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हिमाचल के चंबा में देवदार के घने जंगलों की आगोश में समुद्र तल से 2000 मीटर (6,500 फीट) ऊंचाई पर बसा खजियार में हर तरफ इन दिनों बर्फ की चादर बिछी है। मैदान के बीचों-बीच मौजूद प्राकृतिक झील और इसके एक छोर पर मौजूद ऐतिहासिक खज्जी नाग मंदिर इसकी महत्ता को पर्यटन व धार्मिक दृष्टि से और बढ़ा देता है।
यूं तो खजियार का नामकरण यहां मौजूद 12वीं शताब्दी के हिंदू मंदिर खज्जी नाग पर हुआ है, लेकिन पर्यटन की दृष्टि से इसे नई पहचान तब मिली जब 7 जुलाई 1992 में इसे मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान मिला। जिले का यह पर्यटन स्थल चंबा से करीब 26 और डलहौजी से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।
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| हिमाचल के चंबा में देवदार के घने जंगलों की आगोश में समुद्र तल से दो हज़ार मीटर ऊंचाई पर बसा खजियार में हर तरफ इन दिनों बर्फ की चादर बिछी है। मैदान के बीचों-बीच मौजूद प्राकृतिक झील और इसके एक छोर पर मौजूद ऐतिहासिक खज्जी नाग मंदिर इसकी महत्ता को पर्यटन व धार्मिक दृष्टि से और बढ़ा देता है। यूं तो खजियार का नामकरण यहां मौजूद बारहवीं शताब्दी के हिंदू मंदिर खज्जी नाग पर हुआ है, लेकिन पर्यटन की दृष्टि से इसे नई पहचान तब मिली जब सात जुलाई एक हज़ार नौ सौ बानवे में इसे मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान मिला। जिले का यह पर्यटन स्थल चंबा से करीब छब्बीस और डलहौजी से बीस किलोग्राममीटर की दूरी पर है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
जिस जांच को शिवराज सिंह चौहान राजा हरिश्चंद्र के न्याय जैसा बता रहे हैं, वहां जांच करने वाले खुद ही दहशत में हैं. तो एसआइटी जांच कर नहीं रही है और एसटीएफ जांच कर नहीं पा रही है.
आज तक के पत्रकार अक्षय सिंह की व्यापम घोटाले की रिपोर्टिंग के दौरान हुई रहस्यमयी मौत ने जब घोटाले की जांच पर सवाल उठाए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहकर खुद को पाक-साफ बताया कि मामले की जांच हाई कोर्ट के विशेष जांच दल (एसआइटी) की निगरानी में हो रही है. और जांच कर रही संस्था विशेष कार्य बल (एसटीएफ) सीधे एसआइटी को रिपोर्ट कर रहा है, लिहाजा मध्य प्रदेश सरकार इस अफसोसनाक घटना की जांच भी एसआइटी से करने का निवेदन कर सकती है.
ऊपर से देखने पर चौहान की ये दलीलें बहुत निर्दोष दिखती हैं. लेकिन जरा अंदर जाएं तो हकीकत कुछ और ही है. जैसे एसआइटी के तीन सम्मानित सदस्य हैं मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के रिटायर जज चंद्रेश भूषण, सीआरपीए के पूर्व विशेष निदेशक विजय रमन और राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआइसी) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल सीएलएम रेड्डी. इन तीनों लोगों की प्रतिबद्धता या योग्यता पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन ये तीनों बुजुर्ग हैं. फिर इन्हें मामले की जांच नहीं करनी है सिर्फ एसटीएफ की तरह से हुई जांच की निगरानी करनी है. ऐेसे में एसआइटी की तुलना में एसटीएफ की भूमिका कहीं ज्यादा बड़ी हो जाती है.
अब बात करते हैं एसटीएफ की. एसटीएफ के मुखिया सुधीर साही भी बेदाग छवि के पुलिस अधिकारी हैं. ऐसे में 28 जून को संदिग्ध हालत में इंदौर में मरने वाले व्यापम आरोपी नरेंद्र सिंह तोमर के परिवार के उस आरोप को खारिज भी कर दें कि एसटीएफ उनके बेटे से 7 लाख रु. मांग रही थी, तो भी कई बड़े सवाल एसटीएफ के सामने हैं. और ये सवाल बाहर से नहीं भीतर से हैं. एसटीएफ के उप पुलिस महानिरीक्षक (एआइजी) आशीष खरे और डीएसपी डीएस बघेल ने एसआइटी से शिकायत की है कि इस जांच के दौरान उनकी सुरक्षा को खतरा है. एसआइटी ने यह बात 26 जून को ही मध्य प्रदेश हाइकोर्ट को बता दी. हालांकि इन दोनों अफसरों ने यह नहीं बताया कि किस तरह का खतरा है. लेकिन एसटीएफ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एसटीएफ अफसरों को पता चला है कि कुछ कद्दावर आरोपी उनके परिवार, बच्चों, अधिकारियों के पूंजी निवेश और जायदाद यहां तक की उनकी आदतों पर भी नजर रख रहे हैं. ऐसे में एसटीएफ के अधिकारियों को डर है कि ये कद्दावर आरोपी उनके बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या अपने ऊंचे रसूख का फायदा उठाकर अधिकारियों को किसी मामले में फंसा सकते हैं. गौरतलब है कि व्यापम में पूर्व मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के अलावा कई आईपीएस और उनके रिश्तेदार भी आरोपी हैं. कई आरोपियों के संबंधी अन्य विभागों में ऊंचे पदों पर हैं.
यानी जिस जांच को शिवराज सिंह चौहान राजा हरिश्चंद्र के न्याय जैसा बता रहे हैं, वहां जांच करने वाले खुद ही दहशत में हैं. तो एसआइटी जांच कर नहीं रही है और एसटीएफ जांच कर नहीं पा रही है, ऐसे में जो भी जांच होगी वह किसी न किसी दबाव में होगी और हाइकोर्ट के पास फैसला करने के लिए दबाव में बनी यही रिपोर्ट पहुंचेगी. इस तरह निष्पक्ष जांच का चौहान का दावा संदेह से परे नहीं है. जाहिर है अब इस जांच के लिए सीबीआइ की मदद या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआइटी बनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं दिख रहे. और उस जांच दल में भी मध्य प्रदेश से बाहर के अधिकारियों का होना जरूरी है, जिनका परिवार और कैरियर कद्दावर आरोपियों की पहुंच से कुछ दूर हो. मुख्यमंत्री इन सब बातों को जानते हुए भी कब तक अनजान बने रह पाएंगे क्योंकि किसी सूरत में भी व्यापम घोटाला उनकी चौखट से टलने वाला नहीं है.
(लेखक ने मध्य प्रदेश जाकर व्यापम घोटाले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच पड़ताल की. उनकी स्टोरी को इंडिया टुडे के ताजा अंक में कवर स्टोरी के रूप में प्रकाशित किया गया है. )
| जिस जांच को शिवराज सिंह चौहान राजा हरिश्चंद्र के न्याय जैसा बता रहे हैं, वहां जांच करने वाले खुद ही दहशत में हैं. तो एसआइटी जांच कर नहीं रही है और एसटीएफ जांच कर नहीं पा रही है. आज तक के पत्रकार अक्षय सिंह की व्यापम घोटाले की रिपोर्टिंग के दौरान हुई रहस्यमयी मौत ने जब घोटाले की जांच पर सवाल उठाए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहकर खुद को पाक-साफ बताया कि मामले की जांच हाई कोर्ट के विशेष जांच दल की निगरानी में हो रही है. और जांच कर रही संस्था विशेष कार्य बल सीधे एसआइटी को रिपोर्ट कर रहा है, लिहाजा मध्य प्रदेश सरकार इस अफसोसनाक घटना की जांच भी एसआइटी से करने का निवेदन कर सकती है. ऊपर से देखने पर चौहान की ये दलीलें बहुत निर्दोष दिखती हैं. लेकिन जरा अंदर जाएं तो हकीकत कुछ और ही है. जैसे एसआइटी के तीन सम्मानित सदस्य हैं मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के रिटायर जज चंद्रेश भूषण, सीआरपीए के पूर्व विशेष निदेशक विजय रमन और राष्ट्रीय सूचना केंद्र के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल सीएलएम रेड्डी. इन तीनों लोगों की प्रतिबद्धता या योग्यता पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन ये तीनों बुजुर्ग हैं. फिर इन्हें मामले की जांच नहीं करनी है सिर्फ एसटीएफ की तरह से हुई जांच की निगरानी करनी है. ऐेसे में एसआइटी की तुलना में एसटीएफ की भूमिका कहीं ज्यादा बड़ी हो जाती है. अब बात करते हैं एसटीएफ की. एसटीएफ के मुखिया सुधीर साही भी बेदाग छवि के पुलिस अधिकारी हैं. ऐसे में अट्ठाईस जून को संदिग्ध हालत में इंदौर में मरने वाले व्यापम आरोपी नरेंद्र सिंह तोमर के परिवार के उस आरोप को खारिज भी कर दें कि एसटीएफ उनके बेटे से सात लाख रु. मांग रही थी, तो भी कई बड़े सवाल एसटीएफ के सामने हैं. और ये सवाल बाहर से नहीं भीतर से हैं. एसटीएफ के उप पुलिस महानिरीक्षक आशीष खरे और डीएसपी डीएस बघेल ने एसआइटी से शिकायत की है कि इस जांच के दौरान उनकी सुरक्षा को खतरा है. एसआइटी ने यह बात छब्बीस जून को ही मध्य प्रदेश हाइकोर्ट को बता दी. हालांकि इन दोनों अफसरों ने यह नहीं बताया कि किस तरह का खतरा है. लेकिन एसटीएफ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एसटीएफ अफसरों को पता चला है कि कुछ कद्दावर आरोपी उनके परिवार, बच्चों, अधिकारियों के पूंजी निवेश और जायदाद यहां तक की उनकी आदतों पर भी नजर रख रहे हैं. ऐसे में एसटीएफ के अधिकारियों को डर है कि ये कद्दावर आरोपी उनके बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या अपने ऊंचे रसूख का फायदा उठाकर अधिकारियों को किसी मामले में फंसा सकते हैं. गौरतलब है कि व्यापम में पूर्व मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के अलावा कई आईपीएस और उनके रिश्तेदार भी आरोपी हैं. कई आरोपियों के संबंधी अन्य विभागों में ऊंचे पदों पर हैं. यानी जिस जांच को शिवराज सिंह चौहान राजा हरिश्चंद्र के न्याय जैसा बता रहे हैं, वहां जांच करने वाले खुद ही दहशत में हैं. तो एसआइटी जांच कर नहीं रही है और एसटीएफ जांच कर नहीं पा रही है, ऐसे में जो भी जांच होगी वह किसी न किसी दबाव में होगी और हाइकोर्ट के पास फैसला करने के लिए दबाव में बनी यही रिपोर्ट पहुंचेगी. इस तरह निष्पक्ष जांच का चौहान का दावा संदेह से परे नहीं है. जाहिर है अब इस जांच के लिए सीबीआइ की मदद या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआइटी बनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं दिख रहे. और उस जांच दल में भी मध्य प्रदेश से बाहर के अधिकारियों का होना जरूरी है, जिनका परिवार और कैरियर कद्दावर आरोपियों की पहुंच से कुछ दूर हो. मुख्यमंत्री इन सब बातों को जानते हुए भी कब तक अनजान बने रह पाएंगे क्योंकि किसी सूरत में भी व्यापम घोटाला उनकी चौखट से टलने वाला नहीं है. |
3 सेक्स नॉलेज
सेक्स नॉलेज
एक आम इंसान माँ के पेट से सब कुछ सीख कर पैदा नहीं होता बल्कि इस दुनिया में आ कर सीखना पड़ता है।
चलना, बोलना, लिखना, पढ़ना और बालिग होने के क़रीब होता है तो नमाज़ का तरीक़ा सीखना पड़ता है,
रमज़ान में रोज़े रखने के लिये मसाइल सीखने पड़ते हैं, पैसे हो जायें तो ज़कात के मसाइल सीखने पड़ते हैं,
हज और उमरा को जाये तो मसाइल का इल्म होना ज़रूरी है।
पैदाइश से ले कर मौत तक ये सिलसिला जारी रहता है कि इंसान कुछ ना कुछ सीखता रहता है और सेक्स नॉलेज भी इन्हीं में से एक है।
इस सीखने में ये बात खास अहमियत रखती है कि वो किस से क्या सीखता है। अगर दीन किसी बद मज़हब से सीखेगा तो आखिरत बरबाद हो जायेगी।
अगर ना अहल से कोई काम सीखेगा तो कामयाबी नहीं मिलेगी और सेक्स भी अगर गलत ज़रियों (Sources) से सीखता है तो नुक़सान उठाना पड़ेगा।
नमाज़, रोज़े वग़ैरह के मसाइल लोग उमूमन पूछ लिया करते हैं लेकिन सेक्स से मुतल्लिक़ पूछने में शर्म महसूस होती है हालाँकि ऐसा नहीं होना चाहिये।
अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता हैः
و الله لا يستحي من الحق
"अल्लाह हक़ फ़रमाने में शर्माता नहीं "
ये कोई बुरी बात नहीं कि आप इस बारे में इल्म हासिल करें बल्कि ज़रूरी है कि शादी से पहले ये जान लें कि क्या करना चाहिये और किन बातों से बचना चाहिये,
4 सेक्स नॉलेज
अगर आप को इल्म नहीं होगा तो मुमकिन है कि आप ऐसा कुछ कर जायें जो आप के कांधों पर गुनाहों के बोझ में इज़ाफ़ा कर दे।
हम कोशिश करेंगे कि आसान से आसान लफ्ज़ों में बयान करने की कोशिश करें ताकि हर शख्स को बात समझ में आ सके।
जहाँ उर्दू के थोड़े सख्त अल्फाज़ इस्तिमाल होंगे वहाँ ब्रेकेट में उसके आसान मानों को लिख दिया जायेगा।
साथ ही साथ कुछ इल्मी पॉइंट्स भी बयान किये जायेंगे।
शुरुआत इस बात से करते हैं कि निकाह करने का मक़सद क्या है?
अगर कोई ये सोचता है कि निकाह का मक़सद सिर्फ सेक्स की लज़्ज़त हासिल करना है तो ये सहीह नही है ।
ये भी है लेकिन असल है औलाद का हुसूल।
हज़रते उमर फ़ारूक़ रदिअल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि मैं सिर्फ क़ज़ा-एशहवत के लिए अपनी अज़वाज (बीवियों) के पास नही जाता बल्कि मेरी निय्यत अवलाद का हुसूल है, अगर ये मक़सद ना होता तो मेरी एक ही ज़ौजा (बीवी) होती । (772*16«**13, GURJ19:343U-10&c=BI.Aji_bi)
एक मर्तबा आप रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि मै खुद को जिमा (Sex) करने पर इसलिए मजबूर करता हूँ कि मुमकिन है अल्लाह तआला मुझे ऐसी नेक और सालेह औलाद अता फरमाए जो उसकी तस्बीह करे और हर वक़्त उसकी याद में मगन रहे ।
हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह बिन उमर रदिअल्लाहु त'आला अन्हु फरमाते हैं कि मेरे वालिद (हज़रते उमर फ़ारूक़) शहवत के लिए निकाह नही करते थे बल्कि औलाद के हुसूल के लिए निकाह करते थे।
5 सेक्स नॉलेज
अल्लाह त' आला इरशाद फरमाता है :
نساؤكم حرث لكم فأتوا حرثكم أنى شئتم
"तुम्हारी औरतें तुम्हारे लिए खेतियाँ हैं तो अपनी खेतियों में जिस तरह चाहो आओ।"
क़ुरआन की इस आयत में बीवियों को शौहरों की खेती क़रार दिया गया है और ये इजाज़त दी गयी है के खेत मे जिस तरह चाहें आ सकते है।
अल्लामा अब्दुर रज़्ज़ाक़ भतरालवी लिखते है कि यहाँ औरतों को ज़मीन से तशबीह दी गयी है, जिस तरह ज़मीन में बीज (Seed) डाला जाता है उसी तरह बीवी के रहम (बच्चे दानी) में नुत्फ़ा जो बीज की तरह है डाला जाता है और अवलाद को ज़मीन की पैदावार से तशबीह दी गयी ।
इस आयत का मुख्तसर मतलब ये है की तुम्हारी बीवियां तुम्हारे लिए खेती है यानी जिस तरह खेती से पैदावार होती है उसी तरह इनसे भी औलाद पैदा होती है
तुम अपनी बीवियों के पास आओ जिस तरह चाहो यानी उन से जिमा (Sex) तो अगले हिस्से में करो लेकिन जिमा करने की कैफियत मुअय्यन नही बल्कि बैठ कर या लेट कर, अगली जानिब से या पिछली जानिब से, जिस तरह चाहो उस तरह जिमा करने की तुम्हे इजाज़त है (लेकिन आगे के ही मक़ाम में, पोजीशन जैसी भी हो पर सेक्स आगे के मकाम में ही जाइज़ है)
इस आयत से एक मसअला ये मालूम होता है कि औरत के आगे के मक़ाम में ही जिमा (Sex) किया जा सकता है क्योंकि बीज डालने की जगह आगे ही है और ये समझ आता है कि निक़ाह करने का असल मक़सद वही होना चाहिए जो निकाह | तीन सेक्स नॉलेज सेक्स नॉलेज एक आम इंसान माँ के पेट से सब कुछ सीख कर पैदा नहीं होता बल्कि इस दुनिया में आ कर सीखना पड़ता है। चलना, बोलना, लिखना, पढ़ना और बालिग होने के क़रीब होता है तो नमाज़ का तरीक़ा सीखना पड़ता है, रमज़ान में रोज़े रखने के लिये मसाइल सीखने पड़ते हैं, पैसे हो जायें तो ज़कात के मसाइल सीखने पड़ते हैं, हज और उमरा को जाये तो मसाइल का इल्म होना ज़रूरी है। पैदाइश से ले कर मौत तक ये सिलसिला जारी रहता है कि इंसान कुछ ना कुछ सीखता रहता है और सेक्स नॉलेज भी इन्हीं में से एक है। इस सीखने में ये बात खास अहमियत रखती है कि वो किस से क्या सीखता है। अगर दीन किसी बद मज़हब से सीखेगा तो आखिरत बरबाद हो जायेगी। अगर ना अहल से कोई काम सीखेगा तो कामयाबी नहीं मिलेगी और सेक्स भी अगर गलत ज़रियों से सीखता है तो नुक़सान उठाना पड़ेगा। नमाज़, रोज़े वग़ैरह के मसाइल लोग उमूमन पूछ लिया करते हैं लेकिन सेक्स से मुतल्लिक़ पूछने में शर्म महसूस होती है हालाँकि ऐसा नहीं होना चाहिये। अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता हैः و الله لا يستحي من الحق "अल्लाह हक़ फ़रमाने में शर्माता नहीं " ये कोई बुरी बात नहीं कि आप इस बारे में इल्म हासिल करें बल्कि ज़रूरी है कि शादी से पहले ये जान लें कि क्या करना चाहिये और किन बातों से बचना चाहिये, चार सेक्स नॉलेज अगर आप को इल्म नहीं होगा तो मुमकिन है कि आप ऐसा कुछ कर जायें जो आप के कांधों पर गुनाहों के बोझ में इज़ाफ़ा कर दे। हम कोशिश करेंगे कि आसान से आसान लफ्ज़ों में बयान करने की कोशिश करें ताकि हर शख्स को बात समझ में आ सके। जहाँ उर्दू के थोड़े सख्त अल्फाज़ इस्तिमाल होंगे वहाँ ब्रेकेट में उसके आसान मानों को लिख दिया जायेगा। साथ ही साथ कुछ इल्मी पॉइंट्स भी बयान किये जायेंगे। शुरुआत इस बात से करते हैं कि निकाह करने का मक़सद क्या है? अगर कोई ये सोचता है कि निकाह का मक़सद सिर्फ सेक्स की लज़्ज़त हासिल करना है तो ये सहीह नही है । ये भी है लेकिन असल है औलाद का हुसूल। हज़रते उमर फ़ारूक़ रदिअल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि मैं सिर्फ क़ज़ा-एशहवत के लिए अपनी अज़वाज के पास नही जाता बल्कि मेरी निय्यत अवलाद का हुसूल है, अगर ये मक़सद ना होता तो मेरी एक ही ज़ौजा होती । एक मर्तबा आप रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि मै खुद को जिमा करने पर इसलिए मजबूर करता हूँ कि मुमकिन है अल्लाह तआला मुझे ऐसी नेक और सालेह औलाद अता फरमाए जो उसकी तस्बीह करे और हर वक़्त उसकी याद में मगन रहे । हज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह बिन उमर रदिअल्लाहु त'आला अन्हु फरमाते हैं कि मेरे वालिद शहवत के लिए निकाह नही करते थे बल्कि औलाद के हुसूल के लिए निकाह करते थे। पाँच सेक्स नॉलेज अल्लाह त' आला इरशाद फरमाता है : نساؤكم حرث لكم فأتوا حرثكم أنى شئتم "तुम्हारी औरतें तुम्हारे लिए खेतियाँ हैं तो अपनी खेतियों में जिस तरह चाहो आओ।" क़ुरआन की इस आयत में बीवियों को शौहरों की खेती क़रार दिया गया है और ये इजाज़त दी गयी है के खेत मे जिस तरह चाहें आ सकते है। अल्लामा अब्दुर रज़्ज़ाक़ भतरालवी लिखते है कि यहाँ औरतों को ज़मीन से तशबीह दी गयी है, जिस तरह ज़मीन में बीज डाला जाता है उसी तरह बीवी के रहम में नुत्फ़ा जो बीज की तरह है डाला जाता है और अवलाद को ज़मीन की पैदावार से तशबीह दी गयी । इस आयत का मुख्तसर मतलब ये है की तुम्हारी बीवियां तुम्हारे लिए खेती है यानी जिस तरह खेती से पैदावार होती है उसी तरह इनसे भी औलाद पैदा होती है तुम अपनी बीवियों के पास आओ जिस तरह चाहो यानी उन से जिमा तो अगले हिस्से में करो लेकिन जिमा करने की कैफियत मुअय्यन नही बल्कि बैठ कर या लेट कर, अगली जानिब से या पिछली जानिब से, जिस तरह चाहो उस तरह जिमा करने की तुम्हे इजाज़त है इस आयत से एक मसअला ये मालूम होता है कि औरत के आगे के मक़ाम में ही जिमा किया जा सकता है क्योंकि बीज डालने की जगह आगे ही है और ये समझ आता है कि निक़ाह करने का असल मक़सद वही होना चाहिए जो निकाह |
कोरोना महामारी का असर अब दिखने लगा है। गरीब हो अमीर कोई भी कोरोना की मार से नहीं बच पाया है। धीरे-धीरे दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ रही है। यदि अमीर देशों की बात करें तो पहले सिंगापुर फिर जापान और अब आस्ट्रेलिया मंदी की चपेट में आ गया है। पिछले तीन दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया में मंदी है।
कोरोना महामारी ने ऑस्ट्रेलिया की तीन दशकों की आर्थिक वृद्धि को रोक दिया है। आंकड़ाके के अनुसार इस साल की दूसरी तिमाही में ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले पहली तिमाही में 0. 3 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
1959 के बाद से ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में ये सबसे बड़ी गिरावट है। लगातार दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में संकुचन आने पर उसे मंदी कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया ही एक ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था थी जो 2008 की वैश्विक मंदी से बच पाई थी।
उस बार चीन में ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधनों की मांग की वजह से आस्ट्रेलिया मंदी से बच पाया था लेकिन इस बार की वजह कोरोना वायरस की वजह से हुई तालाबंदी और इस साल की शुरुआत में जंगलों में लगी आग के कारण ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।
यह भी पढ़ें : भाजपा पर इतनी मेहरबान क्यों है फेसबुक?
यह भी पढ़ें : कितना खतरनाक है GDP का 23. 9 फीसदी गिरना?
यह भी पढ़ें : प्राइवेट स्कूल फीसः केजरीवाल सरकार ने क्या फैसला लिया?
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए आस्ट्रेलिया ने भी तालाबंदी का सहारा लिया था। तालाबंदी के चलते पूरे देश में बंद पड़े कारोबार ने अर्थव्यवस्था की हालत और खराब कर दी। सरकार और सेंट्रल बैंक के उठाए गए कदमों से भी कुछ खास असर नहीं हुआ।
वस्तु एवं सेवाओं पर खर्च बहुत कम होने के कारण पिछले 61 सालों में ये सबसे खराब आर्थिक वृद्धि बन गई है। ऑस्ट्रेलिया में आखिरी बार मंदी 1990 के मध्य में आई थी जो 1991 के अंत तक चली थी।
| कोरोना महामारी का असर अब दिखने लगा है। गरीब हो अमीर कोई भी कोरोना की मार से नहीं बच पाया है। धीरे-धीरे दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ रही है। यदि अमीर देशों की बात करें तो पहले सिंगापुर फिर जापान और अब आस्ट्रेलिया मंदी की चपेट में आ गया है। पिछले तीन दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया में मंदी है। कोरोना महामारी ने ऑस्ट्रेलिया की तीन दशकों की आर्थिक वृद्धि को रोक दिया है। आंकड़ाके के अनुसार इस साल की दूसरी तिमाही में ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले पहली तिमाही में शून्य. तीन प्रतिशत की गिरावट आई थी। एक हज़ार नौ सौ उनसठ के बाद से ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में ये सबसे बड़ी गिरावट है। लगातार दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में संकुचन आने पर उसे मंदी कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया ही एक ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था थी जो दो हज़ार आठ की वैश्विक मंदी से बच पाई थी। उस बार चीन में ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधनों की मांग की वजह से आस्ट्रेलिया मंदी से बच पाया था लेकिन इस बार की वजह कोरोना वायरस की वजह से हुई तालाबंदी और इस साल की शुरुआत में जंगलों में लगी आग के कारण ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। यह भी पढ़ें : भाजपा पर इतनी मेहरबान क्यों है फेसबुक? यह भी पढ़ें : कितना खतरनाक है GDP का तेईस. नौ फीसदी गिरना? यह भी पढ़ें : प्राइवेट स्कूल फीसः केजरीवाल सरकार ने क्या फैसला लिया? कोरोना संक्रमण रोकने के लिए आस्ट्रेलिया ने भी तालाबंदी का सहारा लिया था। तालाबंदी के चलते पूरे देश में बंद पड़े कारोबार ने अर्थव्यवस्था की हालत और खराब कर दी। सरकार और सेंट्रल बैंक के उठाए गए कदमों से भी कुछ खास असर नहीं हुआ। वस्तु एवं सेवाओं पर खर्च बहुत कम होने के कारण पिछले इकसठ सालों में ये सबसे खराब आर्थिक वृद्धि बन गई है। ऑस्ट्रेलिया में आखिरी बार मंदी एक हज़ार नौ सौ नब्बे के मध्य में आई थी जो एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के अंत तक चली थी। |
शिमला - बादलों ने स्केटिंग पे्रमियों के शौक पर पानी फेर दिया है। शिमला में शुक्रवार को भी बादल घिरे रहने से आइस स्केटिंग मैदान में सेशन बंद हो गए हैं। ऐसे में स्केटिंग पे्रमी फिर से स्केटिंग सेशन शुरू होने के लिए बादलों के छंटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिमला में गुरुवार से मौसम खराब चल रहा है। हालांकि स्केटिंग के लिए तापमान अनुकूल चल रहा है, मगर बादलों के घिरे रहने से आइस स्केटिंग मैदान में जमी बर्फ की परत पिघल गई है। गुरुवार को भी उक्त मैदान में स्केटिंग का इवनिंग सेशन नहीं हो पाया। गुरुवार रात को बादलों के घिरे रहने से उक्त मैदान में शुक्रवार को भी मॉर्निंग व इवनिंग सेशन नहीं लग पाए, जिससे स्केटिंग पे्रमी निराश हैं। शिमला में शुक्रवार को भी दिन भर बादलों की लुका-छिपी का खेल जारी रहा। ऐसे में शनिवार को भी स्केटिंग सत्र के प्रभावित होने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के तहत जिला शिमला में शनिवार से 18 जनवरी तक मौसम शुष्क बना रहेगा। इस दौरान स्केटिंग (बर्फ जमने) के लिए तापमान अनुकूल बना रहेगा, जिसके चलते उक्त मैदान में फिर से जल्द ही स्केटिंग सेशन शुरू होने की उम्मीदें हैं।
आइस स्केटिंग रिंक मैदान में पिछले करीब एक माह से मॉर्निंग सेशन लग रहा है। वहीं, मौसम अनुकूल रहने से उक्त मैदान में सात-आठ इवनिंग सेशन भी लग चुके हैं, मगर मौसम खराब रहने से अब उक्त मैदान में स्केटिंग ेसेशन ठप पड़ गए हैं।
| शिमला - बादलों ने स्केटिंग पे्रमियों के शौक पर पानी फेर दिया है। शिमला में शुक्रवार को भी बादल घिरे रहने से आइस स्केटिंग मैदान में सेशन बंद हो गए हैं। ऐसे में स्केटिंग पे्रमी फिर से स्केटिंग सेशन शुरू होने के लिए बादलों के छंटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिमला में गुरुवार से मौसम खराब चल रहा है। हालांकि स्केटिंग के लिए तापमान अनुकूल चल रहा है, मगर बादलों के घिरे रहने से आइस स्केटिंग मैदान में जमी बर्फ की परत पिघल गई है। गुरुवार को भी उक्त मैदान में स्केटिंग का इवनिंग सेशन नहीं हो पाया। गुरुवार रात को बादलों के घिरे रहने से उक्त मैदान में शुक्रवार को भी मॉर्निंग व इवनिंग सेशन नहीं लग पाए, जिससे स्केटिंग पे्रमी निराश हैं। शिमला में शुक्रवार को भी दिन भर बादलों की लुका-छिपी का खेल जारी रहा। ऐसे में शनिवार को भी स्केटिंग सत्र के प्रभावित होने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के तहत जिला शिमला में शनिवार से अट्ठारह जनवरी तक मौसम शुष्क बना रहेगा। इस दौरान स्केटिंग के लिए तापमान अनुकूल बना रहेगा, जिसके चलते उक्त मैदान में फिर से जल्द ही स्केटिंग सेशन शुरू होने की उम्मीदें हैं। आइस स्केटिंग रिंक मैदान में पिछले करीब एक माह से मॉर्निंग सेशन लग रहा है। वहीं, मौसम अनुकूल रहने से उक्त मैदान में सात-आठ इवनिंग सेशन भी लग चुके हैं, मगर मौसम खराब रहने से अब उक्त मैदान में स्केटिंग ेसेशन ठप पड़ गए हैं। |
चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Oneplus ने बीते महीने अपना सबसे खास स्मार्टफोन Oneplus 7 और Oneplus 7 Pro को लॉन्च किया था। वनप्ल्स ने अपने दोनों स्मार्टफोन्स वनप्लस 7 और वनप्लस 7 प्रो में कई खास फीचर्स दिए हैं, जिसमें पॉप-अप कैमरे के साथ डिस्प्ले शामिल है।
चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Oneplus ने बीते महीने अपना सबसे खास स्मार्टफोन Oneplus 7 और Oneplus 7 Pro को लॉन्च किया था। वनप्ल्स ने अपने दोनों स्मार्टफोन्स वनप्लस 7 और वनप्लस 7 प्रो में कई खास फीचर्स दिए हैं, जिसमें पॉप-अप कैमरे के साथ डिस्प्ले शामिल है।
अब वनप्लस के दोनों स्मार्टफोन वनप्लस 7 और वनप्लस 7 प्रो की पहली सेल 4 जून 2019 यानि कल से शुरू होने वाली है।
वनप्लस 7 की सेल में ग्राहकों को शानदार ऑफर्स के साथ डिस्काउंट मिल सकते हैं। साथ ही ग्राहक वनप्लस 7 और वनप्लस 7 प्रो स्मार्टफोन को ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेज़न के साथ वनप्लस के अधिकारिक स्टोर्स से खरीद सकते हैं।
कंपनी ने वनप्लस 7 को कई रैम वेरियंट में लॉन्च किया है, जिसमें 6 जीबी रैम + 128 जीबी इंटरनल स्टोरेज और 8 जीबी रैम + 256 जीबी इंटरनल स्टोरेज शामिल है। कंपनी ने 6 जीबी रैम वाले वेरियंट की कीमत 32,999 रुपए रखी है और 8 जीबी रैम वाले वेरियंट की कीमत 37,999 रुपए रखी है।
वनप्लस 7 स्मार्टफोन की सेल को लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेज़न ने एक पेज डेडिकेट किया है। इसके साथ ही अमेज़न ने अपने पेज पर एक बटन दिया है, जिसमें नोटिफाई मी लिखा है। दूसरी तरफ रिलायंस जियो अपने ग्राहकों को वनप्लस 7 खरीदने पर 9,300 रुपए का बेनेफिट्स दे रही है।
1. वनप्लस ने वनप्लस 7 स्मार्टफोन में 6. 41 इंच का फुल एचडी प्लस एमोलेड डिस्प्ले दिया है, जिसका रेजोल्यूशन 1080*2340 पिक्सल शामिल है।
2. कंपनी ने इस फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 855 एसओसी प्रोसेसर दिया है, जो कि एंड्रियू 640 जीपीयू से लैस है।
3. वनप्लस ने इस फोन के रियर में डुअल कैमरा सेटअप दिया है, जिसमें सोनी का 48 मेगापिक्सल का आईएमएक्स 856 सेंसर के साथ 5 मेगापिक्सल का सेंसर शामिल है। दूसरी तरफ सेल्फी के लिए कंपनी ने इस फोन में 16 मेगापिक्सल का पॉप-अप कैमरा दिया है।
4. कनेक्टिविटी के लिहाज से कंपनी ने इस फोन में 4 जी वोल्ट, वाई-फाई, ब्लूटूथ वी5. 0, जीपीएस और यूएसबी पोर्ट-सी जैसे फीचर्स दिए हैं। इसके साथ ही इस फोन में कंपनी ने 37,00 एमएएच की बैटरी दी है।
| चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Oneplus ने बीते महीने अपना सबसे खास स्मार्टफोन Oneplus सात और Oneplus सात Pro को लॉन्च किया था। वनप्ल्स ने अपने दोनों स्मार्टफोन्स वनप्लस सात और वनप्लस सात प्रो में कई खास फीचर्स दिए हैं, जिसमें पॉप-अप कैमरे के साथ डिस्प्ले शामिल है। चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Oneplus ने बीते महीने अपना सबसे खास स्मार्टफोन Oneplus सात और Oneplus सात Pro को लॉन्च किया था। वनप्ल्स ने अपने दोनों स्मार्टफोन्स वनप्लस सात और वनप्लस सात प्रो में कई खास फीचर्स दिए हैं, जिसमें पॉप-अप कैमरे के साथ डिस्प्ले शामिल है। अब वनप्लस के दोनों स्मार्टफोन वनप्लस सात और वनप्लस सात प्रो की पहली सेल चार जून दो हज़ार उन्नीस यानि कल से शुरू होने वाली है। वनप्लस सात की सेल में ग्राहकों को शानदार ऑफर्स के साथ डिस्काउंट मिल सकते हैं। साथ ही ग्राहक वनप्लस सात और वनप्लस सात प्रो स्मार्टफोन को ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेज़न के साथ वनप्लस के अधिकारिक स्टोर्स से खरीद सकते हैं। कंपनी ने वनप्लस सात को कई रैम वेरियंट में लॉन्च किया है, जिसमें छः जीबी रैम + एक सौ अट्ठाईस जीबी इंटरनल स्टोरेज और आठ जीबी रैम + दो सौ छप्पन जीबी इंटरनल स्टोरेज शामिल है। कंपनी ने छः जीबी रैम वाले वेरियंट की कीमत बत्तीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए रखी है और आठ जीबी रैम वाले वेरियंट की कीमत सैंतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए रखी है। वनप्लस सात स्मार्टफोन की सेल को लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेज़न ने एक पेज डेडिकेट किया है। इसके साथ ही अमेज़न ने अपने पेज पर एक बटन दिया है, जिसमें नोटिफाई मी लिखा है। दूसरी तरफ रिलायंस जियो अपने ग्राहकों को वनप्लस सात खरीदने पर नौ,तीन सौ रुपयापए का बेनेफिट्स दे रही है। एक. वनप्लस ने वनप्लस सात स्मार्टफोन में छः. इकतालीस इंच का फुल एचडी प्लस एमोलेड डिस्प्ले दिया है, जिसका रेजोल्यूशन एक हज़ार अस्सी*दो हज़ार तीन सौ चालीस पिक्सल शामिल है। दो. कंपनी ने इस फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन एसओसी प्रोसेसर दिया है, जो कि एंड्रियू छः सौ चालीस जीपीयू से लैस है। तीन. वनप्लस ने इस फोन के रियर में डुअल कैमरा सेटअप दिया है, जिसमें सोनी का अड़तालीस मेगापिक्सल का आईएमएक्स आठ सौ छप्पन सेंसर के साथ पाँच मेगापिक्सल का सेंसर शामिल है। दूसरी तरफ सेल्फी के लिए कंपनी ने इस फोन में सोलह मेगापिक्सल का पॉप-अप कैमरा दिया है। चार. कनेक्टिविटी के लिहाज से कंपनी ने इस फोन में चार जी वोल्ट, वाई-फाई, ब्लूटूथ वीपाँच. शून्य, जीपीएस और यूएसबी पोर्ट-सी जैसे फीचर्स दिए हैं। इसके साथ ही इस फोन में कंपनी ने सैंतीस,शून्य एमएएच की बैटरी दी है। |
आज किसानों के आंदोलन का पांचवां दिन है. दिल्ली के पांच बॉर्डर प्वाइंट पर किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं. सुबह की दो तस्वीरें आपको दिखाते हैं. दिल्ली-हरियाणा सिंघु बॉर्डर और दिल्ली यूपी गाजीपुर बॉर्डर. सिंधु बॉर्डर पर किसान सुबह-सुबह चाय की चुस्कियां ले रहे हैं. किसानों का कहना है कि वो लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए हैं. दूसरी तरफ यूपी गेट पर किसान पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच किसानों ने बुराड़ी आने का सरकार का प्रस्ताव ठुकराव दिया है. सरकार ने तीन दिसंबर को किसानों को बातचीत के लिए बुलाया है लेकिन किसानों का कहना है कि जो भी बातचीत होगी वो सिंघु बॉर्डर पर होगी. बड़ा सवाल ये है कि अड़ने से सुलह का रास्ता कैसे निकलेगा. देखें वीडियो.
| आज किसानों के आंदोलन का पांचवां दिन है. दिल्ली के पांच बॉर्डर प्वाइंट पर किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं. सुबह की दो तस्वीरें आपको दिखाते हैं. दिल्ली-हरियाणा सिंघु बॉर्डर और दिल्ली यूपी गाजीपुर बॉर्डर. सिंधु बॉर्डर पर किसान सुबह-सुबह चाय की चुस्कियां ले रहे हैं. किसानों का कहना है कि वो लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए हैं. दूसरी तरफ यूपी गेट पर किसान पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच किसानों ने बुराड़ी आने का सरकार का प्रस्ताव ठुकराव दिया है. सरकार ने तीन दिसंबर को किसानों को बातचीत के लिए बुलाया है लेकिन किसानों का कहना है कि जो भी बातचीत होगी वो सिंघु बॉर्डर पर होगी. बड़ा सवाल ये है कि अड़ने से सुलह का रास्ता कैसे निकलेगा. देखें वीडियो. |
थाना खरेला क्षेत्र के ऐंचाना गांव स्थित रामजानकी मंदिर को सोमवार की रात चोरों ने बनाया निशाना। खिड़की तोड़कर मंदिर के अंदर चोरों ने प्रवेश किया। ग्रामीणों के मुताबिक करीब डेढ़ सौ वर्ष पुरानी अष्टधातु की राम, जानकी, लक्ष्मण व उर्मिला जी की मूर्तियां थीं। मौके पर सीओ चरखारी व कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई है। जांच की जा रही है।
मंदिर के पुजारी विशंभर प्रसाद ने बताया कि मंदिर आबादी के बीच है। यहां पूजा अर्चना के लिए रात तक लोगों का आना जाना रहता है। सोमवार को भी पूजन आरती करने के बाद वह मंदिर के कपाट बंद करके अपने आवास पर चले गए थे। सुबह ग्रामीण दर्शन करने पहुंचे तो वहां दरवाजा खुले मिले। अंदर जाकर देखने पर सामान बिखरा था। मूर्तियां भी नहीं थीं। इस पर पुजारी को लोगों ने फोन करके सूचना दी। मौके पर पहुंचे पुजारी ने अंदर जाकर देखा तो राम-लक्ष्मण, जानकरी व उर्मिला की मूर्तियां सिंघासन पर नहीं थीं।
सीओ चरखारी राजकुमार पांडेय ने छानबीन शुरू की। ग्रामीणों से भी अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। मंदिर के आसपास की जांच करके पता लगाने की कोशिश हो रही है कि चोर किसी वाहन से आए थे या पैदल थे। सीओ ने कहा कि हालात देख कर लगता है कि इस मामले में गांव के भी किसी व्यक्ति का हाथ हो सकता है। फिलहाल जांच हो रही है। आरोपितों को पकडऩे का प्रयास किया जा रहा है।
| थाना खरेला क्षेत्र के ऐंचाना गांव स्थित रामजानकी मंदिर को सोमवार की रात चोरों ने बनाया निशाना। खिड़की तोड़कर मंदिर के अंदर चोरों ने प्रवेश किया। ग्रामीणों के मुताबिक करीब डेढ़ सौ वर्ष पुरानी अष्टधातु की राम, जानकी, लक्ष्मण व उर्मिला जी की मूर्तियां थीं। मौके पर सीओ चरखारी व कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई है। जांच की जा रही है। मंदिर के पुजारी विशंभर प्रसाद ने बताया कि मंदिर आबादी के बीच है। यहां पूजा अर्चना के लिए रात तक लोगों का आना जाना रहता है। सोमवार को भी पूजन आरती करने के बाद वह मंदिर के कपाट बंद करके अपने आवास पर चले गए थे। सुबह ग्रामीण दर्शन करने पहुंचे तो वहां दरवाजा खुले मिले। अंदर जाकर देखने पर सामान बिखरा था। मूर्तियां भी नहीं थीं। इस पर पुजारी को लोगों ने फोन करके सूचना दी। मौके पर पहुंचे पुजारी ने अंदर जाकर देखा तो राम-लक्ष्मण, जानकरी व उर्मिला की मूर्तियां सिंघासन पर नहीं थीं। सीओ चरखारी राजकुमार पांडेय ने छानबीन शुरू की। ग्रामीणों से भी अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। मंदिर के आसपास की जांच करके पता लगाने की कोशिश हो रही है कि चोर किसी वाहन से आए थे या पैदल थे। सीओ ने कहा कि हालात देख कर लगता है कि इस मामले में गांव के भी किसी व्यक्ति का हाथ हो सकता है। फिलहाल जांच हो रही है। आरोपितों को पकडऩे का प्रयास किया जा रहा है। |
अमरावती/दि. ३- स्थानीय दि अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक मंडल हेतु कल सोमवार 4 अक्तूबर को मतदान होना है. 21 सदस्यीय संचालक मंडल में से 4 संचालकों का इससे पहले ही निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है. वहीं अब शेष 17 सीटों के लिए खडे 48 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कल जिले के 1687 मतदाताओं द्वारा किया जायेगा. चूंकि इस बार इस चुनाव में राज्यमंत्री बच्चु कडू, जिला परिषद के अध्यक्ष व जिला बैंक के पूर्व अध्यक्ष बबलू देशमुख, राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खोडके, विधायक बलवंत वानखडे, राजकुमार पटेल व प्रकाश भारसाकले तथा पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप सहित सहकार क्षेत्र के कई दिग्गज नाम प्रत्याशी के तौर पर मैदान में है. ऐसे में इस चुनाव को लेकर समूचे जिले में उत्सूकता देखी जा रही है. कल मतदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अगले ही दिन मंगलवार 5 अक्तूबर को गाडगेबाबा समाधी मंदिर के सभागार में मतगणना की जायेगी और मंगलवार को ही इस चुनाव के नतीजे घोषित किये जायेगे.
| अमरावती/दि. तीन- स्थानीय दि अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक मंडल हेतु कल सोमवार चार अक्तूबर को मतदान होना है. इक्कीस सदस्यीय संचालक मंडल में से चार संचालकों का इससे पहले ही निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है. वहीं अब शेष सत्रह सीटों के लिए खडे अड़तालीस प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कल जिले के एक हज़ार छः सौ सत्तासी मतदाताओं द्वारा किया जायेगा. चूंकि इस बार इस चुनाव में राज्यमंत्री बच्चु कडू, जिला परिषद के अध्यक्ष व जिला बैंक के पूर्व अध्यक्ष बबलू देशमुख, राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खोडके, विधायक बलवंत वानखडे, राजकुमार पटेल व प्रकाश भारसाकले तथा पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप सहित सहकार क्षेत्र के कई दिग्गज नाम प्रत्याशी के तौर पर मैदान में है. ऐसे में इस चुनाव को लेकर समूचे जिले में उत्सूकता देखी जा रही है. कल मतदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अगले ही दिन मंगलवार पाँच अक्तूबर को गाडगेबाबा समाधी मंदिर के सभागार में मतगणना की जायेगी और मंगलवार को ही इस चुनाव के नतीजे घोषित किये जायेगे. |
Dumka : शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के बरमसिया में रेलवे ट्रैक पर तीन नाबालिगों के कटे शव बरामद हुए हैं. मृतकों में दो लड़के और एक लड़की शामिल है. ये तीनों अगल-बगल गांव के ही रहने वाले थे. इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गयी है. सूचना पर परिजन घटनास्थल पर पहुंचे. घटना को लेकर ग्रामीण आत्महत्या की आशंका जता रहे हैं. शव मिलने की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचे और मामले की जांच में जुट गये. ( दुमका की दूसरी खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )
यह घटना बरमसिया रेलवे स्टेशन के पास हुई है. जहां ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक पर तीन नाबालिग का शव देखा. जिसमें से एक छात्र 11वीं में पढ़ाई करता था, वहीं दूसरा छात्र 8 वीं कक्षा का था. ये दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं. जबकि नाबालिग छात्रा का भी शव बरामद हुआ है. छात्रा 5वीं क्लास में पढ़ाई कर रही थी. वो छात्रा घटनास्थल से कुछ दूर ही दूसरे गांव की निवासी है. ग्रामीणों ने शव मिलने की सूचना मृतकों के परिजनों को दी. सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुचे. एक साथ तीन शव बरामद होने से आस- पास के इलकों में दहशक फैल गयी है. चारों तरफ चीख-पुकार मच गयी है.
| Dumka : शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के बरमसिया में रेलवे ट्रैक पर तीन नाबालिगों के कटे शव बरामद हुए हैं. मृतकों में दो लड़के और एक लड़की शामिल है. ये तीनों अगल-बगल गांव के ही रहने वाले थे. इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गयी है. सूचना पर परिजन घटनास्थल पर पहुंचे. घटना को लेकर ग्रामीण आत्महत्या की आशंका जता रहे हैं. शव मिलने की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचे और मामले की जांच में जुट गये. यह घटना बरमसिया रेलवे स्टेशन के पास हुई है. जहां ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक पर तीन नाबालिग का शव देखा. जिसमें से एक छात्र ग्यारहवीं में पढ़ाई करता था, वहीं दूसरा छात्र आठ वीं कक्षा का था. ये दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं. जबकि नाबालिग छात्रा का भी शव बरामद हुआ है. छात्रा पाँचवीं क्लास में पढ़ाई कर रही थी. वो छात्रा घटनास्थल से कुछ दूर ही दूसरे गांव की निवासी है. ग्रामीणों ने शव मिलने की सूचना मृतकों के परिजनों को दी. सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुचे. एक साथ तीन शव बरामद होने से आस- पास के इलकों में दहशक फैल गयी है. चारों तरफ चीख-पुकार मच गयी है. |
(लुप्तेषु ) सब सोनेपर भी यह प्राण (उर्ध्वः जागार) खडा रह कर जागता है । ( ननु ) कभी नहीं (तिर्थङ ) तिरछा होकर ( निपद्यते ) लेटता है । ( सुप्तेषु ) सबके सोनेपर ( अस्य सुप्तं ) इस प्राणका सोना ( कश्चन ) किसीने भी ( न अनु शुश्राव ) सुना नहीं ।
सब प्राणी थक जानेपर सोजाते हैं, परन्तु उनके सोजानेपर भी यह प्राण खडा रहकर जागता और पहारा करता है। जैसे इतर प्राणी थक जाने पर लेट जाते हैं, उस प्रकार यह प्राण कभीभी लेटता नहीं, अर्थात् विश्राम न करता हुआ सदा अपना कार्य करता रहता है। सब अन्य इन्द्रियां थक जाति हैं और विश्राम लेनेके लिये सो जाती हैं, उस प्रकार यह कभी थकता नहीं और न कभी विश्राम लेता है, उसके थकने और विश्राम लेनेका तात्पर्य मृत्यु ही है । जन्मसे मृत्यु तक यह विश्राम न लेते हुए अपना कार्य करता है।
प्राण मा मत्पर्यावृतो न मदन्यो भविष्यसि ।
अपां गर्भमिव जीवसे प्राण बन्धामि त्वा मयि ॥२६॥ अ. ११।४ (६)
हे प्राण ! ( मत् ) मुझसे ( मा पर्यावृतः) पृथक् मत् हो । ( मद अन्यः ) मुझसे भिन्न अर्थात् दूर ( न भविष्यसि ) तू न होगा । अपां गर्भ इव) पानीके गर्भके समान, ( जीवसे ) दीर्घ जीवनके लिये ( मयि ) अपने में ( त्वा बध्नामि ) तुझेको बांधता हूं।
प्राण शरीर से पृथक् नहीं होना चाहिये, क्यों कि वैसा पृथक् होने से मृत्यु ही होगा । मनुष्यको दीर्घ जीवन प्राप्त करना है, इस लिये प्राणायाम द्वारा प्राण का बल बढाकर प्राणको मानो अपने अन्दर बांधकर रखना चाहिये, ता कि वह शीघ्र दूर न हो सके । | सब सोनेपर भी यह प्राण खडा रह कर जागता है । कभी नहीं तिरछा होकर लेटता है । सबके सोनेपर इस प्राणका सोना किसीने भी सुना नहीं । सब प्राणी थक जानेपर सोजाते हैं, परन्तु उनके सोजानेपर भी यह प्राण खडा रहकर जागता और पहारा करता है। जैसे इतर प्राणी थक जाने पर लेट जाते हैं, उस प्रकार यह प्राण कभीभी लेटता नहीं, अर्थात् विश्राम न करता हुआ सदा अपना कार्य करता रहता है। सब अन्य इन्द्रियां थक जाति हैं और विश्राम लेनेके लिये सो जाती हैं, उस प्रकार यह कभी थकता नहीं और न कभी विश्राम लेता है, उसके थकने और विश्राम लेनेका तात्पर्य मृत्यु ही है । जन्मसे मृत्यु तक यह विश्राम न लेते हुए अपना कार्य करता है। प्राण मा मत्पर्यावृतो न मदन्यो भविष्यसि । अपां गर्भमिव जीवसे प्राण बन्धामि त्वा मयि ॥छब्बीस॥ अ. ग्यारह।चार हे प्राण ! मुझसे पृथक् मत् हो । मुझसे भिन्न अर्थात् दूर तू न होगा । अपां गर्भ इव) पानीके गर्भके समान, दीर्घ जीवनके लिये अपने में तुझेको बांधता हूं। प्राण शरीर से पृथक् नहीं होना चाहिये, क्यों कि वैसा पृथक् होने से मृत्यु ही होगा । मनुष्यको दीर्घ जीवन प्राप्त करना है, इस लिये प्राणायाम द्वारा प्राण का बल बढाकर प्राणको मानो अपने अन्दर बांधकर रखना चाहिये, ता कि वह शीघ्र दूर न हो सके । |
नई दिल्ली - राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2017 के विरोध में 12 दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर गए डाक्टरों ने विधेयक को विचारार्थ संसद की स्थायी समिति के पास भेजे जाने के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली है। भारतीय चिकित्सा संघ के सदस्य तथा पूर्व महासचिव नरेंद्र सैनी ने कहा कि हम चाहते थे कि विधेयक पर पूरी चर्चा हो और इसके लिए इसे स्थायी समिति के पास भेजा जाए। सरकार ने हमारी मांग मान ली है, इसलिए हमने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। उम्मीद है कि स्थायी समिति में उनकी बात सुनी जाएगी।
| नई दिल्ली - राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, दो हज़ार सत्रह के विरोध में बारह दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर गए डाक्टरों ने विधेयक को विचारार्थ संसद की स्थायी समिति के पास भेजे जाने के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली है। भारतीय चिकित्सा संघ के सदस्य तथा पूर्व महासचिव नरेंद्र सैनी ने कहा कि हम चाहते थे कि विधेयक पर पूरी चर्चा हो और इसके लिए इसे स्थायी समिति के पास भेजा जाए। सरकार ने हमारी मांग मान ली है, इसलिए हमने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। उम्मीद है कि स्थायी समिति में उनकी बात सुनी जाएगी। |
एक शक्तिशाली महासागरीय बेड़ा, एक विकसित वायु सेना, शक्तिशाली ज़मीनी ताकत . . . इन सबका क्या फायदा, अगर राज्य की सभी सशस्त्र सेनाएँ अपनी सीमाओं के भीतर "कसकर" बंद हैं और, तदनुसार, इसके लिए बाहरी आक्रामकता को पीछे हटाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। . . . सोवियत संघ के लिए, यह राज्य, निश्चित रूप से, अस्वीकार्य था। यह इस वजह से था कि उसकी सैन्य चौकी स्थित थी, वास्तव में, दुनिया भर में, दुनिया के सभी हिस्सों में।
इसी समय, सोवियत सेना की महत्वपूर्ण टुकड़ियों और उन गढ़ों की स्थायी तैनाती के स्थानों को अलग करना आवश्यक है जिनके बिना लंबी समुद्री यात्राएं, ट्रांसकॉन्टिनेंटल उड़ानें और इस तरह असंभव होगा। हमारे देश के पास पर्याप्त संख्या में आधुनिक युद्धपोत और विमान थे, जो अपनी जन्मभूमि से दूर किसी भी जटिलता के कार्यों को करने में सक्षम थे, हालांकि, इन सभी को ईंधन भरने, मरम्मत और अस्थायी आधार बिंदु के रूप में इस तरह के प्रोसिक चीजों की आवश्यकता थी।
यूएसएसआर का पूर्वी यूरोप के देशों में सबसे बड़ा सैन्य समूह था - जीडीआर, पोलैंड, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया, साथ ही एशिया में - मंगोलिया में। अलग कहानी अफगानिस्तान में सोवियत सैनिकों की एक सीमित टुकड़ी के साथ था, जो वास्तविक युद्ध में लड़े थे। अन्य जगहों पर, सब कुछ कमोबेश शांतिपूर्ण था। उदाहरण के लिए, क्यूबा में, हमारे सैन्य ने प्रसिद्ध क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान खुद को मजबूती से स्थापित किया। फिर हमारी बैलिस्टिक परमाणु मिसाइलें खत्म हो गईं, जिससे लगभग तीसरे विश्व युद्ध का प्रकोप बढ़ गया।
परमाणु हथियार समय के साथ, वे वापस ले लिए गए, लेकिन यहां जीवीएसके - यूएसएसआर के सैन्य विशेषज्ञों का एक समूह क्यूबा में रहा। संयुक्त राज्य अमेरिका से निकटता के कारण, यह न केवल नौसेना के लिए एक आधार के रूप में इस्तेमाल किया गया था बेड़ा (हवाना और सेनफ्यूगोस के बंदरगाह), लेकिन यह भी, सबसे पहले, मुख्य "संभावित दुश्मन" के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के चौकी में से एक के रूप में। एल्बो-गैब्रियल शहर में निर्मित, Priboi संचार केंद्र के कर्मियों को रोकना बहुत आसान था, जिसमें बहुत विशिष्ट कार्य थे।
एक और वस्तु जिसने अमेरिकी सैन्य कमान को बहुत परेशान किया, वह था वियतनामी कैम रण, जो एक समय में एक अमेरिकी सैन्य बेस था। अमेरिकी पैसिफिक फ्लीट की कमान केवल बंदरगाह को देखते हुए, अपने दांत पीस सकती थी, जो एक दर्जन सतह का मुकाबला कर सकती थी और जहाजों और 8 पनडुब्बियों को सहारा दे सकती थी। इसके अलावा, कैम रान एयरफील्ड ने रणनीतिक बमवर्षकों को प्राप्त किया, न कि लड़ाकू और टोही का उल्लेख करने के लिए विमानन. . . सैकड़ों वर्ग किलोमीटर और कर्मियों के क्षेत्र के साथ, जिनकी संख्या अलग-अलग समय में 6 से 10 हजार लोगों तक थी, यह दक्षिण पूर्व एशिया में एक वास्तविक चौकी थी।
वास्तव में, यूएसएसआर की सीमाओं के बाहर की कोई भी जगह, जहां हमारे पायलट, नाविक, सिग्नलमैन और अन्य "विशेषज्ञ" नहीं थे, को कभी भी सैन्य अड्डा नहीं कहा जाता था। यहाँ बिंदु आधिकारिक सोवियत विचारधारा में था, जिसके भीतर यह नाम "संयुक्त और नाटो की आक्रामक नीति" से बहुत जुड़ा हुआ था। हमारी सुविधाओं को बहुत अधिक मामूली नाम दिया गया था - उदाहरण के लिए, सामग्री और तकनीकी सहायता के बिंदु। हालांकि, इसका कोई मतलब नहीं था कि ऐसी जगहें एक-दो गोदी या हैंगर थीं, जहां गंदी चौकी में केवल तकनीशियन ही चिल्लाते थे। हर्गिज नहीं।
विभिन्न समयों पर, मुख्य रूप से यूएसएसआर नौसेना से संबंधित पीएमटीओ ग्रह के सबसे दूरस्थ और विदेशी हिस्सों में मौजूद थे। सेशेल्स (विक्टोरिया), मिस्र (अलेक्जेंड्रिया, मेर्सा मार्टुह), लीबिया (त्रिपोली और टोब्रुक), सीरिया (टार्टस और लताकिया) . . . ब्लैक कॉन्टिनेंट और अरब प्रायद्वीप बुरी तरह से "कवर" नहीं थे - अंगोला (लुआंडा) में संचालित हमारी सैन्य सुविधाएं। ), इथियोपिया (डाहलक), गिनी (कॉनकरी), ट्यूनीशिया (Sfax और Bizerta), यमन (अदन और सोकोट्रा)।
आज, अफसोस, इस सूची में बहुत कम बचा है। लगभग कुछ नहीं। यह खोई जमीन वापस पाने का समय है।
और लगातार बढ़ती रूस की आवश्यकता के बारे में बात करने के लिए खुद को वापस करने के लिए, यदि सभी नहीं, लेकिन कम से कम कुछ विदेशी सैन्य सुविधाओं के पास हर कारण है। दूर की चौकियों के बिना, भविष्य में हमारा देश एक गंभीर भू-राजनीतिक खिलाड़ी की स्थिति का दावा करने में सक्षम नहीं होगा।
और इस दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। यह लाल सागर के तट पर एक रूसी नौसैनिक रसद केंद्र की तैनाती पर सूडानी अधिकारियों के साथ एक समझौते के बारे में है।
यह स्पष्ट है कि आज रूस के पास एक प्राथमिकताओं में सैन्य और वित्तीय संसाधन नहीं हैं जो यूएसएसआर के पास थे, और इसलिए यह दुनिया भर में "बिखराव" (या एक ही एमटीओ अंक) को "तितर बितर" करने के लिए अवास्तविक (और शायद ही उचित) है, लेकिन रणनीतिक रूप से इस तरह की उपस्थिति। दुनिया के महत्वपूर्ण बिंदु - एक विकल्प जो स्पष्ट रूप से उपेक्षित नहीं किया जा सकता है।
- लेखकः
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
| एक शक्तिशाली महासागरीय बेड़ा, एक विकसित वायु सेना, शक्तिशाली ज़मीनी ताकत . . . इन सबका क्या फायदा, अगर राज्य की सभी सशस्त्र सेनाएँ अपनी सीमाओं के भीतर "कसकर" बंद हैं और, तदनुसार, इसके लिए बाहरी आक्रामकता को पीछे हटाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। . . . सोवियत संघ के लिए, यह राज्य, निश्चित रूप से, अस्वीकार्य था। यह इस वजह से था कि उसकी सैन्य चौकी स्थित थी, वास्तव में, दुनिया भर में, दुनिया के सभी हिस्सों में। इसी समय, सोवियत सेना की महत्वपूर्ण टुकड़ियों और उन गढ़ों की स्थायी तैनाती के स्थानों को अलग करना आवश्यक है जिनके बिना लंबी समुद्री यात्राएं, ट्रांसकॉन्टिनेंटल उड़ानें और इस तरह असंभव होगा। हमारे देश के पास पर्याप्त संख्या में आधुनिक युद्धपोत और विमान थे, जो अपनी जन्मभूमि से दूर किसी भी जटिलता के कार्यों को करने में सक्षम थे, हालांकि, इन सभी को ईंधन भरने, मरम्मत और अस्थायी आधार बिंदु के रूप में इस तरह के प्रोसिक चीजों की आवश्यकता थी। यूएसएसआर का पूर्वी यूरोप के देशों में सबसे बड़ा सैन्य समूह था - जीडीआर, पोलैंड, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया, साथ ही एशिया में - मंगोलिया में। अलग कहानी अफगानिस्तान में सोवियत सैनिकों की एक सीमित टुकड़ी के साथ था, जो वास्तविक युद्ध में लड़े थे। अन्य जगहों पर, सब कुछ कमोबेश शांतिपूर्ण था। उदाहरण के लिए, क्यूबा में, हमारे सैन्य ने प्रसिद्ध क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान खुद को मजबूती से स्थापित किया। फिर हमारी बैलिस्टिक परमाणु मिसाइलें खत्म हो गईं, जिससे लगभग तीसरे विश्व युद्ध का प्रकोप बढ़ गया। परमाणु हथियार समय के साथ, वे वापस ले लिए गए, लेकिन यहां जीवीएसके - यूएसएसआर के सैन्य विशेषज्ञों का एक समूह क्यूबा में रहा। संयुक्त राज्य अमेरिका से निकटता के कारण, यह न केवल नौसेना के लिए एक आधार के रूप में इस्तेमाल किया गया था बेड़ा , लेकिन यह भी, सबसे पहले, मुख्य "संभावित दुश्मन" के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के चौकी में से एक के रूप में। एल्बो-गैब्रियल शहर में निर्मित, Priboi संचार केंद्र के कर्मियों को रोकना बहुत आसान था, जिसमें बहुत विशिष्ट कार्य थे। एक और वस्तु जिसने अमेरिकी सैन्य कमान को बहुत परेशान किया, वह था वियतनामी कैम रण, जो एक समय में एक अमेरिकी सैन्य बेस था। अमेरिकी पैसिफिक फ्लीट की कमान केवल बंदरगाह को देखते हुए, अपने दांत पीस सकती थी, जो एक दर्जन सतह का मुकाबला कर सकती थी और जहाजों और आठ पनडुब्बियों को सहारा दे सकती थी। इसके अलावा, कैम रान एयरफील्ड ने रणनीतिक बमवर्षकों को प्राप्त किया, न कि लड़ाकू और टोही का उल्लेख करने के लिए विमानन. . . सैकड़ों वर्ग किलोमीटर और कर्मियों के क्षेत्र के साथ, जिनकी संख्या अलग-अलग समय में छः से दस हजार लोगों तक थी, यह दक्षिण पूर्व एशिया में एक वास्तविक चौकी थी। वास्तव में, यूएसएसआर की सीमाओं के बाहर की कोई भी जगह, जहां हमारे पायलट, नाविक, सिग्नलमैन और अन्य "विशेषज्ञ" नहीं थे, को कभी भी सैन्य अड्डा नहीं कहा जाता था। यहाँ बिंदु आधिकारिक सोवियत विचारधारा में था, जिसके भीतर यह नाम "संयुक्त और नाटो की आक्रामक नीति" से बहुत जुड़ा हुआ था। हमारी सुविधाओं को बहुत अधिक मामूली नाम दिया गया था - उदाहरण के लिए, सामग्री और तकनीकी सहायता के बिंदु। हालांकि, इसका कोई मतलब नहीं था कि ऐसी जगहें एक-दो गोदी या हैंगर थीं, जहां गंदी चौकी में केवल तकनीशियन ही चिल्लाते थे। हर्गिज नहीं। विभिन्न समयों पर, मुख्य रूप से यूएसएसआर नौसेना से संबंधित पीएमटीओ ग्रह के सबसे दूरस्थ और विदेशी हिस्सों में मौजूद थे। सेशेल्स , मिस्र , लीबिया , सीरिया . . . ब्लैक कॉन्टिनेंट और अरब प्रायद्वीप बुरी तरह से "कवर" नहीं थे - अंगोला में संचालित हमारी सैन्य सुविधाएं। ), इथियोपिया , गिनी , ट्यूनीशिया , यमन । आज, अफसोस, इस सूची में बहुत कम बचा है। लगभग कुछ नहीं। यह खोई जमीन वापस पाने का समय है। और लगातार बढ़ती रूस की आवश्यकता के बारे में बात करने के लिए खुद को वापस करने के लिए, यदि सभी नहीं, लेकिन कम से कम कुछ विदेशी सैन्य सुविधाओं के पास हर कारण है। दूर की चौकियों के बिना, भविष्य में हमारा देश एक गंभीर भू-राजनीतिक खिलाड़ी की स्थिति का दावा करने में सक्षम नहीं होगा। और इस दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। यह लाल सागर के तट पर एक रूसी नौसैनिक रसद केंद्र की तैनाती पर सूडानी अधिकारियों के साथ एक समझौते के बारे में है। यह स्पष्ट है कि आज रूस के पास एक प्राथमिकताओं में सैन्य और वित्तीय संसाधन नहीं हैं जो यूएसएसआर के पास थे, और इसलिए यह दुनिया भर में "बिखराव" को "तितर बितर" करने के लिए अवास्तविक है, लेकिन रणनीतिक रूप से इस तरह की उपस्थिति। दुनिया के महत्वपूर्ण बिंदु - एक विकल्प जो स्पष्ट रूप से उपेक्षित नहीं किया जा सकता है। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः |
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने चंद्रयान थ्री की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। इसरो प्रमुख ए। एस। सोमनाथ ने बताया कि चंद्रयान थ्री की लॉन्चिंग जुलाई के दूसरे या तीसरे हफ्ते में हो सकती है। इसी बीच इसरो ने अपने पहले स्थल मिशन को लेकर भी बड़ा एलान कर दिया है।
इसरो चीफ सोमनाथ ने बताया कि अगस्त महीने के आखिर तक आदित्य एलेवन मिशन के लिए भी पेलोड तैयारी कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत में सोमनाथ ने आदित्य एलेवन मिशन के बारे में बताया। उन्होंने कहा, सैटेलाइट्स को अब इंटिग्रेट किया जा रहा है और अलग अलग एजेंसियों की तरफ से डेवलप किए गए पेलोड सेटेलाइट सेंटर पहुंच रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद सभी इक्विपमेंट्स वाइब्रेशन जैसे कई टेस्ट से होकर गुजरेंगे। सोमनाथ ने बताया कि आदित्य इलेवन मिशन के लिए अगस्त तक उनका टारगेट है। आदित्य इलेवन स्पेसक्राफ्ट को धरती और सूरज के बीच एलेवन ऑर्बिट में रखा जाएगा। यानी सूरज और धरती के सिस्टम के बीच मौजूद पहला लोरेंजी प्वाइंट। यहीं पर आदित्य इलेवन को तैनात किया जाएगा।
अंतरिक्ष यान को सूर्य पृथ्वी सिस्टम के नॉलेज प्वाइंट वन यानी एलेवन के चारों तरफ एक हैलो ऑर्बिट में रखा जाएगा, जो हमारे ग्रह से लगभग वन प्वाइंट फाइव मिलियन किलोमीटर दूर है। इलेवन प्वाइंट के आसपास स्थित एक सेटेलाइट से सूर्य को बिना किसी ग्रहण के निरंतर देखा जा सकता है। मिशन में सूर्य के कोरोना क्रोमोसोम भी है और फोटो भी है। इससे निकलने वाले कण प्रवाह और चुंबकीय क्षेत्र की ताकत की स्टडी की जा सकती है।
वहीं चंद्रयान मिशन की बात की जाए तो चंद्रयान थ्री मिशन, चंद्रयान दो मिशन का फॉलो ऑन मिशन है। इसे चांद पर सेफ लैंडिंग कर उसकी सतह पर घूमना है और घूमकर उसे समझना है। इस मिशन से चंद्रमा की सतह को और बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। इसरो ने कहा कि चंद्रयान थ्री अंतरिक्ष यान पूरी तरह से तैयार है। सोमनाथ ने कहा, अभी रॉकेट के साथ ही से जोड़ा जा रहा है और संभवतः यह काम और दो दिन में पूरा हो जाएगा। फिर हमें जांच कार्यक्रम में जाना है। उन्होंने कहा कि रॉकेट से जोड़े जाने के बाद सिलसिलेवार जांच भी की जाएगी।
| भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने चंद्रयान थ्री की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। इसरो प्रमुख ए। एस। सोमनाथ ने बताया कि चंद्रयान थ्री की लॉन्चिंग जुलाई के दूसरे या तीसरे हफ्ते में हो सकती है। इसी बीच इसरो ने अपने पहले स्थल मिशन को लेकर भी बड़ा एलान कर दिया है। इसरो चीफ सोमनाथ ने बताया कि अगस्त महीने के आखिर तक आदित्य एलेवन मिशन के लिए भी पेलोड तैयारी कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत में सोमनाथ ने आदित्य एलेवन मिशन के बारे में बताया। उन्होंने कहा, सैटेलाइट्स को अब इंटिग्रेट किया जा रहा है और अलग अलग एजेंसियों की तरफ से डेवलप किए गए पेलोड सेटेलाइट सेंटर पहुंच रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद सभी इक्विपमेंट्स वाइब्रेशन जैसे कई टेस्ट से होकर गुजरेंगे। सोमनाथ ने बताया कि आदित्य इलेवन मिशन के लिए अगस्त तक उनका टारगेट है। आदित्य इलेवन स्पेसक्राफ्ट को धरती और सूरज के बीच एलेवन ऑर्बिट में रखा जाएगा। यानी सूरज और धरती के सिस्टम के बीच मौजूद पहला लोरेंजी प्वाइंट। यहीं पर आदित्य इलेवन को तैनात किया जाएगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य पृथ्वी सिस्टम के नॉलेज प्वाइंट वन यानी एलेवन के चारों तरफ एक हैलो ऑर्बिट में रखा जाएगा, जो हमारे ग्रह से लगभग वन प्वाइंट फाइव मिलियन किलोमीटर दूर है। इलेवन प्वाइंट के आसपास स्थित एक सेटेलाइट से सूर्य को बिना किसी ग्रहण के निरंतर देखा जा सकता है। मिशन में सूर्य के कोरोना क्रोमोसोम भी है और फोटो भी है। इससे निकलने वाले कण प्रवाह और चुंबकीय क्षेत्र की ताकत की स्टडी की जा सकती है। वहीं चंद्रयान मिशन की बात की जाए तो चंद्रयान थ्री मिशन, चंद्रयान दो मिशन का फॉलो ऑन मिशन है। इसे चांद पर सेफ लैंडिंग कर उसकी सतह पर घूमना है और घूमकर उसे समझना है। इस मिशन से चंद्रमा की सतह को और बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। इसरो ने कहा कि चंद्रयान थ्री अंतरिक्ष यान पूरी तरह से तैयार है। सोमनाथ ने कहा, अभी रॉकेट के साथ ही से जोड़ा जा रहा है और संभवतः यह काम और दो दिन में पूरा हो जाएगा। फिर हमें जांच कार्यक्रम में जाना है। उन्होंने कहा कि रॉकेट से जोड़े जाने के बाद सिलसिलेवार जांच भी की जाएगी। |
नई दिल्ली. बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा (JP Nadda) ने विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा के उपचुनावों (By-Poll Election 2020) में पार्टी को मिली सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व और केंद्र सरकार की नीतियों को दिया और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों व प्रदेश अध्यक्षों को बधाई दी.
नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि देशभर के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और केंद्र व राज्य सरकारों की जन कल्याणकारी नीतियों पर मुहर लगाई है. नड्डा ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों तथा इन राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को भी जीत की बधाई दी. तेलंगाना उपचुनाव में भाजपा की जीत के लिए उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष संजय बांदी को बधाई दी. तेलंगाना में टीआरएस की सरकार है.
इस जनादेश के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।
उनके नेतृत्व में भारत वास्तव में वैश्विक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित होगा जहां समृद्धि, सुरक्षा और सबके लिए आगे बढ़ने के समान अवसर होंगे।
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| नई दिल्ली. बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा के उपचुनावों में पार्टी को मिली सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की नीतियों को दिया और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों व प्रदेश अध्यक्षों को बधाई दी. नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि देशभर के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और केंद्र व राज्य सरकारों की जन कल्याणकारी नीतियों पर मुहर लगाई है. नड्डा ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों तथा इन राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को भी जीत की बधाई दी. तेलंगाना उपचुनाव में भाजपा की जीत के लिए उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष संजय बांदी को बधाई दी. तेलंगाना में टीआरएस की सरकार है. इस जनादेश के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। उनके नेतृत्व में भारत वास्तव में वैश्विक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित होगा जहां समृद्धि, सुरक्षा और सबके लिए आगे बढ़ने के समान अवसर होंगे। . |
हिमचाल प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने अपने महारथियों को चुनावी मैदान में उतारना शुरू कर दिया है. हिमाचल प्रदेश में संगठन पर पकड़ बनाए रखने और कार्यकर्ताओं में जान फूंकने के लिए सीनियर ऑब्जर्वर और ऑब्जर्वर के नामों का ऐलान कर दिया गया है. कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. जबकि, राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट और पंजाब के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह बाजवा को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है.
कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल के साथ-साथ गुजरात के लिए भी राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को सीनियर ऑब्जर्वर और वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव तथा मिलिंद देवड़ा को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. गुजरात में कांग्रेस हार्दिक पटेल और दूसरे नेताओं की टूटने से जहां डांवाडोल की स्थिति में हैं. वहीं, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है.
कांग्रेस की तरफ से कोशिश है कि किसी भी सूरत में पंजाब जैसा आत्मघाती कदम न उठाया जाए. इसलिए पहले ही ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति पार्टी ने कर दी है. गौरतलब है कि संगठन को संचालित करने और मोबलाइज करने के मामले में भूपेश बघेल और सचिन पायलट काफी सिद्ध माने जाते हैं. सचिन पायलट का राजस्थान में इलेक्टोरल मैनेजमेंट काफी कमाल का रहा है.
| हिमचाल प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने अपने महारथियों को चुनावी मैदान में उतारना शुरू कर दिया है. हिमाचल प्रदेश में संगठन पर पकड़ बनाए रखने और कार्यकर्ताओं में जान फूंकने के लिए सीनियर ऑब्जर्वर और ऑब्जर्वर के नामों का ऐलान कर दिया गया है. कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. जबकि, राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट और पंजाब के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह बाजवा को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल के साथ-साथ गुजरात के लिए भी राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को सीनियर ऑब्जर्वर और वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव तथा मिलिंद देवड़ा को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. गुजरात में कांग्रेस हार्दिक पटेल और दूसरे नेताओं की टूटने से जहां डांवाडोल की स्थिति में हैं. वहीं, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है. कांग्रेस की तरफ से कोशिश है कि किसी भी सूरत में पंजाब जैसा आत्मघाती कदम न उठाया जाए. इसलिए पहले ही ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति पार्टी ने कर दी है. गौरतलब है कि संगठन को संचालित करने और मोबलाइज करने के मामले में भूपेश बघेल और सचिन पायलट काफी सिद्ध माने जाते हैं. सचिन पायलट का राजस्थान में इलेक्टोरल मैनेजमेंट काफी कमाल का रहा है. |
देश के सबसे चर्चित शो 'आप की अदालत' के नए एपिसोड को लेकर अब दर्शकों को लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया है।
युवा टीवी पत्रकार ऋचा शर्मा ने 'न्यूज18' (News18) में अपनी पारी को विराम दे दिया है।
नई जॉब तलाश रहे बिजनेस रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए नेटवर्क18 ग्रुप के डिजिटल पोर्टल 'CNBC-TV18' (www. cnbctv18. com) में सुनहरा मौका है।
देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) और 'टैम मीडिया रिसर्च' (Tam Media Research) का जॉइंट वेंचर है 'मीटरोलॉजी डाटा प्राइवेट लिमिटेड' (MDPL)
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने इस बाबत केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है।
टीवी न्यूज की दुनिया के जाने-माने चेहरे और सीनियर न्यूज एंकर सुमित अवस्थी के बारे में एक बड़ी खबर निकलकर सामने आयी है।
59वीं एशिया-पैसिफिक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन जनरल असेंबली के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीडिया को नसीहत दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिली खबर के अनुसार, बीबीसी का कहना है कि इस बारे में उन्हें अधिकारियों की तरफ से किसी तरह का स्पष्टीकरण अथवा माफी नहीं मिली है।
बता दें कि 'टाइम्स नेटवर्क' में भाग्य लक्ष्मी ने करीब दो साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने यहीं से मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की थी।
नौकरी की तलाश में जुटे पत्रकारों अथवा मीडिया में अपना करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बहुत ही अच्छा मौका है।
सीनियर ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट और 'नेटवर्क18' (Network18) की मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा जल्द ही अपना नया शो शुरू कर सकती हैं।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले अजय कुमार को विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करने का करीब 30 साल का अनुभव है।
| देश के सबसे चर्चित शो 'आप की अदालत' के नए एपिसोड को लेकर अब दर्शकों को लंबा इंतजार नहीं करना होगा। भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया है। युवा टीवी पत्रकार ऋचा शर्मा ने 'न्यूजअट्ठारह' में अपनी पारी को विराम दे दिया है। नई जॉब तलाश रहे बिजनेस रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए नेटवर्कअट्ठारह ग्रुप के डिजिटल पोर्टल 'CNBC-TVअट्ठारह' में सुनहरा मौका है। देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' और 'टैम मीडिया रिसर्च' का जॉइंट वेंचर है 'मीटरोलॉजी डाटा प्राइवेट लिमिटेड' इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने इस बाबत केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है। टीवी न्यूज की दुनिया के जाने-माने चेहरे और सीनियर न्यूज एंकर सुमित अवस्थी के बारे में एक बड़ी खबर निकलकर सामने आयी है। उनसठवीं एशिया-पैसिफिक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन जनरल असेंबली के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीडिया को नसीहत दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिली खबर के अनुसार, बीबीसी का कहना है कि इस बारे में उन्हें अधिकारियों की तरफ से किसी तरह का स्पष्टीकरण अथवा माफी नहीं मिली है। बता दें कि 'टाइम्स नेटवर्क' में भाग्य लक्ष्मी ने करीब दो साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने यहीं से मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की थी। नौकरी की तलाश में जुटे पत्रकारों अथवा मीडिया में अपना करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बहुत ही अच्छा मौका है। सीनियर ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट और 'नेटवर्कअट्ठारह' की मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा जल्द ही अपना नया शो शुरू कर सकती हैं। मूल रूप से बिहार के रहने वाले अजय कुमार को विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करने का करीब तीस साल का अनुभव है। |
उत्तरप्रदेश : यूपी के लखनऊ में ग्राम पंचायत सदस्य के हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने दावा किया है कि सगे भतीजे ने ही किराए के हत्यारो से गोली मारकर हत्या करवाई थी. घटना बंथरा इलाके में सोमवार को हुई थी. इस घटना में में ग्राम पंचायत के सदस्य अशोक कुमार मौर्या की हत्या उसके ही भतीजे ने करवाई थी.
पुलिस ने इस मामले में मृतक के भतीजे अंकुर को गिरफ्तार किया है. दरअसल अंकुर और उसके पिता का अशोक मौर्या से करो़ड़ो की कीमत की जमीन का विवाद चल रहा है. जिसको लेकर दोनो पक्षों में लंबे समय से तनातनी चली आ रही है. इसी बीच अंकुर की मां ने अपने पति और बेटो पर घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज़ करवाया था. जिसकी पैरवी अशोक करने लगे. बस इसी बात पर अंकुर ने अपने कानपुर स्थित ससुरालियो की मदद से कानपुर के शातिर बदमाश जावीद आलम को एक लाख की हत्या की सुपारी दी और जिसमें 30 हजार रूपये बतौर पेशगी भी शूटरो को दी गई थी.
फिलहाल पुलिस ने इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड को तो गिरफ्तार कर लिया है लेकिन किराए के हत्यारे सहित 5 लोगो की तलाश में पुलिस अभी भी जुटी हुई है.
| उत्तरप्रदेश : यूपी के लखनऊ में ग्राम पंचायत सदस्य के हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने दावा किया है कि सगे भतीजे ने ही किराए के हत्यारो से गोली मारकर हत्या करवाई थी. घटना बंथरा इलाके में सोमवार को हुई थी. इस घटना में में ग्राम पंचायत के सदस्य अशोक कुमार मौर्या की हत्या उसके ही भतीजे ने करवाई थी. पुलिस ने इस मामले में मृतक के भतीजे अंकुर को गिरफ्तार किया है. दरअसल अंकुर और उसके पिता का अशोक मौर्या से करो़ड़ो की कीमत की जमीन का विवाद चल रहा है. जिसको लेकर दोनो पक्षों में लंबे समय से तनातनी चली आ रही है. इसी बीच अंकुर की मां ने अपने पति और बेटो पर घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज़ करवाया था. जिसकी पैरवी अशोक करने लगे. बस इसी बात पर अंकुर ने अपने कानपुर स्थित ससुरालियो की मदद से कानपुर के शातिर बदमाश जावीद आलम को एक लाख की हत्या की सुपारी दी और जिसमें तीस हजार रूपये बतौर पेशगी भी शूटरो को दी गई थी. फिलहाल पुलिस ने इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड को तो गिरफ्तार कर लिया है लेकिन किराए के हत्यारे सहित पाँच लोगो की तलाश में पुलिस अभी भी जुटी हुई है. |
शहीद डीएसपी देवेंद्र कुमार मिश्र की नृशंस हत्या के पीछे उनकी दहशतगर्द विकास दुबे से 22 साल पुरानी रंजिश की वजह सामने आई है। देवेंद्र मिश्र जब कल्याणपुर थाने में सिपाही थे तो उनका विकास से आमना-सामना हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे पर बंदूक तान ली थी।
ट्रिगर भी दबाया था लेकिन दोनों ओर से फायर नहीं हो पाया था। इसके बाद देवेंद्र ने विकास को जमकर पीटा था और हवालात में डाल दिया था। ये खुलासा खुद विकास ने उज्जैन से कानपुर लाए जाने के दौरान एसटीएफ की पूछताछ में किया था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 1998 में विकास दुबे स्मैक की तीस पुड़िया और बंदूक के साथ कल्याणपुर इलाके से गिरफ्तार हुआ था। तत्कालीन थानेदार हरिमोहन यादव से थाने में ही विकास भिड़ गया था। उनके साथ मारपीट की थी। यह देखकर देवेंद्र मिश्र विकास से भिड़ गए थे। तभी से विकास उनसे रंजिश मानने लगा।
देवेंद्र मिश्र को जब बिल्हौर सर्किल का चार्ज मिला तो विकास समझ गया कि उसको दिक्कत होगी। इसलिए उसने थानेदार विनय तिवारी के साथ साठगांठ की। दो जुलाई को देवेंद्र जब बिकरू गांव में दबिश देने गए तो विनय ने मुखबिरी कर दी। विकास को मौका मिल गया और उसने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।
इस मामले में तत्कालीन विधायक भगवती सागर और राजाराम पाल (दोनों बसपा से) ने थाने पहुंचकर विकास दुबे की पैरवी की थी। पुलिस जब उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुई तो दोनों नेताओं ने थाने में धरना दिया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास के राजनीतिक रिश्ते कितने गहरे थे।
| शहीद डीएसपी देवेंद्र कुमार मिश्र की नृशंस हत्या के पीछे उनकी दहशतगर्द विकास दुबे से बाईस साल पुरानी रंजिश की वजह सामने आई है। देवेंद्र मिश्र जब कल्याणपुर थाने में सिपाही थे तो उनका विकास से आमना-सामना हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे पर बंदूक तान ली थी। ट्रिगर भी दबाया था लेकिन दोनों ओर से फायर नहीं हो पाया था। इसके बाद देवेंद्र ने विकास को जमकर पीटा था और हवालात में डाल दिया था। ये खुलासा खुद विकास ने उज्जैन से कानपुर लाए जाने के दौरान एसटीएफ की पूछताछ में किया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में विकास दुबे स्मैक की तीस पुड़िया और बंदूक के साथ कल्याणपुर इलाके से गिरफ्तार हुआ था। तत्कालीन थानेदार हरिमोहन यादव से थाने में ही विकास भिड़ गया था। उनके साथ मारपीट की थी। यह देखकर देवेंद्र मिश्र विकास से भिड़ गए थे। तभी से विकास उनसे रंजिश मानने लगा। देवेंद्र मिश्र को जब बिल्हौर सर्किल का चार्ज मिला तो विकास समझ गया कि उसको दिक्कत होगी। इसलिए उसने थानेदार विनय तिवारी के साथ साठगांठ की। दो जुलाई को देवेंद्र जब बिकरू गांव में दबिश देने गए तो विनय ने मुखबिरी कर दी। विकास को मौका मिल गया और उसने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस मामले में तत्कालीन विधायक भगवती सागर और राजाराम पाल ने थाने पहुंचकर विकास दुबे की पैरवी की थी। पुलिस जब उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुई तो दोनों नेताओं ने थाने में धरना दिया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास के राजनीतिक रिश्ते कितने गहरे थे। |
पाया है। द्विवेदी काव्य में वो सुस्पष्ट एवंद विचार श्रृंखला का अभाव पाया
बाता है, , उसका भी यही रहस्य है। युग चेतना का वाणी विधान करना इनका कवि धर्म है। युग परिवर्तनशील होता है। फलतः इनके काव्यभाव भी परिवर्तित होते जाते हैं। साथ ही वे किसी पूर्व योजना के अनुसार कविता नहीं लिखते। उन काव्य की प्रेरणा भूमि 'युग-पटल पर जैसे जैसे परिवर्तन नर्तन करता है ठीक उसी के अनुरूप इनकी सरस्वती के स्वर बदल जाते हैं। यही कारण है कि उनके काव्य में यत्र तत्र स्व-सण्डन की प्रवृत्ति भी मिल जाती है। किन्तु यह तो कवि का काव्य दर्शन है, उनके काव्य का लक्ष्य है। अस्तु युग-चेतना का उतना अशक बार सफल कलाकार हिन्दी काव्य में बिरला ही देखा जा सकता है। | पाया है। द्विवेदी काव्य में वो सुस्पष्ट एवंद विचार श्रृंखला का अभाव पाया बाता है, , उसका भी यही रहस्य है। युग चेतना का वाणी विधान करना इनका कवि धर्म है। युग परिवर्तनशील होता है। फलतः इनके काव्यभाव भी परिवर्तित होते जाते हैं। साथ ही वे किसी पूर्व योजना के अनुसार कविता नहीं लिखते। उन काव्य की प्रेरणा भूमि 'युग-पटल पर जैसे जैसे परिवर्तन नर्तन करता है ठीक उसी के अनुरूप इनकी सरस्वती के स्वर बदल जाते हैं। यही कारण है कि उनके काव्य में यत्र तत्र स्व-सण्डन की प्रवृत्ति भी मिल जाती है। किन्तु यह तो कवि का काव्य दर्शन है, उनके काव्य का लक्ष्य है। अस्तु युग-चेतना का उतना अशक बार सफल कलाकार हिन्दी काव्य में बिरला ही देखा जा सकता है। |
Ciprofloxacin डॉक्टर के द्वारा निर्धारित की जाने वाली दवा है, जो मेडिकल स्टोर से टैबलेट दवाओं के रूप में मिलती है। यूरिन इन्फेक्शन, बैक्टीरियल संक्रमण के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा, Ciprofloxacin के कुछ अन्य प्रयोग भी हैं, जिनके बारें में आगे बताया गया है।
Ciprofloxacin को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है।
इन दुष्परिणामों के अलावा Ciprofloxacin के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Ciprofloxacin के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और बिगड़ जाते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।
यह भी जानना जरूरी है कि Ciprofloxacin का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर मध्यम है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए मध्यम है। Ciprofloxacin से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है।
अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। अनियमित दिल की धड़कन, हृदय रोग, मायस्थीनिया ग्रेविस इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Ciprofloxacin लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं।
Ciprofloxacin के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें।
ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Ciprofloxacin लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Ciprofloxacin की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Ciprofloxacin की खुराक अलग हो सकती है।
क्या Ciprofloxacin का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
यदि Ciprofloxacin का कोई दुष्प्रभाव प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य पर होता है तो इसका सेवन करना तुरंत बंद कर दें। इसके बाद चिकित्सक से सलाह के लेने पर ही इसको दोबारा शुरू करें।
क्या Ciprofloxacin का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर Ciprofloxacin के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अगर आप इसके दुष्प्रभावों को महसूस करें तो दवा लेना तुरंत बंद कर दें और जब डॉक्टर कहें तब ही इसे दोबारा लें।
Ciprofloxacin का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
कभी-कभी Ciprofloxacin से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
Ciprofloxacin का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Ciprofloxacin का लीवर पर हानिकारक प्रभाव बहुत ही कम होता है, जो आपको महसूस भी नहीं होता।
क्या ह्रदय पर Ciprofloxacin का प्रभाव पड़ता है?
हृदय पर कुछ ही मामलों में Ciprofloxacin का विपरित प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह प्रभाव बहुत कम होता है, जिससे कोई परेशानी नहीं होती है।
क्या Ciprofloxacin आदत या लत बन सकती है?
हां, इस दवा की लत पड़ सकती है। यह आवश्यक है कि Ciprofloxacin का सेवन डॉक्टर के निर्देश पर ही करें।
क्या Ciprofloxacin को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
Ciprofloxacin को खाने के बाद आपको वाहन चलाने व किसी मशीन पर काम नहीं करना चाहिए, यह खतरनाक हो सकता है।
क्या Ciprofloxacin को लेना सुरखित है?
हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Ciprofloxacin इस्तेमाल की जा सकती है?
नहीं, Ciprofloxacin दिमागी विकारों के इलाज में सक्षम नहीं है।
क्या Ciprofloxacin को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
Ciprofloxacin व खाने को एक साथ लेना आपके लिए घातक स्थिति पैदा कर सकता है। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा को न लें।
जब Ciprofloxacin ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
शराब के साथ Ciprofloxacin लेने से आपकी सेहत पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।
Ciprofloxacin कुछ मरीजों में टेंडोनिटाइटिस और टेंडन (हड्डियों को मासपेशियों से जोड़ने वाले ऊतक) के टूटने के खतरे को बढ़ा सकती है। हालांकि, टेंडन के टूटने के सही कारण का अब तक पता नहीं चल पाया है। अगर आपको Ciprofloxacin लेने के बाद टेंडन के टूटने या मांसपेशियों में दर्द महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
अगर डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और निर्दिष्ट समय में Ciprofloxacin ली जाए तो ये सुरक्षित है। हालांकि, इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं जिनमें चक्कर आना, सिर चकराना, सूजन, जोडों में दर्द शामिल है। अगर आपको Ciprofloxacin लेने के बाद इनमें से कोई भी साइड इफेक्ट महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
Ciprofloxacin के साथ पैरासिटामोल लेने पर किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट अब तक सामने नहीं आया है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि Ciprofloxacin के साथ पैरासिटामोल लेने पर कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है। Ciprofloxacin के साथ पैरासिटामोल लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है।
Ciprofloxacin, सिप्रोफ्लोक्सेसिन का ब्रांड है। Ciprofloxacin एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है जोकि फ्लोरोक्यूरोनोलोंस नामक दवाओं के समूह से संबंधित है। ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, मूत्राशय, श्वसन, त्वचा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, गिल्टी रोग और हड्डियों में संक्रमण जैसे बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में Ciprofloxacin का इस्तेमाल किया जाता है।
Ciprofloxacin के साथ वार्फरिन लेने पर हानिकारक प्रभाव सामने आ सकते हैं इसलिए Ciprofloxacin के साथ वार्फरिन नहीं लेनी चाहिए। अगर डॉक्टर आपको Ciprofloxacin प्रिस्क्राइब करते हैं तो उन्हें जरूर बताएं कि आप वार्फरिन ले रहे हैं।
US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Cipro® (ciprofloxacin hydrochloride)
| Ciprofloxacin डॉक्टर के द्वारा निर्धारित की जाने वाली दवा है, जो मेडिकल स्टोर से टैबलेट दवाओं के रूप में मिलती है। यूरिन इन्फेक्शन, बैक्टीरियल संक्रमण के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा, Ciprofloxacin के कुछ अन्य प्रयोग भी हैं, जिनके बारें में आगे बताया गया है। Ciprofloxacin को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। इन दुष्परिणामों के अलावा Ciprofloxacin के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Ciprofloxacin के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और बिगड़ जाते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। यह भी जानना जरूरी है कि Ciprofloxacin का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर मध्यम है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए मध्यम है। Ciprofloxacin से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। अनियमित दिल की धड़कन, हृदय रोग, मायस्थीनिया ग्रेविस इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Ciprofloxacin लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। Ciprofloxacin के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Ciprofloxacin लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Ciprofloxacin की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Ciprofloxacin की खुराक अलग हो सकती है। क्या Ciprofloxacin का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? यदि Ciprofloxacin का कोई दुष्प्रभाव प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य पर होता है तो इसका सेवन करना तुरंत बंद कर दें। इसके बाद चिकित्सक से सलाह के लेने पर ही इसको दोबारा शुरू करें। क्या Ciprofloxacin का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर Ciprofloxacin के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अगर आप इसके दुष्प्रभावों को महसूस करें तो दवा लेना तुरंत बंद कर दें और जब डॉक्टर कहें तब ही इसे दोबारा लें। Ciprofloxacin का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? कभी-कभी Ciprofloxacin से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। Ciprofloxacin का जिगर पर क्या असर होता है? Ciprofloxacin का लीवर पर हानिकारक प्रभाव बहुत ही कम होता है, जो आपको महसूस भी नहीं होता। क्या ह्रदय पर Ciprofloxacin का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर कुछ ही मामलों में Ciprofloxacin का विपरित प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह प्रभाव बहुत कम होता है, जिससे कोई परेशानी नहीं होती है। क्या Ciprofloxacin आदत या लत बन सकती है? हां, इस दवा की लत पड़ सकती है। यह आवश्यक है कि Ciprofloxacin का सेवन डॉक्टर के निर्देश पर ही करें। क्या Ciprofloxacin को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? Ciprofloxacin को खाने के बाद आपको वाहन चलाने व किसी मशीन पर काम नहीं करना चाहिए, यह खतरनाक हो सकता है। क्या Ciprofloxacin को लेना सुरखित है? हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Ciprofloxacin इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Ciprofloxacin दिमागी विकारों के इलाज में सक्षम नहीं है। क्या Ciprofloxacin को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Ciprofloxacin व खाने को एक साथ लेना आपके लिए घातक स्थिति पैदा कर सकता है। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा को न लें। जब Ciprofloxacin ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? शराब के साथ Ciprofloxacin लेने से आपकी सेहत पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। Ciprofloxacin कुछ मरीजों में टेंडोनिटाइटिस और टेंडन के टूटने के खतरे को बढ़ा सकती है। हालांकि, टेंडन के टूटने के सही कारण का अब तक पता नहीं चल पाया है। अगर आपको Ciprofloxacin लेने के बाद टेंडन के टूटने या मांसपेशियों में दर्द महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। अगर डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और निर्दिष्ट समय में Ciprofloxacin ली जाए तो ये सुरक्षित है। हालांकि, इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं जिनमें चक्कर आना, सिर चकराना, सूजन, जोडों में दर्द शामिल है। अगर आपको Ciprofloxacin लेने के बाद इनमें से कोई भी साइड इफेक्ट महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। Ciprofloxacin के साथ पैरासिटामोल लेने पर किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट अब तक सामने नहीं आया है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि Ciprofloxacin के साथ पैरासिटामोल लेने पर कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है। Ciprofloxacin के साथ पैरासिटामोल लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है। Ciprofloxacin, सिप्रोफ्लोक्सेसिन का ब्रांड है। Ciprofloxacin एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है जोकि फ्लोरोक्यूरोनोलोंस नामक दवाओं के समूह से संबंधित है। ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, मूत्राशय, श्वसन, त्वचा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, गिल्टी रोग और हड्डियों में संक्रमण जैसे बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में Ciprofloxacin का इस्तेमाल किया जाता है। Ciprofloxacin के साथ वार्फरिन लेने पर हानिकारक प्रभाव सामने आ सकते हैं इसलिए Ciprofloxacin के साथ वार्फरिन नहीं लेनी चाहिए। अगर डॉक्टर आपको Ciprofloxacin प्रिस्क्राइब करते हैं तो उन्हें जरूर बताएं कि आप वार्फरिन ले रहे हैं। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Cipro® |
मध्य प्रदेश के नीमच में एक 16 साल के बच्चे फुरकान कुरैशी की मौत पब्जी गेम (PUBG) खेलने से हो गई. बच्चे के पिता हारून राशिद कुरैशी के मुताबिक, उनका बेटा फुरकान लगातार 6 घण्टे से मोबाइल पर पब्जी गेम खेल रहा था. मरने से पहले वो चिल्लाने लगा कि ब्लास्ट कर, ब्लास्ट कर और उसकी मौत हो गई. अस्पताल भी ले गए थे लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि इसके दिमाग पर जोर पड़ने से मौत हो गई है.
फुरकान कुरैशी 16 साल का था और नसीराबाद के केंद्रीय विद्यालय में 12वीं का छात्र था. वो अपने परिवार के साथ नीमच एक सगाई के कार्यक्रम में आया था. फुरकान का परिवार भी पहले नीमच में रहता था. फुरकान बहुत एक्टिव बच्चा था. उसकी मौत से घर में खुशियों का मौहाल मातम में बदल गया.
फुरकान 25 मई को रात 2 बजे तक पब्जी खेलता रहा, फिर 26 की सुबह वह उठा, खाना खाया और लगातार 6 बजे तक पब्जी खेलता रहा. और गेम में जब उसका कैरेक्टर मरा तो उसकी भी मौत हो गई.
