। अगर टीम इंडिया वनडे सीरीज में आस्ट्रेलिया को हरा देती है तो वह रैंकिंग में नंबर वन हो सकती है। अभी टीम इंडिया आस्ट्रेलिया से महज कुछ दशमलव अंकों से ही पीछे है। उम्मीद है कि आगामी सीरीज में टीम इंडिया नंबर वन बन सकती है।
कोलंबो - भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में श्रीलंका के खिलाफ नौ-शून्य की क्लीन स्वीप के बाद ट्विटर पर टीम के लिए बधाइयों का तांता लग गया है। आखिरी ट्वेंटी-बीस मैच में मैन ऑफ दि मैच रहे स्टार खिलाड़ी ने इसी के साथ 'चेज़ मास्टर' बनने की ख्याति भी हासिल कर ली है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने तो स्टार खिलाड़ी विराट को 'चेज़ मास्टर' का शीर्षक दे डाला है। वैश्विक क्रिकेट संस्था ने भारत की श्रीलंका दौरे में जबरदस्त कामयाबी पर बधाई देते हुए कहा कि चेज़ मास्टर विराट कोहली ने बयासी रन की जबरदस्त पारी से भारत को कोलंबो में सात विकेट से ट्वेंटी-बीस मैच में जीत दिला दी। भारत ने श्रीलंका दौरे में तीन-शून्य से टेस्ट, पाँच-शून्य से वनडे और एकमात्र ट््वेंटी-बीस जीता। भारत ने श्रीलंका के खिलाफ एकमात्र ट्वेंटी बीस में सात विकेट की जीत के साथ अपने करीब अढ़ाई महीने चले दौरे का समापन नौ-शून्य से किया। कोलंबो - भारतीय चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने विराट कोहली की तारीफ करते हुए उन्हें खिलाडि़यों के लिए रोल मॉडल कप्तान बताया है। चाइनामैन गेंदबाज़ ने कहा कि विराट मैदान पर आपको वह सब देते हैं, जो आप चाहते हैं। जब मैं गेंदबाजी करता हूं तो वह आकर मुझसे पूछते हैं कि मुझे कैसी फील्ड चाहिए। एक गेंदबाज को यही चाहिए होता है। वह गेंदबाज को पूरी आजादी देते हैं। उन्होंने टेस्ट, वनडे और अब ट््वेंटी-बीस में मेरा पूरा साथ दिया। मैदान पर उनकी प्रतिबद्धता बाकी अन्य खिलाडि़यों के लिए प्रेरणास्रोत है। दुबई - आस्ट्रेलियाई टीम बांग्लादेश के खिलाफ सात विकेट से जीत दर्ज कर दो मैचों की सीरीज एक-एक से ड्रा कराने के बावजूद गुरुवार को जारी ताजा टेस्ट टीम रैंकिंग में एक स्थान नीचे लुढ़क कर पांचवें नंबर पर खिसक गई, जबकि भारत अभी भी शीर्ष पर बरकरार है। भारत अभी भी एक सौ पच्चीस अंकों के साथ शीर्ष पर कायम है। श्रीलंका के सफाए के बाद टीम इंडिया घरेलू सीरीज में आस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरेगी। अगर टीम इंडिया वनडे सीरीज में आस्ट्रेलिया को हरा देती है तो वह रैंकिंग में नंबर वन हो सकती है। अभी टीम इंडिया आस्ट्रेलिया से महज कुछ दशमलव अंकों से ही पीछे है। उम्मीद है कि आगामी सीरीज में टीम इंडिया नंबर वन बन सकती है।
अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद को लेकर एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. बाबरी विध्वंस के मामले में आरोपी बनाए गए लोगों को सीबीआई कोर्ट से बरी होने के बाद एक बार फिर उनको छोड़ने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इसीलिए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में पक्षकार हाजी महबूब और सैयद अखलाक अहमद की तरफ से दाखिल की गई है. हालांकि 2021 में ही यह याचिका दाखिल की गई थी लेकिन अब इसकी चर्चा इसलिए हो रही है कि 18 जुलाई 2022 को इसकी वैधानिकता को लेकर सुनवाई होनी है. अगर पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली जाती है तो एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ जाएगा और सरकार समेत उन जीवित आरोपियों को नोटिस जारी कर दी जाएगी और उस पर बाकायदा फिर सुनवाई होगी. मगर यदि यह याचिका स्वीकार नहीं होती है तो खारिज होने के साथ ही इसका वैधानिक अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. इस हाईप्रोफाइल मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा समेत ऐसे कई बड़े नाम हैं जिनके कारण इस मामले की एक बार फिर चर्चा सुर्खियों में हैं. हालांकि आरोपी बनाए गए लोगों में लगभग आधे अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन जितने लोग बचे हैं उनका वजूद इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला देता है. इस मसले पर हाजी महबूब (पूर्व पक्षकार बाबरी मस्जिद) का कहना है कि याचिका को कई महीने हो गए 5 से 6 महीने से ऊपर हो गया, लेकिन सुनवाई होनी थी 18 तारीख को. उस पर पेशी है, उम्मीद करता हूं कि हमारी अपील मंजूर की जाएगी और केस शुरू हो जाएगा. मस्जिद को उन्होंने गिराया था और गिरवाया था और उसमें वह इंवॉल्व थे और उसके बाद अब अदालत उसका क्या फैसला देती है वह अदालत के ऊपर है. उन्होंने कहा कि अदालत जो भी फैसला देगी हमें मंजूर है. अदालत ने जो फैसला दिया था मुझे नहीं मालूम था इसीलिए मैं हाई कोर्ट गया. लोअर कोर्ट ने उनके फेवर में दे दिया फैसला. इसलिए हम हाईकोर्ट चले गए अब हाई कोर्ट क्या फैसला देती है यह तो देखा जाएगा. हाजी महबूब ने कहा कि इसमें 30 से 32 आरोपी हैं. आडवाणी साहब हैं. मुरली मनोहर जोशी साहब हैं, कटिहार साहब हैं या सब जो हैं उनपर केस चलेगा. फैसला आ गया.
अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद को लेकर एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. बाबरी विध्वंस के मामले में आरोपी बनाए गए लोगों को सीबीआई कोर्ट से बरी होने के बाद एक बार फिर उनको छोड़ने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इसीलिए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में पक्षकार हाजी महबूब और सैयद अखलाक अहमद की तरफ से दाखिल की गई है. हालांकि दो हज़ार इक्कीस में ही यह याचिका दाखिल की गई थी लेकिन अब इसकी चर्चा इसलिए हो रही है कि अट्ठारह जुलाई दो हज़ार बाईस को इसकी वैधानिकता को लेकर सुनवाई होनी है. अगर पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली जाती है तो एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ जाएगा और सरकार समेत उन जीवित आरोपियों को नोटिस जारी कर दी जाएगी और उस पर बाकायदा फिर सुनवाई होगी. मगर यदि यह याचिका स्वीकार नहीं होती है तो खारिज होने के साथ ही इसका वैधानिक अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. इस हाईप्रोफाइल मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा समेत ऐसे कई बड़े नाम हैं जिनके कारण इस मामले की एक बार फिर चर्चा सुर्खियों में हैं. हालांकि आरोपी बनाए गए लोगों में लगभग आधे अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन जितने लोग बचे हैं उनका वजूद इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला देता है. इस मसले पर हाजी महबूब का कहना है कि याचिका को कई महीने हो गए पाँच से छः महीने से ऊपर हो गया, लेकिन सुनवाई होनी थी अट्ठारह तारीख को. उस पर पेशी है, उम्मीद करता हूं कि हमारी अपील मंजूर की जाएगी और केस शुरू हो जाएगा. मस्जिद को उन्होंने गिराया था और गिरवाया था और उसमें वह इंवॉल्व थे और उसके बाद अब अदालत उसका क्या फैसला देती है वह अदालत के ऊपर है. उन्होंने कहा कि अदालत जो भी फैसला देगी हमें मंजूर है. अदालत ने जो फैसला दिया था मुझे नहीं मालूम था इसीलिए मैं हाई कोर्ट गया. लोअर कोर्ट ने उनके फेवर में दे दिया फैसला. इसलिए हम हाईकोर्ट चले गए अब हाई कोर्ट क्या फैसला देती है यह तो देखा जाएगा. हाजी महबूब ने कहा कि इसमें तीस से बत्तीस आरोपी हैं. आडवाणी साहब हैं. मुरली मनोहर जोशी साहब हैं, कटिहार साहब हैं या सब जो हैं उनपर केस चलेगा. फैसला आ गया.