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| मध्य प्रदेश के नीमच में एक सोलह साल के बच्चे फुरकान कुरैशी की मौत पब्जी गेम खेलने से हो गई. बच्चे के पिता हारून राशिद कुरैशी के मुताबिक, उनका बेटा फुरकान लगातार छः घण्टे से मोबाइल पर पब्जी गेम खेल रहा था. मरने से पहले वो चिल्लाने लगा कि ब्लास्ट कर, ब्लास्ट कर और उसकी मौत हो गई. अस्पताल भी ले गए थे लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि इसके दिमाग पर जोर पड़ने से मौत हो गई है. फुरकान कुरैशी सोलह साल का था और नसीराबाद के केंद्रीय विद्यालय में बारहवीं का छात्र था. वो अपने परिवार के साथ नीमच एक सगाई के कार्यक्रम में आया था. फुरकान का परिवार भी पहले नीमच में रहता था. फुरकान बहुत एक्टिव बच्चा था. उसकी मौत से घर में खुशियों का मौहाल मातम में बदल गया. फुरकान पच्चीस मई को रात दो बजे तक पब्जी खेलता रहा, फिर छब्बीस की सुबह वह उठा, खाना खाया और लगातार छः बजे तक पब्जी खेलता रहा. और गेम में जब उसका कैरेक्टर मरा तो उसकी भी मौत हो गई. . |
कोरोना में अपने माता-पिता को गंवाने वाले बच्चों के लिए एक संस्था आगे आई है। वह जोधपुर के ओसियां में जिले के ग्रामीण क्षेत्र का पहला लक्ष्य बाल पुनर्वास केंद्र खोल रही है। यह शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। फिलहाल 29 बच्चों को चिन्हित किया गया है। उनमें वे बच्चे भी शामिल है, जिन्होंने कोरोना के अलावा कारणों से भी अपनों को खोना पड़ा। श्री मरुस्थलीय नवयुवक हितकारिणी शिक्षण संस्थान के कार्यकारी अधिकारी डॉ रविप्रकाश ने बताया कि शुक्रवार को लक्ष्य बाल पुर्नवास केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा।
जहां पर बच्चों के भोजन, आवास, शिक्षा जैसी सभी बुनियादी आवश्यकताए निःशुल्क मुहैया कराई जाएगी। संस्थान का उधेश्य जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित कर राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ना है। जिसको लेकर पूरे देश से 200 ऐसे जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने का लक्ष्य संस्थान द्वारा रखा गया है। फिलहाल संस्थान द्वारा ओसियां व आस पास के गांव ढाणियों से 29 बच्चों को चयनित किया गया है जिन्होंने अपने माता पिता को खोया है। उनको यहां इस केंद्र में रख कर उनके खाने पीने, शिक्षा सहित सभी बुनियादी जरूरतें पूरी की जाएगी।
लक्ष्य बाल पुनर्वास केंद्र का जेजे एक्ट में पंजीकरण होने के बाद इसे बाल गृह में स्थापित किया जाएगा। संस्थान के डॉ रविप्रकाश ने बताया कि इसके लिए बाल अधिकारिता विभाग में आवेदन किया जा चुका है। आगामी दो महीनों में स्वीकृति मिल जाएगी। उसके बाद बच्चों को यहां रखा जाकर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। जब तक स्वीकृति नहीं मिलती तब तक संस्थान द्वारा चयनित ऐसे बच्चों को उनके घर पर ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है।
सुबह 10 बजे पंचायत समिति सभागार भवन में केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। पुनर्वास केंद्र के लिए संस्थान द्वारा कस्बे के पुलिस थाने के निकट भवन किराए पर लिया गया है। जहां पर सभी सुविधा युक्त 20 कमरे तैयार किये गए हैं। इस केंद्र की देखरेख में भामाशाह व भाविका जन कल्याण संस्थान ओसियां, लब्धि निधान अन्नपूर्णा केंद्र जोधपुर का सहयोग रहेगा।
शुभारंभ के अवसर पर स्थानीय निकाय जोधपुर संभाग के उपनिदेशक दलवीर सिंह दढ्ढा, महिला बाल विकास विभाग जोधपुर के उपनिदेशक श्रवण सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरएसी प्रथम रतनलाल, सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग बजरंग लाल सारस्वत, वडेर चैरिटेबल जोधपुर के संस्थापक पदम वडेर, राजस्थान हाईकोर्ट के लीगल कमेटी सदस्य महावीर काकरिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
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| कोरोना में अपने माता-पिता को गंवाने वाले बच्चों के लिए एक संस्था आगे आई है। वह जोधपुर के ओसियां में जिले के ग्रामीण क्षेत्र का पहला लक्ष्य बाल पुनर्वास केंद्र खोल रही है। यह शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। फिलहाल उनतीस बच्चों को चिन्हित किया गया है। उनमें वे बच्चे भी शामिल है, जिन्होंने कोरोना के अलावा कारणों से भी अपनों को खोना पड़ा। श्री मरुस्थलीय नवयुवक हितकारिणी शिक्षण संस्थान के कार्यकारी अधिकारी डॉ रविप्रकाश ने बताया कि शुक्रवार को लक्ष्य बाल पुर्नवास केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। जहां पर बच्चों के भोजन, आवास, शिक्षा जैसी सभी बुनियादी आवश्यकताए निःशुल्क मुहैया कराई जाएगी। संस्थान का उधेश्य जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित कर राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ना है। जिसको लेकर पूरे देश से दो सौ ऐसे जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने का लक्ष्य संस्थान द्वारा रखा गया है। फिलहाल संस्थान द्वारा ओसियां व आस पास के गांव ढाणियों से उनतीस बच्चों को चयनित किया गया है जिन्होंने अपने माता पिता को खोया है। उनको यहां इस केंद्र में रख कर उनके खाने पीने, शिक्षा सहित सभी बुनियादी जरूरतें पूरी की जाएगी। लक्ष्य बाल पुनर्वास केंद्र का जेजे एक्ट में पंजीकरण होने के बाद इसे बाल गृह में स्थापित किया जाएगा। संस्थान के डॉ रविप्रकाश ने बताया कि इसके लिए बाल अधिकारिता विभाग में आवेदन किया जा चुका है। आगामी दो महीनों में स्वीकृति मिल जाएगी। उसके बाद बच्चों को यहां रखा जाकर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। जब तक स्वीकृति नहीं मिलती तब तक संस्थान द्वारा चयनित ऐसे बच्चों को उनके घर पर ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। सुबह दस बजे पंचायत समिति सभागार भवन में केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। पुनर्वास केंद्र के लिए संस्थान द्वारा कस्बे के पुलिस थाने के निकट भवन किराए पर लिया गया है। जहां पर सभी सुविधा युक्त बीस कमरे तैयार किये गए हैं। इस केंद्र की देखरेख में भामाशाह व भाविका जन कल्याण संस्थान ओसियां, लब्धि निधान अन्नपूर्णा केंद्र जोधपुर का सहयोग रहेगा। शुभारंभ के अवसर पर स्थानीय निकाय जोधपुर संभाग के उपनिदेशक दलवीर सिंह दढ्ढा, महिला बाल विकास विभाग जोधपुर के उपनिदेशक श्रवण सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरएसी प्रथम रतनलाल, सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग बजरंग लाल सारस्वत, वडेर चैरिटेबल जोधपुर के संस्थापक पदम वडेर, राजस्थान हाईकोर्ट के लीगल कमेटी सदस्य महावीर काकरिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (Ghazipur) जिले की सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के देवचंदपुर गांव स्थित पेट्रोल पंप पर बुधवार की रात असलहों से लैस हिस्ट्रीशीटर और उसके अपराधी साथियों ने गोली मारकर एक चौकीदार की हत्या कर दी, जबकि पंप पर तैनात दूसरा गार्ड गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। अचानक हुई अंधाधुंध फायरिंग से इलाके में हड़कंप मच गया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर बदमाश फायरिंग करते हुए फरार हो गए।
वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि घायल गार्ड को इलाज के लिए वाराणसी भेजा गया है। हत्या की सूचना मिलते ही एसपी भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मौका-ए-वारदात का निरीक्षण कर पांच टीमें जांच के लिए गठित कर दी हैं। साथ ही आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों ने बताया कि देवचंदपुर गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर शनि उर्फ कर्मवीर सिंह बुधवार की रात तकरीबन 10 बजे दो-चार पहिया वाहनों से 10 से 12 गुर्गों के साथ पेट्रोल पंप पर पहुंचा और वाहनों में तेल भरवाने लगा। उसी दौरान चौकीदार शिवमूरत बंदूक लिए बाहर निकले। उन्हें देखते ही शनि बोला बंदूक मत दिखाओ, हमारे पास बहुत असलहे हैं।
इसके बाद उसने साथियों से फायरिंग करने को कहा तो उसके गुर्गों ने 2-3 राउंड हवाई फायरिंग की। पंप मालिक के मना करने पर शनि और भड़क गया और वाहन से नीचे उतरकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगा। इस दौरान पंप के दूसरे चौकीदार 55 वर्षीय त्रिभुवन नारायण सिंह को एक गोली लग गई। इसके बाद त्रिभुवन अपनी बंदूक लेने दौड़कर अंदर गए लेकिन बदमाशों ने दौड़ाकर उनके सिरपर गोली मार दी।
इसके बाद बदमाश हवाई फायरिंग करते हुए भाग निकले। त्रिभुवन और शिवमूरत को इलाज के लिए वाराणसी ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने त्रिभुवन को मृत घोषित कर दिया। पंप संचालक अजय पांडेय ने शनि, आनंद उर्फ ढोलक सहित 10 अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। एसपी ओमप्रकाश सिंह घटना के तुरंत बाद मय फोर्स मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि अपराधियों को शीघ्र ही पकड़ लिया जाएगा। हिस्ट्रीशीटर शनि वर्ष 2008-09 में विधायक बीजू पटनायक की हत्या कर सुर्खियों में आया था। वह सैदपुर थाने का टाप टेन अपराधी भी है।
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| उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के देवचंदपुर गांव स्थित पेट्रोल पंप पर बुधवार की रात असलहों से लैस हिस्ट्रीशीटर और उसके अपराधी साथियों ने गोली मारकर एक चौकीदार की हत्या कर दी, जबकि पंप पर तैनात दूसरा गार्ड गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। अचानक हुई अंधाधुंध फायरिंग से इलाके में हड़कंप मच गया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर बदमाश फायरिंग करते हुए फरार हो गए। वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि घायल गार्ड को इलाज के लिए वाराणसी भेजा गया है। हत्या की सूचना मिलते ही एसपी भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मौका-ए-वारदात का निरीक्षण कर पांच टीमें जांच के लिए गठित कर दी हैं। साथ ही आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि देवचंदपुर गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर शनि उर्फ कर्मवीर सिंह बुधवार की रात तकरीबन दस बजे दो-चार पहिया वाहनों से दस से बारह गुर्गों के साथ पेट्रोल पंप पर पहुंचा और वाहनों में तेल भरवाने लगा। उसी दौरान चौकीदार शिवमूरत बंदूक लिए बाहर निकले। उन्हें देखते ही शनि बोला बंदूक मत दिखाओ, हमारे पास बहुत असलहे हैं। इसके बाद उसने साथियों से फायरिंग करने को कहा तो उसके गुर्गों ने दो-तीन राउंड हवाई फायरिंग की। पंप मालिक के मना करने पर शनि और भड़क गया और वाहन से नीचे उतरकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगा। इस दौरान पंप के दूसरे चौकीदार पचपन वर्षीय त्रिभुवन नारायण सिंह को एक गोली लग गई। इसके बाद त्रिभुवन अपनी बंदूक लेने दौड़कर अंदर गए लेकिन बदमाशों ने दौड़ाकर उनके सिरपर गोली मार दी। इसके बाद बदमाश हवाई फायरिंग करते हुए भाग निकले। त्रिभुवन और शिवमूरत को इलाज के लिए वाराणसी ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने त्रिभुवन को मृत घोषित कर दिया। पंप संचालक अजय पांडेय ने शनि, आनंद उर्फ ढोलक सहित दस अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। एसपी ओमप्रकाश सिंह घटना के तुरंत बाद मय फोर्स मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि अपराधियों को शीघ्र ही पकड़ लिया जाएगा। हिस्ट्रीशीटर शनि वर्ष दो हज़ार आठ-नौ में विधायक बीजू पटनायक की हत्या कर सुर्खियों में आया था। वह सैदपुर थाने का टाप टेन अपराधी भी है। |
अनंतनाग. जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) के अनंतनाग ज़िले में चार जगहों पर इस वक्त राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की छापेमारी चल रही है. कहा जा रहा है कि ये छापेमारी आतंकियों की फंडिंग से जुड़ा है. जांच एजेंसी ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या घाटी में आंतकियों को ISIS से फंड तो नहीं मिल रहे हैं. अब तक इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक 36 साल की महिला भी शामिल है. NIA के साथ-साथ ये छापेमारी जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के सुरक्षाकर्मी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इस केस में और भी कुछ गिरफ्तारियां हो सकती है.
| अनंतनाग. जम्मू कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में चार जगहों पर इस वक्त राष्ट्रीय जांच एजेंसी की छापेमारी चल रही है. कहा जा रहा है कि ये छापेमारी आतंकियों की फंडिंग से जुड़ा है. जांच एजेंसी ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या घाटी में आंतकियों को ISIS से फंड तो नहीं मिल रहे हैं. अब तक इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक छत्तीस साल की महिला भी शामिल है. NIA के साथ-साथ ये छापेमारी जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के सुरक्षाकर्मी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इस केस में और भी कुछ गिरफ्तारियां हो सकती है. |
प्रशासन पर विधायी नियन्त्ररण
अभिकरण अथवा विभाग को ही अपनी सत्ता का हस्तातरण करती है जोकि उसके नियन्त्ररण मे होता है ।
(२) ससद हस्तातरित की गई विभायी शक्ति की सीमाओ की स्पष्ट रूप से व्याख्या करती है और यदि उन सीमाओो का उल्लघन किया जाता है तो नागरिको के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालयो का प्राश्रय दिया जाता है ।
न्यायाधिकारी वर्ग देशो ( Orders) की छानवीन कर सकता है और उनको अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर सकता है । 2
प्रत ससद ऐसी व्यवस्था करती है कि हस्तातरित शक्ति के कार्यान्वय का खण्डन किया जा सके । नियमो (Rules) को सदन-कक्ष मे चुनौती दी जा सकती है । संसदीय नियन्त्ररण की दृष्टि से, इगलैंड मे दो प्रकार के वैधानिक लेख पत्र हैं
( १ ) एक तो वे, जिनके लिए ससद से स्वीकारात्मक प्रस्ताव ( Affirmative resolution) प्राप्त करना ही होता है । लेख पत्र ( Instrument) का मसौदा (Draft) ससद के सामने रखा जाता है और यह व्यवस्था की जाती है कि "यदि वह एक सपरिषद् आदेश (Order-in-council) है तो यह महामहिम (His Majesty ) के समक्ष नही प्रस्तुत किया जायेगा, अथवा यदि वह कोई अन्य लेख पत्र है तो उसका निर्माण नही किया जायेगा, जब तक कि सपरिषद् प्रदेश की स्थिति मे, प्रत्येक सदन ( House ) महामहिम से यह प्रार्थना न करे कि प्रदेश किया जाना चाहिए, अथवा अन्य किसी स्थिति में प्रत्येक सदन यह न निश्चय कर ले कि लेख पत्र का निर्माण किया जायेगा।" नियम एक स्वीकारात्मक प्रस्ताव के द्वारा ससद से अनुमोदित किए जाने होते हैं ।
(२) दूसरे वे, जोकि अस्वीकृत की प्रक्रिया (Annulment procedure) के अधीन होते हैं । ससद को यह शक्ति प्राप्त होती है कि वह अस्वीकृति प्रस्ताव ( Annulment resolution ) पास कर सके अथवा स्वीकारात्मक प्रस्ताव को अस्वीकार कर सके ।
नियम चालीस दिन की अवधि के लिए सदन की मेज पर रखने होते हैं ।
सूक्ष्म-परीक्षण समिति की व्यवस्था
(Provision of a Scrutiny Committee) इगलैंड मे Donoughmore Committee (१९३२) ने यह सिफारिश की कि प्रत्येक सदन में एक-एक स्थायी समिति ( Standing Committee ) की स्थापना
1 In a case in England in 1917, Lord Shaw of Dunfermline in Rex V, Halliday observed "The Increasing crust of legislative efforts and the Convenience to the executive of a refuge to the device of orders in Council would increase that danger (i e transitions to arbitrary government) ten fold were the Judiciary to approach any action of the Government in a spirit of Compliance rather than that of independent scrutiny"
होनी चाहिए, जोकि ऐसे प्रत्येक विधेयक (Bill) पर विचार करे तथा अपने प्रतिवेदन दे जिसमे विधि-निर्माण की शक्तिया मन्त्री को सौंपने का प्रस्ताव हो, तथा हस्तांतरित विधायी शक्ति के कार्यान्वय के लिए बनाये गए ऐसे प्रत्येक विनियम ( Regulation ) तथा नियम पर विचार करे एवं अपना प्रतिवेदन दे, जिसको सदन के समक्ष रखने की आवश्यकता हो । यह सिफारिश स्वीकार नहीं की गई थी । युद्धकाल मे, हस्तातरित विधान का पर्यवेक्षण करने के लिए लोकसभा ( House of Commons ) मे वैधानिक नियमो तथा प्रदेशो ( Statutory Rules and orders ) पर एक प्रवर समिति ( Select Committee) की स्थापना की गई थी और लार्डसभा (House of Lords) मे एक विशिष्ट प्रदेश समिति ( Special Orders Committee) की स्थापना की गई थी ।
आजकल वैधानिक लेख पत्रो ( Statutory Instruments ) पर एक प्रवर समिति बनी हुई है, जिसे कि सूक्ष्म परीक्षण कहा जाता है । यह ऐसे सारे ही लेख पत्रो की जाच करती है जिनके लिए चाहे स्वीकारात्मक प्रस्ताव को कार्यविधि ( Affirmative resolution procedure) निर्धारित की गई हो अथवा नकारात्मक (Negative) प्रस्ताव की कार्यविधि ।
भारत मे अधीनस्थ विधान पर समिति
(Committee on Subordinate Legislation in India)
भारत मे अधीनस्थ विधान पर विचार करने के लिए एक समिति बनी हुई है जोकि इस बात की छानबीन करती है कि विनियम (Regulations ), नियम ( Rules) उप-नियम ( Sub-rules ) व उप-विधिया (Bye laws) आदि बनाने की सविधान द्वारा प्रदत्त अथवा ससद द्वारा हस्तातरित शक्तियों का कार्यान्वय, ऐसे विधान की परिधि के अन्तर्गत, समुचित रूप से किया जा रहा है या नही और सदन को उसकी सूचना देती है । समिति मे पन्द्रह व्यक्ति होते है जोकि प्रध्यक्ष ( Speaker ) द्वारा एक वर्ष के लिए मनोनीत किये जाते हैं । ससद द्वारा अधीनस्थ प्राधिकारी को हस्तातरित किये गए विधायी कार्यों (Legislative functions ) के अनुसरण के लिए बनाया गया कोई भी विनियम, नियम, उप-नियम व उप-विधि आदि सदन के सामने रखा जायेगा और घोषणा के तुरन्त पश्चात् ही राज्य पत्र ( गजट ) में प्रकाशित किया जायेगा । समिति के कर्तव्य निम्न हैनियम ३१६ मे उल्लिखित ऐसा प्रत्येक प्रदेश सदन के सामने रखा जाने के पश्चात् समिति, विशेष रूप से, इस बात पर विचार करेगी कि -
( १ ) क्या यह आदेश संविधान के श्रथवा उस अधिनियम ( Act ) के सामान्यउद्देश्यो के अनुरूप है जिसके अनुसरण मे कि उसका निर्माण किया गया है
(२) क्या उसमे कोई ऐसा विषय है जिस पर कि, समिति की राय मे, ससद के एक अधिनियम के रूप मे अधिक उपयुक्त रूप से विचार तथा व्यवहार किया जाना चाहिए, | प्रशासन पर विधायी नियन्त्ररण अभिकरण अथवा विभाग को ही अपनी सत्ता का हस्तातरण करती है जोकि उसके नियन्त्ररण मे होता है । ससद हस्तातरित की गई विभायी शक्ति की सीमाओ की स्पष्ट रूप से व्याख्या करती है और यदि उन सीमाओो का उल्लघन किया जाता है तो नागरिको के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालयो का प्राश्रय दिया जाता है । न्यायाधिकारी वर्ग देशो की छानवीन कर सकता है और उनको अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर सकता है । दो प्रत ससद ऐसी व्यवस्था करती है कि हस्तातरित शक्ति के कार्यान्वय का खण्डन किया जा सके । नियमो को सदन-कक्ष मे चुनौती दी जा सकती है । संसदीय नियन्त्ररण की दृष्टि से, इगलैंड मे दो प्रकार के वैधानिक लेख पत्र हैं एक तो वे, जिनके लिए ससद से स्वीकारात्मक प्रस्ताव प्राप्त करना ही होता है । लेख पत्र का मसौदा ससद के सामने रखा जाता है और यह व्यवस्था की जाती है कि "यदि वह एक सपरिषद् आदेश है तो यह महामहिम के समक्ष नही प्रस्तुत किया जायेगा, अथवा यदि वह कोई अन्य लेख पत्र है तो उसका निर्माण नही किया जायेगा, जब तक कि सपरिषद् प्रदेश की स्थिति मे, प्रत्येक सदन महामहिम से यह प्रार्थना न करे कि प्रदेश किया जाना चाहिए, अथवा अन्य किसी स्थिति में प्रत्येक सदन यह न निश्चय कर ले कि लेख पत्र का निर्माण किया जायेगा।" नियम एक स्वीकारात्मक प्रस्ताव के द्वारा ससद से अनुमोदित किए जाने होते हैं । दूसरे वे, जोकि अस्वीकृत की प्रक्रिया के अधीन होते हैं । ससद को यह शक्ति प्राप्त होती है कि वह अस्वीकृति प्रस्ताव पास कर सके अथवा स्वीकारात्मक प्रस्ताव को अस्वीकार कर सके । नियम चालीस दिन की अवधि के लिए सदन की मेज पर रखने होते हैं । सूक्ष्म-परीक्षण समिति की व्यवस्था इगलैंड मे Donoughmore Committee ने यह सिफारिश की कि प्रत्येक सदन में एक-एक स्थायी समिति की स्थापना एक In a case in England in एक हज़ार नौ सौ सत्रह, Lord Shaw of Dunfermline in Rex V, Halliday observed "The Increasing crust of legislative efforts and the Convenience to the executive of a refuge to the device of orders in Council would increase that danger ten fold were the Judiciary to approach any action of the Government in a spirit of Compliance rather than that of independent scrutiny" होनी चाहिए, जोकि ऐसे प्रत्येक विधेयक पर विचार करे तथा अपने प्रतिवेदन दे जिसमे विधि-निर्माण की शक्तिया मन्त्री को सौंपने का प्रस्ताव हो, तथा हस्तांतरित विधायी शक्ति के कार्यान्वय के लिए बनाये गए ऐसे प्रत्येक विनियम तथा नियम पर विचार करे एवं अपना प्रतिवेदन दे, जिसको सदन के समक्ष रखने की आवश्यकता हो । यह सिफारिश स्वीकार नहीं की गई थी । युद्धकाल मे, हस्तातरित विधान का पर्यवेक्षण करने के लिए लोकसभा मे वैधानिक नियमो तथा प्रदेशो पर एक प्रवर समिति की स्थापना की गई थी और लार्डसभा मे एक विशिष्ट प्रदेश समिति की स्थापना की गई थी । आजकल वैधानिक लेख पत्रो पर एक प्रवर समिति बनी हुई है, जिसे कि सूक्ष्म परीक्षण कहा जाता है । यह ऐसे सारे ही लेख पत्रो की जाच करती है जिनके लिए चाहे स्वीकारात्मक प्रस्ताव को कार्यविधि निर्धारित की गई हो अथवा नकारात्मक प्रस्ताव की कार्यविधि । भारत मे अधीनस्थ विधान पर समिति भारत मे अधीनस्थ विधान पर विचार करने के लिए एक समिति बनी हुई है जोकि इस बात की छानबीन करती है कि विनियम , नियम उप-नियम व उप-विधिया आदि बनाने की सविधान द्वारा प्रदत्त अथवा ससद द्वारा हस्तातरित शक्तियों का कार्यान्वय, ऐसे विधान की परिधि के अन्तर्गत, समुचित रूप से किया जा रहा है या नही और सदन को उसकी सूचना देती है । समिति मे पन्द्रह व्यक्ति होते है जोकि प्रध्यक्ष द्वारा एक वर्ष के लिए मनोनीत किये जाते हैं । ससद द्वारा अधीनस्थ प्राधिकारी को हस्तातरित किये गए विधायी कार्यों के अनुसरण के लिए बनाया गया कोई भी विनियम, नियम, उप-नियम व उप-विधि आदि सदन के सामने रखा जायेगा और घोषणा के तुरन्त पश्चात् ही राज्य पत्र में प्रकाशित किया जायेगा । समिति के कर्तव्य निम्न हैनियम तीन सौ सोलह मे उल्लिखित ऐसा प्रत्येक प्रदेश सदन के सामने रखा जाने के पश्चात् समिति, विशेष रूप से, इस बात पर विचार करेगी कि - क्या यह आदेश संविधान के श्रथवा उस अधिनियम के सामान्यउद्देश्यो के अनुरूप है जिसके अनुसरण मे कि उसका निर्माण किया गया है क्या उसमे कोई ऐसा विषय है जिस पर कि, समिति की राय मे, ससद के एक अधिनियम के रूप मे अधिक उपयुक्त रूप से विचार तथा व्यवहार किया जाना चाहिए, |
अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित मशहूर बैडमिंटन कोच पी. गोपीचंद बतौर मुख्य अतिथि इस आयोजन का हिस्सा बने जिन्होंने मैराथन को झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। उन्होंने युवा प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया और कहा कि यह खेल मंत्री विजय गोयल के नेतृत्व में खेल मंत्रालय की एक अनूठी पहल है। खेल मंत्रालय के इस अनोखे कदम की प्रशंसा करते हुए गोपीचंद ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से गांव-देहात में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही उन्हें भविष्य के लिए प्रशिक्षित किया जा सकेगा। युवा मामले एवं खेल मंत्री श्री विजय गोयल इस बारे में पहले ही कह चुके हैं कि इस तरह के खेल आयोजन आगे भी होते रहेंगे जहां प्रतिभावान युवाओं को देश का प्रतिनिधित्व करने के भरपूर अवसर मिलेंगे। श्री गोयल ने कहा था कि आज भी हमारे खिलाड़ियों का ज्यादातर हिस्सा गांव-देहात से ही आता है इसलिए हमारे लिए ये बेहद अहम है कि हम इन युवाओं को अलग-अलग खेलों में प्रशिक्षित करें।
इस मैराथन में पहले तीन स्थानों पर आने वाले धावकों को हर श्रेणी (बालक एवं बालिकाएं) में क्रमशः 21,000 रुपए, 11,000 रुपए औऱ 5000 रुपए दिए गए। इसके साथ ही 10 प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए। मंत्रालय आने वाले हफ्तों में इस तरह की कई और ग्रामीण मैराथन आयोजित करेगा।
| अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित मशहूर बैडमिंटन कोच पी. गोपीचंद बतौर मुख्य अतिथि इस आयोजन का हिस्सा बने जिन्होंने मैराथन को झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। उन्होंने युवा प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया और कहा कि यह खेल मंत्री विजय गोयल के नेतृत्व में खेल मंत्रालय की एक अनूठी पहल है। खेल मंत्रालय के इस अनोखे कदम की प्रशंसा करते हुए गोपीचंद ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से गांव-देहात में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही उन्हें भविष्य के लिए प्रशिक्षित किया जा सकेगा। युवा मामले एवं खेल मंत्री श्री विजय गोयल इस बारे में पहले ही कह चुके हैं कि इस तरह के खेल आयोजन आगे भी होते रहेंगे जहां प्रतिभावान युवाओं को देश का प्रतिनिधित्व करने के भरपूर अवसर मिलेंगे। श्री गोयल ने कहा था कि आज भी हमारे खिलाड़ियों का ज्यादातर हिस्सा गांव-देहात से ही आता है इसलिए हमारे लिए ये बेहद अहम है कि हम इन युवाओं को अलग-अलग खेलों में प्रशिक्षित करें। इस मैराथन में पहले तीन स्थानों पर आने वाले धावकों को हर श्रेणी में क्रमशः इक्कीस,शून्य रुपयापए, ग्यारह,शून्य रुपयापए औऱ पाँच हज़ार रुपयापए दिए गए। इसके साथ ही दस प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए। मंत्रालय आने वाले हफ्तों में इस तरह की कई और ग्रामीण मैराथन आयोजित करेगा। |
राष्ट्रपति प्रशासन के पूर्व प्रमुख वैलेन्टिन युमाशेव ने राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के राज्य प्रमुख के पद से प्रस्थान की 20 वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर व्लादिमीर पॉज़नर को एक साक्षात्कार दिया। येल्तसिन केंद्र में साक्षात्कार रिकॉर्ड किए गए थे। पॉज़नर ने अपने वार्ताकार से यह जानने की कोशिश की कि बोरिस येल्तसिन ने व्लादिमीर पुतिन को दो साल पहले अपने उत्तराधिकारी के रूप में क्यों चुना।
वैलेंटाइन युमशेव के अनुसार, जिन्होंने एक्सएनयूएमएक्स के अध्यक्ष सलाहकार का पद भी संभाला, बोरिस येल्तसिन के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण था कि "वह व्यक्ति यूएसएसआर के अधीन नहीं था"। जाहिर है, यह संघ स्तर पर बिजली की कमी को दर्शाता है।
युमशेव ने कहा कि येल्तसिन ने अपने उदारवादी सुधारों को जारी रखने की आशा के आधार पर एक उत्तराधिकारी को चुना। राष्ट्रपति प्रशासन के पूर्व प्रमुख ने कहा कि व्लादिमीर पुतिन में बोरिस येल्तसिन ने "एक कोर के साथ एक आदमी को देखा" और भविष्य के उत्तराधिकारी का चरित्र तत्कालीन राष्ट्रपति के लिए महत्वपूर्ण था।
युमशेव से पूछा गया कि येल्तसिन ने समयसीमा का इंतजार क्यों नहीं किया और आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस्तीफा दे दिया।
तत्कालीन सलाहकार बोरिस येल्तसिन के अनुसार, राष्ट्रपति "प्राइमाकोव और लामकोव के ऊपर पुतिन को शगुन देना चाहते थे। " युमशेव ने कहा कि येल्तसिन ने शेड्यूल से आगे इस्तीफा दे दिया क्योंकि वह चाहते थे कि पुतिन एक्सएनयूएमएक्स वर्ष में जीत की गारंटी दें।
येल्तसिन प्रशासन के पूर्व प्रमुख, पॉज़्नर के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि बोरिस येल्तसिन वर्ष के दिसंबर 31 के एक्सएनयूएमएक्स के बारे में बहुत खुश थे, "हालांकि यह उनके लिए बहुत मुश्किल दिन था। "
स्मरण करो कि एक्सएनयूएमएक्स के दिसंबर एक्सएनएक्सएक्स पर पूरे देश ने आवाज़ लगाईः "मैं थक गया हूं। मैं जा रहा हूँ। " तब कई रूसियों ने शुरू में इस येल्तसिन के बयान को नए साल के मजाक के रूप में माना था।
| राष्ट्रपति प्रशासन के पूर्व प्रमुख वैलेन्टिन युमाशेव ने राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के राज्य प्रमुख के पद से प्रस्थान की बीस वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर व्लादिमीर पॉज़नर को एक साक्षात्कार दिया। येल्तसिन केंद्र में साक्षात्कार रिकॉर्ड किए गए थे। पॉज़नर ने अपने वार्ताकार से यह जानने की कोशिश की कि बोरिस येल्तसिन ने व्लादिमीर पुतिन को दो साल पहले अपने उत्तराधिकारी के रूप में क्यों चुना। वैलेंटाइन युमशेव के अनुसार, जिन्होंने एक्सएनयूएमएक्स के अध्यक्ष सलाहकार का पद भी संभाला, बोरिस येल्तसिन के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण था कि "वह व्यक्ति यूएसएसआर के अधीन नहीं था"। जाहिर है, यह संघ स्तर पर बिजली की कमी को दर्शाता है। युमशेव ने कहा कि येल्तसिन ने अपने उदारवादी सुधारों को जारी रखने की आशा के आधार पर एक उत्तराधिकारी को चुना। राष्ट्रपति प्रशासन के पूर्व प्रमुख ने कहा कि व्लादिमीर पुतिन में बोरिस येल्तसिन ने "एक कोर के साथ एक आदमी को देखा" और भविष्य के उत्तराधिकारी का चरित्र तत्कालीन राष्ट्रपति के लिए महत्वपूर्ण था। युमशेव से पूछा गया कि येल्तसिन ने समयसीमा का इंतजार क्यों नहीं किया और आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस्तीफा दे दिया। तत्कालीन सलाहकार बोरिस येल्तसिन के अनुसार, राष्ट्रपति "प्राइमाकोव और लामकोव के ऊपर पुतिन को शगुन देना चाहते थे। " युमशेव ने कहा कि येल्तसिन ने शेड्यूल से आगे इस्तीफा दे दिया क्योंकि वह चाहते थे कि पुतिन एक्सएनयूएमएक्स वर्ष में जीत की गारंटी दें। येल्तसिन प्रशासन के पूर्व प्रमुख, पॉज़्नर के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि बोरिस येल्तसिन वर्ष के दिसंबर इकतीस के एक्सएनयूएमएक्स के बारे में बहुत खुश थे, "हालांकि यह उनके लिए बहुत मुश्किल दिन था। " स्मरण करो कि एक्सएनयूएमएक्स के दिसंबर एक्सएनएक्सएक्स पर पूरे देश ने आवाज़ लगाईः "मैं थक गया हूं। मैं जा रहा हूँ। " तब कई रूसियों ने शुरू में इस येल्तसिन के बयान को नए साल के मजाक के रूप में माना था। |
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश में जारी ईंधन का संकट क्रिसमस तक रह सकता है।
फ़ार्स न्यूज़ के अनुसार बोरिस जाॅनसन ने मेनचेस्टर में कंज़रवेटिव पार्टी के समारोह को संबोधित करते हुए यह बात स्वीकार की है कि महीनों से देश के परिवहन उद्योग की समस्याओं से वे अवगत हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट क्रिसमस तक बाक़ी रह सकता है।
इससे पहले ब्रिटेन के पेट्रोलपंपों के संघ के प्रमुख ब्रायान मेडरसन शनिवार को कह चुके हैं कि देश में विशेषकर राजधानी लंदन में पेट्रोल का संकट अभी और गहरा होगा।
ब्रिटेन ने इस वर्ष के आरंभ में यूरोपीय संघ को त्याग दिया था। ब्रेगज़िट समझौते के बाद लगभग 20 हज़ार विदेशी ट्रक ड्राइवर ब्रिटेन छोड़कर चले गए जिसके कारण वहां पर ईंधन का संकट पैदा हो गया। ईंधन की कमी को दूर करने के लिए अब ब्रिटेन में सेना की मदद ली जा रही है।
ब्रिटेन की सरकार के अनुसार सोमवार से सैन्य बल देश में ईंधन की आपूर्ति में सहायता करेंगे। सरकार का कहना है कि देश में ट्रक चालकों की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से वह विदेशी चालकों के लिए 5000 वीज़े जारी करने जा रही है।
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| ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश में जारी ईंधन का संकट क्रिसमस तक रह सकता है। फ़ार्स न्यूज़ के अनुसार बोरिस जाॅनसन ने मेनचेस्टर में कंज़रवेटिव पार्टी के समारोह को संबोधित करते हुए यह बात स्वीकार की है कि महीनों से देश के परिवहन उद्योग की समस्याओं से वे अवगत हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट क्रिसमस तक बाक़ी रह सकता है। इससे पहले ब्रिटेन के पेट्रोलपंपों के संघ के प्रमुख ब्रायान मेडरसन शनिवार को कह चुके हैं कि देश में विशेषकर राजधानी लंदन में पेट्रोल का संकट अभी और गहरा होगा। ब्रिटेन ने इस वर्ष के आरंभ में यूरोपीय संघ को त्याग दिया था। ब्रेगज़िट समझौते के बाद लगभग बीस हज़ार विदेशी ट्रक ड्राइवर ब्रिटेन छोड़कर चले गए जिसके कारण वहां पर ईंधन का संकट पैदा हो गया। ईंधन की कमी को दूर करने के लिए अब ब्रिटेन में सेना की मदद ली जा रही है। ब्रिटेन की सरकार के अनुसार सोमवार से सैन्य बल देश में ईंधन की आपूर्ति में सहायता करेंगे। सरकार का कहना है कि देश में ट्रक चालकों की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से वह विदेशी चालकों के लिए पाँच हज़ार वीज़े जारी करने जा रही है। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए! |
पोर्टल navaltoday. com के अनुसार, नए जर्मन फ्रिगेट बाडेन-वुर्टेमबर्ग ने रॉकेट्स रैम और हार्पून का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, उन्हें मानक लांचर से जारी किया, रिपोर्ट "Warspot"
बाडेन-वुर्टेमबर्ग जर्मन नौसेना के लिए आदेशित चार एफ 125 प्रकार के जहाजों में से पहला है। फ्रिगेट के कारखाने परीक्षणों को अंतिम गिरावट के बाद समाप्त कर दिया गया था, जिसके बाद इसे जर्मन नौसेना में स्थानांतरित कर दिया गया था और परीक्षण प्रणालियों का परीक्षण किया जा रहा है (इस वर्ष के जनवरी में, चालक दल ने हवाई तोपखाने के काम का परीक्षण किया)। यह योजना बनाई गई है कि इस गर्मी में बाडेन-वुर्टेमबर्ग औपचारिक रूप से युद्ध शुल्क लेंगे।
परीक्षण के दौरान, चालक दल ने RIM-116 (जहाज की प्रत्यक्ष सुरक्षा के लिए विमान भेदी मिसाइल प्रणाली) से तीन मिसाइलें दागीं, साथ ही एक एंटी-शिप मिसाइल हार्पून भी।
आकार में, टाइप एफ 125 के जहाज विध्वंसक के समान हैं, लेकिन जर्मनी में उन्हें फ्रिगेट के रूप में वर्गीकृत किया गया है। बाडेन-वुर्टेमबर्ग की लंबाई लगभग 150 मीटर है, इसकी चौड़ाई 19 मीटर है, ड्राफ्ट 5 मीटर है, कुल विस्थापन 7200 टन तक पहुंचता है। एफ 125 प्रकार के फ्रिगेट डीजल जनरेटर और इलेक्ट्रिक मोटर्स के संयोजन से एक कॉडलाग संयुक्त शक्ति से लैस हैं। नए जहाजों की प्रमुख विशेषताओं में से एक लंबे रखरखाव चक्र है। मध्यम तीव्रता (5000 प्रति वर्ष) का संचालन करते हुए, फ्रिगेट को दो साल तक आधार पर रखरखाव के बिना करना चाहिए।
बाडेन-वुर्टेमबर्ग फ्रिगेट 127 मिमी ओटोब्रेडा तोपखाने और दो 27 मिमी एमएलजी 27 एंटी-एयरक्राफ्ट गन से लैस है। इसके अलावा, जहाज ने विभिन्न प्रकार की लड़ाकू मिसाइलों और पनडुब्बी रोधी बोरपेडो के लिए खानों को लॉन्च किया है।
| पोर्टल navaltoday. com के अनुसार, नए जर्मन फ्रिगेट बाडेन-वुर्टेमबर्ग ने रॉकेट्स रैम और हार्पून का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, उन्हें मानक लांचर से जारी किया, रिपोर्ट "Warspot" बाडेन-वुर्टेमबर्ग जर्मन नौसेना के लिए आदेशित चार एफ एक सौ पच्चीस प्रकार के जहाजों में से पहला है। फ्रिगेट के कारखाने परीक्षणों को अंतिम गिरावट के बाद समाप्त कर दिया गया था, जिसके बाद इसे जर्मन नौसेना में स्थानांतरित कर दिया गया था और परीक्षण प्रणालियों का परीक्षण किया जा रहा है । यह योजना बनाई गई है कि इस गर्मी में बाडेन-वुर्टेमबर्ग औपचारिक रूप से युद्ध शुल्क लेंगे। परीक्षण के दौरान, चालक दल ने RIM-एक सौ सोलह से तीन मिसाइलें दागीं, साथ ही एक एंटी-शिप मिसाइल हार्पून भी। आकार में, टाइप एफ एक सौ पच्चीस के जहाज विध्वंसक के समान हैं, लेकिन जर्मनी में उन्हें फ्रिगेट के रूप में वर्गीकृत किया गया है। बाडेन-वुर्टेमबर्ग की लंबाई लगभग एक सौ पचास मीटर है, इसकी चौड़ाई उन्नीस मीटर है, ड्राफ्ट पाँच मीटर है, कुल विस्थापन सात हज़ार दो सौ टन तक पहुंचता है। एफ एक सौ पच्चीस प्रकार के फ्रिगेट डीजल जनरेटर और इलेक्ट्रिक मोटर्स के संयोजन से एक कॉडलाग संयुक्त शक्ति से लैस हैं। नए जहाजों की प्रमुख विशेषताओं में से एक लंबे रखरखाव चक्र है। मध्यम तीव्रता का संचालन करते हुए, फ्रिगेट को दो साल तक आधार पर रखरखाव के बिना करना चाहिए। बाडेन-वुर्टेमबर्ग फ्रिगेट एक सौ सत्ताईस मिमी ओटोब्रेडा तोपखाने और दो सत्ताईस मिमी एमएलजी सत्ताईस एंटी-एयरक्राफ्ट गन से लैस है। इसके अलावा, जहाज ने विभिन्न प्रकार की लड़ाकू मिसाइलों और पनडुब्बी रोधी बोरपेडो के लिए खानों को लॉन्च किया है। |
नई दिल्ली। यौन शोषण के आरोपी तरुण तेजपाल की जमानत अर्जी पर एक ओर जहां गोवा की कोर्ट में बहस चल रही है वहीं एक दूसरी बहस ट्विटर पर चल रही है। हालांकि इसमें तेजपाल पर तीखे कमेंट्स करने वाले ज्यादा है। इसमें राजनेताओं से लेकर आम आदमी तक शामिल है। आईए तरुण तेजपाल पर चल रहे ट्विटर कमेंट्स पर एक नजर डालते हैं :
- राम गोपाल वर्मा ने लिखा है कि एक व्यक्ति पूरी संस्था को बर्बाद कर देता है।
- किरण बेदी ने इस मामले को बेहद संवेदनशील मुद़दा बताते हुए तेजपाल की जमकर खिंचाई की है। उन्होंने लिखा है कि यह केवल बदसलूकी का मामला नहीं है। तेजपाल ने एक नहीं बल्कि दो बार पीड़िता के साथ गलत काम किया है।
- तसलीमा नसरीन ने लिखा है कि रेपिस्ट और गलत लोग तेजपाल के साथ सहानुभूति बरत रहे हैं।
- रुकमणी ने अपने ट्वीट में पीडिता की तारीफ करते हुए लिखा है कि वह इस यंग वूमेन के साथ है जिसने अपने साथ हुए इस अपराध के खिलाफ आवाज उठाई है।
- बेड डॉक्टर के नाम से किए गए ट्वीट में तेजपाल के गोवा फ्लाइट से जाने पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा है कि तेजपाल के हवाई जहाज से गोवा जाने पर उसमें सवार एयरहोस्टेजिज को प्रदर्शन करना चाहिए था कि उन्हें तेजपाल से बचाया जाए।
- वरुण गांधी ने शोमा चौधरी और तेजपाल को धोखेबाजों की सत्ता का नया वारिस बताया है।
- कंचन गुप्ता ने लिखा है कि कोर्ट में तेजपाल के बचाव की दलीलों पर पूरी किताब लिखी जा सकती है। उन्होंने इसको बदतमीजी की पराकाष्ठा बताया हे। उनका कहना है कि तेजपाल के वक ल ने पीडिता के चरित्र पर सवाल उठाकर बेहद गलत काम किया है।
- शिवराम विज ने लिखा है कि मेधा पाटकर ने स्टिंकफास्ट 2013 में भाग लेने से मना कर दिया था और भाजपा ने तेजपाल को मुश्किलों में डाल दिया है।
- सुरेश ने ट्विटर पर तेजपाल के वकील द्वारा पीडिता का नाम लेने पर वकील की खिंचाई की है। उनका कहना है कि यह कोई एक्सीडेंट नहीं है जो उन्होंने पीड़िता का नाम लिया है। इससे पहले उन्होने इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी को पीड़िता का नाम लिखने को भी कहा था।
- रफी इंडियन ने कांबली और तेजपाल को एक साथ रखते हुए लिखा है कि एक को नारी ने बर्बाद कर दिया तो दूसरे को कोरोनारी तबाह कर रही है।
| नई दिल्ली। यौन शोषण के आरोपी तरुण तेजपाल की जमानत अर्जी पर एक ओर जहां गोवा की कोर्ट में बहस चल रही है वहीं एक दूसरी बहस ट्विटर पर चल रही है। हालांकि इसमें तेजपाल पर तीखे कमेंट्स करने वाले ज्यादा है। इसमें राजनेताओं से लेकर आम आदमी तक शामिल है। आईए तरुण तेजपाल पर चल रहे ट्विटर कमेंट्स पर एक नजर डालते हैं : - राम गोपाल वर्मा ने लिखा है कि एक व्यक्ति पूरी संस्था को बर्बाद कर देता है। - किरण बेदी ने इस मामले को बेहद संवेदनशील मुद़दा बताते हुए तेजपाल की जमकर खिंचाई की है। उन्होंने लिखा है कि यह केवल बदसलूकी का मामला नहीं है। तेजपाल ने एक नहीं बल्कि दो बार पीड़िता के साथ गलत काम किया है। - तसलीमा नसरीन ने लिखा है कि रेपिस्ट और गलत लोग तेजपाल के साथ सहानुभूति बरत रहे हैं। - रुकमणी ने अपने ट्वीट में पीडिता की तारीफ करते हुए लिखा है कि वह इस यंग वूमेन के साथ है जिसने अपने साथ हुए इस अपराध के खिलाफ आवाज उठाई है। - बेड डॉक्टर के नाम से किए गए ट्वीट में तेजपाल के गोवा फ्लाइट से जाने पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा है कि तेजपाल के हवाई जहाज से गोवा जाने पर उसमें सवार एयरहोस्टेजिज को प्रदर्शन करना चाहिए था कि उन्हें तेजपाल से बचाया जाए। - वरुण गांधी ने शोमा चौधरी और तेजपाल को धोखेबाजों की सत्ता का नया वारिस बताया है। - कंचन गुप्ता ने लिखा है कि कोर्ट में तेजपाल के बचाव की दलीलों पर पूरी किताब लिखी जा सकती है। उन्होंने इसको बदतमीजी की पराकाष्ठा बताया हे। उनका कहना है कि तेजपाल के वक ल ने पीडिता के चरित्र पर सवाल उठाकर बेहद गलत काम किया है। - शिवराम विज ने लिखा है कि मेधा पाटकर ने स्टिंकफास्ट दो हज़ार तेरह में भाग लेने से मना कर दिया था और भाजपा ने तेजपाल को मुश्किलों में डाल दिया है। - सुरेश ने ट्विटर पर तेजपाल के वकील द्वारा पीडिता का नाम लेने पर वकील की खिंचाई की है। उनका कहना है कि यह कोई एक्सीडेंट नहीं है जो उन्होंने पीड़िता का नाम लिया है। इससे पहले उन्होने इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी को पीड़िता का नाम लिखने को भी कहा था। - रफी इंडियन ने कांबली और तेजपाल को एक साथ रखते हुए लिखा है कि एक को नारी ने बर्बाद कर दिया तो दूसरे को कोरोनारी तबाह कर रही है। |
हेल्थकेयर पुरुषों के साथ महिलाओं के लिए भी बेहद जरूरी है. युवा लड़कियों और महिलाओं को खासकर स्वास्थ्य को लेकर बेहद जागरूक होना चाहिए. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के डेटा के मुताबिक, दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान रोके जा सकने वाले कारणों से हर दिन 810 महिलाओं की मौत हो जाती है. भारत जैसे मध्यम आय वाले देश में बेहतर स्वास्थ्य के लिए आर्थिक खर्च एक अहम जरूरत बन चुका है.
महिलाओं के लिए किसी भी हेल्थ इमरजेंसी से बचाने लायक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस कवर खरीदना बेहद जरूरी हो चला है. हालांकि, महिलाओं से जुड़ीं कई तरह की मेडिकल समस्याओं को इंश्योरेंस में शामिल नहीं किया जाता है. ऐसे में स्वास्थ्य बीमा खरीदने से पहले कवर को अच्छे से समझ लेना चाहिए. आइए आपको बताते हैं वे खास बिंदुएं, जो किसी भी महिला को हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले ध्यान में रखनी चाहिए.
हेल्थ इंश्योरेंस का सबसे जरूरी पहलु उसकी पर्याप्तता होती है. कवर में वे सभी बीमारियां शामिल होनी चाहिए, जिनके भविष्य में होने का खतरा हो सकता है. भविष्य में हो सकने वाली हेल्थ इमरजेंसी का पहले से पता नहीं लगाया जा सकता. मगर उम्र, पारिवार की मेडिकल हिस्ट्री और लाइफ स्टाइल के हिसाब से एक अंदाजा लगा सकते हैं. इसके साथ यह भी सलाह दी जाती है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से भी स्वास्थ्य को लेकर सलाह लें.
अगर आपके पिता ब्लड प्रेशर, मां थाइरॉयड या दादी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित रही हैं, तो आपको इन समस्याओं को ध्यान में रखकर हेल्थ इंश्योरेंस की प्लानिंग करनी होगी. बीमा कंपनी को इन फैक्टर्स की जानकारी भी दे देनी चाहिए.
जैन ने मैमोग्राम, पैप टेस्ट आदि की भी सलाह दी. महिलाओं के स्वास्थ्य कवर में ब्रेस्टफीडिंग सपोर्ट जैसे पहलु बहुत अधिक पॉलिसियों में देखने को नहीं मिलते. चाहे वह ब्रेस्ट पंप हो या ब्रेस्टफीडिंग पर सलाहकार खर्च. भारतीय पॉलिसियों को आज की महिलाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम उठाने होंगे.
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने का सबसे बड़ा नियम होता है, कम उम्र में पॉलिसी लेना. यह महिला-स्पेसिफिक हेल्थ केयर प्लान पर भी लागू होता है. कम कीमत में पॉलिसी मिलना पॉलिसीहोल्डर को मिलने वाला सबसे बड़ा लाभ है.
मान लीजिए कि आप 33 साल की हैं और आपकी शादी को तीन साल हो चुके हैं. अब आप 20 साल की उम्र में लिए हेल्थ कवर और 33 साल की उम्र में लिए हेल्थ कवर की तुलना कीजिए. इंश्योरेंस कंपनी आपको 20s के दौरान उम्र को लेकर ज्यादा कॉन्फिडेंट होगी. इसके चलते, कम उम्र में लिए गए हेल्थ कवर पर कम कीमत चुकानी पड़ती है.
शादी के बाद, आम तौर पर, फैमिली फ्लोटर पॉलिसी का विकल्प चुनना पसंद किया जाता है, जिसमें दोनों पति-पत्नी कवर हो सकें. आप जिस तरह का फैमिली फ्लोटर चुनती हैं, वह परिवार बढ़ने के साथ बदला भी जा सकता है.
हालांकि, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, अपने लिए एक निजी पॉलिसी खरीदना ज्यादा बेहतर उपाय लगता है. ऐसा इसलिए कि फैमिली फ्लोटर में प्रीमियम परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य की उम्र पर निर्भर करेगा और बीमा राशि परिवार के प्रत्येक सदस्य के बीच बंट जाती है.
भले ही आप फ्लोटर पॉलिसी की इन सीमाओं को नजरअंदाज कर दें, फिर भी एक महिला होने के नाते आपके पास निजी बीमा होना चाहिए.
पॉलिसीधारक के रूप में आपको बीमा योजना के फीचर्स और फायदों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. आपको सलाह दी जाती है कि सिर्फ पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स को ही न पढ़ें, बल्कि उसके फीचर्स, जैसे कमरे का किराया, को-पेमेंट और ओपीडी कॉस्ट आदि के बारे में भी समझें. हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय ध्यान रखिए कि कहीं इमरजेंसी के वक्त आप ज्यादा को-पेमेंट और कम रूम रेंट की लिमिट में न फंस जाएं. ऐसी लापरवाही क्लेम के वक्त आप पर भारी पड़ सकती है.
महिलाओं के लिए अस्पताल का कमरे किसी दूसरे मरीज के साथ शेयर करना सुविधाजनक नहीं होता है. इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त प्राइवेट वॉर्ड या निजी कमरे को लेकर हमेशा सतर्क रहें. कवर में रूम का किराया आपके कुल सम इंश्योर्ड का तकरीबन एक फीसदी होता है. अगर आपके पास 5 लाख रुपये का कवर है, तो रूम रेंट 5000 रुपये होगा, जो मेट्रो शहरों के हिसाब से कम माना जाता है.
इसका मतलब, या तो आपको अस्पताल में कमरा दूसरे मरीज के साथ शेयर करना पड़ेगा या कमरे का किराया अपनी जेब से भरना होगा. कवर खरीदने से पहले रूम रेट, सब लिमिट के बारे में अच्छी तरह जानकारी हासिल करें. हेल्थ कवर लेते वक्त महिलाओं के दृष्टिकोण से भी सोचें. याद रखें, पॉलिसी का ज्यादा प्रीमियम अतिरिक्त खर्च कवर होने की ओर संकेत देता है.
| हेल्थकेयर पुरुषों के साथ महिलाओं के लिए भी बेहद जरूरी है. युवा लड़कियों और महिलाओं को खासकर स्वास्थ्य को लेकर बेहद जागरूक होना चाहिए. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के डेटा के मुताबिक, दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान रोके जा सकने वाले कारणों से हर दिन आठ सौ दस महिलाओं की मौत हो जाती है. भारत जैसे मध्यम आय वाले देश में बेहतर स्वास्थ्य के लिए आर्थिक खर्च एक अहम जरूरत बन चुका है. महिलाओं के लिए किसी भी हेल्थ इमरजेंसी से बचाने लायक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस कवर खरीदना बेहद जरूरी हो चला है. हालांकि, महिलाओं से जुड़ीं कई तरह की मेडिकल समस्याओं को इंश्योरेंस में शामिल नहीं किया जाता है. ऐसे में स्वास्थ्य बीमा खरीदने से पहले कवर को अच्छे से समझ लेना चाहिए. आइए आपको बताते हैं वे खास बिंदुएं, जो किसी भी महिला को हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले ध्यान में रखनी चाहिए. हेल्थ इंश्योरेंस का सबसे जरूरी पहलु उसकी पर्याप्तता होती है. कवर में वे सभी बीमारियां शामिल होनी चाहिए, जिनके भविष्य में होने का खतरा हो सकता है. भविष्य में हो सकने वाली हेल्थ इमरजेंसी का पहले से पता नहीं लगाया जा सकता. मगर उम्र, पारिवार की मेडिकल हिस्ट्री और लाइफ स्टाइल के हिसाब से एक अंदाजा लगा सकते हैं. इसके साथ यह भी सलाह दी जाती है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से भी स्वास्थ्य को लेकर सलाह लें. अगर आपके पिता ब्लड प्रेशर, मां थाइरॉयड या दादी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित रही हैं, तो आपको इन समस्याओं को ध्यान में रखकर हेल्थ इंश्योरेंस की प्लानिंग करनी होगी. बीमा कंपनी को इन फैक्टर्स की जानकारी भी दे देनी चाहिए. जैन ने मैमोग्राम, पैप टेस्ट आदि की भी सलाह दी. महिलाओं के स्वास्थ्य कवर में ब्रेस्टफीडिंग सपोर्ट जैसे पहलु बहुत अधिक पॉलिसियों में देखने को नहीं मिलते. चाहे वह ब्रेस्ट पंप हो या ब्रेस्टफीडिंग पर सलाहकार खर्च. भारतीय पॉलिसियों को आज की महिलाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम उठाने होंगे. हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने का सबसे बड़ा नियम होता है, कम उम्र में पॉलिसी लेना. यह महिला-स्पेसिफिक हेल्थ केयर प्लान पर भी लागू होता है. कम कीमत में पॉलिसी मिलना पॉलिसीहोल्डर को मिलने वाला सबसे बड़ा लाभ है. मान लीजिए कि आप तैंतीस साल की हैं और आपकी शादी को तीन साल हो चुके हैं. अब आप बीस साल की उम्र में लिए हेल्थ कवर और तैंतीस साल की उम्र में लिए हेल्थ कवर की तुलना कीजिए. इंश्योरेंस कंपनी आपको बीस सेकंड के दौरान उम्र को लेकर ज्यादा कॉन्फिडेंट होगी. इसके चलते, कम उम्र में लिए गए हेल्थ कवर पर कम कीमत चुकानी पड़ती है. शादी के बाद, आम तौर पर, फैमिली फ्लोटर पॉलिसी का विकल्प चुनना पसंद किया जाता है, जिसमें दोनों पति-पत्नी कवर हो सकें. आप जिस तरह का फैमिली फ्लोटर चुनती हैं, वह परिवार बढ़ने के साथ बदला भी जा सकता है. हालांकि, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, अपने लिए एक निजी पॉलिसी खरीदना ज्यादा बेहतर उपाय लगता है. ऐसा इसलिए कि फैमिली फ्लोटर में प्रीमियम परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य की उम्र पर निर्भर करेगा और बीमा राशि परिवार के प्रत्येक सदस्य के बीच बंट जाती है. भले ही आप फ्लोटर पॉलिसी की इन सीमाओं को नजरअंदाज कर दें, फिर भी एक महिला होने के नाते आपके पास निजी बीमा होना चाहिए. पॉलिसीधारक के रूप में आपको बीमा योजना के फीचर्स और फायदों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. आपको सलाह दी जाती है कि सिर्फ पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स को ही न पढ़ें, बल्कि उसके फीचर्स, जैसे कमरे का किराया, को-पेमेंट और ओपीडी कॉस्ट आदि के बारे में भी समझें. हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय ध्यान रखिए कि कहीं इमरजेंसी के वक्त आप ज्यादा को-पेमेंट और कम रूम रेंट की लिमिट में न फंस जाएं. ऐसी लापरवाही क्लेम के वक्त आप पर भारी पड़ सकती है. महिलाओं के लिए अस्पताल का कमरे किसी दूसरे मरीज के साथ शेयर करना सुविधाजनक नहीं होता है. इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त प्राइवेट वॉर्ड या निजी कमरे को लेकर हमेशा सतर्क रहें. कवर में रूम का किराया आपके कुल सम इंश्योर्ड का तकरीबन एक फीसदी होता है. अगर आपके पास पाँच लाख रुपये का कवर है, तो रूम रेंट पाँच हज़ार रुपयापये होगा, जो मेट्रो शहरों के हिसाब से कम माना जाता है. इसका मतलब, या तो आपको अस्पताल में कमरा दूसरे मरीज के साथ शेयर करना पड़ेगा या कमरे का किराया अपनी जेब से भरना होगा. कवर खरीदने से पहले रूम रेट, सब लिमिट के बारे में अच्छी तरह जानकारी हासिल करें. हेल्थ कवर लेते वक्त महिलाओं के दृष्टिकोण से भी सोचें. याद रखें, पॉलिसी का ज्यादा प्रीमियम अतिरिक्त खर्च कवर होने की ओर संकेत देता है. |
VAISAKHA 19, 1890 (SAKA)
पर देकर गांवों में महाजनी करते हैं; यदि हां, तो क्या सरकार इस बात को अनिवार्य कर देगी कि सारे देश में सभी पंचायतों में बेजमीनों, कम जमीन वालों और खेत मजदूरों की अलग सहकारी समितियां कायम की जायें और उनको कर्जा दिया जाये ? मैं बताना चाहता हूँ कि बिहार में गत वर्ष बेजमीनों श्रौर खेत मजदूरों को जो कर्जा दिया गया, उसकी वसूली का अनुपात जमीन वालों की तुलना में ज्यादा है ।
SHRI M. S. GURUPADASWAMY : The loan system we have introduced will take care of this aspect. Even tenants can have loans from the co-operative societies.
श्री शिवनारायरण : जब हम बैंकों में डिपाजिट करते हैं, तो हमको चार, साढ़े चार परसेंट इन्ट्रेस्ट मिलता है, लेकिन हमको नौ पर सेंट देना पड़ता है। मंत्री महोदय क्लैरिफाई करें कि इतना डिफरेंस क्यों है ।
श्री भोगेन्द्र झा : अध्यक्ष महोदय, मैं ने लैंडलेस पेजेन्ट्स के बारे में पूछा है ।
SHRI M. S. GURUPADASWAMY : We have schemes for co-operative farming to give lands to the landless people. We are not giving loans to the landless unless they are tenants... (Interruptions).
SH JAGJIWAN RAM: There is an arrangement for giving loan to persons who have no property to mortgage to the co-operative banks and in ordinary parlance are not credit-worthy. They can get some loans if two members of the co-operative stand surety for them.
मोरक्षा समिति +
• 1739. श्री निहाल सिंह :
श्री रामावतार शर्मा :
श्री रामगोपाल शालवाले : क्या खाद्य तथा कृषि मन्त्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :
( क ) क्या सरकार द्वारा नियुक्त गोरक्षा
समिति के एक सदस्य, जगतगुरु शंकराचार्य, ने हाल में अपने भाषरण में सरकार पर आरोप लगाया है कि गोरक्षा के राष्ट्रीय प्रश्न पर हिन्दुओं की भावनाओं की अवहेलना करते हुए सरकार ने हटघर्मी का रवैया अपनाया हुआ है;
(ख) क्या यह सच है कि उन्होंने पुनः गोरक्षा आन्दोलन प्रारम्भ करने की धमकी दी
(ग) क्या यह भी सच है कि उक्त समिति के कार्य में कुछ गतिरोध पैदा हो गया है ; और
(घ) यदि हां, तो सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है ?
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF FOOD, AGRICULTURE, COMMUNITY DEVELOPMENT AND CO-OPERATION (SHRI ANNASAHIB SHINDE) : (a) and (b). Government have not received any communication from Jagatguru Shankaracharya making any observation to the effect that Government had adopted an obstinate attitude on the question of cow protection. A section of the Press reported Jagatguru Shankaracharya's speech purporting to start an agitation under certain circumstances.
(c) No, Sir.
(d) Does not arise.
श्री निहाल सिंह क्या यह सच है कि : प्रथम पंचवर्षीय योजना से अब तक काऊ स्लाटर की संख्या हिन्दुस्तान में बढ़ी है ; यदि हां, तो कितनी ?
SHRI ANNASAHIB SHINDE : The number of cows has increased ? I did not quite catch his question.
SHRI BAL RAJ MADHOK : Whether the number of cows butchered has increased.
SHRI ANNASAHIB SHINDE : I have no information on that point.
श्री निहाल सिंह : क्या यह सच है कि प्रथम पंच वर्षीय योजना से अब तक गोमांस
| VAISAKHA उन्नीस, एक हज़ार आठ सौ नब्बे पर देकर गांवों में महाजनी करते हैं; यदि हां, तो क्या सरकार इस बात को अनिवार्य कर देगी कि सारे देश में सभी पंचायतों में बेजमीनों, कम जमीन वालों और खेत मजदूरों की अलग सहकारी समितियां कायम की जायें और उनको कर्जा दिया जाये ? मैं बताना चाहता हूँ कि बिहार में गत वर्ष बेजमीनों श्रौर खेत मजदूरों को जो कर्जा दिया गया, उसकी वसूली का अनुपात जमीन वालों की तुलना में ज्यादा है । SHRI M. S. GURUPADASWAMY : The loan system we have introduced will take care of this aspect. Even tenants can have loans from the co-operative societies. श्री शिवनारायरण : जब हम बैंकों में डिपाजिट करते हैं, तो हमको चार, साढ़े चार परसेंट इन्ट्रेस्ट मिलता है, लेकिन हमको नौ पर सेंट देना पड़ता है। मंत्री महोदय क्लैरिफाई करें कि इतना डिफरेंस क्यों है । श्री भोगेन्द्र झा : अध्यक्ष महोदय, मैं ने लैंडलेस पेजेन्ट्स के बारे में पूछा है । SHRI M. S. GURUPADASWAMY : We have schemes for co-operative farming to give lands to the landless people. We are not giving loans to the landless unless they are tenants... . SH JAGJIWAN RAM: There is an arrangement for giving loan to persons who have no property to mortgage to the co-operative banks and in ordinary parlance are not credit-worthy. They can get some loans if two members of the co-operative stand surety for them. मोरक्षा समिति + • एक हज़ार सात सौ उनतालीस. श्री निहाल सिंह : श्री रामावतार शर्मा : श्री रामगोपाल शालवाले : क्या खाद्य तथा कृषि मन्त्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : क्या सरकार द्वारा नियुक्त गोरक्षा समिति के एक सदस्य, जगतगुरु शंकराचार्य, ने हाल में अपने भाषरण में सरकार पर आरोप लगाया है कि गोरक्षा के राष्ट्रीय प्रश्न पर हिन्दुओं की भावनाओं की अवहेलना करते हुए सरकार ने हटघर्मी का रवैया अपनाया हुआ है; क्या यह सच है कि उन्होंने पुनः गोरक्षा आन्दोलन प्रारम्भ करने की धमकी दी क्या यह भी सच है कि उक्त समिति के कार्य में कुछ गतिरोध पैदा हो गया है ; और यदि हां, तो सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है ? THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF FOOD, AGRICULTURE, COMMUNITY DEVELOPMENT AND CO-OPERATION : and . Government have not received any communication from Jagatguru Shankaracharya making any observation to the effect that Government had adopted an obstinate attitude on the question of cow protection. A section of the Press reported Jagatguru Shankaracharya's speech purporting to start an agitation under certain circumstances. No, Sir. Does not arise. श्री निहाल सिंह क्या यह सच है कि : प्रथम पंचवर्षीय योजना से अब तक काऊ स्लाटर की संख्या हिन्दुस्तान में बढ़ी है ; यदि हां, तो कितनी ? SHRI ANNASAHIB SHINDE : The number of cows has increased ? I did not quite catch his question. SHRI BAL RAJ MADHOK : Whether the number of cows butchered has increased. SHRI ANNASAHIB SHINDE : I have no information on that point. श्री निहाल सिंह : क्या यह सच है कि प्रथम पंच वर्षीय योजना से अब तक गोमांस |
'सम्मान के लिए हत्या' या सम्मान की हत्या? : इनसान की प्रगति के कदमों ने चांद की सतह तक को छू लिया है। अब उसकी परवाज दूसरे अजाने ग्रहों के रहस्य भेदने की ओर है लेकिन उनका अपना खूबसूरत ग्रह धरती कुरीतियों, कुसंस्कारों और रूढ़ियों से दिन ब दिन कलुषित और मलिन होता जा रहा है। 21 वीं सदी में भी हमारे देश में अब भी कई अंचल ऐसे हैं जहां जहालत का अंधेरा है और वहां लोग मध्ययुगीन बर्बरता के बीच जी रहे हैं। हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ अंचलों में पंचायतों के तालिबानी और अमानवीय फरमानों से ऐसे युवक-युवतियों की जिंदगी सांसत में है जो एक-दूसरे को प्रेम करते हैं और विवाह करना चाहते हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में खाप कहलाने वाली पंचायतें ऐसे कई विवाहित जोड़ों को मौत का फरमान न सिर्फ सुना चुकी हैं अपितु उसे पूरा भी किया जा चुका है। उस पर तुर्रा यह कि समाज के ये ठेकेदार इस पर गर्व भी करते हैं कि उन्होंने समाज को एक गुनाह से बचा लिया। गुनाह एक गोत्र में विवाह करने का। इनका मानना है कि एक गोत्र में शादी करने वाले युवक-युवती के बीच भाई-बहन का रिश्ता होता है और वे आपस में विवाह नहीं कर सकते।
अब अगर गोत्र की बात लें तो एक गोत्र वाले युवक-युवतियों की संख्या हजारों नहीं लाखों या उससे भी अधिक होगी। अगर एक ही गोत्र में विवाह वर्जित कर दिया जाये तो संभव है कुछ साल बाद कुछ लड़के-लड़कियों को कुआंरा ही रह जाना पड़े। जाति-पांत का भेदभाव तो शादी के मामले में पहले से ही था और अभी है, अबउस पर यह जाति वाला पचड़ा आ गया है। एक गोत्र में विवाह करने वाले युवक-युवतियों को मौत की सजा दी जाती है और विडंबना देखिए उसे 'सम्मान के लिए हत्या' जैसा महिमामंडित नाम दिया गया है। हमारा सवाल यह है कि यह सम्मान के लिए हत्या कैसे हुई?
यह तो सम्मान की हत्या है उस प्रेमी जोड़े के सम्मान की हत्या जो वयस्क है और जिसमें अपना अच्छा-बुरा सोचने की शक्ति है, जिसे समाज के चंद ठेकेदारों का हाथ पकड़ कर चलने या मार्गदर्शन लेने की जरूरत नहीं। फिर वे उनकी राह में आड़े क्यों आते हैं। माता-पिता या समाज की इच्छा क्या होती है? उनकी आने वाली पीढ़ी खुशहाल, स्वतंत्रचेता और उदार हो। अपने अहंकार की तुष्टि और अपनी तथाकथित सम्मान रक्षा के लिए हम अपने ही बच्चों को मार कर कह रहे हैं कि हम समाज का सम्मान बचा रहे हैं। वाह रे मध्युगीन बर्बरता को ढोता समाज, हम थूकते हैं तुम पर धिक्कारते हैं तुम्हारे अज्ञान को और अफसोस करते हैं तुम्हारे पुरातनपंथी दकियानूसी रूढ़ियों से जकड़े खयालों को।
अखबारो में आये दिन ऐसी सम्मान के लिए हत्या की खबरें आती हैं और मन में एक कसक सी उठती है कि हमारे गणतांत्रिक देश में यह तालिबानी बर्बरता क्यों पल रही है। हम ऐसी कुरीतियों पर यकीन करने को क्यों मजबूर हैं जो देश के युवा वर्ग से उसका सामान्य अधिकार छीनती है। खाप या ऐसी पंचायतों की शादी या प्रेम करने वाले युवक-युवतियों की मौत का फरमान सुनानेवाली परंपरा समाज सुधार या परिष्कार का अंग है या अपनी नाक ऊंची रखने, अपने आदेश का मान रखने के लिए एक हठ जो दूसरों की जान लेकर ही शांत और गर्वित होता है? आज नहीं तो कल समाज को इसका जवाब ढूंढ़ना और देना होगा।
यह जवाब उससे वह युवा पीढ़ी ही मांगेगी जो इन तालिबानी फरमानों से पीड़ित और त्रस्त है। अब अखबार में खबर है कि कुरुक्षेत्र से कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल भी खाप पंचायत के एक गोत्र में विवाह न करने के सिद्धांत के समर्थन में आ गये हैं। नवीन जी युवा हैं, आधुनिक खयालवाले और जहां तक अनुमान है उदारचेता हैं फिर वे इस रूढ़िवादी परंपरा के साथ खड़े होने को क्यों तैयार हो गये? बेचारे क्या करते खाप वालों ने धमकी जो दे डाली थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गयीं तो वे जिंदल के घर का घेराव कर देंगे। अब बेचारे जिंदल खाप वालों के सिद्धांत का संदेश अपने दल और देश की संसद तक ले जाने को तैयार हो गये हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने तो हिंदू विवाह कानून में संशोधन कर एक गोत्र में विवाह करने पर कानूनी रोक लगाने की मांग तक कर डाली है।
हम साधुवाद देते हैं अपनी न्यायपालिका का जो बिना किसी दबाव और द्वेष के अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही है और जिसने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें जिन्होंने 2007 के एक दोहरे हत्याकांड के पांच दोषियों को सजा-ए- मौत और खाप के एक सदस्य को उम्र कैद दी है। यह कैथल में एक ही गोत्र में विवाह करने वाले मनोज और बबली के हत्याकांड का मामला था। मनोज-बबली को अदालत की ओर से सुरक्षा मुहैया करायी गयी थी उसके बावजूद उनकी हत्या कर दी गयी क्योंकि खाप का ऐसा ही फरमान था। खाप पंचायत खुद को देश के कानून से भी ऊपर मानती है इसलिए उसका अपना कानून खुद है। वह खुद अदालत (पंचायत) लगाती है और खुद फैसला भी सुना देती है। उसकी यह कोशिश भी होती है कि उसके फरमान की तामील हो। आश्चर्य इस बात का है कि आज भी हमारा समाज इन रूढ़ियों को ढोने और मानने को मजबूर हैं। खाप के चंगुल में आये युवक-युवतियों के माता-पिता, भाई व दूसरे रिश्तेदार इन फरमानों को पूरा करने और अपने ही दिल के टुकड़ों की जान लेने में फख्र महसूस करते हैं। यह समाज इतना बुद्धिहीन है?
ऐसी परंपरा समाज के मुंह पर कालिख है, उसके सम्मान पर एक तमाचा है और उसके सामने खड़ा एक ऐसा प्रश्नचिह्न है जो उसे मुंह चिढ़ा रहा है। जो लोग मानवता के पक्षधर हैं और समाज को जहालत और रूढ़ियों के अंधेरे से दूर समता, ममता और महानता के पथ पर ले जाना चाहते हैं वे ऐसे समाज उसकी इस सड़ी-गली व्यवस्था पर हजार बार थूकेंगे और लानत-मलामत देंगे। पंचों को परमेश्वर माना जाता है लेकिन कभी-कभी वे तथाकथित परमेश्वर और उनके तालिबानी फरमान किसी न किसी पर भारी पड़ जाते हैं। पंचायतों का प्रपंच उन्हें जीने नहीं देता। आज का युवा वर्ग जात-पांत और दूसरी रूढ़ियों से आगे बढ़ गया है। उसे पता है कि बंदिशें संस्कारवान होने के लिए जरूरी हों लेकिन अनावश्यक बंदिशे समाज में प्रेम की जगह कटुता घोलती हैं।
पुरानी पीढ़ी अगर ऐसे ही युवा वर्ग पर अपनी रूढ़िया थोपती रही तो उनके लिए बचा-खुचा सम्मान भी खत्म हो जायेगा। यह जरूरी है कि माता-पिता या समाज बच्चों को ऊंच-नीच, अच्छे-बुरे का फर्क समझायें और उन्हें विश्वास में लें और उनके मन और मंशा को समझने, उसमें अगर उचित है तो साथ देने की कोशिश करें। अगर कोई युवक-युवती प्रेम करते हैं, दोनों के परिवार अच्छे हैं, विचार अच्छे हैं और बच्चे खुशी और राजी हैं तो परिवार को गोत्र या दूसरी अड़चनों को परे रख अपने बच्चों की खुशी को प्राथमिकता दे कर उनकी शादी करानी चाहिए और उन्हें सुखद भविष्य का आशीर्वाद देना चाहिए। उनके बच्चों का भविष्य वे खुद तय करें किसी खाप या पंचायत को इसका हक क्यों और किस कानून से दे रहे हैं।
माता-पिता अगर बच्चों की मर्जी को जानने-समझने लगें, उसकी कद्र करने लगें तो शायद किसी प्रेमी जोड़े को विवाह के लिए घर से भागने की जरूरत न पड़े। वे खाप या ऐसी ही शक्तियों के खौफ से माता-पिता से अपने संबंध छिपाते हैं कि उन्हें मार डाला जायेगा या प्रताड़ित किया जायेगा। पंचायतों का वह प्रपंच अब बंद होना चाहिए जो मौत का फरमान सुनाता है या मौत के लिए उकसाता है। कई पंचायतों पर दलितों पर जुल्म करने का आरोप तक लग चुका है। यह अनीति बंद होनी चाहिए।
खाप वालों से भी अनुरोध है कि वे सदियों पीछे जाने के बजाय आज के युग में आयें, अपने दिलों और दिमाग को खुला रखें और ऐसा कुछ करें जिससे पंचायतों की खोयी मर्यादा वापस आये। ऐसा होने पर ही पंचायती राज्य की सार्थकता है। ऐसा होन पर ही शायद गांधी का सपना भी साकार हो सकेगा जो उन्होंने भारत के गांवों को लेकर देखा था। समाज का एक अंग होने के नाते मैंने एक कुरीति की ओर उंगली उठायी है यह जानते और समझते हुए कि इसके लिए गालियां मिलेंगे शायद तालियां भी पर मुजे गालियां भी स्वीकार हैं। एक नेक मकसद से मैंने कुछ कुंद मगजों को कुरेदने और जगाने की कोशिश की है।
प्रभु से प्रार्थना है कि ऐसे दिमाग जग जायें, उनमें प्रेम (सच्चे प्रेम सतही या पाखंडी नहीं) को मर्यादा और समर्थन देने के भाव जगें। वे कुरीतियों से उबरें और युवा पीढ़ी से अनुरोध है कि वह अपने स्तर पर इस तरह की कुरीतियों के खिलाफ मोर्चा खोले और इन्हें बंद कराने की हरचंद कोशिश करे क्योंकि इससे समाज और देश का सम्मान और उसकी अस्मिता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
लेखक राजेश त्रिपाठी कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। इन दिनों हिंदी दैनिक सन्मार्ग में कार्यरत हैं। राजेश से संपर्क rajeshtripathi@sify. com के जरिए कर सकते हैं। वे ब्लागर भी हैं और अपने ब्लाग में समसामयिक विषयों पर अक्सर लिखते रहते हैं।
| 'सम्मान के लिए हत्या' या सम्मान की हत्या? : इनसान की प्रगति के कदमों ने चांद की सतह तक को छू लिया है। अब उसकी परवाज दूसरे अजाने ग्रहों के रहस्य भेदने की ओर है लेकिन उनका अपना खूबसूरत ग्रह धरती कुरीतियों, कुसंस्कारों और रूढ़ियों से दिन ब दिन कलुषित और मलिन होता जा रहा है। इक्कीस वीं सदी में भी हमारे देश में अब भी कई अंचल ऐसे हैं जहां जहालत का अंधेरा है और वहां लोग मध्ययुगीन बर्बरता के बीच जी रहे हैं। हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ अंचलों में पंचायतों के तालिबानी और अमानवीय फरमानों से ऐसे युवक-युवतियों की जिंदगी सांसत में है जो एक-दूसरे को प्रेम करते हैं और विवाह करना चाहते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में खाप कहलाने वाली पंचायतें ऐसे कई विवाहित जोड़ों को मौत का फरमान न सिर्फ सुना चुकी हैं अपितु उसे पूरा भी किया जा चुका है। उस पर तुर्रा यह कि समाज के ये ठेकेदार इस पर गर्व भी करते हैं कि उन्होंने समाज को एक गुनाह से बचा लिया। गुनाह एक गोत्र में विवाह करने का। इनका मानना है कि एक गोत्र में शादी करने वाले युवक-युवती के बीच भाई-बहन का रिश्ता होता है और वे आपस में विवाह नहीं कर सकते। अब अगर गोत्र की बात लें तो एक गोत्र वाले युवक-युवतियों की संख्या हजारों नहीं लाखों या उससे भी अधिक होगी। अगर एक ही गोत्र में विवाह वर्जित कर दिया जाये तो संभव है कुछ साल बाद कुछ लड़के-लड़कियों को कुआंरा ही रह जाना पड़े। जाति-पांत का भेदभाव तो शादी के मामले में पहले से ही था और अभी है, अबउस पर यह जाति वाला पचड़ा आ गया है। एक गोत्र में विवाह करने वाले युवक-युवतियों को मौत की सजा दी जाती है और विडंबना देखिए उसे 'सम्मान के लिए हत्या' जैसा महिमामंडित नाम दिया गया है। हमारा सवाल यह है कि यह सम्मान के लिए हत्या कैसे हुई? यह तो सम्मान की हत्या है उस प्रेमी जोड़े के सम्मान की हत्या जो वयस्क है और जिसमें अपना अच्छा-बुरा सोचने की शक्ति है, जिसे समाज के चंद ठेकेदारों का हाथ पकड़ कर चलने या मार्गदर्शन लेने की जरूरत नहीं। फिर वे उनकी राह में आड़े क्यों आते हैं। माता-पिता या समाज की इच्छा क्या होती है? उनकी आने वाली पीढ़ी खुशहाल, स्वतंत्रचेता और उदार हो। अपने अहंकार की तुष्टि और अपनी तथाकथित सम्मान रक्षा के लिए हम अपने ही बच्चों को मार कर कह रहे हैं कि हम समाज का सम्मान बचा रहे हैं। वाह रे मध्युगीन बर्बरता को ढोता समाज, हम थूकते हैं तुम पर धिक्कारते हैं तुम्हारे अज्ञान को और अफसोस करते हैं तुम्हारे पुरातनपंथी दकियानूसी रूढ़ियों से जकड़े खयालों को। अखबारो में आये दिन ऐसी सम्मान के लिए हत्या की खबरें आती हैं और मन में एक कसक सी उठती है कि हमारे गणतांत्रिक देश में यह तालिबानी बर्बरता क्यों पल रही है। हम ऐसी कुरीतियों पर यकीन करने को क्यों मजबूर हैं जो देश के युवा वर्ग से उसका सामान्य अधिकार छीनती है। खाप या ऐसी पंचायतों की शादी या प्रेम करने वाले युवक-युवतियों की मौत का फरमान सुनानेवाली परंपरा समाज सुधार या परिष्कार का अंग है या अपनी नाक ऊंची रखने, अपने आदेश का मान रखने के लिए एक हठ जो दूसरों की जान लेकर ही शांत और गर्वित होता है? आज नहीं तो कल समाज को इसका जवाब ढूंढ़ना और देना होगा। यह जवाब उससे वह युवा पीढ़ी ही मांगेगी जो इन तालिबानी फरमानों से पीड़ित और त्रस्त है। अब अखबार में खबर है कि कुरुक्षेत्र से कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल भी खाप पंचायत के एक गोत्र में विवाह न करने के सिद्धांत के समर्थन में आ गये हैं। नवीन जी युवा हैं, आधुनिक खयालवाले और जहां तक अनुमान है उदारचेता हैं फिर वे इस रूढ़िवादी परंपरा के साथ खड़े होने को क्यों तैयार हो गये? बेचारे क्या करते खाप वालों ने धमकी जो दे डाली थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गयीं तो वे जिंदल के घर का घेराव कर देंगे। अब बेचारे जिंदल खाप वालों के सिद्धांत का संदेश अपने दल और देश की संसद तक ले जाने को तैयार हो गये हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने तो हिंदू विवाह कानून में संशोधन कर एक गोत्र में विवाह करने पर कानूनी रोक लगाने की मांग तक कर डाली है। हम साधुवाद देते हैं अपनी न्यायपालिका का जो बिना किसी दबाव और द्वेष के अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही है और जिसने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें जिन्होंने दो हज़ार सात के एक दोहरे हत्याकांड के पांच दोषियों को सजा-ए- मौत और खाप के एक सदस्य को उम्र कैद दी है। यह कैथल में एक ही गोत्र में विवाह करने वाले मनोज और बबली के हत्याकांड का मामला था। मनोज-बबली को अदालत की ओर से सुरक्षा मुहैया करायी गयी थी उसके बावजूद उनकी हत्या कर दी गयी क्योंकि खाप का ऐसा ही फरमान था। खाप पंचायत खुद को देश के कानून से भी ऊपर मानती है इसलिए उसका अपना कानून खुद है। वह खुद अदालत लगाती है और खुद फैसला भी सुना देती है। उसकी यह कोशिश भी होती है कि उसके फरमान की तामील हो। आश्चर्य इस बात का है कि आज भी हमारा समाज इन रूढ़ियों को ढोने और मानने को मजबूर हैं। खाप के चंगुल में आये युवक-युवतियों के माता-पिता, भाई व दूसरे रिश्तेदार इन फरमानों को पूरा करने और अपने ही दिल के टुकड़ों की जान लेने में फख्र महसूस करते हैं। यह समाज इतना बुद्धिहीन है? ऐसी परंपरा समाज के मुंह पर कालिख है, उसके सम्मान पर एक तमाचा है और उसके सामने खड़ा एक ऐसा प्रश्नचिह्न है जो उसे मुंह चिढ़ा रहा है। जो लोग मानवता के पक्षधर हैं और समाज को जहालत और रूढ़ियों के अंधेरे से दूर समता, ममता और महानता के पथ पर ले जाना चाहते हैं वे ऐसे समाज उसकी इस सड़ी-गली व्यवस्था पर हजार बार थूकेंगे और लानत-मलामत देंगे। पंचों को परमेश्वर माना जाता है लेकिन कभी-कभी वे तथाकथित परमेश्वर और उनके तालिबानी फरमान किसी न किसी पर भारी पड़ जाते हैं। पंचायतों का प्रपंच उन्हें जीने नहीं देता। आज का युवा वर्ग जात-पांत और दूसरी रूढ़ियों से आगे बढ़ गया है। उसे पता है कि बंदिशें संस्कारवान होने के लिए जरूरी हों लेकिन अनावश्यक बंदिशे समाज में प्रेम की जगह कटुता घोलती हैं। पुरानी पीढ़ी अगर ऐसे ही युवा वर्ग पर अपनी रूढ़िया थोपती रही तो उनके लिए बचा-खुचा सम्मान भी खत्म हो जायेगा। यह जरूरी है कि माता-पिता या समाज बच्चों को ऊंच-नीच, अच्छे-बुरे का फर्क समझायें और उन्हें विश्वास में लें और उनके मन और मंशा को समझने, उसमें अगर उचित है तो साथ देने की कोशिश करें। अगर कोई युवक-युवती प्रेम करते हैं, दोनों के परिवार अच्छे हैं, विचार अच्छे हैं और बच्चे खुशी और राजी हैं तो परिवार को गोत्र या दूसरी अड़चनों को परे रख अपने बच्चों की खुशी को प्राथमिकता दे कर उनकी शादी करानी चाहिए और उन्हें सुखद भविष्य का आशीर्वाद देना चाहिए। उनके बच्चों का भविष्य वे खुद तय करें किसी खाप या पंचायत को इसका हक क्यों और किस कानून से दे रहे हैं। माता-पिता अगर बच्चों की मर्जी को जानने-समझने लगें, उसकी कद्र करने लगें तो शायद किसी प्रेमी जोड़े को विवाह के लिए घर से भागने की जरूरत न पड़े। वे खाप या ऐसी ही शक्तियों के खौफ से माता-पिता से अपने संबंध छिपाते हैं कि उन्हें मार डाला जायेगा या प्रताड़ित किया जायेगा। पंचायतों का वह प्रपंच अब बंद होना चाहिए जो मौत का फरमान सुनाता है या मौत के लिए उकसाता है। कई पंचायतों पर दलितों पर जुल्म करने का आरोप तक लग चुका है। यह अनीति बंद होनी चाहिए। खाप वालों से भी अनुरोध है कि वे सदियों पीछे जाने के बजाय आज के युग में आयें, अपने दिलों और दिमाग को खुला रखें और ऐसा कुछ करें जिससे पंचायतों की खोयी मर्यादा वापस आये। ऐसा होने पर ही पंचायती राज्य की सार्थकता है। ऐसा होन पर ही शायद गांधी का सपना भी साकार हो सकेगा जो उन्होंने भारत के गांवों को लेकर देखा था। समाज का एक अंग होने के नाते मैंने एक कुरीति की ओर उंगली उठायी है यह जानते और समझते हुए कि इसके लिए गालियां मिलेंगे शायद तालियां भी पर मुजे गालियां भी स्वीकार हैं। एक नेक मकसद से मैंने कुछ कुंद मगजों को कुरेदने और जगाने की कोशिश की है। प्रभु से प्रार्थना है कि ऐसे दिमाग जग जायें, उनमें प्रेम को मर्यादा और समर्थन देने के भाव जगें। वे कुरीतियों से उबरें और युवा पीढ़ी से अनुरोध है कि वह अपने स्तर पर इस तरह की कुरीतियों के खिलाफ मोर्चा खोले और इन्हें बंद कराने की हरचंद कोशिश करे क्योंकि इससे समाज और देश का सम्मान और उसकी अस्मिता पर प्रश्नचिह्न लगता है। लेखक राजेश त्रिपाठी कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। इन दिनों हिंदी दैनिक सन्मार्ग में कार्यरत हैं। राजेश से संपर्क rajeshtripathi@sify. com के जरिए कर सकते हैं। वे ब्लागर भी हैं और अपने ब्लाग में समसामयिक विषयों पर अक्सर लिखते रहते हैं। |
क्यों टूट जाते हैं विराट जैसे खिलाड़ी?
क्यों टूट जाते हैं विराट जैसे खिलाड़ी?
1998 Sachin Tendulkar vs Olonga: शारजाह में ओलोंगा ने सचिन को लगातार दो गेंदों पर आउट किया, इसका बदला कैसे लिया मास्टर ब्लास्टर ने?
बंद कर देना चाहिए 50 ओवर का खेल?
लेग स्टंप छोड़ जब मिडल पर आए सहवाग तो क्या हुआ?
नडियाद के मानिक चौक पर ही आसपास आपको इस गुजराती शहर की तीन पहचान मिल जाएंगी।
क्या शमी का साथ देने की सजा मिली कोहली को?
| क्यों टूट जाते हैं विराट जैसे खिलाड़ी? क्यों टूट जाते हैं विराट जैसे खिलाड़ी? एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे Sachin Tendulkar vs Olonga: शारजाह में ओलोंगा ने सचिन को लगातार दो गेंदों पर आउट किया, इसका बदला कैसे लिया मास्टर ब्लास्टर ने? बंद कर देना चाहिए पचास ओवर का खेल? लेग स्टंप छोड़ जब मिडल पर आए सहवाग तो क्या हुआ? नडियाद के मानिक चौक पर ही आसपास आपको इस गुजराती शहर की तीन पहचान मिल जाएंगी। क्या शमी का साथ देने की सजा मिली कोहली को? |
बीकानेर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 75 वी पुण्यतिथि पर बीकानेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा स्मरण सभा और पुष्पांजलि कार्यक्रम कार्यालय में आयोजित किया गया।
इसी कार्यक्रम से पहले राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आज जिला कांग्रेस कमेटियों को सुबह 10 बजे ध्वजारोहण करना था। ठीक 10 बजे जिला अध्यक्ष यशपाल गहलोत ने ध्वजारोहण किया।
स्मरण सभा कि अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यशपाल गहलोत ने कहा की महात्मा गांधी जी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा और सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर उन्होंने अमन और शांति के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये।
प्रदेश कांग्रेस सचिव हाजी जिया उर रहमान आरिफ ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का देश प्रेम और अहिंसा का सिदान्त आज सम्पूर्ण विश्व मे मान्य होता जा रहा है। आज हम सबको गांधी के सिदाँतो पर चलकर देश को असामाजिक ताकतों से बचाना है।
प्रदेश सचिव गजेंद्र सिंह सांखला ने गांधी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तारित प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रपिता की उपाधि प्राप्त करना कोई सामान्य बात नही है।
प्रवक्ता नितिन वत्सस ने कहा की आज राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि पर हम सबको ये संकल्प लेना होगा कि देश के सर्वांगीण विकास हेतु और अमन भाईचारे को बनाये रखने के लिए कार्य करेंगे।
पुण्यतिथि पर आयोजित स्मरण सभा को वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम मुस्तफा, प्रेमरतन जोशी पट्टू, किशनलाल इनखिया, ब्लॉक अध्यक्ष सुमित कोचर, ब्लॉक अध्यक्ष आनंद सिंह सोढा, ब्लॉक अध्यक्ष शहजाद खान भुट्टो, ब्लॉक अध्यक्ष जाकिर नागौरी, ओबीसी जिला अध्यक्ष कमल कुमार नागल, पार्षद अभिषेक गहलोत, पार्षद मनोज किराडू, महासचिव ललित तेजस्वी, हरिशंकर नायक,जयदीप सिंह जावा,पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष साजिद सुलेमानी, एससी प्रदेश महासचिव चंद्रशेखर चवरिया,महिला शहर अध्यक्ष सुनीता गौड़,महिला देहात अध्यक्ष राजकुमारी व्यास, अर्चना नागल, शबनम पठान, सचिव हाजिर खान, विकास तंवर, अब्दुल रहमान लोदरा, करणीसिंह राजपुरोहित,मोहम्मद फारूक, रविकांत वाल्मिकी, एन डी कादरी, धनसुख आचार्य, मनोज व्यास,ने भी संबोधित करते महात्मा गांधी के आदर्शो को अपनाने की बात कही। अंत में 11 बजकर दो मिनट का मौन रखा गया उसके बाद बापू के प्रिय भजन गाए गए।
| बीकानेर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पचहत्तर वी पुण्यतिथि पर बीकानेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा स्मरण सभा और पुष्पांजलि कार्यक्रम कार्यालय में आयोजित किया गया। इसी कार्यक्रम से पहले राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आज जिला कांग्रेस कमेटियों को सुबह दस बजे ध्वजारोहण करना था। ठीक दस बजे जिला अध्यक्ष यशपाल गहलोत ने ध्वजारोहण किया। स्मरण सभा कि अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यशपाल गहलोत ने कहा की महात्मा गांधी जी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा और सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर उन्होंने अमन और शांति के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये। प्रदेश कांग्रेस सचिव हाजी जिया उर रहमान आरिफ ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का देश प्रेम और अहिंसा का सिदान्त आज सम्पूर्ण विश्व मे मान्य होता जा रहा है। आज हम सबको गांधी के सिदाँतो पर चलकर देश को असामाजिक ताकतों से बचाना है। प्रदेश सचिव गजेंद्र सिंह सांखला ने गांधी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तारित प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रपिता की उपाधि प्राप्त करना कोई सामान्य बात नही है। प्रवक्ता नितिन वत्सस ने कहा की आज राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि पर हम सबको ये संकल्प लेना होगा कि देश के सर्वांगीण विकास हेतु और अमन भाईचारे को बनाये रखने के लिए कार्य करेंगे। पुण्यतिथि पर आयोजित स्मरण सभा को वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम मुस्तफा, प्रेमरतन जोशी पट्टू, किशनलाल इनखिया, ब्लॉक अध्यक्ष सुमित कोचर, ब्लॉक अध्यक्ष आनंद सिंह सोढा, ब्लॉक अध्यक्ष शहजाद खान भुट्टो, ब्लॉक अध्यक्ष जाकिर नागौरी, ओबीसी जिला अध्यक्ष कमल कुमार नागल, पार्षद अभिषेक गहलोत, पार्षद मनोज किराडू, महासचिव ललित तेजस्वी, हरिशंकर नायक,जयदीप सिंह जावा,पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष साजिद सुलेमानी, एससी प्रदेश महासचिव चंद्रशेखर चवरिया,महिला शहर अध्यक्ष सुनीता गौड़,महिला देहात अध्यक्ष राजकुमारी व्यास, अर्चना नागल, शबनम पठान, सचिव हाजिर खान, विकास तंवर, अब्दुल रहमान लोदरा, करणीसिंह राजपुरोहित,मोहम्मद फारूक, रविकांत वाल्मिकी, एन डी कादरी, धनसुख आचार्य, मनोज व्यास,ने भी संबोधित करते महात्मा गांधी के आदर्शो को अपनाने की बात कही। अंत में ग्यारह बजकर दो मिनट का मौन रखा गया उसके बाद बापू के प्रिय भजन गाए गए। |
आगरा। बुधवार देर रात शुरू हुई बूंदाबांदी के बाद मौसम ने एक बार फिर करवट ली लेकिन गुरुवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश और उसके साथ पड़े ओलों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी। जोरदार बारिश के कारण कई जगह पर जलभराव की स्थिति हो गई तो वहीं ओलों के कारण एक बार फिर मौसम में गलन और ठंड बढ़ गयी जिसके चलते किसान के माथे पर सिकन नजर आई क्योंकि बारिश और उसके साथ पड़े ओलों का असर किसान की खेती पर जो पड़ रहा था।
बुधवार सुबह निकली धूप के बाद शाम होते होते मौसम पूरी तरह से बदल गया। सर्द हवा से ठंड बढ़ गई। रातभर टिप-टिप बारिश होती रही और गुरुवार सुबह भी रुक-रुककर हुई बारिश के बाद एकदम मूसलाधार बारिश हुई। बारिश के साथ ओलों ने तो मौसम को ही बदल दिया। मूसलाधार हुई बारिश से आलू की खेती पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में गलन और बढ़ेगी। बुधवार से चार दिनों तक बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार 15 जनवरी से को शाम तक बारिश के आसार थे उसी अनुमान के मुताबिक शाम से ही बारिश शुरू हो गयी। मौसम विभाग के अनुसार 20 जनवरी तक यही आसार रहेंगे।
लोगों का कहना था कि सुबह बूंदाबांदी बारिश के साथ एकदम मूसलाधार बारिश शुरू हो गई उसके साथ ओले भी पढ़ने लगे। दिन में अंधेरे जैसा माहौल हो गया। चारों ओर घना कोहरा हो गया। बूंदाबांदी के बीच ही स्कूली बच्चों को स्कूल जाना पड़ा तो वही मूसलाधार बारिश के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों को भी घंटों ऑफिस जाने के लिए इंतजार करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र में हुई। पिनाहट, कागरोल, बिचपुरी सहित कई ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी क्षेत्रों में ओले पड़े। इसका असर किसानों की खेती पर पड़ा है। क्योंकि इस समय आलू की खेती चल रही है और बारिश और ओलों के कारण आलू खराब हो जाएगा। अचानक हुई मूसलाधार बारिश और ओलों से किसान चिंतित है।
| आगरा। बुधवार देर रात शुरू हुई बूंदाबांदी के बाद मौसम ने एक बार फिर करवट ली लेकिन गुरुवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश और उसके साथ पड़े ओलों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी। जोरदार बारिश के कारण कई जगह पर जलभराव की स्थिति हो गई तो वहीं ओलों के कारण एक बार फिर मौसम में गलन और ठंड बढ़ गयी जिसके चलते किसान के माथे पर सिकन नजर आई क्योंकि बारिश और उसके साथ पड़े ओलों का असर किसान की खेती पर जो पड़ रहा था। बुधवार सुबह निकली धूप के बाद शाम होते होते मौसम पूरी तरह से बदल गया। सर्द हवा से ठंड बढ़ गई। रातभर टिप-टिप बारिश होती रही और गुरुवार सुबह भी रुक-रुककर हुई बारिश के बाद एकदम मूसलाधार बारिश हुई। बारिश के साथ ओलों ने तो मौसम को ही बदल दिया। मूसलाधार हुई बारिश से आलू की खेती पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में गलन और बढ़ेगी। बुधवार से चार दिनों तक बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार पंद्रह जनवरी से को शाम तक बारिश के आसार थे उसी अनुमान के मुताबिक शाम से ही बारिश शुरू हो गयी। मौसम विभाग के अनुसार बीस जनवरी तक यही आसार रहेंगे। लोगों का कहना था कि सुबह बूंदाबांदी बारिश के साथ एकदम मूसलाधार बारिश शुरू हो गई उसके साथ ओले भी पढ़ने लगे। दिन में अंधेरे जैसा माहौल हो गया। चारों ओर घना कोहरा हो गया। बूंदाबांदी के बीच ही स्कूली बच्चों को स्कूल जाना पड़ा तो वही मूसलाधार बारिश के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों को भी घंटों ऑफिस जाने के लिए इंतजार करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र में हुई। पिनाहट, कागरोल, बिचपुरी सहित कई ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी क्षेत्रों में ओले पड़े। इसका असर किसानों की खेती पर पड़ा है। क्योंकि इस समय आलू की खेती चल रही है और बारिश और ओलों के कारण आलू खराब हो जाएगा। अचानक हुई मूसलाधार बारिश और ओलों से किसान चिंतित है। |
जिलेभर में मादक पदार्थों की रोकथाम और तस्करी करने वालों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोरोना काल की दूसरी लहर के बीच मादक पदार्थों की अवैध तस्कारी के मामले सामने आ रहे है। ताकुला पुलिस ने स्मैक के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। युवकों के कब्जे से 08. 39 ग्राम स्मैक बरामद की गई। बरामद किये गये स्मैक की कीमत करीब 90 हजार रुपये आंकी जा रही है।
पुलिस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बीते बुधवार को सार्कोट स्कूल ताकुला के पास वाहन चेकिंग अभियान के दौरान वाहन संख्या यूके 04 यू 3905 सैरवले बीट कार को चेक करने पर उसमें सवार पवन जोशी पुत्र स्व. रमेश चंद्र जोशी, निवासी ग्राम अमखोली ताकुला और जगदीश चंद्र लोहनी पुत्र स्व. जीवन चंद्र लोहनी निवासी ग्राम झारकोट सोमेश्वर के कब्जे से 08. 39 ग्राम स्मैक कीमत 90 हजार बरामद कर गिरफ्तार किया है। चौकी प्रभारी सुरेंद्र रिंग्वाल ने बताया कि अल्मोड़ा स्मैक खरीदकर ला रहे थे। जिसे अन्य युवाओं को बेचने की फिराक में थे। उन्होंने बताया कि स्मैक के साथ पकड़े गये युवकों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी टीम में उपनिरीक्षक सुरेंद्र रिंग्वाल, कांस्टेबल उमेश लोहनी, भूपेंद्र कुमार शामिल रहे।
| जिलेभर में मादक पदार्थों की रोकथाम और तस्करी करने वालों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोरोना काल की दूसरी लहर के बीच मादक पदार्थों की अवैध तस्कारी के मामले सामने आ रहे है। ताकुला पुलिस ने स्मैक के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। युवकों के कब्जे से आठ. उनतालीस ग्राम स्मैक बरामद की गई। बरामद किये गये स्मैक की कीमत करीब नब्बे हजार रुपये आंकी जा रही है। पुलिस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बीते बुधवार को सार्कोट स्कूल ताकुला के पास वाहन चेकिंग अभियान के दौरान वाहन संख्या यूके चार यू तीन हज़ार नौ सौ पाँच सैरवले बीट कार को चेक करने पर उसमें सवार पवन जोशी पुत्र स्व. रमेश चंद्र जोशी, निवासी ग्राम अमखोली ताकुला और जगदीश चंद्र लोहनी पुत्र स्व. जीवन चंद्र लोहनी निवासी ग्राम झारकोट सोमेश्वर के कब्जे से आठ. उनतालीस ग्राम स्मैक कीमत नब्बे हजार बरामद कर गिरफ्तार किया है। चौकी प्रभारी सुरेंद्र रिंग्वाल ने बताया कि अल्मोड़ा स्मैक खरीदकर ला रहे थे। जिसे अन्य युवाओं को बेचने की फिराक में थे। उन्होंने बताया कि स्मैक के साथ पकड़े गये युवकों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी टीम में उपनिरीक्षक सुरेंद्र रिंग्वाल, कांस्टेबल उमेश लोहनी, भूपेंद्र कुमार शामिल रहे। |
नोएडा। नोएडा स्थित सेक्टर 8 की जेजे कॉलोनी के एक घर में रविवार सुबह घरेलू गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। इस आग में एक ही परिवार के 6 लोग बुरी तरह झुलस गए। जानकारी के मुताबिक इस घटना में महज 12 दिन की एक मासूम बच्ची समेत कुल 2 बच्चों की मौत हो गई।
वहीं बाकी 4 घायल सदस्यों को दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक घटना रविवार सुबह करीब तीन बजे सेक्टर 8 के डी-221 के सामने बनी एक झुग्गी में हुई, जहां आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां और कोतवली फेज-1 की पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने आग पर काबू पाया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस दौरान एक ही परिवार के 6 लोग आग में बुरी तरह झुलस गए। सभी को नोएडा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 8 वर्षीय एक लड़के और महज 12 दिन की एक नवजात बच्ची की मौत हो गई।
गौतमबुद्ध नगर के सीएसओ प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आग गैस के सिलेंडर में लीकेज की वजह से लगने की बात सामने आई है।
वहीं चार घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
| नोएडा। नोएडा स्थित सेक्टर आठ की जेजे कॉलोनी के एक घर में रविवार सुबह घरेलू गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। इस आग में एक ही परिवार के छः लोग बुरी तरह झुलस गए। जानकारी के मुताबिक इस घटना में महज बारह दिन की एक मासूम बच्ची समेत कुल दो बच्चों की मौत हो गई। वहीं बाकी चार घायल सदस्यों को दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक घटना रविवार सुबह करीब तीन बजे सेक्टर आठ के डी-दो सौ इक्कीस के सामने बनी एक झुग्गी में हुई, जहां आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां और कोतवली फेज-एक की पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस दौरान एक ही परिवार के छः लोग आग में बुरी तरह झुलस गए। सभी को नोएडा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान आठ वर्षीय एक लड़के और महज बारह दिन की एक नवजात बच्ची की मौत हो गई। गौतमबुद्ध नगर के सीएसओ प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आग गैस के सिलेंडर में लीकेज की वजह से लगने की बात सामने आई है। वहीं चार घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। |
नई दिल्ली : सिप्ला (Cipla) अमेरिकी बाजार से गैस्ट्रिक अल्सर के इलाज में उपयोग होने वाली दवा के 5. 8 लाख से अधिक पैकेट वापस मंगा रही है. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) की एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी गई है. दवा कंपनी 10 एमजी, 20 एमजी और 40 एमजी की क्षमता वाली एसोमेप्राजोल मैगनेशियम (esomeprazole magnesium) दवाईयों को अमेरिकी बाजार से वापस मंगा रही है.
आपको बता दें कंपनी ने महाराष्ट्र स्थित कुरकुंभ कारखाने में बनाया था. इसके विनिर्माण के बाद में इन दवाइयों को अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित सहयोगी इकाई भेज दिया गया था. यूएसएफडीए (USFDA) के अनुसार अन्य उत्पादों के साथ संक्रमित होने की वजह से इन दवाइयों को वापस मंगाया जा रहा है.
इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि औषधीय तत्व क्रॉसपोवीडोन, एनएफ थेयोफिलाइन से संक्रमित पाया गया. अमेरिकी नियामक के अनुसार कंपनी 10 एमजी क्षमता के 2,84,610 पैकेट और 20 एमजी के 2,89,350 पैकेट दवा वापस मंगा रही है. इसके साथ ही कंपनी 40 एमजी क्षमता के एसोमेप्राजोल मैगनेशियम के 6,491 पैकेट वापस मंगा रही है.
आपको बता दें इन दवाइयों को वापस मंगाने का प्रोसेस 17 दिसंबर, 2020 से शुरू हो गया था. USFDA ने इसको क्लास 2 रिकॉल के तौर पर क्लासीफाई किया है. बता दें इसकी क्लास 2 क्लास रिकॉल प्रक्रिया तब शुरू की जाती है जब किसी भी दवाई के इस्तेमाल से किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीर और प्रतिकूल असर दिखाई देता है.
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| नई दिल्ली : सिप्ला अमेरिकी बाजार से गैस्ट्रिक अल्सर के इलाज में उपयोग होने वाली दवा के पाँच. आठ लाख से अधिक पैकेट वापस मंगा रही है. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी गई है. दवा कंपनी दस एमजी, बीस एमजी और चालीस एमजी की क्षमता वाली एसोमेप्राजोल मैगनेशियम दवाईयों को अमेरिकी बाजार से वापस मंगा रही है. आपको बता दें कंपनी ने महाराष्ट्र स्थित कुरकुंभ कारखाने में बनाया था. इसके विनिर्माण के बाद में इन दवाइयों को अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित सहयोगी इकाई भेज दिया गया था. यूएसएफडीए के अनुसार अन्य उत्पादों के साथ संक्रमित होने की वजह से इन दवाइयों को वापस मंगाया जा रहा है. इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि औषधीय तत्व क्रॉसपोवीडोन, एनएफ थेयोफिलाइन से संक्रमित पाया गया. अमेरिकी नियामक के अनुसार कंपनी दस एमजी क्षमता के दो,चौरासी,छः सौ दस पैकेट और बीस एमजी के दो,नवासी,तीन सौ पचास पैकेट दवा वापस मंगा रही है. इसके साथ ही कंपनी चालीस एमजी क्षमता के एसोमेप्राजोल मैगनेशियम के छः,चार सौ इक्यानवे पैकेट वापस मंगा रही है. आपको बता दें इन दवाइयों को वापस मंगाने का प्रोसेस सत्रह दिसंबर, दो हज़ार बीस से शुरू हो गया था. USFDA ने इसको क्लास दो रिकॉल के तौर पर क्लासीफाई किया है. बता दें इसकी क्लास दो क्लास रिकॉल प्रक्रिया तब शुरू की जाती है जब किसी भी दवाई के इस्तेमाल से किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीर और प्रतिकूल असर दिखाई देता है. . |
क्यों यह इंडिया ऑस्ट्रेलिया की सीरीज इंडिया के लिए इतनी जरूरी है?
किस कारण से गेंदबाजों को उठाना पड़ रहा है बल्ला?
मुंबई इंडियंस के फैन्स के लिए बड़ी खबर क्या इस बार कोच नही होंगे महेला जयवर्धने?
क्या अफगानिस्तान के खिलाड़ी की बातो में है सच्चाई?
इंग्लैंड 2-1 से जीता सीरीज तीसरे मैच में बल्लेबाजों ने नही दिया साथ।
| क्यों यह इंडिया ऑस्ट्रेलिया की सीरीज इंडिया के लिए इतनी जरूरी है? किस कारण से गेंदबाजों को उठाना पड़ रहा है बल्ला? मुंबई इंडियंस के फैन्स के लिए बड़ी खबर क्या इस बार कोच नही होंगे महेला जयवर्धने? क्या अफगानिस्तान के खिलाड़ी की बातो में है सच्चाई? इंग्लैंड दो-एक से जीता सीरीज तीसरे मैच में बल्लेबाजों ने नही दिया साथ। |
Aaj Ka Rashifal 2022: आज शुक्रवार का दिन और 07 अक्टूबर की तारीख है. बदलते दिन के साथ आपके ग्रह और नक्षत्र भी बदल रहे हैं. वहीं आज हम आपको बताएंगे कि आज के दिन किन राशियों (Rashifal) को अपने सेहत का ध्यान रखना होगा, किस राशि वालों को मिलेगा बड़ा लाभ, साथ ही कैसा रहने वाला है आज आपका राशिफल (Rashifal)? आपको बता दें, आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और शतभिषा नक्षत्र रहेगा. यह भी पढ़ेः Aaj Ka Rashifal 2022: इन राशि वालों के काम में आएगी रुकावटें, जानें क्या कहता हैं आज आपका राशिफल?
आज का दिन अच्छा होगा. आज आप अपने घर के विवादित मामलों को अपनी सूझबूझ से खत्म करने का प्रयास करेंगे. आज यदि आप वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो ये समय ठीक नहीं है. पार्टनर के साथ संबंध अच्छे होंगे.
इस राशि को लोगों में आज काफी जोश देखने को मिलेगा. किसी पुराने दोस्त से मुलाकात भी होगी. आज आप अपने परिवार वालों के साथ किसी धार्मिक स्थल जा सकते हैं. जल्दबाजी में कोई गलत फैसला लेने से परेशानी हो सकती है. पार्टनर के साथ समय व्यतीत करें.
आज के दिन समाज में भी आपका मान सम्मान बना रहेगा. इस समय किसी भी यात्रा से बचें, सेहत पर असर पड़ सकता है. घर से जुड़े कामों में खर्चा ज्यादा हो सकता है. पार्टनर के साथ आपकी जिद के कारण भी रिश्ते में दरार आने की संभावना है.
इस राशि के लोगों का आज का दिन मिलाजुला रहेगा. आज कोई बड़ा फैसला ले सकते है. किसी करीबी से मुलाकात होगी और किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर गंभीर चर्चा हो सकती है. आज अपने पार्टनर का सहयोग आपके लिए काफी आरामदायक रहेगा.
आज के दिन को कोई करीबी व्यक्ति आपके घर आ सकते हैं. अपनी पर्सनल बातें किसी को न बताएं. आज शाम तक आपका मन अशांत हो सकता है. परिवार वालों के साथ समय व्यतीत करें. पार्टनर के साथ लम्बे टूर पर जा सकते हैं.
इस राशि के लोगों को आज पूजा-पाठ में मन लगेगा. खुद की सेहत का ख्याल रखें. छात्रों को किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है. पार्टनर की किसी बात को लेकर आपका मन खुश रहेगा.
आज के दिन अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हो सकते है. आज करियर में कोई दिक्कत आ सकती है. कोई बड़ा प्रोजेक्ट आज हाथ से जा सकता है. आज आपको कोई भी निर्णय सोच- समझकर लेना होगा. अपने काम में परिवार और पार्टनर का भरपूर सहयोग मिलेगा.
इस राशि के लोग आज पारिवारिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों की खरीदारी हो सकती है. कोई अटका हुआ काम पूरा करने के लिए समय सही है. कोई भी योजना शुरू करने से पहले परिवार के सदस्यों से सलाह लें. पार्टनर के साथ रोमांटिक डेट पर जा सकते हैं.
आज के दिन धन हानि के योग हैं, फिजूलखर्ची से बचें. आज ऑफिस में आपको कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. सेहत का ख्याल रखे. बड़ों की राय अवश्य ले. आपके पार्टनर आज आपकी किसी बात से नाराज हो सकते है.
इस राशि के लोगों को क़ानूनी मामलों में फंसने की उम्मीद है. शिक्षा से जुड़ी कोई बाधा दूर होने से छात्र फिर से अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा पाएंगे. आपको सामाजिक सम्मान में वृद्धि होगी. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने के बजाय धैर्य और संयम बनाए रखें. आपके पार्टनर से बहस करने से बचें.
आज के दिन किसी से अचानक मुलाकात से मन प्रसन्न होगा. प्रॉपर्टी को लेकर कोई विवाद हजो सकता हैं. किसी पॉलिसी या प्रॉपर्टी आदि में निवेश करने के लिए समय अनुकूल है. किसी के बारे में जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. सेहत का ध्यान रखें. पार्टनर के साथ घूमने जा सकते है.
इस राशि के लोगों को आज मानसिक तनाव से राहत मिलेगी. किसी संस्था से जुड़ने का अवसर मिल सकता है. मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बिजनेसमैन को आज बड़ा लाभ मिल सकता है. वित्तीय लेन-देन से बचें. पार्टनर के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे.
यह भी पढ़ेः Aaj Ka Rashifal 2022: इन राशि वालों को रखना होगा अपने गुस्से पर काबू, जानें कैसा रहने वाला है आज आपका दिन?
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| Aaj Ka Rashifal दो हज़ार बाईस: आज शुक्रवार का दिन और सात अक्टूबर की तारीख है. बदलते दिन के साथ आपके ग्रह और नक्षत्र भी बदल रहे हैं. वहीं आज हम आपको बताएंगे कि आज के दिन किन राशियों को अपने सेहत का ध्यान रखना होगा, किस राशि वालों को मिलेगा बड़ा लाभ, साथ ही कैसा रहने वाला है आज आपका राशिफल ? आपको बता दें, आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और शतभिषा नक्षत्र रहेगा. यह भी पढ़ेः Aaj Ka Rashifal दो हज़ार बाईस: इन राशि वालों के काम में आएगी रुकावटें, जानें क्या कहता हैं आज आपका राशिफल? आज का दिन अच्छा होगा. आज आप अपने घर के विवादित मामलों को अपनी सूझबूझ से खत्म करने का प्रयास करेंगे. आज यदि आप वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो ये समय ठीक नहीं है. पार्टनर के साथ संबंध अच्छे होंगे. इस राशि को लोगों में आज काफी जोश देखने को मिलेगा. किसी पुराने दोस्त से मुलाकात भी होगी. आज आप अपने परिवार वालों के साथ किसी धार्मिक स्थल जा सकते हैं. जल्दबाजी में कोई गलत फैसला लेने से परेशानी हो सकती है. पार्टनर के साथ समय व्यतीत करें. आज के दिन समाज में भी आपका मान सम्मान बना रहेगा. इस समय किसी भी यात्रा से बचें, सेहत पर असर पड़ सकता है. घर से जुड़े कामों में खर्चा ज्यादा हो सकता है. पार्टनर के साथ आपकी जिद के कारण भी रिश्ते में दरार आने की संभावना है. इस राशि के लोगों का आज का दिन मिलाजुला रहेगा. आज कोई बड़ा फैसला ले सकते है. किसी करीबी से मुलाकात होगी और किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर गंभीर चर्चा हो सकती है. आज अपने पार्टनर का सहयोग आपके लिए काफी आरामदायक रहेगा. आज के दिन को कोई करीबी व्यक्ति आपके घर आ सकते हैं. अपनी पर्सनल बातें किसी को न बताएं. आज शाम तक आपका मन अशांत हो सकता है. परिवार वालों के साथ समय व्यतीत करें. पार्टनर के साथ लम्बे टूर पर जा सकते हैं. इस राशि के लोगों को आज पूजा-पाठ में मन लगेगा. खुद की सेहत का ख्याल रखें. छात्रों को किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है. पार्टनर की किसी बात को लेकर आपका मन खुश रहेगा. आज के दिन अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हो सकते है. आज करियर में कोई दिक्कत आ सकती है. कोई बड़ा प्रोजेक्ट आज हाथ से जा सकता है. आज आपको कोई भी निर्णय सोच- समझकर लेना होगा. अपने काम में परिवार और पार्टनर का भरपूर सहयोग मिलेगा. इस राशि के लोग आज पारिवारिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों की खरीदारी हो सकती है. कोई अटका हुआ काम पूरा करने के लिए समय सही है. कोई भी योजना शुरू करने से पहले परिवार के सदस्यों से सलाह लें. पार्टनर के साथ रोमांटिक डेट पर जा सकते हैं. आज के दिन धन हानि के योग हैं, फिजूलखर्ची से बचें. आज ऑफिस में आपको कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. सेहत का ख्याल रखे. बड़ों की राय अवश्य ले. आपके पार्टनर आज आपकी किसी बात से नाराज हो सकते है. इस राशि के लोगों को क़ानूनी मामलों में फंसने की उम्मीद है. शिक्षा से जुड़ी कोई बाधा दूर होने से छात्र फिर से अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा पाएंगे. आपको सामाजिक सम्मान में वृद्धि होगी. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने के बजाय धैर्य और संयम बनाए रखें. आपके पार्टनर से बहस करने से बचें. आज के दिन किसी से अचानक मुलाकात से मन प्रसन्न होगा. प्रॉपर्टी को लेकर कोई विवाद हजो सकता हैं. किसी पॉलिसी या प्रॉपर्टी आदि में निवेश करने के लिए समय अनुकूल है. किसी के बारे में जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. सेहत का ध्यान रखें. पार्टनर के साथ घूमने जा सकते है. इस राशि के लोगों को आज मानसिक तनाव से राहत मिलेगी. किसी संस्था से जुड़ने का अवसर मिल सकता है. मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बिजनेसमैन को आज बड़ा लाभ मिल सकता है. वित्तीय लेन-देन से बचें. पार्टनर के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे. यह भी पढ़ेः Aaj Ka Rashifal दो हज़ार बाईस: इन राशि वालों को रखना होगा अपने गुस्से पर काबू, जानें कैसा रहने वाला है आज आपका दिन? बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः |
चिली की ओर से चार्ल्स अरंगुइज और एडवर्डो वर्गाज ने एक-एक गोल किया. मुकाबला शुरु हुआ तो सभी को उम्मीद थी कि स्पेन अपनी पहली हार को भूलकर वापसी करने में कामयाब रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. चिली ने स्पेन को एकतरफा 2-0 से हराकर उसके स्टेडियम में उपस्थित हजारों दर्शकों को निराश कर दिया. चिली की ओर से पहला गोल एडवर्डो ने 20वें मिनट में लगाया. यह गोल डी के बहुत ही करीब से लगाया गया था.
| चिली की ओर से चार्ल्स अरंगुइज और एडवर्डो वर्गाज ने एक-एक गोल किया. मुकाबला शुरु हुआ तो सभी को उम्मीद थी कि स्पेन अपनी पहली हार को भूलकर वापसी करने में कामयाब रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. चिली ने स्पेन को एकतरफा दो-शून्य से हराकर उसके स्टेडियम में उपस्थित हजारों दर्शकों को निराश कर दिया. चिली की ओर से पहला गोल एडवर्डो ने बीसवें मिनट में लगाया. यह गोल डी के बहुत ही करीब से लगाया गया था. |
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ओणम के अवसर पर सभी को, विशेष रूप से केरल और दुनिया भर में फैले मलयाली समुदाय के लोगों को बधाई दी है।
एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा;
"सभी को, विशेष रूप से केरल और दुनिया भर में फैले मलयाली समुदाय के लोगों को ओणम की बधाई। यह त्योहार प्रकृति माँ की महत्वपूर्ण भूमिका और हमारे मेहनती किसानों के महत्व की पुष्टि करता है। ओणम हमारे समाज में सद्भाव की भावना को और मजबूत करे।"
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| Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ओणम के अवसर पर सभी को, विशेष रूप से केरल और दुनिया भर में फैले मलयाली समुदाय के लोगों को बधाई दी है। एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा; "सभी को, विशेष रूप से केरल और दुनिया भर में फैले मलयाली समुदाय के लोगों को ओणम की बधाई। यह त्योहार प्रकृति माँ की महत्वपूर्ण भूमिका और हमारे मेहनती किसानों के महत्व की पुष्टि करता है। ओणम हमारे समाज में सद्भाव की भावना को और मजबूत करे।" Read this release in: |
थी कि शाम्रफल की जाली (जिसके भीतर गुठली रहती है) में भरी जा सकती थी ।
माडव रूप सुन्दरी रूपमती माडव की राजमहिपी के रूप में जब माडव के प्रासाद को सौंदर्य तथा संगीत से विभूषित एव सुगुजित की, तव प्रणयी वाजवहादुर ने अपने भाग्य को सराहा । रूप हिन्दू थी अत रेवा (नर्मदा) पर वडी श्रद्धा रखती थी । नित्य रेवा दर्शन कर उसे बडी प्रसन्नता होती थी । सुलतान ने अपनी परिणीता प्रणयिनी के लिये रेवा दर्शन महल नामक एक ऊंचे भवन का निर्माण करवाया। जहां से नित्य रेवा का दर्शन व अर्चन करती थी। तत्पश्चात् जहाज महल, हिन्डोला महल, एव अशर्फी महल नामक कलात्मक प्रासाद रानी रूपमती के लिये निर्मित हुये । वाज वहादुर महल तथा रूपमती महल भी दर्शनीय है । रेवा कुन्ड और नीलकठ के अतिरिक्त जामामसजिद होशगशाह का मकवरा तथा मुहम्मद खिलजी का मकबरा है, इनके सुन्दर स्तम्भ, करे, द्वार, गुम्वद, मेहरावें मुस्लिम कला की, अनुपम वस्तुयें हैं । रूपमती महल के समीप का जलाशय संगीत की रानी रूप की उन स्मृति को सजीव कर देता है । जव वाजवहादुर ग्रन्थ वेगमी के नमीप होते तो स्वर किन्नरी रूप मन बहलावे के लिये सितार के पतले तारों पर विहाग के स्वर छेड़ देती थी कम्पित समीर की लहरियो से संदेश पा संगीत की राग-रागिनियो से उसका उत्तर में वाजवहादुर प्रणयिनी के समीप आ जाते थे। भूपकल्याण राम की निर्मातृ रूप ही मानी जाती है। इसी प्रकार इसके कला प्रिय हृदयेश्वर वाज वहादुर ने स्याल वाजखानी तर्ज निकाला था ।
रूप की सजीव प्रतिमा कलामयी रूपमती, गुणवती होने के साथ भारतीय नारीत्व का उज्ज्वल रत्न थी जिसने अपने सतीत्व रक्षार्थ विषपान कर लिया था ।
आज न प्रणयिनी रूप है न उसके प्रिय बाजबहादुर, किन्तु सुषमा शाली प्रकृति के बीच धार से २२ मील दक्षिण में अवस्थित माडव दुर्ग के प्रासाद आप वर्षा सहते मधुर प्रेम कथा की स्मृति को साकार कर रहे हैं । यह माडव वीर आल्हा ऊदल की उस स्मृति को जागृत कर देता है । जिन्होने अपने पिता के वध का बदला लेने के लिये तत्कालीन नरेश को परास्त कर मरवा डाला था और माडव को ध्वस कर दिया था ।
माडव दुर्ग की प्राकृतिक सुषमा, प्रासादो, वन-वृक्षो, तरु- लतिकाओ तृण-वीरुघो में मानो रूपरानी की मधुर प्रणय कथा एव वलिदान निखर रहा है जिन्हें याद कर भावुक मन एक कसक के साथ गुनगुना उठता है
रूपा के महलो में सोई, मुस्लिम युग को याद । माडव दुर्ग मौन हो जैसे, करता हो
उल्लास ।
जहाँ कभी सगीत निगुजन, था अनुपम आज वने भग्नावशेष हैं, रूपमती
प्रासाद ।
उस युग की है याद दिलाता, महल हिडोला मानी । त्याग मयी है मालव धरणी, संस्कृतियो की रानी । | थी कि शाम्रफल की जाली में भरी जा सकती थी । माडव रूप सुन्दरी रूपमती माडव की राजमहिपी के रूप में जब माडव के प्रासाद को सौंदर्य तथा संगीत से विभूषित एव सुगुजित की, तव प्रणयी वाजवहादुर ने अपने भाग्य को सराहा । रूप हिन्दू थी अत रेवा पर वडी श्रद्धा रखती थी । नित्य रेवा दर्शन कर उसे बडी प्रसन्नता होती थी । सुलतान ने अपनी परिणीता प्रणयिनी के लिये रेवा दर्शन महल नामक एक ऊंचे भवन का निर्माण करवाया। जहां से नित्य रेवा का दर्शन व अर्चन करती थी। तत्पश्चात् जहाज महल, हिन्डोला महल, एव अशर्फी महल नामक कलात्मक प्रासाद रानी रूपमती के लिये निर्मित हुये । वाज वहादुर महल तथा रूपमती महल भी दर्शनीय है । रेवा कुन्ड और नीलकठ के अतिरिक्त जामामसजिद होशगशाह का मकवरा तथा मुहम्मद खिलजी का मकबरा है, इनके सुन्दर स्तम्भ, करे, द्वार, गुम्वद, मेहरावें मुस्लिम कला की, अनुपम वस्तुयें हैं । रूपमती महल के समीप का जलाशय संगीत की रानी रूप की उन स्मृति को सजीव कर देता है । जव वाजवहादुर ग्रन्थ वेगमी के नमीप होते तो स्वर किन्नरी रूप मन बहलावे के लिये सितार के पतले तारों पर विहाग के स्वर छेड़ देती थी कम्पित समीर की लहरियो से संदेश पा संगीत की राग-रागिनियो से उसका उत्तर में वाजवहादुर प्रणयिनी के समीप आ जाते थे। भूपकल्याण राम की निर्मातृ रूप ही मानी जाती है। इसी प्रकार इसके कला प्रिय हृदयेश्वर वाज वहादुर ने स्याल वाजखानी तर्ज निकाला था । रूप की सजीव प्रतिमा कलामयी रूपमती, गुणवती होने के साथ भारतीय नारीत्व का उज्ज्वल रत्न थी जिसने अपने सतीत्व रक्षार्थ विषपान कर लिया था । आज न प्रणयिनी रूप है न उसके प्रिय बाजबहादुर, किन्तु सुषमा शाली प्रकृति के बीच धार से बाईस मील दक्षिण में अवस्थित माडव दुर्ग के प्रासाद आप वर्षा सहते मधुर प्रेम कथा की स्मृति को साकार कर रहे हैं । यह माडव वीर आल्हा ऊदल की उस स्मृति को जागृत कर देता है । जिन्होने अपने पिता के वध का बदला लेने के लिये तत्कालीन नरेश को परास्त कर मरवा डाला था और माडव को ध्वस कर दिया था । माडव दुर्ग की प्राकृतिक सुषमा, प्रासादो, वन-वृक्षो, तरु- लतिकाओ तृण-वीरुघो में मानो रूपरानी की मधुर प्रणय कथा एव वलिदान निखर रहा है जिन्हें याद कर भावुक मन एक कसक के साथ गुनगुना उठता है रूपा के महलो में सोई, मुस्लिम युग को याद । माडव दुर्ग मौन हो जैसे, करता हो उल्लास । जहाँ कभी सगीत निगुजन, था अनुपम आज वने भग्नावशेष हैं, रूपमती प्रासाद । उस युग की है याद दिलाता, महल हिडोला मानी । त्याग मयी है मालव धरणी, संस्कृतियो की रानी । |
- करण जौहर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं।
- करण ने अब अपने बच्चों का एक नया वीडियो अपलोड किया है।
- वीडियो में वह अपने बेटे यश से देश का नाम पूछ रहे हैं।
मुंबई. करण जौहर सोशल मीडिया पर सबसे एक्टिव सेलेब हैं। करण जौहर के बच्चे के वीडियोज को फैंस काफी पसंद करते हैं। करण ने सोशल मीडिया पर अपने बच्चों- यश और रूही का एक नई वीडियो अपलोड किया है।
करण जौहर ने अपने बच्चों का एक नया वीडियो शेयर किया है। वीडियो में करण अपने बेटे यश से उनका नाम पूछते हैं। करण के सवाल पर यश बोलते हैं- 'यश जौहर। ' करण इसके बाद पूछते हैं- 'आप कहां रहते हो? '
यश इस पर बोलते हैं- 'मुंबई। ' आखिर में करण पूछते हैं कि आप कौन से देश में रहते हो? ' यश इस पर बोले- 'अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान। ' बेटे का जवाब सुनकर करण हंस देते हैं। वह कहते हैं बेटा अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान कोई देश नहीं है। आप भारत में रहते हो।
करण ने सोशल मीडिया पर इससे पहले एक और वीडियो पोस्ट किया था। करण उन्हें कहते हैं, 'मैं तुम्हारे लिए गाना गाऊंगा, डैडा तुम्हारे लिए गाएंगे. . '। इसके बाद करण जौहर 'चौदहवी का चांद' गाना गाने लगते हैं।
करण जौहर के गाने पर रूही और यश दोनों उन्हें गाना गाने से मना करते हैं और रूही कहती हैं कि इससे उनके सिर में दर्द हो रहा है। करण दूसरा गाना 'गुम है किसी के प्यार में' गाने लगते हैं जिसे सुनकर यश भी कहते हैं कि उनके सिर में दर्द हो रहा है। ये सुनकर करण हंसने लगते हैं और सॉरी बोलते हैं।
वर्कफ्रंट की बात करें तो करण जौहर तख्त फिल्म डायरेक्ट करने वाले हैं। इस फिल्म में करीना कपूर, आलिया भट्ट, रणवीर सिंह, जान्हवी कपूर, विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर और अनिल कपूर हैं। फिल्म मुगल काल पर आधारित है।
करण जौहर की तख्त अगले साल 21 दिसंबर में रिलीज होने वाली है। हालांकि कोरोना वायरस और फिर लॉकडाउन के कारण फिल्म की शूटिंग रुक गई है। करण इस संकट की घड़ी में मदद के लिए भी आगे आए हैं।
| - करण जौहर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं। - करण ने अब अपने बच्चों का एक नया वीडियो अपलोड किया है। - वीडियो में वह अपने बेटे यश से देश का नाम पूछ रहे हैं। मुंबई. करण जौहर सोशल मीडिया पर सबसे एक्टिव सेलेब हैं। करण जौहर के बच्चे के वीडियोज को फैंस काफी पसंद करते हैं। करण ने सोशल मीडिया पर अपने बच्चों- यश और रूही का एक नई वीडियो अपलोड किया है। करण जौहर ने अपने बच्चों का एक नया वीडियो शेयर किया है। वीडियो में करण अपने बेटे यश से उनका नाम पूछते हैं। करण के सवाल पर यश बोलते हैं- 'यश जौहर। ' करण इसके बाद पूछते हैं- 'आप कहां रहते हो? ' यश इस पर बोलते हैं- 'मुंबई। ' आखिर में करण पूछते हैं कि आप कौन से देश में रहते हो? ' यश इस पर बोले- 'अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान। ' बेटे का जवाब सुनकर करण हंस देते हैं। वह कहते हैं बेटा अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान कोई देश नहीं है। आप भारत में रहते हो। करण ने सोशल मीडिया पर इससे पहले एक और वीडियो पोस्ट किया था। करण उन्हें कहते हैं, 'मैं तुम्हारे लिए गाना गाऊंगा, डैडा तुम्हारे लिए गाएंगे. . '। इसके बाद करण जौहर 'चौदहवी का चांद' गाना गाने लगते हैं। करण जौहर के गाने पर रूही और यश दोनों उन्हें गाना गाने से मना करते हैं और रूही कहती हैं कि इससे उनके सिर में दर्द हो रहा है। करण दूसरा गाना 'गुम है किसी के प्यार में' गाने लगते हैं जिसे सुनकर यश भी कहते हैं कि उनके सिर में दर्द हो रहा है। ये सुनकर करण हंसने लगते हैं और सॉरी बोलते हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो करण जौहर तख्त फिल्म डायरेक्ट करने वाले हैं। इस फिल्म में करीना कपूर, आलिया भट्ट, रणवीर सिंह, जान्हवी कपूर, विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर और अनिल कपूर हैं। फिल्म मुगल काल पर आधारित है। करण जौहर की तख्त अगले साल इक्कीस दिसंबर में रिलीज होने वाली है। हालांकि कोरोना वायरस और फिर लॉकडाउन के कारण फिल्म की शूटिंग रुक गई है। करण इस संकट की घड़ी में मदद के लिए भी आगे आए हैं। |
एक स्टील व्यापारी से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई तो पुलिस ने इसे मामले में केस दर्ज कर दो बदमाशों को पकड़ा. बदमाशों ने व्यापारी को धमकी दी थी कि एक करोड़ रुपये दो, नहीं तो गोली मार देंगे. (हिसार से प्रवीण कुमार की रिपोर्ट)
बिजनेसमैन प्रवीण गर्ग ने हांसी पुलिस को शिकायत दी थी, जिसमें फिरौती मांगने वाले ने मोबाइल फोन पर व्यापारी से कहा कि वह उनका घर जनता है इसलिए भलाई इसी में है कि तुम मुझे एक करोड़ रुपये दे दो, नहीं तो तुम्हें गोली से उड़ा दूंगा.
हांसी के एसपी लोकेद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने फिरौती मांगने के मामले में मुख्य आरोपी विक्रम राठी व उसके सहयोगी विनीत को अरेस्ट कर लिया है.
पुलिस ने दोनों को साइबर सेल की मदद से पकड़ा है. दोनों आरोपियों के खिलाफ रेप और अन्य धाराओं के मुकदमे दर्ज है.
एसपी ने आगे बताया कि दोनों की दोस्ती थी और दोनों शराब पीते थे. विक्रम पर तीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा जहां से पुलिस पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड की मांग करेगी.
| एक स्टील व्यापारी से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई तो पुलिस ने इसे मामले में केस दर्ज कर दो बदमाशों को पकड़ा. बदमाशों ने व्यापारी को धमकी दी थी कि एक करोड़ रुपये दो, नहीं तो गोली मार देंगे. बिजनेसमैन प्रवीण गर्ग ने हांसी पुलिस को शिकायत दी थी, जिसमें फिरौती मांगने वाले ने मोबाइल फोन पर व्यापारी से कहा कि वह उनका घर जनता है इसलिए भलाई इसी में है कि तुम मुझे एक करोड़ रुपये दे दो, नहीं तो तुम्हें गोली से उड़ा दूंगा. हांसी के एसपी लोकेद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने फिरौती मांगने के मामले में मुख्य आरोपी विक्रम राठी व उसके सहयोगी विनीत को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस ने दोनों को साइबर सेल की मदद से पकड़ा है. दोनों आरोपियों के खिलाफ रेप और अन्य धाराओं के मुकदमे दर्ज है. एसपी ने आगे बताया कि दोनों की दोस्ती थी और दोनों शराब पीते थे. विक्रम पर तीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा जहां से पुलिस पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड की मांग करेगी. |
बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर के बारे में कम ही लोग ये बात जानते हैं कि बड़े पर्दे पर नजर आने से पहले वह काफी वक्त तक पर्दे के पीछे सक्रिय रही हैं. 18 जुलाई सन 1989 को जन्मीं भूमि के पिता की मुंह के कैंसर के चलते मौत हो गई थी जिसके बाद उनकी मां ने उन्हें पाला और साथ ही कैंसर के लिए अवेयरनेस का हिस्सा बनीं. भूमि जो आज करोड़ों लोगों की इंस्पिरेशन हैं उन्हें बचपन में स्कूल से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि उनकी अटेंडेंस कम थी.
भूमि ने यश राज फिल्म्स की दिग्गज और मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा के अंडर तकरीबन 6 साल तक काम किया है. इसके अलावा वह काफी वक्त तक असिस्टेंट फिल्म डायरेक्टर के तौर पर भी काम करती रही हैं. भूमि ने अपनी अब तक की सभी फिल्मों में जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन दिखाया है. उनके 31वें जन्मदिन पर चलिए आपको बताते हैं उन फिल्मों के बारे में जिनमें भूमि पेडनेकर ने जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेंशन दिखाया.
भूमि पेडनेकर ने सिल्वर स्क्रीन पर अपने करियर की शुरुआत की थी साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म दम लगा के हईशा से. फिल्म में क्योंकि उनका किरदार एक ओवरवेट वुमेन का था तो भूमि ने अपना वजन तकरीबन 12 किलो तक बढ़ा लिया था. उन्होंने फैन्स को और ज्यादा सरप्राइज तब कर दिया जब फिल्म की रिलीज से पहले उन्होंने अपने इस बढ़े हुए वजन को घटा भी लिया.
भूमि पेडनेकर की दूसरी फिल्म थी टॉयलेट एक प्रेम कथा. पीएम मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को सपोर्ट करती इस फिल्म में भूमि अक्षय कुमार के साथ लीडिंग लेडी के किरदार में नजर आई थीं. फिल्म में न सिर्फ भूमि का जबरदस्त फिजीक ट्रांसफॉर्मेशन दिखा बल्कि वह बोली और भाषा के लिहाज से भी एक देसी महिला के किरदार में ढल गईं.
साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म सोनचिड़िया में भूमि सुशांत सिंह राजपूत के साथ दिखीं. इस फिल्म में भूमि ने गांव की महिला का लुक लिया था. फिल्म में उनके लुक और उनके काम दोनों की काफी तारीफ हुई थी.
आयुष्मान खुराना के साथ भूमि पेडनेकर जब दोबारा स्क्रीन पर नजर आईं तो ये फिल्म थी बाला. एक ऐसे लड़के की कहानी जो हेयरफॉल की दिक्कत से परेशान है. इस फिल्म में भी भूमि बिलकुल बदली-बदली नजर आईं. उन्होंने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया जिसका स्किन टोन काफी डार्क है.
भूमि पेडनेकर की एक्टिंग का जादू फिल्म सांड की आंख में भी देखने को मिला. फिल्म में भूमि ने एक बुजुर्ग महिला का किरदार निभाया था. न सिर्फ उनका लुक काफी ज्यादा पसंद किया गया बल्कि उनके किरदार की भी वो सारी खूबियां अख्तियार कर लीं जिसने उन्हें खूब शोहरत दिलाई.
| बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर के बारे में कम ही लोग ये बात जानते हैं कि बड़े पर्दे पर नजर आने से पहले वह काफी वक्त तक पर्दे के पीछे सक्रिय रही हैं. अट्ठारह जुलाई सन एक हज़ार नौ सौ नवासी को जन्मीं भूमि के पिता की मुंह के कैंसर के चलते मौत हो गई थी जिसके बाद उनकी मां ने उन्हें पाला और साथ ही कैंसर के लिए अवेयरनेस का हिस्सा बनीं. भूमि जो आज करोड़ों लोगों की इंस्पिरेशन हैं उन्हें बचपन में स्कूल से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि उनकी अटेंडेंस कम थी. भूमि ने यश राज फिल्म्स की दिग्गज और मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा के अंडर तकरीबन छः साल तक काम किया है. इसके अलावा वह काफी वक्त तक असिस्टेंट फिल्म डायरेक्टर के तौर पर भी काम करती रही हैं. भूमि ने अपनी अब तक की सभी फिल्मों में जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन दिखाया है. उनके इकतीसवें जन्मदिन पर चलिए आपको बताते हैं उन फिल्मों के बारे में जिनमें भूमि पेडनेकर ने जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेंशन दिखाया. भूमि पेडनेकर ने सिल्वर स्क्रीन पर अपने करियर की शुरुआत की थी साल दो हज़ार पंद्रह में रिलीज हुई फिल्म दम लगा के हईशा से. फिल्म में क्योंकि उनका किरदार एक ओवरवेट वुमेन का था तो भूमि ने अपना वजन तकरीबन बारह किलो तक बढ़ा लिया था. उन्होंने फैन्स को और ज्यादा सरप्राइज तब कर दिया जब फिल्म की रिलीज से पहले उन्होंने अपने इस बढ़े हुए वजन को घटा भी लिया. भूमि पेडनेकर की दूसरी फिल्म थी टॉयलेट एक प्रेम कथा. पीएम मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को सपोर्ट करती इस फिल्म में भूमि अक्षय कुमार के साथ लीडिंग लेडी के किरदार में नजर आई थीं. फिल्म में न सिर्फ भूमि का जबरदस्त फिजीक ट्रांसफॉर्मेशन दिखा बल्कि वह बोली और भाषा के लिहाज से भी एक देसी महिला के किरदार में ढल गईं. साल दो हज़ार उन्नीस में रिलीज हुई फिल्म सोनचिड़िया में भूमि सुशांत सिंह राजपूत के साथ दिखीं. इस फिल्म में भूमि ने गांव की महिला का लुक लिया था. फिल्म में उनके लुक और उनके काम दोनों की काफी तारीफ हुई थी. आयुष्मान खुराना के साथ भूमि पेडनेकर जब दोबारा स्क्रीन पर नजर आईं तो ये फिल्म थी बाला. एक ऐसे लड़के की कहानी जो हेयरफॉल की दिक्कत से परेशान है. इस फिल्म में भी भूमि बिलकुल बदली-बदली नजर आईं. उन्होंने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया जिसका स्किन टोन काफी डार्क है. भूमि पेडनेकर की एक्टिंग का जादू फिल्म सांड की आंख में भी देखने को मिला. फिल्म में भूमि ने एक बुजुर्ग महिला का किरदार निभाया था. न सिर्फ उनका लुक काफी ज्यादा पसंद किया गया बल्कि उनके किरदार की भी वो सारी खूबियां अख्तियार कर लीं जिसने उन्हें खूब शोहरत दिलाई. |
(जी. एन. एस) ता. 09पुणेपुणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द़वारा संजीवनी एंबुलेंस सेवाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। ये एफआइआर सेवा के बदले मरीज से अधिक धनराशि मांगने के मामले में आईपीसी की धारा 420 के तहत पुणे के बीबवेवाड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है।
| ता. नौपुणेपुणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द़वारा संजीवनी एंबुलेंस सेवाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। ये एफआइआर सेवा के बदले मरीज से अधिक धनराशि मांगने के मामले में आईपीसी की धारा चार सौ बीस के तहत पुणे के बीबवेवाड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। |
पाज़ीरिक की जमी हुई समाधिया
शासकों के कब्रिस्तान से दीखते थे । मिट्टी और पत्थर के बडे-बडे ढेरो को खोदकर अलग दिया गया, तो खनको को पत्थरो से भरे आयताकार गड्ढे मिले जिनकी दीवारों पर लट्टे जड़े थे। उन्हें हटाने पर गड्ढे के एक सिरे पर सात से सोलह घोडो तक के ककाल (घोडो को फरसो से कत्ल किया गया था ) तथा लकडी की भारी गाडियो के अवशेष मिले, एक गड्ढे मे तो चार पहियो वाला हल्का रथ मिला । कहीं-कही पर तम्बू बनाने के लट्ठो के बडल और उनके साथ कास्य-पात्र व गाजे के बीज भी मिले । ये वस्तुए एक दूसरे ज्यादा गहरे आयताकार गड्ढे के उत्तरी सिरे पर एक पटिया पर मिली थी । इस गड्ढे की दीवारों और छत पर मजबूत पटरे लगे हुए थे जो मजबूत खम्भो के सहारे अपने स्थान पर जमे थे । यही मुख्य समाधि थी । और उसमे बर्फ का एक विशाल खड रखा था ।
सभी समाधियो की अनधिकृत खुदाई पहले की जा चुकी थी । पुराने समाधि-खनको ने शायद इतनी गहराई तक खुदाई की थी कि हमेशा जमी रहने वाली मिट्टी तक जा पहुँचे थे, लेकिन पानी नही निकला था । लेकिन जब डाकुओ ने गड्ढे के भराव को गडबड कर दिया तो ऊपरी मिट्टी की नमी रिस-रिस कर पटरी से रक्षित गड्ढे मे पहुचने लगी और क्रमश गड्ढा लबालब भर गया । तब गर्मी के ताप से दूर यह पानी जम गया और डाकू जो कुछ भी समाधियो के भीतर छोड गये थे, इस उडे गोदाम मे परिरक्षित रहता आया । तब रुदेन्को ने उन्हे खोला । बर्फ की सिल के नीचे, समाधि के फर्श पर पडी वस्तुए हल्की-हल्की दीखने लगी, तो उत्खनन के सामान्य तरीके छोडने पडे । रुदेन्को ने एक आसान तरीका अपनाया । उसने उबलता हुआ पानी बर्फ पर डाल दिया, फिर उसे पम्प करके बाहर निकाल दिया - और समाधि की वस्तुऐ निरावरण सामने थी ।
समाधि मे तनो को खोखला करके बनाए ताबूतो मे दो शव थे - एक राजा का, और दूसरा उसकी पत्नी या प्रिय रक्षिता का । सोने-चादी की वस्तुए, जिन्होने डाकुओं को आकर्षित किया था, गायब थी, लेकिन जो कुछ मिला वह मिस्र के पहाडो को काटकर बनाई गयी समाधियो के अलावा पुराविदो को कही नही मिल सकता, मिस्र की वायुरुद्ध मुद्राकित गुफाओ की भातियहा पर बर्फ ने आदमी की सर्वाधिक नाशवान वस्तुओं को सुरक्षित रखा था । कालीने, कसीदाकारी और जडाऊनमदे के पर्दे लगभग पूरे के पूरे मिले, और उनसे पाचवी शताब्दी ईसापूर्व के खानाबदोशो की संस्कृति का अनायास उद्घाटन हो गया ।
हेरोदोतस ने अपने समय के शक राजाओ की समाधियो का वर्णन किया था, जो ऊपरी द्नीपर के किनारे स्थित एक सुनसान मैदान में दफनाए गए थे ( उन मे से एक बल्गारिया मे निकोपोल के पास अविकल रूप में मिला है) । शव सलेपित थे । राजा के शव को निचले पटरे-लगे गड्ढे मे रखकर, उसकी छत पर राजा की एक रक्षिता, उसके घोड़े, पानपात्र-वाहक और रसोइए के शवो को रखकर कब्र को पूर दिया और उस पर एक विशाल टीला बना दिया जाता था। एक साल बाद, उसके पचास सर्वाधिक विश्वासपात्र आदमियो को मार कर, उनके
पाज़ीरिक की जमी हुई समाधियां
पश्चिमी साइवेरिया मे, अल्ताई पर्वत श्रेणी के उत्तर मे तथा मीस्क नगर के दक्षिण-पूर्व
मे लगभग 130 मील दूर, एक छोटी सी नदी की घाटी मे पाज़ीरिक नामक एक स्थान है । रुसी पुराविद् रुदेन्को ने वहाँ खुदाइया करायी थी । खोज की परिस्थितियो और प्राप्त वस्तुओ की प्रकृति की दृष्टि से वे खुदाइया अपूर्व थी और उनका ऐतिहासिक महत्त्व बहुत अधिक है। पाज़ीरिक मे कभी कोई बस्ती नही रही । सुनसान घाटी मे विशाल टीले थे, जो किसी खानावदोश जाति के
पाजीरिक की जमी हुई समाधियां
मैदानो के दक्षिण में वस्तिया वसाकर रहने वाले लोग दूसरोदा रहते और परस्पर
अज्ञात जातियो व राष्ट्रों में विभाजित थे, लेकिन घास के मैदानो के खानावदोशो का अपना एक स्वच्छन्द समुदाय था - फलत पाजीरिक की एक ही समाधि मे पुरुप निश्चयत मगोल है लेकिन स्त्री भरोपीय । और वे शक हो या मगोल, लडाके श्रेष्ठ थे । वे जमकर लडाई लडने से वचते थे - दारा ने उन्हें पराजित करने का सकल्प किया तो उन्होंने यही किया था । लेकिन जब कभी खराब मौसम के कारण भुखमरी हो जाती थी या जनसख्या अधिक हो जाने पर आत्मविश्वास बढ जाता था या दूसरे पक्ष को निर्बलता को देखकर उनका लोभ वढ जाता था, तो वे समृद्ध दक्षिणी राज्यो पर - जहा की सम्पत्ति का पता उन्हें अपने घोडो और घर मे वने रंगीन नमदो के व्यापार के कारण था- हमला कर देते थे और लूट का माल लेकर वापस आ जाते थे । ऐसे हमलो से डरने के कारण दक्षिण के नासक उन्हे 'दानेगेड', शान्ति बनाये रखने की रिश्वत, देने को तैयार रहते थे । उस तरह, व्यापार, रिश्वत और युद्ध के जरिये मैदानी खानावदोशो को सभ्य ससार की सभी वस्तुए प्राप्त हो जाती थी। और वे वस्तुए विशाल घास के मैदान के आर-पार हाथों-हाथ पहुच जाती थी । पूर्वी यूरोप और एशिया के राज्यो और साम्राज्यो के वीच सम्पर्क बहुत कम था; लेकिन एक हद तक खानाबदोश मध्यस्थ का काम करते थे और प्रत्येक की कलाओ की कुछ जानकारी दूसरे तक पहुचाते थे । क्रीमिया और उऋइन की टीलेदार समाधियो मे सोने की चीजे, यूनानी शिल्पियो द्वारा निर्मित वढिया किस्म के जवाहरात, और पाचवी शताब्दी के एथेन्स के कारखानो के रजित मृद्भाड मिलते है, लेकिन इनके साथ-साथ स्थानीय गिल्पियों द्वारा निर्मित कास्य और सोने के आभूषण भी है जिनपर अजीबोगरीब हरकत करती हुई अत्यधिक अलकृत पशु आकृतिया है - इस अजीव कला को केवल 'शक' कहा जा सकता है, और धातु की ऐसी ही वस्तुए तथा मानव के शरीर पर गुदी हुई ऐसी ही आकृतिया पाजीरिक मे मिली है। चीन की कला पर इनका काफी प्रभाव पड़ा है । भूभाग के इसी छोर पर, साइबेरियाई समाधियो मे, स्थानीय नमदो के साथ-साथ ईरानी कालीन और चीनी रेशम भी है, और दूर उत्तर, मगोलिया के नोइन नामक स्थान पर एक समाधि पाटी गयी है जिसमे चीनी, शक और यूनानी वस्तुए है । यूनानी वस्तुओ से ( फिर चाहे वे पश्चिमी एशिया मे ही क्यो न वनाई गयी हो) सिद्ध होता है कि ईसा पूर्व की अन्तिम शताब्दियो मे, खानाबदोशो ने यूनानी कला को चीन की सीमाओ तक पहुचा दिया था ।
हम विशेषज्ञता के युग मे जीवित है और विद्वान् अपना शोधकार्य एक ही क्षेत्र मे सीमित रखते है । उत्कृष्ट प्राचीन कलाकृतियो की उत्पादक सभ्यताओं में से किसी एक - यूनान और मिस्र, मेसोपोटामिया और फारस, भारत और चीन - पर ध्यान केन्द्रित करते है, और उनका अलग-अलग विवेचन करते है, मानो उनकी कलाओ का विकास शून्य मे हुआ है। सचाई, बेशक, इसके विपरीत है । लेकिन, अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्य, कूटनीतिक सम्बन्धो, विजय - युद्धो और जनस्थानान्तरणो पर खूब ध्यान देने के बावजूद हमे भूलना नही चाहिए कि घास के मैदानो के घुमन्तू | पाज़ीरिक की जमी हुई समाधिया शासकों के कब्रिस्तान से दीखते थे । मिट्टी और पत्थर के बडे-बडे ढेरो को खोदकर अलग दिया गया, तो खनको को पत्थरो से भरे आयताकार गड्ढे मिले जिनकी दीवारों पर लट्टे जड़े थे। उन्हें हटाने पर गड्ढे के एक सिरे पर सात से सोलह घोडो तक के ककाल तथा लकडी की भारी गाडियो के अवशेष मिले, एक गड्ढे मे तो चार पहियो वाला हल्का रथ मिला । कहीं-कही पर तम्बू बनाने के लट्ठो के बडल और उनके साथ कास्य-पात्र व गाजे के बीज भी मिले । ये वस्तुए एक दूसरे ज्यादा गहरे आयताकार गड्ढे के उत्तरी सिरे पर एक पटिया पर मिली थी । इस गड्ढे की दीवारों और छत पर मजबूत पटरे लगे हुए थे जो मजबूत खम्भो के सहारे अपने स्थान पर जमे थे । यही मुख्य समाधि थी । और उसमे बर्फ का एक विशाल खड रखा था । सभी समाधियो की अनधिकृत खुदाई पहले की जा चुकी थी । पुराने समाधि-खनको ने शायद इतनी गहराई तक खुदाई की थी कि हमेशा जमी रहने वाली मिट्टी तक जा पहुँचे थे, लेकिन पानी नही निकला था । लेकिन जब डाकुओ ने गड्ढे के भराव को गडबड कर दिया तो ऊपरी मिट्टी की नमी रिस-रिस कर पटरी से रक्षित गड्ढे मे पहुचने लगी और क्रमश गड्ढा लबालब भर गया । तब गर्मी के ताप से दूर यह पानी जम गया और डाकू जो कुछ भी समाधियो के भीतर छोड गये थे, इस उडे गोदाम मे परिरक्षित रहता आया । तब रुदेन्को ने उन्हे खोला । बर्फ की सिल के नीचे, समाधि के फर्श पर पडी वस्तुए हल्की-हल्की दीखने लगी, तो उत्खनन के सामान्य तरीके छोडने पडे । रुदेन्को ने एक आसान तरीका अपनाया । उसने उबलता हुआ पानी बर्फ पर डाल दिया, फिर उसे पम्प करके बाहर निकाल दिया - और समाधि की वस्तुऐ निरावरण सामने थी । समाधि मे तनो को खोखला करके बनाए ताबूतो मे दो शव थे - एक राजा का, और दूसरा उसकी पत्नी या प्रिय रक्षिता का । सोने-चादी की वस्तुए, जिन्होने डाकुओं को आकर्षित किया था, गायब थी, लेकिन जो कुछ मिला वह मिस्र के पहाडो को काटकर बनाई गयी समाधियो के अलावा पुराविदो को कही नही मिल सकता, मिस्र की वायुरुद्ध मुद्राकित गुफाओ की भातियहा पर बर्फ ने आदमी की सर्वाधिक नाशवान वस्तुओं को सुरक्षित रखा था । कालीने, कसीदाकारी और जडाऊनमदे के पर्दे लगभग पूरे के पूरे मिले, और उनसे पाचवी शताब्दी ईसापूर्व के खानाबदोशो की संस्कृति का अनायास उद्घाटन हो गया । हेरोदोतस ने अपने समय के शक राजाओ की समाधियो का वर्णन किया था, जो ऊपरी द्नीपर के किनारे स्थित एक सुनसान मैदान में दफनाए गए थे । शव सलेपित थे । राजा के शव को निचले पटरे-लगे गड्ढे मे रखकर, उसकी छत पर राजा की एक रक्षिता, उसके घोड़े, पानपात्र-वाहक और रसोइए के शवो को रखकर कब्र को पूर दिया और उस पर एक विशाल टीला बना दिया जाता था। एक साल बाद, उसके पचास सर्वाधिक विश्वासपात्र आदमियो को मार कर, उनके पाज़ीरिक की जमी हुई समाधियां पश्चिमी साइवेरिया मे, अल्ताई पर्वत श्रेणी के उत्तर मे तथा मीस्क नगर के दक्षिण-पूर्व मे लगभग एक सौ तीस मील दूर, एक छोटी सी नदी की घाटी मे पाज़ीरिक नामक एक स्थान है । रुसी पुराविद् रुदेन्को ने वहाँ खुदाइया करायी थी । खोज की परिस्थितियो और प्राप्त वस्तुओ की प्रकृति की दृष्टि से वे खुदाइया अपूर्व थी और उनका ऐतिहासिक महत्त्व बहुत अधिक है। पाज़ीरिक मे कभी कोई बस्ती नही रही । सुनसान घाटी मे विशाल टीले थे, जो किसी खानावदोश जाति के पाजीरिक की जमी हुई समाधियां मैदानो के दक्षिण में वस्तिया वसाकर रहने वाले लोग दूसरोदा रहते और परस्पर अज्ञात जातियो व राष्ट्रों में विभाजित थे, लेकिन घास के मैदानो के खानावदोशो का अपना एक स्वच्छन्द समुदाय था - फलत पाजीरिक की एक ही समाधि मे पुरुप निश्चयत मगोल है लेकिन स्त्री भरोपीय । और वे शक हो या मगोल, लडाके श्रेष्ठ थे । वे जमकर लडाई लडने से वचते थे - दारा ने उन्हें पराजित करने का सकल्प किया तो उन्होंने यही किया था । लेकिन जब कभी खराब मौसम के कारण भुखमरी हो जाती थी या जनसख्या अधिक हो जाने पर आत्मविश्वास बढ जाता था या दूसरे पक्ष को निर्बलता को देखकर उनका लोभ वढ जाता था, तो वे समृद्ध दक्षिणी राज्यो पर - जहा की सम्पत्ति का पता उन्हें अपने घोडो और घर मे वने रंगीन नमदो के व्यापार के कारण था- हमला कर देते थे और लूट का माल लेकर वापस आ जाते थे । ऐसे हमलो से डरने के कारण दक्षिण के नासक उन्हे 'दानेगेड', शान्ति बनाये रखने की रिश्वत, देने को तैयार रहते थे । उस तरह, व्यापार, रिश्वत और युद्ध के जरिये मैदानी खानावदोशो को सभ्य ससार की सभी वस्तुए प्राप्त हो जाती थी। और वे वस्तुए विशाल घास के मैदान के आर-पार हाथों-हाथ पहुच जाती थी । पूर्वी यूरोप और एशिया के राज्यो और साम्राज्यो के वीच सम्पर्क बहुत कम था; लेकिन एक हद तक खानाबदोश मध्यस्थ का काम करते थे और प्रत्येक की कलाओ की कुछ जानकारी दूसरे तक पहुचाते थे । क्रीमिया और उऋइन की टीलेदार समाधियो मे सोने की चीजे, यूनानी शिल्पियो द्वारा निर्मित वढिया किस्म के जवाहरात, और पाचवी शताब्दी के एथेन्स के कारखानो के रजित मृद्भाड मिलते है, लेकिन इनके साथ-साथ स्थानीय गिल्पियों द्वारा निर्मित कास्य और सोने के आभूषण भी है जिनपर अजीबोगरीब हरकत करती हुई अत्यधिक अलकृत पशु आकृतिया है - इस अजीव कला को केवल 'शक' कहा जा सकता है, और धातु की ऐसी ही वस्तुए तथा मानव के शरीर पर गुदी हुई ऐसी ही आकृतिया पाजीरिक मे मिली है। चीन की कला पर इनका काफी प्रभाव पड़ा है । भूभाग के इसी छोर पर, साइबेरियाई समाधियो मे, स्थानीय नमदो के साथ-साथ ईरानी कालीन और चीनी रेशम भी है, और दूर उत्तर, मगोलिया के नोइन नामक स्थान पर एक समाधि पाटी गयी है जिसमे चीनी, शक और यूनानी वस्तुए है । यूनानी वस्तुओ से सिद्ध होता है कि ईसा पूर्व की अन्तिम शताब्दियो मे, खानाबदोशो ने यूनानी कला को चीन की सीमाओ तक पहुचा दिया था । हम विशेषज्ञता के युग मे जीवित है और विद्वान् अपना शोधकार्य एक ही क्षेत्र मे सीमित रखते है । उत्कृष्ट प्राचीन कलाकृतियो की उत्पादक सभ्यताओं में से किसी एक - यूनान और मिस्र, मेसोपोटामिया और फारस, भारत और चीन - पर ध्यान केन्द्रित करते है, और उनका अलग-अलग विवेचन करते है, मानो उनकी कलाओ का विकास शून्य मे हुआ है। सचाई, बेशक, इसके विपरीत है । लेकिन, अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्य, कूटनीतिक सम्बन्धो, विजय - युद्धो और जनस्थानान्तरणो पर खूब ध्यान देने के बावजूद हमे भूलना नही चाहिए कि घास के मैदानो के घुमन्तू |
MEXICO: मेक्सिको ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए कोविद -19 स्वास्थ्य आपातकाल को समाप्त करने की घोषणा की है, रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन के अंडरसेक्रेटरी ह्यूगो लोपेज़-गैटेल ने कहा।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान लोपेज़-गैटेल के हवाले से कहा, "यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि डब्ल्यूएचओ ने अंतर्राष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को निलंबित करने के लिए जिन शर्तों को ध्यान में रखा है, उन्हें पूरा किया गया है। "
मैक्सिकन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर ने एक डिक्री पर हस्ताक्षर किए, जिसने 23 मार्च, 2020 के आरंभिक दस्तावेज़ के अंत को चिह्नित किया, जिसमें स्वास्थ्य आपातकाल की शुरुआत की घोषणा की गई थी।
5 मई को, WHO ने मामलों, अस्पताल में भर्ती होने और मौतों में लगातार गिरावट के कारण Covid-19 के अंत को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया।
लोपेज़-गैटेल के अनुसार, मेक्सिको की 95 प्रतिशत आबादी में वायरस को पीछे हटाने के लिए आवश्यक एंटीबॉडी हैं, जो देश को "उच्च स्तर की प्रतिरक्षा" प्रदान करते हैं।
इसके अलावा, वर्तमान में चल रहे वेरिएंट में पिछले वाले की तुलना में "कम विषाणु" है, जिससे केवल हल्की बीमारी होती है, उन्होंने कहा कि रोगियों के नैदानिक उपचार में सुधार हुआ है।
| MEXICO: मेक्सिको ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए कोविद -उन्नीस स्वास्थ्य आपातकाल को समाप्त करने की घोषणा की है, रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन के अंडरसेक्रेटरी ह्यूगो लोपेज़-गैटेल ने कहा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान लोपेज़-गैटेल के हवाले से कहा, "यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि डब्ल्यूएचओ ने अंतर्राष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को निलंबित करने के लिए जिन शर्तों को ध्यान में रखा है, उन्हें पूरा किया गया है। " मैक्सिकन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर ने एक डिक्री पर हस्ताक्षर किए, जिसने तेईस मार्च, दो हज़ार बीस के आरंभिक दस्तावेज़ के अंत को चिह्नित किया, जिसमें स्वास्थ्य आपातकाल की शुरुआत की घोषणा की गई थी। पाँच मई को, WHO ने मामलों, अस्पताल में भर्ती होने और मौतों में लगातार गिरावट के कारण Covid-उन्नीस के अंत को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया। लोपेज़-गैटेल के अनुसार, मेक्सिको की पचानवे प्रतिशत आबादी में वायरस को पीछे हटाने के लिए आवश्यक एंटीबॉडी हैं, जो देश को "उच्च स्तर की प्रतिरक्षा" प्रदान करते हैं। इसके अलावा, वर्तमान में चल रहे वेरिएंट में पिछले वाले की तुलना में "कम विषाणु" है, जिससे केवल हल्की बीमारी होती है, उन्होंने कहा कि रोगियों के नैदानिक उपचार में सुधार हुआ है। |
प्रदेश विंटर गेम्स एसोसिएशन को हिमपात का इंतजार है। सोलंगनाला की ढलानों पर बर्फ न होने से सुनी पड़ी हैं। हिमपात होते ही विंटर गेम्स एसोसिएशन ट्रेनिग कैंप शुरू करेगी। एसोसिएशन इस बार जनवरी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित करेगी।
उत्तराखंड के औली में 2 से 8 फरवरी को राष्ट्रीय स्कीइंग फिस (फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्पोर्ट्स एसोसिएशन) की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्कीइंग प्रतियोगिता होनी है। इस तरह की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता देश में पहली बार आयोजित हो रही है। विंटर गेम्स एसोसिएशन सहित सभी खिलाड़ियों को बर्फबारी का इंतजार है।
इंटरनेशनल पर्यटन स्थल मनाली घाटी से आंचल ठाकुर व संध्या ठाकुर सहित दर्जनों खिलाड़ी देश-विदेश में हिमाचल का नाम रोशन कर चुके हैं। हिमाचल प्रदेश विंटर गेम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लुदर ठाकुर ने कहा कि एसोसिएशन को हिमपात का इंतजार है। सोलंगनाला की स्की ढ़लानों में हिमपात होते ही एसोसिएशन ट्रेनिग कैंम्प शुरू करेगी।
सोलंग की स्की ढलानों पर जनवरी में स्कीइंग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। स्की एंड स्नो बोर्ड इंडिया के सेक्रेटरी जरनल रूप चंद नेगी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता की तैयारियां तेज हो गई हैं। उन्होंने बताया कि अब इंतजार है तो बर्फबारी का।
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| प्रदेश विंटर गेम्स एसोसिएशन को हिमपात का इंतजार है। सोलंगनाला की ढलानों पर बर्फ न होने से सुनी पड़ी हैं। हिमपात होते ही विंटर गेम्स एसोसिएशन ट्रेनिग कैंप शुरू करेगी। एसोसिएशन इस बार जनवरी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित करेगी। उत्तराखंड के औली में दो से आठ फरवरी को राष्ट्रीय स्कीइंग फिस की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्कीइंग प्रतियोगिता होनी है। इस तरह की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता देश में पहली बार आयोजित हो रही है। विंटर गेम्स एसोसिएशन सहित सभी खिलाड़ियों को बर्फबारी का इंतजार है। इंटरनेशनल पर्यटन स्थल मनाली घाटी से आंचल ठाकुर व संध्या ठाकुर सहित दर्जनों खिलाड़ी देश-विदेश में हिमाचल का नाम रोशन कर चुके हैं। हिमाचल प्रदेश विंटर गेम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लुदर ठाकुर ने कहा कि एसोसिएशन को हिमपात का इंतजार है। सोलंगनाला की स्की ढ़लानों में हिमपात होते ही एसोसिएशन ट्रेनिग कैंम्प शुरू करेगी। सोलंग की स्की ढलानों पर जनवरी में स्कीइंग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। स्की एंड स्नो बोर्ड इंडिया के सेक्रेटरी जरनल रूप चंद नेगी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता की तैयारियां तेज हो गई हैं। उन्होंने बताया कि अब इंतजार है तो बर्फबारी का। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
१) मलमज्ञानमिच्छन्ति संसारांकुरकारणम् । २) अज्ञानाद्वध्यते लोकस्ततः सृष्टिश्च संहृतिः ।।
अशुद्धि स्वरूप इस
क) आत्मा में अनात्मताभिमानरूप जो अख्याति (अज्ञान) या अज्ञानात्मक ज्ञान है वही बन्धन है - 'एवमात्मनि अनात्मताभिमानरूपाख्याति लक्षणाज्ञानात्मकं ज्ञानं केवलं बन्धो । '
(अज्ञान - बन्धन - सृष्टि + संहार) (मालिनीविजय) ज्ञानात्मक अज्ञान का स्वरूप क्या है ?