उत्तराखंड में चमोली जिले के कर्णप्रयाग में बहुगुणा नगर, सुभाष नगर और अपर बाजार में भूधंसाव से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने दरारों वाले भवनों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के आदेश दिए हैं. प्रभावितों से मुलाकात के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूधंसाव के कारण जिन भवनों में अत्यधिक दरारें आ गई हैं, उन्हें खाली करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए. उन्होंने कहा कि जो लोग किराए पर जाना चाहते हैं, उन्हें छह महीने तक किराया भी दिया जाएगा. आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के स्वयंभू कमांडर बशीर अहमद पीर की पाकिस्तान के रावलपिंडी में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. खुफिया अधिकारियों ने यहां बताया कि जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का रहने वाला पीर 15 साल से अधिक समय से पाकिस्तान में रह रहा था. पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के मुताबिक, सोमवार को रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर पीर उर्फ इम्तियाज आलम को हमलावरों ने बेहद करीब से गोली मार दी. उत्तर प्रदेश के आगरा में ग्वालियर राजमार्ग पर सोमवार की देर रात एक वाहन ने दो दोस्तों को टक्कर मार दी, जिससे वे डिवाइडर से टकरा गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि मरने वालों की पहचान आकाश (25) और पवन (26) के तौर पर की गई है. उन्होंने बताया कि घटना मलपुरा थाना क्षेत्र में हुई. उन्होंने बताया कि आकाश और पवन एक विवाह भवन में लाइट डेकोरेशन एवं हलवाई का काम करके वापस अपने घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आए अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 24 फरवरी को आयोजित विश्व भारती के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. विश्वविद्यालय की एक प्रवक्ता ने बताया कि वह विश्वविद्यालय के छात्रों की एक प्रस्तुति देखने के अलावा संबोधन भी देंगे. विश्वभारती की प्रवक्ता महुआ बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष सरकार, कुलपति विद्युत चक्रवर्ती और अन्य गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे. शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को बर्फबारी हुई, जिसके कारण वाहन चालकों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा. क्षेत्र में सड़कों एवं मकानों की छतों पर बर्फ की चादर जम गई. रास्तों पर भी बर्फ के कारण फिसलन बढ़ गई एवं गाड़ी चलाना खतरनाक हो गया. आसमान में काले बादल छा गए एवं बर्फीली हवाएं चलीं. गरज के साथ बौछारों और बर्फबारी के कारण तापमान घट गया जो पिछले कुछ दिनों से सामान्य से आठ-10 डिग्री सेल्सियस अधिक था. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को हत्या के प्रयास के एक मामले में जमानत दे दी है. यह मामला कौशांबी जिले के पूरामुफ्ती पुलिस थाना में दर्ज कराया गया था. वर्तमान में अली अहमद प्रयागराज के नैनी केंद्रीय कारागार में बंद हैं. न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने सोमवार को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता और सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया. राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुंदा थाना क्षेत्र में असामाजिक तत्वों द्वारा भगवान परशुराम की प्रतिमा को खंडित करने का मामला सामने आया है ओर मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. गोगुंदा के थानाधिकारी अनिल विश्नोई ने मंगलवार को बताया कि असामाजिक तत्वों ने रविवार की रात को भगवान परशुराम की प्रतिमा को खंडित कर दिया. उन्होंने बताया कि इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295, 447,427 के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने मंगलवार को कथित असंसदीय व्यवहार को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता और सदन में पार्टी के एक मात्र विधायक अभय सिंह चौटाला के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें दो दिन तक सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेने को कहा. एलेनाबाद से विधायक चौटाला ने 2020 में कोविड महामारी और हरियाणा में लॉकडाउन के दौरान हुए कथित शराब घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल की रिपोर्ट की स्थिति जानने के लिए ध्यानाकर्षण नोटिस दिया था. जयपुर ग्रामीण के दूदू थाना क्षेत्र में मंगलवार की दोपहर तेज गति ट्रेलर ने सड़क किनारे खड़े चार युवकों को टक्कर मार दी, जिससे इस घटना में उन युवकों की मौत हो गई. पुलिस उपनिरीक्षक नेमीचंद ने बताया कि जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो बाइक पर सवार चार युवक सड़क किनारे खड़े होकर मोबाइल पर बातचीत कर रहे थे, उसी दौरान एक तेज गति ट्रेलर ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे चारों की मौत हो गई. पीएम किसान सम्मान निधि योजना के 4 साल पूरे होने पर 24 फरवरी को बीजेपी नमो किसान सम्मान दिवस मनाने जा रही है. देश के सभी जिलों में किसान सम्मेलन, किसान सभाएं एवं लाभार्थियों से संवाद व संपर्क भी बीजेपी करेगी. बीजेपी किसान मोर्चा के कार्यकर्ता देशभर में पीएम मोदी का आभार प्रकट करेंगे. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पीएम मोदी ने किया था. मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के लोगों को अभी कुछ दिन और गर्मी परेशान करेगी. मौसम वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने कहा, इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है जो पश्चिमी हिमालय क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है. बुधवार से थोड़ी संभावना है कि उत्तर पश्चिम भारत में तापमान में 1-2 डिग्री की गिरावट आएगी. हम दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान 31-33 डिग्री के बीच रहने की उम्मीद कर रहे हैं. मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. मऊ में अब्बास अंसारी के नाम दर्ज मकान को गिराने की याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने याची अब्बास अंसारी को डीएम मऊ के यहां अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने डीएम को मामले में नियमानुसार निर्णय लेने का भी निर्देश दिया है. तोशाखाना मामले में एनएबी ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को समन जारी किया और 9 मार्च को पेश होने के लिए कहा है. बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने आरोप लगाया था कि इमरान खान पर 14 करोड़ रुपये के तोशाखाना उपहार को दुबई में बेच दिया है. ऐसा दावा किया गया है कि इमरान खान ने जिन उपहारों को दुबई में बेचा है उनमें हीरे के आभूषण, कंगन और कलाई घड़ी शामिल हैं. मथुरा-वृंदावन की इस्कॉन मंदिर के नजदीक स्थित एक बिल्डिंग में आग लगने से अफरा-तफरी का माहौल है. अभी तक की जानकारी के मुताबिक बिल्डिंग की छत पर रखे कबाड़ में अचानक आग लग गई है. आग लगने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे दमकल के कमर्चारी आग बुझाने में जुट गए हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के एक पदाधिकारी द्वारा कथित रूप से सेना के एक जवान की हत्या किए जाने के मामले में मंगलवार को भूख हड़ताल शुरू कर दी है. भाजपा ने कहा कि यह भूख हड़ताल 29 वर्षीय लांस नायक प्रभु को न्याय दिलाने और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रमुख टी. पेरियासामी के आवास पर हुए हमले के सिलसिले में शुरू की गई है. यूपी के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान को बड़ा झटका लगा है. 72 औद्योगिक भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त ने सभी 72 औद्योगिक भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया है. ये कार्रवाई जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद सामने आई है. इस मामले में अब आवंटन करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की जाना तय है. कल दिल्ली में होने वाले मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से पर्यावरण मंत्री गोपाल राय का बयान सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुंजाइश नहीं बचती है लेकिन नया दौर है और नए दौर में हर जगह सवाल है, तो इसलिए लोगों के मन में शंका होती है वर्ना तो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम निर्णय होता है. मुझे भरोसा है कि भारतीय जनता पार्टी वो किसी लोकतंत्र को नहीं मानती पार्टियों को नहीं मानती जनता के जनादेश को नहीं मानती. कल कम से कम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शांतिपूर्वक बिना कोई बहना बनाए, सुचारू रूप से दिल्ली के मेयर के चुनाव में सहयोग करेगी और दिल्ली के लोगों को मेयर मिले इसमें उसकी हिस्सेदारी होगी. भिवानी हत्याकांड मामले में हरियाणा की नूंह पुलिस ने राजस्थान पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.आरोपी श्नीकांत के नवजात बच्चे की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपी श्रीकांत की माता दुलारी ने राजस्थान पुलिस के खिलाफ शिकायत में गंभीर आरोप लगाए थे. दो युवकों के नरकंकाल मामले के आरोपी श्रीकांत की पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया था पैदा. परिजनों ने लगाया था राजस्थान पुलिस ने गर्भवती को धक्का मारा था. राजस्थान पुलिस के 30-40 अज्ञात अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बच्चों को लेकर जा रही बस पलट गई. 2 से 3 बच्चे घायल हुए हैं. घटना कंपू थाना क्षेत्र के मांढरे की माता मंदिर मार्ग पर हुई है. बस पल्स वेली प्राइवेट स्कूल की बताई गई है. घायल हुए बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया है. आयुष्मान हेल्थ सेंटर का नाम कुछ राज्यों ने बदल दिया है, जिस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई है. अब केंद्र सरकार पैसा रोकने पर विचार कर रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, आयुष्मान हेल्थ सेंटर योजना के तहत तेलंगाना, पंजाब, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वैलनेस सेंटर के निर्माण में कुछ मॉडिफिकेशन किया है और उसकी जगह उन्होंने अपने-अपने सेंटर के नाम को आगे बढ़ाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पंजाब ने उसको मोहल्ला क्लीनिक में तब्दील कर दिया है, ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपत्ति जाहिर की है और इस योजना के तहत मिलने वाली रकम को रोकने पर विचार कर रही है क्योंकि योजना के तहत 60% रकम केंद्र सरकार देती है और 40% रकम राज्य सरकार को देनी होती है. लुधियाना में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये कीमत की 1.5 किलोग्राम हेरोइन के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. वह पटियाला से लुधियाना आकर हेरोइन की सप्लाई किया करता था. एसटीएफ लुधियाना रेंज ने गुप्त सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर हरबंस सिंह के नेतृत्व में की गई नाकाबंदी के दौरान एक व्यक्ति को 1.5 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा कि आपसी बातचीत से ही हल निकलेगा. पश्चिम देशों से दूर रहते हुए यूक्रेन बात करे तो सबके लिए बेहतर होगा. रूस ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि हमने कोशिश की थी कि जंग न हो. हम चाहते हैं कि युद्ध किसी तरह से बंद हो जाए. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने रूसी संसद ड्यूमा में कहा कि यूक्रेन को हथियार देकर बरगलाने की कोशिश हुई. रूस में NATO का दखल बढ़ रहा है. पुतिन ने कहा कि पश्चिम ताकतों की दखल की वजह से हमें आगे बढ़ना पड़ा. वोलिदिमिर जेलेंस्की को बात करने का मौका दिया गया था. उन्होंने कहा कि नाटो ने यूक्रेन को बरगलाया और उसे उकसाने का काम किया. यूक्रेन पर हमला करने से एक साल पूरे होने से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने रूसी संसद ड्यूमा में कहा कि 2014 से डोनबास में बहुत लड़ाई हुई. 2014 से हम डोनबास के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. पुतिन के भाषण से पहले सभी सांसद ड्यूमा पहुंच गए हैं. राजस्थान के धौलपुर में एक कांस्टेबल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. उसका शव उसके घर में फंदे से लटकता मिला. वह जाटोली चौकी पर तैनात था. फिलहाल पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया है. पुलिस खुदकुशी के मामले की जांच कर रही है. मामला निहालगंज थाना इलाके के गिर्राज कॉलोनी का है. कर्नाटक सरकार ने आज मंगलवार को आपस में सार्वजनिक तौर पर उलझने वाली आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी और आईपीएस अधिकारी डी. रुपा मौदगिल को नोटिस दिया है, साथ ही उन पर लगाम लगाने का आदेश जारी किया. मेक्सिको के पुएबला राज्य में एक बस दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार कम से कम 17 प्रवासियों की मौत हो गई. पुएबला के गृह सचिव जूलियो हुएर्ता के अनुसार सभी मृतक प्रवासी थे, इनमें वेनेजुएला, कोलंबिया और मध्य अमेरिका के प्रवासी शामिल हैं. हुएर्ता ने कहा कि दुर्घटना रविवार को दक्षिणी राज्य ओक्साका से आने वाले एक राजमार्ग पर हुई. ऐसा प्रतीत होता है कि प्रवासी अपर्याप्त दस्तावेजों के साथ यात्रा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि 45 में से 15 यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. दो ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. पांच को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनकी हालत गंभीर है. आठ अन्य को भी चोट आई हैं। सभी प्रवासी वयस्क थे. (भाषा) तुर्की में सहायता प्रदान करने के बाद भारत वापस लौटने पर भारतीय सेना की मेडिकल टीम 60 पैरा फील्ड का सेना प्रमुख ने अभिनंदन किया. VIP पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी को गृह विभाग ने Y+ कैटेगरी की सुरक्षा देने का ऐलान किया है. इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के आधार पर ही सहनी को Y+ कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है. सपा विधायक इरफान सोलंकी के मामले में इरफान, रिजवान और शरीफ आरोप मुक्ति नहीं हुए हैं. MP-MLA कोर्ट ने इन तीनों आरोपियों की आरोप मुक्ति की अर्जियां खारिज कर दी है. अब इस मामले में 24 फरवरी को आरोप तय किए जाएंगे. कोर्ट ने इरफान के वकील की कोई भी दलील नहीं सुनी. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा कल से दो राज्यों के दौरे पर रहेंगे. पिछले 3 दिन नड्डा नागालैंड और राजस्थान के दौरे पर होंगे. नड्डा 22 और 23 फरवरी को नागालैंड में चुनावी कार्यक्रम और रैली करेंगे. इसके बाद 24 फरवरी को राजस्थान के हनुमानगढ़ और गंगानगर में सभा करेंगे. दो मुस्लिम लोगों के कार समेत जिंदा जलने के मामले में आरोपी मोनू मानेसर के पक्ष मानेसर में हिंदू महापंचायत हो रही है. इस महापंचायत में बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से लोग आ रहे हैं. इस वजह से भारी ट्रैफिक जाम लग गया है. शिवसेना के उद्धव गुट को एक और झटका लगा है. उद्धव गुट ने अब लोकसभा सचिवालय में अपना ऑफिस भी गंवा दिया है. चुनाव आयोग के फैसले के बाद एकनाथ शिंदे गुट ने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर संसद भवन में शिवसेना संसदीय दल का ऑफिस उनको देने का अनुरोध किया था. जिसको लोकसभा सचिवालय ने मान लिया और यह ऑफिस शिंदे गुट को अलॉट कर दिया है. यह सचिवालय में यह रूम नंबर है 128. नागालैंड के तुएनसांग में आयोजित रैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "शांति वार्ता जारी है, उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश रंग लाएगी." उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंसा में 70 फीसदी, सुरक्षाकर्मियों की मौत के मामलों में 60 फीसदी और आम लोगों की मौत के मामलों में 83 फीसदी कमी आई है." आफ्सपा के बारे में शाह ने कहा कि उम्मीद है कि अगले तीन-चार साल में पूरे नगालैंड से आफ्सपा हटा लिया जाएगा. कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में बुद्धिजीवियों और पेशेवर लोगों को संबोधित करते भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, "9 साल पहले हमारे देश की छवि कैसी थी? हम नीतिगत पक्षाघात से पीड़ित थे, भारत भ्रष्ट देशों में से एक था, हमारी छवि यह थी कि हम अनुयायी थे, हमारी कोई अंतरराष्ट्रीय राय ही नहीं थी, लेकिन 9 साल बाद हम कहते हैं कि यह वह देश है जिसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है." तुर्की में हाल में आए भूकंप के बारे में NDRF के DG अतुल करवाल ने कहा कि तुर्की में हाल ही में आए भूकंप की तीव्रता 6.3 थी. अब तक मदद के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है, लेकिन NDRF किसी भी तरह से मदद के लिए पूरी तरह से तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि हमारे बचावकर्मियों और वहां (तुर्की) के स्थानीय लोगों के बीच एक मजबूत रिश्ता बना. वे चाहते थे कि हम अपने बैज उनके पास छोड़ दें और बदले में उन्होंने हमारी जेब में उनकी कुछ मूल्यवान चीजें रख दीं. भिवानी मामले पर मोनू मानेसर और उसकी टीम पर षड्यंत्र के तहत हत्या के आरोप लगाकर राजस्थान पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में मानेसर गांव तथा क्षेत्र की हिंदू समाज की पंचायत चल रही है. पंचायत में यह कहा गया कि मेवात को आतंक का गढ़ बनाया जा रहा है. मोनू और दूसरे गौ रक्षा दल को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. मोनू ने पहले पंचायत की थी, इसलिए वह गौ तस्करों के निशाने पर था. गौ रक्षा दल को खत्म कर गौ तस्करी करने के लिए ये आरोप लगाए गए हैं. गौ-तस्करों को 20-20 लाख रुपये और सरकारी नौकरी दी जा रही है. पंचायत में यह भी कहा गया कि अशोक गहलोत सरकार श्रीकांत के नवजात बच्चे की हत्या का जिम्मेदार है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में PCS की मुख्य परीक्षा प्रारंभ हो रही है. इसको देखते हुए हमने यह फैसला लिया है कि उत्तराखंड परिवहन की बसों में इस परीक्षा में भाग लेने वाले सभी परीक्षार्थियों के लिए निशुल्क सेवा की व्यवस्था की गई है. यूपी बोर्ड की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह में प्राचार्य, प्रबंधक और फर्जी परीक्षार्थी समेत कुल 13 लोग पुलिस के हत्थे चढ़े हैं. पकड़े गए 13 लोगों में 5 महिलाएं भी शामिल हैं. यह आधार कार्ड में हेरफेर कर फर्जीवाड़ा कराते थे. पकड़ी गई महिलाएं बलरामपुर जिले की रहने वाली है. इन सभी लोगों के पास से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 43 प्रवेश पत्र, 29 आधार कार्ड, 3 फीस रजिस्टर, क्लास 9, 10 ,11 12 का नार्मल फॉर्म, 15 प्रश्न पत्र, एक मॉनिटर, एक सीपीयू और एक प्रिंटर बरामद किया गया है. पकड़े गए छात्र हाईस्कूल एवं इंटर दोनों की दूसरे छात्रों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे. पकड़े गए सभी लोगों पर एनएसए के तहत होगी करवाई. चारधाम यात्रा के लिए तीर्थयात्री आज से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. पर्यटन विभाग ने सुबह सात बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोल दिया है. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि की औपचारिक घोषणा होने तक तीर्थयात्री अभी बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. भारतीय खाद्य निगम (FCI) के ठिकानों पर सीबीआई की ओर से रेड डाली जा रही है. पंजाब में 30 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. ये छापेमारी फिरोजपुर, संगरुर, फतेहपुर साहेब, मोगा, लुधियाना, पटियाला, राजपुरा, मोहाली में की गई है. FCI ऑफिसर्स के यहां रेड हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज के समय में तकनीक हमें अनेक प्रकार से एक-दूसरे से जोड़ती है. फिनटेक भी एक ऐसी तकनीक है जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है. इसका दायरा एक देश की सीमाओं के भीतर ही सीमित होता है. मगर आज की शुरुआत ने क्रॉस बॉर्डर फिनटेक कनेक्टिविटी की नई शुरुआत की है." इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसीन लूंग आज मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सिंगापुर के 'यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)' और 'PAYNOW' के बीच क्रॉस-बॉर्डर कनेक्टिविटी की शुरुआत के साक्षी बनें. ओडिशा के बालेश्वर में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर तेजाब फेंक दिया, जिससे दो महिलाएं और दो बच्चे झुलस गए. यह घटना सोमवार को सदर पुलिस थाने के विमपुरा गांव में उस समय हुई, जब एक व्यक्ति अपनी दूसरी पत्नी को नीलागिरि इलाके के संतारागादिया स्थित अपने घर ले जाने के लिए अपनी ससुराल आया. पुलिस ने बताया कि महिला ने जब उसके साथ जाने से इनकार कर दिया जो उसने उस पर तेजाब फेंक दिया और महिला को बचाने आई उसकी बड़ी बहन भी इस दौरान झुलस गई. उसने बताया कि महिला की बड़ी बहन का बेटा और बेटी भी इस हमले में झुलस गए. (भाषा) हैदराबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई है. आवारा कुत्तों ने चार साल के बच्चे पर हमला कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई. कुत्तों के हमले के दौरान बच्चा जमीन पर गिर पड़ा. वह अपने पिता के साथ छुट्टी पर घूमने आया था, लेकिन कुत्तों के हमले में अपनी जान गंवा दी. PM नरेंद्र मोदी के पिता के खिलाफ टिप्पणी को लेकर बीजेपी आज प्रदर्शन करने जा रही है. दिल्ली बीजेपी ईकाई ने ट्वीट कर बताया कि कांग्रेस नेता द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिताजी के बारे में अपमानजनक शब्द कहे जाने के विरोध में आज दोपहर 2 बजे विशाल प्रदर्शन किया जाएगा. लखनऊ में दबंगों की हरकत की वजह से एक शख्स की मौत हो गई है. कार सवार युवक के एक रिक्शा चालक को गाड़ी पर लटका कर घसीटने का मामला सामने आया है. स्वास्थ्य भवन चौराहे से लेकर परिवर्तन चौराहे तक युवक रिक्शा चालक को घसीटता रहा, इस बीच रिक्शा चालक कार रोकने की गुहार लगाता रहा, लेकिन गिरने की वजह से उसकी मौत हो गई. पहले पहले कार और रिक्शा के बीच टक्कर को रिक्शा चालक की मौत की वजह बताया जा रहा था, लेकिन स्वास्थ्य भवन के पास लगे सीसीटीवी फुटेज ने मौत की वजह खोल दी है. सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस कार सवार की तलाश में जुट गई है. यह मामला हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित परिवर्तन चौराहा का है. सुप्रीम कोर्ट एक और नई शुरुआत करने जा रहा है. टेस्टिंग के तौर पर पहली बार सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की कार्यवाही आज से ट्रांसक्रिप्ट की जाएगी और बहस करने वाले वकीलों को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने से पहले समीक्षा के लिए दी जाएगी. हालांकि यह प्रायोगिक आधार पर एक या दो दिन के लिए ही होगा. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बड़ी कार्रवाई की जा रही है. इनकम टैक्स की ओर से वित्तीय अनियमितता को लेकर देश के 64 ठिकानों पर रेड की गई है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में रेड हो रही है. Uflex लिमिटेड कंपनी के खिलाफ कारवाई की जा रही है. 