ख) इसी प्रकार - शरीरादिक अनात्मा में आत्माभिमानतारूप जो अज्ञान है उससे उत्पन्न ज्ञान भी बन्धन है'यावद् अनात्मनि शरीरादौ' आत्मताभिमातारूप जो अज्ञान है उससे उत्पन्न ज्ञान भी बन्धन है -
'यावद् अनात्मनि शरीरादौ आत्मताभिमानात्मकम् अज्ञानमूलं ज्ञानमपि बन्ध एव' (परामृतरसापाय ....) कारिका में इसी भात को गुंफित किया गया है ।
ग) परमेश्वर के द्वारा स्वस्वातन्त्र्य शक्ति से आभासित स्वस्वरूप गोपनात्मिका महामाया शक्ति के द्वारा अपनी आत्मा में मायाप्रमात्रन्त जो सङ्कोच अवभासित किया गया है वही शिवाभेदरूप अख्यात्यात्मक अर्थात् अपूर्णम्मन्यतात्मक आणवमलसतत्त्वसंकुचित अज्ञानात्मक ज्ञान ही बन्धन है। यही प्रथम अज्ञान या प्रथमा शुद्धि 'आणव मल' है । इसके अनन्तर शिवसूत्रकार ने 'योनिवर्गः कलाशरीरम्' (१ । ३) 'ज्ञानाधिष्ठानं मातृका' (१।४) द्वारा भी अशुद्धियों पर प्रकाश डाला है। आचार्य क्षेमराज ने 'शिवसूत्रविमर्शिनी' में इनकी व्याख्या निम्न स्पन्दसूत्रों१) शब्दराशिसमुत्थस्य ....' (स्पन्दसूत्र) तथा
२) स्वरूपावरणे चास्य शक्तयः सततोत्थिताः (स्पन्द सूत्र) में स्वीकार किया है। स्वच्छन्दशास्त्र में इसी अशुद्धिमूलक 'मल' के स्वरूप का निम्न शब्दों में विवेचन किया गया हैमलप्रध्वस्तचैतन्यं कलाविद्यासमाश्रितम् । रागेण रंजितात्मानं कालेन कलितं तथा ॥ १
'आणव' के अतिरिक्त 'मायीय' एवं 'कार्म' मल की घोर अशुद्धियाँ हैं। शुद्धि और अशुद्धि- वास्तविक शुद्धि तो स्वाहन्ता में निमज्जन है - 'शुद्धिर्बहिष्कृतार्थानां स्वाहन्तायां निमज्जनम्' (परिमल) । वह निखिल विश्व
१. नियत्या यमितं भूयः पुंभावेनोपबृंहितम् । प्रधानाशयसंपन्नं गुणत्रयसमन्वितम् ॥ बुद्धितत्वसमासीनमहंकारसमावृतम् । मनसा बुद्धिर्माक्षैस्तन्मात्रैः स्थूलभूतकैः ॥ (स्वच्छन्दतन्त्र) | एक) मलमज्ञानमिच्छन्ति संसारांकुरकारणम् । दो) अज्ञानाद्वध्यते लोकस्ततः सृष्टिश्च संहृतिः ।। अशुद्धि स्वरूप इस क) आत्मा में अनात्मताभिमानरूप जो अख्याति या अज्ञानात्मक ज्ञान है वही बन्धन है - 'एवमात्मनि अनात्मताभिमानरूपाख्याति लक्षणाज्ञानात्मकं ज्ञानं केवलं बन्धो । ' ज्ञानात्मक अज्ञान का स्वरूप क्या है ? ख) इसी प्रकार - शरीरादिक अनात्मा में आत्माभिमानतारूप जो अज्ञान है उससे उत्पन्न ज्ञान भी बन्धन है'यावद् अनात्मनि शरीरादौ' आत्मताभिमातारूप जो अज्ञान है उससे उत्पन्न ज्ञान भी बन्धन है - 'यावद् अनात्मनि शरीरादौ आत्मताभिमानात्मकम् अज्ञानमूलं ज्ञानमपि बन्ध एव' कारिका में इसी भात को गुंफित किया गया है । ग) परमेश्वर के द्वारा स्वस्वातन्त्र्य शक्ति से आभासित स्वस्वरूप गोपनात्मिका महामाया शक्ति के द्वारा अपनी आत्मा में मायाप्रमात्रन्त जो सङ्कोच अवभासित किया गया है वही शिवाभेदरूप अख्यात्यात्मक अर्थात् अपूर्णम्मन्यतात्मक आणवमलसतत्त्वसंकुचित अज्ञानात्मक ज्ञान ही बन्धन है। यही प्रथम अज्ञान या प्रथमा शुद्धि 'आणव मल' है । इसके अनन्तर शिवसूत्रकार ने 'योनिवर्गः कलाशरीरम्' 'ज्ञानाधिष्ठानं मातृका' द्वारा भी अशुद्धियों पर प्रकाश डाला है। आचार्य क्षेमराज ने 'शिवसूत्रविमर्शिनी' में इनकी व्याख्या निम्न स्पन्दसूत्रोंएक) शब्दराशिसमुत्थस्य ....' तथा दो) स्वरूपावरणे चास्य शक्तयः सततोत्थिताः में स्वीकार किया है। स्वच्छन्दशास्त्र में इसी अशुद्धिमूलक 'मल' के स्वरूप का निम्न शब्दों में विवेचन किया गया हैमलप्रध्वस्तचैतन्यं कलाविद्यासमाश्रितम् । रागेण रंजितात्मानं कालेन कलितं तथा ॥ एक 'आणव' के अतिरिक्त 'मायीय' एवं 'कार्म' मल की घोर अशुद्धियाँ हैं। शुद्धि और अशुद्धि- वास्तविक शुद्धि तो स्वाहन्ता में निमज्जन है - 'शुद्धिर्बहिष्कृतार्थानां स्वाहन्तायां निमज्जनम्' । वह निखिल विश्व एक. नियत्या यमितं भूयः पुंभावेनोपबृंहितम् । प्रधानाशयसंपन्नं गुणत्रयसमन्वितम् ॥ बुद्धितत्वसमासीनमहंकारसमावृतम् । मनसा बुद्धिर्माक्षैस्तन्मात्रैः स्थूलभूतकैः ॥ |
स्वतन्त्रता ठीक है । यदि मद्यपायी अपने अनुभवसे मद्यपानको हानिकारक समझेगा तो उसे छोड़ देगा । राज्य के प्रतिबन्धसे भी मद्यपान छूट सकता है, परंतु इसमे चारित्रिक सघटन नही आता । जो निर्णय अपने अनुभवसे होता है, वही दृढ होता है ! राज्य प्रतिबन्धसे छिपकर भी मनुष्य मद्य पीता रह सकता है । शिक्षा - प्रोत्साहन, चित्रप्रदर्शन आदि परोक्ष रीतियोद्वारा बुरे कामोके रोकनेका प्रयत्न अनुचित नही ।' इसी तरह द्यूत खेलनेको भी वह प्रतिबन्धद्वारा रोकना ठीक नही समझता था । ये सब काम बुरे हैं सही, परंतु आत्मसंघर्पसे ही उनका छूटना चरित्रवलका वर्धक होता है । वह सामाजिक परम्परागत रीति-रिवाजो के बन्धनको भी प्रगतिका बाधक समझता था । सामाजिक नियन्त्रण से व्यक्तित्वका विकास नहीं हो पाता । मिल आविष्कार एवं नवमार्गदर्शक शक्तिको महत्त्वपूर्ण मानता था । उसके मतानुसार 'जनसाधारणकी मनोवृत्ति सामान्यताकी दर्शिका होती है ।' परंतु वह इस मनोवृत्तिका विरोधी था । वह तो 'अपूर्व नवीन बुद्धिवालोको प्रोत्साहनसे नवीन विचारधाराकी सम्भावना होती है। ऐसा मानता था । वह अधिक कवियोका होना समाजकी उन्नतिका लक्षण मानता था । ' इससे रुचियोंकी विभिन्नता विदित होती है और यह स्वतन्त्र वातावरणमे ही सम्भव है । यदि एक कक्षाके विद्याथियो के प्रश्नोत्तरमे विभिन्नता होती है तो वह कक्षाकी प्रगति समझता था। जो जिसे हितकर प्रतीत हो उसे वैसा करने की छूट होनी चाहिये । एक ढंगसे जीवन निर्वाहार्थ किसीको बाध्य करना उचित नही, इसीलिये शिक्षाके राज्यनियन्त्रित होनेका भी वह विरोधी था । हॉ, नागरिकोको अपने बच्चोको स्कूल भेजने के लिये बाध्य करना राज्यका कर्तव्य है । इसके अतिरिक्त शिक्षापर राज्यका हस्तक्षेप न होना चाहिये । शिक्षा प्राप्त करनेकी स्वतन्त्रता नागरिकोको ही होनी चाहिये । विद्यालयमे बालक कैसी शिक्षा प्राप्त करे, यह नागरिकोकी रुचिपर ही छोड़ना चाहिये ।'
उसके मतानुसार 'व्यक्तिवादियोकी भाँति ही व्यक्तिगत लाभके लिये भी मनुष्य भलीभाँति अपना कार्य सञ्चालन करता है । उसमे राज्यके हस्तक्षेप हितकर न होगे । सरकारी कर्मचारियोद्वारा होनेवाले कार्यो मे उनकी इतनी तत्परता नहीं होती जितनी किसीको व्यक्तिगत कार्यमे तत्परता होती जब व्यक्ति कोई काम स्वयं करता है तो उसकी ज्ञानवृद्धि होती है । इसीलिये मनुष्यको स्वय ही अधिकाधिक कार्य करना चाहिये । हाँ, समाचार-पत्रोद्वारा अतीत कार्यक अनुभवोंकी सूचना सरकारको देते रहना चाहिये । उससे लोग त्वयं सबक सीखेगे । चेतावनीद्वारा भी राज्य परोक्षरूप से मार्गदर्शक हो सकता है । सरकारी कायोंकी व्यापकतासे नागरिक सदा हो और निहारते रहते हैं। इससे आलस्य, प्रसाद एवं नगतिका
अवरोध होता है । इससे व्यक्तित्व के विकासमे बाधा पड़ती है और नौकरशाही बढ़ती है। इससे कोई कार्य भलीभाँति सम्पादित नहीं होना। राज्य हग्नक्षेप एक आवश्यक विचाररूपमे ही स्वतन्त्रता के लिये मानना चाहिये । नागरिक जीवन में राज्यका न्यूनतम हस्तक्षेप ही व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके लिये अपेक्षित है ।।
समालोचक कहते हैं कि मिल 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' के दफ्तरमै नौकर और राजनीतिक पत्राका लेखक था। १८५८ मे उसने कम्पनीके शासनके पक्ष में एक प्रार्थनापत्र लिखा था, जिसमें कम्पनीके शासनको न्यायमगत कहा था और १८५९में उसकी 'स्वतन्त्रता' पुस्तक प्रकाशित हुई, जिसमें उसने व्यक्तिगत स्वतन्त्रताका पूर्ण समर्थन किया था। इस तरह उसके कार्य और विचार बेमेल ये । यह भी कहा जाता है कि १८३२ के पूर्व मध्यमवर्ग के लोगोने सामन्तों की सत्ताका विरोध किया था । १९ वीं शतीम सामन्तोका ह्रास हुआ, परंतु बुद्धिजीवी वर्गकी एक बढ़ती हुई जनशक्तिका विरोध इस आधारपर सम्भव नहीं था । पूँजीपतियो एव मध्यमवर्गीय उपयोगितामे जनताकी उपयोगिता भिन्न थी । अतः जनमतसे भयभीत बुद्धिजीवी के लिये अपेक्षित था कि वह व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके नामपर जनमतके हस्तक्षे से बचे । उसी कार्यकी सिद्धि 'स्वतन्त्रता' पुस्तकद्वारा मिलने की । अब तो पूँजीपति एवं सर्वहारा श्रमिकों के बीच पडा मध्यम वर्ग शोचनीय दशामे है । न वह पूँजीपति ही है न तो सर्वहारा ही ! वह स्वयं व्यक्तिगत स्वतन्त्रता चाहता है। किसीका भी एकाधिकार नहीं चाहता । 'स्वतन्त्रता' पुस्तक मे इसी आवश्यकताकी पूर्ति की गयी है । समालोचकोका यह मी कहना है कि 'मिलका धार्मिक जीवन ही परम्पराओं के विरुद्ध था । इसीलिये उमने व्यक्तिगत स्वतन्त्रताको दार्शनिक रूप दिया ।
हम पहले कह चुके हैं कि 'सर्व परवशं दुःग्वं सर्वमात्मवणं सुखम् ।' (मनु । १६० ) - पराधीनता ही दुःख और स्वाधीनता ही मुख है। व्यक्तिगत स्वतन्त्रता अवश्य ही आदरकी वस्तु है, परंतु यदि मद्यपान, धून आदिकी स्वतन्त्रता व्यक्तियोको होनी चाहिये, तब तो आत्महत्याकी भी स्वतन्त्रता होनी चाहिये ! इसी तरह यदि कोई स्वेच्छानुसार शराब, द्यूतसे परहेज न करे, मॉ, बहन, चेट से भी शादी कर ले या मनमानी प्रेमसम्बन्ध करे तब तो मनुष्यता- पशुतामें कोई अन्तर ही नहीं रह जाता । आहार, निद्रा, भय, मैथुन मनुष्य एवं पशुका समान ही होता है। धर्म ही मनुष्यकी विशेषता है । धर्मविहीन स्वतन्त्रता स्वेच्छाचारिता या उच्छृंखलताके ही रूप में परिणत हो जाती है । सर्पोपाधिविनिर्मुक्त व्रतात्मभाव प्राप्त होने से पहले प्राणीको अवश्य ही धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक विभिन्न नियन्त्रणके परतन्त्र रहना पड़ता है। वास्तविक पूर्ण स्वतन्त्रताके लिये प्राणी को पर्याप्त स्वतन्त्रताना बलिदान करना पड़ता है। अपौरुपेय वेद एव तदनुसारी शास्त्रों के अनुसार विविविदित
कार्यको ही धर्म कहा जाता है । भोजन, पान, शयन, विश्राम, संतानोत्पादनादि सभी कार्योंको शास्त्र-विधिके अनुसार करना ही धर्म है। धर्मनियन्त्रित जीवन से ही पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्ति सम्भव है । इसी प्रकार 'सनकी लोगोंके विचार एवं भाषणकी स्वतन्त्रता' भी उपहासास्पद है। अवश्य ही गुदडीसे भी लाल निकलते है, सनकियो में से भी कोई योग्य, लाभदायक सनकी निकल सकते हैं, परतु सभी सनकियोंको पूर्ण स्वतन्त्रता दे देनेसे तो समाजकी शान्ति ही खतरेमे पड़ सकती है।
इसी प्रकार तर्कका आदर अवश्य उपयोगी हो सकता है, परंतु कुछ नियमोको मानकर ही तर्कका प्रयोग करना पड़ता है । फिर तर्कका कुछ अन्त भी नहीं है ! जीवनमे विश्वासका भी तो कही स्थान है । यदि बाजारमे खडे होकर राजद्रोहपर तर्क करनेकी स्वतन्त्रता दे दी जाय तो क्या शान्ति सुरक्षित रह सकेगी ? इसी प्रकार बहुत-सी निश्चित वस्तुएँ भी है । साता, पिता, गुरुजनोद्वारा उन्हे जानकर प्राणी आगे बढ़ता है। निश्चित वस्तुओमें भी तर्कका प्रयोग करके वह अपने समयका अपव्यय ही करेगा । वैज्ञानिकोको भी साम्राज्य तथा कुछ वैज्ञानिक नियमोको मानकर ही नयी खोजकी ओर बढना पड़ता है। पूर्वके अन्वेषणको ही अपने अनुभवसे अन्वेषण करना व्यर्थ ही होगा। यदि कोई अपने अनुभवपर ही संखियाके स्वाद और गुणके निर्णय करनेका हठ करेगा, तो उस-जैसे लक्षो व्यक्तियोको जीवनसे हाथ धोना पडेगा और लाभ कुछ न होगा । काले नागके काटने और उसके विषका परिणाम अनुभवद्वारा ही समझनेका प्रयत्न करना मूर्खता है। स्पष्ट है कि इस सम्बन्धर्मे शिष्टोंके अनुभवोका सदुपयोग करना उचित है । इसी प्रकार जिन दुराचारो, दुर्गुणो, पापोकी अग्राह्यता पूर्वजोके अनुभवोसे सिद्ध है उनपर विश्वास न करके पहले पाप, दुराचार करनेकी छूट देना अमानवता है।'हिंदू विचारोके अनुसार मद्यपानसे ब्राह्मणका ब्राह्मणत्व ही नष्ट हो जाता है। फिर लौटना असम्भव ही होता है । इसी प्रकार एक बार पतिव्रताका सतीत्व चले जानेसे पुनः उसका लौटना सम्भव नहीं । अतः पापोका दुष्परिणाम देखनेके लिये पाप करने की छूट देना बुद्धिमानी नहीं ।
परम्पराके अनुसार एक ढंगका सस्कार वन जानेपर तद्विरुद्ध प्रवृत्ति होती ही नहीं । फिर विरुद्ध प्रवृत्ति कराकर दुष्परिणाम अनुभव करके उससे निवृत्त होने की व्यवस्था करनी वैसी ही होगी, जैसे कंटक चुभ्ाकर पीडा अनुभव करके पुनः कंटकनिष्कासन-जन्य स्वास्थ्यका अनुभव करना । इसकी अपेक्षा अपनी बुद्धि एव समयको किसी अन्य उपयोगी काममे लगाना ही श्रेयस्कर है । जिनकी परम्पराओमे मद्य-मासका प्रचलन नहीं है, वहाँके बच्चों को उस सम्बन्धके न तो संस्कार ही होते हैं, न इच्छा ही होती है। प्रत्युत निषेध ही सस्कार होते हैं । उनके उस मस्कारको दृढ बनाने में ही कल्याण है । अतितार्किकको सर्वतोऽभिशकी हो जाना
पड़ता है । फिर तो भोजनमे भी विपकी कल्पना होने लगती है। कई लोग बालकी खाल की खींचते रहते हैं। वे अपने और दूसरोका समय व्यर्थ ही अपव्यय करने रहते हैं । कितने ही जिद्दियोंको तर्क करनेकी स्वाधीनता देनेपर तत्त्व-निर्णय न होकर विवाद ही बढता है । चरित्रोंकी भिन्नता एव शकियोंकी वृद्धि समाजकी प्रगतिका लक्षण नहीं; किंतु निश्चित एव उपयोगी गुणोंकी समृद्धि ही प्रगतिका लक्षण है। भिन्नताकी अपेक्षा गुणात्मक समृद्धिपर ही जोर देना आवश्यक है। योग्य वातावरण, उच्चकोटिकी शिक्षा एव सदाचार के द्वारा ही उच्चकोटिका चारित्रिक सघटन होता है और यही राष्ट्रकी प्रगति है । शक्कियाँकी स्वतन्त्रता मे चरित्र में भिन्नता भले ही आ जाय, परंतु चारित्रिक उच्चता में कोई सहायता न मिळेगी । इसी प्रकार भले राजकीय नियम कम से कम हों, परंतु धार्मिक, सामाजिक नियमोद्वारा सदा ही व्यक्तियों को उच्छृंखल जीवनसे बचाना अनिवार्य है। अवश्य ही रामराज्यकी दृष्टिमे सभी सम्पत्तियों एवं कार्योंका सरकारीकरण अनुचित है। तथापि विशिष्ट शिष्टो एव शास्त्रों का मार्ग दर्शन समाजकी प्रगतिमे सदा ही सहायक होता है। प्रगति बाधक तत्वोंका निराकरण राज्यका अवश्य कर्तव्य है। विकासवादियो एवं आधुनिक विचारकोका सबसे बड़ा दोष यह है कि वे पूर्व-पूर्व के निर्णयो एच सत्यको निम्नस्तरका तथा उत्तरोत्तर निर्णयों एव सत्योंको उच्चकोटिका मानते हैं । इसीलिये वे सदा ही निश्चित विषयमे भी खोजते रहते हैं। वे इसी दृष्टिसे झकियोंसे भी नवीन ज्ञानकी आशा रखते हैं और नयी-नयी व्यवस्था ऑकी खोजमें लगे रहते हैं। परंतु प्रमाणद्वारा प्रमित तत्त्व किसी भी कालान्तर या देशान्तरमें अन्यथा नहीं हो सकते । इस दृष्टिसे अपौरुषेय वेदो, तदनुसारी आर्ष ग्रन्थों तथा सर्वज्ञकल्प महर्षियो, राजर्पियोने अपने ऋतम्भरा प्रजा एव सफल प्रयोगोद्वारा. जिन नियमो, व्यवस्थाओं को समाजके लिये लाभदायक समझा, वे त्रिकालाबाध्य सत्य एवं उपयोगी हैं। उनका अनुसरण करना समाज एच तघटक व्यक्तियोंका कर्तव्य है ।
गास्त्र एव समाज स्थिर वस्तु है । उनका धार्मिक, सास्कृत स्वरूप एव सभ्यता स्थिर वस्तु है और राज्यलक्ष्मी अस्थिर वस्तु । विशेषतया राज्यसत्ताको हथियाने के लिये सभी लोग प्रयत्नशील होते हैं। जिस ढगकी विचारधारावालोंका बहुमत होता है, उन्हींका शासन होता है। फलतः वे शासन, शिक्षा, सम्पत्ति, वर्म सभीको अपने हाथमे लेना चाहते हैं। कहना न होगा कि उक्त तीनो विषयों में सरकारी हस्तक्षेप होनेसे समाजकी संस्कृति, सभ्यता एव धर्ममें सर्वथा रद्दोबदल हो जाता है, फिर समाजकी स्थिरता भी नष्ट हो जाती है। यह भी नहीं कहा जा सकता कि 'अच्छे ही लोगोंके हाथमे शासन सत्ता जाती है ।" अनुभव तो यह है कि शान्तिप्रिय विचारक, गम्भीर विद्वान्, जाल- फौरेब न करनेवाले पीछे रह
जाते हैं। जाल- फौरेववाले अयोग्य लोग आगे आ जाते हैं । ऐसी स्थितिमें विभिन्न शासनोंके बदलनेके साथ यदि सभ्यता, संस्कृति, शिक्षामे भी रद्दोबदल होता जाय, तब तो समाजकी एकरूपता, स्थिरता असम्भव हो जायगी। बहुत-से लोग विकासवादी नियमानुसार उत्तरोत्तर प्रगतिका ही सिद्धान्त मानते है, परतु इस मतम फिर मनुष्य के प्रमाद, पुरुषार्थकी विशेषता नहीं रह जाती । परंतु वस्तुस्थिति यह है कि प्रमाद और सावधानी से पतन एव अभ्युदय स्पष्ट परिलक्षित होते हैं । अतः हर चीजका भार राज्यपर छोड़ देना उचित नहीं । सामाजिक एव वैयक्तिक जीवन में राज्यका क्म-से-कम हस्तक्षेपवाला सिद्धान्त शास्त्र - सम्मत है । फिर भी धार्मिक, सामाजिक नियमोका पालन तो सबके लिये अपेक्षित होगा ही । न्याय, सुरक्षा, समष्टि स्वास्थ्य, सुव्यवस्था, सफाई आदिका काम सरकार कर सकती है । आज तो राष्ट्रके प्रत्येक जीवन क्षेत्रमे सरकार ही हावी होती जा रही है । व्यक्ति गामनयन्त्रका एक नगण्य कल-पुर्जा बनता चला जा रहा है । उसे व्यक्तिगत विकास- विचार आदिकी कोई भी स्वतन्त्रता नही । मिलकी दृष्टिसे 'मद्य-पान, द्यूत आदि व्यक्तिगत समझे जानेवाले कार्योंका भी समाजपर असर पड़ता ही है।' धन एव समयका यदि अनुचित कार्यो में अपव्यय न कर किसी उचित कार्यमे व्यय किया जाय तो अवश्य ही उससे समाजका लाभ हो सकता है। एक व्यक्तिके भी दुराचारी होने से समाज दूषित होता है । अन्य लोगोपर भी उसके दुस्संस्कार पडते हैं, फिर जब व्यक्तियोका समुदाय ही समाज है, तब तो व्यक्ति के दूषित होनेसे समाज दूषित होगा ही । मिलके इस स्वतन्त्रता-प्रेमका भी आधार रूमोका यह वाक्य है कि मनुष्य स्वतन्त्र जन्मा है, किंतु सभी ओरसे बेड़ियोंसे जकडा हुआ ।' इसका सार यही है कि व्यक्तिगत स्वतन्त्रता और सामाजिक, बन्धन परस्पर विरोधी है । किंतु भारतीय भावनासे स्वतन्त्रता-प्रेम स्वाभाविक है और वह है परम व्येय एव प्राप्य, परंतु उसे पूर्ण रूप से प्राप्त करने के लिये पर्याप्त स्वतन्त्रताका वलिदान कर धार्मिक एवं सामाजिक सभी बन्धनोको अगीकार करना परमावश्यक है। अधिक मुनाफा पानेके लिये व्यापार आदिमें पर्याप्त धन व्यय करना पडता ही है । अतएव रूसो भी तो वास्तविक स्वतन्त्रता राज्य नियन्त्रणसे मानता ही था । इस दृष्टि से व्यक्ति एवं समाजका परस्पर पोष्यपोषक भाव ही हैं, विरोध नहीं । लौकिक दृष्टिसे भी कई स्वतन्त्रताऍ परस्पर विरोधी होती हैं । वहाँ समझौतासे काम चलता है । सर्वथापि समष्टि हिताविरोधेन स्वतन्त्रताका उपयोग ही सदुपयोग है।
विचार और भापणकी स्वतन्त्रता बहुत आवश्यक है । भारतीय सिद्धान्तोमे उसका मदा ही अत्यन्त आदर था । इस देश में चार्वाक, शून्यवाद, द्वैती, अद्वैती आदि अनेक प्रकारके परस्पर विरुद्ध दार्शनिक हुए हैं। उनमें विचार-संघर्प
चलता रहा, परंतु किसी के विचार या भाषणपर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जाता था । यहाँ ईसा, सुकरातकी तरह विचार-भेद के कारण किसीको फॉसीपर नहीं लटकाया जाता था । रामराज्यमें एक रजकको अखण्ड भूमण्डलके लोकप्रिय सर्वजनरजन रामकी परम साध्वी सीताके विरुद्ध भी विचार रखने एव भाषण देनेपर प्रतिवन्ध नहीं या । राम चाहते तो उसे दण्ड दे सकते थे । लौकिक मनुष्य, वानर, भाल, राक्षस तथा अलौकिक महर्षि, देवता, सिद्ध, इन्द्र, ब्रह्म, रुद्र, आदिके सामने जिनकी अग्नि परीक्षा हो चुकी, उनके विरुद्ध एक रजक बोल सका । रामने यही सोचा कि 'टण्डके द्वारा एक मुख वद किया जायगा तो हजारों मुखासे वही आवाज निकलेगी ।" व्यवहारद्वारा ही जनता या व्यक्ति के विचार या भाषण बदले जा सकते है, दण्डद्वारा नहीं । फिर भी उसकी कुछ सीमा उचित है । असम्बद्ध अहितकर विचारो एव भाषणोका दुष्प्रभाव समाजपर पड सकता है । अतः समष्टिहित के लिये उसमे भी एक सीमा उचित ही है । 'सनकीके भाषणसे भी कोई चीज अच्छी मिल सकती है।' इसका इतना ही अभिप्राय है कि 'बालादपि सुभापितं ग्राह्यम् एक अबुद्ध बालकसे भी सुभाषित ग्रहण करने में कोई हर्ज नहीं । इसका यह अभिप्राय नही कि पागलोके बढ़ाने और उनके भाषणोकी व्यवस्था की जाय, उसमे समयका अपव्यय किया जाय ।
ज्ञानपिपासा अवश्य अच्छी चीज है, परंतु बहुत-सा ज्ञानभार भी लाभदायक नहीं होता। ईश्वरद्वारा निर्मित एव नियमित विश्व के कल्याणोपयोगी सभी आवश्यक विषयोका प्रबोध ईश्वरीय शास्त्रो एव सर्वज्ञ महपियोकी ऋतम्भराप्रज्ञाओद्वारा सुलभ है। महाभारतकारका कहना है कि जो भारत ग्रन्थ में है, वही अन्यत्र है, जो यहाँ नही है, वह कहीं नहीं है -- 'यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित् ।' फिर भी एक सीमाके साथ उसपर स्वतन्त्र तर्क करने की परम्परा मान्य ही है । जहाँसे शास्त्रोकी परम्परा टूट गयी थी और शास्त्रीय देशोसे भी सम्पर्क टूट गया था, वहॉ अन्वेषणकी उत्कृष्ट लगन लाभदायक सिद्ध हुई है । यह बात अवश्य है कि किसी परम सत्यपर बिना पहुॅचे और बिना दृढ निश्चय किये समाजकी स्थिरता एव सुखशान्तिका स्थायित्व नहीं हो सकता । दौड दौडके लिये नहीं, श्रम श्रमके लिये नहीं; किंतु परम विश्राम के ही लिये होना चाहिये । 'सत्य किसीकी बपौती नहीं' परतु किसीकी इच्छा अनुसार उसमे रद्दोबदल भी नहीं होता रहता । एक रज्जुमे रज्जु ज्ञान ही यथार्थ है । रज्जुमे सर्पका ज्ञान, धाराका ज्ञान, मालाका ज्ञान अयथार्थ ही है । इन ज्ञानोमे समझौता नहीं हो सकता । देह ही आत्मा है या देहभिन्न आत्मा है, चेतन आत्मा है या अचेतन. व्यापक आत्मा है या अणु अथवा मध्यम परिमाण है, आत्मा असग है या कर्ना-भोक्ता
? इन सभी विचारोका समान दृष्टिकोणसे समान सत्तामे समन्वय नहीं हो
सकता । अवस्थाभेद, दृष्टिभेद, सत्ताभेदसे समन्वयकी बात अलग है । फिर विचार के लिये अनेक पर्योका उत्थापन तत्त्व-अतत्त्वका विवेचन आवश्यक होता ही है ।
इसी प्रकार हरबर्ट स्पेन्सरने (१८२०-१९०३) डार्विनके विकासवादके अनुसार बतलाया कि 'विश्वका विकास एक अनिश्चित असम्बन्धित एकत्वसे निश्चित और सम्बन्धित विभिन्नताकी ओर हो रहा है ।" उसके मतसे समाजका विकास भी इसी ढगसे हुआ है । प्राचीन समाजमे एकत्र था, परंतु था अनिश्चित एव असम्बन्धित । आधुनिक समाज विभिन्नता के साथ निश्चित एव सम्बद्ध है । जीवका विकास भी एक निम्नप्राणी से उच्चकोटिके प्राणीकी ओर हुआ है । पहले एक सूक्ष्म अणुके द्वारा ही खाना, पीना, श्वास लेना आदि काम होता था। प्रगतिके फलस्वरूप विभिन्न अणुओका जन्म हुआ । इनके द्वारा विभिन्न क्रियाएँ होने लगीं । अणुओमे कार्य-विभाजन हो गया । समाजका विकास भी इसी तरह हुआ ! पहले समाजमे कार्य विभाजन नहीं था । जीवन सम्बन्धी सभी कार्योको एक व्यक्ति सम्पादित करता था । विज्ञानकी प्रगतिसे समाजके कायोका विभाजन हो गया । आजका कार्यविभाजन जटिल हो गया । इसीलिये समाजके अंग अन्योन्याश्रित हो गये । पहले भी मनुष्य समूहरूपमे रहते थे। कुछ मात्राके नष्ट होनेपर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पडना था । परंतु आज तो यदि रेल या मिलोके श्रमिक कार्य बद कर दें तो समाजपर उसका भीपण प्रभाव पड़ता है । स्पेन्सरके मतानुसार यह कार्य-विभाजन आन्तरिक एवं अपरिवर्तनीय हैं । इस आन्तरिक कार्य विभाजनकी गतिमे राज्यको हस्तक्षेप न करना चाहिये । इस कार्यविभाजनसे समाज स्वय प्रगतिशील होगा । यह जीवशास्त्रका सुप्रसिद्ध नियम है कि 'योग्य ही जीवित रहेगा ।"
इस तरह उक्त महानुभाव जो सामाजिक वातावरण के अनुकूल अपना जीवन यापन कर सकते हैं, वे ही जीवित रहकर उन्नतिमें सफल होते हैं। वर्षाऋतुमें अनन्त कीडे उत्पन्न होते हैं। वर्षाके अनन्तर ये नये वातावरण के अनुकूल अपनी जीवन व्यवस्थामे परिवर्तन नहीं कर सकते, इसीलिये मर जाते हैं । स्पेन्सर कहता है कि 'गरीब वही है, जो जीवनको सामाजिक व्यवस्था के अनुकूल संचालित करनेमें असफल होता है । जो योग्य होता है वही सफल होता है। योग्य अनुपयुक्त वातावरणमे भी सफलता प्राप्त करता है । अयोग्य व्यक्ति परिस्थितिके शिकार होते हैं । अयोग्य प्राणियोके समान ही अयोग्य व्यक्ति भी समयानुसार जीवन-यापनमें असफल होते हैं। जैसे अयोग्य प्राणी मृत्युके शिकार होते हैं, वैसे ही अयोग्य मनुष्य निर्धन एवं निर्बल होते हैं। संघर्ष में पिछड़ जानेवाला ही गरीब होता है । योग्य ही जीवित रहता है। इस प्राकृतिक नियममे राज्यको हस्तक्षेप नहीं करना
चाहिये । स्पेन्सरके मतानुसार 'एक गदी वस्तीके निवासियों को उनके माग्यपर छोड देना चाहिये । जो व्यक्ति योग्य होंगे, वे इस प्रतिकूल वातावरणमे भी जीवित रह सकेंगे। प्रतिकूल बीमार होकर मर जायेंगे। राज्यको स्वच्छता, जल और अन्नका प्रवन्ध नहीं करना चाहिये । अयोग्य सवपसे त हो जायगा, योग्य वच जायगा ।' यह सिद्धान्त मानवताके विरुद्ध है। किसी भी बीमार प्राणीकी सहायता करना या कम-से-कम उसे स्वावलम्बी बनने में सहायता करना एक मनुष्यता है । किसी परिस्थितिमे रुग्ण, मूच्छित प्यासे तथा असहाय आदमी या प्राणिमात्रकी सहायता करना भारतीय शास्त्रों के अनुसार विश्वधर्म है।
एकसत्तावाद भी एक राजनीतिक वाद है । इसके अनुसार एक प्रादेशिक राशिमें केवल एक ही सर्वोच्च सत्ताधारी व्यक्ति विशेषका व्यक्तिमय होता है। सभी नागरिक एवं सस्थाएँ इस सत्ताधारी संस्थाके आधीन होती हैं। राज्यको राजसत्ताधारी संस्था मानने वाले दार्शनिक 'अद्वैतवादी' या 'एकसत्तावादी' कहलाते हैं। राज सत्ता' शब्द श्रेष्ठता अर्थमे प्रयुक्त होता है। तदनुसार श्रेष्ठता राज्यकी विशेषता है, अन्य किन्हीं भी सस्थाओंका कोई भी स्वतन्त्र अस्तित्व मान्य नहीं होता । राज्यके पास ही पुलिम, जेल, न्यायालय होते हैं । आजोल्लङ्घनका दण्ड राज्य देता है। इसकी सदस्यता भी सबके लिये अनिवार्य है। राज्य ही नियम-निर्मात्री संस्था होती है । वह राज्य संस्था किसी नियम या परम्पराके आधीन नहीं होती । राजाजापालन नागरिकोके लिये अनिवार्य है । बहुलवादी दर्शनराज्यको राजसत्ताधारी तो मानता है, परंतु वह सत्ताको सप्रतिबन्ध मानता है । १६ वीं शतीके एकसत्तावादने ही विवादास्पद राज्यसत्ताकी व्याख्या की है। गियर्क राजसत्ताको एक 'जादूकी छडी' मानता है । राज्यका सर्वश्रेष्ठ सचालक ही राजसत्तावा प्रतिरूप है । वह पूरे देशपर अपनी नीति और योजनाओको लाद सकता है । सभी दल निर्वाचनमें नागरिकोंसे मत प्राप्त करके कर्णधार बनना चाहते हैं । तरह-तरह की प्रतिज्ञा करते हैं। राज्य राजसत्ताधारी है । इसी आधारपर यह सच होता है। जो भी राज्याधिकारी होगा, वह राज्यसत्ताका उपयोग अपनी योजनाओंकी पूर्ति के लिये वरता है, जैसे मदारी जादूके डडेद्वारा पिटारीसे अनेक चीजें निकालता है । नागरिक जादूके डडेके तुल्य ही कुछ समझ नहीं पाता और राजनीतिजाके जाल में फॅस जाता है ।
यूरोपभरमे १६ वीं शतीसे पूर्व धार्मिक विषयोमें पोपा तथा अन्य विषयो में रोमन सम्राट् का सर्वोच्च स्थान होता था । राष्ट्रीयताके आन्दोलनसे मामन्तवादका हास हुआ, केन्द्रीय सरकार शक्तिशाली हुई और प्रत्येक राष्ट्रमे स्वतन्त्र सत्तावारी सरकारी और नेताओ ( राजाओं ) का जन्म हुआ । चोदॉके धर्मसुधार आन्दोलन मे | स्वतन्त्रता ठीक है । यदि मद्यपायी अपने अनुभवसे मद्यपानको हानिकारक समझेगा तो उसे छोड़ देगा । राज्य के प्रतिबन्धसे भी मद्यपान छूट सकता है, परंतु इसमे चारित्रिक सघटन नही आता । जो निर्णय अपने अनुभवसे होता है, वही दृढ होता है ! राज्य प्रतिबन्धसे छिपकर भी मनुष्य मद्य पीता रह सकता है । शिक्षा - प्रोत्साहन, चित्रप्रदर्शन आदि परोक्ष रीतियोद्वारा बुरे कामोके रोकनेका प्रयत्न अनुचित नही ।' इसी तरह द्यूत खेलनेको भी वह प्रतिबन्धद्वारा रोकना ठीक नही समझता था । ये सब काम बुरे हैं सही, परंतु आत्मसंघर्पसे ही उनका छूटना चरित्रवलका वर्धक होता है । वह सामाजिक परम्परागत रीति-रिवाजो के बन्धनको भी प्रगतिका बाधक समझता था । सामाजिक नियन्त्रण से व्यक्तित्वका विकास नहीं हो पाता । मिल आविष्कार एवं नवमार्गदर्शक शक्तिको महत्त्वपूर्ण मानता था । उसके मतानुसार 'जनसाधारणकी मनोवृत्ति सामान्यताकी दर्शिका होती है ।' परंतु वह इस मनोवृत्तिका विरोधी था । वह तो 'अपूर्व नवीन बुद्धिवालोको प्रोत्साहनसे नवीन विचारधाराकी सम्भावना होती है। ऐसा मानता था । वह अधिक कवियोका होना समाजकी उन्नतिका लक्षण मानता था । ' इससे रुचियोंकी विभिन्नता विदित होती है और यह स्वतन्त्र वातावरणमे ही सम्भव है । यदि एक कक्षाके विद्याथियो के प्रश्नोत्तरमे विभिन्नता होती है तो वह कक्षाकी प्रगति समझता था। जो जिसे हितकर प्रतीत हो उसे वैसा करने की छूट होनी चाहिये । एक ढंगसे जीवन निर्वाहार्थ किसीको बाध्य करना उचित नही, इसीलिये शिक्षाके राज्यनियन्त्रित होनेका भी वह विरोधी था । हॉ, नागरिकोको अपने बच्चोको स्कूल भेजने के लिये बाध्य करना राज्यका कर्तव्य है । इसके अतिरिक्त शिक्षापर राज्यका हस्तक्षेप न होना चाहिये । शिक्षा प्राप्त करनेकी स्वतन्त्रता नागरिकोको ही होनी चाहिये । विद्यालयमे बालक कैसी शिक्षा प्राप्त करे, यह नागरिकोकी रुचिपर ही छोड़ना चाहिये ।' उसके मतानुसार 'व्यक्तिवादियोकी भाँति ही व्यक्तिगत लाभके लिये भी मनुष्य भलीभाँति अपना कार्य सञ्चालन करता है । उसमे राज्यके हस्तक्षेप हितकर न होगे । सरकारी कर्मचारियोद्वारा होनेवाले कार्यो मे उनकी इतनी तत्परता नहीं होती जितनी किसीको व्यक्तिगत कार्यमे तत्परता होती जब व्यक्ति कोई काम स्वयं करता है तो उसकी ज्ञानवृद्धि होती है । इसीलिये मनुष्यको स्वय ही अधिकाधिक कार्य करना चाहिये । हाँ, समाचार-पत्रोद्वारा अतीत कार्यक अनुभवोंकी सूचना सरकारको देते रहना चाहिये । उससे लोग त्वयं सबक सीखेगे । चेतावनीद्वारा भी राज्य परोक्षरूप से मार्गदर्शक हो सकता है । सरकारी कायोंकी व्यापकतासे नागरिक सदा हो और निहारते रहते हैं। इससे आलस्य, प्रसाद एवं नगतिका अवरोध होता है । इससे व्यक्तित्व के विकासमे बाधा पड़ती है और नौकरशाही बढ़ती है। इससे कोई कार्य भलीभाँति सम्पादित नहीं होना। राज्य हग्नक्षेप एक आवश्यक विचाररूपमे ही स्वतन्त्रता के लिये मानना चाहिये । नागरिक जीवन में राज्यका न्यूनतम हस्तक्षेप ही व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके लिये अपेक्षित है ।। समालोचक कहते हैं कि मिल 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' के दफ्तरमै नौकर और राजनीतिक पत्राका लेखक था। एक हज़ार आठ सौ अट्ठावन मे उसने कम्पनीके शासनके पक्ष में एक प्रार्थनापत्र लिखा था, जिसमें कम्पनीके शासनको न्यायमगत कहा था और एक हज़ार आठ सौ उनसठमें उसकी 'स्वतन्त्रता' पुस्तक प्रकाशित हुई, जिसमें उसने व्यक्तिगत स्वतन्त्रताका पूर्ण समर्थन किया था। इस तरह उसके कार्य और विचार बेमेल ये । यह भी कहा जाता है कि एक हज़ार आठ सौ बत्तीस के पूर्व मध्यमवर्ग के लोगोने सामन्तों की सत्ताका विरोध किया था । उन्नीस वीं शतीम सामन्तोका ह्रास हुआ, परंतु बुद्धिजीवी वर्गकी एक बढ़ती हुई जनशक्तिका विरोध इस आधारपर सम्भव नहीं था । पूँजीपतियो एव मध्यमवर्गीय उपयोगितामे जनताकी उपयोगिता भिन्न थी । अतः जनमतसे भयभीत बुद्धिजीवी के लिये अपेक्षित था कि वह व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके नामपर जनमतके हस्तक्षे से बचे । उसी कार्यकी सिद्धि 'स्वतन्त्रता' पुस्तकद्वारा मिलने की । अब तो पूँजीपति एवं सर्वहारा श्रमिकों के बीच पडा मध्यम वर्ग शोचनीय दशामे है । न वह पूँजीपति ही है न तो सर्वहारा ही ! वह स्वयं व्यक्तिगत स्वतन्त्रता चाहता है। किसीका भी एकाधिकार नहीं चाहता । 'स्वतन्त्रता' पुस्तक मे इसी आवश्यकताकी पूर्ति की गयी है । समालोचकोका यह मी कहना है कि 'मिलका धार्मिक जीवन ही परम्पराओं के विरुद्ध था । इसीलिये उमने व्यक्तिगत स्वतन्त्रताको दार्शनिक रूप दिया । हम पहले कह चुके हैं कि 'सर्व परवशं दुःग्वं सर्वमात्मवणं सुखम् ।' - पराधीनता ही दुःख और स्वाधीनता ही मुख है। व्यक्तिगत स्वतन्त्रता अवश्य ही आदरकी वस्तु है, परंतु यदि मद्यपान, धून आदिकी स्वतन्त्रता व्यक्तियोको होनी चाहिये, तब तो आत्महत्याकी भी स्वतन्त्रता होनी चाहिये ! इसी तरह यदि कोई स्वेच्छानुसार शराब, द्यूतसे परहेज न करे, मॉ, बहन, चेट से भी शादी कर ले या मनमानी प्रेमसम्बन्ध करे तब तो मनुष्यता- पशुतामें कोई अन्तर ही नहीं रह जाता । आहार, निद्रा, भय, मैथुन मनुष्य एवं पशुका समान ही होता है। धर्म ही मनुष्यकी विशेषता है । धर्मविहीन स्वतन्त्रता स्वेच्छाचारिता या उच्छृंखलताके ही रूप में परिणत हो जाती है । सर्पोपाधिविनिर्मुक्त व्रतात्मभाव प्राप्त होने से पहले प्राणीको अवश्य ही धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक विभिन्न नियन्त्रणके परतन्त्र रहना पड़ता है। वास्तविक पूर्ण स्वतन्त्रताके लिये प्राणी को पर्याप्त स्वतन्त्रताना बलिदान करना पड़ता है। अपौरुपेय वेद एव तदनुसारी शास्त्रों के अनुसार विविविदित कार्यको ही धर्म कहा जाता है । भोजन, पान, शयन, विश्राम, संतानोत्पादनादि सभी कार्योंको शास्त्र-विधिके अनुसार करना ही धर्म है। धर्मनियन्त्रित जीवन से ही पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्ति सम्भव है । इसी प्रकार 'सनकी लोगोंके विचार एवं भाषणकी स्वतन्त्रता' भी उपहासास्पद है। अवश्य ही गुदडीसे भी लाल निकलते है, सनकियो में से भी कोई योग्य, लाभदायक सनकी निकल सकते हैं, परतु सभी सनकियोंको पूर्ण स्वतन्त्रता दे देनेसे तो समाजकी शान्ति ही खतरेमे पड़ सकती है। इसी प्रकार तर्कका आदर अवश्य उपयोगी हो सकता है, परंतु कुछ नियमोको मानकर ही तर्कका प्रयोग करना पड़ता है । फिर तर्कका कुछ अन्त भी नहीं है ! जीवनमे विश्वासका भी तो कही स्थान है । यदि बाजारमे खडे होकर राजद्रोहपर तर्क करनेकी स्वतन्त्रता दे दी जाय तो क्या शान्ति सुरक्षित रह सकेगी ? इसी प्रकार बहुत-सी निश्चित वस्तुएँ भी है । साता, पिता, गुरुजनोद्वारा उन्हे जानकर प्राणी आगे बढ़ता है। निश्चित वस्तुओमें भी तर्कका प्रयोग करके वह अपने समयका अपव्यय ही करेगा । वैज्ञानिकोको भी साम्राज्य तथा कुछ वैज्ञानिक नियमोको मानकर ही नयी खोजकी ओर बढना पड़ता है। पूर्वके अन्वेषणको ही अपने अनुभवसे अन्वेषण करना व्यर्थ ही होगा। यदि कोई अपने अनुभवपर ही संखियाके स्वाद और गुणके निर्णय करनेका हठ करेगा, तो उस-जैसे लक्षो व्यक्तियोको जीवनसे हाथ धोना पडेगा और लाभ कुछ न होगा । काले नागके काटने और उसके विषका परिणाम अनुभवद्वारा ही समझनेका प्रयत्न करना मूर्खता है। स्पष्ट है कि इस सम्बन्धर्मे शिष्टोंके अनुभवोका सदुपयोग करना उचित है । इसी प्रकार जिन दुराचारो, दुर्गुणो, पापोकी अग्राह्यता पूर्वजोके अनुभवोसे सिद्ध है उनपर विश्वास न करके पहले पाप, दुराचार करनेकी छूट देना अमानवता है।'हिंदू विचारोके अनुसार मद्यपानसे ब्राह्मणका ब्राह्मणत्व ही नष्ट हो जाता है। फिर लौटना असम्भव ही होता है । इसी प्रकार एक बार पतिव्रताका सतीत्व चले जानेसे पुनः उसका लौटना सम्भव नहीं । अतः पापोका दुष्परिणाम देखनेके लिये पाप करने की छूट देना बुद्धिमानी नहीं । परम्पराके अनुसार एक ढंगका सस्कार वन जानेपर तद्विरुद्ध प्रवृत्ति होती ही नहीं । फिर विरुद्ध प्रवृत्ति कराकर दुष्परिणाम अनुभव करके उससे निवृत्त होने की व्यवस्था करनी वैसी ही होगी, जैसे कंटक चुभ्ाकर पीडा अनुभव करके पुनः कंटकनिष्कासन-जन्य स्वास्थ्यका अनुभव करना । इसकी अपेक्षा अपनी बुद्धि एव समयको किसी अन्य उपयोगी काममे लगाना ही श्रेयस्कर है । जिनकी परम्पराओमे मद्य-मासका प्रचलन नहीं है, वहाँके बच्चों को उस सम्बन्धके न तो संस्कार ही होते हैं, न इच्छा ही होती है। प्रत्युत निषेध ही सस्कार होते हैं । उनके उस मस्कारको दृढ बनाने में ही कल्याण है । अतितार्किकको सर्वतोऽभिशकी हो जाना पड़ता है । फिर तो भोजनमे भी विपकी कल्पना होने लगती है। कई लोग बालकी खाल की खींचते रहते हैं। वे अपने और दूसरोका समय व्यर्थ ही अपव्यय करने रहते हैं । कितने ही जिद्दियोंको तर्क करनेकी स्वाधीनता देनेपर तत्त्व-निर्णय न होकर विवाद ही बढता है । चरित्रोंकी भिन्नता एव शकियोंकी वृद्धि समाजकी प्रगतिका लक्षण नहीं; किंतु निश्चित एव उपयोगी गुणोंकी समृद्धि ही प्रगतिका लक्षण है। भिन्नताकी अपेक्षा गुणात्मक समृद्धिपर ही जोर देना आवश्यक है। योग्य वातावरण, उच्चकोटिकी शिक्षा एव सदाचार के द्वारा ही उच्चकोटिका चारित्रिक सघटन होता है और यही राष्ट्रकी प्रगति है । शक्कियाँकी स्वतन्त्रता मे चरित्र में भिन्नता भले ही आ जाय, परंतु चारित्रिक उच्चता में कोई सहायता न मिळेगी । इसी प्रकार भले राजकीय नियम कम से कम हों, परंतु धार्मिक, सामाजिक नियमोद्वारा सदा ही व्यक्तियों को उच्छृंखल जीवनसे बचाना अनिवार्य है। अवश्य ही रामराज्यकी दृष्टिमे सभी सम्पत्तियों एवं कार्योंका सरकारीकरण अनुचित है। तथापि विशिष्ट शिष्टो एव शास्त्रों का मार्ग दर्शन समाजकी प्रगतिमे सदा ही सहायक होता है। प्रगति बाधक तत्वोंका निराकरण राज्यका अवश्य कर्तव्य है। विकासवादियो एवं आधुनिक विचारकोका सबसे बड़ा दोष यह है कि वे पूर्व-पूर्व के निर्णयो एच सत्यको निम्नस्तरका तथा उत्तरोत्तर निर्णयों एव सत्योंको उच्चकोटिका मानते हैं । इसीलिये वे सदा ही निश्चित विषयमे भी खोजते रहते हैं। वे इसी दृष्टिसे झकियोंसे भी नवीन ज्ञानकी आशा रखते हैं और नयी-नयी व्यवस्था ऑकी खोजमें लगे रहते हैं। परंतु प्रमाणद्वारा प्रमित तत्त्व किसी भी कालान्तर या देशान्तरमें अन्यथा नहीं हो सकते । इस दृष्टिसे अपौरुषेय वेदो, तदनुसारी आर्ष ग्रन्थों तथा सर्वज्ञकल्प महर्षियो, राजर्पियोने अपने ऋतम्भरा प्रजा एव सफल प्रयोगोद्वारा. जिन नियमो, व्यवस्थाओं को समाजके लिये लाभदायक समझा, वे त्रिकालाबाध्य सत्य एवं उपयोगी हैं। उनका अनुसरण करना समाज एच तघटक व्यक्तियोंका कर्तव्य है । गास्त्र एव समाज स्थिर वस्तु है । उनका धार्मिक, सास्कृत स्वरूप एव सभ्यता स्थिर वस्तु है और राज्यलक्ष्मी अस्थिर वस्तु । विशेषतया राज्यसत्ताको हथियाने के लिये सभी लोग प्रयत्नशील होते हैं। जिस ढगकी विचारधारावालोंका बहुमत होता है, उन्हींका शासन होता है। फलतः वे शासन, शिक्षा, सम्पत्ति, वर्म सभीको अपने हाथमे लेना चाहते हैं। कहना न होगा कि उक्त तीनो विषयों में सरकारी हस्तक्षेप होनेसे समाजकी संस्कृति, सभ्यता एव धर्ममें सर्वथा रद्दोबदल हो जाता है, फिर समाजकी स्थिरता भी नष्ट हो जाती है। यह भी नहीं कहा जा सकता कि 'अच्छे ही लोगोंके हाथमे शासन सत्ता जाती है ।" अनुभव तो यह है कि शान्तिप्रिय विचारक, गम्भीर विद्वान्, जाल- फौरेब न करनेवाले पीछे रह जाते हैं। जाल- फौरेववाले अयोग्य लोग आगे आ जाते हैं । ऐसी स्थितिमें विभिन्न शासनोंके बदलनेके साथ यदि सभ्यता, संस्कृति, शिक्षामे भी रद्दोबदल होता जाय, तब तो समाजकी एकरूपता, स्थिरता असम्भव हो जायगी। बहुत-से लोग विकासवादी नियमानुसार उत्तरोत्तर प्रगतिका ही सिद्धान्त मानते है, परतु इस मतम फिर मनुष्य के प्रमाद, पुरुषार्थकी विशेषता नहीं रह जाती । परंतु वस्तुस्थिति यह है कि प्रमाद और सावधानी से पतन एव अभ्युदय स्पष्ट परिलक्षित होते हैं । अतः हर चीजका भार राज्यपर छोड़ देना उचित नहीं । सामाजिक एव वैयक्तिक जीवन में राज्यका क्म-से-कम हस्तक्षेपवाला सिद्धान्त शास्त्र - सम्मत है । फिर भी धार्मिक, सामाजिक नियमोका पालन तो सबके लिये अपेक्षित होगा ही । न्याय, सुरक्षा, समष्टि स्वास्थ्य, सुव्यवस्था, सफाई आदिका काम सरकार कर सकती है । आज तो राष्ट्रके प्रत्येक जीवन क्षेत्रमे सरकार ही हावी होती जा रही है । व्यक्ति गामनयन्त्रका एक नगण्य कल-पुर्जा बनता चला जा रहा है । उसे व्यक्तिगत विकास- विचार आदिकी कोई भी स्वतन्त्रता नही । मिलकी दृष्टिसे 'मद्य-पान, द्यूत आदि व्यक्तिगत समझे जानेवाले कार्योंका भी समाजपर असर पड़ता ही है।' धन एव समयका यदि अनुचित कार्यो में अपव्यय न कर किसी उचित कार्यमे व्यय किया जाय तो अवश्य ही उससे समाजका लाभ हो सकता है। एक व्यक्तिके भी दुराचारी होने से समाज दूषित होता है । अन्य लोगोपर भी उसके दुस्संस्कार पडते हैं, फिर जब व्यक्तियोका समुदाय ही समाज है, तब तो व्यक्ति के दूषित होनेसे समाज दूषित होगा ही । मिलके इस स्वतन्त्रता-प्रेमका भी आधार रूमोका यह वाक्य है कि मनुष्य स्वतन्त्र जन्मा है, किंतु सभी ओरसे बेड़ियोंसे जकडा हुआ ।' इसका सार यही है कि व्यक्तिगत स्वतन्त्रता और सामाजिक, बन्धन परस्पर विरोधी है । किंतु भारतीय भावनासे स्वतन्त्रता-प्रेम स्वाभाविक है और वह है परम व्येय एव प्राप्य, परंतु उसे पूर्ण रूप से प्राप्त करने के लिये पर्याप्त स्वतन्त्रताका वलिदान कर धार्मिक एवं सामाजिक सभी बन्धनोको अगीकार करना परमावश्यक है। अधिक मुनाफा पानेके लिये व्यापार आदिमें पर्याप्त धन व्यय करना पडता ही है । अतएव रूसो भी तो वास्तविक स्वतन्त्रता राज्य नियन्त्रणसे मानता ही था । इस दृष्टि से व्यक्ति एवं समाजका परस्पर पोष्यपोषक भाव ही हैं, विरोध नहीं । लौकिक दृष्टिसे भी कई स्वतन्त्रताऍ परस्पर विरोधी होती हैं । वहाँ समझौतासे काम चलता है । सर्वथापि समष्टि हिताविरोधेन स्वतन्त्रताका उपयोग ही सदुपयोग है। विचार और भापणकी स्वतन्त्रता बहुत आवश्यक है । भारतीय सिद्धान्तोमे उसका मदा ही अत्यन्त आदर था । इस देश में चार्वाक, शून्यवाद, द्वैती, अद्वैती आदि अनेक प्रकारके परस्पर विरुद्ध दार्शनिक हुए हैं। उनमें विचार-संघर्प चलता रहा, परंतु किसी के विचार या भाषणपर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जाता था । यहाँ ईसा, सुकरातकी तरह विचार-भेद के कारण किसीको फॉसीपर नहीं लटकाया जाता था । रामराज्यमें एक रजकको अखण्ड भूमण्डलके लोकप्रिय सर्वजनरजन रामकी परम साध्वी सीताके विरुद्ध भी विचार रखने एव भाषण देनेपर प्रतिवन्ध नहीं या । राम चाहते तो उसे दण्ड दे सकते थे । लौकिक मनुष्य, वानर, भाल, राक्षस तथा अलौकिक महर्षि, देवता, सिद्ध, इन्द्र, ब्रह्म, रुद्र, आदिके सामने जिनकी अग्नि परीक्षा हो चुकी, उनके विरुद्ध एक रजक बोल सका । रामने यही सोचा कि 'टण्डके द्वारा एक मुख वद किया जायगा तो हजारों मुखासे वही आवाज निकलेगी ।" व्यवहारद्वारा ही जनता या व्यक्ति के विचार या भाषण बदले जा सकते है, दण्डद्वारा नहीं । फिर भी उसकी कुछ सीमा उचित है । असम्बद्ध अहितकर विचारो एव भाषणोका दुष्प्रभाव समाजपर पड सकता है । अतः समष्टिहित के लिये उसमे भी एक सीमा उचित ही है । 'सनकीके भाषणसे भी कोई चीज अच्छी मिल सकती है।' इसका इतना ही अभिप्राय है कि 'बालादपि सुभापितं ग्राह्यम् एक अबुद्ध बालकसे भी सुभाषित ग्रहण करने में कोई हर्ज नहीं । इसका यह अभिप्राय नही कि पागलोके बढ़ाने और उनके भाषणोकी व्यवस्था की जाय, उसमे समयका अपव्यय किया जाय । ज्ञानपिपासा अवश्य अच्छी चीज है, परंतु बहुत-सा ज्ञानभार भी लाभदायक नहीं होता। ईश्वरद्वारा निर्मित एव नियमित विश्व के कल्याणोपयोगी सभी आवश्यक विषयोका प्रबोध ईश्वरीय शास्त्रो एव सर्वज्ञ महपियोकी ऋतम्भराप्रज्ञाओद्वारा सुलभ है। महाभारतकारका कहना है कि जो भारत ग्रन्थ में है, वही अन्यत्र है, जो यहाँ नही है, वह कहीं नहीं है -- 'यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित् ।' फिर भी एक सीमाके साथ उसपर स्वतन्त्र तर्क करने की परम्परा मान्य ही है । जहाँसे शास्त्रोकी परम्परा टूट गयी थी और शास्त्रीय देशोसे भी सम्पर्क टूट गया था, वहॉ अन्वेषणकी उत्कृष्ट लगन लाभदायक सिद्ध हुई है । यह बात अवश्य है कि किसी परम सत्यपर बिना पहुॅचे और बिना दृढ निश्चय किये समाजकी स्थिरता एव सुखशान्तिका स्थायित्व नहीं हो सकता । दौड दौडके लिये नहीं, श्रम श्रमके लिये नहीं; किंतु परम विश्राम के ही लिये होना चाहिये । 'सत्य किसीकी बपौती नहीं' परतु किसीकी इच्छा अनुसार उसमे रद्दोबदल भी नहीं होता रहता । एक रज्जुमे रज्जु ज्ञान ही यथार्थ है । रज्जुमे सर्पका ज्ञान, धाराका ज्ञान, मालाका ज्ञान अयथार्थ ही है । इन ज्ञानोमे समझौता नहीं हो सकता । देह ही आत्मा है या देहभिन्न आत्मा है, चेतन आत्मा है या अचेतन. व्यापक आत्मा है या अणु अथवा मध्यम परिमाण है, आत्मा असग है या कर्ना-भोक्ता ? इन सभी विचारोका समान दृष्टिकोणसे समान सत्तामे समन्वय नहीं हो सकता । अवस्थाभेद, दृष्टिभेद, सत्ताभेदसे समन्वयकी बात अलग है । फिर विचार के लिये अनेक पर्योका उत्थापन तत्त्व-अतत्त्वका विवेचन आवश्यक होता ही है । इसी प्रकार हरबर्ट स्पेन्सरने डार्विनके विकासवादके अनुसार बतलाया कि 'विश्वका विकास एक अनिश्चित असम्बन्धित एकत्वसे निश्चित और सम्बन्धित विभिन्नताकी ओर हो रहा है ।" उसके मतसे समाजका विकास भी इसी ढगसे हुआ है । प्राचीन समाजमे एकत्र था, परंतु था अनिश्चित एव असम्बन्धित । आधुनिक समाज विभिन्नता के साथ निश्चित एव सम्बद्ध है । जीवका विकास भी एक निम्नप्राणी से उच्चकोटिके प्राणीकी ओर हुआ है । पहले एक सूक्ष्म अणुके द्वारा ही खाना, पीना, श्वास लेना आदि काम होता था। प्रगतिके फलस्वरूप विभिन्न अणुओका जन्म हुआ । इनके द्वारा विभिन्न क्रियाएँ होने लगीं । अणुओमे कार्य-विभाजन हो गया । समाजका विकास भी इसी तरह हुआ ! पहले समाजमे कार्य विभाजन नहीं था । जीवन सम्बन्धी सभी कार्योको एक व्यक्ति सम्पादित करता था । विज्ञानकी प्रगतिसे समाजके कायोका विभाजन हो गया । आजका कार्यविभाजन जटिल हो गया । इसीलिये समाजके अंग अन्योन्याश्रित हो गये । पहले भी मनुष्य समूहरूपमे रहते थे। कुछ मात्राके नष्ट होनेपर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पडना था । परंतु आज तो यदि रेल या मिलोके श्रमिक कार्य बद कर दें तो समाजपर उसका भीपण प्रभाव पड़ता है । स्पेन्सरके मतानुसार यह कार्य-विभाजन आन्तरिक एवं अपरिवर्तनीय हैं । इस आन्तरिक कार्य विभाजनकी गतिमे राज्यको हस्तक्षेप न करना चाहिये । इस कार्यविभाजनसे समाज स्वय प्रगतिशील होगा । यह जीवशास्त्रका सुप्रसिद्ध नियम है कि 'योग्य ही जीवित रहेगा ।" इस तरह उक्त महानुभाव जो सामाजिक वातावरण के अनुकूल अपना जीवन यापन कर सकते हैं, वे ही जीवित रहकर उन्नतिमें सफल होते हैं। वर्षाऋतुमें अनन्त कीडे उत्पन्न होते हैं। वर्षाके अनन्तर ये नये वातावरण के अनुकूल अपनी जीवन व्यवस्थामे परिवर्तन नहीं कर सकते, इसीलिये मर जाते हैं । स्पेन्सर कहता है कि 'गरीब वही है, जो जीवनको सामाजिक व्यवस्था के अनुकूल संचालित करनेमें असफल होता है । जो योग्य होता है वही सफल होता है। योग्य अनुपयुक्त वातावरणमे भी सफलता प्राप्त करता है । अयोग्य व्यक्ति परिस्थितिके शिकार होते हैं । अयोग्य प्राणियोके समान ही अयोग्य व्यक्ति भी समयानुसार जीवन-यापनमें असफल होते हैं। जैसे अयोग्य प्राणी मृत्युके शिकार होते हैं, वैसे ही अयोग्य मनुष्य निर्धन एवं निर्बल होते हैं। संघर्ष में पिछड़ जानेवाला ही गरीब होता है । योग्य ही जीवित रहता है। इस प्राकृतिक नियममे राज्यको हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये । स्पेन्सरके मतानुसार 'एक गदी वस्तीके निवासियों को उनके माग्यपर छोड देना चाहिये । जो व्यक्ति योग्य होंगे, वे इस प्रतिकूल वातावरणमे भी जीवित रह सकेंगे। प्रतिकूल बीमार होकर मर जायेंगे। राज्यको स्वच्छता, जल और अन्नका प्रवन्ध नहीं करना चाहिये । अयोग्य सवपसे त हो जायगा, योग्य वच जायगा ।' यह सिद्धान्त मानवताके विरुद्ध है। किसी भी बीमार प्राणीकी सहायता करना या कम-से-कम उसे स्वावलम्बी बनने में सहायता करना एक मनुष्यता है । किसी परिस्थितिमे रुग्ण, मूच्छित प्यासे तथा असहाय आदमी या प्राणिमात्रकी सहायता करना भारतीय शास्त्रों के अनुसार विश्वधर्म है। एकसत्तावाद भी एक राजनीतिक वाद है । इसके अनुसार एक प्रादेशिक राशिमें केवल एक ही सर्वोच्च सत्ताधारी व्यक्ति विशेषका व्यक्तिमय होता है। सभी नागरिक एवं सस्थाएँ इस सत्ताधारी संस्थाके आधीन होती हैं। राज्यको राजसत्ताधारी संस्था मानने वाले दार्शनिक 'अद्वैतवादी' या 'एकसत्तावादी' कहलाते हैं। राज सत्ता' शब्द श्रेष्ठता अर्थमे प्रयुक्त होता है। तदनुसार श्रेष्ठता राज्यकी विशेषता है, अन्य किन्हीं भी सस्थाओंका कोई भी स्वतन्त्र अस्तित्व मान्य नहीं होता । राज्यके पास ही पुलिम, जेल, न्यायालय होते हैं । आजोल्लङ्घनका दण्ड राज्य देता है। इसकी सदस्यता भी सबके लिये अनिवार्य है। राज्य ही नियम-निर्मात्री संस्था होती है । वह राज्य संस्था किसी नियम या परम्पराके आधीन नहीं होती । राजाजापालन नागरिकोके लिये अनिवार्य है । बहुलवादी दर्शनराज्यको राजसत्ताधारी तो मानता है, परंतु वह सत्ताको सप्रतिबन्ध मानता है । सोलह वीं शतीके एकसत्तावादने ही विवादास्पद राज्यसत्ताकी व्याख्या की है। गियर्क राजसत्ताको एक 'जादूकी छडी' मानता है । राज्यका सर्वश्रेष्ठ सचालक ही राजसत्तावा प्रतिरूप है । वह पूरे देशपर अपनी नीति और योजनाओको लाद सकता है । सभी दल निर्वाचनमें नागरिकोंसे मत प्राप्त करके कर्णधार बनना चाहते हैं । तरह-तरह की प्रतिज्ञा करते हैं। राज्य राजसत्ताधारी है । इसी आधारपर यह सच होता है। जो भी राज्याधिकारी होगा, वह राज्यसत्ताका उपयोग अपनी योजनाओंकी पूर्ति के लिये वरता है, जैसे मदारी जादूके डडेद्वारा पिटारीसे अनेक चीजें निकालता है । नागरिक जादूके डडेके तुल्य ही कुछ समझ नहीं पाता और राजनीतिजाके जाल में फॅस जाता है । यूरोपभरमे सोलह वीं शतीसे पूर्व धार्मिक विषयोमें पोपा तथा अन्य विषयो में रोमन सम्राट् का सर्वोच्च स्थान होता था । राष्ट्रीयताके आन्दोलनसे मामन्तवादका हास हुआ, केन्द्रीय सरकार शक्तिशाली हुई और प्रत्येक राष्ट्रमे स्वतन्त्र सत्तावारी सरकारी और नेताओ का जन्म हुआ । चोदॉके धर्मसुधार आन्दोलन मे |
बेनेडिक्ट सोलहवें - २६५वें तथा वर्तमान पोप रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं। 'पोप' का शाब्दिक अर्थ 'पिता' होता है। यह लैटिन के "पापा" (papa) से व्युत्पन्न हा है जो स्वयं ग्रीक के पापास् (πάπας, pápas) से व्युत्पन्न है। इस समय (फरवरी, २००९) बेनेडिक्ट सोलहवें (Benedict XVI) इस पद पर आसीन हैं जिन्हें १९ अप्रैल २००५ को चुना गया था। वे २६५वें पोप हैं। रोमन काथलिक चर्च के परमाधिकारी को संत पापा (पिता) 'होली फादर' अथवा पोप कहते हैं। ईसा से अपने महाशिरूय संत पीटर को अपने चर्च का आधार तथा प्रधान 'चरवाहा' नियुक्त किया था और उनको यह भी सुस्पष्ट आश्वासन दिया था कि उनपर आधारित चर्च शताब्दियों तक बना रहेगा। अतः ईसा के विधान से संत पीटर का देहांत रोम में हुआ था, इसलिये प्रारंभ ही से संत पीटर के उत्तराधिकारी होने के कारण रोम के बिशप समूचे चर्च के अध्यक्ष तथा पृथ्वी पर ईसा के प्रतिनिधि माने गए थे। इतिहास इसका साक्षी है कि रोम के बिशप के अतिरिक्त किसी ने कभी संत पीटर का उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं किया। किंतु प्राच्य चर्च के अलग होते जाने से तथा प्रोटेस्टैंट धर्म के उद्भव से पोप के अधिकारी के विषय में शताब्दियों तक वाद विवाद होता रहा, अंततोगत्वा वैटिकन की प्रथम अधिकार रखते हैं। वे ईसा की शिक्षा के सर्वोच्च व्याख्याता हैं और चर्च के परमाधिकारी की हैसियत से धर्मशिक्षा की व्याख्या करते समय भ्रमातीत अर्थात् अचूक हैं। पोप वैटिकन राज्य के अध्यक्ष हैं तथा उनके देहांत पर कार्डिनल उनके उत्तराधिकारी को चुनते हैं .
एलिज़ाबेथ प्रथम (Elizabeth I, जन्मः ७ सितम्बर १५३३, मृत्युः २४ मार्च १६०३) इंग्लैंड और आयरलैंड की महारानी थीं, जिनका शासनकाल १७ नवम्बर १५५८ से उनकी मौत तक चला। यह ब्रिटेन के ट्युडर राजवंश की पाँचवी और आख़री सम्राट थीं। इन्होनें कभी शादी नहीं की और न ही इनकी कोई संतान हुई इसलिए इन्हें "कुंवारी रानी" (virgin queen, वर्जिन क्वीन) के नाम से भी जाना जाता था। यह ब्रिटेन के सम्राट हेनरी अष्टम की बेटी होने के नाते जन्म पर एक राजकुमारी थीं, लेकिन इनके जन्म के ढाई साल बाद ही इनकी माता, ऐन बोलिन (Anne Boleyn) को मार दिया गया और इन्हें नाजायज़ घोषित कर दिया गया। १५५३ तक इनके सौतेले भाई एडवर्ड ६ के शासनकाल के बाद इनकी बहन मैरी १ ने शासन संभाला। मैरी के संतानरहित होने के बाद एलिज़ाबेथ ने १७ नवंबर १५५८ को अंग्रेजी सिंहासन की बागडोर संभाली। इन्होने अपने इर्द-गिर्द बहुत से समझदार व्यक्तियों को मंत्री-परिषद में रखा जिस से ब्रिटेन सुव्यवस्थित हुआ। इन्होनें इंग्लैंड में "इंग्लिश प्रोटेस्टैंट चर्च" की नींव रखी और स्वयं को उसका अध्यक्ष बना लिया। इस से वे ब्रिटेन की राजनैतिक नेता और धार्मिक नेता दोनों बन गई। इस से रोमन कैथोलिक शाखा का पोप नाराज़ हो गया। वह ब्रिटेन को धार्मिक मामलों में अपने अधीन एक कैथोलिक राष्ट्र मानता था। उसने १५७० में यह आदेश दिया की ब्रिटेन के नागरिकों को एलिज़ाबेथ से वफ़ादारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस से ब्रिटेन के कैथोलिक समुदाय से एलिज़ाबेथ के ख़िलाफ़ बहुत से हमले हुए और कई विद्रोह भड़के, लेकिन एलिज़ाबेथ अपने मंत्रियों की गुप्तचर सेवा की मदद से सत्ता पर बनी रहीं। १५८८ में पोप के आग्रह पर स्पेन (जो एक कैथोलिक राष्ट्र था) ने ब्रिटेन पर एक समुद्री जहाज़ों का बड़ा लेकर आक्रमण करने की कोशिश करी। इस आक्रमण को "स्पेनी अर्माडा" कहा जाता है। एलिज़ाबेथ की नौसेना ने उसे हरा दिया और यह जीत इंग्लैण्ड की सब से ऐतिहासिक जीतों में से एक मानी जाती है। एलिज़ाबेथ के शासनकाल को एलिज़ाबेथेन एरा यानी एलिज़ाबेथ का युग के नाम से भी जाना जाता है। वो अपने शासन में अपने पिता व भाई बहन के मुकाबले ज्यादा उदार थीं। उनकी बहन मैरी ने सैकणों प्रोटेस्टैंटों को मरवा दिया था जिसकी वजह से उसे खूनी मैरी के नाम से भी जाना जाता है। एलिज़ाबेथ ने ऐसा कोई काम नहीं किया। वह लोकप्रिय शासक के रूप में जानी जाती थीं। एलिज़ाबेथ के काल में ब्रिटिश साहित्य और नाटककार फले-फूले, जिनमें विलियम शेक्सपीयर और क्रिस्टोफ़र मार्लोवे के नाम सब से नुमाया हैं। उनके दौर में ब्रिटेन के नौसैनिक दूर-दूर खोज-यात्राओं में निकले। फ़्रांसिस ड्रेक ने उत्तर अमेरिका की यात्रा करी। माना जाता है कि उनके ४४ साल के राज से ब्रिटेन में एक शक्तिशाली राष्ट्रीय भावना फैल गई जिसने आगे चलकर ब्रिटेन को विश्व का सब से शक्तिशाली देश बनने में योगदान दिया। वह ऐसे समय में अपना सिंहासन बचाते हुए लंबे समय तक एक सफल शासन दे सकीं जब पड़ोसी राज्यों के शासक अंदरूनी विवादों में उलझे रहे और अपनी सत्ता गंवाते रहे, जैसे कि उनकी भतीजी व स्कॉटलैंड की रानी मैरी जिसे उन्होंने अपने खिलाफ षडयंत्र रचने के अपराध में १५६८ में मृत्युदंड दे दिया। कुछ इतिहासकार उन्हें चिड़चिड़ा व जल्द कोई फैसला ना ले पाने वाला शासक मानते हैं और उन्हें उनकी काबिलियत से ज्यादा भाग्यशाली बताते हैं। .
एंजल्स एंड डीमन्स (फ़िल्म)
एंजल्स एंड डीमन्स डैन ब्राउन के इसी नाम के उपन्यास का अमेरिकी फ़िल्म रूपांतरण है। यह दा विंची कोड की अगली कड़ी है, हालांकि उपन्यास एंजल्स एंड डीमन्स पहले प्रकाशित हुआ था और दा विंची कोड से पहले घटित होता है। इसका फ़िल्मांकन रोम, इटली और कल्वर सिटी, कैलिफ़ोर्निया के सोनी पिक्चर्स स्टूडियो में किया गया। टॉम हैंक्स ने रॉबर्ट लैंगडन की मुख्य भूमिका दोहराई है, जबकि निर्देशक रॉन हावर्ड, निर्माता ब्रायन ग्रेज़र, संगीतकार हैन्स ज़िम्मर और पटकथा लेखक अकिवा गोल्ड्समैन की भी वापसी हुई है। .
तेरहवीं शताब्दी का एक मंगोल तीरबाज तुर्की के इतिहास को तुर्क जाति के इतिहास और उससे पूर्व के इतिहास के दो अध्यायों में देखा जा सकता है। सातवीं से बारहवीं सदी के बीच में मध्य एशिया से तुर्कों की कई शाखाएँ यहाँ आकर बसीं। इससे पहले यहाँ से पश्चिम में आर्य (यवन, हेलेनिक) और पूर्व में कॉकेशियाइ जातियों का बसाव रहा था। तुर्की में ईसा के लगभग ७५०० वर्ष पहले मानव बसाव के प्रमाण यहां मिले हैं। हिट्टी साम्राज्य की स्थापना १९००-१३०० ईसा पूर्व में हुई थी। १२५० ईस्वी पूर्व ट्रॉय की लड़ाई में यवनों (ग्रीक) ने ट्रॉय शहर को नेस्तनाबूत कर दिया और आसपास के इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। १२०० ईसापूर्व से तटीय क्षेत्रों में यवनों का आगमन आरंभ हो गया। छठी सदी ईसापूर्व में फ़ारस के शाह साईरस ने अनातोलिया पर अपना अधिकार जमा लिया। इसके करीब २०० वर्षों के पश्चात ३३४ इस्वीपूर्व में सिकन्दर ने फ़ारसियों को हराकर इसपर अपना अधिकार किया। बाद में सिकन्दर अफ़गानिस्तान होते हुए भारत तक पहुंच गया था। इसापूर्व १३० इस्वी में अनातोलिया रोमन साम्राज्य का अंग बना। ईसा के पचास वर्ष बाद संत पॉल ने ईसाई धर्म का प्रचार किया और सन ३१३ में रोमन साम्राज्य ने ईसाई धर्म को अपना लिया। इसके कुछ वर्षों के अन्दर ही कान्स्टेंटाईन साम्राज्य का अलगाव हुआ और कान्स्टेंटिनोपल इसकी राजधनी बनाई गई। छठी सदी में बिजेन्टाईन साम्राज्य अपने चरम पर था पर १०० वर्षों के भीतर मुस्लिम अरबों ने इसपर अपना अधिकार जमा लिया। बारहवी सदी में धर्मयुद्धों में फंसे रहने के बाद बिजेन्टाईन साम्राज्य का पतन आरंभ हो गया। सन १२८८ में ऑटोमन साम्राज्य का उदय हुआ और सन् १४५३ में कस्तुनतुनिया का पतन। इस घटना ने यूरोप में पुनर्जागरण लाने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। .
द डा विंची कोड (फ़िल्म)
द डा विंची कोड, रॉन हावर्ड द्वारा निर्देशित, 2006 की एक अमेरिकी रहस्य-रोमांच वाली फ़िल्म है। पटकथा को अकिवा गोल्ड्समैन द्वारा लिखा गया और यह डैन ब्राउन के दुनिया भर में सर्वोच्च बिक्री वाले 2003 के उपन्यास द डा विंची कोड पर आधारित है। हावर्ड ने जॉन कैले और ब्रायन ग्रेज़र के साथ इसका निर्माण किया और कोलंबिया पिक्चर्स ने इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में 9 मई 2006 को जारी किया। द डा विंची कोड में टॉम हैंक्स ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रतीकविज्ञानी रॉबर्ट लेंग्डन का किरदार निभाया है, ऑड्रे तौटो ने फ्रांस के Centrale de la Police Judiciaire के कूट-विशेषज्ञ सोफी नेवू का, सर इयान मेकेलन ने ब्रिटिश ग्रेल इतिहासकार सर ले टीबिंग का, अल्फ्रेड मोलिना ने बिशप मैनुएल अरिंगारोसा का, जीन रेनो ने Direction Centrale de la Police Judiciaire के कैप्टेन बेजु फाक का और पॉल बेट्टेनी ने ओपस डे भिक्षु सीलास का किरदार निभाया.
किसी धार्मिक संप्रदाय के द्वारा स्वीकृत विश्वासों का क्रमबद्ध संग्रह उस संप्रदाय की धर्ममीमांसा है। धर्ममीमांसा में विज्ञान और दर्शन के दृष्टिकोण की सार्वभौमता नहीं होती, इसकी पद्धति भी उनकी पद्धति से भिन्न होती है। विज्ञान प्रत्यक्ष पर आधारित है, दर्शन में बुद्धि की प्रमुखता है और धर्ममीमांसा में, आप्त वचन की प्रधानता स्वीकृत होती है। जब तक विश्वास का अधिकार प्रश्नरहित था, धर्ममीमांसकों को इस बात की चिंता न थी कि उनके मंतव्य विज्ञान के आविष्कारों और दर्शन के निष्कर्षों के अनुकूल हैं या नहीं। परंतु अब स्थिति बदल गई है और धर्ममीमांसा को विज्ञान तथा दर्शन के मेल में रहना होता है। धर्ममीमांसा किसी धार्मिक संप्रदाय के स्वीकृत सिद्धांतों का संग्रह है। इस प्रकार की सामग्री का स्रोत कहाँ है? इन सिद्धांतों का सर्वोपरि स्रोत तो ऐसी पुस्तक है, जिसे उस संप्रदाय में ईश्वरीय ज्ञान समझा जाता है। इससे उतरकर उन विशेष पुरुषों का स्थान है जिन्हें ईश्वर की ओर से धर्म के संबंध में निर्भ्रांत ज्ञान प्राप्त हुआ है। रोमन कैथोलिक चर्च में पोप को ऐसा पद प्राप्त है। विवाद के विषयों पर आचार्यों की परिषदों के निश्चय भी प्रामाणिक सिद्धांत समझे जाते हैं। धर्ममीमांसा के विचार विषयों में ईश्वर की सत्ता और स्वरूप प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त जगत् और जीवात्मा के स्वरूप पर भी विचार होता है। ईश्वर के संबंध में प्रमुख प्रश्न यह है कि वह जगत् में अंतरात्मा के रूप में विद्यमान है, या इससे परे, ऊपर भी है। जगत् के विषय मं पूछा जाता है कि यह ईश्वर का उत्पादन है, उसका उद्गार है, या निर्माण मात्र है। उत्पादनवाद, उद्गारवाद और निर्माणवाद की जाँच की जाती है। जीवात्मा के संबंध में, स्वाधीनता और मोक्षसाधन चिरकाल के विवाद के विषय बने रहे हैं। संत आगस्तिन ने पूर्व निर्धारणवाद का समर्थन किया और कहा कि कोई मनुष्य अपने कर्मों से दोषमुक्त नहीं हो सकता, दोषमुक्ति ईश्वरीय करुणा पर निर्भर है। इसके विपरीत भारत की विचारधारा में जीवात्मा स्वतंत्र है और मनुष्य का भाग्य उसके कर्मों से निर्णीत होता है। .
यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारण नवीन प्रोटेस्टेंट धर्म के प्रसार से चिंतित होकर कैथोलिक धर्म के अनुयायियों ने कैथोलिक चर्च व पोपशाही की शक्ति व अधिकारों को सुरक्षित करने और उनकी सत्ता को पुनः सुदृढ़ बनाने के लिए कैथोलिक चर्च और पोपशाही में अनके सुधार किये। यह सुधार आंदोलन, कैथोलिकों की दृष्टि से उनके पुनरुत्थान का आंदोलन है और प्रोटेस्टेंट विरोधी होने से इसे धर्म-सुधार-विरोधी आंदोलन (Counter-Reformation), या प्रतिवादी अथवा प्रतिवादात्मक धर्म-सुधार आंदोलन कहा गया। यह आंदोलन सोलहवीं सदी के मध्य से प्रारंभ हुआ और सत्रहवीं शताब्दी के मध्य तक चला। (ट्रेण्ट काउंसिल (1545-1563) से आरम्भ होकर तीसवर्षीय युद्ध की समाप्ति तक (1648)) इस धर्मसुधार-विरोधी आंदोलन का उद्देश्य कैथोलिक चर्च में पवित्रता और ऊँचे आदर्शों को स्थापित करना था, चर्च और पोपशाही में व्याप्त दोषों को दूर कर उसके स्वरूप को पवित्र बनाना था। इस युग के नये पोप जैसे पॉल तृतीय, पॉल चतुर्थ, पायस चतुर्थ, पायस पंचम आदि पूर्व पोपों की अपेक्षा अधिक सदाचारी, धर्मनिष्ठ, कर्तव्यपरायण और सुधारवादी थे। इनके प्रयासों से कैथोलिक धर्म में नवीन शक्ति, स्फूर्ति और प्रेरणा आई और कई सुधार किये गये। .
निगम एक विशेषाधिकार प्राप्त स्वतन्त्र कानूनी इकाई के रूप में पहचानी जाने वाली अलग संस्था है जिसके पास अपने सदस्यों से पृथक अपने अधिकार और दायित्व हैं। निगमों के कई प्रकार हैं, जिनमे से अधिकतर का उपयोग व्यापार करने के लिए किया जाता है। निगम कॉर्पोरेट कानून का एक उत्पाद हैं और इनके नियम उन प्रबंधकों के हितों को संतुलित करते हैं जो निगम, लेनदारों, शेयरधारकों तथा श्रम का योगदान करने वाले कर्मचारियों का संचालन करते हैं। आधुनिक समय में, निगम तेजी से आर्थिक जीवन का एक प्रमुख हिस्सा बन गए हैं। निगम की एक महत्वपूर्ण सुविधा सीमित देयता है। अगर एक निगम विफल होता है, तो शेयरधारक सामान्य रूप से केवल अपने निवेश को खोते हैं और कर्मचारी केवल अपनी नौकरी खो देंगे, किन्तु उन में से कोई भी निगम के लेनदारों के ऋणों के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा.
नैपोलियन तृतीय लुई नैपोलियन् बोनापार्ट (२० अप्रैल १८०८ - ९ जनवरी १८७३ ई.) फ्रांसीसी रिपब्लिक का प्रथम राष्ट्रपति तथा नैपोलियन तृतीय के रूप में द्वितीय फ्रांसीसी साम्राज्य का शासक था। वह नैपोलियन प्रथम का भतीजा तथा उत्तराधिकारी था। .
नेपोलियन बोनापार्ट (15 अगस्त 1769 - 5 मई 1821) (जन्म नाम नेपोलियोनि दि बोनापार्टे) फ्रान्स की क्रान्ति में सेनापति, 11 नवम्बर 1799 से 18 मई 1804 तक प्रथम कांसल के रूप में शासक और 18 मई 1804 से 6 अप्रैल 1814 तक नेपोलियन I के नाम से सम्राट रहा। वह पुनः 20 मार्च से 22 जून 1815 में सम्राट बना। वह यूरोप के अन्य कई क्षेत्रों का भी शासक था। इतिहास में नेपोलियन विश्व के सबसे महान सेनापतियों में गिना जाता है। उसने एक फ्रांस में एक नयी विधि संहिता लागू की जिसे नेपोलियन की संहिता कहा जाता है। वह इतिहास के सबसे महान विजेताओं में से एक था। उसके सामने कोई रुक नहीं पा रहा था। जब तक कि उसने 1812 में रूस पर आक्रमण नहीं किया, जहां सर्दी और वातावरण से उसकी सेना को बहुत क्षति पहुँची। 18 जून 1815 वॉटरलू के युद्ध में पराजय के पश्चात अंग्रज़ों ने उसे अन्ध महासागर के दूर द्वीप सेंट हेलेना में बन्दी बना दिया। छः वर्षों के अन्त में वहाँ उसकी मृत्यु हो गई। इतिहासकारों के अनुसार अंग्रेज़ों ने उसे संखिया (आर्सीनिक) का विष देकर मार डाला। .
पवित्र संघ (Holy Alliance; जर्मनः Heilige Allianz; रूसीः Священный союз, Svyashchennyy soyuz) की स्थापना नेपोलियन बोनापार्ट की अन्तिम पराजय के बाद २६ सितम्बर १८१५ को रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशा के राजाओं ने मिलकर की थी। इसमें रूस के जार अलेक्सांदर प्रथम की अग्रणी भूमिका थी। .
प्रथम क्रूसयुद्ध की सफलताः येरूसलम पर कब्जा प्रथम क्रूसयुद्ध (First Crusade (1096-1099)) पश्चिमी इसाई मतावलम्बियों द्वारा की गयी सैनिक कार्यवाही थी जो मुसलमानों द्वारा जीते गये पवित्र स्थानों को पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से की गयी थी। इसका आरम्भ 27 नवम्बर 1095 हुआ था। .
पोप एलेक्ज़ेंडर छठे (1 जनवरी 1431 - 18 अगस्त 1503) 11 अगस्त 1492 से 18 अगस्त 1503 में अपनी मृत्यु तक रोमन कैथोलिक गिरजाघर के मुख्या पोप रहे थे। इन्हें पुनर्जागरण के समय के सबसे विवादित पोप में से एक माना जाता है। इन्हें एक पादरी से अधिक एक राजनयिक, राजनीतिज्ञ और नागरिक प्रशासक के रूप में ज्यादा ख्याति प्राप्त हुई थी। .
फ्रांसिस (Franciscus; जन्मः जॉर्ज मारियो बार्गोग्लियो; १७ दिसम्बर १९३६, ब्यूनस आयर्स) कैथोलिक समुदाय के २६६वें पोप चुने गये हैं। पोप फ्रांसिस प्रथम को १३ मर्च २०१३ को पोंटिफ़ के रूप में चुना गया। .
योज़ेफ़ रात्सिंगरःपोप बेनेडिक्ट XVI left पोप बेनेडिक्ट XVI जिनका असली नाम युसॅफ़ आलिओस रात्सिंगर है, कैथोलिक समुदाय के 265वें पोप चुने गये हैं। 16 अप्रैल 1927 को जर्मनी में जन्मे पोप बेनेडिक्ट को 24 अप्रैल 2005 को पोंटिफ़ के रूप में चुना जाएगा। पिछले 275 सालों में चुने गए ये पोप सबसे उम्रदार हैं, इस समय बेनेडिक्ट की उम्र 80 वर्ष है। श्रेणीःव्यक्तिगत जीवन श्रेणीःपोप.
पोप ग्रीगरी प्रथम (Pope Gregory I) (540-604)। पोप ग्रीगरी को ईसाई धर्म का सर्वोपरि नेता चुने जाने के पहले रोमन सिनेटर का सम्मान प्राप्त था। राजनीति के क्षेत्र में रहते हुए भी इन्होंने अवश्य ही यश और ख्याति अर्जित की होती लेकिन इन्होंने राजनीति को छोड़कर धर्म के क्षेत्र में आना श्रेयस्कर समझा। सन् 590 में ये पोप चुने गए। ईसाई धर्म के व्यापक प्रचार में पोप ग्रीगरी ने महत्वपूर्ण योग दिया। इंग्लैंड से रोमन जाति के हट जाने के बाद वहाँ ईसाई धर्म का लोप होने लगा था। नई अंग्रेज जाति (Angles) जर्मनी से आकर बसने लगी थी जो कई देवी देवताओं की पूजा करती थी। इसने आते ही इंग्लैंड के ईसाई धर्म को नष्ट कर दिया। कहते हैं, एक बार पोप ग्रीगरी ने कुछ अंग्रेज बालकों का रोम के बाजार में दास के रूप में बिकते देखा। इन बालकों की सुंदरता से ये अत्यधिक प्रभावित हुए और निश्चय किया कि ब्रिटिश द्वीप में जहाँ रोमन काल में ईसाई धर्म को लोगों ने स्वीकार कर लिया था, फिर से इस धर्म का प्रचार किया जाय। धर्मप्रचार के उद्देश्य से इन्होंने आगस्टाइन नाम के एक प्रसिद्ध पादरी को इंग्लैंड भेजा जिसने केंट के राजा एथलबर्ट के दरबार में जाकर ईसाई धर्म का प्रचार प्रारंभ कर दिया। एथलबर्ट ने फ्रांस की एक ईसाई राजकुमारी से शादी की थी, अतः उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया और आगस्टाइन का केंटरबरी में गिरजाघर बनाने की आज्ञा दे दी। इस प्रकार पोप ग्रीगरी के प्रयत्न के फलस्वरूप इंग्लैंड में ईसाई धर्म का फिर से प्रचार हुआ। पोप ग्रीगरी ने ईसाई धर्म के सर्वाच्च नेता के रूप में बड़े ऊँचे दर्जे की प्रशसनिक प्रतिभा का परिचय दिया। चाहे धर्म संबंधी, इन्होंने सबका प्रबंध बातें हों या चर्च की संपत्ति की व्यवस्था संबंधी, इन्होंने सबका प्रबंध पटुता से किया। छोटी से छोटी बातों की ओर भी इन्होंने व्यक्तिगत ध्यान दिया और पूरे ईसाई जगत् की प्रशासनिक आवश्यकताओं से परिचित रहने की चेष्टा की। इनके पत्रों से इनकी व्यावहारिक बुद्धि और प्रशासनिक योग्यता का यथेष्ट आभास मिलता है। पोप ग्रीगरी ने धार्मिक ग्रंथों की समीक्षा तथा धर्म संबंधी बातों की वार्तालाप (Dialogues) के रूप में विवेचना भी की। लैटिन भाषा की इन रचनाओं में इन्होंने गूढ़ विषयों के निरूपण के लिये अधिकांशतः रूपक शैली का प्रयोग किया है। शब्द दो अर्थ रखते हैं; एक तो ऊपरी जो स्पष्ट होता है और दूसरा लाक्षणिक जिससे धर्म संबंधी गूढ़ विचार भी सरलता से समझ में आ जाते हैं। पोप ग्रीगरी ने ईसाई धर्म से पहले की कथाओं (Tales) की जगह ईसाई संतों की कहानियों का प्रचार करवाया। इन्होंने जो कुछ भी लिखा, धर्म के व्यापक प्रचार की भावना से लिखा। इनका ध्यान विचारों की स्पष्ट अभिव्यक्ति पर था, न कि शैली पर। लेकिन फिर भी इनकी भाषा में सौंदर्य और प्रभाव है। .
पोप कॅलिक्स्टस तृतीय या कॅलिक्स्टस तृतीय (Pope Callixtus III; 31 दिसम्बर 1378 - 6 अगस्त 1458) 8 अप्रैल 1455 से 1458 में अपनी मृत्यु तक पोप थे, जो कि रोमन कैथोलिक गिरजाघर के राजाध्यक्ष होता है। ये ऐसे अंतिम पोप थे जिन्होंने चुनाव के पश्चात 'कॅलिक्स्टस' नाम ग्रहण किया। चुनाव से पूर्व इनका नाम अल्फोंस डी बोर्हा था। पश्चिमी मतभेद के दौरान कॅलिक्स्टस ने प्रतिपोप बेनेडिक्ट तृतीय का समर्थन किया था और 1429 में प्रतिपोप क्लेमेंट अष्टम को पोप मार्टिन पंचम के आधीन करने में ये प्रेरक शक्ति थे। अपने कैरियर की शुरुआती इन्होंने येइडा विश्विद्यालय में कानून के प्राध्यापक के रूप में गुजरा। इसके पश्चात ये आरागोन के महाराज की सेवा में राजनयिक बन गए। पोप यूजीन चतुर्थ की आरागोन के महाराज अल्फोंसो पंचम के साथ संधि कराने के पश्चात ये कार्डिनल बने व 1455 के पापल सम्मेलन में पोप चुने गए। धार्मिक रूप से ये बहुत कट्टर थे। पोप के पद पर रहते हुए इन्होंने कई विवादित व नवीन आदेश जारी किए थे, जिनमें से अफ्रीकियो और काफ़िरो को गुलाम बनाने का बुल जारी करना व दोपहर को गिरजाघर के घंटे बजाना कुछ प्रमुख हैं। कैथोलिक गिरजाघर की गतिविधियों में इन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को काफ़ी समर्थन किया व उन्हें लाभ भी पहुँचाया और शायद इन्ही की वजह से इनके एक भतीजे आगे चल कर पोप अलेक्जेंडर छठे बने। जोन ऑफ़ आर्क की मृत्यु के 24 साल बाद एक मुकदमे के पश्चात कॅलिक्स्टस ने उन्हें निर्दोष घोषित किया था। .
फ्रांसिस ज़ेवियर का जन्म 7 अप्रैल, 1506 ई. को स्पेन में हुआ था। पुर्तगाल के राजा जॉन तृतीय तथा पोप की सहायता से वे जेसुइट मिशनरी बनाकर 7 अप्रैल 1541 ई को भारत भेजे गए और 6 मार्च 1542 ई. को गोवा पहुँचे जो पुर्तगाल के राजा के अधिकार में था। गोवा में मिशनरी कार्य करने के बाद वे मद्रास तथा त्रावणकोर गए। यहाँ मिशनरी कार्य करने के उपरांत वे 1545 ई. में मलाया प्रायद्वीप में ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए रवना हो गए। उन्होंने तीन वर्ष तक धर्म प्रचारक (मिशनरी) कार्य किया। मलाया प्रायद्वीप में एक जापानी युवक से जिसका नाम हंजीरो था, उनकी मुलाकात हुई। सेंट जेवियर के उपदेश से यह युवक प्रभावित हुआ। 1549 ई. में सेंट ज़ेवियर इस युवक के साथ पहुँचे। जापानी भाषा न जानते हुए भी उन्होंने हंजीरों की सहायता से ढाई वर्ष तक प्रचार किया और बहुतों की खिष्टीय धर्म का अनुयायी बनाया। जापान से वे 1552 ई. में गोवा लौटे और कुछ समय के उपरांत चीन पहुँचे। वहाँ दक्षिणी पूर्वी भाग के एक द्वीप में जो मकाओ के समीप है बुखार के कारण उनकी मृत्यु हो गई। मिशनरी समाज उनको काफी महत्व का स्थान देता और उन्हें आदर तथा सम्मान का पात्र समझता, है क्योंकि वे भक्तिभावपूर्ण और धार्मिक प्रवृत्ति के मनुष्य थे। वे सच्चे मिशनरी थे। संत जेवियर ने केवल दस वर्ष के अल्प मिशनरी समय में 52 भिन्न भिन्न राज्यों में यीशु मसीह का प्रचार किया। कहा जाता है, उन्होंने नौ हजार मील के क्षेत्र में घूम घूमकर प्रचार किया और लाखों लोगों को यीशु मसीह का शिष्य बनाया। श्रेणीः१५०६ जन्म श्रेणीः१५५२ मृत्यु श्रेणीःस्पेनिश संत श्रेणीःस्पेनिश रोमन कैथोलिक संत श्रेणीःचीन में कैथोलिक संत श्रेणीःजापान में कैथोलिक संत श्रेणीः१५वीं शताब्दी के कैथोलिक संत श्रेणीः१६वींण शताभ्दी के कैथोलिक लोग श्रेणीःएंग्लिकन संत.
बायज़ीद प्रथम, (بايزيد اول; 1.; उपनाम Yıldırım यिलदरम (उस्मानी तुर्कीयाईः یلدیرم), "बिजली, वज्र"; 1360 - 8 मार्च 1403) 1389 से 1402 तक उस्मानिया साम्राज्य के चौथे शासक रहे। उन्होंने अपने वालिद मुराद प्रथम के बाद राजकीय शक्ति संभाली जो प्रथम कोसोवो युद्ध में मारे गए थे। उनके साम्राज्य-विस्तार और सैन्य अभियानों की वजह से बायज़ीद को ख़िताब "सुल्तान-ए रूम" (रोम के सम्राट) हासिल था। .
250px ओटो एडुअर्ड लिओपोल्ड बिस्मार्क (1 अप्रैल 1815 - 30 जुलाई 1898), जर्मन साम्राज्य का प्रथम चांसलर तथा तत्कालीन यूरोप का प्रभावी राजनेता था। वह 'ओटो फॉन बिस्मार्क' के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। उसने अनेक जर्मनभाषी राज्यों का एकीकरण करके शक्तिशाली जर्मन साम्राज्य स्थापित किया। वह द्वितीय जर्मन साम्राज्य का प्रथम चांसलर बना। वह "रीअलपालिटिक" की नीति के लिये प्रसिद्ध है जिसके कारण उसे "लौह चांसलर" के उपनाम से जाना जाता है। वह अपने युग का बहुत बड़ा कूटनीतिज्ञ था। अपने कूटनीतिक सन्धियों के तहत फ्रांस को मित्रविहीन कर जर्मनी को यूरोप की सर्वप्रमुख शक्ति बना दिया। बिस्मार्क ने एक नवीन वैदेशिक नीति का सूत्रपात किया जिसके तहत शान्तिकाल में युद्ध को रोकने और शान्ति को बनाए रखने के लिए गुटों का निर्माण किया। उसकी इस 'सन्धि प्रणाली' ने समस्त यूरोप को दो गुटों में बांट दिया। .
रोमन साम्राज्य के पतन के उपरांत, पाश्चात्य सभ्यता एक हजार वर्षों के लिये उस युग में प्रविष्ट हुई, जो साधारणतया मध्ययुग (मिडिल एजेज) के नाम से विख्यात है। ऐतिहासिक रीति से यह कहना कठिन है कि किस किस काल अथवा घटना से इस युग का प्रारंभ और अंत होता है। मोटे तौर से मध्ययुग का काल पश्चिमी यूरोप में पाँचवीं शताब्दी के प्रारंभ से पंद्रहवीं तक कहा जा सकता है। तथाकथित मध्ययुग में एकरूपता नहीं है और इसका विभाजन दो निश्चित एवं पृथक् युगों में किया जा सकता है। 11वीं शताब्दी के पहले का युग सतत संघर्षों, अनुशासनहीनता, तथा निरक्षरता के कारण 'अंधयुग' कहलाया, यद्यपि इसमें भी यूरोप को रूपांतरित करने के कदम उठाए गए। इस युग का प्रारंभ रोमन साम्राज्य के पश्यिमी यूरोप के प्रदेशों में, बर्बर गोथ फ्रैंक्स वैंडल तथा वरगंडियन के द्वारा स्थापित जर्मन साम्राज्य से होता है। यहाँ तक कि शक्तिशाली शार्लमेन (742-814) भी थोड़े ही समय के लिये व्यवस्था ला सका। शार्लमेन के प्रपौलों की कलह तथा उत्तरी स्लाव और सूरासेन के आक्रमणों से पश्चिमी यूरोप एक बार फिर उसी अराजकता को पहुँचा जो सातवीं और आठवीं शताब्दी में थी। अतएव सातवीं और आठवीं शताब्दी का ईसाई संसार, प्रथम शताब्दी के लगभग के ग्रीक रोम जगत् की अपेक्षा सभ्यता एवं संस्कृति की निम्न श्रेणी पर था। गृहनिर्माण विद्या के अतिरिक्त, शिक्षा, विज्ञान तथा कला किसी भी क्षेत्र में उन्नति नहीं हुई थी। फिर भी अंधयुग उतना अंध नहीं था, जितना बताया जाता है। ईसाई भिक्षु एवं पादरियों ने ज्ञानदीप को प्रज्वलित रखा। 11वीं शताब्दी के अंत से 15वीं शताब्दी तक के उत्तर मध्य युग में मानव प्रत्येक दिशा में उन्नतिशील रहा। राष्ट्रीय एकता की भावना इंग्लैंड में 11वीं शताब्दी में, तथा फ्रांस में 12वीं शताब्दी में आई। शार्लमैन के उत्तराधिकारियों की शिथिलता तथा ईसाई चर्च के अभ्युदय ने, पोप को ईसाई समाज का एकमात्र अधिष्टाता बनने का अवसर दिया। अतएव, पोप तथा रोमन सम्राट् की प्रतिस्पर्धा, पावन धर्मयुद्ध, विद्या का नियंत्रण तथा रोमन केथोलिक धर्म के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप इत्यादि में इस प्रतिद्वंद्विता का आभास मिलता है। 13वीं शताब्दी के अंत तक राष्ट्रीय राज्य इतने शक्तिशाली हो गए थे कि चर्च की शक्ति का ह्रास निश्चित प्रतीत होने लगा। नवीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी तक, पश्चिमी यूरोप का भौतिक, राजनीतिक तथा सामाजिक आधार सामंतवाद था, जिसके उदय का कारण राजा की शक्तियों का क्षीण होना था। समाज का यह संगठन भूमिव्यवस्था के माध्यम से पैदा हुआ। भूमिपति सामंत को अपने राज्य के अंतर्गत सारी जनता का प्रत्यक्ष स्वामित्व प्राप्त था। मध्ययुग नागरिक जीवन के विकास के लिये उल्लेखनीय है। अधिकांश मध्ययुगीन नगर सामंतों की गढ़ियों, मठों तथा वाणिज्य केंद्रों के आस पास विकसित हुए। 12वीं तथा 13वीं शताब्दी में यूरोप में व्यापार की उन्नति हुई। इटली के नगर विशेषतया वेनिस तथा जेनोआ पूर्वी व्यापार के केंद्र बने। इनके द्वारा यूरोप में रूई, रेशम, बहुमूल्य रत्न, स्वर्ण तथा मसाले मँगाए जाते थे। पुरोहित तथा सामंत वर्ग के समानांतर ही व्यापारिक वर्ग का ख्याति प्राप्त करना मध्ययुग की विशेषताओं में है। इन्हीं में से आधुनिक मध्यवर्ग प्रस्फुटित हुआ। मध्ययुग की कला तथा बौद्धिक जीवन अपनी विशेष सफलताओं के लिये प्रसिद्ध है। मध्ययुग में लैटिन अंतरराष्ट्रीय भाषा थी, किंतु 11वीं शताब्दी के उपरांत वर्नाक्यूलर भाषाओं के उदय ने इस प्राचीन भाषा की प्राथमिकता को समाप्त कर दिया। विद्या पर से पादरियों का स्वामित्व भी शीघ्रता से समाप्त होने लगा। 12वीं और 13वीं शताब्दी से विश्वविद्यालयों का उदय हुआ। अरस्तू की रचनाओं के साथ साथ, कानून, दर्शन, तथा धर्मशास्त्रों का अध्ययन सर्वप्रिय होने लगा। किंतु वैज्ञानिक साहित्य का सर्वथा अभाव था। भवन-निर्माण-कला की प्रधानता थी, जैसा वैभवशाली चर्च, गिरजाघरों तथा नगर भवनों से स्पष्ट है। भवननिर्माण की रोमन पद्धति के स्थान पर गोथिक पद्धति विकसित हुई। आधुनिक युग की अधिकांश विशेषताएँ उत्तर मध्ययुग के प्रवाहों की प्रगाढ़ता है। .
मैग्ना कार्टा मैग्ना कार्टा (Magna Carta) या मैग्ना कार्टा लिबरटैटम् (Great Charter of Freedoms या आजादी का महान चार्टर) इंग्लैण्ड का एक कानूनी परिपत्र है जो सबसे पहले सन् १२१५ ई में जारी हुआ था। यह लैटिन भाषा में लिखा गया था। मैग्ना कार्टा में इंग्लैण्ड के राजा जॉन ने सामन्तों (nobles and barons) को कुछ अधिकार दिये; कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के पालन का वचन दिया; और स्वीकार किया कि उनकी इच्छा कानून के सीमा में बंधी रहेगी। मैग्ना कार्टा ने राजा की प्रजा के कुछ अधिकारों की रक्षा की स्पष्ट रूप से पुष्टि की, जिनमें से बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका (habeas corpus) उल्लेखनीय है। चार्टर की महत्ता इस तथ्य में निहित है कि प्रत्येक पीढ़ी ने इसकी वैधानिक व्याख्या कर इस सिद्धांत पर जोर दिया कि राजा को कानून का सम्मान अनिवार्य करना चाहिए। यह सामंतों तथा साधारण जनता दोनों के लिये वैधानिकता का प्रतीक बना तथा ब्रिटिश वैधानिक अधिनियमन का श्रीगणेश भी यहीं से हुआ माना जाता है। .
16वीं शताब्दी के प्रारंभ में समस्त पश्चिमी यूरोप धार्मिक दृष्टि से एक था - सभी ईसाई थे; सभी रोमन काथलिक चर्च के सदस्य थे; उसकी परंपरगत शिक्षा मानते थे और धार्मिक मामलों में उसके अध्यक्ष अर्थात् रोम के पोप का शासन स्वीकार करते थे। यूरोपीय धर्मसुधार अथवा रिफॉरमेशन 16वीं शताब्दी के उस महान आंदोलन को कहते हैं जिसके फलस्वरूप पाश्चात्य ईसाइयों की यह एकता छिन्न-भिन्न हुई और प्रोटेस्टैंट धर्म का उदय हुआ। चर्च के इतिहस में समय-समय पर सुधारवादी आंदोलन होते रहे किंतु वे चर्च के धार्मिक सिद्धातों अथवा उसके शासकों को चुनौती न देकर उनके निर्देश के अनुसार ही नैतिक बुराइयों का उन्मूलन तथा धार्मिक शिक्षा का प्रचार अपना उद्देश्य मानते थे। 16वीं शताब्दी में जो सुधार का आंदोलन प्रवर्तित हुआ वह शीघ्र ही चर्च की परंपरागत शिक्षा और उसके शासकों के अधिकार, दोनों का विरोध करने लगा। धर्मसुधार आंदोलन के परिणामस्वरूप यूरोप में कैथोलिक सम्प्रदाय के साथ-साथ लूथर सम्प्रदाय, कैल्विन सम्प्रदाय, एंग्लिकन सम्प्रदाय और प्रेसबिटेरियन संप्रदाय प्रचलित हो गये। .
राफेल का चित्र राफेल (Raffaello Sanzio da Urbino या Raphael, 1483 - 1520) परम पुनरुत्थान काल के इटली के महान चित्रकार एवं वास्तुशिल्पी थे। लियोनार्डो दा विन्ची, माइकल एंजेलो और राफेल अपने युग के महान कलाकार हैं। राफेल को शताब्दियों तक समूह संयोजन का आचार्य माना जाता रहा है। व्यक्तियों के समूह, समूहों का सम्पूर्ण चित्र में अनुपात, चित्र की उंचाई और गहराई का अनुपात, और व्यक्तियों की विभिन्न मुद्राएं - इन सब में उसने कमाल कर दिखाया है। रैफेल की सर्वाधिक ख्याति उसके मैडोन्ना चित्रों से है। रैफेल की कला से ही बरोक शैली का विकास हुआ। माइकेल एंजेलो की अपेक्षा राफेल का काम शान्त, मधुर और नारीसुलभ मोहिनी से भरपूर है। राफेल की नारी और बाल चित्रण में विशेष अभिरुचि थी। .
राजनयिक दूत (Diplomatic Envoys) संप्रभु राज्य या देश द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि होते हैं, जो अन्य राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अथवा अंतरराष्ट्रीय संस्था में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय विधि का प्रचलन आरंभ होने के बहुत पूर्व से ही रोम, चीन, यूनान और भारत आदि देशों में एक राज्य से दूसरे राज्य में दूत भेजने की प्रथा प्रचलित थी। रामायण, महाभारत, मनुस्मृति, कौटिल्यकृत अर्थशास्त्र और 'नीतिवाक्यामृत' में प्राचीन भारत में प्रचलित दूतव्यवस्था का विवरण मिलता है। इस काल में दूत अधिकांशतः अवसरविशेष पर अथवा कार्यविशेष के लिए ही भेजे जाते थे। यूरोप में रोमन साम्राज्य के पतन के उपरांत छिन्न भिन्न दूतव्यवस्था का पुनरारंभ चौदहवीं शताब्दी में इटली के स्वतंत्र राज्यों एवं पोप द्वारा दूत भेजने से हुआ। स्थायी राजदूत को भेजने की नियमित प्रथा का श्रीगणेश इटली के गणतंत्रों एवं फ्रांस के सम्राट् लुई ग्यारहवें ने किया। सत्रहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक दूतव्यवस्था यूरोप के अधिकांश देशों में प्रचलित हो गई थी। .
ये दुनिया के राष्ट्र और शासन के वर्तमान प्रमुखों की सूची है। राष्ट्रप्रमुख अथवा राज्यप्रमुख, किसी संप्रभु राज्य (जिसे सामान्यतः "देश" कहा जाता है) का एक सार्वजनिक राजनैतिक व्यक्तित्व होता है, जो कि राज्य के अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व को स्वरूपित करता है, और सैद्धांतिक रूप से उसे संपूर्ण राज्य के चिन्हात्मक मानवीय स्वरूप के रूप में देखा जाता है। शासनप्रमुख या सरकारप्रमुख, किसी संप्रभु राज्य की कार्यकारी शाखा का प्रमुख अथवा उसका उपाधिकारी होता है। .
मोस्को का ख़्राम ख़्रिस्ता गिरजा रूसी पारम्परिक ईसाई (रूसीः Русская Православная Церковь, अंग्रेज़ीः Russian Orthodox Church) एक ईसाई समुदाय का नाम है। अधिकतर रूसी ईसाई लोग इसी सम्प्रदाय के सदस्य हैं। इसका सर्वोच्च धार्मिक नेता मोस्को का मुख्य पादरी है। यह सम्प्रदाय अन्य पूर्वी पारम्परिक ईसाई सम्प्रदायों को अपना सम्बन्धी मानती है। यह पोप के नेतृत्व वाले कैथोलिक सम्प्रदाय से बिलकुल अलग है। रूस के लगभग ६५% लोग स्वयं को इसका अनुयायी कहते हैं।, Interfax.ru, 2 मार्च 2011 Religare.ru June 6, 2007 .
शंकराचार्य आम तौर पर अद्वैत परम्परा के मठों के मुखिया के लिये प्रयोग की जाने वाली उपाधि है। शंकराचार्य हिन्दू धर्म में सर्वोच्च धर्म गुरु का पद है जो कि बौद्ध धर्म में दलाईलामा एवं ईसाई धर्म में पोप के समकक्ष है। इस पद की परम्परा आदि गुरु शंकराचार्य ने आरम्भ की। यह उपाधि आदि शंकराचार्य, जो कि एक हिन्दू दार्शनिक एवं धर्मगुरु थे एवं जिन्हें हिन्दुत्व के सबसे महान प्रतिनिधियों में से एक के तौर पर जाना जाता है, के नाम पर है। उन्हें जगद्गुरु के तौर पर सम्मान प्राप्त है एक उपाधि जो कि पहले केवल भगवान कृष्ण को ही प्राप्त थी। उन्होंने सनातन धर्म की प्रतिष्ठा हेतु भारत के चार क्षेत्रों में चार मठ स्थापित किये तथा शंकराचार्य पद की स्थापना करके उन पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को आसीन किया। तबसे इन चारों मठों में शंकराचार्य पद की परम्परा चली आ रही है। यह पद अत्यंत गौरवमयी माना जाता है। चार मठ निम्नलिखित हैं.
किसी भौगोलिक क्षेत्र या जन समूह पर सत्ता या प्रभुत्व के सम्पूर्ण नियंत्रण पर अनन्य अधिकार को सम्प्रभुता (Sovereignty) कहा जाता है। सार्वभौम सर्वोच्च विधि निर्माता एवं नियंत्रक होता है यानि संप्रभुता राज्य की सर्वोच्च शक्ति है। .
भाषा विज्ञान में, संज्ञा एक विशाल, मुक्त शाब्दिक वर्ग का सदस्य है, जिसके सदस्य वाक्यांश के कर्ता के मुख्य शब्द, क्रिया के कर्म, या पूर्वसर्ग के कर्म के रूप में मौजूद हो सकते हैं। शाब्दिक वर्गों को इस संदर्भ में परिभाषित किया जाता है कि उनके सदस्य अभिव्यक्तियों के अन्य प्रकारों के साथ किस तरह संयोजित होते हैं। संज्ञा के लिए भाषावार वाक्यात्मक नियम भिन्न होते हैं। अंग्रेज़ी में, संज्ञा को उन शब्दों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो उपपद और गुणवाचक विशेषणों के साथ होते हैं और संज्ञा वाक्यांश के शीर्ष के रूप में कार्य कर सकते हैं। पारंपरिक अंग्रेज़ी व्याकरण में Noun, आठ शब्दभेदों में से एक है। .
०२ मई १८०८ः फ्रांसिस्को डी गोया द्वारा १८१४ में चित्रित 'The Charge of the Mamelukes' नेपोलियन बोनापार्ट के साम्राज्य तथा स्पेन, ब्रिटेन और पुर्तगाल की सम्मिलित सेनाओं के बीच हुआ युद्ध स्पेन का स्वतंत्रता संग्राम (स्पेनी भाषाःGuerra de la Independencia Española) या प्रायद्वीपीय युद्ध (Peninsular War) (1807-1814) कहलाता है। स्पेन ने समय-समय पर फ्रांस को सहायता दी थी। इस समय स्पेन का शासक चार्ल्स चतुर्थ था किन्तु उसके निष्क्रिय शासन के स्थान पर जनमत उसके पुत्र राजकुमार फर्डिनेण्ड को शासक बनान चाहती थी। अतः चार्ल्स ने फर्डिनेण्ड के पक्ष में पद त्याग दिया। इसी समय नेपोलियन ने फर्डिनेण्ड को एक तरह से नजरबन्द कर अपने भाई नेपल्स के राजा जोजफ को स्पेन का राजा बनाया (1808) और नेपल्स अपने बहनोई म्यूरा को दे दिया। वस्तुतः पुर्तगाल में फ्रांस व स्पेन के संयुक्त अभियान के कारण नेपोलियन को फ्रांसीसी सेनाएँ स्पेन में भेजने का अवसर मिल गया और मौका देख उसने स्पने पर अधिकार कर लिया। नेपोलियन के इस कदम से स्पेनिश जनता अपमानित महसूस कर रही थी। स्पेनवासियों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ और पूरा राष्ट्र नेपोलियन के विरूद्ध उठ खड़ा हुआ। जगह-जगह प्रबंध समितियाँ स्थापित की जाने लगी, 'पोप के शत्रु' के विनाश का अच्छा अवसर देखते हुए कैथोलिक पादरियों ने लोगों को उकसाना शुरू किया। Zunta नामक संगठन ने गुरिल्ला पद्धति से लड़ने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना आरंभ कर दिया। स्पेन की जनता की नजर में नेपोलियन राष्ट्रीय एकता का संहारक और राजमुकुट का विनाशक था। अतः उन्होंने गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया। यह युद्ध 1808 से 1814 तक चलता रहा। जुलाई 1808 में बेलन के युद्ध में फ्रांसीसी सेना पराजित हुई। स्थल में, नेपोलियन की सेना की यह प्रथम पराजय थी। स्पेनवासियों का उत्साह बढ़ा और पूरे यूरोप में सनसनी फैल गई। जोजेफ स्पेन छोड़ भाग खड़ा हुआ। ऐसी स्थिति में नेपोलियन ने स्पेन पर हमला किया और उसे पराजित कर पुनः जोजफ को सिंहासन पर बैठाया। स्पेन में फंसे रहने के कारण साम्राज्य पर वह ध्यान नहीं दे पाया। 1809 ई. में यूरोपीय गतिविधयों के कारण नेपोलियन को एक बड़ी सेना स्पेन में छोड़ मध्य यूरोप की ओर जाना पड़ा। इसके बाद उसका स्पेन आना संभव नहीं हुआ। स्पेन में राष्ट्रवादी पुनः सक्रिय हो गए और जोजफ का शासन लड़खड़ाने लगा। इंग्लैण्ड ने स्पेन का समर्थन देकर कई स्थानों पर फ्रांसीसी सेना को परास्त किया और अंततः स्पेन फ्रांसीसी आधिपत्य से मुक्त हुआ। स्पेन का युद्ध नेपोलियन के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हुआ। एक तरफ इसने जहाँ नेपोलियन के लाखों सैनिकों व योग्य सेनापतियों को नष्ट कर दिया तो दूसरी तरफ युद्ध में व्यस्त रहने के कारण शेष यूरोप की ओर ध्यान भी नहीं दे सका। स्पेन की विजय ने नेपोलियन की अपराजेयता के मिथक को तोड़ा और यूरोप में सोई राष्ट्रीयता की भावना को जगाया। इसी राष्ट्रवाद की भावना से पे्ररित होकर आगे आस्ट्रिया ने फ्रांस के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस प्रकार स्पेनिश युद्ध के संदर्भ में नेपोलियन का यह कहना ठीक है कि स्पेन के नासूर ने मुझे बर्बाद कर दिया। .
सेडॉन युद्ध का मानचित्र सेडान युद्ध (Battle of Sedan) फ्रांस-प्रशा युद्ध के दौरान १ सितम्बर १८७० को हुआ था। नैपोलियन तृतीय और उसके बहुत सारे सैनिक पकडे गये। इस युद्ध में सभी दृष्टियों से प्रशा एवं उसके सहयोगियों की जीत हुई। इसके बावजूद नयी फ्रांसीसी सरकार ने युद्ध जारी रखा। .
सेम्युल फिनले ब्रीज मोर्स (27 अप्रैल 1791 - 2 अप्रैल 1872) एक अमेरिकी थे जिन्होंने एकल-तार टेलीग्राफ प्रणाली और मोर्स कोड का निर्माण किया। और उन्हें (कम विख्यात रूप से) ऐतिहासिक दृश्यों के एक चित्रकार के रूप में भी जाना जाता है। .
हठधर्म, राद्धान्त या डॉग्मा (dogma) का अर्थ है - 'कट्टर धार्मिक धारणा या मंतव्य'। आरंभ में "डॉग्मा" संमति या व्यवस्था आदेश के अर्थ में प्रयुक्त होता था; पीछे इससे ऐसी धारण अभिप्रेत होने लगी, जिसे कोई व्यक्ति मानता ही नहीं, वरन् उस पर बलपूर्वक जमा रहता है, चाहे कोई पक्षांतर भी उतना ही विश्वस्त क्यों न दीखता हो। अब इस शब्द का प्रयोग प्रायः धर्मविद्या के संबंध में होता है। डॉग्मा ऐसी धारणा है जिसे किसी संप्रदाय के सभी सदस्यों को मानना होता है, क्योंकि यह अपने तत्व में दैवी प्रकाश है। इस प्रकाश को, जब ऐसा करने की आवश्यकता हो, कोई अधिकार संपन्न व्यक्ति या विशेष विचारसभा सूत्रबद्ध करती है। ईसाइयों के लिए ईसा के कथन, बौद्धों के लिए बुद्ध के कथन ऐसे मंतव्य हैं। इन्हें सिद्धांत नही कह सकते, क्योंकि इनके सिद्ध करने का प्रश्न ही नहीं उठता। ईसाई संप्रदाय के लिए प्रमुख डॉग्मा "त्रित्व" का स्वरूप है। त्रिगुट में "पिता', "पुत्र' और "पवित्र आत्मा' तीन स्वाधीन चेतन संमिलित हैं। तीन चेतन कैसे एक चेतन का अंश बन सकते हैं, यह विवेचन का विषय नहीं, अपितु दैवी अविष्कार है। ३२५-२६ ई० में नाईस की विचारसभा में निश्चय किया गया कि "पिता और पुत्र का तत्व एक ही है', "पिता' पुत्र का उत्पादक नहीं जनक है। यह भी निर्णीत हुआ कि "पवित्रआत्मा' पिता और पुत्र दोनों से पैदा हुई है। १५४५-६३ में, ट्रेंट की विचारसभा में जो मंतव्य निर्णीत हुए, वे प्रायः अब भी रोमन कैथोलिक संप्रदाय के लिए मान्य हैं। १८७० ई० में रोम की सभा में निश्चय किया गया कि पोप को भी अधिकार प्राप्त है कि वह ईसाई मंतव्यय को सूत्रबद्ध कर सके। धर्मान्दोलन के बाद प्रोटेस्टेंट संप्रदाय ने कहा कि दैवी प्रकाश की व्याख्या प्रत्येक ईसाई का अधिकार है। बौद्ध भिक्षु को दीक्षित होने के समय निम्नांकित व्रत लेने होते थे -- ईसा और गौतम बुद्ध ने जो कुछ कहा, अपने अधिकार से कहा। मुहम्मद ने जो कुछ कहा, वह उनके विचार में, ईश्वरीय संदेश था, जो एक देवदूत ने उन्हें पहुँचाया। इस्लाम में मान्य धर्मसूत्र "ईमान' कहलाता है। ईमान के सात अंश हैं -- हर हालत में विश्वासी मानता है कि "डॉग्मा" सत्य है और अधिकारयुक्त है; यह खुला प्रश्न नहीं। .
हंगरी (हंगेरियाईः Magyarország), आधिकारिक तौर पर हंगरी गणराज्य (हंगेरियाईः Magyar Köztársaság, शाब्दिक अर्थ "हंगरी गणराज्य"), मध्य यूरोप के पैनोनियन बेसिन में स्थित एक स्थल-रुद्ध देश है। इसके उत्तर में स्लोवाकिया, पूर्व में यूक्रेन और रोमानिया, दक्षिण में सर्बिया और क्रोएशिया, दक्षिण पश्चिम में स्लोवेनिया और पश्चिम में ऑस्ट्रिया स्थित है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर बुडापेस्ट है। हंगरी, यूरोपीय संघ, नाटो, ओईसीडी और विसेग्राद समूह का सदस्य है और एक शेंगन राष्ट्र है। इसकी आधिकारिक भाषा हंगेरियाई है, जो फिन्नो-उग्रिक भाषा परिवार का हिस्सा है और यूरोप में सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली गैर भारोपीय भाषा है। हंगरी दुनिया के तीस सबसे अधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है और प्रति वर्ष लगभग 8.6 लाख पर्यटकों (2007 के आँकड़े) को आकर्षित करता है। देश में विश्व की सबसे बड़ी गर्म जल की गुफा प्रणाली स्थित है और गर्म जल की सबसे बड़ी झीलों में से एक हेविज़ झील यहीं पर स्थित है। इसके साथ मध्य यूरोप की सबसे बड़ी झील बलातोन झील भी यहीं पर है और यूरोप के सबसे बड़े प्राकृतिक घास के मैदान होर्टोबैगी भी हंगरी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हंगरी की सरकार एक संसदीय गणतंत्र है, जिसे 1989 में स्थापित किया गया था। हंगरी की अर्थव्यवस्था एक उच्च-आय अर्थव्यवस्था है और कुछ क्षेत्रों में यह एक क्षेत्रीय अगुआ है। .
हुल्द्रिख ज्विंगली का तैलचित्र हुल्द्रिख ज्विंगली (Huldrych Zwingli / 1484-1531) स्विटजरलैंड का सुधारक था जिसने स्विटजरलैंड में सुधार आंदोलन का नेतृत्व किया। .
जुज़ॅप्पे गारिबाल्दि जुज़ॅप्पे गारिबाल्दि (इतालवीः Giuseppe Garibaldi, जन्मः 4 जुलाई 1807, देहांतः 2 जून 1882) इटली के एक राजनैतिक और सैनिक नेता थे जिन्होने इटली के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। कावूर, विक्तर एमानुएल द्वितीय तथा मेत्सिनी के साथ गारिबाल्दि का नाम भी इटली के 'पिताओं' में सम्मिलित है। गारिबाल्दि जब पैदा हुए तब इटली कई राज्यों में खंडित था और यूरोप की बाकी शक्तियों के रहम-ओ-करम पर था। पहले उन्होंने "कारबोनारी" नाम के गुप्त राष्ट्रवादी क्रन्तिकारी संगठन के साथ नाता जोड़ा लेकिन एक असफल विद्रोह के बाद उन्हें इटली छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने दक्षिण अमेरिका में कई विद्रोहों और लड़ाइयों में हिस्सा लिया। उसके बाद वे वापस इटली आए और इटली को एक करने की लड़ाई में मुख्य रणनीतिकार रहे। आधुनिक युग में इतालवी लोग उन्हें एक देशभक्त नेता मानते हैं और आदर से देखते हैं। .
जॉन ड्राइडेन जॉन ड्राइडेन (John Dryden; 9 अगस्त 1631 - 12 मई 1700) आंग्ल कवि, साहित्यिक समालोचक तथा नाटककार था। १६६८ में उसे राष्ट्रकवि (Poet Laureate) बनाया गया। .
250px जोवानी पिको देला मीरदेला (Giovanni Pico della Mirandola; १४६३ --१४९४ ई.) इटली का प्रमुख प्लातौनवादी एवं मानववादी विचारक जो यूनानी, लातीनी, यहूदी, चाल्दी तथा अरबी भाषाओं का पंडित था। पिको ने स्वायत्त बुद्धियुक्त मानव व्यक्ति के महत्व, प्रताप, एवं आत्मसम्मान की प्राचीन धारणा की पुनःस्थापना करनेवाले नवीन नवप्लातौनवाद को जन्म दिया। उसका कथन था कि मनुष्य सर्वाधिक सौभाग्यवान्, देवताओं द्वारा भी प्रशंसा एवं ईर्ष्या योग्य जीव है। परमनिर्माता जगत्पिता ने उसे विश्व के मध्य में स्थित करके उसके स्थान, रूप, एवं कार्य को उसी के स्वतंत्र निर्णय पर छोड़ दिया है। मनुष्य चाहे तो वनस्पति स्तर पर जीवन काटे, चाहे पक्षु स्तर पर विषयभोग में रत रहे, और चाहे तो बौद्धिक स्तर पर अपने अधिकतम परिश्रम से स्वाभाविक दर्शन के द्वारा पृथ्वी पर नैतिक, ज्ञानाधारित, पवित्र, दैवी जीवन का विकास करे। पिको ने सार्वजनिक वादविवाद के लिए दर्शन एवं धर्म की विविध शाखाओं पर नौ सौ प्रश्नोत्तर भी बनाए, परंतु धर्माधिकारी पोप ने उनका निषेध कर दिया। पिको द्वारा अपने कथनों की अभ्युपपत्ति प्रस्तुत करने पर उसकी व्यक्तिगत धर्मावलंबिता स्वीकार कर ली गई। उसने सृष्टि की एक रहस्यवादी व्याख्या प्रकाशित की। पिको के मानववाद का प्रभाव नव ईसाई धर्म को केवल श्रद्धा पर आधारित रखने के पक्षपाती स्विस मानववादी जिवंगली पर पड़ा। उसके नवीन प्लातोनवाद ने यूरोप में यूश्लिन तथा अग्रिष्या फौन नैट्टेशाइम के अस्पष्टवाद को और पारा सेल्सस (१४९३) के कीमिया रसायन का जन्म दिया। .
"'ईद्भास/क्रॉस"' - यह ईसाई धर्म का निशान है ईसाई धर्म (अन्य प्रचलित नामःमसीही धर्म व क्रिश्चियन धर्म) एक इब्राहीमीChristianity's status as monotheistic is affirmed in, amongst other sources, the Catholic Encyclopedia (article ""); William F. Albright, From the Stone Age to Christianity; H. Richard Niebuhr; About.com,; Kirsch, God Against the Gods; Woodhead, An Introduction to Christianity; The Columbia Electronic Encyclopedia; The New Dictionary of Cultural Literacy,; New Dictionary of Theology,, pp.
चर्च (Church) शब्द यूनानी विशेषण का अपभ्रंश है जिसका शाब्दिक अर्थ है "प्रभु का"। वास्तव में चर्च (और गिरजा भी) दो अर्थों में प्रयुक्त है; एक तो प्रभु का भवन अर्थात् गिरजाघर तथा दूसरा, ईसाइयों का संगठन। चर्च के अतिरिक्त 'कलीसिया' शब्द भी चलता है। यह यूनानी बाइबिल के 'एक्लेसिया' शब्द का विकृत रूप है; बाइबिल में इसका अर्थ है - किसी स्थानविशेष अथवा विश्व भर के ईसाइयों का समुदाय। बाद में यह शब्द गिरजाघर के लिये भी प्रयुक्त होने लगा। यहाँ पर संस्था के अर्थ में चर्च पर विचार किया जायगा। .
श्रेणीःपुस्तकालय विल्नुस विश्वविद्यालय का पुस्तकालय (VUB) - सब से पुराना पुस्तकालय लिथुआनिया में है। वह जेशूइट के द्वारा स्थापित किया गया था। पुस्तकालय विल्नुस विश्वविद्यालय से पुराना है - पुस्तकालय १५७० में और विश्वविद्यालय १५७९ में स्थापित किया गया था। कहने तो लायक है कि अभी तक पुस्तकालय समान निर्माण में रहा है।पहले पुस्तकालय वर्तमान भाषाशास्त्र (फ़िलोलोजी) के वाचनालय में रहा था। आज पुस्तकालय में लगभग ५४ लाख दस्तावेज रखे हैं। ताक़ों की लम्बाई - १६६ किलोमीटर ।अभी पुस्तकालय के २९ हज़ार प्रयोक्ते हैं। १७५३ में यहाँ लिथुआनिया की प्रथम वेधशाला स्थापित की गयी थी। प्रतिवर्ष विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में बहुत पर्यटक आते हैं - न केवल लिथुआनिया से बल्कि भारत, स्पेन, चीन, अमरीका से, वगैरह। विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी आते हैं। उदाहरण के लिये - राष्ट्रपति, पोप, दलाई लामा, वगैरह। विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का सदर मकान उनिवेर्सितेतो ३ में, राष्ट्रपति भवन के पास स्थापित किया गया है। यहाँ १३ वाचनालय और ३ समूहों के कमरे हैं। दूसरे विल्नुस के स्थानों में अन्य पुस्तकालय के भाग मिलते हैं। .
यह विश्व के देशओं की सूची का अनुलग्नक है। उन देशों की सूची में सम्मिलित न होने वाली अस्तित्वों की एक रूपरेखा दी गई है। .
विक्तर इमनुएल द्वितीय विक्तर एमानुएल द्वितीय (Victor Emanuel II; इतालवीः Vittorio Emanuele Maria Alberto Eugenio Ferdinando Tommaso; १८२० - १८७८) वर्तमान इटली के 'जनक' (Father of the Fatherland; इतालवीः Padre della Patria) माने जाते हैं। उनका नाम जर्मनी के प्रिंस बिस्मार्क और भारत के सरदार पटेल के दर्जे का माना जाता है। इन्होंने अनेक राज्यों में विभक्त देश को एक कर वर्तमान इटली का रूप दिया, सीमावर्ती प्रबल देशों से उसे निर्भय बनाया और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलायी। .
वैटिकन शहर (Città del Vaticano; Civitas Vaticana) यूरोप महाद्वीप में स्थित एक देश है। पृथ्वी पर सबसे छोटा, स्वतंत्र राज्य है, जिसका क्षेत्रफल केवल ४४ हेक्टेयर (१०८.७ एकड़) है। यह इटली के शहर रोम के अन्दर स्थित है। इसकी राजभाषा है लातिनी। ईसाई धर्म के प्रमुख साम्प्रदाय रोमन कैथोलिक चर्च का यही केन्द्र है और इस सम्प्रदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप का यही निवास है। यह नगर, एक प्रकार से, रोम नगर का एक छोटा सा भाग है। इसमें सेंट पीटर गिरजाघर, वैटिकन प्रासादसमूह, वैटिकन बाग तथा कई अन्य गिरजाघर सम्मिलित हैं। सन् १९२९ में एक संधि के अनुसार इसे स्वतंत्र राज्य स्वीकार किया गया। इस राज्य के अधिकारी, ४५ करोड़ ६० लाख रोमन कैथोलिक धर्मावलंबियों से पूजित, पोप हैं। राज्य के राजनयिक संबंध संसार के लगभग सब देशों से हैं। सन् १९३० में पोप की मुद्रा पुनः जारी की गई और सन् १९३२ में इसके रेलवे स्टेशन का निर्माण हुआ। यहाँ की मुद्रा इटली में भी चलती है। आकर्षक गिरजाघरों, मकबरों तथा कलात्मक प्रासादों के अतिरिक्त वैटिकन के संग्रहालय तथा पुस्तकालय अमूल्य हैं। पोप के सरकारी निवास का नाम भी वैटिकन है। यह रोम नगर में, टाइबर नदी के किनारे, वैटिकन पहाड़ी पर स्थित है तथा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक कारणों से प्रसिद्ध है। यहाँ के प्रासादों का निर्माण तथा इनकी सजावट विश्वश्रुत कलाकारों द्वारा की गई है। .
वेस्ट्मिन्स्टर ऍबी, (Westminster Abbey, सामान्य वर्तनीः वेस्टमिंस्टर ऐबी), जिसे पहले आधिकारिक रूप से अंग्रेज़ी में कॉलेजिएट चर्च ऑफ़ सेण्ट पीटर ऍट् वेस्ट्मिन्स्टर(वेस्टमिंस्टर में स्थित संत पीटर का कॉलेजिएट चर्च) का नाम दिया गया था, वेस्टमिंस्टर शहर, लंदन में स्थित एक विशाल, मुख्यतः गोथिक मठ व गिरिजाघर है। यह वेस्टमिंस्टर महल से पश्चिम में स्थित है। यह यूनाइटेड किंगडम के सबसे माननीय पूजा स्थलों में से एक है व ग्रेट ब्रिटेन के शाही परिवार के राज्याभिषेक का परम्परागत स्थल है। 1540 से 1556 तक इस मठ को कैथेड्रल का महत्व हासिल था। हालांकि 1560 से यह भवन मठ या कैथेड्रल नहीं रह गयी और सिर्फ़ शाही निजी संपत्ति ही कही जाती थी। "शाही निजी संपत्ति" - वो संपत्तियाँ थीं जो सीधे सम्राट के प्रति जवाबदेह थीं और सम्राट की जिम्मेदारी थीं। यह भवन वास्तविक मठ व गिरिजाघर है। 1080 में पहली बार सुलकार्ड द्वारा बताई गई परंपरा के अनुसार लंदन के थोर्नी द्वीप पर सातवीं शताब्दी में लंदन के पादरी मेलिटस के जमाने में एक गिरिजाघर का निर्माण हुआ था। वर्तमान गिरिजाघर का निर्माण सन् 1245 में हेनरी अष्टम के आदेश पर शुरु हुआ था।.
आयरलैंड की जागीरदारी(आयरिशःTiarnas na hÉireann) ११७७ से १५४२ के बीच आयरलैंड में विद्यमान सामंतवादी काल था, जोकि आयरलैंड पर नोएमन आक्रमण के बाद इंग्लैण्ड के राजा के अंदर शुरू हुआ था। इस काल के दौरान इंग्लैण्ड के राजा को आयरलैंड के अधिपति का दर्ज प्राप्त था, और आयरलैंड की ज़मीन पर इंग्लैंड के राजा के अधीन अनेक नॉर्मन सामंतों और जागीरदारों का कब्ज़ा था। आधिकारिक रूप से इस जागीरदारी को एक पेपल संपदा के रूप में, इंग्लैंड के राजा के अंतर्गत आधिकारित किया गया था। हालाँकि, सैद्धान्तिक रूप से इस जागीर की भूमि पूरे आयरलैंड द्वीप पर थी, परंतु वास्तविक रूप से पूरे द्वीप पर राजा का संपूर्ण कब्ज़ा नहीं था, और ऐसे अनेक क्षेत्र थे, जिनपर स्थानीय गैलिक सरदारों और अधिपतिगण का कब्ज़ा था। अंग्रेज़ी हुकूमत के अधीन क्षेत्र का आकार अनेकों बार घटता-बढ़ता था, तथा कई क्षेत्र अंग्रेजों की पहुँच से पूर्णतः बहार थे। सामंतवाद की ढीली व्यवस्था के कारण नॉर्मन सामंतों को काफी कार्यकारी स्वतंत्रता प्राप्त थी, और कई सामंतों ने स्वयं के लिए ज़मींदारी सामान अधिकार जमा लिया था। और स्थानीय गैलिक राजाओं की सामान शक्ति हासिल कर ली थी। .
इतालवी एकीकरण को दर्शाता हुआ नक़्शा, जिसमें विभिन्न राज्यों के संगठित इतालवी साम्राज्य में सम्मिलित होने के वर्ष दिए गए हैं इतालवी एकीकरण, जिसे इतालवी भाषा में इल रिसोरजिमेंतो (Il Risorgimento, अर्थः पुनरुत्थान) कहते हैं, १९वीं सदी में इटली में एक राजनैतिक और सामाजिक अभियान था जिसने इतालवी प्रायद्वीप के विभिन्न राज्यों को संगठित करके एक इतालवी राष्ट्र बना दिया। इस अभियान की शुरुआत और अंत की तिथियों पर इतिहासकारों में विवाद है लेकिन अधिकतर के मत में यह सन् १८१५ में इटली पर नेपोलियन बोनापार्ट के राज के अंत पर होने वाले वियना सम्मलेन के साथ आरम्भ हुआ और १८७० में राजा वित्तोरियो इमानुएले की सेनाओं द्वारा रोम पर क़ब्ज़ा होने तक चला।, Jeffrey Thompson Schnapp, Olivia E. Sears, Maria G. Stampino, pp.
सोलहवीं शताब्दी में इंगलैण्ड में एक के बाद एक अनेक घटनाएँ हुईं जिनके परिणामस्वरूप इंगलैण्ड का चर्च, रोमन कैथलिक चर्च से अलग हो गया। इसे ही इंगलैण्ड का धर्मसुधार (English Reformation) कहते हैं। ये घटनाएँ यूरोप में हो रहे प्रोटेस्टैण्ट धर्मसुधार से कुछ अंशों में जुड़ी हुईं थीं। हेनरी का उत्तराधिकारी एडवर्ड छठा अवयस्क था, इसलिए उसके शासनकाल (1547 ई.-1553 ई.) में उसके संरक्षक ड्यूक ऑफ सामरसेट और ड्यूक ऑफ नार्बम्बरलैण्ड ने प्रोटेस्टेंट धर्म के सिद्धांतों का प्रचार किया और इंग्लैण्ड के चर्च को इन सिद्धांतों के आधार पर संगठित किया तथा अंग्रेजी भाषा में 42 सिद्धांतों वाली "सामान्य प्रार्थना पुस्तक" प्रचलित की। इससे इंग्लैण्ड के चर्च की आराधना पद्धति में कई परिवर्तन किये गये। इन सब कारणों से अब इंग्लैण्ड का चर्च 'एंग्लिकन चर्च' कहा जाने लगा। एडवर्ड की मृत्यु के बाद मेरी ट्यूडर (1553 ई.-1558 ई.) के शासनकाल में कैथोलिक धर्म और पोप की सर्वोच्चता को पुनः इंग्लैण्ड में प्रतिष्ठित करने के प्रयास किये गये और लगभग 300 धर्मसुधारकों, जिनमें आर्कबिशप क्रेनमर, लेटिमर और रिडल प्रमुख थे, को मृत्यु दंड भी दिया। किंतु प्रोटेस्टेंट आंदोलन और धर्म प्रचार का पुर्णरूपेण दमन नहीं हो सका। इंग्लैण्ड और यूरोपीय देशों में हुए धर्म सुधार आंदोलनों में अंतर है। यूरोप के देशं में हुआ धर्म सुधार आंदोलन पूर्णरूपेण धार्मिक था। इसके विपरीत इंग्लैण्ड का धर्म सुधार आंदोलन व्यक्तिगत और राजनीतिक था। यूरोप में धर्म सुधार का प्रारंभ धार्मिक नेताओं ओर उनके बहुसंख्यक अनुयायियों ने किया। कालांतर में जनता ने उसे अपना लिया। प्रारंभ में अनेक राजाओं ने धर्म सुधार आंदोलन का विरोध कर उसका दमन किया। इसके विपरीत इंग्लैण्ड में राजा हेनरी अष्टम ने धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ किया और उसके उत्तराधिकारी एडवर्ड षष्ठम के मंत्रियों ने और रानी एजिलाबेथ ने नवीन धर्म को प्रजा के लिए अनिवार्य कर दिया और पोप के स्थान पर राजा इंग्लैण्ड के चर्च का संरक्षक और सर्वोच्च अधिकारी बन गया। हेनरी अष्टम ने अपनी पत्नी केवराइन के तलाक की अनुमति पोप द्वारा नहीं दिये जाने पर पोप का विरोध किया और एक्ट ऑफ सुप्रीमेसी पारित कर वह इंग्लैण्ड के चर्च का सर्वोच्च अधिकारी हो गया। इस प्रकार उसने पोप से संबंध विच्छेद कर लिये और कैथोलिक मठों की धन सम्पित्त भी हथिया ली। हेनरी अष्टम का उद्देश्य धर्म में सुधार नहीं था। उसने पोप से संबंध विच्छेद करने पर भी कैथोलिक धर्म के सिद्धांतों को बनाये रखा। उसकी सहानुभूति न तो लूथरवाद के प्रति थी और न कैल्विनवाद के प्रति। उसका विरोध तो केवल पोप से था, इसलिए इंग्लैण्ड में उसने पोप की सत्त को नष्ट कर दिया। धर्म सुधार का यह कारण व्यक्तिगत था। हेनरी अष्टम ने कैथोलिकों और प्रोटेस्टेंटों दोनों को दंडित किया। उसने कैथोलिकों को इसलिए दंडित किया कि वे उसे चर्च का प्रमुख और सर्वेसर्वा नहीं मानते थे और प्रोटेस्टेंटों को इसलिए दंडित किया किया कि वे कैथोलिक धर्म के सिद्धांतों को नहीं मान ते थे। इंग्लैण्ड में धर्म सुधार का प्रसार धीरे-धीरे एडवर्ड षष्ठ के शासनकाल में प्रारंभ हुआ। श्रेणीःयूरोप का इतिहास श्रेणीःईसाई धर्म.
हेनरी अष्टम (28 जून 1491-28 जनवरी 1547) 21 अप्रैल 1509 से अपनी मृत्यु तक इंग्लैंड के राजा थे। वे लॉर्ड ऑफ आयरलैंड (बाद में किंग ऑफ आयरलैंड) तथा फ्रांस के साम्राज्य के दावेदार थे। हेनरी ट्यूडर राजघराने के दूसरे राजा थे, जो कि अपने पिता हेनरी सप्तम के बाद इस पद पर आसीन हुए। अपने छः विवाहों के अलावा, हेनरी अष्टम चर्च ऑफ इंग्लैंड को रोमन कैथोलिक चर्च से पृथक करने में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका के लिये भी जाने जाते हैं। रोम के साथ हेनरी के संघर्षों का परिणामस्वरूप पोप के प्रभुत्व से चर्च ऑफ इंग्लैंड का पृथक्करण हुआ और मठों का विघटन हो गया और उन्होंने स्वयं को चर्च ऑफ इंग्लैंड के सर्वोच्च प्रमुख (Supreme Head of the Church of England) के रूप में स्थापित कर लिया। उन्होंने धार्मिक आयोजनों व रस्मों को बदल दिया तथा मठों का दमन किया और साथ ही वे कैथलिक धर्मशास्त्र की मूल-शिक्षाओं के समर्थक बने रहे, यहां तक कि रोमन कैथलिक चर्च के साथ उनके निष्कासन के बाद भी। वेल्स ऐक्ट्स (Wales Acts) 1535-1542 के कानूनों के साथ हेनरी ने इंग्लैंड और वेल्स के वैधानिक मिलन का निर्देशन किया। अपनी युवावस्था में हेनरी एक आकर्षक और करिश्माई पुरुष थे, शिक्षित व परिपूर्ण.
कलीसिया (लातिनीःEcclesia, एक्क्लेसिया) अथवा चर्च का अर्थ ईसाई धर्म के अन्तर्गत आने वाले किसी भी धार्मिक संगठन या साम्प्रदाय को कहा जाता है। कलीसिया, का शाब्दिक अर्थ है लोगों का समूह या सभा। कलीसिया कुछ विशेष ईसाइ विश्वासियों का संगठन या समूह, को कहते हैं, जिन्हें ईसाई मान्यता के अनुसार, एकमात्र परमेश्वर में विस्वास हो तथा उनके पुत्र ईसा मसीह पर विश्वास हो। विश्वासियों के इस समुदाय के सदस्य इस तरह देश-काल से परे एक सार्वभौमिक कलीसिया के भाग होते हैं। यह सार्वभौमिक कलीसिया एक वैश्विक समुदाय के समान है जिसमें हर विश्वासी एक अंग का कार्य करता है। .
क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह 25 दिसम्बर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू.
"'एन्टिओक का कब्जा"', प्रथम क्रूसयुद्ध के समय के मध्ययुगीय चित्रकर्म से लिया गया यूरोप के ईसाइयों ने 1095 और 1291 के बीच अपने धर्म की पवित्र भूमि फिलिस्तीन और उसकी राजधानी जेरूसलम में स्थित ईसा की समाधि का गिरजाघर मुसलमानों से छीनने और अपने अधिकार में करने के प्रयास में जो युद्ध किए उनको सलीबी युद्ध, ईसाई धर्मयुद्ध, क्रूसेड (crusades) अथवा क्रूश युद्ध कहा जाता है। इतिहासकार ऐसे सात क्रूश युद्ध मानते हैं। .
"बिशप" नामक उच्च पद पर नियुक्त एक कैथोलिक पादरी स्पेन में चलती दो ननें कैथोलिक धर्म या रोमन कैथोलिक धर्म ईसाई धर्म की एक मुख्य शाखा है जिसके अनुयायी रोम के वैटिकन नगर में स्थित पोप को अपना धर्माध्यक्ष मानते हैं। ईसाई धर्म की दूसरी मुख्य शाखा प्रोटेस्टैंट कहलाती है और उसके अनुयायी पोप के धार्मिक नेतृत्व को नहीं स्वीकारते। कैथोलिकों और प्रोटेस्टैंटों की धार्मिक मान्यताओं में और भी बड़े अंतर हैं। .
कैथोलिक गिरजाघर, जिसे रोमन कैथोलिक गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है, दुनिया का सबसे बड़ा ईसाई गिरजाघर है, दावे के अनुसार इसके सौ करोड़ से अधिक सदस्य हैं।.
कैंटरबरी के आर्चबिशप, चर्च ऑफ़ इंग्लैण्ड के एक वरिष्ठ बिशप और प्रमुख होते हैं। वे विश्वविस्तृत आंगलिकाइ ऐक्य और आंगलिकाइ संप्रदाय के चिन्हनात्मक प्रमुख हैं(जैसे पोप रोमन कैथोलिक संप्रदाय के होते हैं)। तथा वे कैंटरबरी के बिशप-क्षेत्र के प्रदेशीय बिशप होते हैं। वर्त्तमान आर्चबिशप, परणपूज्य आर्चबिशप जस्टिन वेल्बी हैं, जिनका पदस्थापन २१ मार्च २०१३ को हुआ था। वेल्बी, १४०० वर्ष पुराने इस संसथान के १०५वें पदाधिकारी हैं। इस संसथान की शुरुआत कैंटरबरी के ऑगस्टीन के साथ हुई थी, जिन्हें ५९७ ई॰ में रोम से इंग्लैण्ड, ईसाइयत के प्रचार के लिए भेजा गया था। ६ठी शताब्दी में ऑगस्टीन से १६वीं शताब्दी तक, कैंटरबरी की आर्चबिशपी, रोम के गिर्जा के साथ एकमत की स्थिति में थी, परंतु अंग्रेज़ी सुधर के बाद, इंग्लैंड की चर्च ने, पोप और रोमन कैथोलिक चर्च के अधिकार से खुद को अलग कर लिया। सुधर से पहले तक, कैंटरबरी कैथेड्रल के बिशप के चुनाव की प्रक्रिया बदलते रहा करती थीःकभी चुनाव द्वारा या कभी पोप द्वारा, अन्यथा इंग्लैंड के शासक द्वारा। सुधरकाल के बाद से, चर्च ऑफ़ इंग्लैंड, मुख्यतः एक राजकीय गिर्जा की हैसियत रखता है, और तत्पश्चात्, आर्चबिशप के नामांकन का आधिकारिक अधिकार ब्रिटिश मुकुट के पास रहा है। वर्त्तमान समय में, कैंटरबरी के आर्चबिशप की नियुक्ति, ब्रिटिश संप्रभु द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर होता है, जोकि दो नामों की अनुसूची में से अगले पदाधिकारी का चुनाव किया करते हैं। .
अन्जेल्स एंड डेमन्स (देवदूत और शैतान)
अन्ज्लेस एंड डेमोंस 2000सबसे ज्यादा बिकने वाला एक रहस्यमय रोमांचकारी उपन्यास है; जो अमेरिकी लेखक डैन ब्राउन द्वारा लिखा गया है और पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह काल्पनिक हार्वर्ड यूंनिवेर्सिटी (विश्वविद्यालय) के सिम्बोलोजिस्ट रोबेर्ट लैंगडन की ilumi(illuminati) नामक गुप्त समाज के रहस्यों को उजागर करने और विनाशकारी इलुमिनटी एंटीमीटर का प्रयोग करके वेटिकन सिटी का विनाश करने वाली साजिश का पर्दाफाश करने की इच्छा के चारों और घूमता हैl यह उपन्यास विशेष रूप से धर्म और विज्ञान के बीच ऐतिहासिक संघर्ष को प्रकट करता हैl यह सघर्ष इलुमीनटी और रोमन कैथोलिक चर्च के बीच मे हैl यह उपन्यास राबर्ट लैंगडन (रोबेर्ट लैंगडन) नामक पात्र का परिचय देता हैl रॉबर्ट लैंगडन (Robert langdan) ब्राउन के बाद में आने वाले उपन्यास 2003 काविन्ची कोड और 2009 का उपन्यास लोस्ट सिम्बल के नायकभी हैl इसमें बहुत सारे शेलीगत तत्व हैं - जैसे गुप्त समाज की साजिशें, एक दिन की समय सीमा और केथोलिक चर्च प्राचीन इतिहास, वास्तुकला और प्रतीकों का भी भारी प्रयोग इस पुस्तक में हैंl एक फिल्म अनुकूलन 15 मई 2009 को जारी किया गया था; हालांकि यह दा विंची कोड (The Vinci Code) फिल्म की घटनाओं के बाद किया गया था;जो 2006 मैं दिखाई गयी थीl .
1455 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .
| बेनेडिक्ट सोलहवें - दो सौ पैंसठवें तथा वर्तमान पोप रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं। 'पोप' का शाब्दिक अर्थ 'पिता' होता है। यह लैटिन के "पापा" से व्युत्पन्न हा है जो स्वयं ग्रीक के पापास् से व्युत्पन्न है। इस समय बेनेडिक्ट सोलहवें इस पद पर आसीन हैं जिन्हें उन्नीस अप्रैल दो हज़ार पाँच को चुना गया था। वे दो सौ पैंसठवें पोप हैं। रोमन काथलिक चर्च के परमाधिकारी को संत पापा 'होली फादर' अथवा पोप कहते हैं। ईसा से अपने महाशिरूय संत पीटर को अपने चर्च का आधार तथा प्रधान 'चरवाहा' नियुक्त किया था और उनको यह भी सुस्पष्ट आश्वासन दिया था कि उनपर आधारित चर्च शताब्दियों तक बना रहेगा। अतः ईसा के विधान से संत पीटर का देहांत रोम में हुआ था, इसलिये प्रारंभ ही से संत पीटर के उत्तराधिकारी होने के कारण रोम के बिशप समूचे चर्च के अध्यक्ष तथा पृथ्वी पर ईसा के प्रतिनिधि माने गए थे। इतिहास इसका साक्षी है कि रोम के बिशप के अतिरिक्त किसी ने कभी संत पीटर का उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं किया। किंतु प्राच्य चर्च के अलग होते जाने से तथा प्रोटेस्टैंट धर्म के उद्भव से पोप के अधिकारी के विषय में शताब्दियों तक वाद विवाद होता रहा, अंततोगत्वा वैटिकन की प्रथम अधिकार रखते हैं। वे ईसा की शिक्षा के सर्वोच्च व्याख्याता हैं और चर्च के परमाधिकारी की हैसियत से धर्मशिक्षा की व्याख्या करते समय भ्रमातीत अर्थात् अचूक हैं। पोप वैटिकन राज्य के अध्यक्ष हैं तथा उनके देहांत पर कार्डिनल उनके उत्तराधिकारी को चुनते हैं . एलिज़ाबेथ प्रथम इंग्लैंड और आयरलैंड की महारानी थीं, जिनका शासनकाल सत्रह नवम्बर एक हज़ार पाँच सौ अट्ठावन से उनकी मौत तक चला। यह ब्रिटेन के ट्युडर राजवंश की पाँचवी और आख़री सम्राट थीं। इन्होनें कभी शादी नहीं की और न ही इनकी कोई संतान हुई इसलिए इन्हें "कुंवारी रानी" के नाम से भी जाना जाता था। यह ब्रिटेन के सम्राट हेनरी अष्टम की बेटी होने के नाते जन्म पर एक राजकुमारी थीं, लेकिन इनके जन्म के ढाई साल बाद ही इनकी माता, ऐन बोलिन को मार दिया गया और इन्हें नाजायज़ घोषित कर दिया गया। एक हज़ार पाँच सौ तिरेपन तक इनके सौतेले भाई एडवर्ड छः के शासनकाल के बाद इनकी बहन मैरी एक ने शासन संभाला। मैरी के संतानरहित होने के बाद एलिज़ाबेथ ने सत्रह नवंबर एक हज़ार पाँच सौ अट्ठावन को अंग्रेजी सिंहासन की बागडोर संभाली। इन्होने अपने इर्द-गिर्द बहुत से समझदार व्यक्तियों को मंत्री-परिषद में रखा जिस से ब्रिटेन सुव्यवस्थित हुआ। इन्होनें इंग्लैंड में "इंग्लिश प्रोटेस्टैंट चर्च" की नींव रखी और स्वयं को उसका अध्यक्ष बना लिया। इस से वे ब्रिटेन की राजनैतिक नेता और धार्मिक नेता दोनों बन गई। इस से रोमन कैथोलिक शाखा का पोप नाराज़ हो गया। वह ब्रिटेन को धार्मिक मामलों में अपने अधीन एक कैथोलिक राष्ट्र मानता था। उसने एक हज़ार पाँच सौ सत्तर में यह आदेश दिया की ब्रिटेन के नागरिकों को एलिज़ाबेथ से वफ़ादारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस से ब्रिटेन के कैथोलिक समुदाय से एलिज़ाबेथ के ख़िलाफ़ बहुत से हमले हुए और कई विद्रोह भड़के, लेकिन एलिज़ाबेथ अपने मंत्रियों की गुप्तचर सेवा की मदद से सत्ता पर बनी रहीं। एक हज़ार पाँच सौ अठासी में पोप के आग्रह पर स्पेन ने ब्रिटेन पर एक समुद्री जहाज़ों का बड़ा लेकर आक्रमण करने की कोशिश करी। इस आक्रमण को "स्पेनी अर्माडा" कहा जाता है। एलिज़ाबेथ की नौसेना ने उसे हरा दिया और यह जीत इंग्लैण्ड की सब से ऐतिहासिक जीतों में से एक मानी जाती है। एलिज़ाबेथ के शासनकाल को एलिज़ाबेथेन एरा यानी एलिज़ाबेथ का युग के नाम से भी जाना जाता है। वो अपने शासन में अपने पिता व भाई बहन के मुकाबले ज्यादा उदार थीं। उनकी बहन मैरी ने सैकणों प्रोटेस्टैंटों को मरवा दिया था जिसकी वजह से उसे खूनी मैरी के नाम से भी जाना जाता है। एलिज़ाबेथ ने ऐसा कोई काम नहीं किया। वह लोकप्रिय शासक के रूप में जानी जाती थीं। एलिज़ाबेथ के काल में ब्रिटिश साहित्य और नाटककार फले-फूले, जिनमें विलियम शेक्सपीयर और क्रिस्टोफ़र मार्लोवे के नाम सब से नुमाया हैं। उनके दौर में ब्रिटेन के नौसैनिक दूर-दूर खोज-यात्राओं में निकले। फ़्रांसिस ड्रेक ने उत्तर अमेरिका की यात्रा करी। माना जाता है कि उनके चौंतालीस साल के राज से ब्रिटेन में एक शक्तिशाली राष्ट्रीय भावना फैल गई जिसने आगे चलकर ब्रिटेन को विश्व का सब से शक्तिशाली देश बनने में योगदान दिया। वह ऐसे समय में अपना सिंहासन बचाते हुए लंबे समय तक एक सफल शासन दे सकीं जब पड़ोसी राज्यों के शासक अंदरूनी विवादों में उलझे रहे और अपनी सत्ता गंवाते रहे, जैसे कि उनकी भतीजी व स्कॉटलैंड की रानी मैरी जिसे उन्होंने अपने खिलाफ षडयंत्र रचने के अपराध में एक हज़ार पाँच सौ अड़सठ में मृत्युदंड दे दिया। कुछ इतिहासकार उन्हें चिड़चिड़ा व जल्द कोई फैसला ना ले पाने वाला शासक मानते हैं और उन्हें उनकी काबिलियत से ज्यादा भाग्यशाली बताते हैं। . एंजल्स एंड डीमन्स एंजल्स एंड डीमन्स डैन ब्राउन के इसी नाम के उपन्यास का अमेरिकी फ़िल्म रूपांतरण है। यह दा विंची कोड की अगली कड़ी है, हालांकि उपन्यास एंजल्स एंड डीमन्स पहले प्रकाशित हुआ था और दा विंची कोड से पहले घटित होता है। इसका फ़िल्मांकन रोम, इटली और कल्वर सिटी, कैलिफ़ोर्निया के सोनी पिक्चर्स स्टूडियो में किया गया। टॉम हैंक्स ने रॉबर्ट लैंगडन की मुख्य भूमिका दोहराई है, जबकि निर्देशक रॉन हावर्ड, निर्माता ब्रायन ग्रेज़र, संगीतकार हैन्स ज़िम्मर और पटकथा लेखक अकिवा गोल्ड्समैन की भी वापसी हुई है। . तेरहवीं शताब्दी का एक मंगोल तीरबाज तुर्की के इतिहास को तुर्क जाति के इतिहास और उससे पूर्व के इतिहास के दो अध्यायों में देखा जा सकता है। सातवीं से बारहवीं सदी के बीच में मध्य एशिया से तुर्कों की कई शाखाएँ यहाँ आकर बसीं। इससे पहले यहाँ से पश्चिम में आर्य और पूर्व में कॉकेशियाइ जातियों का बसाव रहा था। तुर्की में ईसा के लगभग सात हज़ार पाँच सौ वर्ष पहले मानव बसाव के प्रमाण यहां मिले हैं। हिट्टी साम्राज्य की स्थापना एक हज़ार नौ सौ-एक हज़ार तीन सौ ईसा पूर्व में हुई थी। एक हज़ार दो सौ पचास ईस्वी पूर्व ट्रॉय की लड़ाई में यवनों ने ट्रॉय शहर को नेस्तनाबूत कर दिया और आसपास के इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। एक हज़ार दो सौ ईसापूर्व से तटीय क्षेत्रों में यवनों का आगमन आरंभ हो गया। छठी सदी ईसापूर्व में फ़ारस के शाह साईरस ने अनातोलिया पर अपना अधिकार जमा लिया। इसके करीब दो सौ वर्षों के पश्चात तीन सौ चौंतीस इस्वीपूर्व में सिकन्दर ने फ़ारसियों को हराकर इसपर अपना अधिकार किया। बाद में सिकन्दर अफ़गानिस्तान होते हुए भारत तक पहुंच गया था। इसापूर्व एक सौ तीस इस्वी में अनातोलिया रोमन साम्राज्य का अंग बना। ईसा के पचास वर्ष बाद संत पॉल ने ईसाई धर्म का प्रचार किया और सन तीन सौ तेरह में रोमन साम्राज्य ने ईसाई धर्म को अपना लिया। इसके कुछ वर्षों के अन्दर ही कान्स्टेंटाईन साम्राज्य का अलगाव हुआ और कान्स्टेंटिनोपल इसकी राजधनी बनाई गई। छठी सदी में बिजेन्टाईन साम्राज्य अपने चरम पर था पर एक सौ वर्षों के भीतर मुस्लिम अरबों ने इसपर अपना अधिकार जमा लिया। बारहवी सदी में धर्मयुद्धों में फंसे रहने के बाद बिजेन्टाईन साम्राज्य का पतन आरंभ हो गया। सन एक हज़ार दो सौ अठासी में ऑटोमन साम्राज्य का उदय हुआ और सन् एक हज़ार चार सौ तिरेपन में कस्तुनतुनिया का पतन। इस घटना ने यूरोप में पुनर्जागरण लाने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। . द डा विंची कोड द डा विंची कोड, रॉन हावर्ड द्वारा निर्देशित, दो हज़ार छः की एक अमेरिकी रहस्य-रोमांच वाली फ़िल्म है। पटकथा को अकिवा गोल्ड्समैन द्वारा लिखा गया और यह डैन ब्राउन के दुनिया भर में सर्वोच्च बिक्री वाले दो हज़ार तीन के उपन्यास द डा विंची कोड पर आधारित है। हावर्ड ने जॉन कैले और ब्रायन ग्रेज़र के साथ इसका निर्माण किया और कोलंबिया पिक्चर्स ने इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में नौ मई दो हज़ार छः को जारी किया। द डा विंची कोड में टॉम हैंक्स ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रतीकविज्ञानी रॉबर्ट लेंग्डन का किरदार निभाया है, ऑड्रे तौटो ने फ्रांस के Centrale de la Police Judiciaire के कूट-विशेषज्ञ सोफी नेवू का, सर इयान मेकेलन ने ब्रिटिश ग्रेल इतिहासकार सर ले टीबिंग का, अल्फ्रेड मोलिना ने बिशप मैनुएल अरिंगारोसा का, जीन रेनो ने Direction Centrale de la Police Judiciaire के कैप्टेन बेजु फाक का और पॉल बेट्टेनी ने ओपस डे भिक्षु सीलास का किरदार निभाया. किसी धार्मिक संप्रदाय के द्वारा स्वीकृत विश्वासों का क्रमबद्ध संग्रह उस संप्रदाय की धर्ममीमांसा है। धर्ममीमांसा में विज्ञान और दर्शन के दृष्टिकोण की सार्वभौमता नहीं होती, इसकी पद्धति भी उनकी पद्धति से भिन्न होती है। विज्ञान प्रत्यक्ष पर आधारित है, दर्शन में बुद्धि की प्रमुखता है और धर्ममीमांसा में, आप्त वचन की प्रधानता स्वीकृत होती है। जब तक विश्वास का अधिकार प्रश्नरहित था, धर्ममीमांसकों को इस बात की चिंता न थी कि उनके मंतव्य विज्ञान के आविष्कारों और दर्शन के निष्कर्षों के अनुकूल हैं या नहीं। परंतु अब स्थिति बदल गई है और धर्ममीमांसा को विज्ञान तथा दर्शन के मेल में रहना होता है। धर्ममीमांसा किसी धार्मिक संप्रदाय के स्वीकृत सिद्धांतों का संग्रह है। इस प्रकार की सामग्री का स्रोत कहाँ है? इन सिद्धांतों का सर्वोपरि स्रोत तो ऐसी पुस्तक है, जिसे उस संप्रदाय में ईश्वरीय ज्ञान समझा जाता है। इससे उतरकर उन विशेष पुरुषों का स्थान है जिन्हें ईश्वर की ओर से धर्म के संबंध में निर्भ्रांत ज्ञान प्राप्त हुआ है। रोमन कैथोलिक चर्च में पोप को ऐसा पद प्राप्त है। विवाद के विषयों पर आचार्यों की परिषदों के निश्चय भी प्रामाणिक सिद्धांत समझे जाते हैं। धर्ममीमांसा के विचार विषयों में ईश्वर की सत्ता और स्वरूप प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त जगत् और जीवात्मा के स्वरूप पर भी विचार होता है। ईश्वर के संबंध में प्रमुख प्रश्न यह है कि वह जगत् में अंतरात्मा के रूप में विद्यमान है, या इससे परे, ऊपर भी है। जगत् के विषय मं पूछा जाता है कि यह ईश्वर का उत्पादन है, उसका उद्गार है, या निर्माण मात्र है। उत्पादनवाद, उद्गारवाद और निर्माणवाद की जाँच की जाती है। जीवात्मा के संबंध में, स्वाधीनता और मोक्षसाधन चिरकाल के विवाद के विषय बने रहे हैं। संत आगस्तिन ने पूर्व निर्धारणवाद का समर्थन किया और कहा कि कोई मनुष्य अपने कर्मों से दोषमुक्त नहीं हो सकता, दोषमुक्ति ईश्वरीय करुणा पर निर्भर है। इसके विपरीत भारत की विचारधारा में जीवात्मा स्वतंत्र है और मनुष्य का भाग्य उसके कर्मों से निर्णीत होता है। . यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारण नवीन प्रोटेस्टेंट धर्म के प्रसार से चिंतित होकर कैथोलिक धर्म के अनुयायियों ने कैथोलिक चर्च व पोपशाही की शक्ति व अधिकारों को सुरक्षित करने और उनकी सत्ता को पुनः सुदृढ़ बनाने के लिए कैथोलिक चर्च और पोपशाही में अनके सुधार किये। यह सुधार आंदोलन, कैथोलिकों की दृष्टि से उनके पुनरुत्थान का आंदोलन है और प्रोटेस्टेंट विरोधी होने से इसे धर्म-सुधार-विरोधी आंदोलन , या प्रतिवादी अथवा प्रतिवादात्मक धर्म-सुधार आंदोलन कहा गया। यह आंदोलन सोलहवीं सदी के मध्य से प्रारंभ हुआ और सत्रहवीं शताब्दी के मध्य तक चला। से आरम्भ होकर तीसवर्षीय युद्ध की समाप्ति तक ) इस धर्मसुधार-विरोधी आंदोलन का उद्देश्य कैथोलिक चर्च में पवित्रता और ऊँचे आदर्शों को स्थापित करना था, चर्च और पोपशाही में व्याप्त दोषों को दूर कर उसके स्वरूप को पवित्र बनाना था। इस युग के नये पोप जैसे पॉल तृतीय, पॉल चतुर्थ, पायस चतुर्थ, पायस पंचम आदि पूर्व पोपों की अपेक्षा अधिक सदाचारी, धर्मनिष्ठ, कर्तव्यपरायण और सुधारवादी थे। इनके प्रयासों से कैथोलिक धर्म में नवीन शक्ति, स्फूर्ति और प्रेरणा आई और कई सुधार किये गये। . निगम एक विशेषाधिकार प्राप्त स्वतन्त्र कानूनी इकाई के रूप में पहचानी जाने वाली अलग संस्था है जिसके पास अपने सदस्यों से पृथक अपने अधिकार और दायित्व हैं। निगमों के कई प्रकार हैं, जिनमे से अधिकतर का उपयोग व्यापार करने के लिए किया जाता है। निगम कॉर्पोरेट कानून का एक उत्पाद हैं और इनके नियम उन प्रबंधकों के हितों को संतुलित करते हैं जो निगम, लेनदारों, शेयरधारकों तथा श्रम का योगदान करने वाले कर्मचारियों का संचालन करते हैं। आधुनिक समय में, निगम तेजी से आर्थिक जीवन का एक प्रमुख हिस्सा बन गए हैं। निगम की एक महत्वपूर्ण सुविधा सीमित देयता है। अगर एक निगम विफल होता है, तो शेयरधारक सामान्य रूप से केवल अपने निवेश को खोते हैं और कर्मचारी केवल अपनी नौकरी खो देंगे, किन्तु उन में से कोई भी निगम के लेनदारों के ऋणों के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा. नैपोलियन तृतीय लुई नैपोलियन् बोनापार्ट फ्रांसीसी रिपब्लिक का प्रथम राष्ट्रपति तथा नैपोलियन तृतीय के रूप में द्वितीय फ्रांसीसी साम्राज्य का शासक था। वह नैपोलियन प्रथम का भतीजा तथा उत्तराधिकारी था। . नेपोलियन बोनापार्ट फ्रान्स की क्रान्ति में सेनापति, ग्यारह नवम्बर एक हज़ार सात सौ निन्यानवे से अट्ठारह मई एक हज़ार आठ सौ चार तक प्रथम कांसल के रूप में शासक और अट्ठारह मई एक हज़ार आठ सौ चार से छः अप्रैल एक हज़ार आठ सौ चौदह तक नेपोलियन I के नाम से सम्राट रहा। वह पुनः बीस मार्च से बाईस जून एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में सम्राट बना। वह यूरोप के अन्य कई क्षेत्रों का भी शासक था। इतिहास में नेपोलियन विश्व के सबसे महान सेनापतियों में गिना जाता है। उसने एक फ्रांस में एक नयी विधि संहिता लागू की जिसे नेपोलियन की संहिता कहा जाता है। वह इतिहास के सबसे महान विजेताओं में से एक था। उसके सामने कोई रुक नहीं पा रहा था। जब तक कि उसने एक हज़ार आठ सौ बारह में रूस पर आक्रमण नहीं किया, जहां सर्दी और वातावरण से उसकी सेना को बहुत क्षति पहुँची। अट्ठारह जून एक हज़ार आठ सौ पंद्रह वॉटरलू के युद्ध में पराजय के पश्चात अंग्रज़ों ने उसे अन्ध महासागर के दूर द्वीप सेंट हेलेना में बन्दी बना दिया। छः वर्षों के अन्त में वहाँ उसकी मृत्यु हो गई। इतिहासकारों के अनुसार अंग्रेज़ों ने उसे संखिया का विष देकर मार डाला। . पवित्र संघ की स्थापना नेपोलियन बोनापार्ट की अन्तिम पराजय के बाद छब्बीस सितम्बर एक हज़ार आठ सौ पंद्रह को रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशा के राजाओं ने मिलकर की थी। इसमें रूस के जार अलेक्सांदर प्रथम की अग्रणी भूमिका थी। . प्रथम क्रूसयुद्ध की सफलताः येरूसलम पर कब्जा प्रथम क्रूसयुद्ध ) पश्चिमी इसाई मतावलम्बियों द्वारा की गयी सैनिक कार्यवाही थी जो मुसलमानों द्वारा जीते गये पवित्र स्थानों को पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से की गयी थी। इसका आरम्भ सत्ताईस नवम्बर एक हज़ार पचानवे हुआ था। . पोप एलेक्ज़ेंडर छठे ग्यारह अगस्त एक हज़ार चार सौ बानवे से अट्ठारह अगस्त एक हज़ार पाँच सौ तीन में अपनी मृत्यु तक रोमन कैथोलिक गिरजाघर के मुख्या पोप रहे थे। इन्हें पुनर्जागरण के समय के सबसे विवादित पोप में से एक माना जाता है। इन्हें एक पादरी से अधिक एक राजनयिक, राजनीतिज्ञ और नागरिक प्रशासक के रूप में ज्यादा ख्याति प्राप्त हुई थी। . फ्रांसिस कैथोलिक समुदाय के दो सौ छयासठवें पोप चुने गये हैं। पोप फ्रांसिस प्रथम को तेरह मर्च दो हज़ार तेरह को पोंटिफ़ के रूप में चुना गया। . योज़ेफ़ रात्सिंगरःपोप बेनेडिक्ट XVI left पोप बेनेडिक्ट XVI जिनका असली नाम युसॅफ़ आलिओस रात्सिंगर है, कैथोलिक समुदाय के दो सौ पैंसठवें पोप चुने गये हैं। सोलह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस को जर्मनी में जन्मे पोप बेनेडिक्ट को चौबीस अप्रैल दो हज़ार पाँच को पोंटिफ़ के रूप में चुना जाएगा। पिछले दो सौ पचहत्तर सालों में चुने गए ये पोप सबसे उम्रदार हैं, इस समय बेनेडिक्ट की उम्र अस्सी वर्ष है। श्रेणीःव्यक्तिगत जीवन श्रेणीःपोप. पोप ग्रीगरी प्रथम । पोप ग्रीगरी को ईसाई धर्म का सर्वोपरि नेता चुने जाने के पहले रोमन सिनेटर का सम्मान प्राप्त था। राजनीति के क्षेत्र में रहते हुए भी इन्होंने अवश्य ही यश और ख्याति अर्जित की होती लेकिन इन्होंने राजनीति को छोड़कर धर्म के क्षेत्र में आना श्रेयस्कर समझा। सन् पाँच सौ नब्बे में ये पोप चुने गए। ईसाई धर्म के व्यापक प्रचार में पोप ग्रीगरी ने महत्वपूर्ण योग दिया। इंग्लैंड से रोमन जाति के हट जाने के बाद वहाँ ईसाई धर्म का लोप होने लगा था। नई अंग्रेज जाति जर्मनी से आकर बसने लगी थी जो कई देवी देवताओं की पूजा करती थी। इसने आते ही इंग्लैंड के ईसाई धर्म को नष्ट कर दिया। कहते हैं, एक बार पोप ग्रीगरी ने कुछ अंग्रेज बालकों का रोम के बाजार में दास के रूप में बिकते देखा। इन बालकों की सुंदरता से ये अत्यधिक प्रभावित हुए और निश्चय किया कि ब्रिटिश द्वीप में जहाँ रोमन काल में ईसाई धर्म को लोगों ने स्वीकार कर लिया था, फिर से इस धर्म का प्रचार किया जाय। धर्मप्रचार के उद्देश्य से इन्होंने आगस्टाइन नाम के एक प्रसिद्ध पादरी को इंग्लैंड भेजा जिसने केंट के राजा एथलबर्ट के दरबार में जाकर ईसाई धर्म का प्रचार प्रारंभ कर दिया। एथलबर्ट ने फ्रांस की एक ईसाई राजकुमारी से शादी की थी, अतः उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया और आगस्टाइन का केंटरबरी में गिरजाघर बनाने की आज्ञा दे दी। इस प्रकार पोप ग्रीगरी के प्रयत्न के फलस्वरूप इंग्लैंड में ईसाई धर्म का फिर से प्रचार हुआ। पोप ग्रीगरी ने ईसाई धर्म के सर्वाच्च नेता के रूप में बड़े ऊँचे दर्जे की प्रशसनिक प्रतिभा का परिचय दिया। चाहे धर्म संबंधी, इन्होंने सबका प्रबंध बातें हों या चर्च की संपत्ति की व्यवस्था संबंधी, इन्होंने सबका प्रबंध पटुता से किया। छोटी से छोटी बातों की ओर भी इन्होंने व्यक्तिगत ध्यान दिया और पूरे ईसाई जगत् की प्रशासनिक आवश्यकताओं से परिचित रहने की चेष्टा की। इनके पत्रों से इनकी व्यावहारिक बुद्धि और प्रशासनिक योग्यता का यथेष्ट आभास मिलता है। पोप ग्रीगरी ने धार्मिक ग्रंथों की समीक्षा तथा धर्म संबंधी बातों की वार्तालाप के रूप में विवेचना भी की। लैटिन भाषा की इन रचनाओं में इन्होंने गूढ़ विषयों के निरूपण के लिये अधिकांशतः रूपक शैली का प्रयोग किया है। शब्द दो अर्थ रखते हैं; एक तो ऊपरी जो स्पष्ट होता है और दूसरा लाक्षणिक जिससे धर्म संबंधी गूढ़ विचार भी सरलता से समझ में आ जाते हैं। पोप ग्रीगरी ने ईसाई धर्म से पहले की कथाओं की जगह ईसाई संतों की कहानियों का प्रचार करवाया। इन्होंने जो कुछ भी लिखा, धर्म के व्यापक प्रचार की भावना से लिखा। इनका ध्यान विचारों की स्पष्ट अभिव्यक्ति पर था, न कि शैली पर। लेकिन फिर भी इनकी भाषा में सौंदर्य और प्रभाव है। . पोप कॅलिक्स्टस तृतीय या कॅलिक्स्टस तृतीय आठ अप्रैल एक हज़ार चार सौ पचपन से एक हज़ार चार सौ अट्ठावन में अपनी मृत्यु तक पोप थे, जो कि रोमन कैथोलिक गिरजाघर के राजाध्यक्ष होता है। ये ऐसे अंतिम पोप थे जिन्होंने चुनाव के पश्चात 'कॅलिक्स्टस' नाम ग्रहण किया। चुनाव से पूर्व इनका नाम अल्फोंस डी बोर्हा था। पश्चिमी मतभेद के दौरान कॅलिक्स्टस ने प्रतिपोप बेनेडिक्ट तृतीय का समर्थन किया था और एक हज़ार चार सौ उनतीस में प्रतिपोप क्लेमेंट अष्टम को पोप मार्टिन पंचम के आधीन करने में ये प्रेरक शक्ति थे। अपने कैरियर की शुरुआती इन्होंने येइडा विश्विद्यालय में कानून के प्राध्यापक के रूप में गुजरा। इसके पश्चात ये आरागोन के महाराज की सेवा में राजनयिक बन गए। पोप यूजीन चतुर्थ की आरागोन के महाराज अल्फोंसो पंचम के साथ संधि कराने के पश्चात ये कार्डिनल बने व एक हज़ार चार सौ पचपन के पापल सम्मेलन में पोप चुने गए। धार्मिक रूप से ये बहुत कट्टर थे। पोप के पद पर रहते हुए इन्होंने कई विवादित व नवीन आदेश जारी किए थे, जिनमें से अफ्रीकियो और काफ़िरो को गुलाम बनाने का बुल जारी करना व दोपहर को गिरजाघर के घंटे बजाना कुछ प्रमुख हैं। कैथोलिक गिरजाघर की गतिविधियों में इन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को काफ़ी समर्थन किया व उन्हें लाभ भी पहुँचाया और शायद इन्ही की वजह से इनके एक भतीजे आगे चल कर पोप अलेक्जेंडर छठे बने। जोन ऑफ़ आर्क की मृत्यु के चौबीस साल बाद एक मुकदमे के पश्चात कॅलिक्स्टस ने उन्हें निर्दोष घोषित किया था। . फ्रांसिस ज़ेवियर का जन्म सात अप्रैल, एक हज़ार पाँच सौ छः ई. को स्पेन में हुआ था। पुर्तगाल के राजा जॉन तृतीय तथा पोप की सहायता से वे जेसुइट मिशनरी बनाकर सात अप्रैल एक हज़ार पाँच सौ इकतालीस ई को भारत भेजे गए और छः मार्च एक हज़ार पाँच सौ बयालीस ई. को गोवा पहुँचे जो पुर्तगाल के राजा के अधिकार में था। गोवा में मिशनरी कार्य करने के बाद वे मद्रास तथा त्रावणकोर गए। यहाँ मिशनरी कार्य करने के उपरांत वे एक हज़ार पाँच सौ पैंतालीस ई. में मलाया प्रायद्वीप में ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए रवना हो गए। उन्होंने तीन वर्ष तक धर्म प्रचारक कार्य किया। मलाया प्रायद्वीप में एक जापानी युवक से जिसका नाम हंजीरो था, उनकी मुलाकात हुई। सेंट जेवियर के उपदेश से यह युवक प्रभावित हुआ। एक हज़ार पाँच सौ उनचास ई. में सेंट ज़ेवियर इस युवक के साथ पहुँचे। जापानी भाषा न जानते हुए भी उन्होंने हंजीरों की सहायता से ढाई वर्ष तक प्रचार किया और बहुतों की खिष्टीय धर्म का अनुयायी बनाया। जापान से वे एक हज़ार पाँच सौ बावन ई. में गोवा लौटे और कुछ समय के उपरांत चीन पहुँचे। वहाँ दक्षिणी पूर्वी भाग के एक द्वीप में जो मकाओ के समीप है बुखार के कारण उनकी मृत्यु हो गई। मिशनरी समाज उनको काफी महत्व का स्थान देता और उन्हें आदर तथा सम्मान का पात्र समझता, है क्योंकि वे भक्तिभावपूर्ण और धार्मिक प्रवृत्ति के मनुष्य थे। वे सच्चे मिशनरी थे। संत जेवियर ने केवल दस वर्ष के अल्प मिशनरी समय में बावन भिन्न भिन्न राज्यों में यीशु मसीह का प्रचार किया। कहा जाता है, उन्होंने नौ हजार मील के क्षेत्र में घूम घूमकर प्रचार किया और लाखों लोगों को यीशु मसीह का शिष्य बनाया। श्रेणीःएक हज़ार पाँच सौ छः जन्म श्रेणीःएक हज़ार पाँच सौ बावन मृत्यु श्रेणीःस्पेनिश संत श्रेणीःस्पेनिश रोमन कैथोलिक संत श्रेणीःचीन में कैथोलिक संत श्रेणीःजापान में कैथोलिक संत श्रेणीःपंद्रहवीं शताब्दी के कैथोलिक संत श्रेणीःसोलहवींण शताभ्दी के कैथोलिक लोग श्रेणीःएंग्लिकन संत. बायज़ीद प्रथम, , "बिजली, वज्र"; एक हज़ार तीन सौ साठ - आठ मार्च एक हज़ार चार सौ तीन) एक हज़ार तीन सौ नवासी से एक हज़ार चार सौ दो तक उस्मानिया साम्राज्य के चौथे शासक रहे। उन्होंने अपने वालिद मुराद प्रथम के बाद राजकीय शक्ति संभाली जो प्रथम कोसोवो युद्ध में मारे गए थे। उनके साम्राज्य-विस्तार और सैन्य अभियानों की वजह से बायज़ीद को ख़िताब "सुल्तान-ए रूम" हासिल था। . दो सौ पचासpx ओटो एडुअर्ड लिओपोल्ड बिस्मार्क , जर्मन साम्राज्य का प्रथम चांसलर तथा तत्कालीन यूरोप का प्रभावी राजनेता था। वह 'ओटो फॉन बिस्मार्क' के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। उसने अनेक जर्मनभाषी राज्यों का एकीकरण करके शक्तिशाली जर्मन साम्राज्य स्थापित किया। वह द्वितीय जर्मन साम्राज्य का प्रथम चांसलर बना। वह "रीअलपालिटिक" की नीति के लिये प्रसिद्ध है जिसके कारण उसे "लौह चांसलर" के उपनाम से जाना जाता है। वह अपने युग का बहुत बड़ा कूटनीतिज्ञ था। अपने कूटनीतिक सन्धियों के तहत फ्रांस को मित्रविहीन कर जर्मनी को यूरोप की सर्वप्रमुख शक्ति बना दिया। बिस्मार्क ने एक नवीन वैदेशिक नीति का सूत्रपात किया जिसके तहत शान्तिकाल में युद्ध को रोकने और शान्ति को बनाए रखने के लिए गुटों का निर्माण किया। उसकी इस 'सन्धि प्रणाली' ने समस्त यूरोप को दो गुटों में बांट दिया। . रोमन साम्राज्य के पतन के उपरांत, पाश्चात्य सभ्यता एक हजार वर्षों के लिये उस युग में प्रविष्ट हुई, जो साधारणतया मध्ययुग के नाम से विख्यात है। ऐतिहासिक रीति से यह कहना कठिन है कि किस किस काल अथवा घटना से इस युग का प्रारंभ और अंत होता है। मोटे तौर से मध्ययुग का काल पश्चिमी यूरोप में पाँचवीं शताब्दी के प्रारंभ से पंद्रहवीं तक कहा जा सकता है। तथाकथित मध्ययुग में एकरूपता नहीं है और इसका विभाजन दो निश्चित एवं पृथक् युगों में किया जा सकता है। ग्यारहवीं शताब्दी के पहले का युग सतत संघर्षों, अनुशासनहीनता, तथा निरक्षरता के कारण 'अंधयुग' कहलाया, यद्यपि इसमें भी यूरोप को रूपांतरित करने के कदम उठाए गए। इस युग का प्रारंभ रोमन साम्राज्य के पश्यिमी यूरोप के प्रदेशों में, बर्बर गोथ फ्रैंक्स वैंडल तथा वरगंडियन के द्वारा स्थापित जर्मन साम्राज्य से होता है। यहाँ तक कि शक्तिशाली शार्लमेन भी थोड़े ही समय के लिये व्यवस्था ला सका। शार्लमेन के प्रपौलों की कलह तथा उत्तरी स्लाव और सूरासेन के आक्रमणों से पश्चिमी यूरोप एक बार फिर उसी अराजकता को पहुँचा जो सातवीं और आठवीं शताब्दी में थी। अतएव सातवीं और आठवीं शताब्दी का ईसाई संसार, प्रथम शताब्दी के लगभग के ग्रीक रोम जगत् की अपेक्षा सभ्यता एवं संस्कृति की निम्न श्रेणी पर था। गृहनिर्माण विद्या के अतिरिक्त, शिक्षा, विज्ञान तथा कला किसी भी क्षेत्र में उन्नति नहीं हुई थी। फिर भी अंधयुग उतना अंध नहीं था, जितना बताया जाता है। ईसाई भिक्षु एवं पादरियों ने ज्ञानदीप को प्रज्वलित रखा। ग्यारहवीं शताब्दी के अंत से पंद्रहवीं शताब्दी तक के उत्तर मध्य युग में मानव प्रत्येक दिशा में उन्नतिशील रहा। राष्ट्रीय एकता की भावना इंग्लैंड में ग्यारहवीं शताब्दी में, तथा फ्रांस में बारहवीं शताब्दी में आई। शार्लमैन के उत्तराधिकारियों की शिथिलता तथा ईसाई चर्च के अभ्युदय ने, पोप को ईसाई समाज का एकमात्र अधिष्टाता बनने का अवसर दिया। अतएव, पोप तथा रोमन सम्राट् की प्रतिस्पर्धा, पावन धर्मयुद्ध, विद्या का नियंत्रण तथा रोमन केथोलिक धर्म के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप इत्यादि में इस प्रतिद्वंद्विता का आभास मिलता है। तेरहवीं शताब्दी के अंत तक राष्ट्रीय राज्य इतने शक्तिशाली हो गए थे कि चर्च की शक्ति का ह्रास निश्चित प्रतीत होने लगा। नवीं शताब्दी से चौदहवीं शताब्दी तक, पश्चिमी यूरोप का भौतिक, राजनीतिक तथा सामाजिक आधार सामंतवाद था, जिसके उदय का कारण राजा की शक्तियों का क्षीण होना था। समाज का यह संगठन भूमिव्यवस्था के माध्यम से पैदा हुआ। भूमिपति सामंत को अपने राज्य के अंतर्गत सारी जनता का प्रत्यक्ष स्वामित्व प्राप्त था। मध्ययुग नागरिक जीवन के विकास के लिये उल्लेखनीय है। अधिकांश मध्ययुगीन नगर सामंतों की गढ़ियों, मठों तथा वाणिज्य केंद्रों के आस पास विकसित हुए। बारहवीं तथा तेरहवीं शताब्दी में यूरोप में व्यापार की उन्नति हुई। इटली के नगर विशेषतया वेनिस तथा जेनोआ पूर्वी व्यापार के केंद्र बने। इनके द्वारा यूरोप में रूई, रेशम, बहुमूल्य रत्न, स्वर्ण तथा मसाले मँगाए जाते थे। पुरोहित तथा सामंत वर्ग के समानांतर ही व्यापारिक वर्ग का ख्याति प्राप्त करना मध्ययुग की विशेषताओं में है। इन्हीं में से आधुनिक मध्यवर्ग प्रस्फुटित हुआ। मध्ययुग की कला तथा बौद्धिक जीवन अपनी विशेष सफलताओं के लिये प्रसिद्ध है। मध्ययुग में लैटिन अंतरराष्ट्रीय भाषा थी, किंतु ग्यारहवीं शताब्दी के उपरांत वर्नाक्यूलर भाषाओं के उदय ने इस प्राचीन भाषा की प्राथमिकता को समाप्त कर दिया। विद्या पर से पादरियों का स्वामित्व भी शीघ्रता से समाप्त होने लगा। बारहवीं और तेरहवीं शताब्दी से विश्वविद्यालयों का उदय हुआ। अरस्तू की रचनाओं के साथ साथ, कानून, दर्शन, तथा धर्मशास्त्रों का अध्ययन सर्वप्रिय होने लगा। किंतु वैज्ञानिक साहित्य का सर्वथा अभाव था। भवन-निर्माण-कला की प्रधानता थी, जैसा वैभवशाली चर्च, गिरजाघरों तथा नगर भवनों से स्पष्ट है। भवननिर्माण की रोमन पद्धति के स्थान पर गोथिक पद्धति विकसित हुई। आधुनिक युग की अधिकांश विशेषताएँ उत्तर मध्ययुग के प्रवाहों की प्रगाढ़ता है। . मैग्ना कार्टा मैग्ना कार्टा या मैग्ना कार्टा लिबरटैटम् इंग्लैण्ड का एक कानूनी परिपत्र है जो सबसे पहले सन् एक हज़ार दो सौ पंद्रह ई में जारी हुआ था। यह लैटिन भाषा में लिखा गया था। मैग्ना कार्टा में इंग्लैण्ड के राजा जॉन ने सामन्तों को कुछ अधिकार दिये; कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के पालन का वचन दिया; और स्वीकार किया कि उनकी इच्छा कानून के सीमा में बंधी रहेगी। मैग्ना कार्टा ने राजा की प्रजा के कुछ अधिकारों की रक्षा की स्पष्ट रूप से पुष्टि की, जिनमें से बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका उल्लेखनीय है। चार्टर की महत्ता इस तथ्य में निहित है कि प्रत्येक पीढ़ी ने इसकी वैधानिक व्याख्या कर इस सिद्धांत पर जोर दिया कि राजा को कानून का सम्मान अनिवार्य करना चाहिए। यह सामंतों तथा साधारण जनता दोनों के लिये वैधानिकता का प्रतीक बना तथा ब्रिटिश वैधानिक अधिनियमन का श्रीगणेश भी यहीं से हुआ माना जाता है। . सोलहवीं शताब्दी के प्रारंभ में समस्त पश्चिमी यूरोप धार्मिक दृष्टि से एक था - सभी ईसाई थे; सभी रोमन काथलिक चर्च के सदस्य थे; उसकी परंपरगत शिक्षा मानते थे और धार्मिक मामलों में उसके अध्यक्ष अर्थात् रोम के पोप का शासन स्वीकार करते थे। यूरोपीय धर्मसुधार अथवा रिफॉरमेशन सोलहवीं शताब्दी के उस महान आंदोलन को कहते हैं जिसके फलस्वरूप पाश्चात्य ईसाइयों की यह एकता छिन्न-भिन्न हुई और प्रोटेस्टैंट धर्म का उदय हुआ। चर्च के इतिहस में समय-समय पर सुधारवादी आंदोलन होते रहे किंतु वे चर्च के धार्मिक सिद्धातों अथवा उसके शासकों को चुनौती न देकर उनके निर्देश के अनुसार ही नैतिक बुराइयों का उन्मूलन तथा धार्मिक शिक्षा का प्रचार अपना उद्देश्य मानते थे। सोलहवीं शताब्दी में जो सुधार का आंदोलन प्रवर्तित हुआ वह शीघ्र ही चर्च की परंपरागत शिक्षा और उसके शासकों के अधिकार, दोनों का विरोध करने लगा। धर्मसुधार आंदोलन के परिणामस्वरूप यूरोप में कैथोलिक सम्प्रदाय के साथ-साथ लूथर सम्प्रदाय, कैल्विन सम्प्रदाय, एंग्लिकन सम्प्रदाय और प्रेसबिटेरियन संप्रदाय प्रचलित हो गये। . राफेल का चित्र राफेल परम पुनरुत्थान काल के इटली के महान चित्रकार एवं वास्तुशिल्पी थे। लियोनार्डो दा विन्ची, माइकल एंजेलो और राफेल अपने युग के महान कलाकार हैं। राफेल को शताब्दियों तक समूह संयोजन का आचार्य माना जाता रहा है। व्यक्तियों के समूह, समूहों का सम्पूर्ण चित्र में अनुपात, चित्र की उंचाई और गहराई का अनुपात, और व्यक्तियों की विभिन्न मुद्राएं - इन सब में उसने कमाल कर दिखाया है। रैफेल की सर्वाधिक ख्याति उसके मैडोन्ना चित्रों से है। रैफेल की कला से ही बरोक शैली का विकास हुआ। माइकेल एंजेलो की अपेक्षा राफेल का काम शान्त, मधुर और नारीसुलभ मोहिनी से भरपूर है। राफेल की नारी और बाल चित्रण में विशेष अभिरुचि थी। . राजनयिक दूत संप्रभु राज्य या देश द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि होते हैं, जो अन्य राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अथवा अंतरराष्ट्रीय संस्था में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय विधि का प्रचलन आरंभ होने के बहुत पूर्व से ही रोम, चीन, यूनान और भारत आदि देशों में एक राज्य से दूसरे राज्य में दूत भेजने की प्रथा प्रचलित थी। रामायण, महाभारत, मनुस्मृति, कौटिल्यकृत अर्थशास्त्र और 'नीतिवाक्यामृत' में प्राचीन भारत में प्रचलित दूतव्यवस्था का विवरण मिलता है। इस काल में दूत अधिकांशतः अवसरविशेष पर अथवा कार्यविशेष के लिए ही भेजे जाते थे। यूरोप में रोमन साम्राज्य के पतन के उपरांत छिन्न भिन्न दूतव्यवस्था का पुनरारंभ चौदहवीं शताब्दी में इटली के स्वतंत्र राज्यों एवं पोप द्वारा दूत भेजने से हुआ। स्थायी राजदूत को भेजने की नियमित प्रथा का श्रीगणेश इटली के गणतंत्रों एवं फ्रांस के सम्राट् लुई ग्यारहवें ने किया। सत्रहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक दूतव्यवस्था यूरोप के अधिकांश देशों में प्रचलित हो गई थी। . ये दुनिया के राष्ट्र और शासन के वर्तमान प्रमुखों की सूची है। राष्ट्रप्रमुख अथवा राज्यप्रमुख, किसी संप्रभु राज्य का एक सार्वजनिक राजनैतिक व्यक्तित्व होता है, जो कि राज्य के अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व को स्वरूपित करता है, और सैद्धांतिक रूप से उसे संपूर्ण राज्य के चिन्हात्मक मानवीय स्वरूप के रूप में देखा जाता है। शासनप्रमुख या सरकारप्रमुख, किसी संप्रभु राज्य की कार्यकारी शाखा का प्रमुख अथवा उसका उपाधिकारी होता है। . मोस्को का ख़्राम ख़्रिस्ता गिरजा रूसी पारम्परिक ईसाई एक ईसाई समुदाय का नाम है। अधिकतर रूसी ईसाई लोग इसी सम्प्रदाय के सदस्य हैं। इसका सर्वोच्च धार्मिक नेता मोस्को का मुख्य पादरी है। यह सम्प्रदाय अन्य पूर्वी पारम्परिक ईसाई सम्प्रदायों को अपना सम्बन्धी मानती है। यह पोप के नेतृत्व वाले कैथोलिक सम्प्रदाय से बिलकुल अलग है। रूस के लगभग पैंसठ% लोग स्वयं को इसका अनुयायी कहते हैं।, Interfax.ru, दो मार्च दो हज़ार ग्यारह Religare.ru June छः, दो हज़ार सात . शंकराचार्य आम तौर पर अद्वैत परम्परा के मठों के मुखिया के लिये प्रयोग की जाने वाली उपाधि है। शंकराचार्य हिन्दू धर्म में सर्वोच्च धर्म गुरु का पद है जो कि बौद्ध धर्म में दलाईलामा एवं ईसाई धर्म में पोप के समकक्ष है। इस पद की परम्परा आदि गुरु शंकराचार्य ने आरम्भ की। यह उपाधि आदि शंकराचार्य, जो कि एक हिन्दू दार्शनिक एवं धर्मगुरु थे एवं जिन्हें हिन्दुत्व के सबसे महान प्रतिनिधियों में से एक के तौर पर जाना जाता है, के नाम पर है। उन्हें जगद्गुरु के तौर पर सम्मान प्राप्त है एक उपाधि जो कि पहले केवल भगवान कृष्ण को ही प्राप्त थी। उन्होंने सनातन धर्म की प्रतिष्ठा हेतु भारत के चार क्षेत्रों में चार मठ स्थापित किये तथा शंकराचार्य पद की स्थापना करके उन पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को आसीन किया। तबसे इन चारों मठों में शंकराचार्य पद की परम्परा चली आ रही है। यह पद अत्यंत गौरवमयी माना जाता है। चार मठ निम्नलिखित हैं. किसी भौगोलिक क्षेत्र या जन समूह पर सत्ता या प्रभुत्व के सम्पूर्ण नियंत्रण पर अनन्य अधिकार को सम्प्रभुता कहा जाता है। सार्वभौम सर्वोच्च विधि निर्माता एवं नियंत्रक होता है यानि संप्रभुता राज्य की सर्वोच्च शक्ति है। . भाषा विज्ञान में, संज्ञा एक विशाल, मुक्त शाब्दिक वर्ग का सदस्य है, जिसके सदस्य वाक्यांश के कर्ता के मुख्य शब्द, क्रिया के कर्म, या पूर्वसर्ग के कर्म के रूप में मौजूद हो सकते हैं। शाब्दिक वर्गों को इस संदर्भ में परिभाषित किया जाता है कि उनके सदस्य अभिव्यक्तियों के अन्य प्रकारों के साथ किस तरह संयोजित होते हैं। संज्ञा के लिए भाषावार वाक्यात्मक नियम भिन्न होते हैं। अंग्रेज़ी में, संज्ञा को उन शब्दों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो उपपद और गुणवाचक विशेषणों के साथ होते हैं और संज्ञा वाक्यांश के शीर्ष के रूप में कार्य कर सकते हैं। पारंपरिक अंग्रेज़ी व्याकरण में Noun, आठ शब्दभेदों में से एक है। . दो मई एक हज़ार आठ सौ आठः फ्रांसिस्को डी गोया द्वारा एक हज़ार आठ सौ चौदह में चित्रित 'The Charge of the Mamelukes' नेपोलियन बोनापार्ट के साम्राज्य तथा स्पेन, ब्रिटेन और पुर्तगाल की सम्मिलित सेनाओं के बीच हुआ युद्ध स्पेन का स्वतंत्रता संग्राम या प्रायद्वीपीय युद्ध कहलाता है। स्पेन ने समय-समय पर फ्रांस को सहायता दी थी। इस समय स्पेन का शासक चार्ल्स चतुर्थ था किन्तु उसके निष्क्रिय शासन के स्थान पर जनमत उसके पुत्र राजकुमार फर्डिनेण्ड को शासक बनान चाहती थी। अतः चार्ल्स ने फर्डिनेण्ड के पक्ष में पद त्याग दिया। इसी समय नेपोलियन ने फर्डिनेण्ड को एक तरह से नजरबन्द कर अपने भाई नेपल्स के राजा जोजफ को स्पेन का राजा बनाया और नेपल्स अपने बहनोई म्यूरा को दे दिया। वस्तुतः पुर्तगाल में फ्रांस व स्पेन के संयुक्त अभियान के कारण नेपोलियन को फ्रांसीसी सेनाएँ स्पेन में भेजने का अवसर मिल गया और मौका देख उसने स्पने पर अधिकार कर लिया। नेपोलियन के इस कदम से स्पेनिश जनता अपमानित महसूस कर रही थी। स्पेनवासियों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ और पूरा राष्ट्र नेपोलियन के विरूद्ध उठ खड़ा हुआ। जगह-जगह प्रबंध समितियाँ स्थापित की जाने लगी, 'पोप के शत्रु' के विनाश का अच्छा अवसर देखते हुए कैथोलिक पादरियों ने लोगों को उकसाना शुरू किया। Zunta नामक संगठन ने गुरिल्ला पद्धति से लड़ने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना आरंभ कर दिया। स्पेन की जनता की नजर में नेपोलियन राष्ट्रीय एकता का संहारक और राजमुकुट का विनाशक था। अतः उन्होंने गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया। यह युद्ध एक हज़ार आठ सौ आठ से एक हज़ार आठ सौ चौदह तक चलता रहा। जुलाई एक हज़ार आठ सौ आठ में बेलन के युद्ध में फ्रांसीसी सेना पराजित हुई। स्थल में, नेपोलियन की सेना की यह प्रथम पराजय थी। स्पेनवासियों का उत्साह बढ़ा और पूरे यूरोप में सनसनी फैल गई। जोजेफ स्पेन छोड़ भाग खड़ा हुआ। ऐसी स्थिति में नेपोलियन ने स्पेन पर हमला किया और उसे पराजित कर पुनः जोजफ को सिंहासन पर बैठाया। स्पेन में फंसे रहने के कारण साम्राज्य पर वह ध्यान नहीं दे पाया। एक हज़ार आठ सौ नौ ई. में यूरोपीय गतिविधयों के कारण नेपोलियन को एक बड़ी सेना स्पेन में छोड़ मध्य यूरोप की ओर जाना पड़ा। इसके बाद उसका स्पेन आना संभव नहीं हुआ। स्पेन में राष्ट्रवादी पुनः सक्रिय हो गए और जोजफ का शासन लड़खड़ाने लगा। इंग्लैण्ड ने स्पेन का समर्थन देकर कई स्थानों पर फ्रांसीसी सेना को परास्त किया और अंततः स्पेन फ्रांसीसी आधिपत्य से मुक्त हुआ। स्पेन का युद्ध नेपोलियन के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हुआ। एक तरफ इसने जहाँ नेपोलियन के लाखों सैनिकों व योग्य सेनापतियों को नष्ट कर दिया तो दूसरी तरफ युद्ध में व्यस्त रहने के कारण शेष यूरोप की ओर ध्यान भी नहीं दे सका। स्पेन की विजय ने नेपोलियन की अपराजेयता के मिथक को तोड़ा और यूरोप में सोई राष्ट्रीयता की भावना को जगाया। इसी राष्ट्रवाद की भावना से पे्ररित होकर आगे आस्ट्रिया ने फ्रांस के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस प्रकार स्पेनिश युद्ध के संदर्भ में नेपोलियन का यह कहना ठीक है कि स्पेन के नासूर ने मुझे बर्बाद कर दिया। . सेडॉन युद्ध का मानचित्र सेडान युद्ध फ्रांस-प्रशा युद्ध के दौरान एक सितम्बर एक हज़ार आठ सौ सत्तर को हुआ था। नैपोलियन तृतीय और उसके बहुत सारे सैनिक पकडे गये। इस युद्ध में सभी दृष्टियों से प्रशा एवं उसके सहयोगियों की जीत हुई। इसके बावजूद नयी फ्रांसीसी सरकार ने युद्ध जारी रखा। . सेम्युल फिनले ब्रीज मोर्स एक अमेरिकी थे जिन्होंने एकल-तार टेलीग्राफ प्रणाली और मोर्स कोड का निर्माण किया। और उन्हें ऐतिहासिक दृश्यों के एक चित्रकार के रूप में भी जाना जाता है। . हठधर्म, राद्धान्त या डॉग्मा का अर्थ है - 'कट्टर धार्मिक धारणा या मंतव्य'। आरंभ में "डॉग्मा" संमति या व्यवस्था आदेश के अर्थ में प्रयुक्त होता था; पीछे इससे ऐसी धारण अभिप्रेत होने लगी, जिसे कोई व्यक्ति मानता ही नहीं, वरन् उस पर बलपूर्वक जमा रहता है, चाहे कोई पक्षांतर भी उतना ही विश्वस्त क्यों न दीखता हो। अब इस शब्द का प्रयोग प्रायः धर्मविद्या के संबंध में होता है। डॉग्मा ऐसी धारणा है जिसे किसी संप्रदाय के सभी सदस्यों को मानना होता है, क्योंकि यह अपने तत्व में दैवी प्रकाश है। इस प्रकाश को, जब ऐसा करने की आवश्यकता हो, कोई अधिकार संपन्न व्यक्ति या विशेष विचारसभा सूत्रबद्ध करती है। ईसाइयों के लिए ईसा के कथन, बौद्धों के लिए बुद्ध के कथन ऐसे मंतव्य हैं। इन्हें सिद्धांत नही कह सकते, क्योंकि इनके सिद्ध करने का प्रश्न ही नहीं उठता। ईसाई संप्रदाय के लिए प्रमुख डॉग्मा "त्रित्व" का स्वरूप है। त्रिगुट में "पिता', "पुत्र' और "पवित्र आत्मा' तीन स्वाधीन चेतन संमिलित हैं। तीन चेतन कैसे एक चेतन का अंश बन सकते हैं, यह विवेचन का विषय नहीं, अपितु दैवी अविष्कार है। तीन सौ पच्चीस-छब्बीस ईशून्य में नाईस की विचारसभा में निश्चय किया गया कि "पिता और पुत्र का तत्व एक ही है', "पिता' पुत्र का उत्पादक नहीं जनक है। यह भी निर्णीत हुआ कि "पवित्रआत्मा' पिता और पुत्र दोनों से पैदा हुई है। एक हज़ार पाँच सौ पैंतालीस-तिरेसठ में, ट्रेंट की विचारसभा में जो मंतव्य निर्णीत हुए, वे प्रायः अब भी रोमन कैथोलिक संप्रदाय के लिए मान्य हैं। एक हज़ार आठ सौ सत्तर ईशून्य में रोम की सभा में निश्चय किया गया कि पोप को भी अधिकार प्राप्त है कि वह ईसाई मंतव्यय को सूत्रबद्ध कर सके। धर्मान्दोलन के बाद प्रोटेस्टेंट संप्रदाय ने कहा कि दैवी प्रकाश की व्याख्या प्रत्येक ईसाई का अधिकार है। बौद्ध भिक्षु को दीक्षित होने के समय निम्नांकित व्रत लेने होते थे -- ईसा और गौतम बुद्ध ने जो कुछ कहा, अपने अधिकार से कहा। मुहम्मद ने जो कुछ कहा, वह उनके विचार में, ईश्वरीय संदेश था, जो एक देवदूत ने उन्हें पहुँचाया। इस्लाम में मान्य धर्मसूत्र "ईमान' कहलाता है। ईमान के सात अंश हैं -- हर हालत में विश्वासी मानता है कि "डॉग्मा" सत्य है और अधिकारयुक्त है; यह खुला प्रश्न नहीं। . हंगरी , आधिकारिक तौर पर हंगरी गणराज्य , मध्य यूरोप के पैनोनियन बेसिन में स्थित एक स्थल-रुद्ध देश है। इसके उत्तर में स्लोवाकिया, पूर्व में यूक्रेन और रोमानिया, दक्षिण में सर्बिया और क्रोएशिया, दक्षिण पश्चिम में स्लोवेनिया और पश्चिम में ऑस्ट्रिया स्थित है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर बुडापेस्ट है। हंगरी, यूरोपीय संघ, नाटो, ओईसीडी और विसेग्राद समूह का सदस्य है और एक शेंगन राष्ट्र है। इसकी आधिकारिक भाषा हंगेरियाई है, जो फिन्नो-उग्रिक भाषा परिवार का हिस्सा है और यूरोप में सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली गैर भारोपीय भाषा है। हंगरी दुनिया के तीस सबसे अधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है और प्रति वर्ष लगभग आठ.छः लाख पर्यटकों को आकर्षित करता है। देश में विश्व की सबसे बड़ी गर्म जल की गुफा प्रणाली स्थित है और गर्म जल की सबसे बड़ी झीलों में से एक हेविज़ झील यहीं पर स्थित है। इसके साथ मध्य यूरोप की सबसे बड़ी झील बलातोन झील भी यहीं पर है और यूरोप के सबसे बड़े प्राकृतिक घास के मैदान होर्टोबैगी भी हंगरी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हंगरी की सरकार एक संसदीय गणतंत्र है, जिसे एक हज़ार नौ सौ नवासी में स्थापित किया गया था। हंगरी की अर्थव्यवस्था एक उच्च-आय अर्थव्यवस्था है और कुछ क्षेत्रों में यह एक क्षेत्रीय अगुआ है। . हुल्द्रिख ज्विंगली का तैलचित्र हुल्द्रिख ज्विंगली स्विटजरलैंड का सुधारक था जिसने स्विटजरलैंड में सुधार आंदोलन का नेतृत्व किया। . जुज़ॅप्पे गारिबाल्दि जुज़ॅप्पे गारिबाल्दि इटली के एक राजनैतिक और सैनिक नेता थे जिन्होने इटली के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। कावूर, विक्तर एमानुएल द्वितीय तथा मेत्सिनी के साथ गारिबाल्दि का नाम भी इटली के 'पिताओं' में सम्मिलित है। गारिबाल्दि जब पैदा हुए तब इटली कई राज्यों में खंडित था और यूरोप की बाकी शक्तियों के रहम-ओ-करम पर था। पहले उन्होंने "कारबोनारी" नाम के गुप्त राष्ट्रवादी क्रन्तिकारी संगठन के साथ नाता जोड़ा लेकिन एक असफल विद्रोह के बाद उन्हें इटली छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने दक्षिण अमेरिका में कई विद्रोहों और लड़ाइयों में हिस्सा लिया। उसके बाद वे वापस इटली आए और इटली को एक करने की लड़ाई में मुख्य रणनीतिकार रहे। आधुनिक युग में इतालवी लोग उन्हें एक देशभक्त नेता मानते हैं और आदर से देखते हैं। . जॉन ड्राइडेन जॉन ड्राइडेन आंग्ल कवि, साहित्यिक समालोचक तथा नाटककार था। एक हज़ार छः सौ अड़सठ में उसे राष्ट्रकवि बनाया गया। . दो सौ पचासpx जोवानी पिको देला मीरदेला इटली का प्रमुख प्लातौनवादी एवं मानववादी विचारक जो यूनानी, लातीनी, यहूदी, चाल्दी तथा अरबी भाषाओं का पंडित था। पिको ने स्वायत्त बुद्धियुक्त मानव व्यक्ति के महत्व, प्रताप, एवं आत्मसम्मान की प्राचीन धारणा की पुनःस्थापना करनेवाले नवीन नवप्लातौनवाद को जन्म दिया। उसका कथन था कि मनुष्य सर्वाधिक सौभाग्यवान्, देवताओं द्वारा भी प्रशंसा एवं ईर्ष्या योग्य जीव है। परमनिर्माता जगत्पिता ने उसे विश्व के मध्य में स्थित करके उसके स्थान, रूप, एवं कार्य को उसी के स्वतंत्र निर्णय पर छोड़ दिया है। मनुष्य चाहे तो वनस्पति स्तर पर जीवन काटे, चाहे पक्षु स्तर पर विषयभोग में रत रहे, और चाहे तो बौद्धिक स्तर पर अपने अधिकतम परिश्रम से स्वाभाविक दर्शन के द्वारा पृथ्वी पर नैतिक, ज्ञानाधारित, पवित्र, दैवी जीवन का विकास करे। पिको ने सार्वजनिक वादविवाद के लिए दर्शन एवं धर्म की विविध शाखाओं पर नौ सौ प्रश्नोत्तर भी बनाए, परंतु धर्माधिकारी पोप ने उनका निषेध कर दिया। पिको द्वारा अपने कथनों की अभ्युपपत्ति प्रस्तुत करने पर उसकी व्यक्तिगत धर्मावलंबिता स्वीकार कर ली गई। उसने सृष्टि की एक रहस्यवादी व्याख्या प्रकाशित की। पिको के मानववाद का प्रभाव नव ईसाई धर्म को केवल श्रद्धा पर आधारित रखने के पक्षपाती स्विस मानववादी जिवंगली पर पड़ा। उसके नवीन प्लातोनवाद ने यूरोप में यूश्लिन तथा अग्रिष्या फौन नैट्टेशाइम के अस्पष्टवाद को और पारा सेल्सस के कीमिया रसायन का जन्म दिया। . "'ईद्भास/क्रॉस"' - यह ईसाई धर्म का निशान है ईसाई धर्म एक इब्राहीमीChristianity's status as monotheistic is affirmed in, amongst other sources, the Catholic Encyclopedia ; William F. Albright, From the Stone Age to Christianity; H. Richard Niebuhr; About.com,; Kirsch, God Against the Gods; Woodhead, An Introduction to Christianity; The Columbia Electronic Encyclopedia; The New Dictionary of Cultural Literacy,; New Dictionary of Theology,, pp. चर्च शब्द यूनानी विशेषण का अपभ्रंश है जिसका शाब्दिक अर्थ है "प्रभु का"। वास्तव में चर्च दो अर्थों में प्रयुक्त है; एक तो प्रभु का भवन अर्थात् गिरजाघर तथा दूसरा, ईसाइयों का संगठन। चर्च के अतिरिक्त 'कलीसिया' शब्द भी चलता है। यह यूनानी बाइबिल के 'एक्लेसिया' शब्द का विकृत रूप है; बाइबिल में इसका अर्थ है - किसी स्थानविशेष अथवा विश्व भर के ईसाइयों का समुदाय। बाद में यह शब्द गिरजाघर के लिये भी प्रयुक्त होने लगा। यहाँ पर संस्था के अर्थ में चर्च पर विचार किया जायगा। . श्रेणीःपुस्तकालय विल्नुस विश्वविद्यालय का पुस्तकालय - सब से पुराना पुस्तकालय लिथुआनिया में है। वह जेशूइट के द्वारा स्थापित किया गया था। पुस्तकालय विल्नुस विश्वविद्यालय से पुराना है - पुस्तकालय एक हज़ार पाँच सौ सत्तर में और विश्वविद्यालय एक हज़ार पाँच सौ उन्यासी में स्थापित किया गया था। कहने तो लायक है कि अभी तक पुस्तकालय समान निर्माण में रहा है।पहले पुस्तकालय वर्तमान भाषाशास्त्र के वाचनालय में रहा था। आज पुस्तकालय में लगभग चौवन लाख दस्तावेज रखे हैं। ताक़ों की लम्बाई - एक सौ छयासठ किलोग्राममीटर ।अभी पुस्तकालय के उनतीस हज़ार प्रयोक्ते हैं। एक हज़ार सात सौ तिरेपन में यहाँ लिथुआनिया की प्रथम वेधशाला स्थापित की गयी थी। प्रतिवर्ष विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में बहुत पर्यटक आते हैं - न केवल लिथुआनिया से बल्कि भारत, स्पेन, चीन, अमरीका से, वगैरह। विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी आते हैं। उदाहरण के लिये - राष्ट्रपति, पोप, दलाई लामा, वगैरह। विल्नुस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का सदर मकान उनिवेर्सितेतो तीन में, राष्ट्रपति भवन के पास स्थापित किया गया है। यहाँ तेरह वाचनालय और तीन समूहों के कमरे हैं। दूसरे विल्नुस के स्थानों में अन्य पुस्तकालय के भाग मिलते हैं। . यह विश्व के देशओं की सूची का अनुलग्नक है। उन देशों की सूची में सम्मिलित न होने वाली अस्तित्वों की एक रूपरेखा दी गई है। . विक्तर इमनुएल द्वितीय विक्तर एमानुएल द्वितीय वर्तमान इटली के 'जनक' माने जाते हैं। उनका नाम जर्मनी के प्रिंस बिस्मार्क और भारत के सरदार पटेल के दर्जे का माना जाता है। इन्होंने अनेक राज्यों में विभक्त देश को एक कर वर्तमान इटली का रूप दिया, सीमावर्ती प्रबल देशों से उसे निर्भय बनाया और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलायी। . वैटिकन शहर यूरोप महाद्वीप में स्थित एक देश है। पृथ्वी पर सबसे छोटा, स्वतंत्र राज्य है, जिसका क्षेत्रफल केवल चौंतालीस हेक्टेयर है। यह इटली के शहर रोम के अन्दर स्थित है। इसकी राजभाषा है लातिनी। ईसाई धर्म के प्रमुख साम्प्रदाय रोमन कैथोलिक चर्च का यही केन्द्र है और इस सम्प्रदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप का यही निवास है। यह नगर, एक प्रकार से, रोम नगर का एक छोटा सा भाग है। इसमें सेंट पीटर गिरजाघर, वैटिकन प्रासादसमूह, वैटिकन बाग तथा कई अन्य गिरजाघर सम्मिलित हैं। सन् एक हज़ार नौ सौ उनतीस में एक संधि के अनुसार इसे स्वतंत्र राज्य स्वीकार किया गया। इस राज्य के अधिकारी, पैंतालीस करोड़ साठ लाख रोमन कैथोलिक धर्मावलंबियों से पूजित, पोप हैं। राज्य के राजनयिक संबंध संसार के लगभग सब देशों से हैं। सन् एक हज़ार नौ सौ तीस में पोप की मुद्रा पुनः जारी की गई और सन् एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में इसके रेलवे स्टेशन का निर्माण हुआ। यहाँ की मुद्रा इटली में भी चलती है। आकर्षक गिरजाघरों, मकबरों तथा कलात्मक प्रासादों के अतिरिक्त वैटिकन के संग्रहालय तथा पुस्तकालय अमूल्य हैं। पोप के सरकारी निवास का नाम भी वैटिकन है। यह रोम नगर में, टाइबर नदी के किनारे, वैटिकन पहाड़ी पर स्थित है तथा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक कारणों से प्रसिद्ध है। यहाँ के प्रासादों का निर्माण तथा इनकी सजावट विश्वश्रुत कलाकारों द्वारा की गई है। . वेस्ट्मिन्स्टर ऍबी, , जिसे पहले आधिकारिक रूप से अंग्रेज़ी में कॉलेजिएट चर्च ऑफ़ सेण्ट पीटर ऍट् वेस्ट्मिन्स्टर का नाम दिया गया था, वेस्टमिंस्टर शहर, लंदन में स्थित एक विशाल, मुख्यतः गोथिक मठ व गिरिजाघर है। यह वेस्टमिंस्टर महल से पश्चिम में स्थित है। यह यूनाइटेड किंगडम के सबसे माननीय पूजा स्थलों में से एक है व ग्रेट ब्रिटेन के शाही परिवार के राज्याभिषेक का परम्परागत स्थल है। एक हज़ार पाँच सौ चालीस से एक हज़ार पाँच सौ छप्पन तक इस मठ को कैथेड्रल का महत्व हासिल था। हालांकि एक हज़ार पाँच सौ साठ से यह भवन मठ या कैथेड्रल नहीं रह गयी और सिर्फ़ शाही निजी संपत्ति ही कही जाती थी। "शाही निजी संपत्ति" - वो संपत्तियाँ थीं जो सीधे सम्राट के प्रति जवाबदेह थीं और सम्राट की जिम्मेदारी थीं। यह भवन वास्तविक मठ व गिरिजाघर है। एक हज़ार अस्सी में पहली बार सुलकार्ड द्वारा बताई गई परंपरा के अनुसार लंदन के थोर्नी द्वीप पर सातवीं शताब्दी में लंदन के पादरी मेलिटस के जमाने में एक गिरिजाघर का निर्माण हुआ था। वर्तमान गिरिजाघर का निर्माण सन् एक हज़ार दो सौ पैंतालीस में हेनरी अष्टम के आदेश पर शुरु हुआ था।. आयरलैंड की जागीरदारी एक हज़ार एक सौ सतहत्तर से एक हज़ार पाँच सौ बयालीस के बीच आयरलैंड में विद्यमान सामंतवादी काल था, जोकि आयरलैंड पर नोएमन आक्रमण के बाद इंग्लैण्ड के राजा के अंदर शुरू हुआ था। इस काल के दौरान इंग्लैण्ड के राजा को आयरलैंड के अधिपति का दर्ज प्राप्त था, और आयरलैंड की ज़मीन पर इंग्लैंड के राजा के अधीन अनेक नॉर्मन सामंतों और जागीरदारों का कब्ज़ा था। आधिकारिक रूप से इस जागीरदारी को एक पेपल संपदा के रूप में, इंग्लैंड के राजा के अंतर्गत आधिकारित किया गया था। हालाँकि, सैद्धान्तिक रूप से इस जागीर की भूमि पूरे आयरलैंड द्वीप पर थी, परंतु वास्तविक रूप से पूरे द्वीप पर राजा का संपूर्ण कब्ज़ा नहीं था, और ऐसे अनेक क्षेत्र थे, जिनपर स्थानीय गैलिक सरदारों और अधिपतिगण का कब्ज़ा था। अंग्रेज़ी हुकूमत के अधीन क्षेत्र का आकार अनेकों बार घटता-बढ़ता था, तथा कई क्षेत्र अंग्रेजों की पहुँच से पूर्णतः बहार थे। सामंतवाद की ढीली व्यवस्था के कारण नॉर्मन सामंतों को काफी कार्यकारी स्वतंत्रता प्राप्त थी, और कई सामंतों ने स्वयं के लिए ज़मींदारी सामान अधिकार जमा लिया था। और स्थानीय गैलिक राजाओं की सामान शक्ति हासिल कर ली थी। . इतालवी एकीकरण को दर्शाता हुआ नक़्शा, जिसमें विभिन्न राज्यों के संगठित इतालवी साम्राज्य में सम्मिलित होने के वर्ष दिए गए हैं इतालवी एकीकरण, जिसे इतालवी भाषा में इल रिसोरजिमेंतो कहते हैं, उन्नीसवीं सदी में इटली में एक राजनैतिक और सामाजिक अभियान था जिसने इतालवी प्रायद्वीप के विभिन्न राज्यों को संगठित करके एक इतालवी राष्ट्र बना दिया। इस अभियान की शुरुआत और अंत की तिथियों पर इतिहासकारों में विवाद है लेकिन अधिकतर के मत में यह सन् एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में इटली पर नेपोलियन बोनापार्ट के राज के अंत पर होने वाले वियना सम्मलेन के साथ आरम्भ हुआ और एक हज़ार आठ सौ सत्तर में राजा वित्तोरियो इमानुएले की सेनाओं द्वारा रोम पर क़ब्ज़ा होने तक चला।, Jeffrey Thompson Schnapp, Olivia E. Sears, Maria G. Stampino, pp. सोलहवीं शताब्दी में इंगलैण्ड में एक के बाद एक अनेक घटनाएँ हुईं जिनके परिणामस्वरूप इंगलैण्ड का चर्च, रोमन कैथलिक चर्च से अलग हो गया। इसे ही इंगलैण्ड का धर्मसुधार कहते हैं। ये घटनाएँ यूरोप में हो रहे प्रोटेस्टैण्ट धर्मसुधार से कुछ अंशों में जुड़ी हुईं थीं। हेनरी का उत्तराधिकारी एडवर्ड छठा अवयस्क था, इसलिए उसके शासनकाल में उसके संरक्षक ड्यूक ऑफ सामरसेट और ड्यूक ऑफ नार्बम्बरलैण्ड ने प्रोटेस्टेंट धर्म के सिद्धांतों का प्रचार किया और इंग्लैण्ड के चर्च को इन सिद्धांतों के आधार पर संगठित किया तथा अंग्रेजी भाषा में बयालीस सिद्धांतों वाली "सामान्य प्रार्थना पुस्तक" प्रचलित की। इससे इंग्लैण्ड के चर्च की आराधना पद्धति में कई परिवर्तन किये गये। इन सब कारणों से अब इंग्लैण्ड का चर्च 'एंग्लिकन चर्च' कहा जाने लगा। एडवर्ड की मृत्यु के बाद मेरी ट्यूडर के शासनकाल में कैथोलिक धर्म और पोप की सर्वोच्चता को पुनः इंग्लैण्ड में प्रतिष्ठित करने के प्रयास किये गये और लगभग तीन सौ धर्मसुधारकों, जिनमें आर्कबिशप क्रेनमर, लेटिमर और रिडल प्रमुख थे, को मृत्यु दंड भी दिया। किंतु प्रोटेस्टेंट आंदोलन और धर्म प्रचार का पुर्णरूपेण दमन नहीं हो सका। इंग्लैण्ड और यूरोपीय देशों में हुए धर्म सुधार आंदोलनों में अंतर है। यूरोप के देशं में हुआ धर्म सुधार आंदोलन पूर्णरूपेण धार्मिक था। इसके विपरीत इंग्लैण्ड का धर्म सुधार आंदोलन व्यक्तिगत और राजनीतिक था। यूरोप में धर्म सुधार का प्रारंभ धार्मिक नेताओं ओर उनके बहुसंख्यक अनुयायियों ने किया। कालांतर में जनता ने उसे अपना लिया। प्रारंभ में अनेक राजाओं ने धर्म सुधार आंदोलन का विरोध कर उसका दमन किया। इसके विपरीत इंग्लैण्ड में राजा हेनरी अष्टम ने धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ किया और उसके उत्तराधिकारी एडवर्ड षष्ठम के मंत्रियों ने और रानी एजिलाबेथ ने नवीन धर्म को प्रजा के लिए अनिवार्य कर दिया और पोप के स्थान पर राजा इंग्लैण्ड के चर्च का संरक्षक और सर्वोच्च अधिकारी बन गया। हेनरी अष्टम ने अपनी पत्नी केवराइन के तलाक की अनुमति पोप द्वारा नहीं दिये जाने पर पोप का विरोध किया और एक्ट ऑफ सुप्रीमेसी पारित कर वह इंग्लैण्ड के चर्च का सर्वोच्च अधिकारी हो गया। इस प्रकार उसने पोप से संबंध विच्छेद कर लिये और कैथोलिक मठों की धन सम्पित्त भी हथिया ली। हेनरी अष्टम का उद्देश्य धर्म में सुधार नहीं था। उसने पोप से संबंध विच्छेद करने पर भी कैथोलिक धर्म के सिद्धांतों को बनाये रखा। उसकी सहानुभूति न तो लूथरवाद के प्रति थी और न कैल्विनवाद के प्रति। उसका विरोध तो केवल पोप से था, इसलिए इंग्लैण्ड में उसने पोप की सत्त को नष्ट कर दिया। धर्म सुधार का यह कारण व्यक्तिगत था। हेनरी अष्टम ने कैथोलिकों और प्रोटेस्टेंटों दोनों को दंडित किया। उसने कैथोलिकों को इसलिए दंडित किया कि वे उसे चर्च का प्रमुख और सर्वेसर्वा नहीं मानते थे और प्रोटेस्टेंटों को इसलिए दंडित किया किया कि वे कैथोलिक धर्म के सिद्धांतों को नहीं मान ते थे। इंग्लैण्ड में धर्म सुधार का प्रसार धीरे-धीरे एडवर्ड षष्ठ के शासनकाल में प्रारंभ हुआ। श्रेणीःयूरोप का इतिहास श्रेणीःईसाई धर्म. हेनरी अष्टम इक्कीस अप्रैल एक हज़ार पाँच सौ नौ से अपनी मृत्यु तक इंग्लैंड के राजा थे। वे लॉर्ड ऑफ आयरलैंड तथा फ्रांस के साम्राज्य के दावेदार थे। हेनरी ट्यूडर राजघराने के दूसरे राजा थे, जो कि अपने पिता हेनरी सप्तम के बाद इस पद पर आसीन हुए। अपने छः विवाहों के अलावा, हेनरी अष्टम चर्च ऑफ इंग्लैंड को रोमन कैथोलिक चर्च से पृथक करने में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका के लिये भी जाने जाते हैं। रोम के साथ हेनरी के संघर्षों का परिणामस्वरूप पोप के प्रभुत्व से चर्च ऑफ इंग्लैंड का पृथक्करण हुआ और मठों का विघटन हो गया और उन्होंने स्वयं को चर्च ऑफ इंग्लैंड के सर्वोच्च प्रमुख के रूप में स्थापित कर लिया। उन्होंने धार्मिक आयोजनों व रस्मों को बदल दिया तथा मठों का दमन किया और साथ ही वे कैथलिक धर्मशास्त्र की मूल-शिक्षाओं के समर्थक बने रहे, यहां तक कि रोमन कैथलिक चर्च के साथ उनके निष्कासन के बाद भी। वेल्स ऐक्ट्स एक हज़ार पाँच सौ पैंतीस-एक हज़ार पाँच सौ बयालीस के कानूनों के साथ हेनरी ने इंग्लैंड और वेल्स के वैधानिक मिलन का निर्देशन किया। अपनी युवावस्था में हेनरी एक आकर्षक और करिश्माई पुरुष थे, शिक्षित व परिपूर्ण. कलीसिया अथवा चर्च का अर्थ ईसाई धर्म के अन्तर्गत आने वाले किसी भी धार्मिक संगठन या साम्प्रदाय को कहा जाता है। कलीसिया, का शाब्दिक अर्थ है लोगों का समूह या सभा। कलीसिया कुछ विशेष ईसाइ विश्वासियों का संगठन या समूह, को कहते हैं, जिन्हें ईसाई मान्यता के अनुसार, एकमात्र परमेश्वर में विस्वास हो तथा उनके पुत्र ईसा मसीह पर विश्वास हो। विश्वासियों के इस समुदाय के सदस्य इस तरह देश-काल से परे एक सार्वभौमिक कलीसिया के भाग होते हैं। यह सार्वभौमिक कलीसिया एक वैश्विक समुदाय के समान है जिसमें हर विश्वासी एक अंग का कार्य करता है। . क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह पच्चीस दिसम्बर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से बारह दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, सात से दो ई.पू. "'एन्टिओक का कब्जा"', प्रथम क्रूसयुद्ध के समय के मध्ययुगीय चित्रकर्म से लिया गया यूरोप के ईसाइयों ने एक हज़ार पचानवे और एक हज़ार दो सौ इक्यानवे के बीच अपने धर्म की पवित्र भूमि फिलिस्तीन और उसकी राजधानी जेरूसलम में स्थित ईसा की समाधि का गिरजाघर मुसलमानों से छीनने और अपने अधिकार में करने के प्रयास में जो युद्ध किए उनको सलीबी युद्ध, ईसाई धर्मयुद्ध, क्रूसेड अथवा क्रूश युद्ध कहा जाता है। इतिहासकार ऐसे सात क्रूश युद्ध मानते हैं। . "बिशप" नामक उच्च पद पर नियुक्त एक कैथोलिक पादरी स्पेन में चलती दो ननें कैथोलिक धर्म या रोमन कैथोलिक धर्म ईसाई धर्म की एक मुख्य शाखा है जिसके अनुयायी रोम के वैटिकन नगर में स्थित पोप को अपना धर्माध्यक्ष मानते हैं। ईसाई धर्म की दूसरी मुख्य शाखा प्रोटेस्टैंट कहलाती है और उसके अनुयायी पोप के धार्मिक नेतृत्व को नहीं स्वीकारते। कैथोलिकों और प्रोटेस्टैंटों की धार्मिक मान्यताओं में और भी बड़े अंतर हैं। . कैथोलिक गिरजाघर, जिसे रोमन कैथोलिक गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है, दुनिया का सबसे बड़ा ईसाई गिरजाघर है, दावे के अनुसार इसके सौ करोड़ से अधिक सदस्य हैं।. कैंटरबरी के आर्चबिशप, चर्च ऑफ़ इंग्लैण्ड के एक वरिष्ठ बिशप और प्रमुख होते हैं। वे विश्वविस्तृत आंगलिकाइ ऐक्य और आंगलिकाइ संप्रदाय के चिन्हनात्मक प्रमुख हैं। तथा वे कैंटरबरी के बिशप-क्षेत्र के प्रदेशीय बिशप होते हैं। वर्त्तमान आर्चबिशप, परणपूज्य आर्चबिशप जस्टिन वेल्बी हैं, जिनका पदस्थापन इक्कीस मार्च दो हज़ार तेरह को हुआ था। वेल्बी, एक हज़ार चार सौ वर्ष पुराने इस संसथान के एक सौ पाँचवें पदाधिकारी हैं। इस संसथान की शुरुआत कैंटरबरी के ऑगस्टीन के साथ हुई थी, जिन्हें पाँच सौ सत्तानवे ई॰ में रोम से इंग्लैण्ड, ईसाइयत के प्रचार के लिए भेजा गया था। छःठी शताब्दी में ऑगस्टीन से सोलहवीं शताब्दी तक, कैंटरबरी की आर्चबिशपी, रोम के गिर्जा के साथ एकमत की स्थिति में थी, परंतु अंग्रेज़ी सुधर के बाद, इंग्लैंड की चर्च ने, पोप और रोमन कैथोलिक चर्च के अधिकार से खुद को अलग कर लिया। सुधर से पहले तक, कैंटरबरी कैथेड्रल के बिशप के चुनाव की प्रक्रिया बदलते रहा करती थीःकभी चुनाव द्वारा या कभी पोप द्वारा, अन्यथा इंग्लैंड के शासक द्वारा। सुधरकाल के बाद से, चर्च ऑफ़ इंग्लैंड, मुख्यतः एक राजकीय गिर्जा की हैसियत रखता है, और तत्पश्चात्, आर्चबिशप के नामांकन का आधिकारिक अधिकार ब्रिटिश मुकुट के पास रहा है। वर्त्तमान समय में, कैंटरबरी के आर्चबिशप की नियुक्ति, ब्रिटिश संप्रभु द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर होता है, जोकि दो नामों की अनुसूची में से अगले पदाधिकारी का चुनाव किया करते हैं। . अन्जेल्स एंड डेमन्स अन्ज्लेस एंड डेमोंस दो हज़ारसबसे ज्यादा बिकने वाला एक रहस्यमय रोमांचकारी उपन्यास है; जो अमेरिकी लेखक डैन ब्राउन द्वारा लिखा गया है और पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह काल्पनिक हार्वर्ड यूंनिवेर्सिटी के सिम्बोलोजिस्ट रोबेर्ट लैंगडन की ilumi नामक गुप्त समाज के रहस्यों को उजागर करने और विनाशकारी इलुमिनटी एंटीमीटर का प्रयोग करके वेटिकन सिटी का विनाश करने वाली साजिश का पर्दाफाश करने की इच्छा के चारों और घूमता हैl यह उपन्यास विशेष रूप से धर्म और विज्ञान के बीच ऐतिहासिक संघर्ष को प्रकट करता हैl यह सघर्ष इलुमीनटी और रोमन कैथोलिक चर्च के बीच मे हैl यह उपन्यास राबर्ट लैंगडन नामक पात्र का परिचय देता हैl रॉबर्ट लैंगडन ब्राउन के बाद में आने वाले उपन्यास दो हज़ार तीन काविन्ची कोड और दो हज़ार नौ का उपन्यास लोस्ट सिम्बल के नायकभी हैl इसमें बहुत सारे शेलीगत तत्व हैं - जैसे गुप्त समाज की साजिशें, एक दिन की समय सीमा और केथोलिक चर्च प्राचीन इतिहास, वास्तुकला और प्रतीकों का भी भारी प्रयोग इस पुस्तक में हैंl एक फिल्म अनुकूलन पंद्रह मई दो हज़ार नौ को जारी किया गया था; हालांकि यह दा विंची कोड फिल्म की घटनाओं के बाद किया गया था;जो दो हज़ार छः मैं दिखाई गयी थीl . एक हज़ार चार सौ पचपन ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . |
हाल ही में अखबारों, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फ्रॉड डिलिवरी एग्जीक्यूटिव्स द्वारा ग्राहकों से ओटीपी कलेक्ट करने की रिपोर्ट सामने आई हैं.