200 से ज्यादा अधिकारी सुबह 8 बजे से मौजूद हैं. लखनऊ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में शिवाजी जयंती को लेकर विवाद हो गया है. छात्रों को शिवाजी जयंती मनाने से वार्डन ने रोक दिया है. वार्डन डॉक्टर आजम अंसारी ने हॉस्टल परिसर से शिवाजी की फोटो हटवाई. भाषा विश्वविद्यालय के सुभाष छात्रावास में बिना अनुमति शिवाजी जयंती मना रहे छात्रों को वार्डन ने फटकार लगाई. छात्रों का आरोप है कि उन्हें नोटिस देने की चेतावनी भी दी गई है. समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, "कानपुर देहात अग्निकांड के पीड़ित को अर्द्धनग्न करके प्रताड़ित करने का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी सरकार अब अपनी सफाई में क्या कहेगी. जनता पूछ रही है, अधिकारियों के ऊपर बुलडोज़र कब चलेगा? बीजेपी उत्पीड़न का पर्यायवाची बन गई है." मुंबई में विधायक के लड़के के साथ हुए सेल्फी विवाद के बाद सिंगर सोनू निगम के घर के बाहर पुलिस को तैनात कर दिया गया है. जम्मू-कश्मीर में भी राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) की ओर से छापेमारी की जा रही है. एसआईए में दर्ज आतंकवाद से संबंधित एक मामले की जांच के तहत मंगलवार सुबह कश्मीर के कई हिस्सों में कई स्थानों पर छापेमारी की गई. एक अधिकारी ने कहा कि जांच एजेंसी के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ की मदद से पांच स्थानों पर छापेमारी की. उन्होंने कहा कि 'नार्को टेररिज्म' मामले में बारामूला, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम, सोपोर जिलों में तलाशी ली जा रही है. जांच एजेंसी अनंतनाग में हरदू अकड़ निवासी गुल मोहम्मद के पुत्र ओवैस गुल के आवास की तलाशी ले रही है. तेलंगाना के संगारेड्डी में तेल ले जा रहे एक ट्रक में आग लगने की घटना सामने आई है. जिला अग्निशमन अधिकारी वी. श्रीनिवास ने बताया, "इंजन गर्म हो जाने के कारण ड्रमों में ट्रांसफॉर्मर तेल ले जा रहे एक ट्रक में आग लग गई. आग पास में खड़ी एक कार में भी फैल गई. हालांकि हादसे में अभी तक कोई हताहत या घायल नहीं हुआ है." (ANI) भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के स्वामित्व वाली फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल के हीरे, सोने और प्लेटिनम के आभूषणों की बिक्री 25 मार्च को ई-नीलामी के जरिये होगी. यह बिक्री नोटिस शांतनु टी. रे द्वारा जारी किया गया है, जिन्हें फरवरी 2020 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड का परिसमापक (लिक्विडेटर) नियुक्त किया था. इस कंपनी से जुड़े मामलों का प्रबंधन शांतनु द्वारा किया जा रहा है. नोटिस के मुताबिक सोने, प्लेटिनम और हीरे के आभूषणों की बिक्री 25 मार्च को ई-नीलामी के जरिए होगी. (भाषा) झारखंड सरकार के तहत आने वाले ग्रामीण विकास मंत्रालय में इंजीनियर वीरेंद्र राम से जुड़े रांची समेत देशभर के 24 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय छापेमारी कर रहा है. हरियाणा के यमुनानगर में एनआईए का छापा चल रहा है. स्थानीय पुलिस बल के साथ पुलिस ने आजाद नगर स्थित एक घर पर छापेमारी की है. सुबह से एनआईए की कार्रवाई चल रही है. कर्नाटक में चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 27 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेलगावी यात्रा से पहले बेलगावी जिले के विधायकों और नेताओं के साथ बैठक की. बैठक में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहे. ओडिशा में एक महिला पर एसिड फेंकने का मामला सामने आया है. बालेश्वर की एसपी सागरिका नाथ ने कहा कि 22 साल की महिला पर एसिड फेंका गया है. जानकारी के मुताबिक महिला आरोपी की दूसरी पत्नी है. पारिवारिक विवाद के कारण घटना को अंजाम दिया गया है. उन्होंने बताया कि महिला का इलाज जारी है. आरोपी को जल्द पकड़ लिया जाएगा. पाकिस्तान में खूंखार आतंकी बशीर अहमद मारा गया. आतंकी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन का लॉन्चिंग कमांडर बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम सोमवार को पाकिस्तान के रावलपिंडी में मार दिया गया.एक हमलावर ने सोमवार शाम को रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर बशीर को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई. अक्टूबर में, भारत में केंद्र सरकार ने उसे जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में घुसपैठ के लिए विशेष रूप से प्रतिबंधित संगठन के आतंकवादियों को रसद प्रदान करने सहित आतंकवादी गतिविधियों में उसकी भूमिका के लिए यूएपीए के तहत एक आतंकवादी के रूप में नामित किया था. वह कुपवाड़ा के बरबरपोरा का रहने वाला था. मेघालय के मुख्यमंत्री और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के प्रमुख कॉनराड के. संगमा ने सोमवार को कहा कि तूरा में पीए संगमा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली के लिए अनुमति देने से इनकार करने में न तो उनकी और न ही उनकी पार्टी की कोई भूमिका थी. खेल विभाग ने वेस्ट गारो हिल्स जिले के अधिकारियों को सूचित किया है कि वहां प्रधानमंत्री की रैली के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि मलबा सुरक्षा चिंताओं का कारण बन सकता है. (भाषा) राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की से बड़ी कार्रवाई की गई है. NIA ने गैंगस्टर और उनके करीबियों के ठिकानों पर रेड की है. NIA ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, गुजरात और मध्यप्रदेश में एक साथ की 70 लोकेशन पर रेड की है. ये रेड गैंगस्टर और तमाम राज्यों में फैले उनके सिंडिकेट को लेकर की जा रही है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि रविवार को घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या लगभग 4.45 लाख रही जो अभी तक का एक और कीर्तिमान है. मंत्री ने बताया कि कोविड से पहले, घरेलू यात्रियों की दैनिक औसत संख्या 3,98,579 थी. सिंधिया ने एक ट्वीट में कहा, "घरेलू हवाई यात्रियों की आवाजाही ने कोविड के बाद एक नया उच्च स्तर हासिल किया. घरेलू विमानन कंपनियों ने रविवार को 4,44,845 लोगों को यात्रा कराई" (भाषा)
उत्तराखंड में चमोली जिले के कर्णप्रयाग में बहुगुणा नगर, सुभाष नगर और अपर बाजार में भूधंसाव से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने दरारों वाले भवनों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के आदेश दिए हैं. प्रभावितों से मुलाकात के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूधंसाव के कारण जिन भवनों में अत्यधिक दरारें आ गई हैं, उन्हें खाली करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए. उन्होंने कहा कि जो लोग किराए पर जाना चाहते हैं, उन्हें छह महीने तक किराया भी दिया जाएगा. आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के स्वयंभू कमांडर बशीर अहमद पीर की पाकिस्तान के रावलपिंडी में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. खुफिया अधिकारियों ने यहां बताया कि जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का रहने वाला पीर पंद्रह साल से अधिक समय से पाकिस्तान में रह रहा था. पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के मुताबिक, सोमवार को रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर पीर उर्फ इम्तियाज आलम को हमलावरों ने बेहद करीब से गोली मार दी. उत्तर प्रदेश के आगरा में ग्वालियर राजमार्ग पर सोमवार की देर रात एक वाहन ने दो दोस्तों को टक्कर मार दी, जिससे वे डिवाइडर से टकरा गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि मरने वालों की पहचान आकाश और पवन के तौर पर की गई है. उन्होंने बताया कि घटना मलपुरा थाना क्षेत्र में हुई. उन्होंने बताया कि आकाश और पवन एक विवाह भवन में लाइट डेकोरेशन एवं हलवाई का काम करके वापस अपने घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आए अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चौबीस फरवरी को आयोजित विश्व भारती के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. विश्वविद्यालय की एक प्रवक्ता ने बताया कि वह विश्वविद्यालय के छात्रों की एक प्रस्तुति देखने के अलावा संबोधन भी देंगे. विश्वभारती की प्रवक्ता महुआ बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष सरकार, कुलपति विद्युत चक्रवर्ती और अन्य गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे. शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को बर्फबारी हुई, जिसके कारण वाहन चालकों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा. क्षेत्र में सड़कों एवं मकानों की छतों पर बर्फ की चादर जम गई. रास्तों पर भी बर्फ के कारण फिसलन बढ़ गई एवं गाड़ी चलाना खतरनाक हो गया. आसमान में काले बादल छा गए एवं बर्फीली हवाएं चलीं. गरज के साथ बौछारों और बर्फबारी के कारण तापमान घट गया जो पिछले कुछ दिनों से सामान्य से आठ-दस डिग्री सेल्सियस अधिक था. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को हत्या के प्रयास के एक मामले में जमानत दे दी है. यह मामला कौशांबी जिले के पूरामुफ्ती पुलिस थाना में दर्ज कराया गया था. वर्तमान में अली अहमद प्रयागराज के नैनी केंद्रीय कारागार में बंद हैं. न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने सोमवार को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता और सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया. राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुंदा थाना क्षेत्र में असामाजिक तत्वों द्वारा भगवान परशुराम की प्रतिमा को खंडित करने का मामला सामने आया है ओर मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. गोगुंदा के थानाधिकारी अनिल विश्नोई ने मंगलवार को बताया कि असामाजिक तत्वों ने रविवार की रात को भगवान परशुराम की प्रतिमा को खंडित कर दिया. उन्होंने बताया कि इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा दो सौ पचानवे, चार सौ सैंतालीस,चार सौ सत्ताईस के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने मंगलवार को कथित असंसदीय व्यवहार को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता और सदन में पार्टी के एक मात्र विधायक अभय सिंह चौटाला के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें दो दिन तक सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेने को कहा. एलेनाबाद से विधायक चौटाला ने दो हज़ार बीस में कोविड महामारी और हरियाणा में लॉकडाउन के दौरान हुए कथित शराब घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल की रिपोर्ट की स्थिति जानने के लिए ध्यानाकर्षण नोटिस दिया था. जयपुर ग्रामीण के दूदू थाना क्षेत्र में मंगलवार की दोपहर तेज गति ट्रेलर ने सड़क किनारे खड़े चार युवकों को टक्कर मार दी, जिससे इस घटना में उन युवकों की मौत हो गई. पुलिस उपनिरीक्षक नेमीचंद ने बताया कि जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो बाइक पर सवार चार युवक सड़क किनारे खड़े होकर मोबाइल पर बातचीत कर रहे थे, उसी दौरान एक तेज गति ट्रेलर ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे चारों की मौत हो गई. पीएम किसान सम्मान निधि योजना के चार साल पूरे होने पर चौबीस फरवरी को बीजेपी नमो किसान सम्मान दिवस मनाने जा रही है. देश के सभी जिलों में किसान सम्मेलन, किसान सभाएं एवं लाभार्थियों से संवाद व संपर्क भी बीजेपी करेगी. बीजेपी किसान मोर्चा के कार्यकर्ता देशभर में पीएम मोदी का आभार प्रकट करेंगे. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत चौबीस फरवरी दो हज़ार उन्नीस को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पीएम मोदी ने किया था. मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के लोगों को अभी कुछ दिन और गर्मी परेशान करेगी. मौसम वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने कहा, इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है जो पश्चिमी हिमालय क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है. बुधवार से थोड़ी संभावना है कि उत्तर पश्चिम भारत में तापमान में एक-दो डिग्री की गिरावट आएगी. हम दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान इकतीस-तैंतीस डिग्री के बीच रहने की उम्मीद कर रहे हैं. मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. मऊ में अब्बास अंसारी के नाम दर्ज मकान को गिराने की याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने याची अब्बास अंसारी को डीएम मऊ के यहां अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने डीएम को मामले में नियमानुसार निर्णय लेने का भी निर्देश दिया है. तोशाखाना मामले में एनएबी ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को समन जारी किया और नौ मार्च को पेश होने के लिए कहा है. बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने आरोप लगाया था कि इमरान खान पर चौदह करोड़ रुपये के तोशाखाना उपहार को दुबई में बेच दिया है. ऐसा दावा किया गया है कि इमरान खान ने जिन उपहारों को दुबई में बेचा है उनमें हीरे के आभूषण, कंगन और कलाई घड़ी शामिल हैं. मथुरा-वृंदावन की इस्कॉन मंदिर के नजदीक स्थित एक बिल्डिंग में आग लगने से अफरा-तफरी का माहौल है. अभी तक की जानकारी के मुताबिक बिल्डिंग की छत पर रखे कबाड़ में अचानक आग लग गई है. आग लगने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे दमकल के कमर्चारी आग बुझाने में जुट गए हैं. भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम के एक पदाधिकारी द्वारा कथित रूप से सेना के एक जवान की हत्या किए जाने के मामले में मंगलवार को भूख हड़ताल शुरू कर दी है. भाजपा ने कहा कि यह भूख हड़ताल उनतीस वर्षीय लांस नायक प्रभु को न्याय दिलाने और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रमुख टी. पेरियासामी के आवास पर हुए हमले के सिलसिले में शुरू की गई है. यूपी के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान को बड़ा झटका लगा है. बहत्तर औद्योगिक भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त ने सभी बहत्तर औद्योगिक भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया है. ये कार्रवाई जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद सामने आई है. इस मामले में अब आवंटन करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की जाना तय है. कल दिल्ली में होने वाले मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से पर्यावरण मंत्री गोपाल राय का बयान सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुंजाइश नहीं बचती है लेकिन नया दौर है और नए दौर में हर जगह सवाल है, तो इसलिए लोगों के मन में शंका होती है वर्ना तो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम निर्णय होता है. मुझे भरोसा है कि भारतीय जनता पार्टी वो किसी लोकतंत्र को नहीं मानती पार्टियों को नहीं मानती जनता के जनादेश को नहीं मानती. कल कम से कम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शांतिपूर्वक बिना कोई बहना बनाए, सुचारू रूप से दिल्ली के मेयर के चुनाव में सहयोग करेगी और दिल्ली के लोगों को मेयर मिले इसमें उसकी हिस्सेदारी होगी. भिवानी हत्याकांड मामले में हरियाणा की नूंह पुलिस ने राजस्थान पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.आरोपी श्नीकांत के नवजात बच्चे की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपी श्रीकांत की माता दुलारी ने राजस्थान पुलिस के खिलाफ शिकायत में गंभीर आरोप लगाए थे. दो युवकों के नरकंकाल मामले के आरोपी श्रीकांत की पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया था पैदा. परिजनों ने लगाया था राजस्थान पुलिस ने गर्भवती को धक्का मारा था. राजस्थान पुलिस के तीस-चालीस अज्ञात अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बच्चों को लेकर जा रही बस पलट गई. दो से तीन बच्चे घायल हुए हैं. घटना कंपू थाना क्षेत्र के मांढरे की माता मंदिर मार्ग पर हुई है. बस पल्स वेली प्राइवेट स्कूल की बताई गई है. घायल हुए बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया है. आयुष्मान हेल्थ सेंटर का नाम कुछ राज्यों ने बदल दिया है, जिस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई है. अब केंद्र सरकार पैसा रोकने पर विचार कर रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, आयुष्मान हेल्थ सेंटर योजना के तहत तेलंगाना, पंजाब, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वैलनेस सेंटर के निर्माण में कुछ मॉडिफिकेशन किया है और उसकी जगह उन्होंने अपने-अपने सेंटर के नाम को आगे बढ़ाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पंजाब ने उसको मोहल्ला क्लीनिक में तब्दील कर दिया है, ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपत्ति जाहिर की है और इस योजना के तहत मिलने वाली रकम को रोकने पर विचार कर रही है क्योंकि योजना के तहत साठ% रकम केंद्र सरकार देती है और चालीस% रकम राज्य सरकार को देनी होती है. लुधियाना में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये कीमत की एक दशमलव पाँच किलोग्रामग्राम हेरोइन के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. वह पटियाला से लुधियाना आकर हेरोइन की सप्लाई किया करता था. एसटीएफ लुधियाना रेंज ने गुप्त सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर हरबंस सिंह के नेतृत्व में की गई नाकाबंदी के दौरान एक व्यक्ति को एक.पाँच किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा कि आपसी बातचीत से ही हल निकलेगा. पश्चिम देशों से दूर रहते हुए यूक्रेन बात करे तो सबके लिए बेहतर होगा. रूस ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि हमने कोशिश की थी कि जंग न हो. हम चाहते हैं कि युद्ध किसी तरह से बंद हो जाए. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने रूसी संसद ड्यूमा में कहा कि यूक्रेन को हथियार देकर बरगलाने की कोशिश हुई. रूस में NATO का दखल बढ़ रहा है. पुतिन ने कहा कि पश्चिम ताकतों की दखल की वजह से हमें आगे बढ़ना पड़ा. वोलिदिमिर जेलेंस्की को बात करने का मौका दिया गया था. उन्होंने कहा कि नाटो ने यूक्रेन को बरगलाया और उसे उकसाने का काम किया. यूक्रेन पर हमला करने से एक साल पूरे होने से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने रूसी संसद ड्यूमा में कहा कि दो हज़ार चौदह से डोनबास में बहुत लड़ाई हुई. दो हज़ार चौदह से हम डोनबास के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. पुतिन के भाषण से पहले सभी सांसद ड्यूमा पहुंच गए हैं. राजस्थान के धौलपुर में एक कांस्टेबल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. उसका शव उसके घर में फंदे से लटकता मिला. वह जाटोली चौकी पर तैनात था. फिलहाल पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया है. पुलिस खुदकुशी के मामले की जांच कर रही है. मामला निहालगंज थाना इलाके के गिर्राज कॉलोनी का है. कर्नाटक सरकार ने आज मंगलवार को आपस में सार्वजनिक तौर पर उलझने वाली आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी और आईपीएस अधिकारी डी. रुपा मौदगिल को नोटिस दिया है, साथ ही उन पर लगाम लगाने का आदेश जारी किया. मेक्सिको के पुएबला राज्य में एक बस दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार कम से कम सत्रह प्रवासियों की मौत हो गई. पुएबला के गृह सचिव जूलियो हुएर्ता के अनुसार सभी मृतक प्रवासी थे, इनमें वेनेजुएला, कोलंबिया और मध्य अमेरिका के प्रवासी शामिल हैं. हुएर्ता ने कहा कि दुर्घटना रविवार को दक्षिणी राज्य ओक्साका से आने वाले एक राजमार्ग पर हुई. ऐसा प्रतीत होता है कि प्रवासी अपर्याप्त दस्तावेजों के साथ यात्रा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि पैंतालीस में से पंद्रह यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. दो ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. पांच को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनकी हालत गंभीर है. आठ अन्य को भी चोट आई हैं। सभी प्रवासी वयस्क थे. तुर्की में सहायता प्रदान करने के बाद भारत वापस लौटने पर भारतीय सेना की मेडिकल टीम साठ पैरा फील्ड का सेना प्रमुख ने अभिनंदन किया. VIP पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी को गृह विभाग ने Y+ कैटेगरी की सुरक्षा देने का ऐलान किया है. इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के आधार पर ही सहनी को Y+ कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है. सपा विधायक इरफान सोलंकी के मामले में इरफान, रिजवान और शरीफ आरोप मुक्ति नहीं हुए हैं. MP-MLA कोर्ट ने इन तीनों आरोपियों की आरोप मुक्ति की अर्जियां खारिज कर दी है. अब इस मामले में चौबीस फरवरी को आरोप तय किए जाएंगे. कोर्ट ने इरफान के वकील की कोई भी दलील नहीं सुनी. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा कल से दो राज्यों के दौरे पर रहेंगे. पिछले तीन दिन नड्डा नागालैंड और राजस्थान के दौरे पर होंगे. नड्डा बाईस और तेईस फरवरी को नागालैंड में चुनावी कार्यक्रम और रैली करेंगे. इसके बाद चौबीस फरवरी को राजस्थान के हनुमानगढ़ और गंगानगर में सभा करेंगे. दो मुस्लिम लोगों के कार समेत जिंदा जलने के मामले में आरोपी मोनू मानेसर के पक्ष मानेसर में हिंदू महापंचायत हो रही है. इस महापंचायत में बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से लोग आ रहे हैं. इस वजह से भारी ट्रैफिक जाम लग गया है. शिवसेना के उद्धव गुट को एक और झटका लगा है. उद्धव गुट ने अब लोकसभा सचिवालय में अपना ऑफिस भी गंवा दिया है. चुनाव आयोग के फैसले के बाद एकनाथ शिंदे गुट ने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर संसद भवन में शिवसेना संसदीय दल का ऑफिस उनको देने का अनुरोध किया था. जिसको लोकसभा सचिवालय ने मान लिया और यह ऑफिस शिंदे गुट को अलॉट कर दिया है. यह सचिवालय में यह रूम नंबर है एक सौ अट्ठाईस. नागालैंड के तुएनसांग में आयोजित रैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "शांति वार्ता जारी है, उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश रंग लाएगी." उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंसा में सत्तर फीसदी, सुरक्षाकर्मियों की मौत के मामलों में साठ फीसदी और आम लोगों की मौत के मामलों में तिरासी फीसदी कमी आई है." आफ्सपा के बारे में शाह ने कहा कि उम्मीद है कि अगले तीन-चार साल में पूरे नगालैंड से आफ्सपा हटा लिया जाएगा. कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में बुद्धिजीवियों और पेशेवर लोगों को संबोधित करते भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, "नौ साल पहले हमारे देश की छवि कैसी थी? हम नीतिगत पक्षाघात से पीड़ित थे, भारत भ्रष्ट देशों में से एक था, हमारी छवि यह थी कि हम अनुयायी थे, हमारी कोई अंतरराष्ट्रीय राय ही नहीं थी, लेकिन नौ साल बाद हम कहते हैं कि यह वह देश है जिसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है." तुर्की में हाल में आए भूकंप के बारे में NDRF के DG अतुल करवाल ने कहा कि तुर्की में हाल ही में आए भूकंप की तीव्रता छः.