Cyber Crime बढ़ने से कारोबारी कस्टमर्स के डाटा को लेकर पहले से ज्यादा अलर्ट और कॉशियस हो गए हैं. Flipkart और Amazon जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों ने कस्टमर्स को अधिक सुरक्षित डिलीवरी की गारंटी देने के लिए One Time Password या OTP (डिलीवरी) प्रक्रिया शुरू की है. हालांकि, फ्रॉडस्टर्स और स्कैमर्स ने इस सुरक्षा का फायदा उठाया है और कस्टमर्स के बैंक अकाउंट्स से पैसे चुराए हैं. हाल ही में अखबारों, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फ्रॉड डिलिवरी एग्जीक्यूटिव्स द्वारा ग्राहकों से ओटीपी कलेक्ट करने की रिपोर्ट सामने आई हैं. आज हम ओटीपी के साथ फ्रॉड करने वाले फेक डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स से बचने के लिए कुछ उपायों के बारे में बात करेंगे.
फेक ओटीपी स्कैम को कैसे रोकें?
- ओटीपी शेयर करने से बचें : ओटीपी किसी से शेयर न करें. आपको फोन/टेक्स्ट/ईमेल के माध्यम से फ्रॉडस्टर्स को ओटीपी प्रदान करने में धोखा दिया जाता है. जालसाज लेन-देन में सहायता करने या बेहतर सेवाएं प्रदान करने के झूठे वादे करके आपको लुभाने की कोशिश करेंगे, और सफल होने पर, वे आपको इलीगल ट्रांजेक्शन करने या यहां तक कि पहचान की चोरी करने के लिए बरगलाएंगे.
- वेरिफिकेशन : जो भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का ओटीपी मांग रहा है उसे हमेशा वेरिफाई करें. ग्राहक टेक्स्ट या ईमेल द्वारा भेजे गए सुरक्षित कोड का उपयोग करके ट्रांजेक्शन को वेरिफाई करते हैं.
- डिलिवरी : ग्राहकों को पैसे का भुगतान करने और डिलीवरी की पुष्टि करने से पहले डिलीवरी पैकेज खोलना सुनिश्चित करना चाहिए.
- ट्रस्ट : किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी मांगने वाले लिंक या वेबसाइटों पर भरोसा न करें. डिलीवरी पर भुगतान पर क्यूआर कोड स्कैन करने से बचने के लिए, विश्वसनीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान करने का प्रयास करें. एक रिपोर्ट के अनुसार फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के मुताबिक 2021 में रिकॉर्ड 8,47,376 शिकायतें मिलीं, जो संभावित नुकसान में 6. बिलियन डॉलर था.
ओटीपी क्या है?
वन-टाइम पासवर्ड, जिसे संक्षेप में ओटीपी कहा जाता है, कैरेक्टर्स की एक ऑटोमैटिकली जेनरेट न्यूमैरिक या अल्फ़ान्यूमेरिक स्ट्रिंग है जो यूजर्स को ट्रांजेक्शन या लॉगिन के लिए प्रमाणित करता है. दूसरे शब्दों में, एक ओटीपी एक पासवर्ड है जो कंप्यूटर सिस्टम या अन्य डिजिटल डिवाइस पर केवल एक लॉगिन सेशन या ट्रांजेक्शन के लिए मान्य होता है.
| हाल ही में अखबारों, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फ्रॉड डिलिवरी एग्जीक्यूटिव्स द्वारा ग्राहकों से ओटीपी कलेक्ट करने की रिपोर्ट सामने आई हैं. Cyber Crime बढ़ने से कारोबारी कस्टमर्स के डाटा को लेकर पहले से ज्यादा अलर्ट और कॉशियस हो गए हैं. Flipkart और Amazon जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों ने कस्टमर्स को अधिक सुरक्षित डिलीवरी की गारंटी देने के लिए One Time Password या OTP प्रक्रिया शुरू की है. हालांकि, फ्रॉडस्टर्स और स्कैमर्स ने इस सुरक्षा का फायदा उठाया है और कस्टमर्स के बैंक अकाउंट्स से पैसे चुराए हैं. हाल ही में अखबारों, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फ्रॉड डिलिवरी एग्जीक्यूटिव्स द्वारा ग्राहकों से ओटीपी कलेक्ट करने की रिपोर्ट सामने आई हैं. आज हम ओटीपी के साथ फ्रॉड करने वाले फेक डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स से बचने के लिए कुछ उपायों के बारे में बात करेंगे. फेक ओटीपी स्कैम को कैसे रोकें? - ओटीपी शेयर करने से बचें : ओटीपी किसी से शेयर न करें. आपको फोन/टेक्स्ट/ईमेल के माध्यम से फ्रॉडस्टर्स को ओटीपी प्रदान करने में धोखा दिया जाता है. जालसाज लेन-देन में सहायता करने या बेहतर सेवाएं प्रदान करने के झूठे वादे करके आपको लुभाने की कोशिश करेंगे, और सफल होने पर, वे आपको इलीगल ट्रांजेक्शन करने या यहां तक कि पहचान की चोरी करने के लिए बरगलाएंगे. - वेरिफिकेशन : जो भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का ओटीपी मांग रहा है उसे हमेशा वेरिफाई करें. ग्राहक टेक्स्ट या ईमेल द्वारा भेजे गए सुरक्षित कोड का उपयोग करके ट्रांजेक्शन को वेरिफाई करते हैं. - डिलिवरी : ग्राहकों को पैसे का भुगतान करने और डिलीवरी की पुष्टि करने से पहले डिलीवरी पैकेज खोलना सुनिश्चित करना चाहिए. - ट्रस्ट : किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी मांगने वाले लिंक या वेबसाइटों पर भरोसा न करें. डिलीवरी पर भुगतान पर क्यूआर कोड स्कैन करने से बचने के लिए, विश्वसनीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान करने का प्रयास करें. एक रिपोर्ट के अनुसार फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के मुताबिक दो हज़ार इक्कीस में रिकॉर्ड आठ,सैंतालीस,तीन सौ छिहत्तर शिकायतें मिलीं, जो संभावित नुकसान में छः. बिलियन डॉलर था. ओटीपी क्या है? वन-टाइम पासवर्ड, जिसे संक्षेप में ओटीपी कहा जाता है, कैरेक्टर्स की एक ऑटोमैटिकली जेनरेट न्यूमैरिक या अल्फ़ान्यूमेरिक स्ट्रिंग है जो यूजर्स को ट्रांजेक्शन या लॉगिन के लिए प्रमाणित करता है. दूसरे शब्दों में, एक ओटीपी एक पासवर्ड है जो कंप्यूटर सिस्टम या अन्य डिजिटल डिवाइस पर केवल एक लॉगिन सेशन या ट्रांजेक्शन के लिए मान्य होता है. |
टहलते-टहलते अचानक आगन्तुक ने पूछा- "यदि अभय प्रदान करें तो क्या एक बात पूछ सकता हूं ?" योगिराज ने कहा - "निःसंकोच पूछ सकते हैं । " आगन्तुक ने विनम्रतापूर्वक पूछा- "सुना है आप घर में बैठ कर ध्यान करते हैं; किन्तु क्या किसी देवता का ध्यान करते हैं ?
योगिराज ने मधुर मुस्कान के साथ कहा - "वह तो जानता नहीं ।"
आगन्तुक ने फिर पूछा- "शिव, कृष्ण, काली इन सब देव-देवी में किसी का ध्यान तो निश्चय ही करते हैं ?"
के योगिराज ने उत्तर दिया- "शिव, कृष्ण, काली, तुम, मैं सब के भीतर जो निवास करते हैं उनका ही ध्यान करता हूं ।"
आगन्तुक ने विस्मय पूर्वक कहा - "आपकी बात में अच्छी तरह समझ नहीं पाया ।"
योगिराज ने कहा - "मैं भी समझा नहीं पाऊँगा और तुम भी नहीं समझ पाओगे ।" ●
अष्टम परिच्छेद लीला-प्रसंग एवं उपदेश
योगिराज द्वारा प्रदर्शित क्रिया योग की साधना जो लोग करते हैं उन्हें क्रियावान अथवा क्रियान्वित कहते हैं। वे क्रियावानों के साथ उनके जीवन के विभिन्न पक्षों पर बातचीत करते हुए समझा दिया करते थे। आहार-निद्रा और मैथुन के सम्बन्ध में सात्विक आहार या भोजन को ही श्रेय दिया करते थे। सात्विक आहार से शरीर मन शान्त रहते हैं । योग-कर्म करने पर अल्पाहारी एवं सहजपाच्य भोजन ग्रहण करना उचित है। अधिक भोजन से योग साधना में विघ्न पड़ता है। अधिक गरम, अधिक ठण्डा, अधिक कड़वा, अधिक चटपटा या तेज बासी इत्यादि खाद्यपदार्थ नहीं लेना चाहिए । पूरा भोजन करने के तीन घन्टे पश्चात् क्रिया साधन करना उचित है । प्रतिदिन पांच-छः घन्टा सोना जरूरी है। विवाहित व्यक्तियों को महीने में दो बार स्त्री प्रसंग या सम्भोग करना अच्छा है। उससे मन शान्त रहता है; साधना भी अच्छी होती
। लेकिन किसी प्रकार का भी यथेच्छ जीवन यापन करना उचित नहीं । काम भाव के आक्रमण करने पर जोर से तीन-चार वार प्राणायाम करना चाहिए । प्रतिदिन दाँत से दाँत दबाकर प्राणायाम या प्राणकर्म करना चाहिए । बलपूर्वक प्राणकर्म करने से शीघ्र ही प्राण स्थिर हो जाता है इसीलिए योगिराज बार-बार सबको याद दिला दिया करते थे "कसके प्राणायाम करना चाहिए ।" उनचास वायुओं में प्राणवायु प्रधान है । प्राणायाम द्वारा मुख्य प्राणवायु के स्थिर होने से ही दूसरे सभी प्राण या वायु स्थिर होते हैं उस समय त्याग और ग्रहण कुछ भी नहीं रहता ।
वे कहा करते थे क्रिया करने के लिए दिशा देश और काल का कोई नियम नहीं है इसके सम्बन्ध में वेदान्त का कथन है - यत्रैकाग्रता तत्वा विशेषात् १ " अर्थात् चित्त की एकाग्रता जहाँ सुगमता से हो सके
१ - ब्रह्मसूत्र : चतुर्थ अध्याय प्रथम पाद ११ वाँ सूत्र : वेदान्त दर्शन :
वहीं बैठकर ध्यान का अभ्यास करना चाहिए । क्रिया करने के लिए दिशा, देश-काल का कोई नियम नहीं । जिस समय या जब शरीर मन स्वस्थ रहे तभी क्रिया करनी चाहिए । एक ही समय पर क्रिया करनी होगी इसका कोई विशेष प्रयोजन नहीं दीखता; किन्तु नव अभ्यासी के पक्ष में नियमपूर्वक करने से चित्त प्रसन्न रहता है, या प्रसन्नचित्तता का बोध होता है। किन्तु क्रिया में स्थिति प्राप्त होने पर कोई नियम आवश्यक नहीं। क्रिया सम्बन्धी ग्रन्थ भी पढ़ना चाहिए । कमर, हृदय एवं कंठ इन तीनों स्थानों को उन्नत या ऊपर की ओर या सीधे रखकर समान वायु के प्रवाह में क्रिया करना चाहिए। इस स्थिति में ब्रह्म-ज्ञान होता है । योगाभ्यासी को प्रातःकाल तड़के स्नान नहीं करना चाहिए और अधिक भार वहन करना, अधिक तेज चलना, कठोर उपवास नहीं करना चाहिये तथा अधिक रात को जागना भी नहीं चाहिये । कहने का मतलब यह कि ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे श्वास प्रश्वास की गति द्रुत (तेज) और लम्बी हो जाए । मेघ गर्जन के समय क्रिया नहीं करनी चाहिए । प्रातःकालीन क्रिया से रात्रि के पापों का क्षय होता है और सायंकालीन क्रिया से दिन के पापों का क्षय होता है । शीतकाल एवं वसन्त ऋतु में अधिक क्रिया करनी चाहिए । अधिक क्रिया करने पर नशा होता है और सिर के पिछले हिस्से में शब्द सुनाई देते हैं उसे ही नाद- ब्रह्म कहते हैं। "प्राणायाममनुमत्त्वा उन्मत्तवत् चरन्ति ।"१ अधिक प्राणायाम के नशे में धुत्त या लीन होकर ब्राह्मी स्थिति प्राप्त करके अनासक्त भाव से संसार में विचरण करना चाहिये । प्राणकर्म करने से ही देवत्व की स्थिति में प्रतिष्ठित हुआ जा सकता
इस क्रिया-योग के पाँच अंग हैं जिन्हें तालव्य, प्राणायाम, नाभिक्रिया, योनिमुद्रा और महामुद्रा कहा जाता है। इन पाँचों अंगों की समष्टि ही क्रियायोग है; किन्तु यह गुह्यतम क्रियायोग का साधन रहस्य गुरु द्वारा ही बोधगम्य होता है। तालव्य के द्वारा जिह्वाग्रन्थि का भेदन होता है; प्राणायाम के द्वारा प्राण एवं अपान वायु स्थिर होती है, नाभिक्रिया द्वारा समान वायु को साम्यावस्था में लाया जाता है। योनिमुद्रा द्वारा आत्मदर्शन होता है एवं महामुद्रा द्वारा व्यान और उदान वायु स्थितावस्था प्राप्त करते हैं । इस प्रकार पंचप्राण पर विजय प्राप्त करके योगी ऊर्ध्व में स्थित शून्यतत्त्व की स्थिति प्राप्त करता है और कर्मातीत अवस्था में पहुँचकर आत्मराज्य में विचरण करने में सक्षम होता है ।
१ - जवलोक उपनिषद | टहलते-टहलते अचानक आगन्तुक ने पूछा- "यदि अभय प्रदान करें तो क्या एक बात पूछ सकता हूं ?" योगिराज ने कहा - "निःसंकोच पूछ सकते हैं । " आगन्तुक ने विनम्रतापूर्वक पूछा- "सुना है आप घर में बैठ कर ध्यान करते हैं; किन्तु क्या किसी देवता का ध्यान करते हैं ? योगिराज ने मधुर मुस्कान के साथ कहा - "वह तो जानता नहीं ।" आगन्तुक ने फिर पूछा- "शिव, कृष्ण, काली इन सब देव-देवी में किसी का ध्यान तो निश्चय ही करते हैं ?" के योगिराज ने उत्तर दिया- "शिव, कृष्ण, काली, तुम, मैं सब के भीतर जो निवास करते हैं उनका ही ध्यान करता हूं ।" आगन्तुक ने विस्मय पूर्वक कहा - "आपकी बात में अच्छी तरह समझ नहीं पाया ।" योगिराज ने कहा - "मैं भी समझा नहीं पाऊँगा और तुम भी नहीं समझ पाओगे ।" ● अष्टम परिच्छेद लीला-प्रसंग एवं उपदेश योगिराज द्वारा प्रदर्शित क्रिया योग की साधना जो लोग करते हैं उन्हें क्रियावान अथवा क्रियान्वित कहते हैं। वे क्रियावानों के साथ उनके जीवन के विभिन्न पक्षों पर बातचीत करते हुए समझा दिया करते थे। आहार-निद्रा और मैथुन के सम्बन्ध में सात्विक आहार या भोजन को ही श्रेय दिया करते थे। सात्विक आहार से शरीर मन शान्त रहते हैं । योग-कर्म करने पर अल्पाहारी एवं सहजपाच्य भोजन ग्रहण करना उचित है। अधिक भोजन से योग साधना में विघ्न पड़ता है। अधिक गरम, अधिक ठण्डा, अधिक कड़वा, अधिक चटपटा या तेज बासी इत्यादि खाद्यपदार्थ नहीं लेना चाहिए । पूरा भोजन करने के तीन घन्टे पश्चात् क्रिया साधन करना उचित है । प्रतिदिन पांच-छः घन्टा सोना जरूरी है। विवाहित व्यक्तियों को महीने में दो बार स्त्री प्रसंग या सम्भोग करना अच्छा है। उससे मन शान्त रहता है; साधना भी अच्छी होती । लेकिन किसी प्रकार का भी यथेच्छ जीवन यापन करना उचित नहीं । काम भाव के आक्रमण करने पर जोर से तीन-चार वार प्राणायाम करना चाहिए । प्रतिदिन दाँत से दाँत दबाकर प्राणायाम या प्राणकर्म करना चाहिए । बलपूर्वक प्राणकर्म करने से शीघ्र ही प्राण स्थिर हो जाता है इसीलिए योगिराज बार-बार सबको याद दिला दिया करते थे "कसके प्राणायाम करना चाहिए ।" उनचास वायुओं में प्राणवायु प्रधान है । प्राणायाम द्वारा मुख्य प्राणवायु के स्थिर होने से ही दूसरे सभी प्राण या वायु स्थिर होते हैं उस समय त्याग और ग्रहण कुछ भी नहीं रहता । वे कहा करते थे क्रिया करने के लिए दिशा देश और काल का कोई नियम नहीं है इसके सम्बन्ध में वेदान्त का कथन है - यत्रैकाग्रता तत्वा विशेषात् एक " अर्थात् चित्त की एकाग्रता जहाँ सुगमता से हो सके एक - ब्रह्मसूत्र : चतुर्थ अध्याय प्रथम पाद ग्यारह वाँ सूत्र : वेदान्त दर्शन : वहीं बैठकर ध्यान का अभ्यास करना चाहिए । क्रिया करने के लिए दिशा, देश-काल का कोई नियम नहीं । जिस समय या जब शरीर मन स्वस्थ रहे तभी क्रिया करनी चाहिए । एक ही समय पर क्रिया करनी होगी इसका कोई विशेष प्रयोजन नहीं दीखता; किन्तु नव अभ्यासी के पक्ष में नियमपूर्वक करने से चित्त प्रसन्न रहता है, या प्रसन्नचित्तता का बोध होता है। किन्तु क्रिया में स्थिति प्राप्त होने पर कोई नियम आवश्यक नहीं। क्रिया सम्बन्धी ग्रन्थ भी पढ़ना चाहिए । कमर, हृदय एवं कंठ इन तीनों स्थानों को उन्नत या ऊपर की ओर या सीधे रखकर समान वायु के प्रवाह में क्रिया करना चाहिए। इस स्थिति में ब्रह्म-ज्ञान होता है । योगाभ्यासी को प्रातःकाल तड़के स्नान नहीं करना चाहिए और अधिक भार वहन करना, अधिक तेज चलना, कठोर उपवास नहीं करना चाहिये तथा अधिक रात को जागना भी नहीं चाहिये । कहने का मतलब यह कि ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे श्वास प्रश्वास की गति द्रुत और लम्बी हो जाए । मेघ गर्जन के समय क्रिया नहीं करनी चाहिए । प्रातःकालीन क्रिया से रात्रि के पापों का क्षय होता है और सायंकालीन क्रिया से दिन के पापों का क्षय होता है । शीतकाल एवं वसन्त ऋतु में अधिक क्रिया करनी चाहिए । अधिक क्रिया करने पर नशा होता है और सिर के पिछले हिस्से में शब्द सुनाई देते हैं उसे ही नाद- ब्रह्म कहते हैं। "प्राणायाममनुमत्त्वा उन्मत्तवत् चरन्ति ।"एक अधिक प्राणायाम के नशे में धुत्त या लीन होकर ब्राह्मी स्थिति प्राप्त करके अनासक्त भाव से संसार में विचरण करना चाहिये । प्राणकर्म करने से ही देवत्व की स्थिति में प्रतिष्ठित हुआ जा सकता इस क्रिया-योग के पाँच अंग हैं जिन्हें तालव्य, प्राणायाम, नाभिक्रिया, योनिमुद्रा और महामुद्रा कहा जाता है। इन पाँचों अंगों की समष्टि ही क्रियायोग है; किन्तु यह गुह्यतम क्रियायोग का साधन रहस्य गुरु द्वारा ही बोधगम्य होता है। तालव्य के द्वारा जिह्वाग्रन्थि का भेदन होता है; प्राणायाम के द्वारा प्राण एवं अपान वायु स्थिर होती है, नाभिक्रिया द्वारा समान वायु को साम्यावस्था में लाया जाता है। योनिमुद्रा द्वारा आत्मदर्शन होता है एवं महामुद्रा द्वारा व्यान और उदान वायु स्थितावस्था प्राप्त करते हैं । इस प्रकार पंचप्राण पर विजय प्राप्त करके योगी ऊर्ध्व में स्थित शून्यतत्त्व की स्थिति प्राप्त करता है और कर्मातीत अवस्था में पहुँचकर आत्मराज्य में विचरण करने में सक्षम होता है । एक - जवलोक उपनिषद |
एशिया और यूरोप पूरा हो गए हैंविपरीत। एक यूरोपीय के लिए यह समझना बहुत मुश्किल है कि एशियाई कैसे अपना जीवन बना रहा है, वह क्या सोचता है, और उसके नियम क्या हैं। लेकिन फिर भी, पूर्वी देश पर्यटकों को उनकी सुंदरता और मौलिकता के साथ आकर्षित करते हैं, और इसके अलावा, कई एशियाई देश सामान्य लोगों के जीवन में पेश किए जाने वाले उच्च स्तर के जीवन और नई प्रौद्योगिकियों का दावा कर सकते हैं। जापान इस संबंध में विशेष रूप से दिलचस्प है। जो लोग उगते सूरज की भूमि में यात्रा करने का आनंद लेते थे, वे कभी भी जापानी ट्रेनों को भूल नहीं पाएंगे, जो कुछ ही मिनटों में कई किलोमीटर की यात्रा करते हैं।
जापान पूर्वी एशिया में स्थित है और कब्जा कर रहा हैलगभग सात हजार द्वीप। यह भौगोलिक सुविधा स्थानीय लोगों के जीवन के पूरे तरीके को प्रभावित करती है। 127 मिलियन लोगों की देश की जनसंख्या बड़े शहरों में रहती है। सभी जापानी लोगों में से केवल पांच प्रतिशत से भी कम महानगर के बाहर रह सकते हैं, और यह विभाजन बहुत सशर्त है। दरअसल, जापान में ऐसे क्षेत्र को ढूंढना मुश्किल होता है जिसका उपयोग राज्य के लाभ के लिए नहीं किया जाएगा। जापानी विभिन्न इमारतों के साथ हर मिलीमीटर भूमि का निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं, नतीजतन, केवल तटीय पट्टियां जो आवधिक बाढ़ के अधीन हैं मुक्त रहती हैं।
लेकिन इस दुर्भाग्य से जापानी ने पहले ही लड़ना सीखा हैकई सालों से, वे कृत्रिम द्वीप बनाने, प्रशांत और दक्षिण चीन सागर में उन्नत हो गए हैं। मुक्त भूमि की गंभीर कमी ने जापान को जल क्षेत्रों के निपटारे के लिए एक उच्च तकनीक कार्यक्रम विकसित करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसने पिछले दशकों में खुद को बहुत अच्छा दिखाया है।
जापानी जीवन की विशेषताएं लोगों को बनाती हैंलगातार देश भर में चल रहा है। हर दिन, हजारों लोग टोक्यो या ओसाका में स्थित अपने कार्यालयों में काम करने के लिए उपनगरों से यात्रा करते हैं। जापानी हाई-स्पीड ट्रेन चोटी के घंटों के दौरान भीड़ से बचने और समय बचाने में मदद करती है।
रूस के लिए, रेल से यात्रा करना मुश्किल हैआरामदायक और तेज़ कहा जाता है। हमारे देश का औसत निवासी, छुट्टी पर जा रहा है, हवाई परिवहन का चयन करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उगते सूरज की भूमि में लोकप्रियता और मांग में सभी रिकॉर्ड जापानी ट्रेनों को हराते हैं। यह एक बहुत ही खास प्रकार का परिवहन है जो केवल कुछ घंटों में 600 किलोमीटर की दूरी को कवर कर सकता है।
हाई-स्पीड ट्रेन और रेलवे इनजापान को "शिंकान्सेन" कहा जाता है। सचमुच, इस नाम का अनुवाद "नई ट्रंक लाइन" के रूप में किया जा सकता है। और वास्तव में, इस रेलवे के निर्माण के दौरान, जापानी ने कई नई तकनीकों का उपयोग किया और पहली बार पारंपरिक प्रकार के रेलवे से दूर चले गए जो उस समय अपनाया गया था।
अब Shinkansen जोड़ता हैजापान के लगभग सभी शहरों, लाइन की लंबाई 27 हजार किलोमीटर से अधिक है। इसके अलावा, रेलवे का 75 प्रतिशत जापान के सबसे बड़े कंपनी - जापान रेलवेस समूह के स्वामित्व में है।
नए रेलवे की आवश्यकताअठारहवीं ग्रीष्मकालीन ओलंपिक से पहले जापान में दिखाई दिया। तथ्य यह है कि उस समय तक रेलवे एक संकीर्ण गेज रेलवे थी। यह तथ्य अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करता है और उद्योग के विकास को काफी हद तक धीमा कर देता है। इसलिए, 1 9 64 में, टोकन और ओसाका को जोड़ने, शिंकान्सेन की पहली पंक्ति लॉन्च की गई थी। रेलवे की लंबाई 500 किलोमीटर से अधिक थी।
उस समय, जापान की हाई-स्पीड ट्रेनों ने सभी को हरायारिकॉर्ड, प्रति घंटे 220 किलोमीटर की गति तक पहुंच रहा है। अर्थव्यवस्था में कठिनाइयों के बावजूद, जापानी सरकार देश में रेलवे उद्योग के विकास के लिए धन आवंटित करने में कामयाब रही। नतीजतन, शिंकानसेन उगते सूरज की भूमि के सबसे चमकदार प्रतीकों में से एक बन गया है।
मूल रूप से हाई स्पीड जापानी ट्रेनेंयात्रियों और कार्गो के परिवहन के साधन के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई गई है। लेकिन इस योजना को बहुत जल्दी छोड़ दिया गया था, और अब शिंकानसेन केवल यात्रियों को ले जा रहा है। रात में, लाइन पूरी तरह से बंद हो जाती है, सुबह छह बजे तक स्टेशनों और रेलवे पटरियों का रखरखाव किया जाता है।
नया राजमार्ग बहुत जल्दी लाने लगालाभ, तीन साल में टिकट की कीमत के कारण पूरी तरह से भुगतान किया गया। अब भी वे बहुत अधिक हैं। उदाहरण के लिए, टोक्यो से ओसाका की यात्रा के लिए एक वयस्क $ 130 का खर्च आएगा। लेकिन जापानियों के लिए, इस तरह की राशि बहुत गंभीर नहीं है, वे आसानी से देश भर में त्वरित और आरामदायक आंदोलन के लिए यह पैसा देते हैं।
अब ज्यादातर जापानी ट्रेनें विकसित हो रही हैं320 किलोमीटर प्रति घंटा की गति। इसके लिए, सभी पुरानी लाइनों को फिर से काम में लाया गया है, लेकिन जापानी अपनी प्रशंसा पर नहीं रुकते हैं। वे नई लाइनों के निर्माण पर काम कर रहे हैं, जिस पर शीर्ष गति 590 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होगी।
दैनिक हाई-स्पीड जापानी ट्रेनें400 हजार यात्रियों को ले जाना। रेलवे उद्योग के तेजी से विकास के कारण जापान में नागरिक उड्डयन में गिरावट आई। घरेलू उड़ानें व्यावहारिक रूप से मांग में नहीं हैं, और वाहक को भारी नुकसान होता है। कई एयरलाइंस यात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे उड़ानों की कीमत न्यूनतम सीमा तक कम हो जाती है।
शिंकानसेन ट्रेनें कैसी दिखती हैं?
पर्यटक जापानी ट्रेनों को "बुलेट" या कहते हैं"प्लैटिपस", जो रचना की उपस्थिति के कारण होता है। इसमें 16 कारें शामिल हैं, हेड कार में थोड़ा लम्बा अग्र भाग है, जो एक टोंटी से मिलता जुलता है। यह ध्यान देने योग्य है कि जापानियों ने अपनी हाई-स्पीड ट्रेनों की उपस्थिति पर बहुत ध्यान दिया। लगभग सभी को हरे या फ़िरोज़ा के रंग के साथ चांदी में चित्रित किया जाता है। शहरी परिदृश्य की पृष्ठभूमि के खिलाफ, यह बहुत प्रभावशाली दिखता है।
एक बार में दस ट्रेनें एक ही लाइन पर काम कर सकती हैं; पीक ऑवर्स के दौरान भी ट्रैफिक की रेंज पांच मिनट से ज्यादा नहीं होती है।
यह ध्यान देने योग्य है कि उनकी गाड़ियों और निकासी के लिएजापानी स्टेशन पूरी तरह से उभर आए। जैसा कि यात्री कहते हैं, सब कुछ सख्ती से सजाया गया है, लेकिन बहुत सुविधाजनक है। प्रत्येक कार में नरम कुर्सियाँ हैं, विशेष वेंडिंग मशीनों में आप कॉफी और अन्य पेय खरीद सकते हैं। यात्रा के दौरान, विशेष लोग दोपहर का भोजन खरीदने की पेशकश करते हैं। और, पर्यटकों की समीक्षाओं को देखते हुए, मेनू बहुत विविध है। आप पारंपरिक जापानी व्यंजन, जैसे सुशी और साधारण सैंडविच की कोशिश कर सकते हैं, जिसे दुनिया भर में जाना जाता है।
केवल एक चीज जो दौरान कृपया नहीं होगीयात्रा, तो खिड़की के बाहर परिदृश्य है। लगभग पूरा मार्ग शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यात्रा के दौरान परिदृश्य नहीं बदलता है, और जापान के लिए कुछ सुंदर और पारंपरिक देखना मुश्किल है। यदि आप सर्दियों में उगते सूरज की भूमि में पहुंचते हैं, तो ध्यान रखें कि सुंदर सर्दियों और जापानी ट्रेनें बिल्कुल असंगत हैं। आप बर्फ से ढके बगीचों का आनंद नहीं ले सकते हैं, हालांकि उनके दोहराया विचार जापान के व्यापार कार्डों में से एक हैं। जापानी उद्यानों की सभी सुंदरता शहर के पार्कों में केंद्रित है, उनकी सीमाओं से परे एक सुस्त औद्योगिक परिदृश्य पर्यटक की आंखों को दिखाई देगा।
जिन स्टेशनों पर ट्रेनें रुकती हैं, उनका प्रदर्शन किया जाता है।बहुत सख्त है, लेकिन अंदर नेविगेट करना मुश्किल नहीं है। प्रत्येक स्टेशन पर बहुत सारे पॉइंटर्स, अलग-अलग रंगों में बनाए गए हैं। यहां तक कि सहज रूप से एक पर्यटक समझ सकता है कि यात्रा के लिए टिकट कहां जाना है और कहां जाना है।
लगभग लाखों की पूरी आबादी के बाद सेदेश हाई-स्पीड ट्रेनों की सेवाओं का उपयोग करता है, यह आश्चर्य की बात नहीं है कि हर जापानी का जीवन उनके साथ जुड़ा हुआ है। जापानी इरोटोमैन की कहानियां, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए महसूस करने के लिए भीड़ के घंटे में यात्रा करती हैं, मीडिया में सबसे अच्छी तरह से जानी जाती हैं।
तथ्य यह है कि लोगों के वैगनों में चरम घंटों के दौरानशाब्दिक रूप से नीचे गिरा। स्टेशनों पर, यहां तक कि विशेष रूप से प्रशिक्षित लोग भी हैं। वे मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर समान रूप से अच्छी तरह से काम करते हैं, जहां कुछ घंटों में एक ही समय में कई हजार लोग इकट्ठा होते हैं।
एक-दूसरे के साथ ऐसी निकटता, जिसमें अपनाया नहीं गयाजापान, एक विशेष प्रकार के विकृति के विकास के लिए प्रेरणा था - भावना। जापानी पुरुष महिला के करीब स्थित होते हैं और उसके अंतरंग स्थानों को छूने की कोशिश करते हैं, और कई इसे जानबूझकर अशिष्ट और अभिमानी करते हैं। इससे यह तथ्य सामने आया कि रेलवे परिवहन के समय में "जापानी आनंद ट्रेन" कहा जाने लगा। इस तरह की हिंसा कई दशकों तक चली और दो हजार की शुरुआत तक अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई। हिरासत में लिए गए लोगों द्वारा लाए गए पुलिसकर्मियों ने उन्हें "टिक" या "चिकन्स" कहा। वर्ष के दौरान, पुलिस दो हज़ार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी करती है, अक्सर महिलाएं उन्हें अपने साथ ले जाती हैं। जापानी महिलाएं अब ऐसे मामलों में शर्मिंदा नहीं हैं और सक्रिय रूप से गड़बड़ियों के खिलाफ लड़ रही हैं। हालांकि, महिलाओं की राय में, ट्रेनों में टिकनों की संख्या कम नहीं हुई है। इसके अलावा, उनकी संख्या केवल हर साल बढ़ती है।
कार "केवल महिलाओं के लिए"
पर्चों से लड़ने के लिए,जापानी सरकार ने एक प्रयोग के रूप में विशेष महिला वैगनों की शुरुआत की। वे सुबह और शाम घंटों तक दौड़ते हैं। छुट्टियों पर, एक ट्रेन में "केवल महिलाओं के लिए" एक लेबल वाली दो कारें शामिल हैं।
जापानियों द्वारा इस प्रथा की बहुत प्रशंसा की जाती है। वे टिक के बारे में चिंता किए बिना सुरक्षित रूप से हाई-स्पीड ट्रेनों की सवारी कर सकते हैं। महिला और बच्चों के साथ विकलांग लोग या तो सेक्स की सवारी कर सकते हैं। प्रारंभ में, इन कारों को सबसे लोकप्रिय मार्गों पर पेश किया गया था, लेकिन अब देश के किसी भी रेलवे मार्ग पर "केवल महिलाओं के लिए" कारें देखी जा सकती हैं।
जापान में हाल के वर्षों में, जनसंख्या सक्रिय रूप से हुई हैमेगासिटी में कदम रखते ही गाँव खाली हो जाते हैं और कुछ स्टेशन बंद हो जाते हैं। ऐसे मामले हैं जब उपनगरों से आने वाली ट्रेन में जापानी छात्राओं ने यात्रियों की एकमात्र श्रेणी का गठन किया। रेलवे कंपनियों के लिए इस तरह के मार्ग बहुत ही लाभकारी हैं, लेकिन वे तब तक बंद नहीं होते हैं जब तक कि स्कूली छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर लेती हैं। लोगों के लिए ऐसी चिंता जापान और उसकी सरकार की बहुत विशेषता है।
जापान में हाई-स्पीड ट्रेनों को विभाजित किया गया हैकई प्रकार, वे कारों की श्रेणी, टिकट की गति और कीमत में भिन्न होते हैं। सबसे महंगी और आरामदायक "नोज़ोमी" हैं। ये ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति में सक्षम हैं। उनके मार्ग पर स्टॉप की संख्या सीमित है, कई पर्यटक उन्हें एक्सप्रेस मानते हैं। ऐसी रचनाओं में कारें जापान में सबसे अधिक आरामदायक हैं, उनका डिज़ाइन उन्नत कंपनियों द्वारा किया जाता है, जो जापानी निगमों पर अपने काम के लिए जानी जाती हैं।
दूसरी श्रेणी में "शिकारी" शामिल है। वे थोड़ा और रुकते हैं, उनके मार्ग के टिकटों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। लेकिन क्लास की कारें "नोज़ोमी" से बहुत अलग नहीं हैं, इसके अलावा, यात्रा के समय में केवल 30 मिनट की वृद्धि होती है।
कोडामा सबसे धीमी ट्रेनें हैं, वेसभी प्रमुख स्टेशनों पर रुकें, जो सड़क पर बिताए समय को काफी बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, "नोज़ोमी" और "कोडामा" के बीच एक ही मार्ग पर समय का अंतर एक-डेढ़ घंटा है।
जापानी विशेषज्ञ लगातार काम कर रहे हैंपरिवहन के देश में इतना लोकप्रिय सुधार। पहले से ही लाइनें हैं जो चुंबकीय ट्रेन को चलाती हैं। हालाँकि, जबकि इस प्रकार का सार्वजनिक परिवहन प्रायोगिक स्तर पर है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि प्रयोग पहले से ही बहुत सफल साबित हुआ है। उदाहरण के लिए, परीक्षण मोड में लॉन्च की गई नई जापानी ट्रेन, 600 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को पार करने में सफल रही। जापान में प्रमुख शहरों के बीच नियमित रूप से कई चुंबकीय कुशन ट्रेनें पहले से चल रही हैं, लेकिन उनकी गति 500 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं है।
यह संभावना है कि भविष्य में देश के सभी रेलवे परिचालन के एक नए मोड में स्थानांतरित हो जाएंगे, और जापानी ट्रेनें फिर से सभी इंटरनेट रिकॉर्डों को हराएंगी।
जापान के द्वीप स्थान ने विशेषज्ञों को दायर कियापानी के नीचे सुरंग बनाने का विचार है, जो भूमि रेलवे और सबवे को उतारने की अनुमति देगा। यह परियोजना अभी भी चल रही है, लेकिन यह पहले से ही ज्ञात है कि यह होक्काइडो द्वीप के साथ प्रमुख शहरों को जोड़ेगी, और लाइन की लंबाई 54 किलोमीटर होगी।
जापानी विशेषज्ञों की योजना सभी को खत्म करने की हैअगले साल तक की गणना, और चार साल बाद एक नए हाई-स्पीड राजमार्ग का निर्माण शुरू करने के लिए, जो सगुरु स्ट्रेट के तहत होगा।
| एशिया और यूरोप पूरा हो गए हैंविपरीत। एक यूरोपीय के लिए यह समझना बहुत मुश्किल है कि एशियाई कैसे अपना जीवन बना रहा है, वह क्या सोचता है, और उसके नियम क्या हैं। लेकिन फिर भी, पूर्वी देश पर्यटकों को उनकी सुंदरता और मौलिकता के साथ आकर्षित करते हैं, और इसके अलावा, कई एशियाई देश सामान्य लोगों के जीवन में पेश किए जाने वाले उच्च स्तर के जीवन और नई प्रौद्योगिकियों का दावा कर सकते हैं। जापान इस संबंध में विशेष रूप से दिलचस्प है। जो लोग उगते सूरज की भूमि में यात्रा करने का आनंद लेते थे, वे कभी भी जापानी ट्रेनों को भूल नहीं पाएंगे, जो कुछ ही मिनटों में कई किलोमीटर की यात्रा करते हैं। जापान पूर्वी एशिया में स्थित है और कब्जा कर रहा हैलगभग सात हजार द्वीप। यह भौगोलिक सुविधा स्थानीय लोगों के जीवन के पूरे तरीके को प्रभावित करती है। एक सौ सत्ताईस मिलियन लोगों की देश की जनसंख्या बड़े शहरों में रहती है। सभी जापानी लोगों में से केवल पांच प्रतिशत से भी कम महानगर के बाहर रह सकते हैं, और यह विभाजन बहुत सशर्त है। दरअसल, जापान में ऐसे क्षेत्र को ढूंढना मुश्किल होता है जिसका उपयोग राज्य के लाभ के लिए नहीं किया जाएगा। जापानी विभिन्न इमारतों के साथ हर मिलीमीटर भूमि का निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं, नतीजतन, केवल तटीय पट्टियां जो आवधिक बाढ़ के अधीन हैं मुक्त रहती हैं। लेकिन इस दुर्भाग्य से जापानी ने पहले ही लड़ना सीखा हैकई सालों से, वे कृत्रिम द्वीप बनाने, प्रशांत और दक्षिण चीन सागर में उन्नत हो गए हैं। मुक्त भूमि की गंभीर कमी ने जापान को जल क्षेत्रों के निपटारे के लिए एक उच्च तकनीक कार्यक्रम विकसित करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसने पिछले दशकों में खुद को बहुत अच्छा दिखाया है। जापानी जीवन की विशेषताएं लोगों को बनाती हैंलगातार देश भर में चल रहा है। हर दिन, हजारों लोग टोक्यो या ओसाका में स्थित अपने कार्यालयों में काम करने के लिए उपनगरों से यात्रा करते हैं। जापानी हाई-स्पीड ट्रेन चोटी के घंटों के दौरान भीड़ से बचने और समय बचाने में मदद करती है। रूस के लिए, रेल से यात्रा करना मुश्किल हैआरामदायक और तेज़ कहा जाता है। हमारे देश का औसत निवासी, छुट्टी पर जा रहा है, हवाई परिवहन का चयन करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उगते सूरज की भूमि में लोकप्रियता और मांग में सभी रिकॉर्ड जापानी ट्रेनों को हराते हैं। यह एक बहुत ही खास प्रकार का परिवहन है जो केवल कुछ घंटों में छः सौ किलोग्राममीटर की दूरी को कवर कर सकता है। हाई-स्पीड ट्रेन और रेलवे इनजापान को "शिंकान्सेन" कहा जाता है। सचमुच, इस नाम का अनुवाद "नई ट्रंक लाइन" के रूप में किया जा सकता है। और वास्तव में, इस रेलवे के निर्माण के दौरान, जापानी ने कई नई तकनीकों का उपयोग किया और पहली बार पारंपरिक प्रकार के रेलवे से दूर चले गए जो उस समय अपनाया गया था। अब Shinkansen जोड़ता हैजापान के लगभग सभी शहरों, लाइन की लंबाई सत्ताईस हजार किलोमीटर से अधिक है। इसके अलावा, रेलवे का पचहत्तर प्रतिशत जापान के सबसे बड़े कंपनी - जापान रेलवेस समूह के स्वामित्व में है। नए रेलवे की आवश्यकताअठारहवीं ग्रीष्मकालीन ओलंपिक से पहले जापान में दिखाई दिया। तथ्य यह है कि उस समय तक रेलवे एक संकीर्ण गेज रेलवे थी। यह तथ्य अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करता है और उद्योग के विकास को काफी हद तक धीमा कर देता है। इसलिए, एक नौ चौंसठ में, टोकन और ओसाका को जोड़ने, शिंकान्सेन की पहली पंक्ति लॉन्च की गई थी। रेलवे की लंबाई पाँच सौ किलोग्राममीटर से अधिक थी। उस समय, जापान की हाई-स्पीड ट्रेनों ने सभी को हरायारिकॉर्ड, प्रति घंटे दो सौ बीस किलोग्राममीटर की गति तक पहुंच रहा है। अर्थव्यवस्था में कठिनाइयों के बावजूद, जापानी सरकार देश में रेलवे उद्योग के विकास के लिए धन आवंटित करने में कामयाब रही। नतीजतन, शिंकानसेन उगते सूरज की भूमि के सबसे चमकदार प्रतीकों में से एक बन गया है। मूल रूप से हाई स्पीड जापानी ट्रेनेंयात्रियों और कार्गो के परिवहन के साधन के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई गई है। लेकिन इस योजना को बहुत जल्दी छोड़ दिया गया था, और अब शिंकानसेन केवल यात्रियों को ले जा रहा है। रात में, लाइन पूरी तरह से बंद हो जाती है, सुबह छह बजे तक स्टेशनों और रेलवे पटरियों का रखरखाव किया जाता है। नया राजमार्ग बहुत जल्दी लाने लगालाभ, तीन साल में टिकट की कीमत के कारण पूरी तरह से भुगतान किया गया। अब भी वे बहुत अधिक हैं। उदाहरण के लिए, टोक्यो से ओसाका की यात्रा के लिए एक वयस्क एक सौ तीस डॉलर का खर्च आएगा। लेकिन जापानियों के लिए, इस तरह की राशि बहुत गंभीर नहीं है, वे आसानी से देश भर में त्वरित और आरामदायक आंदोलन के लिए यह पैसा देते हैं। अब ज्यादातर जापानी ट्रेनें विकसित हो रही हैंतीन सौ बीस किलोग्राममीटर प्रति घंटा की गति। इसके लिए, सभी पुरानी लाइनों को फिर से काम में लाया गया है, लेकिन जापानी अपनी प्रशंसा पर नहीं रुकते हैं। वे नई लाइनों के निर्माण पर काम कर रहे हैं, जिस पर शीर्ष गति पाँच सौ नब्बे किलोग्राममीटर प्रति घंटे से अधिक होगी। दैनिक हाई-स्पीड जापानी ट्रेनेंचार सौ हजार यात्रियों को ले जाना। रेलवे उद्योग के तेजी से विकास के कारण जापान में नागरिक उड्डयन में गिरावट आई। घरेलू उड़ानें व्यावहारिक रूप से मांग में नहीं हैं, और वाहक को भारी नुकसान होता है। कई एयरलाइंस यात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे उड़ानों की कीमत न्यूनतम सीमा तक कम हो जाती है। शिंकानसेन ट्रेनें कैसी दिखती हैं? पर्यटक जापानी ट्रेनों को "बुलेट" या कहते हैं"प्लैटिपस", जो रचना की उपस्थिति के कारण होता है। इसमें सोलह कारें शामिल हैं, हेड कार में थोड़ा लम्बा अग्र भाग है, जो एक टोंटी से मिलता जुलता है। यह ध्यान देने योग्य है कि जापानियों ने अपनी हाई-स्पीड ट्रेनों की उपस्थिति पर बहुत ध्यान दिया। लगभग सभी को हरे या फ़िरोज़ा के रंग के साथ चांदी में चित्रित किया जाता है। शहरी परिदृश्य की पृष्ठभूमि के खिलाफ, यह बहुत प्रभावशाली दिखता है। एक बार में दस ट्रेनें एक ही लाइन पर काम कर सकती हैं; पीक ऑवर्स के दौरान भी ट्रैफिक की रेंज पांच मिनट से ज्यादा नहीं होती है। यह ध्यान देने योग्य है कि उनकी गाड़ियों और निकासी के लिएजापानी स्टेशन पूरी तरह से उभर आए। जैसा कि यात्री कहते हैं, सब कुछ सख्ती से सजाया गया है, लेकिन बहुत सुविधाजनक है। प्रत्येक कार में नरम कुर्सियाँ हैं, विशेष वेंडिंग मशीनों में आप कॉफी और अन्य पेय खरीद सकते हैं। यात्रा के दौरान, विशेष लोग दोपहर का भोजन खरीदने की पेशकश करते हैं। और, पर्यटकों की समीक्षाओं को देखते हुए, मेनू बहुत विविध है। आप पारंपरिक जापानी व्यंजन, जैसे सुशी और साधारण सैंडविच की कोशिश कर सकते हैं, जिसे दुनिया भर में जाना जाता है। केवल एक चीज जो दौरान कृपया नहीं होगीयात्रा, तो खिड़की के बाहर परिदृश्य है। लगभग पूरा मार्ग शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यात्रा के दौरान परिदृश्य नहीं बदलता है, और जापान के लिए कुछ सुंदर और पारंपरिक देखना मुश्किल है। यदि आप सर्दियों में उगते सूरज की भूमि में पहुंचते हैं, तो ध्यान रखें कि सुंदर सर्दियों और जापानी ट्रेनें बिल्कुल असंगत हैं। आप बर्फ से ढके बगीचों का आनंद नहीं ले सकते हैं, हालांकि उनके दोहराया विचार जापान के व्यापार कार्डों में से एक हैं। जापानी उद्यानों की सभी सुंदरता शहर के पार्कों में केंद्रित है, उनकी सीमाओं से परे एक सुस्त औद्योगिक परिदृश्य पर्यटक की आंखों को दिखाई देगा। जिन स्टेशनों पर ट्रेनें रुकती हैं, उनका प्रदर्शन किया जाता है।बहुत सख्त है, लेकिन अंदर नेविगेट करना मुश्किल नहीं है। प्रत्येक स्टेशन पर बहुत सारे पॉइंटर्स, अलग-अलग रंगों में बनाए गए हैं। यहां तक कि सहज रूप से एक पर्यटक समझ सकता है कि यात्रा के लिए टिकट कहां जाना है और कहां जाना है। लगभग लाखों की पूरी आबादी के बाद सेदेश हाई-स्पीड ट्रेनों की सेवाओं का उपयोग करता है, यह आश्चर्य की बात नहीं है कि हर जापानी का जीवन उनके साथ जुड़ा हुआ है। जापानी इरोटोमैन की कहानियां, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए महसूस करने के लिए भीड़ के घंटे में यात्रा करती हैं, मीडिया में सबसे अच्छी तरह से जानी जाती हैं। तथ्य यह है कि लोगों के वैगनों में चरम घंटों के दौरानशाब्दिक रूप से नीचे गिरा। स्टेशनों पर, यहां तक कि विशेष रूप से प्रशिक्षित लोग भी हैं। वे मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर समान रूप से अच्छी तरह से काम करते हैं, जहां कुछ घंटों में एक ही समय में कई हजार लोग इकट्ठा होते हैं। एक-दूसरे के साथ ऐसी निकटता, जिसमें अपनाया नहीं गयाजापान, एक विशेष प्रकार के विकृति के विकास के लिए प्रेरणा था - भावना। जापानी पुरुष महिला के करीब स्थित होते हैं और उसके अंतरंग स्थानों को छूने की कोशिश करते हैं, और कई इसे जानबूझकर अशिष्ट और अभिमानी करते हैं। इससे यह तथ्य सामने आया कि रेलवे परिवहन के समय में "जापानी आनंद ट्रेन" कहा जाने लगा। इस तरह की हिंसा कई दशकों तक चली और दो हजार की शुरुआत तक अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई। हिरासत में लिए गए लोगों द्वारा लाए गए पुलिसकर्मियों ने उन्हें "टिक" या "चिकन्स" कहा। वर्ष के दौरान, पुलिस दो हज़ार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी करती है, अक्सर महिलाएं उन्हें अपने साथ ले जाती हैं। जापानी महिलाएं अब ऐसे मामलों में शर्मिंदा नहीं हैं और सक्रिय रूप से गड़बड़ियों के खिलाफ लड़ रही हैं। हालांकि, महिलाओं की राय में, ट्रेनों में टिकनों की संख्या कम नहीं हुई है। इसके अलावा, उनकी संख्या केवल हर साल बढ़ती है। कार "केवल महिलाओं के लिए" पर्चों से लड़ने के लिए,जापानी सरकार ने एक प्रयोग के रूप में विशेष महिला वैगनों की शुरुआत की। वे सुबह और शाम घंटों तक दौड़ते हैं। छुट्टियों पर, एक ट्रेन में "केवल महिलाओं के लिए" एक लेबल वाली दो कारें शामिल हैं। जापानियों द्वारा इस प्रथा की बहुत प्रशंसा की जाती है। वे टिक के बारे में चिंता किए बिना सुरक्षित रूप से हाई-स्पीड ट्रेनों की सवारी कर सकते हैं। महिला और बच्चों के साथ विकलांग लोग या तो सेक्स की सवारी कर सकते हैं। प्रारंभ में, इन कारों को सबसे लोकप्रिय मार्गों पर पेश किया गया था, लेकिन अब देश के किसी भी रेलवे मार्ग पर "केवल महिलाओं के लिए" कारें देखी जा सकती हैं। जापान में हाल के वर्षों में, जनसंख्या सक्रिय रूप से हुई हैमेगासिटी में कदम रखते ही गाँव खाली हो जाते हैं और कुछ स्टेशन बंद हो जाते हैं। ऐसे मामले हैं जब उपनगरों से आने वाली ट्रेन में जापानी छात्राओं ने यात्रियों की एकमात्र श्रेणी का गठन किया। रेलवे कंपनियों के लिए इस तरह के मार्ग बहुत ही लाभकारी हैं, लेकिन वे तब तक बंद नहीं होते हैं जब तक कि स्कूली छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर लेती हैं। लोगों के लिए ऐसी चिंता जापान और उसकी सरकार की बहुत विशेषता है। जापान में हाई-स्पीड ट्रेनों को विभाजित किया गया हैकई प्रकार, वे कारों की श्रेणी, टिकट की गति और कीमत में भिन्न होते हैं। सबसे महंगी और आरामदायक "नोज़ोमी" हैं। ये ट्रेनें तीन सौ किलोग्राममीटर प्रति घंटे से अधिक की गति में सक्षम हैं। उनके मार्ग पर स्टॉप की संख्या सीमित है, कई पर्यटक उन्हें एक्सप्रेस मानते हैं। ऐसी रचनाओं में कारें जापान में सबसे अधिक आरामदायक हैं, उनका डिज़ाइन उन्नत कंपनियों द्वारा किया जाता है, जो जापानी निगमों पर अपने काम के लिए जानी जाती हैं। दूसरी श्रेणी में "शिकारी" शामिल है। वे थोड़ा और रुकते हैं, उनके मार्ग के टिकटों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। लेकिन क्लास की कारें "नोज़ोमी" से बहुत अलग नहीं हैं, इसके अलावा, यात्रा के समय में केवल तीस मिनट की वृद्धि होती है। कोडामा सबसे धीमी ट्रेनें हैं, वेसभी प्रमुख स्टेशनों पर रुकें, जो सड़क पर बिताए समय को काफी बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, "नोज़ोमी" और "कोडामा" के बीच एक ही मार्ग पर समय का अंतर एक-डेढ़ घंटा है। जापानी विशेषज्ञ लगातार काम कर रहे हैंपरिवहन के देश में इतना लोकप्रिय सुधार। पहले से ही लाइनें हैं जो चुंबकीय ट्रेन को चलाती हैं। हालाँकि, जबकि इस प्रकार का सार्वजनिक परिवहन प्रायोगिक स्तर पर है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि प्रयोग पहले से ही बहुत सफल साबित हुआ है। उदाहरण के लिए, परीक्षण मोड में लॉन्च की गई नई जापानी ट्रेन, छः सौ किलोग्राममीटर प्रति घंटे की गति को पार करने में सफल रही। जापान में प्रमुख शहरों के बीच नियमित रूप से कई चुंबकीय कुशन ट्रेनें पहले से चल रही हैं, लेकिन उनकी गति पाँच सौ किलोग्राममीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं है। यह संभावना है कि भविष्य में देश के सभी रेलवे परिचालन के एक नए मोड में स्थानांतरित हो जाएंगे, और जापानी ट्रेनें फिर से सभी इंटरनेट रिकॉर्डों को हराएंगी। जापान के द्वीप स्थान ने विशेषज्ञों को दायर कियापानी के नीचे सुरंग बनाने का विचार है, जो भूमि रेलवे और सबवे को उतारने की अनुमति देगा। यह परियोजना अभी भी चल रही है, लेकिन यह पहले से ही ज्ञात है कि यह होक्काइडो द्वीप के साथ प्रमुख शहरों को जोड़ेगी, और लाइन की लंबाई चौवन किलोग्राममीटर होगी। जापानी विशेषज्ञों की योजना सभी को खत्म करने की हैअगले साल तक की गणना, और चार साल बाद एक नए हाई-स्पीड राजमार्ग का निर्माण शुरू करने के लिए, जो सगुरु स्ट्रेट के तहत होगा। |
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन्हें क्या खिलाया जा रहा हैं यह बहुत मायने रखता हैं। बच्चों के खानपान में पोषक तत्व युक्त कई आहार शामिल किए जाते हैं जिनमे से एक हैं नारियल पानी (Coconut Water) । इसमें उच्च मात्रा में पोटेशियम, सोडियम और नैचुरल शुगर होता है।
हालांकि, पेरेंट्स इस विचार में रहते हैं कि क्या बच्चों को नारियल पानी (Coconut Water) पिलाना चाहिए? तो आपको बता दें कि बच्चों को रोजाना नारियल पानी देने से ये बार-बार होने वाले एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मदद करता है और कई तरह की परेशानियों से निजात दिलाते हैं। आज इस कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि नारियल पानी (Coconut Water) का सेवन कैसे बच्चों को फायदा पहुंचाएगा।
नारियल पानी (Coconut Water) पीने से बच्चे की स्किन को नमी मिलती है और त्वचा से अतिरिक्त तेल खत्म होता है। नारियल पानी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-माइक्रोब्रियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं जो स्किन के इंफेक्शन से बचाते हैं। अगर बच्चे को टीएनज उम्र में एक्ने और दाग-धब्बे हो रहे हैं, तो उसे रोज नारियल पानी पिलाना शुरू करें।
बच्चों को अक्सर कब्ज की शिकायत हो जाती है जिसे नारियल पानी से दूर किया जा सकता है। नारियल पानी में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन में सुधार कर बार-बार होने वाले एसिड रिफलक्स को कम करता है। नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट करता है और शरीर को हाइड्रेट करने का नारियल पानी से बेहतर और कोई एनर्जी ड्रिंक नहीं है। इसमें उच्च मात्रा में पोटेशियम, सोडियम और नैचुरल शुगर होता है। यह बच्चे को डिहाइड्रेशन से बचा सकता है।
नारियल पानी में उच्च मात्रा में कैल्शियम होता है जिससे बच्चों की हड्डियां मजबूत और स्वस्थ बनती हैं। बच्चों में मूत्र मार्ग में संक्रमण का भी खतरा रहता है। नारियल पानी पीने से बच्चों में मूत्र मार्ग में इंफेक्शन का इलाज हो सकता है क्योंकि यह मूत्रवद्र्धक का काम करता है। इसका पौष्टिक पानी बच्चे के मूत्राशय से इंफेक्शन को निकाल देता है और पथरी होने के खतरे को कम कर देता है।
बच्चे में डायरिया के हल्के लक्षण होने पर होम मेड ग्लूकोज इलेक्ट्रोलाइट के तौर पर बच्चे को नारियल पानी पिलाया जा सकता है। नारियल पानी बच्चे के शरीर में तरल पदार्थों का स्तर संतुलित रख सकता है। इस आधार पर नारियल पानी को डायरिया के उपचार के लिए मददगार माना जा सकता है।
नारियल पानी में सोडियम और हेल्दी शुगर कंटेंट पाया जाता है। । इन पोषक तत्वों की उच्च मात्रा से शरीर हाइड्रेट रहता है और पानी की कमी की पूर्ति होती है। नियमित तौर पर बच्चों को नारियल पिलाने से उनके शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ाने में मदद मिलती है।
बच्चे की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी नारियल पानी सहायक हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, नारियल पानी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत हो सकता है। इससे सामान्य सर्दी-जुकाम और फ्लू की समस्या दूर की जा सकती है। ऐसे में बच्चे में सर्दी-जुकाम के घरेलू उपचार के लिए नारियल पानी का सेवन करना लाभकारी हो सकता है।
कई बार छोटे बच्चों को अक्सर पेट में कीड़ों की समस्या हो जाती है। पेट के कीड़ों से निजात पाने में भी नारियल पानी मददगार साबित हो सकता है। पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए रोजाना सुबह नारियल पानी पिलाना चाहिए।
बच्चों को कब, कितना और कैसे पिलाएं नारियल पानी (Coconut Water)?
एक हरे व ताजे नारियल में औसतन 250 से 300 मिलीलीटर पानी हो सकता है। ऐसे में एक नारियल का पानी (Coconut Water) दो या तीन हिस्सों में बांट कर बच्चे को दिनभर में दो से तीन बार में पिला सकते हैं। इसके साथ ही इस बात को भी ध्यान में रखना जरूरी है कि बच्चे के नारियल पानी में चीनी या किसी अन्य हेल्थ ड्रिंक पाउडर को न मिलाएं। बच्चे को सादा नारियल पानी पीने के लिए दें।
छोटे बच्चों को प्रतिदिन ढाई मिलीलीटर नारियल पानी पिलाने से शरीर को 45 से 60 कैलोरी मिलती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक बच्चों को 1 साल के बाद नारियल पीना देना बिल्कुल सुरक्षित है। 1 साल की उम्र से कम के बच्चों को मां के दूध के अलावा कुछ और नहीं देना चाहिए।
| बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन्हें क्या खिलाया जा रहा हैं यह बहुत मायने रखता हैं। बच्चों के खानपान में पोषक तत्व युक्त कई आहार शामिल किए जाते हैं जिनमे से एक हैं नारियल पानी । इसमें उच्च मात्रा में पोटेशियम, सोडियम और नैचुरल शुगर होता है। हालांकि, पेरेंट्स इस विचार में रहते हैं कि क्या बच्चों को नारियल पानी पिलाना चाहिए? तो आपको बता दें कि बच्चों को रोजाना नारियल पानी देने से ये बार-बार होने वाले एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मदद करता है और कई तरह की परेशानियों से निजात दिलाते हैं। आज इस कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि नारियल पानी का सेवन कैसे बच्चों को फायदा पहुंचाएगा। नारियल पानी पीने से बच्चे की स्किन को नमी मिलती है और त्वचा से अतिरिक्त तेल खत्म होता है। नारियल पानी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-माइक्रोब्रियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं जो स्किन के इंफेक्शन से बचाते हैं। अगर बच्चे को टीएनज उम्र में एक्ने और दाग-धब्बे हो रहे हैं, तो उसे रोज नारियल पानी पिलाना शुरू करें। बच्चों को अक्सर कब्ज की शिकायत हो जाती है जिसे नारियल पानी से दूर किया जा सकता है। नारियल पानी में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन में सुधार कर बार-बार होने वाले एसिड रिफलक्स को कम करता है। नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट करता है और शरीर को हाइड्रेट करने का नारियल पानी से बेहतर और कोई एनर्जी ड्रिंक नहीं है। इसमें उच्च मात्रा में पोटेशियम, सोडियम और नैचुरल शुगर होता है। यह बच्चे को डिहाइड्रेशन से बचा सकता है। नारियल पानी में उच्च मात्रा में कैल्शियम होता है जिससे बच्चों की हड्डियां मजबूत और स्वस्थ बनती हैं। बच्चों में मूत्र मार्ग में संक्रमण का भी खतरा रहता है। नारियल पानी पीने से बच्चों में मूत्र मार्ग में इंफेक्शन का इलाज हो सकता है क्योंकि यह मूत्रवद्र्धक का काम करता है। इसका पौष्टिक पानी बच्चे के मूत्राशय से इंफेक्शन को निकाल देता है और पथरी होने के खतरे को कम कर देता है। बच्चे में डायरिया के हल्के लक्षण होने पर होम मेड ग्लूकोज इलेक्ट्रोलाइट के तौर पर बच्चे को नारियल पानी पिलाया जा सकता है। नारियल पानी बच्चे के शरीर में तरल पदार्थों का स्तर संतुलित रख सकता है। इस आधार पर नारियल पानी को डायरिया के उपचार के लिए मददगार माना जा सकता है। नारियल पानी में सोडियम और हेल्दी शुगर कंटेंट पाया जाता है। । इन पोषक तत्वों की उच्च मात्रा से शरीर हाइड्रेट रहता है और पानी की कमी की पूर्ति होती है। नियमित तौर पर बच्चों को नारियल पिलाने से उनके शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ाने में मदद मिलती है। बच्चे की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी नारियल पानी सहायक हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, नारियल पानी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत हो सकता है। इससे सामान्य सर्दी-जुकाम और फ्लू की समस्या दूर की जा सकती है। ऐसे में बच्चे में सर्दी-जुकाम के घरेलू उपचार के लिए नारियल पानी का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। कई बार छोटे बच्चों को अक्सर पेट में कीड़ों की समस्या हो जाती है। पेट के कीड़ों से निजात पाने में भी नारियल पानी मददगार साबित हो सकता है। पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए रोजाना सुबह नारियल पानी पिलाना चाहिए। बच्चों को कब, कितना और कैसे पिलाएं नारियल पानी ? एक हरे व ताजे नारियल में औसतन दो सौ पचास से तीन सौ मिलीलीटर पानी हो सकता है। ऐसे में एक नारियल का पानी दो या तीन हिस्सों में बांट कर बच्चे को दिनभर में दो से तीन बार में पिला सकते हैं। इसके साथ ही इस बात को भी ध्यान में रखना जरूरी है कि बच्चे के नारियल पानी में चीनी या किसी अन्य हेल्थ ड्रिंक पाउडर को न मिलाएं। बच्चे को सादा नारियल पानी पीने के लिए दें। छोटे बच्चों को प्रतिदिन ढाई मिलीलीटर नारियल पानी पिलाने से शरीर को पैंतालीस से साठ कैलोरी मिलती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक बच्चों को एक साल के बाद नारियल पीना देना बिल्कुल सुरक्षित है। एक साल की उम्र से कम के बच्चों को मां के दूध के अलावा कुछ और नहीं देना चाहिए। |
चेन्नईः मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे उन सभी सिविल सेवा उम्मीदवारों को उम्र में छूट के साथ एक अतिरिक्त प्रयास देने की मांग पर विचार करें, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण अपने अंतिम प्रयास को समाप्त कर दिया था. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने राज्य सेवा परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा पहले ही दो साल बढ़ा दी है।
"पिछले दो वर्षों से, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के इच्छुक एक बार के उपाय के रूप में परीक्षा में भाग लेने के लिए आयु सीमा बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं। इस छूट से सरकारी खजाने पर कोई मौद्रिक बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन साथ ही हजारों युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर खुलेगा, जो सिविल सेवाओं में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, "स्टालिन ने सोमवार को मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा।
"संसद की स्थायी समिति ने भी सिविल सेवा के उम्मीदवारों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की सिफारिश की है। शीर्ष अदालत ने भी विभिन्न मामलों में भारतीय प्रशासनिक सेवा विनियम, 1955 के विनियम 4 के तहत एक अतिरिक्त प्रयास देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 150 से अधिक सांसदों ने आकांक्षियों के कारण का समर्थन किया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में सीएपीएफ परीक्षा, 2022 में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) की भर्ती के लिए एक बार के उपाय के रूप में सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए संबंधित निर्धारित ऊपरी आयु सीमा से परे तीन वर्ष की छूट प्रदान की है।
जनता से रिश्ता इस खबर की पुष्टि नहीं करता है ये खबर जनसरोकार के माध्यम से मिली है और ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी जिसके चलते इस खबर को प्रकाशित की जा रही है। इस पर जनता से रिश्ता खबर की सच्चाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
| चेन्नईः मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे उन सभी सिविल सेवा उम्मीदवारों को उम्र में छूट के साथ एक अतिरिक्त प्रयास देने की मांग पर विचार करें, जिन्होंने कोविड-उन्नीस महामारी के कारण अपने अंतिम प्रयास को समाप्त कर दिया था. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने राज्य सेवा परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा पहले ही दो साल बढ़ा दी है। "पिछले दो वर्षों से, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के इच्छुक एक बार के उपाय के रूप में परीक्षा में भाग लेने के लिए आयु सीमा बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं। इस छूट से सरकारी खजाने पर कोई मौद्रिक बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन साथ ही हजारों युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर खुलेगा, जो सिविल सेवाओं में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, "स्टालिन ने सोमवार को मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा। "संसद की स्थायी समिति ने भी सिविल सेवा के उम्मीदवारों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की सिफारिश की है। शीर्ष अदालत ने भी विभिन्न मामलों में भारतीय प्रशासनिक सेवा विनियम, एक हज़ार नौ सौ पचपन के विनियम चार के तहत एक अतिरिक्त प्रयास देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक सौ पचास से अधिक सांसदों ने आकांक्षियों के कारण का समर्थन किया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में सीएपीएफ परीक्षा, दो हज़ार बाईस में कांस्टेबल की भर्ती के लिए एक बार के उपाय के रूप में सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए संबंधित निर्धारित ऊपरी आयु सीमा से परे तीन वर्ष की छूट प्रदान की है। जनता से रिश्ता इस खबर की पुष्टि नहीं करता है ये खबर जनसरोकार के माध्यम से मिली है और ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी जिसके चलते इस खबर को प्रकाशित की जा रही है। इस पर जनता से रिश्ता खबर की सच्चाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। |
मूर नापट इस घटना का उन्नय दरा प्रकार मराजयस्थ हो गया तो उसन भरे टोप से अपनी पगडा बस भी। उसन अपरिगी मरे गिर पर रसी और मरे टोप वो अपन सिर पर आइ लिया। फिर हम दारा ने हाप मिलाए। फिर हमन एवं दूसरे ये सिर पर से कुछ यार तौरगम बंट लिए गए। उसन मु। थोडी-सी दूब भी दो और इस प्रकार जान पनि और रंग रूप की परवाह न करत हुए मुभ गसारचन्द व परिवार का ही एर मन्स्य बना लिया। इस सवा अथ और चाहे कुछ भी न हो पर इतना अवश्य है उन अपनी वृतनता का प्रमाण अनुपम ढंग सदिया।
मूर प्रापट ने ससारच व वश और उसने दैनिक जीवन में बारे भ बहुत कुछ लिखा है 'सध्या का बुलान पर मैं उससे मिलने गया। राजा
और पात के साथ एक सुन बाग म सर कर रहा था। राजा समारपन सम्बा और हृष्ट पुष्ट है। उसकी भायु कोई साठ वप व लगभग होगो रग सविता है पर नक्श बहुत ही तीसे और कोमल हैं। उसका पुत्र राय अनुरूपचंद बहुत खूबसूरत है। उसव चहर का रंग गारा है और उसका शरीर कुछ अधिक मोटा है । कुछ बाल तक मसारच सतलुज से लकर रावी तर सबम अधिक शक्ि गाली राजा था। सतलज नदी से लवर कश्मीर तब व राव राजा इस ग्रराज दत थे । इसके धन का कोई ठिकाना नहीं था। वाई पतीस लाख रुपया इसा वार्षिक करो से मिलता था। अब यह राजा गरीब हो गया है और डर है कि महाराजा रणजीतसिंह इसके पूरे राज्य को हडप कर जायगा। इसकी सव मुसी बनें इसको अपनी खड़ी की हुई है। जस जस इसका हास हो रहा है वैश-यस इसके पडोस म महाराजा रणजीतसिंह जोर पकता जा रहा है।
राजा वे दनिक जीवन के बारे म लिखते हुए मर क्राफ्ट कहता है 'राजा ससारचद प्रभात का समय पूजा-पाठ भविनाता है। फिर कोई दस से बारह बजे तक अधिकारिया और दरबारिया से मिलता है। मेरे लौटने स कई दिन पहले एक छोटे से बगल में यह समय काटता रहा जिसे उसने मरे रहने के लिए खाली किया था। यह बगला बाग वे बाहरी ओर है। दोपहर को राजा दो या तीन घंटे के लिए आराम करता है। इसके उपरान्त वह कुछ देर के लिए शतरज सेलता है और फिर रानि का नाच गाने की महफिल गम होती है। गाने वाले प्राय ब्रज भाषा म श्रीक्ष्ण भगवान की स्तुति वे गीत गाते हैं। ससारचद स्वय भी चित्रकला का शौकीन है और उसने अपने दरबार में कर्म क्लावार रम हुए है। उसके पास चित्रा का एक बहुत वडा संग्रह है। इनमें कुछ चित्र अजुन व भी हैं, और कुछ दूसर चित्रा में महाभारत के दश्य प्रस्तुत किये गए है। इस सग्रह म पड़ौसी राजाओ और मसारचद के पूवजा व भी चित्र हैं। इनमें दो चित्र सिक्दर के भी नमे से एक चित्र राम जनुरूपचंद न मुझे दिया है। चित्र में सिक्दर बहुत | मूर नापट इस घटना का उन्नय दरा प्रकार मराजयस्थ हो गया तो उसन भरे टोप से अपनी पगडा बस भी। उसन अपरिगी मरे गिर पर रसी और मरे टोप वो अपन सिर पर आइ लिया। फिर हम दारा ने हाप मिलाए। फिर हमन एवं दूसरे ये सिर पर से कुछ यार तौरगम बंट लिए गए। उसन मु। थोडी-सी दूब भी दो और इस प्रकार जान पनि और रंग रूप की परवाह न करत हुए मुभ गसारचन्द व परिवार का ही एर मन्स्य बना लिया। इस सवा अथ और चाहे कुछ भी न हो पर इतना अवश्य है उन अपनी वृतनता का प्रमाण अनुपम ढंग सदिया। मूर प्रापट ने ससारच व वश और उसने दैनिक जीवन में बारे भ बहुत कुछ लिखा है 'सध्या का बुलान पर मैं उससे मिलने गया। राजा और पात के साथ एक सुन बाग म सर कर रहा था। राजा समारपन सम्बा और हृष्ट पुष्ट है। उसकी भायु कोई साठ वप व लगभग होगो रग सविता है पर नक्श बहुत ही तीसे और कोमल हैं। उसका पुत्र राय अनुरूपचंद बहुत खूबसूरत है। उसव चहर का रंग गारा है और उसका शरीर कुछ अधिक मोटा है । कुछ बाल तक मसारच सतलुज से लकर रावी तर सबम अधिक शक्ि गाली राजा था। सतलज नदी से लवर कश्मीर तब व राव राजा इस ग्रराज दत थे । इसके धन का कोई ठिकाना नहीं था। वाई पतीस लाख रुपया इसा वार्षिक करो से मिलता था। अब यह राजा गरीब हो गया है और डर है कि महाराजा रणजीतसिंह इसके पूरे राज्य को हडप कर जायगा। इसकी सव मुसी बनें इसको अपनी खड़ी की हुई है। जस जस इसका हास हो रहा है वैश-यस इसके पडोस म महाराजा रणजीतसिंह जोर पकता जा रहा है। राजा वे दनिक जीवन के बारे म लिखते हुए मर क्राफ्ट कहता है 'राजा ससारचद प्रभात का समय पूजा-पाठ भविनाता है। फिर कोई दस से बारह बजे तक अधिकारिया और दरबारिया से मिलता है। मेरे लौटने स कई दिन पहले एक छोटे से बगल में यह समय काटता रहा जिसे उसने मरे रहने के लिए खाली किया था। यह बगला बाग वे बाहरी ओर है। दोपहर को राजा दो या तीन घंटे के लिए आराम करता है। इसके उपरान्त वह कुछ देर के लिए शतरज सेलता है और फिर रानि का नाच गाने की महफिल गम होती है। गाने वाले प्राय ब्रज भाषा म श्रीक्ष्ण भगवान की स्तुति वे गीत गाते हैं। ससारचद स्वय भी चित्रकला का शौकीन है और उसने अपने दरबार में कर्म क्लावार रम हुए है। उसके पास चित्रा का एक बहुत वडा संग्रह है। इनमें कुछ चित्र अजुन व भी हैं, और कुछ दूसर चित्रा में महाभारत के दश्य प्रस्तुत किये गए है। इस सग्रह म पड़ौसी राजाओ और मसारचद के पूवजा व भी चित्र हैं। इनमें दो चित्र सिक्दर के भी नमे से एक चित्र राम जनुरूपचंद न मुझे दिया है। चित्र में सिक्दर बहुत |
जावरा के बडावदा में हार्डवेअर व्यापारी को धमकाने के मामले में पुलिस ने 5 संदिग्धों को पकड़ लिया हैं। शुक्रवार को सुबह से इनसे पूछताछ की जा रही हैं जल्द ही मामले का खुलासा होगा।
जावरा निवासी व्यापारी ताहेर हुसैन बोहरा (28) की बडावदा में यूनीक हार्डवेअर के नाम से दुकान हैं। व्यापारी ताहेर दुकान पर बैठे थे तभी उनके पास किसी बदमाश का फोन आया कि 30 पेटी चाहिए वरना गोली मार दूंगा। व्यापारी घबरा गए और फोन काट दिया।
डर के कारण उन्होंने 3 दिन तक किसी को कुछ नहीं बताया लेकिन जिस नंबर से धमकी आई थी वो बार बार परेशान करने लगे। परेशान होकर व्यापारी ने पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद बडावदा पुलिस हरकत में आई और खोजबीन शुरू की।
इस मामले में पहले लाला पठानों के होने की शंका थी लेकिन पुलिस ने कुछ युवाओं को गिरफ्तार किया। पकड़े गए 5 आरोपियों में 1 आदतन अपराधी तथा 4 नए युवा बताए जा रहे हैं। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही हैं जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
बडावदा पुलिस थाना प्रभारी बीएस जादौन ने बताया साइबर सिस्टम के आधार पर युवा पकड़े हैं इनसे पूछताछ कर रहे हैं। शाम को खुलासा हो जाएगा।
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| जावरा के बडावदा में हार्डवेअर व्यापारी को धमकाने के मामले में पुलिस ने पाँच संदिग्धों को पकड़ लिया हैं। शुक्रवार को सुबह से इनसे पूछताछ की जा रही हैं जल्द ही मामले का खुलासा होगा। जावरा निवासी व्यापारी ताहेर हुसैन बोहरा की बडावदा में यूनीक हार्डवेअर के नाम से दुकान हैं। व्यापारी ताहेर दुकान पर बैठे थे तभी उनके पास किसी बदमाश का फोन आया कि तीस पेटी चाहिए वरना गोली मार दूंगा। व्यापारी घबरा गए और फोन काट दिया। डर के कारण उन्होंने तीन दिन तक किसी को कुछ नहीं बताया लेकिन जिस नंबर से धमकी आई थी वो बार बार परेशान करने लगे। परेशान होकर व्यापारी ने पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद बडावदा पुलिस हरकत में आई और खोजबीन शुरू की। इस मामले में पहले लाला पठानों के होने की शंका थी लेकिन पुलिस ने कुछ युवाओं को गिरफ्तार किया। पकड़े गए पाँच आरोपियों में एक आदतन अपराधी तथा चार नए युवा बताए जा रहे हैं। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही हैं जल्द ही खुलासा किया जाएगा। बडावदा पुलिस थाना प्रभारी बीएस जादौन ने बताया साइबर सिस्टम के आधार पर युवा पकड़े हैं इनसे पूछताछ कर रहे हैं। शाम को खुलासा हो जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
2022 Russian invasion of Ukraine: यूक्रेन पर 48 घंटों के अंदर कब्जा करने का रूस का प्लान फेल होता दिखाई दे रहा है। रूसी सेना पिछले तीन दिनों से यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। खारकीव पर भी रूस का अबतक कब्जा नहीं हो सका है। हालांकि, पहले दावा किया गया था रूसी सेना खारकीव के अंदर घुस चुकी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या रूस ने प्लानिंग में ही गलती कर दी।
| दो हज़ार बाईस Russian invasion of Ukraine: यूक्रेन पर अड़तालीस घंटाटों के अंदर कब्जा करने का रूस का प्लान फेल होता दिखाई दे रहा है। रूसी सेना पिछले तीन दिनों से यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। खारकीव पर भी रूस का अबतक कब्जा नहीं हो सका है। हालांकि, पहले दावा किया गया था रूसी सेना खारकीव के अंदर घुस चुकी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या रूस ने प्लानिंग में ही गलती कर दी। |
ईरान और सऊदी अरब के संबंधों में 2016 में दरार आई थी और तब दोनों ने अपने राजयनिक रिश्ते खत्म कर लिए थे.
हालांकि, सऊदी अरब से तकरार शुरू होने के 7 साल बाद ईरान ने अब 6 जून 2023 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अपनी एम्बेसी खोल ली है. इसी के साथ खाड़ी के दो अहम देशों के बीच राजनयिक रिश्ते फिर से बहाल हो गए हैं.
सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित ईरानी एम्बेसी कम्पाउंड में एक सेरेमनी का आयोजन किया गया. इस दौरान ईरान के कॉन्स्युलर मामलों के डिप्टी विदेश मंत्री ने कहा- ये दिन ईरान और सऊदी के रिश्तों के लिए अहम है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि इससे क्षेत्र स्थिरता और विकास की तरफ आगे बढ़ेगा.
बता दें कि मार्च 2023 में इन दोनों देशों का एम्बेसी खोलने को लेकर समझौता हुआ था. इसके तहत 2016 के बाद दोनों देश एक-दूसरे के मुल्क में अपनी-अपनी एम्बेसी फिर खोलने के लिए राजी हुए.
सऊदी अरब से सुलह होने के बारे में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लाह ने लेबनान की राजधानी बेरूत में जानकारी दी थी. दोनों देशों के बीच ये समझौता चीन ने अपनी राजधानी बीजिंग में कराया था.
सऊदी अरब ने ईरान के अली खमेनेई (Ali Khamenei) को रियाद की यात्रा के लिए आमंत्रित किया है. अली खमेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader of Iran) हैं. ये 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे. अब भी इनका वहां बड़ा प्रभाव है.
| ईरान और सऊदी अरब के संबंधों में दो हज़ार सोलह में दरार आई थी और तब दोनों ने अपने राजयनिक रिश्ते खत्म कर लिए थे. हालांकि, सऊदी अरब से तकरार शुरू होने के सात साल बाद ईरान ने अब छः जून दो हज़ार तेईस को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अपनी एम्बेसी खोल ली है. इसी के साथ खाड़ी के दो अहम देशों के बीच राजनयिक रिश्ते फिर से बहाल हो गए हैं. सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित ईरानी एम्बेसी कम्पाउंड में एक सेरेमनी का आयोजन किया गया. इस दौरान ईरान के कॉन्स्युलर मामलों के डिप्टी विदेश मंत्री ने कहा- ये दिन ईरान और सऊदी के रिश्तों के लिए अहम है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि इससे क्षेत्र स्थिरता और विकास की तरफ आगे बढ़ेगा. बता दें कि मार्च दो हज़ार तेईस में इन दोनों देशों का एम्बेसी खोलने को लेकर समझौता हुआ था. इसके तहत दो हज़ार सोलह के बाद दोनों देश एक-दूसरे के मुल्क में अपनी-अपनी एम्बेसी फिर खोलने के लिए राजी हुए. सऊदी अरब से सुलह होने के बारे में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लाह ने लेबनान की राजधानी बेरूत में जानकारी दी थी. दोनों देशों के बीच ये समझौता चीन ने अपनी राजधानी बीजिंग में कराया था. सऊदी अरब ने ईरान के अली खमेनेई को रियाद की यात्रा के लिए आमंत्रित किया है. अली खमेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता हैं. ये एक हज़ार नौ सौ इक्यासी से एक हज़ार नौ सौ नवासी तक ईरान के राष्ट्रपति रहे. अब भी इनका वहां बड़ा प्रभाव है. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
CHAKRADHARPUR: दक्षिण पूर्व रेल मुख्यालय गार्डेनरीच कोलकाता के ¨प्रसिपल चीफ मेडिकल डायरेक्टर (पीसीएमडी) डाक्टर मिहिर कुमार चौधरी ने गुरुवार को चक्रधरपुर रेल मंडल का दौरा किया। अपने इस दौरे में पीसीएमडी ने रेलवे अस्पताल का निरिक्षण किया और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए चिकित्सकों व चिकित्सा कर्मियों को दिशा निर्देश दिया। अपने इस दौरे से पीसीएमडी काफी संतुष्ट नजर आये। पीसीएमडी ने कहा कि रेलवे अस्पताल में डायलिसिस सेंटर एक प्रोपॉजल है। जिसें हम आउट सोर्स करते हुए पीपीपी मॉडल से संचालित करेंगे। उसके लिए जगह, इलेक्ट्रीसिटी, पानी दे देंगे। बाहर की डायलिसिस प्रोवाइडर हैं, वह आकर यहां पर जितने भी कीडनी के मरीज हैं, उसका डायलिसिस करेंगे। जिसको लेकर कुछ इंजीनिय¨रग कार्य बाकी है। वह हो जाएगा तो टेंडर प्रोसे¨सग कर देंगें।
डॉ चौधरी ने कहा कि ब्लड स्टोरेज यूनिट को लेकर रेलवे अस्पताल पूरी तरह तैयार है। राज्य सरकार से अनुमति और लाईसेंस मिल जाने से शुरू कर देंगे। तकनीकी मामले में राज्य सरकार में कुछ समस्या है। जिस दिन लाईसेंस मिल जाएगा। ब्लड स्टोरेज यूनिट को लेकर हमारे तरफ से भी प्रोसेस किया जा रहा है। इसके अलावे रेलवे अस्पताल में बहुत जल्द नई डिजीटल एक्स रे मशीन भी लगाई जाएगी । मशीन लगाने को लेकर पेंपर वर्क किया गया है। पीसीएमडी ने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित करने वाला रेल मंडल है इसका सभी को गर्व है। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि कर्मचारियों को स्वस्थ रखना और बनाना इसी रेल मंडल के चिकित्सा कर्मियों व डॉक्टरों का काम है। उन्होंने कहा की यह रेल मंडल काफी बड़ा है। वे दो दिनों तक चक्रधरपुर रेल मंडल के दौरे पर रहेंगे लेकिन इसके बाद भी निरिक्षण का कार्य पूरा नहीं हो पायेगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने चक्रधरपुर रेल मंडल को अपनी प्राथमिकता की सूची में रखा है और इस मंडल की स्वास्थ्य चिकित्सा व्यवस्था पर उनकी विशेष नजर है।
पीसीएमडी ने अस्पताल के मेल फिमेल वार्ड से लेकर आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, स्टोर, टेलीमेडिसिन सेंटर सहित सभी कक्ष की बारीकी से जांच की इस दौरान उन्होंने रेलवे अस्पताल के सीएमएस डॉ एसके मिश्रा से अस्पताल के व्यवस्था को लेकर अहम जानकारियां भी ली। उन्होंने अस्पताल के सभी डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों से वार्ता भी की और चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी ली । अस्पताल के सभागार में उन्होंने सभी चिकित्साकर्मियों को संबोधित करते हुए सेवा भावना के साथ काम करने की अपील की। अस्पताल के निरिक्षण के बाद व्यवस्था देख पीसीएमडी संतुष्ट हुए। कुछ त्रुटियों को खत्म करने के लिए जरुरी दिशा निर्देश उन्होंने जारी किया। अपने निरिक्षण के दौरान उन्होंने कोरोना वेक्सिनेशन सेंटर का भी जायजा लिया और व्यवस्था देख खुश हुए। मौके पर चक्रधरपुर रेलवे अस्पताल के सीएमएस डाक्टर एसके मिश्रा, डाक्टर एस सारेन, डाक्टर जी सोरेन, डाक्टर श्याम सोरेन, डाक्टर नंदनी सांडा, डाक्टर राजेश कुमार, डाक्टर पंकज कुमार सहित अस्पताल के दर्जनों कर्मचारी मौजूद थे।
| CHAKRADHARPUR: दक्षिण पूर्व रेल मुख्यालय गार्डेनरीच कोलकाता के ¨प्रसिपल चीफ मेडिकल डायरेक्टर डाक्टर मिहिर कुमार चौधरी ने गुरुवार को चक्रधरपुर रेल मंडल का दौरा किया। अपने इस दौरे में पीसीएमडी ने रेलवे अस्पताल का निरिक्षण किया और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए चिकित्सकों व चिकित्सा कर्मियों को दिशा निर्देश दिया। अपने इस दौरे से पीसीएमडी काफी संतुष्ट नजर आये। पीसीएमडी ने कहा कि रेलवे अस्पताल में डायलिसिस सेंटर एक प्रोपॉजल है। जिसें हम आउट सोर्स करते हुए पीपीपी मॉडल से संचालित करेंगे। उसके लिए जगह, इलेक्ट्रीसिटी, पानी दे देंगे। बाहर की डायलिसिस प्रोवाइडर हैं, वह आकर यहां पर जितने भी कीडनी के मरीज हैं, उसका डायलिसिस करेंगे। जिसको लेकर कुछ इंजीनिय¨रग कार्य बाकी है। वह हो जाएगा तो टेंडर प्रोसे¨सग कर देंगें। डॉ चौधरी ने कहा कि ब्लड स्टोरेज यूनिट को लेकर रेलवे अस्पताल पूरी तरह तैयार है। राज्य सरकार से अनुमति और लाईसेंस मिल जाने से शुरू कर देंगे। तकनीकी मामले में राज्य सरकार में कुछ समस्या है। जिस दिन लाईसेंस मिल जाएगा। ब्लड स्टोरेज यूनिट को लेकर हमारे तरफ से भी प्रोसेस किया जा रहा है। इसके अलावे रेलवे अस्पताल में बहुत जल्द नई डिजीटल एक्स रे मशीन भी लगाई जाएगी । मशीन लगाने को लेकर पेंपर वर्क किया गया है। पीसीएमडी ने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित करने वाला रेल मंडल है इसका सभी को गर्व है। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि कर्मचारियों को स्वस्थ रखना और बनाना इसी रेल मंडल के चिकित्सा कर्मियों व डॉक्टरों का काम है। उन्होंने कहा की यह रेल मंडल काफी बड़ा है। वे दो दिनों तक चक्रधरपुर रेल मंडल के दौरे पर रहेंगे लेकिन इसके बाद भी निरिक्षण का कार्य पूरा नहीं हो पायेगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने चक्रधरपुर रेल मंडल को अपनी प्राथमिकता की सूची में रखा है और इस मंडल की स्वास्थ्य चिकित्सा व्यवस्था पर उनकी विशेष नजर है। पीसीएमडी ने अस्पताल के मेल फिमेल वार्ड से लेकर आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, स्टोर, टेलीमेडिसिन सेंटर सहित सभी कक्ष की बारीकी से जांच की इस दौरान उन्होंने रेलवे अस्पताल के सीएमएस डॉ एसके मिश्रा से अस्पताल के व्यवस्था को लेकर अहम जानकारियां भी ली। उन्होंने अस्पताल के सभी डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों से वार्ता भी की और चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी ली । अस्पताल के सभागार में उन्होंने सभी चिकित्साकर्मियों को संबोधित करते हुए सेवा भावना के साथ काम करने की अपील की। अस्पताल के निरिक्षण के बाद व्यवस्था देख पीसीएमडी संतुष्ट हुए। कुछ त्रुटियों को खत्म करने के लिए जरुरी दिशा निर्देश उन्होंने जारी किया। अपने निरिक्षण के दौरान उन्होंने कोरोना वेक्सिनेशन सेंटर का भी जायजा लिया और व्यवस्था देख खुश हुए। मौके पर चक्रधरपुर रेलवे अस्पताल के सीएमएस डाक्टर एसके मिश्रा, डाक्टर एस सारेन, डाक्टर जी सोरेन, डाक्टर श्याम सोरेन, डाक्टर नंदनी सांडा, डाक्टर राजेश कुमार, डाक्टर पंकज कुमार सहित अस्पताल के दर्जनों कर्मचारी मौजूद थे। |
आपने अक्सर देखा होगा कि, ऑफिस में कई लोग होते है जो सुबह आते तो बड़ी खुशी से हैं लेकिन पूरा दिन आलस में रहते हैं। इस आलस के चलते अक्सर वो काम भी ठीक से नहीं कर पाती हैं। ऐसे में उनकी तरक्की में बाधा भी आ सकती है। अगर आपको भी लगता है कि, आपको आलस आता है तो इसके लिए आप वास्तु के उपाए आजमा सकते हैं।
वास्तु शास्त्र कहता है कि, अगर आप काम करते समय अपने मन को शांत रखना चाहते हैं तो बुद्ध की मूर्ति को अपनी टेबल पर रखे। असल में बुद्धा की मूर्ति को शांति का प्रतीक माना जाता है। इससे मनुष्य को मानसिक शांति मिलती है।
ऑफिस में बैठने का तरीका आपके काम पर काफी प्रभाव डालता है। वास्तु शास्त्र का कहना है कि, उत्तर दिशा या पूर्व दिशा को ऑफिस के काम करने के लिए बेहतर होता है। इन दोनों दिशाओं में बैठने से व्यक्ति को अपने काम में सफलता मिलती है। वह समय से पहले अपना काम पूरा कर लेता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप अपने टेबल पर गणेश जी की मूर्ति रखते हैं तो इससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी। डेस्क पर गणेश मूर्ति रखने से व्यक्ति की नौकरी में कोई बाधा नहीं आती। वह व्यक्ति अपने करियर में उन्नति करता है।
| आपने अक्सर देखा होगा कि, ऑफिस में कई लोग होते है जो सुबह आते तो बड़ी खुशी से हैं लेकिन पूरा दिन आलस में रहते हैं। इस आलस के चलते अक्सर वो काम भी ठीक से नहीं कर पाती हैं। ऐसे में उनकी तरक्की में बाधा भी आ सकती है। अगर आपको भी लगता है कि, आपको आलस आता है तो इसके लिए आप वास्तु के उपाए आजमा सकते हैं। वास्तु शास्त्र कहता है कि, अगर आप काम करते समय अपने मन को शांत रखना चाहते हैं तो बुद्ध की मूर्ति को अपनी टेबल पर रखे। असल में बुद्धा की मूर्ति को शांति का प्रतीक माना जाता है। इससे मनुष्य को मानसिक शांति मिलती है। ऑफिस में बैठने का तरीका आपके काम पर काफी प्रभाव डालता है। वास्तु शास्त्र का कहना है कि, उत्तर दिशा या पूर्व दिशा को ऑफिस के काम करने के लिए बेहतर होता है। इन दोनों दिशाओं में बैठने से व्यक्ति को अपने काम में सफलता मिलती है। वह समय से पहले अपना काम पूरा कर लेता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप अपने टेबल पर गणेश जी की मूर्ति रखते हैं तो इससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी। डेस्क पर गणेश मूर्ति रखने से व्यक्ति की नौकरी में कोई बाधा नहीं आती। वह व्यक्ति अपने करियर में उन्नति करता है। |
प्रसिद्ध प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों को सार्वजनिक रूप से दी गई श्रद्धांजलि की वजह से बीजिंग के लिए कोविड-19 से मरने वालों की संख्या को छिपाना मुश्किल हो गया है. चीन ने नए साल में ताइवान के खिलाफ अपने अभियान तेज कर दिए हैं, जबकि सेमीकंडक्टर उद्योग बीजिंग के गले की फांस बन गया है. तालिबान ने चीन के साथ 540 मिलियन डॉलर के तेल सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं. चायनास्कोप आपके लिए चीन की खबरों को लेकर आया है खासकर तब जब चीनी, ताइवान और हांगकांग चीनी नव वर्ष में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं.
सूचना के तीव्र प्रवाह के युग में डेटा में हेर-फेर करना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के लिए भी मुश्किल हो सकता है.
पिछले कुछ हफ्तों में, चीनी अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक संगठनों ने प्रसिद्ध डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की श्रद्धांजलियां प्रकाशित की हैं, जिससे बीजिंग के लिए इस नई कोविड लहर से मरने वालों की संख्या को छिपाना मुश्किल हो गया है.
कोविड संबंधी जटिलताओं से होने वाली मौतें केवल इंजीनियरों और वैज्ञानिकों तक ही सीमित नहीं हैं; मशहूर हस्तियों को दी गई श्रद्धांजलियों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह संकट कितना बड़ा है. ऑनलाइन सर्कुलेट होने वाली कुछ श्रद्धांजलियों के अनुसार, न्यू पेकिंग ओपेरा फेम के 39 वर्षीय ओपेरा गायक चू लानलान, जिन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक के दौरान भी परफॉर्म किया था, उनका कोविड-संबंधी जटिलता के कारण निधन हो गया.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
ओमिक्रॉन वेरिएंट BF. 7 और BA. 5. 2 से मरने वाली चीनी हस्तियों के नाम चीनी सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं.
18 अक्टूबर 2022 से जान गंवाने वाले 34 चीनी चित्रकारों की सूची वीबो पर साझा की गई. इस सूची के अधिकांश प्रसिद्ध चित्रकार 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के थे.
इस बीच, चीन बड़े पैमाने पर कोविड संक्रमण से जूझ रही आबादी के लिए एक प्रभावी टीका विकसित करने के लिए संघर्ष कर रहा है. चीनी वैक्सीन निर्माता कैनसिनोबायो (CanSinoBio) ने उन लोगों के लिए MRNA बूस्टर टीका विकसित करने का दावा किया है, जिन्हें चीन में उपलब्ध पारंपरिक टीकों के दो या तीन शॉट पहले ही मिल चुके हैं.
बूस्टर के रूप में दिए जाने पर नया शॉट एक पुराने टीके की तुलना में 23 से 29 गुना अधिक एंटीबॉडी बनाता है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल से बात करने वाले चीनी सरकारी अधिकारियों और सलाहकारों के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश में विरोध प्रदर्शनों की लहर के और सरकार के भीतर से भी मांग उठने के बाद हो सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कड़ी कोविड नीतियों को रद्द करने का फैसला लिया हो.
अत्यधिक कोविड संक्रमण और मौतों की परेशान करने वाली वास्तविकता ने शी को टीवी पर नए साल पर लोगों को संबोधित करने से नहीं रोका. चीनी राष्ट्रपति ने बीजिंग में अपने कार्यालय के बाहर भाषण दिया, जहां उनके पीछे शेल्फ पर रखी किताबें दिखाई दे रही थीं. सिन्हुआ समाचार एजेंसी के एक पत्रकार यांग लियू ने अपने समाचार पत्र में शी की बुकशेल्फ़ पर शीर्षकों का एक संक्षिप्त विश्लेषण प्रकाशित किया. यह जानने लायक है कि वे क्या हैं.
अगर हम यह जानने की कोशिश करें कि शी के दिमाग में क्या चल रहा है तो, तो हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि 2023 में वे विश्व के नेताओं से मिलेंगे.
इस बीच, शुक्रवार को शी को बीजिंग में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सर्दार बर्दीमुहामेदोव की मेजबानी करते देखा गया.
पिछले सप्ताह बीजिंग का दौरा करने वाले एक अन्य नेता फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर थे. दोनों पक्षों ने अपनी द्विपक्षीय साझेदारी पर जोर दिया.
मार्कोस के साथ बैठक के दौरान शी ने कहा, "फिलीपीन्स के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों को 'हार्ड' इन्फ्रास्ट्रक्चर और 'सॉफ्ट' बुनियादी ढांचे सहित दूरसंचार, बड़े डेटा और ई-कॉमर्स में व्यापक सहयोग की आवश्यकता है.
2023 में, ताइवान 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान की तैयारी करेगा, जिसे चीन आईलैंड देश के मामलों में हस्तक्षेप करने के अवसर के रूप में उपयोग करेगा. बीजिंग ने इस उद्देश्य के लिए अपने प्रभाव अभियान तेज कर दिए हैं.
चीन की कम्युनिस्ट यूथ लीग (सीवाईएलसी) की केंद्रीय समिति, एक सीसीपी-संबद्ध संस्था, ने इस संदेश को प्रसारित करने की कोशिश की कि ताइवानी वायु सेना 2019 में ताइवान स्ट्रेट में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कार्रवाइयों का जवाब नहीं दे सकी थी.
यह पोस्ट ताइवान के एयरफोर्स के पूर्व डिप्टी कमांडर झांग यानटिंग के दावे पर आधारित था.
संदेश को आधिकारिक चीनी राज्य मीडिया द्वारा भी प्रसारित किया गया था.
ताइवान में राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने के लिए बीजिंग ने ताइपे की अपेक्षाकृत कमजोर सैन्य क्षमता को बढ़ाचढ़ाकर दिखाने की कोशिश की है.
झांग ने अतीत में इसी तरह की टिप्पणियां की हैं, लेकिन समय गवाह है कि बीजिंग ने इन्फॉर्मेशन ऑपरेशन के माध्यम से ताइवान की राजनीति को प्रभावित करने की लगातार कोशिश की है.
नए साल में सिर्फ एक सप्ताह में, ताइवान स्ट्रेट और व्यापक भारत-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षा के मामले में कोसों दूर है.
29 दिसंबर को, एक चीनी युद्धपोत यूएस-नियंत्रित द्वीप गुआम के पास तैरता हुआ नजर आया, जिसे ताइवान स्ट्रेट में अमेरिका द्वारा की जाने वाली किसी भी कार्रवाई की पूर्व चेतावनी के तौर पर देखा गया.
घरेलू सेमीकंडक्टर पावर हाउस विकसित करने की बीजिंग की चाह की वजह से हाल के सप्ताहों में काफी उथल-पुथल रही है.
अब, शीर्ष चीनी अधिकारी सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए महंगी सब्सिडी को रोकने पर विचार कर रहे हैं, जिनके स्वदेशी समाधान विकसित करने के प्रयासों के परिणाम नहीं मिले हैं.
जिसे 'चिप वॉर' करार दिया गया है, सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स के घरेलू विकास को सुनिश्चित करने की दौड़ इस साल सीसीपी के शीर्ष एजेंडे में से एक है.
बीजिंग सरकार न केवल अपनी निवेश योजना में बदलाव कर रही है बल्कि चीनी सेमीकंडक्टर उद्योग को अस्थिर करने की वॉशिंगटन की रणनीति को चुनौती देने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है. हाल ही में, बीजिंग ने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की, जो चीनी कंपनियों को उन्नत चिप्स और चिप बनाने वाले उपकरणों की बिक्री को सीमित करता है.
बीजिंग द्वारा कुछ सप्ताह पहले फाइल किए गए व्यापार विवाद ने एक और मोड़ ले लिया है.
ताइवान ने तीसरे पक्ष के रूप में सुनवाई में शामिल होने के लिए अर्जी दी है क्योंकि उसे लगता है कि परिणाम लंबे समय में उसके सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रभावित कर सकता है. ताइपे बीजिंग और वाशिंगटन के बीच विवाद में कोई पक्ष लेने के बजाय वार्ता की मेज पर एक सीट चाहता है.
बीजिंग को हाल के एक फैसले के माध्यम से डब्ल्यूटीओ मेकैनिज़म के साथ सफलता मिली, जहां उसने अमेरिका की स्थिति को ठीक किया कि हांगकांग में बने सामान 'चीन में बने' हैं. बीजिंग इस विश्व व्यापार संगठन तंत्र के माध्यम से सेमीकंडक्टर निवेश और अन्य क्षेत्रों पर प्रतिबंधों से लड़ेगा इसमें वह कोई कसर नहीं छोड़ेगा.
यदि कोई राजनयिक है जिसने लद्दाख में सैन्य शत्रुता की शुरुआत और चरम देखा तो वह पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला थे.
चीन के साथ सैन्य स्तर पर हुई वार्ता में काफी धीमी प्रगति हुई है, लेकिन इसने नरेंद्र मोदी सरकार को सीमावर्ती क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए नए कदम उठाने से नहीं रोका है.
3 सितंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अलॉन्ग-यिंकिओनग रोड पर बने 100 मीटर 'क्लास-70' स्टील और आर्क सुपरस्ट्रक्चर वाले सिओम ब्रिज का उद्घाटन किया.
सियोम ब्रिज के उद्घाटन के अलावा, सिंह ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 27 परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया.
2021 में काबुल में बीजिंग और तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार के बीच शुरुआती बातचीत के बाद, कुछ समय के लिए बातचीत बंद हो गई थी. कई विशेषज्ञों ने नई विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के साथ आने की पूर्व की क्षमता पर संदेह किया.
तालिबान ने अब उत्तरी अफगानिस्तान के अमु दरिया बेसिन से तेल निकालने के लिए चीन की झिंजियांग सेंट्रल एशिया पेट्रोलियम एंड गैस कंपनी (CAPEIC) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. समझौते में $150 मिलियन का प्रारंभिक निवेश शामिल है.
हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर अफगानिस्तान में तमाम प्राकृतिक संसाधनों के दोहन वाली परियोजनाओं में बीजिंग की रुचि को दर्शाता है, लेकिन राजनीतिक रूप से अशांत काबुल में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कठिनाइयां एक बड़ी चुनौती बनी रहेंगी.
इस बीच, पाकिस्तान ने एक बार फिर कर्ज के पहाड़ के नीचे डूबते हुए रेलवे के उन्नयन के लिए चीनी क्रेडिट लाइन का दोहन किया है. बीजिंग इस्लामाबाद को अपनी 1,700 किलोमीटर लंबी मेन लाइन 1 रेलवे के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देगा.
(लेखक स्तंभकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं. वह पहले बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में चीन के मीडिया पत्रकार थे. वह वर्तमान में ताइपे में स्थित एक MOFA ताइवान फेलो है और उनका ट्विटर हैंडल @aadilbrar है. व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं. )
(संपादनः शिव पाण्डेय)
(लेखक स्तंभकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं. वे पहले बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में चीन के मीडिया पत्रकार थे. उनका ट्विटर हैंडल @aadilbrar है. व्यक्त विचार निजी हैं. )
| प्रसिद्ध प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों को सार्वजनिक रूप से दी गई श्रद्धांजलि की वजह से बीजिंग के लिए कोविड-उन्नीस से मरने वालों की संख्या को छिपाना मुश्किल हो गया है. चीन ने नए साल में ताइवान के खिलाफ अपने अभियान तेज कर दिए हैं, जबकि सेमीकंडक्टर उद्योग बीजिंग के गले की फांस बन गया है. तालिबान ने चीन के साथ पाँच सौ चालीस मिलियन डॉलर के तेल सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं. चायनास्कोप आपके लिए चीन की खबरों को लेकर आया है खासकर तब जब चीनी, ताइवान और हांगकांग चीनी नव वर्ष में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं. सूचना के तीव्र प्रवाह के युग में डेटा में हेर-फेर करना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए भी मुश्किल हो सकता है. पिछले कुछ हफ्तों में, चीनी अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक संगठनों ने प्रसिद्ध डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की श्रद्धांजलियां प्रकाशित की हैं, जिससे बीजिंग के लिए इस नई कोविड लहर से मरने वालों की संख्या को छिपाना मुश्किल हो गया है. कोविड संबंधी जटिलताओं से होने वाली मौतें केवल इंजीनियरों और वैज्ञानिकों तक ही सीमित नहीं हैं; मशहूर हस्तियों को दी गई श्रद्धांजलियों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह संकट कितना बड़ा है. ऑनलाइन सर्कुलेट होने वाली कुछ श्रद्धांजलियों के अनुसार, न्यू पेकिंग ओपेरा फेम के उनतालीस वर्षीय ओपेरा गायक चू लानलान, जिन्होंने दो हज़ार आठ के बीजिंग ओलंपिक के दौरान भी परफॉर्म किया था, उनका कोविड-संबंधी जटिलता के कारण निधन हो गया. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. ओमिक्रॉन वेरिएंट BF. सात और BA. पाँच. दो से मरने वाली चीनी हस्तियों के नाम चीनी सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं. अट्ठारह अक्टूबर दो हज़ार बाईस से जान गंवाने वाले चौंतीस चीनी चित्रकारों की सूची वीबो पर साझा की गई. इस सूची के अधिकांश प्रसिद्ध चित्रकार साठ वर्ष और उससे अधिक आयु के थे. इस बीच, चीन बड़े पैमाने पर कोविड संक्रमण से जूझ रही आबादी के लिए एक प्रभावी टीका विकसित करने के लिए संघर्ष कर रहा है. चीनी वैक्सीन निर्माता कैनसिनोबायो ने उन लोगों के लिए MRNA बूस्टर टीका विकसित करने का दावा किया है, जिन्हें चीन में उपलब्ध पारंपरिक टीकों के दो या तीन शॉट पहले ही मिल चुके हैं. बूस्टर के रूप में दिए जाने पर नया शॉट एक पुराने टीके की तुलना में तेईस से उनतीस गुना अधिक एंटीबॉडी बनाता है. वॉल स्ट्रीट जर्नल से बात करने वाले चीनी सरकारी अधिकारियों और सलाहकारों के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश में विरोध प्रदर्शनों की लहर के और सरकार के भीतर से भी मांग उठने के बाद हो सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कड़ी कोविड नीतियों को रद्द करने का फैसला लिया हो. अत्यधिक कोविड संक्रमण और मौतों की परेशान करने वाली वास्तविकता ने शी को टीवी पर नए साल पर लोगों को संबोधित करने से नहीं रोका. चीनी राष्ट्रपति ने बीजिंग में अपने कार्यालय के बाहर भाषण दिया, जहां उनके पीछे शेल्फ पर रखी किताबें दिखाई दे रही थीं. सिन्हुआ समाचार एजेंसी के एक पत्रकार यांग लियू ने अपने समाचार पत्र में शी की बुकशेल्फ़ पर शीर्षकों का एक संक्षिप्त विश्लेषण प्रकाशित किया. यह जानने लायक है कि वे क्या हैं. अगर हम यह जानने की कोशिश करें कि शी के दिमाग में क्या चल रहा है तो, तो हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि दो हज़ार तेईस में वे विश्व के नेताओं से मिलेंगे. इस बीच, शुक्रवार को शी को बीजिंग में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सर्दार बर्दीमुहामेदोव की मेजबानी करते देखा गया. पिछले सप्ताह बीजिंग का दौरा करने वाले एक अन्य नेता फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर थे. दोनों पक्षों ने अपनी द्विपक्षीय साझेदारी पर जोर दिया. मार्कोस के साथ बैठक के दौरान शी ने कहा, "फिलीपीन्स के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों को 'हार्ड' इन्फ्रास्ट्रक्चर और 'सॉफ्ट' बुनियादी ढांचे सहित दूरसंचार, बड़े डेटा और ई-कॉमर्स में व्यापक सहयोग की आवश्यकता है. दो हज़ार तेईस में, ताइवान दो हज़ार चौबीस के राष्ट्रपति चुनाव अभियान की तैयारी करेगा, जिसे चीन आईलैंड देश के मामलों में हस्तक्षेप करने के अवसर के रूप में उपयोग करेगा. बीजिंग ने इस उद्देश्य के लिए अपने प्रभाव अभियान तेज कर दिए हैं. चीन की कम्युनिस्ट यूथ लीग की केंद्रीय समिति, एक सीसीपी-संबद्ध संस्था, ने इस संदेश को प्रसारित करने की कोशिश की कि ताइवानी वायु सेना दो हज़ार उन्नीस में ताइवान स्ट्रेट में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कार्रवाइयों का जवाब नहीं दे सकी थी. यह पोस्ट ताइवान के एयरफोर्स के पूर्व डिप्टी कमांडर झांग यानटिंग के दावे पर आधारित था. संदेश को आधिकारिक चीनी राज्य मीडिया द्वारा भी प्रसारित किया गया था. ताइवान में राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने के लिए बीजिंग ने ताइपे की अपेक्षाकृत कमजोर सैन्य क्षमता को बढ़ाचढ़ाकर दिखाने की कोशिश की है. झांग ने अतीत में इसी तरह की टिप्पणियां की हैं, लेकिन समय गवाह है कि बीजिंग ने इन्फॉर्मेशन ऑपरेशन के माध्यम से ताइवान की राजनीति को प्रभावित करने की लगातार कोशिश की है. नए साल में सिर्फ एक सप्ताह में, ताइवान स्ट्रेट और व्यापक भारत-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षा के मामले में कोसों दूर है. उनतीस दिसंबर को, एक चीनी युद्धपोत यूएस-नियंत्रित द्वीप गुआम के पास तैरता हुआ नजर आया, जिसे ताइवान स्ट्रेट में अमेरिका द्वारा की जाने वाली किसी भी कार्रवाई की पूर्व चेतावनी के तौर पर देखा गया. घरेलू सेमीकंडक्टर पावर हाउस विकसित करने की बीजिंग की चाह की वजह से हाल के सप्ताहों में काफी उथल-पुथल रही है. अब, शीर्ष चीनी अधिकारी सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए महंगी सब्सिडी को रोकने पर विचार कर रहे हैं, जिनके स्वदेशी समाधान विकसित करने के प्रयासों के परिणाम नहीं मिले हैं. जिसे 'चिप वॉर' करार दिया गया है, सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स के घरेलू विकास को सुनिश्चित करने की दौड़ इस साल सीसीपी के शीर्ष एजेंडे में से एक है. बीजिंग सरकार न केवल अपनी निवेश योजना में बदलाव कर रही है बल्कि चीनी सेमीकंडक्टर उद्योग को अस्थिर करने की वॉशिंगटन की रणनीति को चुनौती देने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है. हाल ही में, बीजिंग ने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की, जो चीनी कंपनियों को उन्नत चिप्स और चिप बनाने वाले उपकरणों की बिक्री को सीमित करता है. बीजिंग द्वारा कुछ सप्ताह पहले फाइल किए गए व्यापार विवाद ने एक और मोड़ ले लिया है. ताइवान ने तीसरे पक्ष के रूप में सुनवाई में शामिल होने के लिए अर्जी दी है क्योंकि उसे लगता है कि परिणाम लंबे समय में उसके सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रभावित कर सकता है. ताइपे बीजिंग और वाशिंगटन के बीच विवाद में कोई पक्ष लेने के बजाय वार्ता की मेज पर एक सीट चाहता है. बीजिंग को हाल के एक फैसले के माध्यम से डब्ल्यूटीओ मेकैनिज़म के साथ सफलता मिली, जहां उसने अमेरिका की स्थिति को ठीक किया कि हांगकांग में बने सामान 'चीन में बने' हैं. बीजिंग इस विश्व व्यापार संगठन तंत्र के माध्यम से सेमीकंडक्टर निवेश और अन्य क्षेत्रों पर प्रतिबंधों से लड़ेगा इसमें वह कोई कसर नहीं छोड़ेगा. यदि कोई राजनयिक है जिसने लद्दाख में सैन्य शत्रुता की शुरुआत और चरम देखा तो वह पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला थे. चीन के साथ सैन्य स्तर पर हुई वार्ता में काफी धीमी प्रगति हुई है, लेकिन इसने नरेंद्र मोदी सरकार को सीमावर्ती क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए नए कदम उठाने से नहीं रोका है. तीन सितंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अलॉन्ग-यिंकिओनग रोड पर बने एक सौ मीटर 'क्लास-सत्तर' स्टील और आर्क सुपरस्ट्रक्चर वाले सिओम ब्रिज का उद्घाटन किया. सियोम ब्रिज के उद्घाटन के अलावा, सिंह ने सीमा सड़क संगठन की सत्ताईस परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया. दो हज़ार इक्कीस में काबुल में बीजिंग और तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार के बीच शुरुआती बातचीत के बाद, कुछ समय के लिए बातचीत बंद हो गई थी. कई विशेषज्ञों ने नई विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के साथ आने की पूर्व की क्षमता पर संदेह किया. तालिबान ने अब उत्तरी अफगानिस्तान के अमु दरिया बेसिन से तेल निकालने के लिए चीन की झिंजियांग सेंट्रल एशिया पेट्रोलियम एंड गैस कंपनी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. समझौते में एक सौ पचास डॉलर मिलियन का प्रारंभिक निवेश शामिल है. हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर अफगानिस्तान में तमाम प्राकृतिक संसाधनों के दोहन वाली परियोजनाओं में बीजिंग की रुचि को दर्शाता है, लेकिन राजनीतिक रूप से अशांत काबुल में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कठिनाइयां एक बड़ी चुनौती बनी रहेंगी. इस बीच, पाकिस्तान ने एक बार फिर कर्ज के पहाड़ के नीचे डूबते हुए रेलवे के उन्नयन के लिए चीनी क्रेडिट लाइन का दोहन किया है. बीजिंग इस्लामाबाद को अपनी एक,सात सौ किलोग्राममीटर लंबी मेन लाइन एक रेलवे के पुनर्निर्माण के लिए दस अरब डॉलर देगा. |
आम आदमी पार्टी की तेज तर्रार विधायक अलका लांबा को एक बहुत बड़ा झटका लगा है. बता दें कि पार्टी ने उनसे इस्तीफा ले लिया है और इस पर अलका का कहना है कि इस्तीफे के बारे में अंतिम फैसला वह आज लेंगी. इसके पीछे की वजह पर नजर डालें तो पता चलता है कि दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को प्रदान किया गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" वापस लेने की मांग वाला एक प्रस्ताव शुक्रवार को पारित किया गया था, जहां आप ने राजीव के नाम के जिक्र से अपने आप को अलग कर लिया है. साथ हे इसे लेकर 1984 के सिख विरोधी दंगे का हवाला दिया था. लेकिन अब इस कहानी में एक नया ट्विस्ट आया है.
प्रस्ताव पर आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया था कि जो मूल लेख सदन में पेश किया गया था, पूर्व प्रधानमंत्री के संबंध में पंक्तियां उसका हिस्सा बिलकुल भी नहीं थीं. साथ ही बताया गया कि यह एक सदस्य (विधायक) का हस्तलिखित संशोधन प्रस्ताव था जिसे इस प्रकार से पारित नहीं किया जा सकता है. वहीं इस मुद्दे ने एक नया मोड़ तब ले लिया जब आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने सदन की कार्यवाही का वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया.
जानिए वीडियो में क्या है ?
कपिल मिश्रा ने दावा करते हुए कहा है कि इस वीडियो में विधानसभा में आप विधायक जरनैल सिंह प्रस्ताव को पढ़ रहे हैं और इसके बाद स्पीकर के आदेश के बाद सभी सदस्य खड़े होकर इस प्रस्ताव को अपना समर्थन प्राप्त कर रहे हैं. ट्विटर पर कपिल मिश्रा ने लिखा, "ये सब ऑन रिकॉर्ड हैं, सदन की कार्यवाही का हिस्सा हैं, उसके बाद अलका लांबा ने पार्टी के अंदर इस प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया था. लांबा ने प्रस्ताव के पास होने की खबर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी, इसके बाद आप विधायक को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया.
| आम आदमी पार्टी की तेज तर्रार विधायक अलका लांबा को एक बहुत बड़ा झटका लगा है. बता दें कि पार्टी ने उनसे इस्तीफा ले लिया है और इस पर अलका का कहना है कि इस्तीफे के बारे में अंतिम फैसला वह आज लेंगी. इसके पीछे की वजह पर नजर डालें तो पता चलता है कि दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को प्रदान किया गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" वापस लेने की मांग वाला एक प्रस्ताव शुक्रवार को पारित किया गया था, जहां आप ने राजीव के नाम के जिक्र से अपने आप को अलग कर लिया है. साथ हे इसे लेकर एक हज़ार नौ सौ चौरासी के सिख विरोधी दंगे का हवाला दिया था. लेकिन अब इस कहानी में एक नया ट्विस्ट आया है. प्रस्ताव पर आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया था कि जो मूल लेख सदन में पेश किया गया था, पूर्व प्रधानमंत्री के संबंध में पंक्तियां उसका हिस्सा बिलकुल भी नहीं थीं. साथ ही बताया गया कि यह एक सदस्य का हस्तलिखित संशोधन प्रस्ताव था जिसे इस प्रकार से पारित नहीं किया जा सकता है. वहीं इस मुद्दे ने एक नया मोड़ तब ले लिया जब आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने सदन की कार्यवाही का वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया. जानिए वीडियो में क्या है ? कपिल मिश्रा ने दावा करते हुए कहा है कि इस वीडियो में विधानसभा में आप विधायक जरनैल सिंह प्रस्ताव को पढ़ रहे हैं और इसके बाद स्पीकर के आदेश के बाद सभी सदस्य खड़े होकर इस प्रस्ताव को अपना समर्थन प्राप्त कर रहे हैं. ट्विटर पर कपिल मिश्रा ने लिखा, "ये सब ऑन रिकॉर्ड हैं, सदन की कार्यवाही का हिस्सा हैं, उसके बाद अलका लांबा ने पार्टी के अंदर इस प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया था. लांबा ने प्रस्ताव के पास होने की खबर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी, इसके बाद आप विधायक को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. |
अपनी चोटों से उबरने के बाद तेज गेंदबाज सुरंगा लकमल और नुवान प्रदीप ने श्रीलंका की टी-20 क्रिकेट टीम में वापसी की है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (एसएलसी) ने छह मार्च से शुरू हो रही त्रिकोणीय टी-20 सीरीज निदास ट्रॉफी के लिए टीम की घोषणा कर दी है। इस सीरीज के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला को बाहर रखा गया है, क्योंकि टीम में धनंजय डी सिल्वा को शामिल किया गया है। इसके अलावा, बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई टी-20 सीरीज में शामिल जैफरे वांडर्से को भी निदास ट्रॉफी के लिए टीम से बाहर रखा गया है। इस ट्रॉफी के लिए टीम में दो स्पिन गेंदबाजों अकीला धनंजय और अमीला अपोंसो को शामिल किया गया है। टीम के अनुभवी खिलाड़ी एंजेलो मैथ्यूज, असेला गुणारत्ने और शेनान मधुशंका चोटिल होने के कारण इस सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
निदास ट्रॉफी 6 से 18 मार्च के बीच खेली जाएगी, जिसमें शामिल हर टीम एक-दूसरे से दो बार मुकाबला करेगी और शीर्ष की दो टीम 18 मार्च को एक-दूसरे से फाइनल में भिड़ेंगी। सभी मैच कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेले जाएंगे। भारतीय टीम की कमान रोहित शर्मा को सौंपी गई है।
श्रीलंका : दिनेश चंडीमल (कप्तान), उपुल थरंगा, दनुश्का गुनाथीलका, कुसल मेंडिस, दासुन शनाका, कुसल परेरा, थिसारा परेरा, जीवन मेंडिस, सुरंगा लकमल, इसुरु उदाना, अकीला धनंजय, अमीला अपोंसो, नुवान प्रदीप, दुश्मंथा चमीरा और धनंजय डी सिल्वा।
बांग्लादेशः शाकिब अल हसन (कप्तान), महमूदुल्लाह, तमीम इकबाल खान, सौम्य सरकार, इमरुल कायेस, मुशफिकर रहीम, शब्बीर रहमान, मुस्तफ़ीजुर्र रहमान, रुबेल हुसैन, तास्किन अहमद, अबू हैदर रोनी, अबू जाशे राही, अमीर हुक, मेहदी हसन मिरज, नूरुल हसन सोहन,नाजमुल इस्लाम अपु।
भारतीय टीम : रोहित शर्मा (कप्तान), शिखर धवन (उप-कप्तान), लोकेश राहुल, सुरेश रैना, मनीष पांडे, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), दीपक हुड्डा, वाशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, विजय शंकर, शार्दुल ठाकुर, जयदेव उनादकट, मोहम्मद सिराज और ऋषभ पंत (विकेटकीपर)।
शिड्यूलः
| अपनी चोटों से उबरने के बाद तेज गेंदबाज सुरंगा लकमल और नुवान प्रदीप ने श्रीलंका की टी-बीस क्रिकेट टीम में वापसी की है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने छह मार्च से शुरू हो रही त्रिकोणीय टी-बीस सीरीज निदास ट्रॉफी के लिए टीम की घोषणा कर दी है। इस सीरीज के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला को बाहर रखा गया है, क्योंकि टीम में धनंजय डी सिल्वा को शामिल किया गया है। इसके अलावा, बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई टी-बीस सीरीज में शामिल जैफरे वांडर्से को भी निदास ट्रॉफी के लिए टीम से बाहर रखा गया है। इस ट्रॉफी के लिए टीम में दो स्पिन गेंदबाजों अकीला धनंजय और अमीला अपोंसो को शामिल किया गया है। टीम के अनुभवी खिलाड़ी एंजेलो मैथ्यूज, असेला गुणारत्ने और शेनान मधुशंका चोटिल होने के कारण इस सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। निदास ट्रॉफी छः से अट्ठारह मार्च के बीच खेली जाएगी, जिसमें शामिल हर टीम एक-दूसरे से दो बार मुकाबला करेगी और शीर्ष की दो टीम अट्ठारह मार्च को एक-दूसरे से फाइनल में भिड़ेंगी। सभी मैच कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेले जाएंगे। भारतीय टीम की कमान रोहित शर्मा को सौंपी गई है। श्रीलंका : दिनेश चंडीमल , उपुल थरंगा, दनुश्का गुनाथीलका, कुसल मेंडिस, दासुन शनाका, कुसल परेरा, थिसारा परेरा, जीवन मेंडिस, सुरंगा लकमल, इसुरु उदाना, अकीला धनंजय, अमीला अपोंसो, नुवान प्रदीप, दुश्मंथा चमीरा और धनंजय डी सिल्वा। बांग्लादेशः शाकिब अल हसन , महमूदुल्लाह, तमीम इकबाल खान, सौम्य सरकार, इमरुल कायेस, मुशफिकर रहीम, शब्बीर रहमान, मुस्तफ़ीजुर्र रहमान, रुबेल हुसैन, तास्किन अहमद, अबू हैदर रोनी, अबू जाशे राही, अमीर हुक, मेहदी हसन मिरज, नूरुल हसन सोहन,नाजमुल इस्लाम अपु। भारतीय टीम : रोहित शर्मा , शिखर धवन , लोकेश राहुल, सुरेश रैना, मनीष पांडे, दिनेश कार्तिक , दीपक हुड्डा, वाशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, विजय शंकर, शार्दुल ठाकुर, जयदेव उनादकट, मोहम्मद सिराज और ऋषभ पंत । शिड्यूलः |
भारत में एक राष्ट्रीय ग्रंथ स़िर्फ और स़िर्फ भारत का संविधान हो सकता है, जो अपने आप में सब कुछ समाहित किए हुए है. इसे गांधी जी के नेतृत्व में जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एवं बीआर अंबेडकर जैसे महान लोगों ने बहुत ही समझदारी से लिखा है. इससे बेहतर करने के लिए आपको सचमुच बहुत ही बुद्धिमान लोगों की ज़रूरत है. मैं मानता हूं कि हमारे लिए यह स्वीकार करना कठिन है कि आज के दौर के नेता उन स्वतंत्रता सेनानियों से ज़्यादा बुद्धिमान हैं.
सरकार विकास के एजेंडे के प्रति छोटे ही सही, लेकिन क़दम उठा रही है और विदेशी निवेश आ रहा है. वित्त मंत्री भी बजट में कुछ घोषणाओं का वादा कर रहे हैं. दूसरी तरफ़, यह देखना दिलचस्प है कि विश्व हिंदू परिषद और भाजपा से जुड़े अन्य संगठनों ने अपने एजेंडे पर काम करना शुरू कर दिया है. यह हरकत वर्तमान स्थिति में न स़िर्फ नरेंद्र मोदी सरकार को कमजोर करेगी, बल्कि उसे नीचा दिखाने का काम करेगी. धर्मांतरण और धर्म प्रचार को ईसाइयत में प्रोत्साहित किया जाता है और अधिक से अधिक लोगों को ईसाई एवं कैथोलिक बनाने की कोशिश की जाती है. ईसाई धर्म में यह एक सिद्धांत है. इस्लाम में इस बारे में क्या है, मैं ज़्यादा नहीं जानता, लेकिन वहां भी धर्मांतरण की प्रक्रिया है.
हालांकि, हिंदू धर्म में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है. या तो आप हिंदू पैदा हुए है या हिंदू पैदा नहीं हुए. हिंदू धर्म में किसी का धर्म परिवर्तित करने के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है. मैंने उपलब्ध हिंदू शास्त्रों एवं ग्रंथों को पढ़ा है और उनमें कहीं भी इस तरह की प्रक्रिया का उल्लेख नहीं हैं. इसके दो कारण हो सकते हैं. एक तो यह कि हिंदू धर्म की कोई तारीख नहीं है. यह इतना पुराना है कि शायद तब कोई संगठित धर्म मौजूद नहीं था. इसलिए इसकी ज़रूरत ही नहीं थी कि किसी को हिंदू धर्म के लिए परिवर्तित किया जाए. दूसरा यह कि हिंदू धर्म वेद, रामायण, महाभारत एवं गीता आदि के माध्यम से चलता है, जहां अधिकतम उदारतावादी दर्शन है. इसलिए हिंदू धर्म में धर्मांतरण अप्रासंगिक और एक निरर्थक प्रयास है.
ऐसा लगता है कि यह पूरी घटना अपनी प्रकृति में राजनीतिक है, धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है. यह स़िर्फ श्रेष्ठता दिखाने की एक कोशिश है. ये संगठन कैसे और क्या सोचते हैं, यह सब काम करके ये कैसे नरेंद्र मोदी की मदद कर पाएंगे, मैं नहीं जानता. मुझे लगता है कि ये ऐसा करके नरेंद्र मोदी के लिए ज़्यादा मुश्किल पैदा कर रहे हैं. बजाय उनकी सरकार को मजबूत करने के, ये लोग ऐसा काम कर रहे हैं, जो समझ से बाहर है.
ऐसा लगता है कि यह पूरी घटना अपनी प्रकृति में राजनीतिक है, धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है. यह स़िर्फ श्रेष्ठता दिखाने की एक कोशिश है. ये संगठन कैसे और क्या सोचते हैं, यह सब काम करके ये कैसे नरेंद्र मोदी की मदद कर पाएंगे, मैं नहीं जानता. मुझे लगता है कि ये ऐसा करके नरेंद्र मोदी के लिए ज़्यादा मुश्किल पैदा कर रहे हैं. बजाय उनकी सरकार को मजबूत करने के, ये लोग ऐसा काम कर रहे हैं, जो समझ से बाहर है. इसी तरह सुषमा स्वराज जैसी प्रबुद्ध शख्सियत ने यह आह्वान किया है कि गीता एक राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित हो. मुझे लगता है कि सुषमा जिस कार्यक्रम में बोल रही थीं, वह गीता से संबंधित था और शायद सुषमा उससे प्रभावित होकर ऐसा बोल गईं. हिंदू भी एक अकेले ग्रंथ के रूप में गीता को स्वीकार नहीं करेंगे.
मैं जानता हूं कि बहुत सारे हिंदू हैं, जो वेदों में विश्वास करते हैं, अन्य ग्रंथों में विश्वास करते हैं. बेशक, मैं भी मानता हूं कि गीता अपने आप में विस्तृत ज्ञान से भरी हुई एक पुस्तक है, जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण किताब है. लेकिन, अगर आप इसे एक राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करना चाहते हैं, तो फिर इसके लिए दो कारक हैं. पहला यह कि भारत एक बहुधर्मी देश है और सबके बीच सह-अस्तित्व है. ऐसा करके आप जोड़ने का नहीं, बल्कि बांटने का काम करेंगे. दूसरी बात यह है कि आप हिंदू दर्शन को कमतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इनके नायक वीर सावरकर कहते थे कि भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में हिंदू धर्म एक सांस्कृतिक भारतीयता है. ऐसे में, गीता एक राष्ट्रीय ग्रंथ के रूप में फिट कैसे होगी?
भारत में एक राष्ट्रीय ग्रंथ स़िर्फ और स़िर्फ भारत का संविधान हो सकता है, जो अपने आप में सब कुछ समाहित किए हुए है. इसे गांधी जी के नेतृत्व में जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एवं बीआर अंबेडकर जैसे महान लोगों ने बहुत ही समझदारी से लिखा है. इससे बेहतर करने के लिए आपको सचमुच बहुत ही बुद्धिमान लोगों की ज़रूरत है. मैं मानता हूं कि हमारे लिए यह स्वीकार करना कठिन है कि आज के दौर के नेता उन स्वतंत्रता सेनानियों से ज़्यादा बुद्धिमान हैं. हम सुलट चुके मामलों को जितना ही कम छेड़ें, देश के लिए उतना ही बेहतर होगा.
| भारत में एक राष्ट्रीय ग्रंथ स़िर्फ और स़िर्फ भारत का संविधान हो सकता है, जो अपने आप में सब कुछ समाहित किए हुए है. इसे गांधी जी के नेतृत्व में जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एवं बीआर अंबेडकर जैसे महान लोगों ने बहुत ही समझदारी से लिखा है. इससे बेहतर करने के लिए आपको सचमुच बहुत ही बुद्धिमान लोगों की ज़रूरत है. मैं मानता हूं कि हमारे लिए यह स्वीकार करना कठिन है कि आज के दौर के नेता उन स्वतंत्रता सेनानियों से ज़्यादा बुद्धिमान हैं. सरकार विकास के एजेंडे के प्रति छोटे ही सही, लेकिन क़दम उठा रही है और विदेशी निवेश आ रहा है. वित्त मंत्री भी बजट में कुछ घोषणाओं का वादा कर रहे हैं. दूसरी तरफ़, यह देखना दिलचस्प है कि विश्व हिंदू परिषद और भाजपा से जुड़े अन्य संगठनों ने अपने एजेंडे पर काम करना शुरू कर दिया है. यह हरकत वर्तमान स्थिति में न स़िर्फ नरेंद्र मोदी सरकार को कमजोर करेगी, बल्कि उसे नीचा दिखाने का काम करेगी. धर्मांतरण और धर्म प्रचार को ईसाइयत में प्रोत्साहित किया जाता है और अधिक से अधिक लोगों को ईसाई एवं कैथोलिक बनाने की कोशिश की जाती है. ईसाई धर्म में यह एक सिद्धांत है. इस्लाम में इस बारे में क्या है, मैं ज़्यादा नहीं जानता, लेकिन वहां भी धर्मांतरण की प्रक्रिया है. हालांकि, हिंदू धर्म में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है. या तो आप हिंदू पैदा हुए है या हिंदू पैदा नहीं हुए. हिंदू धर्म में किसी का धर्म परिवर्तित करने के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है. मैंने उपलब्ध हिंदू शास्त्रों एवं ग्रंथों को पढ़ा है और उनमें कहीं भी इस तरह की प्रक्रिया का उल्लेख नहीं हैं. इसके दो कारण हो सकते हैं. एक तो यह कि हिंदू धर्म की कोई तारीख नहीं है. यह इतना पुराना है कि शायद तब कोई संगठित धर्म मौजूद नहीं था. इसलिए इसकी ज़रूरत ही नहीं थी कि किसी को हिंदू धर्म के लिए परिवर्तित किया जाए. दूसरा यह कि हिंदू धर्म वेद, रामायण, महाभारत एवं गीता आदि के माध्यम से चलता है, जहां अधिकतम उदारतावादी दर्शन है. इसलिए हिंदू धर्म में धर्मांतरण अप्रासंगिक और एक निरर्थक प्रयास है. ऐसा लगता है कि यह पूरी घटना अपनी प्रकृति में राजनीतिक है, धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है. यह स़िर्फ श्रेष्ठता दिखाने की एक कोशिश है. ये संगठन कैसे और क्या सोचते हैं, यह सब काम करके ये कैसे नरेंद्र मोदी की मदद कर पाएंगे, मैं नहीं जानता. मुझे लगता है कि ये ऐसा करके नरेंद्र मोदी के लिए ज़्यादा मुश्किल पैदा कर रहे हैं. बजाय उनकी सरकार को मजबूत करने के, ये लोग ऐसा काम कर रहे हैं, जो समझ से बाहर है. ऐसा लगता है कि यह पूरी घटना अपनी प्रकृति में राजनीतिक है, धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है. यह स़िर्फ श्रेष्ठता दिखाने की एक कोशिश है. ये संगठन कैसे और क्या सोचते हैं, यह सब काम करके ये कैसे नरेंद्र मोदी की मदद कर पाएंगे, मैं नहीं जानता. मुझे लगता है कि ये ऐसा करके नरेंद्र मोदी के लिए ज़्यादा मुश्किल पैदा कर रहे हैं. बजाय उनकी सरकार को मजबूत करने के, ये लोग ऐसा काम कर रहे हैं, जो समझ से बाहर है. इसी तरह सुषमा स्वराज जैसी प्रबुद्ध शख्सियत ने यह आह्वान किया है कि गीता एक राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित हो. मुझे लगता है कि सुषमा जिस कार्यक्रम में बोल रही थीं, वह गीता से संबंधित था और शायद सुषमा उससे प्रभावित होकर ऐसा बोल गईं. हिंदू भी एक अकेले ग्रंथ के रूप में गीता को स्वीकार नहीं करेंगे. मैं जानता हूं कि बहुत सारे हिंदू हैं, जो वेदों में विश्वास करते हैं, अन्य ग्रंथों में विश्वास करते हैं. बेशक, मैं भी मानता हूं कि गीता अपने आप में विस्तृत ज्ञान से भरी हुई एक पुस्तक है, जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण किताब है. लेकिन, अगर आप इसे एक राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करना चाहते हैं, तो फिर इसके लिए दो कारक हैं. पहला यह कि भारत एक बहुधर्मी देश है और सबके बीच सह-अस्तित्व है. ऐसा करके आप जोड़ने का नहीं, बल्कि बांटने का काम करेंगे. दूसरी बात यह है कि आप हिंदू दर्शन को कमतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इनके नायक वीर सावरकर कहते थे कि भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में हिंदू धर्म एक सांस्कृतिक भारतीयता है. ऐसे में, गीता एक राष्ट्रीय ग्रंथ के रूप में फिट कैसे होगी? भारत में एक राष्ट्रीय ग्रंथ स़िर्फ और स़िर्फ भारत का संविधान हो सकता है, जो अपने आप में सब कुछ समाहित किए हुए है. इसे गांधी जी के नेतृत्व में जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एवं बीआर अंबेडकर जैसे महान लोगों ने बहुत ही समझदारी से लिखा है. इससे बेहतर करने के लिए आपको सचमुच बहुत ही बुद्धिमान लोगों की ज़रूरत है. मैं मानता हूं कि हमारे लिए यह स्वीकार करना कठिन है कि आज के दौर के नेता उन स्वतंत्रता सेनानियों से ज़्यादा बुद्धिमान हैं. हम सुलट चुके मामलों को जितना ही कम छेड़ें, देश के लिए उतना ही बेहतर होगा. |
- मॉडल टेनेंसी एक्ट से किराए के घरों से संबंधित पूरे कानूनी ढांचे में बड़ा बदलाव होगा।
- सभी इनकम ग्रुप के लोगों के लिए रेंटल हाउसिंग की व्यवस्था होगी।
- जिन लोगों को बेघर होने की समस्या से जूझनी पड़ती है, उन्हें बड़ी मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में परिचालित करने के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंजूरी दे दी है, ताकि नए कानून बनाकर या मौजूदा रेंटल कानूनों को उपयुक्त रूप से संशोधित किया जा सके। यह देश भर में किराए के आवास के संबंध में कानूनी ढांचे को कायापलट करने में मदद करेगा, जिससे इसके समग्र विकास में मदद मिलेगी।
मॉडल टेनेंसी एक्ट का उद्देश्य देश में एक जीवंत, टिकाऊ और समावेशी रेंटल हाउसिंग मार्केट बनाना है। यह सभी आय समूहों के लिए पर्याप्त किराये के आवास स्टॉक के निर्माण को सक्षम करेगा जिससे बेघरों की समस्या का समाधान होगा। मॉडल टेनेंसी एक्ट औपचारिक बाजार की ओर धीरे-धीरे स्थानांतरित करके किराये के आवास के इंस्टीट्यूनेशनालाइजेशन को सक्षम बनाएगा। मॉडल टेनेंसी एक्ट किराए के आवास उद्देश्यों के लिए खाली घरों को खोलने की सुविधा प्रदान करेगा। इससे आवास की भारी कमी को दूर करने के लिए एक व्यवसाय मॉडल के रूप में किराए के आवास में निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मॉडल टेनेंसी एक्ट से लोगों को प्रॉपर्टी किराये पर लेने में आसानी होगी। धोखाधड़ी या प्रताड़ना से बचने का पूरा अधिकार मिलेगा। नए कानून के चलते रेंटल हाउसिंग को एक औपचारिक मार्केट तैयार होगा। किरायेदार और मकान किराए पर देने वाले दोनों को फायदा होगा। दोनों को किसी बात को लेकर विवाद होने पर अथॉरिटी में जाने का अधिकार होगा। इसके लिए अलग से कोर्ट को भी व्यवस्था होगी।
इस कानून को लागू करने का अधिकार राज्यों पर होगा। कोई भी किसी की प्रोपर्टी पर कब्जा नहीं कर सकता है। मकान मालिक भी किरायेदार को तंग करके घर खाली करने के लिए नहीं कह सकता। घर खाली कराना है तो मकान मालिक को पहले नोटिस देना होगा। किराएदार को भी यह ध्यान रखना होगा कि जिस घर में वह रहता है, उसका देखभाल उसे करना होगा।
| - मॉडल टेनेंसी एक्ट से किराए के घरों से संबंधित पूरे कानूनी ढांचे में बड़ा बदलाव होगा। - सभी इनकम ग्रुप के लोगों के लिए रेंटल हाउसिंग की व्यवस्था होगी। - जिन लोगों को बेघर होने की समस्या से जूझनी पड़ती है, उन्हें बड़ी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में परिचालित करने के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंजूरी दे दी है, ताकि नए कानून बनाकर या मौजूदा रेंटल कानूनों को उपयुक्त रूप से संशोधित किया जा सके। यह देश भर में किराए के आवास के संबंध में कानूनी ढांचे को कायापलट करने में मदद करेगा, जिससे इसके समग्र विकास में मदद मिलेगी। मॉडल टेनेंसी एक्ट का उद्देश्य देश में एक जीवंत, टिकाऊ और समावेशी रेंटल हाउसिंग मार्केट बनाना है। यह सभी आय समूहों के लिए पर्याप्त किराये के आवास स्टॉक के निर्माण को सक्षम करेगा जिससे बेघरों की समस्या का समाधान होगा। मॉडल टेनेंसी एक्ट औपचारिक बाजार की ओर धीरे-धीरे स्थानांतरित करके किराये के आवास के इंस्टीट्यूनेशनालाइजेशन को सक्षम बनाएगा। मॉडल टेनेंसी एक्ट किराए के आवास उद्देश्यों के लिए खाली घरों को खोलने की सुविधा प्रदान करेगा। इससे आवास की भारी कमी को दूर करने के लिए एक व्यवसाय मॉडल के रूप में किराए के आवास में निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मॉडल टेनेंसी एक्ट से लोगों को प्रॉपर्टी किराये पर लेने में आसानी होगी। धोखाधड़ी या प्रताड़ना से बचने का पूरा अधिकार मिलेगा। नए कानून के चलते रेंटल हाउसिंग को एक औपचारिक मार्केट तैयार होगा। किरायेदार और मकान किराए पर देने वाले दोनों को फायदा होगा। दोनों को किसी बात को लेकर विवाद होने पर अथॉरिटी में जाने का अधिकार होगा। इसके लिए अलग से कोर्ट को भी व्यवस्था होगी। इस कानून को लागू करने का अधिकार राज्यों पर होगा। कोई भी किसी की प्रोपर्टी पर कब्जा नहीं कर सकता है। मकान मालिक भी किरायेदार को तंग करके घर खाली करने के लिए नहीं कह सकता। घर खाली कराना है तो मकान मालिक को पहले नोटिस देना होगा। किराएदार को भी यह ध्यान रखना होगा कि जिस घर में वह रहता है, उसका देखभाल उसे करना होगा। |
हिमालयन नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने प्रदेश की दोनों पार्टियों पर हमला किया है। गुमान ने प्रैस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश में हो रहे चुनावों में दोनों मुख्य राजनीतिक पार्टियां लोक हित के मुद्दों को भूल गए है और घोषित घोषणा पत्रो में लोगों के हित के लिए कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज वन अधिकार कानून 2006 को लागू करने के लिए किसी भी पार्टी के घोषणा पत्र में जिक्र नही है। जिसके चलते प्रदेश के लाखों किसानों का हित जुड़ा हुआ है। रोजगार के मुददे पर भी किसी भी राजनीतिक पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में कोई ठोस नीति या योजना का उल्लेख नही किया है।
प्रदेश भर में बन रहे फोरलेन में लोगो को मिलने वाले मुआवजे के पर भी किसी भी राजनीतिक दल ने अपने घोषणा पत्र में जगह नही दी है। उन्हीने कहा कि वे इन सब मामलो को लेकर प्रदेश भर में जा कर लोगो को जागरूक कर रहे हैं।
| हिमालयन नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने प्रदेश की दोनों पार्टियों पर हमला किया है। गुमान ने प्रैस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश में हो रहे चुनावों में दोनों मुख्य राजनीतिक पार्टियां लोक हित के मुद्दों को भूल गए है और घोषित घोषणा पत्रो में लोगों के हित के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज वन अधिकार कानून दो हज़ार छः को लागू करने के लिए किसी भी पार्टी के घोषणा पत्र में जिक्र नही है। जिसके चलते प्रदेश के लाखों किसानों का हित जुड़ा हुआ है। रोजगार के मुददे पर भी किसी भी राजनीतिक पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में कोई ठोस नीति या योजना का उल्लेख नही किया है। प्रदेश भर में बन रहे फोरलेन में लोगो को मिलने वाले मुआवजे के पर भी किसी भी राजनीतिक दल ने अपने घोषणा पत्र में जगह नही दी है। उन्हीने कहा कि वे इन सब मामलो को लेकर प्रदेश भर में जा कर लोगो को जागरूक कर रहे हैं। |
।'नृसिंह द्वादशी' का हिन्दू धर्म में बड़ा धार्मिक महत्त्व है। इस दिन भगवान नृसिंह की पूजा का विशेष महत्त्व बताया गया है।
।नरसिंह द्वादशी व्रत को विधि-विधान से करने वाले मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत के प्रभाव से भय दूर हो जाता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और साहस की प्राप्ति होती है।
नृसिंह द्वादशी फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। भगवान विष्णु के बारह अवतार में से एक अवतार नृसिंह भगवान का है। नृसिंह अवतार में भगवन श्रीहरि विष्णु जी ने आधा मनुष्य तथा आधा शेर का रूप धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि रहते थे। ऋषि कश्यप की पत्नी का नाम दिति था तथा उनकी दो संतान थीं। ऋषि कश्यप ने प्रथम पुत्र का नाम 'हिरण्याक्ष' तथा दूसरे पुत्र का नाम 'हिरण्यकशिपु' रखा। परंतु ऋषि के दोनों संतान असुर प्रवृत्ति का हो गये। आसुरी प्रवृत्ति के होने के कारण भगवान विष्णु के वराह रूप ने पृथ्वी की रक्षा हेतु ऋषि कश्यप के पुत्र हरिण्याक्ष का वध कर दिया। अपने भाई की मृत्यु से दुःखी तथा क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प लिया। हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा का कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने हिरण्यकशिपु को अजेय होने का वरदान दिया।
वरदान पाने के पश्चात हिरण्यकशिपु ने स्वर्ग पर अधिपत्य स्थापित कर लिया तथा स्वर्ग के देवों को मारकर भगा दिया। तीनों लोकों में त्राहि माम् मच गया। अजेय वर प्राप्त करने के कारण हिरण्यकशिपु तीनों लोकों का स्वामी बन गया। देवता गण उनसे युद्ध में पराजित हो जाते थे। हिरण्यकशिपु को अपनी शक्ति पर अत्यधिक अहंकार हो गया। जिस कारण हिरण्यकशिपु प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा। इस दौरान हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया। परन्तु प्रह्लाद पिता के स्वभाव से पूर्णतः विपरीत स्वभाव का था। भक्त प्रह्लाद बचपन से ही संत प्रवृत्ति का था तथा भक्त प्रह्लाद अपने बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु का भक्त बन गया। प्रह्लाद अपने पिता के कार्यों का विरोध करता था। भगवान की भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयास किया। प्रह्लाद इससे कभी विचलित नहीं हुए। अंततः हिरण्यकशिपु ने अनीति का सहारा लेकर अपने पुत्र की हत्या के लिए उसे पर्वत से धकेला। होलिका दहन में जलाया गया, परन्तु हर बार भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच जाते थे। भगवान के इस चमत्कार से प्रजाजन भी भगवान विष्णु की पूजा तथा गुणगान करने लगी।
इस घटना से हिरण्यकशिपु क्रोधित हो गया। वह प्रह्लाद से कटु शब्द में बोला- "कहाँ है तेरा भगवान? सामने बुला।" प्रह्लाद ने कहा- "प्रभु तो सर्वशक्तिमान हैं। वह तो कण-कण में व्याप्त हैं। यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं।" हिरण्यकशिपु ने क्रोधित होकर कहा- "क्या इस खम्बे में भी तेरा भगवान छिपा है?" भक्त प्रह्लाद ने कहा- "हाँ।" यह सुनकर हिरण्यकशिपु ने खम्बे पर अपने गदा से प्रहार किया। तभी खंभे को चीरकर भगवान नृसिंह प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु को अपनी जांघों पर रखकर उसकी छाती को नखों से फाड़ कर उसका वध कर डाला। भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद को वरदान दिया, जो कोई आज के दिन भगवान नृसिंह का स्मरण, व्रत तथा पूजा-अर्चना करेगा, उसकी मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होंगी।
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
इन मंत्रों के जाप करने से समस्त प्रकार के दुःखों का निवारण होता है तथा भगवान नृसिंह की कृपा से जीवन में मंगल ही मंगल होता है। भगवान नृसिंह अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं।
| ।'नृसिंह द्वादशी' का हिन्दू धर्म में बड़ा धार्मिक महत्त्व है। इस दिन भगवान नृसिंह की पूजा का विशेष महत्त्व बताया गया है। ।नरसिंह द्वादशी व्रत को विधि-विधान से करने वाले मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत के प्रभाव से भय दूर हो जाता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और साहस की प्राप्ति होती है। नृसिंह द्वादशी फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। भगवान विष्णु के बारह अवतार में से एक अवतार नृसिंह भगवान का है। नृसिंह अवतार में भगवन श्रीहरि विष्णु जी ने आधा मनुष्य तथा आधा शेर का रूप धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि रहते थे। ऋषि कश्यप की पत्नी का नाम दिति था तथा उनकी दो संतान थीं। ऋषि कश्यप ने प्रथम पुत्र का नाम 'हिरण्याक्ष' तथा दूसरे पुत्र का नाम 'हिरण्यकशिपु' रखा। परंतु ऋषि के दोनों संतान असुर प्रवृत्ति का हो गये। आसुरी प्रवृत्ति के होने के कारण भगवान विष्णु के वराह रूप ने पृथ्वी की रक्षा हेतु ऋषि कश्यप के पुत्र हरिण्याक्ष का वध कर दिया। अपने भाई की मृत्यु से दुःखी तथा क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प लिया। हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा का कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने हिरण्यकशिपु को अजेय होने का वरदान दिया। वरदान पाने के पश्चात हिरण्यकशिपु ने स्वर्ग पर अधिपत्य स्थापित कर लिया तथा स्वर्ग के देवों को मारकर भगा दिया। तीनों लोकों में त्राहि माम् मच गया। अजेय वर प्राप्त करने के कारण हिरण्यकशिपु तीनों लोकों का स्वामी बन गया। देवता गण उनसे युद्ध में पराजित हो जाते थे। हिरण्यकशिपु को अपनी शक्ति पर अत्यधिक अहंकार हो गया। जिस कारण हिरण्यकशिपु प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा। इस दौरान हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया। परन्तु प्रह्लाद पिता के स्वभाव से पूर्णतः विपरीत स्वभाव का था। भक्त प्रह्लाद बचपन से ही संत प्रवृत्ति का था तथा भक्त प्रह्लाद अपने बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु का भक्त बन गया। प्रह्लाद अपने पिता के कार्यों का विरोध करता था। भगवान की भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयास किया। प्रह्लाद इससे कभी विचलित नहीं हुए। अंततः हिरण्यकशिपु ने अनीति का सहारा लेकर अपने पुत्र की हत्या के लिए उसे पर्वत से धकेला। होलिका दहन में जलाया गया, परन्तु हर बार भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच जाते थे। भगवान के इस चमत्कार से प्रजाजन भी भगवान विष्णु की पूजा तथा गुणगान करने लगी। इस घटना से हिरण्यकशिपु क्रोधित हो गया। वह प्रह्लाद से कटु शब्द में बोला- "कहाँ है तेरा भगवान? सामने बुला।" प्रह्लाद ने कहा- "प्रभु तो सर्वशक्तिमान हैं। वह तो कण-कण में व्याप्त हैं। यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं।" हिरण्यकशिपु ने क्रोधित होकर कहा- "क्या इस खम्बे में भी तेरा भगवान छिपा है?" भक्त प्रह्लाद ने कहा- "हाँ।" यह सुनकर हिरण्यकशिपु ने खम्बे पर अपने गदा से प्रहार किया। तभी खंभे को चीरकर भगवान नृसिंह प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु को अपनी जांघों पर रखकर उसकी छाती को नखों से फाड़ कर उसका वध कर डाला। भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद को वरदान दिया, जो कोई आज के दिन भगवान नृसिंह का स्मरण, व्रत तथा पूजा-अर्चना करेगा, उसकी मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होंगी। ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। इन मंत्रों के जाप करने से समस्त प्रकार के दुःखों का निवारण होता है तथा भगवान नृसिंह की कृपा से जीवन में मंगल ही मंगल होता है। भगवान नृसिंह अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। |
लासलगांवः पिछले एक पखवाड़े से प्याज के थोक और फुटकर दोनों भावों में बड़ी तेजी से कमी आई है। इससे किसानों के आंसू छलक पड़े हैं। हर दिन भाव गिरने से किसानों की आर्थिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। एक तरफ हर दिन महंगाई बढ़ रही है तो दूसरी ओर प्याज के गिरते भाव ने किसानों की आंखें सफेद कर दी हैं। किसानों का कहना है कि अगर प्याज के भाव में इसी तरह की गिरावट जारी रही तो उत्पादन खर्च भी नहीं निकल पाएगा।
एक माह पूर्व प्याज को मिल रहे भाव और आज प्याज को मिले भाव में जमीन आसमान का अंतर है। प्याज के गिरते भाव ने किसानों के आंखों से आंसू निकाल दिए हैं।
लासलगांव बाजार समिति में ग्रीष्मकालीन प्याज की रिकॉर्ड आवक हुई है। इससे प्याज की मांग कम हो गई है, जिसका असर उसके भाव पर पड़ रहा है। लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति में शुक्रवार को लाल प्याज 7,500 रुपए क्विंटल न्यूनतम भाव पर बिका।
| लासलगांवः पिछले एक पखवाड़े से प्याज के थोक और फुटकर दोनों भावों में बड़ी तेजी से कमी आई है। इससे किसानों के आंसू छलक पड़े हैं। हर दिन भाव गिरने से किसानों की आर्थिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। एक तरफ हर दिन महंगाई बढ़ रही है तो दूसरी ओर प्याज के गिरते भाव ने किसानों की आंखें सफेद कर दी हैं। किसानों का कहना है कि अगर प्याज के भाव में इसी तरह की गिरावट जारी रही तो उत्पादन खर्च भी नहीं निकल पाएगा। एक माह पूर्व प्याज को मिल रहे भाव और आज प्याज को मिले भाव में जमीन आसमान का अंतर है। प्याज के गिरते भाव ने किसानों के आंखों से आंसू निकाल दिए हैं। लासलगांव बाजार समिति में ग्रीष्मकालीन प्याज की रिकॉर्ड आवक हुई है। इससे प्याज की मांग कम हो गई है, जिसका असर उसके भाव पर पड़ रहा है। लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति में शुक्रवार को लाल प्याज सात,पाँच सौ रुपयापए क्विंटल न्यूनतम भाव पर बिका। |
Akanksha Juneja साइबर क्राइम का शिकार हो गई हैं. एक्ट्रेस के बैक अकाउंट से 30 हजार रुपये गायब हो गए. खास बात है कि एक्ट्रेस को ये चूना फूड ऑर्डर करने के दौरान लगा. एक्ट्रेस ने तुरंत अकाउंट ब्लॉक करवाया लेकिन तब तक उन्हें भारी नुकसान हो चुका था.
Akanksha Juneja Fraud: आम ही नहीं बल्कि खास लोग भी साइबर क्राइम के चपेटे में आ चुके हैं. हाल ही में इसका शिकार टीवी एक्ट्रेस आकांक्षा जुनेजा (Akanksha Juneja) हुईं. आकांक्षा 'साथ निभाना साथिया' सीरियल और अब 'कुंडली भाग्य' सीरियल में नजर आ आती हैं. एक्ट्रेस के साथ हाल ही में खाना ऑर्डर करने के दौरान 30 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है. जिसके बाद एक्ट्रेस सकते में हैं और उन्होंने अकाउंट ब्लॉक करवाया है.
आकांक्षा ने ईटाइम्स को लेकर इस बात का खुलासा किया. एक्ट्रेस ने कहा- 'जब मैंने बाहर से हाल ही में खाना ऑर्डर किया तो उसके बाद मुझे किसी कंपनी से फोन आया. उन्होंने मुझे कहा कि आपके पास एक लिंक आया होगा उस लिंक पर क्लिक पर अपने ऑर्डर को कंफर्म करें. जब मैंने पूछा कि ऐसा तो नहीं होता है. तो उन्होंने कहा- नया प्रोटोकाल है. जैसे ही मैंने लिंक पर क्लिक किया तो मेरे अकाउंट से हर 5 मिनट में 10 हजार रुपये कटने लगे. मैं सोच ही रही थी ऐसा क्यों हो रहा है तभी मुझे वो लिंक क्लिक किया.'
इसके साथ ही एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 'मैंने तुरंत बैंक को फोन किया और अपना अकाउंट ब्लॉक करवाया. लेकिन तब तक मुझे 30 हजार का चूना लग चुका था. जब मेहनत की कमाई के पैसे ऐसे चले जाते हैं तो बहुत तकलीफ होती है.'
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 'लोगों को आजकल होने वाले इस तरह के घोटालों से सावधान रहना चाहिए. जिसने मुझे ये लिंक भेजा था उसने मेरा फोन हैक कर लिया था. इसलिए कभी भी किसी अनजान शख्स के भेजे गए लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए.' आपको बता दें, आकांक्षा जुनेजा कई सारे सीरियल्स में काम कर चुकी हैं. इन सीरियल्स में 'बड़े अच्छे लगते हैं' और 'हमारी बेटी राज करेगी' टीवी शो शामिल है.
| Akanksha Juneja साइबर क्राइम का शिकार हो गई हैं. एक्ट्रेस के बैक अकाउंट से तीस हजार रुपये गायब हो गए. खास बात है कि एक्ट्रेस को ये चूना फूड ऑर्डर करने के दौरान लगा. एक्ट्रेस ने तुरंत अकाउंट ब्लॉक करवाया लेकिन तब तक उन्हें भारी नुकसान हो चुका था. Akanksha Juneja Fraud: आम ही नहीं बल्कि खास लोग भी साइबर क्राइम के चपेटे में आ चुके हैं. हाल ही में इसका शिकार टीवी एक्ट्रेस आकांक्षा जुनेजा हुईं. आकांक्षा 'साथ निभाना साथिया' सीरियल और अब 'कुंडली भाग्य' सीरियल में नजर आ आती हैं. एक्ट्रेस के साथ हाल ही में खाना ऑर्डर करने के दौरान तीस हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है. जिसके बाद एक्ट्रेस सकते में हैं और उन्होंने अकाउंट ब्लॉक करवाया है. आकांक्षा ने ईटाइम्स को लेकर इस बात का खुलासा किया. एक्ट्रेस ने कहा- 'जब मैंने बाहर से हाल ही में खाना ऑर्डर किया तो उसके बाद मुझे किसी कंपनी से फोन आया. उन्होंने मुझे कहा कि आपके पास एक लिंक आया होगा उस लिंक पर क्लिक पर अपने ऑर्डर को कंफर्म करें. जब मैंने पूछा कि ऐसा तो नहीं होता है. तो उन्होंने कहा- नया प्रोटोकाल है. जैसे ही मैंने लिंक पर क्लिक किया तो मेरे अकाउंट से हर पाँच मिनट में दस हजार रुपये कटने लगे. मैं सोच ही रही थी ऐसा क्यों हो रहा है तभी मुझे वो लिंक क्लिक किया.' इसके साथ ही एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 'मैंने तुरंत बैंक को फोन किया और अपना अकाउंट ब्लॉक करवाया. लेकिन तब तक मुझे तीस हजार का चूना लग चुका था. जब मेहनत की कमाई के पैसे ऐसे चले जाते हैं तो बहुत तकलीफ होती है.' एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 'लोगों को आजकल होने वाले इस तरह के घोटालों से सावधान रहना चाहिए. जिसने मुझे ये लिंक भेजा था उसने मेरा फोन हैक कर लिया था. इसलिए कभी भी किसी अनजान शख्स के भेजे गए लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए.' आपको बता दें, आकांक्षा जुनेजा कई सारे सीरियल्स में काम कर चुकी हैं. इन सीरियल्स में 'बड़े अच्छे लगते हैं' और 'हमारी बेटी राज करेगी' टीवी शो शामिल है. |
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
ईद को लेकर देर रात तक शहर में खरीदारी होती रही।
गोरखपुर। रमजान की चांद रात पर शुक्रवार को बाजार गुलजार रहे। ईद के लिए खरीदारी करने की खातिर शहर के प्रमुख बाजारों में पूरी रात लोगों की भीड़ जुटी रही। जमकर बिक्री से दुकानदारों के चेहरे भी खिले नजर आए। चांद रात की चांदनी में बाजार की चांदी रही। देर रात तक चांद रात की रौनक से शहर गुलजार रहा।
पूरी रात बच्चे, नौजवान, बूढ़े यहां तक कि महिलाएं भी कुछ न कुछ खरीदने कोआतुर नजर आईं। सेवइयों की दुकानों पर भीड़ दिखी। मीट की दुकानों पर भीड़ उमड़ी। घोष कंपनी, साहबगंज, रेती, उर्दू बाजार, जाफरा बाजार में ये दुकानें पूरी रात चलती रहीं। ईद के मद्देनजर दुकानदारों ने रेट में इजाफा भी कर दिया। खोवा व मेवे की भी खूब खरीदारी हुई। दर्जियों की दुकानों पर भीड़ नजर आई।
लोग देर रात तक रेडिमेड कपड़े लेते नजर आए। शाहमारुफ, रेती, घंटाघर, गोरखनाथ, जाफरा बाजार के बाजारों भीड़ देखते ही बनी। शाहमारूफ में तो पूरी रात तिल रखने तक की जगह नहीं मिली। यहां रेडीमेड कुर्ता-पायजामा से लेकर बर्तन तक बिके। शाम होते ही यह बाजार खचाखच भीड़ से आबाद हो गया। दुकानदार छूट का माल लूट में चिल्ला-चिल्लाकर ग्राहकों को बुलाते रहे।
बाजार में रेडीमेड कपड़े, जूते-चप्पल, प्लास्टिक के बर्तन, शीशे के सामान, टोपी, इत्र, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, बेल्ट, चश्मा, चूड़ी, प्लास्टिक के सजावटी फूल खूब बिके। औरतें शृंगार प्रसाधन तो पुरुष कुर्ता पैजामा, इत्र, टोपी खरीदते नजर आएं।
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वित्तीय प्रक्षेपण, ऑर्थोगोनल प्रक्षेपण और शंक्वाकार प्रक्षेपण कुछ ऐसी अवधारणाएँ हैं जिनकी हमने पहले ही इस साइट पर समीक्षा की है। यह एक अन्य प्रकार के प्रक्षेपण का विश्लेषण करने का समय हैः तथाकथित सामाजिक प्रक्षेपण ।* दर्शन से लेकर राजनीति तक अपने जीवन को बनाने वाले विभिन्न विमानों में अपने कार्यों के विकास और विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ, मनुष्य और अन्य प्रजातियों के लिए सम्मान को बढ़ावा देना । यह उजागर करना महत्वपूर्ण है कि सम्मान समाज के विकास के उद्देश्य से हर प्रयास का आधार है, क्योंकि यह करुणा और सहानुभूति से जुड़ा हुआ है;
* ऐसे व्यक्तियों के निर्माण में काम करना जो अपने मानवतावादी गुणों के लिए खड़े हों, अपनी जिम्मेदारी की भावना और नैतिकता पर आधारित परियोजनाओं को शुरू करने की अपनी ताकत के लिए, जो अपने समुदाय में सबसे अधिक चिंताजनक समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं, जो उन उपकरणों का लाभ उठाते हैं जो काम से उभरते हैं वैज्ञानिक अनुसंधान;
* मनुष्य को सामाजिक, शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक प्राणी के पूर्ण संयोजन के रूप में समझकर शिक्षा को बढ़ावा देना । सामाजिक प्रक्षेपण एक व्यवसाय नहीं है, लेकिन हमारी प्रकृति की स्वीकृति से उत्पन्न होता है और इस कारण से उन सभी विमानों की समझ पैदा होती है जो हमें अपने वातावरण की सेवा में खुद को डालते समय हमारी क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए मजबूर करते हैं;
* वास्तविक और वर्तमान सामाजिक गतिशीलता, समुदाय में सह-अस्तित्व, उनकी आवश्यकताओं और चिंताओं को जानने वाली विभिन्न संस्कृतियों, इसे बनाए रखने वाली विभिन्न संस्कृतियों को जानते हैं, जो पहल वे स्वयं करते हैं। एक बदलाव को प्राप्त करने के लिए, समाज से संपर्क करना आवश्यक है, यह पूछें कि उसे क्या चाहिए, उसकी प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं क्या हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में एक भागीदार बनाने और इस प्रक्रिया के अंत तक पहुंचने वाले भलाई को बनाए रखने के लिए इसकी ताकत भी जानते हैं।
| वित्तीय प्रक्षेपण, ऑर्थोगोनल प्रक्षेपण और शंक्वाकार प्रक्षेपण कुछ ऐसी अवधारणाएँ हैं जिनकी हमने पहले ही इस साइट पर समीक्षा की है। यह एक अन्य प्रकार के प्रक्षेपण का विश्लेषण करने का समय हैः तथाकथित सामाजिक प्रक्षेपण ।* दर्शन से लेकर राजनीति तक अपने जीवन को बनाने वाले विभिन्न विमानों में अपने कार्यों के विकास और विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ, मनुष्य और अन्य प्रजातियों के लिए सम्मान को बढ़ावा देना । यह उजागर करना महत्वपूर्ण है कि सम्मान समाज के विकास के उद्देश्य से हर प्रयास का आधार है, क्योंकि यह करुणा और सहानुभूति से जुड़ा हुआ है; * ऐसे व्यक्तियों के निर्माण में काम करना जो अपने मानवतावादी गुणों के लिए खड़े हों, अपनी जिम्मेदारी की भावना और नैतिकता पर आधारित परियोजनाओं को शुरू करने की अपनी ताकत के लिए, जो अपने समुदाय में सबसे अधिक चिंताजनक समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं, जो उन उपकरणों का लाभ उठाते हैं जो काम से उभरते हैं वैज्ञानिक अनुसंधान; * मनुष्य को सामाजिक, शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक प्राणी के पूर्ण संयोजन के रूप में समझकर शिक्षा को बढ़ावा देना । सामाजिक प्रक्षेपण एक व्यवसाय नहीं है, लेकिन हमारी प्रकृति की स्वीकृति से उत्पन्न होता है और इस कारण से उन सभी विमानों की समझ पैदा होती है जो हमें अपने वातावरण की सेवा में खुद को डालते समय हमारी क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए मजबूर करते हैं; * वास्तविक और वर्तमान सामाजिक गतिशीलता, समुदाय में सह-अस्तित्व, उनकी आवश्यकताओं और चिंताओं को जानने वाली विभिन्न संस्कृतियों, इसे बनाए रखने वाली विभिन्न संस्कृतियों को जानते हैं, जो पहल वे स्वयं करते हैं। एक बदलाव को प्राप्त करने के लिए, समाज से संपर्क करना आवश्यक है, यह पूछें कि उसे क्या चाहिए, उसकी प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं क्या हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में एक भागीदार बनाने और इस प्रक्रिया के अंत तक पहुंचने वाले भलाई को बनाए रखने के लिए इसकी ताकत भी जानते हैं। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
वैलेंटाइन वीक शुरु हो चुका है और मियां फेंकू की प्रेमिका है कि महंगाई की तरह भाव खाने में लगी है. पहले तो उनको इंतजार भी कराती है फिर उस इंतजार की वजह से मिंया मस्ती में अपना ही नुकसान भी कर डालते हैं.
इस वजह से परेशान मियां फेंकू ने एक शायरी लिखी है बेवफा सनम की याद में. आप भी जरा लीजिए मजा मस्ती, प्यार और चिकन कवाब का.
| वैलेंटाइन वीक शुरु हो चुका है और मियां फेंकू की प्रेमिका है कि महंगाई की तरह भाव खाने में लगी है. पहले तो उनको इंतजार भी कराती है फिर उस इंतजार की वजह से मिंया मस्ती में अपना ही नुकसान भी कर डालते हैं. इस वजह से परेशान मियां फेंकू ने एक शायरी लिखी है बेवफा सनम की याद में. आप भी जरा लीजिए मजा मस्ती, प्यार और चिकन कवाब का. |
शमी ने शुक्रवार को एक ट्वीट किया जिसमें वह गेंदबाजी करते नजर आ रहे हैं। शमी इस वक्त बैगलुरू के नेशनल क्रिकेट अकादमी में नवदीप सैनी के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। सैनी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन में खेले गए सीरीज के आखिरी मैच में ग्रोइंग इंजरी हुई थी।
नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले के पहले दो दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड की टीम को भारतीय गेंदबाज दो दिन के खेल में भी आउट नहीं कर पाए। दूसरे दिन टीम ने 8 विकेट पर 555 रन बनाए। भारत के लिए अच्छी खबर ये है कि तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी फिट हो गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पहले टेस्ट मैच के दौरान बल्लेबाजी के दौरान चोटिल हुए तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी फिट होकर मैदान पर वापस लौट चुके हैं। 19 दिसंबर को एडिलेड टेस्ट मैच के दौरान दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पैट कमिंस की गेंद शमी की कलाई पर लगी थी। उनका हाथ फ्रैक्चर होने के कारण दौरा बीच में छोड़कर ही वापस भारत लौटना पड़ा था। चोटिल होने की वजह से ही उनको इंग्लैंड के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैच में नहीं चुना गया था।
मोहम्मद शमी ने शुक्रवार को एक ट्वीट किया जिसमें वह गेंदबाजी करते नजर आ रहे हैं। शमी इस वक्त बैगलुरू के नेशनल क्रिकेट अकादमी में नवदीप सैनी के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। सैनी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन में खेले गए सीरीज के आखिरी मैच में ग्रोइंग इंजरी हुई थी।
पीटीआइ के मुताबिक, शमी की कलाई अब बिल्कुल ठीक है। अगले कुछ दिन उनको हल्की नेट प्रैक्टिस कराई जाएगी। उनको इस वक्त हर दिन 18 गेंद फेंकने की सलाह दी गई है। यह 50 से 60 फीसदी जोर लगाकर ही फेकने के लिए बोला गया है। चुकी वह लगभग आधे महीने से गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं तो इसी तरह से आहिस्ता आहिस्ता वर्कलोड बढ़ाया जाएगा।
पिंक बॉल टेस्ट मैच खेले जाने में अभी लगभग दो हफ्ते (24 फरवरी को अहमदाबाद में डे नाइट टेस्ट) का वक्त बाकी है। ऐसे में इसकी उम्मीद की जा रही है कि शमी मैच से पहले फिट हो जाएंगे और चयन के लिए उपलब्ध होंगे। उन्होंने गेंदबाजी करना शुरू कर दी है इसका मतलब है कि कलाई बिल्कुल ठीक है। उनको किसी तरह की कोई चोट नहीं है। अगले हफ्ते के अंत तक यह तस्वीर ज्यादा साफ हो पाएगी।
| शमी ने शुक्रवार को एक ट्वीट किया जिसमें वह गेंदबाजी करते नजर आ रहे हैं। शमी इस वक्त बैगलुरू के नेशनल क्रिकेट अकादमी में नवदीप सैनी के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। सैनी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन में खेले गए सीरीज के आखिरी मैच में ग्रोइंग इंजरी हुई थी। नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले के पहले दो दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड की टीम को भारतीय गेंदबाज दो दिन के खेल में भी आउट नहीं कर पाए। दूसरे दिन टीम ने आठ विकेट पर पाँच सौ पचपन रन बनाए। भारत के लिए अच्छी खबर ये है कि तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी फिट हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पहले टेस्ट मैच के दौरान बल्लेबाजी के दौरान चोटिल हुए तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी फिट होकर मैदान पर वापस लौट चुके हैं। उन्नीस दिसंबर को एडिलेड टेस्ट मैच के दौरान दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पैट कमिंस की गेंद शमी की कलाई पर लगी थी। उनका हाथ फ्रैक्चर होने के कारण दौरा बीच में छोड़कर ही वापस भारत लौटना पड़ा था। चोटिल होने की वजह से ही उनको इंग्लैंड के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैच में नहीं चुना गया था। मोहम्मद शमी ने शुक्रवार को एक ट्वीट किया जिसमें वह गेंदबाजी करते नजर आ रहे हैं। शमी इस वक्त बैगलुरू के नेशनल क्रिकेट अकादमी में नवदीप सैनी के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। सैनी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन में खेले गए सीरीज के आखिरी मैच में ग्रोइंग इंजरी हुई थी। पीटीआइ के मुताबिक, शमी की कलाई अब बिल्कुल ठीक है। अगले कुछ दिन उनको हल्की नेट प्रैक्टिस कराई जाएगी। उनको इस वक्त हर दिन अट्ठारह गेंद फेंकने की सलाह दी गई है। यह पचास से साठ फीसदी जोर लगाकर ही फेकने के लिए बोला गया है। चुकी वह लगभग आधे महीने से गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं तो इसी तरह से आहिस्ता आहिस्ता वर्कलोड बढ़ाया जाएगा। पिंक बॉल टेस्ट मैच खेले जाने में अभी लगभग दो हफ्ते का वक्त बाकी है। ऐसे में इसकी उम्मीद की जा रही है कि शमी मैच से पहले फिट हो जाएंगे और चयन के लिए उपलब्ध होंगे। उन्होंने गेंदबाजी करना शुरू कर दी है इसका मतलब है कि कलाई बिल्कुल ठीक है। उनको किसी तरह की कोई चोट नहीं है। अगले हफ्ते के अंत तक यह तस्वीर ज्यादा साफ हो पाएगी। |
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और आम आदमी पार्टी (आप) में जुबानी जंग जारी है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा हमला बोला.
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जेएनयू जांच मामले को मंजूरी नहीं दी. अगर उन्होंने फाइल को मंजूरी दी होती तो आज शाहीन बाग जैसा मुद्दा नहीं होता.
हम देख सकते हैं, शाहीन बाग में किस तरह के नारे लगाए जा रहे हैं. विरोध प्रदर्शन में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भूमिका और 120 करोड़ रुपये कहां और किसे बांटे गए, ये सब जानने की जरूरत है.
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि देशद्रोहियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास पर्याप्त सबूत थे, लेकिन केजरीवाल पिछले साल फाइल दबाकर बैठे रहे. उन्होंने कहा कि शाहीन बाग पर अभी और खुलासे होंगे.
केंद्रीय मंत्री ने विकास को लेकर भी केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दे पर दिल्ली सरकार बाधा बनी रही है. मेट्रो में छह लाइन के विस्तार के लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट मिला, लेकिन केजरीवाल ने इसे बेवजह लंबा खींचा, जिसके कारण खर्च बढ़ा. कोर्ट के दखल के बाद विवाद थमा.
स्कूलों के बारे में प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, दिल्ली सरकार के अंतर्गत चलने वाले 71 प्रतिशत स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई नहीं होती है. शिक्षा का बुरा हाल कर दिया है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली आम आदमी पार्टी की फर्जी क्रांति की भेंट चढ़ रही है. सिर्फ कमरे बनाने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरती, इसके लिए योग्य शिक्षक भी चाहिए. 17,000 शिक्षकों की नियुक्ति का वादा आप सरकार ने क्यों नहीं निभाया?
| दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी में जुबानी जंग जारी है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा हमला बोला. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जेएनयू जांच मामले को मंजूरी नहीं दी. अगर उन्होंने फाइल को मंजूरी दी होती तो आज शाहीन बाग जैसा मुद्दा नहीं होता. हम देख सकते हैं, शाहीन बाग में किस तरह के नारे लगाए जा रहे हैं. विरोध प्रदर्शन में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की भूमिका और एक सौ बीस करोड़ रुपये कहां और किसे बांटे गए, ये सब जानने की जरूरत है. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि देशद्रोहियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास पर्याप्त सबूत थे, लेकिन केजरीवाल पिछले साल फाइल दबाकर बैठे रहे. उन्होंने कहा कि शाहीन बाग पर अभी और खुलासे होंगे. केंद्रीय मंत्री ने विकास को लेकर भी केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दे पर दिल्ली सरकार बाधा बनी रही है. मेट्रो में छह लाइन के विस्तार के लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट मिला, लेकिन केजरीवाल ने इसे बेवजह लंबा खींचा, जिसके कारण खर्च बढ़ा. कोर्ट के दखल के बाद विवाद थमा. स्कूलों के बारे में प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, दिल्ली सरकार के अंतर्गत चलने वाले इकहत्तर प्रतिशत स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई नहीं होती है. शिक्षा का बुरा हाल कर दिया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली आम आदमी पार्टी की फर्जी क्रांति की भेंट चढ़ रही है. सिर्फ कमरे बनाने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरती, इसके लिए योग्य शिक्षक भी चाहिए. सत्रह,शून्य शिक्षकों की नियुक्ति का वादा आप सरकार ने क्यों नहीं निभाया? |
नई दिल्लीः दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के आरोपी ताहिर हुसैन की चार लोगों ने मदद की थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, मुस्तफाबाद में तीन लोगों ने ताहिर की छिपने में मदद की थी लेकिन फिर जब उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी होने लगी तब वह मुस्तफाबाद से निकल गया और जाकिर नगर में अपने किसी जानकर के यहां जाकर छिप गया।
सूत्रों ने बताया कि ताहिर हुसैन की मदद करने वाले यह चारों लोग अब क्राइम ब्रांच की की नजरों में हैं। क्राइम ब्रांच जल्द ही इन चारों लोगों को पूछताछ के लिए बुलाने वाली है। बता दें कि ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया था। ताहिर पर आरोप है कि उसने दिल्ली में 24 और 25 फरवरी के दौरान हुए दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
ताहिर हुसैन पर जब से हत्या का आरोप लगा था, तभी से वह फरार हो गया था लेकिन गुरुवार को जब वह कोर्ट में सरेंडर के लिए जा रहा था तो उसी समय दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली में दंगों से जुड़े ताहिर हुसैन के घर के कई वीडियो वायरल हुए थे जिनमें ताहिर हुसैन दंगे के दौरान कई लोगों के साथ अपने घर पर देखा गया है। बाद में जब ताहिर हुसैन के घर पर इंडिया टीवी की टीम पहुंची तो पाया कि उसके घर की छत पर नुकीले पत्थरों और पेट्रोल बमों का जखीरा पड़ा हुआ था।
आरोप है कि ताहिर हुसैन ने के घर की छत से दंगाइयों ने भीड़ पर पेट्रोल बम और पत्थर भी फेंके थे। हालांकि, ताहिर हुसैन ने इंडिया टीवी को सफाई देते हुए कहा था कि वह खुद दंगों का शिकार हुआ है और भीड़ उसके घर पर जबरदस्ती घुस गई थी। ताहिर हुसैन ने यह भी बताया था कि खुद उसने ही पुलिस को दंगों के बारे में फोन किया था और पुलिस ने ही उसे दंगाग्रस्त क्षेत्र से निकाला था। हालांकि, बाद में जब वह फरार हुआ तो पुलिस ही उसकी तलाश भी कर रही थी।
| नई दिल्लीः दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के आरोपी ताहिर हुसैन की चार लोगों ने मदद की थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, मुस्तफाबाद में तीन लोगों ने ताहिर की छिपने में मदद की थी लेकिन फिर जब उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी होने लगी तब वह मुस्तफाबाद से निकल गया और जाकिर नगर में अपने किसी जानकर के यहां जाकर छिप गया। सूत्रों ने बताया कि ताहिर हुसैन की मदद करने वाले यह चारों लोग अब क्राइम ब्रांच की की नजरों में हैं। क्राइम ब्रांच जल्द ही इन चारों लोगों को पूछताछ के लिए बुलाने वाली है। बता दें कि ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया था। ताहिर पर आरोप है कि उसने दिल्ली में चौबीस और पच्चीस फरवरी के दौरान हुए दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। ताहिर हुसैन पर जब से हत्या का आरोप लगा था, तभी से वह फरार हो गया था लेकिन गुरुवार को जब वह कोर्ट में सरेंडर के लिए जा रहा था तो उसी समय दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली में दंगों से जुड़े ताहिर हुसैन के घर के कई वीडियो वायरल हुए थे जिनमें ताहिर हुसैन दंगे के दौरान कई लोगों के साथ अपने घर पर देखा गया है। बाद में जब ताहिर हुसैन के घर पर इंडिया टीवी की टीम पहुंची तो पाया कि उसके घर की छत पर नुकीले पत्थरों और पेट्रोल बमों का जखीरा पड़ा हुआ था। आरोप है कि ताहिर हुसैन ने के घर की छत से दंगाइयों ने भीड़ पर पेट्रोल बम और पत्थर भी फेंके थे। हालांकि, ताहिर हुसैन ने इंडिया टीवी को सफाई देते हुए कहा था कि वह खुद दंगों का शिकार हुआ है और भीड़ उसके घर पर जबरदस्ती घुस गई थी। ताहिर हुसैन ने यह भी बताया था कि खुद उसने ही पुलिस को दंगों के बारे में फोन किया था और पुलिस ने ही उसे दंगाग्रस्त क्षेत्र से निकाला था। हालांकि, बाद में जब वह फरार हुआ तो पुलिस ही उसकी तलाश भी कर रही थी। |
औरंगाबाद में कल यानी बुधवार को शहर के डीआरसीसी परिसर में रोजगार कैम्प का आयोजन किया जाएगा। जिसमें जिले के 100 युवाओं काे रोजगार मिलेगा। उक्त रोजगार मेला का आयोजन जिला नियोजनालय के तत्वाधान में किया जा रहा है। जिसमें पटना के Rajray securex Pvt. Ltd. Patna की Security कंपनी भाग लेगी। कंपनी 100 रिक्ति पर युवाओं का चयन सिक्योरिटी गार्ड के रूप में करेगी।
रोजगार मेला में भाग लेने वाले युवाओं 10 कक्षा पास होना अनिवार्य है। वहीं आयु 20 से 40 वर्ष, लंबाई 170 सेमी0 व वजन 60 किलो होना चाहिए। तभी युवा उक्त रोजगार कैम्प में भाग ले पाएंगे। जिला नियोजन पदाधिकारी ने बताया कि जिले के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा हमेशा इस तरह का रोजगार मेला का आयोजन किया जाता है। जिसमें युवाओं को रोजगार दिया जाता है।
आगे भी इस तरह के कैम्प का आयोजन किया जाएगा और युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। वहीं उन्होंने बताया कि रोजगार मेला में भाग लेने के लिए जिला नियोजनालय में निबंधन जरूरी है। इसलिए जो युवा अब तक अपना निबंधन नहीं कराए हैं, वे जल्द से जल्द करा लें। किसी भी साइबर कैफे या नियोजनालय में जाकर ऑनलाइन माध्यम से निबंधन कराया जा सकता है।
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| औरंगाबाद में कल यानी बुधवार को शहर के डीआरसीसी परिसर में रोजगार कैम्प का आयोजन किया जाएगा। जिसमें जिले के एक सौ युवाओं काे रोजगार मिलेगा। उक्त रोजगार मेला का आयोजन जिला नियोजनालय के तत्वाधान में किया जा रहा है। जिसमें पटना के Rajray securex Pvt. Ltd. Patna की Security कंपनी भाग लेगी। कंपनी एक सौ रिक्ति पर युवाओं का चयन सिक्योरिटी गार्ड के रूप में करेगी। रोजगार मेला में भाग लेने वाले युवाओं दस कक्षा पास होना अनिवार्य है। वहीं आयु बीस से चालीस वर्ष, लंबाई एक सौ सत्तर सेमीशून्य व वजन साठ किलो होना चाहिए। तभी युवा उक्त रोजगार कैम्प में भाग ले पाएंगे। जिला नियोजन पदाधिकारी ने बताया कि जिले के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा हमेशा इस तरह का रोजगार मेला का आयोजन किया जाता है। जिसमें युवाओं को रोजगार दिया जाता है। आगे भी इस तरह के कैम्प का आयोजन किया जाएगा और युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। वहीं उन्होंने बताया कि रोजगार मेला में भाग लेने के लिए जिला नियोजनालय में निबंधन जरूरी है। इसलिए जो युवा अब तक अपना निबंधन नहीं कराए हैं, वे जल्द से जल्द करा लें। किसी भी साइबर कैफे या नियोजनालय में जाकर ऑनलाइन माध्यम से निबंधन कराया जा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Oppo के ब्रांड Realme के लेटेस्ट स्मार्टफोन Realme 3 को हाल ही में पिछले हफ्ते भारत में लॉन्च किया गया है। इस फ़ोन की शुरूआती कीमत 8,999 रुपए है। या फ़ोन ग्लिटर फिनिश के साथ MediaTek Helio P70 SoC से लैस है। इसमें आपको 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज मिलता है। Realme 3 कल यानी 12 मार्च को Flipkart और Realme. com पर दोपहर दोपहर 12 बजे से सेल के लिए उपलब्ध कराया जायेगा।
आपको Realme 3 का बेस वैरिएंट 3GB/32GB 8,999 रुपए, top-of-the-line वैरिएंट 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरज के साथ 10,999 रुपए में मिलता है। आपको बता दें कि डिवाइस के लॉन्च के दौरान ही इस बात की भी घोषणा हुई थी कि Realme 3 Pro को अप्रैल में लॉन्च किया जायेगा।
लॉन्च की बात करें तो Realme 3 को आप 500 रुपए के इंस्टेंट डिस्काउंट के साथ HDFC cards के ज़रिये खरीद सकते हैं। 4GB RAM + 64GB ROM variant पर भी EMI पर यूज़र्स HDFC कार्ड्स पर इंस्टैंट डिस्काउंट पा सकते हैं। इसके साथ ही कस्टमर्स को जियो बेनिफिट भी 5,300 रुपए का मिलता है। ये ऑफर्स Flipkart. com पर एक्सक्लूसिव तौर पर उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही यूज़र्स Realme. com से इस डिवाइस को खरीदने पर 20% Supercash भी MobiKwik के ज़रिये पा सकते हैं।
Realme 3 में आपको 3D ग्रेडिएंट यूनीबॉडी डिजाईन, ड्यूल रियर कैमरा, फिंगरप्रिंट सेंसर और वाटरड्राप नौच मिलता है। इसके साथ ही फोन में आपको मीडियाटेक Helio P70 प्रोसेसर भी दिया गया है। फोन में आपको 4,230mAh क्षमता की बैटरी भी मिल रही है। इसके साथ ही Realme 3 एंड्राइड 9 पाई पर चलता है। फोन को कंपनी ने अलग-अलग दो वैरिएंट्स में भारत में लॉन्च किया है। आपको बता दें कि इस मोबाइल फोन में आपको डायनामिक ब्लैक, रेडियंट ब्लू और ब्लैक कलर मिल रहे हैं। Realme 3 को सेल के दौरान यूज़र्स डायनामिक ब्लैक और ब्लैक कलर में खरीद सकते हैं। इसके साथ ही इसका रेडियंट ब्लू कलर वैरिएंट 26 मार्च से उपलब्ध कराया जायेगा।
नोटः डिजिट हिंदी अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, दिन भर की टेक से जुड़ी ताज़ातरीन खबरों के लिए हमें Telegram पर भी सब्सक्राइब करें!