तीन थी. अब तक मदद के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है, लेकिन NDRF किसी भी तरह से मदद के लिए पूरी तरह से तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि हमारे बचावकर्मियों और वहां के स्थानीय लोगों के बीच एक मजबूत रिश्ता बना. वे चाहते थे कि हम अपने बैज उनके पास छोड़ दें और बदले में उन्होंने हमारी जेब में उनकी कुछ मूल्यवान चीजें रख दीं. भिवानी मामले पर मोनू मानेसर और उसकी टीम पर षड्यंत्र के तहत हत्या के आरोप लगाकर राजस्थान पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में मानेसर गांव तथा क्षेत्र की हिंदू समाज की पंचायत चल रही है. पंचायत में यह कहा गया कि मेवात को आतंक का गढ़ बनाया जा रहा है. मोनू और दूसरे गौ रक्षा दल को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. मोनू ने पहले पंचायत की थी, इसलिए वह गौ तस्करों के निशाने पर था. गौ रक्षा दल को खत्म कर गौ तस्करी करने के लिए ये आरोप लगाए गए हैं. गौ-तस्करों को बीस-बीस लाख रुपये और सरकारी नौकरी दी जा रही है. पंचायत में यह भी कहा गया कि अशोक गहलोत सरकार श्रीकांत के नवजात बच्चे की हत्या का जिम्मेदार है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में PCS की मुख्य परीक्षा प्रारंभ हो रही है. इसको देखते हुए हमने यह फैसला लिया है कि उत्तराखंड परिवहन की बसों में इस परीक्षा में भाग लेने वाले सभी परीक्षार्थियों के लिए निशुल्क सेवा की व्यवस्था की गई है. यूपी बोर्ड की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह में प्राचार्य, प्रबंधक और फर्जी परीक्षार्थी समेत कुल तेरह लोग पुलिस के हत्थे चढ़े हैं. पकड़े गए तेरह लोगों में पाँच महिलाएं भी शामिल हैं. यह आधार कार्ड में हेरफेर कर फर्जीवाड़ा कराते थे. पकड़ी गई महिलाएं बलरामपुर जिले की रहने वाली है. इन सभी लोगों के पास से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के तैंतालीस प्रवेश पत्र, उनतीस आधार कार्ड, तीन फीस रजिस्टर, क्लास नौ, दस ,ग्यारह बारह का नार्मल फॉर्म, पंद्रह प्रश्न पत्र, एक मॉनिटर, एक सीपीयू और एक प्रिंटर बरामद किया गया है. पकड़े गए छात्र हाईस्कूल एवं इंटर दोनों की दूसरे छात्रों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे. पकड़े गए सभी लोगों पर एनएसए के तहत होगी करवाई. चारधाम यात्रा के लिए तीर्थयात्री आज से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. पर्यटन विभाग ने सुबह सात बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोल दिया है. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि की औपचारिक घोषणा होने तक तीर्थयात्री अभी बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. भारतीय खाद्य निगम के ठिकानों पर सीबीआई की ओर से रेड डाली जा रही है. पंजाब में तीस से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. ये छापेमारी फिरोजपुर, संगरुर, फतेहपुर साहेब, मोगा, लुधियाना, पटियाला, राजपुरा, मोहाली में की गई है. FCI ऑफिसर्स के यहां रेड हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज के समय में तकनीक हमें अनेक प्रकार से एक-दूसरे से जोड़ती है. फिनटेक भी एक ऐसी तकनीक है जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है. इसका दायरा एक देश की सीमाओं के भीतर ही सीमित होता है. मगर आज की शुरुआत ने क्रॉस बॉर्डर फिनटेक कनेक्टिविटी की नई शुरुआत की है." इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसीन लूंग आज मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सिंगापुर के 'यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ' और 'PAYNOW' के बीच क्रॉस-बॉर्डर कनेक्टिविटी की शुरुआत के साक्षी बनें. ओडिशा के बालेश्वर में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर तेजाब फेंक दिया, जिससे दो महिलाएं और दो बच्चे झुलस गए. यह घटना सोमवार को सदर पुलिस थाने के विमपुरा गांव में उस समय हुई, जब एक व्यक्ति अपनी दूसरी पत्नी को नीलागिरि इलाके के संतारागादिया स्थित अपने घर ले जाने के लिए अपनी ससुराल आया. पुलिस ने बताया कि महिला ने जब उसके साथ जाने से इनकार कर दिया जो उसने उस पर तेजाब फेंक दिया और महिला को बचाने आई उसकी बड़ी बहन भी इस दौरान झुलस गई. उसने बताया कि महिला की बड़ी बहन का बेटा और बेटी भी इस हमले में झुलस गए. हैदराबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई है. आवारा कुत्तों ने चार साल के बच्चे पर हमला कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई. कुत्तों के हमले के दौरान बच्चा जमीन पर गिर पड़ा. वह अपने पिता के साथ छुट्टी पर घूमने आया था, लेकिन कुत्तों के हमले में अपनी जान गंवा दी. PM नरेंद्र मोदी के पिता के खिलाफ टिप्पणी को लेकर बीजेपी आज प्रदर्शन करने जा रही है. दिल्ली बीजेपी ईकाई ने ट्वीट कर बताया कि कांग्रेस नेता द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिताजी के बारे में अपमानजनक शब्द कहे जाने के विरोध में आज दोपहर दो बजे विशाल प्रदर्शन किया जाएगा. लखनऊ में दबंगों की हरकत की वजह से एक शख्स की मौत हो गई है. कार सवार युवक के एक रिक्शा चालक को गाड़ी पर लटका कर घसीटने का मामला सामने आया है. स्वास्थ्य भवन चौराहे से लेकर परिवर्तन चौराहे तक युवक रिक्शा चालक को घसीटता रहा, इस बीच रिक्शा चालक कार रोकने की गुहार लगाता रहा, लेकिन गिरने की वजह से उसकी मौत हो गई. पहले पहले कार और रिक्शा के बीच टक्कर को रिक्शा चालक की मौत की वजह बताया जा रहा था, लेकिन स्वास्थ्य भवन के पास लगे सीसीटीवी फुटेज ने मौत की वजह खोल दी है. सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस कार सवार की तलाश में जुट गई है. यह मामला हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित परिवर्तन चौराहा का है. सुप्रीम कोर्ट एक और नई शुरुआत करने जा रहा है. टेस्टिंग के तौर पर पहली बार सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की कार्यवाही आज से ट्रांसक्रिप्ट की जाएगी और बहस करने वाले वकीलों को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने से पहले समीक्षा के लिए दी जाएगी. हालांकि यह प्रायोगिक आधार पर एक या दो दिन के लिए ही होगा. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बड़ी कार्रवाई की जा रही है. इनकम टैक्स की ओर से वित्तीय अनियमितता को लेकर देश के चौंसठ ठिकानों पर रेड की गई है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में रेड हो रही है. Uflex लिमिटेड कंपनी के खिलाफ कारवाई की जा रही है. दो सौ से ज्यादा अधिकारी सुबह आठ बजे से मौजूद हैं. लखनऊ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में शिवाजी जयंती को लेकर विवाद हो गया है. छात्रों को शिवाजी जयंती मनाने से वार्डन ने रोक दिया है. वार्डन डॉक्टर आजम अंसारी ने हॉस्टल परिसर से शिवाजी की फोटो हटवाई. भाषा विश्वविद्यालय के सुभाष छात्रावास में बिना अनुमति शिवाजी जयंती मना रहे छात्रों को वार्डन ने फटकार लगाई. छात्रों का आरोप है कि उन्हें नोटिस देने की चेतावनी भी दी गई है. समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, "कानपुर देहात अग्निकांड के पीड़ित को अर्द्धनग्न करके प्रताड़ित करने का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी सरकार अब अपनी सफाई में क्या कहेगी. जनता पूछ रही है, अधिकारियों के ऊपर बुलडोज़र कब चलेगा? बीजेपी उत्पीड़न का पर्यायवाची बन गई है." मुंबई में विधायक के लड़के के साथ हुए सेल्फी विवाद के बाद सिंगर सोनू निगम के घर के बाहर पुलिस को तैनात कर दिया गया है. जम्मू-कश्मीर में भी राज्य जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी की जा रही है. एसआईए में दर्ज आतंकवाद से संबंधित एक मामले की जांच के तहत मंगलवार सुबह कश्मीर के कई हिस्सों में कई स्थानों पर छापेमारी की गई. एक अधिकारी ने कहा कि जांच एजेंसी के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ की मदद से पांच स्थानों पर छापेमारी की. उन्होंने कहा कि 'नार्को टेररिज्म' मामले में बारामूला, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम, सोपोर जिलों में तलाशी ली जा रही है. जांच एजेंसी अनंतनाग में हरदू अकड़ निवासी गुल मोहम्मद के पुत्र ओवैस गुल के आवास की तलाशी ले रही है. तेलंगाना के संगारेड्डी में तेल ले जा रहे एक ट्रक में आग लगने की घटना सामने आई है. जिला अग्निशमन अधिकारी वी. श्रीनिवास ने बताया, "इंजन गर्म हो जाने के कारण ड्रमों में ट्रांसफॉर्मर तेल ले जा रहे एक ट्रक में आग लग गई. आग पास में खड़ी एक कार में भी फैल गई. हालांकि हादसे में अभी तक कोई हताहत या घायल नहीं हुआ है." भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के स्वामित्व वाली फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल के हीरे, सोने और प्लेटिनम के आभूषणों की बिक्री पच्चीस मार्च को ई-नीलामी के जरिये होगी. यह बिक्री नोटिस शांतनु टी. रे द्वारा जारी किया गया है, जिन्हें फरवरी दो हज़ार बीस में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई पीठ ने फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड का परिसमापक नियुक्त किया था. इस कंपनी से जुड़े मामलों का प्रबंधन शांतनु द्वारा किया जा रहा है. नोटिस के मुताबिक सोने, प्लेटिनम और हीरे के आभूषणों की बिक्री पच्चीस मार्च को ई-नीलामी के जरिए होगी. झारखंड सरकार के तहत आने वाले ग्रामीण विकास मंत्रालय में इंजीनियर वीरेंद्र राम से जुड़े रांची समेत देशभर के चौबीस ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय छापेमारी कर रहा है. हरियाणा के यमुनानगर में एनआईए का छापा चल रहा है. स्थानीय पुलिस बल के साथ पुलिस ने आजाद नगर स्थित एक घर पर छापेमारी की है. सुबह से एनआईए की कार्रवाई चल रही है. कर्नाटक में चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सत्ताईस फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेलगावी यात्रा से पहले बेलगावी जिले के विधायकों और नेताओं के साथ बैठक की. बैठक में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहे. ओडिशा में एक महिला पर एसिड फेंकने का मामला सामने आया है. बालेश्वर की एसपी सागरिका नाथ ने कहा कि बाईस साल की महिला पर एसिड फेंका गया है. जानकारी के मुताबिक महिला आरोपी की दूसरी पत्नी है. पारिवारिक विवाद के कारण घटना को अंजाम दिया गया है. उन्होंने बताया कि महिला का इलाज जारी है. आरोपी को जल्द पकड़ लिया जाएगा. पाकिस्तान में खूंखार आतंकी बशीर अहमद मारा गया. आतंकी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन का लॉन्चिंग कमांडर बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम सोमवार को पाकिस्तान के रावलपिंडी में मार दिया गया.एक हमलावर ने सोमवार शाम को रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर बशीर को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई. अक्टूबर में, भारत में केंद्र सरकार ने उसे जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में घुसपैठ के लिए विशेष रूप से प्रतिबंधित संगठन के आतंकवादियों को रसद प्रदान करने सहित आतंकवादी गतिविधियों में उसकी भूमिका के लिए यूएपीए के तहत एक आतंकवादी के रूप में नामित किया था. वह कुपवाड़ा के बरबरपोरा का रहने वाला था. मेघालय के मुख्यमंत्री और नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रमुख कॉनराड के. संगमा ने सोमवार को कहा कि तूरा में पीए संगमा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली के लिए अनुमति देने से इनकार करने में न तो उनकी और न ही उनकी पार्टी की कोई भूमिका थी. खेल विभाग ने वेस्ट गारो हिल्स जिले के अधिकारियों को सूचित किया है कि वहां प्रधानमंत्री की रैली के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि मलबा सुरक्षा चिंताओं का कारण बन सकता है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी की से बड़ी कार्रवाई की गई है. NIA ने गैंगस्टर और उनके करीबियों के ठिकानों पर रेड की है. NIA ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, गुजरात और मध्यप्रदेश में एक साथ की सत्तर लोकेशन पर रेड की है. ये रेड गैंगस्टर और तमाम राज्यों में फैले उनके सिंडिकेट को लेकर की जा रही है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि रविवार को घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या लगभग चार.पैंतालीस लाख रही जो अभी तक का एक और कीर्तिमान है. मंत्री ने बताया कि कोविड से पहले, घरेलू यात्रियों की दैनिक औसत संख्या तीन,अट्ठानवे,पाँच सौ उन्यासी थी. सिंधिया ने एक ट्वीट में कहा, "घरेलू हवाई यात्रियों की आवाजाही ने कोविड के बाद एक नया उच्च स्तर हासिल किया. घरेलू विमानन कंपनियों ने रविवार को चार,चौंतालीस,आठ सौ पैंतालीस लोगों को यात्रा कराई"