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| Oppo के ब्रांड Realme के लेटेस्ट स्मार्टफोन Realme तीन को हाल ही में पिछले हफ्ते भारत में लॉन्च किया गया है। इस फ़ोन की शुरूआती कीमत आठ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए है। या फ़ोन ग्लिटर फिनिश के साथ MediaTek Helio Pसत्तर SoC से लैस है। इसमें आपको चारGB RAM और चौंसठGB इंटरनल स्टोरेज मिलता है। Realme तीन कल यानी बारह मार्च को Flipkart और Realme. com पर दोपहर दोपहर बारह बजे से सेल के लिए उपलब्ध कराया जायेगा। आपको Realme तीन का बेस वैरिएंट तीनGB/बत्तीसGB आठ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए, top-of-the-line वैरिएंट चारGB RAM और चौंसठGB इंटरनल स्टोरज के साथ दस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए में मिलता है। आपको बता दें कि डिवाइस के लॉन्च के दौरान ही इस बात की भी घोषणा हुई थी कि Realme तीन Pro को अप्रैल में लॉन्च किया जायेगा। लॉन्च की बात करें तो Realme तीन को आप पाँच सौ रुपयापए के इंस्टेंट डिस्काउंट के साथ HDFC cards के ज़रिये खरीद सकते हैं। चारGB RAM + चौंसठGB ROM variant पर भी EMI पर यूज़र्स HDFC कार्ड्स पर इंस्टैंट डिस्काउंट पा सकते हैं। इसके साथ ही कस्टमर्स को जियो बेनिफिट भी पाँच,तीन सौ रुपयापए का मिलता है। ये ऑफर्स Flipkart. com पर एक्सक्लूसिव तौर पर उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही यूज़र्स Realme. com से इस डिवाइस को खरीदने पर बीस% Supercash भी MobiKwik के ज़रिये पा सकते हैं। Realme तीन में आपको तीनD ग्रेडिएंट यूनीबॉडी डिजाईन, ड्यूल रियर कैमरा, फिंगरप्रिंट सेंसर और वाटरड्राप नौच मिलता है। इसके साथ ही फोन में आपको मीडियाटेक Helio Pसत्तर प्रोसेसर भी दिया गया है। फोन में आपको चार,दो सौ तीसmAh क्षमता की बैटरी भी मिल रही है। इसके साथ ही Realme तीन एंड्राइड नौ पाई पर चलता है। फोन को कंपनी ने अलग-अलग दो वैरिएंट्स में भारत में लॉन्च किया है। आपको बता दें कि इस मोबाइल फोन में आपको डायनामिक ब्लैक, रेडियंट ब्लू और ब्लैक कलर मिल रहे हैं। Realme तीन को सेल के दौरान यूज़र्स डायनामिक ब्लैक और ब्लैक कलर में खरीद सकते हैं। इसके साथ ही इसका रेडियंट ब्लू कलर वैरिएंट छब्बीस मार्च से उपलब्ध कराया जायेगा। नोटः डिजिट हिंदी अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, दिन भर की टेक से जुड़ी ताज़ातरीन खबरों के लिए हमें Telegram पर भी सब्सक्राइब करें! ये भी पढ़ेंः |
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग के मुद्दे पर अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और सीलिंग रोकने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की।
कैट ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सिंह को अवगत कराया कि निगरानी समिति दिल्ली नगर निगम अधिनियम के मूल प्रावधानों को ताक पर रखते हुए बेहद मनमाने तरीके से बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए दिल्ली में दुकानों की सीलिंग कर रही है।
उसने आरोप लगाया कि अदालत ने समिति को केवल रिहायशी इलाकों में वाणिज्यिक गतिविधियां देखने का ही आदेश दिया है, जबकि समिति ने पूरी दिल्ली को अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लिया है। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर एक अध्यादेश लाकर सीलिंग पर रोक लगाने पर जोर देते हुए कहा कि जिस तरह बेहद अलोकतांत्रिक तरीके से सीलिंग की जा रही है और व्यापारियों को उनके नगर निगम कानून में मिले मूल अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार का हस्तक्षेप करना ही उचित है और अध्यादेश द्वारा दिल्ली के व्यापार और व्यापारियों को सीलिंग से बचाया जाना आवश्यक है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कैट प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि वे स्वयं इस मुद्दे को लेकर बेहद चिंतित है और सरकार दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग से राहत देने के लिए अनेक कदम उठा रही है। (वार्ता)
| नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग के मुद्दे पर अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और सीलिंग रोकने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की। कैट ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सिंह को अवगत कराया कि निगरानी समिति दिल्ली नगर निगम अधिनियम के मूल प्रावधानों को ताक पर रखते हुए बेहद मनमाने तरीके से बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए दिल्ली में दुकानों की सीलिंग कर रही है। उसने आरोप लगाया कि अदालत ने समिति को केवल रिहायशी इलाकों में वाणिज्यिक गतिविधियां देखने का ही आदेश दिया है, जबकि समिति ने पूरी दिल्ली को अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लिया है। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर एक अध्यादेश लाकर सीलिंग पर रोक लगाने पर जोर देते हुए कहा कि जिस तरह बेहद अलोकतांत्रिक तरीके से सीलिंग की जा रही है और व्यापारियों को उनके नगर निगम कानून में मिले मूल अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार का हस्तक्षेप करना ही उचित है और अध्यादेश द्वारा दिल्ली के व्यापार और व्यापारियों को सीलिंग से बचाया जाना आवश्यक है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कैट प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि वे स्वयं इस मुद्दे को लेकर बेहद चिंतित है और सरकार दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग से राहत देने के लिए अनेक कदम उठा रही है। |
चीजों को मुफ्त में पाने के लिए लोग किस हद से गुजर सकते हैं हाल ही में इसकी बानगी देखने को मिली है। रूस के एक लोकल पेट्रोल पंप ने बिकनी पहनकर आने वाले ग्राहकों को फ्री में पेट्रोल देने का ऑफर दिया था। शायद पेट्रोल पंप के मालिक का सोचना रहा होगा कि इससे पंप की पब्लिसिटी भी हो जाएगी और ज्यादा खर्चा भी नहीं होगा क्योंकि पेट्रोल के लिए आखिर कौन पब्लिकली बिकिनी पहन कर आएगा। लेकिन हुआ उसके एकदम विपरीत। यहां तो आदमी ही बिकिनी पहन कर तेल भरवाने चले आए। ऐसे ही कुछ लोगों की फोटोज भी सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। पेट्रोल पंप के फ्री में पेट्रोल देने के ऑफर के बाद जो नतीजा सामने आया वह खुद पेट्रोल पंप के मालिक ने भी नहीं सोचा होगा। देखें तस्वीरेंः
जो तस्वीरें वायरल हो रही हैं उनमें पुरुष बिकिनी में दिख रहे हैं।
बिकिनी में ये मर्द बेहद अजीब लग रहे हैं।
ये लोग बिकिनी में तेल भरवाते हुए कैमरे के लिए पोज भी दे रहे हैं।
पेट्रोल पंप ने ये ऑफर चंद घंटों के लिए ही दिया था।
लेकिन उतने ही देर में पंप पर बिकिनी पहने मर्दों की लंबी लाइन लग गई।
सोशल मीडिया में इन लोगों के तस्वीरों के साथ ही #Bikiniindress ट्रेंड भी करने लगा।
| चीजों को मुफ्त में पाने के लिए लोग किस हद से गुजर सकते हैं हाल ही में इसकी बानगी देखने को मिली है। रूस के एक लोकल पेट्रोल पंप ने बिकनी पहनकर आने वाले ग्राहकों को फ्री में पेट्रोल देने का ऑफर दिया था। शायद पेट्रोल पंप के मालिक का सोचना रहा होगा कि इससे पंप की पब्लिसिटी भी हो जाएगी और ज्यादा खर्चा भी नहीं होगा क्योंकि पेट्रोल के लिए आखिर कौन पब्लिकली बिकिनी पहन कर आएगा। लेकिन हुआ उसके एकदम विपरीत। यहां तो आदमी ही बिकिनी पहन कर तेल भरवाने चले आए। ऐसे ही कुछ लोगों की फोटोज भी सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। पेट्रोल पंप के फ्री में पेट्रोल देने के ऑफर के बाद जो नतीजा सामने आया वह खुद पेट्रोल पंप के मालिक ने भी नहीं सोचा होगा। देखें तस्वीरेंः जो तस्वीरें वायरल हो रही हैं उनमें पुरुष बिकिनी में दिख रहे हैं। बिकिनी में ये मर्द बेहद अजीब लग रहे हैं। ये लोग बिकिनी में तेल भरवाते हुए कैमरे के लिए पोज भी दे रहे हैं। पेट्रोल पंप ने ये ऑफर चंद घंटों के लिए ही दिया था। लेकिन उतने ही देर में पंप पर बिकिनी पहने मर्दों की लंबी लाइन लग गई। सोशल मीडिया में इन लोगों के तस्वीरों के साथ ही #Bikiniindress ट्रेंड भी करने लगा। |
बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सलमान खान (Salman Khan) इन दिनों टाइगर 3 की शूटिंग में व्यस्त है. सलमान खान को नेक दिल एक्टर माना जाता है. सलमान खान फ़िल्मी दुनिया से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में बने रहते है. वैसे तो सलमान के ऊपर कई एक्ट्रेस ने गंभीर आरोप लगाए. किसी ने सलमान खान के ऊपर हाँथ उठाने का आरोप लगाया था तो किसी ने उन्हें जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था. लेकिन कुछ सालो पहले एक एक्ट्रेस ने ऐसा आरोप लगाया जो वाकई में चौका देने वाला है. जानकारी के मुताबिक एक एक्ट्रेस ने सलमान खान और उनके भाइयो पर कई बार रेप करने का आरोप लगाया है.
सलमान खान और उनके भाइयो पर आरोप लगाने वाले एक्ट्रेस का नाम है पूजा मिश्रा (Actress Pooja Misrra). बता दे की पूजा मिश्रा ने 'बिग बॉस 5' और 'दिल का रिश्ता' जैसी फिल्म में भी काम किया है. पूजा मिश्रा ने वीडियो शेयर करते हुए बताया की फिल्म सुल्तान की शूटिंग के दौरान सलमान खान और उनके भाइयो ने उनका कई बार रेप किया.
पूजा मिश्रा (Actress Pooja Misrra) के इस आरोप के बाद बॉलीवुड में बवाल मच गया था. वही पूजा को सलमान खान के फैंस ने भयंकर खरी-खोटी सुनाई थी. यही नहीं पूजा ने एक्टर शत्रुहन सिन्हा और उनकी पत्नी पर काला जादू करने का आरोप लगाया था. जानकारो की माने तो पूजा ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रही थी.
| बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सलमान खान इन दिनों टाइगर तीन की शूटिंग में व्यस्त है. सलमान खान को नेक दिल एक्टर माना जाता है. सलमान खान फ़िल्मी दुनिया से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में बने रहते है. वैसे तो सलमान के ऊपर कई एक्ट्रेस ने गंभीर आरोप लगाए. किसी ने सलमान खान के ऊपर हाँथ उठाने का आरोप लगाया था तो किसी ने उन्हें जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था. लेकिन कुछ सालो पहले एक एक्ट्रेस ने ऐसा आरोप लगाया जो वाकई में चौका देने वाला है. जानकारी के मुताबिक एक एक्ट्रेस ने सलमान खान और उनके भाइयो पर कई बार रेप करने का आरोप लगाया है. सलमान खान और उनके भाइयो पर आरोप लगाने वाले एक्ट्रेस का नाम है पूजा मिश्रा . बता दे की पूजा मिश्रा ने 'बिग बॉस पाँच' और 'दिल का रिश्ता' जैसी फिल्म में भी काम किया है. पूजा मिश्रा ने वीडियो शेयर करते हुए बताया की फिल्म सुल्तान की शूटिंग के दौरान सलमान खान और उनके भाइयो ने उनका कई बार रेप किया. पूजा मिश्रा के इस आरोप के बाद बॉलीवुड में बवाल मच गया था. वही पूजा को सलमान खान के फैंस ने भयंकर खरी-खोटी सुनाई थी. यही नहीं पूजा ने एक्टर शत्रुहन सिन्हा और उनकी पत्नी पर काला जादू करने का आरोप लगाया था. जानकारो की माने तो पूजा ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रही थी. |
राजा का तालाब - सेक्रेड सोल कैंब्रिज स्कूल रोड में मंगलवार को वार्षिक पारितोषिक समारोह विभिन्न चरणों में संपन्न हुआ । इस समारोह में कक्षा नर्सरी से यूकेजी, पहली से पांचवीं व कक्षा छठी से 11वीं तक के करीब 500 बच्चों को शैक्षणिक सत्र 2017-18 के दौरान विभिन्न गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पुरस्कृत किया गया । अंग्रेजी भाषा में सुंदर लेखन, ड्राइंग, पेंटिंग, भाषण, वाद-विवाद, बुक मार्क, सलाद बनाना, सामान्य ज्ञान, रंगोली में जौहर दिखाने वालों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही स्कूल के बाहर जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उम्दा प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों एवं उनके कोच अनुपम शर्मा को भी सम्मानित किया गया । उक्त सभी पुरस्कार प्रधानाचार्य तरसेम कुमार शर्मा एवं चेयरमैन जगदीश सिंह द्वारा वितरित किए गए। पुरस्कृत विद्यार्थियों में सुहानी, सारवी, मिष्ठी, आरुही, कभी, राघव, मानसी, कनिका शर्मा, नैतिक, आर्यन, प्रांजल, कार्तिक, मृदुल, पल्लवी, आकर्ष शर्मा, युवराज शर्मा, सानवी शर्मा, सिमरन पुनिया, आकर्षित शर्मा, अदिति, आवनी, प्रियांश, अद्वितीय, संगम, सुमित, यशस्ति, तुषार, रिधिमा, विभा व सुधांश आदि बच्चों को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
| राजा का तालाब - सेक्रेड सोल कैंब्रिज स्कूल रोड में मंगलवार को वार्षिक पारितोषिक समारोह विभिन्न चरणों में संपन्न हुआ । इस समारोह में कक्षा नर्सरी से यूकेजी, पहली से पांचवीं व कक्षा छठी से ग्यारहवीं तक के करीब पाँच सौ बच्चों को शैक्षणिक सत्र दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के दौरान विभिन्न गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पुरस्कृत किया गया । अंग्रेजी भाषा में सुंदर लेखन, ड्राइंग, पेंटिंग, भाषण, वाद-विवाद, बुक मार्क, सलाद बनाना, सामान्य ज्ञान, रंगोली में जौहर दिखाने वालों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही स्कूल के बाहर जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उम्दा प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों एवं उनके कोच अनुपम शर्मा को भी सम्मानित किया गया । उक्त सभी पुरस्कार प्रधानाचार्य तरसेम कुमार शर्मा एवं चेयरमैन जगदीश सिंह द्वारा वितरित किए गए। पुरस्कृत विद्यार्थियों में सुहानी, सारवी, मिष्ठी, आरुही, कभी, राघव, मानसी, कनिका शर्मा, नैतिक, आर्यन, प्रांजल, कार्तिक, मृदुल, पल्लवी, आकर्ष शर्मा, युवराज शर्मा, सानवी शर्मा, सिमरन पुनिया, आकर्षित शर्मा, अदिति, आवनी, प्रियांश, अद्वितीय, संगम, सुमित, यशस्ति, तुषार, रिधिमा, विभा व सुधांश आदि बच्चों को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। |
१६ वीं शताब्दीमें भारतमें राष्ट्रीयताकी एक लहर दौड़ गई थी। और तज्जन्य प्रभावको संवर्धन तथा उसको स्थायित्व देने के लिए एक महासभाका भी जन्म हुआ । इस संगठन में पाश्चात्य विद्या पारंगत भारतीय विद्वान ही पहले पहल सम्मिलित हुए, जो अपने राष्ट्रका निर्माण और समाजका सुधार करना चाहते थे । उनमें प्रायः अपनी उच्चताका न तो मिथ्या दम्भ था, न पश्चिमके प्रति घृणा थी और न पश्चिमके अन्धानुकरणकी मनोवृत्ति । वैसे इस प्रकारकी उदार विचारधारा राजाराम मोहनराय के समयमें उत्पन्न हुई थी । रामकृष्ण परमहंस भी धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रोंमें उदार विचारोंवाले थे । ब्रह्म समाजके ही समान बम्बईमें प्रार्थना समाजका जन्म हुआ जिसके प्रशंसकोंमें रामकृष्ण भण्डारकर, महादेव गोविन्द रानाडे और गोपाल कृष्ण गोखले प्रभृत्ति लोग थे जिन्होंने आगे चलकर भारत सेवक संघ बनाया ।
इस प्रकार १६ वीं शताब्दीके भारतीय समाजमें हम दो प्रकारके वर्ग पाते हैं । पहला जो उग्र स्वभावका था जो पाश्चात्य शिक्षा, धर्म, दर्शन और संस्कृतिको हीन मानता था और दूसरा जो भारतीय समाजको न तो प्रकारण ऊँचा और न पाश्चात्य समाजको नीचा मानता था बल्कि बुद्धिके द्वारा पूर्व और पश्चिमकी विचारधाराओंका अध्ययन करता हुआ अपने सामाजिक उत्थानका मार्ग प्रशस्त करना चाहता था । पहला वर्ग उन लोगोंका था जो किसी समय अपने में लघुताकी मनोवृत्ति अपना चुके थे और अब उसकी प्रतिक्रिया के कारण ठीक उल्टी दिशामें चलने लगे थे । दूसरा वर्ग उन लोगोंका था जो पाश्चात्य सम्पर्कसे विचलित नहीं हुए थे तथा जहाँ जो उचित विचार था उसको उन्होंने अपना लिया था । इस दूसरे वर्गने अपने रहन सहन, राजनीतिक तथा सामाजिक दर्शनकी अनेक कमियोंको ईमानदारीके साथ स्वीकार किया और इसलिए उसने पश्चिमके ज्ञानसे लाभ उठाना चाहा । परन्तु कुछ भी हो एक बात दोनों वर्गों मार्केकी है। वह यह कि दोनों प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूपसे भारतीय समाजकी अनेक कमियों और कुरीतियोंको समझ गये थे । इसीलिए पहले वर्गने भी चाहे वह पश्चिमके प्रति उग्र विचारोंवाला ही क्यों न हो उन सामाजिक दोषोंको दूर करना चाहा, जिनके कारण पाश्चात्य धर्म और विचारोंका भारतमें क्षिप्रतासे प्रचार हो रहा था ।
भारतीय समाजपर पाश्चात्य विचारधाराका जो प्रभाव पड़ा उसकी चौथी तथा अन्तिम स्थिति भारतीय और पाश्चात्य संस्कृतियोंका समीकरण है । और इसी समीकरणका परिणाम आजका भारतीय समाज है । परिवर्तनकी इस दशाका प्रारम्भ, हम देख चुके हैं, १९ वीं शताब्दीमें ही हुआ परन्तु उसके प्रत्यक्ष परिणाम २० वीं शताब्दी के दूसरे चरणसे परिलक्षित हुए। महात्मा गांधी इस युगके सर्वाधिक प्रभावशाली पुरुष हुए जिन्होंने अपने ऊपर पाश्चात्य विचार धाराके ऋणको स्पष्टतः स्वीकार किया ।
ऊपर हमने पाश्चात्य प्रभावकी विभिन्न दशाओंको देखनेका प्रयत्न किया है जिनसे चलकर आजका हमारा समाज बना है।
आजका भारतीय समाज पाश्चात्य विचारधारा और संस्कृतिमें ही ढला है । समाजके जिस बड़े वर्गमें अभी शिक्षाका प्रसार नहीं हुआ है वहाँ भी अंग्रेजी शिक्षाका और समयके प्रभावसे आश्चर्यजनक सामाजिक परिवर्तन हो रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि समाजके एक बड़े भागकी आत्मा अब भी भारतीय है परन्तु पाश्चात्य चिन्ताने हमारे
रहन-सहन और जीवनकी मान्यताओंको बदल दिया है । अलगसे भी देख सकते हैं ।
हम यहाँ भारतीय प्रभावोंको
यह कहना शायद अनुचित न होगा कि भारतमें राष्ट्रीयताकी विचारधारा पश्चिमकी ही देन है जो अंग्रेजी शिक्षाके द्वारा यहाँ आई । निस्संदेह राष्ट्रीयता शब्दसे हम प्राचीन कालमें अपरिचित न थे । इसके स्तवनमें अनेक सुन्दर वैदिक मंत्रोंकी रचना भी हुई थी तथापि वर्तमान युगमें भारतीय राष्ट्रीयताका उदय अंग्रेजी शासन और शिक्षाके कारण हुआ । हम इस युगमें वेदोंसे राष्ट्रीयताका भाव कम ले सके किन्तु जान स्टुअर्ट मिलके विचारोंने शिक्षित भारतीयोंको अधिक प्रभावित किया । इन विचारोंके ही प्रभावसे भारत में स्वाधीनता प्राप्तिका आन्दोलन शुरू हुआ । अंग्रेज़ी शिक्षाके कारण बर्क, मैकाले, पेन और मैज़िनी, गैरीवाल्डी भारतीय विद्यार्थियोंके निकट आ गये जिनके विचारोंका प्रभाव उनपर पड़ना स्वाभाविक था । आगे चलकर इंगलैण्ड और योरपके राजनीतिक दर्शकोंने भारतके राष्ट्रीय आंदोलन विचारोंका आधार प्रदान किया । इस प्रभावको आंदोलन के पहले उभार में अनेक भारतीयोंने साभार स्वीकार भी किया । दादाभाई नौरोज़ीने १८६७ ई० में ईस्ट इण्डिया एसोसियेशन के सम्मुख कहा - 'देशी लोग अब इसको जानने और इसका अनुभव करने लगे हैं कि मनुष्य-मनुष्यके बीच न्याय किसको कहते हैं .......विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थामें इस बातके प्रमाण हैं कि लोगोंका कितना बुद्धि प्रकाश हो रहा है ।.... लोग सर्वोच्च राजनीतिक दशा, जो किसी भी राष्ट्रकी आकांक्षा हो सकती है, का पाठ सीख रहे हैं । इसी प्रकार गोखलेने कहा - 'शान्तिका फल विधि और व्यवस्थाका संस्थापन, पाश्चात्य शिक्षा और भाषण स्वतन्त्रता और फलतः उदार संस्थाओंका समुचित सम्मान अंग्रेज़ी शासनके लाभ हैं । १६ वीं शताब्दीके योरपमें राष्ट्रीयता और प्रजातन्त्रवादी विचार विकसित हो रहे थे और वही भारत भी आये । २० वीं शताब्दी में रस्किन और टॉल्सटॉय आदिने भारतीयों को प्रभावित किया । भारतीयोंकी राजनीतिक चेतना पश्चिमके दर्शनका प्रत्यक्ष फल है ।
अंग्रेजी शिक्षाने हमारे वैधानिक विचारोंपर भी प्रभाव डाला । देश में जो नयी न्याय प्रणाली स्थापित की गई, उसका आधार पूर्णतः पाश्चात्य था । पश्चिमी न्यायदर्शन के सहारे आजके क़ानून बने । वैयक्तिक कानूनोंपर भी प्रभाव पड़ा । प्रारम्भमें तो स्मृतियोंमें लिखित कानूनोंका सुधार धीरे-धीरे हुआ परन्तु बादमें हिन्दू और मुसलमान कानून बहुत कुछ बदल गये । कानूनी संशोधन असाधारण महत्वके थे । विवाह, सम्पत्ति और उसका बँटवारा इत्यादिकी नीव बिल्कुल नये सिरे से पड़ी । हिन्दू कोड ऐक्ट जिसके भावी प्रभावसे प्रायः सभी परिचित हैं, इसका उदाहरण है ।
पश्चिमके सम्पर्कसे भारतीयोंकी चिन्तन प्रणाली बदली । स्वतन्त्रता, समानता, नागरिक अधिकार, राज्य व्यवस्था और राजनीतिक दर्शन इत्यादि के विषयमें भारतीय व्यक्ति संसारके अन्य व्यक्तियोंके समान सोचने लगा जिसका फल यह निकला कि भारतीय राष्ट्र संसारके अन्य राष्ट्रोंके निकट प्राया । भारतीयोंका बौद्धिक पुनर्जागरण पाश्चात्य चिन्तनका सबसे महत्वपूर्ण फल है । इस युगके महानतम व्यक्ति गांधी, रवीन्द्रनाथ टैगोर और नेहरू इसी जागरणके प्रतिनिधि हैं ।
भारतीय समाज पर अंग्रेजी शिक्षा और पाश्चात्य विचार-धारा का प्रभाव
यहाँ यह भी कहना अत्युक्ति न होगी कि भारतीयोंका पाश्चात्य जगत्से सम्बन्ध न जुड़ता, तो सम्भवतः आज भारतमें विज्ञान शब्दसे ही हम परिचित न होते । भारत सदा पश्चिमका इसलिए ऋणी रहेगा कि वर्तमान युगमें पश्चिमने उसको विज्ञानकी शिक्षा दी । एक बार उस सत्यको जानकर भारतीय इस क्षेत्रमें चुप न बैठे । जगदीश चन्द्रबोस, पी० सी० राय, सी० वी० रमन और आजकल के अनेक भारतीय वैज्ञानिकों की गवेषणाने संसारके ज्ञानका संवर्धन किया है । मशीनोंसे पहले हम अपरिचित थे और इसलिये डरते थे किन्तु वैज्ञानिक शिक्षाने मशीनोंके प्रति हमारे विचारोंको बदल दिया । आज भारतीय समाज बड़ी तेज़ीके साथ अपनी पुरानी कृषक संस्कृतिका त्यांग करता हुआ पाश्चात्य मशीनोंकी संस्कृतिमें प्रविष्ट हो रहा है । इस नवप्रवेशके फल अच्छे हों या बुरे यह प्रश्न यहाँ विचारणीय नहीं है परन्तु इतना अवश्य है कि भारत अब योरप - जैसा दिखलाई पड़ने लगा है। रेल, तार, डाक, बिजली, रेडियो, हवाईजहाज़ तथा अन्याय आविष्कारोंने हमारे प्राचीन विश्वासोंकी जड़को जिस प्रकार हिला दिया है, उसका उल्लेख हम पहले ही कर चुके हैं ।
पाश्चात्य विचारोंने वस्तुतः वर्त्तमान भारतीय समाजकी काया को बदल दिया है । इनका एक प्रमुख प्रभाव धर्मके ऊपर पड़ा । पहले तो धर्म अन्धविश्वास आदि के साथसे अलग हुआ और फिर उसका सामाजिक महत्व समाप्त हो गया । मानवसमाजको एकसूत्रमें बाँधनेके लिए आजकल धर्म बिल्कुल असमर्थ है। यदि ऐसा होता, तो आजकी अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिकी दशा न जाने क्या होती । भारतके हिन्दू, मुसलमान, ईसाई तथा अन्यान्य धर्मावलम्बी और उनके पारस्परिक सहयोगका आधार धर्म कभी नहीं हो सकता । समानता और बन्धुत्वकी भावनाने सभी धर्मोकी तात्विक एकताकी ओर लोगोंको अधिक उन्मुख किया । तत्वतः सभी धर्म एक हैं । बहुतोंके लिए तो धर्म व्यक्तिगत पसन्दकी चीज़ बन गई । परन्तु ऐसे लोग समाज-विरोधी नहीं माने जाते । योगिराट् अरविन्दमें धर्मके दूसरे पहलूका विकास हुआ । इस युग में यदि किसी नये धर्मका जन्म हुआ तो वह मानव धर्म है, जो सार्वदेशिक और सार्वभौम है । आज संसारके किसी कोने में जो कुछ होता है, उसका हमारे जीवनपर सीधा प्रभाव पड़ता है। हमारा सामाजिक दर्शन समाजवाद, और साम्यवादके सिद्धांतोंसे अनुप्राणित हो रहा है। और यह कौन नहीं मानेगा कि ये सभी वाद पश्चिममें उपजे हैं ?
यदि पाश्चात्य विचारोंका भारतीय समाजपर एक अन्य प्रभाव देखना है तो आधुनिक भारतीय साहित्यका अध्ययन करना पड़ेगा। और यदि यह सत्य है कि साहित्य समाजका दर्पण है, तो यह भी सत्य है कि हमारा शिक्षित वर्ग न केवल पाश्चात्य शिक्षा या विचारों से प्रभावित है प्रत्युत बहुत कुछ उनके अनुकूल ढल चुका है । भारतीय साहित्यको ठीक समझना आजकल तब तक सम्भव नहीं है, जब तक कोई पाश्चात्य साहित्यको न जानता हो । बंगालीमें यह प्रभाव सबसे पहिले परिलक्षित हुआ और फिर उसके माध्यम से यह प्रभाव हिन्दी में आया । पश्चिमकी नयी-नयी मनोवैज्ञानिक खोजोंको आप इस साहित्यमें पायेंगे । साहित्यके पात्रोंका समझना उनके जटिल जीवनके समझने के समान ही कठिन है । काव्यमें नये-नये प्रयोग आलोचनाके नये नये सिद्धान्त, निबन्ध प्रादिका विकास पाश्चात्य साहित्यके अध्ययनका परिणाम है 1
ये सब परिवर्तन तो हमारे जीवन दर्शन में हुए हैं । कुछ प्रभाव अपने मूर्त रूपमें देख पड़ते हैं । भारतीयोंका रहन-सहन अब दूसरा होने लगा है । पाश्चात्य वेश-भूषा, प्रसाधन और शिष्टाचारके नियमोंको हम लोगोंने अपना लिया है और उनको अपनाकर हम लज्जा या ग्लानिका अनुभव नहीं करते। भारतीय नगरोंमें स्थान-स्थानपर योरपकीसी दूकानें खुलती जा रही हैं । होटल, रेस्तराँ तथा अन्य ऐसे ही स्थान बिलकुल योरपीय हैं । जाति-पाँतिका इनमें भेद नहीं है । शिक्षा संस्था अब कुर्सियोंपर बैठकर
पढ़ाई होती है और गुरुकुलकी शिक्षा प्रणाली कुछ स्थानों तक ही एक नये रूपमें सीमित है । स्त्री स्वातन्त्र्यका भाव भी इस युगमें पश्चिमी विचारोंका प्रभाव है, जहाँ स्त्रियोंको पुरुषोंके समान ही अधिकार प्राप्त हैं । आधुनिक भारतीय नारी मध्यकालीन नारीसे बिल्कुल भिन्न हैं और यदि समाजका इसी प्रकारसे परिवर्तन होता गया ( जो अवश्य होगा ) तो रीतिकालकी किसी नायिकाका हमें अन्दाज़ तक न मिलेगा ।
पाश्चात्य शिक्षा और चिन्ताका भारतीय समाजपर प्रभाव सर्वांगीण है । वह केवल शिक्षित समाज तक ही सीमित नहीं है, सुदूर गाँव में जहाँ अशिक्षित, निर्धन अन्धविश्वासी और पिछड़ी हुई मानवताका वास है, वहाँ भी पाश्चात्य सभ्यता की किरणें पहुँच रही हैं। क्योंकि वहाँके युवक नगरोंमें आकर अंग्रेजी प्रणालीसे शिक्षित होते हैं । आते हैं वे दूसरा रूप लेकर और जाते हैं बदलकर । हमारी लोक-भाषाओं में भी यह पाश्चात्य प्रभाव परिलक्षित है । अंग्रेज़ों शताब्दियोंके सम्पर्कमें उनमें अनेक नये शब्द भर दिए हैं जिनसे विचारोंको व्यक्त करनेमें लोगोंको सुविधा होती है ।
परन्तु आवश्यक नहीं है कि उपर्युक्त सभी परिणाम शुभ ही हों । जहाँ एक ओर भारतीय समाज पाश्चात्य विचारोंसे परिचित होकर अत्यधिक प्रगतिशील हुआ है वहाँ पाश्चात्य समाजके अनेक दोष भी उसमें आ गये । जिन अनेक मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और आर्थिक समस्या के कारण योरपके व्यक्तिका जीवन प्रशान्त और जटिल हो गया है, उनसे आजका भारतीय छूटा नहीं है । पश्चिमकी व्यावसायिक बुद्धि, मानवीय सुखोंके साधनोंका केन्द्रीकरण इत्यादि सभी भारतमें भी प्रवेश पा गये हैं । अंग्रेजी शिक्षाका आगमन देशमें उन परिस्थितियोंके बीच हुआ, जिन्होंने भारतीयोंकी सर्जनात्मक शक्तिका ह्रास कर दिया क्योंकि शिक्षा आजीविका दिलानेका साधन बन गई । प्रारम्भ में जब पढ़ने-लिखनेका कम मात्रामें काम था तब लोगोंको पढ़-लिखकर बेकार नहीं बैठना पड़ता था परन्तु शिक्षाकी प्रगति जिस वेगसे हुई, शिक्षित व्यक्तियोंकी आजीविका के लिए काम उतना न बढ़ा । अतः उक्त शिक्षाने आज देशके शिक्षित नवयुवकोंमें बेकारीकी विषम स्थितिको पैदा कर दिया है । हमारी उक्त पाश्चात्य शिक्षाप्रणाली में प्रारम्भसे लेकर अन्त तक विद्यार्थियोंको शारीरिक श्रमसे दूर रक्खा जाता है । फलतः सुशिक्षित व्यक्ति सिवा कार्यालय अथवा पाठशालाके अन्यत्र जीविकोपार्जनके लिए सर्वथा अनुपयुक्त है। शिक्षामें संतुलनका अभाव ही इस आर्थिक समस्याका रहस्य है ।: सांकृतिक दृष्टिसे उक्त शिक्षा के परिणामस्वरूप समाजमें मध्यवर्गका विकास हुआ है जो सामाजिक क्रांतियोंका अग्रदूत है; परन्तु पाश्चात्य शिक्षासे उत्पन्न सामाजिक अथवा आर्थिक समस्या आजका कोई व्यक्ति बच नहीं सकता । विभिन्न राष्ट्रोंके परस्पर निकट आ जानेके कारण नवीन समस्याएँ अवश्य उत्पन्न होती
भारतीय समाज पर अंग्रेजी शिक्षा और पाश्चात्य विचारधारा का प्रभाव २०३
भारतीय समाज जो पिछली कुछ शताब्दियोंमें दूसरोंसे अलग रह रहा था उसके लिए नवीन अन्तर्राष्ट्रीय समस्याएँ बड़ी जटिल मालूम पड़ रही हैं । परन्तु वह जटिलता केवल भारतीयोंके लिए नहीं है बल्कि समूचे संसारके लिए उतनी ही नयी हैं, जितनी भारतके लिए ।
भारत और पश्चिमके सम्बन्ध वस्तुतः अच्छे ही रहे हैं । आजके युग में कोई जाति, समाज या राष्ट्र अकेला नहीं रह सकता । विश्वके अन्य राष्ट्रोंके साथ मिलकर रहना पड़ेगा । यह मिलन यदि आकस्मिक होगा तो आपसमें भ्रम और नासमझदारीके उत्पन्न होनेकी पूरी सम्भावना है । अतः अच्छा यही होगा कि लोग पहलेसे ही एक-दूसरेको समझे रहे । इस दृष्टिसे यह कहा जा सकता है कि पश्चिमके साथ भारतीयोंका सम्पर्क पारस्परिक सहयोगकी भावनाको बल देनेवाला हुआ है । पश्चिमसे अब डरनेकी कोई बात नहीं है । योरपीय भाषाओं के ज्ञानसे और योरपीय समाजके सम्पर्कसे अब हम वहाँके लोगोंको अच्छी तरह समझ गये हैं। उनकी दुर्बलताओं और गुणोंसे पूर्णतः अवगत हैं । इसलिए इधर कुछ वर्षोंसे जिस नवीन भारतीय समाज और संस्कृतिका विकास हो रहा है, वह हमारी परम्पराओंके अनुकूल तथा भारतीयोंके स्वभाव और आकांक्षाओं का वहन करनेवाला है । इधर हमारे समाजका परिष्कार हो रहा है । पश्चिमकी उन सभी बातोंको आत्मसात् करके जिनसे मानव समाज सुखी और सम्पन्न हो सकता है भारतीय पुनः अपने प्राचीन साहित्य, दर्शन, अपनी प्राचीन कलाओं तथा आदर्शांसे अनुप्राणित होने लगे हैं। इससे एक सर्वथा नवीन भारतीयका जन्म हो रहा है जो पूर्व और पश्चिमके सत्य, शिव और सुन्दरका प्रतीक है। संसार ऐसे व्यक्तिको शीघ्र ही देखने की प्रतीक्षामें है । यह सम्भवतः पश्चिमकी भारतको अन्तिम देन है । | सोलह वीं शताब्दीमें भारतमें राष्ट्रीयताकी एक लहर दौड़ गई थी। और तज्जन्य प्रभावको संवर्धन तथा उसको स्थायित्व देने के लिए एक महासभाका भी जन्म हुआ । इस संगठन में पाश्चात्य विद्या पारंगत भारतीय विद्वान ही पहले पहल सम्मिलित हुए, जो अपने राष्ट्रका निर्माण और समाजका सुधार करना चाहते थे । उनमें प्रायः अपनी उच्चताका न तो मिथ्या दम्भ था, न पश्चिमके प्रति घृणा थी और न पश्चिमके अन्धानुकरणकी मनोवृत्ति । वैसे इस प्रकारकी उदार विचारधारा राजाराम मोहनराय के समयमें उत्पन्न हुई थी । रामकृष्ण परमहंस भी धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रोंमें उदार विचारोंवाले थे । ब्रह्म समाजके ही समान बम्बईमें प्रार्थना समाजका जन्म हुआ जिसके प्रशंसकोंमें रामकृष्ण भण्डारकर, महादेव गोविन्द रानाडे और गोपाल कृष्ण गोखले प्रभृत्ति लोग थे जिन्होंने आगे चलकर भारत सेवक संघ बनाया । इस प्रकार सोलह वीं शताब्दीके भारतीय समाजमें हम दो प्रकारके वर्ग पाते हैं । पहला जो उग्र स्वभावका था जो पाश्चात्य शिक्षा, धर्म, दर्शन और संस्कृतिको हीन मानता था और दूसरा जो भारतीय समाजको न तो प्रकारण ऊँचा और न पाश्चात्य समाजको नीचा मानता था बल्कि बुद्धिके द्वारा पूर्व और पश्चिमकी विचारधाराओंका अध्ययन करता हुआ अपने सामाजिक उत्थानका मार्ग प्रशस्त करना चाहता था । पहला वर्ग उन लोगोंका था जो किसी समय अपने में लघुताकी मनोवृत्ति अपना चुके थे और अब उसकी प्रतिक्रिया के कारण ठीक उल्टी दिशामें चलने लगे थे । दूसरा वर्ग उन लोगोंका था जो पाश्चात्य सम्पर्कसे विचलित नहीं हुए थे तथा जहाँ जो उचित विचार था उसको उन्होंने अपना लिया था । इस दूसरे वर्गने अपने रहन सहन, राजनीतिक तथा सामाजिक दर्शनकी अनेक कमियोंको ईमानदारीके साथ स्वीकार किया और इसलिए उसने पश्चिमके ज्ञानसे लाभ उठाना चाहा । परन्तु कुछ भी हो एक बात दोनों वर्गों मार्केकी है। वह यह कि दोनों प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूपसे भारतीय समाजकी अनेक कमियों और कुरीतियोंको समझ गये थे । इसीलिए पहले वर्गने भी चाहे वह पश्चिमके प्रति उग्र विचारोंवाला ही क्यों न हो उन सामाजिक दोषोंको दूर करना चाहा, जिनके कारण पाश्चात्य धर्म और विचारोंका भारतमें क्षिप्रतासे प्रचार हो रहा था । भारतीय समाजपर पाश्चात्य विचारधाराका जो प्रभाव पड़ा उसकी चौथी तथा अन्तिम स्थिति भारतीय और पाश्चात्य संस्कृतियोंका समीकरण है । और इसी समीकरणका परिणाम आजका भारतीय समाज है । परिवर्तनकी इस दशाका प्रारम्भ, हम देख चुके हैं, उन्नीस वीं शताब्दीमें ही हुआ परन्तु उसके प्रत्यक्ष परिणाम बीस वीं शताब्दी के दूसरे चरणसे परिलक्षित हुए। महात्मा गांधी इस युगके सर्वाधिक प्रभावशाली पुरुष हुए जिन्होंने अपने ऊपर पाश्चात्य विचार धाराके ऋणको स्पष्टतः स्वीकार किया । ऊपर हमने पाश्चात्य प्रभावकी विभिन्न दशाओंको देखनेका प्रयत्न किया है जिनसे चलकर आजका हमारा समाज बना है। आजका भारतीय समाज पाश्चात्य विचारधारा और संस्कृतिमें ही ढला है । समाजके जिस बड़े वर्गमें अभी शिक्षाका प्रसार नहीं हुआ है वहाँ भी अंग्रेजी शिक्षाका और समयके प्रभावसे आश्चर्यजनक सामाजिक परिवर्तन हो रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि समाजके एक बड़े भागकी आत्मा अब भी भारतीय है परन्तु पाश्चात्य चिन्ताने हमारे रहन-सहन और जीवनकी मान्यताओंको बदल दिया है । अलगसे भी देख सकते हैं । हम यहाँ भारतीय प्रभावोंको यह कहना शायद अनुचित न होगा कि भारतमें राष्ट्रीयताकी विचारधारा पश्चिमकी ही देन है जो अंग्रेजी शिक्षाके द्वारा यहाँ आई । निस्संदेह राष्ट्रीयता शब्दसे हम प्राचीन कालमें अपरिचित न थे । इसके स्तवनमें अनेक सुन्दर वैदिक मंत्रोंकी रचना भी हुई थी तथापि वर्तमान युगमें भारतीय राष्ट्रीयताका उदय अंग्रेजी शासन और शिक्षाके कारण हुआ । हम इस युगमें वेदोंसे राष्ट्रीयताका भाव कम ले सके किन्तु जान स्टुअर्ट मिलके विचारोंने शिक्षित भारतीयोंको अधिक प्रभावित किया । इन विचारोंके ही प्रभावसे भारत में स्वाधीनता प्राप्तिका आन्दोलन शुरू हुआ । अंग्रेज़ी शिक्षाके कारण बर्क, मैकाले, पेन और मैज़िनी, गैरीवाल्डी भारतीय विद्यार्थियोंके निकट आ गये जिनके विचारोंका प्रभाव उनपर पड़ना स्वाभाविक था । आगे चलकर इंगलैण्ड और योरपके राजनीतिक दर्शकोंने भारतके राष्ट्रीय आंदोलन विचारोंका आधार प्रदान किया । इस प्रभावको आंदोलन के पहले उभार में अनेक भारतीयोंने साभार स्वीकार भी किया । दादाभाई नौरोज़ीने एक हज़ार आठ सौ सरसठ ईशून्य में ईस्ट इण्डिया एसोसियेशन के सम्मुख कहा - 'देशी लोग अब इसको जानने और इसका अनुभव करने लगे हैं कि मनुष्य-मनुष्यके बीच न्याय किसको कहते हैं .......विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थामें इस बातके प्रमाण हैं कि लोगोंका कितना बुद्धि प्रकाश हो रहा है ।.... लोग सर्वोच्च राजनीतिक दशा, जो किसी भी राष्ट्रकी आकांक्षा हो सकती है, का पाठ सीख रहे हैं । इसी प्रकार गोखलेने कहा - 'शान्तिका फल विधि और व्यवस्थाका संस्थापन, पाश्चात्य शिक्षा और भाषण स्वतन्त्रता और फलतः उदार संस्थाओंका समुचित सम्मान अंग्रेज़ी शासनके लाभ हैं । सोलह वीं शताब्दीके योरपमें राष्ट्रीयता और प्रजातन्त्रवादी विचार विकसित हो रहे थे और वही भारत भी आये । बीस वीं शताब्दी में रस्किन और टॉल्सटॉय आदिने भारतीयों को प्रभावित किया । भारतीयोंकी राजनीतिक चेतना पश्चिमके दर्शनका प्रत्यक्ष फल है । अंग्रेजी शिक्षाने हमारे वैधानिक विचारोंपर भी प्रभाव डाला । देश में जो नयी न्याय प्रणाली स्थापित की गई, उसका आधार पूर्णतः पाश्चात्य था । पश्चिमी न्यायदर्शन के सहारे आजके क़ानून बने । वैयक्तिक कानूनोंपर भी प्रभाव पड़ा । प्रारम्भमें तो स्मृतियोंमें लिखित कानूनोंका सुधार धीरे-धीरे हुआ परन्तु बादमें हिन्दू और मुसलमान कानून बहुत कुछ बदल गये । कानूनी संशोधन असाधारण महत्वके थे । विवाह, सम्पत्ति और उसका बँटवारा इत्यादिकी नीव बिल्कुल नये सिरे से पड़ी । हिन्दू कोड ऐक्ट जिसके भावी प्रभावसे प्रायः सभी परिचित हैं, इसका उदाहरण है । पश्चिमके सम्पर्कसे भारतीयोंकी चिन्तन प्रणाली बदली । स्वतन्त्रता, समानता, नागरिक अधिकार, राज्य व्यवस्था और राजनीतिक दर्शन इत्यादि के विषयमें भारतीय व्यक्ति संसारके अन्य व्यक्तियोंके समान सोचने लगा जिसका फल यह निकला कि भारतीय राष्ट्र संसारके अन्य राष्ट्रोंके निकट प्राया । भारतीयोंका बौद्धिक पुनर्जागरण पाश्चात्य चिन्तनका सबसे महत्वपूर्ण फल है । इस युगके महानतम व्यक्ति गांधी, रवीन्द्रनाथ टैगोर और नेहरू इसी जागरणके प्रतिनिधि हैं । भारतीय समाज पर अंग्रेजी शिक्षा और पाश्चात्य विचार-धारा का प्रभाव यहाँ यह भी कहना अत्युक्ति न होगी कि भारतीयोंका पाश्चात्य जगत्से सम्बन्ध न जुड़ता, तो सम्भवतः आज भारतमें विज्ञान शब्दसे ही हम परिचित न होते । भारत सदा पश्चिमका इसलिए ऋणी रहेगा कि वर्तमान युगमें पश्चिमने उसको विज्ञानकी शिक्षा दी । एक बार उस सत्यको जानकर भारतीय इस क्षेत्रमें चुप न बैठे । जगदीश चन्द्रबोस, पीशून्य सीशून्य राय, सीशून्य वीशून्य रमन और आजकल के अनेक भारतीय वैज्ञानिकों की गवेषणाने संसारके ज्ञानका संवर्धन किया है । मशीनोंसे पहले हम अपरिचित थे और इसलिये डरते थे किन्तु वैज्ञानिक शिक्षाने मशीनोंके प्रति हमारे विचारोंको बदल दिया । आज भारतीय समाज बड़ी तेज़ीके साथ अपनी पुरानी कृषक संस्कृतिका त्यांग करता हुआ पाश्चात्य मशीनोंकी संस्कृतिमें प्रविष्ट हो रहा है । इस नवप्रवेशके फल अच्छे हों या बुरे यह प्रश्न यहाँ विचारणीय नहीं है परन्तु इतना अवश्य है कि भारत अब योरप - जैसा दिखलाई पड़ने लगा है। रेल, तार, डाक, बिजली, रेडियो, हवाईजहाज़ तथा अन्याय आविष्कारोंने हमारे प्राचीन विश्वासोंकी जड़को जिस प्रकार हिला दिया है, उसका उल्लेख हम पहले ही कर चुके हैं । पाश्चात्य विचारोंने वस्तुतः वर्त्तमान भारतीय समाजकी काया को बदल दिया है । इनका एक प्रमुख प्रभाव धर्मके ऊपर पड़ा । पहले तो धर्म अन्धविश्वास आदि के साथसे अलग हुआ और फिर उसका सामाजिक महत्व समाप्त हो गया । मानवसमाजको एकसूत्रमें बाँधनेके लिए आजकल धर्म बिल्कुल असमर्थ है। यदि ऐसा होता, तो आजकी अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिकी दशा न जाने क्या होती । भारतके हिन्दू, मुसलमान, ईसाई तथा अन्यान्य धर्मावलम्बी और उनके पारस्परिक सहयोगका आधार धर्म कभी नहीं हो सकता । समानता और बन्धुत्वकी भावनाने सभी धर्मोकी तात्विक एकताकी ओर लोगोंको अधिक उन्मुख किया । तत्वतः सभी धर्म एक हैं । बहुतोंके लिए तो धर्म व्यक्तिगत पसन्दकी चीज़ बन गई । परन्तु ऐसे लोग समाज-विरोधी नहीं माने जाते । योगिराट् अरविन्दमें धर्मके दूसरे पहलूका विकास हुआ । इस युग में यदि किसी नये धर्मका जन्म हुआ तो वह मानव धर्म है, जो सार्वदेशिक और सार्वभौम है । आज संसारके किसी कोने में जो कुछ होता है, उसका हमारे जीवनपर सीधा प्रभाव पड़ता है। हमारा सामाजिक दर्शन समाजवाद, और साम्यवादके सिद्धांतोंसे अनुप्राणित हो रहा है। और यह कौन नहीं मानेगा कि ये सभी वाद पश्चिममें उपजे हैं ? यदि पाश्चात्य विचारोंका भारतीय समाजपर एक अन्य प्रभाव देखना है तो आधुनिक भारतीय साहित्यका अध्ययन करना पड़ेगा। और यदि यह सत्य है कि साहित्य समाजका दर्पण है, तो यह भी सत्य है कि हमारा शिक्षित वर्ग न केवल पाश्चात्य शिक्षा या विचारों से प्रभावित है प्रत्युत बहुत कुछ उनके अनुकूल ढल चुका है । भारतीय साहित्यको ठीक समझना आजकल तब तक सम्भव नहीं है, जब तक कोई पाश्चात्य साहित्यको न जानता हो । बंगालीमें यह प्रभाव सबसे पहिले परिलक्षित हुआ और फिर उसके माध्यम से यह प्रभाव हिन्दी में आया । पश्चिमकी नयी-नयी मनोवैज्ञानिक खोजोंको आप इस साहित्यमें पायेंगे । साहित्यके पात्रोंका समझना उनके जटिल जीवनके समझने के समान ही कठिन है । काव्यमें नये-नये प्रयोग आलोचनाके नये नये सिद्धान्त, निबन्ध प्रादिका विकास पाश्चात्य साहित्यके अध्ययनका परिणाम है एक ये सब परिवर्तन तो हमारे जीवन दर्शन में हुए हैं । कुछ प्रभाव अपने मूर्त रूपमें देख पड़ते हैं । भारतीयोंका रहन-सहन अब दूसरा होने लगा है । पाश्चात्य वेश-भूषा, प्रसाधन और शिष्टाचारके नियमोंको हम लोगोंने अपना लिया है और उनको अपनाकर हम लज्जा या ग्लानिका अनुभव नहीं करते। भारतीय नगरोंमें स्थान-स्थानपर योरपकीसी दूकानें खुलती जा रही हैं । होटल, रेस्तराँ तथा अन्य ऐसे ही स्थान बिलकुल योरपीय हैं । जाति-पाँतिका इनमें भेद नहीं है । शिक्षा संस्था अब कुर्सियोंपर बैठकर पढ़ाई होती है और गुरुकुलकी शिक्षा प्रणाली कुछ स्थानों तक ही एक नये रूपमें सीमित है । स्त्री स्वातन्त्र्यका भाव भी इस युगमें पश्चिमी विचारोंका प्रभाव है, जहाँ स्त्रियोंको पुरुषोंके समान ही अधिकार प्राप्त हैं । आधुनिक भारतीय नारी मध्यकालीन नारीसे बिल्कुल भिन्न हैं और यदि समाजका इसी प्रकारसे परिवर्तन होता गया तो रीतिकालकी किसी नायिकाका हमें अन्दाज़ तक न मिलेगा । पाश्चात्य शिक्षा और चिन्ताका भारतीय समाजपर प्रभाव सर्वांगीण है । वह केवल शिक्षित समाज तक ही सीमित नहीं है, सुदूर गाँव में जहाँ अशिक्षित, निर्धन अन्धविश्वासी और पिछड़ी हुई मानवताका वास है, वहाँ भी पाश्चात्य सभ्यता की किरणें पहुँच रही हैं। क्योंकि वहाँके युवक नगरोंमें आकर अंग्रेजी प्रणालीसे शिक्षित होते हैं । आते हैं वे दूसरा रूप लेकर और जाते हैं बदलकर । हमारी लोक-भाषाओं में भी यह पाश्चात्य प्रभाव परिलक्षित है । अंग्रेज़ों शताब्दियोंके सम्पर्कमें उनमें अनेक नये शब्द भर दिए हैं जिनसे विचारोंको व्यक्त करनेमें लोगोंको सुविधा होती है । परन्तु आवश्यक नहीं है कि उपर्युक्त सभी परिणाम शुभ ही हों । जहाँ एक ओर भारतीय समाज पाश्चात्य विचारोंसे परिचित होकर अत्यधिक प्रगतिशील हुआ है वहाँ पाश्चात्य समाजके अनेक दोष भी उसमें आ गये । जिन अनेक मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और आर्थिक समस्या के कारण योरपके व्यक्तिका जीवन प्रशान्त और जटिल हो गया है, उनसे आजका भारतीय छूटा नहीं है । पश्चिमकी व्यावसायिक बुद्धि, मानवीय सुखोंके साधनोंका केन्द्रीकरण इत्यादि सभी भारतमें भी प्रवेश पा गये हैं । अंग्रेजी शिक्षाका आगमन देशमें उन परिस्थितियोंके बीच हुआ, जिन्होंने भारतीयोंकी सर्जनात्मक शक्तिका ह्रास कर दिया क्योंकि शिक्षा आजीविका दिलानेका साधन बन गई । प्रारम्भ में जब पढ़ने-लिखनेका कम मात्रामें काम था तब लोगोंको पढ़-लिखकर बेकार नहीं बैठना पड़ता था परन्तु शिक्षाकी प्रगति जिस वेगसे हुई, शिक्षित व्यक्तियोंकी आजीविका के लिए काम उतना न बढ़ा । अतः उक्त शिक्षाने आज देशके शिक्षित नवयुवकोंमें बेकारीकी विषम स्थितिको पैदा कर दिया है । हमारी उक्त पाश्चात्य शिक्षाप्रणाली में प्रारम्भसे लेकर अन्त तक विद्यार्थियोंको शारीरिक श्रमसे दूर रक्खा जाता है । फलतः सुशिक्षित व्यक्ति सिवा कार्यालय अथवा पाठशालाके अन्यत्र जीविकोपार्जनके लिए सर्वथा अनुपयुक्त है। शिक्षामें संतुलनका अभाव ही इस आर्थिक समस्याका रहस्य है ।: सांकृतिक दृष्टिसे उक्त शिक्षा के परिणामस्वरूप समाजमें मध्यवर्गका विकास हुआ है जो सामाजिक क्रांतियोंका अग्रदूत है; परन्तु पाश्चात्य शिक्षासे उत्पन्न सामाजिक अथवा आर्थिक समस्या आजका कोई व्यक्ति बच नहीं सकता । विभिन्न राष्ट्रोंके परस्पर निकट आ जानेके कारण नवीन समस्याएँ अवश्य उत्पन्न होती भारतीय समाज पर अंग्रेजी शिक्षा और पाश्चात्य विचारधारा का प्रभाव दो सौ तीन भारतीय समाज जो पिछली कुछ शताब्दियोंमें दूसरोंसे अलग रह रहा था उसके लिए नवीन अन्तर्राष्ट्रीय समस्याएँ बड़ी जटिल मालूम पड़ रही हैं । परन्तु वह जटिलता केवल भारतीयोंके लिए नहीं है बल्कि समूचे संसारके लिए उतनी ही नयी हैं, जितनी भारतके लिए । भारत और पश्चिमके सम्बन्ध वस्तुतः अच्छे ही रहे हैं । आजके युग में कोई जाति, समाज या राष्ट्र अकेला नहीं रह सकता । विश्वके अन्य राष्ट्रोंके साथ मिलकर रहना पड़ेगा । यह मिलन यदि आकस्मिक होगा तो आपसमें भ्रम और नासमझदारीके उत्पन्न होनेकी पूरी सम्भावना है । अतः अच्छा यही होगा कि लोग पहलेसे ही एक-दूसरेको समझे रहे । इस दृष्टिसे यह कहा जा सकता है कि पश्चिमके साथ भारतीयोंका सम्पर्क पारस्परिक सहयोगकी भावनाको बल देनेवाला हुआ है । पश्चिमसे अब डरनेकी कोई बात नहीं है । योरपीय भाषाओं के ज्ञानसे और योरपीय समाजके सम्पर्कसे अब हम वहाँके लोगोंको अच्छी तरह समझ गये हैं। उनकी दुर्बलताओं और गुणोंसे पूर्णतः अवगत हैं । इसलिए इधर कुछ वर्षोंसे जिस नवीन भारतीय समाज और संस्कृतिका विकास हो रहा है, वह हमारी परम्पराओंके अनुकूल तथा भारतीयोंके स्वभाव और आकांक्षाओं का वहन करनेवाला है । इधर हमारे समाजका परिष्कार हो रहा है । पश्चिमकी उन सभी बातोंको आत्मसात् करके जिनसे मानव समाज सुखी और सम्पन्न हो सकता है भारतीय पुनः अपने प्राचीन साहित्य, दर्शन, अपनी प्राचीन कलाओं तथा आदर्शांसे अनुप्राणित होने लगे हैं। इससे एक सर्वथा नवीन भारतीयका जन्म हो रहा है जो पूर्व और पश्चिमके सत्य, शिव और सुन्दरका प्रतीक है। संसार ऐसे व्यक्तिको शीघ्र ही देखने की प्रतीक्षामें है । यह सम्भवतः पश्चिमकी भारतको अन्तिम देन है । |
सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के भटोनी पंचायत टेंगराहा मोड़ के पास एक कार अनियंत्रित होकर 20 फीट गड्डे में गिर गई। जिसमें तीन लोगों की मौत हुई है और तीन जख्मी हुए हैं। सभी घायलों की स्थिति नाजुक है। ये लोग फलदान समारोह में शामिल होकर गांव जा रहे थे, इस दौरान हादसा हुआ।
पूर्णिया के धमदाहा-पूर्णिया स्टेट हाइवे पर तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार दो दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना रविवार की देर रात करीब 10 बजे लोहिया चौक के पास घटी है। हादसा इतना जबरदस्त था कि न सिर्फ बाइक के परखच्चे उड़ गए बल्कि मौके पर ही बाइक सवार दोनों युवकों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जीएमसीएच भेज दिया गया है।
बिहार के मोतिहारी में पुलिस और डकैतों के बीच एनकाउंटर हुआ है। इस मुठभेड़ में दो डकैत ढेर हो गए। घटना घोड़ासन थाना क्षेत्र के पूर्णाहिया गांव की है। बताया जाता है कि पुलिस को सूचना मिली थी कि डकैत गांव में वारदात को अंजाम देने आ रहे हैं।
इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही डकैतों ने बमबाजी शुरू कर दी। इस घटना में तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। जिसमें दो डकैतों को मार गिराया। एसपी कांतेश कुमार मिश्रा घटना स्थल पर कैंप रहे हैं।
भागलपुर के जोगसर थाना क्षेत्र अंतर्गत खरमंचक रोड में दो पक्षों की मारपीट में एक युवक घायल हो गया। घायल शख्स की पहचान बड़ी खंजरपुर निवासी मो परवेज़ आलम का पुत्र मो. रशीद के रूप में हुई है। मामले को लेकर घायल के परिजनों ने बताया कि रशीद अपने दो अन्य साथियों के साथ शाहजंगी इलाके से गाय लेकर आ रहा था इस दौरान खरमनचक के पास कुछ लोगों ने उसे रोका और पूछताछ शुरू की। इस दौरान युवक ने बताया कि वह मवेशी लेकर अपने घर जा रहा है।
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| सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के भटोनी पंचायत टेंगराहा मोड़ के पास एक कार अनियंत्रित होकर बीस फीट गड्डे में गिर गई। जिसमें तीन लोगों की मौत हुई है और तीन जख्मी हुए हैं। सभी घायलों की स्थिति नाजुक है। ये लोग फलदान समारोह में शामिल होकर गांव जा रहे थे, इस दौरान हादसा हुआ। पूर्णिया के धमदाहा-पूर्णिया स्टेट हाइवे पर तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार दो दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना रविवार की देर रात करीब दस बजे लोहिया चौक के पास घटी है। हादसा इतना जबरदस्त था कि न सिर्फ बाइक के परखच्चे उड़ गए बल्कि मौके पर ही बाइक सवार दोनों युवकों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जीएमसीएच भेज दिया गया है। बिहार के मोतिहारी में पुलिस और डकैतों के बीच एनकाउंटर हुआ है। इस मुठभेड़ में दो डकैत ढेर हो गए। घटना घोड़ासन थाना क्षेत्र के पूर्णाहिया गांव की है। बताया जाता है कि पुलिस को सूचना मिली थी कि डकैत गांव में वारदात को अंजाम देने आ रहे हैं। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही डकैतों ने बमबाजी शुरू कर दी। इस घटना में तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। जिसमें दो डकैतों को मार गिराया। एसपी कांतेश कुमार मिश्रा घटना स्थल पर कैंप रहे हैं। भागलपुर के जोगसर थाना क्षेत्र अंतर्गत खरमंचक रोड में दो पक्षों की मारपीट में एक युवक घायल हो गया। घायल शख्स की पहचान बड़ी खंजरपुर निवासी मो परवेज़ आलम का पुत्र मो. रशीद के रूप में हुई है। मामले को लेकर घायल के परिजनों ने बताया कि रशीद अपने दो अन्य साथियों के साथ शाहजंगी इलाके से गाय लेकर आ रहा था इस दौरान खरमनचक के पास कुछ लोगों ने उसे रोका और पूछताछ शुरू की। इस दौरान युवक ने बताया कि वह मवेशी लेकर अपने घर जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
लाये गये । दूध, दही के बाँधे हुये छेने के लड्डू आाये । दूध चावल की गाढ़ी खीर, शक्करपारे आदि की तश्तरी ( पछियाउरि ) परोसी गई । कविवर जायसी कहते हैं कि दूध दही " और दूसरी मिठाइयों का मैं क्या बखान करू ।
सारे खाद्यपदार्थ प्रत्यधिक सुवासित थे और मुँह में पड़ते ही घुल जाते थे । एक ग्रास खाते ही उसमे सौ प्रकार का स्वाद मिलता था ।
शब्दार्थ - भात - वारात का मुख्य चावलों का भोजन । विलाई - । धुल जाना । सुवास==सुगन्ध । कवर = ग्रास । लुचोई == मैदे की पतली पूरी । सोहारी = पूरी । खंडरा =शक्करपारे । सँधान == अचार । मोरँडा = मलाई के लड्डू । जाउरि=खीर । पछियाउरि = जोनार में परोसी गई मिठाई की अन्तिम तश्तरी । खंडोइ = चाशनी ।
भै जेंवनार फिरा खंडवानी । फिरा अरगजा कुंकु हँबानी ।।
फिरे पान बहुरा सब कोई । लाग बियाहचार सब होई ॥ माँडौ सोने के गगन सँवारा। बंदनवार लाग सब तारा ॥ साजा पाट छत्र छाहाँ । रतन चौक पूरा तेहि माँहाँ ॥ कंचन कलस नीर भरि घरा। इंद्र पास श्रानी अपछरा ॥ गाँठि दुलह दुलिहिन के जोरी । दुश्रौ जगत जो जाइ न छोरी ॥ बेद भर्नाह पंडित तेहि ठाऊँ । कन्या तुला रासि लै नाऊ ॥ चाँद सुरुज दूँइ निरमल दुवौ संजोग अनूप ।
सुरुज चाँद सौं भूला चाँद सुरुज के रूप ॥ २८५॥ भावार्थ - पूर्व पद के प्रसंग में -
जेंवनार समाप्त हुई तो शरबत घुमाया गया । फिर केशर चन्दन कपूर आदि का बना हुआ अर्गजा या सुगन्धित द्रव्य दिया गया। तत्पश्चात् सबको पान दिये गये और सब वराती लोग जनवासे में लौट आये। वहाँ विवाह का कार्यक्रम होने लगा । गगनचुम्बी सोने का मॅडप सजाया गया था । वंदनवार थे, जिन पर अनेक तारे या रत्न जड़े हुये थे । छत्र की छाया में वर का आसन सुशोभित किया गया । मॅडप के बीच में रत्नजटित चौक पूरा गया । स्वर्ण-कलशों में पवित्र जल भरकर रखा गया । तब उस मँडप में रत्नसेन रूपी इन्द्र के पास पद्मावती रूपी अप्सरा लाई गई । कविवर जायसी कहते हैं कि वर-वधू की दाम्पत्य गाँठ जोड़ी गई, इतनी मजबूती से कि जो दोनों लोकों में भी न खुल सकेगी । उस जगह पंडित वेद-मन्त्र पढ़ने लगे। साथ ही पंडित लोग वर-वधू की क्रमशः कन्या तुलाराशि नामों का उच्चारण करने लगे ।
चाँद और सूर्य दोनों निर्मल हैं; और इनके अनुरूप रत्नसेन और पद्मावती का वरवधू जनक सम्बन्ध भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है । सूरज चाँद के और चाँद सूरज के रूप पर मुग्ध होगया ।
आशय यह है कि पद्मावती और रत्नसेन का विवाह संस्कार महान है । | लाये गये । दूध, दही के बाँधे हुये छेने के लड्डू आाये । दूध चावल की गाढ़ी खीर, शक्करपारे आदि की तश्तरी परोसी गई । कविवर जायसी कहते हैं कि दूध दही " और दूसरी मिठाइयों का मैं क्या बखान करू । सारे खाद्यपदार्थ प्रत्यधिक सुवासित थे और मुँह में पड़ते ही घुल जाते थे । एक ग्रास खाते ही उसमे सौ प्रकार का स्वाद मिलता था । शब्दार्थ - भात - वारात का मुख्य चावलों का भोजन । विलाई - । धुल जाना । सुवास==सुगन्ध । कवर = ग्रास । लुचोई == मैदे की पतली पूरी । सोहारी = पूरी । खंडरा =शक्करपारे । सँधान == अचार । मोरँडा = मलाई के लड्डू । जाउरि=खीर । पछियाउरि = जोनार में परोसी गई मिठाई की अन्तिम तश्तरी । खंडोइ = चाशनी । भै जेंवनार फिरा खंडवानी । फिरा अरगजा कुंकु हँबानी ।। फिरे पान बहुरा सब कोई । लाग बियाहचार सब होई ॥ माँडौ सोने के गगन सँवारा। बंदनवार लाग सब तारा ॥ साजा पाट छत्र छाहाँ । रतन चौक पूरा तेहि माँहाँ ॥ कंचन कलस नीर भरि घरा। इंद्र पास श्रानी अपछरा ॥ गाँठि दुलह दुलिहिन के जोरी । दुश्रौ जगत जो जाइ न छोरी ॥ बेद भर्नाह पंडित तेहि ठाऊँ । कन्या तुला रासि लै नाऊ ॥ चाँद सुरुज दूँइ निरमल दुवौ संजोग अनूप । सुरुज चाँद सौं भूला चाँद सुरुज के रूप ॥ दो सौ पचासी॥ भावार्थ - पूर्व पद के प्रसंग में - जेंवनार समाप्त हुई तो शरबत घुमाया गया । फिर केशर चन्दन कपूर आदि का बना हुआ अर्गजा या सुगन्धित द्रव्य दिया गया। तत्पश्चात् सबको पान दिये गये और सब वराती लोग जनवासे में लौट आये। वहाँ विवाह का कार्यक्रम होने लगा । गगनचुम्बी सोने का मॅडप सजाया गया था । वंदनवार थे, जिन पर अनेक तारे या रत्न जड़े हुये थे । छत्र की छाया में वर का आसन सुशोभित किया गया । मॅडप के बीच में रत्नजटित चौक पूरा गया । स्वर्ण-कलशों में पवित्र जल भरकर रखा गया । तब उस मँडप में रत्नसेन रूपी इन्द्र के पास पद्मावती रूपी अप्सरा लाई गई । कविवर जायसी कहते हैं कि वर-वधू की दाम्पत्य गाँठ जोड़ी गई, इतनी मजबूती से कि जो दोनों लोकों में भी न खुल सकेगी । उस जगह पंडित वेद-मन्त्र पढ़ने लगे। साथ ही पंडित लोग वर-वधू की क्रमशः कन्या तुलाराशि नामों का उच्चारण करने लगे । चाँद और सूर्य दोनों निर्मल हैं; और इनके अनुरूप रत्नसेन और पद्मावती का वरवधू जनक सम्बन्ध भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है । सूरज चाँद के और चाँद सूरज के रूप पर मुग्ध होगया । आशय यह है कि पद्मावती और रत्नसेन का विवाह संस्कार महान है । |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
भाई बहनों का पवित्र त्योहार रक्षा बंधन इस साल 11 अगस्त दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं और उनकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों को उपहार देने के साथ ही जीवन भर रक्षा करने का वचन देते हैं। बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर शुभ मुहूर्त में रखी बांधनी चाहिए। आइये जानते हैं किस मुहूर्त में रखनी नहीं बांधनी चाहिए।
बहनें अपने भाइयों को राखी 11 अगस्त दिन गुरूवार सुबह 8 बजकर 51 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 19 मिनट के बीच किसी भी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन भद्रा अन्त समयः 11 अगस्त दिन गुरुवार को शाम को 08:51 बजे।
रक्षाबंधन भद्रा पूंछ 11 अगस्त दिन गुरुवार को शाम को 05:17 बजे से शाम 06:18 तक।
कभी भी काले रंग की राखी नहीं लेनी चाहिए। पूजा पाठ में काला रंग अशुभ माना जाता है। बहनें अपने भाइयों के लिए चांदी की छोटी राखी भी ले सकती है। यह शुभ होती है। वहीं स्वास्तिक या ॐ के चिन्ह वाली राखी बेहद शुभ मानी जाती है।
| भाई बहनों का पवित्र त्योहार रक्षा बंधन इस साल ग्यारह अगस्त दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं और उनकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों को उपहार देने के साथ ही जीवन भर रक्षा करने का वचन देते हैं। बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर शुभ मुहूर्त में रखी बांधनी चाहिए। आइये जानते हैं किस मुहूर्त में रखनी नहीं बांधनी चाहिए। बहनें अपने भाइयों को राखी ग्यारह अगस्त दिन गुरूवार सुबह आठ बजकर इक्यावन मिनट से लेकर रात नौ बजकर उन्नीस मिनट के बीच किसी भी बांध सकती हैं। रक्षाबंधन भद्रा अन्त समयः ग्यारह अगस्त दिन गुरुवार को शाम को आठ:इक्यावन बजे। रक्षाबंधन भद्रा पूंछ ग्यारह अगस्त दिन गुरुवार को शाम को पाँच:सत्रह बजे से शाम छः:अट्ठारह तक। कभी भी काले रंग की राखी नहीं लेनी चाहिए। पूजा पाठ में काला रंग अशुभ माना जाता है। बहनें अपने भाइयों के लिए चांदी की छोटी राखी भी ले सकती है। यह शुभ होती है। वहीं स्वास्तिक या ॐ के चिन्ह वाली राखी बेहद शुभ मानी जाती है। |
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
फास्टिंग टी बनाने में काफी आसान है। पानी और सादी चाय की पत्ती। आप अलग अलग स्वाद की चाय की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। जो आपकी फास्टिंग में स्वाद लेकर आएगी। इसके साथ ही आपको चाय की क्रेविंग को कम करेगी।
फास्टिंग टी के हेल्थ बेनिफिट्स क्या है ?
आप खाने के लिए इसे वास्तव में आपके घ्रेलिन के लेवल को रेगुलेट करने के रूप में जाना जाता है। चाय भूख नियंत्रित करने और वास्तविक भूख के दर्द को कम करने में मदद करेगी।
चाय के बारे में रोमांचक चीजों में से एक है कि चाय के अंदर पॉलीफेनोल्स होते हैं। पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट हैं जो शरीर में मुक्त कणों से लड़ते हैं। ये अद्भुत एंटीऑक्सीडेंट मदद करते हैं। आंत के स्वास्थ्य, अच्छे पाचन, स्वस्थ त्वचा, उच्च ऊर्जा के स्तर के साथ-साथ मेंटल फोकस में सुधार करता है।
चाय शांत करने वाली एनर्जी में वृद्धि करती है। चाय में मौजूद कैफीन आपको स्वस्थ ऊर्जा देता है। काली, हरी और सफेद चाय स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन होती है।
पानी के बाद ग्रीन टी को ही सबसे स्वास्थ्यप्रद पेय मानी जाती है। इस चाय में कैटेचिन नामक यौगिक होता है। ये कैटेचिन, कैफीन के साथ, आपकी ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं और वजन घटाने में भी मदद कर सकते हैं।
ब्लैक टी एक प्रीबायोटिक के रूप में भी काम कर सकती है, जो आंत के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करती है। काली चाय में अधिक कैफीन होता है, जो विशेष रूप से सहायक हो सकता है। अगर आप अपनी उपवास प्रक्रिया की शुरुआत कर रहे हैं तो ये आपके लिए फायदेमंद है।
गुड़हल का फूल खूबसूरत होने के साथ कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। गुड़हल की चाय आपकी त्वचा को स्वस्थ, चमकदार और जवान दिखने में मदद कर सकती है। शरीर को डिटॉक्स भी कर सकता है। हिबिस्कस चाय में कैफीन नहीं होती है इसलिए अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो ये आपको उत्तेजित नहीं करेगी।
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भारतीय प्रबंधन संस्थान रोहतक ने मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए एक भर्ती अभियान की घोषणा की है। इच्छुक उम्मीदवार इस पद के लिए 10 मार्च 2023 तक आवेदन कर सकते हैं।
चीफ कॉर्पोरेट रिलेशनशिप ऑफिसर के पद पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. IIM रोहतक में मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए नौकरी का स्थान रोहतक है।
कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 मार्च 2023 है।
IIM रोहतक की आधिकारिक वेबसाइट iimrohtak. ac. inहै। इच्छुक उम्मीदवार संस्थान और भर्ती प्रक्रिया के बारे में अधिक जानने के लिए वेबसाइट पर जा सकते हैं।
उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में मास्टर डिग्री होनी चाहिए। उम्मीदवारों को कॉर्पोरेट क्षेत्र में न्यूनतम 10 वर्ष का प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए।
जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, IIM रोहतक में मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए केवल एक रिक्ति है।
इच्छुक उम्मीदवार 10 मार्च 2023 से पहले IIM रोहतक में मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए iimrohtak. ac. inपर ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
| भारतीय प्रबंधन संस्थान रोहतक ने मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए एक भर्ती अभियान की घोषणा की है। इच्छुक उम्मीदवार इस पद के लिए दस मार्च दो हज़ार तेईस तक आवेदन कर सकते हैं। चीफ कॉर्पोरेट रिलेशनशिप ऑफिसर के पद पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. IIM रोहतक में मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए नौकरी का स्थान रोहतक है। कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि दस मार्च दो हज़ार तेईस है। IIM रोहतक की आधिकारिक वेबसाइट iimrohtak. ac. inहै। इच्छुक उम्मीदवार संस्थान और भर्ती प्रक्रिया के बारे में अधिक जानने के लिए वेबसाइट पर जा सकते हैं। उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में मास्टर डिग्री होनी चाहिए। उम्मीदवारों को कॉर्पोरेट क्षेत्र में न्यूनतम दस वर्ष का प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, IIM रोहतक में मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए केवल एक रिक्ति है। इच्छुक उम्मीदवार दस मार्च दो हज़ार तेईस से पहले IIM रोहतक में मुख्य कॉर्पोरेट संबंध अधिकारी के लिए iimrohtak. ac. inपर ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। |
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2020 का दूसरा क्वालिफायर आज यानी 8 नवंबर को अबुधाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेला जाना है। यह मैच एक तरह से वर्चुअल सेमीफाइनल है। इस मैच को हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। वहीं, जीतने वाली टीम 10 नवंबर को दुबई में होने वाले खिताबी मुकाबले में मुंबई इंडियंस से भिड़ेगी।
प्लेइंग इलेवन की बात करें तो दिल्ली कैपिटल्स ने टीम में दो बदलाव किए। उसने आउट ऑफ फॉर्म चल रहे पृथ्वी शॉ को बाहर का रास्ता दिखा दिया। तेज गेंदबाज डेनियल सैम्स को भी बाहर किया गया है। शिमरॉन हेटमायर और लेग स्पिनर प्रवीण दुबे की वापसी हुई है। दूसरी ओर, सनराइजर्स ने एक भी बदलाव नहीं किया। ऋद्धिमान साहा की चोट ठीक नहीं हो सकी है।
ये है दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवनः
सनराइजर्स हैदराबादः डेविड वार्नर (कप्तान), श्रीवत्स गोस्वामी (विकेटकीपर), मनीष पांडे, केन विलियमसन, प्रियम गर्ग, जेसन होल्डर, अब्दुल समद, राशिद खान, शाहबाज नदीम, टी नटराजन, संदीप शर्मा।
दिल्ली कैपिटल्सः शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर (कप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), मार्कस स्टोइनिस, शिमरॉन हेटमेयर, अक्षर पटेल, रविचंद्रन अश्विन, प्रवीण दुबे, कागिसो रबाडा, एनरिच नोर्त्जे।
| इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार बीस का दूसरा क्वालिफायर आज यानी आठ नवंबर को अबुधाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेला जाना है। यह मैच एक तरह से वर्चुअल सेमीफाइनल है। इस मैच को हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। वहीं, जीतने वाली टीम दस नवंबर को दुबई में होने वाले खिताबी मुकाबले में मुंबई इंडियंस से भिड़ेगी। प्लेइंग इलेवन की बात करें तो दिल्ली कैपिटल्स ने टीम में दो बदलाव किए। उसने आउट ऑफ फॉर्म चल रहे पृथ्वी शॉ को बाहर का रास्ता दिखा दिया। तेज गेंदबाज डेनियल सैम्स को भी बाहर किया गया है। शिमरॉन हेटमायर और लेग स्पिनर प्रवीण दुबे की वापसी हुई है। दूसरी ओर, सनराइजर्स ने एक भी बदलाव नहीं किया। ऋद्धिमान साहा की चोट ठीक नहीं हो सकी है। ये है दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवनः सनराइजर्स हैदराबादः डेविड वार्नर , श्रीवत्स गोस्वामी , मनीष पांडे, केन विलियमसन, प्रियम गर्ग, जेसन होल्डर, अब्दुल समद, राशिद खान, शाहबाज नदीम, टी नटराजन, संदीप शर्मा। दिल्ली कैपिटल्सः शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर , ऋषभ पंत , मार्कस स्टोइनिस, शिमरॉन हेटमेयर, अक्षर पटेल, रविचंद्रन अश्विन, प्रवीण दुबे, कागिसो रबाडा, एनरिच नोर्त्जे। |
छ कि
द्रवरूपस्य वस्तुनो वाचकशब्दस्तरङ्गितत्वादिधर्मनिवन्धनः किमपि सादृश्यमात्रमवलम्व्य संहतस्यापि वाचकत्वेन प्रयुज्यमानः कविप्रवाहे प्रसिद्धः । यथाप्रयमोन्मेषः
श्वासोत्कम्पतरङ्गिणि स्तनतटे । इति ॥ ४६ ॥ क्वचिदमूर्तस्यापि द्रवरूपार्थाभिघायी वाचकत्वेन प्रयुज्यते । यथाएकां कामपि कालविप्रुषममी शौर्योष्मकराडूव्ययव्यग्राः स्युश्चिरविस्मृतामरचमूडिम्बाहवा वाहवः ॥ १७ ॥
द्रव रूप वस्तु का वाचक शब्द, तरङ्गितत्व श्रादि धर्म के कारण किसी [रमरगीय] सादृश्य को लेकर ठोस [द्रव्य] के वाचक रूप में भी प्रयुक्त होता हुआ कवि-समाज में प्रसिद्ध है। [ अर्थात् द्रववाचक शब्द का ठोस अर्थ के लिए भी प्रयोग कवियों में देखा जाता है । यहाँ 'कवि-प्रवाह' शब्द भी इस भाव से विशेष रूप से प्रयुक्त किया गया है] जैसेइवासजन्य कम्प से तरङ्गित स्तन तट में ॥४६॥
यह पद्यश कवीन्द्रवचनसमुच्चय में सख्या ४५० पर उद्धृत है । वक्रोक्तिजीवित में भी आगे उस पूर्ण श्लोक को उद्धृत किया गया है जिसका यह एक भाग है।
यहाँ ठोस स्तनतट को द्रव वाचक तरङ्ग से युक्त [तरङ्गित ] कहा है। उस शब्द के प्रयोग से श्वास से कम्पित स्तन में तरङ्ग के साम्य का प्रतिपादन कर कवि ने विशेष प्रकार का चमत्कार उत्पन्न कर दिया है । इसलिए यह भी 'पद पूर्वार्द्ध-ता' के 'उपचार वक्रता' नामक चतुर्थ भेद का उदाहरण है। इसी' उपचार-वता का एक और प्रकार श्रागे दिखलाते हैं ।
कहीं अमूर्त [अर्थ] के लिए भी द्रव पदार्थ का वाचक [शब्द], वाचक रूप से प्रयुक्त होता है। जैसेयह श्लोक कहाँ का है यह पता नही चलता । पूरा श्लोक तृतीय उन्मेप में फिर उद्धृत किया गया है । जो इस प्रकार है---
लोको यादृशमाहं साहसघनं त क्षत्रियापुत्रक, स्यात् सत्येन स तादृगेव न भवेद् वार्ता विसंवादिनो । एका कामपि कालविप्रुषममी शौर्योष्मकण्डूव्ययव्यग्रा स्मुश्चिरविस्मृतामरचमूडिम्बाहवा वाहव ॥
उस साहसी [मुझ से युद्ध करने का दु साहस करने वाले । तुच्छ ] क्षत्रिया पुत्र [तुच्छता सूचन के लिए 'क' प्रत्यय का और 'क्षत्रिया' शब्द का प्रयोग किया गया है] को लोग जैसा [शूर] कहते हैं वह सचमुच वैसा ही [भले ही ] हो [और उसके विषय में कही जाने वाली] बात सत्य हो हो सही७२ ]
[कारिका १६
एतयोस्तरङ्गिरणीति विप्रुषमिति च वक्रतामावहतः ।
[ड] 'विशेषणवक्रत्वं' नाम पदपूर्वार्धवक्रतायाः प्रकारो विद्यते । यत्र विशेषरणमाहात्म्यादेव तद्विदाह्लादकारित्वलक्षणं वक्रत्वमभिव्यज्यते । यथा -
दाहोऽम्भः प्रसृतिम्पचः प्रचयवान् वाष्पः प्रणालोचितः श्वासाः प्रेङ्खितदीप्रदीपलतिकाः पाण्डिम्नि मग्नं वपुः । किञ्चान्यत् कथयामि रात्रिमखिला त्वन्मार्गवातायने हस्तच्छ त्रनिरुद्ध चन्द्र महसस्तस्या स्थितिर्वर्तते ॥४८॥१
[ किन्तु] बहुत दिन से घेवताओ की सेना के सैनिकों के साथ का युद्ध [ देवताओं के पराजित हो जाने के कारण] जिनको विस्मृत हो गया है, ऐसे मेरे बाहु थोड़ी देर के लिए [ कामपि कालविपुष ] शौर्य की उष्णता से उत्पन्न खुजली को मिटाने के लिए व्यग्र हो रहे है । [ अतः उसके साथ युद्ध करना ही है] ॥४७॥
[ श्वासोत्कम्प०, तथा एकां कामपि ] इन दोनों [उदाहरणो] में [ क्रमशः मूर्त्त के और प्रमूर्त्त के लिए द्रव पदार्थाभिधायी] 'तरङ्गिरिग' यह और 'विप्रुष' [ बूंद ] यह [पद प्रयुक्त होकर ] वक्रता को उत्पन्न करते है । [अर्थात् उपचार-वकता से युक्त हें] ।
[ड] 'विशेषरगवता' [ भी ] 'पदपूर्वार्द्धकता' का [पाँचवाँ] प्रकार है । जहाँ विशेषरण के माहात्म्य से ही सहृदयाहलावकारित्व रूप वऋत्व अभिव्यक्त होता है। जैसेयह श्लोक 'विद्धशालभञ्जिका' के द्वितीयाक का २१व श्लोक है। सुभाषितावली स० १४११, कवीन्द्रवचनामृत स० २७६, रुय्यक पृ० ६८, जयरथ पृ० ४१, अलङ्कारशेखर पृ० ६८, और चित्रमीमांसा पृ० १०३ पर भी उद्धृत हुआ है ।
[ तुम्हारे वियोग में उस नायिका के शरीर का] वाह चुल्हुओं पानी को सुखा देने वाला, श्रांसू नाली में बहने योग्य [ प्रचुर मात्रा में ] है, [उष्ण] निश्वास हिलते हुए प्रज्वलित दीपमाला के समान है और [ सारा ] शरीर सफेदी में डूबा हुआ है । और अधिक क्या कहे सारी रात तुम्हारे मार्ग को ओोर वाले झरोखे में अपने हाथ के छाते से [ हाथ को छाते समान चन्द्रमा के सामने लगाकर ] चांदनी को रोके हुए वह [ तुम्हारी प्रतीक्षा में] बैठी रहती है ॥४८॥
१ विद्धशालभञ्जिका २, २१ । | छ कि द्रवरूपस्य वस्तुनो वाचकशब्दस्तरङ्गितत्वादिधर्मनिवन्धनः किमपि सादृश्यमात्रमवलम्व्य संहतस्यापि वाचकत्वेन प्रयुज्यमानः कविप्रवाहे प्रसिद्धः । यथाप्रयमोन्मेषः श्वासोत्कम्पतरङ्गिणि स्तनतटे । इति ॥ छियालीस ॥ क्वचिदमूर्तस्यापि द्रवरूपार्थाभिघायी वाचकत्वेन प्रयुज्यते । यथाएकां कामपि कालविप्रुषममी शौर्योष्मकराडूव्ययव्यग्राः स्युश्चिरविस्मृतामरचमूडिम्बाहवा वाहवः ॥ सत्रह ॥ द्रव रूप वस्तु का वाचक शब्द, तरङ्गितत्व श्रादि धर्म के कारण किसी [रमरगीय] सादृश्य को लेकर ठोस [द्रव्य] के वाचक रूप में भी प्रयुक्त होता हुआ कवि-समाज में प्रसिद्ध है। [ अर्थात् द्रववाचक शब्द का ठोस अर्थ के लिए भी प्रयोग कवियों में देखा जाता है । यहाँ 'कवि-प्रवाह' शब्द भी इस भाव से विशेष रूप से प्रयुक्त किया गया है] जैसेइवासजन्य कम्प से तरङ्गित स्तन तट में ॥छियालीस॥ यह पद्यश कवीन्द्रवचनसमुच्चय में सख्या चार सौ पचास पर उद्धृत है । वक्रोक्तिजीवित में भी आगे उस पूर्ण श्लोक को उद्धृत किया गया है जिसका यह एक भाग है। यहाँ ठोस स्तनतट को द्रव वाचक तरङ्ग से युक्त [तरङ्गित ] कहा है। उस शब्द के प्रयोग से श्वास से कम्पित स्तन में तरङ्ग के साम्य का प्रतिपादन कर कवि ने विशेष प्रकार का चमत्कार उत्पन्न कर दिया है । इसलिए यह भी 'पद पूर्वार्द्ध-ता' के 'उपचार वक्रता' नामक चतुर्थ भेद का उदाहरण है। इसी' उपचार-वता का एक और प्रकार श्रागे दिखलाते हैं । कहीं अमूर्त [अर्थ] के लिए भी द्रव पदार्थ का वाचक [शब्द], वाचक रूप से प्रयुक्त होता है। जैसेयह श्लोक कहाँ का है यह पता नही चलता । पूरा श्लोक तृतीय उन्मेप में फिर उद्धृत किया गया है । जो इस प्रकार है--- लोको यादृशमाहं साहसघनं त क्षत्रियापुत्रक, स्यात् सत्येन स तादृगेव न भवेद् वार्ता विसंवादिनो । एका कामपि कालविप्रुषममी शौर्योष्मकण्डूव्ययव्यग्रा स्मुश्चिरविस्मृतामरचमूडिम्बाहवा वाहव ॥ उस साहसी [मुझ से युद्ध करने का दु साहस करने वाले । तुच्छ ] क्षत्रिया पुत्र [तुच्छता सूचन के लिए 'क' प्रत्यय का और 'क्षत्रिया' शब्द का प्रयोग किया गया है] को लोग जैसा [शूर] कहते हैं वह सचमुच वैसा ही [भले ही ] हो [और उसके विषय में कही जाने वाली] बात सत्य हो हो सहीबहत्तर ] [कारिका सोलह एतयोस्तरङ्गिरणीति विप्रुषमिति च वक्रतामावहतः । [ड] 'विशेषणवक्रत्वं' नाम पदपूर्वार्धवक्रतायाः प्रकारो विद्यते । यत्र विशेषरणमाहात्म्यादेव तद्विदाह्लादकारित्वलक्षणं वक्रत्वमभिव्यज्यते । यथा - दाहोऽम्भः प्रसृतिम्पचः प्रचयवान् वाष्पः प्रणालोचितः श्वासाः प्रेङ्खितदीप्रदीपलतिकाः पाण्डिम्नि मग्नं वपुः । किञ्चान्यत् कथयामि रात्रिमखिला त्वन्मार्गवातायने हस्तच्छ त्रनिरुद्ध चन्द्र महसस्तस्या स्थितिर्वर्तते ॥अड़तालीस॥एक [ किन्तु] बहुत दिन से घेवताओ की सेना के सैनिकों के साथ का युद्ध [ देवताओं के पराजित हो जाने के कारण] जिनको विस्मृत हो गया है, ऐसे मेरे बाहु थोड़ी देर के लिए [ कामपि कालविपुष ] शौर्य की उष्णता से उत्पन्न खुजली को मिटाने के लिए व्यग्र हो रहे है । [ अतः उसके साथ युद्ध करना ही है] ॥सैंतालीस॥ [ श्वासोत्कम्पशून्य, तथा एकां कामपि ] इन दोनों [उदाहरणो] में [ क्रमशः मूर्त्त के और प्रमूर्त्त के लिए द्रव पदार्थाभिधायी] 'तरङ्गिरिग' यह और 'विप्रुष' [ बूंद ] यह [पद प्रयुक्त होकर ] वक्रता को उत्पन्न करते है । [अर्थात् उपचार-वकता से युक्त हें] । [ड] 'विशेषरगवता' [ भी ] 'पदपूर्वार्द्धकता' का [पाँचवाँ] प्रकार है । जहाँ विशेषरण के माहात्म्य से ही सहृदयाहलावकारित्व रूप वऋत्व अभिव्यक्त होता है। जैसेयह श्लोक 'विद्धशालभञ्जिका' के द्वितीयाक का इक्कीसव श्लोक है। सुभाषितावली सशून्य एक हज़ार चार सौ ग्यारह, कवीन्द्रवचनामृत सशून्य दो सौ छिहत्तर, रुय्यक पृशून्य अड़सठ, जयरथ पृशून्य इकतालीस, अलङ्कारशेखर पृशून्य अड़सठ, और चित्रमीमांसा पृशून्य एक सौ तीन पर भी उद्धृत हुआ है । [ तुम्हारे वियोग में उस नायिका के शरीर का] वाह चुल्हुओं पानी को सुखा देने वाला, श्रांसू नाली में बहने योग्य [ प्रचुर मात्रा में ] है, [उष्ण] निश्वास हिलते हुए प्रज्वलित दीपमाला के समान है और [ सारा ] शरीर सफेदी में डूबा हुआ है । और अधिक क्या कहे सारी रात तुम्हारे मार्ग को ओोर वाले झरोखे में अपने हाथ के छाते से [ हाथ को छाते समान चन्द्रमा के सामने लगाकर ] चांदनी को रोके हुए वह [ तुम्हारी प्रतीक्षा में] बैठी रहती है ॥अड़तालीस॥ एक विद्धशालभञ्जिका दो, इक्कीस । |
आप सभी ने कभी न कभी गलत आर्डर पाया ही होगा, या सूना होगा कि आर्डर कुछ और किया था और आ कुछ और ही गया. ऐसे में आज हम आपको जो मामला बताने जा रहे हैं वह भी कुछ ऐसा ही है. इस मामले को इंग्लैंड का बताया जा रहा है जहाँ कई लोगों ने ऑर्डर कुछ किया था, डिलीवर कुछ और हुआ है. उन्ही की लिस्ट में एक नाम Jake Lawrence का भी शामिल हो गया है.
जी हाँ, मिली जानकारी के मुताबिक Jake Lawrence ने अपने बेटे के लिए विडियो गेम ऑर्डर की थी लेकिन इसके बदले उनके पास कुछ और ही आ गया और वह आया भी ऐसा कि देखने के बाद उनके होश उड़ गए. बताया जा रहा है उन्हें कंडोम की डिलीवरी हुई. जी हाँ, वैसे ऐसा सिर्फ जैक के साथ नहीं हुआ है. बल्कि Viki नाम के एक शख्स ने भी गेम का कंसोल ऑर्डर किया था और उन्हें तो चादरें मिली यानी बेडशीट.
वहीं Steve Handy ने इस बारे में बताया कि उन्होंने ऑफर देखकर Nintendo Switch ऑर्डर किया था और इसके लिए उन्होंने 300 यूरो दिए भी. वहीं जब डिलीवरी आई तो उसमे लैपटॉप फैन का कूलर था और उसकी कीमत 10 यूरो से ज्यादा नहीं है. मिली खबर के मुताबिक अमेजन ने इस बारे में माफी मांगी है और उन्होंने कहा है कि "किसी तकनीक कारणों से यह गड़बड़ हुई और लगभग 10-12 लोगों के साथ ऐसा हुआ. "
दुनिया की एक ऐसी जगह जिस पर किसी का नहीं है अधिकार, एक भारतीय ने नाम दिया था 'किंगडम ऑफ़ दीक्षित'
| आप सभी ने कभी न कभी गलत आर्डर पाया ही होगा, या सूना होगा कि आर्डर कुछ और किया था और आ कुछ और ही गया. ऐसे में आज हम आपको जो मामला बताने जा रहे हैं वह भी कुछ ऐसा ही है. इस मामले को इंग्लैंड का बताया जा रहा है जहाँ कई लोगों ने ऑर्डर कुछ किया था, डिलीवर कुछ और हुआ है. उन्ही की लिस्ट में एक नाम Jake Lawrence का भी शामिल हो गया है. जी हाँ, मिली जानकारी के मुताबिक Jake Lawrence ने अपने बेटे के लिए विडियो गेम ऑर्डर की थी लेकिन इसके बदले उनके पास कुछ और ही आ गया और वह आया भी ऐसा कि देखने के बाद उनके होश उड़ गए. बताया जा रहा है उन्हें कंडोम की डिलीवरी हुई. जी हाँ, वैसे ऐसा सिर्फ जैक के साथ नहीं हुआ है. बल्कि Viki नाम के एक शख्स ने भी गेम का कंसोल ऑर्डर किया था और उन्हें तो चादरें मिली यानी बेडशीट. वहीं Steve Handy ने इस बारे में बताया कि उन्होंने ऑफर देखकर Nintendo Switch ऑर्डर किया था और इसके लिए उन्होंने तीन सौ यूरो दिए भी. वहीं जब डिलीवरी आई तो उसमे लैपटॉप फैन का कूलर था और उसकी कीमत दस यूरो से ज्यादा नहीं है. मिली खबर के मुताबिक अमेजन ने इस बारे में माफी मांगी है और उन्होंने कहा है कि "किसी तकनीक कारणों से यह गड़बड़ हुई और लगभग दस-बारह लोगों के साथ ऐसा हुआ. " दुनिया की एक ऐसी जगह जिस पर किसी का नहीं है अधिकार, एक भारतीय ने नाम दिया था 'किंगडम ऑफ़ दीक्षित' |
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. Shubhi Sharma Dance Video:भोजपुरी सिनेमा का जाना माना नाम शुभी शर्मा अपनी सेक्सी फोटो और हॉट वीडियो के चलते सोशल मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती हैं. सोशल मीडिया पर उनकी सेक्सी, बोल्ड फोटो और वीडियो को काफी पसंद किया जाता है. शुभी शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है इस वीडियो में शुभी शर्मा ने बताया है कि वह अपने फैंस के साथ डांडिया करने बिहार आ रही है. सोशल मीडिया पर संभावना का डांडिया डांस वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो में शुभी शर्मा ने लंहगा चोली पहना हुआ है. साथ में उनके कर्ली बाल उनके लूक को काफी खूबसूरत बना रहे है.
शुभी शर्मा अपने खूबसूरत अंदाज के साथ बोल्ड अवतार के लिए भी जानी जाती है. सोशल मीडिया पर शुभी शर्मा का डाडिय डांस वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इन दिनों भोजपुरी एक्ट्रेस बिहार के हर शहर मे जाकर अपने डांस से रंगारंग माहौल बना रही है. शुभी शर्मा के डांस शो में बहुत बड़ी मात्रा में लोग शामिल हुए है. शुभि शर्मा के आरा शहर में उनके फैंस की बाहरी मात्रा उनके डांस को देखने आई थी.
बात करें शुभी शर्मा की तो वह जल्द ही आम्रपाली दुबे और निरहुआ यानी दिनेश लाल यादव की अपकमिंग फिल्म निरहुआ हिंदुस्तानी 3 में नजर आएंगी. फिल्म वह एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही है जो कि एक मॉडल और एक्ट्रेस बनाना चाहती है. फिल्म में निरहुआ और शुभी को एक दूसरे से प्यार हो जाता है. फिल्म में निरहुआ शुभी को कई गंदे लोगों से बचाते हुए नजर आएंगे. फिल्म के ट्रेलर और गाने को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है.
| बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. Shubhi Sharma Dance Video:भोजपुरी सिनेमा का जाना माना नाम शुभी शर्मा अपनी सेक्सी फोटो और हॉट वीडियो के चलते सोशल मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती हैं. सोशल मीडिया पर उनकी सेक्सी, बोल्ड फोटो और वीडियो को काफी पसंद किया जाता है. शुभी शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है इस वीडियो में शुभी शर्मा ने बताया है कि वह अपने फैंस के साथ डांडिया करने बिहार आ रही है. सोशल मीडिया पर संभावना का डांडिया डांस वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो में शुभी शर्मा ने लंहगा चोली पहना हुआ है. साथ में उनके कर्ली बाल उनके लूक को काफी खूबसूरत बना रहे है. शुभी शर्मा अपने खूबसूरत अंदाज के साथ बोल्ड अवतार के लिए भी जानी जाती है. सोशल मीडिया पर शुभी शर्मा का डाडिय डांस वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इन दिनों भोजपुरी एक्ट्रेस बिहार के हर शहर मे जाकर अपने डांस से रंगारंग माहौल बना रही है. शुभी शर्मा के डांस शो में बहुत बड़ी मात्रा में लोग शामिल हुए है. शुभि शर्मा के आरा शहर में उनके फैंस की बाहरी मात्रा उनके डांस को देखने आई थी. बात करें शुभी शर्मा की तो वह जल्द ही आम्रपाली दुबे और निरहुआ यानी दिनेश लाल यादव की अपकमिंग फिल्म निरहुआ हिंदुस्तानी तीन में नजर आएंगी. फिल्म वह एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही है जो कि एक मॉडल और एक्ट्रेस बनाना चाहती है. फिल्म में निरहुआ और शुभी को एक दूसरे से प्यार हो जाता है. फिल्म में निरहुआ शुभी को कई गंदे लोगों से बचाते हुए नजर आएंगे. फिल्म के ट्रेलर और गाने को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है. |
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