ऑटो एक्सपो में दिख रहीं हैं भांति भांति की प्रीमियम बसें, ये है आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित टाटा की स्टारबस मैग्ना। (सभी फोटो - लाल सिंह /अमर उजाला) एसएमएल इग्जीक्यूटिव सीएनजी टर्बोः जेबीएम की स्कूल लाइफः सीएनजी, एसी बस, 42 सीट, जीपीएस कनेक्टिविटी, बच्चों के बस में आते ही घर पर मैसेज आ जाएगा। लाइव कैमरा चालक देख सकता है और इसकी वीडियो कंट्रोल रूम के पास भी देखी जा सकती है। पैनिक बटन, सीट बेल्ट, कीमत करीब 90 लाख। गुरुग्राम के एक स्कूल में पांच बसें दी हैं। जेबीएम की ई सिटीलाइफः बस के ऊपर चार्जिंग पेंटोग्राफ से पांच मिनट में चार्ज और प्लग इन चार्जिंग से एक से डेढ़ घंटे में चार्ज। फुल चार्ज पर 150 से 200 किमी चलती है। पांच बैटरी बस की छत पर लगी है। 42 सीट, छह माह में बाजार में, कीमत 2. 5 करोड़ रुपये, बारिश के मौसम में पानी भरने से कोई दिक्कत नहीं होगी। टॉप स्पीड-75 किमी/ घंटे।
ऑटो एक्सपो में दिख रहीं हैं भांति भांति की प्रीमियम बसें, ये है आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित टाटा की स्टारबस मैग्ना। एसएमएल इग्जीक्यूटिव सीएनजी टर्बोः जेबीएम की स्कूल लाइफः सीएनजी, एसी बस, बयालीस सीट, जीपीएस कनेक्टिविटी, बच्चों के बस में आते ही घर पर मैसेज आ जाएगा। लाइव कैमरा चालक देख सकता है और इसकी वीडियो कंट्रोल रूम के पास भी देखी जा सकती है। पैनिक बटन, सीट बेल्ट, कीमत करीब नब्बे लाख। गुरुग्राम के एक स्कूल में पांच बसें दी हैं। जेबीएम की ई सिटीलाइफः बस के ऊपर चार्जिंग पेंटोग्राफ से पांच मिनट में चार्ज और प्लग इन चार्जिंग से एक से डेढ़ घंटे में चार्ज। फुल चार्ज पर एक सौ पचास से दो सौ किमी चलती है। पांच बैटरी बस की छत पर लगी है। बयालीस सीट, छह माह में बाजार में, कीमत दो. पाँच करोड़ रुपये, बारिश के मौसम में पानी भरने से कोई दिक्कत नहीं होगी। टॉप स्पीड-पचहत्तर किमी/ घंटे।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज रियाद में एल एंड टी कार्मिकों के आवासीय परिसर का दौरा किया। एल एंड टी रियाद में मेट्रो के एक खंड का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में काम कर रहे कार्मिकों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपका कठिन परिश्रम ही मुझे यहां लाया है। उन्होंने कहा कि विदेश में भारतीय श्रमिकों के द्वारा किए जा रहे कार्य से न सिर्फ धन अर्जित होता है, बल्कि भारत की महत्ता भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि विश्व के बहुत से हिस्सों में भारतीय श्रमिकों को याद किया जाता है जहां उन्होंने बहुत सी प्रतिष्ठित परियोजनाओं को पूर्ण किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रियाद मेट्रो के लिए भी भारतीय कार्मिकों के इसके निर्माण हुए योगदान को इसी प्रकार से याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश में काम कर रहे भारतीयों को उनके परिजनों से प्राप्त होने वाले पत्रों से अकसर जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि वह इन पत्रों के माध्यम से अपने सुख-दुख दोनों ही बांटते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अहसास होता है कि वे उनके परिवार का ही एक हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की ई-प्रवास पहल का उल्लेख किया जिसके माध्यम से विदेश में कार्य करने की इच्छा रखने वाले लोगों को सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि और अधिक 'श्रमिक संसाधन केंद्र' खोले जाएंगे और मदद पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार तक शीघ्रता से संपर्क किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में क्षमता है कि वह आवश्यकता के अनुरूप मानव श्रम को दुनिया को प्रदान कर सके। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान, आयोजन स्थल पर उपस्थित हजारों श्रमिकों ने बहुत बार उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। अपने संबोधन के पश्चात प्रधानमंत्री ने श्रमिकों से मुलाकात करते हुए उनके साथ जलपान भी किया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज रियाद में एल एंड टी कार्मिकों के आवासीय परिसर का दौरा किया। एल एंड टी रियाद में मेट्रो के एक खंड का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में काम कर रहे कार्मिकों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपका कठिन परिश्रम ही मुझे यहां लाया है। उन्होंने कहा कि विदेश में भारतीय श्रमिकों के द्वारा किए जा रहे कार्य से न सिर्फ धन अर्जित होता है, बल्कि भारत की महत्ता भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि विश्व के बहुत से हिस्सों में भारतीय श्रमिकों को याद किया जाता है जहां उन्होंने बहुत सी प्रतिष्ठित परियोजनाओं को पूर्ण किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रियाद मेट्रो के लिए भी भारतीय कार्मिकों के इसके निर्माण हुए योगदान को इसी प्रकार से याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश में काम कर रहे भारतीयों को उनके परिजनों से प्राप्त होने वाले पत्रों से अकसर जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि वह इन पत्रों के माध्यम से अपने सुख-दुख दोनों ही बांटते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अहसास होता है कि वे उनके परिवार का ही एक हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की ई-प्रवास पहल का उल्लेख किया जिसके माध्यम से विदेश में कार्य करने की इच्छा रखने वाले लोगों को सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि और अधिक 'श्रमिक संसाधन केंद्र' खोले जाएंगे और मदद पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार तक शीघ्रता से संपर्क किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में क्षमता है कि वह आवश्यकता के अनुरूप मानव श्रम को दुनिया को प्रदान कर सके। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान, आयोजन स्थल पर उपस्थित हजारों श्रमिकों ने बहुत बार उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। अपने संबोधन के पश्चात प्रधानमंत्री ने श्रमिकों से मुलाकात करते हुए उनके साथ जलपान भी किया।
बड़े पैमाने पर खतना सेवा के लिए पंजीकरण, जो सामाजिक नगरपालिका गतिविधियों के दायरे में केकिओरेन नगर पालिका द्वारा हर साल पारंपरिक रूप से किया जाता है, "2023 में 2023 बच्चे के लिए खतना" के नारे के साथ शुरू किया गया था। इस संदर्भ में, नगर पालिका की कॉर्पोरेट वेबसाइट पर एक आवेदन पत्र बनाया गया है ताकि जरूरतमंद परिवार अपने बच्चों का खतना करा सकें। जो परिवार सामूहिक खतना सेवा से लाभ उठाना चाहते हैं, वे साइट पर "खतना पंजीकरण" प्रणाली के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। यह रेखांकित करते हुए कि बड़े पैमाने पर खतना बच्चों और परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा है, केकिओरेन टर्गुट अल्टीनोक के मेयर ने कहा, "हमारे बच्चों का खतना गर्मियों की अवधि में हमारे विशेषज्ञ सर्जनों द्वारा निःशुल्क किया जाता है। हम अपने बच्चों के खास दिनों में हमेशा उनके साथ हैं, जो हमारे देश का भविष्य हैं। मैं कामना करता हूं कि हमारी प्रत्येक संतान का खतना किया जाए ताकि यह हमारे देश और राष्ट्र के लिए लाभदायक हो, और मैं हमारे परिवारों को अग्रिम बधाई देता हूं।" कहा।
बड़े पैमाने पर खतना सेवा के लिए पंजीकरण, जो सामाजिक नगरपालिका गतिविधियों के दायरे में केकिओरेन नगर पालिका द्वारा हर साल पारंपरिक रूप से किया जाता है, "दो हज़ार तेईस में दो हज़ार तेईस बच्चे के लिए खतना" के नारे के साथ शुरू किया गया था। इस संदर्भ में, नगर पालिका की कॉर्पोरेट वेबसाइट पर एक आवेदन पत्र बनाया गया है ताकि जरूरतमंद परिवार अपने बच्चों का खतना करा सकें। जो परिवार सामूहिक खतना सेवा से लाभ उठाना चाहते हैं, वे साइट पर "खतना पंजीकरण" प्रणाली के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। यह रेखांकित करते हुए कि बड़े पैमाने पर खतना बच्चों और परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा है, केकिओरेन टर्गुट अल्टीनोक के मेयर ने कहा, "हमारे बच्चों का खतना गर्मियों की अवधि में हमारे विशेषज्ञ सर्जनों द्वारा निःशुल्क किया जाता है। हम अपने बच्चों के खास दिनों में हमेशा उनके साथ हैं, जो हमारे देश का भविष्य हैं। मैं कामना करता हूं कि हमारी प्रत्येक संतान का खतना किया जाए ताकि यह हमारे देश और राष्ट्र के लिए लाभदायक हो, और मैं हमारे परिवारों को अग्रिम बधाई देता हूं।" कहा।
बीजेपी द्वारा मालेगांव आतंकवादी हमले की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने पर अब मोदी सरकार के एक केन्द्रीय मंत्री ने ही सवाल उठा दिया है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने रविवार को बीजेपी के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की। अठावले मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री हैं और एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, केंद्रीय मंत्री ने कहा, ठाकुर पर मालेगांव आतंकवादी हमले में लिप्त होने का आरोप है और महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे के पास उनके खिलाफ़ पर्याप्त सबूत थे। ग़ौरतलब है कि भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार घोषित होने के बाद, प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुम्बई आतंकवादी हमलों के दौरान मारे गए अशोक चक्र विजेता हेमंत करकरे को श्राप देने का विवादित बयान देकर देश में हंगामा खड़ा कर दिया था। अठावले ने ठाकुर के इस विवादित बयान की भी निंदा की।
बीजेपी द्वारा मालेगांव आतंकवादी हमले की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने पर अब मोदी सरकार के एक केन्द्रीय मंत्री ने ही सवाल उठा दिया है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने रविवार को बीजेपी के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की। अठावले मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री हैं और एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, केंद्रीय मंत्री ने कहा, ठाकुर पर मालेगांव आतंकवादी हमले में लिप्त होने का आरोप है और महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे के पास उनके खिलाफ़ पर्याप्त सबूत थे। ग़ौरतलब है कि भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार घोषित होने के बाद, प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुम्बई आतंकवादी हमलों के दौरान मारे गए अशोक चक्र विजेता हेमंत करकरे को श्राप देने का विवादित बयान देकर देश में हंगामा खड़ा कर दिया था। अठावले ने ठाकुर के इस विवादित बयान की भी निंदा की।
नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। ट्विटर ने शुक्रवार को पुष्टि करते हुए कहा कि उसके पब्लिक पॉलिसी के वैश्विक उपाध्यक्ष कॉलिन क्रॉवेल 25 फरवरी को भारत में सूचना प्रौद्योगिकी पर संदसीय समिति के समक्ष पेश होंगे। माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने आईएएनएस को दिए एक बयान में कहा कि क्रॉवेल के लिए लोकसभा चुनाव 2019 ट्विटर के लिए प्रमुख वरीयता पर है। सरकार ने ट्विटर पर 'आपत्तिजनक कंटेंट' और 'राजनीतिक पूर्वाग्रह वाले कंटेंट' को अपने प्लेटफॉर्म को हटाने में सुस्त होने का आरोप लगाया था। ट्विटर यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रवादी पोस्टों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता में सदन के पैनल ने इससे पहले ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जैक डोर्सी को समन भेजा था। डोर्सी की अनुपस्थिति में क्रॉवेल 31 सदस्यीय संसदीय समिति के समक्ष ट्विटर का प्रतिनिधित्व करेंगे।
नई दिल्ली, बाईस फरवरी । ट्विटर ने शुक्रवार को पुष्टि करते हुए कहा कि उसके पब्लिक पॉलिसी के वैश्विक उपाध्यक्ष कॉलिन क्रॉवेल पच्चीस फरवरी को भारत में सूचना प्रौद्योगिकी पर संदसीय समिति के समक्ष पेश होंगे। माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने आईएएनएस को दिए एक बयान में कहा कि क्रॉवेल के लिए लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस ट्विटर के लिए प्रमुख वरीयता पर है। सरकार ने ट्विटर पर 'आपत्तिजनक कंटेंट' और 'राजनीतिक पूर्वाग्रह वाले कंटेंट' को अपने प्लेटफॉर्म को हटाने में सुस्त होने का आरोप लगाया था। ट्विटर यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रवादी पोस्टों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता में सदन के पैनल ने इससे पहले ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डोर्सी को समन भेजा था। डोर्सी की अनुपस्थिति में क्रॉवेल इकतीस सदस्यीय संसदीय समिति के समक्ष ट्विटर का प्रतिनिधित्व करेंगे।
डैहर - जिला स्तरीय श्री शीतला माता मेला के उपलक्ष्य पर ग्राम पंचायत डैहर के सौजन्य से आयोजित प्रथम सांस्कृतिक संध्या पहाड़ी स्टार कलाकारों के नाम रही। प्रथम सांस्कृतिक संध्या में सुप्रसिद्ध पहाड़ी लोक गायक लैहरू राम सांख्यान और राजकुमार वर्मा एवं अन्य कलाकारों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रथम सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय व प्रसिद्ध पहाड़ी लोक स्टार कलाकार व केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य डा. लैहरू राम सांख्यान ने करीब नौ बजे स्टेज संभालकर डैहरवासियों को अपनी एक से बढ़कर एक गानों की प्रस्तुतियां देकर थिरकने पर मजबूर कर दिया। लैहरू राम सांख्यान ने ओ लाल मेरी, मैं जट यमला पगला दीवाना, बलिए चल चलिए, छैल छबिलिए ओ, बुरा जमाना आई गया और उनका प्रसिद्ध गाना डैहर रे पूला पर बैठी छम-छम रोंदी गाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। गायक राज कुमार वर्मा ने डगर गिरी, पहाड़ी नॉन स्टाप और पारो रे पारो गाने गाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इसके साथ-साथ क्षेत्र के स्थानीय कलाकारों में सानिया, पूजा, शिवांश संधु, स्नेहा कालिया, अंशुल ने नृत्य और अमित कुमार, आशीष कुमार, राज कुमार, नीरज शर्मा, विजय कुमार ने अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरकर जनता का भरपूर मनोरंजन किया। प्रथम सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के हजारों लोगों ने सांस्कृतिक संध्या में उपस्थिति दर्ज कर आनंद उठाया। मेले की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्यातिथि नायब तहसीलदार डैहर मोहिंद्र सिंह ने शिरकत कर मां सरस्वती की मूर्ति के आगे दीप प्रज्वलित कर आगाज किया। मुख्यातिथि नायब तहसीलदार का सांस्कृतिक संध्या में पधारने पर पंचायत प्रधान राजेश धीमान व उपप्रधान सरोज शर्मा एवं समस्त पंचायत प्रतिनिधियों ने भव्य स्वागत किया। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
डैहर - जिला स्तरीय श्री शीतला माता मेला के उपलक्ष्य पर ग्राम पंचायत डैहर के सौजन्य से आयोजित प्रथम सांस्कृतिक संध्या पहाड़ी स्टार कलाकारों के नाम रही। प्रथम सांस्कृतिक संध्या में सुप्रसिद्ध पहाड़ी लोक गायक लैहरू राम सांख्यान और राजकुमार वर्मा एवं अन्य कलाकारों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रथम सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय व प्रसिद्ध पहाड़ी लोक स्टार कलाकार व केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य डा. लैहरू राम सांख्यान ने करीब नौ बजे स्टेज संभालकर डैहरवासियों को अपनी एक से बढ़कर एक गानों की प्रस्तुतियां देकर थिरकने पर मजबूर कर दिया। लैहरू राम सांख्यान ने ओ लाल मेरी, मैं जट यमला पगला दीवाना, बलिए चल चलिए, छैल छबिलिए ओ, बुरा जमाना आई गया और उनका प्रसिद्ध गाना डैहर रे पूला पर बैठी छम-छम रोंदी गाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। गायक राज कुमार वर्मा ने डगर गिरी, पहाड़ी नॉन स्टाप और पारो रे पारो गाने गाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इसके साथ-साथ क्षेत्र के स्थानीय कलाकारों में सानिया, पूजा, शिवांश संधु, स्नेहा कालिया, अंशुल ने नृत्य और अमित कुमार, आशीष कुमार, राज कुमार, नीरज शर्मा, विजय कुमार ने अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरकर जनता का भरपूर मनोरंजन किया। प्रथम सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के हजारों लोगों ने सांस्कृतिक संध्या में उपस्थिति दर्ज कर आनंद उठाया। मेले की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्यातिथि नायब तहसीलदार डैहर मोहिंद्र सिंह ने शिरकत कर मां सरस्वती की मूर्ति के आगे दीप प्रज्वलित कर आगाज किया। मुख्यातिथि नायब तहसीलदार का सांस्कृतिक संध्या में पधारने पर पंचायत प्रधान राजेश धीमान व उपप्रधान सरोज शर्मा एवं समस्त पंचायत प्रतिनिधियों ने भव्य स्वागत किया। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
मुंबईः मुंबई कोर्ट ने राज कुंद्रा को जमानत दे दी है। राज कुंद्रा 2021 के पोर्न फिल्म मामले में कथित संलिप्तता के लिए न्यायिक हिरासत में थे। राज कुंद्रा ने को 50 हजार के मुचलके पर जमानत मिली है। कुंद्रा के साथ उनकी कंपनी के IT हेड रयान थोर्प को भी ज़मानत मिली। कल दोनों आर्थर रोड जेल से रिहा होंगे। बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति कुंद्रा को 19 जुलाई को गिफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस समय कुंद्रा न्यायिक हिरासत में हैं। शिल्पा शेट्टी ने मुंबई पुलिस को अपना बयान दर्ज कराया है। जिसमें उन्होंने कहा-' पति के पोर्नोग्राफी कॉन्टेंट ऐप में शामिल होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे कहा कि वह अपने काम में बहुत व्यस्त थीं। ' शिल्पा शेट्टी की एक करीबी दोस्त ने बताया कि शिल्पा चाहती हैं कि उनके बच्चे एक नॉर्मल जिंदगी जिएं। पिता के काम का असर बच्चों पर नहीं पड़ने देना चाहती हैं। इसलिए उन्होंने बच्चों से कहा है कि उनके पिता बिजनेस के काम से बाहर गए हुए हैं। 'द कपिल शर्मा शो' में सैफ अली खान ने सुनाया मजेदार किस्सा, जब सारा अली खान ने कहा थाः 'अब्बा मत गाओ प्लीज' एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी हाल ही में वैष्णो देवी से लौटी हैं। वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान शिल्पा की कई तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इस धार्मिक यात्रा में उनकी दोस्त भी उनके साथ नजर आई थीं।
मुंबईः मुंबई कोर्ट ने राज कुंद्रा को जमानत दे दी है। राज कुंद्रा दो हज़ार इक्कीस के पोर्न फिल्म मामले में कथित संलिप्तता के लिए न्यायिक हिरासत में थे। राज कुंद्रा ने को पचास हजार के मुचलके पर जमानत मिली है। कुंद्रा के साथ उनकी कंपनी के IT हेड रयान थोर्प को भी ज़मानत मिली। कल दोनों आर्थर रोड जेल से रिहा होंगे। बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति कुंद्रा को उन्नीस जुलाई को गिफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस समय कुंद्रा न्यायिक हिरासत में हैं। शिल्पा शेट्टी ने मुंबई पुलिस को अपना बयान दर्ज कराया है। जिसमें उन्होंने कहा-' पति के पोर्नोग्राफी कॉन्टेंट ऐप में शामिल होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे कहा कि वह अपने काम में बहुत व्यस्त थीं। ' शिल्पा शेट्टी की एक करीबी दोस्त ने बताया कि शिल्पा चाहती हैं कि उनके बच्चे एक नॉर्मल जिंदगी जिएं। पिता के काम का असर बच्चों पर नहीं पड़ने देना चाहती हैं। इसलिए उन्होंने बच्चों से कहा है कि उनके पिता बिजनेस के काम से बाहर गए हुए हैं। 'द कपिल शर्मा शो' में सैफ अली खान ने सुनाया मजेदार किस्सा, जब सारा अली खान ने कहा थाः 'अब्बा मत गाओ प्लीज' एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी हाल ही में वैष्णो देवी से लौटी हैं। वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान शिल्पा की कई तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इस धार्मिक यात्रा में उनकी दोस्त भी उनके साथ नजर आई थीं।
SAHARSA : सहरसा जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां बेखौफ अपराधियों ने एक मुखिया की गोली मारकर हत्या कर दी है। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार हो गये। घटना के बाद मृतक मुखिया के परिजनों में कोहराम मचा है। घटना सौरबाजार थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर पुलिस शिविर के पास की है। मृतक की पहचान सौरबाजार प्रखंड के खजुरी पंचायत के मुखिया रंजीत साह के रूप में हुई है। वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घटना से गुस्साए मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने आगजनी कर सड़क को जाम कर दिया है और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक खजुरी पंचायत के मुखिया रंजीत साह अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वे खौजरी ढ़ाला के पास पहुंचे पहले से घात लगाए बाइक सवार अज्ञात अपराधियों ने ओवरटेक कर मुखिया के सीने में गोली मार दी और फरार हो गए। गोली की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी। आनन-फानन में खून से लथपथ मुखिया को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
SAHARSA : सहरसा जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां बेखौफ अपराधियों ने एक मुखिया की गोली मारकर हत्या कर दी है। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार हो गये। घटना के बाद मृतक मुखिया के परिजनों में कोहराम मचा है। घटना सौरबाजार थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर पुलिस शिविर के पास की है। मृतक की पहचान सौरबाजार प्रखंड के खजुरी पंचायत के मुखिया रंजीत साह के रूप में हुई है। वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घटना से गुस्साए मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने आगजनी कर सड़क को जाम कर दिया है और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक खजुरी पंचायत के मुखिया रंजीत साह अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वे खौजरी ढ़ाला के पास पहुंचे पहले से घात लगाए बाइक सवार अज्ञात अपराधियों ने ओवरटेक कर मुखिया के सीने में गोली मार दी और फरार हो गए। गोली की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी। आनन-फानन में खून से लथपथ मुखिया को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।